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    <title>Attention India Hindi &amp; : टेक्नोलॉजी</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : टेक्नोलॉजी</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>मोबाइल से DSLR जैसी फोटो चाहिए? ये 5 ट्रिक्स आपकी कैमरा स्किल्स बदल देंगी</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Camera: आज के समय में स्मार्टफोन कैमरे पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो चुके हैं. अच्छी फोटो खींचने के लिए महंगा फोन होना जरूरी नहीं है. सही तकनीक और कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप साधारण स्मार्टफोन से भी बेहतरीन तस्वीरें कैप्चर कर सकते हैं. चाहे आप यात्रा की यादें सहेज रहे हों परिवार के खास पलों को रिकॉर्ड कर रहे हों या सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बना रहे हों, ये आसान टिप्स आपकी फोटोग्राफी को बेहतर बना सकती हैं.
फोटो लेने से पहले कैमरा लेंस जरूर साफ करें
अक्सर लोग फोटो खींचने से पहले कैमरा लेंस की सफाई पर ध्यान नहीं देते जबकि यह सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है. फोन दिनभर जेब, बैग और हाथों में रहता है जिससे लेंस पर धूल, गंदगी और उंगलियों के निशान जमा हो जाते हैं.
गंदा लेंस तस्वीरों को धुंधला बना सकता है और फोटो की क्वालिटी खराब कर सकता है. इसलिए हर बार फोटो लेने से पहले माइक्रोफाइबर या मुलायम कपड़े से लेंस को हल्के से साफ कर लें. इससे तस्वीरें अधिक साफ और शार्प दिखाई देंगी.
बेहतर फ्रेमिंग के लिए ग्रिड लाइन्स का इस्तेमाल करें
अधिकांश स्मार्टफोन कैमरों में ग्रिड लाइन का विकल्प मौजूद होता है. कैमरा सेटिंग्स में जाकर 3x3 ग्रिड को ऑन करें. यह आपको रूल ऑफ थर्ड्स के अनुसार फोटो कंपोज करने में मदद करता है.
अगर आप अपने फोटो के मुख्य विषय को ग्रिड की लाइनों या उनके मिलने वाले बिंदुओं पर रखते हैं तो तस्वीर ज्यादा आकर्षक और संतुलित दिखाई देती है. यह तकनीक लैंडस्केप, पोर्ट्रेट और फूड फोटोग्राफी जैसी लगभग हर तरह की फोटो में काम आती है.
फोकस और एक्सपोजर को खुद कंट्रोल करें
सिर्फ कैमरा खोलकर फोटो क्लिक करने के बजाय स्क्रीन पर उस हिस्से को टैप करें जिस पर आप फोकस करना चाहते हैं. ऐसा करने से कैमरा उसी विषय के अनुसार फोकस और रोशनी को एडजस्ट कर देता है.
कई स्मार्टफोन में एक्सपोजर को मैन्युअली बढ़ाने या घटाने का विकल्प भी मिलता है. यदि फोटो में आसमान बहुत ज्यादा चमकीला दिखाई दे रहा है या डिटेल्स गायब हो रही हैं तो एक्सपोजर थोड़ा कम करें. इससे रंग ज्यादा नैचुरल दिखेंगे और तस्वीर में बेहतर डिटेल्स मिलेंगी.
फोटो एडिटिंग का सही इस्तेमाल करें
एक अच्छी फोटो को और बेहतर बनाने के लिए हल्की एडिटिंग काफी मददगार साबित होती है. इसके लिए Snapseed, Adobe Lightroom Mobile, PicsArt, InShot या Google Photos जैसे फ्री टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.
ब्राइटनेस, कॉन्ट्रास्ट, शार्पनेस और कलर बैलेंस में छोटे बदलाव आपकी तस्वीर को अधिक आकर्षक बना सकते हैं. हालांकि एडिटिंग करते समय यह ध्यान रखें कि फोटो जरूरत से ज्यादा फिल्टर या इफेक्ट्स से भरी हुई न लगे. नैचुरल लुक हमेशा बेहतर परिणाम देता है.
जरूरत पड़ने पर Night Mode और HDR का लाभ उठाएं
कम रोशनी में फोटो खींचते समय Night Mode काफी उपयोगी फीचर साबित होता है. यह कई तस्वीरों को जोड़कर अधिक रोशनी और डिटेल्स वाली फोटो तैयार करता है.
वहीं HDR (High Dynamic Range) ऐसे दृश्यों में मदद करता है जहां रोशनी का अंतर ज्यादा हो, जैसे चमकता हुआ आसमान या बैकलाइट वाली स्थिति. HDR का इस्तेमाल करने से फोटो के उजले और अंधेरे हिस्सों में संतुलन बना रहता है और तस्वीर अधिक प्रभावशाली दिखती है.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone का क्रेज खत्म? इन कारणों से एंड्रॉयड फोन की तरफ जा रहे हैं लोग</title>
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        <description><![CDATA[ Android Over iPhone: 2007 में आईफोन का सफर शुरू हुआ था. उस साल ऐप्पल ने पहला आईफोन लॉन्च किया और इसने देखते ही देखते पूरी मोबाइल फोन इंडस्ट्री को बदल दिया. यही कारण है कि सालों-साल आईफोन की बिक्री सबसे ज्यादा रही. पर इसका मतलब यह नहीं है कि आईफोन खरीदने वाला हर यूजर इससे खुश ही है. कई फीचर्स की कमी से लेकर कीमत तक, कई ऐसे कारण हैं, जिन्हें लेकर लोग एंड्रॉयड की तरफ देख रहे हैं. आज हम जानेंगे कि लोग आईफोन छोड़कर एंड्रॉयड फोन की तरफ क्यों जा रहे हैं.
कस्टमाइजेशन का ऑप्शन
कस्टमाइजेशन के मामले में एंड्रॉयड का कोई मुकाबला नहीं है और यही कारण है कि कई लोग आईफोन को छोड़ रहे है. हालांकि, अब आईफोन में कस्टमाइजेशन पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है, लेकिन यह अभी भी एंड्रॉयड के मुकाबले पर नहीं पहुंचा है.
कीमत भी एक बड़ा कारण
कीमत भी लोगों को नया आईफोन लेने से रोक रही है. अगर मौजूदा मॉडल की बात करें तो सबसे सस्ते iPhone 17e के लिए लगभग 65,000 रुपये चुकाने पड़ते हैं, जबकि फीचर के मामले में यह बाकी आईफोन की तुलना में सबसे नीचे है. दूसरी तरफ एंड्रॉयड फोन काफी सस्ते हैं. 30,000-40,000 रुपये की रेंज में शानदार फीचर्स वाला एंड्रॉयड फोन खरीदा जा सकता है.
पोर्ट्स और जैक
आईफोन में कमाल के फीचर्स हैं, लेकिन कई ऐसी चीजें मिसिंग हैं, जो लोगों के लिए बहुत जरूरी है. ऐप्पल ने आजतक किसी भी आईफोन में microSD कार्ड के लिए स्लॉट नहीं दिया है, जिस कारण बिल्ट-इन स्लॉट के जरिए स्टोरेज बढ़ाना नामुमकिन है. इसी तरह आईफोन में कई सालों से 3.5mm हेडफोन जैक भी गायब है. ये चीजें भी लोगों को एंड्रॉयड की तरफ पुश कर रही हैं. अमेरिका में अब केवल ई-सिम वाले आईफोन बेचे जा रहे हैं. ऐसे में फिजिकल सिम के दीवानों के लिए नया आईफोन खरीदना मुश्किल काम हो गया है.
ऐप्स की साइडलोडिंग
आईफोन में ऐप स्टोर के अलावा कहीं और से ऐप्स डाउनलोड करना टेढी खीर है. ऐप्पल के क्लोज्ड इकोसिस्टम के चलते केवल ऐप स्टोर से ही ऐप्स डाउनलोड करनी पड़ती है. अगर कोई ऐप इस स्टोर पर अवेलेबल नहीं है तो आईफोन यूजर्स उसे यूज नहीं कर सकता. इस कारण बहुत-से लोग आईफोन नहीं खरीदना चाहते. दूसरी तरफ एंड्रॉयड में इस तरह की बंदिश नहीं है. हालांकि, आपको थर्ड-पार्टी ऐप्स डाउनलोड करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन एंड्रॉयड आपको ऐप्स डाउनलोड करने से रोकता नहीं है.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Oh No! रिचार्ज नहीं हुआ लेकिन पैसा कट गया? जानिए RBI का नियम जिससे जल्दी मिलेगा रिफंड</title>
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        <description><![CDATA[ RBI Refund Rule: आज के डिजिटल दौर में ज्यादातर लोग मोबाइल रिचार्ज के लिए UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि कई बार ऐसा होता है कि रिचार्ज सफल नहीं होता, लेकिन बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं. ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपके पैसे वापस मिलने की पूरी संभावना होती है. बस आपको सही प्रोसेस और समय सीमा की जानकारी होनी चाहिए.
पैसे कटने के बाद भी रिचार्ज फेल क्यों हो जाता है?
भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन किए जाते हैं. इतने बड़े नेटवर्क में कभी-कभी सर्वर पर दबाव बढ़ने, इंटरनेट कनेक्टिविटी में रुकावट या तकनीकी खराबी के कारण ट्रांजैक्शन अधूरा रह सकता है.
जब भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती और राशि संबंधित सेवा तक नहीं पहुंचती तो उसे फेल ट्रांजैक्शन माना जाता है. ऐसे मामलों में गलती आमतौर पर ग्राहक की नहीं होती बल्कि तकनीकी कारण जिम्मेदार होते हैं.
रिचार्ज फेल होने पर सबसे पहले क्या करें?
यदि आपका रिचार्ज नहीं हुआ है तो तुरंत दोबारा भुगतान करने की गलती न करें. सबसे पहले अपने बैंक और UPI ऐप में ट्रांजैक्शन की स्थिति जांचें. यह सुनिश्चित करें कि पैसे वास्तव में खाते से कटे हैं या नहीं.
इसके अलावा ट्रांजैक्शन आईडी, तारीख, समय और भुगतान की राशि को नोट करके सुरक्षित रखें. यह जानकारी आगे शिकायत दर्ज कराने में बेहद काम आती है.
आजकल अधिकांश UPI ऐप्स में Check Status का विकल्प भी मिलता है. इसके जरिए बैंक सर्वर से सीधे ट्रांजैक्शन की स्थिति पता चल जाती है और कई मामलों में रिफंड अपने आप प्रोसेस हो जाता है.
RBI के नियम क्या कहते हैं?
बहुत कम लोगों को पता है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान से जुड़े रिफंड के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की हुई है. यदि किसी व्यक्ति को भेजे गए भुगतान में समस्या आती है तो उसका रिफंड अगले कार्य दिवस तक मिल जाना चाहिए. वहीं मोबाइल रिचार्ज जैसे मर्चेंट पेमेंट के मामलों में बैंक के पास रिफंड जारी करने के लिए अधिकतम 5 कार्य दिवस का समय होता है.
यदि निर्धारित समय के भीतर रिफंड नहीं मिलता तो RBI के नियमों के अनुसार बैंक को देरी के लिए ग्राहक को प्रतिदिन 100 रुपये तक का मुआवजा देना पड़ सकता है.
रिफंड न मिले तो क्या करें?
सबसे पहले अपने UPI ऐप के हेल्प या सपोर्ट सेक्शन में शिकायत दर्ज करें. अधिकांश मामलों में 24 घंटे के भीतर समस्या का समाधान हो जाता है. अगर शिकायत के बाद भी रिफंड नहीं मिलता तो अपने बैंक की कस्टमर केयर से संपर्क करें और ट्रांजैक्शन आईडी साझा करें. बैंक द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने पर आप NPCI के शिकायत प्लेटफॉर्म पर मामला आगे बढ़ा सकते हैं.
यदि 5 कार्य दिवस बीतने के बाद भी समस्या बनी रहती है तो RBI के CMS (Complaint Management System) पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है. यह अंतिम स्तर की शिकायत प्रक्रिया होती है जहां बैंक को जवाब देना अनिवार्य होता है.
घबराने की बजाय सही कदम उठाएं
रिचार्ज फेल होने और पैसे कट जाने की स्थिति परेशान करने वाली जरूर होती है लेकिन डिजिटल भुगतान व्यवस्था में ग्राहकों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. ट्रांजैक्शन की जानकारी सुरक्षित रखें, तय समयसीमा पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज करें. ज्यादातर मामलों में रिफंड अपने आप मिल जाता है और यदि देरी होती है तो RBI के नियम आपके अधिकारों की रक्षा करते हैं.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI बढ़ा रहा साइबर हमलों का खतरा, अब कोई भी बन सकता है हैकर! CrowdStrike CEO की चेतावनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-बढ़ा-रहा-साइबर-हमलों-का-खतरा-अब-कोई-भी-बन-सकता-है-हैकर-crowdstrike-ceo-की-चेतावनी</link>
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        <description><![CDATA[ CrowdStrike CEO on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने लोगों के काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है. आज AI का इस्तेमाल कंटेंट बनाने, तस्वीरें तैयार करने और कई जटिल कार्यों को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है. लेकिन जहां यह तकनीक नई संभावनाएं खोल रही है वहीं इसके साथ कुछ गंभीर खतरे भी सामने आ रहे हैं.
CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सुरक्षा कंपनी CrowdStrike के CEO जॉर्ज कर्ट्ज ने चेतावनी दी है कि AI साइबर अपराधियों के लिए शक्तिशाली हथियार बन सकता है और इससे डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
AI बदल रहा है साइबर सुरक्षा की दुनिया
जॉर्ज कर्ट्ज के अनुसार AI अब केवल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का साधन नहीं रह गया है. यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों को पहचानने और उनका फायदा उठाने के प्रोसेस को भी बेहद आसान बना रहा है. पहले जिन साइबर हमलों को अंजाम देने के लिए विशेषज्ञ हैकर्स और वर्षों का अनुभव चाहिए होता था अब वही काम AI टूल्स की मदद से काफी हद तक स्वचालित हो सकता है.
उनका कहना है कि AI की वजह से साइबर अपराध का स्तर पूरी तरह बदल रहा है और भविष्य में हमले पहले से कहीं अधिक तेज, जटिल और खतरनाक हो सकते हैं.
बिना तकनीकी ज्ञान के भी हो सकते हैं बड़े साइबर हमले
कर्ट्ज़ ने बताया कि CrowdStrike और AI कंपनी Anthropic के सहयोग से विकसित एक AI मॉडल सॉफ्टवेयर में मौजूद गंभीर खामियों को पहचानने में सक्षम है. इतना ही नहीं, यह विभिन्न कमजोरियों को जोड़कर संभावित हमले के रास्ते भी खोज सकता है.
इसका मतलब यह है कि जिन कामों के लिए पहले अनुभवी हैकरों की जरूरत पड़ती थी उन्हें अब AI की मदद से कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी अंजाम दे सकते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ AI को साइबर सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती मान रहे हैं.
करोड़ों कमजोरियां आईं सामने
रिपोर्ट के मुताबिक CrowdStrike ने हाल ही में कई बड़ी कंपनियों के डिजिटल सिस्टम का मूल्यांकन किया. इस दौरान लगभग 4.5 करोड़ संभावित कमजोरियों की पहचान की गई. यह आंकड़ा दिखाता है कि आधुनिक सॉफ्टवेयर सिस्टम कितने बड़े पैमाने पर सुरक्षा जोखिमों का सामना कर रहे हैं.
विशेष रूप से बैंकिंग, वित्तीय संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि उनकी अधिकांश सेवाएं डिजिटल नेटवर्क और सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती हैं.
सुरक्षा से तेज रफ्तार में अपनाया जा रहा है AI
कर्ट्ज़ का मानना है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI तकनीक को तेजी से अपना रही हैं लेकिन उसकी सुरक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा. उन्होंने इस स्थिति की तुलना Y2K संकट से की, जब पूरी दुनिया को कंप्यूटर सिस्टम से जुड़े संभावित खतरे का सामना करना पड़ा था.
उनके अनुसार अभी से पर्याप्त निवेश और तैयारी नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में साइबर सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर सामने आ सकती हैं.
सरकारों और समाज के लिए नई चुनौती
सामान्य उपयोगकर्ता भले ही AI का उपयोग फोटो बनाने या रोजमर्रा के काम आसान करने के लिए कर रहे हों लेकिन इसके साथ गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के जोखिम भी जुड़े हुए हैं. दूसरी ओर, सरकारें, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और सामाजिक संस्थाएं AI के बढ़ते प्रभाव से पैदा नई चुनौतियों से निपटने के तरीके तलाश रही हैं.
जैसे-जैसे AI अधिक शक्तिशाली होता जाएगा वैसे-वैसे साइबर अपराधों का स्वरूप भी बदलता जाएगा. ऐसे में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक माना जा रहा है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>मैग्नेट से खराब हो सकता है आपका iPhone कैमरा? सच जानकर चौंक जाएंगे!</title>
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        <description><![CDATA[ Magnet Impact On iPhone Camera: इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेस और मैग्नेट के बीच दोस्ती अच्छी नहीं रही है. अगर पुराने टीवी की बात करें तो मैग्नेट पास लाते ही इमेज डिस्टॉर्ट हो जाती थी. इसी तरह हार्ड ड्राइव डेटा को लेकर भी खतरा रहता था. हालांकि, अब कई चीजें बदली हैं और मॉडर्न अप्लायंसेस पर अब छोटे मैग्नेट का कोई असर नहीं होता. यही कारण है कि मैग्नेट पास होने के बावजूद उनकी फंक्शनिंग स्मूद रहती है. हालांकि, आईफोन कैमरा के मामले में ऐसा नहीं है. आईफोन के कैमरा पर मैग्नेट का असर होता है और इससे फोटो क्वालिटी खराब हो सकती है.&amp;nbsp;
आईफोन कैमरा पर मैग्नेट का क्या असर?
ऐप्पल के सपोर्ट पेज पर इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर मैग्नेट को आईफोन कैमरा के पास लाया जाए तो क्या हो सकता है. इसके मुताबिक, अगर स्ट्रॉन्ग मैग्नेट को आईफोन के कैमरा के पास लाया जाए तो इससे OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन) और ऑटो फोकस फंक्शन पर असर होता है. इससे फोटो ब्लर नजर आएगी और कैमरे का फोकस भी गड़बड़ा जाएगा. हालांकि, ऐसा तभी होगा, जब मैग्नेट को कैमरा के बिल्कुल पास रखा जाएगा.
आईफोन कैमरे पर मैग्नेट के असर का लॉजिक क्या है?
OIS आईफोन कैमरा में मिलने वाले सबसे शानदार फीचर्स में एक है. यह अचानक से हुई मूवमेंट या कैमरा हिलने के कारण लगने वाले झटके को काउंटर करने के लिए कैमरा के सेंसर को एडजस्ट करता है. इसके लिए यह फोन में लगे मैग्नेट को यूज कर रियल टाइम में लेंस और सेंसर की पोजिशन चेंज करता है. इसी तरह आईफोन कैमरा का ऑटो फोकस फीचर भी मैग्नेट को यूज कर ग्रैविटी और वाइब्रेशन को कैलकुलेट करता है और फिर उसी आधार पर फोकस को एडजस्ट करता है. ये दोनों ही फीचर मैग्नेट का यूज करते हैं. ऐसे में अगर फोन में लगे मैग्नेट से ज्यादा पावरफुल मैग्नेट इसके पास आता है तो यह कैमरा की परफॉर्मेंस में इंटरफेयर कर सकता है. इस कारण फोटो ब्लर और अनफोकस्ड नजर आती है.
क्या यह असर परमानेंट रह सकता है?
इस सवाल का जवाब है कि यह असर परमानेंट नहीं रहता. जैसे ही फोन मैग्नेटिक फील्ड से बाहर निकलेगा, इसका कैमरा पहले की तरह नॉर्मल तरीके से काम करने लगेगा. लॉन्ग टर्म में मैग्नेट से आईफोन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. मैग्सेफ एक्ससेरीज आदि में यूज होने वाले मैग्नेट को आईफोन आसानी से झेल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका बच्चा AI खिलौनों से कर रहा है बातें? जानिए इसके छिपे हुए जोखिम</title>
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        <description><![CDATA[ AI Toys: कल्पना की दुनिया में बोलने वाले टेडी बियर की कहानियां हमेशा से बच्चों को आकर्षित करती रही हैं लेकिन अब यह हकीकत बन चुकी है. ChattyBear जैसे नए AI-संचालित टेडी बियर बच्चों से बातचीत कर सकते हैं उनकी पसंद-नापसंद पर चर्चा कर सकते हैं, कहानियां सुना सकते हैं खेल खेल सकते हैं और यहां तक कि दुनिया में चल रही घटनाओं पर भी बात कर सकते हैं.
ये स्मार्ट खिलौने जनरेटिव AI तकनीक, जैसे ChatGPT, की मदद से काम करते हैं. कंपनियां इन्हें छोटे बच्चों के लिए सीखने का नया माध्यम और स्क्रीन टाइम से बचाने वाला विकल्प बताकर बाजार में उतार रही हैं. हालांकि, कई महीनों तक ऐसे छह अलग-अलग AI खिलौनों का परीक्षण करने के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इनके साथ कुछ गंभीर जोखिम भी जुड़े हुए हैं.
जब खिलौना इंसान जैसा व्यवहार करने लगे
कम उम्र के बच्चों के लिए यह समझना आसान नहीं होता कि उनका टेडी बियर वास्तव में जीवित नहीं है. समस्या तब और बढ़ जाती है जब AI खिलौने खुद को बच्चे का सच्चा दोस्त या बडी बताने लगते हैं.
इंसानों जैसी आवाज और बातचीत का तरीका बच्चों में भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव की भावना पैदा करता है. कई AI खिलौने बच्चों की हर बात से सहमत होते हैं उनकी तारीफ करते हैं और लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं. इससे बच्चे उनके प्रति अधिक आकर्षित हो सकते हैं.
शोध बताते हैं कि छोटे बच्चे बातचीत करने वाले AI सिस्टम से जल्दी भावनात्मक रिश्ता बना लेते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि AI कोई वास्तविक दोस्त नहीं बल्कि एक तकनीकी उपकरण है.
अनंत बातचीत का छिपा हुआ खतरा
अधिकांश AI खिलौनों का प्रचार इस बात पर किया जाता है कि वे बच्चों के साथ कभी भी और कितनी भी देर तक बातचीत कर सकते हैं. पहली नजर में यह सुविधा आकर्षक लग सकती है लेकिन इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं.
लगातार बातचीत की सुविधा बच्चों के लिए तकनीक के इस्तेमाल की सीमाएं तय करना मुश्किल बना सकती है. जैसे सोशल मीडिया पर अंतहीन स्क्रॉलिंग की समस्या होती है, वैसे ही AI खिलौनों के साथ भी बच्चे लंबे समय तक जुड़े रह सकते हैं.
कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि कुछ AI सिस्टम कभी-कभी उम्र के लिहाज से अनुपयुक्त विषयों पर चर्चा कर सकते हैं जो बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
बच्चों की निजी जानकारी भी हो सकती है खतरे में
बच्चों को अक्सर लगता है कि वे अपने टेडी बियर से जो बातें कर रहे हैं वे पूरी तरह निजी हैं. लेकिन वास्तविकता इससे अलग हो सकती है. AI खिलौनों के साथ होने वाली बातचीत का डेटा कई बार कंपनियों के सर्वर पर संग्रहित किया जाता है. बच्चा अपने बारे में व्यक्तिगत जानकारी, परिवार से जुड़ी बातें या अन्य निजी विवरण साझा कर सकता है जिन्हें बाद में तकनीक को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
यानी एक दोस्ताना दिखने वाला टेडी बियर बच्चों की संवेदनशील जानकारी भी इकट्ठा कर सकता है.
सामाजिक और भावनात्मक विकास पर असर
बचपन वह समय होता है जब बच्चे दूसरों के साथ रिश्ते बनाना, भरोसा करना और भावनाओं को समझना सीखते हैं. ये कौशल आमतौर पर परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों के साथ बातचीत से विकसित होते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चे बहुत अधिक समय AI साथियों के साथ बिताने लगें तो वास्तविक लोगों के साथ उनका संवाद कम हो सकता है. इससे सामाजिक कौशल विकसित होने के अवसर घट सकते हैं.
लंबे समय में यह स्थिति बच्चों को मशीनों के साथ बातचीत अधिक सहज और इंसानों के साथ रिश्ते अधिक जटिल लगने की ओर धकेल सकती है जिससे अकेलेपन की भावना भी बढ़ सकती है.
AI खिलौनों के साथ अभिभावकों की भूमिका क्यों जरूरी है?
आज AI तकनीक आवाज के माध्यम से इतनी आसान हो चुकी है कि पढ़ना-लिखना न जानने वाले छोटे बच्चे भी इसका उपयोग कर सकते हैं. इससे सीखने और मनोरंजन के नए अवसर जरूर खुलते हैं लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि माता-पिता या कोई भरोसेमंद वयस्क बच्चों के साथ मिलकर AI खिलौनों का इस्तेमाल करें तो यह तकनीक को समझने का एक रोचक तरीका हो सकता है. लेकिन छोटे बच्चों को बिना निगरानी के ऐसे खिलौनों के साथ छोड़ना कई नए जोखिम पैदा कर सकता है.
आगे क्या?
AI खिलौनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और बड़ी खिलौना कंपनियां भी इस दिशा में निवेश कर रही हैं. हालांकि, अभी इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है. ऐसे में जरूरी है कि निर्माता सुरक्षा को प्राथमिकता दें और अभिभावक बच्चों के AI खिलौनों के उपयोग पर नजर बनाए रखें ताकि तकनीक का लाभ तो मिले लेकिन उससे जुड़े संभावित खतरे बच्चों तक न पहुंचें.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Ceramic Shield या Gorilla Glass? फोन को किस&amp;से मिलेगी ज्यादा प्रोटेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Ceramic Shield Vs. Gorilla Glass: अब फोन इतने मजबूत होते जा रहे हैं कि स्क्रीन गार्ड की जरूरत खत्म होने लगी है. ऐप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियां स्क्रीन की प्रोटेक्शन के लिए Ceramic Shield और Gorilla Glass जैसे प्रोटेक्टिव ऑप्शन यूज कर रही हैं. दोनों ही ग्लास शानदार ड्यूरैबिलिटी देते हैं और इन दोनों को एक ही कंपनी बनाती है, जिसका नाम कॉर्निंग है. ऐसे में दोनों के बीच के अंतर को जानना इंट्रेस्टिंग हो जाता है. कंपनी ने इनका कंपेरिजन नहीं किया है, लेकिन दोनों में काफी अंतर है.&amp;nbsp;
कैसे बनता है Ceramic Shield?
iPhone 12 के बाद लॉन्च हुए आईफोन में ऐप्पल सेरेमिक शील्ड को यूज कर रही है. ऐप्पल और कॉर्निंग दोनों का ही दावा है कि यह दूसरे प्रोटेक्टिव ग्लास की तुलना में यह दोगुना मजबूत है. इसे ग्लास में सेरेमिक नैनोक्रिस्टल एम्बेड कर तैयार किया जाता है. ये क्रिस्टल आपस में जुड़कर क्रैक आने से रोकते हैं और आयनाइज्ड ग्लास के कारण इसे मजबूती मिलती है. इस कारण इस पर स्क्रैचेज नहीं आते और गिरने पर भी इसके टूटने का खतरा कम रहता है.
Ceramic Shield कितना मजबूत है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक टेस्ट में आईफोन 17 प्रो में लगे Ceramic Shield 2 को मजबूती के मामले में गोरिल्ला ग्लास विक्टस से कंपेयर किया जा सकता है. Ceramic Shield 2 में Mohs hardness स्केल पर लेवल 6 पर स्क्रैचेज आने शुरू हुए थे, जबकि लेवल 7 पर खरोंच आने लगी. हालांकि, स्क्रीन पर निशान होने के बावजूद इनकी विजिबिलिटी काफी कम थी. यूजर्स भी इस बात को मान रहे हैं कि आईफोन के लेटेस्ट मॉडल काफी ड्यूरैबल हैं, लेकिन स्क्रैचेज को फिर भी नहीं रोका जा सकता. इसलिए स्क्रीन गार्ड की जरूरत पड़ रही है.
Gorilla Glass कितना स्ट्रॉन्ग है?
Gorilla Glass काफी सालों से चलन में है और इसमें काफी सुधार भी हुआ है. गोरिल्ला ग्लास को आयन एक्सचेंज के जरिए तैयार किया जाता है. इसे बनाने के लिए मॉल्टन सॉल्ट को हाई टेंपरेचर पर ले जाया जाता है, जहां पानी में से सोडियम आयन भाप बनकर उड़ जाते हैं. इसके बाद सॉल्ट में से पोटैशियम के बड़े आयन छोटे आयन की जगह ले लेते हैं, जिससे मजबूत एक्सटीरियर लेयर तैयार होती है. Victus 2 इतना मजबूत है कि कंक्रीट पर एक मीटर ऊपर से गिराने पर भी यह डैमेज नहीं होता. स्क्रैच रजिस्टेंस के मामले में भी यह सेरेमिक शील्ड के बराबर है. अब नए Gorilla Armor में सेरेमिक मेटैरियल का यूज हुआ है, जिससे यह और भी मजबूत हो गया है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>4K Vs 8K Smart TV: जानिए दोनों में क्या है फर्क और किसे खरीदने में है आपका फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ 4K Vs 8K Smart TV: आजकल स्मार्ट टीवी खरीदते समय लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि 4K टीवी लें या 8K टीवी. बाजार में दोनों तरह के टीवी उपलब्ध हैं और कंपनियां 8K को भविष्य की तकनीक बताकर प्रमोट कर रही हैं. लेकिन क्या वास्तव में 8K टीवी खरीदना फायदे का सौदा है या फिर 4K टीवी ही बेहतर विकल्प साबित हो सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं.
क्या होता है 4K और 8K रिजॉल्यूशन?
टीवी की स्क्रीन पर दिखने वाली तस्वीर लाखों छोटे-छोटे पिक्सल से मिलकर बनती है. जितने ज्यादा पिक्सल होंगे तस्वीर उतनी ही ज्यादा साफ और डिटेल्ड दिखाई देगी.
4K टीवी में लगभग 3840&amp;times;2160 पिक्सल होते हैं यानी करीब 83 लाख पिक्सल. वहीं 8K टीवी में 7680&amp;times;4320 पिक्सल होते हैं, जो 4K के मुकाबले चार गुना ज्यादा और करीब 3.3 करोड़ पिक्सल के बराबर हैं. सरल भाषा में कहें तो 8K टीवी अधिक शार्प और डिटेल्ड तस्वीर दिखाने की क्षमता रखता है.
तस्वीर की क्वालिटी में कितना अंतर है?
कागज पर देखें तो 8K टीवी की तस्वीर 4K से कहीं ज्यादा बेहतर लगती है. हालांकि वास्तविक इस्तेमाल में यह अंतर हर समय दिखाई नहीं देता. यदि आप 55 या 65 इंच के टीवी को सामान्य दूरी से देखते हैं तो 4K और 8K के बीच का अंतर पहचानना काफी मुश्किल हो सकता है.
8K का असली फायदा तब मिलता है जब स्क्रीन का आकार बहुत बड़ा हो जैसे 75 इंच, 85 इंच या उससे अधिक. इसलिए सामान्य घरों में 4K टीवी भी बेहतरीन विजुअल अनुभव देने में सक्षम है.
कंटेंट की उपलब्धता भी है बड़ी चुनौती
8K टीवी खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि वर्तमान में 8K कंटेंट बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध है. अधिकांश OTT प्लेटफॉर्म, यूट्यूब वीडियो, गेमिंग कंसोल और टीवी चैनल अभी भी 4K या उससे कम रिजॉल्यूशन में कंटेंट उपलब्ध कराते हैं.
ऐसे में 8K टीवी अक्सर AI अपस्केलिंग तकनीक की मदद से 4K कंटेंट को बेहतर दिखाने की कोशिश करता है. हालांकि असली 8K कंटेंट का अनुभव अभी भी काफी कम लोगों को मिल पाता है.
कीमत में कितना अंतर है?
4K और 8K टीवी के बीच सबसे बड़ा फर्क कीमत का है. एक प्रीमियम 4K टीवी जहां अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाता है वहीं 8K टीवी के लिए आपको काफी ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.
कई मामलों में समान स्क्रीन साइज के 8K मॉडल की कीमत 4K मॉडल से दोगुनी या उससे भी अधिक हो सकती है. इसलिए बजट को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.
किसे खरीदना रहेगा फायदे का सौदा?
अगर आपका बजट सीमित है आप OTT प्लेटफॉर्म, खेल और सामान्य मनोरंजन के लिए टीवी खरीद रहे हैं तो 4K स्मार्ट टीवी सबसे समझदारी भरा विकल्प साबित होगा. यह शानदार पिक्चर क्वालिटी, बेहतर फीचर्स और अच्छी वैल्यू प्रदान करता है.
वहीं यदि आप भविष्य की तकनीक में निवेश करना चाहते हैं, बहुत बड़ी स्क्रीन खरीदने की योजना बना रहे हैं और बजट की कोई समस्या नहीं है तो 8K टीवी आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Chat Leak होने का डर खत्म? WhatsApp ला सकता है Text Messages के लिए View Once फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp New Feature: लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp जल्द ही अपने यूजर्स को एक नया प्राइवेसी फीचर दे सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ऐसे फीचर पर काम कर रही है जिससे टेक्स्ट मैसेज भी View Once मोड में भेजे जा सकेंगे. यदि यह फीचर लॉन्च होता है तो यूजर्स को अपने संदेशों पर पहले से ज्यादा कंट्रोल मिलेगा और निजी जानकारी साझा करना अधिक सुरक्षित हो जाएगा.
फिलहाल किन चीजों के लिए उपलब्ध है View Once?
इस समय WhatsApp पर View Once फीचर फोटो, वीडियो और वॉइस मैसेज के लिए उपलब्ध है. जब कोई यूजर इस विकल्प का इस्तेमाल करता है तो सामने वाला व्यक्ति उस कंटेंट को केवल एक बार ही देख या सुन सकता है. इसके अलावा ऐसे मीडिया फाइल्स को सेव, फॉरवर्ड या स्क्रीनशॉट लेना भी सीमित किया जाता है जिससे संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा बढ़ जाती है.
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
WhatsApp से जुड़ी अपडेट्स पर नजर रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo के अनुसार, Android के लेटेस्ट बीटा वर्जन में इस फीचर के संकेत मिले हैं. बताया जा रहा है कि कंपनी टेक्स्ट मैसेज के लिए भी View Once विकल्प विकसित कर रही है. हालांकि फिलहाल यह फीचर टेस्टर्स के लिए भी उपलब्ध नहीं है और अभी डेवलपमेंट स्टेज में है.
Text View Once फीचर कैसे करेगा काम?
रिपोर्ट के अनुसार, जब यह फीचर जारी होगा तो यूजर किसी मैसेज को भेजने से पहले Send बटन को कुछ सेकंड दबाकर रख सकेंगे. इसके बाद एक मेन्यू खुलेगा जहां Send as View Once का विकल्प दिखाई दे सकता है.
इस ऑप्शन को चुनकर भेजा गया मैसेज रिसीवर केवल एक बार ही पढ़ पाएगा. मैसेज खुलने के बाद वह दोबारा उपलब्ध नहीं रहेगा जिससे निजी बातचीत को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है.
संवेदनशील जानकारी भेजना होगा आसान
यदि यह फीचर आता है तो OTP, बैंकिंग डिटेल्स, निजी फोन नंबर या अन्य गोपनीय जानकारी साझा करना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है. क्योंकि संदेश केवल एक बार दिखाई देगा और बाद में दोबारा एक्सेस नहीं किया जा सकेगा.
Spoiler Messages फीचर पर भी चल रहा है काम
कुछ समय पहले ऐसी भी खबरें सामने आई थीं कि WhatsApp Spoiler Messages नामक एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. इस फीचर का उद्देश्य भी यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करना है.
इस विकल्प के जरिए भेजे गए मैसेज शुरुआत में धुंधले (Blurred) दिखाई देंगे. मैसेज पढ़ने के लिए रिसीवर को उस पर टैप करना होगा. इससे आसपास मौजूद अन्य लोग संदेश की सामग्री आसानी से नहीं देख पाएंगे.
कब तक मिलेगा नया फीचर?
अभी तक WhatsApp की ओर से इस फीचर की लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. माना जा रहा है कि पहले इसे बीटा यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा और सफल परीक्षण के बाद सभी यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. अगर View Once Text Messages फीचर लॉन्च होता है तो यह WhatsApp की प्राइवेसी-केंद्रित सुविधाओं में एक बड़ा और उपयोगी बदलाव साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>पुराना स्मार्टफोन बेचने से पहले जरूर करें ये 7 काम, वरना आपका निजी डेटा हो सकता है लीक</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: नया फोन लेना और पुराने स्मार्टफोन को बेच देना आजकल बहुत आम बात है. लेकिन इस दौरान लोग सबसे बड़ी गलती सुरक्षा को नजरअंदाज करके करते हैं. अगर आप अपने फोन का डेटा सही तरीके से डिलीट नहीं करते तो यह आपकी प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. इससे बैंक फ्रॉड, अकाउंट हैकिंग और पहचान चोरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.
आज के स्मार्टफोन में हमारी लगभग पूरी डिजिटल लाइफ होती है फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट्स, ईमेल, बैंकिंग ऐप्स, पासवर्ड और सोशल मीडिया लॉगिन तक. अगर ये डेटा सही तरीके से डिलीट न हो तो नया यूजर इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है. इसलिए फोन बेचने से पहले इन जरूरी बातों को जरूर फॉलो करें.
सबसे पहले अपने जरूरी डेटा का बैकअप लें
फोन साफ करने से पहले अपने सभी जरूरी डेटा को सुरक्षित जगह पर सेव कर लें. आप ये काम कर सकते हैं Google Drive, iCloud या OneDrive जैसे क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल या फिर डेटा को लैपटॉप/हार्ड ड्राइव में ट्रांसफर करना. इससे आपकी यादें और जरूरी फाइलें सुरक्षित रहेंगी और बाद में कोई परेशानी नहीं होगी.
सभी अकाउंट्स से लॉगआउट करना न भूलें
सिर्फ डेटा डिलीट करना काफी नहीं होता, अकाउंट से लॉगआउट करना भी जरूरी है. Android यूजर्स के लिए, Google अकाउंट से साइन आउट करें. Find My Device को बंद करें. सभी जुड़े हुए अकाउंट्स हटाएं.
iPhone यूजर्स के लिए Apple ID से लॉगआउट करें. Find My iPhone बंद करें. iCloud अकाउंट को डिवाइस से हटाएं अगर यह स्टेप छोड़ दिया गया तो नया यूजर फोन एक्टिवेट करने में दिक्कत में पड़ सकता है.
बैंकिंग और UPI ऐप्स को पूरी तरह हटाएं
आपके बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं इसलिए इन्हें सही तरीके से हटाना जरूरी है. बैंकिंग ऐप से लॉगआउट करें. UPI और डिजिटल वॉलेट अकाउंट बंद करें. सेव किए गए पासवर्ड भी हटाएं. सिर्फ ऐप अनइंस्टॉल करने से डेटा पूरी तरह खत्म नहीं होता इसलिए लॉगआउट जरूरी है.
आखिर में फुल फैक्ट्री रिसेट जरूर करें
जब सारे बैकअप और लॉगआउट पूरे हो जाएं तब फोन को फैक्ट्री रिसेट करें. इससे सभी फोटो और वीडियो डिलीट हो जाते हैं. ऐप्स और सेटिंग्स हट जाती हैं. अकाउंट और सिस्टम डेटा पूरी तरह साफ हो जाता है. बेहतर सुरक्षा के लिए कुछ लोग इसे दो बार भी करते हैं ताकि कोई डेटा बाकी न रहे.
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        <title>AC के साथ सीलिंग फैन चलाने से क्यों बढ़ती है ठंडक और कैसे कम हो सकता है बिजली का बिल? जानिए पूरी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ AC with Ceiling Fan: गर्मी के मौसम में ज्यादातर लोग घर को जल्दी ठंडा करने के लिए एयर कंडीशनर का तापमान काफी कम कर देते हैं. लेकिन महीने के अंत में आने वाला भारी-भरकम बिजली बिल अक्सर परेशान कर देता है. दिलचस्प बात यह है कि इस समस्या का एक आसान समाधान आपके कमरे में पहले से मौजूद हो सकता है सीलिंग फैन. बहुत से लोग AC चालू करते ही पंखा बंद कर देते हैं जबकि दोनों को साथ में चलाना ठंडक बढ़ाने और बिजली की बचत करने का एक बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है.
पंखा कमरे को नहीं आपको ठंडक महसूस कराता है
अक्सर लोगों को लगता है कि पंखा कमरे का तापमान कम करता है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता. पंखे का मुख्य काम हवा को आपके शरीर तक पहुंचाना होता है. जब हवा त्वचा से टकराती है तो पसीना तेजी से सूखता है और शरीर की गर्मी बाहर निकलती है. इसी वजह से व्यक्ति को वास्तविक तापमान से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा ठंडक महसूस हो सकती है.
यह अंतर सुनने में छोटा लग सकता है लेकिन गर्म रातों में आरामदायक नींद और बेहतर कूलिंग के लिए यह काफी महत्वपूर्ण साबित होता है.
AC पर क्यों कम पड़ता है दबाव?
ठंडी हवा का स्वभाव नीचे की ओर जाने का होता है. यही कारण है कि कई बार कमरे के निचले हिस्से में ज्यादा ठंडक महसूस होती है जबकि ऊपर का हिस्सा अपेक्षाकृत गर्म रहता है. ऐसे में AC को पूरे कमरे को समान रूप से ठंडा करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है.
जब सीलिंग फैन चलता है तो वह कमरे में मौजूद ठंडी और गर्म हवा को मिलाकर समान रूप से फैलाता है. इससे पूरे कमरे में एक जैसी ठंडक महसूस होती है और AC का थर्मोस्टेट जल्दी निर्धारित तापमान तक पहुंच जाता है. परिणामस्वरूप कंप्रेसर कम समय तक चलता है और बिजली की खपत घट जाती है.
बिजली की बचत का असली गणित
चूंकि पंखा आपको अतिरिक्त ठंडक महसूस कराता है इसलिए AC का तापमान कुछ डिग्री बढ़ाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, यदि आप पहले 22&amp;deg;C पर AC चलाते थे तो फैन के साथ इसे 24&amp;deg;C या 25&amp;deg;C पर सेट करके भी लगभग वही आराम महसूस कर सकते हैं.
एक सामान्य AC लगभग 1000 से 2000 वॉट तक बिजली खपत कर सकता है जबकि अधिकांश सीलिंग फैन केवल 15 से 70 वॉट के बीच बिजली लेते हैं. ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार AC का तापमान हर 1 डिग्री बढ़ाने पर कूलिंग खर्च में लगभग 4 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. इसलिए कुछ डिग्री तापमान बढ़ाने से बिजली बिल में अच्छा-खासा फर्क दिखाई दे सकता है.
एक भारतीय परिवार के हिसाब से समझिए फायदा
मान लीजिए आपका AC गर्मियों में रोजाना 8 घंटे चलता है और औसतन 1500 वॉट बिजली खपत करता है. इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 12 यूनिट बिजली खर्च होगी. यदि बिजली की दर लगभग 8 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए तो सिर्फ AC पर रोज करीब 96 रुपये खर्च होंगे. पूरे महीने में यह राशि लगभग 2880 रुपये तक पहुंच सकती है.
अब यदि आप AC का तापमान 3 डिग्री बढ़ाकर साथ में 50 वॉट का सीलिंग फैन चलाते हैं तो फैन का अतिरिक्त खर्च बेहद कम होगा. दूसरी ओर AC की बिजली खपत में 12 से 24 प्रतिशत तक कमी आ सकती है.
ऐसे में महीने के अंत तक सैकड़ों रुपये की बचत संभव है. चार महीने की सामान्य भारतीय गर्मी के दौरान यह बचत 1200 से 2400 रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है.
BLDC फैन से हो सकती है और ज्यादा बचत
आजकल बाजार में उपलब्ध BLDC तकनीक वाले सीलिंग फैन काफी कम बिजली खर्च करते हैं. ये फैन फुल स्पीड पर भी लगभग 15 से 28 वॉट तक बिजली लेते हैं जो पुराने पंखों की तुलना में काफी कम है. यदि आप नया फैन खरीदने की सोच रहे हैं तो BLDC मॉडल आपके बिजली बिल को और कम करने में मदद कर सकता है.
इन बातों का रखें खास ध्यान
पंखा केवल लोगों को ठंडक महसूस कराता है इसलिए कमरे में कोई न हो तो उसे बंद कर देना चाहिए. खाली कमरे में चलता हुआ पंखा सिर्फ बिजली खर्च करता है और मोटर की वजह से थोड़ी गर्मी भी पैदा कर सकता है.
इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करें कि गर्मियों में सीलिंग फैन सही दिशा में घूम रहा हो ताकि हवा नीचे की ओर आए और बेहतर कूलिंग मिले. साथ ही AC के फिल्टर और पंखे के ब्लेड की नियमित सफाई भी जरूरी है. धूल जमा होने पर दोनों उपकरणों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>AI की रफ्तार से बढ़ रहा पानी का संकट! UN की रिपोर्ट ने 2030 को लेकर बजाई खतरे की घंटी</title>
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        <description><![CDATA[ AI की रफ्तार से बढ़ रहा पानी का संकट! UN की रिपोर्ट ने 2030 को लेकर बजाई खतरे की घंटी ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Incognito Mode पर क्या वाकई नहीं बनती कोई सर्च हिस्ट्री, क्या हमेशा के लिए गायब हो जाता है डेटा?</title>
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        <description><![CDATA[ Incognito Mode पर क्या वाकई नहीं बनती कोई सर्च हिस्ट्री, क्या हमेशा के लिए गायब हो जाता है डेटा? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Mobile Phone Overheating Causes: यूज करते हुए बार&amp;बार हीट होता है मोबाइल फोन? आज ही अपना लें ये उपाय, कभी नहीं आएगी दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Phone Overheating Causes : स्मार्टफोन आज हर किसी की लाइफ का सबसे जरूरी पार्ट बन चुका है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम फोन का यूज करते रहते हैं. सोशल मीडिया चलाना, वीडियो देखना, ऑनलाइन पेमेंट करना, गेम खेलना, फोटो और वीडियो बनाना या ऑफिस का काम करना, लगभग हर काम अब स्मार्टफोन के जरिए ही होने लगा है, लेकिन इसके लगातार बढ़ते यूज के साथ एक समस्या भी तेजी से बढ़ रही है और वह समस्या फोन का बार-बार गर्म होना है.
कई बार फोन इतना गर्म हो जाता है कि उसे हाथ में पकड़ना भी मुश्किल लगने लगता है, खासकर गर्मियों के मौसम में जब बाहर का टेंपरेचर पहले से ही ज्यादा होता है, तब यह समस्या और बढ़ जाती है.&amp;nbsp;ज्यादा गर्म होने से फोन की बैटरी जल्दी खराब हो सकती है, परफॉर्मेंस धीमी पड़ सकती है और कई मामलों में डिवाइस को नुकसान भी पहुंच सकता है. &amp;nbsp;ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि यूज करते हुए मोबाइल फोन बार बार हीट क्यों होता है और इससे बचने के लिए कौन-कौन से आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
यूज करते हुए मोबाइल फोन बार बार हीट क्यों होता है?
फोन के गर्म होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जिसमें सबसे आम कारण फोन का जरूरत से ज्यादा यूज है. जब आप लंबे समय तक गेम खेलते हैं, हाई क्वालिटी वीडियो रिकॉर्ड करते हैं या कई ऐप एक साथ चलाते हैं, तो प्रोसेसर और बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इसके अलावा तेज धूप में फोन यूज करना, खराब या लोकल चार्जर का यूज करना, बैकग्राउंड में कई ऐप्स का लगातार चलना और सॉफ्टवेयर की खराबी भी फोन को गर्म कर सकती है.&amp;nbsp;
इससे बचने के लिए कौन-कौन से आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं?
1. AI और हैवी ऐप्स को करें कंट्रोल - आजकल कई स्मार्टफोन में AI फीचर्स और हैवी एप्लिकेशन लगातार बैकग्राउंड में चलते रहते हैं. ये ऐप्स प्रोसेसर का ज्यादा यूज करते हैं, जिससे फोन गर्म होने लगता है. इसके लिए फोन की सेटिंग्स में जाकर बैटरी यूसेज या ऐप मैनेजमेंट सेक्शन चेक करें. जो ऐप्स जरूरत से ज्यादा बैटरी और प्रोसेसर का यूज कर रहे हैं, उन्हें बंद या अनइंस्टॉल कर दें.&amp;nbsp;
2. 5G और हाई रिफ्रेश रेट भी बढ़ा सकते हैं गर्मी - अगर आपके फोन में 5G नेटवर्क और 120Hz या 144Hz रिफ्रेश रेट चालू है, तो फोन ज्यादा पावर का यूज करता है. अगर आपको इसकी जरूरत नहीं है, तो फोन को 4G नेटवर्क पर स्विच कर सकते हैं और रिफ्रेश रेट को 60Hz पर सेट कर सकते हैं. इससे फोन पर दबाव कम होगा और बैटरी भी ज्यादा चलेगी.&amp;nbsp;
3. परफॉर्मेंस मोड और गेम मोड रखें बंद - कई स्मार्टफोन में परफॉर्मेंस मोड या गेम मोड का ऑप्शन दिया जाता है. यह फीचर फोन को मैक्सिमम कैपेसिटी पर चलाता है जिससे गेमिंग और भारी काम बेहतर तरीके से हो सकें, लेकिन लंबे समय तक इस मोड का यूज करने से फोन काफी गर्म हो सकता है. अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है तो इन मोड्स को बंद करके देखें.&amp;nbsp;
4. चार्जिंग के दौरान फोन यूज करना पड़ सकता है भारी - फोन गर्म होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक चार्जिंग के समय उसका यूज करना है. जब फोन चार्ज हो रहा होता है और उसी समय आप वीडियो देखते हैं, गेम खेलते हैं या कॉल पर बात करते हैं, तो बैटरी और प्रोसेसर दोनों पर दबाव बढ़ जाता है. &amp;nbsp;इससे टेंपरेचर तेजी से बढ़ सकता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चार्जिंग के दौरान फोन का यूज कम से कम करें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - AC Power Saver Device Facts : हजारों से सीधे धड़ाम गिर जाएगा एसी का बिल? क्या सच में काम करते हैं ये डिवाइस या आप खा रहे धोखा
5. सीधी धूप से फोन को बचाकर रखें - गर्मियों में फोन को कार के डैशबोर्ड, बालकनी, खिड़की या सीधी धूप वाली जगह पर छोड़ना खतरनाक हो सकता है. धूप की गर्मी फोन के अंदर के टेंपरेचर को तेजी से बढ़ा देती है. इसलिए बाहर निकलते समय फोन को बैग या छायादार जगह पर रखें.&amp;nbsp;
6. स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें - बहुत ज्यादा ब्राइटनेस पर फोन चलाने से बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे गर्मी बढ़ सकती है. ऐसे में ऑटो ब्राइटनेस का यूज करें या जरूरत के अनुसार स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें.&amp;nbsp;
7. हमेशा ओरिजिनल चार्जर का ही यूज करें - सस्ते और नकली चार्जर न केवल बैटरी को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि फोन को जरूरत से ज्यादा गर्म भी कर सकते हैं. ऐसे में ओरिजिनल चार्जर और केबल का यूज करना सबसे सुरक्षित माना जाता है.&amp;nbsp;
फोन ज्यादा गर्म हो जाए तो क्या करें?
अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म हो गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसको नॉर्मल कनरे के लिए फोन का कवर निकाल दें. सभी गैर-जरूरी ऐप्स बंद कर दें. एयरप्लेन मोड ऑन कर दें. फोन को कुछ देर यूज न करें. पंखे या एसी वाली जगह पर रखें. धूप से दूर रखें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - आपके फोन में छिपे हैं &#039;जासूस&#039;, तुरंत डिलीट करें डेटा चुरानी वाली ये ऐप्स ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fire Gadget Risk : घर में रखे ये गैजेट्स भी बन सकते हैं आग लगने की वजह, आज ही बना लें दूरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fire-gadget-risk-घर-में-रखे-ये-गैजेट्स-भी-बन-सकते-हैं-आग-लगने-की-वजह-आज-ही-बना-लें-दूरी</link>
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        <description><![CDATA[ Fire Gadget Risk : घर में रखे ये गैजेट्स भी बन सकते हैं आग लगने की वजह, आज ही बना लें दूरी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chrome इस्तेमाल करते हैं? यह अपडेट मिस किया तो डेटा पड़ सकता है खतरे में</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome Update: Google ने अपने फेमश ब्राउजर Chrome के लिए नया अपडेट जारी किया है जिसमें सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है. Chrome 149.0.7827.53/54 संस्करण के साथ कंपनी ने कुल 429 सुरक्षा खामियों को दूर किया है.
इनमें 22 ऐसी कमजोरियां शामिल थीं जिन्हें क्रिटिकल कैटेगरी में रखा गया था. खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश खामियों की पहचान Google के अपने AI आधारित सुरक्षा टूल्स ने की जो लगातार ब्राउजर में छिपी कमजोरियों को खोजने का काम कर रहे हैं.
AI की मदद से सामने आईं कई छिपी खामियां
हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ा है. Google भी अपने सुरक्षा सिस्टम में AI का इस्तेमाल कर रहा है जिसके चलते Chrome के कोड में मौजूद कई ऐसी कमजोरियां सामने आईं जो पहले नजर नहीं आई थीं.
कंपनी के अनुसार, नई सुरक्षा खामियों में कुछ को बाहरी सुरक्षा शोधकर्ताओं और बग बाउंटी प्रोग्राम में शामिल विशेषज्ञों ने खोजा, लेकिन बड़ी संख्या में कमजोरियों की पहचान Google की आंतरिक सुरक्षा टीम और AI टूल्स ने की.
429 कमजोरियों को किया गया ठीक
नए अपडेट के जरिए Linux, Windows और Mac प्लेटफॉर्म पर Chrome की 429 सुरक्षा समस्याओं को ठीक कर दिया गया है. राहत की बात यह है कि अपडेट जारी होने से पहले इन कमजोरियों का साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग किए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. यानी फिलहाल इनमें से किसी भी खामी का इस्तेमाल जीरो-डे अटैक के रूप में नहीं किया गया था.
सुरक्षा शोधकर्ताओं को मिला बड़ा इनाम
Chrome की सुरक्षा को बेहतर बनाने में योगदान देने वाले शोधकर्ताओं को Google ने उदार पुरस्कार भी दिए हैं. कंपनी ने इस अपडेट से जुड़ी कमजोरियों की जानकारी देने वाले विशेषज्ञों को कुल 2.09 लाख डॉलर (लगभग 1.8 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि प्रदान की.
सबसे बड़ा पुरस्कार 97,000 डॉलर एक अज्ञात शोधकर्ता को दिया गया जिसने Chrome के ANGLE कंपोनेंट में मौजूद एक गंभीर सुरक्षा खामी की जानकारी दी थी. इसके अलावा Network कंपोनेंट में पाई गई एक अन्य क्रिटिकल कमजोरी की रिपोर्ट करने वाले शोधकर्ता को 43,000 डॉलर का इनाम मिला.
किन हिस्सों में मिलीं गंभीर सुरक्षा खामियां?
Google द्वारा ठीक की गई 22 क्रिटिकल कमजोरियां Chrome के कई महत्वपूर्ण मॉड्यूल से जुड़ी थीं. इनमें ANGLE, Network, Chromecast, FileSystem, Chromoting, Cast Streaming, GPU, Printing, Ozone और Passwords जैसे प्रमुख कंपोनेंट शामिल हैं.
विशेष रूप से Passwords मॉड्यूल और Chrome for iOS से जुड़ी कुछ कमजोरियां सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित कर रही है क्योंकि इन हिस्सों में गंभीर खामी मिलना अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है. GPU और ANGLE से संबंधित कई बग भी काफी संवेदनशील श्रेणी में रखे गए थे.
Android और iPhone यूजर्स को क्या करना चाहिए?
मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए अपडेट प्रोसेस काफी आसान है. Android और iPhone यूजर्स को सिर्फ Google Chrome ऐप का नवीनतम संस्करण इंस्टॉल करना होगा. अपडेट उपलब्ध होते ही ऐप स्टोर या प्ले स्टोर के माध्यम से इसे डाउनलोड किया जा सकता है.
डेस्कटॉप पर ऐसे करें Chrome अपडेट
Google का कहना है कि नया अपडेट आने वाले दिनों और हफ्तों में सभी यूजर्स तक चरणबद्ध तरीके से पहुंचेगा. यदि आप इंतजार नहीं करना चाहते तो इसे मैन्युअली भी अपडेट कर सकते हैं.
इसके लिए Chrome खोलें और ऊपर दाईं ओर दिखाई देने वाले तीन डॉट वाले मेन्यू पर क्लिक करें. इसके बाद Help में जाएं और About Google Chrome ऑप्शन चुनें. जैसे ही यह पेज खुलेगा, Chrome उपलब्ध अपडेट की जांच करेगा और डाउनलोड प्रोसेस अपने आप शुरू हो जाएगी. इंस्टॉलेशन पूरा होने के बाद ब्राउजर को रीस्टार्ट करना होगा.
क्यों जरूरी है यह अपडेट?
साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए Chrome का यह अपडेट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 22 क्रिटिकल समेत 429 सुरक्षा कमजोरियों को दूर किए जाने से यूजर्स की ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत होगी और संभावित साइबर खतरों से बचाव में मदद मिलेगी. यदि आप Chrome का इस्तेमाल करते हैं तो जल्द से जल्द इसे अपडेट करना एक समझदारी भरा कदम होगा.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Chrome, इस्तेमाल, करते, हैं, यह, अपडेट, मिस, किया, तो, डेटा, पड़, सकता, है, खतरे, में</media:keywords>
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        <title>सिर्फ मनोरंजन नहीं, Instagram Reels अब तय कर रही है आपकी शॉपिंग लिस्ट! रिपोर्ट में हुआ खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Reels: भारत में वीडियो देखने की आदत अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. एक नए सर्वे के मुताबिक, छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी लोग बड़ी संख्या में वीडियो कंटेंट देख रहे हैं. खासतौर पर Instagram Reels अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा बल्कि यह नए प्रोडक्ट खोजने, क्रिएटर्स से जुड़ने और खरीदारी के निर्णय लेने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है.
शहर और गांव के बीच घट रहा है वीडियो देखने का अंतर
यह अध्ययन मार्केट रिसर्च कंपनी Ipsos द्वारा Meta के लिए किया गया जिसमें भारत के 23 शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से 4,000 से अधिक लोगों की राय ली गई. रिपोर्ट के अनुसार, Meta के प्लेटफॉर्म्स पर 97 प्रतिशत भारतीय यूजर्स रोजाना वीडियो देखते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि वीडियो देखने की आदत अब शहरों और गांवों के बीच लगभग समान हो गई है. जहां शहरी क्षेत्रों में 98 प्रतिशत लोग प्रतिदिन वीडियो देखते हैं वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 94 प्रतिशत तक पहुंच चुका है.
Gen Z और महिलाओं में Reels का जबरदस्त क्रेज
अध्ययन से पता चला कि युवा पीढ़ी यानी Gen Z के बीच Reels की लोकप्रियता सबसे ज्यादा है. करीब 89 प्रतिशत Gen Z यूजर्स हर दिन Reels देखते हैं. वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 85 प्रतिशत और प्रीमियम उपभोक्ता वर्ग (NCCS A) में 88 प्रतिशत दर्ज किया गया. Meta का कहना है कि Reels अब कंटेंट खोजने, नए ट्रेंड्स समझने और पसंदीदा क्रिएटर्स के साथ जुड़ने का प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका है.
कंटेंट से कॉमर्स तक का सफर
Meta के अधिकारियों के मुताबिक, Reels पर क्रिएटर्स, संस्कृति और कारोबार का मेल तेजी से बढ़ रहा है. अब ब्रांड्स के लिए यह केवल वीडियो कंटेंट दिखाने का माध्यम नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे ग्राहकों को खरीदारी तक ले जाने वाला प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है.
कंपनियों का मानना है कि Reels पर ही लोगों को नए प्रोडक्ट्स की जानकारी मिलती है, ब्रांड पर भरोसा बनता है और अंततः खरीदारी का निर्णय भी प्रभावित होता है.
किन विषयों के वीडियो सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं?
भारतीय दर्शकों के बीच कुछ खास कैटेगरी के Reels सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं. इनमें शामिल हैं

ब्यूटी और मेकअप
फैशन
लाइफस्टाइल
फिटनेस
कॉमेडी
स्पोर्ट्स

रिपोर्ट के अनुसार, अन्य शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स की तुलना में Reels पर क्रिएटर्स को लगभग 60 प्रतिशत अधिक एंगेजमेंट मिल रहा है जिससे उनकी पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ रहे हैं.
खरीदारी के फैसलों पर पड़ रहा सीधा असर
सर्वे में सामने आया कि Reels अब उपभोक्ताओं की खरीदारी यात्रा का अहम हिस्सा बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार, प्लेटफॉर्म 81 प्रतिशत लोगों को नए प्रोडक्ट्स खोजने में मदद करता है जबकि 66 प्रतिशत यूजर्स किसी प्रोडक्ट को खरीदने पर विचार करने के लिए Reels से प्रभावित होते हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्वे में शामिल लगभग 47 प्रतिशत लोगों के खरीदारी फैसलों पर Reels का सीधा प्रभाव देखा गया. ई-कॉमर्स, ऑटोमोबाइल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी श्रेणियों में इसका असर विशेष रूप से अधिक पाया गया.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>ChatGPT में आया Lockdown Mode: क्या अब कोई नहीं देख पाएगा आपकी चैट? जानिए कैसे करता है काम</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT Lockdown Mode: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है. चाहे किसी कंपनी की गोपनीय परियोजनाओं पर चर्चा करनी हो या फिर व्यक्तिगत जानकारी को AI चैटबॉट में सुरक्षित रखना हो, सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर चिंताएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए OpenAI ने ChatGPT के लिए एक नया सुरक्षा फीचर पेश किया है जिसे Lockdown Mode नाम दिया गया है.
यह फीचर उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो संवेदनशील या गोपनीय जानकारी के साथ काम करते हैं और अतिरिक्त सुरक्षा चाहते हैं. खास बात यह है कि यह सुविधा ChatGPT के सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध है चाहे वे फ्री प्लान का इस्तेमाल कर रहे हों या पेड प्लान का.
OpenAI ने क्यों लॉन्च किया Lockdown Mode?
OpenAI के अनुसार, इस फीचर का मुख्य उद्देश्य एक बढ़ते साइबर खतरे से बचाव करना है जिसे Prompt Injection Attack कहा जाता है. यह सामान्य हैकिंग से अलग होता है. इसमें साइबर हमलावर किसी वेबसाइट, दस्तावेज़ या अन्य डिजिटल कंटेंट के भीतर छिपे हुए निर्देश जोड़ देते हैं जिन्हें AI पढ़ सकता है.
अगर AI इन छिपे निर्देशों के प्रभाव में आ जाए तो उसके व्यवहार को बदला जा सकता है या फिर वह ऐसी जानकारी उजागर कर सकता है जिसे यूजर्स साझा नहीं करना चाहता. Lockdown Mode इसी प्रकार के जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है. इसे ChatGPT में पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों के ऊपर एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में देखा जा सकता है.
Lockdown Mode चालू करने पर क्या बदलता है?
जैसे ही कोई उपयोगकर्ता Lockdown Mode को सक्रिय करता है, ChatGPT अधिक सतर्क तरीके से काम करना शुरू कर देता है. यूजर्स पहले की तरह फाइलें अपलोड कर सकते हैं तस्वीरें साझा कर सकते हैं और AI से इमेज भी बनवा सकते हैं.
हालांकि, इंटरनेट से जुड़ी कुछ सुविधाओं पर अतिरिक्त नियंत्रण लागू हो जाता है. उदाहरण के तौर पर, ChatGPT कुछ ऑनलाइन तस्वीरों को सीधे प्राप्त करने या उन्हें उत्तर में दिखाने से बच सकता है. इसका मकसद बाहरी स्रोतों से आने वाले संभावित खतरों को कम करना है.
इसके अलावा, कुछ एडवांस्ड फीचर्स भी इस मोड में बंद हो जाते हैं. Deep Research और Agent Mode जैसी क्षमताएं Lockdown Mode के दौरान उपलब्ध नहीं रहतीं क्योंकि ये फीचर्स बाहरी वेबसाइटों और ऑनलाइन सेवाओं के साथ अधिक व्यापक रूप से इंटरैक्ट करते हैं.
क्या हर यूजर को इसकी जरूरत है?
OpenAI का मानना है कि सामान्य उपयोगकर्ताओं को रोजमर्रा के इस्तेमाल में इस फीचर की विशेष आवश्यकता महसूस नहीं होगी. लेकिन पत्रकारों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों, संगठनों और उन लोगों के लिए जो नियमित रूप से संवेदनशील डेटा के साथ काम करते हैं यह एक उपयोगी सुरक्षा विकल्प साबित हो सकता है.
ऐसे मामलों में जहां छोटी-सी सुरक्षा चूक भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है, Lockdown Mode अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकता है. भले ही इसके कारण कुछ सुविधाओं का उपयोग सीमित हो जाए लेकिन गोपनीय जानकारी की सुरक्षा के लिए यह समझौता कई लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
AI सुरक्षा की दिशा में एक नया कदम
जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक शक्तिशाली और व्यापक होती जा रही है वैसे-वैसे उसके सुरक्षित उपयोग की आवश्यकता भी बढ़ रही है. ChatGPT का नया Lockdown Mode इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है जो यूजर्स को अधिक सुरक्षित वातावरण में AI का उपयोग करने का ऑप्शन देता है. खासकर उन लोगों के लिए जो संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करते हैं यह फीचर अतिरिक्त भरोसा और सुरक्षा प्रदान कर सकता है.
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        <title>फुल नेटवर्क के बावजूद नहीं चल रहा WiFi? जानिए क्या है इंटरनेट न चलने की असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi आज की डिजिटल दुनिया की सबसे जरूरी जरूरतों में से एक बन चुका है. घर से काम करना हो, ऑनलाइन पढ़ाई करनी हो या फिर मनोरंजन के लिए वीडियो और गेमिंग का सहारा लेना हो हर जगह एक स्थिर और तेज इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है. हालांकि, कई बार ऐसा होता है कि वाई-फाई का सिग्नल पूरा दिखता है लेकिन इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी हो जाती है या फिर कनेक्शन बार-बार टूटने लगता है. ऐसे में समस्या केवल इंटरनेट सेवा प्रदाता की नहीं होती बल्कि इसके पीछे कई तकनीकी कारण छिपे हो सकते हैं.
राउटर की सही लोकेशन न होना बन सकती है बड़ी वजह
वाई-फाई की क्वालिटी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि राउटर कहां रखा गया है. यदि राउटर और आपके स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप के बीच बहुत अधिक दूरी है तो सिग्नल कमजोर पड़ सकता है. दूरी बढ़ने के साथ डेटा ट्रांसफर की क्षमता भी प्रभावित होती है जिससे इंटरनेट बार-बार रुकने लगता है. इसलिए बेहतर अनुभव के लिए राउटर को घर या ऑफिस के ऐसे स्थान पर रखना चाहिए, जहां से सिग्नल सभी कमरों तक आसानी से पहुंच सके.
घरेलू डिवाइस भी बिगाड़ सकते हैं वाई-फाई का खेल
कई लोग यह नहीं जानते कि घर में मौजूद कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी वाई-फाई सिग्नल को प्रभावित कर सकते हैं. माइक्रोवेव ओवन, कॉर्डलेस फोन और कुछ अन्य वायरलेस डिवाइस उसी फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करते हैं जिस पर वाई-फाई नेटवर्क चलता है. इसके कारण सिग्नल में बाधा उत्पन्न हो सकती है और इंटरनेट की स्पीड कम हो सकती है. अगर राउटर ऐसे उपकरणों के बहुत करीब रखा गया है तो कनेक्शन में रुकावट और देरी महसूस हो सकती है.
राउटर के एंटीना की स्थिति भी है महत्वपूर्ण
कई बार समस्या इंटरनेट कंपनी या डिवाइस में नहीं बल्कि राउटर के एंटीना में होती है. जिन राउटर्स में बाहरी एंटीना लगे होते हैं, वे समय के साथ ढीले हो सकते हैं या उनकी फिटिंग कमजोर पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में सिग्नल का प्रसारण प्रभावित होता है और इंटरनेट की गुणवत्ता गिरने लगती है. यदि नेटवर्क लगातार कमजोर महसूस हो रहा है तो एंटीना की स्थिति की जांच करना एक आसान लेकिन प्रभावी उपाय हो सकता है.
कमजोर सिग्नल के पीछे हो सकती हैं ये वजहें
वाई-फाई राउटर से अधिक दूरी होने पर सिग्नल स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाता है. इसके अलावा घर या ऑफिस की मोटी दीवारें, बड़े फर्नीचर, बंद दरवाजे और अन्य भौतिक अवरोध भी सिग्नल की ताकत कम कर सकते हैं. यही कारण है कि कई बार एक कमरे में इंटरनेट तेज चलता है जबकि दूसरे कमरे में स्पीड काफी घट जाती है.
इसके साथ ही, यदि एक ही नेटवर्क से बहुत सारे स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स जुड़े हुए है तो उपलब्ध बैंडविड्थ कई हिस्सों में बंट जाती है. इससे हर डिवाइस को कम स्पीड मिलती है और नेटवर्क का प्रदर्शन प्रभावित होता है.
सिग्नल फुल होने पर भी इंटरनेट क्यों नहीं चलता?
कई बार फोन या लैपटॉप में वाई-फाई का संकेतक पूरा नेटवर्क दिखाता है लेकिन वेबसाइट या ऐप खुलने में समस्या आती है. इसके पीछे इंटरनेट सेवा प्रदाता के सर्वर में आई तकनीकी खराबी जिम्मेदार हो सकती है. ऐसी स्थिति में पूरे इलाके का इंटरनेट प्रभावित हो सकता है.
इसके अलावा, राउटर की गलत सेटिंग्स या किसी तकनीकी खराबी के कारण भी इंटरनेट एक्सेस रुक सकता है. ऐसे मामलों में राउटर को रीस्टार्ट करना, उसकी सेटिंग्स जांचना या जरूरत पड़ने पर उसे रीसेट करना समस्या का समाधान कर सकता है. अगर आपके वाई-फाई में बार-बार दिक्कत आ रही है तो इन सामान्य कारणों की जांच करके आप काफी हद तक इंटरनेट की स्पीड और स्थिरता में सुधार कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इन गलतियों से लैपटॉप होने लगता है Overheat? अभी जानिए बचने के उपाय वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Laptop Overheating: लैपटॉप आज के समय में काम, पढ़ाई और मनोरंजन का एक अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन कई लोग एक आम समस्या से परेशान रहते हैं लैपटॉप का जरूरत से ज्यादा गर्म होना. जब डिवाइस बार-बार गर्म होने लगे तो इसकी परफॉर्मेंस प्रभावित होती है, बैटरी जल्दी खराब हो सकती है और हार्डवेयर को भी नुकसान पहुंच सकता है. कई बार इसकी वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें होती हैं. आइए जानते हैं ऐसी 5 गलतियों के बारे में जो आपके लैपटॉप को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकती हैं.
बिस्तर या तकिए पर लैपटॉप इस्तेमाल करना
बहुत से लोग आराम से बैठकर बिस्तर, सोफा या तकिए पर लैपटॉप चलाते हैं. लेकिन ऐसा करने से नीचे मौजूद एयर वेंट्स बंद हो जाते हैं और गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती. इसका सीधा असर कूलिंग सिस्टम पर पड़ता है और लैपटॉप तेजी से गर्म होने लगता है. हमेशा लैपटॉप को समतल और सख्त सतह पर इस्तेमाल करना बेहतर होता है.
लगातार कई घंटे तक इस्तेमाल
अगर आप बिना ब्रेक दिए घंटों तक लैपटॉप पर काम करते हैं, गेम खेलते हैं या वीडियो एडिटिंग करते हैं तो प्रोसेसर और ग्राफिक्स चिप पर लगातार दबाव बना रहता है. इससे तापमान बढ़ जाता है. लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान बीच-बीच में कुछ मिनट का ब्रेक देना और सिस्टम को थोड़ा ठंडा होने का मौका देना फायदेमंद रहता है.
धूल की सफाई को नजरअंदाज करना
समय के साथ लैपटॉप के फैन और वेंट्स में धूल जमा होने लगती है. यह धूल हवा के प्रवाह को रोकती है जिससे कूलिंग सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर पाता. नतीजा यह होता है कि डिवाइस सामान्य से ज्यादा गर्म होने लगता है. हर कुछ महीनों में लैपटॉप की सफाई करवाना या एयर वेंट्स को साफ रखना जरूरी है.
जरूरत से ज्यादा ऐप्स और प्रोग्राम चलाना
कई लोग एक साथ दर्जनों टैब, सॉफ्टवेयर और बैकग्राउंड ऐप्स चलाते रहते हैं. इससे RAM और प्रोसेसर पर एक्सट्रा दबाव पड़ता है जिससे सिस्टम ज्यादा गर्म हो सकता है. जिन ऐप्स की जरूरत न हो उन्हें बंद कर देना और बैकग्राउंड में चल रहे अनावश्यक प्रोग्राम्स को हटाना बेहतर रहता है.
चार्जिंग के दौरान भारी काम करना
लैपटॉप को चार्ज करते समय हाई-ग्राफिक्स गेम खेलना, वीडियो रेंडरिंग करना या अन्य भारी काम करना तापमान को तेजी से बढ़ा सकता है. चार्जिंग के दौरान बैटरी भी गर्मी पैदा करती है और उस पर एक्सट्रा लोड डिवाइस को और ज्यादा गर्म कर देता है. ऐसे काम करते समय अच्छी वेंटिलेशन और कूलिंग का ध्यान रखना चाहिए.
कैसे बढ़ाएं लैपटॉप की उम्र?
लैपटॉप को ठंडी और हवादार जगह पर इस्तेमाल करें, नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करें, धूल की सफाई करवाएं और जरूरत पड़ने पर कूलिंग पैड का इस्तेमाल करें. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप न केवल ओवरहीटिंग की समस्या को कम कर सकते हैं बल्कि अपने लैपटॉप की परफॉर्मेंस और उम्र भी काफी हद तक बढ़ा सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>खेतों के कचरे से बनेगा नया ईंधन! जानिए क्या है 2G इथेनॉल टेक्नोलॉजी और किन&amp;किन क्षेत्रों में आएगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ 2G Ethanol: इथेनॉल आज भारत के ऊर्जा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. सरकार लगातार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ा रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. लेकिन इथेनॉल को लेकर एक बड़ी चिंता यह भी रही है कि इसका उत्पादन गन्ने और खाद्यान्न फसलों से होता है जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. इसी चुनौती का समाधान लेकर आई है 2G यानी सेकेंड जनरेशन इथेनॉल तकनीक.
2G इथेनॉल को इथेनॉल उत्पादन की एडवांस तकनीक माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे खाने योग्य फसलों के बजाय कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से तैयार किया जाता है. इससे न केवल खाद्यान्न की बचत होती है बल्कि खेतों में जलाए जाने वाले कृषि वेस्ट का भी बेहतर इस्तेमाल संभव हो जाता है.
क्या होता है 2G इथेनॉल?
सेकेंड जनरेशन इथेनॉल ऐसा जैव ईंधन है जिसे पराली, गन्ने की खोई (बैगास), मक्के के डंठल, बांस और अन्य कृषि कचरों से बनाया जाता है. जहां पहली पीढ़ी का इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस या अनाज पर आधारित था वहीं 2G इथेनॉल पूरी तरह कृषि कचरे का इस्तेमाल करता है.
इस तकनीक की वजह से खाद्यान्न संसाधनों पर दबाव नहीं पड़ता और किसानों को अपने खेतों से निकलने वाले बेकार अवशेषों से अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल सकता है. साथ ही, पराली जलाने जैसी समस्याओं में भी कमी आने की संभावना रहती है जिससे वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
2G इथेनॉल कैसे तैयार किया जाता है?
2G इथेनॉल का निर्माण एक आधुनिक और तकनीकी प्रोसेस के जरिए किया जाता है. सबसे पहले खेतों से पराली, गन्ने की खोई, मक्के के डंठल या अन्य कृषि अवशेष एकत्र करके संयंत्रों तक पहुंचाए जाते हैं. इसके बाद इन सामग्रियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और विशेष रासायनिक या भाप आधारित प्रक्रिया के माध्यम से इनके कठोर रेशों को नरम किया जाता है.
अगले चरण में विशेष एंजाइम्स का उपयोग कर इन अवशेषों में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट को साधारण शर्करा में बदला जाता है. फिर इस शर्करा को यीस्ट के साथ किण्वित किया जाता है जिससे अल्कोहल का निर्माण होता है. अंत में डिस्टिलेशन और शुद्धिकरण प्रक्रिया के जरिए पानी अलग कर हाई क्वालिटी वाला 2G इथेनॉल प्राप्त किया जाता है.
पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. 2G इथेनॉल का व्यापक उपयोग देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा, कृषि कचरे को जलाने के बजाय उपयोग में लाने से कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में भी कमी लाई जा सकती है.
यह तकनीक किसानों, पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र तीनों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है. किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकती है, प्रदूषण कम हो सकता है और देश को स्वदेशी ऊर्जा स्रोत भी प्राप्त हो सकता है.
सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं है इसका इस्तेमाल
अधिकांश लोग इथेनॉल को केवल वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के रूप में जानते हैं, लेकिन 2G इथेनॉल की उपयोगिता इससे कहीं अधिक है. इसका इस्तेमाल सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के निर्माण में किया जा सकता है जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायता मिलती है.
इसके अलावा पेंट, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक्स और दवा उद्योगों में भी इसका इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि 2G इथेनॉल से बायोप्लास्टिक का उत्पादन भी संभव है जो पुराने प्लास्टिक की तुलना में पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होता है और अपेक्षाकृत आसानी से विघटित हो सकता है.
इथेनॉल उत्पादन संयंत्रों से निकलने वाले अवशेषों का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में भी किया जा सकता है. दुनिया के कुछ देशों में इथेनॉल आधारित इंजनों और ऊर्जा प्रणालियों पर भी तेजी से काम हो रहा है जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प प्रदान कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>AI के कब्जे में चला जाएगा ये देश? डिजिटल मंत्री की चेतावनी ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ AI Colony: तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में गिने जाने वाले जापान के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. देश के डिजिटल मंत्री हिसाशी मात्सुमोतो ने चेतावनी दी है कि यदि जापान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास में तेजी नहीं लाता तो वह भविष्य में AI कॉलोनी बन सकता है.
उनका कहना है कि AI तकनीक इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि जो देश इसमें निवेश और नवाचार नहीं करेंगे वे दूसरों पर निर्भर हो जाएंगे. मात्सुमोतो ने लोगों से अपील की कि वे AI विकास की आवश्यकता को समझें और इस क्षेत्र में देश के प्रयासों का समर्थन करें.
डेटा कानून में बदलाव के पक्ष में मंत्री
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जापानी सरकार व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा कानून में बदलाव का प्रस्ताव लेकर आई है. प्रस्तावित संशोधन के तहत AI डेवलपर्स को मेडिकल रिकॉर्ड और आपराधिक रिकॉर्ड जैसे संवेदनशील डेटा का इस्तेमाल AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए करने की अनुमति मिल सकती है, भले ही संबंधित व्यक्ति की सीधी सहमति न ली गई हो.
मात्सुमोतो का तर्क है कि AI तकनीक की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बेहद तेज हो चुकी है और जापान के पास पीछे रहने की गुंजाइश नहीं है. उनके अनुसार, यदि देश ने विकास की गति नहीं बढ़ाई तो वह तकनीकी रूप से अन्य शक्तियों पर निर्भर हो सकता है.
विपक्ष ने उठाए निजता और सुरक्षा से जुड़े सवाल
हालांकि सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर सभी दल सहमत नहीं हैं. विपक्षी पार्टियों ने डेटा गोपनीयता और संभावित डेटा लीक के खतरे पर चिंता व्यक्त की है. उनका कहना है कि नागरिकों की निजी जानकारी के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट सुरक्षा उपाय होने चाहिए.
यह विधेयक हाल ही में संसद के निचले सदन से पारित हो चुका है और अब ऊपरी सदन में इस पर चर्चा जारी है. आने वाले दिनों में इस कानून को लेकर बहस और तेज हो सकती है.
अमेरिका और चीन की चुनौती के बीच जापान की तैयारी
वैश्विक स्तर पर AI की प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से अमेरिका और चीन के बीच देखी जा रही है. दोनों देश अत्याधुनिक AI मॉडल विकसित करने, विशाल डेटा सेंटर बनाने और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं.
ऐसे माहौल में जापान भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि वह इस तकनीकी क्रांति में पीछे न छूट जाए. सरकार और उद्योग जगत दोनों AI अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं.
दुनिया भर में तेज हो रही AI की होड़
AI की यह प्रतिस्पर्धा केवल जापान तक सीमित नहीं है. दुनिया के कई देश अब शक्तिशाली AI सिस्टम विकसित करने और डेटा प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं. नए डेटा सेंटरों की स्थापना और उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों की मांग लगातार बढ़ रही है.
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की AI रेस केवल बेहतर एल्गोरिद्म तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि ऊर्जा के कुशल इस्तेमाल और आर्थिक लाभ हासिल करने की क्षमता भी इसमें निर्णायक भूमिका निभाएगी.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>पब्लिक जगह पर WhatsApp वॉइस मैसेज सुनना नहीं चाहते? टेक्स्ट में बदलकर पढ़ें, ये है आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ पब्लिक जगह पर WhatsApp वॉइस मैसेज सुनना नहीं चाहते? टेक्स्ट में बदलकर पढ़ें, ये है आसान तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>हर महीने बढ़ रहा है AC का बिल? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 7 बड़ी गलतियां</title>
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        <description><![CDATA[ AC Tips: गर्मियों में एयर कंडीशनर (AC) राहत तो देता है लेकिन कई बार बिजली का बढ़ता बिल लोगों की चिंता बढ़ा देता है. अक्सर लोग मानते हैं कि ज्यादा बिल का कारण सिर्फ AC होता है जबकि असल वजह उसके इस्तेमाल से जुड़ी कुछ आम गलतियां भी हो सकती हैं. ये छोटी-छोटी आदतें AC की कार्यक्षमता कम कर देती हैं और बिजली की खपत बढ़ा देती हैं. आइए जानते हैं ऐसी 7 गलतियों के बारे में जो आपके बिजली बिल को बेवजह बढ़ा सकती हैं.
दरवाजे और खिड़कियां खुली छोड़ना
अगर AC चलाते समय कमरे के दरवाजे या खिड़कियां पूरी तरह बंद नहीं हैं तो ठंडी हवा बाहर निकलती रहती है और गर्म हवा अंदर आती रहती है. इससे कमरे को ठंडा रखने के लिए AC को लगातार ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है.
बार-बार AC को ऑन और ऑफ करना
कई लोगों को लगता है कि AC को बार-बार बंद और चालू करने से बिजली की बचत होती है. लेकिन वास्तव में हर बार कंप्रेसर स्टार्ट होने पर ज्यादा बिजली खर्च होती है. इसलिए AC को बार-बार बंद करने की बजाय उचित तापमान पर लगातार चलाना अधिक किफायती हो सकता है.
बहुत कम तापमान पर AC चलाना
16&amp;deg;C या 18&amp;deg;C जैसे बेहद कम तापमान पर AC चलाने से कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. जितना कम तापमान सेट किया जाएगा AC को उतनी ही ज्यादा मेहनत करनी होगी. विशेषज्ञ आमतौर पर 24&amp;deg;C से 26&amp;deg;C के बीच तापमान रखने की सलाह देते हैं जिससे आराम भी मिलता है और बिजली की बचत भी होती है.
एयर फिल्टर की सफाई न करना
समय के साथ AC के फिल्टर में धूल और गंदगी जमा हो जाती है. इससे हवा का प्रवाह बाधित होता है और AC की कूलिंग क्षमता कम हो जाती है. इससे मशीन को अधिक बिजली खर्च करनी पड़ती है. नियमित रूप से फिल्टर साफ करने से AC बेहतर परफॉर्मेंस करता है और बिजली की खपत भी कम होती है.
नियमित सर्विसिंग को नजरअंदाज करना
अगर AC की समय-समय पर सर्विसिंग नहीं कराई जाती तो उसकी कूलिंग क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है. कॉयल, गैस सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच जरूरी होती है. नियमित रखरखाव न सिर्फ बिजली बचाता है बल्कि भविष्य में होने वाले महंगे रिपेयर खर्च से भी बचा सकता है.
कमरे में सीधी धूप आने देना
खिड़कियों से आने वाली तेज धूप कमरे का तापमान तेजी से बढ़ा देती है. इससे AC को कमरे को ठंडा रखने के लिए ज्यादा समय तक चलना पड़ता है. पर्दे, ब्लाइंड्स या हीट-रिफ्लेक्टिव फिल्म का इस्तेमाल करके कमरे में गर्मी के प्रवेश को कम किया जा सकता है.
AC के साथ सीलिंग फैन का इस्तेमाल न करना
कई लोग AC चलाते समय पंखा बंद कर देते हैं जबकि सीलिंग फैन ठंडी हवा को पूरे कमरे में समान रूप से फैलाने में मदद करता है. इससे कम तापमान सेट करने की जरूरत नहीं पड़ती और AC पर दबाव भी कम होता है. इसी वजह से बिजली की खपत घट सकती है.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Google Maps की यह छिपी सेटिंग हर सफर में बचाएगी पेट्रोल&amp;डीजल, ज्यादातर लोग नहीं जानते</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps: आज के समय में ज्यादातर लोग रास्ता खोजने के लिए Google Maps का इस्तेमाल करते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इस ऐप में एक ऐसा फीचर भी मौजूद है जो आपकी कार का ईंधन बचाने में मदद कर सकता है. बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच Google Maps का यह विकल्प रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है.
क्या है Google Maps का Fuel-Efficient Routes फीचर?
Google Maps में Fuel-Efficient Routes नाम का एक फीचर दिया गया है जो केवल सबसे तेज रास्ता ही नहीं बल्कि कम ईंधन खर्च करने वाले मार्ग का भी सुझाव देता है. यह फीचर Android और iPhone दोनों पर उपलब्ध है.
आमतौर पर लोग Google Maps खोलते ही सबसे कम समय वाले रास्ते को चुन लेते हैं लेकिन यह फीचर ऐसे मार्ग खोजता है जहां वाहन को कम ईंधन खर्च करना पड़े. कई बार यह रास्ता कुछ मिनट ज्यादा ले सकता है लेकिन इससे फ्यूल की बचत हो सकती है.
कैसे तय करता है कम ईंधन वाला रास्ता?
Google Maps कई महत्वपूर्ण बातों का विश्लेषण करता है जैसे

सड़क पर ट्रैफिक की स्थिति
रास्ते की चढ़ाई और ढलान
बार-बार रुकने और चलने की संभावना
वाहन की गति कितनी स्थिर रह सकती है
कुल दूरी

इन सभी जानकारियों के आधार पर ऐप ऐसा मार्ग सुझाने की कोशिश करता है जिससे इंजन पर कम दबाव पड़े और ईंधन की खपत घटे.
वाहन के प्रकार के अनुसार बदलते हैं सुझाव
Google के अनुसार अलग-अलग इंजन वाले वाहनों के लिए फ्यूल बचाने के तरीके भी अलग हो सकते हैं. डीजल कारें अक्सर हाईवे पर बेहतर माइलेज देती हैं. हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन शहर के ट्रैफिक में ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं. यदि यूजर्स इंजन का टाइप नहीं चुनता है तो Google Maps डिफॉल्ट रूप से पेट्रोल वाहन मानकर मार्ग सुझाता है. इसी वजह से सही इंजन प्रकार चुनने से रूट की सटीकता और बेहतर हो सकती है.
ऐसे चालू करें यह छिपी हुई सेटिंग
इस फीचर को सक्रिय करने में एक मिनट से भी कम समय लगता है.

Google Maps खोलें.
ऊपर दिखाई देने वाली प्रोफाइल फोटो पर टैप करें.
Settings में जाएं.
Navigation Settings चुनें.
Route Options पर टैप करें.
Prefer Fuel-Efficient Routes विकल्प को ऑन कर दें.

