Xप्लेन: क्या हर बुखार में स्वाइन फ्लू टेस्ट करवाएं? महिला की मौत के बाद देशभर में हलचल
मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 अगस्त यानी बुधवार शाम एक 60 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई. यह खबर महज एक मौत की खबर नहीं, बल्कि उस खतरे की घंटी है जो पूरे देश में बज रही है. दिल्ली में इस साल स्वाइन फ्लू के मामले पिछले साल की तुलना में लगभग 6 गुना बढ़ गए हैं. बेंगलुरु के एक स्कूल में 500 से ज्यादा छात्र और 21 स्टाफ सदस्य बीमार पड़ गए. मेरठ में मामले बढ़कर 7 हो गए. हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश समेत हर तरफ स्वास्थ्य विभागों ने एडवाइजरी जारी कर दी है. तो क्या यह कोरोना जैसी महामारी की दस्तक है और हर बुखार में अब स्वाइन फ्लू का टेस्ट करवाना जरूरी है या नहीं... स्वाइन फ्लू के क्यों बढ़ रहे हैं मामले? मेयो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम में बदलाव, बारिश और उमस इस वायरस के पनपने के लिए बेहतरीन माहौल बनाते हैं. नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव वायरस को एक्टिव कर देते हैं. यही वजह है कि हर साल अगस्त-सितंबर के आसपास स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं. लेकिन इस बार आंकड़े चौंकाने वाले हैं: ये आंकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ किसी एक शहर या राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि देशव्यापी संकट है. तो आखिर स्वाइन फ्लू के लक्षण को कैसे पहचानें? स्वाइन फ्लू के लक्षण आम फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं: स्वाइन फ्लू फैलता कैसे है? यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या सांस लेने से निकली बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए हवा में फैलता है. अगर आप इन बूंदों को सांस के जरिए अंदर लेते हैं या किसी दूषित सतह (जैसे दरवाजे का हैंडल, सिंक) को छूकर अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूते हैं, तो आप संक्रमित हो सकते हैं. संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखने से एक दिन पहले से ही वायरस फैलाना शुरू कर देता है. यानी आपको पता भी नहीं चलता कि आपके आसपास कोई बीमार है और वह वायरस फैला रहा है. संक्रमित व्यक्ति 7 दिनों तक (बच्चों में 10 दिनों तक) दूसरों को संक्रमित कर सकता है. हर किसी को यह बीमारी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों को गंभीर नुकसान का खतरा ज्यादा होता है: 2 साल से कम उम्र के बच्चे 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग गर्भवती महिलाएं अस्थमा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों वाले लोग कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग (कैंसर, HIV/एड्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट) नर्सिंग होम या बैरक जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने वाले लोग तो क्या हर बुखार में टेस्ट करवाना चाहिए? दिल्ली एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल का कहना है कि हर बुखार में टेस्ट करवाना जरूरी नहीं है. टेस्ट की जरूरत मरीज के लक्षणों, बीमारी की अवधि, आसपास संक्रमण की स्थिति और रिस्क फैक्टर पर निर्भर करती है. यानी, अगर आपको हल्का बुखार, खांसी या गले में खराश है, तो आपको तुरंत टेस्ट की जरूरत नहीं है. आराम करें, लिक्विड फूड लें और लक्षणों पर नजर रखें. अगर बुखार 102-103 डिग्री से ऊपर जा रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है या लक्षण लगातार बने हुए हैं और बिगड़ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और टेस्ट करवाएं. स्वाइन फ्लू की जांच के लिए RT-PCR (Real-Time PCR) टेस्ट सबसे बेहतर है. इसके लिए मरीज के नाक या गले का स्वैब लिया जाता है. देशभर में मामले बढ़ने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देशव्यापी एडवाइजरी जारी की है. कई राज्यों ने भी अपनी-अपनी एडवाइजरी जारी की हैं: हरियाणा: स्वास्थ्य विभाग ने मौसम बदलने के कारण स्वाइन फ्लू से बचाव की सलाह दी है. लोगों को हाथ मिलाने से बचने, सार्वजनिक स्थानों पर न थूकने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लेने की हिदायत दी गई है. चंडीगढ़: स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की. बुखार, खांसी या छींक होने पर लोगों को सार्वजनिक स्थानों से दूरी बनाने की सलाह दी गई. उत्तर प्रदेश: स्वास्थ्य विभाग ने मलिन बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष शिविर लगाने का फैसला किया है. क्या यह कोरोना जैसी महामारी है? नहीं. यह समझना बहुत जरूरी है. 2009 में H1N1 महामारी बनकर उभरा, लेकिन अब यह सीजनल फ्लू का हिस्सा है. हर साल मौसम बदलने पर इसके मामले बढ़ते हैं और फिर कम हो जाते हैं. हां, इस बार मामले असामान्य रूप से अधिक हैं. दिल्ली में 6 गुना, बेंगलुरु में स्कूल बंद, लेकिन यह कोरोना जैसी नई महामारी नहीं है. फिर भी, लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए क्योंकि यह बुजुर्गों, बच्चों और पुरानी बीमारियों वाले लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है.
