World AIDS Day 2025: बिहार में कितने लोग HIV पॉजिटिव? जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके

विश्व एड्स दिवस के मौके पर पूरे बिहार में जागरूकता का माहौल है. बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति और स्वास्थ्य विभाग ने पटना से लेकर राज्य के हर जिले में रैली, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर-बैनर और सेमिनार का आयोजन किया गया. इसका मकसद लोगों को एचआईवी/एड्स के बारे में सही जानकारी देना, डर खत्म करना और बचाव के तरीके बताना था.  बिहार में कितने लोग एचआईवी पॉजिटिव? एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के विभागाध्यक्ष एनके गुप्ता ने कई जरूरी बातें साफ-साफ बताईं. उन्होंने कहा कि बिहार में अभी करीब 97 हजार लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं. सबकी देखभाल हमारी समिति कर रही है. अच्छी बात यह है कि दवा नियमित चलती रहे तो यह बीमारी बढ़ती नहीं है और मरीज बिल्कुल सामान्य जिंदगी जी सकता है. क्यों होता है एड्स? एनके गुप्ता ने बताया कि एचआईवी वायरस चार मुख्य रास्तों से फैलता है. असुरक्षित यौन संबंध. सबसे ज्यादा मामले इसी वजह से सामने आते हैं. इस्तेमाल की हुई सुई. इस वजह से खासकर नशा करने वालों को एचआईवी होता है. संक्रमित खून चढ़ाने से. गर्भवती मां से बच्चे तक, लेकिन अब इसका भी इलाज है. लोगों को रहती है यह गलतफहमी एचआईवी पॉजिटिव होने को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि मां को एड्स है तो बच्चे को भी जरूर होगा. ऐसा बिल्कुल नहीं है. अगर गर्भावस्था के दौरान मां सही दवा लेती रहे तो 99 पर्सेंट तक बच्चा पूरी तरह हेल्दी पैदा होता है. बिहार में यह प्रोग्राम काफी अच्छी तरह चल रहा है.  कब दिखने लगते हैं एड्स के लक्षण? एनके गुप्ता ने बताया कि शुरुआती कई साल तक एचआईवी के कोई खास लक्षण नहीं दिखते हैं. जब इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो जाती है यानी यह बीमारी अपनी आखिरी स्टेज में पहुंच जाती है, तब इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई बीमारी बार-बार हो रही है और ठीक नहीं हो रही तो एक बार एचआईवी टेस्ट जरूर करवा लें. इससे डरने की कोई बात नहीं है. बार-बार बुखार आना लंबे समय तक दस्त लगना, जो ठीक न हो वजन तेजी से गिरना मुंह में छाले, गले में इंफेक्शन स्किन पर चकत्ते या फोड़े बार-बार निमोनिया या टीबी होना बचाव के ये तरीके बेहद आसान हमेशा कंडोम इस्तेमाल करें. नशा करने के लिए कभी सुई शेयर न करें. सैलून में नया ब्लेड और टैटू बनवाते समय नई सुई ही इस्तेमाल हो. खून चढ़वाने या ऑपरेशन से पहले अस्पताल का विश्वास करें, जो स्क्रीनिंग करता हो. शक हो तो तुरंत टेस्ट करवाएं. इसका टेस्ट बिलकुल फ्री है. एचआईवी से निपटने के लिए मुस्तैद है बिहार पूरे राज्य में 186 एआरटी सेंटर (दवा देने वाले केंद्र) हैं. इसकी दवा पूरी तरह मुफ्त है, जो जिंदगी भर मिलती रहेगी. हर जिले के बड़े अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मुफ्त टेस्टिंग की सुविधा. टोल फ्री हेल्पलाइन 1800 180 5544 भी है. किन लोगों को होती है दिक्कत? एनके गुप्ता ने बताया कि जो लोग आखिरी स्टेज तक लापरवाही करते हैं, उनकी जान चली जाती है. वहीं, जो लोग टेस्ट करवाकर तुरंत दवा शुरू कर देते हैं, वे दशकों तक हेल्दी रहते हैं. आज एड्स से डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है. ये भी पढ़ें: फैटी लिवर पेट में क्यों देता है तकलीफ? जानें शुरुआती संकेत और बचाव के तरीके Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Dec 2, 2025 - 01:30
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World AIDS Day 2025: बिहार में कितने लोग HIV पॉजिटिव? जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके

विश्व एड्स दिवस के मौके पर पूरे बिहार में जागरूकता का माहौल है. बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति और स्वास्थ्य विभाग ने पटना से लेकर राज्य के हर जिले में रैली, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर-बैनर और सेमिनार का आयोजन किया गया. इसका मकसद लोगों को एचआईवी/एड्स के बारे में सही जानकारी देना, डर खत्म करना और बचाव के तरीके बताना था. 