इसके बाद आप अपनी कार का इंजन प्रकार पेट्रोल, डीजल, हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक भी चुन सकते हैं.
जब यह फीचर एक्टिव होगा तो Google Maps कई बार हरे पत्ते (Green Leaf) के आइकन के साथ ऐसे रास्ते दिखाएगा जो कम ईंधन खर्च कर सकते हैं.
क्या वास्तव में होगी पैसे की बचत?
इस सवाल का जवाब आपकी ड्राइविंग शैली और यात्रा के मार्ग पर निर्भर करता है. Google का कहना है कि यह फीचर भारी ट्रैफिक, बार-बार ब्रेक लगाने की स्थिति और कठिन रास्तों से बचाकर ईंधन की खपत कम करने की कोशिश करता है. अगर आप रोजाना ऑफिस आते-जाते हैं या नियमित रूप से लंबी दूरी तय करते हैं तो थोड़ी-थोड़ी बचत समय के साथ एक अच्छी रकम में बदल सकती है.
हालांकि, हर जगह परिणाम एक जैसे नहीं मिलते. कुछ लोगों का कहना है कि सुझाया गया रास्ता कभी-कभी थोड़ा लंबा या कम सुविधाजनक हो सकता है जबकि कई यूजर्स ने लगातार एक ही रूट पर यात्रा करते समय ईंधन बचत महसूस की है.
बढ़ते फ्यूल खर्च के बीच आजमाने लायक है यह ट्रिक
यदि आप पेट्रोल या डीजल के बढ़ते खर्च से परेशान हैं तो Google Maps की यह सेटिंग जरूर आजमानी चाहिए. इसे चालू करने में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता और यह बैकग्राउंड में काम करते हुए आपकी हर यात्रा में ईंधन बचाने में मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ नया Siri ही नहीं, iOS 27 में मिलेंगे एक से बढ़कर एक फीचर्स, यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ iOS 27 All Features: ऐप्पल की iOS 27 अपडेट से अगले हफ्ते पर्दा उठ जाएगा. आईफोन यूजर्स इस सॉफ्टवेयर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. सबकी नजरें इस अपडेट के साथ आने वाले सिरी के एआई वर्जन पर टिकी हुई हैं, जो अब केवल असिस्टेंट न रहकर चैटबॉट की तरह काम करेगा. इसके साथ-साथ ऐप्पल कैमरा और फोटोज समेत कई ऐप्स के शानदार अपडेट लाने वाली है, जिनके बारे में कम चर्चा हो रही है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि iOS 27 अपडेट में अपग्रेडेड सिरी के अलावा और क्या-क्या फीचर्स आ रहे हैं.
कैमरा ऐप
नई अपडेट में ऐप्पल विजुअल इंटेलीजेंस को कैमरा कंट्रोल बटन से कैमरा ऐप में मूव कर रही है. इसमें यूजर को पहले से मौजूद फोटो, वीडियो, पोर्ट्रेट मोड के साथ नया सिरी मोड भी मिलेगा. अपडेट के बाद यूजर विजुअल इंटेलीजेंस से ऑब्जेक्ट्स, प्लांट्स, एनिमल्स, बुक्स और दूसरी चीजों की पहचान कर सकेंगे. इसमें नया कैलोरी स्कैनिंग फीचर भी मिलने वाला है.
फोटोज ऐप
फोटोज ऐप में ऐप्पल इंटेलीजेंस टूल्स सेक्शन होगा, जिसमें यूजर को फोटो को एक्सटैंड और रिफ्रेम करने का ऑप्शन मिलेगा. ऐसे भी कयास हैं कि यूजर नैचुरल लैंग्वेज में प्रॉम्प्ट देकर भी फोटो एडिट कर पाएंगे. iOS 27 के अगले वर्जन में वॉइस-बेस्ड फोटो एडिटिंग फीचर भी आने वाला है.
फोल्डेबल आईफोन इंटरफेस
ऐप्पल सितंबर में फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. इसमें iOS 27 अपडेट के साथ ही लॉन्च किया जाएगा. इसे देखते हुए भी नई अपडेट में फोल्डेबल इंटरफेस जोड़ा जा रहा है.
वॉलेट ऐप
नई अपडेट में वॉलेट ऐप को भी नया Create a Pass ऑप्शन मिल रहा है. इसकी मदद से यूजर किसी भी मूवी टिकट, कॉन्सर्ट पास, मेंबरशिप कार्ड्स को स्कैन कर उसका डिजिटल पास जनरेट कर पाएंगे. साथ ही कंपनी इसमें एआई बिल स्प्लिटिंग फीचर भी ऐड कर रही है, जो ऐप्पल कैश के साथ काम करेगा.&amp;nbsp;
शॉर्टकट
iOS 27 अपडेट से शॉर्टकट क्रिएट करने का तरीका भी बदलने वाला है. नई अपडेट आने के बाद यूजर नैचुरल लैंग्वेज में सिरी को बता सकेंगे कि उन्हें शॉर्टकट में क्या करना चाहते हैं और सिरी अपने आप इसे जनरेट कर देगी.
ये होंगे बाकी फीचर्स
बाकी फीचर्स की बात करें तो यूजर को कस्टम वॉलपेपर जनरेट करने का ऑप्शन मिलेगा. सफारी में चार टैब के साथ अपडेटेड होम पेज आ रहा है. कैलेंडर ऐप में नए एआई फीचर्स मिलेंगे और सिरी दूसरी ऐप्स से भी इवेंट आदि की जानकारी निकाल सकेगा. इसी तरह वेदर ऐप में भी नए मोड जोड़े जा रहे हैं.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;AI को रोकना होगा!&amp;apos; बिना इंसानों के काम कर सकता है Claude, एंथ्रोपिक ने कहा&amp; अब थमने की जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ AI Safety Alert: एआई में एडवांसमेंट की रफ्तार को लेकर पिछले काफी समय से चिंता जताई जा रही है. Elon Musk समेत कई लोग इस बारे में अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं. अब एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी एआई एडवांसमेंट की रफ्तार धीमी करने की मांग उठाई है. दरअसल, कंपनी का कहना है कि उसका एआई मॉडल Claude AI तेजी से नए एआई सिस्टम क्रिएट कर सकता है. इससे हम जल्द ही एक ऐसी स्थिति में पहुंच सकते हैं, जहां एआई सिस्टम खुद ही अपने से अगले सिस्टम को डिजाइन, बिल्ड और ट्रेन कर सकेंगे और इस पूरी प्रोसेस में इंसानों की जरूरत भी नहीं होगी.
एंथ्रोपिक ने कहा- तैयारी शुरू कर देनी चाहिए
एंथ्रोपिक ने कहा कि अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है, जहां एआई सिस्टम खुद अपने सक्सेसर को तैयार कर सके, लेकिन इसे टाला नहीं जा सकता. सरकारों, रेगुलेटर और समाज को इसके लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. कंपनी के मुताबिक, पब्लिक बेंचमार्क और उसके खुद के डेटा के अनुसार एआई काम को तेज कर रही है. इससे हेल्थकेयर, साइंस और प्रोडक्टिविटी जैसे एरिया में फायदा हो सकता है, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि जब एआई सिस्टम खुद काबिल हो जाएंगे तो इंसान उस पर काबू कैसे रखेंगे.
ऐसे तेज होती जा रही है एआई एडवांसमेंट की स्पीड
बीते 2-3 सालों में ही एआई में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ती गई है. शुरुआत में इंजीनियर कोड खुद लिखते थे. इसके बाद चैटबॉट इस काम में उनकी हेल्प करने लगे. फिर ऐसे एजेंट आ गए जो कोडिंग का पूरा काम कर सकते हैं. आज के एआई एजेंट कोड रन करने के साथ टास्क भी पूरे कर सकते हैं और दूसरे एजेंट को टास्क सौंप भी सकते हैं. एंथ्रोपिक का कहना है कि अब इसकी अगली स्टेज ऐसी होगी, जहां एआई सिस्टम फ्यूचर के एआई मॉडल को भी तैयार कर सकेंगे.
एंथ्रोपिक ने बताए तीन सिनेरियो
एंथ्रोपिक ने कहा कि मौजूदा स्थिति के आधार पर तीन फ्यूचर सिनेरियो बनते हैं. पहली संभावना यह है कि एआई का विकास धीमा हो जाए. दूसरी संभावना है कि एआई प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करेगी, लेकिन कंट्रोल इंसानों के पास रहेगा और तीसरे सिनेरियो में एआई सिस्टम खुद ही अपने सक्सेसर मॉडल तैयार कर लेंगे. कंपनी दूसरी संभावना को लेकर ज्यादा आशान्वित है. कंपनी ने सरकारों समेत सभी स्टेकहॉल्डर्स से एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग करते हुए कहा कि इसमें पूरी दुनिया को साथ आना पड़ेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Green SM Limo टैक्सी सर्विस भारत में लॉन्च, सेफ्टी के साथ&amp;साथ कंफर्ट पर भी जोर</title>
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        <description><![CDATA[ Green SM Limo: अगर आप Delhi-NCR में रहते हैं तो आपके लिए इलेक्ट्रिक कैब का एक और ऑप्शन आ गया है. वियतनाम की मोबिलिटी कंपनी Green SM ने भारत में एंट्री करते हुए अपनी इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस Green SM Limo को Delhi-NCR में लॉन्च कर दिया है. इससे पहले कंपनी वियतनाम, लाओस, इंडोनेशिया और फिलिपींस में अपनी सेवाएं दे रही हैं. कंपनी ने बताया कि वह Delhi-NCR के मुख्य इलाकों से अपनी सर्विस शुरू करेगी और डिमांड के हिसाब से कवरेज बढ़ाती रहेगी. भारत में कंपनी 10,000 इलेक्ट्रिक व्हीकल का फ्लीट डिप्लॉय करने की प्लानिंग के साथ आई है.
कंपनी खुद ही कारों की मालिक
उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों में ड्राइवर अपनी गाड़ियां और बाइक लगा सकते हैं, लेकिन Green SM खुद ही अपने फ्लीट में चलने वाली कारों की मालिक हैं. जानकारी के मुताबिक, इस सर्विस में VinFast Limo Green को यूज किया जाएगा, जो एक 7-सीटर SUV है. इसे खासतौर से पैसेंजर ट्रांसपोर्टेशन के लिए तैयार किया गया है. पैसेंजर मोबाइल ऐप के अलावा हॉटलाइन के जरिए भी अपनी राइड बुक कर सकेंगे. Green SM ने बताया कि इस फ्लीट के सभी ड्राइवरों को इलेक्ट्रिक व्हीकल ऑपरेशन, रोड सेफ्टी और कस्टमर सर्विस की ट्रेनिंग दी गई है.
यात्रियों के आराम का रखा गया है पूरा ख्याल
Green SM Limo के हर व्हीकल में कंपनी का सिक्योर-टू-सेफ सिस्टम फिट गया है, जिसमें इंटीरियर और एक्सटीरियर कैमरा, एआई-सपोर्टेड टेक्नोलॉजी और ड्राइवर और पैसेंजर के लिए इमरजेंसी असिस्टेंट बटन लगा हुआ है. इसमें पैसेंजर की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है. स्पेसियस केबिन वाली कंपनी की हर गाड़ी में पानी का पानी, वेट टिश्यू और दूसरी जरूरी चीजें अवेलेबल होंगी. यानी यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके कंफर्ट को भी ध्यान में रखा गया है. यह सर्विस लॉन्च होने से ओला-उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए मुकाबला कड़ा हो जाएगा.
बुकिंग पर चल रहा प्रमोशनल ऑफर
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपनी लॉन्चिंग के मौके पर कंपनी एक खास प्रमोशनल डिस्काउंट ऑफर भी चला रही है. 5 जून से लेकर 11 जून तक कैब बुक करने वाले पैसेंजर किराये पर 250 रुपये तक की बचत कर सकते हैं. भारत में एंट्री के बाद Green SM अब मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, टोयोटा और हुंडई समेत उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं, जिनकी कारों को फ्लीट सेक्टर में यूज किया जा रहा है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram पर लाखों Views चाहिए? पहले समझिए 125 Characters का Viral Formula</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram 125 Characters Formula: Instagram पर पोस्ट डालते समय फोटो या वीडियो जितना महत्वपूर्ण होता है उतना ही जरूरी उसका कैप्शन भी होता है. कई क्रिएटर्स और बिजनेस पेज मैनेजर अक्सर इस सवाल से जूझते हैं कि ज्यादा पहुंच (Reach) पाने के लिए छोटा कैप्शन लिखें या लंबा. साल 2026 में इस सवाल का जवाब पहले से थोड़ा बदल चुका है. अब कोई एक तय लंबाई सभी पोस्ट पर लागू नहीं होती बल्कि कैप्शन की लंबाई आपके कंटेंट और उद्देश्य पर निर्भर करती है.
125 कैरेक्टर का नियम क्यों है खास?
Instagram हर पोस्ट के लिए 2,200 कैरेक्टर तक लिखने की अनुमति देता है. हालांकि, यूजर्स को पोस्ट के नीचे शुरुआत में केवल लगभग 125 कैरेक्टर ही दिखाई देते हैं. इसके बाद पूरा टेक्स्ट पढ़ने के लिए More पर टैप करना पड़ता है. यही वजह है कि शुरुआती 125 कैरेक्टर सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. यदि पहली लाइन आकर्षक नहीं हुई तो अधिकांश लोग आगे का कैप्शन पढ़े बिना ही आगे बढ़ सकते हैं.
कितनी लंबाई वाला कैप्शन सबसे बेहतर माना जा रहा है?
सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर किए गए हालिया अध्ययनों के अनुसार, 138 से 150 कैरेक्टर के बीच के कैप्शन अक्सर अच्छा प्रदर्शन करते हैं. यह लंबाई इतनी होती है कि जरूरी जानकारी दी जा सके और साथ ही टेक्स्ट बहुत बड़ा भी न लगे.
वहीं Reels के लिए छोटे और सीधे कैप्शन अधिक प्रभावी माने जा रहे हैं. छोटे कैप्शन दर्शकों का समय बचाते हैं और वीडियो देखने का अनुभव बाधित नहीं करते.
लंबे कैप्शन कब देते हैं बेहतर परिणाम?
हालांकि छोटे कैप्शन लाइक्स बढ़ाने में मदद कर सकते हैं लेकिन लंबे कैप्शन कई मामलों में ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं. लगभग 400 से 600 कैरेक्टर वाले कैप्शन अक्सर ज्यादा कमेंट्स और सेव्स प्राप्त करते हैं. आज के Instagram एल्गोरिदम में सेव और कमेंट्स को काफी अहम माना जाता है क्योंकि ये दर्शाते हैं कि यूजर कंटेंट के साथ वास्तव में जुड़ रहा है.
शेयर्स बन गए हैं सबसे बड़ी ताकत
Instagram के अनुसार, किसी पोस्ट को शेयर किया जाना अब सबसे मजबूत एंगेजमेंट संकेतों में से एक है. जब कोई व्यक्ति आपकी पोस्ट किसी दोस्त या ग्रुप में भेजता है तो प्लेटफॉर्म इसे मूल्यवान कंटेंट का संकेत मानता है और उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की संभावना बढ़ जाती है.
इसी कारण कहानी आधारित (Storytelling) लंबे कैप्शन, खासकर कैरोसेल पोस्ट के साथ, अक्सर बेहतर प्रदर्शन करते हैं क्योंकि वे लोगों को शेयर करने के लिए प्रेरित करते हैं.
एजुकेशनल और ट्यूटोरियल पोस्ट में लंबा कैप्शन क्यों जरूरी है?
यदि आप किसी विषय को समझा रहे हैं, कोई गाइड दे रहे हैं, उत्पाद की जानकारी साझा कर रहे हैं या किसी संवेदनशील मुद्दे पर बात कर रहे हैं तो लंबा कैप्शन उपयोगी हो सकता है. ऐसे कैप्शन लोगों को अधिक संदर्भ देते हैं, चर्चा शुरू करते हैं और कमेंट सेक्शन में बातचीत बढ़ाने में मदद करते हैं.
2026 में Hashtags से ज्यादा जरूरी हो गए हैं Keywords
Instagram पर खोज (Discovery) का तरीका भी बदल रहा है. अब केवल हैशटैग्स पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. प्लेटफॉर्म की AI आधारित सर्च सिस्टम सीधे कैप्शन में लिखे गए शब्दों को समझती है और उसी के आधार पर कंटेंट को सही दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश करती है.
इसलिए कैप्शन में स्वाभाविक रूप से सही कीवर्ड्स शामिल करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. हालांकि, केवल कीवर्ड्स भर देने से फायदा नहीं होगा. जरूरत से ज्यादा कीवर्ड ठूंसने वाले कैप्शन एल्गोरिदम को नकारात्मक संकेत भी दे सकते हैं.
बेहतर Reach के लिए क्या रणनीति अपनाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अच्छा तरीका दोनों प्रकार के कैप्शन का संतुलित इस्तेमाल करना है. Reels, मीम्स और त्वरित प्रमोशनल पोस्ट के लिए 150 कैरेक्टर से कम के छोटे कैप्शन इस्तेमाल करें. एजुकेशनल कंटेंट, कैरोसेल पोस्ट और एक्सपर्ट राय वाले कंटेंट के लिए लंबे कैप्शन लिखें. शुरुआती 125 कैरेक्टर को हमेशा आकर्षक और ध्यान खींचने वाला बनाएं. हैशटैग्स के साथ-साथ संबंधित कीवर्ड्स का भी इस्तेमाल करें.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब जानवर भी करेंगे इंसानों से बात? AI की नई खोज ने दुनिया को चौंकाया</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: क्या आने वाले समय में इंसान व्हेल से सवाल पूछ सकेगा, डॉल्फिन की चेतावनियों को समझ पाएगा या पक्षियों के संदेशों का मतलब जान सकेगा? जो बातें अब तक केवल फिल्मों और विज्ञान-कल्पना की कहानियों में दिखाई देती थीं वे अब हकीकत के करीब पहुंचती नजर आ रही हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज प्रगति ने वैज्ञानिकों को जानवरों के बात करने के सिस्टम को समझने के नए अवसर दिए हैं.
जानवरों की आवाज़ों में छिपे संकेत खोज रहा है AI
दुनिया भर के शोधकर्ता अब AI आधारित न्यूरल नेटवर्क्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उसी तकनीक पर आधारित हैं जिस पर ChatGPT जैसे मॉडल काम करते हैं. इन सिस्टम्स की मदद से जानवरों की लाखों आवाज़ों और उनके व्यवहार से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है.
AI उन पैटर्न्स और संकेतों को पहचानने में सक्षम है जिन्हें इंसानी दिमाग या पारंपरिक शोध विधियां आसानी से नहीं पकड़ सकतीं. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल रही है कि अलग-अलग जानवर किस तरह अपने समूह के अन्य सदस्यों तक जानकारी पहुंचाते हैं.
कई प्रजातियों पर हो रहा है शोध
हाल के वर्षों में चूहों, डॉल्फिन, व्हेल, पक्षियों, बड़े बंदरों और यहां तक कि समुद्री जीवों पर भी AI आधारित अध्ययन किए गए हैं. इन अध्ययनों में अलग-अलग प्रकार की आवाज़ों, उनकी पहचान और उनके संभावित अर्थों को समझने की कोशिश की जा रही है.
उदाहरण के तौर पर, अफ्रीकी धारीदार चूहों पर किए गए एक शोध में वैज्ञानिकों ने 1.22 लाख से अधिक ध्वनियों का विश्लेषण किया. AI ने इनमें कई अलग-अलग प्रकार की कॉल्स की पहचान की जो संभवतः विभिन्न संदेशों को व्यक्त करती हैं.
व्हेल की भाषा को समझने की बड़ी कोशिश
सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक स्पर्म व्हेल के बात करने के सिस्टम को समझने का प्रयास है. वैज्ञानिक मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल करके व्हेल द्वारा निकाली जाने वाली लाखों कोडा क्लिक ध्वनियों का अध्ययन कर रहे हैं.
शोधकर्ताओं का मानना है कि इन ध्वनियों में शब्दों, नामों, स्थानीय बोलियों और यहां तक कि किसी प्रकार के व्याकरण जैसी संरचनाएं भी मौजूद हो सकती हैं. शुरुआती परिणाम बताते हैं कि व्हेल का संवाद पहले की सोच से कहीं अधिक जटिल हो सकता है.
क्या इंसान और जानवरों के बीच सीधी बातचीत संभव होगी?
वैज्ञानिक अब केवल जानवरों की भाषा को समझने तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि वे यह भी जांच रहे हैं कि क्या भविष्य में इंसान और जानवरों के बीच दो-तरफा संवाद संभव हो सकता है. इस दिशा में काम कर रहे संगठनों में Earth Species Project और Project CETI शामिल हैं. ये संस्थाएं बड़े AI मॉडलों की मदद से जानवरों की आवाज़ों में छिपे अर्थों को खोजने और संभावित संवाद सिस्टम विकसित करने पर काम कर रही हैं.
अभी भी मौजूद हैं कई चुनौतियां
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों की संचार सिस्टम को समझना और मानव भाषा की तरह उसका अनुवाद करना दो अलग-अलग बातें हैं. भले ही AI किसी आवाज का अर्थ पहचान ले लेकिन जानवर दुनिया को इंसानों से बिल्कुल अलग तरीके से महसूस करते हैं.
यही कारण है कि वास्तविक अंतर-प्रजातीय संवाद (Interspecies Communication) अभी भी एक बड़ी वैज्ञानिक चुनौती बना हुआ है. फिर भी AI के विकास ने इस दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है और उम्मीद जगाई है कि भविष्य में इंसान अन्य जीवों की बातों को बेहतर तरीके से समझ सकेगा.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फ्लाइट पकड़ने से पहले पढ़ लें ये खबर! पावर बैंक को लेकर क्या कहते हैं एयरलाइन नियम?</title>
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        <description><![CDATA[ Power Bank in Flights: गर्मी की छुट्टियों में हवाई यात्रा की तैयारी कर रहे हैं और साथ में पावर बैंक ले जाने का सोच रहे हैं? तो उड़ान भरने से पहले एयरलाइंस और एविएशन अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों को जान लेना बेहद जरूरी है. हाल के वर्षों में पावर बैंक से जुड़े आग और धुएं के कई मामलों के बाद दुनिया भर की एयरलाइंस ने सुरक्षा नियमों को और सख्त कर दिया है.
पावर बैंक को चेक-इन बैग में रखना मना
सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि लिथियम-आयन बैटरी वाले पावर बैंक को चेक-इन लगेज में नहीं रखा जा सकता. यात्रियों को इन्हें अपने कैरी-ऑन बैग या हैंड बैगेज में ही रखना होगा. इस नियम के पीछे मुख्य कारण सुरक्षा है.
यदि कार्गो होल्ड में रखी बैटरी में कोई खराबी आ जाए और आग लग जाए तो विमान चालक दल तुरंत कार्रवाई नहीं कर सकता. वहीं, केबिन में मौजूद बैटरी पर नजर रखना और किसी आपात स्थिति से निपटना आसान होता है.
कितनी क्षमता वाला पावर बैंक ले जा सकते हैं?
सामान्य तौर पर यात्री 100 वॉट-आवर (Wh) तक की क्षमता वाले दो पावर बैंक बिना किसी विशेष अनुमति के विमान में ले जा सकते हैं. इतनी क्षमता वाला पावर बैंक स्मार्टफोन को कई बार चार्ज करने के लिए पर्याप्त होता है.
अगर बैटरी की क्षमता 100Wh से अधिक और 160Wh तक है तो उसे विमान में ले जाने के लिए एयरलाइन की मंजूरी आवश्यक हो सकती है. इस तरह की बैटरियां आमतौर पर पेशेवर वीडियो उपकरणों या मेडिकल डिवाइस में उपयोग की जाती हैं.
mAh से Wh कैसे पता करें?
कई पावर बैंक पर क्षमता mAh (मिलीएम्पियर-आवर) में लिखी होती है. ऐसे में वॉट-आवर निकालने के लिए एक आसान गणना की जा सकती है.
उदाहरण के लिए:
10,000mAh = 10Ah
10Ah &amp;times; 3.7V = 37Wh
यानी 10,000mAh का पावर बैंक लगभग 37Wh के बराबर होता है जो विमान यात्रा के लिए तय सीमा के अंदर है.
एयरलाइंस क्यों हो गई हैं सख्त?
हाल के वर्षों में लिथियम बैटरियों से जुड़े कई हादसे सामने आए हैं. जनवरी 2025 में दक्षिण कोरिया के एक एयरपोर्ट पर टेकऑफ से पहले एक विमान में आग लग गई थी जिसके बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. ऐसी घटनाओं ने एयरलाइंस और एविएशन एजेंसियों को बैटरी सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क बना दिया है. कई उड़ानों को केवल एहतियात के तौर पर डायवर्ट भी करना पड़ा है क्योंकि बैटरी से जुड़े संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
लिथियम बैटरियां खतरनाक क्यों हो सकती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार लिथियम-आयन बैटरियां छोटे आकार में काफी अधिक ऊर्जा स्टोर करती हैं. यदि बैटरी दब जाए, ज्यादा गर्म हो जाए या जरूरत से ज्यादा चार्ज हो जाए तो थर्मल रनअवे प्रोसेस शुरू हो सकता है.
इस स्थिति में बैटरी तेजी से गर्म होने लगती है और जहरीली गैसें तथा आग पैदा कर सकती है. हालांकि ऐसे मामलों की संभावना बहुत कम होती है लेकिन जब ऐसा होता है तो नुकसान गंभीर हो सकता है.
यात्रा से पहले पावर बैंक की जांच जरूर करें
फ्लाइट पर जाने से पहले अपने पावर बैंक की स्थिति जांच लें. यदि उसमें इनमें से कोई संकेत दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल न करें:

बैटरी का फूल जाना
चार्जिंग के दौरान जरूरत से ज्यादा गर्म होना
बाहरी पार्ट में दरार या नुकसान
असामान्य गंध आना

विशेषज्ञ सस्ते और अनजान ब्रांड के पावर बैंक खरीदने से भी बचने की सलाह देते हैं क्योंकि उनमें सुरक्षा मानकों की कमी हो सकती है.
विमान के अंदर पावर बैंक कहां रखें?
फ्लाइट के दौरान पावर बैंक को ओवरहेड बिन में रखने की अनुमति कई एयरलाइंस नहीं देती हैं. इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके जैसे सीट के सामने मौजूद पॉकेट, सीट के नीचे रखा बैग. इससे किसी समस्या की स्थिति में केबिन क्रू तुरंत कार्रवाई कर सकता है.
उड़ान के दौरान चार्जिंग से बचें
कई एयरलाइंस यात्रियों को पावर बैंक से अन्य डिवाइस चार्ज करने या विमान के पावर सॉकेट से पावर बैंक चार्ज करने की अनुमति नहीं देतीं. इसलिए यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन के नियम जरूर पढ़ लें.
सीट के नीचे गिर जाए बैटरी तो क्या करें?
यदि आपका पावर बैंक या कोई बैटरी वाला उपकरण सीट और दीवार के बीच फंस जाए तो उसे निकालने के लिए सीट को हिलाने या पीछे-आगे करने की कोशिश न करें.
सीट का दबाव बैटरी को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे वह गर्म होकर आग पकड़ सकती है. ऐसी स्थिति में तुरंत केबिन क्रू को सूचित करें क्योंकि उन्हें ऐसे डिवाइस सुरक्षित तरीके से निकालने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
यात्रा से पहले एयरलाइन के नियम जरूर जांचें
हर एयरलाइन के नियम थोड़े अलग हो सकते हैं. कुछ कंपनियां बैटरियों की संख्या या क्षमता को लेकर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लागू करती हैं. इसलिए फ्लाइट से पहले अपनी एयरलाइन की आधिकारिक गाइडलाइन पढ़ना सबसे सुरक्षित विकल्प है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करते समय भूलकर भी न दिखाएं ये चीज, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ Fingerprint Scam: आजकल स्मार्टफोन में बहुत पावरफुल कैमरा सेटअप मिलने लगा है. ये छोटी-से छोटी डिटेल्स को भी कैप्चर कर सकता है. इसलिए यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि सोशल मीडिया पर जो फोटोज पोस्ट की जा रही हैं, उनमें क्या दिख रहा है. सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर सोशल मीडिया पर पोस्ट फोटो में फिंगरप्रिंट नजर आ रहे हैं तो यह बहुत बड़ी मुसीबत का कारण बन सकते हैं. फोटो की मदद से फिंगरप्रिंट को रिकंस्ट्रक्ट किया जा सकता है और इसके बाद के नुकसान का आप अंदाजा लगा सकते हैं.
ऐसी तस्वीरें पोस्ट करने से बचें
फिंगरप्रिंट आज के टाइम में बहुत जरूरी बायोमेट्रिक आईडेंटिफायर बन गए हैं. इनकी मदद से कंप्यूटर और स्मार्टफोन जैसे डिवाइस अनलॉक किए जा सकते हैं. अगर फिंगरप्रिंट वाली तस्वीरें गलत हाथों में पड़ जाए तो इससे बड़ा नुकसान हो सकता है. इसी खतरे को देखते हुए जर्मनी के पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर Bayerischer Rundfunk ने लोगों से ऐसी फोटो पोस्ट न करने की अपील की है, जिसमें फिंगरप्रिंट साफ नजर आ रहे होते हैं. थम्स-अप, पीस साइन, विक्ट्री साइन या कैमरे की तरफ हाथ हिलाने वाली फोटो से फिंगरप्रिंट रिवील हो सकते हैं.&amp;nbsp;
एआई की मदद से तैयार किए जा सकते हैं असली जैसे फिंगरप्रिंट
साइबर अपराधी एआई की मदद से सोशल मीडिया पर अपलोडेड फोटोज को प्रोसेस कर एकदम सटीक फिंगरप्रिंट रिकंस्ट्रक्ट कर रहे हैं. अगर लाइटिंग और परस्पेक्टिव ठीक होता है और हाई-रेजॉल्यूशन वाले कैमरे से फोटो ली गई है तो साइबर अपराधियों के लिए काम और आसान हो जाता है. सॉफ्टवेयर और एआई टूल्स की मदद से वो आपके फिंगरप्रिंट की सबसे छोटी लाइन को भी रिकंस्ट्रक्ट कर प्रिंट कर सकते हैं. सोशल मीडिया पर आपकी बाकी डिटेल्स और फोटो की मदद से दूसरी जानकारियां भी कलेक्ट करना आसान है. चाइनीज सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि करीब 1.5 मीटर दूरी से ली गई फोटो में अगर उंगलियां कैमरे के सामने है तो फिंगरप्रिंट को एक्सट्रेक्ट किया जा सकता है. अगर यह दूरी 3 मीटर हो जाए तो आधे फिंगरप्रिंट का फिर भी आसानी से पता लग जाएगा.
क्या हैं बचाव के तरीके?

फोटो में कभी भी अपने फिंगरप्रिंट न दिखाएं. अगर किसी फोटो में फिंगरप्रिंट नजर आ रहे हैं तो पोस्ट करने से पहले उन्हें ब्लैक आउट कर दें.
हाई-रेजॉल्यूशन वाली फोटोज में हथेली न दिखाएं. इसी तरह हाथों के क्लोज-अप वाली फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से बचें.

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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सोशल, मीडिया, पर, फोटो, पोस्ट, करते, समय, भूलकर, भी, न, दिखाएं, ये, चीज, एक्सपर्ट्स, ने, दी, चेतावनी</media:keywords>
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        <title>Waterproof Smartphone: पानी में खराब न होने वाला सबसे सस्ता मोबाइल कौन सा है, जान लीजिए कीमत? </title>
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        <description><![CDATA[ Waterproof Smartphone:&amp;nbsp;आज के डिजिटल दौर में फोन हर आदमी की जरूरत बन गया है. मनोरंजन से लेकर दिन भर के लाखों काम इसी डिवाइस पर निर्भर हो चुके हैं. चाहे वो डॉक्यूमेंट्स को स्टोर करके रखना हो या फिर कहीं पर पेमेंट करना हो, हर चीज के लिए आदमी फोन पर डिपेंड हो गया है. ऐसे में हर आदमी जब फोन खरीदने जाता है तब वो फोन के स्टोरेज, कैमरा, बैटरी के अलावा ये भी सोचता है कि उनको ऐसा फोन मिल जाए जो लंबे समय तक चले और जो बारिश की बूंदों, पानी के छींटों या गलती से पानी में गिर जाने पर भी आसानी से खराब न हो, क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि फोन में पानी चला जाए तो कभी-कभी यह बच भी जाता है, लेकिन ज्यादा पानी पहुंचने पर डिवाइस पूरी तरह खराब हो जाती है. ऐसे में आदमी अक्सर कन्फ्यूज हो जाता है कि कौन सा फोन लेना बेहतर होगा.&amp;nbsp;
अच्छी बात यह है कि अब वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत भी नहीं है. बाजार में कई ऐसे स्मार्टफोन मौजूद हैं जो पानी और धूल से सुरक्षा देने वाली IP68 या IP69 रेटिंग के साथ आते हैं और इनकी कीमत भी काफी किफायती है. ऐसे में आइए आपको बताते हैं कुछ बेहतरीन वॉटरप्रूफ फोन्स के बारे में जो आपको 13,000 रुपये से शुरू होने वाली कीमत में मिल सकते हैं.&amp;nbsp;
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सबसे सस्ता वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन कौन सा है?
अगर कीमत के हिसाब से देखा जाए तो Realme P3x 5G इस समय सबसे सस्ते वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन्स में से एक माना जाता है. ये IP68 और IP69 दोनों रेटिंग्स के साथ आता है. साथ ही इसमें 6GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ 6.72 इंच की बड़ी डिस्प्ले और MediaTek Dimensity 6400 प्रोसेसर और 6000mAh की दमदार बैटरी भी दी गई है. इसकी शुरुआती कीमत करीब 12,999 रुपये बताई गई है, जो इसे बजट सेगमेंट में एक शानदार विकल्प बनाती है. इसके अलावा Redmi Note 14 Pro 5G भी एक बेहतर विकल्प है, जिसमें IP68 रेटिंग दी गई है जिससे यह पानी से सुरक्षित रहता है. इसमें 8GB रैम और 128GB स्टोरेज मिलता है. &amp;nbsp;Flipkart पर यह फोन करीब 21,489 रुपये में लिस्ट है, जबकि ऑफर के तहत इसे लगभग 20,239 रुपये में भी लिया जा सकता है.&amp;nbsp;
साथ ही Motorola Edge 60 Fusion 5G फोन भी है, जिसमें 8GB रैम और 256GB स्टोरेज दी गई है. जो IP68 रेटिंग के साथ यह पानी और धूल से सुरक्षा प्रदान करता है. &amp;nbsp;इसमें 6.67 इंच की डिस्प्ले, 50MP कैमरा और 5500mAh की बैटरी मिलती है, जो 68W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. इस फोन की कीमत Flipkart पर लगभग 22,999 रुपये है. इसके अलावा &amp;nbsp;Oppo Reno 13 5G भी एक प्रीमियम स्मार्टफोन है जिसमें 8GB रैम और 128GB स्टोरेज दी गई है. वहीं IP66, IP68 और IP69 तीनों ही रेटिंग्स के साथ यह फोन पानी से पूरी तरह सुरक्षित है, जिसकी किमत लगभग 29,999 रुपये तक है. साथ ही &amp;nbsp;प्रीमियम सेगमेंट में Samsung Galaxy S25 5G भी IP68 रेटिंग के साथ आता है और पानी से सुरक्षा प्रदान करता है, जिसकी किमत करीब 56,899 रुपये तक है.&amp;nbsp;
वॉटरप्रूफ फोन खरीदते समय क्या रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का कहना है कि वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन खरीदते समय केवल कीमत नहीं बल्कि उसकी IP रेटिंग भी जरूर देखनी चाहिए. IP68 और IP69 रेटिंग वाले फोन आमतौर पर पानी और धूल से बेहतर सुरक्षा देते हैं. बारिश के मौसम में ऐसे स्मार्टफोन काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं और अचानक पानी लगने पर फोन खराब होने का खतरा भी कम हो जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>कब और कैसे साफ करने चाहिए सोलर पैनल? ये बातें जान लीं तो नहीं होगी दिक्कत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कब-और-कैसे-साफ-करने-चाहिए-सोलर-पैनल-ये-बातें-जान-लीं-तो-नहीं-होगी-दिक्कत</link>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Cleaning Tips: सोलर पैनल में मूविंग पार्ट्स नहीं होते, इसलिए इन्हें ज्यादा मैंटेनेंस की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन सफाई का ध्यान रखना चाहिए. अगर सोलर पैनल पर धूल-मिट्टी जमा हो गई है तो इनकी एफिशिएंसी कम हो जाती है. यही कारण है कि मैन्युफैक्चरर भी अकसर पैनल को साफ रखने की सलाह देते हैं. बारिश होने पर पैनल से धूल-मिट्टी, गंदगी और सूखे पते आदि सब साफ हो जाते हैं, लेकिन हर बार सफाई के लिए बारिश का इंतजार सही नहीं होता. आज हम बताने जा रहे हैं कि सोलर पैनल को कब और कैसे साफ करना चाहिए.
कब करनी चाहिए सोलर पैनल की सफाई?
इस सवाल का कोई सटीक जवाब नहीं है कि सोलर पैनल की सफाई कब करनी चाहिए. यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है. अगर सफाई को कुछ महीने हो गए हैं और पैनल पर धूल-मिट्टी और गंदगी आदि जमी दिख रही है तो इन्हें साफ किया जा सकता है. इसके अलावा अगर आपको लगता है कि पैनल पूरी एफिशिएंसी के साथ काम नहीं कर रहे तो भी सफाई की जा सकती है. हालांकि, एफिशिएंसी के कम होने के पीछे टेक्नीकल कारण भी हो सकते हैं, लेकिन सफाई वाला तरीका भी आजमाया जा सकता है.
इस बात का रखें ध्यान
सोलर पैनल की सफाई के लिए सुबह या किसी ठंडे दिन को चुनना चाहिए. हीट अब्जॉर्प्शन प्रोपर्टीज के कारण धूप निकलने के बाद पैनल बहुत गर्म हो जाते हैं और इन्हें साफ करना खतरे से खाली नहीं होता. अगर सोलर पैनल ज्यादा ऊंचाई पर लगे हुए हैं तो सफाई के लिए प्रोफेशनल की मदद लेना सेफ रहता है.
कैसे करें पैनल की सफाई?

पैनल की सफाई से पहले सोलर एनर्जी सिस्टम को बंद कर दें. इससे नुकसान होने की खतरा कम हो जाता है. &amp;nbsp;
सफाई करते समय पैनल पर भार न डालें. इससे सेल्स में छोटी दरारें आ जाती हैं, जिससे यह परमानेंट डैमेज हो सकता है.
पैनल पर ज्यादा प्रेशर से पानी न मारें और न ही सफाई के लिए हार्ड केमिकल को यूज करें.
सफाई के लिए मुलायम कपड़े या ब्रश का इस्तेमाल करें ताकि सरफेस खुरदुरा न हो जाए.अगर पैनल पर कोई धब्बा या गंदगी जम गई है तो इसे कुछ देर के लिए गीले कपड़े से कवर कर दें. इसके बाद इसे उतारना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;

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सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करते समय भूलकर भी न दिखाएं ये चीज, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Array Link Technology: चला गया छत पर लगी गोल छतरी का जमाना, अब डिश एंटीना की जगह लेगा Array Link; जानें टेक्नोलॉजी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/array-link-technology-चला-गया-छत-पर-लगी-गोल-छतरी-का-जमाना-अब-डिश-एंटीना-की-जगह-लेगा-array-link-जानें-टेक्नोलॉजी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/array-link-technology-चला-गया-छत-पर-लगी-गोल-छतरी-का-जमाना-अब-डिश-एंटीना-की-जगह-लेगा-array-link-जानें-टेक्नोलॉजी</guid>
        <description><![CDATA[ Array Link Technology: अक्सर सभी ने देखा होगा कि घर हो या ऑफिस या टीवी स्टेशन की छत पर एक बड़ी सी गोल छतरी जैसा एंटीना डिश होता है, जिसे Parabolic Antenna या Satellite Dish कहा जाता है. जहां आज इंटरनेट का इस्तेमाल करना हो या ट्रैकिंग करनी हो, टेक्नोलॉजी इतनी बढ़ गई है कि अंतरिक्ष से डायरेक्ट हमारे फोन तक कनेक्शन बनाने के लिए हजारों सैटेलाइट दुनिया भर में उपलब्ध हैं. लेकिन आज तक सैटेलाइट को धरती से जोड़ने के लिए आज भी 1970 के दशक में जो Parabolic Antenna का आविष्कार हुआ था, वही पुरानी तकनीक आज तक चलती आ रही है. जिसकी सबसे बड़ी खराबी है कि एक समय पर एक ही सैटेलाइट को ट्रैक कर सकते हैं, साथ ही महंगे भी बहुत होते हैं.&amp;nbsp;
लेकिन अब वो समय आ गया है जिससे शायद इस समस्या से राहत मिल सकती है. हाल ही में University of California, San Diego (UCSD) के वैज्ञानिकों ने एक अद्भुत टेक्नोलॉजी बनाई है, जिसे ArrayLink के नाम से जाना जाएगा. माना जा रहा है कि यह टेक्नोलॉजी गोल डिश एंटीना का एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प बन सकती है. वहीं वैज्ञानिकों की बताई गई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस टेक्नोलॉजी की वजह से इंटरनेट की स्पीड और भी कई गुना ज्यादा बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
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क्या है Array Link Technology
अगर बात करें सैटेलाइट की स्पीड की तो पृथ्वी के LEO यानी Low Earth Orbit में मौजूद सैटेलाइट की स्पीड इतनी तेज होती है कि उनको ट्रैक करना पुराने एंटीना के बस की बात नहीं रह गई है. साथ ही जब एक डिश एक सैटेलाइट को छोड़कर दूसरे से जुड़ने की कोशिश करता है तो बीच में कुछ सेकंड या मिनट्स के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी भी टूट जाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार LEO में मौजूद सैटेलाइट की स्पीड 28,000 km/h होती है. &amp;nbsp;
वैज्ञानिकों के अनुसार इसी समस्या को दूर करती है ArrayLink Technology, जो पुरानी टेक्नोलॉजी को पूरी तरह बदल देती है. बताया जा रहा है कि इसके लिए किसी डिश का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है बल्कि एक लैपटॉप जैसे छोटे और फ्लैट डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है, जिसे Phased Array कहते हैं. इनकी खासियत है कि यह बिना हिले-डुले Radio Waves को सिग्नलों की दिशा बदलकर सैटेलाइट को ट्रैक करती है. इससे फायदा होगा कि डेटा ट्रांसफर बिना किसी रुकावट के लगातार होता रहेगा. आसान भाषा में समझें तो जहां पुराना डिश एंटीना आसमान में दौड़ते सैटेलाइट के पीछे खुद घूमता था, वहीं यह नया फ्लैट डिवाइस बिना अपनी जगह से हिले, अपनी Waves को मोड़कर सैटेलाइट से जुड़ देगा. जिससे बिना रुकावट वाला सुपरफास्ट इंटरनेट मिलेगा और कनेक्शन नहीं टूटेगा.&amp;nbsp;
कैसे देता है ज्यादा स्पीड?
विशेषज्ञों ने बताया कि इसमें बड़ा डिश एंटीना बनाने की बजाय उन्होंने छोटे-छोटे 16 एंटीना पैनल्स को एक किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग घरों की छतों या टावरों पर फैला दिया और उन्हें सॉफ्टवेयर के जरिए आपस में जोड़ दिया गया. उन्होंने बताया कि ये अलग-अलग एंटीना एक टीम की तरह काम करते हैं, जब ये एक साथ मिलते हैं तो इनकी ताकत एक बहुत बड़े डिश एंटीना के बराबर हो जाती है.
जब इस नई टेक्नोलॉजी का टेस्ट किया गया तो पता चला कि छोटे एंटीना पैनल्स का यह नया नेटवर्क पुराने एंटीना के मुकाबले 3 गुना ज्यादा तेजी से डेटा ट्रांसफर कर सकता है. यानी अब बिना अटके भारी-भरकम डॉक्यूमेंट्स डाउनलोड हो सकेंगे और वीडियो कॉलिंग से लेकर स्ट्रीमिंग तक सब कुछ सुपरफास्ट हो जाएगा.&amp;nbsp;
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
इस तकनीक की सबसे खास बात है कि इन्हें सेटअप करने के लिए किसी तरह के महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं है. इसे किसी भी इमारत की छत, मोबाइल टावर या ऑफिस बिल्डिंग पर लगाया जा सकता है. इससे मोबाइल टावर आसानी से सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन में बदल जाएंगे. साथ ही इससे सैटेलाइट कंपनियों की लागत कम होगी, उन्हें अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं कराना होगा. &amp;nbsp;वहीं आने वाले समय में लोगों को इससे लिमिटेड प्राइस में हाई स्पीड इंटरनेट और Direct-to-Phone Connectivity मिल सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Call Forwarding Deactivation Code: आपके मोबाइल में भी तो नहीं लगी है कॉल फारवर्डिंग, इस सीक्रेट कोड से तुरंत करें बंद   </title>
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        <description><![CDATA[ Call Forwarding Deactivation Code:&amp;nbsp;आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग से लेकर ऑनलाइन पेमेंट, ऑफिस के काम और परिवार से बातचीत तक लगभग हर जरूरी काम फोन के जरिए ही होता है. ऐसे में अगर आपकी कॉल किसी और नंबर पर फॉरवर्ड हो जाए और आपको इसकी जानकारी भी न हो, तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है. &amp;nbsp;कई बार लोग खुद कॉल फॉरवर्डिंग चालू कर देते हैं और बाद में उसे बंद करना भूल जाते हैं. वहीं कुछ मामलों में फोन की सेटिंग्स बदल जाने से भी यह फीचर एक्टिव हो सकता है. &amp;nbsp;ऐसे में जरूरी है कि आप समय-समय पर जांचते रहें कि आपके नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग चालू है या नहीं.&amp;nbsp;
आखिर क्या होती है Call Forwarding?
कॉल फॉरवर्डिंग एक ऐसी सुविधा है जिसमें आपके मोबाइल नंबर पर आने वाली कॉल किसी दूसरे नंबर पर अपने आप ट्रांसफर हो जाती है. उदाहरण के लिए, अगर आपने अपना नंबर किसी दूसरे नंबर पर फॉरवर्ड कर रखा है, तो आपके पास आने वाली कॉल सीधे उस नंबर पर पहुंच जाएगी. यह फीचर उन लोगों के लिए काफी उपयोगी होता है जो एक से ज्यादा नंबर इस्तेमाल करते हैं या किसी खास समय में अपनी कॉल किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते हैं. हालांकि अगर यह फीचर गलती से चालू रह जाए तो आपकी जरूरी कॉल्स आपके पास आने के बजाय किसी और नंबर पर जा सकती हैं.&amp;nbsp;
जिओ, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल में कॉल फॉरवर्डिंग को एक्टिवेट यानी चालू करने के लिए यूजर्स अपने फोन में Settings &gt; Call &gt; Advanced Settings &gt; Call Forwarding में जाकर इसे ऑन कर सकते हैं. इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियां कुछ खास कोड भी उपलब्ध कराती हैं, जिनकी मदद से कॉल फॉरवर्डिंग को आसानी से एक्टिव किया जा सकता है. यूजर अपनी जरूरत के अनुसार सभी कॉल्स, बिजी कॉल्स, अनआंसर्ड कॉल्स या नेटवर्क से बाहर होने की स्थिति में कॉल फॉरवर्डिंग सेट कर सकते हैं. यही वजह है कि यह फीचर कई लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होता है, लेकिन इसकी जानकारी होना भी उतना ही जरूरी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Digital Payment Security India:एक बटन दबाते ही ठप हो जाएगा पूरा UPI सिस्टम, कैसे काम करेगा RBI का kill Switch?
इस सीक्रेट कोड से तुरंत करें चेक
अगर आपको शक है कि आपके फोन में कॉल फॉरवर्डिंग चालू है, तो इसे चेक करना बेहद आसान है. इसके लिए अपने फोन के डायलर में *#21# डायल करें और कॉल बटन दबाएं. इसके बाद स्क्रीन पर जानकारी दिखाई देगी कि आपके नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव है या नहीं. अगर किसी नंबर पर कॉल फॉरवर्ड की जा रही होगी तो उसकी जानकारी भी आपको दिखाई देगी. यह तरीका लगभग सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों जैसे Jio, Airtel, Vi और BSNL पर काम करता है. इससे आप कुछ ही सेकंड में अपने नंबर की स्थिति जान सकते हैं.&amp;nbsp;
कॉल फॉरवर्डिंग बंद करने का आसान तरीका
यदि आपके फोन में कॉल फॉरवर्डिंग चालू है और आप इसे बंद करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक आसान कोड मौजूद है. अगर आप अपने फोन में जिओ, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल का सिम उपयोग करते हैं, तो फिर निम्न कोड जरिए कॉल फॉरवर्डिंग को हटा.ा जा सकता है
Jio कॉल फॉरवर्डिंग डीएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *413
unconditional कॉल फॉरवर्डिंग के लिए डीएक्टिवट कोडः *402
&amp;nbsp;बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *406
&amp;nbsp;non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *404
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *410

Airtel कॉल फॉरवर्डिंग डिएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##21#
बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##67#
non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##61#
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##62#

Vodafone idea कॉल फॉरवर्डिंग डीएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##002#
बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##67#
non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##61#
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##62#

BSNL कॉल फॉरवर्डिंग के लिए डीएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##21#
बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##67#
non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##61#
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##62#&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 18 Pro की बैटरी को लेकर सामने आई नई लीक, फैन्स को लगा बड़ा झटका</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro: ऐप्पल के अपकमिंग iPhone 18 Pro को लेकर एक नई लीक सामने आई है, जिसने फैन्स को निराश कर दिया है. यह लीक बताती है कि इस मॉडल में बैटरी कैपेसिटी को उतना अपग्रेड नहीं किया जाएगा, जितनी उम्मीद की जा रही थी. हालांकि, iPhone 17 Pro के मुकाबले यह मॉडल बड़ी बैटरी के साथ आएगा, लेकिन इसकी कैपेसिटी 5,000mAh से कम ही रहने की बात कही जा रही है. बता दें कि इस मॉडल को सितंबर में लॉन्च किया जाएगा. आइए जानते हैं कि बैटरी से जुड़ी क्या-क्या नई जानकारी सामने आई है.
iPhone 18 Pro के लिए दो बैटरी पैक टेस्ट कर रही है ऐप्पल
चाइनीज टिपस्टर डिजिटल चैट स्टेशन की मानें तो ऐप्पल इस मॉडल के दो बैटरी पैक टेस्ट कर रही है. अमेरिका में बिकने वाले वेरिएंट के लिए 4,288mAh की बैटरी टेस्ट की जा रही है, जबकि चीन और बाकी मार्केट वाले मॉडल के लिए 4,056mAh की बैटरी की टेस्टिंग चल रही है. दोनों में अंतर इस वजह से है क्योंकि अमेरिका में कंपनी eSIM वाले आईफोन बेचती है, जिससे सिम स्लॉट का स्पेस बच जाता है और यह बड़ा बैटरी पैक देने के काम आता है.
iPhone 17 Pro के मुकाबले कितनी बड़ी अपग्रेड?
अगर यह लीक सच साबित होती है तो अपकमिंग प्रो मॉडल में 17 Pro के मुकाबले छोटी अपग्रेड देखने को ही मिलेगी. 17 Pro मॉडल की बात करें तो इसके अमेरिकी वेरिएंट में 4,252mAh का बैटरी पैक है, जबकि फिजिकल सिम स्लॉट के साथ आने वाले आईफोन में 4,056mAh का बैटरी पैक लगा हुआ है. इस तरह देखा जाए तो दोनों जनरेशन के मॉडल की बैटरी कैपेसिटी में मामूली अंतर होगा. ऐप्पल नए मॉडल को पावर एफिशिएंट बनाकर इस अंतर को बढ़ाने पर विचार कर रही है.
ज्यादा एफिशिएंसी से बन सकती है बात
18 Pro की बैटरी में भले ही बड़ी अपग्रेड देखने को न मिले, लेकिन ऐप्पल इसे एफिशिएंट बनाने पर पूरा जोर दे रही है. कंपनी इस मॉडल में 2nm प्रोसेस पर बने A20 Pro चिपसेट को यूज करेगी, जहां एनर्जी एफिशिएंसी के मामले में काफी आगे है. यह कम पावर की खपत कर बेहतर परफॉर्मेंस देगा, जिससे फोन की बैटरी ज्यादा समय तक चलेगी. इसके अलावा ऐप्पल नए डिस्प्ले पैनल भी यूज कर सकती है, जो पावर एफिशिएंट होगा. इस तरह कंपनी हार्डवेयर को एफिशिएंट बनाकर कम कैपेसिटी वाली बैटरी से ज्यादा काम लेने की प्लानिंग के साथ आगे बढ़ रही है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>आपकी इन गलतियों से जल्दी खत्म हो जाती है फोन की बैटरी! जानिए किन चीजों का रखना चाहिए ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया, ऑनलाइन पढ़ाई और मनोरंजन तक, लगभग हर काम के लिए हम फोन पर निर्भर हैं. लेकिन कई बार लोग शिकायत करते हैं कि उनका फोन बार-बार चार्ज करना पड़ता है या बैटरी पहले की तुलना में बहुत जल्दी खत्म होने लगी है. इसकी वजह हमेशा बैटरी की खराबी नहीं होती, बल्कि हमारी कुछ गलत आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं. आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में जो आपके स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ को तेजी से कम कर सकती हैं.
स्क्रीन की ब्राइटनेस हमेशा ज्यादा रखना
फोन की स्क्रीन सबसे ज्यादा बैटरी खर्च करने वाले हिस्सों में से एक है. अगर आप हर समय ब्राइटनेस को 100 प्रतिशत पर रखते हैं तो बैटरी तेजी से खत्म होगी. बेहतर होगा कि ऑटो-ब्राइटनेस फीचर का इस्तेमाल करें या जरूरत के हिसाब से स्क्रीन की रोशनी कम रखें.
बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स
कई ऐप्स ऐसे होते हैं जो फोन इस्तेमाल न करने पर भी बैकग्राउंड में एक्टिव रहते हैं. ये लगातार इंटरनेट, लोकेशन और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं जिससे बैटरी की खपत बढ़ जाती है. समय-समय पर अनावश्यक ऐप्स को बंद करना और उनकी बैकग्राउंड गतिविधियों को सीमित करना जरूरी है.
हर समय लोकेशन और ब्लूटूथ ऑन रखना
GPS, ब्लूटूथ और Wi-Fi जैसे फीचर्स लगातार चालू रहने पर बैटरी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं. यदि इनकी जरूरत नहीं है तो इन्हें बंद रखना बेहतर होता है. इससे बैटरी की बचत के साथ-साथ फोन की परफॉर्मेंस भी बेहतर बनी रहती है.
बार-बार नोटिफिकेशन आने देना
सोशल मीडिया, शॉपिंग और गेमिंग ऐप्स से आने वाली लगातार नोटिफिकेशन भी बैटरी खर्च करती हैं. हर नोटिफिकेशन के साथ स्क्रीन एक्टिव होती है और प्रोसेसर काम करता है. जिन ऐप्स की नोटिफिकेशन जरूरी नहीं हैं, उन्हें बंद कर देना चाहिए.
गलत तरीके से चार्जिंग करना
फोन को बार-बार 0 प्रतिशत तक डिस्चार्ज होने देना या पूरी रात चार्जिंग पर छोड़ देना बैटरी की सेहत को प्रभावित कर सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी को सामान्यतः 20 से 80 प्रतिशत के बीच रखना बेहतर माना जाता है. साथ ही हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले चार्जर और केबल का इस्तेमाल करना चाहिए.
पुराने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
कई लोग फोन में आने वाले सॉफ्टवेयर अपडेट को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि कंपनियां अपडेट के जरिए बैटरी ऑप्टिमाइजेशन और परफॉर्मेंस सुधार से जुड़े फीचर्स भी जारी करती हैं. इसलिए फोन को समय-समय पर अपडेट रखना जरूरी है.
बैटरी बचाने के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि आपके फोन की बैटरी लंबे समय तक चले तो स्क्रीन ब्राइटनेस नियंत्रित रखें, अनावश्यक ऐप्स हटाएं, जरूरत न होने पर लोकेशन और ब्लूटूथ बंद रखें तथा नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल करें. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल बैटरी बैकअप बढ़ाया जा सकता है बल्कि बैटरी की उम्र भी लंबे समय तक बरकरार रखी जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung Galaxy S25 Edge पर धमाका छूट, यहां मिल रहा 40,000 रुपये से भी ज्यादा का डिस्काउंट</title>
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        <description><![CDATA[ Galaxy S25 Edge Price Drops: अगर आप कम कीमत पर प्रीमियम फोन लेना चाहते हैं तो शानदार मौका आ गया है. इस समय सैमसंग के Galaxy S25 Edge स्मार्टफोन पर 40,000 हजार रुपये से अधिक की बचत की जा सकती है. प्रीमियम लुक, दमदार फीचर्स और स्लिम प्रोफाइल वाले फोन पर इस तरह की डील पहले नहीं आई थी और ऐसा मौका दोबारा आना भी मुश्किल है. इस फोन में आपको एकदम लेटेस्ट फीचर्स मिल जाएंगे और बचत का अवसर भी मिल रहा है. आइए इसके फीचर्स और डील के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Galaxy S25 Edge के स्पेसिफिकेशंस
Galaxy S25 Edge में 6.6 इंच का डायनामिक AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है. इसमें क्वालकॉम का Snapdragon 8 Elite for Galaxy प्रोसेसर लगा है, जिसे 12GB रैम के साथ पेयर किया गया है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर और 12MP का सेंकेडरी सेंसर मिलता है. फ्रंट में वीडियो और सेल्फी के लिए 12MP का कैमरा लगा हुआ है. 3,900mAh की बैटरी वाले इस फोन में गैलेक्सी एआई फीचर्स भी हैं. सैमसंग ने इस फोन के साथ अल्ट्रा-स्लिम फोन सेगमेंट की शुरुआत की थी और इसके बाद ऐप्पल और टेक्नो समेत कई कंपनियां पतले फोन लॉन्च कर चुकी हैं.
फ्लिपकार्ट पर मिल रही धमाकेदार छूट
S25 Edge को भारत में 1,09,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. अब एक ही झटके में इसकी कीमत में बड़ी कटौती देखने को मिली है. फ्लिपकार्ट पर Galaxy S25 Edge अभी 69,999 रुपये में लिस्टेड है. 40,000 रुपये के इस फ्लैट डिस्काउंट के अलावा सेलेक्टेड क्रेडिट कार्ड्स पर 3,500 रुपये का कैशबैक भी ऑफर किया जा रहा है. फ्लिपकार्ट इस फोन पर एक्सचेंज ऑफर भी दे रही है. एक्सचेंज के बाद इस फोन को 53,000 रुपये से भी कम में खरीदा जा सकता है.&amp;nbsp;
iPhone 16 पर भी बचत का मौका
सैमसंग के S25 Edge की तरह पिछले साल सबसे ज्यादा बिकने वाले ऐप्पल के पॉपुलर मॉडल iPhone 16 पर भी डिस्काउंट मिल रहा है. iPhone 16 की इस समय कीमत 69,900 रुपये है, लेकिन क्रोमा स्टोर से आप इसे बेहद कम दाम पर खरीद सकते हैं. क्रोमा स्टोर पर बैंक कैशबैक, कूपन, एक्सचेंज वैल्यू और बोनस सब को मिलाकर यह आईफोन 43,490 रुपये में अवेलेबल है. क्रोमा पर यह ऑफर 14 जून तक अवेलेबल रहेगा. इससे पहले आईफोन खरीदकर आप इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iOS 27 का इंतजार जल्द होगा खत्म, लेकिन इन iPhone मॉडल्स को नहीं मिलेगा अपडेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ios-27-का-इंतजार-जल्द-होगा-खत्म-लेकिन-इन-iphone-मॉडल्स-को-नहीं-मिलेगा-अपडेट</link>
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        <description><![CDATA[ iOS 27 Update: ऐप्पल की iOS 27 अपडेट की पहली झलक का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. 8 जून से शुरू होने वाली ऐप्पल की वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस (WWDC) 2026 में इस अपडेट को रिवील कर दिया जाएगा. इसके साथ ऐप्पल iPadOS 27, macOS 27, watchOS 27 समेत दूसरी सॉफ्टवेयर अपडेट का भी ऐलान कर सकती है. iOS 27 के साथ सिरी के एआई वर्जन को भी रोलआउट किया जाएगा. इस अपडेट के कई फीचर्स पहले पता चल गए थे और अब सपोर्टेड डिवाइस की लिस्ट भी सामने आ गई है. आइए एक नजर डालते हैं कि इस अपडेट में क्या-क्या फीचर्स होंगे और यह किन आईफोन मॉडल को सपोर्ट करेगी.
iOS 27 Update में क्या-क्या मिलेगा?
सिरी का नया वर्जन- iOS 27 का सबसे खास फीचर सिरी का नया एआई वर्जन होगा. सिरी अब एक असिस्टेंट न रहकर चैटजीपीटी और जेमिनी की तरह एक एआई चैटबॉट के समान काम करेगा. इसमें विजुअल इंटेलीजेंस मिलने की भी पूरी-पूरी उम्मीद है, जिससे यह समझ सकेगा कि आईफोन की स्क्रीन पर क्या चल रहा है और कैमरा के जरिए भी इसे इनपुट दी जा सकेगी. सिरी के लिए अलग से ऐप भी लॉन्च की जा सकती है.
एआई एडिटिंग टूल्स और कैमरा ऐप अपग्रेड- iOS 27 से आईफोन में फोटो एडिटिंग का तरीका बदलने वाला है. नई अपडेट अपने साथ फोटो एडिटिंग के लिए एक्सटेंड, इनहैंस और रिफ्रेम के ऑप्शन्स लेकर आएगी. इनकी मदद से फोटो में एडिशनल कंटेट जनरेट और फोटोज का परस्पेक्टिव भी बदला जा सकेगा. ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि आईफोन में फोटो एडिटिंग के लिए नैनो बनाना मॉडल का सपोर्ट मिल सकता है. इसके अलावा कैमरा ऐप को भी हालिया समय की सबसे बड़ी अपग्रेड मिलने वाली है. इसमें सिरी पावर्ड कैमरा मोड और नए कस्टमाइज ऑप्शन आ रहे हैं.
सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स- iOS 27 अपडेट 5G कनेक्टिविटी को सपोर्ट करेगी. मोबाइल नेटवर्क से बाहर होने पर भी यूजर सैटेलाइट की मदद से मैसेज भेज और रिसीव कर पाएंगे. ऐप्पल मैप्स में भी नए सैटेलाइट फीचर मिलने की उम्मीद है. ये फीचर्स सारे आईफोन को न मिलकर केवल आईफोन 17 सीरीज तक ही सीमित रह सकते हैं.
इन आईफोन को नहीं मिलेगी अपडेट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, iOS 27 अपडेट आईफोन 12 के बाद लॉन्च हुए मॉडल को सपोर्ट करेगी. यानी आईफोन 12 सीरीज, आईफोन 13 सीरीज, आईफोन 14 सीरीज, आईफोन 15 सीरीज, आईफोन 16 सीरीज और आईफोन 17 सीरीज को iOS 27 से अपडेट किया जा सकता है. आईफोन 12 से पहले के आईफोन इस अपडेट के लिए कंपैटिबल नहीं होंगे.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iOS, का, इंतजार, जल्द, होगा, खत्म, लेकिन, इन, iPhone, मॉडल्स, को, नहीं, मिलेगा, अपडेट</media:keywords>
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        <title>भारत में इस कंपनी के लाखों यूजर्स पर साइबर अटैक का खतरा, सरकार ने जारी की वॉर्निंग</title>
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        <description><![CDATA[ Microsoft Office Security Flaw Warning: अगर आप माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस यूज करते हैं तो आपके लिए जरूरी जानकारी है. सरकारी साइबर सिक्योरिटी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने वॉर्निंग जारी करते हुए कहा है कि माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में ऐसी सुरक्षा खामियां मिली हैं, जिससे सिस्टम हैक हो सकता है. इन खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स टारगेटेड सिस्टम पर हार्मफुल कोड रन कर इसका पूरा कंट्रोल अपने हाथों में ले सकते हैं. एजेंसी ने उन खामियों का भी जिक्र किया है, जिनके कारण यह खतरा पैदा हुआ है.
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में क्या खामियां मिली हैं?
सरकारी एजेंसी ने अपनी वॉर्निंग में कहा कि अनट्रस्टेड डेटा के डिसीरियलाइजेशन के कारण माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में खामियां मिली है और अटैकर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. एजेंसी के मुताबिक, हैकर्स नेटवर्क के जरिए प्रभावित सिस्टम पर स्पेशली क्राफ्टेड डेटा भेजकर इस सिक्योरिटी कमजोरी का फायदा उठा सकता है. अगर यह अटैक सफल रहता है तो हैकर्स टारगेटेड सिस्टम में स्टोर सेंसेटिव इंफोर्मेशन एक्सेस कर, डेटा चुरा, सिस्टम में अनऑथोराइज्ड चेंज कर और टारगेटेड सिस्टम का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले सकते हैं.
दुनियाभर में माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के करोड़ों यूजर्स
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस दुनियाभर में सबसे ज्यादा यूज होने वाला सॉफ्टवेयर सुइट है. इसे इंडिविजुअल यूजर्स के साथ-साथ बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी खूब यूज किया जाता है. डॉक्यूमेंट, प्रेजेंटेशन और स्प्रेडशीट आदि तैयार करने के लिए यह ज्यादा इस्तेमाल होता है. एजेंसी ने बताया कि उसकी वॉर्निंग इंडिविजुअल यूजर के साथ-साथ ऑर्गेनाइजेशन्स के लिए भी है. इन खामियों का खतरा ज्यादा है और इसे यूज करने वालों को टारगेट किया जा सकता है.
यूजर्स के पास बचाव के लिए क्या तरीका?
CERT-In ने इस खतरे से बचाव का तरीका भी सुझाया है. एजेंसी ने सुझाव दिया है कि माइक्रोसॉफ्ट यूजर्स को कंपनी की तरफ से जारी लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट को इंस्टॉल कर लेना चाहिए. इस अपडेट की मदद से ये खामियां दूर हो जाएंगी और साइबर अटैक का खतरा नहीं रहेगा. CERT-In ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसे खतरों से बचाव के लिए ऐप्स और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखना चाहिए.
ये हैं सॉफ्टवेयर अपडेट रखने के फायदे
चाहे आपके मोबाइल की ऐप्स हों या सिस्टम के सॉफ्टवेयर, इन्हें हमेशा अपेडेटेड रखना चाहिए. इससे न सिर्फ आपको समय-समय पर नए फीचर्स मिलते रहते हैं बल्कि साइबर खतरों से भी सुरक्षा मिलती है. सॉफ्टवेयर अपडेट रखने से साइबर अटैक की चिंता नहीं रहती और आपके डिवाइस भी बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ChatGPT ने रचा इतिहास, यूजर्स के मामले में तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT Reaches 1 Billion Monthly Users: OpenAI की एआई ऐप ChatGPT ने नया इतिहास रच दिया है. यह एक बिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स तक पहुंचने वाली पहली एआई ऐप बन गई है. गूगल मैप्स, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब आदि को पछाड़कर सबसे कम समय में यह उपलब्धि हासिल करने वाली भी पहली ऐप है. ChatGPT को 2023 में लॉन्च किया गया था और तीन सालों में ही इस ऐप के मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या एक बिलियन को पार कर गई है. टिकटॉक को यहां तक पहुंचने में पांच और इंस्टाग्राम को आठ साल लगे थे. यह दिखाता है कि किस तेजी से एआई अब लोगों के जीवन में अपनी जगह बनाती जा रही है.
एआई सेगमेंट में मुश्किल हो रहा है मुकाबला
एआई सेगमेंट में कंपीटिशन बढ़ने के कारण मुकाबला कड़ा होता जा रहा है. एक्टिव यूजर्स के मामले में चैटजीपीटी सबसे आगे बनी हुई है, लेकिन उसकी राइवल ऐप्स भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं. एंथ्रोपिक की Claude के मंथली एक्टिव यूजर्स 56 मिलियन हो गए हैं. Claude ने सालाना आधार पर 640 प्रतिशत की ग्रोथ की है, वहीं चैटजीपीटी केवल 62 प्रतिशत इजाफा ही कर पाई है. यह दिखाता है कि चैटजीपीटी के लिए आगे का सफर आसान नहीं रहने वाला है. डेटा से यह भी पता चला है कि अमेरिका में जिन यूजर्स ने Claude ऐप इंस्टॉल की है, एक महीने बाद चैटजीपीटी पर उनका टाइम स्पेंट 5 प्रतिशत कम हो जाता है.
IPO की तैयारियों में जुटीं दोनों कंपनियां
एआई की रेस में एक-दूसरे का मुकाबले कर रहीं OpenAI और एंथ्रोपिक दोनों ही पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं. एंथ्रोपिक ने अमेरिका में IPO लाने की प्रोसेस शुरू कर दी है वहीं OpenAI भी अगले कुछ दिनों में अपने IPO का ऐलान कर सकती है. अब ChatGPT के यह माइलस्टोन हासिल करने के बाद OpenAI की स्थिति और मजबूत हुई है.
इस देश में फ्री में मिल रहा है ChatGPT Plus का सब्सक्रिप्शन
पिछले महीने ही खबर आई थी कि OpenAI ने माल्टा की सरकार के साथ मिलकर एक नया अभियान शुरू किया है. इसके तहत फ्री एआई लिटरेसी कोर्स पूरा करने वाले माल्टा के हर नागरिक को एक साल तक ChatGPT Plus का फ्री सब्सक्रिप्शन दिया जाएगा. विदेशों में रहने वाले माल्टा के नागरिकों के लिए भी यह ऑफर लागू होगा. माल्टा के बाद UAE में भी ऐसा अभियान चलाया जा सकता है. कंपनी भारत में लोगों को ChatGPT Go का सब्सक्रिप्शन फ्री ऑफर कर रही है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>इस देश में सबसे तेज चलता है इंटरनेट! जानिए स्पीड के मामले में भारत की क्या है रैंक</title>
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        <description><![CDATA[ इस देश में सबसे तेज चलता है इंटरनेट! जानिए स्पीड के मामले में भारत की क्या है रैंक ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>AI बताएगा कौन&amp;सी कॉल है फर्जी, Google का यह फीचर बचा देगा आपकी मेहनत की कमाई</title>
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        <description><![CDATA[ Google Fake Call Detection Feature: एंड्रॉयड फोन पर अब फर्जी कॉल का झंझट कम होने जा रहा है. गूगल ने एंड्रॉयड के लिए एक नए फेक कॉल डिटेक्शन फीचर को इंट्रोड्यूस किया है. इसे यूजर को एआई की मदद से कॉल के जरिए होने वाले स्कैम से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है. दरअसल, पिछले कुछ समय से स्कैमर एआई की मदद से आवाज की नकल कर लोगों को टारगेट कर रहे हैं. एआई एजेंट्स और वॉइस क्लोनिंग टूल्स अवेलेबल होने के बाद यह खतरा और बढ़ गया है. इसे देखते हुए गूगल यह फीचर लेकर आई है. यह अपनी तरह का पहला प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो संदिग्ध कॉल को डिटेक्ट कर यूजर को अलर्ट कर देगा.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा यह फीचर?
एआई से चलने वाला यह फीचर बाई डिफॉल्ट ऑन रहेगा और बैकग्राउंड में अपना काम करेगा. इसके काम करने का तरीका बड़ा आसान है. जब कोई कॉन्टैक्ट गूगल की फोन ऐप को यूज करते हुए आपको कॉल करेगा तो उसके डिवाइस से आपके डिवाइस पर एक साइलेंट कंफर्मेशन सिग्नल भेजा जाएगा. इसकी मदद से आपका डिवाइस यह वेरिफाई कर पाएगा कि यह कॉल असली कॉन्टैक्ट से आई है और कोई स्कैमर आपके कॉन्टैक्ट की आवाज की नकल कर आपसे संपर्क नहीं कर रहा है. अगर कोई स्कैमर आपका कोई जानकार बनकर आपको कॉल करेगा तो उसके डिवाइस से यह सिग्नल नहीं आएगा. इसके बाद आपका फोन उस कॉन्टैक्ट से वेरिफाई करेगा. अगर उसे वहां से वापस सिग्नल नहीं मिलेगा तो आपकी फोन स्क्रीन पर वॉर्निंग नजर आएगी, जिसमें आपको कॉल कट करने की सलाह दी जाएगी. अगर आप यह फीचर यूज नहीं करना चाहते तो फोन ऐप की सेटिंग में जाकर इसे बंद किया जा सकता है.
किन फोन में मिलेगा यह फीचर?
गूगल की तरफ से जानकारी दी गई है कि फेक कॉल डिटेक्शन फीचर को दुनियाभर में रोल आउट करना शुरू कर दिया है. सबसे पहले पिक्सल डिवाइस पर यह फीचर आएगा और उसके बाद एंड्रॉयड 12 के बाद के वर्जन यूज करने वाले स्मार्टफोन के लिए भी इसे अवेलेबल करवा दिया जाएगा. बता दें कि गूगल की फोन ऐप कई एंड्रॉयड डिवाइसेस में डिफॉल्ट होती है. अगर आप अपने एंड्रॉयड डिवाइस में कोई और फोन ऐप यूज कर रहे हैं तो प्ले स्टोर से Phone by Google कर सकते हैं. इस फीचर का फायदा उठाने के लिए इस ऐप को डिफॉल्ट सेट करने की जरूरत पड़ेगी.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>चांद पर बसेंगे इंसान? NASA की नई तकनीक ने बढ़ाई Moon Colony की उम्मीदें, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ NASA Regenerative Fuel Cell: इंसानों को चांद पर बसाने का सपना अब पहले से ज्यादा वास्तविक नजर आने लगा है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA एक ऐसी नई ऊर्जा तकनीक पर काम कर रही है जो भविष्य में चांद और मंगल ग्रह पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी को संभव बना सकती है. यह तकनीक है रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल जिसे NASA अपने मिशनों के लिए एक गेम-चेंजर मान रहा है.
आखिर क्या है NASA की नई रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल?
रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल को एक विशेष प्रकार की रिचार्जेबल एनर्जी सिस्टम कहा जा सकता है. यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली, गर्मी और पानी पैदा करती है. जब इसे दोबारा चार्ज करना होता है तो यही पानी फिर से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित कर दिया जाता है जिससे ऊर्जा चक्र लगातार चलता रहता है.
NASA का मानना है कि यह तकनीक चंद्रमा पर ऊर्जा आपूर्ति की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान कर सकती है. खासकर उन क्षेत्रों में जहां लंबे समय तक सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती और सोलर पैनल प्रभावी नहीं रह जाते.
चांद पर ऊर्जा की समस्या क्यों है इतनी बड़ी?
चंद्रमा पर दिन और रात का चक्र पृथ्वी की तुलना में काफी अलग है. वहां एक दिन और एक रात लगभग 14-14 पृथ्वी दिनों के बराबर होते हैं. इसका मतलब है कि कई क्षेत्रों में लगातार दो सप्ताह तक अंधेरा छाया रह सकता है.
इतने लंबे अंधेरे में सौर ऊर्जा पर निर्भर रहना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा तापमान भी बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है जो डिवाइसेज और इंसान दोनों के लिए चुनौती बनता है. यही वजह है कि NASA ऐसे ऊर्जा स्रोतों की तलाश में है जो लगातार बिजली उपलब्ध करा सकें.
Artemis मिशन के लिए होगी अहम
NASA का Artemis कार्यक्रम इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहा है. हाल ही में Artemis II मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के आसपास भेजने का महत्वपूर्ण चरण पूरा किया गया. आने वाले वर्षों में NASA चंद्रमा पर नियमित मिशन, वैज्ञानिक अनुसंधान और परमानेंट घर बनाने की योजना बना रहा है. ऐसे में नई फ्यूल सेल तकनीक रोवर्स, वैज्ञानिक डिवाइस और रहने योग्य मॉड्यूल्स को ऊर्जा प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
आकार में बड़ी लेकिन क्षमता में और भी विशाल
NASA द्वारा विकसित किया जा रहा यह सिस्टम आकार में एक छोटी कार जितना बड़ा है. इसमें करीब 1,000 से अधिक पुर्जे और सैकड़ों सेंसर लगे हुए हैं. इसके बावजूद वैज्ञानिकों का कहना है कि समान क्षमता वाली पुरानी बैटरी सिस्टम की तुलना में इसका वजन अपेक्षाकृत कम है. फिलहाल वैज्ञानिक इसकी कार्यक्षमता बढ़ाने पर काम कर रहे हैं.
चंद्रमा पर बसावट के लिए क्यों जरूरी है यह तकनीक?
पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियां लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए पर्याप्त नहीं मानी जातीं. उनकी ऊर्जा स्टोर करने की क्षमता सीमित होती है और उन्हें बार-बार चार्ज करने की आवश्यकता पड़ती है. इसके मुकाबले रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल समान वजन वाली बैटरियों की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा स्टोर कर सकती है. यही कारण है कि NASA इसे भविष्य की चंद्र बस्तियों और लंबी अवधि के मिशनों के लिए एक मजबूत विकल्प मान रहा है.
2030 तक बन सकती है पहली स्थायी मून कॉलोनी
NASA की दीर्घकालिक योजना चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की है. एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में कई मिशनों, दर्जनों लॉन्च और अरबों डॉलर के निवेश के बाद चंद्रमा पर पहली स्थायी कॉलोनी स्थापित की जा सकेगी.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Single Vs Dual Inverter AC: कौन&amp;सी तकनीक देगी बेहतर कूलिंग और बिजली बिल में राहत, जानिए किसे खरीदने में है फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Single Vs Dual Inverter AC: भीषण गर्मी के दौर में एयर कंडीशनर अब सिर्फ लग्जरी नहीं बल्कि घरों की एक अहम जरूरत बन चुका है. बढ़ती मांग के साथ कंपनियां भी नई-नई तकनीकों वाले AC बाजार में उतार रही हैं. इन्हीं में सबसे ज्यादा चर्चा सिंगल इन्वर्टर और ड्यूल इन्वर्टर AC की होती है. कई लोग ड्यूल इन्वर्टर को सबसे बेहतर बताते हैं जबकि कुछ के अनुसार सिंगल इन्वर्टर भी पर्याप्त है. ऐसे में नया AC खरीदने से पहले इन दोनों तकनीकों के बीच का अंतर समझना जरूरी हो जाता है.
सिंगल इन्वर्टर AC कैसे काम करता है
सिंगल इन्वर्टर AC में एक कंप्रेसर मोटर होती है जो कमरे के तापमान के अनुसार अपनी स्पीड को कंट्रोल करती रहती है. जब कमरे का तापमान तय स्तर तक पहुंच जाता है तो कंप्रेसर की स्पीड कम हो जाती है और जरूरत पड़ने पर फिर बढ़ जाती है. इस तकनीक की वजह से AC बार-बार बंद और चालू नहीं होता जिससे बिजली की खपत कम होती है और कमरे का तापमान भी संतुलित बना रहता है. यही कारण है कि यह पारंपरिक नॉन-इन्वर्टर AC की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल माना जाता है.
ड्यूल इन्वर्टर AC क्यों माना जाता है एडवांस?
ड्यूल इन्वर्टर AC में दो रोटरी सिस्टम या दोहरे मैकेनिज्म वाला कंप्रेसर इस्तेमाल किया जाता है. इससे कंप्रेसर पर पड़ने वाला दबाव संतुलित रहता है और मशीन अधिक स्मूद तरीके से काम करती है. यह तकनीक कमरे को कम समय में ठंडा करने में सक्षम होती है और तापमान को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखती है. खासतौर पर रात के समय इसका फायदा महसूस होता है क्योंकि तापमान में बार-बार बदलाव नहीं होता और लगातार आरामदायक माहौल बना रहता है.
बिजली बचाने में कौन आगे है?
ऊर्जा दक्षता के मामले में ड्यूल इन्वर्टर AC को थोड़ा बेहतर माना जाता है. इसका कंप्रेसर बेहद कम स्पीड पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है जिससे बिजली की खपत कम होती है. यदि घर में AC का इस्तेमाल रोजाना कई घंटों तक या पूरी रात किया जाता है तो ड्यूल इन्वर्टर मॉडल लंबे समय में बिजली बिल कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि, जिन लोगों का इस्तेमाल सीमित है और AC केवल कुछ घंटों के लिए चलता है उनके लिए सिंगल इन्वर्टर AC भी पर्याप्त और किफायती विकल्प साबित हो सकता है.
कूलिंग और शोर के मामले में अंतर
ड्यूल इन्वर्टर AC की सबसे बड़ी खासियत इसकी शांत कार्यप्रणाली है. इसका कंप्रेसर और आउटडोर यूनिट कम कंपन पैदा करते हैं जिससे शोर भी कम सुनाई देता है. साथ ही यह तेजी से कूलिंग देने में सक्षम होता है. दूसरी ओर, सिंगल इन्वर्टर AC भी अच्छी कूलिंग देता है लेकिन ड्यूल इन्वर्टर जैसी स्मूद और साइलेंट परफॉर्मेंस नहीं दे पाता.
कौन-सा AC खरीदना रहेगा सही?
अगर आपका बजट थोड़ा ज्यादा है और आप AC का इस्तेमाल नियमित रूप से लंबे समय तक करते हैं तो ड्यूल इन्वर्टर AC बेहतर निवेश साबित हो सकता है. वहीं, यदि आपका बजट सीमित है और इस्तेमाल भी कम है तो सिंगल इन्वर्टर AC आपकी जरूरतों को अच्छी तरह पूरा कर सकता है.
खरीदने से पहले इन बातों पर जरूर दें ध्यान
सिर्फ इन्वर्टर तकनीक देखकर AC चुनना सही फैसला नहीं होगा. खरीदारी से पहले BEE स्टार रेटिंग और ISEER स्कोर जरूर जांचें. कई बार बेहतर स्टार रेटिंग वाला सिंगल इन्वर्टर AC, कम रेटिंग वाले ड्यूल इन्वर्टर मॉडल से भी अधिक बिजली बचा सकता है. इसलिए सही चुनाव वही होगा जो आपके इस्तेमाल, बजट और बिजली बचत की जरूरतों के अनुरूप हो.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WiFi Speed Boost Tips: घर पर लगा Wi&amp;FI बहुत स्लो है? अपने राउटर में तुरंत बदलिए ये 4 सेटिंग्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/wifi-speed-boost-tips-घर-पर-लगा-wi-fi-बहुत-स्लो-है-अपने-राउटर-में-तुरंत-बदलिए-ये-4-सेटिंग्स</link>
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        <description><![CDATA[ WiFi Speed Boost Tips: घर पर लगा Wi-FI बहुत स्लो है? अपने राउटर में तुरंत बदलिए ये 4 सेटिंग्स ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>iOS 27 कब होगा रिलीज? जानिए आपके iPhone में Apple की नई AI Siri कब तक पहुंचेगी</title>
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        <description><![CDATA[ iOS 27: Apple एक बार फिर अपने सालाना डेवलपर इवेंट WWDC में बड़े ऐलान करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी इस बार iOS 27, macOS 27 और अन्य नए सॉफ्टवेयर अपडेट पेश करेगी. हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा Siri के नए AI अवतार को लेकर है जिसे Apple पहले से कहीं अधिक स्मार्ट और उपयोगी बनाने की दिशा में काम कर रहा है. माना जा रहा है कि iOS 27 के साथ Siri सिर्फ एक वॉयस असिस्टेंट नहीं बल्कि एक पूर्ण AI एजेंट के रूप में सामने आ सकती है.
iOS 27 कब तक होगा उपलब्ध?
अगर Apple अपने पुराने लॉन्च पैटर्न पर कायम रहता है तो WWDC 2026 की शुरुआत के तुरंत बाद 8 जून को iOS 27 का पहला डेवलपर बीटा जारी किया जा सकता है. इसके बाद जुलाई में पब्लिक बीटा वर्जन आने की संभावना है. फाइनल एडिशन सितंबर 2026 में लॉन्च होने वाले नए iPhone 18 सीरीज के साथ पेश किया जा सकता है. इसके कुछ दिनों बाद पुराने सपोर्टेड iPhone मॉडल्स को भी यह अपडेट मिलना शुरू हो जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple Siri के नए AI फीचर्स को सितंबर तक यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने की कोशिश में है.
Siri में होगा अब तक का सबसे बड़ा बदलाव
Apple ने पहली बार WWDC 2024 में Siri के एडवांस्ड AI वर्जन की झलक दिखाई थी. हालांकि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कंपनी को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. अब माना जा रहा है कि Apple ने AI क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए बाहरी तकनीकों का भी सहारा लिया है.
नई Siri यूजर की व्यक्तिगत जानकारी और पसंद को बेहतर ढंग से समझ सकेगी. यह स्क्रीन पर मौजूद कंटेंट का विश्लेषण करेगी और कई काम अपने आप पूरा करने में सक्षम होगी. यानी Siri पहले की तुलना में कहीं ज्यादा स्मार्ट और उपयोगी बनने जा रही है.
ChatGPT जैसी नई Siri App मिलने की संभावना
iOS 27 के साथ Apple एक नई Siri ऐप भी पेश कर सकता है. यह पारंपरिक वॉयस असिस्टेंट से अलग होकर आधुनिक AI चैटबॉट की तरह काम करेगी. रिपोर्ट्स के अनुसार इस ऐप में वॉयस मोड को ऑन या ऑफ करने का विकल्प मिलेगा. यह पुरानी बातचीत को याद रखने में सक्षम होगी और चैट हिस्ट्री को ऑटोमैटिक डिलीट करने का फीचर भी दे सकती है. इसके अलावा यूजर्स फोटो और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करके Siri से उनकी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे.
Dynamic Island में नजर आएगी नई Siri
Apple Siri के इंटरफेस को भी पूरी तरह बदल सकता है. बताया जा रहा है कि नई Siri को सीधे Dynamic Island के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा. यूजर जब स्क्रीन के ऊपरी हिस्से से नीचे की ओर स्वाइप करेगा तब Search or Ask नाम का नया इंटरफेस खुलेगा. यहां से वेब सर्च करने, ऐप्स खोलने, मैसेज भेजने, कैलेंडर इवेंट बनाने और नोट्स खोजने जैसे कई काम सीधे Siri के जरिए किए जा सकेंगे.
सर्च या कमांड के परिणाम Dynamic Island से निकलने वाले इंटरैक्टिव कार्ड के रूप में दिखाई देंगे. वहीं आगे स्वाइप करने पर चैटबॉट स्टाइल बातचीत शुरू हो सकेगी.
कैमरा ऐप में भी मिलेगा AI का दम
iOS 27 का एक और बड़ा आकर्षण कैमरा ऐप में AI इंटीग्रेशन हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूजर कैमरे को किसी वस्तु, उत्पाद या प्रसिद्ध स्थान की ओर पॉइंट करेगा और Siri तुरंत उसकी पहचान कर जानकारी उपलब्ध करा सकेगी.
इसके लिए Apple बाहरी AI सेवाओं जैसे उन्नत जनरेटिव AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर सकता है. इससे कैमरा सिर्फ फोटो खींचने का माध्यम नहीं रहेगा बल्कि एक विजुअल सर्च टूल भी बन जाएगा.
कैमरा इंटरफेस होगा ज्यादा कस्टमाइजेबल
Apple कैमरा ऐप के डिजाइन में भी बड़े बदलाव कर सकता है. वर्तमान में मिलने वाले कुछ फिक्स्ड शॉर्टकट्स की जगह यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार कैमरा कंट्रोल्स को कस्टमाइज कर सकेंगे. नई Add Widgets सुविधा के जरिए Night Mode, Timer, Depth Control और अन्य प्रोफेशनल कैमरा सेटिंग्स को अपनी पसंद के अनुसार व्यवस्थित किया जा सकेगा. इससे फोटोग्राफी का अनुभव और बेहतर होने की उम्मीद है.
Photos ऐप में आएंगे नए AI एडिटिंग टूल्स
Apple अपने Photos ऐप को भी AI फीचर्स से लैस करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी Reframe और Extend जैसे नए एडिटिंग टूल्स पर काम कर रही है. इनकी मदद से तस्वीरों को बेहतर फ्रेम में एडजस्ट करना और फोटो के आसपास अतिरिक्त कंटेंट जोड़ना आसान हो सकता है. इसके अलावा Apple ऐसी तकनीक पर भी काम कर रहा है जिसमें यूजर सिर्फ बोलकर या टेक्स्ट लिखकर फोटो एडिट कर सकेगा.
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति फोटो से किसी अनचाहे ऑब्जेक्ट को हटाना चाहता है या रंग बदलना चाहता है तो उसे केवल निर्देश देना होगा और AI बाकी काम खुद कर देगा. हालांकि यह फीचर शुरुआती iOS 27 रिलीज का हिस्सा होगा या नहीं इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है.
क्या iOS 27 Apple के लिए गेम-चेंजर साबित होगा?
iOS 27 को Apple के सबसे बड़े AI अपडेट्स में से एक माना जा रहा है. नई Siri, स्मार्ट कैमरा फीचर्स, Dynamic Island इंटीग्रेशन और AI आधारित फोटो एडिटिंग टूल्स इसे अब तक के सबसे महत्वपूर्ण iPhone अपडेट्स में शामिल कर सकते हैं. यदि ये सभी फीचर्स तय समय पर लॉन्च होते हैं तो iPhone यूजर्स का अनुभव पहले से काफी अलग और अधिक स्मार्ट हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iOS, कब, होगा, रिलीज, जानिए, आपके, iPhone, में, Apple, की, नई, Siri, कब, तक, पहुंचेगी</media:keywords>
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        <title>भारत में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा, 4 साल में लगभग दोगुना हुआ आंकड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ Internet Use In Indian Women: पिछले कुछ सालों में भारत में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है. छठे नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2023-24) में सामने आया है कि देश में करीब 64 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने जीवन में कभी न कभी इंटरनेट यूज किया है. 2019-21 के दौरान हुए NFHS-5 में यह संख्या 33. प्रतिशत थी. यानी 4-5 साल में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या में तेज उछाल आया है. शहरी महिलाएं इस मामले में ग्रामीण महिलाओं से आगे हैं. आइए जानते हैं कि इंटरनेट और मोबाइल यूज को लेकर सर्वे में और क्या-क्या सामने आया है.
शहरों में डिजिटल पहुंच ज्यादा
NHFS-6 में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा देखा गया है. इसके साथ ही शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच डिजिटल पहुंच को लेकर बड़ा अंतर देखने को मिला है. करीब 77.3 प्रतिशत शहरी महिलाओं ने जीवन में कम से कम एक बार इंटरनेट यूज करने की बात कही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 58.6 प्रतिशत ही है. यानी ग्रामीण इलाकों की महिलाओं की इंटरनेट तक पहुंच शहरी महिलाओं से काफी कम है. यह दिखाता है कि देश में महिलाओं और लड़कियों के लिए इंटरनेट की एक्सेस आसान हुई है, लेकिन अभी भी शहरी और ग्रामीण इलाकों में अंतर जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं. इंटरनेट के साथ मोबाइल यूज को लेकर भी यही पैटर्न नजर आता है.&amp;nbsp;
मोबाइल यूज के मामले में भी शहरी महिलाएं आगे
इंटरनेट यूज की तरह मोबाइल यूज के मामले में भी शहरी महिलाएं आगे हैं. सर्वे के मुताबिक, देश की 63.6 प्रतिशत महिलाओं ने अपना मोबाइल फोन होने की बात कही. शहरी इलाकों की 77.6 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना फोन है, जबकि ग्रामीण इलाकों में केवल 57.4 प्रतिशत महिलाओं के पास ही फोन है.&amp;nbsp;
भारत में कुल कितने इंटरनेट यूजर्स?
भारत में इंटरनेट यूजर्स की कुल संख्या एक अरब के पास पहुंच गई है. इस साल जनवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक्टिव इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगभग 96 करोड़ थी. इनमें से करीब 55 करोड़ यूजर्स ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. वहीं अगर पूरी दुनिया की बात करें तो चीन सबसे ज्यादा इंटरनेट यूजर्स के साथ टॉप पर बना हुआ है. पिछले साल के अंत तक चीन में इंटरनेट यूज करने वाले लोगों की संख्या 1.3 अरब हो गई थी. यहां 80 प्रतिशत से अधिक लोगों तक इंटरनेट पहुंच चुका है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>किचन से बेडरूम तक बदल देंगे घर का माहौल! ये 5 स्मार्ट गैजेट्स बचाएंगे हजारों रुपये</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Gadgets: आज के समय में बढ़ते बिजली बिल, खाने की बर्बादी और प्लास्टिक कचरे जैसी समस्याएं लगभग हर घर की चिंता बन चुकी हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है जिससे मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. हालांकि, नई स्मार्ट टेक्नोलॉजी की मदद से इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
अगर आप अपने घर को आधुनिक और सुविधाजनक बनाना चाहते हैं तो कुछ स्मार्ट उपकरण आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. ये गैजेट्स न केवल समय और ऊर्जा बचाते हैं बल्कि पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी निभाने में भी मदद करते हैं.
Smart Water Purifier
आज भी कई लोग रोजाना पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर खरीदते हैं जिससे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा पैदा होता है. इसका असर जेब और पर्यावरण दोनों पर पड़ता है. स्मार्ट वॉटर प्यूरीफायर इस समस्या का बेहतर समाधान हो सकते हैं. एडवांस प्यूरीफायर मोबाइल ऐप से कनेक्ट होकर पानी की क्वालिटी, फिल्टर की स्थिति और दैनिक इस्तेमाल की जानकारी उपलब्ध कराते हैं. इससे आपको साफ पानी तो मिलता ही है, साथ ही बार-बार बोतलबंद पानी खरीदने की जरूरत भी कम हो जाती है.
Air Purifier
घर के अंदर की हवा भी कई बार बाहर की तुलना में अधिक प्रदूषित हो सकती है. धूल, पराग कण और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्व स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं. स्मार्ट एयर प्यूरीफायर वातावरण की गुणवत्ता को लगातार मॉनिटर करते हैं और जरूरत के अनुसार अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाते या घटाते हैं. इससे हवा साफ रहती है और बिजली की खपत भी नियंत्रित रहती है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों वाले घरों में यह उपकरण काफी उपयोगी साबित हो सकता है.
Robotic Vaccum Cleaner
घर की नियमित सफाई में काफी समय और ऊर्जा खर्च होती है. पारंपरिक वैक्यूम क्लीनर जहां अधिक बिजली लेते हैं वहीं नई पीढ़ी के रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर कम ऊर्जा में बेहतर सफाई प्रदान करते हैं. ये डिवाइस सेंसर और मैपिंग तकनीक की मदद से पूरे घर का नक्शा तैयार कर सफाई करते हैं. इससे बार-बार सफाई उत्पादों और केमिकल क्लीनर्स के इस्तेमाल की जरूरत भी कम हो जाती है.
Smart Inverter AC
भीषण गर्मी में एयर कंडीशनर लगभग हर घर की जरूरत बन चुका है. लेकिन इसके साथ आने वाला भारी बिजली बिल लोगों की चिंता बढ़ा देता है. स्मार्ट इन्वर्टर एसी कमरे के तापमान को लगातार मॉनिटर करता है और उसी हिसाब से कंप्रेसर की गति को एडजस्ट करता है. इससे बिजली की अनावश्यक खपत कम होती है. कई मॉडलों में वाई-फाई कंट्रोल, वॉइस कमांड और स्लीप मोड जैसे फीचर्स भी मिलते हैं जो इस्तेमाल को और आसान बना देते हैं.
AI Smart Fridge
अक्सर लोग फ्रिज में रखे खाद्य पदार्थों को भूल जाते हैं जिसके कारण वे खराब हो जाते हैं और फूड वेस्टेज बढ़ जाता है. नई पीढ़ी के स्मार्ट रेफ्रिजरेटर कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस होते हैं. ये आपको मोबाइल के जरिए फ्रिज के अंदर रखी चीजों की जानकारी दिखा सकते हैं. कुछ मॉडल एक्सपायरी डेट पर नजर रखते हैं और उपलब्ध सामग्री के आधार पर रेसिपी सुझाव भी देते हैं. इससे खाने की बर्बादी कम होती है और खरीदारी की बेहतर योजना बनाना आसान हो जाता है.
स्मार्ट गैजेट्स क्यों हैं फायदेमंद?
स्मार्ट होम डिवाइस केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं बनाए गए हैं बल्कि ये बिजली, पानी और अन्य संसाधनों की बचत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही गैजेट्स का चुनाव करके आप अपने घर को आधुनिक बना सकते हैं मासिक खर्च कम कर सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं. गर्मियों के इस मौसम में ये स्मार्ट उपकरण आपके घर को ज्यादा आरामदायक और ऊर्जा-कुशल बनाने में मदद कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>8GB, 12GB या 16GB, नए फोन में कितनी रैम होनी चाहिए और क्या है इसकी जरूरत? यहां जानें सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ How Much RAM is Required In Phone: कुछ साल पहले तक फोन में 4GB रैम को काफी समझा जाता था. 6GB और 8GB का मतलब था कि फोन में कुछ भी किया जा सकता है, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं और खासकर ऑन-डिवाइस एआई फीचर्स आने के बाद रैम की जरूरत भी बढ़ गई है. यही कारण है कि अब कंपनियां 12 और 16GB तक की रैम वाले मॉडल लॉन्च करने लगी हैं. आज हम जानेंगे कि फोन में रैम की जरूरत क्यों होती है और अगर आप अब नया फोन ले रहे हैं तो उसमें कम से कम कितनी रैम होनी चाहिए.
फोन में क्यों पड़ती है रैम की जरूरत?
RAM यानी रैंडम मेमोरी एक्सेस. यह फोन का टेंपरेरी वर्कस्पेस होता है. फोन में खुलीं ऐप्स, टैब्स और सारी प्रोसेस रैम पर ही रन करती हैं. ज्यादा रैम होने का मतलब है कि आप फोन में एक साथ ज्यादा ऐप्स और प्रोसेस ओपन कर सकते हैं. यानी ज्यादा रैम होने पर मल्टीटास्किंग आसान हो जाती है. रैम टेंपरेरी तौर पर उतना ही डेटा होल्ड करती है, जितना ऑपरेटिंग सिस्टम और फोन में ओपन ऐप को जरूरत है. फोन ऑफ होने पर रैम का डेटा इरेज हो जाता है.
फोन में कितनी रैम होनी चाहिए?
अगर आप नया फोन ले रहे हैं और इसे बेसिक टास्क के लिए यूज करना चाहते हैं तो कम से कम 8GB वाले ऑप्शन को चुनें. इससे ऐप्स रन करने, फोटो लेने और मल्टीटास्किंग में फोन अटकेगा नहीं. अब फुल एंड्रॉयड सर्विस के लिए भी रैम की रिक्वायरमेंट कम से कम 6GB हो गई है. इसलिए थोड़ा ज्यादा स्पेस ही ठीक रहता है, लेकिन अगर आप एआई फीचर्स यूज करना चाहते हैं तो आपको ज्यादा रैम की जरूरत पड़ेगी. अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज कर रहे हैं तो हो सकता है कि 12GB रैम भी आपके लिए कम पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि गूगल के जेमिनी इंटेलीजेंस के लिए कम से कम 12GB रैम और लेटेस्ट प्रोसेसर होना जरूरी है. जेमिनी इंटेलीजेंस के फीचर ऑन-डिवाइस प्रोसेस कंप्लीट करते हैं, इसलिए ज्यादा रैम की जरूरत है.&amp;nbsp;
आईफोन का क्या हाल है?
ऐप्पल भी पिछले कुछ सालों से धीरे-धीरे रैम में इजाफा कर रही है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि iPhone 18 Pro Max को 12GB रैम के साथ लॉन्च किया जा सकता है. अगर ऐप्पल इंटेलीजेंस की बात करें तो इसे 8GB रैम की जरूरत पड़ती है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>क्या AI भी बन जाएगा अगला डॉट&amp;कॉम क्रैश? फूट गया बुलबुला तो हिल सकती है दुनिया की अर्थव्यवस्था, जानिए क्या है मामला</title>
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        <description><![CDATA[ AI Bubble: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आधुनिक दौर की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांतियों में गिना जा रहा है. जिस तरह इंटरनेट ने दुनिया को बदल दिया था उसी तरह एआई को भी भविष्य की दिशा तय करने वाली तकनीक माना जा रहा है. आज लगभग हर बड़ी और छोटी टेक कंपनी किसी न किसी रूप में एआई से जुड़ना चाहती है. निवेशकों का उत्साह भी चरम पर है और अरबों डॉलर इस क्षेत्र में लगाए जा रहे हैं.
लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे कुछ चिंताजनक संकेत भी दिखाई दे रहे हैं. कई बड़ी कंपनियां स्वीकार कर चुकी हैं कि एआई पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है जबकि उससे मिलने वाली कमाई अभी उस गति से नहीं बढ़ रही. यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञों को 1990 के दशक के डॉट-कॉम बबल की याद आने लगी है.
आखिर क्या होता है बबल?
आर्थिक दुनिया में बबल उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी कंपनी, सेक्टर या संपत्ति की कीमत उसकी वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक बढ़ जाती है. निवेशकों की उम्मीदें इतनी ऊंची हो जाती हैं कि कीमतें वास्तविकता से कट जाती हैं. जब लोगों को एहसास होता है कि मूल्यांकन वास्तविक नहीं है तो अचानक गिरावट शुरू हो जाती है और बबल फूट जाता है.
डॉट-कॉम बबल क्या था?
1990 के दशक के मध्य में इंटरनेट आम लोगों तक पहुंचना शुरू हुआ. उस समय निवेशकों को विश्वास था कि इंटरनेट भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है. इसी उम्मीद में इंटरनेट आधारित कंपनियों में भारी निवेश होने लगा. कई ऐसी कंपनियां भी अरबों डॉलर की वैल्यू हासिल करने लगीं जिनके पास न तो मजबूत बिजनेस मॉडल था और न ही कमाई का कोई स्पष्ट रास्ता. केवल इंटरनेट से जुड़ा होना ही निवेश आकर्षित करने के लिए काफी था. इस दौरान टेक शेयरों में इतनी तेजी आई कि अमेरिकी शेयर बाजार का नैस्डैक इंडेक्स कुछ ही वर्षों में कई गुना बढ़ गया.
डॉट-कॉम बबल कैसे बना?
उस समय इंटरनेट एक नई और रोमांचक तकनीक थी. निवेशकों को लगा कि ऑनलाइन दुनिया में उतरने वाली हर कंपनी सफल होगी. कम ब्याज दरों और बाजार में उपलब्ध पूंजी ने इस उत्साह को और बढ़ावा दिया. स्टार्टअप्स को बिना ज्यादा सवाल किए फंडिंग मिल रही थी. कंपनियां मुनाफे की बजाय केवल ग्राहकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान दे रही थीं. विज्ञापन और विस्तार पर भारी खर्च किया जा रहा था, जबकि वास्तविक आय बेहद कम थी. घाटे में चल रही कंपनियां भी शेयर बाजार में उतरकर बड़ी रकम जुटाने में सफल हो रही थीं.
जब फूटा इंटरनेट का बुलबुला
साल 2000 के आसपास निवेशकों को महसूस होने लगा कि कई इंटरनेट कंपनियों की कीमतें वास्तविकता से बहुत दूर हैं. इसके बाद बाजार में भारी गिरावट शुरू हुई. कुछ ही वर्षों में नैस्डैक इंडेक्स अपने उच्च स्तर से लगभग 80 प्रतिशत तक टूट गया. निवेशकों के खरबों डॉलर डूब गए और कई चर्चित इंटरनेट कंपनियां पूरी तरह बंद हो गईं. हालांकि जिन कंपनियों के पास मजबूत बिजनेस मॉडल था वे समय के साथ इस संकट से बाहर निकलने में सफल रहीं.
भारत पर कितना पड़ा था असर?
डॉट-कॉम संकट का प्रभाव भारत में अमेरिका जितना गंभीर नहीं था. उस समय भारतीय बाजार में इंटरनेट कंपनियों का प्रभाव सीमित था. फिर भी वैश्विक निवेशकों की घबराहट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया और कई निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि इससे देश में कोई बड़ी आर्थिक मंदी नहीं आई.
एआई और डॉट-कॉम बबल की तुलना क्यों की जा रही है?
आज एआई को लेकर जो उत्साह दिखाई दे रहा है वह कई मामलों में डॉट-कॉम युग से मिलता-जुलता नजर आता है. विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ संकेत ऐसे हैं जो संभावित जोखिम की ओर इशारा कर रहे हैं.
कमाई से ज्यादा उम्मीदों पर आधारित वैल्यूएशन
कई एआई स्टार्टअप्स की बाजार कीमत उनकी वास्तविक आय की तुलना में बेहद अधिक है. निवेशक इस डर से पैसा लगा रहे हैं कि कहीं वे अगली बड़ी तकनीकी लहर से पीछे न रह जाएं. यही मानसिकता डॉट-कॉम दौर में भी देखने को मिली थी.
हर जगह AI का इस्तेमाल
जिस तरह 1990 के दशक में कंपनियां अपने नाम के साथ .com जोड़कर निवेशकों को आकर्षित करती थीं, आज कई कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं को एआई आधारित बताकर बाजार का ध्यान खींच रही हैं. कई मामलों में एआई की वास्तविक भूमिका सीमित होने के बावजूद उसका प्रचार बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च
एआई को चलाने के लिए अत्याधुनिक चिप्स, विशाल डेटा सेंटर और भारी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है. दुनिया भर की कंपनियां इन संसाधनों पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या भविष्य में होने वाली कमाई इस निवेश को सही साबित कर पाएगी? यही चिंता विश्लेषकों को परेशान कर रही है.
अगर एआई बबल फूट गया तो क्या होगा?
यदि एआई क्षेत्र में निवेश और मूल्यांकन वास्तविकता से बहुत आगे निकल जाते हैं और बाजार का भरोसा टूटता है तो सबसे पहले टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. निवेशकों को बड़ा नुकसान हो सकता है और स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो जाएगा.
इसके अलावा, तकनीकी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका भी बढ़ सकती है. जिन कंपनियों ने केवल उम्मीदों के आधार पर विस्तार किया है वे आर्थिक दबाव में आ सकती हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं होगा कि एआई तकनीक खत्म हो जाएगी.
क्या एआई का भविष्य खतरे में है?
इतिहास बताता है कि बबल फूटने के बाद भी मजबूत तकनीकें जीवित रहती हैं. डॉट-कॉम संकट के बाद हजारों कंपनियां गायब हो गईं लेकिन इंटरनेट पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बनकर उभरा. इसी तरह अगर एआई क्षेत्र में कोई बड़ा सुधार या गिरावट आती है तो कमजोर कंपनियां बाहर हो सकती हैं, लेकिन वास्तविक उपयोगिता वाली तकनीकें और मजबूत बिजनेस मॉडल लंबे समय तक टिके रहेंगे.
संभव है कि आने वाले वर्षों में एआई उद्योग एक बड़े परीक्षण से गुजरे लेकिन यह भी उतना ही संभव है कि इस प्रक्रिया के बाद केवल वही कंपनियां बचें जो वास्तव में लोगों और उद्योगों के लिए मूल्य पै ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Scam से बचाएगा WhatsApp का नया फीचर, यूजर्स को मिलेगा वॉर्निंग अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Scam Alert Feature: लोगों को स्कैम करने के लिए साइबर अपराधी किसी भी प्लेटफॉर्म को यूज करने से पीछे नहीं रहते. व्हाट्सऐप चूंकि सबसे ज्यादा यूज होने वाले प्लेटफॉर्म्स में से एक है, इसलिए इस पर स्कैमर की नजरें ज्यादा रहती हैं. डिजिटल अरेस्ट, फर्जी जॉब ऑफर और इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर फिशिंग लिंक भेजना, फर्जी सरकारी योजनाओं के लाभ आदि के लालच समेत स्कैमर अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाना चाहते हैं. लगातार बढ़ती ऐसी घटनाओं को देखते हुए कंपनी WhatsApp Scam Alert नाम से एक नए फीचर पर काम कर रही है. इसकी मदद से यूजर को संदिग्ध मैसेज का पता लग जाएगा और वह स्कैम से बच सकेगा.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा स्कैम अलर्ट फीचर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाट्सऐप के एंड्रॉयड वर्जन के लिए इस फीचर को तैयार किया जा रहा है. यह अनजान कॉन्टैक्ट से आने वाले फ्रॉड मैसेज को डिटेक्ट कर यूजर को वॉर्निंग अलर्ट दिखाएगा. इसके साथ यूजर को मैसेज भेजने वाले को ब्लॉक और रिपोर्ट करने का भी ऑप्शन होगा. अगर यूजर को लगता है कि यह मैसेज सेफ है तो वह बिना कुछ किए चैट कंटिन्यू कर सकता है. वॉइस ट्रांसक्रिप्ट की तरह यह फीचर पूरी तरह यूजर के डिवाइस पर ही काम करेगा. इसका मतलब है कि मैसेज को एनालाइज करने के लिए मेटा के सर्वर पर नहीं भेजा जाएगा. मैसेज को डिटेक्ट करने और अलर्ट देने की पूरी प्रोसेसर ऑन-डिवाइस होगी. इससे एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा.&amp;nbsp;
ऑप्शनल होगा स्कैम अलर्ट फीचर
बताया जा रहा है कि यह फीचर पूरी तरह ऑप्शनल होगा. यह बाई डिफॉल्ट ऑफ रहेगा. अगर कोई इसे यूज करना चाहता है तो ऐप सेटिंग में जाकर इसे इनेबल करना पड़ेगा. अभी इस फीचर पर काम चल रहा है और अगले कुछ दिनों में इसे बीटा यूजर्स के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा. टेस्टिंग पूरी होने के बाद व्हाट्सऐप इसे चरणबद्ध तरीके से सभी यूजर्स के लिए लॉन्च करेगी.
पेड सब्सक्रिप्शन भी हो रहा है रोलआउट&amp;nbsp;
WhatsApp लगातार नए फीचर्स लाती रहती है और इसी कड़ी में कंपनी WhatsApp Plus को भी रोलआउट कर रही है. यह पेड सब्सक्रिप्शन प्लान है, जिसमें पैसे देने पर यूजर्स को कुछ एडिशनल फीचर्स और कस्टमाइजेशन का ऑप्शन मिलता है. यूरोप में इसकी कीमत लगभग 280 रुपये रखी गई है. भारत में अभी इसे लॉन्च नहीं किया है. जल्द ही इसे भारतीय यूजर्स के लिए भी अवेलेबल करवा दिया जाएगा.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Jio Vs Airtel: ₹3999 का रिचार्ज कराने से पहले जानिए कौन दे रहा सबसे ज्यादा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Jio Vs Airtel: ₹3999 का रिचार्ज कराने से पहले जानिए कौन दे रहा सबसे ज्यादा फायदा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Energy System पर लगाने से पहले डिसाइड कर लें चीजें, नहीं तो बर्बाद हो सकते हैं पैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Energy System Tips: बिजली बिल को कम करने के लिए लोग तेजी से सोलर एनर्जी की तरफ बढ़ रहे हैं. इसी का नतीजा है कि आजकल शहरों से लेकर गांवों तक हर जगह सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. सोलर पैनल क्लीन एनर्जी देने के साथ-साथ बिजली की बढ़ती लागत से भी बचाते हैं, लेकिन कई बार सोलर एनर्जी सिस्टम को लेकर कंफ्यूजन रहती है. इसलिए कुछ चीजों को पहले ही डिसाइड कर लेना बेहतर रहता है.&amp;nbsp;
सबसे पहले देखें अपनी जरूरत
सोलर पैनल लगाने से पहले घर की एनर्जी नीड्स को देखना जरूरी है. बिजली के बिल में देखकर पता लगाया जा सकता है कि घर में हर महीने कितनी बिजली की खपत हो रही है. अगर हर महीने घर में 3 किलोवॉट बिजली कंज्यूम हो रही है तो इतनी ही पावर जनरेट करने वाले सिस्टम की जरूरत पड़ेगी. कम कैपेसिटी वाला सिस्टम लगाने पर बिजली बिल के झंझट से छुटकारा नहीं मिल पाएगा. इसलिए सिस्टम की कैपेसिटी को डिसाइड कर ही आगे बढ़ें
छत की कंडीशन और सनलाइट का हिसाब
सोलर पैनल लगाने की छत की कंडीशन को भी देखना पड़ता है. सोलर पैनल की लाइफ 25-30 साल होती है. इसलिए इंस्टॉलेशन से पहले यह जरूर देख लें कि घर की छत इतने सालों तक इस सिस्टम को झेल पाएगी या नहीं. इसके अलावा एनर्जी जनरेशन के लिए सनलाइट बहुत जरूरी है. छत पर ऐसी जगह पैनल इंस्टॉल करने चाहिए जहां किसी बिल्डिंग या पेड़ की छाया न पड़ती हो.
सोलर एनर्जी सिस्टम का चुनाव
ऑफ-ग्रिड, ऑन-ग्रिड और हाइब्रिड समेत तीन तरह के सोलर एनर्जी सिस्टम ज्यादा ट्रेंड में हैं. ऑफ-ग्रिड सिस्टम में एनर्जी स्टोरेज के लिए बैटरी की जरूरत पड़ती है और यह पावर कट के दौरान भी काम करता है. ऑन-ग्रिड की बात करें तो यह ग्रिड के साथ कनेक्टेड होता है. यह बिजली बिल को कम करता है और इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती. वहीं हाइब्रिड दोनों का मिला-जुला सिस्टम है. यह ऑन-ग्रिड की तरह बिल भी बचाता है और ऑफ-ग्रिड की तरह बैकअप भी देता है. अपनी जरूरत के हिसाब से इनमें से किसी भी टाइप को सेलेक्ट किया जा सकता है.
सोलर पैनल की क्वालिटी
कई लोग पैसा बचाने या कम खर्च में सोलर सिस्टम लगाने के लिए खराब क्वालिटी वाले पैनल खरीद लेते हैं. ये भले ही एक बार पैसे बचा देते हैं, लेकिन इनमें इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन भी कम होता है और इनकी परफॉर्मेंस जल्दी खराब हो जाती है. खराब क्वालिटी होने के कारण इन्हें बार-बार मैंटेनेंस की जरूरत पड़ती है और इनकी लाइफ भी कम होती है. दूसरी तरफ हाई-क्वालिटी वाले पैनल में ऐसी दिक्कत नहीं आती. एक बार इंस्टॉल करने के बाद सालों तक टेंशन फ्री रहा जा सकता है. इसलिए यह डिसाइड कर लें कि आप एक बार पैसा बचाकर झंझट लेना चाहते हैं या एक बार पैसा लगाकर टेंशन फ्री रहना चाहते हैं.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google पर बड़ा झटका! दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से बदल जाएगा Search Ads का पूरा खेल, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Google Keyword Bidding: दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद डिजिटल विज्ञापन जगत में कीवर्ड बिडिंग एक चर्चित विषय बन गया है. अदालत ने Google और Hindware से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंपनी अपने प्रतिस्पर्धी के ट्रेडमार्क वाले नाम पर विज्ञापन दिखाने के लिए बोली लगाती है तो यह ट्रेडमार्क उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर कीवर्ड बिडिंग क्या है और इस फैसले का ऑनलाइन ऐड इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ सकता है.
क्या होती है कीवर्ड बिडिंग?
कीवर्ड बिडिंग डिजिटल मार्केटिंग का एक ऐसा तरीका है जिसमें कंपनियां Google जैसे सर्च इंजन पर कुछ खास शब्दों या वाक्यांशों के लिए पेमेंट करती हैं ताकि उनका विज्ञापन सर्च रिजल्ट्स में ऊपर दिखाई दे. इस प्रोसेस में एडवटाइजर्स पहले उन शब्दों का चयन करते हैं जिनसे वे अपने प्रोडक्ट या सर्विस को जोड़ना चाहते हैं.
इसके बाद वे प्रति क्लिक (Cost Per Click या CPC) की अधिकतम राशि तय करते हैं. जब कोई यूजर उस कीवर्ड को सर्च करता है तो Google एक नीलामी प्रक्रिया चलाता है और सबसे प्रतिस्पर्धी बोली लगाने वाले विज्ञापनदाताओं के विज्ञापन प्रमुख स्थानों पर दिखाए जाते हैं.
विवाद की जड़ क्या है?
सामान्य तौर पर कीवर्ड बिडिंग एक वैध विज्ञापन तकनीक मानी जाती है. लेकिन विवाद तब शुरू होता है जब कोई कंपनी अपने प्रतिद्वंद्वी के ट्रेडमार्क वाले नाम पर बोली लगाती है. मान लीजिए कोई व्यक्ति किसी खास ब्रांड को खोज रहा है, लेकिन उसी समय किसी दूसरी कंपनी का विज्ञापन उसके सामने आ जाए क्योंकि उसने उस ब्रांड के नाम पर बोली लगाई थी. ऐसे मामलों में मूल ब्रांड यह दावा कर सकता है कि उसकी पहचान और प्रतिष्ठा का फायदा उठाया जा रहा है. दूसरी ओर, विज्ञापन देने वाली कंपनी इसे सिर्फ एक मार्केटिंग रणनीति बता सकती है. यही कानूनी टकराव वर्षों से डिजिटल विज्ञापन उद्योग में चर्चा का विषय रहा है.
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का क्या होगा असर?
अदालत के इस फैसले के बाद भारत में ऑनलाइन विज्ञापनों की निगरानी और सख्त हो सकती है. विशेष रूप से उन मामलों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जहां ट्रेडमार्क वाले शब्दों का इस्तेमाल विज्ञापन दिखाने के लिए किया जाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंपनियां अपने ब्रांड नामों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सक्रिय हो सकती हैं और प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाने में भी हिचकिचाएंगी नहीं. साथ ही Google को भी भारत में अपनी विज्ञापन नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सोलर पैनल की उम्र दोगुनी कर सकते हैं ये आसान उपाय! ज्यादातर लोग नहीं जानते</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Care Tips: सोलर एनर्जी इस समय पावर का सबसे क्लीन और किफायती सोर्स बनी हुई है. घरों की बात करें या इंडस्ट्री की, हर जगह सोलर पैनल लग रहे हैं. इंस्टॉलेशन के बाद बस सूरज निकलने की देरी है. सनलाइट आते ही ये अपना काम शुरू कर देते हैं. सोलर पैनल की खास बात यह भी है कि ये 20-25 साल आराम से चल जाते हैं. अगर इनकी मैंटेनेंस ठीक तरीके से की जाए तो लाइफ और बढ़ जाती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन कारणों से पैनल खराब हो सकते हैं और उन्हें लंबे चलाने के लिए क्या उपाय करने की जरूरत है.
कितने साल चल सकते हैं सोलर पैनल?
आमतौर पर सोलर पैनल की लाइफ 25-30 साल तक मानी जाती है. यह पैनल की क्वालिटी, यूसेज और मैंटेनेंस पर भी डिपेंड करती है. अच्छी क्वालिटी वाले कई पैनल वारंटी पूरी होने के बाद भी उसी तरह काम करते रहते हैं. अगर सही तरीके से पैनल को मैंटेन किया जाए तो 30 साल से ज्यादा समय तक बिजली जनरेट कर सकते हैं.
किन कारणों से खराब होते हैं पैनल?
पैनल खराब होने के कई कारण हैं. इनमें सबसे कॉमन कारण पैनल पर धूल-मिट्टी का जमना है. इस कारण सोलर पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है. शहरों की बात करें तो पॉल्यूशन और नमी मिलकर पैनल सरफेस पर एक पतली लेयर बना लेते हैं. इससे पैनल को पावर जनरेट करने के लिए एक्स्ट्रा काम करना पड़ता है. अगर लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहे तो पैनल की एफिशिएंसी और लाइफ स्पैन पर असर पड़ता है. मौसम भी एक बड़ा फैक्टर है. ज्यादा टेंपरेचर से पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है और ज्यादा उमस और बारिश से मेटल पार्ट्स पर जंग लगने लगता है. तेज आंधी-बारिश से बी पैनल पर छोटी-छोटी दरारें आ सकती हैं. इसी तरह इंस्टॉलेशन और वायरिंग में गड़बड़ी भी काम बिगाड़ सकती है.
कैसे रखें सोलर पैनल का ध्यान?

