अब कारखानों में इन खतरनाक कामों को अंजाम देंगी महिलाएं, इस राज्य की सरकार लेने जा रही बड़ा फैसला
महिलाओं को बराबरी का हक देते हुए तमिलनाड़ु की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने तमिलनाडु कारखाना नियम, 1950 में बदलाव किया है ताकि महिलाओं को लगभग 20 ऐसे काम करने की भी इजाजत मिले, जिन्हें 'खतरनाक' मानकर महिलाओं को काम करने से रोका जाता रहा है. इसके अलावा, अगर कोई महिला कर्मचारी नाइट शिफ्ट करना चाहती है, तो उससे लिखित में सहमति लेने के नियम में संशोधन का भी प्रस्ताव है. एक से बढ़कर एक खतरनाक काम पिछले महीने लेबर वेलफेयर एंड स्किल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने तमिलनाडु कारखाना नियमों में संशोधन के मसौदे की अधिसूचना जारी की थी. इस पर अगर किसी को ऐतराज होता तो उसे 9 सितंबर को जारी अधिसूचना के 45 दिनों के भीतर सरकार को भेजना था. जिन खतरनाक कामों में महिलाओं को शामिल किए जाने की सिफारिश की गई है उनमें- इलेक्ट्रोलिटिक प्रॉसेस, लीड प्रॉसेस, ग्लास मैन्युफैक्चर, लीड या सीसा की मैन्युफैक्चरिंग या ट्रीटमेंट शामिल हैं. हालांकि, सरकार ने इन कामों में गर्भवती महिला श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए नियमों में संशोधन करना चाहती है. लिस्ट में और भी कई शामिल खतरनाक गैस और पेट्रोलियम जेनरेशन, ब्लास्टिंग, कच्चे चमड़े और खालों को चूना लगाना और रंगना, ग्रेफाइट पाउडरिंग, सीसा सामग्री से बनी प्रिंटिंग प्रेस और टाइप फाउंड्री, काजू प्रॉसेसिंग, कॉयर और फाइबर कारखानों में मैट, चटाई और कालीनों की रंगाई, स्टेंसिलिंग और पेंटिंग और मिट्टी के बर्तन बनाना भी उन नौकरियों की लिस्ट में शामिल हैं, जिनमें अब महिलाएं काम कर सकती हैं. वैसे तमिलनाड़ु में महिलाएं पहले से ही कई जोखिम भरे कामों को अंजाम देती आ रही हैं जैसे कि समुद्री शैवाल की कटाई, मछली पकड़ना वगैरह. अब इन्हें तेज आवाज और हाईवाइब्रेशन में काम करने की भी इजाजत दिए जाने की तैयारी है. यानी कि अब आगे आने वाले समय में इन्हें भी जहरीले गैस, पेट्रोलियम और केमिकल्स से जुड़े काम करने होंगे. हालांकि, इसके अपने कुछ नुकसान भी हैं जैसे कि समुद्री शैवाल की कटाई से चोट लगने का खतरा है, मछली पकड़ने से बीमारियां होने का डर और कारखानों में खतरनाक चीजों के साथ होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं. ये भी पढ़ें: निवेश से पहले सावधान! आखिर क्यों BSE ने इस शेयर को लेकर किया अलर्ट? 18 महीनों में 63000 परसेंट का दे चुकी है रिटर्न
महिलाओं को बराबरी का हक देते हुए तमिलनाड़ु की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने तमिलनाडु कारखाना नियम, 1950 में बदलाव किया है ताकि महिलाओं को लगभग 20 ऐसे काम करने की भी इजाजत मिले, जिन्हें 'खतरनाक' मानकर महिलाओं को काम करने से रोका जाता रहा है. इसके अलावा, अगर कोई महिला कर्मचारी नाइट शिफ्ट करना चाहती है, तो उससे लिखित में सहमति लेने के नियम में संशोधन का भी प्रस्ताव है.
एक से बढ़कर एक खतरनाक काम
पिछले महीने लेबर वेलफेयर एंड स्किल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने तमिलनाडु कारखाना नियमों में संशोधन के मसौदे की अधिसूचना जारी की थी. इस पर अगर किसी को ऐतराज होता तो उसे 9 सितंबर को जारी अधिसूचना के 45 दिनों के भीतर सरकार को भेजना था. जिन खतरनाक कामों में महिलाओं को शामिल किए जाने की सिफारिश की गई है उनमें- इलेक्ट्रोलिटिक प्रॉसेस, लीड प्रॉसेस, ग्लास मैन्युफैक्चर, लीड या सीसा की मैन्युफैक्चरिंग या ट्रीटमेंट शामिल हैं. हालांकि, सरकार ने इन कामों में गर्भवती महिला श्रमिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए नियमों में संशोधन करना चाहती है.
लिस्ट में और भी कई शामिल
खतरनाक गैस और पेट्रोलियम जेनरेशन, ब्लास्टिंग, कच्चे चमड़े और खालों को चूना लगाना और रंगना, ग्रेफाइट पाउडरिंग, सीसा सामग्री से बनी प्रिंटिंग प्रेस और टाइप फाउंड्री, काजू प्रॉसेसिंग, कॉयर और फाइबर कारखानों में मैट, चटाई और कालीनों की रंगाई, स्टेंसिलिंग और पेंटिंग और मिट्टी के बर्तन बनाना भी उन नौकरियों की लिस्ट में शामिल हैं, जिनमें अब महिलाएं काम कर सकती हैं.
वैसे तमिलनाड़ु में महिलाएं पहले से ही कई जोखिम भरे कामों को अंजाम देती आ रही हैं जैसे कि समुद्री शैवाल की कटाई, मछली पकड़ना वगैरह. अब इन्हें तेज आवाज और हाईवाइब्रेशन में काम करने की भी इजाजत दिए जाने की तैयारी है. यानी कि अब आगे आने वाले समय में इन्हें भी जहरीले गैस, पेट्रोलियम और केमिकल्स से जुड़े काम करने होंगे. हालांकि, इसके अपने कुछ नुकसान भी हैं जैसे कि समुद्री शैवाल की कटाई से चोट लगने का खतरा है, मछली पकड़ने से बीमारियां होने का डर और कारखानों में खतरनाक चीजों के साथ होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं.
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