Silver Price: चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, 4.20 लाख से 2.50 लाख/किलो पर पहुंचा भाव, आगे क्या होगा?

Silver Price Predictions: रॉकेट की रफ्तार से भागने के बाद अब चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (Multi Commodity Exchange of India) यानी एमसीएक्स पर चांदी फिसलकर करीब ढाई लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक आ गई है. इससे पहले चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक उच्च स्तर छुआ था. उस रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद से लगातार मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव के कारण कीमतों में गिरावट जारी है. फिलहाल यह 2.30 लाख रुपये से 2.70 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में कारोबार कर रही है. निवेशकों में चिंता क्यों? निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चांदी की कीमतों में आगे और गिरावट आएगी या फिर यह दोबारा तेजी पकड़ सकती है. हालिया गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं- अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़े अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक संकेतों ने यह संभावना कम कर दी है कि वहां जल्द ब्याज दरों में कटौती होगी. जब दरों में कटौती की उम्मीद घटती है, तो डॉलर मजबूत होता है. डॉलर की मजबूती डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी महंगी हो जाती है, क्योंकि इसकी कीमत डॉलर में तय होती है. इससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है और कीमतों पर दबाव आता है. जबरदस्त मुनाफावसूली रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया. जब बड़े स्तर पर बिकवाली होती है तो कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिलती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स सिल्वर (COMEX) 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद तेजी से नीचे आया. इसका सीधा असर भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा. आगे क्या हो सकता है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म (अल्पावधि) में चांदी पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि डॉलर मजबूत है और वैश्विक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. लॉन्ग टर्म (दीर्घकाल) में चांदी की औद्योगिक मांग (खासकर सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में) मजबूत रहने की उम्मीद है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल सकता है. हालांकि हालिया गिरावट औसत से ज्यादा तेज रही है, जो यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल अस्थिर दौर से गुजर रहा है. निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और लंबी अवधि की रणनीति के साथ आगे बढ़ने का हो सकता है. ये भी पढ़ें: नहीं रह पाई रुपये में मजबूती, ट्रंप के डॉलर की 'हुंकार' के सामने सहम गई भारतीय करेंसी

Feb 13, 2026 - 13:30
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Silver Price: चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, 4.20 लाख से 2.50 लाख/किलो पर पहुंचा भाव, आगे क्या होगा?

Silver Price Predictions: रॉकेट की रफ्तार से भागने के बाद अब चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (Multi Commodity Exchange of India) यानी एमसीएक्स पर चांदी फिसलकर करीब ढाई लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक आ गई है. इससे पहले चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक उच्च स्तर छुआ था. उस रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद से लगातार मुनाफावसूली और वैश्विक दबाव के कारण कीमतों में गिरावट जारी है. फिलहाल यह 2.30 लाख रुपये से 2.70 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में कारोबार कर रही है.

निवेशकों में चिंता क्यों?

निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चांदी की कीमतों में आगे और गिरावट आएगी या फिर यह दोबारा तेजी पकड़ सकती है. हालिया गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं- अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़े अमेरिका से आए मजबूत आर्थिक संकेतों ने यह संभावना कम कर दी है कि वहां जल्द ब्याज दरों में कटौती होगी. जब दरों में कटौती की उम्मीद घटती है, तो डॉलर मजबूत होता है.

डॉलर की मजबूती डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी महंगी हो जाती है, क्योंकि इसकी कीमत डॉलर में तय होती है. इससे वैश्विक मांग पर असर पड़ता है और कीमतों पर दबाव आता है. जबरदस्त मुनाफावसूली रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया. जब बड़े स्तर पर बिकवाली होती है तो कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिलती है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स सिल्वर (COMEX) 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद तेजी से नीचे आया. इसका सीधा असर भारतीय बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा.

आगे क्या हो सकता है?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म (अल्पावधि) में चांदी पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि डॉलर मजबूत है और वैश्विक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. लॉन्ग टर्म (दीर्घकाल) में चांदी की औद्योगिक मांग (खासकर सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में) मजबूत रहने की उम्मीद है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल सकता है.

हालांकि हालिया गिरावट औसत से ज्यादा तेज रही है, जो यह संकेत देती है कि बाजार फिलहाल अस्थिर दौर से गुजर रहा है. निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और लंबी अवधि की रणनीति के साथ आगे बढ़ने का हो सकता है.

ये भी पढ़ें: नहीं रह पाई रुपये में मजबूती, ट्रंप के डॉलर की 'हुंकार' के सामने सहम गई भारतीय करेंसी

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