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    <title>Attention India Hindi &amp; : देश&amp;दुनिया</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : देश&amp;दुनिया</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>‘...मेरा साया साथ होगा’, केन्द्र सरकार पर कांग्रेस का तंज, जानें क्या कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन शनिवार (12 सितंबर, 2026) को हुई बैठक के बाद ब्रिक्स के सदस्य देशों की तरफ से अपनाए गए दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 यानी दिल्ली घोषणापत्र 2026 को लेकर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तंज कसा है. कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए तंज कसने के लिए बॉलीवुड के एक पुराने और मशहूर गाने &amp;lsquo;तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा&amp;rsquo; का इस्तेमाल किया.
दरअसल, कांग्रेस के संचार विभाग के इनचार्ज, महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने दिल्ली घोषणापत्र 2026 को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. उनके पोस्ट करने के पीछे का उद्देश्य पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कूटनीतिक विरासत और 18वें ब्रिक्स समिट में अपनाए गए डिक्लेरेशन में उसकी मौजूदगी को प्रकाश में लाना था.
एक्स पोस्ट में क्या बोले कांग्रेस नेता?
कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 की पैरा 16 के बारे में बताया, जिसमें इंडोनेशिया के बांडुंग में 1955 में हुए एशियन-अफ्रीकन कॉन्फ्रेंस और समानता, आजादी, नॉन-इंटरवेंशन और म्यूचुअल बेनिफिट्स के सिद्धांतों का जिक्र किया गया है.&amp;nbsp;

Para 16 of the New Delhi Declaration just adopted at the BRICS Summit says the following:16. We recall 1955 Asian-African Conference in Bandung, Indonesia that proclaimed general principles, including equality, independence, non-intervention, and mutual benefit. We stress that&amp;hellip; pic.twitter.com/iYaDPScZe5
&amp;mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 12, 2026



जयराम रमेश ने कहा, &amp;lsquo;अभी-अभी ब्रिक्स समिट में अपनाए गए नई दिल्ली घोषणापत्र के पैरा 16 में कहा गया है, &amp;lsquo;हम इंडोनेशिया के बांडुंग में 1955 में आयोजित एशियन-अफ्रीकन कॉन्फ्रेंस को याद करते हैं, जिसमें समानता, आजादी, नॉन-इंटरवेंशन और म्यूचुअल बेनिफिट्स के सिद्धांतों के साथ अन्य सामान्य सिद्धांतों की घोषणा की गई थी. हम इस बात पर जोर देते हैं कि ज्यादा न्यायपूर्ण, समावेशी और रिप्रेजेंटेटिव मल्टीलेटरल सिस्टम की दिशा में कोशिश करते वक्त बांडुंग स्पिरीट एक महत्वपूर्ण रेफ्रेंस का काम करती है.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;यहां 22 अप्रैल, 1955 की दोपहर को उस ऐतिहासिक बैठक के दौरान जवाहर लाल नेहरू की तरफ से लिखे गए कुछ नोट्स हैं. विनीत ठाकुर ने हाल ही में बांडुंग में पंडित नेहरू की ओर से लिखे गए इन नोट्स के साथ अन्य नोट्स, डूडल्स और टिप्पणियों पर एक शानदार लेख लिखा है.&amp;rsquo; उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;इस पुराने हिट गाने को याद कीजिए- तू जहां जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Xप्लेन: BRICS समिट में पहले दिन क्या-क्या हुआ? जानिए एक-एक घटना का हिसाब ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘...मेरा, साया, साथ, होगा’, केन्द्र, सरकार, पर, कांग्रेस, का, तंज, जानें, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>दिल्ली में एअर इंडिया के पायलट की मौत, फ्लाइट उड़ाने के चंद घंटे पहले हुई घटना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिल्ली-में-एअर-इंडिया-के-पायलट-की-मौत-फ्लाइट-उड़ाने-के-चंद-घंटे-पहले-हुई-घटना</link>
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        <description><![CDATA[ मुंबई के रहने वाले एअर इंडिया के एक पायलट की शनिवार (12 सितंबर, 2026) को दिल्ली में मौत की घटना सामने आई है. एयरलाइन ने इस घटना को लेकर कहा कि पायलट अपने लेओवर के दौरान दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में स्थित एक होटल में ठहरे थे, जहां वह बेहोशी की हालत में मिले. इसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
एअर इंडिया ने पायलट की मौत पर गहरा दुख जताया और कहा कि वह उनके परिवार के साथ लगातार संपर्क में है और एयरलाइन्स इस दुख के समय में मृतक के परिवार को हर संभव मदद दे रही है. एयरलाइन ने कहा कि पायलट को शुक्रवार (11 सितंबर, 2026) की शाम को बेहोशी की हालत में पाया गया था. इसके तुरंत बाद ही उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसके पहले ही उनका निधन हो चुका था.
पायलट की मौत के पीछे क्या है कारण?
जानकारी के मुताबिक, पायलट की मौत के पीछे का संभावित कारण दिल का दौरा माना जा रहा है. पायलट दिल्ली से सियोल जाने वाली फ्लाइट को उड़ाने वाले थे. यह एअर इंडिया एयरलाइन के लिए उनक दूसरी फ्लाइट होने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई. इससे पहले वह एअर इंडिया एक्सप्रेस के साथ काम करते थे और करीब दो महीने पहले ही उन्होंने एअर इंडिया को जॉइन किया था और उन्हें शनिवार (12 सितंबर, 2026) की सुबह में दिल्ली से सियोल जाने वाली फ्लाइट को उड़ाना था.&amp;nbsp;

घटना के बारे में दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने बताया कि उन्हें शुक्रवार (11 सितंबर, 2026) को वसंत कुंज इलाके के एक होटल में एक शख्स की तबीयत खराब होने की सूचना पर वसंत कुंज नॉर्थ थाने में पीसीआर कॉल मिली. जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो शख्स बेहोश था और कोई भी रेस्पॉन्स नहीं दे रहा था. इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
पुलिस ने कहा, &amp;lsquo;शुक्रवार (11 सितंबर) की मृतक के भाई ने होटल मैनेजर को कॉल किया था और बताया कि उनका भाई कॉल का जवाब नहीं दे रहा. इसके बाद मैनेजर कमरे में गए, पर कमरा अंदर से बंद था, इसलिए होटल की मास्टर चाबी से दरवाजा खोला गया. अंदर मृतक बेहोशी की हालत में मिले और कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे.&amp;rsquo; दिल्ली पुलिस ने आगे कहा कि शनिवार को सफदरजंग अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया. मौत के कारण का पता रिपोर्ट के आने के बाद ही चलेगा. फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः BRICS के प्रस्ताव से गदगद हुए सलमान खुर्शीद, &#039;कोई कारण नहीं दिखता कि...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, एअर, इंडिया, के, पायलट, की, मौत, फ्लाइट, उड़ाने, के, चंद, घंटे, पहले, हुई, घटना</media:keywords>
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        <title>नंदीग्राम उपचुनाव: ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा बयान &amp; &amp;apos;अगर ममता बनर्जी...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ टीएमसी सिंबल विवाद के बीच नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर टीएमसी के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव &amp;nbsp;लड़ने की इच्छा जाहिर करती हैं तो हम उनके समर्थन में अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लेंगे.
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, &#039;हमने अपने उम्मीदवार के बारे में लगभग फैसला कर लिया है, बस घोषणा होनी बाकी है. अगर घोषणा के बाद भी ममता बनर्जी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करती हैं, तो हम उनके समर्थन में अपना उम्मीदवार वापस ले लेंगे. हम चाहते हैं कि ममता बनर्जी विधानसभा का हिस्सा बनें.&#039;
उन्होंने आगे कहा, &#039;ममता बनर्जी ने कभी कोई सीधा विधानसभा चुनाव नहीं जीता है. हालांकि, वह उपचुनावों में बहुत असहज रहती हैं. 2021 में भी उपचुनाव ही हुआ था, क्योंकि वे नंदीग्राम में हार गई थीं, यहां तक कि उनके &#039;भतीजे&#039; और उनके घर के लोगों ने भी उन्हें वोट नहीं दिया था.&#039;
नंदीग्राम क्यों हॉटसीट?
नंदीग्राम राज्य की सबसे चर्चित सीटों में से एक है. यह वही सीट है, जहां 2021 में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था. 2021 और 2026 में यह बीजेपी की मजबूत सीट बनकर उभरी. शुभेंदु अधिकारी ने यहां से पहले ममता बनर्जी को हराया तो इस बार पवित्र कर को शिकस्त दी थी.
TMC सिंबल विवाद: कल्याण बनर्जी बोले - &#039;चुनाव आयोग हमारे जवाब से...&#039;
6 अक्तूबर को होगी वोटिंग, 9 को रिजल्ट
चुनाव आयोग ने बंगाल की नंदीग्राम, रेजीनगर सीट पर उपचुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है. इन सीटों पर 6 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 9 अक्टूबर को नतीजे आएंगे. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 16 सितंबर है. चुनाव से जुड़े जिलों में आचार संहिता लागू हो गई है. उधर कांग्रेस ने नंदीग्राम सीट से उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने यहां से मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है.
टीएमसी सिंबल विवाद पर क्या कहा?
उधर, टीएमसी सिंबल विवाद को लेकर इलेक्शन कमीशन के साथ हुई बैठक को लेकर ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, &#039;मैं यह नहीं बता सकता कि क्या बातचीत हुई, लेकिन यह बहुत फायदेमंद रही. उनके कई सवाल थे, हमने उनके जवाब दिए और कुछ दस्तावेज दिखाए. चुनाव आयोग ने दस्तावेजों को जमा करने के लिए कहा था. हम ऐसा करेंगे, क्योंकि हम TMC हैं. हमें उम्मीद है कि एक लोकतांत्रिक पार्टी के तौर पर हमें उन सभी दस्तावेज़ों का पालन करना होगा जो हमने दिए हैं.&#039;
BRICS के प्रस्ताव से गदगद हुए सलमान खुर्शीद, &#039;कोई कारण नहीं दिखता कि...&#039;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>नंदीग्राम, उपचुनाव:, ऋतब्रत, बनर्जी, का, बड़ा, बयान, अगर, ममता, बनर्जी...</media:keywords>
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        <title>डॉलर के मुकाबले ब्रिक्स ला रहा अपनी करेंसी? जानें क्या है सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स समिट में न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन को एकमत से लागू किया गया. ब्रिक्स देशों के नेताओं ने सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतानों को अधिक तेज, सस्ता, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का आह्वान किया. वहीं इस बात की भी चर्चा तेज हो गई कि क्या डॉलर के मुकाबले ब्रिक्स अपनी करेंसी ला रहा, जिस पर विदेश मंत्रालय ने स्थिति साफ की है. MEA ने कहा कि फिलहाल कोई ब्रिक्स करेंसी शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
ब्रिक्स करेंसी शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं: MEA
ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान निपटान को बढ़ावा देने पर चर्चा लंबे समय से चल रही है और इसे द्विपक्षीय व्यापार की लागत कम करने का एक व्यावहारिक उपाय माना जा रहा है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने कहा कि वर्तमान में ब्रिक्स के भीतर किसी साझा मुद्रा को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव मौजूद नहीं है. उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान का विषय नया नहीं है और इस पर पिछले एक दशक से अधिक समय से विचार-विमर्श हो रहा है.
लोकल करेंसी में व्यापार करने से फायदा
उन्होंने कहा कि लोकल करेंसी में व्यापार करने से द्विपक्षीय लेनदेन की लागत कम हो सकती है और यह वैश्विक भुगतान और निपटान व्यवस्था के पूरक के रूप में काम कर सकता है. उनका कहना था कि इसका उद्देश्य मौजूदा ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम का विकल्प तैयार करना नहीं, बल्कि व्यापार को अधिक सुविधाजनक, किफायती और प्रभावी बनाना है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा का मुख्य उद्देश्य कॉमन करेंसी बनाना नहीं, बल्कि अंतर-ब्रिक्स व्यापार को बढ़ाना, भुगतान प्रणालियों को बेहतर बनाना और कारोबारियों के लिए लेनदेन लागत कम करना है. दलेला ने कहा कि सदस्य देश द्विपक्षीय और बहुपक्षीय ढांचे के माध्यम से ऐसे तंत्र विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं जो व्यापार और निवेश को आसान बना सकें.
भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें
उन्होंने बताया कि लोकल करेंसी में व्यापार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के स्तर पर भी लगातार चर्चा हो रही है और इस दिशा में विभिन्न पहलुओं का स्टडी किया जा रहा है. दलेला ने कहा कि इस साल भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स सहयोग के दौरान एमएसएमई सहयोग पोर्टल, ग्लोबल वैल्यू चेन सहयोग, लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई), विज्ञान और अनुसंधान रिपॉजिटरी और स्टार्टअप सहयोग जैसी पहलें प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने आई हैं. उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं और 30 से अधिक भारतीय शहरों में विभिन्न ब्रिक्स कार्यक्रम हुए. उन्होंने इसे पूरे देश का प्रयास बताया.
ब्रिक्स की अध्यक्षता से भारत को क्या फायदा हुआ?
सुधाकर दलेला ने आगे कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने चार प्रमुख स्तंभों के तहत लगभग 150 व्यावहारिक परिणाम हासिल किए हैं. इनमें खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग, इनोवेशन, सतत विकास और वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने से जुड़े कई कदम शामिल हैं. विदेश मंत्रालय के सचिव ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा पत्र में विकास-केंद्रित सहयोग को विशेष महत्व दिया गया है और यह एजेंडा अफ्रीका, एशिया और अन्य ग्लोबल साउथ देशों की प्राथमिकताओं के अनुरूप है. भारत ने अपने विकास अनुभवों और विशेषज्ञता को अन्य विकासशील देशों के साथ साझा करने के प्रयासों को भी आगे बढ़ाया है.
सुधाकर दलेला ने कहा कि ब्रिक्स के अंतर्गत 22 मंत्रीस्तरीय ट्रैक सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और लगभग हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई है. उन्होंने कहा कि सभी बैठकों में सदस्य देशों की प्रभावी भागीदारी भारत पर उनके भरोसे को दर्शाती है. इस बीच, ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 को अपनाया, जिसमें एकतरफा शुल्क (टैरिफ) और नॉन टैरिफ बैरियर पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई. सदस्य देशों ने कहा कि ऐसी नीतियां वैश्विक व्यापार को विकृत करती हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;ख्वाब हो तुम या...&amp;apos;, मलेशियाई PM ने गाया बॉलीवुड गाना, वीडियो वायरल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ख्वाब-हो-तुम-या-मलेशियाई-pm-ने-गाया-बॉलीवुड-गाना-वीडियो-वायरल</link>
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        <description><![CDATA[ भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने शनिवार (12 सितंबर, 2026) को सभी को उस वक्त हैरान कर दिया, जब अचानक ही उन्होंने बॉलीवुड के एक पुराने लोकप्रिय गीत &amp;lsquo;ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत&amp;rsquo; को हिंदी में गाया.
उन्होंने न सिर्फ प्यानो की धुन पर इस पुराने लोकप्रिय गीत को बहुत ही साफ हिंदी भाषा में गाया, बल्कि उन्होंने इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल से शेयर किया. X पोस्ट में मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा, &amp;lsquo;गुरुजी थोड़ी देर गाने की अनुमति मांग रहे हैं, ठीक है!&amp;rsquo;&amp;nbsp;

Guru mintak izin nyanyi kejap ok! pic.twitter.com/NzazFHV509
&amp;mdash; Anwar Ibrahim (@anwaribrahim) September 12, 2026



पीएम मोदी के साथ मलेशियाई प्रधानमंत्री की मुलाकात
नई दिल्ली पहुंचने के बाद मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैदराबाद हाउस से पहले मुलाकात की और फिर दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक भी की. बैठक के दौरान भी मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बेहद अनोखे ढंग से द्विपक्षीय बातचीत की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी मलेशिया में बहुत ही ज्यादा पॉपुलर हैं.
बैठक की शुरुआत में पीएम मोदी से हाथ मिलाने के बाद मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने उनकी तारीफ शुरू कर दी. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी इतने पॉपुलर हैं कि मुझे उन तक पहुंचाने के लिए काफी सारे संदेश मिले हैं.&amp;nbsp;

Saya kemudian langsung ke Hyderabad House untuk ketemu sahabat, Perdana Menteri @narendramodi. Saya zahirkan penghargaan atas layanan istimewa yang diberikan sejak delegasi Malaysia tiba di New Delhi malam tadi.Alhamdulillah, kami sepakat untuk meneruskan momentum hubungan erat&amp;hellip; pic.twitter.com/raY5f5P4Wn
&amp;mdash; Anwar Ibrahim (@anwaribrahim) September 12, 2026



पीएम मोदी से मिलने के बाद क्या बोले इब्राहिम?
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा किया. पोस्ट में उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैंने हैदराबाद हाउस में अपने प्रिय दोस्त और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. मैंने कल शुक्रवार (11 सितंबर) की रात नई दिल्ली पहुंचने के बाद से मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल को मिले सेवा और सत्कार के लिए आभार भी जताया.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;अल्हम्दुलिल्लाह, हमने मलेशिया और भारत के संबंधों में बनी नजदीकी की गति को आगे भी जारी रखने और दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और गर्मजोशी भरे संबंधों पर आधारित दोस्ती को और भी ज्यादा मजबूत करने पर सहमति जताई है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः भारत-चीन के बीच बनी 7 सहमति, PM मोदी-जिनपिंग महामुलाकात से बदल गए रिश्तों के आयाम ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>CJP नेता सौरव दास मोदी सरकार पर भड़के, बोले&amp; &amp;apos;इंस्टाग्राम पर मेरी...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cjp-नेता-सौरव-दास-मोदी-सरकार-पर-भड़के-बोले-इंस्टाग्राम-पर-मेरी</link>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि मेटा इंस्टाग्राम पर मेरी पोस्ट्स को लगातार ब्लॉक कर रहा है. इसे लेकर उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. सौरव दास ने शनिवार (12 सितंबर) को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मेरे सोशल मीडिया अकाउंटस को लगातार टारगेट किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसी नय्यर गितेश ने अक्षत त्रिपाठी के साथ मेरे वीडियो की रिपोर्ट की. उन्होंने बताया कि अक्षत 20 साल का स्टूडेंट है, जिसके लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 5 लाख रुपये का बेल बॉन्ड जारी किया था.
इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया कंपनी मेटा पर कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंटस, अकाउंटस की रीच और ब्लॉक करने को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों को भी घेरा है. उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में कहा कि क्या मेटा में कोई जांच-पड़ताल नहीं होती? इसकी वजह से मेरे अकाउंट की रीच कम हो रही है.&amp;nbsp;

Meta continues to block my posts on @instagram. Some Nayyar Gitesh reported my video with Akshat Tripathi, the 20 year old student who was issued a 5 Lakh bail bond by Greater Noida authorities.Does @Meta have no checks? This is leading to my account having restricted reach. I&amp;hellip; pic.twitter.com/MM7H8SB9mp
&amp;mdash; Saurav Das (@SauravDassss) September 12, 2026



सरकार को घेरामोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सौरव दास ने कहा कि मैं सोशल मीडिया कंपनियों से फिर अपील करता हूं कि वे सरकार के दबाव में न आएं. सौरव दास ने अपनी पोस्ट के साथ ही अकाउंट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है, जो कि कॉपीराइट वायलेशन को लेकर है. इसमें लिखा है कि योर कंटेंट इज ब्लॉकड. उनके 10 सितंबर को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए कंटेंट को ब्लॉक किया गया है.
कौन हैं सौरव दाससीजेपी नेता और प्रवक्ता सौरव दास के लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक वो दिल्ली के ही निवासी हैं. सौरव खोजी पत्रकार भी हैं. सौरव ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन किया है. साल 2017 में 18 साल की उम्र में सौरव ने सूचना का अधिकार कानून (RTI) का इस्तेमाल करना शुरू किया और कई बड़े खुलासे किए थे.&amp;nbsp;
सौरव ने साल 2020 में एक पेशेवर पत्रकार के रूप में लिखना शुरू किया था. इस दौरान कानून, शासन, न्यायपालिका, अपराध और संस्थागत पारदर्शिता पर कई आर्टिकल लिखे. बता दें कि सीजेपी नेता सौरव दास के आर्टिकल द कारवां, अल जजीरा, द वायर और द हिंदू जैसे कई बड़े संस्थानों में भी प्रकाशित हुए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 13:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>भारत पहुंचे शी जिनपिंग, BRICS में आज कब क्या होगा, जानें सब</title>
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        <description><![CDATA[ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने शनिवार (12 सितंबर) को भारत पहुंच गए हैं. दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उनका विमान लैंड हुआ है. चीनी राष्ट्रपति एयरपोर्ट से सीधे अपने होटल जाएंगे. दोपहर 2 बजे के आस-पास शी जिनपिंग के अलावा ब्रिक्स मेंबर देशों के अन्य नेता भारत मंडपम पहुंचेंगे और दोपहर ढाई बजे से ब्रिक्स सम्मेलन की शुरुआत होगी.
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स समिट में शाम 5 बजे ब्रिक्स की फैमिली फोटो होगी. इसके बाद शाम साढ़े 5 बजे ब्रिक्स के नेता पौधारोपण करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाम साढ़े 7 बजे विश्व नेताओं के लिए डिनर रखा है.&amp;nbsp;
गाला डिनर का आयोजनब्रिक्स समिट में दोपहर ढाई बजे &#039;समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना&#039; विषय पर चर्चा होगी. इसके बाद शाम 4.30 बजे ब्रिक्स देशों के नेता भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी देखेंगे. भारत मंडपम के लॉन में शाम 5.30 बजे ब्रिक्स मेंबर देशों के नेता संयुक्त रूप से पौधारोपण करेंगे. इसके बाद भारत मंडपम के लेवल-3 में शाम साढ़े 7 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गाला डिनर का आयोजन किया जाएगा.&amp;nbsp;
पीएम मोदी की इथियोपिया और मलेशिया के नेताओं संग बैठक&amp;nbsp;इथियोपिया और मलेशिया के नेताओं के साथ आज पीएम मोदी ने बैठक की. द्विपक्षीय मुलाकातों ने भारत के उनके साथ संबंधों को एक नई दिशा दी है. भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करने में गहरी रुचि दिखाई है. पीएम मोदी संग बैठक में इथियोपिया और मलेशिया के नेताओं की संयुक्त रूप से कर्मियों के प्रशिक्षण और भारत से रक्षा उपकरणों की खरीद पर भी विस्तृत चर्चा हुई.
दोनों देशों ने भारतीय उद्योग और निवेश का स्वागत किया है. इथियोपिया ने विशेष रूप से भारतीय खनन कंपनियों का स्वागत किया. इसके अलावा मलेशिया के साथ सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में अवसरों पर भी चर्चा हुई है.
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Xप्लेन: ब्रिक्स समिट के बीच सऊदी की बढ़ी मुश्किलें, हूती हमलों के डर से मुख्य ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>शी जिनपिंग ब्रिक्स के लिए दिल्ली पहुंचे, एयरपोर्ट पर किसने किया रिसीव?</title>
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        <description><![CDATA[ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं. उन्हें दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने रिसीव किया. शी जिनपिंग का ब्रिक्स सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्वीपक्षीय बातचीत का कार्यक्रम है. यह मुलाकात शाम 5.45 बजे होगी.
चीनी न्यूज एजेंसी &amp;lsquo;शिन्हुआ&amp;rsquo; की रिपोर्ट के मुताबिक, शी प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार सुबह बीजिंग से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए.

#WATCH | Delhi: Chinese President Xi Jinping arrives in Delhi to participate in the BRICS Summit 2026. PM Modi is scheduled to hold a bilateral meeting with the Chinese President later today. pic.twitter.com/mJk6YVYt5P
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 12, 2026



बता दें कि ब्रिक्स सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान समेत कई दिग्गज दिल्ली में हैं. पुतिन जब 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचे, तो केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया. वहीं पेजेशकियान को केंद्रीय राज्य मंत्री शंतनु ठाकुर ने रिसीव किया.&amp;nbsp;
किन मुद्दों पर होगी बात?पीएम मोदी और शी जिनपिंग के साथ बातचीत में कई मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है. इसमें भारत कई मुद्दों को उठा सकता है. ये हैं- कृषि क्षेत्र में चीन के बाजार में पहुंच, सप्लाई चेन राजनीतिक तनाव से बेअसर रहे, आर्थिक संतुलन के लिए संस्थागत व्यवस्था और तकनीक और आयात घटाने पर विचार.
वहीं चीन के मुद्दे की बात करें तो सीमा विवाद द्विपक्षीय रिश्ते से अलग रहे, व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में संबंध बढ़ते रहें, एलएसी पर मजबूत सैन्य सुरक्षा तंत्र बने और दोनों ही देश व्यापार घाटे को कम करें.
शी जिनपिंग के साथ कौन कौन?
उनके प्रतिनिधिमंडल में उनके करीबी सहयोगी काई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
काई चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के राजनीतिक ब्यूरो की शक्तिशाली स्थायी समिति के सदस्य हैं. सीपीसी केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं.
कब कब भारत आए शी?
राष्ट्रपति शी करीब सात साल बाद भारत की यात्रा पर आए हैं. राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा सितंबर 2014 में हुई थी. शी 2019 में चेन्नई के निकट मामल्लपुरम में पीएम मोदी के साथ शिखर वार्ता के लिए भारत आए थे. इससे पहले वो 2016 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने गोवा आए थे.&amp;nbsp;
पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग से कहा था कि &amp;lsquo;&amp;lsquo;चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के अनुरूप भारत के साथ मिलकर काम करेगा। हम द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखेंगे, संवाद बढ़ाएंगे, सहयोग मजबूत करेंगे, मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाएंगे.&amp;rsquo;&amp;rsquo;&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: ब्रिक्स में भारत की बढ़ती साख, इथियोपिया, मलेशिया और वियतनाम के साथ रणनीतिक संबंधों का नया अध्याय</title>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का मंच केवल वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय चर्चाओं तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत की कूटनीति के लिए द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक स्वर्णिम अवसर भी साबित हो रहा है. इस ऐतिहासिक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया और मलेशिया के शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं. इन बैठकों ने दोनों देशों के साथ भारत के कूटनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंधों को एक बिल्कुल नई दिशा और गति प्रदान की है.
वैश्विक राजनीति में आ रहे तेजी से बदलाव और सप्लाई चेन में विविधीकरण की मांग के बीच, भारत के साथ रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की इथियोपिया और मलेशिया दोनों देशों की इच्छा यह दर्शाती है कि भारत वैश्विक दक्षिण के एक भरोसेमंद और प्रमुख रणनीतिक साझीदार के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है.
रक्षा सहयोग और सुरक्षा साझेदारी: एक नई रूपरेखा
इथियोपिया और मलेशिया दोनों ने भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को अभूतपूर्व स्तर पर सुदृढ़ करने की गहरी इच्छा व्यक्त की है. प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई इन बैठकों में रक्षा सहयोग को रणनीतिक साझेदारी का मुख्य स्तंभ बनाने पर सहमति बनी.
संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण: दोनों देशों ने भारतीय रक्षा बलों के उच्च मानक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम करने में रुचि दिखाई है. भारतीय सैन्य अकादमियों में इथियोपियाई और मलेशियाई रक्षा कर्मियों के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और विस्तार देने पर चर्चा हुई. आतंकवाद से निपटने, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता निर्माण के क्षेत्र में यह प्रशिक्षण दोनों देशों के रक्षा बलों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा.
रक्षा उपकरणों की खरीद (डिफेंस प्रोक्योरमेंट): भारत की &#039;मेक इन इंडिया&#039; और &#039;आत्मनिर्भर भारत&#039; पहल के तहत विकसित आधुनिक रक्षा उपकरणों और हार्डवेयर के प्रति इन दोनों देशों ने बड़ा भरोसा जताया है. मलेशिया और इथियोपिया ने भारत से रक्षा उपकरणों की सीधी खरीद के रास्ते तलाशने पर सकारात्मक चर्चा की है, जिससे भारत के रक्षा निर्यात को एक बड़ा वैश्विक बाजार मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है.
आर्थिक और औद्योगिक सहयोग: व्यापारिक रिश्तों को मजबूती
रक्षा क्षेत्र के अलावा, आर्थिक मोर्चे पर भी इन बैठकों के परिणाम बेहद दूरगामी और सकारात्मक रहे हैं. दोनों देशों ने भारतीय उद्योगों और निवेश का खुले दिल से स्वागत किया है, जिससे आने वाले समय में द्विपक्षीय व्यापार में भारी उछाल आने की उम्मीद है.
इथियोपिया और भारतीय खनन (Mining) कंपनियां: अफ्रीकी महाद्वीप के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश इथियोपिया ने विशेष रूप से भारतीय खनन कंपनियों को अपने यहां निवेश करने और संसाधनों के दोहन के लिए आमंत्रित किया है. इथियोपिया के खनिज संसाधनों और भारत की तकनीकी व वित्तीय क्षमताओं का यह मेल दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी साबित होगा. इससे मिनरल्स और कच्चे माल की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में भी मदद मिलेगी.
मलेशिया और सेमीकंडक्टर सहयोग: प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मलेशिया के साथ हुई चर्चा का मुख्य केंद्र &#039;सेमीकंडक्टर&#039; (चिप निर्माण) उद्योग रहा है. ग्लोबल सप्लाई चेन में चिप निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, भारत और मलेशिया ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में आपसी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया है. यह कदम भारत के अपने घरेलू सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने में मददगार साबित हो सकता है.
वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के बीच हुई इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को और प्रगाढ़ करने पर मुख्य रूप से चर्चा हुई. बैठक के प्रमुख बिंदु रहे-
रक्षा और रणनीतिक सहयोग: इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के लिए रक्षा संबंधों और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने पर सहमति बनी.
आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी: दोनों नेताओं ने आपसी व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयां देने के उपायों पर विचार-विमर्श किया.
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे: क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और आपसी हितों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विस्तार से विचार साझा किए गए.
वैश्विक कूटनीति और भारत की बढ़ती साख
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये द्विपक्षीय बैठकें इस बात का प्रमाण हैं कि भारत क्षेत्रीय सीमाओं से परे जाकर वैश्विक स्तर पर रिश्तों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर रहा है. एक तरफ जहां ब्रिक्स मंच पर वैश्विक दक्षिण की आवाज को बुलंद किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इथियोपिया और मलेशिया जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ व्यक्तिगत और रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करके भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह आर्थिक कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों मोर्चों पर एक साथ नेतृत्व करने की पूरी क्षमता रखता है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, ब्रिक्स, में, भारत, की, बढ़ती, साख, इथियोपिया, मलेशिया, और, वियतनाम, के, साथ, रणनीतिक, संबंधों, का, नया, अध्याय</media:keywords>
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        <title>पुतिन ने BRICS में पश्चिमी देशों को धोया, बताया क्या है उनकी गलती</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पुतिन-ने-brics-में-पश्चिमी-देशों-को-धोया-बताया-क्या-है-उनकी-गलती</link>
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        <description><![CDATA[ जर्मनी के सैक्सनी-एनहाल्ट राज्य में हुए चुनावों में दक्षिणपंथी &#039;ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी&#039; (AfD) पार्टी के सबसे आगे रहने पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रतिक्रिया दी है. ब्रिक्स समिट में शामिल होने से पहले उन्होंने कहा, &quot;मुझे लगता है कि आज पूरे यूरोप में जो कुछ भी हो रहा है, वह तथाकथित पश्चिम या साफ तौर पर कहें तो पश्चिम के ग्लोबलिस्ट्स की राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सिस्टम की गलतियों का नतीजा है.&quot;
गलतियां सब करते हैं, लेकिन..
पुतिन ने यह भी कहा कि &quot;गलतियां तो हर कोई करता है, हमने भी कई गलतियां की हैं और बाकी दुनिया भी करती है. पश्चिम के ग्लोबलिस्ट्स के साथ समस्या यह है कि शीतयुद्ध खत्म होने और सोवियत संघ के टूटने के बाद उन्हें लगा कि वे &#039;सबसे ऊंचे मुकाम&#039; पर हैं. शायद उन्हें यह यकीन हो गया था कि उन्हें कुछ भी करने की छूट है और वे ऐसे लोग हैं, जिनसे कभी कोई गलती नहीं होती.&quot;
यूरोप को नहीं हैं रूस से खतरा&amp;nbsp;
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि &quot;यूरोप के देश अपने नागरिकों को रूस से युद्ध के नाम पर डरा रहे हैं, लेकिन उन पर ऐसा कोई खतरा नहीं है और न ही कभी था. हम यूरोपीय देशों को न तो धमका रहे हैं और न ही धमकाने वाले हैं. हम ऐसा क्यों करेंगे? किसी को यह ख्याल भी नहीं आता कि यूरोप के साथ हमारे किसी भी टकराव की कोई वजह नहीं है.&quot;
पुतिन का कहना है कि &quot;दूसरे विश्व युद्ध के बाद सभी मसले सुलझा लिए गए थे और बाद में सोवियत संघ के टूटने के बाद जो कुछ भी हुआ, वह सोवियत संघ के उत्तराधिकारी के तौर पर रूसी संघ की सहमति से हुआ. उन समझौतों के खिलाफ जो कुछ भी होता है, वह हमारे हितों के खिलाफ है और अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है.&quot;
यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;BRICS में आज क्या? शी जिनपिंग समेत कब किस नेता से मिलेंगे PM मोदी, जानें ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>यौन उत्पीड़न केस में टीचर को राहत, SC बोली&amp; &amp;apos;एक शिक्षक पर हमेशा के लिए..&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यौन-उत्पीड़न-केस-में-टीचर-को-राहत-sc-बोली-एक-शिक्षक-पर-हमेशा-के-लिए</link>
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        <description><![CDATA[ शिक्षक को लेकर हुई एफआईआर पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज केस में सुनवाई हुई. इसमें आरोप लगाया गया था कि उसने क्लास में कई छात्राओं को गलत तरीके से छुआ था. इसमें पीठ पर हाथ रखना, कमर को टच करना जैसे गंभीर आरोप शामिल थे.
आरोप के सामने आने के बाद पुलिस ने टीचर्स के खिलाफ पॉक्सो एक्ट 2012 की धारा 10 के तहत केस दर्ज किया. इन्हीं आरोपों की लड़ाई में जुटे टीचर ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, इसके बाद जब वहां से निराशा मिली तो वह सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचे.&amp;nbsp;
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#039;शारीरिक सजा देने का उनका तरीका भले ही गलत और असंवेदनशील रहा हो, लेकिन इससे यौन मंशा का पता नहीं चलता है. कोर्ट ने कहा है कि बाद में बरी हो जाने पर भी मुकदमे से हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है. एक टीचर पर हमेशा के लिए दाग लग जाएगा.&#039;&amp;nbsp;
जस्टिस भुइयां और जस्टिस अतुल एस की बेंच ने की सुनवाई
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया था. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी. उनके तहत पॉक्सो की धारा 10 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. महिला टीचरों ने हेडमास्टर से टीचर की शिकायत की थी. तब आरोप लगाया था कि उन्होंने 10वीं कक्षा की कुछ छात्राओं के शरीर को छुआ. इसके बाद बाल जिला संरक्षण इकाई ने स्कूल का दौरा किया, और जांच रिपोर्ट बनाई. &amp;nbsp;फिर पूरे मामले में पुलिस ने संज्ञान लेते हुए, एफआईआर दर्ज की. शिक्षक ने हाईकोर्ट में इस FIR को रद्द करने की मांग की, और याचिका दाखिल की थी. लेकिन उसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया. इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां माननीय सर्वोच्च अदालत ने रोक लगा दी. &amp;nbsp;
बाल संरक्षण इकाई ने क्या बताया?&amp;nbsp;
बाल संरक्षण इकाई ने बताया था कि छात्राओं ने कहा है कि जब वे क्लास में ध्यान नहीं देती थीं, तो टीचर उनकी पीठ के ऊपरी हिस्से पर मारते थे. ऐसे में वह जिस तरह से छूते थे, वह उनके Comfort स्थिति नहीं थी. इनके अलावा रिपोर्ट में बताया गया था कि छात्राओं की पीठ को रगड़ा जाता था, उनके कमर पर चुटकी काटते थे. एक दिन टीचर ने एक लड़की को मैप न लाने पर थप्पड़ मारा. उसकी गर्दन को गलत तरह से छुआ. अन्य स्टूडेंट्स ने शिकायत की कि भले ही टीचर ने छुआ नहीं, लेकिन वह इस तरह से देखते थे, जिससे उन्हें असहज महसूस होता था.&amp;nbsp;
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई तरह के प्रावधानों के बारे में पॉक्सो एक्ट के तहत बताया थआ. इसमें धारा 10 के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न पांच से सात साल की कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है. इस मामले में लागू धारा 9(f) में ऐसे लोग शामिल हैं, जो किसी भी तरह से टिचिंग प्रोफेशन से जुड़े हैं. कोर्ट ने माना है कि भले ही टीचर के तौर पर व्यवहार गलत था, लेकिन धारा 10 के दायरे में नहीं आता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>पश्चिमी एशिया तनाव पर पेजेश्कियान से बोले PM मोदी &amp; &amp;apos;भारत...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिमी एशिया की मौजूद स्थिति पर भी चर्चा की. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक कहा कि भारत युद्ध की बजाय हमेशा बातचीत और शांति से हर समस्या को सुलझाने में भरोसा रखता है और अपनी इस बात पर हमेशा कायम रहता है. दोनों नेताओं की दो सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी मुलाकात है.
बतौर ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान की यह पहली भारत यात्रा है. &amp;nbsp;पेजेश्कियान का यह दौरा इसलिए अहम है क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से नए आर्थिक प्रतिबंध लागू किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ गया है.
ईरानी राष्ट्रपति से मीटिंग पर क्या बोले पीएम मोदी?
पेजेश्कियान से मुलाकात की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दी. पीएम मोदी ने लिखा, &#039;बिश्केक से दिल्ली तक हमारी सार्थक बातचीत जारी है. ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से मिलकर बहुत खुशी हुई. यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है. हमने भारत और ईरान की दोस्ती पर बात की.&#039;
उन्होंने आगे लिखा, &#039;हमारा मानना है कि हमें लंबे समय तक चलने वाली और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए. बैठक में क्षेत्र के मौजूदा हालातों पर भी चर्चा हुई. भारत क्षेत्र में स्थाई शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.&#039;
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में हिस्सा लेने के लिए दिया धन्यवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ब्रिक्स से संबंधित बैठकों में ईरान की नियमित और उच्च स्तरीय भागीदारी के लिए आभार जताया. उन्होंने वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने में ब्रिक्स की क्षमता का जिक्र किया. उन्होंने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान को भी धन्यवाद दिया.
बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा, आज के समय में दुनिया बेहद जटिल दौर से गुजर रही है. ऐसे में ब्रिक्स की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. उन्होंने ब्रिक्स के आयोजन के लिए &amp;nbsp;भारत का धन्यवाद दिया. इससे पहले बिजनेस फोरम के दौरान एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें पीएम मोदी ईरानी राष्ट्रपति का हाथ थामे दिखाई दिए थे.
राष्ट्रपति पेजेश्कियान और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक, जानें क्या हुई चर्चा
PM मोदी-पेजेश्कियान के बीच बैठक पर क्या बोले MEA?
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पीएम मोदी और पेजेश्कियान के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक को लेकर सोशल मीडिया पर कहा, &#039;भारत और ईरान के बीच सभ्यतागत संबंध हैं, जो मजबूत सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी रिश्तों से जुड़े हैं. ब्रिक्स साझेदारों के तौर पर, दोनों देश मिलकर तरक्की और खुशहाली की दिशा में काम कर रहे हैं.&#039;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैंक फ्रॉड मामले में ED की रेड, सिंगापुर खाते में 35.71 करोड़ की FD फ्रीज</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक धोखाधड़ी और रकम की कथित हेराफेरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय-II ने गजानन गंगामय इंडस्ट्री LLP (GGI LLP) और उससे जुड़े लोगों के छह आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी ली. ये ठिकाने मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में स्थित हैं. कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई.
बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से लिया था कर्ज
ईडी ने यह जांच पुणे की सीबीआई एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर और बाद में दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू की. मामले में GGI LLP, उसके साझेदारों और अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक कदाचार के आरोप हैं. जांच के मुताबिक GGI LLP ने Bank of India के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम से ऋण लिया था. बाद में यह कर्ज एनपीए में बदल गया और करीब 135 करोड़ रुपये की बकाया राशि को कंसोर्टियम बैंकों ने फ्रॉड घोषित किया.
पूर्व पार्टनर पर फंड डायवर्जन का आरोप
ईडी के अनुसार, GGI LLP के पूर्व पार्टनर नितिन रामचंद्र जाधव ने कथित तौर पर रकम को डायवर्ट और सिफन करने के लिए कई संस्थाओं का इस्तेमाल किया. जांच में सामने आया कि लोन की रकम को राउंड-ट्रिपिंग और डायवर्जन के जटिल नेटवर्क के जरिए घुमाया गया. इसके बाद रकम को कई कथित शेल कंपनियों और एंट्री प्रोवाइडरों के माध्यम से अलग-अलग खातों में भेजा गया.&amp;nbsp;
जांच एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया के बाद बड़ी मात्रा में नकद निकासी की गई, जिससे अपराध से अर्जित रकम के वास्तविक इस्तेमाल और लेन-देन को छिपाने की कोशिश की गई.
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सिंगापुर में 35.71 करोड़ की एफडी फ्रीज
ईडी की तलाशी कार्रवाई में बड़ी रकम से जुड़ी संपत्ति का भी पता चला. एजेंसी ने इंडियन बैंक की सिंगापुर शाखा में करीब 37 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 35.71 करोड़ रुपये) के बैलेंस वाला फिक्स्ड डिपॉजिट खाता फ्रीज कर दिया है. &amp;nbsp;इसके अलावा तलाशी के दौरान BMW 320LD &amp;nbsp;ग्रैंड लग्जरी लाइन कार जब्त की गई. ईडी ने मामले से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए हैं, जिनमें कथित वित्तीय लेन-देन और फंड की आवाजाही से जुड़ी सामग्री मिली है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बंगाल उपचुनाव: कांग्रेस ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उतारे उम्मीदवार</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अगले महीने 6 अक्टूबर, 2026 को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने बताया है कि मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि कांग्रेस ने नंदीग्राम सीट से मिलन प्रधान उम्मीदवार बनाया है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
(खबर अपडेट किया जा रहा है.) ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>‘वैश्विक GDP का 40% हिस्सा BRICS देशों से’, राष्ट्रपति पुतिन ने जी&amp;7 पर कसा तंज</title>
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        <description><![CDATA[ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और प्रौद्योगिकी से जुड़ी परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक नया निवेश मंच बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग किसी भी देश के खिलाफ नहीं है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के उद्योग प्रमुखों की बैठक को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि प्रस्तावित निवेश मंच का आधार न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) हो सकता है. इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र से वित्त जुटाकर ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है.
उन्होंने कहा, &quot;हमें वित्तपोषण की जरूरत है.&quot; साथ ही उम्मीद जताई कि ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश भी इस पहल का समर्थन करेंगे. पुतिन ने कहा कि रूस आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर सहित बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं पर साझेदार देशों के साथ काम करने के लिए तैयार है.
ब्रिक्स देशों से वैश्विक जीडीपी का 40%
उन्होंने प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मानव रहित परिवहन, वित्त, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया. पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स दुनिया के साथ व्यापक सहयोग के लिए खुला है. उन्होंने कहा, &quot;हम किसी के खिलाफ नहीं हैं. हम अपने हितों के पक्ष में हैं.&quot; रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 40 प्रतिशत से अधिक योगदान ब्रिक्स देशों का रहा है, जबकि जी-7 देशों की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत रही. उन्होंने कहा कि इसी अवधि में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में ब्रिक्स देशों का योगदान आधे से अधिक रहा है.
पुतिन के अनुसार, आर्थिक वृद्धि के पारंपरिक केंद्रों की जगह अब नए विकास केंद्र ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का बढ़ता आर्थिक सहयोग अन्य देशों को बाहर करने के बजाय सदस्य देशों के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए है. सरकारों, कारोबार और शैक्षणिक जगत के बीच सहयोग के जरिए ब्रिक्स नवाचार और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आधार पर वैश्विक वृद्धि का एक मजबूत मंच तैयार कर रहा है. उन्होंने कहा, &quot;इस वृद्धि के सबसे महत्वपूर्ण तत्व किसी पर बाहर से नहीं थोपे जा रहे हैं.&quot; पुतिन ने भारत की कंपनी महिंद्रा को ब्रिक्स की कारोबारी सफलता के उदाहरणों में शामिल किया.
एआई, डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिक्र
उन्होंने चीन की हुआवेई, ब्राजील की एम्ब्रेयर, संयुक्त अरब अमीरात की टीपीओ और रूस की रोसाटॉम के साथ महिंद्रा द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और AI क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन कंपनियों की सफलता ब्रिक्स देशों के बड़े घरेलू बाजार, तेज शहरीकरण और बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है. पुतिन ने कहा कि रूस भी AI, स्वायत्त प्रणालियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वित्तीय प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तकनीकी नवाचार पर काम कर रहा है. उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि रूस या ब्रिक्स आर्थिक रूप से अलग-थलग होना चाहते हैं. पुतिन ने कहा कि रूस मौजूदा और नए, दोनों तरह के साझेदारों के साथ सहयोग के लिए तैयार है.
उन्होंने कहा, &quot;हम पूरी दुनिया के साथ काम करने के लिए तैयार हैं.&quot; पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स व्यापार परिषद व्यापार और आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकती है तथा बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स, वित्त और प्रौद्योगिकी से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है. इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और अन्य पाबंदियों की तीखी आलोचना की.
उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा तेजी से ऐसे रूप ले रही है, जिनमें व्यापार प्रतिबंध, परिवहन मार्गों पर दबाव और द्वितीयक प्रतिबंध शामिल हैं. पुतिन ने कहा कि प्रतिस्पर्धा कंपनियों और देशों, दोनों स्तरों पर तेजी से &quot;बदरंग रूप&quot; ले रही है. उन्होंने दावा किया कि रूस को 30,000 से अधिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है. हालांकि, रूस ने अपने विदेशी व्यापार का दायरा बदलकर और अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाकर इसका जवाब दिया है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>बिल्डर&amp;फाइनेंशियल संस्थानों की सांठगांठ पर CBI का एक्शन, 12 ठिकानों पर छापे</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देशभर में बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार (10 सितंबर, 2026) को बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने बेंगलुरु, मुंबई और पुणे में कुल 12 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई पांच नए आपराधिक मामलों के सिलसिले में की गई है.
CBI के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बिल्डरों के खिलाफ पांच नए मामले दर्ज किए गए हैं, इनमें ओजोन ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चार मामले हैं, जो बेंगलुरु और मुंबई की परियोजनाओं से संबंधित हैं. वहीं, पांचवां मामला बेंगलुरु की परियोजना से जुड़ी मे. विवांसा बाल्सम के खिलाफ दर्ज किया गया है. इन मामलों में विभिन्न वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
होमबायर्स को धोखा देने का आरोप
जांच एजेंसी को शक है कि बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के बीच कथित गठजोड़ के चलते बड़ी संख्या में घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई. आरोपों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की ओर से आपराधिक कदाचार जैसे अपराध शामिल हैं.&amp;nbsp;
बताया गया कि कई होमबायर्स ने सालों से बिल्डरों की कथित धोखाधड़ी और परियोजनाओं से जुड़ी अनियमितताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. घर खरीदने के लिए अपनी जीवनभर की कमाई लगाने वाले लोगों को लंबे समय तक राहत नहीं मिलने के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ाया गया है.&amp;nbsp;

फंड डायवर्जन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच
CBI की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कथित फंड डायवर्जन, वित्तीय अनियमितताओं और रियल एस्टेट क्षेत्र में धोखाधड़ी के बड़े नेटवर्क का पता लगाना है. छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है. बरामद सामग्री की अब विस्तृत जांच की जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब तक 55 केस
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में सीबीआई इससे पहले देशभर के अलग-अलग बिल्डरों के खिलाफ 50 मामले दर्ज कर चुकी थी. गुरुवार (10 सितंबर) को पांच नए मामले दर्ज होने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI की तरफ से दर्ज मामलों की कुल संख्या 55 हो गई है.
सीबीआई का कहना है कि इन मामलों की जांच तेजी और निष्पक्षता के साथ की जा रही है. एजेंसी का लक्ष्य उन लोगों की जवाबदेही तय करना है, जिन्होंने कानून और निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर कथित तौर पर निर्दोष होमबायर्स को आर्थिक नुकसान पहुंचाया.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BRICS के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन, आज PM मोदी संग मीटिंग, जानें क्या है शेड्यूल</title>
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        <description><![CDATA[ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार (11 सितंबर 2026) सुबह-सुबह 3 बजे भारत पहुंचे हैं. नई दिल्ली पहुंचने पर उनका भारतीय अधिकारियों की ओर से गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया. केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने पालम एयरपोर्ट पर रूसी राष्ट्रपति का स्वागत किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम द्विपक्षीय बैठक होने वाली है. भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर इस बातचीत में चर्चा हो सकती है.
पुतिन के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी 12 सितंबर को भारत पहुंचेंगे. उनका यह भारत दौरा करीब 7 साल बाद हो रहा है. BRICS बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच भी अलग से द्विपक्षीय बातचीत तय है. दोनों देशों के बीच व्यापार और सीमा से जुड़े मुद्दे इस बातचीत में अहम हो सकते हैं.

MEA Official Spokesperson Randhir Jaiswal tweets, &quot;Warmly welcome President Vladimir Putin of Russia for the 18th BRICS Summit. He was received by MoS and Gonda MP KV Singh at the airport. India and Russia share multifaceted and longstanding ties anchored in Special and&amp;hellip; pic.twitter.com/6JxIXcie5v
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 10, 2026



मोदी-पुतिन बातचीत में रक्षा से लेकर ऊर्जा तक कई मुद्दे
प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की पिछली मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी. उस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-रूस के राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी. मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाने की बात भी कही थी. अब दिल्ली में होने वाली बातचीत में रक्षा सहयोग पर खास नजर रहेगी. ब्रह्मोस मिसाइल के संभावित अपग्रेड, रूस से S-400 की बाकी डिलीवरी और Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की संभावना है. इसके अलावा भारत में नए सिविल न्यूक्लियर रिएक्टर लगाने की योजना और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी बातचीत का हिस्सा हो सकता है.
ये भी पढ़ें: &#039;लोगों में एक गलतफहमी...&#039;, ब्रिक्स समिट 2026 से पहले क्या बोला भारत
पुतिन BRICS के बिजनेस फोरम में भी होंगे शामिल
रूसी राष्ट्रपति BRICS शिखर सम्मेलन के अलावा बिजनेस फोरम से जुड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे. वह BRICS बिजनेस फोरम के प्लेनरी सत्र को संबोधित करेंगे. भारत और रूस के बीच कारोबार, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने के रास्तों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है. पुतिन के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अन्य बैठकों के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें भी शामिल हैं. रूस के राष्ट्रपति की BRICS के दौरान दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया और मिस्र समेत कई देशों के नेताओं से बातचीत हो सकती है.
7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग
BRICS Summit 2026 की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटनाओं में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात भी शामिल है. शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे और शनिवार शाम प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की BRICS के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी बातचीत होने की संभावना है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे इस बातचीत के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं. BRICS में ईरान के शामिल होने के बाद संगठन की भूमिका पश्चिम एशिया के मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण हो गई है. ऐसे में भारत के लिए ईरान के साथ संतुलित और रणनीतिक संबंधों पर बातचीत अहम रहेगी.

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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: आज भारत में देशव्यापी बैंक हड़ताल, ब्रिक्स सम्मेलन के बीच कर्मचारियों की क्या है मांग</title>
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        <description><![CDATA[ 

शुक्रवार को &#039;यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस&#039; (UFBU) के आह्वान पर 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण पूरे भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित रहेगी. यह हड़ताल एक ऐसे समय पर हुई है, जब इसके तुरंत बाद महीने का दूसरा शनिवार, रविवार और गणेश चतुर्थी का त्योहार पड़ रहा है. इस तरह एक साथ लगातार चार दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक शाखाओं के किवाड़ बंद रहने की स्थिति बन गई है. इस लंबी तालाबंदी के कारण रिटेल ग्राहकों, व्यापारियों और छोटे-बड़े उद्योगों को भारी वित्तीय असुविधा का सामना करना पड़ेगा.
ब्रिक्स सम्मेलन और सरकार की अपील
यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन ऐसे संवेदनशील समय में हुआ है जब देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. इस सम्मेलन में दुनिया भर के प्रमुख राष्ट्रों के शीर्ष नेता और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं. वैश्विक स्तर पर भारत की साख और कूटनीतिक गतिविधियों को देखते हुए केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से हड़ताल को टालने या बातचीत के माध्यम से रास्ता निकालने की सीधी अपील की थी. हालांकि, यूनियन नेताओं ने सरकार की इस अपील को खारिज कर दिया और लंबे समय से लंबित &#039;पांच दिन के कार्य सप्ताह&#039; को तुरंत अधिसूचित करने की अपनी मांग पर अड़े रहे.
सार्वजनिक बनाम निजी क्षेत्र के बैंक: असर का अंतर
हड़ताल का प्रभाव बैंकिंग क्षेत्र के अलग-अलग ढांचों पर अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है, जिसने भारतीय वित्तीय प्रणाली के विभाजन को उजागर किया है:
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs): स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक जैसे बड़े सरकारी बैंकों में कामकाज लगभग पूरी तरह ठप रहा. इन बैंकों के क्लर्क और अधिकारी वर्ग के कर्मचारियों में यूनियनों की मजबूत पकड़ के कारण शाखाओं में सन्नाटा पसरा रहा. नगद जमा और निकासी, ड्राफ्ट जारी करने, नए खाते खोलने, संस्थागत ट्रेड क्लीयरेंस और चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) जैसी शाखा-आधारित सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं.
-निजी और विदेशी बैंक: HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े निजी बैंकों का कामकाज काफी हद तक सामान्य रूप से चलता रहा. इन बैंकों में कर्मचारियों की संगठित यूनियन न होने के कारण शाखाएं खुली रहीं और काउंटर सेवाएं चालू रहीं. हालांकि, सरकारी बैंकों में क्लियरिंग-हाउस बंद रहने और चेक प्रोसेसिंग की गति धीमी होने के कारण अंतर-बैंक लेन-देन और चेक सेटलमेंट की गति पर भी अप्रत्यक्ष असर देखने को मिला.
डिजिटल बैंकिंग ढांचा: शाखाओं में ताले लटके होने के बावजूद देश का डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर सुचारू रूप से काम करता रहा. UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस), IMPS, NEFT/RTGS और नेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं. इससे आम नागरिकों को रोजमर्रा की खरीदारी और ट्रांसफर में बड़ी राहत मिली, हालांकि शाखाओं के बंद रहने से कई एटीएम में कैश खत्म होने की शिकायतें सामने आईं.
5-दिन के कार्य सप्ताह की मांग का इतिहास और कानूनी गतिरोध
बैंक कर्मचारी पिछले दो सालों से 5-डे वर्क वीक लागू करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. इस विवाद का मुख्य केंद्र मार्च 2024 में हुआ 12वां बाइपार्टाइट सेटलमेंट है.
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच हुए इस ऐतिहासिक समझौते में सभी शनिवारों को आधिकारिक अवकाश घोषित करने पर सहमति बनी थी. इसके बदले में बैंक यूनियनें इस बात पर राजी हुई थीं कि कार्य दिवसों के नुकसान की भरपाई के लिए सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना कामकाज के घंटों में 40 मिनट की बढ़ोतरी की जाएगी.
IBA की स्पष्ट सिफारिश और सहमति के बावजूद, केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा अभी तक इसकी अंतिम प्रशासनिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है. इस प्रशासनिक देरी के कारण बैंक कर्मचारी अब भी &#039;अल्टरनेट-सैटरडे&#039; के पुराने नियम के तहत काम करने के लिए मजबूर हैं. यह स्थिति तब है जब रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI), सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर, केंद्र सरकार के अधिकांश मंत्रालयों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में 5-दिन का कार्य सप्ताह वर्षों से लागू है.
&#039;नो वर्क, नो पे&#039; का सिद्धांत: वित्तीय नुकसान के बावजूद कर्मचारियों का रुख
बैंकिंग सेवा नियमों और भारतीय श्रम कानूनों के अनुसार, हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों पर &quot;काम नहीं तो वेतन नहीं&quot; का सिद्धांत सख्ती से लागू किया जाता है.
-वेतन कटौती: हड़ताल में भाग लेने वाले सभी बैंक कर्मचारियों के मासिक वेतन से एक दिन के मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) की आनुपातिक कटौती की जाएगी.
-छुट्टियों का समायोजन नहीं: नियम के अनुसार, हड़ताल के दिन की अनुपस्थिति को कर्मचारी की अर्जित छुट्टी या आकस्मिक अवकाश में समायोजित करने की अनुमति नहीं होती है.
सीधे आर्थिक नुकसान के बावजूद, यूनियनों का मानना है कि कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance), मानसिक स्वास्थ्य में सुधार, और निष्पक्ष प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) ढांचे को लागू कराने के लिए यह वित्तीय त्याग और विरोध प्रदर्शन आवश्यक है.
ब्रिक्स सम्मेलन और हड़ताल का रणनीतिक संयोग
हालांकि UFBU के शीर्ष नेताओं का आधिकारिक बयान है कि मुख्य श्रम आयुक्त के साथ सुलह वार्ता विफल होने के बाद हड़ताल की तारीख तय की गई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तारीख का चयन ब्रिक्स सम्मेलन के साथ मेल खाना एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है.
जब दुनिया के शीर्ष नेता और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया राजधानी नई दिल्ली में मौजूद हैं, तब देशव्यापी हड़ताल करने से बैंक यूनियनों की आवाज अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर जोर-शोर से गूंजी है. सरकार पर अधिकतम दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया यह कदम दिखाता है कि भारत की वैश्विक आर्थिक साख और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की आंतरि ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, आज, भारत, में, देशव्यापी, बैंक, हड़ताल, ब्रिक्स, सम्मेलन, के, बीच, कर्मचारियों, की, क्या, है, मांग</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;लोगों में एक गलतफहमी...&amp;apos;, ब्रिक्स समिट 2026 से पहले क्या बोला भारत</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में ब्रिक्स समिट 2026 का 12 और 13 सितंबर को आयोजन होना है. इसके लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली पहुंच चुके हैं. उनके साथ और भी दिग्गज आए हैं. इस बीच भारत की अहम प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत ने डी-डॉलराइजेशन और ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम को लेकर बात रखी है.&amp;nbsp;
ब्रिक्स इंटरनेशनल के चेयरमैन पवन जोशी ने कहा, &#039;ब्रिक्स इंटरनेशनल के तहत, हमारे पास अपने ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम हैं. यह क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम, जिस पर हम काम कर रहे हैं, असल में अलग-अलग देशों में पहले से मौजूद सभी सिस्टम के बीच एक पुल का काम करेगा.&#039;&amp;nbsp;
उन्होंने कहा, &#039;यहां मुख्य फोकस संप्रभुता पर है. हमारा देश एक महान देश है और एक महान नेतृत्व के अधीन है. हमारा विजन अपने देश को पूरी तरह से संप्रभु व्यवस्था में लाना है. यह गठबंधन इसी पहलू पर है और हम इसी सिस्टम पर काम कर रहे हैं. हम किसी चीज को बदलने का दावा नहीं कर रहे हैं.&#039;&amp;nbsp;
डी-डॉलराइजेशन पर क्या बोला भारत
पवन जोशी ने कहा, &#039;डी-डॉलराइजेशन को लेकर लोगों में एक गलतफहमी है. मैं इसमें विश्वास नहीं करता. हम अपने पड़ोसियों और दुनिया भर में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. हम अपने नागरिकों, कंपनियों और व्यवसायों के लिए तेजी से लेन-देन की सुविधा देने के लिए मिलकर काम कर रहे.&#039;

पुतिन के बाद जिनपिंग भी आएंगे भारत
नई दिल्ली का भारत मंडपम इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम की मेजबानी के लिए तैयार गया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और कई अन्य नेता समिट में शामिल होने के लिए भारतीय राजधानी आएंगे. जिनपिंग के शनिवार को पहुंचने की उम्मीद है.
यह भी पढ़ें : BRICS के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन, आज PM मोदी संग मीटिंग, जानें क्या है शेड्यूल ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PM मोदी नहीं, फिर कौन पहुंचा &amp;apos;दोस्त&amp;apos; पुतिन को दिल्ली एयरपोर्ट लेने, जानें</title>
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        <description><![CDATA[ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार (11 सितंबर 2026) को नई दिल्ली पहुंच गए हैं. पुतिन के भारत दौरे को लेकर राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. वह ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे.
पुतिन का विमान तड़के पालम एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा. हालांकि, &amp;nbsp;एयरपोर्ट पर उनका स्वागत पीएम मोदी की गैर-मौजूदगी में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया. पुतिन की यात्रा को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

Warmly welcome President Vladimir Putin of Russia for the 18th BRICS Summit. He was received by MoS @KVSinghMPGonda at the airport.India and Russia share multifaceted and longstanding ties anchored in Special and Privileged Strategic Partnership.#BRICS2026 #BRICSIndia2026&amp;hellip; pic.twitter.com/pwxcO2aHLt
&amp;mdash; Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 10, 2026



ये भी पढ़ें: &#039;लोगों में एक गलतफहमी...&#039;, ब्रिक्स समिट 2026 से पहले क्या बोला भारत
आज मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात
पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच शुक्रवार को होने वाली बैठक पहले से तय थी. क्रेमलिन ने भी इसकी पुष्टि की थी. दोनों नेताओं की यह मुलाकात 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रही है. इस बातचीत में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है. प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार मोदी और पुतिन पहले ही रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा कर चुके हैं. दोनों देश अपनी &amp;lsquo;स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप&amp;rsquo; को और मजबूत करने पर भी सहमत हैं.
रक्षा क्षेत्र पर रहेगी खास नजर
मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा सहयोग सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक हो सकता है. भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी रही है. ब्रिक्स सम्मेलन से पहले सामने आई रिपोर्टों में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अगली डिलीवरी और ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़े सहयोग को भी बातचीत के संभावित मुद्दों में बताया गया है. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश को बढ़ाने के रास्तों पर भी बातचीत हो सकती है. वैश्विक स्तर पर बदलते हालात के बीच भारत और रूस आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP प्रोटेस्ट: स्वतंत्र भारद्वाज केस में CJI सख्त, &amp;apos;अगर असामाजिक तत्वों ने...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ जुलाई में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र प्रदर्शन का हिस्सा रही एक 14 साल की लड़की को धमकाने और उसके घर पर पथराव के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.&amp;nbsp;
छात्र प्रदर्शन मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान एक वकील ने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि हाल ही में एक व्यक्ति ने कुछ वीडियो में यह दावा किया कि उसने CJP के प्रदर्शन के दौरान लड़की के पिता पर हमला किया था. एफआईआर दर्ज होने के बाद उस व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया है, लेकिन अब लड़की को धमकाया जा रहा है.
स्वतंत्र भारद्वाज ने किया था दावा
स्वतंत्र भारद्वाज नाम के शख्स ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि उसने सीजेपी की कार्यकर्ता के पिता की पिटाई की थी. पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया. हालांकि सीजेपी के प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और इस समय वो न्यायिक हिरासत में है.
वकील ने दावा किया कि लड़की के घर पर पथराव किए जाने के वीडियो भी मौजूद हैं. अगर उसे किसी तरह का नुकसान पहुंचता है तो बाद में उसकी भरपाई संभव नहीं होगी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पथराव में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है. इसकी बजाय बच्ची और उसके परिवार के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई है.
मामले को रखते हुए वकील ने यह आरोप भी लगाया जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों ने हमला किया, उन्हें बाद में 4 पुलिसकर्मियों के साथ देखा गया. इस बात के सबूत के तौर पर वीडियो उपलब्ध हैं.
सीजेआई की अहम टिप्पणी
इन आरोपों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस (CJI) ने कहा कि बच्चा तो बच्चा ही है, उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए. चीफ जस्टिस ने कहा, &quot;अगर असामाजिक तत्वों ने बच्ची के खिलाफ हिंसा की है और वह अभी भी आज़ाद हैं, उसे डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह गंभीर मामला है.&quot;
कोर्ट में &amp;nbsp;सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर लड़की की तरफ से किए गए पोस्ट के जरिए इस मामले की जानकारी मिली है. इसके बाद कोर्ट ने कहा कि बच्ची की तरफ से दर्ज एफआईआर में की गई कार्रवाई होनी चाहिए. उसकी और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली से मामले पर रिपोर्ट देने को कहा. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गले में फंसा ट्रैक्टर का टायर, चाय बागान में भटकता दिखा जंगली हाथी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गले-में-फंसा-ट्रैक्टर-का-टायर-चाय-बागान-में-भटकता-दिखा-जंगली-हाथी</link>
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        <description><![CDATA[ असम के नुमलीगढ़ इलाके से वन्यजीवों के लिए बढ़ते खतरे की एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. बकियाल क्षेत्र में एक जंगली हाथी के गले में ट्रैक्टर का बड़ा टायर फंसा हुआ दिखाई दिया. हाथी को एक चाय बागान में घूमते हुए देखा गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ गई.
हाथी के गले में टायर कैसे फंसा, इसकी अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है. स्थानीय लोगों का अनुमान है कि भोजन की तलाश में घूमते समय हाथी किसी जगह पड़े पुराने टायर के संपर्क में आया होगा और वह उसके गले में फंस गया. हालांकि, इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
ये भी पढ़ें: छात्र प्रदर्शन पर SC की सुनवाई में प्रशांत भूषण नाराज, SG बोले- &#039;ये कहेंगे सब बेईमान&#039;
चाय बागान में घूमता दिखा हाथी
बकियाल इलाके में लोगों की नजर जब इस हाथी पर पड़ी तो उसके गले में टायर देखकर वे हैरान रह गए. हाथी चाय बागान के भीतर घूम रहा था. उसकी तस्वीर भी कैमरे में कैद हुई, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया. वन्यजीवों के विशेषज्ञों के लिए इस तरह की घटनाएं चिंता का विषय हैं, क्योंकि जंगलों और हाथियों के आने-जाने वाले इलाकों में फेंका गया कचरा जानवरों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है.
वन विभाग से निगरानी की मांग
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग से हाथी पर नजर रखने की अपील की है. लोगों का कहना है कि अगर टायर हाथी के गले में फंसा रहा तो उसके चलने, खाने और सामान्य गतिविधियों पर असर पड़ सकता है. स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि जरूरत पड़ने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर हाथी की स्थिति का आकलन करे और सुरक्षित तरीके से टायर निकालने के लिए जरूरी कदम उठाए.
जंगलों में कचरा वन्यजीवों के लिए बन रहा खतरा
इस घटना ने जंगल और वन्यजीवों के आसपास कचरा फेंकने की समस्या को भी सामने ला दिया है. पुराने टायर, प्लास्टिक और दूसरी चीजें जंगल में लंबे समय तक पड़ी रहती हैं और जानवर अनजाने में इनके संपर्क में आ सकते हैं. हाथियों जैसे बड़े वन्यजीव अक्सर भोजन और पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर चाय बागानों और आसपास के इलाकों तक पहुंचते हैं. ऐसे क्षेत्रों में पड़ा गैर-जरूरी सामान उनके लिए फंसने, घायल होने या अन्य तरह की परेशानी का कारण बन सकता है.

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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>वंदे मातरम विवादः ‘छह अंतरे तभी गाए जाएंगे, जब...’, DKS सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम के अंतरों के गायन को लेकर गुरुवार (10 सितंबर, 2026) को बड़ा आदेश जारी किया है. इस आदेश में डीके शिवकुमार सरकार ने कहा है कि कर्नाटक राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे. हालांकि, राज्य सरकार की तरफ से वंदे मातरम के सभी छह अंतरों के गायन को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं.
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में किया गया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी छह अंतरे के गायन को अनिवार्य किया है.
किन कार्यक्रमों में गाए जाएंगे वंदे मातरम के सभी छह अंतरे?
हालांकि, कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार के इस आदेश में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी छह अंतरों के गायन को पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया गया है. इस आदेश में एक ऐसा प्रावधान भी किया गया है, जिसके मुताबिक, जब किसी भी सरकारी कार्यक्रम में देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल स्वयं मौजूद होंगे, तो सिर्फ उन्हीं कार्यक्रमों में हीं राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे.&amp;nbsp;

इसके अलावा, राज्य सरकार के किसी भी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के सिर्फ पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की सरकार की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं.
देश में लागू हो गया वंदे मातरम कानून
उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र के दौरान केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से संसद में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026, जिसे वंदे मातरम बिल भी कहा जाता है, को पेश किया गया था, जो संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा- से पारित हो चुका है. इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस बिल पर साइन करके इसे कानून में परिवर्तित कर दिया है. राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद इस कानून को पूरे देश में लागू कर दिया गया है.
इस कानून के तहत अब राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का अपमान करना या इसके गायन में किसी भी तरह से बाधा डालना एक दंडनीय अपराध बन गया है और इस अपराध के लिए दोषी को तीन साल तक की जेल की सजा, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः गले में फंसा ट्रैक्टर का टायर, चाय बागान में भटकता दिखा जंगली हाथी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वंदे, मातरम, विवादः, ‘छह, अंतरे, तभी, गाए, जाएंगे, जब...’, DKS, सरकार, का, बड़ा, फैसला</media:keywords>
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        <title>स्क्रैप कारोबार पर दबदबा बनाने वाले ‘सुखा’ पर ED का एक्शन, 17 संपत्तियां अटैच</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र शासित प्रदेश दमन में स्क्रैप कारोबार और ट्रांसपोर्ट सेवाओं पर कथित तौर पर दबदबा कायम करने वाले सुरेश जगुभाई पटेल उर्फ &amp;lsquo;सुखा&amp;rsquo; के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के सूरत सब-जोनल कार्यालय ने मंगलवार (8 सितंबर, 2026) को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत दमन और गुजरात के वलसाड जिले में स्थित 17 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. इन संपत्तियों की कीमत करीब 6.52 करोड़ रुपये बताई गई है.
कई आपराधिक मामलों के आधार पर शुरू हुई जांच
ED ने दमन पुलिस, गुजरात पुलिस और मुंबई पुलिस की ओर से सुरेश पटेल उर्फ सुखा और उसके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. इन मामलों में भ्रष्टाचार, अवैध हथियार रखने, हत्या, जबरन वसूली, जालसाजी, पासपोर्ट में फर्जीवाड़ा और कॉपीराइट उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.
प्रतिद्वंद्वी कारोबारियों को हटाकर बनाया दबदबा&amp;nbsp;
जांच में ED को पता चला कि सुरेश जगुभाई पटेल ने कथित तौर पर धमकी, डराने-धमकाने, बाहुबल और अपने आपराधिक रिकॉर्ड से पैदा आतंक के जरिए दमन में स्क्रैप ट्रेडिंग और ट्रांसपोर्ट कारोबार पर एकाधिकार कायम किया. एजेंसी के मुताबिक, उसने अपने प्रतिद्वंद्वी कारोबारियों को रास्ते से हटाकर कारोबार में अपना दबदबा बनाया.&amp;nbsp;

2024 में दाखिल हो चुकी है अभियोजन शिकायत
इस मामले में ईडी ने 27 नवंबर, 2024 को दमन की विशेष PMLA अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट नंबर 10/2024 दाखिल की थी. इसमें सुरेश जगुभाई पटेल, उसके सहयोगी महेश नंदा और अन्य को आरोपी बनाया गया था.
अब तक 13.85 करोड़ की संपत्ति पर कार्रवाई
ED के मुताबिक, इससे पहले जांच के दौरान 2.90 करोड़ रुपये की नकदी और बैंक बैलेंस जब्त/फ्रीज किए गए थे. इसके अलावा, दमन और मुंबई में स्थित 24 अचल संपत्तियां, जिनकी कीमत करीब 4.42 करोड़ रुपये है, अस्थायी रूप से अटैच की जा चुकी हैं और PMLA की निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority), नई दिल्ली ने इन्हें पुष्टि भी कर दी है.
ताजा कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक कुल करीब 13.85 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त, अटैच या फ्रीज की जा चुकी हैं. ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है.
यह भी पढ़ेंः वंदे मातरम विवादः &amp;lsquo;छह अंतरे तभी गाए जाएंगे, जब...&amp;rsquo;, DKS सरकार का बड़ा फैसला ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;e&amp;KYC हो और...&amp;apos;, बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर SC ने जारी किया नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ 18 साल से कम उम्र के बच्चों का सोशल मीडिया अकाउंट खोलने के लिए हुए कांट्रेक्ट को अमान्य करार देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. याचिका में यह मांग भी की गई है कि सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति और ई-केवाईसी अनिवार्य की जाए.
गुरुवार, 10 सितंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अहम माना. याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील एच एस फुल्का की दलीलें थोड़ी देर सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने केंद्र सरकार से जवाब मांग लिया.
भारतीय कानूनों का हवाला
बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था &amp;lsquo;जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस&amp;rsquo; (JRCA) की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि भारत में मेजोरिटी एक्ट, 1875 वयस्क होने की उम्र 18 साल तय करता है. इंडियन कांट्रेक्ट एक्ट, 1872 के तहत भी नाबालिग व्यक्ति किसी कानूनी कांट्रेक्ट के लिए सक्षम नहीं है. इतना ही नहीं, 2023 का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट भी बच्चों का सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की सहमति को जरूरी बताता है.
अमेरिका में अलग कानून
याचिकाकर्ता ने बताया है कि तमाम भारतीय कानूनों के होते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म अमेरिकी कानून के हिसाब से सिर्फ 13 साल की उम्र से स्वतंत्र अकाउंट बनाने की अनुमति दे रहे हैं. इसमें मेटा, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट जैसे तमाम डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं. यह व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर समस्या है.
बच्चों की सुरक्षा का सवाल
संस्था ने कहा है कि बिना उम्र की जांच और अभिभावकों की निगरानी के सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों को ऑनलाइन ग्रूमिंग, मानव तस्करी, साइबर बुलिंग और यौन शोषण जैसे खतरों के सामने असुरक्षित खड़ा कर रहा है. कंपनियां सिर्फ जन्मतिथि पूछने के बजाय तकनीकी माध्यम से भी उम्र की पुष्टि करें. बच्चों के लिए अभिभावक की निगरानी वाली सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था बनाई जाए.
कोरियन पॉप स्टार मामले का ज़िक्रसुनवाई के दौरान यह कहा गया कि बच्चों की तस्वीरों और निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर उन्हें ब्लैकमेल भी किया जा सकता है. याचिका में एक मामले का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि पॉप स्टार बनाने का झांसा देकर 2 नाबालिग लड़कियों को दक्षिण कोरिया भेजने के नाम पर घर से भगाया गया था, जिन्हें बाद में सिलीगुड़ी में बचाया गया.
याचिका में बच्चों पर सोशल मीडिया के मानसिक असर को लेकर भी चिंता जताई गई है. इसमें कहा गया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया की लत, डिप्रेशन, एकाग्रता में कमी और बच्चों को प्रभावित करने वाले एल्गोरिदम भी उनके लिए नुकसानदेह हो सकते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>रेजीनगर उपचुनाव: हुमायूं कबीर ने चला दांव, गुलाम नबी आजाद को टिकट</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीट रेजीनगर और नंदीग्राम के लिए उपचुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने इस सीट से बड़ा दांव चलते हुए अपने बेटे गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) को चुनावी मैदान में उतारा है. मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए गुलाम नबी आजाद ने बुधवार (9 सितंबर 2026) को अपना नामांकन दाखिल किया. हुमायूं कबीर के रेजीनगर सीट से इस्तीफा देने और नवदा सीट अपने पास रखने का फैसला करने के बाद यहां उपचुनाव होना है.
गुलाम नबी आजाद ने भरा पर्चा
इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोनों सीट पर जीत हासिल की थी. रेजीनगर और नंदीग्राम सीट के लिए उपचुनाव छह अक्टूबर को होंगे और वोटों की गिनती नौ अक्टूबर को होगी. नामांकन दाखिल करते समय गुलाम नबी आजाद के साथ उनके पिता हुमांयू कबीर भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि कबीर की जीत के अंतर की बराबरी करना एक चुनौती होगी. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;जाहिर है जिस अंतर से मेरे पिता ने इस सीट से चुनाव जीता था उसे हासिल करना एक चुनौती होगी.&amp;rsquo;
हुमायूं कबीर ने रेजीनगर में अपने निकटतम बीजेपी के प्रतिद्वंद्वी को लगभग 59,000 वोटों से हराया था. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की आधारशिला रखने को लेकर हुए विवाद के बाद तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था. इसके उन्होंने दिसंबर 2025 में एजेयूपी बनाई थी.&amp;nbsp;
बंगाल की दो सीटों पर होंगे उपचुनाव
चुनाव आयोग ने सोमवार (7 सितंबर 2026) को पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीट रेजीनगर और नंदीग्राम के लिए उपचुनाव की घोषणा की थी. मतदान छह अक्टूबर को होगा और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से नंदीग्राम और आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने रेजीनगर सीट छोड़ा था, जिसके बाद उपचुनाव कराने की जरूरत पड़ी है. चुनाव प्रक्रिया 9 सितंबर को गजट अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू हो गई.
चुनाव आयोग ने बयान में कहा कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 16 सितंबर है. 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और उम्मीदवार 19 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 11 अक्टूबर तक पूरी हो जाएगी. हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में रेजीनगर और नौदा, दोनों सीट पर जीत हासिल की थी. वहीं शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्रों से विजयी हुए थे.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>TMC पर ले सकता चुनाव आयोग बड़ा फैसला, ममता बनर्जी&amp;ऋतब्रत को बुलाया दिल्ली दफ्तर</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस में टूट के मामले और दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के नेताओं को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने बुधवार को टीएमसी के दोनों नेताओं ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी (बागी गुट) को पत्र लिखा है. इसमें 12 सितंबर को सुबह 11 बजे और 12 बजे (अलग-अलग समय पर) 5-5 सदस्यों के साथ आयोग के समक्ष पक्ष रखने की कहा है.&amp;nbsp;
केंद्रीय चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को लिखे लेटर में कहा, &#039;आयोग ने पश्चिम बंगाल, मेघालय, और त्रिपुरा में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा के लिए पांच सदस्यी प्रतिनिधिमंडल के साथ मीटिंग करने का फैसला लिया है. यह मीटिंग 12 सितंबर को सुबह 11 बजे दिल्ली के द्वारका स्थित IIIDEM में होगी.&#039;&amp;nbsp;
इसके अलावा चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को भी उसी दिन दोपहर 12 बजे दिल्ली में मीटिंग के लिए समय दिया है.&amp;nbsp;
नंदीग्राम और रेजीनगर में होना है उपचुनाव
इधर, पूरा मामला नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से जुड़ा है. यह चुनाव टीएमसी के भविष्य को तय कर सकता है. माना जा रहा है कि इससे उनके चुनाव चिन्ह पर भी असर पड़ सकता है. आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामांकन की तारीख 16 सितंबर तय है. ऐसे में चुनाव आयोग के पास इस विवाद को सुलझाने के लिए काफी कम समय है. आयोग ने अभी टीएमसी का चुनाव चिन्ह और नाम फ्रीज नहीं किया है.&amp;nbsp;
इस पूरे मामले पर बागी टीएमसी के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो बागी गुट उनके खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा. वहीं, चुनाव चिन्ह के बारे में दत्ता ने कहा, &#039;पार्टी को भारत निर्वाचन आयोग से चुनाव चिन्ह मिलने का भरोसा है. उसने सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है.&#039;&amp;nbsp;
महाराष्ट्र के मामले में ले चुकी EC ये फैसला
इससे पहले इसी तरह के महाराष्ट्र से जुड़े एक मामले में साल 2022 में अंधेरी ईस्ट उपचुनाव से पहले आयोग ने पार्टी के असली नाम और धनुष बाण चिन्ह दोनों को ही फ्रीज कर दिया था. तब आयोग की तरफ से दोनों गुटों को अस्थायी और अलग-अलग नाम और अंतरिम चिन्ह दिए थे. इसके अलावा साल 2023 और 2024 के एनसीपी से जुड़े मामले में ईसी ने तुरंत फ्रीज करने से परहेज किया था. बाद के अहम चुनावों से पहले गुटों को अलग-अलग नाम और चिन्ह के तहत चुनाव लड़ने का विकल्प दिया था. इधर, टीएमसी का मामला अदालत में है. ऐसे में अब देखना ये है कि क्या चुनाव आयोग नामांकन बंद होने से पहले टीएमसी के नाम और चिन्ह को फ्रीज करेगा, या अस्थायी पहचान देगा. या फिर अदालत के आदेश का इंतजार करेगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>गांधीनगर में बड़ा हादसा, इमारत का एक हिस्सा ढहा, 10&amp;12 लोगों के फंसने की आशंका</title>
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        <description><![CDATA[ गुजरात के गांधीनगर के कुडासन इलाके में बन रही एक इमारत अचानक ढह गई, जिसमें कई लोगों फंसे हुए हैं. गांधीनगर फायर ऑफिस के राजेश पटेल ने बताया कि दमकल विभाग की टीमें अभी मौके पर बचाव कार्य में जुटी हुई है. इसमें 10-12 मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. डिप्टी सीएम हर्ष सांघवी घटनस्थल पर पहुंचे हैं. इस दौरान वह हालात का जायजा लेने फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर चढ़ गए.&amp;nbsp;
कई मजदूरों के अंदर दबे होने की आशंका
यह हादसा रात 9:15 बजे के पास हुआ. &#039;बॉस्की द एम्पायर&#039; नाम के एक निर्माणाधीन कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लोहे का एक भारी स्लैब अचानक ढह गया. इससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और कई मजदूरों के लोहे और मलबे के नीचे दबे होने की आशंका जताई जा रही है. गांधीनगर फायर ब्रिगेड की 5 से ज्यादा गाड़ियां और विशेष रेस्क्यू टीमें मौके पर मौजूद हैं. लोहे के भारी ढांचे और कंक्रीट को हटाकर फंसे हुए लोगों तक पहुंचने का काम तेजी से किया जा रहा है.

#WATCH | Gujarat | Visuals from the Kudasan area of ​​Gandhinagar where a portion of an under-construction building collapsed. Rescue operations are underway at the site. More details awaited pic.twitter.com/l8cAorX9g8
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 9, 2026



कई घायलों को अस्पताल ले जाया गया
इस कॉम्प्लेक्स में दो यूनिटों के बीच बनाया जा रहा लोहे का स्ट्रक्चर तेज आवाज के साथ अचानक गिर गया. चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के वक्त मौके पर करीब 10 मजदूर काम कर रहे थे. धमाके जैसी आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत टीमों के आने से पहले ही लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी. घायलों को तुरंत इलाज देने और अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की कई गाड़ियां तैनात की गई हैं. कुछ घायलों को अस्पताल भेजा गया है.

Gandhinagar, Gujarat: A wall collapsed in Kudasan leaving around 10 people feared injured. The injured were admitted to Gandhinagar Civil Hospital for treatment,An Ambulance staff says, &quot;Eleven people have been transported... There were perhaps two women and the remaining nine&amp;hellip; pic.twitter.com/X0xckvQ0iy
&amp;mdash; IANS (@ians_india) September 9, 2026



एम्बुलेंस के एक कर्मचारी ने बताया, &#039;11 लोगों को अस्पताल ले जाया गया है. इनमें शायद दो महिलाएं और बाकी 9 पुरुष थे, कोई बच्चा नहीं था. वे सभी यहां काम करने वाले मजदूर थे.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गांधीनगर, में, बड़ा, हादसा, इमारत, का, एक, हिस्सा, ढहा, 10-12, लोगों, के, फंसने, की, आशंका</media:keywords>
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        <title>विधानसभा अध्यक्ष संग दुर्व्यवहार पर भड़के रेवंत रेड्डी, विधायकों को दी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बुधवार (9 सितंबर, 2026) को 6 सितंबर को हुई हिंसा से जुड़े विधानसभा अध्यक्ष जी. प्रसाद कुमार के कथित दुर्व्यवहार, बीआरएस विधायकों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प और अन्य घटनाओं की व्यापक जांच के आदेश जारी किए हैं. उन्होंने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इन घटनाओं के लिए जो भी लोग जिम्मेदार होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
इसके साथ ही, उन लोगों पर भी कार्रवाई होगी, जिन्होंने कथित तौर पर इन घटनाओं की साजिश रची, उन्हें समर्थन दिया या उन्हें अंजाम देने में मदद की. सीएम रेड्डी ने कहा कि जहां भी जरूरी होगा, संबंधित लोगों के पद या राजनीतिक ओहदे की परवाह किए बिना उनके खिलाफ जिन भी कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज हो सकेंगे, वो किए जाएंगे, इसमें SC/ST एक्ट भी शामिल है.
जमानत लेने वाले जनता के सवालों से नहीं बचेंगे- रेवंत&amp;nbsp;

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने कथित दुर्व्यवहार की घटना के बाद विधानसभा अध्यक्ष के प्रति एकजुटता जताई और उनसे अपने संवैधानिक दायित्वों का पूरी तरह से निर्वहन करते हुए मजबूती से काम करते रहने की भी अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करके जमानत लेने की कोशिश करने वाले लोग भी जनता के सवालों से नहीं बच पाएंगे.&amp;nbsp;
कांग्रेस अध्यक्ष से जुड़े शुद्धिकरण मुद्दे पर बोले सीएम
इस दौरान मुख्यमंत्री रेड्डी ने बीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों को दलित नेताओं और विधानसभा अध्यक्ष को निशाना बनाने के लिए उकसाया था. इसके साथ ही, रेवंत रेड्डी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े शुद्धिकरण विवाद की भी निंदा की.
विधानसभा अध्यक्ष के साथ दुर्व्यवहार राज्य की जनता का अपमान- रेवंत
उन्होंने तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष के दुर्व्यवहार को राज्य की जनता का अपमान बताया और आरोप लगाया कि बीआरएस के विधायकों ने एक दलित संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज में व्याप्त मनुवादी मानसिकता से सख्ती कार्रवाइयों के जरिए निपटेगी और यह आश्वासन भी दिया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवई की जाएगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः टैक्स चोरी-काले धन पर कांग्रेस का केंद्र और BJP पर हमला, जानें क्या कहा? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>विधानसभा, अध्यक्ष, संग, दुर्व्यवहार, पर, भड़के, रेवंत, रेड्डी, विधायकों, को, दी, चेतावनी</media:keywords>
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        <title>रेड फोर्ट ब्लास्टः NIA चार्जशीट में ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ का जिक्र, जानें क्या है?</title>
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        <description><![CDATA[ लाल किला ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं. जांच एजेंसी ने &amp;lsquo;लोन मुजाहिद पॉकेट बुक (Lone Mujahid Pocket Book)&amp;rsquo; और &amp;lsquo;How to Become an Assassin&amp;rsquo; जैसे कथित मैनुअल का जिक्र करते हुए दावा किया है कि आरोपियों के पास मौजूद सामग्री सामान्य धार्मिक या शैक्षणिक साहित्य नहीं थी, बल्कि हिंसक और गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली ट्रेनिंग सामग्री थी.
NIA के मुताबिक, इन दस्तावेजों में अकेले हमला करने वाले आतंकी के लिए कई तरह की जानकारी दी गई थी. एजेंसी का आरोप है कि आरोपी इस सामग्री के संपर्क में थे और कथित आतंकी गतिविधियों की तैयारी में इसका इस्तेमाल कर रहे थे.
एनआईए ने पॉकेट बुक को लेकर क्या कहा?
चार्जशीट में लोन मुजाहिद पॉकेट बुक को इंस्पायर मैगजीन (Inspire Magazine) में प्रकाशित सामग्री से जुड़ा बताया गया है. NIA के मुताबिक, इंस्पायर मैगजीन का संबंध अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला यानी AQAP के मीडिया नेटवर्क से रहा है.
जांच एजेंसी का दावा है कि इस सामग्री में अकेले काम करने वाले हमलावरों को ध्यान में रखकर ऑपरेशन और सुरक्षा से बचने जैसे विषयों पर जानकारी दी गई थी. चार्जशीट में हथियारों, गुप्त गतिविधियों, निगरानी से बचने और हमले की रणनीति जैसे विषयों का भी उल्लेख किया गया है.
चार्जशीट में किन-किन चीजों का जिक्र?&amp;nbsp;
NIA ने चार्जशीट में विस्फोटक और IED से जुड़ी गतिविधियों को भी जांच का अहम हिस्सा बताया है. एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने विस्फोटक तैयार करने और IED बनाने से जुड़ी जानकारी हासिल की थी. चार्जशीट में TATP जैसे बेहद संवेदनशील विस्फोटक का भी उल्लेख किया गया है. NIA का दावा है कि आरोपियों के पास मौजूद सामग्री में विस्फोटकों से संबंधित जानकारी मिली थी और ये कथित तौर पर उनकी गतिविधियों से जुड़ी हुई थी.
जांच के दौरान आरोपियों के बीच बातचीत के लिए सिग्नल ऐप के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है. चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी इरफान अहमद सिग्नल पर Rauldatta नाम से संपर्क करता था.
आरोपियों के पास से कौन से दस्तावेज बरामद?
NIA ने आरोपियों के पास से कई ऐसे दस्तावेज मिलने का भी दावा किया है, जिनमें जिहाद और हिंसक गतिविधियों के समर्थन से जुड़ी विचारधारा का प्रचार किया गया था, इनमें &amp;lsquo;Definition of Jihad&amp;rsquo;, &amp;lsquo;Requirements of Jihad&amp;rsquo; और &amp;lsquo;21 Aims and Objectives of Jihad&amp;rsquo; जैसे दस्तावेज शामिल बताए गए हैं. चार्जशीट में &amp;lsquo;How to Become an Assassin &amp;ndash; The Propagation&amp;rsquo; नाम के कथित मैनुअल का भी उल्लेख है.&amp;nbsp;

दस्तावेजों में किन बातों के बारे में बताया गया?
NIA के मुताबिक, इसमें लड़ाई, हथियारों के इस्तेमाल, गुप्त गतिविधियों, निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों से बचने और अन्य ऑपरेशनल गतिविधियों से जुड़ी सामग्री थी. जांच एजेंसी का कहना है कि इस दस्तावेज को सिर्फ पढ़ने की सामग्री नहीं माना जा सकता. उसके मुताबिक, इसे इस तरह तैयार किया गया था कि अलग-अलग तरह की हिंसक और गुप्त गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण जैसी जानकारी मिल सके.
NIA ने चार्जशीट में घटनास्थल से मिले सामान यानी Scene of Crime की फॉरेंसिक और बायोलॉजिकल जांच को भी अहम सबूत बताया है. एजेंसी के मुताबिक, लाल किले के पास हुए विस्फोट में कई लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए. धमाके में वाहनों के अलावा, पुलिस पोस्ट और आसपास की संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा.
चार्जशीट में सबूतों के तीन आधार क्या?
चार्जशीट को देखें, तो NIA ने अपना मामला मुख्य रूप से तीन तरह के सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाया हैः

आरोपियों के पास से मिली आपत्तिजनक सामग्री और दस्तावेज
विस्फोटक और IED से जुड़ी कथित गतिविधियों के सबूत
घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य

एनआईए की जांच में क्या-क्या पता चला?
जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी कड़ियों को एक साथ देखने पर आरोपियों की कथित भूमिका सामने आती है. जांच के दौरान NIA ने कुछ आरोपियों का फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट और वॉयस लेयरिंग टेस्ट भी कराया. एजेंसी के मुताबिक, ये परीक्षण नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद से किए गए.
जिन आरोपियों के इन परीक्षणों से गुजरने की बात चार्जशीट में कही गई है, उनमें जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल शकील, आदिल अहमद राथर, शाहीन सईद, इरफान अहमद वागे, सोयाब और बिलाल नासिर शामिल है. NIA का आरोप है कि पूछताछ के दौरान इन आरोपियों ने मामले से जुड़ी वास्तविक जानकारी छिपाने की कोशिश की और जांचकर्ताओं को गुमराह करने वाले जवाब दिए. एजेंसी का दावा है कि पूछताछ और फॉरेंसिक परीक्षणों से उनकी कथित भूमिका के संकेत मिले.
NIA का दावा- महज किताबें नहीं, साजिश की कड़ी
चार्जशीट में NIA ने इन दस्तावेजों को सिर्फ धार्मिक या अकादमिक सामग्री मानने से इनकार किया है. जांच एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजों में अलग-अलग तरह की ऐसी जानकारी थी, जिसका इस्तेमाल गुप्त अभियानों और हिंसक गतिविधियों में किया जा सकता था. NIA ने इन सामग्रियों को रेड फोर्ट ब्लास्ट की कथित साजिश और आरोपियों की गतिविधियों से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण जांच साक्ष्य के तौर पर चार्जशीट में शामिल किया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रेड, फोर्ट, ब्लास्टः, NIA, चार्जशीट, में, ‘लोन, मुजाहिद, पॉकेट, बुक’, का, जिक्र, जानें, क्या, है</media:keywords>
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        <title>PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल, नितिन नवीन ने कहा&amp; 2 अक्टूबर को...</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर कहा कि अगले महीने हम &#039;सेवा संकल्प अभियान&#039; आयोजित कर रहे हैं. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार (9 सितंबर) को कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक इसका आयोजन किया जाएगा. उन्होंने इस दौरान पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने देश में कई बड़े काम किए, जो कि सालों से अटके थे.
नितिन नवीन ने कहा, &#039;7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री के जनसेवा और समर्पण के 25 साल पूरा होने वाले हैं. पिछले 25 वर्षों में जनसेवा से राष्ट्र सेवा के मंत्र को पकड़ते हुए जनसेवा के कार्य को जारी रखा हुआ है. प्रधानमंत्री जी के मन में जो ध्येय वाक्य रहे उनको पूरा करने का काम किया.&#039;
पीएम मोदी ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाला - नितिन नवीन
उन्होंने कहा, &#039;25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना हो, कोविड की फ्री वैक्सीन, फ्री राशन देने का काम प्रधानमंत्री ने किया है. उनका सफर साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ और देश के प्रधान सेवक के रूप में जो काम को आगे बढ़ाया वो उनके दृढ़ संकल्प के के चलते हुआ. जब उनको नेतृत्व संभाला तब अर्थव्यवस्था फ्रेजाइल फाइव में थी. आज सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था हमारे देश की है.&#039;

#WATCH | सेवा संकल्प अभियान... बीजेपी का प्लान@romanaisarkhan | https://t.co/SMm0dUypVm #BJP #NitinNabin #PressConference #PMModi #ABPNews pic.twitter.com/pti61wMC2y
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) September 9, 2026



भाजपा अध्यक्ष ने कहा, &#039;देशों ने प्रधानमंत्री को सम्मान दिया वो देश की 140 करोड़ जनता का सम्मान है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बाहरी और आंतरिक सुरक्षा देने का काम किया. नक्सलवाद को समाप्त किया. विकास ही नहीं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भी मजबूत किया. राम मंदिर हो या &amp;nbsp;काशी विश्वनाथ, महाकाल कॉरिडोर इन सब विरासतों को सृजित करने का काम किया. युवाओं में जो निराशा का भाव था &amp;nbsp;उनमें आशा का संचार करने का काम किया. स्टार्ट अप के जरिए रोजगार देने वाला बनाया. गुजरात मॉडल सभी राज्यो के लिए मॉडल बना.&#039;
2 अक्टूबर को रखा जाएगा स्वच्छता अभियान
उन्होंने पीएम मोदी को लेकर कहा, ज्ञान( गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) इनको आगे रखकर काम किया. 25 साल कार्यकाल बेदाग रहा. इस संदेश को जन जन तक पहुंचाना हमारा काम है. 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाएंगे. 17 सितंबर को सेवा दिवस के रूप में मनाते है, इस बार भी मनाएंगे. रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे. जो काम प्रधानमंत्री ने किए उनके प्रति आभार व्यक्त किया जायेगा. लाभार्थियों द्वारा दीप जलाए जायेंगे. 2 अक्टूबर को स्वच्छता अभियान रखा जाएगा.
अपडेट जारी है...
यह भी पढ़ें : वंदे मातरम: फारूक अब्दुल्ला ने गाया पूरा, कांग्रेस ने टोका तो BJP भड़की ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आतंकी मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बोला झूठ, अब अफगानिस्तान ने खोली पोल</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल आतंकी मसूद अजहर पर पाकिस्तान के झूठ को अफगानिस्तान ने बेनकाब कर दिया है. अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अजहर अफगानिस्तान में नहीं है. पाकिस्तान ने बार बार दावा किया है कि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का संस्थापक मसूद अजहर अफगानिस्तान से अपनी गतिविधियां चला रहा है.&amp;nbsp;
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अफगानिस्तान ने दोहराया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं किया जाएगा. इस्लामाबाद लंबे समय से कहता रहा है कि अजहर अफगानिस्तान भाग गया था.&amp;nbsp;
पाकिस्तान क्यों बोलता है झूठ?
अफगानिस्तान का बयान ऐसे समय में आया है जब पेरिस स्थित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) अपनी आगामी बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद-रोधी प्रयासों की समीक्षा करने वाली है. पाकिस्तान पर दबाव है कि वह आतंकी समूहों और उनके नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे.&amp;nbsp;
मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में कमियों और टेरर फंडिंग को रोकने में विफलता के कारण पाकिस्तान को 2018 और 2022 के बीच FATF की &#039;ग्रे लिस्ट&#039; में रखा गया था. ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए, पाकिस्तान को कई कदम उठाने हैं. जिनमें JeM और LeT और उनके सहयोगी संगठनों पर प्रतिबंध लगाना और इन संगठनों के नेताओं को दोषी ठहराना शामिल है.
भारत का मोस्ट वांटेड मसूद अजहर
2022 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने की इजाज़त इस शर्त पर दी गई थी कि APG (मनी लॉन्ड्रिंग पर एशिया/पैसिफिक ग्रुप) कुछ खास मुद्दों पर उसकी कोशिशों और परफॉर्मेंस की समीक्षा करता रहेगा. FATF के कहने पर APG जिन मुद्दों पर पाकिस्तान की समीक्षा कर रहा था, उनमें से एक मुद्दा अजहर को गिरफ्तार करने की उसकी कोशिशें थीं.
मसूद अजहर ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है. इनमें 2001 में संसद पर हमला, 2008 में मुंबई हमले, 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमला और 2019 में पुलवामा बम धमाका शामिल हैं. भारत लगातार दुनिया से इसपर एक्शन की मांग करता रहा है. मई 2019 में UN सिक्योरिटी काउंसिल ने मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया था. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;पंजाब में ड्रग्स माफिया सरकार चला रहे&amp;apos;, दलित की मौत पर राहुल का भगवंत मान पर तंज</title>
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        <description><![CDATA[ पंजाब में बढ़ते नशे को लेकर लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सूबे की आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरा है. उन्होंने कांग्रेस के सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो को रि-पोस्ट करते हुए कहा कि पंजाब की AAP सरकार में एक खतरनाक पैटर्न दिख रहा है. सरकारी नाकामी पर सवाल करोगे, तो जवाब धमकी और टॉर्चर से मिलेगा.
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अपने बेटे को नशे का शिकार बनते देखने वाले, दलित समुदाय से आने वाले गुलजार सिंह ने जब पंजाब के वित्त मंत्री से सिर्फ इतना पूछा कि सरकार ड्रग्स का कारोबार रोकने में इतनी बुरी तरह नाकाम क्यों है? तो बस इस बात पर उन्हें इतना प्रताड़ित और अपमानित किया गया, माफी मांगने के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उन्होंने जहर खा लिया.
राहुल गांधी ने क्या कहाराहुल गांधी ने आगे कहा कि एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकते हुए इलाज के अभाव में आखिरकार वो ज़िंदगी की जंग हार गए. इसके अलावा राहुल गांधी ने ये भी बताया कि पिछले हफ्ते मैंने एक युवा मोहनजीत सिंह से भी बात की, जिन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ प्रदर्शन करने पर प्रताड़ित किया गया.

पंजाब की AAP सरकार में एक खतरनाक पैटर्न दिख रहा है - सरकारी नाकामी पर सवाल करोगे, तो जवाब धमकी और torture से मिलेगा।अपने बेटे को नशे का शिकार बनते देखने वाले, दलित समुदाय से आने वाले गुलज़ार सिंह जी ने वित्त मंत्री से सिर्फ़ इतना पूछा कि सरकार ड्रग्स का कारोबार रोकने में इतनी&amp;hellip; https://t.co/umImJz7GFm
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 9, 2026



नेता विपक्ष ने साफ किया कि सरकार का काम जनता को जवाब देना है, सवाल पूछने वालों को कुचलना नहीं. उन्होंने आगे कहा कि गुलजार सिंह के परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले. मुख्यमंत्री मान तत्काल वित्त मंत्री का इस्तीफा लें और सुनिश्चित करें कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो, जिसकी FIR में उनका नाम दर्ज किया जाए.
&#039;पंजाब को नशे के दलदल में धकेला&#039;कांग्रेस ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा कि पंजाब में गुलजार सिंह ने AAP सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा से नशे पर सवाल पूछा तो उन्हें डराया-धमकाया गया. उन पर इतना दबाव डाला गया कि उन्होंने अपनी जान दे दी. गुलजार ने AAP सरकार के मंत्री को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है.
पोस्ट में आगे कहा गया कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब को नशे के दलदल में धकेल दिया है. ड्रग्स माफिया सरकार चला रहे हैं और उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों को इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वो जान देने को मजबूर हो जाते हैं. इस अपराध के लिए पंजाब की जनता आम आदमी पार्टी को कभी माफ नहीं करेगी.&amp;nbsp;ये भी पढ़ें
राहुल गांधी को हाई कोर्ट से झटका, PM मोदी के खिलाफ टिप्पणी से जुड़ा है केस ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कोलकाता में 40 रेस्टोरेंट पर गिरी गाज! खराब खाने की शिकायत के बाद एक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ लकाता जैसे शहर में जहां बाहर खाना लोगों की जीवनशैली का अहम हिस्सा है, वहां फूड सेफ्टी को लेकर हुई एक बड़ी कार्रवाई ने लोगों को अगली बार बाहर खाना खाने से पहले सोचने पर मजबूर कर दिया है. कोलकाता नगर निगम (KMC) ने एक सप्ताह तक चले फूड सेफ्टी अभियान के दौरान करीब 40 रेस्टोरेंट, खानपान प्रतिष्ठानों और मिठाई की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की है. जांच में साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों के रखरखाव और अन्य खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़े उल्लंघन सामने आए. कार्रवाई की जद में नाजिम्स, करीम्स, शिमला बिरयानी और अरसलान के एक आउटलेट जैसे कई चर्चित नाम भी शामिल हैं.
यह कार्रवाई राज्य में चलाए गए स्पेशल फूड सेफ्टी वीक के तहत की गई. इस दौरान नगर निगम और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने रेस्टोरेंट की रसोई, खाद्य भंडारण वाले स्थानों, इस्तेमाल की जा रही सामग्री और लाइसेंस की जांच की. अधिकारियों का मकसद केवल ग्राहक की प्लेट तक पहुंचने वाले खाने की जांच करना नहीं था, बल्कि यह देखना भी था कि खाना तैयार होने से पहले उसे किस तरह रखा और संभाला जा रहा है.
रेस्टोरेंट, होटल, क्लब और बाजारों तक पहुंची जांच
KMC कमिश्नर स्मिता पांडे के मुताबिक अभियान के तहत शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े लगभग सभी क्षेत्रों को कवर किया गया. इनमें होटल, क्लब, रेस्टोरेंट, बाजार और बाजारों के अन्य खाद्य प्रतिष्ठान शामिल थे. स्मिता पांडे ने कहा, &amp;ldquo;हमने लोगों को खाना उपलब्ध कराने वाले लगभग सभी क्षेत्रों को कवर किया, जिसमें होटल, क्लब, रेस्टोरेंट, बाजार और बाजार क्षेत्र शामिल हैं.&amp;rdquo;
एक्सपायर्ड सामान से लेकर गंदे किचन तक मिली गड़बड़ियां
अधिकारियों के मुताबिक जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों में एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली. इसके अलावा रसोई में साफ-सफाई की खराब स्थिति, खाद्य पदार्थों के गलत तरीके से रखे जाने, कीड़े-मकौड़ों से जुड़ी समस्याएं और एक ही खाना पकाने वाले तेल को बार-बार इस्तेमाल करने जैसी गड़बड़ियां भी सामने आईं.
कुछ प्रतिष्ठानों में सड़ा हुआ खाना भी मिला. मिठाई की दुकानों की स्थिति ने खास तौर पर नगर निगम के अधिकारियों को चौंकाया. KMC कमिश्नर स्मिता पांडे ने कहा कि कई मिठाई की दुकानों में स्वच्छता के मानकों में सुधार की जरूरत है. उन्होंने यह भी बताया कि बंगाल की मिठाइयां राज्य की खाद्य संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
रिटेल लाइसेंस था, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नहीं
जांच के दौरान कुछ ऐसे प्रतिष्ठान भी मिले, जिनके पास रिटेल लाइसेंस तो था, लेकिन जरूरी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नहीं था. यानी वे खाद्य सामग्री बेचने के लिए अधिकृत थे, लेकिन उसके निर्माण से जुड़े जरूरी लाइसेंस उनके पास नहीं थे. पूरे अभियान के तहत KMC अधिकारियों ने 1,224 किलो ऐसा खाना भी नष्ट कर दिया, जिसे अस्वच्छ और खाने के लिए अनुपयुक्त माना गया. नष्ट किए गए खाद्य स्टॉक में मांस और सीफूड की मात्रा काफी थी. जांच के दायरे में हॉग मार्केट, मणिकतला, पाटीपुकुर फिश मार्केट और टेंगरा जैसे प्रमुख बाजार भी शामिल रहे.
नाजिम्स, करीम्स और शिमला बिरयानी समेत कई नाम कार्रवाई की सूची में
खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई का सामना करने वाले प्रतिष्ठानों में कोलकाता के कई चर्चित नाम शामिल हैं. काठी रोल के लिए मशहूर नाजिम्स का नाम भी इस सूची में है. इसके अलावा रिपन स्ट्रीट स्थित करीम्स, ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाईपास स्थित शिमला बिरयानी और नागेरबाजार स्थित अरसलान का एक आउटलेट भी कार्रवाई की जद में आया है. इनके अलावा डॉन जियोवानी, बलराम मलिक एंड राधारमण मलिक, श्री हरि, बिग बॉस और करी पत्ता समेत अन्य प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की गई है.
नगर निगम ने दूसरे कई प्रतिष्ठानों को अलग-अलग तरह के नोटिस भी जारी किए हैं. करीब 89 प्रतिष्ठानों को शो-कॉज या रिफ्रेन नोटिस मिले हैं, जबकि 112 प्रतिष्ठानों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की धारा 38 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं.
क्या दोबारा खुल सकेंगे ये रेस्टोरेंट?
कार्रवाई का मतलब यह जरूरी नहीं है कि इन प्रतिष्ठानों को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है. जिन प्रतिष्ठानों पर निलंबन की कार्रवाई हुई है, उन्हें जांच के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने और जरूरी खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों को पूरा करने के बाद दोबारा खोलने की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा.
KMC ने प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है. इसका मतलब है कि अगर संबंधित प्रतिष्ठान जरूरी सुधार कर लेते हैं और आवश्यक मंजूरियां हासिल कर लेते हैं तो वे त्योहारी सीजन से पहले भी दोबारा कारोबार शुरू कर सकते हैं. इस कार्रवाई का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्टूबर में दुर्गा पूजा आने वाली है. यह कोलकाता का सबसे व्यस्त त्योहारी समय होता है और इस दौरान रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों तथा अन्य खाद्य कारोबारों में ग्राहकों की संख्या काफी बढ़ जाती है.
सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं था अभियान
कोलकाता में हुई यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल में चलाए जा रहे व्यापक फूड सेफ्टी अभियान का हिस्सा है. राज्य के स्पेशल फूड सेफ्टी वीक के शुरुआती दो दिनों में ही अधिकारियों ने 1,730 फूड बिजनेस ऑपरेटरों का निरीक्षण किया. इनमें से 1,525 प्रतिष्ठानों में बड़ी अनियमितताएं सामने आईं, जबकि 1,517 मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई की सलाह दी गई. अधिकारियों ने लैब जांच के लिए 901 खाद्य नमूने भी एकत्र किए. अभियान के शुरुआती चरण में 11 प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई गई, जबकि पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित या रद्द किए गए. इसके अलावा 13 परिसरों को बंद या सील किया गया.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कोलकाता, में, रेस्टोरेंट, पर, गिरी, गाज, खराब, खाने, की, शिकायत, के, बाद, एक्शन</media:keywords>
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        <title>CJP प्रोटेस्ट: नोटिस पर CJI नाराज, पूछा&amp; &amp;apos;मजिस्ट्रेट कैसे जारी कर सकते हैं&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के मामले में ग्रेटर नोएडा के मजिस्ट्रेट की तरफ से एक छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है.
एक वकील ने बुधवार को सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष&amp;nbsp;बताया कि यह नोटिस पुलिस के अनुरोध पर जारी हुआ था. हालांकि, अब नोटिस को वापस ले लिया गया है, लेकिन इसका जारी होना साफ तौर पर छात्रों को डराने की कोशिश थी. यह 1 सितंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ था जिसमें छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर में आगे की कार्रवाई रोकी गई थी.
मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण की मांग
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. उन्हें बताने दीजिए कि ऐसा क्यों किया गया. सीजेआई ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टि वी. मोहना भी शामिल थे.
सीजेआई ने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;हमें हैरानी है कि मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि हमने पहले ही किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है. यह बिल्कुल स्पष्ट आदेश था.&amp;rsquo;&amp;rsquo;&amp;nbsp;
क्या मामला है?अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था. नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था. बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया.&amp;nbsp;
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को स्पेशल पावर वाले अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए सभी एफआईआर पर रोक लगा दी थी. इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट से स्पेशल पावर का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया था. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>राजपाल यादव चेक बाउंस केस में सुप्रीम कोर्ट का आया फैसला, दी बड़ी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ बॉलीवुड अभिनेता राजपाल नवरंग यादव को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण कर जेल जाने से अंतरिम छूट दी है. हालांकि, यह राहत एक शर्त के साथ मिली है. कोर्ट ने राजपाल को बुधवार तक अपनी रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने राजपाल यादव की याचिका नोटिस भी जारी किया है. अभिनेता ने दिल्ली हाई कोर्ट के 10 जुलाई 2026 के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी सजा को बरकरार रखा गया था.
क्या है मामला?
पूरा विवाद 2010 का है. फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी फिल्म निर्माण कंपनी को लगभग 5 करोड़ रुपये दिए थे. फिल्म की रिलीज में देरी के बाद रकम लौटाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई समझौते हुए.
बाद में कंपनी को दिए गए सात चेक बैंक में बाउंस हो गए. इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत सात अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं.
हाई कोर्ट ने भी माना दोषी
ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में राजपाल यादव को सातों मामलों में दोषी ठहराया. 2024 में सेशन कोर्ट ने भी सजा बरकरार रखी. उन्हें तीन महीने की जेल और प्रत्येक मामले में 1 करोड़ 35 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई. इस साल 10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा में दखल देने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट ने कहा कि राजपाल ने कई बार भुगतान का भरोसा दिया, लेकिन उसे पूरा नहीं किया.
&#039;मुश्किल समय में भारत पर भरोसा बढ़ा&#039;, ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में बोले PM मोदी
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में राजपाल यादव की ओर से कहा गया है कि अप्रैल 2013 में दोनों पक्षों के बीच करीब 10 करोड़ 40 लाख रुपये का समझौता हो गया था. उस समझौते के बाद पुराने चेकों से जुड़ी शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं. मंगलवार को अभिनेता के वकील की बातें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को अगली सुनवाई की बात कही. फिलहाल 5 करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त पूरी करने पर राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक जेल जाने से अंतरिम राहत मिली रहेगी.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>राजपाल, यादव, चेक, बाउंस, केस, में, सुप्रीम, कोर्ट, का, आया, फैसला, दी, बड़ी, राहत</media:keywords>
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        <title>मणिपुरी म्यूजिशियन हत्याकांड: PC में भावुक पत्नी बोली, &amp;apos;हमें बदला नहीं...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ मणिपुर के म्यूजिशियन चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या मामले में उनकी पत्नी जोशना चोंगथम ने भावुक बयान जारी किया है. उन्होंने कहा कि वह बदला नहीं बल्कि न्याय चाहती हैं. चोंगथम ने कहा, &#039;मैं अभी भी अपने पति की मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही हूं. उनकी अचानक मौत ने ऐसा दुख दिया है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने आगे कहा, &#039; वह मेरे पति, मेरे बच्चे के पिता, एक बेटे और भाई, एक संगीतकार और मेरे परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के प्रिय व्यक्ति थे. इस कठिन समय में जिस तरह से परिवार, दोस्तों और देशभर के लोगों से मिले प्यार और सहानुभूति मिली है, उसके लिए हम तहे दिल से आभारी हैं. साथ ही दिल्ली पुलिस, नेताओं ने जिस तरह सहयोग दिया उसके लिए भी धन्यवाद देते हैं.&#039;
निष्पक्ष जांच की मांग की
चोंगथम ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस कठिन मय में उनके परिवार को शांति और एकांत में शोक मनाने दिया जाए. उन्होंने अधिकारियों से यह भी निवेदन किया कि मामले की जांच निष्पक्ष और न्यायपूर्ण की जाए और कानून के तहत सभी जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए. उन्होंने कहा कि हम बदला नहीं चाहते हैं, हम न्याय चाहते हैं.
&#039;दोबारा किसी के साथ ऐसा न हो&#039;
चोंगथम विक्रम सिंह को याद करते हुए उन्होंने कहा, &#039;उनका एक नाम था, एक परिवार था और एक ऐसा जीवन था, जिसका महत्व था. हम केवल यही निवेदन करते हैं कि उनकी स्मृति का सम्मान किया जाए. हमारे शोक को गरिमा दी जाए और न्याय मिले और दोबारा किसी और के परिवार के साथ ऐसा न हो.&#039;
स्टालिन के जबड़े पर CM विजय का इशारा? विवाद बढ़ने पर बोले - &#039;ये सब...&#039;
54 वर्षीय मणिपुरी संगीतकार की मौत सोमवार (7 सितंबर) सुबह किलोकरी गांव में उनके अपार्टमेंट के बाहर हुई. आरोप है कि जब उन्होंने बाहर शोर मचाने और शराब पीने पर आपत्ति जताई तो डिलीवरी वर्कर्स और ढाबा स्टाफ के एक समूह ने उन पर हमला कर दिया. पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है और एक नाबालिग को भी पकड़ा है.
राजपाल यादव चेक बाउंस केस में सुप्रीम कोर्ट का आया फैसला, दी बड़ी राहत
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मणिपुरी, म्यूजिशियन, हत्याकांड:, में, भावुक, पत्नी, बोली, हमें, बदला, नहीं...</media:keywords>
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        <title>TMC MP पर ED का शिकंजा! अखबार से जुड़े 60 करोड़ के लेनदेन की जांच तेज</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद नदिमुल हक से जुड़े एक उर्दू अखबार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में करीब 60 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आने का दावा किया गया है. एजेंसी ने इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक, कई लेनदेन के संबंध में तत्काल संतोषजनक दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका.
ED ने 7 सितंबर की सुबह कोलकाता समेत कई ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया था. कार्रवाई 24 घंटे से ज्यादा समय तक चली और मंगलवार तड़के पूरी हुई. इस दौरान सांसद नदिमुल हक से कोलकाता स्थित उनके आवास और कार्यालय में पूछताछ भी की गई. एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड खंगाले.
60 करोड़ के लेनदेन पर सवाल
जांच के दौरान करीब 60 करोड़ रुपये के लेनदेन में कथित विसंगतियां मिलने की बात सामने आई है. ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये रकम अखबार के नियमित कारोबारी लेनदेन का हिस्सा थी या इसके पीछे कोई अन्य वित्तीय गतिविधि थी. अधिकारियों के मुताबिक, जिन लेनदेन का संतोषजनक रिकॉर्ड नहीं मिला, उनकी विस्तृत जांच की जा रही है.
हवाला एंगल भी जांच के दायरे में
ED अब यह भी पता लगा रही है कि संदिग्ध लेनदेन में कहीं हवाला या किसी अन्य अनौपचारिक माध्यम का इस्तेमाल तो नहीं हुआ. एजेंसी रकम के स्रोत, लेनदेन करने वाली इकाइयों और संबंधित बैंक खातों की कड़ियां खंगाल रही है. जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
FIR के आधार पर शुरू हुई जांच
यह कार्रवाई उस मामले में की जा रही है जिसमें अखबार और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को आधार बनाकर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू की है. एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ धन के वास्तविक इस्तेमाल और उसके अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी है.
सांसद से पूछताछ, आगे भी बढ़ सकती है कार्रवाई
ED अधिकारियों ने तलाशी और पूछताछ के दौरान मिले रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है. जरूरत पड़ने पर मामले से जुड़े अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. हालांकि, 60 करोड़ रुपये के लेनदेन में कथित गड़बड़ी की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी. संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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    <item>
        <title>ओवैसी ने SIR पर उठाए सवाल, कहा &amp; &amp;apos;6 से ज्यादा बच्चों वाले वोटरों को...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ओवैसी-ने-sir-पर-उठाए-सवाल-कहा-6-से-ज्यादा-बच्चों-वाले-वोटरों-को</link>
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        <description><![CDATA[ हैदराबाद के सांसद और एमआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना में चल रहे एसआईआर को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने इस प्रक्रिया को दोषपूर्ण करार दिया है. साथ ही मांग करते हुए समय सीमा को 21 दिन से बढ़ाकर चार हफ्ते करने की मांग की है.&amp;nbsp;
ओवैसी ने कारवान विधानसभा इलाके में सात एसआईआर हियरिंग सेंटर्स का दौरा किया, इसके बाद उन्होंने भारी गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है. उन्होंने कहा है कि अकेले कारवान में 59470 गड़बड़ियां और 40,750 नो मैपिंग मामले पाए गए हैं. उन्होंने कहा है कि जीवित वोटरों को मृत दिखाया जा रहा है. जो लोग अभी भी उसी एड्रेस पर रह रहे हैं, उन्हें शिफ्टेड के तौर पर लिस्ट किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि असली वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर हो सकते हैं.
ओवैसी ने 6 से ज्यादा बच्चों वाले नियम पर जताई आपत्ति
इसके अलावा ओवैसी ने उस नियम की भी आलोचना की है, जिसमें 6 से ज्यादा बच्चों वाले वोटरों को नोटिस भेजे जा रहे है. इस एक बेहद ही अजीब मामला बताया है. उन्होंने कहा है कि बच्चों की संख्या सीमित करने वाला कोई कानून नहीं है. हियरिंग सेंटर्स पर ऐसे लोगों से कई शिकायतें मिल रही हैं. इन्हें इस आधार पर नोटिस मिले हैं, और वे इस तरह के मापदंड की कानूनी वैधता पर सवाल उठा रहे हैं.&amp;nbsp;
जीवित होने के बावजूद मृत घोषित किया: ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि कुछ वोटरों को जीवित होने के बावजूद वोटर रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है. उन्होंने इन गलतियों को परेशानी कहा है. साथ ही अधिकारियों से गड़बड़ियों को तुरंत ठीक करने की अपील की गई है. इसके अलावा जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं, उन वोटर्स से अपील करते हुए कहा है कि वह वेरिफिकेशन प्रोसेस को पूरा करने के लिए आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने तय एसआईआर हियरिंग सेंटर्स पर तुरंत जाएं.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि AIMIM ने हियरिंग सेंटर्स पर हेल्प डेस्क बनाए हैं, ताकि लोगों को नोटिस समझने और दस्तावेज तैयार करने में मदद मिल सके. &amp;nbsp;बता दें, हैदराबाद जिले में एसआईआर के तहत करीबन 6,72,700 वोटरों के मामले में गड़बड़ियां सामने आई है. इनमें 5,82,217 मामलों में नो मैपिंग की बात सामने आई है. वहीं पूरे जिले में 7.66 लाख से ज्यादा नोटिस अभी भी बांटे जाने बाकी है. अकेले कारवान में 1,00,223 नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें से 51,352 अभी भी नहीं बांटे जा सके हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पानी के लिए पाकिस्तान सेना के जवानों में जमकर मार&amp;कुटाई, वीडियो वायरल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पानी-के-लिए-पाकिस्तान-सेना-के-जवानों-में-जमकर-मार-कुटाई-वीडियो-वायरल</link>
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        <description><![CDATA[ पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के ऊपरी दक्षिण वजीरिस्तान जिले से सेना के जवानों के बीच मारपीट का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, आसमान मंजा इलाके में पानी भरने को लेकर पाकिस्तानी सेना के अलग-अलग दस्तों के जवानों और खुफिया विभाग से जुड़े अधिकारियों के बीच विवाद हो गया. देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया.
बताया जा रहा है कि यह घटना आसमान मंज़ा ब्रिगेड के सरकारी मुख्यालय के पास हुई. यहां तैनात एसएसजी के जवान, फ्रंटियर कोर के जवान और सादे कपड़ों में मौजूद खुफिया विभाग के अधिकारियों के बीच पानी के टैंकर को लेकर विवाद शुरू हुआ था.
पानी के टैंकर को लेकर शुरू हुआ विवाद
आसमान मंज़ा इलाके में पानी की भारी कमी बताई जाती है. सैन्य और सरकारी प्रतिष्ठानों में भी पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भरता है. रिपोर्ट के अनुसार, जब पानी का टैंकर मुख्यालय पहुंचा तो सबसे पहले पानी भरने को लेकर एसएसजी जवानों और खुफिया विभाग के अधिकारियों के बीच बहस हुई. बहस बढ़ने के बाद दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई. कुछ ही देर में फ्रंटियर कोर के जवान भी इस विवाद में शामिल हो गए. इसके बाद मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही.

????INTERNAL COLLAPSE IN PAKISTAN ARMYElite SSG Commandos, Frontier Corps, and Intelligence officers engaged in a violent, multi-minute brawl inside the Asman Manza Brigade HQ in South Waziristan all over priority access to a daily water tanker.22 Personnel Injured: Fierce&amp;hellip; pic.twitter.com/lL7mcrRwpO
&amp;mdash; Shivank Mishra (@shivank_8mishra) September 8, 2026



वीडियो में लात-घूंसे चलाते दिखे जवान
घटना से जुड़ा एक वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है. वीडियो में वर्दी पहने जवानों और सादे कपड़ों में मौजूद लोगों के बीच मारपीट होती दिखाई देती है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लात और घूंसे चलाते नजर आ रहे हैं. बताया गया है कि झगड़ा केवल एक जगह तक सीमित नहीं रहा और मैदान से लेकर मुख्यालय के आसपास तक कुछ समय तक जारी रहा. इस कथित झड़प में करीब 22 जवानों के घायल होने की बात कही जा रही है. हालांकि, घायलों की स्थिति और घटना की पूरी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.
इलाके में पानी की गंभीर समस्या
ऊपरी दक्षिण वजीरिस्तान लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों में शामिल है. स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति के लिए टैंकरों का इस्तेमाल किया जाता है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जिले के बड़े हिस्से में नियमित जलापूर्ति की कमी के कारण लोगों को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसी पानी की कमी के बीच सरकारी और सुरक्षा प्रतिष्ठानों में भी टैंकर से आने वाले पानी को लेकर दबाव रहता है. ऐसे में पानी पहले भरने को लेकर हुआ विवाद गंभीर झड़प में बदलने की बात सामने आई है.
पाकिस्तानी सेना की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल इस घटना को लेकर पाकिस्तानी सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. इसलिए जवानों के घायल होने और झड़प की पूरी परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी को रिपोर्ट के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 01:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>सत्य निकेतन हादसा: 7 छात्रों की मौत के बाद जागा सिस्टम या अगली त्रासदी का इंतजार?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सत्य-निकेतन-हादसा-7-छात्रों-की-मौत-के-बाद-जागा-सिस्टम-या-अगली-त्रासदी-का-इंतजार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सत्य-निकेतन-हादसा-7-छात्रों-की-मौत-के-बाद-जागा-सिस्टम-या-अगली-त्रासदी-का-इंतजार</guid>
        <description><![CDATA[ दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को गिरी एक इमारत ने सिर्फ सात लोगों की जान नहीं ली, बल्कि राजधानी में चल रहे अवैध निर्माण और जर्जर पीजी सिस्टम की भयावह सच्चाई भी उजागर कर दी. इस हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी और दिल्ली सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं. कोर्ट जानना चाहता है कि आखिर ऐसे खतरनाक ढांचों को लेकर प्रशासन कब जागेगा, क्योंकि जिस इमारत ने सात लोगों को मौत के मुंह में धकेला, उसके आसपास आज भी कई ऐसी इमारतें खड़ी हैं जो कभी भी अगला हादसा बन सकती हैं.
हादसे वाली बिल्डिंग के ठीक बगल में स्थित 12 और 13 नंबर की इमारतों को भी एमसीडी ने खतरनाक माना है. दोनों को तीन दिन का नोटिस जारी किया गया है. फिलहाल इन्हें लोहे के गार्डरों के सहारे टिकाया गया है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन को इन इमारतों की वास्तविक स्थिति अब पता चली है? क्या सात लोगों की मौत के बाद ही सिस्टम की नींद खुली है?
नींद से कब जागेगा सिस्टम?
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस का प्रमुख छात्र केंद्र है. यहां श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज, राम लाल आनंद कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और आर्यभट्ट कॉलेज जैसे सात बड़े कॉलेज मौजूद हैं. लेकिन इन सात कॉलेजों में सिर्फ दो कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा है. वेंकटेश्वर कॉलेज में लगभग 175 सीटें हैं, जबकि मैत्रेयी कॉलेज में केवल 27 सीटें उपलब्ध हैं. ऐसे में हजारों छात्र मजबूरन निजी पीजी और हॉस्टलों में रहने को विवश हैं.
यही मजबूरी इलाके में पीजी कारोबार का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है. इलाके के कई मकान मालिक खुद कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं और अपने मकानों को पीजी में बदलकर मोटी कमाई कर रहे हैं. अनुमान है कि सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में 200 से ज्यादा पीजी और प्राइवेट हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, जिनमें करीब 8 से 10 हजार छात्र रहते हैं.
लेकिन इन छात्रों को जिन इमारतों में रखा जा रहा है, उनकी हालत बेहद चिंताजनक है. संकरी गलियां, बेतरतीब निर्माण, एक-दूसरे से सटी हुई इमारतें और सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी यहां आम बात है. जहां चार मंजिल की अनुमति है, वहां पांच और छह मंजिल तक निर्माण खड़ा कर दिया गया है. रिहायशी इलाकों को व्यावसायिक केंद्रों में बदल दिया गया है और नियम-कानून केवल कागजों तक सीमित नजर आते हैं.
दरअसल, यह सिर्फ सत्य निकेतन की कहानी नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है जहां हादसा होने तक सब कुछ चलता रहता है. फिर कोई इमारत गिरती है, कुछ लोगों की जान जाती है, कुछ अधिकारियों को निलंबित किया जाता है, कुछ नोटिस जारी होते हैं और फिर मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाता है.
हालांकि, इस बार दिल्ली सरकार ने कई सख्त कदमों की घोषणा की है. सरकार के मुताबिक, पांचवीं मंजिल वाले अवैध निर्माणों को तुरंत सील किया जाएगा. आसपास के पीजी और अन्य इमारतों की जांच होगी. सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों वाली इमारतों के लिए समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य करने की तैयारी की जा रही है. जर्जर इमारतों के मालिकों को उन्हें खुद गिराने का नोटिस दिया गया है, अन्यथा एमसीडी कार्रवाई कर खर्च की वसूली करेगी.
हादसे का कौन कसूरवार?
लेकिन इन घोषणाओं से उन परिवारों का दर्द कम नहीं होगा जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है. इस हादसे में जान गंवाने वालों में अधिकांश छात्र थे. मध्य प्रदेश के कटनी निवासी अक्षत यादव, देवास के अर्पित जाज, छत्तीसगढ़ के दुर्ग के युवराज सोनी, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के अभिषेक और औरैया के पवन अपने परिवारों के सपनों को पूरा करने के लिए दिल्ली आए थे. लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि जिस इमारत में वे रह रहे हैं, वही एक दिन उनकी मौत का कारण बन जाएगी.
अर्पित जाज दिल्ली यूनिवर्सिटी के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था. हादसे के बाद उसका दोस्त उसे ढूंढ़ते हुए अस्पताल पहुंचा, लेकिन परिवार के दिल्ली पहुंचने तक आशंका हकीकत में बदल चुकी थी. वहीं अक्षत यादव और युवराज सोनी जैसे छात्र भी मलबे में दबकर हमेशा के लिए अपने परिवारों से बिछड़ गए. युवराज हादसे के वक्त अपने दोस्त से फोन पर बात कर रहा था, लेकिन इमारत गिरने के साथ ही उसकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई.
आज इन परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है? बिल्डिंग मालिक, प्रशासन, एमसीडी या फिर वह पूरा सिस्टम जिसने वर्षों तक अवैध निर्माण को नजरअंदाज किया? दिल्ली में पिछले तीन वर्षों के दौरान इमारत गिरने की 1,133 घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें 98 लोगों की मौत हो चुकी है. ऐसे में सत्य निकेतन का हादसा कोई पहला मामला नहीं है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आखिरी होगा?
अगर सात छात्रों की मौत के बाद भी अवैध निर्माण, जर्जर इमारतों और नियमों की अनदेखी पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो यह मानने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि राजधानी अगली त्रासदी का इंतजार कर रही है. और तब फिर वही सवाल गूंजेगा-आखिर जिम्मेदार कौन है? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;साजिश हो रही कि...&amp;apos; EC के SIR की डेडलाइन बढ़ाने पर भड़के तेलंगाना CM</title>
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        <description><![CDATA[ तेलंगाना में एसआईआर की समय-सीमा बढ़ने का मुद्दा सियासी रंग लेता दिख रहा है. चुनाव आयोग के राज्य में एसआईआर के तहत दावों और आपत्तियों की समय सीमा बढ़ाने पर तेलंगाना सीएम ने सवाल खड़े करते हुए निशाना साधा है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के जरिए तेलंगाना में मतदाता सूची से एक करोड़ वोट हटाने की साजिश रची जा रही है.
पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव की श्रद्धांजलि सभा में बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण मतदाताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है. रेड्डी ने सवाल किया कि बीजेपी इस मुद्दे पर चुप क्यों है, आरोप लगाया कि बीजेपी उन्हीं तरीकों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है, जिनसे कथित तौर पर बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनावी गड़बड़ी हुई थी. मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि इन्हीं वोटों का इस्तेमाल 2029 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए किया जाएगा.
तेलंगाना सीएम ने लगाए ये आरोप
उन्होंने जनता से SIR प्रक्रिया को लेकर सतर्क और सावधान रहने की अपील की. रेड्डी ने बीजेपी पर SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल करके उन मतदाताओं को हटाने का आरोप भी लगाया जो बीजेपी का विरोध कर सकते हैं और इसे देश के लिए एक खतरनाक रणनीति बताया.
&#039;कौन है ये मूर्ख...&#039;, बाबा बागेश्वर के &#039;नॉनवेज&#039; वाले बयान पर भड़की CPM
9 नवंबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर तेलंगाना में मतदाता सूची के &#039;विशेष एकीकृत संशोधन&#039; (SIR) के तहत दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई करने की समय-सीमा 7 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दी है. अंतिम मतदाता सूची 9 नवंबर को प्रकाशित की जानी है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कम से कम तीन सप्ताह की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था. उन्होंने लगभग 92 लाख मतदाताओं को भेजे गए नोटिस और उनके जवाबों पर कार्रवाई करने की जरूरत का हवाला दिया था; नोटिस पाने वाले 47 लाख मतदाताओं में से अब तक केवल 9 लाख के ही जवाब मिले हैं.
सत्य निकेतन हादसा: 7 छात्रों की मौत के बाद जागा सिस्टम या अगली त्रासदी का इंतजार? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>विधानसभा में हंगामे के बीच CM विजय ने किया कुछ ऐसा, हर तरफ हो रही तारीफ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/विधानसभा-में-हंगामे-के-बीच-cm-विजय-ने-किया-कुछ-ऐसा-हर-तरफ-हो-रही-तारीफ</link>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार (7 सितंबर) को उस समय एक अनोखा नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विपक्षी पार्टी DMK के एक सीनियर विधायक की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.&amp;nbsp;
विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के भाषण का जवाब देने के लिए डीएमके के विधायक बोलने का मौका मांग रहे थे. जब स्पीकर ने उन्हें अनुमति नहीं दी, तो नाराज डीएमके विधायकों ने सदन से वॉकआउट (बाहर जाने) का फैसला किया.
जब सीट से नहीं उठ पाए विधायक, CM ने बढ़ाया मदद का हाथ
डीएमके के सभी विधायक बाहर जा रहे थे, लेकिन तिरुवैयारु से पार्टी के विधायक दुरई चंद्रशेखर अपनी ही जगह पर बैठे रहे. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जब मुख्यमंत्री विजय की नजर उन पर पड़ी, तो उन्होंने पूछा कि वह बाकी साथियों के साथ क्यों नहीं जा रहे? इसके बाद चंद्रशेखर ने बताया कि स्वास्थ्य या किसी समस्या के कारण वे अकेले खड़े नहीं हो पा रहे हैं. यह सुनते ही मुख्यमंत्री विजय अपनी सीट से उठे, चंद्रशेखर के पास पहुंचे और उन्हें सहारा देकर खड़ा किया.
सदन में बजीं तालियां
डीएमके विधायक चंद्रशेखर ने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री का शुक्रिया अदा किया और फिर सदन से बाहर गए. विधानसभा में मौजूद अन्य मंत्रियों और नेताओं ने मेज थपथपाकर मुख्यमंत्री विजय के इस कदम की सराहना की.&amp;nbsp;

pic.twitter.com/1Nrd9jRwLf
&amp;mdash; Laxmi Kanth (@iammoviebuff005) September 7, 2026



सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, हो रही तारीफ&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री विजय के इस व्यवहार ने सदन में मौजूद प्रत्येक नेता और अन्य सदस्यों का ध्यान खींचा, जिन्होंने उनके इस सहयोग की सराहना करते हुए मेज पर जोरों से थाप दी. वहीं, सीएम विजय और डीएमके विधायक के इन छोटे से पलों का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आया, वो देखते ही देखते खूब वायरल हो गया. इस वीडियो पर लोग डीएमके विधायक चंद्रशेखर के उठने में मदद करने के लिए सीएम विजय की मदद पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और तारीफ कर रहे हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: भारत में नकली रेबीज वैक्सीन का खौफ, मिलावटी दवाओं का बढ़ता कारोबार, कौन जिम्मेदार</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में नकली दवाओं के बढ़ते नेटवर्क और अवैध निर्माण के केंद्र में इस बार रेबीज से बचाने वाली सबसे प्रमुख वैक्सीन आ गई है. जानलेवा संक्रमण से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई वैक्सीन का नकली पाया जाना स्वास्थ्य व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है.
विवाद के केंद्र में &#039;अभयरेब&#039; (Abhayrab)
यह पूरा मामला भारत में रेबीज के इलाज के लिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन &#039;अभयरेब&#039; (Abhayrab) से जुड़ा है.
निर्माता: इसे इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड (IIL) अपने &#039;ह्यूमन बायोलॉजिकल्स इंस्टीट्यूट&#039; के ज़रिए तैयार करती है.
बाजार में हिस्सेदारी: भारत के घरेलू रेबीज वैक्सीन बाजार में अकेले IIL की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है.
दिल्ली में कैसे हुआ मामले का खुलासा?
अवैध ठिकाने पर छापेमारी: 22 अप्रैल 2026 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने मुखर्जी नगर की एक बिना लाइसेंस वाली रिहायशी जगह पर छापेमारी की.
नकली शीशियां ज़ब्त: मौके से &#039;अभयरेब&#039; (Abhayrab) के लेबल और बैच नंबर KE25012 वाली कई शीशियां ज़ब्त की गईं. इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया.
लैब टेस्ट में फेल: कसौली स्थित &#039;सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी&#039; (CDL) में जब ज़ब्त किए गए सैंपलों की जांच हुई, तो वे पोटेंसी (क्षमता) टेस्ट में फेल हो गए. सीडीएल ने इन्हें &quot;मानक गुणवत्ता के नहीं&quot; और गलत लेबल वाले घोषित कर दिया.
असली से कई अंतर: ज़ब्त शीशियों की पैकेजिंग, लेबलिंग, आर्टवर्क, QR-कोड वेरिफिकेशन, ढक्कन के रंग और लाइसेंस विवरण में असली शीशियों के मुकाबले कई खामियां पाई गईं.
निर्माता कंपनी IIL का पक्ष: क्या असली बैच खराब था?
IIL ने ज़ब्त की गई शीशियों को बनाने से साफ़ इनकार किया है. कंपनी के अनुसार, असली KE25012 बैच में 83,370 शीशियां शामिल थीं. सभी आवश्यक गुणवत्ता परीक्षणों के बाद इसे 7 नवंबर 2025 को अधिकृत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के ज़रिए जारी किया गया था. CDSCO ने भी पुष्टि की है कि असली KE25012 बैच का कोई हिस्सा निर्यात (Export) नहीं किया गया था. जांच से यह स्पष्ट होता है कि असली IIL बैच खराब नहीं था, बल्कि असामाजिक तत्वों द्वारा असली बैच नंबर का इस्तेमाल कर नकली वैक्सीन तैयार की गई थी.
अंतर्राष्ट्रीय चेतावनी: ऑस्ट्रेलिया में भी मचा था हड़कंप
नकली &#039;अभयरेब&#039; की आपूर्ति का यह पहला मामला नहीं है
-दिसंबर 2025 (ऑस्ट्रेलिया): ऑस्ट्रेलिया के &#039;टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन&#039; (ATAGI) ने भारत में अभयरेब के एक और फर्जी बैच (KA24014) की रिपोर्ट मिलने पर अलर्ट जारी किया था.
-यात्रियों को सलाह: जिन यात्रियों ने नवंबर 2023 के बाद भारत में यह टीका लगवाया था, उन्हें ऑस्ट्रेलिया में एहतियातन रिप्लेसमेंट डोज लेने की सलाह दी गई थी.
मार्च 2025 (दिल्ली एडवाइजरी): भारत के बड़े शहरों में नकली डोज मिलने के बाद दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने भी मार्च 2025 में एडवाइजरी जारी की थी.
नकली रेबीज वैक्सीन इतनी खतरनाक क्यों है?
100% जानलेवा बीमारी: रेबीज के लक्षण एक बार दिखाई देने के बाद यह बीमारी लगभग 100% जानलेवा साबित होती है.
कुत्ते व जानवरों के काटने के मामले: भारत में हर साल जानवरों के काटने के लगभग 90 से 91 लाख मामले सामने आते हैं और औसतन 5,726 लोगों की मौत रेबीज से होती है.
झूठी सुरक्षा का अहसास: यदि किसी मरीज को जानवर के काटने के बाद घटिया या पानी भरी नकली वैक्सीन लगा दी जाए, तो उसे लगता है कि वह सुरक्षित है, जबकि शरीर में एंटीबॉडी न बनने के कारण उसकी जान चली जाती है.
क्या वैक्सीन लगने के बाद हुई मौतें नकली टीके से जुड़ी हैं?
वैक्सीन लगवाने के बावजूद मौत होने के मामलों पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस (NIMHANS) के शोधकर्ताओं ने 89 मौतों की विस्तृत जांच की. जांच में पाया गया कि सिर्फ 3 मामलों में ही इलाज (वैक्सीन) फेल हुआ था. अधिकांश मौतों की वजह प्रोटोकॉल की लापरवाही थी जैसे घाव को तुरंत और ठीक से न धोना, वैक्सीन समय पर न लगाना या गंभीर मामलों में &#039;रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन&#039; न देना.
इसका मतलब यह है कि सही और असली वैक्सीन के साथ-साथ पूरे इलाज प्रोटोकॉल का पालन होना भी उतना ही ज़रूरी है.
देश में नकली दवाओं का बढ़ता और संगठित कारोबार
&#039;अभयराब&#039; मामले ने भारत में पैर पसार रहे नकली दवाओं के सिंडिकेट को उजागर किया है:
ब्रांडेड व लाइफ-सेविंग दवाएं निशाने पर: इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस के अनुसार, अब नकली दवा माफिया सिर्फ सामान्य गोलियां ही नहीं, बल्कि कैंसर-रोधी दवाएं और रेबीज जैसी जीवनरक्षक वैक्सीन भी धड़ल्ले से बना रहा है.
हाई-टेक जालसाजी: जालसाज असली सप्लायर्स से पैकेजिंग मटीरियल और इंक हासिल कर लेते हैं, QR कोड की नकल करते हैं और होलोग्राफिक सील चुरा लेते हैं.
भारी डिस्काउंट का लालच: रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को 60 से 80 प्रतिशत तक का डिस्काउंट देकर नकली माल बाजार में खपाया जाता है.
बाजार में बढ़ता डर: ASPA-क्रिसिल इंटेलिजेंस की &#039;स्टेट ऑफ काउंटरफिटिंग इन इंडिया 2025&#039; रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ताओं का अनुमान है कि बाजार में बिकने वाली लगभग 28% दवाएं नकली या संदेहास्पद हो सकती हैं.
नकली रेबीज वैक्सीन का यह मामला महज एक वित्तीय या व्यापारिक अपराध नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे मानव हत्या का प्रयास है. ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सभी राज्यों को संदिग्ध बैच KE25012 की बिक्री पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं. हालांकि, जब तक नकली दवा माफिया के खिलाफ फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए कठोर सजा और पूरी सप्लाई चेन का पारदर्शी ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम लागू नहीं किया जाता, तब तक आम जनता की जान इसी तरह जोखिम में बनी रहेगी. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>संजय दत्त ने जेल में कैसे गुजारे दिन? जेलर बोली&amp; &amp;apos;मराठी नहीं सीख पाए, लेकिन...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/संजय-दत्त-ने-जेल-में-कैसे-गुजारे-दिन-जेलर-बोली-मराठी-नहीं-सीख-पाए-लेकिन</link>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोलने को लेकर अक्सर विवाद रहता है. महाराष्ट्र में टैक्सी, कैब चालको और ऑटो चालकों को अपना काम चलाने के लिए मराठी सीखना जरुरी है. ऐसे में बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त के एक बयान ने सभी को चौंका दिया है. मुंबई में एक दही हांडी कार्यक्रम में संजय दत्त राज्य परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के साथ पहुंचे थे. इस दौरान संजय दत्त हिंदी में बोलने लगे जिस पर मंत्री ने उन्हें मराठी में बात करने के लिए टोका तो उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि मैं 5 साल तक जेल में रहा और मराठी नहीं सीख पाया. अब उनके जेल विभाग के पूर्व प्रमुख ने उनके जेल के दिनों को याद किया है.
6 साल की हुई थी सजासंजय दत्त को मुंबई की स्पेशल टाडा कोर्ट ने गैर-कानूनी तरीके से AK-47 राइफल रखने के लिए छह साल की सजा सुनाई थी. यह राइफल दाऊद इब्राहिम के गैंग की ओर से मुंबई भेजी गई खेप का हिस्सा थी. उन्हें सिर्फ आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था. संजय दत्त ने जेल में छह साल नहीं बिताए, जैसा कि वे दावा करते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा घटाकर पांच साल कर दी थी और पैरोल, फर्लो और कानूनी रियायतों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने जेल में चार साल से कुछ ज़्यादा समय ही बिताया. हालांकि जेल में मराठी बोलने वाले कई कैदी थे और जेल का स्टाफ भी मराठी था, फिर भी वे उनसे हिंदी में बात करते थे.
जेल में नहीं सीख सके मराठीमहाराष्ट्र जेल विभाग की पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) स्वाति साठे ने याद किया कि जेल में दत्त मराठी तो नहीं सीख पाए, लेकिन उन्होंने एक और भाषा जरूर सीख ली - डराने-धमकाने की भाषा. साठे ने बताया कि आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद दत्त सदमे में थे और जेल की जिंदगी को अपना नहीं पा रहे थे. कोर्ट के आदेश के बाद जब उन्हें पहली बार जेल लाया गया, तो उन्होंने जेल की यूनिफॉर्म पहनने से इनकार कर दिया. जेल वॉर्डन ने उनसे कैदियों के लिए बनी सफेद शर्ट पहनने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने नखरे दिखाए और उनके साथ बदतमीजी से पेश आए.
जेल स्टाफ ने उनके व्यवहार के बारे में जेल सुपरिटेंडेंट स्वाति साठे को बताया. वह सख्त अनुशासन लागू करने और बिना किसी बकवास के काम करने के लिए जानी जाती थीं. जेल के नियमों का उल्लंघन करने पर खतरनाक गैंगस्टरों की बुरी तरह पिटाई करने के लिए उनकी ख्याति थी. उनकी छवि से हिरासत में मौजूद पक्के अपराधी भी डरते थे. दत्त के बुरे व्यवहार के बारे में सुनकर गुस्से में आईं साठे उनकी बैरक में पहुंचीं. अपनी लाठी उनकी ओर करते हुए उन्होंने चेतावनी दी, &quot;संजू, तू बातों की जबान समझेगा या लातों की?&quot;
चेंज कर ली यूनिफॉर्मसाठे के आक्रामक रवैये से दत्त डर गए और उनके आदेश का पालन करना ही बेहतर समझा. वह तुरंत चेंजिंग रूम में गए और जेल की यूनिफॉर्म पहन ली. डराने-धमकाने की भाषा काम कर गई और उस दिन के बाद दत्त ने जेल में कभी नखरे नहीं दिखाए. असल में, कुछ दिनों बाद दत्त के साठे और जेल के अन्य अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध बन गए. उन्होंने जेल अधिकारियों को कई कार्यक्रम आयोजित करने में मदद की और अपनी फ़िल्म &quot;लगे रहो मुन्ना भाई&quot; से प्रेरित होकर जेल रेडियो भी चलाया.
15 अगस्त तक मराठी सीखने की डेडलाइन दीसंजय दत्त का ये बयान उस समय में आया है जब मंत्री प्रताप सरनाइक ने टैक्सी ड्राइवर्स को 15 अगस्त तक मराठी सीखने की डेडलाइन दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके परमिट सस्पेंड कर दिए जाएंगे.
महाराष्ट्र में हिंदी बोलने वाले लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आदेश को एक साल के लिए टाल दिया. इससे सरनाइक और उनके नेता एकनाथ शिंदे &amp;ndash; जो डिप्टी सीएम भी हैं को शर्मिंदगी उठानी पड़ी.
ये भी पढ़ें: 9/11 संदिग्ध के अल-कायदा और सऊदी से संबंध, क्यों सबूत के बाद भी FBI रही खामोश? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>संजय, दत्त, ने, जेल, में, कैसे, गुजारे, दिन, जेलर, बोली-, मराठी, नहीं, सीख, पाए, लेकिन...</media:keywords>
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        <title>CJI सूर्यकांत की सख्ती, कहा&amp; &amp;apos;...आप मेरे रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cji-सूर्यकांत-की-सख्ती-कहा-आप-मेरे-रिटायरमेंट-का-इंतजार-कर-रहे-हैं</link>
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        <description><![CDATA[ अरावली पहाड़ियों की परिभाषा तय करने के लिए गठित &#039;हाई-पावर्ड कमेटी&#039; को ज्यादा वक्त देने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है. कमेटी ने 28 फरवरी 2027 तक का समय मांगा था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सख्त रुख अपनाते हुए 30 नवंबर 2026 तक हर हाल में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है.
चीफ जस्टिस ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि कमेटी ने काम शुरू करते ही छह महीने का अतिरिक्त समय मांग लिया. ऐसा लगता है जैसे कमेटी उनके रिटायरमेंट का इंतजार कर रही हो. उन्होंने साफ किया कि कमेटी को किसी भी तरह का एक्सटेंशन नहीं मिलेगा. वह दिन-रात काम करे और तय समय सीमा में रिपोर्ट दे. इस मामले पर अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को होगी. CJI ने कहा, &quot;अगर वे दो महीने में ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो हम पूरे पैनल का पुनर्गठन करेंगे.&quot;&amp;nbsp;
अरावली को लेकर क्या है विवाद?
पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट स्वीकार की थी. इसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ी को अरावली की परिभाषा से बाहर किया गया था. पर्यावरणविदों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे छोटी पहाड़ियां और आसपास का ईको-सिस्टम संरक्षण से बाहर हो जाएगा और वहां अवैध खनन बढ़ जाएगा.
पर्यावरण कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने मामले की समीक्षा के लिए इस साल मई में 5 सदस्यीय कमेटी बनाई. कमेटी को यह तय करना है कि पूरे अरावली क्षेत्र की सुरक्षा कैसे हो. उसे राजस्थान और गुजरात के आदिवासियों, किसानों और पर्यावरण विशेषज्ञों की बात सुनकर रिपोर्ट तैयार करनी है.
सियासी दलों ने विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के बाद आंदोलन का ऐलान किया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए हाई-पावर्ड कमेटी को वक्त देने से इनकार कर दिया है. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 19:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU के दिमागी एलुमनाई अब क्यों नहीं…, सत्य निकेतन हादसे पर महुआ ने कसा तंज</title>
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        <description><![CDATA[ दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के ढहने की घटना को लेकर देश में राजनीति गरमाई हुई है. विपक्ष इसे लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार पर हमलावर है. इस बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के दिमागी Alumnus छात्रों की दुखद मौतों के बारे में आवाज क्यों नहीं उठाते. उन्होंने पूछा कि पेरिस के एक मंदिर का उद्घाटन करने को इससे ज्यादा अहमियत क्यों दी जाती है?&amp;nbsp;
महुआ ने क्यों किया पेरिस के मंदिर का जिक्र?
हाल ही में पेरिस में बने बीएपीएस (BAPS) स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया. उन्होंने कहा कि यह भव्य स्वामीनारायण मंदिर भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें ऐसे धार्मिक अवसरों से जुड़ने का निरंतर अवसर मिलता रहता है. इसी वजह से महुआ मोइत्रा ने पेरिस के मंदिर का जिक्र किया.
सत्य निकेतन हादसे में 7 की मौत
सत्य निकेतन इलाके में हुए हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वाले अधिकतर छात्र बताए गए हैं, जो दूरदराज से अपनी जिंदगी और परिवार की स्थिति को बदलने का ख्वाब लेकर दिल्ली आए थे. दिल्ली में इमारत गिरने की यह कोई अकेली घटना नहीं है. बीते दो वर्षों में रोहिणी, साकेत, वेलकम, करोल बाग, पहाड़गंज और मुस्तफाबाद के अलावा दिल्ली के कई अन्य इलाकों में इमारत गिरने की घटनाएं हुईं. इस साल मई में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई, जबकि जुलाई में रोहिणी सेक्टर-16 में ऐसी ही घटना में तीन मजदूर मलबे में दबकर मर गए.
दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया
इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र, MCD, पुलिस, DU और NHRC को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने डीयू से बाहर से आने वाले कितने स्टूडेंट्स उसके कॉलेजों में पढ़ते हैं और यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, इसका डेटा मांगा है. मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम, 1.10 लाख करोड़ के खरीद प्रस्ताव को DAC की मंजूरी</title>
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        <description><![CDATA[ रक्षा खरीद परिषद ने करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी डीएसी ने सोमवार को रक्षा बलों के अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर &#039;आवश्यकता की स्वीकृति&#039; (AoN) यानी सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी दी. 
भारतीय सेना के लिए केमिकल बायोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल एंड न्यूक्लियर (CBRN) रेकी वाहनों, हाई मोबिलिटी वाहनों (HMV), सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स (MML), एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों (ALH), ट्रॉवेल टैंकों और &#039;सर्वत्र&#039; ब्रिज सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई.&amp;nbsp; 
रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम&amp;nbsp; 
CBRN रेकी वाहन: ये वाहन CBRN एजेंटों से दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, उनकी पहचान करने, निगरानी करने और उन्हें चिह्नित करने में सक्षम होंगे. HMV: ये कठिन क्षेत्रों में परिचालन क्षमताओं, तार्किक सहायता और गतिशीलता को बढ़ाएंगे. MML: इनसे कठिन क्षेत्रों में त्वरित और उत्तरदायी बारूदी सुरंग बिछाने में मदद मिलेगी. ALH: ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए सभी क्षेत्रों व परिचालन स्थितियों में जटिल मिशनों को अंजाम देंगे. 
ट्रॉवेल टैंक और ब्रिज सिस्टम: इनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में अभियानों के दौरान लड़ाकू टुकड़ियों को रास्ता (कम्पोजिट क्रॉसिंग) प्रदान करने के लिए किया जाएगा. नौसेना के लिए अरुधरा (Arudhra) रडार की खरीद और मरीन गैस टर्बाइन (MGT) के डिजाइन, विकास व बाद की खरीद के लिए AoN दिया गया. अरुधरा रडार: यह विभिन्न नौसेना हवाई स्टेशनों पर मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेगा.
&#039;आत्मनिर्भर भारत&#039; पर जोर
मरीन गैस टर्बाइन (MGT): युद्धपोत प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System) के रूप में यह विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता को कम करेगा. वायु सेना के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की युद्ध क्षमता को बढ़ाने वाले विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. 
इसके अलावा: ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (GBMPJ): यह विरोधियों के रडार के खिलाफ प्रभावी जैमिंग होगा.&amp;nbsp; DEFSAC सिस्टम: डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड (DEFSAC) सिस्टम मौजूदा कागज आधारित पहचान पत्रों/पासों/परमिटों को एक इंटरऑपरेबल रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित स्मार्ट कार्ड सिस्टम से बदलेगा. स्वीकृत किए गए कुल AoNs में से लगभग 98% खरीद भारतीय उद्योगों से की जाएगी.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: क्या J&amp;amp;K&amp;लद्दाख पर भारत पीछे हटा? UN के नए नक्शे में दुनिया कितनी अलग</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका के न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशंस (UN) महासभा का हॉल गूंज उठा क्योंकि 164 देशों ने हाथ उठाकर ऐतिहासिक प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी. अब 500 साल से स्कूलों, किताबों, न्यूजरूम और दफ्तरों में दिखने वाला दुनिया का नक्शा बदल रहा है. इसमें 6 देशों ने वोटिंग से किनारा कर लिया, जबकि सिर्फ अमेरिका विरोध में अकेला खड़ा रहा. भारत ने 164 देशों के साथ &#039;हां&#039; कहा, लेकिन 48 घंटों में बड़ी चेतावनी दे दी. आखिर भारत ने समर्थन देकर हाथ क्यों खींच लिए और क्या नक्शा बदलने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बदल जाएगा...
दुनिया का नक्शा बदलने का पूरा मामला क्या है?
4 सितंबर 2026 को UN ने दुनिया के नक्शे को बनाने के तरीके को बदलने का फैसला किया है. अब तक दुनिया में &#039;मर्केटर प्रोजेक्शन&#039; नाम का नक्शा इस्तेमाल होता था. इसे 1569 में बनाया गया था. इस नक्शे की सबसे बड़ी खामी यह है कि यह अफ्रीका को बहुत छोटा दिखाता है, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका को बहुत बड़ा. असल में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है, लेकिन पुराने नक्शे में दोनों एक जैसे दिखते हैं.
UN ने अब &#039;इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन&#039; को अपनाने का फैसला किया है, जो 2018 में विकसित किया गया था. यह नया नक्शा महाद्वीपों को उनके मौजूदा आकार के करीब दिखाता है. इसमें अफ्रीका बड़ा दिखेगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे.

UN महासभा की वोटिंग में क्या हुआ?
यह प्रस्ताव अफ्रीकी देश टोगो ने पेश किया था और अफ्रीकी संघ ने इसका समर्थन किया था. UN महासभा में हुई वोटिंग में:

164 देशों ने इसके पक्ष में वोट किया.
एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन ने वोटिंग से परहेज किया.
सिर्फ अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया.

नए नक्शे का समर्थन भारत ने क्यों किया?
भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया. इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि भारत लंबे समय से दुनिया के नक्शों में अफ्रीका और दक्षिणी गोलार्ध के देशों की सही लीडरशिप की मांग करता रहा है. पुराने नक्शे में ये देश छोटे दिखाए जाते थे, जो उनकी मौजूदा अहमियत को कम करता था. भारत ने &#039;समान क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपण&#039; (Equal-Area Map Projection) के सिद्धांत का समर्थन किया.
भारत ने साफ किया कि उसका समर्थन किसी खास नक्शे या सीमा बनाने के लिए नहीं है , बल्कि यह सिर्फ नक्शा बनाने के बेहतर तरीके के लिए है.
तो क्या भारत लाल रेखा खींचकर पीछे हटा?
यहां &#039;पीछे हटना&#039; सही शब्द नहीं है. भारत ने समर्थन तो किया, लेकिन एक सख्त शर्त रखी. भारत को डर था कि कहीं नए नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को गलत तरीके से या पाकिस्तान के दावे के मुताबिक न दिखा दिया जाए. इस वजह से वोट करने के दो दिन बाद यानी 6 सितंबर 2026 को भारत ने साफ कर दिया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, &#039;भारत का संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं, भारत के आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए. कोई भी गलत या भ्रामक जानकारी नहीं होगी. भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसका रुख मोलभाव करने वाला नहीं है.&#039;
क्या UN का नया नक्शा भारत की सीमाओं को बदलेगा?
बिल्कुल नहीं! यह समझना सबसे जरूरी है. UN का यह प्रस्ताव सिर्फ नक्शा बनाने के तरीके को बदलने के लिए है. यह किसी भी देश की सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या जगहों के नाम में कोई बदलाव नहीं करता. यानी गोल पृथ्वी को चपटे कागज पर कैसे उतारा जाए, इसकी तकनीक के बारे में काम होगा.
UN ने भी साफ कहा है कि यह प्रस्ताव किसी खास नक्शे या सीमा बनाने का समर्थन नहीं करता. यानी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की स्थिति पर इसका कोई असर नहीं पड़ता. भारत ने बस अपनी सीमाओं के सही मैप दिखाने की मांग की, ताकि कोई गलतफहमी न हो.
&amp;nbsp;

UN के प्रस्ताव में कोई कानूनी बंधन नहीं है.

आखिर दुनिया का मैप बदलने से क्या बदलेगा?
असल में बदलाव हमारी नजर में आएगा भूगोल में नहीं...

अब तक दुनिया में &#039;मर्केटर प्रोजेक्शन&#039; नाम का नक्शा इस्तेमाल होता था, जिसे 1569 में नाविकों के लिए बनाया गया था. इसकी सबसे बड़ी खामी है कि भूमध्य रेखा (equator) के पास के इलाकों को छोटा और ध्रुवों के पास के इलाकों को बड़ा दिखाता है. यह गोल पृथ्वी को चपटे नक्शे में उतारने की चुनौती की वजह से हुआ.
पुराने नक्शे में दोनों एक जैसे दिखते हैं, जबकि असल में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है. अफ्रीका का क्षेत्रफल 3.03 करोड़ वर्ग किमी है, जबकि ग्रीनलैंड 21.6 लाख वर्ग किमी. UN ने अब 2018 में बने &#039;इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन&#039; को अपनाने का फैसला किया है. इसमें महाद्वीपों का सापेक्ष क्षेत्रफल सही दिखता है, हालांकि दूरी नापने में यह पुराने जितना सटीक नहीं.
UN के प्रस्ताव में कोई कानूनी बंधन नहीं है. कोई भी देश या संस्था पुराना नक्शा बदलने के लिए मजबूर नहीं है. लेकिन मर्केटर नक्शा स्कूलों, टेक्नोलॉजी और सरकारी नक्शों में गहराई से बैठा हुआ है, इसलिए UN के इस समर्थन से धीरे-धीरे बदलाव आएगा.
फ्रांस ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह मर्केटर प्रोजेक्शन छोड़ेगा.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>ISRO निजीकरण विवाद: असली तस्वीर क्या है और इसके क्या मायने हैं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/isro-निजीकरण-विवाद-असली-तस्वीर-क्या-है-और-इसके-क्या-मायने-हैं</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर इस समय एक अहम बहस खड़ी हो गई है. क्या ISRO धीरे-धीरे निजीकरण की ओर बढ़ रहा है? यह सवाल अचानक नहीं उठा. 4 सितंबर 2026 को ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी और खास तौर पर लॉन्च व्हीकल के निर्माण को निजी क्षेत्र या PSU को सौंपे जाने की दिशा पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा.
कर्मचारी संगठनों की चिंता की एक बड़ी वजह IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका का वह बयान था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में ISRO लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा. इसके बाद ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ISRO का निजीकरण नहीं हुआ है और कर्मचारियों को अपने रोजगार और भविष्य को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.
उन्होंने साफ किया कि निजी क्षेत्र को आगे लाने का उद्देश्य ISRO की भूमिका कम करना नहीं, बल्कि भारत के पूरे स्पेस इकोसिस्टम की क्षमता को कई गुना बढ़ाना है. यहीं से इस पूरे विवाद को समझने की शुरुआत होती है.
पहला सवाल, क्या ISRO का सचमुच निजीकरण हो रहा है?
सीधा जवाब है मौजूदा घोषित नीति के आधार पर इसे ISRO का निजीकरण कहना सही नहीं होगा. निजीकरण का सामान्य अर्थ किसी सरकारी संस्था के स्वामित्व, नियंत्रण या मूल संचालन को निजी हाथों में देना होता है. अभी ऐसा कोई घोषित फैसला सामने नहीं है जिसमें ISRO को निजी संस्था बनाने या उसका सरकारी नियंत्रण खत्म करने की बात हो. बल्कि सरकार की मौजूदा नीति का जोर Space Sector Reforms के तहत निजी कंपनियों और Non-Government Entities यानी NGEs को अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में प्रवेश देने पर है.
इसलिए मौजूदा बदलाव को ज्यादा सटीक तरीके से ऐसे समझा जा सकता है, ISRO खत्म नहीं हो रहा है, बल्कि ISRO की पारंपरिक भूमिका का पुनर्गठन हो रहा है. और यही बदलाव आज की पूरी बहस का केंद्र है.&amp;nbsp;

ISRO चेयरमैन ने क्या कहा?
ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि निजी प्लेयर्स को आगे लाने का मकसद देश की अंतरिक्ष क्षमता का विस्तार करना है. वी. नारायणन के मुताबिक, भारत का स्पेस प्रोग्राम करीब 64 साल पुराना है और फिलहाल भारत के पास अंतरिक्ष में 56 स्पेस एसेट्स हैं, जो देश के आम लोगों की सेवाओं में काम कर रहे हैं. लेकिन भविष्य की जरूरत इससे कहीं बड़ी है.
उन्होंने कहा, देश की ज़रूरत हर साल लगभग 50 लॉन्च व्हीकल्स की है, और हमें आगे बढ़ना है. यानी सरकार और ISRO के सामने चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि भारत कितने रॉकेट बना सकता है, बल्कि यह है कि भारत अपनी कुल लॉन्च क्षमता को कितने बड़े स्तर तक ले जा सकता है.
वी. नारायणन ने निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात साफ शब्दों में कही, ISRO का प्राइवेटाइज़ेशन नहीं हुआ है. ISRO एक सरकारी संगठन है. उन्होंने कहा कि सरकारी निवेश के साथ ISRO अपनी भूमिका निभा रहा है. साथ ही देश में स्पेस इकोसिस्टम और स्पेस इकोनॉमी को बढ़ाने के लिए IN-SPACe, ISRO और NSIL को मिलकर काम करना है. यानी नई व्यवस्था में निजी क्षेत्र को आगे लाना ISRO को replace करने के बजाय उसकी क्षमता के साथ जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

क्या सवाल उठ रहे?
ISRO चेयरमैन ने कर्मचारी संगठनों की चिंताओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया. उन्होंने माना कि कर्मचारियों की चिंताएं जायज़ हैं और उन्हें दूर करना ISRO की जिम्मेदारी है. यह महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्मचारी संगठनों की चिंता केवल नौकरी जाने की नहीं है. उनका सवाल है कि अगर ISRO धीरे-धीरे लॉन्च व्हीकल निर्माण, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और दूसरी operational activities से पीछे हटता है तो
1. मौजूदा कर्मचारियों की भूमिका क्या होगी?2. इन-हाउस काम कितना बचेगा?3. भर्ती का क्या होगा?4. प्रमोशन और स्किल डेवलपमेंट के अवसरों पर क्या असर पड़ेगा?5. वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञता ISRO के भीतर किस तरह बनी रहेगी?
क्या ISRO के सारे रॉकेट अब निजी कंपनियां बनाएंगी? यही वह बिंदु है जहां पवन गोयनका के बयान और कर्मचारी संगठनों की चिंता को समझना जरूरी है.
पवन गोयनका ने ISRO के सामने मौजूद बड़े मिशनों का जिक्र करते हुए कहा, &#039;&#039;चंद्रयान सीरीज़, गगनयान, भारतीय स्पेस स्टेशन, चांद पर भारतीय का जाना, शुक्र और मंगल मिशन, दोबारा इस्तेमाल होने वाला भारी पेलोड ले जाने वाला व्हीकल, NavIC को मज़बूत करना और SPS सीरीज़ के सैटेलाइट्स मुझे नहीं लगता कि ISRO के पास कभी इतना सारा काम एक साथ रहा है.&#039;&#039;
गोयनका ने आगे ISRO को इन सभी कार्यक्रमों की रीढ़ की हड्डी और मज़बूत आधार बताया. उन्होंने कहा कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका से ISRO की भूमिका कम हो जाएगी, उन्हें फिर से सोचना चाहिए.
उनके मुताबिक, हममें से हर किसी की अपनी भूमिका है. पूरी व्यवस्था तभी आगे बढ़ती है जब हम सब मिलकर काम करते हैं. यानी उनका तर्क है कि स्पेस इकोसिस्टम में ISRO, निजी कंपनियां, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थान अलग-अलग भूमिकाओं में काम करेंगे.
दशकों तक भारत का स्पेस प्रोग्राम मुख्य रूप से एक सरकारी मॉडल पर चला. ISRO, रॉकेट डिजाइन करता था, बनाता था, टेस्ट करता था, लॉन्च करता था. सैटेलाइट डिजाइन और निर्माण से लेकर मिशन ऑपरेशन और नई तकनीक के विकास तक बड़ी जिम्मेदारी ISRO के पास थी. निजी उद्योग मुख्य रूप से ISRO की supply chain का हिस्सा था. अब मॉडल बदल रहा है. सरकार का विचार है कि जो technologies mature हो चुकी हैं और जिन्हें commercial scale पर बनाया जा सकता है, उनका Productionisation और Commercialisation Industry के जरिए किया जाए-
वहीं ISRO ज्यादा फोकस करे1. Frontier R&amp;amp;D2. नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल3. Reusable Launch Vehicles4. Advanced Propulsion5. Human Spaceflight6. Gaganyaan7. Bharatiya Antariksh Station8. Moon और Planetary Missions9. Space Science10. Strategic और critical space capabilities
यानी सवाल यह न ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ISRO, निजीकरण, विवाद:, असली, तस्वीर, क्या, है, और, इसके, क्या, मायने, हैं</media:keywords>
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        <title>‘विजय&amp;तृशा कृष्णन पर किया था आपत्तिजनक पोस्ट’, IGI एयरपोर्ट पर उद्यमी गिरफ्तार</title>
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        <description><![CDATA[ चेन्नई की साइबर क्राइम पुलिस ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अभिनेत्री तृशा कृष्णन को लेकर एक आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में राज्य के एक उद्यमी प्रवीण गणेशन को गिरफ्तार किया है. दरअसल, 35 वर्षीय प्रवीण गणेशन हांगकांग से यात्रा कर रहे थे, इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया.
यह पूरा घटनाक्रम शनिवार (5 सितंबर, 2026) को सामने आया, जब प्रवीण गणेशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि उन्हें चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस की तरफ से जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) की वजह से इमिग्रेशन विभाग ने उन्हें हिरासत में ले लिया है.
X पोस्ट में क्या बोले प्रवीण गणेशन?
गणेशन ने अपने पोस्ट में कहा, &amp;lsquo;जून महीने में किए गए एक एक्स पोस्ट को लेकर चेन्नई साइबर क्राइम और तमिलनाडु पुलिस की तरफ से जारी लुकआउट सर्कुलर (LOC) की वजह से मुझे दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने हिरासत में ले लिया है, जिसे हटाया जा चुका है. हमें दिल्ली/एनसीआर में एक ऐसे आपराधिक वकील की जरूरत है, जो तुरंत IGI एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन या पटियाला हाउस कोर्ट पहुंचकर स्थिति को संभाल सके. इसके अलावा, आगामी ट्रांजिट रिमांड का विरोध कर सके.&amp;rsquo;
उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कहा, &amp;lsquo;प्लीज इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें और उपलब्ध आपराधिक वकीलों या लीगल एड नेटवर्क्स को टैग करें.&amp;rsquo;
तमिलनाडु के उद्यमी के हिरासत पर बोले अधिकारी&amp;nbsp;

इसके बाद प्रवीण गणेशन को दिल्ली पुलिस के IGI अधिकारियों को सौंप दिया गया. इस बारे में दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (IGI) विचित्र वीर ने द प्रिंट से बातचीत में कहा, &amp;lsquo;शनिवार (5 सितंबर को चेन्नई साइबर क्राइम की टीम को पहुंचने में समय लग रहा था, इसलिए दिल्ली पुलिस की IGI विंग ने गणेशन को हिरासत में ले लिया. हालांकि, बाद में उसे चेन्नई की टीम को सौंप दिया गया.&amp;rsquo;
क्या है पूरा घटनाक्रम?
इसके अलावा, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रेडिंग कंपनी विनट्रैक के सीईओ गणेशन को सीएम विजय और तृशा के बारे में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;गणेशन ने जून महीने में तमिलनाडु के सीएम के बारे में एक X पोस्ट में आपत्तिजनक बातें कही थी. हालांकि, बाद में वो पोस्ट हटा दिया गया, लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद चेन्नई के साउथ जोन साइबर क्राइम यूनिट ने गणेशन के खिलाफ LOC जारी कर दिया.&amp;rsquo;
अधिकारी ने कहा, &amp;ldquo;गणेशन ने जून में मुख्यमंत्री के बारे में मानहानिकारक बयान पोस्ट किए थे. हालांकि बाद में वह पोस्ट हटा दी गई, लेकिन एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद चेन्नई के साउथ जोन साइबर क्राइम यूनिट ने उनके खिलाफ LOC जारी कर दिया.&amp;rdquo; उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट और उसके URL सेव करने के बाद पुलिस से संपर्क किया था.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः PM मोदी के &amp;lsquo;नाराज फूफा&amp;rsquo; वाले बयान पर खरगे का रिएक्शन, कहा - &#039;अफसोस है कि...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 03:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली हादसा: विपक्ष पर निशिकांत दुबे का पलटवार, बोले&amp; &amp;apos;लोगों को पब्लिसिटी...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ साउथ दिल्ली में सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए बिल्डिंग हादसे पर विपक्ष के पीएम मोदी को लेकर लगाए जा रहे आरोप पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार करते हुए कहा है कि वह एल्गोरिदम के चक्कर में पीएम मोदी पर निशाना साध रहे हैं. हमने विकास किया है, हमें नेतागिरी से ज्यादा मतलब नहीं है.
अबतक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, वहां कई लोगों का रेस्क्यू कर लिया गया है. हादसे के बाद से एनडीए सरकार को विपक्ष के नेता लगातार कटघरे में खड़ा कर रहे है.

#WATCH | Delhi | Satya Niketan building collapse | BJP MP Nishikant Dubey says, &quot;...Whatever the problem is, be it a house collapsing or something else, our government is concerned about it. We have come to the program today, but Chief Minister Rekha Gupta has not come. They are&amp;hellip; pic.twitter.com/IJXoCc7v8I
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 6, 2026



लोगों को पब्लिसिटी चाहिए: निशिकांत दुबे
बीजेपी सांसद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, &#039;देखिए क्या है कि लोगों को पब्लिसिटी चाहिए. राहुल गांधी को कोई सीरियसली लेता नहीं है. कांग्रेस पार्टी को कोई सीरियसली लेता नहीं है. कांग्रेस पॉलिटिकल पार्टी को कोई सीरियसली लेता नहीं है, दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता कौन है? नरेंद्र मोदी जी हैं, उन्होंने 12 साल में विकास करके दिखाया है. विकसित भारत 2047 का सपना उन्होंने दिखाया है.&#039;
दुबे ने आगे कहा, &#039;जब कामता प्रसाद जी एक गुरु हुआ करते थे, जिन्होंने हिंदी व्याकरण लिखा है, उनकी एक लाइन फेमस है, कि निशाने से ऊपर मारो नहीं तो वार खाली जाएगा, तो ये सभी मोदी जी पर अटैक करते हैं, जिससे उनका कोई न कोई ट्रैक्शन हो जाए, एल्गोरिदम में जो है, मोदी जी को गाली देने वाला कोई आदमी पैदा हो गया, इस तरह से करके, अपनी, केवल वो जो, कमी है, उसको छुपाने की कोशिश है. मोदी जी को गाली देने से कुछ नहीं होगा, मोदी जी ने यहां विकास किया है, जनता का उनपर विश्वास है, और जो भी समस्याएं हैं, चाहे मकान गिरने का हो, आपको पता है, जिस कार्यक्रम में आए, वहां रेखा गुप्ता जी नहीं आईं, वह मौके पर खड़ी हुई हैं. हम काम करके दिखाते हैं, हमें नेतागिरी से कोई मतलब नहीं.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, हादसा:, विपक्ष, पर, निशिकांत, दुबे, का, पलटवार, बोले-, लोगों, को, पब्लिसिटी...</media:keywords>
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        <title>निजीकरण की खबरों पर ISRO का आया रिएक्शन, कहा &amp; &amp;apos;यह पूरी तरह से...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/निजीकरण-की-खबरों-पर-isro-का-आया-रिएक्शन-कहा-यह-पूरी-तरह-से</link>
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        <description><![CDATA[ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में स्पेस सेक्टर में सुधारों, निजीकरण और ISRO की भूमिका को लेकर जारी अटकलों पर रविवार (6 सितंबर, 2026) को अपना रिएक्शन दिया है. इसरो ने कहा कि ऐसे दावे पूरी तरह से निराधार और गलत हैं. हम स्पष्ट तौर पर कहना चाहते हैं कि ISRO का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही उसके महत्व को कम किया जाएगा. &amp;nbsp;
संगठन ने कहा कि ISRO एडवांस स्पेस रिसर्च और तकनीकी विकास, राष्ट्रीय और स्ट्रैटेजिक मिशनों, स्पेस साइंज एंड एक्सप्लोरेशन और महत्वपूर्ण और अत्याधुनिक अंतरिक्ष क्षमताओं के लिए भारत की प्रमुख संस्था बनी रहेगी.&amp;nbsp;
स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर ISRO ने क्या कहा?
ISRO ने कहा, &amp;lsquo;स्पेस सेक्टर में निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य किसी भी तरह से इसरो की भूमिका को कम करना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य इसरो को भारत के स्पेस प्रोग्राम की अगली पीढ़ी पर और ज्यादा मजबूती से फोकस करने में सक्षम बनाना है, जबकि इंडस्ट्री मैच्योर टेक्नोलॉजिज और क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विकसित करेगा.&amp;rsquo;
संगठन ने कहा कि जो भी कुछ बदलाव हो रहा है वो ISRO के लिए महत्व में नहीं हो रहा, बल्कि भारत के स्पेस इकोसिस्टम के स्ट्र्क्चर और स्केल में हो रहा है.

ISRO posts clarification regarding media reports on concerns relating to Space Sector Reforms and the role of ISROISRO tweets, &quot;There has been considerable reporting in parts of the media around the future role of ISRO including speculations and misinformation that there is an&amp;hellip; https://t.co/awcIDTNYv1 pic.twitter.com/yWQGDgbXni
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 6, 2026



ISRO के नेतृत्व में स्पेस इकोसिस्टम
निजीकरण की अटकलों को लेकर अंतरिक्ष संगठन ISRO ने रविवार (6 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना स्पष्टीकरण दिया. संगठन ने कहा, &amp;lsquo;साल 2020 में शुरू किए गए स्पेस सेक्टर के सुधारों और इंडियन स्पेस पॉलिसी, 2023 के जरिए उन्हें संस्थागत रूप देने के साथ-साथ FDI पॉलिसी में प्रोग्रेसिव लिबरलाइजेशन का उद्देश्य भारत में एक बड़ा, मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना है.&amp;rsquo;
इसरो ने कहा, &amp;lsquo;इंडस्ट्री, स्टार्टअप और एकेडमिक जगत को स्पेस की पूरी वैल्यू चेन में भागीदारी के लिए सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे इसरो की क्षमताओं को विस्तार मिल सके. इसलिए इन सुधारों को निजीकरण के रूप में नहीं, बल्कि इकोसिस्टम और क्षमताओं के विस्तार के तौर पर देखा जाना चाहिए.&amp;rsquo;
बदलाव नेशनल स्पेस इकोसिस्टम की दिशा में- ISRO
ISRO ने कहा, &amp;lsquo;क्योंकि भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमताएं बढ़ी हैं, ऐसे में अब मैच्योर और बड़े पैमाने पर किए जाने वाले भारतीय इंडस्ट्री की तरफ से किए जा सकते हैं. इसरो पहले ही कई टेक्नोलॉजिज को ट्रांसफर कर चुका है. किसी भी मैच्योर टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर करने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि इसरो उस सेक्टर से अब पीछे हट रहा है.&amp;rsquo;
संगठन ने कहा, &amp;rsquo;इससे लार्ज-स्केल प्रोडक्शन, कमर्शियलाइजेशन, इनोवेशन और वैश्विक बाजार तक पहुंच संभव होती है. इसके साथ ही, इसरो के वैज्ञानिक और तकनीकी मैनपावर को एडवांस रिसर्च, नेक्स्ट-जेनरेशन टेक्नोलॉजिज और कॉम्प्लेक्स नेशनल मिशनों पर फोकस करने का मौका मिलता है. इसलिए यह बदलाव इसरो के नेतृत्व वाले नेशनल स्पेस इकोसिस्टम की दिशा में है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;आतंक से नक्सलवाद तक कसी नकेल&#039;, शाह ने बताया कैसे मजबूत हुई आंतरिक सुरक्षा ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिगरेट नहीं दी तो मार डाला, चेन्नई में 4 नशेड़ियों ने की मजदूर की हत्या</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिगरेट-नहीं-दी-तो-मार-डाला-चेन्नई-में-4-नशेड़ियों-ने-की-मजदूर-की-हत्या</link>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पास नोलांबुर इलाके में शनिवार (5 सितंबर, 2026) की रात मामूली विवाद के बाद चार लोगों के एक गिरोह ने 62 वर्षीय प्रवासी मजदूर की पीट-पीटकर हत्या कर दी. मृतक की पहचान पश्चिम बंगाल के रहने वाले एन. अभिजीत मंडल के रूप में हुई है.
पुलिस के मुताबिक, मृतक अभिजीत मंडल नोलांबुर के गजलक्ष्मी नगर में एक निर्माणाधीन साइट पर काम कर रहे थे. शनिवार की रात करीब 10:15 बजे उसी इलाके के चार युवक, जो कथित तौर पर नशे में धूत थे, उनके पास पहुंचे और सिगरेट मांगी. मंडल ने सिगरेट देने से इनकार किया, तो दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई. आरोप है कि इसके बाद युवकों ने जमीन पर पड़ा एक डंडा उठाया और मंडल पर हमला कर दिया. नशेड़ियों के हमले में 62 वर्षीय अभिजीत मंडल के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं.
मामले की जांच में जुटी पुलिस
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने घायल प्रवासी मजदूर अभिजीत मंडल को सरकारी किलपॉक मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रविवार (6 सितंबर, 2026) की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मामले में नोलांबुर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.&amp;nbsp;

जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वी. वसीगरन, आर. अजय, एस. गोकुल राज और आर. सबरी के रूप में हुई है. इन चारों आरोपियों में से तीन वसीगरन, अजय और गोकुल राज की उम्र 18 वर्ष बताई जा रही है. फिलहाल, पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है.&amp;nbsp;
घटना का वीडियो आया सामने
घटना के सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे नशे में धूत चारों लड़के बुजुर्ग मजदूर पर लात-घूसों, डंडा और पटरे से हमला किया. यहां तक की एक नशेड़ी ने सड़क पार खड़ी एक साइकिल को उठाकर भी बुजुर्ग मजदूर के ऊपर फेंक कर हमला किया. इसके बाद नशेड़ी कुछ मिनटों के लिए वहां पर से गायब हो गए और जब वे फिर लौटे तब उन्होंने एक बार फिर से बुजुर्ग मजदूर पर हमला किया. इसके बाद खून से लथपथ मजदूर को सड़क पर पड़ा हुआ छोड़कर भाग गए.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः राहुल या विजय, कौन होगा INDIA गठबंधन का चेहरा? KC वेणुगोपाल ने कर दिया साफ ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>राहुल या विजय, कौन होगा INDIA गठबंधन का चेहरा? KC वेणुगोपाल ने कर दिया साफ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राहुल-या-विजय-कौन-होगा-india-गठबंधन-का-चेहरा-kc-वेणुगोपाल-ने-कर-दिया-साफ</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस के संगठन महासचिव और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने 2029 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेतृत्व और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर रविवार (6 सितंबर, 2026) को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ही 2029 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करेंगे.
इसके साथ ही, उन्होंने उन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें टीवीके ने अपने नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को गठबंधन की तरफ से पीएम पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया है.
TVK चीफ विजय की उम्मीदवारी पर बोले वेणुगोपाल
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केरलम में त्रिशूर में पत्रकारों से बातचीत में जब कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से टीवीके प्रमुख के पीएम उम्मीदवारी को लेकर सवाल किया गया, तब उन्होंने कहा, &amp;lsquo;टीवीके ने ऐसी कोई मांग नहीं की है. किसी को भी इस तरह का भ्रम पैदा नहीं करना चाहिए. राहुल गांधी ही इंडिया गठबंधन का चेहरा होंगे.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

उन्होंने कहा, &amp;lsquo;छात्रों, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी के राजनीतिक अभियानों को पूरे देश में व्यापक ध्यान मिला है. आज भारत मे सबसे ज्यादा चर्चा उसी लड़ाई की हो रही है, जिसका नेतृत्व राहुल गांधी कर रहे हैं. चाहे वह छात्रों, किसानों या युवाओं के लिए हो, सभी ने इसे स्वीकार किया है.&amp;rsquo;
हर कोई राहुल के काम पर ध्यान दे रहा- केसी वेणुगोपाल
वहीं, जब राहुल गांधी के अगले आम चुनाव में नेतृत्व को लेकर सवाल किया गया, तब उन्होंने कहा, &amp;lsquo;निश्चित रूप से राहुल गांधी ही विपक्षी इंडिया गठबंधन का नेतृत्व करेंगे. राहुल गांधी आज भारत की जनता के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं. हर कोई राहुल गांधी के फैसलों और उनके कामों पर बहुत ध्यान दे रहा है.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;कुछ राज्यों में गठबंधन के घटक दलों के बीच मतभेद होने के बावजूद इंडिया गठबंधन मजबूत बना हुआ है. इंडिया गठबंधन आगे बढ़ रहा है. कुछ राज्यों में ऐसे मुद्दे हैं, जहां हम एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. इसके बावजूद गठबंधन ही आगे बढ़ रहा है. यही सच है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः निजीकरण की खबरों पर ISRO का आया रिएक्शन, कहा - &#039;यह पूरी तरह से...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>राहुल, या, विजय, कौन, होगा, INDIA, गठबंधन, का, चेहरा, वेणुगोपाल, ने, कर, दिया, साफ</media:keywords>
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        <title>PM मोदी ने मेट्रो में किया सफर, बच्चों से की बात, काशी को क्यों किया याद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-ने-मेट्रो-में-किया-सफर-बच्चों-से-की-बात-काशी-को-क्यों-किया-याद</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-ने-मेट्रो-में-किया-सफर-बच्चों-से-की-बात-काशी-को-क्यों-किया-याद</guid>
        <description><![CDATA[ दिल्ली मेट्रो में शनिवार (5 सितंबर 2026) की शाम उस समय यात्रियों की नजरें ठहर गईं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम यात्रियों के साथ ट्रेन में सफर करते दिखाई दिए. उस दौरान पीएम मोदी ने बच्चों के साथ बात करते हुए नजर आए. इससे जुड़ा वीडियो पीएम मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर शेयर किया. उन्होंने लिखा कि मेट्रो मोमेंट्स कल शाम SRCC तक और वापस आने के सफ़र के दौरान की बातचीत की.
PM मोदी ने सफर के दौरान एक बच्ची से पूछा भी क्या नाम है तुम कहां जा रही हो. इसके अलावा एक अन्य बच्चे ने कहा कि 5 सितंबर को हमलोग टीचर डे मनाते हैं. हमारे साथ सर्वपल्ली राधाकृष्णन नहीं है, जिन्होंने ढेर सारे स्टूडेंट को प्रेरित किया था, लेकिन आज हमारे आप (पीएम मोदी) है जो सारे स्टूडेंट को प्रेरित करते हैं. इसके लिए मैं आपको बहुत धन्यवाद करता हूं.

Metro moments&amp;hellip;Conversations during last evening&amp;rsquo;s journey to SRCC and back. pic.twitter.com/GHIuPqYAKI
&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) September 6, 2026



पीएम मोदी ने किताबें पढ़ने की सलाह दी
पीएम मोदी ने बच्चों को किताबें पढ़ने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि हमें स्कूल की किताबों के अलावा भी बाहर की किताबें पढ़ने चाहिए खासकर ऑटोबायोग्राफी चाहे वो किसी खिलाड़ी की हो कलाकार, वैज्ञानिक की भी हो सकती है. मेट्रो में सफर करने के दौरान पीएम मोदी ने काशी को भी याद किया, जो उनका संसदीय क्षेत्र है. पीएम मोदी ने एक लड़की से पूछा कि काशी के लोग खुश है. वहां विकास का काम हो रहा है.
SRCC का शताब्दी समारोह&amp;nbsp;
पीएम मोदी दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए जा रहे थे. इसी दौरान उन्होंने दिल्ली मेट्रो से सफर किया. मेट्रो में प्रधानमंत्री को अपने बीच देखकर यात्रियों में भी उत्साह देखने को मिला. बच्चों के साथ बातचीत करते हुए पीएम मोदी का सहज अंदाज वीडियो में नजर आया, जिसके बाद उनकी यह यात्रा चर्चा में आ गई.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>मोदी, ने, मेट्रो, में, किया, सफर, बच्चों, से, की, बात, काशी, को, क्यों, किया, याद</media:keywords>
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        <title>दिनेश शर्मा बने अंडमान के उपराज्यपाल, पत्नी ने बताया क्या सबसे बड़ी चुनौती</title>
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        <description><![CDATA[ भाजपा के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. उनकी नियुक्ति पर पत्नी जयलक्ष्मी शर्मा ने खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि दिनेश शर्मा ने अब तक अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाया है. उन्हें उम्मीद है कि नई जिम्मेदारी को भी वह इसी तरह पूरी मेहनत, जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ निभाएंगे.
परिवार ने साथ मिलकर मनाई खुशी
जयलक्ष्मी शर्मा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, &amp;ldquo;वो अपनी जिम्मेदारियों को हमेशा से बहुत अच्छे से निभाते रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि वो उतनी ही मेहनत, जिम्मेदारी से, ईमानदारी से इस पद के लिए भी काम करेंगे. बहुत खुशी का माहौल है. पूरा परिवार रात में इकट्ठा हुआ और हम सबने खूब एन्जॉय किया.&amp;rdquo;
उन्होंने आगे कहा कि नई जिम्मेदारी के साथ कई चुनौतियां भी सामने हैं. उन्होंने कहा, &amp;ldquo;ये जिम्मेदारी और चुनौतियां हम दोनों के ही सामने हैं.&amp;rdquo;

#WATCH | Lucknow: On BJP MP Dr Dinesh Sharma being appointed as the Lieutenant Governor of the Andaman and Nicobar Islands, his wife Jayalakshmi Sharma says, &quot;He has always fulfilled his responsibilities exceptionally well, and I am confident that he will work in this role with&amp;hellip; pic.twitter.com/KJKlgqSha3
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 6, 2026



राष्ट्रपति भवन से जारी हुई नियुक्ति की अधिसूचना
शनिवार देर रात राष्ट्रपति भवन की ओर से दिनेश शर्मा की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई. दिनेश शर्मा वर्ष 2023 में राज्यसभा सदस्य चुने गए थे. इससे पहले वह मार्च 2017 से वर्ष 2022 तक उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहे.
लखनऊ विश्वविद्यालय में रहे वाणिज्य के प्रोफेसर
दिनेश शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य के प्रोफेसर रह चुके हैं. उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से लंबे समय से जुड़े और मिलनसार राजनेता के रूप में जाना जाता है. वह दो बार लखनऊ के महापौर भी चुने गए.
पहली बार नवंबर 2006 में उन्होंने लखनऊ के महापौर का चुनाव जीता था. इसके बाद जुलाई 2012 में वह दोबारा इस पद पर चुने गए.
1988 से लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे थे
दिनेश शर्मा ने वर्ष 1988 में लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन शुरू किया था. उनका अपना शिक्षण संस्थान भी है. उनका राजनीतिक सफर आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ था.
लखनऊ का महापौर बनने से पहले वह भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे
अगस्त 2014 में दिनेश शर्मा को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था. इसके बाद उन्हें गुजरात का प्रभारी बनाया गया. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद शुरू किए गए सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर दी गई थी.
दिनेश शर्मा को भाजपा के मौजूदा नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिना जाता है. राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री के रूप में राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव के बाद अब उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
यह भी पढ़िएः गोवा दौरे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, BJP क्या कर रही प्लानिंग?
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;अपनी कमियां छिपाने के लिए विपक्ष पर सवाल&amp;apos;, खरगे ने PM मोदी पर कसा तंज</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (5 सितंबर 2026) को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी SRCC के शताब्दी समारोह में शामिल हुए. इस कार्यक्रम में उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी और विपक्ष पर भी निशाना साधा. अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर प्रतिक्रिया दी है.
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि SRCC में प्रधानमंत्री का जाना युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर बातचीत का अच्छा मौका था, लेकिन उनके मुताबिक, युवाओं के सवालों पर चर्चा करने के बजाय कार्यक्रम का भाषण राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित हो गया.

.@narendramodi जी कल दिल्ली विश्वविद्यालय के SRCC में गए. यह देश के युवाओं, शिक्षा और उनके भविष्य पर संवाद का अवसर था. लेकिन अफसोस, युवाओं के सवालों का सामना करने के बजाय भाषण फिर एक राजनीतिक प्रचार में बदल गया.मोदी जी की Modus Operandi &amp;mdash; लोकतंत्र में सवालों को दबाने के लिए&amp;hellip;
&amp;mdash; Mallikarjun Kharge (@kharge) September 6, 2026



विपक्ष को नए-नए नाम देना सरकार की रणनीति-खरगे
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष पर अलग-अलग तरह के विशेषण लगाए जाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कथित नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए हर साल विपक्ष के लिए नए नाम इस्तेमाल करती है. खरगे ने अपनी पोस्ट में &amp;lsquo;नाराज़ फूफा&amp;rsquo;, &amp;lsquo;दिमाग़ी नक्सल&amp;rsquo;, &amp;lsquo;अर्बन नक्सल&amp;rsquo;, &amp;lsquo;खान मार्केट गैंग&amp;rsquo;, &amp;lsquo;आंदोलनजीवी&amp;rsquo; और &amp;lsquo;परजीवी&amp;rsquo; जैसे शब्दों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नाम और विशेषण बदल सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों में बदलाव नहीं आया है.
आउट रीच तभी करनी पड़ती है, जब आप आउट ऑफ रीच हो जाते हैं
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री की युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति लोगों से दूर हो जाता है, तभी उसे दोबारा लोगों तक पहुंच बनाने की जरूरत महसूस होती है. खरगे ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में दिखाए गए &amp;lsquo;रिपोर्ट कार्ड&amp;rsquo; का जिक्र करते हुए कहा कि देश का युवा भी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर खड़ा है. उनके मुताबिक युवाओं के सामने बेरोजगारी, सरकारी नौकरियों की लंबित भर्तियां और परीक्षा में पेपर लीक जैसी समस्याएं हैं.
शिक्षा और छात्रवृत्ति को लेकर भी कांग्रेस का हमला
खरगे ने अपनी पोस्ट में शिक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि छात्रों के सामने महंगी होती शिक्षा और छात्रवृत्ति के सीमित होते अवसर जैसी चुनौतियां हैं. इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर भी चिंता जताई. कांग्रेस अध्यक्ष ने युवाओं से जुड़े इन मुद्दों को #ChhatronKiGoonj के साथ उठाते हुए कहा कि इन सवालों पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केवल दूसरी बातों की ओर ध्यान खींचने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा. इस तरह SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद कांग्रेस की ओर से तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है. खरगे ने अपने बयान के जरिए बेरोजगारी, भर्ती, पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखते हुए सरकार से जवाब मांगा है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>अरूणाचल में भारत&amp;चीन कोर कमांडर की पहली बड़ी बैठक, क्या है एजेंडा</title>
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        <description><![CDATA[ अरूणाचल प्रदेश में भारत और चीन के कोर कमांडर के बीच पहली बड़ी बीपीएम मीटिंग का आयोजन होगा. चीन सीमा पर किबिथू के करीब वाचा-डमई बॉर्डर पर्सनैल मीटिंग (बीपीएम) पॉइंट पर रविवार (6 सितंबर) को मीटिंग होगी. पिछले एक महीने से भारत और चीन की सेनाओं के बीच अपर सुबानसरी इलाके में तनातनी चल रही है. हालांकि भारतीय सेना की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
सूत्रों ने बताया कि पूर्वी सेक्टर में कोर कमांडर स्तर के अधिकारियों के बीच आज पहली बैठक होगी. इस बैठक से इलाके में चल रहे मुद्दों को सुलझाने में मदद मिलेगी. बता दें कि ये बैठक भारतीय पक्ष की ओर से वाचा बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर आयोजित होगी.
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल&amp;nbsp;चीनी कमांडरों के साथ बैठक में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व 3 कोर कमांडर करेंगे. अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की देखरेख भारतीय सेना के 2 कोर फॉर्मेशन करते हैं, जिनमें तेजपुर स्थित 4 कोर और रंगापहार स्थित 3 कोर शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने उस इलाके में चीनी सैनिकों के रुख से निपटने के लिए बहुत ही सख्त रवैया अपनाया है.
गलवान झड़प&amp;nbsp;एक्सपर्ट के मुताबिक भारत और चीन की अपनी-अपनी सीमाओं में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल को लेकर अलग-अलग समझ है. कभी-कभी इससे जमीनी स्तर पर समस्याएं पैदा हो जाती हैं. 2020 में गलवान झड़प में दोनों ही पक्षों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बाद से भारत और चीन लद्दाख सेक्टर में चुशुल-मोल्डो बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर LAC के मुद्दों को सुलझाने के लिए कोर कमांडर स्तर की बैठकें करते हैं.
अजीत डोभाल की चीन यात्रा&amp;nbsp;बता दें कि ये बैठक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की चीन यात्रा के बाद हो रही हैं. इसके बाद दोनों पक्षों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कई उपायों की घोषणा की. सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी हाल ही में 3 कोर मुख्यालय का दौरा किया था.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अरूणाचल, में, भारत-चीन, कोर, कमांडर, की, पहली, बड़ी, बैठक, क्या, है, एजेंडा</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;वरना न्याय मिलने तक ये...&amp;apos;, महाराष्ट्र में छात्रों के प्रदर्शन पर राहुल की सरकार को चेतावनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वरना-न्याय-मिलने-तक-ये-महाराष्ट्र-में-छात्रों-के-प्रदर्शन-पर-राहुल-की-सरकार-को-चेतावनी</link>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र में लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं के पैटर्न में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का विरोध तेज हो गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हजारों छात्र सड़कों पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. यह नाराजगी सिर्फ किसी एक परीक्षा या भर्ती को लेकर नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम से टूटे भरोसे का नतीजा है.
राहुल गांधी ने एक्स पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि चाहे केंद्र की सरकार हो या राज्य की, भाजपा सरकार से छात्र परेशान हैं. उन्होंने पेपर लीक, भर्तियां रुके होने, शिक्षा की बढ़ती लागत, हॉस्टल की खराब व्यवस्था, खराब गुणवत्ता वाले भोजन और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) में धोखाधड़ी जैसे मुद्दों का जिक्र किया.
उन्होंने आगे कहा कि अब MPSC जैसी संवैधानिक संस्था पर कब्जा कर उसकी विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाया गया है.
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के सफल भविष्य से जुड़ी उनकी हर मांग जायज है. सरकार को छात्रों की आवाज सुनकर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो न्याय मिलने तक छात्रों की आवाज और तेज होती जाएगी.

महाराष्ट्र में हजारों छात्र सड़कों पर हैं, शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलनरत हैं - इसकी वजह सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती नहीं, पूरे सिस्टम से टूट चुका भरोसा है।चाहे वो केंद्र की हो या राज्य की, BJP सरकार से हर छात्र त्रस्त है। पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियां, शिक्षा की असहनीय लागत, हॉस्टल&amp;hellip;
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 6, 2026



चार सितंबर को बारिश में भी छात्रों का प्रदर्शन
अपने अधिकारों की मांग को लेकर चार सितंबर को बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतरे. बारिश के बीच भी छात्रों ने अपना विरोध जारी रखा. प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर &amp;lsquo;आक्रोश मोर्चा&amp;rsquo; निकाला.
इसके बाद जिला कलेक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा गया. इस दौरान कलेक्टर कार्यालय का पूरा परिसर छात्रों और युवाओं के जोरदार नारों से गूंज उठा.&amp;nbsp;
नासिक में आदिवासी छात्रों का आंदोलन जारी
इधर, महाराष्ट्र के सरकारी सहायता प्राप्त आश्रम स्कूलों की बदहाल स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों की मौत के मुद्दे को लेकर नासिक में आदिवासी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है.
नासिक के ईदगाह मैदान में 100 से अधिक आदिवासी छात्र आंदोलन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी आश्रम स्कूलों की व्यवस्था, छात्रों की सुरक्षा और उनकी मौत से जुड़े मामलों को लेकर सरकार से जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
यह भी पढ़िएः कांग्रेस ने सचिन पायलट को दी बड़ी जिम्मेदारी, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र पर फैसला
&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PM मोदी GenZ स्टाइल में बोले &amp; &amp;apos;यहां के एल्युमिनाई OG हैं&amp;apos;, लगे ठहाके</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-genz-स्टाइल-में-बोले-यहां-के-एल्युमिनाई-og-हैं-लगे-ठहाके</link>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में भाग लेने पहुंचे. जहां उन्होंने जेन जी के स्टाइल में कहा कि यहां के एल्युमिनाई OG हैं. पीएम मोदी के ऐसा बोलने पर जोरदार ठहाके लगे. पीएम मोदी ने कहा कि सौ से अधिक साल से श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) ने छात्रों की पीढ़ियों को सीखने, आगे बढ़ने और बदलाव लाने का अवसर प्रदान किया है.
पीएम मोदी ने कहा, साल 2013 में घोटाले चरम पर थे. देश निराशा के दलदल में था. निराशाजनक खबरें आती रहती थी. बता दें कि साल 2013 में देश में कांग्रेस की सरकार थी.

#WATCH | Delhi: At the centenary celebrations of Shri Ram College of Commerce (SRCC), Prime Minister Narendra Modi says, &quot;The alumni of SRCC have also been very special. In your language, I would say the alumni here are the OGs. They have taken the name of SRCC across the world&amp;hellip; pic.twitter.com/MvPvz2kGNi
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 5, 2026






कॉलेज के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का भाषण
प्रधानमंत्री मोदी ने कॉलेज के शताब्दी समारोह में कहा, &#039;&#039;SRCC के छात्र अपने कॉलेज की प्रसिद्धि को वैश्विक स्तर पर ले गये. मैं जब 2013 में SRCC में पहुंचा था तब मैं प्रतिपक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहा था, किंतु इसके बावजूद मैंने इस मंच का इस्तेमाल तत्कालीन सरकार की आलोचना करने के लिए नहीं किया.SRCC में 2013 में दिया गया मेरा भाषण एक &amp;lsquo;वेब&amp;rsquo; बन गया था और आज 13-14 साल बाद भी उस भाषण का असर बरकरार है. नीतिगत पंगुता से नीतिगत गतिशीलता तक, भारत ने एक लंबा सफर तय किया है.&#039;&#039; PM मोदी ने मौजूदा जीडीपी पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर उसकी आर्थिक मजबूती को दर्शाती है.
&#039;मेड इन इंडिया&#039; से लेकर आज तक का जिक्र
PM मोदी ने अपने 2013 के भाषण में &amp;lsquo;मेड इन इंडिया&amp;rsquo; की जरूरत बताए जाने का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस समय कुछ लोगों को यह विचार मुश्किल या असंभव लगता था, लेकिन आज भारत में बने उत्पादों और देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की पहचान बढ़ी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि वह SRCC में अपना &amp;lsquo;रिपोर्ट कार्ड&amp;rsquo; लेकर आए हैं. उनके भाषण का मुख्य संदेश यही रहा कि 2013 में जिस बदलाव और आत्मनिर्भरता की बात उन्होंने की थी, उसके बाद भारत की अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था में कई बदलाव हुए हैं.

&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>‘2013 में देश निराशा के दलदल में था’, SRCC में PM मोदी का कांग्रेस पर हमला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/2013-में-देश-निराशा-के-दलदल-में-था-srcc-में-pm-मोदी-का-कांग्रेस-पर-हमला</link>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा है. उन्होंने देश में कांग्रेस के शासन का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2013 में देश निराशा के दलदल में धंसा हुआ था. विकास फर्स पर थी और महंगाई अर्स पर थी. घोटाले चरम पर थे और भ्रष्टाचारी बेखौफ घूमते थे. अर्थव्यवस्था बेहाल थी, चारों तरफ पॉलिसी पैरालिसिस की चर्चा थी. दुनिया भारत को फ्रेजाइल-5 में गिन रही थी, आतंकी बेलगाम थे और पाकिस्तान बेकाबू था. यानी तब निराशा और हताशा के अलावा कुछ नहीं था.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
पुराने संबोधन का जिक्र कर बोले पीएम मोदी
2013 में SRCC में दिए अपने संबोधन के बारे में जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, &amp;lsquo;2013 में मैं मुख्यमंत्री तो था, लेकिन देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का एक सदस्य भी था, लेकिन विपक्ष में होने के बाद भी, तत्कालीन सरकार का आलोचक होने के बावजूद मैंने इस मंच का वो इस्तेमाल नहीं किया था. मैंने एक विजन रखा, सकारात्मक बाते कहीं. मैंने तब जो कुछ कहा वो मेरा Conviction था. उसको मैं जीता रहा और रास्ते पर चलता रहा.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैंने उस दिन पानी के ग्लास का उदाहरण दिया था. मैंने बताया कि पानी के आधे भरे ग्लास के देखने के तीन नजरिए क्या होते हैं- पहला आधा भरा दिखता है, दूसरा आधा खाली दिखता है और तीसरा जिनको पूरा भरा हुआ दिखता है, वो आधा पानी और आधा हवा से भरा हुआ. ये वो समय था जब देश निराशा के दलदल में धंसा हुआ था. मैंने तब भी कहा था कि मैंने ग्लास को पूरा भरा हुआ देखता हूं.

BREAKING | &#039;2013 में देश निराशा के दलदल में था&#039; - PM मोदीhttps://t.co/SMm0dUypVm #Delhi #SRCC #PMModi #ABPNews pic.twitter.com/us8wKoclaG
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) September 5, 2026



पीएम मोदी ने छात्रों को कांग्रेस शासन की घटनाएं बताईं
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;आप जब 2013 के आसपास की खबरें पढ़ेंगे और देखेंगे कि स्थिति क्या थी, उस समय जो हेडलाइन हुआ करती थी, मैं आज आपको उस समय के हेडलाइन दिखाता हूं &amp;ndash; &amp;lsquo;LOC पर भारतीय सैनिकों की हत्या&amp;rsquo;, &amp;lsquo;वर्ल्ड बैंक ने जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान घटाया&amp;rsquo;, &amp;lsquo;करंट अकाउंट डेफिसिट ऑल टाइम हाई&amp;rsquo;, &amp;lsquo;हेलीकॉप्टर के सौदे में घूसखोरी का पर्दाफाश&amp;rsquo;, &amp;lsquo;महंगाई दर करीब 10 प्रतिशत के दर पर&amp;rsquo;, &amp;lsquo;इंडस्ट्रियल सेक्टर मंदी की चपेट में&amp;rsquo;, &amp;lsquo;हैदराबाद में बम ब्लास्ट&amp;rsquo;&amp;mdash; ये सभी उस वक्त की हेड लाइन्स थी.&amp;rsquo;
यह भी पढ़ेंः PM मोदी का राहुल गांधी पर हमला, &#039;सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज नहीं टिकेगी&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘2013, में, देश, निराशा, के, दलदल, में, था’, SRCC, में, मोदी, का, कांग्रेस, पर, हमला</media:keywords>
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        <title>कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल, पंजाब से गुजरात तक बदले प्रभारी</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. पार्टी ने गुजरात से पंजाब तक अपने प्रभारी बदले हैं. भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी से हटकर असम का प्रभारी महासचिव बनाया गया. सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई.&amp;nbsp; सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का इंचार्ज बनाया गया. रणदीप सुरजेवाला को प्रभारी महासचिव गुजरात बनाया गया.
कांग्रेस की तरफ से प्रेस रिलीज में बताया गया है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी संगठन में AICC के जनरल सेक्रेटरी / इंचार्ज का कुछ राज्यों में फेरबदल किया गया है.&amp;nbsp;
पार्टी ने प्रेस रिलीज में बताया,&#039; भूपेश बघेल को असम का प्रभारी महासिचव बनाया गया है. उनकी जगह पंजाब में सचिन पायलट को प्रभारी महासिचव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अलावा रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी महासिचव नियुक्त किया गया है. वहीं, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़, डॉ. सिरीवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पीवी मोहन को आंध्र प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है.&#039;
रणदीप सुरजेवाला को अतिरिक्त जिम्मेदारी
इसके अलावा ब्रीफिंग में कहा गया है कि रणदीप सुरजेवाला कर्नाटक के महासविच प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभालेंगे. इसके अलावा श्री मुकुल वासनिक AICC के महासचिव पद पर बने रहेंगे.&amp;nbsp;
पार्टी ने की निवर्तमान प्रभारियों की सराहना
इसके अलावा पार्टी की तरफ से जानकारी देते हुए कहा गया है कि पार्टी निवर्तमान महासचिव प्रभारियों के योगदान की सरहाना करता है. इनमें जितेंद्र सिंह, रमेश चेन्निथला और मणिकम टैगोर शामिल हैं. कांग्रेस ने इन बदलावों के जरिए राज्यों में संगठनात्म जिम्मेदारियों का बंटवारा किया है. इस प्रेस रिलीज में संगठन के महासचिव केसी वेणुगोपाल के साइन हैं. सभी नियुक्तियों के तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया गया है.&amp;nbsp;
पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी रणनीतिपंजाब और गुजरात में आगामी चुनाव को देखते हुए पार्टी की तरफ से इस फेरबदल को माना जा रहा है. पार्टी ने पंजाब की बड़ी जिम्मेदारी सचिन पायलट को सौंपी है. वह एक युवा चेहरा भी हैं. वहीं, भूपेश बघेल को यहां से हटाकर असम भेज दिया गया है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>PM मोदी का राहुल गांधी पर हमला, &amp;apos;सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज नहीं टिकेगी&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-का-राहुल-गांधी-पर-हमला-सच-की-हुंकार-के-आगे-झूठ-की-गूंज-नहीं-टिकेगी</link>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (5 सितंबर, 2026) को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में संबोधन के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर हमला किया. उन्होंने कहा कि उन लोगों के बारे में सोचिए जो करोड़ों लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने की कोशिशों का भी विरोध कर रहे थे. असल में, ऐसे लोगों को ग्लास आधा भरा हुआ देखने में मजा आता है, ताकि देश के आम गरीब लोग उन पर निर्भर रहें. यही &amp;lsquo;माई-बाप&amp;rsquo; कल्चर है, जो वे दशकों से चला रहे हैं. मैं जानता हूं कि सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज टिक नहीं पाएगी. कहा- &#039;ये मोदी है, ये &#039;माई-बाप&#039; कल्चर को सपोर्ट करने वालों के सामने चट्टान की तरह खड़ा रहता है.&#039;&amp;nbsp;&amp;nbsp;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;जिन लोगों ने लंबे समय तक देश पर राज किया, उनका एक खास स्टाइल था, आग लगने पर ही जागना और सूखा पड़ने पर ही कुआं खोदना. मैंने इस अप्रोच को बदलने की बात कही थी और 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद हमने उस बदलाव को असलियत में करके दिखाया.&amp;rsquo;
जो मजाक उड़ाते थे, वो आज मेक इन इंडिया की ब्रांड वैल्यू देखें- PM मोदी&amp;nbsp;
पीएम मोदी ने कहा, &amp;lsquo;मुझमें हिम्मत है, इसीलिए मैं आपको याद दिला रहा हूं कि मैंने उस दिन क्या कहा था. मैं अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर आपके सामने आया हूं. 2013 में इसी प्रोग्राम में, जब मैंने कहा था कि हमें &amp;lsquo;मेड इन इंडिया&amp;rsquo; की तरफ काम करने की जरूरत है, तो उस समय के इकोसिस्टम के लोग इसे समझ ही नहीं पाए थे. उन्हें लगता था कि उस निराशा के दौर में मेड इन इंडिया नामुमकिन है और जो लोग उस सोच के साथ पले-बढ़े हैं, वे आज भी मेड इन इंडिया का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन आज आप मेक इन इंडिया की ब्रांड वैल्यू देख सकते हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
पीएम मोदी की विपक्ष पर तीखी टिप्पणी

#WATCH | Delhi: At the centenary celebrations of Shri Ram College of Commerce (SRCC), PM Narendra Modi says, &quot;You will meet two kinds of people. One kind transforms the strength of society into the strength of the nation. The other becomes &#039;Naraz Fufa&#039; whenever any work is&amp;hellip; https://t.co/f8QqVjsyXk pic.twitter.com/4lz2FNWgFR
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 5, 2026



इसके अलावा, पीएम मोदी ने इशारों-इशारों में विपक्ष पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;देश में अलग-अलग प्रजाति के लोग हैं. एक वो लोग हैं, जो पॉजिटिव तरीके से समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में बदलते हैं, जबकि दूसरे वो लोग हैं, जो हर चीज में नाराज फूफा बन जाते हैं. उनका एक ही डायलॉग है- &amp;lsquo;इसकी क्या जरूरत है!&amp;rsquo;
पीएम मोदी ने कहा, &amp;lsquo;जब हम दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू बना रहे थे, तब उन्होंने कहा कि इसकी क्या जरूरत है. इन्होंने बुलेट ट्रेन, UPI, चिप और नई संसद पर भी ऐसा ही कहा. जब हमने हमारे वीर सेना नायकों का मेमोरियल बनाया, तो फूफा फिर मैदान में आ गए, बोले- इसकी क्या जरूरत थी, लेकिन भारत ने ऐसे सारे फूफाओं को जवाब दिया कि जो देश के लिए जरूरी है, वो भारत को करने से कोई रोक नहीं सकता.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढे़ंः &amp;lsquo;2013 में देश निराशा के दलदल में था&amp;rsquo;, SRCC में PM मोदी का कांग्रेस पर हमला ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोदी, का, राहुल, गांधी, पर, हमला, सच, की, हुंकार, के, आगे, झूठ, की, गूंज, नहीं, टिकेगी</media:keywords>
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        <title>सहारनपुर मस्जिद टूटने पर भड़के अरशद मदनी! बोले&amp; &amp;apos;संविधान और समान कानून...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सहारनपुर-मस्जिद-टूटने-पर-भड़के-अरशद-मदनी-बोले-संविधान-और-समान-कानून</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सहारनपुर-मस्जिद-टूटने-पर-भड़के-अरशद-मदनी-बोले-संविधान-और-समान-कानून</guid>
        <description><![CDATA[ सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक प्राचीन मस्जिद को तोड़े जाने के मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद दुखद बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इस घटना से संविधान, कानून और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं.
मदनी ने कहा कि अगर देश में कानून सभी लोगों और समुदायों के लिए बराबर है तो उसके इस्तेमाल में अलग-अलग मापदंड नहीं होने चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बुलडोजर की कार्रवाई कई मामलों में न्याय से ज्यादा बदले और भेदभाव की राजनीति जैसी दिखाई देने लगी है.