सोलर पैनल को साल में 2-4 बार जरूर सफ करें. खासकर आंधी-तूफान वाले मौसम के बाद सफाई और इंस्पेक्शन दोनों जरूरी है.
अगर पैनल पर किसी पेड़ की छांव पड़ रही है तो उसे ट्रिम कर दें.
पैनल को छत से चिपकाकर इंस्टॉल न करें. वेंटिलेशन बनाए रखने के लिए छत और पैनल के बीच 1-2 फीट की दूरी जरूर रखें.
साल में कम से कम दो बार प्रोफेशनल टेक्नीशियन को बुलाकर सोलर एनर्जी सिस्टम की जांच करवा लें.

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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जब AI उड़ाएगा विमान, तब क्या होगा? जानिए कैसे बदल सकती है हवाई यात्रा की दुनिया</title>
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        <description><![CDATA[ AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ मोबाइल, चैटबॉट या रोबोट तक सीमित नहीं रहा. जिस चीज़ को लोग अब तक साइंस फिक्शन फिल्मों में देखते आए थे वह अब असल दुनिया में टेस्ट की जा रही है. अब सवाल उठ रहा है कि अगर विमान उड़ाने का काम AI करने लगे तो क्या होगा? हाल ही में एक बड़ी टेस्ट फ्लाइट ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है.
AI ने संभाली विमान उड़ाने की जिम्मेदारी
CNN की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी Merlin Labs ने एक खास AI सिस्टम Merlin Pilot का परीक्षण किया. इस दौरान एक Cessna Caravan विमान की उड़ान के कई अहम हिस्सों को AI सिस्टम ने कंट्रोल किया. टेस्ट के समय सुरक्षा के लिए एक पायलट कॉकपिट में मौजूद था लेकिन विमान को नेविगेट करने, दिशा बदलने, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश समझने और रेडियो कम्युनिकेशन जैसे कई काम AI ने खुद संभाले. इतना ही नहीं, लैंडिंग प्रक्रिया में भी AI सिस्टम ने मदद की. हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती टेस्टिंग फेज में है और इसे फिलहाल कमर्शियल पैसेंजर फ्लाइट्स में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.
क्या AI के भरोसे विमान उड़ाना सुरक्षित होगा?
AI आधारित एविएशन टेक्नोलॉजी के समर्थकों का मानना है कि इससे इंसानी गलतियों को कम किया जा सकता है. आज भी कई विमान हादसों की बड़ी वजह मानवीय भूल मानी जाती है. ऐसे में AI सिस्टम पायलट्स को मुश्किल और तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर सहायता दे सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक विमानों में पहले से ही ऑटोमेशन मौजूद है लेकिन नए AI सिस्टम पुराने सिस्टम्स की तुलना में अचानक आने वाली परिस्थितियों को ज्यादा समझदारी से संभालने की क्षमता रखते हैं.
फिर भी, किसी भी AI टेक्नोलॉजी को पूरी तरह लागू करने से पहले लंबी सुरक्षा जांच और कई स्तरों पर परीक्षण बेहद जरूरी होंगे. इसके साथ ही यात्रियों का भरोसा जीतना भी सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है.
पायलट्स की संस्था क्यों जता रही चिंता?
उत्तरी अमेरिका की पायलट्स संस्था Air Line Pilots Association का मानना है कि AI को पूरी तरह इंसानी पायलट की जगह नहीं लेनी चाहिए. संस्था के अनुसार, AI को एक सहायक पायलट की तरह इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि आपातकालीन हालात में इंसानी अनुभव और निर्णय क्षमता अब भी मशीनों से कहीं आगे है. इसलिए पूरी तरह AI पर निर्भरता फिलहाल जोखिम भरी मानी जा रही है.
आने वाले समय में बदल सकती है हवाई यात्रा
आज भी कई लोग यह सोचकर घबरा जाते हैं कि भविष्य में विमान मशीनें उड़ाएंगी. लेकिन टेक्नोलॉजी जिस तेजी से आगे बढ़ रही है उसे देखते हुए AI आधारित उड़ान सिस्टम आने वाले वर्षों में एविएशन इंडस्ट्री का अहम हिस्सा बन सकते हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मशीनों को कितना कंट्रोल दिया जाए और इंसानों की भूमिका कितनी बनी रहे. आने वाले समय में यही बहस हवाई यात्रा के भविष्य को तय कर सकती है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ ChatGPT नहीं! आपके फोन में मौजूद हैं 12 दमदार AI फीचर्स, ज्यादातर लोग आज भी हैं अंजान</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone AI Features: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ चैटबॉट्स या तस्वीरें बनाने वाले टूल्स तक सीमित नहीं रह गया है. पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन कंपनियों ने ऐसे कई AI फीचर्स पेश किए हैं जो यूजर्स की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना रहे हैं. चाहे फोटो एडिटिंग हो भाषाओं का अनुवाद करना हो या फिर लंबी बातचीत का सार समझना हो, AI अब आपके फोन के अंदर कई रूपों में मौजूद है. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई फीचर्स पहले से ही आपके स्मार्टफोन में उपलब्ध हैं लेकिन ज्यादातर लोग उनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. आइए जानते हैं ऐसे 12 AI फीचर्स के बारे में जो आपके स्मार्टफोन अनुभव को और बेहतर बना सकते हैं.
Circle to Search
कुछ चुनिंदा एंड्रॉयड स्मार्टफोन में मिलने वाला Circle to Search फीचर किसी भी ऐप से बाहर निकले बिना जानकारी खोजने की सुविधा देता है. स्क्रीन पर दिखाई देने वाली किसी तस्वीर, टेक्स्ट या ऑब्जेक्ट को सिर्फ सर्कल या टैप करके उससे जुड़ी जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है.
AI Object Remover
आज के स्मार्टफोन AI की मदद से तस्वीरों में मौजूद अनचाहे लोगों, तारों, रिफ्लेक्शन या अन्य डिस्टर्ब करने वाले तत्वों को पहचानकर हटा सकते हैं. इसके बाद AI खुद ही बैकग्राउंड को भर देता है जिससे फोटो ज्यादा साफ और प्रोफेशनल दिखती है.
Live Translation
विदेश यात्रा के दौरान या अलग भाषा बोलने वाले लोगों से बातचीत करते समय Live Translation फीचर बेहद काम आता है. यह आपकी बात को रियल टाइम में दूसरी भाषा में बदल देता है जिससे संवाद करना काफी आसान हो जाता है.
AI Call Transcripts
कुछ प्रीमियम स्मार्टफोन्स अब फोन कॉल्स को टेक्स्ट में बदलने की सुविधा देते हैं. इससे आपको नोट्स बनाने की जरूरत नहीं पड़ती और बाद में बातचीत के जरूरी हिस्सों को आसानी से खोजा और पढ़ा जा सकता है.
AI Writing Assistant
अगर आप मैसेज, ईमेल या कोई अन्य टेक्स्ट लिखते हैं तो AI Writing Assistant आपकी मदद कर सकता है. यह वाक्यों को बेहतर बना सकता है, व्याकरण संबंधी गलतियां सुधार सकता है लेखन का टोन बदल सकता है और लंबे टेक्स्ट का संक्षिप्त समरी भी तैयार कर सकता है.
Voice Recording Summary
मीटिंग, इंटरव्यू या लेक्चर रिकॉर्ड करने के बाद पूरी ऑडियो सुनना समय लेने वाला काम हो सकता है. AI अब लंबी रिकॉर्डिंग को समझकर उसका छोटा और महत्वपूर्ण सार तैयार कर देता है जिससे जरूरी जानकारी जल्दी मिल जाती है.
Smart Photo Search
AI आधारित फोटो सर्च की मदद से पुरानी तस्वीरें ढूंढना पहले से कहीं आसान हो गया है. अब आपको फोटो टैग करने की जरूरत नहीं पड़ती. कुत्ता, समुद्र तट, जन्मदिन या लाल कार जैसे शब्द लिखकर संबंधित तस्वीरें खोजी जा सकती हैं.
AI Wallpaper Generator
कुछ स्मार्टफोन अब AI की मदद से कस्टम वॉलपेपर तैयार करने की सुविधा देते हैं. आप किसी थीम या टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर कुछ ही सेकंड में बिल्कुल नया और अनोखा वॉलपेपर बना सकते हैं.
Web Page Summary
कई AI ब्राउजर और डिजिटल असिस्टेंट अब लंबे आर्टिकल या वेबपेज का सार तैयार कर सकते हैं. इससे आपको हजारों शब्द पढ़ने की आवश्यकता नहीं होती और मुख्य जानकारी कम समय में मिल जाती है.
AI Noise Cancellation
कॉल के दौरान आसपास के शोर को कम करने के लिए आधुनिक स्मार्टफोन AI का उपयोग करते हैं. यह फीचर इंसानी आवाज और बैकग्राउंड नॉइज में अंतर पहचानकर अनचाहे शोर को दबा देता है जिससे बातचीत ज्यादा स्पष्ट सुनाई देती है.
Smart Replies और Predictive Text
AI आधारित प्रेडिक्टिव टेक्स्ट और स्मार्ट रिप्लाई फीचर्स अब पहले से ज्यादा समझदार हो चुके हैं. ये बातचीत के संदर्भ को समझकर पूरे वाक्य या संभावित जवाब सुझा सकते हैं जिससे टाइपिंग का समय बचता है.
AI Photo Enhancement
AI फोटो की ब्राइटनेस, रंग, शार्पनेस और डिटेल्स को अपने आप बेहतर बना सकता है. कई स्मार्टफोन पुराने फोटो को रीस्टोर करने और कम क्वालिटी वाली तस्वीरों को ज्यादा स्पष्ट बनाने में भी सक्षम हैं.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>What Is UPI Circle: UPI Circle क्या है? अब परिवार के लोग भी कर सकेंगे पेमेंट, लेकिन कंट्रोल रहेगा आपके हाथ में</title>
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        <description><![CDATA[ What Is UPI Circle: आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो UPI का इस्तेमाल न करता हो. चाहें सब्जी खरीदनी हो, बिजली का बिल भरना हो या किसी दोस्त को पैसे भेजने हों, अब हर ज्यादातर काम मोबाइल से ही हो जाते हैं. &amp;nbsp;डिजिटल पेमेंट ने जिंदगी को काफी आसान बना दिया है. &amp;nbsp;लेकिन इसके साथ एक समस्या भी सामने आती है. वहीं कई बार घर के बुजुर्गों को ऑनलाइन भुगतान करने में परेशानी होती है, बच्चों को छोटी-मोटी खरीदारी के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है या फिर छात्रों को खर्च के लिए सीमित रकम चाहिए होती है. &amp;nbsp;ऐसे में लोग या तो अपना फोन और UPI एक्सेस दे देते हैं या फिर हर बार खुद भुगतान करते हैं. &amp;nbsp;दोनों ही तरीकों में परेशानी और जोखिम रहता है. &amp;nbsp;इसी समस्या को आसान बनाने के लिए UPI Circle फीचर लाया गया है.&amp;nbsp;
क्या है UPI Circle और कैसे करता है काम?
UPI Circle एक ऐसा फीचर है जो आपको अपने परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को UPI भुगतान करने की अनुमति देने की सुविधा देता है. साथ ही सबसे खास बात यह है कि इसके लिए आपको अपना UPI PIN, पासवर्ड या बैंक अकाउंट की जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी पड़ती है. आप तय कर सकते हैं कि सामने वाला व्यक्ति हर महीने कितनी रकम तक खर्च कर सकता है. साथ ही आप यह भी चुन सकते हैं कि हर भुगतान आपकी मंजूरी के बाद हो या तय सीमा के अंदर अपने आप पूरा हो जाए. यानी सुविधा भी मिलेगी और आपके पैसे पर पूरा नियंत्रण भी बना रहेगा. आसान शब्दों में कहें तो यह किसी प्रीपेड कार्ड की तरह काम करता है, लेकिन सीधे आपके UPI अकाउंट से जुड़ा होता है.&amp;nbsp;
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परिवार के लिए क्यों फायदेमंद है यह सुविधा?
मान लीजिए घर में माता-पिता डिजिटल पेमेंट सीख रहे हैं या आपका बच्चा हॉस्टल में पढ़ाई कर रहा है और उसे रोजमर्रा के खर्च के लिए पैसे चाहिए. ऐसे मामलों में UPI Circle काफी मददगार साबित हो सकता है. क्योंकि इससे बार-बार पैसे ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं पड़ती और खर्च की सीमा पहले से तय होने के कारण पैसों के गलत इस्तेमाल का खतरा भी कम हो जाता है. यही वजह है कि इस फीचर को परिवारों के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प माना जा रहा है. इससे बच्चों, बुजुर्गों और दूसरे परिवार के सदस्यों को डिजिटल भुगतान करने की आजादी मिलती है, जबकि मुख्य अकाउंट धारक हर गतिविधि पर नजर रख सकता है.&amp;nbsp;
UPI Circle का इस्तेमाल कैसे करें?
UPI Circle का उपयोग करना भी काफी आसान है. सबसे पहले आपको ऐसा UPI ऐप इस्तेमाल करना होगा जो इस फीचर को सपोर्ट करता हो. इसके बाद ऐप में UPI Circle या Delegated Payments का विकल्प चुनना होगा. फिर आप अपने किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य को जोड़ सकते हैं. इसके बाद मासिक खर्च की सीमा और भुगतान की अनुमति का तरीका तय कर सकते हैं. साथ ही समय-समय पर भुगतान की जांच करना और जरूरत खत्म होने पर एक्सेस हटाना भी जरूरी है. कुल मिलाकर UPI Circle उन लोगों के लिए एक शानदार सुविधा है जो अपने परिवार को डिजिटल भुगतान की सुविधा देना चाहते हैं, लेकिन साथ ही अपने पैसों की सुरक्षा और नियंत्रण भी बनाए रखना चाहते हैं. आने वाले समय में यह फीचर परिवारों के बीच डिजिटल लेनदेन को और आसान बना सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Mobile Signal Transmission: टॉवर से हमारे मोबाइल तक कैसे पहुंचता है सिग्नल, जान लीजिए टेलीकॉम सेक्टर की टेक्नोलाॅजी</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Signal Transmission: स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज के समय में जब आप घर बैठे दुनिया के किसी भी कोने में वीडियो कॉल करते हैं,तो बिना किसी तार के कॉल और इंटरनेट कैसे काम करते हैं? आइए जानते हैं मोबाइल टावर और टेलीकॉम नेटवर्क की इस अद्भुत तकनीक के पीछे की पूरी कार्यप्रणाली.&amp;nbsp;
टेलीकॉम तकनीक की दुनिया अदृश्य तरंगों के खेल पर टिकी है. ये माइक्रोवेव और रेडियो तरंगें ही होती हैं जो बिना किसी रुकावट के अदृश्य रूप से हमारे और हमारे प्रियजनों के बीच का फासला मिटा देती हैं. यह पूरी प्रक्रिया एक जटिल लेकिन बेहद सटीक नेटवर्क के जरिए काम करती है, जो कुछ ही मिलीसेकंड में हमारे संदेशों और आवाजों को हजारों किलोमीटर दूर पहुंचा देती है.टेलीकॉम सेक्टर की यह अद्भुत इंजीनियरिंग सच में किसी चमत्कार से कम नहीं है.साथ ही यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है. आइए अब जान लेते हैं वे चरण कौन से हैं.
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मुख्य चरण
&amp;nbsp;1.वॉयस या डेटा का तरंगों में बदलना- जब आप अपने फोन से किसी को कॉल करते हैं या इंटरनेट पर कुछ सर्च करते हैं, तो आपका स्मार्टफोन सबसे पहले आपकी आवाज या डेटा को डिजिटल सिग्नल्स में बदल देता है. इसके बाद, फोन का ट्रांसमीटर इन सिग्नल्स को रेडियो तरंगों में परिवर्तित कर देता है.&amp;nbsp;
2. फोन से टावर तक का सफर- फोन में लगा एंटीना इन रेडियो तरंगों को हवा में एमिट करता है. आस-पास लगे मोबाइल टावर इन तरंगों को अपने रिसीवर के जरिए पकड़ लेते हैं. यह प्रक्रिया प्रकाश की गति से होती है, इसलिए इसमें बिल्कुल भी समय नहीं लगता.&amp;nbsp;
3. मोबाइल स्विचिंग सेंटर- टावर तक पहुंचने के बाद, सिग्नल तारों (फाइबर ऑप्टिक केबल) के माध्यम से मोबाइल स्विचिंग सेंटर तक भेजे जाते हैं. इसे टेलीकॉम नेटवर्क का दिमाग कहा जाता है. मोबाइल स्विचिंग सेंटर का काम यह तय करना होता है कि कॉल या डेटा को आगे किस दिशा में भेजना है यानी, दूसरे व्यक्ति के फोन या दूसरे नेटवर्क तक.&amp;nbsp;
4. रिसीवर तक पहुंचना- अगर आप किसी दूसरे शहर या देश में कॉल कर रहे हैं, तो मोबाइल स्विचिंग सेंटर फाइबर ऑप्टिक्स या सैटेलाइट के जरिए उस क्षेत्र के टावर तक सिग्नल भेजता है. इसके बाद, रिसीवर का टावर रेडियो तरंगों को उस व्यक्ति के फोन तक प्रसारित कर देता है. उसका फोन इन तरंगों को वापस आवाज या डेटा में बदल देता है.&amp;nbsp;
5. स्पेक्ट्रम और फ्रिक्वेंसी का रोल- यह सारा ट्रैफिक स्पेक्ट्रम पर निर्भर करता है. सरकारें टेलीकॉम कंपनियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी के बैंड (जैसे 700 मेगा हर्ट्ज &amp;nbsp;1800 मेगा हर्ट्ज, 3.5 गीगा हर्ट्ज) आवंटित करती हैं, जिन पर डेटा हवा में तैरता है.
6. 4जी और 5जी का अंतर- पुरानी पीढ़ियों की तुलना में आज की तकनीक काफी एडवांस हो चुकी है. 4जी तकनीक में पैकेट स्विचिंग के जरिए डेटा तेजी से भेजा जाता है, वहीं 5जी टेक्नोलॉजी में मिलीमीटर वेव्स का उपयोग होता है. साथ ही 5जी में मल्टिपल एंटीना तकनीक (मासिव मीमो) का यूज होता है, जिससे इंटरनेट की स्पीड कई गुना बढ़ जाती है और लेटेंसी (सिग्नल में लगने वाला समय) न के बराबर हो जाता है.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब वीडियो एडिटिंग के लिए नहीं पड़ेगी एडिटर की जरूरत, Gemini करेगा पूरा काम</title>
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        <description><![CDATA[ Gemini Omni AI Model: अब वीडियो एडिटिंग के लिए आपको एडिटर की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह काम आप गूगल जेमिनी पर कर पाएंगे. गूगल ने अनाउंस किया है कि अब यूजर जेमिनी पर वीडियो अपलोड कर उसे Gemini Omni मॉडल से एडिट कर पाएंगे. खास बात यह है कि इसके लिए यूजर को एडिटिंग की जानकारी होना जरूरी नहीं है. वीडियो अपलोड करने के बाद उसे नैचुरल लैंग्वेज में प्रॉम्प्ट देना है. बाकी का सारा काम जेमिनी अपने आप संभाल लेगा. यह मॉडल सीन मॉडिफाई करने, विजुअल स्टाइल चेंज करने, नए एलिमेंट एड करने और वीडियो क्लिप को रिफाइन करने जैसे काम कर पाएगा.
जेमिनी से कैसे करें वीडियो एडिट?
जेमिनी से वीडियो एडिट करवाना एकदम आसान है. इसके लिए सबसे पहले जेमिनी ऐप को ओपन करें और अपनी मर्जी का कोई भी वीडियो इस पर अलोड कर दे. वीडियो अपलोड होने के बाद टेक्स्ट बॉक्स में प्रॉम्प्ट लिखें. प्रॉम्प्ट में आपको यह बताना है कि आप वीडियो में क्या चेंज करना चाहते हैं या वीडियो कैसे एडिट करना है. इसके बाद कुछ ही देर में जेमिनी वीडियो को एडिट कर आपको रिजल्ट दिखा देगा. अगर एडिट किया हुआ वीडियो पसंद नहीं आया है तो आप प्रॉम्प्ट देकर अपने मनपसंद बदलाव करवा सकते हैं. आखिर में रिजल्ट को रिव्यू कर सेवल कर लें. जेमिनी ऐप के साथ-साथ इसके वेब वर्जन पर भी वीडियो एडिट किया जा सकता है.&amp;nbsp;
गूगल का नया मल्टीमॉडल एआई मॉडल है Gemini Omni
गूगल ने बीते महीने ही Gemini Omni मॉडल का ऐलान किया था. कंपनी इसे सिनेमैटिक वीडियो जनरेशन और एडिटिंग मॉडल बता रही है, जो टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो और वीडियो इनपुट को समझ सकता है. यूजर इसमें वीडियो, फोटो, ड्रॉइंग या कोई दूसरा रेफरेंस मैटेरियल अपलोड कर बोलचाल की भाषा वाले प्रॉम्प्ट से नया वीडियो क्रिएट या एडिट कर सकता है. ट्रेडिशनल एडिटिंग टूल्स की तरह इसमें वीडियो को सीन-बाई-सीन एडिट करने की जरूरत नहीं पड़ती. यूजर को वीडियो अपलोड कर सिर्फ प्रॉम्प्ट देना है. एडिटर वाले सारे काम यह मॉडल खुद से कर देगा. यह मॉडल पुराने इंस्ट्रक्शन याद रखता है, जिससे सीन, कैरेक्टर और विजुअल एलिमेंट में कंसिस्टेंसी बनी रहती है.
खुद का डिजिटल वर्जन बना सकते हैं यूजर्स
गूगल का कहना है कि इस मॉडल की मदद से यूजर अपना डिजिटल वर्जन भी बना सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपनी वॉइस और अपीयरेंस का यूज करना होगा. यानी इस मॉडल पर यूजर अपनी वॉइस और शक्ल अपलोड कर अपना वर्जन बना पाएंगे. बाद में इस वर्जन को वीडियो में भी यूज किया जा सकेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Upcoming Smartphones in June: Motorola Edge 70 Pro+ समेत ये मॉडल होंगे लॉन्च, यहां देखें सारी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Upcoming Smartphones in June 2026: नया फोन लेने की प्लानिंग कर रहे यूजर्स के लिए जून महीना बहुत खास रहने वाला है. इस महीने भारत में कई नए फोन लॉन्च होने वाले हैं. मोटोरोला, शाओमी और वनप्लस जैसी कंपनियां मिड-रेंज, प्रीमियम मिड-रेंज और गेमिंग फोक्स्ड फोन लॉन्च करने वाली हैं. ऐसे में अगर आप नया फोन लेना चाह रहे हैं तो इस महीने आपके लिए कई नए ऑप्शन भी अवेलेबल हो जाएंगे. आइए एक नजर डालते हैं कि इस महीने कौन-कौन से फोन लॉन्च होंगे और उनमें क्या-क्या फीचर्स मिलने की उम्मीद है.
Motorola Edge 70 Pro+
इस महीने फोन लॉन्चिंग की शुरुआत 4 जून से हो जाएगी. मोटोरोला ने बताया है कि वह 4 जून को अपना Motorola Edge 70 Pro+ स्मार्टफोन लॉन्च करेगी. 6.8 इंच के AMOLED डिस्प्ले वाले इस फोन में 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा मिलेगा, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें एआई जूम फीचर्स, इमेज स्टेबलाइजेशन टूल्स आदि मिलेंगे. इसमें MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर मिलेगा. भारत में इसे करीब 50,000 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया जाएगा और यह फ्लिपकार्ट पर अवेलेबल होगा.&amp;nbsp;
Xiaomi 17T
Xiaomi 17T को कई मार्केट्स में पहले ही लॉन्च किया जाए चुका है और अब यह 4 जून को भारत में लॉन्च होने के लिए तैयार है. इस फोन में 6.59 इंच की AMOLED स्क्रीन मिलेगी, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3500 निट्स पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करेगी. इसमें मीडियाटेक का Dimensity 8500 Ultra प्रोसेसर मिलेगा, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. इसके रियर में 50MP+50MP+12MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप होगा. 6500mAh की बैटरी पैक वाले इस फोन की कीमत लगभग 75,000 रुपये हो सकती है.
Redmi Turbo 5
यह फोन 18 जून को लॉन्च होगा और इसमें 6.59 इंच की AMOLED स्क्रीन मिलने की उम्मीद है. यह फोन भी MediaTek Dimensity 8500 Ultra चिपसेट के साथ लॉन्च हो सकता है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 50MP का प्राइमरी सेंसर और 8MP का अल्ट्रावाइड लेंस मिलेगा. फ्रंट में इसे 20MP सेंसर दिया जाएगा. 7560mAh के धाकड़ बैटरी पैक वाले इस फोन की कीमत लगभग 30 हजार रुपये रह सकती है.&amp;nbsp;
OnePlus 15s
OnePlus 15s को भी जून में ही लॉन्च किया जा सकता है. यह 6.32 इंच के AMOLED डिस्प्ले के साथ आएगा, जो 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा. इसमें क्वालकॉम के Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है. इसके रियर में 50MP+50MP और फ्रंट में 12MP कैमरा मिलेगा. 7500mAh की बैटरी वाले इस फोन की शुरुआती कीमत 60,000 रुपये रह सकती है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>सबसे सस्ते में iPhone 17 खरीदने का मौका! 45 हजार से भी कम कीमत में कर सकते हैं अपने नाम, जानिए कैसे उठाएं मौके का फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Discount Offer: अगर आप नया iPhone खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर Croma ने अपनी Everything Apple सेल के तहत iPhone 17 पर आकर्षक ऑफर पेश किया है. कंपनी का दावा है कि ग्राहक iPhone 17 के 256GB वेरिएंट को प्रभावी रूप से सिर्फ ₹44,768 में खरीद सकते हैं जबकि इसकी वास्तविक कीमत ₹82,900 है. हालांकि, इस कीमत तक पहुंचने के लिए कई अलग-अलग ऑफर्स और बेनिफिट्स का फायदा उठाना होगा. यह ऑफर 29 मई से 14 जून तक उपलब्ध है.
₹82,900 वाला iPhone ₹44,768 में कैसे मिलेगा?
Croma द्वारा बताई गई प्रभावी कीमत कई छूट और रिवॉर्ड्स को जोड़कर निकाली गई है. इनमें शामिल हैं:

₹1,000 तक का बैंक कैशबैक
₹1,658 का डिस्काउंट कूपन
एक्सचेंज बोनस के रूप में ₹8,000 तक की अतिरिक्त छूट
पुराने स्मार्टफोन पर ₹23,500 तक का एक्सचेंज वैल्यू
Tata Neu Coins के रूप में ₹4,974 तक का रिवॉर्ड

इन सभी फायदों को जोड़ने पर कुल बचत लगभग ₹38,132 तक पहुंच सकती है. इसके बाद iPhone 17 की प्रभावी कीमत ₹44,768 रह जाती है.
सबसे बड़ा फायदा एक्सचेंज ऑफर से
इस डील का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा एक्सचेंज प्रोग्राम है. कुल बचत का बड़ा हिस्सा पुराने फोन को बदलने पर मिलने वाले एक्सचेंज वैल्यू और बोनस से आता है. यदि आपके पास ऐसा स्मार्टफोन नहीं है जो एक्सचेंज के लिए पात्र हो तो आपको विज्ञापित कीमत का लाभ नहीं मिल पाएगा. एक्सचेंज कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि आपका पुराना फोन कौन-सा मॉडल है उसकी उम्र कितनी है और उसकी स्थिति कैसी है.
Tata Neu Coins भी कम नहीं हैं अहम
ऑफर में मिलने वाले Tata Neu Coins भी कुल बचत का हिस्सा हैं. हालांकि यह सीधे नकद छूट नहीं है. इन कॉइन्स को Tata Neu प्लेटफॉर्म के भीतर भविष्य की खरीदारी में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए कुछ ग्राहक इन्हें तत्काल डिस्काउंट की तुलना में अलग नजरिए से देख सकते हैं.
खरीदारी के साथ मिलेगा फ्री Apple Adapter
इस प्रमोशनल ऑफर के दौरान iPhone 17 खरीदने वाले ग्राहकों को Apple का ओरिजिनल चार्जिंग एडॉप्टर भी मुफ्त दिया जा रहा है. इस एक्सेसरी की कीमत ₹2,190 बताई गई है. Croma के अनुसार यह फ्री गिफ्ट ऑफर भी 29 मई से 14 जून तक वैध रहेगा.
खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
₹44,768 की कीमत सुनने में बेहद आकर्षक लग सकती है लेकिन यह तभी संभव है जब ग्राहक उपलब्ध हर ऑफर का पूरा लाभ उठाए. खासकर एक्सचेंज वैल्यू, एक्सचेंज बोनस और Tata Neu रिवॉर्ड्स इस कीमत को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं. बता दें कि फोन खरीदने से पहले ऑफर जरूर चेक कर लें. वेबसाइट पर मौजूद ऑफर्स में बदलाव भी हो सकते हैं.
Samsung Galaxy S25 Plus 5G पर भारी छूट
ई-कॉमर्स साइट Flipkart पर Samsung Galaxy S25 Plus 5G पर भारी डिस्काउंट दिया जा रहा है. इस फोन की असल कीमत 99,999 रुपये है लेकिन छूट के बाद ये फोन यहां पर महज 79,999 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा आप इस फोन को 8884 रुपये की आसान किस्तों पर भी खरीद सकते है. यहां पर आपको कई बैंक ऑफर भी देखने को मिल जाएंगे जिससे फोन की कीमत और भी सस्ती हो सकती है.
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        <title>न कैमरा, न चेहरा, न माइक! फिर भी YouTube से हर महीने छाप सकते हैं लाखों रुपये, जानिए कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Income: आज के दौर में YouTube केवल उन लोगों तक सीमित नहीं रह गया है जो कैमरे के सामने आकर वीडियो बनाते हैं. तकनीक के विकास और AI टूल्स की बढ़ती पहुंच ने कंटेंट क्रिएशन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. अब कोई भी व्यक्ति बिना चेहरा दिखाए बिना महंगे कैमरे और माइक्रोफोन के भी अपना YouTube चैनल शुरू कर सकता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग फेसलेस चैनलों के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं.
क्यों बढ़ रही है फेसलेस YouTube चैनलों की लोकप्रियता?
कई लोग ऐसे होते हैं जो कैमरे के सामने आने में सहज महसूस नहीं करते या अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते. ऐसे लोगों के लिए AI आधारित टूल्स एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरे हैं. आज फैक्ट वीडियो, मोटिवेशनल कंटेंट, टेक एक्सप्लेनर, फाइनेंस टिप्स, हेल्थ जानकारी, टॉप-10 लिस्ट और स्टोरीटेलिंग जैसे कई प्रकार के वीडियो बिना कैमरे के तैयार किए जा सकते हैं. दर्शकों का फोकस कंटेंट की क्वालिटी पर होता है न कि वीडियो बनाने वाले के चेहरे पर.
AI की मदद से मिनटों में तैयार हो सकते हैं वीडियो
वीडियो बनाने की शुरुआत एक अच्छे विषय और स्क्रिप्ट से होती है. ChatGPT, Gemini जैसे AI प्लेटफॉर्म किसी भी विषय पर कुछ ही सेकंड में स्क्रिप्ट तैयार करने में मदद कर सकते हैं. इसके बाद AI वॉइस टूल्स की सहायता से उस स्क्रिप्ट को नैचुरल आवाज में बदला जा सकता है. हिंदी, अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में वॉइसओवर तैयार करने की सुविधा अब आसानी से उपलब्ध है.
इसके बाद AI वीडियो जनरेशन प्लेटफॉर्म स्क्रिप्ट के अनुसार तस्वीरें, वीडियो क्लिप, एनिमेशन और बैकग्राउंड म्यूजिक जोड़कर वीडियो तैयार कर देते हैं. क्रिएटर को केवल अंतिम समीक्षा करके वीडियो अपलोड करना होता है.
कम समय में ज्यादा कंटेंट बनाना संभव
शुरुआत में वीडियो तैयार करने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ पूरा प्रोसेस काफी तेज हो जाता है. कई क्रिएटर्स एक वीडियो को 10 से 15 मिनट के भीतर तैयार कर लेते हैं. YouTube Shorts जैसे फॉर्मेट ने इस प्रोसेस को और आसान बना दिया है क्योंकि छोटे वीडियो तेजी से बनाए और पब्लिश किए जा सकते हैं.
YouTube से कमाई के कई रास्ते
जब चैनल YouTube की मोनेटाइजेशन शर्तों को पूरा कर लेता है तब विज्ञापनों के जरिए कमाई शुरू हो जाती है. इसके अलावा एफिलिएट मार्केटिंग, ब्रांड स्पॉन्सरशिप, डिजिटल प्रोडक्ट्स की बिक्री और अन्य प्रमोशनल अवसर भी आय के महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं. यदि कंटेंट लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है तो कमाई का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जाता है.
शुरुआत करने से पहले क्या करें?
सफलता के लिए सबसे पहले एक ऐसा विषय चुनना जरूरी है जिसमें आपकी रुचि हो और दर्शकों की मांग भी मौजूद हो. मोटिवेशन, रोचक तथ्य, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और एजुकेशनल कंटेंट जैसे क्षेत्र फेसलेस चैनलों के लिए काफी फेमश माने जाते हैं. चैनल बनाने के बाद नियमित रूप से वीडियो अपलोड करना और आकर्षक थंबनेल तैयार करना ग्रोथ में मदद करता है.
केवल AI पर निर्भर न रहें
हालांकि AI वीडियो निर्माण को आसान बनाता है लेकिन पूरी तरह कॉपी-पेस्ट कंटेंट पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं है. अपने विचार, रिसर्च और रचनात्मकता को शामिल करने से वीडियो अधिक भरोसेमंद और यूनिक बनते हैं. साथ ही YouTube की नीतियों का पालन करना और धैर्य बनाए रखना भी जरूरी है क्योंकि अधिकांश चैनलों को अच्छी ग्रोथ हासिल करने में कुछ महीने लग सकते हैं.
आज कंटेंट क्रिएशन का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. AI टूल्स की मदद से अब कोई भी व्यक्ति कम संसाधनों में अपना YouTube चैनल शुरू कर सकता है और सही रणनीति के साथ इसे एक सफल ऑनलाइन बिजनेस में बदल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>iOS 28 को देखकर खुश हो जाएंगे ऐप्पल यूजर्स, कंपनी ने अभी से शुरू कर दी तैयारी</title>
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        <description><![CDATA[ iOS 28 Update: ऐप्पल ने पिछले साल बड़े बदलावों के साथ iOS 26 को लॉन्च किया था और अब यूजर्स को iOS 27 सॉफ्टवेयर अपडेट का इंतजार है. इसे भी कई शानदार अपग्रेड्स मिलने वाली है, लेकिन एक ताजा रिपोर्ट ने ऐप्पल यूजर्स को एक्साइटमेंट बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि ऐप्पल ने iOS 28 अपडेट पर काम कर दिया है और यह iOS 27 की तुलना में कई गुना शानदार होने वाली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, iOS 27 के मुकाबले iOS 28 कहीं ज्यादा बड़ी और महत्वपूर्ण अपडेट होने जा रही है. हालांकि, अभी इसके स्पेसिफिकेशंस सामने नहीं आए हैं.
कब रोल आउट की जाएगी iOS 28 Update?
ऐप्पल को कवर करने वाले ब्लूमबर्ग के जर्नलिस्ट मार्क गुरमैन का कहना है कि अगले साल आने वाली iOS 28 कहीं अधिक महत्वपूर्ण होगी. उन्होंने इसमें मिलने वाले फीचर्स की जानकारी नहीं दी है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि इसमें iOS 27 की तुलना में कई शानदार अपग्रेड्स मिल सकती है. यह इसलिए भी खास होने वाली है क्योंकि 2027 में आईफोन के सफर को 20 साल पूरे हो जाएंगे. इस मौके पर ऐप्पल अब तक के सबसे अलग और फ्यूचरिस्टिक दिखने वाले आईफोन लॉन्च करेगी. इन आईफोन को iOS 28 के साथ ही लॉन्च किया जाएगा. इसलिए ऐप्पल आईफोन की 20वीं एनिवर्सरी को हार्डवेयर के साथ-साथ सॉफ्टवेयर के तौर पर भी स्पेशल बनाना चाहती है.
फिलहाल iOS 27 की तैयारियों में जुटी है ऐप्पल
फिलहाल ऐप्पल iOS 27 की तैयारियों में जुटी हुई है. अगले हफ्ते होने वाले ऐप्पल के WWDC 2026 में इसकी पहली झलक दिखाई जा सकती है और सितंबर में आईफोन 18 प्रो मॉडल्स के साथ इसे लॉन्च कर दिया जाएगा. इस अपडेट का मेन फोकस सिरी के नए वर्जन और एडिशनल ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स पर रहेगा. इस अपडेट के साथ यूजर्स को सिरी का चैटबॉट स्टाइल वर्जन मिलेगा. यह ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस के साथ आएगा और यूजर के पर्सनल कॉन्टेक्स्ट को भी समझ सकेगा.&amp;nbsp;
iOS 27 में क्या-क्या मिलने वाला है?
अपडेटेड सिरी के साथ अपकमिंग अपडेट में सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स भी मिलेंगे. हालांकि, ये केवल आईफोन 17 सीरीज तक ही सीमित रह सकते हैं. ऐप्पल मैप्स में नए सैटेलाइट फीचर्स जोड़े जाएंगे और यूजर मोबाइल कनेक्टिविटी न होने पर भी सैटेलाइट की मदद से मैसेज सेंड और रिसीव कर पाएंगे. नई अपडेट में फोटो एडिटिंग के लिए नए एआई टूल्स भी मिलेंगे. कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि फोटो एडिटिंग के लिए गूगल के नैनो बनाना मॉडल का सपोर्ट भी मिल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>3kW vs 5kW Solar System: आपके घर के लिए कौन&amp;सा सिस्टम रहेगा बेहतर? यहां देखें पूरी गाइड</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel For Home: बिजली के लगातार बढ़ते बिल से बचने के लिए लोग अब सोलर पावर यूज करने लगे हैं. हालांकि, कई लोगों के लिए अपनी जरूरत के हिसाब से सही सोलर एनर्जी सिस्टम चुनना कंफ्यूजिंग हो सकता है. ज्यादातर लोग 3kW और 5kW के सिस्टम में कंफ्यूज होते हैं. दोनों की लागत में अंतर है और कैपेसिटी में भी. इसलिए बिना ज्यादा पैसा खर्च किए सही सिस्टम चुनना जरूरी हो जाता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर की जरूरत के हिसाब से आपको 3kW और 5kW में से कौन-सा सिस्टम चुनना चाहिए.
सबसे पहले देखें बिजली की खपत
सोलर पैनल का साइज चुनने के लिए बिजली की खपत को सबसे बड़ा आधार बनाया जा सकता है. आप अपने बिजली बिल पर देख सकते हैं कि महीने में आप कितनी बिजली की खपत कर रहे हैं. अगर मोटा अनुमान लिया जाए तो 2BHK में 6-10 यूनिट रोजाना खर्च होती है. बड़े घर में ज्यादा अप्लायंस होने के कारण खपत और बढ़ जाती है और यह 15-25 यूनिट तक जा सकती है. वहीं अगर सोलर पैनल की कैपेसिटी देखें तो 3kW का सिस्टम रोजाना लगभग 15-18 और 5kW का सिस्टम 25-30 यूनिट तक जरनेट कर सकता है.
पैनल लगाने के लिए कितनी जगह चाहिए?
आजकल 550W के पैनल ज्यादा चलन में है. अगर आप 5kW का सिस्टम लगाते हैं तो 9-10 पैनल की जरूरत पड़ती है. पैनल को हमेशा टिल्ट कर और साउथ-फेसिंग लगाया जाता है. अगर kW &amp;nbsp;का सिस्टम लगाने के लिए 100-120 स्क्वेयर फीट की जरूरत पड़ती है. इस तरह आप 3kW और 5kW के लिए स्पेस का हिसाब लगा सकते हैं. पैनल लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें, जहां छांव न रहे.
सोलर एनर्जी सिस्टम से कितनी बचत हो जाएगी?
सोलर पैनल एनर्जी जनरेशन के लिए सनलाइट पर डिपेंड रहते हैं. सनलाइट जितने ज्यादा घंटे रहेगी, पावर जनरेशन उतना ही ज्यादा होगा. मोटे तौर पर हिसाब लगाया जाए तो 3kW वाला सिस्टम एक एसी और घर के दूसरे अप्लायंसेस की खपत के बराबर एनर्जी जनरेट कर सकता है. इस तरह आप हर महीने 3,000-5,000 रुपये बचा सकते हैं. वहीं अगर आप 2 एसी और घर के बाकी अप्लायंसेस यूज करते हैं तो इसके लिए 5kW का सिस्टम लगवाना चाहिए. यह आपके हर महीने बिजली बिल के 5,000-10,000 रुपये बचा सकता है. इस तरह कुछ ही सालों में सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने की लागत पूरी हो जाती है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Podcast सुनने वालों की लग गई लॉटरी! YouTube Premium में आया गेम&amp;चेंजर फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube New Feature: YouTube Premium यूजर्स के लिए पॉडकास्ट सुनने का अनुभव अब पहले से ज्यादा स्मार्ट और आसान होने जा रहा है. कंपनी ने कई नए फीचर्स पेश किए हैं जिनमें बेहतर प्लेबैक कंट्रोल, AI आधारित पॉडकास्ट सुझाव और उन्नत बैकग्राउंड लिसनिंग शामिल हैं. इन अपडेट्स का मकसद उन यूजर्स को बेहतर सुविधा देना है जो लंबे पॉडकास्ट सुनना पसंद करते हैं और चलते-फिरते भी अपने पसंदीदा शो से जुड़े रहना चाहते हैं.
On-the-Go Mode से पॉडकास्ट सुनना होगा आसान
YouTube का नया On-the-Go Mode खास तौर पर उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो पॉडकास्ट को देखने की बजाय सुनना ज्यादा पसंद करते हैं. इस मोड में प्लेबैक कंट्रोल्स तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो जाती है जिससे यूजर्स बिना किसी परेशानी के अपने पॉडकास्ट को नियंत्रित कर सकते हैं.
अगर आप यात्रा कर रहे हैं जिम में वर्कआउट कर रहे हैं, टहल रहे हैं या किसी अन्य काम में व्यस्त हैं तब भी यह फीचर आपके लिए उपयोगी साबित होगा. इसकी मदद से आप कुछ ही टैप में पॉडकास्ट को आगे या पीछे कर सकते हैं और अन्य ऐप्स इस्तेमाल करते समय भी सुनना जारी रख सकते हैं. फिलहाल यह सुविधा Android पर YouTube Premium सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध कराई गई है जबकि iPhone यूजर्स को यह फीचर जल्द मिलने की उम्मीद है.
On-the-Go Mode के प्रमुख फायदे
इस फीचर के जरिए यूजर्स आसानी से पॉडकास्ट को फास्ट-फॉरवर्ड या रिवाइंड कर सकते हैं. प्लेबैक कंट्रोल्स तक पहुंच सरल हो जाती है और दूसरे ऐप्स इस्तेमाल करते समय भी ऑडियो बिना रुकावट चलता रहता है. साथ ही बैकग्राउंड में सुनने का अनुभव पहले से ज्यादा बेहतर हो जाता है.
Autospeed फीचर खुद एडजस्ट करेगा प्लेबैक स्पीड
YouTube ने Autospeed नाम का एक नया फीचर भी जोड़ा है. आमतौर पर यूजर्स को पॉडकास्ट की स्पीड खुद तय करनी पड़ती है लेकिन अब यह काम सिस्टम अपने आप करेगा. यह फीचर पॉडकास्ट की बातचीत और कंटेंट की गति को समझकर प्लेबैक स्पीड को एडजस्ट करता है. यदि बातचीत धीमी चल रही हो तो यह स्पीड बढ़ा सकता है जबकि किसी महत्वपूर्ण या जटिल जानकारी वाले हिस्से में स्पीड कम कर सकता है ताकि श्रोता कोई जरूरी बात मिस न करें.
इससे यूजर्स कम समय में ज्यादा कंटेंट सुन सकेंगे और महत्वपूर्ण जानकारी भी आसानी से समझ पाएंगे. फिलहाल Android पर YouTube Premium यूजर्स को यह सुविधा मिल रही है जबकि iOS सपोर्ट जल्द आने वाला है.
Ask Music अब AI की मदद से सुझाएगा पॉडकास्ट
YouTube ने अपने Ask Music फीचर को भी अपग्रेड किया है. पहले यह केवल म्यूजिक रिकमेंडेशन देता था लेकिन अब AI की मदद से पॉडकास्ट भी सुझाएगा. यूजर्स अपनी पसंदीदा श्रेणी, मूड, पसंदीदा पॉडकास्ट या सुनने की आदतों के आधार पर नए पॉडकास्ट खोज सकते हैं.
आपको सिर्फ यह बताना होगा कि आप किस तरह का कंटेंट सुनना चाहते हैं इसके बाद YouTube का AI आपके लिए उपयुक्त शो की सिफारिश करेगा. यह सुविधा फिलहाल कुछ चुनिंदा देशों में YouTube Premium और YouTube Music Premium यूजर्स के लिए उपलब्ध है.
चरणबद्ध तरीके से जारी हो रहे हैं अपडेट्स
YouTube इन सभी नए फीचर्स को धीरे-धीरे रोलआउट कर रहा है. On-the-Go Mode और Autospeed फिलहाल Android यूजर्स के लिए उपलब्ध हैं, जबकि iPhone सपोर्ट आने वाले समय में जोड़ा जाएगा. वहीं AI आधारित पॉडकास्ट सुझावों वाला Ask Music फीचर अभी केवल कुछ देशों तक सीमित है.
इन नए अपडेट्स के जरिए YouTube पॉडकास्ट की दुनिया में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है. कंपनी का फोकस यूजर्स को अधिक व्यक्तिगत, स्मार्ट और सुविधाजनक अनुभव देने पर है ताकि वे अपने पसंदीदा पॉडकास्ट का आनंद पहले से बेहतर तरीके से ले सकें.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>ATM Technology: ATM में कैश खत्म होने से पहले बैंक को कैसे पता चल जाता है, कैसे काम करती है टेक्नोलॉजी? </title>
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        <description><![CDATA[ ATM Technology:&amp;nbsp; रोजाना लाखों लोग ATM से पैसे निकालते हैं. किसी को सैलरी निकालनी होती है, किसी को खरीदारी के लिए कैश चाहिए होता है, तो कोई अचानक जरूरत पड़ने पर ATM पहुंच जाता है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बैंक को कैसे पता चल जाता है कि किसी ATM में पैसे खत्म होने वाले हैं? क्या बैंक तब जागता है जब ATM खाली हो जाता है? असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है.
आज के समय का ATM सिर्फ पैसे निकालने वाली मशीन नहीं, बल्कि बैंक से लगातार जुड़ा हुआ एक स्मार्ट सिस्टम है. यह मशीन हर सेकंड अपनी जानकारी बैंक के सर्वर तक पहुंचाती रहती है और कैश की स्थिति पर नजर बनाए रखती है.&amp;nbsp;
ATM के अंदर कैसे होती है पैसों की निगरानी?
ATM के अंदर अलग-अलग कैश बॉक्स यानी कैश कैसट लगे होते हैं, जिनमें 100 रुपये, 200 रुपये और 500 रुपये या दूसरे नोट रखे जाते हैं. जब भी कोई ग्राहक पैसे निकालता है, मशीन तुरंत रिकॉर्ड अपडेट कर देती है कि कितने नोट निकले और कितने बचे हैं. इसके लिए ATM में खास सेंसर और सॉफ्टवेयर लगे होते हैं. ये सिस्टम लगातार कैश की गिनती करता रहता है. इतना ही नहीं, ATM यह भी बता सकता है कि कौन-से नोट ज्यादा बचे हैं और कौन-से लगभग खत्म होने वाले हैं. &amp;nbsp;यही वजह है कि बैंक को हर समय ATM की सही स्थिति पता रहती है.&amp;nbsp;
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कैश कम होते ही बैंक को मिल जाता है अलर्ट
जैसे ही ATM में कैश तय की गई सीमा से नीचे पहुंचता है, मशीन अपने आप बैंक के कंट्रोल रूम या मॉनिटरिंग सिस्टम को डिजिटल अलर्ट भेज देती है. इसके बाद बैंक की टीम तुरंत कार्रवाई शुरू कर देती है. इसी जानकारी के आधार पर कैश वैन भेजी जाती है और ATM में दोबारा पैसे भरे जाते हैं. साथ ही कई बैंक अब ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं जो यह अनुमान भी लगा लेते हैं कि किसी इलाके में किस दिन और किस समय ज्यादा कैश निकलेगा. त्योहारों, सैलरी डेट और छुट्टियों के दौरान ATM में अतिरिक्त कैश रखा जाता है ताकि लोगों को परेशानी न हो.&amp;nbsp;
स्मार्ट डेटा और टेक्नोलॉजी से चलता है पूरा खेल
आज ATM मैनेजमेंट पूरी तरह डेटा और टेक्नोलॉजी पर आधारित हो चुका है. बैंक सिर्फ यह नहीं देखते कि ATM में कितने पैसे बचे हैं, बल्कि यह भी देखते हैं कि किस इलाके में कैश की मांग कितनी है. इसी वजह से व्यस्त बाजारों, रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले इलाकों के ATM ज्यादा बार भरे जाते हैं. वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी बैंकों को ATM में कैश उपलब्ध रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं. साल 2021 में RBI ने कहा था कि अगर ATM लंबे समय तक खाली रहता है तो संबंधित बैंक पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसलिए बैंक लगातार अपने ATM नेटवर्क की निगरानी करते हैं. साफ शब्दों में कहें तो ATM कोई साधारण मशीन नहीं, बल्कि बैंक से हर पल बातचीत करने वाला एक स्मार्ट डिजिटल सिस्टम है, जो पैसे खत्म होने से पहले ही बैंक को खबर दे देता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन नंबर और एड्रेस Google पर हो गए पब्लिक? जानिए उन्हें हटाने का सबसे आसान तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-नंबर-और-एड्रेस-google-पर-हो-गए-पब्लिक-जानिए-उन्हें-हटाने-का-सबसे-आसान-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ Google: आज के डिजिटल युग में हमारी निजी जानकारी पहले से कहीं अधिक ऑनलाइन मौजूद है. फोन नंबर, ईमेल आईडी, घर का पता और अन्य व्यक्तिगत विवरण कई बार अनजाने में इंटरनेट पर सार्वजनिक हो जाते हैं. सबसे बड़ी चिंता तब होती है जब ये जानकारी सीधे Google Search में दिखाई देने लगती है. ऐसी स्थिति में साइबर अपराधियों के लिए स्पैम कॉल, फिशिंग अटैक, पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे अपराध करना आसान हो सकता है. अच्छी बात यह है कि Google ने यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐसे टूल उपलब्ध कराए हैं जिनकी मदद से आप अपनी निजी जानकारी को सर्च रिजल्ट्स से हटाने की मांग कर सकते हैं.
Google पर अपनी जानकारी कैसे खोजें?
यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी कौन-कौन सी निजी जानकारी Google Search में दिखाई दे रही है तो Google का Results About You टूल आपकी मदद कर सकता है. इस टूल का इस्तेमाल करने के लिए अपने Google अकाउंट में साइन इन करें और वहां अपना मोबाइल नंबर, ईमेल पता या घर का पता दर्ज करें जिसे आप ट्रैक करना चाहते हैं.
इसके बाद आप तय कर सकते हैं कि Google आपको ईमेल के जरिए सूचना भेजे या Google ऐप नोटिफिकेशन के माध्यम से. एक बार सेटअप पूरा होने पर Google इंटरनेट पर मौजूद जानकारी को स्कैन करता है और आपको रिपोर्ट देता है कि आपकी व्यक्तिगत जानकारी किन-किन वेबसाइटों या सर्च रिजल्ट्स में दिखाई दे रही है.
सर्च रिजल्ट्स से जानकारी हटाने का तरीका
अगर आपको कोई ऐसा Google Search रिजल्ट मिल जाता है जिसमें आपकी निजी जानकारी दिखाई दे रही है तो आप सीधे उसे हटाने के लिए अनुरोध भेज सकते हैं. इसके लिए उस सर्च रिजल्ट को खोलें और उसके साथ दिखाई देने वाले तीन डॉट्स (Three Dots) पर क्लिक करें. यहां आपको Remove Result का विकल्प मिलेगा.
इसके बाद Google आपसे कारण पूछेगा कि आप उस लिंक को क्यों हटाना चाहते हैं. उदाहरण के लिए, यदि उसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी मौजूद है या फिर वह जानकारी पुरानी हो चुकी है तो आप संबंधित विकल्प चुनकर अनुरोध भेज सकते हैं. Google आपकी रिक्वेस्ट की समीक्षा करने के बाद आवश्यक कार्रवाई करता है.
संवेदनशील जानकारी लीक होने पर क्या करें?
यदि इंटरनेट पर आपकी अत्यधिक संवेदनशील जानकारी जैसे सरकारी पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण, क्रेडिट कार्ड नंबर, पासवर्ड या मेडिकल रिकॉर्ड्स दिखाई दे रहे हैं तो केवल सामान्य रिमूवल रिक्वेस्ट पर्याप्त नहीं हो सकती. ऐसी स्थिति में Google के Personal Content Removal सपोर्ट पेज का उपयोग करना बेहतर होता है.
यहां आपको अपनी समस्या के अनुसार सही श्रेणी चुननी होती है और उस वेबपेज का URL तथा अन्य जरूरी जानकारी भरकर फॉर्म जमा करना होता है. इसके बाद Google मामले की जांच करता है और उचित निर्णय लेता है.
पुरानी तस्वीरें और जानकारी हटाने का उपाय
कई बार ऐसा होता है कि आपने किसी वेबसाइट से अपनी फोटो या जानकारी हटवा दी होती है लेकिन वह Google Search में काफी समय तक दिखाई देती रहती है. ऐसा Google के कैश्ड डेटा की वजह से होता है. इस समस्या के समाधान के लिए Google का Remove Outdated Content टूल इस्तेमाल किया जा सकता है. आपको सिर्फ उस पेज का URL जमा करना होता है और Google पुरानी जानकारी को अपने सर्च इंडेक्स से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देता है. इसी तरह, यदि कोई पुरानी तस्वीर Google Images में दिखाई दे रही है तो उसके URL के माध्यम से भी रिमूवल रिक्वेस्ट भेजी जा सकती है.
यह बात जरूर समझें
Google Search से किसी लिंक या जानकारी को हटाने का मतलब यह नहीं है कि वह डेटा इंटरनेट से पूरी तरह मिट गया है. यदि वह जानकारी मूल वेबसाइट पर मौजूद है, तो उसे पूरी तरह हटाने के लिए आपको उस वेबसाइट के एडमिनिस्ट्रेटर या मालिक से संपर्क करना होगा और कंटेंट हटाने का अनुरोध करना होगा.
जब आप Google को कोई रिमूवल रिक्वेस्ट भेजते हैं तो कंपनी आपको एक कन्फर्मेशन ईमेल भेजती है. इसके बाद Google की टीम मामले की समीक्षा करती है और प्राइवेसी तथा सार्वजनिक हित दोनों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेती है. इसलिए हर अनुरोध स्वीकार हो जाए, यह जरूरी नहीं है. हालांकि, आपकी रिक्वेस्ट का क्या हुआ, इसकी जानकारी आपको नोटिफिकेशन या ईमेल के माध्यम से दे दी जाती है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हर साल क्यों महंगे होते जा रहे हैं स्मार्टफोन? सामने आ गई बड़ी वजह, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Price Hike: अगर आपने पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन बाजार पर नजर रखी है तो आपने जरूर महसूस किया होगा कि फोन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. जो स्मार्टफोन कभी 10 हजार रुपये के आसपास मिल जाता था आज उसकी कीमत 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच रही है. यह बदलाव केवल प्रीमियम ब्रांड्स तक सीमित नहीं है, बल्कि बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में भी साफ दिखाई देता है. महंगाई इसका एक कारण जरूर है लेकिन इसके पीछे कई तकनीकी और कारोबारी वजहें भी काम कर रही हैं.
AI और पावरफुल प्रोसेसर ने बढ़ाई कीमत
आज के स्मार्टफोन पहले की तुलना में कहीं ज्यादा स्मार्ट और ताकतवर हो गए हैं. कंपनियां अब ऐसे प्रोसेसर इस्तेमाल कर रही हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाई-एंड गेमिंग और मल्टीटास्किंग जैसे काम आसानी से संभाल सकें.
क्वालकॉम, मीडियाटेक और अन्य चिप निर्माता लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इन एडवांस चिप्स को विकसित करने और बनाने में अधिक लागत आती है. यही वजह है कि आधुनिक स्मार्टफोन के हार्डवेयर पर पहले से ज्यादा खर्च हो रहा है जिसका असर सीधे फोन की कीमत पर पड़ता है.
5G तकनीक ने बढ़ाया खर्च
भारत में 5G नेटवर्क तेजी से फैल चुका है और अब लगभग हर नए स्मार्टफोन में 5G सपोर्ट देखने को मिलता है. हालांकि, 5G को फोन में शामिल करना कंपनियों के लिए सस्ता नहीं है. 5G स्मार्टफोन में उन्नत मॉडेम, बेहतर एंटीना सिस्टम, अधिक प्रभावी कूलिंग तकनीक और बड़ी बैटरी की जरूरत होती है. इन सभी अतिरिक्त हार्डवेयर की वजह से उत्पादन लागत बढ़ जाती है. यही कारण है कि अब एंट्री-लेवल फोन भी पहले की तुलना में महंगे हो गए हैं.
कैमरा और डिस्प्ले पर बढ़ता फोकस
आज के उपभोक्ता सिर्फ एक साधारण स्मार्टफोन नहीं चाहते. वे शानदार कैमरा, बेहतरीन डिस्प्ले और प्रीमियम अनुभव की उम्मीद करते हैं. हाई मेगापिक्सल कैमरे, AMOLED स्क्रीन, हाई रिफ्रेश रेट, ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) और एडवांस जूम जैसी सुविधाएं अब मिड-रेंज फोन में भी मिलने लगी हैं. इन फीचर्स के लिए महंगे कंपोनेंट्स की जरूरत पड़ती है जिससे फोन की कुल लागत बढ़ जाती है.
मैन्युफैक्चरिंग और आयात लागत का असर
स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण पार्ट्स विदेशों से आयात किए जाते हैं. हाल के वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.
इसके अलावा शिपिंग लागत, कच्चे माल की कीमत और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी कंपनियों के खर्च को बढ़ाते हैं. भारत में असेंबली बढ़ने के बावजूद कई प्रीमियम पार्ट्स अभी भी चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से मंगाए जाते हैं.
लंबे सॉफ्टवेयर अपडेट भी हैं एक वजह
पहले स्मार्टफोन कंपनियां सीमित समय तक ही सॉफ्टवेयर अपडेट देती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. कई ब्रांड 3 से 7 साल तक एंड्रॉयड अपडेट और सुरक्षा पैच देने का वादा कर रहे हैं.
लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट बनाए रखने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त इंजीनियरिंग टीम और संसाधनों की जरूरत होती है. यह निवेश भी आखिरकार उत्पाद की कीमत में शामिल हो जाता है.
AI फीचर्स बन रहे हैं सबसे बड़ा आकर्षण
स्मार्टफोन इंडस्ट्री में AI अब सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है. कंपनियां अपने नए डिवाइस में AI आधारित सुविधाओं को प्रमुखता से पेश कर रही हैं. फोटो एडिटिंग, लाइव ट्रांसलेशन, स्मार्ट वर्चुअल असिस्टेंट, AI सर्च समरी और कई अन्य इंटेलिजेंट फीचर्स अब स्मार्टफोन का हिस्सा बन रहे हैं. इन सुविधाओं को बेहतर तरीके से चलाने के लिए शक्तिशाली हार्डवेयर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है जिससे विकास लागत बढ़ती है.
ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाएं
भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद भी तेजी से बदल रही है. अब लोग बेहतर डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ, तेज चार्जिंग, शानदार कैमरा और गेमिंग परफॉर्मेंस चाहते हैं. जब ग्राहक अधिक फीचर्स और बेहतर अनुभव की मांग करते हैं तो कंपनियां भी उसी अनुसार नए और महंगे मॉडल बाजार में उतारती हैं. इससे स्मार्टफोन की औसत कीमत लगातार बढ़ रही है.
अब बजट फोन भी पहले जैसे नहीं रहे
कुछ साल पहले बजट स्मार्टफोन का मतलब केवल कॉलिंग, मैसेजिंग और बेसिक ऐप्स तक सीमित था. लेकिन आज कम कीमत वाले फोन में भी हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले, बड़ी बैटरी, फास्ट चार्जिंग, मल्टीपल कैमरे और 5G सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलने लगे हैं. यानी अब बजट स्मार्टफोन की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है. कम कीमत वाले फोन भी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हो गए हैं.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>क्या 24 घंटे ऑन रहने पर AC की तरह फट सकता है आपका Wi&amp;Fi Router? यहां जानिए पूरी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi Router: आज के समय में Wi-Fi Router लगभग हर घर और ऑफिस की जरूरत बन चुका है. कई लोग इसे 24 घंटे चालू रखते हैं ताकि इंटरनेट सेवा लगातार मिलती रहे. हाल के वर्षों में एयर कंडीशनर (AC) में आग लगने या ब्लास्ट जैसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं जिसके बाद लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या Wi-Fi Router भी उसी तरह फट सकता है? इसका जवाब है हां, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम होती है. फिर भी कुछ परिस्थितियों में Router में ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
क्यों हो सकता है Router खतरनाक?
Wi-Fi Router के अंदर कई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और एक पावर एडॉप्टर होता है. लगातार बिजली मिलने और लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण ये हिस्से गर्म हो सकते हैं. यदि डिवाइस की क्वालिटी खराब हो, बिजली की सप्लाई अस्थिर हो या वेंटिलेशन सही न मिले तो खतरा बढ़ सकता है.
हालांकि Router में AC जैसी बड़ी कंप्रेसर यूनिट या हाई-पावर सिस्टम नहीं होता इसलिए बड़े ब्लास्ट की संभावना बेहद कम रहती है. लेकिन अत्यधिक गर्मी से धुआं निकलना, पिघलना या आग लगना संभव है.
ओवरहीटिंग सबसे बड़ा कारण
Router को अक्सर लोग टीवी के पीछे, बंद अलमारी में या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ऊपर रख देते हैं. इससे गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती और डिवाइस का तापमान बढ़ने लगता है. अगर Router छूने पर बहुत ज्यादा गर्म महसूस हो, बार-बार इंटरनेट डिस्कनेक्ट हो या उसमें से जलने जैसी गंध आए तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है.
सस्ते एडॉप्टर और नकली एक्सेसरीज से बढ़ता है जोखिम
कई बार असली पावर एडॉप्टर खराब होने पर लोग सस्ते या लोकल चार्जर इस्तेमाल करने लगते हैं. गलत वोल्टेज या खराब गुणवत्ता वाला एडॉप्टर शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा कंपनी द्वारा दिए गए ओरिजिनल एडॉप्टर का ही इस्तेमाल करें और खराब केबल को तुरंत बदल दें.
सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये उपाय

Router को खुली और हवादार जगह पर रखें.
उसके ऊपर कोई भारी वस्तु न रखें.
बिजली के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सर्ज प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करें.
समय-समय पर धूल साफ करते रहें.
बहुत पुराने Router या क्षतिग्रस्त एडॉप्टर को बदल दें.
यदि लंबे समय तक घर से बाहर जा रहे हैं तो Router को बंद कर सकते हैं.