मध्य प्रदेश के इंदौर में 19 अगस्त यानी बुधवार शाम एक 60 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई. यह खबर महज एक मौत की खबर नहीं, बल्कि उस खतरे की घंटी है जो पूरे देश में बज रही है. दिल्ली में इस साल स्वाइन फ्लू के मामले पिछले साल की तुलना में लगभग 6 गुना बढ़ गए हैं. बेंगलुरु के एक स्कूल में 500 से ज्यादा छात्र और 21 स्टाफ सदस्य बीमार पड़ गए. मेरठ में मामले बढ़कर 7 हो गए. हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश समेत हर तरफ स्वास्थ्य विभागों ने एडवाइजरी जारी कर दी है. तो क्या यह कोरोना जैसी महामारी की दस्तक है और हर बुखार में अब स्वाइन फ्लू का टेस्ट करवाना जरूरी है या नहीं...
स्वाइन फ्लू के क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
मेयो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम में बदलाव, बारिश और उमस इस वायरस के पनपने के लिए बेहतरीन माहौल बनाते हैं. नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव वायरस को एक्टिव कर देते हैं. यही वजह है कि हर साल अगस्त-सितंबर के आसपास स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं. लेकिन इस बार आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
ये आंकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ किसी एक शहर या राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि देशव्यापी संकट है.
तो आखिर स्वाइन फ्लू के लक्षण को कैसे पहचानें?
स्वाइन फ्लू के लक्षण आम फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं:
स्वाइन फ्लू फैलता कैसे है?
यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, बोलने या सांस लेने से निकली बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के जरिए हवा में फैलता है. अगर आप इन बूंदों को सांस के जरिए अंदर लेते हैं या किसी दूषित सतह (जैसे दरवाजे का हैंडल, सिंक) को छूकर अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूते हैं, तो आप संक्रमित हो सकते हैं.
संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखने से एक दिन पहले से ही वायरस फैलाना शुरू कर देता है. यानी आपको पता भी नहीं चलता कि आपके आसपास कोई बीमार है और वह वायरस फैला रहा है. संक्रमित व्यक्ति 7 दिनों तक (बच्चों में 10 दिनों तक) दूसरों को संक्रमित कर सकता है.
हर किसी को यह बीमारी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों को गंभीर नुकसान का खतरा ज्यादा होता है:
- 2 साल से कम उम्र के बच्चे
- 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग
- गर्भवती महिलाएं
- अस्थमा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों वाले लोग
- कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग (कैंसर, HIV/एड्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट)
- नर्सिंग होम या बैरक जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने वाले लोग
तो क्या हर बुखार में टेस्ट करवाना चाहिए?
दिल्ली एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल का कहना है कि हर बुखार में टेस्ट करवाना जरूरी नहीं है. टेस्ट की जरूरत मरीज के लक्षणों, बीमारी की अवधि, आसपास संक्रमण की स्थिति और रिस्क फैक्टर पर निर्भर करती है. यानी,
- अगर आपको हल्का बुखार, खांसी या गले में खराश है, तो आपको तुरंत टेस्ट की जरूरत नहीं है. आराम करें, लिक्विड फूड लें और लक्षणों पर नजर रखें.
- अगर बुखार 102-103 डिग्री से ऊपर जा रहा है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है या लक्षण लगातार बने हुए हैं और बिगड़ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और टेस्ट करवाएं.
स्वाइन फ्लू की जांच के लिए RT-PCR (Real-Time PCR) टेस्ट सबसे बेहतर है. इसके लिए मरीज के नाक या गले का स्वैब लिया जाता है.
देशभर में मामले बढ़ने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देशव्यापी एडवाइजरी जारी की है. कई राज्यों ने भी अपनी-अपनी एडवाइजरी जारी की हैं:
- हरियाणा: स्वास्थ्य विभाग ने मौसम बदलने के कारण स्वाइन फ्लू से बचाव की सलाह दी है. लोगों को हाथ मिलाने से बचने, सार्वजनिक स्थानों पर न थूकने और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लेने की हिदायत दी गई है.
- चंडीगढ़: स्वास्थ्य विभाग ने सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की. बुखार, खांसी या छींक होने पर लोगों को सार्वजनिक स्थानों से दूरी बनाने की सलाह दी गई.
- उत्तर प्रदेश: स्वास्थ्य विभाग ने मलिन बस्तियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष शिविर लगाने का फैसला किया है.
क्या यह कोरोना जैसी महामारी है?
नहीं. यह समझना बहुत जरूरी है. 2009 में H1N1 महामारी बनकर उभरा, लेकिन अब यह सीजनल फ्लू का हिस्सा है. हर साल मौसम बदलने पर इसके मामले बढ़ते हैं और फिर कम हो जाते हैं.
हां, इस बार मामले असामान्य रूप से अधिक हैं. दिल्ली में 6 गुना, बेंगलुरु में स्कूल बंद, लेकिन यह कोरोना जैसी नई महामारी नहीं है. फिर भी, लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए क्योंकि यह बुजुर्गों, बच्चों और पुरानी बीमारियों वाले लोगों के लिए जानलेवा हो सकता है.
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