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित प्राचीन मस्जिद का ध्वस्तीकरण अत्यंत अफसोसजनक है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं तो उनके लागू करने में दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है? आज बुलडोजर न्याय की निशानी कम और बदले,&amp;hellip;
&amp;mdash; Arshad Madani (@ArshadMadani007) September 5, 2026



मस्जिद के रिकॉर्ड और जमीन को लेकर क्या दावा है?
अरशद मदनी ने अपने बयान में दावा किया कि संबंधित मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है और उसका वक्फ नंबर 451 है. उन्होंने यह भी कहा कि पुराने जमीन रिकॉर्ड में याकूब खान और वहीद खान के नाम दर्ज बताए जाते हैं. मदनी के मुताबिक, मस्जिद कमेटी ने अदालत के सामने 1911 से जुड़े दस्तावेज, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख भी पेश किए थे. उनका कहना है कि इतने पुराने दस्तावेजों और कानूनी दावों के बावजूद मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है. हालांकि, इन रिकॉर्ड और कानूनी दावों की अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी.
प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का भी किया जिक्र
अरशद मदनी ने अपने बयान में 1991 के Places of Worship Act का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह कानून अभी भी लागू है. साथ ही उन्होंने नए वक्फ कानून में &amp;lsquo;वक्फ बाई यूजर&amp;rsquo; से जुड़े प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े पुराने इस्तेमाल और रिकॉर्ड को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व दिया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि किसी धार्मिक स्थल को लेकर विवाद होने पर कार्रवाई से पहले उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी दावों की पूरी तरह जांच होनी चाहिए.
अतिक्रमण पर कार्रवाई हो तो नियम सभी के लिए बराबर हों
मदनी ने अपने बयान में यह भी सवाल उठाया कि अगर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण कार्रवाई का आधार है तो यही नियम हर धर्म और समुदाय के धार्मिक निर्माण पर समान रूप से लागू होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन, सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय से मौजूद किसी भी धार्मिक निर्माण के मामले में प्रशासन को एक जैसे नियम अपनाने चाहिए. उनके मुताबिक, किसी एक समुदाय के धार्मिक स्थल पर ज्यादा सख्ती और दूसरे मामलों में अलग रवैया समान न्याय की भावना पर सवाल खड़ा कर सकता है.
&#039;समान न्याय चाहते हैं, कोई विशेष रियायत नहीं&#039;
जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि भारत सभी धर्मों के लोगों का साझा देश है और संविधान किसी नागरिक को दूसरे से कम या ज्यादा अधिकार नहीं देता. उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समेत सभी समुदायों के लिए समान संवैधानिक अधिकारों की बात कही. मदनी ने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष रियायत की नहीं बल्कि समान न्याय की है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कानून सभी धार्मिक स्थलों के लिए समान है तो उसके लागू होने का तरीका भी सभी के लिए एक जैसा क्यों नहीं होना चाहिए.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सहारनपुर, मस्जिद, टूटने, पर, भड़के, अरशद, मदनी, बोले-, संविधान, और, समान, कानून...</media:keywords>
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        <title>कुवैत में पीड़ित भारतीय महिला ने लगाई मदद की गुहार, MEA ने उठाया कदम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कुवैत-में-पीड़ित-भारतीय-महिला-ने-लगाई-मदद-की-गुहार-mea-ने-उठाया-कदम</link>
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        <description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट के देश कुवैत में स्थित भारतीय दूतावास ने तमिलनाडु की रहने वाली एक घरेलु कामगार की मदद की गुहार पर मामले में हस्तक्षेप किया है. दरअसल, भारतीय महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट शेयर कर यह आरोप लगाया था कि खाड़ी देश में उसके साथ मारपीट की गई, उसका शोषण किया गया और उसे कई महीनों से वेतन भी नहीं दिया गया. इस मामले को लेकर विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावास ने महिला की मदद के लिए कदम उठाया है.
मामले पर क्या बोले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता?
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित महिला की पहचान तमिलनाडु की रहने वाली वनिता के रूप में हुई है, जिसने अपने वीडियो पोस्ट में अपने गृह राज्य के अधिकारियों से खुद को बचाने और वापस भारत लाने की अपील की थी. इस मामले को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (4 सितंबर, 2026) को नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रतिक्रिया दी.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;जैसे ही हमारे दूतावास को इस मामले की जानकारी मिली, उसने तुरंत ही मदद की पेशकश की. महिला फिलहाल भारतीय दूतावास में ही है. हम विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, भलाई और उनका वेलफेयर सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?

दरअसल, तमिलनाडु की कल्लाकुरिची जिले की निवासी वनिता ने कुवैत में रहने वाले अपने एम्प्लोयर्स पर आरोप लगाया कि उन्होंने वनिता को बहुत प्रताड़ित किया, उन्हें भूखा रखा और उन्हें वेतन भी नहीं देते थे. वनिता ने बताया कि वह करीब तीन महीने पहले ही एक इंप्लायमेंट एजेंट के जरिए काम करने के लिए कुवैत पहुंची थीं.
वीडियो में क्या बोली थीं वनिता?
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो पोस्ट में वनिता अपने सिर पर स्कार्फ बांधे हुए नजर आ रही थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पिछले 50 दिनों से ज्यादा समय से सही खाना नहीं दिया गया और दो महीने से उन्हें सैलरी भी नहीं दी गई है. उन्होंने अपने पोस्ट में हाथ जोड़कर कहा, &amp;lsquo;वे मुझे बहुत परेशान कर रहे हैं. मैं कलेक्टर मैडम और एसपी मैडम से अनुरोध करती हूं कि किसी भी तरह से मुझे बचाएं और मुझे वापस अपने देश भारत लौटने में मदद करें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &amp;lsquo;नौटंकी छोड़ें और...&amp;rsquo;, ममता बनर्जी के धरने की चेतावनी पर बोले गिरिराज सिंह ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>स्वतंत्र भारद्वाज कैसे घिरा? पुलिस ने दबोचा, लगा SC&amp;ST Act, चिराग ने बढ़ाई मुश्किलें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्वतंत्र-भारद्वाज-कैसे-घिरा-पुलिस-ने-दबोचा-लगा-sc-st-act-चिराग-ने-बढ़ाई-मुश्किलें</link>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता के साथ हुई मारपीट का मुद्दा शुक्रवार (4 सितंबर 2026) को दिनभर गरमाया रहा. आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के कबूलनामे के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया. सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि स्वतंत्र भारद्वाज पर आपराधिक डराने-धमकाने की धारा जोड़ी गई है. उन्होंने कहा, दिल्ली पुलिस ने निशु के पिता संजय जी की पहले से दर्ज FIR में गुंडे स्वतंत्र भारद्वाज पर SC/ST एक्ट के तहत आरोप लगाए हैं. इसमें जान से मारने की धमकी देने के लिए BNS की धारा 351(3) भी जोड़ी गई है.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;जल्द ही स्वतंत्र भारद्वाज पर हत्या की कोशिश या गैर-इरादतन हत्या की कोशिश की धारा भी जोड़ी जाएगी. हमारे वकील अभी पुलिस स्टेशन में हैं और पुलिस से उनके वादे को पूरा करने के लिए फॉलो-अप कर रहे हैं. वह उन्हें गंभीर चोट पहुंचाने वाली धारा भी जोड़ने के लिए मना रहे हैं ताकि मामला और सख्त हो सके.&#039; मामले नाम आने के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि उनका स्वतंत्र भारद्वाज से कोई संबंध नहीं है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ आधिकारिक शिकायत की है. उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की मांग की. &amp;nbsp;
निशु के पिता संजय आजाद पर 23 जून 2026 को हमला हुआ था. इस मामले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने जब से इस खुलेआम ये कबूला कि उसी ने ये अपराध किया है तो पुलिस एक्शन को लेकर देशभर में राजनीति गरमा गई है. स्वतंत्र भारद्वाज का क्लिप 3 सितंबर 2026 वायरल हुआ, जिसके बाद निशु को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का साथ मिला. इसके बाद 4 सितंबर को CJP के नेता दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग पर अड़े रहे.
निशु आजाद ने राहुल गांधी से मांगी मदद
इस मामले देशभर में चर्चा इसलिए और ज्यादा होने लगी क्योंकि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने वीडियो में बीजेपी ने बड़े नेताओं से संरक्षण मिलने की बात कही थी. उसने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा को अपना बड़ा भाई बताया. उसे पीएम मोदी को भी अपनी बड़ा भाई बताया, जिसके बाद विपक्ष ने इस मुद्दे पर लपक लिया है और बीजेपी पर गुंडों को संरक्षण देने का आरोप लगाया. निशु आजाद ने 3 सितंबर को दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़ा करते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मदद मांगी थी.
संसद मार्ग थाने के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा
वहीं स्वतंत्र भारद्वाज का पॉडकास्ट वीडियो वायरल होने के बाद सीजेपी ने 3 सितंबर को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए. पार्टी ने फैसला किया कि वे छात्रा निशु आजाद के पिता संजय आजाद को न्याय दिलाने के लिए 4 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन का घेराव करेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे. CJP के इस ऐलान के बाद 4 सितंबर को संसद मार्ग थाने के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला.
सुबह 10 बजे से ही सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका के नेतृत्व में CJP कार्यकर्ता और पीड़िता निशु आजाद संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे. CJP कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने थाने के बाहर भारी बैरिकेडिंग और सुरक्षा बल तैनात कर दिए थे. इस विरोध प्रदर्शन को बड़ा राजनीतिक मोड़ तब मिला जब आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी प्रदर्शनकारियों और निशु आजाद के समर्थन में संसद मार्ग थाने पहुंचे.
इन धाराओं में केस दर्ज करने का मिला आश्वासन&amp;nbsp;
संसद मार्ग थाने पर विरोध प्रदर्शन जब धीरे-धीरे बढ़ने लगा तो पुलिस भी एक्शन में आई. थोड़ी देर बाद निशु आजाद और चंद्रशेखर आजाद ने मीडिया को बताया कि दिल्ली पुलिस ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को अगले 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया. उनके मुताबिक, पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि वायरल वीडियो में जुर्म कबूलने के आधार पर FIR की समीक्षा की जाएगी और इस मामले में हत्या के प्रयास (BNS की धारा 109) और SC-ST एक्ट जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी जा रही हैं.
बवाल बढ़ा तो स्वतंत्र भारद्वाज ने लिया यू-टर्न
ये पूरा मामला 3 सितंबर की रात तक ही गरमा गया था क्योंकि एक तरफ सीजेपी ने थाने के बाद प्रदर्शन की बात कही थी. दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से सपोर्ट मिलने के बाद ये तय हो चुका था कि दिल्ली में 4 सितंबर को ये मामला जोर पकड़ेगा. बवाल बढ़ता देख आज सुबह आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज मीडिया के सामने आया और उसने अपने वायरल पॉडकास्ट वाले बयान से पूरी तरह यू-टर्न ले लिया. उसने दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप आउट ऑफ कॉन्टेक्स्ट है. स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा, &#039;जंतर-मंतर पर 10-15 लोगों की भीड़ ने मुझे घेर लिया था और मेरी मॉब लिंचिंग करने की कोशिश की. मैंने केवल सेल्फ-डिफेंस में हाथ चलाया था, जिससे मेरे हाथ में पहने कड़े से संजय आजाद के सिर पर चोट लग गई.&#039; उसने ये भी कहा कि नेताओं के फोन आने से पुलिस ने उसे नहीं छोड़ा, बल्कि वह जांच में सहयोग कर रहा था.
निशु आजाद के पिता संजय आजाद ने 4 सितंबर की सुबह कहा कि जंतर-मंतर पर उन पर अचानक हमला किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावर &#039;जय भीम&#039; के नारों से नाराज थे, जिसके बाद उन पर जानलेवा हमला किया गया और उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं. CJP ने कहा है कि अगर 72 घंटे में स्वतंत्र भारद्वाज जेल की सलाखों के पीछे नहीं गया तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा.
किस वीडियो पर देशभर में गरमाई राजनीति
स्वतंत्र भारद्वाज का क्लिप 3 सितंबर 2026 वायरल हुआ. इस वीडियो में उसे ये कहते हुए सुना जा सकता है, &#039;क्या आपको पता है कि इस अपराध में कौन सी धारा लगती है? धारा 307. उन्हें 60 टांके लगे थे. उस व्यक्ति  ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>स्वतंत्र, भारद्वाज, कैसे, घिरा, पुलिस, ने, दबोचा, लगा, SC-ST, Act, चिराग, ने, बढ़ाई, मुश्किलें</media:keywords>
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        <title>खरगे से जुड़े शुद्धिकरण विवाद पर बेंगलुरु में FIR, SC&amp;ST के तहत मामला दर्ज</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 8 अगस्त, 2026 को उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के विधान सौधा थाने में FIR दर्ज कराई गई है. FIR में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उत्तराखंड इकाई के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को नामजद किया गया है.
एफआईआर के मुताबिक, मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी SC-ST एक्ट, सिविल राइट्स प्रोटेक्शन एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं लगाई गईं हैं.
जेपी नड्डा को मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा पत्र
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने खुद इस मामले को लेकर गुरुवार (3 सितंबर, 2026) को राज्यसभा में नेता सदन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है. उन्होंने अपने पत्र में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होने पर नाराजगी जताई है. जेपी नड्डा को भेजे गए गए पत्र को खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में साझा किया.&amp;nbsp;

राज्यसभा में नेता सदन श्री @JPNadda को पत्र लिखकर हल्द्वानी में मेरी जनसभा के बाद रामलीला मैदान में कराए गए शुद्धीकरण (purification) के गंभीर मामले में उनके द्वारा सदन में दिए गए आश्वासन की मैंने याद दिलाई है और आग्रह किया है कि इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।24 दिन बीत जाने&amp;hellip; pic.twitter.com/QWtFACaSg6
&amp;mdash; Mallikarjun Kharge (@kharge) September 3, 2026



पोस्ट में उन्होंने कहा, &amp;lsquo;राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा को पत्र लिखकर हल्द्वानी में मेरी जनसभा के बाद रामलीला मैदान में कराए गए शुद्धीकरण (Purification) के गंभीर मामले में उनकी तरफ से सदन में दिए गए आश्वासन की मैंने याद दिलाई है और आग्रह किया है कि इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए. 24 दिन बीत जाने के बाद भी इस घृणित घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों व संगठनों के विरुद्ध FIR तक दर्ज नहीं की गई है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

पत्र में खरगे ने क्या मांग रखी?
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैंने अपने पत्र में स्पष्ट कहा है कि यह मुद्दा निजी तौर पर मेरे या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद से परे व्यापक तौर पर करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है, जो इस क्रूर वास्तविकता से रोज रूबरू होते रहते हैं. ऐसे गलत लोगों को सबक देना जरूरी है और मेरी मांग स्पष्ट है कि इन तथ्यों और राज्यसभा सदन में दिए गए आश्वासन के आलोक में आप मुख्यमंत्री उत्तराखंड को निर्देशित करते हुए यह सुनिश्चित करें कि हल्द्वानी में मेरी जनसभा के बाद रामलीला मैदान पर हुए शुद्धीकरण की इस घटना में संलिप्त व्यक्तियों और संगठनों पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करें.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;पिंजरे का तोता कभी पिटबुल...&amp;apos;, CBI&amp;ED के अधिकारों पर चिदंबरम का तंज</title>
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        <description><![CDATA[ पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने CBI-ED को और ज्यादा अधिकार देने के विचार को खारिज करते हुए कहा कि निगरानी और देखरेख की कमी के कारण पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद की लिखी किताब &#039;पुलिसिंग द रिपब्लिक&#039; के लॉन्च पर हुई एक पैनल चर्चा में चिदंबरम ने ये बातें कहीं&amp;nbsp;
पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पुलिस में स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) से लेकर डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) तक एक हैरारकी होती है. CBI में बेहतरीन अधिकारी होते हैं, जिनमें से ज़्यादातर राज्यों से डेपुटेशन पर आए होते हैं. वही अधिकारी राज्य में तो अच्छा काम करता है, लेकिन केंद्र में आकर बुरा अधिकारी क्यों बन जाता है? उन्होंने कहा कि देखरेख और निगरानी की कमी के कारण कभी-कभी पिंजरे में बंद तोता भी पिटबुल बन सकता है.&amp;nbsp;
&#039;राजनीतिक दखल की संभावना से इनकार नहीं&#039;चिदंबरम ने कहा कि वे राज्य और शायद केंद्र स्तर पर भी राजनीतिक दखल की संभावना से इनकार नहीं करते, लेकिन अधिकारियों को संगठन के अनुशासन का पालन करना चाहिए. अगस्त 2019 में INX मीडिया मामले में CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए कांग्रेस नेता ने आजाद की इस राय का विरोध किया कि ED और CBI को और ज्यादा अधिकार दिए जाने चाहिए. चिदंबरम ने कहा कि CBI और ED ने अपने कानूनी अधिकार-क्षेत्र का बहुत ज्यादा उल्लंघन किया है. वे खुद ही कानून बन गए हैं.&amp;nbsp;
&#039;अधिकारी नेताओं के सामने क्यों नहीं डटते&#039;पूर्व गृह मंत्री ने सवाल किया कि IAS और IPS अधिकारी नेताओं के सामने क्यों नहीं डटकर खड़े होते. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? तबादला हो जाएगा, लेकिन वे आपका सिर तो नहीं काट सकते. उन्होंने आगे कहा कि मेरे हिसाब से CBI और ED के कामकाज की बाहरी निगरानी होनी चाहिए. अमेरिका में FBI और दूसरी संस्थाओं पर विधायी निगरानी होती है.&amp;nbsp;
उन्होंने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट 2008 में हुए एक संशोधन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने एक प्रावधान पेश किया था जिसके तहत NIA की चार्जशीट को 2 अधिकारियों के एक स्वतंत्र पैनल से गुजरना होगा, जिसमें हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज और दूसरे एक सीनियर पुलिस अधिकारी होंगे.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>नशे में फ्लाइट उड़ाने वाले पायलट की गई नौकरी, एअर इंडिया का बड़ा एक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हादसे की AAIB की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद एअर इंडिया ने बड़ा एक्शन लिया है. एयरलाइन ने फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड की नौकरी तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी है. जांच में पायलट का साइकोएक्टिव पदार्थ के लिए किया गया टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था.
एअर इंडिया ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. सुरक्षा, फिटनेस और नियमों के उल्लंघन को लेकर एयरलाइन की जीरो टॉलरेंस नीति है.
क्या हुआ था?
4 अगस्त 2026 को एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 फुकेट से दिल्ली आ रही थी. एयरबस A320neo में 137 यात्री सवार थे जिनमें तीन बच्चे शामिल थे. विमान में छह केबिन क्रू और दो पायलट भी थे.
फ्लाइट करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर थी तभी विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम कुछ ही सेकंड में एक के बाद एक फेल हो गए. इसके बाद ऑटोपायलट बंद हो गया और करीब दो सेकंड तक स्टॉल वॉर्निंग सुनाई दी.
विमान पहले करीब 372 फीट ऊपर गया और फिर करीब 292 फीट नीचे आ गया. उस समय सीट बेल्ट का साइन बंद था. अचानक हुए इस बदलाव के कारण 24 लोगों को चोटें आईं. इनमें 20 यात्री और चार केबिन क्रू शामिल थे. 20 लोगों को शुरुआती इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि चार लोगों को गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया.
पहले टर्बुलेंस बताया गया - अब हादसे की जांच
शुरुआत में इस घटना को खराब मौसम और टर्बुलेंस से जुड़ा बताया गया था, लेकिन विमान में हुई चोटों और नुकसान को देखते हुए मामले की जांच हादसे के तौर पर की गई. AAIB यानी विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने अब अपनी शुरुआती रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने और पायलट की ड्रग टेस्ट रिपोर्ट से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है.

पायलट का ड्रग टेस्ट कैसे आया पॉजिटिव?
दिल्ली में विमान उतरने के बाद दोनों पायलटों की मेडिकल जांच हुई. शराब की जांच के लिए किए गए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में दोनों पायलटों का नतीजा सामान्य था. लेकिन साइकोएक्टिव पदार्थ की जांच में पायलट-इन-कमांड का सैंपल नॉन-निगेटिव आया. वहीं को-पायलट का सैंपल निगेटिव था. इसके बाद दोनों के ब्लड सैंपल की कन्फर्मेटरी जांच कराई गई. इसमें भी पायलट-इन-कमांड का नतीजा नॉन-निगेटिव आया जबकि को-पायलट का टेस्ट निगेटिव रहा.
पायलट-इन-कमांड की उम्र 34 साल है. AAIB ने रिपोर्ट में इस नतीजे को गंभीर चिंता का विषय बताया है और DGCA से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश की है.
रिपोर्ट के बाद एअर इंडिया का एक्शन
AAIB की रिपोर्ट सामने आने के बाद एअर इंडिया ने पायलट के खिलाफ कार्रवाई की है. एयरलाइन ने कहा कि सुरक्षा नियमों, फिटनेस और नियामकीय जरूरतों के उल्लंघन को लेकर उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है. इसी के तहत पायलट-इन-कमांड की नौकरी तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है. एअर इंडिया ने यह भी कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है.
350 से ज्यादा पायलटों की जांच
इस मामले के बाद एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने पायलटों की ड्रग टेस्टिंग भी शुरू की है. 17 अगस्त तक करीब 350 पायलटों की जांच हो चुकी थी. इनमें दो पायलटों के शुरुआती टेस्ट नॉन-निगेटिव आए हैं. हालांकि इन मामलों में कन्फर्मेटरी टेस्ट होना अभी बाकी है. फिलहाल नियमों के मुताबिक एयरलाइंस को अपने 10 फीसदी पायलटों की रैंडम ड्रग जांच करनी होती है. सरकार अब सभी पायलटों की सालाना रैंडम ड्रग टेस्टिंग पर भी विचार कर रही है.
क्या ड्रग टेस्ट और हादसे का कोई कनेक्शन है?
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. AAIB ने अभी तक यह नहीं कहा है कि पायलट के ड्रग टेस्ट के नतीजे की वजह से विमान में यह घटना हुई. विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ क्यों फेल हुए, ऑटोपायलट क्यों बंद हुआ और विमान के अचानक ऊपर-नीचे होने की पूरी वजह क्या थी इन पहलुओं की जांच अभी जारी है.
फिलहाल इतना साफ है कि AAIB की रिपोर्ट में पायलट-इन-कमांड का ड्रग टेस्ट नॉन-निगेटिव आने की बात सामने आई और रिपोर्ट के बाद एअर इंडिया ने उसकी नौकरी तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में 2 दोषी, 3&amp;3 साल की हुई सजा</title>
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        <description><![CDATA[ ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी सफलता मिली है. मोहाली की प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) स्पेशल कोर्ट ने दारा सिंह और गुरदर्शन सिंह को मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी करार देते हुए दोनों को 3-3 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है.&amp;nbsp;
मोहाली की PMLA स्पेशल कोर्ट ने दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. केंद्रीय जांच एजेंसी ED के मुताबिक, यह मामला 1.230 किलो कोकीन की बरामदगी से जुड़े ड्रग तस्करी के मामले से सामने आया था. बता दें कि पंजाब पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट (NDPS) एक्ट के तहत FIR दर्ज की थी.&amp;nbsp;
ED को 6 लाख और 4 लाख के 2 चेक मिलेबाद में दोनों आरोपियों को NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत भी दोषी ठहराया गया था. मामले की जांच के दौरान ED को 6 लाख और 4 लाख रुपये के दो चेक मिले थे. दोनों चेक की कुल रकम 10 लाख रुपये थी और इनका संबंध नशीले पदार्थ की खरीद-फरोख्त से जुड़ी गतिविधियों से पाया गया.
दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी माना गयाPMLA स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि बरामद नशीला पदार्थ और ये दोनों चेक PMLA के तहत &amp;lsquo;प्रॉपर्टी&amp;rsquo; और &amp;lsquo;अपराध से हुई कमाई&amp;rsquo; (Proceeds of Crime) की श्रेणी में आते हैं. इसी आधार पर दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का दोषी माना गया. ED ने कहा है कि इस कार्रवाई का मकसद सिर्फ ड्रग तस्करी करने वालों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे के कारोबार से होने वाली कमाई और उसके आर्थिक नेटवर्क को भी खत्म करना है.&amp;nbsp;
इससे पहले हाल ही में मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया में पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स और मोहाली पुलिस ने मुठभेड़ के बाद 2 बड़े नशा तस्करों जसकरण और लखविंदर को गिरफ्तार किया था. मोहाली के बड़माजरा में मंगलवार को एक नशा तस्कर के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर पुलिस ने उसे ध्वस्त किया.
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अभिजीत दीपके ने शेयर किया निशु आजाद का वीडियो, दिल्ली पुलिस से बोले- &#039;खुलेआम...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ड्रग, तस्करी, से, जुड़े, मनी, लॉन्ड्रिंग, केस, में, दोषी, 3-3, साल, की, हुई, सजा</media:keywords>
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        <title>‘उनके मुंह से ऐसी बात...’, पूर्व CM ममता बनर्जी पर मिथुन चक्रवर्ती का हमला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/उनके-मुंह-से-ऐसी-बात-पूर्व-cm-ममता-बनर्जी-पर-मिथुन-चक्रवर्ती-का-हमला</link>
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        <description><![CDATA[ पद्म भूषण से सम्मानित दिग्गज अभिनेता और BJP के पूर्व राज्यसभा सांसद मिथुन चक्रवर्ती ने शुक्रवार (4 सितंबर, 2026) को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि क्या ये सब बातें उनके (ममता बनर्जी के) मुंह से अच्छी लग रही है कि उन पर अत्याचार हो रहा है. मैं बस इतना ही कह रहा हूं कि हमने सहा है, हमने ये सब (अत्याचार) सहा है. मैं ज्यादा बोलकर किसी का अपमान नहीं कर रहा, लेकिन उनके मुंह से ये सब बातें अच्छी नहीं लगतीं कि उन पर अत्याचार हो रहा है.
बंगाल सरकार के सांस्कृतिक सलाहकार बनाए जाने पर बोले मिथुन
पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार में नए सांस्कृतिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद पूर्व सांसद मिथुन चक्रवर्ती ने कहा, &amp;lsquo;हमने जो कुछ भी खोया है, उसे वापस लाने की कोशिश करेंगे. हम 30% सब्सिडी दे रहे हैं, ताकि हम सभी को, पूरे भारत को बंगाल ला सकें. बंगाल आइए, यहां शूटिंग कीजिए, पहाड़ों और समुद्र का मजा लीजिए और रोमांस का आनंद उठाइए.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

#WATCH | Kolkata, West Bengal | On being appointed as the Cultural Advisor to the West Bengal government, BJP leader and Actor Mithun Chakraborty says, &amp;ldquo;We will try to bring back what we have lost; we are offering a 30% subsidy and inviting everyone across India to come to&amp;hellip; pic.twitter.com/OVgrpRdE6k
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 4, 2026




Kolkata, West Bengal: On former CM Mamata Banerjee, BJP leader and actor Mithun Chakraborty says, &quot;All these things are sounding good to me. I am only asking this much. This actor&#039;s thing, the atrocities that are happening against us. All this is sounding good. I have endured&amp;hellip; pic.twitter.com/4kfWnvAfNB
&amp;mdash; IANS (@ians_india) September 4, 2026



दरअसल, दिग्गज एक्टर और पूर्व सांसद मिथुन चक्रवर्ती ने गुरुवार (3 सितंबर, 2026) को पश्चिम बंगाल में फिल्म प्रोडक्शन के लिए 30 प्रतिशत की सब्सिडी देने की मांग की थी, जिसे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी सहमति दे दी है. चक्रवर्ती ने कहा, &amp;lsquo;अगर हम पश्चिम बंगाल के फिल्म इंडस्ट्री को उसके गौरवशाली दौर में वापस लेकर जाना चाहते हैं, तो मेरा एक विशेष अनुरोध है कि बंगाल की तरफ से 30 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए. इस पर मुख्यमंत्री जी कहा है कि यह किया जाएगा.&amp;rsquo;
फिल्म सेंटर के शिलान्यास समारोह में बोले CM शुभेंदु अधिकारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (4 सितंबर, 2026) को राजधानी कोलकाता में &amp;lsquo;उत्तर कुमार फिल्म सेंटर&amp;rsquo; के शिलान्यास समारोह के दौरान अपना संबोधन देते हुए एक्टर और पूर्व सांसद मिथुन चक्रवर्ती को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उन्हें राज्य सरकार का सांस्कृतिक सलाहकार यानी कल्चरल एडवाइजर नियुक्त करने की घोषणा की.
इस फिल्म सेंटर को 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा, जो राज्य सरकार के कल्चर अफेंयर्स डिपार्टमेंट की तरफ से पहले ही मंजूर कर दिया गया है. शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, &amp;lsquo;फिल्म सेंटर के डिजाइन को अंतिम रूप देने का काम बंगाली सिनेमा जगत से जुड़े एक्सपर्ट्स पर छोड़ दिया जाएगा और राज्य सरकार किसी भी परिस्थिति में इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी.&amp;rsquo; उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मुझे लगता है कि जो लोग इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, उन्हें यह काम पूरी आजादी के साथ करने का मौका दिया जाना चाहिए. हमारा काम उन्हें सहयोग और समर्थन देना है. हर हर मामले में दखल नहीं देंगे, क्योंकि ऐसा करना सही नहीं है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः अभिजीत दीपके ने शेयर किया निशु आजाद का वीडियो, दिल्ली पुलिस से बोले- &#039;खुलेआम...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘उनके, मुंह, से, ऐसी, बात...’, पूर्व, ममता, बनर्जी, पर, मिथुन, चक्रवर्ती, का, हमला</media:keywords>
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        <title>बडगाम में एक आतंकी ढेर, जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बडगाम-में-एक-आतंकी-ढेर-जम्मू-कश्मीर-में-सुरक्षाबलों-को-मिली-बड़ी-कामयाबी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बडगाम-में-एक-आतंकी-ढेर-जम्मू-कश्मीर-में-सुरक्षाबलों-को-मिली-बड़ी-कामयाबी</guid>
        <description><![CDATA[ जम्मू कश्मीर के बडगाम के अशदार गली इलाके में सेना ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया है. शुक्रवार को खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और श्रीनगर सीआरपीएफ ने ज्वाइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया था. जिस इलाके में मुठभेड़ हो रही है, वह पीर पंजाल रेंज में आता है. दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले और जम्मू क्षेत्र के पुंछ जिले की सीमा से लगा हुआ है. इलाके में एक से दो आतंकी और छुपे होने की खबर भी है.&amp;nbsp;
इस दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. इसके बाद जबरदस्त मुठभेड़ हुई. इस दौरान एक आतंकवादी मारा गया. उसके पास से एके 47 राइफल और युद्ध से जुड़ी अन्य सामाग्री बरामद की गई है. फिलहाल ऑपरेशन जारी है.&amp;nbsp;
ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए अधिकारियों ने बताया, &#039;जम्मू कश्मीर के बडगाम में सेना और अन्य सुरक्षा बलों के ज्वाइंट ऑपरेशन में एक आतंकवादी मारा गया है.&#039;
यह बड़ा एंटी-टेरर ऑपरेशन गुरुवार को बडगाम जिले के ऊंचे पहाड़ी और जंगली इलाकों में कई दिनों तक चले घेराबंदी और तलाशी अभियान के बाद शुरू किया गया था. मुठभेड़ गुरुवार देर शाम शुरू हुई, जब सुरक्षा कर्मियों की जॉइंट टीम, जिसमें भारतीय सेना के 10 पैरा कमांडो, जम्मू-कश्मीर पुलिस (SOG) और CRPF शामिल थे, ने ऊबड़-खाबड़, जंगली इलाके में घिरे भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह को पकड़ने के लिए कड़ा घेरा बनाया.
डेटा को ट्रैक करने के बाद, आतंकवादियों को अशदार गली इलाके के पास छिपे हुए पाया गया और गुरुवार देर शाम (3 सितंबर) 10 पैरा के जवानों और आतंकवादियों के बीच शुरुआती गोलीबारी हुई.
पूरी रात घने जंगल वाले इलाके से आती रही गोलियों की आवाजपूरी रात घने जंगल वाले इलाके में रुक-रुक कर गोलियों की आवाज आती रही, जबकि अतिरिक्त बल को मौके पर भेजा गया ताकि भागने के सभी संभावित रास्तों को बंद किया जा सके. आखिरकार, आज सुरक्षा बल एक आतंकवादी को मार गिराने में सफल रहे, जबकि अन्य आतंकवादियों के खिलाफ सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन जारी है. पहलगाम हमले के बाद 2025 में हुए ऑपरेशन्स के बाद इस इलाके में यह पहला बड़ा ऑपरेशन है.
खुफिया जानकारी पर आधारित यह &#039;घेराबंदी और तलाशी अभियान&#039; (CASO) पाखेरपोरा (पुलवामा) और मशहूर टूरिस्ट हब यूसमर्ग (बडगाम) के ऊंचे इलाकों के बीच फैले घने और ऊंचे पहाड़ी जंगल में चलाया जा रहा है.
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, घेराबंदी वाले इलाके में दो से तीन सक्रिय आतंकवादी फंसे हुए थे. बहुत मुश्किल रास्तों, खराब मौसम और जंगल के घने पेड़ों के बीच मोबाइल नेटवर्क या आम रेडियो सिग्नल ठीक से काम न करने की वजह से ऑपरेशन में थोड़ी देरी हुई.
इधर, जिला प्रशासन ने इमरजेंसी एडवाइजरी जारी की है. आम लोगों की सुरक्षा के लिए, अगले आदेश तक पर्यटकों को दूधपथरी और यूसमर्ग जैसी मशहूर जगहों पर जाने से सख्ती से मना किया गया है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कर्नाटक CM ने केन्द्र से मांगी कृषि ऋण माफी पर मदद, पार्क विधेयक का बचाव</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से किसानों के कृषि ऋण माफ करने की मांग की. उन्होंने भाजपा नेताओं से भी अपील की कि वे इस मुद्दे को दिल्ली में केंद्र सरकार के सामने उठाने के लिए उनके साथ आएं. मुख्यमंत्री ने विवादित पार्क विधेयक को वापस लेने के अपनी सरकार के फैसले का भी बचाव किया.
यह विधेयक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और जनहित की परियोजनाओं के लिए पार्कों और बगीचों की 5 प्रतिशत भूमि के उपयोग की अनुमति देता था. विधेयक वापस लिए जाने पर भाजपा द्वारा इसे अपनी जीत बताने की आलोचना करते हुए शिवकुमार ने पार्टी को &quot;विकास-विरोधी&quot; करार दिया और कहा कि बेंगलुरु की मौजूदा समस्याओं के लिए भाजपा जिम्मेदार है.
कर्नाटक सरकार ने मांगी केंद्र से मदद
बागलकोट और विजयनगर जिलों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से पहले शिवकुमार ने कहा, &quot;आपने भाजपा और जेडी(एस) की राजनीति देखी है. हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान किसानों और सूखे की स्थिति पर कोई चर्चा नहीं हुई.
यही वजह है कि विशेष सत्र बुलाया गया है.&quot; उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मानसून सत्र के दौरान सूखे के मुद्दे पर चर्चा का अवसर नहीं मिलने से भाजपा और जेडी(एस) के कई विधायक भी नाराज थे. कांग्रेस के विधायकों ने भी इस संबंध में चिंता जताई थी.
पार्क विधेयक का बचाव
शिवकुमार ने कहा, &quot;मैं किसानों की मदद करना चाहता हूं. केंद्र सरकार को भी इसके लिए आर्थिक सहायता देनी चाहिए. इस मुद्दे पर एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली ले जाने की जरूरत है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र भी कृषि ऋण माफी की मांग कर चुके हैं. जब प्रधानमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि राज्य सूखे की मार झेल रहा है, तो कृषि ऋण माफी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार को लेनी चाहिए.&quot;
उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक से अपील की कि वे उनके साथ दिल्ली चलें और केंद्र सरकार के सामने किसानों के ऋण माफी की मांग उठाएं, क्योंकि इस विषय पर अंतिम निर्णय केंद्र के हाथ में है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्रू मेंबर ने लिखा था बम की धमकी वाला नोट? हैंडराइटिंग की जांच तेज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्रू-मेंबर-ने-लिखा-था-बम-की-धमकी-वाला-नोट-हैंडराइटिंग-की-जांच-तेज</link>
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        <description><![CDATA[ सऊदी अरब के दम्माम से दिल्ली आ रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट में बम की धमकी वाला नोट मिलने के मामले में जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. जांच एजेंसियों को एक क्रू मेंबर की हैंडराइटिंग धमकी वाले नोट से काफी हद तक मिलती हुई मिली है. इसके बाद इस क्रू मेंबर से पूछताछ की जा रही है. लेकिन बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है- क्या धमकी वाला नोट इसी क्रू मेंबर ने लिखा था? फिलहाल जांच एजेंसियां किसी नतीजे पर नहीं पहुंची हैं. एक यात्री भी शक के घेरे में है.
31 अगस्त को क्या हुआ था?
दम्माम से दिल्ली आ रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट 31 अगस्त को सऊदी अरब से रवाना हुई थी. फ्लाइट को दिल्ली पहुंचना था लेकिन रास्ते में विमान के टॉयलेट से एक टिश्यू पेपर मिला. इस टिश्यू पेपर पर बम की धमकी लिखी थी. साथ ही एक डिब्बे जैसी आकृति भी बनाई गई थी.
धमकी मिलने के बाद विमान को दिल्ली ले जाने के बजाय अहमदाबाद डायवर्ट कर दिया गया. विमान शाम करीब साढ़े चार बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा. विमान में सवार सभी 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इसके बाद यात्रियों, क्रू और विमान की गहन जांच की गई लेकिन कोई बम या संदिग्ध सामान नहीं मिला.
टिश्यू पेपर बना जांच की सबसे बड़ी कड़ी
बम नहीं मिला लेकिन जांच एजेंसियों के हाथ एक अहम सुराग लग गया- वही टिश्यू पेपर जिस पर धमकी लिखी गई थी. एजेंसियों ने विमान में सवार सभी 40 लोगों के हैंडराइटिंग सैंपल लिए. इनमें 32 यात्री, 4 केबिन क्रू और 4 पायलट शामिल थे. जांच को ज्यादा सटीक बनाने के लिए वैसा ही टिश्यू पेपर और उसी रंग का पेन भी इस्तेमाल किया गया ताकि लोगों की लिखावट की धमकी वाले नोट से तुलना की जा सके.
एक क्रू मेंबर की लिखावट क्यों बनी सवाल?
सूत्रों के मुताबिक जांच में एक क्रू मेंबर की लिखावट धमकी वाले नोट से काफी हद तक मिलती दिखाई दी. अलग-अलग रिपोर्ट्स में इस लिखावट के मैच को करीब 60 से 75 फीसदी तक बताया गया है. हालांकि यह जानकारी अभी सूत्रों के हवाले से है और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यही वजह है कि फिलहाल इसे सबूत नहीं बल्कि जांच का सुराग माना जा रहा है.
सभी क्रू मेंबर्स से पूछताछ की गई थी. इनमें से सात को अहमदाबाद से जाने की इजाजत दे दी गई जबकि एक क्रू मेंबर से जुड़ी जांच अभी जारी है.लेकिन एक यात्री पर भी शक ! जांच सिर्फ क्रू मेंबर तक सीमित नहीं है. एक यात्री भी जांच के घेरे में है. सूत्रों के मुताबिक एक साथी यात्री ने जांच टीम को बताया कि यह शख्स फ्लाइट के दौरान कई बार टॉयलेट गया था और उसका व्यवहार उसे संदिग्ध लगा चूंकि धमकी वाला नोट टॉयलेट से मिला था इसलिए एजेंसियां इस यात्री की भूमिका को भी जांच रही हैं. हालांकि अभी यह भी साबित नहीं हुआ है कि नोट इसी यात्री ने लिखा था.
तो क्या क्रू मेंबर ही धमकी दे रहा था?
अभी इसका जवाब &#039;हां&#039; नहीं है. हैंडराइटिंग का मिलान जांच को एक दिशा जरूर देता है लेकिन किसी व्यक्ति को दोषी साबित करने के लिए दूसरे सबूत भी जरूरी होंगे. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नोट किसने लिखा वह टॉयलेट तक कैसे पहुंचा और फ्लाइट के दौरान संदिग्ध गतिविधि किसने की.
पुलिस और एयरलाइन भी जांच में जुटी
एयर इंडिया एक्सप्रेस की शिकायत के बाद अहमदाबाद एयरपोर्ट पुलिस ने मामला दर्ज किया है. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच भी जांच में शामिल है. एयरलाइन ने कहा है कि वह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है और यात्रियों, क्रू या फ्लाइट की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यवहार को गंभीरता से लिया जाएगा.
पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां
फ्लाइट के टॉयलेट या टिश्यू पेपर पर बम की धमकी लिखने का यह पहला मामला नहीं है. मई 2024 में दिल्ली-वडोदरा एयर इंडिया फ्लाइट के टॉयलेट में भी टिश्यू पेपर पर बम की धमकी लिखी मिली थी. जांच में कोई बम नहीं मिला था. ऐसी धमकियों के कारण फ्लाइट डायवर्ट करनी पड़ती है सुरक्षा जांच बढ़ जाती है और यात्रियों के साथ-साथ एयरलाइन को भी परेशानी उठानी पड़ती है.
अब दम्माम-दिल्ली फ्लाइट के मामले में जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है-&amp;nbsp;टिश्यू पेपर पर बम की धमकी किसने लिखी थी? क्या हैंडराइटिंग मैच वाला क्रू मेंबर ही इसके पीछे है या जांच किसी और शख्स तक पहुंचेगी? फिलहाल जांच जारी है और किसी की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;ग्रोथ मजबूत तो जॉब्स क्यों नहीं बढ़ रही&amp;apos;, GDP पर रघुराम राजन ने किए सवाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ग्रोथ-मजबूत-तो-जॉब्स-क्यों-नहीं-बढ़-रही-gdp-पर-रघुराम-राजन-ने-किए-सवाल</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के पूर्व आरबीआई गवर्नर रहे, रघुराम राजन ने हालिया जीडीपी आंकड़े पर साफ किया है कि उन्होंने इससे जुड़ा कोई सवाल नहीं उठाया है. न ही इन आंकड़ों का समर्थन किया है. इसके अलावा उन्होंने इस मामले पर और कुछ भी कहने से मना कर दिया है.&amp;nbsp;
राजन ने कहा, &#039;हालिया जीडीपी आंकड़ों पर न तो कोई सवाल उठाया है. न ही उनका समर्थन किया है. इस मामले पर उन्हें और कुछ नहीं कहना है.&#039;
इसके अलावा उन्होंने कहा कि इकोनॉमी ग्रोथ की चाल को लेकर हैरान हैं. साथ ही सोचते हैं कि मजबूत जीडीपी ग्रोथ के बावजूद ज्यादा प्राइवेट इन्वेस्टमेंट, FDI और बेहतर नौकरियों में क्यों इजाफा नहीं हुआ है? यह बातें पूर्व आरबीआई गवर्नर ने &amp;nbsp;प्रोफेशनल साइट लिंक्डइन पोस्ट में कही है.&amp;nbsp;
इसके अलावा उन्होंने कहा, &#039;यह हर एक आंकड़े पर सवाल उठाने से अलग हैं. मैं यह उन लोगों पर छोड़ता हूं, जो जीडीपी की गणना में मुझसे ज्यादा माहिर हैं.&#039;
GDP को लेकर क्या है पूरा विवाद?&amp;nbsp;
दरअसल, जीडीपी के आंकड़ों के विवाद को देखें तो MoSPI (भारत का सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की वास्तविक जीडीपी फाइनेंशियल ईयर 2027 के पहले क्वार्टर में साल दर साल 7.8 प्रतिशत की उछाल देखी गई है. ऐसे में बेस ईयर में बदलाव को लेकर चिंताओं के बीच जीडीपी आंकड़ों की जांच पड़ताल हो रही है.
इस मामले में वित्त मंत्रालय के पूर्व शीर्ष अधिकारी सुभाष चंद्र गर्ग ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ग्रोथ के आंकड़े बढ़ा चढ़ा के दिखाए गए, क्योंकि सरकार ने तुलना के आधार पर पिछले साल की अवधि के लिए जीडीपी के अपने माप को कम कर दिया था.&amp;nbsp;
इधर, कुछ प्राइवेट इकोनॉमिस्ट ने भी सवाल उठाते हुए कहा हैकि क्या डिफ्लेटर जो ऐसी वैल्यू है, जिसका कैलकुलेशन नॉमिनल जीडीपी से महंगाई को हटाकर वास्तविक ग्रोथ रेट दिखाने के लिए की जाती है, अन्य प्राइज इंडिकेटर की तुलना में महंगाई को कम करके दिखाता है.&amp;nbsp;
सरकार ने पूरे विवाद क्या सफाई दी?&amp;nbsp;
इधर सरकार की तरफ से कहा गया है कि फरवरी में लागू किया गया नया तरीका विचार विमर्श का नतीजा था. सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद आर्थिक स्थितियों को ज्यादा सही ढंग से दिखाना था. इसके तहत नई डेटा सीरीज अपनाई गई. इससे अप्रैल-जून 2025 के लिए जीडीपी की नॉमिनल वैल्यू पुरानी जीडीपी सीरीज के 86.05 ट्रिलियन रुपये से घटकर 80 ट्रिलियन रुपये हो गई. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>झारखंड DGP की नियुक्ति पर सवाल, एमिकस क्यूरी ने SC के फैसले का बताया उल्लंघन</title>
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        <description><![CDATA[ झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सवाल उठे हैं. मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने रिपोर्ट दाखिल की है. इसमें उन्होंने कहा कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से तय किए गए सिद्धांतों के मुताबिक नहीं है.
यह मामला बीजेपी के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और अखिल भारतीय आदिम जनजाति विकास समिति की ओर से दाखिल याचिकाओं से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच सोमवार (7 सितंबर, 2026) को इस मामले में सुनवाई करेगी.
DGP की नियुक्ति पर सवाल
विवाद का मुख्य मुद्दा तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के समय उनकी बची हुई सेवा अवधि है. सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह मामले में कहा था कि जिस अधिकारी को DGP के पद के लिए चुना जाए, उसकी सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय बाकी होना चाहिए.
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के मुताबिक, तदाशा मिश्रा को पूर्णकालिक DGP के पद पर उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले नियुक्त किया गया. इसके बाद उन्हें दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया गया. यह नियुक्ति प्रकाश सिंह फैसले में तय सिद्धांतों के विपरीत है.
2025 की नियमावली भी सवालों के घेरे में
मामला सिर्फ तदाशा मिश्रा की नियुक्ति तक सीमित नहीं है. एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में झारखंड सरकार की तरफ से 2025 में बनाए गए &amp;lsquo;झारखंड पुलिस महानिदेशक चयन और नियुक्ति नियम, 2025&amp;rsquo; पर भी सवाल उठाए गए हैं.&amp;nbsp;

रामचंद्रन ने बताया कि DGP के चयन के लिए झारखंड सरकार के नियम UPSC की सामान्य व्यवस्था से अलग हैं. झारखंड ने UPSC की व्यवस्था से अलग अपनी नामांकन समिति का प्रावधान किया है. UPSC की व्यवस्था में DGP पद के लिए 3 अधिकारियों के नाम का पैनल भेजने का प्रावधान है, लेकिन झारखंड के नए नियमों में 5 नाम का पैनल भेजने की व्यवस्था बनाई गई है.
DGP को हटाने के अधिकार पर भी ऐतराज
नए नियमों में डीजीपी को हटाने के लिए राज्य सरकार को दी गई शक्ति पर भी रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है. नियम 10(1)(d) में &amp;lsquo;कर्तव्य पालन में असमर्थता&amp;rsquo; के आधार पर डीजीपी को हटाने का प्रावधान है. एमिकस क्यूरी ने आशंका जताई है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल डीजीपी पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है. इससे डीजीपी को मिलने वाले 2 साल के निश्चित कार्यकाल की सुरक्षा कमजोर हो सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः होमबायर्स फ्रॉड केस में CBI की 19वीं चार्जशीट, बिल्डरों और निदेशकों पर कसा शिकंजा ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चीन&amp;पाक बॉर्डर पर अब 24 घंटे नजर, क्यों EOS&amp;05 सुरक्षा के लिए &amp;apos;तुरुप का पत्ता&amp;apos;?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चीन-पाक-बॉर्डर-पर-अब-24-घंटे-नजर-क्यों-eos-05-सुरक्षा-के-लिए-तुरुप-का-पत्ता</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के लिए अंतरिक्ष से निगरानी का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है. ISRO पहला इमेजिंग सैटेलाइट EOS 05 लॉन्च करने जा रहा है. यह देश के हिस्सों, जिनमें पाकिस्तान-चीन समेत अन्य देशों की बॉर्डर, रणनीतिक इलाकों पर नजर रख सकेगा. इससे भारत का सर्विलांस मजबूत होगा. शुक्रवार सुबह तड़के अपना नया सैटेलाइट EOS-05 अंतरिक्ष में भेजेगा.
इसकी सबसे खास बात यह है कि यह धरती के ऊपर एक ऐसी कक्षा में रहेगा जहां से यह भारत और उसके आसपास के इलाके पर लगातार नजर रख सकेगा. ISRO के मुताबिक GSLV-F17 रॉकेट 4 सितंबर को रात 2 बजकर 55 मिनट पर श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा. यह GSLV रॉकेट की 19वीं उड़ान होगी.
आखिर EOS-05 में ऐसा क्या खास है?
भारत के ज्यादातर सैटेलाइट धरती के काफी करीब वाली कक्षा में घूमते हैं. वे लगातार धरती का चक्कर लगाते रहते हैं. किसी इलाके की तस्वीर लेने के बाद सैटेलाइट आगे निकल जाता है और उसी जगह की दोबारा तस्वीर लेने के लिए कुछ दिन बाद वापस आता है.
EOS-05 का तरीका अलग होगा
यह धरती से करीब 36 हजार किलोमीटर ऊपर रहेगा. इतनी ऊंचाई पर सैटेलाइट धरती की घूमने की रफ्तार के साथ घूमता है. इसलिए वह आसमान में एक ही इलाके के ऊपर टिका हुआ दिखाई देता है यानी भारत और उसके आसपास का इलाका लगातार इसके कैमरे के सामने रहेगा. ISRO ने अपने दस्तावेज में कहा है कि इतनी ऊंचाई से तस्वीर लेने वाला यह भारत का पहला सैटेलाइट है.
हर 30 मिनट में भारत की नई तस्वीर!
EOS-05 की सबसे बड़ी खासियत इसकी बार-बार तस्वीरें लेने की क्षमता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह पूरे देश की तस्वीर करीब हर 30 मिनट में ले सकेगा. वहीं अगर किसी खास इलाके पर ज्यादा ध्यान देना हो तो वहां की तस्वीर करीब हर 5 मिनट में मिल सकती है. इसे ऐसे समझिए, अगर किसी इलाके में बाढ़ आ रही है तूफान आगे बढ़ रहा है या जंगल में आग फैल रही है तो उस इलाके की ताजा तस्वीर बार-बार मिलती रहेगी. इससे हालात को समझने और समय रहते फैसला लेने में मदद मिलेगी.
बाढ़ से लेकर जंगल की आग तक - कहां आएगा काम?
EOS-05 का असली फायदा उन जगहों पर होगा जहां हालात तेजी से बदलते हैं और हर मिनट कीमती होता है. तूफान किस दिशा में जा रहा है? नदी का पानी किस गांव की तरफ बढ़ रहा है? जंगल की आग कितनी तेजी से फैल रही है? बादल कहां फट सकते हैं? फसल की हालत कैसी है? इन सब पर लगातार नजर रखने में सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरें मदद करेंगी. इसके अलावा खेती, पानी, जंगल और पर्यावरण में होने वाले बदलावों पर भी नजर रखी जा सकेगी.
सैटेलाइट में ऐसे खास कैमरे लगे हैं जो सिर्फ आम तस्वीरें ही नहीं लेते. ये ऐसी चीजों में आए बदलाव भी पकड़ सकते हैं जो हमारी आंखों से सीधे दिखाई नहीं देते. उदाहरण के लिए फसल में बीमारी या मिट्टी में बदलाव.
क्या इसे जासूसी सैटेलाइट कह सकते हैं?
EOS-05 को लेकर कुछ जगहों पर इसे जाससी सैटेलाइट भी कहा जा रहा है लेकिन ISRO ने इसे इस तरह पेश नहीं किया है. ISRO के मुताबिक इसका मकसद धरती पर नजर रखना और आम लोगों से जुड़े कामों में मदद करना है. हां बार-बार किसी इलाके की तस्वीर मिलने की क्षमता का फायदा सीमा पर नजर रखने और सुरक्षा की तैयारी में भी हो सकता है लेकिन ISRO ने इसे सेना का मिशन नहीं बताया है. जिस रॉकेट से जाएगा EOS-05 - वह भी खास है. EOS-05 को अंतरिक्ष में पहुंचाने की जिम्मेदारी GSLV-F17 की है. ISRO के मुताबिक इस रॉकेट की ऊंचाई 51.7 मीटर है और उड़ान के समय इसका वजन करीब 420.5 टन होगा. यह तीन हिस्सों वाला रॉकेट है.
सबसे नीचे वाले हिस्से में ठोस ईंधन वाला एक बड़ा इंजन है और इसके साथ चार और इंजन लगे हैं. इसके ऊपर वाला हिस्सा तरल ईंधन से चलता है. सबसे ऊपर बहुत ठंडे ईंधन वाला इंजन है. इसे भारत ने खुद विकसित किया है. रॉकेट के सबसे ऊपर करीब 4 मीटर चौड़ा ढक्कन लगा होता है. इसके अंदर EOS-05 सैटेलाइट सुरक्षित रहता है.सैटेलाइट का वजन करीब 2367 किलो है. रॉकेट इसे सीधे 36 हजार किलोमीटर ऊपर नहीं ले जाएगा. यह बात समझना भी जरूरी है - रॉकेट सैटेलाइट को सीधे 36 हजार किलोमीटर ऊपर नहीं छोड़ेगा. ISRO के मुताबिक पहले रॉकेट इसे एक अंडाकार रास्ते पर छोड़ेगा. इस रास्ते की धरती से सबसे कम दूरी करीब 170 किलोमीटर और सबसे ज्यादा दूरी करीब 28,934 किलोमीटर होगी. इसके बाद EOS-05 अपने इंजन का इस्तेमाल करके धीरे-धीरे और ऊपर जाएगा और अपनी तय कक्षा तक पहुंचेगा. इस पूरी प्रक्रिया में कुछ हफ्ते लग सकते हैं.
पांच साल पुराना अधूरा काम अब होगा पूरा?
EOS-05 मिशन के साथ ISRO की एक पुरानी कहानी भी जुड़ी है. अगस्त 2021 में ISRO ने EOS-03 नाम का एक सैटेलाइट भेजा था. रॉकेट ने उड़ान भरी लेकिन ऊपर वाले हिस्से में गड़बड़ी आने की वजह से सैटेलाइट अपनी तय जगह तक नहीं पहुंच पाया. अब करीब पांच साल बाद EOS-05 के जरिए वही अधूरा काम पूरा करने की कोशिश होगी. यह मिशन ISRO के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि इस साल जनवरी में एक लॉन्च के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी आई थी. उसके बाद यह ISRO का पहला लॉन्च है.
कब होगा लॉन्च और कहां देख सकेंगे?
EOS-05 का लॉन्च 4 सितंबर की रात 2 बजकर 55 मिनट पर होगा. ISRO अपनी वेबसाइट और YouTube चैनल पर लॉन्च का सीधा प्रसारण करेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>चीन-पाक, बॉर्डर, पर, अब, घंटे, नजर, क्यों, EOS-05, सुरक्षा, के, लिए, तुरुप, का, पत्ता</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;बिल्डर की देरी की सजा नहीं भुगतेंगे खरीदार&amp;apos;, SC का अहम फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने एक कहा है कि हाउसिंग प्रोजेक्ट में हुई देरी के लिए पुराने बिल्डर पर लगने वाला जुर्माना मकान खरीदारों से नहीं वसूला जा सकता. इसे प्रोजेक्ट को पूरा कर रही नई कंपनी से भी नहीं वसूला जा सकता. इस अहम फैसले में कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी की तरफ से 2 प्रोजेक्ट पर लगाए गए शुल्क को हटा दिया है.
क्या था मामला?
मामला नोएडा के सेक्टर 100 और 110 के &#039;लोटस बुलेवार्ड&#039; और &#039;लोटस पनाचे&#039; प्रोजेक्ट से जुड़ा था. बिल्डर कंपनी &#039;ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज&#039; को 2016 तक इन्हें काम पूरा करना था. कंपनी के आर्थिक संकट के कारण निर्माण अटक गया. इसके बाद कंपनी दिवालिया समाधान प्रक्रिया (CIRP) में चली गई.
&#039;सभी विपक्षी पार्टियों से गठबंधन...&#039;, RLD को लेकर बीजेपी के मंत्री का बड़ा बयान
नोएडा अथॉरिटी की मांग
प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए घर खरीदारों ने खुद पैसा लगाया. &#039;एसएमवी एजेंसीज&#039; नाम की नई कंपनी भी समाधान योजना के साथ आगे आई. इस बीच नोएडा अथॉरिटी ने पुराने बिल्डर की देरी के एवज में &#039;टाइम एक्सटेंशन चार्ज&#039; की मांग की और लोटस पनाचे के तीन टावर सील कर दिए.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
इस मामले में नेशनल कंपनी लॉ एपिलेट ट्रिब्यूनल यानी NCLAT ने अथॉरिटी के इस शुल्क को सही ठहराया. NCLAT ने इसे दिवालिया प्रक्रिया का हिस्सा माना. इस आदेश के खिलाफ खरीदार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने NCLAT के आदेश को रद्द कर दिया है. जजों ने कहा है कि जुर्माने का मकसद बिल्डर को समय पर काम करने के लिए बाध्य करना होता है. जब बिल्डर दिवालिया हो चुका है, तब उसकी गलती का बोझ उन खरीदारों पर नहीं डाला जा सकता जो अपने पैसे से घर पूरा करवा रहे हैं.
&#039;ग्रोथ मजबूत तो जॉब्स क्यों नहीं बढ़ रही&#039;, GDP पर रघुराम राजन ने किए सवाल ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>तेलंगाना में राजनीतिक बवाल, कैबिनेट से निकाले जाने पर मंत्री सीएम पर भड़कीं</title>
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        <description><![CDATA[ तेलंगाना की पूर्व मंत्री कोंडा सुरेखा ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के आदेश के बाद राज्य मंत्रिमंडल से उन्हें निकाले जाने के फैसले का विरोध किया है. उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री के साथ-साथ सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस को भी सवालों के घेरे में लिया है. कोंडा सुरेखा ने तेलंगाना कैबिनेट से उन्हें निकालने के फैसले पर सवाल उठाते हुए गुरुवार (3 सितंबर, 2026) को कहा कि उन्होंने न तो कोई भ्रष्टाचार किया है और न हीं पार्टी की तरफ से ऐसी कार्रवाई करने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका दिया गया है.
कार्रवाई से पहले मुझसे चर्चा क्यों नहीं की- सुरेखा&amp;nbsp;

#WATCH | Hyderabad, Telangana: After being dropped from State Cabinet, Konda Surekha says, &quot;I am not at all at fault. They issued me a show-cause, but I had not levelled any allegations against Revanth Reddy or the party. In a meeting, my daughter expressed her frustration. She&amp;hellip; pic.twitter.com/590jxE9yzS
&amp;mdash; ANI (@ANI) September 3, 2026



सुरेखा ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व की तरफ से जारी किए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब भी दे दिया और फिर यह सवाल उठाया कि जब उन्हें तेलंगाना कैबिनेट से बाहर करने की सिफारिश की जा रही थी, उससे पहले इस मुद्दे को लेकर उनसे चर्चा क्यों नहीं की गई? इसके साथ ही, कांग्रेस नेता ने उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई की घोषणा करने वाले उस पत्र की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए, जिस पर कोई साइन नहीं किए गए थे. उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ की गई यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई दिखाई देती है.
बेटी का बचाव करते हुए पार्टी पर उठाए सवाल
तेलंगाना की पूर्व मंत्री कोंडा सुरेखा ने अपनी बेटी कोंडा सुष्मिता, जिन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनके परिवार को लेकर टिप्पणी की थी, का बचाव करते हुए कहा कि उनकी बेटी अब बालिग हैं और उसकी टिप्पणियों या विचारों के लिए सुरेखा पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है.&amp;nbsp;
उन्होंने यह भी पूछा कि उनके बेटी की तरफ से की गई टिप्पणी के लिए उन्हें क्यों जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और जब कांग्रेस नेता कोमातिरेड्डी राज गोपाल रेड्डी और टी. जग्गा रेड्डी ने विवादित टिप्पणी की थी, तो पार्टी की तरफ से उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई थी?
यह भी पढ़ेंः US ट्रेड डील से पहले भारत ने खींची &amp;lsquo;रेड लाइन&amp;rsquo;, कहा- &#039;...तभी लगेगी मुहर&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>तेलंगाना, में, राजनीतिक, बवाल, कैबिनेट, से, निकाले, जाने, पर, मंत्री, सीएम, पर, भड़कीं</media:keywords>
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        <title>बंगाल में UCC आने से रद्द हो जाएंगे 13 मैरिज कानून, जानें क्या कुछ बदलेगा</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए ड्राफ्टिंग कमेटी की प्रक्रिया शुरू हो गई है. यूसीसी के आने से 13 मैरिज एक्ट की जगह एक सिंगल कानून लाया जा सकता है. बंगाल यूसीसी के लिए पैनल की पहली मीटिंग आज दिल्ली में होगी.
इस नए कानूनी ढांचे के तहत विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, कस्टडी और संपत्ति उत्तराधिकार के नियम सभी समुदायों के लिए समान होंगे. अनुसूचित जनजातियों को इस कोड के दायरे से बाहर रखा जाएगा और पारंपरिक सांस्कृतिक रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा.
13 मैरिज एक्ट होंगे रद्दटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 13 मैरिज एक्ट रद्द किए जाएंगे. जिसकी जगह एक एक्ट लाया जाएगा. इसका फोकस लैंगिक समानता और धर्म तटस्थता पर होगा. इस नए एक्ट में सांस्कृतिक रीति रिवाजों, पहनावे और रस्मों में कोई दखल नहीं किया जाएगा.
ये हैं 13 एक्ट

इंडियन तलाक अधिनियम, 1869
भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम, 1872&amp;nbsp;
बंगाल मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम, 1876
आनंद विवाह अधिनियम, 1909 (Anand Marriage Act, 1909)
पारसी विवाह एवं तलाक अधिनियम, 1936
आर्य विवाह मान्यता अधिनियम, 1937&amp;nbsp;
मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937
मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939
विशेष विवाह अधिनियम, 1954
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
विदेशी विवाह अधिनियम, 1969
मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019

करवाना होगा शादी का रजिस्ट्रेशनप्रस्तावित यूसीसी के तहत सभी शादियों का रजिस्ट्रेशन तय समय सीमा के अंदर राज्य के तय अधिकारियों के पास करवाना जरूरी होगा. ये एक्ट आस्था, अलग धर्मों के बीच विवाह और विदेश में रहने की स्थिति के आधार पर लागू होते हैं.
कोर्ट के बाहर नहीं होगा तलाककोर्ट के बाहर तलाक की कोई व्यवस्था नहीं होगी. तलाक के आधार दोनों पार्टनर के लिए एक जैसे होंगे. पति-पत्नी दोनों को समान एलिमनी के अधिकार होंगे.
लिव इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरीलिव इन रिलेशनशिप के लिए अपने पार्टनर का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा. अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उसे सजा भी हो सकती है. इससे धोखाधड़ी रूकेगी साथ ही लिन इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे को कानूनी सुरक्षा मिलेगी.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 13:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बंगाल, में, UCC, आने, से, रद्द, हो, जाएंगे, मैरिज, कानून, जानें, क्या, कुछ, बदलेगा</media:keywords>
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        <title>CM विजय का बड़ा ऐलान, तमिलनाडु में बनेगा नया सचिवालय और विधानसभा</title>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु की विजय सरकार 1,200 करोड़ रुपये की लागत से विधानसभा-सह-सचिवालय का नया इंटीग्रेटेड परिसर बनाएगी. मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने गुरुवार (3 सितंबर) को विधानसभा में बड़ा ऐलान किया.&amp;nbsp;
इससे साफ है कि सचिवालय अब ऐतिहासिक फोर्ट सेंट जॉर्ज से बाहर जाएगा. विधानसभा में नियम 110 के तहत सीएम ने घोषणा करते हुए कहा कि आधुनिक इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स में राज्य सरकार के सभी विभाग होंगे.
उन्होंने कहा, &#039;&#039;मॉडर्न एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स में फायरफाइटिंग की सुविधाएं, दिव्यांगों के लिए एक्सेसिबिलिटी और ग्रीन बिल्डिंग स्टैंडर्ड्स होंगे. अधिकारियों के लिए काफी पार्किंग स्पेस, कॉन्फ्रेंस हॉल, पब्लिक सर्विस सेंटर और मॉडर्न सुविधाएं दी जाएंगी.&#039;&#039;
ओलंपिक सिटी का ऐलान
सीएम विजय ने चेन्नई में &amp;lsquo;ओलंपिक सिटी&amp;rsquo;, &amp;lsquo;मोटर स्पोर्ट्स सिटी&amp;rsquo; स्थापित करने की भी घोषणा की. उन्होंने कहा, &#039;&#039;तमिलनाडु के एथलीट ओलंपिक गेम्स और दूसरे इंटरनेशनल स्पोर्ट्स इवेंट्स में बड़ी संख्या में मेडल जीत सकें, इसके लिए तमिलनाडु स्पोर्ट्स डेवलपमेंट अथॉरिटी की तरफ से चेन्नई में एक वर्ल्ड-क्लास तमिलनाडु ओलंपिक सिटी बनाया जाएगा.&#039;&#039;
सीएम ने कहा, &#039;&#039;यह ओलंपिक सिटी ओलंपिक स्टैंडर्ड के एक इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के तौर पर डेवलप की जाएगी. इसमें वर्ल्ड-क्लास स्पोर्ट्स वेन्यू होंगे. स्टेट-ऑफ-द-आर्ट स्पोर्ट्स इक्विपमेंट हाई परफॉर्मेंस ट्रेनिंग सेंटर, स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन सेंटर, एथलीट और कोच के रहने की सुविधा सहित मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं बनाई जाएंगी.&#039;&#039;
उन्होंने कहा, &#039;&#039;यह कॉम्प्लेक्स एक वर्ल्ड-क्लास इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स सेंटर होगा जो नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन आयोजित करने और ऐसे टैलेंटेड एथलीट तैयार करने में मदद करेगा.&#039;&#039;
मोटर स्पोर्ट्स सिटी
सीएम विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में नियम 110 के तहत एक वर्ल्ड-क्लास मोटर स्पोर्ट्स सिटी बनाने के बारे में घोषणा की. मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर बनाने में एक अग्रणी राज्य है. कई ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियां अपनी नई ऑटोमोबाइल फैक्ट्रियां लगाने के लिए इसे पहली पसंद मानती हैं. मोटर स्पोर्ट्स प्रोडक्शन यूनिट कोयंबटूर में चल रही हैं. चेन्नई के पास इरुंगट्टुकोट्टई में मद्रास इंटरनेशनल सर्किट और कोयंबटूर में KARI मोटर स्पीड वे मोटर रेसिंग के लिए जरूरी स्ट्रक्चर हैं.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 13:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>विजय, का, बड़ा, ऐलान, तमिलनाडु, में, बनेगा, नया, सचिवालय, और, विधानसभा</media:keywords>
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        <title>हवा में पायलट की तबीयत खराब, IndiGo की फ्लाइट ने मस्कट में की इमरजेंसी लैंडिंग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हवा-में-पायलट-की-तबीयत-खराब-indigo-की-फ्लाइट-ने-मस्कट-में-की-इमरजेंसी-लैंडिंग</link>
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        <description><![CDATA[ दोहा से बेंगलुरु जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E 1302 की गुरुवार सुबह मस्कट में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. उड़ान के दौरान फ्लाइट के पायलट की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद विमान को एहतियात के तौर पर मस्कट डायवर्ट किया गया. विमान की मस्कट एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई गई. लैंडिंग के तुरंत बाद पायलट को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. फिलहाल उनकी हालत ठीक बताई जा रही है.
यात्रियों को बेंगलुरु पहुंचाने की तैयारी
पायलट की तबीयत बिगड़ने के कारण फ्लाइट को मस्कट में उतारने के बाद यात्रियों को उनके गंतव्य बेंगलुरु तक पहुंचाने के लिए IndiGo ने वैकल्पिक व्यवस्था की है. एयरलाइन ने यात्रियों को बेंगलुरु पहुंचाने के लिए बेंगलुरु से मस्कट के लिए दूसरा विमान और नई क्रू टीम भेजने की व्यवस्था की है. इसके जरिए यात्रियों की आगे की यात्रा पूरी कराई जाएगी.
यह भी पढ़िएः&amp;nbsp;पंजाब के ड्राफ्ट SIR में राघव चड्ढा संग खेल, बोले- &#039;AAP की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं&#039;
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वंदे मातरम पर सोनम वांगचुक की पत्नी का बड़ा बयान, &amp;apos;किसी और को खुश करने के लिए...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वंदे-मातरम-पर-सोनम-वांगचुक-की-पत्नी-का-बड़ा-बयान-किसी-और-को-खुश-करने-के-लिए</link>
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        <description><![CDATA[ एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने &#039;वंदे मातरम&#039; के मूल भाव पर कहा, &quot;&#039;वंदे मातरम&#039; का मूल भाव है हे मां, मैं आपको नमन करती हूं. क्योंकि हमने दस हजार साल तक इसे मां के रूप में देखा है. इसलिए, हम उसको छोड़ नहीं सकते. हमारा दिल इतना बड़ा होना चाहिए कि हम सभी को अपना सकें, साथ ही हमें अपनी जीवन-शक्ति, अपनी संस्कृति और अपनी विरासत को भी ज़िंदा रखना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि आम लोगों के बीच उतनी समस्या है, जितनी कभी-कभी राजनीतिक एजेंडे के कारण बनाई गई बात या नैरेटिव से राजनेता लोगों को बांटने वाली सोच को बढ़ावा देते हैं.&quot;
हिंदू संस्कृति को लेकर राजनीति से पैदा हुए बंटवारे पर कहा, &quot;जब राजनीति अपने एजेंडे के लिए सार्वजनिक जीवन में आती है, तो यही समस्या होती है. साथ चलने के लिए खुद को खत्म करने की जरूरत नहीं है. अपनी असलियत को पहचानना और उसे सामने लाना और साथ ही दूसरों का भी अपनी असलियत को पहचानकर उसे सामने लाना यही असली खूबसूरती है. अगर मैं किसी और को खुश करने के लिए खुद को चुप करा लूं या दबा दूं और मेरी असलियत सामने न आए, तो आखिर में मैं खुश नहीं रह पाऊंगी.&quot;
वंदे मातरम पर कही ये बात
आंग्मो ने &#039;वंदे मातरम&#039; के बारे में कहा, &quot;एक राष्ट्रीय गीत के तौर पर यह हमेशा से मौजूद था, लेकिन लोगों की यादों से यह धीरे-धीरे मिटता जा रहा था. आज़ादी के दिन लाल किले से इसे गाए जाने में 80 साल लग गए और मुझे लगता है कि यह एक स्वागत योग्य कदम है. क्योंकि &#039;मां&#039; एक प्रतीक के तौर पर है, श्री अरबिंदो ने कहा था कि जब बंकिम चंद्र चटर्जी ने &#039;आनंदमठ&#039; लिखा, तो वे सिर्फ़ एक उपन्यासकार नहीं थे वे एक ऋषि थे. ऋषि वे द्रष्टा होते हैं जो देख सकते हैं, इसलिए उन्होंने इस ज़मीन को सिर्फ़ एक भौतिक भू-भाग के तौर पर नहीं, बल्कि &#039;शक्ति&#039; एक जीवित सत्ता के तौर पर देखा. यह &#039;माँ&#039; एक जीवित सत्ता है जिसके साथ आप रिश्ता बना सकते हैं. इसलिए इसमें 80 साल नहीं लगने चाहिए थे. शायद अगर हमें यह समझ पहले होती, तो आज हमें भारत के बंटवारे की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता.&quot;
10,000 साल पुरानी अपनी संस्कृति को दिखाने में क्यों झिझकना 
आंग्मो से पूछा गया कि वह भारत में बाहर से आए सांस्कृतिक प्रभावों को कैसे देखती हैं, तो उन्होंने कहा, &quot;बाद में भारत में दूसरे प्रभाव भी आए, जैसे मुग़ल प्रभाव या कुछ और हमने उन्हें अपना लिया. लेकिन उन्हें अपनाने का मतलब यह नहीं है कि हमें 10,000 साल पुरानी अपनी संस्कृति को दिखाने में झिझकना चाहिए. किसी और को जगह देने के लिए हमें खुद को छोटा नहीं समझना चाहिए. हर व्यक्ति के लिए अपनी महानता दिखाने की काफी जगह है. इसके कई उदाहरण हैं, जैसे अब्दुल कलाम उन्होंने उपनिषद, गीता और श्री अरबिंदो को पढ़ा था. मैं खुद सूफी कविताएं पढ़ती हूं. इसलिए, अगर कोई हिंदू कुरान या सूफी कविताएं पढ़ता है, तो इससे वे और समृद्ध ही होंगे और अगर कोई मुसलमान गीता पढ़ता है या संस्कृत बोलता है, तो इससे उनके धर्म के भ्रष्ट होने की बात नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे उर्दू बोलने से किसी हिंदू का धर्म भ्रष्ट नहीं होता.&quot;
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने विविधता को समझाने के लिए एक उदाहरण देते हुए कहा, &quot;एक बॉटनिकल गार्डन में जाते हैं, तो सभी फूल एक जैसे नहीं होते. हर फूल का रंग, आकार, खुशबू और साइज़ अलग-अलग होता है. बॉटनिकल गार्डन की खूबसूरती इसी में है. मोनोकल्चर हम जानते हैं कि खेती में भी यह एक गलत तरीका है. मोनोकल्चर अच्छा नहीं है, जबकि मियावाकी जंगल में सभी पौधे एक साथ उगते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर बेहतर ढंग से बढ़ते हैं. तो वही तालमेल या सिनर्जी, जो एक-दूसरे को आगे बढ़ाती है, उसी तरह राजनीतिक पार्टियों या विचारधाराओं को भी विविधता को बढ़ावा देना चाहिए, न कि सब कुछ एक जैसा बना देना चाहिए. हमें खुद को इतना शिक्षित और विकसित करना होगा कि हम एक-दूसरे का सम्मान करें.&quot;
&amp;nbsp;क्या विविधता के साथ जीने का यही सिद्धांत समाज और राजनीति पर भी लागू होता है? इस पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा, &quot;यह साथ मिलकर जीने का सिद्धांत है. जब हम सद्भाव की बात करते हैं, तो यही समाजवाद और पूंजीवाद के बीच का बुनियादी फ़र्क है और यह भी कि दोनों ही अधूरे क्यों हैं. क्योंकि समाजवाद कहता है कि हर किसी को अपनी बात कहने की समान आज़ादी होनी चाहिए, सब एक जैसे होने चाहिए. वहीं पूंजीवाद या व्यक्तिवाद कहता है कि हर किसी को अलग और अनोखा होना चाहिए. लेकिन असल सच्चाई इन दोनों का मिला-जुला रूप है कि जब मैं ईमानदारी से खुद को, यानी अपने सबसे गहरे सच को ज़ाहिर कर सकूं और आपको भी अपने सबसे गहरे सच को ज़ाहिर करने की आज़ादी हो, तभी एक आदर्श समाज बनता है ठीक वैसे ही जैसे जिगसॉ पज़ल के टुकड़े मिलकर एक पूरी तस्वीर बनाते हैं.&quot;
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भारत और विदेश में अपने अनुभवों के बाद अपनी जन्मभूमि ओडिशा लौटने के महत्व पर कहा, &quot;ओडिशा मेरी जन्मभूमि है और मैंने यहां से बहुत कुछ सीखा है. खासकर यहां के लोगों में श्री अरबिंदो के प्रति जो प्यार और सम्मान है, उसने श्री अरबिंदो की फिलॉसफी के ज़रिए मेरी दुनिया को देखने का नज़रिया बनाया. यह मेरी ज़िंदगी का एक बहुत अहम मोड़ था. जब मैं छोटी थी, तो मैं दुनिया की राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध या भारत की कई विचारधाराओं और नज़रियों को समझ नहीं पाती थी. उन्हें समझना मुश्किल था और मुझे एक ऐसे नज़रिए की ज़रूरत थी जो इन सबको एक साथ जोड़कर समझा सके. मुझे वह मंच श्री अरबिंदो की फिलॉसफी में मिला, जो ओडिशा में बहुत प्रचलित है. यह मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा तोहफ़ा रहा है. इस फिलॉसफी ने मुझे सिखाया कि हम जो दो विरोधी पक्ष देखते हैं जैसे लेफ्ट बनाम राइट, समाजवाद बनाम पूंजीवाद, धर्मनिरपेक्ष बनाम पवित्र, व्यक्ति बनाम समूह ये सब पश्चिमी ढांचे हैं जिन्हें हमने ज़बरदस्ती खुद पर थोपा है...&quot;
क्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजल ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वंदे, मातरम, पर, सोनम, वांगचुक, की, पत्नी, का, बड़ा, बयान, किसी, और, को, खुश, करने, के, लिए...</media:keywords>
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        <title>CJP के खिलाफ बनी CJP D, कहा&amp; &amp;apos;अभिजीत दीपके ने...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तरह कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक का ऐलान हुआ है. मनीष ब्रह्मभट्ट नाम के युवक ने कहा कि CJP पूरी तरह से केजरीवाल की पार्टी बन गई है. मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, &#039;&#039;आंदोलन देश का आंदोलन था. लोगों की वजह से आंदोलन सफल हुआ, आंदोलन खत्म होने के बाद इनका सौदा हो गया है. टीम केजरीवाल बन गई है.&#039;&#039;
उन्होंने कहा, &#039;&#039;अभिजीत दीपके की 12 लोगों की टीम बनाई, घर बैठ कर बना लिया. किसी वॉलेंटियर या आंदोलन से जुड़े लोगों को नहीं बुलाया गया. पद का क्या पैरामीटर है? उन्होंने आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को जोड़ा है. महिला मित्र, कॉलेज के मित्र को जोड़ लिया. हम चाहते थे कि हर राज्य से प्रतिनिधि हो. राजा बनकर कोई फैसला नहीं हो.&#039;&#039;
अहमदाबाद के रहने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट का दावा है कि वो सीजेपी आंदोलन से जुड़े थे. उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन अहम भूमिका निभाई थी. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: AIIMS में 13 साल तक इंतजार का बदला मौत, बड़े अस्पतालों में इलाज कितना मुश्किल?</title>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी को दिल्ली के AIIMS में गंभीर दिल की बीमारी का पता तब चला, जब तन्वी 2 साल की थी. तब डॉक्टरों ने सर्जरी कराने को कहा था. लेकिन वह सर्जरी कभी नहीं हो पाई. 13 साल तक तारीखें मिलीं, इंतजार बढ़ा और 1 सितंबर 2026 को 15 साल की उम्र में तन्वी ने AIIMS परिसर में ही दम तोड़ दिया. यह सिर्फ एक परिवार का किस्सा नहीं है. यह उस व्यवस्था की कहानी है जिसमें देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सालों-साल सर्जरी का इंतजार करना पड़ता है. आखिर AIIMS दिल्ली समेत देश भर के बड़े अस्पतालों में वेटिंग पीरियड कितना है और वजहें क्या हैं...
तन्वी की कहानी: जब 13 साल बेकार गुजरे
तन्वी पारियानी को 2012 में पहली बार AIIMS दिल्ली ले जाया गया. 31 जनवरी 2014 के AIIMS के एक मेडिकल दस्तावेज में उसे &#039;दिल में छेद और फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली धमनी का न होना&#039; डायग्नोस किया गया. डॉक्टरों ने सर्जरी की सिफारिश की, जिसका खर्चा करीब 1.2 लाख रुपए आंका गया.
परिवार का आरोप है कि 2015 में सर्जरी की तारीखें तय भी हुईं, लेकिन बार-बार बदलती रहीं और ऑपरेशन कभी हो ही नहीं पाया. 2018 में AIIMS ने सर्जरी से इनकार कर दिया. डॉक्टरों ने बताया कि तन्वी की फेफड़ों की धमनियां लगभग खत्म हो चुकी थीं. तन्वी के दिल की बनावट इतनी जटिल थी कि सर्जरी जानलेवा साबित हो सकती थी.
24 अगस्त 2026 को तन्वी को हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना जांचने के लिए AIIMS में भर्ती कराया गया. 31 अगस्त की शाम करीब 7 बजे उसका एंडोस्कोपी टेस्ट हुआ. 1 सितंबर को सुबह 2:50 बजे उसे थकान और कमजोरी महसूस हुई, ऑक्सीजन लेवल गिरकर 48% पर आ गया. सुबह 3:30 बजे ऑक्सीजन दी गई, लेकिन तब तक कार्डियक अरेस्ट हो चुका था. सुबह 5:06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया.
तन्वी के पिता मुकेश पारियानी का कहना है कि अगर समय पर सर्जरी हो जाती तो उनकी बेटी आज जिंदा होती. यह सवाल हर उस परिवार के मन में है जो सरकारी अस्पतालों में सर्जरी के लिए महीनों और सालों कतार में खड़ा है.
AIIMS दिल्ली में वेटिंग पीरियड कितना?
AIIMS दिल्ली में अलग-अलग बीमारियों के लिए 6 महीने से 5 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है...
कार्डियो-थोरेसिक-वैस्कुलर सर्जरी (दिल की सर्जरी)
यह वही विभाग है जहां तन्वी का इलाज होना था. 2025 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि कार्डियो-थोरेसिक-वैस्कुलर सर्जरी में प्लान्ड (यानी नॉन-इमरजेंसी) सर्जरी का इंतजार दो साल तक हो सकता है.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस विभाग में 690 मरीज सर्जरी का इंतजार कर रहे हैं. ये सिर्फ AIIMS दिल्ली के आंकड़े हैं. हालांकि सरकार ने यह भी कहा कि किसी भी दिल के मरीज को एक साल से ज्यादा की तारीख नहीं दी गई है. &#039;एक साल से कम&#039; का मतलब यह नहीं कि इंतजार कम है. एक साल भी बहुत लंबा समय है, खासकर जब जान दांव पर लगी हो.
न्यूरोसर्जरी (दिमाग और नसों की सर्जरी)
यहां हालात और भी बदतर हैं. न्यूरोसर्जरी में 1,324 मरीज इंतजार की कतार में हैं. वेटिंग पीरियड दो साल तक का हो सकता है. संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूरोसर्जरी में इंतजार 5 साल तक भी पहुंच जाता है.

आंख, बच्चे, बर्न्स एंड प्लास्टिक, यूरोलॉजी और डेंटल जैसे कुछ विभागों में बिल्कुल भी वेटिंग नहीं है. बशर्ते मरीज क्रिटिकल ट्रीटमेंट ले रहा हो.
देश भर में बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए कितना इंतजार?
लोक नायक जयप्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, LNJP अस्पताल में जनरल सर्जरी के लिए 2 से 3 महीने और बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी के लिए 6 से 8 महीने का इंतजार करना पड़ता है. CAG रिपोर्ट में यह भी पता चला कि LNJP के सर्जरी विभाग का एक बड़ा ऑपरेशन थिएटर 2016-17 से लेकर अगस्त 2022 तक बंद पड़ा था.
LNJP के निदेशक डॉ. राकेश चौधरी ने खुद माना कि मरीजों के अनुपात में ऑपरेशन थिएटर कम हैं और 24 घंटे ऑपरेशन थियेटर (OT) चालू नहीं रहता. बच्चों की सर्जरी (पीडियाट्रिक) के लिए 12 महीने तक की वेटिंग है.
सफदरजंग अस्पताल में भी हालत कुछ अलग नहीं
दिल की बीमारियों के मामले में 37,000 मरीज सर्जरी की कतार में हैं और 30,000 मरीज एंजियोप्लास्टी का इंतजार कर रहे हैं. यानी करीब 67,000 मरीज सिर्फ दिल के इलाज के लिए कतार में खड़े हैं.
हार्ट सर्जरी का औसत इंतजार 1.5 साल है, जबकि कुछ मरीजों को 2 साल तक इंतजार करना पड़ता है. AIIMS की तरह सफदरजंग और RML अस्पताल भी इसी भीड़-भाड़ की समस्या से जूझ रहे हैं. सफदरजंग में रोजाना 2,000 दिल के मरीज OPD में आते हैं.
RML अस्पताल में भी मरीजों की भारी भीड़
राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में इंतजार कम करने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं. यूरोलॉजी विभाग में अपग्रेडेड ऑपरेशन थिएटर लगाए गए हैं, जिससे रोजाना 18 से 20 सर्जरी हो पा रही हैं. लेकिन पूरे अस्पताल में बेड की कमी और इमरजेंसी में भी मरीजों को जमीन पर लेटना पड़ता है. संसद में भी यह माना गया कि RML में मरीजों की संख्या संसाधनों से कहीं ज्यादा है.
चंडीगढ़: पीजीआईएमईआर (PGI)
PGIMER चंडीगढ़ देश के टॉप मेडिकल संस्थानों में गिना जाता है, लेकिन यहां भी वेटिंग की समस्या गंभीर है. प्लांड सर्जरी के लिए 4 से 6 महीने का इंतजार था. इसे कम करने के लिए PGI ने ऑपरेशन थिएटर का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे (12 घंटे) कर दिया.
सर्जरी की संख्या में 10.46% की बढ़ोतरी हुई और वेटिंग पीरियड में 30-40% की कमी आई. पहले जहां 2 से 6 महीने की वेटिंग थी, अब मरीजों को तय तारीख से पहले ही ऑपरेशन का मौका मिल रहा है. किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 3 महीने का इंतजार होता था, जो बढ़कर 4 महीने हो गया.
हैदराबाद: तेलंगाना के बड़े अस्पताल
हैदराबाद के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों उस्मानिया जनरल हॉस्पिटल (OGH), गांधी हॉस्पिटल और NIMS में कुछ इलाज और सर्जरी के लिए 3 से 5 महीने का इंतजार करना पड़ता है. तेलंग ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सबसे ज्यादा बैंक&amp;रेलवे में भ्रष्टाचार, CVC रिपोर्ट से खुलासा, जानें बाकी सेक्टर का हाल</title>
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        <description><![CDATA[ सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) ने सरकारी संस्थाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी रिपोर्ट में बड़े खुलासे किए हैं. CVC की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल सरकारी संस्थाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की 70,500 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं. इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें बैंकों और रेलवे के खिलाफ थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, सतर्कता आयोग की ओर से काम करने वाले मुख्य विजिलेंस अधिकारियों (CVO) को कुल 70,584 शिकायतें मिली थीं. इनमें से 31 दिसंबर 2025 तक 64,905 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया था.
सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट 2025 में कहा गया है, &amp;lsquo;साल 2025 के अंत तक कुल 5,679 शिकायतों की जांच या कार्रवाई पूरी नहीं हुई थी. इनमें से 2,002 शिकायतें ऐसी थीं, जो 3 महीने से अधिक समय से लंबित थीं.&amp;rsquo; सीवीओ से अपेक्षा की जाती है कि वे शिकायतों की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करें. रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायतों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए आयोग समय-समय पर सीवीओ के पास लंबित शिकायतों की समीक्षा करता है.&amp;nbsp;
बैंकों के सीवीओ को सबसे अधिक 9,933 शिकायतें मिलीं. इनमें से 9,520 शिकायतों का निपटारा कर दिया गया, जबकि 413 शिकायतें लंबित थीं. इनमें 52 शिकायतें तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं. रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे से संबंधित 9,381 शिकायतें सीवीओ को मिलीं. इनमें से 8,754 शिकायतों का निपटारा किया गया, जबकि 627 शिकायतें 31 दिसंबर 2025 तक लंबित थीं. इनमें 10 शिकायतें तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं.&amp;nbsp;
आवास और शहरी मामलों से संबंधित कुल 6,531 शिकायतें मिलीं, जबकि दिल्ली सरकार को छोड़कर स्थानीय निकायों के खिलाफ 4,834 शिकायतें मिलीं. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल प्राप्त 4,118 शिकायतें कोयला क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों से संबंधित थीं. इसके अलावा 3,107 शिकायतें फाइनेंस सेक्टर, 2,804 दिल्ली सरकार और 2,722 शिकायतें पेट्रोलियम मंत्रालय से संबंधित थीं. यह रिपोर्ट हाल ही में सार्वजनिक की गई है. रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली पुलिस के खिलाफ कुल 2,633 शिकायतें मिलीं, जबकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग क्षेत्र से संबंधित 2,139 और दिल्ली पुलिस को छोड़कर केंद्रीय गृह मंत्रालय से संबंधित 2,036 शिकायतें प्राप्त हुईं.
रिपोर्ट में 2025 के दौरान सीवीसी की ओर से आवश्यक कार्रवाई के लिए सीवीओ को भेजी गई शिकायतों का विवरण भी दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी कुल 18,651 शिकायतों में सबसे अधिक 4,110 शिकायतें दिल्ली सरकार को छोड़कर स्थानीय निकायों से संबंधित थीं. इसके बाद बैंकों के खिलाफ 1,749, रेलवे से संबंधित 1,428, पेट्रोलियम मंत्रालय के खिलाफ 1,318, दिल्ली सरकार से संबंधित 1,307 और रक्षा मंत्रालय के खिलाफ 1,016 शिकायतें थीं. (इनपुट पीटीआई एजेंसी के साथ) ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;मैंने कहा शूट...&amp;apos;, रि. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने सुनाई ऑपरेशन सिंदूर की कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नया सीईओ नियुक्त किया है. इस पद के लिए लंबे समय से चयन प्रक्रिया चल रही थी, जिस पर अब अंतिम मुहर लग गई है. जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर तैनात थे. स्वतंत्रता दिवस 2025 पर उन्हें &#039;ऑपरेशन सिंदूर&#039; में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था.
न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में तबाही मचाई थी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने एस-400 डिफेंस सिस्टम तोड़ निकालने के लिए अपने जासूस भेजे थे. इस ऑपरेशन की तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, &#039;पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला हुआ था. शाम करीब 9 बजे तक मैंने एयरफोर्स चीफ को बता दिया था कि अगर सरकार सैन्य कार्रवाई का फैसला लेती है तो हम अपनी प्लानिंग के साथ तैयार हैं.&#039;
S-400 की लोकेशन जानना चाहता था पाकिस्तान
इस दौरान उन्होंने एस-400 को लेकर पाकिस्तान की नियत का खुलासा किया. रि. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तान ने हमारे देश के भीतर जासूस तैनात किए थे और S-400 की लोकेशन का पता करने के लिए स्लीपर सेल एक्टिव किए थे. S-400 ने पाकिस्तानी सेना की ओर दागे गए मिसाइल को कुछ ही देर में हवा में नष्ट कर दिया था. ऑपरेशन के दौरान इससे जुड़ी घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, &#039;मेरे S-400 के ऑपरेटर ने मुझसे पूछा शूट? मैंने कहा शूट.&#039;&amp;nbsp;
जितेंद्र मिश्रा ने सुनाई ऑपरेशन सिंदूर की कहानी
उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद ने S-400 सिस्टम का पता लगाने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया. उन्होंने बताया, &#039;पाकिस्तान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को अपना सबसे बड़ा खतरा मानता है, क्योंकि इसने पाकिस्तान के कई विमान और ड्रोन्स को इंटरसेप्ट किया है. S-400 की लोकेशन ट्रैक करने के लिए पाकिस्तान ने किसी दूसरे देश की सैटेलाइट और इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की मदद ली थी. पाकिस्तान को लगा कि S-400 आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात है, इसी वजह से उसने इस एयरबेस को सबसे ज्यादा निशाना बनाया.&#039;
इससे पहले जितेंद्र मिश्रा को 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल भी मिल चुका है. कारगिल युद्ध के दौरान जितेंद्र मिश्रा ने मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को संचालन में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बाद में इन बमों का इस्तेमाल &#039;ऑपरेशन सफेद सागर&#039; के तहत टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे रणनीतिक ठिकानों पर हमलों में किया गया. वह 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बागी सांसदों ने नोटिस का जवाब देने का मांगा समय, महुआ बोलीं &amp; &amp;apos;यह दिखाता है...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बागी-सांसदों-ने-नोटिस-का-जवाब-देने-का-मांगा-समय-महुआ-बोलीं-यह-दिखाता-है</link>
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        <description><![CDATA[ टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बुधवार (2 सितंबर) को उन 20 बागी सांसदों पर निशाना साधा है, जिन्होंने सांसदी रद्द करने की याचिकाओं के संबंध में जारी नोटिसों का जवाब देने के लिए और समय मांगा है. इस पर मोइत्रा ने कहा कि तय समय में जवाब न दे पाना यह दिखाता है कि वे जानते हैं कि उन्होंने गलती की है. आरोप लगाया कि ये सांसद टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीते थे, लेकिन बाद में वे NCPI और बीजेपी के गठबंधन के साथ चले गए. उनके पास अपने खिलाफ लगे आरोपों का कोई ठोस जवाब नहीं है.
मोइत्रा ने कहा कि बागी सांसदों के इस रवैये ने उनकी राजनीतिक चालों को उजागर कर दिया है. उनके मुखौटे उतर गए हैं. उनकी बेशर्मी और विश्वासघात सबके सामने है. टीएमसी सांसद का यह बयान तब सामने आया है, जब एक दिन पहले ही टीएमसी के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा था कि 20 बागी सांसदों ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं पर जारी नोटिसों का जवाब देने के लिए लोकसभा सचिवालय से तीन सप्ताह का समय मांगा है.
लोकसभा सचिवालय ने सात दिन में मांगा था जवाब
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, &amp;nbsp;मोइत्रा ने कहा, &#039;हमने भाजपा से गठबंधन करने वाले टीएमसी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दायर की हैं. लोकसभा सचिवालय ने पिछले सप्ताह उन्हें नोटिस भेजकर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा था. समय सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन वे जवाब नहीं दे पाए. अब उन्होंने दो-तीन सप्ताह का और समय मांगा है.&#039;
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महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल
महुआ ने सवाल उठाया कि जब सांसदों को अपना जवाब तैयार करने के लिए पहले ही काफी समय मिल चुका था तो इस तरह का और समय मांगने की क्या जरूरत थी. उन्होंने कहा, &#039;हमने जून में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था. वे अब तक जवाब क्यों नहीं दे पाए?&#039; आपको जवाब देने में एक सप्ताह से ज्यादा समय क्यों लगता है? अगर आप मुझसे पूछे तो मैं जवाब देने में इतना समय नहीं लूंगी.&#039;
बागी सांसदों ने मांगा और समय
लोकसभा सचिवालय ने बीते महीने ही बागी सांसदों को नोटिस जारी किया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी थी, जिसमें स्पीकर ओम बिरला से अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई थी. बागी सांसद अपने जवाब दाखिल करने से पहले वकीलों से सलाह ले रहे हैं और उनकी ओर से मांगे गए अतिरिक्त समय से सदन के सदस्य के रूप में उनके बने रहने को लेकर कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच सकती है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>‘कुछ बेरोजगार खुद को अर्थशास्त्री…’, विपक्ष&amp;आलोचकों पर पीयूष गोयल का तंज</title>
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        <description><![CDATA[ कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने विपक्षी पार्टियों और पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी सुभाष गर्ग की आलोचना की है. उन्होंने बुधवार को बयान देते हुए &amp;nbsp;7.8 जीडीपी ग्रोथ पर गर्ग की टिप्पणियों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें सही तुलना करना नहीं आता. वे भारत के लोगों को गुमराह करने की कोशिशें कर रहे हैं.
भारत की संशोधित जीडीपी सीरिज के मुताबिक, साल 2026 और 27 की पहली तिमाही में भारत की इकोनॉमी में वास्विक रूप से 7.8 की वृद्धि दर्ज की गई है. गोयल ने कहा है कि उथल-पुथल भरी इस दुनिया में भारत रेगिस्तान में एक ओएसिसि की तरह है. देश दुनिया की बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी बना हुआ है.&amp;nbsp;
आलोचक जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन 7.8 प्रतिशत ग्रोथ एक सच्चाई है: पीयूष गोयल
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने कहा, &#039;आलोचक जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ एक सच्चाई है. जब मैं टेलीविजन पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं और शायद आप उनमें पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को शामिल कर सकते हैं, जो दोनों ही भारत या सरकार में अपना नेताओं को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि उन्हें तुलना करना नहीं आता है. बयान में उन्होंने पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को भी शामिल किया है, जो भारत या सरकार में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए.&#039;&amp;nbsp;
तिरुपुर में एक लाख लोग भेजिए, हम उन्हें नौकरी देंगे: पीयूष गोयल
गोयल ने कहा कि तिरुपुर में एक लाख भेजिए, हम उन्हें नौकरी देंगे. उन्होंने कहा कि आलोचक किसी तरह यह पचा नहीं पा रहे हैं कि अब वे एकमात्र बेरोजगार लोग बचे हैं. उनके पास बची खुची एकमात्र नौकरी टेलीविजन पैनल पर जाकर कोई तर्क गढ़ना या मनगढ़ंत बातें करना है. गर्ग ने कहा कि अगर पिछले साल की जीडीपी को लगभग 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया गया होता तो मौजूदा कीमतों पर जीडीपी ग्रोथ लगभग 2.6 प्रतिशत होती.
उन्होंने यह भी कहा कि सच को छिपाया नहीं जा सकता. हर महीने और हर तिमाही में होने वाली घटनाओं को रिकॉर्ड करने वाला सिस्टम बरसों से चल रहा है. हम राजनेता, मंत्री, सांसद इन आंकड़ों को नहीं बनाते. गोयल ने कहा कि जब आप इतनी नकारात्मक सोच के साथ सामने आते हैं, तो एक तरह से आप खुद को छोटा कर रहे होते हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>तेलंगाना में कांग्रेस और BJP कार्यकर्ताओं में झड़प, दफ्तरों पर हमले</title>
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        <description><![CDATA[ तेलंगाना के यादाद्री भुवनगिरी जिले में राजनीतिक हिंसा की एक नई लहर देखने को मिली है, जहां कांग्रेस और BJP कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के पार्टी दफ्तरों के बाहर पत्थरबाजी और तोड़-फोड़ की. यह झड़प तब शुरू हुई, जब BJP नेताओं ने कथित तौर पर स्थानीय कांग्रेस विधायक के कैंप ऑफिस पर हमला किया, जिसके जवाब में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में BJP दफ्तर को निशाना बनाया. इसके बाद पुलिस को दखल देना पड़ा और झगड़ रहे समूहों को तितर-बितर करना पड़ा.
क्यों भड़का विवाद?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विवाद तब शुरू हुआ जब BJP कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भुवनगिरी विधायक के कैंप ऑफिस पर हमला किया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. इसके जवाब में, कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक समूह नारे लगाते और पत्थर फेंकते हुए BJP दफ्तर पहुंचा. दोनों तरफ से पत्थरबाजी होने से स्थिति बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिस को हालात काबू में करने के लिए हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा. अभी तक किसी के घायल होने की खबर नहीं है और पुलिस ने दोनों पार्टियों के अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज की एफआईआर&amp;nbsp;

BJP filed an FIR against Rahul Gandhi. Nalgonda Youth Congress filed its reply, right outside BJP&amp;rsquo;s office in Telangana????Kharge ji&amp;rsquo;s insult and the attack on constitutional rights will neither be buried nor forgotten. pic.twitter.com/QmZeCG2zRL
&amp;mdash; Indian Youth Congress (@IYC) September 1, 2026



पुलिस ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक रैली के दौरान अडानी मुद्दे पर की गई टिप्पणी को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की है. शिकायत में आरोप लगाया गया कि गांधी ने सरकार और प्रधानमंत्री के बारे में आपत्तिजनक और झूठे बयान दिए. इस बीच तेलंगाना में नलगोंडा यूथ कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष के नेतृत्व में BJP दफ्तर के ठीक बाहर विरोध प्रदर्शन किया और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अपमान और संवैधानिक अधिकारों पर हमले की निंदा की.
जिला प्रशासन ने तैनात किए अतिरिक्त बल
पुलिस ने दोनों पार्टियों के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है. हालांकि, दोनों तरफ के नेताओं का दावा है कि उनके कार्यकर्ता सिर्फ अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे थे. पुलिस ने अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए इलाके के CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है. राजनीतिक तनाव के बीच जिला प्रशासन ने और ज़्यादा हिंसा रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः AI-171 विमान हादसाः राम मोहन नायडू का बड़ा बयान, &amp;lsquo;अंतिम चरण में जांच...&amp;rsquo; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>तेलंगाना, में, कांग्रेस, और, BJP, कार्यकर्ताओं, में, झड़प, दफ्तरों, पर, हमले</media:keywords>
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        <title>कारगिल&amp;लेह पदयात्रा को KDA ने पूर्ण समर्थन का किया ऐलान, क्या हैं मांग?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कारगिल-लेह-पदयात्रा-को-kda-ने-पूर्ण-समर्थन-का-किया-ऐलान-क्या-हैं-मांग</link>
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        <description><![CDATA[ कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने मंगलवार (1 सितंबर) को प्रस्तावित कारगिल-लेह पदयात्रा को अपना पूरा समर्थन देने की घोषणा की. यह पदयात्रा सोशलिस्ट पार्टी और अन्य नागरिक व राजनीतिक संगठनों की ओर से लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची और 24 सितंबर की घटना के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग के समर्थन में आयोजित की जा रही है.
KDA और अन्य संबंधित पक्षों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें KDA के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई और सज्जाद कारगिली के साथ-साथ KDA के सदस्य और सभी संबंधित पक्ष शामिल हुए. बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें KDA ने 10 से 24 सितंबर तक होने वाली कारगिल-लेह पदयात्रा के लिए अपना पूरा समर्थन घोषित किया. इस बैठक में लद्दाख के सांसद हाजी हनीफा जान भी शामिल हुए.
क्या बोले KDA के सह-अध्यक्ष ?
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए KDA के सह-अध्यक्ष असगर अली करबलाई ने कहा कि कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस लद्दाख के लोगों के संवैधानिक, लोकतांत्रिक और जायज़ अधिकारों के लिए अपना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासन और भारत सरकार कारगिल और लेह क्षेत्रों के लोगों के जायज अधिकारों और मांगों को मान्यता नहीं देते और उन पर ध्यान नहीं देते, तब तक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष और लोगों की आवाज़ उठाने का काम जारी रहेगा.
पदयात्रा को दिया समर्थन
उन्होंने कहा कि पदयात्रा को कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस का पूरा समर्थन मिलेगा. KDA के सह-अध्यक्ष और पदयात्रा के संयोजक सज्जाद कारगिली पूरी यात्रा के दौरान नियमित रूप से मीडिया को जानकारी देंगे और संदीप पांडे के साथ मिलकर यात्रा का नेतृत्व करेंगे. कार्यक्रम के अनुसार, पदयात्रा 10 सितंबर को कारगिल से शुरू होकर हानिसकोट तक जाएगी, और इस हिस्से में समन्वय की ज़िम्मेदारी कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस की होगी. हानिसकोट से लेह तक, पदयात्रा का समन्वय लेह एपेक्स बॉडी (LAB) द्वारा किया जाएगा.
यह पदयात्रा 24 सितंबर को लेह में कैंडललाइट विजिल (मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि देने) के साथ समाप्त होगी. यह कार्यक्रम 24 सितंबर की दुखद घटना की याद में आयोजित किया जाएगा, जब लेह में विरोध प्रदर्शन के दौरान चार युवाओं की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल व हिरासत में लिए गए थे.
&#039;पदयात्रा किसी व्यक्ति या राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं&#039;
पदयात्रा पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता दोहराएगी और न्याय, जवाबदेही तथा उन मुद्दों के विश्वसनीय समाधान की मांग को फिर से उठाएगी जिनके कारण यह त्रासदी हुई थी. KDA ने जोर देकर कहा कि यह पदयात्रा किसी व्यक्ति या राजनीतिक पार्टी के खिलाफ नहीं है, बल्कि लद्दाख के लोगों के लोकतांत्रिक, संवैधानिक और जायज़ अधिकारों के लिए एक शांतिपूर्ण जन-आंदोलन है.
देश के अलग-अलग हिस्सों से सांसद, सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य जानी-मानी हस्तियां भी इस पदयात्रा में शामिल हो सकती हैं. जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है. बैठक में मौजूद सभी लोगों ने कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस को पूरा समर्थन देने और पदयात्रा को सफल बनाने के अपने संकल्प को दोहराया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत, लोकतांत्रिक भागीदारी और शांतिपूर्ण जन-सहभागिता के ज़रिए किया जाना चाहिए.
तेलंगाना में कांग्रेस और BJP कार्यकर्ताओं में झड़प, दफ्तरों पर हमले ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कारगिल-लेह, पदयात्रा, को, KDA, ने, पूर्ण, समर्थन, का, किया, ऐलान, क्या, हैं, मांग</media:keywords>
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        <title>महंगा चश्मा दिया, हाथ थामकर घूमे, दिल जीत लेगा CM विजय का ये Video</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महंगा-चश्मा-दिया-हाथ-थामकर-घूमे-दिल-जीत-लेगा-cm-विजय-का-ये-video</link>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की एक बुजुर्ग महिला के साथ मुलाकात का दिल छू लेने वाला वीडियो सामने आया है. मेट्टूर दौरे के दौरान सामने आईं उनकी तस्वीरों ने हर किसी का दिल जीत लिया. विजय ने इस छोटी सी मुलाकात में बूढ़ी अम्मा को अपना महंगा चश्मा तक गिफ्ट कर दिया. &amp;nbsp;चश्मा पाकर उनका चेहरा खिलखिला उठा और उन्होंने फौरन विजय को गले लगा लिया और आशीर्वाद देती दिखाई दीं. विजय की इस दरियादिली को देखकर वहां मौजूद हर शख्स गदगद हो गया.
विजय मंगलवार (1 सितंबर) को सलेम में थे, जहां उन्होंने मेट्टूर हाइट्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट का निरीक्षण करने और खेती को आसान बनाने के लिए मेट्टूर स्थित स्टेनली जलाशय के स्लुइस गेट खोले. कम बारिश और पानी के कम स्टोरेज के कारण लगभग तीन महीने की देरी के बाद कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा गया. यहां से वापस एयरपोर्ट लौटते समय एक सड़क किनारे स्थित फार्म हाउस पर रुके. यहां से वह खेत में काम करने वाली बुजुर्ग महिलाओं से मिलने पहुंचे थे. इनमें बुजुर्म महिला चेल्लम भी शामिल थीं.

The way people showing their love to CM Vijay &amp;hearts;️ தமிழ்நாட்டின் தங்கபிள்ளை விஜய் ????&amp;hearts;️ pic.twitter.com/I2zdiqRnsB
&amp;mdash; ???????????? ???????????????????????? (@TVK_Dinshu) September 1, 2026



चश्मा पहनकर विजय के साथ घूमीं बुजुर्ग
विजय के काफिले को देखकर वहां भीड़ उमड़ पड़ी. चेल्लम भी तमिलनाडु सीएम को नजदीक से देखने के उनके पास बढ़ीं. इसके बाद विजय का हाथ थामकर वह साथ घूमती दिखाई दीं. सीएम ने उनका नाम पूछा और हालचाल लिया. यही नहीं, विजय ने चेल्लम को अपना क्रिश्चियन डायोर का महंगा चश्मा उनको अपने हाथों से पहना दिया. इसके पहनकर वह विजय के बगल में चलती हुई दिखाई दीं. उनका हाथ विजय के हाथ पर था और वह रास्ते में जमा लोगों को हाथ हिला रही थीं, जबकि विजय उन्हें भीड़ के बीच से आगे ले जा रहे थे.
&#039;वो पल करोड़ों रुपये जीतने जैसा&#039;
बुजुर्ग महिला चेल्लम ने पीटीआई को बताया, &#039;जब वे आकर मेरे बगल में खड़े हुए तो मैं हैरान रह गई. मैंने उन्हें बताया कि उन्हें देखकर मुझे कितनी खुशी हुई और उन्होंने मुझे ये चश्मा उपहार में दे दिया. चेल्लम के अनुसार उनके लिए वह पल &#039;करोड़ रुपये जीतने&#039; जैसा था.&#039;
बॉडी नंबर 1003...तीन दावेदार, दर्दनाक है नेपाल बाढ़ की ये कहानी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>महंगा, चश्मा, दिया, हाथ, थामकर, घूमे, दिल, जीत, लेगा, विजय, का, ये, Video</media:keywords>
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        <title>भारतीय रक्षा बलों में एयर वाइस मार्शल रैंक हासिल करने वाली पहली अधिकारी बनीं शक्ति शर्मा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारतीय-रक्षा-बलों-में-एयर-वाइस-मार्शल-रैंक-हासिल-करने-वाली-पहली-अधिकारी-बनीं-शक्ति-शर्मा</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को भारतीय वायु सेना (IAF) की एक ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की. सरकार ने कहा कि भारतीय वायु सेना के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि में एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा भारतीय रक्षा बलों में एयर वाइस मार्शल (या समकक्ष) रैंक हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी (नॉन-मेडिकल) बन गई हैं. उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में मंगलवार (1 सितंबर) को असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (एजुकेशन) का पदभार संभाला.
तीन दशक से ज्यादा समय से वायु सेना में शामिल हैं शक्ति शर्मा
सरकार ने बताया कि एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा 18 जून, 1994 को यानी तीन दशक पहले भारतीय वायु सेना (IAF) की एजुकेशन ब्रांच में कमीशन हासिल किया था, जो अपने नए पद पर व्यापक अनुभव लेकर पहुंची हैं. अपने तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने ट्रेनिंग संस्थानों, फील्ड स्टेशनों, कमांड हेडक्वार्टर्स और एयर हेडक्वार्टर में कई अलग-अलग पदों पर अपने सेवाएं दी हैं.
भारतीय वायु सेना में शक्ति शर्मा के नाम कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां

➡️In a historic milestone for the Indian Air Force Air Vice Marshal Shakti Sharma became the first woman officer (non-medical) in the Indian Defence Forces to attain the rank of Air Vice Marshal (or equivalent). On 01 September 2026, she assumed the appointment of Assistant Chief&amp;hellip; pic.twitter.com/kIqjZT043d
&amp;mdash; PIB India (@PIB_India) September 1, 2026



एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण संस्थागत अभियानों का भी नेतृत्व किया है. इनमें आईआईटी कानपुर और पुणे यूनिवर्सिटी में IAF चेयर्स ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी शामिल है. इसका उद्देश्य एकेडमिक क्षेत्र और रणनीतिक रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना था. इसके अलावा, उन्होंने तीनों सेनाओं में से पहली महिला अधिकारी बनकर सैनिक स्कूल की कमान संभालने का गौरव भी हासिल किया है. उन्होंने पंजाब के कपूरथला में स्थित सैनिक स्कूल की प्रिंसिपल के तौर पर अपनी सेवाएं दीं हैं.
आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगी एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा
यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय रक्षा बलों में महिला अधिकारियों की यात्रा के एक नए अध्याय की शुरुआत है. तीन दशक से ज्यादा की विशिष्ट सेवा के साथ एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा भविष्य की पीढ़ियों को &amp;lsquo;टच द स्काई विद ग्लोरी&amp;rsquo; यानी &amp;lsquo;गौरव के साथ आकाश को छूने&amp;rsquo; के लिए प्रेरित करती रहेंगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः AI-171 विमान हादसाः राम मोहन नायडू का बड़ा बयान, &amp;lsquo;अंतिम चरण में जांच...&amp;rsquo; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारतीय, रक्षा, बलों, में, एयर, वाइस, मार्शल, रैंक, हासिल, करने, वाली, पहली, अधिकारी, बनीं, शक्ति, शर्मा</media:keywords>
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        <title>भारत का &amp;apos;शिकारी&amp;apos; रुद्रास्त्र&amp; 500 KM रेंज, 400 की स्पीड, ताकत देख कांप रहा PAK</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-का-शिकारी-रुद्रास्त्र-500-km-रेंज-400-की-स्पीड-ताकत-देख-कांप-रहा-pak</link>
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        <description><![CDATA[ भारतीय वायुसेना अपनी क्षमता को अगले स्तर पर ले जा रहा है. हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से लॉन्च होने वाले लोइटरिंग म्यूनिशंस और किलर ड्रोन्स क नई तकनीक अपनाने की दिशा में काम कर रहा है. अब बिना पायलटों की जान को जोखिम में डाले दुश्मन के ठिकाने पर सटीक निशाना साधेंगे. ये नई तकनीक भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगी.
भारत जिस एयर लॉन्च कैपेबिलिटी पर काम कर रहा है उसकी ताकत बहुत खतरनाक है. ये 0 से 500 किलोमीटर की लंबी रेंज, 400 किमी/घंटा तक की धांसू स्पीड और 30 किलो तक वॉरहेड ले जाने की क्षमता वाले हथियार हैं. इनमें बिना पायलट के दुश्मनों को गिराया जा सकता है.
ये है खासियतये हेलिकॉप्टर लॉन्च ड्रोन बहुत ही खास हैं. ये स्वदेशी पावर पैक एयर कॉम्बैट का नियम बदल देंगे. रियल टाइम वीडियो फीड, मैन इन द लूप कंट्रोल से लैस हैं. ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से लॉन्च होने वाले लोइटरिंग म्यूनिशन के लिए एक अलग रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन भी जारी किया गया है, जिनकी रेंज 500 किलोमीटर, वॉरहेड 30 किलोग्राम और क्रूजिंग स्पीड 350-400 किलोमीटर प्रति घंटा होनी चाहिए.&amp;nbsp;
NLOS गाइडेड वेपंसइनकी रेंज की बात करें तो ये 50 से 60 किमी है.इनका मैन इन द लूप कंट्रोल के साथ रियल टाइम वीडियो फीड है. हमला करने से ठीक पहले भी पायलट अपना टारगेट बदल सकता है या अबॉर्ट कर सकता है.ये हल्के, बेहद किफायती, बख्तरबंद टैंको और सॉफ्ट टारगेट्स दोनों को ही तबाह कर सकते हैं.
हेलिकॉप्टर-डिप्लॉयड ड्रोन्सइनकी रेंज की बात करें तो ये 80 किमी से भी अधिक है.ये कम से कम 500 ग्राम का वॉरहेड ले जा सकता है.
ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लोइटरिंग म्यूनिशन्स
इनकी रेंज 500 किमी है.ये 30 किलो का भारी भरकम वॉरहेड ले जा सकता है.
स्पीड की बात करें तो 350-400 किमी/घंटा की सुपर फास्ट स्पीड है.
दुनियाभर में बढ़ेगी ताकत
दुनियाभर में ये तकनीक तेजी से बढ़ रही है. अमेरिका अपने Black Hawk हेलिकॉप्टर से Altius-700 को टेस्ट कर चुका है. इजरायल का Hero-120 सिस्टम मिड-एयर में ग्राउंड फोर्सेस को कंट्रोल ट्रांसफर करने की क्षमता रखता है. भारत की ये नई पहल रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन भारतीय वायुसेना को ग्लोबल सुपरपॉवर्स की बराबरी में आधुनिक वॉरफेयर के लिए तैयार है.
ये भी पढ़ें: ईरान का बदला, जॉर्डन-बहरीन में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हमला, कई US सैनिक मारने का दावा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, का, शिकारी, रुद्रास्त्र-, 500, रेंज, 400, की, स्पीड, ताकत, देख, कांप, रहा, PAK</media:keywords>
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        <title>FIR पर SC के फैसले पर अभिजीत दीपके की पहली प्रतिक्रिया, क्या कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट की तरफ से स्टूडेंट प्रोसेस्ट में शामिल छात्रों पर किए गए सभी एफआईआर को रद्द करने और इस मामले का खत्म करने के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पर अपना पहला रिएक्शन दिया है. अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें वह भारत का संविधान दिखाते हुए नजर आ रहे हैं. इसके साथ ही, उन्होंने अपने पोस्ट के कैप्शन में जय हिंद लिखकर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की एक इमोजी भी शेयर की है.
CJP ने आधिकारिक X हैंडल से क्या किया पोस्ट?
वहीं, देश की सर्वोच्च अदालत की तरफ से मंगलवार (1 सितंबर, 2026) को इस आदेश के आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर अपनी प्रतिक्रिया दी. सीजेपी ने इसे छात्रों की बड़ी जीत करार दिया है.

Jai Hind ???????? pic.twitter.com/5lHvWX585h
&amp;mdash; Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 1, 2026




Big Victory for the Students!The Supreme Court has dismissed the unjust legal cases against students. Our demands have been heard, and no student will face such action anymore.Inquilab Zindabad! https://t.co/sLGSA9oa2O
&amp;mdash; Cockroach Janta Party - CJP (@Cockroachisback) September 1, 2026



पोस्ट में सीजेपी ने कहा, &amp;lsquo;सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ चल रहे सभी अन्यायपूर्ण मुकदमों को खारिज कर दिया है. हमारी मांगें सुनी गई हैं और अब किसी भी छात्र को आगे ऐसी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा. इंकलाब जिंदाबाद!&amp;rsquo;&amp;nbsp;
सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले में फैसला देते हुए नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर करीब एक महीने तक प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने कहा कि वह यह फैसला उन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर ले रही है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और अच्छी नीयत के साथ छात्र आंदोलन में हिस्सा लिया था.
कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि 20 से 25 जुलाई, 2026 के बीच छात्र प्रदर्शन से जुड़े जितने भी एफआईआर दर्ज किए गए हैं, उन्हें रद्द करने के साथ इस मामले को अब बंद करने का आदेश दिया जाता है. देश के जिन भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए गए हैं, उन पर अब आगे जांच नहीं बढ़ाई जाएगी और न हीं कोई कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, आपराधिक प्रवृति के 2,873 लोगों के खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की जाएगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः SC के फैसले पर सौरव दास ने जोड़े हाथ, CJI ने की तारीफ ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>TMC सांसद महुआ मोइत्रा को दिखाए गए काले झंडे, &amp;apos;गो बैक&amp;apos; के लगे नारे</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को अपने ही संसदीय क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा. नदिया जिले के छपरा में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ &#039;वापस जाओ&#039; के नारे लगाए गए. महुआ मोइत्रा आज (1 सितंबर) सुबह पार्टी की बैठक में भाग लेने के लिए नदिया के छपरा गई थीं. वहां कुछ लोग काले झंडे लिए जमा हो गए और &#039;वापस जाओ&#039; के नारे लगाते हुए कहा कि उनकी सांसद ने उनके इलाके के लिए कुछ नहीं किया. बाद में, महुआ मोइत्रा वहां से चली गईं. वहां जमा हुए स्थानीय लोगों ने दावा किया कि वे भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे से हैं और उनकी सांसद ने उनके इलाके के लिए कुछ नहीं किया. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TMC, सांसद, महुआ, मोइत्रा, को, दिखाए, गए, काले, झंडे, गो, बैक, के, लगे, नारे</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;BJP और &amp;apos;वोट चोरी आयोग&amp;apos; के तरीके...&amp;apos;, राहुल गांधी का केन्द्र&amp;EC पर बड़ा हमला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bjp-और-वोट-चोरी-आयोग-के-तरीके-राहुल-गांधी-का-केन्द्र-ec-पर-बड़ा-हमला</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/bjp-और-वोट-चोरी-आयोग-के-तरीके-राहुल-गांधी-का-केन्द्र-ec-पर-बड़ा-हमला</guid>
        <description><![CDATA[ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में एसआईआर के बाद जारी हुई पहली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर सवाल उठाते हुए बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, &#039;भाजपा और &#039;वोट चोरी आयोग&#039; के तरीके बदलते रहते हैं और बदलते रहेंगे. मकसद बस एक ही है कि किसी भी कीमत पर BJP की जीत और भारत के लोकतंत्र का अंत.&#039;
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में राहुल गांधी ने आगे लिखा, &#039;महाराष्ट्र 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचानक 39 लाख नए वोटर जुड़ गए. मैंने तब भी कहा था आज भी कहता हूं, यह वोट चोरी थी. उन्होंने कहा , बंगाल 2026 में SIR में जिन नामों को काटा गया, उनमें से 91 प्रतिशत नाम अपील के बाद वापस जोड़ने पड़े. यानी हर 10 में से 9 नाम गलत तरीके से काटे गए और नाम चुनाव के बाद ही जोड़े गए। मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूं: यह वोट चोरी थी और अब महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं को ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया है. यानी हर पांचवां वोटर.&#039;
उन्होंने आंकड़े देते हुए लिखा, &#039;लोक सभा 2024 में 9.29 करोड़, विधान सभा 2024 में 9.7 करोड़. SIR 2026 में 7.78 करोड़. कौन सी लिस्ट सही थी? वोट चोरी से बनी सरकार के लिए जनता जरूरी नहीं है. यही कारण है कि ये BJP न जनता की सुनती है, न उनका आदेश मानती है.&#039;

भाजपा और &#039;वोट चोरी आयोग&#039; के तरीके बदलते रहते हैं, और बदलते रहेंगे - मकसद बस एक ही है: किसी भी क़ीमत पर BJP की जीत, और भारत के लोकतंत्र का अंत।महाराष्ट्र 2024 - लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच अचानक 39 लाख नए वोटर जुड़ गए। मैंने तब भी कहा था, आज भी कहता हूँ: यह वोट चोरी थी।&amp;hellip;
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 1, 2026



महाराष्ट्र से हटाए गए 2.06 करोड़ के नाम
महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 2.06 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए थे. यह संख्या राज्य के पिछले वोटर्स का करीब 21.14 प्रतिशत है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सोमवार (31 अगस्त) को दी गई जानकारी के मुताबिक, मौजूदा मसौदा मतदाता सूची में 7.71 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जिनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.75 करोड़ महिलाएं और 3,087 थर्ड जेंडर के मतदाता हैं.
चुनाव आयोग ने बताई वजह
CEO के मुताबिक, 2,06,88,487 मतदाताओं को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उनके गणना प्रपत्र जमा नहीं हो पाए या उनसे संपर्क नहीं हो सका या उनकी मौत हो गई थी या फिर उन्होंने अपना आवास बदल लिया था. एसआईआर की प्रक्रिया से पहले महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 78.86 प्रतिशत मतदाताओं को मसौदा मतदाता सूची में जगह मिली है.
(इस खबर को अपडेट किया जा रहा है) ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>क्रीमी लेयर पर केंद्र सरकार की SC में अर्जी, कहा&amp; कोई अंतरिम आदेश न दें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्रीमी-लेयर-पर-केंद्र-सरकार-की-sc-में-अर्जी-कहा-कोई-अंतरिम-आदेश-न-दें</link>
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        <description><![CDATA[ ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज दी है. सुप्रीम कोर्ट ने आज कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया। 17 सितंबर को सुनवाई की बात कही. केंद्र ने इस साल 11 मार्च को आया फैसला लागू करने में राहत मांगी है. उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की आमदनी देखना काफी नहीं है। उनका पद भी देखा जाना चाहिए.केंद्र ने अचानक इसे लागू करने से जटिलता बढ़ने का हवाला देते हुए UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 और 2026 के लिए छूट की मांग की है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
    <item>
        <title>Xप्लेन: 7.8% GDP ग्रोथ डिकोड! सरकार का &amp;apos;गोल्ड&amp;apos; या विपक्ष का &amp;apos;गेम ऑफ डिस्टॉर्शन&amp;apos;?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-78-gdp-ग्रोथ-डिकोड-सरकार-का-गोल्ड-या-विपक्ष-का-गेम-ऑफ-डिस्टॉर्शन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-78-gdp-ग्रोथ-डिकोड-सरकार-का-गोल्ड-या-विपक्ष-का-गेम-ऑफ-डिस्टॉर्शन</guid>
        <description><![CDATA[ भारत की अर्थव्यवस्था यानी GDP ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी की दर से ग्रोथ की. ये ग्रोथ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 7 फीसदी के अनुमान और 58 अर्थशास्त्रियों के 7.1 फीसदी के औसत अनुमान से ज्यादा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे &#039;अभूतपूर्व उपलब्धि&#039; बताया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये NDA सरकार के मैनेजमेंट का नतीजा है. लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाते हुए कह दिया कि यह बहुत बिगड़ी हुई तस्वीर है. तो GDP क्या है से लेकर 7.8% के मायनों की असली कहानी डिकोड करते हैं...
आखिर GDP होती क्या है?
GDP का पूरा नाम है Gross Domestic Product. हिंदी में कहें तो &#039;सकल घरेलू उत्पाद.&#039;
बहुत आसान भाषा में समझें तो- GDP किसी देश की सीमाओं के अंदर एक निश्चित समय (तीन महीने या एक साल) में बनने वाली सभी चीजों और सेवाओं की कुल कीमत होती है.
थोड़ा और आसान करें- मान लीजिए पूरे भारत में एक साल में जितनी भी रोटियां बनती हैं, जितने भी कपड़े बनते हैं, जितनी भी मोबाइल फोन असेंबल होते हैं, जितनी भी फिल्में बनती हैं, जितने भी ऑटो-रिक्शा चलते हैं और जितनी भी दवाइयां बनती हैं समेत हर एक चीज की कीमत जोड़ें, तो वही GDP है.
GDP को दो तरह से देखा जाता है:

रियल GDP: महंगाई का असर निकालने के बाद की GDP
नॉमिनल GDP: महंगाई समेत मौजूदा कीमतों पर GDP

रियल GDP बताती है कि वाकई कितना उत्पादन बढ़ा है. नॉमिनल बताती है कि कीमतों के हिसाब से कितना बढ़ा है.
एक और शब्द है ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA). ये GDP का एक हिस्सा है. ये बताता है कि कृषि, उद्योग और सेवाएं जैसे अलग-अलग सेक्टरों ने कितना योगदान दिया. अब इन्हीं आंकड़ों को समझते हैं.
GDP का 7.8% का आंकड़ा क्या है?

यानी भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून 2026 में जबरदस्त प्रदर्शन किया. ये तब हुआ जब ईरान-अमेरिका युद्ध चल रहा था और तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया था.

सबसे बड़ी बात यह है कि मैन्युफैक्चरिंग 9.2% की रफ्तार से बढ़ा. फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विसेज ने 12.1% की जबरदस्त ग्रोथ दी. कंस्ट्रक्शन 7.7% पर रहा. यानी, उद्योग और सेवाओं ने मिलकर ये ग्रोथ दी है. हालांकि, कृषि 3.6% पर सिमट गई, जो पिछले साल 4.4% थी. खनन में तो 2.4% की गिरावट आई. यानी, सभी सेक्टर एक जैसे नहीं चले.
निवेश, खपत और निर्यात ने दिया साथ
ग्रोथ सिर्फ एक सेक्टर की वजह से नहीं आई। तीनों इंजनों ने साथ दिया:

निजी खपत: 7.1% बढ़ी
निवेश: 11.9% की जबरदस्त बढ़ोतरी
निर्यात: 12.0% बढ़े

यानी, लोगों ने ज्यादा खर्च किया, कंपनियों ने ज्यादा निवेश किया और देश ने ज्यादा माल बेचा. तीनों मिलकर ये आंकड़ा बना.
मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा, &#039;मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज ने पहली तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया है. पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर उम्मीद से ज्यादा लंबा रह सकता है. ब्रेंट क्रू़ड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने की संभावनी नहीं है.&#039;
यानी, तेल की कीमतें ज्यादा बनी रहेंगी. यह भारत के लिए चिंता की बात है.
GDP ग्रोथ पर सरकार और विपक्ष ने क्या कहा?
PM मोदी ने इसे &#039;हरक्यूलियन फीट&#039; (बहुत बड़ी उपलब्धि) बताया. PM मोदी ने X पर लिखा, &#039;7.8% की ये ग्रोथ तेल के झटके, सप्लाई चेन की समस्याओं और दुनिया भर की अनिश्चितताओं के बावजूद आई है. डूमसेयर्स (बुरा मानने वाले) डूमेड थे और इंडिया ब्लूम्ड... एक बार फिर!&#039; यानी, जो लोग कह रहे थे कि भारत की अर्थव्यवस्था बुरे दौर में जाएगी, वो गलत साबित हुए.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, &#039;ये ग्रोथ सेक्युलर है. हर सेक्टर में फैली हुई है. हर कोई तारीफ कर रहा है कि भारत ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद ये ग्रोथ हासिल की है.&#039;
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा, &#039;ये आंकड़े अर्थव्यवस्था की बहुत गलत तस्वीर पेश करते हैं. उपभोक्ता का भरोसा कमजोर है, घरेलू बचत गिरी है और कर्ज रिकॉर्ड ऊंचाई पर है.&#039; जयराम रमेश ने निजी निवेश में गिरावट की बात की है.
वहीं, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सवाल उठाते हुए पूछा, &#039;अगर भारत सच में खिल गया है, तो बेरोजगारी, पेपर लीक और बिखरती शिक्षा व्यवस्था क्यों हैं? नौकरियां कहां हैं?&#039;
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सवाल करते हुए पूछा, &#039;अगर GDP बढ़ी है तो महंगाई क्यों बढ़ रही है? रुपया क्यों गिर रहा है? बेरोजगारी क्यों बढ़ रही है?&#039;&amp;nbsp;
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और विपक्ष दोनों की बात में दम है.

सरकार सही है कि 7.8% ग्रोथ, दुनिया के बड़े देशों में सबसे तेज है. IMF ने भी कहा है कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनी हुई है.
विपक्ष सही है कि GDP केवल उत्पादन मापता है, रोजगार, मजदूरी और आम आदमी की तकलीफ नहीं. महंगाई, बेरोजगारी और कर्ज का बोझ भी देश में सच है. रेटिंग एजेंसी ICRA ने कहा, &#039;मजबूत Q1 के बावजूद, जोखिम बने हुए हैं.&#039;

आखिर ये नंबर क्यों मायने रखते हैं?
ये नंबर 4 वजहों से मायने रखते हैं:

RBI का अनुमान भी पीछे छूटा: RBI ने Q1 के लिए 7% ग्रोथ का अनुमान लगाया था. असल में 7.8% आया यानी उम्मीद से बेहतर.
पिछली तिमाहियों से तुलना: Q4 FY26 में 8.6% थी. यानी 7.8% थोड़ी कम है, लेकिन एक साल पहले Q1 FY26 में 6.9% थी. यानी साल-दर-साल बढ़त है.
पूरे साल का अनुमान: RBI को उम्मीद है कि पूरे FY27 में 6.7% ग्रोथ रहेगी. वर्ल्ड बैंक ने 6.6% का अनुमान लगाया है. IMF ने 6.4% कहा है. Q1 का 7.8% इन सारे अनुमानों से ऊपर है.
पूरी दुनिया में भारत: अमेरिका ने भारत को &#039;डायनेमिक, स्ट्रॉन्ग एंड रेजिलिएंट इकोनॉमी&#039; (गतिशील, मजबूत और लचीली अर्थव्यवस्था) कहा है. S&amp;amp;P ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की &#039;BBB/A-2&#039; रेटिंग बरकरार रखी है.

7.8% का क्या मतलब आम आदमी के लिए?
7.8% की GDP ग्रोथ एक अच्छी खबर है, लेकिन ये पूरी कहानी नहीं है:
अच्छी बातें:

भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
फैक् ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, 7.8, GDP, ग्रोथ, डिकोड, सरकार, का, गोल्ड, या, विपक्ष, का, गेम, ऑफ, डिस्टॉर्शन</media:keywords>
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        <title>बिहार&amp;झारखंड में पानी पर नहीं होगी तकरार! शाह ने खत्म कराया 25 साल पुराना विवाद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बिहार-झारखंड-में-पानी-पर-नहीं-होगी-तकरार-शाह-ने-खत्म-कराया-25-साल-पुराना-विवाद</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बिहार-झारखंड-में-पानी-पर-नहीं-होगी-तकरार-शाह-ने-खत्म-कराया-25-साल-पुराना-विवाद</guid>
        <description><![CDATA[ केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थित में आज (31 अगस्त) को बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. इस ऐतिहासिक समझौते से पूर्वी भारत के एक बहुप्रतीक्षित जल विवाद का समाधान हुआ है. समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिये जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा.
उन्होंने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है. दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है.शाह ने कहा कि इस समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा.
&#039;जल विवाद का समाधान हुआ&#039;
शाह ने कहा बिहार और झारखंड के बीच आज के समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है. उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा. आगे कहा कि सोन नदी के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता प्रधानमंत्री मोदी की &#039;टीम भारत&#039; की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है.
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, &#039;देश के सभी राज्यों का अलग-अलग अस्तित्व तो है ही मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें तो कोई समस्या ऐसी नहीं है, जिसका समाधान न हो सके. शाह कहा कि इस साल अभी तक कई राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है, जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में इजाफा होगा.
बिहार-झारखंड सीएम ने जताया आभार
इसके साथ ही, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी जल बंटवारे के समाधान के लिए प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताया.
शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं. 7 जुलाई को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की मौजूदगी में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच अटके भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बिहार-झारखंड, में, पानी, पर, नहीं, होगी, तकरार, शाह, ने, खत्म, कराया, साल, पुराना, विवाद</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;नाबालिग भाई&amp;बहनों की जमीन नहीं बेच सकते&amp;apos;, गुवाहटी HC का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ असम के गुवाहाटी स्थित हाई कोर्ट ने हाल ही में साल 1975 में खरीदी गई जमीन पर महिला की दावेदारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर अपना फैसला सुनाया है. कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि जमीन बिक्री को चुनौती देने वाले परिवार के सदस्यों ने इस पर दावा करने में काफी देरी कर दी.
हालांकि, गुवाहाटी हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई के दौरान यह पाया कि जब संबंधित जमीन बेची गई थी, उस वक्त बड़े भाई की तरफ से की गई नाबालिग भाई-बहनों के हिस्से की जमीन की बिक्री वैध नहीं थी, लेकिन पिछले 30 सालों से ज्यादा समय से महिला उक्त जमीन पर काबिज है.
इसके साथ ही, कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस्लामी कानून के तहत बड़े भाई को अपने नाबालिग भाई-बहनों के हिस्से की जमीन बेचने का हक नहीं है. गुवाहाटी हाई कोर्ट ने इस मामले में इसी महीने की 24 तारीख यानी 24 अगस्त, 2026 को अपना अंतिम फैसला सुना दिया है.
कैसे खड़ा हुआ पूरा विवाद?
दरअसल, कोर्ट के आदेश से मिली जानकारी के मुताबिक, तारुबाला साहा ने 18 फरवरी, 1975 को एक रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए 4 बीघा, 2 कट्ठा और 10 लेचा जमीन खरीदी थी. इस जमीन के उस वक्त असली मालिक याद अली थे, जिनके कई बच्चे थे, जो उनकी मौत के वक्त नाबालिग थे, लेकिन याद अली के बड़े बेटे नागर अली ने अपने और अपने नाबालिग भाई-बहनों की तरफ से वह जमीन तारुबाला साहा को बेच दी.
साहा ने अदालत को बताया कि नागर अली से जमीन खरीदारी करने के बाद उन्होंने उस जमीन पर कब्जा बनाए रखा था और उस जमीन पर मजदूरों से खेती भी करवाती थी. इसके साथ ही, उनका नाम जमीन के रिकॉर्ड्स में भी दर्ज था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिवादियों ने 15 फरवरी, 2008 को उन्हें जमीन से बाहर निकाल दिया और वहां अपना मकान बना लिया था.&amp;nbsp;

वहीं, दूसरी तरफ नागर अली के प्रतिवादी भाई-बहनों ने अदालत में उक्त की जमीन की बिक्री को अवैध करार दिया और कहा कि नागर अली को अपने नाबालिग भाइयों और बहनों के हिस्से की जमीनों को बेचने को कोई हक नहीं था. नागर अली को कोर्ट की तरफ से उनके भाई-बहनों का गार्जियन भी नियुक्त नहीं किया गया था. ऐसे में उन्होंने जमीन की सेल डीड को कैंसिल करने की मांग की और उस पर अपना मालिकाना हक जताया.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद असम की एक निचली अदालत ने इस मामले में पक्षकार तारुबाला साहा के हक पर फैसले सुनाया और उन्हें उक्त जमीन के मालिकाना हक देने का आदेश दिया. साथ ही, कोर्ट ने प्रतिवादियों के दावों और उनकी तरफ से की गई अपील को भी खारिज कर दिया गया.
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने मामले में क्या कहा?
गुवाहाटी हाई कोर्ट में जस्टिस कल्याण राय सुराना ने सुनवाई के दौरान इस बात पर सहमति जताई कि नागर अली सिर्फ बड़ा भाई होने के नाते अपने नाबालिग भाई-बहनों के हिस्से की जमीनों को कानूनी रूप से नहीं बेच सकता था, लेकिन अदालत ने यह भी माना कि करीब 30-33 सालों से तारुबाला साहा ने अपना कब्जा बनाए रखा, उस पर मजदूरों से खेती भी करवाई थी और उन लोगों के जरिए जमीन पर अपना कब्जा भी साबित कराया, जो उनके लिए जमीन पर खेती करते थे. लिहाजा अदालत ने जमीन पर तारुबाला साहा की फिर से कब्जा देने का आदेश दिया.
जस्टिस सुराना ने आगे कहा, &amp;lsquo;प्रतिवादियों को कानून के तहत निर्धारित समय सीमा के अंदर जमीन की बिक्री को चुनौती नहीं दी. उन्हें अपने बालिग होने के बाद या जमीन को साहा को सौंपे जाने के बाद एक तय समयसीमा में ही इस पर अपना दावा करना चाहिए था. उन्होंने इस मामले में काफी देरी कर दी, जिसका मतलब है कि अब जमीन के सेल डीड को कैंसिल नहीं किया जा सकता है और न ही वे जमीन वापस लेने का दावा कर सकते हैं.&amp;rsquo;
यह भी पढ़ेंः तेजाब की रिटेल बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र-राज्यों से मांगी रिपोर्ट ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नाबालिग, भाई-बहनों, की, जमीन, नहीं, बेच, सकते, गुवाहटी, का, बड़ा, फैसला</media:keywords>
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        <title>सोनिया गांधी की किताब को लेकर था दबाव? पेंगुइन रेंडम हाउस का बड़ा दावा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोनिया-गांधी-की-किताब-को-लेकर-था-दबाव-पेंगुइन-रेंडम-हाउस-का-बड़ा-दावा</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा &#039;बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव&#039; को लेकर देश में राजनीति गरमाई हुई है. इस किताब का प्रकाशन नहीं करने को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सफाई दी है. पब्लिशर ने कहा कि सोनिया गांधी की आत्मकथा को प्रकाशित नहीं करने के उसके फैसले के पीछे कोई बाहरी दबाव नहीं था बल्कि चर्चा के दौरान एक विशेष मुद्दे को लेकर गतिरोध सामने आया था. पब्लिशर ने समझौते और लेखक की गोपनीयता का हवाला देते हुए उस मुद्दे का खुलासा नहीं किया.
कांग्रेस ने लगाए थे दवाब बनाने के आरोप&amp;nbsp;
अमेरिका स्थित प्रकाशक &amp;lsquo;अल्फ्रेड ए नॉफ&amp;rsquo; ने घोषणा की है कि यह पुस्तक 10 नवंबर को दुनियाभर में प्रकाशित होगी. अल्फ्रेड ए. नॉफ, पेंगुइन रैंडम हाउस का एक प्रकाशन संस्थान है. कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार के दबाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किए गए कब्जे से संबंधित अंश हटाने का दबाव डाला गया था.
पेंगुइन ने बाहरी दबाव की बात को नकारा
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने स्पष्ट रूप से उन अटकलों को खारिज किया कि इस किताब को प्रकाशित नहीं करने का फैसला बाहरी हस्तक्षेप के कारण लिया गया. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, PRHI की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने कहा, &amp;lsquo;हमारा मानना है कि बिलॉन्गिंग के संबंध में कुछ गलत प्रस्तुतियों को स्पष्ट करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इस किताब को पब्लिश करने के लिए वास्तव में उत्सुक था और इसके अधिकार हासिल करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे.
पब्लिशर ने कहा, &amp;lsquo;चूंकि पुस्तक की विषय-वस्तु गोपनीय है और उस पर प्रकाशन से पहले का प्रतिबंध (एम्बार्गो) है... किसी भी तरह का बाहरी दबाव नहीं था.&amp;rsquo; पीआरएचआई ने कहा, स्क्रिप्ट को लेकर सामान्य संपादकीय प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके दौरान कई प्वाइंट्स उठाए गए और लेखक के प्रतिनिधियों के साथ उन पर विचार-विमर्श किया गया. कुछ मामलों में उन्होंने बदलावों पर सहमति जताई और कुछ अन्य मामलों में हमने लेखक के रुख को स्वीकार किया. &amp;nbsp;दुर्भाग्य से एक खास मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोनिया, गांधी, की, किताब, को, लेकर, था, दबाव, पेंगुइन, रेंडम, हाउस, का, बड़ा, दावा</media:keywords>
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        <title>बॉम्बे HC ने खारिज की ओवैसी की याचिका, कहा &amp; &amp;apos;भगवान राम का मजाक उड़ाने...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बॉम्बे-hc-ने-खारिज-की-ओवैसी-की-याचिका-कहा-भगवान-राम-का-मजाक-उड़ाने</link>
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        <description><![CDATA[ बॉम्बे हाई कोर्ट ने AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने 2011 में एक जनसभा के दौरान भगवान राम और उनकी माता के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए अपने खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक सहिष्णुता को किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं का जानबूझकर अपमान करने के लाइसेंस के रूप में गलत नहीं समझा जा सकता है.
औरंगाबाद बेंच के जस्टिस आरएम जोशी ने निचली अदालत के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295A और 298 के तहत अपराधों का संज्ञान लिया था. कोर्ट ने माना कि विधायक के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है.
2011 में नांदेड़ में चुनावी रैली में दिए भाषण से शुरू हुआ था मामला
यह मामला 8 दिसंबर, 2011 को नांदेड़ में एक चुनावी रैली में ओवैसी की तरफ से दिए गए भाषण से जुड़ा है, जो इलाहाबाद हाई कोर्ट के श्रीराम जन्मभूमि फैसले की पृष्ठभूमि में दिया गया था. सोशल मीडिया पर भाषण का वीडियो देखने के बाद बीजेपी विधायक टी. राजा सिंह ने एक निजी शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद नांदेड़ जिले के अर्धापुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया.
जांच के बाद पुलिस ने 15 मार्च, 2021 को चार्जशीट दाखिल की और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ने 15 नवंबर, 2021 को ओवैसी को समन जारी किया. AIMIM नेता ने इन कार्यवाहियों को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि तीन साल की समयसीमा (लिमिटेशन पीरियड) समाप्त होने के बाद कोर्ट मामले का संज्ञान नहीं ले सकता, क्योंकि इन अपराधों के लिए अधिकतम सजा तीन साल की है.
ओवैसी की दलील को हाई कोर्ट ने किया खारिज
इस तर्क को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने &#039;घनश्याम सोनी बनाम राज्य&#039; मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया और कहा कि समयसीमा की गणना शिकायत दर्ज करने या कार्यवाही शुरू होने की तारीख से की जाती है, न कि संज्ञान लेने की तारीख से. कोर्ट ने कहा कि शिकायत निर्धारित समय के भीतर दर्ज की गई थी और धारा 298 के तहत आरोप, धारा 295A के तहत अधिक गंभीर अपराध के साथ-साथ आगे बढ़ सकता है.&amp;nbsp;

भाषण के मुख्य अंशों पर गौर करते हुए, जस्टिस जोशी ने कहा कि ओवैसी ने शुरुआत में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का जिक्र किया, लेकिन बाद में ऐसी बातें कहीं जो पहली नजर में भगवान श्रीराम का मजाक उड़ाने और उनके मानने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से कही गई लगती थी. कोर्ट ने उन कथित टिप्पणियों को दोहराने से इनकार कर दिया, ताकि उन्हें और ज्यादा प्रचार न मिले, लेकिन यह भी कहा कि वे बयान न तो अनजाने में दिए गए थे और न ही अचानक.
यह भाषण सोचा-समझा, नपा-तुला लगता है- जस्टिस जोशी
जस्टिस जोशी ने कहा कि एक चुने हुए प्रतिनिधि से ऐसी टिप्पणियों के नतीजों को समझने की उम्मीद की जाती है और यह भाषण सोचा-समझा, नपा-तुला और पहले से तय लगता है. धारा 295A के प्रावधानों का जिक्र करते हुए, कोर्ट ने कहा कि जानबूझकर और बुरी नीयत का आकलन इस्तेमाल किए गए शब्दों के साथ-साथ उनके लहजे, आवाज के उतार-चढ़ाव और बोलने के तरीके के आधार पर किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;सहिष्णुता का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि दूसरों की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने की छूट मिल गई है. आजादी, सहिष्णुता और भाईचारे जैसे संवैधानिक मूल्य धार्मिक भावनाओं को भड़काने के इरादे से किए गए जानबूझकर किए गए कामों को सुरक्षा नहीं देते.&amp;rsquo;
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए क्या कहा?
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की इस बात पर भी ध्यान दिया कि भाषण अभी भी ऑनलाइन उपलब्ध है, इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा गया कि इससे कथित अपमान का सिलसिला जारी रह सकता है. जरूरी पक्षों की गैर-मौजूदगी में कोई निर्देश जारी न करते हुए कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सरकार उचित कार्रवाई करेगी.
याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने साफ किया कि उसकी टिप्पणियां केवल शुरुआती (prima facie) हैं और मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला करते समय ट्रायल कोर्ट पर इनका कोई असर नहीं पड़ना चाहिए. ओवैसी के खिलाफ कार्यवाही अब अर्धापुर में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत में जारी रहेगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एंटी&amp;कंवर्जन बिल पर बैकफुट पर गोवा सरकार, विरोध के बाद लिया बड़ा फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एंटी-कंवर्जन-बिल-पर-बैकफुट-पर-गोवा-सरकार-विरोध-के-बाद-लिया-बड़ा-फैसला</link>
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        <description><![CDATA[ गोवा में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने धर्मांतरण-विरोधी विधेयक यानी एंटी-कंवर्जन बिल को अब राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान चर्चा और पारित करने के लिए पेश नहीं करने का फैसला लिया है. भाजपा विधायक माइकल लोबो ने सोमवार (31 अगस्त, 2026) को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सावंत सरकार ने यह फैसला भाजपा सहित कई अन्य विधायकों की तरफ से विरोध दर्ज कराने के बाद किया है कि राज्य विधानसभा के जारी तीन-दिवसीय मानसून सत्र में इस बिल को पेश नहीं किया जाएगा.
कैबिनेट से बिल को मिल चुकी थी मंजूरी
जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कड़े नियमों के साथ लाए गए &amp;lsquo;द गोवा प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कंवर्जन ऑफ रिलीजन बिल, 2026&amp;rsquo; को गोवा सरकार की कैबिनेट ने पिछले हफ्ते ही मंजूरी दे दी थी. इस प्रस्तावित बिल को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश किया जाना था, लेकिन विधानसभा सत्र की शुरुआत से पहले गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सोमवार (31 अगस्त, 2026) को कई विधायकों के साथ बैठक की.&amp;nbsp;

यह बैठक इसी प्रस्तावित बिल को लेकर आयोजित की गई थी, जिसमें भाजपा के कुछ विधायकों और भाजपा समर्थित एक निर्दलीय विधायक ने प्रस्तावित बिल का विरोध किया. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद राज्य के कैलंगुट सीट से भाजपा विधायक माइकल लोबो ने कहा कि उन्हें लगा की सरकार ने बिल को कैबिनेट से मंजूरी दिलाने में जल्दबाजी कर दी. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;सीएम के साथ हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि मौजूदा विधानसभा सत्र में इस प्रस्तावित बिल को पेश नहीं किया जाएगा.&amp;rsquo;
बिल को लेकर क्या बोले लोबो?
लोबो ने कहा, &amp;lsquo;बिल नहीं आएगा. हमें अभी इसका अध्ययन करना होगा और सभी को भरोसे में लेना होगा. हमें यह समझना होगा कि आखिर इस बिल में क्या है. जो हो रहा है, वो गलत है. सभी लोगों की धार्मिक आस्थाएं जरूरी हैं और सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए.&amp;rsquo; उन्होंने कहा, &amp;lsquo;देर-सबेर इस बात पर चर्चा होनी ही चाहिए कि गोवा के लिए क्या अच्छा है और क्या सही है. चीजें गलत दिशा में जा रही हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;सच तो यह है कि...&amp;apos;, मोहन भागवत के बयान को लेकर ओवैसी अब क्या बोले?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सच-तो-यह-है-कि-मोहन-भागवत-के-बयान-को-लेकर-ओवैसी-अब-क्या-बोले</link>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका के न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयानों को लेकर हैदराबाद से AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख भागवत ने जो कहा है, वह आरएसएस की पुरानी चाल है.&amp;nbsp;
ओवैसी ने निशाना साधते हुए कहा कि आरएसएस ने जो बातें हमेशा कही हैं, उनसे वे कभी इनकार नहीं करेंगे और न ही उन्हें वापस लेंगे. उन्होंने कहा कि बाहरी दुनिया के लिए दिए जाने वाले भाषणों और अपने सदस्यों के लिए दिए जाने वाले भाषणों में साफ फर्क होता है और यही उनका हमेशा से तरीका रहा है.&amp;nbsp;
आजादी की लड़ाई को लेकर क्या बोले ओवैसी&amp;nbsp;AIMIM सुप्रीमो ने आजादी की लड़ाई को लेकर आरएसएस पर जमकर हमला बोला. ओवैसी ने कहा कि सच तो यह है कि उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया था. आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार असल में इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ थे. उन्होंने उस समय कांग्रेस क्यों छोड़ी? क्योंकि वे इस बात से नाराज थे कि महात्मा गांधी सभी धार्मिक समुदायों को एकजुट करके अंग्रेज़ों से लड़ना चाहते थे.&amp;nbsp;
हेडगेवार ने क्यों छोड़ी कांग्रेस&amp;nbsp;ओवैसी ने आगे कहा कि उन्हें (हेडगेवार) गांधी का हिंदू-मुस्लिम एकता का समर्थन करना पसंद नहीं था. इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी. उन्होंने आगे कहा, &quot;क्या आरएसएस देश में सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा दे रहा है? मुझे बताइए, वे ऐसा कहां कर रहे हैं? ईसाइयों को उनके धर्म के मामले में दबाया जा रहा है. आपने धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून बनाए हैं लेकिन क्या आपने इसके बारे में नहीं पढ़ा?&amp;nbsp;
चर्च का जिक्र कर क्या कहाउन्होंने कहा, &quot;क्या देश ने नहीं देखा कि मुंबई में एक चर्च ने ईसाइयों से अंदर आने से पहले अपने नाम, आधार नंबर दर्ज करने और अपनी ईसाई पहचान बताने को कहा था? आप UCC की आड़ में हिंदू कानून लागू कर रहे हैं. यह भी RSS की विचारधारा है. यह सब हो रहा है तो फिर सांप्रदायिक सद्भाव कहां है?.&quot;
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किर्गिस्तान पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 26वें SCO समिट में लेंगे हिस्सा ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>शुद्धिकरण: राहुल गांधी के खिलाफ FIR पर भड़की कांग्रेस, &amp;apos;इनकी नीयत...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली वाली जगह पर शुद्धिकरण मामले को लेकर अब नया बवाल देखने को मिल रहा है. इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद सोमवार को कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला. कांग्रेस ने पूछा कि धामी सरकार इस शुद्धिकरण रस्म के खिलाफ मामला दर्ज करने से क्यों बच रही है. विपक्षी पार्टी ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से इसका मुंहतोड़ जवाब देगी.&amp;nbsp;
राहुल गांधी पर FIR को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा ने कहा, &quot;कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद &#039;शुद्धिकरण&#039; रस्म करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उस जातिवादी हरकत के खिलाफ आवाज उठाने वाले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की गई. क्या यही BJP सरकार का न्याय है?&quot;

राहुल जी के खिलाफ FIR को मुद्दा बनाना छोड़िए।जिस व्यक्ति के ख़िलाफ़ बीजेपी ने देश भर में 40-50 केस करा दिए हैं, उनके ख़िलाफ़ एक और FIR हो भी गई तो कौनसा आसमान सर पर टूट पड़ा?असली मुद्दा राहुल जी के ख़िलाफ़ हुआ FIR नहीं है। असली मुद्दा &amp;lsquo;शुद्धिकरण&amp;rsquo; का है।बीजेपी और उत्तराखंड&amp;hellip;
&amp;mdash; Pawan Khera ???????? ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) August 31, 2026



क्या बोले पवन खेड़ाकांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, &quot;राहुल जी के खिलाफ FIR को मुद्दा बनाना छोड़िए. जिस व्यक्ति के ख़िलाफ़ बीजेपी ने देश भर में 40-50 केस करा दिए हैं, उनके ख़िलाफ़ एक और FIR हो भी गई तो कौनसा आसमान सर पर टूट पड़ा? असली मुद्दा राहुल जी के ख़िलाफ़ हुई FIR नहीं है. असली मुद्दा &amp;lsquo;शुद्धिकरण&amp;rsquo; का है.&quot;
&#039;उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी है कि FIR करे&#039;पवन खेड़ा ने कहा कि बीजेपी और उत्तराखंड सरकार की नीयत देखिए. जिस व्यक्ति ने शुद्धिकरण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई, उनके खिलाफ तो तुरंत FIR कर दी लेकिन जिन लोगों ने शुद्धिकरण किया और करवाया, उनके ख़िलाफ़ अब तक एक FIR तक नहीं हुई. उन्होंने आगे कहा कि खरगे जी ने संसद में खड़े होकर कहा कि शुद्धिकरण हुआ है. उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी है कि FIR करे. बाकी क्या हुआ, किसने किया, क्यों किया वो छानबीन में सामने आ ही जाएगा.
धामी सरकार पर निशाना साधते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि फिर FIR दर्ज करने से इतना डर क्यों? आखिर बीजेपी और उत्तराखंड सरकार शुद्धिकरण के ख़िलाफ़ FIR से कतरा क्यों रही है? क्या उनकी दलित गरिमा और न्याय सुनिश्चित करने की कोई मंशा ही नहीं है?
ये भी पढ़ें&amp;nbsp;
&#039;सच तो यह है कि...&#039;, मोहन भागवत के बयान को लेकर ओवैसी अब क्या बोले? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>शुद्धिकरण:, राहुल, गांधी, के, खिलाफ, FIR, पर, भड़की, कांग्रेस, इनकी, नीयत...</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: अधिकारी की खुदकुशी से खुला 89 करोड़ का वाल्मीकि घोटाला, कैसे बैकफुट पर आई कर्नाटक सरकार</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक के अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. &#039;कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम&#039; (KMVSTDC) में कथित तौर पर ₹89.63 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों (भाजपा और जेडीएस) के भारी दबाव के बाद उन्होंने यह कदम उठाया. हालांकि, इस्तीफा सौंपते समय नागेंद्र ने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और किसी भी लेनदेन पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं.
क्या है वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला?
वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला कर्नाटक का एक बड़ा वित्तीय घोटाला है. इसमें &#039;कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम&#039; के कुल ₹187 करोड़ के फंड में से ₹89.63 करोड़ को कथित तौर पर अवैध रूप से डायवर्ट और हड़पने का मामला शामिल है.
यह फंड विशेष रूप से राज्य के आदिवासी (ST) समुदाय के कल्याण और विकास कार्यों के लिए आवंटित किया गया था. आरोप हैं कि इस पैसे को कल्याणकारी योजनाओं में लगाने के बजाय सैकड़ों शेल कंपनियों (फर्जी खातों), आईटी फर्मों और एक कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के खातों के जरिए अवैध रूप से घुमाया गया.
कैसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश?
इस बहुचर्चित घोटाले का खुलासा तब हुआ जब निगम के अकाउंट्स सुपरिटेंडेंट 52 वर्षीय चंद्रशेखरन पी ने दुखद रूप से आत्महत्या कर ली. उन्होंने एक विस्तृत सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें शीर्ष प्रबंधन और अधिकारियों के जबरदस्त दबाव में बिना मंजूरी अवैध ट्रांसफर करने की बात उजागर हुई थी.
जांच से पता चला कि निगम के &#039;यूनियन बैंक ऑफ इंडिया&#039; (एमजी रोड शाखा) के आधिकारिक खाते से लगभग ₹88.62 करोड़ अनधिकृत खातों में भेजे गए. फर्जी चेक, RTGS और ऑनलाइन सिस्टम का उपयोग करके यह राशि हैदराबाद की &#039;फर्स्ट फाइनेंस क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी&#039; सहित 600 से अधिक अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई और बाद में इसे नकद निकाल लिया गया.
ED का खुलासा: बी. नागेंद्र ही हैं मुख्य &#039;मास्टरमाइंड&#039;
मामले की जांच कर रही राज्य की एसआईटी (SIT) के साथ केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग खेल का मुख्य &quot;मास्टरमाइंड&quot; और साजिशकर्ता करार दिया है.
ED के अनुसार


नागेंद्र ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करके बिना किसी अनुमति के निगम का बैंक खाता बेंगलुरु की एक विशेष शाखा में ट्रांसफर करवाया.


उन्होंने अपने निजी स्टाफ, सहयोगियों और निजी कंपनियों की मदद से ₹89.63 करोड़ के डायवर्जन की साजिश रची.


केंद्रीय एजेंसी के दस्तावेजों के मुताबिक, हेराफेरी की गई राशि में से लगभग ₹20 करोड़ का इस्तेमाल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक अभियानों के वित्तपोषण के लिए किया गया था.


राजनीतिक असर और इस्तीफा
इस घोटाले के सामने आने के बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया. विपक्षी दल भाजपा और जेडीएस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सीबीआई जांच व मंत्री के इस्तीफे की मांग की. बीजेपी द्वारा रायचूर से बेल्लारी तक निकाली जाने वाली 10-दिवसीय पदयात्रा से ठीक पहले बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
इस्तीफा देने के बाद नागेंद्र ने कहा, &quot;मुझे राजनीतिक साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है. जांच में सच सामने आएगा और मेरी बेगुनाही साबित होगी.&quot;
घोटाले की गहराई और बदलता राजनीतिक परिदृश्य
वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला न केवल प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर जारी सार्वजनिक धन का किस प्रकार दुरुपयोग किया जा सकता है. आदिवासी समुदाय के उत्थान और विकास के लिए सुरक्षित रखी गई ₹89.63 करोड़ की भारी-भरकम राशि का निजी लाभ और राजनीतिक अभियानों के लिए इस्तेमाल होना बेहद चिंताजनक है. इस घटनाक्रम ने कर्नाटक सरकार की छवि पर गहरा असर डाला है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ एक प्रमुख मुद्दा बनाकर राज्यव्यापी प्रदर्शनों के जरिए घेराबंदी तेज कर रहा है. मामले में एसआईटी और प्रवर्तन निदेशालय की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, फर्जी खातों के जाल और धन के लेन-देन से जुड़ी कई चौंकाने वाली परतें खुलने की उम्मीद है. यदि जांच एजेंसियां स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से ठोस सबूत जुटाने में सफल रहती हैं, तो यह मामला न केवल बी. नागेंद्र के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगा, बल्कि राज्य की राजनीति में दीर्घकालिक असर भी डालेगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>राहुल या विजय? PM फेस पर कांग्रेस बोली&amp;&amp;apos;...तो मंत्री इस्तीफा दे देंगे&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु में कांग्रेस और टीवीके के बीच लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री चेहरे को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पर्यटन मंत्री और कांग्रेस नेता एस. राजेश कुमार ने चेतावनी दी है कि अगर TVK 2029 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर राहुल गांधी का समर्थन नहीं करती है, तो कांग्रेस मंत्री राज्य कैबिनेट से इस्तीफा दे देंगे.
उन्होंने कन्याकुमारी वेस्ट जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद संभालने वाले जॉर्ज रॉबिन्सन के पदभार ग्रहण समारोह में पीएम पद पर टीवीके से रुख साफ करने के लिए कहा. उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी केवल राहुल गांधी का ही समर्थन करेगी.
क्या बढ़ेगा तकरार?
सत्तारूढ़ सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के मंत्रियों, विधायकों और सदस्यों ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग उठाई है. इसी बीच, राजेश कुमार ने कहा कि अगर गठबंधन सहयोगी इस मुद्दे पर कांग्रेस का समर्थन नहीं करता है, तो वह और उनके सहयोगी पी. विश्वनाथन (उच्च शिक्षा मंत्री) अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं. राजेश कुमार के बयान से कांग्रेस और TVK के रिश्तों में दरार आने की संभावना है.
बता दें कि तमिलनाडु में सार्वजनिक जगहों पर कई पोस्टर्स में विजय को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया गया है. हाल ही में इंडिया टुडे सी वोटर सर्वे में प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में विजय को 9 फीसदी समर्थन के साथ तीसरा स्थान मिला.&amp;nbsp;
कांग्रेस के सहयोग से बनी विजय सरकार
मई में कांग्रेस के सहयोग से विजय ने सरकार बनाई. पार्टी कैबिनेट में भी शामिल हुई. हालांकि इस फैसले के बाद एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके की नाराजगी बढ़ी और धोखा देने के आरोप लगाए. चुनाव से पहले कांग्रेस और डीएमके मिलकर चुनाव लड़ी थी. हालांकि विजय की हवा में डीएमके को करारी हार मिली. इसके बाद कांग्रेस ने विजय को समर्थन देना का ऐलान किया.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, बजरंग दल से जुड़ा है केस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मोहम्मद-दीपक-को-सुप्रीम-कोर्ट-से-मिली-राहत-बजरंग-दल-से-जुड़ा-है-केस</link>
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        <description><![CDATA[ मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, बजरंग दल से जुड़ा है केस
&amp;nbsp;
अपडेट जारी है... ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>शुद्धिकरण विवाद: राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत, जातिवादी टिप्पणी का आरोप</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तराखंड के हल्द्वानी जिले में श्री राम सेना के अमित कुमार ने रविवार (30 अगस्त, 2026) को लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ कोतवाली थाने में एक शिकायत दर्ज कराई है. अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है, इसलिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए. दरअसल, राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण एससी/एसटी एक्ट के तहत एक आपराधिक कृत्य है, जिन भी लोगों ने ऐसा किया है उन पर जल्द से जल्द FIR होनी चाहिए.
हालांकि, इस मामले को लेकर हल्द्वानी जिला पुलिस का कहना है कि अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. फिलहाल, पुलिस श्री राम सेना के अमित कुमार की तरफ से की गई शिकायत की जांच कर रही है.
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने वहां शुद्धिकरण हवण किया था. इस घटना के सामने आने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी.
मैं स्वयं दलित समाज से आता हूं- विनोद आर्य&amp;nbsp;

शुद्धिकरण विवाद पर श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्य विनोद आर्य (शुद्धिकरण कराने वाले) ने कहा, &#039;सनातन परंपरा के एक अनुयायी के रूप में, यह मेरा प्राथमिक अधिकार और कर्तव्य है कि मैं उस स्थान की स्वच्छता सुनिश्चित करूं, जहां भगवान श्री राम की पूजा की जाती है और जहां विभिन्न धार्मिक समारोह आयोजित किए जाते हैं. मैं स्वयं दलित समाज से आता हूं और इस गतिविधि के दौरान मेरे साथ दलित समुदाय के अन्य भाई भी थे.&amp;rsquo;
हम पर अनुचित दबाव डाला जा रहा- आर्य
आर्य ने आगे कहा, &amp;lsquo;हमने निश्चित रूप से कुछ भी गलत नहीं किया. अब इस तथ्य के बावजूद कि हम दलित हैं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी हमारे खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मामले दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. हम राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहते हैं. हम उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का इरादा रखते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि हमारे कार्यों के लिए हम पर अनुचित दबाव डाला जा रहा है और हमारी गिरफ्तारी की मांग की जा रही है.&amp;rsquo;
क्या बोले थे राहुल गांधी?
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार (29 अगस्त, 2026) को कहा, &amp;lsquo;शुद्धिकरण करना एक अपराध है, क्रिमनल ऑफेंस है. 10 अगस्त को शुद्धिकरण किया गया, 13 अगस्त को खरगे जी ने सदन में कहा कि उनका अपमान हुआ है, लेकिन फिर भी अभी तक इस मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. हमारी मांग है कि जिन लोगों ने ऐसा किया है उन पर जल्द से जल्द FIR हो. यह हरकत SC/ST एक्ट का उल्लंघन है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः PM मोदी ने ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि, &#039;ऐसे महान राजनेता जो...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>शुद्धिकरण, विवाद:, राहुल, गांधी, के, खिलाफ, शिकायत, जातिवादी, टिप्पणी, का, आरोप</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>‘वो गजनी लुक में थे, शायद...’, आमिर खान के बयान पर सोनम वांगचुक का पलटवार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वो-गजनी-लुक-में-थे-शायद-आमिर-खान-के-बयान-पर-सोनम-वांगचुक-का-पलटवार</link>
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        <description><![CDATA[ एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने इस साल जुलाई महीने में नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में राष्ट्रीय राजधानी स्थित जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी, जो तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की तरफ से सीजेपी की मांगों पर चर्चा के बाद खत्म हुई थी, लेकिन वांगचुक के भूख हड़ताल के दौरान फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार आमिर खान और सलमान खान ने सोनम वांगचुक को लेकर टिप्पणी की थी, जो काफी ज्यादा वायरल हुई थी, इस पर अब एक्टिविस्ट ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
आमिर खान की टिप्पणी पर क्या बोले सोनम वांगचुक?
यूट्यूबर प्रखर गुप्ता के साथ एक पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आमिर खान और सलमान खाल की तरफ से की गई टिप्पणियों पर अपनी बात रखी. दरअसल, अभिनेता आमिर खान ने अपनी फिल्म &amp;lsquo;3 इडियट्,&amp;rsquo; को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ जोड़े जाने पर कहा था कि उनकी फिल्म वांगचुक पर नहीं बनी है, उनका फिल्म से कोई लेना-देना नहीं है.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने कहा, &amp;lsquo;शायद वो उस टाइम जब उन्होंने कहा कि हम तो मिले भी नहीं थे, तो बाद में कुछ वीडियोज सामने आए, जिसमें वो गजनी आउटफिट में मेरे एक स्पीच को देख रहे थे, तो शायद क्योंकि वो गजनी आउटफिट में थे, तो उन्हें शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस हुआ हो सकता है. वो 15 मिनट बाद भूल गए होंगे, तो मैं हैरान नहीं हूं. वरना हम बहुत डिटेल में मिले थे.&amp;rsquo;
हम बहुत डिटेल में थे, हमने काफी आइडिया पर चर्चा की थी- वांगचुक
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;हमने सुना है, वो अपने कैरेक्टर में बहुत घुस जाते हैं, तो शायद गजनी में वो इतने घुसे थे कि जब वो अवार्ड फंक्शन में आए, जिस अवार्ड फंक्शन में मैं अवार्ड ले रहा था, तो हो सकता है कि वो भी वो भूल गए होंगे, वरना बहुत डिटेल में मिले. बहुत आइडियाज डिस्कस किए.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

वांगचुक ने कहा, &amp;lsquo;मैं ये नहीं कहूंगा कि उन्होंने &amp;lsquo;रिकॉर्डेड बेस्ड ऑन&amp;rsquo; या &amp;lsquo;बायोग्राफी ऑफ...&amp;rsquo; की, इसी को तो इन्फ्लुएंस बोलते हैं ना. इंस्पिरेशन बोलते हैं. उन्होंने दिमाग में लेके गए अपने ग्रुप में उन्होंने ये बदलाव किए, जो पुराना स्क्रिप्ट था. पुराना स्क्रिप्ट था उनका उसमें डाला और शायद उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं यह सब देखकर आ रहा हूं और यह बात हुई. उन्होंने ऐसे ही डाला होगा, तो बाकी जो उनके को राइटर्स-डायरेक्टर्स थे, उनको नहीं पता चला होगा कि ये उन्होंने अपना एक आज का आइडिया डाला कि कहीं से आकर, मिलकर, बात करके डाला हो, तो वो इसलिए भूल गए होंगे. इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है.&amp;rsquo;
सलमान खान की टिप्पणी पर बोले वांगचुक
वहीं, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान अभिनेता सलमान खान की तरफ से की गई टिप्पणी &amp;lsquo;सोनम, इट्स डन ब्रो!&amp;rsquo; पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने कहा, &amp;lsquo;सबकी अपनी-अपनी मजबूरियां होती होंगी. आगे-पीछे, दाएं-बाएं देखना पड़ता है, लेकिन उन्होंने कुछ कहा मैं उसकी इज्जत करता हूं.&amp;rsquo;
सलमान खान ने क्या कहा था?
अभिनेता सलमान खान ने पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में X पर पोस्ट किया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि देश के छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर एकजुट हो रहे हैं. इसके अगले दिन सलमान खान ने एक और पोस्ट कर छात्रों से अपना विरोध प्रदर्शन खत्म करने की अपील की. साथ ही, उन्होंने सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने को कहते हुए कहा, &amp;lsquo;सोनम, इट्स डन ब्रो. इसे आगे मत बढ़ाओ. कुछ खा लो. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे लिए घर से खाना भेज दूंगा.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;आप ऐसे हैं नेता जो...&#039;, PM मोदी के नेतृत्व के मुरीद हुए मिर्जियोयेव ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘वो, गजनी, लुक, में, थे, शायद...’, आमिर, खान, के, बयान, पर, सोनम, वांगचुक, का, पलटवार</media:keywords>
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        <title>अभिजीत दीपके CJP में विजेता दहिया को देंगे जगह? &amp;apos;अच्छे हैं, लेकिन..&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अभिजीत-दीपके-cjp-में-विजेता-दहिया-को-देंगे-जगह-अच्छे-हैं-लेकिन</link>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने पार्टी के पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया को लेकर कहा है कि उनकी वापसी पर सोचेंगे. उन्होंने कहा, &#039;&#039;जो उस दिन हुआ वो असंवेदनशील था. लेकिन वो अच्छे व्यक्ति हैं. उनकी टाइमिंग गलत थी. ऐसा नहीं होना चाहिए था.&#039;&#039;
अभिजीत दीपके ने दहिया को CJP के प्रवक्ता पद से हटा दिया था, जब आंदोलन के दौरान फास्ट-फूड आउटलेट पर देखा गया था. उसी समय नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज हो रहा था. ये वीडियो काफी वायरल हुआ. आलोचना के बाद पार्टी ने उन्हें पद से हटा दिया.
तब दहिया ने भी सफाई दी. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने मुझे रोका और दो बार धक्का दिया था. वे इस बात से नाराज थे कि मैंने मिस्टर प्रेमानंद को महारा कहकर बुलाने से इनकार कर दिया था. इसके बाद विवाद बर्गर की तरफ मुड़ गया कि मैंने विरोध-प्रदर्शन वाले दिन खाया था.
सोनम वांगचुक पर क्या बोले अभिजीत दीपके?
अभिजीत ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा कि उनकी वापसी पर सोचेंगे.&amp;nbsp; दीपके जंतर मंतर पर हुए आंदोलन का चेहरा रहे सोनम वांगचुक पर भी खुलकर बातचीत की. उन्होंने कहा, &#039;&#039;आंदोलन खत्म होने के बाद भी बात हुई, लोग कहते हैं कि मैंने उन्हें मैनिपुलेट करके अनशन पर बैठाया, वो वैज्ञानिक हैं, क्या मैं उन्हें मैनिपुलेट&amp;nbsp; कर सकता हूं. वो स्मार्ट हैं, उनका खुद का फैसला था.&#039;&#039;
अभिजीत दीपके ने कहा, &#039;&#039;मैं उन्हें पूरे टाइम कहता रहा कि अनशन खत्म कर दीजिए. उन्होंने कहा कि आप क्यों अनशन खत्म करने के लिए दबाव डाल रहे हो. वो मूवमेंट के फेस थे. उनके बिना ये मूवमेंट इतना बड़ा नहीं होता. जान दांव पर लगाकर उन्होंने देश को जागरूक किया है. आज ये मूवमेंट सीजेपी और सोनम वांगचुक जरूर बड़ा हो चुका है.&#039;&#039;&amp;nbsp;
सीजेपी के फाउंडर ने कहा, &#039;&#039;सोनम सर को उठाकर ले गए तो, उन्होंने मिलने नहीं दिया. एक तरह से किडनैप करके रखा था.&#039;&#039;&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ईरान वॉर के बीच PM मोदी ने कैसे बदली रणनीति?  रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका से रिश्तों को लेकर वहां के प्रतिष्ठित अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया कूटनीतिक कदमों की तारीफ की है. अखबार ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया फैसले के चलते पीएम मोदी ने अपनी कूटनीति को आर्थिक नीति में तब्दील कर दिया है. वह अमेरिका से रिश्तों को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं. इससे जुड़ा पोस्ट बीजेपी की महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी एक्स पर भी साझा किया है.&amp;nbsp;
उन्होंने लिखा कि भारत की विदेश नीति अब तेजी से आर्थिक नीति बनती जा रही है. पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक कूटनीति स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी की आर्थिक मजबूती में बदल रही है. इसके तहत मार्केट में विविधता लाना, सप्लाई चेन को सुरक्षित करना, टेक्नोलॉजी और पूंजी तक पहुंच बढ़ाना. साथ ही किसी एक चीज पर निर्भरता के जोखिम को कम करना शामिल है.&amp;nbsp;
ईरानी ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि अनिश्चितता से भरी इस दुनिया में मजबूती ही देश की असली ताकत है. भारत की कूटनीति के आर्थिक पहलू पर एक दिलचस्प नजरिया. इसे जरूर पढ़ें. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
अपनी रिपोर्ट में न्यूयॉर्क टाइम्स ने क्या लिखा है?&amp;nbsp;
NYT ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, फ्रांस, न्यूज़ीलैंड, सेशेल्स, मलेशिया, स्लोवाकिया, इटली; पिछले एक साल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत तेजी से दुनिया भर की यात्राएं की हैं. उन्होंने नए पार्टनर बनाए हैं. या मौजूदा पार्टनर के साथ रिश्ते मजबूत किए हैं. उन्हें एक कड़वी सच्चाई ने तेजी से कदम उठाने पर मजबूर किया है.&amp;nbsp;
अखबार ने आगे ट्रंप की आलोचना करते हुए लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप की वजह से दुनिया में मची उथल-पुथल का सामना करने और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भारत के पास एकमात्र तरीका है कि वह अलग-अलग जगह पर अपने रिश्ते बढ़ाए. रिपोर्ट में पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान की यात्रा का जिक्र भी शामिल है.&amp;nbsp;
अखबार ने लिखा, &#039;इनमें से कई बैठकें कामकाजी थीं. यह वॉल स्ट्रीट बैंकरों के बीच सौदों पर बातचीत के लिए होने वाली जरूरी बंद दरवाजे की चर्चाओं जैसी थीं. उज्बेकिस्तान के बाद श्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के सालाना शिखर सम्मेलन के लिए किर्गिस्तान जाएंगे. यह 10 सदस्यों वाला एक क्षेत्रीय सुरक्षा समूह है. यहां उनके रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर वी पुतिन के साथ बैठक करने की उम्मीद है. इस लेख को अनुप्रीता दास की तरफ से न्यूयॉर्क टाइम्स की तरफ से लिखा गया है. इस खबर में मिडिल ईस्ट के बाद जो फैसले भारत सरकार की तरफ से लिए गए हैं, साथ ही जिस तरह से ईयू की डील की गई है, उन सभी का जिक्र किया गया है.&#039;
ट्रंप के खिलाफ फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे पीएम मोदी: NYT
इस रिपोर्ट की हेडिंग में लिखा है कि कैसे पीएम मोदी ट्रंप के मामले में फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं. एक-एक करके डील कर रहे हैं. इसे उन्होंने एक सोची समझी और सही रणनीति करार दिया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>छात्रों को लेकर SC के जस्टिस भुइयां की दो टूक, ‘सवाल पूछने पर सजा देना...’</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उज्जवल भुइयां ने रविवार (30 अगस्त, 2026) को शिक्षण संस्थानों में छात्रों की तरफ से अपने अलग-अलग विचारों को रखने और सवालों पूछने की आजादी को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. इसके साथ ही, उन्होंने छात्रों की तरफ से सवाल पूछे जाने पर किसी भी तरह की सजा की धमकी देने के रवैये को असंवैधानिक और सत्ता का गलत इस्तेमाल करार दिया है. अदालत ने कहा कि किसी भी छात्र को अपनी अलग राय रखने या सवाल पूछने पर सजा देने की धमकी नहीं दी जा सकती है.
उन्होंने विश्वविद्यालयों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा, &amp;lsquo;विश्वविद्यालयों को ऐसी जगह होना चाहिए, जहां पूरी आजादी के साथ सोचने की आदत को विकसित किया जाए और छात्र किसी भी मुश्किल सवाल को पूछने में हिचकिचाएं नहीं. जहां स्थापित विचारों की जांच की जा सके, उन पर सवाल उठाए जा सके, जबकि अगर उस विचार पर किसी की असहमति हो, तो उसे दुश्मनी की नजर से न देखा जा सके.&amp;rsquo;
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए बोले जस्टिस भुइयां
न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर (Masters) छात्रों के 13वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करने के दौरान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा, &amp;lsquo;सवाल पूछने का अधिकार किसी भी तरह से विरोध और अवज्ञा का काम नहीं है और असहिष्णु मानसिकता भारत के संविधान की भावना के पूरी तरह से विपरीत है. जब छात्र अपने अलग-अलग विचारों को एक मंच पर रखते हैं या फिर किसी विषय को लेकर सवाल पूछते हैं, तो उन्हें सजा देने की धमकी नहीं दी जा सकती है. यह पूरी तरह से असंवैधानिक है. यह सत्ता और पद का गलत इस्तेमाल है.&amp;nbsp;

उन्होंने कहा, &amp;lsquo;यूनिवर्सिटी एक ऐसी जगह है, जहां लोगों का सामना ऐसे विचारों से होता है, जो शायद उनके अपने विचारों से अलग हों, जहां स्थापित मान्यताओं की जांच की जाती है और उन पर सवाल उठाए जा सकते हैं और जहां असहमति का जवाब दुश्मनी के बजाय तर्क से दिया जा सकता है. अगर हम एक ऐसा लोकतांत्रिक समाज चाहते हैं, जो आजादी और अलग-अलग विचारों का सम्मान करे, तो इस संस्कृति की शुरुआत विश्वविद्यालय से ही होनी चाहिए.&amp;rsquo;
हमारा संविधान बोलने, सोचने और अलग सोच रखने की देता है आजादी
जस्टिस भुइयां ने कहा, &amp;lsquo;हमारा संविधान बोलने, सोचने और अलग तरह से विश्वास करने की आजादी की रक्षा करता है. असहिष्णुता उस ढांचे को तब कमजोर करने लगती है, जब असहमति या विरोध को राय का जायज फर्क नहीं, बल्कि ऐसी चीज माना जाने लगता है, जिसे दबाना, खारिज करना या जिसके लिए सजा देना जरूरी हो. इसलिए असहमति के साथ रहने की क्षमता सिर्फ एक सामाजिक गुण नहीं है. यह एक उदार संवैधानिक लोकतंत्र का मूल आधार है.&amp;rsquo; &amp;nbsp;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;लोकतंत्र तब सार्थक नहीं होता, जब हर कोई एक ही तरह की सोच रखता हो, बल्कि तब होता है, जब अलग-अलग विचार साथ-साथ रह सकें, सुने जा सकें और उनके साथ सम्मान से पेश आया जाए.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः शुद्धिकरण विवाद: राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत, जातिवादी टिप्पणी का आरोप ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नेपाल बाढ़: शशि थरूर ने की PM मोदी की तारीफ, बोले &amp; &amp;apos;जिस तरह से...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ नेपाल त्रासदी में भारत ने जिस तरह से तत्परता दिखाई है, उसको लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को लेटर लिखते हुए मौजूदा केंद्र सरकार की तारीफ की है. उन्होंने एक्स पर इस पोस्ट को जारी करते हुए, विदेश मंत्री के सोशल मीडिया हैंडल को भी टैग किया है. शनिवार (30 अगस्त) को लिखे पत्र में कहा कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ पर भारत की प्रतिक्रिया तेज और असरदार रही है. पीएम मोदी ने काठमांडू से तुरंत संपर्क किया. राहत सामग्री, मेडिकल टीमें और टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट्स की मदद से राहत कार्यों में बड़ा योगदान दिया है.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा कि त्रिशुली-1 में भारतीय मजदूरों को बचाना एक बड़ी कामयाबी थी. परिवारों ने यह सब देखा है. कई लोगों ने मुझसे कहा है कि मैं व्यक्तिगत रूप से आपका आभार व्यक्त करूं. मुझे ऐसा करने में खुशी हो रही है. इसके अलावा कांग्रेस ने रेस्क्यू में तेजी लाने के लिए कई सुझाव भी साझा किए. उन्होंने कहा कि सैकड़ों लोग अभी भी फंसे हुए हैं. रेस्क्यू कार्य के लिए समय तेजी से कम हो रहा है.&amp;nbsp;
पूरी NDRF टीम, आर्मी टास्क फोर्स
इधर, उन्होंने रेस्क्यू कार्यों के लिए NDRF की पूरी टीम और उनके उपकरणों को तुरंत भेजने और तैनात करने की मांग की. उन्होंने पासांग ल्हामू हाइवे को फिर से खोलने के लिए अर्थ मूविंग इक्विपमेंट के साथ आर्मी इंजीनियर टास्क फोर्स को तैनात करने का भी सुझाव दिया. थरूर ने साथ ही सुदूर इलाकों तक पहुंचने के लिए भारतीय वायुसेना के भारी भरकम हेलीकॉप्टर तैनात करने और मलबे वाले इलाकों का नक्शा बनाने लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार, थर्मल इमेंजिंक, स्निफर डॉग स्क्वाड और खास सैटेलाइन टास्किंग का इस्तेमाल करने का सुझाव भी दिया है.

My letter to Foeign Minister @DrSJaishankar appreciates India&amp;rsquo;s efforts to conduct search &amp;amp; rescue of missing persons, especially Indians, in the wake of the tragic events in #Nepal, and makes specific suggestions for further action that&amp;rsquo;s urgently needed: pic.twitter.com/E7nAiuNSuE
&amp;mdash; Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) August 29, 2026



उन्होंने कहा कि बुधवार सुबह से ही मुझे उन परिवारों से जानकारी मिल रही है, जिनके लोग लापता हैं. किसी ने भी मुझसे कोई शिकायत नहीं की. वे अपने बेटे, बेटी, पति या पत्नी के बारे में बात करने से पहले भारत की तरफ से की गई कोशिशों के लिए आभार व्यक्त कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने आग्रह किया कि रेस्क्यू ऑपरेशन और भारतीय की वापस कुशल वापसी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाए.&amp;nbsp;
थरूर का नेपाल दौरा
दरअसल, हाल ही में घटना से कुछ वक्त पहले नेपाल दौरे पर थे. उन्होंने कहा था कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बारे में पूरी जानकारी है. जब वे वहां पहुंचे, तबतक 270 लोगों की मौत हो चुकी थी. उन्होंने कहा कि वहां पहुंचने पर पता चला कि जानमाल का नुकसान हुआ है. अनुमान है कि लगभग 2000 या उससे ज्यादा लोग लापता हैं. बाढ़ का तेज पानी कम से कम 19 ऐसे पुलों को नष्ट कर गया, जहां गाड़ियां चल सकती थीं. बेत्रावती, रुसुवागढ़ी हाईवे का लगभग 40 किमी हिस्सा बहा दिया. 8 पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>नेपाल, बाढ़:, शशि, थरूर, ने, की, मोदी, की, तारीफ, बोले, जिस, तरह, से...</media:keywords>
    </item>
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        <title>कर्नाटक BJP के &amp;apos;दिमागी नक्सल&amp;apos; पोस्ट पर भड़की CJP, बोली&amp; &amp;apos;यह नरसंहार...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कर्नाटक-bjp-के-दिमागी-नक्सल-पोस्ट-पर-भड़की-cjp-बोली-यह-नरसंहार</link>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर कर्नाटक बीजेपी के एक पोस्ट पर आलोचना की है. इस पोस्ट में सीजेपी को दिमागी नक्सल कहकर निशाना पर लिया गया था. सीजेपी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता धारी पार्टी ने उन लोगों के खिलाफ हिंसा वाली तस्वीरों का इस्तेमाल किया है, जिन्हें नक्सली करार दिया गया है. साथ ही पार्टी ने चेतावनी दी है कि यह पोस्ट बड़े पैमान पर नरसंहार का खुला आह्वान है.&amp;nbsp;
सीजेपी ने कहा, क्या हम सच में सत्ताधारी पार्टी को खुलेआम बड़े पैमाने पर नरसंहार का आह्वान करते हुए देख रहे हैं? हम इसे पूरी तरह नजरंदाज नहीं कर सकते.&amp;nbsp;
कर्नाटक बीजेपी के पोस्ट पर भड़की सीजेपी
सीजेपी ने कर्नाटक बीजेपी की तरफ से केजीएफ चैप्टर 2 के एक सीन वाले मीम का इस्तेमाल करते हुए आलोचना की है. इस सीन में मुख्य किरदार और उसके साथ पहाड़ से अपने दुश्मनों पर गोलीबारी करते हैं. बीजेपी ने इस सीन का इस्तेमाल शूटरों को अपनी अलग अलग राज्य इकाइयों के तौर पर दिखाने के लिए किया. जबकि दुश्मनों को दिमागी नक्सल बताया है. बीजेपी कर्नाटक की तरफ से एक पोस्ट किया है, इसमें लिखा है, कोई सुस्ती नहीं. पूरी ताकत से दिमागी नक्सलियों का मुकाबला.&amp;nbsp;

Are we really witnessing a ruling party openly calling for mass genocide?We cannot simply brush this off. https://t.co/5Kw45ozuhq
&amp;mdash; Cockroach Janta Party - CJP (@Cockroachisback) August 29, 2026



सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास बोले- वे अपना होश खो बैठे
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने लिखा, सत्ताधारी पार्टी खुलेआम देश के युवाओं को गोली मारकर हत्या करने की धमकी दे रही है. सरासर बुराई. लगता है वे अपना होश खो बैठे हैं.
एक अन्य पोस्ट में दास ने लिखा, उन्हें यह देखकर दुख हुआ कि जिसे वे दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कहते हैं, वह नफरत में डूबी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी एक ऐसी पीढ़ी की बड़े पैमाने पर हत्या का आह्वान कर रही है. यह सरकार से सवाल करती है और बेहतर व्यवस्था की मांग करती है.&amp;nbsp;
दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को नफरत में डूबा देख दुख होता है: सौरव दास
दास ने कहा कि सच कहूं तो दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को इतनी ज्यादा नफरत में डूबा हुआ देखकर दुख होता है, कि उन्हें उस पीढ़ी के सामूहिक नरंसहार की बात करने में बुराई लगती है, जो सरकार से सवाल पूछने और अपने लिए बेहतर सिस्टम और उज्जवल भविष्य की मांग करने में विश्वास रखती है.&amp;nbsp;
दास ने कहा कि यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा हिटलर ने नाजी जर्मनी में याहूदियों के साथ किया था. हम यहां तक कैसे पहुंच गए. हमें यह पोस्टकरना सामान्य कैसे लगा? ये लोग संविधान में विश्वास नहीं करते. वे सच में एक दूसरे के विचारों और राय के प्रति सम्मान और सहनशीलता की भावना में विश्वास नहीं करते. वे सच में यह नहीं मानते कि लोकतंत्र तभी टिकता है, जब चुने हुए लोगों से जवाब मांगा जाए. यह सच में भारत का विचार नहीं है. इसमें हमारे गांधी, और अंबेडकर विश्वास करते थे. यह दुखद है. यह बेहद ही घिनौना है. मुझे उम्मीद है कि हम इस बदसूरती से बाहर निकल पाएंगे, जिसने हमारे खूबसूरत देश को अपने चपेट में ले लिया है. हमें बहुत संघर्ष के बाद आजादी मिली थी. इसलिए हमें ऐसे घटिया लोगों को कभी भी ऐसे पदों पर नहीं रहने देना चाहिए.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कर्नाटक, BJP, के, दिमागी, नक्सल, पोस्ट, पर, भड़की, CJP, बोली-, यह, नरसंहार...</media:keywords>
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        <title>हल्द्वानी में खरगे के शुद्धिकरण पर बोले शशि थरूर, कहा&amp; &amp;apos;जो कुछ हुआ वह...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हल्द्वानी-में-खरगे-के-शुद्धिकरण-पर-बोले-शशि-थरूर-कहा-जो-कुछ-हुआ-वह</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/हल्द्वानी-में-खरगे-के-शुद्धिकरण-पर-बोले-शशि-थरूर-कहा-जो-कुछ-हुआ-वह</guid>
        <description><![CDATA[ केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ उत्तराखंड के हल्द्वानी में कथित छुआछूत की घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हाल ही में हल्द्वानी में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी पर हमला नहीं है, यह इस देश के हर दलित नागरिक की गरिमा पर सीधा हमला है.
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान किसी भी तरह की अस्पष्टता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ता है. छुआछूत को खत्म कर दिया गया है और किसी भी रूप में इसका अभ्यास पूरी तरह से प्रतिबंधित है.
शशि थरूर ने विरोध के लिए कौन से पांच कारण बताए?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार (29 अगस्त, 2026) को इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है. उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मीडिया को बयान देते वीडियो शेयर करते हुए कुछ कारणों के बारे में बताया और कहा कि कुछ कारण हैं कि हम चुप इसे लेकर चुप क्यों नहीं रह सकते हैं और न ही चुप रहेंगे.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

The Constitution of India leaves no room for ambiguity: untouchability is abolished and its practice in any form is forbidden.What transpired recently in #Haldwani is not just an attack on @incindia President Mallikarjun @Kharge Ji; it is a direct assault on the dignity of&amp;hellip; https://t.co/GjJzJm3Plo
&amp;mdash; Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) August 29, 2026



उन्होंने कहा, &amp;lsquo;पहला कारण- खरगे जी के लिए न्याय, सभी दलितों के लिए न्याय हैः यह कोई निजी मुद्दा या साधारण राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं है. अगर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और दशकों से लोगों की सेवा के लिए समर्पित एक नेता को इस मानसिकता का सामना करना पड़ सकता है, तो सोचिए कि पूरे भारत में साधारण दलित नागरिकों और बच्चों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में किन मुश्किलों और अपमान का सामना करना पड़ता होगा.