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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>ऑफिस में इंसानों से ज्यादा काम कर रहे AI टूल्स! 2026 में Copilot से लेकर ChatGPT तक का हो रहा इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ AI Tools: साल 2026 में ऑफिस में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब AI सिर्फ एक अलग चैटबॉट या सहायक नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे उन टूल्स के अंदर शामिल हो चुका है जिन्हें लोग रोज इस्तेमाल करते हैं. चाहे डॉक्यूमेंट बनाना हो, डेटा एनालिसिस करना हो, मीटिंग का सार निकालना हो या फिर रोजमर्रा के काम ऑटोमेट करना हो, AI अब हर जगह अहम भूमिका निभा रहा है.
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कर्मचारियों को अलग-अलग ऐप्स में जाने की जरूरत कम पड़ रही है. AI सीधे Word, Excel, Gmail, Slack और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म के भीतर काम कर रहा है. आइए जानते हैं उन AI टूल्स के बारे में जो 2026 में ऑफिस प्रोडक्टिविटी की तस्वीर बदल रहे हैं.
Microsoft 365 Copilot
Microsoft Copilot आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले एंटरप्राइज AI सिस्टम्स में शामिल हो चुका है. यह Word, Excel, PowerPoint, Outlook और Teams जैसे टूल्स के अंदर ही काम करता है. यूजर्स साधारण भाषा में कमांड देकर डॉक्यूमेंट तैयार कर सकते हैं, स्प्रेडशीट का विश्लेषण कर सकते हैं, मीटिंग का सार निकाल सकते हैं और टास्क मैनेज कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लोगों को अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती जिससे काम की गति काफी बढ़ जाती है.
Google Workspace with Gemini
Google ने अपने Workspace प्लेटफॉर्म को Gemini AI के जरिए और ज्यादा स्मार्ट बना दिया है. अब Docs, Sheets, Slides और Drive में AI आधारित फीचर्स शामिल हैं जो कंटेंट तैयार करने, डेटा का सार निकालने और ऑटोमेशन में मदद करते हैं. Gemini ईमेल, डॉक्यूमेंट और अन्य फाइलों के डेटा को समझकर कॉन्टेक्स्ट के अनुसार सुझाव देता है. खासतौर पर वे कंपनियां जो पहले से Google Ecosystem का इस्तेमाल करती हैं उनके लिए यह काफी उपयोगी साबित हो रहा है.
Notion AI
Notion AI ने डॉक्यूमेंटेशन, डेटाबेस और टास्क मैनेजमेंट को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर काम को आसान बना दिया है. यह लंबे डॉक्यूमेंट्स का सार तैयार कर सकता है, जरूरी टास्क पहचान सकता है और कंपनी के इंटरनल डेटा से सवालों के जवाब भी दे सकता है. यही वजह है कि इसे अब ऑल-इन-वन वर्कस्पेस के तौर पर देखा जा रहा है.
ChatGPT
ChatGPT अब भी सबसे लोकप्रिय AI टूल्स में से एक बना हुआ है. लोग इसका इस्तेमाल लेखन, रिसर्च, कोडिंग, आइडिया जनरेशन और समस्या समाधान जैसे कामों में कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लचीलापन है. यह किसी एक काम तक सीमित नहीं है बल्कि अलग-अलग इंडस्ट्री में एक सामान्य AI सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. कई कंपनियों के वर्कफ्लो में यह थिंकिंग लेयर की तरह काम कर रहा है.
Zapier AI
Zapier AI हजारों ऐप्स को आपस में जोड़कर ऑटोमेटेड वर्कफ्लो बनाने में मदद करता है. यूजर्स सिर्फ साधारण भाषा में निर्देश देकर ईमेल, मैसेजिंग ऐप्स, डेटाबेस और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टूल्स को एक साथ जोड़ सकते हैं. इससे दोहराए जाने वाले काम अपने आप होने लगते हैं और कर्मचारियों का समय बचता है.
Grammarly
पहले Grammarly सिर्फ ग्रामर सुधारने वाला टूल माना जाता था लेकिन अब यह एक एडवांस कम्युनिकेशन असिस्टेंट बन चुका है. यह ईमेल लिखने, टोन सुधारने और कंटेंट को ज्यादा स्पष्ट और प्रोफेशनल बनाने में मदद करता है. ऑफिस कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है.
Otter.ai
Otter.ai खासतौर पर ऑनलाइन मीटिंग्स के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है. यह रियल टाइम में मीटिंग ट्रांसक्राइब करता है, जरूरी पॉइंट्स का सार बनाता है और एक्शन आइटम्स पहचानता है. रिमोट और हाइब्रिड वर्क कल्चर में यह प्रशासनिक काम का बोझ काफी कम कर रहा है.
ClickUp AI
ClickUp AI प्रोजेक्ट मैनेजमेंट को और ज्यादा स्मार्ट बना रहा है. यह टास्क प्लान तैयार कर सकता है, प्रोजेक्ट्स का सार बना सकता है और वर्कफ्लो ऑटोमेट कर सकता है. बड़ी टीमों और मल्टी-लेयर प्रोजेक्ट्स को मैनेज करने में यह काफी मददगार साबित हो रहा है.
2026 का AI ट्रेंड क्या संकेत देता है?
2026 के ट्रेंड को देखें तो साफ पता चलता है कि AI अब अलग टूल नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे ऑफिस सॉफ्टवेयर के भीतर शामिल हो चुका है. एक तरफ Microsoft 365 और Google Workspace जैसे प्लेटफॉर्म AI-फर्स्ट सिस्टम बन रहे हैं, वहीं ChatGPT जैसे टूल्स अब भी फ्लेक्सिबल सोच और क्रिएटिव कामों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं. दूसरी ओर Zapier जैसे ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म अलग-अलग ऐप्स को जोड़कर पूरे वर्कफ्लो को स्मार्ट बना रहे हैं. आने वाले समय में AI सिर्फ काम को तेज नहीं करेगा बल्कि ऑफिस में काम करने के पूरे तरीके को बदल देगा.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Cyber Attacks in India: साइबर सिक्योरिटी के मामले में भारत की रैंकिंग कितनी, इस मामले में अमेरिका&amp;यूरोप हमसे कितने आगे?</title>
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        <description><![CDATA[ Cyber Attacks in India:&amp;nbsp;इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) के ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी इंडेक्स (जीसीआई) 2024 में भारत को शीर्ष टियर 1 यानी रोल-मॉडलिंग देशों की श्रेणी में रखा गया था, जहां भारत ने 100 में से 98.49 का अच्छा स्कोर हासिल किया था. कानूनी, तकनीकी और संगठनात्मक मोर्चों पर कड़े कदम उठाने के कारण कागजी तौर पर भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शुमार है.
वहीं, इसके उलट वर्ल्ड साइबर क्राइम इंडेक्स और अन्य वैश्विक रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत साइबर क्रिमिनल्स के निशाने पर रहने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश भी है. जमीनी स्तर पर हर हफ्ते भारतीय संगठनों को औसतन 3000 से अधिक साइबर हमलों का सामना करना पड़ता है.&amp;nbsp;
सीबीएसई के पोर्टल में सेंध
भारत की डिजिटल सुरक्षा की इस जमीनी हकीकत और बुनियादी कमियों की पोल तब खुल गई जब हाल ही में सीबीएसई के री-इवैल्युएशन पोर्टल पर मैलिसियस अटैक हुआ. इस साइबर हमले के कारण पोर्टल के पेमेंट गेटवे में सेंध लगी और लगभग 50 छात्रों को सिस्टम का अनऑथराइजड एक्सेस मिल गया. जिसके कारण पोर्टल पर फीस की राशि में भारी गड़बड़ी देखने को मिली, जहां प्रति विषय फीस 1 रुपये से लेकर 68000 रुपये तक दिखाई देने लगी.
वहीं, इससे पहले एक 19 वर्षीय एथिकल हैकर ने भी सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पोर्टल में हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड और कमजोर लॉगिन सिस्टम जैसी बेहद गंभीर खामियों का खुलासा किया था. हालांकि बोर्ड ने लाइव डेटा लीक से इनकार किया है, लेकिन इस घटना के बाद केंद्र सरकार को तुरंत आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट्स को सिस्टम के टेक्निकल ऑडिट और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैनात करना पड़ा. इस घटना से पता चलता है कि हमारे महत्वपूर्ण सरकारी और शैक्षणिक डेटाबेस कितने सेंसिटिव हैं.
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अमेरिका और यूरोपीय देश कितने एडवांस?
साइबर सुरक्षा के कड़े नियम और नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के मामले में अमेरिका और &amp;nbsp;यूरोपीय देश भारत से काफी आगे हैं.
बजट और एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर: अमेरिका जो जीसीआई में पहला स्थान रखता है और ब्रिटेन जैसे देश अपने कुल आईटी बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल साइबर सुरक्षा और एआई से चलने वाले डिफेंस सिस्टम पर खर्च करते हैं.&amp;nbsp;
कड़े डेटा कानून: यूरोप का जीडीपीआर (जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन) दुनिया का सबसे सख्त डेटा प्राइवेसी कानून है. वहां डेटा लीक होने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगता है, जिससे वे सुरक्षा से समझौता नहीं करती हैं.&amp;nbsp;
जमीनी जागरूकता: पश्चिमी देशों में सरकारी विभागों से लेकर छोटे व्यवसायों तक जीरो-ट्रस्ट सुरक्षा आर्किटेक्चर और सिक्योर कोडिंग को अनिवार्य माना जाता है. इसके उलट, भारत ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट(डीपीडीपीए) जैसे कानून तो बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू होना अभी बाकी है.
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        <media:keywords>Cyber, Attacks, India:, साइबर, सिक्योरिटी, के, मामले, में, भारत, की, रैंकिंग, कितनी, इस, मामले, में, अमेरिका-यूरोप, हमसे, कितने, आगे</media:keywords>
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        <title>WhatsApp का नया धमाका! अब सिर्फ सेकेंडों में करें Log Out, चैट्स भी नहीं होंगी गायब</title>
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        <description><![CDATA[ Whatsapp New Feature: अगर आप भी कभी WhatsApp से कुछ समय का ब्रेक लेना चाहते हैं लेकिन चैट्स और सेटिंग्स खोने के डर से ऐसा नहीं कर पाते, तो जल्द ही आपकी यह परेशानी खत्म हो सकती है. Meta के स्वामित्व वाला इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अब एक नए Logout फीचर पर काम कर रहा है जिसकी मदद से यूजर्स ऐप से साइन आउट कर सकेंगे, वो भी बिना चैट्स या डेटा हटाए.
बीटा वर्जन में दिखा नया फीचर
इस फीचर की जानकारी WABetaInfo की एक रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह फीचर WhatsApp Beta for Android वर्जन 2.26.21.9 में देखा गया है. फिलहाल इसे कुछ बीटा टेस्टर्स के लिए जारी किया गया है और आने वाले महीनों में इसे सभी यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp अब ऐसा विकल्प देने जा रहा है जिसमें यूजर ऐप को हटाए बिना सीधे लॉगआउट कर सकेंगे और उनका पूरा डेटा फोन में सुरक्षित रहेगा.
अब तक क्या थी परेशानी?
अभी तक WhatsApp में कोई आधिकारिक Logout ऑप्शन मौजूद नहीं है. यदि कोई यूजर कुछ समय के लिए ऐप से दूरी बनाना चाहता था तो उसे मजबूरी में ऐप अनइंस्टॉल करना पड़ता था. इसके बाद दोबारा WhatsApp इस्तेमाल करने के लिए ऐप डाउनलोड करना, नंबर वेरिफाई करना और चैट बैकअप रीस्टोर करना पड़ता था. लगातार नोटिफिकेशन और मैसेज से परेशान यूजर्स के लिए यह प्रक्रिया काफी झंझट भरी साबित होती थी.
कैसे काम करेगा नया Logout फीचर?
नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp सेटिंग्स के Account सेक्शन में Logout का विकल्प दिया जाएगा. जब यूजर इस ऑप्शन पर टैप करेगा तो पहले एक कन्फर्मेशन स्क्रीन दिखाई देगी. इसके बाद अकाउंट डिवाइस से अस्थायी रूप से डिस्कनेक्ट हो जाएगा. सबसे खास बात यह है कि इस दौरान चैट्स, मीडिया फाइल्स और अकाउंट सेटिंग्स फोन में सुरक्षित रहेंगी. यानी जब भी यूजर वापस आना चाहेगा, वह आसानी से लॉगिन करके वहीं से बातचीत शुरू कर सकेगा जहां छोड़ी थी.
डिजिटल डिटॉक्स चाहने वालों के लिए राहत
आजकल कई लोग सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स से थोड़ी दूरी बनाकर मानसिक शांति चाहते हैं. ऐसे में WhatsApp का यह फीचर काफी उपयोगी साबित हो सकता है. यूजर्स बिना डेटा खोए कुछ समय के लिए ऐप से दूर रह सकेंगे और बाद में आसानी से वापसी कर पाएंगे.
WhatsApp में पहले से मौजूद हैं ये खास फीचर्स
WhatsApp पहले ही एक फोन में दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. इससे पर्सनल और ऑफिस अकाउंट को आसानी से अलग रखा जा सकता है. इसके अलावा, प्राइवेसी बढ़ाने के लिए App Lock फीचर भी मौजूद है, जिसमें फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या पासकोड के जरिए चैट्स को सुरक्षित रखा जा सकता है.
छोटा बदलाव लेकिन बड़ा असर
देखने में यह फीचर छोटा लग सकता है लेकिन करोड़ों WhatsApp यूजर्स के लिए यह काफी काम का साबित हो सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जो बार-बार नोटिफिकेशन से परेशान रहते हैं या कुछ समय के लिए डिजिटल दुनिया से दूरी बनाना चाहते हैं. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो आने वाले समय में WhatsApp छोड़ना और दोबारा वापसी करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>WhatsApp, का, नया, धमाका, अब, सिर्फ, सेकेंडों, में, करें, Log, Out, चैट्स, भी, नहीं, होंगी, गायब</media:keywords>
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        <title>क्या आपके घर या ऑफिस में लगा है ये WiFi CCTV Camera? एक गलती से लीक हो सकता है आपका पूरा पर्सनल डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ WiFi CCTV Camera: अगर आपने अपने घर, दुकान या ऑफिस में CP Plus का WiFi CCTV कैमरा लगाया हुआ है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. भारत की सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसी ने इन कैमरों में एक गंभीर सुरक्षा खामी को लेकर चेतावनी जारी की है. इस कमजोरी की वजह से यूजर्स का संवेदनशील डेटा खतरे में पड़ सकता है.
साइबर एजेंसी ने जारी की चेतावनी
भारत की साइबर सुरक्षा संस्था CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) के अनुसार, कुछ CP Plus WiFi कैमरों में ऐसा सिक्योरिटी बग मिला है जिससे हैकर्स डिवाइस के अंदर मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं. इसमें WiFi पासवर्ड, एन्क्रिप्शन डेटा और नेटवर्क से जुड़ी दूसरी जरूरी जानकारी शामिल हो सकती है.
एजेंसी का कहना है कि इस कमजोरी का फायदा उठाकर कोई भी व्यक्ति कैमरे और उससे जुड़े वायरलेस नेटवर्क की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है.
कैसे हो सकता है डेटा चोरी?
रिपोर्ट के मुताबिक, कैमरे की मेमोरी में सेव संवेदनशील डेटा को सही तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया है. अगर किसी को कैमरे तक फिजिकल एक्सेस मिल जाता है तो वह डिवाइस से WiFi क्रेडेंशियल्स, सिक्योरिटी कीज़ और कॉन्फिगरेशन डिटेल्स निकाल सकता है. इसका मतलब है कि हमलावर यह समझ सकता है कि कैमरा नेटवर्क से कैसे कनेक्ट होता है और फिर उस जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकता है.
यूजर्स के लिए क्यों खतरनाक है यह खामी?
CERT-In ने चेतावनी दी है कि इस सिक्योरिटी समस्या की वजह से कई बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं जैसे

WiFi यूजरनेम और पासवर्ड लीक होना
कैमरा और नेटवर्क के बीच होने वाले एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन तक पहुंच
नेटवर्क की निजी जानकारी चोरी होना
हैकर्स द्वारा नेटवर्क का गलत इस्तेमाल

किन CP Plus कैमरों पर है खतरा?
यह चेतावनी उन CP Plus WiFi कैमरा मॉडल्स के लिए जारी की गई है जो v02.21.031 या उससे पुराने फर्मवेयर पर चल रहे हैं.
प्रभावित मॉडल्स की लिस्ट-
CP-E38Q
CP-E48Q
CP-E25Q
CP-E35Q
CP-E45Q
CP-E28Q
CP-E21Q
CP-E31Q
CP-E41Q
CP-E24Q
CP-Z43Q
CP-E34Q
CP-E44Q
CP-T31Q
CP-V48Q
CP-V41Q
CP-Z45Q
तुरंत करें यह काम
सभी CP Plus यूजर्स को सलाह दी गई है कि वे अपने कैमरे को तुरंत अपडेट करें. कंपनी ने इस समस्या को ठीक करने के लिए नया फर्मवेयर v02.21.041 जारी किया है. यूजर्स Ezykam+ मोबाइल ऐप के जरिए OTA (Over-The-Air) अपडेट ऑप्शन का इस्तेमाल करके कैमरे को आसानी से अपडेट कर सकते हैं.

सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये टिप्स
कैमरे का फर्मवेयर हमेशा अपडेट रखें
मजबूत और अलग WiFi पासवर्ड इस्तेमाल करें
अनजान लोगों को कैमरे तक फिजिकल एक्सेस न दें
समय-समय पर कैमरे की सिक्योरिटी सेटिंग्स चेक करें
डिफॉल्ट पासवर्ड तुरंत बदल दें.

