VNS Therapy For PTSD: वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला PTSD का 100 फीसदी इलाज, इस स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे

PTSD treatment breakthrough: पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी PTSD एक गंभीर मानसिक समस्या है, जो किसी डरावने या जीवन-धमकी वाले हादसे के बाद हो सकती है. इस बीमारी का असर इंसान की सोच, व्यवहार और भावनाओं पर गहरा पड़ता है. लोग बार-बार बुरे सपने देखते हैं, घबराहट महसूस करते हैं और सामान्य जिंदगी जीने में कठिनाई होती है. आमतौर पर इसके इलाज के लिए दवाइयां और थेरेपी इस्तेमाल की जाती हैं, लेकिन हर मरीज पर इनका असर नहीं होता. स्टडी में मिला हैरान करने वाला नतीजा हाल ही में अमेरिका में की गई एक क्लिनिकल स्टडी ने उम्मीद जगाई है. इस रिसर्च में शामिल सभी नौ मरीजों का PTSD एक नए इलाज के बाद पूरी तरह खत्म हो गया. टेक्सास यूनिवर्सिटी एट डलास और बायलर यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों ने यह स्टडी की. खास बात यह रही कि छह महीने की निगरानी के बाद भी किसी मरीज में लक्षण वापस नहीं आए. VNS तकनीक क्या है? इस नए इलाज में पारंपरिक थेरेपी के साथ Vagus Nerve Stimulation (VNS) नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इस तकनीक में गर्दन की नस को हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजे जाते हैं. यह नस दिमाग के कई काम जैसे मूड, तनाव और भावनाओं को नियंत्रित करती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि VNS थेरेपी के साथ मिलकर दिमाग में तेजी से पॉजिटिव बदलाव लाती है. कैसे दी गई थेरेपी? रिसर्चर्स ने VNS को Prolonged Exposure Therapy के साथ जोड़ा. इस थेरेपी में मरीज को धीरे-धीरे सुरक्षित माहौल में अपने डर का सामना कराया जाता है. इसके लिए गर्दन की त्वचा के नीचे एक छोटा डिवाइस लगाया गया, जो सत्र के दौरान छोटे-छोटे इलेक्ट्रिकल सिग्नल देता है. कुल 12 सत्रों में इलाज किया गया और नतीजे चौंकाने वाले रहे. 13 साल से चल रहा रिसर्च काम वैज्ञानिक पिछले 13 सालों से VNS पर काम कर रहे हैं. इससे पहले वे स्ट्रोक मरीजों के हाथ-पैर की मूवमेंट सुधारने में सफलता पा चुके हैं. उनका कहना है कि VNS को थेरेपी के साथ जोड़ने पर दिमाग तेजी से नई चीजें सीखता है. इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है. PTSD का खतरा कितना बड़ा? हर साल अमेरिका में लगभग 5 प्रतिशत एडल्ट PTSD से प्रभावित होते हैं. इनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में दोगुनी है. कई मरीज दवाइयों या थेरेपी से ठीक नहीं हो पाते या फिर उन्हें साइड इफेक्ट्स झेलने पड़ते हैं. ऐसे मरीजों के लिए यह नया तरीका उम्मीद की किरण हो सकता है. सुरक्षित और छोटा डिवाइस इस ट्रायल में इस्तेमाल किया गया VNS डिवाइस बहुत छोटा है, लगभग सिक्के के आकार का. यह MRI या CT स्कैन जैसे टेस्ट में बाधा नहीं डालता. डलास में पिछले कई सालों से करीब 50 लोगों पर इसका सुरक्षित इस्तेमाल किया जा चुका है. अब बड़े ट्रायल से साबित होगी तकनीक की ताकत अब इसका Phase-2 Trial डलास और ऑस्टिन में चल रहा है. इसमें ज्यादा मरीज शामिल होंगे और एक "placebo group" भी होगा, ताकि साफ हो सके कि नतीजे सिर्फ डिवाइस की वजह से आए हैं. कुल मिलाकर, यह स्टडी छोटी जरूर है लेकिन बेहद उम्मीद जगाने वाली है. अगर आगे के बड़े ट्रायल्स में भी ऐसे ही नतीजे मिलते हैं, तो यह तकनीक PTSD के मरीजों के लिए जिंदगी बदलने वाला इलाज बन सकती है. इसे भी पढ़ें: Colon Cancer: ये 7 फूड तुरंत खाना छोड़ दें तो कम हो जाएगा कोलन कैंसर होने का खतरा, यूथ में ज्यादा बढ़ रहा खतरा Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Sep 16, 2025 - 14:30
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VNS Therapy For PTSD: वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला PTSD का 100 फीसदी इलाज, इस स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे

