TMC सिंबल फ्रीज, कांग्रेस प्रत्याशी अरेस्ट, बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. इन दोनों सीटों पर मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान, कांग्रेस और वाम दलों की वापसी की कोशिश और बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के बीच भी यह चुनाव अहम हो गया है. दोनों सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे. नंदीग्राम में मुकाबले की तस्वीर उस समय बदल गई, जब ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया. बनर्जी ने कहा कि यह फैसला विपक्षी दलों के बीच तालमेल मजबूत करने के लिए लिया गया है. कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया गए इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. उनके खिलाफ करीब 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी वारंट लंबित होने की बात पुलिस की ओर से कही गई है. इस गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी और कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और कार्रवाई के समय को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए हैं. दूसरी ओर, पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुराने मामले और लंबित वारंट के आधार पर हुई है. इसलिए इस मामले में अलग-अलग पक्षों के दावों को उनके बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए. TMC के दोनों गुटों के लिए पहचान की लड़ाई तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न तय किए हैं. ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न दिया गया है. वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चिह्न मिला है. नंदीग्राम में डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी ने हसीरानी रथ और वाम दलों ने शांतिगोपाल गिरि को मैदान में उतारा है. ममता गुट के उम्मीदवार के हटने के बाद कांग्रेस के मिलन प्रधान भी मुकाबले में हैं. ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है. उनका कहना है कि पार्टी के पुराने नाम और चुनाव चिह्न पर उनका दावा है. मामला अब अदालत के सामने है. रेजीनगर में उम्मीदवार ने पहले नाम वापस लिया, फिर लौटे मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट पर भी TMC के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आई. ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनाव से हटने का ऐलान किया. उन्होंने कार्यकर्ताओं पर दबाव और नए नाम-चिह्न के साथ चुनाव लड़ने में आ रही परेशानियों का हवाला दिया था. हालांकि, ममता बनर्जी से बातचीत के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और दोबारा चुनाव मैदान में लौट आए. अब वह ममता गुट के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. रेजीनगर में उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के सफीउज्जमान शेख, कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी, सीपीआई(एम) के सैयद असद अली और बीजेपी के सखराव सरकार समेत कई उम्मीदवारों से है. आम जनता उन्नयन पार्टी ने भी गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है. अल्पसंख्यक वोट पर सबकी नजर रेजीनगर में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाता हैं. इसलिए यह सीट कांग्रेस, वाम दलों, बीजेपी और TMC के दोनों गुटों के लिए खास महत्व रखती है. चुनाव के नतीजे से यह संकेत मिल सकता है कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद अल्पसंख्यक मतदाताओं का रुझान किस दिशा में जा रहा है. साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि TMC के विभाजन का उसके पारंपरिक वोट आधार पर कितना असर पड़ता है. हालांकि, चुनाव नतीजे आने से पहले यह कहना संभव नहीं है कि कोई एक दल इस वोट बैंक पर अपना प्रभाव बनाए रखेगा. कांग्रेस और वाम दल भी तलाश रहे हैं वापसी का रास्ता नंदीग्राम और रेजीनगर के चुनाव कांग्रेस और वाम दलों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अपने पुराने राजनीतिक आधार को वापस पाने की कोशिश कर रही है. पार्टी के नेता अब उन मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की बात कर रहे हैं, जो बीजेपी के खिलाफ हैं. वाम दल भी TMC की ओर गए अपने पुराने मतदाताओं को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. सीपीआई(एम) नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा है कि राज्य में वाम, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतें बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की भूमिका निभाएंगी. यह उनका राजनीतिक दावा है. बीजेपी दोनों सीटों पर मैदान में बीजेपी ने नंदीग्राम में हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. वह दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रहे थे. रेजीनगर में पार्टी ने पूर्व मुर्शिदाबाद जिला अध्यक्ष सखराव सरकार को टिकट दिया है. बीजेपी नेता इन उपचुनावों को राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने के मौके के तौर पर देख रहे हैं. पार्टी की ओर से दोनों सीटों पर जीत का दावा भी किया गया है, लेकिन चुनाव से पहले किसी परिणाम का निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है. 6 अक्टूबर को मतदान, 9 अक्टूबर को नतीजे नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी. दोनों सीटों पर नामांकन और उम्मीदवारों की वापसी के बाद अब मुकाबले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है.