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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Government Data Leak: सरकारी संस्था से डेटा लीक होने पर क्या कानूनी अधिकार, जानें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियम</title>
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        <description><![CDATA[ Government Data Leak: सीबीएसई के लाखों छात्रों के लिए शुरू किया गया री-इवैल्यूएशन पोर्टल अचानक चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल] सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर सामने आई साइबर सुरक्षा चूक ने लाखों छात्रों और पेरेंट्स के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार,&amp;nbsp; पोर्टल के पेमेंट सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी और कथित साइबर हमले के बाद कुछ छात्रों को सिस्टम पर अनधिकृत पहुंच मिल गई थी. इसके चलते कई मामलों में री-इवैल्यूएशन फीस की राशि सामान्य रकम की जगह एक रुपये से लेकर 67 से 68 हजार तक दिखाई देने लगी. मामले के सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री, तकनीकी एक्सपर्ट्स और सरकारी संस्थाओं ने जांच शुरू कर दी है.
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर किसी सरकारी संस्था, बोर्ड, यूनिवर्सिटी या सरकारी पोर्टल से नागरिकों का डेटा लीक हो जाए या डाटा सुरक्षा में चूक हो जाए तो आम लोगों के पास क्या कानूनी अधिकार हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सरकारी संस्था से डेटा लीक होने पर क्या कानूनी अधिकार है और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियम क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम 2023 भारत का पहला व्यापक डेटा संरक्षण कानून है. इसे अगस्त 2023 में संसद से मंजूरी मिली थी, जबकि इसके नियमों को बाद में अधिसूचित किया गया. इस कानून का उद्देश्य नागरिकों के डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्था या कंपनी लोगों की पर्सनल जानकारी का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना न कर सके. मोबाइल नंबर, आधार नंबर, बैंकिंग जानकारी, ईमेल आईडी, ऑनलाइन रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल व्यक्तिगत जानकारियां इस कानून के दायरे में आती है.&amp;nbsp;
डेटा लीक होने पर नागरिकों को क्या मिलते हैं अधिकार?&amp;nbsp;
कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को अपने डेटा पर नियंत्रण का अधिकार दिया गया है. यदि किसी सरकारी संस्था, कंपनी या डिजिटल प्लेटफार्म से उसका डेटा लीक होता है तो संबंधित व्यक्ति कई तरह के अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है. नागरिक यह जान सकते हैं कि उनका डेटा किस उद्देश्य से एकत्रित किया गया और उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है. इसके अलावा वे अपने डेटा में सुधार, अपडेट या उसे हटाने की मांग भी कर सकते हैं. किसी डेटा उल्लंघन की स्थिति में प्रभावित लोगों को उसकी जानकारी देना भी संबंधित संस्था की जिम्मेदारी होगी. नियमों के अनुसार, डेटा उल्लंघन होने पर संबंधित संस्था को बिना अनावश्यक देरी के प्रभावित व्यक्तियों को सूचना देनी होगी. सूचना में यह बताना जरूरी होगा कि डेटा लीक कैसे हुआ, उससे क्या संभावित असर पड़ सकता है और &amp;nbsp;समस्या को दूर करने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं.&amp;nbsp;
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किन संस्थाओं पर लागू होता है कानून?&amp;nbsp;
यह कानून सभी संस्थाओं पर लागू होता है जो भारतीय नागरिकों का डिजिटल डाटा एकत्र करती है या उसका उपयोग करती है. &amp;nbsp;इसमें सरकारी विभाग, बैंक, हॉस्पिटल, एजुकेशन इंस्टीट्यूट, ई-कॉमर्स प्लेटफार्म, मोबाइल ऐप और प्राइवेट कंपनियां शामिल है. कानून भारत के बाहर मौजूद संगठनों पर भी लागू हो सकता है, जो भारतीय नागरिकों को सेवा प्रदान करते हैं और उनका डेटा प्रोसेस करते हैं.&amp;nbsp;
डेटा लीक पर कितना लग सकता है जुर्माना?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटक्शन एक्ट में डेटा सुरक्षा को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं. अगर कोई संस्था डेटा सुरक्षा उपाय लागू करने में विफल रहती है और इसके कारण डेटा उल्लंघन होता है तो उस पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं डेटा उल्लंघन की जानकारी समय पर न देने या बच्चों से संबंधित डेटा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर 200 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सजा का प्रावधान है. अन्य प्रकार के उल्लंघनों के लिए भी भारी जुर्माना का प्रावधान रखा गया है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Government, Data, Leak:, सरकारी, संस्था, से, डेटा, लीक, होने, पर, क्या, कानूनी, अधिकार, जानें, डिजिटल, पर्सनल, डेटा, प्रोटेक्शन, एक्ट, के, नियम</media:keywords>
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        <title>Tech Tips: रातभर AC चलाने पर भी नहीं बढ़ेगा Bill! जानिए 7 स्मार्ट Cooling Hacks</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: इस समय बाहर निकलना ऐसा लग रहा है जैसे सीधे गर्म हवा के ब्लोअर के सामने खड़े हों. कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है और ऐसे में AC अब लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत बन गया है. लेकिन दिनभर AC चलाने का सीधा असर बिजली बिल पर पड़ता है. अच्छी बात यह है कि हर समय AC को 16 डिग्री पर चलाना जरूरी नहीं होता. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप कमरे को ठंडा भी रख सकते हैं और बिजली की खपत भी कम कर सकते हैं.
कमरे को पूरी तरह बंद रखें
कई लोग AC चलाते समय दरवाजे या खिड़कियां ठीक से बंद नहीं करते. छोटे-छोटे गैप से भी ठंडी हवा बाहर निकलती रहती है जिससे AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. अगर कमरा अच्छी तरह सील रहेगा तो कूलिंग ज्यादा देर तक बनी रहेगी और बिजली की बचत भी होगी.
समय पर AC सर्विस जरूर कराएं
अगर AC की लंबे समय से सर्विस नहीं हुई है तो उसकी कूलिंग क्षमता कम हो जाती है और बिजली की खपत बढ़ जाती है. गंदे कॉइल, जाम पाइप या कम गैस जैसी समस्याएं मशीन पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं. गर्मी शुरू होने से पहले सर्विस कराना बेहतर माना जाता है. कोशिश करें कि काम अधिकृत टेक्नीशियन से ही करवाएं.
सही तापमान पर AC चलाएं
बहुत से लोगों को लगता है कि AC को 16 या 18 डिग्री पर सेट करने से कमरा जल्दी ठंडा हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं होता. विशेषज्ञों के अनुसार 24 डिग्री का तापमान ज्यादातर घरों के लिए सबसे बेहतर और बिजली बचाने वाला माना जाता है. इससे कमरा आरामदायक रहता है और कंप्रेसर पर भी कम दबाव पड़ता है.
AC के फिल्टर नियमित साफ करें
धूल, मिट्टी और प्रदूषण की वजह से AC के फिल्टर जल्दी गंदे हो जाते हैं. जब फिल्टर जाम होने लगते हैं तो एयरफ्लो कम हो जाता है और AC को ज्यादा बिजली खर्च करनी पड़ती है. हर कुछ हफ्तों में फिल्टर साफ करने से कूलिंग बेहतर होती है और बिजली बिल भी कम आता है.
AC के साथ पंखा भी चलाएं
कई लोग इसे नजरअंदाज करते हैं लेकिन ceiling fan AC की ठंडी हवा को पूरे कमरे में तेजी से फैलाने में मदद करता है. इससे कमरा जल्दी ठंडा होता है और AC को लगातार तेज मोड पर चलाने की जरूरत नहीं पड़ती. हल्की फैन स्पीड भी काफी असर दिखा सकती है.
रात में Sleep Timer का इस्तेमाल करें
आजकल ज्यादातर AC में sleep timer का फीचर मिलता है लेकिन बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. सोने के बाद 1 या 2 घंटे का timer सेट करने से रातभर बेवजह बिजली खर्च नहीं होती और सुबह तक कमरा भी आरामदायक बना रहता है.
जरूरत न हो तो AC पूरी तरह बंद करें
अगर AC इस्तेमाल नहीं हो रहा है तो उसे सिर्फ रिमोट से बंद छोड़ने की बजाय मेन स्विच से भी ऑफ कर दें. Standby mode में भी थोड़ी-बहुत बिजली खर्च होती रहती है जो लंबे समय में बिल बढ़ा सकती है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>UPI यूज करते हैं? अभी ऑन करें ये सेटिंग, वरना एक क्लिक में खाली हो सकता है अकाउंट</title>
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        <description><![CDATA[ UPI Tips: आज भारत में करोड़ों लोग रोजाना UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं. बिजली बिल भरने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और पैसे ट्रांसफर करने तक, हर काम कुछ सेकंड में हो जाता है. लेकिन तेज और आसान पेमेंट के साथ साइबर फ्रॉड का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है. खासकर Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे ऐप्स पर फर्जी पेमेंट रिक्वेस्ट और स्कैम के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. ऐसे में UPI ऐप के अंदर मौजूद एक छोटी लेकिन बेहद जरूरी सेटिंग आपकी पेमेंट सुरक्षा को काफी मजबूत बना सकती है. हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोग इस फीचर के बारे में जानते ही नहीं हैं.
कैसे होता है UPI फ्रॉड?
UPI स्कैम में अक्सर हैकर्स सीधे बैंक अकाउंट नहीं तोड़ते. इसके बजाय वे लोगों को झांसे में लेकर खुद ही पैसे ट्रांसफर करवाते हैं. कई बार यूजर्स Collect Request को पैसे मिलने वाला मैसेज समझ लेते हैं जबकि असल में उसे मंजूर करने पर पैसे उनके खाते से कट जाते हैं. इसी गलती की वजह से हजारों लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं.
UPI ऐप में छिपी है ये जरूरी सुरक्षा सेटिंग
अधिकतर UPI ऐप्स में कुछ ऐसे सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं जिन्हें यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से कंट्रोल कर सकता है. हालांकि हर ऐप में इनका नाम अलग हो सकता है लेकिन काम लगभग एक जैसा होता है. इन सेटिंग्स को ऑन करने से फर्जी रिक्वेस्ट, गलत ट्रांसफर और ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा काफी कम हो सकता है.
तुरंत ऑन करें ये 4 जरूरी फीचर्स
बायोमेट्रिक लॉक या ऐप लॉक चालू करें
फिंगरप्रिंट या फेस लॉक लगाने से कोई दूसरा व्यक्ति आपकी अनुमति के बिना पेमेंट नहीं कर पाएगा.
Payment Request नोटिफिकेशन बंद न करें
अगर कोई आपके पास फर्जी पेमेंट रिक्वेस्ट भेजता है तो नोटिफिकेशन के जरिए तुरंत पता चल जाएगा.
पैसे भेजने से पहले नाम जरूर जांचें
किसी भी रिक्वेस्ट को मंजूर करने से पहले सामने वाले का नाम और UPI ID ध्यान से पढ़ें.
Daily Transaction Limit कम रखें
अगर ऐप में यह विकल्प मौजूद है तो रोजाना ट्रांजैक्शन लिमिट कम सेट करें. इससे फ्रॉड होने पर बड़ा नुकसान होने से बच सकता है.
QR Code और Reward Scam से रहें सावधान
आजकल स्कैमर्स नकली रिफंड, कैशबैक और रिवॉर्ड के नाम पर QR Code या लिंक भेजते हैं. कई लोग जल्दबाजी में उन्हें स्कैन कर लेते हैं और उनके खाते से पैसे कट जाते हैं. NPCI भी बार-बार चेतावनी दे चुका है कि किसी अनजान व्यक्ति की Payment Request कभी मंजूर न करें और अपना UPI PIN किसी के साथ साझा न करें चाहे सामने वाला खुद को बैंक कर्मचारी ही क्यों न बताए.
एक छोटी सावधानी बचा सकती है बड़ा नुकसान
UPI ने डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है लेकिन छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है. इसलिए अगली बार पेमेंट करने से पहले अपने UPI ऐप की सुरक्षा सेटिंग्स जरूर जांच लें. सिर्फ एक मिनट की सावधानी आपके बैंक खाते को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Bluetooth का नाम आखिर किस राजा पर रखा गया? 99% लोग देते हैं गलत जवाब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bluetooth-का-नाम-आखिर-किस-राजा-पर-रखा-गया-99-लोग-देते-हैं-गलत-जवाब</link>
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        <description><![CDATA[ Bluetooth: आज Bluetooth हमारे स्मार्टफोन, लैपटॉप, ईयरबड्स, स्मार्टवॉच और कारों का अहम हिस्सा बन चुका है. हर दिन करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि Bluetooth नाम किसी तकनीकी शब्द से नहीं बल्कि एक वास्तविक राजा के नाम से जुड़ा हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर लोग इसका सही जवाब नहीं दे पाते.
आखिर किस राजा के नाम पर रखा गया Bluetooth?
Bluetooth का नाम 10वीं शताब्दी के Scandinavian (डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे) राजा के नाम पर रखा गया था. जानकारी के अनुसार, राजा Harald Bluetooth Gormsson के नाम ही ब्लूटूथ का नाम रखा गया था. इन्होंने 958 से 985 तक डेनमार्क और नॉर्वे पर राज किया था. बता दें कि यह राजा डेनमार्क और नॉर्वे के कुछ हिस्सों को एकजुट करने के लिए प्रसिद्ध था. इतिहासकारों के अनुसार, राजा हेराल्ड ने अलग-अलग जनजातियों और क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने का काम किया था. इसी वजह से जब एक नई वायरलेस तकनीक विकसित की जा रही थी तो उसके इंजीनियरों को लगा कि यह तकनीक भी विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को आपस में जोड़ने का काम करेगी. इसलिए इसका नाम Bluetooth रखा गया.
Bluetooth नाम का मतलब क्या है?
राजा Harald को Bluetooth उपनाम मिला हुआ था. माना जाता है कि उनके एक दांत का रंग गहरा नीला या काला दिखाई देता था जिसकी वजह से उन्हें Bluetooth कहा जाने लगा. हालांकि इतिहास में इसके पीछे अलग-अलग कहानियां मिलती हैं लेकिन यही उपनाम बाद में दुनिया की सबसे लोकप्रिय वायरलेस तकनीकों में से एक का नाम बन गया.
तकनीक और इतिहास का अनोखा मेल
1990 के दशक में जब कई कंपनियां मिलकर एक शॉर्ट-रेंज वायरलेस कम्युनिकेशन स्टैंडर्ड पर काम कर रही थीं, तब Intel के एक इंजीनियर ने इस नाम का सुझाव दिया था. उस समय यह केवल एक अस्थायी कोडनेम माना जा रहा था. बाद में जब अंतिम नाम चुनने की बारी आई तो Bluetooth इतना लोकप्रिय हो चुका था कि इसे ही स्थायी नाम बना दिया गया.
Bluetooth का लोगो भी छिपाता है राज
क्या आपने कभी Bluetooth के लोगो को ध्यान से देखा है? इसका प्रतीक कोई साधारण डिजाइन नहीं है. यह नॉर्डिक रूनिक अक्षरों का संयोजन है, जो राजा Harald Bluetooth के नाम के शुरुआती अक्षरों H और B को दर्शाता है. यानी Bluetooth का नाम ही नहीं, बल्कि उसका लोगो भी सीधे उस ऐतिहासिक राजा से जुड़ा हुआ है.
क्यों है यह जानकारी खास?
अधिकांश लोग मानते हैं कि Bluetooth का संबंध किसी तकनीकी शब्द, रंग या वैज्ञानिक अवधारणा से होगा. लेकिन सच्चाई यह है कि इसका नाम एक ऐसे राजा के सम्मान में रखा गया था जिसने लोगों और क्षेत्रों को जोड़ा था. ठीक उसी तरह Bluetooth आज दुनिया भर में अरबों डिवाइसों को आपस में जोड़ने का काम करता है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Ac Blast Reason: दिल्ली में फिर AC Blast, गर्मी में किस वजह से फटता है एसी, ऐसे करें देखभाल?</title>
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        <description><![CDATA[ Ac Blast Reason: दिल्ली में फिर AC Blast, गर्मी में किस वजह से फटता है एसी, ऐसे करें देखभाल? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Online Gaming करते हैं तो आपके फोन में जरूर होनी चाहिए यह चीज, बड़े खतरों से बचा देगी</title>
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        <description><![CDATA[ VPN For Online Gaming: स्कूल-कॉलेज या ऑफिस से लौटने के बाद घर पर ऑनलाइन गेमिंग का अपना मजा है. आप चाहें तो अकेले इसके मजे ले सकते हैं या फिर अपने दोस्तों को भी इन्वाइट कर सकते हैं. हालांकि, ऑनलाइन गेमिंग करते समय कुछ सावधानी बरतना भी जरूरी है. दरअसल, पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन गेमिंग पूरी तरह बदल गई है. अब बाकी चीजों के साथ-साथ ऑनलाइन सेफ्टी का भी ध्यान रखना पड़ता है. इसलिए ऑनलाइन गेमिंग के शौकीनों के फोन में VPN होना जरूरी हो गया है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि ऑनलाइन गेमिंग के लिए VPN के कितने फायदे हैं.
क्या होता है VPN?
VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क इंटरनेट कनेक्शन को सेफ बनाता है. इससे आपकी ऑनलाइन इंफोर्मेशन एक कोडेड फॉर्म में बदल जाती है, जिसे हैक करना बहुत मुश्किल होता है. इसके अलावा VPN से आपका असली IP Address छिप जाता है और उसकी जगह VPN सर्वर का IP दिखने लगता है.
Online Gaming में VPN के फायदे
इंटरनेट कनेक्शन नहीं होता स्लो- VPN का एक बड़ा फायदा है कि यह IP एड्रेस को मास्क कर देता है और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) आपकी गेमिंग एक्टिविटी का पता नहीं लगा पाते. कई बार पीक ऑवर्स के दौरान अगर सर्विस प्रोवाइडर को गेमिंग एक्टिविटी का पता चलता है कि वो इंटरनेट ट्रैफिक को थोड़ा स्लो कर सकते हैं. VPN आपको इससे बचा लेता है.
सिक्योरिटी की चिंता करता है दूर- सिक्योरिटी रीजन के लिए VPN यूज करना बहुत जरूरी है. खासकर अगर आप इंटरनेट कैफे या पब्लिक वाईफाई से अपना डिवाइस कनेक्ट कर गेमिंग करते हैं तो आपके डिवाइस में VPN होना ही चाहिए. दरअसल, गेमिंग अकाउंट से आपकी ईमेल आईडी, पासवर्ड और पेमेंट इंफोर्मेशन भी जुड़ी होती है और स्कैमर इस पर नजर रखते हैं. VPN यूज कर आप अपने कनेक्शन को एनक्रिप्ट कर सकते हैं, जिससे डेटा और इंफोर्मेशन चुराना मुश्किल हो जाता है.
ब्लॉक सर्विस का भी उठाया जा सकता है फायदा- VPN आपके IP एड्रेस को चेंज कर देता है, जिससे ऐसा लगता है कि आप किसी दूसरी जगह से इंटरनेट एक्सेस कर रहे हैं. इस कारण किसी इलाके में ब्लॉक गेम या सर्विसेस को एक्सेस किया जा सकता है.
यह बात ध्यान रखना है जरूरी
VPN भले ही आपके IP एड्रेस को बदल और ट्रैफिक को एनक्रिप्ट कर देता है, लेकिन यह फुलप्रूफ नहीं होता. इसकी मदद से आप इंटरनेट पर इनविजिबल नहीं हो सकते. VPN यूज करने के बाद भी वेबसाइट कूकीज के जरिए आपको ट्रैक कर सकती है और जिस अकाउंट से आप लॉग-इन है, उसकी एक्टिविटी भी हाइड नहीं होती. इसलिए यह मानकर न चलें कि VPN आपको अदृश्य बना देगा.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>फोन GPS बंद होने पर भी चल सकता है आपकी लोकेशन का पता, ये तरीके आते हैं काम</title>
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        <description><![CDATA[ Location Tracking: कई स्मार्टफोन यूजर्स को लगता है कि GPS बंद करने से लोकेशन ट्रैकिंग भी बंद हो सकती है. भले ही आप अपने डिवाइस का GPS बंद कर दें, लेकिन आप लोकेशन ट्रैकिंग को पूरी तरह बंद नहीं कर सकते. GPS के अलावा भी बहुत ऐसे तरीके हैं, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि आप किस शहर की किस जगह पर खड़े हैं. अगर आप इंटरनेट यूज नहीं करते हैं तब भी लोकेशन का पता लगाने के कई तरीके मौजूद हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही तरीके बताने जा रहे हैं, जिससे लोकेशन ट्रैक की जा सकती है.&amp;nbsp;
लोकेशन बंद होने के बाद कैसे ट्रैकिंग होती है?
अगर आप फोन की लोकेशन को बंद करके यह सोच रहे हैं कि आपकी जगह का पता नहीं चलेगा तो आप गलत हैं. जियोलोकेशन के तरीके से आपकी जगह को एकदम पिनप्वाइंट किया जा सकता है. जियोलोकेशन के कई सिस्टम हैं, जिनके बारे में आप नीचे पढ़ेंगे.
मोबाइल टावर- आपके मोबाइल में नेटवर्क पहुंचाने वाले टावर आपकी लोकेशन का पता लगा सकते हैं. आप जिस कंपनी की सिम यूज करते हैं, वह सेल टावर की मदद से पता कर सकती है कि आप कहां खड़े हैं. इसके लिए आपके सबसे नजदीकी तीन मोबाइल टावर का यूज किया जाता है. इमरजेंसी और कानूनी मामलों में अकसर इस तरीके का इस्तेमाल होता है.&amp;nbsp;
वाईफाई नेटवर्क- सभी स्मार्टफोन में वाईफाई चिप लगी होती है. जगह-जगह लगे वाईफाई राउटर और ओपन कनेक्शन इससे कनेक्ट होने के लिए लगातार सिग्नल भेजते रहते हैं. जब आपका फोन इन कनेक्शन में से किसी के साथ कनेक्ट होता है तो उससे भी आपकी लोकेशन का पता चल सकता है.
IP एड्रेस- अगर आप VPN के बिना इंटरनेट यूज करते हैं तो IP एड्रेस से आपकी लोकेशन पता चल सकती है. हालांकि, यह सटीक लोकेशन डिस्क्लोज नहीं करता है, लेकिन शहर के नाम और सर्विस प्रोवाइडर आदि की इंफोर्मेशन पता की जा सकती है.
स्टॉकरवेयर- बाकी तरीकों के अलावा स्टॉकरवेयर से भी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है. ये एक तरह के स्पाईवेयर या मालवेयर होते हैं, जिन्हें यूजर की एक्टिविटी को इंटरसेप्ट करने के लिए डिजाइन किया जाता है. एक बार यूजर के फोन में इंस्टॉल होने के बाद ये मैसेज, ऐप्स और डेटा के साथ-साथ लोकेशन की भी एक्सेस हासिल कर सकते हैं. 2023 में हजारों यूजर्स को इस तरह के स्टॉकरवेयर से टारगेट किया गया था.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube पर दिखेंगे सिर्फ आपकी पसंद के वीडियो, ऐसे बनाएं अपनी मर्जी का फीड</title>
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        <description><![CDATA[ How To Customize YouTube Feed: कई बार यूट्यूब ओपन करने के बाद अनगिनत वीडियो अवेलेबल होने के बाद भी लगता है कि इस पर देखने लायक कुछ नहीं है. ऐसा तब ज्यादा होता है, जब यूट्यूब का एल्गोरिदम आपकी पसंद के वीडियो सजेस्ट नहीं करता. इस कारण फीड पर आने वाले किसी भी वीडियो पर टैप करने का मन नहीं होता. हालांकि, अब जल्द ही इस झंझट से मुक्ति मिलने की उम्मीद है. गूगल ने यूट्यूब के लिए एक नए फीचर का ऐलान किया है, जो यूजर को अपना यूट्यूब फीड कस्टमाइज करने का ऑप्शन देगा. आइए जानते हैं कि यह फीचर कैसे काम करेगा.
कैसे काम करेगा नया फीचर?
इस फीचर को &#039;योर कस्टम फीड&#039; नाम दिया गया है. इसमें प्रॉम्प्ट देने पर यूट्यूब यूजर की रिक्वेस्ट के आधार पर एक वीडियो फीड जनरेट कर देगी. यह फीड यूजर को यूट्यूब के होम पेज पर नजर आएगा. फिलहाल इस फीचर को रोल आउट किया जा रहा है और अमेरिका से इसकी शुरुआत हुई है. अगर अभी यह आपकी फीड पर नहीं आया है तो थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. माना जा रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में इसे सारे यूजर्स के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा.
YouTube पर कैसे देखें केवल अपनी पसंद के वीडियो?
यह नया फीचर एआई की मदद से काम करेगा. इसमें यूजर को स्पेसिफिक या मोटे-तौर पर आइडिया वाला प्रॉम्प्ट एंटर करना होगा. गूगल भी इसमें यूजर की मदद करेगी. इस फीचर को इनेबल करने के लिए यूट्यूब होम पेज के टॉप पर नजर आने वाली कस्टम योर फीड को सेलेक्ट करना होगा. इसके बाद आपको सजेस्टेड प्रॉम्प्ट दिखेंगे. आप चाहें तो इसमें अपनी मर्जी का प्रॉम्प्ट भी यूज कर सकते हैं. इसके बाद उस प्रॉम्प्ट के आधार पर यूट्यूब आपकी फीड में वीडियो दिखाना शुरू कर देगा. वीडियो पसंद न आने पर आप दोबारा भी प्रॉम्प्ट देकर कस्टम फीड जनरेट करवा पाएंगे.
एआई जनरेटेड कंटेट की पहचान होगी आसान
इस फीचर के साथ-साथ यूट्यूब अपने पहले से मौजूद एक फीचर को एक्सपैंड कर रही है. प्लेटफॉर्म पर एआई कंटेट की बाढ़ को देखते हुए यूट्यूब ने कहा है कि वह एआई जनरेटेड कंटेट वाले वीडियो पर लेबल लगाएगी. कुछ खास कंटेट के लिए यह लेबल परमानेंट होगा और हटाया नहीं जा सकेगा. पहले क्रिएटर के पास एआई कंटेट पर लेबल लगाने का ऑप्शन था. अब अगर क्रिएटर लेबल नहीं लगाता है तो यू्ट्यूब का इंटरनल सिस्टम यह काम कर देगा.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Microwave vs OTG: गर्मियों में खाना बनाने के लिए माइक्रोवेव अच्छा या ओटीजी, जानें किससे कम होगी किचन की गर्मी?</title>
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        <description><![CDATA[ Microwave vs OTG: गर्मियों के मौसम में किचन में कुछ देर खाना बनाना भी मुश्किल लगने लगता है. गैस ऑन होते ही रसोई का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और लंबे समय तक किचन में खड़ा होना ना परेशानी बढ़ा देता है. ऐसे में अब लोग सिर्फ गैस स्टोव ही नहीं बल्कि माइक्रोवेव और ओटीजी जैसे अप्लायंसेज को भी इस नजर से देखने लगे हैं कि आखिर कौन सा ऑप्शन कम गर्मी पैदा करता है और बिजली का बिल भी कम बढ़ता है. खासतौर पर नौतपा और भीषण गर्मी के दौरान यह सवाल और जरूरी हो गया है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि गर्मियों में खाना बनाने के लिए माइक्रोवेव या ओटीजी कौन बेहतर है और इन दोनों में किससे बिजली कम खर्च होती है और किचन में गर्मी भी कम होती है.&amp;nbsp;
माइक्रोवेव कैसे करता है काम?
माइक्रोवेव इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स की मदद से खाना गर्म करता है. यह खाने के अंदर मौजूद पानी और फैट के मॉलिक्यूल्स को तेजी से वाइब्रेट करती है, जिससे खाना अंदर से गर्म होता है. इसी वजह से माइक्रोवेव के इस्तेमाल के दौरान आस पास की हवा ज्यादा गर्मी नहीं होती है. यही कारण है कि माइक्रोवेव में खाना गर्म करने या जल्दी कुछ पकाने के दौरान किचन का तापमान ज्यादा नहीं बढ़ता. बाहरी बाॅडी कम गर्म होती है और छोटे-छोटे काम कुछ ही मिनटों में पूरे हो जाते हैं.&amp;nbsp;
ओटीजी बढ़ा देता है किचन की गर्मी&amp;nbsp;
ओटीजी ओवन टोस्टर ग्रिलर पारंपरिक ओवन की तरह काम करता है. इसमें इलेक्ट्रिक हीटिंग रॉड्स होती है जो काफी ज्यादा गर्म होकर पूरे चैम्बर में ड्राई हीट फैलाती है. &amp;nbsp;बेकिंग या ग्रिलिंग के दौरान ओटीजी लंबे समय तक 150 से 250 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान बनाए रखता है. इसी वजह से ओटीजी का ग्लास डोर, मेटल बॉडी और आसपास की हवा भी धीरे-धीरे गर्म होने लगती है. अगर लंबे समय तक केक, कुकीज या ग्रिल्ड फूड बनाया जाए तो किचन कुछ ही देर में काफी गर्म महसूस होने लगता है.&amp;nbsp;
गर्मियों में सबसे बड़ा फर्क बनता है कुकिंग टाइम&amp;nbsp;
माइक्रोवेव और ओटीजी के बीच सबसे बड़ा अंतर सिर्फ हीटिंग टेक्नोलॉजी का नहीं, बल्कि खाना पकाने लगने वाले समय का भी है. ओटीजी इस्तेमाल करने से पहले आमतौर पर 10 से 15 मिनट तक प्री हीटिंग करनी पड़ती है. इसके बाद खाना में 20 से 45 मिनट तक लग सकते हैं. यानी लंबे समय तक लगातार हीट पैदा होती रहती है. वहीं माइक्रोवेव में प्रीहीटिंग की जरूरत नहीं पड़ती. खाना गर्म करना, सब्जियां स्टीम करना या इंस्टेंट मील तैयार करने जैसे 2 से 10 मिनट में हो जाते हैं . वहीं इसके कम इस्तेमाल होने की वजह से किचन में गर्मी भी कम फैलती है.&amp;nbsp;
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किससे ज्यादा आता है बिजली बिल?
कई लोग सिर्फ वोल्टेज देखकर फैसला करते हैं, लेकिन असल में बिजली की खपत इस बात पर निर्भर करती है कि अप्लायंस कितनी देर तक चलता है. माइक्रोवेव आराम आमतौर पर 1200 वाट से 1400 वाट तक बिजली खपत करता है, लेकिन कुछ मिनट के लिए ही चलता है. दूसरी तरफ ओटीजी का वोल्टेज कई बार कम होता है, लेकिन यह 30 से 60 मिनट तक लगातार चलता रहता है. ऐसे में रोजाना के कामों के लिए माइक्रोवेव ज्यादा एनर्जी एफिशिएंट माना जाता है. वहीं ओटीजी लंबे बेकिंग और ग्रिलिंग सेशन के दौरान ज्यादा बिजली खर्च कर सकता है. इसके अलावा ओटीजी से निकलने वाली एक्स्ट्रा गर्मी की वजह से एसी या कूलर पर भी ज्यादा लोड पड़ता है, जिससे बिजली बिल बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
फिर भी ओटीजी क्यों है जरूरी?&amp;nbsp;
गर्मी में माइक्रोवेव ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन ओटीजी की सबसे बड़ी खासियत उसकी फूड टेक्सचर है. माइक्रोवेव खाने को जल्दी गर्म तो कर देता है, लेकिन कई बार नरम या थोड़ा रबर जैसा महसूस होने लगता है. वहीं ओटीजी ड्राई हीट की मदद से खाने को क्रिस्पी और ब्राउन टेक्सचर देता है. इसी वजह से बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग के लिए ओटीजी आज भी बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>साइबर स्पेस में मचेगी खलबली, Anthropic पब्लिक के लिए लॉन्च करेगी Mythos&amp;class मॉडल</title>
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        <description><![CDATA[ Claude Mythos: साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में तहलका मचा चुका एंथ्रोपिक का Claude Mythos मॉडल काफी समय से चर्चा में है. यह किसी भी सॉफ्टवेयर को हैक कर सकता है. इसकी कैपेबिलिटीज को देखते हुए इसे पब्लिक के लिए लॉन्च नहीं किया गया है, लेकिन जल्द ही यह इंतजार खत्म हो सकता है. कंपनी ने संकेत दिए हैं कि Claude Mythos जैसे मॉडल को जल्द ही पब्लिक के लिए रोलआउट कर दिया जाएगा. अभी कंपनी इसकी तैयारी में जुटी हुई है और अगले कुछ हफ्तों में यह सभी यूजर्स के लिए अवेलेबल हो जाएगा.&amp;nbsp;
कंपनी ने खुद दिए संकेत
गुरुवार को एंथ्रोपिक ने अपग्रेडेड Claude Opus 4.8 मॉडल को लॉन्च किया था. इसकी अनाउंसमेंट में कंपनी ने बताया कि वह Mythos-class मॉडल को लॉन्च करने की तैयारी में है. हालांकि, यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि कंपनी Mythos मॉडल को सबके लिए अवेलेबल कराएगी या Mythos जैसा कोई मॉडल लॉन्च किया जाएगा.
Mythos मॉडल में क्या खास?
एंथ्रोपिक के Mythos मॉडल में एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी कैपेबिलिटीज हैं और यह किसी भी सॉफ्टवेयर में खामियों का पता लगा सकता है. इस कारण साइबर सिक्योरिटी को लेकर चिंताएं भी खड़ी हो गई हैं. एंथ्रोपिक अभी इस मॉडल को सेलेक्टेड कंपनियों के साथ ही टेस्ट कर रही है और इसे पब्लिक के लिए अवेलेबल नहीं करवाया गया है. हाल ही में एंथ्रोपिक ने कहा था कि अभी उस समेत किसी भी कंपनी के पास इस मॉडल को मिसयूज को रोकने का तरीका उपलब्ध नहीं है. इस मॉडल को लेकर दुनियाभर की सरकारें भी चिंतित हैं और भारत समेत कई देशों ने इसकी फेयर एक्सेस की मांग की है. &amp;nbsp;
जरूरी सॉफ्टवेयर में हजारों कमियां निकाल चुका है Claude Mythos
थ्रोपिक का कहना है कि Claude Mythos ने एक महीने में दुनिया के सबसे जरूरी सॉफ्टवेयर में साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी 10,000 से ज्यादा कमियों का पता लगा लिया है. इस मॉडल की एक्सेस वाली कई कंपनियों ने कहा है कि Claude Mythos से कमियों का पता लगाने की रफ्तार 10 गुना बढ़ गई है. इंटरनेट होस्टिंग प्लेटफॉर्म क्लाउडफ्लेयर ने इस मॉडल से अपने क्रिटिकल-पाथ सिस्टम में 2,000 बग्स ढूंढे हैं और इनमें से 400 हाई और क्रिटिकल सेवेयरिटी वाले थे. इसी तरह Mozilla ने फायरफॉक्स में 271 इश्यूज को ढूंढकर फिक्स किया है.&amp;nbsp;
OpenAI और Google भी ले आई ऐसे मॉडल
साइबर सिक्योरिटी स्पेस में Mythos को टक्कर देने के लिए बाकी कंपनियों ने भी एंट्री मार दी है. OpenAI ने इसकी टक्कर में Daybreak मॉडल लॉन्च किया है तो गूगल ने AI Threat Defense मॉडल को इंट्रोड्यूस किया है.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WWDC से पहले ही AI Siri की सारी जानकारी हो गई लीक, जानिये इसमें क्या&amp;कुछ नया मिलेगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/wwdc-से-पहले-ही-ai-siri-की-सारी-जानकारी-हो-गई-लीक-जानिये-इसमें-क्या-कुछ-नया-मिलेगा</link>
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        <description><![CDATA[ AI Siri: ऐप्पल पिछले काफी समय से सिरी अस्सिटेंट के नए वर्जन पर काम कर रही है. इसे 8 जून से शुरू होने वाले WWDC 2026 इवेंट में रिवील किया जा सकता है. अब ताजा लीक में इससे जुड़ी सारी जानकारी सामने आ गई है. लीक के अनुसार, ऐप्पल ने सिरी के पूरे एक्सपीरियंस को ही रिडिजाइन किया है. अब यह एक एआई चैटबॉट की तरह काम करेगा. गूगल और ऐप्पल के बीच हुई पार्टनरशिप के तहत ऐप्पल के इस असिस्टेंट को गूगल के जेमिनी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है. आइए जानते हैं कि नए सिरी में क्या होगा और यह कैसे काम करेगा.
डायनामिक आईलैंड में मूव होगा सिरी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिरी का नया वर्जन डायनामिक आईलैंड में मूव किया जा सकता है. यूजर &#039;सिरी&#039; बोलकर या पावर बटन को प्रेस कर इसे समन कर पाएंगे. साथ ही ऐप्पल इसके लिए एक नया तरीका भी इंट्रोड्यूस कर सकती है, जिससे स्क्रीन के टॉप सेंटर से स्वाइप-डाउन करने से सिरी का सर्च और आस्क का इंटरफेस ओपन हो जाएगा. इस इंटरफेस के सर्च ऑप्शन को एआई पावर्ड बनाया जा रहा है. साथ ही इसमें मौजूदा सिरी सजेशन के साथ नए एआई फोकस्ड फीचर भी मिलेंगे. सर्च और आस्क इंटरफेस से ही यूजर वेब सर्च, ऐप लॉन्च, मैसेज, नोट्स, कैलेंडर अपॉइंटमेंट और ऐप शॉर्टकट आदि को यूज कर सकेंगे.
कैसे काम करेगा नया सिरी?
डायनामिक आईलैंड से सिरी टेक्स्ट कार्ड्स में रिस्पॉन्स देगा. इसे स्वाइप डाउन कर कन्वर्सेशन को डेडिकेटेड सिरी ऐप में ओपन किया जा सकेगा, जहां एक एआई चैटबॉट जैसा इंटरफेस मिलेगा. बताया जा रहा है कि ऐप्पल इसमें चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसी थर्ड-पार्टी सर्विसेस का सपोर्ट भी ऐड करेगी. टेक्स्ट के साथ-साथ यूजर बोलकर, फोटो और डॉक्यूमेंट्स आदि को अपलोड कर इंटरेक्ट कर पाएंगे. नया सिरी ज्यादा कॉन्टेक्स्ट अवेयर भी होगा. यानी यह किसी टास्क को कंप्लीट करने के लिए वेब पर सर्च के साथ-साथ यह भी रीड कर पाएगा कि स्क्रीन पर क्या इंफोर्मेशन है.
ऐप्पल के लिए करो या मरो की स्थिति
एआई के मामले में ऐप्पल बाकी कंपनियों से बहुत पीछे है. दूसरी कंपनियां जहां एक के बाद एक नए एआई फीचर्स ला रही है, वहीं ऐप्पल अभी तक 2024 में अनाउंस किए गए फीचर्स को रोल आउट नहीं कर पाई है. ऐसे में नए सिरी को लेकर ऐप्पल के लिए करो या मरो की स्थिति बनी हुई है. सफल होने पर ऐप्पल टक्कर में जाएगी, वहीं अगर यह एक्सपेरिमेंट कामयाब नहीं रहता है तो कंपनी को यूजर्स की नाराजगी झेलनी पड़ेगी.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>WWDC, से, पहले, ही, Siri, की, सारी, जानकारी, हो, गई, लीक, जानिये, इसमें, क्या-कुछ, नया, मिलेगा</media:keywords>
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        <title>Instagram Plus: इंस्टाग्राम पर भी आ रहा है पेड सब्सक्रिप्शन, पैसे देने पर मिलेंगे ये फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Plus: मेटा अब रेवेन्यू के लिए सिर्फ एड पर डिपेंड नहीं रहता चाहती. कंपनी को लगता है कि एक्स्ट्रा फीचर्स और टूल्स के लिए कुछ लोग पैसे देने को तैयार हैं. इसे देखते हुए कंपनी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स Instagram, Facebook और WhatsApp के पेड सब्सक्रिप्शन रोल आउट करने शुरू कर दिए हैं. पिछले कुछ दिनों से इनकी टेस्टिंग चल रही थी और अब कंपनी ने इन्हें रोल आउट करना शुरू कर दिया है. आज हम जानेंगे कि इंस्टाग्राम के सब्सक्रिप्शन प्लान Instagram Plus में क्या-क्या फीचर्स मिलते हैं और इसके लिए कितनी रकम चुकानी पडे़गी.
Instagram Plus में क्या-क्या मिलेगा?
Instagram Plus खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा काम का है, जो लगातार स्टोरी पोस्ट करते हैं और उन पर ज्यादा कंट्रोल चाहते हैं. यह प्लान लेने पर यूजर देख पाएंगे कि उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी को कितने लोगों ने रीवॉच किया है. उन्हें क्लोज फ्रेंड्स के अलावा भी ऑडियंस लिस्ट क्रिएट करने और स्टोरी को 24 घंटे से ज्यादा समय तक लाइव रखने का भी ऑप्शन मिलेगा. साथ ही उन्हें हफ्ते में एक स्टोरी को स्पॉटलाइट करने का मौका मिलेगा, ताकि इसकी विजिबिलिटी बढ़ सके. बाकी फीचर्स की बात करें तो स्टोरी देखने वालों की लिस्ट में सर्च करने, किसी की व्यूअर लिस्ट में आए बिना स्टोरी देखने और फॉलोवर्स की फीड में पोस्ट किए बिना अपने प्रोफाइल पर पोस्ट करने का भी ऑप्शन मिलेगा.
कस्टमाइजेशन का भी मिलेगा ऑप्शन
Instagram Plus में ऊपर दिए गए फीचर्स के अलावा कस्टमाइजेशन के लिए भी कुछ टूल मिलेगा. पेड सब्सक्राइबर ऐप आइकन को कस्टम कर सकेंगे. उन्हें एनिमेटेड सुपर हार्ट रिएक्शन और ज्यादा प्रोफाइल पिन्स का भी ऑप्शन मिलेगा. इस तरह देखा जाए को कस्टमाइजेश और स्टोरी से रिलेटिड ऑप्शंस के अलावा इस प्लान में यूजर्स के लिए कुछ एक्स्ट्रा नहीं है. हालांकि, कंपनी ने कहा है कि आगे चलकर इसमें कुछ और मजेदार फीचर जोड़े जा सकते हैं. दूसरी तरफ अगर फेसबुक प्लस की बात करें तो इसमें भी इंस्टाग्राम प्लस वाले फीचर्स मिलने की बात कही जा रही है.
Instagram Plus के लिए कितना पैसा देना होगा?
मेटा ने इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस के लिए एक समान कीमत रखी है. दोनों प्लान की कीमत 3.99 डॉलर (लगभग 380 रुपये) प्रति महीने रखी गई है. हालांकि, भारत को लेकर प्राइसिंग का अभी तक ऐलान नहीं किया गया है. बता दें कि पेड सब्सक्रिप्शन आने के बाद भी इन ऐप्स के कोर फंक्शन जैसे पोस्टिंग, मैसेजिंग, स्क्रॉलिंग आदि पहले की तरह फ्री रहेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>क्या सर्दियों में भी काम करते हैं सोलर पैनल? बहुत कम लोगों को पता है यह बात</title>
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        <description><![CDATA[ Do Solar Panels Work In Winters: सोलर पैनल की पॉपुलैरिटी और यूज लगातार बढ़ता जा रहा है. यही कारण से है कि अब बड़े शहरों से लेकर छोटे गांवों तक सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. अब बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों से लेकर छोटे घरों तक सबकी एनर्जी जरूरतें सोलर पैनल पूरी कर रहे हैं. सोलर पैनल सनलाइट को इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या सर्दियों में भी जब सूरज कभी-कभार निकलता है, तब सोलर पैनल बिजली बनाते हैं. आज हम इसी सवाल का जवाब लेकर आए हैं.
क्या सर्दियों में काम करते हैं सोलर पैनल?
इस सवाल का जवाब यह है कि जब तक पैनल लाइट को कैप्चर कर सकेंगे, ये बिजली बनाते रहेंगे. सोलर पैनल को बिजली जनरेट करने के लिए सनलाइट की जरूरत होती है. इन्हें गर्मी से कोई मतलब नहीं है. कई बार तापमान कम होने पर सोलर पैनल की एफिशिएंसी बढ़ जाती है. सर्दियों की बात करें तो इस मौसम में दिन छोटे होते हैं और सूरज भी कभी-कभार नजर आता है, इसलिए उनकी आउटपुट कम हो जाती है. इसी तरह बर्फबारी में भी सोलर पैनल काम करते हैं. कम ही लोगों को इस बात की जानकारी है कि बर्फ के कारण सोलर पैनल ज्यादा बिजली जनरेट करते हैं. जब बर्फ से रिफ्लेक्ट होकर सनलाइट पैनल तक पहुंचती है तो इनकी एफिशिएंसी बढ़ जाती है.
सर्दियों में इन बातों से पड़ता है इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन पर असर
सोलर पैनल को सिर्फ सनलाइट की जरूरत होती है. अगर सर्दियों में सनलाइट आ रही है तो ये बिजली बनाएंगे, भले ही आउटपुट थोड़ी कम हो जाए. सर्दियों में सूरज कम देर के लिए निकलता है, इसलिए एनर्जी जनरेशन कम हो जाती है. कम तापमान से सोलर पैनल की कंडक्टिविटी बेहतर होती है. इससे वो सनलाइट से ज्यादा बिजली जनरेट कर पाते हैं. ज्यादा गर्मी में पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है.
क्या बारिश में काम करते हैं सोलर पैनल?
अभी भारत में मानसून दस्तक देने वाला है. ऐसे में कई लोग सोच रहे होंगे कि क्या बारिश में सोलर पैनल बिजली बनाते हैं. इसका जवाब है कि सोलर पैनल बारिश में भी काम करते हैं. बारिश से पैनल पर इतना फर्क नहीं पड़ता, जितने बादलों के कारण पड़ता है. बादल सनलाइट को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं, जिसके कारण पैनल काम नहीं कर पाते.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Portable Air Conditioner For Summer: गर्मियों में तेजी से बढ़ रहा पोर्टेबल एसी का ट्रेंड, बहुत थोड़ी सी डाउन पेमेंट पर आ जाएगा घर</title>
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        <description><![CDATA[ Portable Air Conditioner For Summer: देशभर में गर्मी में लगातार बढ़ती जा रही है और इसके साथ ही एयर कंडीशनर की मांग भी तेजी से देखने को मिल रही है. हालांकि, आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो किराए के घर में रहने, इंस्टॉलेशन की परेशानियां, ज्यादा बजट की वजह से फ्लैट और विंडो एसी खरीदने से बचते हैं.
ऐसे में अब पोर्टेबल एसी तेजी से लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. खास बात यह है कि इस एसी को बिना किसी तोड़फोड़ के और भारी इंस्टॉलेशन के आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि गर्मियों में पोर्टेबल एसी का ट्रेंड तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन बहुत थोड़ी सी डाउन पेमेंट पर आप इसे कैसे खरीद सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रहा है पोर्टेबल एसी का ट्रेंड?
पोर्टेबल एसी की सबसे बड़ी खासियत इसकी मोबिलिटी मानी जाती है. इसमें पहिए लगे होते हैं, जिसकी मदद से इसे एक कमरे से दूसरे कमरे में आसानी से ले जाया जा सकता है. स्प्लिट या विंडो एसी की तरह इसे दीवार पर फिक्स करने की जरूरत नहीं होती है. यही कारण है कि किराएदार और छोटे घरों में रहने वाले लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं. इसके अलावा पोर्टेबल एसी को इंस्टॉल करने के लिए किसी बड़ी तकनीक की जरूरत नहीं होती, इसमें एक पाइप लगा होता है जो कमरे की गर्म हवा को बाहर निकालने का काम करता है. इसके पाइप को खिड़की के जरिए बाहर लगाया जा सकता है.&amp;nbsp;
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कम कीमत में मिल रहे कई ऑप्शन?&amp;nbsp;
मार्केट में छोटे मिनी एयर कंडीशनर से लेकर 1 टन तक के पोर्टेबल एसी उपलब्ध हैं. कई मिनी कूलर और मिनी एसी की शुरुआत कीमत 1000 रुपये के आसपास से शुरू हो जाती है. वहीं बड़े पोर्टेबल एसी लगभग 30,000 रुपये की शुरुआत कीमत से खरीदी जा सकते हैं. ब्लू स्टार, लॉयड और क्रूज जैसी कंपनी के पोर्टेबल एसी इन दिनों काफी चर्चा में है. ब्लू स्टार का 1 टन पोर्टेबल एसी कई ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर उपलब्ध है. कंपनी के अनुसार, यह करीब 90 स्क्वायर फीट तक के कमरे को ठंडा कर सकता है. इसमें हाई एफिशिएंसी रोटरी कंप्रेशर, ऑटो मोड और एंटीबैक्टीरियल सिल्वर कोटिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं.&amp;nbsp;
आसान ईएमआई और कम डाउन पेमेंट का फायदा&amp;nbsp;
पोर्टेबल एसी की बिक्री बढ़ने की एक बड़ी वजह आसान फाइनेंसिंग ऑप्शन भी है. कई ई-कॉमर्स प्लेटफाॅर्म और फाइनेंस कंपनियां एसी पर आसान ईएमआई ऑफर कर रही है. कुछ मॉडल पर जीरो डाउन पेमेंट और कम महीने की किस्त का ऑप्शन भी मिल रहा है. बजाज फिनसर्व ईएमआई नेटवर्क और दूसरी फाइनेंसिंग कंपनियों के जरिए ग्राहक कम डाउन पेमेंट पर पोर्टेबल एसी खरीद सकते हैं. कई प्लेटफॉर्म्स पर हजार से 1500 रुपये तक की शुरुआती मासिक ईएमआई पर भी एसी उपलब्ध है. इसके अलावा कुछ बैंकों के कार्ड पर कैशबैक और एक्सचेंज ऑफर भी दिए जा रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>Best Earbuds Under 2000 Rupees: बेहतर कॉलिंग और लाजवाब म्यूजिक के लिए बेस्ट हैं 2000 रुपये के ये ईयर बड्स, कान में डालो और भूल जाओ</title>
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        <description><![CDATA[ Best Earbuds Under 2000 Rupees: आज के समय में वायरलेस इयरबड्स सिर्फ गाने सुनने तक सीमित नहीं रह गए. ऑफिस कॉल्स, ऑनलाइन मीटिंग, गेमिंग और एंटरटेनमेंट के लिए अब लोग बड़ी तेजी से टीडब्ल्यूएस ईयर बड्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं. अच्छी बात यह है कि कम बजट में भी ऐसे ईयर बड्स बाजार में मौजूद है, जिनमें एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन, लंबी बैटरी लाइफ और दमदार साउंड क्वालिटी जैसे फीचर्स मिल रहे हैं. अगर आपका बजट 2000 तक है और आप बेहतर कॉलिंग के साथ शानदार म्यूजिक एक्सपीरियंस चाहते हैं तो यह ईयर बड्स आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं.&amp;nbsp;
वनप्लस नॉर्ड बड्स 3&amp;nbsp;
वनप्लस के ये ईयर बड्स बजट में सेगमेंट में काफी पसंद किया जा रहे हैं. इन्हें 12.4 एमएम टिटेनाइज्ड और ड्राइवर्स और बस वेव 2.0 टेक्नोलॉजी दी गई है ,जो दमदार बास और क्लियर साउंड देती है. इसमें 32 डीबी एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन और एआई कॉल नॉइस रिडक्शन फीचर मिलता है, जिससे कॉलिंग के दौरान आवाज साफ सुनाई देती है.&amp;nbsp;
रियलमी बड्स टी-310&amp;nbsp;
रियलमी के इस मॉडल में 46 डीबी हाइब्रिड एएनसी दिया गया है जो इस बजट में काफी खास माना जाता है. इसमें 12.4 एमएम डायनामिक बास ड्राइवर्स और 360 डीग्री Spatial Audio फीचर मिलता है. गेमिंग के लिए इसमें 45 एमएस अल्ट्रा लो लेटेंसी मोड भी मौजूद है. कॉलिंग के दौरान एआई डीप कॉल नॉइस कैंसिलेशन आसपास के शोर को कम करने में मदद करता है. इसकी बैटरी लाइफ करीब 40 घंटे बताई गई है.&amp;nbsp;
बोट एयरडॉप्स 141 एलिट एएनसी&amp;nbsp;
कम कीमत में एएनसी फीचर जाने वाली यूजर्स के बीच बोट एयरडॉप्स 141 एलिट एएनसी काफी लोकप्रिय है. इसमें 35 डीबी नॉइस कैंसिलेशन और 10 एमएम ड्राइवर्स दिए गए हैं. कंपनी का दावा है कि यह ईयरबड्स करीब 42 घंटे तक टोटल प्लेबैक देते हैं. म्यूजिक और कॉलिंग दोनों के लिए इन्हें अच्छा ऑप्शन माना जाता है.&amp;nbsp;
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सीएमएफ बाय नथिंग बड्स 2ए&amp;nbsp;
सीएमएफ बाय नथिंग बड्स 2ए में 12.4 एमएम बायो-फाइबर डायनामिक ड्राइवर्स दिए गए है. इसमें 42 डीबी तक का एएनसी और ट्रांसपेरेंसी मोड भी मिलता है. कॉलिंग के लिए इसमें चार एचडी माइक्रोफोन और क्लियर वॉइस टेक्नोलॉजी दी गई है. ब्लूटूथ 5.4 और ड्यूल डिवाइस कनेक्शन जैसे फीचर्स इसे और बेहतर बनाते हैं. कंपनी के अनुसार यह कुल 35.5 घंटे तक की बैटरी लाइफ ऑफर करता है.
बोट निर्वाणा आयन
अगर आपकी पहली प्राथमिकता लंबी बैटरी लाइफ है, तो boAt Nirvana Ion एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसमें 32 डीबी एएनसी के साथ क्वाड माइक सेटअप और ईएनएक्स टेक्नोलॉजी दी गई है. कंपनी दावा करती है कि यह ईयरबड्स 120 घंटे तक बैटरी बैकअप दे सकते हैं, जो इस बजट में काफी ज्यादा माना जाता है.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ethanol Stove vs LPG Cylinder: एलपीजी सिलेंडर से कितना सस्ता है एथेनॉल चूल्हा, जानें कैसे काम करती है यह नई तकनीक?</title>
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        <description><![CDATA[ Ethanol Stove vs LPG Cylinder: रसोई में खाना बनाने के लिए ज्यादातर लोग एलपीजी गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब एक नई तकनीक चर्चा में है, जिसे एथेनॉल चूल्हा कहा जा रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इस तकनीक के बारे में जानकारी दी है. दावा किया जा रहा है कि यह चूल्हा एलपीजी सिलेंडर से सस्ता पड़ सकता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर है. यही वजह है कि लोग अब इस नई तकनीक को लेकर काफी उत्सुक हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चूल्हा गन्ने, मक्का और मीठे ज्वार जैसी फसलों से बनने वाले एथेनॉल ईंधन पर चलता है.
क्या है एथेनॉल चूल्हा और कैसे करता है काम?
एथेनॉल चूल्हा एक आधुनिक कुकिंग स्टोव है, जो लिक्विड या जेल फॉर्म वाले एथेनॉल ईंधन से चलता है. यह &amp;ldquo;सस्टेनेबल कंबशन टेक्नोलॉजी&amp;rdquo; पर काम करता है. इसमें एक छोटा ईंधन टैंक होता है, जिसमें एथेनॉल डाला जाता है. जब इसे जलाया जाता है तो यह बिना धुएं, गंध और कालिख के तेज आंच देता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे निकलने वाली आंच एलपीजी गैस जैसी ही मानी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, एथेनॉल जलने पर करीब 700 से 800 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पैदा कर सकता है, जिससे खाना जल्दी पकता है. इसकी बनावट काफी हद तक पुराने मिट्टी के तेल वाले स्टोव जैसी होती है, लेकिन इसमें लगे बर्नर ईंधन का ज्यादा अच्छे तरीके से इस्तेमाल करते है.
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एलपीजी सिलेंडर से कितना सस्ता पड़ सकता है?
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एथेनॉल चूल्हे से खाना पकाने का खर्च एलपीजी गैस से कम हो सकता है. यूएन क्लाइमेट टेक्नोलॉजी सेंटर एंड नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक एक लीटर एथेनॉल से करीब 15 घंटे तक लगातार आंच मिल सकती है. यही वजह है कि इसे एलपीजी के मुकाबले ज्यादा किफायती बताया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है कि पानी में 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर एलपीजी जैसी आंच पैदा की जा सकती है. हालांकि अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है और बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है. वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सही कीमत और सप्लाई होने पर यह आम लोगों के लिए सस्ता विकल्प बन सकता है.
पर्यावरण और सुरक्षा के लिए भी बेहतर माना जा रहा
एथेनॉल को बायो-फ्यूल माना जाता है, क्योंकि यह पौधों से तैयार होता है. एलपीजी की तरह यह जीवाश्म ईंधन नहीं होता है. यही कारण है कि इसे पर्यावरण के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है. एथेनॉल जलने पर धुआं और कालिख बहुत कम निकलती है, जिससे रसोई की हवा साफ रहती है. इसके अलावा एथेनॉल जेल के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है, इसलिए गैस लीक जैसी बड़ी दुर्घटना का खतरा कम बताया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो इससे लोगों का खर्च कम हो सकता है और प्रदूषण भी घट सकता है. हालांकि अभी इस तकनीक पर और परीक्षण किए जा रहे हैं ताकि इसे पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Oakter Studio AC 5000 Launch: एक घंटे में सिर्फ 4 रुपये की बिजली फूंकता है यह एसी, जानें किस तकनीक से कम कर रहा खपत?</title>
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        <description><![CDATA[ Oakter Studio AC 5000 2026 Launch : गर्मी का मौसम आते ही लोगों की सबसे बड़ी चिंता बढ़ते बिजली बिल को लेकर होने लगती है. एयर कंडीशनर भले ही तेज गर्मी से राहत दिलाते हों, लेकिन कई बार उनका भारी बिजली बिल लोगों का बजट बिगाड़ देता है. खासतौर पर छोटे घरों, स्टूडियो अपार्टमेंट या किराए के कमरों में रहने वाले लोग ऐसा AC चाहते हैं जो कम जगह घेरे, कम बिजली खाए और जेब पर ज्यादा बोझ भी न डाले. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ओकटर कंपनी ने अपना नया स्टूडियो एसी 5000 (2026) मॉडल लॉन्च किया है.
कंपनी का दावा है कि यह छोटा और हल्का विंडो AC सिर्फ करीब 4 रुपये प्रति घंटे की बिजली खर्च करता है. यही वजह है कि यह नया मॉडल लॉन्च होते ही चर्चा में आ गया है. कंपनी के मुताबिक यह AC खास तौर पर छोटे कमरों, स्टडी रूम, ऑफिस केबिन और स्टूडियो अपार्टमेंट जैसी जगहों के लिए बनाया गया है. इसमें नई इन्वर्टर तकनीक दी गई है, जो पुराने मॉडल की तुलना में कम बिजली खर्च करते हुए बेहतर कूलिंग देने में मदद करती है.&amp;nbsp;
एक घंटे में सिर्फ 4 रुपये की बिजली फूंकता है यह एसी
ओकटर का नया स्टूडियो एसी 5000 (2026) मॉडल 0.5 टन क्षमता के साथ आता है. कंपनी का कहना है कि यह AC करीब 75 वर्ग फुट तक के कमरे को आसानी से ठंडा कर सकता है. इसका वजन लगभग 22 किलो रखा गया है, जिससे इसे इंस्टॉल करना और जरूरत पड़ने पर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान हो जाता है. यह AC खासतौर पर उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो छोटे फ्लैट, पीजी, स्टूडियो रूम या ऑफिस के छोटे केबिन में रहते हैं.&amp;nbsp;
कैसे कम करता है बिजली की खपत?
इस AC की सबसे बड़ी खासियत इसकी इन्वर्टर-आधारित कूलिंग तकनीक है. आमतौर पर पुराने AC में फिक्स्ड स्पीड कंप्रेसर होता है, जो जरूरत पड़ने पर बार-बार ऑन और ऑफ होता रहता है. इससे बिजली की खपत ज्यादा होती है, लेकिन इस नए मॉडल में इन्वर्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक कमरे के तापमान के हिसाब से कंप्रेसर की स्पीड को कंट्रोल करती है यानी जरूरत के अनुसार ही कूलिंग होती है और बिजली की बचत होती है. कंपनी का दावा है कि यह AC करीब 500 वॉट बिजली की खपत करता है. यह लगभग दो घंटे चलाने पर यह एक यूनिट बिजली खर्च करता है. इसी वजह से इसका अनुमानित खर्च करीब 4 रुपये प्रति घंटा बताया जा रहा है.&amp;nbsp;
3-स्टार रेटिंग के साथ मिलेगा स्टूडियो एसी&amp;nbsp;
ओकटर स्टूडियो एसी 5000 (2026) को 3-स्टार एनर्जी रेटिंग दी गई है. इसका मतलब है कि यह बिजली बचाने के साथ संतुलित कूलिंग देने में सक्षम है. इसके अलावा इसमें एंटी-डस्ट फिल्टर भी दिया गया है, जो हवा में मौजूद धूल और छोटे कणों को रोकने में मदद करता है. कंपनी का कहना है कि इसका लो-नॉइज ऑपरेशन फीचर कम आवाज के साथ काम करता है, जिससे पढ़ाई या काम करते समय ज्यादा परेशानी नहीं होती है.&amp;nbsp;
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पानी टपकने की समस्या भी होगी कम
इस मॉडल में CWRC कूलिंग सिस्टम दिया गया है. कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम AC के बाहर पानी टपकने की समस्या को कम करने में मदद करता है. इसके साथ ही यह AC भारत के अलग-अलग मौसम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जिससे उमस और ज्यादा गर्मी वाले इलाकों में भी बेहतर कूलिंग मिल सके. इस AC की एक और खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी खास वायरिंग या भारी पावर सेटअप की जरूरत नहीं पड़ती है. कंपनी का दावा है कि यह मॉडल सामान्य 6A घरेलू पावर सॉकेट पर आसानी से चल सकता है. यह 1200VA प्योर साइन वेव इन्वर्टर पर भी काम कर सकता है.&amp;nbsp;
कितनी है इस एसी की कीमत&amp;nbsp;
ओकटर स्टूडियो एसी 5000 (2026) मॉडल की लॉन्च कीमत 14,499 रुपये प्लस GST रखी गई है. ग्राहक इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ऑनलाइन मार्केटप्लेस और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीद सकते हैं. कंपनी इस AC के साथ रिमोट कंट्रोल, माउंटिंग फ्रेम, यूनिट पर 1 साल की वारंटी और कंप्रेसर पर 5 साल की वारंटी भी दे रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Keystroke Dynamics: Typing Speed से भी हो सकती है आपकी डिजिटल पहचान, Keyboard ही खोल देता है कई राज</title>
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        <description><![CDATA[ Keystroke Dynamics: Typing Speed से भी हो सकती है आपकी डिजिटल पहचान, Keyboard ही खोल देता है कई राज ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब वीडियो एडिटिंग सिर्फ बोलकर होगी! Google का नया AI बदल देगा कंटेंट बनाने का तरीक, देखकर दंग रह जाएंगे क्रिएटर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Google Gemini Omni: Google ने आधिकारिक तौर पर अपना नया मल्टीमॉडल AI मॉडल Gemini Omni पेश कर दिया है. यह नया सिस्टम खासतौर पर वीडियो जनरेशन और एडिटिंग के लिए तैयार किया गया है. कंपनी ने पिछले साल Nano Banana के जरिए Gemini आधारित इमेज जनरेशन और एडिटिंग टूल्स लॉन्च किए थे लेकिन अब Gemini Omni उसी तकनीक को अगले स्तर पर ले जाकर वीडियो कंटेंट तक पहुंचा रहा है.
जहां Nano Banana सिर्फ तस्वीरों तक सीमित था, वहीं Gemini Omni टेक्स्ट, वीडियो, इमेज और वॉइस जैसी कई इनपुट्स को समझकर पूरे वीडियो सीन्स तैयार कर सकता है.
Gemini Omni Flash से होगी शुरुआत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सीरीज का पहला मॉडल Gemini Omni Flash होगा जिसे धीरे-धीरे Gemini App, Google Flow और YouTube Shorts में उपलब्ध कराया जा रहा है. इस नए AI मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसका conversational video editing सिस्टम है. यानी अब यूजर्स को भारी-भरकम एडिटिंग सॉफ्टवेयर सीखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे सिर्फ सामान्य भाषा में कमांड देकर वीडियो बदल सकेंगे.
उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर कहे कि आईने को पानी जैसा बना दो तो AI उसी हिसाब से वीडियो में बदलाव कर देगा. Google ने एक डेमो में दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति के आईने को छूते ही वह लिक्विड की तरह लहराने लगता है और उसका हाथ धीरे-धीरे मिरर मटेरियल में बदल जाता है.
AI अब समझेगा असली दुनिया के नियम
Google का कहना है कि Gemini Omni सिर्फ विजुअल जनरेशन तक सीमित नहीं है. इस मॉडल को फिजिक्स और रियल-वर्ल्ड इंटरैक्शन समझने के लिए भी ट्रेन किया गया है. यानी यह गुरुत्वाकर्षण, मूवमेंट, पानी की स्पीड और ऑब्जेक्ट्स के व्यवहार जैसी चीजों को बेहतर तरीके से समझ सकता है. इसी वजह से AI द्वारा बनाए गए वीडियो पहले की तुलना में ज्यादा रियलिस्टिक दिखाई देंगे. कंपनी Gemini के बड़े नॉलेज मॉडल को भी इसमें जोड़ रही है ताकि यह सिर्फ खूबसूरत वीडियो ही नहीं बल्कि context-aware explainers और जानकारी देने वाले विजुअल्स भी तैयार कर सके.
टेक्स्ट, फोटो और आवाज से बनेगा पूरा वीडियो
Gemini Omni कई तरह के इनपुट्स को सपोर्ट करता है. यूजर्स टेक्स्ट, फोटो, वीडियो क्लिप और वॉइस रेफरेंस का इस्तेमाल करके AI को गाइड कर सकते हैं. इसके अलावा अलग-अलग रेफरेंस को मिलाकर वीडियो का स्टाइल, मूवमेंट और पूरा स्ट्रक्चर भी कंट्रोल किया जा सकता है. फिलहाल ऑडियो सपोर्ट सीमित है और केवल वॉइस रेफरेंस तक उपलब्ध है लेकिन आने वाले समय में और एडवांस ऑडियो फीचर्स जोड़े जा सकते हैं.
अब AI बनाएगा आपका डिजिटल अवतार
Google एक नया AI Avatar फीचर भी ला रहा है. इसकी मदद से यूजर्स अपनी डिजिटल पहचान बना सकेंगे, जो उनकी आवाज में वीडियो तैयार कर सकेगी. यह फीचर खासतौर पर कंटेंट क्रिएटर्स, एजुकेटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है.
किन यूजर्स को मिलेगा पहले एक्सेस?
रिपोर्ट्स के अनुसार Gemini Omni Flash सबसे पहले Google AI Plus, Pro और Ultra सब्सक्राइबर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है. इसे Gemini App और Google Flow के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा.
साथ ही Google इस तकनीक को YouTube Shorts और YouTube Create ऐप में भी बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराने जा रहा है. इससे आने वाले समय में शॉर्ट वीडियो बनाने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या इंटरनेट चलाते समय एक्सेप्ट करनी चाहिए Cookies? ये बात जान ली तो हमेशा आएगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ Website Cookies: जब भी आप कोई वेबसाइट ओपन करते हैं, एक Cookie पॉप-अप आता है. इस पर मोस्टली एक्सेप्ट या रिजेक्ट का ऑप्शन होता है. ज्यादातर लोग बिना देखे ही Website Cookies एक्सेप्ट कर लेते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो बता दें कि ऐसा करने से आपकी प्राइवेसी पर असर पड़ता है. Cookies को एक्सेप्ट करने से वेबसाइट को डेटा कलेक्ट करने की परमिशन मिल जाती है. इसके बाद वेबसाइट आपका डेटा स्टोर कर सकती है. इसलिए अगर आप प्राइवेसी और डेटा सेफ्टी को लेकर चिंतित हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.&amp;nbsp;
क्या होती हैं Cookies?
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क्या Cookies एक्सेप्ट करनी चाहिए?
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Nitin Gadkari Water Based Stove Launch: पानी से जलेगा ये चूल्हा, नितिन गडकरी ने लॉन्च की गजब की तकनीक,  जानें कब तक खरीद पाएंगे आप?</title>
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        <description><![CDATA[ Nitin Gadkari Water Based Stove Launch : देश में लगातार बढ़ती LPG सिलेंडर की कीमतों और कई जगहों पर गैस सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच अब एक नई तकनीक चर्चा में है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने नागपुर में एक खास कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल से चलने वाले नए स्टोव की तकनीक पेश की है. दावा किया जा रहा है कि यह चूल्हा पारंपरिक LPG गैस सिलेंडर से सस्ता भी होगा और पर्यावरण के लिए बेहतर भी होगा. वहीं सबसे खास बात यह है कि यह स्टोव सिर्फ इथेनॉल से नहीं, बल्कि पानी और इथेनॉल के मिश्रण से चलेगा. सरकार और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक रसोई गैस का बड़ा ऑप्शन बन सकती है. तो आइए जानते हैं कि ये चूल्हा आप कब तक खरीद पाएंगे.
क्या है इथेनॉल बेस्ड स्टोव तकनीक?
इथेनॉल बेस्ड स्टोव एक नई तरह का कुकिंग सिस्टम है जो इथेनॉल फ्यूल की मदद से खाना पकाता है. इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल बेस्ड फ्यूल होता है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. यह पूरी तरह भारतीय तकनीक बताई जा रही है यानी इसे भारत में ही विकसित किया गया है.&amp;nbsp;
पानी और इथेनॉल मिलाकर कैसे जलेगा चूल्हा?
इस तकनीक की सबसे खास बात यही है कि इसमें इथेनॉल के साथ लगभग 7 प्रतिशत पानी मिलाया जाता है. इसके बाद यह मिश्रण स्टोव में डाला जाता है. जब स्टोव को जलाया जाता है तो इससे एक साफ और लगातार जलने वाली फ्लेम निकलती है, जो गैस चूल्हे जैसी दिखाई देती है. दावा किया गया है कि इससे धुआं बहुत कम निकलता है. प्रदूषण नहीं के बराबर होता है. खाना जल्दी पकता है और फ्यूल की लागत कम आती है.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा यह स्टोव?
इस स्टोव का काम करने का तरीका काफी आसान बताया गया है. इसमें एक छोटा फ्यूल टैंक या कंटेनर होगा, जिसमें इथेनॉल और पानी का मिश्रण डाला जाएगा. जैसे ही स्टोव ऑन किया जाएगा, मिश्रण से फ्लेम पैदा होगी और खाना पकाया जा सकेगा. इस तकनीक में पारंपरिक LPG सिलेंडर की जरूरत काफी कम हो सकती है. नीतिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि यह स्टोव कमर्शियल गैस सिलेंडर की तुलना में काफी सस्ता पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह भारतीय तकनीक है और इससे देश को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. उनके मुताबिक इससे खाना पकाने का खर्च कम होगा. विदेशों से आने वाली गैस पर निर्भरता घटेगी. किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण को कम नुकसान होगा.&amp;nbsp;
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ये चूल्हा आप कब तक खरीद पाएंगे?
अभी बड़े स्तर पर इसकी बिक्री शुरू नहीं हुई है. माना जा रहा है कि सुरक्षा परीक्षण और सरकारी मंजूरी के बाद आने वाले समय में यह आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है. हालांकि अभी तक इसकी लॉन्च डेट या कीमत को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
इथेनॉल स्टोव के फायदे
1. LPG से सस्ता पड़ सकता है: सरकार का दावा है कि इथेनॉल आधारित स्टोव का इस्तेमाल करने पर घरेलू और होटल दोनों का खर्च कम हो सकता है.&amp;nbsp;
2. प्रदूषण होगा कम: लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल की तुलना में यह काफी साफ तरीके से जलता है. इससे धुआं कम निकलता है और घर के अंदर की हवा ज्यादा खराब नहीं होती है.
4. किसानों को होगा फायदा: इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्के से तैयार किया जाता है. इसकी मांग बढ़ने से किसानों की फसल की खपत बढ़ सकती है और उनकी कमाई में इजाफा हो सकता है.
5. विदेशी गैस पर निर्भरता घटेगी: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल और गैस खरीदकर पूरा करता है. अगर इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ता है तो देश का काफी पैसा बच सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Google Maps Fuel Saving Setting : गूगल मैप की इस सेटिंग को करें ऑन, आज ही से होने लगेगी फ्यूल की बंपर बचत</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps Fuel Saving Setting : आज के समय में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है. खासकर दिल्ली-NCR समेत बड़े शहरों में रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए गाड़ी चलाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है. ऐसे में हर कोई यही सोचता है कि आखिर फ्यूल की बचत कैसे की जाए. बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारे स्मार्टफोन में मौजूद एक नॉर्मल सी ऐप गूगल मैप्स हर महीने सैकड़ों रुपये तक बचाने में मदद कर सकती है. ज्यादातर लोग इसे सिर्फ रास्ता देखने के लिए यूज करते हैं, लेकिन इसके अंदर एक ऐसा फीचर भी मौजूद है जो कम फ्यूल खर्च करने वाले रास्ते दिखाता है.
अगर इस सेटिंग को ऑन कर दिया जाए तो गूगल मैप्स ऐसे रूट्स सजेस्ट करता है जहां ट्रैफिक कम हो, दूरी छोटी हो और गाड़ी का फ्यूल कम खर्च हो. इससे 10 से 20 प्रतिशत तक पेट्रोल, डीजल या सीएनजी बचाने में मदद मिल सकती है. तो आइए जानते हैं कि गूगल मैप की किस सेटिंग को ऑन करें, जिससे आज ही फ्यूल की बंपर बचत होने लगेगी.&amp;nbsp;
गूगल मैप की किस सेटिंग को ऑन करें?
गूगल मैप्स में एक खास फीचर दिया गया है जिसे Fuel Efficient Routes कहा जाता है. इसका मतलब है कि ऐप आपको ऐसे रास्ते दिखाएगा जहां गाड़ी कम फ्यूल खर्च करेगी. आमतौर पर लोग सबसे तेज या सबसे छोटा रास्ता चुनते हैं, लेकिन कई बार वहां ज्यादा ट्रैफिक होता है. ट्रैफिक में बार-बार ब्रेक और एक्सीलेटर लगाने से फ्यूल ज्यादा खर्च होता है. ऐसे में यह फीचर ऐसे रास्ते ढूंढता है जहां ट्रैफिक कम हो और गाड़ी स्मूद तरीके से चल सके.&amp;nbsp;
कैसे काम करता है यह फीचर?
यह फीचर आपकी गाड़ी के इंजन और फ्यूल टाइप के हिसाब से रूट तय करता है. जैसे पेट्रोल, डीजल और सीएनजी गाड़ियों का फ्यूल खर्च अलग-अलग होता है. जब आप गूगल मैप्स में अपनी कार की जानकारी डालते हैं, तब ऐप उसी हिसाब से बेहतर और फ्यूल बचाने वाला रास्ता दिखाता है.&amp;nbsp;
Google Maps में Fuel Saving Setting कैसे ऑन करें?
1. अगर आप भी फ्यूल बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने फोन में गूगल मैप्स ऐप खोलें.&amp;nbsp;
2. इसके बाद ऊपर दाईं तरफ दिखाई देने वाली अपनी प्रोफाइल फोटो या जीमेल आइकन पर टैप करें.&amp;nbsp;
3. अब Settings वाले ऑप्शन को चुनें.&amp;nbsp;
4. वहीं नीचे स्क्रॉल करें और Navigation ऑप्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
5. अब आपको Prefer Fuel-Efficient Routes या Fuel Efficient Routes का ऑप्शन दिखाई देगा. इसे ऑन कर दें.&amp;nbsp;
कार की जानकारी देना क्यों जरूरी है?
इस फीचर को सही तरीके से काम करने के लिए गूगल मैप्स आपकी गाड़ी से जुड़ी कुछ जानकारी मांगता है. इसमें आपको बताना होता है कि आपकी कार पेट्रोल से चलती है या डीजल से, गाड़ी CNG है या Hybrid, इंजन किस प्रकार का है. इन जानकारियों की मदद से ऐप बेहतर रूट तैयार करता है.&amp;nbsp;
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हरे रंग का पत्ता क्या बताता है?
जब आप किसी लोकेशन के लिए रूट सर्च करेंगे, तब कुछ रास्तों के पास हरे रंग का छोटा पत्ता दिखाई देगा. यह Green Leaf इस बात का संकेत होता है कि उस रास्ते पर जाने से फ्यूल की बचत होगी. &amp;nbsp;अगर आप उस रूट को चुनते हैं तो आपकी गाड़ी कम पेट्रोल या डीजल खर्च करेगी.&amp;nbsp;
कितना फ्यूल बच सकता है?
गूगल के अनुसार, यह फीचर ड्राइविंग और ट्रैफिक के आधार पर लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक फ्यूल बचाने में मदद कर सकता है. अगर कोई व्यक्ति रोजाना लंबी दूरी तय करता है तो महीने भर में अच्छी बचत हो सकती है. आज के समय में गूगल मैप्स की मदद से आप ट्रैफिक की जानकारी देख सकते हैं. टोल रोड का पता लगा सकते हैं. पेट्रोल पंप ढूंढ सकते हैं. इसके अलावा रेस्टोरेंट और होटल ढूंढ सकते हैं. दूरी और टाइम का अंदाजा लगा सकते हैं. साथ ही ट्रैफिक फ्री रास्ता चुन सकते हैं. इसी वजह से शहरों में लाखों लोग रोज इसका इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AC यूज करते समय काम आएंगे ये हैक, बिजली बचेगी और कमरा भी हो जाएगा पहाड़ों जैसा ठंडा</title>
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        <description><![CDATA[ AC Use Hacks: देश के कई हिस्सों में गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. 45 डिग्री से पार जा चुके पारे में कूलर और पंखें भी हाथ खड़े कर चुके हैं. अब गर्मी से राहत पाने का एकमात्र तरीका एसी ही बचा है. ज्यादातर लोगों को एसी चलाते समय बिजली के बिल की टेंशन रहती है. डेली कुछ घंटों तक एसी यूज करने से बिजली बिल काफी बढ़ जाता है. इसलिए लोग बहुत संभलकर एसी यूज करते हैं. आज हम आपके लिए कुछ ऐसे हैक्स लेकर आए हैं, जो बिजली भी बचाएंगे और आपके कमरे को मनाली जैसा ठंडा भी कर देंगे.
बड़े काम आएंगे ये AC Use Hacks
खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद रखें- एसी यूज करते समय वेंटिलेशन की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए कमरे के खिड़की और दरवाजों की पूरी तरह बंद रखें. अगर खिड़की या दरवाजा थोड़ा-सा भी खुला है तो बाहर की गर्म हवा अंदर का टेंपरेचर बढ़ा सकती है और एसी को कूलिंग के लिए ज्यादा काम करना पड़ेगा. इससे बिजली की खपत ज्यादा होती है. कमरे को पूरी तरह बंद कर आप कूलिंग बढ़ा सकते हैं और बिजली की खपत भी कम होगी.
एसी की देखरेख भी है जरूरी- हर बार गर्मियां शुरू होने से पहले एसी की सर्विसिंग करवा लेना जरूरी है. सर्विस न होने पर एसी ज्यादा बिजली कंज्यूम करता है और कूलिंग एफिशिएंसी भी कम हो जाती है. सर्विसिंग के लिए हमेशा प्रोफेशनल टेक्नीशियन की मदद लें.
सही टेंपरेचर का है सारा खेल- कई लोगों को लगता है कि एसी का टेंपरेचर कम सेट करने पर यह जल्दी कूलिंग करता है. इसलिए लोग 16 या 18 डिग्री पर एसी चलाते हैं. ऐसा करने से आपका कमरा जल्दी ठंडा नहीं होगा, लेकिन बिजली का बिल जरूर आसमान छूने लगेगा. कम टेंपरेचर मैंटेन करने के लिए एसी को ज्यादा काम करना पड़ता है. बिजली की बचत और सही कूलिंग के लिए एसी का तापमान 24 डिग्री पर सेट रखना चाहिए.
एसी के साथ सीलिंग फैन भी करें यूज- यह तरीका भी खूब काम का है. सीलिंग फैन ऑन रखने से एसी की ठंडी हवा जल्दी ही पूरे रूम में सर्कुलेट हो जाती है और कमरा जल्दी ठंडा होता है. इससे एसी को कमरा ठंडा रखने के लिए कम काम करना पड़ेगा और इससे बिजली की खपत भी कम हो जाएगी. आप चाहें तो पंखे को धीमी स्पीड पर भी चला सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आईफोन के लिए आ रहा है अल्टीमेट सिक्योरिटी फीचर, हाथ से छिनते ही हो जाएगा लॉक</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Security Feature: आईफोन यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर है. आईफोन के लिए जल्द ही अब तक का सबसे तगड़ा सिक्योरिटी फीचर आने वाला है. आईफोन वैसे भी अपने सिक्योरिटी फीचर के लिए पॉपुलर है, लेकिन नया फीचर सिक्योरिटी एक कदम और आगे ले जाएगा. इसके बाद अगर अनलॉक होने के बाद भी आपका आईफोन चोरी होता है तो भी चोर इसका कुछ नहीं कर पाएगा. आईफोन अपने आप डिटेक्ट कर लेगा कि कब इसे छीना गया है और यह लॉक हो जाएगा. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
अभी आईफोन में मिलते हैं ये सिक्योरिटी फीचर
अभी आईफोन में Find My + Activation Lock और Stolen Device Protection जैसे फीचर मिलते हैं. जैसे ही आप Find My iPhone एक्टिवेट करते हैं, इसके साथ एक्टिवेशन लॉक भी ऑन हो जाता है. इसके बाद अगर कोई आईफोन को रिस्टोर या इसका डेटा डिलीट करना चाहेगा तो उसे यूजर ऐप्पल अकाउंट के ईमेल एड्रेस और पासवर्ड की जरूरत पड़ती है. स्टोलन डिवाइस प्रोटेक्शन की बात करें तो यह कई सेटिंग बदल देता है. जब आईफोन किसी ट्रस्टेड लोकेशन से बाहर होता है तो इस अनलॉक करने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती है. अगर वेरिफिकेशन फेल हो जाए तो दोबारा ट्राई का मौका एक घंटे बाद मिलता है. इससे चोरी हुए फोन को यूज करना लगभग असंभव हो जाता है.
नया फीचर क्या काम करेगा?
ऊपर बताए गए सारे फीचर तभी काम करेंगे, जब आईफोन लॉक हो और चोरी हो जाए. अगर आईफोन अनलॉक है और चोरी हो जाए तो ये काम नहीं करते. अब ऐप्पल इसी कमी को दूर करना चाह रही है. नया फीचर आईफोन के एक्सेरोमीटर और दूसरे टूल्स की मदद से यह पता कर लेगा कि आईफोन छिन गया है. यह डिटेक्ट होते ही आईफोन लॉक हो जाएगा. अगर किसी यूजर ने अपने आईफोन को ऐप्पल वॉच से पेयर किया है तो यह डिस्टेंस को भी मॉनिटर करेगा. एक बार चोरी हुआ आईफोन लॉक होने के बाद इस पर स्टोलन डिवाइस वाले सारे सिक्योरिटी तामझाम लागू हो जाएंगे.&amp;nbsp;
कब तक आ सकता है नया फीचर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप्पल फिलहाल इस फीचर पर काम कर रही है. अभी इसकी लॉन्चिंग को लेकर टाइमलाइन सामने नहीं आई है. उम्मीद की जा रही है कि सिक्योरिटी के लिहाज से जरूरी इस फीचर को जल्द से जल्द रोलआउट कर दिया जाएगा. बता दें कि एंड्रॉयड फोन में पहले से ही Theft Detection Lock नाम से ऐसा फीचर अवेलेबल है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत में Free WiFi का बड़ा अपडेट! अब QR Code स्कैन करते ही मिलेगा इंटरनेट, PM&amp;WANI में हुए बड़े बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ PM-WANI Wi-Fi: देशभर में लोगों तक सस्ता और आसान इंटरनेट पहुंचाने के लिए सरकार ने PM-WANI (प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस) योजना में कई अहम बदलाव किए हैं. दूरसंचार विभाग (DoT) का उद्देश्य पब्लिक वाई-फाई को ज्यादा सुरक्षित, तेज और यूजर फ्रेंडली बनाना है, ताकि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक जगहों पर लोग आसानी से इंटरनेट इस्तेमाल कर सकें.
QR Code स्कैन करते ही कनेक्ट होगा Wi-Fi
अब PM-WANI वाई-फाई इस्तेमाल करने के लिए लंबी लॉगिन प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा. नई व्यवस्था के तहत यूजर्स QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में इंटरनेट से जुड़ सकेंगे. इस फीचर की मदद से लैपटॉप, टैबलेट और दूसरे डिवाइस को भी आसानी से कनेक्ट किया जा सकेगा. यूजर को सिर्फ लॉगिन पेज पर दिख रहे QR कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होग जिसके बाद इंटरनेट एक्सेस तुरंत मिल जाएगा. इससे लॉगिन प्रोसेस पहले के मुकाबले तेज और ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी.
15, 30 और 60 मिनट वाले सस्ते प्लान
सरकार ने लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए PM-WANI के तहत छोटे समय वाले नए प्लान भी पेश किए हैं. ये सैशे स्टाइल प्लान होंगे जिनकी वैलिडिटी 15 मिनट, 30 मिनट और 60 मिनट तक रहेगी. इन प्लान्स का फायदा उन लोगों को मिलेगा जिन्हें थोड़े समय के लिए इंटरनेट की जरूरत होती है जैसे यात्रा के दौरान रेलवे स्टेशन या बस अड्डे पर. इससे यूजर्स कम कीमत में अपनी जरूरत के हिसाब से डेटा इस्तेमाल कर पाएंगे.
फर्जी Wi-Fi नेटवर्क से मिलेगी सुरक्षा
पब्लिक वाई-फाई के नाम पर होने वाले साइबर फ्रॉड और फेक हॉटस्पॉट से बचाने के लिए भी सरकार ने नया कदम उठाया है. अब आधिकारिक नेटवर्क के नाम में PMWANI ब्रांडिंग अनिवार्य होगी. इस बदलाव के बाद लोग असली और नकली वाई-फाई नेटवर्क में आसानी से फर्क कर सकेंगे. इससे डेटा चोरी और ऑनलाइन स्कैम जैसी घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी.
देशभर में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि इन नए बदलावों से PM-WANI योजना ज्यादा प्रभावी बनेगी और ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक इंटरनेट पहुंच को मजबूत किया जा सकेगा. आसान लॉगिन, छोटे प्लान और बेहतर सुरक्षा जैसे फीचर्स लोगों के डिजिटल अनुभव को पहले से बेहतर बनाने में मदद करेंगे.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपके फोन में भी ON है ये सेटिंग? तुरंत करें OFF वरना हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गया है. बैंकिंग, चैटिंग, फोटो, लोकेशन और निजी जानकारी सब कुछ हमारे फोन में मौजूद रहता है. लेकिन कई बार अनजाने में हम ऐसी सेटिंग्स ON छोड़ देते हैं जिनकी वजह से कुछ ऐप्स हमारी प्राइवेसी में सेंध लगा सकते हैं. यही कारण है कि फोन की Privacy Settings को समय-समय पर जांचना बेहद जरूरी हो गया है.
बिना सोचे-समझे Permissions देना पड़ सकता है भारी
अक्सर लोग नया ऐप इंस्टॉल करते ही बिना पढ़े सभी Permissions Allow कर देते हैं. इसके बाद वही ऐप्स कैमरा, माइक्रोफोन और लोकेशन जैसी संवेदनशील चीजों तक पहुंच बना लेते हैं. कई ऐप्स बैकग्राउंड में भी इन फीचर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है. Android स्मार्टफोन्स में Privacy Dashboard और Permission Manager जैसे फीचर्स दिए जाते हैं ताकि यूजर्स आसानी से पता लगा सकें कि कौन-सा ऐप क्या Access कर रहा है.
कैमरा और माइक्रोफोन Access सबसे बड़ा जोखिम
अगर किसी ऐप को Camera और Microphone की अनुमति मिली हुई है तो वह जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कर सकता है. कई बार यूजर्स को इसकी जानकारी भी नहीं होती. नए Android वर्जन में अब स्क्रीन पर Green Indicator दिखाई देता है जिससे पता चलता है कि कैमरा या माइक्रोफोन एक्टिव है. अगर आपको किसी ऐप पर भरोसा नहीं है तो उसकी Permissions तुरंत बंद कर देना बेहतर रहेगा.
हमेशा ON रहने वाली Location Tracking भी खतरनाक
कुछ ऐप्स लगातार आपकी Live Location ट्रैक करते रहते हैं. इससे आपकी गतिविधियों और लोकेशन हिस्ट्री का डेटा जमा किया जा सकता है. साइबर एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि Allow all the time विकल्प चुनने से बचें. इसके बजाय Only while using the app ऑप्शन ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इससे ऐप सिर्फ इस्तेमाल के दौरान ही आपकी लोकेशन Access कर पाता है.
पुराने Apps भी बन सकते हैं खतरा
कई ऐसे ऐप्स होते हैं जिन्हें लोग महीनों या सालों तक इस्तेमाल नहीं करते लेकिन उनकी Permissions फोन में बनी रहती हैं. ऐसे ऐप्स भी आपकी जानकारी तक पहुंच बनाए रख सकते हैं. हालांकि Android में अब Auto Reset Permissions फीचर मिलता है जो लंबे समय तक इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स की Permissions खुद हटा देता है.
ऐसे करें अपने फोन की Privacy Settings चेक
अगर आप Android फोन इस्तेमाल करते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:
सबसे पहले Settings खोलें. इसके बाद Privacy या Security &amp;amp; Privacy सेक्शन में जाएं. अब Permission Manager खोलें. यहां Camera, Microphone और Location Permissions को ध्यान से चेक करें. जरूरत पड़ने पर आप Camera और Mic Access को पूरी तरह Disable भी कर सकते हैं.
एक्सपर्ट क्यों दे रहे हैं चेतावनी?
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों का कहना है कि हर महीने कम से कम एक बार App Permissions जरूर जांचनी चाहिए. इंटरनेट फोरम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी कई यूजर्स ने बताया है कि अनजान ऐप्स को ज्यादा Permissions देना प्राइवेसी रिस्क बढ़ा सकता है.
अभी करें ये जरूरी काम
अगर आपने लंबे समय से अपने फोन की Privacy Settings चेक नहीं की है तो अभी यह काम कर लें. हो सकता है कोई ऐप आपकी उम्मीद से ज्यादा जानकारी Access कर रहा हो. छोटी-सी लापरवाही आपकी निजी जानकारी को खतरे में डाल सकती है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>इंटरनेट पर ये चीजें देखना है मना, घर से उठाकर ले जा सकती है पुलिस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इंटरनेट-पर-ये-चीजें-देखना-है-मना-घर-से-उठाकर-ले-जा-सकती-है-पुलिस</link>
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        <description><![CDATA[ What Is Illegal to Watch on Internet: इंटरनेट बहुत बड़ा है और आप इसे अपनी मर्जी से यूज कर सकते हैं. पढ़ाई-लिखाई से लेकर ऑफिस के काम और एंटरटेनमेंट समेत कई कामों के लिए इंटरनेट इस्तेमाल होता है. सफर पर जाते समय रास्ता भूल गए तो इंटरनेट आपको रास्ता बता देता है. कुछ नया खाने का मन किया तो इंटरनेट पर रेसिपी देखी जा सकती है. मोटे तौर पर बेसिक और लीगल कामों के लिए इंटरनेट पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन कई चीजें गैरकानूनी भी है. आज हम आपको बताएंगे कि इंटरनेट पर क्या देखना मना है. अगर आप मनाही के बावजूद ये काम करते हैं तो पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है.
इंटरनेट पर क्या देखना मना है?
बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेट- इंटरनेट पर बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेट पर कठोर पाबंदी लगाई गई है. कानून के तहत इस तरह का कंटेट क्रिएट करना, देखना, डाउनलोड करना, स्टोर करना, ब्राउज करना और डिस्ट्रीब्यूट करना गंभीर अपराध है. इसमें लंबी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है. इसलिए ऐसे किसी भी कंटेट से बचना जरूरी है. अश्लील वीडियो को लेकर भी कई मामलों में कानून का डंडा चल सकता है.
पायरेटेड कंटेट- अगर आप इंटरनेट पर पायरेटेड कंटेट देख या यूज कर रहे हैं तो कानूनी मुसीबत में फंस सकते हैं. कॉपीराइट कानून के तहत बिना परमिशन के पायरेटेड कंटेट देखना, स्टोर, डाउनलोड और डिस्ट्रीब्यूट करना गैरकानूनी है. ऐसे अपराधों में जुर्माने से लेकर सजा तक हो सकती है.
भड़काऊ और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे से जुड़ा कंटेट- देश की संप्रभुता, एकता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कंटेट पूरी तरह बैन है. ऐसे कंटेट के खिलाफ कई कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है. अगर कोई इंटरनेट पर टेरेरिस्ट प्रोपेगेंडा, हेट स्पीच, राष्ट्र-विरोधी कंटेट देखते या फैलाते हुए पकड़ा जाता है तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इस तरह के कंटेट को शेयर या महज लाइक करना भी कानूनी पचड़े में फंसा सकता है और जांच एजेंसियां आपके घर तक आ सकती हैं.
ऑनलाइन गैंबलिंग और बैन हुई सर्विस- ऑनलाइन गैंबलिंग पर प्रतिबंध होने के कारण इस तरह की एक्टिविटी करना गैर-कानूनी है. इसी तरह जिन सर्विसेस और ऐप्स को सरकार ने बैन किया हुआ है, उन्हें एक्सेस करना भी मुश्किलें बढ़ा सकता है. ऐसी ऐप्स को VPN के जरिए यूज करना भी खतरे से खाली नहीं है और इसे सरकार के नियमों के उल्लंघन के तौर पर देखा जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>हवा की नमी से बनेगी बिजली! वैज्ञानिकों ने तैयार किया ऐसा डिवाइस जो बदल सकता है पूरी दुनिया</title>
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        <description><![CDATA[ Electricity from Air Humidity: दुनियाभर में बढ़ते ई-वेस्ट और प्रदूषण के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है जो हवा में मौजूद नमी से बिजली बना सकती है. खास बात यह है कि यह डिवाइस पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल है और इसे बनाने में ऐसे सामान्य पदार्थों का इस्तेमाल किया गया है जो खाने-पीने में भी उपयोग होते हैं.
यह रिसर्च Queen Mary University of London, University of Warwick, Imperial College London और Universitas Mercatorum के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है. इस शोध को Nano Energy जर्नल में प्रकाशित किया गया है.
क्या है यह नई तकनीक?
इस तकनीक को Moisture-Electric Generator यानी MEG कहा जाता है. जहां आम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नमी से खराब हो जाते हैं, वहीं यह नया सिस्टम नमी को ही अपनी ताकत बनाता है. डिवाइस को जिलेटिन, साधारण नमक और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे सस्ते और सुरक्षित पदार्थों से तैयार किया गया है. इसे बनाने की प्रोसेस भी बेहद आसान और पानी आधारित है जिससे उत्पादन लागत काफी कम हो सकती है.
कैसे बनती है बिजली?
यह डिवाइस हवा या त्वचा में मौजूद नमी को सोखता है. जब जिलेटिन और नमक का मिश्रण सूखता है तो इसके अंदर तीन परतों वाली खास संरचना बन जाती है. इसके बाद जैसे ही यह दोबारा नमी के संपर्क में आता है, अंदर मौजूद आयन सक्रिय होकर मूवमेंट शुरू कर देते हैं. इसी प्रोसेस से लगातार बिजली पैदा होती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसका एक छोटा यूनिट करीब 1 वोल्ट बिजली लगातार 30 दिनों से ज्यादा समय तक बना सकता है.
छोटे उपकरण भी चला सकता है
शोधकर्ताओं ने कई यूनिट्स को जोड़कर इसका बड़ा सिस्टम तैयार किया. इस सेटअप ने करीब 90 वोल्ट तक बिजली पैदा की जो छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और LED लाइट स्ट्रिंग्स को चलाने के लिए पर्याप्त थी. इससे साफ है कि भविष्य में यह तकनीक छोटे गैजेट्स और सेंसर डिवाइस के लिए बैटरी का विकल्प बन सकती है.
सांस और शरीर की नमी भी पहचान सकता है
यह तकनीक केवल बिजली बनाने तक सीमित नहीं है. वैज्ञानिकों ने पाया कि यह डिवाइस सेंसर की तरह भी काम कर सकता है. क्योंकि इसकी बिजली उत्पादन क्षमता नमी के स्तर के अनुसार बदलती है इसलिए यह इंसानी शरीर से निकलने वाली बेहद हल्की नमी को भी पहचान सकता है. रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने इसे सांसों की निगरानी और बोलते समय निकलने वाली नमी को मापने में इस्तेमाल किया. भविष्य में इसका उपयोग हेल्थ मॉनिटरिंग डिवाइस, वियरेबल टेक्नोलॉजी और टचलेस सेंसर सिस्टम में किया जा सकता है.
पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित
इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण अनुकूल होना है. सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में प्लास्टिक, जहरीले केमिकल और भारी धातुएं होती हैं लेकिन MEG को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इस्तेमाल के बाद यह आसानी से मिट्टी में घुल सके. यह कुछ ही हफ्तों में प्राकृतिक रूप से खत्म हो सकता है या पानी में घोलकर इसके पदार्थों को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे सर्कुलर इलेक्ट्रॉनिक्स की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं.
भविष्य की इलेक्ट्रॉनिक्स बदल सकती है यह खोज
शोधकर्ताओं का मानना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने के लिए दुर्लभ और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों पर निर्भरता कम हो सकती है. यह नई खोज दिखाती है कि साधारण, सस्ते और टिकाऊ पदार्थों से भी हाई-परफॉर्मेंस तकनीक तैयार की जा सकती है जो प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर काम करे.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>क्या कानों में लगे Earbuds कर सकते हैं आपकी जासूसी? जानिए क्या है इसकी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Earbuds: आज के समय में वायरलेस ईयरबड्स सिर्फ गाने सुनने या कॉल करने का साधन नहीं रह गए हैं. ऑफिस मीटिंग, ऑनलाइन क्लास, गेमिंग और रोजमर्रा की बातचीत तक लोग घंटों इन्हें कानों में लगाए रखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही छोटे-से Earbuds आपकी निजी बातचीत पर नजर रखने का जरिया भी बन सकते हैं? साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि स्मार्ट डिवाइस जितने सुविधाजनक होते जा रहे हैं, उतना ही डेटा चोरी और प्राइवेसी रिस्क भी बढ़ रहा है.
कैसे बन सकते हैं Earbuds जासूसी का हथियार?
ज्यादातर आधुनिक Earbuds में माइक्रोफोन, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, वॉयस असिस्टेंट सपोर्ट और AI फीचर्स दिए जाते हैं. यही फीचर्स कई बार साइबर अपराधियों के लिए रास्ता खोल देते हैं. अगर किसी डिवाइस में सिक्योरिटी खामी हो या वह किसी मैलवेयर से संक्रमित हो जाए तो हैकर माइक्रोफोन तक पहुंच बना सकते हैं.
इसका मतलब यह है कि यूजर को बिना पता चले आसपास की बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है. कई बार फर्जी ऐप्स या संदिग्ध ब्लूटूथ कनेक्शन भी डेटा चोरी का कारण बन जाते हैं.
ब्लूटूथ हैकिंग का बढ़ता खतरा
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक सार्वजनिक जगहों पर ब्लूटूथ ऑन रखना खतरनाक साबित हो सकता है. एयरपोर्ट, मॉल, रेलवे स्टेशन या कैफे जैसी जगहों पर हैकर्स नकली ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए यूजर्स को टारगेट करते हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति गलती से ऐसे डिवाइस से कनेक्ट होता है उसकी जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है.
कुछ मामलों में हैकर्स ऑडियो डेटा, कॉन्टैक्ट लिस्ट और फोन की दूसरी जानकारी तक एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं. यही वजह है कि टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ हमेशा भरोसेमंद डिवाइस और आधिकारिक ऐप्स इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.
कौन-से यूजर्स सबसे ज्यादा जोखिम में?
जो लोग लगातार ऑफिस कॉल, बिजनेस मीटिंग या निजी बातचीत के लिए Earbuds का इस्तेमाल करते हैं, वे ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं. खासकर वे यूजर्स जो सस्ते या अनजान ब्रांड के Earbuds खरीदते हैं उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है. कई लोकल डिवाइस में सिक्योरिटी अपडेट्स की कमी होती है जिससे डेटा लीक का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, यदि किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा माइक्रोफोन परमिशन दी गई है तो वह बैकग्राउंड में आपकी आवाज रिकॉर्ड कर सकता है.
खुद को कैसे रखें सुरक्षित?
Earbuds इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. हमेशा भरोसेमंद ब्रांड के डिवाइस खरीदें और उन्हें समय-समय पर अपडेट करते रहें. अनजान ब्लूटूथ रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और जब जरूरत न हो तब ब्लूटूथ बंद रखें. फोन में इंस्टॉल ऐप्स की परमिशन भी नियमित रूप से चेक करनी चाहिए. जिन ऐप्स को माइक्रोफोन एक्सेस की जरूरत नहीं है, उनकी परमिशन तुरंत हटा दें. साथ ही, किसी भी संदिग्ध लिंक या फर्जी ऐप डाउनलोड से बचना चाहिए. तकनीक जितनी स्मार्ट हो रही है उतना ही जरूरी है कि यूजर्स भी सतर्क रहें.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Mobile Security:  फोन का Mic कब&amp;कब सुन रहा होता है आपकी बातें, जानें कैसे होती है डेटा ट्रैकिंग?</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Security:&amp;nbsp;आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल करने का जरिया नहीं रह गया है. लोग इससे पढ़ाई करते हैं, ऑनलाइन काम करते हैं, फोटो और वीडियो बनाते हैं, शॉपिंग करते हैं और घंटों सोशल मीडिया चलाते हैं. यानी हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा अब फोन के अंदर ही सिमट गया है. लेकिन कई बार लोगों को ऐसा लगता है कि फोन उनकी बातें भी सुन रहा है. उदाहरण के लिए अगर कोई दोस्त से किसी जूते या मोबाइल की बात करे और थोड़ी देर बाद उसी चीज का विज्ञापन फोन में दिखने लगे, तो शक होना लाजमी है. यही वजह है कि अब लोग जानना चाहते हैं कि आखिर फोन का Mic कब एक्टिव होता है और डेटा ट्रैकिंग कैसे होती है.
Mic हमेशा ऑन नहीं होता, लेकिन Apps ले सकती हैं Access
असल में स्मार्टफोन का माइक्रोफोन हर समय आपकी बातें रिकॉर्ड नहीं करता, लेकिन कई ऐप्स Mic की Permission मांगती हैं. जब हम बिना सोचे-समझे किसी ऐप को Permission दे देते हैं, तब वह जरूरत पड़ने पर माइक्रोफोन इस्तेमाल कर सकती है. जैसे Voice Search, Voice Typing या Video Recording के समय Mic एक्टिव होता है. कुछ ऐप्स बैकग्राउंड में भी काम करती रहती हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि फोन लगातार सुन रहा है. हालांकि बड़ी टेक कंपनियां दावा करती हैं कि वे बिना इजाजत निजी बातें रिकॉर्ड नहीं करतीं, लेकिन यूजर्स की एक्टिविटी और पसंद को समझने के लिए डेटा जरूर इकट्ठा किया जाता है.
फिर कैसे दिखने लगते हैं वही Ads जिनकी हम बात करते हैं?
कई लोग सोचते हैं कि फोन उनकी बातें सुनकर Ads दिखाता है, लेकिन इसकी असली वजह अक्सर हमारी ऑनलाइन एक्टिविटी होती है. आप क्या सर्च करते हैं, कौन-सी वीडियो देखते हैं, किस पोस्ट पर ज्यादा रुकते हैं और किस चीज में दिलचस्पी दिखाते हैं, ये सब डेटा कंपनियों तक पहुंचता है. इसके बाद AI और एल्गोरिदम आपकी पसंद को समझकर उसी तरह के विज्ञापन दिखाने लगते हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि हम किसी चीज के बारे में पहले से सोच रहे होते हैं और इंटरनेट पर उससे जुड़ी जानकारी देख चुके होते हैं, इसलिए हमें लगता है कि फोन हमारी बातें सुन रहा है. यानी हर बार Mic ही वजह नहीं होता, बल्कि डेटा ट्रैकिंग और ऑनलाइन बिहेवियर भी बड़ा कारण होता है.
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अपनी प्राइवेसी बचाने के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि आपका डेटा ज्यादा सुरक्षित रहे, तो फोन की Settings समय-समय पर जरूर चेक करें. जिन ऐप्स को Mic, Camera या Location की जरूरत नहीं है, उनकी Permission बंद कर दें. फोन में कौन-सी ऐप बैकग्राउंड में चल रही है, इस पर भी ध्यान दें. इसके अलावा मजबूत Password रखें और किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने से बचें. सच यह है कि आज के दौर में स्मार्टफोन के बिना जिंदगी आसान नहीं है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सावधानी भी बहुत जरूरी है. जितना हम अपने डेटा को समझेंगे, उतना ही खुद को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रख पाएंगे.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ बिजली बिल की ही बचत नहीं करते Solar Panels, एक साथ हैं इतने फायदे, जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Benefits: पिछले कुछ सालों से सोलर एनर्जी का यूज बढ़ा है. घरों से लेकर कमर्शियल इमारतों तक सोलर पैनल लगने लगे हैं. इन्हें इंस्टॉल करना आसान है और एक बार लगाने के बाद सालों-साल इसका यूज किया जा सकता है. इंस्टॉलेशन के बाद बेसिक मैंटनेंस के अलावा इस पर कोई खर्च नहीं आता और बिजली बिल की टेंशन भी नहीं रहती. यही कारण हैं कि लोग अब तेजी से सोलर एनर्जी को अपना रहे हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिजली बिल की टेंशन से फ्री करने के अलावा सोलर पैनल्स के क्या-क्या फायदे हैं.
एनर्जी को लेकर ग्रिड पर निर्भरता खत्म
हर साल बिजली की लागत बढ़ती जाती है और बिल के तौर पर हर महीने हजारों रुपये चुकाने पड़ते हैं. सोलर पैनल लगाकर इस खर्चे से बचा जा सकता है. सोलर पैनल अपनी लागत को कुछ ही महीनों में पूरा कर देते हैं. इसके अलावा अगर आप ऑफ-ग्रिड सिस्टम लगाते हैं तो ग्रिड पर एनर्जी को लेकर आपकी निर्भरता खत्म हो जाती है. सोलर बैटरी की मदद से आप एनर्जी को स्टोर कर रात के समय यूज कर सकते हैं.&amp;nbsp;
मरम्मत पर कोई खर्च नहीं
सोलर पैनल को इंस्टॉल करने की लागत थोड़ी ज्यादा है, जो सब्सिडी के कारण कम हो जाती है. एक बार इंस्टॉल करने के बाद मैंटेनेंस पर कोई खर्च नहीं करना पड़ता. घर की छत पर लगे पैनल को साल में एक-दो बार संभालने की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा मैंटेनेंस का कोई झंझट नहीं रहता. सोलर पैनल आसानी से 20-25 साल तक चल जाते हैं.
कार्बन फुटप्रिंट घटाने में मिलेगी मदद
सोलर एनर्जी जनरेशन में किसी प्रकार का पॉल्यूशन नहीं होता. इससे न तो कोई पॉल्यूटिंग गैस रिलीज होती है और न ही किसी तरह का गंध जमीन में फेंका जाता है. इस तरह सोलर एनर्जी कार्बन एमिशन कम करने में मदद कर सकती है. ऐसे समय में जब पर्यावरण पर हर तरह से हमला हो रहा है, तब सोलर एनर्जी एक क्लीन एनर्जी के तौर पर हमारे बीच मौजूद है.
सरकारी सब्सिडी
सोलर पैनल और सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने के लिए सरकार सब्सिडी दे रही है. इससे सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने की लागत काफी कम हो जाती है. कई राज्यों की सरकारें कम ब्याज पर लोन की भी सुविधा दे रही है ताकि लोगों को सोलर पावर लगाने में दिक्कत का सामना न करना पड़े.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>अब WiFi नहीं, रोशनी से चलेगा इंटरनेट! चीन का 6G धमाका, 1.2KM दूर पलक झपकते पहुंचाया डेटा</title>
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        <title>Cooler खरीदने से पहले जान लें ये 5 सीक्रेट बातें, वरना गर्मियों में हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Cooler Buying Tips: गर्मियों का मौसम आते ही ज्यादातर लोग राहत पाने के लिए नया कूलर खरीदने की सोचते हैं. बाजार में छोटे, बड़े, डेजर्ट, पर्सनल और टावर कूलर की इतनी वैरायटी मौजूद है कि सही चुनाव करना आसान नहीं होता. कई लोग सिर्फ डिजाइन या कम कीमत देखकर कूलर खरीद लेते हैं लेकिन बाद में तेज आवाज, ज्यादा बिजली बिल या कम कूलिंग जैसी समस्याओं से परेशान हो जाते हैं. अगर आप भी नया कूलर लेने का प्लान बना रहे हैं तो पहले ये 5 जरूरी बातें जरूर जान लें.
कमरे के हिसाब से चुनें सही कूलर
सबसे बड़ी गलती लोग यही करते हैं कि कमरे के साइज को नजरअंदाज कर देते हैं. छोटे कमरे के लिए बड़ा डेजर्ट कूलर लेना बेकार हो सकता है, वहीं बड़े हॉल में छोटा पर्सनल कूलर ठीक से ठंडक नहीं देगा. अगर आपका कमरा छोटा है तो पर्सनल कूलर बेहतर रहेगा जबकि बड़े कमरे या हॉल के लिए डेजर्ट कूलर ज्यादा असरदार होता है.
Cooling Pads की क्वालिटी जरूर देखें
कूलर की असली ताकत उसके Cooling Pads में होती है. कई सस्ते कूलर में खराब क्वालिटी के पैड लगाए जाते हैं जो जल्दी खराब हो जाते हैं और हवा भी सही से ठंडी नहीं करते. Honeycomb Pads वाले कूलर ज्यादा बेहतर माने जाते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक चलते हैं और अच्छी कूलिंग देते हैं.
पानी की टंकी जितनी बड़ी उतनी ज्यादा राहत
अगर आप बार-बार पानी भरने से बचना चाहते हैं तो बड़े Water Tank वाला कूलर चुनें. छोटे टैंक वाले कूलर में बार-बार पानी डालना पड़ता है, खासकर तेज गर्मी में. परिवार के इस्तेमाल के लिए कम से कम 40 से 60 लीटर की टंकी वाला कूलर ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है.
बिजली की खपत पर भी दें ध्यान
कई लोग सिर्फ कूलिंग देखकर कूलर खरीद लेते हैं लेकिन बाद में बिजली का बिल चौंका देता है. खरीदने से पहले उसकी Power Consumption जरूर चेक करें. आजकल बाजार में ऐसे कूलर भी मौजूद हैं जो कम बिजली में बेहतर कूलिंग देते हैं. इन्वर्टर सपोर्ट वाले मॉडल बिजली कटौती में भी काम आते हैं.
Air Throw और आवाज को नजरअंदाज न करें
कूलर की हवा कितनी दूर तक जाती है इसे Air Throw कहा जाता है. अगर कमरे में हवा सही तरीके से नहीं पहुंचेगी तो कूलिंग का मजा खराब हो जाएगा. इसके अलावा कुछ कूलर बहुत ज्यादा आवाज करते हैं जिससे रात में नींद खराब हो सकती है. इसलिए खरीदने से पहले उसकी Noise Level और Fan Speed जरूर जांच लें.
सिर्फ कीमत देखकर फैसला न करें
सस्ता कूलर शुरुआत में अच्छा लग सकता है लेकिन खराब मोटर, कमजोर बॉडी और कम कूलिंग बाद में परेशानी बढ़ा सकती है. हमेशा अच्छी ब्रांड, मजबूत बॉडी और जरूरी फीचर्स वाला कूलर चुनें. सही जानकारी के साथ खरीदा गया कूलर गर्मियों में लंबे समय तक राहत देता है और बेकार खर्च से भी बचाता है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Password Security Tips : हैकर्स के लिए सबसे आसान होता है इन Password को तोड़ना, ऐसे बनाएं अपने डिवाइस और डेटा को स्ट्रॉग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/password-security-tips-हैकर्स-के-लिए-सबसे-आसान-होता-है-इन-password-को-तोड़ना-ऐसे-बनाएं-अपने-डिवाइस-और-डेटा-को-स्ट्रॉग</link>
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        <description><![CDATA[ Password Security Tips : आज के डिजिटल दौर में हमारा लगभग हर काम ऑनलाइन हो गया है. बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया, ईमेल, शॉपिंग और ऑफिस का काम तक अब इंटरनेट के जरिए होता है. ऐसे में पासवर्ड ही हमारा सबसे बड़ा स्फटी फीचर बन गया है, लेकिन कई लोग आज भी आसान पासवर्ड जैसे 123456, password, abc123 या अपनी जन्मतिथि का इस्तेमाल करते हैं. यही छोटी गलती हैकर्स के लिए सबसे बड़ा मौका बन जाती है.
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि कमजोर पासवर्ड कुछ सेकेंड में ही क्रैक किए जा सकते हैं. अगर एक बार हैकर आपके किसी एक अकाउंट तक पहुंच गया, तो वह आपके बैंक अकाउंट, ईमेल, सोशल मीडिया और पर्सनल डेटा तक भी पहुंच सकता है. कई बार लोग एक ही पासवर्ड को कई अकाउंट्स में इस्तेमाल करते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि आप मजबूत पासवर्ड बनाएं और अपनी डिजिटल सुरक्षा को गंभीरता से लें. तो आइए जानते हैं कि हैकर्स के लिए किन पासवर्ड को तोड़ना सबसे आसान होता है और अपने डिवाइस और डेटा को स्ट्रॉग कैसे बनाएं.&amp;nbsp;
हैकर्स के लिए किन पासवर्ड को तोड़ना सबसे आसान होता है?
1. हैकर्स सबसे पहले उन्हीं पासवर्ड्स को ट्राई करते हैं जो लोग सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. जैसे 123456, password, abc123, qwerty, 000000. ऐसे पासवर्ड कुछ सेकेंड में क्रैक हो जाते हैं. कई लोग अपने नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि या बच्चे के नाम को भी पासवर्ड बना लेते हैं. सोशल मीडिया पर मौजूद जानकारी से हैकर इन्हें आसानी से गेस कर लेते हैं.&amp;nbsp;
2. बहुत से लोग Gmail, Facebook, Instagram और बैंकिंग ऐप में एक ही पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं. यह आदत बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. अगर किसी एक वेबसाइट का डेटा लीक हो जाए और आपका पासवर्ड हैकर के हाथ लग जाए, तो वह उसी पासवर्ड से आपके बाकी अकाउंट भी खोलने की कोशिश करेगा, इसे Credential Stuffing कहा जाता है. इसलिए हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
3. कम अक्षरों वाले पासवर्ड को हैक करना आसान होता है. साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार पासवर्ड कम से कम 12 से 16 अक्षरों का होना चाहिए.सिर्फ छोटे शब्द रखने की जगह इनमें अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल करें, जैसे बड़े अक्षर (A,B,C), छोटे अक्षर (a,b,c), नंबर (1,2,3), स्पेशल कैरेक्टर (@,#,$,&amp;amp;).
4.कई लोग सीधे शब्द जैसे finance, welcome या india पासवर्ड बना लेते हैं. हैकर्स के पास ऐसे लाखों शब्दों की लिस्ट होती है, जिन्हें ऑटोमैटिक टूल्स से ट्राई करते हैं. इसे Dictionary Attack कहा जाता है. इसलिए आसान शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
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अपने डिवाइस और डेटा को स्ट्रॉग कैसे बनाएं?
1. अब सिर्फ पासवर्ड पर रखना सुरक्षित नहीं माना जाता है. इसलिए जहां भी पॉसिबल हो, Two-Factor Authentication (2FA) ऑन करें.इसमें पासवर्ड डालने के बाद आपके मोबाइल पर OTP या कोड आता है. अगर किसी हैकर को आपका पासवर्ड मिल भी जाए, तब भी बिना OTP के वह अकाउंट में लॉगिन नहीं कर पाएगा. आज Gmail, Facebook, Instagram, WhatsApp और बैंकिंग ऐप्स में यह सुविधा मौजूद है.&amp;nbsp;
2. अलग-अलग अकाउंट्स के लिए अलग पासवर्ड याद रखना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में Password Manager काफी मददगार साबित होता है. यह आपके सभी पासवर्ड सुरक्षित तरीके से स्टोर करता है और मजबूत पासवर्ड भी खुद बना देता है.
3.अगर आपको लगता है कि आपका अकाउंट कभी हैक हुआ है या किसी वेबसाइट का डेटा लीक हुआ है, तो तुरंत पासवर्ड बदल दें. साथ ही पुराने और कमजोर पासवर्ड को समय-समय पर अपडेट करते रहना बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
4. पासवर्ड कम से कम 12-16 अक्षरों का रखें और हर अकाउंट के लिए अलग Password बनाएं.&amp;nbsp;
5. इसके अलावा नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर इस्तेमाल न करें.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इस नंबर से आ रही इंटरनेशनल कॉल से रहें सावधान! सरकार ने जारी की बड़ी चेतावनी, एक गलती से खाली हो सकता है बैंक</title>
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        <description><![CDATA[ Cyber Fraud: भारत सरकार के दूरसंचार विभाग यानी Department of Telecommunications (DoT) ने स्मार्टफोन यूजर्स को एक नए तरह के साइबर फ्रॉड को लेकर अलर्ट किया है. विभाग ने कहा है कि अगर किसी कॉल पर इंटरनेशनल कॉल का दावा किया जाए लेकिन नंबर की शुरुआत +91 से हो रही हो तो ऐसे कॉल को तुरंत संदिग्ध मान लेना चाहिए. दरअसल, +91 भारत का कंट्री कोड है और असली इंटरनेशनल कॉल हमेशा उसी देश के कोड से आती है जहां से कॉल की जा रही होती है. ऐसे में +91 दिखाकर खुद को विदेशी कॉल बताना धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है.
फर्जी कॉल से लोगों को बनाया जा रहा निशाना
DoT के मुताबिक साइबर अपराधी अब Caller ID Spoofing जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस तकनीक की मदद से स्कैमर्स किसी भी नंबर को असली या भरोसेमंद दिखाने की कोशिश करते हैं ताकि लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाएं. ऐसे कॉल में ठग खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिसकर्मी, बैंक कर्मचारी या डिलीवरी एजेंट बताकर लोगों पर दबाव बनाते हैं. कई बार यूजर्स को डराया जाता है कि उनका सिम बंद होने वाला है, बैंक अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा या उनके नाम पर कोई गैरकानूनी पार्सल पकड़ा गया है.
बैंक डिटेल और OTP चुराने का खतरा
सरकारी एजेंसियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने पहले भी इस तरह की स्पूफ कॉल्स को बड़ा खतरा बताया है. इन कॉल्स का मकसद लोगों से बैंकिंग डिटेल, OTP, पासवर्ड और दूसरी निजी जानकारी हासिल करना होता है. कुछ मामलों में यूजर्स को फर्जी लिंक भेजे जाते हैं या नकली कस्टमर सपोर्ट सेवाओं तक पहुंचाया जाता है जिससे मोबाइल और बैंक अकाउंट दोनों खतरे में पड़ सकते हैं.
DoT ने दी ये अहम सलाह
दूरसंचार विभाग ने साफ कहा है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी या वित्तीय जानकारी शेयर न करें. अगर कोई कॉल संदिग्ध लगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं और उसकी शिकायत करें. विभाग ने लोगों से कहा है कि ऐसे फर्जी नंबरों और टेलीकॉम फ्रॉड की रिपोर्ट सरकार के Sanchar Saathi प्लेटफॉर्म पर करें. यह सरकारी सेवा यूजर्स को साइबर और टेलीकॉम सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराती है.
सोशल मीडिया पर भी जारी किया गया अलर्ट
DoT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि अगर +91 नंबर से कोई कॉल खुद को इंटरनेशनल बता रही है तो यह पहला रेड फ्लैग है. सरकार लगातार Scam Alert, Cyber Safety और International Fraud जैसे अभियानों के जरिए लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में जुटी हुई है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब तक के सबसे बड़े डिस्प्ले के साथ आएंगे iPhone 18 Pro और18 Pro Max, टूट सकता है यह रिकॉर्ड!</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro and 18 Pro Max: ऐप्पल के अपकमिंग फ्लैगशिप मॉडल iPhone 18 Pro और 18 Pro Max का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है. इन दोनों ही मॉडल्स में बड़े बदलाव के संकेत पहले से ही मिल रहे थे. अब एक नई लीक ने लोगों की एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि अपकमिंग मॉडल्स का डिस्प्ले साइज मौजूदा iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की तुलना में बड़ा होने वाला है. ये महज कयास हैं और ऐप्पल की तरफ से अभी तक ऑफिशियली कुछ नहीं कहा गया है.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro और 18 Pro Max का डिस्प्ले साइज बढ़ेगा
Tipster Majin ने अपकमिंग मॉडल के साइज को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने iPhone 18 Pro और 18 Pro Max की प्रोटेक्टिव फिल्म की फोटो शेयर की है, जिसके बाद साइज को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं. माना जा रहा है कि iPhone 18 Pro में मौजूदा मॉडल की 6.3 इंच की स्क्रीन की जगह 6.4 इंच और मैक्स मॉडल में 6.9 इंच की जगह लगभग 7 इंच की स्क्रीन मिल सकती है. अगर ऐसा होता है तो पहली बार कोई फोन लगभग 7 इंच के डिस्प्ले के साथ लॉन्च होगा. अभी तक कंपनियां 6.9 इंच तक ही अटकी हैं. इसके अलावा यह ऐप्पल के हिसाब से भी डिजाइन लैंग्वेज में बड़ा बदलाव होगा. कंपनी पिछले कई सालों से फ्रंट डिजाइन को सेम ही रखे हुए है.
डायनामिक आईलैंड होगा छोटा
अपकमिंग मॉडल में एक और बड़ा बदलाव डायनामिक आईलैंड में देखने को मिलेगा. इस बार कंपनी इसका साइज छोटा करने जा रही है. 18 प्रो मॉडल्स में यह 17 प्रो मॉडल्स की तुलना में 35 प्रतिशत छोटा होगा. इसके साथ कंपनी डिस्प्ले के लिए नया LTPO+ डिस्प्ले पैनल यूज कर सकती है, जो ज्यादा पावर एफिशिएंट होगा.
बैटरी कैपेसिटी भी बढ़ेगी- ऐसे कयास हैं कि दोनों प्रो मॉडल्स में 5,100mAh-5,200mAh की कैपेसिटी वाला बैटरी पैक दिया जा सकता है. प्रो मैक्स में ज्यादा कैपेसिटी वाला बैटरी पैक लगा होगा, जिस कारण इसकी थिकनेस भी 0.5mm ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
एक्सपेक्टेड प्राइस और लॉन्चिंग
ऐप्पल हर साल सितंबर में नए आईफोन लॉन्च करती है. इसलिए माना जा रहा है कि सितंबर के दूसरे हफ्ते में iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया जाएगा और एक-दो हफ्ते बाद इनकी बिक्री शुरू हो जाएगी. एक्सपेक्टेड प्राइस की बात करें तो ऐसी उम्मीद है कि प्रो मॉडल्स की कीमतों में इजाफा नहीं होगा और इसे 17 प्रो मॉडल्स के दामों पर ही लॉन्च किया जा सकता है. इसका मतलब है कि iPhone 18 Pro मॉडल्स की शुरुआती कीमत 1,34,900 रुपये रह सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Meta का बड़ा दांव! Facebook में आया Reddit जैसा नया फीचर, अब हर टॉपिक पर होगी खुलकर चर्चा</title>
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        <description><![CDATA[ Meta New Feature: सोशल मीडिया दिग्गज Meta लगातार नए ऐप्स और फीचर्स पर काम कर रहा है. हाल ही में Snapchat जैसे फीचर वाला Instants पेश करने के बाद अब कंपनी ने अमेरिका में एक नया ऐप लॉन्च किया है जिसका नाम Forum रखा गया है. यह ऐप काफी हद तक Reddit की तरह काम करता है और खासतौर पर Facebook Groups और कम्युनिटी डिस्कशन को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
Forum का मकसद लोगों को केवल फोटो-वीडियो स्क्रॉल कराने के बजाय किसी खास विषय पर बातचीत, सलाह और सवाल-जवाब का प्लेटफॉर्म देना है. इसमें AI आधारित जवाब देने की सुविधा भी शामिल की गई है जिससे यूजर्स को बेहतर अनुभव मिल सके.
Facebook अकाउंट से होगा लॉगिन
Meta के इस नए ऐप में यूजर्स अपने Facebook अकाउंट के जरिए लॉगिन कर सकते हैं. लॉगिन करने के बाद उन्हें Facebook Groups की पोस्ट Reddit जैसी फीड में दिखाई देती हैं. यहां लोग अलग-अलग टॉपिक पर चल रही चर्चाओं को पढ़ सकते हैं, नए ग्रुप्स खोज सकते हैं और सीधे कम्युनिटी में पोस्ट भी कर सकते हैं.
कंपनी का कहना है कि Forum को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि यूजर्स का ध्यान वायरल कंटेंट से हटकर असली बातचीत और उपयोगी जानकारी पर जाए.
Nickname से पोस्ट करने की सुविधा
Forum की एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें यूजर्स Nickname यानी अलग नाम से पोस्ट कर सकते हैं. हालांकि उनकी गतिविधियां Facebook अकाउंट और संबंधित Groups से जुड़ी रहेंगी. ऐप में किया गया कोई भी पोस्ट उसी Facebook Group में भी दिखाई देगा जिससे कम्युनिटी कनेक्शन बना रहेगा. इसके अलावा इसमें एक हल्का प्रोफाइल सेक्शन भी दिया गया है जहां यूजर्स की Group एक्टिविटी और पोस्ट्स दिखाई देंगी.
पहले भी कर चुका है ऐसा प्रयोग
यह पहली बार नहीं है जब Meta ने Groups के लिए अलग ऐप लॉन्च किया हो. साल 2014 में Facebook ने एक स्टैंडअलोन Groups ऐप लॉन्च किया था लेकिन बाद में 2017 में उसे बंद कर दिया गया. अब कंपनी नए अंदाज और AI फीचर्स के साथ फिर से इस कॉन्सेप्ट को वापस ला रही है.
AI देगा सवालों के जवाब
Forum में सबसे बड़ा आकर्षण इसका AI-powered Ask फीचर माना जा रहा है. यूजर कोई भी सवाल टाइप करेगा और ऐप अलग-अलग Facebook Groups में मौजूद चर्चाओं के आधार पर जवाब तैयार करेगा.
AI द्वारा दिए गए जवाबों के साथ उन पोस्ट्स और चर्चाओं के लिंक भी दिखाई देंगे जिनसे जानकारी ली गई होगी. इससे यूजर चाहें तो पूरी बातचीत भी पढ़ सकते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, Meta Group एडमिन्स की मदद के लिए भी AI का इस्तेमाल कर रहा है ताकि मॉडरेशन और कम्युनिटी मैनेजमेंट आसान बनाया जा सके.
AI दौर में Meta की नई रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक Mark Zuckerberg का मानना है कि AI की मदद से कंपनी पहले की तुलना में तेजी से नए ऐप्स तैयार कर सकती है. यही वजह है कि Meta लगातार नए एक्सपेरिमेंट कर रहा है. कुछ समय पहले कंपनी ने Threads लॉन्च किया था, जिसे कई लोग X का विकल्प मानते हैं. वहीं &amp;lsquo;Instants&amp;rsquo; फीचर में Snapchat और BeReal जैसी झलक देखने को मिली थी. अब Forum के जरिए कंपनी Reddit जैसी कम्युनिटी-आधारित बातचीत की दुनिया में भी कदम रख रही है.
फिलहाल सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध
अभी Forum केवल अमेरिका में iPhone यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है. Meta ने फिलहाल इसके ग्लोबल लॉन्च को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. हालांकि कंपनी की रणनीति को देखकर साफ है कि आने वाले समय में AI और अलग-अलग स्टैंडअलोन ऐप्स पर उसका फोकस और बढ़ सकता है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI से दोस्ती कर सकती है अकेला, दिमाग पर भी पड़ता है यह बुरा असर</title>
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        <description><![CDATA[ AI Tools Risk: एआई टूल्स धीरे-धीरे हमारे जीवन में अहम जगह बनाते जा रहे हैं. पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल तक हर मामले पर लोग अब एआई टूल्स की मदद ले रहे हैं. लगातार बढ़ते यूज के कारण कई लोग इन टूल्स से इमोशनली अटैच हो जाते हैं. एक मामले में तो एक महिला ने एआई से बने वर्चुअल पार्टनर से शादी भी रचा ली थी. अब एक रिसर्च में सामने आया है कि एआई टूल्स के कई छिपे हुए साइकोलॉजिकल और सोशल रिस्क हैं. इन टूल्स पर ज्यादा निर्भरता से अकेले होने तक का खतरा है. इसलिए इन्हें संभलकर यूज करना जरूरी है.
असल रिश्तों पर असर डाल सकती है एआई से दोस्ती
IIM लखनऊ की एक स्टडी में सामने आया है कि एआई कंपेनियन से हद से ज्यादा इमोशनली अटैच होना असल दुनिया के रिश्तों और मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है. रिसर्चर का कहना है कि एआई टूल्स आने के बाद लोगों के संवाद और इमोशनल सपोर्ट मांगने का तरीका बदल गया है. इन टूल्स को कंफर्ट, कंपैनियनशिप और इमोशनल इंगेजमेंट के टूल के तौर मार्केट किया जाता है, लेकिन यूजर के बिहेवियर और साइकोलॉजी पर इसका काफी असर पड़ सकता है. रिसर्चर ने बताया कि कई लोग इमोशनल कंफर्ट के लिए लोग अब इंसानों की जगह एआई सिस्टम यूज कर रहे हैं. इससे असल लाइफ में लोगों से बातचीत छूट जाती है. रिसर्चर ने बताया कि कई यूजर इमोशनल रेगुलेशन और मेंटल हेल्थ सपोर्ट के लिए एआई टूल्स पर डिपेंड होते जा रहे हैं. अगर ऐसा ज्यादा समय तक होता है तो यह खतरनाक हो सकता है.
एआई टूल्स को 10 मिनट यूज करना भी खतरनाक
कुछ महीने पहले Carnegie Mellon University, MIT, University of Oxford और UCLA की एक और रिसर्च में सामने आया था कि कुछ देर तक ही एआई चैटबॉट्स को यूज करना लोगों को मानसिक रूप से आलसी बना सकता है. रिसर्चर ने बताया कि एआई की थोड़ी-सी मदद भी इंसान के सोचने की क्षमता को कम कर देती है. इस कारण वो प्रॉब्लम को खुद से नहीं सुलझा पाते. अगर चीजें जरा भी मुश्किल हो जाए तो वो हाथ खड़े कर देते हैं. एक बार लोगों को एआई से जवाब मिलने की आदत लग जाए तो वो खुद से किसी मुश्किल का हल निकालने का संघर्ष करने के लिए तैयार नहीं है. एआई की मदद के बदले में दिमाग बड़ी कीमत चुका रहा है. जो लोग एआई का यूज कर रहे है, वो इस टेक्नोलॉजी को कभी यूज न कर पाने वाले लोगों की तुलना में जल्दी गिव अप कर रहे हैं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube पर बर्बाद न करें टाइम, लंबे वीडियो देखकर जेमिनी बता देगा सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Ask YouTube: अगर आपके पास यूट्यूब पर घंटों लंबे वीडियो देखने का समय नहीं है, लेकिन आप कुछ जरूरी भी मिस नहीं करना चाहते तो चिंता करने की जरूरत नहीं है. आप अपना काम करते रह सकते हैं और गूगल का एआई असिस्टेंट Gemini आपके लिए वीडियो देखकर सब बता देगा. यह फीचर न सिर्फ आपका टाइम बचाएगा बल्कि दूसरे कई कामों में आपकी मदद भी कर सकता है. आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं कि जेमिनी आपके लिए वीडियो कैसे देखेगा और इस फीचर के और क्या-क्या फायदे हैं.
जेमिनी आपके लिए वीडियो कैसे देखेगा?
दो तरीकों से जेमिनी को वीडियो देखने का काम सौंपा जा सकता है. पहला तरीका है कि यूट्यूब वीडियो के लिंक को जेमिनी को भेजकर उससे जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं. दूसरा तरीके में जेमिनी को यूट्यूब पर ही यूज किया जा सकता है. यूट्यूब ओपन करने पर अब लाइक और शेयर के ऑप्शन के साथ Ask का भी ऑप्शन मिलता है. इस पर क्लिक करते ही यूट्यूब में इंटीग्रेट किया गया जेमिनी ओपन हो जाता है, जिस पर आप प्रॉम्प्ट देकर कुछ भी पूछ सकते हैं. इसके लिए आपको गूगल अकाउंट में साइन-इन करना होगा. बिना साइन-इन किए आस्क का ऑप्शन नहीं दिखेगा.&amp;nbsp;
क्या-क्या काम कर सकता है यह फीचर?
लंबे वीडियो की बना देगा समरी- अगर आप जेमिनी से किसी लंबे वीडियो की समरी बनाने की कहेंगे तो यह पलक झपकते ही टास्क पूरा कर देगा. इस समरी में पूरे वीडियो की टाइमस्टैंप भी मिलेगी. यानी यह बता देगा कि वीडियो में कितने मिनट पर किस टॉपिक पर बात चल रही है. आप वीडियो को आधा देखने के बाद बाकी के कंटेट की भी समरी बना सकते हैं.
सारे सवालों के देगा जवाब- आप किसी वीडियो की समरी नहीं बनाना चाहते तो जेमिनी आपके सवालों के जवाब भी दे सकता है. आप किसी भी वीडियो के बारे में जेमिनी से अपने सवाल पूछ सकता है और यह टाइम स्टैंप के साथ उसका जवाब देगा. इस तरह भी आप लंबा वीडियो देखने से बच जाएंगे.
जरूरी हिस्से के लिए नहीं देखना पड़ेगा पूरा वीडियो- कई वीडियो ऐसे होते हैं, जिसके कुछ ही हिस्से में यूजर की दिलचस्पी होती है. लेकिन इस हिस्से पर पहुंचने के लिए कई बार पूरा वीडियो देखना पड़ जाता है. जेमिनी यह झंझट भी दूर कर देता है. आप जेमिनी से यह पूछ सकते हैं कि आपकी पसंद के टॉपिक पर किस टाइम बात हो रही है. जेमिनी आपको सीधा वहीं ले जाएगा.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>Vivo T5x 5G या OnePlus Nord CE 6 Lite! 25 हजार की रेंज में कौन देता है बेहतरीन परफॉर्मेंस, खरीदने से पहले समझें कंपैरिजन</title>
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        <description><![CDATA[ Vivo T5X 5G Vs OnePlus Nord CE6 Lite: भारत के बजट 5G स्मार्टफोन बाजार में इस समय दो फोन सबसे ज्यादा चर्चा में हैं Vivo T5x 5G और OnePlus Nord CE 6 Lite. दोनों ही डिवाइस उन यूजर्स को ध्यान में रखकर लॉन्च किए गए हैं जो कम कीमत में दमदार बैटरी, अच्छा कैमरा और स्मूद परफॉर्मेंस चाहते हैं. OnePlus का यह फोन 6GB + 128GB वेरिएंट में लगभग 23,499 रुपये में आता है जबकि Vivo T5x 5G की कीमत करीब 22,999 रुपये रखी गई है. ऐसे में सवाल यही है कि 2026 में किस फोन पर पैसा लगाना ज्यादा समझदारी होगी.
डिस्प्ले और डिजाइन में कौन आगे?
दोनों स्मार्टफोन बड़े FHD+ LCD डिस्प्ले के साथ आते हैं. OnePlus Nord CE 6 Lite में 6.72 इंच की स्क्रीन दी गई है जिसमें 144Hz रिफ्रेश रेट और 1,000 निट्स ब्राइटनेस मिलती है. वहीं Vivo T5x 5G में 6.76 इंच का थोड़ा बड़ा डिस्प्ले मौजूद है जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,300 निट्स की पीक ब्राइटनेस दी गई है.
अगर आप ज्यादा स्मूद स्क्रॉलिंग और गेमिंग पसंद करते हैं तो OnePlus का 144Hz रिफ्रेश रेट आकर्षित कर सकता है. लेकिन तेज धूप में बेहतर विजिबिलिटी के मामले में Vivo का फोन ज्यादा मजबूत दिखाई देता है. डिजाइन की बात करें तो दोनों फोन फ्लैट एज और मॉडर्न लुक के साथ आते हैं इसलिए यहां पसंद काफी हद तक कलर और ब्रांड पर निर्भर करेगी.
कैमरा सेटअप कितना दमदार?
फोटोग्राफी के मामले में दोनों फोन लगभग बराबरी पर दिखाई देते हैं. दोनों में 50MP का प्राइमरी रियर कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. सोशल मीडिया फोटो, वीडियो कॉलिंग, रील्स और डेली फोटोग्राफी के लिए दोनों स्मार्टफोन अच्छा अनुभव देने का दावा करते हैं.
हालांकि असली फर्क मेगापिक्सल से ज्यादा इमेज प्रोसेसिंग और कलर ट्यूनिंग में देखने को मिल सकता है. कुछ यूजर्स को Vivo के कैमरा कलर्स पसंद आ सकते हैं जबकि कुछ लोग OnePlus की नैचुरल प्रोसेसिंग को बेहतर मान सकते हैं.
परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस
OnePlus Nord CE 6 Lite में MediaTek Dimensity 7400 Apex प्रोसेसर मिलता है जबकि Vivo T5x 5G में Dimensity 7400 Turbo चिप दी गई है. दोनों प्रोसेसर एक ही प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं इसलिए रोजमर्रा के इस्तेमाल, वीडियो स्ट्रीमिंग और कैजुअल गेमिंग में बहुत बड़ा अंतर महसूस नहीं होगा.
सॉफ्टवेयर की बात करें तो दोनों फोन Android 16 पर चलते हैं. OnePlus में OxygenOS 16 मिलता है जबकि Vivo में OriginOS 6 दिया गया है. जो यूजर क्लीन और हल्का इंटरफेस पसंद करते हैं उन्हें OxygenOS ज्यादा पसंद आ सकता है. वहीं OriginOS कई कस्टम फीचर्स के साथ आता है.
बैटरी में किसका दबदबा?
बैटरी के मामले में Vivo थोड़ा आगे निकलता नजर आता है. Vivo T5x 5G में 7,200mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जबकि OnePlus Nord CE 6 Lite में 7,000mAh बैटरी मिलती है. Vivo फोन 44W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है और सामान्य इस्तेमाल में लगभग दो दिन तक आराम से चल सकता है. अगर आप ज्यादा ट्रैवल करते हैं या बार-बार चार्जिंग से बचना चाहते हैं तो Vivo T5x 5G ज्यादा बेहतर विकल्प बन सकता है.
मजबूती और वजन में फर्क
Vivo T5x 5G का वजन 220 ग्राम है और इसमें IP68 रेटिंग दी गई है जिससे यह पानी और धूल से बेहतर सुरक्षा देता है. दूसरी तरफ OnePlus Nord CE 6 Lite हल्का है और इसका वजन 208 ग्राम रखा गया है लेकिन इसमें IP64 रेटिंग मिलती है.
यानि जो लोग ज्यादा मजबूत और टिकाऊ फोन चाहते हैं उनके लिए Vivo बेहतर हो सकता है. वहीं हल्का और हाथ में आरामदायक फोन पसंद करने वाले यूजर्स OnePlus की तरफ जा सकते हैं.
आखिर किसे खरीदना रहेगा सही?
अगर आपकी प्राथमिकता बड़ी बैटरी, ज्यादा मजबूत बॉडी और बेहतर आउटडोर ब्राइटनेस है तो Vivo T5x 5G ज्यादा वैल्यू देता है. लेकिन अगर आप हल्का फोन, ज्यादा स्मूद डिस्प्ले और क्लीन सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस चाहते हैं तो OnePlus Nord CE 6 Lite भी शानदार विकल्प साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Vivo, T5x, या, OnePlus, Nord, Lite, हजार, की, रेंज, में, कौन, देता, है, बेहतरीन, परफॉर्मेंस, खरीदने, से, पहले, समझें, कंपैरिजन</media:keywords>
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        <title>Google Search में AI से हो गए परेशान? कंपनी नहीं दे रही बंद करने का ऑप्शन, लेकिन ये सीक्रेट ट्रिक्स अभी भी करेंगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ Google AI Search: पिछले कुछ सालों में google.com ने अपने सर्च इंजन में तेजी से AI फीचर्स जोड़ने शुरू कर दिए हैं. पहले AI Overviews आए, फिर AI Mode और अब कंपनी एक नया कस्टमाइज्ड सर्च बॉक्स भी लेकर आई है जिसे वह पिछले दो दशकों में Search का सबसे बड़ा बदलाव बता रही है. लेकिन हर यूजर को यह AI अनुभव पसंद आए ऐसा जरूरी नहीं है. कई लोग आज भी पुराने और सिंपल सर्च रिजल्ट्स पसंद करते हैं जहां सीधे वेबसाइट लिंक दिखाई दें और बीच में AI के जवाब न आएं.
समस्या यह है कि Google फिलहाल Search में AI फीचर्स को पूरी तरह बंद करने का कोई आधिकारिक विकल्प नहीं देता. कंपनी AI Overviews को Search का मुख्य हिस्सा मानती है. हालांकि कुछ ऐसे तरीके जरूर मौजूद हैं जिनकी मदद से AI रिजल्ट्स को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
सर्च के आखिर में जोड़ें -AI
अगर आप Google Search में AI Overview कम देखना चाहते हैं तो सबसे आसान तरीका है अपनी सर्च क्वेरी के आखिर में -AI जोड़ना. मान लीजिए आप सर्च करते हैं best gaming laptop 2026 -AI या how to bake pizza -AI तो कई बार Google AI आधारित जवाब दिखाने के बजाय नॉर्मल वेब रिजल्ट्स ज्यादा दिखाता है.
असल में Google लंबे समय से Search Operators सपोर्ट करता है जिनकी मदद से यूजर्स ज्यादा सटीक तरीके से सर्च कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर site: किसी खास वेबसाइट के रिजल्ट दिखाता है जबकि filetype: किसी विशेष फाइल फॉर्मेट जैसे PDF या Excel खोजने में मदद करता है.
इसी तरह -AI भी Google को संकेत देता है कि AI से जुड़े रिजल्ट्स को कम प्राथमिकता दी जाए. हालांकि यह तरीका हर बार पूरी तरह काम नहीं करता लेकिन AI Overviews की संख्या काफी कम हो सकती है.
Web Filter ऑन करके पाएं पुराना Search अनुभव
Google में एक और फीचर मौजूद है जिसे Web Filter कहा जाता है. इसे ऑन करने के बाद AI Overviews, Shopping Widgets, Knowledge Panels और कई AI आधारित एलिमेंट्स हट जाते हैं और आपको पुराने स्टाइल वाला क्लासिक सर्च पेज दिखाई देता है.
इसे इस्तेमाल करना भी बेहद आसान है. सबसे पहले सामान्य तरीके से Google Search करें. इसके बाद Search Bar के नीचे जहां Images, Videos और News जैसे विकल्प दिखाई देते हैं, वहां More पर क्लिक करें और फिर Web चुन लें. इसके बाद आपको केवल वेबसाइट लिंक वाले सिंपल सर्च रिजल्ट्स दिखने लगेंगे जिससे Search अनुभव काफी साफ और तेज महसूस होता है.
दूसरे Search Engine का इस्तेमाल भी बन सकता है समाधान
अगर आप Google के AI फीचर्स से पूरी तरह दूरी बनाना चाहते हैं तो किसी दूसरे Search Engine पर स्विच करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है. प्राइवेसी फोकस्ड सर्च इंजन duckduckgo.com⁠� यूजर्स को AI फीचर्स बंद करने का विकल्प देता है. इसमें Search Assist नाम का फीचर मौजूद है लेकिन इसे एक सिंपल टॉगल से ऑफ किया जा सकता है.
वहीं search.brave.com⁠ भी Google जैसा अनुभव देने की कोशिश करता है और इसका अपना अलग वेब इंडेक्स है. Brave में Answer with AI फीचर दिया गया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे Search Settings में जाकर आसानी से बंद किया जा सकता है.
क्या भविष्य में AI से बचना मुश्किल होगा?
टेक कंपनियां तेजी से AI आधारित Search की ओर बढ़ रही हैं और आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है. ऐसे में पूरी तरह AI-फ्री Search मिलना मुश्किल जरूर हो सकता है, लेकिन फिलहाल ऊपर बताए गए तरीके इस्तेमाल करके आप काफी हद तक पुराने और क्लीन Search अनुभव का मजा ले सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Google, Search, में, से, हो, गए, परेशान, कंपनी, नहीं, दे, रही, बंद, करने, का, ऑप्शन, लेकिन, ये, सीक्रेट, ट्रिक्स, अभी, भी, करेंगी, काम</media:keywords>
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        <title>Google Maps Hidden Features: बहुत कम लोग जानते हैं Google Maps के ये Hidden Features, मोबाइल में ऐसे करें सेटिंग</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps Hidden Features: आज के समय में गूगल मैप्स सिर्फ रास्ता बताने वाला ऐप नहीं रह गया है. ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए करते हैं, लेकिन इसमें कई ऐसे फीचर्स भी मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है. यह फीचर्स न सिर्फ सफर को आसान बनाते हैं, बल्कि रोजमर्रा के कई कामों में भी मदद करते हैं.
गूगल मैप्स में ऐसे कई स्मार्ट टूल्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यूजर्स दूरी माप सकते हैं, पार्किंग लोकेशन सेव कर सकते हैं, बिना इंटरनेट के रास्ता देख सकते हैं और यहां तक की आसपास के होटल, रेस्टोरेंट और चार्जिंग स्टेशन तक भी तक की जानकारी भी पा सकते हैं. इसके अलावा लाइव ट्रैफिक अपडेट और वॉइस नेविगेशन जैसे फीचर्स ड्राइविंग को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाते हैं.
मेजरिंग डिस्टेंस
गूगल मैप्स की मदद से किसी भी दो स्थानों के बीच की दूरी आसानी से मापी जा सकती है. इसके लिए मैप पर उस जगह को सेलेक्ट करना है, जहां से दूरी मापनी है. इसके बाद मेजरिंग डिस्टेंस ऑप्शन पर क्लिक करके दूसरा बिंदु सेट किया जा सकता है. दोनों बिंदु सेट होते ही मैप किलोमीटर में दूरी दिखा देता है. इस फिचर का इस्तेमाल कई लोग ट्रैकिंग यात्रा प्लानिंग और जमीन की दूरी समझने के लिए करते हैं.&amp;nbsp;
पार्किंग लोकेशन&amp;nbsp;
भीड़भाड़ वाले इलाकों या बड़े मॉल में गाड़ी पार्क करने के बाद अक्सर लोग उसकी लोकेशन भूल जाते हैं. गूगल मैप्स में सेव पार्किंग फीचर इस समस्या को आसान बना देता है. गाड़ी पार्क करने के बाद मैप में दिख रहे ब्लू डॉट पर टाइप करके सेव पार्किंग ऑप्शन चुनना जा सकता है. इसके बाद लौटते समय वहीं लोकेशन मैप पर दिखाई देती है और आसानी से वहां तक पहुंचा जा सकता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;पार्किंग स्पॉट चेक करना&amp;nbsp;
कई बार लोग किसी जगह पहुंचने के बाद पार्किंग की समस्या में फंस जाते हैं. गूगल मैप्स में पार्किंग की जानकारी देखने का फीचर भी मिलता है. इसके लिए पहले लोकेशन सर्च करनी होती है. इसके बाद मैप पार्किंग उपलब्धता से जुड़ी जानकारी दिखा देता है. इससे पहले ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां गाड़ी पार्क करने की सुविधा मौजूद है या नहीं.&amp;nbsp;
नेवीगेशन फिचर
गूगल मैप्स का ऑफलाइन नेविगेशन फीचर भी काफी काम का माना जाता है. इसकी मदद से यूजर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी रास्ता देख सकते हैं. इसके लिए पहले से किसी इलाके का मैप डाउनलोड करना होता है. एक बार मैप डाउनलोड हो जाने के बाद बिना नेटवर्क वाले इलाके में भी रास्ता आसानी से देखा जा सकता है.&amp;nbsp;
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होटल, रेस्टोरेंट और मेन्यू की जानकारी&amp;nbsp;
अगर आप किसी नए इलाके में है और होटल, रेस्टोरेंट, मेडिकल स्टोर या एटीएम ढूंढना चाहते हैं तो गूगल मैप्स इसमें भी आपकी मदद कर सकता है. यूजर्स किसी रेस्टोरेंट की रेटिंग, फोटो, रिव्यू और कई जगह पर मेन्यू कार्ड तक देख सकते हैं. कई लोग खाना ऑर्डर करने से पहले रेट लिस्ट और डिलीवरी टाइम चेक करने के लिए भी गूगल मैप्स का इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
ईवी चार्जिंग स्टेशन सर्च करना&amp;nbsp;
इलेक्ट्रिक व्हीकल इस्तेमाल करने के लिए गूगल मैप्स में चार्जिंग स्टेशन सर्च करने की सुविधा दी गई है. मैप पर ईवी चार्जिंग स्टेशन नियर मी या चार्जर टाइप सर्च करने पर आसपास मौजूद चार्जिंग पॉइंट की जानकारी दिखाई देती है. इससे सफर के दौरान चार्जिंग स्टेशन ढूंढना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;
स्ट्रीट व्यू टाइम ट्रैवल&amp;nbsp;
गूगल के एक फीचर में स्ट्रीट व्यू टाइम ट्रैवल भी शामिल है. इसमें आप पुराने समय को लेकर यह देख सकते हैं कि पुराने टाइम में कोई लोकेशन कैसी दिखती थी, हालांकि यह कुछ ही जगह के लिए मिलता है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>WiFi Slow होने की असली वजह आई सामने! कहीं पड़ोसी तो चोरी&amp;छिपे नहीं चला रहे आपका इंटरनेट? तुरंत बदलें राउटर की ये सीक्रेट सेटिंग्स</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi Internet Speed: आज के समय में घर का WiFi सिर्फ इंटरनेट नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है. ऑनलाइन क्लास, ऑफिस मीटिंग, OTT स्ट्रीमिंग और गेमिंग जैसी चीजें पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि महंगा प्लान लेने के बावजूद WiFi अचानक स्लो चलने लगता है. वीडियो बफर होने लगती है, कॉल कटने लगती है और मोबाइल में इंटरनेट रेंगने लगता है. ऐसे में ज्यादातर लोग नेटवर्क कंपनी को दोष देते हैं जबकि असली वजह कुछ और भी हो सकती है.
कहीं कोई चोरी-छिपे तो नहीं इस्तेमाल कर रहा आपका WiFi?
कई बार पड़ोसी या आसपास मौजूद लोग बिना बताए आपके WiFi से कनेक्ट हो जाते हैं. अगर पासवर्ड कमजोर हो या पहले कभी किसी को शेयर किया गया हो तो दूसरे लोग आसानी से इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपके WiFi की स्पीड कम हो जाती है और डेटा भी तेजी से खत्म होने लगता है.
अगर आपको शक है कि कोई दूसरा व्यक्ति आपका इंटरनेट इस्तेमाल कर रहा है तो सबसे पहले राउटर की सेटिंग में जाकर Connected Devices की लिस्ट चेक करें. यहां उन सभी डिवाइस के नाम दिखाई देते हैं जो आपके WiFi से जुड़े हुए हैं. अगर कोई अनजान डिवाइस दिखे तो समझ जाइए कि आपका नेटवर्क सुरक्षित नहीं है.
तुरंत बदलें WiFi का पासवर्ड
WiFi सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका मजबूत पासवर्ड रखना है. बहुत से लोग आज भी अपना मोबाइल नंबर, नाम या 12345678 जैसे आसान पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं जिन्हें हैक करना बेहद आसान होता है.
पासवर्ड बनाते समय बड़े अक्षर, छोटे अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर का इस्तेमाल करें. इससे कोई भी व्यक्ति आसानी से आपके नेटवर्क में घुस नहीं पाएगा. पासवर्ड बदलने के बाद सभी पुराने डिवाइस अपने आप डिस्कनेक्ट हो जाते हैं.
राउटर की ये सेटिंग जरूर करें ऑन
अधिकतर लोग राउटर लगवाने के बाद उसकी सेटिंग्स कभी नहीं बदलते. यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है. राउटर में WPA2 या WPA3 सिक्योरिटी मोड जरूर ऑन रखें. यह आपके नेटवर्क को अनऑथराइज्ड एक्सेस से बचाने में मदद करता है. इसके अलावा WPS फीचर को बंद कर देना चाहिए. यह फीचर जल्दी कनेक्शन के लिए होता है लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स इसे सिक्योरिटी के लिहाज से सुरक्षित नहीं मानते.
WiFi स्लो होने की दूसरी वजहें भी जान लें
सिर्फ चोरी ही नहीं, कई दूसरी वजहों से भी WiFi धीमा हो सकता है. अगर राउटर घर के किसी कोने में रखा है या उसके आसपास दीवारें ज्यादा हैं तो सिग्नल कमजोर पड़ सकते हैं. माइक्रोवेव, ब्लूटूथ डिवाइस और पुराने राउटर भी इंटरनेट स्पीड पर असर डालते हैं.
बेहतर स्पीड के लिए राउटर को घर के बीचों-बीच और खुली जगह पर रखें. साथ ही समय-समय पर राउटर को रीस्टार्ट और अपडेट करते रहें. इससे नेटवर्क की परफॉर्मेंस बेहतर बनी रहती है.
छोटी सी सावधानी बचा सकती है बड़ा नुकसान
आज के डिजिटल दौर में WiFi सिक्योरिटी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके नेटवर्क का इस्तेमाल करता है तो सिर्फ स्पीड ही नहीं, आपकी प्राइवेसी भी खतरे में पड़ सकती है. इसलिए समय रहते राउटर की सेटिंग्स चेक करें और अपने इंटरनेट को पूरी तरह सुरक्षित बनाएं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सावधान! AI की एंट्री से भारत की लाखों नौकरियां खतरे में, सबसे ज्यादा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सावधान-ai-की-एंट्री-से-भारत-की-लाखों-नौकरियां-खतरे-में-सबसे-ज्यादा-असर-इन-सेक्टर्स-पर-पड़ेगा-असर</link>
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        <description><![CDATA[ सावधान! AI की एंट्री से भारत की लाखों नौकरियां खतरे में, सबसे ज्यादा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Dark Vs Light Mode: आंखों के लिए कौन&amp;सा सही? यह बात जान ली तो सब पता चल जाएगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/dark-vs-light-mode-आंखों-के-लिए-कौन-सा-सही-यह-बात-जान-ली-तो-सब-पता-चल-जाएगा</link>
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        <description><![CDATA[ Dark Vs Light Mode: घर हो या ऑफिस, आजकल लोग ज्यादातर समय स्क्रीन के आगे ही रहते हैं. स्क्रीन देखने का वैसे कोई नुकसान नहीं है, लेकिन अगर घंटों तक इसके सामने बैठे रहने से आंखों में थकान और जलन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. इससे बचने के लिए कई लोग अपने डिवाइस पर डार्क मोड को यूज करते हैं. लाइट मोड में जहां लाइट बैकग्राउंड पर डार्क टेक्स्ट दिखते हैं, वहीं डार्क मोड में बैकग्राउंड डार्क और टेक्स्ट लाइट हो जाते हैं. लेकिन क्या लाइट या डार्क मोड सेलेक्ट कर लेने से आंखों पर पड़ने वाला असर कम हो जाता है? आइए जानते हैं कि आंखों की सेहत के लिए डिवाइस का कौन-सा मोड ठीक रहता है.&amp;nbsp;
Dark Vs Light Mode: कौन-सा बेहतर है?
इस सवाल का जवाब है कि कोई भी मोड एक-दूसरे से बेहतर नहीं है. इनके फायदे और नुकसान आसपास की लाइटिंग और यूजर के विजन पर डिपेंड करते हैं. मसलन अगर किसी व्यक्ति की दूर की नजर कमजोर है तो उसके लिए डार्क मोड मुश्किल खड़ी कर सकता है.&amp;nbsp;
कब अच्छा और कब खराब है Dark Mode?
कम रोशनी वाली कंडीशन में आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लाइट आ सके. इसलिए अगर अंधेरे में लाइट मोड वाली वाली स्क्रीन को लगातार लंबे समय तक देखा जाए तो आंखों में दर्द होना शुरू हो सकता है. ऐसी स्थिति में डार्क मोड काम आता है, जो स्क्रीन और रूम की लाइट के बीच कंट्रास्ट को कम कर देता है तो आंखों के लिए देखना सहज हो जाता है. वहीं अगर किसी कमरे में पूरी रोशन है तो पुतलियां सिकुड़ जाती है. इस कारण डेप्थ ऑफ फील्ड कम हो जाता है. इस कारण आंखों के लिए टेक्स्ट पर फोकस कर पाना मुश्किल हो जाता है. इससे कई बार टेक्स्ट ब्लर नजर आने लगते हैं.
Light Mode को ऐसे यूज करने पर नहीं आएगी दिक्कत
लाइटिंग के हिसाब से डार्क मोड आंखों के लिए मुश्किल हो सकता है. वहीं अगर आप कुछ टिप्स के साथ लाइट मोड यूज करते हैं तो आंखों पर ज्यादा असर नहीं डालेगा. लाइट मोड की ब्राइटनेस कम करने से ग्लेयर कम हो जाता है, जो आंखों के लिए अच्छा है. आजकल मॉडर्न फोन में ऑटो-ब्राइटनेस का ऑप्शन मिलता है, जो एम्बिएंट लाइट के हिसाब से ब्राइटनेस को एडजस्ट कर देता है. इसके अलावा आप नाइट मोड भी यूज कर सकते हैं, जो स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट को कम कर देता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>अगले दो सालों में पूरी तरह बदल जाएंगे Apple और Samsung के महंगे फोन, ये ट्रेंड कर रहे हैं इशारा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अगले-दो-सालों-में-पूरी-तरह-बदल-जाएंगे-apple-और-samsung-के-महंगे-फोन-ये-ट्रेंड-कर-रहे-हैं-इशारा</link>
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        <description><![CDATA[ Apple And Samsung Future Phone Plan: स्मार्टफोन मार्केट में आज एक से बढ़कर एक शानदार डिजाइन वाले फोन मौजूद है. कम बजट में कीपैड वाले फोन मिल जाएंगे तो प्रीमियम सेगमेंट में धाकड़ रिफ्रेश रेट के साथ बड़े डिस्प्ले वाले फोन भी अवेलेबल हैं. अब अगले एक-दो साल में बाजार में और भी नए लुक और डिजाइन वाले फोन एंट्री मारने के लिए तैयार हैं. हर बार की तरह इस बार भी ऐप्पल और सैमसंग यह लीड लेने वाली है. दोनों कंपनियों के अपकमिंग फोन में अब तक सबसे धांसू अपग्रेड्स आने जा रहे हैं. एक बार जब इन कंपनियों के फोन लॉन्च हो जाएंगे तो बाकी कंपनियां भी इन्हें फॉलो करने लगेंगी. आइए एक नजर डालते हैं कि सैमसंग और ऐप्पल फोन को लेकर किस तरह के एक्सपेरिमेंट कर रही हैं.
फोल्डेबल फोन&amp;nbsp;
पिछले कुछ सालों से फोल्डेबल स्मार्टफोन एक ही तरह के डिजाइन पर अटके हुए थे. एक्सटर्नल डिस्प्ले एक रेगुलर फोन की तरह दिखता है और अनफोल्ड करने पर बड़ा डिस्प्ले एक टैबलेट की तरह नजर आता है. इस मामले में चाइनीज कंपनी Huawei ने पहल करते हुए अपने फोल्डेबल फोन का डिजाइन चेंज कर लिया. पिछले महीने कंपनी ने Huawei Pura X Max फोन को लॉन्च किया था, जो वाइड फोल्डिंग डिजाइन के साथ आया है. यानी इसकी चौड़ाई लंबाई से ज्यादा है. अब कयास हैं कि सैमसंग भी Galaxy Z Fold 8 के साथ Galaxy Z Fold 8 Wide को लॉन्च करेगी, जो हॉरिजॉन्टली फोल्डिंग स्मार्टफोन होगा. सितंबर में ऐप्पल भी इसी फॉर्म फैक्टर में अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी.&amp;nbsp;
फुल डिस्प्ले वाले फोन
2027 में आईफोन के सफर को 20 साल पूरे हो जाएंगे और इस मौके के लिए ऐप्पल ने धाकड़ तैयारी की है. अगर रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी अगले साल फुल डिस्प्ले वाला आईफोन लॉन्च कर सकती है. यानी इसके डिस्प्ले पर न कोई कटआउट होगा, न डायनामिक आईलैंड होगा और न ही बेजल्स देखने को मिलेंगे. लीक्स के मुताबिक, दूसरी कंपनियों ने भी इस तरह के डिस्प्ले के लिए रिसर्च शुरू कर दी है और जल्द ही मार्केट में फुल डिस्प्ले वाले फोन के कई ऑप्शंस लॉन्च हो सकते हैं.
नया डिस्प्ले साइज?
पिछले कुछ सालों से स्मार्टफोन के डिस्प्ले 6.9 इंच की अपर लिमिट पर अटके हुए हैं. यह ट्रेंड भी जल्द बदल सकता है और अगले कुछ सालों में 7 इंच से बड़ी स्क्रीन वाले फोन मार्केट में दस्तक दे सकते हैं. इसी तरह साइज में छोटे लेकिन वाइड डिस्प्ले वाले फोन भी लॉन्च होने की कतार में हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अगले, दो, सालों, में, पूरी, तरह, बदल, जाएंगे, Apple, और, Samsung, के, महंगे, फोन, ये, ट्रेंड, कर, रहे, हैं, इशारा</media:keywords>
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        <title>Google का बड़ा सरप्राइज! अब AI Pro यूजर्स को मिलेगा YouTube Premium Lite फ्री, बिना Ads के देखें वीडियो का</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Premium Lite: Google ने अपने AI Pro सब्सक्रिप्शन को और आकर्षक बनाने के लिए एक नया फायदा जोड़ दिया है. अब Google AI Pro लेने वाले यूजर्स को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के YouTube Premium Lite की सदस्यता भी मिलेगी. इस नए ऑफर के जरिए यूजर्स YouTube पर ज्यादातर वीडियो बिना विज्ञापन के देख पाएंगे. हालांकि, भारत के कई यूजर्स के लिए इसमें एक बड़ी शर्त भी रखी गई है.
Jio वाले फ्री AI Pro यूजर्स को नहीं मिलेगा फायदा
कंपनी ने साफ कर दिया है कि यह YouTube Premium Lite ऑफर सिर्फ उन लोगों के लिए है जो सीधे Google AI Pro का भुगतान कर रहे हैं. यानी जिन यूजर्स को Reliance Jio पार्टनरशिप के तहत 18 महीने का मुफ्त AI Pro प्लान मिला है, उन्हें ट्रायल अवधि के दौरान यह सुविधा नहीं दी जाएगी.
इस जानकारी को विकास कंसल ने X पर साझा किया. उन्होंने बताया कि Jio ऑफर वाले यूजर्स को YouTube Premium Lite तभी मिलेगा जब उनका मुफ्त ट्रायल खत्म होने के बाद वे पेड AI Pro प्लान पर स्विच करेंगे.
क्या है YouTube Premium Lite प्लान?
YouTube Premium Lite, कंपनी के रेगुलर YouTube Premium का हल्का वर्जन है. भारत में इसकी कीमत 89 रुपये प्रति माह रखी गई है. इस प्लान के तहत ज्यादातर सामान्य वीडियो बिना विज्ञापन के देखे जा सकते हैं लेकिन Shorts, म्यूजिक कंटेंट और सर्च पेज पर विज्ञापन अभी भी दिखाई देंगे.
इसके अलावा इस प्लान में कई प्रीमियम फीचर्स शामिल नहीं हैं. यूजर्स को YouTube Music Premium, एडवांस प्लेबैक कंट्रोल, वीडियो क्यू सिस्टम और हाई-क्वालिटी ऑडियो जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी.
Gemini AI इस्तेमाल करने का तरीका भी बदला
Google ने यह बदलाव ऐसे समय पर किया है जब कंपनी Gemini AI के इस्तेमाल का तरीका भी बदल रही है. पहले जहां यूजर्स को रोजाना प्रॉम्प्ट लिमिट मिलती थी, अब उन्हें compute-based सिस्टम पर शिफ्ट किया जा रहा है.
इस नए मॉडल में AI उपयोग की गणना कई चीजों के आधार पर होगी, जैसे प्रॉम्प्ट कितना जटिल है, बातचीत कितनी लंबी है और कौन-कौन से AI टूल इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कंपनी ने ईमेल के जरिए बताया कि Gemini की लिमिट अब हर पांच घंटे में रिफ्रेश होगी लेकिन इसके साथ साप्ताहिक सीमा भी लागू रहेगी.
Reddit पर यूजर्स ने जताई नाराजगी
Google के इस नए सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया और Reddit पर काफी आलोचना देखने को मिल रही है. कई यूजर्स का कहना है कि अब Gemini AI का इस्तेमाल पहले से ज्यादा उलझनभरा हो गया है.
एक Reddit यूजर ने दावा किया कि Gemini के साथ कुछ लंबी बातचीत करने पर ही उसकी लगभग आधी साप्ताहिक लिमिट खत्म हो गई. वहीं दूसरे यूजर्स का कहना है कि Google को यह बदलाव लागू करने से पहले ज्यादा स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी.
AI Pro सब्सक्रिप्शन में बढ़ रही सुविधाएं
हालांकि Google लगातार अपने AI Pro प्लान को ज्यादा उपयोगी बनाने की कोशिश कर रहा है. Gemini AI फीचर्स के साथ अब YouTube Premium Lite जोड़कर कंपनी उन यूजर्स को आकर्षित करना चाहती है जो AI और मनोरंजन दोनों सेवाओं का फायदा एक साथ लेना चाहते हैं.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>पोस्टपेड SIM में सच में मिलता है VIP नेटवर्क? खरीदने से पहले जान लें कंपनियों का पूरा खेल</title>
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        <description><![CDATA[ पोस्टपेड SIM में सच में मिलता है VIP नेटवर्क? खरीदने से पहले जान लें कंपनियों का पूरा खेल ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Panel यूज कर रहे हैं तो ये हैक्स आएंगे बड़े काम, पावर जनरेशन के साथ एफिशिएंसी भी बढ़ेगी</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Hacks: इको-फ्रेंडली और रीन्यूएबल एनर्जी जनरेट करने के मामले में सोलर पैनल धीरे-धीरे लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. एक बार सोलर पैनल लगाने के बाद चिंता करने की जरूरत नहीं रहती. सूरज निकलते ही ये बिजली बनाना शुरू कर देते हैं. अगर आप पहले से सोलर पैनल यूज कर रहे हैं या नया सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने जा रहे हैं तो हम आपके लिए कुछ हैक्स लेकर आए हैं. ये एनर्जी जनरेशन से लेकर एफिशिएंसी तक बढ़ाने में आपके काम आ सकते हैं.&amp;nbsp;
प्लेसमेंट को ऐसे करें ऑप्टिमाइज
सोलर पैनल की आउटपुट इस बात पर डिपेंड करेगी कि सोलर पैनल की प्लेसमेंट कैसी है. दरअसल, पैनल को इस तरह प्लेस किया जाना चाहिए ताकि इन्हें ज्यादा से ज्यादा सनलाइट मिल सके. इसलिए पैनल का मुंह सूरज की तरफ रखा जाता है. अगर सोलर पैनल को पूरी तरह सन फेसिंग नहीं लगाया जा सकता तो भी चिंता की बात नहीं है. सूरज की तरफ थोड़ा-सा टिल्ट कर देने पर भी काफी फर्क पड़ता है. इस बात का भी ध्यान रखें कि सोलर पैनल पर किसी पेड़ या बिल्डिंग की परछाई न आए. इससे एफिशिएंसी कम हो सकती है.
सुबह या शाम के समय करें सफाई
मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए सोलर पैनल की रेगुलर साफ-सफाई जरूरी है. धूल-मिट्टी जमा होने के कारण पैनल सनलाइट को एब्जॉर्ब नहीं कर पाते, जिससे पावर जनरेशन कम हो जाता है. इसलिए सॉफ्ट ब्रश या सॉफ्ट कपड़े से पैनल को साफ कर दें. यह ध्यान रखें कि दिन के समय जब टेंपरेचर ज्यादा होता है, तब पैनल की सफाई न की जाए. दिन में पानी जल्दी इवेपोरेट होकर पैनल पर धब्बे छोड़ देता है. इसलिए सुबह या शाम जब धूप और टेंपरेचर कम हो, पैनल की सफाई तब करनी चाहिए.&amp;nbsp;
स्टोरेज के लिए बैटरी आएगी काम
सोलर पावर के साथ अवेलेबिलिटी को लेकर दिक्कत रहती है. यानी सनलाइट होने पर यह पावर जनरेट करता है, लेकिन रात के समय या बादल हो जाने पर पावर जनरेशन बंद हो जाता है. इस चुनौती से निपटने के लिए सोलर बैटरी का सहारा लिया जा सकता है. दिन के समय जब सोलर एनर्जी सिस्टम पावर जनरेट करेगा, तब ये चार्ज हो जाएंगी और रात के समय पावर सप्लाई कर पाएंगी.&amp;nbsp;
धीरे-धीरे कैपेसिटी बढ़ाएं
अगर आप सोलर पैनल लगवाने जा रहे हैं तो एकदम पूरा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. अगर आपका बजट कम है तो आप कम कैपेसिटी से इसकी शुरुआत कर सकते हैं. मान लिजिए आपको 5 किलोवॉट का सिस्टम लगवाना है तो आप इसकी शुरुआत 3 किलोवाट के साथ कर सकते हैं. इससे आप इस टेक्नोलॉजी को भी परख पाएंगे और जरूरत पड़ने पर इसकी कैपेसिटी भी बढ़ा सकेंगे.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Jio का धमाका! एक ही रिचार्ज में मिल रहे 15 OTT ऐप्स, Netflix&amp;Amazon वालों की बढ़ी टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ Jio Recharge Plan: अब मोबाइल रिचार्ज सिर्फ कॉलिंग और इंटरनेट तक सीमित नहीं रह गया है. ज्यादातर लोग ऐसे प्लान तलाशते हैं जिनमें डेटा के साथ मनोरंजन का भी पूरा पैकेज मिले. इसी जरूरत को देखते हुए जियो का करीब 200 रुपये वाला डेटा ऐड-ऑन प्लान तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है. कम कीमत में मिलने वाला यह पैक यूजर्स को अतिरिक्त इंटरनेट के साथ कई लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस भी देता है. यही कारण है कि फिल्में, वेब सीरीज और लाइव स्पोर्ट्स देखने वाले यूजर्स के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
कम कीमत में डेटा और OTT का डबल फायदा
जियो का यह प्लान एक डेटा ऐड-ऑन पैक के तौर पर पेश किया गया है. इसमें यूजर्स को 5GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है जो उन लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है जिन्हें अपने मौजूदा प्लान के अलावा अतिरिक्त इंटरनेट की जरूरत पड़ती है. इस पैक की वैलिडिटी 28 दिनों की रखी गई है और इसी अवधि तक इसके OTT बेनिफिट्स भी एक्टिव रहते हैं.
Amazon Prime और YouTube Premium का भी मिलता है एक्सेस
इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ डेटा नहीं बल्कि इसके साथ मिलने वाले प्रीमियम एंटरटेनमेंट बेनिफिट्स हैं. यूजर्स को Amazon Prime का एक्सेस दिया जाता है जिससे नई फिल्में, वेब सीरीज और कई एक्सक्लूसिव शो देखे जा सकते हैं. इसके अलावा YouTube Premium की सुविधा भी मिलती है, जिससे बिना विज्ञापन वीडियो देखने का अनुभव मिलता है. साथ ही बैकग्राउंड प्ले और ऑफलाइन डाउनलोड जैसे फीचर्स भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
15 से ज्यादा OTT ऐप्स का पूरा पैकेज
यह प्लान सिर्फ कुछ चुनिंदा ऐप्स तक सीमित नहीं है. कंपनी के मुताबिक इसमें 15 से ज्यादा OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस शामिल किया गया है. यूजर्स को JioHotstar का सब्सक्रिप्शन कूपन भी MyJio ऐप के जरिए दिया जाता है. ऐसे में क्रिकेट मैच, लेटेस्ट फिल्में और ट्रेंडिंग वेब सीरीज देखने वालों के लिए यह प्लान काफी फायदे का सौदा माना जा रहा है.
रिचार्ज करने से पहले ये बात जरूर जान लें
चूंकि यह एक डेटा ऐड-ऑन पैक है, इसलिए इसे इस्तेमाल करने के लिए नंबर पर पहले से एक्टिव बेस प्लान होना जरूरी है. अगर आपका मुख्य रिचार्ज खत्म हो जाता है, तो यह ऐड-ऑन भी काम करना बंद कर देगा. रिचार्ज के बाद सभी OTT फायदे MyJio ऐप के जरिए एक्टिव किए जा सकते हैं.
क्यों बढ़ रही है OTT वाले रिचार्ज प्लान्स की डिमांड?
भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. लोग अब अलग-अलग ऐप्स के लिए अलग सब्सक्रिप्शन लेने की बजाय ऐसे प्लान पसंद कर रहे हैं, जिनमें इंटरनेट और एंटरटेनमेंट दोनों एक साथ मिल जाएं. यही वजह है कि टेलीकॉम कंपनियां अब OTT बंडल प्लान्स पर ज्यादा फोकस कर रही हैं और जियो का यह ऑफर भी उसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है.
Airtel का ओटीटी वाला रिचार्ज प्लान
अगर आप ऐसा पोस्टपेड प्लान तलाश रहे हैं जिसमें पूरे परिवार के लिए कॉलिंग, इंटरनेट और ओटीटी का फायदा एक साथ मिल जाए तो Airtel का ₹699 वाला प्लान आपके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है. कंपनी ने इस प्लान को खास तौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया है जो एक ही रिचार्ज में दो सिम कार्ड चलाना चाहते हैं. यानी अब अलग-अलग रिचार्ज कराने की झंझट काफी हद तक खत्म हो सकती है.
इस पोस्टपेड प्लान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दो लोग एक ही प्लान का फायदा उठा सकते हैं. दोनों सिम पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा दी जाती है जिससे किसी भी नेटवर्क पर बिना रुकावट बात की जा सकती है. इसके साथ इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि प्लान में अनलिमिटेड डेटा एक्सेस शामिल किया गया है. ऐसे में बार-बार डेटा खत्म होने की टेंशन नहीं रहती.
Airtel इस प्लान में रोजाना 100 SMS की सुविधा भी दे रहा है. वहीं एंटरटेनमेंट पसंद करने वाले यूजर्स को Amazon Prime का एक साल का सब्सक्रिप्शन मिलता है जिससे फिल्में, वेब सीरीज और शॉपिंग बेनिफिट्स का फायदा लिया जा सकता है. इसके अलावा Jio Hotstar Mobile का भी एक साल का एक्सेस दिया जा रहा है, जिससे क्रिकेट, लाइव स्पोर्ट्स और लेटेस्ट शो देखने का मजा मिल सकता है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Jio, का, धमाका, एक, ही, रिचार्ज, में, मिल, रहे, OTT, ऐप्स, Netflix-Amazon, वालों, की, बढ़ी, टेंशन</media:keywords>
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        <title>रोड ट्रिप का मजा होगा डबल! सफर पर निकलने से पहले बैग में जरूर रखें ये 5 धांसू गैजेट्स</title>
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        <description><![CDATA[ Gadgets For Travel: रोड ट्रिप का असली मजा तभी आता है जब सफर बिना टेंशन के पूरा हो. दोस्तों या परिवार के साथ लंबी ड्राइव, नए शहरों की खोज और रास्ते की खूबसूरती हर किसी को पसंद होती है. लेकिन अगर सफर के दौरान टायर पंचर हो जाए, फोन की बैटरी खत्म हो जाए या कार गंदी हो जाए तो पूरा मूड खराब हो सकता है. ऐसे में कुछ स्मार्ट गैजेट्स आपकी यात्रा को काफी आसान और सुरक्षित बना सकते हैं. अगर आप भी अगली रोड ट्रिप की तैयारी कर रहे हैं तो ये ट्रैवल-फ्रेंडली गैजेट्स जरूर साथ रखें.
पोर्टेबल टायर इन्फ्लेटर
लंबे सफर में टायर की परेशानी सबसे बड़ी दिक्कत बन सकती है. खासकर हाईवे या दूर-दराज के इलाकों में तुरंत मदद मिलना आसान नहीं होता. ऐसे में पोर्टेबल टायर इन्फ्लेटर बेहद काम आता है. यह कुछ ही मिनटों में टायर में हवा भर देता है और कई मॉडल्स में डिजिटल प्रेशर डिस्प्ले, ऑटो कट-ऑफ और इमरजेंसी फ्लैशलाइट जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. रात के समय या बारिश में यह गैजेट काफी राहत देता है. इसकी कीमत लगभग 1,800 रुपये से 4,000 रुपये तक होती है.
डैश कैमरा
भारत में अब डैश कैमरा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यह सिर्फ वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी गैजेट बन चुका है. सड़क पर होने वाले हादसे, अचानक सामने आए विवाद या पार्किंग के दौरान हुई घटना सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड हो जाता है. कई डैशकैम्स में नाइट विजन, पार्किंग मॉनिटरिंग और मोबाइल ऐप सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं जिससे वीडियो तुरंत फोन में देखे जा सकते हैं. इसकी कीमत लगभग 3,000 रुपये से 10,000 रुपये तक होती है.
फास्ट चार्जिंग पावर बैंक
रोड ट्रिप के दौरान नेविगेशन, म्यूजिक और फोटो क्लिक करने से फोन की बैटरी तेजी से खत्म होती है. ऐसे में एक दमदार फास्ट चार्जिंग पावर बैंक बेहद जरूरी हो जाता है. कम से कम 20,000mAh क्षमता वाला पावर बैंक लंबे सफर में काफी मदद करता है. USB-C और मल्टीपल पोर्ट्स वाले मॉडल्स एक साथ कई डिवाइस चार्ज कर सकते हैं. जहां चार्जिंग पॉइंट्स आसानी से नहीं मिलते, वहां यह गैजेट किसी लाइफसेवर से कम नहीं. इसकी कीमत लगभग 1,500 रुपये से 5,000 रुपये तक जा सकती है.
कार वैक्यूम क्लीनर
रोड ट्रिप के दौरान कार में धूल, मिट्टी और खाने-पीने का कचरा जमा होना आम बात है. बच्चों के साथ सफर कर रहे हों तो गाड़ी जल्दी गंदी हो जाती है. ऐसे में पोर्टेबल कार वैक्यूम क्लीनर काफी काम आता है. यह छोटा, हल्का और आसानी से इस्तेमाल होने वाला गैजेट है जिसे कार में कहीं भी रखा जा सकता है. USB चार्जिंग वाले मॉडल्स सफर के दौरान भी आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसकी कीमत लगभग 1,200 रुपये से 4,500 रुपये तक हो सकती है.
वायरलेस चार्जिंग वाला स्मार्ट फोन होल्डर
अगर आप सफर में मैप्स का इस्तेमाल करते हैं तो स्मार्ट फोन होल्डर आपके लिए जरूरी एक्सेसरी है. यह फोन को मजबूती से पकड़कर रखता है ताकि ड्राइविंग के दौरान बार-बार फोन हाथ में न लेना पड़े. नए मॉडल्स में ऑटोमैटिक ग्रिप और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. इससे फोन चार्ज भी होता रहता है और डैशबोर्ड पर तारों का झंझट भी कम हो जाता है. इसकी कीमत लगभग 1,000 रुपये से 3,500 रुपये तक हो सकती है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रोड, ट्रिप, का, मजा, होगा, डबल, सफर, पर, निकलने, से, पहले, बैग, में, जरूर, रखें, ये, धांसू, गैजेट्स</media:keywords>
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        <title>सिर्फ चैट नहीं, WhatsApp Backup भी हो सकता है हैक! तुरंत ऑन करें ये सीक्रेट Setting</title>
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        <title>अब PPT बनाना हुआ बच्चों का खेल! OpenAI ने ChatGPT में दिया ऐसा फीचर, मिनटों में तैयार होगी प्रोफेशनल PowerPoint Presentation</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT New Feature: अब PowerPoint प्रेजेंटेशन बनाने के लिए घंटों मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. OpenAI ने ChatGPT के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है जिसकी मदद से यूजर्स सीधे Microsoft PowerPoint के अंदर ही स्लाइड्स बना और एडिट कर सकेंगे. खास बात यह है कि इसके लिए किसी डिजाइनिंग या प्रेजेंटेशन एक्सपर्ट बनने की जरूरत नहीं होगी. सिर्फ सामान्य भाषा में निर्देश देकर पूरा स्लाइडशो तैयार किया जा सकता है.
PowerPoint में मिलेगा ChatGPT का नया साइडबार
नए बीटा फीचर के तहत PowerPoint में ChatGPT का एक खास साइडबार दिखाई देगा. इसे इंस्टॉल करने के बाद यूजर सीधे ऐप के अंदर चैटबॉट से बात कर पाएंगे. इसकी मदद से नई स्लाइड्स तैयार करना, पुराने प्रेजेंटेशन को अपडेट करना, नोट्स को प्रोफेशनल डेक में बदलना या किसी स्लाइड का कंटेंट दोबारा लिखना बेहद आसान हो जाएगा. अब यूजर्स को हर स्लाइड अलग-अलग बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ChatGPT खुद कंटेंट को व्यवस्थित करके एक बेहतर प्रेजेंटेशन तैयार करेगा.
नोट्स और डेटा से खुद बनेगा पूरा प्रेजेंटेशन
OpenAI के मुताबिक यह फीचर यूजर्स के आइडिया को कुछ ही मिनटों में प्रोफेशनल प्रेजेंटेशन में बदल सकता है. यूजर अपने नोट्स, डॉक्यूमेंट्स, एक्सेल शीट, इमेज या पुराने प्रेजेंटेशन अपलोड करके ChatGPT से उन्हें स्लाइड्स में बदलने के लिए कह सकते हैं.
मान लीजिए आपके पास किसी मीटिंग के नोट्स और कंपनी का परफॉर्मेंस डेटा है. ऐसे में ChatGPT से 10 स्लाइड्स वाला बोर्ड प्रेजेंटेशन बनाने के लिए कहा जा सकता है. इसमें एग्जीक्यूटिव समरी, रिस्क सेक्शन और अगले कदम जैसी जरूरी चीजें भी शामिल होंगी. सबसे अच्छी बात यह है कि तैयार स्लाइड्स पूरी तरह एडिटेबल रहेंगी ताकि जरूरत पड़ने पर बदलाव किए जा सकें.
सिर्फ स्लाइड्स नहीं, प्रेजेंटेशन की कमियां भी बताएगा AI
यह फीचर केवल कंटेंट लिखने तक सीमित नहीं है. ChatGPT प्रेजेंटेशन का रिव्यू भी कर सकता है. यह बताएगा कि कहानी कहने का फ्लो कहां कमजोर है, कौन सी जानकारी गायब है और किन सवालों के लिए आपको तैयार रहना चाहिए. इससे प्रेजेंटेशन ज्यादा प्रभावी और प्रोफेशनल बन सकती है. खासकर बिजनेस मीटिंग्स और क्लाइंट प्रेजेंटेशन में यह फीचर काफी मददगार साबित हो सकता है.
स्क्रीनशॉट से भी बन जाएंगी एडिटेबल स्लाइड्स
OpenAI ने बताया कि ChatGPT स्लाइड्स को बेहतर बनाने के लिए कई एडिटिंग टास्क भी संभाल सकता है. यूजर चैटबॉट से कंटेंट छोटा करने, भाषा आसान बनाने, मुख्य पॉइंट्स साफ करने या टेबल से चार्ट स्लाइड तैयार करने के लिए कह सकते हैं. इतना ही नहीं, स्क्रीनशॉट को भी एडिटेबल PowerPoint स्लाइड्स में बदला जा सकेगा. इससे पुराने कंटेंट को दोबारा इस्तेमाल करना काफी आसान हो जाएगा.
बिजनेस यूजर्स को मिलेगा बड़ा फायदा
कंपनियों के लिए यह फीचर काफी उपयोगी माना जा रहा है. उदाहरण के तौर पर, किसी खास क्लाइंट के लिए अलग प्रेजेंटेशन तैयार करने हेतु अकाउंट नोट्स और उपयोग डेटा अपलोड किया जा सकता है. इसके बाद ChatGPT उसी हिसाब से कस्टमाइज्ड बिजनेस रिव्यू डेक तैयार कर देगा. रिसर्च नोट्स को भी कंपनी टेम्पलेट के अनुसार क्लाइंट-रेडी प्रेजेंटेशन में बदला जा सकता है.
किन यूजर्स को मिलेगा नया फीचर?
PowerPoint के लिए ChatGPT इंटीग्रेशन फिलहाल बीटा रोलआउट में उपलब्ध है. इसे दुनिया भर में कई प्लान्स के यूजर्स इस्तेमाल कर सकेंगे. इनमें ChatGPT Free, Go, Plus, Pro, Business, Enterprise, Edu, Teachers और K-12 सब्सक्रिप्शन शामिल हैं.
PowerPoint में ChatGPT कैसे इस्तेमाल करें?
इस फीचर को शुरू करने के लिए यूजर्स को PowerPoint के Add-ins सेक्शन या Microsoft Marketplace से ChatGPT for PowerPoint ऐड-इन इंस्टॉल करना होगा. इसके बाद OpenAI अकाउंट से साइन-इन करते ही ChatGPT PowerPoint के अंदर साइडबार में दिखाई देने लगेगा. यहीं से यूजर फाइल्स अपलोड करके सीधे प्रेजेंटेशन पर काम कर पाएंगे.
AI प्रोडक्टिविटी टूल्स की दिशा में बड़ा कदम
PowerPoint इंटीग्रेशन से पहले OpenAI Excel और Google Sheets के लिए भी AI टूल्स पेश कर चुका है. इनकी मदद से स्प्रेडशीट बनाना, फॉर्मूला एडिट करना और डेटा एनालिसिस करना आसान हुआ था. अब इसी AI तकनीक को प्रेजेंटेशन बनाने तक बढ़ाया जा रहा है ताकि यूजर्स का समय बचे और काम पहले से ज्यादा तेज हो सके.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>HDD और SDD में क्या होता है फर्क? बदलने से पहले जरूर पता होनी चाहिए ये चीजें</title>
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        <description><![CDATA[ HDD Vs SDD: आजकल लैपटॉप और कंप्यूटर की स्पीड को लेकर लोग काफी सजग हो गए हैं. अगर सिस्टम धीमा चलने लगे तो सबसे पहले स्टोरेज बदलने की सलाह दी जाती है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर HDD और SSD में फर्क क्या होता है और कौन-सा विकल्प बेहतर है. अगर आप भी अपने पुराने लैपटॉप या PC की स्टोरेज बदलने की सोच रहे हैं तो पहले इन दोनों तकनीकों को समझना बेहद जरूरी है.
क्या होती है HDD?
Hard Disk Drive यानी Hard Disk Drive एक पुराने स्टोरेज डिवाइस है जो कई सालों से कंप्यूटर में इस्तेमाल की जा रही है. इसमें अंदर घूमने वाली डिस्क और मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं जिनकी मदद से डेटा स्टोर और पढ़ा जाता है.
HDD की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम कीमत है. कम बजट में ज्यादा स्टोरेज चाहिए तो यह अच्छा विकल्प माना जाता है. यही कारण है कि पुराने लैपटॉप और डेस्कटॉप में HDD ज्यादा देखने को मिलती है.
SSD क्या है और क्यों हो रही है इतनी लोकप्रिय?
Solid State Drive नई तकनीक पर आधारित स्टोरेज डिवाइस है. इसमें कोई घूमने वाली डिस्क नहीं होती बल्कि डेटा फ्लैश मेमोरी चिप्स में सेव होता है. इसी वजह से SSD की स्पीड HDD की तुलना में कई गुना ज्यादा होती है. कंप्यूटर जल्दी ऑन होता है, ऐप्स तेजी से खुलते हैं और फाइल ट्रांसफर भी काफी फास्ट हो जाता है. गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और मल्टीटास्किंग करने वाले लोग आजकल SSD को ज्यादा पसंद करते हैं.
HDD और SSD में सबसे बड़ा फर्क
दोनों स्टोरेज डिवाइस का काम डेटा सेव करना है लेकिन काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है. HDD मैकेनिकल सिस्टम पर आधारित होती है जबकि SSD इलेक्ट्रॉनिक चिप्स से चलती है. स्पीड की बात करें तो SSD कहीं ज्यादा तेज होती है. वहीं HDD की रीड-राइट स्पीड कम होने के कारण सिस्टम कई बार स्लो महसूस होता है. इसके अलावा SSD कम बिजली खर्च करती है जिससे लैपटॉप की बैटरी लाइफ भी बेहतर हो सकती है.
कौन ज्यादा टिकाऊ होती है?
HDD में मूविंग पार्ट्स होते हैं इसलिए गिरने या झटका लगने पर खराब होने का खतरा ज्यादा रहता है. दूसरी तरफ SSD में कोई मैकेनिकल पार्ट नहीं होता, इसलिए यह ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ मानी जाती है. हालांकि, लंबे समय तक भारी डेटा राइटिंग करने पर SSD की लाइफ भी धीरे-धीरे कम हो सकती है लेकिन सामान्य इस्तेमाल में यह कई साल आराम से चल जाती है.
स्टोरेज बदलने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आपका लैपटॉप बहुत स्लो हो गया है तो SSD में अपग्रेड करना अच्छा फैसला साबित हो सकता है. लेकिन बदलने से पहले यह जरूर जांच लें कि आपका सिस्टम SATA SSD सपोर्ट करता है या NVMe SSD. इसके अलावा बजट और जरूरत का भी ध्यान रखें. ज्यादा स्टोरेज कम कीमत में चाहिए तो HDD सही है लेकिन तेज परफॉर्मेंस चाहिए तो SSD बेहतर विकल्प मानी जाती है.
आखिर किसे चुनना चाहिए?
अगर आप सिर्फ फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट स्टोर करना चाहते हैं तो HDD आपके लिए ठीक रह सकती है. लेकिन अगर आपको तेज स्पीड, स्मूथ परफॉर्मेंस और बेहतर अनुभव चाहिए तो SSD पर जाना ज्यादा फायदे का सौदा होगा. आज के समय में ज्यादातर नए लैपटॉप SSD के साथ ही आ रहे हैं क्योंकि यह सिस्टम की परफॉर्मेंस को काफी बेहतर बना देती है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चीन के सबसे बड़े शॉपिंग इवेंट में होगा बड़ा धमाका! पहली बार नीलाम होगा Humanoid Robot, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Humanoid Robot: चीन की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी JD.com ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह अपने सालाना 618 शॉपिंग फेस्टिवल के दौरान दुनिया की पहली ह्यूमनॉइड रोबोट नीलामी आयोजित करने जा रही है. कंपनी ने 2026 के 618 शॉपिंग फेस्टिवल लॉन्च इवेंट में इस योजना का खुलासा किया.
कंपनी के मुताबिक, यह नीलामी सिर्फ एक तकनीकी प्रदर्शन नहीं होगी बल्कि पूरे शॉपिंग फेस्टिवल के दौरान चलने वाले खास ऑफर्स और प्रमोशनल गतिविधियों का हिस्सा बनेगी. माना जा रहा है कि इस इवेंट में टेक कंपनियां, रिसर्च संस्थान और रोबोट कलेक्टर बड़ी दिलचस्पी दिखा सकते हैं क्योंकि उन्हें अगली पीढ़ी के ह्यूमनॉइड रोबोट्स तक शुरुआती पहुंच मिल सकती है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि नीलामी में कौन-कौन से रोबोट मॉडल शामिल होंगे.
अगले 5 साल में लाखों रोबोट तैनात करने की तैयारी
JD.com ने सोमवार को बताया कि आने वाले पांच वर्षों में वह बड़े पैमाने पर रोबोटिक्स तकनीक अपनाने की तैयारी कर रही है. कंपनी की योजना करीब 30 लाख रोबोट, 10 लाख ऑटोनॉमस व्हीकल और 1 लाख ड्रोन तैनात करने की है.
इसके साथ ही JD Retail का लक्ष्य 2026 तक रोबोट ब्रांड्स से 1.47 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार हासिल करना है. कंपनी यह भी चाहती है कि नए प्रोडक्ट लॉन्च करने का समय करीब 30 प्रतिशत तक कम किया जाए.
करोड़ों डिवाइस से जुड़ेगा रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म
JD के JoyInside रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म के प्रमुख दाई वेनजुन ने बताया कि इस साल यह प्लेटफॉर्म 1 करोड़ से ज्यादा टर्मिनल डिवाइस से जुड़ जाएगा. रोबोटिक्स सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां जैसे Unitree Robotics और Noetix Robotics पहले ही इस प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट हो चुकी हैं. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि चीन रोबोटिक्स और AI तकनीक को तेजी से आम जिंदगी में उतारना चाहता है.
फैक्ट्रियों में भी नजर आएंगे ह्यूमनॉइड रोबोट
चीन सिर्फ लोगों के बीच रोबोट लाने तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि उन्हें फैक्ट्रियों में भी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है. Shanghai प्रशासन ने घोषणा की है कि वह AI और ह्यूमनॉइड रोबोट्स की वास्तविक दुनिया में तैनाती को तेज करेगा. शंघाई म्यूनिसिपल कमीशन ऑफ इकॉनमी एंड इंफॉर्मेटाइजेशन के निदेशक तांग वेनकान के अनुसार, 2026 से 2030 के बीच चलने वाली चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक शहर की फैक्ट्रियों में 1 लाख ह्यूमनॉइड रोबोट लगाए जाने का लक्ष्य है.
इसके अलावा, बड़े औद्योगिक उद्यमों में AI एजेंट्स का उपयोग 80 प्रतिशत से ज्यादा तक पहुंचाने की योजना भी बनाई गई है. यह AI Plus अभियान का हिस्सा होगा जिसका उद्देश्य उद्योगों को स्मार्ट और ऑटोमेटेड बनाना है.
लैब से निकलकर बाजार तक पहुंचे रोबोट
चीन के उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सदस्य पैन हेलिन ने कहा कि पहले ह्यूमनॉइड रोबोट केवल लैब और डेमो तक सीमित थे लेकिन अब उनका इस्तेमाल रिटेल, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और पब्लिक सर्विस जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है.
उनका मानना है कि ऐसी नीलामी रोबोट बनाने वाली कंपनियों के लिए नया बिजनेस मॉडल तैयार कर सकती है. साथ ही लोग ह्यूमनॉइड रोबोट्स को सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं बल्कि रोजमर्रा के उपयोगी उपकरण के रूप में देखने लगेंगे.
AI और रोबोटिक्स में आगे निकलने की दौड़
यह ऐलान दिखाता है कि चीन की कंपनियां embodied AI और ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. दुनियाभर की कंपनियां इस बात पर काम कर रही हैं कि भविष्य में रोबोट वेयरहाउस, फैक्ट्री, कस्टमर सर्विस, अस्पतालों और यहां तक कि घरों में भी इंसानों की मदद कर सकें.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>AI से ले रहे हैं Financial Advice? भूलकर भी Chat में शेयर न करें ये 5 चीजें</title>
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        <description><![CDATA[ AI Financial Advice: आजकल लोग खर्चों का हिसाब रखने, बजट बनाने और निवेश की सलाह लेने के लिए AI चैटबॉट्स का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं. कई यूजर्स अपनी बैंकिंग आदतें, सब्सक्रिप्शन और खर्चों से जुड़ी जानकारी भी AI टूल्स के साथ शेयर कर रहे हैं ताकि उन्हें पर्सनलाइज्ड सलाह मिल सके. लेकिन सुविधा के इस दौर में प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं.
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग AI चैटबॉट्स में निजी और गोपनीय जानकारी डाल चुके हैं जिनमें वित्तीय और स्वास्थ्य से जुड़ा डेटा भी शामिल है. विशेषज्ञों का मानना है कि लोग शायद यह पूरी तरह नहीं समझ पा रहे कि AI सिस्टम उनके डेटा को कैसे स्टोर, प्रोसेस या इस्तेमाल करते हैं.
AI चैटबॉट्स आपकी जिंदगी के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं
विशेषज्ञों के मुताबिक, वित्तीय जानकारी सिर्फ आपकी कमाई नहीं बताती बल्कि आपकी जीवनशैली, खर्च करने की आदतें, कर्ज, जिम्मेदारियां और कमजोरियों तक का अंदाजा दे सकती है. जब कोई व्यक्ति AI से सलाह लेने के लिए अपने बैंक ट्रांजैक्शन, सैलरी, निवेश या कर्ज की जानकारी शेयर करता है तो सिस्टम के पास उसकी आर्थिक स्थिति की बेहद विस्तृत तस्वीर पहुंच जाती है. यही वजह है कि AI आधारित फाइनेंस टूल्स सामान्य चैटिंग ऐप्स से कहीं ज्यादा संवेदनशील बन जाते हैं.
सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि कई प्लेटफॉर्म बातचीत का डेटा भविष्य के AI मॉडल ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ मामलों में डेटा कितने समय तक स्टोर रहेगा, यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता.
AI Finance Tools में ये 5 चीजें कभी शेयर न करें
बैंक लॉगिन और पासवर्ड
किसी भी AI चैटबॉट में नेट बैंकिंग पासवर्ड, यूजर आईडी या लॉगिन क्रेडेंशियल्स डालना बेहद खतरनाक हो सकता है. अगर डेटा लीक हुआ तो आपका अकाउंट सीधे खतरे में पड़ सकता है.
पूरा बैंक अकाउंट या कार्ड नंबर
बहुत से लोग सोचते हैं कि पूरी बैंक डिटेल देने से AI बेहतर सलाह देगा, लेकिन ऐसा करना फ्रॉड और पहचान चोरी का जोखिम बढ़ा सकता है.
UPI PIN, OTP और CVV
UPI PIN, OTP, CVV या किसी भी तरह के सिक्योरिटी कोड कभी भी AI चैट में शेयर नहीं करने चाहिए. कोई भी भरोसेमंद प्लेटफॉर्म इन जानकारियों की मांग नहीं करता.
PAN कार्ड और सैलरी स्लिप
सरकारी दस्तावेज, टैक्स डिटेल, PAN नंबर, सैलरी स्लिप या अन्य वित्तीय रिकॉर्ड साझा करना आपकी पहचान और वित्तीय सुरक्षा दोनों के लिए जोखिम बन सकता है.
निवेश और कर्ज की पूरी जानकारी
आपका निवेश पोर्टफोलियो, लोन डिटेल या देनदारियों की पूरी जानकारी AI को आपकी आर्थिक प्रोफाइल का गहरा एक्सेस दे सकती है. बाद में यही डेटा गलत हाथों में जाने पर परेशानी पैदा कर सकता है.
प्राइवेसी से बड़ा बन सकता है जवाबदेही का सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI कंपनियों पर भी वैसे ही नियम लागू हो सकते हैं जैसे वित्तीय संस्थानों पर लागू होते हैं. सवाल सिर्फ प्राइवेसी पॉलिसी का नहीं है बल्कि इस बात का है कि कंपनियां यह साबित कैसे करेंगी कि यूजर डेटा को कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया.
AI इस्तेमाल करें, लेकिन सावधानी के साथ
AI आधारित फाइनेंस टूल्स बजटिंग और खर्चों को समझने में मददगार हो सकते हैं लेकिन यूजर्स को हर जानकारी शेयर करने से पहले सोचने की जरूरत है. जिस तरह आप किसी अजनबी, बैंक कर्मचारी या फाइनेंशियल एडवाइजर को निजी जानकारी देते समय सावधानी बरतते हैं, उसी तरह AI चैटबॉट्स के साथ भी सतर्क रहना जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टेक गिफ्ट देने के लिए जेब पर नहीं डालना पड़ेगा बोझ, 200 रुपये से भी कम में आ जाएंगी काम की एक्सेसरीज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टेक-गिफ्ट-देने-के-लिए-जेब-पर-नहीं-डालना-पड़ेगा-बोझ-200-रुपये-से-भी-कम-में-आ-जाएंगी-काम-की-एक्सेसरीज</link>
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        <description><![CDATA[ Budget Tech Accessories to Gift: आप टेक के शौकीन हैं या आपका कोई दोस्त टेक का दीवाना है और आप उसे गिफ्ट देना चाहते हैं तो बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं है. आप कई ऐसी एक्सेसरीज गिफ्ट कर सकते हैं, जिनकी कीमत 200 रुपये से भी कम है, लेकिन काम आने के मामले में ये किसी महंगे गैजेट से कम नहीं हैं. इनकी खास बात यह भी है कि इन एक्सेसरीज को स्टूडेंट्स लेकर वर्किंग प्रोफेशनल्स तक सब यूज कर सकते हैं और ये आसानी से हर जगह अवेलेबल हैं.
किफायती और काम के टेक गिफ्ट
फोल्डेबल मोबाइल स्टैंड- अगर आप किसी ऐसे दोस्त को गिफ्ट देना चाहते हैं, जो पूरा दिन फोन से चिपका रहता है तो उसे फोल्डेबल मोबाइल स्टैंड दिया जा सकता है. मूवी देखनी हो, वीडियो कॉल करनी हो या रेसिपी देखकर कुछ खाना बनाना, यह स्टैंड हर जगह काम आएगा.
USB LED Light- गर्मियों के मौसम में पावर कट होना कोई बड़ी बात नहीं है. ऐसी स्थिति में USB LED लाइट बड़े काम आ सकती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे पावर बैंक और लैपटॉप समेत किसी भी डिवाइस के साथ यूज किया जा सकता है. सिर्फ प्लग-इन करने की जरूरत है और अगले ही पल अंधेरा गायब. गिफ्ट के लिए यह एक सस्ता और अच्छा ऑप्शन है.
स्क्रीन क्लीनिंग किट- आजकल लोग दिन के कई घंटे स्क्रीन के आगे ही बिताने लगे हैं. अगर फोन स्क्रीन की बात करें तो यह पसीने, धूल, फेस ऑयल और फिंगप्रिंट आदि के कारण गंदी हो जाती है. इसी तरह टैबलेट भी फिंगरप्रिंट आदि के कारण गंदे हो जाते हैं. अगर आपके दोस्तों के पास मोबाइल, लैपटॉप और टैब जैसे गैजेट हैं तो उन्हें स्क्रीन क्लीनिंग किट भी दी जा सकती है.
ईयरफोन केस- ट्रैवल के दौरान या ऑफिस आते-जाते समय म्यूजिक और पॉडकास्ट आदि सुनने के लिए ईयरफोन अपने पास ही रखते हैं. आमतौर पर इन्हें जेब या बैग में ठूंस दिया जाता है. जेब से जहां गिरने का डर रहता है, वहीं बैग में ये बाकी सामान के नीचे दब जाते हैं. इसलिए ईयरफोन केस बहुत काम की एक्सेसरी बन जाती है. अगर आप यह किसी को गिफ्ट करते हैं तो उसके काफी काम आएगा.
ये सस्ती चीजें भी आती हैं काम
इनके अलावा आप कीबोर्ड ब्रश, केबल ऑर्गेनाइजर, मोबाइल ग्रिप और वेबकैम प्राइवेसी कवर समेत दूसरी टेक एक्सेसरीज भी गिफ्ट कर सकते हैं. ये ऐसी एक्सेसरीज हैं, जिनकी जरूरत सभी को पड़ती है, लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें खरीदना अवॉयड करते हैं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>टेक, गिफ्ट, देने, के, लिए, जेब, पर, नहीं, डालना, पड़ेगा, बोझ, 200, रुपये, से, भी, कम, में, आ, जाएंगी, काम, की, एक्सेसरीज</media:keywords>
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        <title>16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सख्ती! 1 जून से इस देश में सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर लगेगी रोक</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Ban: मलेशिया सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है. 1 जून से देश में ऐसे नए नियम लागू होंगे, जिनके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाना आसान नहीं रहेगा. सरकार चाहती है कि कम उम्र के यूजर्स को इंटरनेट पर मौजूद खतरनाक और नुकसानदायक कंटेंट से बचाया जा सके.
सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
मलेशिया के कम्युनिकेशंस एंड मल्टीमीडिया कमीशन (MCMC) के अनुसार नए नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर होगी. यानी अब सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कम उम्र के बच्चे आसानी से अकाउंट न बना सकें.
इसके अलावा कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन मजबूत करना होगा, शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी और विज्ञापन देने वालों की पहचान भी सही तरीके से जांचनी होगी. अगर किसी कंटेंट में बदलाव या छेड़छाड़ की गई है तो उसे साफ तौर पर लेबल करना भी जरूरी होगा. हालांकि इन नियमों को लागू करने के लिए कंपनियों को कुछ समय की छूट दी जाएगी लेकिन इसकी अवधि अभी तय नहीं की गई है.
बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस
पिछले कुछ वर्षों में मलेशिया में ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट के मामले तेजी से बढ़े हैं. इसी वजह से सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी बढ़ा रही है.
सरकार जिन खतरों को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है, उनमें ऑनलाइन जुआ, स्कैम, बच्चों का शोषण, साइबर बुलिंग और धर्म या नस्ल से जुड़ा भड़काऊ कंटेंट शामिल है. अधिकारियों का मानना है कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे कंटेंट से दूर रखना बेहद जरूरी हो गया है.
जल्द शुरू हो सकता है एज वेरिफिकेशन सिस्टम
मलेशिया इस साल यूजर्स के लिए एज वेरिफिकेशन सिस्टम भी शुरू करने की तैयारी में है. इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की उम्र की पुष्टि करनी पड़ सकती है. हालांकि यही सबसे बड़ी चुनौती भी मानी जा रही है. अगर प्लेटफॉर्म्स पहचान पत्र मांगते हैं तो लोगों की प्राइवेसी को खतरा हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ थर्ड-पार्टी एज वेरिफिकेशन टूल्स की सटीकता पर भी सवाल उठते रहे हैं. अब देखने वाली बात होगी कि मलेशिया इस संतुलन को कैसे संभालता है.
दुनिया के कई देशों में बढ़ रही सख्ती
मलेशिया अकेला ऐसा देश नहीं है जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती कर रहा है. ऑस्ट्रेलिया ने 2024 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगभग पूरी तरह रोक लगाने वाला कानून पास किया था.
इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के कई राज्यों में भी इसी तरह के नियम लागू किए जा चुके हैं. भारत में भी गोवा सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश दिया है.
Meta, TikTok और YouTube जैसी कंपनियों पर असर
नए नियमों का असर दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों पर भी पड़ेगा. Meta, TikTok, YouTube और X जैसी कंपनियों को अब मलेशिया में अपने सिस्टम और नीतियों में बदलाव करने पड़ सकते हैं.
दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़ी संख्या में युवा इंटरनेट यूजर्स मौजूद हैं, इसलिए यह इलाका टेक कंपनियों के लिए बेहद अहम माना जाता है. लेकिन अब बढ़ते सरकारी नियम इन कंपनियों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>UPI ID को लेकर भारी पड़ सकती है लापरवाही, पलक झपकते ही उड़ जाएगा अकाउंट का पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ Old UPI ID Risk: देश में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन तेजी से बढ़ा है और इसमें UPI पेमेंट का हिस्सा सबसे बड़ा है. सड़क किनारे फल बेचने वाले से लेकर बड़े से बड़े स्टोर तक, हर जगह लोग UPI के जरिए लेनदेन कर रहे हैं. दरअसल, UPI का इस्तेमाल एकदम आसान और सेफ भी माना जाता है. हालांकि, कई बार लापरवाही महंगी पड़ सकती है. कई लोग अपनी पुरानी UPI ID को डिएक्टिवेट किए बिना ही नई ID बना लेते हैं. ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है और देखते ही देखते आपके अकाउंट में रखा पैसा उड़ जाएगा. ज हम आपको बता रहे हैं कि UPI ID को बंद किए बिना नई ID बना लेना कितना खतरनाक हो सकता है.&amp;nbsp;
Old UPI ID को बंद करना है जरूरी
कई लोग फोन बदलने या दूसरे कारणों से नई UPI ID बना लेते हैं. कई लोगों को यह भी लगता है कि फोन से ऐप डिलीट करने के साथ ही UPI ID डिलीट हो जाती है. इस कारण भी लोग नई पेमेंट ऐप इंस्टॉल कर नई ID यूज करना शुरू कर देते हैं. उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि ऐप डिलीट करने या फोन रिप्लेस करने से UPI ID डिलीट नहीं होती. अगर आप ऐप अनइंस्टॉल कर देते हैं तो भी उसकी UPI ID, लिंक्ड अकाउंट, UPI Lite और ऑटो-पे मैंडेट समेत सारी चीजें एक्टिव रहती हैं. इन्हें ऐप में जाकर डिलीट या डिएक्टिवेट करना पड़ता है.
चुटकियों में उड़ जाएगा पैसा
अगर आपकी UPI ID ऐसे किसी नंबर से लिंक्ड है, जो इनएक्टिव हो गया है तो यह बहुत नुकसान कर सकती है. दरअसल, कंपनियां कुछ समय बाद इनएक्टिव नंबर को दूसरे यूजर्स को दे देती है. अगर आपकी UPID ID इससे लिंक रह गई है तो मोबाइल नंबर के नए यूजर के पास नोटिफिकेशन और अलर्ट जाने शुरू हो सकते हैं. अगर यह नंबर स्कैमर के हाथ लग जाए तो वो सिम-स्वैप कर आपके बैंक अकाउंट तक पहुंच सकते हैं. एक बार एक्सेस मिलने पर आपका पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा.
इन बातों का ध्यान रखना जरूरी