PTSD treatment breakthrough: पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी PTSD एक गंभीर मानसिक समस्या है, जो किसी डरावने या जीवन-धमकी वाले हादसे के बाद हो सकती है. इस बीमारी का असर इंसान की सोच, व्यवहार और भावनाओं पर गहरा पड़ता है. लोग बार-बार बुरे सपने देखते हैं, घबराहट महसूस करते हैं और सामान्य जिंदगी जीने में कठिनाई होती है. आमतौर पर इसके इलाज के लिए दवाइयां और थेरेपी इस्तेमाल की जाती हैं, लेकिन हर मरीज पर इनका असर नहीं होता.

स्टडी में मिला हैरान करने वाला नतीजा

हाल ही में अमेरिका में की गई एक क्लिनिकल स्टडी ने उम्मीद जगाई है. इस रिसर्च में शामिल सभी नौ मरीजों का PTSD एक नए इलाज के बाद पूरी तरह खत्म हो गया. टेक्सास यूनिवर्सिटी एट डलास और बायलर यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों ने यह स्टडी की. खास बात यह रही कि छह महीने की निगरानी के बाद भी किसी मरीज में लक्षण वापस नहीं आए.

VNS तकनीक क्या है?

इस नए इलाज में पारंपरिक थेरेपी के साथ Vagus Nerve Stimulation (VNS) नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इस तकनीक में गर्दन की नस को हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजे जाते हैं. यह नस दिमाग के कई काम जैसे मूड, तनाव और भावनाओं को नियंत्रित करती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि VNS थेरेपी के साथ मिलकर दिमाग में तेजी से पॉजिटिव बदलाव लाती है.

कैसे दी गई थेरेपी?

रिसर्चर्स ने VNS को Prolonged Exposure Therapy के साथ जोड़ा. इस थेरेपी में मरीज को धीरे-धीरे सुरक्षित माहौल में अपने डर का सामना कराया जाता है. इसके लिए गर्दन की त्वचा के नीचे एक छोटा डिवाइस लगाया गया, जो सत्र के दौरान छोटे-छोटे इलेक्ट्रिकल सिग्नल देता है. कुल 12 सत्रों में इलाज किया गया और नतीजे चौंकाने वाले रहे.

13 साल से चल रहा रिसर्च काम

वैज्ञानिक पिछले 13 सालों से VNS पर काम कर रहे हैं. इससे पहले वे स्ट्रोक मरीजों के हाथ-पैर की मूवमेंट सुधारने में सफलता पा चुके हैं. उनका कहना है कि VNS को थेरेपी के साथ जोड़ने पर दिमाग तेजी से नई चीजें सीखता है. इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है.

PTSD का खतरा कितना बड़ा?

हर साल अमेरिका में लगभग 5 प्रतिशत एडल्ट PTSD से प्रभावित होते हैं. इनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में दोगुनी है. कई मरीज दवाइयों या थेरेपी से ठीक नहीं हो पाते या फिर उन्हें साइड इफेक्ट्स झेलने पड़ते हैं. ऐसे मरीजों के लिए यह नया तरीका उम्मीद की किरण हो सकता है.

सुरक्षित और छोटा डिवाइस

इस ट्रायल में इस्तेमाल किया गया VNS डिवाइस बहुत छोटा है, लगभग सिक्के के आकार का. यह MRI या CT स्कैन जैसे टेस्ट में बाधा नहीं डालता. डलास में पिछले कई सालों से करीब 50 लोगों पर इसका सुरक्षित इस्तेमाल किया जा चुका है.

अब बड़े ट्रायल से साबित होगी तकनीक की ताकत

अब इसका Phase-2 Trial डलास और ऑस्टिन में चल रहा है. इसमें ज्यादा मरीज शामिल होंगे और एक "placebo group" भी होगा, ताकि साफ हो सके कि नतीजे सिर्फ डिवाइस की वजह से आए हैं. कुल मिलाकर, यह स्टडी छोटी जरूर है लेकिन बेहद उम्मीद जगाने वाली है. अगर आगे के बड़े ट्रायल्स में भी ऐसे ही नतीजे मिलते हैं, तो यह तकनीक PTSD के मरीजों के लिए जिंदगी बदलने वाला इलाज बन सकती है.

इसे भी पढ़ें: Colon Cancer: ये 7 फूड तुरंत खाना छोड़ दें तो कम हो जाएगा कोलन कैंसर होने का खतरा, यूथ में ज्यादा बढ़ रहा खतरा

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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