Vastu Tips for Couples: लव लाइफ में खत्म करें तनाव, जानें वास्तुशास्त्र का नियम
Vastu Tips for Couples: व्यक्ति अपने जीवन में खुशहाली के लिए दांपत्य जीवन अपनाता है. पति-पत्नी एक-दूसरे से अनेक अपेक्षाएं रखते हैं. लेकिन कई बार यह रिश्ता कष्टमय होने लगता है. दोनों के बीच तनाव रहने लगता है. ऐसे में वास्तु शास्त्र के कुछ नियम है जो आपके जीवन को खुशहाल बना सकते हैं. अगर पति-पत्नी के बीच प्रेम और सौहार्द की भावना नहीं बन रही है. इसका असर सिर्फ पति-पत्नी पर ही नहीं, बल्कि बच्चों पर भी पड़ने लगता है. भारतीय वास्तु शास्त्र में दांपत्य जीवन में मधुरता और सामंजस्य लाने के कई उपाय बताए गए हैं. अगर कोई दंपत्ति इन उपायों को अपनाए, तो उनके जीवन में फिर से प्रेम और शांति का प्रवाह लौट सकता है. बेडरूम की दिशा और वास्तु का महत्व वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम के लिए सबसे शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम दिशा मानी गई है. यह दिशा स्थायित्व और संतुलन प्रदान करती है. इस दिशा में स्थित बेडरूम में सोने वाले दंपत्ति का मन शांत और व्यवहार संयमित रहता है. अगर बेडरूम दक्षिण-पूर्व दिशा में हो, तो झगड़े और तनाव की स्थिति बन सकती है क्योंकि यह दिशा अग्नि तत्व प्रधान होती है. सोने की दिशा का प्रभाव सोते समय दंपत्ति को सिर दक्षिण दिशा और पैर उत्तर दिशा में रखने चाहिए. यह दिशा स्वास्थ्य और सुख दोनों के लिए शुभ मानी गई है. यदि ऐसा संभव न हो, तो सिर पूर्व दिशा में रखकर भी सो सकते हैं. इससे मन शांत रहता है और नींद अच्छी आती है. पति और पत्नी के सिर की दिशा विपरीत नहीं होनी चाहिए. जैसे, अगर पति पूर्व की ओर सिर रखे और पत्नी पश्चिम की ओर, तो धीरे-धीरे उनके बीच दूरी और मतभेद बढ़ने लगते हैं. गद्दा और रसोई का वास्तु भी जरूरी वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस डबल बेड पर दंपत्ति सोते हैं उस पर एक ही बड़ा गद्दा होना चाहिए. दो अलग-अलग गद्दे धीरे-धीरे उनके जीवन में अलगाव का कारण बन सकते हैं. घर में रसोई बनाने की सर्वोत्तम दिशा आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) है क्योंकि यह अग्नि तत्व प्रधान होती है. अगर रसोई पूर्व दिशा में बनी हो, तो ऐसी स्थिति में घर की स्त्री अपने पति से अक्सर असंतुष्ट या नाराज़ रहने लगती है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Vastu Tips for Couples: व्यक्ति अपने जीवन में खुशहाली के लिए दांपत्य जीवन अपनाता है. पति-पत्नी एक-दूसरे से अनेक अपेक्षाएं रखते हैं. लेकिन कई बार यह रिश्ता कष्टमय होने लगता है. दोनों के बीच तनाव रहने लगता है. ऐसे में वास्तु शास्त्र के कुछ नियम है जो आपके जीवन को खुशहाल बना सकते हैं.
अगर पति-पत्नी के बीच प्रेम और सौहार्द की भावना नहीं बन रही है. इसका असर सिर्फ पति-पत्नी पर ही नहीं, बल्कि बच्चों पर भी पड़ने लगता है. भारतीय वास्तु शास्त्र में दांपत्य जीवन में मधुरता और सामंजस्य लाने के कई उपाय बताए गए हैं. अगर कोई दंपत्ति इन उपायों को अपनाए, तो उनके जीवन में फिर से प्रेम और शांति का प्रवाह लौट सकता है.
बेडरूम की दिशा और वास्तु का महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम के लिए सबसे शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम दिशा मानी गई है. यह दिशा स्थायित्व और संतुलन प्रदान करती है. इस दिशा में स्थित बेडरूम में सोने वाले दंपत्ति का मन शांत और व्यवहार संयमित रहता है. अगर बेडरूम दक्षिण-पूर्व दिशा में हो, तो झगड़े और तनाव की स्थिति बन सकती है क्योंकि यह दिशा अग्नि तत्व प्रधान होती है.
सोने की दिशा का प्रभाव
सोते समय दंपत्ति को सिर दक्षिण दिशा और पैर उत्तर दिशा में रखने चाहिए. यह दिशा स्वास्थ्य और सुख दोनों के लिए शुभ मानी गई है. यदि ऐसा संभव न हो, तो सिर पूर्व दिशा में रखकर भी सो सकते हैं. इससे मन शांत रहता है और नींद अच्छी आती है. पति और पत्नी के सिर की दिशा विपरीत नहीं होनी चाहिए. जैसे, अगर पति पूर्व की ओर सिर रखे और पत्नी पश्चिम की ओर, तो धीरे-धीरे उनके बीच दूरी और मतभेद बढ़ने लगते हैं.
गद्दा और रसोई का वास्तु भी जरूरी
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस डबल बेड पर दंपत्ति सोते हैं उस पर एक ही बड़ा गद्दा होना चाहिए. दो अलग-अलग गद्दे धीरे-धीरे उनके जीवन में अलगाव का कारण बन सकते हैं.
- घर में रसोई बनाने की सर्वोत्तम दिशा आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) है क्योंकि यह अग्नि तत्व प्रधान होती है. अगर रसोई पूर्व दिशा में बनी हो, तो ऐसी स्थिति में घर की स्त्री अपने पति से अक्सर असंतुष्ट या नाराज़ रहने लगती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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