दूसरा कारण- इसे वही नाम दें, जो यह असलियत में है- छुआछुतः जैसा कि राहुल गांधी ने भी कहा कि शुद्धिकरण या सफाई जैसे शब्दों के पीछे छिपने की कोशिश करने से इस घटना की असलियत तो नहीं बदल जाती है. किसी प्रमुख दलित नेता की मौजूदगी के बाद शुद्धिकरण करना छुआछुत की मानसिकता को दिखाता है. यह असंवैधानिक, अस्वीकार्य और एससी/एसटी एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है.
तीसरा कारण- असली कारण भाजपा की विचारधारा हैः कोई भी बहाना, अफसोस या शब्दों की कलाकारी इस मुश्किल की जड़ को छिपा नहीं सकती है. यह घटना भाजपा के नेतृत्व और उसकी विचारधारा में गहराई तक पैठ बनाए हुई भेदभाव वाली मानसिकता को दिखाती है. हमें जिम्मेदार लोगों को जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं देनी चाहिए.
चौथा कारण- बहानों के बजाए कार्रवाईः हमें इंटरनल इंक्वायरी के वादों या खोखले शब्दों में कोई रुचि नहीं है. संविधान के तहत अपराध, अपराध ही रहता है. चाहे उसे किसी भी तरह से किया जाए. हम कड़ी कार्रवाई, जवाबदेही और न्याय की मांग करते हैं.
पांचवां कारण- संविधान की रक्षा की लड़ाईः हमारी लड़ाई राजनीतिक गंठबंधनों, छिटपुट विवादों या साधारण पार्टी की प्रतिद्वंद्विता को लेकर नहीं है. कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक लड़ाई भारत के संविधान की रक्षा करना और उसे कमजोर करने वाली भेदभाव वाली विचारधारा का लगातार मुकाबला करना है.&amp;rsquo;

समानता एक संवैधानिक अधिकार- थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, &amp;lsquo;हम समानता, न्याय और व्यक्ति की गरिमा की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़े हैं. समानता कोई ऐसी सुविधा नहीं है, जो किसी दी जाए, यह देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः नेपाल बाढ़: शशि थरूर ने की PM मोदी की तारीफ, बोले - &#039;जिस तरह से...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हल्द्वानी, में, खरगे, के, शुद्धिकरण, पर, बोले, शशि, थरूर, कहा-, जो, कुछ, हुआ, वह...</media:keywords>
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        <title>नेपाल बाढ़: ग्लेशियर टूटने का वीडियो आया सामने, 626 शव बरामद; 2400 की तलाश जारी</title>
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        <description><![CDATA[ नेपाल में भोटे कोशी में आई विनाशकारी बाढ़ में अबतक 626 शव बरामद किये जा चुके हैं. नेपाल ने भारत से रेस्क्यू ऑपरेशन मजबूत करने के लिए मदद भी मांगी है, जिससे 2400 लोग जो लापता बताए जा रहे हैं, उनकी खोज की जा सके. इसी बीच न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक एक्सक्लूसिव वीडियो जारी किया है, जिसमें ग्लेशियर टूटता हुआ नजर आ रहा है.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में इस वीडियो को जारी करते हुए लिखा कि इस वैरिफाइड वीडियो में तिब्बत के पास उत्तरी नेपाल में हुए एवलांच का अबतक का सबसे साफ नजारा दिख रहा है. इससे नीचे नदी और घाटियों में पानी-कीचड़ की दीवारें बह रही हैं. &amp;nbsp;हिमालय के उच्च इलाके लैंगटांग लिरुंग के पास अचानक हुए विशाल ग्लेशियर और चट्टान के ढहने यानी एवलांच थी. इसके कारण भारी मात्रा में मलबा भोटेकोशी नदी की सहायक नदी लेंडे खोला में गिर गया. इससे यह बाढ़ आ गई.
NYT ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा है कि टूर गाइड जिहायिती और उनके हाईकर्स के ग्रुप ने बुधवार सुबह तिब्बत में एक ऑब्जर्वेशन डेक पर चढ़ाई की. जहां से नेपाल में बॉर्डर के उस पार बर्फ से ढके पहाड़ों को नजारा दिख रहा था. सुबह की धुंध में एक ब्रेक ने त्सांगबू री की शानदार चोटी और ग्लेशियर को दिखाया. उन्होंने अपने कैमरे निकाल, जब वे फिल्म बना रहे थे, तो हाईकर्स ने एक गहरी गड़गड़ाहट सुनीं.&amp;nbsp;



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&#039;ऐसा लगा, जैसे पहाड़ों के अंदर एक्सप्लोसिव फट रहे हों&#039;
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि उन्होंने आवाजों को बिजली कड़कने जैसा समझा. फिर तिब्बत में सुबह 10:50 बजे के ठीक बाद घाटी में एक जोरदार दरार की आवाज आई.&amp;nbsp;
मिस्टर जिहा ने कहा कि ऐसा लगा जैसे पहाड़ों के अंदर एक्सप्लोसिव फट रहे हों. उन्होंने शुरुआती आवाज के कई मिनट बाद तक वे हिमस्खलन के शोर से घिरे रहे. हिमस्खलन से पहले और बाद में हाइकर्स के फुटेज की तुलना करने पर हिमस्खलन के पैमाने का अबतक का सबसे साफ नजारा मिलता है.&amp;nbsp;
अबतक इतनी मौत, करीबन 2498 लोगों को बचाया गयानेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा आंकड़ों की मानें तो अबतक नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है. इसमें नेपाली, भारतीय समेत कई विदेशी लोग शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि अबतक इस आपदा में कम से कम 2498 लोगों को बचा लिया गया है. 219 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.&amp;nbsp;
250 से ज्यादा विदेशी नागरिकों को बचाया गयानेपाल टूरिज्म बोर्ड ने बताया कि 250 से ज्यादा विदेशी नागरिकों को बचाया गया है. बोर्ड के मुताबिक, 261 विदेशी नागरिकों को बचाया गया है. जबकि, 320 लोगों का अभी भी कोई पता नहीं है. जिन विदेशी नागरिकों को बचाया गया है, उनमें बेल्जियम, बुल्गारिया, पुर्तगाल, ओमान के एक एक नागरिक, चीन के 40 नागरिक, जर्मनी के 4 नागरिक, भारत के सबसे ज्यादा 167 नागरिक, इटली, स्पेन, स्विट्जरलैंड, तुर्की के दो-दो नागरिक, यूक्रेन के 8 नागरिक, अमेरिका के 3 नागरिक शामिल हैं. इनके अलावा 21 ऐसे भी विदेशी नागरिक हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है. NDRRMA का कहना है कि खोज अभियान में मदद के लिए 18,700 से ज्यादा बचाव कर्मियों को तैनात किया गया है.
भारत से टनल रेस्क्यू के लिए 11 सदस्यों की टेक्निकल टीम को भेजा गया&amp;nbsp;
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अपने प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी देते हुए कहा कि भारत से टनल रेस्क्यू के लिए 11 सदस्यों वाले एक खास टेक्निकल टीम को भेजा गया है. सरकार ने प्रभावित इलाकों में फंसे जीवित लोगों को पता लगाने के लिए खास टेक्नोलॉजी, तेजी से फोरेंसिक और डीएनए जांच और बरामद शवों को रखने के लिए मॉर्चरी सुविधाओं की मदद की मांग की है. रासुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में रेस्क्यू जारी है.
मंत्रालय ने जानकारी दी है कि जैसे-जैसै अधिकारी खोज, बचाव और पुष्टी का काम जारी रखेंगे. आंकड़े बदल भी सकते हैं. साथ ही लोगों से आधिकारिक पुष्टी की गई जानकारी पर ही भरोसा रखने की अपील की गई है. नेपाल ने कहा है कि भारत से 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री मिल चुकी है. बाकी अन्य देशों से भेजे जरूरी सामान मिल रहा है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>नेपाल, बाढ़:, ग्लेशियर, टूटने, का, वीडियो, आया, सामने, 626, शव, बरामद, 2400, की, तलाश, जारी</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;भारत के DNA में विविधता में एकता&amp;apos;, मैडिसन स्क्वायर में बोले मोहन भागवत</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका के न्यूयार्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत के DNA में विविधता में एकता है. कई भाषाएं, धर्म और जीवन-शैली हैं, फिर भी एकता है.
उन्होंने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि हर देश का एक मकसद और एक नियति होती है. भारत की नियति दुनिया को यह एहसास कराना है कि हम सब एक हैं.
मोहन भागवत ने कहा, &#039;&#039;भारत को क्या नियति मिली है? भारत का काम है इस विविधता में एकता को खुद महसूस करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना.&#039;&#039;
प्रवासी भारतीयों को संदेश
मोहन भागवत ने प्रवासी भारतीयों से कहा कि अपनी कर्मभूमि के लिए काम करें, भारत के मूल्यों को नहीं भूलें, उसे अपनाएं. उन्होंने कहा कि हम हर चीज के लिए किसी न किसी के ऋणी हैं. हम दुनिया से लेते हैं. इसलिए हमें इसे वापस देना चाहिए. हम कितना कमाते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है; हम कितना बांटते हैं, यह महत्वपूर्ण है.
&amp;lsquo;यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन&amp;rsquo; नाम से आयोजित इस कार्यक्रम को &amp;lsquo;अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग&amp;rsquo; (एएचईएडी) ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित किया. आयोजक ने दावा किया कि इस कार्यक्रम में 39 राज्यों और 853 शहरों के लोग शामिल हुए. 250 से अधिक स्टूडेंट्स अलग-अलग यूनिवर्सिटी के मौजूद थे.
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Tune in and listen to @DrMohanBhagwat&amp;rsquo;s message of #UniversalOneness at Madison Square Garden, New York. https://t.co/eajJWbADMA
&amp;mdash; AHEAD Forum (@Aheadforum1) August 29, 2026



मोहन भागवत ने कहा, &amp;ldquo;आप एक आसान सा प्रयोग कर सकते हैं. जब आप दोपहर या रात का खाना खा रहे हों, तो किसी भूखे व्यक्ति को अपने सामने खड़ा होने दें और उसे भूखी नजरों से आपकी भरी हुई थाली को देखते रहने दें और उसकी नजरों से बचने या उसे वहां से भगाने के बजाय, बिना उसे एक भी निवाला दिए अपना खाना खाकर देखिए. आप ऐसा नहीं कर पाएंगे. आप कोशिश कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं कर पाएंगे. क्योंकि हम इंसान हैं. हमारे अंदर संवेदना है. जानवरों में भी यह संवेदना होती है. इसलिए सही दिशा महत्वपूर्ण है. और जो व्यक्ति सही दिशा के अनुसार अपना जीवन जीता है, वह ईश्वर के इस साम्राज्य का एक जिम्मेदार नागरिक बन जाता है.&amp;rdquo; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>भारत, के, DNA, में, विविधता, में, एकता, मैडिसन, स्क्वायर, में, बोले, मोहन, भागवत</media:keywords>
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        <title>बाबा रामदेव ने कंगना रनौत को भिजवाए गिफ्ट, जानें क्या बोलीं बीजेपी सांसद</title>
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        <description><![CDATA[ योग गुरु बाबा रामदेव ने रक्षाबंधन पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत को बहन बताते हुए उनके साथ सभी मतभेदों को खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा कि मैं उन्हें मिठाई, उपहार और राखी भेज रहा हूं, ताकि विवाद का अंत संवाद से हो. बाबा रामदेव के इस बयान से कंगना रनौत भी खुश हुईं.&amp;nbsp;
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किए एक नोट में लिखा, &amp;lsquo;त्योहार का दिन होता है सब भूल-चूक माफ करने के लिए. मेरे भाई बाबा रामदेव जी ने बहुत अच्छा कहा कि विवाद नहीं बल्कि संवाद होना चाहिए. आज रक्षाबंधन के दिन मैं उनकी मिठाई और बड़े भाई का प्रेम दोनों स्वीकार करती हूं. बहुत-बहुत धन्यवाद, ईश्वर आपको लंबी आयु दे.&amp;rsquo; कंगना रनौत ने आगे कहा कि त्योहार पुरानी बातों को भुलाकर माफ करने के लिए होते हैं.
बाबा रामदेव ने क्या कहाबाबा रामदेव ने मीडिया से बातचीत में कहा, &amp;lsquo;हम बहन कंगना रनौत को यह गिफ्ट और यह मिठाई पोस्ट द्वारा भेज दे रहे हैं. किसी भी कारण से नफरत देश में नहीं होनी चाहिए. इसलिए सब बैर खत्म करें. पिछले दिनों सवाल उठा कि क्या हमारा बहन कंगना रनौत के साथ विवाद तो नहीं हो गया है?&amp;nbsp;

PHOTO | Yoga Guru Baba Ramdev sends sweets and a gift to BJP MP Kangana Ranaut on the ocassion of Raksha Bandhan.Kangana Ranaut accepted the gesture, referring to Ramdev as her &#039;elder brother&#039; and saying that festivals are meant to forgive and forget past differences. pic.twitter.com/wakWzZp9sV
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) August 29, 2026



बता दें कि योग गुरु और बॉलीवुड एक्ट्रेस के बीच विवाद तब शुरू हुआ था, जब बाबा रामदेव ने कंगना रनौत के गटर जेनरेशन वाले बयान पर कड़ी आपत्ति जताई थी. बाबा रामदेव ने तब कंगना के बयान को उनके बिगड़े हुए दिमाग की उपज करार दिया था इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने उनके अतीत पर भी सवाल उठाए थे.&amp;nbsp;
पिछले दिनों हुआ था जमकर विवादतब बाबा रामदेव के बयान से आहत कंगना ने भी उन्हें तीखा जवाब दिया था. उन्होंने बाबा रामदेव के पुराने विवाद खोलते हुए उन्हें कैरेक्टर का पाठ न पढ़ाने की नसीहत दी थी. कंगना रनौत ने बाबा रामदेव को लेकर पोस्ट करते हुए कहा था कि बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में दिन में सपने न देखें. कोई भी सिर्फ अफवाहों और गपशप के आधार पर ही अंदाजा लगा सकता है. कम से कम मुझे तो कभी झूठे या फर्जी दावों के लिए सुप्रीम कोर्ट से फटकार नहीं पड़ी है.&amp;rsquo;
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नेपाल बाढ़ को लेकर खरगे ने पीएम मोदी को लिखा लेटर, जानें क्या मांग की ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बाबा, रामदेव, ने, कंगना, रनौत, को, भिजवाए, गिफ्ट, जानें, क्या, बोलीं, बीजेपी, सांसद</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;हर संभव मदद के लिए तैयार भारत, हालात पर नजर&amp;apos;, नेपाल के लिए बोले कीर्तिवर्धन सिंह</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हर-संभव-मदद-के-लिए-तैयार-भारत-हालात-पर-नजर-नेपाल-के-लिए-बोले-कीर्तिवर्धन-सिंह</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने गोंडा में नेपाल बाढ़ त्रासदी को लेकर कहा कि नेपाल में आई त्रासदी में 579 लोगों की मौत की सूचना है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार सामग्री भेज रही है. उन्होंने बताया कि जिस दिन ये बहुत ही दुखदायी घटना हुई थी, उसी दिन हमारा जो वहां मिशन है, उन्होंने तत्काल एक 24 घंटे की हेल्पलाइन शुरू कर दी और एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया.&amp;nbsp;
उन्होंने बताया कि हेल्पलाइन नंबर के जरिए हम लोग वॉच कर रहे हैं कि कहां क्या है और कहां किस चीज की जरूरत है. खासकर जो हमारे भारतीय नागरिक वहां फंसे हुए हैं उनकी भी खोज-खबर हम लोगों को मिलती रहे. उन्होंने आगे कहा कि आप देख ही रहे हैं कि हमारे देश ने कई बार हवाई जहाज से, स्पेशल हवाई जहाज से मेडिकल हेल्प भी और हर तरह का संभव राशन वगैरह भी सब भिजवाया है और हम लोग भिजवा रहे हैं.
&#039;हम लोग वॉच रख रहे हैं&#039;केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे वहां की सरकार बताएगी, वैसे-वैसे हम लोग उनकी हर यथासंभव सहायता करेंगे. हर जरूरी कोऑपरेशन करेंगे. चीन के अलर्ट को लेकर उन्होंने कहा कि हमारी फोर्स बॉर्डर इलाके पर तैनात हैं, इसीलिए कि कहीं कुछ ऐसा अगर होता है तो वहां तुरंत एक्शन होगा. उन्होंने आगे कहा कि अब इस पर हम लोग वॉच रख रहे हैं कि कहीं भी कुछ अगर ऐसा होता है तो तुरंत हम लोग उस पर एक्शन लेंगे.
नेपाली पीएम के दौरे को लेकर क्या कहाउन्होंने बताया कि अगर गांवों से लोगों को एवेक्यूएट कराना पड़ा जो या कुछ भी करना हो, हम लोग वो सभी जरूरी कदम उठाएंगे. इस पर वॉच रखी जाएगी. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के इसी साल भारत दौरे के सवाल पर उन्होंने कहा कि देखिए ये चीजें अभी प्रिलिमिनरी स्टेज पर हैं, जैसे-जैसे इस पर और क्लेरिटी आएगी आप लोगों को पता चल जाएगा.&amp;nbsp;
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25 दिन में फिर गया मंत्री पद, फंड गड़बड़ी के आरोपों में बी. नागेंद्र का इस्तीफा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सज्जन कुमार के घर जाना पड़ा भारी! नितिन नवीन ने 3 सांसदों को फटकारा</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिल्ली के तीन BJP सांसदों को फटकार लगाई है. इन सांसदों के कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके घर जाने और परिवार से मुलाकात करने पर पार्टी अध्यक्ष ने नाराजगी जताई है. जिन सांसदों को फटकार लगाई गई है, उनमें कमलजीत सहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी और योगेंद्र चंदोलिया शामिल हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार, तीनों सांसद हाल ही में सज्जन कुमार के घर पहुंचे थे और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की थी.
सज्जन कुमार की 20 अगस्त को मौत हुई थी. वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए थे और उम्रकैद की सजा काट रहे थे. उनकी प्रार्थना सभा शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित की जानी है.
सज्जन कुमार के घर जाने पर क्यों हुआ विवाद?
तीनों BJP सांसदों के सज्जन कुमार के घर जाने के बाद इस दौरे की आलोचना शुरू हो गई. BJP नेता एचएस फुल्का ने भी सांसदों के इस कदम पर सवाल उठाया. HS फुल्का 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की ओर से लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ चुके हैं. उन्होंने सांसदों के सज्जन कुमार के घर जाने की कड़ी आलोचना की और कहा कि ऐसे मामले में सहानुभूति दंगा पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ होनी चाहिए. फुल्का ने कहा कि 1984 के दंगों के पीड़ितों के परिवार आज भी उस हिंसा के दर्द से गुजर रहे हैं. उन्होंने तीनों सांसदों के बहिष्कार की मांग भी की.
BJP ने क्या सफाई दी?
मामले पर BJP की ओर से सफाई देते हुए पार्टी प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि तीनों सांसद सज्जन कुमार के घर अपनी निजी हैसियत से गए थे. उनका यह दौरा पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं था. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इसके बावजूद BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीनों सांसदों के इस कदम पर नाराजगी जताई है.
कौन हैं तीनों BJP सांसद?
रामवीर सिंह बिधूड़ी दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद हैं. कमलजीत सहरावत पश्चिमी दिल्ली और योगेंद्र चंदोलिया उत्तर-पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन क्षेत्रों का 1984 के बाद की दिल्ली की राजनीति से भी संबंध रहा है. सज्जन कुमार पहले बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद रहे थे और लोकसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर चुके थे.
1984 के दंगों में सज्जन कुमार को हुई थी उम्रकैद
सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के राज नगर इलाके में दो सिखों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. उन्हें इस मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी. इसके अलावा वह 1984 के दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी उम्रकैद की सजा काट रहे थे. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी हिंसा हुई थी. BJP लंबे समय से 1984 के दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के मुद्दे को उठाती रही है. ऐसे में पार्टी के तीन सांसदों का सज्जन कुमार के परिवार से मिलने जाना राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सज्जन, कुमार, के, घर, जाना, पड़ा, भारी, नितिन, नवीन, ने, सांसदों, को, फटकारा</media:keywords>
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        <title>ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! CM शुभेंदु के आदेश पर पुलिस का एक्शन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ममता-बनर्जी-को-एक-और-बड़ा-झटका-cm-शुभेंदु-के-आदेश-पर-पुलिस-का-एक्शन</link>
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        <description><![CDATA[ कोलकाता पुलिस ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के टीएमसी छात्र परिषद के आयोजकों के खिलाफ केस दर्ज किया है. 28 अगस्त को कैथेड्रल रोड पर संगठन के स्थापना दिवस प्रोग्राम के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया गया है.&amp;nbsp;
पुलिस ने आरोप लगाते हुए कहा है कि समर्थकों ने बैरिकेड्स हटा दिए. पुलिसकर्मियों के साथ धक्का मुक्की की. ट्रैफिक में बाधा डाली. कोर्ट की तरफ से तय समय के बाद भी कार्यक्रम जारी रखा. मामला बीएनएस की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है.&amp;nbsp;
बंगाल के मु्ख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के आदेश पर कोलकाता पुलिस ने हेस्टिंग्स पुलिस स्टेशन ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है. पुलिस के मुताबिक, ममता बनर्जी और WBTMCP के आयोजकों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश रची और कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है. पुलिस का आरोप है कि समर्थकों ने बैरिकेड्स हटा दिए. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात कर्मियों के साथ धक्का मुक्की की. अफरातफरी का माहौल बनाया. कैथेड्रल रोड के एक हिस्सा पर ट्रैफिक बाधित किया.
मैंने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने को कहा है: शुवेंदु अधिकारी
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि स्टूडेंट इलेक्शन होंगे. हर जगह भगवा झंडे लहराएंगे. एबीवीपी हर जगह जीतेगी. इंतजार करते रहिए. गुंजाइश नहीं है. पश्चिम बंगाल का कोई भी देशभक्त नागरिक इस जाल में नहीं फंसेगा. क्या आपने आज नहीं देखा कि कैसे पूर्व मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया. उनसे सड़क का एक हिस्सा खुला रखने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने पेड़ों के नीचे खड़े लोगों को बुला लिया. सड़क जाम कर दी. क्या किया? मैंने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने और खिलाफ हाईकोर्ट जाने को कहा है.&amp;nbsp;
इन धाराओं के तहत हुआ मामला दर्ज
पुलिस ने पूरे मामले में केस दर्ज करते हुए आरोप लगाया कि समर्थकों ने बैरिकेड्स हटा दिए. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात कर्मियों से धक्का मुक्की की. अफरातफरी का माहौल बनाया. कैथेड्रल रोड के एक हिस्से पर ट्रैफिक बाधित किया. यह मामला बीएनएस की धाराओं 61(2)/223/125(a)/132/285 के तहत हेस्टिंग्स पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है. कोलकाता हाईकोर्ट ने 28 अगस्त की मीटिंग के लिए साफ निर्देश दिए थे कि भीड़ 1500 लोगों की हो, और सड़क का एक हिस्सा ट्रैफिक के लिए खुला रखा जाए. लेकिन ममता बनर्जी और उनकी कानून तोड़ने की आदत, वे जनता को बैरिकेड तोड़ने और सड़क व ट्रैफिक जमा करने के लिए उकसाती हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ममता, बनर्जी, को, एक, और, बड़ा, झटका, शुभेंदु, के, आदेश, पर, पुलिस, का, एक्शन</media:keywords>
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        <title>नेपाल बाढ़ त्रासदी पर बोले कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, &amp;apos;भारत के लोग...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ नेपाल में आई भीषण बाढ़ से मची तबाही और भारी संख्या में हुई जनहानि पर कांग्रेस पार्टी ने अपनी गहरी संवेदना और इस मुश्किल घड़ी में एकजुटता व्यक्त की है. पार्टी ने कहा कि हमारी संवेदनाएं उन परिवारों और उन सभी लोगों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस भयानक त्रासदी में खो दिया है और जो अभी भी अपने प्रियजनों के सलामत होने की खबर का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत के लोग इस संकट की घड़ी में नेपाल की जनता के हर संभव मदद के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
नेपाल में आए संकट पर सलमान खुर्शीद की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के विदेश विभाग के चेयरमैन और देश के पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने नेपाल में बुधवार (26 अगस्त) को आई भीषण बाढ़ पर पार्टी और देश की तरफ से संवेदना जताई है. उन्होंने इस संबंध में शनिवार (29 अगस्त, 2026) को एक आधिकारिक बयान भी जारी किया है.
बयान में कहा गया, &amp;lsquo;भारत की जनता की तरफ से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) नेपाल के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है. हम पूरी तरह से नेपाल की जनता के साथ एकजुटता से खड़े हैं. नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की वजह से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और देश के गंभीर आर्थिक और मानवीय क्षति पहुंची है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

Statement by Shri @salman7khurshid, Chairman, INC Foreign Affairs Department, on the flash floods in Nepal. pic.twitter.com/g5K4jJuDT9
&amp;mdash; Congress (@INCIndia) August 29, 2026



उन्होंने कहा, &amp;lsquo;हमारी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं, जो अभी भी अपने प्रियजनों के सुरक्षित होने की खबर का इंतजार कर रहे हैं.&amp;rsquo;
भारत और नेपाल के रिश्ते पर बोले सलमान खुर्शीद

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने आधिकारिक बयान में कहा, &amp;lsquo;भारत और नेपाल के बीच एक ऐसी सभ्यतागत विरासत है, जो आधुनिक देश और राज्यों के अस्तित्व में आने से पहले की है. यह साझा आस्था, संस्कृति और हिमालय की पारिस्थिति (इकोलॉजी) पर आधारित है, जिसने कई सदियों से हमारे दोनों देशों के लोगों को जोड़े रखा है.&amp;rsquo;
भारत-नेपाल की रिश्ते में पंडित नेहरू की भूमिका महत्वपूर्ण- खुर्शीद
उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा, &amp;lsquo;साल 1950 में शांति और मैत्री संधि (Treaty of Peace and Friendship, 1950) के माध्यम से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत और नेपाल के संबंध को औपचारिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्होंने एक ऐसे रिश्ते की परिकल्पना की थी, जो खुलेपन और आपसी सहयोग से परिभाषित होती है.&amp;rsquo;
उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;भारत की जनता नेपाल के लोगों को हर संभव मदद देने के लिए तैयार है. हम इस संकट से उबरने के दौरान नेपाल के एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में पूरी मजबूती से उसके साथ खड़े रहेंगे.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः नेपाल पर फिर मंडराया बाढ़ का खतरा! चीन ने झील टूटने की दी चेतावनी ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>‘हमें पता है इस बीमारी का…’, आजादी के नारे लगाने वाले छात्रों को शुभेंदु की चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के मौके पर देशभक्ति और राष्ट्रवाद का संदेश देते हुए उन लोगों पर निशाना साधा, जो &amp;lsquo;आजादी&amp;rsquo; जैसे नारे लगाते हैं. उन्होंने यादवपुर विश्वविद्यालय की दीवारों पर बने माओवादी नेता किशनजी के समर्थन वाले भित्तिचित्र &amp;lsquo;लाल सलाम किशनजी&amp;rsquo; पर भी सवाल उठाए.
शुभेंदु की वॉर्निंग
भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति की भावना से भी जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा सेना करती है, लेकिन देश के अंदर भी कुछ लोग ऐसे हैं जो राष्ट्रहित के खिलाफ काम करते हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग देशभक्ति, राष्ट्रवाद, &amp;lsquo;वंदे मातरम्&amp;rsquo; और &amp;lsquo;जन गण मन&amp;rsquo; का विरोध करते हैं, उन्हें समाज से अलग करना चाहिए.
शुभेंदु ने कहा कि जब वह कोलकाता की सड़कों पर &amp;lsquo;आजादी&amp;rsquo; के नारे देखते हैं तो उन्हें दुख होता है. उन्होंने कहा कि भारत को आजादी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से मिली है और हमें उनके योगदान को याद रखना चाहिए. मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यादवपुर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की दीवारों पर &amp;lsquo;कश्मीर मांगे आजादी&amp;rsquo; जैसे नारे और &amp;lsquo;लाल सलाम किशनजी&amp;rsquo; जैसे संदेश दिखाई देते हैं, जो चिंताजनक हैं.
किशनजी माओवादी नेता
उन्होंने सवाल उठाया कि नई पीढ़ी को इस तरह के संदेश देकर क्या सिखाया जा रहा है. उनके अनुसार, किशनजी एक माओवादी नेता था जिसने संविधान को नहीं माना और अलगाववादी विचारों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि यादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षा का एक प्रतिष्ठित संस्थान है और वहां राष्ट्रविरोधी संदेशों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. शुभेंदु अधिकारी ने दोहराया कि अगर कोई &amp;lsquo;कश्मीर मांगे आजादी&amp;rsquo; जैसे नारे लगाएगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि कुछ राजनीतिक दल और विपक्ष &amp;lsquo;वंदे मातरम्&amp;rsquo; के पूर्ण संस्करण का विरोध क्यों कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि &amp;lsquo;वंदे मातरम्&amp;rsquo; किसी राजनीतिक नेता ने नहीं, बल्कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और यह देश की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है.
अपने संबोधन में उन्होंने बंगाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का भी उल्लेख किया. उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस और रानी रासमणि जैसी महान हस्तियों को याद करते हुए कहा कि राज्य सरकार बंगाल की खोई हुई सांस्कृतिक पहचान को फिर से मजबूत करने का प्रयास कर रही है.
शुभेंदु अधिकारी ने यह भी घोषणा की कि पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों और कॉलेजों में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) शुरू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं में अनुशासन, देशभक्ति और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा दिया जा सके. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>‘राहुल ही होंगे विपक्ष के PM उम्मीदवार’, तमिलनाडु के मंत्री ने भरी हुंकार</title>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु के मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. विश्वनाथन ने शुक्रवार (28 अगस्त, 2026) को साल 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में विपक्षी INDIA गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ही विपक्षी इंडिया गठबंधन के निश्चित पीएम पद के उम्मीदवार हैं.
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की तरफ से यह टिप्पणी ऐसे वक्त पर सामने आई है, जब तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के कई मंत्रियों, विधायकों के साथ जनता के कुछ वर्गों की तरफ से राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर पेश करने की मांग लगातार बढ़ रही है. इसके साथ ही, आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई अन्य संभावित राष्ट्रीय नेताओं को लेकर भी व्यापक रूप से चर्चा हो रही है.
राहुल गांधी को लेकर क्या बोले विश्वनाथन?&amp;nbsp;
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में CM विजय के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पी. विश्वनाथन ने कहा, &amp;lsquo;कांग्रेस के नेता के तौर पर हम पूरी तरह से स्पष्ट हैं कि हमारे प्यारे नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी साल 2029 में होने वाले आम चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं.&amp;rsquo;
नेपाल में फंसे राज्य के पर्यटकों पर बोले कांग्रेस नेता

वहीं, नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच फंसे तमिलनाडु के पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से की जा रही कोशिशों की जानकारी देते हुए विजय सरकार में मंत्री पी. विश्वनाथन ने कहा, &amp;lsquo;राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए चार सदस्यीय मंत्रियों की समिति को गुरुवार (27 अगस्त, 2026) की रात में पड़ोसी देश नेपाल में भेजा गया है.
बता दें कि नेपाल में बुधवार (26 अगस्त) को अचानक आई बाढ़ की वजह से गुरुवार (28 अगस्त) तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई, जबकि एक हजार से ज्यादा अभी भी लापता हैं. राहत और बचाव की टीमें लगातार तीसरे दिन लापता और फंसे हुए लोगों की मदद के लिए खोज और बचाव अभियान चला रही है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः वाल्मिकी घोटालाः बी. नागेंद्र का कर्नाटक कैबिनेट से इस्तीफा, रोते हुए की घोषणा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>‘जनता के दबाव का नतीजा...’, DKS के मंत्री के इस्तीफे पर BJP का रिएक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के कैबिनेट में योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार (28 अगस्त, 2026) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिस पर अब राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा जनता के लगातार बढ़ते दबाव और कथित वाल्मीकि विकास निगम घोटाले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल-सेक्युलर (JD-S) की तरफ से चलाए गए आंदोलन का नतीजा है.
वहीं, मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र ने कहा कि कथित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले को लेकर कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना न करना पड़े, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया.
कांग्रेस सरकार मंत्री को जवाबदेही से बचा रही थी- अशोक
न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, बी. नागेंद्र के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार शुरू से ही मंत्री को जवाबदेही से बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन आखिरकार उसे जनता के गुस्से के आगे झुकना ही पड़ा. उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए निर्धारित 187 करोड़ रुपये का दुरुपयोग किया गया.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;जब भाजपा और JD-S ने जवाब मांगा, तो कांग्रेस सरकार ने क्या किया? हमने सवाल उठाए, लेकिन सरकार सदन से भाग गई. हमने जवाब मांगे, लेकिन विधानसभा का सत्र छोटा कर दिया गया. हमने सच्चाई सामने रखी, लेकिन सरकार ने आरोपियों को बचाने के लिए पूरे सरकारी तंत्र को ढाल बना लिया.&amp;rsquo; उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर सकती है और बहस से बच सकती है, लेकिन सच्चाई को दबा नहीं सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
भाजपा नेता ने सरकार से पूछे कई सवाल?
कर्नाटक विधानसभा नेता विपक्ष आर. अशोक ने दावा किया कि कथित घोटाले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर भाजपा की तरफ से राज्यव्यापी पदयात्रा की घोषणा के बाद कांग्रेस सरकार घबरा गई. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;बी नागेंद्र का इस्तीफा जनता के लगातार दबाव और विधानसभा के भीतर और बाहर भाजपा और जेडी-एस की तरफ से लड़ी गई अथक लड़ाई का नतीजा है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;&amp;nbsp;

उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;नागेंद्र का इस्तीफा सिर्फ एक मंत्री के पद छोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है. हालांकि, नागेंद्र का इस्तीफा इस मामले का अंत नहीं है, बल्कि जांच की शुरुआत है.&amp;rsquo; उन्होंने कथित जनजातीय कल्याण निधि के दुरुपयोग को लेकर कई सवाल उठाए.
उन्होंने पूछा कि कथित घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है? धनराशि के हस्तांतरण की अनुमति किसने दी? आदेश किस कार्यालय से जारी हुआ? कथित रूप से धन का लाभ आखिर किसे मिला? क्या किसी ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की? उन्होंने कहा कि हर सवाल का जवाब मिलना चाहिए.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &amp;lsquo;राहुल ही होंगे विपक्ष के PM उम्मीदवार&amp;rsquo;, तमिलनाडु के मंत्री ने भरी हुंकार ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>‘PM मोदी का लद्दाख के प्रति विशेष लगाव’, लेह में बोले किरेन रिजिजू</title>
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        <description><![CDATA[ संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बड़ी घोषणा की है कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश (UT) को जल्द ही एक खास मामले के तौर पर अनुच्छेद 371 के तहत विशेष दर्जा मिलेगा. अनुच्छेद 371 के तहत आने वाले विशेष प्रावधान लद्दाख की अनोखी आदिवासी पहचान, जमीन के अधिकारों, अलग संस्कृति और स्थानीय रोजगार के अवसरों की सुरक्षा की कानूनी गारंटी देंगे.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
किरेन रिजिजू ने यह घोषणा शुक्रवार (28 अगस्त, 2026) को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह के शे में स्थित ड्रुक पद्मा करपो स्कूल के सिल्वर जुबली स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए की. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लद्दाख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल के बहुत करीब है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का हमेशा से मानना रहा है कि लद्दाख जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है और जब से उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री का पद संभाला है, वे इसी दिशा में काम कर रहे हैं. उन्हीं की सोच की वजह से लद्दाख में आर्थिक और सामाजिक, दोनों मोर्चों पर विकास का नजारा पहले जैसा नहीं रहा, बल्कि उसमें अभूतपूर्व बदलाव आ रहा है.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लिए विशेष प्रावधान करने की दिशा में काम कर रहा है. इस क्षेत्र के लिए ऐसे प्रावधानों पर विचार केवल इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी का इस क्षेत्र के प्रति विशेष लगाव है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
उन्होंने कहा कि वहां के लोगों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए इस योजना में केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एक चुनी हुई संस्था और एक विधान परिषद बनाने की बात है, जिसके पास मजबूत प्रशासनिक, विधायी और वित्तीय शक्तियां होंगी. हालांकि, राज्य का दर्जा देने की मुख्य मांग शायद पूरी न हो.&amp;nbsp;

स्थानीय नेतृत्व को एक अहम रियायत देते हुए इस ढांचे में यह तय किया जाएगा कि स्थानीय प्रशासन, जिसमें मुख्य सचिव भी शामिल हैं, स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय सीधे इस चुनी हुई राजनीतिक कार्यपालिका (Elected Political Executive) के प्रति जवाबदेह होगा.
मौजूदा लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों (LAHDC) का विस्तार पहले के दो जिलों (लेह और करगिल) से बढ़ाकर सभी सात नए अधिसूचित जिलों (शाम, नुब्रा, चांगथांग, जंस्कार और द्रास सहित) में कर दिया गया है. इन परिषदों को वैधानिक दर्जे से ऊपर उठाकर स्थायी संवैधानिक दर्जा दिया जाएगा.
जल्द ही लागू होंगे प्रावधान- रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उम्मीद जताई कि ये प्रावधान जल्द ही लागू होंगे और लद्दाख के लोग इनका फायदा उठा सकेंगे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लंबे समय से इस इलाके का दौरा करने और लोगों के साथ अपने विचार साझा करने की इच्छा रखते रहे हैं और यह इच्छा भी जल्द ही पूरी हो सकती है.
उन्होंने कहा कि लद्दाख को देखने के नजरिए में जबरदस्त बदलाव आया है और आज के हालात 25 साल पहले की स्थिति से बिल्कुल अलग हैं. इस इलाके में खासकर पिछले 10 सालों में काफी विकास हुआ है. उन्होंने सड़क कनेक्टिविटी में सुधार का खास जिक्र किया और कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने में पहले जो कई दिन लगते थे, वे अब कुछ ही घंटों में पूरे हो जाते हैं.
लद्दाख के लोगों की केंद्र शासित प्रदेश की मांग पूरी हुई- रिजिजू
मंत्री ने कहा कि लद्दाख में नए जिले बनाने जैसे हालिया बदलावों से वहां की आबादी को बहुत फायदा होगा और लोगों को एहसास होगा कि ये बदलाव सिर्फ उनकी भलाई के लिए किए गए हैं. केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा लद्दाख के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग थी और अब वह मांग भी पूरी हो गई है. जल्द ही लद्दाख में हाई कोर्ट की एक बेंच भी स्थापित की जाएगी और इससे स्थानीय आबादी को बहुत फायदा होगा.
उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय मंत्रिमंडल में पद संभालने वाले पहले बौद्ध हैं और प्रधानमंत्री मोदी की अल्पसंख्यकों के प्रति देखभाल और चिंता की वजह से ही ऐसा संभव हो पाया है. उन्होंने कहा कि देश में सभी अल्पसंख्यकों को समान अवसर मिलते हैं और सरकार सभी अल्पसंख्यकों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसे संभव बनाने की दिशा में काफी काम किया जा रहा है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः पीएम मोदी से लेकर नितिन गडकरी तक..., राजनेताओं ने ऐसे बंधवाई राखी-Pics ]]></description>
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        <title>भारत और कुवैत ने की पहली संयुक्त रक्षा समिति की बैठक, इन मुद्दों पर दिया जोर</title>
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        <description><![CDATA[ भारत और कुवैत ने डिफेंस सेक्टर में अपने संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम उठाते हुए शुक्रवार (28 अगस्त, 2026) को पहली बार संयुक्त रक्षा समिति की बैठक की. दोनों देशों के बीच हुई यह महत्वपूर्ण बैठक राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हुई. इस अहम बैठक में भारत और कुवैत ने सैन्य परीक्षण, सैन्य अभ्यास, सैन्य चिकित्सा, स्टाफ डायलॉग, रक्षा उद्योग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट समेत कई क्षेत्रों में अपने सहयोग को बढ़ाने पर जोर देते हुए सहमति जताई है.
पीएम मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान समझौते पर हुई थी बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2024 के दिसंबर महीने में कुवैत की यात्रा की थी. उनकी इसी यात्रा के दौरान भारत और कुवैत के बीच रक्षा सहयोग समझौते को लागू किए जाने की दिशा में पहल हुई थी. नई दिल्ली में आयोजित भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की तरफ से संयुक्त सचिव अभिताभ प्रसाद ने की. इसके साथ ही, बैठक में भारतीय डेलिगेशन में तीनों सेनाओं के अधिकारी, रक्षा उत्पादन विभाग, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO), सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के साथ विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल रहे. जबकि कुवैत की ओर से पांच सदस्यीय डेलिगेशन के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसकरान ने की.
बैठक में किन मुद्दों पर दिया गया जोर&amp;nbsp;

न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति की बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी डिफेंस रिलेशन्स को न सिर्फ सैन्य संपर्क तक सीमित रखने, बल्कि इसे प्रशिक्षण से लेकर डिफेंस टेक्नोलॉजी और उद्योग तक सहयोग का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया.
कुवैती डेलिगेशन चीफ ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैती डेलिगेशन के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसकरान भारतीय पक्ष के साथ संयुक्त रक्षा समिति की अहम बैठक से पहले राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचे, जहां पहुंचकर उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और पुष्प भी अर्पित किए. इसके अलावा, कुवैती प्रतिनिधिमंडल ने बैठक से पहले डीपीएसयू भवन में भारतीय रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ संभावित सहयोग के क्षेत्रों को लेकर विस्तार से गंभीर चर्चा भी की.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः लैंडिंग के दौरान फट गया विमान का टायर, क्रू मेंबर्स समेत 41 लोग थे सवार ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Xप्लेन: लोकसभा में NDA का जलवा, UP में योगी की राहें मुश्किल, CJP को कितने वोट? सर्वे के नतीजे ने चौंकाया</title>
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        <description><![CDATA[ प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक से लेकर जातीय जनगणना और Gen-Z (युवाओं) की नाराजगी जैसे मुद्दे देश की राजनीति के केंद्र में हैं. विपक्ष का दावा है कि इन ज्वलंत मुद्दों के कारण जनता सत्तारूढ़ पार्टी से खफा है, जिसका असर आगामी विधानसभा और साल 2029 के लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा. हालांकि, इस राजनीतिक बहस के बीच आए इंडिया टुडे-सी वोटर (India Today - C Voter) के ताजा &amp;lsquo;मूड ऑफ द नेशन&amp;rsquo; (MOTN) सर्वे के आंकड़े एक अलग ही सियासी कहानी बयां कर रहे हैं.
सर्वे के अनुसार, यदि देश में आज अचानक लोकसभा चुनाव हो जाएं, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 45% वोट शेयर और 326 सीटों के साथ एक बार फिर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाता दिख रहा है. वहीं, विपक्षी INDIA ब्लॉक को 185 सीटें (39% वोट शेयर) और अन्य दलों को 32 सीटें मिलने का अनुमान है. पार्टी स्तर पर BJP अकेले 261 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभर रही है, जबकि कांग्रेस को 106 सीटें मिलने का आकलन है.
राज्यवार नतीजों में दिलचस्प संतुलन नजर आ रहा है जहां उत्तर प्रदेश में INDIA ब्लॉक 41 सीटों के साथ NDA (38 सीटें) पर बढ़त बनाता दिख रहा है, वहीं महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल (35 सीटें) में NDA की स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही है.
1 जुलाई से 25 अगस्त 2026 के बीच देश भर के 1.16 लाख से अधिक लोगों की राय पर आधारित यह सर्वे, राजनीतिक दावों से इतर देश के मतदाताओं के मौजूदा मूड की एक तस्वीर सामने रखता है.
आज तक पर प्रकाशित इंडिया टुडे-सी वोटर के &amp;lsquo;मूड ऑफ द नेशन&amp;rsquo; (MOTN) सर्वे (27 अगस्त 2026) के अनुसार अगर आज लोकसभा चुनाव हुए तो किसको कितनी सीटें मिलने का अनुमान है
1. कुल सीट अनुमान (लोकसभा 543 सीटें)



गठबंधन / दल
अनुमानित सीटें




NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन)
326 सीटें


INDIA ब्लॉक
185 सीटें


अन्य
32 सीटें



प्रमुख पार्टियों का सीट अनुमान:


BJP (अकेले): 261 सीटें


Congress (अकेले): 106 सीटें


अन्य दल (कुल मिलाकर): 176 सीटें


2. वोट शेयर (Vote Share)



गठबंधन
अनुमानित वोट शेयर




NDA
45%


INDIA ब्लॉक
39%


अन्य
16%



3. प्रमुख राज्यों का आंकड़ा
लोकसभा चुनाव से पहले जिस एक राज्य के विधानसभा चुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा है वो उत्तर प्रदेश है. ताजा सर्वे में यहां के आंकड़े देख लीजिए
उत्तर प्रदेश (कुल सीटें: 80)


INDIA ब्लॉक: 41 सीटें (वोट शेयर: 40%)


NDA: 38 सीटें (वोट शेयर: 42%)


महाराष्ट्र (कुल सीटें: 48)


NDA: 31 सीटें (वोट शेयर: 49%)


INDIA ब्लॉक: 17 सीटें (वोट शेयर: 43%)


पश्चिम बंगाल (कुल सीटें: 42)


NDA: 35 सीटें (वोट शेयर: 46%)


INDIA ब्लॉक: 7 सीटें (वोट शेयर: 11%)


पंजाब (कुल सीटें: 13)


INDIA ब्लॉक: 11 सीटें (वोट शेयर: 25%)


NDA: 1 सीट (वोट शेयर: 16%)


4. सर्वे का सैंपल साइज और कार्यप्रणाली&amp;nbsp;


सर्वे की अवधि: 1 जुलाई 2026 से 25 अगस्त 2026


कुल सैंपल साइज़: 1,16,644 लोग


पीएम मोदी के कामकाज को लेकर क्या है जनता की राय?
इस सर्वे में पीएम मोदी के कामकाज से जनता कितनी खुश है इसको लेकर भी सवाल पूछे गए. जिन लोगों प्रधानमंत्री के काम-काज को लेकर खुशी जताई उनमें 51 फीसदी लोग थे. 17 प्रतिशत ने पीएम के कामकागज को औसत करार दिया, जबकि 27 प्रतिशत लोगों ने इसे खराब माना.
वहीं NDA के सबसे बड़ी उपलब्धी में 13 प्रतिशत लोगों ने राजनीतिक स्थिरता को चुना. राम मंदिर और बुनियादी ढांचे के विकास को 11-11 प्रतिशत.
प्रधानमंत्री के लिए जनता की पहली पसंद कौन
सर्वे में प्रधानमंत्री पद की पसंद को लेकर भी जनता की राय स्पष्ट नजर आई. सर्वाधिक 49% लोगों ने देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पर अपना भरोसा जताया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 27% जनता का समर्थन मिला. वहीं तमिलनाडु के अभिनेता और नेता सी. जोसेफ विजय को 9% लोगों ने अपनी पहली पसंद बताया.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड पर लोगों की क्या राय
सर्वे में राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड के राजनीतिक प्रभावों पर भी जनता का रुख जाना गया. इसके नतीजों में व्यापक असंतोष देखने को मिला. सर्वाधिक 47% लोगों की स्पष्ट राय थी कि इस घटना से केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है. 8% उत्तरदाताओं का मानना था कि इसका असर सिर्फ केंद्र सरकार तक सीमित रहा. वहीं 7% लोगों ने इसके लिए केवल राज्य सरकार को प्रभावित माना. इसके उलट, 20% जनता का मानना था कि इसका कोई व्यापक राजनीतिक असर नहीं हुआ है और वे इसे महज एक स्थानीय प्रशासनिक चूक या मामला मानते हैं.
क्या कॉकरोच जनता पार्टी को वोटर्स का मिलेगा समर्थन
MOTN सर्वे के अनुसार, 39% लोगों की राय है कि CJP को केवल प्रेशर ग्रुप के रूप में कार्य करना चाहिए, जबकि 26% लोग इसे चुनावी राजनीति में उतरते देखना चाहते हैं. यदि CJP चुनाव लड़ती है, तो 33% लोगों ने उसे वोट देने का समर्थन जताया, वहीं 43% लोगों ने साफ तौर पर वोट देने से इनकार किया.&amp;nbsp;
Gen-Z के मुख्य मुद्दे क्या
वहीं Gen-Z के मुख्य मुद्दे को लेकर सर्वे में शामिल 53% युवाओं ने &#039;नौकरी&#039; (रोजगार) को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया, और 63% का मानना है कि उन्हें रोजगार योग्य बनाने की मुख्य जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, लोकसभा, में, NDA, का, जलवा, में, योगी, की, राहें, मुश्किल, CJP, को, कितने, वोट, सर्वे, के, नतीजे, ने, चौंकाया</media:keywords>
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        <title>पेंगुइन का सोनिया गांधी की किताब छापने से इनकार, सामने आया कारण</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पेंगुइन-का-सोनिया-गांधी-की-किताब-छापने-से-इनकार-सामने-आया-कारण</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आने वाली किताब &amp;lsquo;Belonging: ए जर्नी ऑफ लव&amp;rsquo; को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारत में इस किताब को प्रकाशित करने की जिम्मेदारी पहले पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) के पास थी, लेकिन अब कंपनी इस किताब को भारत में प्रकाशित नहीं करेगी. हालांकि, ये किताब बाहर छप रही है.
जानकारी के मुताबिक, पब्लिशर और किताब की लेखिका के बीच पांडुलिपि के कुछ हिस्सों को लेकर सहमति नहीं बन पाई. सूत्रों के अनुसार, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने किताब के एक हिस्से में कुछ बदलाव और कुछ कंटेंटे हटाने का सुझाव दिया था. सोनिया गांधी ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया. इसके बाद PRHI इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया.
हार्पर कॉलिन्स के साथ समझौते की चर्चा
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के इस प्रोजेक्ट से बाहर होने के बाद अब कई भारतीय प्रकाशक सोनिया गांधी की किताब को प्रकाशित करने की कोशिश कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, हार्पर कॉलिन्स इंडिया किताब के प्रकाशन और भारत में वितरण को लेकर समझौता करने के करीब है. हालांकि, इस बारे में अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. किताब की रिलीज की तारीख 10 नवंबर बताई गई है. अमेरिका में इसे अल्फ्रेड ए. नोपफ प्रकाशित करेगा, जो पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का हिस्सा है. नोपफ ने किताब का पहला प्रिंट रन करीब 1 लाख प्रतियों का रखने की घोषणा की है.
सोनिया गांधी की सबसे निजी किताब होने का दावा
सोनिया गांधी पहले भी कई किताबें लिख और एडिट कर चुकी हैं. हालांकि, इस किताब से जुड़े लोगों के अनुसार, &amp;lsquo;Belonging: ए जर्नी ऑफ लव&amp;rsquo; उनकी जिंदगी का अब तक का सबसे निजी और डिटेल वर्जन है. &amp;nbsp;नोपफ ने किताब को एक प्रमुख महिला नेता की निजी कहानी बताते हुए कहा था कि इसमें प्यार, परिवार और भारत के साथ उनके लंबे रिश्ते की कहानी सामने आएगी. किताब की घोषणा के समय सोनिया गांधी ने कहा था कि उनके परिवार को लेकर बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनकी नजर में बहुत कम कहानियां परिवार के लोगों के इरादों, काम और उनकी मानवीय कमजोरियों को सही तरीके से सामने ला पाई हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी कहानी पिछले करीब छह दशकों में हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को देखने का एक अलग नजरिया देगी.
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया पहले भी रहा है चर्चा में
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया हाल के समय में कुछ दूसरी किताबों को लेकर भी चर्चा में रहा है. इस साल कंपनी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब &amp;lsquo;Four Stars of Destiny&amp;rsquo; को प्रकाशित करने से इनकार किया था. हालांकि, इस किताब की एक हार्ड कॉपी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में दिखाई थी. इस किताब के कुछ हिस्से मीडिया में भी सामने आए थे. इनमें गलवान में भारत और चीन के बीच हुई झड़प और अग्निपथ योजना से जुड़े जनरल नरवणे के विचार शामिल थे. इसके अलावा जून में मशहूर ग्राफिक नॉवेलिस्ट Joe Sacco की मुजफ्फरनगर दंगों पर आधारित किताब &amp;lsquo;The Once and Future Riot&amp;rsquo; को लेकर भी PRHI चर्चा में आया था. उस समय कंपनी ने कहा था कि कानूनी जांच के दौरान किताब की कुछ सामग्री को लेकर लेखक के सामने सवाल उठाए गए थे. इनमें भारत के गलत नक्शे से जुड़ा एक मुद्दा भी शामिल था.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पेंगुइन, का, सोनिया, गांधी, की, किताब, छापने, से, इनकार, सामने, आया, कारण</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>बाबा रामदेव का विवाद के बीच बड़ा बयान, &amp;apos;हम कंगना बहन को फोन करेंगे और...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बाबा-रामदेव-का-विवाद-के-बीच-बड़ा-बयान-हम-कंगना-बहन-को-फोन-करेंगे-और</link>
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        <description><![CDATA[ हरिद्वार में योग गुरु बाबा रामदेव ने कंगना रनौत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वह कंगना को डाक के जरिए तोहफा और मिठाइयां भेज रहे हैं. रामदेव ने कहा कि देश में किसी भी वजह से नफरत नहीं होनी चाहिए और लोगों के बीच आपसी बैर नहीं होना चाहिए.
बाबा रामदेव ने कहा कि वह कंगना को फोन भी करेंगे. उन्होंने भाईचारे और आपसी प्यार का संदेश देते हुए कहा कि किसी भी विवाद को नफरत में नहीं बदलना चाहिए.
कंगना और रामदेव के बीच पहले भी हुई बयानबाजी
बाबा रामदेव और कंगना रनौत के बीच पिछले कुछ दिनों से बयानबाजी चर्चा में रही है. कंगना ने रामदेव की कुछ टिप्पणियों पर नाराजगी जताई थी और उन पर मर्यादा पार करने का आरोप लगाया था. इसके बाद रामदेव ने भी कंगना के बयानों पर प्रतिक्रिया दी थी. अब उनका कंगना को मिठाई और तोहफा भेजने का बयान इस विवाद को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
कंगना रनौत ने युवाओं से जुड़े एक मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए &amp;lsquo;जनरेशन गटर&amp;rsquo; शब्द का इस्तेमाल किया. उनकी इस टिप्पणी पर बाबा रामदेव ने आपत्ति जताई और उनके बयान को गलत बताते हुए उनकी सोच पर सवाल उठाया. रिपोर्टों के अनुसार रामदेव ने इसे परेशान मन की निशानी बताया था. इसके बाद कंगना ने सोशल मीडिया पर रामदेव को जवाब दिया. उन्होंने रामदेव की बातों को लेकर उन पर तीखा निशाना साधा और कहा कि उन्हें उनके अतीत या निजी जीवन पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. विवाद यहीं नहीं रुका और दोनों तरफ से बयान सामने आते रहे.
कंगना ने रामदेव पर क्या आरोप लगाया?
कंगना ने बाद की प्रतिक्रिया में कहा कि रामदेव ने महिलाओं के बारे में बोलते हुए मर्यादा की सीमा पार की. उन्होंने रामदेव की कुछ पुरानी चर्चाओं और पतंजलि से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया. कंगना ने यह भी कहा कि वह ऐसे लोगों की सलाह नहीं लेना चाहतीं, जिन्होंने उनके अनुसार उनकी सफलता का बहुत छोटा हिस्सा भी हासिल नहीं किया है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बाबा, रामदेव, का, विवाद, के, बीच, बड़ा, बयान, हम, कंगना, बहन, को, फोन, करेंगे, और...</media:keywords>
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        <title>UP चुनाव में AIMIM की एंट्री पक्की! ओवैसी बोले&amp; ‘वोट काटने...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/up-चुनाव-में-aimim-की-एंट्री-पक्की-ओवैसी-बोले-वोट-काटने</link>
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        <description><![CDATA[ हैदराबाद में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी यूपी विधानसभा चुनाव जरूर लड़ेगी. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि AIMIM कितनी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.
ओवैसी ने कहा कि अगर पार्टी पहले के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करती है तो जल्द ही यह साफ हो जाएगा कि AIMIM किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कितने उम्मीदवार मैदान में उतारे जाएंगे. उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का संगठन पहले से काफी मजबूत हुआ है.
&#039;वोट काटने वाली पार्टी&#039; के आरोप पर ओवैसी का जवाब
AIMIM पर अक्सर चुनाव में वोट काटने वाली पार्टी होने का आरोप लगाया जाता है. ओवैसी ने इस धारणा को खारिज करते हुए कहा कि अब जनता के बीच पार्टी को लेकर सोच बदल रही है. उनके मुताबिक, लोगों को लगने लगा है कि AIMIM एक राजनीतिक विकल्प के रूप में सामने आ सकती है. ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी पर बार-बार लगाए जाने वाले आरोपों से लोगों के बीच एक अलग तरह की राजनीतिक समझ बन रही है. उन्होंने विपक्षी दलों की राजनीति और उनके सेक्युलरिज्म के दावों पर भी सवाल उठाए.
बिहार चुनाव का दिया उदाहरण
AIMIM प्रमुख ने अपने दावे के समर्थन में बिहार चुनाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बिहार में पार्टी के प्रदर्शन ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का भरोसा बढ़ाया है. इससे उत्तर प्रदेश में भी पार्टी के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद मजबूत हुई है. ओवैसी ने इससे पहले भी यूपी चुनाव को लेकर कहा था कि AIMIM को मजबूत करने की जरूरत है और पार्टी उत्तर प्रदेश में बिहार जैसी सफलता दोहराने की कोशिश करेगी.
यूपी में कई विधायक जीतने का दावा
ओवैसी ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में AIMIM के कई उम्मीदवार जीतकर विधायक बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन मजबूत हो रहा है और आने वाले समय में चुनावी तस्वीर और साफ होगी. हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि AIMIM कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी और उसे कितनी सीटों पर सफलता मिलेगी. फिलहाल पार्टी ने सीटों की अंतिम संख्या घोषित नहीं की है.
सीटों को लेकर अभी फैसला बाकी
ओवैसी के मुताबिक, AIMIM ने अभी चुनाव लड़ने वाली सीटों की संख्या तय नहीं की है. पार्टी के संगठन और चुनावी स्थिति को देखते हुए आगे फैसला लिया जाएगा. इससे पहले जून में AIMIM की ओर से यूपी की करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात सामने आई थी, लेकिन ओवैसी के ताजा बयान में सीटों की संख्या को अभी अंतिम रूप नहीं दिए जाने की बात कही गई है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: नेपाल में ग्लेशियर ब्लास्ट का अलर्ट, सीमा पार मंडराते &amp;apos;जल प्रलय&amp;apos; से निपटने को भारत कितना तैयार?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-नेपाल-में-ग्लेशियर-ब्लास्ट-का-अलर्ट-सीमा-पार-मंडराते-जल-प्रलय-से-निपटने-को-भारत-कितना-तैयार</link>
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        <description><![CDATA[ नेपाल से सटे हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर टूटने और हिमनद झील फटने की घटनाओं ने सभी को चिंतित कर दिया है.&amp;nbsp;हिमालय के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में अचानक होने वाले ये बदलाव पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए एक गंभीर मानवीय और प्राकृतिक आपदा का रूप ले रहे हैं. चूंकि नेपाल से निकलने वाली प्रमुख नदियां सीधे भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं, इसलिए वहां आने वाली कोई भी फ्लैश फ्लड भारत के सीमावर्ती राज्यों विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी तबाही मचाने की क्षमता रखती हैं. इस अभूतपूर्व प्राकृतिक संकट के बीच भारत की वर्तमान तैयारियों, तकनीकी क्षमताओं, प्रशासनिक प्रतिक्रिया और मौजूदा कमजोरियों का मूल्यांकन 7 प्रमुख बिंदुओं के आधार पर किया जा सकता है.
भारत की तैयारियों का मूल्यांकन
1. NDMA का राष्ट्रीय GLOF मिशन और जोखिम प्रबंधन
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने हिमालयी राज्यों (जैसे सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश) में स्थित खतरनाक हिमनद झीलों का मानचित्रण कर 56 से अधिक अत्यधिक संवेदनशील झीलों को चिह्नित किया है. इन झीलों में पानी की अधिकता से होने वाले दबाव को कम करने के लिए &#039;लेक-साइफनिंग&#039; (Lake-Siphoning) और नियंत्रित जल निकासी के पायलट प्रोजेक्ट संचालित किए जा रहे हैं, ताकि अचानक झील फटने की स्थिति को रोका जा सके.
2. अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) का विस्तार और सीमाएं
भारत ने संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS), जलस्तर मापने वाले सेंसर और अर्ली वार्निंग अलार्म स्थापित करने की गति तेज की है. इसके बावजूद, नेपाल या तिब्बत जैसे ट्रांस-बाउंड्री क्षेत्रों से रीयल-टाइम डेटा समय पर न मिलने के कारण चेतावनी जारी करने की अवधि (Lead Time) काफी कम हो जाती है, जो कि निचले क्षेत्रों को समय रहते खाली कराने में एक बड़ी बाधा है.
3. ISRO और CWC द्वारा उन्नत सैटेलाइट निगरानी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और केंद्रीय जल आयोग (CWC) रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की दर और नई बन रही हिमनद झीलों के आकार पर निरंतर नजर रख रहे हैं. सैटेलाइट आधारित यह मैपिंग संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का पूर्वानुमान लगाने और आपातकालीन योजनाएं बनाने में बेहद मददगार साबित हो रही है.
4. NDRF और SDRF का त्वरित और सक्षम रिस्पॉन्स नेटवर्क
उत्तराखंड की चमोली आपदा (2021) और सिक्किम में आई फ्लैश फ्लड (2023) से सबक लेते हुए, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य स्तरीय बलों (SDRF) की कार्यप्रणाली को अत्यधिक आधुनिक बनाया गया है. इन टीमों को &#039;हाई-ऑल्टीट्यूड रेस्क्यू&#039; उपकरणों, उपग्रह संचार प्रणालियों और ड्रोन तकनीक से लैस किया गया है, ताकि कठिन दुर्गम इलाकों में भी तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके.
5. सीमा पार सहयोग और रीयल-टाइम डेटा साझाकरण में कमी
नेपाल और चीन, तिब्बत क्षेत्र से निकलने वाली कोसी, गंडक, घाघरा और त्रिशूली जैसी नदियां भारत में बहती हैं. हालांकि इन देशों के साथ द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं, लेकिन आपातकालीन स्थितियों में तत्काल &#039;रीयल-टाइम हाइड्रोलॉजिकल और मीटीरोलॉजिकल डेटा&#039; का स्वतः आदान-प्रदान अभी भी बेहद सीमित है. एक एकीकृत सीमा-पार पूर्व चेतावनी नेटवर्क का अभाव भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है.
6. बुनियादी ढांचे और हाइड्रो-प्रोजेक्ट्स की संवेदनशीलता
हिमालयी नदियों पर बने बांध, सुरंगे और जलविद्युत परियोजनाएं ऐसी तीव्र बाढ़ के प्रति बेहद संवेदनशील हैं. पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण, सड़कों का चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में &#039;क्लाइमेट-रेसिलिएंट&#039; (जलवायु-अनुकूल) इंजीनियरिंग मानकों का पूरी तरह पालन न होना आपदा के प्रभाव और विनाश को कई गुना बढ़ा देता है.
7. समुदाय-आधारित आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया समय
निचले इलाकों में रहने वाली आबादी को जागरूक करने के लिए मॉक ड्रिल, स्थानीय आपदा मित्रों की नियुक्ति और आपातकालीन निकासी मार्गों का सीमांकन किया गया है. हालांकि, ग्लेशियर टूटने से आने वाली फ्लैश फ्लड, जो मात्र 10 से 15 मिनट में जलस्तर को 5 से 10 मीटर तक बढ़ा देती हैं, से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया समय को और कम करने की सख्त आवश्यकता है.
भारत ने नीतिगत सुधारों, उपग्रह तकनीक के उपयोग और आपदा प्रबंधन बलों की तत्परता के स्तर पर महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है. हालांकि, ग्लेशियरों के अचानक ढहने और ट्रांस-बाउंड्री फ्लैश फ्लड की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए तैयारियों को पूरी तरह से अचूक नहीं माना जा सकता.
जब तक नेपाल और चीन के साथ एक पारदर्शी और त्वरित रीयल-टाइम डेटा साझाकरण ढांचा तैयार नहीं होता और हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ निर्माण नीतियां लागू नहीं की जातीं, तब तक भारत के मैदानी राज्यों पर यह गंभीर खतरा बना रहेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सुकेश चंद्रशेखर अब पहुंचा हाई कोर्ट, जज बनकर कॉल करने का है मामला</title>
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        <description><![CDATA[ ठग सुकेश चंद्रशेखर ने साल 2017 के एक भ्रष्टाचार मामले में जमानत दिलाने के उद्देश्य से एक स्पेशल जज को प्रभावित करने के लिए खुद को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर पेश करने के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोई में चुनौती दी है. सुकेश ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में उसकी भूमिका को लेकर की गई अपमानजनक, निंदा करने वाली और गैर-जरूरी टिप्पणियों को हटाने की मांग की है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने दाखिल की याचिका में ठग सुकेश चंद्रशेखर ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने बार-बार उसके बारे में ऐसी टिप्पणियां की हैं, जो मामले के न्यायिक फैसले के लिए किसी भी तरह से जरूरी नहीं है. उसने दावा किया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला इस मूलभूत जरूरत के पूरी तरह से विपरीत है कि किसी मामले का फैसला आरोपी के चरित्र के आधार पर नहीं, बल्कि सबूतों के आधार पर किया जाना चाहिए.
कोर्ट ने बचाव पक्ष को सबूत पूरा करने का नहीं दिया मौका- सुकेश
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सुकेश ने अपनी याचिका में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले की सुनवाई पहले से बनी प्रतिकूल मानसिकता के साथ ही की और बचाव पक्ष को सबूतों को पूरा करने का मौका भी नहीं दिया. बता दें कि यह मामला 28 अप्रैल, 2017 को किए गए एक फोन कॉल से जुड़ा है और तब कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर पहले से ही भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस हिरासत में था.
क्या था पूरा मामला?

प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, सुकेश चंद्रशेखर ने पुलिस कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल का एक्सेस हासिल किया और फिर उसके इस्तेमाल उस वक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहीं स्पेशल जज पूनम चौधरी के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल के जरिए कॉन्टैक्ट करने के लिए किया.&amp;nbsp;
ट्रायल कोर्ट ने क्या कहा?
इस घटना को देखते हुए ट्रायल कोर्ट ने 20 अगस्त को सुकेश चंद्रशेखर को आईपीसी की धारा 170 (लोक सेवक की नकल करना), धारा 189 (लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी देना) और धारा 507 (अनजान कम्युनिकेशन के माध्यम से आपराधिक धमकी देना) के तहत दोषी ठहराया. इसके साथ ही, ट्रायल कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में सुकेश के इस अपराध को न्यायिक प्रक्रिया की आजादी और पवित्रता पर सीधा हमला करार दिया.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः कस्टडी में मौत पर CBI ने हत्या का मामला किया दर्ज, SC ने मांगी जांच रिपोर्ट ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मालदा मेडिकल कॉलेज में एक दिन में 10 नवजात की मौत से हड़कंप, एक्शन में स्वाथ्य विभाग</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के मालदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ही दिन 10 नवजात बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत इसे संज्ञान में लिया और मेडिकल कॉलेज प्रशासन से इसे लेकर डिटेल रिपोर्ट मांगी है. अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रसेनजीत बार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जिन 10 शिशुओं की जान गई है, उनमें से केवल 2 बच्चों का जन्म इसी अस्पताल में हुआ था. बाकी 8 बच्चों को अन्य सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट नर्सिंग होम से बेहद गंभीर स्थिति में यहां रेफर किया गया था.
उन्होंने बताया कि इन नवजात शिशुओं को मुख्य रूप से सांस लेने में तकलीफ (रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस), जॉन्डिस, दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. स्वास्थ्य विभाग की ओर से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की प्राथमिक रिपोर्ट स्वास्थ्य भवन को सौंप दी है. अस्पताल सुपरिटेंडेंट ने कहा है कि घटना की पूरी जानकारी और जांच के साथ एक डिटेल रिपोर्ट भी जल्द ही विभाग को भेज दी जाएगी.
इस मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने &amp;nbsp;कहा कि मालदा में नवजात बच्चों की मृत्यु दर में बढ़ोतरी देखी गई है और इसका मुख्य कारण जानने के लिए रिपोर्ट मांगी गई है. उन्होंने बताया कि इस मामले में अस्पताल के सुपर और प्रिंसिपल सहित जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. स्वास्थ्य मंत्री ने ये भी कहा कि क्षेत्र में &#039;रॉडेंट और कैनाइन पेस्ट&#039; की भी एक वजह सामने आई है. यह चूहों और कुत्तों के जरिए फैलने वाला संक्रमण होता है. उन्होंने ये भी कहा कि केस-टू-केस आधार पर सभी कारणों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि इस समय देश के कई हिस्सों में बच्चों में सांस की तकलीफ, बुखार और खांसी जैसे लक्षणों के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR), इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) मिलकर देशभर की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. नई दिल्ली में DHR के सचिव और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि वर्तमान में देश में इन्फ्लूएंजा (विशेषकर H1N1 वायरस) का प्रकोप बढ़ा है, लेकिन केंद्र सरकार स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>बागी सांसदों को नोटिस, शत्रुघ्न सिन्हा बोले&amp; &amp;apos;सही दिशा में पहला बड़ा कदम&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा सेक्रेटेरिएट की ओर से NCPI में शामिल होने वाले बागी सांसदों को नोटिस दिए जाने पर TMC नेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस कदम को जरूरी बताया और कहा कि अब बागी सांसदों को इसका जवाब देना होगा. शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह लोकसभा सेक्रेटेरिएट की इस कार्रवाई को सही दिशा में उठाया गया पहला बड़ा कदम मानते हैं. उनके मुताबिक, नोटिस मिलने के बाद बागी सांसदों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी.
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि बागी समूह के सांसदों को यह बताना होगा कि उन्होंने ऐसा फैसला क्यों लिया. इसके बाद लोकसभा स्पीकर उनकी पार्टी के प्रति वफादारी और दूसरी पार्टी में शामिल होने के फैसले को लेकर सवाल कर सकते हैं. उन्होंने NCPI यानी नेशनल सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया का जिक्र करते हुए कहा कि यह देश की कोई बड़ी या चर्चित पार्टी नहीं है. ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि बागी सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने का मकसद क्या है.

#WATCH | Delhi: On the Lok Sabha Secretariat&#039;s notice issued to the rebel MPs who joined the NCPI, TMC leader Shatrughan Sinha says, &quot;I consider this a very significant and most-awaited move, and it seems to be in the right direction. They, from the rebel faction, will have to&amp;hellip; pic.twitter.com/EQtETa4M1t
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 27, 2026



सुप्रीम कोर्ट में भी मामला
TMC नेता ने यह भी कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी संबंधित जानकारी मांगी है. ऐसे में लोकसभा सेक्रेटेरिएट की ओर से नोटिस जारी होना मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह इस कार्रवाई को लंबे समय से जिसका इंतजार था, उस दिशा में उठाया गया कदम मानते हैं. हालांकि, बागी सांसदों के जवाब और लोकसभा स्पीकर के फैसले के बाद ही इस मामले की आगे की तस्वीर साफ होगी.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बागी, सांसदों, को, नोटिस, शत्रुघ्न, सिन्हा, बोले-, सही, दिशा, में, पहला, बड़ा, कदम</media:keywords>
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        <title>ऑपरेशन सिंदूर: S&amp;400 की तैनाती पर पाक ने कराई जासूसी! सेना के अधिकारी का बड़ा दावा</title>
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        <description><![CDATA[ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत के अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर जासूसी अभियान चलाया था. यह दावा भारतीय वायुसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने किया है. उनके अनुसार, पाकिस्तान ने S-400 की तैनाती का पता लगाने के लिए &quot;हर संभव तरीका&quot; अपनाया और भारत के भीतर सक्रिय स्लीपर सेल तथा जासूसी नेटवर्क का भी सहारा लिया.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जासूसी
एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में एयर मार्शल मिश्रा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी मिसाइलों और हवाई खतरों को लगातार इंटरसेप्ट कर उन्हें हवा में ही नष्ट किया. इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए इस्लामाबाद ने इसे अपने लिए सबसे बड़ा खतरा मान लिया था और इसकी लोकेशन पता लगाने के लिए व्यापक खुफिया प्रयास शुरू कर दिए थे.
मिश्रा के मुताबिक, S-400 की रणनीतिक तैनाती इतनी प्रभावी रही कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारतीय सीमा से करीब 200 किलोमीटर के दायरे तक आने से बच रहे थे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की कोशिश थी कि किसी तरह इस सिस्टम की स्थिति का पता लगाया जाए ताकि उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके, लेकिन भारतीय सुरक्षा और छलावरण रणनीति के कारण उसे सफलता नहीं मिली.
सेना के अधिकारी का बड़ा दावा
S-400 को भारत की वायु रक्षा क्षमता का प्रमुख स्तंभ माना जाता है. इससे पहले भी भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका को &quot;गेम चेंजर&quot; बताया था. भारतीय पक्ष का दावा है कि इस प्रणाली ने पाकिस्तान के कई हवाई प्लेटफॉर्म और मिसाइल खतरों को निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
एयर मार्शल मिश्रा के इस दावे ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल मिसाइलों और विमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुफिया जानकारी जुटाने और संवेदनशील सैन्य प्रणालियों की लोकेशन पता लगाने की लड़ाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान का दौरा करेंगे PM मोदी, जानें क्यों है विशेष?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/उज्बेकिस्तान-और-किर्गिस्तान-का-दौरा-करेंगे-pm-मोदी-जानें-क्यों-है-विशेष</link>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (29 अगस्त, 2026) से दो देशों, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान, की चार दिवसीय यात्रा पर जाने वाले हैं. उनकी यह यात्रा शनिवार (29 अगस्त) से शुरू होगी, जिसका समापन मंगलवार (1 सितंबर) को होगा. इस दौरान पीएम मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें SCO समिट में भी हिस्सा लेंगे. साथ ही, वे वर्ल्ड नोमाड गेम्स (World Nomad Games) की ओपनिंग समारोह में भी शामिल होंगे.
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (27 अगस्त, 2026) को एक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी विदेश यात्रा के बारे में जानकारी साझा की. प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा, &amp;lsquo;पीएम मोदी 29-30 अगस्त, 2026 तक उज्बेकिस्तान के दौरे पर रहेंगे और 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान जाएंगे, जहां पर वे 26वें SCO समिट में शामिल होंगे.&amp;rsquo;
क्यों महत्वपूर्ण है पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा?
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;पीएम मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति महामहिम शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर ताशकंद का राजकीय दौरा करेंगे. यह प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा होगी. यात्रा के दौरान पीएम मोदी राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ डेलिगेशन-लेवल पर बातचीत करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और ज्यादा मजबूत बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;पिछले कई सालों से भारत और उज्बेकिस्तान ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय, दोनों स्तरों पर व्यापक और सार्थक सहयोग को बनाए रखा है. भारत और उज्बेकिस्तान ने साल 2011 में अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था. इसके बाद से ही कई अलग-अलग क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों काफी विस्तार हुआ है.&amp;rsquo;
किन मुद्दों पर पीएम मोदी करेंगे बातचीत?&amp;nbsp;

उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;दोनों देशों के नेता व्यापार और निवेश, डिफेंस, डिजिटल कनेक्टिविटी, एनर्जी, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे. इसके साथ ही, वे भविष्य के लिए एजेंडा भी तय करेंगे. वे विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान 2030 के साझा विकास नजरिए को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी अपने विचारों को साझा करेंगे.&amp;rsquo;
पीएम की किर्गिस्तान यात्रा को लेकर क्या बोले विदेश सचिव?
विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा, &amp;lsquo;ताशकंद के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिज रिपब्लिक के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर 31 अगस्त से 1 सितंबर तक 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए राजधानी बिश्केक जाएंगे. यह समिट SCO की स्थापना के 25वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित हो रहा है, जिसका भारत साल 2017 पूर्ण सदस्य बन चुका है.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;प्रधानमंत्री एससीओ समिट को संबोधित करेंगे, जिसमें वह मंच के जरिए सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर से जुड़ी भारत की प्राथमिकताओं पर जोर देंगे. इस दौरान वे एससीओ नेताओं के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे. इसके अलावा, पीएम मोदी मध्य एशिया के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के सेलिब्रेशन 6वें वर्ल्ड नोमाड गेम्स के ओपनिंग समारोह में शामिल होंगे.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः नेपाल बाढ़: सांसद विदुषी राणा बोलीं- &#039;जब भी कोई आपदा आता है, भारत...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>उज्बेकिस्तान, और, किर्गिस्तान, का, दौरा, करेंगे, मोदी, जानें, क्यों, है, विशेष</media:keywords>
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        <title>नेपाल में ईशा फाउंडेशन के 77 लोग लापता, सदगुरु ने साझा किया वीडियो</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नेपाल-में-ईशा-फाउंडेशन-के-77-लोग-लापता-सदगुरु-ने-साझा-किया-वीडियो</link>
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        <description><![CDATA[ नेपाल में आई बाढ़ की वजह से ईशा फाउंडेशन के 77 लोग लापता हो गए हैं. इससे जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है. सदगुरु ने एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि टीम तिब्बत में कैलाश मानसरोवर से लौटते समय इमिग्रेशन ऑफिस पर थी.&amp;nbsp;
सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने पोस्ट करते हुए बताया कि तिब्बत में गियिरोंग (Gyirong) में अचानक भयानक बाढ़ आ गई है और हमारा एक कैलाश यात्रा ग्रुप इसकी चपेट में आ गया है. जब बाढ़ आई, तो वे लौटते समय इमिग्रेशन ऑफिस में थे. ऐसा लगता है कि बिल्डिंग और शहर का ज्यादातर हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है. इमिग्रेशन ऑफिस में मौजूद लोगों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. हम अधिकारियों के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम उस जगह तक पहुंच सकते हैं और किसी भी जोखिम की परवाह किए बिना बचाव कार्यों में मदद के लिए तैयार हैं.
उन्होंने बताया, &#039;हमारी यात्रा में शामिल 21 ग्रुप्स में से 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं. अभी 743 लोग तिब्बत में हैं. 148 लोग नेपाल में हैं. 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर पर थे और 3 वॉलंटियर नेपाल के तिमुरे (Timure) में हैं.&#039;

A terrible and tragic flash flood has taken place at Gyirong in Tibet - China, and one of our Kailash groups was caught in it. While on their way back, they were at the immigration office when the flood occurred and the building and much of the town seems to have been flooded.&amp;hellip; pic.twitter.com/CqOBxsPlWo
&amp;mdash; Sadhguru (@SadhguruJV) August 26, 2026



बता दें, &amp;nbsp;तिब्बत से सटे रासुवा जिले में बाढ़ से 95 लोगों की मौत हो चुकी है. बाढ़ ने आसपास के गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है. पुल और घर बह गए हैं.&amp;nbsp;
फिलहाल इमिग्रेशन में मौजूद लोगों की कोई जानकारी नहींआध्यत्मिक गुरु ने अफसोस जताते हुए कहा, &#039;इमिग्रेशन में मौजूद लोगों के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. उनके वॉलंटियर और सपोर्ट टीमें बहुत परेशान हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;हम अधिकारियों से मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम उस जगह तक पहुंच सकते हैं. रेस्क्यू कार्यों में मदद के लिए तैयार हैं. इसमें कितना भी जोखिम क्यों न हो.&#039;&amp;nbsp;
माना जा रहा है कि इमिग्रेशन ऑफिस में मौजूद 77 लोग उन 105 भारतीय कैलाश यात्रियों में शामिल हैं. इनके लापता होने की सूचना नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने दी थी. &amp;nbsp;इसके अलावा एक बयान में बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाके में कम से कम 384 यात्री संपर्क से बाहर हो गए थे. इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं.&amp;nbsp;
सदगुरु ने कहा, &#039;हमारे ग्रुप के लोगों और इस इलाके में प्रबावित हुए सैकड़ों अन्य लोगों के परिवारों और प्रियजनों के साथ मेरी संवेदना है. इस बेहद मुश्किल समय में हम हर संभव कोशिश कर रहे हैं. मैं खुद उस इलाके मे मौजूद हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके, कि मौजूदा हालात में जो सबसे अच्छा हो सकता है. वह किया जाए.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कपिल सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस, SIR समेत कई मुद्दों पर सरकार से पूछे सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने एसआईआर के मुद्दे पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि जब एसआईआर की शुरुआत हुई तो हमने विरोध किया था. सरकार की साझेदारी इलेक्शन कमीशन के साथ है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर विश्वास रखा. ट्रिब्यूनल बना दिया.
इसके अलावा उन्होंने कहा, &#039;अभी एक आरटीआई के जरिए पूछा गया है, जिसमें बताया गया कि अबतक 82,782 का फैसला हो गया है. मतलब सिर्फ 2 प्रतिशत का ही फैसला हुआ है. ऐसे में पता नहीं कि पूरा होने में कितने साल लगेंगे. जो फैसले हुए उनमें 75 हजार से ज्यादा नाम गलत काटे गए हैं. जहां टीएमसी के स्ट्रांग होल्ड थे, वहां से नाम काटे गए.&#039;&amp;nbsp;
सिब्बल ने कहा, &#039;हम अमित शाह से पूछ रहे हैं ,कि जंतर मंतर पर जो गोली चली, वो आदेश किसने दिया. ऐसे ही हम चुनाव आयोग से पूछ रहे हैं, जो नाम काटने का आदेश आया, वो किसने दिया. पूर्व डिप्लोमेट कह रहे हैं, मैं नागरिक नहीं हूं क्या? कई और अधिकारी भी यही पूछ रहे हैं.&#039;
देश की जनता को इसपर अभियान चलाना चाहिए: कपिल सिब्बल
सिब्बल ने कहा, &#039;देश की जनता को इस पर अभियान चलाना चाहिए. कॉकरोच जनता पार्टी करेगी या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन जनता को चलाना चाहिए. दूसरा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने राजस्थान के एक्टिंग चीफ जस्टिस के खिलाफ आरोप लगाये है. रोस्टर ड्यूटी को लेकर. चीफ जस्टिस को इसकी शिकायत भी की है.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;तीसरी बात आपको पता है राजस्थान में स्कूलों की किस तरह के हालत हैं. 611 स्कूलों की अपनी कोई बिल्डिंग नहीं है. 2 हजार स्कूलों में टॉयलेट्स नहीं है. अभी तो यूपी के आदेश हुआ है कि कोई मुआयना करने जाएगा तो उस पर केस हो जाएगा. राजस्थान में पथराव हो गया. यही सब करना है तो विकसित भारत की क्या बात करना. उनको पता है, उनको तो देखना नहीं है.&#039;
इसके अलावा सिब्बल ने कहा, &#039;वन नेशन वन इलेक्शन पर कहना चाहता हूं, सब कुछ एक ही क्यों करना चाहते है. एक पार्टी डिसाइड करेगी क्या खाना है क्या नहीं. क्या पहनना है क्या नहीं. एक देश एक परीक्षा. सब कुछ एक क्यों करना चाहते है. सभी राज्यों के अलग अलग मुद्दे और समस्याएं होती है. सभी राज्यों के चुनाव एक साथ क्यों कराना. निश्चित रूप से हम इसको चैलेंज करेंगे.&#039;
इसके अलावा उन्होंने कहा, &#039;NCPI के सांसदों को स्पीकर के नोटिस पर कहा है कि उन्होंने जो किया वो असंवैधानिक था। जल्दी ही वो जीरो हो जायंगे.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आप न धोखा खाइएगा! फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट से ऐसे चूना लगा रहे ठग</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली पुलिस की साइबर नॉर्थ थाना पुलिस ने दुकानदारों को फर्जी Paytm/UPI पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाकर ठगी करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है. आरोपी पहले दुकान से सामान खरीदता था और भुगतान के नाम पर मोबाइल में फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर दुकानदार को भरोसा दिलाता था कि पैसे भेज दिए गए है. जब दुकानदार खाते में रकम नहीं आने की बात कहता था तो आरोपी मोबाइल चेक करने के बहाने फोन अपने हाथ में लेने की कोशिश करता था. मौका मिलने पर मोबाइल लेकर बैंक और UPI ऐप के जरिए खाते से पैसे निकाल लेता था.
पुलिस के मुताबिक अब तक सामने आए मामलों में 30 लाख 81 हजार 700 रुपये से ज्यादा की ठगी का पता चला है. मामले की जांच अभी जारी है और ठगी की रकम तथा अन्य पीड़ितों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है.
29 मार्च को सामने आया मामला
डीसीपी नार्थ निहारिका भट्ट ने बताया कि मामला 29 मार्च 2026 को सामने आया. जब सदर बाजार स्थित कपड़े की दुकान के मालिक विष्णु कुमार गोयल ने साइबर नॉर्थ थाने में शिकायत दी. उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ग्राहक बनकर उनकी दुकान पर आया और कपड़े खरीदे. भुगतान के समय उसने Paytm का ऐसा स्क्रीनशॉट दिखाया. जिसमें पेमेंट सफल बताया गया था, लेकिन बैंक खाता चेक करने पर दुकानदार को कोई रकम जमा नहीं मिली.
आरोपी ने इसके बाद पेमेंट की समस्या ठीक करने के बहाने दुकानदार का मोबाइल लेने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक मोबाइल तक पहुंच मिलने के बाद आरोपी ने दुकानदार के बैंक खाते से एक लाख रुपये का ट्रांजेक्शन कर दिया. शिकायत के आधार पर साइबर नॉर्थ थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई.
पुलिस ने खंगाले रिकॉर्ड
जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों, UPI ट्रांजेक्शन और मोबाइल से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड खंगाले. पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम पहले शाहिना नाम की महिला के बैंक खाते में पहुंची थी. इसके बाद रकम कई खातों में ट्रांसफर की गई, ताकि पैसों का असली स्रोत छिपाया जा सके.
पुलिस ने शाहिना को हिरासत में लेकर पूछताछ की. उसके बाद उसकी निशानदेही पर तरुण तक पहुंच बनाई गई. पूछताछ में तरुण ने बताया कि उसने रकम नकद में निखिल यादव उर्फ नाडा उर्फ नाला को दी थी. तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने निखिल यादव को 20 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर लिया.
कैसे करते ठगी?
पुलिस के मुताबिक निखिल छोटे दुकानदारों को निशाना बनाता था. वो कम कीमत का सामान खरीदता. फिर भुगतान के नाम पर फर्जी या डिजिटल रूप से बदला हुआ Paytm/UPI स्क्रीनशॉट दिखा देता था.
जब दुकानदार कहता कि खाते में पैसे नहीं आए हैं, तो आरोपी मदद करने का नाटक करता. वो मोबाइल चेक करने के बहाने फोन लेने की कोशिश करता था. यदि दुकानदार मोबाइल देने से मना करता, तो आरोपी कथित तौर पर मोबाइल या UPI से जुड़ी जरूरी जानकारी देखने या याद करने की कोशिश करता था. इसके बाद मौका मिलने पर मोबाइल चोरी या झपटने के बाद बैंकिंग और UPI ऐप के जरिए पैसे निकालता था.
अलग-अलग खातों में भेजते ठगी का पैसा
ठगी की रकम अलग-अलग फेक बैंक खातों में भेजी जाती थी. बाद में कई ट्रांजेक्शन और ATM से निकासी के जरिए पैसों का ट्रेल छिपाने की कोशिश की जाती थी.पुलिस के मुताबिक कुछ मामलों में आरोपी चोरी किया गया मोबाइल आगे की वारदात में भी इस्तेमाल करता था.
पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को दिल्ली और मुंबई में दर्ज कई मामलों से जोड़ा है. इनमें साइबर नॉर्थ वेस्ट, मॉडल टाउन, सराय रोहिल्ला, सब्जी मंडी और रूप नगर के मामले शामिल है. इसके अलावा मुंबई के शिवडी और तारदेव थानों में दर्ज दो मामलों में भी उसकी भूमिका सामने आई है.
पुलिस के मुताबिक निखिल यादव 12वीं तक पढ़ा है और पहले भी दिल्ली व मुंबई के अलग-अलग थानों में चोरी और ठगी के 8 मामलों में शामिल रहा है. शाहिना 27 साल की गृहिणी है, जबकि 25 साल का तरुण 12वीं तक पढ़ा है और दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करता है. &amp;nbsp;पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, फेक बैंक खातों और ठगी के बाकी मामलों की जांच कर रही है. साथ ही ये भी पता लगाया जा रहा है कि इस तरीके से कितने अन्य दुकानदारों को निशाना बनाया गया.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आप, न, धोखा, खाइएगा, फर्जी, पेमेंट, स्क्रीनशॉट, से, ऐसे, चूना, लगा, रहे, ठग</media:keywords>
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        <title>राहुल गांधी के दावों की पड़ताल के लिए बनाई &amp;apos;झूठ की गूंज&amp;apos; वेबसाइट, लॉन्च हुई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राहुल-गांधी-के-दावों-की-पड़ताल-के-लिए-बनाई-झूठ-की-गूंज-वेबसाइट-लॉन्च-हुई</link>
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        <description><![CDATA[ अपने हक की मांग करती भारत की नई पीढ़ी GenZ को साधने कांग्रेस-बीजेपी से लेकर अन्य दल भी जुटे हुए हैं. ऐसे में जहां राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर देशभर के शहरों में रैलियों को संबोधित कर रहे हैं, तो वहीं अब इस प्रोग्राम पर नजर रखने के लिए GenZ क्रिएटर्स ने झूठ की गूंज नाम से एक वेबसाइट बनाई है. यह 26 अगस्त को लॉन्च हो गई है.&amp;nbsp;
इसका मकसद राहुल गांधी की स्टूडेंट रैलियों में दिए गए बयानों की सच्चाई की जांच करना है. इस वेबसाइट का एक डोमेन भी बना है. जो https://jhoothkigoonj.com/ है. इस वेबसाइट पर लिखा है कि चार रैली, चालीस दावे और एक जवाब.
राहुल के छात्रों की गूंज का जवाब झूठ की गूंज से
यह वेबसाइट जून और अगस्त 2026 के बीच कोट, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रमों में दिए गए 40 बयानों की समीक्षा करती है. यह सरकारी नौकरियों, बेरोजगारी, शिक्षा और क्राइम से जुड़े मुद्दे पर 29 बयानों को गलत और 11 को गुमराह करने वाली बताती है. इसके लिए सरकारी डेटा समेत 134 सोर्स का इस्तेमाल किया गया है.&amp;nbsp;






इस वेबसाइट को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है. यूजर्स इसे बड़े पैमाने पर शेयर कर रहे हैं. इसके अलावा वेबसाइट में भर्ती के आंकड़े और अपडेटेड सर्वे की जानकारी का इस्तेमाल करके नौकरी के उम्मीदवारों और रिपोर्ट न किए जाने वाली यौन हिंसा के मामलों से जुड़े आंकड़ों को गलत साबित करने वाले उदाहरण भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
एक तरह का फैक्ट चेकिंग प्लेटफॉर्म हैपुणे में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज के दावों की सच्चाई पता करने के लिए यह एक फैक्ट चेकिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है. इस साइट को गुमनाम लोगों, आम लोगों और इंटरनेट यूजर्स (नेटिज्म) की पहल माना जा रहा है. यानी इसे किसी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि इंटरनेट यूजर्स, राजीनितिक एक्सपर्ट्स और सोशल मीडिया पर डिजिटल कंटेंट बनाने वालों ने मिलकर तैयार किया है. इन्हें डिजिटल ऑडियंस या नेटिज्म कहा जाता है. इस ट्रैकर साइट को अगस्त 2026 में शुरू किया गया है.&amp;nbsp;
इन्फ्लुएंसर्स विवाद के बाद सामने आई, यह वेबसाइट
इस साइट की चर्चा तब से होने लगी है, जब बीजेपी प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 25 से 35 हजार रुपये दे रही थी. ताकि, इससे कराए गए डिजिटल प्रचार को जेनजी का असली उत्साह दिखाया जा सके.
इधर, बूम लाइव जैसे स्वतंत्र फैक्ट चेकर्स ने पाया कि इस कार्यक्रम को लेकर दोनों तरफ से गलत जानकारी फैलाई गई. इसमें डिजिटल रूप से बदले गए ऐसे वीडियो शामिल थे, जिनमें झूठा दावा किया गया कि भीड़ मोदी के समर्थन में नारे लगा रही थी. साथ ही ऐसी वायरल पोस्ट भी थीं, जिनमें रैली में भारी भीड़ दिखाने के लिए मेक्सिको के पुराने इंटरनेशनल स्टेडियम के फुटेज का गलत इस्तेमाल किया गया था.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राहुल, गांधी, के, दावों, की, पड़ताल, के, लिए, बनाई, झूठ, की, गूंज, वेबसाइट, लॉन्च, हुई</media:keywords>
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        <title>‘असम चुनाव से पहले हिमंत सरमा पर झूठे आरोप…’, राहुल पर जानें क्या बोले रिजिजू</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस नेताओं के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है. यह विवाद सोशल मीडिया की बहस के बाद बढ़ गया है. रिजिजू ने आरोप लगाया है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पार्टी के साथी पवन खेड़ा से असम विधानसभा चुनाव से पहले असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर झूठे आरोप लगाने को कहा था.&amp;nbsp;
एक्स पर पोस्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस के दो सदस्यों ने उन्हें बताया कि गांधी ने खेड़ा से सरमा और उनकी पत्नी पर झूठे आरोप लगाने को कहा था. इसके बाद मामला तब और बढ़ गया, जब खेड़ा के खिलाफ मानहानी का केस दर्ज किया गया. इसके बाद इनाम के तौर पर उन्हें राज्यसभा की सीट दी गई. वह इसके हकदार नहीं हैं.&amp;nbsp;
खेड़ा और सरमा के बीच विवाद इस साल अप्रैल में शुरू हुआ था, जब कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरमा की पत्नी और रिनीकी भुइयां शर्मा के पास विदेशी पासपोर्ट हैं. साथ ही कहा गया कि भुइयां के पास दुबई में बिना घोषित की गई लग्जरी प्रॉपर्टी और अमेरिका के व्योमिंग राज्य में एक कंपनी है.&amp;nbsp;
इन आरोपों के बाद खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. उनके दिल्ली स्थित घर पर छापेमारी हुई. विदेश मंत्रालय ने इसमें दखल दिया. केंद्रीय राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने कहा कि सरमा की पत्नी रिनीकी भुइयां शर्मा के खिलाफ खेड़ा के दावे फर्जी और मनगढ़ंत थे.&amp;nbsp;
क्या है पवन खेड़ा और किरेन रिजिजू विवाद?&amp;nbsp;
पूरा विवाद तब शुरू हुआ था, जब किरेन रिजिजू ने नदी में तैरते हुए अपना एक वीडियो शेयर किया था. इसमें उन्होंने यूजर्स से राहुल गांधी से तुलना न करने की अपील करते हुए, खुद को उस जगह का खिलाड़ी बताया था.&amp;nbsp;
इससे पहले खेड़ा ने रिजिजू के वीडियो और राहुल गांधी से तुलना करने पर अपने पोस्ट में कहा था कि मित्रों, मान जाओ.
किरेन रिजिजू वह (राहुल गांधी) एक कठिन , अनुभवी तैराक हैं. कोई पूल पानी का नौसिखिया नहीं. वर्ना ये भी बेकार बैठे हैं. कहीं घर-घर जा के बताना शुरू न कर दें.&amp;nbsp;
जिसके बाद रिजिजू ने पवन खेड़ा को बदतमीजी न करने की सलाह दी है. इसके बाद पवन खेड़ा ने टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि भाई किरेन रिजिजू जल्द ठीक हो जाइए.&amp;nbsp;
किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रिय पवन खेड़ा अगर आप आधे-अधूरे कपड़ों में स्विमिंग करने की बात करेंगे, तो मैं सीएम हिमंत बिस्वा सरमा जी से आपके अनुशासनहीन व्यवहार की शिकायत करूंगा. क्या आप पूरे सूट-कोट पहनकर स्विमिंग करते हैं? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: महिला वोट बैंक पर सरकारें मेहरबान क्यों? BJP का &amp;apos;वादा निभाने&amp;apos; का गणित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-महिला-वोट-बैंक-पर-सरकारें-मेहरबान-क्यों-bjp-का-वादा-निभाने-का-गणित</link>
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        <description><![CDATA[ इन दिनों देशभर में महिलाओं के लिए सरकारी योजनाओं की बाढ़ आ गई है. उत्तर प्रदेश में बुजुर्ग महिलाओं के लिए फ्री बस की सुविधा शुरू हो गई है, बिहार सरकार ने रक्षाबंधन के मौके पर बेटियों के लिए बड़े ऐलान किए हैं और दिल्ली में महिलाओं को लक्ष्मी योजना के तहत पैसे मिलना शुरू हो रहे हैं. एक तरफ बीजेपी वादा निभाने का है संदेश दे रही है, तो दूसरी तरफ महिलाएं वफादार वोटर्स साबित हो रही हैं. आखिर इसके पीछे बड़ा खेल क्या है...
BJP का वादा, BJP की निभाने की सियासत
देखिए, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह चुनाव से पहले जो वादा करती है, उसे पूरा करने की कोशिश जरूर करती है. चाहे वह राम मंदिर का मुद्दा हो या फिर महिलाओं से जुड़ी योजनाएं. अब फिर 3 बड़े वादे पूरे हो रहे हैं:
1. उत्तर प्रदेश: बुजुर्ग महिलाओं को मुफ्त बस सफर
योगी आदित्यनाथ सरकार ने &#039;लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा&#039; योजना के तहत 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को रोडवेज बसों में मुफ्त सफर देने का ऐलान किया है. इस योजना के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है. रक्षा बंधन के मौके पर सरकार ने सभी उम्र की महिलाओं को भी मुफ्त सफर देने का एलान किया है. इसमें एक साथ चलने वाले शख्स को भी यह सुविधा मिलेगी. यह स्कीम BJP के &#039;लोक कल्याण संकल्प पत्र&#039; का हिस्सा थी, जिसे अब पूरा किया जा रहा है.
2. बिहार: रक्षा बंधन पर बड़ा तोहफा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 27 और 28 अगस्त को महिलाओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में मुफ्त सफर का एलान किया है. इसके अलावा, &#039;बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना&#039; के तहत महिलाओं को 50,000 से लेकर 2 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी. &#039;मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप&#039; के तहत 1000 छात्राओं को 4 साल तक हर महीने 10,000 रुपए की सहायता दी जाएगी. महिला सुरक्षा के लिए 4700 &#039;पुलिस दीदी&#039; को स्कूटी और मोटरसाइकिल भी दी जाएंगी.
3. दिल्ली: महिलाओं के खाते में आएंगे पैसे
&#039;मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना&#039; (अब महिला समृद्धि योजना) के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी. सरकार ने होली और दिवाली के मौके पर 2500-2500 रुपए की दो किस्तें देने का भी एलान किया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में CM रेखा गुप्ता ने &#039;सशक्त नारी समृद्ध दिल्ली&#039; कार्यक्रम में &#039;लखपति बिटिया योजना&#039; के तहत बेटियों को 21 साल की उम्र में 1 लाख रुपए से ज्यादा देने की भी घोषणा की.
कैसे BJP &#039;वादा निभाने&#039; का संदेश दे रही?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई के मुताबिक, BJP के लिए &#039;वादा निभाना&#039; सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित राजनीतिक रणनीति है. इसका केंद्र बिंदु &#039;महिला सशक्तिकरण&#039; है. पार्टी ने धीरे-धीरे अपनी छवि &#039;महिला-केंद्रित विकास&#039; से बढ़कर &#039;महिला-नेतृत्व वाले विकास&#039; की बनाई है:
1. &#039;मोदी की गारंटी&#039; का क्रेडिट बढ़ाने का फॉर्मूला
BJP की हर महिला-केंद्रित योजना &#039;मोदी की गारंटी&#039; के ब्रांड के तहत पेश की जाती है. चाहे दिल्ली में 2500 रुपए महीना देने का वादा हो या पश्चिम बंगाल में 3000 रुपए महीना का ऐलान. हर स्कीम को &#039;गारंटी&#039; के रूप में पेश किया जाता है, जिसे सरकार बनने पर पूरा किया जाना है. यह पार्टी को &#039;वादा करो और निभाओ&#039; वाली विश्वसनीय छवि देता है.
2. महिला सशक्तिकरण की चार दीवार
BJP अपनी महिला नीतियों को सिर्फ कागजी वादों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें &#039;पॉलिसी-ड्रिवन, आउटकम-ओरिएंटेड&#039; (नीति-आधारित, परिणाम-केंद्रित) योजनाओं के रूप में पेश करती है. पार्टी के आंकड़ों के मुताबिक, सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं ने महिलाओं की जिंदगी बदली है:

उज्ज्वला योजना: 10.33 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मुफ्त LPG कनेक्शन देकर धुएं से मुक्ति दिलाई गई.
मुद्रा योजना: कुल लोन का 69% (23.2 लाख करोड़ रुपए) महिला उद्यमियों को दिया गया, जिससे वे अपना कारोबार शुरू कर सकीं.
लखपति दीदी: 1 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया गया, अब 3 करोड़ का टारगेट है.

ये योजनाएं पार्टी के &#039;महिला सशक्तिकरण&#039; के एजेंडे को मजबूती देती हैं और उसे &#039;वादे के मुकाबले उपलब्धि&#039; के रूप में पेश करती हैं.
3. राजनीतिक होड़ का हथियार
महिला योजनाओं का इस्तेमाल सीधे विपक्षी पार्टियों को टक्कर देने के लिए भी होता है. दिल्ली में BJP ने AAP की 2100 रुपए योजना के मुकाबले 2500 रुपए देने का वादा किया. पश्चिम बंगाल में TMC की 1500 रुपए योजना के मुकाबले 3000 रुपए का ऐलान किया. यह सीधा &#039;ज्यादा देने वाला&#039; बनने का खेल है, जो &#039;हम आपके लिए ज्यादा करेंगे&#039; का संदेश देता है.
4. &#039;वादा निभाने&#039; की छवि का चुनावी फायदा
BJP के इस &#039;गारंटी&#039; मॉडल का सबसे बड़ा टारगेट महिला वोटर्स हैं. अब एक मजबूत और वफादार वोट बैंक बनती जा रही हैं. जब कोई पार्टी अपने चुनावी वादे पूरे करती है, तो उस पर भरोसा बढ़ता है. BJP इसी फॉर्मूले पर काम कर रही है. महिलाओं को लुभाने वाली योजनाओं का ऐलान करना, सरकार बनने पर उन्हें लागू करना और फिर अगले चुनाव में महिलाओं से वोट की उम्मीद करना.
महिलाएं कैसे बन जातीं वफादार वोटर्स?
महिला केंद्रित स्कीम्स और वोटिंग पैटर्न का गहरा कनेक्शन है. पोस्ट-पोल डेटा बताता है कि स्कीम का फायदा उठाने वाली महिलाएं सत्तारूढ़ पार्टी को ज्यादा वोट देती हैं:

पश्चिम बंगाल: लक्ष्मीर भंडार स्कीम की लाभार्थी महिलाओं में से 60% ने TMC को वोट दिया, जबकि गैर-लाभार्थियों में 75% ने BJP को वोट दिया.
महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना के लिए आवेदन करने वाली 54% महिलाओं ने महायुति को वोट दिया.
केरल: WCD स्कीम्स की लाभार्थी महिलाओं में 68% ने LDF को वोट दिया, जबकि गैर-लाभार्थियों में UDF को ज्यादा समर्थन मिला.

भारत के चुनाव आयोग के मुताबिक, 2014 के लोकसभा चुनाव में देश की कुल महिला मतदाताओं में से 65.63% ने वोट किया. 2009 में यह आंकड़ा 55.82% था. इसके उलट पुरुषों क ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, महिला, वोट, बैंक, पर, सरकारें, मेहरबान, क्यों, BJP, का, वादा, निभाने, का, गणित</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;रेट पूछे गए थे..&amp;apos;, बांसुरी स्वराज ने &amp;apos;पितृसत्ता&amp;apos; के मुद्दे पर राहुल को घेरा</title>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी पर झूठा नैरेटिव सेट करने का आरोप लगाते हुए पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर &#039;पितृसत्ता को खत्म करो&#039;( Smash the Patriacrchy) के मुद्दे पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि इससे पूरी तरह सहमत हूं. लेकिन राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं कि इस मुद्दे का यह नारा पुणे के स्टेज तक ही सीमित रखते हैं? इसके अलावा कंगना रनौत समेत तमाम मुद्दे बांसुरी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिनाते हुए, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
बांसुरी ने अपने बयान में कहा, &#039;Smash the Patriarchy, मैं इसके लिए पूरी तरह सहमत हूं. मैं राहुल गांधी जी से पूछना चाहती हूं कि क्या आप &#039;Smash the Patriarchy&#039; का नारा पुणे के स्टेज तक ही सीमित रखते हैं, और आप अपनी कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक पितृसत्ता को संरक्षण देते रहते हैं.&#039;

#WATCH | Delhi: On Rahul Gandhi&#039;s &#039;Chhatro Ki Goonj&#039; program in Pune, BJP MP Bansuri Swaraj says, &quot;On August 22nd, the Leader of the Opposition, Rahul Gandhi, attempted to create a new false narrative in this country. He speaks of &quot;Smashing the Patriarchy&quot;&amp;mdash;a sentiment I fully&amp;hellip; pic.twitter.com/1MPzxIf5J9
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 26, 2026



उन्होंने कहा, &#039;राहुल गांधी के पास न कोई विजन है, न कोई सकारात्मक एजेंडा. इसलिए अब उनकी रिसर्च टीम, जो भी पर्ची लिखकर दे देती है, उसी से वो देश के वोटर्स और युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं.&#039;&amp;nbsp;
कंगना रनौत पर जब अभद्र टिप्पणी की, तो चुप्पी साध ली थी: बांसुरी
उन्होंने कहा, &#039;जब हमारी मंडी की सांसद कंगना रनौत जी को टिकट मिला, तब कांग्रेस पार्टी की एक महिला नेता सुप्रिया श्रीनेत जी के सोशल मीडिया अकाउंट से अभद्र टिप्पणी की गई थी. याद है आपको, रेट पूछा गया था... तब राहुल गांधी ने चुप्पी साध ली थी. मैंने ही इस मामले के खिलाफ शिकायत की थी.&#039;
बांसुरी ने कहा, &#039;अप्रैल 2024 में रणदीप सुरजेवाला जी ने कैथल की एक रैली में भाजपा की सांसद हेमा मालिनी जी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की थी, लेकिन राहुल गांधी जी ने मौन साध लिया था. अधीर रंजन चौधरी जी ने देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को &#039;राष्ट्रपत्नी&#039; कहकर अपमानित किया था. लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मौन साध लिया. 22 अगस्त को उन्होंने पुणे के मंच से यह बयान दिया, जबकि 10 दिन पहले खुद राहुल गांधी जी संदीप दीक्षित के साथ एक बेहद ओछे मजाक में शामिल हुए थे. एक महिला प्रधानमंत्री के साथ, वो भी हमारे मित्र देश इटली की, जो वहां की वर्तमान प्रधानमंत्री हैं. आपने भारत में सिर्फ एक समुदाय को ही निशाना क्यों बनाया? जब मामला धर्म से जुड़ा होता है, तो &quot;पितृसत्ता को खत्म करने&quot; की बात क्यों बदल जाती है?&#039;
बांसुरी ने कहा, &#039;अगर आप सच में पितृसत्ता को खत्म करना चाहते थे, तो जब सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो को गुज़ारा-भत्ता (मेंटेनेंस) देने का फ़ैसला सुनाया, तब कांग्रेस सरकार उस फ़ैसले को पलटने के लिए कानून क्यों लाई? और आपने तीन तलाक़ कानून का विरोध क्यों किया?&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नेपाल बाढ़ में 105 भारतीय लापता, देखें तबाही की तस्वीरें</title>
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        <description><![CDATA[ नेपाल बाढ़ में 105 भारतीय लापता, देखें तबाही की तस्वीरें ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नेपाल बाढ़: PM मोदी ने बालेन शाह से की बात, कहा&amp; हर संभव मदद करेंगे</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बात की और नेपाल में बाढ़ से हुई जान-माल की हानि पर शोक व्यक्त किया. प्रधानमंत्री मोदी ने हर संभव मानवीय और राहत सहायता देने का भी आश्वासन दिया. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के दौरान मासूम को पुलिस ने पकड़ा, राहुल ने रि&amp;शेयर किया वीडियो</title>
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        <description><![CDATA[ राहुल गांधी ने बिहार की राजधानी पटना में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए सवाल पूछा है. उन्होंने अपने एक्स पोस्ट पर एनएसयूआई के एक पोस्ट को रिपोस्ट किया है, जिसमें पुलिस इस प्रदर्शन के बीच बच्चे को गिरफ्तार करके ले जा रही है.
राहुल ने अपने बयान में पूछा है कि बिहार के छात्रों का सवाल बहुत सीधा है. भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी क्यों हुई है? पेपर लीक के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं? और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कबतक चलता रहेगा?&amp;nbsp;
BPSC का विवाद आज का नहीं है, छात्रों को हिरासत में ले रही पुलिस: राहुल गांधी
राहुल ने अपने पोस्ट में बीपीएसएसी एग्जाम के मुद्दे को उठाते हुए कहा, &#039;BPSC की परीक्षाओं का विवाद आज का नहीं है. छात्र लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा पैटर्न, देरी और पारदर्शिता को लेकर सड़कों पर हैं. पर सरकार जवाब देने के बजाय कर क्या रही है? लाठी और वॉटर कैनन चला रही है. छात्रों को हिरासत में ले रही है. सीवान में तो प्रदर्शनकारियों पर AK 47 द्वारा गोलीबारी तक सामने आई.&#039;

बिहार के छात्रों का सवाल बहुत सीधा है - भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी क्यों? पेपर लीक के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं? और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक?BPSC की परीक्षाओं का विवाद आज का नहीं है। छात्र लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा पैटर्न, देरी और पारदर्शिता को लेकर&amp;hellip; https://t.co/RwZPlxJHxB
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 26, 2026



&#039;यह सिर्फ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल नहीं, बीजेपी की मानसिकता पर है&#039;&amp;nbsp;उन्होंने कहा, &#039;यह सिर्फ पुलिस की कार्रवाई का सवाल नहीं. यह उस BJP सरकार की मानसिकता का सवाल है, जिसके पास जवाब नहीं हैं &amp;nbsp;- इसलिए वह पुलिस को जवाबदेही से बचने का हथियार बना रही है. BJP सरकार यह समझ ले - लाठी से सवाल नहीं रुकते. डराकर किसी का भविष्य नहीं छीना जा सकता. बिहार के छात्र सवाल पूछते रहेंगे। और अब सिर्फ जवाब नहीं - जवाबदेही चाहिए.&#039;
वीडियो में छोटे बच्चे को ले जाती नजर आई पुलिसबच्चे को हिरासत में लेने वाला वीडियो NSUI ने शेयर किया है. इसके पोस्ट में लिखा है कि&amp;nbsp; इन चोरों के खिलाफ इस देश के पांच साल के नन्हें बच्चे भी खड़े हो गए. &amp;nbsp;

इन चोरों के ख़िलाफ़ इस देश के पाँच साल के नन्हे बच्चे भी खड़े हो गए है।????और चोरों की पुलिस उन्हें हिरासत में ले रही है, लेकिन असली पेपर चोर आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। शर्मनाक! ???? pic.twitter.com/RTmctGb5t4
&amp;mdash; NSUI (@nsui) August 25, 2026



NSUI ने कहा, &#039;असल चोरों की पुलिस उन्हें हिरासत में ले रही है. &amp;nbsp;लेकिन असली पेपर चोर आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. शर्मनाक!&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>विजय थलपित के फैन हैं अभिजीत दीपके? बोले&amp; &amp;apos;Gen&amp;Z के बीच वो...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/विजय-थलपित-के-फैन-हैं-अभिजीत-दीपके-बोले-gen-z-के-बीच-वो</link>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और अभिनेता से नेता बने थलपति विजय को लेकर अपनी राय रखी है. एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि Gen Z यानी युवा वर्ग के बीच सबसे लोकप्रिय नेता कौन हैं तो उन्होंने थलपति विजय का नाम लिया. हालांकि, यह उनकी व्यक्तिगत राय थी. इसे किसी सर्वे या आधिकारिक रैंकिंग का नतीजा नहीं बताया गया है.
एक निजी टीवी चैनल के एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके से पूछा गया कि Gen Z के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता कौन हैं. इस सवाल पर उन्होंने थलपति विजय का नाम लिया. दीपके ने कहा कि उन्हें लगता है कि थलपति विजय इस मामले में आगे हो सकते हैं, क्योंकि उनका पूरा राजनीतिक अभियान युवाओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ा है. CJP के एक अन्य नेता सौरभ दास ने भी कहा कि दक्षिण भारत में विजय की बड़ी फैन फॉलोइंग है.
पसंदीदा युवा नेता के सवाल पर क्या बोले?
इंटरव्यू में जब अभिजीत दीपके से उनके पसंदीदा युवा नेता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीति में उन्हें कोई ऐसा नेता खास तौर पर नजर नहीं आता. उन्होंने नेताओं की उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि जिस उम्र में दूसरे क्षेत्रों में लोग रिटायरमेंट की ओर बढ़ते हैं, उसी उम्र में कई नेता अभी भी सक्रिय राजनीति में हैं.
कई मुख्यमंत्रियों के काम की तारीफ
उनसे जब पूछा गया कि देश का सबसे अच्छा मुख्यमंत्री किसे मानते हैं, तो दीपके ने किसी एक नाम को चुनने के बजाय कई नेताओं के काम का जिक्र किया. उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आर्थिक नीतियों की तारीफ की. इसके अलावा उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कामों का भी उल्लेख किया. दीपके ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के स्कूल और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कामों की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि किसी नेता ने अच्छा काम किया है तो वह उसे अच्छा ही कहेंगे, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो.
CJP ने स्कूलों की सुविधाओं पर मांगी जानकारी
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को सभी राज्य सरकारों को पत्र भेजकर सरकारी स्कूलों से जुड़ी जानकारी मांगी. पार्टी ने पिछले पांच वर्षों में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों के खाली पदों और स्कूलों को दी गई राशि का विवरण मांगा है. अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्रियों को भेजे पत्र में सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताई. उनका कहना है कि कई स्कूलों में बच्चों को अब भी साफ पानी, ठीक शौचालय, पर्याप्त कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.
5 सितंबर को दिल्ली में मार्च की तैयारी
CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च करने की घोषणा की है. पार्टी का कहना है कि इस मार्च के जरिए युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा. फिलहाल थलपति विजय को Gen Z का सबसे लोकप्रिय नेता बताने वाला बयान अभिजीत दीपके की व्यक्तिगत राय है. देशभर में युवाओं के बीच नेताओं की लोकप्रियता को लेकर कोई आधिकारिक राष्ट्रीय रैंकिंग उपलब्ध नहीं है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 03:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या पंजाब में फिर होगा बीजेपी&amp;अकाली दल का गठबंधन? कहां फंसा पेंच</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-पंजाब-में-फिर-होगा-बीजेपी-अकाली-दल-का-गठबंधन-कहां-फंसा-पेंच</link>
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        <description><![CDATA[ अगले साल के शुरुआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है. पंजाब की सत्ता में फिर से वापसी के लिए बीजेपी अपने पुराने NDA के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन को लेकर चर्चा कर रही है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक गठबंधन में अभी सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा जारी है. हालांकि गठबंधन ना होने की सूरत में पार्टी सभी 117 सीटो पर भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.
सूत्रों के मुताबिक बीजेपी और SAD के बीच अभी भी सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा चल रही है. दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर लगातार चर्चा चल रही है. सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सबसे बड़ा पेंच सीटों की संख्या को लेकर है. बीजेपी के मुताबिक अब बीजेपी पंजाब में पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है ऐसे में बीजेपी चाहती है कि राज्य में दोनों दलों के बीच में लगभग बराबरी का गठबंधन हो.&amp;nbsp;
55 सीटों पर लड़ना चाहती है BJP - सूत्र
बीजेपी सूत्रों की माने तो BJP करीब 55 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है जबकि शिरोमणि अकाली दल की BJP को 45 सीटें देने को तैयार है. दोनों दल अपने अपने राजनीतिक प्रभाव और चुनावी तैयारियों के आधार पर सीटों को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं. अगर सब कुछ ठीक रहता है तो जल्दी ही दोनों दलों के बीच गठबन्धन को लेकर फैसला हो सकता है.
शीर्ष नेतृत्व पर बातचीत जारी
सूत्रों के मुताबिक सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर बातचीत जारी है. कोशिश की जा रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच एक ऐसा फॉर्मूला तैयार हो सके, जिस पर दोनों की सहमति बने और गठबंधन को अंतिम रूप दिया जा सके. एक बार जब सीटों की संख्या पर बात बन जाएगी तो उसके बाद कौन सी सीट किस पार्टी के खाते में जाएगी उसको लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा शुरू होगी.
बीएल संतोष कर चुके पंजाब का दौरा
हालांकि, बीजेपी ने गठबंधन न होने की स्थिति में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है. हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पंजाब का दौरा किया और पार्टी नेताओं को अकेले अपने दम पर राज्य में चुनाव लड़ने को तैयार रहने के निर्देश &amp;nbsp;दिए हैं. इसको लेकर पार्टी ने राज्य में अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, पंजाब, में, फिर, होगा, बीजेपी-अकाली, दल, का, गठबंधन, कहां, फंसा, पेंच</media:keywords>
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        <title>IIT दिल्ली प्रशासन और छात्रों की अहम बैठक में किन मुद्दों पर बनी सहमति</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iit-दिल्ली-प्रशासन-और-छात्रों-की-अहम-बैठक-में-किन-मुद्दों-पर-बनी-सहमति</link>
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        <description><![CDATA[ आईआईटी दिल्ली के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत को लेकर मंगलवार (25 अगस्त, 2026) को संस्थान के डायरेक्टर, डीडीओ, डीडीएसपी और छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच अहम बैठक हुई. यह अहम बैठक मुआवजे, मानसिक स्वास्थ्य, अकोमोडेशन प्रोटोकॉल्स, डीन के इस्तीफे और प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सुरक्षा पर केंद्रित थी.
इस पूरी बैठक में कुछ मुद्दों पर IIT ने आगे बढ़ने की कमिटमेंट दी है, लेकिन छात्रों की कई कोर डिमांडें अभी भी पूरे नहीं हुए हैं. मीटिंग में IIT ने मुआवजा, प्रदर्शन, स्वास्थ्य प्रोटोकॉल्स, आवास पॉलिसी और जांच जैसे मुद्दों पर कुछ कदम उठाने का भरोसा दिया, लेकिन 1 करोड़ रुपये मुआवजा और ADSW के इस्तीफे जैसी छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं किया गया.
बैठक में किन मुद्दों पर बनी सहमति, किस पर हुई चर्चा

कमेटी बनाने पर सहमति, लेकिन नामों पर मतभेद

छात्रों ने कहा कि मौजूदा कमेटी में ऐसे लोग हैं, जिन पर उन्हें भरोसा नहीं है. कमेटी में छात्रों की तरफ से नॉमिनेटेड सदस्य होने चाहिए. इस पर आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर ने कहा कि कमेटी की कंपोजिशन बदली जाएगी. इसके बाद छात्रों से कहा गया कि वे सर्वसम्मति बनाकर नाम दें, जिसमें दो छात्र प्रतिनिधि हों और इसमें कम से कम 1 महिला हो. अगर जरूरत हुई तो अन्य नाम भी दिए जाएंगे. डायरेक्टर ने शुक्रवार (28 अगस्त, 2026) तक नामों पर आगे बढ़ने की बात कही. वहीं, छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र प्रतिनिधियों पर प्रशासन का प्रभाव नहीं होना चाहिए.

1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग, लेकिन IIT ने कोई निश्चित रकम नहीं बताई

इस बैठक में मुआवजा एक बहुत बड़ा मुद्दा था. मुआवजे की कोई रकम तय नहीं की गई थी, इसलिए छात्रों ने 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी. इस पर डायरेक्टर ने साफ तौर पर जवाब दिया, &amp;lsquo;IIT 1 करोड़ रुपये की कमिटमेंट नहीं कर सकता हैं.
हालांकि, उन्होंने कहा कि परिवार को समर्थन करने लायक पर्याप्त राशि जुटाने की कोशिश की जाएगी. DDO ने बताया कि 6 लाख रुपये स्टैंडर्ड वेनोवोलेंट फंड (Standard Benevolent Fund) के तहत दिए जाने की बात है. इसके अलावा, स्टाफ मेंबर्स से भी फंड जुटाने की कोशिश होगी. डायरेक्टर ने कहा कि इसके लिए क्राउडफंडिग/फंडरेजर शुरू किया जा सकता है.
क्या तय हुआ?
छात्रों ने बताया है कि डायरेक्टर ने कहा कि रिवाइज्ड मेल में 6 लाख रुपये वेनेवोलेंट फंड की रकम स्पष्ट रूप से बताई जाएगी. फंडरेजर शुक्रवार (28 अगस्त) तक IITDA अध्यक्ष से चर्चा के बाद शुरू करने की बात कही गई. इसके अलावा 6 लाख रुपये के साथ मेडिकल बिल की अदायगी और फंडरेजर से जुटाई गई रकम परिवार को देने की बात हुई. छात्रों ने मांग की कि पैसा सीधे छात्र की मां के अकाउंट में जाए, जिस पर डायरेक्टर ने भी अपनी सहमति दी. यानि 1 करोड़ मुआवजा पर IIT ने हामी नहीं भरी है.

मानसिक स्वास्थ्य और आवास के पुराने प्रोटोकॉल्स जारी करने की मांग

छात्रों ने मांग की कि IIT के पास पहले से मौजूद मानसिक स्वास्थ्य और आवास से जुड़े प्रोटोकॉल्स तुरंत सार्वजनिक किए जाएं. इस पर डायरेक्टर ने प्रोटोकॉल्स को गुरुवार (27 अगस्त) तक जारी करने की बात कही. उन्होंने बताया कि ये प्रोटोकॉल्स काउंसेलर्स और मनोचिकित्सकों से कंसल्टेशन के बाद बनाए गए हैं. इसमें एक फुल-टाइम मनोचिकित्सक, 2 पार्ट-टाइम मनोचिकित्सक और 15 काउंसेलर्स की कंसल्टेशन का उल्लेख है.
छात्रों ने कहा कि प्रोटोकॉल्स घंटों के अंदर जारी होने चाहिए. डायरेक्टर ने कहा कि वे उसी दिन जारी करने की कोशिश करेंगे, लेकिन गुरुवार (27 अगस्त) तक जारी करने के लिए कमिटेड हैं. साथ ही, छात्रों को शामिल करके प्रोटोकॉल्स की रिव्यू कमेटी बनाने की बात हुई.

हॉस्टल/अपार्टमेंट आवास को लेकर अहम सवाल

छात्रों का कहना है कि सिर्फ इसलिए हॉस्टल आवास से इनकार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि छात्र को पैरेंटल सपोर्ट मिल सकता है. छात्रों को अपने पीयर्स (Peers) तक एक्सेस मिलना चाहिए. डायरेक्टर ने कहा कि आवास प्रोटोकॉल को मेडिकल असेसमेंट के आधार पर रिव्यू किया जाएगा. प्रोटोकॉल्स जारी होने के बाद छात्रों और मेडिकल प्रोफेशनल्स को शामिल करके एक बड़ी कमेटी बनाकर इसकी समीक्षा की जाएगी.
ऋषिकेश के मामले में छात्रों ने सवाल उठाया कि उसे अपार्टमेंट देने के लिए एक्ससेपशन क्यों नहीं बनाया गया. डायरेक्टर ने जवाब दिया कि प्रशासन के अनुसार रिक्वेस्ट हॉस्टल की थी, अपार्टमेंट की नहीं. छात्रों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि छात्र की मां ने बताया था कि उन्होंने अपार्टमेंट आवास के लिए सक्रिय रूप से रिक्वेस्ट की थी. इस मामले को डायरेक्टर ने जांच कमेटी के सामने देखने की बात कही.

ADSW/Dean के इस्तीफे की मांग, IIT ने नहीं मानी

छात्रों ने श्रीदेवी/ADSW के इस्तीफे की मांग रखी. छात्रों का तर्क था कि यह मांग सिर्फ ऋषिकेश incident की वजह से नहीं है. उनके अनुसार ADSW के खिलाफ पहले भी मोरल पुलिसिंग और इनटेंसिव रिमार्क्स से जुड़े आरोप रहे हैं. छात्रों का कहना था कि ऐसे रिमार्क्स और पुरानी घटनाओं को देखते हुए वह ADSW के पद के लिए उचित नहीं हैं. छात्रों ने कहा कि वे इस्तीफे की मांग पर सर्वसम्मति रखते हैं.
इस पर डायरेक्टर का जवाब काफी स्पष्ट था. उन्होंने कहा कि वे ADSW के कुछ टिप्पणियों को समर्थन नहीं करते, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ADSW ने ऑफिस में काफी समय दिया है और उनके काम को केवल टिप्पणियों की वजह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इसलिए डायरेक्टर ने इस्तीफे की मांग मानने से इनकार कर दिया.&amp;nbsp;

वहीं, DDO ने कहा कि डीन्स की अपॉइंटमेंट के लिए एक प्रक्रिया है और इस्तीफे की जगह शॉर्टकमिंग्स को ठीक करने की दिशा में काम होना चाहिए. DDSP ने कहा कि छात्रों अपनी समस्याएं किसी और अधिकारी, जैसे DOSA के पास भी ले जा सकते हैं. इस पर छात्रों ने सवाल किया कि अगर छात्रों को किसी दूसरे व्यक्ति के पास ही जाना है, तो ADSW के पद का क्या मतलब  ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IIT, दिल्ली, प्रशासन, और, छात्रों, की, अहम, बैठक, में, किन, मुद्दों, पर, बनी, सहमति</media:keywords>
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        <title>‘राम रहीम का...’, Kiss वाली कार मामले पर अभिजीत दीपके का रिएक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार (25 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो पर अजीब प्रतिक्रिया दी है. दरअसल, सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला ट्रैफिक पुलिस की तरफ से एक कार चालक से पूरी गाड़ी पर से लिपस्टिक का निशान साफ कराने का वीडियो सामने आया. ट्रैफिक पुलिस की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेपी चीफ अभिजीत दीपके ने कहा कि इसकी जगह राम रहीम का स्टीकर लगाना चाहिए था.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले एक सोशल मीडिया इंफ्लूएंशर ने इंटरनेट पर सेंसेशन बनाने के लिए एक बेतरतीब कोशिश की. स्विफ्ट कार के मालिक की गर्लफ्रेंड ने गाड़ी की पूरी बॉडी पर 3,400 लिपस्टिक किस के निशान बनाएं. इंफ्लूएंशर की इंटरनेट सेंसेशन बनाने की यह कोशिश कामयाब भी हो गई, उसकी इंस्टाग्राम रील वीडियो पर 55 लाख से ज्यादा व्यूज आए, लेकिन इस किसिंग कार की सेंसशनल रील वीडियो को इंटरनेट पर देखने वालों में ग्वालियर ट्रैफिक पुलिस भी शामिल थी.
इसके बाद सोशल मीडिया के वायरल प्रयोग का अंत अगली रील वीडियो के साथ नहीं, बल्कि कार के पुलिस थाने पहुंचने, साढ़े पांच हजार रुपये का चालान भरने और कार मालिक द्वारा उस पर लगे हजारों लिपस्टिक के निशान खुद साफ करने के साथ हुआ.&amp;nbsp;

#WATCH | Gwalior, Madhya Pradesh: Traffic Police seized a car with lipstick marks for performing dangerous car stunts on city roads after an Instagram video went viral.Under &#039;Operation Eagle,&#039; police tracked the vehicle, issued a Rs 5,500 challan, and seized the car for traffic&amp;hellip; pic.twitter.com/iVLGttC4Ie
&amp;mdash; ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) August 24, 2026



पुलिस ने कार को किया ट्रेस, फिर जब्त
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक मारुति स्विफ्ट कार पूरी तरह से लिपस्टिक के किस के निशानों से ढकी हुई दिखाई दे रही थी. कार के शहर की सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ाया जा रहा था. लोगों के साथ इस अनोखे नजारे ने ट्रैफिक पुलिस का भी ध्यान खींचा. इसके बाद ग्वालियर ट्रैफिक पुलिस कार की पहचान करते हुए थाटीपुर पहुंची और किसिंग कार को ढूंढ निकाला और उसके ट्रैफिक पुलिस थाने ले आई. साथ ही, कार के मालिक आदित्य सिकरवार को भी थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया, जिसमें उसने सारी बात पुलिस को बताई.
यह भी पढ़ेंः TMC के 20 बागी सांसदों पर संकट, स्पीकर ने कहा- &#039;7 दिनों के भीतर...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इलाहाबाद HC के हिजाब फैसले पर बोले BJP नेता नकवी &amp; &amp;apos;किसी की आस्था...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ स्कूल में हिजाब पहनने के मामले में एक स्टूडेंट (छात्रा) &amp;nbsp;की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से खारिज कर दिया गया है. अब इस पर बीजेपी के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने रिएक्शन दिया है. उन्होंने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर सांप्रदायिक तनाव और अशांति पैदा करने की कोशिश नहीं करना चाहिए.&amp;nbsp;
नकवी ने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा है कि किसी को भी हिजाब के मुद्दे पर सांप्रदायिक तनाव या अशांति पैदा करने की कोशिश नहीं करना चाहिए. शिक्षण संस्थानों के अपने ड्रेस कोड, अनुशासन के नियम और कामकाज के तरीके होते हैं. सभी को इनका सम्मान करना चाहिए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बात की पुष्टी की है कि जैसा कि पहले भी कई अन्य अदालतों और अधिकारियों ने किया है. यह मुद्दा किसी की आस्था या सम्मान के लिए कोई खतरा नहीं है.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा है कि हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं माना जा सकता. यह बात एक मुस्लिम छात्रा की याचिका पर कही है, जिसमें उसने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इच्छा जाहिर की थी. उन्होंने कहा कि जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीजन बेंच ने 21 अगस्त 2026 के एक आदेश में प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल में तय यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की इजाजत मांगने वाली 11वीं क्लास की छात्रा की याचिका खारिज कर दी.&amp;nbsp;
छात्रा ने याचिका में स्कार्फ पहनाने को एक धार्मिक प्रथा बताया था
छात्रा ने याचिका में तर्क दिया था कि स्कार्फ पहनने को एक जरूरी धार्मिक प्रथा बताया था. इसे संविधान के आर्टिकल 14 और 19(1)(a) के तहत उसके मौलिक अधिकारों से सुरक्षा मिली हुई है. उसने कहा कि वह उसी स्कूल में छठी क्लास से ही बिना किसी आपत्ति के हेडस्कार्फ पहनती आ रही थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कई सालों तक स्कार्फ पहनना ऐसा कोई अधिकार नहीं बनाता, जिसके आधार पर स्कूल को अपनी यूनिफॉर्म पॉलिसी में ढील देने या बदलाव करने के लिए मजबूर किया जा सके.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इलाहाबाद, के, हिजाब, फैसले, पर, बोले, BJP, नेता, नकवी, किसी, की, आस्था...</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;गुमराह किया कि...&amp;apos;, ऋतब्रत से TMC के बागी मुस्लिम विधायक का मोह भंग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गुमराह-किया-कि-ऋतब्रत-से-tmc-के-बागी-मुस्लिम-विधायक-का-मोह-भंग</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/गुमराह-किया-कि-ऋतब्रत-से-tmc-के-बागी-मुस्लिम-विधायक-का-मोह-भंग</guid>
        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस विधायक मोहम्मद कासिम सिद्दीकी ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट से खुद को अलग करने का ऐलान किया है, साथ ही बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपना अटूट भरोसा जाहिर किया. उन्होंने दो टूक कहा है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी धड़े से उनका अब कोई लेना-देना नहीं है. इस बयान के बाद टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी गुटबाजी और बगावती सुरों को एक बड़ा झटका लगा है.
टीएमसी विधायक ने यह भी दावा किया कि उनको और अन्य विधायकों को शुरू से ही यह कहकर गुमराह किया गया कि बागी गुट &#039;दीदी&#039; (ममता बनर्जी) के मार्गदर्शन में ही काम कर रहा है. सिद्दीकी ने आगे कहा, उनको इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि ऋतब्रत बनर्जी का गुट तृणमूल कांग्रेस की मूल विचारधारा और शीर्ष नेतृत्व से अलग दिशा में जा रहा है.&amp;nbsp;
बताया क्यों बनाई ऋतब्रत गुट से दूरी
उन्होंने दावा किया कि बागी गुट की बैठकों में ममता बनर्जी का कोई जिक्र नहीं होता था. जब उन्हें यह अहसास हुआ कि इस गुट का ममता बनर्जी की नीतियों से कोई संबंध नहीं है तो उन्होंने तुरंत उस समूह से अपनी दूरी बना ली और मूल पार्टी (ममता गुट) के प्रति अपनी के प्रति वफादारी जाहिर की.
&#039;हमेशा दीदी के साथ रहूंगा&#039;
बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली जीत का जिक्र करते हुए टीएमसी विधायक ने कहा कि उन्होंने जनता के बीच जाकर ममता बनर्जी के चेहरे और उनके काम के नाम पर वोट मांगे थे. जनता ने भी ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताकर ही उन्हें विधानसभा तक पहुंचाया है. कहा कि वह अपनी राजनीति के आखिरी क्षण तक ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे.

#WATCH | Kolkata, West Bengal: On leaving the rebel TMC faction led by Ritabrata Banerjee, TMC MLA Mohammad Kasem Siddique says, &quot;It wasn&#039;t the Ritabrata Banerjee group. We were told that we were all with Didi (Mamata Banerjee). We didn&#039;t realize that Ritabrata was separate...&amp;hellip; pic.twitter.com/i6ZEpiBfdi
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 24, 2026



CAA पर एक्शन में शुभेंदु सरकार, 23,000 लोगों को मिली नागरिकता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही टीएमसी के भीतर उठा-पटक देखने को मिल रही है. ममता बनर्जी को बड़ा झटका तब लगा, जब हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट की बेंच ने ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को दोबारा एकल पीठ के पास भेज दिया था, यानी अभी तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे.
&#039;मैं राजनीति से संन्यास&amp;hellip;&#039;, TMC में बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा बयान ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गुमराह, किया, कि..., ऋतब्रत, से, TMC, के, बागी, मुस्लिम, विधायक, का, मोह, भंग</media:keywords>
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        <title>‘बागियों पर हो कार्रवाई’, अयोग्यता की मांग लेकर SC पहुंचे अभिषेक बनर्जी</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए अब देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है. उन्होंने कोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की है कि बागियों को अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए. इसके साथ ही, उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से भी इस मामले पर जल्द निर्देश देने का अनुरोध किया है.
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करने के लिए मंगलवार (25 अगस्त, 2026) की तारीख निर्धारित की है. बनर्जी की इस याचिका पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की बेंच सुनवाई करेगी. तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से टीएमसी छोड़कर NCPI में शामिल होने वाले 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने के लिए दाखिल की गई 20 अलग-अलग याचिकाओं पर जल्द फैसला सुनाने का अनुरोध किया है.
दलबदल विरोधी प्रावधानों के तहत जल्द हो कार्रवाई- अभिषेक
न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपनी याचिका में बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता को लेकर शुरू की गई कार्यवाही पर फैसला लेने में कथित देरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने ओम बिरला से जल्द से जल्द बागियों के खिलाफ संविधान में निहित दलबदल विरोधी प्रावधानों के अनुसार उन्हें अयोग्य घोषित करने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाने के लिए अपील की है. इससे पहले ही, उन्होंने बीसों बागी सांसदों के लिए 20 अलग-अलग अयोग्यता चायिकाएं लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दाखिल कराई और उसका जल्द निपटारा करने का भी अनुरोध किया था.&amp;nbsp;

मामले को लेकर काफी ज्यादा सक्रिय हैं अभिषेक बनर्जी
इस मुद्दे को संसद में प्रभावी ढंग से उठाने के लिए अभिषेक बनर्जी सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. उन्होंने मामले को लेकर 27 जुलाई को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को मामले की याद दिलाई थी. इसके बाद वे इस महीने 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने भी पहुंच गए थे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;पीएम बनेंगे थलापति विजय&#039;, TVK के दावे पर भड़की कांग्रेस, बोली- &#039;272 सांसद...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आरक्षण का जिक्र कर अभिजीत दीपके बोले, &amp;apos;मैं दलित परिवार से आता हूं, मेरे पिता...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आरक्षण-का-जिक्र-कर-अभिजीत-दीपके-बोले-मैं-दलित-परिवार-से-आता-हूं-मेरे-पिता</link>
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        <description><![CDATA[ देश में इस समय आरक्षण और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी नियमों के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं. इस बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि वह बंटवारे की राजनीति नहीं करना चाहता हैं क्योंकि वह दलित परिवार के ताल्लुक रखते हैं.
आरक्षण को लेकर अभिजीत दीपके का बयान
उन्होंने कहा, &#039;मेरे पिता को आरक्षण का फायदा मिला इसलिए उनको एक अच्छी जॉब मिली. यही कारण है कि मैं प्राइवेट स्कूल जा पाया और मुझे बेहतर मौके मिले. मेरे पिता इंजीनियर बन गए तभी मैं बॉस्टन तक जा पाया, नहीं तो मैं कहां जा पाता.&#039; अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के लिए जो लोन लिया था वो अभी चुकाना बाकी है.
न्यूज 24 को दिए इंटरव्यू में CJP संस्थापक ने कहा, &#039;मेरे पिता पढ़े लिखे हैं, लेकिन मेरे जो कई रिश्तेदार में वो पढ़े-लिखे नहीं हैं. मेरे चाचा अभी भी एक दुकान चलाते हैं. बुआ खेतों में काम करती है.&#039; इस दौरान अभिजीत दीपके ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की वजह भी बताई. उन्होंने कहा कि वहां पैसे ज्यादा नहीं मिल रहे थे इसलिए उन्होंने AAP के साथ काम करना छोड़ दिया.
आरक्षण सिस्टम में बदलाव को लेकर हो रहे प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सिस्टम में बदलाव करने और यूजीसी के नियमों के विरोध में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें टेंट लगाने और मंच बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है. उनकी मांग है क आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किए जाएं. इसका राजनीतिकरण बंद होना चाहिए, जिसे जरूरत है, उसे मदद मिले. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आरक्षण में सुधार की मांग बहुत पहले उठनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसलिए अब हमें आगे आना पड़ रहा है. प्रदर्शनकारी ने कहा कि सरकार हमारी बात समझे और आर्थिक स्थिति तथा गरीबी के आधार पर आरक्षण दे, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति हो.
दिल्ली में विरोध मार्च निकालेगी सीजेपी
सीजेपी ने दिल्ली में 5 सितंबर 2026 को विरोध मार्च निकालने का भी ऐलान किया. सीजेपी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान उनसे जो वादे किए थे वो पूरे नहीं किए गए. संगठन का कहना है कि मार्च का नेतृत्व उन छात्रों के परिजन करेंगे, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी. इसके अलावा जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पुलिस की ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिजन भी मार्च में शामिल होंगे.
ये भी पढ़ें : एयरपोर्ट प्रोजेक्ट रद्द: CM विजय पर भड़के स्टालिन, &#039;कई साल पीछे हो जाएंगे&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आरक्षण, का, जिक्र, कर, अभिजीत, दीपके, बोले, मैं, दलित, परिवार, से, आता, हूं, मेरे, पिता...</media:keywords>
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        <title>ध्रुव जुरेल के टैटू पर फिदा हुए शिवराज सिंह चौहान, शेयर किया वीडियो</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय क्रिकेटर ध्रुव जुरैल के शतक लगाने के बाद &#039;टैटू दिखाकर किए गए सेलिब्रेशन पर फिदा हुए हैं. उन्होंने &#039;जय जवान जय किसान&#039; लिखते हुए जुरैल का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है. श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में ध्रुव जुरैल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 115 रनों की पारी खेली है. उन्होंने अपने अनोखे अंदाज में किए गए सेलिब्रेशन के पीछे की वजह भी बताई.

जय जवान जय किसान pic.twitter.com/FyoY3vKT1j
&amp;mdash; Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) August 24, 2026



पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, &amp;nbsp;जुरेल ने कहा कि उनके दादा किसान थे और पिता सैनिक रह चुके हैं. उन्होंने कहा, &#039;यही मेरी जड़ें हैं और मैं इन्हें भूलना नहीं चाहता. इसलिए वह सलामी मेरे पिता और दादा के लिए थी.&#039; उन्होंने टेस्ट करियर के दूसरे शतक को अपने माता-पिता को समर्पित किया.
शेयर किया सेंचुरी लगाने का किस्सा
शतक बनाने से जुड़ा किस्सा शेयर करते हुए जुरेल ने कहा कि जब वह 99 रन पर बैटिंग कर रहे थे, तब तक उनका पूरा कंट्रोल था, लेकिन &amp;nbsp;उसके बाद गेंदबाज असिता फर्नांडो ने बेहतर लेंथ पर गेंदबाजी शुरू की और श्रीलंकाई फील्डिंग भी ज्यादा बेहतर हो गई. फर्नांडो की गेंद पर सीधे बल्ले से शॉट खेलने के बाद जब जुरेल ने गेंद के सामने फील्डर को तेजी से आते देखा तो उन्हें लगा, ओह! मैंने ये क्या कर दिया.&#039; हालांकि किसी तरह एक रन लेने में वह कामयाब रहे और शतक पूरा किया.&#039;
हिमंत बिस्वा सरमा का आरोप, &#039;शरिया प्रथाओं के खिलाफ क्यों नहीं बोलते राहुल गांधी&#039;
भारत ने अपनी पहली पारी 503/9 के स्कोर पर घोषित की है. जब श्रीलंकाई टीम बल्लेबाजी के लिए उतरी तो दो गेंदों के बाद बारिश के चलते मैच को रोकना पड़ा. टीम इंडिया की मैच पर पकड़ मजबूत नजर आ रही है. दिन का खेल खत्म होने पर श्रीलंका का स्कोर 8/2 रहा. मानव सुथार और मोहम्मद सिराज ने एक-एक विकेट झटका.
आरक्षण का जिक्र कर अभिजीत दीपके बोले, &#039;मैं दलित परिवार से आता हूं, मेरे पिता...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ध्रुव, जुरेल, के, टैटू, पर, फिदा, हुए, शिवराज, सिंह, चौहान, शेयर, किया, वीडियो</media:keywords>
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        <title>हिमंत बिस्वा सरमा का आरोप, &amp;apos;शरिया प्रथाओं के खिलाफ क्यों नहीं बोलते राहुल गांधी&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ पुणे में छात्राओं से संवाद के दौरान मनुस्मृति पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिला अधिकारों के पैरोकार नहीं, बल्कि हिंदू विरोधी हैं. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर असम के सीएम ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी महिला सशक्तीकरण मुद्दे की आड़ में हिंदू धर्म को बदनाम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी शरिया के तहत जारी पितृसत्तात्मक, मध्ययुगीन प्रथाओं के खिलाफ कभी उसी तरह के आक्रोश के साथ नहीं बोलते.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;जरा सोचिए, राहुल गांधी ने शरिया के तहत कायम पितृसत्तात्मक और मध्ययुगीन प्रथाओं के खिलाफ इसी तरह कितनी बार आक्रोश के साथ आवाज उठाई है? कभी नहीं. जबकि शरिया इस्लामी का आधार है, वहीं मनुस्मृति को हिंदू धर्म में ऐसी कोई तुलनीय शास्त्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है. यह हिंदुओं के लिए कोई सार्वभौमिक रूप से बाध्यकारी संहिता भी नहीं है. हिंदू धर्म की असली ताकत समय के साथ बदलने, सुधार करने और ढलने की उसकी अनोखी क्षमता में है, जैसा कि यह हजारों सालों से होता आया है और हमेशा होता रहेगा.
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, &#039;हर हिंदू को यह पूछना चाहिए कि राहुल गांधी का असली मकसद क्या है. महिलाओं के अधिकारों की वकालत करना या हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए उनका बहाना बनाना? महिलाओं के अधिकारों पर कांग्रेस की बातें खोखली लगती हैं जब उनके अपने रिकॉर्ड को देखा जाता है. उन्होंने शाह बानो फैसले के असर को पलटकर हमारी माताओं और बहनों के साथ धोखा किया.&#039;
असम के सीएम ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में सत्ता से चिपके रहने के लिए राहुल गांधी की पार्टी ने यह सुनिश्चित किया कि राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह न मिले। उन्होंने कहा, &#039;राहुल गांधी के लिए एक सीधी चुनौती है, अगर महिला समानता वास्तव में राजनीति से ऊपर है तो क्या वह ऐसे समान नागरिक संहिता का स्पष्ट रूप से समर्थन करेंगे, जो धर्म से परे समान अधिकारों की गारंटी देती है? या फिर &amp;lsquo;महिला अधिकारों&amp;rsquo; का उनका विचार हिंदू धर्म पर हमला करने तक ही सीमित रहेगा?&#039;
पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं का अपना अस्तित्व है और उनकी पहचान को उनके पिता, पति या बेटों के अधीन नहीं रखा जाना चाहिए. उन्होंने मनुस्मृति के उस नियम को शर्मनाक बताया, जिसके अनुसार महिला को जीवन के हर चरण में पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रहना चाहिए.
राहुल गांधी ने कहा, &#039;भारत की सबसे बड़ी ताकत यहां की 70 करोड़ महिलाओं की अनोखी यात्राएं, अनोखी कल्पनाएं और अनोखे सपने हैं. मैं यहां मनुस्मृति का जिक्र करना चाहूंगा, जिसमें साफ कहा गया है कि बचपन में महिला को अपने पिता के अधीन रहना चाहिए, जवानी में वह अपने पति के अधीन होती है और जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने बेटों के अधीन होती है. महिला को कभी भी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए. ये शब्द शर्मनाक हैं. ये शब्द नहीं कहे जाने चाहिए.&amp;rsquo; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IIT दिल्ली में छात्र की मौत पर फूटा गुस्सा, AISA ने किया विरोध प्रदर्शन</title>
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        <description><![CDATA[ आईआईटी (IIT) दिल्ली के M.Sc. फिजिक्स के दूसरे साल के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद रविवार (23 अगस्त, 2026) को AISA ने IIT दिल्ली के गेट नंबर 5 के बाहर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने छात्र की मौत की स्वतंत्र जांच कराने और संस्थान में छात्रों के लिए बेहतर अकादमिक और काउंसलिंग व्यवस्था की मांग की.
ऋषिकेश कुमार की शनिवार (22 अगस्त) को लेक्चर हॉल कॉप्लेक्स की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी. AISA का कहना है कि इस साल IIT दिल्ली में यह दूसरी बार छात्र की मौत है. संगठन ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि ऐसी घटनाओं को सिर्फ व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य की समस्या बताकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
रिसर्च प्रोजेक्ट और सेमेस्टर ड्रॉप का दावा
AISA ने दावा किया कि ऋषिकेश को एक प्रमुख रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं दिया गया था और उन्हें एक सेमेस्टर छोड़ना पड़ा था. संगठन ने कहा कि छात्रों के अकादमिक भविष्य से जुड़े फैसलों में फैकल्टी और सुपरवाइजर के अधिकारों की समीक्षा होनी चाहिए. संगठन का आरोप है कि अकादमिक अवसरों की कमी, सेमेस्टर ड्रॉप और छात्रों पर मौजूद दबाव जैसे मुद्दों की भी जांच होनी चाहिए.
काउंसलिंग व्यवस्था पर भी सवाल
प्रदर्शन के दौरान AISA ने IIT दिल्ली की काउंसलिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. संगठन ने मांग की कि संस्थान में कितने काउंसलर उपलब्ध हैं, छात्रों को उनसे मदद लेने में कितनी आसानी होती है और काउंसलिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए.&amp;nbsp;

मौत की स्वतंत्र जांच की मांग
AISA ने ऋषिकेश कुमार की मौत की स्वतंत्र जांच के साथ-साथ IIT दिल्ली में इस तरह की पिछली घटनाओं की भी जांच कराने की मांग की. संगठन ने छात्रों के अकादमिक भविष्य से जुड़े फैसलों में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की.
AISA ने IIT दिल्ली प्रशासन पर छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया. हालांकि, ऋषिकेश की मौत के पीछे अकादमिक दबाव या संस्थागत लापरवाही होने के संगठन के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और संस्थान को छात्रों की अकादमिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः BJP के Gen-Z प्रोग्राम पर CJP का तंज, सौरव दास बोले - &#039;शानदार फैसला...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>EXCLUSIVE: 150 से ज्यादा छर्रे... पेलेट गन से घायल साहिल ने सुनाई आपबीती</title>
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        <description><![CDATA[ पेलेट गन मामले को लेकर हाल ही में राहुल गांधी के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचने वाले साहिल लोचव से एबीपी न्यूज ने एक्सक्लूसिव बातचीत की. साहिल लोचव ने 20 जुलाई की झड़प के बाद का अपना दर्दनाक अनुभव सुनाया.&amp;nbsp;
साहिल के मुताबिक, उनके शरीर में 150 से ज्यादा छर्रे धंसे हैं, जिनमें कुछ छाती को चीरते हुए दिल के बेहद करीब जाकर रुके. साहिल ने बताया कि अगर छर्रे थोड़ा और अंदर तक चले जाते तो उनकी जान भी जा सकती थी. उनकी आंख के पीछे भी छर्रे हैं और एक छर्रा दिमाग की नस के बेहद करीब बताया गया है.
FIR के लिए कई दिनों तक भटके22 जुलाई की रात साहिल की सर्जरी हुई. इसके बाद एफआईआर दर्ज कराने के लिए साहिल और उनकी मां कई दिनों तक दर-दर भटकते रहे. साहिल का दावा है कि ऑनलाइन शिकायत, ई-मेल के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की. आखिरकार राहुल गांधी के साथ जब वह बीते दिनों संसद मार्ग थाने पहुंचे, जहां करीब 6 से 7 घंटे के धरना प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की.
साहिल ने यह भी बताया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके समेत किसी भी CJP के पदाधिकारी ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है. हालांकि दबी आवाज में साहिल ने ये भी कहा कि उन्हें इसका कोई मलाल नहीं है और उम्मीद है कि भविष्य में CJP के लोग उनसे संपर्क करेंगे.
कौन हैं साहिल लोचव&amp;nbsp;बता दें कि साहिल लोचव हरियाणा के रहने वाले हैं. हालांकि उनका परिवार दिल्ली के नजफगढ़ एरिया में रहता है. साहिल के पिता ड्राइवर हैं और साहिल अपने तीन भाई बहनों में सबसे बड़े हैं.वो डीयू से स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के स्टूडेंट हैं. साहिल अपनी पढ़ाई के साथ-साथ एसएससी सीजीएल और पुलिस भर्ती की तैयारी में जुटे हुए थे. उनका सपना पुलिस में भर्ती होकर सेवा करना था.&amp;nbsp;
150 से ज्यादा छर्रे, दिल और दिमाग की नस के करीब जिंदगी और एफआईआर के लिए मां-बेटे का दर-दर भटकना साहिल की कहानी पुलिस और सिस्टम की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    <item>
        <title>SIR में पूर्व भारतीय राजनयिक से मांगे नागरिकता के सबूत, बोले&amp; &amp;apos;आम नागरिकों...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sir-में-पूर्व-भारतीय-राजनयिक-से-मांगे-नागरिकता-के-सबूत-बोले-आम-नागरिकों</link>
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        <description><![CDATA[ पंजाब में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पूर्व भारतीय राजनयिक नवदीप सूरी को अपने दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ा. तीन दशक से अधिक समय तक भारतीय विदेश सेवा में रहने वाले सूरी ने बताया कि उन्होंने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के पास अपना वोटर आइडी और आधार कार्ड जमा कराया था. उन्हें बताया गया था कि सभी दस्तावेज ठीक हैं, लेकिन बाद में एक स्वयंसेवक के संदेश से जानकारी मिली कि 2003 की मतदाता सूची से जुड़े कुछ विवरण उनके दस्तावेजों से मेल नहीं खा रहे हैं.
2003 में भारत में नहीं थे, इसलिए पासपोर्ट मांगा
नवदीप सूरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला में अपना अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि जब उन्हें दस्तावेजों के विवरण का मिलान नहीं होने की जानकारी दी गई तो उनसे दोबारा ऐसे दस्तावेज लेकर आने को कहा गया, जिनसे यह साबित हो सके कि वह भारतीय नागरिक हैं. सूरी के मुताबिक, वह पहले ही अपना वोटर आइडी और आधार कार्ड जमा कर चुके थे.
उन्होंने बताया कि चूंकि वह वर्ष 2003 में भारत में नहीं थे, इसलिए उनसे नागरिकता के प्रमाण के तौर पर पासपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया.
तीन देशों में भारत के राजदूत रह चुके हैं सूरी
नवदीप सूरी वर्ष 1983 से 2019 तक भारतीय विदेश सेवा में रहे. अपने लंबे राजनयिक करियर के दौरान उन्होंने मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ऑस्ट्रेलिया में भारत का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आई परेशानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है, तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी.
सूरी ने एक्स पर लिखा, &amp;ldquo;अगर तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद भी मुझे अपनी नागरिकता साबित करने में परेशानी हो रही है, तो आम नागरिक का क्या होगा?&amp;rdquo;
चुनाव आयोग या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं
नवदीप सूरी के इस मामले पर अभी तक भारत निर्वाचन आयोग, पंजाब सरकार या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
सोमनाथ भट्टी ने भी मतदाता सूची को लेकर जताई थी चिंता
इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सोमनाथ भट्टी ने भी पंजाब की पुरानी मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिलने का दावा किया था. उन्होंने कहा था कि वर्ष 1997 में IIT दिल्ली से स्नातक करने और बाद में राजधानी में कानून की पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें वर्ष 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिला.
भट्टी ने उन रिपोर्टों पर भी चिंता जताई थी, जिनमें विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान 20 से 30 लाख नाम हटाए जाने की आशंका जताई गई थी.
पंजाब में SIR के तहत जारी हुई 2026 की प्रारूप मतदाता सूची
पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों के लिए वर्ष 2026 की प्रारूप मतदाता सूची पिछले सप्ताह विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत प्रकाशित की गई. मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने बताया कि यह सूची भारत निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार जारी की गई है.
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दोबारा जांचना और उसमें जरूरी सुधार करना है. इसी प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के दस्तावेजों और पुराने मतदाता रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है.

यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;BJP के Gen-Z प्रोग्राम पर CJP का तंज, सौरव दास बोले - &#039;शानदार फैसला...&#039;
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Xप्लेन: दिल्ली में क्यों बढ़ रहे हैं स्वाइन फ्लू के केस, H1N1 कोविड से कितना अलग?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-दिल्ली-में-क्यों-बढ़-रहे-हैं-स्वाइन-फ्लू-के-केस-h1n1-कोविड-से-कितना-अलग</link>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में इस साल H1N1 (स्वाइन फ्लू) के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को दिल्ली के अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की. राजधानी में H1N1 के 1,777 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है.
इसी बीच आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि बीमारी &quot;चिंताजनक गति से फैल रही है&quot; और यह &quot;कोरोना की तरह एक व्यक्ति से पूरे परिवार तक पहुंच रही है&quot;.
हालांकि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार H1N1 का संक्रमण कोविड-19 पैदा करने वाले SARS-CoV-2 की तुलना में कम संक्रामक है. इसके लक्षण भी अधिकांश मामलों में हल्के होते हैं और पिछले डेढ़ दशक में संक्रमण तथा टीकाकरण के कारण लोगों में इसके खिलाफ कुछ हद तक प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी है.
H1N1 वायरस की शुरुआत कैसे हुई?
H1N1 वायरस की पहली पहचान 2009 की शुरुआत में मैक्सिको में हुई थी. वैज्ञानिकों ने इसके जीनोम का अध्ययन कर पाया कि यह इंसानों, पक्षियों और सूअरों में वर्षों से फैल रहे विभिन्न इन्फ्लूएंज़ा वायरसों का मिश्रित रूप था. इसके आठ जीन खंडों में अधिकांश ऐसे थे जो पहले सूअरों में पाए जाने वाले वायरस से जुड़े थे. इसी वजह से इसे शुरुआती दौर में &quot;स्वाइन फ्लू&quot; कहा गया.
बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्पष्ट किया कि इस बीमारी का पोर्क खाने या सूअरों के संपर्क से कोई संबंध नहीं है. इसलिए इसे आधिकारिक रूप से Influenza A(H1N1) 2009 नाम दिया गया. 11 जून 2009 को WHO ने इसे महामारी घोषित किया और 10 अगस्त 2010 को महामारी समाप्त होने की घोषणा कर दी. इसके बाद यह वायरस मौसमी इन्फ्लूएंज़ा का हिस्सा बन गया और अब हर वर्ष H3N2 तथा इन्फ्लूएंज़ा B के साथ फैलता है.
2012 में द लैंसेट इंफेक्शियस डिज़ीज़ेज़ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, महामारी के पहले 12 महीनों में दुनिया भर में लगभग 2.84 लाख लोगों की मौत H1N1 से जुड़ी श्वसन और हृदय संबंधी जटिलताओं के कारण हुई थी.
H1N1 कितना तेजी से फैलता है?
किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को समझने के लिए वैज्ञानिक R₀ (आर-नॉट) का उपयोग करते हैं. इसका अर्थ है कि पूरी तरह संवेदनशील आबादी में एक संक्रमित व्यक्ति औसतन कितने लोगों को संक्रमित करता है.
2014 में BMC Infectious Diseases में प्रकाशित 57 अध्ययनों की समीक्षा के अनुसार, H1N1 महामारी का औसत R₀ लगभग 1.46 था. अधिकांश अध्ययनों में यह 1.3 से 1.7 के बीच पाया गया. वहीं सामान्य मौसमी फ्लू का R₀ लगभग 1.28 माना गया.
इसके विपरीत, कोविड-19 के शुरुआती SARS-CoV-2 वायरस का R₀ लगभग 2.5 था, जबकि बाद में आए ओमिक्रॉन वेरिएंट्स में यह कई गुना अधिक हो गया. इसका अर्थ है कि कोविड H1N1 की तुलना में कहीं अधिक तेजी से फैलने वाला वायरस था.
फिर भी H1N1 कई बार लोगों को अधिक तेजी से फैलता हुआ महसूस होता है. इसकी दो प्रमुख वजहें हैं.

पहली वजह है सीरियल इंटरवल. यानी एक संक्रमित व्यक्ति में लक्षण आने और उससे संक्रमित अगले व्यक्ति में लक्षण आने के बीच का समय. H1N1 में यह औसतन करीब तीन दिन होता है, जबकि शुरुआती कोविड-19 में लगभग 5.2 दिन था. कम सीरियल इंटरवल के कारण स्थानीय स्तर पर मामलों में अचानक वृद्धि दिखाई दे सकती है.
दूसरी वजह घरेलू संक्रमण है. H1N1 परिवारों, स्कूलों और बंद कमरों में तेजी से फैल सकता है, विशेषकर छोटे बच्चों के बीच. इसलिए यदि घर के एक सदस्य को संक्रमण हो जाए तो परिवार के अन्य सदस्यों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
संक्रमण कैसे फैलता है?
WHO और अमेरिकी CDC के अनुसार H1N1 मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली श्वसन बूंदों (Respiratory Droplets) के माध्यम से फैलता है. ये बूंदें लगभग एक से दो मीटर की दूरी तक मौजूद व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं. संक्रमित सतहों को छूने और फिर आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
किन लोगों को सबसे अधिक खतरा है?
अधिकांश लोगों में H1N1 के लक्षण हल्के होते हैं और वे कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं. लेकिन कुछ समूहों में गंभीर बीमारी का खतरा अधिक रहता है. इनमें 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, हृदय, फेफड़े, किडनी, लिवर या मधुमेह जैसी बीमारियों से पीड़ित लोग तथा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीज शामिल हैं.

यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, लगातार तेज बुखार, भ्रम की स्थिति, होंठों का नीला पड़ना या ठीक होने के बाद दोबारा तेज बुखार आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
इलाज और बचाव
H1N1 के इलाज के लिए ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) सबसे प्रभावी एंटीवायरल दवा मानी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार लक्षण शुरू होने के 48 घंटे के भीतर यह दवा शुरू करने पर सबसे अधिक लाभ मिलता है. भारत में ओसेल्टामिविर राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है और सरकारी और बड़े निजी अस्पतालों में उपलब्ध रहती है.
बचाव के लिए बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखना, खांसते या छींकते समय मुंह ढंकना, हाथों की नियमित सफाई करना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और जरूरत पड़ने पर वार्षिक फ्लू वैक्सीन लगवाना प्रभावी उपाय हैं.
अब पहले जैसी घातक क्यों नहीं रही बीमारी?
विशेषज्ञों का मानना है कि 2009 की महामारी के बाद दुनिया भर में बड़ी आबादी H1N1 वायरस के संपर्क में आ चुकी है. साथ ही मौसमी फ्लू के टीकों में अब H1N1 स्ट्रेन भी शामिल होता है. इससे लोगों में संक्रमण और गंभीर बीमारी का खतरा पहले की तुलना में कम हुआ है.
इसके अलावा चिकित्सा व्यवस्था में भी काफी सुधार हुआ है. समय पर ओसेल्टामिविर का उपयोग, बेहतर आईसीयू सुविधाएं, उन्नत वेंटिलेटर सपोर्ट और गंभीर मरीजों के बेहतर उपचार ने मृत्यु दर को कम करने में म ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नए कप्तानों संग नितिन नवीन की महाबैठक, उठाए ये बड़े मुद्दे</title>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में संगठन के नए अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत बनाना और अगले साल सात राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश और गुजरात) में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा करना था.
इस बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे. जिनमें बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष, नए बने राष्ट्रीय पदाधिकारी, राज्यों के पार्टी अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी शामिल थे. बैठक के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके मीटिंग की जानकारी दी थी. उन्होंने लिखा- आज बीजेपी मुख्यालय में उन्होंने नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश अध्यक्षों और संगठन प्रभारियों के साथ बैठक में भाग लिया.
युवाओं को पार्टी से जोड़ने पर ध्यानबैठक में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और युवाओं को पार्टी से जोड़ने पर खास ध्यान दिया गया. अगले साल उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं. इन छह राज्यों में से चार में बीजेपी की सरकार है और पंजाब में आम आदमी पार्टी, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है.
पीएम मोदी ने की मीटिंगशनिवार को हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नए पदाधिकारियों से लगभग पांच घंटे तक बातचीत की. उन्होंने नेताओं को जमीन से जुड़कर काम करने और युवाओं के बीच पहुंच बढ़ाने का सुझाव दिया.
वंदे मातरम को लेकर हुई चर्चाबैठक में पार्टी ने एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव पास किया. इसमें कांग्रेस के कार्यक्रमों में &#039;वंदे मातरम&#039; के केवल दो पद (स्टैंजा) गाए जाने के फैसले का विरोध किया गया और पूरे राष्ट्रगीत के सम्मान और इतिहास के बारे में लोगों (विशेषकर युवाओं) को जागरूक करने का संकल्प लिया गया. बीजेपी ने कांग्रेस को याद दिलाया कि उसकी कार्यसमिति (वर्किंग कमेटी) का कोई भी फैसला देश के संविधान और संसद के कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हत्या या आत्महत्या? रक्षा मंत्रालय की कर्मचारी की मौत पर क्या बोले परिजन</title>
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        <description><![CDATA[ रक्षा मंत्रालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के पद पर कार्यरत 30 वर्षीय नाजिया खानम की मौत को लेकर परिजनों ने पति और ससुराल के अन्य सदस्यों पर &amp;nbsp;प्रताड़ना का आरोप लगाया है. परिजनों का दावा है कि नाजिया तीन महीने की गर्भवती थी. मृतका के भाई शादाब खान के मुताबिक नाजिया की शादी 11 अप्रैल 2026 को आजम अली खान से हुई थी.
परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही पति, सास-ससुर और अन्य ससुराल वाले नाजिया को कथित तौर पर प्रताड़ित, मारपीट और जान से मारने की धमकी देते थे. परिजनों के अनुसार, 21 अगस्त की सुबह करीब 4 बजे नाजिया के ससुर ने फोन कर उसकी मौत की जानकारी दी और बताया कि उसने आत्महत्या कर ली है.
पुलिस की भूमिका पर सवालपरिवार ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. परिजनों का आरोप है कि वे लगातार द्वारका सेक्टर-23 थाने के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जा रही है. परिवार ने SHO और जांच अधिकारी सतपाल व जयपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और उनकी जांच की मांग की है.
सीबीआई से जांच की मांगनाजिया के परिजनों ने न्याय मिलने तक शव लेने से इनकार कर दिया है. परिवार का कहना है कि स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की जा रही है. नाजिया के पिता अब्दुल तौवाब खान ट्रक ड्राइवर हैं. परिवार के मुताबिक, आर्थिक संघर्ष के बावजूद नाजिया ने मेहनत से SSC CGL परीक्षा पास की और केंद्र सरकार में ASO के पद तक पहुंची.
ससुरालीजनों पर गंभीर आरोपपिता का आरोप है कि जिस बेटी ने संघर्ष करके यह मुकाम हासिल किया, उसकी मौत के मामले में परिवार को अब न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. परिजनों ने पति, सास-ससुर के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही थाना स्तर पर पुलिस की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच और पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर परिवार अड़ा हुआ है.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP की जंतर&amp;मंतर जैसे आंदोलन की चेतावनी, कहा &amp; &amp;apos;युवाओं से अपील है कि वो...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी ने रविवार (23 अगस्त) को केंद्र सरकार की तरफ से जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन को खत्म के समय किए वादों को पूरा करने की अपील की है. इस प्रेशर ग्रुप ने केंद्र पर युवाओं को धोखा देने और उनका भरोसा तोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.
सीजेपी ने कहा,&#039;सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन को खत्म करने के समय जो वादें करती है, सड़कें खाली हो जाने के बाद, उन्हीं वादों से मुकरने की कोशिश करती है. भारत के युवाओं से किए गए वादों को अक्षरश: और उसकी भावना के अनुरूप किया जाना चाहिए.&#039;
सरकार की तरफ से लिस्ट नहीं सौंपी गई है
सीजेपी ने अपने बयान में आगे कहा है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट के समय दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए कोर्ट की बार-बार गुजारिश के बावजूद अभी तक सरकार की तरफ से लिस्ट नहीं सौंपी गई है. बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने इसे उपलब्ध कराने का कोई वादा नहीं किया था.
इसके तुरंत बाद सीजेपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार देश की युवा पीढ़ी को धोखा देने की कोशिश कर रही है. जबकि सरकार ने ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस के वादे के साथ आंदोलन वापस करवाया था. अब किए गए वादों को कमजोर करने, उनमें देरी करने, उनका गलत मतलब निकालने या उनका सम्मान न करने की किसी भी कोशिश को भरोसे का अस्वीकार्य उल्लंघन और देश के युवाओं के साथ विश्वासघात माना जाएगा.&amp;nbsp;
सीजेपी ने फिर से आंदोलन की दी चेतावनी, 24 अगस्त को कर सकती है बड़ा ऐलानसीजेपी ने अपने ताजा बयान में कार्रवाई की चेतावनी दी है. साथ ही फिर से आंदोलन का संकेत दिया है. इसके अलावा ग्रुप की तरफ से कहा गया है कि वह अपनी आगे की कार्रवाई करने के लिए 24 अगस्त को मीटिंग करेगी.
साथ ही एक संभावित आंदोलन की चेतावनी देगी. इसलिए हम देशभर के स्टूडेंट्स, युवा नागरिकों, समर्थकों और सीजेपी के वर्कर्स से अनुरोध करते हैं कि वे 24 अगस्त को होने वाले अगले घटनाक्रम के लिए तैयार रहें.
सीजेपी ने अपने बयान में कहा है कि विरोध प्रदर्शन के कारण धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन आप निश्चित रहें, हम तबतक चैन से नहीं बैठेंगे जबतक युवा पीढ़ी से किए गए वादे को पूरा नहीं कर लिया जाता.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>मणिपुर में जनगणना से पहले लागू होगा NRC? KZC ने साफ कर दिया स्टैंड</title>
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        <description><![CDATA[ मणिपुर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. कुकी-ज़ो काउंसिल (KZC) ने कुछ मैतेई और नागा संगठनों की उस मांग का विरोध किया है, जिसमें जनगणना से पहले राज्य में NRC लागू करने की बात कही जा रही है. KZC ने इस मांग को जल्दबाजी में उठाया गया और गलत कदम बताया है.
काउंसिल के मुताबिक, NRC एक राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया है और इसे लागू करने या इसकी समयसीमा तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. किसी राज्य सरकार या किसी समुदाय को अपनी तरफ से किसी राज्य में अलग NRC शुरू करने का अधिकार नहीं है.

जनगणना के बाद NRC की मांग करने की बात
KZC के सूचना एवं प्रचार सचिव गिन्जा वुअलजोंग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मणिपुर में आबादी और जनसांख्यिकी को लेकर कई तरह के दावे और आरोप सामने आते रहे हैं. ऐसे में सही तथ्यों को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जनगणना जरूरी है. काउंसिल ने कहा कि जनगणना जनसंख्या और जनसांख्यिकीय आंकड़ों का आधिकारिक आधार है. इसलिए 2027 की जनगणना के आंकड़े पूरी तरह तैयार होकर सार्वजनिक होने से पहले NRC लागू करने की मांग करना उचित नहीं होगा.
डिलिमिटेशन का किया स्वागत
KZC ने परिसीमन यानी डिलिमिटेशन की प्रक्रिया का भी स्वागत किया है. 2021 में होने वाली जनगणना में देरी के कारण परिसीमन की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई थी. काउंसिल का कहना है कि सत्यापित जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होने से प्रतिनिधित्व को अधिक सही तरीके से तय करने में मदद मिल सकती है.
असम NRC का दिया उदाहरण
KZC ने मणिपुर में NRC की मांग को लेकर असम के अनुभव का भी हवाला दिया. काउंसिल के मुताबिक, 1985 के असम समझौते के तहत हुई NRC प्रक्रिया में करीब 19 लाख लोग अंतिम सूची से बाहर रह गए थे. इसके बाद कई मामले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल और कानूनी अपील की प्रक्रिया में पहुंचे. काउंसिल ने कहा कि मणिपुर में NRC की मांग करने वालों को ऐसी प्रक्रिया की जटिलता और उसके सामाजिक व कानूनी प्रभावों पर पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए.
KZC ने क्या अपील की?
कुकी-ज़ो संगठन ने सभी पक्षों से जनगणना प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा होने देने की अपील की है. साथ ही उसने NRC को लेकर केंद्र सरकार के अधिकार का सम्मान करने की बात कही. KZC ने यह भी कहा कि जनसांख्यिकीय मुद्दों का इस्तेमाल सामुदायिक प्रचार या किसी समुदाय के उत्पीड़न के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
घाटी क्षेत्रों में NRC को लेकर प्रदर्शन
बीजेपी, कांग्रेस और नागा, मैतेई समेत अलग-अलग समुदायों से जुड़े कई नागरिक संगठनों के सदस्य 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC पूरा होने तक जनगणना प्रक्रिया को टालने की मांग कर रहे हैं. इस मांग को लेकर मणिपुर के घाटी क्षेत्रों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. अलग-अलग जगहों पर धरने और रात में रैलियां भी आयोजित की जा रही हैं. 20 अगस्त को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने राज्य में NRC लागू करने के समर्थन की बात कही और भरोसा दिलाया कि 2 सितंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में मणिपुर में NRC लागू करने के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी.
NRC को लेकर दो अलग-अलग राय
मणिपुर में NRC को लेकर फिलहाल दो अलग-अलग राय सामने आ रही हैं. एक पक्ष 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग कर रहा है, जबकि KZC का कहना है कि पहले निष्पक्ष जनगणना होनी चाहिए और उसके बाद ही जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाना चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>केंद्र के इस फैसले के विरोध में उतरे शशि थरूर, बोले &amp; &amp;apos;सरकार ने...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरलम स्थित पल्लकड़ रेलवे डिवीजन से मैंगलुरु रेलवे स्टेशन को शिफ्ट किए जाने के केंद्र के फैसले पर आपत्ति जताई है. इस मामले को लेकर थरूर ने शनिवार (22 अगस्त, 2026) की देर रात केरलम के यूडीएफ सांसदों के साथ एक ऑनलाइन मीटिंग की और केंद्र के फैसले पर चर्चा की. उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध करने का फैसला किया है.
शशि थरूर ने केंद्र सरकार के फैसले का किया विरोध
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस संबंध में रविवार (23 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में थरूर ने कहा, &amp;lsquo;कल शनिवार (22 अगस्त) की देर रात केरलम के यूडीएफ सांसदों की एक ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें केंद्र सरकार की तरफ से पलक्कड़ रेलवे डिवीजन के एक बड़े हिस्से को अलग करने के चौंकाने वाले फैसले पर गंभीरता से चर्चा की गई. इस फैसले से राज्य पर गंभीर वित्तीय और परिचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;हमने इस फैसले के खिलाफ विरोध करने का निर्णय किया है. केंद्र सरकार की तरफ से प्रभावित राज्य सरकार या उसके सांसदों से किसी भी तरह की चर्चा या सलाह के बिना लिया गया यह फैसला पूरी तरह से अस्वीकार्य है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

पलक्कड़ रेलवे डिवीजन और अन्य क्षेत्रों के सांसद देंगे धरना- थरूर
थरूर ने कहा, &amp;lsquo;केरलम के यूडीएफ सांसदों की मांग है कि इस फैसले को तब तक के लिए सस्पेंड किया जाए, जब तक इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा नहीं हो जाती है. पलक्कड़ रेलवे डिवीजन और अन्य क्षेत्रों के सांसद इस मुद्दे को लेकर धरना देंगे.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

An online meeting of Keralam UDF MPs took place late last night to discuss the shocking decision of the Government of India to hive off a large chunk of the Palakkad Railway Division, creating severe financial and operational repercussions for the state. We have decided to&amp;hellip; pic.twitter.com/GBEbxAJDHg
&amp;mdash; Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) August 23, 2026



रेल मंत्री को भेजेंगे पत्र- थरूर
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैंने रेल मंत्री को भेजने के लिए एक ड्राफ्ट लेटर तैयार किया है, जिस पर यूडीएफ के सभी सांसद सर्वसम्मति से साइन करेंगे, फिर इसे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बाद भेजा जाएगा.&amp;rsquo; उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;केरलम सुनवाई, निष्पक्ष प्रक्रिया और एक न्यायसंगत नतीजा पाने का हकदार है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः राहुल गांधी के प्रदर्शन में थाने की दीवार पर ग्रैफिटी, CCTV से पकड़ा गया आरोपी; फिर मिली जमानत ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>संसद में आने वाला है महिला आरक्षण&amp;परिसीमन बिल? जानिए क्यों बढ़ी आहट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/संसद-में-आने-वाला-है-महिला-आरक्षण-परिसीमन-बिल-जानिए-क्यों-बढ़ी-आहट</link>
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        <description><![CDATA[ सरकार एक बार फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन बिल सदन में लाने वाली है, इस तरह की बातें राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही हैं. क्योंकि मानसून सत्र खत्म होने के बाद भी राष्ट्रपति ने अभी तक सत्र समाप्ति की औपचारिक मंजूरी नहीं दी है.
इधर, बीजेपी की तरफ से रविवार (23 अगस्त) को एक बार फिर से अपील की गई है कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पास किया जाए. यह बयान बीजेपी ने राहुल गांधी की तरफ से शनिवार को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित किए गए छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण और भारत की पितृ सत्ता वाली सोच पर सवाल उठाने के बाद दिया है.&amp;nbsp;
कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं से की स्मृति ईरानी ने अपील
बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी और कांग्रेस समेत विपक्ष के नेताओं से अपील की थी कि अगर महिलाओं की बात करते हैं, तो केंद्र सरकार जो 2029 में उनको 33 फीसदी आरक्षण देने की बात कर रही है, उस बिल को संसद से पास करवाने में मदद करें. ऐसे में सरकार ने इस बिल को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है. सरकार अब जल्द से जल्द इन दोनों बिलों को संसद से पास करवाने की कोशिश में जुटी हुई है.&amp;nbsp;
सरकार की कोशिश मानसून सत्र में पास किया जा सके महिला आरक्षण बिल
सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र के दौरान ही इस बिल को लेकर आए. 13 को अगस्त को भले ही सदन का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस सत्र को औपचारिक रूप से खत्म करने की राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है. ऐसे में सरकार इस बीच सत्र को आगे बढ़ा सकती है, और सदन के पटल पर महिला आरक्षण और परिसीमन बिल टेबल पर फिर से रख सकती है. किसी भी सत्र को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी होना जरूरी है. इधर, सरकार लगातार बैक डोर से इस बिल को पास कराने के लिए एक माहौल बनाने की कोशिश में जुटी हुई है. अगले दो से तीन हफ्ते बाद सरकार सदन में बिल ला सकती है. कई विपक्षी पार्टियों ने भी इसको लेकर अंदेशा जाहिर की है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 19:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पहलगाम केस में हाफिज सईद पर शिकंजा! NIA पाक भेजेगी कोर्ट का समन</title>
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        <description><![CDATA[ पहलगाम आतंकी हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अब लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख और हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को अदालत का समन भेजने की तैयारी में है. NIA विदेश मंत्रालय के जरिए यह समन पाकिस्तान भेजेगी. पहलगाम हमले के मामले में NIA ने दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद को आरोपी बनाया है. जम्मू की NIA विशेष अदालत पहले ही हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है.
चूंकि हाफिज सईद इस मामले में आरोपी है, इसलिए मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश होने के लिए उसे समन भेजा जाएगा. NIA के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के माध्यम से पाकिस्तान में समन की तामील कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
पहलगाम आतंकी हमले के मामले की सुनवाई
हाफिज सईद की अनुपस्थिति में भी पहलगाम आतंकी हमले के मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने की तैयारी है. इसके लिए BNSS-2023 की धारा 365 के तहत &amp;lsquo;ट्रायल ऑफ एन्सेंसिया&amp;rsquo; (Trial of Absentia) की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इसके तहत आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी अदालत में मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती है.
पहलगाम हमला कब हुआ था?
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में &amp;nbsp;22 अप्रैल 2025 को आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए. मृतकों में अधिकांश पर्यटक थे. केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच अपने हाथ में ली. जांच में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का नाम सामने आया.
जांच में क्या सामने आया?
NIA ने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया है. एजेंसी के अनुसार हमले की साजिश और उसे अंजाम देने में पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की भूमिका सामने आई. NIA ने बाद की कार्रवाई में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को भी मामले में आरोपी बनाया.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>सर्जियो गोर&amp;अब्दुल्ला की मुलाकात पर उनके ही MP ने उठाए सवाल, क्या कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के एक सांसद रुहुल्लाह मेहदी ने हाल ही में हुए उनके और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर की मुलाकात पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि मैं अपने मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूं कि जब उस हत्यारे अमेरिकी शासन का राजदूत यहां आया, तो क्या आपने अपने लोगों की तरफ से उससे पूछा कि वो और उसका सहयोगी इजरायल फिलिस्तीन और ईरान में निर्दोष लोगों की हत्याएं क्यों कर रहा है?
उन्होंने कहा कि अगर आपने उससे ये सवाल नहीं पूछा, तो क्या कम से कम आपने अमेरिकी राजदूत के सामने फिलिस्तीन, गाजा, ईरान, यमन और लेबनान में हो रहे खून-खराबे के खिलाफ विरोध दर्ज कराया?
सर्जियो गोर के जम्मू कश्मीर दौरे पर NC सांसद का विरोध
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा में श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के सांसद रुहुल्लाह मेहदी पिछले कुछ वक्त से अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे हैं. उन्होंने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू कश्मीर दौरे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर की जनता अमेरिका और इजरायल को इस खूब-खराबे का जिम्मेदार मानती है और उनके खिलाफ हमारा विरोध पूरी तरह से कायम है.&amp;nbsp;

दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का US को हक नहीं- मेहदी
रुहुल्लाह मेहदी ने शनिवार (22 अगस्त, 2026) को मीडिया से बातचीत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू कश्मीर दौरे पर आपत्ति जाहिर की. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में अपनी नाक घुसने का कोई हक नहीं है. उन्होंने फिलिस्तीन और ईरान में अमेरिका और इजरायल की तरफ से की जा रही हिंसा का हवाला देते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और अपनी ही पार्टी के नेता उमर अब्दुल्ला की सर्जियो गोर से हुई मुलाकात पर सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;अगर मुझे अमेरिकी राजदूत से वैधता मिलती, तो मैं उसे नदी में फेंक देता. आज जब फिलिस्तीन और ईरान में खून की नदियां बह रही है, तो वही हत्यारा यहां आकर मुझे वैधता देगा? यहां की स्थिति कैसी भी हो, अच्छी हो या खराब हो. इसका फैसला करना हमारा आंतरिक मामला है. इसके लिए मुझे अमेरिका से वैधता लेने की कोई भी जरूरत क्यों है?&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &amp;lsquo;BJP ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही...&amp;rsquo;, वंदे मातरम् को लेकर खरगे का हमला ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>लद्दाख में कनेक्टिविटी&amp;टूरिज्म पर फोकस, एयरफोर्स ने दी सिविल टर्मिनल निर्माण को मंजूरी</title>
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        <description><![CDATA[ लद्दाख में हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होने वाली है. सरकार लेह के मौजूदा एयरपोर्ट को अपग्रेड करने और नुब्रा वैली के लिए सिविलियन उड़ानें चालू करने के मिशन पर काम कर रही है. कारगिल में उड़ान सेवा शुरू करने का फैसला 1 सितंबर को आखिरी जांच के बाद लिया जाएगा.
इन एयरपोर्ट्स पर उड़ान सेवा शुरू होने से तुरतुक, सियाचिन बेस कैंप, कारगिल और द्रास जैसे सीमावर्ती इलाकों में टूरिज़्म की संभावनाओं को और बढ़ावा मिलेगा. इन विकास कार्यों की घोषणा लद्दाख के LG ने नई दिल्ली में एयरफोर्स, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी और सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद की.
लद्दाख के LG वी.के. सक्सेना ने कहा, &#039;लद्दाख UT में रीजनल कनेक्टिविटी और टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए नुब्रा वैली के थोइस एयरपोर्ट और कारगिल एयरपोर्ट पर सिविल ऑपरेशन शुरू करने के मकसद से दिल्ली के लद्दाख भवन में रक्षा मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, IAF और AAI के सीनियर अधिकारियों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की.&#039;
नया सिविल टर्मिनल बनाने पर 5 एकड़ जमीन को दी मंजूरी
दिल्ली में हुई बैठक के बाद, LG वी.के. सक्सेना ने घोषणा की कि इंडियन एयरफोर्स ने नुब्रा के थोइस एयरपोर्ट पर एक नया सिविल टर्मिनल बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन देने की मंज़ूरी दे दी है. साथ ही, थोइस में रनवे की री-कार्पेटिंग का काम भी चल रहा है, जिसे नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है.
अधिकारियों के अनुसार, अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो थोइस में सिविल ऑपरेशन दिसंबर 2026 से शुरू हो सकते हैं. इसके लिए पुराने चार्टर्ड फ़्लाइट टर्मिनल को रिनोवेट किया जाएगा.
लद्दाख सरकार ने पहले ही इस ऊंचे रेगिस्तानी इलाके के लिए हवाई ट्रैफ़िक की समीक्षा शुरू कर दी थी. सर्दियों के महीनों में श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह हाईवे बंद होने के कारण इस इलाके में कनेक्टिविटी की भारी समस्या होती है.
ज्यादातर निर्माण 2026 तक पूरा होने की उम्मीद
11 अगस्त को, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने लेह के कुशोक बकुला रिम्पोचे एयरपोर्ट पर नए टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण और नुब्रा के थोइस एयरपोर्ट से सिविल फ़्लाइट ऑपरेशन शुरू करने की प्रगति की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की. बैठक के दौरान, AAI के एयरपोर्ट डायरेक्टर और जनरल मैनेजर (प्रोजेक्ट्स) ए. उमाशंकर ने बताया कि ज़्यादातर निर्माण कार्य 15 सितंबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है और इसके साथ ही नई टर्मिनल बिल्डिंग ज़्यादा यात्रियों को संभालने में सक्षम होगी.
कारगिल को हवाई कनेक्टिविटी से अछूता न छोड़ते हुए, लद्दाख प्रशासन ने कारगिल के लिए भी नागरिक उड़ानें शुरू करने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं. यह द्रास और कारगिल इलाकों के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है. लेकिन LOC के पास होने और पाकिस्तानी एयर डिफेंस व आर्टिलरी गन की फायरिंग रेंज में होने के कारण इसमें ज़्यादा प्रगति नहीं हो पाई है.
टर्मिनल बिल्डिंग और रनवे का काम काफी पहले हुआ पूरा
LG सक्सेना ने बताया कि हालांकि कारगिल एयरपोर्ट पर टर्मिनल बिल्डिंग और रनवे का काम काफी पहले पूरा हो चुका है, लेकिन नागरिक संचालन की तैयारी का आकलन करने के लिए 1 सितंबर को भारतीय वायु सेना, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ एक नया संयुक्त निरीक्षण तय किया गया है.
लद्दाख क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का समावेशी विकास करना है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>लद्दाख, में, कनेक्टिविटी-टूरिज्म, पर, फोकस, एयरफोर्स, ने, दी, सिविल, टर्मिनल, निर्माण, को, मंजूरी</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;कुछ नहीं आता है...&amp;apos;, मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान पर BJP का पलटवार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कुछ-नहीं-आता-है-मनुस्मृति-पर-राहुल-गांधी-के-बयान-पर-bjp-का-पलटवार</link>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की तरफ से महिलाओं और मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार किया है. भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा, &amp;lsquo;राहुल गांधी जी, मनुस्मृति पढ़ना आप से ना हो पाएगा. अंग्रेजी भाषा के कारण आपको भारत का वेद, पुराण, ग्रंथ, रामायण, महाभारत कुछ नहीं आता है?
भाजपा सांसद ने X पोस्ट के जरिए किया तीखा हमला
भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने शनिवार (22 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में उन्होंने कहा, &amp;lsquo;राहुल गांधी जी, यह श्लोक मनुस्मृति का है, पढ़िए, समझिए, बोलिए. अंग्रेजी भाषा के कारण आपको भारत का वेद, पुराण, ग्रंथ, रामायण, महाभारत कुछ नहीं आता है? यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता (Where women are respected and worshipped, the gods reside.) यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः (Where they are not respected, all work and noble deeds bring no results.)&amp;rsquo;&amp;nbsp;&amp;nbsp;

मनु स्मृति पढ़ना आप से ना हो पाएगा @RahulGandhi जी, यह श्लोक मनुस्मृति का है,पढ़िए,समझिए,बोलिए ।अंग्रेज़ी भाषा के कारण आपको भारत का वेद,पुराण,ग्रंथ,रामायण,महाभारत कुछ नहीं आता है?1. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः⁰(Where women are respected and worshipped, the gods&amp;hellip; https://t.co/p9RN9sy6Qi
&amp;mdash; Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) August 22, 2026



मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार (22 अगस्त, 2026) को महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में मनुस्मृति को महिलाओं को नियंत्रित करने के पीछे की सोच का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मनुस्मृति में साफ-साफ कहा गया है कि महिलाओं को कभी भी आजाद नहीं करना चाहिए, लेकिन मैं मानता हूं कि महिलाओं को पूरी तरह से आजाद होना चाहिए.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

महिलाओं को दबाने का माइंडसेट मनुस्मृति से आता है और आज हमारी लड़ाई इसी माइंडसेट से है।BJP-RSS के लोग चाहते हैं कि लड़कियां/महिलाएं पिंजरे में बंद रहें।लेकिन हम ऐसा हिंदुस्तान नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि सम्मान सभी का हो। : नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ???? पुणे,&amp;hellip; pic.twitter.com/8fxhL8g9aT
&amp;mdash; Congress (@INCIndia) August 22, 2026



राहुल गांधी ने पुणे में महिलाओं और लड़कियों के लिए आयोजित विशेष छात्रों की गूंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, &amp;lsquo;आपका आपके पिता के साथ संबंध हो सकता है, आपके भाई के साथ, पति के साथ और आपके बेटे के साथ संबंध हो सकता है, लेकिन आप उनके अधीन नहीं है. आपकी जीवन की डोर आपके हाथों में है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;मनुस्मृति में यह शर्मनाक है कि महिला को पिता, पति और...&#039;, राहुल गांधी का बड़ा बयान ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कुछ, नहीं, आता, है..., मनुस्मृति, पर, राहुल, गांधी, के, बयान, पर, BJP, का, पलटवार</media:keywords>
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        <title>पाकिस्तानी सीमा पर बाज बटालियन, ड्रोन वॉरफेयर की तैयारी पूरी</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय सेना ने अपनी पहली ड्रोन बटालियन को लेकर बड़ी जानकारी साझा की है. भारतीय सेना के मुताबिक, पाकिस्तान सीमा से सटी पंजाब के जालंधर की 11वीं कोर, जिसे वज्र कोर के नाम से भी जाना जाता है, उसके अंतर्गत इस बटालियन को खड़ा किया गया है. भारतीय सेना ने इसे बाज बटालियन का नाम दिया है.
फिलहाल, इस बटालियन में इजरायल के हेरोन और सर्चर ड्रोन को शामिल किया गया है. इसके अलावा Quadcoptrs यानी छोटे FBP ड्रोन हैं. ये ड्रोन बटालियन, भारतीय सेना की आर्मी एविएशन कोर का हिस्सा हैं. ठीक वैसे, जैसे सेना की सिख, जाट और गोरखा रेजीमेंट और अन्य इंफेंट्री के अंतर्गत होती हैं. आने वाले समय में अमेरिका से लिए जाने वाले MQ-9 प्रीडेटर ड्रोन भी इसका हिस्सा बनेंगे.
सेना ने नई बाज बटालियन खड़ी करने का किया फैसला
दरअसल, भारतीय सेना यानी थलसेना के पास इस समय करीब 50 हजार ड्रोन हैं और आने वाले 2-3 साल में ये संख्या लगभग डबल यानी एक लाख हो जाएगी. ऐसे में FPB, लोएटरिंग म्युनिशन, स्वार्म ड्रोन और रिमोटलैस पायलट एयरक्राफ्ट (RPA) के इंटीग्रेशन के लिए सेना ने इस नई बाज बटालियन खड़ी करना का फैसला किया है. ये सेना की ड्रोन से जुड़ी सबसे नई यूनिट है. ये सभी यूनिट ड्रोन अटैक से जुड़ी हैं यानी जब भारत को दुश्मन देश पर ड्रोन अटैक करना है या बॉर्डर की निगरानी करनी है, उस दौरान इनका इस्तेमाल किया जाएगा.
इसके अलावा, दुश्मन के ड्रोन को काउंटर करने के लिए भी भारतीय सेना स्वदेशी कंपनियों के साथ मिलकर ड्रोन इंटरसेप्टर और काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैयार कर रही है. इनमें से कुछ सिस्टम्स को बॉर्डर पर तैनात भी कर लिया गया है.
जैसा हम जानते हैं कि अमेरिका जैसे सुपरपावर के खिलाफ ईरान के शहीद ड्रोन ने मिडिल-ईस्ट की जंग का रुख बदल दिया है. ठीक वैसे जैसे पिछले चार साल से ड्रोन की ताकत के जरिए यूक्रेन जैसे देश ने मिलिट्री सुपरपावर माने जाने वाले रूस को बांधकर रखा है. ऐसे में भारतीय सेना को भी ड्रोन वॉरफेयर के लिए पारंगत होना है.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने 1000 ड्रोन से किया था हमला
पिछले साल मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ छेड़े गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने सिचायिन ग्लेशियर से लेकर जम्मू कश्मीर और पंजाब से लेकर राजस्थान और गुजरात के रण ऑफ कच्छ तक 1,000 ड्रोन से हमला किया था, लेकिन भारतीय सेना की एंटी-एयरक्राफ्ट गन और काउंटर ड्रोन सिस्टम ने इस हमले को नाकाम कर दिया, लेकिन ऑपरेशन के बाद भारतीय सेना ने अपनी ड्रोन फोर्स खड़ी करने का संकल्प लिया, जिसके बाद अशनी प्लाटून और भैरव बटालियन से शुरुआत हुई.&amp;nbsp;

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने ड्रोन प्लाटून को किया पेश
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के ड्रोन अटैक के बाद भारतीय सेना ने सभी इंफेंट्री बटालियन में एक खास ड्रोन प्लाटून बनाकर खड़ी कर दी. महज कुछ हफ्तों के भीतर भारतीय सेना ने अपनी इस खास &amp;lsquo;अश्नि&amp;rsquo; (अशनी) प्लाटून को दुनिया के सामने पेश कर दिया. खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान सीमा के करीब जैसलमेर में इस खास ड्रोन प्लाटून का उद्घाटन किया.
पौराणिक इतिहास में &amp;lsquo;अश्नि&amp;rsquo; को देवराज इंद्र का हथियार माना जाता है, जिसे वज्र के नाम से भी जाना जाता है. भारतीय सेना की अश्नि प्लाटून में 20 सैनिक हैं, जिन्हें FPV से लेकर सर्विलांस ड्रोन और स्वार्म ड्रोन सहित लोएटरिंग म्युनिशन में ट्रेनिंग दी गई है. ये सेना की प्रत्येक इंफेंट्री बटालियन का हिस्सा हैं.
लंबी दूरी के आत्मघाती ड्रोन्स की कमी से जूझ रही भारतीय सेना
भारतीय सेना की इस समय करीब 380 इन्फेंट्री बटालियन हैं, लेकिन ये बाज बटालियन, एफपीवी ड्रोन के साथ-साथ सर्विलांस और अटैक ड्रोन का इस्तेमाल भी करेंगी. यानी ये अश्नि प्लाटून से स्तर पर बड़ी होंगी. ठीक वैसे, जैसा कि इंफेंट्री में एक प्लाटून और बटालियन का अंतर होता है, लेकिन भारतीय सेना अभी भी लंबी दूरी के आत्मघाती ड्रोन की कमी से जूझ रही है.
ये ईरान के शहीद ड्रोन जैसे होते हैं, जो डेढ़ से दो हजार किलोमीटर तक वार करते हैं. इन ड्रोन ने अमेरिका, इजरायल और दूसरे खाड़ी देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और ईरान जंग का रुख बदल दिया. कुछ स्वदेशी कंपनियों ने ईरान के शहीद ड्रोन जैसे लोएटरिंग म्युनिशन बनाने का दावा जरूर किया है, लेकिन अमेरिका-ईरान जंग को देखते हुए भारत को ऐसे आत्मघाती ड्रोन की बड़ी संख्या में जरूरत है.
अश्न और बाज के अलावा सेना ने शक्तिबाण और शौर्य स्क्वाड्रन को किया तैयार
अश्नि प्लाटून और बाज बटालियन के साथ भारतीय सेना ने खास शक्तिबाण यूनिट और शौर्य स्क्वाड्रन भी बनाकर तैयार कर ली हैं. शक्तिबाण भी ड्रोन यूनिट है, जो भारतीय सेना की आर्टिलरी यानी तोपखाने के साथ अटैच हैं. इनकी संख्या 15-20 हैं और इन्हें स्वार्म ड्रोन और लोएटरिंग म्युनिशन के साथ लंबी दूरी के यूएवी ऑपरेट करने के लिए खड़ा किया गया है.
तोपखाने के अलावा, आर्मर्ड यानी टैंक रेजीमेंट के लिए भी सेना ने शौर्य स्क्वाड्रन तैयार की हैं. ये इसलिए क्योंकि, रूस-यूक्रेन युद्ध में टैंक, आईसीवी और मिलिट्री व्हीक्लस को बड़ी संख्या में ड्रोन से अटैक कर तबाह किया गया. ऐसे में जंग के मैदान में खतरों को भांपकर सेना के टैंक और दूसरे मैकेनाइज्ड कॉलम दुश्मन के सीने पर वार कर सकेंगे. अशनी, शक्तिबाण और शौर्य के अलावा सेना की डिवीजन स्तर पर जो खास भैरव बटालियन तैयार की गई हैं, उसमें तैनात हर कमांडो को ड्रोन ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है.
ऐसे में मान सकते हैं कि आने वाले समय में भारतीय सेना, जिसमें सैनिकों की संख्या की बात करें, तो दुनिया में दूसरे-तीसरे नंबर पर है और फायर पावर यानी ताकत में भी टॉप में शुमार है, वो जल्द ही ड्रोन वॉरफेयर में भी निपुण हो जाएगी.
यह भी पढ़ेंः नितिन नवीन का BJP की नई टीम को संदेश, &#039;सार्वजनिक जीवन में संयम और...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पाकिस्तानी, सीमा, पर, बाज, बटालियन, ड्रोन, वॉरफेयर, की, तैयारी, पूरी</media:keywords>
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        <title>27 में 7 राज्यों की जंग! BJP की नई टीम की पहली बैठक, Gen Z पर क्या प्लान?</title>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद पदाधिकारियों के साथ शनिवार को बैठक करने जा रहे हैं. इसे लेकर दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय के आसपास पार्टी की नई टीम में शामिल पदाधिकारियों के स्वागत में पोस्टर लगाए गए हैं. बैठक में जेन-जी से संवाद, सोशल मीडिया पर सक्रियता, 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है. &amp;nbsp;
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में तीन बैठकें होंगी, जिनमें पहली बैठक में नई टीम का परिचय, दूसरी में &#039;Modi@25&#039; कार्यक्रम की तैयारियों और तीसरी में संगठन की रणनीति और चुनावी तैयारियों पर विस्तार से मंथन होगा.




Delhi: BJP National President Nitin Nabin arrived at the party headquarters to chair a meeting with the party&#039;s newly appointed national office-bearers pic.twitter.com/sA2ki6B0OZ
&amp;mdash; IANS (@ians_india) August 22, 2026



पहली बैठक में नई टीम का होगा परिचय
शनिवार को पहली बैठक सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच होगी. इसमें नितिन नवीन की पिछले 17 अगस्त को घोषित नई राष्ट्रीय टीम के सभी पदाधिकारियों का औपचारिक परिचय कराया जाएगा. नितिन नवीन की इस नई टीम में संगठन के पुराने अनुभवी नेताओं के साथ कई नए चेहरों को भी जिम्मेदारी दी गई है.
&amp;nbsp;इस बैठक में नवनियुक्त पदाधिकारियों को संगठन के कामकाज, जिम्मेदारियों और पार्टी की प्राथमिकताओं के बारे में बताया जाएगा.
Modi@25 कार्यक्रम पर होगा मंथन
दिन की दूसरी अहम बैठक में &#039;Modi@25&#039; कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर चर्चा होगी. चूंकि नरेंद्र मोदी पहले मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री के रूप में कुल 25 साल पूरे करने जा रहे हैं. बीजेपी इस मौके को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी कर रही है.
बैठक में देशभर में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा, लोगों तक पहुंच बनाने के तरीकों और विभिन्न अभियानों की समयसीमा तय करने पर चर्चा होगी.
चुनावी रणनीति पर होगी चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, तीसरी बैठक शाम छह बजे से होगी. इसमें नितिन नवीन के साथ बीजेपी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी और सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष शामिल होंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बैठक में संबोधन दे सकते हैं. बैठक में जेन-जी, महिलाओं के मुद्दे, सोशल मीडिया पर सक्रियता, संगठन को मजबूत करने की रणनीति और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तार से चर्चा हो सकती है.
पांच राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव
वर्ष 2027 में देश के पांच राज्य गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें मौजूदा विधानसभाओं का कार्यकाल अगले साल समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद नई विधानसभा के लिए मतदान कराया जाएगा.
बता दें कि नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान 17 अगस्त को किया गया था. इसमें कई बड़े नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं. इनमें राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, बीजेपी के वरिष्ठ नेता राम माधव, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और ओडिशा के बैजयंत जय पांडा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>में, राज्यों, की, जंग, BJP, की, नई, टीम, की, पहली, बैठक, Gen, पर, क्या, प्लान</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;यही असली चेहरा&amp;apos;, वंदे मातरम विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान का कांग्रेस पर तंज</title>
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        <description><![CDATA[ वंदे मातरम् पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के प्रस्ताव को लेकर बीजेपी सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के तालचेर में शनिवार (22 अगस्त) को कहा कि यह पार्टी कभी भी देश की एकता, उसकी पहचान या उसके स्वाभिमान के साथ खड़ी नहीं रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है. यह खुलेआम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है. कांग्रेस पार्टी का असली चेहरा देश की जनता के सामने आ गया है.&amp;nbsp;
दिल्ली में बुधवार को वंदे मातरम् पर विवाद को लेकर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई. इस बैठक में वंदे मातरम् के गायन को लेकर चर्चा की गई. बैठक में कहा गया कि कांग्रेस के कार्यकर्ता वंदे मातरम् को लेकर 1937 प्रस्ताव को ही मानेंगे. इसका मतलब साफ है कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के शुरू के 2 पैरा ही गाए जाएंगे.

#WATCH | Talcher, Odisha: On CWC resolution on Vande Mataram, BJP MP Dharmendra Pradhan says, &quot;It has never stood by the nation&#039;s unity, its identity, or its self-respect. The Congress has always engaged in the politics of appeasement. This represents the height of blatant&amp;hellip; pic.twitter.com/EZXczVv13S
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 22, 2026



जयराम रमेश ने क्या कहाकांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 1937 में कांग्रेस नेतृत्व की सहमति से जो प्रस्ताव पारित हुए था, पार्टी उसी का पालन करेगी. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उस समय महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस समेत कई टॉप नेताओं की मौजूदगी में जो सहमति बनी थी, उसी पर अमल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस मुद्दे पर कोई भ्रम नहीं है. वो 1937 के प्रस्ताव के अनुसार ही वंदे मातरम् के शुरूआत के दो पैरा गाएंगे.
क्या बोले केसी वेणुगोपालकांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि हमने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की विस्तृत बैठक की, जिसमें CWC सदस्य, स्थायी आमंत्रित सदस्य, विशेष आमंत्रित सदस्य और हमारे 4 मुख्यमंत्री शामिल हुए. बैठक में 88 से ज्यादा लोग मौजूद थे. मुख्यमंत्रियों और वर्किंग कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों समेत 33 लोगों ने चर्चा में हिस्सा लिया.
इससे पहले 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर वंदे मातरम् के अपमान का मामला सामने आया था. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रगीत का अपमान किया है.&amp;nbsp;
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&#039;भारत में है राजनीतिक स्थिरता&#039;, PM मोदी बोले- रिफॉर्म हमारे लिए नहीं कम्पल्शन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यही, असली, चेहरा, वंदे, मातरम, विवाद, पर, धर्मेंद्र, प्रधान, का, कांग्रेस, पर, तंज</media:keywords>
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        <title>राहुल vs सरकार: पेपर लीक से पेलेट गन तक कांग्रेस आक्रामक, BJP का पलटवार</title>
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        <description><![CDATA[ NEET पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन से लेकर वंदे मातरम विवाद और पेलेट गन से घायल छात्र साहिल लोचब को न्याय दिलाने तक कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं. शुक्रवार को राहुल गांधी साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठ गए. करीब सात घंटे चले इस विरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने साहिल की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कर ली.
राहुल गांधी का आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान साहिल को पेलेट गन के छर्रे लगे, जिससे उसकी आंख की रोशनी प्रभावित हुई. राहुल का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि FIR दर्ज होना न्याय की दिशा में पहला कदम है.
NEET पेपर लीक से शुरू हुई छात्रों की आवाज उठाने की मुहिम
NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर राहुल गांधी पहले भी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं. उनका कहना रहा है कि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य पर पड़ता है. उन्होंने छात्रों के मुद्दे को संसद में उठाने और उनके साथ खड़े रहने की बात कही थी. हालिया छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर की घटनाओं ने इस मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. राहुल गांधी का कहना है कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए. इसी कड़ी में उन्होंने साहिल के मामले में पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग उठाई.
पेलेट गन मामले में थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल
शुक्रवार को राहुल गांधी साहिल और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे. उनका आरोप था कि साहिल की शिकायत पर FIR दर्ज करने में पुलिस टालमटोल कर रही है. पहले उन्होंने DCP से मुलाकात की और मांग रखी, लेकिन बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद वह थाने के बाहर धरने पर बैठ गए. राहुल ने साफ कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होगी, वह वहां से नहीं हटेंगे. उनके साथ प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के कई नेता भी मौजूद रहे. आखिरकार पुलिस ने साहिल की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कर ली.
राहुल बोले- न्याय की दिशा में पहला कदम
FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है. उन्होंने पैलेट के छर्रे दिखाते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया और पूछा कि अगर पुलिस ने पैलेट गन नहीं चलाई तो फिर साहिल को ये छर्रे कैसे लगे. राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में ऊपर से न्याय की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की जा रही थी. उनका कहना है कि साहिल जैसे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और इस घटना के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
वंदे मातरम विवाद पर भी सरकार-कांग्रेस आमने-सामने
इसी बीच वंदे मातरम को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद ने भी कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव बढ़ा दिया है. भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस और राहुल गांधी इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए नए-नए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
भाजपा ने राहुल गांधी के थाने के बाहर धरने को राजनीतिक ड्रामा और मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश बताया. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि जब मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया चल रही है, तब कैमरों के सामने थाने के बाहर बैठने का क्या मतलब है. उन्होंने राहुल गांधी पर वंदे मातरम विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश का आरोप लगाया.
बीजेपी का पलटवार- जांच चल रही है तो धरना क्यों?
भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने भी राहुल गांधी के प्रदर्शन पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर की घटना को लेकर जांच की प्रक्रिया पहले से चल रही है. उन्होंने राहुल से पूछा कि क्या उन्होंने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों और पुलिस पर कथित हमलों की भी जांच की मांग की थी. भाजपा का कहना है कि राहुल गांधी हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार छात्रों की आवाज और उनके अधिकारों को दबा रही है.
NEET से पेलेट गन तक बढ़ा सियासी टकराव
NEET पेपर लीक से शुरू हुआ छात्र मुद्दा अब पेलेट गन मामले तक पहुंच गया है. इसके साथ वंदे मातरम विवाद ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. एक तरफ राहुल गांधी लगातार छात्रों और प्रदर्शनकारियों के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं भाजपा उनके विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक फायदे और मीडिया की सुर्खियों के लिए किया गया कदम बता रही है.
यह भी पढ़ें : विजय सरकार बच्चों को देने जा रही है सोने की अंगूठी, ज्वेलर्स को दिया ऑर्डर ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>विजय सरकार बच्चों को देने जा रही है सोने की अंगूठी, ज्वेलर्स को दिया ऑर्डर</title>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु को लेकर मुख्यमंत्री विजय ने बड़ी घोषणा की है. उन्होंने नवजात बच्चों के लिए &#039;थैमामन गोल्ड रिंग स्कीम&#039; की शुरुआत की है. अहम बात यह है कि इसके लिए दो ज्वेलर्स को ऑर्डर भी दे दिया गया है. इस योजना के तहत तमिलनाडु सरकार जून से सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को सोने की अंगूठी देगी. पहली बार में 1,28,499 सोने की अंगूठियां बांटी जाएंगी.&amp;nbsp;
&#039;पीटीआई&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (TNMSC) ने जॉय अलुक्कास और कल्याण ज्वेलर्स को ऑर्डर दिया है. अहम बात यह भी है कि तमिलनाडु सरकार ने इस योजना की शुरुआत 15 सितंबर 2026 को करने का फैसला किया है. 15 सितंबर को पूर्व मुख्यमंत्री सी एन अन्नादुरई की जयंती भी है. सीएम विजय ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना की घोषणा की थी.&amp;nbsp;
सोने की अंगूठी का कितना होगा वजन
तमिलनाडु सरकार के आदेश के बाद कुल 4,41,667 सोने की अंगूठियां खरीदी जाएंगी. हर अंगूठी का वजन करीब एक ग्राम होगा. इसके लिए TNMSC ने 14 जुलाई को टेंडर जारी किया था, जिसमें 11 कंपनियों ने हिस्सा लिया था. सरकार के मुताबिक, जॉय अलुक्कास ने एक ग्राम सोने की कीमत को छोड़कर 0.01 रुपये की अपनी सबसे कम कीमत दी. इसमें प्रोसेसिंग फीस, इश्योरेंस, परिवहन और BIS स्टांपिंग समेत सभी चार्ज शामिल थे.

रिपोर्ट के मुताबिक कल्याण ज्वेलर्स ने भी सबसे कम कीमत की पेशकश की. योजना को 15 सितंबर से लागू किया जाना है, इसलिए जून से सितंबर के चार महीनों के दौरान जन्म लेने वाले पात्र बच्चों के लिए 1,28,499 अंगूठियों की आपूर्ति का वर्क ऑर्डर दोनों कंपनियों को दिया गया है.
तमिलनाडु सरकार ने क्यों शुरू की गोल्ड रिंग स्कीम
सोने की अंगूठी को लेकर एक अहम नियम यह भी है कि सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को ही इस योजना का फायदा मिलेगा. सरकार का कहना है कि &#039;गोल्ड रिंग स्कीम&#039; का बड़ा मकसद लोगों के सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसे को मजबूत करना है. लिहाजा 22 जून 2026 से सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को ही अंगूठी दी जाएगी.
यह भी पढ़ें : 27 में 7 राज्यों की जंग! BJP की नई टीम की पहली बैठक, Gen Z पर क्या प्लान? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>विजय, सरकार, बच्चों, को, देने, जा, रही, है, सोने, की, अंगूठी, ज्वेलर्स, को, दिया, ऑर्डर</media:keywords>
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        <title>वीजा खत्म, फिर भी भारत में डेरा! द्वारका में नाइजीरियाई नागरिक पकड़ा गया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वीजा-खत्म-फिर-भी-भारत-में-डेरा-द्वारका-में-नाइजीरियाई-नागरिक-पकड़ा-गया</link>
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        <description><![CDATA[ नई दिल्ली के द्वारका में वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी भारत में रह रहे एक नाइजीरियाई नागरिक को पुलिस ने पकड़ा है. यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस के ऑपरेशन विस्टा 1.0 के तहत की गई. पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी का भारतीय वीजा अप्रैल 2026 में ही खत्म हो चुका था, लेकिन इसके बाद भी वह भारत में रह रहा था. कार्रवाई के बाद उसे एफआरआरओ दिल्ली के सामने पेश किया गया, जहां से उसे प्रतिबंध केंद्र भेज दिया गया.
सेक्टर-10 द्वारका में पेट्रोल पंप के पास पकड़ा गया
द्वारका जिला पुलिस की एंटी-पीओ एंड जेल बेल सेल की टीम को वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच का जिम्मा दिया गया था. इसी अभियान के दौरान 14 अगस्त 2026 को पुलिस टीम ने सेक्टर-10 द्वारका में पेट्रोल पंप के पास एक नाइजीरियाई नागरिक को पकड़ा.
पुलिस ने उसकी पहचान हेनरी चिनाजाएकपेरे ओन्येका के रूप में की है. वह नाइजीरिया का रहने वाला है. जांच के दौरान उसने नाइजीरिया का पासपोर्ट पुलिस को दिखाया, जिसकी वैधता 28 अगस्त 2034 तक है. हालांकि, जांच में उसके पास भारत का वैध वीजा नहीं मिला.
अप्रैल 2026 में खत्म हो चुका था भारतीय वीजा
पुलिस के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला कि हेनरी का भारतीय वीजा अप्रैल 2026 तक ही वैध था. वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी वह भारत में रह रहा था. इसके बाद द्वारका साउथ थाने में मामले से जुड़ी जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई.
जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आरोपी को एफआरआरओ दिल्ली के सामने पेश किया गया. एफआरआरओ ने 14 अगस्त को आदेश जारी करते हुए उसकी आवाजाही पर रोक लगा दी.
एफआरआरओ के आदेश के बाद प्रतिबंध केंद्र भेजा गया
एफआरआरओ के आदेश के बाद नाइजीरियाई नागरिक को सेवा सदन, लामपुर, नरेला स्थित प्रतिबंध केंद्र भेज दिया गया. पुलिस के अनुसार, उसे वहां आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है.
ऑपरेशन विस्टा 1.0 के तहत विदेशी नागरिकों की जांच
दिल्ली पुलिस ने राजधानी में रहने वाले विदेशी नागरिकों के दस्तावेज और वीजा की स्थिति जांचने के लिए ऑपरेशन विस्टा 1.0 शुरू किया है. इसी अभियान के तहत द्वारका जिला पुलिस की टीम विदेशी नागरिकों की पहचान करने के साथ उनके दस्तावेजों की भी जांच कर रही है.
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं कोई विदेशी नागरिक वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी अवैध रूप से भारत में तो नहीं रह रहा है. इसी अभियान के दौरान द्वारका में नाइजीरियाई नागरिक के वीजा की अवधि खत्म होने का मामला सामने आया. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वीजा, खत्म, फिर, भी, भारत, में, डेरा, द्वारका, में, नाइजीरियाई, नागरिक, पकड़ा, गया</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;इथेनॉल में चला गया गन्ना इसलिए महंगी हुई चीनी&amp;apos;, कांग्रेस का मोदी सरकार पर निशाना</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच कांग्रेस ने E20 नीति को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने के कारण चीनी और दूसरे खाद्य पदार्थ महंगे हो रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि इससे वाहन मालिकों को कम माइलेज और गाड़ी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा रहा है.
इथेनॉल में चला गया गन्ना इसलिए महंगा हुआ चीनी: कांग्रेस
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 21 फरवरी को एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मोदी सरकार की E20 नीति के कारण जनता को सड़क रसोई दोनों जगहों पर इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है. उनके मुताबिक, गन्ने और अनाज से इथेनॉल बनाने के कारण खाद्य पदार्थ की उपलब्धता प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा, &#039;स्वाभाविक था कि गन्ने और अनाज को इथेनॉल बनाकर 20 फीसदी पेट्रोल में जब मिलाया जाएगा तो एक तरफ गन्ने और अनाज से पैदा होने वाली चीजों की कमी होगी.&#039;
कांग्रेस नेता ने कहा, &#039;अब स्पष्ट हो गया है कि 25 लाख टन चीनी-लायक गन्ना इथेनॉल में चला गया, जिससे केवल पिछले तीन महीनों में चीनी 48 रुपये से बढ़कर 67 रुपये प्रति किलो और गुड़ 50 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो हो गया. चावल 16 और और मक्के का आटा 11 फीसदी महंगा हो गया है. पशु आहार के दाम भी 10.34 फीसदी बढ़े हैं. वाहन मालिकों के पास पेट्रोल के विकल्प भी सीमित कर दिए गए हैं, लेकिन E20 से वाहनों के माइलेज और कंपेबिलिटी पर गंभीर सवाल बने हुए हैं.&#039;
पेट्रोल के दाम कम नहीं होने पर उठाए सवाल
उन्होंने इथेनॉल मिलाने के बाद भी पेट्रोल के दामों में कमी नहीं होने को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, &#039;अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में कमी और 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने से आई लागत में कमी के बावजूद पेट्रोल के दामों में कोई कमी नहीं की गई है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार E20 के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को प्रमुखता से उठा रहे हैं. कांग्रेस कार्यसमिति ने 19 अगस्त को ही E20 के कारण कम माइलेज, वाहनों की कंपेबिलिटी से जुड़े जोखिम और उपभोक्ताओं के सीमित विकल्पों, पर्यावरणीय क्षति के सवालों पर अपनी चिंता जताई थी.
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के &amp;nbsp;गलत फैसलों के कारण जनता महंगे खाने और महंगे सफर की कीमत चुका रही है. उन्होंने कहा, &#039;हमारी मांग है कि E20 नीति की तत्काल समीक्षा होनी चाहिए और जनता को बिना इथेनॉल वाले विकल्प मिलने चाहिए. गाड़ी भी महंगी पड़े और रसोई भी, ऐसी जनविरोधी ईंधन नीति देश को स्वीकार्य नहीं हो सकती.&#039;
केंद्र ने चीनी जीरो शुल्क पर आयात करने की अनुमति दी
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी जीरो शुल्क पर आयात करने की अनुमति दी. इस कदम के जरिए सरकार की कोशिश कीमतों को नियंत्रण में रखना है. यह बीते एक दशक में पहला मौका है, जब भारत विदेशों से चीनी आयात करने जा रहा है. दिल्ली में 21 अगस्त को चीनी 65 रुपये किलो मिल रहा है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इथेनॉल, में, चला, गया, गन्ना, इसलिए, महंगी, हुई, चीनी, कांग्रेस, का, मोदी, सरकार, पर, निशाना</media:keywords>
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        <title>पैलेट गन केस: राहुल गांधी थाने के बाहर धरने पर बैठे, कहा&amp; &amp;apos;FIR नहीं तो, हटेंगे नहीं&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पहुंचे हैं. वह जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्र साहिल लाछोब को लेकर शिकायत करने पहुंचे. एफआईआर दर्ज नहीं होने पर राहुल गांधी थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. उनके साथ साहिल का परिवार भी है. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने शर्त रखी है कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती है तब तक वह थाने में ही रहेंगे.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम अहमद मीर ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा कि 20 जुलाई को जिस तरह से कार्रवाई हुई. गृहमंत्री अमित शाह से पूछा जा रहा है कि आपने इजाजत दी है तो हां बोलिए नहीं दी है तो नहीं बोलिए, ताकि देश जाने. उससे वो भाग रहे हैं. देश में कहीं जवाब नहीं दे रहे हैं. &amp;nbsp;पैलेट गन मामले को उठाने के लिए राहुल गांधी थाने गए हैं. पूरे मामले को उजागर करने के लिए थाने पहुंचे हैं, कार्रवाई की मांग करने के लिए.

On 14th, Sahil Lochav went with his lawyers to Delhi Police and gave a written complaint. They refused to give a I/O number.It was again pursued on 17th with email, phone as well. Again, no I/O number given. No acknowledgement was also given. Now, LoP @RahulGandhi ji went&amp;hellip; pic.twitter.com/PVEXNZXGWk
&amp;mdash; Congress (@INCIndia) August 21, 2026



कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर जवाबदेही तय करने की भी मांग कर चुके हैं. कांग्रेस सासंद ने बताया था कि उन्होंने 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचब से मुलाकात की, जो गंभीर दर्द में है और पैलेट गन लगने के कारण उसकी एक आंख की रोशनी जाने की आशंका है. उन्होंने सवाल किया था, &#039;क्या प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन समेत घातक बल प्रयोग की मंजूरी गृह मंत्री ने दी थी? यदि नहीं, तो इसकी अनुमति किसने दी?&#039;
जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा या अनुचित बल का इस्तेमाल तो नहीं किया. इसमें पैलेट गन, बिजली के डंडे, लाठी और आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच होगी. यह देखा जाएगा कि इनका इस्तेमाल पर्याप्त चेतावनी दिए बिना या जरूरत से अधिक तो नहीं किया गया.
इसके साथ ही कमेटी यह भी देखेगी कि पुलिस की कार्रवाई उस समय की परिस्थितियों के हिसाब से उचित थी या नहीं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार के बीच उचित संतुलन कायम किया गया था या नहीं.कमेटी यह भी विचार करेगी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट या अन्य धातु के प्रोजेक्टाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए या नहीं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पैलेट, गन, केस:, राहुल, गांधी, थाने, के, बाहर, धरने, पर, बैठे, कहा-, FIR, नहीं, तो, हटेंगे, नहीं</media:keywords>
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        <title>TMC नेता सुजीत बोस की जमानत पर बड़ा ट्विस्ट! जज ने खुद को केस से किया अलग</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी खबर सामने आई है. मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस सुव्र घोष ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है. जज ने बताया कि सुजीत बोस की ओर से पेश एक वकील और उनकी निजी सचिव ने उनके चैंबर में जाकर केस की फाइल देखने की कोशिश की. कोर्ट के कर्मचारियों ने इसका विरोध किया. जस्टिस घोष ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस पूरे मामले में किसी अप्रत्यक्ष मकसद की बू आती है. उन्होंने केस को आगे के निर्देश के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया है.
फैसला सुरक्षित होने के अगले दिन चैंबर में पहुंचे वकील
जस्टिस सुव्र घोष ने 19 अगस्त को जारी अपने आदेश में कहा कि सुजीत बोस की जमानत याचिका पर फैसला 17 अगस्त को सुरक्षित रखा गया था. इसके अगले दिन यानी 18 अगस्त को जब जज कोर्ट में थीं, तब सुजीत बोस की ओर से पेश एक वकील उनकी निजी सचिव के साथ उनके चैंबर में पहुंचा.
आदेश के मुताबिक, दोनों ने चैंबर के बाहर मौजूद कर्मचारियों से केस की फाइल लाने को कहा. कर्मचारियों ने फाइल देने से मना कर दिया. इसके बाद दोनों ने चैंबर के अंदर जाने और केस का रिकॉर्ड देखने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारियों ने इसका भी विरोध किया.
जज ने जताई नाराजगी, केस से हुईं अलग
इस घटना पर जस्टिस घोष ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि केस का रिकॉर्ड देखने की इस कोशिश से ऐसा लगता है कि इसके पीछे कोई गलत या छिपा हुआ मकसद हो सकता है. इसके बाद जस्टिस घोष ने सुजीत बोस की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. उन्होंने निर्देश दिया कि अब यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाए, ताकि आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सके.
नगरपालिका भर्ती मामले में ED ने किया था गिरफ्तार
सुजीत बोस पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं और TMC के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं. उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका में भर्ती में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था. ED के मुताबिक, सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगरपालिका में अलग-अलग पदों पर करीब 150 लोगों की कथित तौर पर गलत तरीके से सिफारिश की थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि नगरपालिका में नौकरी दिलाने के बदले अवैध तरीके से पैसे लिए गए.
ED का दावा- नौकरी के बदले खरीदे गए फ्लैट
ED ने दावा किया था कि जांच के दौरान कुछ ऐसे फ्लैटों का पता चला, जिन्हें नगरपालिका में नौकरी दिलाने के बदले मिली कथित अवैध रकम से खरीदा गया था. जांच एजेंसी ने यह भी कहा था कि सुजीत बोस के नियंत्रण वाले बैंक खातों में बड़ी रकम जमा होने के सबूत मिले हैं. ED की जांच के सिलसिले में सुजीत बोस को कई बार समन भी भेजा गया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया था.
बेटे के साथ ED दफ्तर पहुंचे थे सुजीत बोस
जांच के दौरान सुजीत बोस अपने बेटे समुद्र के साथ साल्ट लेक स्थित CGO कॉम्प्लेक्स में ED के दफ्तर पहुंचे थे. अब जस्टिस सुव्र घोष के केस से अलग होने के बाद सुजीत बोस की जमानत याचिका पर अगली सुनवाई किस जज या पीठ के सामने होगी, इसका फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद होगा. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>TMC, नेता, सुजीत, बोस, की, जमानत, पर, बड़ा, ट्विस्ट, जज, ने, खुद, को, केस, से, किया, अलग</media:keywords>
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        <title>Rahul Gandhi Dharna Live: थाने के बाहर राहुल गांधी का धरना, पैलेट गन मामले में FIR की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ Rahul Gandhi Dharna Live: दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी धरने पर बैठ गए हैं. वो पैलेट गन के मामले में एफआईआर की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर एफआईआर नहीं हुई तो वो नहीं हटेंगे. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rahul, Gandhi, Dharna, Live:, थाने, के, बाहर, राहुल, गांधी, का, धरना, पैलेट, गन, मामले, में, FIR, की, मांग</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: भारतीयों को कितना पसंद करते पाकिस्तानी? प्यू रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-भारतीयों-को-कितना-पसंद-करते-पाकिस्तानी-प्यू-रिपोर्ट-में-चौंकाने-वाले-खुलासे</link>
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        <description><![CDATA[ भारत और पाकिस्तान को आजाद हुए करीब 80 साल हो चुके हैं, लेकिन दोनों देशों के आम लोगों के बीच एक-दूसरे को लेकर नकारात्मक सोच आज भी उतनी ही गहरी है. अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के ताजा सर्वे ने इस कड़वी हकीकत को एक बार फिर उजागर किया है. दोनों तरफ से करीब 8 से 9 में से 10 लोग एक-दूसरे को दुश्मन नजर से देखते हैं. आखिर दोनों देशों की एक-दूसरे को लेकर बदगुमानी खत्म क्यों नहीं होती...
प्यू सर्वे में क्या आया?
प्यू रिसर्च सेंटर का यह सर्वे फरवरी-अप्रैल 2026 के दौरान 3,566 भारतीय वयस्कों से फेस-टू-फेस इंटरव्यू के आधार पर किया गया. यह सर्वे 13 भारतीय भाषाओं में कराया गया. पाकिस्तान में यह सर्वे 8 अप्रैल से 7 मई 2026 &amp;nbsp; के बीच 1,039 वयस्कों से 5 पाकिस्तानी भाषाओं में किया गया. इसके मुताबिक,

भारत को लेकर: 73% पाकिस्तानियों की बेहद खराब राय है. 18% की कुछ हद तक नकारात्मक राय.
पाकिस्तान को लेकर: 65% भारतीयों की बेहद खराब राय है. 16% की कुछ हद तक नकारात्मक राय.

