SIP निवेशक ध्यान दें! ज्यादा फंड्स का मतलब हमेशा बेहतर रिटर्न नहीं होता, जानें एक्सपर्ट की राय

Mutual Fund Portfolio Management: निवेश विकल्पों की बहुतायत होने से कई बार निवेशकों को परेशानी का भी सामना करना पड़ जाता है. निवेशक इन सभी को लेकर फैसला नहीं ले पाते हैं. अगर आपने भी एसआईपी के तहत अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर रखा हैं तो, आप इस परेशानी को समझ सकते है. अच्छा फंड होने के कारण निवेशक थोड़ी-थोड़ी रकम अलग-अलग फंडों में निवेश कर देते हैं. इससे उनका पोर्टफोलियो बिखरा हुआ नजर आता है. सबसे ज्यादा परेशानी तो तब होती है, जब आपको इनमें से कुछ फंड्स का चयन करना होता है और बाकी को छोड़ना. ETWealth की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ रवि कुमार ने इस परेशानी से निपटने का तरीका बताया है. उन्होंने जानकारी दी है कि, कैसे आप अपने पोर्टफोलियो को संभाल सकते हैं.  5 से 6 फंड्स हैं काफी रवि कुमार ने जानकारी दी है कि, अगर कोई निवेशक अपने फंड्स की नियमित निगरानी करते हैं और फंड्स की समझ रखते हैं तो, ऐसे निवेशकों के लिए 5 से 6 म्यूचुअल फंड्स ही काफी होते हैं. उन्होंने बताया कि, हर फंड की भूमिका अलग होती है, इसलिए एक जैसी कंपनियों में निवेश करने से बचना चाहिए. बाजार जानकारों की सलाह पर हमेशा अलग-अलग फंड का चयन करना चाहिए. ताकि पोर्टफोलियो में विविधता हो.  फंड्स मैनेज करते समय इन बातों का रखें ध्यान  कई निवेशकों का यह मानना है कि, जितने ज्यादा फंड्स होंगे, उतना अच्छा डाइवर्सिफिकेशन मिलेगा, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. बतौर रवि, असली बात यह है कि आपके चुने गए फंड्स एक दूसरे से कितने अलग हैं और उनका निवेश करने का तरीका कितना बैलेंस है. अगर आपने अपने सारे पैसे एक ही तरह के शेयरों में लगाए हैं, तो फंड्स और कंपनी की संख्या तो बढ़ सकती है, पर एक ही सेगमेंट में रहने के कारण आपको कोई खास फायदा नहीं होगा.   रवि कुमार ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि,  हर इक्विटी फंड का अपना स्टाइल होता है. कुछ ग्रोथ स्टॉक्स पर फोकस करते हैं, तो कुछ वैल्यू या क्वालिटी स्टॉक्स में. इसलिए जरूरी है कि, पोर्टफोलियो में ऐसे फंड्स शामिल किए जाएं जिनकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी अलग हो, ताकि मार्केट के उतार-चढ़ाव में भी संतुलन बना रहे. डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.) यह भी पढ़ें: चालू वित्त वर्ष में कलेक्शन में 7% की उछाल, नेट डायरेक्ट टैक्स बढ़कर हुआ 12.92 लाख करोड़  

Nov 12, 2025 - 10:30
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SIP निवेशक ध्यान दें! ज्यादा फंड्स का मतलब हमेशा बेहतर रिटर्न नहीं होता, जानें एक्सपर्ट की राय

Mutual Fund Portfolio Management: निवेश विकल्पों की बहुतायत होने से कई बार निवेशकों को परेशानी का भी सामना करना पड़ जाता है. निवेशक इन सभी को लेकर फैसला नहीं ले पाते हैं. अगर आपने भी एसआईपी के तहत अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर रखा हैं तो, आप इस परेशानी को समझ सकते है.

अच्छा फंड होने के कारण निवेशक थोड़ी-थोड़ी रकम अलग-अलग फंडों में निवेश कर देते हैं. इससे उनका पोर्टफोलियो बिखरा हुआ नजर आता है. सबसे ज्यादा परेशानी तो तब होती है, जब आपको इनमें से कुछ फंड्स का चयन करना होता है और बाकी को छोड़ना. ETWealth की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ रवि कुमार ने इस परेशानी से निपटने का तरीका बताया है. उन्होंने जानकारी दी है कि, कैसे आप अपने पोर्टफोलियो को संभाल सकते हैं. 

5 से 6 फंड्स हैं काफी

रवि कुमार ने जानकारी दी है कि, अगर कोई निवेशक अपने फंड्स की नियमित निगरानी करते हैं और फंड्स की समझ रखते हैं तो, ऐसे निवेशकों के लिए 5 से 6 म्यूचुअल फंड्स ही काफी होते हैं. उन्होंने बताया कि, हर फंड की भूमिका अलग होती है, इसलिए एक जैसी कंपनियों में निवेश करने से बचना चाहिए. बाजार जानकारों की सलाह पर हमेशा अलग-अलग फंड का चयन करना चाहिए. ताकि पोर्टफोलियो में विविधता हो. 

फंड्स मैनेज करते समय इन बातों का रखें ध्यान 

कई निवेशकों का यह मानना है कि, जितने ज्यादा फंड्स होंगे, उतना अच्छा डाइवर्सिफिकेशन मिलेगा, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. बतौर रवि, असली बात यह है कि आपके चुने गए फंड्स एक दूसरे से कितने अलग हैं और उनका निवेश करने का तरीका कितना बैलेंस है. अगर आपने अपने सारे पैसे एक ही तरह के शेयरों में लगाए हैं, तो फंड्स और कंपनी की संख्या तो बढ़ सकती है, पर एक ही सेगमेंट में रहने के कारण आपको कोई खास फायदा नहीं होगा.  

रवि कुमार ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि,  हर इक्विटी फंड का अपना स्टाइल होता है. कुछ ग्रोथ स्टॉक्स पर फोकस करते हैं, तो कुछ वैल्यू या क्वालिटी स्टॉक्स में. इसलिए जरूरी है कि, पोर्टफोलियो में ऐसे फंड्स शामिल किए जाएं जिनकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी अलग हो, ताकि मार्केट के उतार-चढ़ाव में भी संतुलन बना रहे.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

यह भी पढ़ें: चालू वित्त वर्ष में कलेक्शन में 7% की उछाल, नेट डायरेक्ट टैक्स बढ़कर हुआ 12.92 लाख करोड़

 

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