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. इन दोनों सीटों पर मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान, कांग्रेस और वाम दलों की वापसी की कोशिश और बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के बीच भी यह चुनाव अहम हो गया है. दोनों सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे.
नंदीग्राम में मुकाबले की तस्वीर उस समय बदल गई, जब ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली. इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया. बनर्जी ने कहा कि यह फैसला विपक्षी दलों के बीच तालमेल मजबूत करने के लिए लिया गया है.
कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया गए
इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया. अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. उनके खिलाफ करीब 19 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी वारंट लंबित होने की बात पुलिस की ओर से कही गई है. इस गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी और कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और कार्रवाई के समय को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए हैं. दूसरी ओर, पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुराने मामले और लंबित वारंट के आधार पर हुई है. इसलिए इस मामले में अलग-अलग पक्षों के दावों को उनके बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
TMC के दोनों गुटों के लिए पहचान की लड़ाई
तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न तय किए हैं. ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न दिया गया है. वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चिह्न मिला है. नंदीग्राम में डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है.
बीजेपी ने हसीरानी रथ और वाम दलों ने शांतिगोपाल गिरि को मैदान में उतारा है. ममता गुट के उम्मीदवार के हटने के बाद कांग्रेस के मिलन प्रधान भी मुकाबले में हैं. ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है. उनका कहना है कि पार्टी के पुराने नाम और चुनाव चिह्न पर उनका दावा है. मामला अब अदालत के सामने है.
रेजीनगर में उम्मीदवार ने पहले नाम वापस लिया, फिर लौटे
मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट पर भी TMC के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आई. ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले चुनाव से हटने का ऐलान किया. उन्होंने कार्यकर्ताओं पर दबाव और नए नाम-चिह्न के साथ चुनाव लड़ने में आ रही परेशानियों का हवाला दिया था. हालांकि, ममता बनर्जी से बातचीत के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और दोबारा चुनाव मैदान में लौट आए. अब वह ममता गुट के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं.
रेजीनगर में उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के सफीउज्जमान शेख, कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी, सीपीआई(एम) के सैयद असद अली और बीजेपी के सखराव सरकार समेत कई उम्मीदवारों से है. आम जनता उन्नयन पार्टी ने भी गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है.
अल्पसंख्यक वोट पर सबकी नजर
रेजीनगर में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मतदाता हैं. इसलिए यह सीट कांग्रेस, वाम दलों, बीजेपी और TMC के दोनों गुटों के लिए खास महत्व रखती है. चुनाव के नतीजे से यह संकेत मिल सकता है कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद अल्पसंख्यक मतदाताओं का रुझान किस दिशा में जा रहा है. साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि TMC के विभाजन का उसके पारंपरिक वोट आधार पर कितना असर पड़ता है. हालांकि, चुनाव नतीजे आने से पहले यह कहना संभव नहीं है कि कोई एक दल इस वोट बैंक पर अपना प्रभाव बनाए रखेगा.
कांग्रेस और वाम दल भी तलाश रहे हैं वापसी का रास्ता
नंदीग्राम और रेजीनगर के चुनाव कांग्रेस और वाम दलों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अपने पुराने राजनीतिक आधार को वापस पाने की कोशिश कर रही है. पार्टी के नेता अब उन मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की बात कर रहे हैं, जो बीजेपी के खिलाफ हैं. वाम दल भी TMC की ओर गए अपने पुराने मतदाताओं को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं. सीपीआई(एम) नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा है कि राज्य में वाम, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतें बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की भूमिका निभाएंगी. यह उनका राजनीतिक दावा है.
बीजेपी दोनों सीटों पर मैदान में
बीजेपी ने नंदीग्राम में हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है. वह दिवंगत चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी रहे थे. रेजीनगर में पार्टी ने पूर्व मुर्शिदाबाद जिला अध्यक्ष सखराव सरकार को टिकट दिया है. बीजेपी नेता इन उपचुनावों को राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने के मौके के तौर पर देख रहे हैं. पार्टी की ओर से दोनों सीटों पर जीत का दावा भी किया गया है, लेकिन चुनाव से पहले किसी परिणाम का निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है.
6 अक्टूबर को मतदान, 9 अक्टूबर को नतीजे
नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी. दोनों सीटों पर नामांकन और उम्मीदवारों की वापसी के बाद अब मुकाबले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है.
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