प्यू रिसर्च के 2013 से अब तक के सर्वेक्षणों में 20% से ज्यादा भारतीयों ने कभी भी पाकिस्तान को लेकर अच्छा रुख नहीं जताया. पाकिस्तान में भी भारत के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का प्रतिशत सिंगल डिजिट से लेकर एक-तिहाई (33%) के बीच रहा है.
यानी यह नफरत या बदगुमानी कोई नई बात नहीं है. यह पिछले एक दशक से लगातार बनी हुई है.

We ask people in #India and #Pakistan if their government and citizens are committed to good relations with the other side. The clear pattern is most Indians and Pakistanis only trust their own country. pic.twitter.com/M0Iz8b8mCt
&amp;mdash; Pew Research Center (@pewresearch) August 17, 2026



एक-दूसरे के इरादों पर गहरी बदगुमानी
सर्वे की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों देशों के लोग यह मानते हैं कि उनकी अपनी सरकार पड़ोसी से अच्छे संबंध बनाना चाहती है, लेकिन दूसरे देश की सरकार ऐसा नहीं चाहती.

भारत सरकार को लेकर: 57% भारतीय अपनी सरकार को रिश्ते बेहतर करने की कोशिश वाली मानते हैं, जबकि 65% पाकिस्तानी भारत को प्रतिबद्ध नहीं मानते.
पाकिस्तान सरकार को लेकर: 61% पाकिस्तानी अपनी सरकार को प्रतिबद्ध मानते हैं, जबकि 51% भारतीय पाकिस्तान को प्रतिबद्ध नहीं मानते.

यानी दोनों तरफ एक-दूसरे के इरादों पर भरोसा नहीं है. यह अविश्वास ही सबसे बड़ी बाधा है.
बदगुमानी क्यों नहीं खत्म होती?
विदेश मामलों के जानकार और JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ. ए के पाशा 4 बड़ी वजहें बताते हैं:
1. &#039;पीस विद पाकिस्तान&#039; वाली कमजोर लॉबी
एक जमाना था जब पाकिस्तान में भारत विरोधी भावनाएं बहुत ज्यादा थीं. हमारे देश में एक आकांक्षा थी कि हम रिश्ते ठीक करें. एक जमाने में एक स्ट्रॉन्ग लॉबी होती थी, जो &#039;पीस विद पाकिस्तान&#039; वाली थी. अब वह लॉबी कमजोर हो गई है या दिखाई ही नहीं देती. जो लोग अपना मुकाम छोड़कर आए थे, वो जनरेशन लगभग खत्म है और नई जनरेशन को पाकिस्तान के बारे में कुछ और ही सिखाया गया है.
2. सही राय रखने में लोगों में डर
दोनों देशों के लोग पब्लिक में अपनी सही राय रखने से झिझकते हैं. अगर आप किसी स्कूल या कॉलेज में यूथ के बीच या प्रोफेशनल ग्रुप में जाएंगे तो वहां ज्यादातर लोग वही नैरेटिव बोलेंगे या वही राय रखेंगे, जो देश की होती है. वो अपनी राय नहीं रखेंगे क्योंकि कोई विवाद में नहीं पड़ना चाहता.
यानी देश में चल रहे नैरेटिव ने लोगों की सोच को इतना प्रभावित कर दिया है कि वे अपनी राय भी खुलकर नहीं रख पाते.
3. शांति की बात जंग की बात से ज्यादा मुश्किल
आज हमारे दोनों देशों में अमन और शांति की बात करना, जंग की बात करने से ज्यादा मुश्किल हो गया है. आम लोगों के मन में एक-दूसरे के खिलाफ दुश्मनी पैदा कर दी गई है. आजकल हम लोकतंत्र के रूप में उतने अपरिपक्व लग रहे हैं, जितना पाकिस्तान है.
4. व्यापार के समर्थक, लेकिन दोस्त नहीं
पाकिस्तानी छोटे कारोबारी और व्यापारी दोनों देशों के बीच व्यापार शुरू करने के पैरोकार हैं. छोटे कारोबारी और व्यापारियों से जब बात होती है तो वो यह नहीं कहते कि भारत हमारा दोस्त है, लेकिन वो यह मानते हैं कि अगर पाकिस्तान को आर्थिक तौर पर तरक्की करनी है तो दोनों देशों को बातचीत करनी होगी और ट्रेड बढ़ानी होगी.
चीन को लेकर भारत-पाकिस्तान में जमीन-आसमान का फर्क
सर्वे में चीन को लेकर दोनों देशों की राय में बहुत बड़ा फर्क सामने आया:

21% भारतीय मानते हैं कि चीन सबसे बड़ा खतरा है.
75% पाकिस्तानी मानते हैं कि चीन सबसे अहम सहयोगी है.

पाकिस्तान को सबसे ज्यादा समर्थन चीन से मिला है, चाहे वो UN में वीटो की बात हो, आर्थिक समर्थन की बात या टेक्नोलॉजी के सपोर्ट की बात हो. हालांकि, चीन को लेकर भारत की चिंता नई नहीं है. नेहरू के समय भी भारत सरकार, चीन को एक बड़ी चुनौती मानती थी.
फॉरेन एक्सपर्ट और BHU के प्रोफेसर डॉ. प्रियांकर उपाध्याय कहते हैं कि भारत की आजादी के बाद पहली इंस्पेक्टर जनरल की कॉन्फ्रेंस में पंडित नेहरू ने कहा था कि हमको ऐसा लगता हो कि हमारे लिए बड़ा चैलेंज पाकिस्तान है, लेकिन सच्चाई में हमारे लिए बड़ा चैलेंज चीन है. भारत और पाकिस्तान के रिश्तों के बीच चीन कोई फैक्टर नहीं है.
अमेरिका को लेकर भी अलग-अलग नजरिए
सर्वे के मुताबिक, भारत रूस और फिर अमेरिका पर सबसे ज्यादा भरोसा करता है.

क्या कभी बदल सकती है यह तस्वीर?
प्यू सर्वे के नतीजे साफ बताते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच आपसी नफरत और बदगुमानी कोई नई बात नहीं है. यह पिछले एक दशक से लगातार बनी हुई है.
91% पाकिस्तानी और 78% भारतीय एक-दूसरे को नकारात्मक नजर से देखते हैं. दोनों तरफ एक-दूसरे के इरादों पर भरोसा नहीं है. देशों में चल रहे नैरेटिव, &#039;पीस विद पाकिस्तान&#039; वाली कमजोर लॉबी और हर बार शांति की उम्मीद को तोड़ने वाली घटनाएं मिलकर नकारात्मक माहौल बनाती हैं. अब अमन और शांति की बात करना जंग की बात करने से ज्यादा मुश्किल हो गया है.
हाल ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, भारतीयों, को, कितना, पसंद, करते, पाकिस्तानी, प्यू, रिपोर्ट, में, चौंकाने, वाले, खुलासे</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: 113 देशों में मृत्युदंड खत्म, भारत की SC ने क्यों कहा&amp; &amp;apos;हैंगिंग&amp;apos; संविधान के दायरे में</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-113-देशों-में-मृत्युदंड-खत्म-भारत-की-sc-ने-क्यों-कहा-हैंगिंग-संविधान-के-दायरे-में</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-113-देशों-में-मृत्युदंड-खत्म-भारत-की-sc-ने-क्यों-कहा-हैंगिंग-संविधान-के-दायरे-में</guid>
        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा देने के लिए फांसी के तरीके को खत्म करने से इनकार कर दिया है, लेकिन कहा है कि अगर नए वैज्ञानिक या मेडिकल सबूतों से पता चलता है कि किसी दूसरे तरीके से कम दर्द होता है, तो इस मामले पर फिर से विचार किया जा सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार एक एक्सपर्ट पैनल बना सकती है जो यह जांच करे कि क्या मौत की सज़ा देने का कोई दूसरा तरीका दर्द कम कर सकता है और मौत की सज़ा पाए कैदियों की गरिमा की रक्षा कर सकता है.
मौत की सज़ा के लिए फांसी के तरीके के खिलाफ याचिका क्यों दायर की गई थी?&amp;nbsp;
ANI न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह याचिका सीनियर वकील ऋषि मल्होत्रा ​​ने दायर की थी. उन्होंने उस कानून को चुनौती दी थी जिसके तहत मौत की सज़ा फांसी देकर दी जाती है. क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 354(5) में कहा गया है कि मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को &quot;तब तक गर्दन से लटकाया जाए जब तक उसकी मौत न हो जाए.&quot;
मल्होत्रा ​​की याचिका में फांसी की जगह दूसरे तरीकों, जैसे कि ज़हरीला इंजेक्शन, गोली मारना, बिजली का झटका देना या गैस चैंबर का इस्तेमाल करने की मांग की गई थी. उन्होंने तर्क दिया कि फांसी से लंबे समय तक दर्द और तकलीफ़ हो सकती है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति के गरिमा के साथ मरने के अधिकार का उल्लंघन है. यह याचिका 2017 में दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी विचार किया था कि क्या मौत की सज़ा देने के दूसरे तरीकों की जांच के लिए कोई एक्सपर्ट पैनल बनाया जाना चाहिए.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2023 में कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से फांसी देने से होने वाली तकलीफ, मौत होने में लगने वाले समय और इस तरीके से जुड़े दूसरे मुद्दों पर जानकारी इकट्ठा करने को कहा था. बाद में अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने मौत की सज़ा देने के बेहतर तरीकों की जांच के लिए एक एक्सपर्ट पैनल बनाने की सिफारिश की थी.
&amp;nbsp;सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सज़ा को खत्म करने से इनकार क्यों किया?&amp;nbsp;
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता ने फांसी के इस्तेमाल को सही ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं दिए थे. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, &quot;हमें ऐसा कोई मामला नहीं दिखा जिससे &#039;दीना&#039; मामले में तीन जजों की बेंच के फैसले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाए.&quot;&amp;nbsp;
हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि उसके फैसले का मतलब यह नहीं है कि इस मुद्दे पर कभी दोबारा विचार नहीं किया जा सकता. बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि अगर भविष्य में ठोस वैज्ञानिक, मेडिकल या अन्य सबूतों से पता चलता है कि पुराने फैसले के पीछे के तथ्य बदल गए हैं, तो इस सवाल पर विचार किया जा सकता है कि क्या फांसी देना संवैधानिक है. कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान की व्याख्या विज्ञान में आए बदलावों और नई तरक्की को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्र सरकार एक एक्सपर्ट पैनल के ज़रिए मौत की सज़ा देने के मौजूदा तरीके की विस्तृत समीक्षा कर सकती है. इस पैनल में कानून, फोरेंसिक मेडिसिन, न्यूरोसाइंस, क्रिमिनोलॉजी और अन्य संबंधित क्षेत्रों के एक्सपर्ट शामिल हो सकते हैं. पैनल यह जांच कर सकता है कि क्या मौत की सज़ा का कोई दूसरा तरीका मौत की सज़ा पाने वाले कैदियों की गरिमा की रक्षा करते हुए कम अनावश्यक दर्द देगा.
सुनवाई के दौरान, प्रोजेक्ट 39A ने भी फांसी के विकल्पों पर अपनी राय रखी. उसने कहा कि लीथल इंजेक्शन, जिसका अमेरिका में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है, खुद भी समस्याओं का सामना कर चुका है और हमेशा सफल नहीं रहा है.
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन नए वैज्ञानिक या मेडिकल सबूत मिलने पर इस मुद्दे की दोबारा जांच करने की संभावना खुली रखी. फिलहाल, मौत की सज़ा के लिए फांसी का तरीका जारी रहेगा, जबकि केंद्र सरकार यह जांचने के लिए स्वतंत्र है कि क्या कोई दूसरा तरीका कम दर्द और तकलीफ देगा.
इन देशों में दोषियों को फांसी नहीं दी जाती
यूनाइटेड किंगडम- 1965 में हत्या के मामले में फाँसी की सज़ा खत्म कर दी गई और 1998 में मौत की सज़ा को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया.कनाडा-1976 में हत्या के लिए मौत की सज़ा खत्म कर दी गई; अब फाँसी का इस्तेमाल नहीं होता है।ऑस्ट्रेलिया- आखिरी बार फांसी 1967 में दी गई थी; 1985 तक पूरे देश में मौत की सज़ा खत्म कर दी गई थी.न्यूज़ीलैंड-1989 में मौत की सज़ा के साथ-साथ फांसी की सज़ा भी खत्म कर दी गई (आखिरी बार फांसी 1957 में दी गई थी)दक्षिण अफ्रीका- संवैधानिक अदालत ने 1995 में मौत की सज़ा खत्म कर दी.फ्रांस- यहां कभी फांसी नहीं दी गई (यहां गिलोटिन का इस्तेमाल होता था) और 1981 में मौत की सज़ा खत्म कर दी गई.

वे देश जहां अभी भी फांसी दी जाती है
कुछ देशों में सज़ा-ए-मौत के तौर पर फांसी देने का तरीका अभी भी लागू है, जिनमें शामिल हैं भारत, जापान, सिंगापुर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, बोत्सवाना.
साल 2026 तक 113 देशों में मौत की सजा खत्म
दुनिया के 113 देशों ने सभी तरह के अपराधों के लिए मौत की सज़ा खत्म कर दी है. 9 देशों ने इसे सिर्फ़ आम अपराधों के लिए खत्म किया है. 23 देश असल में इसे खत्म करने की दिशा में हैं. उनके कानूनों में मौत की सज़ा का प्रावधान तो है, लेकिन उन्होंने कम से कम 10 सालों से किसी को मौत की सज़ा नहीं दी है और माना जाता है कि उनकी नीति या चलन इसे इस्तेमाल न करने का है. लगभग 50 देश अभी भी मौत की सज़ा को बनाए हुए हैं और इसका इस्तेमाल करते हैं, या उन्हें इसे बनाए रखने वाले देशों (रिटेंशनिस्ट) के तौर पर देखा जाता है. कुल मिलाकर, 145 देशों ने कानूनन मौत की सज़ा खत्म कर दी है या असल में इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं, जबकि लगभग 50 देश अभी भी इसे बनाए हुए हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सर्जियो गोर ने J&amp;amp;K पर बोला सच तो भड़का पाक, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की ओर से जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए बयान के बाद पाकिस्तान भड़क गया है. पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिका की चार्ज डी&#039;अफेयर्स नताली बेकर को तलब किया और सर्जियो गोर की जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान वहां के बारे में की गई टिप्पणियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. लेकिन इस मामले में एक्सपर्ट्स पाकिस्तान के सच को उजागर कर रहे हैं.
पूरे मामले पर रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड कैप्टन अनिल गौर ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कश्मीर के दौरे पर आए अमेरिकी राजदूत के बयान के बारे में मेरा मानना ​​है कि यह सच्चाई को दर्शाता है. अब पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान की ओर से बार-बार फैलाया जाने वाला प्रोपेगैंडा झूठा है.

Jammu, Jammu &amp;amp; Kashmir: On US Ambassador Sergio Gor&#039;s statement that Jammu and Kashmir is an integral part of India, Defence expert Cap. Anil Gour (Retd) says, &quot;Regarding the statement made by the US Ambassador who is currently on a visit to Kashmir, I feel this reflects reality.&amp;hellip; pic.twitter.com/lTtfGWM1IV
&amp;mdash; IANS (@ians_india) August 19, 2026



उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जो अशांति है और जहां से ऐसी आवाजें उठ रही हैं कि वे पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते और भारत में शामिल होना चाहते हैं- सर्जियो गोर ने इस सच्चाई की पुष्टि की है.
बहुत पहले आ जाना चाहिए था यह बयान
इस संबंध में पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के स्टेटस पर सर्जियो गोर का बयान बहुत अच्छा है और शायद बहुत पहले ही आ जाना चाहिए था. मुझे उम्मीद है कि यह भारत को प्रेसिडेंट ट्रंप के टुकड़े देने की एक और कोशिश नहीं है, जबकि मुख्य खाना कहीं और परोसा जा रहा है. अगर इस्लामाबाद में अमेरिकन एम्बेसडर इसे दोहराते हैं तो इससे भारत में इस तरह के नज़रिए के लंबे समय तक चलने वाले असर के बारे में और भरोसा बढ़ेगा.
पीओके में गरीबी और जुल्म से परेशान हैं लोग &amp;nbsp;
उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि इससे पाकिस्तान के साथ अपने गठबंधन की वजह से इस इलाके को क्रॉस-टाईज से देखने की अमेरिकन आदत भी खत्म हो जाएगी. शायद पाकिस्तान के सबसे भरोसेमंद साथी ने भी आज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जो हो रहा है, उसकी असलियत देख ली है, जहां लोग गरीबी और ज़ुल्म से परेशान हैं, क्योंकि पाकिस्तान ने हमेशा पीओके को एक कॉलोनी की तरह माना है.
अमेरिकी विदेश नीति पर भी दी प्रतिक्रिया
उन्होंने भारत-पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी विदेश नीति पर कहा कि प्रेसिडेंट ट्रंप के अंडर इस इलाके के लिए अमेरिकन पॉलिसी में सबसे जरूरी डेवलपमेंट भारत को हिंद महासागर और वेस्ट एशिया की स्टेबिलिटी और सिक्योरिटी आर्किटेक्चर से अलग करना है. यह तब साफ हुआ जब प्रेसिडेंट ट्रंप ने काफी सोच-समझकर इंडो-पैसिफिक से इंडो शब्द हटा दिया. दिल्ली में अमेरिकी एम्बेसडर ठीक से नहीं बता पाए कि ऐसा क्यों हुआ, लेकिन हम अमेरिकी पॉलिसी में इस बड़े बदलाव का मतलब समझ गए.
अपनी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा करेगा अमेरिका
वहीं, अमेरिका जम्मू-कश्मीर की यात्रा को लेकर जारी अपनी एडवाइजरी की दोबारा समीक्षा करेगा. उमर अब्दुल्ला के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में गोर ने कहा कि केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. अमेरिका समय-समय पर अपनी यात्रा संबंधी चेतावनियों की समीक्षा करता है. अभी कोई बड़ी घोषणा नहीं की जा सकती, लेकिन इस एडवाइजरी को कम करने पर विचार किया जाएगा.
अमेरिकी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर की खूबसूरती का किया जिक्र
गोर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर खूबसूरत क्षेत्र है और उन्हें लगता है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी यहां की प्राकृतिक सुंदरता और यहां मौजूद अवसरों को देखने आना चाहेंगे. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और स्थानीय सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को देखते हुए यात्रा चेतावनी में बदलाव की संभावना पर विचार किया जाएगा.
अमेरिकी राजदूत के बयान पर पाकिस्तान नाराज
इधर, पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को लेकर सर्जियो गोर के बयान पर बुधवार को अमेरिकी चार्ज डी&#039;अफेयर्स नताली बेकर को तलब किया और कड़ा विरोध दर्ज कराया. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र है और इसका अंतिम फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों तथा कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए.
अमेरिका से बयान पर आपत्ति
पाकिस्तान ने कहा कि सर्जियो गोर का बयान अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे रुख के खिलाफ है और अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना से भी मेल नहीं खाता. साथ ही, पाकिस्तान ने पिछले साल मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद कश्मीर मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश का जिक्र किया. पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा कि उसके सार्वजनिक बयान जम्मू-कश्मीर के विवादित दर्जे के अनुरूप होने चाहिए. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>मणिपुर में तीन दिन तक बंद रहेंगे स्कूल&amp;कॉलेज, जानिए क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ मणिपुर में चलते तनाव की वजह से सरकार ने तीन दिन तक स्कूल-कॉलेज बंद करने का आदेश दिया है. एजुकेशनल इंटीट्यूट 20 से 22 अगस्त तक बंद करने का फैसला लिया गया है. राज्य के कुछ हिस्सों में जनगणना से पहले एनआरसी अपडेट की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है.
जारी किया आदेश
राज्य शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया, &amp;lsquo;&amp;lsquo;राज्य में कानून और व्यवस्था की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, मणिपुर के राज्यपाल द्वारा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या अन्य से संबद्ध; सरकारी, सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त क्षेत्रों के तहत आने वाले कॉलेजों और विश्वविद्यालयों सहित सभी उच्च शिक्षा संस्थानों/स्कूलों को 20 अगस्त से 22 अगस्त तक बंद रखने की घोषणा की जाती है.&amp;rsquo;&amp;rsquo;
इस बीच, राज्य में जनगणना प्रक्रिया आयोजित करने से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को अद्यतन करने की मांग को लेकर &amp;lsquo;कैम्पेन फॉर जस्ट एंड फेयर डीलिमिटेशन&amp;rsquo; (जेएफडी) के आहूत 48 घंटे की आम हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने नेताओं के पुतले जलाए और मणिपुर के घाटी जिलों के विभिन्न हिस्सों में रैलियां निकालीं.
जेएफडी ने अपने आंदोलन के तहत बृहस्पतिवार से सभी सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का भी ऐलान किया है. इंफाल पूर्व जिले के खुरई लामलोंग में प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम के पुतले जलाए.
ये है मामलामेइतेई समूह NRC लागू करने की मांग कर रहे हैं ताकि 1951 के बाद पड़ोसी देशों से आकर मणिपुर में बसे उन लोगों की पहचान की जा सके जिनके पास कोई दस्तावेज नहीं है और जो राज्य के मूल निवासियों के लिए खतरा हैं. कूकी संगठनों ने मेइतेई लोगों पर आरोप लगाया है कि वे उन सभी को बिना दस्तावेज वाले प्रवासी बताने की कोशिश कर रहे हैं. पड़ोसी राज्य असम में, 1971 के बाद राज्य में आए बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की पहचान करने के लिए 2019 में NRC को अपडेट किया गया था.
इनपुट-भाषा
ये भी पढ़ें: अमेरिकी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर पर बोला सच, सर्जियो गोर के बयान पर क्या बोले एक्सपर्ट्स ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मणिपुर, में, तीन, दिन, तक, बंद, रहेंगे, स्कूल-कॉलेज, जानिए, क्या, है, वजह</media:keywords>
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        <title>इस्लामाबाद की कार्रवाई पर भारत का जवाब, पाक हाई कमीशन पर लिया एक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ इस्लामाबाद की कार्रवाई पर भारत का जवाब, पाक हाई कमीशन पर लिया एक्शन ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>राजीव गांधी जयंती: पीएम मोदी ने किया याद, सोनिया गांधी ने दी श्रद्धांजलि</title>
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        <description><![CDATA[ आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजवी गांधी की जयंती है. इस मौके पर उनके परिवार के साथ पीएम मोदी ने भी उन्हें याद किया. राजीव गांधी को याद करते हुए पीएम मोदी ने पोस्ट शेयर किया है. कांग्रेस लीडर सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी श्रद्धांजलि देने के लिए वीरभूमि गए थे.
&amp;nbsp;

On the occasion of his birth anniversary, paying homage to former Prime Minister of India, Shri Rajiv Gandhi.
&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) August 20, 2026


 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 10:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>13 साल की लड़की ने दादा को मौत के घाट उतारा, वीडियो कॉल पर देखा दम घुटते</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/13-साल-की-लड़की-ने-दादा-को-मौत-के-घाट-उतारा-वीडियो-कॉल-पर-देखा-दम-घुटते</link>
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        <description><![CDATA[ केरल के अलाप्पुझा में 15 अगस्त की रात एक खौफनाक वारदात सामने आई है. जिसने भी इस घटना को सुना है, वो दंग रह गया. यहां एक 13 साल की लड़की ने अपने दादा की हत्या की साजिश रची. सभी हत्यारे नाबालिग (Teenagers) हैं.
साजिशकर्ता लड़की (मृतक की पोती) ने उन हत्यारों को घर पहुंचाया. इसके बाद 67 साल के बुजुर्गों ने उन आरोपियों ने पीटा और बांधा, फिर दम घोंटकर मार डाला. यह पूरी वारदात लड़की ने वीडियो कॉल के जरिए देखी. वारदात के समय पीड़ित घर पर अकेला था.&amp;nbsp;
आरोपियों को वीडियो कॉल पर रास्ता बता रही थी लड़की
पुलिस के मुताबिक, मृतक की एक छोटी बेटी को डिलीवरी के लिए अलाप्पुझा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया गया था. उनकी पत्नी साथ गई थी और वो अपनी पोती के साथ घर पर मौजूद थे. लड़की की दोस्ती 17 साल के लड़के से थी और तीन अन्य टीनएजर्स बाथरूम के वेंटिलेंटर से घर में घुसे थे.
आरोपी लड़की वीडियो कॉल पर उन्हें रास्ता बता रही थी. इसके बाद जो हुआ, वह बहुत बेरहम था. हत्यारों ने बुजुर्ग के हाथ पैर बांध दिए. उनके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया. उनका सिर दीवार पर दे मारा. आखिरकार कपड़े से दम घोंटकर उनकी हत्या कर दी गई. अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित की पोती ने वीडियो कॉल पर हत्या को लाइव देखा.&amp;nbsp;
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में हत्या की वजह दम घुटने की सामने आई है. यहां शरीर पर कई चोटें पाई गई हैं. जांच में पता चला है कि हत्यारे लगभग 4.5 सॉवरेन सोना लेने गए थे. इसे बरामद कर लिया गया है. हत्या के बाद क्या हुआ, फिलहाल जांच का विषय है.
पड़ोसियों ने इस मामले से जुड़ी क्या जानकारी दी?&amp;nbsp;
पड़ोसियों की मानें तो लड़की के व्यवहार में किसी तरह का बदलाव नहीं आया. वो 16 अगस्त को लौटी और छोटे बच्चों के साथ चिप्स के पैकेट खरीदने के लिए दो बार पास की दुकान पर गई थी. अगली सुबह उसने लोगों को बताया कि उसके दादा दरवाजा नहीं खोल रहे हैं.
एक स्थानीय दुकानदार ने कहा है कि लड़की ने उससे कहा था कि उसे लगा कि उसके दादा ने शराब पी रखी है. वे सो रहे हैं. आखिरकार जब घर खोला गया, तो 67 साल के बुजुर्ग मृत पाए घए. दुकानदार ने बताया कि इसके बाद लड़की ने अपने स्कूल यूनिफॉर्म पहनी और जाने की तैयारी करने लगी. लड़की का कहना था कि उसका एक एग्जाम है, जिसे वो छोड़ नहीं सकती. जांच में सामने आया है कि हत्या के पीछे वजह पैसा भी था.&amp;nbsp;
लड़की कथित तौर पर मोबाइल फोन चाहती थी, और लड़का बाइक के लिए पैसे
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़की कथित तौर पर मोबाइल फोन चाहती थी. उसका दोस्त बाइक के लिए पैसे चाहता था. सूत्रों को शक है कि यह लोग ड्रग्स भी लेते थे. पुलिस उस बयान की भी जांच में जुटी है, जिसमें उसने कहा था कि वह अपने दादा जी से नाराज थी. क्योंकि उनके साथ गलत व्यवहार किया था. परिवार के बाकी सदस्यों के लिए एक खुशी के मौके पर बहुत दुखद घटना घटी है. जिस वक्त शख्स का शव पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल मोर्चरी में भेजा गया, उसी वक्त उनकी छोटी बेटी ने एक बच्ची को जन्म दिया.
सभी आरोपी नाबालिग, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड करेगा शुरुआती जांच
इधर, पूरा मामला कानूनी पेंच में फंस गया है, यहां हत्या के आरोपी नाबालिग है. पुलिस ने कहा है कि 16 से 18 साल की उम्र के आरोपियों पर बालिगों की तरह मुकदमा चलाने की कोशिश करेंगे. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत ऐसे मामलों में बालिगों की तरह मुकदमे के लिए जांच करने से पहले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ट को शुरुआती जांच करना होती है. अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है. &amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>महुआ मोइत्रा होंगी गिरफ्तार? हेट स्पीच केस में वारंट जारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/महुआ-मोइत्रा-होंगी-गिरफ्तार-हेट-स्पीच-केस-में-वारंट-जारी</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल की सियासत से बड़ी खबर सामने आई है. यहां हेट स्पीच मामले में नादिया जिले की कोर्ट के समन का अनुपालन न करने और अनदेखी करने को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर कानूनी हंटर चल गया है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी से सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ अदालत ने अरेस्ट वारंट जारी किया है. बुधवार 19 अगस्त को जारी इस आदेश के बाद से टीएमसी सांसद की मुश्किलें बढ़ गई हैं.&amp;nbsp;
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की नदिया जिले की एक अदालत ने बुधवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ अरेस्ट वारेंट जारी करने का आदेश दिया. उनपर यह आदेश कथित हेट स्पीच मामले में अदालत में पेश होने के निर्देश का पालन न करने पर दिया गया है.&amp;nbsp;
कृष्णानगर अदालत ने निर्देश दिया कि मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट पर अमल की रिपोर्ट 28 अगस्त को अदालत में पेश की जाए. &amp;nbsp;इसके अलावा मोइत्रा के खिलाफ के महिलाओं का अपमान करने और हेट स्पीच देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद अदालत ने पूरे मामले में समन जारी किया था.
समन भेजे जाने के बाद भी टीएमसी सांसद पेश न हुईं: अदालत
अदालत की तरफ से बार-बार समन भेजे जाने के बाद बावजूद टीएमसी सांसद पेश न हुईं. इसके तुरंत बाद कृष्णानगर अदालत के तीसरे न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मोइत्रा के खिलाफ तुरंत गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया. जज ने मंगलवार को टीएमसी सांसद को अगले दिन अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था. लेकिन वे पेश नहीं हुई.&amp;nbsp;
अदालत ने अपने आदेश में कहा है, &#039;अदालत के आदेश की लगातार अनदेखी, आरोपी का अदालत के आदेश का पालन करने के प्रति लापरवाह रवैया दिखाता है और इसलिए अदालत के पास उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है.&amp;nbsp;
जज ने अपने आदेश में कहा है कि मोइत्रा की ओर से पेश वकील ने कहा है कि वे किसी भी समय अदालत में पेश नहीं होंगी. इससे यह पता चलता है कि उन्हें अदालत के प्रति कोई सम्मान नहीं है. सांसद के वकील ने अदालत के सामने आशंका जताई है कि अगर वे पेश होती हैं, तो अदालत परिसर के बाहर उनके साथ बदसलूकी हो सकती है.&amp;nbsp;
महुआ के खिलाफ इन धाराओं के तहत मामला दर्ज
कृष्णानगर जिले की पुलिस के सीनियर अधिकारी ने बताया कि उनके खिलाफ धारा 79 (महिला की गरिमा का अपमान), धारा 196 (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 299 (धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना), 351 (आपराधिक धमकी), और 353 (2) (हेट स्पीच) के तहत शिकायत दर्ज की गई थी.&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>क्या चीन अरुणाचल प्रदेश में 60 KM अंदर घुसा? अब आया भारत सरकार का जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीनी घुसपैठ के दावों को बुधवार (19 अगस्त) को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, &#039;&#039;जो लोग कहते हैं कि चीन 60 किमी अंदर आ गया है, हमें बदनाम करने के लिए तरह-तरह के वीडियो शेयर करते हैं, वे गलत हैं.&#039;&#039;
रिजिजू ने साथ ही न्यूज एजेंसी IANS से कहा कि सीमा पर समस्या है. अरुणाचल प्रदेश के गांवों के कुछ लोगों ने सीमा की समस्या के बारे में चिंता जाहिर की है. यह चिंता जायज है. सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है.

India-China Border issue is a serious subject. Do not make false claim on such sensitive matter. We don&#039;t want to repeat the past mistakes. Govt will address the concern of the local people and protect Indian Territory. pic.twitter.com/AZXTMUlujm
&amp;mdash; Kiren Rijiju (@KirenRijiju) August 19, 2026



कुछ जमीनों पर उनकी नजर है, क्योंकि सीमांकन नहीं हुआ: रिजिजू
रिजिजू ने कहा, &#039;इस स्थिति का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि चीन ने किसी भारतीय गांव पर कब्जा कर लिया है. उन्होंने बताया कि सीमांकन न होने के कारण चीन कुछ इलाकों पर अपना दावा करता है. तो, ऐसा नहीं है कि वे (चीन) आए और हमारे गांव पर कब्जा कर लिया. ऐसा नहीं है. कुछ जमीनों पर उनकी नजर है क्योंकि वहां सीमांकन नहीं हुआ है.&#039;
केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री रिजिजू ने कहा, &#039;हमारी जमीन आगे तक है. चीन की तरफ बसे गांवों के लोग, जिनमें तिब्बती और स्थानीय लोग शामिल हैं, दावा करते हैं कि उनकी जमीन यहां काफी अंदर तक है. इसलिए भ्रम की स्थिति है. ऐसे झूठ बोलना कि वे 60 किमी अंदर आ गए हैं. बांग्लादेश या अन्य जगहों की ऐसी तस्वीरें पोस्ट करना, जिनका इससे कोई लेना देना नहीं है, सिर्फ यह दावा करने के लिए चीनी सेना अरुणाचल में 60 किमी अंदर घुस गई है. ऐसी गलत जानकारी फैलाने से वहां तैनात हमारे सेना के जवानों और सुरक्षा बलों का मनोबल गिरता है. देश में भ्रम पैदा होता है. यह सही नहीं है.&#039;&amp;nbsp;
भारत ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है: रिजिजू
उन्होंने कहा, &#039;भारत ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है. सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है. रिजिजू का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शों पर मानक नामों से पहचाने का फैसला किया है.&#039;&amp;nbsp;
यह कदम अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए चीन की तरफ से बार-बार अपने नाम रखने की कोशिशों के बाद उठाया गया है. भारत ने बार-बार इस पर जोर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है. विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि व्यापक भारत-चीन रिश्तों के लिए लाइन ऑफ कंट्रोल पर शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है.
सीमा पर हालात का असर दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा: भारत सरकार
भारत ने कहा है कि सीमा पर हालात का असर दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा है कि कई बार दोरहाना चाहता हूं कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है. यह एक ऐसा तथ्य है, जो स्वत: स्पष्ट है. मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि कोई भी चीज इस निर्विवाद वास्तविकता को बदल नहीं सकती.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वायु सेना का हुआ था इस्तेमाल…, किरेन रिजिजू का राहुल के आरोपों पर करारा पलटवार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वायु-सेना-का-हुआ-था-इस्तेमाल-किरेन-रिजिजू-का-राहुल-के-आरोपों-पर-करारा-पलटवार</link>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर आक्रामक रुख अपनाने वाले राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्र सरकार की तरफ से करारा पलटवार किया गया है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस शासन के दौरान मिजोरम में लोगों के खिलाफ वायुसेना के इस्तेमाल की याद दिलाई.
रिजिजू ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &amp;lsquo;एक्स&amp;rsquo; पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा और उनकी जिंदगी इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्रों के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की तरफ से इसका फायदा उठाने की कोशिशों के बावजूद किसी की जान नहीं गई.
रिजिजू का राहुल गांधी पर पलटवार
उन्होंने आगे तेलंगाना आंदोलन (1969) का जिक्र करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में हुए इस आंदोलन के दौरान ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार 369 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से अधिकांश छात्र पुलिस गोलीबारी में मारे गए थे. इसके साथ ही उन्होंने तुर्कमान गेट विध्वंस और पुलिस फायरिंग (1976) का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में आपातकाल के दौरान यह एक बड़ा टकराव था.
इसमें मृतकों की संख्या को लेकर विवाद है. पुलिस ने छह मौतों की बात स्वीकार की थी, जबकि गोलीबारी का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारी के हवाले से दिए गए बयानों सहित अन्य रिपोर्टों में यह संख्या 20 या उससे अधिक बताई गई है.
इसके अलावा, रिजिजू ने मुजफ्फरनगर नसबंदी विरोधी गोलीबारी (1976) का भी जिक्र किया. 18 अक्टूबर 1976 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जबरन नसबंदी अभियान के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए थे, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दी थीं. विभिन्न ऐतिहासिक वृत्तांतों में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने का उल्लेख मिलता है. कुछ स्रोतों में यह संख्या करीब 50 बताई गई है.
मोगा आंदोलन का जिक्र
रिजिजू ने 1972 में हुए पंजाब के मोगा आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि सिनेमा टिकटों की कथित कालाबाजारी को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन बाद में झड़पों में बदल गया. पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें छात्रों और राहगीरों सहित चार लोगों की जान चली गई. उन्होंने गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन (1973-74) का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह छात्रों के नेतृत्व में हुआ एक बड़ा आंदोलन था. इसके ऐतिहासिक ब्योरों में कुल 103 मौतों का उल्लेख है, जिनमें से 88 मौतें पुलिस गोलीबारी के कारण हुई थीं.
इसके अलावा, मध्य प्रदेश के मुलताई किसान आंदोलन (1998) का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर गोलीबारी की. शुरुआती रिपोर्टों में 17 मौतों की बात कही गई थी, जबकि बाद के आंकड़ों में मृतक किसानों की अंतिम संख्या 24 बताई गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे.
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान पुलिस गोलीबारी की ऐसी और भी कई घटनाएं हुई हैं. उन्होंने कहा कि ये उन प्रमुख आंदोलनों का ब्योरा हैं, जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और पुलिस कार्रवाई में लोगों की मौत हुई थी. इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि हमारी सरकार ने सभी आंदोलनों के दौरान हमेशा अत्यधिक संयम बरता है.
ये भी पढ़ें: क्या चीन अरुणाचल प्रदेश में 60 KM अंदर घुसा? अब आया भारत सरकार का जवाब ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वायु, सेना, का, हुआ, था, इस्तेमाल…, किरेन, रिजिजू, का, राहुल, के, आरोपों, पर, करारा, पलटवार</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: &amp;apos;कश्मीर भारत का हिस्सा&amp;apos;, US एम्बेसडर सर्जियो के बयान से इंडिया के लिए क्या मायने?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-कश्मीर-भारत-का-हिस्सा-us-एम्बेसडर-सर्जियो-के-बयान-से-इंडिया-के-लिए-क्या-मायने</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-कश्मीर-भारत-का-हिस्सा-us-एम्बेसडर-सर्जियो-के-बयान-से-इंडिया-के-लिए-क्या-मायने</guid>
        <description><![CDATA[ भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 19 अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर के अपने पहले दौरे के दौरान एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे साउथ एशिया की राजनीति को हिलाकर रख दिया. श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने कहा, &#039;यह भारत का एक अहम हिस्सा है.&#039; यह बयान ऐसे समय आया है जब &amp;nbsp;पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में सेना के खिलाफ अभियान तेज हैं. यह संयोग नहीं, बल्कि एक नई अमेरिकी नीति का संकेत है. तो आखिर इस बयान का भारत और दुनिया के स्तर पर क्या महत्व है और पाकिस्तान पर क्या फर्क पड़ेगा...
15 साल बाद अमेरिकी राजदूत का कश्मीर दौरा
सर्जियो गोर सिर्फ भारत में अमेरिकी राजदूत नहीं हैं. वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत भी हैं. जनवरी 2026 में पद संभालने के बाद कश्मीर का यह उनका पहला दौरा है. पिछले 15 सालों में कोई अमेरिकी राजदूत कश्मीर नहीं गया था.
यह दौरा अपने आप में एक बड़ा राजनयिक बदलाव है. खास बात यह है कि गोर ने सिर्फ श्रीनगर ही नहीं, बल्कि लद्दाख का भी दौरा किया. यह भारत का केंद्र शासित प्रदेश है और चीन-भारत सीमा विवाद का अहम हिस्सा है.
सर्जियो गोर के बयान के राजनीतिक मायने क्या हैं?
गोर का बयान, &#039;यह भारत का एक अहम हिस्सा है&#039; शब्दों में छोटा है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं.
पिछले कुछ दशकों में अमेरिका ने कश्मीर मुद्दे पर हमेशा एक &#039;मध्यस्थ&#039; या &#039;तटस्थ&#039; रुख अपनाया था. 1990 के दशक में अमेरिकी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा तो किया, लेकिन उन्होंने कभी इतने स्पष्ट शब्दों में कश्मीर को &amp;nbsp; &#039;भारत का हिस्सा&#039; नहीं कहा था.
विदेश मामलों के जानकार और JNU के प्रोफेसर डॉ. राजन कुमार कहते हैं, &#039;गोर का यह बयान वाशिंगटन के जुड़ाव के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है. यानी अमेरिका अब कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है.&#039;
यह बयान ऐसे समय आया है जब अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त हो चुका है. वहां विकास और आतंकवाद पर कंट्रोल बढ़ा है.
अमेरिकी यात्रा चेतावनी में ढील
गोर ने एक और बड़ा संकेत दिया, &#039;अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए अपनी यात्रा चेतावनी (Travel Advisory) की समीक्षा करेगा.&#039;
अभी अमेरिकी विदेश विभाग जम्मू-कश्मीर (पूर्वी लद्दाख और लेह को छोड़कर) के लिए लेवल 4 &#039;Do not travel&#039; चेतावनी जारी करता है, जो सबसे गंभीर कैटेगरी है. यह चेतावनी आतंकवाद और नागरिक अशांति का हवाला देती है. श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों को भी इसके दायरे में रखती है.
गोर ने कहा, &#039;हम यह देखेंगे कि जो यात्रा चेतावनी लागू है, क्या उसे नीचे किया जाना चाहिए.&#039; उन्होंने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार की सुरक्षा सुधारों की सराहना करते हुए कहा, &#039;नई दिल्ली, यहां के मुख्यमंत्री, यहां की सरकार ने इस क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए अविश्वसनीय कदम उठाए हैं.&#039;
दरअसल, अमेरिकी यात्रा चेतावनी का सीधा असर पर्यटन, निवेश और अंतरराष्ट्रीय सोच पर पड़ता है. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी गोर से इस चेतावनी को वापस लेने की अपील की थी. इसे &#039;कश्मीर और दुनिया के बीच दीवार&#039; बताते हुए.
गोर ने कहा कि अगर चेतावनी में ढील आती है, तो &#039;बहुत से अमेरिकी यहां आने और यहां की सुंदरता को देखने का आनंद लेंगे.&#039;
PoK में पाकिस्तानी नरसंहार के बीच बयान कितना अहम?
गोर का यह दौरा और बयान ऐसे वक्त आया है, जब PoK में हालात बेहद खराब हैं. जून 2026 से PoK में स्थानीय लोग बिजली, महंगाई, बेरोजगारी और अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं. पाकिस्तानी सेना ने इस विरोध को गोलियों से कुचलने की कोशिश की.
भारत के विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 को कहा कि कम से कम 90 नागरिक पाकिस्तानी बलों की बर्बरता में मारे गए हैं. MEA के प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इन अत्याचारों के लिए जिम्मेदार ठहराने की अपील की. PoK में 50 से ज्यादा लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए. ज्यादातर पीड़ित 15-16 से 32-35 साल के युवा हैं.
लंदन में हजारों लोगों ने &#039;PoK में नरसंहार बंद करो&#039; के नारे लगाए. भारत ने PoK में हुए चुनावों को &#039;पूरी तरह से दिखावा&#039; करार दिया.
राजन कुमार का मानना है कि ऐसे हालात में जब अमेरिकी राजदूत खुद कश्मीर आकर उसे &#039;भारत का अहम हिस्सा&#039; कहते हैं, तो अमेरिका भारत के कश्मीर दावे को मान्यता दे रहा है. पाकिस्तान के PoK पर कब्जे को नजरअंदाज कर रहा है.
भारत में राष्ट्रीय स्तर पर बयान कितना अहम है?
डॉ. राजन कुमार के मुताबिक,
1. पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा
जब अमेरिकी राजदूत कश्मीर को &#039;भारत का अहम हिस्सा&#039; कहता है, तो PoK पर पाकिस्तान के दावे की वैधता कमजोर पड़ जाती है. खासकर जब PoK में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और नरसंहार की खबरें दुनिया भर में फैल रही हैं. यह बयान पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में मददगार साबित होगा.
2. कश्मीर पर भारत की स्थिति को मान्यता
यह बयान कश्मीर को लेकर अमेरिकी रुख में एक स्पष्ट और ऐतिहासिक बदलाव है. पिछले तीन दशकों में अमेरिकी राजदूतों ने कश्मीर का दौरा तो किया, लेकिन कभी इतने स्पष्ट शब्दों में कश्मीर को &#039;भारत का हिस्सा&#039; नहीं कहा. जब दुनिया का सबसे ताकतवर देश खुले तौर पर कश्मीर को भारत का हिस्सा मान रहा है, तो यह भारत की कूटनीति के लिए कोई आम जीत नहीं है. यह अंतरराष्ट्रीय कानून और जनमत के स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करता है.
3. अनुच्छेद 370 फैसले को अमेरिका की चुप्पी नहीं
2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अमेरिका ने इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया था. लेकिन गोर का यह दौरा और बयान संकेत देता है कि वाशिंगटन ने इस फैसले को मान लिया है. अब कश्मीर को भारत के आंतरिक मामले के रूप में देखता है. बीजेपी प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इसे &#039;बहुत ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, कश्मीर, भारत, का, हिस्सा, एम्बेसडर, सर्जियो, के, बयान, से, इंडिया, के, लिए, क्या, मायने</media:keywords>
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        <title>US राजदूत गोर का पहला J&amp;amp;K&amp;लद्दाख दौरा, जानें क्यों है इस पर पाक&amp;चीन की नजर!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/us-राजदूत-गोर-का-पहला-jk-लद्दाख-दौरा-जानें-क्यों-है-इस-पर-पाक-चीन-की-नजर</link>
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        <description><![CDATA[ भारत में अमेरिका के राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया के लिए वाशिंगटन के विशेष दूत, सर्जियो गोर बुधवार (19 अगस्त) को श्रीनगर पहुंचेंगे. यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का उनका पहला हाई-लेवल राजनयिक दौरा होगा.&amp;nbsp;तुर्की-सऊदी रक्षा समझौते और इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण उनके इस दौरे को लेकर कई तरह की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, क्योंकि वे दक्षिण और मध्य एशिया के लिए वाशिंगटन के विशेष दूत भी हैं.
उपराज्यपाल-सीएम संग हो सकती है बैठक
सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान उनके उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कुछ अन्य अधिकारियों के साथ बैठकें करने की संभावना है. आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि 14 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना परिचय पत्र सौंपकर भारत में 27वें अमेरिकी राजदूत के तौर पर औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने के बाद गोर का यह जम्मू-कश्मीर का पहला दौरा है.
गोर का दौरा क्यों अहम?
राजदूत के बुधवार दोपहर श्रीनगर पहुंचने और गुरुवार को लद्दाख के लिए रवाना होने की उम्मीद है. दोनों देशों की मौजूदा सरकारों के बीच भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के और मजबूत होने के संदर्भ में भी यह दौरा महत्वपूर्ण है. नई दिल्ली में कार्यभार संभालने के बाद से, गोर ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों, आतंकवाद-रोधी और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने जैसे मुद्दों पर भारतीय नेतृत्व के साथ व्यापक बातचीत की है. उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें की हैं.
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ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे गोर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे गोर इससे पहले व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के सहायक और &#039;प्रेसिडेंशियल पर्सनल&#039; (राष्ट्रपति के स्टाफ मामलों) के निदेशक के तौर पर काम कर चुके हैं. इससे पहले, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ मिलकर एक पब्लिशिंग हाउस की शुरुआत की थी और उन्हें अमेरिकी राजनीति व विधायी मामलों का लंबा अनुभव है. श्रीनगर में राजदूत की आवाजाही के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की उम्मीद है.
शिक्षा मंत्री ने लगाई लताड़ तो एक्शन में आया NTA, उठाए ये बड़े कदम ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>CBI सीएम से जुड़े केस में जांच कर सकती है? जानें SC ने क्या कहा</title>
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        <description><![CDATA[ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (18 अगस्त, 2026) को सुप्रीम कोर्ट से यह तय करने का अनुरोध किया कि अगर कोई अपराध किसी पद पर बैठे मुख्यमंत्री की तरफ से किया जाता है, तो क्या केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) उसकी जांच कर सकता है या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की दो जजों की बेंच ईडी की तरफ से दाखिल की गई उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि 8 जनवरी, 2026 को कोलकाता में पॉलिटिकल कसंल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस में छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी और राज्य के अन्य अधिकारियों ने जांच में बाधा डाली थी.
सुनवाई के दौरान कोर्ट में ममता बनर्जी के वकील ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की सुनवाई की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अब राज्य में सरकार बदल चुकी है, इसलिए सैंक्शन की मंजूरी और मामले को स्थानीय पुलिस को ट्रांसफर करने का अनुरोध राज्य सरकार की तरफ से किया जा सकता है और इस मामले में अब कुछ बाकी नहीं है.
इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि बंगाल की सत्ता में हुए बदलाव के बाद अब कुछ बाकी नहीं रह गया है और ईडी की जांच को सीबीआई को ट्रांसफर करने के अनुरोध को स्वीकार करके मामले का निपटारा किया जा सकता है.&amp;nbsp;

ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने क्या दी दलील?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि इस बड़े मुद्दे पर फैसला किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;हम नहीं चाहते हैं कि हम पर यह आरोप लगे कि राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों की वजह से ऐसा किया है. हम सही हैं या गलत, मैं चाहता हूं कि अदालत इस पर फैसला करे. मैं इस स्थिति में नहीं फंसना चाहता हूं कि सरकार बदलने के बाद राज्य ने मामले को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया.&amp;rsquo;
इसके बाद अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी. राजू ने अदालत में दलील दी कि कोर्ट को यह तय करना चाहिए कि अगर कोई अपराध किसी पदासीन मुख्यमंत्री की तरफ से किया जाता है, तो क्या सीबीआई उस मामले की तहकीकात कर सकती है. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;अगर कोई पदासीन सीएम, जो गृह मंत्री भी हैं और वो अपराध करती हैं, तो क्या ऐसे मामले में जांच सीबीआई को करना सही है या नहीं?&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः शिक्षा मंत्री ने लगाई लताड़ तो एक्शन में आया NTA, उठाए ये बड़े कदम ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>PM केयर्स फंड में गिरावट, ऑडिट रिपोर्ट्स से सामने आयी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान &amp;lsquo;पीएम केयर्स&amp;rsquo; को मिलने वाले घरेलू चंदे में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी और यह 479 करोड़ रुपये रह गया, जबकि विदेशी चंदा 18 प्रतिशत गिरावट के साथ 92.8 लाख रुपये हो गया. &amp;lsquo;पीएम केयर्स फंड&amp;rsquo; की ऑडिट रिपोर्ट में यह जानकारी दी &amp;nbsp;गयी है. &amp;lsquo;पीएम केयर्स फंड&amp;rsquo; (प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन राहत कोष) में 31 मार्च 2025 को कुल 8,452 करोड़ रुपये थे, जबकि एक साल पहले यह राशि 7,173 करोड़ रुपये थी.
रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से 7,846 करोड़ रुपये सावधि जमा में और 605 करोड़ रुपये बचत खाता में रखे गए थे. वित्त वर्ष 2023-24 में &amp;lsquo;पीएम केयर्स&amp;rsquo; कोष को मिला घरेलू चंदा 681.8 करोड़ रुपये था, जबकि उसे कुल 1.13 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा मिला था. इस कोष ने 2024-25 के दौरान &amp;lsquo;पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन स्कीम&amp;rsquo; पर 87.8 लाख रुपये खर्च किये हैं, जो इससे एक साल पहले के 15.37 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है. &amp;nbsp;
वर्ष 2024-25 के दौरान कुल भुगतान 87.85 लाख रुपये था, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 15.6 करोड़ रुपये का था. &amp;lsquo;पीएम केयर्स&amp;rsquo; की ऑडिट रिपोर्ट के अध्ययन से पता चलता है कि स्वैच्छिक घरेलू चंदा 2020-21 में सबसे ज्यादा 7,184 करोड़ रुपये था, जो 2021-22 में घटकर 1,896 करोड़ रुपये हो गया और 2022-23 में और अधिक घटकर 909 करोड़ रुपये रह गया.
रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी चंदे में तेजी से गिरावट आई है. वित्त वर्ष 2020-21 में यह 495 करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर था, लेकिन अगले दो वर्षों में गिरकर क्रमशः 40 करोड़ रुपये और 2.57 करोड़ रुपये रह गया. अब विदेशी योगदान 92.8 लाख रुपये है, जो 2019-20 के पहले वर्ष में दर्ज 39.7 लाख रुपये के बाद दूसरा सबसे निचला स्तर है. &amp;nbsp;
पीएम मोदी सरकार ने पीएम केयर्स फंड की स्थापना मुख्य रूप से किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति (जैसे कोविड महामारी) से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से की थी. इसे एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया गया था. &amp;nbsp;प्रधानमंत्री इस कोष के पदेन अध्यक्ष होते हैं; यह कोष पूरी तरह से स्वैच्छिक चंदे से चलता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>केयर्स, फंड, में, गिरावट, ऑडिट, रिपोर्ट्स, से, सामने, आयी, जानकारी</media:keywords>
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        <title>असम कैबिनेट के 9 बड़े फैसले, बाल संरक्षण नीति को मिली मंजूरी</title>
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        <description><![CDATA[ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार (18 अगस्त, 2026) को राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए कई अहम फैसलों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि असम के मंत्रिमंडल ने युवाओं की शिक्षा, विकास और सुरक्षा, इंडस्ट्रियल सेक्टर, मजदूरों के कल्याण से लेकर राज्य में हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा देने के मुद्दों पर गंभीर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं.
उन्होंने कैबिनेट मीटिंग के बाद गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, &amp;lsquo;हमने सरकार चलाई है और पिछले 10 सालों में हमारी ज्यादातर योजनाएं युवाओं पर केंद्रित रहे हैं. यही वजह है कि युवाओं ने इस सरकार को पूरे दिल से समर्थन देते हुए अपना वोट दिया है. हमारी निजुत मोइया योजना, निजुत बाबू योजना, खेल महारण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मुख्यमंत्री ट्रिपल-ए योजना जैसी अगर असम सरकार की 10 योजनाएं है, तो उनमें से नौ युवाओं के लिए समर्पित है.&amp;rsquo;
असम कैबिनेट ने लिए कौन-कौन से 9 अहम फैसले?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि हमारी सरकार ने जो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, उनमें-

हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा देना 

उन्होंने बताया कि असम कैबिनेट ने असम हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन, प्रोडक्शन एंड अपस्ट्रीम इकोसिस्टम डेवलपमेंट पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दी. इस नीति का मकसद असम में हाइड्रोकार्बन के एक्सप्लोरेशन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है.

कोचिंग संस्थानों के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करना

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, &amp;lsquo;कैबिनेट ने असम प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट्स (कंट्रोल एंड स्टूडेंट मेंटल हेल्थ सेफगार्ड) रूल्स, 2026 को लागू करने को मंजूरी दी. इसमें 50 या उससे ज्यादा छात्रों वाले हर एक कोचिंग संस्थान को डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के पास अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. संस्थानों में SC, ST, OBC और EWS, दिव्यांग, LGBTQ+ छात्रों और ट्रॉमा, वियोग या आत्महत्या करने की कोशिश कर चुके छात्रों के लिए एक संवेदनशील और भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना होगा.

युवा सशक्तिकरण और विकास विभाग का गठन

उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने युवा सशक्तिकरण और विकास विभाग के गठन को मंजूरी दी है. यह विभाग युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, करियर गाइडेंस, उद्यमिता (Entrepreneurship), लीडरशिप डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े विभिन्न योजनाओं के समन्वय पर ध्यान देगा.

Following decisions have been approved in today&#039;s meeting of the #AssamCabinet✅ Legal framework for Private coaching institutes✅8 new Co-Districts and Youth Empowerment and Development Dept✅Hydrocarbon Exploration Policy✅Digital registration of Dairy Co-op societies pic.twitter.com/UmSmFn97Tp
&amp;mdash; Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) August 18, 2026


बराक वैली स्थित मिनी सेक्रेटेरियट के नाम बदलना.

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, &amp;lsquo;कैबिनेट ने मिनी सचिवालय, बराक वैली का नाम बदलकर असम सचिवालय, बराक वैली, सिलचर करने को मंजूरी दी है. इस सचिवालय में 32 प्रमुख और महत्वपूर्ण विभागों को संचालन को शामिल किया जाएगा.

डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटीज को मजबूत करना.

उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने असम में डेयरी कोऑपरेटि सोसायटीज के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, आसान और तेज करने को मंजूरी दी. इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा, जिससे बिजनेस करना आसान होगा और मिल्क कोऑपरेटिव सोसायटीज के मैनेजमेंट को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा.

8 नए सह-जिलों का संचालन.

उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने राज्य में 8 नए सह-जिलों को संचालित करने की मंजूरी दी है. इन आठ सह-जिलों में कमलपुर, बरहामपुर, रंगानदी, सिसिबोरगांव, चबुआ-लाहोवाल, खुमताई, कातिगोड़ा और बोर्खोला का नाम शामिल है.&amp;nbsp;

Coaching centres should help students succeed, not become centres of pressure.#AssamCabinet has approved legal safeguards to ensure they operate with students&amp;rsquo; well being at the forefront. pic.twitter.com/UIsrBEtHqf
&amp;mdash; Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) August 18, 2026


बाल संरक्षण नीतियों का क्रियान्वयन.

सरमा ने बताया कि कैबिनेट ने असम स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दी है. इसके साथ ही, असम जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) रूल्स, 2026 को भी मंजूरी दी गई है. इनसे जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 और पॉक्सो रूल्स, 2020 को प्रभावी रूप से लागू करने में मदद मिलेगी.

इंडस्ट्रियल और मजदूर कल्याण को मजबूत करना.

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने असम इंडस्ट्रियल रिलेशंस रूल्स, 2026 के नोटिफिकेशन को मंजूरी दी है. यह नया नियम तीन पुराने कोलोनियल और आजादी के बाद के बनाए गए नियमों की जगह लेगा. इसके साथ ही, कैबिनेट ने असम सोशल सिक्योरिटी रूल्स, 2026 को भी मंजूरी दी, जिसे सेंट्रल कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के तहत तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य असम के मजदूर इकोसिस्टम को ज्यादा प्रभावी और वर्कर-सेंट्रिक बनाना है.

असम को शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करना.

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने गुवाहाटी स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) और अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के स्थायी परिसरों के निर्माण के लिए जमीन के ट्रांसफर और अलॉटमेंट को मंजूरी दी.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>असम, कैबिनेट, के, बड़े, फैसले, बाल, संरक्षण, नीति, को, मिली, मंजूरी</media:keywords>
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        <title>भारत में बनेंगे डिफेंस से जुड़े 405 उपकरण, 3070 करोड़ होंगे खर्च</title>
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        <description><![CDATA[ &amp;lsquo;आत्मनिर्भर भारत&amp;rsquo; और &amp;lsquo;मेक इन इंडिया&amp;rsquo; अभियान के तहत भारत का डिफेंस सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले रक्षा उत्पादन विभाग ने 405 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा सामानों की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की है. इन 405 सामानों का अनुमानित कीमत करीब 3,070 करोड़ रुपये है.
इन 405 सामानों में हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान, बख्तरबंद प्लेटफॉर्म से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण, मिसाइल और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स, तटरक्षक बल और रक्षा उपक्रमों की वस्तुएं शामिल हैं. इन सभी सामानों का अब देश में ही विकास और निर्माण किया जाएगा. इस नियमित विकास से आने वाले समय में भारत में बनने वाले इन हथियारों और तकनीकों के आयात पर निर्भरता कम होगी.
कौन-कौन से हथियार और तकनीक का होगा स्वदेशी निर्माण?
आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी नई सूची में 16 वस्तुएं भारतीय तटरक्षक बल और 389 वस्तुएं रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जुड़ी हैं. यह सूची काफी व्यापक है. इसमें अलग-अलग हथियार प्रणालियों और रक्षा प्लेटफॉर्म में इस्तेमाल होने वाले कल-पुर्जे, उप-प्रणालियां, उप-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, घटक और कच्चा माल शामिल है.
इस सूची में सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण इक्विपमेंट्स शामिल हैं. एयर प्लेटफॉर्म में एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, सुखोई-30 MKI, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, AL-31FP इंजन से जुड़े उत्पाद शामिल हैं. वहीं, बख्तरबंद प्लेटफॉर्म के लिए टी-72, टी-90 और BMP-2 से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण भी सूची में रखे गए हैं.&amp;nbsp;

भारत के डिफेंस सेक्टर को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद
केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण मिसाइल सिस्टम्स से जुड़े सामानों को भी स्वदेशी तौर पर बनाने का फैसला किया है. इनमें कोंकर्स-M, INWAR और MRSAM से संबंधित वस्तुएं शामिल हैं. इसके अलावा, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी कई अहम सामानों का स्वदेशीकरण किया जाएगा. इनमें रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेश सिस्टम शामिल हैं. हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक गोला-बारूद और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण भी इस सूची का हिस्सा हैं. सरकार के इस कदम से भारत के डिफेंस बिजनेस को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है. स्वदेशी विकास सफल होने के बाद इन उत्पादों की खरीद भारतीय उद्योग से ही की जाएगी.
यह भी पढ़ेंः &amp;lsquo;पति को खोया&amp;rsquo;, चिदंबरम के दिमागी नक्सल वाले बयान पर भड़कीं शहीद की पत्नी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, में, बनेंगे, डिफेंस, से, जुड़े, 405, उपकरण, 3070, करोड़, होंगे, खर्च</media:keywords>
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        <title>सिवान में पुलिस ने छात्रों पर क्यों चलाई थी AK&amp;47? सरकार ने SC में बताया</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार सरकार ने भी छात्र प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. बिहार सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है.
हलफनामे में बताया गया ये
सिवान में एक कांस्टेबल भीड़ में फंस गया था, इसलिए उसने AK-47 से हवा में 4 गोलियां चलाईं. इससे किसी को नुकसान नहीं पहुंचा. हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ हटाने के लिए 9mm पिस्टल से दो गोलियां चलाईं, जिससे 3 प्रदर्शनकारियों को मामूली चोट आई. जिन 3 लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है, वह AK-47 की गोली से घायल नहीं हुए थे. AK-47 चलाने वाले कांस्टेबल को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसा, पत्थरबाजी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया.&amp;nbsp; पूरे राज्य में 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए. छपरा में दो BDO समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए. 22 से 25 जुलाई के बीच 69 FIR दर्ज हुईं और 500 लोग गिरफ्तार हुए.
&amp;nbsp;सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 छात्रों को जमानत पर छोड़ा गया, जबकि 75 नाबालिगों को रिहा किया गया.&amp;nbsp; छात्रों और प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं.
राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त डीजीपी को दिए गए हैं. प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है. सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है. देशभर में छात्रों के प्रदर्शन में हुई पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.
इनपुट-आईएएनएस
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सिवान, में, पुलिस, ने, छात्रों, पर, क्यों, चलाई, थी, AK-47, सरकार, ने, में, बताया</media:keywords>
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        <title>सर्किट हाउस खाली कराने पर भड़की महुआ मोइत्रा, ओम बिरला को नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में देर रात सर्किट हाउस खाली कराने के मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष विशेषाधिकार नोटिस दिया है. मोइत्रा ने नदिया जिले के तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रोटोकॉल के गंभीर उल्लंघन और कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उनके संसदीय दायित्वों को निभाने से रोकने के लिए किए जा रहे एक बड़े प्रयास का हिस्सा है. सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से अपने संवैधानिक दायित्वों को बिना किसी डर, दबाव या उत्पीड़न के निभाने के लिए संरक्षण देने की मांग की है.
तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने 16 अगस्त को लोकसभा के नियम 222 के तहत यह नोटिस भेजा. इसमें उन्होंने नदिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पाली, अतिरिक्त जिलाधिकारी निरपेंद्र सिंह और नाजरेथ डिप्टी कलेक्टर अनामिका बेरा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. मोइत्रा का आरोप है कि 14 अगस्त की देर रात उन्हें नदिया सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा गया, जबकि वह अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर थीं. उन्होंने इसे संसदीय प्रोटोकॉल और सांसद के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है.
14 अगस्त को शाम 6:15 बजे पहुंची थीं सर्किट हाउस
अपने नोटिस में महुआ मोइत्रा ने बताया कि मानसून सत्र खत्म होने से पहले 13 अगस्त को ही उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पश्चिम बंगाल में अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे की जानकारी दी थी. साथ ही उन्होंने किसी भी तरह के उत्पीड़न या अपने काम में बाधा से सुरक्षा की मांग की थी. मोइत्रा के मुताबिक, वह 14 अगस्त को शाम करीब 6:15 बजे नदिया सर्किट हाउस पहुंचीं. यह जिला मुख्यालय आने वाले सांसदों के लिए आधिकारिक आवास है. उन्होंने बताया कि उन्हें उनका सामान्य कमरा दिया गया था, जिसे उनके लिए तैयार किया गया था. सांसद के अनुसार, शाम करीब 7 बजे उनके कमरे में चाय परोसी गई और रात 9:20 बजे कमरे में ही उन्हें खाना दिया गया.
रात 9:47 बजे कमरा खाली करने का फोन आया
महुआ मोइत्रा ने बताया कि रात 9:47 बजे नदिया के अतिरिक्त जिलाधिकारी का फोन आया और उनसे सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा गया. जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो कथित तौर पर अधिकारी ने कहा कि यह आदेश &quot;ऊपर से आया है&quot; और जिलाधिकारी का हवाला दिया.
इसके बाद रात 10:52 बजे नाजरेथ डिप्टी कलेक्टर की ओर से उन्हें व्हाट्सऐप पर एक संदेश मिला. इसके साथ 12 अगस्त का एक आदेश भी भेजा गया था. आदेश में कहा गया था कि वार्षिक रखरखाव और सफाई के कारण 14 अगस्त की शाम से अगले आदेश तक सर्किट हाउस सेवा के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा. आदेश में यह भी कहा गया था कि 13 अगस्त से पहले की गई और पुष्टि की जा चुकी बुकिंग को इस सामान्य निलंबन से छूट दी जाएगी.
&amp;lsquo;12 अगस्त को आदेश था तो रात 10 बजे क्यों बताया?&amp;rsquo;
महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि यदि सर्किट हाउस को बंद करने का आदेश 12 अगस्त को ही जारी हो चुका था, तो प्रशासन ने उन्हें रात 10 बजे के बाद परिसर खाली करने के लिए क्यों कहा. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सर्किट हाउस की बुकिंग कराई या वहां पहुंचकर चेक-इन किया, तब कर्मचारियों ने उन्हें किसी तरह के निलंबन या बंद होने की जानकारी नहीं दी. इसके उलट, उन्हें पूरी तरह तैयार कमरा दिया गया और वहां भोजन भी परोसा गया.
सर्किट हाउस में अन्य अधिकारियों के ठहरने का दावा
मोइत्रा ने दावा किया कि उस रात सर्किट हाउस के कम से कम चार कमरों में लोग ठहरे हुए थे. इनमें नाजरेथ डिप्टी कलेक्टर, नदिया प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एक IAS प्रोबेशनर और एक अन्य सरकारी अधिकारी के कमरे में रहने की बात कही गई. उन्होंने यह भी कहा कि सर्किट हाउस के कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि वहां किसी तरह का सफाई या रखरखाव का काम नहीं चल रहा था. केवल इमारत के बाहर पानी से आयरन हटाने वाले प्लांट की स्थापना का काम हो रहा था. उनका कहना है कि सर्किट हाउस की रसोई और कर्मचारी भी पूरी तरह काम कर रहे थे.
व्हाट्सऐप पर भेजे आदेश को लेकर भी सवाल
महुआ मोइत्रा ने आदेश की सूचना देने के तरीके पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि आदेश उन्हें पहले ईमेल नहीं किया गया और न ही सर्किट हाउस के रिसेप्शन पर प्रदर्शित किया गया. इसके बजाय रात 10:52 बजे उन्हें यह आदेश केवल व्हाट्सऐप के जरिए भेजा गया. उन्होंने दावा किया कि उन्हें सर्किट हाउस खाली करने के बाद ठहरने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं कराई गई.
रात में सर्किट हाउस के बाहर भीड़ जुटने का आरोप
मोइत्रा ने अपने नोटिस में सर्किट हाउस के बाहर देर रात जुटी भीड़ का भी जिक्र किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि रात करीब 11 बजे उन्हें बाहर से नारेबाजी और शोर सुनाई दिया. सांसद ने कहा कि सर्किट हाउस के सामने ही पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी के आधिकारिक आवास हैं. उन्होंने इस इलाके को हाई-सिक्योरिटी जोन बताते हुए सवाल उठाया कि वहां देर रात भीड़ को इकट्ठा होने की अनुमति कैसे दी गई.
&amp;lsquo;सांसद को प्रोटोकॉल के तहत सर्किट हाउस में ठहराया जाता है&amp;rsquo;
अपने विशेषाधिकार नोटिस में महुआ मोइत्रा ने गृह मंत्रालय के Order of Precedence का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि इसमें सांसदों को 21वें स्थान पर रखा गया है और किसी सांसद के अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें सर्किट हाउस में ठहराया जाना चाहिए. मोइत्रा के मुताबिक, किसी सांसद को तब तक अपना आवास खाली करने के लिए नहीं कहा जा सकता, जब तक वहां उनसे ऊंचे प्रोटोकॉल वाले किसी अन्य गणमान्य व्यक्ति की आवश्यकता न हो.
उन्होंने कहा कि एक महिला सांसद का अकेले रहते हुए रात 9:47 बजे और फिर रात 10:52 बजे अपना उचित आवास खाली करने के लिए कहा जाना उनके अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है. उन्होंने इसे महिला सुरक्षा के मुद्दे से भी जोड़ते हुए कहा कि इससे शासन व्यवस्था की ओर से महिलाओं को दी जाने वाली सुरक्षा पर सवाल उठता है.
1 जुलाई  ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सर्किट, हाउस, खाली, कराने, पर, भड़की, महुआ, मोइत्रा, ओम, बिरला, को, नोटिस</media:keywords>
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        <title>स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा की हुई एंजियोप्लास्टी, जानिए हेल्थ अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की 17 अगस्त को एंजियोप्लास्टी की गई. उनका हेल्थ अपडेट एम्स ने दिया है. उन्होंने बताया कि मंत्री जेपी नड्डा स्टेबल हैं और उन्हें ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. बता दें जेपी नड्डा गुरुवार (13 अगस्त) को बेचैनी की शिकायत के बाद दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में भर्ती कराया गया था.
इससे पहले अस्पताल प्रशासन ने जे.पी. नड्डा की स्वास्थ्य रिपोर्ट जारी करते हुए बताया था कि उनका स्वास्थ्य अब स्थिर है और उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग में निगरानी में रखा गया है. एम्स की ओर से डॉ प्रोफेसर रीमा दादा ने जारी बयान में कहा था कि 13 अगस्त की शाम बेचैनी की वजह से मंत्री नड्डा को अस्पताल लाया गया था. इसके बाद उनकी विस्तृत जांच की गई, जिसमें कोरोनरी एंजियोग्राफी भी शामिल है. फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है, लेकिन डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें अस्पताल में ही रखा गया है.
राहुल गांधी ने की स्वस्थ होने की कामना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके स्वास्थ्य मंत्री के जल्दी ठीक होने की कामना की थी. उन्होंने लिखा था, &#039;&#039;मुझे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के बीमार पड़ने और एम्स में भर्ती होने की खबर मिली है। मैं उनके सफल इलाज और जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं.&#039;&#039;

क्या होती है एंजियोप्लास्टी&amp;nbsp;
एंजियोप्लास्टी एक ऐसी इलाज की प्रक्रिया है जिसका उपयोग दिल की बंद या संकीर्ण धमनियों को खोलने और रक्त प्रवाह को ठीक करने के लिए किया जाता है. ये ओपन हार्ट जैसी बड़ी प्रक्रिया नहीं है बल्कि डॉक्टर इसमें हाथ या जांघ की खून की नली के जरिए एक बारीक तार और बैलून कैथेटर हार्ट तक पहुंचाते हैं. फिर हार्ट की नस में ब्लॉकेज वाली जगह पर बैलून फुलाते हैं. उसके बाद नस के रास्ते को चौड़ा करने के लिए स्टंट डालते हैं.
ये भी पढ़ें: &#039;असामाजिक तत्व शामिल थे&#039;, CJP प्रोटेस्ट लाठीचार्ज पर पुलिस का SC में हलफनामा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>अमित मालवीय को BJP देनी वाली है कुछ और जिम्मेदारी? समीकरण समझें</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय संगठन में हुए बड़े फेरबदल के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अमित मालवीय की भूमिका को लेकर है. करीब 11 साल तक पार्टी के IT और सोशल मीडिया तंत्र की कमान संभालने वाले अमित मालवीय को अब राष्ट्रीय IT सेल के प्रमुख पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी दी गई है.
मालवीय को हालांकि केवल एक संगठनात्मक पद से हटाया गया है. पार्टी की ओर से उनकी अगली भूमिका या किसी नई जिम्मेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. यही वजह है कि अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि पार्टी अमित मालवीय को आने वाले चुनावों को देखते हुए कोई दूसरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती है.
बंगाल चुनाव में मालवीय के पास थी दोहरी जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान अमित मालवीय के पास भाजपा के लिए दो अहम जिम्मेदारियां थीं. वह पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी होने के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय IT और सोशल मीडिया विभाग के प्रमुख भी थे. मालवीय को पहली बार 2020 में, 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले, पश्चिम बंगाल का सह-प्रभारी बनाया गया था. 2026 के चुनाव में भी वह इस भूमिका में बने रहे.
बंगाल में उन्होंने लंबे समय तक जमीन पर काम किया और तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और दूसरे राजनीतिक मुद्दों को पार्टी के अभियान में प्रमुखता से उठाया. उनकी दूसरी बड़ी भूमिका भाजपा के डिजिटल अभियान को संभालने की थी. सोशल मीडिया नैरेटिव, डिजिटल कैंपेन और चुनावी रणनीति को ऑनलाइन और ग्राउंड स्तर पर जोड़ना उनकी जिम्मेदारियों में शामिल रहा.
अब IT सेल की जिम्मेदारी दीपक म्हस्के के पास
भाजपा ने अब अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को राष्ट्रीय IT और सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी है. म्हस्के छत्तीसगढ़ से आते हैं और लंबे समय से भाजपा के IT और सोशल मीडिया संगठन से जुड़े रहे हैं. विभिन्न विधानसभा चुनावों में डिजिटल कैंपेन से जुड़े रहने के अलावा उन्हें चुनावी डेटा और रणनीति की समझ रखने वाला नेता माना जाता है. म्हस्के की नियुक्ति को भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है. पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में बड़ी संख्या में नए चेहरों को जगह मिली है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पीयूष गोयल: टीम BJP में इकलौते मंत्री को जिम्मेदारी, क्या हैं संकेत?</title>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नाम ने सियासी जानकारों को चौंका दिया. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को बीजेपी ने कोषाध्यक्ष बनाया है. पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट गोयल इकलौते केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्हें टीम बीजेपी में शामिल किया गया है.
दिलचस्प है कि पीयूष गोयल के पिता वेद प्रकाश गोयल, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री थे. वो करीब दो दशक तक पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे थे. &amp;nbsp;
लगने लगी अटकलें
पीयूष गोयल को कमान मिलने के बाद सवाल उठने लगे कि क्या मोदी सरकार आने वाले समय में कैबिनेट का विस्तार करने वाली है. दरअसल, बीजेपी एक व्यक्ति-एक पद के पैटर्न पर चलती रही है. हालांकि कुछ अपवाद भी रहे हैं. माना जा रहा है कि गोयल मंत्री पद के साथ ही कोषाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी संभालते रहेंगे. वो मोदी सरकार में 2014 से ही लगातार मंत्री पद पर रहे हैं. वो महाराष्ट्र बीजेपी के भी कोषाध्यक्ष रह चुके हैं.
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी दिसंबर में यूपी बीजेपी के अध्यक्ष बने थे. वहीं कॉर्पोरेट मामलों के राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा को मई में दिल्ली बीजेपी की कमान मिली. दोनों ही नेताओं को जिम्मेदारी मिलने के बाद से अटकलें लगने लगी कि क्या मोदी कैबिनेट का विस्तार होने वाला है.
केंद्रीय रेलवे राज्यमंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू को अब तक पार्टी में जिम्मेदारी नहीं मिली है. पिछले महीने ही उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हुआ और इसके साथ ही मंत्री पद भी गंवानी पड़ी. माना जा रहा है कि उन्हें आने वाले समय में पंजाब विधानसभा चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है.&amp;nbsp;
बीजेपी की नई टीम
नितिन नवीन की टीम की सोमवार को 65 नेताओं की लंबी लिस्ट जारी हुई. नई टीम में उपाध्यक्षों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है, जिनमें से 9 नए हैं. राष्ट्रीय महासचिवों की कुल संख्या भी पहले के सात से बढ़ाकर आठ कर दी गई है. बीजेपी की नई टीम में 16 राष्ट्रीय सचिव हैं, जबकि पिछली टीम में 11 राष्ट्रीय सचिव थे. इसमें विधानसभा चुनाव पर खास फोकस दिखा. यूपी से आठ नेताओं को जगह मिली.
वहीं कई चौंकाने वाले नाम थे जिन्हें दोबारा मौका नहीं मिला. तेजस्वी सूर्या, अमित मालवीय, अरुण सिंह, दुष्यंत कुमार गौतम और पंकजा मुंडे को नई टीम से बाहर कर दिया गया.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;रद्द हो संसद सदस्यता&amp;apos;, TMC के बागी MPs के खिलाफ SC पहुंचे अभिषेक बनर्जी</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय मामले को लेकर पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. लोकसभा अध्यक्ष और 20 बागी सांसदों को पक्ष बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि इन सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए और उनकी संसद सदस्यता रद्द होनी चाहिए, लेकिन लोकसभा स्पीकर ऐसा नहीं कर रहे हैं.
इनमें काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय और सायनी घोष का नाम भी शामिल हैं. बनर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन 20 लोगों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून क्यों लागू नहीं किया जा रहा है. उनकी संसदीय सदस्यता क्यों रद्द नहीं की गई है. यह मामला पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से ध्यान में लाया गया था. सोमवार को औपचारिक रूप से याचिका दायर की गई थी. सूत्रों के मुताबिक, इस हफ्ते सुनवाई होने की संभावना है.&amp;nbsp;
स्पीकर ने 20 सांसदों को दलबदल को मान्यता नहीं दी
इन 20 सांसदों ने सार्वजनिक रूप से टीएमसी छोड़कर नेशनल सिटिजन्स पार्टी नाम की एक पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी. हालांकि,स्पीकर ने अभी तक इस कदम को मान्यता नहीं दी है. अभिषेक ने बार-बार स्पीकर से उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की है. उनका तर्क है कि ये 20 लोग एनसीपीआई से जुड़े होने का दावा करते हैं. संसद में बोलते समय वह अभी भी AITC में लिस्टेड होते हैं. इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती.&amp;nbsp;
अभिषेक बनर्जी ने 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की
अभिषेक ने तृणमूल के चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले इन 20 सासंदों की सदस्यता तुरंत (1985 के अधिनियम पर आधारित) रद्द करने की मांग की है. लोकसभा सदस्यता से जुड़े नियमों के पैरा 6 के तहत कार्रवाई करने की अपील की गई है. उन्होंने इस मामले में 19 जून को याचिका दायर की थी. अभिषेक का आरोप है कि इसके बाद किसी तरह की कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है. न ही कोई सुनवाई हुई. स्पीकर से मिलने पर उन्होंने सवाल किया है कि जब उनकी पार्टी संबद्धता के बारे में औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया हैतो इन 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था कैसे बदली जा सकती है. उन्होंने तुरंत बैठने की व्यवस्था में किए बदलावों को तुरंत वापस लेने और सर्कुलर जारी होने से पहले तृणमूल के चुनाव चिन्ह पर जीतने वाले 28 सांसदों के लिए निर्धारित मूल सीट आवंटन को बहाल करने की मांग की है. हालांकि, स्पीकर ने 20 सांसदों के दलबदल को मान्यता नहीं दी है. उनके बैठने की व्यवस्था वास्तव में बदल दी है.&amp;nbsp;
अपडेट जारी है..&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>रद्द, हो, संसद, सदस्यता, TMC, के, बागी, MPs, के, खिलाफ, पहुंचे, अभिषेक, बनर्जी</media:keywords>
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        <title>BJP के मीडिया प्रभारी बने रहेंगे अनिल बलूनी, लेकिन बदल उनकी पूरी टीम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bjp-के-मीडिया-प्रभारी-बने-रहेंगे-अनिल-बलूनी-लेकिन-बदल-उनकी-पूरी-टीम</link>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में पौड़ी गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी को एक बार फिर से राष्ट्रीय मीडिया संयोजक (मीडिया प्रभारी) की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं दीपक म्हस्के को अमित मालवीय की जगह आईटी सेल का हेड बनाया गया है. अमित मालवीय का नाम बीजेपी की नई लिस्ट में नहीं है. बीजेपी ने ये फेरबदल ऐसे समय में किया है जब राजनीतिक अभियानों के लिए सोशल मीडिया और रियल-टाइम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बेहद निर्णायक हो चुकी है.
दीपक म्हस्के को बीजेपी ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. पार्टी ने डिजिटल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए चार राज्यों से नए सोशल मीडिया समन्वयक भी बनाए हैं, जिनमें महाराष्ट्र से प्रीति गांधी, दिल्ली से शिवानंद द्विवेदी, उत्तराखंड से आलोक भट्ट और हरियाणा से अरुण यादव शामिल हैं. 2024 में संसद चुने गए अनिल बलूनी के पास संसदीय और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन का लंबा अनुभव है. वह सितंबर 2024 से संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति के सदस्य हैं.
&amp;nbsp;संसदीय समीति में काम करने का अनुभव
इसके अलावा दिसंबर 2024 में उन्हें संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक की संयुक्त समिति में शामिल किया गया था. बलूनी मार्च 2025 से &#039;सरकारी आश्वासनों पर गठित समिति&#039; में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सोशल मीडिया संयोजक बनाए गए दीपक म्हस्के बीजेपी के डिजिटल और आईटी स्ट्रक्चर का एक पुराना और भरोसेमंद चेहरा हैं. वे सितंबर 2009 से छत्तीसगढ़ बीजेपी आईटी सेल के प्रदेश प्रभारी के रूप में काम कर रहे थे, जहां उन्होंने पार्टी की वेबसाइट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और तकनीक-आधारित चुनाव अभियानों को संभाला. ये माना जा रहा है कि इन दोनों के तालमेल से पार्टी की मीडिया मशीनरी को और अधिक धार मिलेगी.
बीजेपी ने नई टीम का ऐलान किया
बीजेपी ने कहा है कि उसने युवाओं और अनुभवी नेताओं के बीच सही संतुलन बनाए रखा है. पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, उसने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को भी अपने आठ राष्ट्रीय महासचिवों की टीम में शामिल किया है, जिनमें से छह नये हैं. नये उपाध्यक्षों में लोकसभा सदस्य डी. पुरंदेश्वरी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत शामिल हैं. महासचिव की सूची में शामिल नये चेहरों में बीजेपी सांसद एवं पार्टी की राजस्थान इकाई के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया, लोकसभा सदस्य गजेंद्र पटेल, राज्यसभा सदस्य संजय भाटिया और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी शामिल हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिमागी नक्सल: भड़के विपक्ष के तीखे सवाल और &amp;apos;वोट बैंक&amp;apos; की छिपी हुई राजनीति</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दिमागी-नक्सल-भड़के-विपक्ष-के-तीखे-सवाल-और-वोट-बैंक-की-छिपी-हुई-राजनीति</link>
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        <description><![CDATA[ देश के नेता सिर्फ उन्हीं मुद्दों पर अपना दिमाग लगाते हैं, जहां उन्हें अपना सियासी हित दिखाई देता है. बाकी देश की जनता के &amp;lsquo;जीने-मरने&amp;rsquo; से उन्हें कोई सरोकार नहीं है. ये बात कड़वी है, लेकिन गलत नहीं है. इस वक्त देश की पूरी राजनीति सिर्फ एक शब्द के जाल में उलझी है. वो शब्द है &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo;. ऐसे में सवाल उठता है कि क्यों हमारे देश की सरकारें और नेता भीड़ प्रबंधन सीखने में अपना &amp;lsquo;दिमाग&amp;rsquo; नहीं लगाते?
अगर वो ऐसा करते तो बिहार में 8 लोगों की जान नहीं जाती और मध्य प्रदेश के मंदिर में भगदड़ नहीं मचती. क्यों हमारे देश की सरकारें और नेता शिक्षा का ढांचा सुधारने में अपना &amp;lsquo;दिमाग&amp;rsquo; नहीं लगाते? अगर ऐसा करते तो एक बार फिर NTA छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर पाता. दुर्भाग्य ये है कि आम आदमी और युवाओं के मुद्दों पर राजनीति अपना &amp;lsquo;दिमाग&amp;rsquo; खर्च नहीं करना चाहती. वो सिर्फ &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; को ही देश के दिमाग में बिठाना चाहती है, क्योंकि इस एक शब्द में वोटबैंक की बड़ी राजनीति छिपी है.
दिमाग नक्सल पर सियासत
देश में तीन जगह हादस हुए, लेकिन सियासत का दिमाग इन घटनाओं की तरफ नहीं गया, क्योंकि उसे &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; में सियासी नफा ज्यादा दिखाई देता है. बाकी आम आदमी का क्या है? वो तो अक्सर मंदिर की भगदड़ में दम तोड़ता रहा है.
शुरुआत बिहार से करते हैं, जहां प्रशासन ने श्रद्धालुओं को भीड़ में मरने के लिए छोड़ दिया, लेकिन पीड़ितों को राहत का चेक देने में वो रॉकेट की रफ्तार से भी तेज दिखा. &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; पर सियासी संग्राम प्रधानमंत्री ने &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; के विषय को उठाया. लेकिन मात्र 24 घंटे में ही किसके दिमाग में नक्सली दिमाग था, ये निकलकर सामने आ गया. पी. चिदंबरम कहते हैं कि उन्हें &amp;lsquo;दिमागी नक्सली&amp;rsquo; होने पर गर्व है. मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि मनमोहन सिंह सही हैं या पी. चिदंबरम? प्रमुख नक्सली नेता ने कहा था कि 2030 तक दिल्ली पर कब्जा होगा. आज नक्सल प्रभावित जिले जीरो हो गए हैं. चिदंबरम जी ने कहा था कि भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन नहीं हो सकते. जिसकी सोच ऐसी है, वो &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; है.
सत्ता-विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;पी. चिदंबरम &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; नहीं, बल्कि पूरी तरह से नक्सल हैं. अब जब देश के गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने खुद को &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; कहा है, तो इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या उन्होंने देश के गृह मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद को खत्म करने के लिए जान-बूझकर कोई कदम नहीं उठाया.&amp;rsquo;&amp;rsquo; &amp;lsquo;नक्सल&amp;rsquo; से &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; तक नक्सल क्या है, ये देश को पिछले छह दशक से पता है. &amp;lsquo;अर्बन नक्सल&amp;rsquo; के बारे में भी हम कई बार सुन चुके हैं. पीएम मोदी ने 2018 में छत्तीसगढ़ की एक चुनावी रैली में &amp;lsquo;अर्बन नक्सल&amp;rsquo; शब्द का इस्तेमाल किया था.
&amp;lsquo;अर्बन नक्सल&amp;rsquo; शब्द का इस्तेमाल ऐसे शहरी बुद्धिजीवियों, कार्यकर्ताओं या समर्थकों के लिए किया जाता रहा है, जिन पर माओवादी विचारधारा से सहानुभूति रखने के आरोप लगाए जाते हैं. राज्यसभा में विपक्ष ने सरकार से &amp;lsquo;अर्बन नक्सल&amp;rsquo; की परिभाषा भी पूछी थी. तब गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि सरकार आधिकारिक दस्तावेजों या कानूनी तौर पर &amp;lsquo;अर्बन नक्सल&amp;rsquo; शब्द का इस्तेमाल नहीं करती है. लेकिन &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; शब्द का प्रयोग पहली बार हुआ है. अब विपक्ष पूछ रहा है कि क्या आपके लिए &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; वो पढ़ा-लिखा युवा है, जो अपने हक की बात कर रहा है? इस पर बीजेपी कह रही है कि जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, वो &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; हैं.
विपक्ष पूछ रहा है कि क्या &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; वो युवा है, जो पेपर लीक की बात करता है? बीजेपी कह रही है कि &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; वो है, जो भारत के संविधान को नहीं मानता. कांग्रेस पूछ रही है कि क्या &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; वो पढ़े-लिखे लोग हैं, जो आपकी विफलताओं पर आपको आईना दिखाते हैं? बीजेपी कह रही है कि &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; वो हैं, जो चिकन नेक को काटकर नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करना चाहते हैं. विपक्ष ने भी साधा निशाना इस बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह एक कदम आगे चले गए. उन्होंने सीधे पीएम मोदी के &amp;lsquo;दिमागी नक्सली&amp;rsquo; शब्द का मतलब बता दिया. संजय सिंह ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;प्रधानमंत्री ने देश के नौजवानों को &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; कहा है.&amp;rsquo;&amp;rsquo;
विपक्ष के आक्रामक तेवर
&amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; पर विपक्ष बेहद आक्रामक है. पी. चिदंबरम और अरविंद केजरीवाल के बाद महबूबा मुफ्ती ने भी अपने आपको &amp;lsquo;दिमागी नक्सली&amp;rsquo; बताया है. यानी खुद को &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; कहने वाले नेताओं की लिस्ट अब लंबी होती जा रही है. प्रधानमंत्री ने देश के नौजवानों को &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; कहा. क्या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाली Gen Z &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; है? क्या अपने स्कूलों को ठीक करने की मांग करने वाले छोटे-छोटे बच्चे &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; हैं? या फिर लड़ाई कराने वाली &amp;lsquo;भारतीय झगड़ा पार्टी&amp;rsquo; &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; है? कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;पहले तो &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; की परिभाषा बताई जाए कि ये क्या है? आप किसे &amp;lsquo;दिमागी नक्सल&amp;rsquo; कह रहे हैं?&amp;rsquo;&amp;rsquo;
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;दिमागी नक्सल का मतलब होता है- वे लोग, जो दिल्ली, मुंबई, पटना, कोलकाता के AC कमरों में बैठते हैं और माओवादियों की विचारधारा को खाद-पानी देते हैं, जो इनके लिए पैसा और व्यवस्थ ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिमागी, नक्सल:, भड़के, विपक्ष, के, तीखे, सवाल, और, वोट, बैंक, की, छिपी, हुई, राजनीति</media:keywords>
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        <title>जनगणना 2027 में OBC कॉलम पर कांग्रेस का बड़ा प्लान, दिल्ली में होगी बैठक</title>
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        <description><![CDATA[ जनगणना 2027 में OBC का अलग कॉलम नहीं होने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस अब बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है. इसी रणनीति के तहत कल दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस के OBC विभाग की अहम बैठक बुलाई गई है.
बैठक में कांग्रेस OBC विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिंद समेत सात राज्यों के करीब 300 जिलों के OBC जिला अध्यक्ष शामिल होंगे. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान समेत चुनावी राज्यों से जुड़े OBC पदाधिकारी बैठक में मौजूद रहेंगे. इसके अलावा कांग्रेस OBC महिला विंग के सभी पदाधिकारियों को भी बैठक में बुलाया गया है.
जनगणना में ओबीसी कॉलम के मुद्दे को उठाने की रणनीति पर होगी चर्चा
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, बैठक में जनगणना 2027 में OBC का कॉलम नहीं होने के मुद्दे को चुनावी राज्यों में प्रमुखता से उठाने की रणनीति पर चर्चा होगी. पार्टी इस मुद्दे को पिछड़े वर्ग के अधिकार, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है.
कांग्रेस OBC विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जय हिंद ने ABP न्यूज से कहा कि जनगणना 2027 में OBC कॉलम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा देश के प्रधानमंत्री अपने आप को OBC कहते हैं, लेकिन OBC का सम्मान नहीं हो रहा है. पिछड़ा वर्ग की लड़ाई राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लड़ रही है.
पिछड़े वर्ग को न्याय दिलाने के लिए बुलाई गई बैठक: अनिल जय हिंदअनिल जय हिंद ने कहा कि यह बैठक पिछड़े वर्ग को न्याय दिलाने के लिए बुलाई गई है और कांग्रेस का मकसद है कि हर वर्ग को सम्मान और उसका अधिकार मिले.
राहुल गांधी की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक को कांग्रेस के OBC आउटरीच अभियान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. पार्टी अब इस मुद्दे को संगठन के जिला स्तर तक ले जाकर चुनावी राज्यों में राजनीतिक रूप से धार देने की तैयारी में है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>जनगणना, 2027, में, OBC, कॉलम, पर, कांग्रेस, का, बड़ा, प्लान, दिल्ली, में, होगी, बैठक</media:keywords>
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        <title>ट्विशा शर्मा मामले में सीबीआई की चार्जशीट, चौंकाने वाले खुलासे</title>
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        <description><![CDATA[ ट्विशा शर्मा मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है. जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि सास गिरीबाला सिंह और पति समर्थ सिंह ट्विशा को काफी प्रताड़ित करते थे और गंदी-गंदी गालियां देते थे. समर्थ सिंह और गिरीबाला सिंह ने कई बार ट्विशा को अपशब्द कहे. ये बात समर्थ सिंह ने ट्विशा से कहना तब शुरू किया, जब ट्विशा ने शादी के बाद अपने सारे पुराने रिलेशन के बारे में बताया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में ट्विशा के पिता को हार्ट अटैक आया, क्योंकि ट्विशा लगातार प्रताड़ित हो रही थी. इसके बाद ट्विशा अपने पिता के घर नोएडा गई थी. 24 मार्च 2026 को ट्विशा फिर से भोपाल आ गई. गिरीबाला सिंह हमेशा ट्विशा से पीरियड्स के बारे में पूछती थी, जिसे ट्विशा ने जवाब दिया था जब नहीं आएंगे तब तुम्हें बता दूंगी. सीबीआई की जांच में सामने आया है कि ट्विशा बच्चे को लेकर असमंजस में थी, वह कंफ्यूजन में थी कि बच्चा रखना है या नहीं. 16 अप्रैल को पता चला कि ट्विशा गर्भवती है, इसके बाद 17 तारीख को अस्पताल जाकर कंफर्म किया कि ट्विशा गर्भवती है या नहीं.
बच्चे को लेकर हुई लड़ाई
ट्विशा बच्चा रखने या ना रखने के लिए वक्त मांग रही थी. समर्थ सिंह ने अपनी मां को बताया, इसके बाद 17 अप्रैल को ही जमकर लड़ाई हुई. इस दौरान ट्विशा को गन्दी गालियां दी गई और ट्विशा को घर से निकाल दिया गया. उसी रात ट्विशा नसीराबाद,राजस्थान 19 अप्रैल को पहुंची जाकर मां बाप को बताया कि गिरिबाला सिंह रोज़ हमसे पीरियड्स के बारे में पूछती है. ट्विशा ने अपने मां बाप से यह भी कहा कि समर्थ सिंह ड्रग एडिक्ट है और बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों यानी समर्थ और ट्विशा के पास 20 लाख रु के शेयर थे. जब घर वालों को पता चला तो समर्थ और गिरिबाला सिंह ने ट्विशा पर पैसे देने का दबाव बनाया. अप्रैल माह में उसे भोपाल के बागमुगलिया ब्रांच भी उसे लेकर गए, लेकिन ट्विशा ने पैसा ट्रांसफर करने से मना कर दिया. कहा कि ये उसके पिता का पैसा है. ट्विशा के जॉब छोड़ने के बाद समर्थ सिंह उसका मजाक उड़ाता था और कहता था कि तुझे नौकरी से इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि तुझे तो इंग्लिश भी बोलने नहीं आती.
ट्विशा भोपाल छोड़कर नोएडा गई और अपने दोस्तों से कहा कि मुझे जॉब चाहिए. 30 अप्रैल 2026 को दोनों ही भोपाल आए और बंसल अस्पताल गए. वहां तय हुआ कि बच्चा नहीं रखना है. डॉक्टर ने दस दिन की दवा दी और काउंसलिंग कर कहा कि दस दिन बाद आयेगा और बताएं कि बच्चा रखना है या नहीं. 6 मई 2026 को दोनों पति पत्नी अस्पताल गए और पति ने कहा कि बच्चा नहीं रखना है. ये हमारा फैसला है. इसी दिन ट्विशा को जॉब ऑफर आया और उसने एक्सेप्ट किया.
ट्विशा ने मां से कहा मुझे ले जाओ
उसी रात को ट्विशा ने अपनी मां को मैसेज किया कि आप मुझे लेकर चले जाओ, समर्थ ने कहा कि एक साल से तुझे झेल रहा हूं अब नहीं सह सकता. 7 मई को ट्विशा फिर से अपस्ताल गई, और बोली मेरा अबॉर्शन कर दो , लेकिन डॉक्टर ने मना कर दिया. हालांकि, 8 मई तक अबॉर्शन हो गया. ट्विशा ने अपनी मां से कहा कि इन लोगों ने परिवार में मेरे बारे में न जाने क्या-क्या बता दिया है.
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, &amp;nbsp;ट्विशा ने अपनी मां से कहा कि समर्थ सिंह मुझसे पूछ रहा है, ये किसका बच्चा है? क्यों अबॉर्शन करना है. 12 मई 2026 को समर्थ और ट्विशा के बीच लड़ाई हुई. ट्विशा शर्मा ने अपनी मां को रोते हुए कॉल किया, इसके बाद मां ने गिरीबाला सिंह कॉल कर बताया कि की वो रो रही है. गिरीबाला सिंह ऊपर गई, कॉल किया ट्विशा को उसने नहीं उठाया, समर्थ सिंह को कॉल किया फिर ऊपर छत पर गए. &amp;nbsp;सीसीटीवी में दिख रहा है कि वो बॉडी सीढ़ियों से लाते हुए दिख रहा है. एम्स लेकर गए. दोनों पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सुसाइड आया है.
दिमागी नक्सल: भड़के विपक्ष के तीखे सवाल और &#039;वोट बैंक&#039; की छिपी हुई राजनीति
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ट्विशा, शर्मा, मामले, में, सीबीआई, की, चार्जशीट, चौंकाने, वाले, खुलासे</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;BJP कनेक्शन नहीं&amp;apos;, बांकुड़ा में शख्स पर मौत पर बोले शुभेंदु अधिकारी</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक शख्स की मौत के मामले में पीड़ित परिवार ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया है. पीड़ित परिवार का कहना है कि भाजपा से जुड़े लोगों ने उनके घर पर हमला किया था, जिसमें 51 वर्षीय शख्स गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई. हालांकि, बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार (16 अगस्त, 2026) को कहा कि हत्या के मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे अपराधी हैं और उनका भाजपा के साथ कोई संबंध नहीं है. इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
घटना को लेकर बोले बंगाल के मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, &amp;lsquo;यहां भाजपा का कोई संबंध नहीं है. ये सभी अपराधी हैं. उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.&amp;rsquo; उन्होंने कहा, &amp;lsquo;इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या यह घटना सच में दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है. FIR में भाजपा का नाम नहीं है. एफआईआर की कॉपी में आरोपियों को उपद्रवी बताया गया है. यहां कानून-व्यवस्था अच्छी है, इसलिए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. पीड़ित के घर पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

क्या था पूरा मामला?
दरअसल, बांकुड़ा में घटी इस घटना को लेकर पीड़ित परिवार का आरोप है कि 51 वर्षीय मृतक शेख मोहम्मद मफीक की मौत उसके बेटे शेख अब्दुल हाफिज के दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण एक समूह की तरफ से उनकी बेरहमी से पिटाई से हुई है.
CJP सदस्य शेख अब्दुल हाफिज के परिवार का कहना है कि जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और स्थानीय प्राथमिक स्कूल की खराब स्थिति और खराब प्रबंधन को लेकर सवाल उठाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके घर पर हमला किया. इस हमले में उसके पिता शेख मोहम्मद मफीक गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः जावेद अख्तर ने PAK राष्ट्रपति की उधेड़ी बखिया, कहा - &#039;हिंदुओं की...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BJP, कनेक्शन, नहीं, बांकुड़ा, में, शख्स, पर, मौत, पर, बोले, शुभेंदु, अधिकारी</media:keywords>
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    <item>
        <title>Xप्लेन: इन्फ्लेडेटिंग क्या है? महंगी डेट्स से क्यों दूर हो रही Gen Z और मिलेनियल्स, डेटा से समझिए</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-इन्फ्लेडेटिंग-क्या-है-महंगी-डेट्स-से-क्यों-दूर-हो-रही-gen-z-और-मिलेनियल्स-डेटा-से-समझिए</link>
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        <description><![CDATA[ आजकल प्यार को बाजार से जोड़ कर देखा जाता है. कई लोग ऐसा मानते हैं कि अपने पार्टनर को किसी खास मौके पर महंगे तोहफे देना प्यार के लिए जरूरी है. जबकि हकीकत ये है कि कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता. प्यार उनमें से एक है. हालांकि नई जेनरेशन में प्यार से पहले एक चीज आती है वो है डेटिंग.
डेटिंग में नई जेनरेशन काफी खर्च करती रही है लेकिन अब ट्रेंड बदल गया है. आज के ज़माने का प्यार पेचीदा हो गया है. महंगाई की मार प्यार पर भी पड़ रही है. 2026 में डेटिंग के साथ पैसों की चिंताएं भी जुड़ी हैं. बजट-फ्रेंडली डेट्स अब आम बात हो गई हैं. इसी दुनिया को &amp;nbsp;&#039;इन्फ्लेडेटिंग&#039; (infladating) या &#039;डेटफ्लेशन&#039; (dateflation) की दुनिया कहते हैं. आइए समझते हैं ये क्या है.
इन्फ्लेडेटिंग क्या है?बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर डालते हैं. आपकी लव लाइफ भी इससे अछूती नहीं है, और इसकी शुरुआत डेटिंग से ही होती है. जब Gen Z और मिलेनियल्स आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, तो रिश्तों के बारे में बात करते समय &#039;इन्फ्लेडेटिंग&#039; शब्द अक्सर सामने आता है. &#039;इन्फ्लेशन&#039; (महंगाई) और &#039;डेटिंग&#039; शब्दों को मिलाकर बना यह शब्द, बजट की तंगी के बीच डेट्स पर होने वाले खर्च को लेकर समझदारी बरतने की ओर इशारा करता है.
&#039;इन्फ्लोडेटिंग&#039; लगातार बढ़ रही है. इसको लेकर ग्लोबल मैचमेकिंग फर्म &#039;एक्सक्लूसिव मैचमेकिंग&#039; की CEO और मैचमेकर सुज़ैन ट्रॉम्बेट्टी ने भी बयान दिया है. उन्होंने &amp;nbsp;VICE से कहा, &quot;महंगाई की वजह से खर्च बढ़ रहे हैं, और रिश्तों की दुनिया में &#039;इन्फ्लोडेटिंग&#039; (infladating) नाम का एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है. इसका मतलब है बढ़ती कीमतों के कारण डेट्स पर होने वाले खर्च को लेकर ज़्यादा सोच-समझकर चलना.&quot;
अमेरिका में सिंगल लोग साथी की तलाश में होने वाले खर्च में कटौती कर रहे हैं. वे दिखावे या बड़े-बड़े खर्चों के बजाय सस्ती एक्टिविटीज़ चुन रहे हैं.&amp;nbsp;
अमेरिकी डेटिंग पर कितना खर्च कर रहे हैं?
अमेरिका समेत दुनियाभर में युवाओं में डेटिंग आम बात है. लेकिन आम बात ही जब बाजार की महंगाई से जुड़ी हो तो लोग प्लस-माइनस कर के डेट करते हैं. आज लाखों लोग डेटिंग एप्स का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए पैसे यानी मंथली सब्सक्रिप्शन चार्ज भी देते हैं. मॉर्गन स्टेनली की रिसर्च से पता चला है कि 2023 में डेटिंग ऐप पर पैसे खर्च करने वाले एक औसत यूज़र ने हर महीने लगभग $19 खर्च किए. यह खर्च तब होता है, जब आपको अभी कोई मैच भी नहीं मिला होता है.
इन ऐप्स की वजह से युवा अमेरिकियों के पास चुनने के लिए बहुत सारे विकल्प हो सकते हैं. हालांकि, CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें BMO फाइनेंशियल ग्रुप के 2026 BMO रियल फाइनेंशियल प्रोग्रेस इंडेक्स का हवाला दिया गया है, बढ़ती लागत के कारण वे कम डेट पर जा रहे हैं या ज़्यादा सस्ती एक्टिविटीज़ चुन रहे हैं.
डेटा से समझें पूरा खेल
2,501 वयस्कों के एक सर्वे में पाया गया कि Gen Z के लोग एक डेट पर औसतन $205 (₹19,544) और मिलेनियल्स $252 (₹24,025) खर्च करते हैं. फिर भी, लगभग 47 प्रतिशत सिंगल लोगों का मानना ​​है कि डेटिंग पर इतना खर्च करना सही नहीं है, और 48 प्रतिशत Gen Z और 40 प्रतिशत मिलेनियल्स का कहना है कि डेटिंग के ज़्यादा खर्च ने उनके फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा करने में रुकावट डाली.
BMO इंडेक्स के अनुसार, अमेरिका में डेट पर जाने का औसत खर्च &amp;nbsp;जिसमें बाहर जाने से पहले तैयार होने, पेट्रोल/डीज़ल का खर्च और खुद डेट का खर्च शामिल है &amp;nbsp;बढ़कर $189 (₹18,018) हो गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 12.5 प्रतिशत ज़्यादा है.

इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है. कई वजहों से ज़रूरी चीज़ों जैसे राशन, ईंधन और किराए की कीमतें बढ़ी हैं; इनमें ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से ऊर्जा की कीमतों में आया उछाल भी शामिल है. &amp;nbsp;ज़ाहिर है, लोग खर्च कम कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि वे कम पैसे खर्च कर रहे हैं या कम डेट पर जा रहे हैं. 2025 में, एक्टिव रूप से डेटिंग करने वाले लोग साल में औसतन 12 डेट पर गए, जबकि 2024 में यह संख्या 14 थी.
क्या &#039;इन्फ्लेडेटिंग&#039; (कम खर्चीली डेटिंग) कोई बुरी बात है?
बिल्कुल नहीं. रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीज़ों को सिंपल रखना ठीक है, खासकर तब जब आप डेटिंग की शुरुआती स्टेज में हों. फ़ोकस फैंसी कपड़ों, चमकदार एक्सेसरीज़ और शानदार डिनर के बजाय एक-दूसरे पर और साथ में बिताए अच्छे समय पर होता है. लोग कम खर्चीले लेकिन यादगार अनुभवों पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं, जैसे टहलना, घर का बना खाना, मूवी देखना, या लाइब्रेरी या पार्क में समय बिताना. असल में, किसी को ठीक से जाने बिना ही महंगी जगहों पर जाना या उन्हें बहुत महंगे तोहफ़े देना एक &#039;रेड फ़्लैग&#039; (चेतावनी का संकेत) हो सकता है.
ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा
भारत समेत दुनिया भर में ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. कुल यूजर्स की संख्या के आधार पर चीन दुनिया में पहले स्थान पर है, जहां लगभग 8.28 करोड़ (82.8 मिलियन) लोग डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जहां करीब 6.05 करोड़ (60.5 मिलियन) यूजर्स हैं. भारत लगभग 2.72 करोड़ (27.2 मिलियन) यूजर्स के साथ तीसरे स्थान पर है.

सूची में ब्राज़ील चौथे स्थान पर है, जहां लगभग 1.69 करोड़ (16.9 मिलियन) लोग डेटिंग ऐप्स का उपयोग करते हैं. इसके बाद जर्मनी (75 लाख), फ्रांस (72 लाख), दक्षिण कोरिया (54 लाख) और यूनाइटेड किंगडम (43 लाख) का स्थान आता है. यह आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल डेटिंग अब दुनिया भर में लोगों के बीच रिश्ते बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Xप्लेन:, इन्फ्लेडेटिंग, क्या, है, महंगी, डेट्स, से, क्यों, दूर, हो, रही, Gen, और, मिलेनियल्स, डेटा, से, समझिए</media:keywords>
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        <title>CJP वॉलंटियर के पिता की मौत से बंगाल में सियासी घमासान, 8 गिरफ्तार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cjp-वॉलंटियर-के-पिता-की-मौत-से-बंगाल-में-सियासी-घमासान-8-गिरफ्तार</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में CJP वॉलंटियर के पिता की मौत के बाद विवाद बढ़ गया है. आरोप है कि घर पर हुए हमले के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हो गई. मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं.
पुलिस ने इस मामले में रविवार को 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह और हमले में किसकी भूमिका थी, इसकी जांच अभी जारी है.

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पत्नी की शिकायत के बाद हुई गिरफ्तारी
मृतक की पत्नी हसीना बेगम ने रविवार को इंडास पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में उन्होंने पांच लोगों के नाम बताए हैं और आरोप लगाया है कि करीब 10 से 15 लोगों ने घर पर हमला किया था. शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस अब आरोपों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे.
पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी का बयान
बांकुरा मामले पर पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने BJP का किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए. शुभेंदु अधिकारी ने कहा, &#039;यहां भाजपा का कोई संबंध नहीं है. ये सभी अपराधी हैं. उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.&#039; उन्होंने यह भी कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि घटना का संबंध दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन से था या नहीं. उनके मुताबिक, दर्ज FIR में BJP का नाम नहीं है और आरोपियों को उपद्रवी बताया गया है. शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और पीड़ित के घर पर सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए गए हैं. उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति का भी जिक्र किया.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJP, वॉलंटियर, के, पिता, की, मौत, से, बंगाल, में, सियासी, घमासान, गिरफ्तार</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में भारत का नाम क्यों? ट्रांसशिपमेंट विवाद का क्या असर पड़ेगा</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के कई देशों पर फिर एक गंभीर आरोप लगाया है. एक नई रिपोर्ट में ट्रंप सरकार ने आरोप लगाया गया है कि भारत उन 40 देशों में शामिल है जो एक गुप्त ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क के ज़रिए चीन को ट्रंप के टैरिफ़ से बचने में मदद कर रहे हैं. व्हाइट हाउस ने &#039;द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज़, स्कोप, एंड कॉस्ट्स नाम की एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट 25 पेजों में विस्तार से लिखा गया है कि चीनी एक्सपोर्टर अमेरिका के ऊंचे टैरिफ़ से बचने के लिए 40 से ज़्यादा देशों के ज़रिए सामान भेज रहे हैं.
पीटर नवारो के नेतृत्व में व्हाइट हाउस के &#039;ऑफ़िस ऑफ़ ट्रेड एंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी&#039; द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में चीन के ख़िलाफ़ लागू किए गए &#039;सेक्शन 301&#039; टैरिफ़ ने अमेरिका को होने वाले सीधे चीनी एक्सपोर्ट को तो कम किया, लेकिन साथ ही इसने दुनिया भर में एक ट्रांस-शिपमेंट नेटवर्क को भी जन्म दिया.
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी उत्पादों को अमेरिका भेजने से पहले उन देशों में भेजा जाता है जहां अमेरिकी टैरिफ दरें कम हैं. वहां इन उत्पादों पर नए लेबल लगाए जाते हैं, उनकी पैकेजिंग बदली जाती है, नए इनवॉइस बनाए जाते हैं या उन पर थोड़ी-बहुत प्रोसेसिंग की जाती है, ताकि उन्हें किसी दूसरे देश का उत्पाद बताकर अमेरिका भेजा जा सके.
रिपोर्ट में इस सिस्टम को &quot;शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क&quot; कहा गया है. इस समस्या के दायरे को समझाने के लिए रिपोर्ट में सालाना ट्रांसशिपमेंट या इससे जुड़े व्यापार के पांच अलग-अलग अनुमान दिए गए हैं जैसे गोल्डमैन सैक्स का $40 बिलियन, व्हाइट हाउस काउंसिल ऑफ़ इकोनॉमिक एडवाइजर्स का $60 बिलियन, एक्सिगर का $75 बिलियन, अमेरिकी वाणिज्य विभाग का $109 बिलियन और अल्टाना का $303 बिलियन. इसमें यह भी बताया गया है कि ये अनुमान अलग-अलग तरीकों पर आधारित हैं, इसलिए इनकी सीधे तुलना नहीं की जा सकती.
ट्रांसशिपमेंट क्या है?
ट्रांसशिपमेंट का मतलब है सामान को उसकी आखिरी मंज़िल तक पहुंचने से पहले किसी दूसरे देश से होकर ले जाना. कुछ मामलों में यह ग्लोबल ट्रेड का एक जायज़ हिस्सा है. हालांकि, व्हाइट हाउस का आरोप है कि कुछ चीनी कंपनियां भारत, वियतनाम, मैक्सिको, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में अपने प्रोडक्ट या पार्ट्स भेजती हैं जहां उन पर बहुत कम प्रोसेसिंग होती है या उन्हें बस रीपैकेज किया जाता है. इसके बाद इन प्रोडक्ट्स को चीन के बजाय उन्हीं देशों से आए सामान के तौर पर अमेरिका में एक्सपोर्ट कर दिया जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में लगभग 67 अरब डॉलर का चीनी सामान इसी तरह अमेरिकी बाज़ार में आया हो सकता है, जिससे चीनी इंपोर्ट पर अमेरिकी टैरिफ का असर कम हो गया.
भारत का ज़िक्र क्यों किया गया है?
&#039;मेक इन इंडिया&#039; और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी पहलों के तहत भारत मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक अहम जगह बन गया है. कई मल्टीनेशनल कंपनियों ने चीन से हटकर सप्लाई चेन को अलग-अलग जगहों पर फैलाने के लिए भारत में अपना प्रोडक्शन बढ़ाया है. व्हाइट हाउस की रिपोर्ट से पता चलता है कि कुछ चीनी प्रोडक्ट्स सीमित प्रोसेसिंग के बाद भारत के रास्ते अमेरिका पहुंच सकते हैं. हालांकि, इसमें ऐसी गतिविधियों में शामिल किसी खास भारतीय कंपनी, फैक्ट्री या शिपमेंट का नाम नहीं बताया गया है.
भारत पर इसका क्या असर हो सकता है?
इस पूरे रिपोर्ट में कहीं भी भारत पर सीधे &amp;nbsp;गलत काम करने का आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन इससे अमेरिका के बाज़ार में आने वाले भारतीय एक्सपोर्ट की ज़्यादा बारीकी से जांच हो सकती है. अमेरिकी कस्टम अधिकारी &#039;रूल्स ऑफ़ ओरिजिन&#039; (यानी वे नियम जिनसे यह तय होता है कि कोई प्रोडक्ट असल में कहां बना है) की जांच को और सख्त कर सकते हैं. भारतीय एक्सपोर्टर्स को ऐसे और दस्तावेज़ देने पड़ सकते हैं जिनसे यह साबित हो सके कि प्रोडक्ट का काफ़ी हद तक निर्माण भारत में ही हुआ है. अगर जांच और सख्त होती है, तो इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोलर इक्विपमेंट, स्टील के सामान और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टर को ज़्यादा नियमों का पालन करना पड़ सकता है.
क्या भारत पर कोई ठोस आरोप हैं?
अब तक, व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में शिपमेंट-लेवल के सबूत नहीं दिए गए हैं और न ही किसी ऐसे भारतीय एक्सपोर्टर का नाम लिया गया है जिस पर अमेरिकी व्यापार नियमों के उल्लंघन का आरोप हो. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का तर्क है कि किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट्स होने का मतलब यह नहीं है कि वह चीनी एक्सपोर्ट ही है. आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में कई देशों से पार्ट्स और रॉ मटीरियल आते हैं, जिससे इंटरनेशनल मैन्युफैक्चरिंग आपस में बहुत ज़्यादा जुड़ी हुई है. इसलिए, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि चीनी इनपुट वाले सभी प्रोडक्ट्स को टैरिफ से बचने की कोशिश (टैरिफ इवेज़न) का उदाहरण नहीं माना जाना चाहिए.
भारत को क्या करना चाहिए?
ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि भारत को अपने &#039;रूल्स ऑफ़ ओरिजिन&#039; सर्टिफ़िकेशन, कस्टम्स वेरिफिकेशन सिस्टम और एक्सपोर्ट से जुड़े डॉक्यूमेंटेशन को मज़बूत करते रहना चाहिए. पारदर्शी सप्लाई चेन बनाए रखने और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों का पालन करने से भारतीय एक्सपोर्टर्स को बेवजह के विवादों से बचने में मदद मिलेगी. साथ ही एक भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग डेस्टिनेशन के तौर पर देश की साख भी बनी रहेगी
क्या इससे भारत-अमेरिका के ट्रेड संबंधों पर असर पड़ सकता है?
ये आरोप ऐसे संवेदनशील समय में सामने आए हैं जब भारत और अमेरिका के बीच आपसी व्यापार बढ़ाने और मार्केट तक पहुंच बेहतर बनाने पर बातचीत चल रही है. हालांकि इस रिपोर्ट की वजह से रेगुलेटरी जांच-पड़ताल बढ़ सकती है, लेकिन जानकारों का मानना ​​है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के पटरी से उतरने की संभावना कम है. भारत, अमेरिका के लिए एक अहम आर्थिक और जियोपॉलिटिकल पार्टनर बना हुआ है, खासकर तब जब वॉशिंगटन चीनी मैन्युफैक्चरि ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जनगणना की आज से शुरुआत, आधार से बैकिंग तक पूछे जाएंगे 40 सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ भारत की 2027 की जनगणना का अहम चरण आज से शुरू होने जा रहा है. सोमवार को लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के बर्फ़ीले इलाकों में &#039;सेल्फ़-एन्यूमरेशन&#039; (खुद अपनी जानकारी दर्ज करने) के साथ शुरू होगा. इसमें दूर-दराज़ के गांव, पहाड़ी समुदाय और मुश्किल रास्तों वाले इलाके शामिल होंगे. &amp;nbsp;गृह मंत्रालय ने उन 40 सवालों की लिस्ट जारी की है जो जनगणना अधिकारी हाउसहोल्ड शेड्यूल के तहत परिवारों से पूछेंगे.
इन इलाकों में रहने वाले लोग 17 से 31 अगस्त के बीच अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं. इसके बाद, जनगणना करने वाले कर्मचारी, जिनके पास पिछले हफ़्ते बताए गए 40 सवाल होंगे. 1 सितंबर से 30 सितंबर तक घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करने का काम शुरू करेंगे. देश के बाकी हिस्सों में आबादी की गिनती अगले साल फरवरी में होगी.
क्यां है ये 40 सवाल

व्यक्ति का नाम
परिवार के मुखिया से संबंध
लिंग
जन्म तिथि और उम्र
वर्तमान वैवाहिक स्थिति
विवाह के समय उम्र
पति/पत्नी का नाम
घोषित राष्ट्रीयता
धर्म
जाति
पिता का विवरण
माता का विवरण
दिव्यांगता
मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति
शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई
प्राप्त उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और स्ट्रीम
क्या पिछले एक साल के दौरान किसी समय काम किया है
आर्थिक गतिविधि की श्रेणी
व्यवसाय
उद्योग, व्यापार या सेवा का स्वरूप
काम की तलाश में है या काम के लिए उपलब्ध हैं
कार्यस्थल तक आने-जाने की स्थिति
जन्मस्थान
अंतिम निवास स्थान
प्रवासन का कारण
पिछले प्रवासन के बाद से इस गांव या शहर में रहने की अवधि
कामगार की श्रेणी
गैर आर्थिक गतिविधि
स्थायी आवासीय पता
वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या
अब तक जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या
पिछले एक में जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या
कोविड-19 टीकाकरण की जगह
कुल बैंक खातों की संख्या
मोबाइल नंबर, यदि उपलब्ध हो
आधार नंबर, यदि उपलब्ध हो
वोटर आईडी नंबर, यदि उपलब्ध हो
पासपोर्ट नंबर, यदि भारतीय पासपोर्ट धारक हैं
ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता

मुख्य जनगणना अधिकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के 16 जिले ऐसे हैं जहां भारी बर्फबारी होती है. इन जिलों में पहले ही पॉपुलेशन एन्यूमरेशन कराया जाएगा, क्योंकि सितंबर-अक्टूबर के बाद पहाड़ी इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. वहीं लद्दाख को लेकर उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब लद्दाख की स्वतंत्र जनगणना हो रही है. 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख को अपना पहला आधिकारिक डेटा मिलेगा. लद्दाख पूरी तरह बर्फबारी वाला क्षेत्र है। इसमें लेह और कारगिल दोनों जिले शामिल हैं.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>बाहर खाने वाले हो जाएं सतर्क! KFC के चिकन में बदबू, बासी होने का आरोप</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक में होटल और रेस्टोरेंट के खाने को लेकर खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग (FDA) छापेमारी अभियान चला रहा है, जिसने बाहर खाने वालों की चिंता बढ़ा दी है. FDA की ये कार्रवाई बड़े होटलों और नामी फूड चेन में भी की जा रही है. इसी के तहत मैसूरु में जांच के दौरान कई होटलों से एक्सपायर्ड चिकन और मीट जब्त किया गया. इसके अलावा मंगलुरु के KFC आउटलेट में भी ग्राहक की शिकायत के बाद अचानक छापेमारी की गई.
ग्राहक ने अपनी शिकायत में KFC आउटलेट के चिकन पेरी पेरी लेग्स के बासी होने का आरोप लगाया था. इसके बाद मंगलुरु के सिटी सेंटर में KS राव रोड पर स्थित KFC आउटलेट पर फूड सेफ़्टी अधिकारियों ने अचानक छापेमारी की. ये कार्रवाई ग्राहक की शिकायत के बाद की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ऑनलाइन ऑर्डर किए गए चिकन में बदबूदार चिकन मिला.

Mangaluru, Karnataka: Food safety officials conducted a surprise raid at a KFC outlet in Mangaluru&#039;s City Centre on K.S. Rao Road following a customer complaint alleging that they received spoiled, foul-smelling chicken ordered online. During the inspection of the kitchen,&amp;hellip; pic.twitter.com/K0InEr2ghz
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 15, 2026



FDA के अधिकारियों ने किचन, स्टोर रूम और कोल्ड स्टोरेज की जांच के दौरान गो-डाउन को सील कर दिया और खाने के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए लैब भेजे गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि लैब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
कहां-कहां हुई छापेमारी
कर्नाटक के मैसूरु के अलावा बेंगलुरु और मंगलुरु समेत कई शहरों में होटल, रेस्टोरेंट, रिजॉर्ट और दूसरे फूड आउटलेट में खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की जांच के दायरे में हैं. अधिकारियों को कई जगह एक्सपायर्ड सामान, खराब सब्जियां, फंगस और मीट को सही तापमान पर स्टोर नहीं करने जैसी कमियां मिली हैं.&amp;nbsp;
हाल की इन कार्रवाइयों में कर्नाटक के अलग-अलग शहरों से कुल मिलाकर 1,000 किलो से ज्यादा असुरक्षित खाद्य सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है. इन सबके अलावा अधिकारियों ने सरकारी इमारतों में चलने वाले फूड आउटलेट्स की भी जांच की. बेंगलुरु के विधान सौधा, विकास सौधा और आरोग्य सौधा में संचालित कुछ फूड सेंटर में भी खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी मिली. अधिकारियों के मुताबिक कुछ जगहों पर साफ-सफाई की कमी थी.
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&#039;दिमागी नक्सल&#039; विवाद पर बोले सौरव दास: &#039;युवाओं का अपमान, घंटी बज चुकी है&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बाहर, खाने, वाले, हो, जाएं, सतर्क, KFC, के, चिकन, में, बदबू, बासी, होने, का, आरोप</media:keywords>
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        <title>स्टालिन ने केजरीवाल को दी जन्मदिन की बधाई, कहा&amp; ‘मेरे प्यारे दोस्त...’</title>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके पार्टी प्रमुख एम. के. स्टालिन ने दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को उनके जन्मदिन पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने अरविंद केजरीवाल को अपना प्रिय और करीबी मित्र कहते हुए बधाई दी.
स्टालिन ने केजरीवाल के लिए लिखा बधाई संदेश
डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस संबंध में रविवार (16 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में उन्होंने अरविंद केजरीवाल के साथ अपनी एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें एमके स्टालिन अरविंद केजरीवाल को सम्मानित करते और हाथ मिलाते नजर आ रहे हैं.
वहीं, उन्होंने अपने शुभकामना पोस्ट में लिखा, &amp;lsquo;मेरे प्रिय मित्र अरविंद केजरीवाल को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं.&amp;rsquo; उन्होंने कहा, &amp;lsquo;भारत का भविष्य उन्हीं लोगों की ओर से बनाया जाएगा, जो समय से आगे देखने का संकल्प और अपनी आकांक्षाओं को स्थायी बदलाव लाने का दृढ़ संकल्प रखते हैं.&amp;rsquo;
केजरीवाल के विश्वास के साथ आगे बढ़ने की स्टालिन ने की कामना
इसके बाद डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के बड़े दृष्टिकोण को साहस, उद्देश्य और देश के लोगों की क्षमता में विश्वास के साथ आगे बढ़ाने की कामना की.&amp;nbsp;

केजरीवाल ने स्टालिन के बधाई पर जताया आभार
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की तरफ से जन्मदिन पर मिले बधाई संदेश पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री को शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि साझा दृष्टिकोण में आपका भरोसा मेरे लिए बहुत मायने रखता है.&amp;nbsp;

Thank you so much for your warm birthday wishes and inspiring words, Thiru @mkstalin ji. Your belief in our shared vision means a lot to me. https://t.co/szwKTu1vCj
&amp;mdash; Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 16, 2026



पंजाब के सीएम ने भी केजरीवाल को दी जन्मदिन की बधाई
इसके अलावा, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को अपना बड़ा भाई बताते हुए उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. सीएम मान ने X पोस्ट में कहा, &amp;lsquo;मेरे बड़े भाई और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई. आपका ईमानदार नजरिए ने देश की राजनीति में बदलाव लाया है और लाखों लोगों को नई उम्मीद दी है. आपके नेतृत्व में आम आदमी पार्टी आम जनता के अधिकारों के लिए मजबूती और दृढ़ता से संघर्ष को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है. वाहेगुरु आपको हमेशा अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद दें.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज, &#039;वंदे मातरम्&#039; के कथित अपमान का आरोप ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्टालिन, ने, केजरीवाल, को, दी, जन्मदिन, की, बधाई, कहा-, ‘मेरे, प्यारे, दोस्त...’</media:keywords>
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        <title>वंदे मातरम विवाद: माफी मांगें सोनिया, बंकिम चंद्र के वंशज ने लिखा पत्र</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वंदे-मातरम-विवाद-माफी-मांगें-सोनिया-बंकिम-चंद्र-के-वंशज-ने-लिखा-पत्र</link>
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        <description><![CDATA[ स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस हेडक्वार्टर पर हुए राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन के समय कांग्रेस की सीनियर नेता सोनिया गांधी के हाव-भाव को लेकर उपजे कथित विवाद पर अब नैहाटी से बीजेपी विधायक और ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने पत्र लिखकर इस पूरे मामले पर गहरा दुख जताया है. इस दौरान उन्होंने भारत के लोगों समेत पश्चिम बंगाल के नागरिकों से बिना शर्त माफी मांगने की मांग सोनिया गांधी से की है.&amp;nbsp;
मामला शनिवार 15 अगस्त का है. इस पूरे विवाद को हवा तब मिली, जब कांग्रेस के मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की मौजूदगी में वंदे मातरम के बीच सोनिया गांधी कुछ कहने लगीं. आरोप लगे कि उन्होंने वंदे मातरम के गायन को रोकने के निर्देश दिए. हालांकि, इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस ने बयान दिया है कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष (जो बहुत देर से खड़े थे) उनके लिए कुर्सी का इंतजाम करने को कहा था.&amp;nbsp;
सुमित्रो चटर्जी बोले- घटनाएं सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि...
पश्चिम बंगाल की नॉर्थ 24 परगना जिले की नैहाटी सीट से बीजेपी विधायक सुमित्रो चटर्जी ने अपने पत्र में गहरी नाराजगी जताते हुए कहा, &#039;जब पूरा देश मातृभूमि की पूजा में लगा हुआ था, तब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में हुईं घटनाएं सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बशर्मी से दोहराना थीं.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;जब कांग्रेस कार्यकर्ता वंदे मातरम का पूरा वर्जन गा रहे थे, तो सोनिया गांधी की साफ दिख रही बेचैनी, नाराजगी और उसे रोकने की बार-बार की कोशिशों से उन्हें बहुत दुख हुआ. एक आम भारतीय नागरिक, एक देशभक्त और सबसे बढ़कर ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार का सीधा वंशज होने के नाते, मैं आज गहरे दुख, खालीपन और पीड़ा के साथ यह पत्र लिख रहा हूं.&#039;
चटर्जी ने अपने पत्र में इस गीत के राष्ट्रीय महत्व का जिक्र करते हुए अरबिंदो का हवाला देते हुए कहा, &#039;यह मंत्र दिया गया और एक ही दिन में पूरा देश देशभक्ति के धर्म में दीक्षित हो गया. अरबिंदो ने इसे सिर्फ एक मंत्र नहीं, बल्कि देशभक्ति का धर्म बताया था. आज स्वतंत्र भारत की धरती पर उसी मंत्र वंदे मातरम के पूर्ण पाठ के प्रति आपकी असहिष्णुता उन लाखों शहीदों के बलिदान का गंभीर अपमान प्रतीत होती है.&#039;
इसके अलावा उन्होंने आजादी की लड़ाई में वंदे मातरम की भूमिका को याद करते हुए राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल का जिक्र किया. इसमें उन्होंने लिखा था, बंगाल के बंटवारे के बाद यह गीत हर क्रांतिकारी की जुबान पर था.&amp;nbsp;
जो स्वतंत्रता मंत्र का सम्मान करना नहीं जानता, उसे इतिहास अंधकार में धकेल देता है: चटर्जी
पत्र के आखिर में उन्होंने कहा, &#039;इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं. यह आपको बताना मैं अपना नैतिक दायित्व समझता हूं. ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार के एक वंशज के रूप में मैं आपसे विनम्र, किंतु अत्यंत दृढ़ शब्दों से आग्रह करता हूं कि आप आत्ममंथन करें और अपने इस व्यवहार के लिए समस्त देशवासियों, विशेषकर पश्चिम बंगाल की जनात से बिना किसी शर्त के क्षमा मांगे. इतिहास किसी को क्षमा नहीं करता. जो नेतृत्व अपने ही स्वतंत्रता मंत्र का सम्मान करना नहीं जानता, इतिहास उसे विस्मृति के अंधकार में धकेल देता है.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वंदे, मातरम, विवाद:, माफी, मांगें, सोनिया, बंकिम, चंद्र, के, वंशज, ने, लिखा, पत्र</media:keywords>
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        <title>2014 से 2026: बुनियादी चुनौतियों से अहम मुद्दों तक, PM मोदी के भाषण में &amp;apos;देश पहले&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/2014-से-2026-बुनियादी-चुनौतियों-से-अहम-मुद्दों-तक-pm-मोदी-के-भाषण-में-देश-पहले</link>
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        <description><![CDATA[ PM Narendra Modi Freedom Day Speeches: साल 2014 में पहली बार लाल किले के प्राचीर से देश को बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था. तब से अबतक 13वीं बार प्रधानमंत्री मोदी स्वंतत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र को संबोधित कर चुके हैं. इतने सालों में देश में मूल भूत सुविधाओं के साथ-साथ तकनीक की दुनिया में काफी तब्दीली आई है. इतने सालों में प्रधानमंत्री के भाषण में भी कई बदलाव आए हैं. बात शौचालय के विकास से निकलकर सेमीकंडक्टर के विकास तक आ चुकी है.&amp;nbsp;
मोदी सरकार के शुरुआती सालों में भाषण अक्सर ऐसी समस्याओं के बारे में होते थे, जो आज मामूली सी नजर आती है. शौचालय, बिजली, गरीबी, सड़कें, बैंक खाते, खाद की कमी ऐसे तमाम मुद्दे पहले के भाषणों में हुआ करते थे. तब देश में इस तरह की समस्याएं बेहद ही जटिल हुआ करती थी. उस समय जब पीएम मोदी इन मुद्दों पर बात करते थे, तो उनका लहजा बेहद ही गंभीर, जरूरी काम वाला होता था. चुनौती यह थी कि जो चीजें खराब थीं, उन्हें ठीक किया जाए. उन लोगों तक पहुंच बनाई जाए, जो बेहद ही पीछे छूट गए थे.
साल दर साल गुजरे, पीएम मोदी के भाषण की शब्दावली में भी तब्दीली आने लगी. बातचीत सुविधाओं की पहुंच से निकलकर आशा आकांक्षओं की ओर अग्रसर होने लगी. कमियों को दूर करने से लेकर समस्याओं को हल करने के ऐसे सिस्टम बनाने की ओर बढ़ चुकी हैं, जहां विकसित भारत के रास्ते की ओर बढ़ा जा सके.&amp;nbsp;
शौचालय के इंतजाम से लेकर सेमीकंडक्टर के विकास की ओर बढ़ता भारत

साल 2014 के भाषण पर नजर डालें तो उनके मुद्दों में शौचालय जैसे मुद्दे थे. तब उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि क्या हम अपनी माताओं और बहनों की गरीमा के लिए शौचालयों का इंतजाम नहीं कर सकते?
अब अगर 2026 के भाषण को देखें तो उन्होंने कहा कि &amp;nbsp;आज की डिजिटल दुनिया और टेक्नोलॉजी से चलने वाले दौर में हम चिप की अहमियत को समझते हैं. चाहे इलेक्ट्रॉनिक सामान हो, मेडिकल उपकरण हों या ट्रांसपोर्ट सिस्टम, चिप हर जगह जरूरी है. दुनिया ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां चिप के बिना पूरा सिस्टम ठप हो सकता है. इसीलिए, भारत ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अपनी सेमीकंडक्टर बनाने की क्षमता विकसित करना शुरू कर दिया है.
ग्रामीण सड़कों से AI और क्वांटम कप्यूटिंग के विकास की ओर बढ़ता भारत

साल 2016 में पीएम मोदी ने अपने भाषण में देश में ग्रामीण सड़कों से जुड़े मुद्दे की चर्चा की थी. तब उन्होंने कहा &amp;nbsp;था कि हर ग्रामीण नागरिक पक्की सड़कों की चाहत रखता है.&amp;nbsp;
2018 के भाषण में उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों ने एक ही बार में 100 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च किए, इससे दुनिया हैरान रह गई. 2024 में उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि चंद्रयान मिशन की सफलता के बाद हमारे स्कूलों और कॉलेजों में साइंस और टेक्नोलॉजी की दिलचस्पी में एक नया माहौल बना है. 2025 में हम अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर भारत के तहत गगनयान मिशन की तैयारी खुद कर रहे हैं. हम अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.&amp;nbsp;
2026 के भाषण में उन्होंने कहा कि आज का दौर एआई, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस, रोबोटिक्स और डेटासेंटर्स का है. एक बिल्कुल नया क्षेत्र खुल गया है. नई नई टेक्नोलॉजी हर पल हमें चुनौती दे रही हैं. इसलिए हमें अपने देश को सिर्फ दुनिया के लिए बाजार नहीं बनाना है. हमें इनोवेशन हब बनना है.&amp;nbsp;
गरीबी की लड़ाई से समृद्धि से जुड़े लक्षित उद्देश्य की ओर बढ़ता भारत&amp;nbsp;
2014 के भाषण में पीएम मोदी ने गरीबी मिटाने पर जोर दिया था. तब उन्होंने कहा था कि अगर भारत के लोग बिना सरकारी ताकत, बिना हथियारों और बिना संसाधनों के इतने बड़े साम्राज्य को उखाड़ फेंक सकते थे, तो दोस्तों आज गरीबी &amp;nbsp;मिटाना समय की जरूरत है. क्या हम गरीबी से पार नहीं पा सकते? क्या हम गरीबी को हरा नहीं सकते? मेरे 125 करोड़ प्यारे देशवासियों, आइए गरीबी मिटाने और उससे जीतने का संकल्प लें.&amp;nbsp;
2026 के भाषण में उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब विकास आखिरी व्यक्ति तक पहुंचेगा. 2014 से पहले सिर्फ 25 करोड़ लोगों के पास सोशल सिक्योरिटी कवर था. हमने एक दशक के भीतर 100 करोड़ देशवासियों को सोशल सिक्योरिटी कवर दिया है.&amp;nbsp;
महिलाओं की गरिमा से लेकर उनकी लीडरशिप सुनिश्चित करने की ओर बढ़ता भारत
2014 में पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि हम 21वीं सदी में जी रहे हैं. क्या हमें कभी इस बात का दुख हुआ है कि हमारी माताओं और बहनों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है? क्या महिलाओं की गरिमा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी नहीं है? गांव की गरीब महिलाएं रात का इंतज़ार करती हैं; जब तक अंधेरा नहीं हो जाता, वे शौच के लिए बाहर नहीं जा सकतीं. क्या हम अपनी माताओं और बहनों की गरिमा के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं कर सकते?
2018 में उन्होंने कहा कि मैं गर्व के साथ घोषणा करता हूं कि भारतीय सशस्त्र बलों के शॉर्ट सर्विस कमीशन में महिला अधिकारियों की नियुक्ति के लिए परमानेंट कमीशन दिया जाएगा.
2026 के भाषण में उन्होंने कहा कि आइए उनकी गरिमा बनाए रखने के लिए आगे बढ़ें और यह सुनिश्चित करें कि हमारी माताओं और बहनों को जल्द से जल्द विधानसभाओं और लोकसभा में 33% प्रतिनिधित्व मिले, ताकि वे भारत की नीतियां बनाने में योगदान दे सकें. यह समय की जरूरत है और मैं एक बार फिर सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि वे आएं और इस मुहिम में शामिल हों.
किसानों को प्राथमिकता को तवज्जों देते उद्देश्यों की ओर बढ़ता भारत

पीएम मोदी ने किसानों के मुद्दे पर भी अपने भाषणों में भी गंभीरता से जिक्र किया. साल 2014 के भाषण में उन्होंने कहा था कि कृपया मुझे बताएं कि हमारे किसान आत्महत्या क्यों करते हैं? एक किसान साहूकार से कर्ज लेता है, लेकिन उसे चुका नहीं पाता. वह अपनी बेटी की शादी के लिए कर्ज लेता है, पर उसे भी नहीं चुका पाता. उसे जिंदगी भर मुश्किलों का सामना करना पड़ता ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>‘अब लड़कियां...’, पुणे में होने वाले गूंज कार्यक्रम पर बोले राहुल गांधी</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के पुणे में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के आयोजन का ऐलान किया है, जिसे लेकर उन्होंने कहा है कि इस बार का कार्यक्रम सिर्फ लड़कियों के लिए होगा. अब लड़कियां बोलेंगी और देश सुनेगा.
उन्होंने इस दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में चले छात्र प्रदर्शन का समर्थन करते हुए छात्रों पर दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा.
प्रदर्शनकारी युवाओं ने राहुल गांधी से की बातचीत
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार (16 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट शेयर किया. वीडियो में राहुल गांधी नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर वाले कुछ युवाओं के साथ बातचीत करते नजर आ रहे हैं.
बातचीत के दौरान युवा लड़के और लड़कियों ने राहुल गांधी को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की तरफ से की गई लाठीचार्ज की कार्रवाई के बारे में बताया. युवाओं ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस के सैनिक उन्हें देशद्रोही और आतंकवादी कह रहे थे. जबकि दूसरे ने कहा कि उन्होंने (दिल्ली पुलिस ने) इतना खतरनाक लाठीचार्ज किया, कि लगा उन्हें मर्डर की परमिशन थी.&amp;nbsp;

भारत के युवाओं ने मोदी जी के हिंसक शासन के सामने जिस साहस और मजबूती से खड़े होकर जवाबदेही की मांग की, वह काबिल-ए-तारीफ है।उन्होंने शांति, मोहब्बत और हंसी-मज़ाक के साथ अपनी आवाज़ बुलंद की।मुझे हर एक युवा पर गर्व है - खासकर उन लड़कियों पर, जिन्हें BJP के गुंडों की बदसलूकी,&amp;hellip; pic.twitter.com/JOVCj4WCkd
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 16, 2026



राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में क्या कहा?
वहीं, लोकसभा LoP राहुल गांधी ने अपने X पोस्ट में लिखा, &amp;lsquo;भारत के युवाओं ने मोदी जी के हिंसक शासन के सामने जिस साहस और मजबूती से खड़े होकर जवाबदेही की मांग की, वह काबिल-ए-तारीफ है. उन्होंने शांति, मोहब्बत और हंसी-मजाक के साथ अपनी आवाज बुलंद की.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मुझे हर एक युवा पर गर्व है, खासकर उन लड़कियों पर, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गुंडों की बदसलूकी, गाली-गलौज और हिंसा का सामना करना पड़ा, यहां तक कि उन्हें प्रधानमंत्री से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन अब उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकेगी.&amp;rsquo;
उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;22 अगस्त को &amp;lsquo;छात्रों की गूंज&amp;rsquo; पुणे पहुंच रही है और इस बार का कार्यक्रम सिर्फ लड़कियों के लिए होगा. अब लड़कियां बोलेंगी, देश सुनेगा.&amp;rsquo;
यह भी पढ़ेंः स्टालिन ने केजरीवाल को दी जन्मदिन की बधाई, कहा- &amp;lsquo;मेरे प्यारे दोस्त...&amp;rsquo; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सर्किट हाउस विवाद: कमरा खाली कराने के आदेश पर भड़कीं महुआ, उठाया ये कदम</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार (14 अगस्त, 2026) को अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर में स्थित सर्किट हाउस के कमरे को खाली करने के लिए आए संदेश के मामले को लेकर शनिवार (15 अगस्त, 2026) को कहा कि वह इस पूरे मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के सामने प्रिविलेज मोशन लाएंगी. उन्होंने कहा कि मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि कल (14 अगस्त को) मैं होगलबरिया में आयोजित एक कार्यक्रम में गई थी. इसके बाद मैं सर्किट हाउस आई, क्योंकि वहां मेरी बुकिंग थी. मेरा घर करीमपुर में है और जब से मैं सांसद बनी हूं, जब भी कृष्णानगर आती हूं, तो मैं सर्किट हाउस में ही रुकती हूं.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;सरकारी नियमों के मुताबिक, ऑर्डर लिस्ट में एक सांसद का नंबर 21 है, जबकि किसी राज्य के मुख्य सचिव और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री का नंबर सर्किट हाउस में 22 या 23 है. इसका मतलब है कि अगर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का मुख्यमंत्री भी आता है, तो चीफ सेक्रेटरी को प्राथमिकता मिलेगी और सांसद को प्राथमिकता मिलेगी और अगर जगह उपलब्ध है, तो परिवार को भी प्राथमिकता दी जाएगी.&amp;rsquo;
सर्किट हाउस में ठहरना मेरा अधिकार- महुआ मोइत्रा
टीएमसी नेता ने कहा, &amp;lsquo;उन्होंने मुझे शाम 7 बजे चाय दी और रात 9:20 बजे खाना दिया और रात 9:57 बजे नदिया के ADM ने मुझे फोन कर कहा कि मैं शर्मिंदा हूं, लेकिन मुझे आपको यह बताने के लिए मजबूर किया जा रहा है कि आपको सर्किट हाउस छोड़ना होगा. तब मैंने उनसे कहा कि मैं मौजूदा सांसद हूं और रात 10 बजे कहीं नहीं जाऊंगी. सर्किट हाउस में ठहरना मेरा अधिकार है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

उन्होंने कहा, &amp;lsquo;इसके बाद मैंने फोन काट दिया और अपने परिवार के साथ विपक्षी पार्टी के सांसदों और लोगों को फोन किया. फिर रात 10:52 बजे जिला प्रशासन की एनडीसी अंकिता बेरा ने मुझे मैसेज किया. उसमें कहा गया कि जिन लोगों ने 14 अगस्त से पहले सर्किट हाउस बुक किया है, उनकी बुकिंग वैलिड रहेगी, जबकि 13 अगस्त के बाद की गई बुकिंग रद्द कर दी जाएगी. इसका कारण बताया गया कि 14 अगस्त से सर्किट हाउस में सर्विसिंग का काम होगा.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

Nadia, West Bengal | TMC MP Mahua Moitra says, &quot;I want to be clear: yesterday I had an appearance in Hogalbaria. After this, I came to the Circuit House because I had a booking there. My house is in Karimpur, and ever since I became an MP, whenever I come to Krishnanagar, I stay&amp;hellip; pic.twitter.com/8v0o7cPV8F
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 15, 2026



सर्किट हाउस के बाहर भाजपा कार्यकर्ता लगा रहे थे नारे- महुआ
महुआ मोइत्रा ने कहा, &amp;lsquo;वह कारण एक सादे सफेद कागज पर लिखा था और उस पर न तो अशोक स्तंभ छपा था और न ही कोई सरकारी चिह्न बना हुआ था. इसलिए मैंने उस लेटर का जवाब नहीं दिया, क्योंकि मैं सर्किट हाउस छोड़कर नहीं जाने वाली थी.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;इसके बाद मैंने बाहर से नारेबाजी की जोरों-शोर से आवाज सुनी. गेट के बाहर भाजपा के 50 से 100 कार्यकर्ता जय श्री राम के नारे लगा रहे थे. भाजपा कह रही है कि मैं यहां चोरी-छिपे आई थी. मैं यहां की मौजूदा सांसद हूं. मैं जब चाहूं सर्किट हाउस आ सकती हूं और जब चाहूं जा सकती हूं. यह मेरा अधिकार है. हम इस पूरे मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के सामने प्रिविलेज मोशन लाएंगे.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः केंद्रीय मंत्री ने किया तिरंगे का अपमान? वायरल वीडियो पर विवाद ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सर्किट, हाउस, विवाद:, कमरा, खाली, कराने, के, आदेश, पर, भड़कीं, महुआ, उठाया, ये, कदम</media:keywords>
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        <title>भारत से रिश्ते सुधार रहा ये मुस्लिम देश, स्वतंत्रता दिवस पर भेजा मैसेज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-से-रिश्ते-सुधार-रहा-ये-मुस्लिम-देश-स्वतंत्रता-दिवस-पर-भेजा-मैसेज</link>
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        <description><![CDATA[ मुस्लिम देश मालदीव अब विवादों को छोड़कर आगे बढ़ रहा है, और भारत से रिश्ते बेहतर करने में लगा हुआ है. जहां एक तरफ पूरा भारत अपने 80वें आजादी के जश्न में डूबा हुआ था, तो उसी दौरान मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत के साथ साझेदारी को और गहरा करने और दोनों देशों के लोगों के बीच अटूट दोस्ती बनाए रखने के लिए अपने देश की प्रतिबद्धता को दोहराया.&amp;nbsp;
मालदीव के राष्ट्रपति ने एक्स पर पोस्ट करते हुए 80वें स्वतंत्रता दिवस के खुशी के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत सरकार और भारत के लोगों बधाई दी. उन्होंने कहा, &#039;आजादी के आठ दशक भारत सरकार और लगोों की आकांक्षाओं, मजूबती और अटूट जज्बे को दर्शाते हैं. इस शुभ अवसर पर मैं मालदीव सरकार की उस प्रतिबद्धता को दोहराता हूं. इसके तहत हम आपसी सम्मान, साझा समृद्धि और हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच अटूट दोस्ती पर बनी अपनी करीबी साझेदारी को और आगे बढ़ाएंगे.&#039;
साल 2024 से भारत और मालदीव के रिश्तों में बना रहा तनाव
दोनों देशों के बीच उस समय विवाद गहरा गया था, जब जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया. वहां उन्होंने टूरिज्म को बढ़ाने की अपील की. इसके जवाब में मालदीव के कुछ मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की. इससे भारत में भारी आक्रोश फैल गया. सोशल मीडिया पर बॉयकोट मालदीव कैंपेन चलाया. विवादित टिप्पणियों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो गया. बाद में मालदीव सरकार ने उन मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था.
मालदीव ने भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस भेजने की मांग की थी
इससे पहले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जु ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान भारत विरोधी इंडिया आउट का नारा दिया था. मालदीव में तैनात भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस भेजने की मांग की थी. इसके बाद मालदीव के राष्ट्रपति की चीन समर्थक नीतियों और बीजिंग की यात्रा के बाद मालदीव और भारत के रिश्तों में खटास और बढ़ गई. इससे वहां के टूरिज्म उद्योग को बड़ा झटका लगा. मालदीव की इकोनॉमी भारत के टूरिस्टों पर काफी हदतक निर्भर है. अभी भी मालदीव सरकार की तरफ से भारतीय प्रोजेक्ट के कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने के बाद से असहजता बनी हुई है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>भारत, से, रिश्ते, सुधार, रहा, ये, मुस्लिम, देश, स्वतंत्रता, दिवस, पर, भेजा, मैसेज</media:keywords>
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        <title>ईरान ने भारत को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ईरान-ने-भारत-को-दी-स्वतंत्रता-दिवस-की-बधाई-राष्ट्रपति-पेजेशकियन-ने-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी को बधाई दी है. उन्होंने इस मौके पर ईरान और भारत के बीच लंबे वक्त से चले आ रहे और व्यापक रिश्तों को और गहरा और विस्तृत करने का एक अहम अवसर बताया है.&amp;nbsp;
भारत में ईरान के दूतावास ने अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए मैसेज साझा किया है. उन्होंने लिखा, &#039;उन्होंने (ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन) इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सभ्यतागत और लोगों के आपसी संबंध, साझा हितों पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों के उज्जवल भविष्य के लिए निस्संदेह एक बहुमूल्य संपत्ति हैं.&#039;
अधिक प्रभावी कदम उठाने के लिए तैयार 
उन्होंने कहा, &#039;भारत गणराज्य के साथ व्यापक संबंधों को और मजबूत करने के लिए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के संकल्प पर जोर देते हुए, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान आपसी विश्वास और सम्मान के माहौल में और मौजूदा व्यापक संभावनाओं का लाभ उठाते हुए, दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के लोगों के साझा हितों को आगे बढ़ाने की दिशा में और अधिक प्रभावी कदम उठाने के लिए तैयार हैं.&#039;
उन्होंने कहा, अपने संदेश में डॉ पेजेशकियन ने सर्वशक्तिमान ईश्वर से भारत की समृद्धि, प्रगति, कल्याण और निरंतर बढ़ती खुशहाली के साथ-साथ दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत और समृद्ध होने की भी प्रार्थना की है.&amp;nbsp;
विदेश मंत्रालय ने कई देशों के बधाई संदेश पर जताया आभार
दुनिया भर से भारत को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बधाई संदेश दिए हैं. इसी बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर कई पोस्ट करते हुए उज्बेकिस्तान, ग्वाटेमाला और पेरू के विदेश मंत्रालयों का स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त किया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ईरान, ने, भारत, को, दी, स्वतंत्रता, दिवस, की, बधाई, राष्ट्रपति, पेजेशकियन, ने, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>वंदे मातरम और दिमागी नक्सल पर BJP&amp;कांग्रेस में आर पार, PM का Gen Z को खास संदेश | बड़ी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से अपने संबोधन का केंद्र देश के युवाओं को बनाया. पीएम ने अपने भाषण के दौरान पीएम मोदी ने मुफ्त कोचिंग, एआई स्किलिंग और 2036 के ओलंपिक लक्ष्यों सहित कई बड़ी घोषणाएं कीं. 75 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने 52 बार युवाओं का जिक्र किया. सरकार ने अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है. वहीं पीएम मोदी के &#039;दिमागी नक्सल&#039; वाले बयान पर देश में राजनीति गरमा गई है. लाला किले पर आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों सदनों के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे अनुपस्थित रहे.
पीएम मोदी ने 52 बार किया युवाओं का जिक्र किया
पीएम मोदी ने अपने भाषण में युवाओं के लिए युवा शक्ति, साथियों, नौजवान और युवा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. युवा शब्द का इस्तेमाल 20 बार किया, जिसमें पांच बार युवा शक्ति और युवा सामर्थ्य जैसे शब्दों के जरिए युवाओं की ताकत का जिक्र किया. उन्होंने युवाओं को 22 बार नौजवानों और 10 बार साथियों कहकर भी संबोधित किया. उन्होंने युवाओं से समाज और अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया.
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थान गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालते हैं, जिसे खत्म करने के लिए बेहतरीन शिक्षकों और डिजिटल नेटवर्क को एक साथ लाया जाएगा. पीएम मोदी में देश को खेल जगत में वैश्विक महाशक्ति बनाने और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दो बड़े दूरगामी फैसलों का ऐलान किया. प्रधानमंत्री ने 2036 के खेल लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि देश का लक्ष्य आगामी 2036 ओलंपिक में कम से कम तीन-चौथाई (75 फीसदी) खेल स्पर्धाओं में भागीदारी दर्ज करना है.
&#039;दिमागी नक्सल&#039; वाले बयान पर राजनीति गरमाई
पीएम मोदी ने आंतरिक सुरक्षा और नक्सलवाद पर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि देश को जंगलों में पनपने वाले हथियारी नक्सलवाद से मुक्त कराने में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन अब देश के सामने &#039;दिमागी नक्सल&#039; की नई और गंभीर चुनौती है, जिनसे बेहद सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को समाज से अलग-थलग करना होगा, जिस पर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष भड़क गया. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पहले अपने विरोधियों को &#039;अर्बन नक्सल&#039; कहा था और अब वे उन्हें &#039;दिमागी नक्सल&#039; कह रहे हैं.
वंदे मातरम पर BJP-कांग्रेस में आर पार
बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का अपमान किया. बीजेपी ने उनसे माफी की मांग की. बीजेपी कई नेताओं ने सोनिया गांधी पर कार्यक्रम में वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताने का भी आरोप लगाया. हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया. पार्टी ने कहा कि गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी को लेकर कह रही थीं, क्योंकि वह काफी समय से खड़े थे.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी आपस में बातचीत करते नजर आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस के दोनों नेता &#039;वंदे मातरम्&#039; गाने को राकने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, वीडियो में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी दिखाई पड़ रहे हैं. बीजेपी सांसद ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, &#039;आज राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के कांग्रेस मुख्यालय पर हुए अपमान पर यह है सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच हुए बातचीत का अंश. निर्णय देश करे, मेरा मुंह बंद रखना ही उचित है.&#039;
दुनिया भर के नेताओं ने भारत को दी बधाई
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर दुनियाभर के वैश्विक नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 140 करोड़ भारतीयों को बधाई संदेश भेजे. मित्र राष्ट्रों ने न केवल भारत के विकास की सराहना की, बल्कि रक्षा, टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प जताया. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई भेजते हुए भारत की आर्थिक, वैज्ञानिक और सामाजिक प्रगति की खुलकर सराहना की.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को बधाई देते हुए दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की बात की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे संबंधों की वजह से भारत-अमेरिका रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. इजरायल के राष्ट्रपति आइजक हर्जोग ने &amp;lsquo;एक्स&amp;rsquo; पर पोस्ट कर भारत सरकार और देश की जनता को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि कि इजरायल और भारत के बीच की यह गहरी और घनिष्ठ मित्रता समय के साथ और अधिक मजबूत होगी. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी भारत को 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;महंगा तेल खरीदो...&amp;apos;, होर्मुज संकट के बीच ट्रंप का जनता को फरमान</title>
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        <description><![CDATA[ ईरान और अमेरिका में तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने देश के लोगों से अपील की है कि वे पेट्रोल की थोड़ी ज्यादा कीमतें स्वीकार करें. न्यूयॉर्क गार्डन सिटी की एक राजनीतिक रैली में ट्रंप ने कहा है कि पेट्रोल के लिए थोड़ा ज्यादा पैसा इस बात को पक्का करने के लिए सही है, कि एक बहुत बुरे देश के पास एटमिक हथियार न हो.&amp;nbsp;
ट्रंप बोले- ईरान को हराने के बाद होर्मुज को अमेरिका का इलाका घोषित कर देंगे
ट्रंप ने कहा है कि ईरान को हराने के बाद वह होर्मुज को अमेरिका का इलाका घोषित कर देंगे. सीजफायर की दिशा में रुकावट लगातार बनी हुई है. इस वजह से होर्मुज से तेल टैंकरों का आना जाना भी रुका हुआ है. ट्रंप की तरफ से होर्मुज को अमेरिकी कंट्रोल में लाने का वादा करने के एक दिन बाद शनिवार को ईरान ने अमेरिका से हार की सच्चाई स्वीकार करने को कहा है.&amp;nbsp;
अमेरिका और ईरान के बीच जारी है गतिरोध
होर्मुज पर अमेरिका और ईरान का गतिरोध जारी है. कच्चे तेल और नैचुरल गैस की शिपिंग के लिए इस जलमार्ग पर संकट और गहरा गया है. ईरान ने कहा है कि इसे केवल उसके आदेश पर ही खोला और बंद किया जाएगा. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक्स पर कहा है कि जब तक की सच्चाई स्वीकार नहीं करते और कल्पनाओं में खोए रहना बंद नहीं करते, ईरान नाकेबंदी जारी रखेगा. ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने भी कहा है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला नहीं किया है.&amp;nbsp;
ईरान और अमेरिका में तनाव बरकरार है
ईरान और अमेरिका में 28 फरवरी से युद्ध जारी है. अमेरिका और ईरान कई बार शांति वार्ता की टेबल आ चुके हैं, लेकिन हालात सुधर नहीं पाए हैं. फिलहाल होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Independence Day 2026 : रेत से बनाई खूबसूरत कलाकृति, देखें खास तस्वीरें</title>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Independence Day 2026 : शिवराज सिंह चौहान ने फहराया तिरंगा</title>
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        <description><![CDATA[ Independence Day 2026 : शिवराज सिंह चौहान ने फहराया तिरंगा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Viral Video : दिल्ली पुलिस की चप्पे&amp;चप्पे पर नज़र</title>
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        <description><![CDATA[ Viral Video : दिल्ली पुलिस की चप्पे-चप्पे पर नज़र ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Independence Day 2026 : 80वां स्वतंत्रता दिवस, बाबा विश्वनाथ का &amp;apos;तिरंगा&amp;apos; श्रृंगार</title>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Independence Day 2026 : दिल्ली में &amp;apos;हाई अलर्ट&amp;apos;, गाड़ियों की सघन चेकिंग!</title>
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        <description><![CDATA[ Independence Day 2026 : दिल्ली में &#039;हाई अलर्ट&#039;, गाड़ियों की सघन चेकिंग! ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>78 वीरता पुरस्कार का ऐलान, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, 13 मरणोपरांत भी शामिल</title>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 14 अगस्त 2026 (शुक्रवार) की शाम को डिफेंस फोर्सेज और सेंट्रल ऑर्म्ड पुलिस फोर्सेज के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कार को अवॉर्ड्स की मंजूरी दी है. इसमें 13 मरणोपरांत अवॉर्ड्स शामिल हैं. इनमें 09 कीर्ति चक्र, इनमें, 7 मरणोपरांत अवॉर्ड्स शामिल हैं. इनके अलावा 19 शौर्य चक्र अवॉर्ड्स, इनमें 01 मरणोपरांत अवॉर्ड शामिल हैं. साथ ही 36 सेना के मेडल्स, 5 मरणोपरांत अवॉर्ड्स शामिल हैं. 03 नौसेना मेडल और 5 वायुसेना मेडल्स &amp;nbsp;शामिल हैं. &amp;nbsp;
कीर्ति चक्र अवॉर्ड कब दिया जाता है?&amp;nbsp;
क्रीर्ति चक्कर और शौर्य चक्र प्रमुख सम्मानों में शामिल हैं. 9 कीर्ति चक्रों को मंजूरी दी है. इनमें से सात मरणोपरांत दिए जाने वाले सम्मान हैं. कीर्ति चक्र भारत के शांति काल के प्रमुख वीरता पुरस्कारों में से एक हैं. यह असाधारण बहादुरी के कामों के लिए दिया जाता है. इस लिस्ट में 19 शौर्य चक्रों के साथ-साथ एक बार टू शौर्य चक्र भी शामिल हैं. शौर्य चक्र उन परिस्थितियों में वीरता और साहस के कामों के लिए दिया जाता है, जिनमें दुश्मन से सीधी लड़ाई शामिल नहीं होती है.&amp;nbsp;
सेना मेडल 41 अवॉर्ड्स के साथ लिस्ट में टॉप पर
सेना मेडल 41 अवॉर्ड्स के साथ लिस्ट में टॉप पर है. कुल 41 सेना मेडल को मंजूरी दी गई है. इनमें सेना के मेडल के लिए पांच बार और 36 सेना मेडल शामिल हैं. 36 सेना मेडल अवॉर्ड्स में से पांच मरणोपरांत दिए जान के लिए मंजूर किए गए हैं. यह अवॉर्ड उन जवानों को अतिरिक्त वीरतापूर्ण कार्यों को मान्यता देता है, जिन्हें पहले ही सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है.&amp;nbsp;
नौसेना और वायुसेना के जवानों को भी किया गया सम्मानित&amp;nbsp;
इसके अलावा नौसेना और वायुसेना के जवानों को भी सम्मानित किया गया है. राष्ट्रपति ने भारतीय नौसेना के जवानों के लिए तीन नौसेना मेडल को मंजूरी दी है. भारतीय वायुसेना के जवानों के लिए पांच वायुसेना मेडल को मंजूरी दी गई है. यह भारत की तीनों सशस्त्र सेनाओं के जवानों के योगदान को भी उजागर करता है.
बीते एक दशक में देश ने तेजी के साथ तरक्की की- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DU के नए PG हिस्ट्री सिलेबस पर विवाद, हटाया गया दिल्ली &amp;apos;सल्तनत&amp;apos; पेपर</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के इतिहास विभाग के पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम के नए सिलेबस को लेकर विवाद शुरू हो गया है. 2026-27 सत्र से लागू होने वाले MA हिस्ट्री के Semester III के नए सिलेबस में इतिहास के कई अहम प्रस्तावित पेपरों को जगह नहीं मिली है. इनमें मध्यकालीन भारत के इतिहास से जुड़ा चर्चित पेपर &amp;ldquo;द दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर ऑफ अथॉरिटी इन मिडिबल नॉर्थ इंडिया(13th&amp;ndash;14th Centuries)&amp;rdquo; भी शामिल है. दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 7 अगस्त को MA हिस्ट्री के PGCF 2024 के तहत सेमेस्टर III का सिलेबस जारी किया है.
नए सिलेबस के मुताबिक सेमेस्टरIII में दो डिसिपिलिन स्पेसिफिक कोर यानी DSC पेपर शामिल किए गए हैं. इनमें &amp;ldquo;Themes in Ancient Indian Culture and Society&amp;rdquo; और &#039;Socio-Cultural History of India C. 700&amp;ndash;1700&amp;rdquo; शामिल हैं. इसके अलावा 16 Discipline Specific Elective यानी DSE पेपर फाइनल सिलेबस में रखे गए हैं. यह सिलेबस PGCF 2024 के तहत NEP-2020 आधारित है और जुलाई 2026 से प्रभावी है.
कैसा है फाइनल सिलेबस?
फाइनल सिलेबस में शामिल 16 DSE पेपरों में प्राचीन भारत से जुड़े &amp;ldquo;Prehistory of India&amp;rdquo;, &amp;ldquo;History of Early Indian Art and Architecture (up to c. 600 CE)&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Theories, Methods and Practices in Archaeology&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Historiography of Ancient India&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Historical Geography of Ancient India&amp;rdquo; और &amp;ldquo;Perspectives on Nature in Ancient India&amp;rdquo; शामिल हैं.
नए सिलेबस में मध्यकालीन भारत का अध्ययन पूरी तरह खत्म नहीं
मध्यकालीन भारत से जुड़े फाइनल DSE पेपरों में &amp;ldquo;History, Sources and Narratives in Medieval India&amp;rdquo;, &amp;ldquo;History of an Idea: Rajasthan, c 1200-1800&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Socio-Economic History of India: 1200-1700&amp;rdquo; और &amp;ldquo;Sovereignty and Court Culture in South Asia, 1400&amp;ndash;1700&amp;rdquo; शामिल हैं. यानी नए सिलेबस में मध्यकालीन भारत का अध्ययन पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, लेकिन पहले पढ़ाया जाने वाला &amp;ldquo;The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India (13th&amp;ndash;14th Centuries)&amp;rdquo; पेपर फाइनल सूची में नहीं है.
आधुनिक भारतीय इतिहास के लिए फाइनल सिलेबस में &amp;ldquo;The Rise of British Imperial and Colonial Power in India, 1707-1857&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Some Aspects of the Cultural Histories of Colonial India: The Visual and the Aural&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Revolutionaries in India&amp;rsquo;s Struggle for Freedom&amp;rdquo;, &amp;ldquo;The Colonial Economy in India: 1757-1857&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Strategies of Imperial Control, 1857&amp;ndash;1939&amp;rdquo; और &amp;ldquo;Artisans, Skill, and Knowledge in Modern Indian History (c.1857-1947)&amp;rdquo; शामिल किए गए हैं.
इन प्रस्तावित पेपरों को Semester III के फाइनल सिलेबस में &amp;nbsp;नहीं मिली जगह
वहीं, जिन प्रस्तावित पेपरों को Semester III के फाइनल सिलेबस में जगह नहीं मिली है, उनमें &amp;ldquo;The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India (13th&amp;ndash;14th Centuries)&amp;rdquo;, &amp;ldquo;History of North India, c. 1400&amp;ndash;1550&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Gender and Women in Early India: 1500 BCE&amp;ndash;1000 CE&amp;rdquo;, &amp;ldquo;Political Processes and Structure of Polities in Ancient India&amp;rdquo; और &amp;ldquo;Religion and Society in Ancient Indian Literature&amp;rdquo; शामिल हैं. इन विषयों में मध्यकालीन उत्तर भारत में सत्ता और शासन व्यवस्था से लेकर प्राचीन भारत में महिलाओं, जेंडर, राजनीतिक संस्थाओं तथा धर्म और समाज जैसे विषय शामिल थे.
&amp;ldquo;The Delhi Sultanate: Structures of Authority in Medieval North India&amp;rdquo; पेपर के जरिए तुर्क और ग़ुलाम वंश के दौरान उत्तर भारत में सत्ता के स्वरूप, शासन व्यवस्था, राज्य संरचना और राजनीतिक-सामाजिक बदलावों का अध्ययन कराया जाता था. दिल्ली सल्तनत भारतीय इतिहास के उस महत्वपूर्ण दौर से जुड़ी है जिसमें 11 वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान उत्तर भारत में विभिन्न सल्तनती राजवंशों का शासन रहा.
DU में एम ए इतिहास के छात्र शुभ के मुताबिक इस तरह का फैसला इतिहास के छात्रों के साथ खिलवाड़ है. किसी भी राजवंश ने अपने समय पर काम अच्छा किया या फिर गलत किया इसका फ़ैसला तभी होगा जब उसे पढ़ा जाएगा.
विवाद पर क्या बोले भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक?
इतिहासकार और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ ओमजी उपाध्याय हालांकि चैप्टर हटाए जाने के पक्ष में तर्क दे रहे हैं कि सेमेस्टर-3 में जो पेपर पढ़ाए जा रहे हैं, उनमे सुल्तान डायनेस्टी के कालखंड की अन्य चीजें पढ़ाई जा रही हैं और बताई जा रही हैं, ऐसे में ये कह देना कि सुल्तान डायनेस्टी पूरा पूरा गायब है, ये आधा अधूरा तर्क दिया जा रहा है.
बीते एक दशक में देश ने तेजी के साथ तरक्की की- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफ़ेसर डॉ अली नदीम रिजवी इस तरफ से पेपर के हटाने का विरोध कर रहे हैं. डॉ अली नदीम रिज़वी के मुताबिक ये सिलसिला एनसीईआरटी से शुरू हुआ था जो आज पीजी तक पहुंच गया है कि जब इतिहास बदल ना पाओ तो उसे हटा दो.
जानकारी के अनुसार, विभाग की ओर से बड़ी संख्या में DSE पेपर प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन अंतिम सिलेबस में सीमित संख्या में पेपर शामिल किए गए. फाइनल दस्तावेज में 16 DSE पेपर दर्ज हैं. उपलब्ध सिलेबस दस्तावेज यह भी दिखाता है कि अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों को कवर करने वाले पेपरों को अंतिम सूची में शामिल किया गया है, जिसमें प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय इतिहास तीनों शामिल हैं.
78 वीरता पुरस्कार का ऐलान, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, 13 मरणोपरांत भी शामिल ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>विदेश नीति, युवा आबादी और शिक्षित महिलाएं&amp; राष्ट्रपति के संबोधन की 10 बातें</title>
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        <description><![CDATA[ देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार (14 अगस्त, 2026) को देश के नाम अपना संबोधन दिया. अपने संबोधन की शुरुआत राष्ट्रपति मुर्मू ने सभी देशवासियों को राष्ट्रीय पर्व की बधाई देकर की. उन्होंने कहा कि कुछ ही घंटों के बाद हमारे देश की स्वाधीनता के 80वें वर्ष का शुभारंभ होगा और हमारा तिरंगा हमारी स्वाधीनता का प्रतीक है. इस दौरान उन्होंने देश की विदेश नीति, युवा आबादी, शिक्षि महिलाओं समेत कई अन्य विषयों पर अपनी बात रखी है. जानें राष्ट्रपति के संबोधन की 10 बड़ी बातें-
युवा आबादी पर बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, &#039;देश की कुल आबादी में 65 प्रतिशत लोगों की आयु 35 वर्ष से कम है. यह युवा आबादी हमारी सबसे मूल्यवान संपदा है. केवल 28 वर्ष की औसत आयु वाली युवा टीम द्वारा हाल ही में रॉकेट का सफल प्रक्षेपण करके अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए चरण का शुभारंभ किया गया है. हमारे देश के युवा टैलेंटेड हैं, कमिटेड हैं और स्किल्ड हैं. जमीनी स्तर पर युवाओं द्वारा किए गए विभिन्न समस्याओं के इनोवेटिव और प्रैक्टिकल समाधान को देखकर मुझे समाज और देश के लिए उनकी प्रतिबद्धता का परिचय मिलता है.&amp;rsquo;
शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बेटियों का प्रदर्शन प्रभावशाली- राष्ट्रपति मुर्मू
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता होती है कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बेटियां प्रभावशाली प्रदर्शन कर रही हैं. महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है. स्वयं सहायता समूहों की 10 करोड़ से अधिक महिला सदस्य हैं. मुद्रा योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाले उद्यमियों में लगभग दो तिहाई लाभार्थी महिलाएं हैं. कृषि उत्पादकता बढ़ाने में योगदान देने वाली ड्रोन दीदी से लेकर वायु सेना में फाइटर कॉम्बैट लीडर बनने तक विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है.&amp;rsquo;
उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य तय किया गया था. इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा चुका है. अब हमारा देश 3 करोड़ महिलाओं को नई लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य की तरफ अग्रसर है.&amp;rsquo;
भारत की विदेश नीति पर राष्ट्रपति का संबोधन
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, &amp;lsquo;हमारी विदेश नीति, देश हित पर आधारित है. आर्थिक सहयोग बढ़ाने तथा पारस्परिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए हमने अनेक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements) किए हैं. ग्लोबल साउथ के देशों में हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. विश्व पटल पर हमारे देश का सम्मान बढ़ा है. शांति, सहयोग, संवाद और वसुधैव कुटुंबकम् के आदर्श हमारी विदेश नीति के स्तंभ हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
भारत की आधुनिक विकास पर राष्ट्रपति की कथन
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत विश्वस्तर पर अग्रणी योगदान दे रहा है. रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) के विकास को पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति मिली है. सस्टेनबल डेवलपमेंट गोल्स 2030 के कुछ लक्ष्यों को हमारे देश ने समय से पहले ही प्राप्त कर लिया है.&amp;rsquo;

VIDEO | Addressing the nation, President Droupadi Murmu says, &quot;Under the Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana, 60 crore people have been provided free healthcare coverage of up to Rs 5 lakh per year. The PM-KISAN Samman Nidhi and Kisan Credit Card have provided&amp;hellip; pic.twitter.com/hPv7e30NK0
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) August 14, 2026



देश की अर्थव्यवस्था पर बोलीं राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, &amp;lsquo;हमारे देश की अर्थव्यवस्था, सबसे तेज गति से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है. आत्मनिर्भर भारत अभियान से हमारी आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार मजबूत हुआ है.&amp;rsquo;
भावी पीढ़ियों के लिए नहीं होनी चाहिए कोई कमी- राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, &amp;lsquo;हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे किसी भी कार्य से आने वाली पीढ़ियों द्वारा इस अधिकार के प्रयोग में तनिक भी कमी न हो. हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम उनको और अधिक समृद्ध प्राकृतिक संपदाएं प्रदान करें. पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी आस्था हमारी परंपरा का हिस्सा है. प्राकृतिक संपदाओं पर हमारी भावी पीढ़ियों का भी उतना ही अधिकार है, जितना हमारा है.&amp;rsquo;
आज का व्यक्ति सपने देखने और पूरा करने में सक्षम- राष्ट्रपति
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;आज साधारण पृष्ठभूमि के लोग अनेक क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रहे हैं. इससे मेरा यह विश्वास दृढ़ होता है कि आज के भारत में हर व्यक्ति बड़े सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है. पिछले एक दशक से कुछ अधिक समय में हमारे देश ने तेज गति से समावेशी विकास किया है, विरासत और विकास के समन्वय को प्राथमिकता दी है और विकास में बाधक दशकों पुराने अनेक अवरोधों को दूर किया है.
देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर राष्ट्रपति ने क्या कहा?
राष्ट्रपति ने कहा, &amp;lsquo;हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अच्छा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) विकसित किया गया है. गांवों की छोटी-छोटी दुकानों में और रेहड़ी-पटरी पर भी डिजिटल पेमेंट्स हो रहे हैं. विश्व में आधे से अधिक रियल टाइम डिजिटल ट्रांसजैक्शन (Real Time Digital Transactions) भारत में हो रहे हैं. तकनीक का उपयोग करके सरकार ने जनकल्याण की सुविधाओं को पारदर्शी तरीके से जन-जन तक पहुंचाया है.&amp;rsquo; &amp;nbsp;
विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के कर्तव्य पर राष्ट्रपति के विचार
द्रौपदी मुर्मू ने कहा, &amp;lsquo;जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वे विधायिका में जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करें. कार्यपालिका का कर्तव्य है कि जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को क ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>विदेश, नीति, युवा, आबादी, और, शिक्षित, महिलाएं-, राष्ट्रपति, के, संबोधन, की, बातें</media:keywords>
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        <title>टीवी चैनलों को बड़ी राहत, सरकार ने हटाई 12 मिनट विज्ञापन की टाइम लिमिट</title>
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        <description><![CDATA[ भारत सरकार ने टेलीविजन चैनलों के लिए एडवरटाइजमेंट की अवधि पर लगी 12 मिनट की समय सीमा को हटाने का फैसला किया है. सरकार ने शुक्रवार को इससे जुड़ा आदेश भी जारी कर दिया है. सरकार ने टेलीविजन के लिए एडवरटाइजमेंट की समय सीमा 2006 में केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के तहत लागू की थी.&amp;nbsp;
उसी वक्त से अबतक टीवी ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में काफी बदलाव आ चुके हैं. 2006 में देश में सिर्फ 62 टीवी चैनल थे. आज देश में कुल 900 चैनल हैं. उस समय टीवी चैनल दिखाने का मुख्य जरिया केबल टीवी था. यह एनालॉग माध्यम था. इसकी क्षमता सीमित थी. इससे कस्टमर्स के पास बहुत कम विकल्प होते थे.&amp;nbsp;
अब केबल टीवी सेक्टर पूरी तरह से डिजिटल होने के बाद से डीटीएच, केबल टीवी, HITS और IPTV जैसे टीबी डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म डिजिटल हो चुके हैं. ये प्लेटफॉर्म अभी 300 से 500 या उससे ज्यादा चैनल दिखाते हैं. इससे ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतें पूरी होती हैं. उन्हें ज्यादा विकल्प मिलते हैं.&amp;nbsp;
मार्केट में काफी कॉम्पीटिशन बढ़ चुका है. टीवी ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में आए बदलावों के चलते एडवरटाइजमेंट की टाइमलाइन से जुड़े नियमों पर फिर से विचार करने की जरूरत को महसूस किया गया है.&amp;nbsp;
भारत में टीवी सेक्टर काफी हद तक एडवरटाइजमेंट पर निर्भर
भारत में टीवी चैनलों का सेक्टर काफी हद एडवरटाइजमेंट पर निर्भर है. चाहे चैनल पे हो या फ्री टू एयर. इसके अलावा ट्रेडिशनल टीवी चैनलों पर डिजिटल मीडिया के बीच बराबरी का माहौल नहीं था, क्योंकि डिजिटल मीडिया पर विज्ञापन की सीमा जैसा कोई नियम नहीं है.
सूचना &amp;nbsp;प्रसारण मंत्रालय का कहना है कि टीवी इंडस्ट्री के अंदर और टीवी इंडस्ट्री और डिजिटल मीडिया के बीच मार्केट में काफी कॉम्पिटिशन है. सरकार ने निष्पक्षता बढ़ावा देने और आसानी से कारोबार (Ease Of Doing Business) को सुनिश्चित करने के लिए एडवरटाइजमेंट की टाइम लिमिट को हटाने का फैसला किया है. यह फैसला केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 में संशोधन की अधिसूचना के गजट के पब्लिश होने के साथ ही लागू होगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कहीं तिरंगा यात्रा, कहीं देशभक्ति का रंग…, कश्मीर से गुजरात तक छाया जश्न</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कहीं-तिरंगा-यात्रा-कहीं-देशभक्ति-का-रंग-कश्मीर-से-गुजरात-तक-छाया-जश्न</link>
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        <description><![CDATA[ स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पूरे देश में जश्न का माहौल दिखा. लोग देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आए. देश के अलग-अलग हिस्सों में तिरंगे की रोशनी, तिरंगा यात्राओं और खास आयोजनों के जरिए आजादी के पर्व का उत्साह देखने को मिला. तिरंगे की रोशनी से जगमगाया माही डेम राजस्थान के बांसवाड़ा संभाग का सबसे बड़ा माही डेम तिरंगे के रंगों की रोशनी से जगमगा उठा.
जल संसाधन विभाग की ओर से माही डेम पर आकर्षक तिरंगा रोशनी की सजावट की गई, जिसने पूरे क्षेत्र को देशभक्ति के रंग में रंग दिया. शाम ढलते ही डेम पर केसरिया, सफेद और हरे रंग की रोशनी दिखाई देने लगी. तिरंगे रंग में सजा माही डेम लोगों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया. रोशनी से जगमगाता डेम दूर से बेहद खूबसूरत नजर आया. स्वतंत्रता दिवस के उत्साह और राष्ट्रभक्ति की भावना को दर्शाती इस सजावट को देखने के लिए लोगों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया. माही डेम पर तिरंगे की रोशनी ने आजादी के पर्व की खुशी को और बढ़ा दिया. स्वतंत्रता दिवस से पहले बांसवाड़ा में देशभक्ति का यह नजारा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
देशभक्ति में सराबोर देश
स्वतंत्रता दिवस से पहले नगर निगम ने लखनऊ को भी तिरंगे के रंगों से रोशन किया है. शहर के प्रमुख मार्गों और स्थानों, जैसे हजरतगंज, राजभवन, 1090 चौराहा, लोहिया पथ और मुख्यमंत्री चौराहा पर तिरंगा एलईडी लाइटों की आकर्षक सजावट की गई है. नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग की टीम ने दिन-रात मेहनत कर शहर को स्वतंत्रता दिवस के रंग में रंगने की तैयारियां पूरी कीं.
15 अगस्त से पहले शहर की तिरंगा सजावट लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. नगर निगम की इस पहल से लखनऊ का नजारा बेहद खूबसूरत और देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया. गुजरात में निकली तिरंगा यात्रा गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले शुक्रवार को आणंद शहर में आयोजित &amp;lsquo;तिरंगा यात्रा&amp;rsquo; में हिस्सा लिया. संघवी ने स्थानीय बीजेपी नेताओं, पदाधिकारियों और छात्रों के साथ विद्यानगर के शास्त्री मैदान से टाउन हॉल तक मार्च किया.
निकाली गई तिरंगा यात्रा
संघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &amp;lsquo;एक्स&amp;rsquo; पर लिखा कि 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित &amp;lsquo;हर घर तिरंगा&amp;rsquo; अभियान के तहत वल्लभ विद्यानगर, आणंद में भव्य तिरंगा यात्रा में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि तिरंगे के सम्मान और देश की एकता एवं अखंडता को प्रदर्शित करने वाली इस यात्रा में शामिल होना उनके लिए गौरवपूर्ण क्षण है. वहीं, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और हर्ष संघवी की मौजूदगी में बृहस्पतिवार शाम सूरत में दो किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया.
यात्रा मार्ग पर विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दलों, छात्रों और पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने देशभक्ति से जुड़ी रंगारंग प्रस्तुतियां दीं और प्रतिभागियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया. तिरंगे के रंगों में रंगा कश्मीर जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर और घाटी के अन्य जिले 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में सराबोर नजर आए.
वहीं, समारोहों को शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है. अधिकारियों ने बताया कि नियंत्रण रेखा यानी एलओसी के निकट उरी सेक्टर समेत कई स्थानों पर तिरंगा रैलियां निकाली गईं. उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में एलओसी की आखिरी चौकी से उरी शहर तक तिरंगा बाइक रैली आयोजित की गई. इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के साथ-साथ नागरिक प्रशासन के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया.
राष्ट्री ध्वज के रंगों में रंगा कश्मीर
घाटी के अन्य हिस्सों में भी तिरंगा रैलियों का आयोजन किया गया, जिनमें छात्रों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया. प्रमुख प्रतिष्ठानों, सरकारी और अन्य इमारतों, सड़कों तथा टावरों को तिरंगे के रंगों से सजाया गया है. एलओसी के निकट कई स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज भी फहराया गया है. स्वतंत्रता दिवस समारोह को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरी घाटी में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. हिमाचल में 433 कैदियों को सजा में छूट स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने 433 दोषसिद्ध कैदियों को सजा में छूट प्रदान की है.
हालांकि, इनमें से केवल तीन कैदियों को सजा में मिली इस छूट के कारण रिहा किया जाएगा. एक सरकारी प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लागू कानूनी प्रावधानों के तहत पात्र दोषसिद्ध कैदियों की सजा में छूट दी गई है. उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद 1,025 दोषसिद्ध कैदियों में से अच्छे आचरण वाले 433 कैदियों को सजा में छूट के लिए पात्र पाया गया. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>किसकी टेंशन बढ़ाने वाले हैं सोनम वांगचुक? कर दिया बड़ा ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/किसकी-टेंशन-बढ़ाने-वाले-हैं-सोनम-वांगचुक-कर-दिया-बड़ा-ऐलान</link>
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        <description><![CDATA[ स्वतंत्रता दिवस से पहले साइनटिस्ट और एक्टविस्ट सोनम वांगचुक ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने देश के भविष्य को लेकर एक बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने देश में नेताओं को चुनने के तरीके में बदलाव लाने के लिए भारत के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन का आह्वान किया है. उन्होंने नागरिकों से ऐसे निस्वार्थ और निडर लोगों के नाम सुझाने को कहा है जो अच्छे चरित्र और काबिलियत वाले हों.
&#039;&#039;देश को बदलाव की जरुरत है&#039;&#039;सोनम वांगचुक ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा- &#039;&#039;देश को एक शांतिपूर्ण बदलाव की जरूरत है. कम से कम इस बात में कि हम अपने नेताओं का चुनाव कैसे करते हैं. ताकि 2047 तक हम एक सम्मानित राष्ट्र बने रहें. हमारे लगभग आधा सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं और एक-तिहाई पर हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं. ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि जनता और शासन के बीच भरोसा टूट रहा है.&#039;&#039;

THIS INDIPENDENCE DAY, I NEED YOUR HELP...This country needs a peaceful revolution, at least in how we chose our leaders... if we are to remain even a respectable nation by 2047.Close to half of our MPs have criminal cases and a third have serious charges like murder, rape &amp;amp;&amp;hellip; pic.twitter.com/10byPuzwtX
&amp;mdash; Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) August 13, 2026



&#039;&#039;दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत करें&#039;&#039;&#039;&#039;मैं देश भर के उन बेहतरीन और निडर लोगों से जुड़ना चाहता हूं जो चरित्र और नीयत से पक्के हों ताकि हम मिलकर इस स्थिति को सुधारने पर चर्चा कर सकें. सुदूर लद्दाख में बैठे होने के कारण मुझे नहीं पता कि वे लोग कहां हैं. क्या आप अपने क्षेत्र या देश से ऐसे किसी कम से कम एक व्यक्ति का नाम सुझा सकते हैं? आइए, मिलकर भारत के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत करें.&#039;&#039;
झारखंड में बच्चों का किया सपोर्ट&amp;nbsp;हाल ही में सोनम वांगचुक ने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को अपना समर्थन दिया था, जो JPSC, JSSC CGL और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उन्होंने महतो से वीडियो कॉल के जरिए बात भी की थी. सोनम से बात करने के बाद ही महतो से पानी पीया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वो अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे.
ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने विदेश नीति पर की पीएम मोदी की मिमिक्री तो भड़की BJP, &#039;शर्मनाक, हताशा में अपमान&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;खुलेआम डराने&amp;धमकाने की कोशिश...&amp;apos; NALSAR विवाद पर ओवैसी का BCI पर तीखा हमला</title>
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        <description><![CDATA[ बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने गुरुवार को चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के पुराने निर्देश में बदलाव किया है. जिसमें उन्होंने स्टेट बार काउंसिल्स को NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स को वकील के तौर पर एनरोल करने से रोका गया था. ये निर्देश आने के बाद AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन औवैसी ने इसकी निंदा की. उन्होंने कहा है कि खुलेआम युवाओं को डराने-धमकाने का काम हो रहा है.
ओवैसी ने कही ये बातओवैसी ने लिखा- &#039;&#039;यह बिल्कुल निंदनीय है. BCI चेयरमैन ने पहले स्टेट बार काउंसिल्स को निर्देश दिया था कि वे NALSAR के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स को एडवोकेट के तौर पर एनरोल न करें. अब BCI ने अपना पिछला आदेश वापस ले लिया है और इसके बजाय इस बात की जांच का आदेश दिया है कि कन्वोकेशन में CJI की भागीदारी को लेकर छात्रों का कैंपेन किसने आयोजित किया था. ऐसा करने का अधिकार BCI या उसके चेयरमैन के पास कहां से आया?&#039;&#039;

Absolutely condemnable.The BCI Chairman first directed State Bar Councils not to enrol NALSAR&amp;rsquo;s 2026 graduates as advocates. The BCI has now withdrawn the previous order &amp;amp; instead ordered an &amp;ldquo;inquiry&amp;rdquo; into who organised a student campaign over the participation of the CJI at&amp;hellip; https://t.co/OuC5kq9dYc
&amp;mdash; Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) August 13, 2026



&#039;&#039;छात्रों को अपनी यूनिवर्सिटी में किसी पब्लिक फिगर की भागीदारी पर आपत्ति जताने का पूरा अधिकार है. आप असहमत हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ इसलिए उनके करियर को खतरे में नहीं डाल सकते कि इससे आपको परेशानी हो रही है. इसका बड़ा मकसद साफ है: लॉ यूनिवर्सिटीज में स्वतंत्र सोच पर रोक लगाना और एक ऐसा एकेडमिक कल्चर बनाना जो सत्ता के इशारों पर चले. यह युवाओं को खुलेआम डराने-धमकाने जैसा है. मकसद उन्हें यह बताना है कि वे हुक्म मानें. अगर आप सत्ता में बैठे लोगों की मर्जी के हिसाब से नहीं चलते.&#039;&#039;
क्या है मामलानालसार के कुछ छात्रों ने CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी. छात्रों ने यह कदम जंतर मंतर पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े एक हालिया सुप्रीम कोर्ट मामले में CJI की कथित टिप्पणियों को लेकर उठाया था. जिसके बाद बार काउंसिल ने अपने पहले आदेश में नालसार के 2026 बैच के छाों के संबंध में यूनिवर्सिटी से रिपोर्ट मांगी थी.
ये भी पढ़ें: किसकी टेंशन बढ़ाने वाले हैं सोनम वांगचुक? कर दिया बड़ा ऐलान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>खुलेआम, डराने-धमकाने, की, कोशिश..., NALSAR, विवाद, पर, ओवैसी, का, BCI, पर, तीखा, हमला</media:keywords>
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        <title>CJI&amp;NALSAR विवाद: बार काउंसिल ने फैसला पलटा, दीपके करेंगे मनन मिश्रा के खिलाफ आंदोलन?</title>
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        <description><![CDATA[ चीफ जस्टिस आफ इंडिया सूर्यकांत को NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में बुलाने का विरोध करने के विवाद ने नया तूल पकड़ लिया है. विरोध करने वाले छात्रों की जांच और उनके बतौर वकील नामांकन नहीं करने के अपने निर्देश को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वापस ले लिया है. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह फैसला लिया है. यही नहीं अब सीजेपी बीसीआई के अध्यक्ष और भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा का इस्तीफा मांगने का भी संकेत दे रही है.
वहीं मनन मिश्रा की ओर से एक्स पर फैसला वापस लेने की जानकारी पर सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, &#039;हो गया, भाई. युवाओं की एक और बड़ी जीत! लेकिन जवाबदेही की लड़ाई जारी रहेगी.&#039;

#BreakingIt&amp;rsquo;s done, bro. Another major victory for the youth! But the quest for accountability will continue.@Cockroachisback https://t.co/jllQrc6irm
&amp;mdash; Saurav Das (@SauravDassss) August 13, 2026



मनन मिश्रा का इस्तीफा मांगने का समय आया?
सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा, क्या मनन कुमार मिश्रा का इस्तीफा मांगने का समय आ गया है. वहीं सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने भी एक्स पर लिखा, &#039;मनन कुमार मिश्रा के बारे में जिस तरह की डरावनी बातें सामने आ रही हैं, उसके बाद उन्हें तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. एक ठीक-ठाक काम करने वाले लोकतंत्र में ऐसा ही होता है. एक ठीक-ठाक लोकतंत्र बनाने के लिए कॉकरोच आ गए हैं. मिस्टर मिश्रा, अब समय खत्म हो गया है!&#039;

Time for Manan Mishra isteefa do?
&amp;mdash; Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 13, 2026



बाहरी लोगों ने छात्रों को भड़कायाः काउंसिल
सीजेपी के विरोध के बाद काउंसिल ने यह तय किया है कि राज्य बार काउंसिल सभी छात्रों का बतौर वकील नामांकन कर सकते हैं. मामले में विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा. काउंसिल ने अपने बदले हुए आदेश का आधार इस बात को बनाया है कि ज्यादातर छात्र इस मामले में निर्दोष हैं. लेकिन, साथ ही यह भी कहा है कि &#039;कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों&#039; ने यूनिवर्सिटी में CJI सूर्यकांत को बुलाए जाने पर विरोध-प्रदर्शन को भड़काया था.
मनन मिश्रा ने दी सफाई, बोले- कार्रवाई की जरूरत नहीं
मनन मिश्रा ने एक्स पर जानकारी दी कि सीनियर वकीलों, बार के सम्मानित सदस्यों, लॉ के छात्रों और समाज के प्रति जागरूक नागरिकों की बातों और प्रतिक्रियाओं पर विचार करने और इस बात से संतुष्ट होने के बाद कि NALSAR हैदराबाद के 2026 बैच की किसी भी गड़बड़ी या आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थी इसलिए बीसीआई ने इस मामले की कार्यवाही को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है. अब और किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है.
कांग्रेस और ओवैसी ने की आलोचना
इससे पहले कांग्रेस सांसद कार्ति चिंदबरम ने एक्स पर लिखा, मनन मिश्रा को मेरी सलाह है कि सीजेपी द्वारा बाहर किए जाने से पहले ही इस्तीफा दे दें. वहीं एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि यह बिल्कुल निंदनीय है. बीसीआई चेयरमैन ने पहले स्टेट बार काउंसिल्स को निर्देश दिया था कि वे NALSAR के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स को एडवोकेट के तौर पर एनरोल न करें. अब बीसीआई ने अपना पिछला आदेश वापस ले लिया है और इसके बजाय इस बात की जांच का आदेश दिया है कि कन्वोकेशन में सीजेआई की भागीदारी को लेकर छात्रों का कैंपेन किसने आयोजित किया था. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJI-NALSAR, विवाद:, बार, काउंसिल, ने, फैसला, पलटा, दीपके, करेंगे, मनन, मिश्रा, के, खिलाफ, आंदोलन</media:keywords>
    </item>
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        <title>&amp;apos;युवाओं की एक और बड़ी जीत...&amp;apos; NALSAR विवाद पर सौरव दास</title>
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        <description><![CDATA[ बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने गुरुवार को चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के पुराने निर्देश में बदलाव को सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने युवाओं की जीत बताया है. उन्होंने मनन कुमार मिश्रा के पोस्ट को शेयर करते हुए कहा ये युवाओं की एक और बड़ी जीत है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>युवाओं, की, एक, और, बड़ी, जीत..., NALSAR, विवाद, पर, सौरव, दास</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;परिवार उजड़ गए, अपनों को खो दिया...&amp;apos; विभाजन विभीषिका दिवस पर इमोशनल हुए पीएम मोदी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/परिवार-उजड़-गए-अपनों-को-खो-दिया-विभाजन-विभीषिका-दिवस-पर-इमोशनल-हुए-पीएम-मोदी</link>
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        <description><![CDATA[ पीएम मोदी हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाते हैं. इस दिन 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दर्द और उसमें जान गंवाने वाले लोगों को याद करते हैं. उन्हें याद करते हुए पीएम मोदी ने पोस्ट शेयर किया है.
पीएम मोदी हुए इमोशनल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; में कहा, &quot;आज हम &#039;विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस&#039; मना रहे हैं. हम उन सभी लोगों के साहस को याद करते हैं जो विभाजन से प्रभावित हुए थे. यह इतिहास का वह दौर था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं, परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा सही.&quot;

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया. उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है. आइए, सद्भावना और एकजुटता की&amp;hellip; pic.twitter.com/lzLu5wbiXb
&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) August 14, 2026



पीएम मोदी ने आगे कहा, &quot;इन मुश्किलों से उबरते हुए लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर से बनाई, चुनौतियों को कामयाबी में बदला और देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया. उनकी जीवन-यात्राएं हमें इंसानी जब्जे की ताकत की याद दिलाती हैं.&quot;
उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिन हमारे देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को अधिक मजबूत करे और हम सब मिलकर &#039;विकसित भारत&#039; के निर्माण की दिशा में काम करें.
एक और पोस्ट शेयर किया
एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, &quot;विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया. उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है. आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें.&quot; इस अवसर पर उन्होंने &#039;संस्कृत सुभाषितम्&#039; भी शेयर किया. उन्होंने लिखा, &quot;उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः. कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति.&quot; &#039;संस्कृत सुभाषितम्&#039; में कहा गया है, &quot;परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार विकसित होते हैं व सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं. इसलिए, मनुष्य को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है.&quot;
इनपुट- आईएएनएस
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>परिवार, उजड़, गए, अपनों, को, खो, दिया..., विभाजन, विभीषिका, दिवस, पर, इमोशनल, हुए, पीएम, मोदी</media:keywords>
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        <title>PM मोदी ने हमले के बाद सुखबीर बादल का जाना हाल, पत्नी हरसिमरत कौर को किया फोन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-ने-हमले-के-बाद-सुखबीर-बादल-का-जाना-हाल-पत्नी-हरसिमरत-कौर-को-किया-फोन</link>
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        <description><![CDATA[ शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका हाल जाना है. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने सुखबीर बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल से फोन पर बात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा.
पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरुद्वारा माता साहिब देवान जी मुगत में कृपाण से हमला हुआ. इसमें वो घायल हो गए. नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नीलाभ रोहन ने बताया कि एक निहंग ने गुरुद्वारे के अंदर बादल पर कृपाण से हमला किया. हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है.
सीएम ने बादल से फोन पर की बात
उन्होंने कहा कि बादल को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बादल के हाथ में तीन टांके लगे हैं.&amp;nbsp;महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए हैं. फडणवीस ने बादल को फोन कॉल कर उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली.
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी सुखबीर सिंह बादल की पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल से फोन पर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने सुखबीर सिंह बादल के स्वास्थ्य की भी जानकारी ली और उनके जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होने की प्रार्थना की. उन्होंने कहा, &amp;ldquo;इस हमले के दोषियों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा. हमलावरों के खिलाफ जल्द से जल्द और बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.&amp;rdquo;
बीजेपी-अकाली दल में बढ़ी नजदीकी
बता दें कि पिछले कुछ दिनों में बीजेपी और अकाली दल की नजदीकी बढ़ी है. सात अगस्त को सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद बादल ने महिला आरक्षण बिल पर समर्थन देने का ऐलान किया. अब अटकलें लगाई जा रही है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन होगा. बीजेपी और अकाली दल के बीच लंबा गठबंधन रहा है, लेकिन किसान आंदोलन के समय सितंबर 2020 में गठबंधन टूट गया.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
 ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोदी, ने, हमले, के, बाद, सुखबीर, बादल, का, जाना, हाल, पत्नी, हरसिमरत, कौर, को, किया, फोन</media:keywords>
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    <item>
        <title>&amp;apos;मैं RSS की भी रक्षा करूंगा, जब...&amp;apos;, राहुल गांधी का बड़ा बयान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मैं-rss-की-भी-रक्षा-करूंगा-जब-राहुल-गांधी-का-बड़ा-बयान</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/मैं-rss-की-भी-रक्षा-करूंगा-जब-राहुल-गांधी-का-बड़ा-बयान</guid>
        <description><![CDATA[ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर दिए बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है. उन्होंने कहा कि जिस दिन आरएसएस की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने की कोशिश शुरू हुई तो मैं उस दिन उनकी भी रक्षा करूंगा, क्योंकि उनकी भी अभिव्यक्ति की आजादी है. उन्होंने कहा कि हम किसी को रोकना नहीं चाहते, हमारा कहना है कि हर किसी का फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन होना चाहिए. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा.
जंतर-मंतर को लेकर राहुल गांधी का बयान
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, &#039;जंतर-मंतर पर जो हो रहा था, वह यह है कि छात्र अपनी बात रखना चाहते हैं. वे तकलीफ में हैं और अपनी बात कहना चाहते हैं लेकिन सरकार कहती है नहीं. हम जंतर-मंतर पर व्यवस्था बनाए रखेंगे. आप अपनी बात नहीं रख सकते. आप अपनी बात नहीं रख सकते. आज एक महिला मेरे पास आई, जिसकी बेटी के साथ 4 साल पहले उत्तराखंड में रेप हुआ था और उसकी हत्या कर दी गई थी. वह रो रही है, अपनी बात कहना चाहती है, लेकिन सिस्टम कहता है माफ कीजिए, हम आपको अपनी बात कहने की इजाजत नहीं देंगे क्योंकि इससे अव्यवस्था फैलेगी.&#039;
आरएसएस की रक्षा मैं करूंगा: राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, &#039;अब इन्हें (सरकार) एक बात समझ आ गई है कि यह देश अभिव्यक्त करने से नहीं रुकेगा. भारत में बहुत से लोग कायरों की तरह व्यवहार कर रहे हैं. भारत में बहुत से लोग इस कायर फोर्स के डर से कायरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं. 3000 साल पुराने भारत को समझने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आज के भारत को समझने की जरूरत है. आरएसएस की अभिव्यक्ति को देश से बाहर करने की कोशिश शुरू हुई तो मैं उस दिन मैं उनकी रक्षा करूंगा क्योंकि उनकी भी अभिव्यक्ति की आजादी है.
पीएम मोदी और अमित शाह पर राहुल गांधी का निशाना
रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, &#039;हमारा काम बहुत सिंपल है. हम इनको पागल कर देंगे. आजकल पीएम मोदी रात में सोते नहीं हैं. इसके कई कारण हैं. अमित शाह को चाणक्य और न जाने क्या-क्या कहा जाता था, लेकिन वो गायब हो गए. वे भाग गए और 20 दिन तक संसद में नहीं आ पाए. अब इस सरकार को समझ आ गया है कि ये देश अपने आपको express करने से नहीं रोकेगा.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;पीएम मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते&amp;apos;, राहुल गांधी का बड़ा हमला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पीएम-मोदी-प्रेस-कॉन्फ्रेंस-क्यों-नहीं-करते-राहुल-गांधी-का-बड़ा-हमला</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने &amp;lsquo;रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन&amp;rsquo; में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि देश का सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है और सरकार लोगों, छात्रों तथा पीड़ितों की आवाज सुनने के बजाय उन पर अपना आदेश थोपना चाहती है.&amp;nbsp;
राहुल गांधी ने संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सदन में गृह मंत्री अमित शाह नहीं आए और सवाल किया कि वह 20 दिनों तक कहां गायब रहे. राहुल गांधी ने पूछा कि पीएम मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते हैं.
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री रात को नहीं सोते हैं. जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र अपनी बात रखना चाहते थे. वे दर्द में थे और अपनी समस्याएं बताना चाहते थे, लेकिन सरकार की ओर से कहा गया कि जंतर-मंतर पर व्यवस्था बनाए रखनी है और उन्हें अपनी बात कहने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
राहुल का केन्द्र पर हमला
राहुल गांधी ने उत्तराखंड की अंकिता भंडारी मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज उनके पास एक महिला आई, जिसकी बेटी के साथ चार साल पहले उत्तराखंड में कथित तौर पर दुष्कर्म हुआ और उसकी हत्या कर दी गई.
राहुल गांधी के मुताबिक, वह महिला रो रही थी और अपनी बात रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन सिस्टम उससे कहता है कि अगर वह अपनी बात रखेगी तो अव्यवस्था पैदा होगी. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली और उसकी राजनीतिक सोच भारत पर एक ऐसा &amp;lsquo;ऑर्डर&amp;rsquo; थोपने की है, जिससे सरकार और कुछ दूसरे लोगों को फायदा होता है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का काम इसके उलट है. कांग्रेस लोगों को अपनी बात कहने का अधिकार दिलाने और उस व्यवस्था को चुनौती देने का काम करेगी. राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में आम लोगों, छात्रों और पीड़ितों की आवाज सुनी जानी चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार का काम केवल व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि लोगों के दर्द और उनकी समस्याओं को समझना भी है.
केन्द्र पर लगाए गंभीर आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार लोगों को बोलने से रोकती है तो कांग्रेस की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके साथ खड़ी हो और उनकी आवाज को सामने लाए. राहुल गांधी के इस बयान में केंद्र सरकार पर दो बड़े आरोप दिखाई दिए- पहला, सरकार संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने से बच रही है और दूसरा, सरकार छात्रों तथा आम लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है. राहुल गांधी ने इसे सत्ता और विपक्ष की सामान्य राजनीतिक लड़ाई के बजाय देश में लोकतांत्रिक अधिकारों और लोगों की आवाज से जुड़ा मुद्दा बताया. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पीएम, मोदी, प्रेस, कॉन्फ्रेंस, क्यों, नहीं, करते, राहुल, गांधी, का, बड़ा, हमला</media:keywords>
    </item>
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        <title>शुभेंदु सरकार ने BJP सांसद अनंत महाराज से वापस लिया सम्मान, नेताजी पर टिप्पणी पड़ी भारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शुभेंदु-सरकार-ने-bjp-सांसद-अनंत-महाराज-से-वापस-लिया-सम्मान-नेताजी-पर-टिप्पणी-पड़ी-भारी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/शुभेंदु-सरकार-ने-bjp-सांसद-अनंत-महाराज-से-वापस-लिया-सम्मान-नेताजी-पर-टिप्पणी-पड़ी-भारी</guid>
        <description><![CDATA[ 21 फरवरी 2026 को बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज को दिए बंगा विभूषण सम्मान को वापस ले लिया है. यह कार्रवाई सुभाष चंद्र बोस पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर की गई है. बीजेपी सरकार ने न सिर्फ राजकीय सम्मान लिया, बल्कि इसे रद्द भी कर दिया है.&amp;nbsp;
सूचना और सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने एक आदेश में कहा है कि सम्मान दिए जाने के बाद सामने आए कुछ तथ्यों और परिस्थितियों ने इसे बनाए रखने पर सवाल खड़े कर दिए. रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी पर विचार करने के बाद, सक्षम अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला है कि इस सम्मान को बनाए रखना, इसकी गरिमा, प्रतिष्ठा और उद्देश्य के अनुरूप नहीं था.&amp;nbsp;
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिए कार्रवाई के निर्देश
पूरा मामला नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर की गई टिप्पणियों को लेकर है. जिसपर राज्य में बवाल खड़ा हो गया है. वहीं, पूरे मामले पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. मामले में अपमानजनक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की गई. इस पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने मान करते हुए कहा है कि आप चाहें तो याचिका दाखिल कर सकते हैं. स्वत: संज्ञान ऐसे मामलों में लिया जाता है, जहां कोर्ट का तुरंत दाखिल जरूरी हो. याचिका दाखिल करने वाला कोई न हो.&amp;nbsp;
नेताजी और आजाद हिंद फौज पर उठाए थे सवाल
बीजेपी सांसद अनंत महाराज ने एक मीडिया के बयान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर सवाल उठाए. इसके अलावा सोशल मीडिया पर नेता से जुड़ी तस्वीरें और आपत्तिजनकर पोस्ट शेयर किए जाने लगे. इसपर नॉर्थ बंगाल के विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और राष्ट्रीय नायक की गरिमा की रक्षा करने के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग की. &amp;nbsp;
नागेंद्र राय से जुड़े फैक्ट्स, जानें कौन हैं?&amp;nbsp;
नागेंद्र राय की बात करें, तो वह ग्रेटर कूच बिहार पीपल्स एसोसिएशन के एक प्रमुख नेता हैं. उत्तरी बंगाल के राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली व्यक्ति भी हैं. कुछ दिन पहले उन्होंने नेताजी को युद्ध अपराधी कहा था. इसके अलावा उनके नेतृत्व पर भी सवाल उठाए थे. इतना ही नहीं नागेंद्र रॉय ने भारत की आजादी की लड़ाई में आजाद हिंद फौज की भूमिका पर भी संदेह जताया था.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>शुभेंदु, सरकार, ने, BJP, सांसद, अनंत, महाराज, से, वापस, लिया, सम्मान, नेताजी, पर, टिप्पणी, पड़ी, भारी</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: जस्टिस वर्मा का जाना तय! इम्पीचमेंट या इस्तीफा होगा मंजूर? समझें वकीलों की जुबानी</title>
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        <description><![CDATA[ 14 मार्च 2025 की रात को दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई. दमकल कर्मियों ने आग बुझाई तो स्टोर रूम से जले और अधजले 500 के नोटों के ढेर मिले. यह घटना देश की न्यायपालिका के इतिहास में सबसे बड़े विवादों में से एक बन गई. अब 12 अगस्त 2026 को इस मामले की संसदीय जांच समिति की रिपोर्ट लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पेश कर दी गई. तीनों आरोप साबित पाए गए हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले ही इस्तीफा दे चुके जस्टिस वर्मा के खिलाफ आगे क्या होगा- इम्पीचमेंट या FIR...
जस्टिस वर्मा ने क्या किया इस्तीफा?
9 अप्रैल 2026 को जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया. जस्टिस वर्मा ने अपने फैसले के पीछे के कारणों से राष्ट्रपति के कार्यालय को &#039;बोझ&#039; न डालने की बात कही. लेकिन इस्तीफा अधिसूचित नहीं हुआ है और यहीं सबसे बड़ा कानूनी पेंच है.
नियम: हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज का इस्तीफा उसी दिन प्रभावी हो जाता है जिस दिन वह राष्ट्रपति को संबोधित किया जाता है, भले ही राष्ट्रपति मंजूर न करें. लेकिन 1978 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक, जज &#039;माना जाता है कि उसने इस्तीफा दे दिया&#039; एक बार जब वह राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंपता है और उसकी कॉपी सार्वजनिक करता है. राष्ट्रपति &#039;औपचारिक स्वीकृति&#039; देते हैं, जिसके बाद कानून मंत्रालय का कार्मिक विभाग अधिसूचना जारी करता है.
अब तक जस्टिस वर्मा का इस्तीफा अधिसूचित ही नहीं हुआ. उनका नाम अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों की सूची में है. सूत्रों के मुताबिक, चूंकि इस्तीफा संसद में हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भेजा गया था, इसलिए इसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जिस तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था, उसने 12 अगस्त 2026 को अपनी 126-पेज की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी. समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे तीनों आरोपों को साबित करार दिया है.
रिपोर्ट पेश होने के बाद अब आगे क्या होगा, इस पर कानूनी विशेषज्ञों में गहरा मतभेद है. लेकिन एक बात पर लगभग सबकी सहमति है कि अब FIR दर्ज हो सकती है.
जस्टिस वर्मा केस में आगे होगा क्या?
कानून के जानकार और वकीलों के मुताबिक:
1. इम्पीचमेंट (महाभियोग): सरकार कोशिश कर रही
सरकार शीतकालीन सत्र (दिसंबर 2026) में इम्पीचमेंट मोशन लाने पर विचार कर रही है. वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह कहते हैं, &#039;जब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ, जस्टिस वर्मा को महाभियोग किया जा सकता है. इस्तीफे की स्थिति में उन्हें पेंशन मिलेगी, जबकि महाभियोग की स्थिति में पेंशन नहीं मिलेगी.&#039; सरकार यह मिसाल कायम करना चाहती है कि कोई जज गंभीर अनियमितताओं के बाद इस्तीफा देकर हटाने की प्रक्रिया से नहीं बच सकता.
2. इम्पीचमेंट संभव नहीं: वकीलों का एक बड़ा तबका
वरिष्ठ अधिवक्ता और संविधान विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी कहते हैं, &#039;अब रिपोर्ट संसद में पेश हो चुकी है और उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, इसलिए उन्हें हटाया नहीं जा सकता. इम्पीचमेंट मोशन &#039;खत्म हो चुका है.&#039; मेरे विचार में यह &amp;nbsp; निष्क्रिय हो गया है.&#039;
वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन कहते हैं, &#039;मेरे विचार में संसद ने अपनी अधिकारिता खो दी है. इम्पीचमेंट का सवाल ही नहीं उठता. महाभियोग संभव नहीं है क्योंकि जिस पद से उन्हें हटाना है, वह पद वे अब धारण नहीं करते, ऐसे में संसद मोशन पर विचार नहीं कर सकती.&#039;
3. FIR: लगभग सभी वकीलों की सहमति
इस पर सबसे ज्यादा सहमति है. जज की प्रतिरक्षा खत्म हो चुकी है.

