Rupee vs Dollar: ट्रेड डील के बाद भारतीय रुपये के 'दम' के आगे कांप रहा ट्रंप का डॉलर, आज फिर दी करारी शिकस्त

Rupee vs Dollar: अमेरिका के साथ ट्रेड डील के ऐलान के बाद भले ही बाजार में शुरुआती उत्साह देखा गया हो, लेकिन अब निवेशक और कारोबारी ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं. गुरुवार को रुपये में हल्की मजबूती दर्ज की गई और यह सात पैसे चढ़कर 90.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, लेकिन यह तेजी सीमित दायरे में ही रही. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक और हस्ताक्षरित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है. विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल बाजार “सेलिब्रेशन मोड” से बाहर आकर “वेरिफिकेशन मोड” में आ चुका है, यानी अब सिर्फ बयानों के बजाय ठोस शर्तों और लिखित समझौते का इंतजार किया जा रहा है. सेलिब्रेशन मोड में बाजार इंटर बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.52 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान थोड़ा मजबूत होकर 90.40 तक पहुंच गया. बुधवार को यह 90.47 पर बंद हुआ था. हालांकि, रुपये की इस मजबूती पर कंपनियों की ओर से डॉलर की लगातार मांग और वैश्विक संकेतों का दबाव बना हुआ है. डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.18 प्रतिशत बढ़कर 97.79 पर पहुंच गया, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिला. शेयर बाजार की बात करें तो घरेलू इक्विटी बाजारों में कमजोरी दिखाई दी. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 279 अंक गिरकर 83,538.97 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 94 अंक फिसलकर 25,681.85 पर पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से आने वाले ब्याज दर संकेतों का इंतजार कर रहे हैं. शुक्रवार को होने वाली आरबीआई की घोषणा से यह साफ होगा कि आगे ब्याज दरों का रुख क्या रहने वाला है, जिसका सीधा असर रुपये और शेयर बाजार दोनों पर पड़ेगा. क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये के लिए कुछ हद तक राहत लेकर आई. वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड करीब दो प्रतिशत टूटकर 68.07 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में किसी भी तरह की तेज उछाल रुपये की मजबूती को तुरंत सीमित कर सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी के अनुसार, उम्मीद से कमजोर सेवा क्षेत्र पीएमआई आंकड़ों ने रुपये पर दबाव बनाया है. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उम्मीदों के चलते मंगलवार को रुपये में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण यह तेजी आगे बरकरार नहीं रह सकी. हालांकि, उनका मानना है कि जैसे-जैसे ट्रेड डील की शर्तें स्पष्ट होंगी और अगर वे भारत के पक्ष में रहती हैं, तो इससे घरेलू बाजार की धारणा मजबूत होगी और रुपये में मध्यम अवधि में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है. ये भी पढ़ें: एक झटके में 20000 रुपये गिरी चांदी की कीमत, जानें अपने शहर का ताजा भाव

Feb 5, 2026 - 13:30
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Rupee vs Dollar: ट्रेड डील के बाद भारतीय रुपये के 'दम' के आगे कांप रहा ट्रंप का डॉलर, आज फिर दी करारी शिकस्त

Rupee vs Dollar: अमेरिका के साथ ट्रेड डील के ऐलान के बाद भले ही बाजार में शुरुआती उत्साह देखा गया हो, लेकिन अब निवेशक और कारोबारी ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं. गुरुवार को रुपये में हल्की मजबूती दर्ज की गई और यह सात पैसे चढ़कर 90.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, लेकिन यह तेजी सीमित दायरे में ही रही. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक और हस्ताक्षरित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है. विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल बाजार “सेलिब्रेशन मोड” से बाहर आकर “वेरिफिकेशन मोड” में आ चुका है, यानी अब सिर्फ बयानों के बजाय ठोस शर्तों और लिखित समझौते का इंतजार किया जा रहा है.

सेलिब्रेशन मोड में बाजार

इंटर बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.52 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान थोड़ा मजबूत होकर 90.40 तक पहुंच गया. बुधवार को यह 90.47 पर बंद हुआ था. हालांकि, रुपये की इस मजबूती पर कंपनियों की ओर से डॉलर की लगातार मांग और वैश्विक संकेतों का दबाव बना हुआ है. डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.18 प्रतिशत बढ़कर 97.79 पर पहुंच गया, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिला.

शेयर बाजार की बात करें तो घरेलू इक्विटी बाजारों में कमजोरी दिखाई दी. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 279 अंक गिरकर 83,538.97 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 94 अंक फिसलकर 25,681.85 पर पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति की बैठक से आने वाले ब्याज दर संकेतों का इंतजार कर रहे हैं. शुक्रवार को होने वाली आरबीआई की घोषणा से यह साफ होगा कि आगे ब्याज दरों का रुख क्या रहने वाला है, जिसका सीधा असर रुपये और शेयर बाजार दोनों पर पड़ेगा.

क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रुपये के लिए कुछ हद तक राहत लेकर आई. वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड करीब दो प्रतिशत टूटकर 68.07 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में किसी भी तरह की तेज उछाल रुपये की मजबूती को तुरंत सीमित कर सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है.

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी के अनुसार, उम्मीद से कमजोर सेवा क्षेत्र पीएमआई आंकड़ों ने रुपये पर दबाव बनाया है. उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उम्मीदों के चलते मंगलवार को रुपये में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण यह तेजी आगे बरकरार नहीं रह सकी. हालांकि, उनका मानना है कि जैसे-जैसे ट्रेड डील की शर्तें स्पष्ट होंगी और अगर वे भारत के पक्ष में रहती हैं, तो इससे घरेलू बाजार की धारणा मजबूत होगी और रुपये में मध्यम अवधि में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है.

ये भी पढ़ें: एक झटके में 20000 रुपये गिरी चांदी की कीमत, जानें अपने शहर का ताजा भाव

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