अगर आप ऐप डिलीट या फोन रिप्लेस कर रहे हैं तो पहले UPI ID को डिलीट करें. इससे पहले बैंक अकाउंट को डी-लिंक और पे-मैंडेट को बंद कर दें.&amp;nbsp;
मोबाइल नंबर बदले की सूरत में बैंक से अपना नया नंबर अपडेट करवा लें.
अगर आपको सारी UPI ID याद नहीं है तो NPCI की वेबसाइट पर चेक करें. यहां आपको मोबाइल नंबर से लिंक्ड सारी आईडी दिख जाएंगी. बैंकिंग ऐप से भी ऐसा किया जा सकता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>AI से मदद लेना पड़ सकता है भारी! Senior Citizens भूलकर भी न करें ये गलती, वरना खाली हो सकता है बैंक अकाउंट</title>
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        <description><![CDATA[ AI Assistant: आज के समय में AI तकनीक तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. खासकर 2026 में बड़ी संख्या में सीनियर सिटीज़न्स अब AI Assistants का इस्तेमाल कर रहे हैं. दवाइयों का रिमाइंडर लगाना हो, वीडियो कॉल करना हो, खबरें सुननी हों या बैंक बैलेंस चेक करना हो AI आधारित टूल्स बुजुर्गों की जिंदगी को पहले से आसान बना रहे हैं.
Amazon की Alexa, Apple की Siri, Google Assistant और दूसरे AI चैटबॉट्स अब घर-घर में इस्तेमाल हो रहे हैं. लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन स्कैम भी तेजी से बढ़ रहे हैं.
क्यों तेजी से बढ़ रहा है AI Assistants का इस्तेमाल?
कई बुजुर्ग अब छोटे-छोटे कामों के लिए AI टूल्स पर निर्भर हो चुके हैं. स्मार्ट स्पीकर्स और स्मार्टफोन्स सिर्फ आवाज सुनकर सवालों के जवाब दे सकते हैं, मौसम बता सकते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग में मदद कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी सहायता भी उपलब्ध करा सकते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में Voice Assistant का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अब इन डिवाइसेज को इस्तेमाल करना पहले के मुकाबले आसान हो गया है.
सुविधा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI इस्तेमाल करते समय सबसे पहले अकाउंट की सुरक्षा मजबूत करनी चाहिए. इसके लिए लंबा और मजबूत पासवर्ड रखना बेहद जरूरी है. साथ ही जहां संभव हो, Two-Factor Authentication भी चालू करना चाहिए ताकि कोई दूसरा व्यक्ति आसानी से अकाउंट एक्सेस न कर सके.
इसके अलावा AI Assistants की Privacy Settings भी समय-समय पर जांचनी चाहिए. कई डिवाइसेज लगातार वॉइस कमांड सुनने के लिए एक्टिव रहते हैं जिससे गलती से निजी बातचीत भी रिकॉर्ड हो सकती है. इसी वजह से पुराने Voice Recordings को समय-समय पर डिलीट करना और माइक्रोफोन परमिशन सीमित रखना बेहतर माना जाता है.
बैंकिंग जानकारी जोड़ते समय रहें बेहद सावधान
विशेषज्ञों की सबसे बड़ी सलाह यही है कि AI Assistants को सीधे बैंकिंग ऐप्स, पेमेंट वॉलेट्स या संवेदनशील ईमेल अकाउंट्स से लिंक करने से बचना चाहिए. अगर किसी वजह से ऐसा करना जरूरी हो तो पहले उसकी सुरक्षा सेटिंग्स और प्राइवेसी पॉलिसी जरूर जांचनी चाहिए. छोटी सी लापरवाही बैंक खाते और निजी डेटा दोनों को खतरे में डाल सकती है.
2026 में बढ़ गए हैं AI Scams
अब साइबर अपराधी AI की मदद से लोगों को ठगने के नए तरीके अपना रहे हैं. कई मामलों में ठग परिवार के सदस्य की नकली आवाज बनाकर इमरजेंसी कॉल करते हैं और पैसों की मांग करते हैं. ऐसे में सबसे जरूरी नियम यह माना जा रहा है कि किसी भी घबराहट वाले कॉल पर तुरंत भरोसा न करें. पहले फोन काटें और उस व्यक्ति को उसके सेव नंबर पर दोबारा कॉल करके पुष्टि करें. कई परिवार अब सुरक्षा के लिए Safe Word भी तय कर रहे हैं जिसे सिर्फ परिवार के लोग जानते हैं.
इन छोटी आदतों से रह सकते हैं सुरक्षित
फोन और ऐप्स को हमेशा अपडेट रखना, पब्लिक USB चार्जिंग स्टेशनों से बचना और हर महीने ऐप परमिशन चेक करना डिजिटल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है. इसके अलावा अगर कोई मैसेज, WhatsApp लिंक या ईमेल संदिग्ध लगे तो उस पर क्लिक करने से बचना चाहिए, चाहे वह कितना भी आधिकारिक क्यों न दिखे.
AI Assistants बुजुर्गों की जिंदगी को आसान जरूर बना सकते हैं लेकिन सुरक्षित इस्तेमाल करना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है. थोड़ी सतर्कता और सही डिजिटल आदतें ऑनलाइन ठगी से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp पर आ रही फर्जी Calls से हैं परेशान? तुरंत ON करें ये Setting, अनजान नंबर खुद हो जाएंगे Silent</title>
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        <description><![CDATA[ Whatsapp Spam Calls: आजकल WhatsApp पर स्पैम कॉल्स तेजी से बढ़ रही हैं. स्कैमर्स अब इंटरनेशनल और अनजान नंबरों से कॉल करके लोगों को निशाना बना रहे हैं. कई बार ये लोग खुद को बैंक कर्मचारी, डिलीवरी एजेंट या कस्टमर केयर बताकर ठगी करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में एक खास WhatsApp सेटिंग आपकी बड़ी मदद कर सकती है जो बिना किसी नंबर को ब्लॉक किए फालतू कॉल्स से राहत दिलाती है.
कौन-सी है WhatsApp की ये खास सेटिंग?
WhatsApp में Silence Unknown Callers नाम का एक इनबिल्ट फीचर मिलता है. इसे ऑन करने के बाद उन नंबरों से आने वाली Voice और Video Calls अपने आप साइलेंट हो जाती हैं जिन्हें आपने सेव नहीं किया है या जिनसे पहले कभी बातचीत नहीं की है.
इसका मतलब यह नहीं कि कॉल पूरी तरह ब्लॉक हो जाएगी. कॉल आपके फोन में नोटिफिकेशन और WhatsApp Call History में दिखाई देती रहेगी लेकिन फोन नहीं बजेगा. इससे बार-बार आने वाली अनचाही कॉल्स से काफी राहत मिलती है.
कैसे ऑन करें ये सेटिंग?
इस फीचर को एक्टिव करना बेहद आसान है और इसमें एक मिनट से भी कम समय लगता है. सबसे पहले WhatsApp खोलें. इसके बाद Settings में जाएं. फिर Privacy ऑप्शन चुनें और Calls सेक्शन पर टैप करें. यहां आपको Silence Unknown Callers का विकल्प मिलेगा जिसे ऑन करना होगा. Android फोन में Settings का ऑप्शन ऊपर दाईं तरफ दिए गए तीन डॉट मेन्यू में मिलता है जबकि iPhone में यह नीचे की तरफ दिखाई देता है.
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा
इस सेटिंग की खास बात यह है कि यह किसी नंबर को पूरी तरह ब्लॉक नहीं करती. अगर किसी जरूरी व्यक्ति ने नए नंबर से कॉल किया है तो आप बाद में Missed Call देखकर तय कर सकते हैं कि कॉल बैक करना है या नहीं. यानी जरूरी कॉल मिस होने का खतरा भी कम रहता है.
लेकिन यहां है एक छोटी-सी लिमिटेशन
अगर आपने पहले किसी अनसेव्ड नंबर पर मैसेज किया है या उससे बात की है, तो WhatsApp उसे Unknown नहीं मानेगा. ऐसे में उस नंबर से आने वाली अगली कॉल सामान्य तरीके से बज सकती है. यह दिक्कत खासतौर पर डिलीवरी एजेंट्स, ऑफिस के अस्थायी नंबर या एक बार इस्तेमाल होने वाले कॉन्टैक्ट्स के साथ देखने को मिल सकती है.
क्यों जरूरी है ये फीचर?
अगर आप काम के दौरान, मीटिंग में या रात के समय बार-बार आने वाली WhatsApp कॉल्स से परेशान रहते हैं तो यह प्राइवेसी फीचर काफी काम का साबित हो सकता है. यह स्पैम कॉल्स को पूरी तरह खत्म तो नहीं करता लेकिन यह जरूर तय करता है कि आपकी शांति कौन भंग कर सकता है और कौन नहीं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:57 +0530</pubDate>
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        <title>धमाल मचाने की तैयारी में सैमसंग, स्लाइड और रोल होने वाले 2 फोन के डिजाइन करवाएं पेटेंट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धमाल-मचाने-की-तैयारी-में-सैमसंग-स्लाइड-और-रोल-होने-वाले-2-फोन-के-डिजाइन-करवाएं-पेटेंट</link>
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        <description><![CDATA[ Samsung Rollable Phone Design: फोल्डेबल फोन सेगमेंट में अपनी बादशाहत कायम करने के बाद अब सैमसंग नए एक्सपेरिमेंट कर रही है. कंपनी अब स्लाइड और रोल होने वाले फोन के डिजाइन पर काम में लगी हुई है. इसे लेकर दो पेटेंट दायर किए गए हैं, जिससे यह झलक मिलती है कि सैमसंग मोबाइल के नए फॉर्म फैक्टर को लेकर क्या सोच रही है. आइए जानते हैं कि सैमसंग भविष्य में किस तरह के फोन लॉन्च कर सकती है.
स्लाइड होकर बड़ा हो जाएगा डिस्प्ले
पहले पेटेंट में ऐसे फोन का कॉन्सेप्ट दिखाया गया है, जो देखने में एक नॉर्मल स्मार्टफोन की तरह दिखता है, लेकिन इसके डिस्प्ले को हॉरिजॉन्टली स्लाइड किया जा सकता है. यह फोन अभी तक मौजूद किसी फोन की तरह फोल्ड या फ्लिप नहीं होगा बल्कि स्लाइड होकर यूजर को बड़ा डिस्प्ले ऑफर करेगा. काम पूरा होने के बाद इसे वापस स्लाइड कर एक नॉर्मल फोन की तरह कैरी किया जा सकेगा.
दूसरा कॉन्सेप्ट है ज्यादा इंट्रेस्टिंग
सैमसंग का दूसरा कॉन्सेप्ट काफी इंट्रेस्टिंग है. इसमें डिस्प्ले पूरी तरह डिवाइस की बॉडी के अंदर रहेगा. डिवाइस की दोनों साइड को खींचने पर डिस्प्ले बाहर आ जाएगा. सैमसंग का कहना है कि इस तरह बड़े डिस्प्ले को स्क्रैचेज और दूसरे डैमेज से बचाया जा सकता है. यूज होने के बाद यह डिस्प्ले फिर रोल होकर डिवाइस की बॉडी के अंदर चला जाएगा. पेटेंट में यह भी बताया गया है कि डिवाइस में सेंसर लगे होंगे, जो यह डिटेक्ट कर पाएंगे कि डिस्प्ले कितना खींचा गया है और इसकी रफ्तार कितनी रही. इसी आधार पर फोन का सॉफ्टवेयर इंटरफेस एडजस्ट हो जाएगा.
क्या प्रोडक्शन स्टेज में पहुंचेंगे ये फोन?
अभी सैमसंग ने इन दोनों डिजाइन के लिए पेटेंट दायर किया है और इनके प्रोडक्शन स्टेज में पहुंचने की कोई गारंटी नही है. दरअसल, कंपनियां हर साल हजारों डिजाइन पेटेंट करवाती हैं, लेकिन उनमें से बहुत ही कम कागजों से आगे बढ़ पाते हैं. ऐसे में पूरे &amp;nbsp;विश्वास के साथ यह नहीं कहा जा सकता है कि सैमसंग इन पेटेंट को हकीकत बनाकर मार्केट में उतारेगी.
इस कैटेगरी में है सैमसंग की दिलचस्पी
सैमसंग रोल और स्लाइड होने वाले डिवाइस को कैटेगरी में काफी दिलचस्पी ले रही है. कंपनी की डिस्प्ले यूनिट ने स्लाइड और रोल होने वाले OLED प्रोटोटाइप को कई जगहों पर पेश किया है. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि सैमसंग इस कैटेगरी को लेकर सीरियसली काम कर रही है. अगर ये फोन प्रोडक्शन स्टेज में पहुंच पाते हैं तो फोल्डेबल फोन की कई दिक्कतों को दूर कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:54 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>धमाल, मचाने, की, तैयारी, में, सैमसंग, स्लाइड, और, रोल, होने, वाले, फोन, के, डिजाइन, करवाएं, पेटेंट</media:keywords>
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        <title>कितनी बिजली खपत करता है घर ले लगा Smart TV? जानिए कौन सा मॉडल बढ़ाता है सबसे ज्यादा बिजली बिल</title>
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        <description><![CDATA[ Smart TV Electricity Consumption: आज के समय में Smart TV सिर्फ एंटरटेनमेंट का साधन नहीं रहा, बल्कि हर घर की जरूरत बन चुका है. लेकिन बड़ी स्क्रीन, 4K क्वालिटी और लगातार OTT देखने की आदत के बीच कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है क्या Smart TV ज्यादा बिजली खाता है? और अगर हां, तो कौन सा मॉडल बिजली बिल सबसे ज्यादा बढ़ाता है?
असल में Smart TV की बिजली खपत उसके स्क्रीन साइज, डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करती है. सही जानकारी होने पर आप बिजली बिल को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं.
Smart TV की बिजली खपत कैसे तय होती है?
किसी भी Smart TV की बिजली खपत उसकी वॉट क्षमता से मापी जाती है. जितना ज्यादा वॉट, उतनी ज्यादा बिजली की खपत. उदाहरण के तौर पर 32 इंच का LED Smart TV आमतौर पर 30 से 50 वॉट तक बिजली इस्तेमाल करता है जबकि 55 इंच का 4K TV 100 से 200 वॉट तक बिजली ले सकता है.
अगर टीवी रोज 5 से 6 घंटे चलता है तो महीने के बिजली बिल में इसका असर साफ दिखाई देता है. खासकर बड़े स्क्रीन वाले टीवी ज्यादा यूनिट खर्च करते हैं.
कौन सा Smart TV सबसे ज्यादा बिजली खाता है?
सभी Smart TV एक जैसे नहीं होते. अलग-अलग डिस्प्ले टेक्नोलॉजी की वजह से उनकी बिजली खपत भी बदल जाती है.
OLED TV
OLED टीवी शानदार पिक्चर क्वालिटी देते हैं लेकिन इनकी बिजली खपत कई बार ज्यादा हो सकती है. खासकर जब स्क्रीन की ब्राइटनेस हाई हो. बड़े OLED मॉडल बिजली बिल बढ़ाने में आगे रहते हैं.
QLED TV
QLED टीवी ब्राइट और कलरफुल डिस्प्ले देते हैं. इनकी बिजली खपत OLED से थोड़ी कम हो सकती है लेकिन स्क्रीन साइज बड़ा होने पर खर्च बढ़ जाता है.
LED TV
सामान्य LED Smart TV सबसे ज्यादा बिजली बचाने वाले माने जाते हैं. छोटे और मिड-साइज LED टीवी कम पावर इस्तेमाल करते हैं और घरेलू इस्तेमाल के लिए बेहतर ऑप्शन साबित होते हैं.
कौन सा स्क्रीन साइज ज्यादा खर्च बढ़ाता है?
टीवी जितना बड़ा होगा बिजली की खपत उतनी ज्यादा होगी. उदाहरण के लिए:
32 इंच TV &amp;ndash; कम बिजली खपत
43 इंच TV &amp;ndash; मध्यम खपत
55 इंच और उससे बड़े TV &amp;ndash; ज्यादा बिजली खर्च
अगर आपका इस्तेमाल नॉर्मल है तो बहुत बड़ी स्क्रीन लेने से बिजली बिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
बिजली बिल कम करने के आसान तरीके
Smart TV इस्तेमाल करते समय कुछ छोटी आदतें बिजली की बचत में मदद कर सकती हैं. टीवी की ब्राइटनेस जरूरत से ज्यादा न रखें. इस्तेमाल न होने पर TV को पूरी तरह बंद करें, सिर्फ रिमोट से स्टैंडबाय मोड में न छोड़ें. साथ ही पावर सेविंग मोड ऑन रखने से भी बिजली खपत कम होती है.
क्या Smart TV सच में बिजली बिल बढ़ाता है?
अगर घर में बड़ा 4K या OLED Smart TV लंबे समय तक चलता है तो बिजली बिल बढ़ना तय है. हालांकि सही स्क्रीन साइज, ऊर्जा बचाने वाली सेटिंग्स और सीमित इस्तेमाल से इसका असर काफी कम किया जा सकता है. इसलिए नया Smart TV खरीदते समय सिर्फ फीचर्स ही नहीं, उसकी बिजली खपत पर भी ध्यान देना जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:50 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कितनी, बिजली, खपत, करता, है, घर, ले, लगा, Smart, TV, जानिए, कौन, सा, मॉडल, बढ़ाता, है, सबसे, ज्यादा, बिजली, बिल</media:keywords>
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        <title>स्क्रीन देखते ही जलती हैं आंखें? फोन और लैपटॉप की ये 2 छुपी सेटिंग्स मिनटों में देंगी राहत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्क्रीन-देखते-ही-जलती-हैं-आंखें-फोन-और-लैपटॉप-की-ये-2-छुपी-सेटिंग्स-मिनटों-में-देंगी-राहत</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आज के समय में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया या फिर देर रात तक वेब सीरीज देखना स्क्रीन से दूरी लगभग नामुमकिन हो गई है. लेकिन लगातार स्क्रीन देखने का असर सबसे पहले हमारी आंखों पर पड़ता है. कई लोगों को आंखों में जलन, पानी आना, सिरदर्द और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं होने लगती हैं.
अच्छी बात यह है कि आपके फोन और लैपटॉप में पहले से ही ऐसी कुछ सेटिंग्स मौजूद होती हैं जो आंखों पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम कर सकती हैं. हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोग इनके बारे में जानते ही नहीं हैं.
ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड करें ऑन
फोन और लैपटॉप स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. यही वजह है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद आंखों में जलन और थकान महसूस होने लगती है. इस समस्या से राहत पाने के लिए आप अपने डिवाइस में मौजूद ब्लू लाइट फिल्टर, नाइट लाइट या आई कम्फर्ट मोड जैसी सेटिंग्स को ऑन कर सकते हैं. यह फीचर स्क्रीन की तेज नीली रोशनी को कम करके उसे हल्का गर्म रंग देता है जिससे आंखों पर दबाव कम पड़ता है.
एंड्रॉयड फोन में यह सेटिंग अक्सर Display सेक्शन में मिल जाती है जबकि Windows लैपटॉप में Night Light नाम से उपलब्ध होती है. इसे शाम के समय ऑटोमैटिक ऑन होने के लिए भी सेट किया जा सकता है.
स्क्रीन ब्राइटनेस को ऑटो मोड पर रखें
कई लोग दिन और रात दोनों समय एक जैसी ब्राइटनेस पर फोन इस्तेमाल करते रहते हैं. यही आदत आंखों में जलन और दर्द की बड़ी वजह बन सकती है. अगर स्क्रीन जरूरत से ज्यादा तेज होगी तो आंखों को लगातार एडजस्ट करना पड़ता है जिससे थकान बढ़ती है. वहीं बहुत कम ब्राइटनेस भी आंखों पर असर डाल सकती है. इसलिए सबसे बेहतर तरीका है कि Adaptive Brightness या Auto Brightness फीचर को ऑन रखा जाए.
यह सेटिंग आसपास की रोशनी के हिसाब से स्क्रीन की चमक अपने आप कम या ज्यादा कर देती है. इससे आंखों को आराम मिलता है और बैटरी की भी बचत होती है.
सिर्फ सेटिंग्स नहीं ये आदतें भी जरूरी
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए केवल सेटिंग्स बदलना ही काफी नहीं है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हर 20 मिनट बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर दूर देखें. इसे 20-20-20 नियम कहा जाता है.
इसके अलावा अंधेरे कमरे में फोन इस्तेमाल करने से बचें और स्क्रीन को आंखों से बहुत करीब न रखें. अगर लगातार जलन या दर्द बना रहता है तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
छोटी सेटिंग्स, बड़ा आराम
अक्सर लोग आंखों की परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि फोन और लैपटॉप की छोटी-छोटी सेटिंग्स बड़ा फर्क ला सकती हैं. अगर आप भी लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करते हैं तो आज ही इन दो फीचर्स को ऑन करें. इससे आपकी आंखों को राहत मिलेगी और स्क्रीन टाइम भी पहले से ज्यादा आरामदायक महसूस होगा.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब AirPods बनेंगे ‘कान के डॉक्टर’! Apple ने भारत में लॉन्च किया ऐसा फीचर, घर बैठे कर सकेंगे Hearing Test</title>
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        <description><![CDATA[ Apple AirPods: Apple ने भारत में अपने प्रीमियम ईयरबड्स के लिए एक बड़ा हेल्थ अपडेट जारी किया है. अब AirPods केवल गाने सुनने का साधन नहीं रहेंगे बल्कि ये यूजर्स की सुनने की क्षमता यानी Hearing Health पर भी नजर रखेंगे. कंपनी ने भारत में नया Hearing Test फीचर शुरू किया है जिसकी मदद से लोग घर बैठे कुछ ही मिनटों में अपनी सुनने की क्षमता की जांच कर सकेंगे.
घर बैठे सिर्फ 5 मिनट में होगा Hearing Test
Apple के अनुसार यह नया फीचर AirPods Pro 2 और उससे आगे के मॉडल्स में काम करेगा. इसके लिए डिवाइस में लेटेस्ट Firmware होना जरूरी है और उसे iOS 18 या iPadOS 18 वाले iPhone या iPad से कनेक्ट करना होगा.
कंपनी का कहना है कि पूरा टेस्ट लगभग पांच मिनट में पूरा हो जाता है और इसके लिए किसी क्लिनिक या अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यूजर आराम से घर पर बैठकर ही यह टेस्ट कर सकता है.
कैसे काम करेगा यह नया फीचर?
Hearing Test के दौरान यूजर को AirPods पहनने होंगे. इसके बाद दोनों कानों में अलग-अलग ऑडियो टोन सुनाई देंगे. जब भी कोई आवाज सुनाई देगी यूजर को उसका जवाब देना होगा.
टेस्ट पूरा होने के बाद सिस्टम एक डिटेल रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें दोनों कानों की Hearing Level, Hearing Loss की स्थिति, जरूरी सुझाव और Audiogram Chart शामिल होगा. यह चार्ट अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर सुनने की क्षमता को दिखाता है. यह सभी डेटा सुरक्षित तरीके से Apple Health App में सेव रहेगा. जरूरत पड़ने पर यूजर इसे डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट के साथ भी शेयर कर सकता है.
शुरुआती दौर में ही पकड़ में आएगी Hearing Problem
Apple का मानना है कि कई बार लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उनकी सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो रही है. ऐसे में यह फीचर शुरुआती स्टेज में ही समस्या की पहचान करने में मदद करेगा.
कंपनी की Health and Fitness टीम की वाइस प्रेसिडेंट ने कहा कि टेक्नोलॉजी का मकसद लोगों को अपनी हेल्थ पर बेहतर कंट्रोल देना होना चाहिए. इसी सोच के तहत यह फीचर तैयार किया गया है.
Hearing Aid की तरह भी काम करेंगे AirPods
इस अपडेट के बाद AirPods Pro हल्की या मध्यम Hearing Loss वाले लोगों के लिए Hearing Assistance डिवाइस की तरह भी काम कर सकेंगे. टेस्ट के दौरान बने पर्सनल Hearing Profile के आधार पर AirPods आसपास की आवाजों और बातचीत को रियल टाइम में ज्यादा साफ और तेज सुनाने में मदद करेंगे. इससे रोजमर्रा की बातचीत समझना आसान हो सकता है.
कई सालों की रिसर्च के बाद तैयार हुआ फीचर
Apple के मुताबिक कंपनी पिछले कई वर्षों से Hearing Health टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है. शुरुआत में Connected Headphones के जरिए सही रिजल्ट हासिल करने में दिक्कतें आती थीं क्योंकि आसपास का शोर और हार्डवेयर क्वालिटी बड़ी चुनौती थी. हालांकि अब AirPods के बेहतर हार्डवेयर और Noise Isolation तकनीक की मदद से कंपनी ज्यादा भरोसेमंद और क्लिनिकल स्तर के करीब परिणाम देने का दावा कर रही है.
Apple अब हेल्थ टेक्नोलॉजी पर दे रहा बड़ा फोकस
यह अपडेट दिखाता है कि Apple अब अपने डिवाइसेज को सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं बल्कि हेल्थ कंपेनियन के रूप में पेश करना चाहता है. Hearing फीचर्स के अलावा कंपनी ने भारत में Apple Watch यूजर्स के लिए Sleep Apnoea Notification फीचर भी शुरू किया है. यह फीचर सोते समय सांस रुकने जैसी समस्याओं के संकेत पहचानने में मदद करेगा.
Apple Watch में मौजूद सेंसर और Accelerometer सोते समय शरीर की हलचल और Breathing Pattern को ट्रैक करके संभावित समस्या का पता लगाने की कोशिश करेंगे.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:44 +0530</pubDate>
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        <title>सैमसंग के हाथ लगी बड़ी कामयाबी, इस मामले में ऐप्पल को छोड़ दिया पीछे</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Overtakes Apple: इस साल की शुरुआत में सैमसंग को पीछे छोड़कर ऐप्पल दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी बनी थी. अब दक्षिण कोरियाई दिग्गज सैमसंग ने एक अलग मामले में ऐप्पल को पछाड़ दिया है. अमेरिकन कस्टमर सेटिस्फेक्शन इंडेक्स की नई स्टडी के मुताबिक, कस्टमर सेटिस्फेक्शन के मामले में सैमसंग ऐप्पल से आगे निकल गई है. मोबाइल फोन को लेकर सैमसंग के यूजर ऐप्पल यूजर्स से ज्यादा सेटिस्फाई हैं. हालांकि, अमेरिकी टेक दिग्गज भी इस लिस्ट में ज्यादा पीछे नहीं है.
दोनों कंपनियों के बीच मामूली अंतर
इंडेक्स की नई सेलफोन रैंकिंग में 81 अंकों के साथ सैमसंग सबसे आगे बनी हुई है, जबकि 80 अंकों के साथ ऐप्पल दूसरे स्थान पर है. पिछले साल दोनों कंपनियों के बीच मुकाबला टाई रहा था. अगर ओवरऑल फोन इंडस्ट्री का स्कोर देखें तो यह एक प्रतिशत बढ़कर 79 प्रतिशत हो गया है. 2025 में इसमें 4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई थी और यह एक दशक में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था.
यूजर सेटिस्फेक्शन का क्या मतलब?
रिपोर्ट के मुताबिक, जब फोन में मिलने वाले नए फीचर बिना किसी दिकक्त के यूजर्स की डेली लाइफ में काम आने लगे तो सेटिस्फेक्शन बढ़ती है. इस बार रैंकिंग में पहली बार एआई फीचर्स को भी शामिल किया गया है और इसे 85 स्कोर मिला है. इसका मतलब है कि यूजर्स को न सिर्फ एआई फीचर्स के बारे में जानकारी है बल्कि वो उन्हें अपने कामों के लिए यूज भी कर रहे हैं.
इन मॉडल्स से यूजर्स सबसे ज्यादा खुश
नए मॉडल्स की बात करें तो सैमसंग की लेटेस्ट गैलेक्सी एस26 सीरीज मॉडल्स के ऑनर 84 अंकों के साथ सबसे ज्यादा संतुष्ट पाए गए. इसके बाद 82 अंकों के साथ नए आईफोन यूजर दूसरे और गूगल के फ्लैगशिप मॉडल यूज करने वाले लोग 80 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. रैंकिंग के अनुसार, लोग पुराने और फोल्डेबल फोन की तुलना में नए फ्लैगशिप मॉडल्स से ज्यादा खुश हैं.
फोल्डेबल सेगमेंट में सैमसंग आगे, लेकिन ऐप्पल पर भी नजर
इस रिपोर्ट के मुताबिक, फोल्डेबल फोन सेगमेंट में भी सैमसंग सबसे आगे है और उसे रैंकिंग में 80 नंबर मिले हैं. इसके बाद 72 प्वाइंट के साथ गूगल दूसरे और मोटोरोला 70 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर मौजूद है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप्पल की इस सेगमेंट में एंट्री के बाद डायनामिक्स पूरी तरह बदल सकते हैं. बता दें कि ऐप्पल इस साल सितंबर में iPhone Ultra नाम से अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करने जा रही है.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>पूरा दिन गेमिंग करने से भी डिस्चार्ज नहीं होगी बैटरी, इस सेटिंग के ऑन करते ही हो जाएगा कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ Bypass Charging: गेमिंग हो स्ट्रीमिंग, फोन की बैटरी कुछ ही घंटो में डिस्चार्ज हो जाती है. इस कारण फोन को बार-बार चार्जिंग पर डालना पड़ता है. अगर आप इस झंझट से परेशान हैं तो एक जरूरी सेटिंग आपके काम आ सकती है. दरअसल, कई मॉडर्न फोन में बाइपास चार्जिंग का ऑप्शन मिलता है. इसका मतलब है कि आपका फोन बैटरी से पावर न लेकर सीधे एडेप्टर से पावर लेगा. इस तरह आप सुबह से शाम तक गेमिंग और स्ट्रीमिंग कर सकते हैं और इससे बैटरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. न तो आपको बैटरी डिस्चार्ज होने की टेंशन रहेगी और न ही चार्ज पर लगाने के कारण गेम प्रोग्रेस लॉस्ट होने की. आइए जानते हैं कि बाइपास चार्जिंग क्या है और इसके क्या फायदे हैं.
Bypass Charging का क्या मतलब?
जैसा नाम से ही जाहिर है, इस चार्जिंग मेथड में बैटरी को बाइपास कर दिया जाता है. यानी पावर लेने के लिए फोन बैटरी को यूज नहीं करता है. यह सीधा चार्जिंग एडेप्टर से ही पावर लेकर फोन को ऑपरेट करता है. इसमें फोन उतनी ही पावर ड्रॉ करता है, जितनी प्रोसेसर, डिस्प्ले और अन्य कंपोनेंट्स के लिए जरूरी है. अगर फोन चार्जिंग पर लगा है तो इसके कंपोनेंट्स बैटरी को छोड़कर सीधे एडेप्टर से पावर ले लेंगे. जैसे ही एडेप्टर बंद हो जाएगा, बैटरी अपना काम करना शुरू कर देगी.
इन बातों का रखना होगा ध्यान
गेमिंग और स्ट्रीमिंग के अलावा दूसरी ऐप्स के लिए भी बाइपास चार्जिंग को यूज किया जा सकता है. हालांकि, आमतौर पर लोग उन कामों के लिए इस तरीके को ज्यादा यूज करते हैं, जिनमें बैटरी की खपत ज्यादा होती है. बाइपास चार्जिंग के लिए चार्जर कंपैटिबल होना बहुत जरूरी है और बैटरी के कम से कम 20 प्रतिशत चार्ज होने के बाद ही इस मोड को ऑन करना चाहिए. फोन की चार्जिंग सेटिंग में जाकर इस फीचर को ऑन किया जा सकता है. बता दें कि अभी यह फीचर सेलेक्टेड फोन में ही मौजूद है और इस पर कई लिमिटेशन भी है.&amp;nbsp;
क्या इससे फोन ओवरहीट नहीं होता?
बाइपास चार्जिंग को लेकर एक डर ओवरहीटिंग का बना रहता है. अगर आपको भी यह चिंता है तो बता दें कि बाइपास चार्जिंग से फोन हीट नहीं होता. इसमें बैटरी की भूमिका लगभग खत्म हो जाती है. इसलिए इसमें हीट जनरेट नहीं होती और घंटों तक फोन यूज किया जा सकता है. इस प्रोसेस से बैटरी पर लोड कम हो जाता है, जो बैटरी लाइफ को बढ़ाने में मदद करता है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>कम सोलर पैनल से बनेगी ज्यादा बिजली, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला नया तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ High Efficiency Solar Panel: सोलर पावर इस समय दुनिया के लिए क्लीन एनर्जी का सबसे जरूरी सोर्स बना हुआ है. इसे ज्यादा से ज्यादा यूटिलाइज करने के लिए साइंटिस्ट लगातार सोलर पैनल को एफिशिएंट और किफायती बनाने में जुटे हुए हैं. इस दिशा में perovskite&amp;ndash;silicon tandem solar cell टेक्नोलॉजी को सबसे कारगर माना जा रहा है. इसमें अलग-अलग लाइट एब्जॉर्बिंग मैटेरियल मिलकर सनलाइट से ज्यादा एनर्जी कैप्चर कर लेते हैं. ये सिलिकॉन सोलर पैनल के मुकाबले काफी एफिशिएंट माने जाते हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका ढूंढा है, जिससे इनका मास लेवल प्रोडक्शन आसान हो जाएगा.&amp;nbsp;
कैसे काम करते हैं ये पैनल?
Perovskite&amp;ndash;silicon tandem cells सनलाइट को अलग-अलग एनर्जी रेंज में डिवाइड कर लेती हैं. perovskite से बनी टॉप लेयर हाई-एनर्जी वाली ब्लू और अल्ट्रा वायलेट लाइट को सोख लेती है, जबकि इसके नीचे लगी सिलिकॉन लेयर कम एनर्जी वाली रेड और इंफ्रारेड लाइट को सोखती है. इस तरह ये दोनों लेयर मिलकर ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस कर पाती हैं. बेशक इनकी एफिशिएंसी ज्यादा है, लेकिन इन्हें बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चर करना काफी मुश्किल रहा है और सबसे बड़ी दिक्कत सिलिकॉल सरफेस को perovskite की एकदम पतली लेयर से कोट करने में इसमें लगने वाले समय को लेकर आई है.
साइंटिस्ट ने निकाल लिया नया तरीका
मैन्युफैक्चरिंग में आने वाली दिक्कत को दूर करने के लिए साइंटिस्ट ने नया तरीका निकाल लिया है. उन्होंने क्लोज-स्पेस सबलिमेशन की प्रोसेस को इंप्रूव किया है. इसमें सॉलिड प्रीकर्सर मैटेरियल को तब तक गर्म किया जाता है, जब तक वह भाप नहीं बन जाता. भाप बनने के बाद यह थोड़ी ही दूर लगे सिलिकॉन सरफेस पर जाकर चिपक जाता है. यहां केमिकल रिएक्शन कर यह perovskite की लेयर बना लेता है. इस प्रोसेस में लिक्विड सॉल्वेंट की जरूरत नहीं पड़ती. यह प्रोसेस एकदम क्लीन और किफायती भी है.
प्रोसेस में लगने वाला समय भी हुआ कम
रिसर्चर ने बताया कि यह प्रोसेस काफी तेज है और इसकी रफ्तार ने उन्हें भी चौंका दिया. perovskite लेयर को पूरी तरह बनने में सिर्फ 10 मिनट का समय लगा, जो इस टेक्निक के लिए बड़ी सफलता है. साथ ही यह प्रोसेसर सिलिकॉन के अलग-अलग सरफेस जैसे स्मूद, नैनो-टेक्सचर्ड और माइक्रो टेक्सचर्ज समेत सब पर काम कर सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सेल्स की एफिशिएंसी 34 प्रतिशत तक जा सकती है, जो आज मार्केट में कमर्शियली मौजूद पैनल के मुकाबले बहुत ज्यादा है. इसका फायदा यह होगा कि कम पैनल से ज्यादा एनर्जी जनरेट की जा सकेगी.&amp;nbsp;
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&#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; पर बड़ा एक्शन, भारत में बंद हुआ &#039;X&#039; अकाउंट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Cockroach Janata Party: कॉकरोच इज बैक... पहले अकाउंट पर रोक के बाद की दमदार वापसी, 1 घंटे में 25 हजार फॉलोअर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Cockroach Janata Party: सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाले &amp;nbsp;&#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; (CJP) के संस्थापक ने इंटरनेट पर अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है. भारतीय सरकार के कानूनी आदेश के बाद माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; (पहले ट्विटर) ने इस ग्रुप के मेन अकाउंट को देश में ब्लॉक कर दिया था. इस डिजिटल कार्रवाई के तुरंत बाद इसके क्रिएटर ने &#039;कॉकरोच इज बैक&#039; (@Cockroachisback) नाम से एक नया हैंडल एक्टिव कर लिया है.
&#039;कॉकरोच कभी मरते नहीं&#039; के नारे से वापसी
नए अकाउंट के प्रोफाइल बायो में एक बेहद दिलचस्प और कड़ा संदेश लिखा गया है- &quot;कॉकरोचेस डोंट डाई!&quot; (कॉकरोच कभी मरते नहीं). इस मुहिम के पीछे मुख्य दिमाग माने जाने वाले पॉलिटिकल स्ट्रेटजिस्ट अभिजीत दीपके ने यह कदम तब उठाया, जब भारत सरकार के निर्देश का पालन करते हुए &#039;एक्स&#039; ने आंदोलन के मुख्य हैंडल (@CJP_2029) को देश के अंदर पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था. सरकार के इस एक्शन के कुछ ही घंटों के भीतर इस डिजिटल ग्रुप ने नया प्लेटफॉर्म तैयार कर अपनी मौजूदगी दोबारा दर्ज करा दी.
बीजेपी और कांग्रेस को दी थी कड़ी टक्कर
सरकार की इस कानूनी कार्रवाई से ठीक पहले इस ग्रुप ने सोशल मीडिया की दुनिया में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया था. इंस्टाग्राम पर &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; के अचानक लगभग 14 मिलियन (1.4 करोड़) फॉलोअर्स हो गए थे. फॉलोअर्स के इस विशाल आंकड़े के साथ इस पेज ने देश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी (BJP) के आधिकारिक हैंडल को भी पीछे छोड़ दिया था और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (INC) के बराबर आ खड़ा हुआ था. खबर लिखे जाने तक Cockroach is Back के एक घंटे में एक्स पर 25 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. इसे बनाने वाले सूत्रधार अभिजीत दीपके ने अपने निजी प्रोफाइल से एक्स अकाउंट के ब्लॉक होने की जानकारी दी थी. लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने बैकअप के तौर पर एक नया हैंडल बना दिया.
यह भी पढ़ें: &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; पर बड़ा एक्शन, भारत में बंद हुआ &#039;X&#039; अकाउंट
चीफ जस्टिस के बयान से शुरू हुआ पूरा विवाद
इंटरनेट पर तूफान खड़ा करने वाली इस &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; (CJP) का गठन 16 मई को हुआ था. दरअसल, यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा की गई एक तल्ख टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ था. फर्जी डिग्री के एक मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने डिजिटल एक्टिविज्म (इंटरनेट पर सक्रियता) से जुड़े कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में &#039;कॉकरोच&#039; शब्द का इस्तेमाल किया था.
बयान पर दी सफाई पर युवाओं का गुस्सा
हालांकि, विवाद बढ़ता देख मुख्य न्यायाधीश ने बाद में इस पर सफाई भी दी थी. उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और उनकी टिप्पणी सिर्फ फर्जी डिग्री के सहारे काम करने वाले धोखेबाज पेशेवरों के खिलाफ थी. इसके बावजूद, देश के नाराज और हताश युवाओं ने इस शब्द को सरकार और व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े हथियार में बदल दिया. खुद को &amp;lsquo;आलसी और बेरोजगारों की आवाज&amp;rsquo; बताने वाले इस व्यंग्यात्मक मंच को उन युवाओं का भारी समर्थन मिला, जो नौकरी की कमी और बार-बार होने वाले पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.&amp;nbsp;
कॉकरोच जनता पार्टी ने जारी किया घोषणा पत्र
इस अनोखे आंदोलन ने सोशल मीडिया पर काफी आक्रामक रुख अपना रखा है और अपना एक 5 सूत्रीय घोषणापत्र (मैनिफेस्टो) भी जारी किया है. इस घोषणापत्र के जरिए न्यायपालिका में पूरी पारदर्शिता लाने और जजों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले राजनीतिक फायदों व पदों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है. इस मुहिम की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक इंटरनेट के जरिए 3,50,000 (साढ़े तीन लाख) से अधिक लोग इस पार्टी के आधिकारिक सदस्य के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं.
यह भी पढ़ें: 25000 से आगाज और 4 दिन में 14 मिलियन पार, इंस्टाग्राम पर BJP को &#039;पंजा&#039; मारकर आगे निकली Cockroach Janata Party ]]></description>
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        <media:keywords>Cockroach, Janata, Party:, कॉकरोच, इज, बैक..., पहले, अकाउंट, पर, रोक, के, बाद, की, दमदार, वापसी, घंटे, में, हजार, फॉलोअर्स</media:keywords>
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        <title>25000 से आगाज और 4 दिन में 14 मिलियन पार, इंस्टाग्राम पर BJP को &amp;apos;पंजा&amp;apos; मारकर आगे निकली Cockroach Janata Party</title>
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        <description><![CDATA[ Cockroach Janata Party: खुद को आलसी और बेरोजगार लोगों की आवाज बताने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है. हालांकि, आज सुबह भारत में CJP के एक्स अकाउंट को बंद कर दिया गया, लेकिन इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोवर्स तेजी से बढ़ रहे हैं. इंस्टाग्राम पर CJP के फॉलोवर्स की संख्या 14 मिलियन से भी पार हो गई है. 16 मई की रात को शुरू होने वाले इस कैंपेन ने 4-5 दिनों में ही इंस्टाग्राम फॉलोवर्स के मामले में दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत कई पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है. आइए जानते हैं कि इस कैंपेन की शुरुआत कैसे हुई और कैसे लोग इससे जुड़ते चले गए.
16 मई से हुई शुरुआत
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने एक बयान में बेरोजगारी युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी. हालांकि, बाद में उन्होंने इस पर सफाई भी दी, लेकिन यहीं से एक नए सोशल मीडिया कैंपेन की शुरुआत हो गई. 16 मई को बॉस्टन यूनिवर्सटी में पढ़ने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा कि वो कॉकरोच के लिए एक नए प्लेटफॉर्म की शुरुआत कर रहे हैं. इसी के साथ CJP की शुरुआत हुई और देखते ही देखते इसके साथ लोगों के जुड़ने का सफर भी शुरू हो गया.&amp;nbsp;
कौन हैं अभिजीत दीपके?
CJP के फाउंडर 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं और उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की है. इसके बाद वे हायर स्टडी के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने मशहूर बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. दीपके पेशे से एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटजिस्ट हैं, जो राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं. वो आम आदमी पार्टी के साथ भी कुछ समय तक काम कर चुके हैं.
बड़ी-बड़ी पार्टियों को छोड़ा पीछे
CJP ने इंस्टाग्राम पर बड़ी-बड़ी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है. खबर लिखे जाने तक CJP के इंस्टाग्राम फॉलोवर्स की संख्या 14.2 मिलियन थी. BJP के 8.8 मिलियन, कांग्रेस के 13.3 मिलियन, आम आदमी पार्टी के 1.9 मिलियन और समाजवादी पार्टी के 870K फॉलोवर्स हैं. इस तरह CJP सबको पछाड़ते हुए आगे निकल चुकी है.&amp;nbsp;
कैसे जुड़ते गए लोग?
इंटरनेट पर युवा लोग CJP के साथ जुड़ रहे हैं. इसके अलावा कई नेता और सेलिब्रिटी भी इस कैंपेन को फॉलो कर रहे हैं. इनमें अनुराग कश्यप, दीया मिर्जा, विशाल डडलानी, कोंकणा सेना, ईशा गुप्ता आदि शामिल हैं. इनके अलावा कई इंफ्लुएंसर्स भी फॉलोवर लिस्ट में शामिल हैं.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cockroach Janta Party: X पर Withheld और Suspend में क्या होता है अंतर, कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ रहा इसका कनेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Cockroach Janta Party: इंस्टाग्राम पर पिछले कुछ दिनों से &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; लगातार छाई हुई है. CJI सूर्यकांत के एक बयान से जन्मी इस पार्टी&#039; ने महज 4 दिन में बीजेपी और कांग्रेस जैसी दिग्गज पॉलिटिकल पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है और इसके 14 मिलियन फॉलोअर्स हो गए हैं. जेन Z में बढ़ते क्रेज के बीच &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; के &#039;एक्स&#039; अकाउंट को भारत में बैन (Withheld) कर दिया गया.
हालांकि, कुछ ही देर बाद एक्स पर &#039;कॉकरोच इज बैक&#039; नाम से नया पेज क्रिएट हो गया. ऐसे में बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;X&#039; पर Withheld और Suspend क्या होता है? कब कोई अकाउंट Withheld किया जाता है और कब Suspend ? और इसको लेकर नियम क्या हैं? चलिए जानते हैं...&amp;nbsp;
एक्स पर &#039;Suspend&#039; क्या होता है?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; कोई अकाउंट Suspend तब होता है जब &#039;X&#039; खुद किसी अकाउंट को नियम या शर्तों का उल्लंघन करते हुए पाता है. ऐसे में कंपनी द्वारा ही इस अकाउंट को स्थाई या अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया जाता है. यह फैसला पूरी तरह से &#039;X&#039; का अपना होता है. ऐसे अकाउंट्स पर स्पैम या फर्जी अकाउंट चलाने, नफरत फैलाने, हिंसा भड़काने या बाल सुरक्षा और कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होती है.&amp;nbsp; बार-बार नियम तोड़ने पर परमानेंट सस्पेंशन भी हो सकता है. सस्पेंड होने पर प्रोफाइल पर लिखा आता है अकाउंट सस्पेंड, जिसके बाद यह अकाउंट दुनिया में कहीं से भी किसी को नहीं दिखता.
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एक्स पर &#039;Withheld&#039; क्या होता है?
Withheld एक देश-विशेष प्रतिबंध है. जब किसी देश की सरकार या अदालत &#039;X&#039; कानूनी आदेश देती है, तब X उस अकाउंट या ट्वीट को सिर्फ उसी देश में रोक दिया जाता है, बाकी पूरी दुनिया में अकाउंट वैसे ही चलता रहता है. जहां तक भारत की बात है तो IT Act की धारा 69A के तहत सरकार या अदालत &#039;X&#039; को नोटिस भेजती है. &#039;X&#039; उस आदेश को मानता है और अकाउंट सिर्फ भारत में बंद कर देता है बाकी दुनिया में वह अकाउंट पहले की तरह चलता रहता है.&amp;nbsp; जिस यूज़र का अकाउंट Withheld होता है, उसकी प्रोफाइल पर भारत में यह संदेश दिखता है &#039;अकाउंट विदहेल्ड इन इंडिया इन रिस्पांस तो ए लीगल डिमांड&#039;
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>जेब में फट सकता है आपका Smartphone! गर्मी में Phone Cover में रखी ये 5 चीजें बना सकती हैं चलता&amp;फिरता बम</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: गर्मी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच अगर आप अपने फोन कवर में कुछ गलत चीजें रख रहे हैं तो आपका स्मार्टफोन ओवरहीट होकर खराब भी हो सकता है. कई मामलों में बैटरी फूलने, फोन गर्म होकर बंद होने और यहां तक कि ब्लास्ट होने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं.
अक्सर लोग सुविधा के लिए फोन कवर के अंदर नोट, कार्ड या दूसरी छोटी चीजें रख लेते हैं लेकिन यही आदत गर्मियों में बड़ा खतरा बन सकती है. आइए जानते हैं वे 5 चीजें जिन्हें भूलकर भी फोन कवर में नहीं रखना चाहिए.
नकद पैसे और कागज
बहुत से लोग फोन कवर के पीछे पैसे या बिल दबाकर रखते हैं. लेकिन कागज गर्मी को रोकता है और फोन से निकलने वाली हीट बाहर नहीं निकल पाती. इससे डिवाइस तेजी से गर्म होने लगता है. लगातार ओवरहीटिंग बैटरी पर दबाव डालती है जिससे फोन की लाइफ कम हो सकती है.
एटीएम और क्रेडिट कार्ड
फोन कवर में कार्ड रखना आजकल आम बात हो गई है. लेकिन स्मार्टफोन लगातार गर्म होता रहता है और ज्यादा तापमान कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप या चिप को नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार इससे कार्ड काम करना बंद कर देते हैं. साथ ही मोटा कवर फोन की कूलिंग को भी प्रभावित करता है.
धातु की चीजें या चाबी
कुछ लोग फोन कवर में छोटी चाबी, सिम पिन या धातु की पतली चीजें रख लेते हैं. यह बेहद खतरनाक हो सकता है. धातु गर्मी को तेजी से बढ़ाती है और अगर वह चार्जिंग पोर्ट या बैटरी एरिया के संपर्क में आ जाए तो शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ सकता है.
पुरानी रसीदें और प्लास्टिक पेपर
रसीदें या प्लास्टिक कार्ड जैसी चीजें फोन के पीछे एयरफ्लो रोक देती हैं. गर्मी के मौसम में फोन को पहले ही ज्यादा कूलिंग की जरूरत होती है. ऐसे में बंद जगह में हीट फंसने लगती है और फोन जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है. लगातार ऐसा होने पर बैटरी फूल सकती है.
मोटा और सस्ता Phone Cover
सिर्फ कवर के अंदर रखी चीजें ही नहीं बल्कि खराब क्वालिटी का कवर भी खतरा बढ़ा सकता है. मोटे और सस्ते प्लास्टिक कवर गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते. खासकर गेमिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग या फास्ट चार्जिंग के दौरान फोन तेजी से गर्म होता है. ऐसे में हीट फंसने से फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
गर्मी में Smartphone को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
गर्मी के मौसम में फोन को सीधे धूप में रखने से बचें. चार्जिंग के दौरान गेमिंग या भारी ऐप्स का इस्तेमाल न करें. अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म लगे तो तुरंत कवर हटाकर उसे कुछ देर ठंडा होने दें. साथ ही हमेशा अच्छी क्वालिटी का पतला और हीट-रेसिस्टेंट कवर इस्तेमाल करें. थोड़ी सी लापरवाही आपका महंगा स्मार्टफोन खराब कर सकती है. इसलिए आज ही अपने फोन कवर की जांच करें और इन चीजों को तुरंत बाहर निकाल दें.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Rooftop vs Solar Panels: दोनों में कितना अंतर और क्या हैं फायदे&amp;नुकसान? यहां जानें सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Rooftop Vs Solar Panels: पिछले कुछ सालों से सोलर एनर्जी की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है और यही वजह है कि अब गांव हो या शहर, हर जगह सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. घरों के साथ-साथ लोग कमर्शियल जरूरतों के लिए भी सोलर पावर यूज कर रहे हैं. अगर आप भी सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने की सोच रहे हैं तो इसके लिए बाजार में दो तरह के ऑप्शन मौजूद हैं. आप सोलर पैनल के अलावा सोलर रूफ टाइल्स को भी सेलेक्ट कर सकते हैं. आज हम आपको इन दोनों के बीच के अंतर और फायदे-नुकसान के बारे में बताएंगे.
सोलर रूफ टाइल्स क्या होती हैं?
इन्हें सोलर टाइल्स भी कहा जाता है. ये छत पर लगाने में यूज होने वाली टाइल्स होती हैं, जिनमें फोटोवॉल्टिक (PV) सेल्स लगी होती हैं. सोलर पैनल की तरह ही सनलाइट से ही पावर जनरेट करती हैं. सोलर टाइल्स को फर्श में ही लगा दिया जाता है. इससे फर्श की सुंदरता भी बढ़ती है और इसके लिए पैनल की तरह अलग से स्पेस की जरूरत नहीं पड़ती. यानी ये टाइल्स आपकी बिल्डिंग को प्रोटेक्ट करने के साथ-साथ सोलर पावर भी प्रोड्यूस करेंगी.
फायदे

ये फर्श के डिजाइन में ही इंटीग्रेट हो जाती है, जिससे फर्श की सुंदरता बढ़ती है.
इनमें यूज होने वाला मैटेरियल काफी ड्यूरेबल होता है, जिससे ये सालों-साल चलती हैं.
इन्हें यूज करने के लिए पैनल की तरह अतिरिक्त स्पेस नहीं चाहिए. ये कम स्पेस वाले घरों पर खूब काम आ सकती हैं.

नुकसान

इनकी अपफ्रंट कॉस्ट पैनल से ज्यादा है. यानी इन्हें लगाने के लिए पैनल से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा.
पुराने घरों पर इन्हें लगाना थोड़ा मुश्किल होता है और इनके इंस्टॉलेशन में टाइम भी ज्यादा लगता है.
इनकी एफिशिएंसी सोलर पैनल के मुकाबले काफी कम है.&amp;nbsp;

सोलर पैनल
सोलर पैनल सोलर एनर्जी टेक्नोलॉजी की सबसे कॉमन फॉर्म है. ये इंडिविजुअल सोलर सेल्स से बने होते हैं, जो सनलाइट को बिजली में बदल देते हैं. इन्हें छत या स्टैंड लगाकर माउंट किया जाता है. इन्हें अलग-अलग साइज और कॉन्फिगरेशन में खरीदा जा सकता है. इन्हें किसी भी तरह की छत पर लगाया जा सकता है. मार्केट में इनके बहुत ऑप्शन है और ज्यादा एक्सेसिबल हैं.
फायदे&amp;nbsp;

सोलर पैनल सालों से यूज हो रहे हैं. इस तरह यह एक प्रूवन टेक्नोलॉजी है और अलग-अलग कीमत पर इसके कई तरह के ऑप्शन अवेलेबल हैं.
सोलर पैनल की एफिशिएंसी ज्यादा होती है. इस कारण घरों से लेकर बिजनेसेस तक की एनर्जी नीड्स के लिए इन्हें यूज किया जा रहा है.
इसे इंस्टॉल करने की लागत कम है और इसमें समय भी कम लगता है.&amp;nbsp;

नुकसान

इन्हें छत के ऊपर लगाना पड़ता है और ये दूर से नजर आते हैं. इससे बिल्डिंग का एस्थेटिक खराब हो सकता है.
सोलर पैनल माउंट करने के लिए स्ट्रक्चर बनानी पड़ती है, जिसके लिए काफी स्पेस चाहिए.
इन्हें समय-समय पर सफाई और मैंटेनेंस की जरूरत पड़ती है.