राकेश द्विवेदी कहते हैं, &#039;इस रिपोर्ट के आधार पर निश्चित रूप से FIR दर्ज की जा सकती है.&#039;
राजीव धवन कहते हैं, &#039;जब वे जज थे, तो CJI की अनुमति लेना जरूरी था क्योंकि उन्हें जज के रूप में प्रतिरक्षा हासिल थी. लेकिन वह प्रतिरक्षा अब खत्म हो गई है.&#039;
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी कहते हैं, &#039;जजों को प्रतिरक्षा उन्हें न्यायिक शक्तियों के भीतर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की स्वतंत्रता देती है, लेकिन इतना पैसा घर पर रखने की इजाजत नहीं देती.&#039;

लेकिन एक अलग राय &amp;nbsp;वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन की है. वे कहते हैं, &#039;मुझे नहीं लगता कि इस पैनल की रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है. पैनल ने पूरा दायित्व जस्टिस वर्मा पर डाल दिया कि वे बताएं कि पैसे कहां से आए.&#039;
4. सुप्रीम कोर्ट ने FIR की मांग वाली याचिका खारिज कर दी
7 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ FIR और SIT जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया और इसे &#039;सस्ता प्रचार&#039; करार दिया. राकेश द्विवेदी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का यह खारिज करना &amp;nbsp; अब कोई बाधा नहीं है क्योंकि रिपोर्ट संसद में पेश हो चुकी है.
जस्टिस वर्मा के घर से कैश मिलने का मामला क्या था?
दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस वर्मा (तब दिल्ली हाईकोर्ट के जज) के सरकारी आवास में आग लग गई. दमकल कर्मियों ने आग बुझाई तो स्टोर रूम से 500 के नोटों के ढेर मिले. आग बुझने के बाद स्टोर रूम को तुरंत सील नहीं किया.
रात करीब 3 बजे जस्टिस वर्मा के निजी सचिव और सहायक को स्टोर रूम की सफाई करते देखा गया. सुबह तक जला हुआ सामान बाहर निकाल दिया गया. कॉल डिटेल से पता चला कि जस्टिस वर्मा (जो उस समय शहर से बाहर थे) रात भर अपने सचिव और सहायक के संपर्क में थे.
तीन आरोप और समिति का निष्कर्ष
समिति ने 126-पेज की रिपोर्ट में तीनों आरोप साबित पाए:

बेहिसाब नकदी: स्टोर रूम में 500 रुपए के नोटों का ढेर मिला, जस्टिस वर्मा संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.
सबूतों से छेड़छाड़: स्टोर रूम को सील नहीं किया, सबूत गायब हो गए.
टालमटोल वाले जवाब: जस्टिस वर्मा के जवाब &#039;अधूरे, टालमटोल वाले और भ्रामक&#039; पाए गए.

समिति ने स्पष्ट किया कि नकदी व्यक्तिगत रूप से जस्टिस वर्मा की ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पश्चिम बंगाल का नाम हो &amp;apos;पश्चिम बंगो&amp;apos;, बख्तियारपुर स्टेशन का भी बदले नाम, BJP चीफ की बड़ी मांग</title>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सामिक भट्टाचार्य ने राज्यसभा में मांग की कि राज्य के नाम को पश्चिम बंगाल की जगह पश्चिम बंगो किया जाए. बीजेपी सांसद ने केरल का नाम बदलने वाले बिल पर बोलते हुए यह बातें कहीं है. उन्होंने कहा कि बिहार का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने और नालंदा के रास्ते पड़ने वाले बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की भी मांग की है. इसके अलावा उन्होंने नालंदा के रास्ते में पड़ने वाले बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग की. साथ ही तर्क दिया कि नालंदा को बर्बाद करने के लिए बख्तियार खिलजी जिम्मेदार था.&amp;nbsp;
सरकार ने बदले योजनाओं का नाम
बता दें, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के नाम के बारे में बात की थी. उन्होंने बंगाल के बजाय पश्चिम बंगाल नाम बनाए रखने के ऐतिहासिक महत्व को समझाया था. साथ ही योजनाओं का नाम बदलकर इस संदेश को और मजबूत किया था. अधिकारी ने बंग्लार बारी (बंगाल का घर) का नाम बदलकर पश्चिम बंगाल आवास (वेस बंगाल हाउसिंग) करके अपना रूख स्पष्ट किया है.&amp;nbsp;
पश्चिम बंगाल एक गहरी विरासत को दर्शाता है: मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, &#039;कैबिनेट ने फैसला किया है कि पश्चिम बंगाल नाम एक गहरी विरासत को दर्शाता है. 1947 के दर्दनाक बंटवारे के दौरान हमें पाकिस्तान खासकर पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की साजिश रची गई थी. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में हमें पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की कोशिश को नाकाम कर दिया गया था. पश्चिम बंगाल विधानसभा ने पश्चिम बंगाल राज्य बनाने के लिए 58 के मुकाबले 21 वोटों के अंतर से निर्णायक वोट दिया था. हमारी सरकार को दिशा देने वाली विचारधारा, और इतिहास की कड़वी सच्चाई को देखते हुए हम नाम से पश्चिम शब्द को बस ऐसे ही नहीं हटा सकते.&#039;
पश्चिम नाम एक इतिहास को समेटे हुए है: अधिकारी
अधिकारी ने कहा था कि पश्चिम नाम एक ऐसे इतिहास को समेटे हुए है, जिसे वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को समझने की जरूरत है. इसलिए कैबिनेट ने बंग्लार बारी का नाम बदलकर पश्चिम बंगाल आवास करने का फैसला किया है. हम पश्चिम बंगाल नाम को नहीं भूला सकते. इसे बनाए रखना हमारा फर्ज है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पश्चिम, बंगाल, का, नाम, हो, पश्चिम, बंगो, बख्तियारपुर, स्टेशन, का, भी, बदले, नाम, BJP, चीफ, की, बड़ी, मांग</media:keywords>
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        <title>दिल्ली फुकेत फ्लाइट में कब क्या हुआ ? पढ़ें पूरी पोस्ट फ्लाइट रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में 4 अगस्त को हुई घटना की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. अब ऐसे में कब क्या हुआ है, इसकी डिटेल भी सामने आई है. विमान ने उड़ान के शुरुआती ढाई घंटे से ज्यादा समय तक सामान्य तरीके से उड़ान भरी थी. फिर सुबह 9.32 बजे अचानक कई सिस्टम से जुड़ी अलर्ट रिकॉर्ड किए गए. इसके बाद अलग-अलग समय पर दरवाजे, इंजन एंटी-आइस और ऑटोपायलट से जुड़े मैसेज आते रहे. लेकिन यहां सबसे जरूरी सावधानी है, 9:32 बजे के मैसेज लेकर हैं. अभी यह तय नहीं किया जा सकता कि कौन-सी खराबी सबसे पहले हुई या किस खराबी की वजह से दूसरी खराबियां हुईं.
ECAM लॉग मिनट तो बताता है लेकिन सेकंड नहीं. इसलिए असली कारण और घटनाओं का सटीक क्रम DFDR डेटा की जांच के बाद AAIB ही तय कर पाएगा.&amp;nbsp;
(Adding time stamp - भारतीय समयानुसार कर दिया है)
सुबह 6:56 बजे (0126 GMT) विमान की रिकॉर्डिंग शुरू होती है. यह उड़ान भरने के आसपास का समय है. इसके बाद करीब 2 घंटे 36 मिनट तक लॉग में कोई बड़ी चेतावनी दर्ज नहीं होती. यानी इस हिस्से में सिस्टम लॉग के हिसाब से सब सामान्य दिखता है.&amp;nbsp;
सुबह 9:32 बजे (0402 GMT) यही सबसे अहम समय है. इसी एक मिनट में 9 चेतावनियां दर्ज होती हैं. इनमें हाइड्रोलिक प्रेशर, ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट, एलिवेटर फॉल्ट और दूसरे हाइड्रोलिक सिस्टम/टैंक लेवल से जुड़े मैसेज शामिल हैं.&amp;nbsp;
फेल्योर सेक्शन में भी इसी समय की 3 एंट्री हैं. सुबह 9:33 बजे (0403 GMT) दायां आगे वाला इमरजेंसी दरवाजा दो मैसेज. सुबह 9:35 बजे (0405 GMT) दायां पीछे वाला दरवाजा&amp;mdash;एक मैसेज. इसके बाद करीब 41 मिनट तक कोई नई एंट्री नहीं.
सुबह 10:16 बजे (0446 GMT) इंजन नंबर-1 के एंटी-आइस सिस्टम में खराबी दर्ज होती है. सुबह 10:52 बजे (0522 GMT) ऑटोपायलट दूसरी बार डिस्कनेक्ट होता है. सुबह 11:07 बजे (0537 GMT) रिकॉर्डिंग खत्म होती है जो लैंडिंग के आसपास का समय माना जा रहा है. सुबह 11:30 बजे (0600 GMT) यह खराबी का समय नहीं, बल्कि रिपोर्ट जनरेट होने का समय है.
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 11 अगस्त को कहा कि विमान ने cruise के दौरान करीब 300 फीट की अचानक एल्टीट्यूड वेरिएशन का सामना किया. विमान बाद में स्थिर हुआ और दिल्ली में सुरक्षित उतरा. इस घटना में 20 यात्री और चार केबिन क्रू घायल हुए. अब यही कुछ सेकंड पूरी जांच का केंद्र हैं क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि विमान नीचे क्यों आया. असली सवाल यह है कि विमान के नीचे आने से पहले क्या हुआ था और उसके बाद क्या हुआ?
इधर, पूरे मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 11 अगस्त को कहा कि विमान ने क्रूस के दौरान 300 फीट की अचानक एल्टीट्यूड वेरिएसन का सामना किया. विमान बाद में स्थिर हुआ. दिल्ली में सुरक्षित उतरा. इस घटना में 20 यात्रा और चार केबिन क्रू घायल हुए थे. अब यही कुछ सेंक पूरी जांच का केंद्र है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>दिल्ली, फुकेत, फ्लाइट, में, कब, क्या, हुआ, पढ़ें, पूरी, पोस्ट, फ्लाइट, रिपोर्ट</media:keywords>
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        <title>शोरगुल में सिमटा मॉनसून सत्र! आखिरी दिन भी संसद में गतिरोध बरकरार रहने के आसार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शोरगुल-में-सिमटा-मॉनसून-सत्र-आखिरी-दिन-भी-संसद-में-गतिरोध-बरकरार-रहने-के-आसार</link>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Session of Parliament: 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होना है, यानी कल सत्र का आखिरी दिन है. लेकिन पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव ने सदन की कार्यवाही को बुरी तरह प्रभावित किया है. एक तरफ लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सदन में जवाब मांग रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार का आरोप है कि विपक्ष चर्चा चाहता ही नहीं, बल्कि सदन को लगातार बाधित कर रहा है.
नतीजा यह है कि जिस संसद में जनता के मुद्दों पर बहस और समाधान होना चाहिए था, वहां लगातार नारेबाजी, हंगामा और स्थगन देखने को मिला. दरअसल, विवाद की शुरुआत 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए छात्रों के मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर हुई. विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया और कुछ छात्रों को गंभीर चोटें आईं. इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी लगातार गृह मंत्री अमित शाह से संसद के भीतर जवाब देने की मांग कर रहे हैं.
विपक्ष का कहना है कि गृह मंत्री को सदन में आकर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की गई. राहुल गांधी ने इस मामले में एक घायल प्रदर्शनकारी छात्र को मीडिया के सामने भी पेश किया था. 19 वर्षीय साहिल लोचब के शरीर पर छर्रों के निशान होने का दावा किया गया. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और छात्र की दाईं आंख में छर्रा लगने से उसकी आंख को नुकसान पहुंचा.
हंगामे की भेंट चढ़ा सत्र
राहुल गांधी ने अपने आवास पर साहिल से हुई बातचीत का वीडियो भी जारी किया था. इसके बाद से ही यह मामला संसद में विपक्ष के विरोध का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है. विपक्ष की ओर से यह भी दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से कई लोग घायल हुए. समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने आरटीआई के हवाले से दावा किया कि पैलेट गन से 10 बच्चे घायल हुए हैं.
दूसरी तरफ सरकार और सत्तापक्ष लगातार इन आरोपों को लेकर विपक्ष से तथ्य और जवाब मांग रहा है. सरकार का कहना है कि 20 जुलाई की कार्रवाई के संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड और आधिकारिक जानकारी को देखा जाना चाहिए और पूरे मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. इसी बीच बुधवार को इस राजनीतिक टकराव में बड़ा मोड़ आया. दोपहर करीब 12 बजे गृह मंत्री अमित शाह मीडिया के सामने आए और उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. अमित शाह ने विपक्ष को प्रस्ताव दिया कि बुधवार दोपहर 3 बजे से इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की जाए और वह गुरुवार दोपहर 3 बजे सदन में आकर विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देंगे.
शाह ने यह भी कहा कि चर्चा जितने समय तक चलानी हो, चलाई जाए और वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं. अमित शाह के इस बयान के करीब 10 मिनट बाद राहुल गांधी की प्रतिक्रिया सामने आई. राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें कोई लेक्चर नहीं चाहिए, उन्हें अपने सवालों के जवाब चाहिए. विपक्ष की तरफ से यह सवाल उठाया गया कि अगर गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं तो 20 जुलाई की घटना के इतने दिनों बाद चर्चा की पेशकश क्यों की जा रही है.
वहीं सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष पहले गृह मंत्री के सदन में आने की मांग कर रहा था और अब जब गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार हैं तो विपक्ष अपना रुख बदल रहा है. इसके बाद करीब पौने 3 बजे गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष को एक चिट्ठी भी लिखी. इसमें उन्होंने विपक्ष के साथ चर्चा के लिए समय और अवधि पर सहमति बनाने की अपील की. शाह ने कहा कि वह निर्धारित समय के दौरान सदन में मौजूद रहकर इस मुद्दे पर चर्चा में भाग लेना चाहते हैं और विपक्ष के सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हैं. लेकिन इसके बावजूद सदन में गतिरोध खत्म नहीं हुआ.
सरकार के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा
दोपहर 3 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो उम्मीद थी कि शायद अब चर्चा का रास्ता खुलेगा, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा. न तो चर्चा शुरू हो सकी और न ही सदन सामान्य तरीके से चल पाया. हंगामे के बीच कार्यवाही फिर स्थगित करनी पड़ी. यानी गृह मंत्री की ओर से चर्चा की पेशकश के बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी. संसद के बाहर भी दोनों पक्षों का राजनीतिक प्रदर्शन जारी रहा. बुधवार सुबह विपक्षी सांसद संसद परिसर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए. समाजवादी पार्टी के सांसद अयोध्या में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले को लेकर दान पेटी के साथ प्रदर्शन करते रहे. कांग्रेस ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.
वहीं दूसरी तरफ झारखंड में छात्रों के विधानसभा मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी पर हमला बोला. बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों पर चयनात्मक राजनीति कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर राहुल गांधी वास्तव में छात्रों की आवाज उठाना चाहते हैं तो उन्हें झारखंड जाकर वहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों से भी मिलना चाहिए. इसी राजनीतिक खींचतान के बीच संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अलग-अलग नारे भी सुनाई दिए.
बीजेपी सांसद राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग करते नजर आए, जबकि विपक्षी सांसद गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी करते रहे. यानी जिस सदन में देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, महंगाई, सुरक्षा और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, वहां राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा दिखाई दिए. इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार थी तो चर्चा आखिर हो क्यों नहीं पाई और अगर विपक्ष को सरक ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>शोरगुल, में, सिमटा, मॉनसून, सत्र, आखिरी, दिन, भी, संसद, में, गतिरोध, बरकरार, रहने, के, आसार</media:keywords>
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        <title>बेस्ट फूड्स मनी लॉन्ड्रिंग केस, ED ने इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल जितेश गुप्ता को किया अरेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ बेस्ट फूड्स मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने बड़ी कार्रवाई करते हुए Insolvency Professional जितेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है. ED ने उन्हें 12 अगस्त 2026 को PMLA के तहत गिरफ्तार किया. जितेश गुप्ता, होमस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड (Homestead Infrastructure Development Pvt. Ltd) और गोल्डन पीकॉक रेज़िडेंस प्राइवेट लिमिटेड (Golden Peacock Residence Pvt. Ltd) की दिवालिया प्रक्रिया में अंतरिम समाधान पेशेवर/समाधान पेशेवर (Interim Resolution Professional/Resolution Professional (IRP/RP)) की भूमिका में थे.
गिरफ्तारी के बाद जितेश गुप्ता को PMLA की विशेष अदालत में पेश किया गया. अदालत ने आगे की जांच के लिए उन्हें ED की हिरासत में भेज दिया है. ED के मुताबिक ये मामला CBI की ओर से Best Foods Ltd. और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ा है.&amp;nbsp;
जांच में सामने आया कि Best Foods Ltd और उससे जुड़ी कंपनियों पर नियंत्रण रखने वाले दिनेश गुप्ता ने फर्जी और शेल कंपनियों के जरिए लोन की रकम दूसरी जगह भेजी और इस पैसे को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इस्तेमाल किया.
ईडी को जितेश गुप्ता की भूमिका मिली संदिग्ध
जांच के दौरान ED को जितेश गुप्ता की भूमिका भी संदिग्ध मिली. आरोप है कि IRP/RP रहते हुए उन्होंने पहले जिन दावों को फर्जी और गलत मानकर खारिज किया था. उन्हें बाद में खुद ही दोबारा स्वीकार कर लिया. ED का कहना है कि इससे कंपनी की Creditors Committee यानी लेनदारों की समिति की संरचना बदल गई.
ED के मुताबिक, जितेश गुप्ता ने ऐसी Resolution Plan को आगे बढ़ाने में भी मदद की, जिसके पीछे दिनेश गुप्ता का हाथ बताया जा रहा है...इस योजना के लिए फंडिंग भी दिनेश गुप्ता से जुड़ी एक इकाई के जरिए होने की बात जांच में सामने आई है. इसके अलावा, दिनेश गुप्ता से जुड़े एक व्यक्ति को संभावित Resolution Applicant के तौर पर आगे बढ़ाने की भी बात सामने आई है.
NCLT ने जितेश गुप्ता के खिलाफ की थी गंभीर टिप्पणियां
NCLT ने 9 सितंबर 2025 के अपने आदेश में जितेश गुप्ता के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां की थी. ED के मुताबिक, NCLT ने माना था कि उन्होंने अपने अधिकार से आगे जाकर काम किया और ऐसे दस्तावेजों पर भरोसा किया जो फर्जी तरीके से तैयार या गलत तरीके से पेश किए गए थे. इसके बाद NCLT ने उन्हें Resolution Professional के पद से हटाकर उनकी जगह दूसरे व्यक्ति को नियुक्त करने का निर्देश दिया था.
जांच में जितेश गुप्ता के बैंक खातों में दिनेश गुप्ता, Best Foods Ltd. और उससे जुड़ी कंपनियों से जुड़े कई लोगों की ओर से पैसे आने की बात भी सामने आई है. ED का कहना है कि इन पैसों के बदले कोई वैध काम या सेवा किए जाने का रिकॉर्ड नहीं मिला है.
ED के मुताबिक, अब तक मिले सबूतों से पता चलता है कि जितेश गुप्ता ने जानबूझकर अपराध से हासिल की गई रकम यानी Proceeds of Crime से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद की। इसी आधार पर उनके खिलाफ PMLA की धारा 3 के तहत मामला बनता है, जिसमें धारा 4 के तहत सजा का प्रावधान है. ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बेस्ट, फूड्स, मनी, लॉन्ड्रिंग, केस, ने, इनसॉल्वेंसी, प्रोफेशनल, जितेश, गुप्ता, को, किया, अरेस्ट</media:keywords>
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        <title>FCRA बिल पर दो धड़े में बंटी कांग्रेस&amp;सपा, कहां रह गया कन्फ्यूजन और क्या है प्रावधान?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fcra-बिल-पर-दो-धड़े-में-बंटी-कांग्रेस-सपा-कहां-रह-गया-कन्फ्यूजन-और-क्या-है-प्रावधान</link>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा में बुधवार को विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. सदन ने शोर-शराबे के बीच ही खान एवं खनिजों से संबंधित एक बिल को पारित कर दिया और FCRA अमेंडमेंट बिल को JPC में भेजने का प्रस्ताव पास कर दिया. हालांकि इस पर विपक्ष का स्टैंड क्या था ये पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया. लोकसभा में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बिल पेश किया तो कांग्रेस के वेणुगोपाल ने कहा कि JPC की जरूरत नहीं है, बिल वापस लो. सपा चीफ अखिलेश यादव भी बोले कि बिल वापस लो, क्योंकि ये अल्पसंख्यकों के खिलाफ है.
ससंदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी सांसद से कहा कि आप एक प्वाइंट तो बता दीजिए कि इसमें क्या माइनॉरिटी के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि बड़ा अजीब विपक्ष है कि JPC की मांग करके खुद पलट रहा है. सरकार ने कहा, &#039;FCRA पर कांग्रेस ने हद ही कर दी. कहां तो इसे JPC में भेजने को कह रही थी और आज जब भेज दिया तो कह रही है बिल ही वापस लो.&#039;
FCRA कानून क्या है?

ये कानून विदेश से आने वाले पैसे या दान को नियंत्रित करता है.
इसका उद्देश्य है कि विदेशी पैसा भारत के खिलाफ इस्तेमाल न हो.
विदेशी पैसे का भारत की सुरक्षा-संप्रभुता के विरुद्ध उपयोग न हो.

मौजूदा FCRA कानून में NGO, चैरिटेबल ट्रस्ट, शैक्षणिक और धार्मिक संस्थाओं को विदेशी पैसा लेने के लिये FCRA रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है. इसी कानून को धार देने के लिये सरकार FCRA संशोधन बिल लाई. सरकार का मकसद एकाउंटिबिलिटी फिक्स करना है कि विदेशी पैसा कहां से और कितना आ रहा है, किस काम में लगा रहा है और संस्था का रजिस्ट्रेशन खत्म होने की सूरत में उस पैसे से बनी संपत्तियों का क्या होगा.&amp;nbsp;
नए बिल में क्या प्रावधान

किसी संस्था या NGO का रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है तो उसकी संपत्ति पर सरकार के अधीन हो जाएंगी.
सरकार का नियंत्रण अस्थायी रहेगा. रजिस्ट्रेशन बहाल होते ही संपत्ति वापस संस्था के हवाले कर दी जाएंगी.
संस्था निर्धारित समय में रजिस्ट्रेशन बहाल नहीं करा पाती है तो संपत्तियां स्थायी रूप से सरकार की होंगी.
सुनिश्चित किया जाएगा कि विदेशी पैसा धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल ना हो रहा हो.
राज्य की एजेंसियों को FCRA से जुड़े मामलों की जांच से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी.
संशोधित कानून में FCRA उल्लंघन पर अधिकतम सजा 5 साल से घटाकर अब सिर्फ 1 साल ही होगी.
उल्लंघन के आरोप या कार्रवाई पर जिला अदालत में अपील करने और चुनौती देने का अधिकार भी होगा.

इन्हीं संशोधनों का विपक्ष विरोध कर रहा है. उसे अंदेशा है कि सरकार FCRA को हथियार बनाकर मुस्लिम और ईसाई NGO के रजिस्ट्रेशन रद्द करेगी. उनके स्कूल-अस्पतालों और चैरिटेबल ट्रस्टों की संपत्तियों पर कब्जे करेगी. धर्मांतरण और देश विरोध के मामलों में फंसाकर अल्पसंख्यकों को टारगेट करेगी. लोकसभा में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का यही पक्ष था कि बिल को JPC में भेजने की बजाए सरकार इसे वापस ही ले ले.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने FCRA बिल को JPC के पास भेजे जाने पर कहा कि हमारा पक्ष ये है कि ये बिल वापस लेना चाहिए. टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जब भी कोई संकट होता है तब यह सरकार कोई न कोई अमेंडमेंट करके प्रयास करता है कि अटेंशन कैसे हटाया जाए. हालांकि लेकिन सरकार खुली चुनौती दे रही है कि विपक्ष इस बिल में किसी धर्म के खिलाफ एक भी शब्द दिखा दे. बीजेपी ने पूछा कि कांग्रेस ये बिल रोककर आखिर किन्हें बचाना चाहती है?
FCRA बिल पर दो धड़े में बंटी कांग्रेस
सरकार ने कहा कि FCRA बिल को JPC में भेजना कांग्रेस की मांग थी. रिकॉर्ड बताता है कि FCRA संशोधन बिल को JPC में भेजने की मांग कांग्रेस ने ही की थी. 25 मार्च 2026 को लोकसभा में बिल पेश हुआ तो कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने मांग उठाई थी. मनीष तिवारी ने चर्चा में कहा था, &#039;संशोधित बिल में गंभीर संवैधानिक समस्याएं हैं.&#039; 31 मार्च को फिर कहा था, &#039;बिल दोषपूर्ण है, इसे JPC या सेलेक्ट कमेटी में भेजा जाए.&#039;
ऐसे में सवाल है कि आज कांग्रेस लोकसभा में पलट क्यों गई? कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर दो धरों में बंटी हुई दिखाई दे रही है. लोकसभा में राहुल गांधी की गैरहाजिरी में केसी वेणुगोपाल बिल वापस लेने की मांग कर गये. जबकि राज्यसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे का स्टैंड ये था कि बिल को JPC में भेजना ही चाहिये.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>FCRA, बिल, पर, दो, धड़े, में, बंटी, कांग्रेस-सपा, कहां, रह, गया, कन्फ्यूजन, और, क्या, है, प्रावधान</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;मुझे लुंगी वाला कहते हैं&amp;apos;, महिला सांसद पर आरोप, रिजिजू बोले&amp; आपत्तिजनक है</title>
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        <description><![CDATA[ राज्यसभा में बुधवार (12 अगस्त) को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब लेफ्ट (सीपीएम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया कि BJP की सांसद सुष्मिता देव मुझे लुंगी वाला, लुंगी वाला कहती हैं. इसके बाद विपक्षी दलों ने ब्रिटास के समर्थन में जमकर हंगामा किया.
हंगामे के बीच चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संबंधित सांसदों को अपने चैंबर में बुलाएंगे और कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद कि गरिमा और उसके सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाया जाए.
 किरेन रिजिजू ने किया हस्तक्षेप
वहीं संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अगर ऐसा कुछ भी जो आपत्तिजनक है, तो आप (सभापति) उन्हें चेंबर में बुलाकर उनकी आपत्ति सुनें. किरेन रिजिजू और सदन के नेता जेपी नड्डा ने चेयरमैन से सुष्मिता देव को भी बोलने की अनुमति देने का आग्रह किया. वह बोलने की अनुमति मांगने के लिए चेयरमैन के पास गईं.
इस बीच, कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ विपक्षी सांसदों ने मांग की कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की अनुमति दी जाए. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए दिए गए दान की कथित चोरी को लेकर नारे भी लगाए. जब ​​दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, तो चेयरमैन ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

क्या है पूरा मामला?
ब्रिटास ने सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान उन्हें &#039;लुंगी वाला&#039; कहने के लिए सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था. बुधवार को बोलने की अनुमति मिलने के बाद, ब्रिटास ने कहा कि जब वह सोमवार दोपहर इनकम टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के खिलाफ एक वैधानिक प्रस्ताव पेश कर रहे थे, तो BJP सांसद अपनी निर्धारित सीट छोड़कर ठीक उनके पीछे वाली सीट पर आ गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने बार-बार उन्हें &#039;लुंगीवाला&#039; कहा. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मुझे, लुंगी, वाला, कहते, हैं, महिला, सांसद, पर, आरोप, रिजिजू, बोले-, आपत्तिजनक, है</media:keywords>
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        <title>हिरासत में मौत की FIR लिखने में पुलिस की देरी से SC नाराज, CBI को सौंपा केस, मुआवजे का आदेश</title>
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        <description><![CDATA[ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में श्रवण सूर्यवंशी की जेल में मौत मामले की जांच अब सीबीआई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले में ढाई साल तक एफआईआर दर्ज नहीं करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
क्या है मामला?
18 जनवरी 2024 को बिलासपुर जिले के सीपत थाने की पुलिस ने 34 साल के श्रवण सूर्यवंशी को गिरफ्तार किया था. यह उनकी किराने की दुकान में बिक्री के लिए 1200 रुपए की कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में हुई थी. गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया. 21 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. 22 जनवरी की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
सिर पर चोट से मौत
श्रवण की मौत के बाद सीजेएम, बिलासपुर के निर्देश पर मौत की जांच कराई गई. इस जांच में मौत का कारण सिर में लगी गंभीर चोट को बताया गया. इसके बाद श्रवण के परिवार ने पुलिसकर्मियों और जेल अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की. उन्होंने &amp;nbsp;50 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की.अक्टूबर, 2024 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था.&amp;nbsp;
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा परिवार
श्रवण की पत्नी लहरा बाई और उनकी 8 और 10 साल की नाबालिग बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश पर असंतोष जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अब तक एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाए. कोर्ट ने राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव और डीजीपी को 4 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए पेश होने का आदेश दिया. कोर्ट की इस सख्ती के बाद 30 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई.
सीबीआई जांच और अंतरिम मुआवजा
बुधवार, 12 अगस्त को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज होने में ढाई साल की देरी पर सवाल उठाए. जजों ने कहा मामले की जांच का ज़िम्मा पुलिस के पास बनाए रखना न्यायसंगत नहीं लगता. इसके बाद कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया. जजों ने यह भी कहा कि मृतक अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था. कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा कि वह परिवार को फिलहाल 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा दे. अंतिम मुआवजा राशि पर बाद में फैसला किया जाएगा. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हिरासत, में, मौत, की, FIR, लिखने, में, पुलिस, की, देरी, से, नाराज, CBI, को, सौंपा, केस, मुआवजे, का, आदेश</media:keywords>
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        <title>जमानत पर आया बाहर और अब फरार, दाऊद के करीबी अख्तर मर्चेंट के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जमानत-पर-आया-बाहर-और-अब-फरार-दाऊद-के-करीबी-अख्तर-मर्चेंट-के-खिलाफ-रेड-कॉर्नर-नोटिस</link>
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        <description><![CDATA[ अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी रहे अख्तर कासम अली मर्चेंट के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है. कासम अली मर्चेंट का नाम दाऊद के डी-कंपनी नेटवर्क से जुड़ा रहा है और उसके खिलाफ मुंबई, ठाणे और गुजरात में अपहरण, वसूली समेत कई गंभीर मामले दर्ज रहे हैं.
महाराष्ट्र पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक अख्तर मर्चेंट को साल 2020 में पालघर पुलिस की एंटी-टेररिज्म सेल ने नालासोपारा से गिरफ्तार किया था. वह 2018 में मीरा रोड के नया नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अपहरण और वसूली के मामले में वांछित था.&amp;nbsp;

आरोप है कि अख्तर कासम अली मर्चेंट के गुर्गों ने एक कारोबारी का बंदूक की नोक पर अपहरण कर उसकी रिहाई के लिए 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी. जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि मर्चेंट इस मामले के बाद देश छोड़कर नेपाल चला गया था और बाद में बांग्लादेश पहुंचा. बांग्लादेश के रास्ते मर्चेंट नैरोबी जाने की कोशिश में था, लेकिन पासपोर्ट हासिल करने में नाकाम रहने के बाद वापस नेपाल लौटा और फिर मुंबई चला आया था.&amp;nbsp;
दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगीपुलिस ने अख्तर मर्चेंट की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उसे नालासोपारा से दबोच लिया था. बता दें कि मर्चेंट को दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी माना जाता है. पुलिस के मुताबिक बाद में उसने अपना अलग गिरोह भी खड़ा कर लिया था और वसई-विरार तथा ठाणे ग्रामीण इलाके में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता था. अख्तर कासम अली मर्चेंट के खिलाफ वसूली, अपहरण, तस्करी और हथियारों से जुड़े मामलों में भी जांच हुई है.
जमानत पर बाहर आने के बाद हुआ फरारपुलिस के मुताबिक जमानत पर बाहर आने के बाद से वो फ़रार है और एजेंसियों को शक है की वो विदेश में कहींं छिपा हो सकता है इसीलिए अब उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है. रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद उम्मीद है कि मर्चेंट को एजेंसियां जल्द ही धर दबोचेंगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>जमानत, पर, आया, बाहर, और, अब, फरार, दाऊद, के, करीबी, अख्तर, मर्चेंट, के, खिलाफ, रेड, कॉर्नर, नोटिस</media:keywords>
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        <title>BJP जिलाध्यक्ष पर वसूली रैकेट चलाने का आरोप, जम्मू कश्मीर पुलिस ने दर्ज किया केस</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू कश्मीर पुलिस ने बीजेपी के पुलवामा जिलाध्यक्ष इंजीनियर सैयद शौकत गयूर अंद्राबी के खिलाफ केस दर्ज किया है. गयूर पर लगातार वसूली (extortion) रैकेट चलाने, अधिकृत कामों में बाधा डालने और कॉन्ट्रैक्टर के कर्मचारियों को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में लेने की धमकी देने के आरोप हैं.&amp;nbsp;
शौकत गयूर को 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में पंपोर विधानसभा क्षेत्र से BJP का आधिकारिक उम्मीदवार बनाया गया था. चुनाव लड़ने के बाद से वह पुलवामा के लिए BJP जिला अध्यक्ष के तौर पर संगठन की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. पुलवामा थाने में दर्ज FIR के अनुसार ये आपराधिक मामला बडगाम के रहने वाले मोहम्मद यासीन गनी की लिखित शिकायत पर दर्ज किया गया है.&amp;nbsp;

गनी ने अपनी शिकायत में कहा कि जब वह सक्षम सरकारी अधिकारियों से मिली आधिकारिक मंज़ूरी के आधार पर गुरुद्वारा प्रबंधक, बरथाना से जुड़े विकास कार्यों के लिए मिट्टी निकालने और उसे ले जाने का काम कर रहे थे, तब गयूर ने कॉन्ट्रैक्टर और उनके कर्मचारियों को लगातार परेशान किया. शिकायतकर्ता का आरोप है कि काम के लिए पूरी मंजूरी होने के बावजूद गयूर ने काम जारी रखने के लिए 5 लाख की मांग की थी.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामलाशिकायत में कहा गया है कि मामला तब और बढ़ गया, जब 8 अगस्त 2026 को सुबह लगभग 10:50 बजे गयूर पुलवामा के परिगाम में खुदाई वाली जगह पर पहुंचे. आरोप है कि उन्होंने भारी मशीनों और ट्रकों के सामने अपनी गाड़ी खड़ी कर दी ताकि उनकी आवाजाही रोकी जा सके. जब कर्मचारियों और ड्राइवरों ने उनसे बात करने की कोशिश की और सरकार से मिली वैध मंज़ूरी दिखाई, तो आरोप है कि गयूर ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाना शुरू कर दिया और गैर-कानूनी काम का आरोप लगाते हुए उन्हें बुरी तरह धमकाना शुरू कर दिया.
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि गयूर ने बार-बार &#039;पब्लिक सेफ्टी एक्ट&#039; के तहत हिरासत में लेने की धमकी दी, जिससे कर्मचारियों में भारी डर और घबराहट फैल गई. दबाव में आकर ठेकेदार ने नेताजी को कुछ नकद भुगतान किया. आरोप है कि 21 नवंबर 2025 को 50,000 रुपये और उसके बाद 22 नवंबर, 2025 को 4,000 रुपये की एक और किस्त दी गई, यानी कुल मिलाकर 54,000 रुपये जबरन वसूले गए.
किन-किन धाराओं में केस दर्जशिकायत मिलने के बाद पुलवामा पुलिस ने मामला दर्ज किया. इसमें गलत तरीके से रोकने के लिए धारा 126(2), जबरन वसूली के लिए धारा 308(2), किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने का डर दिखाकर जबरन वसूली की कोशिश के लिए धारा 308(3), आपराधिक धमकी के लिए धारा 351(2) और शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर अपमान करने के लिए धारा 352 लगाई गई.
इस पूरे मामले पर बीजेपी की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है. ना ही शौकत गयूर ने इस पूरे मामले में अपना पक्ष साफ किया है. बीजेपी के सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय से गयूर के खिलाफ शिकायतें मिल रही थी और उनकी आंतरिक जांच हो रही है.
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लाल किला, चांदनी चौक और रिंग रोड पर नो-एंट्री, 15 अगस्त के लिए ट्रैफिक एडवाजरी लागू ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Xप्लेन: देशभर में कहां&amp;कहां गूंज रहा पेपर लीक का मुद्दा? जानें हर शहर का हाल</title>
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        <description><![CDATA[ पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा अब सिर्फ एक-दो शहरों तक सीमित नहीं रहा. दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर पटना, रांची, भोपाल, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद और जबलपुर तक देशभर में युवा सड़कों पर उतर आए हैं. यह आंदोलन NEET-UG 2026 पेपर लीक से शुरू हुआ, लेकिन अब यह JSSC, JPSC, बिहार सिपाही भर्ती और शिक्षक भर्ती जैसी दर्जनों प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी विरोध में तब्दील हो चुका है. तो आइए जानते हैं कि देशभर में कहां-कहां आंदोलन की गूंज सुनाई दे रही है...
दिल्ली में जंतर मंतर से हुई शुरुआत
यह सब 20 जून 2026 को शुरू हुआ. दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुछ छात्र इकट्ठे हुए. उनकी मांग साफ थी- NEET-UG 2026 का पेपर लीक हुआ है, इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को इस्तीफा देना चाहिए. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे 30 साल के अभिजीत दीपके, जो बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करके आए थे. अभिजीत ने एक इंस्टाग्राम पर &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; (CJP) की स्थापना की थी.
28 जून को इस आंदोलन को एक बड़ा बूस्ट मिला. जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. 26 दिनों तक चली इस हड़ताल और 20 जुलाई को CJP के &#039;चलो संसद&#039; मार्च से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. छात्रों ने इसे एक बड़ी जीत के रूप में देखा, लेकिन यह जीत अधूरी थी. छात्रों का सवाल था- सिस्टम तो वही रहा. एक मंत्री के जाने से क्या बदल गया?
रांची में सबसे लंबा और सबसे भीषण आंदोलन
अगर दिल्ली से आंदोलन शुरू हुआ, तो रांची में इसने सबसे भीषण रूप ले लिया. झारखंड में झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और &amp;nbsp;झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के आरोप हैं. 25 जुलाई 2026 को JPSC-JSSC अभियार्थी न्याय मार्च के बैनर तले शुरू हुआ. छात्रों की प्रमुख मांगें:

JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना
CBI और ED से जांच
भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार
14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द करना

10 अगस्त 2026 को हजारों छात्र झारखंड विधानसभा की तरफ मार्च करने निकले. प्रशासन ने विधानसभा के 750 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग लगा दी थी. पुलिस ने लाठीचार्ज &amp;nbsp; किया, पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. वे एंबुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए. 12 अगस्त 2026 तक आंदोलन को 19 दिन हो चुके हैं.
झारखंड सरकार ने JPSC की प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दी और आयोग के तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. राज्य CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्टे को गिरफ्तार किया, लेकिन CBI जांच की मांग पर छात्र अड़े हैं. छात्र नेता रवींद्र पासवान ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो छात्र आंदोलन को जनआंदोलन में बदल दिया जाएगा.
पटना में NEET विरोध पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नया आंदोलन
बिहार की राजधानी पटना में 4 अगस्त 2026 को फिर से छात्र सड़कों पर उतर आए. दरअसल, जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक के खिलाफ बिहार बंद बुलाया गया था. पुलिस ने करीब 600 लोगों को हिरासत में लिया था. पुलिस ने बाद में आधे से ज्यादा (नाबालिग होने के कारण) रिहा कर दिए, लेकिन बाकी को जेल भेज दिया गया.
सैकड़ों छात्र गांधी मैदान से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास की तरफ मार्च करने निकले. वे NSUI, AISF और DYFI के झंडे लहरा रहे थे. पुलिस ने इनकम टैक्स चौराहा के पास रोका और पानी की बौछारें कीं.
वहीं, सीवान से आए एक एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने AK-47 राइफल से छात्रों पर फायर किया था. कांस्टेबल तो सस्पेंड हुआ, लेकिन SP के खिलाफ कार्रवाई की मांग है.
मध्य प्रदेश में 20 से ज्यादा शहरों में आंदोलन
मध्य प्रदेश में यह आंदोलन सबसे व्यापक रहा है. 20 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हुए.

जबलपुर: जबलपुर में एक साथ दो मुद्दों पर छात्र सड़कों पर उतरे. 11 अगस्त 2026 को पाटन-जबलपुर रोड पर सांदीपनी विद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया. छात्रों की मांग है कि स्कूल 10 किमी दूर है, बस सुविधा नहीं है, इसलिए आवागमन आसान किया जाए. इसके अलावा 1 अगस्त 2026 को जबलपुर की छात्राओं ने बीजेपी सांसद कंगना रनौत के &#039;जेनरेशन गटर&#039; वाले बयान के विरोध में पुतला जलाया और इस्तीफे की मांग की. आगरा के एक वकील ने इस बयान के खिलाफ केस दायर &amp;nbsp; किया है, जिसकी सुनवाई 21 अगस्त को होगी.
भोपाल: 8 अगस्त 2026 से नर्सिंग छात्र संगठन (NSO) ने नर्सिंग काउंसिल भोपाल के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया. नर्सिंग छात्रों का आरोप है कि परीक्षा, रिजल्ट, रजिस्ट्रेशन और डिग्री से जुड़े मामलों में लंबे समय से देरी की जा रही है. कुछ मामलों में तो 6 साल तक डिग्री अटकी हुई है.
इंदौर: तांत्या भील चौराहे पर छात्रों ने धरना दिया. बारिश भी उनके हौसले नहीं तोड़ पाई. एक प्रदर्शनकारी बैटमैन का कॉस्ट्यूम पहनकर आया. उसने कहा &#039;बैटमैन न्याय की लड़ाई का प्रतीक है. मेरा नाम &#039;होप&#039; है और उम्मीद का मतलब आशावाद है. जब तक युवाओं में उम्मीद है, हम जमीन पर खड़े रहेंगे.&#039; 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इंदौर में 25 दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने जश्न मनाया.

इसके अलावा मध्य प्रदेश के रीवा, उमरिया, बड़वानी, श्योपुर, ग्वालियर, रतलाम, बैतूल, झाबुआ, टीकमगढ़, सिंगरौली, शाजापुर, सिधी, मऊगंज, टांडा, धार, पलेरा और बैधन में प्रदर्शन हुए. श्योपुर में PG कॉलेज से कलेक्ट्रेट तक 4 किलोमीटर का मार्च निकाला गया.
इसके अलावा किन-किन शहरों मे आंदोलन?

चेन्नई: एंटी-NEET फेडरेशन का प्रदर्शन 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है. जीवा, धनशेखर, पुलियानथोपे मोहन और रवि 1 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. रवि को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकि ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>हमले को लेकर ममता बनर्जी का आया पहला रिएक्शन, कहा &amp; &amp;apos;मेरे सीने में...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने ऊपर हुए कथित हमले को लेकर बड़ा आरोप लगाया है. मंगलवार को उन्होंने कहा कि उनके काफिले पर हुए अटैक के दौरान उनकी कार पर एक पत्थर फेंका गया था, जिसके चलते उनके सीने में अभी भी दर्द हो रहा है. टीएमसी प्रमुख पार्टी के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंची थी, इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह आरोप लगाए.
ममता बनर्जी ने अपने काफिले पर हुए कथित हमले पर कहा,&#039;जनता सब कुछ देख रही है. मैं दो दिन तक किसी से बात नहीं कर पाई. मेरे काफिले पर ईंटों से हमला किया गया. इससे मुझे सीने में दर्द हुआ. गिरफ्तारियां करना पुलिस का काम है. आज भी पुलिस हमारे टीएमसी भवन में आई और लोगों को प्रताड़ित किया. हम ऐसा नहीं चाहते, हम शांति चाहते हैं.&#039;
क्या बोलीं ममता बनर्जी?
बनर्जी ने आगे कहा कि वह शारीरिक अस्वस्थता के चलते शुरुआत में इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के डिजिटल विंग का समर्थन करने के लिए इसमें भाग लेने का फैसला किया. उन्होंने आगे कहा, &#039;हमारी गाड़ी पर जो पत्थर फेंका गया, वह बड़ी ईंट थी, उसकी वजह से मेरे सीने में दर्द हो रहा था. आज भी मैं आने को तैयार नहीं थी, लेकिन फिर भी हमने सोचा कि यह कार्यक्रम हमारी आईटी टीम का है, तो हम क्यों न जाएं? इसीलिए हम आए हैं.&#039;
15 अगस्त को GenZ से फिर बात करेंगे भागवत, कहा- हम अपनेपन की भावना भूल गए
9 अगस्त की है घटना
घटना रविवार (9 अगस्त) की है, जब बनर्जी उत्तर 24 परगना में एक दिवंगत टीएमसी कार्यकर्ता के परिवार से मिलने जा रही थीं. उनके साथ लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और राज्यसभा सांसद डोला सेन भी थीं, जब उनके काफिले को कथित तौर पर रोका गया और उस पर पत्थर फेंके गए. उनके साथ लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी और राज्यसभा सांसद डोला सेन भी थीं, जब उनके काफिले को कथित तौर पर रोका गया और उस पर पत्थर फेंके गए.
TB को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की बैठक, कर्नाटक-केरल के सांसद मौजूद ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>क्या है मून बेस प्रोग्राम, जिसके लिए NASA ने ISRO को किया इनवाइट?</title>
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        <description><![CDATA[ नासा ने भारत के एयरस्पेस एजेंसी ISRO को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. यह जानकारी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Ambassador Sergio Gor) ने दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि इससे भारत की साझेदारी और मजबूत होगी.&amp;nbsp;
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, &#039;अमेरिका और भारत की डीप स्पेस पार्टनरशिप और मजबूत होगी. यह खबर तब आई है, जब बेंगलुरु में स्टेट डिपार्टमेंट और नासा ने 9वें स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप की सह अध्यक्षता की है. इससे यूएस और इंडिया ट्रस्ट की पहल को आगे बढ़ाया गया है.&#039;
यूएस एंबेसी ने एक्स पर क्या पोस्ट किया है?&amp;nbsp;
यूएस एंबेसी इंडिया (U.S. Embassy India) ने एक्स पर जारी बयान में कहा है कि इंसानियत का अगला बड़ा कदम उठाया जा रहा है. NASA एक मून बेस बना रहा है. चांद पर इंसानियत का पहला ठिकाना. यह बेस चांद से जुड़ी वैज्ञानिक खोजों को बढ़ावा देगा. मंगल ग्रह पर इंसानी मिशन की तैयारी में मदद करेगा. ट्रेलर देखें और जुड़े रहें, क्योंकि जल्द ही एक बड़ी घोषणा होने वाली है. &amp;nbsp;यूएस एंबेसी ने एक वीडियो भी अपनी पोस्ट में साझा किया है.&amp;nbsp;
क्या है मून बेस प्रोग्राम?&amp;nbsp;अमेरिकी एंबेसी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि मून बेस प्रोग्राम अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की तरफ से चलाया जा रहा, एक बेहद ही महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष प्रोग्राम है. इसका उद्देश्य चंद्रमा पर मानवता का पहला स्थायी आधार केंद्र स्थापित करना है. यह बेस अंतरिक्ष यात्रियों के लिए चांद पर रहने, काम करने, और गहन वैज्ञानिक शोध करने के लिए एक स्थायी ठिकाने के रूप में काम करेगा.&amp;nbsp;
यह मून बेस मुख्य रूप से चंद्रमा के साउथ पोल के पास बनाया जा रहा है. यह इलाका साइंटिस्टों की खोज और बर्फ के रूप में पानी की मौजूदगी के कारण बेहद महत्वपूर्ण है. इस बेस का अंतिम लक्ष्य सिर्फ चांद तक सीमित नहीं है. यहां मिलने वाले अनुभवों और तकनीक का इस्तेमाल भविष्य के क्रू मार्स मिशन की तैयारी के लिए एंट्री गेट के तौर पर किया जाएगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>प्रियंका&amp;अखिलेश ने यूपी के कांग्रेस नेताओं को संसद से दे दिया बड़ा संदेश, वीडियो से समझें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/प्रियंका-अखिलेश-ने-यूपी-के-कांग्रेस-नेताओं-को-संसद-से-दे-दिया-बड़ा-संदेश-वीडियो-से-समझें</link>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं, जिसे लेकर राजनीतिक बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. संसद परिसर में 11 अगस्त को &amp;nbsp;समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने विपक्षी एकता संदेश दिया. कांग्रेस के कई नेता यूपी में अकेले सभी सीटों पर तैयारी की बात करते हुए ऐसे बयान देते रहे हैं, जिससे गठबंधन में असहजता की स्थिति बन जाती. हालांकि लगातार बड़े नेताओं की तरफ से एकजटुता के संदेश भी दिए जा रहे हैं.
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और पार्टी के सांसद इमरान मसूद के बयान से विपक्षी गठबंधन में टकराव के संकेत मिलने लगे थे. इमरान मसूद ने यूपी चुनाव 2027 को लेकर कहा था कि कांग्रेस को बैसाखी की जरूरत नहीं है और पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है. उन्होंने कहा, &#039;कांग्रेस को चुनाव लड़ने के लिए किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है. हम किसी से टिकट या समर्थन की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि कांग्रेस को मजबूत करने की बात कर रहे हैं. आज जो माहौल है, वह राहुल गांधी के नेतृत्व का परिणाम है. इसके बाद अजय राय के बयान से सियारी पारा और चढ़ गया.&#039;

#WATCH | Delhi: Opposition MPs, including Priyanka Gandhi Vadra, Akhilesh Yadav and others, hold a protest in Parliament over Ram temple donations theft. pic.twitter.com/YTGsZpgHSO
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 11, 2026



अजय राय ने कहा था कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा था, &#039;कहां, किससे और कितना गठबंधन करना है ये शीर्ष नेतृत्व तय करेगा. हमारा हर कार्यकर्ता बूथ स्तर पर लगा हुआ है.&#039; उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की बैठक का जिक्र करते हुए कहा था कि हम समीक्षा करेंगे कि सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को कैसे मजबूत किया जा सकता.
संसद के मानसून सत्र के दौरान &amp;lsquo;चढ़ावा चोरी&amp;rsquo; के आरोपों और गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच गतिरोध जारी है. विपक्ष ने सदन में विस्तार से चर्चा करने की मांग की है. सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि विपक्ष की दो प्रमुख मांगें हैं. पहला राम मंदिर के नाम पर मिले चढ़ावा में अनियमितताओं पर चर्चा और दूसरा गृह मंत्री की मौजूदगी में संबंधित मुद्दे पर चर्चा हो. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों पर पूरी तरह चर्चा कराने से बच रही है. कांग्रेस भी सरकार से यही मांग कर रही है. इसी कड़ी में संसद परिसर में प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव साथ बैनर लिए खड़े नजर आए. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;हम बहुत जल्द लाएंगे UCC&amp;apos;, CM शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, बोले&amp; एक देश, एक कानून</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हम-बहुत-जल्द-लाएंगे-ucc-cm-शुभेंदु-अधिकारी-का-ऐलान-बोले-एक-देश-एक-कानून</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार लगातार बड़े बदलाव कर रही है. अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को इशारा किया है कि उनकी सरकार की राजनीतिक और कानूनी लड़ाई धर्म बदलने और अलग-अलग कम्युनिटी में जमीन के लेन-देन पर रोक के बीच हो सकती है.&amp;nbsp;
बांकुरा में पश्चिमांचल उन्नयन परिषद की एक रिव्यू मीटिंग को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा, &#039;उनकी सरकार जल्द ही जबरदस्ती धर्म बदलने के खिलाफ एक बड़ा कानून लाएगी. साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री पर कानूनी रोक लगाएगी. इसके अलावा कहा है कि हम बहुत जल्द यूसीसी लाएंगे. एक देश, एक कानून.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;इसके बाद हमारा अगला कदम जबरदस्ती धर्म बदलने को रोकने के लिए एक बड़ा कानून लाना और जमीन की खरीद बिक्री पर नई कानूनी रोक लगाना होगा. बीजेपी के राजनीतिक नैरेटिव में लंबे समय से दो मुद्दे रहे हैं. धर्म बदलना और जिसे वह लैंड जिहाद कहती हैं.&#039;
अधिकारी ने कहा, &#039;प्रस्तावित जमीन कानून में क्या होगा, या क्या यह अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच प्रॉपर्टी की बिक्री पर रोक लगाएगा. उनकी बातें सो तुरंत बांग्लादेश की सीमा से लगे दूसरे बीजेपी शासित राज्यों से तुलना की जा सकती है. जहां सरकार ने सुरक्षित समुदायों और इलाको में कुछ जमीन के लेन-देन पर रोक लगाई है.&#039;&amp;nbsp;
कैंपेन से निकलकर पॉलिसी स्तर पर आया नैरेटिव
इधर, जमीन का सवाल राज्य सरकार के एजेंडे को बॉर्डर जिलों में डेमोग्राफी, गैर कानूनी माइग्रेशन और जमीन कंट्रोल पर बीजेपी के बड़े नैरेटिव से भी जोड़ता है. बीजेपी पिछले कई सालों से बॉर्डर के इलाकों में कथित तौर पर घुसपैठ की वजह से डेमोग्राफिक बदलावों की चेतावनी दे रही है. बाहरी लोगों के हाथों जमीन खोने की चिंता जताई है. अब 15 साल सत्ता में रहने के बाद टीएमसी के बाहर होने के बाद वह नैरेटिव कैंपेन के बयानों से निकलकर पॉलिसी सके दायरे में आ गया है.&#039;
मंगलवार को मीटिंग में एमपी, एमएलए, कैबिनेट मिनिस्टर्स, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और करीब 75 लोग शामिल हुए. बांकुरा, पुरुलिया, झारग्राम, और बीरभूम जैसे जिलों के बीडीओ अधिकारी ने आरोप लगाया है कि विदेश फंड से चलने वाले संगठन बांकुरा और जंगलमहल इलाके में गरीब लोगों को गुमराह कर रहे हैं. गैर कानूनी धर्म परिवर्तन और कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल हैं.&amp;nbsp;
अधिकारी ने कहा, &#039;सरकार ने बॉर्डर पर जमीन बीएसएफ को सौंप दी है. गैर कानूनी ओबीसी लिस्ट को खत्म कर दिया है. इमाम मुअज्जिन भत्ते बंद कर दिए हैं. मुहर्रम के दौरान तलवारें ले जाने पर रोक लगा दी है. दो काम बाकी है, धर्म परिवर्तन कानून लाना और दूसरा जमीन की खरीद बिक्री से जुड़ा कानून. अधिकारी ने कहा भी है कि मैं दोनों कर रहा हूं.&#039;&amp;nbsp;
यह बात राज्य कैबिनेट की तरफ से यूसीसी बिल के ड्राफ्ट की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में एक कमिटी बनाने की मंजूरी देने के मुश्किल से छ हफ्ते बाद आई है. चार सदस्यों वाले पैनल को ड्राफ्ट की जांच करने और अपनी सिफारिशें देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया गया था. इसके बाद इस कानून को विधानसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है. अधिकारी ने 29 जून को विधानसभा में इस कदम की घोषणा की थी. प्रस्तावित यूसीसी शादी, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और गोद लेने के लिए कॉमन सिविल फ्रेमवर्क चाहता है. यह क्षेत्रों में धर्म आधारित पर्सनल लॉ की जगह लेगा. अगर अगस्त में बजट सेशन के दौरान यह बिल पास हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला चौथा राज्य बन जाएगा. बीजेपी के लिए यह समय राजनीतिक रूप से फायदेमंद है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बांग्लादेश की शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग पर आया भारत का रिएक्शन,कहा &amp; &amp;apos;हम अपनी...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बांग्लादेश-की-शेख-हसीना-के-प्रत्यर्पण-की-मांग-पर-आया-भारत-का-रिएक्शनकहा-हम-अपनी</link>
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        <description><![CDATA[ बांग्लादेश की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर भारत ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है. भारत की ओर से साफ किया गया है कि हसीना के प्रत्यर्पण के लिए बांग्लादेश की ओर से मिले अनुरोध की जांच तय प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है. उन्होंने दोहराया कि इस मुद्दे पर भारत का रुख पहले जैसा ही है.
नई दिल्ली में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मामले पर काम चल रहा है. इसके साथ ही, बांग्लादेशी एक्टिविस्ट शरीफ उस्मान हादी की हत्या के संदिग्धों से जुड़े मामले की जांच भी जारी है. उन्होंने कहा,&#039;हमारे हाई कमिश्नर ने कल (10 अगस्त) को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से मुलाकात की और दोनों के बीच आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा हुई.
क्या बोले विदेश मंत्रालय प्रवक्ता?
उन्होंने कहा, &#039;जहां तक पूर्व प्रधानमंत्री के प्रत्यर्पण और हादी के मामले का सवाल है, हादी का मामला एक कानूनी विषय है, जिसकी जांच अभी चल रही है. प्रत्यर्पण के मामले पर हमारा रुख हमेशा की तरह बिल्कुल साफ है कि हम अपनी तय कानूनी प्रक्रियाओं के हिसाब से इस मामले को देख रहे हैं.&#039; ANI ने लोकल रिपोर्ट्स के हवाले से बताया कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कल (10 अगस्त) को हसीना के प्रत्यर्पण और हादी की हत्या के आरोपियों की वापसी सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बातचीत की थी, जिसके बाद भारत की ओर से यह आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है.
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हसीना को लेकर बांग्लादेश की क्या मांग?
इससे पहले ढाका में हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद रहमान के प्रधानमंत्री प्रेस विंग की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, &#039;बांग्लादेश को उम्मीद है कि भारत शेख हसीना की वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाएगा. इसके साथ ही, बांग्लादेशी मीडिया &#039;प्रथम आलो&#039; के मुताबिक, बांग्लादेश ने भारत से हादी की हत्या में शामिल आरोपियों को भी सौंपने की मांग की है. हादी को पिछले साल 12 दिसंबर को ढाका के पलटन रोड पर एक रिक्शे पर जाते समय चलती मोटरसाइकिल से हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BJP की सियासत का जो अब तक रहा &amp;apos;हथियार&amp;apos;, कैसे विपक्ष उसी को ढाल बना कर रहा वार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bjp-की-सियासत-का-जो-अब-तक-रहा-हथियार-कैसे-विपक्ष-उसी-को-ढाल-बना-कर-रहा-वार</link>
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        <description><![CDATA[ राम मंदिर, जिसके नाम पर बीजेपी ने दशकों तक अपनी सियासत का सबसे मजबूत नैरेटिव तैयार किया. अब उसी राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे का मुद्दा बीजेपी के खिलाफ विपक्ष का बड़ा हथियार बनता जा रहा है. राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे सवालों पर दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सियासत गर्म है. संसद में विपक्ष सरकार को घेर रहा है, सड़क पर प्रदर्शन हो रहे हैं और समाजवादी पार्टी लगातार इस मुद्दे को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से जोड़कर बीजेपी पर हमला कर रही है.
आज यानी 10 अगस्त को संसद परिसर में सपा सांसदों का प्रदर्शन इसी सियासी रणनीति की नई तस्वीर लेकर आया. कुछ दिन पहले तक हाथों में सांकेतिक दान पात्र था, लेकिन आज वही प्रदर्शन दूध और पानी की बोतल तक पहुंच गया. सपा सांसदों ने संसद परिसर में दान पात्र के सामने एक हाथ में दूध और दूसरे हाथ में पानी की बोतल लेकर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन के पीछे सीधे यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पुराना बयान था, जिसमें उन्होंने चंदे से जुड़े आरोपों की जांच के संदर्भ में कहा था कि दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया जाएगा.
दूध का डब्बा लेकर संसद पहुंचीं डिंपल यादव
इसी बयान को याद दिलाते हुए डिंपल यादव भी संसद परिसर में दूध से भरा डब्बा लेकर पहुंचीं. डिंपल यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद दूध का दूध और पानी का पानी करने की बात कही थी, लेकिन कमेटी गठित होने के बावजूद अब तक पूरे मामले का हिसाब सामने नहीं आया है. उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की जमीनों की खरीद और चढ़ावे से जुड़े सवाल उठाते हुए सरकार और मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की. यानी सपा अब सीएम के पुराने बयान को ही बीजेपी सरकार के खिलाफ सवाल बनाने में जुटी है.
सपा उठा रही राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा
राम मंदिर चंदा और चढ़ावे से जुड़े आरोपों का मुद्दा जून महीने में सामने आने के बाद से सपा इसे यूपी विधानसभा से लेकर संसद तक लगातार उठा रही है. यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सपा की कोशिश साफ दिखाई दे रही है कि इस मुद्दे को चुनाव तक राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखा जाए. सपा को लगता है कि राम मंदिर से जुड़ा ये विवाद बीजेपी के उस सबसे मजबूत राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देने का मौका दे सकता है, जिसके सहारे पार्टी ने यूपी की राजनीति में लंबे समय तक बढ़त बनाए रखी.
क्या है सपा की रणनीति?
दरअसल, राम मंदिर सिर्फ आस्था का विषय नहीं रहा है, बल्कि बीजेपी की चुनावी राजनीति का भी सबसे बड़ा प्रतीक रहा है. अयोध्या आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण तक बीजेपी ने इसे अपने हिंदुत्व के नैरेटिव का केंद्र बनाया, लेकिन अब समाजवादी पार्टी उसी पिच पर बीजेपी के खिलाफ बैटिंग करना चाहती है. सपा की रणनीति है कि जिस राम मंदिर ने बीजेपी को राजनीतिक बढ़त दिलाई, उसी मंदिर के चढ़ावे और चंदे का हिसाब मांगकर बीजेपी को बैकफुट पर लाया जाए.
अखिलेश यादव इस मुद्दे पर एक्टिव
अखिलेश यादव भी इस मुद्दे पर लगातार बीजेपी को घेर रहे हैं. उन्होंने बीजेपी को भूमाफिया पार्टी बताते हुए अयोध्या में जमीनों और आस्था से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए. अखिलेश का आरोप है कि अयोध्या जैसी पावन धरती पर आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ और जमीनों के दाम तेजी से बढ़े. यानी चढ़ावे के सवाल के साथ समाजवादी पार्टी ने अयोध्या की जमीनों का मुद्दा भी जोड़ दिया है, ताकि राम मंदिर के साथ-साथ अयोध्या की जमीन की राजनीति को भी बीजेपी के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके.
अब ये लड़ाई सिर्फ संसद परिसर के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है. लोकसभा में भी विपक्ष की तरफ से चंदे और राम मंदिर से जुड़े सवाल उठाए गए. सदन में चंदा चोर, गद्दी छोड़ जैसे नारे सुनाई दिए. विपक्ष सरकार से जवाब की मांग कर रहा है. सरकार की तरफ से गृह मंत्री के सदन में जवाब देने की बात कही गई है, लेकिन अखिलेश यादव का कहना है कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े सवालों पर भी जवाब देना होगा. उनका आरोप है कि ये चोरी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए.
सपा को मिला कांग्रेस का साथ
इस मुद्दे पर कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी के साथ खड़ी नजर आ रही है. कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि बच्चों से जुड़े मुद्दे और अयोध्या राम मंदिर में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल दोनों महत्वपूर्ण हैं और सरकार को दोनों विषयों पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए. यानी संसद में विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर एकजुटता की तस्वीर दिखाई दे रही है.
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी का पलटवार भी उतना ही तीखा है. बीजेपी का कहना है कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है और वह राम मंदिर जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने विपक्ष पर मुद्दाविहीन होने का आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर को लेकर राजनीतिक नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की जा रही है. वहीं बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल का कहना है कि जब सरकार गृह मंत्री के जवाब के लिए तैयार है और चर्चा की बात कह रही है, तो विपक्ष सदन को चलने क्यों नहीं दे रहा. बीजेपी इसे विपक्ष की सोची-समझी रणनीति बता रही है.
इसी बीच संसद से बाहर भी राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा सड़क पर उतर आया. साधु-संतों ने मंडी हाउस से प्रधानमंत्री आवास की तरफ मार्च किया. इस मार्च में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी साधु-संतों के साथ दिखाई दिए. पप्पू यादव ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया और राम मंदिर से कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को दूर करने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव साधुओं के साथ जमीन पर बैठते और उनके चरणों में लेटते भी दिखाई दिए. उन्होंने कहा, &#039;सदन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेता इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से स्पष्ट जवाब नहीं आ रहा है.&#039;
पप्पू यादव के इस प्रदर्शन की तस्वीर इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि इससे पहल ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बेंगलुरु के ताज होटल में दो बेटियों की हत्या, पिता ने की खुदकुशी की कोशिश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बेंगलुरु-के-ताज-होटल-में-दो-बेटियों-की-हत्या-पिता-ने-की-खुदकुशी-की-कोशिश</link>
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        <description><![CDATA[ बेंगलुरु के नागवारा इलाके में दो मासूम बच्चियों की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस के अनुसार, 40 वर्षीय एसजी इमरान पर अपनी दो बेटियों की गला घोंटकर हत्या करने का आरोप है. इसके बाद इमरान ने कथित तौर पर खुदकुशी की कोशिश की. मृत बच्चियों की पहचान 5 वर्षीय शेख जेहरा और 10 वर्षीय शेख जोया के रूप में हुई है. दोनों बच्चियां नागवारा इलाके में अपने परिवार के साथ रहती थीं.
जानकारी के मुताबिक, सोमवार (10 अगस्त, 2026) की शाम ताज होटल के सिक्योरिटी मैनेजर की ओर से संदिग्ध मौत की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची. घटनास्थल पर बच्चियों के पिता इमरान की हालत गंभीर मिली. ताज होटल की सुरक्षा टीम ने उसे इलाज के लिए मणिपाल अस्पताल पहुंचाया. पुलिस के मुताबिक, इमरान फिलहाल अस्पताल में भर्ती है और खतरे से बाहर है.
मामले के बारे में पुलिस ने दी जानकारी
पुलिस के अनुसार, इमरान ने दोनों बच्चियों की गला घोंटकर हत्या की. मामले की जांच कर रही पुलिस को एक कथित नोट भी मिला है. नोट में इमरान ने पत्नी के साथ वैवाहिक विवाद का जिक्र किया है. उसने पत्नी पर शक होने और किसी अन्य व्यक्ति के साथ उसके संबंध होने के कथित सबूत मिलने का भी दावा किया है. हालांकि, पुलिस का कहना है कि बच्चियों की हत्या की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी जांच की जा रही है.
नॉर्थ-ईस्ट डिवीजन के डीसीपी के नेतृत्व में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब घटनास्थल से मिले सबूतों, कथित नोट और परिवार से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है. मामले में आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी.

कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा?
बेंगलुरु पुलिस के मुताबिक, इमरान एक प्राइवेट कैब कंपनी में मैनेजर था और नागवारा मेन रोड के पास बिलालनगर में रहता था. वह रविवार (9 अगस्त, 2026) की शाम करीब 7.30 बजे होटल के चौथे मंजिल पर एक कमरे में रुका था. होटल स्टाफ के अनुसार, इमरान ने कहा था कि वह कमरा इसलिए ले रहा है, क्योंकि उसे दुबई से आने वाले एक मेहमान को रिसीव करना है, जो रविवार (9 अगस्त) की आधी रात के बाद पहुंचेगा. उसने होटल स्टाफ से कहा था कि वह सोमवार (10 अगस्त) की सुबह चेक-आउट कर लेगा.
हालांकि, जांच अधिकारी ने बताया कि इमरान ने सोमवार (10 अगस्त) की सुबह चेक-आउट नहीं किया. पुलिस ने कहा कि दोपहर 12.30 बजे हाउसकीपिंग स्टाफ ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. शाम 4.30 बजे उन्होंने फिर खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई रेस्पॉन्स नहीं मिला. इसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे होटल के मैनेजर ने डुप्लिकेट चाबी से दरवाजा खोला.
मैनेजर ने पुलिस को बताया कि बच्चियां बिस्तर के पास मृत पड़ी थीं और इमरान, जिसका गला कटा हुआ था, सोफे के पास पड़ा था. तुरंत एम्बुलेंस बुलाई गई और तीनों को पास के प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया. हालांकि, पुलिस ने बताया कि डॉक्टरों ने दोनों बच्चियों को मृत घोषित कर दिया और इमरान का अभी भी इलाज चल रहा है.
मामले पर नॉर्थ-ईस्ट डिवीजन के DCP ने दी जानकारी
नॉर्थ-ईस्ट डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) मिथुन कुमार GK ने कहा, &amp;lsquo;शाम को हमें होटल के सिक्योरिटी मैनेजर का फोन आया, जिसमें दो बच्चियों की संदिग्ध मौत और एक आदमी के जिंदगी-मौत से जूझने की जानकारी दी गई घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है और पुलिस को शक है कि इसे इमरान ने ही लिखा था. सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं अपनी पत्नी के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर की वजह से जिंदगी से तंग आ चुका हूं. मेरे पास उसके अफेयर को साबित करने के सबूत हैं. उसने मुझे दुख पहुंचाया है. मैं अपनी बेटियों को अपने साथ ले जा रहा हूं. पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः कोलंबिया भूकंप: ढहती इमारतें और चीखते लोग..., 77 मौत के बाद इमरजेंसी का ऐलान ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अभिजीत दीपके ने देवेंद्र महतो से की बात, &amp;apos;अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस ने...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अभिजीत-दीपके-ने-देवेंद्र-महतो-से-की-बात-अस्पताल-ले-जाने-से-पहले-पुलिस-ने</link>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिदजीत दीपके ने सोमवार (10 अगस्त, 2026) को झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ रांची में 18 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के दौरान पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो से फोन पर बात की. उन्होंने रांची में छात्रों पर पुलिस की तरफ से की लाठीचार्ज की कार्रवाई की आलोचना की है और कहा कि चाहे जंतर मंतर हो या झारखंड, छात्रों के साथ पुलिस की ऐसी बर्बरता उनकी क्रूरता और अमानवीयता को दर्शाती है. &amp;nbsp;
देवेंद्र महतो से बात करके क्या बोले दीपके?
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो के साथ वीडियो कॉल के दौरान लिए गए स्क्रीनशॉट को शेयर किया है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, &amp;lsquo;मैंने देवेंद्र महतो से बात की, जो पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उन्होंने मुझे बताया कि अस्पताल लेकर जाने से पहले पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया, जिससे उन्हें काफी चोटें आई हैं. उन्हें सीने में भी काफी दर्द महसूस हो रहा है.&amp;rsquo;
सीजेपी संस्थापक ने आगे कहा, &amp;lsquo;चाहे जंतर मंतर हो या झारखंड, छात्रों के खिलाफ पुलिस की ऐसी बर्बरता उनकी क्रूरता और अमानवीयता को दर्शाती है. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) देवेंद्र भाई और उनके संघर्षों के साथ मजबूती से खड़ी है. वो एक सच्चे नायक है. मैं उनके साहस और हिम्मत को सलाम करता हूं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

Spoke to Devendra Mahto, who has been on a hunger strike for the past 9 days.He told me that before being taken to the hospital, he was lathi-charged by the police and suffered injuries. He is also experiencing chest pain.Be it Jantar Mantar or Jharkhand, such police&amp;hellip; pic.twitter.com/o8PkyA2Yps
&amp;mdash; Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 10, 2026



झारखंड में नहीं थम रहा छात्रों का आंदोलन
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ रांची में 18 दिनों से जारी छात्र आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा. सोमवार (10 अगस्त, 2026) को सुबह 9 बजे से विधानसभा मार्च के लिए इकट्ठा हुए हजारों छात्र शाम चार बजे के बाद भी डटे हुए हैं. पिछले सात घंटों से जारी प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन की बौछारों, आंसू गैस के गोलों और लाठीचार्ज के बावजूद आंदोलन कर रहे युवा पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः कोलंबिया भूकंप: ढहती इमारतें और चीखते लोग..., 80 मौत के बाद इमरजेंसी का ऐलान ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अभिजीत, दीपके, ने, देवेंद्र, महतो, से, की, बात, अस्पताल, ले, जाने, से, पहले, पुलिस, ने...</media:keywords>
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        <title>PM मोदी, अमित शाह, सोनिया&amp;अखिलेश... सुप्रिया सुले की बेटी के रिसेप्शन में पहुंचे दिग्गज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-अमित-शाह-सोनिया-अखिलेश-सुप्रिया-सुले-की-बेटी-के-रिसेप्शन-में-पहुंचे-दिग्गज</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-अमित-शाह-सोनिया-अखिलेश-सुप्रिया-सुले-की-बेटी-के-रिसेप्शन-में-पहुंचे-दिग्गज</guid>
        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र की राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शरद पवार की मुलाकातें पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में हैं. सोमवार को दिल्ली में एक बार फिर दोनों नेता साथ नजर आए, लेकिन इस बार मुलाकात का कारण सियासत नहीं, बल्कि पारिवारिक समारोह था. एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले और सारंग लखानी के शादी समारोह के रिसेप्शन में पीएम मोदी पहुंचे. यहां वह शरद पवार के साथ बैठे और उनसे बातचीत करते नजर आए. खास बात यह रही कि इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई बड़े राजनीतिक चेहरे भी पहुंचे.
रेवती सुले के रिसेप्शन में पहुंचे पीएम मोदी
दिल्ली में सोमवार को एनसीपी (एसपी) नेता और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले की शादी का रिसेप्शन आयोजित किया गया. समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत राजनीति और दूसरे क्षेत्रों की कई हस्तियां शामिल हुईं.

विवाह समारोह pic.twitter.com/bVyOWMBVI4
&amp;mdash; Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 10, 2026



समारोह से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में पीएम मोदी एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के साथ बैठे नजर आए. दोनों नेताओं के बीच बातचीत भी हुई. रिसेप्शन के दौरान प्रधानमंत्री ने नवविवाहित जोड़े और परिवार के सदस्यों से मुलाकात की. वह कार्यक्रम में मौजूद मेहमानों से भी मिले और उनका अभिवादन किया.
रेवती सुले, बारामती से एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले की बेटी और शरद पवार की नातिन हैं. शादी के रिसेप्शन में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी और शरद पवार के साथ उनकी बातचीत की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई.
अमित शाह से राहुल गांधी तक कई बड़े चेहरे पहुंचे
रेवती सुले की शादी सारंग लखानी से हुई है. रिसेप्शन में शरद पवार ने खुद मेहमानों का स्वागत किया. समारोह में गृह मंत्री अमित शाह भी पहुंचे. इसके अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, उनकी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी भी कार्यक्रम में शामिल हुईं.

आज नई दिल्ली में एनसीपी की वरिष्ठ नेत्री एवं सांसद बहन श्री सुप्रिया सुले जी की सुपुत्री के विवाह समारोह में सम्मिलित होकर नवविवाहित दंपति को सुखद एवं मंगलमय वैवाहिक जीवन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।@supriya_sule pic.twitter.com/wFVcpKktBF
&amp;mdash; युवा बिहारी चिराग पासवान (@iChiragPaswan) August 10, 2026



इस तरह अलग-अलग राजनीतिक दलों के कई बड़े नेता एक ही समारोह में नजर आए.
पीएम मोदी से सुप्रिया सुले ने की 20 मिनट मुलाकात
रेवती सुले के रिसेप्शन से पहले सोमवार को सुप्रिया सुले ने पार्टी के आठ सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. यह बैठक करीब 20 मिनट तक चली. इसके बाद एक बार फिर परिसीमन विधेयक को लेकर एनसीपी (एसपी) के रुख की चर्चा शुरू हो गई.
सुप्रिया सुले पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी किसी भी परिसीमन विधेयक का समर्थन तभी करेगी, जब उसकी सभी जरूरी मांगों को विधेयक के मसौदे में शामिल किया जाएगा.
INDIA गठबंधन में बैठक को लेकर हलचल
प्रधानमंत्री मोदी के साथ सुप्रिया सुले और एनसीपी (एसपी) सांसदों की बैठक के बाद INDIA गठबंधन के भीतर भी हलचल की चर्चा होने लगी. हालांकि, बैठक के दौरान परिसीमन का मुद्दा नहीं उठाया गया.&amp;nbsp;
एनसीपी (एसपी) के सांसदों ने प्रधानमंत्री के सामने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विकास और जनहित के कई मुद्दे रखे.
यह भी पढ़ें: अभिजीत दीपके ने देवेंद्र महतो से की बात, &#039;अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस ने...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोदी, अमित, शाह, सोनिया-अखिलेश..., सुप्रिया, सुले, की, बेटी, के, रिसेप्शन, में, पहुंचे, दिग्गज</media:keywords>
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        <title>Fact Check: अरुणाचल प्रदेश में घुस गई है चीनी सेना? वायरल वीडियो का सच</title>
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        <description><![CDATA[ भारत ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों को भारतीय नाम के तहत आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया है. इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन अरुणाचल प्रदेश में 60 किमी तक अंदर तक घुस आया है. वीडियो में एक शख्स सेल्फी कैमरे से सब रिकॉर्ड करता हुआ नजर आ रहा है. इस वीडियो में कुछ सैनिक आपस में बहस करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में कितनी सच्चाई है, इस वायरल दावे का फैक्ट चेक करके आपको सच्चाई बताते हैं.
क्या है सच्चाईरिपोर्ट्स के मुताबिक ये वीडियो पुराना है और इसे हालिया घटने से जोड़कर शेयर किया जा रहा है. पीआईबी ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर जानकारी शेयर की है. उन्होंने बताया है कि ये वीडियो भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से जुड़ा पुराना वीडियो है.

सोशल मीडिया पर भारत - बांग्लादेश सीमा क्षेत्र की एक वीडियो को गलत संदर्भ में साझा किया जा रहा है। #PIBFactCheck:❌ यह वीडियो पुरानी है। ⚠️ कृपया सतर्क रहिए। सनसनी फैलाने वाले ऐसे कंटेंट के झांसे में न आएं।???? प्रामाणिक सूचनाओं के लिए आधिकारिक स्त्रोतों पर ही भरोसा कीजिए।&amp;hellip; pic.twitter.com/0LsbbpPauJ
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) August 10, 2026



पीआईबी के मुताबिक ये घटना हाल की नहीं है. फिर भी लोग इसे नए संदर्भ में जोड़कर शेयर कर रहे हैं. जिससे ऐसा लग रहा है कि वीडियो में दिखाई गई घटना हाल ही की है.
भ्रामक सामग्री से सावधान रहेइस तरह के वीडियो से लोगों को बचने की अपील की गई है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो या फोटो के साथ किए जाने वाले दावों को सत्य नहीं मानना चाहिए. गलत सूचना फैलाने के लिए कई लोग पुरानी फोटोज और वीडियो को नई घटना से जोड़कर शेयर करते हैं. इसलिए किसी भी तरह के वीडियो या फोटो पर बिना सच्चाई जाने विश्वास नहीं करना चाहिए.
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने चीनी घुसपैठ की खबरों का खंडन किया है. उन्होंने कहा है कि भारत-चीन की सीमाओं के पास रहने वाले लोगों की चिंताएं सुनना और जमीन पर चाकर उनकी सच्चाई जानना भी जरुरी है.
ये भी पढ़ें: अभिजीत दीपके ने देवेंद्र महतो से की बात, &#039;अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस ने...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Fact, Check:, अरुणाचल, प्रदेश, में, घुस, गई, है, चीनी, सेना, वायरल, वीडियो, का, सच</media:keywords>
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        <title>स्वतंत्रता दिवस: लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा &amp;apos;वंदे मातरम&amp;apos;, दिखेगी Gen&amp;Z की छाप</title>
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        <description><![CDATA[ भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाएगा. इस बार लालकिले पर &amp;nbsp;Gen-Z की छाप छाई रहेगी. सरकार ने इसके लिए प्लान तैयार कर लिया है. दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं के योगदान के लिए &#039;युवा शक्ति&#039; को भी सम्मानित किया जाएगा. पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रगान &#039;वंदे मातरम&#039; गाया जाएगा.
रक्षा सचिव कुमार सिंह ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बताया, &#039;80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के लाल किले से करेंगे. आमंत्रित लोगों के लिए मेट्रो सेवाएं सुबह 4 बजे से फ्री उपलब्ध रहेंगी. वॉलंटियर्स, व्हीलचेयर, क्लॉकरूम, पीने का पानी, शौचालय और रेनकोट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी.&#039;
इस कार्यक्रम में भारत की परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और नई टेक्नोलॉजी में हुई तरक्की को दिखाया जाएगा. इसके साथ ही, महिला उद्यमियों, किसानों, कारीगरों और नाम कमाने वाले युवाओं को विशेष मेहमान के रूप में सम्मानित किया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में पदक जीतने वाले उन्नीस छात्रों को सम्मानित किया जाएगा. यह समारोह &#039;वंदे मातरम&#039; के 150 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिसे पहली बार लाल किले से गाया जाएगा. युवाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
उधर, स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले लाल किले और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है. दिल्ली पुलिस भीड़ में संदिग्ध और वांछित लोगों की पहचान करने के लिए &#039;अभिज्ञान&#039; ऐप और &amp;lsquo;फेशियल रिकग्निशन सिस्टम&amp;rsquo; का इस्तेमाल करेगी. 15 अगस्त के समारोह के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लगभग 15000 से 20000 जवानों को तैनात किए जाने की उम्मीद है.
किरेन रिजिजू के बयान पर विपक्ष का पलटवार, कहा- &amp;lsquo;PM और गृह मंत्री...&amp;rsquo;
ड्रोन-पतंग उड़ाने पर लगी रोक
दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए राजधानी में 2 से 16 अगस्त तक ड्रोन सहित सभी तरह के छोटे हवाई प्लेटफॉर्म उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. इसके अलावा सुरक्षा कारणों से स्मारक के आसपास लालकिले के आस-पास पतंग उड़ाने पर रोक लगा दी गई है. बीएनएसएस, की धारा 163 के तहत जारी किया गया यह आदेश 16 अगस्त तक लागू रहेगा.
संसद परिसर में दूध-पानी के साथ प्रदर्शन, सांसदों के अनोखे अंदाज की तस्वीरें ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्वतंत्रता, दिवस:, लाल, किले, की, प्राचीर, से, गाया, जाएगा, वंदे, मातरम, दिखेगी, Gen-Z, की, छाप</media:keywords>
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        <title>संसद से पास बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, जानें राज्यसभा में क्या बोलीं वित्त मंत्री?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/संसद-से-पास-बैंकर्स-बुक्स-एविडेंस-बिल-जानें-राज्यसभा-में-क्या-बोलीं-वित्त-मंत्री</link>
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        <description><![CDATA[ मानसून सत्र के 16वें दिन मंगलवार (10 अगस्त, 2026) को संसद ने &amp;lsquo;द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026&amp;rsquo; को पारित कर दिया है. मोदी सरकार की तरफ से इस बिल को पिछले हफ्ते सोमवार (3 अगस्त, 2026) को संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में पेश किया गया था. जहां यह बिल अगले दिन मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को ही लोकसभा से पारित हो गया था. इसके बाद इसे राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया, जहां सोमवार (10 अगस्त) को यह बिल पास हो गया और अब इसके कानूनी रूप लेने का रास्ता साफ हो गया है.
विपक्ष बिल पर चर्चा से ज्यादा वॉकआउट को देता है महत्व- सीतारमण
इस विधेयक को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (10 अगस्त, 2026) को राज्यसभा में कहा, &amp;lsquo;यह ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक हैं, जिसमें वास्तव में विपक्ष को रुचि लेनी चाहिए और इसके लिए हो रही चर्चा में भाग भी लेना चाहिए. ये बहुत ही रिफॉर्मेट्री यानी सुधारों वाला विधेयक है.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;ये विधेयक देश को तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ने में मदद करेंगे. यह ऐसे कदम हैं, जिन पर किसी को भी आपत्ति नहीं हो सकती है, सिवाय ऐसे लोगों के, जो इनमें किसी भी तरह के सुधार के लिए सुझाव देना चाहते हों. इसलिए यह बहुत ही दुखद स्थिति है कि हमारा विपक्ष इस तरह के महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा करने या बहस में भाग लेने से ज्यादा सदन से वॉकआउट करने को प्राथमिकता देता है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

These are the kind of Bills (The Bankers&#039; Books Evidence Bill, 2026) on which the Opposition should actually take interest and participate. These are very reformatory.These are going to help the country move forward fast. And these are steps on which no one can have a&amp;hellip; pic.twitter.com/rojVOTgCdc
&amp;mdash; Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) August 10, 2026



पुराने कानून में क्यों किया गया बदलाव?
दरअसल, 135 साल पुराने इस कानून का मुख्य उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड्स की सर्टिफाइड कॉपियों को कानूनी कार्यवाही में सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी देना था. इससे बैंक अधिकारियों को हर बार अदालतों में असली बही-खाते और रिकॉर्ड्स को भौतिक रूप से पेश करने की परेशानी से बचाया जा सकता है.
बिल में क्या किए गए बदलाव?
इस बिल में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बैंकर्स बुक्स की परिभाषा का विस्तार है. पुराने कानून में बैंकर्स बुक्स को सिर्फ ऐसे रिकॉर्ड के रूप में बताया गया था, जो लिखित रूप में रखे गए हों या माइक्रोफिल्म, मैग्नेटिक टेप या किसी अन्य मेकेनिकल या इलेक्टॉनिक डेटा-रिट्रीवल माध्यम में सुरक्षित गया हो. जबकि साल 2026 का विधेयक उन रिकॉर्ड्स को भी सबूतों के रूप में मान्यता देता है, जो इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल फॉर्म, अन्य रूप में ऑनसाइट या किसी ऑफसाइट, वर्चुअल या क्लाउड लोकेशन पर सुरक्षित रखे गए हों.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः हंगामे के बीच लोकसभा में पेश हुए 4 बिल, कौन-कौन से हैं ये विधेयक ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>संसद, से, पास, बैंकर्स, बुक्स, एविडेंस, बिल, जानें, राज्यसभा, में, क्या, बोलीं, वित्त, मंत्री</media:keywords>
    </item>
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        <title>अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की इजाजत, जानें क्यों यात्रा पर लगी थी रोक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अभिषेक-बनर्जी-को-विदेश-जाने-की-इजाजत-जानें-क्यों-यात्रा-पर-लगी-थी-रोक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अभिषेक-बनर्जी-को-विदेश-जाने-की-इजाजत-जानें-क्यों-यात्रा-पर-लगी-थी-रोक</guid>
        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए सितंबर में तीन सप्ताह विदेश जाने की अनुमति दी है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह अनुमति कई शर्तों के साथ दी है. अदालत ने साफ किया कि विदेश यात्रा के दौरान जांच एजेंसियों के साथ जरूरी जानकारी साझा करना अनिवार्य होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक के सामने रखी कौन-सी शर्तें
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी सिर्फ अपने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर विदेश यात्रा कर सकेंगे. उन्हें जांच एजेंसियों को अपनी पूरी यात्रा का कार्यक्रम, विदेश में रहने का पता, इलाज करने वाले डॉक्टर और अस्पताल की जानकारी, ठहरने की अवधि और फ्लाइट से जुड़ी पूरी जानकारी देनी होगी. कोर्ट ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि बनर्जी की तरफ से दी गई इन जानकारियों को गोपनीय रखा जाए.
कलकत्ता हाई कोर्ट ने विदेश यात्रा करने पर लगाई थी रोक
अभिषेक बनर्जी के विदेश जाने पर रोक एक आपराधिक मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने लगाई थी. यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण से जुड़ा है. मई में कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने को कहा था. हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह उसकी अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते हैं.&amp;nbsp;

सुप्रीम कोर्ट अभिषेक बनर्जी की याचिका पर क्या कहा?
बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति लेने के लिए जून में कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका अर्जी दाखिल की. हाई कोर्ट ने पहले उन्हें राज्य के SSKM अस्पताल में मेडिकल जांच कराने को कहा था और विदेश में इलाज की जरूरत होने पर ही इस अनुरोध पर विचार की बात कही थी. बाद में हाई कोर्ट ने विदेश यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया.
इसके बाद बनर्जी ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सितंबर में तीन सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि विदेश जाना हर व्यक्ति का अधिकार है. किसी व्यक्ति को अपने पसंद की जगह पर इलाज करवाने का भी अधिकार है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;शुभेंदु अधिकारी ने...&#039;, ममता पर अटैक को लेकर अभिषेक बनर्जी का बड़ा आरोप ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अभिषेक, बनर्जी, को, विदेश, जाने, की, इजाजत, जानें, क्यों, यात्रा, पर, लगी, थी, रोक</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;झारखंड में छात्रों के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल ग़लत&amp;apos;, राहुल गांधी की सोरेन सरकार को दो टूक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/झारखंड-में-छात्रों-के-ख़िलाफ़-बल-का-इस्तेमाल-ग़लत-राहुल-गांधी-की-सोरेन-सरकार-को-दो-टूक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/झारखंड-में-छात्रों-के-ख़िलाफ़-बल-का-इस्तेमाल-ग़लत-राहुल-गांधी-की-सोरेन-सरकार-को-दो-टूक</guid>
        <description><![CDATA[ झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी है. इस बीच प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गलत बताया है. उन्होंने कहा, &#039;&#039;झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल ग़लत है. छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है. झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए.&#039;&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>झारखंड, में, छात्रों, के, ख़िलाफ़, बल, का, इस्तेमाल, ग़लत, राहुल, गांधी, की, सोरेन, सरकार, को, दो, टूक</media:keywords>
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        <title>Xप्लेन: रांची, दिल्ली या पटना! छात्रों पर लाठी, आंसू गैस और गोली ही सरकार का सहारा क्यों?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-रांची-दिल्ली-या-पटना-छात्रों-पर-लाठी-आंसू-गैस-और-गोली-ही-सरकार-का-सहारा-क्यों</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-रांची-दिल्ली-या-पटना-छात्रों-पर-लाठी-आंसू-गैस-और-गोली-ही-सरकार-का-सहारा-क्यों</guid>
        <description><![CDATA[ 10 अगस्त 2026 को झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ 17वें दिन से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया. यह वही झारखंड है जहां INDIA गठबंधन की सरकार है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है. इससे ठीक तीन हफ्ते पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के &#039;चलो संसद&#039; मार्च पर पुलिस ने लाठियां, आंसू गैस और पेलेट गन की गोलियां बरसाई थीं. बिहार में NEET पेपर लीक के विरोध में उतरे छात्रों पर पुलिस ने AK-47 तक तान दी. महाराष्ट्र में 900 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों पर मामले बने और डिजीटल पेट्रोलिंग से निगरानी हुई. यानी सत्ता में बीजेपी हो या INDIA गठबंधन, छात्रों की मांगों का हर जगह एक ही जवाब है- डंडा, आंसू गैस, गोली और मुकदमा...
झारखंड: CM का &#039;संवाद&#039; 24 घंटे में ध्वस्त
झारखंड में छात्रों का गुस्सा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में सालों से चली आ रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर है. 17 दिनों से छात्र सड़क पर हैं, लेकिन सरकार ने न तो कोई ठोस बातचीत की पहल की और न ही उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट आश्वासन दिया.
10 अगस्त को जब प्रदर्शनकारी विधानसभा घेराव के लिए निकले तो पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की. जैसे ही छात्र बैरिकेड तोड़कर विधानसभा में घुसे, तो पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया और वॉटर कैनन भी चलाई. चश्मदीदों ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने न तो कोई चेतावनी दी और न ही भीड़ को शांत करने का कोई और उपाय अपनाया, बस सीधे डंडे बरसा दिए.
इस पूरे मामले ने हेमंत सोरेन सरकार और खासकर कांग्रेस को बुरी तरह बेनकाब कर दिया. दिल्ली में जब केंद्र की बीजेपी सरकार के अधीन पुलिस ने CJP आंदोलनकारियों पर कार्रवाई की थी, तब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में गरजते हुए कहा था, &#039;हम छात्रों के साथ हैं, चाहे वह दिल्ली हो, झारखंड हो या पंजाब.&#039; लेकिन जब वही छात्र झारखंड में उनकी अपनी गठबंधन सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे, तो न खरगे का कोई बयान आया और न ही कांग्रेस ने कोई सख्त रुख अपनाया.
बीजेपी ने इसी विरोधाभास को पकड़ा और तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने सीधे शब्दों में कहा, &#039;कांग्रेस और उसके INDIA गठबंधन के साथी छात्रों के मुद्दों पर अपनी दोहरी नीति के लिए पूरी तरह से उजागर हो गए हैं.&#039;
दिल्ली: जहां से पूरे देश में बहस छिड़ी
20 जुलाई 2026 को मई में बनी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर से संसद तक &#039;चलो संसद&#039; मार्च निकाला. सुबह 8 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन सुबह 10 बजे तक उग्र हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद मार्ग, जनपथ और विजय चौक होते हुए संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश की.
पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले दागे, फिर लाठीचार्ज किया और बाद में पेलेट गन की गोलियां भी चलाईं. दिनभर चले इस संघर्ष में 118 से अधिक पुलिसकर्मी और 50 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए. CJP ने आरोप लगाया कि निहत्थे आंदोलनकारियों पर बिना किसी चेतावनी के बल प्रयोग किया गया.
विपक्ष ने इस घटना पर संसद में जमकर हंगामा किया. खरगे ने गृह मंत्री से सार्वजनिक रूप से पूछा, &#039;किस आदेश पर छात्रों पर लाठीचार्ज और पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ?&#039; दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 15 FIR दर्ज कीं, हालांकि 30 जुलाई को दिल्ली सरकार ने कई मामले वापस लेने का फैसला किया. तब तक दिल्ली की ये तस्वीरें देश भर के छात्रों के लिए एक प्रतीक बन चुकी थीं. यानी राज्य चाहे कोई भी हो, सत्ता का चेहरा चाहे जो भी हो, छात्रों की आवाज दबाने का तरीका एक जैसा ही रहता है.
बिहार: जहां पुलिस की AK-47 तक पहुंच गई
बिहार की तस्वीर और भी भयावह रही. NEET-UG 2026 पेपर लीक के खिलाफ पूरे राज्य में छात्र सड़कों पर उतरे थे. 22 जुलाई को पटना के गांधी मैदान पर जुटी भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान कई जिलों में फिर से लाठीचार्ज हुआ.
सबसे चौंकाने वाली घटना सिवान जिले से सामने आई, जहां एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने प्रदर्शनकारी छात्रों को तितर-बितर करने के लिए अपनी सर्विस AK-47 राइफल तान दी. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और उस कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया, लेकिन इस घटना ने पुलिस बल की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
राज्य सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए कानूनी शिकंजा भी कसा. 23 जुलाई को पटना में 268 लोगों पर नामजद FIR दर्ज की गई और 56 लोगों को गिरफ्तार किया गया. पूरे बिहार में 2000 से ज्यादा छात्रों पर FIR दर्ज की गईं और 270 संदिग्धों की तस्वीरें सार्वजनिक की गईं.
बिहार की सत्ता में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार (बीजेपी+जदयू) है. विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने सरकार पर छात्र विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया, लेकिन खुद उनकी पार्टी के पिछले कार्यकाल में भी प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चली थीं.
महाराष्ट्र: डंडा नहीं तो डिजीटल पेट्रोलिंग और सामूहिक FIR
महाराष्ट्र में महायुति सरकार (बीजेपी+शिवसेना+राकांपा) ने CJP समर्थित आंदोलन से निपटने के लिए एक अलग ही तरीका अपनाया. दिल्ली की घटना के बाद राज्य के 98 स्थानों पर CJP के समर्थन में प्रदर्शन हुए.
मुंबई के दादर स्थित चैत्यभूमि पर जुटे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने सीधे लाठीचार्ज करने के बजाय बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई और डिजीटल निगरानी का रास्ता चुना. 14 दिनों तक मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर कीवर्ड और हैशटैग के जरिए डिजीटल पेट्रोलिंग की, आंदोलन से जुड़े हर पोस्ट और अकाउंट पर नजर रखी गई.
इसके बाद 8 अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में कुल 900 से ज्यादा लोगों पर FIR दर्ज की गई. सबसे ज्यादा मामले शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में दर्ज हुए जहां 600 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर केस बनाया गया. माहिम और दादर थानों में भी सैकड़ों लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए.
पुलिस का त ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, रांची, दिल्ली, या, पटना, छात्रों, पर, लाठी, आंसू, गैस, और, गोली, ही, सरकार, का, सहारा, क्यों</media:keywords>
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        <title>MoU का उल्लंघन जारी रहने तक US के साथ बातचीत संभव नहीं, अराघची की दो टूक</title>
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        <description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है. विदेश मंत्रालय के सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड इंटरनेशनल स्टडीज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यह बात कही. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, अराघची ने कहा, इस समय हमारी अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है. हालांकि, कुछ मध्यस्थ अब भी बातचीत दोबारा शुरू कराने के रास्ते तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.&amp;nbsp;
हमारे नजरिए से तब तक वार्ता फिर से शुरू नहीं हो सकती, जब तक अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) के उल्लंघन बंद नहीं करता और पहले किए गए उल्लंघनों की भरपाई नहीं करता.
उन्होंने कहा, जब तक अमेरिका एमओयू के उल्लंघन रोक नहीं देता और अपनी गलतियों का सुधार नहीं करता, तब तक हमारी राय में बातचीत दोबारा शुरू होने की कोई संभावना नहीं है.विदेश मंत्री ने बताया कि होर्मुज स्&amp;zwj;ट्रेट में एक नए समुद्री मार्ग को तय करने के मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ नए समुद्री मार्गों पर काम कर रहे हैं, जो मौजूदा पुराने मार्गों की जगह लेंगे.अराघची ने कहा, इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्&amp;zwj;ट्रेट को खोल दिया जाएगा. इस संबंध में एक समझौता हो सकता है, लेकिन होर्मुज स्&amp;zwj;ट्रेट को खोले जाने का फैसला कई शर्तों पर निर्भर करेगा.ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा था कि तेहरान एमओयू के तहत शांति के रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा, बशर्ते वॉशिंगटन भरोसे का माहौल बनाने में मदद करे.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेजेशकियन ने कहा कि ईरान एमओयू में शामिल प्रावधानों के आधार पर &#039;शांति के रास्ते&#039; पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, समझौते तक पहुंचने के लिए यह सबसे अच्छा समय है, क्योंकि देश में एकता, ताकत और आपसी सहयोग मौजूद है.उन्होंने कहा, हम एमओयू को आधार बनाकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि अमेरिका उस अविश्वास के माहौल को खत्म करे जिसे उसने पैदा किया है, और उसकी जगह भरोसे का माहौल बने. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कौन हैं जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा? पंजाब&amp;हरियाणा HC के चीफ जस्टिस के लिए हुई सिफारिश</title>
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        <description><![CDATA[ सीजेआई (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) सूर्याकांत की अध्यक्षता में कॉलेजियम ने फैसला लेते हुए चार जजों की बतौर हाईकोर्ट चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्ति करने की सिफारिश की है. इसमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को उसी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है. कॉलेजियम एक व्यवस्था है, जिसकी सिफारिश पर भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जज से लेकर चीफ जस्टिस की नियुक्ति की जाती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
(ऐसे में हम उनकी लाइफ से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे हैं. यह सिफारिश 6 अगस्त को हुई कॉलेजियम की मीटिंग में की गई थी.)&amp;nbsp;
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस कॉलेज से की है एलएलबी की पढ़ाई
इलाहबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था. उन्होंने दिल्ली स्थित किरोड़ीमल कॉलेज से बीए ऑनर्स इकोनॉमिक्स और दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है.
इन स्ट्रेटचरी बॉडी में भी निभा चुके अहम जिम्मेदारी
8 मई 1993 को वकील के तौर पर वह एनरोल हुए थे. इस दौरान उन्होंने सिविल, संवैधानिक और सर्विस से जुड़े मामलों में वकालत की. इसके अलावा उन्होंने नोएडा, गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी, इलाहाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी, IFFCO, IOC, और यूपी पावर कॉर्पोरेशन जैसे कई वैधानिक निकायों (Statutory Bodies) के लिए बहस करने वाले वकील यानी आर्ग्युइंग काउंसिल के तौर पर काम किया.&amp;nbsp;
राज्य सरकार में सीनियर काउंसिल रह चुके अश्वनी कुमार मिश्रा
इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से महत्वपूर्ण मामलों में सीनियर काउंसिल के तौर पर भी काम किया. साल 2013 में सीनियर एडवोकेट के तौर पर नामित हुए. 3 फरवरी 2014 को एडिशनल जज बने थे.
साल 2016 में परमानेंट जज के तौर पर ली शपथ
1 फरवरी 2016 को परमानेंट जज के तौर पर शपथ ली. 21 जुलाई 2025 को पंजाब और हरियाणा, चंडीगढ़ हाईकोर्ट में ट्रांसफर हुआ. फिलहाल वह इस हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कौन, हैं, जस्टिस, अश्वनी, कुमार, मिश्रा, पंजाब-हरियाणा, के, चीफ, जस्टिस, के, लिए, हुई, सिफारिश</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;FCRA संशोधन बिल को...&amp;apos;, मिजोरम CM ने सरकार से की ये मांग</title>
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        <description><![CDATA[ मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने रविवार (9 अगस्त) को अहम फैसला लिया है. यह फैसला केंद्र से प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने से जुड़ा है. राज्य सरकार ने जेपीसी के पास भेजने का आग्रह किया है. इससे कानून को अंतिम रूप देने से पहले विचार विमर्श किया जा सके.&amp;nbsp;
इस संशोधन में एक पावरफुल अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है. यह उन नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन की प्रॉपर्टी को जब्त और बैन कर सकेगी, जिनका लायसेंस रद्द हो गया. प्रस्तावित संशोधनों ने ईसाई बहुल मिजोरम की तरफ ध्यान आकर्षित किया है. यहां चर्चों और नागरिक समाज संगठनों ने उन प्रावधानों पर चिंता जताई है, जो उनके अनुसार विदेश अंशदान प्राप्त करने वाल ग्रपों को प्रभावित कर सकते है.
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने की गृहमंत्री शाह से मुलाकात
मुख्यमंत्री ने कहा, &#039;हाल ही में नई दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह जी से मुलाकात हुई. उनके साथ राज्य भर के विभिन्न ईसाई संप्रदायों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे. इनमें मिजोरम कोहरन हुइतुते समिति (MKHC) और काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम (CCM) के नेता भी थे.&#039;&amp;nbsp;
उन्होंने बताया, &#039;बैठक के दौरान डेलीगेशन ने प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधानों के बारे में अपनी चिंताएं और सुझाव शाह के सामने रखे. केंद्रीय गृह मंत्रालय को ज्ञापन भी सौंपा.&#039;&amp;nbsp;लालदुहोमा ने कहा, &#039;विधेयक को जेपीसी के पास भेजने से देश के विभिन्न हिस्सों और विभिन्न हितधारकों की चिंताओं और सुझावों की जांच अंतिम रूप से पारित होने से पहले की जा सकेगी.&#039;
मुख्यमंत्री ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, &#039;लोकतांत्रिक परामर्श की भावना के साथ, हम केंद्र सरकार से सम्मानपूर्वक अपील करते हैं. वह विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजे.&#039;&amp;nbsp;इसके अलावा उन्होंने कहा कि इससे कानून को अंतिम रूप देने से पहले देश के कई हिस्सों और हितधारकों की चिंताओं और सुझावों की सावधानीपूर्वक जांच और विचार करने का अवसर मिलेगा.&amp;nbsp; इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र समावेशी, पारदर्शी और परामर्श आधारित नीति निर्माण के व्यापक हित में इस अनुरोध पर विचार करेगा.&amp;nbsp;
12 अगस्त को संशोधन विधेयक पर होगी सदन में चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा, &#039;विवादित संशोधन विधेयक पर 12 अगस्त को संसद में चर्चा और पारित करने के लिए विचार किया जाए. हालांकि, यह पिछली तारीख से लागू नहीं होगा. इससे पहले राज्य में कांग्रेस सरकार से विधानसभा सत्र बुलाने का आग्रह कर चुकी है. इसके अलावा प्रस्तावित बिल के विरोध में 11 अगस्त को आइजोल में मार्च भी निकाला जाएगा.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>JNU में उमर खालिद की किताब पर चर्चा को लेकर विवाद, प्रशासन और JNUSU आमने&amp;सामने</title>
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        <description><![CDATA[ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पूर्व छात्र उमर खालिद की किताब &amp;ldquo;Fractured Communities: Adivasi Histories and the Politics of Power&amp;rdquo; पर प्रस्तावित बुक डिस्कशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए की गई ऑडिटोरियम बुकिंग रद्द कर दी है. हालांकि, इसके बाद JNU छात्रसंघ (JNUSU) ने घोषणा की है कि कार्यक्रम तय समय पर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS)-2 के बाहर खुले में आयोजित किया जाएगा, क्योंकि कार्यक्रम करने के लिए ऑडिटोरियम नहीं मिलेगा.
सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) के ऑडिटोरियम की बुकिंग के लिए 10 अगस्त, 2026 को दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक का समय मांगा गया था. आवेदन में कार्यक्रम का उद्देश्य &amp;ldquo;Public Talk for Adivasi Diwas (Book Discussion)&amp;rdquo; बताया गया था. आवेदन में यह भी बताया था कि यह एक आधिकारिक कार्यक्रम है और इसके लिए SSS-I ऑडिटोरियम की मांग की गई थी. आवेदन पर संबंधित फैकल्टी के सदस्य, विभागाध्यक्ष और दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों के हस्ताक्षर (Official approval) भी दर्ज हैं, लेकिन 9 अगस्त, 2026 को जारी स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के संयुक्त रजिस्ट्रार के पत्र में इस बुकिंग को रद्द करने की जानकारी दी गई.
विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर जारी किया पत्र
पत्र में कहा गया है कि कार्यक्रम के बारे में सभी तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया था, इसलिए SSS-I ऑडिटोरियम की बुकिंग निरस्त की जाती है. पत्र में यह भी कहा है कि यह निर्णय डीन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की स्वीकृति से लिया गया है. इसकी कॉपी SSS काउंसलर, मुख्य सुरक्षा अधिकारी और संबंधित सुरक्षा कर्मियों को भी भेजी गई है.&amp;nbsp;

JNU is a democratic and decentralised institution. The permission was given by Dean, SSS who has taken action as well in cancelling the event.The booking of the auditorium SSS-1 stands cancelled because of non-disclosure of the full facts about the program which is going to&amp;hellip; pic.twitter.com/SsEsMO3muT
&amp;mdash; Jawaharlal Nehru University (JNU) (@JNU_official_50) August 9, 2026



कार्यक्रम में कौन-कौन वक्ता हो रहे शामिल?
इसी बीच JNUSU की ओर से जारी पोस्टर के अनुसार, यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाना था. पोस्टर में उमर खालिद की पुस्तक &amp;ldquo;Fractured Communities&amp;rdquo; पर चर्चा की घोषणा की गई है. कार्यक्रम में प्रो. प्रभु महापात्रा, प्रो. उमा चक्रवर्ती, शुद्धब्रत सेनगुप्ता, हर्ष मंदर और बनोज्योत्सना लाहिड़ी सहित कई वक्ताओं के शामिल होने की जानकारी है.
इस बीच JNU के आधिकारिक X हैंडल पर भी इस मामले से जुड़े दस्तावेज पोस्ट किए गए हैं. इसमें कार्यक्रम का पोस्टर, JNUSU की ओर से ऑडिटोरियम बुकिंग के लिए दिया गया आवेदन और बाद में प्रशासन द्वारा जारी बुकिंग रद्द करने का आदेश साझा किया गया है.&amp;nbsp;

बुकिंग रद्द होने के बाद JNUSU ने जारी किया बयान
बुकिंग रद्द होने के बाद JNUSU ने मीडिया को भेजे संदेश में कहा कि ऑडिटोरियम की बुकिंग भले ही रद्द कर दी गई हो, लेकिन कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया है. छात्रसंघ के मुताबिक, अब यह बुक डिस्कशन SSS-2 के बाहर खुले परिसर में तय समय पर आयोजित किया जाएगा. अब यह देखना होगा कि प्रशासन के फैसले और छात्रसंघ के ऐलान के बीच कार्यक्रम किस तरह आयोजित होता है और विश्वविद्यालय परिसर में इसे लेकर आगे क्या स्थिति बनती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः मोदी सरकार का बड़ा फैसला, ED चीफ राहुल नवीन का बढ़ाया कार्यकाल ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>JNU, में, उमर, खालिद, की, किताब, पर, चर्चा, को, लेकर, विवाद, प्रशासन, और, JNUSU, आमने-सामने</media:keywords>
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        <title>4 दिन, 3 बड़े बिल, मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते में चढ़ेगा सियासी पारा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/4-दिन-3-बड़े-बिल-मानसून-सत्र-के-आखिरी-हफ्ते-में-चढ़ेगा-सियासी-पारा</link>
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        <description><![CDATA[ मानसून सत्र खत्म होने में चार दिन बचे हैं. ऐसे में संसद में चल रही रुकावट के बीच वीमेन रिजर्वेशन, डिलिमिटेशन और फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) जैसे बड़े बिलों का भविष्य अधर में है. इनमें से कोई भी बिल सोमवार (10 अगस्त) को लोकसभा की कामकाज लिस्ट में नहीं था.&amp;nbsp;
सरकार की कोशिशों के बाद कुछ विपक्षी पार्टियों ने महिला कोटा और डिलिमिटेशन बिल पर अपना रुख नरम करने के संकेत दिए हैं. कांग्रेस और उसके ज्यादातर सहयोगी दलों ने इन कानूनों और FCRA अमेंडमेंट बिल का विरोध कर रही है.&amp;nbsp;
संविधान अमेंडमेंट बिल, इसमें 2029 में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत रिजर्वेशन और सदन की सीटें बढ़ाने के लिए लोकसभा इलाकों को फिर से बनाने का प्रस्ताव है. अप्रैल में दो तिहाई बहुमत हासिल करने में नाकाम रहने के &amp;nbsp;कारण गिर गया था.&amp;nbsp;
FCRA का क्यों विरोध कर रही कांग्रेस?&amp;nbsp;
FCRA संशोधन बिल 2026 की बात करें, तो इस साल 25 मार्च को यह लोकसभा में पेश किया गया था. इस पर चर्चा और पास होना है. AICC के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार को लगता है कि वे इन दो या तीन दिनों में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल ला सकते हैं, तो उन्हें अपनी यह इच्छा अपने तक ही रखना चाहिए.&amp;nbsp;
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और एनजीओ को टारगेट करता है. उन्होंने कहा कि विपक्ष इसे पास नहीं होने देगा. अगर अमित शाह भी इस जनविरोधी बिल को पास करने आते हैं, तो इसमें कोई शक नहीं कि संसद में कड़े विरोध का सामना करना पड़े. यह बिल असंवैधानिक और जनविरोधी है.&amp;nbsp;
इसके अलावा पिछले हफ्ते सरकार ने महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन बिल पर विपक्ष से समर्थन हासिल करने की कोशिशें की. हालांकि, इस मामले में सफलता न के बराबर है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रुकावट खत्म करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की है.&amp;nbsp;
इसके अलावा रिजिजू ने उनसे फोन पर बात की. सूत्रों का कहना है कि जब रिजिजू ने महिला आरक्षण और डीलिजिमिटेशन बिल पास कराने में कांग्रेस से सपोर्ट मांगा तो विपक्ष के नेता ने प्रस्तावित कानूनों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दिया. दोनों नेताओं के बीच इस मसले पर सोशल मीडिया पर भी बहस देखने को मिली. इसमें महिला कोटा और डीलिमिटेशन बिल मुख्य रूप से चर्चा में थे.&amp;nbsp;
इधर एक तरफ सरकार विपक्ष के अन्य दलों जिनमें समाजवादी पार्टी और डीएमके समेत अन्य नेता इन बिलों पर उनका विचार जानने की कोशिश कर रहे हैं.&amp;nbsp;
वहीं अगर देखें तो डीएमके अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है. 22 लोकसभा सदस्यों के साथ यह पार्टी सदन में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है. राज्यसभा में 8 सदस्य डीएमके को दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनाते हैं. शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार को महिला आरक्षण बिल और डिलिमिटेशन बिल पर अपना सपोर्ट दिया है. पंजाब में इस पार्टी का सिर्फ एक एमपी है. पार्टी चीफ सुखबीर सिंह बादल ने पीएम मोदी से मुलाकात की है.&amp;nbsp;
तमिलनाडु सरकार ने परिसीमन के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव
शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की तरफ से बुलाई मीटिंग में राज्य के कुछ सांसदों की मौजूदगी वाली बैठक में परिसीमन के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया गया है. लोकसभा सीटों की संक्या 543 पर ही बनाए रखने की मांग की गई है. विपक्षी पार्टी डीएमके और एआईएडीएमके ने इस मीटिंग का विरोध किया. वहीं, एनसीपी (एसपी) के कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को परिसीमन बिल पर फिलहाल किसी तरह की टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने बस इतना कहा है कि जब यह बिल आएगा, तो हम अपने गठबंधन के सहयोगियों के साथ हर बिल पर चर्चा करेंगे.&amp;nbsp;
कांग्रेस ने जारी किया व्हिप
इससे पहले अप्रैल में 131वां संशोधन बिल को संसद में मंजूरी दिलाने के लिए 16 से 18 अप्रैल के बीच विशेष सत्र बुलाया गया था. लेकिन तब यह बिल गिर गया था. पीएम मोदी के कार्यकाल में पहली बार कोई बिल गिर गया था. फिलहाल 299 का एनडीए गठबंधन अभी भी 360 के आंकड़े से काफी पीछे है. शुक्रवार को कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी किया है. साथ ही राज्यसभा और लोकसभा में उपस्थित होने को कहा है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>एक टक्कर और &amp;apos;मौत का कुआँ&amp;apos;—एक दुखद हादसा।</title>
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        <description><![CDATA[ एक टक्कर और &#039;मौत का कुआँ&#039;&amp;mdash;एक दुखद हादसा। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>क्या चीफ इलेक्शन ऑफिसर को हटाया जा सकता है? संविधान में क्या है प्रावधान?</title>
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        <description><![CDATA[ CEC यानी चीफ इलेक्शन ऑफिसर को हटाना एक औपचारिक और अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया है, जिसे भारत के चुनाव आयोग (ECI) की स्वतंत्रता को कार्यपालिका के दखल से बचाने के लिए बनाया गया है. लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के लिए, CEC को भारत के सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही कार्यकाल की सुरक्षा दी गई है.
संवैधानिक प्रावधान
संविधान का अनुच्छेद 324(5)
इसमें कहा गया है कि संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन रहते हुए, चुनाव आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों की सेवा की शर्तें और कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा तय किए जाते हैं. CEC को केवल उसी तरीके से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है, और नियुक्ति के बाद उनकी सेवा की शर्तों में उनके नुकसान के लिए कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है. अन्य चुनाव आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को केवल CEC की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है.

इसके बाद, संसद ने &#039;मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023&#039; पारित किया, जिसमें इस्तीफे और हटाने की प्रक्रिया का प्रावधान है. यह संविधान में बताई गई प्रक्रिया का ही पालन करता है.
हटाने के आधार
संविधान सुप्रीम कोर्ट के जज (और इसी तरह CEC) को हटाने के आधारों को केवल दो विशिष्ट आरोपों तक सीमित करता है-साबित कदाचार या अक्षमता.
हालांकि राजनीतिक चर्चा में इसे आमतौर पर &quot;महाभियोग&quot; (impeachment) कहा जाता है, लेकिन संविधान तकनीकी रूप से महाभियोग शब्द को विशेष रूप से भारत के राष्ट्रपति (अनुच्छेद 61) के लिए ही सुरक्षित रखता है. जजों और CEC के लिए, औपचारिक संवैधानिक शब्द &#039;हटाना&#039;&amp;nbsp; है.
हटाने की प्रक्रियाCEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया के समान ही अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) होती है, जो &#039;जज जांच अधिनियम, 1968&#039; द्वारा शासित होती है.&amp;nbsp;
हटाने के प्रस्ताव की शुरुआत
हटाने के आधार बताते हुए हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है. इस पर लोकसभा में 100 सदस्यों या राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए. इसके बाद हस्ताक्षरित प्रस्ताव संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी (लोकसभा में स्पीकर या राज्यसभा में चेयरमैन) को सौंपा जाता है.
स्वीकृति और जांच
स्पीकर/चेयरमैन प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं. यदि स्वीकार कर लिया जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति (सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ) का गठन किया जाता है.
रिपोर्ट सौंपना
समिति जांच करती है, और CEC को अपना बचाव करने का अधिकार होता है. यदि समिति इस नतीजे पर पहुंचती है कि आरोप साबित नहीं हुए हैं, तो प्रस्ताव को रद्द कर दिया जाता है और प्रक्रिया समाप्त हो जाती है. अगर कमिटी CEC को गलत व्यवहार या काम करने में अक्षम पाती है, तो रिपोर्ट उस सदन में पेश की जाती है जहां प्रस्ताव सबसे पहले लाया गया था.
संसद में वोटिंग
प्रस्ताव को पास करने के लिए, संसद के दोनों सदनों में एक ही सत्र के दौरान &#039;विशेष बहुमत&#039; (Special Majority) का समर्थन ज़रूरी है. विशेष बहुमत का मतलब है सदन के कुल सदस्यों का बहुमत, और साथ ही मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का बहुमत.
हटाने के लिए राष्ट्रपति का आदेश
अगर प्रस्ताव दोनों सदनों में सफलतापूर्वक पास हो जाता है, तो भारत के राष्ट्रपति को एक औपचारिक अनुरोध भेजा जाता है. आखिर में, राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>पुडुचेरी पुलिस को अमित शाह ने सौंपा &amp;apos;प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर’, क्या है इसकी खासियत?</title>
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        <description><![CDATA[ पुडुचेरी पुलिस के लिए रविवार (9 अगस्त) &amp;nbsp;का दिन गौरव और सम्मान का रहा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुडुचेरी पुलिस को प्रेसिडेंट्स कलर प्रदान किया. इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि यह सम्मान किसी सरकारी आदेश या फाइल के जरिए नहीं मिला है, बल्कि पुडुचेरी पुलिस ने इसे अपनी मेहनत, शौर्य, सेवा और समर्पण के दम पर अर्जित किया है.
&amp;lsquo;अनुशासित बल के इतिहास का सबसे गौरवपूर्ण क्षण&amp;rsquo;
अमित शाह ने कहा कि प्रेसिडेंट्स कलर किसी भी अनुशासित बल के इतिहास का सबसे गौरवपूर्ण क्षण होता है. उन्होंने कहा कि पुडुचेरी पुलिस ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और समर्पित सेवा के जरिए इस प्रतिष्ठित सम्मान को हासिल किया है. गृह मंत्री ने पुलिस बल के सभी अधिकारियों और जवानों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की वर्षों की मेहनत, वीरता, सेवा और समर्पण इस सम्मान के पीछे है. यह पुडुचेरी पुलिस की कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता और उसकी सेवाओं की पहचान है.
&amp;lsquo;5 हजार से कम जवान, फिर भी निभा रहे बड़ी जिम्मेदारी&amp;rsquo;
गृह मंत्री ने कहा कि पुडुचेरी पुलिस बल में 5,000 से कम जवान हैं, लेकिन इसके बावजूद यह बल क्षेत्र की आंतरिक सुरक्षा और सम्मान की रक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहा है. उन्होंने कहा कि पुडुचेरी पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है. पुलिस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
पुलिस के साहस और सेवा की सराहना
अमित शाह ने कहा कि प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर पुडुचेरी पुलिस के लिए सिर्फ एक ध्वज नहीं, बल्कि उसके कर्तव्य, साहस और सेवा भावना का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि पुलिस बल ने जिस समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं, यह सम्मान उसी का परिणाम है. गृह मंत्री ने पुडुचेरी पुलिस के अधिकारियों और जवानों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ देश और क्षेत्र की सेवा करने के लिए प्रेरित किया.
क्या है &amp;lsquo;प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर&amp;rsquo;?
&amp;lsquo;प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर&amp;rsquo; देश के किसी पुलिस बल को उसकी उत्कृष्ट सेवा, वीरता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है. यह किसी पुलिस बल की वर्षों की समर्पित सेवा और उपलब्धियों को मिली राष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक माना जाता है. इस सम्मान के तहत संबंधित पुलिस बल को एक विशेष ध्वज यानी &amp;lsquo;कलर&amp;rsquo; प्रदान किया जाता है. यह ध्वज उस बल के गौरव, सेवा और उपलब्धियों का प्रतीक होता है और महत्वपूर्ण औपचारिक अवसरों पर इसे प्रदर्शित किया जाता है.
पुलिस बल के लिए क्यों है बड़ा सम्मान?
किसी पुलिस बल को प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर मिलना उसकी पेशेवर क्षमता, साहस, अनुशासन और जनता की सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को मिली बड़ी राष्ट्रीय मान्यता है. पुलिस संगठनों के लिए इसे प्रमुख संस्थागत सम्मानों में शामिल किया जाता है.
&amp;lsquo;सम्मान आगे भी प्रेरणा देगा&amp;rsquo;
अमित शाह ने उम्मीद जताई कि प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर का यह सम्मान पुडुचेरी पुलिस के अधिकारियों और जवानों को भविष्य में और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करेगा. उन्होंने कहा कि पुलिस बल की मेहनत, बहादुरी और सेवा भावना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है. प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर मिलने के साथ पुडुचेरी पुलिस के लिए यह उपलब्धि उसके इतिहास में एक महत्वपूर्ण सम्मान के रूप में दर्ज हो गई है.
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;US उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने PM मोदी को किया फोन, रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर जोर ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>टर्बुलेंस वाली फ्लाइट के पायलट का हुआ डोप टेस्ट, रिपोर्ट से क्या पता चला?</title>
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        <description><![CDATA[ एअर इंडिया की फ्लाइट में हाल ही में हुए तेज टर्बुलेंस के बाद अब एक नया एंगल सामने आया है. 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की A320 फ्लाइट AI2379 को तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था. इस दौरान विमान अचानक से करीब 300 फीट नीचे आ गया, जिसमें कई यात्री और क्रू मेंबर घायल हुए थे. इस मामले को लेकर कैप्टन का ड्रग टेस्ट कराया गया है.
ऐसे में अब इस मामले की जांच DGCA कर रही है. सूत्रों के मुताबिक सामने आया है कि टर्बुलेंस के बाद दिल्ली पहुंचने पर पायलटों का ड्रग/डोप टेस्ट कराया गया. कैप्टन के टेस्ट में कथित तौर पर psychoactive substance मिला हो सकता है. हालांकि एअर इंडिया ने अभी इस रिजल्ट की पुष्टि नहीं की है. एयरलाइन का कहना है कि टेस्ट हुआ था लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी उन्हें नहीं मिली है.

इससे साफ है कि अब जांच सिर्फ इस चीज की नहीं हो रही है कि टर्बुलेंस के दौरान कॉकपिट से विमान को कैसे संभाला गया बल्कि DGCA यह भी देख रही है कि घटना मौसम की वजह से हुई या कोई और कारण था. विमान पर इसका क्या असर पड़ा और ऐसी स्थिति में दिल्ली तक उड़ान जारी रखना सही फैसला था या नहीं.
टेस्ट रिपोर्ट का इंतजारबता दें कि पायलटों के लिए उड़ान के दौरान psychoactive substance के प्रभाव में होना गंभीर सुरक्षा मामला है. अंतरराष्ट्रीय विमानन नियम भी ऐसे पायलट को उड़ान भरने से रोकते हैं. हालांकि अब इस मामले में टेस्ट रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सामने आने और जांच पूरी होने का इंतजार है.
विमान इतनी तेजी से नीचे क्यों आया?&amp;nbsp;अब तक रेगुलेटर और मंत्रालय की ओर से इस बात पर पूरी तरह चुप्पी है कि इसका जांच पर क्या असर पड़ेगा या फिर यह खबर सही भी है या नहीं. अब सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर विमान इतनी तेजी से नीचे क्यों आया? जिससे यात्री घायल हुए. क्या पायलट के नशे में होने का कोई रोल था? या फिर टर्बुलेंस की स्थिति को संभालने में कोई चूक हुई?
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पुडुचेरी पुलिस को अमित शाह ने सौंपा &#039;प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर&amp;rsquo;, क्या है इसकी खासियत? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>PM मोदी से मिलेंगे NCP (SP) सांसद, परिसीमन पर बनेगी बात?</title>
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        <description><![CDATA[ संसद के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में प्रवेश के साथ ही परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने और परिसीमन के साथ महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार की कोशिशों के बीच एनसीपी (शरद पवार) गुट के सांसदों के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक 10 अगस्त को हो सकती है. सांसदों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मुलाकात के लिए समय मांगा है.
बताया जा रहा है कि इस बैठक में सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रधानमंत्री के सामने रखेंगे. हालांकि, सरकार की प्राथमिकताओं में परिसीमन प्रक्रिया भी अहम मुद्दा हो सकती है. बैठक ऐसे समय हो रही है, जब संसद के मानसून सत्र का अंतिम सप्ताह शुरू होने वाला है.
परिसीमन पर सुप्रिया सुले के रुख से बढ़ी चर्चा
एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले पहले ही परिसीमन को लेकर पार्टी के रुख के संकेत दे चुकी हैं. उन्होंने कहा था कि अगर प्रस्तावित बदलावों के तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में समान रूप से बढ़ोतरी सुनिश्चित की जाती है, तो पार्टी परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करने पर विचार कर सकती है.
सुले ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यदि विधेयक में देशभर में लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान किया जाता है, तो एनसीपी (एसपी) इस प्रस्ताव का समर्थन करने पर विचार कर सकती है. उन्होंने यह भी बताया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा हुई थी.
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर सरकार की नजर
केंद्र सरकार की प्राथमिकता में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक दोनों शामिल हैं. परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण का रास्ता साफ होने के बाद महिला आरक्षण के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है. संसद में इन मुद्दों पर चर्चा को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार गतिरोध बना हुआ है. ऐसे में अलग-अलग दलों के सांसदों से बातचीत के जरिए सहमति बनाने की कोशिश भी तेज हुई है.
PM मोदी बोले- NDA के पास पर्याप्त संख्या बल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया है कि एनडीए के पास महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा में आवश्यक संख्या बल मौजूद है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार को अब तक करीब 366 सांसदों का समर्थन प्राप्त हो चुका है. हालांकि, संसद में जारी गतिरोध के कारण अगर मौजूदा मानसून सत्र में दोनों विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाती है, तो केंद्र सरकार इस महीने के अंत में संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर विचार कर सकती है.
10 अगस्त को हो सकती है PM और NCP (SP) सांसदों की मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) के सांसदों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मुलाकात के लिए समय मांगा है और बैठक 10 अगस्त को होने की संभावना है. इस दौरान क्षेत्रीय समस्याओं के साथ-साथ परिसीमन प्रक्रिया और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.
बैठक से पहले सुप्रिया सुले के परिसीमन पर दिए गए संकेतों ने राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के बाद एनसीपी (एसपी) का परिसीमन विधेयक को लेकर रुख किस दिशा में जाता है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>NEET पेपर लीक के बाद NTA का एक्शन, उठाया ये बड़ा कदम</title>
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        <description><![CDATA[ NEET-UG समेत देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पिछले कुछ वर्षों में लगातार सवाल उठे हैं. खासकर NEET पेपर लीक के मामलों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख को गंभीर झटका पहुंचाया. इसी पृष्ठभूमि में NTA ने अब अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.&amp;nbsp;
एजेंसी ने तीन सीनियर पदों - जनरल मैनेजर (विजिलेंस, इन्वेस्टिगेशन एंड फॉरेंसिक), जनरल मैनेजर (इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी/CISO) और जनरल मैनेरेज ( टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन) के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इन तीनों पदों को देखें तो साफ संकेत मिलता है कि NTA अब सिर्फ परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नहीं रहना चाहती, बल्कि परीक्षा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और पूरे परीक्षा तंत्र की निगरानी के लिए एक प्रोफेशनल और संस्थागत व्यवस्था खड़ी करना चाहती है.
GM-विजिलेंस का क्या काम?
सबसे जरूरी पद जनरल मैनेजर,विजिलेंस, इन्वेस्टिगेशन एंड फॉरेंसिक का है. इस अधिकारी का काम केवल पेपर लीक होने के बाद जांच करना नहीं होगा, बल्कि परीक्षा से पहले ही जोखिम का आकलन करना, संदिग्ध नेटवर्क पर नजर रखना, कोचिंग माफिया और संगठित नकल गैंग की पहचान करना, डिजिटल फॉरेंसिक के जरिए सबूत जुटाना और CBI, IB, ED, साइबर सेल और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों के साथ तालमेल बनाना होगा. यानी NTA पहली बार अपने भीतर एक समर्पित जांच और इंटेलिजेंस तंत्र विकसित करना चाहती है.
दूसरा अहम पद चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर का है. पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया तेजी से डिजिटल हुई है. ऐसे में केवल प्रश्नपत्र की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सर्वर, डेटा, उम्मीदवारों की जानकारी और आईटी सिस्टम को साइबर हमलों से बचाना भी उतना ही जरूरी हो गया है. CISO का दायित्व 24&amp;times;7 साइबर निगरानी, CERT-In और DPDP Act का अच्छे से काम करना, थर्ड पार्टी टेक्नोलॉजी कंपनियों की सुरक्षा जांच और पूरे सिस्टम की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा.
तीसरा पद GM-टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन का है, जिसका फोकस परीक्षा केंद्रों की क्वॉलिटी, सिक्योरिटी और संचालन पर रहेगा. परीक्षा केंद्रों को बढ़ाना होगा और इसे छोटे शहरों और जिलों तक करना होगा , केंद्रों की सुविधाओं की निगरानी भी इस पद के लिए ज़रूरी काम होगा. इसका उद्देश्य परीक्षा के दिन होने वाली अव्यवस्था और संचालन संबंधी कमियों को कम करना भी है.
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क्या इससे सच में फर्क पड़ेगा?
इन नियुक्तियों से निश्चित रूप से NTA की संस्थागत क्षमता मजबूत हो सकती है. अब तक एजेंसी पर सबसे बड़ा आरोप यही रहा कि परीक्षा सुरक्षा के लिए उसके पास अपना मजबूत जांच तंत्र या साइबर विशेषज्ञता नहीं थी और घटनाओं के बाद उसे बाहरी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था. ऐसे में अगर इन पदों पर अनुभवी अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे और उन्हें पर्याप्त अधिकार, संसाधन और स्वतंत्र निर्णय लेने की इजाज़त मिलती है, तो परीक्षा सुरक्षा पहले की तुलना में काफी बेहतर हो सकती है.
हालांकि, केवल नई भर्तियां अपने आप समाधान नहीं हैं. असली परीक्षा इनके प्रभावी ढंग से लागू करना होगी. अगर प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल सिस्टम, परीक्षा केंद्रों और जांच प्रक्रिया तक हर स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, तो केवल वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति से पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरी तरह बंद होने की गारंटी नहीं दी जा सकती.
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;भारत को विश्वगुरु बनाना है तो...,&amp;apos; मोहन भागवत का बड़ा बयान</title>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि देश को असल मायने में &amp;lsquo;विश्वगुरु&amp;rsquo; बनाने के लिए वंचित और हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा में लाना जरूरी है, महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के खामगांव में पारधी समुदाय के आवासीय विद्यालय में तीन खेल मैदानों का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस समुदाय को आज हम &#039;भटके-विमुक्त&#039; (घुमंतू और गैर अधिसूचित जनजाति) कहते हैं, वह कभी ज्ञान देने वाला समुदाय हुआ करता था.
वंचित वर्ग को मुख्यधारा में लाना होगा: भागवत
आरएसएस प्रमुख ने कहा, &amp;lsquo;भटके और विमुक्त समुदाय का हर व्यक्ति हमारा अपना है इसलिए यह मेरा कर्तव्य है कि मैं इस दृष्टिकोण के साथ इन लोगों के लिए कुछ करूं, ताकि उनके जीवन में सुधार आ सके.&amp;rsquo; उन्होंने कहा, &#039;कभी ये समुदाय ज्ञान बांटने का काम करते थे वे निस्वार्थ भाव से अपना ज्ञान बांटने के लिए बाहर जाते थे, लेकिन समय के साथ वे हाशिए पर चले गए ब्रिटिश शासन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण पूरे पारधी समुदाय को अपराधी जनजाति घोषित कर दिया गया, जिससे वे विकास की दौड़ में काफी पीछे रह गए.&amp;rsquo; आरएसएस प्रमुख ने कहा, &amp;lsquo;अगर हमें भारत को विश्वगुरु बनाना है तो समाज के इन वंचित वर्ग को मुख्यधारा में लाना होगा.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
समाज को एकजुट होकर खड़ा होना होगा: भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज को एकजुट होकर खड़ा होना होगा, जिसमें हर व्यक्ति समान रूप से सक्षम और मजबूत हो. उन्होंने कहा, &#039;हर परिवार और हर व्यक्ति को शिक्षा और जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी होनी चाहिए इसके लिए समस्त समाज को केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय मिलकर काम करना चाहिए.&#039;
RSS चीफ ने कहा कि भारतीय समाज कभी पूरी तरह संगठित था, लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों की गुलामी के कारण उसमें बिखराव आ गया. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;इसके परिणामस्वरूप समाज में वंचित वर्गों की संख्या बढ़ गई. इसके बावजूद इन समुदायों ने कभी अधीनता स्वीकार नहीं की और वे लगातार स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे. संघ कई सालों से पारधी समुदाय के विकास के लिए काम कर रहा है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अंबादास दानवे भी संघ के इस कार्यक्रम में मौजूद थे. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;रेंट बॉयफ्रेंड&amp;apos; ऑफर से सावधान, स्कैमर्स का डेटिंग जाल कर देगा कंगाल</title>
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        <description><![CDATA[ &#039;क्या आप अकेलेपन से परेशान हैं? क्या आप चाहती हैं कि कोई हैंडसम लड़का आपके साथ कॉफी पिए या सिनेमा जाए? वो भी 50 परसेंट ऑफर के साथ!&#039; अगर आपके सोशल मीडिया पर इस तरह के एड्स आ रहे हैं तो सावधान हो जाइए. अलग-अलग ऑफर के नाम पर रंग-बिरंगे दिखने वाले इन पोस्टरों के पीछे एक बड़ा साइबर फ्रॉड छिपा है. यह एक नया डेटिंग जाल है जिसे साइबर बदमाश फेंक रहे हैं, खासकर लड़कियों और महिलाओं को टारगेट कर रहे हैं.
कमिश्नर हैदराबाद सिटी पुलिस सज्जनार ने युवतियों को चेतावनी देते हुए ऑनलाइन स्कैमर्स से सावधान रहने की सलाह देती है. खास तौर पर &#039;रेंट ए बॉयफ्रेंड&#039; जैसे झांसे में न आने की सलाह दी. &#039;1st August Special - 50% OFF&#039;, &#039;Rent Boyfriend - Your Personal Companion&#039; जैसे अलग-अलग डिस्काउंट पैकेज वाले पोस्टर Instagram, Telegram और Facebook प्लेटफॉर्म पर प्रमोट किए जा रहे हैं.
आकर्षक लड़कों की फोटो दिखाकर, स्कैमर आपके लिए एक बड़ी प्राइस लिस्ट लाते हैं, जिसमें एक घंटे की कॉफी मीटिंग के लिए 499 रुपये, मूवी डेट के लिए 1,249 रुपये, शॉपिंग साथी के लिए 1,499, इवेंट या शादियों में लोगों के साथ जाने के लिए 1,999 और 10 घंटे के पूरे दिन के पैकेज के लिए 4,499 लिखा होता है. वे आपसे बुकिंग के लिए उन्हें डायरेक्ट मैसेज करने के लिए कहते हैं, यह भरोसा दिलाते हुए कि वे किसी को पता चले बिना प्राइवेसी और सुरक्षा बनाए रखेंगे और यह कोई गैर-कानूनी धंधा नहीं है.
कैसे करते फ्रॉड?
वे AI से बनाई गई या इंटरनेट से इकट्ठा की गई सुंदर लड़कों की फोटो को प्रोफाइल पिक्चर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं और उन लड़कियों से बातचीत शुरू करते हैं जो उन्हें मीठी-मीठी बातें मैसेज करती हैं. वे बुकिंग कन्फर्मेशन, सिक्योरिटी डिपॉज़िट और एडवांस रकम के नाम पर डिजिटल वॉलेट और QR कोड के ज़रिए हज़ारों रुपये इकट्ठा करते हैं, और फिर अकाउंट ब्लॉक कर देते हैं.
अगर आप ऑनलाइन बातचीत पर भरोसा करते हैं और सीधे अजनबियों से मिलने जाते हैं तो वे आपको आसानी से फंसा सकते हैं. प्यार के नाम पर झूठ बोलने और धोखा देने के बहुत चांस होते हैं. चैटिंग के दौरान चालाकी से इकट्ठा किए गए फ़ोन नंबर और पर्सनल फोटो के आधार पर ब्लैकमेलिंग की संभावना है. हैदराबाद साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने इस तरह के धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों पर ध्यान दिया है. इनके लिए जिम्मेदार लोगों की तेजी से जांच की जाएगी और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.
माता-पिता को भी सतर्क रहने की जरूरत
इस मामले में लड़कियों के साथ-साथ उनके माता-पिता को भी बहुत सतर्क रहना चाहिए. उनके बच्चे सोशल मीडिया पर किस तरह के पोस्ट देख रहे हैं? वे किससे बात कर रहे हैं? जब वे बाहर जाते हैं तो किससे मिल रहे हैं? माता-पिता को इन मामलों पर लगातार नजर रखनी चाहिए. अगर स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर सही निगरानी नहीं होगी तो मासूम बच्चों के स्कैमर्स के जाल में फंसने का खतरा रहता है.
&#039;शशि थरूर को कोई शक है तो...&#039;, पवन खेड़ा ने बयान पर दिया ऐसा जवाब
संदिग्ध पोस्ट दिखे तो यहां करें शिकायत
स्कैमर्स के लुभावने डिस्काउंट ऑफर के झांसे में न आएं. अजनबियों से चैट या मिलें नहीं, और एक भी रुपया एडवांस न दें. अगर कोई ऐसे साइबरबुलीज का शिकार होता है, या कोई संदिग्ध पोस्ट देखता है तो घबराएं नहीं और तुरंत साइबरक्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें.
&#039;भारत को विश्वगुरु बनाना है तो...,&#039; मोहन भागवत का बड़ा बयान ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;राहुल गांधी को प्रयागराज की जगह रांची जाना था&amp;apos;, किरेन रिजिजू का तंज</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रयागराज में हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने निशाना साधा है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी जी को प्रयागराज की जगह रांची जाना चाहिए था. छात्रों की गूंज कार्यक्रम में कांग्रेस सासंद राहुल गांधी रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, कथित पेपर लीक और रजिस्ट्रेशन पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या रोजगार की है और पढ़ाई पर पैसा खर्च करने के बावजूद नौकरी के अवसर लगातार सीमित होते जा रहे हैं.
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर निशाना
राहुल गांधी ने कहा कि विश्वविद्यालयों से लेकर नौकरशाही और अन्य संस्थानों तक आरएसएस के लोगों को बैठाया जा रहा है. उन्होंने कहा, भारत में करीब 40 करोड़ युवा हैं और यही देश की सबसे बड़ी ताकत हैं. जब वह युवाओं को भारत की शक्ति और शान कहते हैं तो उनका आशय केवल कार्यक्रम में मौजूद भीड़ से नहीं, बल्कि देश के युवाओं से होता है. युवा पढ़ाई करते हैं, परिवार पैसा खर्च करता है और डिग्री हासिल होती है, लेकिन इसके बाद रोजगार की गारंटी नहीं मिलती.&#039; उन्होंने दावा किया कि एक हजार युवाओं में केवल 12 युवाओं को स्थायी नौकरी मिलती है.
रांची के छात्रों से राहुल गांधी ने की बात
रांची में JPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. बीजेपी का कहना है कि झारखंड में कांग्रेस के गठबंधन की सरकार है इसलिए राहुल गांधी वहां जाने से बच रहे हैं. हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आंदोलन कर रहे छात्रों से फोन पर बात किया. प्रदर्शनकारियों में शामिल एक छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि गुरुवार (6 अगस्त 2026) की शाम को फोन पर हुई बातचीत में राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों की लिस्ट भेजने को कहा. छात्र नेता ने दावा किया कि राहुल गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे.
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र 29 जुलाई से रांची में आंदोलन कर रहे हैं. छात्र 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच कराने तथा परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं. आंदोलनकारी छात्र मामले की सीबीआई और ईडी से जांच की मांग भी कर रहे हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हल्द्वानी में खरगे की हुंकार, 2027 चुनाव से पहले कांग्रेस ने दे दिया बड़ा मैसेज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हल्द्वानी-में-खरगे-की-हुंकार-2027-चुनाव-से-पहले-कांग्रेस-ने-दे-दिया-बड़ा-मैसेज</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली को उत्तराखंड की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है. रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ने कुमाऊं में संगठन और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में लाने का संदेश दिया. पार्टी पहले ही इस सभा को अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम बता चुकी थी.&amp;nbsp;
युवाओं के मुद्दे पर कांग्रेस का फोकस
खरगे की हल्द्वानी रैली के लिए कांग्रेस ने जिन मुद्दों को प्रमुखता दी, उनमें बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के मुद्दे प्रमुख हैं. पार्टी का प्रयास इन मुद्दों के जरिए खासकर युवा मतदाताओं के बीच सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का है.&amp;nbsp;
कांग्रेस की रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2027 के विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का समय बचा है. पार्टी कुमाऊं की 29 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए इस रैली को बड़ा राजनीतिक संदेश मान रही है.&amp;nbsp;
धामी सरकार को घेरने की जमीन पहले से तैयार
खरगे के दौरे से पहले कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व पेपर लीक और अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर लगातार हमलावर रहा है. पार्टी ने मंदिरों में चढ़ावे से जुड़े विवाद को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति तैयार की थी.&amp;nbsp;कांग्रेस नेताओं का आरोप रहा है कि प्रदेश में युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है. पेपर लीक को लेकर पार्टी पहले भी सरकार पर गंभीर आरोप लगा चुकी है.&amp;nbsp;
2027 की लड़ाई का पहला बड़ा संदेश?
हल्द्वानी की सभा को सिर्फ एक राजनीतिक जनसभा के तौर पर देखना मुश्किल है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में सक्रिय हो चुकी हैं. कांग्रेस जहां रोजगार, पेपर लीक और छात्र मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा विकास, सुशासन और युवाओं से सीधे संवाद को अपनी रणनीति का हिस्सा बना रही है.&amp;nbsp;
इससे पहले कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि खरगे की सभा में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचेंगे. उदाहरण के लिए काशीपुर से 2,000 कार्यकर्ताओं को हल्द्वानी ले जाने की तैयारी की बात सामने आई थी, लेकिन मुझे पूरे कार्यक्रम में मौजूद लोगों की कोई आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित संख्या नहीं मिली है. इसलिए इसे सभा की कुल भीड़ का आंकड़ा मानना सही नहीं होगा.&amp;nbsp;
कांग्रेस के लिए कितनी अहम है कुमाऊं की जमीन?
खरगे की हल्द्वानी रैली को सिर्फ एक जनसभा के तौर पर देखना कांग्रेस की रणनीति को अधूरा समझना होगा. कुमाऊं मंडल में विधानसभा की 29 सीटें हैं, ऐसे में 2027 के चुनावी गणित में यह पूरा क्षेत्र बेहद अहम है. कांग्रेस ने हल्द्वानी को चुनकर सीधे कुमाऊं के मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की है.&amp;nbsp;
हल्द्वानी लंबे समय से कुमाऊं की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है. ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव करीब हैं, खरगे की यहां मौजूदगी का मकसद संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में चुनावी ऊर्जा भरने और भाजपा के सामने कांग्रेस की राजनीतिक चुनौती को मजबूत तरीके से पेश करने के तौर पर देखा जा रहा है.
&#039;राहुल गांधी को प्रयागराज की जगह रांची जाना था&#039;, किरेन रिजिजू का तंज
कांग्रेस का कुमाऊं से चुनावी शंखनाद
कांग्रेस के लिए चुनौती सिर्फ सरकार को घेरने की नहीं, बल्कि 2022 के बाद कुमाऊं में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की भी है. बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, युवाओं के मुद्दे और स्थानीय सवालों को उठाकर पार्टी 2027 के लिए अपना नैरेटिव तैयार करने की कोशिश कर रही है. इस लिहाज से हल्द्वानी की रैली कांग्रेस का एक तरह से कुमाऊं से चुनावी शंखनाद भी मानी जा सकती है.&amp;nbsp;
खरगे की हल्द्वानी रैली का बड़ा संदेश
खरगे की हल्द्वानी रैली का सबसे बड़ा संदेश यही है कि कांग्रेस ने 2027 के लिए चुनावी मैदान तैयार करना शुरू कर दिया है. अब देखना होगा कि बेरोजगारी, पेपर लीक और छात्र मुद्दों पर बनाया गया यह नैरेटिव जमीन पर कितना असर डालता है और क्या कांग्रेस इसे भाजपा सरकार के खिलाफ वास्तविक चुनावी समर्थन में बदल पाती है.
&#039;भारत को विश्वगुरु बनाना है तो...,&#039; मोहन भागवत का बड़ा बयान ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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    </item>
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        <title>&amp;apos;सेंसरशिप नहीं, कानून का पालन&amp;apos;, AI कंटेंट&amp;CSAM पर केंद्र की मेटा को दो टूक</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने मेटा की टीम से दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को तकनीकी स्तर पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और बिना लेबल वाले एआई जेनरेटेड कंटेंट पर कंपनी की कार्ययोजना पर विशेष ध्यान रहा. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मेटा की टीम ने इन समस्याओं से निपटने के तरीकों के बारे में बताया जबकि सरकार ने कंपनी को ठोस कदम उठाकर परिणामों की रिपोर्ट देने को कहा है.
अधिकारियों ने कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का संचालन करने वाली कंपनी की इन मामलों में प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी. बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा कि निर्देश दिए जाने के बावजूद एआई जेनरेटेड हानिकारक कंटेंट दोबारा सामने आ जाती है और तेजी से फैलती है. सरकार ने यह भी पूछा कि आईटी नियमों के बावजूद बिना लेबल वाले एआई ढंग से तैयार वीडियो इस प्लेटफॉर्म पर क्यों बने रहते हैं. सरकार ने &amp;lsquo;कंटेंट मॉडरेशन&amp;rsquo; में अधिक मानवीय निगरानी, भारतीय भाषाओं की बेहतर समझ और स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखने की जरूरत पर जोर दिया.
सूत्रों ने कहा कि अगले हफ्ते इन मुद्दों पर एक और बैठक होने की संभावना है. इससे पहले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दो दिनों की बैठक में मेटा के वैश्विक मामलों के प्रमुख जोएल काप्लान की अगुवाई वाली टीम से कंटेंट एल्गोरिद्म और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर सवाल किए थे. तीसरे दिन हुई बैठक में कंपनी के प्रस्तावित उपायों पर तकनीकी रूप से गहराई से चर्चा हुई.
मेटा ने आईटी मंत्रालय के अधिकारियों को अपने सिस्टम की कार्यप्रणाली समझाते हुए कहा कि डीपफेक, सीएसएएम और बॉट्स अकाउंट्स से निपटने के लिए उसके पास समाधान हैं और उन्हें लागू करने की योजना तैयार है. कंपनी ने पहले गंभीर मुद्दों को स्वीकार करते हुए लगातार सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिलाया था. सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य सेंसरशिप नहीं, बल्कि भारतीय कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना है. साथ ही, कंपनी पर लगातार दबाव बनाए रखा जाएगा कि वह ठोस और निरंतर सुधार करे.
मेटा के साथ सरकार की यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रोक के बाद बुलाई गई थी. हालांकि मेटा ने प्रधानमंत्री की पोस्ट को एआई आधारित कंटेंट फिल्टर की गलती मानते हुए बहाल कर दिया था और माफी मांगी थी. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सेंसरशिप, नहीं, कानून, का, पालन, कंटेंट-CSAM, पर, केंद्र, की, मेटा, को, दो, टूक</media:keywords>
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        <title>भारत ने इजरायल से डिफेंस डील के लिए किया एप्रोच? सरकार ने बताई सच्चाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-ने-इजरायल-से-डिफेंस-डील-के-लिए-किया-एप्रोच-सरकार-ने-बताई-सच्चाई</link>
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        <description><![CDATA[ विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार (7 अगस्त 2026) को उस वायरल खबर को फर्जी बताया है, जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हाल ही में हुए सुरक्षा समझौते के जवाब में भारत ने इजरायल से रक्षा समझौता करने के लिए संपर्क किया है. यह दावा तुर्किए के मीडिया आउटलेट स्ट्रैटुरका की एक रिपोर्ट में किया गया था. इसके बाद सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से फैल गई. रिपोर्ट में कुछ अज्ञात पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि भारत ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए समझौते का मुकाबला करने के लिए इजरायल से रक्षा समझौता करने की मांग की है.
विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक विभाग ने इस दावे की जांच की. विभाग ने रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इसे सीधे तौर पर फर्जी खबर बताया. MEA फैक्ट चेक विंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे गलत और भ्रामक पोस्ट से सावधान रहने की जरूरत है, जिनमें नकली सामग्री तैयार करने के लिए AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस तरह विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि भारत की ओर से इजरायल से किसी नए रक्षा समझौते के लिए संपर्क किए जाने का वायरल दावा सही नहीं है.

Fake Alert!!! ????????????We caution against such malicious posts on social media platforms which use AI to create fake content! pic.twitter.com/Zor218yW0J
&amp;mdash; MEA FactCheck (@MEAFactCheck) August 7, 2026




ये भी पढ़ें: मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते सदन आएंगे शाह? FCRA बिल पर संभालेंगे मोर्चा, कांग्रेस भी तैयार
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने किया रक्षा समझौता
MEA का यह स्पष्टीकरण पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच &amp;lsquo;मक्का संयुक्त रक्षा समझौते&amp;rsquo; पर हस्ताक्षर होने के कुछ घंटे बाद आया. यह समझौता तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और एक-दूसरे की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते का मकसद तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है. समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाले सशस्त्र हमले को सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा. समझौते में रक्षा के कई क्षेत्रों में तीनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी बात कही गई है.
समझौते पर नजर है-भारत
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच हुए समझौते पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारत इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है और आगे की जानकारी से अवगत कराया जाएगा.
नेतन्याहू ने PM मोदी को किया फोन
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच गुरुवार को फोन पर बातचीत हुई. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने भारत और इजरायल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. दोनों नेताओं ने कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की भी समीक्षा की. शुक्रवार की मीडिया ब्रीफिंग में रणधीर जायसवाल ने बताया कि फोन कॉल इजरायल की ओर से किया गया था. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों, दोस्ती और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई.
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: कैसे होती है मानसून की भविष्यवाणी, बारिश अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है जरूरी?</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी &amp;lsquo;स्टेट ऑफ द इकोनॉमी&amp;rsquo; रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहता है, तो इसका असर देश की आर्थिक वृद्धि और महंगाई के अनुमान पर पड़ सकता है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की 29 मई 2026 को जारी संशोधित भविष्यवाणी के मुताबिक, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून से होने वाली बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. मानसून को लेकर यह अनुमान ऐसे समय आया है जब देश की खेती, खाद्य कीमतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसकी भूमिका एक बार फिर चर्चा में है.
लेकिन आखिर मानसून काम कैसे करता है? इसकी भविष्यवाणी कब से की जा रही है? आज मौसम वैज्ञानिक किन तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मानसून इतना महत्वपूर्ण क्यों है? इसे सिलसिलेवार समझते हैं.
मानसून क्या है और भारत में बारिश कैसे होती है?
मानसून मूल रूप से मौसम के साथ हवाओं की दिशा में होने वाला बदलाव है. इसकी सबसे बड़ी वजह जमीन और समुद्र का अलग-अलग गति से गर्म और ठंडा होना है.
गर्मियों में जमीन समुद्र की तुलना में तेजी से गर्म होती है. इससे जमीन के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने लगता है. इसके मुकाबले समुद्र के ऊपर अपेक्षाकृत अधिक दबाव रहता है. नतीजतन, समुद्र से ठंडी और नमी से भरी हवाएं जमीन की ओर बढ़ती हैं. भारत में पहुंचने के बाद यही हवाएं बड़े पैमाने पर बारिश कराती हैं. इसे दक्षिण-पश्चिम मानसून कहा जाता है.
सर्दियों में स्थिति उलट जाती है. जमीन समुद्र की तुलना में जल्दी ठंडी होती है और हवाएं जमीन से समुद्र की ओर चलने लगती हैं. इन्हें उत्तर-पूर्वी मानसूनी हवाएं कहा जाता है.
भारत में मानसून के दो प्रमुख प्रकार
भारत की मानसूनी व्यवस्था को मुख्य रूप से दो हिस्सों में समझा जाता है, पहला दक्षिण-पश्चिम मानसून और दूसरी उत्तर-पूर्वी मानसून. आइए एक-एक कर के समझते हैं.
दक्षिण-पश्चिम मानसून
दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है. यह केरल के दक्षिण-पश्चिमी तट से भारत में प्रवेश करता है और धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों तक फैलता है.
यह भारत का मुख्य मानसून है. गर्मी से राहत देने के अलावा खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी इसका खास महत्व है. खासकर खरीफ फसलों की खेती काफी हद तक इसी बारिश पर निर्भर करती है.
देश में होने वाली कुल वार्षिक बारिश का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जून से सितंबर के मानसून सीजन में मिलता है. इस अवधि में भारत में होने वाली औसत बारिश का दीर्घकालिक औसत यानी LPA 880 मिलीमीटर है.
LPA क्या होता है?
LPA यानी Long Period Average. इसका इस्तेमाल यह बताने के लिए किया जाता है कि सामान्य तौर पर जून से सितंबर के बीच देश में कितनी बारिश होती है.
इसके लिए लंबी अवधि के दौरान दर्ज बारिश के आंकड़ों का औसत निकाला जाता है. मानसून के पूर्वानुमान में इसी आंकड़े को एक मानक (Benchmark) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
उत्तर-पूर्वी मानसून
उत्तर-पूर्वी मानसून आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच सक्रिय रहता है. इसका नाम हवाओं की दिशा के आधार पर पड़ा है, जो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर चलती हैं.
इसका असर मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत में देखने को मिलता है. दक्षिण-पश्चिम मानसून की तुलना में यह कम व्यापक होता है, लेकिन दक्षिण भारत के कई हिस्सों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और यनम में इसका खास असर होता है. अक्टूबर से दिसंबर के बीच तमिलनाडु में होने वाली वार्षिक बारिश का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा इसी मानसून से मिलता है.
उत्तर-पूर्वी मानसून को शीतकालीन मानसून, लौटता मानसून (Retreating Monsoon) या रिवर्स मानसून भी कहा जाता है.
भारत में मानसून की भविष्यवाणी कब शुरू हुई?
भारत में मानसून की बारिश का व्यवस्थित पूर्वानुमान लगाने की कोशिश 1877 में शुरू हुई. यह भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की स्थापना से करीब दो साल पहले की बात है.
उस समय ब्रिटिश मौसम विज्ञानी और जीवाश्म विज्ञानी हेनरी फ्रांसिस ब्लैनफोर्ड (Henry Francis Blanford) भारत सरकार के मौसम विज्ञान रिपोर्टर थे.
1876-77 के दौरान पड़े अकाल और उसके बाद फसल खराब होने से मानसून को समझने की जरूरत और बढ़ गई. 1877 तक अकाल का असर देश के बड़े हिस्से में दिखाई देने लगा था. प्रशासन के लिए यह समझना जरूरी हो गया था कि मानसून कब आएगा और बारिश देश के अलग-अलग हिस्सों में किस तरह होगी.

1882 से 1885 के बीच ब्लैनफोर्ड ने मानसून की शुरुआती प्रायोगिक भविष्यवाणियां कीं. उन्होंने हिमालय में होने वाली बर्फबारी और भारत में बाद में होने वाली मानसूनी बारिश के बीच संबंध तलाशने की कोशिश की.
ब्लैनफोर्ड की थ्योरी क्या थी?
ब्लैनफोर्ड का अनुमान हिमालय में सर्दियों और वसंत के दौरान जमा होने वाली बर्फ तथा उसके बाद भारत में होने वाली गर्मियों की बारिश के बीच संबंध पर आधारित था.
उनका मानना था कि हिमालय में बर्फ की मात्रा और उसके पिघलने का असर बाद में मानसून पर पड़ सकता है. IMD के अनुसार, यह भारत में आधुनिक मौसम विज्ञान के शुरुआती महत्वपूर्ण विचारों में से एक था.
ब्लैनफोर्ड के बाद क्या हुआ?
मई 1889 में ब्लैनफोर्ड के बाद सर जॉन एलियट को भारत का पहला Director General of Indian Observatories नियुक्त किया गया. यह पद आज के IMD प्रमुख के पद के समान माना जाता है.
एलियट ने ब्लैनफोर्ड के काम को आगे बढ़ाया. उन्होंने हिमालय की बर्फबारी के साथ-साथ अप्रैल-मई के स्थानीय मौसम, हिंद महासागर और ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियों जैसे दूसरे कारकों को भी मानसून के पूर्वानुमान में शामिल करने की कोशिश की.
हालांकि, इन शुरुआती तरीकों से सूखे या उसके बाद पड़ने वाले अकाल का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सका. 1899-1900 का भारतीय अकाल इसका बड़ा उदाहरण था. इसमें अनुमान के मुताबिक करीब 4.5 करोड़ से 5 करोड़ लोग प्रभावित हुए.
सर गिल् ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>तमिलनाडु में पहले ही दिन इतने लोगों ने ऑनलाइन बुक की शराब, लेकिन नहीं हुई होम डिलीवरी, जानें क्यों</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/तमिलनाडु-में-पहले-ही-दिन-इतने-लोगों-ने-ऑनलाइन-बुक-की-शराब-लेकिन-नहीं-हुई-होम-डिलीवरी-जानें-क्यों</link>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु में शराब खरीदने वालों के लिए शुक्रवार से नई ऑनलाइन सुविधा शुरू होने जा रही है. राज्य के निषेध और आबकारी मंत्री के. विग्नेश ने गुरुवार को बताया कि ग्राहक TASMAC की वेबसाइट (tasmac.tn.gov.in) के जरिए शराब का ऑर्डर और ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे. हालांकि, शराब की घर तक डिलीवरी नहीं होगी.
घर तक डिलीवरी की खबरों को मंत्री ने बताया गलत
सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने साफ किया कि नई व्यवस्था में शराब की होम डिलीवरी का कोई प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन भुगतान करने के बाद ग्राहक को खुद दुकान पर जाकर शराब लेनी होगी. विग्नेश ने घर तक शराब पहुंचाने से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ लोग नई व्यवस्था को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि घर तक कोई डिलीवरी नहीं होगी. ग्राहकों को ऑनलाइन भुगतान पूरा करने के बाद खुद दुकान पर जाकर शराब लेनी होगी.
मद्रास हाई कोर्ट के आदेश का किया उल्लेख
उन्होंने बताया कि पहले ही दिन 700 से अधिक लोगों ने शराब ऑर्डर और खरीदी है. उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश का उल्लेख किया, जिसमें पुलिस को उन लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति दी गई थी जो शराब के लिए अधिक राशि चार्ज कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें इस आदेश के बारे में पता है, लेकिन उन्होंने अभी तक पूरी जानकारी नहीं पढ़ी है और समीक्षा करने के बाद ही टिप्पणी करेंगे. उन्होंने बताया कि विदेशी शराब ब्रांड पहले ही शराब की दुकानों में उपलब्ध हैं और जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में कोई एकाधिकार नहीं होना चाहिए, यह कहकर कि ग्राहकों को जो चाहिए वह प्रदान करना उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा कि बडवाइजर और फोस्टर जैसे विशेष ब्रांडों के लिए आने वाली रिक्वेस्ट पर विचार किया जाएगा.

Coimbatore, Tamil Nadu: Minister K. Vignesh announced that the online liquor booking system came into effect today, noting that over 700 people have already ordered and purchased liquor on this first day. He addressed the Madras High Court&#039;s order allowing the police to register&amp;hellip; pic.twitter.com/RnnuzZeuDa
&amp;mdash; IANS (@ians_india) August 8, 2026



हर बिक्री का बिल देना होगा, MRP पर ही बिकेगी शराब
मंत्री ने बताया कि ऑनलाइन व्यवस्था अदालत के निर्देशों के पालन के लिए शुरू की गई है. इसका उद्देश्य शराब की हर बिक्री का बिल सुनिश्चित करना है. इससे यह भी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि बोतल पर छपी अधिकतम खुदरा कीमत यानी MRP पर ही शराब बेची जाए.
ग्राहकों की लंबी कतार से मिलेगी राहत
सरकार के अनुसार, ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से TASMAC कर्मचारियों पर कैश काउंटर का दबाव कम होगा. ग्राहकों को भी भुगतान के लिए लंबी कतार में खड़े होने से राहत मिलेगी. नई व्यवस्था के तहत ग्राहक किसी खास TASMAC दुकान पर उपलब्ध शराब के अलग-अलग ब्रांड की जानकारी पहले ही देख सकेंगे और उसके बाद अपना ऑर्डर कर सकेंगे.
मंत्री ने कहा कि इससे शराब की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों से अतिरिक्त 10 रुपये की अवैध वसूली रोकने में भी मदद मिलेगी.
परेशान करने वाली TASMAC दुकानों को हटाया जाएगा
विग्नेश ने कहा कि ऐसी TASMAC दुकानों की पहचान की जाएगी, जिनकी वजह से आम लोगों को परेशानी हो रही है. इन दुकानों का निरीक्षण किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा. मंत्री ने बताया कि TVK सरकार TASMAC से जुड़े कई प्रशासनिक मामलों को भी चरणबद्ध तरीके से सुलझा रही है.
इनमें कर्मचारियों के वेतन से जुड़े मामले, बिजली के बिलों का भुगतान, शराब के कार्टन की ढुलाई और रखरखाव समेत अन्य संचालन संबंधी समस्याएं शामिल हैं.
अवैध शराब की शिकायतों पर होगी कार्रवाई
अवैध शराब की बिक्री से जुड़ी शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि इस मामले को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के संज्ञान में लाया जाएगा. इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी. इस बीच, तमिलनाडु TASMAC कर्मचारी संघ ने ऑनलाइन भुगतान की नई व्यवस्था का कड़ा विरोध किया है. संघ का कहना है कि इस प्रणाली को लागू करने में कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ सकती हैं.
संघ ने एक बयान में कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वेबसाइट के जरिए शराब की बिक्री में कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए गए हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>तमिलनाडु, में, पहले, ही, दिन, इतने, लोगों, ने, ऑनलाइन, बुक, की, शराब, लेकिन, नहीं, हुई, होम, डिलीवरी, जानें, क्यों</media:keywords>
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        <title>पंजाब&amp;दिल्ली को दहलाने का पाकिस्तानी प्लान फेल! NIA ने की बड़ी कार्रवाई</title>
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        <description><![CDATA[ NIA ने भारत-पाकिस्तान सीमा के जरिए आतंक फैलाने की साजिश रचने के मामले में दो आरोपियों के खिलाफ मोहाली की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. एजेंसी के मुताबिक, दोनों पर पाकिस्तान से IED, हथियार और हेरोइन मंगाकर भारत में बड़े आतंकी हमले की योजना बनाने का आरोप है.
चार्जशीट में गिरफ्तार आरोपी शुभम कुमार और फरार चल रहे जसवीर चौधरी का नाम शामिल है. दोनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता (BNS), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आर्म्स एक्ट, NDPS एक्ट और रेलवे एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए है.
ये मामला फरवरी 2026 में अमृतसर के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) ने दर्ज किया था. उसी दौरान शुभम कुमार को गिरफ्तार किया गया था. उसके पास से एक जिंदा IED, रिमोट कंट्रोल, विदेशी .30 बोर की पिस्टल, मैगजीन, 20 जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और हेरोइन बरामद हुई थी. मार्च 2026 में NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली. जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठा एक हैंडलर अपने भारतीय साथियों के जरिए सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और नशीले पदार्थ भारत भेज रहा था.

जांच एजेंसी के मुताबिक, शुभम कुमार को टाइमर से चलने वाला IED एक यात्री ट्रेन में लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी, ताकि बड़ा धमाका कर अधिक से अधिक लोगों की जान ली जा सके. जांच में ये भी पता चला कि साजिश सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं थी, बल्कि पंजाब और दिल्ली समेत कई स्थानों पर हमले की योजना बनाई गई थी.
NIA ने जुटाए डिजिटल सबूत
NIA का कहना है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाए गए है, जो इस साजिश और आरोपियों की भूमिका की पुष्टि करते हैं. एजेंसी ने तय समय सीमा के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है. NIA ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है.
पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों और उनके अन्य साथियों की पहचान कर उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है. साथ ही ये भी पता लगाया जा रहा है कि सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और हेरोइन भारत तक पहुंचाने के लिए किन-किन रास्तों और नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया.
यह भी पढ़ें : US का नया बिल, रूस से तेल-गैस खरीदा तो लगेगा 100% टैरिफ! भारत समेत किस पर होगा असर ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>FCRA पर US के सांसद की टिप्पणी पर भड़का भारत, &amp;apos;खुद अमेरिका...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ अमेरिकी सांसद राइली मूर की ओऱ से FCRA संशोधन विधेयक पर की गई टिप्पणी का भारत ने जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये भारत का आंतरिक मामला है, जो विदेशी फंड को रेगुलेट करता है. MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नसीहत दी कि खुद अमेरिका भी अपने देश में बाहर से आने वाले पैसों पर कड़ी नजर रखता है, इसलिए भारत के ऐसा करने पर सवाल उठाना सही नहीं है.
FCRA पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर भड़का भारत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, &#039;हमने FCRA पर की गई टिप्पणियां देखी हैं. भारत से जुड़े विधायी मामले हमारे आंतरिक मामले हैं, जिन पर देश की संसद निर्णय लेती है. मैं यह भी बताना चाहूंगा कि अमेरिका सहित कई देश विदेशी फंड को रेगुलेट करते हैं.&#039;

#WATCH | Delhi: Responding to comments by a US lawmaker on the proposed Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) Amendment Bill, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, &quot;We have seen the comments on FCRA. Legislative matters concerning India are our internal affairs on which&amp;hellip; pic.twitter.com/l3i52nrEuS
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 7, 2026



FCRA बिल पर अमेरिकी सांसद ने क्या कहा?
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने भारतीय संसद में पेश होने वाले FCRA संशोधन बिल 2026 पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल ईसाई समुदाय पर सीधा हमला है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे पारित किया गया तो यह मुद्दा भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय बन सकता है. राइली मूर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, &#039;भारत में ईसाई तब से हैं, जब हमारे ईसा मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद सेंट थॉमस द एपोसल मालाबार तट पर आए थे, लेकिन ईसाइयों के इतने लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद FCRA नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है, ताकि सरकार चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में ले सके.
कैथोलिक एरीना ने भी भारत सरकार के प्रस्तावित FCRA संशोधन बिल पर प्रतिक्रिया दी. कैथोलिक एरीना ने इस मुद्दे पर राइली मूर को धन्यवाद देते हुए पोस्ट किया, &#039;भारत में ईसाई दुनिया में सबसे अधिक वंचित समुदायों में से एक हैं. यूरोपीय यूनियन (EU) और अन्य लोगों को ट्रेड डील करने के बजाय इस मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए.&#039;
FCRA बिल पारित कराने की तैयारी में सरकार
भारत सरकार मानसून सत्र के दौरान एफसीआरए संशोधन विधेयक-2026 संसद से पारित कराने की तैयारी में है. इस संशोधन विधेयक में यह प्रस्ताव किया गया है कि किसी रजिस्ट्रेशन की समय सीमा समाप्त होने या उसके निरस्त होने की स्थिति में विदेशी फंड की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकरण की व्यवस्था की जाए. अधिसूचित एफसीआरए (संशोधन) नियम, 2026 के अनुसार अब विदेशी चंदे के लिए पंजीकरण को तय उद्देश्यों और अनुमोदित राज्यों से जोड़ा गया है. साथ ही अनुमत धार्मिक गतिविधियों में से धर्म परिवर्तन के मकसद से किए जाने वाले प्रचार-प्रसार को बाहर रखा गया है.
इस कानून की शुरुआत साल 1976 में हुई थी और समय-समय पर इसमें संशोधन कर इसे और मजबूत बनाया गया. साल 2010 में नया कानून लागू किया गया, जिसमें बाद में 2016, 2018, 2020 और अब 2026 में संशोधन किए गए. FCRA किसी फॉरेन सोर्स से प्राप्त विदेशी चंदा को स्वीकार करने और उसके उपयोग को रेगुलेट करता है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>लोकसभा में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन? MPs को व्हीप जारी, NDA के भी निर्देश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/लोकसभा-में-कांग्रेस-का-शक्ति-प्रदर्शन-mps-को-व्हीप-जारी-nda-के-भी-निर्देश</link>
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        <description><![CDATA[ देश की मुख्य विपक्षी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस मानसून सत्र के दौरान संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में अपनी पूरी ताकत दिखाने की तैयारी कर रही है. कांग्रेस ने शुक्रवार (7 अगस्त, 2026) को अपने सभी लोकसभा सांसदों के लिए थ्री-लाइन व्हिप जारी किया है. जिसके तहत पार्टी ने अपने सभी सांसदों को सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
कांग्रेस के चीफ व्हिप ने जारी किया नोटिस
लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल (CPP) के मुख्य सचेतक यानी चीफ व्हिप कोडिकुन्निल सुरेश ने शुक्रवार (7 अगस्त, 2026) को अपने सभी लोकसभा सांसदों के लिए थ्री-लाइन व्हिप जारी किया. इसमें उन्होंने सभी सांसदों को निर्देश दिया है कि वे सोमवार से बुधवार तक यानी 10, 11 और 12 अगस्त को सुबह 11 बजे से सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहें. इस दौरान सदन में बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि किसी भी स्थिति में उनकी अनुपस्थिति को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

Congress has issued a three-line whip for all its Lok Sabha MPs, asking them to remain present in the House from 11 am onwards on Monday, Tuesday, and Wednesday, August 10, 11, and 12, without fail pic.twitter.com/nGOg48asFG
&amp;mdash; IANS (@ians_india) August 7, 2026



नोटिस में कांग्रेस ने सांसदों से क्या कहा?
नोटिस में कहा गया, &amp;lsquo;लोकसभा में सोमवार, मंगलवार और बुधवार यानी 10, 11 और 12 अगस्त, 2026 को बहुत ही महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी. लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्यों से अनुरोध किया जाता है कि वे तीनों दिन सुबह 11 बजे से लेकर सदन की कार्यवाही के स्थगित होने तक अनिवार्य रूप से सदन में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे और पार्टी के रुख का समर्थन करेंगे. इसे बहुत ही महत्वपूर्ण निर्देश माना जाए.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

NDA सांसदों को भी दिया गया निर्देश
वहीं, दूसरी तरफ केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी सांसदों को भी सोमवार (10 अगस्त, 2026) से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हीं रहने का निर्देश दिया गया है.
हालांकि, इसे लेकर अभी तक कोई व्हिप जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA अमेंडमेंट बिल को संसद में पेश करने, उसपर चर्चा करने और उसे संसद से पारित करवाने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>लोकसभा, में, कांग्रेस, का, शक्ति, प्रदर्शन, MPs, को, व्हीप, जारी, NDA, के, भी, निर्देश</media:keywords>
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        <title>पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग पर SC बोला&amp; &amp;apos;सस्ती लोकप्रियता...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ पूर्व हाई कोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर की मांग करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (7 अगस्त) खारिज कर दिया. कोर्ट ने इसे प्रचार के लिए दाखिल बताया. जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की याचिका खारिज कर दी.&amp;nbsp;
घनश्याम उपाध्याय ने याचिका दायर कर कहा था कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहते उनके घर पर बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश बरामद हुआ था. अब वह इस्तीफा दे चुके हैं. इसके बावजूद दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ दी गई शिकायत पर एफआईआर नहीं दर्ज कर रही है.
पहले भी खारिज हुई याचिका
पीठ ने कहा कि इससे पहले भी इसी तरह की एक याचिका खारिज की जा चुकी है. उपाध्याय ने कहा कि पिछली याचिका इस तकनीकी आधार पर खारिज की गई थी कि कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी जबकि मौजूदा मामले में उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है.
जस्टिस नरसिम्हा ने उनसे कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;आप एक अधिवक्ता हैं. यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है. यह सब सस्ती लोकप्रियता के लिए किया जा रहा है. हम इस पर सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं. याचिका खारिज की जाती है.&amp;rsquo;&amp;rsquo;
कोई छूट प्राप्त नहीं- वकील
उपाध्याय ने कहा कि याचिका पर सुनवाई नहीं करने का कोई कारण नहीं है क्योंकि हाई कोर्ट के न्यायाधीश को लोक सेवक माना गया है. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;अब वह सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं. उन्हें अभियोजन से कोई छूट प्राप्त नहीं है.&amp;rsquo;&amp;rsquo; हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया.
यशवंत वर्मा ने नौ अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था. वह भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पद से हटाए जाने संबंधी महाभियोग की कार्यवाही का सामना कर रहे थे. पिछले साल दिल्ली स्थित उनके आवास से नोटों की जली हुई गड्डियां कथित तौर पर बरामद हुई थीं. वर्मा द्वारा अपना इस्तीफा सौंपे जाने के बाद उनके खिलाफ जारी महाभियोग की कार्यवाही निष्प्रभावी हो गई.
संसद द्वारा पद से हटाए जाने की प्रक्रिया को रोकने के लिए भ्रष्टाचार के आरोपी न्यायाधीश के पास एकमात्र विकल्प इस्तीफा देना ही बचा था. न्यायाधीश को पांच जनवरी, 2031 को सेवानिवृत्त होना था. यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास में 14 मार्च, 2025 को होली की रात लगभग 11 बजकर 35 मिनट पर आग लगने के बाद भारी मात्रा में नकदी मिलने का दावा किया गया है. आग बुझाने के लिए अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>शेख हसीना के मीडिया इवेंट पर आया भारत सरकार का बयान, जानें क्या कहा</title>
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        <description><![CDATA[ भारत की जमीन से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर ढाका में सियासी हलचल तेज हो गई. शेख हसीना के बयान के बाद बांग्लादेश और भारत के बीच तनाव बढ़ता नजर आया. बांग्लादेश ने इस पूरे मामले को लेकर भारत पर सवाल उठाए और अपनी नाराजगी जाहिर की.
बांग्लादेश की आपत्तियों पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी साफ जवाब दिया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि शेख हसीना के इस कार्यक्रम से भारत सरकार का कोई लेना-देना नहीं था.

Bi-Weekly Media Briefing by the Official Spokesperson (August 07, 2026)https://t.co/rT0CbgPosI
&amp;mdash; Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 7, 2026




ये भी पढ़ें: FCRA पर US के सांसद की टिप्पणी पर भड़का भारत, &#039;खुद अमेरिका...&#039;
शेख हसीना के बयान पर भारत का साफ जवाब
विदेश मंत्रालय ने कहा कि शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस एक निजी कार्यक्रम था. इसके आयोजन में भारत सरकार की किसी भी तरह की भूमिका नहीं थी. MEA ने यह भी साफ कर दिया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने जो भी बयान दिए, भारत सरकार उनका समर्थन नहीं करती है. यानी भारत ने शेख हसीना के बयानों से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है. भारत का कहना है कि यह कार्यक्रम निजी था और इसे लेकर भारत सरकार की कोई भागीदारी नहीं थी.
FCRA बिल पर अमेरिकी सांसद को भारत का जवाब
FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट बिल को लेकर एक अमेरिकी सांसद की ओर से सवाल उठाए जाने पर भी भारत ने अपना रुख साफ किया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि FCRA बिल पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि देश के कानून और विधायी मामलों पर अंतिम फैसला भारत की संसद करती है. ऐसे मामलों में किसी बाहरी हस्तक्षेप की कोई जगह नहीं है. भारत ने यह भी कहा कि विदेशी फंड को नियंत्रित करने के नियम सिर्फ भारत में ही नहीं हैं. अमेरिका समेत दुनिया के कई देश अपने यहां आने वाले विदेशी फंड को नियंत्रित करते हैं. ऐसे में भारत का विदेशी फंड को रेगुलेट करने के लिए कानून बनाना एक सामान्य प्रक्रिया है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>PM मोदी से मिलने पहुंचे डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे, बोले&amp; जब जब संसद सत्र...</title>
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        <description><![CDATA[ महाराष्ट्र के डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि जब भी संसद का सत्र होता है, वह अपने सांसदों से मिलने दिल्ली आते हैं. इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मिलने का समय दिया. एकनाथ शिंदे ने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ महाराष्ट्र के विकास और उससे जुड़े दूसरे मुद्दों पर बातचीत हुई. उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि NDA के 6 नए चुने गए शिवसेना सांसदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज चाय पर बुलाया.
शिंदे ने कहा कि सभी सांसद प्रधानमंत्री की ओर से मिले इस निमंत्रण से खुश हैं. प्रधानमंत्री के साथ उनकी मुलाकात के दौरान इस बात का भी जिक्र हुआ. एकनाथ शिंदे के मुताबिक, बैठक में नए सांसदों के चुनाव क्षेत्रों के विकास पर भी चर्चा हुई. इसके साथ ही इन इलाकों में विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों की ओर से मिलने वाले सहयोग पर भी बात हुई. शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकात में महाराष्ट्र के विकास और सांसदों के क्षेत्रों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई.

