Tamil Nadu: 12 साल पहले नाबालिग लड़कियों को वेश्यावृत्ति में धकेला, कोर्ट ने 16 लोगों को ठहराया दोषी

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के कडलूर जिले के थिट्टाकुडी इलाके से सामने आया यह मामला मानवता को शर्मसार करने वाला है. साल 2014 में एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली 13 और 14 साल की दो नाबालिग छात्राएं इस अपराध का शिकार बनीं. दोनों आपस में सहेलियां थीं और सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती थीं, लेकिन कुछ लोगों की दरिंदगी ने उनकी जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया. इन छात्राओं की जान-पहचान इडली की दुकान चलाने वाले सेंथिलकुमार की पत्नी धनलक्ष्मी (32) से थी. इसी भरोसे का फायदा उठाकर धनलक्ष्मी ने अपने प्रेमी आनंदराज के जरिए दोनों नाबालिगों का यौन शोषण करवाया. इसके बाद उसने छात्राओं को वेश्यावृत्ति में धकेलने की साजिश रची. दलालों के जाल में फंसी नाबालिग छात्राएं धनलक्ष्मी दोनों छात्राओं को वृद्धाचलम के वेश्यावृत्ति दलाल कला के पास ले गई. वहां से सेलवराज नामक व्यक्ति के जरिए उन्हें जबरन देह व्यापार में शामिल किया गया. इतना ही नहीं, धनलक्ष्मी ने दोनों छात्राओं को थिट्टाकुडी के एक धार्मिक उपदेशक अरुलदास के घर भी भेजा, जहां दो दिनों तक उनका शोषण किया गया. इसके बाद गिरोह ने छात्राओं को विल्लुपुरम जिले के वलवनूर, सलेम, वडालूर और नेयवेली जैसे इलाकों में ले जाकर लगातार वेश्यावृत्ति में धकेला. बाद में इन्हें अरियालूर जिले के इदयक्कुरिची निवासी सतीशकुमार और उसकी पत्नी तमिलारसी को बेच दिया गया. दोनों छात्राओं को वडालूर में एक किराए के मकान में रखा गया, जहां उनसे जबरन देह व्यापार कराया गया. हिम्मत दिखाकर भागीं छात्राएं, दर्ज कराई शिकायत लगातार हो रहे अत्याचार से तंग आकर दोनों छात्राएं किसी तरह सतीशकुमार के घर से भाग निकलीं और थिट्टाकुडी पहुंचकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत ने पूरे गिरोह की पोल खोल दी. पुलिस ने सतीशकुमार, उसकी पत्नी तमिलारसी, धार्मिक उपदेशक अरुलदास सहित 23 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. 2016 में केस की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई. जांच के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि 4 आरोपी फरार रहे. अदालत का सख्त फैसला अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी ठहराया. धार्मिक उपदेशक अरुलदास को 30 साल की जेल की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य को अलग-अलग अवधि की सजा मिली. बाद में फरार आरोपी जेबीना को गिरफ्तार कर 20 साल की सजा दी गई. शेष तीन आरोपियों को भी पकड़ लिया गया और अदालत ने तीनों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई.

Jan 22, 2026 - 15:30
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Tamil Nadu: 12 साल पहले नाबालिग लड़कियों को वेश्यावृत्ति में धकेला, कोर्ट ने 16 लोगों को ठहराया दोषी

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के कडलूर जिले के थिट्टाकुडी इलाके से सामने आया यह मामला मानवता को शर्मसार करने वाला है. साल 2014 में एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली 13 और 14 साल की दो नाबालिग छात्राएं इस अपराध का शिकार बनीं. दोनों आपस में सहेलियां थीं और सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती थीं, लेकिन कुछ लोगों की दरिंदगी ने उनकी जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया.

इन छात्राओं की जान-पहचान इडली की दुकान चलाने वाले सेंथिलकुमार की पत्नी धनलक्ष्मी (32) से थी. इसी भरोसे का फायदा उठाकर धनलक्ष्मी ने अपने प्रेमी आनंदराज के जरिए दोनों नाबालिगों का यौन शोषण करवाया. इसके बाद उसने छात्राओं को वेश्यावृत्ति में धकेलने की साजिश रची.

दलालों के जाल में फंसी नाबालिग छात्राएं

धनलक्ष्मी दोनों छात्राओं को वृद्धाचलम के वेश्यावृत्ति दलाल कला के पास ले गई. वहां से सेलवराज नामक व्यक्ति के जरिए उन्हें जबरन देह व्यापार में शामिल किया गया. इतना ही नहीं, धनलक्ष्मी ने दोनों छात्राओं को थिट्टाकुडी के एक धार्मिक उपदेशक अरुलदास के घर भी भेजा, जहां दो दिनों तक उनका शोषण किया गया.

इसके बाद गिरोह ने छात्राओं को विल्लुपुरम जिले के वलवनूर, सलेम, वडालूर और नेयवेली जैसे इलाकों में ले जाकर लगातार वेश्यावृत्ति में धकेला. बाद में इन्हें अरियालूर जिले के इदयक्कुरिची निवासी सतीशकुमार और उसकी पत्नी तमिलारसी को बेच दिया गया. दोनों छात्राओं को वडालूर में एक किराए के मकान में रखा गया, जहां उनसे जबरन देह व्यापार कराया गया.

हिम्मत दिखाकर भागीं छात्राएं, दर्ज कराई शिकायत

लगातार हो रहे अत्याचार से तंग आकर दोनों छात्राएं किसी तरह सतीशकुमार के घर से भाग निकलीं और थिट्टाकुडी पहुंचकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत ने पूरे गिरोह की पोल खोल दी.

पुलिस ने सतीशकुमार, उसकी पत्नी तमिलारसी, धार्मिक उपदेशक अरुलदास सहित 23 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया. 2016 में केस की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई. जांच के दौरान 19 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि 4 आरोपी फरार रहे.

अदालत का सख्त फैसला

अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी ठहराया. धार्मिक उपदेशक अरुलदास को 30 साल की जेल की सजा सुनाई गई, जबकि अन्य को अलग-अलग अवधि की सजा मिली. बाद में फरार आरोपी जेबीना को गिरफ्तार कर 20 साल की सजा दी गई. शेष तीन आरोपियों को भी पकड़ लिया गया और अदालत ने तीनों को 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई.

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