बिहार में कितने लोग एचआईवी पॉजिटिव?

एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के विभागाध्यक्ष एनके गुप्ता ने कई जरूरी बातें साफ-साफ बताईं. उन्होंने कहा कि बिहार में अभी करीब 97 हजार लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं. सबकी देखभाल हमारी समिति कर रही है. अच्छी बात यह है कि दवा नियमित चलती रहे तो यह बीमारी बढ़ती नहीं है और मरीज बिल्कुल सामान्य जिंदगी जी सकता है.

क्यों होता है एड्स?

एनके गुप्ता ने बताया कि एचआईवी वायरस चार मुख्य रास्तों से फैलता है.

  1. असुरक्षित यौन संबंध. सबसे ज्यादा मामले इसी वजह से सामने आते हैं.
  2. इस्तेमाल की हुई सुई. इस वजह से खासकर नशा करने वालों को एचआईवी होता है.
  3. संक्रमित खून चढ़ाने से.
  4. गर्भवती मां से बच्चे तक, लेकिन अब इसका भी इलाज है.

लोगों को रहती है यह गलतफहमी

एचआईवी पॉजिटिव होने को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि मां को एड्स है तो बच्चे को भी जरूर होगा. ऐसा बिल्कुल नहीं है. अगर गर्भावस्था के दौरान मां सही दवा लेती रहे तो 99 पर्सेंट तक बच्चा पूरी तरह हेल्दी पैदा होता है. बिहार में यह प्रोग्राम काफी अच्छी तरह चल रहा है. 

कब दिखने लगते हैं एड्स के लक्षण?

एनके गुप्ता ने बताया कि शुरुआती कई साल तक एचआईवी के कोई खास लक्षण नहीं दिखते हैं. जब इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो जाती है यानी यह बीमारी अपनी आखिरी स्टेज में पहुंच जाती है, तब इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई बीमारी बार-बार हो रही है और ठीक नहीं हो रही तो एक बार एचआईवी टेस्ट जरूर करवा लें. इससे डरने की कोई बात नहीं है.

  • बार-बार बुखार आना
  • लंबे समय तक दस्त लगना, जो ठीक न हो
  • वजन तेजी से गिरना
  • मुंह में छाले, गले में इंफेक्शन
  • स्किन पर चकत्ते या फोड़े
  • बार-बार निमोनिया या टीबी होना

बचाव के ये तरीके बेहद आसान

  • हमेशा कंडोम इस्तेमाल करें.
  • नशा करने के लिए कभी सुई शेयर न करें.
  • सैलून में नया ब्लेड और टैटू बनवाते समय नई सुई ही इस्तेमाल हो.
  • खून चढ़वाने या ऑपरेशन से पहले अस्पताल का विश्वास करें, जो स्क्रीनिंग करता हो.
  • शक हो तो तुरंत टेस्ट करवाएं. इसका टेस्ट बिलकुल फ्री है.

एचआईवी से निपटने के लिए मुस्तैद है बिहार

  • पूरे राज्य में 186 एआरटी सेंटर (दवा देने वाले केंद्र) हैं.
  • इसकी दवा पूरी तरह मुफ्त है, जो जिंदगी भर मिलती रहेगी.
  • हर जिले के बड़े अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक मुफ्त टेस्टिंग की सुविधा.
  • टोल फ्री हेल्पलाइन 1800 180 5544 भी है.

किन लोगों को होती है दिक्कत?

एनके गुप्ता ने बताया कि जो लोग आखिरी स्टेज तक लापरवाही करते हैं, उनकी जान चली जाती है. वहीं, जो लोग टेस्ट करवाकर तुरंत दवा शुरू कर देते हैं, वे दशकों तक हेल्दी रहते हैं. आज एड्स से डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है.

ये भी पढ़ें: फैटी लिवर पेट में क्यों देता है तकलीफ? जानें शुरुआती संकेत और बचाव के तरीके

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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