VIDEO | On meeting PM Narendra Modi, Maharashtra Deputy CM Eknath Shinde says, &amp;ldquo;I met the Prime Minister today. Whenever Parliament is in session, I come here to meet our MPs. The Prime Minister gave me time to meet him, and we discussed Maharashtra&amp;rsquo;s development and other&amp;hellip; pic.twitter.com/p5p7r5OMJS
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) August 7, 2026




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एकनाथ शिंदे के पास शहरी विकास मंत्री का पद
2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने. एकनाथ शिंदे ने 5 दिसंबर 2024 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 2026 में भी एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री हैं. वर्तमान में एकनाथ शिंदे के पास शहरी विकास मंत्री का पद भी है. इसके अलावा वह मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) के चेयरमैन भी हैं.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारी बारिश से लेकर बढ़ते तापमान तक, IMD ने बताया अगले 14 दिनों का मौसम</title>
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        <description><![CDATA[ अगस्त का दूसरा हफ्ता शुरू होते ही मौसम का मिजाज &amp;nbsp;फिर बदलने वाला है. कहीं झमाझम बारिश होगी तो कहीं उमस और गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है. इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 6 से 19 अगस्त तक का एक्सटेंडेड रेंज फोरकास्ट जारी किया है.
मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो हफ्तों में देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं उत्तर-पश्चिम भारत और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है. हालांकि राहत की बात यह है कि इस दौरान देश के किसी भी हिस्से में हीटवेव चलने की आशंका नहीं है.&amp;nbsp;
पहले हफ्ते में इन राज्यों में होगी अच्छी बारिश
IMD के मुताबिक 6 से 12 अगस्त के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाके, मध्य भारत, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में व्यापक बारिश होगी. कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इस दौरान गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं भी चल सकती हैं. मौसम विभाग का कहना है कि हफ्ते की शुरुआत में देशभर में बारिश सामान्य रहेगी, लेकिन दूसरे हिस्से में बारिश सामान्य से कुछ कम रह सकती है.&amp;nbsp;
दूसरे हफ्ते में फिर सक्रिय होगा मानसून
IMD के अनुसार 12 अगस्त के आसपास बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में ऊपरी हवा में बनने वाला चक्रवाती सिस्टम बनने की संभावना है. इसके असर से 14 अगस्त के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है. इसके चलते 13 से 19 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, पश्चिम बंगाल-सिक्किम, ओडिशा, कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में कई दिनों तक हल्की से मध्यम और कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है.&amp;nbsp;
इन इलाकों में बढ़ेगा तापमान
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो हफ्तों में उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, उससे सटे पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है. बाकी देश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहने का अनुमान है. IMD ने साफ किया है कि इस दौरान देश में कहीं भी हीटवेव या गर्म रात की संभावना नहीं है.&amp;nbsp;
अब तक कैसा रहा मानसून?
IMD के मुताबिक 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पूरे देश में सामान्य से 7 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई. हालांकि 1 जून से 5 अगस्त तक के पूरे मानसून सीजन पर नजर डालें तो देश में अब भी सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है. क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में 12 फीसदी, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 27 फीसदी तथा दक्षिण प्रायद्वीप में 18 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है. वहीं मध्य भारत में सामान्य से 2 फीसदी अधिक बारिश हुई है.&amp;nbsp;
एल नीनो पर भी IMD की नजर
IMD ने बताया कि फिलहाल प्रशांत महासागर में मॉडरेट एल नीनो की स्थिति बनी हुई है और मानसून के बाकी सीजन में इसके और मजबूत होने की संभावना है. IMD के मुताबिक फिलहाल हिंद महासागर में न्यूट्रल IOD की स्थिति बनी हुई है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडलों के अनुसार सितंबर के दौरान पॉजिटिव IOD बनने के भी संकेत हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>SC/ST आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ का केन्द्र ने किया विरोध, SC में दाखिल हलफनामा</title>
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        <description><![CDATA[ Centre Opposes Creamy Layer for SC/ST: अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के आरक्षण में &amp;lsquo;क्रीमी लेयर&amp;rsquo; या आमदनी पर आधारित सब-कोटा लागू करने की मांग का केंद्र सरकार ने विरोध किया है. सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर केंद्र ने कहा है कि आरक्षण व्यवस्था में कोई भी बदलाव संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है. सरकार ने यह भी कहा है कि आरक्षण सिर्फ आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है. इसका आधार ऐतिहासिक रूप से चला आ रहा सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन है.
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने यह हलफनामा रमाशंकर प्रजापति की याचिका पर दाखिल किया है. इस याचिका के अलावा इस मसले पर समता आंदोलन समिति, ओ पी शुक्ला, अश्विनी उपाध्याय और ज्ञानेंद्र खरे की याचिकाएं भी लंबित हैं. इन सभी पर सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है.
क्रीमी लेयर रिजर्वेशन का विरोध&amp;nbsp;
सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं में कहा गया है SC/ST आरक्षण की मौजूदा नीति से इस वर्ग के उन लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं. ओबीसी आरक्षण में आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को &#039;क्रीमी लेयर&#039; में मानते हुए आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाता है. वैसी ही व्यवस्था में SC/ST आरक्षण में भी होनी चाहिए.
इन याचिकाओं का जवाब देते हुए केंद्र ने कहा है कि &amp;lsquo;क्रीमी लेयर&amp;rsquo; का सिद्धांत मुख्य रूप से OBC आरक्षण के लिए विकसित हुआ था. इसे SC/ST वर्गों पर लागू नहीं किया जा सकता. सरकार ने अपने दावे के समर्थन में इंदिरा साहनी, ईवी चिन्नैया और अशोक कुमार ठाकुर जैसे मामलों में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया है. इन फैसलों में यह कहा गया था कि क्रीमी लेयर व्यवस्था ओबीसी आरक्षण के लिए है. SC/ST के लिए कहा गया था कि आर्थिक स्थिति में सुधार होने भर से सामाजिक पिछड़ापन समाप्त नहीं हो जाता.
केंद्र ने अपने जवाब में संविधान के अनुच्छेद 341, 342 और 342A का ज़िक्र किया है. सरकार ने कहा कि SC/ST सूची में बदलाव की शक्ति राष्ट्रपति और संसद के पास है. हलफनामे में कहा गया है कि संविधान व्यवस्था के अलग-अलग अंगों में &#039;शक्ति का स्पष्ट बंटवारा&#039; करता है. आरक्षण नीति में बदलाव न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.
सामाजिक नीति लागू नहीं बाध्यकारी
केंद्र ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट संसद को किसी विशेष सामाजिक नीति को लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता. अगर आरक्षण के भीतर आय के आधार पर किसी तरह के बदलाव होना भी है, तो इसका फैसला संसद ही कर सकती है. साथ ही, इस तरह का फैसला लेने के लिए व्यापक सामाजिक-आर्थिक अध्ययन और विश्वसनीय आंकड़ों की जरूरत होगी.
सरकार ने यह भी बताया है कि सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के अलावा SC/ST और SEBC के लिए चलाई जा रही ज्यादातर कल्याणकारी योजनाओं में &#039;मीन्स टेस्ट&#039; लागू है. यानी आमदनी के आधार पर लाभ दिए जाने का प्रावधान है. केंद्र ने याचिकाओं को &amp;lsquo;भ्रामक और आधारहीन&amp;rsquo; बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से उन्हें खारिज करने का आग्रह किया है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>SCST, आरक्षण, में, ‘क्रीमी, लेयर’, का, केन्द्र, ने, किया, विरोध, में, दाखिल, हलफनामा</media:keywords>
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        <title>ATF में एथेनॉल मिलाने की खबर सच या अफवाह? जानिए सरकार ने क्या कहा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/atf-में-एथेनॉल-मिलाने-की-खबर-सच-या-अफवाह-जानिए-सरकार-ने-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ कि सरकार अब पेट्रोल की तरह हवाई जहाज़ के ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल - ATF में भी एथेनॉल मिलाने जा रही है ? दावा इतना बड़ा था कि लोगों ने विमान की सुरक्षा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए लेकिन जब पूरे मामले की पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ और ही निकली. &amp;nbsp;सरकार ने साफ किया है कि ATF में सीधे एथेनॉल मिलाने की कोई योजना नहीं है. नया नियम दरअसल सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल - SAF से जुड़ा है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भ्रम फैल गया.
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार (6 अगस्त 2026) को सोशल मीडिया पर दावा किया कि केंद्र सरकार डीजल और ATF में एथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है. उन्होंने इसे विमान सुरक्षा के लिए खतरा बताया ! हालांकि इस दावे के साथ कोई सरकारी आदेश, तकनीकी रिपोर्ट या विशेषज्ञ की राय साझा नहीं की गई. करीब ढाई घंटे बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने X पर जवाब देते हुए कहा कि ATF में एथेनॉल मिलाने का दावा पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है. उन्होंने साफ किया कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

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सरकार ने आखिर बदला क्या है?
केजरीवाल ने कहा कि एथेनॉल और SAF दो बिल्कुल अलग चीजें हैं और इन्हें मिलाकर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि SAF दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित विमान ईंधन है जो सख्त सुरक्षा जांच के बाद ही उपयोग में लाया जाता है. पूरे विवाद की जड़ यही है. सरकार ने 17 अप्रैल 2026 को एक अधिसूचना जारी कर ATF से जुड़े पुराने नियमों में संशोधन किया. लेकिन इस अधिसूचना में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि विमान के ईंधन में सीधे एथेनॉल मिलाया जाएगा. असल बदलाव सिर्फ इतना है कि अब SAF मिले हुए ATF को भी कानूनी तौर पर मान्यता मिल गई है यानी सरकार ने सिर्फ नियमों का दायरा बढ़ाया है ताकि भविष्य में प्रमाणित SAF का इस्तेमाल किया जा सके.
SAF क्या है और एथेनॉल से कैसे अलग है?
SAF यानी Sustainable Aviation Fuel कोई साधारण एथेनॉल नहीं है. इसे कई तरह के कच्चे माल से बनाया जा सकता है जिनमें इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल, कृषि अवशेष, बायो वेस्ट और एथेनॉल भी शामिल हैं लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि विमान में सीधे एथेनॉल डाला जाता है.
एथेनॉल से जेट फ्यूल कैसे बनता है?
एथेनॉल को एक खास रासायनिक प्रक्रिया से गुजारा जाता है जिसे Alcohol to Jet या Ethanol to Jet तकनीक कहा जाता है. इस प्रक्रिया में एथेनॉल पूरी तरह बदलकर जेट फ्यूल जैसे हाइड्रोकार्बन में बदल जाता है. यही अंतिम ईंधन SAF कहलाता है यानी पेट्रोल में एथेनॉल अपनी मूल अवस्था में मौजूद रहता है लेकिन हवाई जहाज़ के ईंधन में ऐसा नहीं होता. वहां एथेनॉल पहले ही पूरी तरह बदल चुका होता है.
क्या SAF सुरक्षित है?
सरकार का कहना है कि SAF को इस्तेमाल से पहले दुनिया के सबसे सख्त सुरक्षा मानकों से गुजरना पड़ता है. ICAO और ASTM जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे विमान में इस्तेमाल किया जा सकता है. बिना सर्टिफिकेशन के कोई भी SAF विमान के टैंक तक नहीं पहुंच सकता.
भारत की क्या तैयारी है?
भारत भी धीरे-धीरे SAF अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सरकार ने 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1% SAF ब्लेंडिंग, 2028 तक 2% और 2030 तक 5% ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा है. इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी देश की पहली प्रमाणित SAF उत्पादन इकाई बन चुकी है.
दुनिया में क्या स्थिति है?
दुनिया भर में अब तक लाखों उड़ानों में SAF का इस्तेमाल किया जा चुका है. हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती इसकी कीमत है. SAF अभी पारंपरिक जेट फ्यूल की तुलना में कई गुना महंगा है और इसकी उपलब्धता भी सीमित है. यही वजह है कि पूरी दुनिया अभी इसे धीरे-धीरे अपनाने की रणनीति पर काम कर रही है. साफ है सरकार ने हवाई जहाज़ के ईंधन में सीधे एथेनॉल मिलाने का कोई फैसला नहीं किया है. नया नियम सिर्फ SAF को कानूनी और तकनीकी रूप से शामिल करने के लिए लाया गया है. एथेनॉल सिर्फ एक कच्चा माल हो सकता है अंतिम विमान ईंधन नहीं. इसलिए फिलहाल विमान की सुरक्षा को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. असली चुनौती SAF की लागत, उत्पादन और उपलब्धता है जिस पर भारत समेत पूरी दुनिया काम कर रही है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>8 अगस्त को ही होगा राहुल गांधी का प्रयागराज कार्यक्रम, दोबारा मिली परमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ प्रयागराज में 8 अगस्त को लेकर प्रस्तावित लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम &#039;छात्रों की गूंज&#039; का रास्ता साफ हो गया है. &amp;nbsp;गुरुवार 6 अगस्त 2026 की मिली जानकारी के अनुसार गांधी को कार्यक्रम के लिए अनुमति दे दी गई है. इससे पहले कार्यक्रम के आयोजक ने एक दिन पहले अनुमति निरस्त कर दी थी. प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के लिखित आश्वासन पर दोबारा से परमिशन दी गई है.&amp;nbsp;
कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट ने आदेश जारी किया है. दोबारा परमिशन मिलने के बाद कांग्रेस ने फिर से इस कार्यक्रम की जोर-शोर से तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस के कार्यकर्ता फिर से ग्राउंड पर पहुंचे हैं.&amp;nbsp;
प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के लिखित आश्वासन पर दोबारा परमिशन दी गई &amp;nbsp;
अजय राय ने अपने लिखित आश्वासन में कहा है कि हम आपके खेल मौदान और प्रांगण की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. हम उतने ही हिस्से का प्रयोग करेंगे, जिससे किसी भी छात्रों से जुड़े खेलकूद में व्यवधान न पड़े. हम माननीय इलाहबाद हाईकोर्ट या किसी भी कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं करेंगे. हम स्कूल प्रांगण का उपयोग किसी भी स्वरूप में नहीं करेंगे. कोर्ट के निर्देश का पूर्णत: पालन किया जाएगा.&amp;nbsp;अजय राय ने आगे कहा, यदि तैयारी के दौरान कोई नुकसान खेल मैदान को हुआ तो हम उसको पूरी तरह ठीक कर आपकी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे.&amp;nbsp;
इस कार्यक्रम का स्वरूप कमर्शियल नहीं है: अजय राय
उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम किसी भी स्वरूप में कमर्शियल नहीं है. इस कार्यक्रम से माननीय इलाहबाद हाईकोर्ट की तरफ से पारित आदेश (दिनांक 14/08/2025) (जनहित याचिका-542 (2025), गिरिजा शंकर बनाम उत्तर प्रदेश सरकारी की किसी भी स्वरूप में अवहेलना नहीं होगी.&amp;nbsp;
छात्रों की गूंज कार्यक्रम, राहुल करेंगे स्टूडेंट से चर्चाराहुल गांधी का 8 अगस्त 2026 को प्रयागराज में छात्रों की गूंज संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित है. केपी ट्रस्ट की तरफ से मैदान की अनुमति रद्द किए जाने के बाद से कार्यक्रम चर्चा और विवादों में घिर गया था. कांग्रेस ने हर हाल में इस कार्यक्रम को आयोजित करने का ऐलान किया था. अब फिर से राहुल गांधी को कार्यक्रम की अनुमति दे दी गई है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>राहुल गांधी को BJP में कौन नेता पसंद? दिया जवाब, &amp;apos;हैलो अंकल...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने Gen-Z के बीच अपनी पहुंच को बढ़ाने के उद्देश्य से एक नई पहल करते हुए गुरुवार (6 अगस्त 2026) को इंस्टाग्राम पर &amp;lsquo;आस्क मी एनीथिंग&amp;rsquo; (मुझसे कुछ भी पूछिए) सत्र की शुरुआत की. इस दौरान एक यूजर ने राहुल गांधी से उनके फेवरेट बीजेपी नेता का नाम पूछा. इस पर उन्होंने कहा कि वे कैप्टन अमरिंदर सिंह को बहुत पसंद करते हैं, वे &#039;कूल&#039; हैं और उनका इतिहास सेना से जुड़ा रहा है. इस दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए &#039;हैलो अंकल अमरिंदर&#039; कहकर उनका जिक्र किया.
राहुल गांधी ने Gen-Z के सवालों का दिया जवाब
राहुल गांधी ने युवाओं से इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से अपने सवाल भेजने का आग्रह करते हुए कहा कि वह अधिक से अधिक प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करेंगे. उन्होंने अपनी इस पहल का लिंक सोशल मीडिया मंच प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए कहा, &amp;lsquo;छात्रों, Gen-Z, मैं आपकी बात सुनने के लिए यहां हूं. इंस्टाग्राम पर मुझसे कुछ भी पूछिए, मैं जितने संभव होंगे उतने सवालों के जवाब दूंगा.&amp;rsquo;
यह पहल ऐसे समय की गई है जब एक दिन पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन छात्रों के एक ग्रुप से मुलाकात की थी, जिन्होंने पिछले महीने पेपर लीक के मुद्दे पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था और 20 जुलाई को कथित पुलिस कार्रवाई का सामना किया था.
कौन हैं कैप्टन अमरिंदर सिंह?
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2 नवंबर 2021 को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से औपचारिक रूप से इस्तीफा दिया था. उन्होंने सोनिया गांधी को अपना भेजा था. उन्होंने 18 सितंबर 2021 को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और फिर पंजाब लोक कांग्रेस (PLC) नाम से नई पार्टी बनाई थी. 19 सितंबर 2022 को वह बीजेपी में शामिल हुए और अपनी पार्टी PLC का भी बीजेपी में विलय कर दिया था.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने रांची में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर कहा कि झारखंड समेत सभी सरकारों को छात्रों की बात सुननी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए कदम उठाने चाहिए. राहुल गांधी ने &amp;lsquo;इंस्टाग्राम&amp;rsquo; पर एक Gen-Z युवा के सवाल के जवाब में यह भी कहा कि उन्होंने कोटा और देहरादून में छात्रों का विषय उठाया है और आठ अगस्त को प्रयागराज जाकर भी छात्रों के बारे में बात करेंगे. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Viral News: रुद्रप्रयाग में मूसलाधार बारिश से हाहाकार!</title>
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        <description><![CDATA[ Viral News: रुद्रप्रयाग में मूसलाधार बारिश से हाहाकार! ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्या था वो केस, जिसमें 22 साल से जेल में बंद था शख्स? अब सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी</title>
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        <description><![CDATA[ ओडिशा के नबरंगपुर पुलिस क्षेत्र के हिरली गांव में 2004 में हुए तीन लोगों की निर्मम हत्या के मामले में आरोपी अर्जुन जानी को 2 दशक से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद अब निर्दोष घोषित कर दिया गया है. न्याय में हुई इस चूक पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने कहा कि बिना ठोस सबूत के किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता 22 साल तक छीन ली गई.&amp;nbsp;
कोर्ट ने टिप्पणी की कि पर्याप्त सबूत के बिना किसी व्यक्ति को 2 दशक से अधिक समय तक स्वतंत्रता से वंचित रखना देश की न्याय प्रणाली की सामूहिक विफलता है. यह मामला 2004 का है, जब हिरली गांव में तीन महिलाओं की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद एक कथित चश्मदीद गवाह के यह दावा करने पर कि उसने अर्जुन जानी को अपराध स्थल पर देखा था, उसे गिरफ्तार कर लिया गया.&amp;nbsp;
संदेह के आधार पर हुई गिरफ्तारीसुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार पुलिस ने उसे मुख्य रूप से संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया और कथित तौर पर पूछताछ के दौरान उससे जुर्म कबूलवाने के लिए &#039;थर्ड-डिग्री&#039; तरीकों का इस्तेमाल किया गया. वही कबूलनामा आखिरकार अभियोजन पक्ष के मामले का आधार बना, जिसके कारण अर्जुन जानी को दोषी ठहराया गया और लंबी जेल की सजा काटनी पड़ी. तीन लोगों की हत्या के मामले में सजा काटते हुए वह 22 साल तक जेल में रहा.
न्यायिक खामियों की कड़ी आलोचनासबूतों और जांच से जुड़ी परिस्थितियों की दोबारा समीक्षा करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे उसका अपराध साबित करने में विफल रहा है. बेंच ने पाया कि विश्वसनीय और कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूतों के अभाव में दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता. अर्जुन जानी को सभी आरोपों से बरी करते हुए शीर्ष अदालत ने न केवल उसकी स्वतंत्रता बहाल की, बल्कि जांच और न्यायिक खामियों की कड़ी आलोचना भी की. जिनके कारण एक निर्दोष व्यक्ति को अपने जीवन के 22 साल गंवाने पड़े.
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&#039;भारत हिंदू राष्ट्र बनता है तो...&#039; सिद्धारमैया के बेटे ने किसे दे डाली चेतावनी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Viral News: देशभक्ति और आस्था का अद्भुत संगम, देखिए!</title>
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        <description><![CDATA[ Viral News: देशभक्ति और आस्था का अद्भुत संगम, देखिए! ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Viral News: देखिए किन्नौर में लैंडस्लाइड का खौफनाक वीडियो वायरल!</title>
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        <description><![CDATA[ Viral News: देखिए किन्नौर में लैंडस्लाइड का खौफनाक वीडियो वायरल! ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>SC जाएंगे तरुण तेजपाल, रेप केस में दोषी, बोले&amp; &amp;apos;62 का हूं, 2 बेटियां हैं...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ न्यूज मैगजीन &amp;lsquo;तहलका&amp;rsquo; के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा झटका लगा है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए रेप केस में दोषी करार दिया. हाई कोर्ट की गोवा पीठ की न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने कहा कि सजा पर फैसला दोपहर में सुनाया जाएगा.&amp;nbsp;
फैसले के दौरान तरुण तेजपाल कोर्ट में मौजूद थे और उन्होंने नरमी बरतने की गुहार लगाई. उन्होंने कहा कि फैसले के फिलाफ वो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, तरुण तेजपाल ने कोर्ट से कहा, &quot;आज मैं 62 साल का हूं. मैं दो बेटियों का पिता हूं. मेरी पत्नी है. मैं राजनीतिक साजिश का शिकार हूं. मेरे वकीलों ने भी मुझसे कहा है कि मैं कोर्ट से नरमी बरतने की अपील करूं.&quot;&amp;nbsp;
तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने कम से कम सजा की मांग करते हुए कोर्ट से यह भी गुजारिश की कि सजा और दोषसिद्धि पर कम से कम 10 हफ्ते के लिए रोक लगाई जाए, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें.&amp;nbsp;
वहीं सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहते हुए अधिकतम सजा की मांग की कि इससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि &amp;lsquo;&amp;lsquo;नहीं का मतलब नहीं होता है.&amp;rsquo;&amp;rsquo;&amp;nbsp;
कितनी सजा हो सकती है?
अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) (संरक्षक या विश्वास अथवा अधिकार की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति द्वारा महिला से दुष्कर्म), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत दोषी ठहराया है. धारा 376 के तहत तेजपाल को कम से कम 10 वर्ष और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.
यह मामला नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित थिंकफेस्ट कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में अपनी एक पूर्व जूनियर महिला सहकर्मी के कथित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म से जुड़ा है. निचली अदालत ने 2021 में तेजपाल को इस मामले में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>‘वर्तमान पर फोकस करें और...’, PM मोदी ने भाजपा सांसदों को दी बड़ी सलाह</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (5 अगस्त, 2026) को राज्यसभा के लिए चुने गए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 37 नए सांसदों के साथ नाश्ते पर बैठक की. इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP) को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कुछ नेता भी मौजूद थे. बैठक के दौरान पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि संसद का कामकाज सुचारु रूप से और बिना किसी दिक्कत के चलना चाहिए. उन्होंने सभी से कहा कि वे सिर्फ वर्तमान पर फोकस रखें और देश के भविष्य के लिहाज से क्या बेहतर हो सकता है, उस दिशा में काम करें.
उन्होंने कहा कि अच्छे नतीजों के लिए वर्तमान में जीना जरूरी है. जैसे इस समय मैं आपके साथ हूं, इसलिए मैं किसी और बात के बारे में नहीं सोच रहा हूं. मैं उसी पल के बारे में सोचता हूं और उसी पल को जीता हूं, जिसमें मैं उस समय होता हूं.
सांसदों से बैठक में क्या बोले पीएम मोदी?
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को साझा किया और सांसदों को सलाह दी कि वे संसद के कार्यवाही को बेहद गंभीरता से लें. वे सभी सांसदों से सीखें, चाहे वे विपक्ष के ही क्यों न हों. उन्होंने सांसदों को हर रोज कम से कम एक से दो घंटे संसद पुस्तकालय में अध्ययन करने के लिए भी प्रेरित किया.&amp;nbsp;

उन्होंने सांसदों से कहा कि वे दिल्ली के मकड़जाल से दूर रहें और क्षेत्र और कार्यकर्ताओं से जुड़े रहे. इसके अलावा, युवाओं के साथ नियमित संवाद बढ़ाएं और अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में एमपी लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम (MPLADS) के तहत विशेष रूप से युवाओं और खेल से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर ध्यान दें.&amp;nbsp;

साथ ही साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में चुने गए एनडीए के नए सांसदों को अपने लेटरहेड के दुरुपयोग से सतर्क रहने और फोन पर लोगों से रूखा व्यवहार करने से बचने की भी सलाह दी है.
बैठक में कौन-कौन सांसद शामिल हुए?
संसद सत्र के दौरान सांसदों के साथ नाश्ते पर बैठक करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले कई सालों से चली आ रही उस परंपरा का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सांसदों को प्रधानमंत्री से सीधे संवाद करने का मौका देना है. इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, बीजेपी के नव-निर्वाचित पदाधिकारी तरुण चुघ और विनोद तावड़े के अलावा आम आदमी पार्टी (AAP) से भाजपा में शामिल हुईं स्वाती मालीवाल, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक और विक्रमजीत सिंह साहनी समेत कई अन्य सांसद मौजूद रहे.&amp;nbsp;
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        <title>‘कोई दम नहीं...’, TVK सरकार के पहले बजट पर जानें क्या बोले एमके स्टालिन</title>
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        <description><![CDATA[ मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने बुधवार (5 अगस्त, 2026) को तमिलनाडु के विधानसभा में अपना पहला बजट पेश किया है. विधानसभा में विजय सरकार में वित्त मंत्री डॉ. एन. मैरी विल्सन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया. इस बजट में विजय सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लेकर सुरक्षा तक के क्षेत्र में निवेश की बात कही. साथ ही, राज्य की महिलाओं के लिए भी बड़े तोहफा का ऐलान किया गया है. हालांकि, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने विजय सरकार की तरफ से पेश बजट को पूरी तरह से बेकार बताते हुए इसे डीएमके सरकार के योजनाओं का रीमेक वर्जन करार दिया है.
TVK सरकार के पहले बजट पर एमके स्टालिन की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार (5 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करके विजय सरकार की तरफ से पेश किए गए बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;अगर आज तमिलनाडु विधानसभा में पेश किए गए बजट (TNBudget2026) को मुझे ऐसी भाषा में समझाना हो, जिसे रील्स सीएम (CM विजय) भी आसानी से समझ सकें, तो मैं यही कहूंगा कि लोगों को उम्मीद थी कि यह ब्लास्ट, ब्लास्ट बजट होगा, लेकिन ये तो बेकार-बेकार (वेस्ट, वेस्ट) बजट बनकर रह गया.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

இன்று சட்டமன்றத்தில் வாசிக்கப்பட்ட #TNBudget2026 பற்றி Reels CM-க்குப் புரியும் மொழியில் சொல்ல வேண்டுமென்றால், &#039;Blast Blast&#039;-ஆக இருக்கும் என எதிர்பார்த்த மக்களுக்கு, &amp;lsquo;Waste Waste&#039; எனச் சொல்லும்படிதான் இருக்கு!அதுமட்டுமல்ல, இது #DravidianModel-அரசின் திட்டங்களின் Remake&amp;hellip; pic.twitter.com/5PxxbNlKbL
&amp;mdash; M.K.Stalin (@mkstalin) August 5, 2026



उन्होंने कहा, &amp;lsquo;सिर्फ इतना ही नहीं, यह बजट द्रविड़ मॉडल सरकार की पहले से चल रही योजनाओं का महज एक रीमेक वर्जन है. आम लोगों की भाषा में कहूं तो, ये ऐसा बजट है, जिसमें किसानों की मुश्किलों, बिजली कीमतों पर बनी उलझनों या जीवनयापन के खर्चों में बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर कोई चिंता दिखाई नहीं दी है. न हीं इसमें राज्य की असली जरूरतों के हिसाब से कोई नई और लॉन्ग टर्म विजिनरी योजना का ऐलान किया गया है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

सीएम विजय के चुनावी वादों पर बोले स्टालिन
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने कहा, &amp;lsquo;इस बजट में चुनाव के दौरान किए गए वादों का भी कहीं कोई जिक्र नहीं है. टीवीके प्रमुख विजय ने राज्य की जनता से वादा किया था कि तमिलनाडु की सत्ता में आने के बाद वो महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक मदद देंगे, बेरोजगार युवाओं को 4,000 की मदद देंगे, हर साल 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देंगे और किसानों के बकाया फसल लोन को पूरी तरह से माफ कर देंगे, लेकिन इनमें से किसी बात को कोई जिक्र नहीं हुआ. कुल मिलाकर, यह रील्स सरकार का पहला बजट है, एक ऐसा बजट, जिसमें न ही कोई मौलिक सोच है, न अपने किए गए वादों को पूरा करने की प्रतिबद्धता और न हीं कोई ठोस दम है. आखिर में यह सिर्फ एक फीका और राज्य की जनता के लिए एक निराशाजनक बजट साबित हुआ है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः तमिलनाडु में महिलाओं को मिलेगा सोने का सिक्का, विजय सरकार का बड़ा ऐलान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘कोई, दम, नहीं...’, TVK, सरकार, के, पहले, बजट, पर, जानें, क्या, बोले, एमके, स्टालिन</media:keywords>
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        <title>अरबों का &amp;apos;नीलम&amp;झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट&amp;apos;, कैसे PoJK के लिए बन गया &amp;apos;दोहन मशीन&amp;apos;?</title>
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        <description><![CDATA[ PoJK Neelam-Jhelum Hydropower Project: ये कहानी उस बांध की है, जिससे जुड़ा प्रोजेक्ट पूरी तरह से बंद हो गया है. इस प्रोजेक्ट का नाम है, नीलम-झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट. यह पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओजेके के हालात को पूरी तरह बयां करता है. कब्जे वाले इलाके के पहाड़ों के बीच बना अरबों रुपये का बांध की दास्तान ऐसी है, कि इसे नीलम और झेलम नदियों की ताकत का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के नेशनल ग्रिड को लगभग एक हजार मेगावट बिजली देने के लिए बनाया गया था. इसे तरक्की का एक बेहतरीन नमूना करार दिया था. लेकिन आज हालात पूरी तरह पलट गए हैं. &amp;nbsp;
भारत सरकार के पास मौजूद रिकॉर्ड की मानें तो कब्जे वाले इलाके की राजधानी मुजफ्फराबाद के लोग बिजली जैसी मूल जरूरत की समस्या से जूझ रहे हैं. लगातार बिजली कटौती ने हालात बेहद ही निम्न स्तर पर पहुंचा दिए हैं. वो भी ऐसे इलाके में जहां, यह अरबों का प्रोजेक्ट मौजूद है. कुछ साल पहले इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था. लेकिन तकनीकि खराबी का हवाला देते हुए बंद कर दिया गया. स्थानीय व्यापारियों ने अब इस मामले में जांच की मांग करते हुए बिजली कटौती की समस्या को सुलझाने की मांग की है. साथ ही प्रशासन पर इन स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप मढ़े हैं.&amp;nbsp;
प्रशासन पर गंभीर आरोप, दोहन का शिकार हो रहे PoJK के लोग
प्रशासन पर आरोप हैं, कि वह प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तो करता है, लेकिन अपने ही लोगों को बुनियादी सुविधाओं से मरहूम रखता है. कब्जे वाली इन इलाकों की नदियां उस इलाके की महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसधान है. बांध बनाकर यहां से बिजली का उत्पादन किया जाता है. लेकिन यह बिजली घाटियों के घरों को रोशन करने के लिए नहीं दी जाती. इसे बाहर भेजा जाता है. ऐसे में इन इलाकों में जो थोड़ी बहुत बिजली पहुंचती है, उसके लिए महंगी दरों पर बिल लिया जाता है. यानी साफ है कि इस इलाके के प्राकृतिक संसाधन का दोहन करके, इस ही इलाके को मूल जरूरत से परे रखा जाता है.&amp;nbsp;
अब यह पैटर्न सिर्फ एक बांध तक नहीं है. यहां की राजनीतिक पार्टी यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी ने महीनों से चल रही बिजली कटौती, कम वोल्टेज और पूरे इलाके में बार बार इंटरनेट और मोबाइल सर्विस बंद होने की निंदा की है. यहां के लोग जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी के बैनर तले ढाई साल से ज्यादा समय से अपनी बुनियादी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं. लगातार ढाई साल से इसे लेकर विरोध किया जा रहा है. यह एक तरह से इस इलाके दोहन किया जा रहा है.&amp;nbsp;
LOC के पार हालात बिल्कुल उलट, पहुंच रहा स्थानीय लोगों को फायदा
इधर, एलओसी पार करते ही बिजली का तर्क बिल्कुल उलट जाता है. जम्मू-कश्मीर में हाइड्रोइलेक्ट्रिक की बहुत बड़ी क्षमता है. इसके विकास को सिर्फ वहां के संसाधन निकालने के बजाय पूरे इलाके के लिए संसाधन के तौर पर देखा गया है. नेशनल प्रोग्राम के जरिए ग्रिड का विस्तार किया गया है. ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचने लगी है. नए बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन प्रोजेक्टस बनाए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा पहुंच रहा है. फर्क यह नहीं है कि एक तरफ नदियां हैं, दूसरी तरफ नहीं. दोनों ही जगह नदियां हैं. बस बात इतनी है कि इन नदियों का फायदा स्थानीय लोगों तक कैसे पहुंचाया जाता है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अरबों, का, नीलम-झेलम, हाइड्रोपावर, प्रोजेक्ट, कैसे, PoJK, के, लिए, बन, गया, दोहन, मशीन</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;पाकिस्तान कर रहा यौम&amp;ए&amp;इस्तेहसाल की नौटंकी&amp;apos;,  भारत बोला&amp; बंद करो प्रोपेगेंडा</title>
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        <description><![CDATA[ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान बार-बार मुंह की खाने से बाज नहीं आता है. अब जम्मू कश्मीर का स्पेशल स्टेटस यानी विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने को लेकर इस्लामाबाद विरोध कर रहा है. इसको भारत ने पूरी &amp;nbsp;तरह से खारिज कर दिया है. भारत ने साफ कहा है कि नई दिल्ली के अंदरूनी मामलों में दखल देने की इस्लामाबाद की कोशिशों का मकसद मानवाधिकारों और आतंकवाद के मामले में अपने खराब रिकॉर्ड से ध्यान भटकाना है.&amp;nbsp;
भारत ने साल 2019 को इसी दिन (5 अगस्त) को जम्मू कश्मीर का स्पेशल स्टेटस खत्म कर दिया था. तब से पाकिस्तान इस दिन को यौम ए इस्तेहसाल यानी शोषण के तौर पर मनाता है.&amp;nbsp;
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में क्या कहा है?&amp;nbsp;
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, &#039;भारत पाकिस्तान की राजनीतिक बेतुकी बातों और यौम ए इस्तेहसाल के नाम पर गलत प्रचार फैलाने की कोशिशों को खारिज करता है. 5 अगस्त 2019 को किए गए संवैधानिक बदलाव पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मामला है. इन फैसलों से इलाके के लोगों के लिए अभूतपूर्व सामाजिक-आर्थिक विकास, अच्छा शासन और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण आया है. पाकिस्तान को भारत के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है.&#039;
जायसवाल ने कहा, &#039;पाकिस्तान की झूठ फैलाने की हताश कोशिशों का मकसद केवल देश के खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड और आतंकवाद के वैश्विक केंद्र के तौर पर उसकी स्थिति से दुनिया का ध्यान भटकाना था.&#039;
उन्होंने नई दिल्ली का रुख दोहराते हुए कहा कि 2019 में आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद बने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अभिवाज्य हिस्सा हैं. हमेशा से रहे हैं. हमेशा रहेंगे.&amp;nbsp;
PoJK में पाकिस्तानी कार्रवाई पर क्या बोले जायसवाल?
जायसवाल ने पीओजेके में पाकिस्तान की तरफ से की गई कार्रवाई को लेकर कहा कि इंटरनेशनल कम्युनिटी इस इलाके में मौलिक अधिकारों के क्रूर दमन का गवाह बन रहा है. उन्होंने कहा, हाल के हफ्तों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने स्थानीय लोगों के शांतिपूर्ण नागरिक अधिकार प्रदर्शनों को दबाने के लिए जानलेवा हिंसा, टारगेटेड हत्याओं और कठोर प्रतिबंधों का सहारा लिया है. यह निहत्थे नागरिकों के खिलाफ इस तरह की सरकारी हिंसा पाकिस्तानी तंत्र के गहरे पाखंड को उजागर करती हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा&amp;apos;, CJP के सौरभ दास ने किस पर लगाया आरोप?</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कुछ यूट्यूबर्स और मीडिया चैनलों पर गंभीर आरोप मढ़े हैं. उन्होंने बुधवार (5 अगस्त 2026) को कहा है कि वे उनके घर के अंदर घुस आए. अंदर के दृश्य दिखाए. इसे प्राइवेसी का उल्लंघन और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है. दास ने कहा है कि अगर इस वजह से असामाजिक तत्व मेरे घर पर मुझ पर हमला करते हैं, तो ये यूट्यूबर्स और उनके ट्रोल हैंडलर्स सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे. वो लोग भी होंगे, जो इसे कॉर्डिनेट कर रहे हैं.&amp;nbsp;
इससे पहले उन्होंने सीजेपी के पार्टी नेताओं और समर्थकों की आलोचना का जिक्र किया था. इसमें उन्होंने कहा था, कोई कृपया भविष्य के सीजेपी स्टैंड अप कॉमेडी स्पेशल के लिए इन सभी कहानियों को इकट्ठा करे.&amp;nbsp;

????#SOS: Certain YouTubers and media channels have broken into my house and are showing the visuals from inside. It&amp;rsquo;s not just an invasion of my privacy but also a grave security threat for me and my family. If anti-social elements attack me at my residence as a result of this,&amp;hellip;
&amp;mdash; Saurav Das (@SauravDassss) August 5, 2026



कौन हैं सौरभ दास, सीजेपी के मुख्य चेहरों में कौन-कौन शामिल?
सौरभ दास के बारे में जो हालिया जानकारी मौजूद हैं, वो यह कि वह एक पत्रकार हैं. डेटा, लीगल रिपोर्टिंग करते हैं. साथ ही इन्हें कानूनी संदर्भों में बेहतरीन तरीके से पेश करते हैं. वह सीजेपी के सबसे प्रमुख प्रतिनिधियों में से एक हैं. वह जंतर मंतर के आंदोलन के दौरान पार्टी के डेलीगेशन के मुख्य चेहरों में रहे हैं.
सौरभ दास को मीडिया में उस समय ज्यादा सुर्खियां मिली, जब उन्होंने बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत के साथ एक सार्वजनिक बहस के दौरान सभी का ध्यान खींचा. सौरभ ने साल 2016 से 2019 के बीच पत्रकारिता और मास कम्युनिकेसन में ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने 18 साल की उम्र से ही आरटीआई के कानून का इस्तेमाल शुरू कर दिया था. इस दौरान उन्होंने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही पर कई खुलासे किए हैं.
सौरभ के अलावा सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, नीति रणनीतिकार आशुतोष रांका और वकील रत्ना सिंह भी जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान मुख्य लोगों में रहे हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सुरक्षा, के, लिए, गंभीर, खतरा, CJP, के, सौरभ, दास, ने, किस, पर, लगाया, आरोप</media:keywords>
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        <title>आर्टिकल 370 हटने के बाद 7 वर्षों में कितना बदल गया जम्मू कश्मीर?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आर्टिकल-370-हटने-के-बाद-7-वर्षों-में-कितना-बदल-गया-जम्मू-कश्मीर</link>
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        <description><![CDATA[ भारत के सिर का ताज कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर के लिए 5 अगस्त का दिन कोई साधारण दिन नहीं, बल्कि बदलाव, विकास, उन्नति और प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाने वाले दिन के रूप में याद किया जाता है. क्योंकि आज से ठीक सात साल पहले 5 अगस्त, 2019 को देश की सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास और प्रगति में बाधा बन बैठे संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के तहत मिलने वाले विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था. आज जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 370 और 35ए के समाप्त होने की सातवीं वर्षगांठ मना रहा है.
केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग कर दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में मान्यता दी थी और दोनों प्रदेशों की सुरक्षा और विकास की जिम्मेदारी को सीधे अपने हाथों में ले लिया था. इन बीते सात सालों में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व विकास और प्रगति हुई, जिसका सबसे बड़ा फायदा जम्मू-कश्मीर की जनता को प्राप्त हुआ.
जम्मू-कश्मीर में बह रही विकास की धारा
कभी आतंकवादी गतिविधियों से जूझने वाली जम्मू-कश्मीर की जनता आज बुनियादी ढांचे, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के वितरण, सार्वजनिक सेवाओं, बेहतर सड़कें, बिजली और पानी की बेहतर आपूर्ति, सड़क से लेकर रेल कनेक्टिविटी के विकास और बढ़ते पर्यटन के बदलावों को देख रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुच्छेद 370 के समाप्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर विकास ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है.
लोगों ने अनुच्छेद 370 के निरस्त किए जाने पर क्या कहा?
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भू-राजनीतिक एक्सपर्ट दिपांकर सेनगुप्ता ने कहा कि साल 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों ने जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचों के विकास को एक नई गति दी है और यहां दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए परिस्थितियों का भी निर्माण किया है. आज बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी पहले दूरस्थ इलाकों में गिने जाने वाले इलाकों को भी मुख्यधारा में विकास की रास्ता पर लाकर खड़ा कर दिया है. इससे केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खुल गए हैं.&amp;nbsp;

वहीं, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में नागाम गांव के रहने वाले तालिब हुसैन ने कहा कि अगर जमीनी स्तर पर विकास की बात करें, तो पहले हमें यहां मात्र एक ट्रांसफॉर्मर लगवाने के लिए महीनों तक लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन आज स्थिति में ऐसा बदलाव हुआ है कि अब ग्राम प्रधान को बिना किसी देरी के ट्रांसफॉर्मर लगवाने का अधिकार दिया गया है. हमने अनुच्छेद 370 के रद्द होने के बाद ये बदलाव देखा है.
इसके अलावा, एक अन्य स्थानीय जोहरान मीर ने कहा कि केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले ने जम्मू-कश्मीर की जनता के रोजमर्रा की जिंदगी में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आया है. आज स्थानीय समुदायों के लिए यहीं आजीविका के नए मौके बने हैं, पर्यटन के क्षेत्र में सुधार की वजह से केंद्र शासित प्रदेश के साथ-साथ यहां की जनता का भी आर्थिक विकास हुआ है.
विपक्षी राजनीतिक पार्टियां मनाएगी काला दिवस
हालांकि, जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अलावा पीडीपी, कांग्रेस समेत देश की कई अन्य राजनीतिक पार्टियां जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त करने के केंद्र सरकार के फैसले के विरोध कर रही हैं. विपक्षी राजनीतिक पार्टियों ने 5 अगस्त को काला दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रांतीय अध्यक्ष रतन लाल गुप्ता ने मंगलवार (4 अगस्, 2026) को घोषणा की कि उनकी पार्टी 2019 में जम्मू-कश्मीर को प्राप्त संवैधानिक गारंटियों को कथित रूप से असंवैधानिक और एकतरफा तरीके से खत्म करने की याद में और केंद्र सरकार की ओर से राज्य का दर्जा फिर से बहाल न किए जाने के विरोध में 5 अगस्त को काला दिवस मनाएगी.
वहीं, जम्मू कश्मीर कांग्रेस जम्मू के शहीदी चौक पर स्थित अपने पार्टी हेडक्वार्टर के बाहर और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) गांधी नगर स्थित पार्टी ऑफिस के बाहर अनुच्छेद 370 के निरस्त होने की सातवीं वर्षगांठ पर अलग-अलग विरोध प्रदर्शन करेगी.&amp;nbsp;
यह भी पढे़ंः &amp;lsquo;संसद में चर्चा की बजाय हंगामा कर रहा विपक्ष&amp;rsquo;, BJP सांसदों के गंभीर आरोप ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आर्टिकल, 370, हटने, के, बाद, वर्षों, में, कितना, बदल, गया, जम्मू, कश्मीर</media:keywords>
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        <title>आसमान में यात्री उछलकर कैसे छत से टकराए, एयर इंडिया फ्लाइट में हुआ क्या? समझें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आसमान-में-यात्री-उछलकर-कैसे-छत-से-टकराए-एयर-इंडिया-फ्लाइट-में-हुआ-क्या-समझें</link>
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        <description><![CDATA[ फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 में मंगलवार (4 अगस्त, 2026) सुबह, जो हुआ उसे यात्रियों ने दोबारा जन्म लेने जैसा बताया. एक यात्री ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि उसके पिता सीट से उछलकर विमान की छत से जा टकराए. मां और दो साल की बेटी को भी चोट आई. दिल्ली एयरपोर्ट पर जब विमान उतरा तो बाहर एंबुलेंस खड़ी थीं और कई लोग व्हीलचेयर पर बाहर आए. किसी के सिर पर पट्टी थी तो किसी क्रू मेंबर की गर्दन में कॉलर लगा था.
एयर इंडिया ने कहा कि विमान को क्रूज के दौरान थोड़ी देर के लिए टर्बुलेंस से जुड़ी घटना का सामना करना पड़ा, जिससे ऊंचाई में पलभर का बदलाव आया. सूत्र बताते हैं कि पायलट की रिपोर्ट के मुताबिक विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आया और इसकी वजह टर्बुलेंस या अपड्राफ्ट डाउनड्राफ्ट रहा होगा. सवाल यही है कि सिर्फ 300 फीट में इतनी चोटें कैसे लग गईं. जवाब समझने के लिए थोड़ा तकनीकी होना पड़ेगा.
क्या हुआ था विमान के साथ
फ्लाइट AI2379 ने फुकेत से सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर उड़ान भरी और 11 बजकर 50 मिनट पर दिल्ली में सुरक्षित उतरी. विमान एयरबस A320neo था, जिसमें करीब 134 यात्री सवार थे. सार्वजनिक ट्रैकिंग डेटा के हिसाब से विमान करीब 34 हजार से 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था. यही वो हिस्सा होता है, जब उड़ान सबसे स्थिर मानी जाती है, सीट बेल्ट की लाइट अक्सर बंद रहती हैं और लोग सो रहे होते हैं या खाना खा पी रहे होते हैं. एक यात्री ने भी बताया कि सुबह का वक्त था लोग सो रहे थे और अचानक विमान झुका और दो तीन मिनट तक वैसे ही हिलता रहा.
आम बोलचाल में लोग कहते हैं कि विमान हवा के गड्ढे में गिर गया या वैक्यूम में चला गया. हकीकत में आसमान में न कोई गड्ढा होता है न कोई खालीपन. ये शब्द पुरानी पत्रकारिता से चले आ रहे हैं और तकनीकी तौर पर गलत हैं. होता ये है कि विमान का पंख हवा को काटता है और उससे ऊपर की तरफ लिफ्ट बनती है. ये लिफ्ट इस बात पर टिकी होती है कि हवा पंख से किस कोण पर टकरा रही है.
जब विमान अचानक ऐसी हवा में घुसता है, जो नीचे की तरफ बह रही हो तो पंख से टकराने वाली हवा का कोण पलभर में बदल जाता है. लिफ्ट कम हो जाती है और विमान नीचे बैठ जाता है. इसके ठीक उलट अगर हवा ऊपर की तरफ उठ रही हो तो लिफ्ट अचानक बढ़ जाती है और विमान ऊपर उछल जाता है. यही ऊपर उठती हवा अपड्राफ्ट है और नीचे गिरती हवा डाउनड्राफ्ट. विमान गिरता नहीं है विमान के नीचे से हवा का सहारा पलभर के लिए बदल जाता है. बाहर से देखने पर लगता है कि जहाज गिर गया.
चोट विमान से नहीं, शरीर के उड़ने से लगती है
यही असली तकनीकी बात है जो ज्यादातर लोगों से छूट जाती है. नुकसान 300 फीट गिरने से नहीं होता. नुकसान इस बात से होता है कि वो 300 फीट कितनी तेजी से तय हुए. जब विमान अचानक नीचे बैठता है तो जो यात्री सीट बेल्ट लगाए बैठा है, वो विमान के साथ नीचे आ जाता है, लेकिन जो यात्री बेल्ट नहीं लगाए हैं, उनका शरीर उसी जगह हवा में रह जाता है, जहां वो था और विमान का फर्श उसके नीचे से खिसक जाता है.
नतीजा ये होता है कि आदमी सीट से उठकर छत से जा टकराता है. यही वजह है कि AI2379 के यात्री ने बताया कि उसके पिता कॉफी पीते हुए उछले और छत से टकराए. यही वजह है कि सिर की चोटें और गर्दन की चोटें सबसे ज्यादा आती हैं. इसी को इंजीनियरिंग की भाषा में नेगेटिव जी या कम gravity वाला पल कहते हैं. कुछ सेकंड के लिए शरीर पर लगने वाला भार शून्य के करीब चला जाता है और आदमी सचमुच तैरने लगता है.
इसमें ट्रॉली, गर्म चाय कॉफी, केबिन में रखा सामान और ऊपर के लॉकर से गिरने वाला बैग भी उतना ही खतरनाक हो जाता है. यही वजह है कि टर्बुलेंस में सबसे ज्यादा चोट केबिन क्रू को लगती है, क्योंकि वही खड़े होकर काम कर रहे होते हैं.
टर्बुलेंस कितने तरह का होता है
टर्बुलेंस कई तरह का होता है और सबकी वजह अलग होती है. पहला होता है बादलों वाला या कन्वेक्टिव टर्बुलेंस. गर्म हवा जमीन से ऊपर उठती है, नमी लेकर विशाल बादल बनाती है जिन्हें क्यूमुलोनिंबस कहते हैं. इन बादलों के अंदर हवा एक तरफ रॉकेट की तरह ऊपर जा रही होती है और साथ ही दूसरी तरफ तेजी से नीचे गिर रही होती है. यही सबसे हिंसक किस्म है. अच्छी बात ये है कि इसमें नमी होती है, इसलिए विमान का मौसम रडार इसे पकड़ लेता है और पायलट रास्ता बदलकर बच सकता है.
दूसरा होता है साफ आसमान वाला टर्बुलेंस, जिसे क्लियर एयर टर्बुलेंस या CAT कहते हैं. ये सबसे खतरनाक इसलिए है, क्योंकि इसमें बादल होता ही नहीं. ये जेट स्ट्रीम यानी आसमान में बहने वाली तेज हवा की पट्टी के किनारों पर बनता है, जहां दो अलग रफ्तार वाली हवाएं आपस में रगड़ खाती हैं. इसमें नमी नहीं होती, इसलिए विमान का रडार इसे नहीं देख पाता. पायलट को कोई चेतावनी नहीं मिलती और झटका बिना किसी संकेत के लगता है. दुनियाभर में टर्बुलेंस से होने वाली गंभीर चोटों की बड़ी वजह यही किस्म है.
तीसरा होता है पहाड़ों वाला टर्बुलेंस. जब तेज हवा किसी बड़ी पहाड़ी श्रृंखला से टकराकर ऊपर चढ़ती है तो उसके पार लहरें बनती हैं, जो ऊंचाई तक जाती हैं. हिमालय के आसपास ये आम है. चौथा होता है दूसरे विमान की पीछे छूटी हवा से बनने वाला टर्बुलेंस, जिसे वेक टर्बुलेंस कहते हैं. ये ज्यादातर टेकऑफ और लैंडिंग के वक्त होता है.
तीव्रता के हिसाब से भी इसे बांटा जाता है, हल्का, मध्यम, गंभीर और अत्यधिक. गंभीर श्रेणी में विमान की ऊंचाई और झुकाव में तेज बदलाव आता है. बेल्ट लगाए लोग भी बेल्ट में झटका खाते हैं और खुला सामान केबिन में उछलने लगता है. AI2379 में जिस तरह की चोटें आई हैं, वो मध्यम से गंभीर के बीच की तस्वीर बनाती हैं. हालांकि आधिकारिक श्रेणी अभी तय नहीं हुई है.
इस मामले में कौन सा टर्बुलेंस था, ये अभी तय नहीं
यही सबसे अहम अनसुलझा सवाल है. अभी तक न एयर इंडिया ने और न डीजीसीए ने बताया है कि झटका बादलों की वजह से लगा या साफ आसमान में लगा. इसी एक जानकारी से पूरी जवाबदेही बदल जाती ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;आप मर्द हैं तो...&amp;apos; तृषा पर स्टालिन के कमेंट के बाद खुशबू सुंदर का फूटा गुस्सा</title>
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        <description><![CDATA[ डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन एक्ट्रेस तृषा कृष्णन पर कमेंट करके बुरी तरह से फंस गए हैं. मंगलवार को उन्हें पुलिस ने घर से हिरासत में भी ले लिया था. अब वो घर वापस आ गए हैं. स्टालिन के डबल मीनिंग कमेंट के बाद कई लोग उन्हें खरी खोटी सुना रहे हैं. बीजेपी नेता और एक्ट्रेस खुशबू सुंदर का भी गुस्सा फूटा है. उन्होंने कहा है कि स्टालिन को खुद को नेता कहने में शर्म आनी चाहिए.&amp;nbsp;
खुशबू ने एक न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए कहा- मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई. मैंने पहले भी DMK पार्टी में महिलाओं के खिलाफ ऐसी घटिया और औरतों का अपमान करने वाली बातें देखी हैं. ऐसा लगता है कि आप उसी पुरानी सोच और परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.
गाली देने का अधिकार किसने दिया
खुशबू ने कहा- &#039;आपको किसी सार्वजनिक मंच से किसी महिला को गाली देने का अधिकार किसने दिया? और यह बात सिर्फ उदयनिधि स्टालिन की नहीं है, बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों में ऐसा ही हो रहा है. अपनी बात साबित करने के लिए आप कब तक महिलाओं को निशाना बनाते रहेंगे? एक पुरुष कितना कमजोर हो सकता है जो किसी महिला के बारे में इतने अपमानजनक तरीके से बात करे, महिला के कंधे पर रखकर बंदूक चलाए और कहे कि &#039;मैं एक मजबूत आदमी हूं, मैं एक नेता हूं&#039;? आपको खुद को नेता कहते हुए शर्म आनी चाहिए.&#039;
अगर आप मर्द हैं तो...खुशबू ने कहा- &#039;मुझे उदयनिधि स्टालिन से ऐसी उम्मीद नहीं थी. मुझे लगा था कि वे युवा हैं, उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं और खेल मंत्री रहे हैं, तो वे अलग सोच रखते होंगे. लेकिन यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि वे भी इतनी अश्लील, भद्दी और खराब भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें अपनी इस बात पर जरा सा भी पछतावा नहीं है.&#039; खुशबू ने याद किया कैसे DMK के एक नेता (सादिक) ने उन्हें और अन्य महिलाओं को &#039;आइटम&#039; कहा था. तब उस नेता को पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद वापस पार्टी में शामिल कर लिया गया. इससे साफ है कि स्टालिन भी उसी पुरानी सोच के इंसान हैं. अगर आप खुद को एक सच्चा मर्द और असली नेता मानते हैं, तो किसी महिला को गाली दिए बिना या अपमानित किए बिना राजनीति करके दिखाएं. देखते हैं कि क्या आपमें इतनी हिम्मत है.&#039;
यह भी पढ़ें: भारत के FCRA बिल से तिलमिला उठा ट्रंप का सांसद, बोला- &#039;ये हमारे धर्म पर...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Xप्लेन: जातिगत जनगणना क्या है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों है?</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय सामाजिक ढांचे में जाति एक प्राचीन, जन्म-आधारित और जटिल सामाजिक व्यवस्था है, जिसको लेकर समय-समय पर चर्चा और मतभेद होते रहे हैं. अब देश में 1931 (2011 में जारी नहीं किया गया) के बाद एक बार फिर जातिगत जनगणना होने जा रही है. जातिगत जनगणना में कुल आबादी के साथ-साथ देश के प्रत्येक नागरिक की जाति से संबंधित जानकारी भी जुटाई जाएगी. इसके अलावा उनके सामाजिक-आर्थिक हालात से जुड़ा जातिवार डेटा भी तैयार किया जाएगा.
इसी महीने 17 तारीख से जनगणना-2027 के दूसरे चरण की शुरुआत होगी. खबरों के मुताबिक, भारत का जो भी नागरिक अपनी जो भी जाति दर्ज कराएगा, उसे उसी रूप में दर्ज कर लिया जाएगा. इसके लिए किसी से जाति प्रमाण-पत्र या कोई अन्य दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा.
जातिगत जनगणना को लेकर कई विवाद भी हैं. मुख्य विवाद आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग, राजनीतिक नफ़ा-नुकसान और सामाजिक बंटवारे के गहरा होने की आशंकाओं से जुड़ा है. आइए, इस मुद्दे से जुड़े सभी पहुलओं को एक-एक कर समझते हैं.
भारत में वर्ण व्यवस्था क्या है?
भारत में वर्ण व्यवस्था की शुरुआत वैदिक युग से मानी जाती है.&amp;nbsp;ऋग्वेद में सबसे पहले वर्णों का उल्लेख मिलता है. इसमें समाज को पुरुष का रूपक मानते हुए चार वर्णों का वर्णन किया गया है. इन चारों वर्णों की उत्पत्ति क्रमशः मुख, भुजाओं, जंघाओं और पैरों से बताई गई है.
इन्हीं वर्णों से आगे चलकर जाति व्यवस्था विकसित हुई. हालांकि प्रारंभ में जाति का निर्धारण व्यक्ति के कार्य (पेशा) के आधार पर होता था, लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था वंशानुगत (Hereditary) बन गई. इसके बाद व्यक्ति जिस जाति में जन्म लेता, वही उसकी स्थायी सामाजिक पहचान बन जाती और उसे बदलना लगभग असंभव है.
चार प्रमुख वर्ण कौन से हैं और उनके कार्य का उल्लेख
वेदों के अनुसार समाज को इन चार वर्णों में विभाजित किया गया है
ब्राह्मण- पुजारी और धार्मिक कार्य करने वालेक्षत्रिय- योद्धा, राजा और शासक वर्गवैश्य- किसान, व्यापारी और शिल्पकारशूद्र- खेतिहर मजदूर, सेवक और श्रमिक

हजारों जातियां और उपजातियां
प्रारंभिक वैदिक ग्रंथों में केवल चार वर्णों का उल्लेख मिलता है, लेकिन भारतीय समाज में समय के साथ हजारों जातियां और उपजातियां विकसित हो गईं. यही जाति सामाजिक प्रतिष्ठा, पेशे और समुदाय की वास्तविक इकाई बन गई.
चार प्रमुख वर्णों के अतिरिक्त अनेक अन्य जातियां हैं जैसे
भूमिहार &amp;ndash; भूमि के स्वामी (जमींदार)कायस्थ &amp;ndash; लेखक, लिपिक और प्रशासनिक कार्य करने वाला समुदायराजपूत &amp;ndash; उत्तर भारत का प्रमुख योद्धा समुदाय, जिसे क्षत्रिय वर्ग का हिस्सा माना जाता हैगरुड़ी &amp;ndash; सांप पकड़ने या सांपों का खेल दिखाने वालेसोंझारी &amp;ndash; नदी की रेत से सोना निकालने का कार्य करने वाले
तो भारत में कुल कितनी जातियां हैं?
समाजशास्त्रीय अध्ययनों के अनुसार भारत में लगभग 3,000&amp;ndash;4,000 प्रमुख जातियां और 25,000 से अधिक उपजातियां हैं. People of India परियोजना (Anthropological Survey of India) के अनुसार भारत में 4,600 से अधिक समुदाय दर्ज किए गए हैं. इनमें कई जातियां, उपजातियां और जनजातियां शामिल हैं.
1931 की जनगणना आख़िरी ऐसी जनगणना थी, जिसमें सभी जातियों का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया था. इसके बाद सामान्य जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य सभी जातियों की अलग-अलग गणना नहीं की गई.
ओबीसी कौन होते हैं?
इस बार जातिगत जनगणना में सबसे बड़ा मुद्दा ओबीसी की संख्या को लेकर है. भारतीय संविधान के तहत सामाजिक न्याय के उद्देश्य से ऐसे समुदायों की पहचान की गई, जो ऐतिहासिक रूप से शिक्षा, रोजगार और सामाजिक अवसरों में पीछे रह गए थे. इन्हें ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की श्रेणी में रखा गया.
ओबीसी की सूची केंद्र और राज्यों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. कुछ प्रमुख ओबीसी समुदाय हैं-&amp;nbsp;यादव, कुर्मी, जाट (कुछ राज्यों में), गुर्जर (कुछ राज्यों में), मौर्य, कुशवाहा, सैनी, नाई, लोहार, कुम्हार, तेली, कहार, मल्लाह आदि

ध्यान देने वाली बात यह है कि कोई जाति एक राज्य में ओबीसी हो सकती है, जबकि दूसरे राज्य में नहीं. केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में नॉन-क्रीमी लेयर ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है.
जाति जनगणना से ओबीसी का मुद्दा क्यों गर्म हो सकता है?जातिगत जनगणना के बाद सभी जातियों के साथ ओबीसी की वास्तविक आबादी का भी आधिकारिक आंकड़ा सामने आएगा. यदि उनकी आबादी अपेक्षा से अधिक निकलती है, तो कुछ राजनीतिक दल 27 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने की मांग कर सकते हैं.
-भारत के कई राज्यों में ओबीसी मतदाता बड़ी संख्या में हैं। यदि उनकी वास्तविक आबादी के आंकड़े सामने आते हैं, तो राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन, चुनावी रणनीति और घोषणापत्र में बदलाव कर सकते हैं.
-ओबीसी कोई एक समान समूह नहीं है. इसमें सैकड़ों जातियां शामिल हैं. लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि कुछ अपेक्षाकृत मजबूत ओबीसी जातियों को आरक्षण का अधिक लाभ मिला है, जबकि अत्यंत पिछड़ी जातियां पीछे रह गई हैं. जातिगत जनगणना के आंकड़े इस बहस को नया आधार दे सकते हैं और ओबीसी के उप-वर्गीकरण (Sub-categorisation) की मांग तेज हो सकती है.
यह विवाद कब तेज हुआ?
1979 में मंडल आयोग का गठन हुआ. आयोग ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान की और 1931 की जनगणना के आधार पर अनुमान लगाया कि ओबीसी की आबादी लगभग 52 प्रतिशत है.
1990 में मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार ने 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने की घोषणा की. इसके बाद सवाल उठने लगा कि जब आरक्षण का आधार जनसंख्या है, तो ओबीसी की वास्तविक संख्या का नया आधिकारिक डेटा क्यों नहीं है.
इसके बाद 2011 में सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत सर्वेक्षण (SECC) कराया गया, लेकिन जातिवार आंकड़ों में तकनीकी और वर्गीकरण संबंधी समस्याएं बताकर उन्हें आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं  ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, जातिगत, जनगणना, क्या, है, और, इसे, लेकर, इतना, विवाद, क्यों, है</media:keywords>
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        <title>रिहाई के बाद पिता स्टालिन से मिले उदयनिधि, बोले&amp; &amp;apos;हर मां&amp;बहन को मैं...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रिहाई-के-बाद-पिता-स्टालिन-से-मिले-उदयनिधि-बोले-हर-मां-बहन-को-मैं</link>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार को पुलिस हिरासत में लिया गया था. उसी दिन उन्हें रिहा भी कर दिया गया है. रिहाई होने के बाद उदयनिधि अपने पिता से जाकर मिले जहां पर उनका भव्य स्वागत किया गया. मंगलवार को पुलिस से रिहा किए जाने के बाद आरोप लगाया कि उनके साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार किया गया. उन्होंने यहां कहा- &#039;तीन हजार पुलिसकर्मियों के साथ हमें चेन्नई से तंजावुर तक सड़क मार्ग से 400 किलोमीटर ले जाया गया. हमारे साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया.&#039;
उदयनिधि को एक्ट्रेस तृषा को लेकर डबल मीनिंग&amp;nbsp; टिप्पणी करने के मामले में मंगलवार को चेन्नई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था. उन्हें बाद में तंजावुर ले जाया गया, जहां इस संबंध में मामला दर्ज किया गया. उदयनिधि ने हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से बातचीत में आरोपों को &amp;lsquo;&amp;lsquo;झूठा&amp;rsquo;&amp;rsquo; बताया और कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर &amp;lsquo;एक ही अर्थ वाला बयान दिया था.
लगाया गलत आरोप
उदयनिधि ने कहा- &#039;मेरे भाषण को काट-छांट कर और कुछ हिस्सों को जोड़कर यह दावा किया गया कि मैंने अनुचित बात कही है. कुछ लोगों ने मुझ पर डबल मीनिंग बात करने का आरोप लगाया है. मैंने केवल एक ही अर्थ में बात की थी कि किसानों को पानी की जरूरत है.&#039;
हर मां-बहन मेरे परिवार का हिस्सा है
उन्होंने कहा-महिलाओं का अपमान करने का मेरा कोई इरादा नहीं है. तमिलनाडु की हर मां और बहन को मैं अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं.&amp;rsquo;&amp;rsquo; उदयनिधि ने इस बात पर निराशा जताई कि कुछ सहयोगी राजनीतिक नेताओं ने भी उनके पूरे भाषण का संदर्भ जाने बिना उनकी आलोचना की. डबल मीनिंग करने के आरोप को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए कावेरी का पानी जारी करने की मांग करते समय उन्होंने &#039;एक ही अर्थ&#039; में बात की थी.
उन्होंने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार पर निशाना साधते हुए उसे &#039;सर्कस कैंप&#039; करार दिया और कहा कि वह झूठे मामलों से डरने वाले नहीं हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उनके साथ एक आतंकवादी जैसा व्यवहार किया और उन्हें सड़क मार्ग से तंजावुर ले जाया गया.
इनपुट-भाषा
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP के अभिजीत दीपके और सौरव दास की बढ़ी मुश्किलें, बंगाल में दर्ज हुई FIR</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) संस्थापक अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. पश्चिम बंगाल में अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अभिजीत दीपके, सौरव दास और सीजेपी आयोजकों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम की धारा 13, 14 और 15 और बीएनएस की धारा 153 के तहत एफआईआर दर्ज कराई है. इससे पहले एक इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस से शिकायत की थी और आरोप लगाया था कि दीपके के समर्थकों ने उनके ऊपर पुणे और औरंगाबाद में हमला किया था.
फैजान ने इसको लेकर दिल्ली के डीसीसी को लिखित शिकायत सौंपी है. दावा किया है कि उनके पास वह सभी सबूत मौजूद है, जिनसे पता चलता है कि अभिजीत दीपके के लोगों ने उनके ऊपर हमला किया था. उन्होंने आगे कहा कि दोनों घटनाओं को लेकर पहले से ही दो मामले दर्ज हैं अब उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी कार्रवाई की मांग की है. इन्फ्लुएंसर का आरोप है कि अभिजीत दीपके अपने निजी फायदे के लिए इस तरह की गतिविधियां कर रहे हैं. उन्होंने सीजेपी संस्थापक की गिरफ्तारी की मांग भी की है.

West Bengal: Advocate Rinki Chatterjee Singh has filed an FIR at the Siliguri Cyber Crime Police Station against Avijit Depke (Abhijeet Deepke), Sourav Das, and CJP organisers under Sections 13, 14, and 15 of the POCSO Act and Section 153 of the BNS pic.twitter.com/qcPFBXPBf3
&amp;mdash; IANS (@ians_india) August 4, 2026



दीपके ने आरोपों को &#039;पब्लिसिटी स्टंट&#039; बताकर किया खारिज
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों पर लगने वाले मारपीट और एफआईआर को लेकर अभिजीत दीपके का भी रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने इन आरोपों को &#039;पब्लिसिटी स्टंट&#039; बताकर खारिज कर दिया. उन्होंने, झारखंड और दूसरे राज्यों में स्टूडेंट प्रोटेस्ट को सपोर्ट करते हुए कहा कि प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स को टेंट और टॉयलेट जैसी बेसिक सुविधाएं न देना गलत है और उनकी मांगें जायज हैं.
&#039;अभिजीत दीपके को तुरंत गिरफ्तार किया जाए&#039;, किसने दी दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत?
दीपके ने इसके साथ ही सीजेपी की मीटिंग पर कहा कि पार्टी की दो दिन की ऑर्गेनाइज़ेशनल मीटिंग में पिछले आंदोलनों से मिले सबक का रिव्यू किया जाएगा, देश भर में विस्तार पर चर्चा की जाएगी और इसके भविष्य का रोडमैप बनाया जाएगा. 6 अगस्त को एक डिटेल्ड ब्रीफिंग होगी. उन्होंने कहा, देश का पहला फोकस यह पक्का करना होना चाहिए कि हर गरीब और ज़रूरतमंद बच्चे तक अच्छी क्वालिटी की एजुकेशन पहुंचे.
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के बदले नियम, संसद से पास नए बिल में क्या खास? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Xप्लेन: क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शादीशुदा और लिव&amp;इन पार्टनर में कोई फर्क नहीं?</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी तौर पर एक नई पहचान दी. 3 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पुरुष किसी महिला के साथ &#039;शादी जैसे रिश्ते&#039; में रह रहा है, तो उस पर IPC की धारा 498A (क्रूरता से जुड़ी धारा) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. अब सिर्फ शादीशुदा महिलाओं को ही नहीं, बल्कि लिव-इन पार्टनर को भी क्रूरता से सुरक्षा मिलेगी. यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनाया. कोर्ट ने कहा कि &#039;लिव-इन रिलेशनशिप आज एक हकीकत है&#039; और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. आखिर इस फैसले के बाद बिना शादी के साथ रहने पर क्या-क्या बदल जाएगा...
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे कहानी क्या है?
यह फैसला कर्नाटक के एक मामले से जुड़ा है. यहां एक महिला ने अपने पार्टनर लोकेश बी.एच. के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी. महिला का आरोप था कि:

लोकेश ने उससे अपनी पहली शादी के बारे में छिपाया
उसने और उसके परिवार ने महिला को दहेज के लिए परेशान किया
उन्होंने महिला को शारीरिक नुकसान पहुंचाया

लोकेश ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की कि उनकी कोई कानूनी शादी नहीं हुई है, इसलिए धारा 498A उन पर लागू नहीं होनी चाहिए. हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद लोकेश सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, बल्कि इससे भी आगे बढ़कर एक बड़ा सवाल उठाया कि क्या सिर्फ शादीशुदा महिलाओं को ही क्रूरता से सुरक्षा मिलनी चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य तर्क: &#039;भेदभाव क्यों?&#039;
सुप्रीम कोर्ट ने सबसे अहम सवाल पूछा, &#039;अगर एक महिला को अपने पति/पार्टनर या उसके परिवार से क्रूरता झेलनी पड़ती है, तो उसे सुरक्षा देने में फर्क क्यों किया जाए?&#039;
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, &#039;क्रूरता यह नहीं देखती कि वह किस घर में दाखिल हो रही है. चाहे वह शादीशुदा महिला का घर हो या न हो. एक बार दाखिल होने के बाद, उसकी तबाही मचाने की प्रवृत्ति और बढ़ जाती है.&#039;
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि शादीशुदा महिला और शादी जैसे रिश्ते में रहने वाली महिला के बीच क्रूरता से सुरक्षा के मामले में फर्क करना असंवैधानिक है. यह आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है.
77 पन्नों का फैसला और सामाजिक बदलाव
अपने 77 पन्नों के फैसले में कोर्ट ने समाज में आए बदलावों को भी बताते हुए कहा,&amp;nbsp;&#039;शादी से पहले साथ रहना अब अनसुना या अस्वीकार्य नहीं रह गया है. ठीक उसी तरह, जैसे समलैंगिक संबंधों को, अब अपराध की कैटेगरी से बाहर कर दिया गया है और उन्हें प्राकृतिक माना गया है.&#039; कोर्ट ने यह भी कहा, &#039;विवाह को पवित्र माना जाता था, जो निस्संदेह अब एक बदलती हुई व्यवस्था है.&#039;
फैसले की तीन शर्तें: हर लिव-इन पर नहीं लागू
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह फैसला हर लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं होगा. इसके लिए तीन शर्तें जरूरी हैं:

&#039;शादी जैसा रिश्ता&#039;: सिर्फ कोई भी लिव-इन रिलेशनशिप नहीं, बल्कि वह जो शादी जैसा हो. यानी, एक गंभीर, लंबे समय तक चलने वाला रिश्ता, जिसमें दोनों साथ रह रहे हों और एक-दूसरे की जिम्मेदारी उठा रहे हों.
शादी का इरादा: रिश्ते में शादी करने का इरादा साफ होना चाहिए. यानी, दोनों पार्टनर्स का एक-दूसरे से शादी करने का संकल्प हो.
सबूत का भार महिला पर: यह साबित करने की जिम्मेदारी महिला पर होगी कि उनके रिश्ते में शादी का इरादा था.

सरकार का तर्क और कोर्ट का जवाब
केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा कि लिव-इन पार्टनर्स को पहले से ही पोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 2005 के तहत सुरक्षा मिलती है. इस वजह से धारा 498A का दायरा बढ़ाने की जरूरत है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि:

DV Act एक सिविल कानून है, जो मुख्य रूप से मुआवजा, रहने का अधिकार और सुरक्षा आदेश जैसी राहत देता है.
धारा 498A एक आपराधिक कानून है, जिसमें तीन साल तक की सजा का प्रावधान है.
दोनों कानून अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं.

इस धारा का BNS में क्या होगा?
IPC की जगह अब भारतीय न्याय सहिंता (BNS) लागू हो चुकी है. IPC की धारा 498A की जगह BNS की धारा 85 और 86 हैं. कोर्ट के इस फैसले का असर BNS की इन्हीं धाराओं पर भी होगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस कानून का दुरुपयोग न हो. कोर्ट ने आदेश दिया कि:

अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन हो
किसी भी आरोपी को बिना प्रारंभिक जांच के गिरफ्तार नहीं किया जाएगा

कोर्ट ने यह भी माना कि धारा 498A का दुरुपयोग होता रहा है. कनविक्शन रेट सिर्फ 15% है, जबकि चार्जशीटिंग रेट 93.6% है.
रिश्तों की बदलती परिभाषा क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी तौर पर शादी के करीब ला दिया है. कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि क्रूरता के खिलाफ सुरक्षा किसी के भी साथ भेदभाव नहीं कर सकती है. चाहे वह शादीशुदा हो या लिव-इन में हो. इसके लिए:

लिव-इन रिलेशनशिप को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह आज की सामाजिक वास्तविकता है.
&#039;शादी जैसे रिश्ते&#039; में महिला को शादीशुदा महिला के बराबर सुरक्षा मिलेगी.
शादी का इरादा होना जरूरी है.
DV Act से आपराधिक सुरक्षा नहीं मिलती, इसलिए 498A/BNS की जरूरत है.
गिरफ्तारी से पहले जांच अनिवार्य होगी.

क्रूरता, किसी भी तरह, दरवाजे पर नहीं रुकती. चाहे वह घर किसी शादीशुदा महिला का हो या न हो. यह फैसला भारतीय समाज में बदलते रिश्तों को कानूनी मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. हालांकि, इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कोर्ट ने सख्त दिशा-निर्देश भी दिए हैं.
अब देखना यह होगा कि इस फैसले का असर आने वाले समय में कितना गहरा पड़ता है. क्या यह महिलाओं को सशक्त बनाता है, या फिर कानूनी विवादों को बढ़ाता है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, क्या, सुप्रीम, कोर्ट, के, फैसले, से, शादीशुदा, और, लिव-इन, पार्टनर, में, कोई, फर्क, नहीं</media:keywords>
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        <title>यूसुफ पठान लौटेंगे ममता बनर्जी के साथ? लंच के बाद बदल गई कहानी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूसुफ-पठान-लौटेंगे-ममता-बनर्जी-के-साथ-लंच-के-बाद-बदल-गई-कहानी</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से अलग हुए सांसदों के गुट को लेकर अटकलों पर विराम लग गया है. टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए यूसुफ पठान और अबु ताहिर को लेकर सूत्रों ने बताया कि कहीं कोई मतभेद नहीं है.&amp;nbsp;
कई रिपोर्ट्स में दावा था कि नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) के कुछ सांसद एनडीए के साथ रहने में असहज़ हैं. ऐसे में ममता बनर्जी के खेमे में फिर लौट सकते हैं. हालांकि अब सूत्रों ने साफ कर दिया है कि कोई असहजता नहीं है और NCPI के साथ बने हुए हैं.&amp;nbsp;
सीएम ने साथ किया लंच
मंगलवार (4 अगस्त) को दिल्ली में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का एनसीपीआई के तमाम सांसदों के साथ लंच हुआ, उसमें वो सांसद मौजूद थे जिनको लेकर पाला बदलने की चर्चा चल रही थी.&amp;nbsp;
लंच के बाद क्या बोले नेता?
सीएम के साथ लंच के बाद बीजेपी नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा, &quot;यह एक शिष्टाचार भेंट थी; मैं बस उनसे मिलने आया था.&quot; वहीं बैठक के बाद टीएमसी की बागी रचना बनर्जी ने कहा कि सीएम के साथ अच्छी मुलाकात रही. हम लोग इंतजार कर रहे थे. कई सलाह मिली. हम अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करेंगे. क्षेत्र का विकास कैसे होगा, इन सब मुद्दों पर बातचीत हुई.&amp;nbsp;
सीएम के साथ बैठक क्यों जरूरी?
विधानसभा चुनाव के बाद TMC से अलग हुए 20 लोकसभा सांसदों ने NCPI जॉइन किया था. ये सभी सांसद संसद के अंदर NDA सहयोगी के तौर पर काम कर रहे हैं, लेकिन यह ग्रुप लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है.
आज की मीटिंग को लेकर राजनीतिक जानकारों का कहना है कि BJP के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और NCPI सांसदों के बीच तालमेल और मजबूत होने की उम्मीद है. यह तालमेल चुनाव क्षेत्र के विकास, संसदीय रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों के लिए जरूरी है.&amp;nbsp;
अधिकारी ने इससे पहले 8 जून को बागी सांसदों से मुलाकात की थी, जब TMC संसदीय दल में टूट हो रही थी. जब से सांसद औपचारिक रूप से NCPI में शामिल हुए और पार्टी NDA का हिस्सा बनी, तब से मुख्यमंत्री और संसदीय समूह के बीच कोई ठोस बैठक नहीं हुई. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अभिजीत दीपके की किस बात पर भड़के पूर्व विदेश सचिव, सुनाई खरी&amp;खरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अभिजीत-दीपके-की-किस-बात-पर-भड़के-पूर्व-विदेश-सचिव-सुनाई-खरी-खरी</link>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के जंतर मंतर पर एक महीने तक विरोध प्रदर्शन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा और केंद्र सरकार की तरफ से सभी शर्तों के मान लेने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना प्रदर्शन तो खत्म कर दिया, लेकिन सरकार की तरफ से उनकी शर्तें मान लेने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके खासे चर्चा में रहने लगे. इस बीच उन्होंने देश के प्रधानमंत्री को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की, जिस पर भारत के पूर्व विदेश सचिव रहे कंवल सिब्बल अभिजीत दीपके पर भड़क गए और उन्होंने अभिजीत को खरी-खरी सुना दी.
सीजेपी संस्थापक को लेकर क्या बोले पूर्व विदेश सचिव?
दरअसल, हाल ही में सीजेपी प्रमुख का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो कहते हैं कि मैं अपने स्कॉलरशिप के दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हूं और मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उनकी अपनी डिग्रियां दिखाने का अनुरोध करता हूं. दीपके के इस टिप्पणी पर का वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोमवार (3 अगस्त, 2026) शेयर करते हुए पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने एक पोस्ट साझा किया.
1966 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) के पूर्व अधिकारी कंवल सिब्बल ने अपने पोस्ट में अभिजीत दीपके की टिप्पणी पर सवाल उठाए और कहा, &amp;lsquo;इस टिप्पणी में हो सकता है कि यह उस सोच की पूरी तस्वीर को न दिखा पा रहा है, लेकिन इससे देखने पर ऐसा लगता है कि अभिजीत दीपके अपने आपको देश के प्रधानमंत्री के बराबर या उनके प्रतिद्वंद्वी समझते हैं. ये घमंड है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

This excerpt may not present the whole picture .But judging from this he sees himself as an equal and rival to the Prime Minister of India. Arrogance. https://t.co/PFz15rKfnC
&amp;mdash; Kanwal Sibal (@KanwalSibal) August 3, 2026



आखिर अभिजीत दीपके ने क्या कहा था?
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए लगातार केंद्र सरकार को लेकर टिप्पणियां कर रहे थे. उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी. इस दौरान जब उनसे उनकी डिग्री और स्कॉलरशिप के कागजातों के बारे में सवाल किया गया, तब उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैं अपने एजुकेशन लोन और स्कॉलरशिप के कागजात दिखाने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं. मैं प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध करता हूं कि वह भी अपनी डिग्री दिखा दें.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः उदयनिधि स्टालिन की हिरासत पर मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- पूछताछ के बाद... ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अभिजीत, दीपके, की, किस, बात, पर, भड़के, पूर्व, विदेश, सचिव, सुनाई, खरी-खरी</media:keywords>
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        <title>NEET PG एडमिशन रिव्यू के लिए बनी कमेटी, जानें निगेटिव मार्किंग का पूरा विवाद</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने मेडिकल पीजी में दाखिले की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया है. नकारात्मक अंक पाने वालों को भी पीजी सीट मिलने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी गई. 4 मई को कोर्ट ने ही व्यवस्था में स्थायी सुधार के लिए कहा था.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
13 जनवरी 2026 को नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स ने NEET-PG 2025-26 के तीसरे राउंड का कट-ऑफ घोषित किया. इसमें कट-ऑफ परसेंटाइल को काफी घटा दिया गया. याचिकाकर्ताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि इस फैसले से -40 अंक पाने वाले छात्रों को भी पीजी में प्रवेश का अवसर मिल रहा है. यह चिकित्सा शिक्षा के मानकों के खिलाफ है.
केंद्र सरकार का क्या था जवाब?
केंद्र ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर दलील दी कि NEET-PG एक कंपीटिटिव रैंकिंग परीक्षा है. इसमें नेगेटिव मार्किंग भी होती है. इसके चलते कुल अंक नकारात्मक भी हो सकते हैं. इस परीक्षा में बैठने वाला हर उम्मीदवार 4.5 साल की मेडिकल पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी कर चुका एक योग्य MBBS डॉक्टर है, जो कानूनन प्रैक्टिस करने का हकदार है. ऐसे में कट-ऑफ कम करने से उनकी शैक्षणिक योग्यता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.
कोर्ट ने क्या कहा था?
केंद्र ने अपने हलफनामे में यह भी बताया था कि मेडिकल पीजी की खाली सीटों को भरना भी ज़रूरी है. उम्मीदवारों को उनके मार्क्स के आधार पर ही विशेषज्ञ पीजी कोर्स में प्रवेश मिलता है. दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्थायी हल की ज़रूरत बताई थी. जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा था कि हर साल काउंसलिंग में होने वाली देरी और खाली पड़ी सीटों की समस्या का एक स्थायी व संस्थागत समाधान बेहद जरूरी है.
कमेटी का गठन
केंद्र सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने कमेटी का गठन किया है. स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (DGHS) डॉ. लोवनीश जी. कृष्णा हैं. 12 सदस्यों वाली इस उच्चस्तरीय कमेटी में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBE) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.
7 साल में 36 देशों से लाए गए 275 भगोड़े अपराधी, शाह बोले- मोदी सरकार में&amp;hellip;
कमेटी क्या करेगी?
कमेटी का मुख्य काम NEET के ज़रिए होने वाले मेडिकल पीजी की प्रवेश व्यवस्था का ऑडिट कर उसकी खामियों की पहचान करना है. कमेटी उन समस्याओं का व्यावहारिक समाधान भी सुझाएगी. &amp;nbsp;कोर्ट ने कमिटी के गठन पर सहमति जताते हुए कहा कि वह 8 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दे.
किसी का फटा सिर, किसी के कान&amp;hellip;, फ्लाइट टर्बुलेंस से जख्मी पैसेंजर की आपबीती ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 21:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जीते पीके..., ढह गया बीजेपी का 30 साल का किला, RJD की भी बढ़ी चिंता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जीते-पीके-ढह-गया-बीजेपी-का-30-साल-का-किला-rjd-की-भी-बढ़ी-चिंता</link>
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        <description><![CDATA[ पीके पास हो गए... बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर प्रशांत किशोर ने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ चुनावी रणनीतिकार ही नहीं, बल्कि जनता का भरोसा जीतकर खुद चुनाव भी जीत सकते हैं. उनकी यह जीत कई मायनों में बेहद अहम मानी जा रही है. सबसे बड़ी वजह यह है कि बांकीपुर सीट पिछले करीब तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही है. यह वही सीट है, जहां से बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार चुनाव जीतते रहे थे. नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई और उपचुनाव कराया गया. ऐसे में इस चुनाव को बीजेपी की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा था.
इसके अलावा, सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला बड़ा चुनाव था, जिसमें बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. यही कारण है कि इस जीत ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. मतगणना शुरू होने के साथ ही शुरुआती रुझानों में प्रशांत किशोर बढ़त बनाते नजर आए और 32 राउंड तक चली गिनती में उन्होंने लगभग हर चरण में अपनी बढ़त बरकरार रखी. जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, बीजेपी और जन सुराज पार्टी के बीच जीत का अंतर भी बढ़ता गया. शुरुआत में बीजेपी कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास इतना अधिक था कि मतगणना शुरू होने से पहले ही जीत का जश्न मनाने के लिए लड्डू तैयार कर लिए गए थे.
बीजेपी खेमे में सन्नाटा
हालांकि, कुछ ही राउंड के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई. जन सुराज के कार्यकर्ता जश्न मनाते नजर आए, जबकि बीजेपी खेमे में सन्नाटा पसर गया. इस जीत को कई राजनीतिक विश्लेषक जन सुराज के अभियान, स्थानीय मुद्दों और मौजूदा राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की प्रतिक्रिया से भी जोड़कर देख रहे हैं. प्रशांत किशोर के लिए यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक जीवन का पहला चुनावी जनादेश है. देश के कई बड़े नेताओं के लिए चुनावी रणनीति तैयार कर चुके प्रशांत किशोर को लंबे समय तक एक सफल चुनावी रणनीतिकार के रूप में जाना जाता रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक कई बड़े नेताओं के चुनावी अभियानों में उनकी भूमिका चर्चा का विषय रही है. लेकिन जब उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा, तब सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या जो व्यक्ति दूसरों को चुनाव जिताने की रणनीति बनाता है, वह खुद जनता का भरोसा जीत पाएगा?
इस जीत के खास मायने
बांकीपुर की जीत ने फिलहाल इस सवाल का जवाब उनके पक्ष में दे दिया है. प्रशांत किशोर ने वर्ष 2024 में जन सुराज पार्टी का गठन किया था. इसके बाद 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली. उस हार के बाद विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाए थे कि क्या प्रशांत किशोर की रणनीति केवल सलाह देने तक सीमित है और क्या वह खुद चुनावी राजनीति में सफल हो पाएंगे? हालांकि, बांकीपुर उपचुनाव की जीत ने इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया है.
अब प्रशांत किशोर केवल चुनावी रणनीतिकार नहीं, बल्कि जनता से सीधे जनादेश प्राप्त करने वाले नेता भी बन गए हैं. बांकीपुर सीट बीजेपी के लिए हमेशा से प्रतिष्ठा का विषय रही है. यही वजह थी कि पार्टी को भरोसा था कि यह सीट उसके पास ही बनी रहेगी. लेकिन इस चुनाव में राजनीतिक परिस्थितियां धीरे-धीरे बदलती चली गईं. प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश की कि यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि बिहार में नई राजनीति की शुरुआत का चुनाव है.
उन्होंने अपने भाषणों में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी लगातार निशाना साधा और दावा किया कि यदि बांकीपुर में बीजेपी हारती है, तो उसका संदेश पूरे बिहार में जाएगा. चुनाव परिणाम आने के बाद उनकी यह रणनीति सफल होती दिखाई दी और बांकीपुर का उपचुनाव राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक चर्चा वाले चुनावों में शामिल हो गया. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बांकीपुर&amp;दतिया उपचुनाव में हार पर आया BJP चीफ नितिन नवीन का पहला रिएक्शन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बांकीपुर-दतिया-उपचुनाव-में-हार-पर-आया-bjp-चीफ-नितिन-नवीन-का-पहला-रिएक्शन</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बांकीपुर-दतिया-उपचुनाव-में-हार-पर-आया-bjp-चीफ-नितिन-नवीन-का-पहला-रिएक्शन</guid>
        <description><![CDATA[ बिहार की बांकीपुर समेत तीन सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं. दतिया में कांग्रेस ने जीत हासिल की तो बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने बीजेपी का 30 साल का किला ढहा दिया. हालांकि, भाजपा गुजरात की मांजलपुर सीट बचाने में कामयाब रही. उपचुनाव परिणाम पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा, &#039;आज तीन विधानसभा उपचुनावों में आए जनादेश को हम स्वीकार करते हैं.&#039;
उन्होंने आगे लिखा, &#039;गुजरात की मांजलपुर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी पर अपना भरोसा जताने के लिए वहां की जनता का हृदय से आभार. इस जीत के लिए भाजपा के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई. बांकीपुर और दतिया में हमें अपेक्षित जनादेश प्राप्त नहीं हुआ. हम इन दोनों क्षेत्रों के चुनाव परिणामों का पूरी गंभीरता से आत्ममंथन करेंगे और नई ऊर्जा और संकल्प के साथ जनता के बीच जाकर उनके विश्वास को और अधिक मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे.&#039;

आज तीन विधानसभा उपचुनावों में आए जनादेश को हम स्वीकार करते हैं।गुजरात की मांजलपुर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी पर अपना विश्वास व्यक्त करने के लिए वहाँ की जनता का हृदय से आभार। इस विजय के लिए भाजपा के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई।बांकीपुर और&amp;hellip;
&amp;mdash; Nitin Nabin (@NitinNabin) August 3, 2026



बांकीपुर में प्रशांत किशोर की प्रचंड जीत
उपचुनाव की सबसे चर्चित सीट बिहार की बांकीपुर रही. जहां बड़ा उलटफेर देखने को मिला. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में जीत दर्ज करते हुए भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों से शिकस्त दी. इस जीत के साथ प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं, जबकि भाजपा को इस प्रतिष्ठित सीट पर बड़ा झटका लगा है.

यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा पहुंचे नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई थी. साल 1995 से यह सीट भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती रही है. 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन पहली बार यहां से विधायक बने और 2025 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे. ऐसे में इस सीट पर भाजपा की हार को बड़ा झटका माना जा रहा है.
दतिया में कांग्रेस ने लहराया परचम
मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने छह हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है. कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6000 से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी. कांग्रेस ने दतिया में यह लगातार दूसरी जीत दर्ज की है. इस जीत से कांग्रेसी गदगद है, वहीं भाजपा ने ऐलान किया है कि वह इस बात की समीक्षा करेगी कि आखिर भाजपा क्यों हारी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी हो सकती है. इस चुनाव को राज्य की सियासत के तौर पर काफी अहम माना जा रहा था.
बांकीपुर उपचुनाव: कहां चूकी BJP? हार की 5 बड़ी वजहें
मांजलपुर में खिला कमल
गुजरात में मांजलपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रही. यहां भाजपा के उम्मीदवार सतीश पटेल ने कांग्रेस उम्मीदवार भीखा रबारी को बड़े अंतर से शिकस्त दी. बीजेपी उम्मीदवार को 55,481 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 24,851 मत हासिल किए. इस जीत से वडोदरा में भाजपा की पारंपरिक मजबूत पकड़ और मजबूत हो गई है.
ऐसा क्या हुआ कि BJP 8 महीने में ही गंवा बैठी 30 साल का अभेद किला? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कल होगा NDA दलों का साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’, किन मुद्दों पर होगी चर्चा?</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के ससंदीय दलों के बीच मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को साप्ताहिक मंगल मिलन बैठक का आयोजन किया जाएगा. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण बैठक राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में संसद पुस्तकालय भवन में स्थित जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में सुबह साढ़े 9 बजे शुरू होगी.
इससे पहले NDA संसदीय दलों की मंगल मिलन बैठक पिछले मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को संपन्न हुई थी और उस बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे. पीएम मोदी के अलावा, बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ-साथ एनडीए के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे.
बैठक में किन मुद्दों पर हुई थी चर्चा
पिछले हफ्ते आयोजित बैठक में केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रीजीजू ने गठबंधन के सांसदों को संबोधित किया था. इसके साथ ही, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ केंद्रीय पंचायती राज एवं मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी अपने विचार रखे थे और केंद्र सरकार की योजनाओं और पहलों की प्रगति को लेकर जानकारी साझा की.
केंद्रीय उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बैठक में हाल ही में भारत की तरफ से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की सफलता और उसके रणनीतिक प्रभावों के बारे में सभी सांसदों को जानकारी दी थी. वहीं, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने देश के मछली पालन के क्षेत्र की प्रगति, सरकार की विभिन्न पहलों और भविष्य की विकास के रोडमैप के बारे में जानकारी दी थी.&amp;nbsp;

विपक्ष लगातार केंद्र सरकार से कर रहा जवाब की मांग
वहीं, दूसरी तरफ संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार (3 अगस्त, 2026) को 20 जुलाई, 2026 को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में केंद्र सरकार से जवाब की मांग की है.
विपक्ष ने इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगातार हमला तेज कर रखा है. विपक्ष का आरोप है कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पैलेट गन का इस्तेमाल किया. उन्होंने अमित शाह के सदन में न आने पर सवाल उठाते हुए इस मामले में उनकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की.&amp;nbsp;
यह भी पढे़ंः &amp;lsquo;मार्क जुकरबर्ग मांगे माफी&amp;rsquo;, PM मोदी के वीडियो विवाद पर बोले संसदीय समिति चीफ ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>दूसरे चरण की जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी, कब और कहां होगी काउंटिंग?</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने सोमवार (3 अगस्त, 2026) को लद्दाख, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जारी जणगणना की दूसरे चरण के आयोजन के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. सरकार ने बताया है कि दो केंद्र शासित प्रदेशों और दो राज्यों में जारी जनगणना के दूसरे चरण का आयोजन एक से 30 सितंबर, 2026 तक किया जाएगा. &amp;nbsp;
सरकार ने राजपत्र अधिसूचना में क्या कहा?
न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार की तरफ से जारी राजपत्र अधिसूचना में भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इन सभी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना इस साल तक एक सितंबर से लेकर 30 सितंबर, 2026 तक कराई जाएगी. इसके बाद, उसके अगले महीने एक से पांच अक्टूबर तक पुनरीक्षण यानी रिवीजन प्रक्रिया को आयोजित किया जाएगा.&amp;nbsp;



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खुद से भी अपने नाम करा सकते हैं दर्ज
हालांकि, लद्दाख और जम्मू कश्मीर के साथ-साथ अन्य दोनों राज्यों में जनगणना के दूसरे चरण की शुरुआत अगले महीने 1 सितंबर से होने वाली है, लेकिन अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि जनगणना के संचालन के लिए घर-घर जाकर जनसंख्या गणना शुरू होने से ठीक पहले 17 से 31 अगस्त, 2026 तक लोगों के पास खुद से अपना नाम जनगणना के लिए दर्ज कराने का ऑप्शन मौजूद रहेगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

इसमें यह भी कहा गया कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से प्रभावित गैर-समान समय वाले इलाकों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की रात 12 बजे होगी. वहीं, देश के बाकी हिस्सों के लिए जनसंख्या गणना का दूसरा चरण अगले साल शुरू होने की संभावना है.
देश की आजादी के बाद यह आठवीं जनगणना
देश के आजादी के बाद से अब तक यह आठवीं जनगणना है, जो कुल दो चरणों में संपन्न कराई जा रही है. इस दौरान यह पहली बार है जब जनगणना के जनसंख्या गणना प्रक्रिया के दौरान जाति से संबंधित जानकारियों को भी इकट्ठा किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट ने देश में जनगणना की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए कुल 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जो अब तक की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया होगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः कल होगा NDA दलों का साप्ताहिक &amp;lsquo;मंगल मिलन&amp;rsquo;, किन मुद्दों पर होगी चर्चा? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>स्वतंत्रता दिवसः अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां, पाकिस्तान से लगने वाली सीमा पर चलाया ऑपरेशन</title>
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        <description><![CDATA[ भारत अगले हफ्ते 15 अगस्त, 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. ऐसे में देश की सभी सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह के खतरे को लेकर पूरी तरह से अलर्ट हो गई हैं. वहीं, स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तान की ओर से होने वाली किसी भी नापाक साजिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी कमर कस ली है.
इसी सिलसिले में जम्मू पुलिस और सीमा सुरक्षा बल यानी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास के इलाकों में संयुक्त एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया है. इंटरनेशनल बॉर्डर पर सुरक्षा को मजबूत करने और कड़ी निगरानी बनाए रखने की कोशिशों के तहत, बॉर्डर पुलिस पोस्ट अल्लाह के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बॉर्डर आउट पोस्ट पीतल के बॉर्डर इलाके में एक संयुक्त एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन चलाया गया.
ऑपरेशन में नहीं मिली कोई संदिग्ध गतिविधि या सुरंग
यह ऑपरेशन जम्मू पुलिस और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने मिलकर चलाया. टीमों ने तय इलाके में अच्छी तरह से तलाशी ली, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या जमीन के नीचे बनी ऐसी सुरंगों का पता लगाया जा सके, जिनका इस्तेमाल गैर-कानूनी तरीके से बॉर्डर पार करने के लिए किया जा सकता है.
पुलिस और बीएसएफ की कड़ी मशक्कत के बाद सर्च ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ और कोई संदिग्ध गतिविधि या सुरंग नहीं मिली और इलाके में सुरक्षा की स्थिति कुल मिलाकर शांतिपूर्ण और सामान्य रही.&amp;nbsp;

नियमित रूप से चलाए जाते हैं ऐसे ऑपरेशन
जम्मू पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर, बॉर्डर इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमेशा हाई अलर्ट पर रहती है और नियमित रूप से ऐसे ऑपरेशन चलाती रहती है.
दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस के पहले किए जाएंगे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
सीमा से लेकर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली और देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर प्रशासन और सुरक्षा बलों की तरफ से सुरक्षा सुरक्षित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एंजेंसियों के साथ जांच एजेंसियों की आंखें भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि को भांपने के लिए पूरी तरह से टिकी हुई हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः PoJK में नहीं थमा बवाल, चौथे दिन मुजफ्फराबाद में आगजनी-प्रदर्शन, गोलीबारी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्वतंत्रता, दिवसः, अलर्ट, पर, सुरक्षा, एजेंसियां, पाकिस्तान, से, लगने, वाली, सीमा, पर, चलाया, ऑपरेशन</media:keywords>
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        <title>संसद में चढ़ावा चोरी के ड्रामे पर कीर्ति आजाद बोले&amp; &amp;apos;पप्पू यादव ने जो किया वो...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/संसद-में-चढ़ावा-चोरी-के-ड्रामे-पर-कीर्ति-आजाद-बोले-पप्पू-यादव-ने-जो-किया-वो</link>
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        <description><![CDATA[ बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सासंद पप्पू यादव ने संसद परिसर में गेरुआ वस्त्र पहनकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले को लेकर प्रदर्शन किया था. पप्पू यादव के संसद परिसर में गेरुआ वस्त्र पहनने को लेकर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि पप्पू यादव ने दर्शाया है कि किस तरह डकैती होती है.
&#039;स्वामी निरित्यनंद दास भगवाधारी हैं&#039;कीर्ति आजाद ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि &#039;स्वामी नित्यानंद दास भगवाधारी हैं, गोविंद देव गिरि, दिनेंद्र दास जैसे लोग भगवाधारी हैं ट्रस्ट में. इसमें इतने सारे भगवाधारी हैं.&#039;
सरकार पर साधा निशानाकीर्ति आजाद ने आगे कहा- &#039;नितिन नवीन हनुमान जी को दौड़ा रहे हैं. ये सब संस्थान का सम्मान नहीं है. पप्पू यादव ने तो दर्शाया कि किस तरह डकैती हुई है.&#039;
भगवा पहनने पर कही थी ये बातसंसद परिसर में भगवा पहनने की वजह से वाराणसी में पप्पू यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी. एफआईआर दर्ज होने के बाद पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था- &#039;एफआईआर से न तो राहुल गांधी कभी डरे हैं और न ही प्रियंका गांधी, इसलिए वह भी डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा था- &amp;nbsp;भगवा पहनने का अधिकार हमें नहीं है? जब गिरी को छद्म रूप से गेरुआ पहनकर चोरी करने का अधिकार है तो पप्पू यादव को गेरुआ पहनकर गेरुआ की रक्षा करने का अधिकार नहीं है? और मैं खीरा-ककड़ी हूं क्या?&#039;
पप्पू यादव पर हुआ हमलापप्पू यादव के संसद में प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए सरकारी आवास पर 2 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी. जहां पर उस समय हंगामा मच गया, जब एक युवक ने कथित तौर पर उन पर चप्पल फेंककर हमला कर दिया.
ये भी पढ़ें: बांकीपुर, दतिया और मंजलपुर उपचुनाव के नतीजे आज, कौन मारेगा बाजी? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>संसद, में, चढ़ावा, चोरी, के, ड्रामे, पर, कीर्ति, आजाद, बोले-, पप्पू, यादव, ने, जो, किया, वो...</media:keywords>
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        <title>गडकरी के दावे पर कांग्रेस का पलटवार, कहा&amp; &amp;apos;ई20 पेट्रोल से...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि देशभर में ई20 पेट्रोल की बिक्री को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और वे जवाबदेही तथा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. मुख्य विपक्षी दल ने यह आरोप भी लगाया कि मोदी सरकार के मंत्री लोगों को यह भरोसा दिलाने में नाकाम रहे हैं कि ई20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि इसके समर्थन में कोई ठोस आंकड़े या रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हैं.
ई20 पेट्रोल एक ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल मिला होता है.
नितिन गडकरी के दावे पर पलटवार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने &amp;lsquo;एक्स&amp;rsquo; पर एक पोस्ट में कहा कि 29 जुलाई को संसद में ई20 पेट्रोल के देशव्यापी क्रियान्वयन पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दिए गए जवाब से समाधान की बजाय और अधिक सवाल खड़े हुए हैं. उनके अनुसार, गडकरी का दावा है कि ई20 को सालों तक वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं है.
रमेश ने पर कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;लेकिन पिछले कई महीनों से देशभर के उपभोक्ता और मैकेनिक कम माइलेज, इंजन के प्रदर्शन में गिरावट, वाहनों पर ई20 के दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता, इंजन की अनुकूलता, ठंडे मौसम में स्टार्ट होने में दिक्कत, 2023 से पहले बने वाहनों में तेजी से घिसावट, पुराने वाहनों में फ्यूल इंजेक्टर जाम होने, ईंधन पाइपों में जंग लगने तथा रबर के पुर्जों में दरार आने जैसी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं.&amp;rsquo;&amp;rsquo;

29 जुलाई 2026 को संसद में E20 पेट्रोल के देशभर में रोलआउट पर नितिन गडकरी के जवाब ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए।उन्होंने दावा किया कि E20 को वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है और इससे वाहनों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचने का&amp;hellip;
&amp;mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) August 3, 2026



उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ताओं के पास ई20 ईंधन के अलावा लगभग कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है.
44 हजार वाहनों के मालिक पर सर्वे
रमेश ने दावा किया कि 2023 से पहले बने 44,000 से अधिक पेट्रोल वाहनों के मालिकों पर जून 2026 में किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में लोगों ने ई20 लागू होने के बाद प्रतिकूल प्रभाव महसूस होने की बात कही.
उन्होंने कहा, &#039;सितंबर 2025 में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जैव ईंधन के कारण वाहन या इंजन को नुकसान पहुंचने संबंधी शिकायतों को बकवास बताया था.&#039;
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने आरोप लगाया कि जुलाई, 2026 की &#039;ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया&#039; (एआरएआई) की रिपोर्ट के बावजूद मोदी सरकार ई20 से जुड़े दावों को लगातार खारिज कर रही है.
उन्होंने कहा कि टिकाऊपन संबंधी परीक्षणों में यात्री वाहनों के इंजनों में खराबी और विफलता के मामले भी सामने आए.
रमेश ने दस्तावेज का हवाला देते हुए दावा किया कि ई20 से ईंधन टैंक और अन्य आंतरिक धातु के पुर्जों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है.
उन्होंने यह दावा भी किया कि ई20 के कारण पुराने चार पहिया वाहनों की ईंधन दक्षता में छह से सात प्रतिशत, पुराने दो पहिया वाहनों में तीन से चार प्रतिशत तथा ई20 अनुकूल चार पहिया वाहनों में भी एक से दो प्रतिशत तक की कमी आती है.
रमेश ने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;जनता का आक्रोश बढ़ रहा है. लोग जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. वहीं, मोदी सरकार के मंत्री ई20 के पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा लोगों को नहीं समझा पा रहे हैं, क्योंकि इसके समर्थन में कोई वास्तविक आंकड़े या रिपोर्ट मौजूद नहीं हैं.&amp;rsquo;&amp;rsquo;
इनपुट-भाषा
यह भी पढ़ें: संसद में चढ़ावा चोरी के ड्रामे पर कीर्ति आजा बोले- &#039;पप्पू यादव ने जो किया वो...&#039; ]]></description>
        <enclosure url="http://hindi.attentionindia.com/uploads/images/202608/image_870x580_6a704a8a3d96a.jpg" length="78152" type="image/jpeg"/>
        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>गडकरी, के, दावे, पर, कांग्रेस, का, पलटवार, कहा-, ई20, पेट्रोल, से...</media:keywords>
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        <title>बाढ़ पीड़ितों को मिलेंगे 75000 रुपए, असम सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ असम समेत भारत के कुछ राज्य बुरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं. इसकी वजह से केरल में छह लोगों की मौत भी हो चुकी है. इस बीच असम सरकार ने अपने राज्य के प्रभावित लोगों की मदद के लिए बड़ा कदम उठाया है. असम की बीजेपी सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सोमवार (3 अगस्त) को लगभग 75,000 रुपये प्रति परिवार की अंतरिम राहत की पहली किस्त जारी की.&amp;nbsp;
&#039;पीटीआई&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी असम में आई भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है. रविवार को तीन और लोगों की मौत की पुष्टि हुई. इस बीच, बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या घटकर लगभग 1.35 लाख रह गई है.
15000 रुपए पहली किश्त में जारी
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा सर्वाधिक प्रभावित जिलों के दौरे पर हैं, उन्होंने डिब्रूगढ़ से अंतरिम राहत की पहली किस्त जारी की. अधिकारियों के मुताबिक, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में जिन परिवारों के मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें पहली किस्त के तहत 15,000 रुपये प्रति परिवार दिए जाएंगे. इसके अलावा अन्य सहायता भी प्रदान की जाएगी, जिससे कुल राहत राशि 75,000 रुपये प्रति परिवार होगी.
मुख्यमंत्री सोमवार को शिवसागर जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करेंगे और बाढ़ प्रभावित लोगों से भी मुलाकात करेंगे. रविवार को बाढ़ से तीन और लोगों की जान चली गई. ये तीनों शिवसागर जिले से हैं, जो मौजूदा बाढ़ की लहर में सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल है.

असम के पांच जिलों में एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
राज्य के चराइदेव, धेमाजी, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर जिलों में कुल 1,36,200 लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं. शनिवार को इन पांच जिलों में लगभग 1.80 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे. इनमें शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 55,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए. चराइदेव में लगभग 40,000 और जोरहाट में करीब 22,000 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.
प्रशासन की ओर से पांचों जिलों में कुल 54 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां वर्तमान में 13,771 लोगों को आश्रय और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. प्रभावित जिलों में 15,422 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी जलमग्न है. अधिकारियों ने बताया कि गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.
इनपुट - पीटीआई
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;जंतर मंतर की जगह...&amp;apos;, दिल्ली प्रोटेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए इस्तेमाल होने वाले जंतर-मंतर को लेकर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता ने मांग की कि प्रदर्शन के लिए कोई दूसरी जगह तय की जाए, क्योंकि जंतर-मंतर अब ऐसे आयोजनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है. याचिका में कहा गया कि जंतर-मंतर पर आने-जाने में लोगों को काफी परेशानी होती है. वहां चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. इसी वजह से प्रदर्शन के लिए किसी नए और बेहतर स्थान का चयन किया जाना चाहिए.
सुनवाई के दौरान अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वह इस मामले में सरकार से निर्देश लेकर अपना जवाब दाखिल करें. इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रस्तावित मार्च का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर बड़े स्तर पर फिर से प्रदर्शन या मार्च होता है तो 20 जुलाई जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है. इस पर अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े मामलों को संभालना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का काम है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है. अब अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा है कि वह PIL पर निर्देश लें और उस याचिका का जवाब दें, जिसमें विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का अनुरोध किया गया है. उच्चतम न्यायालय में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है और जरूरी सामान की आपूर्ति में बाधा आती है.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;INDIA गठबंधन को जवाब देना होगा&amp;apos;, चढ़ावा चोरी और पेलेट गन पर फायर हुए खरगे</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार (3 अगस्त) को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ विपक्षी दलों के सांसदों संग बैठक की. इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान संसद में मोदी सरकार को घेरने को लेकर रणनीति बनाई गई.&amp;nbsp;
कांग्रेस दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर लगातार मोदी सरकार को घेर रही है. बीते दिनों संसद परिसर में राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर विपक्ष का आक्रामक प्रदर्शन देखने को मिला था, जिसके बाद वाराणसी में राहुल गांधी और पप्पू यादव समेत कई नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई है.

विपक्षी नेताओं संग बैठक को लेकर खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को INDIA गठबंधन को जवाब देना होगा. इसके अलावा छात्रों पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने अमित शाह को घेरा.
राम मंदिर चंदे को लेकर उठाए सवालमल्लिकार्जुन खरगे ने पोस्ट कर कहा कि गृह मंत्री को संसद में आकर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल के बारे में सफाई देनी चाहिए. इसके बाद उन्होंने राम मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए. खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह जवाब देना चाहिए कि श्री राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे की चोरी कैसे हुई, जबकि ट्रस्ट प्रधानमंत्री की देखरेख में था.

Modi Govt will have to answer INDIA 1. Home Minister should come to the Parliament and explain the lathicharge-pellet gun action on students. 2. Prime Minister should answer how the चंदा-चढ़ावा donated to Shri Ram Mandir, was stolen, even as the Trust was under PM&#039;s&amp;hellip; pic.twitter.com/CulQC8d0lj
&amp;mdash; Mallikarjun Kharge (@kharge) August 3, 2026



अमित शाह के इस्तीफे की मांग&amp;nbsp;इससे पहले खरगे ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया था. उन्होंने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा ले लेना चाहिए. खरगे ने 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर किए गए बल प्रयोग का हवाला देते हुए कहा कि 10 दिन पहले सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडों और पेलेट गन से दमन किया था. इस दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के अलावा तृणमूल कांग्रेस की नेता और ममता बनर्जी की करीबी मोहुआ मोइत्रा भी मौजूद रहीं. इसके अलावा इंडिया गठबंधन के तमाम नेता मौजूद रहे.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जंतर&amp;मंतर प्रोटेस्ट के बाद अब क्या करेगी CJP? सामने आया बड़ा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ नीट परीक्षा 2026 पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं ने करीब एक महीने तक केंद्र सरकार के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद सरकार ने उनकी मांगें मान ली और प्रदर्शन खत्म हुआ. अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके अगले कुछ दिनों में अपने संगठन के कोर मेंबर्स के साथ एक बैठक करने वाले हैं.
यह बैठक महाराष्ट्र में छत्रपति संभाजीनगर में स्थित कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके के आवास पर बुधवार (5 अगस्त, 2026) को संपन्न होगी. इस बैठक का मकसद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के भविष्य का एजेंडे पर चर्चा करना है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि पिछले महीने दिल्ली में नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ एक महीने तक चले प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक्टिविस्ट्स और वालेंटियर्स को कहा गया है कि वे कुछ वक्त अपने परिवारों के साथ बिताएं. &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;
सीजेपी के आगे के एजेंडे और पंजाब पेपर लीक पर बोले थे दीपके
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने जंतर मंतर पर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के 25 जुलाई, 2026 को खत्म होने के अगले दिन यानी 26 जुलाई, 2026 को न्यूज एजेंसी एएनआई से बाचतीत के दौरान कहा था कि हम जल्द से जल्द अपनी आगे की रणनीति का खुलासा करेंगे.&amp;nbsp;

इस दौरान जब उनसे पंजाब में हुए पेपर लीक के बारे में पूछा गया था, तब दीपके ने कहा था कि हम इस मुद्दे पर भी अपनी बात जल्द रखेंगे और हम अभी उसी की प्लानिंग कर रहे हैं.
दीपके की पीएम मोदी से माफी की मांग
वहीं, 20 जुलाई, 2026 को सीजेपी के संसद चलो मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन लड़कियों से माफी मांगेंगे, जिनकी 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुरुष पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने बेरहमी से पिटाई की थी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>बंगाल में अंडे पर पॉलिटिक्स! शुभेंदु सरकार के फैसले पर क्यों भड़की TMC</title>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील में अंडे दिए जाने को लेकर विवाद और राजनीतिक घमासान अभी भी जारी है. बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार की तरफ स्कूली बच्चों के मिड-डे-मील के साथ हफ्ते में दो दिन अंडा दिए जाने की घोषणा की गई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों को अंडा हफ्ते में सिर्फ दो ही दिन क्यों देगी, बच्चों को हर दिन अंडा दिया जाना चाहिए.
मिड-डे-मील में अंडा शामिल करने पर बोले कुणाल घोष
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने रविवार (2 अगस्त, 2026) को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, &amp;lsquo;स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील में हफ्ते में सिर्फ दो ही दिन क्यों, हर रोज उन्हें खाने में अंडा देना चाहिए. जब भी स्कूल खुले हों, बच्चों को अंडा दिया जाना चाहिए. ये तो हमारी मांग के बाद दो अंडे देने की बात कही गई है, नहीं तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) वालों ने तो मेन्यू से अंडा पूरी तरह से निकाल ही दिया था.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

#WATCH | Kolkata: On eggs twice a week in mid-day meals, TMC MLA Kunal Ghosh says, &amp;ldquo;Eggs should be served daily when schools are open. The BJP had completely removed eggs from the menu. ISKCON is a respected organisation; it is a religious institution, and their menu is strictly&amp;hellip; pic.twitter.com/8NtRNDqS5N
&amp;mdash; ANI (@ANI) August 2, 2026



उन्होंने कहा, &amp;lsquo;इस्कॉन एक सम्मानिक संगठन है. मैं भी इस्कॉन में जाता हूं. प्रसाद खाता हूं, लेकिन वो एक धार्मिक प्रतिष्ठान है और उनका जो भी मेन्यू होगा, वो पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी होगा, लेकिन पोषण के लिहाज से अंडा बेहद फायदेमंद है और बच्चों के लिए भी यह एक बड़ा आकर्षण है. जो लोग शाकाहारी लाइफस्टाइल अपनाते हैं, उनके लिए शाकाहारी खाना सही है, लेकिन जो लोग अंडा खाते हैं, उन्हें इससे वंचित क्यों रखा जाए? अंडे को सिर्फ हफ्ते में दो दिन नहीं, बल्कि मिड-डे-मील का रेगुलर हिस्सा बनाया जाना चाहिए.&amp;rsquo;
बागी सांसदों को लेकर बोले टीएमसी विधायक
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों की पार्टी में वापसी को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की है. कुणाल घोष ने कहा, &amp;lsquo;जब वे लोकसभा में बोलते हैं, तो ब्रॉडकास्टिंग में उनकी पहचान टीएमसी के रूप में दिखाती जाती है, लेकिन लगता है कि उन्हें खुद अपनी राजनीतिक स्थिति का ही पता नहीं है. वे टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीतकर आए, बीजेपी के साथ बैठकें करते रहे, फिर दावा करते हैं कि वे NCPI में शामिल हो गए हैं, जबकि संसद उन्हें अब भी टीएमसी के रूप में पहचानती है. आखिर इन लोगों की असली राजनीतिक पहचान क्या है?&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बंगाल, में, अंडे, पर, पॉलिटिक्स, शुभेंदु, सरकार, के, फैसले, पर, क्यों, भड़की, TMC</media:keywords>
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        <title>तसलीमा नसरीन ने मोदी सरकार को लेकर कह दी बड़ी बात, बोलीं &amp; &amp;apos;भारत की...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/तसलीमा-नसरीन-ने-मोदी-सरकार-को-लेकर-कह-दी-बड़ी-बात-बोलीं-भारत-की</link>
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        <description><![CDATA[ बांग्लादेशी से निष्कासित लेखिका तसलीमा नसरीन (वर्तमान में नई दिल्ली में रहती हैं) ने बंगाल सरकार की तारीफ की है. उन्होंने साथ ही शुक्रिया अदा किया है. नसरीन ने कहा है कि एक सरकार ने मुझे देश छोड़ने पर मजबूर किया. दूसरी ने मुझे आने नहीं दिया और तीसरी ने मेरा स्वागत किया. मैं खुश हूं.
तसलीमा ने कहा, &#039;मैं सीएम शुवेंदु अधिकारी का शुक्रिया अदा करती हूं. क्योंकि उन्होंने मेरी सुरक्षा सुनिश्चित की. मैंने अभी यह तय नहीं किया है कि मैं कोलकाता में रहूंगी या नहीं. नसरीन ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते अच्छे रहेंगे. हम हमेशा मानते हैं कि 1971 में भारत ने हमारे लिए क्य़ा किया था. लेकिन कुछ पाकिस्तानी जिहादी भारत के खिलाफ हैं.&#039;&amp;nbsp;
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तसलीमा ने कहा- मौजूदा केंद्र सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखती है
तसलीमा नसरीन लगभग दो दशक बाद कोलकाता लौटी है. रविवार (1 जुलाई) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नसरीन ने अलग-अलग सरकारों के दौर में अपने अनुभवों के बारे में बात की. उन्होंने लेफ्ट, फ्रंट, तृणमूल कांग्रेस और मौजूदा बीजेपी सरकार के बीच साफ फर्क बताया. इसके अलावा उन्होंने केंद्र सरकार के रुख की तारीफ की. इसके अलावा नसरीन ने केंद्र सरकार के रुख की तारीफ की है.
उन्होंने कहा, &#039;मेरा मानना है कि भारत की मौजूदा सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखती है. मेरे कार्यक्रम में कोई राजनीति शामिल नहीं थी. इस एक पंक्ति के लिए मैंने कई वर्षों तक इंतजार किया है.&#039;
2007 छोड़ना पड़ा था कोलकाता
नसरीन दो दशक बाद कोलकाता लौटी हैं. जहां उन्हें 2007 में अपनी रचनाओं और संस्मरण द्विखोन्दितो को लेकर तीव्र विरोध प्रदर्शन के बीच शहर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था. यह संस्मरण 2003 मे प्रकाशित हुआ था. उनकी वापसी तब से शहर में उनकी पहली सार्वजनिक यात्रा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>तसलीमा, नसरीन, ने, मोदी, सरकार, को, लेकर, कह, दी, बड़ी, बात, बोलीं, भारत, की...</media:keywords>
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        <title>असम में बाढ़ प्रभावित लोगों की खामोशी से सेवा कर रहे कई असली नायक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/असम-में-बाढ़-प्रभावित-लोगों-की-खामोशी-से-सेवा-कर-रहे-कई-असली-नायक</link>
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        <description><![CDATA[ असम के शिवसागर और चराइदेव जिले विनाशकारी बाढ़ से पूरी तरह प्रभावित हुए हैं. ऐसे मुश्किल समय में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग और कई संगठन राहत कार्यों के लिए आगे आए हैं. जहां कई नामी हस्तियों और सेलिब्रिटीज ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत सामग्री वितरित की, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के चुपचाप मानवता की सेवा में जुटे हुए हैं.
ऐसे ही एक व्यक्ति हैं हेमंत कलिता, जो लगभग 400 किलोमीटर दूर सुवालकुची से अपने क्षेत्र के कुछ युवाओं के साथ शिवसागर पहुंचे. वे व्यक्तिगत रूप से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं. इसके साथ ही वे राहत कार्यों के दौरान बढ़ते प्लास्टिक कचरे को लेकर भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं.
हेमंत कलिता ने सरकार से क्या की अपील?
हेमंत कलिता ने कहा, &amp;lsquo;हम यहां सिर्फ बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद करने आए हैं. राहत सामग्री का अधिकांश हिस्सा प्लास्टिक के पैकेटों में दिया जा रहा है. यदि इन प्लास्टिकों का उचित निपटान नहीं किया गया, तो यह भविष्य में एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या बन सकती है. मैं सरकार से अपील करता हूं कि राहत कार्य के बाद इन प्लास्टिक कचरों को एकत्र कर उचित तरीके से नष्ट करने की व्यवस्था की जाए.&amp;rsquo;
कई संगठन दे रहे बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास में योगदान
नागालैंड के नागिनीजान स्थित गोरखा यूनियन के सदस्य नेपाली खूटी गांव में छोटे-छोटे बांस के घर बना रहे हैं. यह वही गांव है, जिसे विनाशकारी बाढ़ ने पूरी तरह तबाह कर दिया था और जहां अधिकांश घर पानी में बह गए.

इधर, लगभग 250 किलोमीटर दूर तेजपुर से सशस्त्र सीमा बल (SSB) के कंपोजिट अस्पताल की एक टीम भी शिवसागर पहुंची. &#039;मानवतार स्वार्थत आमी&#039; नामक गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से टीम ने जिले के दूर-दराज और पिछड़े इलाकों में रहने वाले बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच आवश्यक राहत सामग्री वितरित की. वहीं, लगभग 200 किलोमीटर दूर जगुन से लालपहाड़ सेमा स्टूडेंट्स यूनियन के सदस्य भी शिवसागर पहुंचे और राहत सामग्री लेकर बाढ़ पीड़ितों की सहायता की.
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद कर रहे मशहूर हस्तियां
लालपहाड़ सेमा स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष ने कहा, &amp;lsquo;हम शिवसागर के बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ खड़े होने के लिए यहां आए हैं. हम आवश्यक राहत सामग्री लेकर आए हैं और इसे दिखौमुख कॉलेज के प्राचार्य को सौंपा है, ताकि वे इसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा सकें.&amp;rsquo;
जहां एक ओर कई मशहूर हस्तियों और चर्चित लोगों की राहत यात्राओं ने सुर्खियां बटोरीं, वहीं दूसरी ओर ये गुमनाम नायक बिना किसी पहचान या प्रचार की इच्छा के लगातार लोगों की सेवा में लगे हुए हैं. राहत सामग्री पहुंचाने से लेकर बेघर परिवारों के लिए आश्रय बनाने तक, उनके निस्वार्थ प्रयास इस आपदा के बीच इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल पेश कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>शेख हसीना का क्या होगा अगला प्लान? दो साल बाद दुनिया के सामने आएंगी</title>
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        <description><![CDATA[ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपने देश में साल 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए जन आंदोलन के बीच सत्ता से बेदखल होने के ठीक दो बाद भारत में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आने वाली हैं. दरअसल, पूर्व बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC South Asia) की तरफ से एक वर्चुअली आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी, जहां वे अपने भविष्य को लेकर बनाई गई योजनाओं और अपने वतन बांग्लादेश लौटने के प्रस्तावित कार्यक्रम पर खुलकर बात कर सकती हैं.
यह कार्यक्रम बुधवार (5 अगस्त, 2026) को शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक नई दिल्ली के मथुरा रोड पर स्थित सर मार्क टली ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा. इसके साथ ही, इस कार्यक्रम की लाइव स्ट्रिमिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी की जाएगी.
सत्ता छोड़ने के ठीक दो साल बाद होगी सार्वजनिक उपस्थिति
यह कार्यक्रम शेख हसीना के बांग्लादेश की सत्ता में 15 सालों के शासन के बाद हुए पतन की दूसरी वर्षगांठ पर आयोजित होने वाला है. बता दें कि दो साल पहले 5 अगस्त के दिन ही यानी 5 अगस्त, 2024 को ही बांग्लादेश में कोटा सिस्टम के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन पूरे देश में एक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया था, जिसने प्रधानमंत्री शेख हसीना को उनकी सत्ता छोड़कर देश से भागने के लिए मजबूर कर दिया था. प्रदर्शनकारियों की धमकियों और अपनी जान के डर से शेख हसीना बांग्लादेश को छोड़कर भारत आ गई थीं.

हालांकि, भारत आने के बाद शेख हसीना ने सार्वजनिक कार्यक्रमों और फॉर्मल मीडिया इंट्रैक्शन्स से भी दूरी बनाए रखा है. ऐसे में पिछले दो सालों से पर्दे के पीछे रहने के बाद अब उनका सार्वजनिक रूप से संबोधन उनके सत्ता छोड़ने के बाद एक बहुत ही महत्वपूर्ण पब्लिक अपीयरेंस माना जा रहा है.
कार्यक्रम में शामिल होंगे बांग्लादेश की कई प्रमुख हस्तियां
FCC साउथ एशिया की तरफ आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बांग्लादेश के कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल होने वाले हैं. कार्यक्रम के इंविटेशन लिस्ट के मुताबिक, इसमें शेख हसीना के साथ बांग्लादेश के कई राजनेता, डिप्लोमैट और पब्लिक फीगर्स भी शामिल होंगे. जिनमें शेख हसीना के बेटे और बांग्लादेश के पूर्व पीएम के ICT सलाहकार सजीब वाजिद जॉय, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नोफेल और बांग्लादेश ह्यूमन राइट्स वॉच के जनरल सेक्रेटरी महम्मद अली सिद्दीकी शामिल हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः तसलीमा नसरीन ने मोदी सरकार को लेकर कह दी बड़ी बात, बोलीं - &#039;भारत की...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;लड़कियों की बेरहमी से पिटाई&amp;apos;, अभिजीत दिपके ने की PM से माफी की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर और सीजेपी प्रोटेस्ट का मुख्य चेहरा रहे अभिजीत दिपके ने शनिवार (1 अगस्त) को एक बार फिर पीएम मोदी को लेकर बयान दिया है. अभिजीत दिपके ने पीएम मोदी की तरफ से प्रदर्शन में शामिल लड़कियों से माफी मांगने की बात कही है.&amp;nbsp;
अभिजीत दिपके ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन लड़कियों से माफी मांगेंगे. जिनकी 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुरुष पुलिस अधिकारियों ने बेरहमी से पिटाई की थी.&amp;nbsp;
अभिजीत ने इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी की तरफ से 30 जुलाई को जारी वीडियो पर भी प्रतिक्रिया दी. इस वीडियो में पीएम मोदी ने कहा था कि वह उन प्रदर्शनकारियों को माफ करना चाहते हैं, जिन्होंने उन्हें और उनकी मां को भी अपशब्द कहे थे.&amp;nbsp;
दिपके बोले- पीएम मोदी रात में एक और वीडियो कर सकते हैं अपलोड
दिपके ने एक्स पर पोस्ट करते हुए एक वीडियो में कहा है कि प्रधानमंत्री शनिवार रात एक और वीडियो अपलोड कर सकते हैं. सीजेपी नेता ने कहा, मुझे लगता है कि मोदी जी रात एक नया वीडियो अपलोड करेंगे. इसलिए उम्मीद है कि वह माफी मांगेंगे. वह 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के लिए माफी मांगेंगे. &amp;nbsp;
इससे पहले अभिजीत दिपके ने एक वीडियो जारी करते हुए पूछा था कि क्या आप सिर्फ वीडियो पर ही माफ करोगे. या उनके खिलाफ दर्ज केस भी वापस लेंगे. दिपके ने पूछा है कि क्या उन आईटी सेल सदस्यों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी, जिन्होंने इतने सालों तक महिलाओं के साथ बेहद बुरा बर्ताव किया है?
पहली बार नहीं है कि दिपके ने पीएम मोदी के वीडियो को लेकर किसी तरह की प्रतिक्रिया दी हो. इससे पहले गुरुवार को जब पीएम मोदी ने हाल ही में पारित पेपर लीक विरोधी कानून के बारे में एक वीडियो संदेश जारी किया था, तो दिपके ने इंस्टाग्राम पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि आपकी त्वचा देश के भविष्य से अधिक चमकदार है. पीएम ने इस कानून को परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण सुधार बताया था.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे रणदीप हुड्डा, देश से की असम की मदद की अपील</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बाढ़-पीड़ितों-के-बीच-पहुंचे-रणदीप-हुड्डा-देश-से-की-असम-की-मदद-की-अपील</link>
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        <description><![CDATA[ बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित असम के शिवसागर जिले पहुंचे और पीड़ित परिवारों के बीच राहत कार्यों में हिस्सा लिया. मानव सेवा संगठन ग्लोबल सिख से जुड़े रणदीप हुड्डा ने राहत सामग्री वितरित की और देशभर के लोगों से असम के बाढ़ पीड़ितों की हरसंभव मदद करने की अपील की.
ग्लोबल सिख पिछले एक सप्ताह से शिवसागर और पड़ोसी चराईदेव जिले के कई बाढ़ प्रभावित गांवों में लगातार राहत अभियान चला रहा है. संगठन के स्वयंसेवक प्रभावित परिवारों तक खाद्य सामग्री, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं. इस दौरान रणदीप हुड्डा ने कहा कि यहां की स्थिति बेहद दर्दनाक है.
क्या बोले रणदीप हुड्डा?
उन्होंने कहा, &#039;मैंने पहले भी कई बार ऐसी परिस्थितियां देखी हैं, लेकिन यहां आकर एहसास हुआ कि हालात कितने भयावह हैं. मैं पिछले कई वर्षों से ग्लोबल सिख के साथ जुड़ा हूं. यह संगठन पिछले एक सप्ताह से यहां लोगों की मदद कर रहा है. मैं भी अगले दो-तीन दिनों तक यहीं रहूंगा. हम बाढ़ पीड़ितों को जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं.&#039; रणदीप हुड्डा ने कहा कि बड़ी संख्या में गांव अब भी जलमग्न हैं और लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.
बाढ़ पीड़ितों की मदद की अपील की
हुड्डा ने कहा, &#039;कई गांव पूरी तरह डूब चुके हैं. यहां की स्थिति देखकर मुझे बहुत दुख हुआ. लोगों ने बहुत कुछ खो दिया है. मैं सभी से अपील करता हूं कि वे आगे आएं और बाढ़ पीड़ितों की मदद करें. मदद करने के कई तरीके हैं. आप उनके लिए प्रार्थना कर सकते हैं, आर्थिक सहायता दे सकते हैं या यहां आकर स्वयंसेवक के रूप में राहत कार्यों में शामिल हो सकते हैं.&#039;
राहत अभियान में सहयोग के लिए एयर इंडिया को दिया धन्यवाद
उन्होंने राहत अभियान में सहयोग के लिए एयर इंडिया का भी धन्यवाद किया. रणदीप हुड्डा ने कहा, &#039;मैं एयर इंडिया का दिल से आभारी हूं, जिसने हमें राहत सामग्री असम तक पहुंचाने के लिए नि:शुल्क हवाई परिवहन उपलब्ध कराया. मैं पूरे देश से अपील करता हूं कि असम के लोगों के साथ खड़े हों और उनकी हरसंभव मदद करें.&#039; रणदीप हुड्डा के इस दौरे से बाढ़ प्रभावित लोगों का मनोबल बढ़ा है. वहीं, उनकी अपील ने एक बार फिर असम में जारी राहत और पुनर्वास कार्यों की ओर पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>परिसीमन विधेयक का समर्थन, जनता के साथ विश्वासघात, तमिलनाडु में बोले राहुल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/परिसीमन-विधेयक-का-समर्थन-जनता-के-साथ-विश्वासघात-तमिलनाडु-में-बोले-राहुल</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर परिसीमन को लेकर बड़ा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में परिसीमन विधेयक पारित कराने की भाजपा की कोशिश को हर राष्ट्रीय और तमिल पार्टी को मिलकर नाकाम करना चाहिए. राहुल गांधी ने कहा कि इस विधेयक का समर्थन करना तमिलनाडु की जनता और राज्य के भविष्य के साथ विश्वासघात होगा.
मामल्लापुरम के निकट पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के जरिए तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों और उनकी राजनीतिक ताकत को कमजोर करना चाहती है. उन्होंने कहा, &quot;तमिल लोगों की राजनीतिक ताकत छीनने का यह प्रयास भाजपा की एक साजिश है.&quot; राहुल गांधी ने कहा कि संसद में हर तमिल और राष्ट्रीय पार्टी को परिसीमन विधेयक का विरोध करना चाहिए.
जनता से होगा विश्वासघात
उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी इस विधेयक का समर्थन करेगा, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)-भाजपा को तमिलनाडु के लोगों पर हमला करने का अवसर देगा. उन्होंने कहा कि इतिहास ऐसे लोगों को &quot;21वीं सदी का एट्टप्पन&quot; के रूप में याद रखेगा. राहुल गांधी ने बताया कि 18वीं सदी के तमिल शासक एट्टप्पन का नाम विश्वासघात का पर्याय बन गया था, क्योंकि माना जाता है कि उन्होंने ब्रिटिशों की मदद कर स्वतंत्रता सेनानी वीरपांडिया कट्टाबोम्मन को पकड़वाने में भूमिका निभाई थी.
कांग्रेस नेताओं को दिया एकता का संदेश राहुल गांधी पार्टी के पुनर्गठन अभियान के तहत जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) अध्यक्षों के लिए आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन कार्यक्रम में शामिल होने तमिलनाडु पहुंचे थे. पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने संगठन में गुटबाजी की आलोचना करते हुए कहा कि यह पार्टी के विकास में सबसे बड़ी बाधा है. उन्होंने कहा कि जो पदाधिकारी सभी को साथ लेकर नहीं चलते और जमीनी स्तर पर मेहनत नहीं करते, उनके लिए संगठन में कोई जगह नहीं है.
राहुल गांधी ने पार्टी के भीतर एकता और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया. नीट अभ्यर्थियों के परिजनों से की मुलाकात राहुल गांधी ने तमिलनाडु में नीट परीक्षा की तैयारी के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों से भी मुलाकात की. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी व्यवस्था में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है, जो खुद उनके प्रति ईमानदार नहीं है.
उन्होंने कहा, &quot;माता-पिता को अपने बच्चे के लिए शोक मनाते देखना सबसे दर्दनाक अनुभव है. हर उस छात्र के पीछे, जिसने अपनी जान गंवाई, एक ऐसा परिवार है जो जीवनभर इस दर्द के साथ जीएगा.&quot; राहुल गांधी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होना, परीक्षाओं का रद्द होना और वर्षों की मेहनत का एक झटके में बर्बाद हो जाना देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
माफी मांगने का उठाया मुद्दा
पीएम मोदी से माफी मांगने की मांग राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; पर भी इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने लिखा कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को खो दिया है, उनके आंसुओं से बड़ा कोई दुख नहीं हो सकता. यह दर्द जीवनभर उनके साथ रहेगा और टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था पर सवाल भी हमेशा बने रहेंगे.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, &quot;प्रधानमंत्री छात्रों को माफ करने की बात करते हैं, लेकिन क्या उन्होंने कभी उन परिवारों से मुलाकात की है, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया? क्या वे उन छात्रों से मिले हैं, जिनकी वर्षों की मेहनत और सपने प्रश्नपत्र लीक की वजह से बर्बाद हो गए? जवाब है- नहीं.&quot; राहुल गांधी ने कहा कि भारत के विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री से माफी की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री को विद्यार्थियों से माफी मांगने की जरूरत है. अपने सभी कार्यक्रमों के बाद राहुल गांधी चेन्नई से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए.
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>20 साल बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, क्यों मच गया हंगामा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/20-साल-बाद-कोलकाता-लौटीं-तसलीमा-नसरीन-क्यों-मच-गया-हंगामा</link>
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        <description><![CDATA[ तसलीमा नसरीन करीब दो दशक बाद एक बार फिर कोलकाता पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी वापसी इस बात का प्रमाण है कि अन्याय लंबे समय तक चल सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं रहता. उन्होंने यह भी कहा कि वह उस दिन का इंतजार कर रही हैं, जब किसी लेखक को अपने विचारों के कारण अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े. वहीं, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जब भी वह राज्य आएंगी, उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी.
कोलकाता लौटकर भावुक हुईं तसलीमा नसरीन
शनिवार (1 अगस्त) को कोलकाता में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में तसलीमा नसरीन ने कहा कि शहर लौटकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे वह अपने जीवन के उस हिस्से में वापस आ गई हैं जिसे वह यहां छोड़कर गई थीं. उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी लेखक को अपने विचार व्यक्त करने की वजह से निर्वासन का जीवन न जीना पड़े, यही उनकी सबसे बड़ी कामना है.
तसलीमा ने कहा, &quot;मेरी वापसी इस बात का सबूत है कि अन्याय लंबे समय तक रह सकता है, लेकिन स्थायी नहीं होता. मैं उस दिन का सपना देखती हूं, जब किसी लेखक को अपने देश से निर्वासित न होना पड़े.&quot;
महिलाओं के अधिकारों की बात करने आई हूं
तसलीमा नसरीन ने स्पष्ट किया कि उनका कार्यक्रम में आने का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है. उन्होंने कहा कि वह न तो किसी राजनीतिक दल के समर्थन में बोलने आई हैं और न ही किसी के विरोध में. उनका उद्देश्य केवल महिलाओं के अधिकारों की बात करना है.
उन्होंने कहा कि यूरोप ने उन्हें नागरिकता और रहने की जगह दी, लेकिन बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में उन्हें रहने के लिए एक छोटा-सा ठिकाना भी नहीं मिल सका. तसलीमा ने कहा कि किसी अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया, लेकिन अपने विचार खुलकर रखने की वजह से उन्हें कट्टरपंथियों के विरोध और निर्वासन की कीमत चुकानी पड़ी.
ये भी पढ़ें-IBPS क्लर्क भर्ती के लिए आवेदन शुरू, 11403 पदों पर निकली वैकेंसी
सुभेंदु अधिकारी ने सुरक्षा का दिया भरोसा
रवींद्र सदन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन का स्वागत किया और कहा कि जब भी वह पश्चिम बंगाल आएंगी, राज्य सरकार उन्हें पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराएगी.
उन्होंने कहा, &quot;मुख्यमंत्री और पुलिस विभाग के प्रभारी के रूप में यह मेरा कर्तव्य है कि जब भी आप पश्चिम बंगाल आएं, आपको पूरी सुरक्षा दी जाए.&quot;
उन्होंने यह भी कहा कि तसलीमा जब चाहें और जितनी बार चाहें पश्चिम बंगाल आ सकती हैं. सुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि सरकार बदलने के साथ राज्य भी बदला है और अब यहां संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार सुरक्षित हैं.
2007 में छोड़ना पड़ा था कोलकाता
तसलीमा नसरीन वर्ष 2004 से 2007 तक कोलकाता में रही थीं. उनकी आत्मकथा &#039;द्विखंडितो&#039; के कुछ हिस्सों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था. कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए नवंबर 2007 में उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा था.
इससे पहले बांग्लादेश में अपनी लेखनी को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों से मिली धमकियों के बाद तसलीमा ने वर्ष 1994 में अपना देश छोड़ दिया था. तब से वह निर्वासन का जीवन जी रही हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>साल, बाद, कोलकाता, लौटीं, तसलीमा, नसरीन, क्यों, मच, गया, हंगामा</media:keywords>
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        <title>केरल में भारी बारिश और बाढ़ से 6 लोगों की मौत, 6 लापता, CM ने क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/केरल-में-भारी-बारिश-और-बाढ़-से-6-लोगों-की-मौत-6-लापता-cm-ने-क्या-कहा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/केरल-में-भारी-बारिश-और-बाढ़-से-6-लोगों-की-मौत-6-लापता-cm-ने-क्या-कहा</guid>
        <description><![CDATA[ केरल में हो रही भारी बारिश के चलते पैदा हुए हालात के मद्देनजर मुख्यमंत्री वीडी सतीशन लगातार राजस्व मंत्री और अन्य मंत्रियों के संपर्क में हैं. मंत्री अलग-अलग जिलों में प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों का समन्वय कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने हालात का जायजा लेने और राहत व बचाव कार्यों की निगरानी के लिए सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों के विधायकों और अन्य जन-प्रतिनिधियों से भी बात की है. शाम 6:00 बजे तक आधिकारिक तौर पर 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 6 लोग अभी भी लापता हैं. जन-प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की मदद से कई एजेंसियां ​​मिलकर खोज अभियान चला रही हैं.
17 घर पूरी तरह बर्बाद

राज्य में कुल 65 राहत कैंप खोले गए हैं, जिनमें 1,465 लोगों को आश्रय दिया गया है. जरूरत पड़ने पर और लोगों को राहत कैंपों में ले जाने के इंतजाम किए गए हैं. 17 घर पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं, जबकि 127 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. जिन इलाकों में दिन में भारी बारिश हुई थी, वहां शाम तक बारिश कम होने से लोगों को राहत मिली है.&amp;nbsp;बचाव कार्यों को और मजबूत करने के लिए जरूरत के हिसाब से दूसरे जिलों से नावें मंगवाई गई हैं. अलग-अलग बांधों में पानी के बहाव पर कड़ी नजर रखी जा रही है और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
35 घंटों में 340 मिमी बारिश
कोझिकोड जिले के अनाक्कम्पोयिल इलाके में पिछले 35 घंटों में 340 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि वायनाड जिले के मेप्पाडी में 177 मिमी बारिश हुई. राज्य सरकार ने कहा है कि वह किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और लोगों से सरकार और जिला प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की है.
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हैदराबाद पुलिस ने नवजात बच्ची को बचाया, स्टिंग ऑपरेशन में महिला गिरफ्तार ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>केरल, में, भारी, बारिश, और, बाढ़, से, लोगों, की, मौत, लापता, ने, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>नेताओं को फंसाने की &amp;apos;हनी ट्रैप साजिश&amp;apos; बेनकाब! JeM संदिग्ध&amp;महिला को STF ने पकड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ बंगाल पुलिस ने हनी ट्रैप से जुड़े एक मामले में खुलासा किया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नेताओं को हनी ट्रैप में फंसाने की साजिश रची गई थी. पुलिस ने झारखंड की एक महिला को अरेस्ट किया है. पुलिस की मानें तो यह जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध ऑपरेटिव हामिम मंडल से संपर्क में थी, जिसे 30 जुलाई को अरेस्ट किया गया था. &amp;nbsp;महिला का नाम अर्पिता सरकार है. इस शुक्रवार को झारखंड के साहिबगंज से अरेस्ट किया गया और बंगाल के बर्धमान लाया गया है.&amp;nbsp;
अधिकारियों ने शनिवार को जानकारी दी कि जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध ऑपरेटिव मोहम्मद हामिम मंडल को गुरुवार को बर्धमान शहर से अरेस्ट किया गया था. अर्पिता सरकार मंडल की करीबी साथी और गर्लफ्रेंड है. वह व्हाट्सएप के जरिए मंडल से संपर्क में थी. जांच के दौरान दोनों की बातचीत हुई थी. इससे जुड़ी चैट बरामद की गई है. एसटीएफ ने बर्धमान शहर के एक हाउसिंग कॉम्पलेक्स में मंडल को उसके किराए के अपार्टमेंट से अरेस्ट किया है. उसपर आईएसआई समर्थित नेटवर्क का हिस्सा होने का संदेह है. इसका काम बीजेपी नेताओं सहित वीआईपी लोगों के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करना, ऑपरेटिव्स की भर्ती करना और राज्य में संभावित आतंकी गतिविधियों के लिए आधार तैयार करना था.
मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी बोले- यह एक संवेदनशील मामला
बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने बताया, &#039;यह एक संवेदनशील मामला है. एसटीएफ और सीनियर पुलिस अधिकारी इस मामले को देख रहे हैं. हो सकता है कि उसके इंटरनेशनल रिलेशन हों. पुलिस इसकी जांच कर रही है. शुरुआती जांच से पता चलता है कि मंडल मुख्यमंत्री अधिकारी की गतिविधियों और उनके काफिले के रास्तों पर नजर रख रहा था.&#039; &amp;nbsp;
बताया जा रहा है कि कथित तौर पर सरकार ने संदिग्ध मॉड्यूल की गतिविधियों के तहत लोगों को फंसाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हनी &amp;nbsp;ट्रैप नेटवर्क में अहम भूमिका निभाई.
राजनीतिक हस्तियों की संवेदनशील जानकारी पाने नेटवर्क बनाने की कोशिश
पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि हमारी जांच से पता चलता है कि आरोपी ने कुछ राजनीतिक हस्तियों की संवेदनशील निजी जानकारी हासिल करने के लिए एक नेटवर्क बनाने की कोशिश की थी. कथित तौर पर उस महिला का इस्तेमाल संपर्क बनाने और जानकारी जुटाने के लिए किया गया था. इसके अलावा अधिकारी ने बताया कि डिजिटल सबूतों की पुष्टी कर रहे हैं. उसकी भूमिका की असलियत का पता लगा रहे हैं. साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या उसके द्वारा जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल हमलों की योजना बनाने के लिए किया जाना था. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मनमर्जी नहीं होती आजादी…, अजीत डोभाल ने जेन&amp;G को समझाया ‘सही मतलब’!</title>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को शनिवार (1 अगस्त) को महाराष्ट्र के पुणे में हुए एक प्रोग्राम में प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह सम्मान दिया. डोभाल को यह सम्मान देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. इस दौरान डोभाल ने देश के युवाओं से राष्ट्रीय हित के लिए समर्पित होने होने निर्जी स्वार्थ से ऊपर उठने की अपील की.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, डोभाल ने लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 के बाद हुए समारोह के दौरान कहा, &#039;भारत के सामने राष्ट्र निर्माण का जो &#039;अवसर का दौर&#039; है, उसका पूरा फायदा उठाया जाना चाहिए.&#039; &amp;nbsp;उन्होंने कहा, &#039;आज की युवा पीढ़ी शायद यह मानती है कि भारत हमेशा से ऐसा ही था. संभव है कि युवा यह समझते हों कि स्वतंत्रता का मतलब मनमर्जी करना है, जबकि स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं था.&#039;

उन्होंने आगे कहा, जिन लोगों ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया, उनमें लोकमान्य तिलक भी थे. लोगों के मन में पीड़ा थी, वे अपनी बात कहना चाहते थे. तिलक ने उन्हें बोलने का साहस दिया और उनमें नई चेतना का संचार किया.&#039; उन्होंने कहा कि आजकल लोग अपने अधिकारों की बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अगर इन अधिकारों का दुरुपयोग किया जाए तो उन लोगों को कितना दुख होगा, जिन्होंने इन्हें दिलाने के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया.
&#039;दूरगामी फायदों को प्राथमिकता दें युवा&#039;
डोभाल ने कहा, &#039;युवाओं को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे केवल राष्ट्रहित में काम करेंगे और केवल तुरंत मिलने वाले फायदे के बारे में नहीं सोचेंगे, बल्कि बड़े और दूरगामी फायदों को प्राथमिकता देंगे. साथ ही अगर ऐसे विचार मन में आते भी हैं तो उन्हें नजरअंदाज कर देना चाहिए.&#039;
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डोभाल ने की पीएम मोदी-शाह की तारीफ
उन्होंने कहा, &#039;देश के इतिहास में यह बेहद खास अवसर का समय है, इसको गंवाना नहीं चाहिए. इस समय प्राथमिकता राष्ट्र निर्माण होनी चाहिए.&#039; आगे कहा, &#039;मुझे पूरा भरोसा है कि हम इस प्रयास में सफल होंगे और नया इतिहास रचेंगे.&#039; डोभाल ने कहा कि देश सौभाग्यशाली है कि उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जैसे नेतृत्व का मार्गदर्शन मिला है.&#039;
अजीत डोभाल को क्यों मिला पुरस्कार?
81 साल के अजीत डोभाल मौजूद समय में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं, वह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सुरक्षा सलाहकार हैं. अपने लंबे करियर में उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में काम किया है. इस्लामाबाद और लंदन में भारतीय मिशनों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. डोभाल भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रह चुके हैं. 2017 में डोकलाम गतिरोध को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया था. राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर उनके रणनीतिक फैसलों और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मनमर्जी, नहीं, होती, आजादी…, अजीत, डोभाल, ने, जेन-G, को, समझाया, ‘सही, मतलब’</media:keywords>
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        <title>बाढ़ के हीरो: असम के क्वारी गांव के लोगों ने बचाईं 2000 जिंदगियां</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बाढ़-के-हीरो-असम-के-क्वारी-गांव-के-लोगों-ने-बचाईं-2000-जिंदगियां</link>
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        <description><![CDATA[ 19 जुलाई को असम में आई विनाशकारी बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई, जिसे प्रभावित लोग शायद ही कभी भूल पाएंगे. नेपाली खूटी, बिहूबोर, संताक, नंबर-2 क्वारी गांव, मिचिंग गांव समेत आसपास के कई इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए. देखते ही देखते पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया. लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए और घंटों तक मदद का इंतजार करते रहे.
इसी भयावह स्थिति के बीच नंबर-2 क्वारी गांव के लोगों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी आज पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है. अपनी जान की परवाह किए बिना गांव के लोगों ने छोटी-छोटी नावों के सहारे राहत और बचाव अभियान चलाया और दावा किया कि उन्होंने आसपास के पांच गांवों के लगभग 1,500 से 2,000 लोगों की जान बचाई.
&#039;1,500 से 2,000 लोगों को सुरक्षित निकाला&#039; - ग्रामीण
गांव के निवासी सरवन प्रसाद ने बताया, &#039;सुबह हम नदी में लकड़ियां निकालने गए थे. तभी अचानक पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा. पहले हमने सोचा कि अपना सामान लेकर किसी सुरक्षित जगह चले जाएं. लेकिन तभी आसपास के गांवों से लोगों की चीख-पुकार सुनाई दी. जब वहां पहुंचे तो देखा कि लोग बेहद खतरनाक स्थिति में फंसे हुए हैं. उसी समय हमने फैसला किया कि अपना सामान छोड़कर पहले लोगों की जान बचाएंगे. अपनी नावों से हमने करीब 1,500 से 2,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला.&#039;
सिस्टम पर उठाए सवाल
सरवन ने बताया कि दूसरों की जान बचाते समय उनकी अपनी स्थिति भी बेहद दयनीय थी. उन्होंने कहा, &#039;हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं था और पीने का साफ पानी भी नहीं था. मजबूरी में हमें बाढ़ का पानी पीना पड़ा. कहीं से एक छोटे बर्तन में थोड़ा-सा चना मिला, उसी से हमने पेट भरा. आज तक कोई सरकारी अधिकारी हमारी सुध लेने नहीं आया. अगर समय पर मदद पहुंची होती तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं.&#039;
&#039;चारों तरफ पानी, रोते-बिलखते लोग&#039;
गांव के एक अन्य निवासी ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि बाढ़ का पानी घरों की छतों से भी ऊपर पहुंच गया था. उन्होंने कहा,&#039;हमारे घर पूरी तरह पानी में डूब गए थे. चारों ओर सिर्फ पानी ही पानी था. बच्चे और महिलाएं मदद के लिए रो रहे थे. पहले हमने अपने गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. जब वे सुरक्षित हो गए, तब पड़ोसी गांवों से मदद की पुकार सुनकर वहां पहुंचे और लोगों को निकालना शुरू किया.&#039;
मनमर्जी नहीं होती आजादी&amp;hellip;, अजीत डोभाल के जेन-G को समझाया &amp;lsquo;सही मतलब&amp;rsquo;!
ग्रामीणों के अनुसार, उनके पास केवल छह छोटी नावें थीं. बावजूद इसके, गांव के लोगों ने एकजुट होकर पांच आसपास के गांवों में लगातार बचाव अभियान चलाया. जिन लोगों को बचाया गया, उन्हें उन पक्के मकानों में पहुंचाया गया जिनकी छतें बाढ़ के पानी से ऊपर थीं.
एक अन्य ग्रामीण ने बताया, &#039;सिर्फ छह नावों और पूरे गांव के सामूहिक प्रयास से हम लगभग 1,500 से 2,000 लोगों को सुरक्षित बचाने में सफल रहे.&#039; असम की इस विनाशकारी बाढ़ के बीच नंबर-2 क्वारी गांव के लोगों का साहस, एकजुटता और निस्वार्थ सेवा मानवता की एक ऐसी मिसाल बनकर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि सबसे कठिन और अंधेरे समय में भी इंसानियत की रोशनी सबसे अधिक चमकती है.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बाढ़, के, हीरो:, असम, के, क्वारी, गांव, के, लोगों, ने, बचाईं, 2000, जिंदगियां</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>आवारा पशुओं से होने वाले सड़क हादसों पर SC की सख्त टिप्पणी, क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आवारा-पशुओं-से-होने-वाले-सड़क-हादसों-पर-sc-की-सख्त-टिप्पणी-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ सड़क पर घूमते मवेशियों के चलते होने वाले हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने समाज के दोहरे रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि लोग मवेशियों की उपयोगिता खत्म होने पर उन्हें सड़क पर लावारिस छोड़ देते हैं, लेकिन अगर कोई उनका उपयोग भोजन के रूप में करता है, तो इस पर बुरा मान जाते हैं.
&#039;हर साल 1300 लोगों की मौत&#039;
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने आदेश में यह भी दर्ज किया है कि 24 राज्यों में सख्त गौहत्या निषेध कानून है. उन कानूनों में मवेशियों के संरक्षण को लेकर प्रावधान हैं. पर उनका सही तरह से पालन नहीं हो रहा है. इसके चलते देश में हर साल लगभग 1300 लोग हादसे का शिकार होकर अपनी जान गवां रहे हैं.
क्या था मामला?
यह मामला पंजाब के संगरूर में 2007 में एक सांड़ के हमले में मारे गए व्यक्ति से जुड़ा है. उसकी पत्नी की याचिका पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी घटनाओं पर दुख जताया. कोर्ट ने पीड़ित महिला को 15 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया. साथ ही, बेसहारा मवेशियों के मुद्दे पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए.
&#039;मवेशी स्पीड ब्रेकर नहीं बन सकते&#039;
जजों ने यह माना है कि कई लोगों के पास गैर-उपयोगी जानवरों के रखरखाव के लिए ज़रूरी पैसे नहीं होते. फिर भी इसका समाधान यह नहीं हो सकता कि वह अपने पशुओं को सड़क पर छोड़ दें. ऐसे किसानों की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने मवेशी को सरकारी संरक्षण केंद्र तक पहुंचाएं. कोर्ट ने कहा, &quot;सभी को यह समझना होगा कि मवेशी हाइवे और सड़कों पर बेतरतीब ढंग से रखे गए स्पीड ब्रेकर नहीं बन सकते.
कुलगाम हमले की टाइमिंग पर फारूक के सवाल, रविन्द्र रैना बोले- दुर्भाग्यपूर्ण
कोर्ट की सिफारिशें
कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को इस समस्या से निपटने के लिए यह उपाय अपनाने का सुझाव दिया है :-
&amp;nbsp;- सभी मवेशियों की अनिवार्य टैगिंग की जाए और उनका डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए.&amp;nbsp;- अगर मवेशी का मालिक उसे नहीं पाल सकता, तो उसे अधिकृत आश्रय गृहों में सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी उसी की होगी.&amp;nbsp;- आश्रय गृहों के संचालन, टैगिंग और रिकॉर्ड की देखरेख के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं.&amp;nbsp;- बेसहारा मवेशियों के चलते होने वाले हादसों के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाई जाए.
फैसले के अंत में कोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि ने इसकी कॉपी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों दी जाए. कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकारें इन सिफारिशों पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करें.
मनमर्जी नहीं होती आजादी&amp;hellip;, अजीत डोभाल के जेन-G को समझाया &amp;lsquo;सही मतलब&amp;rsquo;! ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आवारा, पशुओं, से, होने, वाले, सड़क, हादसों, पर, की, सख्त, टिप्पणी, क्या, कहा</media:keywords>
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    <item>
        <title>&amp;apos;एक भी स्टूडेंट या पैरेंट्स से...&amp;apos;, राहुल का PM मोदी के माफी वाले Video पर हमला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-भी-स्टूडेंट-या-पैरेंट्स-से-राहुल-का-pm-मोदी-के-माफी-वाले-video-पर-हमला</link>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नीट यूजी पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले बच्चों के माता पिता से मुलाकात की. इसी को लेकर गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए बयान जारी किया है. राहुल गांधी ने कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं. जहां उनके साथ कुछ बच्चे और उनके परिजन नजर आ रहे हैं. इसके अलावा राहुल ने पीएम मोदी के माफ करने वाले वीडियो को लेकर भी उनको निशाने पर लिया. इसके अलावा बच्चों पर हो रही FIR को लेकर भी अपनी बात रखी है.&amp;nbsp;
माता पिता को बच्चों के दुख में देखना सबसे ज्यादा दर्दनाक: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, किसी माता पिता को अपने बच्चे के दुख में देखना सबसे ज्यादा दर्दनाक होता है. किसी युवा की जान जाने के पीछे एक ऐसा परिवार होता है, जो कभी न खत्म होने वाला दर्द झेल रहा होता है. साथ ही एक खराब शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा कि पेपर लीक होना, परीक्षाएं रद्द होना, सालों की तैयारी का एक ही रात में बर्बाद हो जाना. हमारे छात्रों से ईमानदारी से काम करने को कहा जाता है. जबकि सिस्टम उनके साथ ईमानदार नहीं है.&amp;nbsp;
इसके अलावा राहुल गांधी ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री में छात्रों को माफ करने की बात कहने की हिम्मत भी है. वे किसी भी दुखी माता पिता से नहीं मिले. वे किसी ऐसे छात्र से नहीं मिले, जिसका भविष्य पेपर लीक होने की वजह से बर्बाद हो गया. &amp;nbsp;राहुल ने कहा कि भारत के छात्रों को उनके माफी की जरूरत नहीं है. उन्हें उनसे माफी मिलनी चाहिए.&amp;nbsp;
माता पिता के आंसू, उनका बिलखना, सबसे बड़ा दुख: राहुल गांधी
इसके अलावा राहुल गांधी ने कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता पिता के आंसू उनका बिलखना, इससे बड़ा कोई दुख नहीं होता. ये एक गम उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा. साथ ही रह जाते हैं, इस टूटी और भ्रष्ट एजुकेशन सिस्टम के बारे में कई सवाल. पेपर लीक, रद्द परिक्षाएं सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद.&amp;nbsp;
बेईमान सिस्टम में ईमानदादी से मेहनत के लिए कहा जाता है: राहुल गांधीराहुल ने कहा, &#039;हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है, जो खुद बेईमान है. उसके बाद भी पीएम की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को माफ करने की बात करते हैं. क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है. उन लोगों की जिनकी जमा पूंजी, जिंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए. जवाब है नहीं. भारत के छात्रों को पीएम की क्षमा की जरूरत नहीं. मोदी जी को उनसे माफी मांगनी चाहिए.&#039;
GenZ को डरा धमकाकर चुप नहीं करा सकतेइसके अलावा राहुल गांधी ने कहा, पीएम मोदी और शाह आप Gen Z को डरा धमकाकर चुप नहीं करा सकते. पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ी. अब आप एफआईआर दर्ज कर रहे हैं. उनके अकाउंट्स बंद करवा रहे हैं. आप भारत के अतीत हैं. भारत के भविष्य के साथ कैसा बर्ताव करते हैं, इसे लेकर सावधान रहें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एक, भी, स्टूडेंट, या, पैरेंट्स, से..., राहुल, का, मोदी, के, माफी, वाले, Video, पर, हमला</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>अपने गांव पहुंचकर सोनम वांगुचक ने जारी किया पहला वीडियो, सरकार से की अपील</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अपने-गांव-पहुंचकर-सोनम-वांगुचक-ने-जारी-किया-पहला-वीडियो-सरकार-से-की-अपील</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अपने-गांव-पहुंचकर-सोनम-वांगुचक-ने-जारी-किया-पहला-वीडियो-सरकार-से-की-अपील</guid>
        <description><![CDATA[ जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक हाल ही में जंतर मंतर पर अपने प्रदर्शन को लेकर चर्चा में आए थे. उन्होंने 26 दिन की भूख हड़ताल की थी. हालांकि, सरकार के आश्वासन के बाद उन्होंने अपना धरना खत्म कर दिया था. अब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है.
इस वीडियो में उन्होंने सरकार की तरफ से वादे पूरे करने की उम्मीद जताई है. सोनम वांगचुक ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए कहा है, &#039;दोस्तों में मैं अपने गांव पहुंच गया हूं. मेरे पीछे डूबता सूरज और सिंधु नदी है. यहां मैं विश्राम कर रहा हूं. दोबारा उर्जा प्राप्त कर रहा हूं.&#039;&amp;nbsp;

Back In My Village&amp;hellip;But haven&amp;rsquo;t forgotten the causes.With hopes that government will fulfil the remaining promises too&amp;hellip;No copyrights share freely #cjp #sonamwangchuknews pic.twitter.com/785UObJNqA
&amp;mdash; Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 31, 2026



स्टूडेंट पर कानूनी कार्रवाई न करें, पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी दें
इसके अलावा उन्होंने कहा, &#039;जैसा में कश्मीर से आते वक्त सरकार से कह रहा था कि अनशन तोड़ते वक्त जो लिखित वादे किए गए थे, उन्हें पूरा करें. प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करें. उसी तरफ में याद दिलाना चाहूंगा उन छात्रों का जिन्होंने आत्महत्या की थी. उनके घर परिवारों को मुआवजा देने का. अब उसका भी वक्त आ गया है. हर चीज जो वक्त पर पूरी हो, उसकी कीमत होती है. तो मैं यह याद दिलाना चाहूंगा.&#039;
&#039;हमें भक्त नहीं बनना है, गलत को गलत, सही को सही कहना है&#039;
वांगचुक ने कहा, &#039;साथ ही साथ मैं यह कहना चाहूंगा कि मैं कह रहा था कि मुझे कितना गर्व है कि रेलवे के इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट पर. जो कश्मीर तक बनाने में लगे हैं. इस पर भी कुछ लोग नाराज थे, कि मैं सरकार की तारीफ क्यों कर रहा हूं. क्या हम इतने तंग नजर हो चुके हैं, क्या कोई विभाग, जैसे इसरो मंगल ग्रह पर एस्ट्रोनॉट उतारे तो क्या हम उनकी भी प्रशंसा नहीं करेंगे. यह भारतीय रेल है. भारत की रेल सेवा है. कितने इंजीनियर और अफसरों ने मिलकर यह रेल लाइन बिछाई है. कृपया दिमाग को जरा खोले रखिए. चाहें पक्ष हो या विपक्ष हो. यह देश हमको मिलकर बनाना है. आपको भक्त नहीं बनना है. गलत को गलत कहना है. सही को सही कहना है.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अगस्त&amp;सितंबर में कमजोर पड़ेगा मॉनसून! IMD ने जताई कम बारिश की आशंका</title>
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        <description><![CDATA[ 




अगर आप अगस्त और सितंबर में झमाझम बारिश की उम्मीद कर रहे हैं, तो मौसम विभाग का ताजा अनुमान थोड़ा निराश कर सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दूसरे चरण को लेकर जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसके मुताबिक अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. विभाग का कहना है कि पूरे देश में इन दो महीनों के दौरान बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 94 फीसदी से भी कम रह सकती है. अगस्त-सितंबर के लिए LPA 422.8 मिमी तय किया गया है. हालांकि कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में मॉनसून कमजोर रहने का अनुमान है. ऐसे में खेती, जलाशयों के जलस्तर और सामान्य जनजीवन पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
IMD के मुताबिक दक्षिण भारत के कई हिस्सों, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी इलाकों और पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. लेकिन इसके अलावा देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. यानी इस बार मॉनसून पूरे देश में एक जैसा असर नहीं दिखाएगा. कुछ राज्यों में अच्छी बारिश होगी तो कई राज्यों में बारिश की कमी लोगों की चिंता बढ़ा सकती है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
अगस्त में भी कम बारिश का अनुमान
&amp;nbsp;
मौसम विभाग का कहना है कि सिर्फ अगस्त ही नहीं, बल्कि अकेले अगस्त महीने में भी बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. अगस्त के लिए देश में औसत बारिश (LPA) 254.9 मिमी मानी जाती है, लेकिन इस बार इसके भी 94 फीसदी से कम रहने का अनुमान है. हालांकि पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत, उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत के कुछ हिस्सों और पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत के चुनिंदा इलाकों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है. यानी अगस्त में भी पूरे देश में एक जैसी बारिश देखने को नहीं मिलेगी.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
120 साल का रिकॉर्ड भी दे रहा संकेत
&amp;nbsp;
IMD की ओर से जारी ऑल इंडिया रेनफॉल ट्रेंड (अगस्त) का ग्राफ भी इस बार के अनुमान को मजबूती देता है. 1901 से 2025 तक के आंकड़ों में अगस्त महीने की बारिश में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. हाल के वर्षों में सामान्य से कम बारिश वाले सालों की संख्या बढ़ी है और बारिश का पैटर्न पहले की तुलना में ज्यादा अस्थिर हुआ है. हालांकि लंबे समय के रिकॉर्ड में बहुत तेज गिरावट का रुझान नहीं दिखता, लेकिन ग्राफ यह जरूर बताता है कि अगस्त में बारिश का वितरण लगातार अनिश्चित होता जा रहा है. इसी वजह से इस साल सामान्य से कम बारिश के अनुमान को मौसम वैज्ञानिक गंभीरता से देख रहे हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
गर्मी और उमस भी कर सकती है परेशान
&amp;nbsp;
बारिश कम होने का असर तापमान पर भी पड़ सकता है. IMD के मुताबिक अगस्त के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. इसका मतलब है कि कई राज्यों में लोगों को बारिश के बावजूद गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है. वहीं रात का तापमान भी देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
अल नीनो बन रहा बड़ी वजह
&amp;nbsp;
IMD के अनुसार फिलहाल प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Ni&amp;ntilde;o) की मध्यम स्थिति बनी हुई है. आसान भाषा में कहें तो अल नीनो ऐसी मौसमी स्थिति है, जो भारत में मॉनसून को कमजोर करने के लिए जानी जाती है. मौसम विभाग का अनुमान है कि मॉनसून सीजन के बाकी महीनों में अल नीनो और मजबूत हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर बारिश पर पड़ सकता है और कई इलाकों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
IOD पर भी IMD की नजर
&amp;nbsp;
मौसम विभाग ने बताया कि फिलहाल हिंद महासागर में न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति बनी हुई है और मॉनसून सीजन के बाकी हिस्से में इसके भी न्यूट्रल रहने की संभावना है. हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल सितंबर के दौरान पॉजिटिव IOD बनने के संकेत दे रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो कुछ इलाकों में बारिश पर इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिल सकता है. फिलहाल IMD इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
सितंबर का अलग पूर्वानुमान होगा जारी
&amp;nbsp;
मौसम विभाग ने बताया कि सितंबर महीने में कितनी बारिश होगी, इसका विस्तृत पूर्वानुमान अगस्त 2026 के आखिर में जारी किया जाएगा. इसके अलावा IMD हर सप्ताह विस्तारित मौसम पूर्वानुमान और रोजाना शॉर्ट व मीडियम रेंज फोरकास्ट भी जारी करता रहेगा, ताकि राज्यों और आम लोगों को समय-समय पर मौसम की सटीक जानकारी मिलती रहे.&amp;nbsp;




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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर IYC ने निकाला मार्च, अमित शाह पर निशाना</title>
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        <description><![CDATA[ छात्रों पर दर्ज FIR को लेकर देश की सियासत गरमा गई है. भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) शुक्रवार (31 जुलाई, 2026) को दिल्ली की सड़कों पर उतर आई और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध मार्च निकाला. कांग्रेस का आरोप है कि अदालत ने छात्रों पर कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया था. इसके बावजूद, छात्र नेता रुचिका सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई और दूसरे छात्रों को भी धमकाया जा रहा है.
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब की अगुवाई में यह मार्च दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से किरोड़ीमल कॉलेज (KMC) तक निकाला गया. इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की.
IYC का गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला
प्रदर्शन के दौरान उदय भानु चिब ने कहा, &amp;lsquo;आज लड़ाई सिर्फ छात्रों की नहीं, बल्कि जवाबदेही की भी है. पहले छात्रों पर पेलेट गन और घातक बल (Lethal Force) का इस्तेमाल किया गया और अब अदालत के आदेश के बावजूद रुचिका सिंह पर FIR दर्ज कर दी गई.&amp;rsquo; उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोर्ट ने साफ कहा है कि छात्रों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी, तो फिर FIR क्यों दर्ज की गई और दूसरे छात्रों को क्यों धमकाया जा रहा है?&amp;nbsp;

उन्होंने कहा, &amp;lsquo;अगर यह सब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जानकारी में हुआ है, तो उन्हें जवाब देना होगा. अगर उनकी जानकारी के बिना हुआ है, तो यह देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. दोनों ही हालात में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.&amp;rsquo;
राहुल गांधी का भी किया जिक्र
उदय भानु चिब ने कहा कि भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) छात्रों को न्याय दिलाने तक संघर्ष जारी रखेगी. उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों पर हमला करने वालों को सजा मिलनी चाहिए, जवाबदेही तय होनी चाहिए और छात्रों को न्याय मिलना चाहिए.
युवा कांग्रेस ने रखी मांगें
युवा कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बर्खास्त करने की मांग की. साथ ही, कहा कि अदालत के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए, छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई को रोका जाए और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. पार्टी ने कहा कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होंगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;BJP से हो क्या?&amp;rsquo; दिल्ली पुलिस के परिवार से जुड़े सवाल पर बोले राहुल गांधी ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारतीय सेना की LoC पर कार्रवाई, पाक के जासूसी ड्रोन को मार गिराया</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू के खौड़ सेक्टर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की एक बड़ी जासूसी कोशिश को नाकाम किया है. सेना ने एक संदिग्ध सर्विलांस ड्रोन को मार गिराया. सेना के सूत्रों के अनुसार, यह ड्रोन भारतीय सैन्य ठिकानों के बेहद करीब उड़ान भर रहा था. इसके बाद उसे तत्काल कार्रवाई करते हुए डिएक्टिवेट कर दिया गया.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
पाकिस्तानी ड्रोन को सेना के अहम ठिकानों के पास मंडराते हुए देखा गया था. इसके बाद सेना ने इसे मार गिराया. सुरक्षा एजेंसियों ने बरामद ड्रोन की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी.&amp;nbsp;
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जम्मू के अखनूर के खौड़ सेक्टर में एलओसी के पास शुक्रवार तड़के एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन बरामद किए जाने की सूचना मिली थी. यह ड्रोन मंडियाला (छंब) की ओर से भारतीय क्षेत्र की दिशा में आया था. इसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए ड्रोन को बरामद कर लिया.&amp;nbsp;
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ड्रोन के साथ एक 65 जीबी का मेमोरी कार्ड भी बरामद किया गया है. साथ ही बैटरियां भी इस ड्रोन के साथ बरामद की गई हैं. इनमें कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ड्रोन पर मेड इन चाइना लिखा हुआ है. इसकी तकनीकी जांच के लिए संबंधित एजेंसी के पास भेजा गया है. &amp;nbsp;मामले की जांच की जा रही है. फिलहाल पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
बता दें, पिछले कुछ महीनों से जम्मू-कश्मीर में एलओसी के पास पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते हुए पकड़े गए हैं. माना जा रहा है कि ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय सेना की गतिविधियों, तैनाती और सैन्य तैयारियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने के उद्देश्य से किया जा रहा था. फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही इससे जुड़ी अन्य जानकारी का खुलासा हो सकेगा. इनमें ड्रोन की उत्पत्ति, उसके ऑपरेटर और मिशन से जुड़े अन्य अहम पहलुओं से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>तमिलनाडु में संगठन को धार देने उतरेंगे राहुल गांधी, 74 जिला अध्यक्षों के साथ करेंगे मंथन</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस के &#039;संगठन सृजन&#039; अभियान के तहत लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार (1 अगस्त 2026) को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में पार्टी संगठन की बड़ी बैठक करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, सुबह 10:30 बजे होने वाली इस बैठक में राहुल गांधी तमिलनाडु के 74 जिला अध्यक्षों के साथ संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे.
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी प्रेजेंटेशन के माध्यम से जिला अध्यक्षों को संबोधित करेंगे और आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठनात्मक रोडमैप साझा करेंगे. बैठक का मुख्य फोकस बूथ स्तर तक कांग्रेस की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करना और कार्यकर्ताओं को अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना होगा.&amp;nbsp;
बैठक के बाद राहुल गांधी राज्य के सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों और पूर्व उम्मीदवारों के साथ अलग से बैठक करेंगे. इस दौरान तमिलनाडु कांग्रेस में नई ऊर्जा भरने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर मंथन होगा. सूत्रों का कहना है कि लंबे समय बाद तमिलनाडु में कांग्रेस को सत्ता में भागीदारी मिली है और पार्टी अब इस राजनीतिक अवसर को मजबूत संगठनात्मक आधार में बदलना चाहती है.
तमिलनाडु के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा कि &#039;संगठन सृजन&#039; अभियान का उद्देश्य बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जागरूक करना, कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाना और प्रत्येक बूथ पर मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करना है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की यह बैठक कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेगी और तमिलनाडु में कांग्रेस नए सिरे से संगठन विस्तार के अभियान को गति दे रही है.
कांग्रेस की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष बी. मणिकम टैगोर ने शुक्रवार को पीएमके प्रमुख अंबुमणि रामदास पर कावेरी जल विवाद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को घसीटने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की. टैगोर ने कहा कि राज्यों के बीच के इस मुद्दे को सुलझाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बुनियादी कर्तव्य और ज़िम्मेदारी है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: E20 फ्यूल पर संसद में अलग&amp;अलग जवाब! क्या खुद उलझ गई बीजेपी सरकार?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-e20-फ्यूल-पर-संसद-में-अलग-अलग-जवाब-क्या-खुद-उलझ-गई-बीजेपी-सरकार</link>
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        <description><![CDATA[ E20 पेट्रोल यानी 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण पर नई उलझन पैदा हो गई है. इसे लेकर संसद में दो अलग-अलग मंत्रालयों के दो अलग-अलग जवाब सामने आए हैं. इससे भी बड़ा खुलासा तब हुआ जब पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि FCI 37 रुपए प्रति किलोग्राम में खरीदे चावल को 23 रुपए प्रति किग्रा में डिस्टिलरीज को बेच रही है. यह अंतर इतना साफ है कि आम आदमी के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकार खुद ही समझ नहीं पा रही कि E20 आखिर है क्या...
लोकसभा में सड़क परिवहन मंत्रालय ने क्या कहा?
30 जुलाई 2026 को लोकसभा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक लिखित जवाब में कहा, &#039;E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक घट सकती है, जो गाड़ियों की कैटेगरी और उम्र पर निर्भर करता है.&#039;
गडकरी ने यह भी कहा कि ARAI, SIAM और IOCL की स्टडी में E20 की वजह से इंजन फेल होने का कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने दावा किया कि E20 से गाड़ी का एक्सक्लेरेशन बेहतर होता है, राइड क्वालिटी सुधरती है और E10 की तुलना में 30% कम कार्बन उत्सर्जन होता है. गडकरी ने आगे कहा कि 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया और 3 करोड़ से ज्दादा पेट्रोल कार पहले से ही इथेनॉल-मिक्स्ड ईंधन पर चल रही हैं. निर्माताओं के सर्विस डेटा में E20 से कोई असामान्य जंग, घिसाव या गाड़ियों की उम्र में कमी नहीं पाई गई.
राज्यसभा में सड़क परिवहन मंत्रालय ने क्या कहा?
एक दिन पहले (29 जुलाई 2026) राज्यसभा में भी गडकरी ने ही एक और जानकारी दी थी, &#039;1 अप्रैल 2005 से 2016 के बीच बने BS-III पेट्रोल गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल से कुछ रबर के पुर्जे और गास्केट खराब हो सकते हैं.&#039; हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन पुर्जों को नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदला जा सकता है और इंजन पर कोई असर नहीं पड़ता.
तीसरा जवाब: राज्यसभा (पेट्रोलियम मंत्रालय)
यह मामला 20 जुलाई 2026 को ही उलझ गया था, जब पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया, &#039;पुराने E10-डिजाइन वाले वाहनों में ईंधन अर्थव्यवस्था में कमी आमतौर पर 3-5% तक सीमित है.&#039; यानी एक ही सरकार के दो मंत्रालय सड़क परिवहन और पेट्रोलियम मंत्रालय E20 से माइलेज में कमी को लेकर अलग-अलग आंकड़े दे रहे हैं. सड़क परिवहन ने कहा कि 2-6% माइलेज कम होगा, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि 3-5% माइलेज कम होगा.
क्या कहती है रिपोर्ट?
गडकरी ने यह भी बताया कि ARAI, SIAM और IOCL ने मिलकर E20 का BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों पर असर की स्टडी की. इस अध्ययन में इंजन ड्यूरेबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी, फ्यूल सिस्टम, जंग प्रतिरोध, ड्राइवबिलिटी, उत्सर्जन और ईंधन अर्थव्यवस्था जैसे पहलुओं को कवर किया गया.
हालांकि, दिल्ली के मैकेनिक्स E20 से इंजन फेल होने के मामलों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं बता रहे, लेकिन फ्यूल माइलेज में कमी की शिकायतें बढ़ी हैं. इसमें 5% से 30% तक की गिरावट बताई जा रही है.
जनता की जेब पर E20 का गणित क्या कहता है?
E20 का मामला सिर्फ माइलेज और इंजन तक सीमित नहीं है. इसकी आर्थिक लागत भी बड़ा सवाल खड़ा करती है.
चावल से इथेनॉल: FCI का 10,000 करोड़ का घाटा
सरकार ने राज्यसभा में बताया कि:

FCI ने चावल 3,720-3,889 रुपए प्रति क्विंटल (लगभग 37 रुपए प्रति किलो) में खरीदा था.
चावल इथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरीज को 2,250-2,320 रुपए प्रति क्विंटल (लगभग 23 रुपए किलो) में बेचा.
सरकार ने लगभग 40% घाटे पर चावल बेचा था.

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बांभनिया ने बताया कि FCI ने पिछले 12 महीनों के दौरान 6.35 मिलियन टन चावल डिस्टिलरीज को भेजा. इसकी कुल कीमत 14,596.78 करोड़ रुपए थी. इस प्रक्रिया से लगभग 10,000 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है.
इसका सबसे ज्यादा 844,141 टन चावल हरियाणा की इथेनॉल डिस्टिलरीज को मिला. इसके बाद उत्तर प्रदेश (838,645 टन), पंजाब (658 टन), हिमाचल प्रदेश (952 टन) और पश्चिम बंगाल (584,672 टन) का नंबर आता है.
इथेनॉल पेट्रोल से महंगा, सब्सिडी कौन चुका रहा है?
केंद्र सरकार ने यह भी माना कि तेल कंपनियां इथेनॉल को पेट्रोल से ज्यादा महंगे दाम पर खरीद रही हैं. इसका मतलब साफ है कि E20 पेट्रोल सस्ता नहीं हो सकता. असल में E20 पेट्रोल की कीमत शुद्ध पेट्रोल से ज्यादा है.
केंद्र सरकार FCI को घाटे की भरपाई कर रही है और तेल कंपनियों को महंगा इथेनॉल खरीदने के लिए मुआवजा दे रही है. यह सब टैक्सपेयर की जेब से चुकाया जा रहा है. यानी जनता के टैक्स से सब्सिडी दी जा रही है और फिर वही जनता E20 पेट्रोल महंगा खरीद रही है.
फीडस्टॉक के मुताबिक, तेल कंपनियां इथेनॉल को लगभग 65 से 72 रुपए प्रति लीटर के प्रशासित मूल्य पर खरीदती हैं. जबकि पेट्रोल का प्री-टैक्स, रिफाइनरी-गेट मूल्य लगभग ₹53 प्रति लीटर है. यानी, इथेनॉल पेट्रोल से 20-35% ज्यादा महंगा है.
उदाहरण से समझें तो दिल्ली में E20 पेट्रोल का खुदरा मूल्य 102.12 रुपए प्रति लीटर है. इसमें डीलर कमीशन 4.45 और VAT 16.59 शामिल है. इस कीमत में इथेनॉल, पेट्रोल और ब्लेंडिंग की लागत अलग-अलग नहीं बताई जाती है.
बीजेपी सरकार ने खुद माना कि जब अंतरराष्ट्रीय क्रूड तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास होती है, तो E20 का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल के बराबर या उससे ज्यादा महंगा होता है. E20 तभी सस्ता हो सकता है जब क्रूड तेल की कीमत 120-130 डॉलर प्रति बैरल या उससे ज्यादा हो जाए. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xप्लेन:, E20, फ्यूल, पर, संसद, में, अलग-अलग, जवाब, क्या, खुद, उलझ, गई, बीजेपी, सरकार</media:keywords>
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        <title>राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर संसद में ड्रामा! साधु बने पप्पू यादव, चढ़ावा डालने पहुंचे राहुल गांधी</title>
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        <description><![CDATA[ अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन कर सरकार को घेरने की कोशिश की. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने एक नाटक के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया, जिसने संसद परिसर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया. प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में दिखाई दिए. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसद भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान एक दान पेटी रखी गई, जिसमें राहुल गांधी को चढ़ावा चढ़ाते दिखाया गया.
नाटक के एक हिस्से में साधु के वेश में मौजूद पप्पू यादव दान पेटी लेकर भागते हुए दिखाई दिए. इसके बाद अन्य विपक्षी सांसद उन्हें रोकने और चोर-चोर के नारे लगाने का अभिनय करते नजर आए. विपक्षी नेताओं का कहना था कि यह प्रदर्शन कथित चढ़ावा चोरी और अलग-अलग मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने के लिए किया गया है. प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी भी की. सांसदों ने अमित शाह सदन में आओ, जवाब दो, चढ़ावा चोरी नहीं चलेगी और पेपर चोरी नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए. प्रदर्शन में हाल के अलग-अलग राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दों को भी जोड़ा गया.

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लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई
इस घटनाक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि संसद और उसके परिसर की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है. उन्होंने सांसदों को सलाह दी कि वे संसद परिसर में वेश बदलकर आने से बचें और संसदीय मर्यादा का पालन करें. घटना के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. हालांकि, विपक्ष ने अपने प्रदर्शन को लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बताते हुए कहा कि वह विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगता रहेगा.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नागरिकता पर बहस के बीच भारतीय पासपोर्ट पर सरकार का बड़ा बयान, जानें क्या कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय पासपोर्ट को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में अहम जानकारी दी है. सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन यह सीधे तौर पर नहीं कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण है. सरकार ने यह भी दोहराया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जिसे पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है.
राज्यसभा में उठा सवाल, सरकार ने दिया जवाब
राज्यसभा सांसद अब्दुल वहाब ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या भारतीय पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सकता है. इसके साथ ही उन्होंने पासपोर्ट जारी करने की पात्रता, विदेशी नागरिकता लेने के बाद भारतीय नागरिकता की स्थिति, भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाले विदेशी नागरिकों को पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया और नागरिकता कानून की समीक्षा जैसे सवाल भी उठाए.
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इन सवालों का लिखित जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट भारत सरकार द्वारा पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है. इसे निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक सत्यापन पूरा होने के बाद ही जारी किया जाता है.
पासपोर्ट पर सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने अपने जवाब में यह साफ किया कि भारतीय पासपोर्ट भारत के नागरिकों को विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है. इसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों के देश से बाहर जाने की प्रक्रिया को विनियमित करना है. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण है. यानी इस सवाल पर सरकार ने सीधे &#039;हां&#039; या &#039;नहीं&#039; में जवाब नहीं दिया.
सिर्फ भारतीय नागरिक को ही मिलता है पासपोर्ट
विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट केवल उसी व्यक्ति को जारी किया जाता है, जो भारतीय नागरिक हो. पासपोर्ट जारी करने से पहले निर्धारित नियमों के तहत आवेदक का सत्यापन किया जाता है. सरकार ने बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पासपोर्ट जारी किया जाता है.
भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं
सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि भारत दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) की अनुमति नहीं देता. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 9 और 11 तथा नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 का हवाला दिया गया. इन प्रावधानों के अनुसार यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है. ऐसी स्थिति में उसके पास मौजूद भारतीय पासपोर्ट भी अमान्य हो जाता है और उसे सरकार के पास जमा करना अनिवार्य होता है.
पासपोर्ट बनने की प्रक्रिया क्या है?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 में उन परिस्थितियों का उल्लेख है, जिनमें पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है. इन कारणों में एक प्रमुख आधार यह भी है कि यदि आवेदक भारतीय नागरिक नहीं है, तो उसे पासपोर्ट जारी नहीं किया जाएगा. इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय नागरिक होना पासपोर्ट प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त है.
पहले भी सरकार दे चुकी है ऐसा जवाब
यह पहली बार नहीं है जब केंद्र सरकार ने इस विषय पर ऐसा रुख अपनाया है. इससे पहले जून में भी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पासपोर्ट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है. इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा था कि भारतीय पासपोर्ट, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत भारत के नागरिकों को देश से बाहर यात्रा करने के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Viral Video: घर है या Snake Hostel!</title>
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        <description><![CDATA[ Viral Video: घर है या Snake Hostel! ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Viral Video: दांतों से कार खींचकर हरिद्वार से गंगाजल ला रहा &amp;apos;शिवभक्त&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ Viral Video: दांतों से कार खींचकर हरिद्वार से गंगाजल ला रहा &#039;शिवभक्त&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>राज्यसभा से भी पास एंटी पेपर लीक बिल, पीएम मोदी ने की राष्ट्रपति से मुलाकात</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा के बाद अब राज्यसभा से भी एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. विपक्षी सांसदों के वॉकआउट करने के बाद ध्वनि मत से इस बिल को राज्यसभा से भी पारित किया. दोनों सदनों से पास होने के बाद अब यह बिल कानून बनने से बस एक कदम दूर है. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस बिल में अधिक सख्त सजा का प्रस्ताव है. इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की ईमानदारी पर बुरा असर पड़ता है.
बिल में क्या-क्या प्रावधान?
इस बिल के प्रावधान के तहत, परीक्षाओं में पेपर लीक या अनुचित तरीकों में शामिल पाए गए लोगों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक जेल जाना पड़ सकता है और उन पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. संगठित अपराधों के लिए, विधेयक में कम से कम सात साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है. एआई की मदद से नकल करना, परीक्षा प्रणाली को हैक करना, ऑनलाइन पेपर सेंड करना और साइबर फ्रॉड भी इस कानून के दायरे में आएगा.
यह मुद्दा देश के हर परिवार से जुड़ा हुआ: जितेंद्र सिंह
राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल पेश करते हुए केंद्रीय जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मुद्दा देश के हर परिवार से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, &#039;पीएम मोदी जब विकसित भारत 2047 की बात करते हैं तो उसमें हमारे ये बच्चे बड़ा निवेश हैं. हमारे विपक्ष नेता ने फिर से 152 पेपर लीक की बात कही ,लेकिन उसे ऑथेंटिकेट नहीं कर सके.&#039; जितेंद्र सिंह ने कहा कि मैनेजमेंट कोटा खत्म कर प्रधानमंत्री ने मेडिकल शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाया.&#039;
मल्लिकार्जुन खरगे ने दिया ये सुझाव
इससे पहले राज्यसभा में गुरुवार को इस बिल पर चर्चा के दौरान जमकर हंगामा हुआ. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रश्न पत्र लीक मामलों को रोकने के लिए सरकार द्वारा लाये गये विधेयक को लेकर एक वार्षिक परीक्षा कैलेंडर बनाये जाने का सुझाव दिया. उन्होंने हाल में हुए छात्र आंदोलन में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई ज्यादतियों की न्यायिक जांच कराने की मांग की. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>राज्यसभा, से, भी, पास, एंटी, पेपर, लीक, बिल, पीएम, मोदी, ने, की, राष्ट्रपति, से, मुलाकात</media:keywords>
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        <title>चीन ने J&amp;20 फाइटर जेट LAC के करीब किया तैनात, सैटेलाइट से सामने आयी तस्वीर</title>
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        <description><![CDATA[ करीब आठ साल बाद अपने इंजन और एवियोनिक्स को पूरी तरह अपग्रेड करने के बाद चीन का जे-20 स्टेल्थ फाइटर जेट एक बार फिर मैदान में कूद गया है. इस बार चीन ने स्वदेशी जे-20 &amp;lsquo;चेंगदू&amp;rsquo; फाइटर जेट को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब अपने दो अहम एयरबेस पर तैनात किए हैं. ओपन सोर्स इंटेलिजेंस पर इन दोनों एयरबेस पर खड़े जे-20 की तस्वीरें भी सामने आई हैं.&amp;nbsp;
खास बात यह है कि जे-20 की तैनाती की ये सैटेलाइट तस्वीरें ऐसे सामने आई हैं, जब अगले कुछ हफ्तों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर आने जा रहे हैं. मौका होगा, सिंतबर के महीने में ब्रिक्स सम्मेलन का.&amp;nbsp;
हालांकि, दो साल पहले भी चीन ने इन्हें सिक्किम के करीब तिब्बत के शिगात्से एयरबेस पर तैनात किया था. उस वक्त भी ओपन सोर्स इंटेलिजेंस ने शिगात्से एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थी, जिसमें एक दर्जन जे-20 फाइटर जेट कतार में खड़े दिखाई पड़ रहे थे. उस वक्त सिक्किम के करीब हाशिमारा एयरबेस (उत्तर बंगाल) में भारतीय वायुसेना की तरफ से रफाल (राफेल) फाइटर जेट की पूरी एक स्क्वाड्रन की तैनाती के जवाब में चीन ने ऐसा किया था.&amp;nbsp;
चीन ने दो एयरबेस पर तैनात किए J-20 विमान
इस बार चीन ने जिन दो एयरबेस पर जे-20 की तैनाती की है, उनमें पहला शिंजियांग प्रांत का होटन एयरबेस और दूसरा तिब्बत का डैमशुंग एयरबेस है. होटन की पूर्वी लद्दाख के DBO से करीब 245 किलोमीटर की दूरी है और डैमशुंग की अरूणाचल प्रदेश के तवांग से करीब 350 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई &amp;lsquo;माइटी-ड्रैगन&amp;rsquo; भारत के ओमनी-रोल फाइटर जेट रफाल (राफेल) को टक्कर दे पाएगा भी या नहीं. चीन में जे-20 को माइटी-ड्रैगन के नाम से जाना जाता है.&amp;nbsp;
भारत की नजर में आने पर चीन ने माइटी ड्रैगन को छिपाया
दरअसल, साल 2018 में अरुणाचल प्रदेश से सटी LAC की एयरस्पेस पर कुछ ऐसा हुआ था कि चीन ने अपने तथाकथित स्टेल्थ फाइटर जेट जे-20 को हमेशा-हमेशा के लिए पूरी दुनिया की नजरों से छिपा लिया था. उसके एक साल पहले यानी 2017 में ही चीन ने बेहद जोश खरोश के साथ स्टेल्थ फाइटर जेट जे-20 बनाने का दावा किया था. अमेरिका के एफ-22 और एफ-35 के बाद दुनिया में ये तीसरा ऐसा फाइटर जेट था, जिसे स्टेल्थ फाइटर जेट माना जा रहा था.&amp;nbsp;
&amp;lsquo;स्टेल्थ&amp;rsquo; यानी ऐसा लड़ाकू विमान जो दुनिया की किसी रडार और फाइटर जेट की पकड़ में ना आ सके, लेकिन भारतीय वायुसेना के सुखोई फाइटर जेट ने अरुणाचल प्रदेश से सटी चीनी एयरस्पेस में जे-20 यानी चेंगदू फाइटर जेट को डिटेक्ट कर लिया था. उस वक्त तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने इस बात की तस्दीक की थी.&amp;nbsp;
कभी-कभार ट्रायल पर नजर आता था माइटी ड्रैगन
अरुणाचल प्रदेश से सटी LAC की एयरस्पेस की निगहबानी के लिए भारतीय वायुसेना ने असम के तेजपुर और झाबुआ में सुखोई फाइटर जेट की पूरी स्क्वाड्रन तैनात कर रखी है. सुखोई के डिटेक्टशन के चलते एशिया के पहले स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने का दम भरने वाले चीन का सपना अधूरा रह गया. इस घटना के बाद से जे-20, जिसे चीन ने &amp;lsquo;माइटी-ड्रैगन&amp;rsquo; का नाम दिया है, फिर दिखाई नहीं दिया. हालांकि, ईका-दुका शिनजियांग के होटन एयरबेस पर जरूर ट्रायल देते हुए दिखाई पड़ा.&amp;nbsp;
यही वजह है कि जब 2024 में जे-20, शिगात्से एयरबेस पर दिखाई पड़ा, तो जानकारों ने यही माना था कि हो सकता है चीन ने ट्रायल के लिए दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे एयरबेस पर चेंगदू की तैनाती की हो. क्योंकि शिगात्से में अभी भी चीन के पुराने जे-10 फाइटर जेट तैनात रहते हैं. नई सैटेलाइट तस्वीरों में जे-20 के साथ जे-10 भी दिखाई दिए थे. जे-10 रूस के मिग-21 का चीनी वर्जन है और 60 के दशक से ओपरेट किए जा रहे हैं.&amp;nbsp;

सिक्किम बॉर्डर पर IAF की राफेल की एक पूरी स्क्वाड्रन तैनात
शिगात्से की दूरी सिक्किम बॉर्डर से महज 150 किलोमीटर है. इतनी ही दूरी सिक्किम बॉर्डर से हाशिमारा (हासीमारा) एयरबेस की है. हासीमारा में भारतीय वायुसेना के रफाल (राफेल) फाइटर जेट्स की एक पूरी स्क्वाड्रन (18 फाइटर जेट) तैनात है.&amp;nbsp;
शिगात्से (12,408 फीट) की गिनती दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस के तौर पर की जाती है. पहले नंबर पर पूर्वी लद्दाख का नियोमा एयरबेस है, जिसके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. ओपन सोर्स इंटेलिजेंस की सैटेलाइट तस्वीरों में शिगात्से एयरबेस के रनवे पर भी एक फाइटर जेट खुले हुए पैराशूट के साथ लैंड करते हुए दिखाई पड़ रहा है. ये सैटेलाइट तस्वीरें 27 मई की बताई जा रही हैं.&amp;nbsp;
भारत में पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ विमान के विकास पर काम जारी
जानकारी के मुताबिक, 2018 में जिस जे-20 फाइटर जेट को भारतीय सुखोई ने डिटेक्ट किया था, जिसमें चीन ने अब आमूल-चूल अपग्रेड किए हैं. पहले तो ये कि इसमें रूसी इंजन के बजाए अब स्वदेशी इंजन लगाया गया है. चेंगदू ट्वीन इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट है, जिसे चीन फीफ्थ जेनरेशन होने का दावा करता है.&amp;nbsp;
हालांकि, चीन के बाहर एविएशन एक्सपर्ट्स को चीन के दावे पर अभी पूरा विश्वास नहीं है. भारत के पास भी फिलहाल कोई स्टेल्थ फाइटर जेट नहीं है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पांचवीं श्रेणी के स्टेल्थ फाइटर जेट &amp;lsquo;AMCA&amp;rsquo; (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के डिजाइन और डेवलपमेंट पर काम कर रहा है. AMCA के बनने में अभी 8-10 साल लग सकते हैं, लेकिन भारत के पास ओमनी-रोल रफाल (राफेल) फाइटर जेट है, जिसके बारे में कहा जाता है कि ये दुश्मन के &amp;lsquo;चार-चार फाइटर जेट&amp;rsquo; के बराबर एक अकेला है.&amp;nbsp;
राफेल के न्यूक्लियर मिसाइल की सफल टेस्टिंग ने दुनिया को चौंकाया 
हाल ही में फ्रांस ने अपने रफाल फाइटर जेट से न्यूक्लियर मिसाइल का परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. साल 2016 में जब भारत ने फ्रांस से 36 रफाल फाइटर जेट खरीदने का सौदा किया था, तो उस वक्त खुलकर कभी ये दावा नही ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>चीन, ने, J-20, फाइटर, जेट, LAC, के, करीब, किया, तैनात, सैटेलाइट, से, सामने, आयी, तस्वीर</media:keywords>
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        <title>एजुकेशन सेक्टर में अल्पसंख्यक बच्चों की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी, सरकार ने जारी किए आंकड़े</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एजुकेशन-सेक्टर-में-अल्पसंख्यक-बच्चों-की-हिस्सेदारी-में-बढ़ोतरी-सरकार-ने-जारी-किए-आंकड़े</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/एजुकेशन-सेक्टर-में-अल्पसंख्यक-बच्चों-की-हिस्सेदारी-में-बढ़ोतरी-सरकार-ने-जारी-किए-आंकड़े</guid>
        <description><![CDATA[ अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी अहम जानकारी मानसून सत्र के दौरान सदन में दी है. उन्होंने कहा है कि पिछले पांच शैक्षणिक सालों के भीतर स्कूलों में अल्पसंख्यक छात्रों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा स्तर पर पहुंची है. संसद में सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि अल्पसंख्यक छात्रों की हिस्सेदारी 5 साल में सबसे ज्यादा बढ़ी है. केंद्र सरकार ने इससे जुड़े आंकड़े भी पेश किए हैं.
सरकार ने पिछले पांच सालों के आंकड़े पेश किए हैं
उन्होंने बताया कि प्राइमरी स्तर की शिक्षा में 2021-22 में 18 प्रतिशत थी. यह तीन प्रतिशत के साथ बढ़ते हुए 2025 और 26 में 21.8 प्रतिशत पहुंच गई है.&amp;nbsp;इसके अलावा अपर प्राइमरी में साल 2021-22 में 17.8 प्रतिशत थी, जो 1.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 19.6 प्रतिशत पर पहुंच गई है.&amp;nbsp;
वहीं, सेकेंडरी स्तर की एजुकेशन में हिस्सेदारी 16.4 प्रतिशत थी, जो 2.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 18.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है. वहीं, हायर सेकेंडरी में भागीदारी 15.1प्रतिशत थी, जो बढ़कर 17.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है. यह कुल 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.&amp;nbsp;
सरकार ने इन आंकड़ों को रखते हुए माना है कि शिक्षा के हर स्तर पर अल्पसंख्यक छात्रों की भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी हुई है. यह पिछले पांच सालों का सबसे ऊंचे स्तर पर है. इन आंकड़ों में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन समुदायों के स्टूडेंट हैं.&amp;nbsp;
अल्पसंख्यकों के लिए सबसे सुरक्षित देशों में भारत: रिजिजू
वहीं, इस पूरे मामले पर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि भारत अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सबसे सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले देशों में से एक बना हुआ है. &amp;nbsp;राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की तरफ से आयोजित राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए रिजिजू ने कहा है कि अल्पसंख्यक समुदायों ने भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति को आकार देने में अहम रोल अदा किया है. उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की और विकास में सभी अल्पसंख्यक समुदाय का बहुत बड़ा योगदान है.&amp;nbsp;
इसके अलावा उन्होंने कहा है कि सरकार 2047 तक विकसित भारत के विजन के तहत बुनियादी ढांचे के विकास और अल्पसंख्यक समुदायों के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एजुकेशन, सेक्टर, में, अल्पसंख्यक, बच्चों, की, हिस्सेदारी, में, बढ़ोतरी, सरकार, ने, जारी, किए, आंकड़े</media:keywords>
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        <title>दिल्ली&amp;UP समेत देश में कब&amp;कहां होगी बारिश, IMD ने की भविष्यवाणी</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से कभी तेज बारिश तो कभी उमस भरा मौसम देखने को मिल रहा है. ऐसे में दिल्ली के लोगों के मन में अब सवाल है कि आखिर आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहेगा? इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार (30 जुलाई, 2026) से 12 अगस्त 2026 तक का विस्तारित मौसम पूर्वानुमान जारी किया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो हफ्तों में दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का मिजाज बदलता रहेगा. सप्ताह की शुरुआत में बारिश की गतिविधियां सीमित रह सकती हैं, लेकिन बाद के दिनों में इनमें बढ़ोतरी होने की संभावना है. हालांकि, दिल्ली के लिए इस रिपोर्ट में किसी तरह का अलग भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है.
दिल्ली में कब बढ़ेगी बारिश?
IMD के अनुसार, 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति से दक्षिण में बनी रहेगी और सप्ताह के दूसरे हिस्से में धीरे-धीरे उत्तर की ओर खिसकेगी. इसी दौरान उत्तर-पश्चिम भारत पर एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का असर भी रहेगा.
इन दोनों मौसम प्रणालियों के प्रभाव से दिल्ली और आसपास के इलाकों में सप्ताह के दूसरे हिस्से में हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की भी संभावना है.
बारिश होगी, लेकिन उमस से पूरी राहत नहीं
हालांकि, बारिश के बावजूद दिल्लीवासियों को उमस से पूरी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. IMD के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है. ऐसे में जब बारिश नहीं होगी, तब हवा में नमी अधिक रहने के कारण उमस महसूस होगी.
राहत की बात यह है कि अगले दो हफ्तों में दिल्ली समेत देश के किसी भी हिस्से में हीटवेव या गर्म रात (Warm Night) की संभावना नहीं है और न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास बना रहेगा.
उत्तर प्रदेश में भी बढ़ेगी बारिश की गतिविधियां
मौसम विभाग के विस्तारित पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भी अगले दो हफ्तों के दौरान मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा. 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की गतिविधियां बनी रह सकती हैं.
वहीं, 6 से 12 अगस्त के दौरान मानसून ट्रफ के सामान्य स्थिति के करीब आने और बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने के संकेत हैं. इसके असर से खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. हालांकि, IMD ने इस विस्तारित रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के लिए किसी व्यापक भारी बारिश का अलग अलर्ट जारी नहीं किया है.
महाराष्ट्र में भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर
अगले कुछ दिनों में सबसे ज्यादा बारिश का असर महाराष्ट्र में देखने को मिल सकता है. IMD के मुताबिक, 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.
30 और 31 जुलाई को मध्य महाराष्ट्र, 30 जुलाई को मराठवाड़ा और विदर्भ तथा 31 जुलाई और 1 अगस्त को गुजरात क्षेत्र के साथ लगते इलाकों में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है. कोंकण और गोवा में भी कई दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है. मौसम विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव, यातायात प्रभावित होने और भूस्खलन जैसी स्थितियों की आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
देश के इन राज्यों में होगी ज्यादा बारिश
IMD के मुताबिक, 30 जुलाई से 5 अगस्त के दौरान मध्य और पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है. पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी भारत और पश्चिमी हिमालय राज्यों में भी कई दिनों तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा. कई इलाकों में भारी से बहुत भारी और कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है.
वहीं, देश के कई हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश होने का भी अनुमान है. कुल मिलाकर पहले सप्ताह में पूरे देश में बारिश सामान्य के आसपास रहने की संभावना है.
6 से 12 अगस्त के बीच फिर बदलेगा मौसम
IMD के अनुसार, अगस्त के दूसरे सप्ताह में मानसून ट्रफ सामान्य या सामान्य से उत्तर की ओर रहने की संभावना है. इस दौरान उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बनने और उसके प्रभाव से नया कम दबाव का क्षेत्र बनने के संकेत हैं.
इसके चलते ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. कोंकण-गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में भी कई दिनों तक भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है. पूरे देश में कुल वर्षा सामान्य रहने की संभावना जताई गई है.&amp;nbsp;

मानसून की मौजूदा स्थिति क्या है?&amp;nbsp;
IMD के मुताबिक, 23 से 29 जुलाई के दौरान पूरे देश में साप्ताहिक बारिश सामान्य से 1 प्रतिशत अधिक रही. हालांकि, 1 जून से 29 जुलाई तक पूरे मानसून सीजन में देश में अब भी सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है.
इस प्रकार है क्षेत्रवार स्थिति:

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: सामान्य से 30% कम बारिश
उत्तर-पश्चिम भारत: सामान्य से 10% कम बारिश
मध्य भारत: लगभग सामान्य (-1%)
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: सामान्य से 26% कम बारिश
पूरे देश में: सामान्य से 15% कम बारिश.

एल नीनो रहेगा प्रभावी
मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रशांत महासागर में एल नीनो (El Ni&amp;ntilde;o) की स्थिति बनी हुई है और दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना है. वहीं, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है और पूरे मानसून सीजन के दौरान इसके इसी स्थिति में बने रहने का अनुमान है.
क्या है सबसे बड़ा संदेश?
IMD के विस्तारित पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अगले दो हफ्तों के दौरान बारिश की गतिविधियां बनी रहें ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>‘मृत्यु तक जेल में रहने की सजा संवैधानिक रूप से गलत नहीं...’, SC का बड़ी टिप्पणी</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि किसी दोषी को उसकी मौत होने तक जेल में रखने की सजा संवैधानिक रूप से वैध है. ऐसा आदेश देते समय अदालत का यह कहना भी सही है कि दोषी को सजा में छूट देने वाले प्रावधानों का लाभ नहीं मिल सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा पाने वाले 6 लोगों की याचिका को ठुकराते हुए यह फैसला दिया है.
किन दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका?
जिन 6 दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, उनमें चंबल का कुख्यात डकैत राम आसरे उर्फ फक्कड़, दिल्ली का साइकोपैथ सीरियल किलर चंद्रकांत झा, अपनी सौतेली मां और सौतेले भाई-बहन का हत्यारा दिल्ली का अतबीर सिंह और एक ही परिवार के 17 लोगों की हत्या करने वाले पंजाब के अमृतसर के तीन भाई सरबजीत सिंह, गुरदेव सिंह और सतनाम सिंह शामिल हैं. इन सबको अंतिम सांस तक सलाखों के पीछे रहने की सजा मिली है.
याचिकाकर्ताओं की दलील पर सुप्रीम कोर्ट का टिप्पणी
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि IPC की धारा 302 के तहत केवल मौत की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान है. इसमें बिना छूट के प्राकृतिक जीवन के अंत तक कैद की सजा की कोई बात नहीं कही गई है. आजीवन कारावास की सजा पाने वाले लोग 14 साल के बाद रिहाई का आवेदन दे सकते हैं. इससे उन्हें नहीं रोका जाना चाहिए.&amp;nbsp;

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया. जजों ने कहा कि प्राकृतिक मृत्यु तक कैद की सजा एक स्थापित कानूनी सिद्धांत है. 2016 के &#039;यूनियन ऑफ इंडिया बनाम वी. श्रीहरन&#039; मामले में 5 जजों की संविधान पीठ यह तय कर चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट फांसी की सजा के विकल्प के तौर पर ऐसी विशेष श्रेणी की सजा दे सकते हैं. इस फैसले को बार-बार चुनौती देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है.
कोर्ट ने मामले में दी स्पष्ट जानकारी
कोर्ट ने साफ किया है कि अगर फैसले में बिना छूट के आजीवन कारावास लिखा है, तो इसका अर्थ मृत्यु तक जेल ही होगा. ऐसे मामलों में सरकार CrPC की धारा 432 (अब BNSS की धारा 473) के तहत सजा माफ या कम नहीं कर सकती है. हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास मौजूद दया या सजा माफी की शक्ति पर इसका असर नहीं होगा.
यह भी पढे़ंः भोजशाला विवाद में SC ने मुस्लिम पक्ष को दिलवाई जगह, नमाज की अनुमति दी ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘मृत्यु, तक, जेल, में, रहने, की, सजा, संवैधानिक, रूप, से, गलत, नहीं...’, का, बड़ी, टिप्पणी</media:keywords>
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        <title>दिल्ली से मणिपुर तक फैला लग्जरी कार चोर नेटवर्क ध्वस्त, दो गिरफ्तार</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लग्जरी गाड़ियों की चोरी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह दिल्ली से महंगी एसयूवी और लग्जरी कारें चुराकर राजस्थान और मणिपुर समेत उत्तर-पूर्वी राज्यों में बेच देता था.
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और दिल्ली, राजस्थान और मणिपुर से सात चोरी की लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं, इनमें टोयोटा फॉर्च्यूनर, इनोवा क्रिस्टा, किआ सेल्टोस, महिंद्रा थार और हुंडई आई-20 जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं.
दिल्ली से चोरी, मणिपुर में होती थी बिक्री
जांच में सामने आया कि गिरोह दिल्ली के द्वारका, रोहिणी, पश्चिम विहार और अन्य रिहायशी इलाकों से लग्जरी गाड़ियों को निशाना बनाता था. चोरी के बाद गाड़ियों के नंबर प्लेट बदल दिए जाते थे और उन्हें मणिपुर के उखरूल और उत्तर-पूर्व के अन्य इलाकों में स्थानीय नेटवर्क के जरिए बेच दिया जाता था. कुछ वाहन राजस्थान में भी ठिकाने लगाए जाते थे.
हाईटेक तरीके से चुराते थे गाड़ियां आरोपी 
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बेहद आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते थे. पहले कार का शीशा तोड़ा जाता था और सायरन की वायर काट दी जाती थी. इसके बाद एक विशेष इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट की मदद से वाहन के इंजन कंट्रोल मॉड्यूल को हैक कर गाड़ी स्टार्ट की जाती थी. मौके पर ही डुप्लीकेट स्मार्ट-की तैयार कर ली जाती थी. जिस मॉडल की गाड़ी चोरी करनी होती थी, उसी मॉडल का शीशा पहले से साथ रखा जाता था, ताकि चोरी के बाद नया शीशा लगाकर किसी को शक न हो.&amp;nbsp;

ऐसे चढ़े पुलिस के हत्थे कार चुराने वाले शातिर
क्राइम ब्रांच की टीम को 4 जुलाई को सूचना मिली कि एक वाहन चोर महिंद्रा थार से आने वाला है. डॉ. बीएसए रोड, महादेव चौक के पास जाल बिछाकर पुलिस ने अमित नगर उर्फ सोनू को दबोच लिया. तलाशी के दौरान उसके पास से पांच स्मार्ट कार की चाबियां, चोरी की गाड़ियों के चार असली नंबर प्लेट और कई अहम सुराग मिले. पूछताछ में उसने पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया.
मणिपुर तक पहुंची दिल्ली पुलिस
अमित नगर से पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि चोरी की गाड़ियां मणिपुर भेजी जा रही हैं. इसके बाद टीम ने उत्तर प्रदेश पुलिस से अनुमति लेकर पहले से जेल में बंद आरोपी तोइजाम नटराज सिंह को इस मामले में गिरफ्तार किया. उसकी निशानदेही पर मणिपुर के उखरूल में स्थानीय पुलिस की मदद से चार चोरी की गाड़ियां बरामद की गईं. इससे पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ.
हर गाड़ी पर मिलते थे 70 से 80 हजार रुपये
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह चोरी की हर लग्जरी गाड़ी के बदले 70 से 80 हजार रुपये लेता था. इसके बाद वाहन रिसीवर तक पहुंचा दिया जाता था, जहां नंबर बदलकर उसे खरीदारों को बेच दिया जाता था. गिरोह कई राज्यों में फैले अपने नेटवर्क के जरिए लंबे समय से इस धंधे में लगा हुआ था.
40 से ज्यादा मामलों में शामिल है मुख्य आरोपी
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी अमित नगर उर्फ सोनू वर्ष 2011 से वाहन चोरी के अपराध में सक्रिय है. उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं, मणिपुर निवासी तोइजाम नटराज सिंह चोरी की गाड़ियों का रिसीवर और सप्लायर था तथा उसके खिलाफ भी वाहन चोरी के कई मामले दर्ज हैं.
फरार साथियों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि गिरोह का सरगना अशरफ समेत कई अन्य आरोपी अभी फरार हैं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश के संभल और मेरठ सहित कई जगहों पर लगातार छापेमारी की जा रही है. जांच के दौरान BNS की धारा 112 सहित अन्य गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं. पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में चोरी की और भी लग्जरी गाड़ियों का पता चल सकता है.
यह भी पढ़ेंः PM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा ने लिखी चिट्ठी, जानें क्या कहा? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, से, मणिपुर, तक, फैला, लग्जरी, कार, चोर, नेटवर्क, ध्वस्त, दो, गिरफ्तार</media:keywords>
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        <title>E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान, जानें संसद में क्या कहा?</title>
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        <description><![CDATA[ E20 पेट्रोल को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि E20 पेट्रोल से कार और दोपहिया वाहनों के इंजन में किसी बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन 1 अप्रैल, 2005 से लागू BS-III मानकों वाले और 2016 से पहले बने कुछ पुराने वाहनों में रबर के कुछ पार्ट्स और गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं.
हालांकि, सरकार का कहना है कि इन्हें नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदला जा सकता है. संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गडकरी ने बताया कि E20 के प्रभाव का अध्ययन इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने संयुक्त रूप से किया था.
इंजन में बदलाव की जरूरत नहीं- गडकरी
सरकार के मुताबिक, अध्ययन में पाया गया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार और दोपहिया वाहनों के इंजन में किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता नहीं है. यहां तक कि पुराने वाहनों में भी प्रदर्शन, ड्राइविंग, स्टार्ट होने की क्षमता, धातु और प्लास्टिक के पुर्जों पर कोई असामान्य असर नहीं देखा गया.
किन वाहनों में बदलने पड़ सकते हैं रबर पार्ट्स?
सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल BS-III श्रेणी के उन वाहनों में जिन्हें 1 अप्रैल 2005 के बाद लागू मानकों के तहत बनाया गया था और जिनका निर्माण 2016 से पहले हुआ था, सिर्फ उनमें कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है. सरकार का कहना है कि यह सामान्य सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है.&amp;nbsp;

माइलेज पर क्या बोली सरकार?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि वाहन का माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करता. ड्राइविंग स्टाइल, इंजन की देखभाल, समय पर ऑयल बदलना, एयर फिल्टर की सफाई, टायर प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल जैसे कई कारक भी माइलेज को प्रभावित करते हैं.
E20 लागू करने से पहले हुई थी तैयारी- सरकार
सरकार के अनुसार, E20 लागू करने से पहले व्यापक लैब परीक्षण, फील्ड ट्रायल और विशेषज्ञ एजेंसियों से वैलिडेशन कराया गया. नीति आयोग की अंतर-मंत्रालयी समिति ने भी वाहन अनुकूलता, माइलेज, इंजन, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता का अध्ययन किया था. जून 2021 में जारी &amp;lsquo;Roadmap for Ethanol Blending in India 2020-25&amp;rsquo; भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा था.
इंजन फेल होने की शिकायत नहीं- सरकार
सरकार ने SIAM के हवाले से कहा कि E20 पेट्रोल के कारण बड़े पैमाने पर इंजन फेल होने या वाहन खराब होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है. इंजन प्रदर्शन और माइलेज को लेकर जो चिंताएं सामने आई हैं, वे मुख्य रूप से सार्वजनिक चर्चाओं और सोशल मीडिया पर उठे सवालों के रूप में सामने आई हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः 5 साल में 40 बार फेल हुआ NH इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकार का संसद में जवाब ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>E20, पेट्रोल, पर, सरकार, का, बड़ा, बयान, जानें, संसद, में, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>BJP की सहयोगी SKM ने संसद में किया छात्रों के प्रदर्शनों का बचाव, क्या कहा? </title>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी की एक सहयोगी पार्टी ने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों पर कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देश में हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों को नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने सरकारों और सांसदों के िए भारत की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक जागरूकता का संकेत बताया है.&amp;nbsp;
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान बोलते हुए एसकेएम के नेता इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि व्यापक प्रदर्शन उम्मीदवारों की बढ़ती हताशा को दर्शाते हैं. बता दें कि सरकार जो नया बिल लेकर आई है, उसका उद्देश्य कड़ी सजा देना, न्यूनतम कारावास की अवधि, जुर्माने की राशि बढ़ाना और फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करके तुरंत न्याय दिलाने का वादा करना है.
SKM ने संसद में किया विरोध प्रदर्शनों का बचाव&amp;nbsp;सिक्किम से दो बार सांसद रह चुके सुब्बा ने कहा, &#039;पिछले कुछ महीनों में हमारे युवाओं ने सड़कों पर उतरकर जिस तरह से अपनी नाराजगी जताई है, उसे नकारात्मक रूप से नहीं लेना चाहिए. मेरा मानना ​​है कि व्यवस्था, सांसदों और सरकार, चाहे वह किसी भी पार्टी की हो, उनके लिए यह एक चेतावनी है कि हमें अपनी परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना होगा.&#039;
SKM सांसद ने क्या कहा?
ये बिल लोकसभा में पास हो गया है. नीट-यूजी पेपर लीक के बाद हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है. कई राज्यों के छात्रों ने परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के लिए कड़ी सजा और सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में अधिक जवाबदेही की मांग की थी. सुब्बा ने कहा कि परीक्षाओं में नकल की घटनाएं छिटपुट घटनाओं से बढ़कर संगठित अपराध में तब्दील हो गई हैं, जिनमें वित्तीय लेन-देन भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
एसकेएम सांसद ने तर्क दिया कि ऐसे गिरोहों से धनी उम्मीदवारों को असमान रूप से लाभ होता है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्र, जो अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक परीक्षाओं पर निर्भर रहते हैं, वंचित रह जाते हैं.
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लंबी जांच न्याय में देरी: SKM सांसद
उन्होंने कहा, &#039;जब परीक्षा पेपर लीक होने और अनुचित साधनों के कारण एक उम्मीदवार अच्छा प्रदर्शन करता है जबकि एक मेहनती छात्र पीछे रह जाता है, तो इससे न केवल व्यवस्था विफल होती है, बल्कि बच्चे का भविष्य भी खतरे में पड़ जाता है.&#039; उन्होंने डेडलाइन में जांच की भी मांग की और कहा कि लंबी जांच अक्सर न्याय में देरी करती है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>BJP, की, सहयोगी, SKM, ने, संसद, में, किया, छात्रों, के, प्रदर्शनों, का, बचाव, क्या, कहा </media:keywords>
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        <title> बस्तर जिस रेस से चूका, अब दोगुनी स्पीड से दौड़ेगा; नक्सली भी बनेंगे विकास का पहिया</title>
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        <description><![CDATA[ &#039;अब हम कभी बंदूक नहीं हटाएंगे. संविधान के दायरे में रहकर अपने जल-जंगल-जमीन के हक की मांग करेंगे. हम यहां काम सीख रहे हैं, उसके बाद गांव चले जाएंगे और मम्मी-पापा के साथ रहेंगे.&#039; ये शब्द माओवादी पार्टी के बस्तर की डिवीजनल कमेटी के प्रवक्ता रहे मोहन कड़ती के हैं. वो इस समय दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में प्लम्बर का काम सीख रहे हैं. यहां वो अकेले नहीं हैं, जो बंदूक छोड़कर विष्णुदेव साय सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्य धारा में लौटकर आए हैं. दंतेवाड़ा के इस लाइवलीहुड कॉलेज में उनके जैसे करीब 100 लोग ऐसे हैं, जो इलेक्ट्रिशियन, प्लम्बर, वेल्डिंग और ड्राइविंग जैसे काम सीख रहे हैं ताकि आगे चलकर सामान्य जीवन जी सकें.
मोहन कड़ती ने सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि पुनर्वास में आने के बाद हमको पुनर्जीवन मिला है. कड़ती ने कहा, &#039;सरकार हमको कपड़े, खाना, रहना मुहैया करा रही है. इसके अलावा हमको हर महीना 10 हजार रुपये भी मिलते हैं. इसलिए हम यहां आकर बहुत खुश हैं.&#039;
उनसे जब पूछा कि पुनर्वास अभियान के तहत आपने सरेंडर किया है तो अभी आपको कितना पैसा मिला है तो उन्होंने कहा कि अभी 50 हजार मिला है, हमें बोला गया है कि मेरे ऊपर रखा गया इनाम यानी 5 लाख रुपये मिलेंगे. अगर इसमें देरी हुई तो सीएम, डिप्टी सीएम से गुहार लगाएंगे.&#039;

पार्टी में क्या मिला था काम?
उन्होंने बताया कि जब वो पार्टी से जुड़े हुए थे तो स्कूल-कॉलेजों में जाकर आदिवासी बच्चों के साथ बातचीत करने का जिम्मा मिला हुआ था. जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी आपने बच्चों से पार्टी में शामिल को कहा था? इस पर उन्होंने कहा, &#039;हम लोग उनको आंदोलन में उतरने को नहीं बोलते थे. जब आप लोग की समस्या रहे तो ही लड़ो. समस्या आप लोगों को दिख जाएगी. आदिवासी भाई होने के नाते हम लोग समझाइश कर रहे हैं.&#039;
बंदूक उठाने को लेकर क्या कहा?
मोहन कड़ती से जब पूछा गया कि जिस जल-जंगल-जमीन के लिए आप लड़ रहे थे, उसको अब सरकार लेना चाहती है क्योंकि उसके बिना तो विकास नहीं आएगा. उसको छोड़ने बोलेंगे तो आप क्या करेंगे? इस पर पूर्व नक्सल नेता ने कहा, &#039;बंदूक के साथ तो नहीं लड़ेंगे. हम संविधान के दायरे में रहकर आवाज उठाएंगे. सर्व आदिवासी समाज जैसी छोटी-छोटी पार्टियां लड़ते समय साथ दे पाएंगी. हमारी जमीन के लिए तो हम आवाज उठाएंगे.&#039;&amp;nbsp;रूपेश-हिडवा का साथी भी सीख रहा हुनर
कड़ती की तरह यहां एक और पूर्व माओवादी कमांडर प्लम्बर की ट्रेनिंग ले रहा है. उसका नाम है- पुदिया तेलम उर्फ राहुल तेलम. पुदिया ने बस्तर के जंगलों में 22 साल बिताए. उस पर 8 लाख रुपये का इनाम था. वो रूपेश और माडवी हिडवा जैसे टॉप कमांडरों के साथ काम कर चुका था. बीजापुर के टाडकेल गांव का रहने वाले राहुल तेलम को जल-जंगल-जमीन के नाम पर बहलाया-फुसलाया गया था, लेकिन अब वो मुख्यधारा में लौट आया है.&amp;nbsp;

पुदिया ने बताया कि जब वो पार्टी में शामिल हुआ तो उसे छह महीने तक संगठन के नियम और विचारधारा समझाई गई थी. नए लोगों को भर्ती करना सिखाया जाता था. उसके बाद हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती थी. उसने बताया कि मैंने AK-47, SLR से लेकर आईईडी जैसे विस्फोटक हथियारों का खूब इस्तेमाल किया था. पुदिया उर्फ राहुल तेलम ने बताया कि वो सुरक्षाबलों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन में भी शामिल रहा था.&amp;nbsp;
बस्तर से खत्म हुआ नक्सलवाद&amp;nbsp;
कभी बस्तर के रेड कॉरिडोर को डिजाइन करने में अहम भूमिका निभाने वाले ये हार्डकोर लोग अब सामान्य जीवन जीना चाहते हैं. यह बदलाव लगातार चले सुरक्षा अभियानों के बाद संभव हुआ है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने की समय सीमा तय की थी और अब सरकार ने घोषणा की है कि उसने यह टारगेट हासिल कर लिया है.

लाइवलीहुड कॉलेज में 97 पूर्व नक्सली सीख रहे हुनर
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लाइवलीहुड कॉलेज में 97 आत्मसमर्पित नक्सली हैं, जो यहां से ट्रेनिंग ले रहे हैं. इनमें से दंतेवाड़ा जिले के 60, जबकि बीजापुर जिले में सरेंडर करने वाले 37 लोग शामिल हैं. यहां सिलाई मशीन ऑपरेटर, असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, ड्राइविंग, प्लम्बर, सोलर, वेल्डर, फील्ड टेक्नीशियन और असिस्टेंट मेसन की ट्रेनिंग दी जा रही है. यहां से अब तक सरेंडर करने वाले कुल 428 नक्सलियों ने 42 दिनों की ट्रेनिंग पूरी की है और वो अपना-अपना काम शुरू करके सामान्य जीवन जी रहे हैं.&amp;nbsp;
पंडुम कैफे में काम कर रहे पूर्व नक्सली
इसी तरह सरेंडर करने वाले कुछ नक्सलियों को जगदलपुर के पंडुम कैफे में भी काम मिला है. बस्तर पुलिस ने नुक्कड़ कैफे के साथ मिलकर ये पहल शुरू की है. इस कैफे में 24 लोगों का स्टाफ है, जिनमें से 12 पूर्व नक्सली हैं. इनमें 7 महिलाएं हैं और 5 पुरुष हैं, जोकि अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इससे जुड़े हैं. यहां काम करने वाले लक्ष्मण ने बताया कि वो सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी के सदस्य रूपेश के कमांडरों में से एक था. उसके ऊपर 8 लाख रुपये का इनाम था. उसने कहा, &#039;मैं यहां 5-7 दिन पहले ही आया हूं. मुझे पहले ट्रेनिंग कैम्प में रखा गया था, उसके बाद मैं घर चला गया और अब लौटकर आया हूं.&#039;

पंडुम कैफे में लखमी भी काम करता है. उसके ऊपर भी 8 लाख रुपये का इनाम था. उसने कहा, &#039;मैं यहां 3-4 महीने पहले से हूं. मेरी 10 हजार रुपये हर महीने सैलरी आती है. मेरी पत्नी की भी सैलरी आ रही है. हम दोनों बहुत खुश हैं.&#039;
बस्तर से कब तक हटेंगे CAPF कैंप?
जगदलपुर के डीएम आकाश छिकारा ने बताया, &#039;जिन नक्सलियों ने सरेंडर किया है, उन 221 लोगों को कौशल विकास की ट्रेनिंग दी गई है, जैसे- वेल्डिंग, इलेक्ट्रिशियन या प्लबंर. ताकि ये लोग यहां से सीखकर अपने गांव या किसी अन्य जगह जाएं और वहां अच्छे से जीवनयापन कर सकें.&#039; इसके अलावा उन्होंने बताया कि बस्तर को डेवलेप करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 234 किमी की सड़क अप्रूव हुई है. 500 से ज्यादा बीएसएनएल के टावर लगाए जा रहे हैं. इसके स ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>बंगाल के मिड डे मील में बदलाव, स्कूलों में सात्विक खाने के साथ अंडा शामिल</title>
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        <description><![CDATA[ West Bengal&#039;s Mid Day Meal: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील को अधिक पौष्टिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने फैसला किया है कि कोलकाता के सरकारी स्कूलों में ISKCON द्वारा परोसे जाने वाले मिड-डे मील के साथ छात्रों को अंडा भी दिया जाएगा. वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु सरकार भी छात्रों के लिए सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी परोसने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.
कोलकाता में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी शुरुआत
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि 1 अगस्त से पायलट प्रोजेक्ट के तहत कोलकाता के बड़े हिस्से के सरकारी स्कूलों में ISKCON मिड-डे मील उपलब्ध कराएगा. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के माध्यम से छात्रों को भोजन के साथ अतिरिक्त रूप से अंडा भी उपलब्ध कराएगी.
ISKCON परोसेगा सात्विक और पौष्टिक भोजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि ISKCON सरकारी स्कूलों के छात्रों को सात्विक और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि छात्रों को प्रोटीन से भरपूर और संतुलित आहार देने के उद्देश्य से राज्य सरकार भोजन के साथ अंडा भी उपलब्ध कराएगी.
पहले भी की थी योजना की घोषणा
इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने राज्य के शिक्षा मंत्रियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के बाद घोषणा की थी कि ISKCON कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों के स्कूलों में मिड-डे मील उपलब्ध कराएगा. उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि 1 अगस्त से प्राथमिक विद्यालयों में प्रति छात्र मिड-डे मील पर होने वाला खर्च 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया जाएगा.
स्कूलों में गैस पर बनेगा भोजन, लगेंगे सोलर पैनल
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिड-डे मील अब गैस पर तैयार किया जाएगा. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे. उन्होंने बताया कि प्रत्येक स्कूल में साफ-सुथरे शौचालय, आर्सेनिक मुक्त पेयजल और छात्रों के भोजन के लिए आवश्यक बर्तन उपलब्ध कराए जाएंगे.
स्कूलों के विकास के लिए जारी किए 296.64 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 80,375 सरकारी, सहायता प्राप्त और प्रायोजित स्कूलों के विकास के लिए नेट बैंकिंग के माध्यम से 296.64 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. उन्होंने कहा कि स्कूलों की संख्या को देखते हुए यह राशि बहुत अधिक नहीं है, लेकिन संस्थानों के लिए यह फंड बेहद जरूरी था.
पिछली सरकार पर लगाए आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में शिक्षा नीति, लापरवाही और अहंकार के कारण राज्य के शिक्षा संस्थानों को नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने कहा कि स्कूलों को मिलने वाले कॉम्पोजिट ग्रांट का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार देती है.
तमिलनाडु में सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी पर विचार
इधर, तमिलनाडु सरकार भी छात्रों के मिड-डे मील में बदलाव की तैयारी कर रही है. राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने कहा कि उन्होंने सप्ताह में एक दिन छात्रों को चिकन बिरयानी परोसने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को भेजा है. उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव के साथ सभी जरूरी आंकड़े और संबंधित दस्तावेज भी सरकार को सौंप दिए गए हैं.

