इंजेक्शन को कहें अलविदा: अब मोटापा और डायबिटीज पर असरदार साबित हो रही वेट लॉस टेबलेट
मोटापा और टाइप टू डायबिटीज आज की तेज रफ्तार जिंदगी की सबसे बड़ी बीमारियों में गिनी जाती है. इलाज के लिए अब तक ज्यादातर मरीजों को इंजेक्शन पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब एक नई गोली ने उम्मीद की किरण दिखाई है. दवा बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एली लिली ने अपने ताजा ट्रायल में यह दावा किया है कि उनकी नई वेट लॉस टेबलेट वजन और शुगर दोनों पर कारगर साबित हुई है. ट्रायल में क्या निकला नतीजा कंपनी ने इस दवा का तीसरा और अहम फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल पूरा किया है. ट्रायल का नाम था एटीटीएआईएन जिसमें दवा और ऑर्फोर्ग्लिप्रॉन दी गई. खास बात यह है कि यह glp-1 रिसेप्टर क्लास की पहली ऐसी दवा है जिसे गोली के रूप में पेश किया गया है. ट्रायल में शामिल मोटापा और डायबिटीज से परेशान लोगों को रोजाना दवा दी गई. इसके बाद नतीजे चौंकाने वाले रहे. इसके नतीजों में 72 हफ्तों में कई मरीजों का 10 किलो तक वजन घटा. प्लेसीबो यानी नकली दवा लेने वाले ग्रुप का वजन मुश्किल से 2 किलो कम हुआ. दवा लेने वाले मरीजों का ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से कम हुआ. इंजेक्शन के बराबर असरदार एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोली के रूप में आई यह दवा इंजेक्शन वाली जीएलपी-1 क्लास की तरह ही असरदार है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह दवा सुरक्षित भी है और असरदार भी. वहीं जिन मरीजों को इंजेक्शन लेने में परेशानी होती है उनके लिए यह एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है. इस दवा ने वजन और शुगर कम करने के अलावा दिल से जुड़ी कई समस्याओं पर भी असर दिखाया. ट्रायल रिपोर्ट में सामने आया कि मरीज का ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स बेहतर हुए हैं. इसके अलावा शरीर में सूजन लगभग आधी यानी 50% तक कम हो गई. सबसे बड़ी बात ज्यादा खुराक लेने वाले 70% से ज्यादा प्रतिभागियों का a1c लेवल डायबिटीज-फ्री रेंज तक आ गया. आने वाले वक्त में बड़ा बदलाव अब तक वजन घटाने और डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए इंजेक्शन ही सबसे बड़ा विकल्प माने जाते थे, लेकिन गोली के तौर पर आया यह नया विकल्प आने वाले समय में लाखों मरीजों की जिंदगी आसान बना सकता है. ये भी पढ़ें- यूथ में क्यों बढ़ रहे कार्डियक अरेस्ट से मौत के मामले, आखिर क्या गलती करके जान गंवा रहे युवा?

मोटापा और टाइप टू डायबिटीज आज की तेज रफ्तार जिंदगी की सबसे बड़ी बीमारियों में गिनी जाती है. इलाज के लिए अब तक ज्यादातर मरीजों को इंजेक्शन पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब एक नई गोली ने उम्मीद की किरण दिखाई है. दवा बनाने वाली अमेरिकी कंपनी एली लिली ने अपने ताजा ट्रायल में यह दावा किया है कि उनकी नई वेट लॉस टेबलेट वजन और शुगर दोनों पर कारगर साबित हुई है.
ट्रायल में क्या निकला नतीजा
कंपनी ने इस दवा का तीसरा और अहम फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल पूरा किया है. ट्रायल का नाम था एटीटीएआईएन जिसमें दवा और ऑर्फोर्ग्लिप्रॉन दी गई. खास बात यह है कि यह glp-1 रिसेप्टर क्लास की पहली ऐसी दवा है जिसे गोली के रूप में पेश किया गया है. ट्रायल में शामिल मोटापा और डायबिटीज से परेशान लोगों को रोजाना दवा दी गई. इसके बाद नतीजे चौंकाने वाले रहे.
- इसके नतीजों में 72 हफ्तों में कई मरीजों का 10 किलो तक वजन घटा.
- प्लेसीबो यानी नकली दवा लेने वाले ग्रुप का वजन मुश्किल से 2 किलो कम हुआ.
- दवा लेने वाले मरीजों का ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से कम हुआ.
इंजेक्शन के बराबर असरदार
एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोली के रूप में आई यह दवा इंजेक्शन वाली जीएलपी-1 क्लास की तरह ही असरदार है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह दवा सुरक्षित भी है और असरदार भी. वहीं जिन मरीजों को इंजेक्शन लेने में परेशानी होती है उनके लिए यह एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है. इस दवा ने वजन और शुगर कम करने के अलावा दिल से जुड़ी कई समस्याओं पर भी असर दिखाया. ट्रायल रिपोर्ट में सामने आया कि मरीज का ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स बेहतर हुए हैं. इसके अलावा शरीर में सूजन लगभग आधी यानी 50% तक कम हो गई. सबसे बड़ी बात ज्यादा खुराक लेने वाले 70% से ज्यादा प्रतिभागियों का a1c लेवल डायबिटीज-फ्री रेंज तक आ गया.
आने वाले वक्त में बड़ा बदलाव
अब तक वजन घटाने और डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए इंजेक्शन ही सबसे बड़ा विकल्प माने जाते थे, लेकिन गोली के तौर पर आया यह नया विकल्प आने वाले समय में लाखों मरीजों की जिंदगी आसान बना सकता है.
ये भी पढ़ें- यूथ में क्यों बढ़ रहे कार्डियक अरेस्ट से मौत के मामले, आखिर क्या गलती करके जान गंवा रहे युवा?
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