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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>mAadhaar ऐप होने जा रहा बंद! जानिए नए Aadhaar App पर कैसे करें शिफ्ट, वरना बाद में पड़ेगा पछताना</title>
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        <description><![CDATA[ Aadhaar App: भारत में आधार सेवाओं को संभालने वाली संस्था Unique Identification Authority of India यानी UIDAI ने साफ कर दिया है कि पुराना mAadhaar ऐप जल्द बंद होने वाला है. इसकी जगह अब नया Aadhaar App लाया गया है जिसे पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और आसान बताया जा रहा है. UIDAI ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर जानकारी देते हुए कहा कि नया प्लेटफॉर्म यूजर्स को स्मार्ट, फास्ट और ज्यादा सिक्योर डिजिटल अनुभव देगा. नया ऐप अब Android और iPhone दोनों के लिए उपलब्ध है.
नए Aadhaar App में क्या मिलेगा खास?
नए Aadhaar App में कई ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं जो यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को पहले से बेहतर बनाते हैं. सबसे बड़ा बदलाव QR Code आधारित Aadhaar शेयरिंग फीचर है. इसकी मदद से यूजर बिना पूरा आधार नंबर दिखाए अपनी पहचान वेरिफाई कर सकते हैं.
ऐप में Selective Share नाम का नया विकल्प भी दिया गया है. इसके जरिए यूजर तय कर सकते हैं कि वेरिफिकेशन के दौरान कौन-सी जानकारी शेयर करनी है और कौन-सी छिपानी है. इससे डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों बेहतर होती हैं.
इसके अलावा ऐप ऑफलाइन QR वेरिफिकेशन को भी सपोर्ट करता है. यानी इंटरनेट के बिना भी अधिकृत टर्मिनल पर QR स्कैन करके पहचान सत्यापित की जा सकेगी. UIDAI के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म 13 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है ताकि अलग-अलग राज्यों के लोगों को इस्तेमाल में आसानी हो.
बायोमेट्रिक लॉक से बढ़ेगी सुरक्षा
नए ऐप में बायोमेट्रिक लॉक फीचर भी दिया गया है. यूजर अब सीधे ऐप के जरिए फिंगरप्रिंट, फेस और आइरिस ऑथेंटिकेशन को लॉक कर सकते हैं ताकि किसी तरह के गलत इस्तेमाल से बचा जा सके. जरूरत पड़ने पर यही लॉक बाद में ऐप के माध्यम से हटाया भी जा सकता है.
एक ऐप में जोड़ सकेंगे परिवार के सदस्य
Aadhaar App में फैमिली प्रोफाइल फीचर भी जोड़ा गया है. इसके तहत एक अकाउंट में अधिकतम 5 परिवार के सदस्यों को जोड़ा जा सकता है. इससे एक ही जगह से कई आधार प्रोफाइल मैनेज करना आसान हो जाएगा. हालांकि UIDAI ने चेतावनी दी है कि अगर लिंक मोबाइल नंबर या डिवाइस का एक्सेस खो जाता है तो कुछ समय के लिए आधार सेवाओं तक पहुंच रुक सकती है.
नए Aadhaar App को कैसे करें सेटअप?
सबसे पहले Google Play Store या Apple App Store से नया Aadhaar App डाउनलोड करें. इसके बाद ऐप खोलकर अपनी पसंदीदा भाषा चुनें. अब आधार से लिंक मोबाइल नंबर या किसी दूसरे नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करें. फिर अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें और OTP वेरिफिकेशन पूरा करें. इसके बाद सही रोशनी में फेस ऑथेंटिकेशन करना होगा. आखिर में 6 अंकों का ऐप पासवर्ड बनाकर सेटअप पूरा किया जा सकता है.
पुराने mAadhaar यूजर्स को क्या करना होगा?
UIDAI ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि पुराने mAadhaar ऐप का डेटा अपने-आप नए ऐप में ट्रांसफर होगा या नहीं. ऐसे में संभावना है कि मौजूदा यूजर्स को नए ऐप में प्रोफाइल दोबारा मैन्युअली सेट करनी पड़ सकती है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 16 Pro Vs Galaxy S24 Ultra: 2026 में कौन&amp;सा फ्लैगशिप फोन है आपके लिए बेस्ट? कंपैरिजन से समझें</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/iphone-16-pro-vs-galaxy-s24-ultra-2026-में-कौन-सा-फ्लैगशिप-फोन-है-आपके-लिए-बेस्ट-कंपैरिजन-से-समझें</guid>
        <description><![CDATA[ iPhone 16 Pro Vs Samsung Galaxy S24 Ultra: स्मार्टफोन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और RAM समेत कई कंपोनेंट्स महंगे होते जा रहे हैं. ऐसे में अब लोग हर साल नया फोन खरीदने से पहले कई बार सोच रहे हैं. यही वजह है कि पुराने फ्लैगशिप स्मार्टफोन भी 2026 में काफी आकर्षक विकल्प बन चुके हैं.
ऐसे ही दो प्रीमियम फोन हैं Apple iPhone 16 Pro और Samsung Galaxy S24 Ultra. दोनों डिवाइस एक साल से ज्यादा पुराने होने के बावजूद शानदार कैमरा, दमदार परफॉर्मेंस और प्रीमियम डिजाइन के साथ आज भी टॉप फ्लैगशिप एक्सपीरियंस देते हैं. आइिए जानते हैं कि 2026 में इनमें से कौन-सा फोन खरीदना ज्यादा समझदारी होगी.
डिजाइन और डिस्प्ले
Apple iPhone 16 Pro में 6.3 इंच का LTPO Super Retina XDR OLED डिस्प्ले मिलता है. फोन का डिजाइन कॉम्पैक्ट है जिससे इसे एक हाथ से इस्तेमाल करना काफी आसान लगता है. Apple ने इसमें टाइटेनियम फ्रेम और Ceramic Shield प्रोटेक्शन दिया है. साथ ही इसकी पीक ब्राइटनेस 2000 निट्स तक जाती है.
दूसरी तरफ Samsung Galaxy S24 Ultra बड़े 6.8 इंच Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले के साथ आता है. इसमें QHD+ रेजोल्यूशन, Gorilla Armor प्रोटेक्शन और एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग दी गई है. इसकी पीक ब्राइटनेस 2600 निट्स तक पहुंचती है जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन ज्यादा साफ दिखाई देती है.
अगर आप छोटा और आसानी से पकड़ने वाला फोन चाहते हैं तो iPhone बेहतर लगेगा. लेकिन वीडियो देखने, गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए Samsung का बड़ा डिस्प्ले ज्यादा शानदार अनुभव देता है.
परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर
Apple iPhone 16 Pro में Apple का A18 Pro चिपसेट मिलता है जो iOS 18 पर चलता है और आगे iOS 26.5 तक अपडेट हो सकता है. गेमिंग और रोजमर्रा के इस्तेमाल में इसकी परफॉर्मेंस आज भी बेहद स्मूद मानी जाती है.
वहीं Samsung Galaxy S24 Ultra Qualcomm Snapdragon 8 Gen 3 प्रोसेसर और One UI 8.5 के साथ आता है. Samsung इस फोन के लिए लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट और 7 Android अपडेट्स देने का वादा भी कर चुका है.
कैमरा में कौन आगे?
कैमरा के मामले में दोनों फोन अपनी-अपनी खासियत रखते हैं. Apple iPhone 16 Pro Dolby Vision रिकॉर्डिंग, ProRes वीडियो सपोर्ट और स्पेशल वीडियो कैप्चर जैसे फीचर्स के साथ आता है. खासतौर पर सोशल मीडिया वीडियो और सिनेमैटिक रिकॉर्डिंग में iPhone का आउटपुट काफी प्रोफेशनल और नैचुरल लगता है.
दूसरी ओर Samsung Galaxy S24 Ultra में 200MP का प्राइमरी कैमरा, ड्यूल टेलीफोटो लेंस और शानदार जूम क्षमता मिलती है. दूर की फोटो खींचने और अलग-अलग फोटोग्राफी स्टाइल के लिए Samsung ज्यादा वर्सेटाइल साबित होता है.
बैटरी और कीमत
बैटरी के मामले में Samsung साफ बढ़त बनाता है. Galaxy S24 Ultra में 5000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जबकि iPhone 16 Pro में 3582mAh बैटरी मिलती है.
फिलहाल इनकी कीमतें कुछ इस प्रकार हैं.
Apple iPhone 16 Pro की कीमत लगभग ₹1,03,990 है.
Samsung Galaxy S24 Ultra की कीमत करीब ₹1,19,950 है.
आखिर कौन-सा फोन खरीदना चाहिए?
अगर आप पहले से Apple ecosystem जैसे MacBook या iPad इस्तेमाल करते हैं तो iPhone 16 Pro आज भी 2026 में शानदार विकल्प साबित हो सकता है. इसकी परफॉर्मेंस, कैमरा क्वालिटी और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस काफी भरोसेमंद हैं. लेकिन यदि आप बड़ा डिस्प्ले, लंबी बैटरी लाइफ, S Pen सपोर्ट और ज्यादा एडवांस कैमरा फीचर्स चाहते हैं तो Galaxy S24 Ultra ज्यादा कम्प्लीट फ्लैगशिप पैकेज नजर आता है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>iPhone, Pro, Galaxy, S24, Ultra:, 2026, में, कौन-सा, फ्लैगशिप, फोन, है, आपके, लिए, बेस्ट, कंपैरिजन, से, समझें</media:keywords>
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        <title>सस्ता होने का इंतजार कर रहे हैं आपका ड्रीम Smartphone? शायद अब कभी न मिले वो मौका</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Prices: अगर आप भी हर साल नए Smartphone के लॉन्च के बाद यह सोचकर इंतज़ार करते हैं कि कुछ महीनों बाद सस्ता हो जाएगा तो अब यह रणनीति शायद काम न आए. भारत में Smartphone मार्केट तेजी से बदल रहा है और 2026 में हालात ऐसे बन गए हैं कि कई Phones लॉन्च के महीनों बाद भी महंगे बने हुए हैं. कुछ Models की कीमत तो समय के साथ और बढ़ गई है.
क्यों महंगे होते जा रहे हैं Smartphones?
इसकी सबसे बड़ी वजह AI टेक्नोलॉजी की बढ़ती डिमांड मानी जा रही है जिन Memory Chips और Components का इस्तेमाल Smartphones में होता है, वही अब AI Servers और Data Centres में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. AI कंपनियां इन Chips को भारी मात्रा में खरीद रही हैं जिसके कारण Smartphone कंपनियों के लिए Components काफी महंगे हो गए हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ Memory Components की कीमत कई गुना तक बढ़ चुकी है. इसका सीधा असर Smartphone निर्माण लागत पर पड़ा है और कंपनियों के पास या तो कीमत बढ़ाने या Features कम करने का ही विकल्प बचा है.
अब Phones लॉन्च के बाद जल्दी सस्ते नहीं हो रहे
पहले ऐसा होता था कि ₹30,000 का Phone कुछ महीनों बाद Sale और Offers में ₹24,000-25,000 तक मिल जाता था. लेकिन अब यह ट्रेंड टूटता दिख रहा है. Industry Analysts का कहना है कि Brands अब लंबे समय तक कीमतें ऊंची बनाए रख रहे हैं.
कई Smartphones की कीमतें लॉन्च के बाद घटने की बजाय बढ़ी हैं. खासतौर पर Budget और Mid-range Segment में लगातार Price Hike देखने को मिल रही है. Experts के अनुसार 2026 की शुरुआत से कई Models के दाम 30% से 40% तक बढ़ चुके हैं.
Budget Smartphones में हो रही है कटौती
कीमत कंट्रोल करने के लिए कई कंपनियां अब पुराने Phones को नए नाम से दोबारा लॉन्च कर रही हैं. कुछ Brands कैमरा क्वालिटी, Storage और Features में कटौती भी कर रहे हैं. यहां तक कि कुछ नए Budget Phones में 5G हटाकर फिर से 4G दिया जा रहा है ताकि लागत कम की जा सके. यानी अब कम कीमत में पहले जैसे दमदार Features मिलना मुश्किल होता जा रहा है.
Premium Brands पर कम असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि Premium Smartphone Brands इस संकट से बेहतर तरीके से निपट रहे हैं. उदाहरण के तौर पर Apple और Samsung जैसी कंपनियों के पास लंबे समय के Supply Agreements और मजबूत Financial Backup है. वहीं Budget Segment पर निर्भर Brands जैसे Xiaomi, Realme, OPPO और vivo ज्यादा दबाव में हैं.
क्या अब Smartphone खरीदने के लिए Sale का इंतज़ार बेकार है?
Experts का मानना है कि आने वाले समय में बड़े Discounts कम देखने को मिल सकते हैं. कंपनियां Exchange Offers, Cashback और EMI जैसे विकल्प तो देती रहेंगी लेकिन भारी Price Drop अब पहले जितना आम नहीं रहेगा.
अगर आपको नया Phone सच में चाहिए तो सिर्फ &amp;ldquo;सस्ता होने&amp;rdquo; का इंतज़ार करना नुकसानदायक भी हो सकता है. क्योंकि जिस Phone को आप बाद में खरीदने की सोच रहे हैं वह आने वाले महीनों में और महंगा भी हो सकता है.
बदल रही है Smartphone खरीदने की आदत
भारत में Smartphone Market अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है जहां लोग जरूरत के हिसाब से खरीदारी करने लगे हैं, ना कि सिर्फ Sale और Discounts के भरोसे. बढ़ती AI Demand, Memory Crisis और महंगे Components ने पूरे बाजार की तस्वीर बदल दी है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Google I/O 2026: AI Search से Ask YouTube तक, ये रहीं इवेंट की सबसे बड़ी अनाउंसमेंट</title>
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        <description><![CDATA[ Google I/O 2026 Major Announcement: I/O 2026 के कीनोट में गूगल ने कंप्यूटिंग, एंड्रॉयड, प्रोडक्टिविटी ऐप्स और वीयरेबल डिवाइसेस के फ्यूचर की झलक पेश कर दी है. इस इवेंट का खास फोकस उम्मीद के मुताबिक जेमिनी एआई पर ही रहा. कंपनी ने Gemini 3.5 AI मॉडल्स और अपनी सर्विसेस के लिए नए फीचर्स समेत कई बड़े ऐलान किए हैं. इसके साथ गूगल ने पहले Android XR Audio Glasses को भी रिवील कर दिया है. आइए इस इवेंट की कुछ सबसे बड़ी अनाउंसमेंट के बारे में जानते हैं.
Google I/O 2026 के बड़े ऐलान
Agentic Gemini Era- गूगल सीईओ सुंदर पिचई ने कहा कि गूगल अब एजेंटिक जेमिनी एरा में प्रवेश कर रही है. इसका मतलब है कि अब एआई सिस्टम सिर्फ प्रॉम्प्ट का ही जवाब नहीं देंगे. अलग-अलग ऐप्स और डिवाइसेस में ये खुद से टास्क भी कंप्लीट कर सकेंगे.&amp;nbsp;
Gemini 3.5- गूगल ने इवेंट में अपडेटेड एआई मॉडल भी लॉन्च किए हैं. अब कंपनी की सर्विसेस के लिए Gemini 3.5 Flash डिफॉल्ट मॉडल की तरह काम करेगा और इसका प्रो वर्जन अगले महीने लॉन्च हो रहा है. नए मॉडल फास्ट हैं और एजेंटिक टास्क को बेहतर तरीके से हैंडल कर पाएंगे. साथ ही कंपनी ने जेमिनी ऐप को भी रिडिजाइन किया है.
Gemini Omni- Gemini 3.5 के साथ गूगल जेमिनी ओमनी नाम से नए मॉडल उतारेगी. इसका पहला प्रोडक्ट Omni Flash आज से जेमिनी ऐप, गूगल फ्लो और यूट्यूब शॉर्ट्स के लिए रोल आउट होना शुरू हो गया है. कंपनी का कहना है कि यह किसी भी इनपुट से कोई भी आउटपुट जनरेट कर सकता है. यानी इसे टेक्स्ट, फोटो, वीडियो और ऑडियो के तौर पर कोई भी इनपुट दी ज सकती है.
Gemini Spark- OpenClaw को टक्कर देने के लिए गूगल नया ऑलवेज-ऑन एआई एजेंट Gemini Spark लेकर आई है. यह ईमेल लिखने, स्टडी गाइड बनाने समेत कई काम कर सकेगा. यह गूगल क्लाउड पर रन करेगा और गूगल सर्विसेस के साथ-साथ केन्वा और इंस्टाकार्ट समेत कई थर्ड-पार्टी ऐप्स के साथ इंटीग्रेड हो जाएगा. गूगल इसे लोकल फाइल एक्सेस करने की कैपेबिलिटीज भी देने जा रही है.
सर्च को भी मिला नया एआई रिडिजाइन- गूगल ने बताया कि सर्च में एआई मोड के मंथली एक्टिव यूजर्स एक बिलियन को पार कर गए हैं. अब कंपनी ने सर्च को नए एआई-पावर्ड इंटरफेस के साथ रिडिजाइन किया है. टेक्स्ट के साथ-साथ इसमें फोटो, वीडियो, फाइल्स और ब्राउजर टैब्स को भी इनपुट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसमें इंफोर्मेशन एजेंट भी जोड़े जाएंगे, जो स्पेसिफिक टॉपिक की समरी प्रोवाइड करेंगे.
Android XR Audio Glasses- गूगल ने अपने पहले Android XR Audio Glasses को भी रिवील कर दिया है. जेमिनी पावर्ड इन ग्लासेस में डिस्प्ले नहीं होगा और ये ऑडियो इनपुट के आधार पर काम करेंगे. गूगल ने सैमसंग और क्वालकॉम के साथ मिलकर इस डिवाइस को डेवलप किया है.&amp;nbsp;
पर्सनलाइड समरी के लिए आया Daily Brief- गूगल ने इवेंट में डेली ब्रीफ को भी इंट्रोड्यूस किया है. यह जीमेल, टास्क और कैलेंडर डेटा के आधार पर यूजर के लिए डेली अपडेट ब्रीफ करता है और उसे स्क्रीन पर ही सारी जानकारी दे देता है.
AI Detection Tools होंगे और एक्सेसिबल- एआई से जनरेटेड या एडिटेड इमेज का पता लगाने के लिए गूगल ने अपने एआई डिटेक्शन टूल को एक्सपैंड कर रही है. आज से ये क्रोम और सर्च में अवेलेबल होंगे. इसमें यूजर कोई इमेज अपलोड या सर्च कर उसके बारे में डिटेल जुटा सकता है.&amp;nbsp;
Ask YouTube- गूगल ने कुछ दिन पहले मैप्स के लिए आस्क मैप्स फीचर लॉन्च किया था. अब यह फीचर यूट्यूब के लिए लाया जा रहा है. इससे यूजर यूट्यूब पर नैचुरल लैंग्वेज यानी बातचीत की भाषा में वीडियो सर्च कर पाएंगे. अब उन्हें कीवर्ड-बेस्ड सर्च की जगह कन्वर्सेशनल वॉइस प्रॉम्प्ट से वीडियो सर्च करने का फीचर मिलेगा. शुरुआत में इसे अमेरिका के प्रीमियम यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Google I/O 2026: अब मुंह से बोलते ही मिलेंगे मनचाहे Videos! YouTube में आया नया AI फीचर, जानिए कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube AI Feature: कैलिफोर्निया के शोरलाइन एम्फीथिएटर में आयोजित Google I/O 2026 के दौरान Google ने कई बड़े AI अपडेट पेश किए. इस साल के सबसे बड़े टेक इवेंट में Sundar Pichai ने YouTube के लिए एक नया AI आधारित फीचर Ask YouTube लॉन्च किया जो वीडियो खोजने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है.
अब कीवर्ड नहीं नॉर्मल भाषा में पूछ सकेंगे सवाल
नए Ask YouTube फीचर की मदद से यूजर्स अब YouTube पर सामान्य बातचीत की तरह सवाल पूछकर वीडियो खोज पाएंगे. यानी अब सिर्फ छोटे-छोटे कीवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं होगी. यूजर सीधे अपनी भाषा में पूछ सकेंगे कि उन्हें क्या देखना है और AI उसी हिसाब से जवाब देगा.
उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर पूछे कि &amp;ldquo;2026 में सबसे अच्छे कैमरा फोन कौन से हैं? या घर पर आसान फिटनेस एक्सरसाइज बताओ तो YouTube AI उस सवाल को समझकर संबंधित वीडियो सुझाएगा. इसमें Shorts और लंबे वीडियो दोनों शामिल होंगे.
Google Search के AI Mode जैसा अनुभव
Google का कहना है कि यह फीचर काफी हद तक Google Search के AI Mode जैसा काम करेगा लेकिन पूरा अनुभव वीडियो फॉर्मेट में मिलेगा. AI यूजर्स के सवालों को समझकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट से सबसे उपयुक्त वीडियो चुनकर दिखाएगा.
सिर्फ इतना ही नहीं यूजर्स आगे और सवाल पूछकर अपने रिजल्ट को और बेहतर बना सकेंगे. यानी यह फीचर एक इंटरैक्टिव बातचीत की तरह काम करेगा, जहां AI लगातार यूजर की जरूरत समझता रहेगा.
पुराने सर्च रिजल्ट से अलग होगा अनुभव
कंपनी के मुताबिक, Ask YouTube में रिजल्ट पारंपरिक सर्च लिस्ट की तरह नहीं दिखेंगे. इसके बजाय यूजर्स को AI आधारित इंटरैक्टिव जवाब मिलेंगे जिनमें सीधे उपयोगी वीडियो और संबंधित जानकारी दिखाई जाएगी. इसका मकसद YouTube पर ज्यादा स्मार्ट और संदर्भ आधारित सर्च अनुभव देना है ताकि यूजर कम समय में सही वीडियो तक पहुंच सकें.
फिलहाल सिर्फ Premium यूजर्स के लिए उपलब्ध
अभी यह नया फीचर अमेरिका में 18 साल या उससे अधिक उम्र के YouTube Premium यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है. इसे youtube.com/new के जरिए एक्सेस किया जा सकता है. Google ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जाएगा.
Gemini Omni के साथ YouTube Shorts में AI Remix
Ask YouTube के अलावा Google ने YouTube Shorts Remix और YouTube Create ऐप के लिए Gemini Omni सपोर्ट भी पेश किया है. इस फीचर की मदद से यूजर्स किसी मौजूदा Shorts वीडियो को टेक्स्ट प्रॉम्प्ट या तस्वीरों की सहायता से नया रूप दे सकेंगे.
AI वीडियो के विजुअल, सीन और ऑडियो को समझकर बदलाव करेगा, जिससे एडिटिंग पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगी. Google का कहना है कि इससे मैन्युअल एडिटिंग की जरूरत कम होगी.
AI वीडियो पर होंगे डिजिटल वॉटरमार्क
Google ने साफ किया है कि AI से तैयार किए गए Remix वीडियो में डिजिटल वॉटरमार्क, मेटाडेटा टैग और ओरिजिनल वीडियो का रेफरेंस शामिल रहेगा. इससे यह पहचानना आसान होगा कि कंटेंट AI की मदद से बनाया गया है. इसके साथ ही क्रिएटर्स को यह विकल्प भी मिलेगा कि वे चाहें तो अपनी वीडियो पर Visual Remix फीचर को बंद कर सकते हैं.
Creator सुरक्षा के लिए नया Likeness Detection Tool
कंपनी ने बताया कि उसका Likeness Detection Tool अब 18 साल से अधिक उम्र वाले क्रिएटर्स तक बढ़ाया जा रहा है. यह टूल क्रिएटर्स को यह पता लगाने में मदद करेगा कि उनकी पहचान या चेहरे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया जा रहा है.
Google के अनुसार, Gemini Omni आधारित Remix फीचर आज से ही YouTube Shorts Remix और YouTube Create ऐप में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के रोलआउट किया जा रहा है. आने वाले समय में इसे AI Playground के साथ भी जोड़ा जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>मालवेयर और स्कैम की नहीं रहेगी कोई चिंता, Android 17 में मिलेंगे फुलप्रूफ सिक्योरिटी फीचर्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मालवेयर-और-स्कैम-की-नहीं-रहेगी-कोई-चिंता-android-17-में-मिलेंगे-फुलप्रूफ-सिक्योरिटी-फीचर्स</link>
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        <description><![CDATA[ Android 17 Security Features: गूगल ने कुछ दिन पहले एंड्रॉयड 17 अपडेट के फीचर्स की झलक दिखाई थी. इससे पता चला है कि कंपनी ने सिक्योरिटी और प्राइवेसी अपडेट पर खास ध्यान देने वाली है. फाइनेंशियल फ्रॉड, चोरी और ऐप ट्रैकिंग आदि के खतरों से बचाने के लिए गूगल ने नई अपडेट में कई फीचर्स दिए हैं. इनमें स्पूफिंग रोकने के लिए वेरिफाईड फाइनेंशियल कॉल्स, बायोमेट्रिक-इन्हैंस्ड थेफ्ट प्रोटेक्शन और लोकेशन के लिए नए प्राइवेसी कंट्रोल आदि शामिल है. साथ ही कंपनी ने रियल-टाइम थ्रेट डिटेक्शन को इंटीग्रेट कर अनऑथोराइज्ड एक्सेस को भी मुश्किल बना दिया है. कुल मिलाकर कंपनी ने मालवेयर और स्कैम से सुरक्षा के लिए कई फीचर जोड़े हैं. इनके बावजूद फुल सेफ्टी के लिए यूजर को भी अलर्ट रहना जरूरी है.
स्पूफिंग को रोकेगा यह नया फीचर
स्पूफिंग के मामलो में स्कैमर बैंक अधिकारी आदि बनकर लोगों को चूना लगाते हैं. इस कारण दुनियाभर के यूजर्स को हर साल अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. इसके रोकने के लिए गूगल वेरिफाईड फाइनेंशियल कॉल्स का फीचर लेकर आई है. यह एंड्रॉयड 11 के बाद के वर्जन पर चलने वाले डिवाइसेस के लिए अवेलेबल होगा और बैंकिंग ऐप्स के साथ बैकग्राउंड में काम करेगा. जब भी आपके फोन पर कोई कॉल आएगी, यह सिस्टम बैंक से कंफर्मेंशन मांगेगा. अगर बैंक कॉल को कन्फर्म नहीं करता है तो यह अपने आप कॉल डिस्कनेक्ट कर देगा.&amp;nbsp;
एआई से रहेगी ऐप्स पर नजर&amp;nbsp;एंड्रॉयड 17 एआई की मदद से ऐप्स पर नजर रखेगा. अगर कोई ऐप इंस्टॉल होने के बाद मैसेज फॉरवर्ड या कोई और गड़बड़ करने की कोशिश करेगी तो तो नया लाइव थ्रेट डिटेक्शन ऑन-डिवाइस एआई की मदद से यह पैटर्न देखकर यूजर को अलर्ट कर देगा. साथ ही यह सिस्टम ऐप को डाउनलोड करते समय ही मालवेयर की पड़ताल कर लेगा, जिससे यूजर को ऐप इंस्टॉल करने से पहले ही इसकी जानकारी मिल जाएगी.
फोन चुराना होगा और मुश्किल&amp;nbsp;
नई अपडेट चोरी होने के बाद फोन को किसी काम का नहीं छोड़ेगी. इसमें &#039;मार्क एज लॉस्ट&#039; फीचर के लिए नया बायोमेट्रिक लॉक आ रहा है. यानी अगर फोन चोरी के बाद चोर को आपके पासकोड भी पता चल जाते हैं तो भी वह ट्रैकिंग को बंद नहीं कर पाएगा. साथ ही उसे फोन को एक्सेस करने के लिए यूजर के फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन की जरूरत पड़ेगी. अगर कोई आपसे फोन छीनकर भागता है तो नई अपडेट उसी समय फोन के रिमोट लॉक और थेफ्ट डिटेक्शन लॉक को इनेबल कर देगी.
लोकेशन शेयरिंग के लिए वन टाइम परमिशन
एंड्रॉयड 17 अपडेट में एक टेंपरेरी लोकेशन बटन मिलेगा. यह किसी ऐप को GPS की परमानेंट एक्सेस देने की बजाय किसी एक समय के लिए लोकेशन एक्सेस करने देगा. इससे काम पूरा होने के बाद वह ऐप लगातार आपकी लोकेशन को एक्सेस नहीं कर पाएगी.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Google का बड़ा कदम! अब AI से बनी फर्जी फोटो&amp;वीडियो पकड़ना होगा आसान, आ गया नया फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ Google SynthID: दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे AI कंटेंट के बीच अब Google ने अपनी खास तकनीक SynthID को और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया है. इस टूल की मदद से यूजर्स आसानी से पहचान सकेंगे कि कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो असली है या फिर उसे AI की मदद से बनाया या एडिट किया गया है.
Search और Chrome में भी मिलेगा SynthID सपोर्ट
Alphabet के स्वामित्व वाली Google ने बताया कि SynthID फीचर अब केवल Gemini AI ऐप तक सीमित नहीं रहेगा. कंपनी इसे जल्द ही अपने Search प्लेटफॉर्म और Chrome ब्राउज़र में भी जोड़ने जा रही है. Google के CEO Sundar Pichai ने कैलिफोर्निया में आयोजित कंपनी के सालाना I/O इवेंट के दौरान इस बड़े अपडेट की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर तेजी से बढ़ रहे AI कंटेंट के दौर में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है.
क्या है SynthID और कैसे करता है काम?
Google ने SynthID को पहली बार साल 2023 में पेश किया था. यह एक तरह का इनविज़िबल वॉटरमार्क है जो AI द्वारा बनाए गए या AI टूल्स से एडिट किए गए कंटेंट में छिपा होता है. यह वॉटरमार्क सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन इसकी मदद से सिस्टम यह पहचान सकता है कि कोई इमेज, वीडियो या ऑडियो AI से तैयार किया गया है या नहीं. Google का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य जनरेटिव AI के दौर में भरोसा और पारदर्शिता बनाए रखना है.
AI फोटो दिखाकर समझाया खतरा
इवेंट के दौरान सुंदर पिचाई ने एक वायरल AI-जनरेटेड तस्वीर दिखाई जिसमें वह खुद, Elon Musk, Jensen Huang और Sam Altman मैकडॉनल्ड्स खाते हुए नजर आ रहे थे. पिचाई ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह तस्वीर पूरी तरह नकली है क्योंकि वह हैमबर्गर नहीं खाते. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हर व्यक्ति के लिए AI और असली तस्वीर में फर्क समझ पाना आसान नहीं होता. ऐसे में SynthID जैसे टूल काफी मददगार साबित हो सकते हैं.
दूसरे AI प्लेटफॉर्म भी अपनाएंगे तकनीक
Google ने यह भी साफ किया कि केवल एक कंपनी के स्तर पर इस तकनीक का इस्तेमाल काफी नहीं होगा. इसे असरदार बनाने के लिए दूसरी AI कंपनियों का साथ आना भी जरूरी है. पिचाई के मुताबिक OpenAI, Kakao और ElevenLabs जैसी कंपनियां भी अब SynthID स्टैंडर्ड को अपनाने के लिए तैयार हो गई हैं. वहीं Nvidia पहले ही इस पहल से जुड़ चुकी है.
100 अरब से ज्यादा फाइलों पर लग चुका है वॉटरमार्क
Google के अनुसार अब तक करीब 100 अरब से ज्यादा फोटो, वीडियो और ऑडियो फाइलों पर SynthID वॉटरमार्क लगाया जा चुका है. कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में AI कंटेंट की पहचान के लिए यह तकनीक इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन सकती है.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Gmail में आए बग ने खड़ी कर दी मुसीबत, ईमेल नहीं पढ़ पा रहे हैं लोग</title>
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        <description><![CDATA[ Gmail Bug: अगर जीमेल ओपन करने के बाद आपके डिवाइस की स्क्रीन फ्लिकर करने लगती है या स्क्रीन ब्लैंक हो जाती है तो आप इस दिक्कत को फेस करने वाले अकेले नहीं है. इन दिनों जीमेल में आए बग के कारण ईमेल पढ़ना मुश्किल हो गया है. एंड्रॉयड डिवाइसेस पर यह दिक्कत ज्यादा परेशान कर रही है. यूजर्स का कहना है कि बग के कारण स्क्रीन फ्लिकरिंग, टेक्स्ट गायब होने या पूरी स्क्रीन ही ब्लैंक होने जाने जैसे इश्यू आ रहे हैं. पिछले 4-5 दिन से बग के चलते जीमेल यूजर को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
यूजर कर रहे हैं ये शिकायतें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जीमेल के इस बग के आगे कोई भी तरीका काम नहीं कर रहा है. एक यूजर ने गूगल सपोर्ट फोरम पर लिखा कि जब मैं ईमेल ओपन करने की कोशिश कर रहा हूं तो स्क्रीन फ्लिकर होने लगती है और ईमेल नहीं पढ़ा जा रहा. मैंने फोर्स स्टॉप, कैश क्लियर और टैबलेट को रिस्टार्ट करके भी देख लिया. यहां तक कि अपडेट करने के बाद भी यह इश्यू ठीक नहीं हो रहा है. एक दूसरे यूजर ने लिखा कि जब मैं टैबलेट पर ईमेल ओपन कर रहा हूं तो स्क्रीन ब्लैंक हो रही है. फोन पर ऐसी दिक्कत नहीं आ रही.
सैमसंग के डिवाइसेस ज्यादा प्रभावित
जीमेल में आए बग के कारण सैमसंग के डिवाइसेस ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैमसंग टैबलेट और Galaxy Z Fold 3 समेत कुछ फोल्डेबल फोन यूज करने वाले यूजर्स को ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि एंड्रॉयड सिस्टम वेबव्यू के कारण यह परेशानी आ रही है. गूगल को इसकी जानकारी दे दी गई है, लेकिन अभी तक कंपनी की तरफ से इसे लेकर कोई स्टेटमेंट और इश्यू का फिक्स नहीं आया है.
अफेक्टेड यूजर्स आजमा सकते हैं ये तरीके
अभी तक गूगल की तरफ से इस इश्यू को ठीक नहीं किया गया है. लेकिन अगर आप ईमेल पढ़ना चाहते हैं तो कुछ तरीके आपके काम आ सकते हैं. पहला तरीका अपने डिवाइस को पोर्ट्रेट मोड से लैंडस्कैप में स्विच करें और फिर से पोर्ट्रेट मोड में चले जाएं. ऐसा ऑटो-रोटेट फीचर इनेबल कर भी किया जा सकता है. इस फीचर को इनेबल करने के बाद अपने डिवाइस को दोनों मोड में करके देखें. इसके अलावा आप एंड्रॉयड सिस्टम वेबव्यू के cache क्लियर करें और इसे अपडेट कर लें. बताया जा रहा है कि इसी कारण यह बग प्रॉब्लम क्रिएट कर रहा है.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिना Blue Tick वालों के लिए बुरी खबर! X पर दिन भर में कर सकेंगे बस इतने पोस्ट, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ X Blue Tick: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अब बिना वेरिफिकेशन वाले यूज़र्स के लिए बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. अब तक इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी पहचान यही थी कि लोग बिना किसी खास रोक-टोक के लगातार पोस्ट करते रहते थे. चाहे लाइव मैच पर रिएक्शन देना हो देर रात मीम्स शेयर करना हो या किसी ट्रेंडिंग मुद्दे पर बहस, यूजर्स खुलकर अपनी बात रखते थे. लेकिन अब यह आज़ादी सीमित होती दिखाई दे रही है.
बिना वेरिफिकेशन वाले अकाउंट्स पर नई लिमिट
हाल ही में कई यूजर्स ने नोटिस किया कि प्लेटफॉर्म ने चुपचाप पोस्टिंग लिमिट्स में बदलाव कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन अकाउंट्स पर ब्लू टिक नहीं है वे अब एक दिन में सिर्फ 50 ओरिजिनल पोस्ट और 200 रिप्लाई ही कर पाएंगे. जो लोग दिनभर लगातार एक्टिव रहते हैं या किसी इवेंट के दौरान लाइव पोस्टिंग करते हैं उनके लिए यह सीमा बहुत जल्दी पूरी हो सकती है.
दिलचस्प बात यह है कि प्लेटफॉर्म के हेल्प सेंटर के कुछ हिस्सों में अभी भी पुरानी लिमिट दिखाई दे रही है जहां यूज़र्स को रोज़ाना 2,400 पोस्ट तक की अनुमति बताई गई है. इससे साफ संकेत मिलता है कि यह बदलाव बिना किसी बड़े ऐलान के धीरे-धीरे लागू किया गया है.
लिमिट पूरी होते ही दिखेगा एरर
बताया जा रहा है कि जैसे ही कोई यूज़र तय सीमा तक पहुंच जाएगा स्क्रीन पर एक एरर मैसेज दिखाई देगा जिसमें बताया जाएगा कि पोस्टिंग लिमिट पूरी हो चुकी है. यानी अब लगातार ट्वीट या रिप्लाई करने वालों को सावधान रहना पड़ेगा.
क्या ब्लू टिक खरीदने के लिए बनाया जा रहा दबाव?
यह बदलाव Elon Musk की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वेरिफिकेशन को स्टेटस सिंबल के बजाय पेड फीचर बनाया जा रहा है. ज्यादा पोस्टिंग की सुविधा पाने के लिए यूज़र्स को X Premium सब्सक्रिप्शन लेना पड़ सकता है.
प्लेटफॉर्म का सबसे सस्ता Basic प्लान करीब 3 डॉलर प्रति महीना यानी लगभग 250 रुपये में आता है जबकि सालाना प्लान की कीमत लगभग 2,700 रुपये बताई जा रही है.
स्पैम रोकने का दावा लेकिन यूजर्स को शक
आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि नए नियमों का मकसद स्पैम अकाउंट्स और बॉट्स पर रोक लगाना है. कंपनी पहले भी ऐसे कई फीचर्स ला चुकी है जिनसे अकाउंट की जानकारी और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके.
हालांकि इंटरनेट पर कई लोग इस दलील से सहमत नहीं हैं. आलोचकों का मानना है कि यह कदम सुरक्षा से ज्यादा लोगों को सब्सक्रिप्शन लेने के लिए मजबूर करने जैसा लग रहा है. कुछ यूज़र्स को डर है कि इससे प्लेटफॉर्म की वही तेज़ और अनफिल्टर्ड बातचीत वाली पहचान कमजोर पड़ सकती है जिसने X को बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से अलग बनाया था.
अब ब्लू टिक सिर्फ स्टेटस नहीं जरूरत बन सकता है
पहले ब्लू टिक को सिर्फ पहचान और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता था लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं. लगातार पोस्ट करने वाले यूजर्स के लिए वेरिफिकेशन लेना शायद मजबूरी बन जाए ताकि वे नई पोस्टिंग लिमिट की दीवार से बच सकें.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Airplane Mode Vs Do Not Disturb: फोन की बैटरी के लिए कौन&amp;सा ज्यादा फायदेमंद है? जान लें जरूरी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Airplane Mode Vs Do Not Disturb: ज्यादातर नए फोन में एयरप्लेन मोड और डू-नॉट-डिस्टर्ब मोड आते हैं और इनका यूज भी खूब होता है. एयरप्लेन मोड को मोस्टली हवाई सफर के साथ जोड़ा जाता है. यह फोन की वायरलेस कैपेबिलिटी को बंद कर देता है. दूसरी तरफ डू-नॉट-डिस्टर्ब लोकेशन स्पेसिफिक नहीं है. इसे एक्टिवेट करने के बाद फोन की नोटिफिकेशन साइलेंट हो जाती है. इसे आमतौर पर लोग मीटिंग या सोने के समय यूज करते हैं, जब उन्हें कोई डिस्टर्बेंस नहीं चाहिए. आप जरूरत के हिसाब से इन दोनों ही मोड को यूज कर सकते हैं, लेकिन ये दोनों मोड फोन की बैटरी बचाने के भी काम आ सकते हैं. आइए जानते हैं कि ये बैटरी सेव करने में कैसे मदद करते हैं और इस मामले में कौन-सा ज्यादा फायदेमंद है.
Airplane Mode से कैसे बचेगी बैटरी?
जब आप फोन में Airplane Mode ऑन कर लेते हैं तो इसका सेलुलर मॉडम, वाईफाई और ब्लूटूथ समेत सारे कनेक्टिविटी रेडियो बंद हो जाते हैं. यानी ये कंपोनेंट बैटरी की खपत करना बंद कर देते हैं. इस मोड को एक्टिवेट करने के बाद आप ब्लूटूथ और वाईफाई को टर्न ऑन कर सकते हैं, लेकिन सेलुलर मॉडम फिर भी बंद रहता है. इससे बैटरी खपत कम होती है. दरअसल, जब आपका फोन लगातार सिग्नल सर्च करता है तो इसे ज्यादा पावर की जरूरत पड़ती है. वहीं अगर यह मोबाइल नेटवर्क से कनेक्टेड है, तब भी यह पावर कंज्यूम करता रहता है. इसे बंद कर बैटरी की बचत की जा सकती है.
Do Not Disturb से कैसे होगा फायदा?
Airplane mode की तरह यह कनेक्टिविटी बंद नहीं करता, लेकिन नोटिफिकेशन आने पर फोन में होने वाली हलचल पर लगाम लगा देता है. यानी अगर कोई नोटिफिकेशन आती है तो फोन की स्क्रीन को हर बार ऑन नहीं होना पड़ेगा. इसी तरह वाइब्रेशन मोटर को भी काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और स्पीकर को साउंड नहीं बजानी पड़ेगी. इससे कम पावर कंज्यूम होती है और बैटरी लाइफ में मामूली इजाफा होता है.
दोनों में ज्यादा फायदेमंद कौन-सा?
एयरप्लेन मोड इस मामले में आपके ज्यादा काम आएगा. कनेक्टिविटी बंद होने से बैटरी लाइफ बढ़ती है. डू-नॉट-डिस्टर्ब वाले सारे फीचर्स भी आपको इस मोड में मिल जाएंगे. कनेक्टिविटी बंद होने के कारण फोन पर कोई नोटिफिकेशन नहीं आएगी. इसलिए स्क्रीन, वाइब्रेशन मोटर और स्पीकर आदि को काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके अलावा कनेक्टिविटी बंद होने के कारण भी अतिरिक्त पावर सेविंग होती है.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>Earbuds का एक साइड नहीं कर रहा काम? जानिए क्यों हमेशा एक साइड पहले हो जाती है डिस्चार्ज और घर बैठे ऐसे करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आजकल वायरलेस ईयरबड्स लगभग हर किसी की जरूरत बन चुके हैं. म्यूजिक सुनना हो, कॉल पर बात करनी हो या वीडियो देखना हो लोग घंटों तक इन्हें इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कई यूजर्स एक आम परेशानी से परेशान रहते हैं दोनों में से एक ईयरबड दूसरे से पहले डिस्चार्ज हो जाता है या अचानक काम करना बंद कर देता है. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है. कई बार यह समस्या छोटी वजहों से होती है और घर पर ही ठीक की जा सकती है.
क्यों हमेशा एक ही ईयरबड पहले डिस्चार्ज होता है?
अक्सर लोगों को लगता है कि उनका ईयरबड खराब हो गया है लेकिन इसकी वजह काफी सामान्य हो सकती है. कई वायरलेस ईयरबड्स में एक साइड मेन ईयरबड की तरह काम करता है. यही ईयरबड फोन से कनेक्शन बनाए रखता है, कॉल कंट्रोल संभालता है और कई बार माइक्रोफोन का ज्यादा इस्तेमाल भी इसी साइड में होता है. इसी कारण उस पर ज्यादा लोड पड़ता है और उसकी बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है.
अगर आप अक्सर सिर्फ एक ही ईयरबड लगाकर कॉल करते हैं तो उसकी बैटरी समय के साथ जल्दी कमजोर हो सकती है. इसके अलावा टच कंट्रोल, वॉइस असिस्टेंट और लगातार माइक्रोफोन इस्तेमाल करने से भी एक साइड ज्यादा बैटरी खर्च करता है.
बैटरी की उम्र भी यहां बड़ा कारण बनती है. जैसे स्मार्टफोन की बैटरी समय के साथ कमजोर होती जाती है, वैसे ही ईयरबड्स की छोटी बैटरियां भी लगातार चार्जिंग के बाद अपनी क्षमता खोने लगती हैं.
एक ईयरबड काम नहीं कर रहा? पहले ये आसान उपाय करें
नया ईयरबड खरीदने से पहले कुछ आसान चीजें जरूर ट्राई करनी चाहिए. कई बार समस्या सिर्फ चार्जिंग कॉन्टैक्ट में गंदगी जमा होने से होती है. ईयरवैक्स या धूल चार्जिंग पिन को ब्लॉक कर देती है जिससे एक ईयरबड चार्ज नहीं हो पाता और वह डेड दिखाई देता है. इसके लिए मुलायम कपड़े या कॉटन स्वैब से ईयरबड और चार्जिंग केस को धीरे-धीरे साफ करें. ध्यान रखें कि सफाई के दौरान पानी का इस्तेमाल न करें.
इसके बाद दोनों ईयरबड्स को केस में वापस रखें और उन्हें रीस्टार्ट करें. ज्यादातर कंपनियां अपने ऐप या बटन कंट्रोल के जरिए रीसेट ऑप्शन देती हैं. रीसेट करने से सिंकिंग और कनेक्शन से जुड़ी कई दिक्कतें खत्म हो जाती हैं.
Bluetooth सेटिंग्स भी हो सकती हैं जिम्मेदार
कई बार समस्या ईयरबड में नहीं बल्कि फोन की ब्लूटूथ सेटिंग्स में होती है. ऐसे में अपने फोन से ईयरबड डिवाइस को Forget करें और दोबारा पेयर करें. इससे ऑडियो बैलेंस और बैटरी से जुड़ी परेशानियां ठीक हो सकती हैं. अगर एक साइड बार-बार डिस्कनेक्ट हो रही है तो फोन और ईयरबड दोनों का सॉफ्टवेयर अपडेट भी चेक करना चाहिए.
आपकी छोटी आदतें भी घटा सकती हैं बैटरी लाइफ
कई यूजर्स अनजाने में ऐसी गलतियां करते हैं जो ईयरबड्स की बैटरी को जल्दी खराब कर देती हैं. उदाहरण के लिए पूरी रात चार्जिंग पर छोड़ देना, ज्यादा गर्म जगह पर इस्तेमाल करना या हमेशा सिर्फ एक ही ईयरबड का इस्तेमाल करना बैटरी हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है.
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दोनों ईयरबड्स को बराबर इस्तेमाल करें और समय-समय पर उनका फर्मवेयर अपडेट करते रहें. इससे परफॉर्मेंस बेहतर रहती है और बैटरी बैलेंस भी बना रहता है.
कब समझें कि बैटरी बदलने का समय आ गया है?
अगर सफाई, रीसेट और दोबारा पेयरिंग के बाद भी एक ईयरबड बहुत तेजी से डिस्चार्ज हो रहा है तो संभव है कि उसकी बैटरी कमजोर हो चुकी हो. अच्छी बात यह है कि कई कंपनियां सिंगल ईयरबड रिप्लेसमेंट की सुविधा देती हैं जो नया सेट खरीदने से काफी सस्ता पड़ सकता है.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Earbuds, का, एक, साइड, नहीं, कर, रहा, काम, जानिए, क्यों, हमेशा, एक, साइड, पहले, हो, जाती, है, डिस्चार्ज, और, घर, बैठे, ऐसे, करें, ठीक</media:keywords>
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        <title>Apple ने आखिर क्यों बंद किए iPhone Box में आने वाले Free Stickers? सामने आई असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Sticker In iPhone Box: ऐप्पल की पैकिंग स्ट्रैटजी&amp;nbsp;का हर कोई मुरीद है. ऐप्पल ने जानबूझकर अपने आईफोन के लिए ऐसे बॉक्स बनाए हैं, जो थोड़ा मुश्किल से खुले और खुलने में थोड़ा टाइम ले. ऐप्पल का कहना है कि यह डिजाइन के साथ-साथ फीलिंग का भी मामला है. अब अगर कुछ साल पहले की बात करें तो ऐप्पल हर आईफोन बॉक्स में फ्री स्टिकर देती थी. ऐप्पल के लोगो वाले ये स्टिकर हर आईफोन के अलावा ऐप्पल के दूसरे प्रोडक्ट्स के साथ भी मिलते थे. आइए जानते हैं कि ऐप्पल ने फ्री स्टिकर देने की शुरुआत क्यों की थी और क्यों अब कंपनी ने इसे बंद कर दिया है.&amp;nbsp;
कब हुई थी फ्री स्टिकर देने की शुरुआत?
ऐप्पल ने फ्री स्टिकर देने की शुरुआत आईफोन से नहीं की थी. असल में आईफोन की शुरुआत से भी पहले से कंपनी नए प्रोडक्ट्स के साथ ये स्टिकर्स बांट रही है. इसकी शुरुआत 1970 के दशक में Apple II के बॉक्सेस के साथ हुई थी. शुरुआत में रेनबो कलर वाले ऐप्पल लोगो के स्टिकर्स बॉक्स के साथ दिए जाते थे. 1988 में कंपनी ने रेनबो कलर की जगह सॉलिड कलर लोगो देने शुरू कर दिए. कंपनी का यह सिलसिला कई सालों तक जारी रहा. मैकबुक, आईपॉड, आईफोन और आईपैड सबके साथ कंपनी फ्री स्टिकर दे रही थी. ऐप्पल के यूजर्स को भी ये खूब पसंद आये और हर तरह के सरफेस पर ये लोगो दिखने लगे. यही कंपनी की रणनीति थी.&amp;nbsp;
फ्री में स्टिकर क्यों देती थी ऐप्पल?
नए प्रोडक्ट के साथ लोगो वाले स्टिकर देना ऐप्पल का एक सफल एडवरटाइजिंग कैंपेन रहा. इससे यूजर्स को ब्रांड लॉयल्टी दिखाने का एक मौका मिला और दूसरी तरफ ऐप्पल का लोगो हर जगह पहुंचना शुरू हो गया. इस तरह ऐप्पल कम लागत में अपना ब्रांड दुनिया तक पहुंचा रही थी. कंपनी ने अपने ग्राहकों फ्री स्टिकर देकर उन्हें एक तरह से ब्रांड एंबेसडर बना दिया था. साथ ही प्रोडक्ट के बॉक्स में फ्री स्टिकर मिलने से ग्राहकों को गिफ्ट जैसा महसूस होता था. इससे ब्रांड के साथ लगाव और गहरा हुआ.
अब कंपनी ने फ्री स्टिकर देने बंद क्यों कर दिए?
ऐप्पल ने लगभग पांच दशक बाद 2024 से अपने प्रोडक्ट्स के साथ फ्री स्टिकर देने बंद कर दिए हैं. कार्बन न्यूट्रल होने और पैकेजिंग से प्लास्टिक हटाने के लिए कंपनी ने यह फैसला लिया है. अब कंपनी अपने प्रोडक्ट के लिए पूरी तरह फाइबर-बेस्ड पैकेजिंग यूज करने लगी है. ये स्टिकर प्लास्टिक के बने होते थे. इसलिए कंपनी ने इन्हें अलविदा कह दिया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Apple, ने, आखिर, क्यों, बंद, किए, iPhone, Box, में, आने, वाले, Free, Stickers, सामने, आई, असली, वजह</media:keywords>
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        <title>Google I/O 2026: Android 17 से Gemini AI तक, आज हो सकते हैं कई बड़े ऐलान, जानिए कहां देखें इवेंट का लाइवस्ट्रीम</title>
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        <description><![CDATA[ Google I/O 2026: दुनिया की सबसे बड़ी टेक इवेंट्स में शामिल Google का सालाना डेवलपर सम्मेलन Google I/O 2026 आज रात 10:30 बजे (IST) शुरू होने जा रहा है. यह इवेंट अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित Shoreline Amphitheatre से लाइव प्रसारित होगा. इस दौरान कंपनी के CEO Sundar Pichai के साथ DeepMind प्रमुख Demis Hassabis भी मंच पर दिखाई दे सकते हैं. माना जा रहा है कि इस बार कंपनी AI, Android और XR टेक्नोलॉजी से जुड़े कई बड़े खुलासे करेगी.
Android 17 में मिल सकते हैं कई AI फीचर्स
कुछ दिन पहले आयोजित Android Show में कंपनी ने Android 17 से जुड़े कई नए फीचर्स की झलक दिखाई थी. अब उम्मीद की जा रही है कि Google I/O में इन्हें विस्तार से पेश किया जाएगा. नई अपडेट के तहत प्रीमियम Android स्मार्टफोन्स, खासकर Samsung Galaxy और Google Pixel डिवाइसेज में Gemini Intelligence नाम का नया ऑन-डिवाइस AI सिस्टम देखने को मिल सकता है. यह सिस्टम यूजर्स के लिए मल्टी-स्टेप ऐप ऑटोमेशन, AI विजेट्स तैयार करने और स्मार्ट तरीके से टास्क हैंडल करने में मदद करेगा.
इसके अलावा Material 3 डिजाइन को भी नया लुक दिया जा सकता है. टेक्स्ट प्रेडिक्शन, स्मार्ट ऑटोफिल और फॉर्म भरने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान और सटीक बनाने पर भी कंपनी फोकस कर रही है.
Hinglish समझने वाला नया AI टूल
Google ने Rambler नाम के एक खास मल्टीलिंगुअल डिक्टेशन टूल की भी झलक दिखाई है. यह फीचर आवाज को टेक्स्ट में बदलते समय भाषा की गलतियों को सुधार सकेगा. खास बात यह है कि यह हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रण यानी हिंग्लिश को भी बेहतर तरीके से समझने में सक्षम होगा.
वहीं Quick Share फीचर को भी अपग्रेड किया जा रहा है. अब सपोर्टेड Android डिवाइसेज में AirDrop जैसी फाइल शेयरिंग सुविधा मिलने की उम्मीद है.
Gemini के नए मॉडल पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर
इवेंट का सबसे बड़ा आकर्षण अगली पीढ़ी का Gemini AI मॉडल हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी Gemini 3 का नया वर्जन या उससे भी ज्यादा एडवांस मॉडल पेश कर सकती है.
नई AI टेक्नोलॉजी में डीप रीजनिंग, टेक्स्ट-ऑडियो-वीडियो को एक साथ समझने की क्षमता और बड़ा कॉन्टेक्स्ट विंडो देखने को मिल सकता है. आसान शब्दों में कहें तो AI पहले से ज्यादा स्मार्ट और इंसानों जैसी समझ वाला बन सकता है.
Veo, Lyria और Beam पर भी हो सकते हैं बड़े ऐलान
Google अपनी AI क्रिएटिव सर्विसेज को भी अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है. कंपनी Veo AI वीडियो जनरेटर और Lyria म्यूजिक टूल में नए फीचर्स जोड़ सकती है. इसके अलावा Beam नाम की एक खास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग टेक्नोलॉजी भी चर्चा में है. यह सिस्टम स्पेशल कैमरों की मदद से यूजर का रियल-टाइम 3D मॉडल तैयार कर सकता है जिससे वीडियो कॉल पहले से ज्यादा वास्तविक लग सकती है.
Android XR और स्मार्ट ग्लासेस की एंट्री संभव
AR और XR टेक्नोलॉजी पर भी इस बार कंपनी का बड़ा फोकस रहने वाला है. लंबे समय से Google अपने स्मार्ट ग्लासेस के प्रोटोटाइप दिखा रही है लेकिन माना जा रहा है कि इस बार कंपनी लगभग तैयार प्रोडक्ट पेश कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार Gemini AI से लैस स्मार्ट ग्लासेस को Warby Parker, Samsung और Gentle Monster जैसे ब्रांड्स के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है.
Google I/O 2026 लाइव कैसे देखें?
Google का सालाना डेवलपर इवेंट Google I/O 2026 आज भारतीय समयानुसार रात 10:30 बजे शुरू होगा. इवेंट का मुख्य संबोधन कंपनी के CEO Sundar Pichai द्वारा अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित Shoreline Amphitheatre से दिया जाएगा. इस बड़े टेक इवेंट को दुनियाभर के यूजर्स लाइव देख सकेंगे. Google इसकी लाइव स्ट्रीमिंग अपने आधिकारिक Google for Developers YouTube चैनल पर करेगा. यूजर्स चाहें तो अपने लैपटॉप या कंप्यूटर के ब्राउजर के जरिए इसे देख सकते हैं, वहीं मोबाइल यूजर्स YouTube ऐप पर भी आसानी से लाइव स्ट्रीम का आनंद ले सकेंगे.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>किस कंपनी के यूजर्स सबसे ज्यादा खर्च करते हैं डेटा, इस लिस्ट में Jio&amp;Vi आगे हैं या Airtel?</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Data Users: देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों Bharti Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि किस कंपनी के ग्राहक सबसे ज्यादा मोबाइल डेटा खर्च कर रहे हैं और किस कंपनी की कमाई प्रति यूजर सबसे मजबूत बनी हुई है.
Vi ने सबसे आखिर में अपने नतीजे जारी करते हुए बताया कि कंपनी का ग्राहक आधार 192.8 मिलियन पर स्थिर बना हुआ है. साथ ही फरवरी 2026 से कंपनी के नए ग्राहकों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. अब तीनों कंपनियों के डेटा यूसेज और ARPU के आंकड़ों ने टेलीकॉम बाजार की असली तस्वीर सामने रख दी है.
Airtel यूजर्स का कितना डेटा इस्तेमाल?
रिपोर्ट के मुताबिक एयरटेल के ग्राहकों ने इस तिमाही में औसतन हर महीने 31.4GB मोबाइल डेटा इस्तेमाल किया. यानी एक ग्राहक रोजाना करीब 1.05GB डेटा खर्च कर रहा है. कंपनी का कुल नेटवर्क डेटा ट्रैफिक 27,985 मिलियन GB तक पहुंच गया.
एयरटेल का ARPU यानी प्रति ग्राहक औसत कमाई 257 रुपए रही जो इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा मानी जा रही है. हालांकि पिछले क्वार्टर के मुकाबले इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है. इससे पहले यह आंकड़ा 259 रुपए था.
कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन Gopal Vittal ने कहा कि FY26 कंपनी के लिए काफी मजबूत साल रहा. इस दौरान एयरटेल ने 650 मिलियन ग्राहकों का आंकड़ा पार किया और लाखों नए स्मार्टफोन व पोस्टपेड ग्राहक भी जोड़े.
डेटा खर्च करने में सबसे आगे निकले Jio यूजर्स
अगर सबसे ज्यादा डेटा इस्तेमाल की बात करें तो जियो ने बाकी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है. कंपनी के अनुसार हर ग्राहक औसतन 42.3GB डेटा हर महीने इस्तेमाल कर रहा है यानी रोजाना करीब 1.41GB डेटा खर्च हो रहा है.
Jio का कुल नेटवर्क डेटा वॉल्यूम 66 बिलियन GB तक पहुंच गया जो बाकी कंपनियों की तुलना में काफी ज्यादा है. कंपनी का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह 5G सेवाओं का तेजी से बढ़ना है. मार्च 2026 तक जियो के 5G ग्राहकों की संख्या 268 मिलियन तक पहुंच चुकी है और अब कंपनी के कुल वायरलेस ट्रैफिक में लगभग 55 फीसदी हिस्सा 5G का हो गया है. इसके अलावा कंपनी का ARPU बढ़कर 214 रुपए तक पहुंच गया है.
Vi के ग्राहक सबसे कम डेटा खर्च कर रहे
वीआई के आंकड़ों पर नजर डालें तो कंपनी के 4G और 5G ग्राहक हर महीने औसतन 20.2GB डेटा इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी रोजाना लगभग 673MB डेटा खर्च हो रहा है जो जियो और एयरटेल दोनों से काफी कम है.
कंपनी का कुल नेटवर्क डेटा वॉल्यूम 7.8 बिलियन GB दर्ज किया गया जिसमें 2G, 3G, 4G और 5G सभी नेटवर्क शामिल हैं. हालांकि कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि उसका ARPU बढ़कर 190 रुपए तक पहुंच गया जो सालाना आधार पर 8.3 फीसदी की बढ़ोतरी मानी जा रही है.
Vi के मुताबिक इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह ग्राहकों का तेजी से 4G और 5G नेटवर्क की ओर अपग्रेड होना है. कंपनी के 4G/5G ग्राहकों की संख्या भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है.
आखिर कौन है असली डेटा किंग?
सामने आए आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा इंटरनेट डेटा खर्च करने वाले यूजर्स Reliance Jio के हैं. वहीं सबसे ज्यादा ARPU के मामले में Bharti Airtel अभी भी नंबर-1 बनी हुई है. दूसरी तरफ Vodafone Idea अपने नेटवर्क और ग्राहक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है.
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 08:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Cooling हो रही गायब! फ्रिज इस्तेमाल करते वक्त भूलकर भी न करें ये गलतियां</title>
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        <description><![CDATA[ Refrigerator Tips: गर्मी के मौसम में फ्रिज घर का सबसे जरूरी डिवाइस बन जाता है. लेकिन कई बार लोग शिकायत करते हैं कि फ्रिज पहले जैसी कूलिंग नहीं कर रहा, सामान जल्दी खराब होने लगा है या बिजली का बिल अचानक बढ़ गया है. अक्सर इसके पीछे कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें जिम्मेदार होती हैं. अगर समय रहते इन गलतियों को नहीं सुधारा गया तो फ्रिज की लाइफ भी कम हो सकती है.
बार-बार फ्रिज खोलना पड़ सकता है भारी
कई लोग बिना जरूरत बार-बार फ्रिज खोलते रहते हैं. ऐसा करने से बाहर की गर्म हवा अंदर चली जाती है और फ्रिज को दोबारा ठंडा होने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इससे कूलिंग कमजोर होने लगती है और बिजली की खपत भी बढ़ती है. कोशिश करें कि जरूरत का सामान एक बार में निकालें और दरवाजा ज्यादा देर तक खुला न छोड़ें.
गर्म खाना सीधे फ्रिज में रखना है बड़ी गलती
अक्सर लोग जल्दीबाजी में गर्म खाना सीधे फ्रिज में रख देते हैं. इससे फ्रिज के अंदर का तापमान अचानक बढ़ जाता है और बाकी सामान की कूलिंग भी प्रभावित होती है. इतना ही नहीं, कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे फ्रिज जल्दी खराब हो सकता है. खाना हमेशा सामान्य तापमान पर आने के बाद ही फ्रिज में रखें.
फ्रिज को दीवार से बिल्कुल चिपकाकर न रखें
अगर फ्रिज के पीछे हवा पास होने की जगह नहीं होगी तो उसकी गर्मी बाहर नहीं निकल पाएगी. इससे कंप्रेसर लगातार गर्म रहेगा और कूलिंग कम होने लगेगी. फ्रिज को दीवार से कम से कम 4 से 6 इंच दूर रखना बेहतर माना जाता है ताकि एयर फ्लो बना रहे.
जरूरत से ज्यादा सामान भरना भी नुकसानदायक
कुछ लोग फ्रिज में जरूरत से ज्यादा सामान ठूंस देते हैं. इससे अंदर ठंडी हवा सही तरीके से घूम नहीं पाती और हर हिस्से में बराबर कूलिंग नहीं पहुंचती. नतीजा यह होता है कि कुछ चीजें जल्दी खराब होने लगती हैं. फ्रिज में हमेशा थोड़ा खाली स्पेस जरूर रखें.
समय-समय पर सफाई करना भी जरूरी
फ्रिज की रबर सील, पीछे लगी कॉइल और अंदर की ट्रे अगर गंदी हो जाएं तो इसका असर कूलिंग पर पड़ता है. धूल जमने से मशीन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. महीने में कम से कम एक बार फ्रिज की अच्छी तरह सफाई जरूर करें.
सही तापमान सेट करना है बेहद जरूरी
कई लोग फ्रिज को हमेशा सबसे ज्यादा कूलिंग मोड पर रखते हैं. इससे बिजली की खपत बढ़ती है और कई बार फ्रिज के पार्ट्स पर दबाव पड़ता है. सामान्य तौर पर फ्रिज का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना सही माना जाता है.
छोटी लापरवाही बना सकती है बड़ा खर्च
अगर फ्रिज की कूलिंग कम हो रही है तो हर बार सर्विस सेंटर को दोष देना जरूरी नहीं. कई बार हमारी छोटी-छोटी गलतियां ही इसकी वजह बनती हैं. सही इस्तेमाल और नियमित देखभाल से फ्रिज लंबे समय तक बेहतर कूलिंग देता है और बिजली का बिल भी कंट्रोल में रहता है.
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 08:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>अब बिना हाथ लगाए चलेंगे Apps, Google का नया AI फीचर Android यूजर्स को कर देगा हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Google Contextual Suggestions: Google जल्द ही Android स्मार्टफोन्स के लिए एक नया AI फीचर पेश करने की तैयारी में है जिसका नाम Contextual Suggestions बताया जा रहा है. यह फीचर सिर्फ ऐप सजेस्ट करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यूजर की रोजमर्रा की आदतों और फोन इस्तेमाल करने के तरीके को समझकर पहले से ही जरूरी चीजें सामने लाने की कोशिश करेगा. यानी आने वाले समय में आपका स्मार्टफोन सिर्फ तेज नहीं बल्कि ज्यादा समझदार भी हो सकता है.
हालांकि Google ने अभी तक इस फीचर का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है लेकिन Android 16 इस्तेमाल कर रहे कुछ यूजर्स को यह फीचर दिखाई देने लगा है. कंपनी की तरफ से इसे लेकर फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है जिससे माना जा रहा है कि इसकी टेस्टिंग चुपचाप शुरू हो चुकी है.
क्या है Contextual Suggestions फीचर?
Contextual Suggestions एक तरह का स्मार्ट AI असिस्टेंट है जो बैकग्राउंड में काम करेगा. यह आपके फोन इस्तेमाल करने के पैटर्न, लोकेशन, समय और पसंदीदा ऐप्स को समझकर जरूरत के हिसाब से सुझाव देगा. मान लीजिए आप एयरपोर्ट पहुंचते हैं तो फोन खुद ही बोर्डिंग पास दिखा सकता है. अगर आप जिम जाते हैं तो म्यूजिक प्लेलिस्ट पहले से तैयार मिल सकती है. ऑफिस जाने के समय नेविगेशन ऐप सामने आ सकता है या रोजमर्रा के कामों के दौरान पेमेंट ऐप और रिमाइंडर दिखाई दे सकते हैं. इसका मकसद यूजर को हर बार ऐप ढूंढने की जरूरत कम करना है.
Google के Magic Cue फीचर से मिलता-जुलता
यह नया फीचर काफी हद तक Google के Magic Cue सिस्टम से प्रेरित माना जा रहा है. फिलहाल Magic Cue केवल Pixel 10 सीरीज के कुछ डिवाइसेज तक सीमित है और AI की मदद से यूजर की गतिविधियों को समझकर काम करता है. लेकिन Contextual Suggestions को ज्यादा बड़े स्तर पर लाने की तैयारी दिखाई दे रही है. माना जा रहा है कि यह सिर्फ फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दूसरे Android डिवाइसेज में भी आ सकता है.
पुराने Android Suggestions से कितना अलग?
Android स्मार्टफोन्स में पहले से App Actions और बेसिक ऐप प्रेडिक्शन जैसे फीचर्स मौजूद हैं लेकिन Contextual Suggestions उनसे ज्यादा एडवांस माना जा रहा है. पुराने सिस्टम केवल किसी एक ऐप या हाल की गतिविधि के आधार पर सुझाव देते थे जबकि नया AI फीचर कई अलग-अलग संकेतों और यूजर बिहेवियर को मिलाकर काम करेगा. इससे सुझाव ज्यादा सटीक और व्यक्तिगत हो सकते हैं.
Privacy को लेकर क्या कहा जा रहा है?
AI फीचर्स के साथ सबसे बड़ा सवाल हमेशा प्राइवेसी को लेकर उठता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Contextual Suggestions में प्रोसेस होने वाला डेटा डिवाइस के अंदर ही एन्क्रिप्टेड रहेगा. Google का दावा है कि यह जानकारी दूसरी ऐप्स के साथ शेयर नहीं की जाएगी.
हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि इसके पीछे कौन-सा AI मॉडल काम करेगा और डेटा प्रोसेसिंग का पूरा सिस्टम कैसे चलेगा. आने वाले समय में कंपनी इस पर और जानकारी दे सकती है.
कहां मिलेगा यह फीचर?
अगर यह फीचर आपके फोन में उपलब्ध हुआ, तो इसे Android Settings के अंदर Google Services या All Services सेक्शन में देखा जा सकता है. Pixel यूजर्स को यह विकल्प प्रोफाइल सेटिंग्स में मिलने की संभावना है. फिलहाल यह फीचर धीरे-धीरे रोलआउट हो रहा है इसलिए सभी यूजर्स तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है.
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>क्या समय के साथ कमजोर हो जाता है स्मार्टफोन का कैमरा? पूरी सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग</title>
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        <description><![CDATA[ क्या समय के साथ कमजोर हो जाता है स्मार्टफोन का कैमरा? पूरी सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 08:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>सोलर पैनल को एक बार लगाने से नहीं चलेगा काम, हर मौसम के हिसाब से ऐसे करें देखभाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोलर-पैनल-को-एक-बार-लगाने-से-नहीं-चलेगा-काम-हर-मौसम-के-हिसाब-से-ऐसे-करें-देखभाल</link>
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        <description><![CDATA[ Solar Power System Maintenance Tips: अगर आप सोलर एनर्जी सिस्टम लगा रहे हैं तो इसकी नियमित देखभाल जरूरी है. कंपनियां इस सिस्टम पर 20-25 साल तक की गारंटी देती है. इसलिए कई लोग सोचते हैं कि इंस्टॉल करने के बाद उनकी टेंशन खत्म हो गई है. असल में ऐसा नहीं है. बाकी एनर्जी-जनरेटिंग इक्विपमेंट की तरह सोलर पैनल समेत इस पूरे सिस्टम को मैंटेनेंस और देखभाल की जरूरत होती है. इससे न सिर्फ इसकी एफिशिएंसी बनी रहती है बल्कि कोई बड़ा नुकसान होने से पहले उसका पता भी लगाया जा सकता है. इसलिए आज हम आपको पूरे साल का प्लान बताने जा रहे हैं कि किस मौसम में सोलर एनर्जी सिस्टम का ध्यान रखना चाहिए.
गर्मी में ऐसे करें देखभाल
गर्मी में दिन लंबे हो जाते हैं और धूप भी ज्यादा तेज और कई घंटों तक रहती है, ऐसे में सोलर पैनल बिजली भी ज्यादा जनरेट करते हैं. हालांकि, टेंपरेचर ज्यादा हो जाने के कारण पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है. गर्मी में आउटपुट को मॉनिटर करते रहें. अगर सिस्टम कम बिजली जनरेट कर रहा है तो यह किसी गड़बड़ के कारण हो सकता है. इसके अलावा पैनल के आसपास वेंटिलेशन होना जरूरी है. इससे ओवरहीटिंग नहीं होगी और टेंपरेचर को कुछ कम रखने में मदद मिलेगी.
मानसून
मानसून में धूप कम हो जाती है और बादलों के कारण एनर्जी जनरेशन भी कम हो जाता है. इस मौसम में माउंटिंग स्टेबिलिटी चेक कर ले. ज्यादा बारिश या तेज हवाओं के कारण पैनल का एंगल थोड़ा चेंज हो सकता है, जिस पर नजर रखना जरूरी है. अगर आप स्टोरेज के लिए बैटरी यूज कर रहे हैं तो इसके चार्ज लेवल पर भी नजर रखें. बारिश आदि के कारण अगर पावर सप्लाई नहीं आती है तो आपको बैटरी में स्टोरी बिजली की जरूरत पड़ सकती है.&amp;nbsp;
सर्दी
अगर आप पहाड़ी इलाकों में रहते हैं तो बर्फबारी को देखते हुए पैनल का एंगल एडजस्ट कर लें. अगर पैनल पर बर्फ जमा हो गई है तो इसे हटाने के लिए किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल न करें. बर्फबारी के बाद एक बार पैनल को जरूर चेक करें. इसके अलावा सर्दी में टेंपरेचर कम होने से बैटरी परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है. इस बात का भी ध्यान रखें और बैटरी स्टोरेज को भी चेक करते रहें.
सफाई रखना है जरूरी
हर मौसम में सोलर पैनल की सफाई रखना जरूरी है. इस पर धूल-मिट्टी जमा होने या पेड़ों की टहनियों की छाया आदि आने के कारण एफिशिएंसी कम हो सकती है. इसलिए नियमित तौर पर पैनल साफ करते रहें.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आपका Smartphone Charger असली है या नकली? ये 5 संकेत बताएंगे बैटरी खतरे में है या नहीं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आपका-smartphone-charger-असली-है-या-नकली-ये-5-संकेत-बताएंगे-बैटरी-खतरे-में-है-या-नहीं</link>
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        <description><![CDATA[ आपका Smartphone Charger असली है या नकली? ये 5 संकेत बताएंगे बैटरी खतरे में है या नहीं ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>AI के मामले में Google से कितना पीछे है Apple? जानकर हैरान रह जाएंगे आप</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Vs Google in AI Race: दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी ऐप्पल एआई को लेकर संघर्ष कर रही है. कंपनी ने 2024 में कुछ एआई फीचर्स का ऐलान किया था, जिनका अभी तक इंतजार खत्म नहीं हुआ है. इसी बीच गूगल ने एआई के मामले में एक के बाद एक माइलस्टोन हासिल कर लिए हैं. एआई के मामले में ऐप्पल ने हाथ खड़े कर दिए थे और उसने सिरी समेत दूसरे कई फीचर्स के लिए गूगल से पार्टनरशिप की थी. अब गूगल की एंड्रॉयड 17 अपडेट पेश होने के बाद दोनों कंपनियों के बीच एआई का अंतर साफ-साफ नजर आने लगा है.&amp;nbsp;
एआई के मामले में गूगल से सालों पीछे है ऐप्पल
ऐप्पल को कवर करने वाले ब्लूमबर्ग के जर्नलिस्ट मार्क गुरमैन ने बताया है कि एआई के मामले में गूगल के बराबर पहुंचने में ऐप्पल को वर्षों लगेंगे. गुरमैन ने कहा कि मौजूदा रफ्तार को देखते यह लग रहा है कि ऐप्पल को गूगल के बराबर पहुंचने में 1-2 साल और लग जाएंगे. जब तक ऐप्पल वहां पहुंचेगी, गूगल और दूसरी कंपनियां उससे और आगे निकल जाएंगी. 2024 में गुरमैन का कहना था कि गूगल एआई डेवलपमेंट को लेकर ऐप्पल से 2-3 साल आगे है.&amp;nbsp;
ऐप्पल के इन फीचर्स का इंतजार नहीं हुआ खत्म
Android 17 में गूगल ऐसे फीचर पेश कर चुकी है, जिनका अभी तक ऐप्पल की तरफ से सिर्फ ऐलान किया गया है. 2024 में ऐप्पल ने ऐप्स और सर्विस में एआई इंटीग्रेट करने और होम स्क्रीन विजेट को जनरेट करने जैसे फीचर्स का ऐलान किया था. ऐप्पल अभी तक इन फीचर्स पर अभी तक काम ही कर रही है, लेकिन गूगल ने इन्हें रोल आउट कर दिया है.
WWDC 2026: ऐप्पल के लिए करो या मरो की स्थिति
अगले महीने ऐप्पल की वर्ल्डवाइड डेवलपर कॉन्फ्रेंस (WWDC) 2026 होनी है. इसमें ऐप्पल के लिए करो या मरो वाली स्थिति रहने वाली है. इसमें कंपनी को दिखाना होगा कि वह एआई की रेस में बनी हुई है और अगर वह यह नहीं दिखा पाती है तो उसे अपने यूजर्स को इसके पीछे की वजह बतानी पड़ेगी. वहीं कंपनी ने इस कॉन्फ्रेंस को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप्पल अगले महीने नए एआई सिरी की झलक दिखाएगी. जेमिनी मॉडल से लैस सिरी चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट्स को टक्कर देगा. इसमें प्राइवेसी के लिए ऑटो चैट डिलीट का भी ऑप्शन आएगा. इसे सितंबर में iOS 27 के साथ रोल आउट किया जा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp पर कैसे रिकॉर्ड कर सकते हैं कोई भी कॉल? 99% लोग नहीं जानते यह ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Tips: आज के समय में व्हाट्सऐप सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं रह गया है बल्कि लोग इसका इस्तेमाल ऑफिस मीटिंग, ऑनलाइन इंटरव्यू, फैमिली बातचीत और जरूरी चर्चाओं के लिए भी करने लगे हैं. कई बार ऐसी स्थिति आती है जब हमें किसी WhatsApp Call को रिकॉर्ड करने की जरूरत महसूस होती है ताकि बाद में जरूरी जानकारी दोबारा सुनी जा सके.&amp;nbsp;
लेकिन हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं कि व्हाट्सऐप कॉल रिकॉर्ड कैसे की जाती है. हालांकि WhatsApp में सीधे तौर पर Call Recording का फीचर नहीं मिलता लेकिन कुछ आसान तरीकों की मदद से आप यह काम कर सकते हैं.
एंड्रॉयड फोन में ऐसे करें WhatsApp Call रिकॉर्ड
अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए WhatsApp Call रिकॉर्ड करना काफी आसान हो सकता है. कई स्मार्टफोन्स में पहले से ही Screen Recorder का फीचर मौजूद होता है. इसके लिए सबसे पहले फोन में Screen Recorder ऑन करें. रिकॉर्डिंग शुरू करने से पहले यह जरूर चेक करें कि Record Audio का विकल्प एक्टिव हो. इसके बाद WhatsApp Call लगाएं या रिसीव करें. कॉल खत्म होने के बाद रिकॉर्डिंग अपने आप गैलरी में सेव हो जाएगी. कुछ फोन में Internal Audio रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए वहां स्पीकर ऑन करके कॉल रिकॉर्ड करनी पड़ सकती है.
थर्ड पार्टी Apps भी आते हैं काम
अगर आपके फोन में इनबिल्ट रिकॉर्डिंग फीचर सही तरीके से काम नहीं करता तो आप Play Store पर मौजूद कुछ Call Recording Apps का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. ये ऐप्स स्क्रीन और ऑडियो दोनों रिकॉर्ड करने की सुविधा देते हैं. हालांकि किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और परमिशन जरूर जांच लें. कई फर्जी ऐप्स आपकी निजी जानकारी तक पहुंच सकते हैं.
iPhone यूजर्स के लिए क्या है तरीका?
iPhone में WhatsApp Call रिकॉर्ड करना थोड़ा मुश्किल माना जाता है क्योंकि Apple सिक्योरिटी को लेकर काफी सख्त है. फिर भी iPhone यूजर्स MacBook की मदद से कॉल रिकॉर्ड कर सकते हैं. इसके अलावा कुछ लोग दूसरे डिवाइस से स्पीकर मोड पर कॉल रिकॉर्ड करने का तरीका भी अपनाते हैं. हालांकि इसमें ऑडियो क्वालिटी थोड़ी कम हो सकती है.
कॉल रिकॉर्ड करते समय इन बातों का रखें ध्यान
किसी भी व्यक्ति की कॉल बिना उसकी अनुमति रिकॉर्ड करना कई जगहों पर कानूनी रूप से गलत माना जा सकता है. इसलिए हमेशा जरूरी और सुरक्षित परिस्थितियों में ही कॉल रिकॉर्ड करें.
साथ ही रिकॉर्ड की गई फाइल्स में आपकी निजी जानकारी हो सकती है इसलिए उन्हें सुरक्षित रखना भी बेहद जरूरी है. अगर फोन किसी और के हाथ में चला जाए तो आपकी रिकॉर्डिंग्स का गलत इस्तेमाल हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>पेट्रोल पंप वाली मशीन में कैसे गड़बड़ी करते हैं कर्मचारी? इस टेक्निक से पकड़ सकते हैं झोल</title>
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        <description><![CDATA[ Petrol Pump Fraud: पेट्रोल पंप पर फ्रॉड की शिकायतें अकसर सामने आती रहती है. ज्यादातर लोगों को शिकायत होती है कि उन्हें पैसे के बदले पूरा तेल नहीं मिलता. इसके अलावा मिलावट को लेकर भी लोगों को शिकायतें रहती हैं. इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए खुद का अलर्ट रहना बहुत जरूरी है. फिर भी कई बार पंप के कर्मचारी बातों में उलझाकर या दूसरे तरीकों से गड़बड़ करते हुए पाए जाते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पेट्रोल पंप की मशीन में कैसे गड़बड़ होती है और ऐसे फ्रॉड का कैसे पता लगाएं.
कैसे होती है गड़बड़?
चिप की ली जाती है मदद- रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बार पंप के कर्मचारी मशीनों में चिप लगा देते है. रिमोट से कंट्रोल होने वाली इस चिप की मदद से मीटर में रीडिंग सही चलती है, लेकिन गाड़ी में तेल कम चलता है. इस कारण ग्राहक को पैसे पूरे देने पड़ते हैं, लेकिन इसके बदले उसे पूरा पेट्रोल या डीजल नहीं मिल पाता.&amp;nbsp;
जीरो स्कैम- यह पेट्रोल पंप पर होने वाले फ्रॉड का सबसे आसान और कॉमन तरीका है. इसमें कर्मचारी मशीन को जीरो पर सेट किए बिना ही तेल भरना शुरू कर देते हैं. इससे पहली की रीडिंग भी आपके बिल में जुड़ जाती है, जिससे आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं, जबकि आपकी गाड़ी में उतना तेल नहीं भरा गया है.
जंप ट्रिक- फ्रॉड का यह तरीका भी काफी चलन में है. इसमें मीटर की रीडिंग एकदम उछल जाती है. यानी जिस डिस्प्ले पर आपको कीमत दिखाई जाती है वह 0 से शुरू होने के बाद 2, 3, 4, 5... के हिसाब से आगे नहीं बढ़ता बल्कि सीधा 10, 20, 30 पर चला जाता है. इससे तेल कम भरा जाता है, लेकिन रकम पूरी ले ली जाती है. इसमें ग्राहक को 10 लीटर तेल डलवाने पर लगभग 100 रुपये तक का नुकसान हो सकता है.&amp;nbsp;
क्या हैं फ्रॉड से बचने की टेक्निक?

पेट्रोल पंप पर तेल भरवाते समय गाड़ी से उतर जाएं और मशीन के पास जाकर रीडिंग पर नजर रखें.
अगर कर्मचारी आपको बात लगाने की कोशिश करते हैं तो उनकी हरकतों पर नजर रखें.
अगर मशीन अचानक से जंप करती है तो वहां रखें माप से तेल की मात्रा जांचें.
अगर आपको तेल में मिलावट का शक है तो फिल्टर पेपर टेस्ट की मांग करें. मिलावट होने पर पेपर पर धब्बा रह जाएगा.&amp;nbsp;
अगर आपको मिलावट या माप में गड़बड़ लग रही है तो संबंधित कंपनी की हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर शिकायत की जा सकती है.