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मंत्री बोले- समय के साथ मिड-डे मील में हुए कई बदलाव
राजमोहन ने कहा कि समय-समय पर मिड-डे मील योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं. उन्होंने कहा कि जस्टिस पार्टी ने भोजन योजना की शुरुआत की थी, कामराज सरकार ने इसे मिड-डे मील का रूप दिया, करुणानिधि सरकार ने इसमें अंडा शामिल किया, एम.जी. रामचंद्रन ने इसे पौष्टिक आहार योजना बनाया और जयललिता सरकार ने हर सप्ताह अंडा देने की व्यवस्था शुरू की. उन्होंने कहा कि इसी क्रम में उनकी इच्छा है कि छात्रों को सप्ताह में एक दिन चिकन बिरयानी भी परोसी जाए, इसलिए उन्होंने यह प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बंगाल, के, मिड, डे, मील, में, बदलाव, स्कूलों, में, सात्विक, खाने, के, साथ, अंडा, शामिल</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;मैं सही समय...&amp;apos;, सदन में भाषण पूरा न होने पर राहुल का रिएक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ राहुल गांधी के संसद में दिए भाषण को लेकर एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई. इस दौरान सदन में उनका भाषण पूरा नहीं हो सका. वहीं, अब इस पर प्रियंका गांधी ने भी बयान दिया है. जहां राहुल गांधी ने सदन के बाहर आकर कहा कि मैं सही वक्त पर बोलता हूं. तो वहीं प्रियंका गांधी ने कहा है कि पूरा देश देख रहा है कि क्या हुआ. बच्चे की आंख फोड़ दी गई है.&amp;nbsp;
इसके अलावा राहुल गांधी ने एक्स पर भी पोस्ट किया. उन्होंने कहा, &#039;आज संसद में मेरे भाषण के दौरान मैंने दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया और इसके जिम्मेदार का नाम लिया - गृह मंत्री अमित शाह. मुझे BJP ने बोलने नहीं दिया. आज शाम 6 बजे - प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा और वो सब कहूंगा जो सदन में कहने नहीं दिया गया. माइक बंद कर सकते हैं - छात्रों की गूंज नहीं.
राहुल गांधी ने अमित शाह को लेकर क्या बोला?
राहुल गांधी ने सदन में 29 जुलाई को दिए अपने भाषण के दौरान छात्रों के साथ हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर अपनी बात रखी. साथ ही पैलेट गन को लेकर भी गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधा. हालांकि, सदन में गृहमंत्री की गैर मौजूदगी पर भी राहुल गांधी ने अपना बयान दिया राहुल ने कहा, &#039;वे सदन में आए ही नहीं हैं. वे क्यों नहीं आ रहे हैं? भारत के तथाकथित बहादुर गृहमंत्री सदन में क्यों नहीं हैं? अगर उन्होंने कुछ नहीं किया है, और कोई आदेश जारी नहीं किया है, तो उन्हें बस यह साफ कर देना चाहिए कि उन्होंने आदेश जारी नहीं किया था. मुख्य बात यह है कि मुझे संसद में बोलने का अधिकार है, और मुझे वह अधिकार मिलना ही चाहिए.&#039;
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प्रियंका गांधी ने बयान कार्यवाही से हटाने को लेकर क्या कहा है?&amp;nbsp;
इधर, सदन में जाने से पहले प्रियंका गांधी ने नए शिक्षामंत्री प्रह्लाद जोशी वाले मामले पर भी अपना बयान दिया. उन्होंने कहा कि उनके बयान में असंसदीय क्या था? यह तो बस सच था. अगर वे सच बोलने की मुझे सजा देना चाहते हैं, तो ठीक है. मैं सच ही बोलूंगी. आपने देखा है कि वीडियो मौजूद हैं. यह सिर्फ एक मामला नहीं है. मंगलुरु में महिलाओं पर हुए पब हमले में शामिल व्यक्ति को बीजेपी में किसने शामिल किया था? प्रह्लाद जोशी ने. उसे पांच घंटे बाद&amp;mdash;या जब भी हुआ हो&amp;mdash;निकाल दिया गया था. लेकिन उसके शामिल होने की तस्वीर मौजूद है. यह सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के प्रति उनके नजरिए को दिखाता है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एंटी पेपर लीक बिल पास होने पर राहुल गांधी का पहला रिएक्शन, बोले&amp; गृह मंत्री...</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एंटी-पेपर-लीक-बिल-पास-होने-पर-राहुल-गांधी-का-पहला-रिएक्शन-बोले-गृह-मंत्री</link>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा ने बुधवार को एंटी पेपर लीक संशोधन बिल को मंजूरी दे दी. इस संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई. इस वजह से सदन की कार्यवाही पहले एक बार करीब 40 मिनट के लिए दोपहर 2:30 बजे तक और फिर तीन बजे तक स्थगित कर दी गई. इस बिल के पास होने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया क्योंकि बीजेपी के सांसद बार-बार उन्हें सामने से टोक रहे थे.
बिल पास होने के बाद राहुल गांधी का रिएक्शन
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, &#039;आज संसद में मेरे भाषण के दौरान मैंने दिल्ली में छात्रों पर हुई बर्बरता का मुद्दा उठाया और इसके जिम्मेदार का नाम लिया- गृह मंत्री अमित शाह. मुझे बीजेपी ने बोलने नहीं दिया. आज मैं वो सब कहूंगा जो सदन में कहने नहीं दिया गया. मेरा माइक बंद कर सकते हैं, लेकिन छात्रों की गूंज नहीं.&#039;
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को यह स्पष्टीकरण देना चाहिए कि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था या नहीं दिया था. उन्होंने सदन में अमित शाह को लेकर गंभीर आरोप लगाया जिसके कारण सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखा विरोध किया और उनसे माफी की मांग की.
लोकसभा में हुई तीखी बहस
तीन बजे सदन की बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के सांसद &amp;lsquo;एलओपी को बोलने&amp;rsquo; दो के नारे लगाते हुए हंगामा कर रहे थे. हंगामे के बीच ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया और उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी. विधेयक पारित होने के बाद कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी के बीच ही अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी. चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के मामले में सरकार ने फौरन कार्रवाई की और 12 जुलाई को जांच सीबीआई को सौंप दी गई.
जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने देश में पिछले कुछ साल में 152 बार पेपर लीक होने और इनमें 750 करोड़ बच्चों के प्रभावित होने का दावा किया. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;पता नहीं प्रियंका गांधी यह आंकड़ा कहां से लाईं. 2024 का कानून लागू होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने की बात कही, जबकि ऐसे मामलों में 52 प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं.&#039; उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रतिबद्धता के अनुरूप यही सरकार 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाई जो कांग्रेस का अधूरा काम था. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>एंटी, पेपर, लीक, बिल, पास, होने, पर, राहुल, गांधी, का, पहला, रिएक्शन, बोले-, गृह, मंत्री...</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;गृह मंत्री नहीं मजिस्ट्रेट देता आदेश&amp;apos;, राहुल के आरोपों पर BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गृह-मंत्री-नहीं-मजिस्ट्रेट-देता-आदेश-राहुल-के-आरोपों-पर-bjp-की-प्रेस-कॉन्फ्रेंस</link>
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        <description><![CDATA[ BJP Press Conference on Rahul Gandhi: सदन में बुधवार यानी 29 जुलाई को एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. इस पर चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाषण दिया. उनके भाषण के दौरान गृहमंत्री पर दिए एक बयान पर हंगामा हो गया. राहुल गांधी ने अपने भाषण में गृहमंत्री अमित शाह पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर कई आरोप लगाए हैं.
इधर, सदन की कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. सदन में लगाए राहुल गांधी के आरोपों का खंडन किया. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बना है. राहुल गांधी ने सदन में सिलसिलेवार तरीके से झूठ बोला है. वह भ्रम फैला रहे हैं. छात्रों के संसद मार्च में गोली नहीं चली है. गृहमंत्री ने किसी तरह का गोली चलाने का आदेश नहीं दिया है.&amp;nbsp;
राहुल गांधी ने झूठ बोला, गृहमंत्री ने नहीं दिया आदेश : संबित पात्रा
बीजेपी से सांसद संबित पात्रा ने कहा, &#039;बीजेपी कहती है कि गोली नहीं चलाई गई. राहुल ने झूठ बोला है. उन्होंने (राहुल गांधी) कहा कि गोली चालने का आदेश गृहमंत्री अमित शाह ने दिया. ये झूठ है, क्योंकि गोली चली नहीं तो आदेश कहां से देंगे. जहां भी मार्च होता है, वहां फोर्स होती है, तो वहां मजिस्ट्रेट होता है, जो ऑन द स्पॉट निर्णय लेता है कि गोली चलानी चाहिए या नहीं. गृहमंत्री निर्णय नहीं लेते. राहुलजी को ये मालूम होना चाहिए. उन्हें यदि नहीं मालूम तो प्रियंका जी आकर बता रहीं थी, सब लोग सत्य से अवगत करा रहे होंगे. लेकिन जागते हुए जो सो रहे हैं, उन्हें जगाया नहीं जा सकता. राहुल जी भ्रम फैला रहे थे.&#039;&amp;nbsp;

BJP National Spokesperson Dr. @sambitswaraj addresses press conference at BJP Headquarters, New Delhi. https://t.co/9E60g3bwZk
&amp;mdash; BJP (@BJP4India) July 29, 2026



इसके अलावा बीजेपी सांसद ने कहा, &#039;राहुल गांधी ने पूछा, गृहमंत्री कहां हैं. सदन में क्यों नहीं आए. मैं बताता हूं कि गृहमंत्री आपकी तरह चोरी-चोरी, चुपके-चुपके विदेश नहीं जाते. उनके सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं. ये सबको पता होता है. जिस समय राहुल बोल रहे थे, वे सदन में मौजूद थे. केवल सनसनी बनाने के लिए राहुल जी ने शाह का नाम लिया है.&#039;&amp;nbsp;
यह स्टूडेंट्स का अपमान है: संबित पात्रा
स्टूडेंट की कैटेगिरी वाले बयान पर संबित पात्रा ने कहा, &#039;लोकसभा में राहुल जी ने कहा कि 3 कैटेगिरी के स्टूडेंट्स होते हैं. इसके बाद उन्होंने कहा कि देश में 3 कैटेगिरी के लोग होते हैं. एक कैटेगिरी स्टूडेंट्स हैं, दूसरी इडियट और तीसरी अंधभक्त की कैटेगिरी है. ये देश के स्टूडेंट्स का अपमान है. देश के सारे स्टूडेंट्स विद्यार्थी हैं. देश का कोई भी स्टूडेंट इंडियट अंधभक्त नहीं है.&#039;
अमित शाह से नक्सली कांपते हैं: संबित पात्रा
इसके अलावा बीजेपी सांसद ने कहा, &#039;अमित शाह के काफिले में 30 गाड़ियां थीं. मैं चैलेंज करता हूं, राहुल जी दिखाइए कहां 30 गाड़ियां थीं. राहुल जी 5 मिनट सदन में बैठ नहीं सकते. निकल जाते हैं. 30 गाड़ियों तो पीएम मोदी के काफिले में नहीं होती. इन्होंने कहा कि अमित शाह जी कांप रहे थे, लेकिन राहुल जी अमित शाह वो शख्स हैं, जिन्हें देखकर नक्सली कांपते हैं. शाह जी ने चुन-चुनकर 100-100 हत्याएं करने वाले नक्सलियों का सफाया किया है. उनके नाम से आतंकवादी कांपते हैं. आप देश को भ्रमित मत करिए.&#039;
GenZ नहीं GenG की बात हुई: संबित पात्रासंबित पात्रा ने कहा कि जितने साल कांग्रेस सरकार रही है, तब जेन-Z नहीं, जेन G यानी गांधी जनरेशन की बात हुई. गांधी परिवार को आगे बढ़ाने की और गांधी परिवार की चिंता होती थी. इन्होंने आंध प्रदेश, तेलंगाना के आंदोलन में स्टूडेंट्स को गोली से उड़वा दिया. कश्मीर में, असम में स्टूडेंट्स पर गोली चलावाई थीं. उस समय सिर्फ गांधी परिवार की चिंता होती थी. अब जेन Z की चिंता होती है. उनकी बात होती है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>गृह, मंत्री, नहीं, मजिस्ट्रेट, देता, आदेश, राहुल, के, आरोपों, पर, BJP, की, प्रेस, कॉन्फ्रेंस</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;अगर पुराना कानून सफल था तो..&amp;apos;, महुआ मोइत्रा ने सरकार को घेरा</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा में एंटी-पेपर लीक (संशोधन) बिल 2026 को पास किए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह स्थिति अपने आप में एक मजाक जैसी है क्योंकि इसी सदन ने वर्ष 2024 में भी इसी विषय से जुड़ा कानून पारित किया था, लेकिन वह प्रभावी साबित नहीं हुआ. उनके अनुसार, यदि 2024 का कानून सही तरीके से काम करता तो सरकार को 2026 में फिर से संशोधन लाने की जरूरत नहीं पड़ती.
महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष ने इस बिल का विरोध नहीं किया क्योंकि यह छात्रों और युवाओं के हित से जुड़ा मामला है. उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी और विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया था कि बच्चों और छात्रों के भविष्य से जुड़े किसी भी कदम का समर्थन किया जाएगा.

VIDEO | Delhi: As the Lok Sabha passes the Anti-Paper Leak (Amendment) Bill by voice vote, TMC MP Mahua Moitra (@MahuaMoitra) says, &quot;This is an absolute mockery. This House passed this Act in 2024, but it obviously did not work because the government has had to bring another&amp;hellip; pic.twitter.com/aU42Ku9Eqg
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) July 29, 2026




ये भी पढ़ें: राज्यसभा में पास हुआ &amp;lsquo;वंदे मातरम&amp;rsquo; बिल, जानें सरकार ने क्या कहा?
राहुल गांधी के भाषण का जिक्र
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के सामने कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे रखे गए थे. उनके अनुसार, छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस ली जानी चाहिए. इसके अलावा दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर की गई सख्त कार्रवाई और बल प्रयोग को लेकर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए थी. उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री सदन में आकर इस पूरे मामले पर बयान दें. महुआ मोइत्रा ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब सदन में अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो उन्हें अपनी बात पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया. उनके मुताबिक राहुल गांधी किसी विशेष व्यक्ति को नहीं, बल्कि लोगों के एक समूह के बारे में टिप्पणी कर रहे थे, लेकिन सत्ता पक्ष ने उनके बयान का गलत अर्थ निकाला.
राहुल गांधी को &amp;nbsp;बात पूरी करने का मौका नहीं दिया गया- महुआ मोइत्रा
महुआ मोइत्रा &amp;nbsp;ने कहा कि राहुल गांधी को अपनी बात पूरी करने का मौका नहीं दिया गया और उनके भाषण के दौरान लगातार हंगामा किया गया. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि सदन में शोर-शराबे और व्यवधान के कारण महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा नहीं हो सकी. TMC सांसद ने कहा कि लोकतंत्र में हर पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की बात सुनने के बजाय लगातार व्यवधान पैदा किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है.
लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है पेपर लीक का मुद्दा
महुआ मोइत्रा ने दोहराया कि पेपर लीक का मुद्दा देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और इस पर राजनीति से ऊपर उठकर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी. उनके अनुसार, केवल कानून में संशोधन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही तय करने और छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर भी चर्चा जरूरी है.
ये भी पढ़ें: लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल पास, हंगामे के बाद ध्वनि मत से मिली मंजूरी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अगर, पुराना, कानून, सफल, था, तो.., महुआ, मोइत्रा, ने, सरकार, को, घेरा</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;किसी को नहीं बख्शेंगे...&amp;apos;, पेपर लीक बिल पास होने पर अमित शाह का पहला रिएक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा से एंटी पेपर लीक संसोधन बिल पास होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के छात्रों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि इस बिल में ऐसे कई कड़े प्रावधान हैं जो युवाओं को सपनों की रक्षा करेगा. एक्स पर पोस्ट कर गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, &#039;यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता को भंग करने की हिम्मत करने वालों के लिए सबसे कठोर सजा के कड़े प्रावधान करके हमारे युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं की रक्षा करता है.&#039;
किसी को नहीं बख्शेगी सरकार: अमित शाह
उन्होंने कहा, &#039;मोदी सरकार हमारे छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी. हमारी सरकार यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी कि उन्हें कानून की पूरी सख्ती का सामना करना पड़े.&#039;
लोकसभा में बुधवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित हो गया. साथ ही, विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता के रवैये पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है.
राहुल गांधी का अमित शाह पर बड़ा आरोप
दिल्ली में छात्रों के आंदोलन, कथित पुलिस कार्रवाई और देश में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर बुधवार (29 जुलाई) को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों के बाद घमासान तेज हो गया. विपक्षी दलों के नेताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर गृह मंत्रालय को कटघरे में खड़ा किया और सरकार से जवाब देने की मांग की.
राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को यह स्पष्टीकरण देना चाहिए कि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था या नहीं दिया था. उन्होंने सदन में अमित शाह को लेकर गंभीर आरोप लगाया जिसके कारण सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखा विरोध किया और उनसे माफी की मांग की. हालांकि अमित शाह को लेकर दिए गए बयानों को लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया है.
ये भी पढ़ें : &#039;गृह मंत्री नहीं मजिस्ट्रेट देता आदेश&#039;, राहुल के आरोपों पर BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>किसी, को, नहीं, बख्शेंगे..., पेपर, लीक, बिल, पास, होने, पर, अमित, शाह, का, पहला, रिएक्शन</media:keywords>
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        <title>छात्र प्रदर्शन मामलों में SC का आदेश, अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/छात्र-प्रदर्शन-मामलों-में-sc-का-आदेश-अगली-सुनवाई-तक-गिरफ्तारी-पर-रोक</link>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों देश भर में हुए छात्रों के प्रदर्शन के मामलों में फिलहाल कोई गिरफ्तारी न करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा है कि हिरासत में लिए जा चुके जिन लोगों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है, उन्हें रिहा कर दिया जाए. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने संकेत दिया है कि वह इन मामलों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी का गठन करेगा. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को सौंपी जा सकती है.
कोर्ट ने कहा है कि वह मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 3 अगस्त को करेगा. जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और उसके बाद दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने और भी कई अहम निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, केरल और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इन राज्यों के मुख्य सचिवों को ऑनलाइन पेश होने को कहा गया है.

ये भी पढ़ें: प्रियंका गांधी के शिक्षा मंत्री पर बयान से हंगामा, पक्ष-विपक्ष भिड़े
केंद्र ने किया छात्रों का समर्थन
सुनवाई के दौरान दिल्ली और केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी छात्रों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि छात्रों को प्रदर्शन का अधिकार है. छात्र ऐसी हिंसा नहीं कर सकते. इसमें अपराधी तत्व घुस गए थे. भीड़ में शामिल कई लोगों की पहचान हुई है जो हत्या, रेप जैसे गंभीर अपराध के आरोपी हैं.
&#039;व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक न हो&#039;
कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा है कि वह मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, कैमरा रिकॉर्डिंग, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूत को सुरक्षित रखा जाए. कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रदर्शनकारियों, खास तौर पर छात्रों का व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाए.
रिहाई का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सहित सभी राज्यों की पुलिस को उनके यहां दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी है. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया है कि अगली सुनवाई तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है. बिहार में नाबालिग प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखने के आरोपों पर गंभीर चिंता जताते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर नाबालिगों को हिरासत में रखा गया है तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए. जिन प्रदर्शनकारियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें भी रिहा किया जाए.प्रस्तावित बिल के तहत मौजूदा 1972 की तय तारीख को हटाकर सात साल की लगातार निवास अवधि को आधार बनाया जाएगा.
ये भी पढ़ें: एंटी पेपर लीक बिल पर बहस, बांसुरी स्वराज ने UPA सरकारों की लीक गिनाई ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कौन हैं प्रो कामकोटी? जिन्हें प्रियंका गांधी ने कहा &amp;apos;गोमूत्र एक्सपर्ट&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कौन-हैं-प्रो-कामकोटी-जिन्हें-प्रियंका-गांधी-ने-कहा-गोमूत्र-एक्सपर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का सदन में मंगलवार (28 जुलाई) को दिया भाषण सुर्खियां बटोर रहा है. उन्होंने अपने भाषण में कई बातों का जिक्र किया, लेकिन जिस पर सभी की निगाहें अटक गईं, वो नाम था IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी कामकोटी. जिन्हें &#039;गोमूत्र एक्सपर्ट&#039; कहे जाने का मामला गरमा गया है. अब कामकोटी के एजुकेशन बैकग्राउंड से जुड़ी जानकारी सामने आई है.&amp;nbsp;
प्रो. वी. कामकोटी देश के कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं. उन्होंने देश के आईआईटी मद्रास से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में एमएस और पीएचडी किया है. 2001 में बतौर फैकल्टी उन्होंने आईआईटी मद्रास ज्वाइन किया था. इसके अलावा 2002 में आईआईटी मद्रास में डायरेक्टर बने थे. &amp;nbsp;प्रोफेसर कामकोटी ने इन्फोर्मेंशन सिक्योरिटी, VLSI डिजाइन और कंप्यूटर आर्किटेक्चर में विशेषज्ञता हासिल की है.
इन जिम्मेदारियों को निभा चुके हैं कामकोटी&amp;nbsp;
इसके अलावा उन्होंने आईआईटी मद्रास में JEE के अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च के एसोसिएट डीन के तौर पर अपनी सेवाएं दी है. इसके अलावा कई इंटरनेशनल जर्नल्स और सम्मेलनों में उनके 150 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश हो चुके हैं. इसके अलावा पीएचडी और मास्टर ऑफ साइंस के रिसर्च स्कॉलर्स को उन्होंने गाइड भी किया है. इनके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाई हैं.
पेपर लीक रोकने ये बिल कितना कारगर? सदन की मंजूरी के बाद चेंज होंगे रूल&amp;nbsp;
वर्तमान में वह आईआईटी मद्रास में माइक्रो प्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम, इन्फ्रॉर्मेंशन सिक्योरिटी एजुकेशन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम को लीड कर रहे हैं. साथ ही वह नेशनल सिक्योरिटी बोर्ड के मेंबर भी हैं. साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के चैयरमैन रह चुके हैं. इसके अलावा वह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, आरबीआई की टेक्नोलॉजी में अपनी सर्विस दे रहे हैं. उन्हें &amp;nbsp;कई पुरस्कार मिल चुके हैं. इनमें डीआरडीओ एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड समेत कई अवॉर्ड मिल चुके हैं.&amp;nbsp;
किस बयान का जिक्र प्रियंका गांधी ने किया है?&amp;nbsp;
दरअसल, जिस बयान का जिक्र प्रियंका गांधी ने किया, उससे जुड़ा मामला 2025 का है. चेन्नै की एक गौशाला में माट्टू पोंगल प्रोग्राम के दौरान बोलते हुए कामकोटी ने दावा किया था गौमूत्र बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने के गुण होते हैं. यह पाचन के लिए फायदेमंद होता है. साथ ही कहा था कि पाचन की समस्या जैसे इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम का इलाज हो सकता है. उस समय उनका यह बयान चर्चा का विषय बना था.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;PM मोदी के वीडियो बैन की सजा भुगतेगा फेसबुक! सरकार ने किया तलब ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कौन, हैं, प्रो, कामकोटी, जिन्हें, प्रियंका, गांधी, ने, कहा, गोमूत्र, एक्सपर्ट</media:keywords>
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        <title>‘जो पड़ोसी देश में हुआ, वो हरकत यहां न हो जाए’, ओवैसी ने चेताया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जो-पड़ोसी-देश-में-हुआ-वो-हरकत-यहां-न-हो-जाए-ओवैसी-ने-चेताया</link>
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        <description><![CDATA[ संसद के मानसून सत्र के 9वें दिन मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को लोकसभा में देर रात तक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 यानी एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा चलती रही. इस दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ने इस बिल के विरोध में अपनी बात रखी.
उन्होंने शायरी के साथ अपनी बात की शुरुआत के साथ कहा कि मैं उन सभी नौजवानों के साथ खड़ा हूं, जो मुसीबत में हैं और जिनकी जिंदगियां पेपर लीक की वजह से खराब हो चुकी है. इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार बेरहमी के साथ नौजवानों के साथ बर्ताव कर रही है. ये युवाओं से पूरी तरह से दूर हो चुकी है और इनमें इनकी तकलीक समझना तो छोड़िए, एहसास भी उनमें खत्म हो चुका है.
एंटी पेपर लीक बिल को लेकर सरकार पर ओवैसी का निशाना
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा, &amp;lsquo;आप जुर्माना बढ़ा रहे हैं, आप सजाएं बढ़ा रहे हैं, लेकिन इनके बढ़ाने से कुछ होने वाला है क्या? असल गलती कहां पर है- आपने अकाउंटिबिलिटी को खत्म कर दिया, जांच एजेंसियों को कोई ताकत नहीं दी, न हीं आप जांच एजेंसियों से यह कहते हैं कि जो ये पेपर लीक करते हैं, उन्हें सजा दी जाए.&amp;rsquo;
उन्होंने नीट री-एग्जाम के लिए भारतीय वायु सेना के विमानों के इस्तेमाल को लेकर टिप्पणी की. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;कितनी अफसोस की बात है कि ऐसे विषय में भारतीय वायु सेना का इस्तेमाल किया जा रहा है. प्रधानमंत्री 130 करोड़ जनता के हैं और वो सिर्फ एक परीक्षा की निगरानी कर रहे हैं और सरकार बड़े फक्र से कहती है कि इस मामले को प्रधानमंत्री खुद देख रहे हैं, इंडियन एयरफोर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

ओवैसी का सरकार पर कुशासन का आरोप
ओवैसी ने आगे कहा, &amp;lsquo;सरकार ये कानून लाकर देश की जनता और नौजवानों को यह संदेश दे रही है कि तुम सड़क पर निकलकर आओ, तब हम डरेंगे. अगर ऐसे संदेश दिए जा रहे हैं तो सरकार को सोचना पड़ेगा कि लोग सिर्फ अराजकता और विरोध प्रदर्शन पर भरोसा रखेंगे, संसद पर भरोसा नहीं रखेंगे.&amp;rsquo;
उन्होंने अंत में बड़ा बयान देते हुए कहा, &amp;lsquo;आप नौजवानों को छोड़कर हुकूमत करना चाहते हैं. मैं कहना चाहता हूं कि आपके कुशासन (Misgovernance) के कारण कहीं ऐसा न हो जाए कि पड़ोसी देश में जो हुआ, वही यहां भी हो. आप उस आफत को दावत दे रहे हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः एंटी पेपर लीक बिल पर बहस, बांसुरी स्वराज ने UPA सरकारों की लीक गिनाई ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘जो, पड़ोसी, देश, में, हुआ, वो, हरकत, यहां, न, हो, जाए’, ओवैसी, ने, चेताया</media:keywords>
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        <title>PM मोदी ने सचिवों के साथ की हाईलेवल मीटिंग, जानें क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pm-मोदी-ने-सचिवों-के-साथ-की-हाईलेवल-मीटिंग-जानें-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की. पीएम मोदी ने वित्त और अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भावी कार्य एजेंडे की समीक्षा की. बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रगति को और तेज करना था.
पीएम मोदी ने सभी मंत्रालयों और विभागों में मजबूत टीम भावना विकसित करने पर जोर देते हुए अधिकारियों से साझा उद्देश्य के साथ काम करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि सरकार के अंदर Horizontal और Vertical दोनों तरह की कार्यगत बाधाओं को समाप्त करना आवश्यक है, ताकि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और एकीकृत परिणाम दे सकें.
बैठक में सचिवों से पीएम मोदी ने क्या कहा?
नागरिक-केंद्रित सुशासन के महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, &amp;lsquo;भारत के नागरिक ही शासन व्यवस्था के केंद्र में होने चाहिए. हर निर्णय और हर नीति का मार्गदर्शन आम नागरिक के हितों और आकांक्षाओं से होना चाहिए.&amp;rsquo; उन्होंने कहा, &amp;lsquo;भारत अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए.&amp;rsquo; उन्होंने तकनीकी आत्मनिर्भरता और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं के निर्माण के महत्व पर बल दिया.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;ऊर्जा सुरक्षा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से है. इनोवेशन, विविधीकरण और क्षमता निर्माण में तेजी के माध्यम से भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा.&amp;rsquo; &amp;nbsp;
रिफॉर्म्स सिर्फ एक शब्द नहीं प्रभावी शासन की जरूरत- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार (रिफॉर्म्स) सिर्फ एक प्रचलित शब्द नहीं, बल्कि प्रभावी शासन के लिए निरंतर आवश्यकता हैं. उन्होंने प्रक्रियाओं में सुधार, कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और संस्थागत दक्षता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा पर भी समान रूप से मजबूत ध्यान देना आवश्यक है, ताकि डिजिटल प्रणालियों और अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

उन्होंने उभरते साइबर खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में युवा इनोवेटर्स (Innovators) और उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया और कहा कि इसे एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए.
पीएम मोदी ने सक्रिय और प्रभावी संवाद की जरूरत पर दिया जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने उन रणनीतिक क्षेत्रों में, जहां देश बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण पहल कर रहा है, सक्रिय और प्रभावी संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि इन प्रयासों को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार और निराधार आशंकाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके.
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;उभरते और भविष्य के उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने के लिए उद्योग जगत के सहयोग से नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए. सरकार को हमेशा युवा सोच वाली, गतिशील और दूरदर्शी बने रहना चाहिए, ताकि वह नई चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप फुर्ती और नवाचार के साथ स्वयं को लगातार ढालती रहे.&amp;rsquo;
बैठक के दौरान सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति, प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुतियां और चर्चा की. बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों और विभागों के सचिव और प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पूर्व अग्निवीरों के लिए गुडन्यूज! SSB भर्ती में हुआ ये बड़ा बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ भारत सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी सीएपीएफ्स और असम राइफल्स यानी एआर में कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन पदों के लिए एक नई &#039;पूर्व-अग्निवीर&#039; भर्ती श्रेणी बनाई है. सरकार की तरफ से यह जानकारी मानसून सत्र के दौरान दी गई है. सरकार से इससे जुड़ा सवाल पूछा गया था. यह सारी जानकारी गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में पिछले हफ्ते दी थी.&amp;nbsp;
किस तरह के बदलाव भरे प्रावधान सरकार की तरफ से किए गए हैं?
जानकारी के मुताबिक, सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स (CAPFs और AR) में क्रमानुसार जो कैटेगरी तैयार की है, उसके लिए सरकार की तरफ से जरूरी प्रावधान किए गए हैं. इन प्रावधानों के तहत 50 प्रतिशत रिजर्वेशन रखा गया है. साथ ही निर्धारित ऊपरी आयु सीमा में 3 साल की छूट रखी गई है.
इसके अलावा पूर्व अग्निवीरों के पहले बैच के उम्मीदवारों को निर्धारित ऊपरी आयु सीमा से 5 साल अतिरिक्त आयु में छूट देने का प्रावधान रखा गया है.&amp;nbsp; इनके अलावा शारीरिक मानक परीक्षण (PST), शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET) और लिखित परीक्षा से छूट दी गई है.
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क्या है अग्निवीर ?&amp;nbsp;
अग्निवीर भारत सरकार की अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना (थल, वायु और नौसेना) में चार साल के लिए भर्ती होने वाले युवा सैनिक हैं. यह चार साल की सर्विस है. इसमें मासिक वेतन 30 हजार है. वहीं चार साल बाद लगभग 11.7 लाख का कर मुक्त सेवानीधि पैकेज भी शामिल है. इस सेवा को पूरी करने वाले पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में 50 प्रतिशत रिजर्वेशन का प्रावधान भी रखा गया है.&amp;nbsp;
अग्निवीर बनने के लिए कैंडिडेट को निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इस प्रक्रिया के तहत लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट और मेडिकल जांच शामिल होती है. चयन प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य, फिट और सक्षम उम्मीदवारों का चयन करना है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;जांच करें, एक्शन न लें&amp;apos;, प्रदर्शन में लाठीचार्ज पर 8 राज्यों को SC का नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसूगैस के गोले भी छोड़े थे. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. मंगलवार (28 जुलाई) को इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, &#039;शुरू में आंदोलन शांति से चल रहा था तो फिर एक दिन हिंसा हो गई. इसके दो कारण हो सकते हैं. पहला कि पुलिस ने ज्यादा सख्ती कर दी और दूसरा कि प्रदर्शनकारियों में ऐसे लोग घुस आए जो हिंसा भड़काना चाहते थे.&#039; उन्होंने कहा कि जब एक बार प्रोटोकॉल बन जाएगा, तब जवाबदेही तय करना आसान हो जाएगा.&#039;
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या-क्या कहा
लाठीचार्ज मामले को लेकर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, &#039;पुलिस चाहे तो उग्र लोगों पर एफआईआर कर सकती है. लेकिन जहां तक संभव हो बल प्रयोग से बचना चाहिए. प्रदर्शन के दौरान ऐसे पुलिसकर्मी भी थे, जो कि यूनिफॉर्म में नहीं थे और हथियार लेकर चल रहे थे. उन्होंने बलप्रयोग भी किया.&#039;

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, &#039;पूर्व चीफ जस्टिस की निगरानी में SIT बननी चाहिए. कोर्ट भविष्य के उपाय की बात कर रहा है. हम उसका स्वागत करते हैं. लेकिन इन घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है. प्रदर्शनकारियों की डिजिटल टेक्नोलॉजी से पहचान कर उसे सार्वजनिक करने पर भी रोक लगनी चाहिए. इसमें छात्र और कई नाबालिग हैं.&#039;
सुप्रीम कोर्ट में उठा जुनैद का मसला
सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने बिहार में हुए प्रदर्शन का मामला भी उठाया. उन्होंने कहा कि बिहार में नाबालिगों यहां तक कि 13 साल तक के बच्चों को भी हिरासत में ले लिया गया है. वहीं प्रशांत भूषण ने कहा, &#039;मैं जुनैद का मसला रखना चाहता हूं. उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.&#039; इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह एक अलग मसला है.
सुप्रीम कोर्ट ने आठ राज्यों को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के मामले पर उत्तर प्रदेश समेत आठ राज्यों को नोटिस जारी किया है. इस लिस्ट में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, एमपी, बिहार, असम, केरल, महाराष्ट्र और यूपी शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, &#039;महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, केरल, असम, यूपी के मामले यहां रखे गए हैं. अभिव्यक्ति के अधिकार और जीवन के अधिकार का हवाला दिया गया है. दिल्ली में पुलिस के अत्यधिक बलप्रयोग की बात बताई गई है.&#039;
कोर्ट ने यह भी कहा है कि पुलिस जांच जरूर करे, लेकिन फिलहाल एक्शन न ले. सीजेआई ने कहा, &amp;nbsp;&#039;लाठीचार्ज, पैलेट गन, आंसू गैस के इस्तेमाल की बात बताई गई है. यह भी बताया गया है कि कुछ लोगों की आंख को नुकसान पहुंचा. मीडिया के लोग भी घायल हुए.&#039;
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>NEET आंदोलनकारियों को बिहार&amp;असम में बड़ी राहत, बंगाल खामोश!</title>
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        <description><![CDATA[ NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बिहार और असम सरकार की ओर से राहत मिलने लगी है. दोनों राज्यों ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
इसी बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने NEET परीक्षा में सफल छात्रों को सम्मानित करने का कार्यक्रम तय किया है. मंगलवार को मुख्यमंत्री खुद NEET-UG परीक्षा में सफल होने वाले शीर्ष 100 छात्रों को सम्मानित करेंगे. यह कार्यक्रम नाबन्न सभागार में आयोजित किया जाएगा. यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में कोलकाता में NEET पेपर लीक के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए थे और कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई थीं.

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कोलकाता में प्रदर्शन
पिछले शुक्रवार को कोलकाता में प्रदर्शन के दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी. वामपंथी संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. प्रदर्शनकारियों ने एस्प्लेनेड क्षेत्र के डोरिना चौराहे को जाम कर दिया था. इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर जूते और पानी की बोतलें भी फेंकी थीं. पुलिस के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का समर्थन करने वाले कुछ प्रदर्शनकारी, जिन्हें अलग से मार्च निकालने की अनुमति नहीं मिली थी. वे बाद में धर्मतला में वामपंथी संगठनों की रैली में शामिल हो गए थे. इस बीच CJP ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है.
CJP पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका का बयान
CJP पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की बातचीत में यह सहमति बनी थी कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियां वापस ली जाएंगी. साथ ही भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी या आयोजक के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा. CJP की कानूनी टीम से जुड़ी रत्ना सिंह ने बताया कि असम, बिहार और पश्चिम बंगाल में हिरासत में लिए गए लोगों की मदद के लिए वकील लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 10 मुस्लिम समुदाय से हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन लोगों के खिलाफ कड़े कानून लगाए जाने की संभावना है.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>ममता के लिए आफत! सामने आई NCPI के सभी MPs की लिस्ट, अब क्या होगा?</title>
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        <description><![CDATA[ लोकसभा में एनसीपीआई नेता सुदीप बंदोपाध्याय (कोलकाता उत्तर) ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए 20 सांसदों में से 19 की सूची दी है, जिन्होंने 18 मई को लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को अपने नाम भेजे थे. बता दें कि इनमें काकोली घोष दस्तीदार (बारासात) शताब्दी रॉय (बीरभूम) बापी हलदर (मथुरापुर (एससी)) डॉ. शर्मिला सरकार (बर्धमान पुरबा) शामिल हैं.
इसके अलावा प्रसून बंद्योपाध्याय (हावड़ा), जगदीश बर्मा बसुनिया (कूचबिहार), असित कुमार मल (बोलपुर ),अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), रचना बनर्जी (हुगली) का भी नाम शामिल हैं. महुआ मोइत्रा की करीबी नेता सयोनी घोष (जादवपुर), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद), यूसुफ पठान (बहरामपुर), मिताली बाग (आरामबाग (एससी)) माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), कालीपाड़ा सोरेन (झारग्राम (एसटी), दीपक अधिकारी (घाटल), जून मालिया (मेदिनीपुर), पार्थ भौमिक (बैरकपुर) शामिल हैं.

बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मंगलवार को नई दिल्ली में टीएमसी के बागी सांसदों से मुलाकात करेंगे. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ये सभी सांसद नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए थे. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की इन सांसदों से मुलाकात उस वक्त होने वाली है, जब टीएमसी एंटी-डिफेक्शन लॉ के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की कोशिश कर रही है.
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र&amp;nbsp;ऐसे में सीएम के साथ ये बैठक खास तब हो जाती है, जब टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखने के ठीक एक दिन बाद हो रही है. अभिषेक बनर्जी ने सांसदों के खिलाफ पार्टी की डिसक्वालिफिकेशन पिटीशन को जल्द से जल्द निपटाने की अपील की थी.&amp;nbsp;
बागी सांसदों को डिसक्वालिफाई करने की मांगस्पीकर ने बागी सांसदों के लोकसभा में अलग बैठने का इंतजाम पहले ही कर दिया है. इससे पहले अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के साथ स्पीकर ओम बिरला ने मुलाकात की थी और सभी बागी सांसदों को तुरंत डिसक्वालिफाई करने की मांग की गई थी.
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पेपर धांधली के 21 साल में 220 केस, देशभर से जुड़े तार, 10 करोड़ प्रभावित ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>बांकीपुर उपचुनाव पर BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने कर डाली बड़ी भविष्यवाणी</title>
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        <description><![CDATA[ बिहार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भरोसा जताया है कि इस बार भी जनता बीजेपी को अपना समर्थन देगी. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता का BJP और NDA के साथ गहरा जुड़ाव रहा है. नितिन नवीन ने कहा कि उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा के समय से ही इस क्षेत्र की जनता बीजेपी के साथ खड़ी रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने हमेशा सेवा भाव से जनता के लिए काम किया है और इसी वजह से लोगों का भरोसा पार्टी पर बना हुआ है.
नितिन नवीन ने कहा कि जनता का आशीर्वाद इस बार भी BJP के साथ दिखाई दे रहा है. उन्हें पूरा विश्वास है कि बांकीपुर की जनता BJP प्रत्याशी नीरज सिन्हा को अपना समर्थन और आशीर्वाद देगी. उन्होंने कहा कि 30 जुलाई को होने वाले मतदान में जनता एक बार फिर BJP के पक्ष में फैसला करेगी. राजद और जनसुराज की चुनौती को लेकर पूछे गए सवाल पर नितिन नवीन ने कहा कि बीजेपी ने हमेशा विकास को राजनीति का आधार बनाया है. उन्होंने कहा कि वह खुद इस क्षेत्र से 5 बार विधायक रहे हैं और उन्होंने हमेशा क्षेत्र के विकास पर ध्यान दिया है.

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बिहार में जंगलराज जैसी स्थिति थी-नितिन नवीन
नितिन नवीन ने कहा कि एक समय बिहार में जंगलराज जैसी स्थिति थी. उस दौर में महिलाएं और बेटियां घर से बाहर निकलने में भी डरती थीं, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में बड़ा बदलाव आया और विकास को सरकार की पहचान बनाया गया. नितिन नवीन ने कहा कि बांकीपुर की जनता विकास और सुशासन के साथ खड़ी रहेगी. उन्होंने दावा किया कि अगर बीजेपी को जनता का समर्थन मिलता है तो विकास की गति और तेज होगी. उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि 30 जुलाई को बांकीपुर में एक बार फिर कमल खिलेगा.
हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट
पटना जिले की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है, जबकि चुनाव परिणाम 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे. यह उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि नितिन नवीन राज्यसभा सदस्य बनने के बाद इस सीट से इस्तीफा दे चुके हैं. वह इस सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं. इससे पहले उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा भी चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वर्ष 1995 से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा है.
सभी की नजर 30 जुलाई के मतदान पर
इस बार चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है. बीजेपी ने नीरज सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से रेखा गुप्ता मैदान में हैं. वहीं जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है. अब सभी की नजर 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है, जहां यह तय होगा कि बांकीपुर की जनता किस उम्मीदवार और किस पार्टी पर अपना भरोसा जताती है.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>जंतर&amp;मंतर हिंसा के बाद पुलिस परिवारों की SC से गुहार&amp; ‘हमें भी...’</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के &#039;संसद चलो&#039; प्रदर्शन के दौरान हिंसा का शिकार हुए ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने मांग की है कि ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों को भी आम नागरिकों की तरह जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का संरक्षण प्रदान किया जाए.
यह याचिका घायल ASP कैलाश सिंह बिष्ट, ASI संदीप, कॉन्स्टेबल धीरज और ASI हेमेन्दर राठी के परिवार के सदस्यों लक्ष्य सिंह बिष्ट, कुंजल, निशा यादव और अक्षत राठी- ने संयुक्त रूप से दायर की है. उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट प्रदर्शनों से जुड़े दिशानिर्देश तय करते समय उनका पक्ष भी सुने.

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याचिका में क्या बताया गया?
याचिका में बताया गया है कि 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच जंतर-मंतर पर 20,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों की भीड़ को संभालने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था. 20 जुलाई को बैरिकेड्स तोड़े जाने और हिंसा के दौरान 130 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए. वहीं 24 और 25 जुलाई को भीड़ ने पथराव और नुकीली टाइलों से हमला किया. इसमें कई वरिष्ठ अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए. ऐसे में कुल घायल पुलिसकर्मियों की संख्या लगभग 200 है.
याचिकाकर्ताओं का तर्क
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों पर भी लागू होता है. अनुच्छेद 19 लोगों को विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन इसकी सीमाएं हैं. यह कानून लागू करवाने वाले पब्लिक सर्वेंट पर हिंसा करने की अनुमति नहीं देता.
अदालत से क्या मांग की गई?
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि मुख्य याचिका में पुलिसकर्मियों के परिवार को पक्षकार के रूप में शामिल किया जाए. इससे प्रदर्शनकारियों का ही नहीं, घायल पुलिसकर्मियों का मानवीय पक्ष भी सामने आ सकेगा. याचिकाकर्ताओं ने यह मांग भी की है कि पुलिस बल के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों की सख्त जवाबदेही तय करने और ऑन-ड्यूटी लोगों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए जाएं.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>PM मोदी और राहुल को टैग कर क्या बोलीं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि?</title>
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        <description><![CDATA[ नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर 26 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने सोमवार (27 जुलाई, 2026) को राजनीतिक पार्टियों की तरफ से की जा रही टिप्पणियों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को टैग करते हुए एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस की तरफ से की गई टिप्पणियों को लेकर चर्चा की.
पीएम मोदी और राहुल गांधी को टैग करके क्या बोलीं गीतांजलि?
गीतांजलि जे. आंग्मो ने पीएम मोदी और राहुल गांधी को टैग करते हुए ट्वीट में कहा, &amp;lsquo;जब सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल ने हमें देश-विरोधी, चीन का एजेंट, विदेशी फंडिंग पाने वाला और हम पर वो सभी लेबल लगाए, जो वो लगा सकते थे.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;इसके बाद आज जब हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को दिखावटी कहा, तो कांग्रेस के ट्रोल्स हमें संघी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पिट्ठू कह रहे हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

When @Wangchuk66 was detained, the BJP IT cell called us anti-national, Chinese agents, foreign-funded, and every other label they could manufacture.Today, because we called the Congress&#039; protest at PM&#039;s residence insincere, Congress trolls are calling us Sanghis, RSS and BJP&amp;hellip;
&amp;mdash; Gitanjali J Angmo (@GitanjaliAngmo) July 27, 2026



भारत में राजनीति के तौर-तरीके बदलने की जरूरत- गीतांजलि
गीतांजलि आंग्मो ने कहा, &amp;lsquo;झंडे अलग-अलग हैं, लेकिन तरीका वही है. हमारी पूरी राजनीतिक संस्कृति में यह बुराई फैल चुकी है. भारत को सिर्फ सरकार बदलने की जरूरत नहीं है. उसे राजनीति के तौर-तरीके बदलने की जरूरत है, जहां असहमति पर बातचीत किए जाए, न कि बुरा-भला कहा जाए, जहां देशभक्ति को ईमानदारी से मापा जाए, न कि पार्टी से जुड़ाव से और जहां गुटों के प्रति वफादारी से ज्यादा सच मायने रखे.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक को लेकर कही गई कई बातें
दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान जब एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल किया. इस दौरान सोनम वांगचुक को लेकर कई तरह की टिप्पणियां की गईं थीं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>J&amp;amp;K में दिखा पाकिस्तानी ड्रोन, आर्मी अलर्ट, राजौरी&amp;सांबा में सर्च ऑपरेशन</title>
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        <description><![CDATA[ पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने के बाद सुरक्षा बलों ने सोमवार (27 जुलाई 2026) को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और सांबा जिले में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास कई अग्रिम इलाकों में तलाशी अभियान शुरू किया. अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के सांबा और राजौरी जिलों में इंटरनेशनल बॉर्डर और लाइन ऑफ कंट्रोल के पास कई अग्रिम इलाकों में सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया. यह कार्रवाई रात में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने के बाद की गई.
बॉर्डर के पास देखे गए पाकिस्तानी ड्रोन
अधिकारियों ने कहा, &#039;सांबा में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास नंदपुर और राजौरी के नौशेरा सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास तरकुंडी-साज में सतर्क सेना के जवानों ने ड्रोन की गतिविधि देखी. दोनों इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई और सेना और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद से सुबह सर्च ऑपरेशन शुरू किया, ताकि यह पक्का किया जा सके कि संदिग्ध ड्रोन से कोई नशीला पदार्थ या हथियार तो नहीं गिराया गया है. शाम तक तलाशी अभियान जारी था.&#039;
सांबा और कठुआ जिलों में निगरानी बढ़ा दी गई
उन्होंने बताया कि अभी तक कोई चीज बरामद नहीं हुई है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है. यह ताजा घटना पिछले हफ्ते से अग्रिम इलाकों में ड्रोन गतिविधियों में हुई साफ बढ़ोतरी के बीच सामने आई है. अधिकारियों ने बताया कि हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी या घुसपैठ की कोशिशों की चिंताओं के बीच कई संदिग्ध ड्रोन देखे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों, खासकर सांबा और कठुआ जिलों में निगरानी बढ़ा दी है और ड्रोन-रोधी उपाय तेज कर दिए हैं.
राजौरी जिले में मोर्टार शेल मिला
इस बीच, रविवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में 51-एमएम का मोर्टार शेल मिला और बाद में बम निरोधक दस्ते ने नियंत्रित धमाके के जरिए उसे नष्ट कर दिया. अधिकारियों ने बताया कि राजधानी इलाके के कयान गांव में शाम करीब 4 बजे किसानों को एक खुले खेत में मोर्टार शेल पड़ा हुआ मिला. सूचना मिलने पर राष्ट्रीय राइफल्स के जवान बम निरोधक टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मोर्टार शेल को बरामद किया. बाद में बिना किसी नुकसान के नियंत्रित धमाके के जरिए नष्ट कर दिया गया. सेना जम्मू-कश्मीर में एलओसी की सुरक्षा करती है, जबकि बीएसएफ इंटरनेशनल बॉर्डर की सुरक्षा करती है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>RAF ने चलाई पैलेट गन? जंतर&amp;मंतर घटना पर सामने आई बड़ी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में अनियंत्रित भीड़ को काबू करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने वाकई पैलेट गन का इस्तेमाल किया था. CRPF के सूत्रों ने इस बात की तस्दीक की है. लेकिन CRPF के DG, जीपी सिंह ने पूरे प्रकरण पर आधिकारिक बयान के लिए एक-दो दिन का समय मांगा है ताकि ये साफ हो सके कि किन परिस्थितियों में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था.
जानकारी के मुताबिक, RAF के एक जवान ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया था. जवान ने सात (07) बुलेट्स का इस्तेमाल किया था, जिसके चलते तीन प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. तीनों का दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है. पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राजनीति भी बेहद तेज हो गई है. संसद में विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है.

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किन परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है पैलेट गन?
दरअसल, RAF के जवानों को अपने हथियारों के इस्तेमाल करने को लेकर पूरी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) है. आखिर किन परिस्थितियों में और कैसे अपने हथियारों का इस्तेमाल करना है. क्योंकि RAF के जवानों को बैटन (खास डंडे), टीयर गैस यानी आंसू गैस के गोले और पैलेट गन से लैस किया गया है. किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान, भीड़ को नियंत्रित करने पहुंचे आरएएफ के सभी जवानों को पैलेट गन से लैस नहीं किया जाता है. एक कंपनी के कुछ जवानों के पास ही ऐसी पैलेट गन इस्तेमाल के लिए दी जाती है. उग्र भीड़ को खदेड़ने के लिए सबसे पहले पैरों में डंडे चलाकर तितर-बितर करने का प्रयास किया जाता है. उसके बाद अगर भीड़ पत्थरबाजी करती है तो आंसू गैस के गोले दागकर खदेड़ने की कोशिश होती है. उसके बाद पैलेट गन का इस्तेमाल किया जाता है.
पैलेट गन चलाने की जानकारी&amp;nbsp;
पैलेट गन चलाने की जानकारी ऐसे दिन आई है, &amp;nbsp;जब सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) अपना 88 वां स्थापना दिवस मना रही है (27 जुलाई यानी सोमवार को). आरएएफ, CRPF के एक स्पेशलाइज्ड फोर्स है, जिसे उग्र-प्रदर्शन, भीड़ का नियंत्रित करने और बिगड़ते कानून व्यवस्था को संभालने जैसी जिम्मेदारियों के लिए खास तौर से खड़ा किया गया है. आरएएफ के जवानों की यूनिफॉर्म (वर्दी) भी सीआरपीएफ से अलग है. पुलिस से अलग दिखने के लिए RAF की वर्दी नीली है. ऐसे में विरोध-प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए RAF के जवान अलग दिखाई पड़ते हैं.
पैलेट गन का विवाद सबसे पहले कहां उठा था?
पैलेट गन का विवाद सबसे पहले, करीब एक दशक पहले कश्मीर घाटी में सामने आया था. आतंकी सरगना बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद पूरी कश्मीर घाटी में जगह-जगह सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी हो रही थी. ऐसे में सीआरपीएफ ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया था. उस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पैलेट गन के छर्रे से घायल हुए थे. पैलेट गन की एक बुलेट में करीब एक दर्जन छोटे-छोटे छर्रे होते हैं. ऐसे में लगने वाले के शरीर पर छोटे-छोटे कई घाव बन जाते हैं. सबसे ज्यादा मुश्किल आंख में लगने के कारण आती है. पैलेट गन की गोली अगर आंख के आस-पास लग जाए तो खासी मुश्किल हो सकती है.&amp;nbsp;
कश्मीर को लेकर मानवाधिकार का सवाल
कश्मीर में जब स्थानीय लोगों की आंखों पर इसका असर पड़ा तो दुनियाभर में मानवाधिकार का सवाल उठने लगा. ऐसे में सुरक्षाबलों ने पैलेट गन का इस्तेमाल बेहद कम कर दिया. लेकिन जंतर मंतर पर तीन प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद एक बार फिर पैलेट गन विवादों के घेरे में है. माना जा रहा है कि जंतर मंतर में पैलेट गन के इस्तेमाल की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद सीआरपीएफ और आरएएफ एक बार फिर उग्र-प्रदर्शन के लिए अपने एसओपी में बदलाव &amp;nbsp;ला सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>5 साल में 17 हजार से ज्यादा स्कूल घटे, संसद में सरकार ने क्या बताया?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/5-साल-में-17-हजार-से-ज्यादा-स्कूल-घटे-संसद-में-सरकार-ने-क्या-बताया</link>
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        <description><![CDATA[ अगर सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार कम हो रही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है. क्या स्कूल बंद हो रहे हैं? अगर हां ! तो बच्चों की पढ़ाई पर इसका क्या असर पड़ रहा है? इन्हीं सवालों के बीच लोकसभा में सरकार ने ऐसे आंकड़े पेश किए हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है.
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में समाजवादी पार्टी सांसद आनंद भदौरिया के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि साल 2021-22 में देश में 10,22,386 सरकारी स्कूल थे, लेकिन 2025-26 तक यह संख्या घटकर 10,05,245 रह गई. यानी सिर्फ पांच साल में करीब 17,141 सरकारी स्कूल कम हो गए.
केंद्र सरकार ने क्या बताया ?
सरकार ने साफ किया कि स्कूल खोलने, बंद करने या उनका विलय करने का फैसला राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आता है. सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के मुताबिक स्कूलों का विलय बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए, यह तभी किया जाए जब यह सुनिश्चित हो कि इससे बच्चों की स्कूल तक पहुंच या उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. सरकार के मुताबिक स्कूल कॉम्प्लेक्स या क्लस्टर बनाने का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और स्कूलों का संचालन अधिक प्रभावी बनाना है.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा कमी दर्ज हुई?
लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़ी गिरावट जम्मू-कश्मीर में दर्ज हुई. यहां सरकारी स्कूलों की संख्या 23,173 से घटकर 18,787 रह गई. इसके अलावा कई बड़े राज्यों में भी सरकारी स्कूलों की संख्या कम हुई है. महाराष्ट्र, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में भी सरकारी स्कूलों की संख्या पहले के मुकाबले कम दर्ज की गई.
किन राज्यों में गिरावट?
- मेघालय: 7,783 से 5,620- तेलंगाना: 30,023 से 28,088- पश्चिम बंगाल: 83,302 से 81,591- मध्य प्रदेश: 92,695 से 91,199- कर्नाटक: 49,679 से 48,527
इन राज्यों में बढ़े स्कूल
हर जगह तस्वीर एक जैसी नहीं है. कुछ राज्यों में सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ी भी है. राजस्थान में पांच साल के दौरान सरकारी स्कूलों की संख्या 68,948 से बढ़कर 69,983 हो गई. बिहार में यह 75,558 से बढ़कर 76,435 पहुंच गई. इसके अलावा छत्तीसगढ़ और गुजरात में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यानी पूरे देश की तस्वीर एक जैसी नहीं है, कुछ राज्यों में स्कूलों की संख्या घटी है जबकि कुछ ने नए सरकारी स्कूल भी जोड़े हैं.
उत्तर प्रदेश का आंकड़ा क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश में पहली नजर में तस्वीर लगभग स्थिर दिखाई देती है. 2021-22 में राज्य में 1,37,024 सरकारी स्कूल थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या 1,37,103 हो गई लेकिन जिलेवार आंकड़े देखें तो तस्वीर बदलती नजर आती है.
- गाजियाबाद: 504 से 474- अलीगढ़: 2,167 से 2,114- झांसी: 1,504 से 1,450- हाथरस: 1,285 से 1,268
इसके अलावा फिरोजाबाद, प्रयागराज और जालौन में भी सरकारी स्कूलों की संख्या में मामूली कमी दर्ज की गई.
लड़कियों की पढ़ाई पर क्या तस्वीर सामने आई?
सरकार ने अपने जवाब में लड़कियों के नामांकन और पढ़ाई जारी रखने से जुड़े आंकड़े भी दिए. कक्षा 3 से 5 में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात 97 से घटकर 93.5 हो गया. कक्षा 6 से 8 में भी यह 92.5 से घटकर 92.3 रहा. हालांकि, 9वीं से 12वीं के स्तर पर इसमें सुधार दर्ज किया गया और यह 70.5 से बढ़कर 74 पहुंच गया. अगर स्कूल में टिके रहने की दर देखें तो प्राथमिक स्तर पर यह 93.4 से घटकर 92.2 रही. वहीं, हायर सेकेंडरी स्तर पर यह 49.6 से बढ़कर 55 हो गई.
सरकार का दावा - सुविधाओं के लिए पैसा दिया जा रहा
सरकार ने बताया कि समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को नए स्कूल खोलने, स्कूल भवन और अतिरिक्त कमरे बनाने, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चलाने, मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म देने, आने-जाने का भत्ता उपलब्ध कराने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है.&amp;nbsp;
शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर बनाए रखने में भी केंद्र राज्यों की मदद करता है. हालांकि, शिक्षकों की भर्ती और तैनाती की जिम्मेदारी राज्यों की ही है, लेकिन इस जवाब से कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं.&amp;nbsp;
लोकसभा में पूछा गया सवाल सिर्फ यह नहीं था कि देश में कितने सरकारी स्कूल हैं. सांसद ने यह भी जानना चाहा था कि कितने स्कूल बंद हुए कितनों का दूसरे स्कूलों में विलय किया गया और क्या इससे बच्चों की पढ़ाई या स्कूल तक पहुंच प्रभावित हुई, लेकिन सरकार के जवाब में सिर्फ कुल सरकारी स्कूलों की संख्या दी गई. यह नहीं बताया गया कि इन पांच वर्षों में कितने स्कूल वास्तव में बंद हुए, कितनों का विलय हुआ और कितने नए स्कूल खोले गए.
&amp;nbsp;
स्कूल घटे लेकिन पूरी तस्वीर साफ नहीं
इसी तरह यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि जिन इलाकों में स्कूलों का विलय हुआ, वहां बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ी या नहीं और उसका दाखिले या पढ़ाई जारी रखने पर क्या असर पड़ा. यानी लोकसभा में आए इन आंकड़ों ने एक तथ्य जरूर सामने रखा है कि देश में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या पांच साल में 17 हजार से ज्यादा घटी है, लेकिन इसके पीछे की पूरी तस्वीर अभी भी इन आंकड़ों से साफ नहीं होती.
&#039;कांग्रेस के सांसद कर रहे ऐसी हरकत&#039;, रिजिजू के बयान पर खरगे का पलटवार ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>साल, में, हजार, से, ज्यादा, स्कूल, घटे, संसद, में, सरकार, ने, क्या, बताया</media:keywords>
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        <title>प्रधान… बीजेपी का वो चेहरा, जिन्होंने हारते चुनाव के बीच ऐसे बाजी पलटा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/प्रधान-बीजेपी-का-वो-चेहरा-जिन्होंने-हारते-चुनाव-के-बीच-ऐसे-बाजी-पलटा</link>
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        <description><![CDATA[ बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण राज्यों में भरोसेमंद चुनाव प्रबंधक बनने और मोदी सरकार के तीन कार्यकाल में अहम मंत्रालय संभालने से लेकर शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने तक धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन को नीट पेपर लीक के होने से देशभर में भड़के विरोध प्रदर्शनों के बाद बड़ा झटका लगा. कई बार उन्होंने बीजेपी के लिए मुश्किल लग रही राह को जिस तरह से जीत में बदला उससे वह पार्टी के भीतर एक बड़े चुनावी रणनीतिकार के रूप में स्थापित हो गए थे.
परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और नीट पेपर लीक को लेकर इस्तीफे की मांग करते हुए सीजेपी के नेतृत्व में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के 35 दिन बाद शनिवार (25 जुलाई 2026) को धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनका का इस्तीफा आंदोलन को लेकर सरकार के शुरुआती उपेक्षापूर्ण रुख से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.&amp;nbsp;
साल 1983 में एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र प्रधान दो दशक बाद तीन बार केंद्रीय मंत्री बने. अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. हाल के सालों में बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी देने के मामले में भी वह बीजेपी की पहली पसंद रहे. उन्हें 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. प्रधान का सबसे महत्वकांक्षी लक्ष्य उनका गृह राज्य ओडिशा रहा, जहां 2024 में बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई.&amp;nbsp;
पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें केवल एक जिम्मेदारी दी गई थी, जो नंदीग्राम सीट की कमान संभालना था. इसी सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव लड़ा था और राज्य में उनकी पार्टी की भारी जीत के बावजूद वह यह सीट हार गई थीं. धर्मेंद्र प्रधान ने साल 2000 में ओडिशा की पल्लाहारा सीट से चुनाव लड़कर अपने चुनावी सफर की शुरुआत की थी. उन्होंने 2004 में देवगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. इस सीट पर पहले उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान का कब्जा था.&amp;nbsp;
2009 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सीधे चुनावी राजनीति से दूरी बना ली. हालांकि, उनकी संगठनात्मक क्षमता और कामकाज के कौशल के कारण 2010 में उन्हें बीजेपी का महासचिव बनाया गया. इसके बाद 2012 में वह बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए. 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को स्वतंत्र प्रभार के साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री बनाया गया. गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने वाली उज्ज्वला योजना के कारण धर्मेंद्र प्रधान को लोकप्रिय रूप से &amp;lsquo;उज्ज्वला मैन&amp;rsquo; कहा जाने लगा. उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले केंद्रीय मंत्री का श्रेय भी दिया जाता है.&amp;nbsp;
साल 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा मंत्रालय अपने पास बरकरार रखा. हालांकि, उनका यह कार्यकाल कथित प्रश्नपत्र लीक विवाद के बीच कठिन शुरुआत के साथ शुरू हुआ. ओडिशा में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल धर्मेंद्र प्रधान को विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल (BJD) को हराकर 78 सीट पर जीत हासिल करने के बाद राज्य के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री की दौड़ में भी माना जा रहा था.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ शानदार ट्यूनिंग के चलते पिछले साल हुए बिहार चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी को फी सहायता पहुंचायी है. बिहार की राजनीति में जब भी नीतीश कुमार के एनडीए से होने पर या उनकी वापसी पर धर्मेंद्र प्रधान को ही बीजेपी ने एक्टिव किया था. साल 2013 में जब नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो रहे थे तब धर्मेंद्र प्रधान ने उन्हें खूब समझाने की कीशिश की थी. ठीक वैसे ही साल 2022 में भी जब नीतीश खेमे में ऐसी सुगबुगाहट शुरू हुई तो प्रधान को ही पार्टी ने बात करने भेजा. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>प्रधान…, बीजेपी, का, वो, चेहरा, जिन्होंने, हारते, चुनाव, के, बीच, ऐसे, बाजी, पलटा</media:keywords>
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        <title>पेपर लीक रोकने कड़े संशोधन करने जा रही मोदी सरकार, आज लोकसभा में पेश होगा अहम बिल</title>
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        <description><![CDATA[ CJP के प्रदर्शन के बाद उठा शिक्षा का मुद्दा देश की सियासत का मुख्य केंद्रित मुद्दा बनकर उभरा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने 25 जुलाई 2026 को अपना इस्तीफा सौंप दिया. ऐसे में मोदी सरकार शिक्षा के मुद्दे पर गंभीर नजर आ रही है. केंद्र सरकार सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश करेगी.&amp;nbsp;
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस बिल का अनुमति प्रस्ताव सदन के पटल पर रखेंगे. यह बिल सात मुख्य संशोधन पेश करता है. इनका मकसद NEET-UG 2026 परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों के बाद लागू करने में आ रही कमियों को दूर करना, खास न्यायिक तंत्र बनाना और आपराधिक मुकदमों में तेजी लाना है.&amp;nbsp;
सरकार ने यह कदम मानसून सत्र जो 20 जुलाई से शुरू हुआ है, उसके ठप हो जाने के बाद उठाया है. विपक्षी दलों और स्टूडेंट ग्रुप्स ने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र पर लगातार प्रेशर बनाए रखा था. इस कानून का मकसद जांच-न्यायिक कार्यवाही दोनों के लिए सख्त समय सीमा तय करके मूल 2024 के ढांचे में बड़े बदलाव करना है.&amp;nbsp;
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इस बिल के तहत मिलेंगी यह शक्तियां
इस बिल में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर नामित करने का अधिकार दिया जाएगा. यह खास तौर पर इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई करेंगे. विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यवाही रोजाना के आधार पर होना चाहिए. चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी होनी चाहिए. गंभीर या एक से ज्यादा राज्यों से जुड़े परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों को संभालने के लिए केंद्र के पास एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार होगा.
इस कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी. राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को परीक्षा में गड़बड़ियों के मुकदमे के लिए खास तौर पर कानूनी सलाहकार नियुक्त करने का अधिकार होगा. संगठित पेपर लीक के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों, कोचिंग सेंटरों और सर्विस प्रोवाइडरों के लिए जेल की सजा और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होगा.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;शिक्षा मंत्री का चार्ज लेने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले - &#039;यह जिम्मेदारी...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;फोन मत करो...&amp;apos;, घर वालों से ऐसा क्यों बोले अभिजीत दीपके, पिता ने बताया कारण</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के भारी प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. अब उनकी जगह प्रह्लाद जोशी ने पद संभाला है. इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी ने अहम भागीदारी निभाई. सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके प्रदर्शन में सबसे आगे नजर आए. इस बीच अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके ने कई बातों का खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि अभिजीत ने बार-बार फोन करने से मना किया था.
भगवानराव दीपके ने &#039;एएनआई&#039; से बात करते हुए कहा, &#039;जब प्रदर्शन हो रहा था तो पूरा परिवार तनाव में था. 20 जुलाई के बाद काफी ज्यादा टेंशन बढ़ गई थी. मैंने सोचा कि एक बार दिल्ली जाऊं और अभिजीत को घर ले आऊं, लेकिन उसने मुझे वहां जाने से मना कर दिया. अभिजीत ने यह भी कहा कि मुझे बार-बार फोन मत करो, अब मैं सिर्फ आपका बेटा नहीं हूं, पूरे देश का बेटा हूं.&#039;

उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा, &#039;यह अच्छा ही हुआ क्योंकि जो बच्चे उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे, उनमें बहुत गुस्सा भरा था. बच्चों के माता-पिता भी गुस्से में थे. शुरुआत में यह सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित था, लेकिन बाद में, 20 तारीख के बाद, यह पूरे भारत में फैल गया. धर्मेंद्र प्रधान ने बहुत अच्छा कदम उठाया. उन्होंने इस्तीफा दे दिया और बच्चे को खुश कर दिया.&#039;&amp;nbsp;
प्रह्लाद जोशी ने संभाला पद
गौरतलब है कि नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पदभार संभाल लिया है. उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इसकी जानकारी दी. धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार को पद से इस्तीफा देने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया. जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. वह उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं.
यह भी पढ़ें : फिर समंदर में मचा बवाल! अपने जहाज पर हमले के बाद ईरान ने दे डाली वॉर्निंग- &#039;अब जवाब...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पहले किया सपोर्ट अब कसा तंज, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने क्यों कहा&amp; &amp;apos;ये Gen&amp;Z वाले...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ CJP आंदोलन के वक्त पीएम मोदी को Gen-Z को लेकर सलाह देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने रविवार को उन (Gen-Z) पर तंज कसा है. इस बार उन्होंने कहा है कि &amp;lsquo;Gen-Z&amp;rsquo; वाले दूसरों की देखा-देखी चीजें करते हैं, भावुक होते हैं और शांत मन से नहीं सोचते.
भागवत ने कहा कि &amp;lsquo;Gen-Z&amp;rsquo; वालों को जो बात सही लगती है, उसी की ओर वे आकर्षित हो जाते हैं. &amp;lsquo;Gen-Z&amp;rsquo; उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है. इससे पहले CJP आंदोलन के वक्त RSS चीफ ने कहा था कि शासन या व्यवहार में तानाशाही या आदेश की जगह चर्चा (Discussion) और आपसी सहमति (Consensus) का तरीका अपनाना चाहिए.
RSS प्रमुख ने कहा कि &amp;lsquo;&amp;lsquo;विवाह एक अनुशासन है, जो धर्म के संस्कार देता है. इसका विकल्प लिव इन रिलेशनशिप है. इसके परिणाम क्या हैं? हमें जिम्मेदारियां नहीं, बल्कि सिर्फ खुशी चाहिए. जब तक मन हो साथ रहो और जब मन न हो तो अलग हो जाओ. कोई जिम्मेदारी नहीं. इससे क्या बढ़ेगा? क्या बढ़ रहा है, दुनिया भर में यह देखा जा सकता है.&amp;rsquo;&amp;rsquo;
LGBTQ को लेकर क्या बोले मोहन भागवत?
मोहन भागवत ने कहा किआधुनिकता भी जरूरी है और समय के साथ बदलना भी देश की परंपराओं का एक नियम है. लिव इन रिलेशनशिप का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण है. भागवत ने कहा कि आधुनिकता का स्वागत किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि एलजीबीटीक्यू समुदाय समाज का हिस्सा है और उन्हें हीन दृष्टि से नहीं देखना चाहिए.
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;शिक्षा मंत्री का चार्ज लेने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले - &#039;यह जिम्मेदारी...&#039;
बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भागवत की सलाह
भागवत ने कहा कि माता-पिता को मोबाइल फोन के इस्तेमाल में अनुशासन अपनाना चाहिए. उन्होंने नयी पीढ़ी के बच्चों के सवालों के जवाब देने और परिवार से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सुलझाने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत को भी महत्वपूर्ण बताया. मोबाइल फोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल समेत नयी पीढ़ी की जीवनशैली को लेकर माता-पिता की चिंताओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बड़ों को खुद वैसा ही आचरण करना चाहिए जैसा वे नयी पीढ़ी में देखना चाहते हैं.
सरकार से नहीं खुद से हो शुरुआत
भागवत ने कहा, &amp;ldquo;समाज में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, उसकी शुरुआत खुद से करें. सोशल मीडिया पर अपना समय कम करें. मोबाइल के इस्तेमाल में अनुशासन बरतें. हम सरकार की ओर देखते हैं. हमारी परंपरा में सरकार का स्थान दूसरा है, समाज का पहला. (हम कहते हैं कि) सरकार को यह या वह कानून बनाना चाहिए...जबकि हम खुद अपने घर पर भी ऐसा कर सकते हैं.&amp;rdquo; उन्होंने कहा, &amp;ldquo;हम बच्चों को मोबाइल के इस्तेमाल के नियम तो बताते हैं, लेकिन खुद मोबाइल से इतने जुड़े हुए हैं कि बच्चा रोने पर मां उसे मोबाइल थमा देती है.&amp;rdquo;
Nandan M Nilekani Networth: IIT बॉम्बे से इंफोसिस तक, अब परीक्षा सुधारों की कमान संभालेंगे नंदन नीलेकणी, जानिए उनकी सैलरी
इनपुट-भाषा ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;मैं पोस्ट डिलीट नहीं करूंगी&amp;apos;... अड़ गई BJP सांसद की बेटी, पोस्ट ने मचाया बवाल, अब गायब हुआ इंस्टा अकाउंट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मैं-पोस्ट-डिलीट-नहीं-करूंगी-अड़-गई-bjp-सांसद-की-बेटी-पोस्ट-ने-मचाया-बवाल-अब-गायब-हुआ-इंस्टा-अकाउंट</link>
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        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. इस घटनाक्रम के बीच भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सारंगी की एक इंस्टाग्राम पोस्ट चर्चा का विषय बन गई. पोस्ट साझा करने के बाद अर्चिता ने एक और इंस्टाग्राम स्टोरी लगाई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन पर पोस्ट हटाने का दबाव बनाया जा रहा है. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि वह अपनी पोस्ट डिलीट नहीं करेंगी. बाद में उनका इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिएक्टिवेट हो गया.
इस्तीफे के बाद अर्चिता सारंगी की इंस्टाग्राम पोस्ट
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अर्चिता सारंगी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक समाचार की हेडलाइन साझा की, जिसमें उनके इस्तीफे की जानकारी दी गई थी. इसके बाद उन्होंने एक इंस्टाग्राम स्टोरी पोस्ट की, जिसने पूरे मामले को नई चर्चा में ला दिया.
&#039;मैं पोस्ट डिलीट नहीं करूंगी&#039;
अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में अर्चिता ने लिखा कि वह यह पोस्ट किसी भी हालत में डिलीट नहीं करेंगी. उन्होंने यह भी लिखा कि &quot;डीपी के पीए&quot;, जो उनकी मां को यह पोस्ट हटाने के लिए संदेश भेज रहे हैं, उन्हें वह आश्वस्त करना चाहती हैं कि ऐसा नहीं होगा. माना जा रहा है कि उन्होंने &quot;डीपी&quot; शब्द का इस्तेमाल धर्मेंद्र प्रधान के नाम के संक्षिप्त रूप के तौर पर किया है. अपनी स्टोरी में उन्होंने लिखा, &quot;चिंता मत कीजिए. यह डिलीट नहीं होगा. जय जगन्नाथ, जय हिंद.&quot; कुछ समय बाद अर्चिता का इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिवेट हो गया, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गईं.
ये भी पढ़ें:&amp;nbsp;CAA से किसान आंदोलन तक... 12 साल की मोदी सरकार में पहला इस्तीफा, भारी बवाल के बाद धर्मेंद्र प्रधान को छोड़ना पड़ा पद
अपराजिता सारंगी ने धर्मेंद्र प्रधान का किया समर्थन
दूसरी ओर भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने धर्मेंद्र प्रधान के फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है और यह उनका साहसिक निर्णय है. अपराजिता सारंगी पहले प्रशासनिक सेवा में रह चुकी हैं. बाद में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भुवनेश्वर सीट से जीत दर्ज की थी. इस चुनाव में उन्होंने बीजू जनता दल के उम्मीदवार को करीब 35 हजार वोटों से हराया था.
राष्ट्रपति ने स्वीकार किया इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त जिम्मेदारी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. प्रह्लाद जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब तक घर नहीं लौटे अभिजीत दीपके? मंत्री ने क्यों मांगी सुरक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए भारी प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह प्रह्लाद जोशी ने पद संभाला है. इन सबके बीच कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके काफी चर्चा में रहे. अभिजीत फिलहाल टाइफाइड से जूझ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि वे प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी घर नहीं पहुंचे. महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने अभिजीत और उनके परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की.
&#039;इंडियन एक्सप्रेस&#039; की रिपोर्ट के मुताबिक संजय शिरसाट ने कहा, &#039;अभिजीत अगले दो से तीन-दिनों में अपने घर लौट आएंगे. जब वह महाराष्ट्र पहुंचेंगे, तो मैं खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से विशेष अनुरोध करूंगा कि उन्हें सरकारी सुरक्षा दी जाए, जिससे उनकी जान को कोई खतरा न रहे.&#039;

शिरसाट से पूछा गया कि उन्होंने आंदोलन के दौरान दीपके के माता-पिता से मुलाकात क्यों नहीं की थी. उन्होंने कहा, &#039;दीपके परिवार के साथ हमारे पारिवारिक संबंध हैं. मैंने विरोध प्रदर्शन के दौरान मुलाकात इसलिए नहीं की, जिससे इस मुद्दे को राजनीतिक रंग न दिया जा सके. अब मैं अभिजीत की तबीयत का हाल-चाल लेने आया हूं और सरकार उनका पूरा ध्यान रखेगी.&#039;
गौरतलब है कि अभिजीत दीपके टाइफाइड से जूझ रहे हैं. सीजेपी ने रविवार को एक्स पर एक पोस्ट शेयर की. दीपके बेड पर लेटे हुए दिखे. दीपके जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान लगातार एक्टिव थे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें : &#039;बार-बार फोन मत करो...&#039;, अपने घर वालों से ऐसा क्यों बोल बैठे अभिजीत दीपके, पिता ने बताया कारण ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिद्धारमैया ने किया 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान, बोले &amp; &amp;apos;आज की राजनीति...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिद्धारमैया-ने-किया-2028-का-कर्नाटक-विधानसभा-चुनाव-नहीं-लड़ने-का-ऐलान-बोले-आज-की-राजनीति</link>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक की सियासत को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता सिद्धारमैया ने 2028 का विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने इसकी जानकारी एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दी है.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा, &#039;मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैं अब 79 साल का हो गया हूं. हमारी सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ साल और बाकी है. तबतक मैं 81-82 साल का हो जाऊंगा. मेरी सेहत अब वैसी नहीं रही, जैसी पहले हुआ करती थी. अब पहले जैसा जोश और उत्साह के साथ काम करना मुमकिन नहीं है.&#039;

ರಾಜಕೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರ ಇಂದು ಕಲುಷಿತಗೊಂಡಿರುವುದರಿಂದ 2028ರ ವಿಧಾನಸಭಾ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ನಾನು ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವುದಿಲ್ಲ. ಆದರೆ, ಸಕ್ರಿಯ ರಾಜಕಾರಣದಲ್ಲಿದ್ದು, ಜನರ ಕಷ್ಟ, ಸುಖಗಳಿಗೆ ಧ್ವನಿಯಾಗಿ ನಿಲ್ಲುತ್ತೇನೆ. ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಚುನಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ಸ್ಪರ್ಧಿಸುವಂತೆ ವರುಣ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಜನರು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಆದರೆ ನಾನು ಇನ್ನು ಮುಂದೆ ಯಾವುದೇ&amp;hellip; pic.twitter.com/v0S4tCQ30o
&amp;mdash; Siddaramaiah (@siddaramaiah) July 26, 2026



आज राजनीति में भ्रष्टाचार आ गया है, इसलिए नहीं लड़ूंगा चुनाव: सिद्धारमैया
सिद्धारमैया मांड्या जिले के के.आर. पेट में शनिवार को आयोजित एक निजी कार्यक्रम में बोल रहे थे. सिद्धारमैया ने ऐलान करते हुए कहा, &#039;आज राजनीति में भ्रष्टाचार आ गया है. इसलिए मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. हालांकि, राजनीति में एक्टिव रहते हुए, मैं लोगों के दुख-सुख की आवाज बनता रहूंगा.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;वरुणा निर्वाचन क्षेत्र के लोग एक बार मुझसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं. लेकिन मैंने तय किया है कि अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा. पहले जब मैं चुनाव लड़ता था, तो निर्वाचन क्षेत्र के लोग ही हमें पैसे देते थे. हमारी जीत सुनिश्चित करते थे, लेकिन आज वैसी स्थिति नहीं रही.&#039;
उन्होंने उम्र का हवाला देते हुए कहा, &#039;मैं अब 79 साल का हो गया हूं. हमारी सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ साल और बाकी है. तब तक मैं 81-82 साल का हो जाऊंगा. मेरी सेहत अब वैसी नहीं रही जैसी पहले हुआ करती थी. अब पहले जैसा जोश और उत्साह के साथ काम करना संभव नहीं है.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;2028 तक मैं 82 साल का हो जाऊंगा. तब मेरे राजनीतिक जीवन के 50 साल पूरे हो जाएंगे. मैंने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के तौर पर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. मैंने हार और जीत, दोनों देखी हैं. लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने कभी उन सिद्धांतों के खिलाफ काम नहीं किया जिनमें मेरा विश्वास था, और न ही कभी अपनी अंतरात्मा के साथ धोखा किया.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;अब ऐसा समय आ गया है कि अगर हम चुनाव लड़ते हैं, तो हमें लोगों को पैसे देने होंगे. आज की राजनीति पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है. ईमानदार राजनीति के लिए कोई जगह नहीं बची है. इसी माहौल को देखते हुए, मैंने भविष्य में चुनाव न लड़ने का फैसला किया है. पांच दशकों तक राज्य की जनता ने मुझे अपने ही बीच का एक व्यक्ति माना और प्यार से मेरा मार्गदर्शन किया. मुझ पर उनका यह कर्ज है. इसलिए, मेरा भविष्य का जीवन भी जनसेवा को ही समर्पित रहेगा.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सिद्धारमैया, ने, किया, 2028, का, कर्नाटक, विधानसभा, चुनाव, नहीं, लड़ने, का, ऐलान, बोले, आज, की, राजनीति...</media:keywords>
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        <title>CJP&amp;लेफ्ट के प्रदर्शन में पत्रकारों पर हुए हमलों पर बोले CM शुभेंदु अधिकारी, ‘ये छात्र नहीं, बल्कि...’</title>
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        <description><![CDATA[ नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों और युवाओं के भारी प्रदर्शन के साथ-साथ देश के कई राज्यों में भी बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी नीट पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के विरोध में भारी प्रदर्शन किया गया, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ-साथ लेफ्ट गुट के लोग भी शामिल हुए. वहीं, कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह वामपंथियों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह सेल्फ-डिक्लेयर्ड कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन था. जिसमें बाद में वामपंथी भी शामिल हो गए.
नीट आंदोलन में शामिल लोग, हमले में शामिल नहीं थे- मुख्यमंत्री
सीजेपी-लेफ्ट छात्र प्रदर्शन के दौरान मीडिया कर्मियों पर हुए हमलों को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नाराजगी जताई. शुभेंदु अधिकारी ने कहा, &amp;lsquo;जो भी लोग नीट आंदोलन से जुड़े थे, उनमें से कोई भी इस घटना (मीडिया कर्मियों पर हमले) में शामिल नहीं है. मैंने खुद देखा है. उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लिखा है कि पत्रकारों पर हुए इन बर्बर हमलों की जिम्मेदारी वो नहीं ले रहे हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

Kolkata: On CJP-Left students&amp;rsquo; protest in Kolkata, West Bengal Chief Minister Suvendu Adhikari says, &quot;It was not a Leftist protest. It was the self-declared Cockroach Janta Party. Later, the Leftists joined.&quot;Regarding an attack on the media personnel during the protest, he&amp;hellip; pic.twitter.com/oSMC3JYgGw
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 26, 2026



उन्होंने कहा, &amp;lsquo;कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने मुझे पूरी रिपोर्ट भेजी थी, जिन्हें मैंने खुद देखा है. यह पूरी तरह से विदेशी ताकतों की तरफ से प्रायोजित भी हो सकता है. इसकी पुष्टि जांच एजेंसियां ही कर सकेंगी.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
अब तक सात मामले दर्ज और 14 लोग गिरफ्तार- मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, &amp;lsquo;जिस तरह से मीडिया कर्मियों की हत्या करने को कोशिश की गई, उनका खून बहाने और उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई, उसे लेकर अब तक सात मामले दर्ज किए गए हैं. ये सभी मामले पत्रकारों की शिकायतों पर दर्ज किए गए हैं. वहीं, पुलिस ने भी अपनी ओर से कुछ मामलों को दर्ज किया है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

ভামপন্থী গুন্ডাদের হাতে আক্রান্ত সাংবাদিকদের দেখতে হাসপাতালে মুখ্যমন্ত্রী Suvendu Adhikari মহাশয়...???? pic.twitter.com/uIAFKVFn1H
&amp;mdash; Saswata Banerjee #ModiKaParivar (@banerjee_sotu) July 24, 2026



उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैं तुरंत पीजी अस्पताल गया. पत्रकार ने एफआईआर दर्ज कराई और मेडिकल टेस्ट भी कराया. अभी तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. उनका कॉकरोच जनता पार्टी के नीट आंदोलन से कोई वास्ता नहीं है. ये छात्र नहीं है. ये पूरी तरह से जमाती, कट्टरपंथी है, जो भारत को कमजोर और अस्थिर करना चाहते हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJP-लेफ्ट, के, प्रदर्शन, में, पत्रकारों, पर, हुए, हमलों, पर, बोले, शुभेंदु, अधिकारी, ‘ये, छात्र, नहीं, बल्कि...’</media:keywords>
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        <title>ब्लैक सी में भारतीय नाविकों की मौत के बाद सरकार का एक्शन, जारी की एडवाइजरी, कहा &amp; &amp;apos;बहुत सावधानी...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ब्लैक-सी-में-भारतीय-नाविकों-की-मौत-के-बाद-सरकार-का-एक्शन-जारी-की-एडवाइजरी-कहा-बहुत-सावधानी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ब्लैक-सी-में-भारतीय-नाविकों-की-मौत-के-बाद-सरकार-का-एक्शन-जारी-की-एडवाइजरी-कहा-बहुत-सावधानी</guid>
        <description><![CDATA[ सरकार ने रविवार (26 जुलाई) को एक एडवाइजरी जारी की है. यह एडवाइजरी ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों से जुड़े कर्मचारियों और नाविकों से जुड़ी है. एडवाइजरी में सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है. इसमें इंश्योरेंस कवरेज और इमरजेंसी इंतजाम शामिल हैं. एडवाइजरी कमर्शियल जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों में पांच भारतीयों की मौत के बाद दी गई है.&amp;nbsp;
विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि संघर्ष के कारण इस इलाके और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा की स्थिति बहुत अस्थिर है. एडवाइजरी के मुताबिक, इन इलाकों में चलने वाले यहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों सहित सुरक्षा के बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है.&amp;nbsp;
अप्रैल के बाद से लगातार हमलों में हुई है बढ़ोतरी
अप्रैल के बाद से लगातार हमलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. अबतक पांच भारतीयों की मौत हो चुकी है. ऐसे में उन इलाकों में चलने वाले कमर्शियल जहाजों पर काम करने के इच्छुक भारतीय नागरिकों सलाह दी गई है. इसमें कहा गया है कि वे ऐसे काम स्वीकार करने से पहले मौजूदा सुरक्षा खतरों का सावधानीपूर्वक आकलन करें.&amp;nbsp;
एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक इस इलाके में काम करना चुनते हैं, उन्हें बहुत सावधानी बरतना चाहिए. अन्य सावधानियां भी लेना चाहिए. इनमें साफ तौर पर कहा गया है कि नियोक्ता, भर्ती एजेंसियों और जहाज ऑपरेटरों से जहाज के रूट, रुकने की जगहों, सुरक्षा इंतजामों, इंश्योरेंस कवरेज और इमरजेंसी रिस्पॉन्स के बारे में पूरी जानकारी लेना शामिल है.&amp;nbsp;
एडवाइजरी में कहा- नौकरी की शर्तें इंटरेनशनल मैरिटाइम गाइडलाइन के तहत हो
एडवाइजरी की मानें तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उनकी नौकरी की शर्तें इंटरनेशनल मैरिटाइम गाइडलाइन के अनुरूप हो. उनमें इमरजेंसी की स्थिति में मेडिकल सुविधाएं, इवैक्यूएशन, स्वदेश वापसी और मुआवजे के लिए पर्याप्त प्रावधान हों. नाविकों को अपने परिवार को अपनी यात्रा की योजना के बारे में जानकारी देना चाहिए. नियमित संपर्क बनाए रखना चाहिए. उन्हें डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य सरकारी अधिकारियों की एडवाइजरी और जहाजों ऑपरेटरों और समुद्री अधिकारियों की तरफ से जारी सुरक्षा निर्देशों पर नजर रखना चाहिए. उनका पालन करना चाहिए.&amp;nbsp;
एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों को बहुत सावधानी बरतने की हिदायत
एडवाइजरी में बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है. अबतक भारत के क्रू मेबर वाले विदेश झंडे वाले जहाजों पर 10 हमले हो चुके हैं. 19 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय MV गोल्डन लियो पर कई मिसाइलों से हमला हुआ. इसमें मारे गए 10 लोगों में चार भारतीय नाविक भी शामिल थे.&amp;nbsp;
18 जुलाई को काला सागर से गुजरते समय बल्क कैरियर एमवी ओमोर्फी पर हमले में एक और भारतीय नाविक की मौत हो गई. रूस में नोवोरोसिस्क के पास विदेशी झंडे वाले टैंकरों एमटी लुईस-1, एमटी एशिया और एमटी नेल्सा पर हमले हुए. इन सभी में भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे. इन भारतीय नाविकों को कांसुलर मदद की जरूरत है. वे इस इलाके में मौजूद भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावासों से संपर्क कर सकते हैं. इमरजेंसी संपर्क नंबर इस प्रकार हैं. रूस में भारतीय दूतावास: +7 9652773414; यूक्रेन में भारतीय दूतावास: +38 0933559958 के लिए ये नंबर जारिए किए गए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ब्लैक, सी, में, भारतीय, नाविकों, की, मौत, के, बाद, सरकार, का, एक्शन, जारी, की, एडवाइजरी, कहा, बहुत, सावधानी...</media:keywords>
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        <title>शिक्षा मंत्री का चार्ज लेने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले &amp;  &amp;apos;यह जिम्मेदारी...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शिक्षा-मंत्री-का-चार्ज-लेने-के-बाद-प्रह्लाद-जोशी-का-आया-पहला-रिएक्शन-बोले-यह-जिम्मेदारी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/शिक्षा-मंत्री-का-चार्ज-लेने-के-बाद-प्रह्लाद-जोशी-का-आया-पहला-रिएक्शन-बोले-यह-जिम्मेदारी</guid>
        <description><![CDATA[ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर भरोसा जताते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. उन्होंने कहा कि वह इस नई जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास करेंगे. प्रह्लाद जोशी ने बताया कि वह कल कर्नाटक में थे और देर रात दिल्ली पहुंचे. इसके बाद आज सुबह उन्होंने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया. उन्होंने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद वह मंत्रालय से जुड़ी सभी जानकारियां जुटाने और कामकाज को समझने में लगे हुए हैं.
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि आज पूरे दिन उनकी लगातार कई बैठकें हुईं. उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की और विभिन्न विषयों पर जानकारी ली. उनके अनुसार शिक्षा मंत्रालय बहुत बड़ा विभाग है और इसकी जिम्मेदारियां भी काफी व्यापक हैं, इसलिए इसे पूरी तरह समझने में समय लगेगा. प्रह्लाद जोशी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय उनके लिए एक नया विषय है. इसलिए वह जल्दबाजी में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. फिलहाल उनकी प्राथमिकता मंत्रालय के सभी विभागों, योजनाओं और चल रहे कार्यों की जानकारी लेना है.

#WATCH | Delhi: After taking additional charge of the Ministry of Education, Union Minister Pralhad Joshi says, &quot;The Prime Minister has entrusted me with this responsibility with full confidence. I was in Karnataka yesterday. I reached here last night and came this morning to&amp;hellip; pic.twitter.com/S7jZvVo324
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 26, 2026




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मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं-प्रह्लाद जोशी
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि किन क्षेत्रों में क्या फैसले लिए गए हैं और आगे किन मुद्दों पर काम करने की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सभी पहलुओं को विस्तार से समझने के बाद ही वह आगे की योजनाओं और फैसलों पर विस्तार से बात करेंगे. प्रह्लाद जोशी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय देश के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में से एक है, क्योंकि इसका सीधा संबंध करोड़ों छात्रों, शिक्षकों और देश के भविष्य से है, इसलिए वह पहले पूरे मंत्रालय की वर्किंग सिस्टम को अच्छी तरह समझना चाहते हैं, ताकि आगे प्रभावी तरीके से काम किया जा सके.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>शिक्षा, मंत्री, का, चार्ज, लेने, के, बाद, प्रह्लाद, जोशी, का, आया, पहला, रिएक्शन, बोले, यह, जिम्मेदारी...</media:keywords>
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        <title>CJP प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग के वायरल पोस्ट पर आया विदेश मंत्रालय का रिएक्शन, कहा &amp; &amp;apos;यह एकदम...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ सीजेपी के विरोध प्रदर्शन में कथित विदेशी फंडिंग से जुड़े दावे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के बयानों से जोड़े गए थे. अब इस पर मंत्रालय &amp;nbsp;की तरफ से बयान जारी किया गया है. उन्होंने इस तरह के पोस्ट को गुमराह करने वाला बताया.&amp;nbsp;
गलत तरीके से पेश किया गया था विदेश मंत्रालय का बयान
दरअसल, दो हफ्ते पहले होने वाली मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उनके असली बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था. एक्स पर पोस्ट करते मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने कहा है कि यह पोस्ट गुमराह करने वाला है. प्रवक्ता के बयान को गलत तरीके से पेश करता है.&amp;nbsp;
क्या बोले विदेश मंत्री के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
विदेश मंत्रालय ने यह पोस्ट ऐसे वक्त किया, जिसमें प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था. &#039;मुझसे कई बार सीजेपी के विरोध प्रदर्शन की फंडिंग के बारे में पूछा गया है. मैं कहना चाहता हूं कि हमारी खुफिया जानकारी और जांच से पता चलता है कि इसमें कोई विदेशी फंडिंग नहीं है.&#039;&amp;nbsp;

The post is misleading and misrepresents the statement of the Spokesperson. At the BiWeekly briefing on Friday, the Spokesperson stated the following &quot; Madhu, regarding the point you raised about allegations of foreign funding and other such claims in connection with the&amp;hellip; pic.twitter.com/oZsc5fb9oz
&amp;mdash; MEA FactCheck (@MEAFactCheck) July 26, 2026



यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&amp;nbsp;CJP Protest Viral Video : CJP के प्रोटेस्ट में कुत्ता लेकर पहुंच गया स्टूडेंट, देखते ही डांस करने लगे प्रदर्शनकारी; वीडियो वायरल
प्रवक्ता ने कहा था, &#039;विदेशी फंडिंग के आरोपों और चल रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़े अन्य दावों के बारे में आपने जो बात उठाई है, उसके संबंध में मैं यह कहना चाहूंगा कि इस समय मेरे पास आपके साथ साझा करने के लिए इस मामले में किसी तरह की जानकारी नहीं है.&#039;&amp;nbsp;
MEA ने कहा, &#039;वायरल पोस्ट ने प्रवक्ता की बातों को गलत तरीके से पेश किया. ऐसा बयान को उनसे जोड़ा, जो दिया ही नहीं गया था, साथ ही दोहराया कि आधिकारिक जवाब बस इतना था कि उस समय इस मामले पर साझा करने के लिए किसी तरह की जानकारी नहीं थी. लगभग पचास दिन चले आंदोलन के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था.&#039;
ये भी पढ़ें:&amp;nbsp;लाल सागर में तनाव बरकरार, हूतियों ने सऊदी तेल टैंकर को बनाया निशाना, जहाजों पर भी मंडरा रहा खतरा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 18:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJP, प्रोटेस्ट, में, विदेशी, फंडिंग, के, वायरल, पोस्ट, पर, आया, विदेश, मंत्रालय, का, रिएक्शन, कहा, यह, एकदम...</media:keywords>
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        <title>29 साल पहले जिस पेपर लीक ने बनाया धर्मेंद्र प्रधान को नेता, आज उसी मुद्दे ने छीन ली उनकी कुर्सी!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/29-साल-पहले-जिस-पेपर-लीक-ने-बनाया-धर्मेंद्र-प्रधान-को-नेता-आज-उसी-मुद्दे-ने-छीन-ली-उनकी-कुर्सी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/29-साल-पहले-जिस-पेपर-लीक-ने-बनाया-धर्मेंद्र-प्रधान-को-नेता-आज-उसी-मुद्दे-ने-छीन-ली-उनकी-कुर्सी</guid>
        <description><![CDATA[ 57 साल उम्र के शिक्षामंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया है. कभी युवा जोश में इसी पेपर लीक को हथियार बनाकर उन्होंने दक्षिणपंथ की सियासत में कदम रखा. देश के केंद्रीय नेतृत्व का हिस्सा बने. लेकिन एक पेपर लीक और 50 दिन तक चले प्रदर्शन ने उन्हें कुर्सी से त्यागपत्र देने को आखिरकार मजबूर कर दिया.
देश में लंबे अर्से बाद शिक्षा को लेकर आंदोलन चल रहा था. प्रधान ने कहा, &#039;राष्ट्रपविरोधी ताकतों को भ्रम फैलाने और स्थिति का फायदा उठाने से रोकने के लिए पद छोड़ने का फैसला किया है.&#039;
जिस मुद्दे ने बनाया नेता, उसी ने छिनी कुर्सी
पिछले कुछ सालों में बीजेपी सरकार के भरोसेमंद केंद्रीय मंत्री बनकर उभरे प्रधान की पहचान कुशल आयोजक, एक मंत्री और एक राजनीतिक प्रबंधक के तौर पर भी है. वह उन गिने चुने ओडिशा के लोगों में हैं, जिन्होंने राजनीति के राष्ट्रीय फलक पर अपनी छाप छोड़ी. लेकिन नियति का खेल देखो, जिस शिक्षा को लेकर उन्होंने 29 साल पहले राजनीतिक मुद्दा बनाया था, वही मुद्दा उनके पद ले गया.&amp;nbsp;
पेपर लीक के एक आंदोलन से राजनीतिक करियर की शुरुआत
पेपर लीक के एक आंदोलन से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई. साल 1997 था. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी. इसके मुख्यमंत्री वल्लभ पटनायक थे. पूरे राज्य में पेपर लीक का मामला गरमाया था. उस समय प्रधान एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव और उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी की पढ़ाई कर रहे थे. 28 साल के धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में 1500 स्टूडेंट ने भुवनेश्वर के राज्य सचिवालय का घेराव किया. इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता से लाठियां चलाई. इसमें प्रधान गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके शरीर की हड्डियां टूटी. आज भी कहा जाता है कि अपनी किस्मत की वजह से ही प्रधान आज जिंदा हैं.&amp;nbsp;
प्रधान दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव भी रहे
18 साल के उम्र में एक छात्र के तौर पर उन्होंने रानजीति में कदम रखा. प्रधान ने आरएसएस के स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ABVP में एक सक्रिय आयोजक के रूप में पहचान बनाई.1994 से 1997 के बीच दो बार एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे.&amp;nbsp;
1997 में ओडिशा के इस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए. उन्होंने बीजेपी की जड़ों को मजबूत किया. इसका नतीजा साल 2024 में दिखा. भाजपा ने ओडिशा में नवीन पटनायक के 24 साल पुराने बीजू जनता दल के शासन को खत्म किया. बीजेपी ने इसी साल पहली बार सरकार बनाई. उन्हें केंद्र में पेट्रोलियम और कौशल विकास जैसे अहम मंत्रालय को संभालने के बाद 2021 में देश का शिक्षामंत्री बनाया.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 06:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>शिक्षामंत्री बनाए जाने के बाद प्रह्लाद जोशी का आया पहला रिएक्शन, बोले&amp; &amp;apos;धर्मेंद्र प्रधान ने...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शिक्षामंत्री-बनाए-जाने-के-बाद-प्रह्लाद-जोशी-का-आया-पहला-रिएक्शन-बोले-धर्मेंद्र-प्रधान-ने</link>
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        <description><![CDATA[ 25 जुलाई 2026 को आखिरकार छात्रों की मांग के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा दिया है. उनके इस्तीफे के मंजूर करते हुए सरकार ने अब इस मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी है. उन्हें अतिरिक्त प्रभार सरकार की तरफ से सौंपा गया है. अब शिक्षामंत्री बनाए जाने के बाद प्रह्लाद जोशी का रिएक्शन आया है. उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताया है.&amp;nbsp;
कर्तव्य-विनम्रता से जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं: प्रह्लाद जोशी
प्रहलाद जोशी ने कहा, &#039;मैं कर्तव्य और विनम्रता की भावना के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री का आभारी हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया और कई महत्वपूर्ण पहल की गईं. देश ने नई शिक्षा प्रणाली में उल्लेखनीय प्रगति की है. प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में, मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों को निभाऊंगा.&#039;
प्रह्लाद जोशी पहले से केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इन मंत्रालयों के साथ-साथ वह अब शिक्षा मंत्रालय के कामकाज और नीतिगत फैसलों की निगरानी करेंगे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से पांच बार के सांसद हैं. उन्हें पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी भी माना जाता है.
राष्ट्रपति ने मंजूर किया इस्तीफा
प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के आर्टिकल 75 के खंड (2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्री परिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया है. पीएम की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है. कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूद विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का प्रभार भी सौंपा जाएगा.&amp;nbsp;
इसके अलावा, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) का प्रभार भी सौंपा जाए। ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>शिक्षामंत्री, बनाए, जाने, के, बाद, प्रह्लाद, जोशी, का, आया, पहला, रिएक्शन, बोले-, धर्मेंद्र, प्रधान, ने...</media:keywords>
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    <item>
        <title>‘आप 2017 तक UP की सत्ता में थे, आपने क्यों नहीं...’, जौहर यूनिवर्सिटी मामले पर ओवैसी का अखिलेश यादव पर निशाना</title>
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        <description><![CDATA[ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार (25 जुलाई, 2026) को उन युवाओं (Gen-Z) की कोशिशों की तारीफ की, जो अपने मकसद में कामयाब रहे और सरकार को युवाओं के सामने झुकने और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पर मजबूर किया.
मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा और RSS पर हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया. ओवैसी ने मुसलमानों से अपील की कि वे उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से पहले उस राजनीति के खिलाफ एकजुट रहें, जिसे उन्होंने बांटने वाली राजनीति कहा.
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर बिफरे ओवैसी
इस दौरान हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (SP) के नेता अखिलेश यादव पर खासतौर पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि अखिलेश यादव, जो 2017 तक मुख्यमंत्री रहे, ने अपने कार्यकाल के दौरान यूनिवर्सिटी की इमारतों को रेगुलर क्यों नहीं किया, जबकि उत्तर प्रदेश शहरी विकास अधिनियम, 1973 में ऐसा करने की गुंजाइश थी.
ओवैसी ने सभा से पूछा, &amp;lsquo;अखिलेश यादव ने कानून का हवाला देते हुए कहा था कि उत्तर प्रदेश शहरी विकास अधिनियम, 1973 के तहत जौहर यूनिवर्सिटी को रेगुलर किया जा सकता है. मैं सपा के चाटुकारों और समाजवादी पार्टी की गुलामी करने वालों से पूछना चाहता हूं कि आप 2017 तक मुख्यमंत्री थे. आपने जौहर यूनिवर्सिटी को रेगुलर क्यों नहीं किया?&amp;rsquo;
अखिलेश यादव पर ओवैसी का तीखा हमला
AIMIM प्रमुख ने सपा की इस दलील को पाखंड करार दिया कि पूर्व मंत्री आजम खान ने उन्हें इस मुद्दे के बारे में जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;सपा के लोग कहेंगे- नहीं, आजम खान ने हमें नहीं बताया. तो क्या आप वही करेंगे, जो आजम खान कहेंगे? यह उनका पाखंड है. जब वे मुख्यमंत्री थे, तब वे इमारत को बचा सकते थे, लेकिन अब क्योंकि चुनाव आ रहे हैं, वे आपके सामने ऐसे झूठ पेश कर रहे हैं.&amp;rsquo;
उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने हाल ही में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया था. यह आदेश उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए दिया गया था.&amp;rsquo;
यूपी चुनाव से पहले बढ़ रही सियासी सरगर्मी
ओवैसी का यह भाषण उत्तर प्रदेश में बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी के बीच आया है. AIMIM प्रमुख ने सत्ताधारी पार्टी के तथाकथित हिंदुत्व एजेंडा के खिलाफ मुसलमानों की एकता पर जोर दिया. इमारतों को गिराने का यह आदेश राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले चुनावों से पहले कई पार्टियां इसका इस्तेमाल एक-दूसरे पर हमला करने के लिए कर रही हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘आप, 2017, तक, की, सत्ता, में, थे, आपने, क्यों, नहीं...’, जौहर, यूनिवर्सिटी, मामले, पर, ओवैसी, का, अखिलेश, यादव, पर, निशाना</media:keywords>
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        <title>धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह का पहला रिएक्शन, कहा&amp; पद से ज्यादा देश जरूरी</title>
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        <description><![CDATA[ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारे लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश और युवा छात्र हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई दोपहर में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार देश के युवाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के खिलाफ सुधार के लिए प्रतिबद्ध है.
बीजेपी के लिए देश महत्वपूर्ण: अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, &#039;बीजेपी के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं. आज धर्मेंद्र प्रधान जी &amp;nbsp;का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है. मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के लिए कटिबद्ध है. पेपर लीक के दोषियों को कठोर दंड मिले, इसके लिए मोदी जी द्वारा लिए गए निर्णय सराहनीय हैं. मुझे पूर्ण विश्वास है कि इन कदमों से NEET परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा.&#039;

भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारी युवा पीढ़ी और विद्यार्थी हैं। आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री @dpradhanbjp जी का अपने पद से इस्तीफा इसी को दर्शाता है।मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और पेपर लीक के विरुद्ध आवश्यक सुधारों के&amp;hellip; https://t.co/p12wLKGUkm
&amp;mdash; Amit Shah (@AmitShah) July 25, 2026



गृह मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के कामों को गिनाया
उन्होंने कहा, &#039;धर्मेंद्र प्रधान जी ने अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं. परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं. उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का परिचायक है.&#039;
प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. इसी बीच, राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिमंडल मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि वे खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्री के रूप में अपना मौजूदा कार्यभार भी संभालते रहेंगे. देश के कई हिस्सों में जोर पकड़ने वाले इन विरोध प्रदर्शनों ने मंत्रालय को गहन जन और राजनीतिक जांच के दायरे में ला दिया था.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं में खुशी की लहर है. प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने लंबे आंदोलन की पहली बड़ी सफलता करार देते हुए जश्न मनाया. छात्रों का कहना है कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने तक जारी रहेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक..., CJP आंदोलन ने कैसे हिला दी हुकूमत</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में आंदोलन की परिभाषा को फिर से गढ़ा है. भारत में अब तक रैलियों, पर्चों और भाषणों से महीनों तक जमीनी स्तर पर भीड़ जुटाकर आंदोलनों को सफल बनाया जाता था. जबकि इस आंदोलन में पेपर लीक का मुद्दा जिस तरह से सोशल मीडिया पर उठाया गया उससे देशभर के लोग इससे जुड़ते गए और इसका एपी सेंटर रहा जंतर-मंतर. सरकार की ओर से संगठन की अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद सीजेपी ने 36 दिन से जारी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की.
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शनिवार को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है. जोशी को उनके उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है.
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त चार्ज मिलने पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, &#039;मैं यह जिम्मेदारी निभाऊंगा. मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुजार हूं. पीएम मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति भी लागू की और कई जरूरी काम किए गए. देश ने नई शिक्षा व्यवस्था में काफी तरक्की की है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मैं अपनी पूरी काबिलियत से काम करूंगा और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी लगन से पूरा करूंगा.&#039;
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
इस पूरे घटनाक्रम को युवाओं के नेतृत्व वाले उस आंदोलन के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक विवाद को लेकर लाखों लोगों को एकजुट किया था. धर्मेंद्र प्रधान ने दोपहर में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. उन्होंने कहा, &#039;जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र-विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझें, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है.&#039;&amp;nbsp;
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से प्रधान का इस्तीफा रात में स्वीकार कर लिया. सीजेपी प्रवक्ता सौरव घोष ने देशभर में सभी जगहों पर अपना विरोध-प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार नीट विवाद को लेकर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने और बीजेपी शासित सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने पर भी सहमत हो गई है.&amp;nbsp;
36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार ने मानी बात
सीजेपी ने 25 जुलाई दोपहर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. यह सीजेपी और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत थी. इसमें केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने किया, जबकि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास के अलावा आशुतोष रांका शामिल थे. रांका ने कहा, &#039;चूंकि, सरकार ने 36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद हमारी सभी मांगें मान ली हैं, इसलिए हम सभी से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध स्थल से हट जाएं और घर लौट जाएं.&#039; &amp;nbsp;
सौरव दास ने कहा कि उन्होंने संगठन की मांगों का एक मसौदा सरकार के साथ साझा किया है, जिस पर मंगलवार (28 जुलाई 2026) तक लिखित गारंटी मिलेगी. जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी के प्रतिनिधि बैठक में एक लिखित मसौदा लेकर आए थे, जिसमें उन्होंने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों से जुड़े कुछ बिंदु रखे हैं. उन्होंने कहा कि सीजेपी ने (मसौदे में) बाकी मांगें भी उठाई हैं, जिनमें कोई जवाबी कार्रवाई न किया जाना, मुआवजा दिया जाना और संगठन के पांच-सूत्री चार्टर पर विचार किया जाना शामिल है. नड्डा ने कहा, &#039;हमने इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. चर्चा के बाद पहला निर्णय यह लिया गया कि कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी. अगर दिल्ली पुलिस या बीजेपी शासित राज्यों में कोई प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है, तो उसे वापस ले लिया जाएगा.&#039;
जंतर-मंतर पर खुशी की लहर&amp;nbsp;
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी और विरोध स्थल पर &#039;हम जीत गए&#039; के नारे गूंजने लगे. जश्न जारी रहने के बीच अधिकारियों ने विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने की प्रक्रिया की निगरानी शुरू की और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक तितर-बितर होने का आग्रह किया, जबकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए आसपास के स्टेशन पर सभी एंट्री और एग्जिट गेट फिर से खोल दिए.&amp;nbsp;
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं. उनसे पहले एमजे अकबर ने 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा दे दिया था, जब मीटू आंदोलन के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 2014 के बाद उन कुछ मौकों में से एक है, जब मोदी सरकार ने जनता के विरोध या राजनीतिक दबाव के बीच अपने पैर खींचे हैं. 2015 में मोदी सरकार को बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाने  ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, पेपर, लीक, प्रोटेस्ट, से, धर्मेंद्र, प्रधान, के, इस्तीफे, तक..., CJP, आंदोलन, ने, कैसे, हिला, दी, हुकूमत</media:keywords>
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    <item>
        <title>&amp;apos;पूरे देश में होगा...&amp;apos;, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP, मीटिंग से ठीक पहले केंद्र सरकार को दिया अल्टीमेटम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पूरे-देश-में-होगा-धर्मेंद्र-प्रधान-के-इस्तीफे-पर-अड़ी-cjp-मीटिंग-से-ठीक-पहले-केंद्र-सरकार-को-दिया-अल्टीमेटम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पूरे-देश-में-होगा-धर्मेंद्र-प्रधान-के-इस्तीफे-पर-अड़ी-cjp-मीटिंग-से-ठीक-पहले-केंद्र-सरकार-को-दिया-अल्टीमेटम</guid>
        <description><![CDATA[ CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा है कि संगठन को मुआवजे और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर आज एक लिखित समझौता मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के साथ बातचीत चल रही है और संगठन को उम्मीद है कि इन विषयों पर आश्वासन दिया जाएगा. आशुतोष रांका ने कहा कि आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी है. उन्होंने कहा कि संगठन सरकार की ओर से इस मांग पर आने वाली प्रतिक्रिया का भी इंतजार कर रहा है.
आशुतोष रांका ने कहा कि अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में सीजेपी को जल्द ही आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए एक नया देशव्यापी आह्वान जारी करना पड़ सकता है. रांका ने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी बातों पर सकारात्मक निर्णय लेगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे की रणनीति सरकार की प्रतिक्रिया और बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी.

ये भी पढ़ें:&amp;nbsp; &#039;मेट्रो बंद करो, रास्ते बंद करो और...&#039;, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर कसा तंज, पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?
CJP का मुख्य मुद्दा क्या है?
CJP का कहना है कि मुआवजे, कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है. संगठन का मानना है कि इन मामलों में स्पष्ट निर्णय और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है, ताकि छात्रों और उनके परिवारों की चिंताओं का समाधान हो सके. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा को लेकर फैसला लिया जाएगा और अगर प्रमुख मांगों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो विरोध प्रदर्शन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है.
ये भी पढ़ें: &#039;धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो...&#039;, CJP का क्या है &#039;प्लान बी&#039;? आशुतोष रांका ने दिया जवाब ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <description><![CDATA[ राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच 18 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के फैसले पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के आंदोलन को रोकने के लिए मेट्रो स्टेशन बंद कर सकती है, सड़कों पर पाबंदियां लगा सकती है, इंटरनेट सेवाएं बाधित कर सकती है और आम लोगों की आवाजाही मुश्किल बना सकती है, लेकिन बार-बार हो रहे पेपर लीक को रोकने में पूरी तरह विफल रही है. राहुल गांधी ने कहा कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के साथ सरकार का रवैया बेहद कठोर और असंवेदनशील है.
राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; पर पोस्ट करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने लिखा, &quot;मेट्रो बंद करो. रास्ते बंद करो. दुकानें बंद करो. Internet बंद करो. खाना बंद करो. अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए. बस एक चीज बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक.&quot;

मेट्रो बंद करो।रास्ते बंद करो।दुकानें बंद करो।Internet बंद करो।खाना बंद करो।अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 25, 2026



यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;पाकिस्तान में बड़ा आत्मघाती हमला, सेना के 12 जवान सहित कम से कम 15 लोगों की मौत
18 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने शनिवार सुबह 7:30 बजे से राजधानी के 18 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने की घोषणा की. डीएमआरसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया है और अगले निर्देश तक इन स्टेशनों पर यात्रियों का प्रवेश और निकास बंद रहेगा. हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा पहले की तरह जारी रहेगी. डीएमआरसी ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी जताया है.
नई दिल्ली स्टेशन बंद करने की वजह नहीं बताई
डीएमआरसी ने अपने आधिकारिक बयान में यह जरूर बताया कि नई दिल्ली सहित 18 मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि नई दिल्ली स्टेशन को बंद करने के पीछे क्या विशेष कारण है.
इन मेट्रो स्टेशनों पर लगी रोक
जिन मेट्रो स्टेशनों को बंद किया गया है उनमें लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग, शिवाजी स्टेडियम और झंडेवालान शामिल हैं. झंडेवालान स्टेशन को बाद में इस सूची में जोड़ा गया.
20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा
इन स्टेशनों को 20 जुलाई को हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद बंद किया गया है. उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों और बड़ी संख्या में छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था. प्रदर्शनकारी कथित NEET पेपर लीक समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए राजधानी के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था. इसके बाद से दिल्ली में सुरक्षा इंतजाम और सख्त कर दिए गए हैं.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मेट्रो, बंद, करो, रास्ते, बंद, करो, और..., राहुल, गांधी, ने, केंद्र, सरकार, पर, कसा, तंज, पीएम, मोदी, को, लेकर, क्या, कहा</media:keywords>
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        <title>CJP Protest: बैरिकेड्स और लोहे की चादरों से जंतर मंतर प्रोटेस्ट साइट सील, भारी पुलिस फोर्स के साथ सड़कें बंद</title>
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        <description><![CDATA[ CJP के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. प्रदर्शन लगातार जारी रहने के कारण प्रशासन ने पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र को बैरिकेड लगाकर सील कर दिया है. इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. जंतर-मंतर के आसपास आने-जाने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी तरह की अप्रिय घटना न हो.
सुरक्षा एजेंसियां पूरे इलाके पर नजर बनाए हुए हैं. प्रदर्शन के चलते जंतर-मंतर और उसके आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं. फिलहाल जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा बल तैनात है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है. हालांकि, पूरे इलाके में लोहे के बड़े-बड़े बैरिकेट्स को जंजीरों से लपेटा गया है. उन्हें जगह-जगह पर सील किया गया है, ताकी कोई भी प्रदर्शनकारी उसमें सेंध न लगा सके.
&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें: &#039;धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिया तो...&#039;, CJP का क्या है &#039;प्लान बी&#039;? आशुतोष रांका ने दिया जवाब
जंतर-मंतर पर इंटरनेट सेवाएं बंद
जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दिए गए हैं. CJP 20 जून से मध्य दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. इस बीच कानूनी सेवा संगठन सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर ने अपनी याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 17, 20, 22 और 23 जुलाई को मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के लिए जारी किए गए आदेशों को रद्द करने का अनुरोध किया.
ये भी पढ़ें: &#039;पैर तोड़े, सिर फोड़ा...&#039;, दिल्ली पुलिस के लाठीचार्ज पर राहुल गांधी का बड़ा आरोप, PM मोदी के सामने रखी 3 मांगें ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJP, Protest:, बैरिकेड्स, और, लोहे, की, चादरों, से, जंतर, मंतर, प्रोटेस्ट, साइट, सील, भारी, पुलिस, फोर्स, के, साथ, सड़कें, बंद</media:keywords>
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        <title>कर्तव्य पथ हिंसा केस में बड़ा खुलासा, हत्या के प्रयास समेत 13 धाराओं में FIR; FRS कैमरों से 2 हजार से ज्यादा संदिग्धों की पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को हुई हिंसा को लेकर कर्तव्य पथ थाना पुलिस की एफआईआर में कई बड़े खुलासे हुए हैं. संसद और रेल भवन के पास हुई झड़प के मामले में पुलिस ने हत्या के प्रयास (BNS 109(1)) समेत 13 गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है. एफआईआर में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, पुलिस पर पथराव और चप्पलें फेंकी, मारपीट की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस हिंसा में 129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए.
इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एफआईआर थाने में तैनात एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज की गई है. इसमें रफी मार्ग पर हुई हिंसा के दौरान पुलिस की ओर से सामने आए घटनाक्रम का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है. एफआईआर के अनुसार, इंस्पेक्टर की ड्यूटी 20 जुलाई की सुबह 5 बजे से सी-हेक्सागन, जोन-11 (पिंक बूथ) पर लगी थी. इसी दौरान वायरलेस के जरिए सूचना मिली कि रेल भवन राउंडअबाउट के पास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद थे.
&#039;बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश&#039;
एफआईआर में कहा गया है कि मौके पर मौजूद पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणा की कि BNSS की धारा 163 लागू है और प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. प्रदर्शनकारियों से वहां से हटने की अपील भी की गई, लेकिन चेतावनी के बावजूद भीड़ नहीं हटी और लगातार नारेबाजी करती रही. पुलिस का आरोप है कि इसके बाद कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने के लिए उकसाया. एफआईआर के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों को चारों तरफ से घेर लिया.
&#039;पुलिस पर पत्थर और चप्पलें फेंकी गईं&#039;
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की और उन पर पत्थर तथा चप्पलें फेंकीं. पुलिस का दावा है कि हमले में कई जवान घायल हो गए. एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हत्या की नीयत से हमला किया. इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) यानी हत्या के प्रयास सहित कुल 13 गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.
सरकारी संपत्ति और वाहनों को नुकसान पहुंचाने का आरोप
दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि हिंसा के दौरान सरकारी संपत्ति और निजी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाई गई, जिससे हालात और बिगड़ गए. एफआईआर के मुताबिक, संसद और आसपास स्थित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया. इसके साथ ही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए की गई.
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हत्या के प्रयास समेत 13 धाराओं में मामला दर्ज
कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास के अलावा सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा डालना, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और लोगों की जान को खतरे में डालने जैसी कुल 13 गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से हो रही पहचान
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि जंतर-मंतर आने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पुलिस का दावा है कि इस तकनीक की मदद से अब तक 2 हजार से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और जो जंतर-मंतर पहुंचे थे. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कर्तव्य, पथ, हिंसा, केस, में, बड़ा, खुलासा, हत्या, के, प्रयास, समेत, धाराओं, में, FIR, FRS, कैमरों, से, हजार, से, ज्यादा, संदिग्धों, की, पहचान</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>&amp;apos;धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, PM मोदी मांगें माफी&amp;apos;, राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखी की तीन मांगें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धर्मेंद्र-प्रधान-का-इस्तीफा-pm-मोदी-मांगें-माफी-राहुल-गांधी-ने-सरकार-के-सामने-रखी-की-तीन-मांगें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/धर्मेंद्र-प्रधान-का-इस्तीफा-pm-मोदी-मांगें-माफी-राहुल-गांधी-ने-सरकार-के-सामने-रखी-की-तीन-मांगें</guid>
        <description><![CDATA[ कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर सरकार पर तीखा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अनशन पर बैठे छात्रों से उनकी बात हुई है और छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं, जिन पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता. राहुल गांधी ने साफ कहा कि छात्रों की पहली और सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की है.
राहुल गांधी ने बताई अपनी पहली मांग
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की तीन मांगें हैं और ये ऐसी मांगें हैं, जिन पर बातचीत या समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा कि छात्रों का साफ मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होनी चाहिए. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्ट, अयोग्य और अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि छात्रों की पहली मांग यही है कि धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए.

देश के छात्रों की तीन मांग हैं, जिनसे समझौता नहीं हो सकता।&amp;bull; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से हटाया जाए&amp;bull; छात्रों पर बर्बरता करने वालों पर सख्त एक्शन हो&amp;bull; नरेंद्र मोदी देश के छात्रों से माफी मांगें: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi pic.twitter.com/6b6pijW6Fp
&amp;mdash; Congress (@INCIndia) July 25, 2026



राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में इस बात की चर्चा चल रही है कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो यह समाधान नहीं होगा. राहुल गांधी ने कहा कि भारत के छात्र और देश का कोई भी व्यक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगा.
&#039;धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुके हैं&#039;
राहुल गांधी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान अब केवल एक मंत्री नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और छात्रों के भविष्य के साथ हुए नुकसान का प्रतीक बन चुके हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सबसे बड़ी पूंजी उसके छात्र और उनका भविष्य हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उसी भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है.

यह भी पढ़ें-&amp;nbsp;खतरे में भारतीय सैनिकों का जान! इजरायल के इस कदम पर भारत ने जताई चिंता, जानें क्या कहा


राहुल गांधी की अन्य दो मांगे&amp;nbsp;

राहुल गांधी ने छात्रों की अन्य दो मांगों का जिक्र करते हुए कहा कि इन पर कोई समझौता नहीं हो सकता. उनकी अन्य दो मांगें हैं:

प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित बर्बरता और बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें.

 ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, का, इस्तीफा, मोदी, मांगें, माफी, राहुल, गांधी, ने, सरकार, के, सामने, रखी, की, तीन, मांगें</media:keywords>
    </item>
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        <title>CJP की ताकत देर से समझी सरकार? फास्ट ट्रैक कोर्ट, नया बिल और बातचीत, महज 36 घंटे में उठाए क्या&amp;क्या कदम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cjp-की-ताकत-देर-से-समझी-सरकार-फास्ट-ट्रैक-कोर्ट-नया-बिल-और-बातचीत-महज-36-घंटे-में-उठाए-क्या-क्या-कदम</link>
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        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन की जो चिंगारी 30 दिन पहले सुलगी थी वो अब देश के शिक्षा तंत्र के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है. दिल्ली के जंतर-मंतर से निकला ये गुस्सा अब धीरे-धीरे देश के दूसरे शहरों तक फैल गया है. केंद्र सरकार पहले तो इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन आखिरकार उसे अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी और बीते 36 घंटे के दौरान ताबड़तोड़ फैसले लेने पड़े. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने पीएम आवास के बाहर कांग्रेस सासंदों के साथ प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद आगे आए और सरकार ने भीतर एक के बाद एक कई फैसले लिए गए.
फास्ट-ट्रैक कोर्ट का ऐलान
पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि पेपर लीक के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. पीएम मोदी ने कहा, &#039;इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें. युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.&#039; इसके कुछ ही घंटों भीतर दिल्ली हाई कोर्ट ने इसके लिए विशेष कोर्ट भी तय कर दिया. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और PMO राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के बीच करीब 4 घंटे तक हाई-स्तरीय बैठक चली.&amp;nbsp;
इसके बाद सरकार ने अपना रुख बदला और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों को बातचीत का न्योता दिया. वार्ता के स्थान को लेकर काफी खींचतान के बाद आखिर में &#039;कॉन्स्टिट्यूशन क्लब&#039; को बातचीत के लिए चुना गया. भारी दबाव के बीच सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा सचिव विनीत जोशी को पद से हटा दिया.
रील्स फॉर्मेट में वीडियो जारी कर पीएम मोदी का संदेश
पीएम मोदी एक दिन में दूसरी बार इस मुद्दे पर बोले. आधी रात को रील्स फॉर्मेट में वीडियो जारी किया, जिसे खासतौर पर युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाने के लिए बनाया गया था. उन्होंने कहा, &#039;मैं जानता हूं कि पेपर लीक कोई सामान्य बात नहीं है. यह लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बेहद दर्दनाक है.&#039; उन्होंने इस मामले में और कड़ी कार्रवाई की भी बात कही थी, जिसे 24 जुलाई की शाम तक अमल में भी लाया गया. न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी से जुड़े 47 लोगों को हटा दिया गया है और इसमें से कुछ लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.
सरकार एनटीए के पुनर्गठन की योजना पर काम कर रही है. इसके तहत अगले एक महीने के भीतर एजेंसी की संरचना में बड़े बदलाव किए जाएंगे. एनटीए के कामकाज और परीक्षा संचालन प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे. खास तौर पर एजेंसी द्वारा अपनाई जाने वाली आउटसोर्सिंग व्यवस्था को बदला जाएगा. यह बदलाव विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किए जाएंगे. सरकार का उद्देश्य ऐसी लीक प्रूफ व्यवस्था तैयार करना है, जिससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके और परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बने.
सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन
दूसरी तरफ शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी. रात को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुग्राम के अस्पताल पहुंचे. सरकार ने आश्वासन दिया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और पेपर लीक रोकने के कड़े कदम उठाए जाएंगे. इसके बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया.
कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ बैठक हुई. बैठक के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास ने कहा कि मंत्रियों के साथ करीब 10 मिनट तक बैठक हुई. उन्होंने कहा, &#039;हमने सरकार के सामने तीन मांगें रखीं. पीड़ितों के परिजनों को एक करोड़ मुआवजा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों पर दर्ज किए गए केस को वापस लिया जाए.&#039;
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी सीजेपी
आशुतोष रांका ने कहा, &#039;धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या कैबिनेट से बर्खास्तगी के बिना कुछ भी हमें मंजूर नहीं होगा. सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की हमारी मांग पर शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है. हमने सरकार को बता दिया है कि पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं. अगर जल्द ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या बर्खास्तगी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा.&#039;
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 जून को एक इंटरव्यू में सीजेपी को दहशतगर्दों की बी-टीम बताया था और आरोप लगाया था कि यह संगठन उन ताकतों की ओर से काम कर रहा है जिन्हें जनता पहले ही नकार चुकी है. सीजेपी ने 20 जून को जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था. आठ दिन बाद सोनम वांगचुक और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के छह कार्यकर्ताओं ने भी वहां अनशन शुरू किया. करीब दो सप्ताह बाद सोशल मीडिया पर, वांगचुक की बिगड़ती सेहत के वीडियो वायरल होने के बाद आंदोलन ने गति पकड़ ली.
कैसे अचानक तेज हुआ आंदोलन?
18 जुलाई को पुलिस उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई, जिससे छात्रों और प्रदर्शनकारियों में व्यापक आक्रोश फैल गया. इसके बाद 20 जुलाई को संसद तक विशाल मार्च निकाला गया, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. आंदोलन शांत होने के बजाय पुलिस कार्रवाई के बाद और तेज हो गया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और अंततः केंद्र सरकार को अपने रुख पर पुनर्विचार करना पड़ा। उसी दिन जेपी नड्डा ने पहली बार अपने आवास पर सीजेपी नेतृत्व के साथ औपचारिक बैठक की, जिससे राजनीतिक संवाद की शुरुआत हुई.&amp;nbsp;
केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को पेपर लीक के मामलों में ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJP, की, ताकत, देर, से, समझी, सरकार, फास्ट, ट्रैक, कोर्ट, नया, बिल, और, बातचीत, महज, घंटे, में, उठाए, क्या-क्या, कदम</media:keywords>
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        <title>‘इंस्टाग्राम पर रहें एक्टिव, रील्स बनाकर करें पोस्ट और...’, कैबिनेट बैठक में PM मोदी की मंत्रियों को सलाह</title>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (24 जुलाई, 2026) को कैबिनेट की बैठक बुलाई. इस अहम बैठक में पीएम मोदी ने कई मुद्दों को लेकर कैबिनेट मंत्रियों के साथ चर्चा की. इसमें एक अहम मुद्दा छात्रों के साझ जुड़ाव और उनसे कनेक्शन बनाने को लेकर भी रहा, जिसे लेकर पीएम मोदी ने मंत्रियों को सलाह भी दी है.
कैबिनेट मीटिंग में पीएम मोदी ने मंत्रियों को क्या दी सलाह?
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों से एक बेहद अलग और अहम सवाल पूछा. उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार के कितने मंत्री सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक्टिव हैं? इसके बाद उन्होंने मंत्रियों को सलाह देते हुए इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आउटरीज बढ़ाने को कहा है.
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कैबिनेट मंत्रियों को सलाह दी है कि आज का युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी ज्यादा एक्टिव है, इसलिए सभी मंत्री भी इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहें. मंत्री सरकार की योजनाओं और कामों के बारे में सोशल मीडिया पर रील बनाकर शेयर करें और उसके बारे में लोगों और युवाओं को बताएं. इसके साथ ही, पीएम मोदी ने कल गुरुवार (23 जुलाई, 2026) को बनाए गए वीडियो का भी युवाओं से आउटरीच बढ़ाने को लेकर जिक्र किया है.&amp;nbsp;

पीएम मोदी ने मंत्रियों को इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहने को क्यों कहा?
दरअसल, नीट परीक्षा पेपर लीक के बाद प्रभावित छात्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेषकर इंस्टाग्राम पर रील्स बनाकर राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया. वहीं, जंतर जंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों के आंदोलन को और व्यापक स्तर पर पहुंचाने में सोशल मीडिया और खासकर इंस्टाग्राम से काफी मदद मिली है. युवा और छात्र आंदोलन, सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी रील्स पोस्ट और शेयर कर रहे हैं, जिन्हें देखकर और ज्यादा छात्र में विरोध में शामिल हो रहे हैं. इसी पैटर्न को देखते हुए पीएम मोदी ने कैबिनेट की बैठक में अपने मंत्रियों से सोशल मीडिया और विशेष रूप से इंस्टाग्राम पर एक्टिव रहने की सलाह दी है.
यह भी पढ़ेंः सरकार 2 मांगों पर तैयार, प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी सीजेपी, जानें दूसरे राउंड की बैठक में क्या हुआ ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>केंद्र ने दिल्ली में CRPF की और कंपनियां एयरलिफ्ट कीं, CJP प्रोटेस्ट को देखते हुए सरकार का बड़ा फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार ने दिल्ली में जारी स्टूडेंट प्रोटेस्ट कोलेकर अहम सुरक्षा कदम उठाए हैं. सरकार ने छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स की 10 और कंपनियों को एयरलिफ्ट का निर्देश जारी किया है. सीआईएफ ने भी दिल्ली मेट्रो सुरक्षा यूनिट के कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी हैं.&amp;nbsp;
पिछले एक महीने से नीट पेपर लीक को लेकर देशभर से प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं. साथ ही वह शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.&amp;nbsp;
दिल्ली में हुई रिव्यू मीटिंग में क्या फैसला?
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली में हुई रिव्यू मीटिंग में फैसला किया है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रीय राजधानी में तैनात की जानेवाली सभी सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज यूनिट की योजना से पहले रिपोर्ट करना चाहिए. अगले कुछ दिन में करीबन 150 सीएपीएफ कंपनियों को तैनात किए जाने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
एक सीएपीएफ में लगभग 100 कर्मी होते हैं. कानून व्यवस्था बनाए रखने दिल्ली पुलिस की मदद के लिए पहले से ही 100 सीएपीएफ कंपनियां तैनात हैं. सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए शुक्रवार को छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक सीआरपीएफ की 100 कंपनियों को एयरलिफ्ट किया जा चुका है.&amp;nbsp;
बंगाल से किए जा चुकी CRPF की 20 कंपनियां एयरलिफ्ट
इससे पहले सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले आयोजित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पश्चिम बंगाल से राष्ट्रीय राजधानी तक सीआरपीएफ की 20 कंपनियों को एयरलिफ्ट किया गया. सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आरएएफ की तीन यूनिट, एसएसबी, बीएसएफ और आईटीबीपुी के जवानों को तैनात किया गया है.&amp;nbsp;
सीआईएफ अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली मेट्रो यूनिट के जवानों को सिर्फ इमरजेंसी छुट्टी ही दी जा रही है. सुरक्षा के हालातों को देखते हुए दिल्ली एनसीआर में मेट्रो स्टेशनों पर ज्यादा जवानों की जरूरत है. सीआईएसएफ ने 250 स्टेशनों पर आतंकवाद रोधी सुरक्षा के लिए 13000 जवानों को तैनात किया गया है. पिछले चार दिनों से मेट्रो के 15 से 17 स्टेशनों को बंद कर दिया गया है. वहीं, सीजेपी ने प्रदर्शन जारी रखने को कहा है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Exclusive: क्या CJP का प्रदर्शन बना वांटेड अपराधियों का नया ठिकाना? वहां पहुंचे 216 में से हुई 215 की पहचान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/exclusive-क्या-cjp-का-प्रदर्शन-बना-वांटेड-अपराधियों-का-नया-ठिकाना-वहां-पहुंचे-216-में-से-हुई-215-की-पहचान</link>
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        <description><![CDATA[ देश की सरकार, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं से संबंधित व्यवस्थाओं के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित जंतर मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर शुक्रवार (24 जुलाई, 2026) को एक बड़ा खुलासा हुआ है. एबीपी न्यूज की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की तरफ से दावा किया गया है कि नई दिल्ली जिले में सीजेपी के प्रदर्शन स्थल पर 216 वांटेड अपराधी पहुंचे थे, जिसमें से अब तक 215 वांटेड अपराधियों की पहचान प्रदर्शन स्थल के आसपास लगाए गए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों के जरिए हो चुकी है.
सूत्रों के मुताबिक, इन 215 वांटेड अपराधियों में कई ऐसे अपराधी भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों में तलाश जारी है. दावा किया जा रहा है कि इनमें से कई लोग हिंसा भड़काने और दंगा जैसी स्थिति पैदा करने की मंशा से प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे हैं. ABP न्यूज के पास इन कथित अपराधियों की तस्वीरें और संबंधित जानकारी मौजूद है.
दिल्ली के अन्य इलाकों में आपराधिक घटनाओं में कमी

Delhi: Police personnel monitor through the FRS (Facial Recognition System). It helps identify criminals with previous involvement and alerts the concerned police personnel for verification. pic.twitter.com/NbYGZ9yOj3
&amp;mdash; IANS (@ians_india) July 24, 2026



सूत्रों का यह भी दावा है कि बड़ी संख्या में अपराधियों के प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहने के कारण दिल्ली के अन्य इलाकों में अपराध की घटनाओं में कमी दर्ज की गई. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन वांटेड अपराधियों का अब नया ठिकाना बन गया है? दिल्ली पुलिस के FRS कैमरों ने कथित तौर पर प्रदर्शन में शामिल इन संदिग्धों की पहचान की है, जो आमतौर पर दिल्ली पुलिस तमाम बड़े भीड़-भाड़ वाले इवेंट्स पर लगाती है.&amp;nbsp;

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर क्यों लगाए FRS कैमरे?
दरअसल, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को यह गुप्त सूचनाएं मिली हैं कि दिल्ली में जंतर मंतर पर जारी छात्र प्रदर्शन पर सीमा पार के आतंकवादी संगठन अपनी नजरें गड़ाए बैठे हैं और वो देश का माहौल खराब करने के लिए साजिश रच रहे हैं. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले के मौजूदा हालात को देखते हुए और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जगह-जगह पर फेशियल रिकॉगनिशन सिस्टम (FRS) कैमरे लगाए हैं, ताकि जंतर मंतर पर जारी प्रदर्शन में असामाजिक तत्व, अपराधी किस्म के लोग, वांटेड क्रिमिनलस या एंटी सोशल एलिमेंट न घुस पाएं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः एनटीए में बहुत बड़ा बदलाव, 47 अधिकारी बर्खास्त, कुछ और अफसरों पर गिरेगी गाज ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>प्रदर्शन के बीच पेपर लीक पर एक्शन में आयी मोदी सरकार, पिछले 24 घंटों में लिए गए ये 6 बड़े फैसले</title>
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        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है. पिछले 24 घंटे के दौरान सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और जांच को तेज करने के लिए कई बड़े फैसलों की घोषणा की है.
सरकार ने ऐलान किया है कि नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, ताकि आरोपियों के खिलाफ मामलों का जल्द निपटारा हो सके. इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए संसद में नया विधेयक लाने की तैयारी भी की जा रही है.
प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने शिक्षा सचिव को बदल दिया है. वहीं, जवाबदेही तय करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है.
एक्शन में मोदी सरकार
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नीट पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और अभ्यर्थियों पर कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा. इसके अलावा, पेपर लीक प्रकरण से जुड़े उन अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देने का फैसला किया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर इस मामले से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या कर ली.
इधर, दिल्ली पुलिस ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए परीक्षा पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है. यह STF पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत बनाई गई है.
नई गठित STF UPSC, SSC, रेलवे भर्ती, IBPS, NTA और केंद्र सरकार की अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं की जांच करेगी. केंद्र सरकार भविष्य में जिन परीक्षा संस्थाओं को अधिसूचित करेगी, उनके मामलों की जांच भी यही STF करेगी. सरकार का उद्देश्य जांच को अधिक पेशेवर, प्रभावी और समयबद्ध बनाना है, ताकि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई
STF अभियोजन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेगी, जिससे अदालतों में मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके. इस विशेष इकाई की कमान क्राइम ब्रांच के डीसीपी के पास होगी, जबकि स्पेशल सीपी (क्राइम ब्रांच) इसके पूरे कामकाज की निगरानी करेंगे.
सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास बहाल करना, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है.
ये भी पढ़ें: मोदी सरकार के इस मंत्री का प्रधानमंत्री की सलाह पर इस्तीफा, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया स्वीकार ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>प्रदर्शन, के, बीच, पेपर, लीक, पर, एक्शन, में, आयी, मोदी, सरकार, पिछले, घंटों, में, लिए, गए, ये, बड़े, फैसले</media:keywords>
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        <title>अनशन तोड़ने के बाद सोनम वांगचुक से PM मोदी की अपील, &amp;apos;जल्द से जल्द अपना पुराना...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अनशन-तोड़ने-के-बाद-सोनम-वांगचुक-से-pm-मोदी-की-अपील-जल्द-से-जल्द-अपना-पुराना</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अनशन-तोड़ने-के-बाद-सोनम-वांगचुक-से-pm-मोदी-की-अपील-जल्द-से-जल्द-अपना-पुराना</guid>
        <description><![CDATA[ सरकार से मांगें पूरी होने का आश्वासन मिलने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त किया. उनके अनशन खत्म करने पर पीएम मोदी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, मैं सोनम जी से आग्रह करता हूं की वो डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या रखें और जल्द से जल्द अपना पुराना वज़न फिर से प्राप्त करें. मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि सोनम जी स्वस्थ रहें.
26 दिनों के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन
सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद अनशन तोड़ने का फैसला लिया. उन्होंने &amp;nbsp;कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समर्थन में 28 जून को अनशन शुरू किया था. इसी बीच तबीयत खराब होने के बाद सोनम को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सोनम को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, &#039;अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में मैंने 26 दिनों के बाद अपना अनशन तोड़ा. इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर मुझसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया था. यह देश में संभावित हिंसा को देखते हुए और विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद किया गया. मैं जल्द ही एक अलग वीडियो में इन शर्तों का विस्तार से वर्णन करूंगा. इस बीच, मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें.&#039;
छात्रों के नाम पीएम मोदी का वीडियो संदेश
इससे थोड़ी देर पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करके देश के युवाओं, छात्रों और अभिभावकों से पेपर लीक पर रोक लगाने से जुड़े बड़े कदम उठाने की जानकारी दी थी. पीएम मोदी ने कहा कि इससे जुड़ा एक मसौदा शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में पेश किया जाएगा. उन्होंने कहा, &#039;मैं जानता हूं कि पेपर लीक मामूली विषय नहीं है. लाखों छात्र और उनके अभिभावकों के लिए बहुत ही पीड़ादायक है इसलिए पेपर लीक की घटना से निपटने को लेकर अब तक पिछले ढाई महीने में अनेक कदम उठाए गए. गुनाहगारों को पकड़ा गया है, वे जेल में हैं. हमारा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मा था कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अनशन, तोड़ने, के, बाद, सोनम, वांगचुक, से, मोदी, की, अपील, जल्द, से, जल्द, अपना, पुराना...</media:keywords>
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        <title>सोनम वांगचुक का 26 दिन का अनशन तोड़ने के बाद पहला बयान&amp; &amp;apos;मैंने कई शर्तों पर...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-का-26-दिन-का-अनशन-तोड़ने-के-बाद-पहला-बयान-मैंने-कई-शर्तों-पर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-का-26-दिन-का-अनशन-तोड़ने-के-बाद-पहला-बयान-मैंने-कई-शर्तों-पर</guid>
        <description><![CDATA[ पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पेपर लीक मामले को लेकर पिछले 26 दिनों से अनशन पर थे, लेकिन उन्होंने अब अनशन तोड़ दिया है. वांगचुक ने गुरुवार और शुक्रवार की रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया. उन्होंने कहा कि मैंने कई शर्तों पर चर्चा के बाद यह फैसला लिया है. वांगचुक ने यह भी कहा कि वे जल्द ही वीडियो जारी करके पूरी बात देश के सामने रखेंगे.
वांगचुक ने देर रात एक्स पर पोस्ट शेयर कर कहा, &#039;अभी-अभी केंद्रीय मंत्री श्री जे.पी. नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख के एपेक्स बॉडी के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में मैंने 26 दिनों के बाद अपना खत्म कर दिया. इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुलाकात कर या पत्र पर हस्ताक्षर करके मुझसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया था. यह फैसला कई शर्तों पर लंबी बातचीत और देश में हिंसा की आशंका को देखते हुए लिया गया है.&#039;

उन्होंने कहा, &#039;मैं जल्द ही एक वीडियो में इन शर्तों की विस्तृत जानकारी दूंगा. इस बीच, मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि सतर्क रहें और कहीं भी किसी भी तरह की हिंसा न होने दें.&#039;

Just now in the presence of Union Ministers Sh. JP Nadda, Dr. Jitendra Singh and the senior leaders of Apex Body of Leh Ladakh I finally broke my fast after 26 days. Earlier 65 members of parliament from different political parties had visited or signed letters urging me to break&amp;hellip; pic.twitter.com/RFCet7Oksy
&amp;mdash; Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 23, 2026



वांगचुक की पत्नी गीतांजलि से क्या बोले नड्डा
इससे पहले, नड्डा ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो एवं अन्य लोगों की मौजूदगी में उन्हें सरकार का भरोसा दिलाते हुए कहा, &#039;सरकार दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध-प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई, 2026 को संसद तक मार्च में शामिल होने वालों के खिलाफ मामले दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक रुख अपना रही है.&#039;
सौरव दास ने वांगचुक के अनशन तोड़ने पर क्या कहा
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, &#039;हम खुश हैं. हमने कल भी पत्र लिखकर सोनम सर से उपवास खत्म करने का अनुरोध किया था. यह आंदोलन जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक जारी रहेगा. हम बहुत खुश हैं कि सरकार हमारा अनुरोध मान गई है कि बातचीत न्यूट्रल जगह पर हो. बातचीत के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया को चुना गया है.&#039;
यह भी पढ़ें : सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन, अभिजीत दीपके बोले- &#039;धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोनम, वांगचुक, का, दिन, का, अनशन, तोड़ने, के, बाद, पहला, बयान-, मैंने, कई, शर्तों, पर...</media:keywords>
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        <title>सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद खत्म हो जाएगा आंदोलन? अभिजीत दीपके ने दिया जवाब, बोले&amp; &amp;apos;मुझे खुशी है कि...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-के-अनशन-तोड़ने-के-बाद-खत्म-हो-जाएगा-आंदोलन-अभिजीत-दीपके-ने-दिया-जवाब-बोले-मुझे-खुशी-है-कि</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-के-अनशन-तोड़ने-के-बाद-खत्म-हो-जाएगा-आंदोलन-अभिजीत-दीपके-ने-दिया-जवाब-बोले-मुझे-खुशी-है-कि</guid>
        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 26 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार से मिले आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है. सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद अभिजित दीपके का रिएक्शन सामने आया है.&amp;nbsp;
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, &quot;हमें इस बात की बेहद राहत और खुशी है कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है. सर, आपकी जबरदस्त हिम्मत और कुर्बानी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. अपनी जान जोखिम में डालकर आपने पूरे देश की चेतना को जगाया है. आपकी जान इस देश के लिए बेहद कीमती है. कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने ट्वीट करते हुए लिखा, &quot;हमें राहत है और हम आभारी हैं कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है... कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे&amp;hellip; pic.twitter.com/aG0HXsID0A
&amp;mdash; ANI_HindiNews (@AHindinews) July 23, 2026



सरकार के आश्वासन के बाद लिया फैसला
सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद अपना अनशन समाप्त किया. दोनों मंत्री गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे और सरकार की ओर से कई मुद्दों पर सकारात्मक रुख का भरोसा दिया. सरकार ने आश्वासन दिया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले और 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा.
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परीक्षा सुधार और पीड़ित परिवारों को राहत पर भी चर्चा
सरकार ने यह भी दोहराया कि संसद में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा कराई जाएगी. साथ ही, हाल के नीट पेपर लीक मामलों से जुड़े आत्महत्या के पीड़ित छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक विचार किया जा रहा है.
सोनम वांगचुक ने क्या कहा
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर बताया कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त किया. उन्होंने कहा कि लंबी और गंभीर बातचीत, सरकार की ओर से मिले आश्वासनों और देश में संभावित हिंसा की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी दी प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने पर कहा कि वह डॉक्टरों की सलाह का पालन करें और जल्द पूरी तरह स्वस्थ हों. प्रधानमंत्री ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी की. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोनम, वांगचुक, के, अनशन, तोड़ने, के, बाद, खत्म, हो, जाएगा, आंदोलन, अभिजीत, दीपके, ने, दिया, जवाब, बोले-, मुझे, खुशी, है, कि...</media:keywords>
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        <title>आधी रात को प्रधानमंत्री ने जारी किया वीडियो मैसेज तो राहुल गांधी ने ऐसा क्यों बोला&amp; &amp;apos;मिस्टर मोदी, हमारे...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देर रात जारी किए गए वीडियो पर लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सवाल उठाए हैं. राहुल गांधी ने सरकार के सामने प्रमुखता से तीन मांगें रखी हैं और देर रात जारी किए गए वीडियो को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा.
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, &quot;मिस्टर मोदी, हमारे छात्र धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं. आधी रात को जारी इस बेकार वीडियो से उनकी समझदारी का अपमान न करें.&quot; राहुल गांधी ने आगे कहा कि सरकार इन तीन मांगों को पूरा करे. इनमें पहली और मुख्य मांग है धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा.&amp;nbsp;

राहुल गांधी की दूसरी मांग है संसद चलो मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर, उनका कहना है कि जिन्होंने भी छात्रों को पीटा है उन सभी को सजा दी जाए. राहुल गांधी की तीसरी मांग है कि सरकार इन छात्रों से माफी मांगे. इससे पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए थे.

Mr. Modi, our students are demanding Dharmendra Pradhan&amp;rsquo;s resignation.Don&amp;rsquo;t insult their intelligence with this pathetic midnight video. 1. Sack Pradhan.2. Punish those who beat students.3. ⁠Apologise https://t.co/7SLB6pQqZx
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 23, 2026



फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन को लेकर क्या कहापीएम मोदी ने अपने वीडियो में कहा कि अधिकारियों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने को लेकर मसौदा तय कर लिया है और उन्होंने मुझे ये सौंप भी दिया है. इस पर आज शुक्रवार (24 जुलाई) को कैबिनेट में चर्चा होगी. कैबिनेट मंत्रियों के साथ सुझाव के बाद उसे अंतिम रूप दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि सोमवार से संसद में चल रहे मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह शुरू हो रहा है, उस दौरान संबंधित बिल को जल्द से जल्द सदन में पारित कराने का काम किया जाएगा.&amp;nbsp;
इससे पहले पीएम मोदी ने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बार-बार हिंसक होने को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं और छात्रों के लिए बड़ी घोषणा की. पीएम मोदी ने कहा था कि हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से अधिक कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है. उन्होंने ऐलान किया है कि पेपर लीक में जो भी शामिल हैं, उन्हें अदालत से तुरंत और कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का फैसला किया है. अब उन्होंने बताया कि इस पर अमल भी हो रहा है.&amp;nbsp;
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सोनम वांगचुक ने खत्म किया 26 दिन का अनशन, अभिजीत दीपके बोले- &#039;धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आधी, रात, को, प्रधानमंत्री, ने, जारी, किया, वीडियो, मैसेज, तो, राहुल, गांधी, ने, ऐसा, क्यों, बोला-, मिस्टर, मोदी, हमारे...</media:keywords>
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        <title>सोनम वांगचुक ने किन शर्तों पर तोड़ा अनशन? वीडियो जारी कर बताया, बोले&amp; &amp;apos;26 दिन बाद खाने स्वाद अच्छा लगता है&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ मशहूर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है. उनका कहना है कि भूख हड़ताल खत्म करने के बाद अब सरकार से जवाबदेही मांगी जाएगी. उन्होंने शुक्रवार (24 जुलाई) को एक्स पर वीडियो पोस्ट कर सिलसिलेवार ढंग से अपनी बात रखी.
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने आए थे. इसके अलावा उससे पहले कई पार्टियों के मिलाकर 65 सांसदों ने हमसे मिलकर और कागज पर साइन कर हमसे अनशन तोड़ने की अपील की थी. सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने (करीब 65 सांसदों) ने हमसे कहा है कि वो नीट पेपर लीक केस और एजुकेशन सिस्टम समेत तमाम मुद्दों को संसद में उठाएंगे. उन पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी. &amp;nbsp;&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्यों हुआ पेपर लीक और क्यों चली लाठी? प्रियंका गांधी ने मांगा शिक्षा मंत्री&amp;गृह मंत्री और PM से जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ CJP Protest: नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नीट परीक्षा में पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाब देना चाहिए.
प्रियंका का सरकार पर हमला
प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि अब तक इन दोनों मंत्रियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई. उन्होंने कहा कि इसका जवाब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की कार्यवाही नहीं चल पाने के लिए भी सरकार जिम्मेदार है. प्रियंका ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि संबंधित मंत्री कब इस्तीफा देंगे और इस पूरे मामले की जवाबदेही कौन लेगा.
प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बाचतीत करते हुए कहा कि क्या आपने अमित शाह से पूछा कि छात्रों पर लाठियां क्यों चलवाईं, बच्चे हॉस्पिटल में क्यों हैं? किसलिए... क्या ये छात्र आतंकवादी हैं? उन्होंने आगे कहा कि जब आप सरकार से ये सवाल करेंगे, तब मैं आपके सवालों का जवाब दूंगी.
वहीं, मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के संस्थापक और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने भी नीट विवाद और छात्रों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि जब बच्चे सवाल पूछते हैं तो उन्हें जवाब देने के बजाय बैरिकेड और लाठियां मिलती हैं, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.
कमल हासन ने पूछे सवाल
सोशल मीडिया मंच &amp;lsquo;एक्स&amp;rsquo; पर लिखी अपनी पोस्ट में कमल हासन ने कहा, &quot;जब एक बच्चा रोया था, तभी हमें उसकी बात सुननी चाहिए थी. इसके बजाय हमने तब तक इंतजार किया, जब तक हमारे बहुत सारे बच्चों की मौत नहीं हो गई. ऐसा तंत्र, जिसमें सीखने की जगह कोचिंग, जिज्ञासा की जगह बेचैनी और मेधा की जगह अपराध ले लेते हैं, वह पूरी तरह से विफल है.&quot;
उन्होंने आगे कहा कि &quot;देश तब नाकाम हो जाता है, जब बच्चों को जवाब के बजाय बैरिकेड और लाठियां मिलती हैं.&quot; कमल हासन ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि देश को आगे के संघर्ष में उनकी अंतरात्मा की आवाज की जरूरत है.
उन्होंने देश के छात्रों के नाम संदेश देते हुए लिखा, &quot;आप हममें से सबसे बेहतर हैं. आपने अपना फर्ज निभाया है, अब देश की बारी है कि वह आपके प्रति अपना फर्ज निभाए. आपके सपने हमेशा हमारी नाकामियों से बड़े हों.&quot; नीट पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है. संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान जारी है, जबकि विपक्ष परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्यों, हुआ, पेपर, लीक, और, क्यों, चली, लाठी, प्रियंका, गांधी, ने, मांगा, शिक्षा, मंत्री-गृह, मंत्री, और, से, जवाब</media:keywords>
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        <title>केजरीवाल का सवाल&amp; NEET पेपर लीक केस में CBI ने संजीव मुखिया को दी क्लीन चिट? एजेंसी बोली&amp; नहीं मिला सबूत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/केजरीवाल-का-सवाल-neet-पेपर-लीक-केस-में-cbi-ने-संजीव-मुखिया-को-दी-क्लीन-चिट-एजेंसी-बोली-नहीं-मिला-सबूत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/केजरीवाल-का-सवाल-neet-पेपर-लीक-केस-में-cbi-ने-संजीव-मुखिया-को-दी-क्लीन-चिट-एजेंसी-बोली-नहीं-मिला-सबूत</guid>
        <description><![CDATA[ NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि उसकी जांच में संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया के खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि वह प्रश्नपत्र चोरी या उसे आगे बांटने की साजिश में शामिल था. वहीं, इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
CBI ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि 2024 में बिहार पुलिस ने NEET-UG का प्रश्नपत्र चोरी होने का मामला दर्ज किया था. शुरुआती जांच में संजीव मुखिया पर शक जताया गया, क्योंकि उसका नाम पहले भी अन्य परीक्षा पेपर लीक मामलों में सामने आ चुका था. इसी आधार पर बिहार पुलिस ने उसे FIR में आरोपी बनाया था.
बाद में जांच CBI को सौंपी गई. एजेंसी का दावा है कि उसने पेपर चोरी करने, उसे आगे पहुंचाने और उससे लाभ उठाने वाले सभी लोगों की पहचान कर ली. इस मामले में अब तक 45 आरोपियों के खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं.
CBI के अनुसार, विस्तृत जांच और पूछताछ के बावजूद संजीव मुखिया की NEET-UG 2024 पेपर लीक में संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला. इसलिए उसके खिलाफ इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई. एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे NEET मामले में जमानत मिली, लेकिन वह बिहार पुलिस द्वारा दर्ज अन्य मामलों में आरोपी होने के कारण न्यायिक हिरासत में रहा.
CBI ने यह भी कहा कि पूरी साजिश और उसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जा चुकी है तथा यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी आरोपी कानून की प्रक्रिया से बच न सके. एजेंसी के मुताबिक, यह स्थिति 2024 में ही स्पष्ट कर दी गई थी और अब यह कहना कि संजीव मुखिया का नाम जानबूझकर चार्जशीट से हटाया गया, तथ्यों के आधार पर गलत है.
उधर, CBI के इस स्पष्टीकरण के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि &quot;2024 में NEET का पेपर लीक हुआ. मोदी सरकार ने कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया, लेकिन CBI ने तय समय के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिससे उसे स्वतः जमानत मिल गई. अब CBI ने उसे क्लीन चिट दे दी.&quot; केजरीवाल ने आगे कहा, &quot;आप इससे बच नहीं पाएंगे, क्योंकि आपकी नीयत में खोट है.&quot;

लीजिए। मोदी जी की पूरी पोल खुल गई। 2024 में NEET का पेपर लीक हुआ। मोदी सरकार ने इसको मास्टरमाइंड कहकर गिरफ्तार किया। फिर सीबीआई ने जानबूझकर टाइम पे चार्जशीट दायर नहीं की जिसकी वजह से इसको तीन महीने में ही ऑटोमैटिक बेल दिलवा दी। और आज उसको CBI से मोदी जी ने क्लीन चिट दिलवा दी।&amp;hellip; https://t.co/bwbexAwjQa
&amp;mdash; Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) July 23, 2026



राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि छात्रों का गुस्सा जायज है, लेकिन किसी भी आंदोलन को हिंसक नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक, इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार और संस्थाओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
वहीं, अभिनव बिंद्रा ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, &quot;मैंने खुद को कभी राजनीतिक व्यक्ति नहीं माना. लेकिन मेरा मानना है कि कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जो हम सभी के हैं, चाहे हमारी राजनीतिक सोच कुछ भी हो. शिक्षा उन्हीं में से एक है.&quot; उन्होंने कहा कि हर छात्र को यह विश्वास होना चाहिए कि उसकी मेहनत का मूल्यांकन निष्पक्ष होगा. बिंद्रा ने जोर देकर कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है जो पारदर्शी, विश्वसनीय और पूरी तरह योग्यता आधारित हो, ताकि छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत हो सके. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>केजरीवाल, का, सवाल-, NEET, पेपर, लीक, केस, में, CBI, ने, संजीव, मुखिया, को, दी, क्लीन, चिट, एजेंसी, बोली-, नहीं, मिला, सबूत</media:keywords>
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        <title>इधर सीजेपी से बातचीत के लिए तैयार हुई सरकार, उधर खरगे ने मोदी सरकार के सामने रखी ये शर्त</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इधर-सीजेपी-से-बातचीत-के-लिए-तैयार-हुई-सरकार-उधर-खरगे-ने-मोदी-सरकार-के-सामने-रखी-ये-शर्त</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/इधर-सीजेपी-से-बातचीत-के-लिए-तैयार-हुई-सरकार-उधर-खरगे-ने-मोदी-सरकार-के-सामने-रखी-ये-शर्त</guid>
        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक राजनीति गरमाई हुई है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि वह NEET के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष नई शर्तें थोपकर सदन रुकावट पैदा कर रहा है. इस बीच राज्य सभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार के सामने शर्त रख दी है. उन्होंने कहा कि हम चर्चा के लिए तभी तैयार होंगे, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा.
युवा सडकों पर लाठी खाने पर मजबूर: खरगे&amp;nbsp;
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, &#039;पीएम मोदी ने ऐसा वातावरण बनाया जिससे युवा सडकों पर लाठी खाने पर मजबूर हुए. अब वह अपने ही सांसदों को विपक्ष की आवाज दबाने के लिए भड़का कर रहे हैं.&#039; संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार (23 जुलाई 2026) को संसद भवन परिसर में नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला.
बीजेपी की यह प्रतिक्रिया लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस आरोप के बाद आई, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने और देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद होने देने का आरोप लगाया था. दोनों पक्ष संसद के मकर द्वार के बाहर जमा हुए और एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की.
सरकार छात्रों से बातचीत को तैयार
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार नीट पेपर लीक मुद्दे को लेकर संवेदनशील है और छात्रों के साथ बातचीत कर इसका हल निकालना चाहती है. उन्होंने कहा, &#039;धीरे-धीरे हम चर्चा करके समाधान की तरफ बढ़ सकते हैं और समाधान से ही नया रास्ता भी निर्धारित हो सकता है. जहां भी आप कहें... चाहे आप जेपी नड्डा के आवास पर कहें या आप कहें ऑफिस में तो वहां चर्चा हो सकती है. हमारे लिए ये प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है.&#039;
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP
दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर भी सीजेपी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों में सख्ती दिखाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है. इसका मकसद दोषियों को जल्दी और कड़ी सजा दिलाना है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस पर तुरंत काम शुरू करने के निर्देश दिए. इसके थोड़ी देर बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सीजेपी का रिएक्शन आया. राहुल गांधी ने कहा, &#039;छात्रों की मांगें साफ हैं. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं. छात्रों से माफी मांगें. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें.&#039; CJP ने कहा, &#039;धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा.&#039;
छात्रों का हित सरकार की प्राथमिकता: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना पीएम मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा, &#039;पेपर लीक मामलों में तुरंत सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का पीएम मोदी का निर्णय युवाओं को सशक्त बनाने के प्रति उनके दृढ़ संकल्प और अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह निर्णायक कदम उन लोगों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, जो हमारे युवाओं की आकांक्षाओं और भविष्य को खतरे में डालते हैं.&#039;
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, &#039;विपक्ष से अनुरोध है कि चर्चा करें. विषय का राजनीतिकरण ना करें... भागे नहीं. चर्चा होगी तो इस मुद्दे पर और क्या कड़े नियम बन सकते है उस पर आगे बढ़ा जा सकता है.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>इधर, सीजेपी, से, बातचीत, के, लिए, तैयार, हुई, सरकार, उधर, खरगे, ने, मोदी, सरकार, के, सामने, रखी, ये, शर्त</media:keywords>
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        <title>सरकार ने बताया पाकिस्तान को क्यों नहीं भेजा कोई अलर्ट, सिंधु जल संधि पर भी दिया बड़ा संदेश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सरकार-ने-बताया-पाकिस्तान-को-क्यों-नहीं-भेजा-कोई-अलर्ट-सिंधु-जल-संधि-पर-भी-दिया-बड़ा-संदेश</link>
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        <description><![CDATA[ भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर जारी तनाव के बीच एक बार फिर बाढ़ संबंधी सूचनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इस बीच भारत सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान को किसी भी तरह की बाढ़ चेतावनी इसलिए नहीं भेजी गई, क्योंकि ऐसी स्थिति बनी ही नहीं थी.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, चिनाब (अखनूर), तवी (जम्मू), सतलुज (फिरोजपुर) और रावी (माधोपुर) नदियों में मौजूदा जलप्रवाह निर्धारित असाधारण जलप्रवाह या उच्च बाढ़ की सीमा से काफी नीचे है. ऐसे में पाकिस्तान को अलर्ट भेजने की जरूरत नहीं पड़ी.
नहीं भेजा गया अलर्ट
सूत्रों ने बताया कि सिंधु जल संधि के अनुच्छेद IV(8) के तहत बाढ़ संबंधी जानकारी केवल उन्हीं परिस्थितियों में साझा की जाती है, जब असाधारण जलप्रवाह या बाढ़ की स्थिति दूसरे पक्ष को प्रभावित कर सकती हो. चूंकि फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है, इसलिए भारत की ओर से कोई सूचना नहीं भेजी गई.
सरकार ने यह भी याद दिलाया कि अप्रैल 2025 में भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित (Abeyance) करने का फैसला लिया था. इसके बाद संधि के तहत भारत पर नियमित रूप से जानकारी साझा करने का दायित्व नहीं रह गया. हालांकि, भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन परिस्थितियों में बाढ़ संबंधी सूचनाएं साझा करना जारी रखा है, जब वास्तव में असाधारण बाढ़ की आशंका उत्पन्न हुई है.
सूत्रों के अनुसार, बाढ़ संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान केवल चिनाब, तवी, रावी और सतलुज के अंतिम निगरानी स्थलों (टर्मिनल साइट्स) पर दर्ज असाधारण जलप्रवाह तक सीमित रहता है. संधि में असाधारण जलप्रवाह की कोई निश्चित सीमा तय नहीं है. इसके लिए भारत-पाकिस्तान सिंधु आयोग की प्रचलित कार्यप्रणाली (Commission Practice) के आधार पर मानक तय किए जाते हैं.
पिछले साल 23 बार चेतावनी
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 2025 के बाढ़ सीजन के दौरान भारत ने भारतीय उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान को 23 बाढ़ चेतावनियां भेजी थीं. वर्ष 2026 में भी यही व्यवस्था लागू है. लेकिन इस समय वाटर लेवल तय सीमा से नीचे होने के कारण पाकिस्तान को किसी प्रकार की चेतावनी भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ी.
भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में बाढ़ संबंधी प्रोटोकॉल का पालन तथ्यों और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर किया जा रहा है. इसलिए पाकिस्तान को अलर्ट नहीं भेजे जाने को लेकर लगाए जा रहे दावों का वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं है.
इसके पहले संयुक्त राष्ट्र में भारत ने सिंधु जल संधि पर अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट करते हुए पाकिस्तान को दो टूक संदेश दिया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को राज्य की नीति के रूप में अपनाने वाले देश के साथ सामान्य सहयोग संभव नहीं है. पाकिस्तान द्वारा लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाए जाने के बीच भारत ने साफ किया कि असली मुद्दा पानी नहीं, बल्कि आतंकवाद है. जब तक सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं होगा, तब तक भारत अपने मौजूदा रुख पर कायम रहेगा. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सऊदी अरब से दिल्ली पहुंचते ही NIA ने PFI के फरार आरोपी को दबोचा, 3 लाख रुपए का था इनाम</title>
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        <description><![CDATA[ केरल के चर्चित श्रीनिवासन हत्याकांड में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता मिली है. एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े एक और फरार आरोपी मुहम्मदअली के.पी. को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) से गिरफ्तार किया है. आरोपी पिछले करीब चार वर्षों से सऊदी अरब में छिपा हुआ था.
NIA के अनुसार, मुहम्मदअली गुरुवार सुबह सऊदी अरब के रियाद से दिल्ली पहुंचा था. जैसे ही वह एयरपोर्ट पर उतरा, एजेंसी ने उसे हिरासत में ले लिया. मुहम्मदअली PFI की पलक्कड़ जिला इकाई का पूर्व अध्यक्ष रह चुका है. उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है.
केरल मर्डर केस में बड़ी सफलता
NIA ने मुहम्मदअली की गिरफ्तारी में मदद करने वाले को तीन लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि वह श्रीनिवासन की हत्या की साजिश रचने वाले प्रमुख आरोपियों में शामिल था और हत्या में शामिल हमलावरों को पनाह देने में भी उसकी अहम भूमिका थी.
इस मामले में अब तक 65 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. मुहम्मदअली पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.
गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2022 को केरल के पलक्कड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े नेता श्रीनिवासन की हत्या कर दी गई थी. सितंबर 2022 में NIA ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी.
चार साल बाद पकड़ा गया आरोपी
NIA का आरोप है कि श्रीनिवासन की हत्या PFI से जुड़े कैडरों द्वारा एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी. एजेंसी का दावा है कि आरोपियों का उद्देश्य हिंसा के जरिए सांप्रदायिक तनाव फैलाना था. जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि PFI का एजेंडा वर्ष 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन स्थापित करना था.
जांच एजेंसी के मुताबिक, PFI ने अलग-अलग उद्देश्यों के लिए कई विंग और विशेष इकाइयां बनाई थीं. चुनिंदा कैडरों को फिजिकल एजुकेशन और योग प्रशिक्षण की आड़ में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती थी. NIA का यह भी दावा है कि संगठन की &quot;रिपोर्टर्स विंग&quot; संभावित टारगेट की जानकारी जुटाती थी, जबकि &quot;सर्विस टीम&quot; को हिंसक वारदातों को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी.
अब NIA गिरफ्तार मुहम्मदअली से पूछताछ कर हत्या की साजिश, उसके नेटवर्क और इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है. एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>PM आवास के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी को हिरासत में लेने पर आया नवीन पटनायक का रिएक्शन, बोले &amp; &amp;apos;यह बेहद ही...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक ने नयी दिल्ली में छात्रों और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को बुधवार को &#039;हैरान करने वाला&#039; करार दिया और नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी पार्टी की मांग दोहरायी.
एक सप्ताह के दिल्ली दौरे के बाद भुवनेश्वर लौटने पर पत्रकारों से बातचीत में पटनायक ने जारी छात्र आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने कहा, &#039;युवा छात्रों पर पुलिस की अनावश्यक हिंसा से हर कोई बेहद स्तब्ध है. केवल छात्रों के साथ ही नहीं, बल्कि संसद में नेता प्रतिपक्ष और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भी पुलिस ने बहुत कठोर व्यवहार किया. यह हैरान करने वाला है.&#039;
क्या बोले पटनायक?
पटनायक ने कहा कि परीक्षा से जुड़ी अनियमितताएं पूरे देश में एक बड़ा मुद्दा बन गई हैं. उन्होंने कहा, &#039;जैसा कि आप जानते हैं, पूरा देश उनके (धर्मेंद्र प्रधान के) इस्तीफे की मांग कर रहा है. यह मांग केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में स्थित हमारे दूतावासों के बाहर भी उठाई जा रही है.&#039; छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए पटनायक ने कहा कि उन्होंने दिल्ली प्रवास के दौरान भी इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की थी.
&#039;पूरा देश धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहा&#039;
उन्होंने कहा, &#039;युवा छात्रों के साथ जो हुआ, उसे लेकर पूरे देश में आंदोलन हो रहा है. इससे पूरा देश हैरान है. हम आंदोलन में शामिल रहे हैं और ओडिशा में भी आंदोलन करेंगे.&#039; प्रधान के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा, &#039;छात्रों के साथ जो हुआ, उसके बाद पूरा देश उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है. उन्हें इस्तीफा देना चाहिए.&#039;
घायल छात्रों से मिला था बीजेडी डेलीगेशन
दिल्ली दौरे के दौरान पटनायक ने प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद की स्थिति पर बीजद सांसदों के साथ चर्चा की थी. राज्यसभा सदस्य मानस रंजन मंगराज के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल जाकर घायल छात्रों से मुलाकात की थी और उन्हें समर्थन का भरोसा दिया था. बीजद ने छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई पर संसद में एक विशेष चर्चा की मांग भी की है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>CJP Protest: जंतर&amp;मंतर के पास इंटरनेट बंद करने का जिक्र कर भड़की कांग्रेस, कहा &amp; &amp;apos;इसका मकसद...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cjp-protest-जंतर-मंतर-के-पास-इंटरनेट-बंद-करने-का-जिक्र-कर-भड़की-कांग्रेस-कहा-इसका-मकसद</link>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में जंतर-मंतर के पास एक बार फिर बवाल हुआ है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बीच प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हो गई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे. जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट भी बंद किया गया है, जिस पर कांग्रेस ने निशाना साधते हुए कहा कि यह अभिव्यक्ति पर सीधा हमला है.
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाते हुए कहा, &#039;जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद कर दिया है. जिससे भारी अफरा-तफरी मच गई है. यह अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला है, जिसका मकसद भारत के युवाओं की आवाज को दबाना और दिल्ली पुलिस की बर्बरता को छिपाना है.&#039;
केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, &#039;प्रधानमंत्री मोदी, सावधान हो जाइए, युवाओं के इस विरोध-प्रदर्शन को कुचलने के लिए उठाया गया कोई भी गलत कदम बेहद विनाशकारी साबित होगा और जनता आपको ऐतिहासिक सजा देगी.&#039;

PM Modi has cut off internet around Jantar Mantar, which is creating immense panic.This is a direct assault on freedom of speech, to silence the voice of India&amp;rsquo;s youth and hide the Delhi Police&amp;rsquo;s brutalities. Be warned, Mr. Modi - any untoward step to quash this youth protest&amp;hellip;
&amp;mdash; K C Venugopal (@kcvenugopalmp) July 22, 2026



प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प
बता दें, नई दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बीच एक बार फिर प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई. हमले में दिल्ली पुलिस के एसीपी गंभीर रूप से घायल और एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं. बवाल के बाद जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया था. सूत्रों के मुताबिक अब इलाके में हालात सामान्य हैं, और इंटरनेट सेवा को बहाल कर दिया गया है.
एसीपी विवेक भगत हुए घायल
सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल के पास पार्क होटल के सामने प्रदर्शनकारियों ने कुछ पुलिसकर्मियों को घेर लिया था. जानकारी के अनुसार, पुलिसकर्मियों को छुड़ाने के लिए पहुंचे ACP विवेक भगत इसी दौरान घायल हो गए. बताया जा रहा है कि उनके सिर पर डंडे &amp;nbsp;से वार किया गया, जिससे उन्हें चोट आई. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है.
बवाल के बाद सख्त हुई सुरक्षा
सूत्रों के मुताबिक, रात करीब 9 बजे के आसपास इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने का संदेश भी जारी हुआ. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस की मौजूदगी लगातार बढ़ाई गई है और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है. स्थिति पर पुलिस की कड़ी नजर है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे या नहीं? केंद्र सरकार के बड़े अधिकारी ने साफ कर दी तस्वीर</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गुंजाइश कम है, क्योंकि सरकार के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. केंद्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार (22 जुलाई 2026) को इसकी जानकारी दी. प्रतियोगी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही, शिक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन जारी है.
सरकार बातचीत करने के लिए तैयार
कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दल भी प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग कर रहे हैं. अधिकारी ने बताया कि सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ गंभीरता से बातचीत करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने कहा कि बैठक की &amp;ldquo;जगह&amp;rdquo; को लेकर किसी को भी अड़ियल रुख नहीं अपनाना चाहिए, जैसा कि सीजेपी जोर दे रही है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को सीजेपी के दो प्रतिनिधियों के साथ अपने आवास पर मुलाकात थी. उन्होंने संगठन की मांग सुनी थी और भरोसा दिलाया था कि शीर्ष नेताओं से बातचीत के बाद उनसे फिर से संपर्क करेंगे.&amp;nbsp;तब से सरकार के भीतर कई दौर की बैठकें हुई हैं, जिनमें जेपी नड्डा के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और शिक्षा मंत्री प्रधान सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए हैं.
सीजेपी और सरकार के बीच एक और बैठक के संकेत
सरकार की ओर से सीजेपी को उसकी मांगों पर एक और बैठक करने का संकेत भेजा गया है. हालांकि, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन के प्रतिनिधि नड्डा से फिर से मिलने को तैयार हैं, लेकिन यह बैठक किसी मंत्री के आवास पर नहीं, बल्कि जंतर-मंतर या उसके आसपास किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए. सौरव दास ने ये भी कहा कि बैठक तभी की जानी चाहिए, जब सरकार की वास्तव में प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने की मंशा हो.
सीजेपी ने प्रधान के इस्तीफे और नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन के लिए एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे के अलावा शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस लिए जाने की मांग की है. अधिकारी ने नीट पुन:परीक्षा के सफल आयोजन का जिक्र करते हुए कहा, &#039;शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता. नीट प्रश्नपत्र लीक के लिए मंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वह इसमें व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं थे.&#039;
मुआवजा देने पर विचार करने को तैयार सरकार: अधिकारी
हालांकि, अधिकारी ने कहा कि सरकार नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन को मुआवजा देने की मांग पर सकारात्मक रूप से विचार करने के लिए तैयार है.&amp;nbsp;उन्होंने कहा कि सरकार नीट प्रश्नपत्र लीक मामले पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए भी तैयार है, क्योंकि उसका मानना ​​है कि वहां वह विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से की गई कार्रवाई पर विस्तार से जवाब देने के साथ-साथ यह भी बता सकती है कि &amp;ldquo;मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पुन: परीक्षा किसी सफलतापूर्वक आयोजित की गई.&#039;
अधिकारी के मुताबिक, &#039;अगर जरूरत पड़ी, तो हम दो-तीन दिन-या फिर जितना भी समय लगे-चर्चा के लिए तैयार हैं. लेकिन विपक्ष की अव्यावहारिक मांगों को पूरा नहीं किया जा सकता.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, इस्तीफा, देंगे, या, नहीं, केंद्र, सरकार, के, बड़े, अधिकारी, ने, साफ, कर, दी, तस्वीर</media:keywords>
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        <title>कैसे 1997 में पेपर लीक प्रदर्शन ने धर्मेंद्र प्रधान को बनाया छात्र नेता, आज उसी तरह के मामले में हो रही उनके इस्तीफे की मांग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कैसे-1997-में-पेपर-लीक-प्रदर्शन-ने-धर्मेंद्र-प्रधान-को-बनाया-छात्र-नेता-आज-उसी-तरह-के-मामले-में-हो-रही-उनके-इस्तीफे-की-मांग</link>
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        <description><![CDATA[ बात उस समय की है, जब साल 1997 था. उस समय ओडिशा में कांग्रेस की सरकार थी. तब मुख्यमंत्री हुआ करते थे, जानकी बल्लभ पटनायक. भुवनेश्वर में सीएम आवास पर कुछ ही किलोमीटर दूर कुछ छात्र जिनकी संख्या 1500 थी, जब वह परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में राज्य सचिवालय के बाहर जमा हुए थे. उस प्रदर्शन में शामिल थे, देश के वर्तमान शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिनके इस्तीफे की मांग लगातार की जा रही है. वजह है, नीट का पेपर लीक होना.&amp;nbsp;
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रधान ने आरएसएस के स्टूडेंट ग्रुप यानी छात्र संगठन एबीवीपी से जुड़े नेता के तौर पर 1997 में हुए ओडिशा की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्हीं के नेतृत्व में इस प्रदर्शन को किया गया था. प्रधान ने उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी की पढ़ाई की है. नवंबर 1994 से 1997 में दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे.
1997 में हुए विरोध प्रदर्शन को याद करते हुए उनके जूनियर प्रशांत राउत के हवाले से न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में बताया था कि सचिवालय के सामने ओडिशा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. करीबन उस समय 1500 स्टूडेंट प्रदर्शन में शामिल हुए. कार्रवाई से पहले विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था.&amp;nbsp;
जब प्रधान की बुरी तरह से हुई थी पिटाई, हुआ था फ्रैक्चर
राउत ने कहा, &#039;उस समय वह बेहद डरे हुए थे. उस समय प्रधान की बुरी तरह पिटाई हुई थी. उन्हें फ्रैक्चर भी हुआ था. उस समय कैंपस चुनाव हिंसक हो जाया करते थे. बताया जाता है कि उस समय यह तय हो गया था कि प्रधान जीतने वाले हैं, तो जनता दल के सपोटर्स ने उनपर हमला कर दिया. वह आज सिर्फ किस्मत से जिंदा हैं.&#039;&amp;nbsp;
उनके छात्र जीवन में एक्टिव रहने और लंबे समय तक संगठनात्मक कामों में रहने के चलते बीजेपी में उनके करियर की नींव रखी गई. 2021 में एजुकेशन मिनिस्टर बनने से पहले पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के केंद्रीय मंत्री रहे. उन्होंने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय भी संभाला. कई दशक तक ओडिशा में उन्होंने बीजेपी का संगठन मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. यह कोशिश 2024 में सफल हुई.
ओडिशा में बीजेपी के नेता, आरएसएस का मजबूत बैक सपोर्ट
बीजेपी ने ओडिशा में अपनी सरकार बनाई. नवीन पटनायक के नेतृत्व वाले बीजू जनता दल के दो दशक के शासन को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई. ऐसे में माना जाता है कि प्रधान आरएसएस में अहम पैठ रखते हैं. बीजेपी अगर उन्हें हटाती भी है, तो यह एक बड़ा कदम माना जाएगा.&amp;nbsp;
धर्मेंद्र प्रधान का 1997 का प्रदर्शन उस समय चर्चा में आ गया, जब नीट यूजी पेपर लीक को लेकर विवाद चल रहा है. ऐसे में बड़ी तदाद में छात्र सीजेपी और सोनम वांगचुक की अपील पर संसद मार्च में शामिल हुए. अभी फिलहाल देशभर में उनके इस्तीफा की मांग की चर्चा गरम है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कैसे, 1997, में, पेपर, लीक, प्रदर्शन, ने, धर्मेंद्र, प्रधान, को, बनाया, छात्र, नेता, आज, उसी, तरह, के, मामले, में, हो, रही, उनके, इस्तीफे, की, मांग</media:keywords>
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        <title>अनंतनाग में आतंकी हमले के बाद एक्शन में सिक्योरिटी फोर्स, पूरे कश्मीर घाटी से 1,000 OGWs लिए गए हिरासत में</title>
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        <description><![CDATA[ जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में स्थित अनंतनाग जिले में हुए आतंकवादी हमले में एक पुलिसकर्मी की हत्या के बाद सुरक्षा बलों ने व्यापक रूप से कार्रवाई शुरू कर दी है. सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को समर्थन देने वालों और पूर्व में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने वाले लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान की शुरुआत की है.
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे कश्मीर घाटी में विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से चलाए गए अभियान के तहत सुरक्षा बलों की तरफ से अब तक 1,000 से ज्यादा ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को हिरासत में लिया गया है.
अधिकारी ने घटना के संबंध में दी जानकारी
एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस ने घाटी के सभी 10 जिलों में व्यापक रूप से तलाशी अभियान और छापेमारी शुरू कर दी. अब तक 1,000 से ज्यादा ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हिरासत में लेने के बाद कई स्थानों पर, विशेष रूप से अनंतनाग जिले में, छापेमारी अभियान को और तेज कर दिया गया है.
आतंकी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने की इलाके की घेराबंदी

#WATCH | Anantnag, J&amp;amp;K: Family members mourn the loss of Head Constable Ashiq Hussain Qureshi, who sacrificed his life in the line of duty. Head Constable Ashiq Hussain Qureshi, lost his life in a terror attack in Anantnag. pic.twitter.com/d5jG1ZIcw3
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 22, 2026



अधिकारी ने बताया कि मृतक पुलिसकर्मी की पहचान हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन के रूप में हुई है, जो अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात थे. ड्यूटी पर तैनाती के दौरान बुधवार (22 जुलाई, 2026) को दोपहर करीब 12:30 बजे अनंतनाग के लाल चौक इलाके में एक आतंकवादी ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई. आतंकवादी हमले के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे अनंतनाग शहर की घेराबंदी कर दी और हमलावर की तलाश के लिए व्यापक रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू किया.&amp;nbsp;

उपराज्यपाल और सीएम ने मृतक के प्रति जताई संवेदना
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है और इस हमले को कायराना हरकत करार दिया है. इसके अलावा, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने आतंकी हमले में मारे गए जम्मू-कश्मीर पुलिस के कांस्टेबल के शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की है.
जम्मू-कश्मीर के DGP ने घटनास्थल का किया दौरा
इस बीच, जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात और कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) वीके बिर्दी ने घटनास्थल का दौरा किया और इलाके की सुरक्षा व्यवस्था और हालात की समीक्षा की.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः संसद भवन के भीतर अखिलेश यादव और केसी वेणुगोपाल की तीखी नोकझोंक, जानें क्या है पूरा मामला? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अनंतनाग, में, आतंकी, हमले, के, बाद, एक्शन, में, सिक्योरिटी, फोर्स, पूरे, कश्मीर, घाटी, से, 1, 000, OGWs, लिए, गए, हिरासत, में</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;धर्मेंद्र प्रधान इतने अहम क्यों&amp;apos;, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर अभिजीत दीपके ने PM मोदी से पूछा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धर्मेंद्र-प्रधान-इतने-अहम-क्यों-सोनम-वांगचुक-की-भूख-हड़ताल-को-लेकर-अभिजीत-दीपके-ने-pm-मोदी-से-पूछा</link>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पेपर लीक के मुद्दे को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है. पार्टी का कहना है कि एग्जाम सिस्टम में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए उनका आंदोलन जारी रहेगा. इसी मांग को लेकर सोनम वांगचुक 25 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. इस बीच CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक पोस्ट किया है. उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक 25 दिनों से अनशन पर हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट में लिखा कि राजनीति केवल चुनावी रैलियां करने और चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होती है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह होने की भी जिम्मेदारी होती है. उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि देश को बताया जाना चाहिए कि अब तक सोनम वांगचुक से बातचीत क्यों नहीं की गई, ताकि इस मामले का समाधान निकल सके और उनकी भूख हड़ताल खत्म कराई जा सके.

It&amp;rsquo;s day 25 of @Wangchuk66&amp;rsquo;s hunger-strike. The PM is yet to break his silence.Mr. @narendramodi, politics is not just about doing election rallies and winning elections. It&amp;rsquo;s about being accountable and answerable to people. Tell the country why have you not reached out to&amp;hellip; pic.twitter.com/oECSB96m36
&amp;mdash; Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 22, 2026




ये भी पढ़ें: &#039;NEET को ही पूरी तरह खत्म कर दो&#039;, CJP प्रदर्शन के बीच विजय थलापति की बड़ी मांग, राहुल गांधी के प्रोटेस्ट पर क्या कहा?
अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान को लेकर पूछा सवाल
अभिजीत दीपके ने आगे कहा कि देश यह भी जानना चाहता है कि शांतिपूर्ण तरीके से एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने इतनी सख्त कार्रवाई क्यों की. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के साथ पुलिस का व्यवहार बेहद कठोर रहा. अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश को यह बताया जाना चाहिए कि इतने सारे छात्रों की मौत के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों बने हुए हैं.
ये भी पढ़ें: CJP Protest News LIVE: &#039;आपने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म करवाने की कोशिश क्यों नहीं की&#039;, अभिजीत दीपके ने PM मोदी से पूछा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>धर्मेंद्र, प्रधान, इतने, अहम, क्यों, सोनम, वांगचुक, की, भूख, हड़ताल, को, लेकर, अभिजीत, दीपके, ने, मोदी, से, पूछा</media:keywords>
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        <title>Explained: वांगचुक और CJP की &amp;apos;जमीन&amp;apos; पर कांग्रेसी कब्जा! एक्सपर्ट्स से जानें कैसे राहुल के बाद आंदोलन का हुआ &amp;apos;कांग्रेसीकरण&amp;apos;?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-वांगचुक-और-cjp-की-जमीन-पर-कांग्रेसी-कब्जा-एक्सपर्ट्स-से-जानें-कैसे-राहुल-के-बाद-आंदोलन-का-हुआ-कांग्रेसीकरण</link>
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        <description><![CDATA[ 21 जुलाई 2026 को जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे, तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक के आंदोलन ने एक नया मोड़ लिया. NEET पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन, अचानक कांग्रेस के &#039;किले&#039; में तब्दील होता नजर आने लगा. अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी के दखल ने इस आंदोलन को कांग्रेस का बना दिया है?
CJP आंदोलन: शुरुआत और पहचान
CJP और सोनम वांगचुक का आंदोलन NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था. यह आंदोलन डिजिटल था. इसकी पहचान सोशल मीडिया, ऑनलाइन याचिकाएं और युवाओं की जुड़ाव थी. इसका कोई राजनीतिक चेहरा नहीं था. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कहा था, &#039;हमें कोई राजनीतिक दल नहीं चाहिए, हमें बस इंसाफ चाहिए.&#039; सोनम वांगचुक ने भी किसी राजनीतिक पार्टी से दूरी बनाए रखी थी. यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत थी. यह जनता का आंदोलन था, किसी पार्टी का नहीं.
तो फिर कांग्रेस के दखल से क्या बदल गया?
21 जुलाई 2026 को कांग्रेस ने अपना सबसे बड़ा राजनीतिक कदम उठाया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, के.सी. वेणुगोपाल और पवन खेड़ा PM आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बाहर धरने पर बैठ गए. उनकी मांगें थीं:

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का इस्तीफा: 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: NEET पेपर लीक के मामले में.
संसद में चर्चा: 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत चर्चा.

राहुल गांधी ने कहा, &#039;हम कल की युवाओं के खिलाफ हुई क्रूरता का जवाब मांगने PM मोदी के घर आए हैं. PM और गृह मंत्री को भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए इस्तीफा देना चाहिए.&#039;
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को &#039;सबसे युवा विरोधी प्रधानमंत्री&#039; करार दिया. उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में 152 परीक्षा पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं. दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के कई नेताओं को धरना स्थल से हिरासत में ले लिया. हालांकि, देर रात तक सभी नेताओं को रिहाई मिल गई.
इस पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स की राय भी पढ़ते हुए चलें:
1. &#039;कांग्रेस ने आंदोलन को हाईजैक किया&#039;
पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई के मुताबिक, &#039;CJP और सोनम वांगचुक का आंदोलन एक ग्रासरूट आंदोलन था, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बना लिया है. कांग्रेस का मकसद साफ है कि 2027 के चुनाव से पहले युवाओं और छात्रों को अपनी तरफ करना.&#039; उनका कहना है, &#039;कांग्रेस का दखल आंदोलन को ताकत तो देगा, लेकिन उसकी &#039;अराजनीतिक&#039; पहचान खत्म कर देगा.&#039;
2. &#039;आंदोलन ने कांग्रेस को मौका दिया&#039;
रशीद किदवई कहते हैं, &#039;CJP ने खुद कहा था हमें कोई राजनीतिक दल नहीं चाहिए. लेकिन जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया और छात्रों को पीटा, तो आंदोलन को एक राजनीतिक सहारे की जरूरत थी. कांग्रेस ने वह मौका भांप लिया. अब यह आंदोलन कांग्रेस के बिना नहीं चल सकता, लेकिन कांग्रेस इस आंदोलन के बिना भी चल सकती है.&#039;
3. &#039;कांग्रेस की जमीन पर खड़ा हो गया आंदोलन&#039;
CSDS के संजय कुमार कहते हैं, &#039;CJP आंदोलन अब पूरी तरह से कांग्रेस के कब्जे में आ गया है. राहुल गांधी ने इसे अपनी &#039;नेशनल पॉलिटिक्स&#039; का हिस्सा बना लिया है. यह आंदोलन अब &#039;जनता का आंदोलन&#039; नहीं रहा, बल्कि &#039;कांग्रेस का आंदोलन&#039; बन गया है.&#039;
4. &#039;CJP का किला, कांग्रेस की छाया&#039;
रशीद किदवई का कहना है, &#039;CJP आंदोलन अभी भी अपनी जमीन पर खड़ा है, लेकिन कांग्रेस ने उस पर अपनी छाया डाल दी है. अब CJP और कांग्रेस को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. हालांकि, CJP के नेता अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक अभी भी &#039;अराजनीतिक&#039; बने हुए हैं. लेकिन कांग्रेस का समर्थन उनकी &#039;निष्पक्ष&#039; छवि को कमजोर कर रहा है.&#039;
5. &#039;कांग्रेस ने आंदोलन को वैधता दी&#039;
दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट मिथिलेश कुमार के मुताबिक, &#039;कांग्रेस का दखल आंदोलन को एक &#039;राष्ट्रीय मुद्दा&#039; बनाने में मदद करेगा. लेकिन यह दोधारी तलवार है. कांग्रेस का समर्थन आंदोलन को जितना ताकत देगा, उतना ही इसे &#039;राजनीतिक&#039; भी बनाएगा.&#039;
कांग्रेस की राजनीति: एक बड़ी चाल बन गई?
राहुल गांधी और कांग्रेस ने इस आंदोलन को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाकर तीन बड़े टारगेट हासिल किए हैं:

युवाओं से जुड़ाव: 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने युवाओं और छात्रों को अपनी तरफ करने की कोशिश की है.
विपक्षी एकजुटता: कांग्रेस ने INDIA गठबंधन को एक नया मुद्दा दिया है. अगर अन्य दल भी इस आंदोलन का समर्थन करते हैं, तो यह सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा बन सकता है.
सरकार पर दबाव: राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करके सरकार पर सीधा दबाव बनाया है.

तो क्या अब यह आंदोलन पूरी तरह कांग्रेसी हो गया है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आंदोलन पूरी तरह से नहीं, लेकिन काफी हद तक हो गया है. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक अभी भी खुद को &#039;अराजनीतिक&#039; बताते हैं. लेकिन कांग्रेस का समर्थन और राहुल गांधी का दखल इस आंदोलन को एक राजनीतिक रंग दे चुका है.
हालांकि, यह कहना भी गलत नहीं है कि CJP की जमीन पर कांग्रेस का किला खड़ा हो गया है. CJP अब कांग्रेस के बिना नहीं चल सकता है. कांग्रेस ने इस आंदोलन को अपना &#039;किला&#039; बना लिया है और अब CJP इस किले का हिस्सा बन गया है. अब आगे तीन बड़ी संभावनाएं हैं:

INDIA गठबंधन का और मजबूत होना: अगर अन्य दल (SP, TMC, DMK) भी इस आंदोलन का समर्थन करते हैं, तो यह सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा बन सकता है.
सरकार का और सख्त रुख: सरकार किसी भी कीमत पर इस्तीफा नहीं देगी. वह CJP और कांग्रेस को &#039;तोड़फोड़&#039; और &#039;साजिश&#039; करार दे सकती है.
आंदोलन का &#039;कांग्रेसीकरण&#039;: CJP का &#039;अराजनीतिक&#039; होने का नारा धीरे-धीरे खत्म हो सकता है. यह आंदोलन कांग्रेस के चुनावी एजेंडे का हिस्सा बन सकता है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Explained:, वांगचुक, और, CJP, की, जमीन, पर, कांग्रेसी, कब्जा, एक्सपर्ट्स, से, जानें, कैसे, राहुल, के, बाद, आंदोलन, का, हुआ, कांग्रेसीकरण</media:keywords>
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        <title>उद्धव ठाकरे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय पर फिलहाल रोक से इनकार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/उद्धव-ठाकरे-को-सुप्रीम-कोर्ट-से-बड़ा-झटका-6-सांसदों-के-शिंदे-गुट-में-विलय-पर-फिलहाल-रोक-से-इनकार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/उद्धव-ठाकरे-को-सुप्रीम-कोर्ट-से-बड़ा-झटका-6-सांसदों-के-शिंदे-गुट-में-विलय-पर-फिलहाल-रोक-से-इनकार</guid>
        <description><![CDATA[ शिवसेना यूबीटी के सांसदों के शिवसेना में विलय को मंजूरी देने वाले लोकसभा स्पीकर के आदेश पर फिलहाल रोक से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने स्पीकर ऑफिस और विलय करने वाले 6 सांसदों को नोटिस जारी किया है. अब इस मामले में 2 सप्ताह बाद सुनवाई होगी.
उद्धव गुट की ओर से पेश वकील देवदत्त कामत ने दलील दी कि ये सांसद एकतरफा विलय का फैसला नहीं ले सकते थे. हम अंतरिम आदेश की मांग कर रहे हैं. इस पर अदालत ने कहा कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं. मामले की 2 सप्ताह के बाद सुनवाई होगी.&amp;nbsp;
कामत ने कोर्ट से मांग करते हुए कहा कि अंतरिम आदेश के लिए अगले सप्ताह सुन लीजिए तो अदालत ने स्पष्ट किया कि दो सप्ताह बाद ही सुनवाई होगी. वहीं शिंदे के वकील नीरज कौल ने कहा कि हम एक-एक बात का जवाब देंगे.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;&#039;धर्मेंद्र प्रधान इतने अहम क्यों&#039;, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर अभिजीत दीपके ने PM मोदी से पूछा
स्पीकर ने सत्र से पहले दी थी विलय की मंजूरी
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद के मानसून सत्र से पहले शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों को एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी थी. इसके बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना में सिर्फ तीन सांसद ही रह गए हैं.
किन 6 सांसदों ने छोड़ा साथ?&amp;nbsp;-संजय देशमुख (यवतमाल)-संजय जाधव (परभणी)-संजय दीना पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट)-नागेश पाटिल (हिंगोली)-ओमप्रकाश राजेनिंबाल्कर (धाराशिव)-बाबूसाहेब वाकचौरे (शिरडी)
उद्धव के लोकसभा में अब सिर्फ तीन सांसद
इन छह सांसदों के अलग हो जाने के बाद उद्धव ठाकरे के लोकसभा में सिर्फ तीन सांसद ही रह गए हैं. इनमें अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजाभाऊ वाजे (नाशिक) शामिल हैं.
ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;&#039;आप हमारा समय बर्बाद कर रहे, वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं&#039;, संसद मार्च में लाठीचार्ज पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>उद्धव, ठाकरे, को, सुप्रीम, कोर्ट, से, बड़ा, झटका, सांसदों, के, शिंदे, गुट, में, विलय, पर, फिलहाल, रोक, से, इनकार</media:keywords>
    </item>
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        <title>&amp;apos;ढाई घंटे में शिकायत नहीं लिख पाए...दीपके को अरेस्ट नहीं किया&amp;apos;, BJP सांसद बांसुरी स्वराज का CJP पर पलटवार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ढाई-घंटे-में-शिकायत-नहीं-लिख-पाएदीपके-को-अरेस्ट-नहीं-किया-bjp-सांसद-बांसुरी-स्वराज-का-cjp-पर-पलटवार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ढाई-घंटे-में-शिकायत-नहीं-लिख-पाएदीपके-को-अरेस्ट-नहीं-किया-bjp-सांसद-बांसुरी-स्वराज-का-cjp-पर-पलटवार</guid>
        <description><![CDATA[ बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संवेदनशीलता के साथ बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार थी और प्रदर्शनकारियों की बात सुनना चाहती थी. बांसुरी स्वराज ने कहा कि जब प्रदर्शनकारी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने गए थे, तब वे अपनी मांगों की कोई लिखित सूची लेकर नहीं पहुंचे थे. उस समय नड्डा जी ने कहा कि अपनी मांग लिखित में दे दीजीए तो उन्हें अपनी मांग को लिख कर देने में ढाई घंटे लग गए. बांसुरी स्वराज ने कहा कि बैठक के दौरान सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा गया था कि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की पूरी कोशिश की जाएगी. साथ ही प्रदर्शनकारियों से आंदोलन रोकने की भी अपील की गई थी.
बांसुरी स्वराज के मुताबिक, उस समय प्रदर्शनकारियों ने आश्वासन दिया था कि वे ऐसा करेंगे, लेकिन बाद में वे अपने आश्वासन से पीछे हट गए. बांसुरी स्वराज ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कई गलत बातें और भ्रामक दावे फैलाए गए. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने ऐसे आरोप लगाए जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं था. बांसुरी स्वराज ने 12 साल की एक बच्ची के घायल होने के दावे को भी गलत बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरें और आरोप सही नहीं हैं और इनका इस्तेमाल एक गलत माहौल बनाने के लिए किया गया.

ये भी पढ़ें: CJP Protest News LIVE: &#039;जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, हम...&#039;, जंतर-मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी की हुंकार
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने मोदी सरकार का पक्ष रखा
दिल्ली में बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर मोदी सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवाओं को राष्ट्र निर्माता मानते हैं और छात्रों के हितों को हमेशा सबसे ऊपर रखते हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसी सोच के साथ NEET पेपर लीक मामले में तुरंत कार्रवाई की गई.
शिक्षा मंत्रालय का बांसुरी स्वराज ने किया बचाव
बांसुरी स्वराज ने बताया कि NEET परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी. इसके बाद 11 मई को परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई. उन्होंने कहा कि जैसे ही यह जानकारी मिली, उसी दिन शिक्षा मंत्रालय ने FIR दर्ज कराई और बिना किसी देरी के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच आगे बढ़ाई. उन्होंने बताया कि CBI ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. जांच के दौरान 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और सभी आरोपी अभी भी हिरासत में हैं. बांसुरी स्वराज ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले और छात्रों को न्याय मिल सके.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ढाई, घंटे, में, शिकायत, नहीं, लिख, पाए...दीपके, को, अरेस्ट, नहीं, किया, BJP, सांसद, बांसुरी, स्वराज, का, CJP, पर, पलटवार</media:keywords>
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        <title>सोनम वांगुचक से देर रात हुई मुलाकात, आज CJP नेताओं संग सरकार की बैठक, क्या बन जाएगी बात?</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. संसद मार्च के बाद भी विरोध थमा नहीं है. सोनम वांगचुक अस्पताल में अनशन पर हैं और इसी बीच मोदी सरकार बातचीत की पहल करती दिख रही है. बुधवार (22 जुलाई) को सीजेपी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का एक और दौर देखने को मिलेगा. &amp;nbsp;
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह आज सीजेपी प्रतिनिधियों से मिल सकते हैं. बता दें कि ये बैठक ऐसे समय में होने जा रही है, जब मंगलवार रात उन्होंने और जेपी नड्डा ने मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है. देर रात हुई बैठक में सबसे अहम मुद्दा था कि छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा कराई जाए.&amp;nbsp;

बताया जा रहा है कि सरकार ने इस मांग पर सहमति जताई है. इससे लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध खत्म हो सकता है. सोनम वांगचुक की भी यही मांग थी कि छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा हो. दिल्ली में हालिया प्रदर्शनों के बाद सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया. यह सब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ.&amp;nbsp;
बातचीत के दरवाजे खुले- सरकार&amp;nbsp;मोदी सरकार पहले भी कह चुकी है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, भले ही राजधानी में प्रदर्शन तेज हो गए हों, लेकिन सरकार आंदोलनकारी छात्रों से संवाद की कोशिश कर रही है. यह ताजा बातचीत सरकार की ओर से की जा रही कोशिशों की एक कड़ी है. सोमवार को जेपी नड्डा ने सीजेपी प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी. केंद्र ने कहा था कि बातचीत के दरवाजे खुले हैं.&amp;nbsp;
संसद में चर्चा की मांगइस बीच मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी के आवास की ओर मार्च करने को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था. संसद के मानसून सत्र में भी ये मुद्दा लगातार गूंज रहा है और विपक्ष छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा की मांग कर रहा है.
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Pakistan On CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर क्या बोला पाकिस्तानी मीडिया, PAK एक्सपर्ट ने लगाई फटकार, जानें क्या कहा? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>CJP Protest: ‘भेड़िये से भेड़ की मुलाकात’, जेपी नड्डा के हॉस्पिटल पहुंचने पर CJP फाउंडर अभिजीत दीपके का विवादित बयान</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित संसद मार्च के एक दिन बाद मंगलवार को सैकड़ों छात्र और समर्थक फिर जंतर-मंतर पहुंचे. उनका कहना है कि पुलिस के बल प्रयोग की कार्रवाई ने आंदोलन को कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया है तथा वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे. इस बीच दिल्ली के केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा कल हुए विरोध प्रदर्शन में घायल हुए लोगों से मिलने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज पहुंचे. इस पर अभिजीत दीपके ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि भेड़िये से भेड़ की मुलाकात.
अभिजीत दीपके की यह टिप्पणी अब चर्चा का विषय बन गई है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब छात्र और समर्थक लगातार आंदोलन कर रहे हैं और सरकार पर उनकी मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं. दूसरी ओर, सरकार के मंत्री घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर रहे हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं.


Wolf meeting sheep. https://t.co/eHSSD0QTJh
&amp;mdash; Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 21, 2026



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पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा प्रदर्शन
बता दें कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन अब कथित पेपर लीक के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की व्यापक मुहिम बन गया है. इस दौरान जंतर-मंतर पर &amp;lsquo;&amp;lsquo;धर्मेंद्र प्रधान, इस्तीफा दो&amp;rsquo;&amp;rsquo; और &amp;lsquo;&amp;lsquo;एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे&amp;rsquo;&amp;rsquo; के नारे लगातार गूंजते रहे. स्नातकोत्तर छात्रा रितिका शर्मा ने कहा कि यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर है. उन्होंने कहा, &amp;lsquo;&amp;lsquo;हममें से कई लोगों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाए हैं. हम यहां राजनीति करने नहीं, बल्कि इसलिए आए हैं क्योंकि छात्रों को पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिए.&amp;rsquo;&amp;rsquo;&amp;nbsp;
ये भी पढें:&amp;nbsp; राहुल-प्रियंका को पुलिस ने किया डिटेन, अखिलेश यादव को PM आवास से हटाया गया ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>CJP, Protest:, ‘भेड़िये, से, भेड़, की, मुलाकात’, जेपी, नड्डा, के, हॉस्पिटल, पहुंचने, पर, CJP, फाउंडर, अभिजीत, दीपके, का, विवादित, बयान</media:keywords>
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        <title>नाक से बहा खून, छाती पर चोट..., प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के घायल होने की आई तस्वीर</title>
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        <description><![CDATA[ पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सपा चीफ अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है. इस दौरान राहुल गांधी के नाक और छाती पर चोट लगने की खबर सामने आ रही है. कांग्रेस ने राहुल गांधी की जो तस्वीर शेयर की है उसमें उनके नाक के पास से खून बहता देखा जा सकता है.
पीएम आवास के बाहर से हटाए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, &#039;प्रधानमंत्री मोदी, हर जोर आजमा लो, सारी ताकत लगा लो-छात्रों के इंसाफ की ये लड़ाई अब रोके न रुकेगी.&#039; ये नेता जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में लोक कल्याण मार्ग की ओर मार्च कर रहे थे. राहुल गांधी काफी देर तक सड़क पर ही डटे रहे और हटने से इनकार कर दिया. उन्हें कई पुलिसकर्मियों ने घेर लिया और फिर विपक्ष के दूसरे नेताओं के साथ पुलिस की गाड़ी में ले जाया गया.&#039;

मोदी जी, हर ज़ोर आज़मा लो, सारी ताकत लगा लो - छात्रों के इंसाफ की ये लड़ाई अब रोके न रुकेगी. pic.twitter.com/suXh8LkWzh
&amp;mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 21, 2026



यह विरोध प्रदर्शन संसद तक छात्रों के मार्च में पुलिस के दखल के एक दिन बाद हुआ. इससे पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने खड़गे के घर से प्रधानमंत्री के आवास तक पार्टी कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के अभियान को तेज किया. हिरासत में लिए जाने से पहले राहुल ने लोगों से धरने में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है और सरकार पर छात्रों की चिंताओं का जवाब न देने का आरोप लगाया.
इससे पहले केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी से मिले. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बातचीत बेनतीजा रही क्योंकि पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा पेपर लीक पर संसद में चर्चा की मांग पर अड़ी रही.कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि पार्टी अपनी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रखेगी, हालांकि जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार थी और आरोप लगाया कि बाद में कांग्रेस ने मंत्री के इस्तीफे को शर्त बना दिया.
कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार के मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के लिए माफी मांगें या इस्तीफा दें।इस विरोध प्रदर्शन को एनसीपी (SP) सांसद सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं का समर्थन मिला है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>नाक, से, बहा, खून, छाती, पर, चोट..., प्रदर्शन, के, दौरान, राहुल, गांधी, के, घायल, होने, की, आई, तस्वीर</media:keywords>
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        <title>CJP Protest: &amp;apos;जरूरत पड़ी तो कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सड़क पर उतरूंगी&amp;apos;, ममता बनर्जी का बड़ा बयान</title>
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        <description><![CDATA[ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारी भारी बारिश और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद पूरी रात दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे रहे. प्रदर्शनकारी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. &amp;nbsp;एक दिन पहले ही प्रदर्शनकारियों ने संसद चलो मार्च निकाला था. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी और पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए कार्रवाई की थी. इसके बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और जंतर-मंतर पर अपना आंदोलन जारी रखा.
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह खुद भी कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगी. ममता बनर्जी के इस बयान को आंदोलन के प्रति राजनीतिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है. उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह कब और किस रूप में प्रदर्शन में शामिल हो सकती हैं.


If needed, I will join protest staged by Cockroach Janata Party: Mamata Banerjee in Kolkata pic.twitter.com/zpJp6HOo6W
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) July 21, 2026



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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत तथा ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे.
जंतर-मंतर पर हजारों लोग जमा हुए
सोमवार को संसद तक प्रस्तावित मार्च के लिए जंतर-मंतर पर हजारों लोग जमा हुए. प्रदर्शनकारियों के संसद की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग किया. हिंसा के लिए दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को दोषी ठहराया. प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून को आंदोलन शुरू हुआ था.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मिली छुट्टी, गुरुग्राम के वेदांता में किए गए शिफ्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-को-सफदरजंग-अस्पताल-से-मिली-छुट्टी-गुरुग्राम-के-वेदांता-में-किए-गए-शिफ्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-को-सफदरजंग-अस्पताल-से-मिली-छुट्टी-गुरुग्राम-के-वेदांता-में-किए-गए-शिफ्ट</guid>
        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक के विरोध में आमरण अनशन कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को मंगलवार (21 जुलाई, 2026) को दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और इसके बाद उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है. यह घटनाक्रम दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद सामने आया है.
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट के मंगलवार (21 जुलाई, 2026) के आदेश के तहत सोनम वांगचुक को आगे के इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों की टीम को सौंपा गया है. वहीं, उनके इलाज में किसी तरह की रुकावट न आए, इसके लिए वांगचुक के सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी दस्तावेज भी मेदांता की मेडिकल टीम को सौंप दिया गया है.
शाम करीब साढ़े छह बजे वांगचुक को किया गया डिस्चार्ज
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को शाम 6:40 बजे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को VMMC और सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया. डिस्चार्ज के समय उनके वाइटल पैरामीटर स्थिर पाए गए. हालांकि, पैनसाइटोपेनिया (Pancytopenia) की स्थिति अभी भी बनी हुई है. वहीं, सीरम पोटैशियम स्तर 3.4 mEq/L दर्ज किया गया.&amp;nbsp;

गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया आदेश
जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को तीन दिन पहले शनिवार (18 जुलाई, 2026) को दिल्ली पुलिस ने तबीयत बिगड़ने का हवाला देते हुए तत्काल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में भर्ती कराया गया. वहीं, उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट से वांगचुक को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की.
दिल्ली हाई कोर्ट की एकल बेंच ने रविवार (19 जुलाई, 2026) को गीतांजलि आंग्मो की याचिका के विपरीत आदेश दिया. जिसके बाद, उन्होंने आदेश को चुनौती देते हुए फिर से याचिका दाखिल की. इस बार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश यानी दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज कर मेदांता अस्पताल में भर्ती कराने के आदेश दिया.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &#039;वे कायर और....&#039;, जानें PM आवास के बाहर से पुलिस हिरासत में लेने पर क्या बोलीं प्रियंका गांधी ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कांग्रेस सांसदों को भी नहीं पता था राहुल गांधी के धरने का &amp;apos;सीक्रेट प्लान&amp;apos;! अब हुआ बड़ा खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कांग्रेस-सांसदों-को-भी-नहीं-पता-था-राहुल-गांधी-के-धरने-का-सीक्रेट-प्लान-अब-हुआ-बड़ा-खुलासा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कांग्रेस-सांसदों-को-भी-नहीं-पता-था-राहुल-गांधी-के-धरने-का-सीक्रेट-प्लान-अब-हुआ-बड़ा-खुलासा</guid>
        <description><![CDATA[ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के एक गेट के निकट धरना देकर न केवल सरकार और पुलिस, बल्कि पार्टी के कई सांसदों को भी चौंका दिया. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेताओं के लिए इतने उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में प्रदर्शन करने के लिए गोपनीयता बनाए रखना जरूरी था, क्योंकि इसकी जानकारी पहले मिल जाती तो इलाके की घेराबंदी की जा सकती थी.
कांग्रेस सांसदों को भी नहीं दी गई थी जानकारी
सांसदों से कहा गया था कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर बधाई देने के लिए 10, राजाजी मार्ग स्थित उनके आवास पर पहुंचना है. इसलिए कई सांसदों को आगे होने वाले घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी और वे खरगे के आवास पर पहुंच गए. इसके बाद उनसे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का अनुसरण करने को कहा गया, क्योंकि शीर्ष नेता अचानक खरगे के आवास से करीब 500 मीटर दूर 7, लोक कल्याण मार्ग के गेट की ओर बढ़ने लगे.
इस घटनाक्रम की जानकारी फैलते ही पार्टी के अन्य नेता भी मौके पर पहुंच गए. कुछ शीर्ष नेताओं को ही इस कदम की जानकारी थी और दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित होने के बाद वे खरगे के आवास पर पहुंच गए थे. हालांकि, ज्यादातर सांसदों को योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.&amp;nbsp;
छत्रसाल स्टेडियम से बाहर आए राहुल गांधी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरना दे रहे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कई सांसदों को पुलिस ने कर लिया था. पुलिस उन्हें और बाकी कई नेताओं को छत्रसाल स्टेडियम लेकर पहुंची थी. अब राहुल गांधी समेत तमान नेताओं तो छोड़ दिया गया है.
प्रियंका गांधी ने कहा, &#039;कल छात्रों के साथ जैसी बर्बरता की गई, वो बहुत गलत थी. ये हमारे बच्चे हैं, देश का भविष्य हैं. हम संसद में फिर से छात्रों के मुद्दे को जरूर उठाएंगे. जब हम संसद में बच्चों के भविष्य से जुड़े जरूरी मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हैं, तो सरकार &#039;वंदे मातरम&#039; के सम्मान पर चर्चा करने लगती है.&#039;वंदे मातरम&#039; का मतलब हमारी मातृभूमि की इज्जत है, इसलिए हमें अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना है, उनकी रक्षा करनी है.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>CJP प्रदर्शन में बवाल: 118 पुलिसकर्मी घायल, हिरासत में 78 प्रदर्शनकारी, कई गाड़ियों को नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई झड़प में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी एवं प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इलाके में CJP के प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को कई बार समझाया गया और हटने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी और लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन किया. पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन कारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिसकर्मियों पर पत्थर और दूसरी चीजें फेंकीं, सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ की और हिंसा की, इससे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ा.
झड़प में 118 पुलिसकर्मी घायल
झड़प में पुलिस के अनुसार 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी, एडिशनल सीपी, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं. कई महिला पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं. वहीं, करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी जानकारी है. घायल पुलिसकर्मियों का मेडिकल कराया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान 15 से 20 सरकारी वाहनों और अन्य सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया.

