Sterilization Surgery: नसबंदी में कौन-सी नस काट देते हैं डॉक्टर, जिससे पैदा नहीं होते बच्चे?

Tubectomy procedure: भारत में एक समय ऐसा दौर था, जब सरकार लोगों को पकड़कर नसबंदी कर देती थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने इस मामले को काफी आगे बढ़ाया. बताया जाता है कि उस समय लोगों को पकड़कर उनकी नसबंदी कर दी जाती थी. डर का आलम ऐसा था कि लोग खेतों में काम करने जाने से कतराने लगे थे, घरों में छिपकर रह रहे थे कि कहीं कोई सरकारी गाड़ी न आ जाए और उनको ले जाकर नसबंदी न कर दिया जाए. लेकिन हमारे मन में एक सवाल आता है कि नसबंदी कैसे की जाती थी, नसबंदी में कौन सी नस काट देते थे, जिससे लोगों को बच्चे नहीं पैदा होते थे. अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं, तो चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं. पुरुषों में नसबंदी कैसे होती है? पुरुष नसबंदी को मेडिकल भाषा में वेसक्टॉमी कहते हैं. इसमें डॉक्टर वास डिफरेंस नाम की नलिका को काटकर बांध देते हैं. वास डिफरेंस वह ट्यूब है, जो टेस्टिस से शुक्राणु को बाहर ले जाती है. नसबंदी के दौरान इसको काटकर सील कर दिया जाता है, इसलिए जब शुक्राणु बाहर ही नहीं निकलता, तो बच्चे कहां से पैदा होंगे. इस तरह जब पुरुष फिजिकल रिलेशन बनाता, तो वीर्य तो बाहर निकलता, लेकिन उसके साथ शुक्राणु बाहर नहीं निकलता है. इस तरह आदमी के बच्चे पैदा करने की संभावना खत्म हो जाती है. इसको सरल शब्दों में जाएं, तो प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है, लेकिन पुरुष की फिजिकल रिलेशन बनाने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता. महिलाओं में नसबंदी महिला नसबंदी को ट्यूबेक्टॉमी कहा जाता है. इसमें डॉक्टर महिला की फैलोपियन ट्यूब को काटकर या बांधकर बंद कर देते हैं. आपकी जानकारी के लिए सरल शब्दों में बता दें कि फैलोपियन ट्यूब वह मार्ग है, जिससे एग्स ओवरी से यूट्रस तक पहुंचता है. जब यह ट्यूब बंद कर दी जाती है, तो एग्स और शुक्राणु का मिलन नहीं हो पाता. इस तरह औरतें बच्चे पैदा करने में असमर्थ हो जाती थीं. हालांकि, यहां एक बात जो सबसे ध्यान देने वाली होती है, वह है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में नसबंदी करना काफी मुश्किल काम होता है. इसमें पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाकर ट्यूब तक पहुंचना पड़ता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, नसबंदी 99 प्रतिशत प्रभावी होती है. एक बार यह प्रक्रिया हो जाने के बाद दोबारा बच्चे पैदा होने की संभावना बेहद कम होती है. लेकिन इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि नसबंदी का काम किसी जानकार डॉक्टर से ही करवाना चाहिए. इसे भी पढ़ें: Iodine Solution: कफ सिरप के बाद मध्य प्रदेश में आयोडीन सॉल्यूशन का खौफ, मरीजों की स्किन पर पड़ रहे छाले Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Oct 10, 2025 - 15:30
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Sterilization Surgery: नसबंदी में कौन-सी नस काट देते हैं डॉक्टर, जिससे पैदा नहीं होते बच्चे?

Tubectomy procedure: भारत में एक समय ऐसा दौर था, जब सरकार लोगों को पकड़कर नसबंदी कर देती थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने इस मामले को काफी आगे बढ़ाया. बताया जाता है कि उस समय लोगों को पकड़कर उनकी नसबंदी कर दी जाती थी. डर का आलम ऐसा था कि लोग खेतों में काम करने जाने से कतराने लगे थे, घरों में छिपकर रह रहे थे कि कहीं कोई सरकारी गाड़ी न आ जाए और उनको ले जाकर नसबंदी न कर दिया जाए. लेकिन हमारे मन में एक सवाल आता है कि नसबंदी कैसे की जाती थी, नसबंदी में कौन सी नस काट देते थे, जिससे लोगों को बच्चे नहीं पैदा होते थे. अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं, तो चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

पुरुषों में नसबंदी कैसे होती है?

पुरुष नसबंदी को मेडिकल भाषा में वेसक्टॉमी कहते हैं. इसमें डॉक्टर वास डिफरेंस नाम की नलिका को काटकर बांध देते हैं. वास डिफरेंस वह ट्यूब है, जो टेस्टिस से शुक्राणु को बाहर ले जाती है. नसबंदी के दौरान इसको काटकर सील कर दिया जाता है, इसलिए जब शुक्राणु बाहर ही नहीं निकलता, तो बच्चे कहां से पैदा होंगे. इस तरह जब पुरुष फिजिकल रिलेशन बनाता, तो वीर्य तो बाहर निकलता, लेकिन उसके साथ शुक्राणु बाहर नहीं निकलता है. इस तरह आदमी के बच्चे पैदा करने की संभावना खत्म हो जाती है. इसको सरल शब्दों में जाएं, तो प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है, लेकिन पुरुष की फिजिकल रिलेशन बनाने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता.

महिलाओं में नसबंदी

महिला नसबंदी को ट्यूबेक्टॉमी कहा जाता है. इसमें डॉक्टर महिला की फैलोपियन ट्यूब को काटकर या बांधकर बंद कर देते हैं. आपकी जानकारी के लिए सरल शब्दों में बता दें कि फैलोपियन ट्यूब वह मार्ग है, जिससे एग्स ओवरी से यूट्रस तक पहुंचता है. जब यह ट्यूब बंद कर दी जाती है, तो एग्स और शुक्राणु का मिलन नहीं हो पाता. इस तरह औरतें बच्चे पैदा करने में असमर्थ हो जाती थीं. हालांकि, यहां एक बात जो सबसे ध्यान देने वाली होती है, वह है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में नसबंदी करना काफी मुश्किल काम होता है. इसमें पेट के निचले हिस्से में चीरा लगाकर ट्यूब तक पहुंचना पड़ता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, नसबंदी 99 प्रतिशत प्रभावी होती है. एक बार यह प्रक्रिया हो जाने के बाद दोबारा बच्चे पैदा होने की संभावना बेहद कम होती है. लेकिन इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि नसबंदी का काम किसी जानकार डॉक्टर से ही करवाना चाहिए.

इसे भी पढ़ें: Iodine Solution: कफ सिरप के बाद मध्य प्रदेश में आयोडीन सॉल्यूशन का खौफ, मरीजों की स्किन पर पड़ रहे छाले

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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