T20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पाकिस्तान को श्रीलंका ने क्यों दिलाई 2009 आतंकी हमले की याद

टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पाकिस्तान के मैच बहिष्कार के संकेतों ने श्रीलंका को गहरी चिंता में डाल दिया है. सह-मेजबान होने के नाते श्रीलंका ने इस फैसले को न सिर्फ क्रिकेट के लिए, बल्कि अपने देश की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी बड़ा झटका बताया है. इसी कड़ी में श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को एक औपचारिक पत्र भेजकर अपना पक्ष मजबूती से रखा है. श्रीलंका ने जताई नाराजगी श्रीलंका क्रिकेट की ओर से भेजे गए इस पत्र में साफ कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबले का न होना पूरे टूर्नामेंट की चमक कम कर देगा. SLC का मानना है कि इस मैच के कारण न सिर्फ टिकटों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है, बल्कि होटल, ट्रैवल और लोकल बिजनेस को भी बड़ा फायदा मिलने वाला था. अब बहिष्कार की खबरों से ही कोलंबो में होटल बुकिंग रद्द होने लगी हैं, जो चिंता का विषय है. 2009 का दर्द फिर किया याद श्रीलंका ने अपने पत्र में 2009 में लाहौर में टीम की बस पर हुए आतंकी हमले को याद दिलाया. उस हमले में श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ को गंभीर चोट आई थी. इन सब के बाद भी, जब बाकी टीमें पाकिस्तान जाने से मान कर रही थीं, तब श्रीलंका ने हिम्मत दिखाते हुए वहां क्रिकेट खेलने का फैसला किया. SLC ने याद दिलाया कि 2019 में पाकिस्तान में टेस्ट खेलने वाली पहली टीम भी श्रीलंका ही थी, जिसने पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी में अहम भूमिका निभाई थी. आर्थिक नुकसान का डर श्रीलंका का कहना है कि उसने इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले के लिए सुरक्षा और आयोजन से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. मैच रद्द होने की स्थिति में बोर्ड को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है. इसके साथ ही पर्यटन पर भी सीधा असर पड़ेगा, जो पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है. खेल भावना की अपील श्रीलंका क्रिकेट ने पाकिस्तान से “स्पिरिट ऑफ रेसिप्रोसिटी” यानी आपसी सहयोग और भरोसे की भावना निभाने की अपील की है. SLC का कहना है कि जब पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत थी, तब श्रीलंका उसके साथ खड़ा था. अब जब श्रीलंका मेजबान है और पूरी सुरक्षा का भरोसा दे रहा है, तो पाकिस्तान को भी क्रिकेट और फैंस के हित में मैदान पर उतरना चाहिए. अब पाकिस्तान के पाले में गेंद श्रीलंका की अपील के बाद अब सभी की नजरें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और सरकार के फैसले पर टिकी हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान अपने पुराने दोस्त की बात मानता है या बहिष्कार के रुख पर कायम रहता है. इस फैसले का असर सिर्फ एक मैच पर नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट और क्रिकेट संबंधों पर पड़ सकता है. 

Feb 6, 2026 - 13:30
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T20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पाकिस्तान को श्रीलंका ने क्यों दिलाई 2009 आतंकी हमले की याद

टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले पाकिस्तान के मैच बहिष्कार के संकेतों ने श्रीलंका को गहरी चिंता में डाल दिया है. सह-मेजबान होने के नाते श्रीलंका ने इस फैसले को न सिर्फ क्रिकेट के लिए, बल्कि अपने देश की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए भी बड़ा झटका बताया है. इसी कड़ी में श्रीलंका क्रिकेट (SLC) ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को एक औपचारिक पत्र भेजकर अपना पक्ष मजबूती से रखा है.

श्रीलंका ने जताई नाराजगी

श्रीलंका क्रिकेट की ओर से भेजे गए इस पत्र में साफ कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबले का न होना पूरे टूर्नामेंट की चमक कम कर देगा. SLC का मानना है कि इस मैच के कारण न सिर्फ टिकटों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है, बल्कि होटल, ट्रैवल और लोकल बिजनेस को भी बड़ा फायदा मिलने वाला था. अब बहिष्कार की खबरों से ही कोलंबो में होटल बुकिंग रद्द होने लगी हैं, जो चिंता का विषय है.

2009 का दर्द फिर किया याद

श्रीलंका ने अपने पत्र में 2009 में लाहौर में टीम की बस पर हुए आतंकी हमले को याद दिलाया. उस हमले में श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ को गंभीर चोट आई थी. इन सब के बाद भी, जब बाकी टीमें पाकिस्तान जाने से मान कर रही थीं, तब श्रीलंका ने हिम्मत दिखाते हुए वहां क्रिकेट खेलने का फैसला किया. SLC ने याद दिलाया कि 2019 में पाकिस्तान में टेस्ट खेलने वाली पहली टीम भी श्रीलंका ही थी, जिसने पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी में अहम भूमिका निभाई थी.

आर्थिक नुकसान का डर

श्रीलंका का कहना है कि उसने इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले के लिए सुरक्षा और आयोजन से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. मैच रद्द होने की स्थिति में बोर्ड को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है. इसके साथ ही पर्यटन पर भी सीधा असर पड़ेगा, जो पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है.

खेल भावना की अपील

श्रीलंका क्रिकेट ने पाकिस्तान से “स्पिरिट ऑफ रेसिप्रोसिटी” यानी आपसी सहयोग और भरोसे की भावना निभाने की अपील की है. SLC का कहना है कि जब पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत थी, तब श्रीलंका उसके साथ खड़ा था. अब जब श्रीलंका मेजबान है और पूरी सुरक्षा का भरोसा दे रहा है, तो पाकिस्तान को भी क्रिकेट और फैंस के हित में मैदान पर उतरना चाहिए.

अब पाकिस्तान के पाले में गेंद

श्रीलंका की अपील के बाद अब सभी की नजरें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और सरकार के फैसले पर टिकी हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान अपने पुराने दोस्त की बात मानता है या बहिष्कार के रुख पर कायम रहता है. इस फैसले का असर सिर्फ एक मैच पर नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट और क्रिकेट संबंधों पर पड़ सकता है. 

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