70 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया
अब तक करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य संबंधित कानूनों के तहत दंगा, सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई कर रही है. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और हिंसा या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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प्रदर्शन के दौरान हिंसा की जांच में जुटी दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के &#039;चलो संसद&#039; प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच शुरू कर दी है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि झड़पों में शामिल लोगों की पहचान करने के अलावा, जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल करेंगे कि क्या इस अशांति के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र था. हिंसा के संबंध में 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अलग-अलग जगहों से मिली शिकायतों के आधार पर कई एफआईआर दर्ज की जा रही हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Telangana Politics: तेलंगाना के निजामाबाद में कांग्रेस&amp;BJP आमने&amp;सामने, विधायक पैदी राकेश रेड्डी के घर घेराव की तैयारी के बाद बढ़ा तनाव</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निज़ामाबाद ज़िले के आर्मूर विधानसभा क्षेत्र के अंकापुर गांव में BJP MLA पैदी राकेश रेड्डी के घर का घेराव करने की तैयारी की और जवाब में MLA के समर्थक इकट्ठा हो गए और चेतावनी दी कि हम हमले का जवाब देंगे, जिससे एक बार फिर गांव में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है. कांग्रेस के चुनावी वादों को पूरा न करने के आरोपों के बीच, दोनों तरफ से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया.
कांग्रेस नेताओं ने आर्मूर विधानसभा क्षेत्र में MLA के घर की घेराबंदी की मांग की, जिसके बाद अंकापुर में तनाव फैल गया. उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान किए गए विकास के वादे पूरे नहीं किए गए. MLA राकेश रेड्डी के सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट में यह कमेंट किया गया है कि वह लोकल पॉलिटिकल चर्चाओं के दौरान इस्सापल्ली इलाके में BJP-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पिछली झड़प का जवाब देंगे, जो चर्चा का विषय बन गया है, जिसे कांग्रेस के नेता खुली धमकी के तौर पर दिखा रहे हैं.

ये भी पढ़ें: वांगचुक की पत्नी से हुई बर्बरता? दिल्ली पुलिस ने किया फैक्ट चेक, फिर CJP नेता ने बताई हकीकत!
BJP के कार्यकर्ता गुस्सा
कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में अंकापुर में MLA के घर के पास जमा हुए. BJP के कार्यकर्ता भी बड़े-बड़े लाठियां लेकर तैयार खड़े थे, लोकल मीडिया और सोशल मीडिया पर ये सीन वायरल हो गए. दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई, नारे और बहस होने से गांव में हाई-टेंशन का माहौल बन गया, और पुलिस ने और टेंशन रोकने के लिए कुछ इलाकों में सिक्योरिटी बढ़ा दी और बैरिकेड लगा दिए.&amp;nbsp;
कांग्रेस लीडर विनय रेड्डी का बयान
लोकल न्यूज आउटलेट्स ने बताया कि कांग्रेस लीडर विनय रेड्डी को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है, जबकि रिपोर्ट्स सामने आईं कि MLA राकेश रेड्डी अंकापुर में थे और उन्होंने चेतावनी दी कि &amp;ldquo;हम हिंदुओं पर हमले बर्दाश्त नहीं करेंगे.&amp;rdquo; घटनाओं को और बढ़ने से रोकने के लिए, ज़िला पुलिस ऑफिसर कथित तौर पर और फोर्स तैनात कर रहे हैं, दोनों पार्टियों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं और एक्टिविस्ट्स को कानून अपने हाथ में न लेने की चेतावनी दे रहे हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज पर भड़कीं ममता बनर्जी, कहा&amp; &amp;apos;असहमति जताना अपराध...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को NEET पेपर लीक के मामले को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा की. बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया.
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद मार्ग के पास कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के हजारों समर्थकों ने &#039;चलो संसद&#039; मार्च के दौरान कथित तौर पर बैरिकेडिंग तोड़ने के प्रयास किए, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाए.
ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;CJP के प्रदर्शन पर राहुल गांधी बोले, &#039;सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती, जवाबदेही जरूर तय की जाएगी&#039;
उन्होंने कहा, &#039;मैं आज दिल्ली में हमारे युवाओं और छात्रों पर की गई पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा करती हूं.&#039; ममता बनर्जी ने सवाल किया, &#039;यह कैसी सरकार है जो अपने ही छात्रों से डरती है? यह कैसा लोकतंत्र है जो बातचीत के बजाय सवालों का जवाब लाठी और आंसू गैस से देता है?&#039;

I strongly condemn the police brutality unleashed on our youth and students in Delhi today.What kind of government fears its own students? What kind of democracy responds to questions with batons and tear gas instead of dialogue?The Nation belongs to its students, its&amp;hellip;
&amp;mdash; Mamata Banerjee (@MamataOfficial) July 20, 2026



असहमति अपराध नहीं: ममता बनर्जी
बनर्जी ने कहा कि असहमति जताना लोकतांत्रिक अधिकार है और देश इसके ममछात्रों, किसानों, महिलाओं, श्रमिकों और हर नागरिक का है.&amp;nbsp; उन्होंने कहा, &#039;असहमति अपराध नहीं है. बर्बरता शासन नहीं हो सकती.&#039;
उन्होंने कहा कि मैं अपने युवा भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी हूं. जवाबदेही पर कोई समझौता नहीं हो सकता. पूर्व सीएम ने कहा कि उनकी हिम्मत, मजबूती और अटूट जज्बे के लिए मैं उन सभी को सलाम करता हूं. उन्होंने देश को दिखाया है कि निडरता क्या होती है.
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21 जुलाई को कोलकाता में रैली
ममता बनर्जी ने साथ ही आरोप लगाया कि 21 जुलाई को कोलकाता में होने वाली सालाना &#039;शहीद दिवस&#039; रैली से पहले उनकी पार्टी के धड़े को बैठकें और जुलूस निकालने से रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद समर्थक इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता आ रहे हैं.
ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से मिली रैली की मंजूरी
पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्य कोलकाता के बिड़ला तारामंडल इलाके में तैयारियों का जायजा लेने के बाद यह दावा किया. कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उनके गुट को वहां रैली करने की अनुमति मिली है.
बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, &#039;हमारी सभाओं और जुलूसों की इजाजत नहीं दी जा रही है. दूर-दराज के जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं को ठहरने की जगह तक नहीं मिल रही है. फिर भी, वे स्नेह के कारण आ रहे हैं.&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कॉकरोच, जनता, पार्टी, के, संसद, मार्च, के, दौरान, लाठीचार्ज, पर, भड़कीं, ममता, बनर्जी, कहा-, असहमति, जताना, अपराध...</media:keywords>
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        <title>यूपी के लिए मौसम विभाग का रेड अलर्ट, दिल्ली&amp;बिहार से लेकर हरियाणा तक क्या है चेतावनी, जानें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/यूपी-के-लिए-मौसम-विभाग-का-रेड-अलर्ट-दिल्ली-बिहार-से-लेकर-हरियाणा-तक-क्या-है-चेतावनी-जानें</link>
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        <description><![CDATA[ भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक मंगलवार (21 जुलाई) को कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ ही कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और नॉर्थ ईस्ट के कई इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है. कई जगहों पर भारी बारिश की आशंका जताई गई है. लोगों को जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थितियों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, यूपी और राजस्थान के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. उत्तराखंड और हिमाचल में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बना रहेगा. दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की जा सकती है.

IMD के मुताबिक यूपी के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में भी कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश की संभावना है. यूपी के 12 जिलों बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, कासगंज, एटा, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आने वाले मजबूत मानसूनी प्रवाह के कारण यूपी में अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है.&amp;nbsp;
यूपी को लेकर अलर्टमौसम विभाग ने बताया कि 21 जुलाई से 25 जुलाई तक दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और आंधी-तूफान आने का अनुमान है. मंगलवार को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी मंडलों में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है.
MP छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावनामध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है. गोवा और घाट क्षेत्रों में भी तेज बारिश का दौर बना रह सकता है. गुजरात के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी, जबकि मराठवाड़ा में कई जगहों पर भारी बारिश का अनुमान है. दक्षिण भारत के केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और लक्षद्वीप के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. केरल और तटीय कर्नाटक में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है.
जम्मू-कश्मीर में 16 लोगों की मौतजम्मू-कश्मीर में बारिश और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि 7 लोग अब भी लापता हैं. पुंछ और राजौरी में बाढ़ और खराब मौसम के कारण राहत और बचाव अभियान प्रभावित हुआ है. मौसम विभाग ने 23 जुलाई तक जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें&amp;nbsp;
CJP प्रदर्शन में बवाल: 118 पुलिसकर्मी घायल, हिरासत में 78 प्रदर्शनकारी, कई गाड़ियों को नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>सुरक्षाकर्मियों पर हमला, तोड़फोड़... प्रदर्शनकारियों के खिलाफ होगा सख्त एक्शन, CJP प्रोटेस्ट में दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR</title>
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        <description><![CDATA[ सुरक्षाकर्मियों पर हमला, तोड़फोड़... प्रदर्शनकारियों के खिलाफ होगा सख्त एक्शन, CJP प्रोटेस्ट में दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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    <item>
        <title>&amp;apos;सिंहासन खाली करो, जनता...&amp;apos;, संसद मार्च में छात्रों पर लाठीचार्ज तो भड़के कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, PM मोदी पर भी साधा निशाना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिंहासन-खाली-करो-जनता-संसद-मार्च-में-छात्रों-पर-लाठीचार्ज-तो-भड़के-कांग्रेस-अध्यक्ष-खड़गे-pm-मोदी-पर-भी-साधा-निशाना</link>
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        <description><![CDATA[ जंतर मंतर से संसद तक मार्च संसद तक पहुंच गया है. इस दौरान दिल्ली पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए 20 से 25 मिनट तक आंसू गैस के गोले दागे गए हैं. इधर, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्य गेट बंद कर दिया गया है. सांसदों के आने जाने के लिए एक छोटा गेट खुला रखा गया है. यह प्रदर्शन ऐसे वक्त हो रहा है, जब देश का मॉनसून सत्र चल रहा है. अब इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र को निशाने पर लेते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने निशाना साधा है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
छात्रों पर हुए लाठी चार्ज को लेकर कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि ये सरकार नौजवानों और छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही है. अगर आपको एग्जामिनेशन कंडक्ट नहीं आता है, तो सिंहासन खाली करो. जनता आएगी. ये लोग सत्ता में रहने लायक़ नहीं है. भगवान् के नाम पर चंदा चोरी हुआ, रामभक्त के नाम पर जनता से पैसे चोरी कर रहें हैं. &amp;nbsp;मोदी जी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए है, क्योंकि उन्होंने Trust बनाया.
इसके अलावा खड़गे ने कहा, &#039;अपनी कमजोरी छिपाने के लिए पीएम मोदी ऐसे कहते हैं कि 56 साल के युवाओं की बात नहीं कर रहा हूं. ऐसी बातें प्रधानमंत्री नहीं करता है. मैं इस बयान की निंदा करता हूं. ये हटेंगे तो ही सख्ती आएगी.
मल्लिकार्जुन ने सदन में पीएम मोदी के भाषण पर कहा, &#039;PM मोदी का काम सिर्फ दूसरों को ताना मारना और मजाक उड़ाना है. पहले लोगों के सामने अपनी क्रेडिबिलिटी साबित करें. आपका वह &#039;56 इंच का सीना&#039; कहां गया? आप आज दूसरों की बुराई करते हैं, लेकिन मैं पूछता हूं: आपने देश के लिए असल में क्या किया है?&#039;
खड़गे ने कहा, &#039;आपने अपने फॉलोअर्स से ट्रस्ट बनाने को कहा ताकि वे चोरी कर सकें, और अब वे खुलेआम चोरी कर रहे हैं. आपने कानून बनाए और राम मंदिर ट्रस्ट के लिए लोगों को नॉमिनेट किया, और आपके अपने लोग इसमें शामिल हैं. फिर NEET का मामला है. लाखों स्टूडेंट्स परेशान हैं, अपने घर छोड़कर पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं. उनकी जिंदगी बर्बाद करने के लिए कौन जिम्मेदार है? मोदी सरकार और खुद PM मोदी. वह ये सब सिर्फ अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए करते हैं. किसी भी प्राइम मिनिस्टर को ऐसा नहीं बोलना चाहिए. हर प्राइम मिनिस्टर प्रॉब्लम सॉल्व करने की बात करता है, न कि ऐसी बातें करता है जिनका बाद में मजाक उड़ाया जाए. मैं इस बयान की निंदा करता हूं, और PM मोदी को भविष्य में ऐसी बातें करने से बचना चाहिए. जब तक वे अगर वे रहेंगे, तो देश में खुशहाली नहीं आएगी. खुशहाली तभी आएगी जब वे चले जाएंगे.&#039;
&amp;nbsp;क्या धर्मेंद्र प्रधान देंगे इस्तीफा? CJP के प्रदर्शन के बीच गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे शिक्षा मंत्री
अभिजीत दीपके को पुलिस ने किया अरेस्ट, पुलिस ने किया दावे से इनकार
इधर, सीजेपी के सदस्य सौरभ दास ने कहा है कि अभिजीत दीपके को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है. वहीं, पुलिस का कहना है कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है. इसके अलावा सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश की है. सौरभ दास ने जेपी नड्डा से मुलाकात की है. सौरभ दास ने कहा है कि 2 घंटे इंतजार के बाद सिर्फ 10 मिनट की मुलाकात हुई है.
संसद भवन की बढ़ाई सुरक्षा, डिंपल यादव अरेस्ट
इसके अलावा खबर है कि प्रदर्शन को देखते हुए संसद भवन की सुरक्षा बढ़ाई गई है. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे हैं. .बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया. पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में लिया है. कुछ प्रदर्शनकारी दिल्ली पुलिस की गाड़ी के ऊपर चढ़ गए.
इधर समाजवादी पार्टी ने दावा किया है कि सांसद और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव को हिरासत में लिया है. इस मामले में एक पोस्ट भी सपा ने जारी किया है. सपा ने इस कार्रवाई को निंदनीय करार दिया है.&amp;nbsp;
Parliament Monsoon Season Live: CJP के प्रदर्शन को लेकर संसद में भारी बवाल, मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र से किया सवाल- &#039;क्यों हुआ लाठीचार्ज&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP के सौरभ दास से मिलने के बाद मोदी सरकार का पहला रिएक्शन, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हुई चर्चा?</title>
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        <description><![CDATA[ परीक्षा पत्र लीक के विरोध में &amp;lsquo;कॉकरोच जनता पार्टी&amp;rsquo; (CJP) के संसद मार्च के दौरान सोमवार को पुलिस ने हजारों की संख्या में जुटे युवाओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. विरोध प्रदर्शन तेज होने के कारण सेंट्रल दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात ठप हो गया. इस सीजेपी प्रवक्ता से सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की. सीजेपी प्रतिनिधि से मुलाकात के बाद सरकार का पहला बयान सामने आया है.
CJP के सौरभ दास से मिलने के बाद मोदी सरकार का रिएक्शन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, &#039;आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 बजे से हमारी बातचीत चल रही है. बैठक अच्छे माहौल में हुई. उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ शुरुआती बातचीत विस्तार से हुई और शाम करीब 4 बजे उन्होंने मुझे एक लिखित ज्ञापन सौंपा. मैंने सभी प्रदर्शनकारियों से अपना धरना खत्म करने और हालात सामान्य करने में प्रशासन की मदद करने का आग्रह किया है.&#039;

आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया और सुबह 11:50 AM से ही हमारी बातचीत जारी है।सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई। उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई।मैंने&amp;hellip; pic.twitter.com/HLCl20RBSp
&amp;mdash; Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) July 20, 2026



धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी CJP
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने हमें भरोसा दिलाया है कि वे इस मामले पर सही स्तर पर बातचीत करेंगे. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, मैं और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की है. हमने उनको अपनी मांगों के बारें बता दिया है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा या उन्हें पद से हटाना शामिल है.&#039; उन्होंने कहा कि हम आगे की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं.
1 करोड़ के मुआवजे की मांग
स बीच, बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं. आशुतोष रांका ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, &#039;जेपी नड्डा ने हमारी इन मांगों पर पार्टी नेतृत्व से चर्चा करने के लिए कुछ समय मांगा है. हमारी मागों में सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और आत्महत्या करने वाले सभी नीट उम्मीदवारों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा शामिल है.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, &#039;हमारी मांगें स्पष्ट हैं. धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए. जिन बच्चों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए. इसके अलावा, सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए.&#039; दिल्ली में सोमवार को तनाव बना रहा क्योंकि सीजेपी और उसके समर्थकों ने संसद चलो विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
दिल्ली में CJP का प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सरकार से जवाबदेही की मांग की. जब प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें रोकने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों से उनका सामना हुआ. पुलिस बल वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात था. यह विरोध प्रदर्शन नीट-यूजी पेपर लीक मामले और परीक्षा से जुड़ी अन्य अनियमितताओं (जिनमें 12वीं सीबीएसई बोर्ड परीक्षा भी शामिल है) को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए किया गया. इन घटनाओं के बाद देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>CJP, के, सौरभ, दास, से, मिलने, के, बाद, मोदी, सरकार, का, पहला, रिएक्शन, धर्मेंद्र, प्रधान, के, इस्तीफे, पर, हुई, चर्चा</media:keywords>
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        <title>राम जन्मभूमि में कथित चंदा चोरी का मामला: SC ने यूपी सरकार से नए सिरे से SIT के गठन को कहा, 27 जुलाई को आदेश जारी करेगा कोर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राम-जन्मभूमि-में-कथित-चंदा-चोरी-का-मामला-sc-ने-यूपी-सरकार-से-नए-सिरे-से-sit-के-गठन-को-कहा-27-जुलाई-को-आदेश-जारी-करेगा-कोर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से अयोध्या के राम जन्मभूमि चंदा चोरी मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एसआईटी बनाने के लिए कहा है. कोर्ट ने ऐसा तब कहा जब उसे जानकारी दी गई कि मामले में शुरू में गठित की गई एसआईटी अपना काम पूरा कर चुकी है और अब मामले की जांच पुलिस कर रही है.
इस मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को नोटिस जारी किया था और उत्तर प्रदेश सरकार से जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. सोमवार, 20 जुलाई को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को दी जा चुकी है. इस पर जजों ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट को पढ़ने के लिए कुछ समय चाहिए. वह कुछ दिन बाद सुनवाई करेंगे.

ये भी पढ़ें: CJP का अनशन और मार्च: आमने-सामने पुलिस-प्रदर्शनकारी, केजरीवाल से प्रियंका तक&amp;hellip; सरकार पर &amp;lsquo;हल्लाबोल&amp;rsquo;
पुलिस कर रही है जांच
चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने इसके बाद सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि मामले की जांच कौन कर रहा है? सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि अब यह जांच पुलिस कर रही है. शुरू में जिस एसआईटी का गठन किया गया था, उसको आरोपों की शुरुआती जांच का जिम्मा सौंपा गया था. उसकी तरफ से आरोपों की पुष्टि के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और आगे की जांच कर रही है.
दोबारा बने एसआईटी
चीफ जस्टिस ने कहा कि पुरानी एसआईटी में कुछ अच्छे अधिकारी थे. उन्हें विषय की पूरी जानकारी भी हो चुकी है. बेहतर होगा कि एक नई एसआईटी बनाई जाए. उसमें पहले जांच कर चुके अधिकारियों के अलावा और भी वरिष्ठ अधिकारियों को रखा जाए. इस पर मेहता ने कहा कि इस आदेश का पालन किया जाएगा.
27 जुलाई को आदेश
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी बात रखने की कोशिश की. वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा कि मंदिर निर्माण के समय बहुत सारे लोगों ने पैसे और सोना-चांदी का योगदान दिया था. इसका ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए. एक और वकील ने कहा कि अभी तक एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक नहीं की गई है. कोर्ट इसका आदेश दे. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, &quot;हम मामले पर विचार कर सोमवार, 27 जुलाई को ज़रूरी आदेश जारी करेंगे.&quot;
राजनीति न करें-सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान जजों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान ले लिया है. यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति अब इस पर याचिका दाखिल करता रहे. इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. कोर्ट राजनीति का मंच नहीं है. यह एक अपराध का मामला है. इसे उसी तरह से देखा जाएगा.
ये भी पढ़ें: &#039;क्या यह कोई युद्ध का इलाका है?&#039;, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे तो CJP ने उठाए सवाल ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हिंसक हुआ CJP का प्रदर्शन, abp न्यूज टीम पर अटैक, पुलिस की गाड़ियों को भी बनाया निशाना</title>
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        <description><![CDATA[ जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने एबीपी न्यूज की टीम पर हमला किया गया.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वांगचुक की पत्नी से हुई बर्बरता? दिल्ली पुलिस ने किया फैक्ट चेक, फिर CJP नेता ने बताई हकीकत!</title>
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        <description><![CDATA[ CJP Parliament March: सीजेपी का प्रदर्शन अब बवाल में बदल गया है. दिल्ली पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कर रही है. सीजेपी प्रवक्ता ने सोनम वांगचुक की पत्नी के साथ मारपीट का आरोप लगाया है. जिसपर दिल्ली पुलिस ने फैक्ट चेक किया है, जिसे उन्होंने अगले ही पोस्ट में इसे स्पष्ट करते हुए लिखा है. जिसमें गीतांजलि वांग्मो के साथ हुई अभद्रता को स्पष्ट किया है.&amp;nbsp;
क्या अलर्ट जारी किया था, सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने?
सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने करीबन दोपहर तीन बजे बताया था कि दिल्ली पुलिस ने गीतांजलि जी के बाल खींचे और उनके साथ मारपीट की. एक 12 साल की बच्ची का सिर फूट गया है. 40 से 50 लोगों के सिर फूटे हैं. उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए पूछा कि यह सब क्या हो रहा है?&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस ने किया फैक्ट चेक
इस पर दिल्ली पुलिस ने फैक्ट चेक करते हुए प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही जानकारी गलत है. गीतांजलि नाम की 12 साल की लड़की के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है. इन पोस्ट्स में दावा किया गया है कि लड़की से साथ मारपीट की गई. उसके बाल खीचें गए. उसके सिर में चोट आई. साथ ही लगभग 40 से 50 अन्य लोगों के सिर भी फूट गए. यह जानकारी गलत है. कृपया गलत या गुमराह करने वाली जानकारी न फैलाएं और न ही उसे बढ़ावा दें.

TO BE CLEAR: SONAM WANGCHUK&amp;rsquo;S PARTNER @GitanjaliAngmo&amp;rsquo;s HAIR WAS PULLED. SHE WAS ASSAULTED BY THE DELHI POLICE!BRUTAL CRACKDOWN ONGOING AT JANTAR MANTAR! https://t.co/soRgky8914
&amp;mdash; Saurav Das (@SauravDassss) July 20, 2026



&#039;सिंहासन खाली करो, जनता...&#039;, संसद मार्च में छात्रों पर लाठीचार्ज तो भड़के कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे, PM मोदी पर भी साधा निशाना
सौरभ दास ने किया क्लियर, बताई सही जानकारी
इस पर सौरभ दास ने स्पष्ट किया है, साफ तौर पर बता दें, सोनम वांगचुक की पार्टनर गीतांजलि वांग्मो के बाल खींचे गए. दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट की. जंतर-मंतर पर बर्बर कार्रवाई चल रही है.
क्या धर्मेंद्र प्रधान देंगे इस्तीफा? CJP के प्रदर्शन के बीच गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे शिक्षा मंत्री ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 01:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वांगचुक, की, पत्नी, से, हुई, बर्बरता, दिल्ली, पुलिस, ने, किया, फैक्ट, चेक, फिर, CJP, नेता, ने, बताई, हकीकत</media:keywords>
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        <title>CJP प्रोटेस्ट और इस्तीफे की मांग के बीच NEET के सेकंड टॉपर से मिले धर्मेंद्र प्रधान, बोले &amp; &amp;apos;मुझे भरोसा है...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तरफ से लगातार इस्तीफे की मांग की बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार (19 जुलाई, 2026) को नीट यूजी 2026 के री-एग्जाम के ऑल इंडिया रैंक-2 (AIR-2) हासिल करने वाले छात्र पांशुल बंसल से मुलाकात की और उन्हें परीक्षा में सफलता के लिए बधाई भी दी.
धर्मेंद्र प्रधान की तरफ से यह फोटो उस समय एक्स प्लेटफॉर्म पर साझा की गई, जब एक दिन पहले शनिवार (18 जुलाई, 2026) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनस्थल से हटाकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया. वहीं, दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के सोमवार (20 जुलाई) को प्रस्तावित चलो संसद मार्च को रोकने के लिए BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दिया है.
नीट छात्र से मुलाकात पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार (19 जुलाई, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो शेयर कर बताया कि उन्होंने हरियाणा के पांशुल बंसल से मुलाकात कर उन्हें उनकी उपलब्धि पर बधाई दी. उन्होंने यहा भी कहा कि पांशुल की परफॉर्मेंस भारत के युवाओं की मेहनत, समर्पण और उनकी आकांक्षाओं का प्रतीक है.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मुझे पूरा विश्वास है कि वह अपने बेहतरीन काम और सेवा से देश के हेल्थकेयर इकोसिस्टम में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान देंगे.&amp;rsquo;

Met Panshul Bansal from Haryana, who has secured AIR 2 in NEET UG 2026. Congratulated him on this outstanding achievement and wished him success in his career . His accomplishment reflects the dedication, perseverance and aspiration of India&#039;s young minds. I am confident he&amp;hellip; pic.twitter.com/siO8NhoE7l
&amp;mdash; Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 19, 2026



पाशुंल ने 720 में से 715 अंक किए हासिल
हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले पांशुल बंसल ने नीट के री-एग्जाम में 720 में से 715 नंबर हासिल किए हैं. उन्होंने पंजाब के आर्यन गुप्ता के साथ नीट परीक्षा में सबसे ज्यादा नंबर हासिल किए, लेकिन टाई-ब्रेकिंग रूल्स के तहत उन्हें सेकंड रैंक मिली. &amp;nbsp;
दरअसल, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शुरू में नीट यूजी 2026 परीक्षा के आयोजन के लिए 3 मई, 2026 की तिथि निर्धारित की थी, लेकिन परीक्षा से पहले पेपर लीक हो जाने की वजह से एनटीए ने परीक्षा को रद्द कर दिया और इसके बाद 21 जून, 2026 को दोबारा से नीट की आयोजित की गई.
यह भी पढ़ेंः &#039;सब कुछ रिकॉर्ड करें...&#039;, &#039;चलो संसद&#039; मार्च से पहले CJP ने जारी की गाइडलाइन, प्रदर्शनकारियों से खास अपील ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>प्रकाश राज से लेकर शबाना आजमी तक..CJP के &amp;apos;संसद मार्च&amp;apos; से पहले कौन&amp;कौन पहुंचा जंतर&amp;मंतर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/प्रकाश-राज-से-लेकर-शबाना-आजमी-तकcjp-के-संसद-मार्च-से-पहले-कौन-कौन-पहुंचा-जंतर-मंतर</link>
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        <description><![CDATA[ सोमवार को मानसून सत्र शुरू होना है, इधर कॉकरोच जनता पार्टी जंतर मंतर से संसद तक मार्च (20 जुलाई) की तैयारी कर चुकी है. बड़ी संख्या पर लोग जंतर मंतर पर जमा हैं. इनके अलावा सोमवार को भी चलो संसद मार्च में बड़ी संख्या में भीड़ जुटने की उम्मीद है. रविवार को भी उनके समर्थन में कई बड़े नाम शामिल हुए. इनमें शबाना आजमी, प्रकाश राज जैसे नाम शामिल रहे. यह दोनों रविवार (19 जुलाई) की शाम प्रदर्शन स्थल पहुंचे. इधर, दिल्ली पुलिस ने बयान जारी करते हुए, इस तरह के किसी भी मार्च की अनुमति न देने की बात कही है.&amp;nbsp;
उनसे जुड़े वीडियो सामने आए हैं. इनके अलावा पूनम पांडे ने भी बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि यह छात्रों के बारे में है, राजनीति या धर्म के बारे में नहीं है. इनके अलावा पूनम पांडे ने सोनम वांगचुक का समर्थन किया है.&amp;nbsp;
शबाना आजमी ने प्रदर्शनकारियों का हाथ चूमा
शबाना आजमी ने प्रदर्शनकारी का हाथ चूमा. सीजेपी की तरफ से आजमी का वीडियो जारी किया गया. इसमें प्रकाश राज का अभिवादन करते हुए देखा जा सकता है. एक प्रदर्शनकारी ने शबाना आजमी को उनके पास बैठने और उनके हाथों को चूमने का एक वीडियो साझा किया. एक्टर ने जाने से पहले उनके चेहरे पर भी हाथ फेरा और समर्थन जताया. वहीं शबाना आजमी ने मंच से सोनम वांगचु को समर्थन दिया है.&amp;nbsp;
संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस की दो टूक, कहा- न कोई परमिशन मांगी गई, न हमने दी, धारा 163 लागू
प्रकाश राज बोले- आज रात आपके साथ हूं
इधर, प्रकाश राज दूसरी बार जंतर मंतर पर पहुंचे. जहां उन्होंने भाषण दिया. इसमें उन्होंने कहा कि मैं आज रात आपके साथ हूं. मैं यहीं हूं. देखते हैं क्या होता है. इसके अलावा उन्होंने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि हमारे देश के युवा सवाल पूछ रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि ये युवा हैं. जो एक मकसद से लड़ रहे हैं. आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया भी जंतर मंतर पर पहुंचे.
इनके अलावा लेखक डॉ. लक्ष्मण यादव भी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे. म्यूजिक कंपोजर विशाल ददलानी ने भी एक वीडियो जारी किया है. उसमें उन्होंने अपील करते हुए कहा है कि अब भी नहीं जागे तो कब जागोगे. रालोपा के संस्थापक हनुमान बेनीवाल भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचे. समाजवादी पार्टी से सांसद राजीव राय भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचे. इनके अलावा समाजवादी सांसद प्रिया सरोज और कैराना सासंद इकरा हसन भी जंतर मंतर पहुंची.&amp;nbsp;
6 जून से जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रही सीजेपी6 जून से जंतर मंतर पर विरोध प्रदरशन जारी है. सीजेपी इस प्रदर्शन को होल्ड कर रही है. उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है. वहीं 28 जून से सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं. अदालती हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को शनिवार को ले गई और उन्हें सफदरगंज अस्पताल में एडमिट किया है.&amp;nbsp;
Delhi Weather News: दिल्ली में गर्मी बरकरार, सामान्य से अधिक रहा पारा, नहीं हुई बारिश, कल क्या होगा? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>प्रकाश, राज, से, लेकर, शबाना, आजमी, तक..CJP, के, संसद, मार्च, से, पहले, कौन-कौन, पहुंचा, जंतर-मंतर</media:keywords>
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        <title>CM रेवंत रेड्डी ने FIFA वर्ल्ड कप फाइनल से पहले फुटबॉलर मेसी को किया याद, वायरल हो रहा पुराना वीडियो</title>
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        <description><![CDATA[ जैसे-जैसे लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना की टीम FIFA वर्ल्ड कप में आगे बढ़ रही है, इसी बीच सोशल मीडिया पर फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
इस वीडियो में स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी को एक फ्रेंडली फुटबॉल मैच के दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद स्थित फुटबॉल मैदान पर हंसी-मजाक करते हुए देखा जा सकता है, जिसने फैंस का काफी ध्यान खींचा है.
रेड्डी और मेसी के वीडियो पर फुटबॉल फैन्स कर रहे रिएक्ट
सोशल मीडिया पर रेड्डी और मेसी के फैंस इस क्लिप को खूब शेयर कर रहे हैं और ग्लोबल फुटबॉल स्टारडम और भारतीय राजनीतिक नेतृत्व के इस अनोखे मिलन का जश्न मना रहे हैं. कई यूजर्स मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की खेल भावना की तारीफ कर रहे हैं, जबकि दूसरे लोग इस वीडियो के जरिए मेसी के वर्ल्ड कप अभियान के लिए अपना उत्साह और समर्थन जाहिर कर रहे हैं.
CM रेवंत रेड्डी ने एक्स पर शेयर किया पोस्ट
वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार (19 जुलाई, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है. पोस्ट में सीएम रेवंत रेड्डी ने लियोनेल मेसी के साथ उनके हैदराबाद आगमन के दौरान की तस्वीरों और बड़ी संख्या में फुटबॉल फैंस के साथ अपनी तस्वीर शेयर की है.&amp;nbsp;

Most of you know I am a die-hard sports and a #football lover. I loved the day we could bring GOAT #Messi to #Hyderabad to share the pitch with children of Telangana. But there is a deeper purpose and vision for my support of the FIFA World Cup. I am convinced one day&amp;hellip; pic.twitter.com/3vfoQ6i1pb
&amp;mdash; Revanth Reddy (@revanth_anumula) July 19, 2026



पोस्ट में उन्होंने लिखा, &amp;lsquo;आपमें से ज्यादातर लोग जानते हैं कि मैं खेलों, खासकर फुटबॉल का जबरदस्त प्रशंसक रहा हूं. मुझे उस दिन बहुत ज्यादा खुशी हुई थी, जब हम फुटबॉल के गोट (ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम/GOAT) खिलाड़ी लियोनेल मेसी को हैदराबाद ला सके, ताकि वह तेलंगाना के बच्चों के साथ पिच शेयर कर सकें, लेकिन फीफा वर्ल्ड कप के प्रति मेरे समर्थन के पीछे मेरा एक और भी बड़ा उद्देश्य और दूरदृष्टि है.&amp;rsquo;
रेड्डी ने कहा, &amp;lsquo;मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन भारतीय फुटबॉल टीम फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल में खेलेगी और भारत इस टूर्नामेंट की मेजबानी भी करेगा. मेरी इस बात को याद रखिए, उस भविष्य की फुटबॉल टीम के कई सितारे तेलंगाना से होंगे. फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल्स का मजा उठाइए.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रेवंत, रेड्डी, ने, FIFA, वर्ल्ड, कप, फाइनल, से, पहले, फुटबॉलर, मेसी, को, किया, याद, वायरल, हो, रहा, पुराना, वीडियो</media:keywords>
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        <title>सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच महात्मा गांधी के पोते का आया रिएक्शन, बोले &amp; &amp;apos;उन्होंने उपवास का इस्तेमाल केवल...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-की-भूख-हड़ताल-के-बीच-महात्मा-गांधी-के-पोते-का-आया-रिएक्शन-बोले-उन्होंने-उपवास-का-इस्तेमाल-केवल</link>
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        <description><![CDATA[ एक तरफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी है, तो वहीं सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर हैं. 20 जुलाई को यह सभी संसद तक मार्च निकालेंगे. ऐसे में कई लोगों को समर्थन देखने को मिल रहा है. अब इस पर महात्मा गांधी के पोते का बयान भी आया है.&amp;nbsp;
उन्होंने उपवास को लेकर अपनी बात रखी है. इतिहासकार और महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने सिर्फ सरकारों को ही नहीं, बल्कि लोगों की सोच को बदलने के लिए भी उपवास का सहारा लिया था.&amp;nbsp;
आयरलैंड में सबसे पहले हुई थी ब्रिटिश शासन के खिलाफ भूख हड़ताल
इसके अलावा उन्होंने कहा कि भारत से पहले आयरलैंड के लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भूख हड़ताल की थी. इनके अलावा भगत सिंह और जतिन दास ने भी सबसे पहले &amp;nbsp;ज्यादा दिन तक भूख हड़ताल की थी. लेकिन महात्मा गांधी ने सबसे पहले भूख हड़ताल साउथ अफ्रीका में की थी. इसके अलावा उन्होंने अन्य छोटे और बड़े उपवास रखे थे.

VIDEO | Historian and Mahatma Gandhi&#039;s grandson Rajmohan Gandhi says, &quot;Gandhi used fasting to change minds, not just governments.&quot;(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/r1k0sczQVO
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) July 19, 2026



संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस की दो टूक, कहा- न कोई परमिशन मांगी गई, न हमने दी, धारा 163 लागू
महात्मा गांधी ने अपने उपवास से लोगों के मन बदलने का काम किया
महात्मा गांधी ने के पोते राजमोहन गांधी ने कहा &#039;यह सच है कि कई भूख हड़ताल उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ की थी. इसके अलावा उन्होंने कई बार भूख हड़ताल भारत के लोगों के मन में बदलाव को लेकर की थी. उन्होंने हिंदू और मुस्लिम की एकता को बनाए रखने के लिए भी उपवास किए. इसके अलाव उन्होंने कहा कि अगर सरकार बातचीत करे या उनकी मांगों को समझे तो उपवास को तुड़वाया जा सकता है. &#039;
6 जून से चल रहा जंतर मंतर पर प्रदर्शन
बता दें, 6 जून से सीजेपी जंतर मंतर पर शिक्षा के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रही है. वहीं, सोनम वांगचुक ने 21 दिन तक भूख हड़ताल की. इसके बाद शनिवार को दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में एडमिट कर दिया. रविवार को उनके परिजनों की मांग की याचिका की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने से इनकार कर दिया है.&amp;nbsp;
Delhi Weather News: दिल्ली में गर्मी बरकरार, सामान्य से अधिक रहा पारा, नहीं हुई बारिश, कल क्या होगा? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोनम, वांगचुक, की, भूख, हड़ताल, के, बीच, महात्मा, गांधी, के, पोते, का, आया, रिएक्शन, बोले, उन्होंने, उपवास, का, इस्तेमाल, केवल...</media:keywords>
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        <title>हैदराबाद NPA में चौंकाने वाला मामला, महिला IPS ट्रेनी की शिकायत पर साथी ट्रेनी IPS के खिलाफ केस दर्ज</title>
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        <description><![CDATA[ हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी (NPA) में एक महिला IPS ट्रेनी ने अपने साथी IPS प्रोबेशनर उदय कृष्ण रेड्डी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है. महिला अधिकारी का आरोप है कि रेड्डी ने चाकू की नोक पर धमकाया और उनके प्राइवेट वीडियो फैलाए, जिसके बाद हैदराबाद के अट्टापुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया.
क्या है पूरा मामला?
हैदराबाद के अट्टापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह घटना नेशनल पुलिस एकेडमी में प्रोबेशन पर चल रहे दो IPS ट्रेनी से जुड़ी है. महिला अधिकारी का आरोप है कि रेड्डी ने उन्हें अश्लील मैसेज भेजे, भद्दी भाषा में गाली-गलौज की, उन्हें एक कमरे में ले गए, उनकी गर्दन पर चाकू रखा, प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड किए और बाद में वे वीडियो उनके पति को भेज दिए, जिसके कारण उन्हें पुलिस के पास जाना पड़ा.
ट्रेनी अधिकारी ने क्या लगाए आरोप?
अपनी लिखित शिकायत में, ट्रेनी अधिकारी ने बताया कि रेड्डी ने उन्हें बार-बार अश्लील तरीके से मैसेज किए और अपमानजनक टिप्पणियों से बेइज्जत किया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेड्डी ने उन्हें एकेडमी कैंपस के एक कमरे में जबरदस्ती बुलाया, गर्दन पर चाकू रखकर धमकाया और उनकी मर्जी के बिना प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड किए, जिन्हें बाद में उनके पति को भेज दिया गया.&amp;nbsp;

पुलिस ने मामले में शुरू की जांच
शिकायत के आधार पर, अट्टापुर पुलिस ने ट्रेनी IPS अधिकारी उदय कृष्ण रेड्डी के खिलाफ मामला दर्ज किया है और यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और संबंधित अपराधों के आरोपों की जांच शुरू कर दी है. जांच करने वाले अधिकारी शिकायत में बताए गए मैसेज और वीडियो की जांच कर रहे हैं. उम्मीद है कि वे शिकायत करने वाली महिला, आरोपी और एकेडमी के संभावित गवाहों के बयान दर्ज करेंगे.
इन आरोपों से प्रतिष्ठित नेशनल पुलिस एकेडमी में हलचल मच गई है, जहां देश के लिए भविष्य के IPS अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाती है. पता चला है कि सीनियर अधिकारी जांच पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह मामला भारत के टॉप पुलिस ट्रेनिंग संस्थानों में से एक में सुरक्षा, व्यवहार और उत्पीड़न से निपटने के आंतरिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>हैदराबाद, NPA, में, चौंकाने, वाला, मामला, महिला, IPS, ट्रेनी, की, शिकायत, पर, साथी, ट्रेनी, IPS, के, खिलाफ, केस, दर्ज</media:keywords>
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        <title>सोनम वांगचुक और राम मंदिर चढ़ावा चोरी... मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, संसद में विपक्ष उठाएगा ये मुद्दे</title>
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        <description><![CDATA[ संसद के मानसून सत्र के आरंभ होने से एक दिन पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे और कुछ अन्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. विपक्ष सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाए जाने का मुद्दा इस बैठक में उठा सकता है. इस बैठक में सभी प्रमुख दलों के सदन के नेता शामिल होंगे और कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिनमें अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला भी शामिल है.
सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के जंतर-मंतर से पुलिस द्वारा वांगचुक को जबरन हटाए जाने का मामला इस बैठक में उठाया जा सकता है. राम मंदिर के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग मामले को लेकर समाजवादी पार्टी ने घोषणा की है कि वह इस मामले को संसद में पुरजोर तरीके से उठाएगी. सरकार ने कुछ नए विधेयकों की घोषणा की है जिन्हें आगामी मानसून सत्र के दौरान लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाएगा.

लोकसभा सचिवालय के एक बुलेटिन के मुताबिक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने उस पर विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रावधान करता है. इसके जरिए सरकार राष्ट्रीय गीत &#039;वंदे मातरम्&#039; का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना चाहती है.
कौन-कौन से विधेयक पेश करेगी सरकारइसके अलावा जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 को भी पेश करने विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से संबंधित प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है. सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी, जो सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने के प्रावधान को औपचारिक रूप देने वाला विधेयक है.
20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा सत्रसंसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए समूह के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय को भी इस सर्वदलीय बैठक के लिए आमंत्रित किया है. मानसून सत्र 20 जुलाई से आरंभ होगा और इसके 13 अगस्त तक चलने की संभावना है. संसद के प्रत्येक सत्र से पहले होने वाली इस बैठक में सरकार आमतौर पर अपने विधायी कार्यक्रम की जानकारी देती है और सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग की अपील करती है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोनम, वांगचुक, और, राम, मंदिर, चढ़ावा, चोरी..., मानसून, सत्र, से, पहले, सर्वदलीय, बैठक, संसद, में, विपक्ष, उठाएगा, ये, मुद्दे</media:keywords>
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        <title>बंगाल में अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर चला बुलडोजर, लॉकेट चटर्जी बोलीं&amp; &amp;apos;TMC की सरकार में...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बंगाल-में-अभिषेक-बनर्जी-के-दफ्तर-पर-चला-बुलडोजर-लॉकेट-चटर्जी-बोलीं-tmc-की-सरकार-में</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बंगाल-में-अभिषेक-बनर्जी-के-दफ्तर-पर-चला-बुलडोजर-लॉकेट-चटर्जी-बोलीं-tmc-की-सरकार-में</guid>
        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर प्रशासन की तरफ से की गई कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश महासचिव लॉकेट चटर्जी ने इस कार्रवाई का सपोर्ट किया है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ सरकार की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.
लॉकेट चटर्जी ने शनिवार (19 जुलाई 2026) को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले 15 सालों के दौरान तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन में कई अनियमितताएं हुईं, लेकिन अब ऐसी चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जहां भी भ्रष्टाचार या अवैध निर्माण मिलेगा, वहां प्रशासन नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगा और गैर-कानूनी ढांचों को हटाया जाएगा.
अधिकारियों के अनुसार, अमतला में स्थित अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया. कार्रवाई के दौरान डायमंड हार्बर पुलिस जिले के बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो.

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चुनावी नतीजे के बाद से बंद था ऑफिस
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि चुनावी नतीजे आने के बाद से यह ऑफिस बंद पड़ा था. अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने कथित अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया था. हालांकि तय समय के भीतर ऑफिस की ओर से कोई प्रतिनिधि जिला परिषद के सामने उपस्थित नहीं हुआ. इसके बाद प्रशासन ने सरकारी नियमों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू की और परिसर खाली कराने की प्रक्रिया अपनाई. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए और पूरे घटनाक्रम को देखने के लिए भीड़ जमा हो गई. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार निगरानी करती रही और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई.
पश्चिम बंगाल STF और CID पर गंभीर आरोप
इससे पहले 3 जुलाई को अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया था कि उनके ऑफिस और उनसे जुड़े लोगों को राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके कार्यालय या उनसे जुड़े करीब 25 लोगों को बिना उचित नोटिस के पूछताछ के लिए बुलाया गया या हिरासत में लिया गया. उन्होंने कहा था कि इन लोगों पर उनके खिलाफ झूठे बयान देने का दबाव बनाया जा रहा है. साथ ही उन्होंने फोन टैपिंग, परिवार के सदस्यों को परेशान करने और महिलाओं को भी धमकाने जैसे आरोप लगाए थे.
अभिषेक बनर्जी ने कार्रवाई पर क्या कहा?
अभिषेक बनर्जी ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक प्रताड़ना करार दिया था. वहीं प्रशासन और भाजपा का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की जा रही है और इसका मकसद केवल अवैध निर्माण और अनियमितताओं पर रोक लगाना है. फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rajouri Flood: जम्मू&amp;कश्मीर में बाढ़ संकट, एक्शन में अमित शाह, LG और CM उमर अब्दुल्ला को किया फोन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rajouri-flood-जम्मू-कश्मीर-में-बाढ़-संकट-एक्शन-में-अमित-शाह-lg-और-cm-उमर-अब्दुल्ला-को-किया-फोन</link>
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        <description><![CDATA[ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में भारी बारिश के बाद पैदा हुए बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बातचीत कर हालात की डिटेल जानकारी हासिल की. राजौरी जिले में रात भर हुई तेज बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है. इसके चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है. गृह मंत्री अमित शाह ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए.
जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ जिलों में रात भर हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी है. रात करीब एक बजे शुरू हुई तेज बारिश के बाद कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया. बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई लोगों की जान चली गई, दर्जनों गाड़ियां बर्बाद हो गई और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.

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दरहाली नदी में आई बाढ़ 
अधिकारियों के अनुसार, राजौरी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद उसका पानी बेला कॉलोनी में घुस गया. देखते ही देखते पूरा इलाका पानी में डूब गया. बेला बस स्टैंड पर खड़ी कई गाड़ियां तेज बहाव में बह गईं. कई घरों में पानी भर गया और लोग अपने घरों में फंस गए. बेला कॉलोनी और आसपास के इलाकों में पशुधन के नुकसान की भी खबरें सामने आई हैं. दरहाली नदी में आई बाढ़ ने राजौरी के बेला क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया है. इलाके के पार्क, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों को नुकसान हुआ है. वहीं थन्ना मंडी सब-डिविजन के चुरुंग, राजधानी और बेहरोट क्षेत्र भी अचानक आई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. बेहरोट स्थित एक क्रशर यूनिट में काम कर रहे कुछ मजदूरों के फंसे होने की सूचना भी मिली है.
बादल फटने की घटनाएं सामने आई
मंजाकोट तहसील के कोटली कलाबन और गोलिनारी क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं. इसके बाद आई तेज बाढ़ में स्थानीय कब्रिस्तान पूरी तरह बह गया और कई कब्रें नष्ट हो गईं. इस घटना से स्थानीय लोगों में गहरा दुख और चिंता का माहौल है. बाढ़ के कारण कई स्थानों पर वाहन डूब गए और अनेक इमारतों को नुकसान पहुंचा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने एक दिन पहले ही भारी से बहुत भारी बारिश और अचानक बाढ़ की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की थी. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल भेज दिए हैं. अधिकारियों ने निचले इलाकों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rajouri, Flood:, जम्मू-कश्मीर, में, बाढ़, संकट, एक्शन, में, अमित, शाह, और, उमर, अब्दुल्ला, को, किया, फोन</media:keywords>
    </item>
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        <title>सोनम वांगचुक अस्पताल में, CJP ने 20 जुलाई को किया मार्च का ऐलान, आगे क्या होगा, एक्सपर्ट्स ने बताया</title>
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        <description><![CDATA[ NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन नए मोड़ पर पहुंच गया है. आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों के चलते अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह अभियान यहीं थम जाएगा या फिर नए स्वरूप में आगे बढ़ेगा.
इस बीच CJP नेता अभिजीत दीपके ने 20 जुलाई को मार्च निकालने और भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान कर दिया है. सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद आंदोलन की दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि CJP की ओर से साफ किया गया है कि विरोध प्रदर्शन फिलहाल समाप्त नहीं होगा. संगठन का कहना है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित मार्च और भूख हड़ताल के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश जारी रहेगी.

आंदोलन के बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस व्यापक जनसमर्थन की उम्मीद CJP और आंदोलन से जुड़े लोगों को थी, वह अब तक दिखाई क्यों नहीं दिया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े राजनीतिक मुद्दों पर केवल प्रतीकात्मक विरोध से सरकारों पर दबाव बनाना आसान नहीं होता, जबकि दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े लोग दावा कर रहे हैं कि लोगों में समर्थन तो है, लेकिन खुलकर सामने आने का माहौल नहीं है.
क्या बोले जानकारराजनीतिक मामलों के जानकार एस.के. शर्मा ने एबीपी लाइव से बातचीत में कहा कि किसी भी मंत्री का इस्तीफा केवल कुछ लोगों की मांग से नहीं हो सकता. उनके अनुसार सरकार संवैधानिक व्यवस्था के तहत काम करती है और किसी समूह के विरोध भर से शासन व्यवस्था में बदलाव नहीं आता. उन्होंने कहा कि इस पूरे आंदोलन में न तो कोई ठोस रणनीति दिखाई देती है और न ही ऐसा कोई संवैधानिक आधार, जिसके चलते सरकार पर इस्तीफे का दबाव बन सके. शर्मा के मुताबिक इसे राजनीतिक दलों का प्रचार अभियान या पब्लिसिटी स्टंट कहना ज्यादा उचित होगा.
&#039;भीड़ बढ़ने से संवैधानिक व्यवस्था नहीं बदलती&#039;एस.के. शर्मा ने कहा कि अगर विरोध प्रदर्शन में लोगों की संख्या कई गुना भी बढ़ जाए, तब भी उससे संविधान या सरकार की कार्यप्रणाली स्वतः नहीं बदल जाती. उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था तय प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है और केवल सोशल मीडिया या धरना-प्रदर्शन के दबाव से किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं हो सकता. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आंदोलनों का उद्देश्य कई बार केवल चर्चा में बने रहना होता है और उनका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव सीमित रहता है.
राजनीतिक विश्लेषक बलविंदर सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को बिल्कुल अलग नजरिए से देखा. उनका कहना है कि जनता की आवाज चाहे कम लोगों के माध्यम से उठे या बड़ी भीड़ के साथ, उसे हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता. बलविंदर सिंह का कहना है कि कई लोग विरोध प्रदर्शन से सहमत होने के बावजूद सरकारी कार्रवाई, सामाजिक बहिष्कार या आर्थिक नुकसान की आशंका के कारण खुलकर भाग लेने से बचते हैं.
अब आगे क्या होगाउन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक के अस्पताल से बाहर आने के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी और यह अभियान आगे भी जारी रह सकता है. फिलहाल जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन का अगला चरण 20 जुलाई के प्रस्तावित मार्च और भूख हड़ताल पर निर्भर माना जा रहा है. एक ओर कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे सीमित प्रभाव वाला विरोध प्रदर्शन मान रहे हैं, जबकि दूसरी ओर आंदोलन के समर्थकों का दावा है कि यह मुहिम अभी समाप्त होने वाली नहीं है. हालांकि, वांगचुक की गैरमौजूदगी के बावजूद यह आंदोलन कितनी गति पकड़ पाता है, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चल पाएगा.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोनम, वांगचुक, अस्पताल, में, CJP, ने, जुलाई, को, किया, मार्च, का, ऐलान, आगे, क्या, होगा, एक्सपर्ट्स, ने, बताया</media:keywords>
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        <title>TMC के बागी सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाने पर भड़का विपक्ष, पहले किया वॉकआउट, फिर हुआ शामिल</title>
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        <description><![CDATA[ संसद सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों को भी बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया गया. इस पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और सिंबॉलिक वॉकआउट कर दिया. हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए.
TMC ने उठाया बागी सांसदों का मुद्दा- धर्मेंद्र यादवइस बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि TMC के नेताओं ने सवाल उठाया कि आधिकारिक TMC सांसदों की जगह पहले बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई. उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम अलोकतांत्रिक है.
महुआ मोइत्रा ने कहा- यह गलत परंपराTMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए सवाल किया कि जब ये सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, तो उन्हें सर्वदलीय बैठक में क्यों बुलाया गया. उन्होंने कहा कि बागी सांसदों को आमंत्रित करना गलत परंपरा है.
विपक्ष ने किया प्रतीकात्मक वॉकआउटविवाद के बाद कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, NCP (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले और TMC की महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेता बैठक से बाहर निकल गए. विपक्ष ने इसे प्रतीकात्मक वॉकआउट बताया. विपक्षी नेताओं ने बाहर आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और TMC के बागी सांसदों के मुद्दे पर सरकार को घेरा. इसके बाद सभी विपक्षी दलों के नेता दोबारा सर्वदलीय बैठक में शामिल हो गए.महुआ मोइत्रा ने साधा निशानामहुआ मोइत्रा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (UBT) समेत पूरे विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक से प्रतीकात्मक वॉकआउट किया. उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-मान्यता प्राप्त NCPI को बैठक में बुलाया गया, जबकि उसके 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं दी है और उनकी अयोग्यता संबंधी याचिकाएं लंबित हैं. महुआ ने सवाल उठाया कि आखिर संसदीय कार्य मंत्री ने इन सांसदों को किस आधार पर बैठक का निमंत्रण दिया.
बीजेपी पर भड़कीं महुआ माझीजेएमएम की राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने कहा कि बीजेपी लगातार दूसरे दलों के सांसदों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है और उसे अब भी कुछ सीटों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि विपक्ष महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन (Delimitation) से जोड़ दिया है. उन्होंने आशंका जताई कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होने पर झारखंड में अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें कम हो सकती हैं. उन्होंने कहा कि अगर सरकार सीटें कम नहीं होने का भरोसा दे और विपक्ष सहमत हो, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर विचार कर सकती है.
किरेन रिजिजू ने की अपीलवहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और इसी को लेकर सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाई गई थी. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की. रिजिजू ने कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनेगी और उम्मीद करती है कि विपक्ष भी सरकार की बात सुनेगा, क्योंकि संसद जितनी बेहतर चलेगी, देश को उतना ही फायदा होगा. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>उद्धव गुट के सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मिली मंजूरी, TMC के बागी सांसदों पर भी आया फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ मॉनसून सत्र से पहले उद्धव ठाकरे और ममता बनर्जी को भी बड़ा झटका लगा है. मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने शनिवार को टीएमसी से अलग होकर बागी नेताओं की बनी NCPI में विलय करने वाले सांसदों को सदन में सीटिंग की मंजूरी दी है.
इनकी संख्या 20 है. अलग से लोकसभा में स्टेटस भी दिया गया है.&amp;nbsp;वहीं, यूबीटी शिवसेना यानी उद्धव ठाकरे की शिवसेना के 6 सांसदों के शिवसेना शिंदे गुट में विलय की मंजूरी दी है.
ममता बनर्जी की पार्टी से अलग हुए नेताओं को लोकसभा में सीटिंग की मंजूरी दी गई है. टीएमसी के पिछले बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ज्यादातर विधायकों और सांसदों ने साथ छोड़ दिया है. उन्होंने एक अलग गुट बना लिया है. इनमें विधायकों की संख्या 60 है, और सांसद की संख्या 20 है. यह सभी सांसदों ने काकोली घोष को अपना नेता माना है.
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;&amp;lsquo;यह शक पैदा करता है...&amp;rsquo; अस्पताल पहुंचे सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर क्या बोले उनके डॉक्टर?
इधर उद्धव ठाकरे भी लगातार पार्टी के पतन का दौर देख रहे हैं. हाल ही में शिवसेना यूबीटी में दूसरी सबसे बड़ी टूट हुई थी. पहले कई विधायक और सांसद अलग होकर शिंदे गुट में सम्मिलित होकर एनडीए में शामिल हो गए थे. अभी हाल ही में 6 सांसदों ने पार्टी को छोड़ दिया. यही हाल ममता बनर्जी की पार्टी का बंगाल में बना हुआ है.&amp;nbsp;
अभिषेक बनर्जी ने मान्यता न देने की अपील की थी
इधर, टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने एक पत्र लिखा था. यह पत्र स्पीकर को लिखा था. इस पत्र में अनुरोध किया था कि टीएमसी को अकेली पार्टी माना जाए. अलग गुट को मान्यता न दी जाए. इसके अलावा अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि कानून किसी भी राजनीतिक पार्टी के अलग-अलग ग्रुप में बंटने को सही घटना नहीं मानता. यानी अभिषेक बनर्जी ने अलग गुट को मान्यता न देने को कहा था.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;Exclusive: &amp;lsquo;सोनम के सभी वाइटल्स नॉर्मल हैं, पर...&amp;rsquo;, सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर वांगचुक की पत्नी का गंभीर आरोप ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>सरकार ने NCPI सांसदों को दिया न्योता, मानसून सत्र पर आयोजित ऑल पार्टी मीटिंग में चर्चा के लिए बुलाया</title>
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        <description><![CDATA[ संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार (20 जुलाई, 2026) से होने वाली है. केंद्र सरकार ने सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले रविवार (19 जुलाई, 2026) को लोकसभा और राज्यसभा में सभी राजनीतिक पार्टियों के फ्लोर लीडर्स की बैठक बुलाई है. सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने वाले 20 सांसदों को भी बैठक में शामिल होने के लिए न्योता दिया है.
सुदीप बंद्योपाध्याय को लिखे पत्र में क्या बोले रीजीजू?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार (18 जुलाई, 2026) को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों के गुट के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय के नाम एक पत्र भेजा है. पत्र में केंद्रीय मंत्री ने कहा, &amp;lsquo;सुदीप बंद्योपाध्याय जी, हाल ही में आप 19 अन्य सांसदों के साथ नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए हैं और आपने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी से अपनी पार्टी को मान्यता देने का अनुरोध भी किया है, जो इस वक्त उनके विचाराधीन है.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं आपको लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहा हूं. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों के सामने आने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों और संभावित संसदीय विषयों पर चर्चा करना है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

काकोली दास दस्तीदार का नाम लेकर केंद्रीय मंत्री ने दिया आमंत्रण
केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा, &amp;lsquo;मैं संसद के दोनों सदनों के सुचारु रूप से संचालन के लिए आपके सहयोग चाहता हूं. यह बैठक रविवार (19 जुलाई, 2026) को सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी के मेन कमिटी रूप में आयोजित की जाएगी.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैं इस महत्वपूर्ण बैठक में आपसे भाग लेने की अपेक्षा रखता हूं. इसके साथ ही, आपकी पार्टी की नॉमिनेटेड चीफ व्हीप डॉ. काकोली दास दस्तीदार से भी अनुरोध करता हूं कि वो भी इस बैठक में भाग लें.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः सोनम वांगचुक के सपोर्ट में उतरे अन्ना हजारे, सरकार को दी नसीहत, बोले- &amp;lsquo;सब्र की परीक्षा न लें वरना...&amp;rsquo; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने पर भड़के योगेंद्र यादव, बोले &amp; &amp;apos;आप उनको ले जा सकते हैं लेकिन...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-को-जबरन-अस्पताल-ले-जाने-पर-भड़के-योगेंद्र-यादव-बोले-आप-उनको-ले-जा-सकते-हैं-लेकिन</link>
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        <description><![CDATA[ सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया है. इस कार्रवाई का लगातार विरोध देखने को मिल रहा है. अब इस पर पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने इस कार्रवाई को शर्मनाक और कायरतापूर्ण करार दिया है. साथ ही गैरकानूनी बताया है.&amp;nbsp;
योगेंद्र यादव ने कहा, &#039;दिल्ली पुलिस की कार्रवाई शर्मनाक, कायरतापूर्ण और गैर कानूनी है. ऐसे में युवाओं और स्टूडेंट्स ने फैसला किया है कि आप सोनम वांगचुक को ले जा सकते हैं. लेकिन आप युवाओं की भावनाओं और जोश को नहीं तोड़ सकते. वे अपने संघर्ष के लिए तैयार हैं. युवाओं ने तय किया है कि आप सोनम वांगचुक को ले जा सकते हैं. लेकिन भूख हड़ताल जारी रहेगी. दीपके ने कमान संभाल ली है. सरकार को लगता है कि ऐसा करने से 20 तारीख का मार्च खत्म हो जाएगा, लेकिन युवाओं ने तय किया है कि मार्च होकर रहेगा. पार्लियामेंट मार्च होकर रहेगा.&#039;&amp;nbsp;
उस आदमी की मर्जी के खिलाफ घसीटकर ले गए: योगेंद्र यादवइसके अलावा योगेंद्र यादव ने कहा कि यह कायरतापूर्ण और शर्मनाक है. क्योंकि आपने अपने कामों को छिपाने के लिए सफेद चादरों को पर्दे की तरह लगाया. फिर उस आदमी को उसकी मर्जी के खिलाफ घसीटकर ले गए. यह बात कि आपको पर्दे के पीछे छिपना पड़ा. यह साबित करता है कि यह कितना शर्मनाक है. यह गैरकानूनी है, क्योंकि कोर्ट के ऑर्डर में कहीं भी यह नहीं लिखा था कि आप उसे जबरदस्ती ले जा सकते हैं, न हीं यह लिखा था कि आप उसे जबरदस्ती खिला सकते हैं. किसी भी डॉक्टर की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि उनके वाइटल साइन कम हो रहे थे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;सोनम वांगचुक के बाद अब अनशन करेंगे अभिजीत दीपके, जंतर-मंतर पहुंचकर किया ऐलान
सोनम वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल की रिपोर्ट पर उठाए सवालवहीं, इस मामले पर एबीपी न्यूज से बात करते हुए हुए सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. साथ ही पोटैशियम को लेकर दोबारा ब्लड टेस्ट कराने की मांग भी की. साथ ही अस्पताल की रिपोर्ट पर संदेह खड़ा किया है और वांगचुक को डिस्चार्ज करने की मांग की है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर गरजा बुलडोजर तो आई बीजेपी की प्रतिक्रिया, बोले &amp; &amp;apos;खुद को राजकुमार...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अभिषेक-बनर्जी-के-ऑफिस-पर-गरजा-बुलडोजर-तो-आई-बीजेपी-की-प्रतिक्रिया-बोले-खुद-को-राजकुमार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/अभिषेक-बनर्जी-के-ऑफिस-पर-गरजा-बुलडोजर-तो-आई-बीजेपी-की-प्रतिक्रिया-बोले-खुद-को-राजकुमार</guid>
        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के कोलकाता में बंगाल के अमतला में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई पर बीजेपी की तरफ से टिप्पणी आई है. एक तरफ बीजेपी एमपी सुकांत मजूमदार ने बयान दिया है, तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष सामिक &amp;nbsp;भट्टाचार्य ने बयान दिया है.&amp;nbsp;
यहां एक तरफ अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर हुई बुलडोजर कार्रवाई पर रिएक्शन देते हुए केंद्रीय मंत्री और बीजेपी एमपी सुकांत मजूमदार ने कहा है कि अगर यह अवैध कंस्ट्रक्शन था, तो इसे गिरा देना चाहिए. कोई भी अवैध सट्रक्चर खड़ा नहीं रहना चाहिए.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा कि सिर्फ कानूनी कंस्ट्रक्शन ही रहने चाहिए. जब भी टीएमसी सरकार में सत्ता में थी, तो अभिषेक बनर्जी खुद को राजकुमार समझते थे. इसलिए उन्होंने जो चाहा वो किया. &amp;nbsp;उन्होंने एक ऑफिस बनाया. कोई सही प्लान भी नहीं था. जमीन का मालिकाना हक ही विवादित है.&amp;nbsp;
सुकांत मजूमदार के अलावा बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार अवैध निर्माण को गिरा रही है. सरकार ने सभी दस्तावेजों की जांच पड़ताल के बाद ही ये फैसले लिए हैं. अगर किसी को लगता है कि कुछ गलत हुआ है, तो वे कोर्ट जा सकते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;सोनम वांगचुक के सपोर्ट में उतरे अन्ना हजारे, सरकार को दी नसीहत, बोले- &amp;lsquo;सब्र की परीक्षा न लें वरना...&amp;rsquo;
अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाईदरअसल शनिवार को शुभेंदु सरकार ने ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के ऑफिस पर बुलडोजर चला दिया. पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के ऑफिस को कथित रूप से अवैध बताकर गिराना शुरू कर दिया. यह ऑफिस दक्षिण 24 परगना में &amp;nbsp;अमतला में अमतला और बरुईपुर रोड पर स्थित था.&amp;nbsp;
जानकारी के मुताबिक, सुबह इस ऑफिस के पास बुलडोजर पहुंचे. उसे गिराया जाने लगा. प्रशासन ने बनर्जी के ऑफिस पर कुछ दिन पहले नोटिस जारी किया था. इसे अवैध बताया गया था. प्रशासन का कहना है कि यह बिल्डिंग बिना अनुमति के बनाई गई थी. बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई. आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp;Exclusive: &amp;lsquo;सोनम के सभी वाइटल्स नॉर्मल हैं, पर...&amp;rsquo;, सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर वांगचुक की पत्नी का गंभीर आरोप ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>अभिषेक बनर्जी ने TMC के बागी गुट को दिया चैलेंज तो BJP ने किया पलटवार, कहा&amp; &amp;apos;शायद वो भी...&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार (18 जुलाई, 2026) को पार्टी से बागी गुट के नेताओं को बड़ी चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी को छोड़कर आज मुझे बुरा भला कह रहे हैं, मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि अगर वे दीदी के पास वापस आ जाते हैं, तो मैं एक घंटे के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा.
अभिषेक बनर्जी के इस चुनौती के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने टीएमसी सांसद पर बड़ा पलटवार करते हुए चुटकी ली है. भाजपा ने कहा कि अगर वे 2018 में ऐसी बात बोल देते, तो आज वे टीएमसी का प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्यमंत्री बन गए होते.
भाजपा सांसद ने अभिषेक बनर्जी पर कसा तंज
पश्चिम बंगाल के बिशनुपुर से सांसद और भाजपा नेता सौमित्र खान ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा, &amp;lsquo;बंगाल में एक कहावत है कि जब आत्मा शरीर छोड़कर निकलती है और उसे शांति मिल जाती है और हम श्मशान घाट जाते हैं, तो &#039;हरे कृष्ण, हरे कृष्ण&amp;hellip;&#039; का कीर्तन करते हैं. आज अभिषेक बनर्जी भी इसी भाव में बोल रहे थे.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;अगर उन्होंने साल 2018 में हीं ऐसी बात कही होती, तो शायद वो भी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्यमंत्री बन गए होते.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
मैं नहीं चाहूंगा कि आप टीएमसी को छोड़कर जाएं- सौमित्र खान

#WATCH | Kolkata: On Abhishek Banerjee&#039;s statement, West Bengal Minister Saumitra Khan says, &quot;...There is a saying in Bengal: when the soul departs the body and finds peace, and we visit the cremation ground, chant &#039;Hare Krishna, Hare Krishna...&#039; Abhishek Banerjee spoke in this&amp;hellip; pic.twitter.com/51HXjgrjyX
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 18, 2026



भाजपा सांसद ने कहा, &amp;lsquo;मैं उनसे कहना चाहता हूं कि आप न विधायक बन पाएंगे और न ही सांसद. हां, आप एक अच्छे &#039;जेलर&#039; जरूर बन सकते हैं. जेल के अंदर आप अच्छे से रहेंगे. हम भी कभी-कभार आपको देखने जाया करेंगे, लेकिन ये कभी नहीं चाहेंगे कि आप तृणमूल कांग्रेस को छोड़ो. क्योंकि जितने ज्यादा वक्त आप टीएमसी में बने रहेंगे, उतने समय तक और उतनी ही तेजी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) आगे बढ़ती रहेगी.&amp;rsquo;
भाजपा नेता का टीएमसी पर आरोप
सौमित्र खान ने अभिषेक बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा, &amp;lsquo;आप आखिर गुस्सा दिखा किसे रहे हो, खुद को. अभी राजनीति में आपको बहुत कुछ देखना बाकी है.&amp;rsquo; इसके साथ ही, उन्होंने टीएमसी को भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं का जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि हमारे 342 कार्यकर्ता मारे गए हैं, उनकी हत्या का जिम्मेदार अभिषेक बनर्जी की टीएमसी ही है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः TMC के बागी गुट के नेताओं को अभिषेक बनर्जी ने दी चुनौती, बोले- &#039;एक घंटे में इस्तीफा दे दूंगा अगर...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अभिषेक, बनर्जी, ने, TMC, के, बागी, गुट, को, दिया, चैलेंज, तो, BJP, ने, किया, पलटवार, कहा-, शायद, वो, भी...</media:keywords>
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        <title>18 साल बाद अमेरिका छोड़ भारत लौटे Meta के इंजीनियरिंग लीडर, बोले&amp; ‘अब परिवार को दूर से नहीं देखना था’</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/18-साल-बाद-अमेरिका-छोड़-भारत-लौटे-meta-के-इंजीनियरिंग-लीडर-बोले-अब-परिवार-को-दूर-से-नहीं-देखना-था</link>
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        <description><![CDATA[ सिलिकॉन वैली में शानदार करियर, दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में नेतृत्व की भूमिका और अमेरिका में 18 साल की जिंदगी. यह सब छोड़कर Meta के इंजीनियरिंग लीडर बालाजी गुरुराजन ने भारत लौटने का फैसला किया. वजह नौकरी नहीं, बल्कि परिवार था. बालाजी का भावुक LinkedIn पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. हजारों लोग उनकी कहानी से खुद को जोड़ रहे हैं और इसे &#039;रिवर्स ब्रेन ड्रेन&#039; के बढ़ते ट्रेंड की एक मिसाल बता रहे हैं.
बालाजी ने लिखा, &quot;18 साल बाद... एक महीने पहले मैं और मेरा परिवार अमेरिका में बिताए 18 साल समेटकर बेंगलुरु आ गए. हम अपने बुजुर्ग माता-पिता के करीब रहना चाहते थे, बच्चों को परिवार के बीच बड़ा होते देखना चाहते थे और जिंदगी के उस दौर को अब दूर से नहीं देखना चाहते थे.&quot;
पोस्ट के साथ उन्होंने एयरपोर्ट की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें सामान से भरी ट्रॉली उनके जीवन के एक बड़े अध्याय के समापन की कहानी बयां कर रही थी.
&#039;सिलिकॉन वैली ने मुझे बहुत कुछ दिया&#039;
बालाजी ने माना कि अमेरिका छोड़ना आसान फैसला नहीं था. उन्होंने Microsoft और LinkedIn जैसी कंपनियों में काम करने के बाद Meta में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने लिखा, &quot;अब भी यह पूरी तरह वास्तविक नहीं लगता. बे एरिया ने मुझे मेरा करियर दिया, मेरी सबसे करीबी दोस्तियां दीं और टेक्नोलॉजी व नेतृत्व के बारे में सोचने का ऐसा नजरिया दिया, जिसे मैं पूरी जिंदगी अपने साथ रखूंगा.&quot;

भारत लौटकर फिर से शुरू हुई नई जिंदगी
भारत लौटने के बाद नई शुरुआत भी आसान नहीं रही. बच्चों के स्कूल, नया घर और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने खुद को फिर से एक नई जिंदगी में ढालना शुरू किया.
उन्होंने लिखा, &quot;यह अपने आप में एक नया प्रोजेक्ट रहा है&amp;mdash;स्कूल, घर और उस शहर में दोबारा बसने की रोजमर्रा की चुनौतियां, जिसे मैं कई साल पहले छोड़कर गया था. यह अनुभव विनम्र बनाने वाला रहा है और ज्यादातर समय बेहद अच्छा भी.&quot;
Claude AI से बनाया नया ऐप
नई शुरुआत के बीच बालाजी ने एक साइड प्रोजेक्ट भी शुरू किया. उन्होंने Claude AI की मदद से Bhavitta नाम का एक ऐप बनाया है. यह उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो दो देशों, दो मुद्राओं और दो टैक्स सिस्टम के बीच अपनी वित्तीय योजना बनाते हैं या विदेश से भारत लौटने की तैयारी कर रहे हैं.
सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- &#039;यही असली सफलता है&#039;
बालाजी की पोस्ट पर हजारों प्रतिक्रियाएं आईं. एक यूजर ने लिखा, &quot;बेंगलुरु आपको तकनीकी विकास की रफ्तार से जरूर चौंकाएगा. मैं 12 साल पहले लौटा था और यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा फैसला साबित हुआ.&quot;
एक अन्य यूजर ने कहा, &quot;ऐसा लगता है कि अब रिवर्स ब्रेन ड्रेन का दौर शुरू हो चुका है.&quot;
सबसे ज्यादा चर्चा एक टिप्पणी की हुई, जिसमें लिखा था, &quot;जब आप अपने माता-पिता के साथ बैठते हैं, उनकी आंखों में सुकून देखते हैं, तब बाकी सब चीजें पीछे छूट जाती हैं. यह वह खुशी है जिसे डॉलर से कभी नहीं खरीदा जा सकता.&quot;
एक अन्य यूजर ने सलाह देते हुए लिखा, &quot;भारत लौटने के बाद शुरुआती दो साल सबसे अहम होते हैं. एक-एक दिन आगे बढ़िए और परिवार का साथ बनाए रखिए.&quot;
क्या बदल रही है भारतीय प्रोफेशनल्स की सोच?
बालाजी गुरुराजन की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के घर लौटने की नहीं है. यह उन हजारों भारतीय पेशेवरों की बदलती सोच को भी दिखाती है, जो अब केवल वैश्विक करियर नहीं, बल्कि परिवार, जीवन की गुणवत्ता और अपनेपन को भी उतनी ही अहमियत दे रहे हैं. भारत के तेजी से बढ़ते टेक इकोसिस्टम के बीच ऐसे फैसले अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आम होते जा रहे हैं.
पोस्ट के अंत में बालाजी ने सिर्फ एक लाइन लिखी, लेकिन उसी में उनके फैसले की पूरी भावना झलक गई&amp;mdash;&quot;फिलहाल, मैं आभारी हूं, थोड़ा जेट लैग्ड हूं और यहां आकर खुश हूं.&quot; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>साल, बाद, अमेरिका, छोड़, भारत, लौटे, Meta, के, इंजीनियरिंग, लीडर, बोले-, ‘अब, परिवार, को, दूर, से, नहीं, देखना, था’</media:keywords>
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        <title>‘हम नहीं चाहते कि दोष हमारे या...’ यौन उत्पीड़न के दोषी आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर SC ने राजस्थान सरकार से कहा</title>
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        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 जुलाई, 2026) को यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई की. याचिका में आसाराम के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की गई है, जिस पर सुनवाई के दौरान देश के सर्वोच्च अदालत ने राजस्थान की सरकार को दोषी आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति से कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राजस्थान सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, &amp;lsquo;हम नहीं चाहते हैं कि बाद में दोष हमारे या आपके सिर पर आए.&amp;rsquo;
20 जुलाई तक सरकार एफिडेविट फाइल कर देगी- मेहता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि डॉक्टरों का कहना है कि यौन उत्पीड़न मामले के दोषी ठहराए गए आसाराम को अपने स्वास्थ्य समस्याओं को मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने की जरूरत है. इस पर बेंच ने कहा, &amp;lsquo;हम नहीं चाहते हैं कि कोई अप्रिय घटना घटे.&amp;rsquo; इस पर मेहता को कोर्ट को आश्वस्त किया कि राजस्थान सरकार सोमवार (20 जुलाई, 2026) तक इस संबंध में एफिडेविट फाइल कर देगी.
राजस्थान हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, तो SC का खटखटाया दरवाजा
दरअसल, राजस्थान हाई कोर्ट ने भी 27 मई को हुई सुनवाई के बाद साल 2013 में एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को दोषी मानते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था. इसके बाद दोषी आसाराम ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया. सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया.&amp;nbsp;

सुनवाई के दौरान दोषी आसाराम के वकील ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा, &amp;lsquo;गैस्ट्रो से जुड़े समस्या की वजह से कुछ ब्लीडिंग हो रही है, लेकिन यह अस्थायी दिक्कत नजर आती है, उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं.&amp;rsquo; इस पर बेंच ने कहा, &amp;lsquo;हम सिर्फ इतना कह रहे हैं कि उचित निर्देश लेकर आइए, क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि कोई अप्रिय घटना घटे.&amp;rsquo; जबकि दोषी आसाराम की तरफ से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल एक हाई-रिस्क पेशेंट हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः संसद में पेश होने से पहले ही वंदे मातरम बिल पर छिड़ गई बहस, कांग्रेस ने बताया संविधान के खिलाफ, जानें सरकार का तर्क ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>‘हम, नहीं, चाहते, कि, दोष, हमारे, या...’, यौन, उत्पीड़न, के, दोषी, आसाराम, की, अंतरिम, जमानत, याचिका, पर, ने, राजस्थान, सरकार, से, कहा</media:keywords>
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        <title>500 करोड़ के क्रिप्टो घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार, 2.48 लाख लोग बने शिकार</title>
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        <description><![CDATA[ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करीब 500 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया है. तीनों को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार कर शिमला की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 12 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया है.
क्या है पूरा मामला?
ED के मुताबिक, इस मामले की जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा, जो फिलहाल फरार है, ने अपने साथियों के साथ मिलकर Korvio, DGT, Hypenext और A-Global जैसे फर्जी क्रिप्टो निवेश प्लेटफॉर्म बनाए. इन प्लेटफॉर्म पर लोगों को कम समय में भारी और पक्का मुनाफा देने का लालच देकर निवेश कराया गया.
ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?
जांच में पता चला कि ये पूरा नेटवर्क पोंजी स्कीम की तरह काम कर रहा था. नए निवेशकों से आए पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था. जब शक बढ़ने लगा तो डिजिटल रिकॉर्ड और वेबसाइट का डेटा भी मिटाने की कोशिश की गई. इसके बावजूद, ईडी को अहम डिजिटल सबूत मिले हैं.
एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले में 2.48 लाख से ज्यादा लोग ठगी का शिकार हुए और 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लेन-देन हुए. इससे निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है.&amp;nbsp;

मामले की तह तक जाने में जुटी ईडी
ED का दावा है कि मिलन गर्ग इस पूरे फर्जी क्रिप्टो नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था. उसने प्लेटफॉर्म तैयार किए, क्रिप्टो वॉलेट संभाले और निवेशकों के पैसे को अलग-अलग माध्यमों से इधर-उधर भेजने का काम किया. वहीं, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा निवेशकों को जोड़ने, नकदी इकट्ठा करने और उसे दूसरे आरोपियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते थे.
जांच में ये भी सामने आया है कि दोनों ने इस घोटाले से कमाई गई रकम से संपत्तियों में हिस्सेदारी भी हासिल की. इस मामले में ED पहले ही हेम राज और मासूम जुनेजा को भी गिरफ्तार कर चुकी है. अब एजेंसी ये पता लगाने में जुटी है कि इस घोटाले से कुल कितनी अवैध कमाई हुई और किन-किन लोगों तक ये पैसा पहुंचा.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः &amp;lsquo;सेकेंड क्लास बोगियां होती हैं, यात्री नहीं...&amp;rsquo;, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगा दी भारतीय रेलवे की क्लास, क्या था मामला? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;प्याज की कीमतों पर सरकारें गिर सकती हैं तो...&amp;apos;, सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/प्याज-की-कीमतों-पर-सरकारें-गिर-सकती-हैं-तो-सोनम-वांगचुक-ने-धर्मेंद्र-प्रधान-के-इस्तीफे-पर-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का उनके शरीर पर प्रतिकूल असर होने के बावजूद वह अपने संकल्प पर अडिग हैं.
वांगचुक ने साथ ही कहा कि अगर प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकारें गिर सकती हैं तो छात्रों के लिए जवाबदेही की मांग से भी राजनीतिक बदलाव आ सकता है.
सोनम वांगचुक ने अपने अनशन के 20वें दिन के अंत में साझा किए गए एक वीडियो संदेश में लोगों से 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है.
मैं अभी जिंदा हूं: वांगचुक
वांगचुक ने कहा, &#039;हां, मैं अभी जीवित हूं. मेरे शरीर का 20 प्रतिशत हिस्सा क्षीण हो गया है. पहले शरीर की चर्बी खत्म होती है, उसके बाद मांसपेशियां और फिर अंग प्रभावित होते हैं. अंत में मस्तिष्क. अभी वह समय नहीं आया है.&#039;
उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों को आश्वस्त करते हुए कहा, &#039;20वां दिन समाप्त होने वाला है. मैं यह बता दूं कि मेरा दिमाग अब भी ठीक है.&#039;
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले वांगचुक?
मौजूदा आंदोलन से जवाबदेही तय होने या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की संभावना संबंधी सवालों का जिक्र करते हुए वांगचुक ने कहा कि लोग अक्सर जन आंदोलनों की ताकत को कम करके आंकते हैं.
वांगचुक ने प्याज की कीमतों का किया जिक्र
उन्होंने कहा, &#039;मैं आपसे पूछता हूं-भारत के लोग अपने बच्चों के जीवन और उनकी शिक्षा से ज्यादा प्यार करते हैं या प्याज से? प्याज की कीमतों में भारी वृद्धि को लेकर लोगों में फैले आक्रोश के कारण देश में पहले भी सरकारें गिर चुकी हैं.
उन्होंने कहा, &#039;भारत में जन आंदोलन के कारण तीन बार सरकारें गिरीं. एक बार 1980 में केंद्र सरकार गिरी. वर्ष 1998 में दिल्ली सरकार गिरी और उसी साल राजस्थान सरकार भी गिरी. ये आंदोलन किस मुद्दे पर हुए थे? प्याज की कीमतों पर.&#039;
वांगचुक ने कहा, &#039;यहां हम बच्चों के जीवन की बात कर रहे हैं. इस साल 20 से अधिक आत्महत्याएं हो चुकी हैं और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या बढ़ सकती है. क्या हम इस आंदोलन के जरिये जवाबदेही तय नहीं करा सकते? क्या शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे?&#039;
सोनम वांगचुक ने की संसद मार्च में जुड़ने की अपील
उन्होंने लोगों से 20 जुलाई के &amp;lsquo;चलो संसद&amp;rsquo; मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन की ताकत लोगों की भागीदारी में निहित है.
वांगचुक ने कहा, &#039;20 जुलाई को मेरे साथ संसद तक मार्च कीजिए. आप हमारी ताकत हैं. अन्यथा मैं कौन हूं? मैं क्या हूं? मैं अकेला, भूखा और बेकार इंसान हूं. आप ही ताकत हैं.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;आपकी संख्या हमारी ताकत है. इसी ताकत ने प्याज के मुद्दे पर सरकारें गिराई हैं. हम केवल जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.&#039;
CJP का 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है. वह NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, कथित परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रही है. वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सोनम वांगचुक को धरने से हटाने के बाद अभिजीत दीपके का बड़ा दावा&amp; &amp;apos;दिल्ली पुलिस ने मुझे...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोनम-वांगचुक-को-धरने-से-हटाने-के-बाद-अभिजीत-दीपके-का-बड़ा-दावा-दिल्ली-पुलिस-ने-मुझे</link>
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        <description><![CDATA[ शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटा दिया है और उन्हें अस्पताल लेकर गई है. इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके ने बड़ा दावा किया है.
सीजेपी चीफ ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दिल्ली पुलिस ने मुझे पीटा है और बाद में हिरासत में भी ले लिया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोनम, वांगचुक, को, धरने, से, हटाने, के, बाद, अभिजीत, दीपके, का, बड़ा, दावा-, दिल्ली, पुलिस, ने, मुझे...</media:keywords>
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        <title>राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह पहले पेश करेंगे वंदे मातरम बिल, अपमान करने पर होगी सख्त सजा</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Session Bill: राष्ट्रीय गीत &amp;lsquo;वंदे मातरम्&amp;rsquo; का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने सहित कई बिल 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बिल पहले राज्यसभा करेंगे. इस बिल में प्रावधान किया गया है कि अगर कहीं कोई वंदे मातरम का अपमान करता है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है. जिस तरह से हमारे राष्ट्रगान जन गण मन को सम्मान दिया जाता है उसी तरह का सम्मान वंदे मातरम को भी देना जरूरी होगा.
वंदे मातरम के गाने से रोका तो होगी सजा
सूत्रों के मुताबिक सरकार के रणनीतिकार पूरी तरीके से आश्वस्त हैं कि जब जरूरत पड़ेगी किसी भी बिल के लिए चाहे उसके लिए दो तिहाई की भी जरूरत पड़ेगी तो सरकार के पास सदन में पर्याप्त नंबर हैं. बताया जा रहा है कि सरकार डीएमके के लोगों से भी संपर्क में है.
इस बिल के मुताबिक अगर जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत को बीच में रोकता है या इसे गाने के दौरान बाधा डालता है तो या किसी सभा में इस ऐसे गायन के दौरा हंगामा करता है तो उसे कारावास की सजा दी जाएगी जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है. यह कैबिनेट में हाल में पारित किया गया है. यह बिल पहले राज्यसभा में पेश किया जाएगा. मोदी सरकार इससे पहले सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का गायन अनिवार्य कर चुकी है.
वंदे मातरम का अपमान होगा दंडनीय अपराध
लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने, उस पर विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रावधान करता है. सूत्रों के अनुसार, इसके माध्यम से सरकार राष्ट्रीय गीत &#039;वंदे मातरम&#039; का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना चाहती है.
बीजेपी का कहना है कि पिछली सरकारों ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े वंदे मातरम को उसका उचित स्थान नहीं दिया, क्योंकि उन्होंने गीत में हिंदू प्रतीकों के कारण मुसलमानों के एक वर्ग की आपत्तियों के आगे घुटने टेक दिए थे.
लोकसभा सचिवालय ने एक बुलेटिन जारी कर यह भी बताया कि सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसआरए) को विचार और पारित कराने के लिए भी सूचीबद्ध किया है. यह विधेयक बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन उस समय इस पर विचार और पारित नहीं कराया गया. माना जा रहा है कि उस समय केरल में विधानसभा चुनाव होने के कारण कुछ वर्गों, खासकर ईसाई परमार्थ संगठनों के विरोध के चलते इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया गया. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले बदल गई मानसून सत्र की तस्वीर?</title>
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        <description><![CDATA[ 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 यानी परिसीमन बिल को पास कराने की कोशिश होगी. अप्रैल 2026 के बजट सत्र में यह बिल 54 वोटों से गिर गया &amp;nbsp; था. लेकिन पिछले तीन महीनों में संसद का पूरा राजनीतिक गणित बदल गया है. विपक्षी गठबंधन में दरारें आ चुकी हैं, 37 सांसद चार अलग-अलग विपक्षी दलों से तोड़कर सत्ता पक्ष में आ गए हैं और कुछ क्षेत्रीय दल शर्तों के साथ समर्थन को तैयार हैं. सवाल यह है कि क्या NDA इस बार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार कर पाएगी...
क्या है 131वां संशोधन बिल और क्यों है विवादित?
यह बिल दो बड़े काम करता है:

लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 तक करना
33 फीसदी महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को परिसीमन के बाद लागू करने का संवैधानिक आधार तैयार करना.

बिल के मुताबिक, हर एक राज्य में उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का सिद्धांत वापस लाया जाएगा. विवाद इसलिए है क्योंकि तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों को डर है कि &amp;nbsp; जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ाने से उनकी सियासी ताकत घट जाएगी. जिन राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल में सफलता पाई है, वे अपने प्रतिनिधित्व में कमी से परेशान हैं.
अप्रैल 2026: जब बिल गिर गया था
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में वोटिंग हुई. कुल 528 सांसदों ने वोट डाले. संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट चाहिए थे. सरकार को 298 वोट मिले, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े. यानी 54 वोट कम &amp;nbsp; पड़ गए थे.
कांग्रेस, TMC, DMK, शिवसेना (UBT), NCP (शरद पवार), सपा, RJD और वाम दल ने साथ मिलकर बिल को हराया. DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने बिल की हार को &#039;तमिलनाडु की जीत&#039; करार दिया था.
तीन महीनों में कौन से बड़े बदलाव हुए?
अप्रैल से अब तक संसद का गणित पूरी तरह पलट चुका है. यह 1985 के दल-बदल कानून के बाद सबसे बड़ा दल-बदल है. 37 सांसद &amp;nbsp;चार विपक्षी दलों से तोड़कर सत्ता पक्ष में आ गए हैं.

TMC का बंटवारा: ममता बनर्जी की पार्टी के 20 सांसदों ने बगावत कर दी और नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव (NCPI) नाम की नई पार्टी बनाकर NDA को समर्थन दे दिया.
शिवसेना (UBT) का कमजोर होना: उद्धव ठाकरे के गुट के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गए.
AAP का विलय: आम आदमी पार्टी के 7 सांसद बीजेपी में विलय हो गए.

इन बदलावों के बाद NDA की ताकत 292 से बढ़कर 329 हो गई है. लोकसभा में फिलहाल तीन सीटें खाली हैं, इसलिए दो-तिहाई का आंकड़ा घटकर 360 हो गया है. यानी NDA अब 360 के आंकड़े से महज 31 वोट दूर है. अप्रैल में यह अंतर 62 वोट था.
&#039;मिशन 360&#039;: कहां से मिलेंगे बाकी के वोट?
केंद्र सरकार ने &#039;मिशन 360&#039; का नाम दिया है, यानी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना. NDA की निगाहें कई विपक्षी दलों पर हैं:

DMK ने कांग्रेस से नाता तोड़ा: पार्टी ने कांग्रेस के करीब बैठना भी स्वीकार नहीं किया और INDIA गठबंधन की बैठक का बहिष्कार किया. स्टालिन ने अपने सांसदों को साफ कह दिया, &#039;पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के हित राजनीतिक गठबंधनों से पहले आएंगे.&#039; वे इश्यू-बेस्ड समर्थन पर विचार करेंगे. सरकार को उम्मीद है कि अगर &#039;सभी राज्यों में 50 फीसदी सीट बढ़ाने&#039; की गारंटी बिल में शामिल की जाए, तो DMK समर्थन कर सकता है.
NCP (शरद पवार) 8 सांसद: सुप्रिया सुले ने साफ किया है कि अगर सरकार हर राज्य में 50 फीसदी सीट बढ़ाने की लिखित गारंटी दे, तो NCP समर्थन पर विचार कर सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, &#039;हमारे पास बिल का टेक्स्ट नहीं है. जब होगा, 24 घंटे में जवाब देंगे.&#039; NCP ने अभी कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है.
शिवसेना (UBT) को कशमकश: संजय राउत ने कहा है कि अगर सरकार विपक्ष के संशोधनों को शामिल करती है, तो वे पुनर्विचार कर सकते हैं.
DMK और NCP(SP) का साथ: एकसाथ दोनों का समर्थन मिल जाए, तो NDA की संख्या 329 से बढ़कर 359 हो जाएगी. BJD और YSRCP जैसे कुछ और क्षेत्रीय दलों के समर्थन से 360 का आंकड़ा पार किया जा सकता है.

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दावा किया, &#039;अब NDA के पास दो-तिहाई बहुमत है. महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पास हो जाएं&#039;.
विपक्ष की रणनीति: बिल को गिराने की कोशिश
विपक्षी गठबंधन INDIA अब पहले जैसा एकजुट नहीं रहा. TMC बंट चुकी है, शिवसेना (UBT) कमजोर हुई है, DMK कांग्रेस से अलग हो गया है और NCP (शरद पवार) समर्थन की शर्त रख रही है.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है. खरगे कहा, &#039;131वां संशोधन बिल अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा. अब सरकार संशोधित बिल ला रही है, जिसे देखे बिना कोई फैसला नहीं लिया जा सकता.&#039;
विपक्ष के लिए तत्काल उद्देश्य NDA को 360-वोट की सीमा से नीचे रखना है. अगर NDA दो-तिहाई समर्थन हासिल करने में विफल रहती है, तो संविधान संशोधन एक बार फिर गिर जाएगा. संसद में:

19 जुलाई: सर्वदलीय बैठक
20 जुलाई: मानसून सत्र शुरू
21 जुलाई: NDA संसदीय दल की बैठक (प्रधानमंत्री मोदी संबोधित करेंगे)
13 अगस्त: सत्र समाप्त

तो क्या मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास होगा या नही?
चार बड़े बदलाव समीकरण को पूरी तरह बदल रहे हैं:

संख्यात्मक बदलाव: NDA अब 329 सांसदों के साथ 360 के आंकड़े से महज 31 वोट दूर है.
राजनीतिक बदलाव: TMC, शिवसेना (UBT) और AAP में बगावत/विलय से NDA मजबूत हुई है.
सामरिक बदलाव: NCP(SP) और DMK के शर्तों के साथ समर्थन से NDA और करीब आ सकती है.
बिल का फॉर्मूला: सरकार &#039;सभी राज्यों में 50 फीसदी सीट बढ़ाने&#039; की गारंटी देकर दक्षिणी राज्यों की चिंता दूर करने की कोशिश कर रही है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब अगर NDA DMK के 22 और NCP(SP) के 8 सांसद अपने साथ ला पाई, तो बिल पास हो सकता है. अगर नहीं तो यह सत्र अप्रैल 2026 की तरह ही निराशा ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Brij Bhushan Sharan Singh: &amp;apos;अगर इमारतें अवैध हैं तो...&amp;apos;, आजम खान की यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन को लेकर क्या बोले बृजभूषण सिंह</title>
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        <description><![CDATA[ समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की तरफ से स्थापित यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के आदेश को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता बृज भूषण शरण सिंह ने प्रतिक्रिया दी है. मीडिया से बातचीत के दौरान बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने जो जानकारी सुनी है, उसके अनुसार इस मामले में करीब 38 इमारतें शामिल हैं.&amp;nbsp;
बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि इनमें से अधिकांश इमारतों को कथित तौर पर गैर-कानूनी बताया जा रहा है. उन्होंने कहा, &#039;मैंने जो सुना है, उसके हिसाब से करीब 38 बिल्डिंग्स इसमें शामिल हैं और उनमें से ज़्यादातर कथित तौर पर गैर-कानूनी हैं. उन्हें क्यों गिराया जा रहा है या नहीं, यह मेरा विषय नहीं है. अगर वे गैर-कानूनी हैं तो उन्हें गिराया जा रहा है.

Gonda, Uttar Pradesh: On the demolition order of 38 buildings at the university founded by SP leader Azam Khan, BJP leader Brij Bhushan Sharan Singh says, &quot;From what I have heard, around 38 buildings are involved, and most of them are allegedly illegal. Why they are being&amp;hellip; pic.twitter.com/PyijAXySaa
&amp;mdash; IANS (@ians_india) July 17, 2026




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बृज भूषण शरण सिंह ने मामले पर और क्या कहा?
बृज भूषण शरण सिंह ने इस मामले पर अधिक टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि यह संबंधित विभागों और प्रशासन का विषय है. उन्होंने संकेत दिया कि अगर किसी निर्माण को नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है. आजम खान की यूनिवर्सिटी से जुड़े इस मामले को लेकर पहले से ही कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई चल रही है. अब 38 इमारतों को गिराने के आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. वहीं इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं. फिलहाल संबंधित अधिकारियों की ओर से आदेश के आधार और आगे की कार्रवाई को लेकर प्रक्रिया जारी है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Brij, Bhushan, Sharan, Singh:, अगर, इमारतें, अवैध, हैं, तो..., आजम, खान, की, यूनिवर्सिटी, पर, बुलडोजर, एक्शन, को, लेकर, क्या, बोले, बृजभूषण, सिंह</media:keywords>
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        <title>ED Raid: MP में 70 करोड़ की MDMA ड्रग्स तस्करी मामले में ED का बड़ा एक्शन! इंदौर&amp;मंदसौर में ताबड़तोड़ छापेमारी</title>
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        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के तहत ED ने मध्य प्रदेश में ड्रग्स तस्करी के बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए इंदौर और मंदसौर के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. ये कार्रवाई करीब 70 करोड़ रुपये कीमत की 70 किलो एमडीएमए (मेफेड्रोन) ड्रग्स की कथित तस्करी से जुड़े मामले में की गई.&amp;nbsp;
ये जांच इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी. एफआईआर में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कई आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. &amp;nbsp;जांच के दौरान ED को पता चला कि मामले का एक मुख्य आरोपी अपने सभी पुराने ठिकाने छोड़कर फरार हो गया था.

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ED की टीम ने आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी
ED की टीम ने तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी और आधुनिक जांच तकनीकों की मदद से कई दिनों तक आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी. जांच के दौरान उसकी लोकेशन हैदराबाद, बीकानेर और इंदौर तक ट्रैक की गई. आखिरकार आरोपी को इंदौर के एक ऐसे पते से तलाश लिया गया, जिसकी जानकारी पहले एजेंसी के पास नहीं थी.इसके बाद उसके ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया. &amp;nbsp;छापेमारी के दौरान ED को कई अहम दस्तावेज, डिजिटल सबूत और आरोपियों की संपत्ति तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मिले है. कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए है. जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी. एजेंसी अब ये पता लगाएगी कि ड्रग्स तस्करी से कमाए गए पैसे को कहां-कहां लगाया गया और मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था.&amp;nbsp;
ED को जांच के दौरान बैंक लॉकर भी मिला
जांच के दौरान एक आरोपी के रिश्तेदार के नाम पर बैंक लॉकर भी मिला है. ED अब उस लॉकर की अलग से तलाशी और जांच कर रही है. एजेंसी का मानना है कि बरामद सबूतों से ड्रग्स तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क, संपत्तियों और इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है. &amp;nbsp;ED ने कहा है कि मामले में सभी संदिग्ध लोगों की भूमिका और ड्रग्स से कमाई गई रकम के लेन-देन की गहन जांच जारी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;शराब&amp;सिगरेट पर अतिरिक्त टैक्स लगाइए, लेकिन बेटियों को...&amp;apos;, SC ने दिया अदालतों में महिलाओं के लिए बेहतर व्यवस्था का आदेश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/शराब-सिगरेट-पर-अतिरिक्त-टैक्स-लगाइए-लेकिन-बेटियों-को-sc-ने-दिया-अदालतों-में-महिलाओं-के-लिए-बेहतर-व्यवस्था-का-आदेश</link>
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        <description><![CDATA[ देश की जिला और तहसील अदालतों में महिला वकीलों के लिए शौचालय समेत दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए राज्यों से कहा है कि वह 6 सप्ताह में इस बारे में कदम उठाएं.
महिला वकीलों को कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने को कोर्ट ने बेहद ज़रूरी बताया. चीफ जस्टिस ने सूर्य कांत ने कहा, &quot;हमारी बेटियां जर्जर इमारतों में और दयनीय स्थितियों में काम कर रही हैं. इस स्थिति में बदलाव हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं न होना उनके आत्मसम्मान और काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है.&quot;

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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने जिस याचिका पर यह आदेश दिया है, उसमें देश भर की अदालतों में महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं के अभाव और युवा वकीलों की आर्थिक चुनौतियों का सवाल उठाया गया है. याचिकाकर्ताओं ने हर कोर्ट में &#039;लेडीज बार रूम&#039; की मांग की है. साथ ही, जूनियर वकीलों को आर्थिक सहायता देने के लिए &#039;यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड&#039; बनाने की भी मांग याचिका में की गई है. सारिका त्यागी, सीमा वशिष्ठ समेत 6 महिला वकीलों की इस याचिका पर कोर्ट ने 19 जून को नोटिस जारी किया था. नोटिस के बाद शुक्रवार, 17 जुलाई को मामला पहली बार सुनवाई के लिए लगा. केंद्र सरकार के लिए पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा कि याचिका में रखी गई मांगों पर वह राज्यों के एडवोकेट जनरल से बात करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को लेकर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 6 सप्ताह बाद सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश देते हुए सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल से कहा कि वह 2 सप्ताह के भीतर अपने यहां की अदालतों में स्वच्छता सुविधाओं की जमीनी स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपें. इस रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग 4 सप्ताह के भीतर शौचालयों का निर्माण कार्य शुरू करे. कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में फंड या बजट की कमी का कोई बहाना स्वीकार नहीं करेगा. राज्य सरकारें चाहें तो धन जुटाने के लिए शराब या सिगरेट पर अतिरिक्त टैक्स लगा दें. उनके ऐसे कदम को सुप्रीम कोर्ट कानूनी मान्यता देगा.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>UP के अलीगढ़ निवासी अमन की पैदलयात्रा पहुंची आदिलाबाद, CM विजय से मिलने के तमिलनाडु जा रहा युवक</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश के अमन नाम के एक युवक ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से तमिलनाडु तक पदयात्रा शुरू की है. अमन की यह पदयात्रा गुरुवार (16 जुलाई, 2026) को तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में पहुंच गई है. इससे पहले अमन ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से मिलने के लिए अलीगढ़ से हैदराबाद तक पदयात्रा की थी.
अब एक बार फिर वह मुख्यमंत्री विजय थलपति से मिलने के लिए राष्ट्रीय ध्वज लेकर यूपी के अलीगढ़ जिले से तमिलनाडु तक पदयात्रा पर निकल पड़ा है. इस महीने तीन जुलाई को अमन ने अलीगढ़ से अपनी पदयात्रा शुरू की थी और आज गुरुवार (16 जुलाई, 2026) वह तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में पहुंच गया है. उसकी पदयात्रा का आज 14वां दिन है.
थलापति विजय से मिलने क्यों जा रहा अमन?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति के प्रति प्रशंसा उनके तरफ से किए जा रहे विकास कार्यों और जनता को दी जा रही कल्याणकारी योजनाओं पर खुशी व्यक्त करते हुए, अमन ने एबीपी न्यूज से बात की और कहा कि मुख्यमंत्री विजय थलपति से मिलने के लिए पदयात्रा करना उनकी इच्छा थी.
उन्होंने कहा कि देश को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति जैसे नेताओं की जरूरत है. उनके प्रति प्रशंसा के साथ-साथ, वह राज्य में उनके द्वारा की जा रही प्रगति से भी बहुत खुश हैं. उन्होंने कहा कि यह निर्णय पदयात्रा के दौरान लिया गया था.

सीएम विजय से मिलकर उनके कामों के लिए धन्यवाद करेंगे अमन
अमन ने बताया कि वह इससे पहले 2025 में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से मिलने के लिए पदयात्रा पर गए थे और उनसे मुलाकात भी की थी. उन्होंने कहा कि वह फिलहाल तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति से मिलने के लिए पदयात्रा पर हैं.
उन्होंने बताया कि वह आज तेलंगाना के आदिलाबाद जिले पहुंचे और यहां से हैदराबाद होते हुए 14 दिनों में तमिलनाडु पहुंचेंगे. वहां वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति से मिलेंगे और उनके द्वारा किए जा रहे विकास और कल्याणकारी कार्यों के लिए उन्हें धन्यवाद देंगे और उनसे आने वाले दिनों में देश की राजनीति में सक्रिय होने का अनुरोध भी करेंगे.
उन्होंने बताया कि पदयात्रा के दौरान कई लोग उनसे मिल रहे हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं. वहीं, कुछ लोग गरीब होने के नाते उनका स्वागत कर रहे हैं और उनके साथ सहयोग कर रहे हैं और इसी वजह से वह अपनी पदयात्रा जारी रख रहे हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>के, अलीगढ़, निवासी, अमन, की, पैदलयात्रा, पहुंची, आदिलाबाद, विजय, से, मिलने, के, तमिलनाडु, जा, रहा, युवक</media:keywords>
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        <title>10,314 करोड़ रुपये के घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, SAGA ग्रुप के करीबी रवि शंकर तिवारी गिरफ्तार</title>
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        <description><![CDATA[ देशभर के 30 लाख से ज्यादा निवेशकों के साथ कथित तौर पर 10,314 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े बहुचर्चित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रवि शंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है. ED ने आरोपी रवि शंकर तिवारी को मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को PMLA के तहत गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के अगले दिन बुधवार (15 जुलाई, 2026) को उसे दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है.
ED के मुताबिक, ये मामला लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC), लस्टीनेस जनहित क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (LJCC), ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज कई FIR से जुड़ा है. उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ समेत देश के कई राज्यों में इन संस्थाओं के खिलाफ मामले दर्ज हैं.
ईडी की जांच में क्या हुआ खुलासा?
जांच में सामने आया कि इन संस्थाओं ने लोगों को जमा योजनाओं में निवेश करने पर भारी मुनाफे का लालच दिया. लाखों लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई इन योजनाओं में जमा कर दी, लेकिन बाद में निवेश की रकम का कथित तौर पर गबन कर लिया गया. ED के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में देशभर के करीब 30.51 लाख निवेशकों से लगभग 10,314 करोड़ रुपये की ठगी की गई. ये नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था.
जांच में यह भी पता चला कि रवि शंकर तिवारी साल 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले SAGA ग्रुप से जुड़ा हुआ था. वो समूह में वरिष्ठ पद पर काम करता था और एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज लिमिटेड, LUCC सहित SAGA ग्रुप की कई कंपनियों में टीम लीडर की भूमिका निभा रहा था.&amp;nbsp;

ईडी के सवालों का आरोपी ने नहीं दिया सही जवाब
जांच एजेंसी का दावा है कि रवि तिवारी ने विदेश में मौजूद समीर अग्रवाल की मदद से LUCC और LJCC के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई. PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयान और अन्य जांच के दौरान ईडी को रवि तिवारी की भूमिका से जुड़े कई अहम सुराग मिले. जांच में ये भी सामने आया कि SAGA ग्रुप की विभिन्न कंपनियों से रवि तिवारी और उसके परिवार के बैंक खातों में बड़ी रकम जमा कराई गई थी. जब ईडी ने इन पैसों के स्रोत के बारे में पूछा तो रवि तिवारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका.
आरोपी ने अपने और अपने परिजनों के नाम कई संपत्तियां खरीदीं
ईडी के मुताबिक, रवि तिवारी का कई कंपनियों में हित था. इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को अलग-अलग खातों में भेजने, घुमाने और निकालने के लिए किया गया. जांच में ये भी पता चला कि रवि तिवारी ने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर कई आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां खरीदीं, जिनके लिए कथित तौर पर घोटाले से हासिल धन का इस्तेमाल किया गया.
इस मामले में ED पहले ही कई अचल संपत्तियां जब्त कर चुकी है. एजेंसी अब रवि तिवारी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क, धन के प्रवाह और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है. ईडी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः ED Action: ED का बड़ा एक्शन! दिल्ली से बंगाल तक 5 राज्यों में 13 ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड, विदेशी फंडिंग नेटवर्क की जांच तेज ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>10, 314, करोड़, रुपये, के, घोटाले, में, का, बड़ा, एक्शन, SAGA, ग्रुप, के, करीबी, रवि, शंकर, तिवारी, गिरफ्तार</media:keywords>
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        <title>बेंगलुरु में 22 वर्षीय लॉ छात्रा की मौत, प्रेम संबंध विवाद में हत्या का आरोप; दो भाई गिरफ्तार</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के जीवन बीमा नगर इलाके में एक 22 वर्षीय लॉ छात्रा अमृता की इलाज के दौरान मौत हो गई. अमृता पर सोमवार (13 जुलाई, 2026) को उनके घर में घुसकर जानलेवा हमला किया गया था. दो दिनों तक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद बुधवार (15 जुलाई, 2026) की शाम उन्होंने दम तोड़ दिया.
पुलिस के अनुसार, 13 जुलाई को सूर्या नामक युवक ने अमृता के घर पहुंचकर उन पर चाकू से हमला कर दिया. बताया जा रहा कि हमले से पहले उसकी अमृता की मां के साथ कहासुनी हुई थी. शोर सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे, घायल अमृता को अस्पताल पहुंचाया और आरोपी सूर्या को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.
पुलिस की जांच में क्या हुआ खुलासा?
जांच में सामने आया है कि करीब तीन साल पहले एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अमृता के परिवार की पहचान सूर्या के भाई धनुष से हुई थी. बाद में धनुष और अमृता के बीच संबंध बने, लेकिन मार्च 2026 में अमृता ने उससे दूरी बना ली.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अमृता को पता चला था कि धनुष पहले से शादीशुदा था, उसका तलाक हो चुका है और उसका एक बच्चा भी है. कथित तौर पर धनुष ने यह जानकारी उससे छिपाई थी. सच्चाई सामने आने के बाद अमृता ने रिश्ता खत्म कर दिया. रिश्ता टूटने के बाद दोनों परिवारों के बीच विवाद बढ़ गया.&amp;nbsp;

पुलिस ने हत्या का मामला किया दर्ज, जांच जारी
पुलिस का कहना है कि धनुष और उसके भाई सूर्या ने पहले अमृता के भाई तेजस को भी धमकी दी थी और बदला लेने की चेतावनी दी थी. आरोप है कि धनुष के कहने पर ही सूर्या ने अमृता के घर पहुंचकर उस पर हमला किया. गंभीर रूप से घायल अमृता का अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन बुधवार को उसकी मौत हो गई. बेंगलुरु पुलिस ने मामले को हत्या में तब्दील करते हुए सूर्या और धनुष दोनों को गिरफ्तार कर लिया है. मामले की आगे की जांच जारी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः मानसून सत्र: &amp;lsquo;फिर वही करने जा रही सरकार&amp;rsquo;, परिसीमन बिल लाने की खबर से भड़के खरगे, PM मोदी को लेटर ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बेंगलुरु, में, वर्षीय, लॉ, छात्रा, की, मौत, प्रेम, संबंध, विवाद, में, हत्या, का, आरोप, दो, भाई, गिरफ्तार</media:keywords>
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        <title>देश का पहला प्राइवेट रॉकेट इतिहास रचने को तैयार, श्री हरिकोटा से विक्रम&amp;1 भरेगा उड़ान, US&amp;चीन की उड़ेगी नींद</title>
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        <description><![CDATA[ एक तरफ इसरो में इस्तीफों की खबर है, तो अब भारत का पहला प्राइवेट तौर पर बनाया गया ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के पहले लॉन्च पैड से अपनी टेस्ट फ्लाइट के लिए तैयार है.&amp;nbsp;
देश में बना विक्रम-1 18 जुलाई की सुबह 11:30 बजे उड़ान भरेगा. स्काईरूट एयरोस्पेस के को फाउंडर और सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कहा है कि कड़ी टेस्टिंग के बाद विक्रम-1 को उड़ान के लिए मंजूरी मिलना, भारत के अंतरिक्ष सफर में एक अहम पड़ाव है. ऐसे में माना जा रहा है कि यह पहली फ्लाइट सभी के लिए अंतरिक्ष के दरवाजे खोलने की स्काइरूट की महत्वाकांक्षा की शुरुआत है.&amp;nbsp;
इस पेलोड के साथ भारत के महान साइंटिस्ट सीवी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 18 कैरेट सोने की बनी हुई छोटी रॉकेट होल्डिंग मूर्तियां और कॉसमॉस डायमंड्स का आर्टवर्क कॉस्मिक ब्लूम में उड़ान भरेंगे.&amp;nbsp;
लॉन्च पैड पर खड़ा है विक्रम-1, जांच हुई पूरी
स्काईरूट के विक्रम-1 के सभी स्टेज को सफलतापूर्वक जोड़कर लॉन्च पैड पर खड़ा कर दिया है. स्काईरूट के लॉन्च कंट्रोल सेंटर ने लॉन्च पैड पर व्हीकल की फाइनल इंटीग्रेड जांच पूरी कर ली है. साथ ही सभी टेलीमेट्री ग्राउंड स्टेशनों और ट्रैकिंग रडार के साथ इंटरफेस की जांच भी कर ली गई है.&amp;nbsp;
जारी बयान में बताया गया है कि संबंधित अधिकारियों ने जरूरी एयरस्पेस और समुद्री नोटिस जारी कर दिए हैं. साथ ही इस मिशन को ग्लोबल लॉन्च बिजनेस में भारत के प्राइवेट सेक्टर के आने का प्रतीक माना गया है.&amp;nbsp;
यह मिशन स्टेज से अलग होने, गाइडेंस, नेविगेशन, कंट्रोल और कुल मिलाकर व्हीकर की परफोर्मेंस से जुड़ा डेटा इकट्ठा करेगा. इसमें स्काईरूट के कमर्शियली काम करने वाली लॉन्च कंपनी बनने में मदद मिलेगी. पहली टेस्ट फ्लाइट में भारतीय और इंटरनेशनल कंपनियों के चार टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन पेलोड होंगे.&amp;nbsp;
क्या है इस रॉकेट की खासियत?
इस रॉकेट में शामिल है, बेंगलुरु स्थित स्पेस स्टार्टअप ग्रहा स्पेस की तरफ से बनाया गया सोलारस एस 3 सैटेलाइट, हैदराबाद स्थित स्टार्टअप कॉस्मोसर्व स्पेस की तरफ बनाया गया, एम्ब्रेस नाम का ऑर्बिट में मलबा हटाने वाला रोबोटिक आर्म, स्काईरूट का स्कोप सैटेलाइट और जर्मन न्यूस्पेस हार्डवेयर निर्माता DCUBED का ऑर्बिट में डेमोंस्ट्रेशन.&amp;nbsp;
चंदना ने कहा है कि 18 जुलाई को हम उत्सुक हैं कि विक्रम-1 असल में उड़ान के माहौल में कैसा प्रदर्शन करता है. यह हमारी पहली टेस्ट फ्लाइट है. इसे हमें बहुत काम का डेटा मिलेगा. यह स्काईरूट के लगातार लॉन्च करने की क्षमता विकसित करने के लक्ष्य के लिए आधार का काम करेगा.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पोलावरम परियोजना: आंध्र प्रदेश BJP चीफ बोले, &amp;apos;केंद्र के पूर्ण सहयोग से राज्य की बदलेगी तस्वीर&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ आंध्र प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पोलावरम परियोजना पर तेजी से काम जारी है. इस बीच, गुरुवार (16 जुलाई, 2026) को केंद्रीय मंत्री भूपतिराजु श्रीनिवास वर्मा, राज्य मंत्री सत्य कुमार यादव, कई सांसद-विधायक, विधान परिषद सदस्यों और भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना का दौरा किया. परियोजना के दौरे के बाद आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पीवीएन माधव ने परियोजना की प्रगति देखकर हर्ष जताया है.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग से पोलावरम परियोजना आंध्र प्रदेश की तस्वीर बदल देगी. परियोजना की प्रगति देखकर हमें बहुत खुशी हुई है. दाहिनी और बाईं दोनों नहरों का निर्माण पूरा हो चुका है.
अब तक परियोजना के कई महत्वपूर्ण चरण हो चुके पूरे- माधव
आंध्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव ने कहा, &amp;lsquo;आज हमें राष्ट्रीय परियोजना के रूप में विकसित की जा रही बहुआयामी पोलावरम परियोजना का दौरा करने का सौभाग्य मिला है. साल 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद इस परियोजना को नई गति मिली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया कि बाढ़ प्रभावित सभी गांवों का आंध्र प्रदेश में विलय हो, इससे परियोजना का मार्ग प्रशस्त हुआ.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;पोलावरम को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया. इसके लिए अध्यादेश जारी किया गया. आंध्र प्रदेश सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने परियोजना के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी राज्य सरकार को सौंपी. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ा और अब तक कई महत्वपूर्ण चरण पूरे किए जा चुके हैं. मुख्य स्पिलवे का निर्माण भी पूरा हो चुका है, जबकि अर्थ-कम-रॉकफिल डैम का निर्माण कार्य जारी है.&amp;rsquo;
कार्य प्रगति संतोषजनक है, बचा हुआ काम भी जल्द पूरा होगा- माधव
आंध्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, &amp;lsquo;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज हमने परियोजना का दौरा किया. परियोजना की प्रगति देखकर हमें खुशी हुई. दाहिनी और बाईं दोनों नहरों का निर्माण पूरा हो चुका है. कल बुधवार (15 जुलाई, 2026) को मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कृष्णा-गोदावरी नदी जोड़ो कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने यह भी घोषणा की कि 10 अगस्त से बाईं नहर के माध्यम से गोदावरी का पानी अनकापल्ली तक पहुंचाया जाएगा.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

उन्होंने कहा, &amp;lsquo;हमने बाईं नहर, हेड रेगुलेटर और अन्य निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया. कार्य की गति संतोषजनक है और हमें विश्वास है कि शेष कार्य भी शीघ्र पूरे हो जाएंगे. परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर आंध्र सुजला श्रावंती योजना के तहत उत्तर आंध्र क्षेत्र तक पानी पहुंचाया जाएगा, जिससे लगभग पांच लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी.&amp;rsquo;
परियोजना के पूरा हो जाने के बाद कई राज्यों को मिलेगा फायदा
पीवीएन माधव ने कहा, &amp;lsquo;विशाखापट्टनम को पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए लगभग 23.44 टीएमसी पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जो इस परियोजना की बड़ी उपलब्धि होगी. यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्ण सहयोग से संभव हो पाया है. केंद्र सरकार अब तक इस परियोजना के लिए लगभग 30,500 करोड़ रुपये उपलब्ध करा चुकी है. इसके अतिरिक्त, लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से 960 मेगावाट जलविद्युत परियोजना विकसित की जा रही है. साथ ही इस परियोजना में नेविगेशन चैनल का भी प्रावधान है.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;इस पहल के तहत भविष्य में कई अन्य सिंचाई परियोजनाएं भी शुरू होने की उम्मीद है. पोलावरम परियोजना केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि गोदावरी का लगभग 80 टीएमसी पानी रायलसीमा की ओर मोड़कर कृष्णा बेसिन को भी स्थिरता प्रदान करेगी. इसके साथ ही तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को भी गोदावरी नदी के जल के बेहतर उपयोग से लाभ मिलेगा.&amp;rsquo;
उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. राज्य और केंद्र सरकार मिलकर इस परियोजना को शीघ्र पूरा करने के लिए कार्य कर रही है और आज इसकी प्रगति देखकर हमें अत्यंत प्रसन्नता हुई. परियोजना से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और विस्तृत जानकारी देने के लिए हम एमईआईएल (MEIL) का भी आभार व्यक्त करते हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पोलावरम, परियोजना:, आंध्र, प्रदेश, BJP, चीफ, बोले, केंद्र, के, पूर्ण, सहयोग, से, राज्य, की, बदलेगी, तस्वीर</media:keywords>
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        <title>आज कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत? बोले&amp; &amp;apos;मुझे अनशन तोड़ने को मत कहिए...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आज-कैसी-है-सोनम-वांगचुक-की-तबीयत-बोले-मुझे-अनशन-तोड़ने-को-मत-कहिए</link>
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        <description><![CDATA[ Sonam Wangchuk Hunger Strike: जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग उठाने वाले सोनम वांगचुक का अनशन गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया. लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत कमजोर होती जा रही है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल अपना अनशन खत्म नहीं करेंगे. उन्होंने समर्थकों से अपील की है कि उनसे अनशन तोड़ने की अपील करने के बजाय 20 जुलाई को प्रस्तावित &quot;चलो संसद&quot; मार्च में शामिल हों.
19 दिन के अनशन से काफी कमजोर हुए वांगचुक
देर रात जारी किए गए एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा, &quot;मैं पूरी तरह ठीक नहीं हूं, लेकिन इतनी भी खराब स्थिति में नहीं हूं.&quot; उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत कमजोर जरूर है, लेकिन उनका संकल्प अभी भी मजबूत है. ताजा मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, 59 वर्षीय वांगचुक की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर रखे हुए हैं. पिछले 24 घंटे में उनका वजन 400 ग्राम और अनशन शुरू होने के बाद अब तक करीब 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है. फिलहाल उनका वजन 57.15 किलोग्राम दर्ज किया गया है.
डॉ. अशोक लांबा ने कहा, सोनम वांगचुक का वज़न अब तक 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है. हालांकि, वह अभी भी मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क और सचेत हैं. उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा, &quot;सोनम वांगचुक हमारे देश का एक अनमोल रत्न&amp;nbsp; हैं. सरकार से हमारी विनती है कि उनके अनशन को समाप्त कराने के लिए गंभीर प्रयास करे और बातचीत के जरिए समाधान निकाले.&quot;
डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उनका रक्तचाप 105/76 mmHg, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन स्तर 97 प्रतिशत दर्ज किया गया है. डॉक्टरों का कहना है कि वह पूरी तरह सचेत हैं और मानसिक रूप से भी सामान्य हैं, लेकिन उनकी स्थिति को देखते हुए 24 घंटे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है.
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20 जुलाई को &#039;चलो संसद&#039; मार्च की अपील
वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह न करें. उन्होंने कहा कि यदि लोग वास्तव में उनके आंदोलन का समर्थन करना चाहते हैं, तो 20 जुलाई को होने वाले शांतिपूर्ण &quot;चलो संसद&quot; मार्च में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें.
&amp;nbsp;

I&amp;rsquo;m Not in good shape but not so bad either...Rather than asking me to break my fast please join me on 20th July... Peaceful March to the Parliament.#cockroachjanataparty #jantarmantar #cjpprotest #chalosansad pic.twitter.com/QZ6VyxVMAR
&amp;mdash; Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 15, 2026



अन्य छात्र नेता भी भूख हड़ताल पर
जंतर-मंतर पर वांगचुक के साथ कई छात्र संगठन भी आंदोलन में शामिल हैं. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के मंच पर नेहा, मनीष और आमीन भी लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं. संगठन के अनुसार, नेहा का वजन 5.85 किलोग्राम, जबकि मनीष और आमीन का वजन क्रमशः 8.2 और 8.3 किलोग्राम तक कम हो चुका है. तीनों का ब्लड शुगर स्तर भी सामान्य से नीचे पहुंच गया है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आज, कैसी, है, सोनम, वांगचुक, की, तबीयत, बोले-, मुझे, अनशन, तोड़ने, को, मत, कहिए...</media:keywords>
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        <title>NEET में 5 लाख की डील, 111 सवाल और कोचिंग कनेक्शन... CBI ने खोली परत&amp;दर&amp;परत साजिश</title>
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        <description><![CDATA[ NEET Paper Leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है. एजेंसी ने स्पेशल कोर्ट को बताया कि महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर के संचालक ने परीक्षा से पहले केमिस्ट्री के सवाल हासिल करने के लिए कथित तौर पर 5 लाख रुपये दिए थे. CBI का दावा है कि यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश का हिस्सा था और इसमें कई लोग शामिल थे.
कोचिंग संचालक पर गंभीर आरोप
CBI के मुताबिक, लातूर के कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर परीक्षा से पहले लीक हुए केमिस्ट्री के सवाल हासिल किए. एजेंसी ने कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा कि इसके बदले कथित तौर पर 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया था.
NTA पैनल से जुड़े व्यक्ति से मिले सवाल
जांच एजेंसी का आरोप है कि मोटेगांवकर को ये सवाल पी.वी. कुलकर्णी से मिले थे, जो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उस पैनल का हिस्सा थे जिसने NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र तैयार किया था. CBI ने यह भी बताया कि मोटेगांवकर का बेटा कुलकर्णी की केमिस्ट्री ट्यूशन क्लास में पढ़ता था और वहीं से कथित तौर पर ये सवाल उपलब्ध कराए गए.
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मोबाइल से मिले हाथ से लिखे सवाल
जांच के दौरान CBI ने मोटेगांवकर का मोबाइल फोन जब्त किया. एजेंसी के अनुसार, फोन में 36 तस्वीरें मिलीं, जिनमें पांच डुप्लिकेट थीं. इन तस्वीरों में हाथ से लिखे केमिस्ट्री के 132 सवाल दर्ज थे. CBI का दावा है कि इनमें से 111 सवाल NTA द्वारा तैयार किए गए NEET-UG 2026 के मास्टर क्वेशन सेट से मेल खाते हैं. एजेंसी का कहना है कि ये नोट्स कथित तौर पर कुलकर्णी की केमिस्ट्री क्लास में दिए गए सवालों के आधार पर तैयार किए गए थे.
जमानत का किया विरोध
CBI ने स्पेशल कोर्ट में मोटेगांवकर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य इस मामले में उनकी भूमिका की ओर इशारा करते हैं. इसलिए उन्हें जमानत देना जांच को प्रभावित कर सकता है.
क्या है पूरा मामला?
NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी. पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी थी. इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई. फिलहाल CBI इस मामले में कई पहलुओं की जांच कर रही है और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश में जुटी है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>NEET, में, लाख, की, डील, 111, सवाल, और, कोचिंग, कनेक्शन..., CBI, ने, खोली, परत-दर-परत, साजिश</media:keywords>
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        <title>&amp;apos;हर जान की कीमत, अगर जरूरत पड़े तो...&amp;apos; सोनम वांगचुक को लेकर याचिका पर हाईकोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश</title>
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        <description><![CDATA[ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनकी भूख हड़ताल को लेकर एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी, जिस पर गुरुवार (16 जुलाई) को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. अदलात ने उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की. कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति की जान की अहमियत है. उसने केंद्र सरकार को एक निर्देश भी दिया है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि हर नागरिक का जीवन अहम है और सरकार की जिम्मेदारी है कि उसके जीवन की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करे. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सोनम वांगचुक की हर दिन डॉक्टर जांच करेंगे. उन्होंने कोर्ट से बताया कि सोनम वांगचुक पर हर दिन नजर रखी जाती है और रिपोर्ट भी तैयार होती है.

अदालत ने सवाल किया कि क्या सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए कोई व्यवस्था तय की गई है कि नहीं. इस पर जवाब में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वांगचुक का रोजाना मेडिकल चेक-अप होता है. वे जब भी इजाजत देते हैं सरकारी डॉक्टर पहुंचते हैं. &amp;nbsp;
वांगचुक को लेकर कोर्ट ने क्या दिया निर्देश
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वांगचुक की हर दिन डॉक्टर जांच को जारी रखें. उसने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि अगर डॉक्टरों की राय में किसी प्रकार के मेडिकल हेल्प की जरूरत महसूस होती है तो तुरंत उचित कदम उठाए जाएं. अदालत ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति का जीवन अनमोल है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है.
बता दें कि सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से पेपर लीक के मामले को लेकर भूख हड़ताल पर हैं. उनके साथ कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य भी धरने पर हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा यह धरना अभी तक खत्म नहीं हो सका है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हर, जान, की, कीमत, अगर, जरूरत, पड़े, तो..., सोनम, वांगचुक, को, लेकर, याचिका, पर, हाईकोर्ट, का, केंद्र, सरकार, को, निर्देश</media:keywords>
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        <title>उत्तर प्रदेश में ED का एक्शन! आतंकी फंडिंग और बांग्लादेशी&amp;रोहिंग्या घुसपैठ नेटवर्क के 13 ठिकानों पर रेड</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर प्रदेश में कथित आतंकी फंडिंग और अवैध घुसपैठ से जुड़े एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (16 जुलाई 2026) को बड़ी कार्रवाई की. ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत राज्य के 13 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की गई है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि एक संगठित गिरोह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध तरीके से घुसपैठ कराने का काम कर रहा था. इसके साथ ही उनके लिए फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार कराए जा रहे थे और उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में बसाने की व्यवस्था की जा रही थी.
ED के अनुसार जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं को विदेशों से बड़ी मात्रा में धनराशि प्राप्त हो रही थी. एजेंसी का आरोप है कि इस धन को कई बैंक खातों, कथित फर्जी खातों और विभिन्न वित्तीय लेनदेन के माध्यम से घुमाया जाता था. जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. ED को नकद निकासी और छोटी-छोटी रकम को अलग-अलग संदिग्ध व्यक्तियों तक पहुंचाने से जुड़े सुराग भी मिले हैं. एजेंसी अब इन वित्तीय लेनदेन की डिटेल जांच कर रही है.

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छापेमारी के दौरान ED ने क्या कब्जे में लिए?
छापेमारी के दौरान ED ने कई दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं. एजेंसी का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क और धन के स्रोत का पता लगाया जा सके. ED ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और शुरुआती जांच में मिले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच के दौरान और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं. फिलहाल ED ने किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है और मामले की डिटेल जांच जारी है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित नेटवर्क किस लेवल तक एक्टिव था और इसमें कौन-कौन लोग या एजेंसी शामिल थीं.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>उत्तर, प्रदेश, में, का, एक्शन, आतंकी, फंडिंग, और, बांग्लादेशी-रोहिंग्या, घुसपैठ, नेटवर्क, के, ठिकानों, पर, रेड</media:keywords>
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        <title>Marital Dispute: पति से झगड़ा है तो उसकी नौकरी पर हमला क्यों? वैवाहिक विवाद पहुंचा दफ्तर तो सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता</title>
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        <description><![CDATA[ वैवाहिक विवाद के दौरान पत्नियों की तरफ से पति के दफ्तर में शिकायत करने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. जस्टिस बी वी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आखिर इससे क्या हासिल होता है? पति की नौकरी छीनकर क्या मिलेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की वह गाजियाबाद के एक दंपति से जुड़ा है. दोनों के बीच तलाक का मामला लंबित है. उन्होंने एक दूसरे के खिलाफ कई और केस भी दर्ज करवा रखे हैं. इनमें से एक केस मानहानि का भी है. उस केस को गाजियाबाद ट्रांसफर करवाने के लिए महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

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पति ने मानहानि का यह मुकदमा कब दर्ज किया?
वायु सेना में काम करने वाले पति ने मानहानि का यह मुकदमा तब दर्ज करवाया, जब पत्नी ने उसके खिलाफ वायु सेना मुख्यालय में एक शिकायत दी. पत्नी ने उसपर नौकरी पर रहते हुए व्यापार करने का आरोप लगाते हुए मुख्यालय में एक ज्ञापन दिया. इसे अपनी मानहानि बताते हुए पति ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया. पत्नी का कहना है कि पति ने अपने एक दोस्त के जरिए उस पर कई झूठे केस करवा रखे हैं. उनमें से एक केस वायु सेना से पति को मिले हेलमेट की चोरी का भी है. इस मामले में उसके भाई को भी आरोपी बनाया गया है. महिला के वकील ने जजों को बताया कि वायु सेना मुख्यालय जाने के पीछे उसका मकसद इस बारे में जानकारी जुटाना था.
जस्टिस नागरत्ना ने दोनों पक्षों से क्या कहा?
जस्टिस नागरत्ना ने दोनों पक्षों से कहा कि आप तलाक के लिए पहले से लड़ रहे हैं. फिर एक दूसरे के खिलाफ अलग से कई तरह की कार्रवाई क्यों कर रहे हैं? आप लोगों को एक दूसरे के खिलाफ दर्ज करवाए गए बाकी मुकदमे वापस लेने पर विचार करना चाहिए. &amp;nbsp;सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वैवाहिक विवाद में पत्नियों को गुजारा भत्ते की ज़रूरत पड़ती है. बाद में एकमुश्त सेटलमेंट भी होता है. ऐसे में पति की आमदनी का जरिया खत्म कर देने की कोशिश करना समझ से परे है. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुलह के लिए अपने मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया. कोर्ट ने कहा है कि दोनों पक्ष मध्यस्थ की मौजूदगी में समाधान निकालने का प्रयास करें. अगर विवाद नहीं सुलझता है तो फिर आगे सुनवाई की जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Marital, Dispute:, पति, से, झगड़ा, है, तो, उसकी, नौकरी, पर, हमला, क्यों, वैवाहिक, विवाद, पहुंचा, दफ्तर, तो, सुप्रीम, कोर्ट, ने, जताई, चिंता</media:keywords>
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        <title>ममता के करीबी मदन मित्रा ने बदला पाला तो आया TMC  का रिएक्शन, कहा &amp; &amp;apos;उनके जाने से...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ममता-के-करीबी-मदन-मित्रा-ने-बदला-पाला-तो-आया-tmc-का-रिएक्शन-कहा-उनके-जाने-से</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ममता-के-करीबी-मदन-मित्रा-ने-बदला-पाला-तो-आया-tmc-का-रिएक्शन-कहा-उनके-जाने-से</guid>
        <description><![CDATA[ ममता बनर्जी के करीब नेताओं में गिने जाने वाले टीएमसी के दिग्गज नेता और कमारहाटी से विधायक मदन मित्रा ने बुधवार (15 जुलाई) को अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो गए. उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी वजह से ही पार्टी की यह हालत हुई है. मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया दी है.
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, &#039;मुझे उनके जाने का बहुत दुख है. वे लंबे समय से हमारे साथ थे और चुनाव में हार के बाद भी हमारे साथ खड़े रहे.उनका जाने का फैसला निराशाजनक है.&#039;

#WATCH | Kolkata, West Bengal: On MLA Madan Mitra&#039;s resignation, TMC MP Saugata Roy says, &quot;... I am saddened that he has left. He was with us for a very long time and stood by us even after our election defeat. His decision to leave is disappointing...&quot; pic.twitter.com/jG9nWpZFTJ
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 15, 2026



अभिषेक बनर्जी को ठहराया जिम्मेदार
मित्रा ने कहा, &#039;मैं टीएमसी के साथ था और आज भी टीएमसी में ही हूं. मैंने सिर्फ एक गुट से दूसरे गुट में कदम रखा है. पार्टी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी की है.&#039; उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में उनके पास जो भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां थीं, उनसे उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. आगे कहा, &#039;मैं सिर्फ तृणमूल का विधायक नहीं हूं, मैं पूरे बंगाल का विधायक हूं. मैं विधानसभा का सदस्य हूं. मैंने तृणमूल के लिए सब कुछ छोड़ दिया. मेरे पास जो भी पद थे, उन सभी से मैंने इस्तीफा दे दिया.
बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा का आया पहला रिएक्शन, बोले - &#039;ममता बनर्जी का फोटो दिल में लेकिन...&#039;
ममता गुट को लगा बड़ा झटका
विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में हुई टूट के बीच मदन मित्रा का यह कदम ममता बनर्जी के गुट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है. इससे पहले 60 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दूसरे गुट में शामिल हो चुके थे, जबकि ममता बनर्जी के साथ अब बहुत कम विधायक बचे हैं. मदन मित्रा को ममता बनर्जी के भरोसेमंद और वफादार नेताओं में से एक माना जाता था. उन्हें संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं.
पत्नी-बेटे को ईडी ने भेजा समन
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब ईडी ने पश्चिम बंगाल के कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में मदन मित्रा की पत्नी और उनके बेटों को समन भेजा था. समन मिलने के बाद मित्रा ने मध्य कोलकाता में दूसरे गुट के विधायक संदीपन साहा के घर जाकर पूर्व तृणमूल विधायक स्वर्ण कमल साहा से मुलाकात की. इसके बाद उनके गुट बदलने की अटकलें तेज हो गईं थीं.
&#039;अभिषेक बनर्जी बहुत बुरे हैं...&#039;, TMC में टूट के बीच बोलीं ममता, बागियों को लेकर बड़ा ऐलान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ममता, के, करीबी, मदन, मित्रा, ने, बदला, पाला, तो, आया, TMC, का, रिएक्शन, कहा, उनके, जाने, से...</media:keywords>
    </item>
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        <title>परिसीमन और महिला आरक्षण पर बदल गया नंबर गेम? मानसून सत्र में फिर बिल पेश करने की तैयारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/परिसीमन-और-महिला-आरक्षण-पर-बदल-गया-नंबर-गेम-मानसून-सत्र-में-फिर-बिल-पेश-करने-की-तैयारी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/परिसीमन-और-महिला-आरक्षण-पर-बदल-गया-नंबर-गेम-मानसून-सत्र-में-फिर-बिल-पेश-करने-की-तैयारी</guid>
        <description><![CDATA[ केंद्र सरकार मानूसन सत्र में फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन बिल लाने की तैयारी में है. इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों के साथ सरकार चर्चा भी कर रही है. इसी बीच परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले के संकेत ने संसद के नंबर गेम को और दिलचस्प बना दिया है. सीटें बढ़ाने और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा पर चर्चा की शर्त के साथ एनसीपी शरदचंद्र पवार समर्थन पर विचार कर सकती है. सरकार की नजर JMM, AAP और NC के सांसदों पर भी है, लेकिन इस खेल की सबसे बड़ी चाबी डीएमके के हाथ में है.
लोकसभा में टीएमसी और शिवसेना सांसदों के पाला बदलने के बाद अब एनडीए के पास 318 सांसद हैं. दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए. यानी सरकार के सामने 42 अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती है. हालांकि जब पिछले सत्र में बिल को लेकर वोटिंग हुई थी तब YSRCP ने बिल के पक्ष में मतदान किया था उसको जोड़ने के बाद 38 वोट की जरूरत रह जाती है.

लोकसभा का नंबर गेमकुल प्रभावी संख्या- 540, तीन सीटें अभी खाली है.दो-तिहाई बहुमत- 360NDA के पास 322 वोट अभी हैं.सरकार को चाहिए 38 अतिरिक्त वोट
अब सरकार की नजर विपक्षी खेमे के कई सांसदों पर है. समाजवादी पार्टी के 37 सांसद, आरजेडी के 4 सांसद और एनसीपी शरदचंद्र पवार के 8 सांसद. सूत्रों के मुताबिक JMM के 3 और NC के 2 सांसदों के साथ भी सरकार समपर्क में है. संसद में नंबर गेम ऐसा है हर सांसद का हिसाब हो रहा है.सरकार समर्थन जुटाने के साथ-साथ वोटिंग से दूरी के विकल्प पर भी काम कर रही है.
शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद इस पूरे गणित में बड़ा फैक्टर हैं. अगर सभी राज्यों में 50 फीसदी तक सीटें बढ़ाने के फॉर्मूले पर सहमति बनती है तो एनसीपी शरदचंद्र पवार के रुख में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा. 8 सांसद सरकार के साथ आते हैं तो सरकार द्वारा लाए जाने वाले बिल के समर्थन में संख्या 330 हो जाएगी. लेकिन फिर भी 30 वोट की जरूरत रहेगी, यानी गणित अभी भी पूरा नहीं हुआ है.&amp;nbsp; यहीं से शुरू होता है DMK FACTOR.
लोकसभा- 22 सांसदराज्यसभा- 8 सांसदकुल- 30 सांसद
डीएमके के पास लोकसभा में 22 सांसद हैं.अगर डीएमके सरकार के समर्थन में वोट करती है तो सरकार का आंकड़ा 352 तक पहुंच जाएगा. यानी 360 के बहुमत से सिर्फ 8 वोट दूर. और अगर डीएमके समर्थन के बजाय एब्सटेन करती है , तो सदन में मौजूद सांसदों की संख्या घटेगी और बहुमत का आंकड़ा भी नीचे आएगा. मतलब डीएमके चाहे समर्थन करे या दूरी बनाए दोनों ही स्थिति में उसका फैसला अहम है. इसीलिए कहा जा रहा है परिसीमन की चाबी अब भी डीएमके के हाथ में है.
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राज्यसभा में सरकार का नंबर गेमदो-तिहाई बहुमत- 164सरकार के पास- 155बंगाल उपचुनाव के बाद- 158चाहिए- 6 सांसदों का समर्थनया 12 सांसद ABSTAIN करें
राज्यसभा में सरकार का नंबर गेम लोकसभा के मुकाबले आसान दिखाई दे रहा है. बंगाल की तीन सीटों पर उपचुनाव के बाद सरकार की संख्या 158 हो जाएगी. दो-तिहाई बहुमत के लिए सिर्फ 6 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. राज्यसभा में डीएमके के 8 सांसद हैं. मतलब यहां भी डीएमके समर्थन करे या एब्सटेन ,सरकार का काम आसान हो सकता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>परिसीमन, और, महिला, आरक्षण, पर, बदल, गया, नंबर, गेम, मानसून, सत्र, में, फिर, बिल, पेश, करने, की, तैयारी</media:keywords>
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        <title>PM मोदी करेंगे हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब का दौरा, 26 हजार 770 करोड़ के विकास परियोजनाओं की सौगात</title>
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        <description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (17 जुलाई, 2026) को हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब के दौरे पर जाने वाले हैं. इस दौरान पीएम मोदी तीनों राज्यों में 26,770 करोड़ से ज्यादा की लागत वाले विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे. राज्य स्तर पर बात करें, तो प्रधानमंत्री हरियाणा में 14,700 करोड़, चंडीगढ़ में 6,600 करोड़ और पंजाब में 5,470 करोड़ से ज्यादा की लागत वाले विकास परियोजनाओं को देश को समर्पित करेंगे.
हरियाणा में भारत के पहले हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे PM मोदी
पीएम मोदी के दौरे की शुरुआत हरियाणा से जिंद के शुरू होगी, जहां वे शुक्रवार (17 जुलाई) को सुबह 11 बजे जिंद रेलवे स्टेशन से जिंद और सोनीपत के बीच चलने वाले भारत के पहले हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे, जो रेलवे सेक्टर में साफ-सुथरी और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और इंटीग्रेट की गई है और स्वदेशी तकनीक पर आधारित है. पीएम मोदी के इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन की ताकत से चलने वाली ट्रेनें संचालित होती हैं.
नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का PM करेंगे उद्घाटन और शिलान्यास
इसके बाद, करीब साढ़े 11 बजे प्रधानमंत्री मोदी जिंद स्थित एकलव्य स्टेडियम में करीब 14,700 करोड़ की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, जिसमें 12,470 करोड़ से ज्यादा की लागत से तैयार नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के साथ हेल्थ और कल्चरल प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं.
नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के तहत पीएम मोदी करीब 9,680 करोड़ की लागत से बने 157.92 किमी लंबे फोर लेन, फुली-एक्सेस कंट्रोल वाले दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (पैकेज 1 टू 5) देश को समर्पित करेंगे. इसके साथ, पीएम मोदी NH-7 और NH -344 के बीच 33.81 की लंबे फोर लेन अंबाला-काला अंब हाईवे, NH-352ए पर 40.60 किमी लंबे जिंद&amp;ndash;गोहाना ग्रीनफील्ड हाईवे और कुरुक्षेत्र में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक को देश को समर्पित करेंगे. साथ ही, 24.27 की लंबे हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट का शिलान्यास भी करेंगे.
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा में कई स्वास्थ्य और सांस्कृतिक परियोजनाओं का भी शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. इसके बाद वे जनसभा को संबोधित भी करेंगे.&amp;nbsp;

चंडीगढ़ को मिलेगी 6,600 करोड़ के परियोजनाओं की सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के दौरे को पूरा करने के बाद दोपहर करीब 1:45 बजे चंडीगढ़ पहुंचेंगे, जहां वे 6,600 करोड़ से ज्यादा की लागत की स्वास्थ्य, शिक्षा और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. इसके बाद वे जनसभा को संबोधित करेंगे.
जालंधर में PM मोदी का कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी अपने तीन राज्यों के दौरे के आखिर में पंजाब के जालंधर पहुंचेंगे, जहां वे 5,470 करोड़ से ज्यादा की लागत वाली रेल और सड़क परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. इन परियोजनाओं का उद्देश्य कनेक्टिविटी को बढ़ाने, यात्रियों की सुविधाओं का विस्तार करने के साथ क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है.
जालंधर दौरे के दौरान पीएम मोदी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करीब 1,570 करोड़ की लागत से विकसित जालंधर कैंट सहित 20 राज्यों के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे. साथ ही, PM मोदी 830 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कई नई रेलवे लाइनों का उद्घाटन करेंगे और करटोली-अंबाला ट्रेन सर्विस और अमृतसर (छेहरटा)-वाराणसी रेल सेवा को भी हरी झंडी दिखाएंगे.
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी 3,070 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाले नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. इसमें दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के 30.9 किमी लंबे पैकेज-6 का उद्घाटन और 25.2 किमी लंबे 6-लेन दक्षिणी लुधियाना ग्रीनफील्ड बाईपास की शिलान्यास शामिल है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>मोदी, करेंगे, हरियाणा, चंडीगढ़, और, पंजाब, का, दौरा, हजार, 770, करोड़, के, विकास, परियोजनाओं, की, सौगात</media:keywords>
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        <title>मदन मित्रा ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, तो भड़की महुआ मोइत्रा; जानें अभिषेक बनर्जी को लेकर क्या बोले बागी विधायक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मदन-मित्रा-ने-छोड़ा-ममता-बनर्जी-का-साथ-तो-भड़की-महुआ-मोइत्रा-जानें-अभिषेक-बनर्जी-को-लेकर-क्या-बोले-बागी-विधायक</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी को बुधवार (15 जुलाई, 2026) को एक बार फिर से बड़ा झटका लगा है. बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से उनकी पार्टी में फूट पड़ रही है. इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा भी ममता बनर्जी का साथ छोड़कर ऋतब्रत बनर्जी के बागी टीएमसी गुट में शामिल हो गए हैं. वहीं, ममता बनर्जी की सहयोगी और लोकसभा में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मदन मित्रा के ऋतब्रत बनर्जी के साथ जाने को लेकर कड़ी टिप्पणी की है.
मदन मित्रा को लेकर क्या बोलीं महुआ मोइत्रा?
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने बुधवार (15 जुलाई, 2026) को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, &amp;lsquo;मदन मित्रा का ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट के साथ जाना कोई हैरानी की बात नहीं है. कल मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को मदन मित्रा की पत्नी, बहुओं और बेटों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तलब किया था, तो वे ईडी की बुलावे पर गए हैं. तो अब हमें यह समझना चाहिए कि जो आदमी परसों तक ऋतब्रत गैंग को गाली दे रहा था, वो आज अचानक वहां जाकर ऋतब्रत के बगल में बैठ रहा है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

#WATCH | Kolkata, West Bengal: On Madan Mitra quitting Mamata Banerjee&#039;s TMC and joining rebel TMC faction led by Ritabrata Banerjee, Mamata Banerjee&#039;s TMC MP Mahua Moitra says, &quot;It&#039;s not a surprise. Yesterday, his wife, daughters-in-law and sons were summoned by the ED. So, he&amp;hellip; pic.twitter.com/uvarccPytC
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 15, 2026



उन्होंने कहा, &amp;lsquo;यह ईडी के खास बुलावे पर किया गया है, इसलिए हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं. हम उनके अच्छे भाग्य और अच्छी सेहत की कामना करते हैं. ऋतब्रत गैंग के साथ काम करने में उनका अच्छा समय बीते.&amp;rsquo;
ममता बनर्जी का साथ छोड़ने पर बोले मदन मित्रा
वहीं, दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) बागी विधायकों में शामिल हो चुके मदन मित्रा ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ने को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि अब तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व संगठन को मजबूत करने के बजाय सिर्फ और सिर्फ ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को प्रमोट करने पर फोकस करते हुए काम कर रहा है.&amp;nbsp;
उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, &amp;lsquo;मैंने ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इसलिए इस्तीफा दिया, क्योंकि अब मैं वहां पूरी ताकत के साथ काम नहीं कर पा रहा था. मैंने उन सभी समितियों के पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसका मैं सदस्य रहा.&amp;rsquo;

#WATCH | Kolkata, West Bengal: After resigning from TMC, MLA Madan Mitra says, &quot;... I resigned because I was no longer able to work effectively within Mamata Banerjee&#039;s TMC. I have stepped down from all the committees I was part of. More and more of Mamata Banerjee&#039;s long-time&amp;hellip; pic.twitter.com/QiFebumEcf
&amp;mdash; ANI (@ANI) July 15, 2026



अभिषेक बनर्जी पर मदन मित्रा का बड़ा आरोप
मदन मित्रा ने कहा, &amp;lsquo;ममता बनर्जी के लंबे वक्त से सहयोगी रहने वाले लोग मेरे हिसाब से इसलिए उनका साथ छोड़कर जा रहे हैं, क्योंकि अब पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत करने के बजाए सिर्फ अभिषेक बनर्जी के प्रमोशन पर फोकस कर रही है. टीएमसी सिर्फ एक व्यक्ति की तो पार्टी है नहीं, ऐसे में मैंने कई मौकों पर ममता बनर्जी के सामने इन मुद्दों को उठाया, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.&amp;rsquo;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मुझे लगता है कि अभिषेक बनर्जी ये चाहते हैं कि कोई भी फैसला सिर्फ उनके शर्तों और नियमों के मुताबिक बने. इसके अलावा वो किसी और को महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नहीं देखना चाहते हैं और मुझे लगता है कि इसका नतीजा यह है कि पार्टी कमजोर हो रही है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः पत्नी को ED समन के एक दिन बाद करीबी मदन मित्रा ने छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, जानें BJP ने क्या कहा ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मदन, मित्रा, ने, छोड़ा, ममता, बनर्जी, का, साथ, तो, भड़की, महुआ, मोइत्रा, जानें, अभिषेक, बनर्जी, को, लेकर, क्या, बोले, बागी, विधायक</media:keywords>
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        <title>जिस PoK के लिए अमित शाह ने खाई थी कसम, क्या वो अब वापस मिलने वाला है? बगावत के विद्रोह से संकेत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जिस-pok-के-लिए-अमित-शाह-ने-खाई-थी-कसम-क्या-वो-अब-वापस-मिलने-वाला-है-बगावत-के-विद्रोह-से-संकेत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/जिस-pok-के-लिए-अमित-शाह-ने-खाई-थी-कसम-क्या-वो-अब-वापस-मिलने-वाला-है-बगावत-के-विद्रोह-से-संकेत</guid>
        <description><![CDATA[ PoK Protest: पीओके... यानी पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर... एक बार फिर सुर्खियों में है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में बीते कई हफ्तों से प्रदर्शन जारी हैं. प्रदर्शनकारी महंगाई, बेरोज़गारी, बिजली संकट, प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक अधिकारों जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं. कई जगह पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ भी नारेबाज़ी हुई है. इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और झड़पों की भी खबरें आई हैं.
हालांकि, सोशल मीडिया पर इन विरोध प्रदर्शनों को सीधे &quot;भारत में शामिल होने&quot; या &quot;पीओके भारत लौटने वाला है&quot; जैसे दावों से जोड़कर पेश किया जा रहा है. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पीओके में विरोध क्यों हो रहा है? क्या ये आंदोलन सिर्फ स्थानीय अधिकारों का है या इसके पीछे कुछ और भी है? आइए समझते हैं.
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलाकोट, मुज़फ्फराबाद, बाग और दूसरे इलाकों में पिछले कई सप्ताह से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. शुरुआत महंगाई, बिजली संकट, रोज़गार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर हुई थी. लेकिन समय के साथ आंदोलन का दायरा बढ़ता गया और प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए.
कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं. स्थानीय संगठनों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया, जबकि पाकिस्तान की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है.
विरोध क्यों हो रहा है?
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं&amp;mdash;
महंगाई पर नियंत्रणलगातार बिजली कटौती खत्म करनाबेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएंरोजगार के अवसर बढ़ानाराजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व को मजबूत करनाआंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) समेत कई स्थानीय संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से अनसुनी की जा रही हैं.
चुनाव का विरोध
27 जुलाई को प्रस्तावित चुनावों को लेकर भी विरोध तेज हुआ. कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि आरक्षित सीटों और राजनीतिक प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की वास्तविक भागीदारी नहीं है. इसी वजह से चुनाव के बहिष्कार का भी ऐलान किया गया.
इसी दौरान कुछ राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार का भी विरोध हुआ और कई जगह तनाव की स्थिति बनी.
क्या आंदोलन आजादी का है?
प्रदर्शनों के दौरान कुछ वीडियो में पाकिस्तान विरोधी नारे और आजादी की मांग भी सुनाई दी है. हालांकि पूरे आंदोलन को एक ही मांग से जोड़कर देखना सही नहीं होगा. स्थानीय स्तर पर अलग-अलग समूह अलग-अलग मांगें उठा रहे हैं. कुछ संगठन प्रशासनिक सुधार चाहते हैं, कुछ ज्यादा राजनीतिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं और कुछ समूह पाकिस्तान से अलग होने की भी बात कर रहे हैं.
ऐसे में पूरे पीओके के आंदोलन को सिर्फ &quot;भारत में विलय&quot; की मांग बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता.
भारत का रुख
भारत लगातार यह कहता रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी शामिल है, भारत का अभिन्न अंग है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि पीओके भारत का हिस्सा है और भविष्य में वह भारत का हिस्सा बनेगा. भारत ने पीओके में प्रदर्शनकारियों पर कथित बल प्रयोग और मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे भी कई बार उठाए हैं.
पाकिस्तान की चुनौती
पीओके में जारी विरोध पाकिस्तान के लिए इसलिए भी चुनौती बन गया है क्योंकि यह इलाका लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक असंतोष का सामना करता रहा है. आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई, ऊर्जा संकट और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है. इन परिस्थितियों ने विरोध प्रदर्शनों को और तेज कर दिया है.
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में असंतोष गहराता दिखाई दे रहा है. लेकिन यह कहना कि पूरा पीओके भारत में शामिल होने जा रहा है या जल्द भारत को सौंप दिया जाएगा- ऐसा दावा उपलब्ध और सत्यापित तथ्यों से सिद्ध नहीं होता. वास्तविक स्थिति यह है कि पीओके में बड़े पैमाने पर राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी है, जिसकी दिशा और परिणाम आने वाले समय में ही स्पष्ट होंगे.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>जिस, PoK, के, लिए, अमित, शाह, ने, खाई, थी, कसम, क्या, वो, अब, वापस, मिलने, वाला, है, बगावत, के, विद्रोह, से, संकेत</media:keywords>
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        <title>देश में कितने फीसदी लोगों के पास पासपोर्ट, कैसे होता है जारी? विदेश मंत्रालय ने सब साफ कर दिया</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-में-कितने-फीसदी-लोगों-के-पास-पासपोर्ट-कैसे-होता-है-जारी-विदेश-मंत्रालय-ने-सब-साफ-कर-दिया</link>
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        <description><![CDATA[ क्या पासपोर्ट का इस्तेमाल नागरिकता वेरिफिकेशन करने के लिए किया जा सकता है? इस मुद्दे पर लंबे समय से बहस छिड़ी हुई है. बीते दिनों इस पर खूब सियासी बवाल देखने को मिला था. विदेश मंत्रालय ने मंगलवार (14 जुलाई) को साफ किया है कि पासपोर्ट ऐसा डॉक्यूमेंट है, जो भारतीय नागरिकों के देश से बाहर जाने को &#039;नियंत्रित करता&#039; है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पासपोर्ट एक स्थापित प्रक्रिया के तहत किए जाने वाले उचित &amp;lsquo;वेरिफिकेशन&amp;rsquo; के बाद जारी किया जाता है और मौजूदा समय में केवल 8 प्रतिशत से भी कम भारतीय नागरिकों के पास पासपोर्ट है.
क्या बोले रणधीर जायसवाल?
जायसवाल ने कहा, &#039;भारतीय पासपोर्ट ऐसा दस्तावेज होता है जिसे पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत भारत सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों के भारत से बाहर जाने को नियंत्रित करने के लिए जारी किया जाता है.&#039; उन्होंने कहा, &#039;इसे एक तय प्रक्रिया के तहत जरूरी जांच-पड़ताल के बाद जारी किया जाता है. भारतीय नागरिकों या किसी भी अन्य व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने का काम &#039;पासपोर्ट कानून, 1967&#039; और &#039;पासपोर्ट नियम, 1980&#039; के तहत किया जाता है.&#039;
विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों ने 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर आयोजित प्रेस वार्ता में पासपोर्ट को यात्रा दस्तावेज बताया था, न कि नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज. ये टिप्पणियां इस सवाल के जवाब में आई थीं कि क्या निर्वाचन आयोग द्वारा कई राज्यों में कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
राहुल गांधी, जोसेफ विजय से जेपी नड्डा तक... जंतर-मंतर पर नीट के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए CJP ने भेजा न्योता
&#039;पासपोर्ट नागरिकता साबित करने का डॉक्यूमेंट नहीं&#039;
अधिकारियों ने कहा था कि पासपोर्ट विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाता है और यह नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं है. इन टिप्पणियों पर कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हैरानी जताई थी कि पासपोर्ट किसी व्यक्ति की नागरिकता का सबूत कैसे नहीं हो सकता. कांग्रेस ने विदेश मंत्रालय की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि सरकार उन भारतीयों के नागरिकता अधिकारों को मनमाने ढंग से नकारने की जमीन तैयार कर रही है, जिनसे वह असहमत है.
12 बाइकर्स और एक SUV मालिक पर लद्दाख प्रशासन सख्त, संरक्षित इलाकों में गैरकानूनी तरीके से गाड़ी चलाने पर लगाया भारी जुर्माना
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देश, में, कितने, फीसदी, लोगों, के, पास, पासपोर्ट, कैसे, होता, है, जारी, विदेश, मंत्रालय, ने, सब, साफ, कर, दिया</media:keywords>
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        <description><![CDATA[ लद्दाख में अधिकारियों ने 12 बाइकर्स और एक SUV के मालिक पर संरक्षित वन्यजीव इलाकों में गैर-कानूनी तरीके से गाड़ी चलाने के लिए जुर्माना लगाया है. वहीं, लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पर्यटकों से अपील की है कि वे केंद्र शासित प्रदेश का आनंद जिम्मेदारी से लें और इसके बेदाग पर्यावरण और वन्यजीवों को बचाने में मदद करें.
बाइकर्स ने 10-10 हजार, तो SUV मालिक ने भरा 50 हजार जुर्माना
संरक्षित इलाकों में गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग की बढ़ती समस्या के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए लद्दाख प्रशासन ने बाइक सवार समूहों पर जुर्माना लगाया है. सरकारी प्रवक्ता ने मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को बताया कि मोरीरी झील के पास पर्यावरण के नजरिए से संवेदनशील संरक्षित इलाकों में गैर-कानूनी तरीके से जाने के लिए 12 बाइकर्स पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
उन्होंने कहा कि पैंगोंग झील के पास SUV चलाने वाले एक और पर्यटक पर भी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के नियमों का उल्लंघन करने के लिए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
बाइकर्स का फेवरेट मोटोरिस्ट डेस्टिनेशन बना लद्दाख
पिछले कुछ सालों में, लद्दाख मोटरसाइकिल के शौकीनों के लिए देश की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक बनकर उभरा है. हालांकि, पर्यटन में बढ़ोतरी के साथ-साथ अधिकारियों ने देखा है कि पर्यटक संरक्षित वन्यजीव इलाकों में जा रहे हैं और नाज़ुक वेटलैंड्स, झील के किनारों और संवेदनशील आवासों में गाड़ियां चला रहे हैं. इससे लद्दाख के अनोखे इकोसिस्टम को कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंच रहा है और वन्यजीव परेशान हो रहे हैं.&amp;nbsp;

मामले पर क्या बोले लद्दाख के उपराज्यपाल?
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा, &amp;lsquo;लद्दाख के पहाड़, झीलें, नदियां और वन्यजीव इसकी सबसे बड़ी धरोहर हैं और ये सिर्फ यहां के लोगों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की हैं. हम लद्दाख की बेमिसाल खूबसूरती, संस्कृति और मेहमाननवाजी का अनुभव करने आने वाले हर पर्यटक का दिल से स्वागत करते हैं.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
उन्होंने कहा, &amp;lsquo;मैं सभी पर्यटकों से अपील करता हूं कि वे हमारे शानदार नजारों और अनोखे वन्यजीवों का आनंद जिम्मेदारी से लें और ऐसी किसी भी गतिविधि से बचें, जिससे हमारे नाजुक पर्यावरण को नुकसान पहुंचे या संरक्षित आवासों में खलल पड़े.&amp;rsquo; उन्होंने आगे कहा, &amp;lsquo;प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देना जारी रखेगा, लेकिन साथ ही हम उन लोगों के खिलाफ सख्ती से कानून लागू करेंगे, जो लद्दाख की अनमोल प्राकृतिक धरोहर को खतरे में डालते हैं.&amp;rsquo;
उपराज्यपाल के निर्देशों के मुताबिक की गई कार्रवाई
यह सख्ती उपराज्यपाल के उन निर्देशों के बाद की गई है, जिनमें गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग को रोकने और लद्दाख के पर्यावरण की दृष्टि से नाज़ुक इलाकों को बचाने के लिए कहा गया था. प्रवक्ता ने कहा, &amp;lsquo;लद्दाख पर्यावरण संरक्षण बल (EPF) की हालिया तैनाती के बाद इस पहल को तेजी मिली है. इस बल में 100 पूर्व सैनिक शामिल हैं, जिन्हें पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों का मौके पर ही चालान काटने का अधिकार दिया गया है.&amp;rsquo;
अधिकारी ने आगे कहा, &amp;lsquo;दोनों उल्लंघन वन्यजीव विभाग के कर्मचारियों और वन्यजीव मुखबिरों की सतर्क गश्त के दौरान पकड़े गए, जो संरक्षित इलाकों में प्रशासन की मजबूत निगरानी व्यवस्था को दर्शाता है.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बाइकर्स, और, एक, SUV, मालिक, पर, लद्दाख, प्रशासन, सख्त, संरक्षित, इलाकों, में, गैरकानूनी, तरीके, से, गाड़ी, चलाने, पर, लगाया, भारी, जुर्माना</media:keywords>
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        <title>बेंगलुरु ISIS साजिश केस में बड़ा फैसला, NIA कोर्ट ने आरोपी मोहम्मद हनीफ खान को सुनाई 7 साल की सजा</title>
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        <description><![CDATA[ भारत की जांच एजेंसी NIA की बेंगलुरु स्थित विशेष अदालत ने 2020 के चर्चित अल-हिंद ISIS आतंकी साजिश मामले में मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को बड़ी कार्रवाई की है. एनआईए की विशेष अदालत ने इस आतंकी साजिश मामले में अहम आरोपी मोहम्मद हनीफ खान को दोषी ठहराते हुए सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही, दोषी पर 48 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. मोहम्मद हनीफ खान अदालत की तरफ से इस आतंकी साजिश मामले में सजा पाने वाला पहला आरोपी है.
क्या था पूरा मामला?
NIA के मुताबिक, मोहम्मद हनीफ खान उस टीम का हिस्सा था, जिसने कर्नाटक के शिवनसमुद्र और गुंडलपेट के जंगलों में आतंकियों के प्रशिक्षण और छिपने के ठिकानों के लिए जगह तलाश की थी. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ISIS का नेटवर्क खड़ा करने और उसका ठिकाना बनाने की साजिश में शामिल था.
एजेंसी की जांच में क्या हुआ खुलासा?

NIA के मुताबिक, इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड मेहबूब पाशा था, जिसने अपने घर पर कई बैठकें कर सांप्रदायिक हिंसा फैलाने, टारगेट किलिंग करने और ISIS के एजेंडे को आगे बढ़ाने की साजिश रची थी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का कहना है कि पाशा ने हनीफ को दो पिस्टल और 60 जिंदा कारतूस भी दिए थे. इतना ही नहीं, हनीफ ने साजिश के तहत कई आरोपियों को किराये की कार से बेंगलुरु से पश्चिम बंगाल भी पहुंचाया था.&amp;nbsp;
मॉड्यूल के ऑनलाइन हैंडलर की तलाश में NIA
ये मामला जनवरी, 2020 में पहले कर्नाटक पुलिस ने दर्ज किया था, जिसे बाद में NIA ने अपने हाथ में ले लिया. अब तक इस केस में 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और सभी गिरफ्तार किए जा चुके है. एनआईए अब भी इस मॉड्यूल के ऑनलाइन हैंडलर की तलाश में जुटी है, जिसने पूरे नेटवर्क को खड़ा करने की साजिश रची थी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Weather Forecast Today: दिल्ली&amp;यूपी और हरियाणा&amp;पंजाब में आज होगी बारिश? मौसम विभाग ने जारी कर दिया ताजा अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ दक्षिण पश्चिम मानसून कमजोर होने के कारण कई जगहों पर बारिश में बदलाव देखने को मिल रहा है. उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश थम सी गई है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 15 जुलाई को नॉर्थ ईस्ट के अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है.&amp;nbsp;
मौसम विभाग के मुताबिक बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है. इन क्षेत्रों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है. इसके अलावा उत्तर भारत के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में आज भारी बारिश के आसार हैं.&amp;nbsp;

IMD के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश होगी. इस दौरान कहीं-कहीं गरज-चमक देखने को मिल सकती है. इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बाारिश के आसार हैं. कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र और सौराष्ट्र में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा.&amp;nbsp;
राजस्थान में बढ़ा पारादक्षिण पश्चिम मानसून कमजोर पड़ने के बीच राजस्थान में कई जगह हल्की बारिश हुई. बीते 24 घंटों के दौरान राज्य में कहीं-कहीं तेज हवाएं दर्ज की गईं. राज्य के कई हिस्सों में अब भी गर्मी पड़ रही है. अधिकतम तापमान गंगानगर में 41.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान सिरोही में 21.0 डिग्री सेल्सियस रहा. पश्चिम राजस्थान के जोधपुर व बीकानेर संभाग के अधिकतर भागों में आगामी एक सप्ताह तक मौसम शष्क रहेगा.&amp;nbsp;
रथ यात्रा के दौरान भयंकर बारिशरथ यात्रा के दौरान पुरी सहित ओडिशा के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इस बार रथ यात्रा 16 जुलाई को पुरी में आयोजित की जाएगी. मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बांग्लादेश तट पर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. इस कारण बुधवार से शुक्रवार तक पुरी में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इस देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है.
मौसम विभाग के मुताबिक केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में कई जगहों पर हल्की से भारी बारिश होने की संभावना है. कुछ इलाकों में गरज के साथ बौछारें और तेज हवाएं भी चल सकती हैं. हालांकि दक्षिण के कुछ तटीय क्षेत्रों में उमस बनी रह सकती है.&amp;nbsp;
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मुकदमे का फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए जज की कुर्सी पर &amp;lsquo;काला जादू&amp;rsquo;, महिला गिरफ्तार ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर आधी रात बवाल, परेड ग्राउंड में अड़कर बैठ गए कांग्रेसी, अब क्या होगा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राहुल-गांधी-के-कार्यक्रम-को-लेकर-आधी-रात-बवाल-परेड-ग्राउंड-में-अड़कर-बैठ-गए-कांग्रेसी-अब-क्या-होगा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/राहुल-गांधी-के-कार्यक्रम-को-लेकर-आधी-रात-बवाल-परेड-ग्राउंड-में-अड़कर-बैठ-गए-कांग्रेसी-अब-क्या-होगा</guid>
        <description><![CDATA[ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 17 जुलाई को देहरादून में प्रस्तावित &amp;lsquo;छात्रों की गूंज&amp;rsquo; कार्यक्रम को लेकर परेड ग्राउंड की अनुमति पर शुरू हुआ विवाद मंगलवार देर रात धरना-प्रदर्शन में बदल गया. कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आधी रात परेड ग्राउंड पहुंचकर राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. कांग्रेस ने कार्यक्रम का स्थान बदलने का फैसला किया है.&amp;nbsp;
राहुल गांधी अब छात्रों से परेड ग्राउंड के बजाय बन्नू स्कूल मैदान में संवाद करेंगे. कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है. &amp;lsquo;छात्रों की गूंज&amp;rsquo; कार्यक्रम 17 जुलाई को ही आयोजित होगा. पार्टी का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा तथा कार्यक्रम में किसी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए वैकल्पिक मैदान चुना गया है.

परेड ग्राउंड में कार्यक्रम की तैयारियों के लिए टेंट और अन्य सामग्री लेकर पहुंचे ट्रकों को मैदान में प्रवेश नहीं मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं ने देर रात विरोध का फैसला किया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत और प्रदेश सह प्रभारी मनोज यादव सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेस मुख्यालय से पैदल मार्च करते हुए परेड ग्राउंड पहुंचे. मैदान के आसपास पहले से पुलिस बल तैनात था. इसी के चलते कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई. इसके बाद नेता और कार्यकर्ता परेड ग्राउंड में धरने पर बैठ गए और कार्यक्रम की अनुमति वापस लेने का विरोध किया.
फीस लेने के बाद रोकी गई अनुमति- कांग्रेस&amp;nbsp;गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए समय से आवेदन किया था और परेड ग्राउंड के इस्तेमाल के लिए करीब 1.77 लाख रुपये जमा कराए थे. उनका दावा है कि कांग्रेस को 15, 16 और 17 जुलाई के लिए मैदान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में सरकार के दबाव में कार्यक्रम की अनुमति रोक दी गई. उन्होंने कहा कि निर्धारित शुल्क करीब 65 हजार रुपये बताया गया था, जबकि कांग्रेस ने उससे कहीं अधिक राशि जमा कराई. इसके बावजूद टेंट और दूसरे सामान से लदे ट्रकों को मैदान में प्रवेश नहीं दिया गया.
नगर आयुक्त आलोक पांडे का कहना था कि कांग्रेस को पत्र के माध्यम से अनुमति से जुड़ी शर्तों और जरूरी एनओसी की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए. नगर निगम उन दस्तावेजों और शर्तों के अनुपालन का इंतजार कर रहा था. दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री संगठन राजेंद्र भंडारी का कहना था कि पार्टी ने नगर निगम में आवेदन करने के साथ निर्धारित धनराशि जमा कर दी थी और उसी आधार पर तैयारियां शुरू की गई थीं.
सरकारी कार्यक्रम के कारण पैदा हुआ विवादपरेड ग्राउंड में 16 जुलाई को हरेला पर्व से जुड़ा सरकारी कार्यक्रम प्रस्तावित होने की बात कही गई. प्रशासनिक स्तर पर इन्हीं कार्यक्रमों के कारण मैदान उपलब्ध कराने में व्यावहारिक कठिनाई का भी हवाला दिया गया. कांग्रेस ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस सरकारी आयोजन के नाम पर राहुल गांधी के कार्यक्रम को रोका गया, देर रात मैदान में उससे जुड़ी कोई बड़ी गतिविधि दिखाई नहीं दे रही थी.
ढाई लाख से ज्यादा पंजीकरण का दावाकांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी के &amp;lsquo;छात्रों की गूंज&amp;rsquo; कार्यक्रम के लिए प्रदेशभर से ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है. परेड ग्राउंड की क्षमता लगभग 50 हजार लोगों की मानी जाती है. इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए कार्यक्रम की भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे. पार्टी का कहना है कि कार्यक्रम में राहुल गांधी उत्तराखंड के विद्यार्थियों से शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं, रोजगार और युवाओं से जुड़े दूसरे विषयों पर संवाद करेंगे.
17 जुलाई को बन्नू स्कूल मैदान में कार्यक्रमकांग्रेस ने अब आधिकारिक रूप से स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी का कार्यक्रम 17 जुलाई को बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित किया जाएगा. पार्टी के मुताबिक कार्यक्रम का स्वरूप और छात्रों के साथ संवाद की योजना पहले जैसी ही रहेगी, केवल आयोजन स्थल बदला गया है.
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पंजाब कांग्रेस में खींचतान के बीच आलाकमान की बड़ी बैठक, राहुल गांधी का सीधा मैसेज - &#039;किसी भी सूरत में...&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>राहुल, गांधी, के, कार्यक्रम, को, लेकर, आधी, रात, बवाल, परेड, ग्राउंड, में, अड़कर, बैठ, गए, कांग्रेसी, अब, क्या, होगा</media:keywords>
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        <title>धार भोजशाला केस: सुप्रीम कोर्ट में बोला मुस्लिम पक्ष&amp; 800 साल पुरानी मस्जिद में नमाज रुकवा दी&amp;apos;,  CJI तुरंत बोले&amp; &amp;apos;संयम रखें...&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धार-भोजशाला-केस-सुप्रीम-कोर्ट-में-बोला-मुस्लिम-पक्ष-800-साल-पुरानी-मस्जिद-में-नमाज-रुकवा-दी-cji-तुरंत-बोले-संयम-रखें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/धार-भोजशाला-केस-सुप्रीम-कोर्ट-में-बोला-मुस्लिम-पक्ष-800-साल-पुरानी-मस्जिद-में-नमाज-रुकवा-दी-cji-तुरंत-बोले-संयम-रखें</guid>
        <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट में धार भोजशाला मामले में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि मस्जिद में 800 सालों से नमाज हो रही थी, जिसे बंद करा दिया गया. हमें धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर दिया गया. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सभी पक्षों से संयमित रहने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट में कही गई बातों का बाहर लोग गलत अर्थ लगा सकते हैं. यह केस पहली बार लगा है. इसे जल्द से जल्द सुनने की कोशिश की जाएगी.
मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा, &amp;nbsp;&#039;पहले जो स्थिति थी उसे हाई कोर्ट ने बदल दिया. हमें धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट आने का मौका तक नहीं दिया गया.&#039;
आंख के बदले आंख दुनिया को अंधा कर देगी- सिंघवी
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, &#039;एक आंख के बदले आंख दुनिया को अंधा कर देगी. हो सकता है वहां मंदिर था. कुतुब मीनार के बारे में भी दावा है. ताज महल के बारे में भी दावा है. 700 साल तक धार भोजशाला में नमाज होती रही. अंग्रेजों के जमाने के दस्तावेज भी यह दिखाते हैं.&#039;
उन्होंने कहा, &#039;नमाज के साथ बसंत पंचमी और मंगलवार को पूजा होना धार्मिक सौहार्द का अच्छा उदाहरण था. इसे नहीं बदलना चाहिए था.&#039; उन्होंने बेंच से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक पुरानी स्थिति बहाल की जाए.
वहीं सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कहा, &#039;2 महीने हो गए फैसले को. तब से स्थिति बहुत बदल चुकी है.&#039; मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने सॉलिसिटर जनरल की इस दलील का विरोध किया.
ये भी पढ़ें- धार भोजशाला मामला: &#039;आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा कर देगी&#039;, सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी की दलील
800 साल पुरानी मस्जिद में नमाज रुकवाना सख्त कदम- मुस्लिम पक्ष
मुस्लिम पक्ष की एक और वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा, &#039;1995 में दोनों पक्षों में सहमति बनी कि दोनों सौहार्दपूर्ण तरीके से धार्मिक गतिविधि करेंगे. इस स्थिति को अचानक बदलना गलत था. 800 साल पुरानी मस्जिद है. वहां नमाज रुकवा देना बेहद सख्त कदम है.&#039;
इसके बाद CJI ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि पहले इस केस में सलमान खुर्शीद जिरह करते रहे हैं. उन्होंने विशेष ध्यान रखा था कि समाज में कोई गलत संदेश न जाए.
सॉलिसिटर जनरल ने क्या दी दलील?
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, &#039;बस मैं यही कहना चाहता हूं कि अब 2 महीने बीत चुके हैं. हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने उसके आधार पर कुछ कदम उठाए हैं. वहां शांति बनी हुई है.&#039;
वहीं हुजैफा अहमदी कोर्ट को आश्वस्त करने की कोशिश की कि पुरानी स्थिति बहाल की जा सकती है. इसके लिए उन्होंने 1935 और 1951 के कुछ पुराने आदेशों का हवाला भी दिया. &amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>धार, भोजशाला, केस:, सुप्रीम, कोर्ट, में, बोला, मुस्लिम, पक्ष-, 800, साल, पुरानी, मस्जिद, में, नमाज, रुकवा, दी,  CJI, तुरंत, बोले-, संयम, रखें...</media:keywords>
    </item>
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        <title>&amp;apos;नमाज के लिए मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी जगह&amp;apos;, धार भोजशाला केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नमाज-के-लिए-मुस्लिम-पक्ष-को-दी-जाएगी-जगह-धार-भोजशाला-केस-में-सुप्रीम-कोर्ट-का-आदेश-हाईकोर्ट-के-फैसले-पर-रोक-नहीं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नमाज-के-लिए-मुस्लिम-पक्ष-को-दी-जाएगी-जगह-धार-भोजशाला-केस-में-सुप्रीम-कोर्ट-का-आदेश-हाईकोर्ट-के-फैसले-पर-रोक-नहीं</guid>
        <description><![CDATA[ धार भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम अंतरिम आदेश देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया. हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को राहत देते हुए निर्देश दिया कि हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक परिसर के नजदीक नमाज के लिए एक उपयुक्त खुली जगह उपलब्ध कराई जाए. साथ ही कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इमारत की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी.
सभी पक्षों को नोटिस, जल्द होगी विस्तृत सुनवाई
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि सभी पक्षों की सुविधा के अनुसार जल्द सुनवाई की जाएगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले का जल्द निपटारा करने की कोशिश की जाएगी.
मुस्लिम पक्ष बोला- बिना मौका दिए बदल दी गई व्यवस्था
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट के आदेश से पहले की व्यवस्था अचानक बदल दी गई और उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील का अवसर तक नहीं मिला. उनका कहना था कि उन्हें धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है और हाईकोर्ट को अपने आदेश पर कुछ समय के लिए रोक लगानी चाहिए थी.
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सिंघवी ने कहा- सौहार्द की पुरानी व्यवस्था बनी रहनी चाहिए
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को अचानक बदलना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय के दस्तावेज भी बताते हैं कि भोजशाला परिसर में लंबे समय तक नमाज अदा की जाती रही. उनके मुताबिक बसंत पंचमी पर पूजा और शुक्रवार को नमाज की व्यवस्था धार्मिक सौहार्द का उदाहरण थी, जिसे बनाए रखा जाना चाहिए.
सिंघवी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक पुरानी स्थिति बहाल की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अभी परिसर में स्थायी मूर्ति स्थापित नहीं है और प्रतिदिन कार्डबोर्ड पर बनी तस्वीर लाकर पूजा की जाती है.
सॉलिसिटर जनरल बोले- दो महीने में हालात बदल चुके हैं
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को दो महीने हो चुके हैं और इस दौरान प्रशासन ने उसके अनुरूप कदम उठाए हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि वर्तमान में वहां शांति बनी हुई है और इस स्तर पर व्यवस्था में बदलाव उचित नहीं होगा.
कोर्ट ने संयम बरतने की दी सलाह
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि अदालत में कही गई बातों का बाहर गलत अर्थ निकाला जा सकता है, इसलिए सभी को जिम्मेदारी के साथ अपनी दलीलें रखनी चाहिए. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद भी इस बात का विशेष ध्यान रखते थे कि समाज में कोई गलत संदेश न जाए.
1995 की सहमति और पुरानी व्यवस्था का भी हुआ जिक्र
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि वर्ष 1995 में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी कि धार्मिक गतिविधियां सौहार्दपूर्ण तरीके से जारी रहेंगी. उनके अनुसार 800 वर्ष पुरानी मस्जिद में नमाज रुकवाना बेहद कठोर कदम है.
वहीं हुजैफा अहमदी ने 1935 और 1951 के कुछ पुराने आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: होर्मुज पर दो धड़ों में बंटा ईरान! IRGC ने किया बंद का ऐलान, सरकार बोली- &#039;युद्ध आगे बढ़ाने की बजाय..&#039;
हाईकोर्ट के आदेश और ASI की भूमिका पर भी हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हाईकोर्ट के निर्देशों का अध्ययन किया. जजों ने हाईकोर्ट के उस निर्देश पर भी सवाल उठाया, जिसमें लंदन संग्रहालय से वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने का उल्लेख किया गया था. अदालत ने टिप्पणी की कि किसी संवैधानिक अदालत द्वारा ऐसा आदेश कैसे दिया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तय तारीख पर होगी. तब तक प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मुस्लिम पक्ष को परिसर के नजदीक नमाज के लिए उपयुक्त खुली जगह उपलब्ध कराई जाएगी. साथ ही ASI को निर्देश दिया गया कि वह फिलहाल भोजशाला की इमारत की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं करेगा. हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>मुकदमे का फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए जज की कुर्सी पर ‘काला जादू’, महिला गिरफ्तार</title>
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        <description><![CDATA[ कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर से एक अलग ही किस्म का मामला सामने आया है. 21वीं सदी में इस तरह के जादू टोने की खबर ने सभी को अचरज में डाल दिया है. मामला ये है कि अदालत में चल रहे केस में एक महिला ने अपने पक्ष में फैसला कराने के लिए जो कुछ किया, उसने एक बार सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
फैसला अपने पक्ष में कराने की कोशिश में एक 65 वर्षीय महिला को कथित तौर पर काला जादू करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. कर्नाटक पुलिस के अनुसार, मंजुला नाम की एक महिला फर्स्ट एडिशनल सीनियर सिविल जज एवं JMFC कोर्ट के परिसर में दाखिल हुई और जज की कुर्सी पर कथित तौर पर मंत्र फूंके हुए सफेद सरसों के दाने छिड़क दिए. बता दें कि ये पूरी घटना कोर्ट में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है.

इस मामले के 2 दिन बाद जब सीसीटीवी फुटेज की जांच गई तो उस दौरान महिला की ये सारी हरकत सामने आई, जिसके बाद कोर्ट की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नेत्रा की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. जांच के बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है.
जज के चैंबर में जाकर टोना-टोटका कियापुलिस द्वारा सख्ती से की गई पूछताछ में महिला ने कथित तौर पर बताया कि वह अपने केस का फैसला अपने पक्ष में चाहती थी, इसलिए उसने जज के चैंबर में जाकर टोना-टोटका किया. पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ कर्नाटक अमानवीय कुप्रथाओं और काला जादू की रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम, 2017 के तहत मामला दर्ज किया है.
आरोपी महिला को भेजा गया जेलकर्नाटक पुलिस ने आरोपी महिला मंजुला को अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. फिलहाल पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है. पुलिस ये पता लगाने की भी कोशिश कर रही है कि इस मामले में क्या महिला के साथ और कोई भी शामिल था.&amp;nbsp;
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धार भोजशाला मामला: &#039;आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा कर देगी&#039;, सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी की दलील ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: मध्यस्थता के खिलाफ एकमत क्यों हिंदू&amp;मुस्लिम? संभल, वाराणसी और मथुरा विवाद समझौता ठुकराने के क्या नतीजे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-मध्यस्थता-के-खिलाफ-एकमत-क्यों-हिंदू-मुस्लिम-संभल-वाराणसी-और-मथुरा-विवाद-समझौता-ठुकराने-के-क्या-नतीजे</link>
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        <description><![CDATA[ काशी, मथुरा और संभल तीन बड़े धार्मिक विवाद. तीन ऐतिहासिक शहर और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की सुप्रीम कोर्ट की एक कोशिश. लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ने एक सुर में कहा, &#039;नहीं, हमें कोर्ट का फैसला चाहिए, समझौता नहीं.&#039; यह एक ऐसा अनोखा मोड़ है जहां आमतौर पर आमने-सामने खड़े रहने वाले दोनों धड़े, मध्यस्थता ठुकराने पर एकमत हो गए. आखिर ऐसा क्यों हुआ, सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता क्यों कराना चाहती है और आगे रास्ते क्या बचे हैं...
सबसे पहले जानिए, ये तीनों मामले हैं क्या?
1. काशी (ज्ञानवापी मस्जिद विवाद) &amp;nbsp;
वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा यह विवाद सदियों पुराना है. हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब ने 1669 में यहां एक भव्य शिव मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई थी. उनकी मांग है कि मस्जिद की जमीन उन्हें सौंपी जाए और वहां नियमित पूजा का अधिकार दिया जाए. मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 का हवाला दिया और कहा कि मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है. सदियों से वहां नमाज होती आ रही है. फिलहाल यह मामला वाराणसी की सिविल कोर्ट में चल रहा है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं लंबित हैं.
&amp;nbsp;

मुस्लिम पक्ष की मांग है कि मस्जिद में मुस्लिमों के नमाज के अधिकार सुरक्षित रहें

2. मथुरा (शाही ईदगाह विवाद)
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद आमने-सामने हैं. हिंदू पक्ष का कहना है कि भगवान कृष्ण का जन्मस्थान होने के नाते यह जमीन मंदिर की है और औरंगजेब के आदेश पर 1670 में मंदिर का एक हिस्सा गिराकर वहां ईदगाह बना दी गई. याचिकाकर्ताओं ने पूरी 13.37 एकड़ जमीन पर अपना दावा पेश किया है. मुस्लिम पक्ष 1968 के एक समझौते का हवाला देता है, जिसके तहत दोनों पक्षों ने जमीन को लेकर अपने-अपने हक मान लिए थे. यहां भी मामला कोर्ट में विचाराधीन है और सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
&amp;nbsp;

हिंदू पक्ष की मांग है कि शाही ईदगाह मस्जिद हटाई जाए

3. संभल (शाही जामा मस्जिद विवाद)
यह तीसरा और नया उभरता विवाद है. उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मूल रूप से एक प्राचीन हरिहर मंदिर था, जिसे बाबर के समय में तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया. हाल ही में यहां एक सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिससे यह मामला देश भर में सुर्खियों में आ गया. अभी यह विवाद स्थानीय अदालत में है, जहां हिंदू पक्ष ने मस्जिद परिसर में पूजा की अनुमति मांगी है.
&amp;nbsp;

मुस्लिम पक्ष की मांग है कि मस्जिद को ऐतिहासिक और वैध मस्जिद माना जाए

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश क्यों की?
सुप्रीम कोर्ट इन तीनों विवादों को लेकर एक साथ सुनवाई कर रही थी. बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की सोच यह थी कि इन मामलों में ऐतिहासिक और धार्मिक भावनाएं इतनी गहरी हैं कि अदालती फैसले चाहे जो भी आएं, एक पक्ष की नाराजगी तय है. ऐसे में कोर्ट ने अयोध्या मामले की तर्ज पर &#039;कोर्ट-मॉनिटर्ड मीडिएशन&#039; यानी अदालत की निगरानी में सुलह का रास्ता सुझाया.
इसके पीछे मकसद सिर्फ कानूनी पेंच खत्म करना नहीं था, बल्कि एक ऐसा समाधान निकालना था जिससे आपसी सौहार्द बना रहे और आगे कोई टकराव न हो. लेकिन जब कोर्ट ने दोनों पक्षों से इस पर राय मांगी, तो जवाब ने सबको चौंका दिया.
मध्यस्थता के नियम क्या होते हैं?
अदालत की निगरानी में मध्यस्थता कोई आम सुलह-सफाई नहीं होती. इसके पीछे एक पूरा कानूनी ढांचा काम करता है:

यह मध्यस्थता पूरी तरह से गोपनीय प्रक्रिया होती है.
दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात एक न्यूट्रल मध्यस्थ यानी मीडिएटर के सामने रखते हैं.
मध्यस्थ कोई फैसला नहीं सुनाता, बल्कि दोनों को एक ऐसे समाधान तक लाने की कोशिश करता है जो दोनों को मंजूर हो.
अगर बात नहीं बनती, तो यह प्रक्रिया बंद कर दी जाती है और मामला वापस कोर्ट में चला जाता है.
मध्यस्थता के दौरान कही गई कोई भी बात या दी गई कोई भी पेशकश, अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती.
इसके लिए दोनों पक्षों की राजी होना पहली और अनिवार्य शर्त है.

तो फिर दोनों पक्षों ने मध्यस्थता क्यों ठुकराई?
यहीं पर यह पूरा मामला दिलचस्प हो जाता है. दोनों पक्षों के वकीलों ने एक ही रुख अपनाया, &#039;हमें मध्यस्थता नहीं चाहिए.&#039; लेकिन दोनों की अपनी-अपनी दलीलें हैं.
हिंदू पक्ष की दलील: &amp;nbsp;

तीनों जगहों पर ऐतिहासिक और पुरातात्विक सबूत इस बात के मौजूद हैं कि वहां पहले भव्य मंदिर थे. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट्स में भी इसके संकेत मिले हैं.
जब सच्चाई हमारे पक्ष में है और सबूत मौजूद हैं, तो फिर समझौता क्यों किया जाए?
उन्हें पूरा भरोसा है कि अदालत उनके हक में फैसला सुनाएगी और उन्हें पूरी जमीन मिलेगी.
मध्यस्थता में बीच का रास्ता निकालने का मतलब होगा अपने हक से समझौता करना, जो उन्हें मंजूर नहीं.

मुस्लिम पक्ष की दलील:

पूजा स्थल अधिनियम, 1991 कहता है कि 15 अगस्त 1947 को किसी भी धार्मिक स्थल का जो स्वरूप था, उसे बदला नहीं जा सकता. सिर्फ अयोध्या विवाद को इससे अलग रखा गया था.
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जब संसद का बनाया कानून ही यह कहता है कि 1947 में जो मस्जिद थी, वह मस्जिद ही रहेगी, तो फिर मुकदमे की सुनवाई की गुंजाइश ही कहां बचती है?
मुस्लिम पक्ष का मानना है कि इन मुकदमों के होने पर ही सवाल है और ऐसे में समझौते का सवाल ही नहीं उठता.
इस्लामी कानून के तहत एक बार किसी जमीन को मस्जिद के लिए वक्फ कर दिया जाए, तो उसे वापस नहीं लिया जा सकता.
इस वजह से वे भी किसी भी तरह के समझौते से इनकार करते हुए सीधे कानूनी लड़ाई के पक्ष में हैं.

&#039;नफरत&#039; में भी एकता: दोनों एकमत कैसे हुए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक तरफ हिंदू पक्ष जहां ऐतिहासिक और पुरातात्विक सबूतों के दम पर कोर्ट से पूर्ण न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम पक ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>विजय सरकार को गिराने की थी साजिश? TVK विधायक को 35 करोड़ की रिश्वत केस की जांच में जुटी ED</title>
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        <description><![CDATA[ तमिलनाडु में TVK विधायक को 35 करोड़ की रिश्वत ऑफर केस में ईडी ने जांच शुरू कर दी है. ED ने चेन्नई के रॉयपेट्टा से जुड़े कथित अवैध मनी ट्रांसफर मामले की जांच शुरू कर दी है. इसके तहत ईडी अधिकारियों ने चेन्नई महानगर पुलिस से इस मामले से जुड़े दस्तावेजों की कॉपियां हासिल कीं. इस मामले में पुलिस पहले ही एक संदिग्ध के पास से 60 लाख रुपये की नकदी बरामद कर चुकी है. अब ईडी इस रकम के स्रोत और कथित धन लेनदेन के पूरे नेटवर्क की जांच करेगी.
यह मामला तब सामने आया जब तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के उथनकरई विधानसभा क्षेत्र से विधायक एन. इलैयाराजा ने चेन्नई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. अपनी शिकायत में विधायक ने आरोप लगाया कि तिरुनावुक्करासु नाम के एक व्यक्ति ने खुद को इंडियन पॉलिटिकल डेमोक्रेटिक स्ट्रैटेजीज (IDPS) नामक चुनावी सर्वेक्षण कंपनी का मालिक बताया.
TVK विधायक का क्या आरोप?
विधायक के अनुसार, आरोपी ने उनसे विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए कहा. इसके बदले 35 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की गई. विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें धमकी दी गई. इलैयाराजा ने 29 जून को चेन्नई पुलिस कमिश्नर के पास &amp;nbsp;शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर ट्रिपलिकेन पुलिस ने मामला दर्ज किया.
&#039;नमाज के लिए मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी जगह&#039;, धार भोजशाला केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं
मामले की जांच में जुटी पुलिस
जांच के दौरान, पुलिस ने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी थिरुनावुक्करसु ने तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई आर.वी. अशोक कुमार के कहने पर इलैयाराजा से संपर्क किया था. इस बीच, मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार (8 जुलाई) को सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार को अग्रिम जमानत दे दी और उन्हें जांच में सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया. पुलिस ने साफ कर दिया है कि जांच जारी है और लक्ष्मण पेरुमल समेत अन्य आरोपियों का पता लगाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं. पेरुमल की भूमिका की भी जांच हो रही है.
होर्मुज में ईरान के अटैक से गई भारतीय की जान तो गुस्से में बोला भारत- &#039;जहाजों को निशाना बनाना बंद करो&#039; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बंगाल नाव हादसे में 9 मछुआरों की मौत, PM मोदी ने जताया दुख, मृतकों के परिजनों को 2&amp;2 लाख का ऐलान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बंगाल-नाव-हादसे-में-9-मछुआरों-की-मौत-pm-मोदी-ने-जताया-दुख-मृतकों-के-परिजनों-को-2-2-लाख-का-ऐलान</link>
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        <description><![CDATA[ पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में सुंदरबन के पास बंगाल की खाड़ी से बड़ी घटना सामने आई है. अधिकारियों ने सोमवार (13 जुलाई) को बताया कि इस महीने की शुरुआत में एक मछली पकड़ने वाली लापता हुई नाव में नौ मछुआरे मृत पाए गए हैं, जबकि छह मछुआरे लापता हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर दुख जताया है और मृतक के परिवारों और घायलों को आर्थिक मदद की घोषणा की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में नाव पलटने से हुआ जानमाल का नुकसान बेहद &amp;nbsp;पीड़ादायक है. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं. ईश्वर करे कि घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाएं.&#039; उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की मदद का ऐलान किया.

The loss of lives due to the capsizing of a boat in the South 24 Parganas district of West Bengal is deeply painful. My thoughts are with the bereaved families in this hour of grief. May the injured recover at the earliest. An ex-gratia of Rs. 2 lakh from PMNRF would be given&amp;hellip;
&amp;mdash; PMO India (@PMOIndia) July 13, 2026



2 जुलाई को निकली थी वोट
न्यूज एजेंसी IANS ने अधिकारियों के हवाले से बताया, रविवार (12 जुलाई) को पुलिस, वन विभाग और भारतीय तटरक्षक बल के कर्मियों ने चुल्काठी जंगल के पास रक्ताचार इलाके में डूबे हुए नाव का पता लगाया. नाव को बाहर निकाल कर तलाशी ली गई तो नौ मछुआरों के शव मिले. &#039;एफबी मां काली&#039; नाम की यह नाव 2 जुलाई को पूर्वी मिदनापुर जिले के शंकरपुर फिशरीज पोर्ट से 15 मछुआरों के साथ निकली थी.&amp;nbsp;
खराब मौसम के चलते टूटा संपर्क
बताया जा रहा है कि इलाके में खराब मौसम के कारण 5 जुलाई के बाद नाव से संपर्क टूट गया था. तब से सुंदरबन टाइगर रिजर्व के डिप्टी फील्ड डायरेक्टर चित्रक भट्टाचार्य के नेतृत्व में पुलिस, तटरक्षक बल, वन विभाग और मछुआरा संगठनों का एक संयुक्त तलाशी अभियान चल रहा था. अधिकारियों ने बताया कि लापता छह मछुआरों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. बरामद शवों को पोस्टमार्टम के लिए काकद्वीप सब-डिविजनल अस्पताल भेजा गया है. बाकी मछुआरों का पता लगाने के लिए सोमवार को एक नया संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया.
बांग्लादेश में 81 फीट ऊंचे श्रीराम की प्रतिमा बनवाने वाले हरिदास को CID ने किया गिरफ्तार, लगाया ये गंभीर आरोप
बढ़ सकती है मरने वालों की संख्या
अधिकारियों को आशंका है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है.सुंदरबन मामलों के राज्य मंत्री दीपांकर जाना ने नाव को किनारे पर लाए जाने के बाद वहां का दौरा किया और तलाशी अभियान की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को घटना के बारे में सूचित कर दिया गया है और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई के बारे में बातचीत चल रही है.रविवार शाम को सीतारामपुर घाट तक खींचकर लाए जाने से पहले, यह नाव दक्षिण 24 परगना जिले में बक्खाली तट से लगभग 35 किमी दूर चुल्काठी जंगल के पास पलटा हुआ मिला था.
अब पूर्व चुनाव कमिश्नर को भी नहीं SIR पर भरोसा! SY कुरैशी बोले- यह लोकतंत्र के साथ छेड़छाड़
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>सुप्रीम कोर्ट में CJI के सामने महिला ने उतारा मंगलसूत्र, गिड़गिड़ाते हुए कहा&amp; माईलॉड! हमारा पूरा परिवार...</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सुप्रीम-कोर्ट-में-cji-के-सामने-महिला-ने-उतारा-मंगलसूत्र-गिड़गिड़ाते-हुए-कहा-माईलॉड-हमारा-पूरा-परिवार</link>
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        <description><![CDATA[ देश के सर्वोच्च अदालत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को पूरी तरह से हैरान कर दिया. दरअसल, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के सामने एक महिला याचिकाकर्ता, जो अपने केस की पैरवी खुद करने पहुंची थी, वो अपने केस की सुनवाई करवाने के लिए गिड़गिड़ाने लगी, लेकिन सभी तब हैरान हो गए जब महिला ने अपने गले से मंगलसूत्र निकाला और CJI से सुनवाई के लिए गुहार लगाने लगी.
कोर्ट रूम में महिला ने CJI से लगाई गुहार
बार एंड बेंचे के मुताबिक, याचिकाकर्ता महिला ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच से गुहार लगाते हुए कहा, &amp;lsquo;माईलॉर्ड, मैं हैदराबाद से आई हूं. एक शब्द हमारा भी सुन लीजिए, माईलॉर्ड. 15 साल से...&amp;rsquo; इस बीच सीजेआई ने टोकते हए कहा, &amp;lsquo;मैडम, आपका मामला अगले सोमवार को सुना जाएगा.&amp;rsquo; लेकिन महिला ने फिर से गुहार लगाते हुए कहा, &amp;lsquo;नहीं, प्लीज सर. मैं बस एक शब्द कहूंगी. 15 साल से हम जिंदगी नहीं जी रहे हैं. हमारी जिंदगी बर्बाद हो गई है. हमारा पूरा परिवार बर्बाद हो गया है. हम सब मिलकर यह अनुरोध कर रहे हैं, माईलॉर्ड.&amp;rsquo;
स्पेशल बेंच सुनेगी आपका मामला- CJI
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा, &amp;lsquo;अगले सोमवार को आपका केस सुना जाएगा. यह मामला एक विशेष बेंच को सुनना है. आप ऐसा कीजिए, आप मत आइएगा. आप ऑनलाइन पेश हो जाइए. आपको खुद आने की जरूरत नहीं है.&amp;rsquo;
तभी महिला ने कहा, &amp;lsquo;नहीं सर, हम आएंगे सर. हमारे दिल की जो बात है न सर, आपके दिल को टच होना चाहिए. क्योंकि हम कितनी तकलीफ में है. पूरा परिवार बर्बाद हो गया है, सर. हम बच्चों को खाना तक नहीं दे पा रहे हैं. शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, सर.&amp;rsquo;&amp;nbsp;

आप यात्रा करने में पैसे बर्बाद न करें- CJI
जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर फिर से अपनी बात को दोहराते हुए कहा, &amp;lsquo;केस की सुनवाई के बाद ही फैसला किया जाएगा. सुनवाई के लिए अगले सोमवार की तारीख निर्धारित है, लेकिन मेरा एक सुझाव है आपको कि आप यात्रा करने में पैसे बर्बाद न करें.&amp;rsquo; इतना सुनते ही महिला ने फिर से कहा, &amp;lsquo;नहीं, सर, हम आएंगे सर. हमारी जिंदगी से बढ़कर कुछ नहीं है सर.&amp;rsquo; हालांकि, सीजेआई ने फिर से कहा कि आप ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हो सकती हैं और जब तक आप चाहें, आपकी सुनवाई होगी.
इसके बाद महिला याचिकाकर्ता ने अपने गले से मंगलसूत्र निकालकर सीजेआई से कहा, &amp;lsquo;एक औरत के लिए उसके मंगलसूत्र से बढ़कर कुछ नहीं होता, सर. हमारे गले में अब क्या बचा है, सर.&amp;rsquo; तभी महिला की लगातार गुहार पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, &amp;lsquo;अगले हफ्ते एक स्पेशल बेंच होगी. सिर्फ यही मामला बोर्ड के ऊपर उस स्पेशल बेंच के सामने लिस्ट होगा. केस वहीं सुना जाएगा और आपकी पूरी बात भी सुनी जाएगी.&amp;rsquo;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>शरीर पर 51 बार चाकू से गोदा और नाले में बहाया शव…, नॉर्थ&amp;ईस्ट दिल्ली दंगे के खौफनाक मर्डर की कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ North East Delhi Riots: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान मारे गए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया है. फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव एक नाले से बरामद हुआ था. इस मामले में ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नसीम और कासिम को भी विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया है. हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में छह अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया.
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी. चांद बाग, खजूरी खास और मुस्तफाबाद समेत कई क्षेत्रों में भारी पत्थरबाजी, आगजनी और गोलीबारी हुई थी. इस सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा कार्यालय से घर लौटे थे. इलाके में तनाव का माहौल देखकर वे घर से बाहर निकले. आरोप है कि इसी दौरान दंगाइयों ने उन्हें पकड़ लिया और तत्कालीन आप पार्षद ताहिर हुसैन के घर की ओर ले गए, जहां उन पर धारदार हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई. बाद में उनका शव नाले में फेंक दिया गया.
दिल्ली दंगे का खौफनाम मर्डर
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 153A (वैमनस्य फैलाना), 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा) और धारा 149 के तहत दोषी ठहराया. हालांकि, उन्हें धारा 120B (आपराधिक साजिश) और धारा 109 (उकसाने) के आरोपों से बरी कर दिया गया. अदालत ने नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी हत्या को छोड़कर अन्य आरोपों में दोषी ठहराया, जबकि हसीन उर्फ मुल्लाजी, फिरोज, गुलफाम, शोएब, समीर खान और मुंताजिम उर्फ मूसा को बरी कर दिया.
फैसला सुनाए जाने के दौरान ताहिर हुसैन अदालत में फूट-फूटकर रो पड़े. उनके वकील ने उन्हें सांत्वना दी. अदालत ने जमानत पर बाहर चल रहे अनस और जावेद को तुरंत हिरासत में लेने का भी आदेश दिया. फिलहाल अदालत ने सजा पर सुनवाई की तारीख तय नहीं की है और विस्तृत फैसले का इंतजार किया जा रहा है.
यह मामला अंकित शर्मा के पिता रविंद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी को कार्यालय से लौटने के बाद बाहर निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं आए. बाद में स्थानीय लोगों ने परिवार को बताया कि उनकी हत्या कर दी गई है और शव चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है. इसके बाद पुलिस ने शव बरामद किया और जांच शुरू की.
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, ताहिर हुसैन 24 और 25 फरवरी 2020 को अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे. आरोप है कि उन्होंने भीड़ को सांप्रदायिक रूप से भड़काया और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया. अभियोजन का दावा है कि उनके उकसावे के बाद भीड़ ने दुकानों और घरों में आग लगाई, पत्थरबाजी और पेट्रोल बम से हमले किए तथा अंकित शर्मा को पकड़कर उनकी हत्या कर दी.

अदालत ने क्या कहा
विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने फैसले के बाद कहा कि यह किसी भी पक्ष की जीत नहीं, बल्कि पूरे समाज की हार है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार ने अपना बेटा खोया है और अब दोषी ठहराए गए लोगों के परिवार भी दुख झेलेंगे. उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में अंततः समाज ही सबसे बड़ा नुकसान उठाता है.
वहीं, ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि न तो अंकित शर्मा के परिवार को न्याय मिला और न ही ताहिर हुसैन को. उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देगा. उनके अनुसार, अभी विस्तृत फैसला सामने नहीं आया है, इसलिए उसके अध्ययन के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रंगारेड्डी में छह लोगों की जान लेने वाले हत्यारे राजकुमार ने कर ली आत्महत्या, पुलिस ने शव किया बरामद</title>
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        <description><![CDATA[ तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के शाबाद में छह लोगों की हत्या के मामले में आरोपी राजकुमार ने आत्महत्या कर ली. उसका शव कोथुर में रेलवे ट्रैक पर मिला. रंगारेड्डी के देवालगुडा के शाबाद में राजकुमार ने हाल ही में छह लोगों की हत्या कर दी थी, यह बात जब सामने आई, तो पूरे सभी को चौंका दिया.
इन हत्याओं के बाद आरोपी राजकुमार ने अपने पिता को फोन करके कहा कि वह आत्महत्या कर लेगा. इस बात से परेशान उसके माता-पिता ने पुलिस को बताया. वे हत्याओं वाले दिन से ही उसे ढूंढ रहे थे. हालांकि, तीन दिन बाद छह लोगों की हत्या करने वाला हत्यारा राजकुमार अपने मामा के गांव में मृत पाया गया. उन्हें बताया गया कि कोथुर मंडल के पंजर में एक शव है.
पुलिस ने घटनास्थल से जहर की बोतल की बरामद
जब पुलिस जांच करने गई, तो उन्होंने पाया कि वह राजकुमार था. उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उसने आत्महत्या की होगी, क्योंकि उसके शव के पास एक जहर की बोतल भी मिली थी. राजकुमार ने शनिवार (11 जुलाई, 2026) को शाबाद में उस लड़की के परिवार और अपने परिवार को बेरहमी से मार डाला, जिसने उसके खिलाफ केस किया था.&amp;nbsp;&amp;nbsp;

शिकायतकर्ता लड़की के साथ अपने परिवार का भी किया खात्मा
वह शुक्रवार (10 जुलाई, 2026) की सुबह 11 बजे उस लड़की के घर गया, जिसने उसके खिलाफ POCSO केस किया था. जैसे ही उसने दरवाजा खोला, उसने लड़की की मां को मार डाला. फिर उसने लड़की की दादी की जान ले ली. फिर वह लड़की को जबरदस्ती ले गया. वहां से वह सीधा दैपालगुड़ा गया, जो पांच किलोमीटर दूर है. वहां, उसने चेरुवुगट्टू में लड़की का रेप किया और उसे मार डाला.
फिर वह अपने घर गया. जैसे ही उसने दरवाजा खोला, उसने अपनी पत्नी से बच्चों को दिखाने को कहा और उन्हें मार डाला. उसने अपने सोते हुए दो बच्चों का गला काट दिया. नशे में धुत होकर वह उन लोगों से बदला लेने के लिए पूरी रात हंगामा करता रहा, जिन्होंने उसके खिलाफ केस किया था.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>भारत&amp;नेपाल सीमा पर SSB ने अमेरिकी नागरिक को पकड़ा, बिना वैध कागजात नेपाल में घुसने की कर रहा था कोशिश</title>
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        <description><![CDATA[ भारत और नेपाल की सीमा पर एक अमेरिकी नागरिक को बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के नेपाल में घुसने की कोशिश के दौरान हिरासत में लिया गया है. पीटीआई के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सोनौली पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मैनिहवा इलाके में पिलर नंबर 516 के नजदीक सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने अपनी रूटीन पेट्रोलिंग के दौरान उसे हिरासत में लिया है.
मामले में महाराजगंज के एडिशनल एसपी ने दी जानकारी
वहीं, जब अमेरिकी नागरिक से पूछताछ की गई, तब उसने अपनी पहचान 36 वर्षीय जॉर्डन ब्राउन के रूप में बताई. अधिकारियों ने बताया कि वह 2025 में बिना किसी वैध कागजात के समुद्री रास्ते से भारत में दाखिल हुआ था.
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, महाराजगंज के एडिशनल एसपी सिद्धार्थ ने बताया कि जॉर्डन ब्राउन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. उसके पास कोई भी वैध यात्रा दस्तावेज नहीं मिले हैं.
ब्राउन ने थाईलैंड में पासपोर्ट खोने का किया दावा- एडिशनल एसपी&amp;nbsp;

A US national was arrested near the India Nepal border in UP&#039;s Maharajganj district while allegedly trying to cross into Nepal without any valid travel documents. The Sashastra Seema Bal caught the man, who identified himself as Jordan Brown, 36, from California, during a routine&amp;hellip; pic.twitter.com/WCdSvcCTpn
&amp;mdash; G K Gourav (@GouravGKRepots) July 13, 2026



रिपोर्ट के मुताबिक, एक वीडियो मैसेज में एडिशनल एसपी सिद्धार्थ ने बताया, &amp;lsquo;सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने 11 जुलाई, 2026 को सोनौली के पास एक शख्स को बिना अनुमति के नेपाल में घुसने की कोशिश करते हुए पकड़ा. पूछताछ के दौरान उसने अपने नाम जॉर्डन ब्राउन बताया और कहा कि वह अमेरिका के कैलिफोर्निया का नागरिक है. उसने आगे बताया कि वह टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड गया था, लेकिन वहां उसका पासपोर्ट खो गया था. इसके बाद वो समुद्र के रास्ते होते हुए श्रीलंका पहुंचा और नवंबर 2025 में फिर समुद्र के रास्ते ही भारत आ गया.&amp;rsquo;
नवंबर 2025 से भारत में रह रहा है ब्राउन- सिद्धार्थ
एडिशनल एसपी सिद्धार्थ ने कहा, &amp;lsquo;नवंबर, 2025 में भारत आने के बाद से वो गोवा में रह रहा था. नेपाल जाने की कोशिश के दौरान एसएसबी ने उसे पकड़ लिया. उसके पास कोई वैध यात्रा के कागजात नहीं मिले हैं.&amp;rsquo;
उन्होंने आगे कहा कि जॉर्डन ब्राउन ने जो दावे किए हैं, उन्हें वेरिफाई किया जा रहा है. भारत में बिना वैध कागजात के प्रवेश करने के आरोप में उसके खिलाफ सोनौली थाने में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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