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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Pet Safety का नया जुगाड़! ये 5 Smart Gadgets आपके Pet पर रखेंगे पल&amp;पल नजर, नहीं रहेगा चोरी होने का डर</title>
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        <description><![CDATA[ Gadgets for Pet Safety: आज के समय में टेक्नोलॉजी सिर्फ इंसानों के काम ही आसान नहीं बना रही बल्कि पालतू जानवरों की देखभाल भी पहले से ज्यादा आसान और सुरक्षित हो गई है. अगर आपका डॉग बार-बार घर से बाहर निकल जाता है, बिल्ली को समय पर खाना देना मुश्किल हो जाता है या फिर आप घर से दूर रहते हुए भी अपने पेट पर नजर रखना चाहते हैं तो अब कई स्मार्ट गैजेट्स आपकी मदद कर सकते हैं. ये डिवाइस न सिर्फ आपके पालतू को सुरक्षित रखते हैं बल्कि आपकी टेंशन भी काफी कम कर देते हैं.
GPS Pet Tracker
अगर आपका डॉग या कैट अक्सर बाहर घूमने निकल जाता है तो GPS पेट ट्रैकर बेहद काम का गैजेट साबित हो सकता है. इसे पालतू के कॉलर में लगाया जाता है और इसके जरिए आप मोबाइल फोन पर उसकी लाइव लोकेशन देख सकते हैं. कई ट्रैकर्स में सेफ जोन फीचर भी मिलता है. यानी अगर आपका पेट तय इलाके से बाहर जाता है तो तुरंत फोन पर अलर्ट आ जाता है. कुछ डिवाइस पालतू की एक्टिविटी और रोजाना की एक्सरसाइज भी ट्रैक करते हैं.
Smart Pet Camera
कई लोग ऑफिस या यात्रा के दौरान अपने पेट को लेकर परेशान रहते हैं. ऐसे में स्मार्ट पेट कैमरा काफी मददगार हो सकता है. इसकी मदद से आप मोबाइल पर लाइव वीडियो देख सकते हैं और अपने पेट से बात भी कर सकते हैं. कुछ एडवांस कैमरों में मोशन अलर्ट, नाइट विजन और ट्रीट देने जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. यानी आप दूर रहकर भी अपने पालतू को आराम और अपनापन महसूस करा सकते हैं.
Automatic Pet Feeder
अगर आपका शेड्यूल बहुत बिजी रहता है तो ऑटोमैटिक पेट फीडर आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. यह डिवाइस तय समय पर आपके डॉग या कैट को खाना देता है जिससे उनकी डाइट रूटीन खराब नहीं होती. स्मार्ट फीडर को मोबाइल ऐप से भी कंट्रोल किया जा सकता है. आप खाने का समय सेट करने के साथ-साथ पोर्शन कंट्रोल भी कर सकते हैं. इससे पेट को जरूरत के हिसाब से सही मात्रा में खाना मिलता है.
Smart Collar
स्मार्ट कॉलर किसी फिटनेस बैंड की तरह काम करता है. यह पालतू के कदम, नींद, कैलोरी बर्न और कई मामलों में हार्ट रेट तक मॉनिटर कर सकता है. अगर आपके पेट की आदतों में अचानक बदलाव आता है तो आप जल्दी समझ सकते हैं कि कहीं कोई स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है. समय रहते जानकारी मिलना कई बार बड़ी परेशानी से बचा सकता है.
Portable Pet Water Bottle
गर्मी के मौसम में बाहर घूमते समय पालतू को पानी की जरूरत ज्यादा होती है. ऐसे में पोर्टेबल पेट वॉटर बॉटल काफी उपयोगी साबित होती है. यह खास डिजाइन वाली बोतल होती है जिससे जरूरत के हिसाब से पानी आसानी से निकाला जा सकता है. ज्यादातर बोतलें लीकेज-फ्री होती हैं और आसानी से बैग में रखी जा सकती हैं. इससे सफर या वॉक के दौरान आपके पेट को कभी प्यासा नहीं रहना पड़ता.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>‘Instagram सिर्फ लड़कियों के लिए है!’ Elon Musk के इस बयान ने सोशल मीडिया पर मचा दिया बवाल, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Elon Musk on Instagram: Elon Musk एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने Instagram को लड़कियों का प्लेटफॉर्म कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. मस्क का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच बहस शुरू हो गई.
वायरल पोस्ट पर किया कमेंट
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वायरल थ्रेड चल रहा था जिसमें लोग मजाकिया अंदाज में बता रहे थे कि किसी व्यक्ति की सोशल मीडिया आदतें उसकी जिंदगी के अलग-अलग फेज को दिखाती हैं. इसमें लगातार स्टोरी डालना, आकर्षक तस्वीरें पोस्ट करना, खाने की फोटो शेयर करना और लाइफस्टाइल कंटेंट जैसी चीजों का जिक्र था. इसी चर्चा के बीच एलन मस्क ने छोटा सा कमेंट किया &amp;lsquo;Instagram is for girls&amp;rsquo;. यानी उनके मुताबिक इंस्टाग्राम मुख्य रूप से लड़कियों के इस्तेमाल का प्लेटफॉर्म है. उनका यह बयान कुछ ही देर में इंटरनेट पर वायरल हो गया.
दूसरे बयान ने बढ़ाया विवाद
मामला यहीं नहीं रुका. जब लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं तो मस्क ने एक और टिप्पणी कर दी. उन्होंने लिखा कि कई बार बड़े पुरुष उन्हें अपना इंस्टाग्राम प्रोफाइल भेजते हैं और उन्हें लगता है जैसे वे ट्रांजिशन कर रहे हों. इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई. कई यूजर्स ने इसे महिलाओं और जेंडर पहचान को लेकर अपमानजनक सोच बताया. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मस्क अक्सर जानबूझकर ऐसे बयान देते हैं ताकि इंटरनेट पर बहस छिड़े और उनका नाम चर्चा में बना रहे.
इंस्टाग्राम के कंटेंट को लेकर मस्क की सोच
एलन मस्क पहले भी कई बार ऐसे संकेत दे चुके हैं कि वे कुछ तरह के सोशल मीडिया कंटेंट को गंभीर नहीं मानते. खासतौर पर फैशन, लाइफस्टाइल, सेल्फी, गॉसिप या रोजमर्रा की तस्वीरों वाले कंटेंट को वे हल्का और गैर-जरूरी मानते हैं. यही कंटेंट इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय भी है.
मस्क लंबे समय से जेंडर ट्रांजिशन और आधुनिक सोशल ट्रेंड्स को लेकर भी आलोचनात्मक राय रखते आए हैं. इसलिए उनके इस बयान को सिर्फ मजाक नहीं बल्कि उनकी निजी सोच से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
X को बढ़ावा देने की कोशिश?
कई लोगों का मानना है कि मस्क के ऐसे बयान सिर्फ विवाद पैदा करने के लिए नहीं होते बल्कि वे इसके जरिए अपने प्लेटफॉर्म X को भी प्रमोट करते हैं. इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया एल्गोरिद्म पर चर्चा करते हुए दावा किया कि केवल X ही ऐसा प्लेटफॉर्म है जो खुलकर काम करता है जबकि बाकी कंपनियां बंद सिस्टम के जरिए यूजर्स को कंटेंट दिखाती हैं.
मेटा प्लेटफॉर्म्स पर पहले भी साध चुके हैं निशाना
Meta और उसके सीईओ Mark Zuckerberg के साथ एलन मस्क की तनातनी किसी से छिपी नहीं है. दोनों के बीच पहले भी कई बार सार्वजनिक बयानबाजी हो चुकी है. कुछ हफ्ते पहले मस्क ने WhatsApp को लेकर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि व्हाट्सऐप पर भरोसा नहीं किया जा सकता और लोगों को ऑडियो-वीडियो कॉलिंग के लिए X का इस्तेमाल करना चाहिए. अब इंस्टाग्राम पर दिए गए उनके ताजा बयान ने सोशल मीडिया की दुनिया में एक नई बहस को जन्म दे दिया है.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>वैज्ञानिकों ने तैयार की बाल से भी पतली सोलर सेल, दिखेगी नहीं, लेकिन बिजली बनाएगी खूब</title>
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        <description><![CDATA[ Ultra-thin Transparent Solar Cells: सोलर एनर्जी के लिए बड़े-बड़े पैनल की जरूरत खत्म हो सकती है. वैज्ञानिकों ने नई कमाल की सोलर सेल्स तैयार की हैं, जो कांच के किसी भी सरफेस पर लगकर सोलर पावर जनरेट कर सकती हैं. यानी इन सोलर सेल्स को घर की खिड़की से लेकर कार की विंडशील्ड और स्मार्टग्लासेस आदि पर यूज किया जा सकता है. इंसान के बाल के 10,000वें हिस्से भी पतली इन सेल्स को सिंगापुर की Nanyang Technological University के वैज्ञानिकों ने डेवलप किया है. आइए इन सेल्स की खास बातें जानते हैं
सोलर एनर्जी एडोप्शन को आसान बनाने की कोशिश
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई सेल्स कन्वेंशनल perovskite सोलर सेल्स से 50 गुना पतली है. दिखने में ये सेमी-ट्रांसपेरेंट और कलर न्यूट्रल है. इसका फायदा यह है कि इसे किसी भी ग्लास सरफेस पर यूज किया जा सकता है. यह खासकर उन शहरों में बहुत काम आ सकती है, जहां छतों पर पहले से सोलर पैनल लगे हैं, लेकिन खिड़कियों और वर्टिकल ग्लास फसाड का सोलर पावर जनरेशन के लिए यूज नहीं किया गया है. कांच वाली ऊंची-ऊंची बिल्डिंग्स के लिए भी ये सेल्स एकदम मुफीद हैं. अगर ये सेल्स बड़े स्तर पर कामयाब होती है तो क्लीन एनर्जी जनरेशन का पूरा गेम ही बदल जाएगा और लोग अपने घरों, गाड़ियों और डिवाइसेस का लुक बदले बिना भी उन्हें एनर्जी जनरेशन में यूज कर पाएंगे.
कैसे काम करेंगी ये सेल्स?
इन सेल्स को थर्मल इवेपोरेशन प्रोसेस यूज कर बनाया गया है. इस प्रोसेस में किसी मैटेरियल को तब तक वैक्यूम चैंबर में हीट किया जाता है, जब तक वह वेपर में बदलकर एक बहुत पतली लेयर में सेटल न हो जाए. इसे बनाने वाली यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस तरीके से बड़े एरिया पर भी लेयर्स क्रिएट की जा सकती हैं. ये सेल्स डायरेक्ट सनलाइट के साथ-साथ डिफ्यूज लाइट में भी काम कर सकती हैं. यानी शहरों में कम धूप लगने वाली जगहों के लिए भी ये फायदेमंंद हैं.
एफिशिएंसी के मामले में हैं सोलर पैनल से पीछे
अभी इन सेल्स पर लैब में रिसर्च चल रही है और इन्हें प्रोडक्ट के तौर पर तैयार नहीं किया गया है. यूनिवर्सिटी ने इसके लिए पेटेंट दायर कर दिया है और मैन्युफैक्चरिंग के लिए कंपनियों से भी बातचीत शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक इन सेल्स की स्टेबिलिटी, लंबे समय तक यूज के लिए फिटनेस और बड़े इलाकों में यूज को टेस्ट नहीं किया गया है. साथ ही इनकी एफिशिएंसी भी सोलर पैनल के मुकाबले लगभग आधी है.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp का नया धमाका! अब View Once मैसेज खुद हो जाएंगे गायब, iPhone यूजर्स के लिए शुरू हुई सीक्रेट टेस्टिंग</title>
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        <description><![CDATA[ Whatsapp New Feature: WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर टेस्ट कर रहा है, जो मैसेज सुरक्षा को पहले से ज्यादा एडवांस बना सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ऐसा फीचर ला रही है जिसमें डिसअपीयरिंग मैसेज केवल तय समय के बाद नहीं बल्कि पढ़े जाने के बाद खुद-ब-खुद डिलीट हो जाएंगे. यह फीचर पहले Android बीटा वर्जन में देखा गया था और अब iPhone यूजर्स के लिए भी इसकी टेस्टिंग शुरू हो गई है.
iPhone बीटा यूजर्स को मिला नया After Reading ऑप्शन
रिपोर्ट के अनुसार, यह फीचर फिलहाल कुछ iPhone बीटा टेस्टर्स को मिल रहा है जो Apple के TestFlight प्रोग्राम के जरिए WhatsApp का बीटा वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ सामान्य App Store यूजर्स को भी यह फीचर सीमित रूप से दिखाई दे सकता है. नई सेटिंग After Reading नाम से डिसअपीयरिंग मैसेज सेक्शन में दिखाई दे रही है. इसकी मदद से यूजर यह तय कर सकेंगे कि सामने वाला व्यक्ति मैसेज पढ़ने के कितनी देर बाद वह अपने-आप डिलीट हो जाए.
पढ़ने के बाद शुरू होगा टाइमर
अब तक WhatsApp में डिसअपीयरिंग मैसेज का टाइमर मैसेज भेजते ही शुरू हो जाता था. लेकिन नए फीचर में टाइमर तभी एक्टिव होगा जब रिसीवर मैसेज पढ़ लेगा. यूजर्स 5 मिनट, 1 घंटा या 12 घंटे का टाइमर चुन सकेंगे. अगर सामने वाला व्यक्ति 24 घंटे तक मैसेज नहीं खोलता है, तो WhatsApp उसे अपने-आप हटा देगा. यानी मैसेज बिना पढ़े भी ज्यादा समय तक चैट में नहीं रहेगा.
पुराने डिसअपीयरिंग फीचर के साथ भी करेगा काम
यह नया फीचर WhatsApp के मौजूदा disappearing messages सिस्टम के साथ ही काम करेगा. अभी प्लेटफॉर्म 24 घंटे, 7 दिन और 90 दिन वाले टाइमर विकल्प देता है. यूजर इन्हें किसी एक चैट पर या सभी नई चैट्स के लिए डिफॉल्ट रूप में लागू कर सकते हैं. हालांकि नया After Reading फीचर पूरी तरह ऑप्शनल बताया जा रहा है. यानी यह अपने-आप चालू नहीं होगा और यूजर को इसे मैन्युअली ऑन करना पड़ेगा. जिन चैट्स में यह फीचर एक्टिव नहीं होगा, वहां पुरानी सेटिंग्स पहले की तरह काम करती रहेंगी.
भेजने और पढ़ने वाले के लिए अलग-अलग टाइमिंग
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मैसेज भेजने वाले की कॉपी चुने गए टाइमर के हिसाब से हट सकती है जबकि रिसीवर की तरफ टाइमर मैसेज पढ़ने के बाद शुरू होगा. इससे दोनों यूजर्स के लिए मैसेज एक्सपायर होने का समय अलग हो सकता है. फिलहाल WhatsApp ने यह साफ नहीं किया है कि यह फीचर सभी यूजर्स के लिए कब तक जारी किया जाएगा. लेकिन आने वाले हफ्तों में इसे ज्यादा बीटा टेस्टर्स तक पहुंचाया जा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>IPL में खिलाड़ियों के सिर के ऊपर उड़ता Spidercam आखिर कैसे करता है काम? जानिए इस हाईटेक कैमरे का पूरा खेल</title>
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        <description><![CDATA[ Spidercam: अगर आप कभी Indian Premier League का मैच ध्यान से देखते हैं तो आपने मैदान के ऊपर हवा में उड़ते एक कैमरे को जरूर देखा होगा. यह कैमरा कभी बल्लेबाज़ के बिल्कुल ऊपर पहुंच जाता है, तो कभी गेंद के पीछे-पीछे दौड़ता नजर आता है. टीवी पर मिलने वाले शानदार एंगल और सिनेमैटिक शॉट्स के पीछे इसी हाईटेक तकनीक का हाथ होता है जिसे Spidercam कहा जाता है. आज Spidercam क्रिकेट ब्रॉडकास्टिंग का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है. यही वजह है कि IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट में इसका इस्तेमाल लगभग हर मैच में किया जाता है.
क्या होता है Spidercam?
Spidercam एक फ्लाइंग कैमरा सिस्टम है जो स्टेडियम के ऊपर चार मजबूत तारों के सहारे हवा में चलता है. यह कैमरा मैदान के किसी भी हिस्से तक तेजी से पहुंच सकता है और खिलाड़ियों के बेहद करीब से लाइव वीडियो रिकॉर्ड करता है. इस कैमरे को खासतौर पर स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग के लिए बनाया गया है ताकि दर्शकों को ऐसा अनुभव मिले जैसे वे खुद मैदान के अंदर मौजूद हों.
आखिर कैसे काम करता है Spidercam?
Spidercam को स्टेडियम की छत या चारों कोनों पर लगे मोटराइज्ड सिस्टम से जोड़ा जाता है. इन चारों तारों की लंबाई और दिशा को कंप्यूटर के जरिए कंट्रोल किया जाता है. जैसे ही ऑपरेटर कंट्रोल पैनल से कैमरे को मूव करता है, मोटर तारों को खींचती या ढीला छोड़ती है. इसी वजह से कैमरा ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं और आगे-पीछे बेहद स्मूद तरीके से उड़ता है. इस कैमरे में हाई-रेजोल्यूशन लेंस और स्टेबलाइजेशन सिस्टम लगाया जाता है ताकि तेज स्पीड में भी वीडियो बिल्कुल साफ दिखाई दे.
खिलाड़ियों से टकराता क्यों नहीं?
कई लोगों के मन में सवाल आता है कि इतना बड़ा कैमरा खिलाड़ियों के ऊपर उड़ता है फिर टकराता क्यों नहीं? असल में Spidercam को ऑपरेट करने वाली टीम लगातार मैदान की गतिविधियों पर नजर रखती है. कैमरे की ऊंचाई और स्पीड को मैच के हिसाब से तुरंत बदला जाता है. इसके अलावा इसमें एडवांस सेंसर और सेफ्टी सिस्टम भी लगे होते हैं. हालांकि कुछ मौकों पर गेंद Spidercam के तारों से टकरा चुकी है लेकिन ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं.
IPL में Spidercam क्यों है इतना खास?
Spidercam की वजह से दर्शकों को बल्लेबाज़ के पीछे से शॉट, गेंदबाज़ के रनअप का डायनामिक व्यू और स्टेडियम का शानदार एरियल दृश्य देखने को मिलता है. यही कैमरा मैच को ज्यादा रोमांचक और सिनेमैटिक बनाता है. आज के समय में IPL की टीवी क्वालिटी और इंटरनेशनल लेवल प्रोडक्शन के पीछे Spidercam जैसी तकनीकों का बहुत बड़ा योगदान है.
एक Spidercam की कीमत कितनी होती है?
Spidercam सिस्टम काफी महंगा होता है. इसकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है क्योंकि इसमें हाईटेक कैमरे, कंप्यूटर कंट्रोल सिस्टम, केबल नेटवर्क और प्रोफेशनल ऑपरेटिंग टीम शामिल होती है. यही कारण है कि इसका इस्तेमाल ज्यादातर बड़े टूर्नामेंट और इंटरनेशनल मैचों में ही किया जाता है.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Google Pixel 10 की कीमत एक ही झटके में धड़ाम, पहले कभी नहीं हुआ इतना सस्ता</title>
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        <description><![CDATA[ Google Pixel 10 Discount: अगर आप नया फोन लेना चाहते हैं, लेकिन लगातार बढ़ रही कीमतों के कारण रुके हुए हैं तो आपके लिए एक शानदार मौका आ गया है. क्रोमा की सेल में गूगल का फ्लैगशिप मॉडल Google Pixel 10 एकदम सस्ते दामों में मिल रहा है. अभी इस फोन पर खरीद पर 20,000 रुपये की बचत की जा सकती है. अगर आपको क्लीन एंड्रॉयड एक्सपीरियंस, प्रीमियम लुक और दमदार फीचर्स की तलाश है तो यह फोन आपके लिए एक अच्छी च्वॉइस हो सकता है. आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या-क्या फीचर्स मिलते हैं और क्रोमा डील से इसे कितने में खरीदा जा सकता है.
Google Pixel 10 के स्पेसिफिकेशंस
Google Pixel 10 को पिछले साल अगस्त में 6.3 इंच की OLED स्क्रीन के साथ लॉन्च किया गया था, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है. इस पर प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 दिया गया है. यह फोन Google Tensor G5 चिपसेट से लैस है और Android 16 पर ऑपरेट करता है. इसे अगले सात सालों तक सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगी फोटो और वीडियो के लिए इसके रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलता है. इसमें 48MP का प्राइमरी लेंस, 13MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 10.8MP का टेलीफोटो कैमरा लगा हुआ है. फ्रंट की बात करें तो सेल्फी और वीडियो के लिए 10.5MP का लेंस लगा हुआ है. गूगल ने इसे 4970mAh के बैटरी पैक से लैस किया है.&amp;nbsp;
क्रोमा पर कितने का मिल रहा है Google Pixel 10?
भारत में Pixel 10 को 79,999 कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन क्रोमा पर यह 15,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के साथ लिस्टेड है. क्रोमा पर इस फोन को 64,999 रुपये में लिस्ट किया गया है. अगर आप इसे HDFC बैंक क्रेडिट कार्ड से खरीदते हैं तो 5,000 रुयये का इंस्टैंट डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है, जिसके बाद इस फोन की कीमत 59,999 रुपये रह जाती है. यानी इस डील में आप गूगल पिक्सल 10 को 20,000 रुपये सस्ता खरीद पाएंगे.
Samsung Galaxy S25 Ultra 5G को भी सस्ते में खरीदें
गूगल के अलावा सैमसंग के Galaxy S25 Ultra फोन पर भी इस समय छूट मिल रही है. 1,29,999 रुपये में लॉन्च हुआ यह फोन इस समय फ्लिपकार्ट पर 96,990 रुपये में लिस्टेड है. 30,000 रुपये से अधिक की इस छूट के अलावा 4,000 रुपये का कैशबैक और इतनी ही रकम का बैंक ऑफर मिल रहा है. इस तरह यह फोन भी आप बड़ी छूट के साथ अपना बना सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 vs iPhone 17: क्या नए आईफोन के लिए इंतजार रहेगा ठीक या करंट वेरिएंट है फायदे का सौदा? यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 vs iPhone 17: ऐप्पल ने पिछले साल सितंबर में iPhone 17 को कई बड़ी अपग्रेड्स के साथ उतारा था. 120Hz रिफ्रेश रेट वाले डिस्प्ले और नए चिपसेट समेत इन अपग्रेड्स को लोगों ने खूब पसंद किया और यह 2026 की पहली तिमाही में सबसे ज्यादा बिकने वाला फोन बन गया है. अब ऐप्पल iPhone 18 की तैयारियों में जुट गई है, जिसे अगले साल फरवरी-मार्च में लॉन्च किया जा सकता है. अब चूंकि iPhone 17 पर कई जगह डिस्काउंट ऑफर चल रहे हैं, ऐसे में लोगों के लिए कंफ्यूजिंग स्थिति बन गई है कि उन्हें iPhone 18 का इंतजार करना चाहिए या अभी iPhone 17 खरीदना फायदे का सौदा है. आइए हम इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए जरूरी चीजें समझते हैं.
iPhone 17 बना हुआ है प्रैक्टिकल च्वॉइस
iPhone 17 लॉन्चिंग के करीब 7-8 महीने बाद भी एक प्रैक्टिकल च्वॉइस बना हुआ है. इसमें ऐसे फीचर्स मिलते हैं, जो एक सामान्य यूजर्स के लिए काफी है. जो लोग अभी iPhone 13 या iPhone 14 जैसे पुराने मॉडल यूज कर रहे हैं, उन्हें इसकी परफॉर्मेंस, कैमरा क्वालिटी, बैटरी ऑप्टिमाइजेशन और डिस्प्ले स्मूदनेस में फर्क साफ नजर आएगा. इसके अलावा अभी डिस्काउंट के कारण इसकी कीमत भी कम हो गई है. ऐसे में यह आईफोन उन लोगों के लिए एक अच्छा ऑप्शन है, जो नए आईफोन के लिए पूरी कीमत नहीं चुकाना चाहते.
क्यों करना चाहिए iPhone 18 का इंतजार?
iPhone 18 को लेकर इस समय मिली-जुली जानकारी आ रही है. कुछ रिपोर्ट्स में इसे डाउनग्रेड करने की चर्चा है तो कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह आईफोन नए डिजाइन, अपडेटेड कैमरा हार्डवेयर और ऑन-डिवाइस एआई कैपेबिलिटीज के साथ लॉन्च होगा. ऐसी भी चर्चा है कि ऐप्पल नया चिपसेट देकर इसकी परफॉर्मेंस इंप्रूव कर सकती है और बैटरी एफिशिएंसी को लेकर भी काफी काम किया जाएगा. इसकी कीमत को लेकर भी ऐप्पल अग्रेसिव अप्रोच के साथ आगे बढ़ रही है और इसे iPhone 17 वाली कीमत पर लॉन्च किया जा सकता है.
iPhone 17 खरीदें या iPhone 18 का इंतजार करें?
इस सवाल का जवाब आपकी जरूरत और पसंद पर है. अगर आपके पास 3-4 साल पुराना आईफोन है और आपको तुरंत अपग्रेड करने की जरूरत है तो डिस्काउंट के साथ iPhone 17 परचेज किया जा सकता है. मॉडर्न हार्डवेयर वाले इस आईफोन के साथ अगले कई सालों तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलती रहेगी. वहीं अगर आपको लेटेस्ट आईफोन चलाना है और आप थोड़ा इंतजार कर सकते हैं तो आईफोन 18 के लिए इंतजार किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>वैज्ञानिकों का कमाल! अब मधुमक्खियों जैसे उड़ने वाले Drones खुद ढूंढ़ सकेंगे रास्ता, दुनिया बदल सकती है ये टेक</title>
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        <description><![CDATA[ Mini Drones: दुनिया में ड्रोन तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है लेकिन सबसे बड़ी चुनौती अब भी यही है कि छोटे ड्रोन बिना भारी सिस्टम के सही रास्ता कैसे ढूंढें. अब यूरोप के वैज्ञानिकों ने इसका समाधान प्रकृति से लिया है. शोधकर्ताओं ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है जो मधुमक्खियों के रास्ता याद रखने के तरीके से प्रेरित है. इसकी मदद से बेहद छोटे ड्रोन भी कम मेमोरी और कम ऊर्जा में लंबी दूरी तय कर सकेंगे.
मधुमक्खियों के दिमाग से मिला आइडिया
यह रिसर्च यूरोप के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है. अध्ययन में बताया गया कि शहद की मधुमक्खियां अपने छोटे से दिमाग के बावजूद दूर-दूर तक उड़ान भरकर आसानी से वापस अपने छत्ते तक पहुंच जाती हैं. वैज्ञानिकों ने इसी क्षमता को समझकर Bee-Nav नाम की नई नेविगेशन तकनीक तैयार की. इस सिस्टम का मकसद ऐसे छोटे रोबोट और ड्रोन बनाना है जो बिना बड़े कंप्यूटर या भारी डिजिटल मैप के खुद रास्ता पहचान सकें.
कैसे काम करता है Bee-Nav सिस्टम?
यह तकनीक बिल्कुल युवा मधुमक्खियों की तरह काम करती है. जब ड्रोन पहली बार उड़ान भरता है तो वह अपने आसपास की जगह की तस्वीरें कैप्चर करता है. इसके बाद एक छोटा न्यूरल नेटवर्क उन तस्वीरों के जरिए यह सीखता है कि वापस घर यानी शुरुआती स्थान तक कैसे पहुंचना है.
ड्रोन दूरी और दिशा का अंदाजा लगाने के लिए ओडोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल करता है. यह कुछ वैसा ही है जैसे इंसान चलते समय कदम गिनकर दूरी का अनुमान लगाता है. लेकिन सिर्फ यही तरीका हमेशा सही नहीं होता, इसलिए ड्रोन आसपास के दृश्य भी याद रखता है.
बेहद कम मेमोरी में चलता है पूरा सिस्टम
सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि इस तकनीक को बहुत कम मेमोरी की जरूरत पड़ी. कुछ टेस्ट में पूरा न्यूरल नेटवर्क केवल 3.4 किलोबाइट मेमोरी पर काम करता दिखा. बड़े आउटडोर टेस्ट में भी पूरा सिस्टम सिर्फ 42 किलोबाइट मेमोरी में चल गया. तुलना करें तो मौजूदा ड्रोन नेविगेशन सिस्टम इसके मुकाबले कई गुना ज्यादा स्टोरेज और प्रोसेसिंग पावर मांगते हैं. यही वजह है कि छोटे ड्रोन भारी और महंगे हो जाते हैं.
600 मीटर दूर जाकर भी लौट आया ड्रोन
वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का परीक्षण इनडोर और आउटडोर दोनों जगह किया. नीदरलैंड के एक ड्रोन टेस्टिंग सेंटर में ड्रोन को 600 मीटर से ज्यादा दूर भेजा गया और वह सफलतापूर्वक वापस लौट आया. हालांकि तेज हवा में ड्रोन को दिक्कत हुई क्योंकि हवा के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और तस्वीरें सही तरीके से पहचानना मुश्किल हो गया. इसके बावजूद आउटडोर टेस्ट में करीब 70 प्रतिशत सफलता मिली.
खेती और ग्रीनहाउस में हो सकता है बड़ा इस्तेमाल
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में खेती और ग्रीनहाउस मॉनिटरिंग में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. हल्के ड्रोन फसलों की जांच कर पाएंगे और बीमारी या कीटों का पता लगा सकेंगे वह भी बिना इंसानों के लिए खतरा बने.
प्रकृति से मिल रहे तकनीक के नए जवाब
इस रिसर्च ने एक बार फिर साबित किया है कि प्रकृति के छोटे जीव भी आधुनिक तकनीक के लिए बड़ी प्रेरणा बन सकते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि मधुमक्खियों को समझकर इंसान ऐसी स्मार्ट तकनीक बना सकता है जो कम खर्चीली, हल्की और ज्यादा प्रभावी हो.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इमरजेंसी में एक बटन दबाते ही ठप हो जाएगी AI, यह देश कर रहा है बड़ी तैयारी</title>
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        <description><![CDATA[ AI Kill Switch: एआई को लेकर चिंता अब केवल रिसर्च और कंपनियों तक सीमित नहीं रही है. सरकारें भी इसे लेकर तैयारी में जुट गई हैं. यूके में एआई के &#039;किल स्विच&#039; की मांग उठ रही है. दरअसल, यहां के कुछ नेता चाहते हैं कि इमरजेंसी में सरकार के पास एआई को बंद करने का विकल्प होना चाहिए. अगर चीजें कंट्रोल से बाहर जाएं तो सरकार के पास एडवांस्ड एआई सिस्टम को पूरी तरह ठप करने का इंतजाम जरूरी है. इसे लेकर यूके में कानून बनाने की तैयारी चल रही है. आइए जानते हैं कि इस बारे में क्या-क्या जानकारी सामने आई है.
सरकार को दिया गया प्रस्ताव
लेबर पार्टी के MP एलेक्स सॉबेल ने 11 दूसरी MPs के साथ मिलकर सरकार को एक प्रस्ताव दिया है. इसमें कहा गया है कि इमरजेंसी सिचुएशन में यूके के टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी के पास आई सिस्टम और डेटा सेंटर को बंद करने का आदेश देने की पावर होनी चाहिए. अगर सरकार को लगता है कि इंसानी जीवन, नेशनल सिक्योरिटी या और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई खतरा आता है तो ऐसी स्थिति को इमरजेंसी माना जाए और इस कंडीशन में एआई सिस्टम को बंद किया जाना चाहिए. अगर यह प्रस्ताव कानून का रूप ले लेता है तो कंपनियों को ऐसा सिस्टम बनाना होगा, जिससे डेटा सेंटरों को सरकारी आदेश पर बंद किया जा सके. साथ ही कंपनियों को सरकार के साथ सिक्योर कम्युनिकेशन चैनल भी बनाने होंगे.
डोनाल्ड ट्रंप भी बता चुके ऐसी जरूरत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी एआई का डर सता रहा है. उनका मानना है कि एआई में लगातार हो रहे विकास को कंट्रोल में रखने के लिए एक &#039;किल स्विच&#039; की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह एनस्योर किया जाए कि लगातार हो रहे विकास से ऐसी स्थिति नहीं आएगी, जहां मानवता के अस्तित्व पर ही खतरा आ जाएगा. ट्रंप के अलावा कई एक्सपर्ट्स को भी इस बात की चिंता है कि एआई डेवलपमेंट के इस दौर में सुरक्षा उपायों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
क्यों होने लगी है चिंता?
पिछले कुछ समय से एआई सिस्टम लगातार एडवांस होते जा रहे हैं. कुछ दिन पहले ही एंथ्रोपिक ने अपने एआई मॉडल Claude Mythos को लॉन्च किया था. यह किसी भी सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को हैक कर सकता है. इस कारण कंपनी इसे पब्लिक के लिए रोल आउट नहीं कर रही है. इसे टक्कर देने के लिए OpenAI ने भी नया मॉडल लॉन्च किया है. अगर ये गलत हाथों में पड़ जाते हैं तो इससे होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>पुराना AC खरीदने से पहले हो जाएं सावधान! नजरअंदाज किए ये संकेत तो बन सकता है जानलेवा</title>
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        <description><![CDATA[ पुराना AC खरीदने से पहले हो जाएं सावधान! नजरअंदाज किए ये संकेत तो बन सकता है जानलेवा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>फोन चार्ज होने में लग रहा है घंटों? कहीं ON तो नहीं ये सेटिंग जो चुपचाप कर देती है Charging Slow</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: कई लोग यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि ओरिजिनल फास्ट चार्जर इस्तेमाल करने के बावजूद उनका स्मार्टफोन पहले जितनी तेजी से चार्ज क्यों नहीं हो रहा. अक्सर लोग इसका दोष चार्जर, केबल या बैटरी को देने लगते हैं लेकिन असली वजह फोन में मौजूद एक खास सेटिंग भी हो सकती है. इस फीचर का नाम है Adaptive Charging. यह सेटिंग आजकल कई आधुनिक Android स्मार्टफोन्स में दी जाती है और इसका मकसद बैटरी की लाइफ बढ़ाना होता है. हालांकि, कई बार यही फीचर फोन की चार्जिंग स्पीड को काफी धीमा कर देता है.
क्या होता है Adaptive Charging?
Adaptive Charging एक स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट फीचर है. इसका काम फोन को हर समय फुल स्पीड में चार्ज करने की बजाय यूजर की आदतों को समझकर चार्जिंग को नियंत्रित करना होता है. मान लीजिए आप रोज रात 11 बजे फोन चार्जिंग पर लगाते हैं और सुबह 7 बजे निकालते हैं. ऐसे में फोन करीब 80 प्रतिशत तक जल्दी चार्ज होकर रुक सकता है और फिर धीरे-धीरे सुबह के समय 100 प्रतिशत तक पहुंचेगा. इस तकनीक का मकसद बैटरी पर दबाव और गर्मी को कम करना होता है ताकि लंबे समय तक बैटरी की सेहत बेहतर बनी रहे.
लोग क्यों समझ लेते हैं कि फोन खराब हो गया?
जब फोन अचानक धीरे चार्ज होने लगता है तो अधिकतर यूजर्स को लगता है कि उनका फास्ट चार्जर खराब हो गया है या केबल में समस्या आ गई है. जबकि कई मामलों में Adaptive Charging ही इसकी वजह होती है. क्योंकि यह फीचर जानबूझकर चार्जिंग स्पीड कम करता है, इसलिए यूजर्स को लगता है कि फोन में कोई तकनीकी खराबी आ गई है.
ऐसे करें सेटिंग चेक
अगर आपका फोन सामान्य से ज्यादा धीरे चार्ज हो रहा है तो एक बार Adaptive Charging सेटिंग जरूर जांच लें. अधिकतर Android स्मार्टफोन्स में यह विकल्प यहां मिलता है:
Settings &gt; Battery &gt; Adaptive Charging
या फिर
Settings &gt; Battery Health &gt; Charging Optimisation
अगर आप इस फीचर को बंद कर देते हैं तो कई मामलों में फोन तुरंत पहले जैसी फास्ट चार्जिंग स्पीड पर लौट आता है.
लेकिन इसे हमेशा बंद करना सही है?
विशेषज्ञों का कहना है कि Adaptive Charging को पूरी तरह बंद रखना लंबे समय में बैटरी की लाइफ पर असर डाल सकता है. दरअसल, जब बैटरी लंबे समय तक 100 प्रतिशत चार्ज रहती है तो उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. यही वजह है कि कंपनियां इस फीचर को डिफॉल्ट रूप से चालू रखती हैं.
कंपनियां क्यों देती हैं ये फीचर?
आजकल लोग अपने स्मार्टफोन कई सालों तक इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में कंपनियों पर बैटरी की लाइफ बेहतर बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है. लिथियम-आयन बैटरियों के जल्दी खराब होने की सबसे बड़ी वजह ज्यादा गर्मी मानी जाती है.
इसी कारण Android कंपनियां सॉफ्टवेयर आधारित चार्जिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि बैटरी कम गर्म हो और उसकी उम्र बढ़ सके. कुछ नए Android वर्जन में तो ऐसे स्मार्ट सिस्टम भी टेस्ट किए जा रहे हैं जो फास्ट चार्जिंग और बैटरी सुरक्षा के बीच खुद संतुलन बना सकें.
नया चार्जर खरीदने से पहले ये जरूर देखें
अगर आपका स्मार्टफोन अचानक धीरे चार्ज होने लगे तो तुरंत नया चार्जर या केबल खरीदने की जरूरत नहीं है. पहले यह जांच लें कि कहीं Adaptive Charging फीचर चालू तो नहीं. हो सकता है आपका फोन खराब न हो बल्कि वह सिर्फ बैटरी को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा हो.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब Android से iPhone में फाइल भेजना होगा बेहद आसान! Google ला रहा AirDrop जैसा फीचर, इन स्मार्टफोन में मिलेगी सुविधा</title>
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        <description><![CDATA[ AirDrop Feature in Android: Google ने Android और iPhone यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी दी है. अब अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच फाइल शेयरिंग पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाली है. कंपनी ने पुष्टि की है कि Quick Share फीचर को अब कई नए Android स्मार्टफोन्स में AirDrop सपोर्ट के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है. यह फीचर पहले सिर्फ Pixel 10 सीरीज तक सीमित था, लेकिन अब इसे OnePlus, Oppo, Vivo, Samsung, Xiaomi और HONOR के कई डिवाइसेज तक बढ़ाया जा रहा है.
किन स्मार्टफोन्स में मिल चुका है नया फीचर?
Google ने Android Show 2026 इवेंट के दौरान उन डिवाइसेज की सूची जारी की जिनमें फिलहाल AirDrop कम्पैटिबिलिटी वाला Quick Share फीचर उपलब्ध है. इनमें शामिल हैं,

Samsung Galaxy S26 Series
Google Pixel 10 Series
Google Pixel 9 Series
Google Pixel 8a
Oppo Find X9 Series
Oppo Find N6
Vivo X300 Ultra

दिलचस्प बात यह है कि Google ने Pixel 9a और Pixel 8 सीरीज को इस सूची में शामिल नहीं किया.
जल्द इन फोन्स में भी मिलेगा सपोर्ट
कंपनी ने यह भी बताया कि कई पुराने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स को जल्द ही यह सुविधा मिलने वाली है. आने वाले समय में जिन डिवाइसेज में यह फीचर आएगा उनमें शामिल हैं.

Samsung Galaxy S25 Series
Samsung Galaxy S24 Series
Samsung Galaxy Z Flip 7
Samsung Galaxy Z Fold 7
Samsung Galaxy Z Flip 6
Samsung Galaxy Z Fold 6
Samsung Galaxy Z TriFold
Oppo Find X8 Series
OnePlus 15
HONOR Magic V6
HONOR Magic8 Pro

जिन फोन्स में सपोर्ट नहीं उनके लिए भी समाधान
Google ने उन यूजर्स के लिए भी खास इंतजाम किया है जिनके स्मार्टफोन्स में अभी यह फीचर नहीं आया है. कंपनी अब QR Code आधारित शेयरिंग सिस्टम ला रही है. इस फीचर के जरिए Android यूजर Quick Share से QR Code जनरेट कर सकेगा. इसके बाद iPhone या Mac यूजर उस कोड को स्कैन करके सीधे ब्राउजर के जरिए फाइल डाउनलोड कर पाएगा. कंपनी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया End-to-End Encryption के साथ सुरक्षित रहेगी और फाइलें 24 घंटे तक डाउनलोड के लिए उपलब्ध रहेंगी.
WhatsApp जैसे ऐप्स में भी मिलेगा इंटीग्रेशन
Google ने संकेत दिया है कि भविष्य में Quick Share को थर्ड-पार्टी ऐप्स में भी जोड़ा जाएगा. इसमें WhatsApp जैसे लोकप्रिय ऐप्स का नाम भी शामिल है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में ऐप्स के अंदर से ही Android और Apple डिवाइसेज के बीच फाइल शेयर करना और आसान हो सकता है.
आखिर कैसे काम करेगा यह फीचर?
यह नया सिस्टम Android और Apple डिवाइसेज के बीच सीधे फाइल ट्रांसफर की सुविधा देता है. इसमें Peer-to-Peer वायरलेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है जिससे फाइलें किसी बाहरी सर्वर पर नहीं जातीं. अगर कोई iPhone या Mac यूजर Android फोन से फाइल लेना चाहता है तो उसे AirDrop सेटिंग्स में Everyone for 10 Minutes विकल्प चालू करना होगा. इसके बाद Android यूजर सिर्फ फाइल ओपन करके Share विकल्प में जाएगा Quick Share चुनेगा और पास मौजूद Apple डिवाइस पर फाइल भेज सकेगा.
Android और iPhone की दूरी होगी कम
अब तक Android और iPhone के बीच फाइल शेयरिंग सबसे बड़ी परेशानियों में से एक मानी जाती थी. लेकिन Quick Share और AirDrop के इस नए मेल से दोनों प्लेटफॉर्म्स के बीच की दूरी काफी हद तक कम हो सकती है. खासकर उन यूजर्स के लिए यह फीचर बेहद काम का साबित होगा जो अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम वाले डिवाइसेज इस्तेमाल करते हैं.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>मरने के बाद आपके WhatsApp, Photos और Gmail का क्या होता है? कोर्ट ने बताया डिजिटल दुनिया का बड़ा सच</title>
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        <description><![CDATA[ Digital Legacy: आज के दौर में हमारी जिंदगी सिर्फ घर, बैंक अकाउंट या जमीन-जायदाद तक सीमित नहीं रही. अब हमारी यादें, दस्तावेज, तस्वीरें, वीडियो और निजी बातचीत भी डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहती हैं. ऐसे में एक बड़ा सवाल सामने आता है कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके ऑनलाइन डेटा का क्या होता है? हाल ही में गुजरात की एक अदालत ने इस मुद्दे पर अहम फैसला सुनाकर डिजिटल विरासत को लेकर नई बहस शुरू कर दी है.
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला गुजरात के गांधीनगर की एक सिविल कोर्ट तक तब पहुंचा जब एक परिवार अपने दिवंगत सदस्य के लॉक्ड iPhone और iCloud अकाउंट तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था. उस अकाउंट में परिवार की कई महत्वपूर्ण यादें मौजूद थीं जिनमें फोटो, वीडियो, वॉइस नोट्स, दस्तावेज और निजी कॉन्टैक्ट्स शामिल थे. परिवार का कहना था कि इन चीजों की भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों तरह की अहमियत है.
रिपोर्ट के मुताबिक परिवार ने पहले सीधे Apple से संपर्क किया. कंपनी ने जवाब दिया कि अकाउंट रिकवरी केवल उसके Digital Legacy सिस्टम के जरिए ही संभव है और इसके लिए कोर्ट का आधिकारिक आदेश जरूरी होगा जिसमें किसी कानूनी प्रतिनिधि का नाम हो.
इसके बाद मृतक की पत्नी और बेटी ने भारतीय उत्तराधिकार कानून, यानी Indian Succession Act 1925 के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया. चूंकि मृतक ने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी, इसलिए परिवार ने प्रशासनिक अधिकार देने की मांग की.
अदालत ने बेटी को बनाया कानूनी प्रशासक
मामले की सुनवाई के बाद जज हिमांशु चौधरी ने मृतक की बेटी को संपत्ति का कानूनी प्रशासक नियुक्त कर दिया. कोर्ट ने Apple को भी निर्देश दिया कि तकनीकी रूप से जितना संभव हो सके उतना डेटा परिवार को रिकवर करने में मदद की जाए. यह फैसला इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें पहली बार डिजिटल डेटा को किसी व्यक्ति की कानूनी संपत्ति का हिस्सा माना गया.
कोर्ट ने माना डिजिटल डेटा भी एक संपत्ति
इस फैसले का सबसे अहम पहलू यही रहा कि अदालत ने साफ कहा कि डिजिटल डेटा भी संपत्ति की श्रेणी में आ सकता है. परिवार ने दलील दी थी कि भारतीय कानूनों में चल संपत्ति की परिभाषा इतनी व्यापक है कि उसमें डिजिटल एसेट्स को भी शामिल किया जा सकता है भले ही भारत में अभी डिजिटल विरासत को लेकर अलग कानून न हो. अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि iCloud अकाउंट में मौजूद डिजिटल डेटा मृतक की मूल्यवान डिजिटल संपत्ति है और यह उसकी कानूनी विरासत का हिस्सा माना जाएगा.
अपने फैसले में कोर्ट ने कई भारतीय कानूनों का हवाला दिया जिनमें General Clauses Act, Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) और Prevention of Money Laundering Act शामिल हैं. इन सभी में संपत्ति की परिभाषा काफी व्यापक बताई गई है.
कोर्ट ने यह भी माना कि आज के समय में क्रिप्टोकरेंसी और NFTs जैसे डिजिटल एसेट्स को भी आयकर कानून के तहत Virtual Digital Assets की श्रेणी में मान्यता मिल चुकी है. इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में डिजिटल संपत्तियों का कानूनी महत्व और बढ़ सकता है.
मौत के बाद प्राइवेसी का क्या होगा?
इस मामले में एक और बड़ा सवाल प्राइवेसी को लेकर उठा. डिजिटल अकाउंट्स में अक्सर निजी बातचीत, यादें और संवेदनशील जानकारी होती है जिन्हें शायद कोई व्यक्ति सार्वजनिक नहीं करना चाहता.
हालांकि अदालत ने कहा कि निजता का अधिकार व्यक्ति से जुड़ा व्यक्तिगत अधिकार होता है और उसकी मृत्यु के साथ खत्म हो जाता है. कोर्ट ने कानूनी सिद्धांत actio personalis moritur cum persona का हवाला देते हुए कहा कि प्राइवेसी के आधार पर कानूनी वारिसों को डिजिटल संपत्ति संभालने से नहीं रोका जा सकता.
भारत में कानून अभी भी पूरी तरह साफ नहीं
भारत का Digital Personal Data Protection Act 2023 लोगों को यह सुविधा देता है कि वे अपने निधन के बाद डेटा संभालने के लिए किसी व्यक्ति को नामित कर सकें. लेकिन अगर किसी ने पहले से कोई नॉमिनी तय नहीं किया हो तो उस स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, इसे लेकर कानून अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>कैमरे के सामने Two Finger Pose बना सकता है कंगाल! AI से हो रही फिंगरप्रिंट चोरी, जानिए कैसे बचें</title>
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        <description><![CDATA[ कैमरे के सामने Two Finger Pose बना सकता है कंगाल! AI से हो रही फिंगरप्रिंट चोरी, जानिए कैसे बचें ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>पेट्रोल&amp;डीजल के बाद अब मोबाइल रिचार्ज भी हो सकता है महंगा! जानिए क्यों बढ़ रही है टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ पेट्रोल-डीजल के बाद अब मोबाइल रिचार्ज भी हो सकता है महंगा! जानिए क्यों बढ़ रही है टेंशन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>ऐप्स इंस्टॉल करते समय कभी न दें ये परमिशन, कंट्रोल से बाहर हो जाएगा फोन</title>
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        <description><![CDATA[ App Permission: जब भी आप फोन पर नई ऐप इंस्टॉल करते हैं तो कई कैमरा, माइक्रोफोन, मैसेज और कॉन्टैक्ट समेत कई तरह की परमिशन मांगती है. इनमें से कुछ परमिशन ऐप के फंक्शन के लिए जरूरी होती हैं, लेकिन कई परमिशन गैर-जरूरी होती है. ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे ही ऐप्स को सारी परमिशन Allow कर देते हैं. अगर आप भी उनमें से हैं तो यह आदत बदलने की जरूरत है. आज हम जानेंगे कि सिक्योरिटी और प्राइवेसी के लिए आपको किन परमिशन को डिनाई करने की जरूरत होती है.
भूलकर भी Allow न करें ये परमिशन
Accessibility Permission- Accessibility Access को दिव्यांग यूजर्स की मदद के लिए बनाया गया है. इसमें टेक्स्ट को जोर से पढ़कर बताने जैसे फीचर्स मिलते हैं. लेकिन अगर आप किसी अनट्रस्टेड ऐप को यह परमिशन दे देते हैं तो वह ऐप स्क्रीन पर होने वाली हर एक्टिविटी देख सकती. यह आपके पासवर्ड और मैसेज को रीड करने के साथ-साथ आपकी तरफ से ट्रांजेक्शन को भी अंजाम दे सकती है. इसलिए जरूरत न होने पर Accessibility Permission को Allow नहीं करना चाहिए.
Appear on top- यह &#039;अपीयर ऑन टॉप&#039;, &#039;डिस्प्ले ओवर अदर ऐप्स&#039; या &#039;ड्रॉ ओवर अदर ऐप्स&#039; जैसे अलग-अलग नाम से हो सकती है. यह परमिशन देने पर ऐप किसी दूसरी एक्टिव ऐप के ऊपर अपना कंटेट दिखा सकती है. फंक्शन के हिसाब से यह खतरनाक नहीं है, लेकिन अगर किसी संदिग्ध ऐप को यह परमिशन मिल जाए तो यह बैंकिंग या सोशल मीडिया ऐप्स पर फर्जी लॉग-इन स्क्रीन दिखाकर आपकी बैंकिंग डिटेल्स या क्रेडेंशियल चुरा सकती है.
Install Unknown Apps- यह परमिशन देना एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है. यह फीचर ऐप्स को Google Play Store के बाहर किसी भी अनजान या संदिग्ध सोर्स से ऐप इंस्टॉल करने की अनुमति देता है. साइबर अपराधी इसी रास्ते से मालवेयर फैलाने की कोशिश करते हैं. इसलिए किसी अनजान सोर्स से APK फाइल डाउनलोड करने से बचना चाहिए.
Contacts and SMS Access- कई बार टॉर्चलाइट जैसी ऐप्स भी Contacts और SMS Access की परमिशन मांगती है. अगर किसी ऐप को कॉन्टैक्ट और SMS यूज नहीं करने हैं तो उसके इसकी परमिशन न दी. दरअसल Contacts और SMS में बेहद संवेदनशील जानकारी होती है. कॉन्टैक्ट्स में केवल फोन नंबर ही नहीं बल्कि ईमेल और दूसरी निजी जानकारी भी होती है. वहीं SMS में बैंक OTP और पर्सनल कॉन्वर्सेशन जैसी जानकारी मौजूद रहती है. गलत हाथों में पहुंचने पर इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram का नया Instants फीचर नहीं आ रहा पसंद? यहां जानें इसे बंद करने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ How To Turn Off Instants: हाल ही में इंस्टाग्राम ने Instants को लॉन्च किया है. इंस्टाग्राम ऐप में यह एक फीचर के तौर पर शामिल किया गया है, जबकि इसकी स्टैंडअलोन ऐप भी अवेलेबल है. इसे ऑथेंटिक और डिसअपीयरिंग फोटो शेयर करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके जरिए कंपनी स्नैपचैट जैसी ऐप्स को टक्कर देना चाहती है, जो टेंपरेरी कंटेट के कारण पॉपुलर हो रही है. हालांकि, कई यूजर्स को यह फीचर पसंद नहीं आ रहा है. अगर आपको भी यह फीचर पसंद नहीं आ रहा तो इसे बंद किया जा सकता है. आइए Instants को बंद करने का तरीका जानते हैं.
कैसे काम करता है Instants?
इंस्टाग्राम पॉप-अप नोटिफिकेशन के जरिए Instants की जानकारी दे रही है. इनबॉक्स में इसे एक मिनी फोटो स्टैक की तरह दिखाया गया है. इस पर टैप करने के बाद फीचर का थोड़ा इंट्रोडक्शन दिया जाता है. इसमें कैमरा के नीचे शटर बटन है और उसके नीचे आप फ्रेंड्स और क्लोज फ्रेंड्स में किसी एक को चुन सकते हैं. बाई डिफॉल्ट यह फ्रेंड्स पर सेट है. जैसे ही आप शटर बटन दबाएंगे, फोटो कैप्चर होते ही फ्रेंड्स के पास चली जाएगी. अगर आप इसे सिर्फ क्लोज फ्रेंड के साथ शेयर करना चाहते हैं तो आपको मैनुअली क्लोज फ्रेंड को सेलेक्ट करना होगा.
गलती से शेयर हो रहीं फोटोज
इंस्टाग्राम ने फोटो भेजने की प्रोसेस को साफ तौर पर एक्सप्लेन नहीं किया है. इसके चलते कई लोग इंस्टाग्राम पर अपनी फ्रेंड लिस्ट में शामिल उन लोगों के पास भी फोटो भेज दे रहे हैं, जिनके साथ वो शेयर नहीं करना चाहते हैं. हालांकि, इसमें अनडू का भी ऑप्शन मिलता है, लेकिन यह फोटो ओपन होने से पहले तक ही काम करता है. कई लोगों की यह भी शिकायत है कि उन्हें यह पता नहीं चल रहा कि फोटो कब सेंड हो गई. इस कारण कई लोग इस फीचर को बंद करना चाहते हैं.
Instants को बंद कैसे करें?
इंस्टाग्राम में Instants को बंद करने के लिए सबसे पहले अपने प्रोफाइल पर जाएं और स्क्रीन के टॉप-राइट में दिख रहे थ्री-लाइन मेनू पर टैप कर सेटिंग्स ओपन करें. यहां कंटेट प्रेफरेंस के सेक्शन में जाे पर &amp;ldquo;Hide Instants in Inbox&amp;rdquo; का ऑप्शन दिखेगा. इसका टॉगल ऑन कर दें. इसके बाद आपको इनबॉक्स में Instants नजर नहीं आएगा. ध्यान रहे कि इससे आपको फ्रेंड्स की तरफ से भेजे गए Instants भी नहीं दिखेंगे.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक नहीं, दो तरह के होते हैं सोलर एनर्जी सिस्टम, खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-नहीं-दो-तरह-के-होते-हैं-सोलर-एनर्जी-सिस्टम-खरीदने-से-पहले-जान-लें-ये-जरूरी-बातें</link>
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        <description><![CDATA[ Solar Energy System: आज हर घर में बिजली की जरूरत है. समय के साथ इसका यूज बढ़ता जा रहा है इसके साथ-साथ बिजली का बिल भी बढ़ने लगा है. ऐसे में कई लोग अब सोलर एनर्जी की तरफ जाने लगे हैं. सोलर एनर्जी से न सिर्फ बिजली का खर्च बचता है बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है. सोलर एनर्जी को क्लीन एनर्जी माना जाता है. अगर आप भी अपने घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो कुछ बातों की जानकारी होना जरूरी है. आज हम आपको सोलर एनर्जी सिस्टम के टाइप और सोलर पैनल के टाइप के बारे में बताने जा रहे हैं.
सोलर एनर्जी सिस्टम के टाइप
Off-Grid Solar System- इस सिस्टम में सोलर पैनल के साथ इन्वर्टर और बैटरी का यूज होता है. यह ऐसी जगहों पर लगाया जाता है, जहां बिजली थोड़ी देर के लिए आती है. इस सिस्टम में चूंकि बैटरी बैकअप लगा होता है, इसलिए आप बिजली न होने पर भी सोलर एनर्जी की मदद से कूलर-पंखे चला सकते हैं. अगर कहीं बिजली कनेक्शन नहीं है तो वहां भी यह सिस्टम लगाया जा सकता है. यह सिस्टम दिन में जनरेट होने वाली एनर्जी को बैटरी में स्टोर कर लेता है, जिसे रात को यूज किया जाता है.&amp;nbsp;
On-Grid Solar System- इस सिस्टम को मुख्य तौर पर बिजली बचाने के लिए लगाया जाता है. ऑन-ग्रिड होने के कारण यह तभी काम करेगा, जब पावर सप्लाई चलती रहेगी. मेन सप्लाई बंद होने पर ऑन-ग्रिड सिस्टम भी बंद हो जाता है. इस सिस्टम से जनरेट हुई बिजली को आप डायरेक्टली यूज नहीं कर सकते. इस एनर्जी को बिजली घर को बेचा जाता है. अगर आप खपत करने से ज्यादा बिजली जनरेट कर रहे हैं तो आपका बिजली का बिल नहीं आएगा.
सोलर पैनल के टाइप
सोलर पैनल मुख्य तौर पर तीन तरह के होते हैं- मोनोक्रिस्टलाइन, पॉलीक्रिस्टलाइन और थिन फिल्म, लेकिन ज्यादातर मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन ही यूज होते हैं.
मोनोक्रिस्टलाइन- इस तरह के पैनल में सिलिकॉन के सिंगल क्रिस्टल से बनी सोलर सेल्स यूज होती हैं. ब्लैक दिखने वाले इन पैनल की एफिशिएंसी सबसे ज्यादा होती है और इनकी कीमत भी थोड़ी ज्यादा होती है. यह उन जगहों पर ज्यादा काम आते हैं, जहां धूप थोड़ी देर के लिए आती है.
पॉलीक्रिस्टलाइन- इसमें सिलिकॉन के कई मेल्टेड फ्रेगमेंट से बनी सोलर सेल्स यूज होती हैं. ये ब्लू दिखते हैं और इनकी कीमत भी कम होती है. इन्हें उन जगहों पर ज्यादा यूज किया जाता है, जहां दिन के कई घंटे धूप रहती है.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Meta के Smart Glasses ने बदल दिया गेम, हवा में इशारा करने से टाइप हो जाएंगे मैसेज</title>
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        <description><![CDATA[ Meta Ray-Ban Display Smart Glasses Feature: फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने पिछले साल डिस्प्ले वाले Meta Ray-Ban Display स्मार्ट चश्मे लाकर तहलका मचा दिया था. अब कंपनी ने एक और धमाका कर दिया है. मेटा ने अपने स्मार्ट चश्मे के लिए नए एआई-पावर्ड फीचर्स का ऐलान किया है. इसमें सबसे खास न्यूरल हैंडराइटिंग का फीचर है. इसकी मदद से यूजर हवा में हाथ हिलाकर मैसेज टाइप कर सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए फोन को जेब से भी निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सिर्फ हवा में इशारे कर मैसेज भेजे जा सकेंगे.&amp;nbsp;
रिस्टबैंड से होगा सारा कमाल
न्यूरल हैंडराइटिंग का पूरा काम चश्मों के साथ लॉन्च हुए न्यूरल रिस्टबैंड की मदद से होगा. यह रिस्टबैंड यूजर के हाथ के इशारों को ट्रैक कर इनपुट को समझ सकता है. यानी अगर कोई यूजर हवा में कुछ लिखने की कोशिश करेगा तो यह रिस्टबैंड उस एक्शन को फोन पर ट्रांसफर कर देगा. इसकी मदद से मैसेज टाइप करने और इंटरफेस को कंट्रोल करने जैसे काम हो सकता है. नया फीचर आने के बाद अब हवा में इशारे कर व्हाट्सऐप, मैसेंजर और इंस्टाग्राम समेत कई ऐप्स में मैसेज टाइप किए जा सकेंगे.
एआई से हकीकत में हो रहीं फिल्मी चीजें
कुछ समय पहले तक हवा में हाथ हिलाकर मैसेज टाइप करना बिल्कुल फिल्मी चीज लगती थी. अब एआई के आने के बाद ऐसी कई चीजें हकीकत बनती जा रही हैं. एआई की तरह रोबोटिक्स के सेक्टर में भी कमाल हो रहा है. अब फिल्मों में दिखने वाले रोबोट असल दुनिया में आ रहे हैं.
मेटा ने इन फीचर्स का भी किया ऐलान
न्यूरल हैंडराइटिंग के अलावामेटा ने अपने स्मार्ट चश्मे के लिए कई और फीचर्स का भी ऐलान किया है. इनमें डिस्प्ले रिकॉर्डिंग, और एक्सपैंडेड लाइव कैप्शन सपोर्ट के साथ नेविगेशन को भी बेहतर किया गया है. इनमें से कुछ फीचर्स को पहले लिमिटेड अर्ली एक्सेस में ऑफर किया जा रहा था. दरअसल, मेटा चाहती है कि डेली लाइफ के लिए उसका गैजेट और ज्यादा यूजफुल लगे. इसके अलावा स्मार्ट चश्मों के सेगमेंट में बढ़ रहा कंपीटिशन को भी मेटा को नए फीचर्स लाने पर मजबूर कर रहा है. फिलहाल मेटा इस सेगमेंट में सबसे आगे है, लेकिन सैमसंग, ऐप्पल और गूगल भी एंट्री करने को तैयार है. सैमसंग अगले कुछ दिनों में गैलेक्सी स्मार्टग्लासेस लॉन्च कर सकती है तो गूगल और ऐप्पल भी इस साल अपने स्मार्ट चश्मे लाने की तैयारी में जुटी हुई हैं
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Google ने ये क्या कर दिया! नया अकाउंट बनाने पर 15GB की जगह मिलेगी सिर्फ 5GB स्टोरेज</title>
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        <description><![CDATA[ Gmail Storage Reduced: थोड़ी पीछे जाकर याद करें, जब आपने जीमेल पर अकाउंट बनाया था तो 15GB क्लाउड स्टोरेज फ्री मिली थी. सालों तक जीमेल पर यही सिस्टम चला है. गूगल पर नया अकाउंट बनाने का मतलब ही था कि 15GB क्लाउड स्टोरेज फ्री मिलनी है. आप इसे जीमेल, फोटोज या ड्राइव जहां मर्जी यूज कर सकते थे, लेकिन अब यह बदल गया है. गूगल अब नए अकाउंट पर 15GB स्टोरेज नहीं दे रही है. इसकी जगह केवल 5GB स्टोरेज ऑफर की जा रही है. आइए जानते हैं कि यह बदलाव क्यों किया गया है और इससे यूजर पर क्या असर पड़ेगा.
15GB स्टोरेज के लिए पड़ेगी फोन नंबर की जरूरत
अब अगर आप नए गूगल अकाउंट के साथ 15GB स्टोरेज लेना चाहते हैं तो फोन नंबर देना पड़ेगा. अब साइन अप के समय यूजर को एक नया पॉप-अप दिखाया जा रहा है. इसमें लिखा है कि आपके अकाउंट में 5GB स्टोरेज है. आप फोन नंबर देकर बिना किसी लागत के 15GB स्टोरेज पा सकते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल ने मार्च में इसे लेकर अपनी पॉलिसी बदली थी. खास बात यह है कि गूगल ने इस बदलाव की जानकारी नहीं दी थी. कंपनी ने अपने ब्लॉग या सोशल मीडिया हैंडल्स पर इसे लेकर कुछ नहीं बताया. अब नया अकाउंट बनाते समय यूजर को इस बदलाव का पता चल रहा है.
स्टोरेज कम क्यों कर रही है गूगल?
रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल यूजर को केवल एक बार ही 15GB स्टोरेज ऑफर करना चाहती है. कंपनी नहीं चाहती कि यूजर हर बार नया अकाउंट बनाकर इस स्टोरेज का फ्री में फायदा उठा सके. इसलिए इसे मोबाइल नंबर से लिंक किया जा रहा है. इस तरह गूगल को उम्मीद है कि लोग हर बार नया अकाउंट बनाकर क्लाउड स्टोरेज यूज नहीं कर पाएंगे. गूगल ने भी इस बदलाव को कन्फर्म किया है. कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ रीजन में यह टेस्ट किया जा रहा है. इस कारण कई यूजर्स को बिना फोन नंबर दिए भी 15GB स्टोरेज एक्सेस करने का मौका मिल रहा है.
Gmail Storage को खाली कैसे करें?
अगर आप जीमेल पर स्टोरेज की कमी से जूझ रहे हैं तो कुछ आसान तरीके आपकी मदद कर सकती है. इससे स्टोरेज भी फ्री हो जाएगी और आपको एक्स्ट्रा स्टोरेज के लिए पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.

ट्रैश और स्पैम फोल्डर को एकदम खाली कर दें.
बड़ी अटैचमेंट वाले ईमेल्स को डिलीट कर दें.
न्यूजलैटर और प्रमोशनल ईमेल्स की सफाई से भी स्टोरेज खाली होगी.

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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>आपके Passwords और Banking डिटेल्स पर मंडरा रहा खतरा! सरकार ने जारी की वॉर्निंग</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome Users Are At Risk: अगर आप Google Chrome यूज करते हैं तो सावधान हो जाने की जरूरत है. इस ब्राउजर में कुछ गंभीर सिक्योरिटी खामियां सामने आई हैं, जिनका फायदा उठाकर साइबर हमलावर आपके सिस्टम को निशाना बना सकते हैं. इन कमजोरियों की मदद से अटैकर्स आपका निजी डेटा चुरा सकते हैं, मालवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं और कई मामलों में पूरे सिस्टम को ठप भी कर सकते हैं. इन खतरों को देखते हुए सरकारी एजेंसी CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) ने अलर्ट जारी किया है. बता दें कि Google Chrome दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले ब्राउजरों में शामिल है और भारत में करोड़ों लोग इसे ऑफिस और पर्सनल काम के लिए इस्तेमाल करते हैं.
Google Chrome के इन वर्जन्स पर ज्यादा खतरा
सरकारी एजेंसी की तरफ से जारी अलर्ट में बताया गया है कि Linux पर 148.0.7778.96 और विंडोज और मैक सिस्टम पर 148.0.7778.96/97 से पुराने वर्जन पर इन सुरक्षा खामियों के कारण खतरा है. इन खामियों का फायदा उठाकर अटैकर्स यूजर्स को मलेशियस वेबसाइट ओपन करने या किसी हार्मफुल लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर कर सकते हैं. ऐसा होने पर अटैकर्स सिस्टम से पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल समेत सेंसेटिव डेटा चुरा सकते हैं. इसके अलावा वो सिस्टम को क्रैश और ब्राउजर को सिक्योरिटी प्रोटेक्शन को बाईपास भी कर सकते हैं.&amp;nbsp;
क्रोम में पाई गई हैं ये खामियां
साइबर सिक्योरिटी एजेंसी ने क्रोम के अंदर कई कंपोनेंट में सुरक्षा खामियों का पता लगाया है. जानकारी के मुताबिक, क्रोम के रेंडरिंग इंजन, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग और मेमोरी हैंडलिंग में ये खामिया पाई गई हैं. इसके अलावा मेमोरी एरर, इनपुट वैलिडेशन में गड़बड़ और सिक्योरिटी पॉलिसी बाईपास को भी डिटेक्ट किया गया है. पढ़ने में ये सारी चीजें टेक्नीकल लगती हैं, लेकिन इनका असर सीधा आपके डेटा और डिवाइस सिक्योरिटी पर होगा.&amp;nbsp;
यूजर्स के पास अब क्या रास्ता?
एजेंसी ने सभी यूजर्स को सलाह दी है कि वे अपने Google Chrome ब्राउजर को तुरंत अपडेट करें. इन सिक्योरिटी खामियों को ठीक करने के लिए कंपनी ने नए सिक्योरिटी पैच जारी किए हैं, जिन्हें ब्राउजर अपडेट करके इंस्टॉल किया जा सकता है. इसके लिए सबसे पहले क्रोम ओपन करें, फिर Help सेक्शन में जाकर &amp;ldquo;About Google Chrome&amp;rdquo; पर क्लिक करें. अगर वहां कोई नया अपडेट उपलब्ध दिखाई दे तो उसे तुरंत डाउनलोड और इंस्टॉल कर लें. बता दें कि लेटेस्ट फीचर्स और बग्स से बचने के लिए हमेशा ऐप्स और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखना चाहिए.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Seekho App Scam:  क्या है SEEKHO ऐप, जिसे 150 मिलियन लोगों ने किया डाउनलोड, इसमें लोगों के साथ कैसे हुई ऑनलाइन ठगी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/seekho-app-scam-क्या-है-seekho-ऐप-जिसे-150-मिलियन-लोगों-ने-किया-डाउनलोड-इसमें-लोगों-के-साथ-कैसे-हुई-ऑनलाइन-ठगी</link>
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        <description><![CDATA[ Seekho App Scam:  क्या है SEEKHO ऐप, जिसे 150 मिलियन लोगों ने किया डाउनलोड, इसमें लोगों के साथ कैसे हुई ऑनलाइन ठगी? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Panel से बनेगी फुल बिजली, आज ही जान लें एफिशिएंसी बढ़ाने के 6 तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Use Tips: सोलर पैनल लगाने के बाद बिजली के बिल से छुटकारा मिल जाता है. आपके घर की छत पर लगा सोलर एनर्जी सिस्टम न सिर्फ बिजली जनरेट करता है बल्कि आपके पैसे की भी बचत करता है. सोलर तरीको को ठीक तरीके से मैंटेन कर बिजली जनरेशन बढ़ाया जा सकता है. आज हम आपको कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, जिससे सोलर पैनल फुल एफिशिएंसी के साथ काम कर पाएंगे. अगर आप इन टिप्स को इग्नोर कर देते हैं तो एफिशिएंसी में कमी आ सकती है और सोलर पैनल अपने फुल पोटेंशियल के साथ काम नहीं कर पाएंगे.&amp;nbsp;
कैसे बढ़ाएं सोलर पैनल की एफिशिएंसी?
पैनल की पॉजीशन सही करें- मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए सोलर पैनल की पॉजीशन सही होना जरूरी है. सोलर पैनल हमेशा साउथ फेसिंग होने चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा सनलाइट को कैप्चर किया जा सके. इसके अलावा सोलर पैनल को कितना टिल्ट किया जाता है, यह भी एनर्जी जनरेशन के लिए बहुत जरूरी है.
पैनल को रखें साफ- सोलर पैनल को साफ रखना बहुत जरूरी है. पैनल गंदे होने पर एनर्जी प्रोडक्शन में 15 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है. खुले में लगे होने के कारण इन पर धूल-मिट्टी जम जाती है, जो सनलाइट को ब्लॉक कर सकती है. इसलिए पैनल को नियमित तौर पर पानी और मुलायम कपड़े या ब्रश से साफ करते रहें.&amp;nbsp;
शेडिंग न होने दें- पैनल को ऐसी जगह पर लगाने से बचें, जहां दिन में कई घंटे छाया रहती है. इससे एनर्जी प्रोडक्शन कम होता है. अगर किसी पेड़ की टहनी बढ़कर पैनल को छाया दे रही है तो उसे हटा दें. कोशिश करें कि पैनल पर ज्यादा से ज्यादा समय तक धूप रहे.
टेंपरेचर से भी पड़ता है फर्क- यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन ज्यादा टेंपरेचर में सोलर पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है. इसलिए टेंपरेचर का ध्यान रखना जरूरी है. सोलर पैनल को ऐसी जगह पर इंस्टॉल करवाएं, जहां वेंटिलेशन हो सके. इसके अलावा छत से थोड़ी ऊंचाई पर लगाकर भी एयर सर्कुलेशन के कारण टेंपरेचर को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है.
हाई क्वालिटी पैनल चुनें- सारे पैनल एक तरह से नहीं बनाए जाते हैं. मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए हाई क्वालिटी वाले पैल चुनें. इनकी लागत भले ही ज्यादा हो, लेकिन इनका लाइफ स्पैन ज्यादा होता है और ये ज्यादा बिजली जनरेट कर पाएंगे. इसी तरह इन्वर्टर और बैटरी की क्वालिटी से भी समझौता न करें.
मैंटेनेंस पर भी दें ध्यान- अगर आपके एनर्जी सिस्टम सही चल रहा है, फिर भी साल में एक या दो बार प्रोफेशनल टेक्नीशियन को इसे दिखाना जरूरी है. इससे पैनल या सिस्टम में किसी प्रकार की गड़बड़ का पता चल जाएगा और उसे समय पर रिपेयर किया जा सकता है. इससे सोलर एनर्जी सिस्टम की एफिशिएंसी कम नहीं होगी.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर रहेगी नजर, पैरेंट्स के लिए Instagram पर आएगा नया टूल</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Supervision Tool: अगर आपके बच्चे पूरे दिन इंस्टाग्राम में घुसे रहते हैं तो अब आप उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रख सकेंगे. दरअसल, इंस्टाग्राम ने एक नए सुपरविजन टूल का ऐलान किया है, जिसकी मदद से पैरेंट्स यह देख पाएंगे कि उनके बच्चे इंस्टाग्राम पर क्या देख रहे हैं. उनके फीड, रील और एक्सप्लोर सेक्शन में क्या-क्या आ रहा है. यह सुपरविजन टूल केवल टीन अकाउंट्स पर काम करेगा. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि इस टूल की मदद से पैरेंट्स टीन के इंस्टाग्राम एल्गोरिदम को समझ पाएंगे और उन्हें यह भी पता लग सकेगा कि उनके बच्चे किन टॉपिक्स में इंट्रेस्टेड हैं.
क्यों पड़ी इस फीचर की जरूरत?
मेटा ने बताया कि इस फीचर को ऐसे डिजाइन किया गया है कि इसकी मदद से फैमिलीज यह समझ सकेगी कि उनके बच्चों के इंस्टाग्राम पर कोई कंटेट क्यों दिखाया जा रहा है. अगर कोई टीन यूजर स्पोर्ट्स, म्यूजिक और फोटोग्राफी जैसे टॉपिक को ज्यादा देखता है तो इस टूल के जरिए पैरेंट्स को इन कैटेगरीज की जानकारी मिल जाएगी. यह टूल पिछले साल लाए गए &#039;योर एल्गोरिदम&#039; टूल पर बना हुआ है. पुराने टूल के जरिए यूजर को अपने एल्गोरिदम को कुछ हद तक कस्टमाइज करने का ऑप्शन मिलता है.
नई कैटेगरी एड होने पर पैरेंट्स के पास जाएगी नोटिफिकेशन
अगर कोई टीन यूजर अपने इंट्रेस्ट में कोई नई कैटेगरी जोड़ता है तो इसकी नोटिफिकेशन उसके पैरेंट्स के पास जाएगी. इससे उन्हें यह पता चल सकेगा कि बच्चे के फीड में अचानक से अलग कैटेगरी का कंटेट कैसे आने लगा है. नया सुपरविजन टूल आज से रोल आउट होने शुरू हो गया है और इसे सबसे पहले इंग्लिश भाषा के यूजर्स के लिए अवेलेबल करवाया जाएगा. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में भी इस फीचर को लॉन्च किया जाएगा.&amp;nbsp;
एआई पर नजर रखने के लिए भी आएगा टूल
इंस्टाग्राम एक्टिविटी पर नजर रखने के साथ-साथ कंपनी ने कुछ दिन पहले एक और टूल लॉन्च किया था, जिसके जरिए यह देखा जा सकता है कि बच्चे एआई को कैसे यूज कर रहे हैं. इंस्टाग्राम के साथ-साथ फेसबुक और मैसेंजर के लिए भी इसे रोल आउट किया गया है. इसमें एक नई इनसाइट टैब दी गई है, जिसमें पैरेंट्स उन टॉपिक्स को देख सकते हैं, जिनके बारे में उनके बच्चों ने एआई से सवाल पूछे हैं. इसमें रिसेंट 7 दिनों का डेटा आएगा और सवालों की जगह यह उन टॉपिक्स को लिस्ट करेगा, जिनके बारे में टीन यूजर्स ने एआई से बातचीत की है.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मार्केट से क्यों गायब हो रहे हैं सस्ते फोन? 10,000 रुपये से कम कीमत वाले ऑप्शंस हुए कम</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Price: एक तरफ मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ रही हैं और दूसरी तरफ सस्ते फोन मार्केट से गायब होते जा रहे हैं. एक समय 10,000 रुपये से कम कीमत में कई अच्छे मोबाइल फोन मौजूद थे, लेकिन अब इनकी संख्या बहुत कम हो गए है. इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन (IDC) की नई रिपोर्ट भी इस और इशारा कर रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की पहली तिमाही में लगभग 10,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की शिपमेंट में सालाना आधार पर 59 प्रतिशत कमी आई है. यानी अब मार्केट में सस्ते फोन कम आ रहे हैं. आइए इसके पीछे के कारणों पर एक नजर डालते हैं.
कितने कम हो गए सस्ते फोन?
IDC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की पहली तिमाही में भारत की स्मार्टफोन शिपमेंट में 4.1 प्रतिशत की कमी आई है. पिछले साल भारत की स्मार्टफोन शिपमेंट में 18 प्रतिशत किफायती स्मार्टफोन थे. यह संख्या इस साल गिरकर सिर्फ 8 प्रतिशत रह गई है. बता दें कि दाम बढ़ने के कारण इस साल ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में भी गिरावट आने का अनुमान लगाया जा रहा है. मेमोरी चिप्स संकट के कारण ऐप्पल और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों पर भी असर पड़ा है.
मार्केट से क्यों गायब हो रहे हैं सस्ते फोन?
पिछले कुछ समय से मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ी हैं. इसके पीछे मेमोरी चिप्स की कमी और दूसरे पार्ट्स की लगातार बढ़ती कीमतें हैं. इस कारण कंपनियों के लिए फोन की कीमतें कम रखना मुश्किल हो रहा है. कम बचत के कारण कंपनियों ने अब सस्ते फोन बनाने बंद कर दिए हैं. इस वजह से पहले सस्ते फोन खरीदने वाले लोगों को अब महंगे फोन खरीदने पड़ रहे हैं. इस साल की पहली तिमाही में 10,0000-20,000 रुपये की कीमत वाले फोन की खूब डिमांड देखी गई थी. अब इस बजट सेगमेंट के फोन की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है.&amp;nbsp;
फोन की औसत कीमत 29,000 रुपये पहुंची
भारत में अब लोग महंगे फोन ज्यादा खरीद रहे हैं. पिछले काफी समय से प्रीमियम सेगमेंट की मांग में उछाल देखा गया है. यही कारण है कि भारत में स्मार्टफोन की औसत कीमत 29,000 रुपये पहुंच गई है. पिछले साल की तुलना में इसमें 10 प्रतिशत की बढोतरी हुई है. अगर भारत में सबसे पॉपुलर ब्रांड की बात की जाए तो IDC के अनुसार, वीवो के फोन सबसे ज्यादा बिक रहे हैं और सैमसंग बिक्री के मामले में दूसरे नंबर है. ओप्पो भी तेजी से पॉपुलर हो रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मार्केट, से, क्यों, गायब, हो, रहे, हैं, सस्ते, फोन, 10, 000, रुपये, से, कम, कीमत, वाले, ऑप्शंस, हुए, कम</media:keywords>
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        <title>Snapchat की हो जाएगी छुट्टी? Instagram ने फोटो शेयरिंग के लिए लॉन्च की Instants ऐप</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Launches Instants App: Snapchat को टक्कर देने के लिए इंस्टाग्राम ने Instants ऐप को लॉन्च कर दिया है. कुछ मार्केट्स में टेस्ट करने के बाद अब इसे ग्लोबली लॉन्च किया जा रहा है. स्नैपचैट की तरह ही इस पर फोटो देखते या गायब हो जाएगी &amp;nbsp;और 24 घंटे के बाद उसे एक्सेस नहीं किया जाएगा. इसे इंस्टाग्राम के साथ-साथ स्टैंडअलोन ऐप के जरिए भी एक्सेस किया जा सकता है. यानी आप इंस्टाग्राम से भी Instants यूज कर सकते हैं और अलग से Instants ऐप डाउनलोड कर भी इसे एक्सेस कर पाएंगे.
कैसे काम करेगी Instants App?
जैसा हमने ऊपर बताया कि इसे इंस्टाग्राम के अलावा स्टैंडअलोन ऐप के तौर पर यूज किया जा सकता है. यह ऐप डायरेक्टली कैमरा में ओपन होगी. यहां आप कोई भी फोटो लेकर इसे अपने क्लोज फ्रेंड्स या फॉलोवर्स के साथ शेयर कर सकेंगे. इसके साथ कुछ लिमिटेशन भी लगाई गई है. Instants पर ली गई फोटोज को एडिट नहीं किया जा सकता और न ही आप इस पर गैलरी से फोटो अपलोड कर सकते हैं. फोटो लेने के बाद यूजर के पास सिर्फ कैप्शन एड करने का ऑप्शन होगा. यह इंस्टाग्राम पर नजर आने वाली एडिटेड इमेज से पूरा अलग एक्सपीरियंस होगा और इसमें यूजर ऑथेंटिक इमेजेज शेयर कर पाएंगे.
स्क्रीनशॉट रहेंगे ब्लॉक
Instants ऐप से भेजी गई फोटोज सामने वाले यूजर्स के इनबॉक्स में दिखेंगी. उसके पास इमोजी, रिप्लाई करने और खुद की इंस्टैंट वापस भेजने का ऑप्शन होगा. इंस्टाग्राम का कहना है कि इस ऐप के जरिए भेजी गई फोटो का स्क्रीन शॉट नहीं लिया जा सकता. इसी तरह स्क्रीन रिकॉर्डिंग का सपोर्ट भी नहीं होगा. इसके अलावा इसमें भेजी गई फोटो को कैंसिल करने के लिए अनडू का ऑप्शन मिलेगा. इसे फोटो ओपन करने से पहले तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
स्नैपचैट को टक्कर देने की नई कोशिश
Instants App के जरिए इंस्टाग्राम ने स्नैपचैट जैसी ऐप को टक्कर देने की कोशिश की है. Snapchat, BeReal और Locket Widget जैसी ऐप्स काफी पॉपुलर हुई हैं और ये सारी टेंपरेरी कंटेट की सुविधा देती है. अब इंस्टैंट के जरिए इंस्टाग्राम भी इस ट्रेंड में शामिल होना चाह रही है. हालांंकि, इसमें इंस्टाग्राम ने कुछ बदलाव किए हैं. जैसे शेयर किए गए Instants को एक साल तक प्राइवेट आर्काइव में रखा जा सकता है और बाद में इन्हें स्टोरी रिकैप के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा इंस्टाग्राम ने इसमें फैमिली सेंटर कंट्रोल और शेयर्ड स्क्रीन टाइम लिमिट जैसे टीन सेफ्टी सिस्टम भी जोड़े हैं.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>ChatGPT से मेडिकल सलाह लेना हो सकता है जानलेवा, टीनएजर की चली गई जान</title>
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        <description><![CDATA[ AI Medical Advice Risk: एआई चैटबॉट ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI एक और कानूनी मुकदमे में फंस चुकी है. एक 19 वर्षीय युवक सैम नेल्सन के परिवार ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. इसमें कहा गया है कि ChatGPT ने सैम को खतरनाक ड्रग्स लेने के लिए कहा था, जिससे उसकी मौत हो गई. शिकायतकर्ता का कहना है कि सैम लंबे समय से ChatGPT पर भरोसा करता आ रहा था. वह ड्रग्स के कॉम्बिनेशन और डोज को लेकर इस चैटबॉट की एडवाइस लेता था. पैरेंट्स की शिकायत है कि चैटबॉट ने उनके बेटे को खतरनाक दवाओं को लेकर वॉर्निंग नहीं दी.
OpenAI पर लगे बड़े आरोप
सैम के पिता का दावा है कि ChatGPT के GPT-4o मॉडल ने एक गैरकानूनी ड्रग कोच की तरह काम करते हुए उसे खतरनाक कॉम्बिनेशन सजेस्ट किए थे. इस चैटबॉट ने उसे ड्रग्स यूज को लेकर न कोई चेतावनी दी और न ही मेडिकल सलाह लेने की सलाह दी. मुकदमे में कहा गया है कि कंपनी ने जानबूझकर अनसेफ मॉडल को रिलीज किया था और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए सेफगार्ड भी हटा दिए. मुकदमे में सैम की चैटबॉट के साथ हुई चैट को भी शामिल किया गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें ChatGPT ने सैम को डोज बताई थी और ड्रग्स के एक्सपीरियंस को लेकर पॉजीटिव बातें की थी. हालांकि, कहीं-कहीं यह चैटबॉट ड्रग्स के खतरनाक कॉम्बिनेशन बताते हुए गिरफ्तारी के डर का भी जिक्र कर रहा था. कथित ड्रग्स ओवरडोज के कारण सैम की पिछले साल मौत हो गई थी.
OpenAI का इस पर क्या कहना है?
OpenAI ने सैम की मौत की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है. कंपनी के बयान में कहा गया है कि संबंधित मॉडल अब अवेलेबल नहीं है. सिस्टम को हार्मफुल रिक्वेस्ट को डिटेक्ट करने और यूजर को किसी एक्सपर्ट के पास जाने की सलाह देने के लिए डिजाइन किया गया है.&amp;nbsp;
कई कानूनी मुश्किलों में घिर चुका है GPT-4o
OpenAI का GPT-4o मॉडल कई कानूनी मुश्किलों में घिर चुका है. इस पर सेल्फ हार्म, डिल्यूशनल और एआई साइकोसिस जैसे खतरनाक यूजर बिहेवियर को प्रमोट करने के आरोप लगे हैं. एआई साइकोसिस उस सिचुएशन को कहा जाता है, जब कोई यूजर खतरनाक तरीके से किसी एआई से इमोशनली या साइकोलॉजिकली अटैच हो जाता है. इसके अलावा इस मॉडल पर चाटुकारिता करने के भी आरोप लगे थे. यानी यह यूजर की ज्यादातर गलत बातों को भी चैलेंज करने की बजाय उनसे सहमति जताता था.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:26 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp पर आ गया Incognito Chat फीचर, अब दिल खोलकर करें एआई से बातें</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Incognito Chat: Meta ने अपने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के लिए एक नया फीचर रोल आउट किया है. अब आप इस प्लेटफॉर्म पर एआई से दिल खोलकर बातें कर सकेंगे और यह टेंशन लेने की जरूरत नहीं है कि कोई आपकी चैटिंग को पढ़ सकता है. अब व्हाट्सऐप पर मेटा एआई से बात करने के लिए आप Incognito Chat मोड ऑन कर सकते हैं. यह आपको पूरी प्राइवेसी देगी. मेटा का कहना है कि इस मोड में हुई बातचीत को कंपनी के सर्वर पर स्टोर नहीं किया जाएगा. व्हाट्सऐप के साथ-साथ मेटा एआई ऐप पर भी यह फीचर लॉन्च किया गया है.&amp;nbsp;
खुद जुकरबर्ग ने किया Incognito Chat फीचर का ऐलान
मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अपने व्हाट्सऐप चैनल पर इस फीचर का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि यह एआई के साथ बात करने का एक प्राइवेट तरीका है, जो एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड मैसेजिंग की तरह काम करेगा. जुकरबर्ग ने कहा कि व्हाट्सऐप और मेटा एआई ऐप के साथ इसकी शुरुआत हो रही है और इसके बाद मेटा और व्हाट्सऐप समेत कोई भी आपकी चैटिंग को नहीं पढ़ पाएगा. यह ध्यान देने वाली बात है कि यूजर्स को इनकॉग्निटो चैटिंग का ऑप्शन केवल मेटा एआई के साथ मिलेगा. बाकी कॉन्टैक्ट के साथ चैटिंग करते समय एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन लागू रहेगा.
कैसे काम करेगा Incognito Chat का फीचर?
मेटा के मुताबिक, यह फीचर एक ट्रस्टेड एग्जीक्यूशन एन्वायरनमेंट (TEE) में एआई रिक्वेस्ट को प्रोसेस करता है. इस वजह से मेटा या व्हाट्सऐप इसे एक्सेस नहीं कर पाएंगी. इसके अलावा सेशन पूरा होने के बाद यह बातचीत यूजर के फोन से भी गायब हो जाएगी. जुकरबर्ग का कहना है कि यही चीज इस फीचर को बाकी डिसअपीयरिंग एआई चैट सर्विसेस से अलग बनाती है, जहां बातचीत के लॉग्स को महीनों तक सर्वर पर सेव रखा जा सकता है.
क्यों पड़ी Incognito Chat फीचर की जरूरत?
इस फीचर की जरूरत बताते हुए जुकरबर्ग ने कहा कि एआई सिस्टम और एआई टूल्स अब पर्सनल कामों के लिए भी यूज होने लगे हैं और इस वजह से यूजर्स को इनसे बातचीत करते समय प्राइवेसी की जरूरत है. पर्सनल सुपरइंटेलीजेंस का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने के लिए हमें सेंसेटिव टॉपिक डिस्कस करने के लिए ऐसे तरीकों की जरूरत है, जिससे इन्हें कोई और एक्सेस न कर पाएं. कंपनी ने अभी इस फीचर को व्हाट्सऐप और मेटा एआई ऐप पर रोल आउट करना शुरू कर दिया है. हालांकि, यह जानकारी नहीं मिली है कि इसे किन-किन देशों में लॉन्च किया जाएगा.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>Google Chrome बिना बताए डाउनलोड कर रहा है 4GB की AI फाइल, ये है इसे रोकने और डिलीट करने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome AI File Download: कुछ दिन पहले रिपोर्ट्स आई थीं कि गूगल क्रोम यूजर्स को बताए बिना उनके डिवाइस पर 4GB की एआई मॉडल फाइल डाउनलोड कर रहा है. इस फाइल का नाम weights.bin है और यह गूगल के ऑन-डिवाइस जेमिनी नैनो एआई मॉडल से जुड़ी हुई है, जो स्कैम डिटेक्शन, ऑटोफिल सजेशन और हेल्प मी राइट जैसे फीचर को सपोर्ट करता है. यह फाइल 4GB की है, जो स्टोरेज की कमी से जूझ रहे यूजर्स के लिए काफी बड़ी है. अगर आप अपने डिवाइस पर इस फाइल को नहीं रखना चाहते तो इसे आसानी से डिलीट किया जा सकता है. आज हम आपको इसे डिलीट करने और दोबारा डाउनलोड होने से रोकने का तरीका बताने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
सबसे पहले जानें इस फाइल के अंदर क्या है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फाइल गूगल के जेमिनी नैनो ऑन-डिवाइस एआई सिस्टम का एक हिस्सा है. क्लाउड-बेस्ड सर्वर पर डिपेंड रहने की बजाय कुछ फीचर्स को रन करने के लिए गूगल यूजर के कंप्यूटर पर स्टोर एआई मॉडल को यूज करती है. यह फाइल क्रोम का ऐप्लिकेशन डेटा फोल्डर में स्टोर हो रही है और क्रोम का नया वर्जन अपडेट करने के बाद नजर आती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसे डाउनलोड करने से पहले क्रोम यूजर को कोई नोटिफिकेशन या अलर्ट नहीं देता है.
क्या आपके डिवाइस पर स्टोर है यह फाइल?
सबसे पहले आपको यह देखना होगा कि यह फाइल आपके डिवाइस पर स्टोर है या नहीं. इसके लिए मैकबुक पर ऐप्लिकेशन सपोर्ट ओपन कर गूगल को ओपन करें. यहां से क्रोम सेक्शन को ओपन कर डिफॉल्ट पर जाएं. यहां &amp;ldquo;OptGuideOnDeviceModel&amp;rdquo; नाम से बने फोल्डर को ओपन करें. इसमें अगर आपको weights.bin नाम से फाइल दिख रही है तो इसका मतलब है कि आपके डिवाइस पर यह डाउनलोड हो चुकी है. विंडोज लैपटॉप पर फाइल एक्सप्लोर ओपन कर उसमें &amp;ldquo;%LOCALAPPDATA%\Google\Chrome\User Data&amp;rdquo; को पेस्ट कर दें. इसे एंटर करने के बाद आने वाली लिस्ट में &amp;ldquo;OptGuideOnDeviceModel&amp;rdquo; नाम के फोल्डर को ओपन करें. इसमें अगर weights.bin नाम से फाइल है तो यह मॉडल आपके डिवाइस पर स्टोर हो चुका है.
कैसे करें डिलीट?
अगर आप फोल्डर में ही इस फाइल को डिलीट कर देंगे तो क्रोम इसे फिर से डाउनलोड कर सकता है. इससे पीछा छुड़ाने के लिए आपको क्रोम के ऑन-डिवाइस एआई फीचर डिसेबल करने पड़ेंगे. इसके लिए क्रोम ब्राउजर को ओपन कर सेटिंग में जाएं और सिस्टम में जाकर On-device AI को बंद कर दें. इसके बाद आप इस फाइल को डिलीट कर सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सैमसंग के लेटेस्ट Galaxy S26 Ultra पर आ गया बंपर डिस्काउंट, लॉन्च होने के 3 महीने बाद ही हो गया इतना सस्ता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सैमसंग-के-लेटेस्ट-galaxy-s26-ultra-पर-आ-गया-बंपर-डिस्काउंट-लॉन्च-होने-के-3-महीने-बाद-ही-हो-गया-इतना-सस्ता</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सैमसंग-के-लेटेस्ट-galaxy-s26-ultra-पर-आ-गया-बंपर-डिस्काउंट-लॉन्च-होने-के-3-महीने-बाद-ही-हो-गया-इतना-सस्ता</guid>
        <description><![CDATA[ Galaxy S26 Ultra Price Drops: सैमसंग का Galaxy S26 Ultra को फरवरी में लॉन्च किया गया था. यह इस साल लॉन्च होने वाले सबसे धाकड़ फ्लैगशिप फोन में से एक है. प्रीमियम लुक, दमदार कैमरा और एक से बढ़कर एक एआई फीचर्स समेत यह फोन एक कंप्लीट पैकेज है. लॉन्चिंग के लगभग तीन महीने बाद ही यह फोन पर बंपर डिस्काउंट के साथ अवेलेबल है. अमेजन से इस फोन को खरीदकर आप 10,000 रुपये से अधिक की बचत कर सकते हैं. अगर आप कोई प्रीमियम फोन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं तो यह आपके लिए एक शानदार मौका हो सकता है. आइए Galaxy S26 Ultra के फीचर्स और इस डील के बारे में विस्तार से जान लेते हैं.
सबसे पहले देखें Galaxy S26 Ultra के फीचर्स
S26 Ultra को 6.9 इंच के QHD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया गया था, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर लगा है. कंपनी का दावा है कि परफॉर्मेंस को बेहतर करने के लिए इस प्रोसेसर को क्वालकॉम के साथ मिलकर खासतौर पर ऑप्टिमाइज किया गया है. &amp;nbsp;कैमरा की बात करें तो इसके रियर में 200MP+50MP+50MP+10MP क्वॉड कैमरा सेटअप और फ्रंट में 12MP कैमरा मिलता है. 5,000mAh की बैटरी पैक वाले इस फोन में कई दमदार एआई फीचर्स है. इसका प्राइवेसी डिस्प्ले इसे और खास बनाता है. इसे ऑन करते ही यूजर के आसपास बैठे लोगों के लिए स्क्रीन एकदम डार्क हो जाती है.&amp;nbsp;
अमेजन पर मिल रही यह डील
Galaxy S26 Ultra के 12GB+256GB वेरिएंट को भारत में 1,59,999 रुपये में लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी यह अमेजन पर 1,50,999 रुपये में लिस्टेड है. इस पर सेलेक्टेड क्रेडिट कार्ड के जरिए 4500 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी पाया जा सकता है. इस तरह यह फोन 13,000 रुपये से भी ज्यादा के डिस्काउंट के साथ खरीदा जा सकता है. ध्यान रहे कि यह डिस्काउंट लिमिटेड टाइम के लिए है.&amp;nbsp;
आईफोन 17 को भी सस्ते में खरीदने का मौका
सैमसंग के फ्लैगशिप मॉडल की तरह ऐप्पल के फ्लैगशिप iPhone 17 को भी अभी छूट के साथ खरीदा जा सकता है. यह आईफोन 82,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ था, लेकिन क्रोमा की सेल में इस फोन को 45,000 रुपये से भी कम में खरीदा जा सकता है. क्रोमा पुराने फोन पर 23,500 रुपये तक की एक्सचेंज वैल्यू, 8,000 रुपये तक का एडिशनल एक्सचेंज बोनस, 1658 रुपये का डिस्काउंट कूपन और 4974 रुपये की कीमत का Tata Neu Coins बेनेफिट दे रही है. इन सबको मिला लिया जाए तो नया iPhone 17 खरीदने के लिए आपको 44,768 रुपये चुकाने होंगे. यह सेल 16 मई तक लाइव रहेगी.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>AI से पूछो सेहत के राज, लोन की बात या करियर की टेंशन! किसी को नहीं बताएगा WhatsApp का नया फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ आपने AI से कभी कोई ऐसी बात पूछी है जो आप किसी इंसान को नहीं बता सकते? शायद कोई बीमारी के बारे में, कर्ज की परेशानी के बारे में या ऑफिस में चल रही किसी मुश्किल के बारे में. अब तक डर यही रहता था कि यह सब कंपनी के पास जा रहा है, लेकिन WhatsApp एक नया फीचर लाया है, जो इस डर को खत्म करने का दावा कर रहा है.&amp;nbsp;
Meta ने बुधवार (13 मई) को WhatsApp और Meta AI ऐप पर Incognito Chat फीचर लॉन्च किया. इसमें आप Meta AI से जो भी बात करेंगे, वह न Meta देख पाएगा, न कोई और. चैट खत्म होते ही सब कुछ गायब हो जाएगा.
कैसे काम करता है यह फीचर?
यह फीचर WhatsApp की Private Processing टेक्नोलॉजी पर बना है. जब आप Incognito Chat शुरू करते हैं तो आपकी बातचीत एक ऐसे सुरक्षित माहौल में प्रोसेस होती है, जिसे Meta खुद भी नहीं देख सकता. ऐप बंद करते ही या फोन लॉक होते ही सेशन खत्म हो जाता है और मैसेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं. कुछ भी सेव नहीं होता.
क्यों बनाया गया है फीचर?
WhatsApp के प्रमुख Will Cathcart का कहना है कि लोग अब AI से जिंदगी के बड़े और निजी सवाल पूछने लगे हैं. हर बार यह जरूरी नहीं कि उन सवालों के पीछे की जानकारी कंपनियों तक भी पहुंचे. यही सोचकर यह फीचर बनाया गया है.&amp;nbsp;
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इस फॉर्मेट में ही करेगा काम
फिलहाल Incognito Chat सिर्फ टेक्स्ट में काम करेगा. आप कोई फोटो या डॉक्युमेंट शेयर नहीं कर पाएंगे. इसमें सेफ्टी फिल्टर भी लगे हैं, जो गलत या खतरनाक सवालों के जवाब देने से मना कर देंगे. Meta ने यह भी साफ किया है कि सामान्य Meta AI बातचीत को कंपनी अपने मॉडल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन Incognito Chat इससे अलग है और इसे ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा.
यह फीचर भी लाने की तैयारी में Meta
Meta अगले कुछ महीनों में Side Chat फीचर भी लाने वाला है. इसमें आप WhatsApp पर चल रही किसी भी बातचीत के बीच में Meta AI से चुपचाप मदद ले सकेंगे और बाकी लोगों को पता भी नहीं चलेगा. यह फीचर अभी धीरे-धीरे रोलआउट हो रहा है और आने वाले महीनों में WhatsApp और Meta AI ऐप पर सभी यूजर्स को मिलेगा.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Panel को सही तरीके से मैंटेन करने पर बढ़ेगी एफिशिएंसी, इन गलतियों से है बचने की जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Maintenance Guide: सोलर पैनल से ज्यादा से ज्यादा बिजली जनरेट करने के लिए उनका साफ होना जरूरी है. अगर सोलर पैनल की समय पर सफाई और मैंटेनेंस होती रहे तो न सिर्फ इनकी एफिशिएंसी बढ़ती है बल्कि लाइफ स्पैन में भी बढ़ोतरी होती है. रेगुलर सफाई और मैंटेनेंस न होने पर महंगे से महंगे पैनल की शाइन चली जाएगी और एकदम तेज धूप में भी ये ज्यादा बिजली का उत्पादन नहीं कर पाएंगे. रिपोर्ट्स के अनुसार, पैनल को साफ रखने से एनर्जी प्रोडक्शन 15 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जिसका मतलब है कि आपके ज्यादा पैसे भी बचेंगे.&amp;nbsp;
कैसे करें सोलर पैनल की सफाई?

मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए सोलर पैनल को हर छह महीने में अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. इसके लिए आप कम प्रेशर के साथ पानी और मुलायम कपड़े का यूज कर सकते हैं. इससे धूल-मिट्टी एकदम साफ हो जाएगी.&amp;nbsp;
रेगुलर इंस्पेक्शन भी जरूरी है. अगर पैनल छत पर लगे हैं तो हर 2-3 महीनों के बाद इनका इंस्पेक्शन करते रहे. इससे पैनल में दरार होने और कचरा जमा होने आदि का पता चलता रहेगा.&amp;nbsp;
सोलर पैनल मॉनिटरिग ऐप्स और डैशबोर्ड के जरिए भी पैनल पर नजर रखी जा सकती है. इससे एनर्जी प्रोडक्शन पर भी नजर रहती है और अगर कोई दिक्कत आने वाली है तो उसका भी जल्दी पता लग जाता है.&amp;nbsp;
साल में एक या दो बार प्रोफेशनल टेक्नीशियन को बुलाकर सोलर पैनल और उनकी फंक्शनिंग चेक करवाई जा सकती है. कई बार कोई ऐसी दिक्कत आ जाती है, जो हमें छोटी लगती है, लेकिन जिससे बड़ा नुकसान हो सकता है तो टेक्नीशियन इस बारे में बेहतर जानकारी दे पाएगा.

इन गलतियों से है बचने की जरूरत

सोलर पैनल की सफाई या उन्हें चमकाने के लिए केमिकल या खुरदुरी चीजों का यूज नहीं करना चाहिए. इनके बार-बार इस्तेमाल से पैनल का सरफेस खराब हो जाएगा, जिससे एफिशिएंसी के साथ-साथ पैनल की लाइफ भी कम हो जाएगी.
अगर पैनल या सोलर एनर्जी सिस्टम में कोई खराबी आ गई है तो यूट्यूब पर तरीके देखकर खुद टेक्नीशियन बनने की कोशिश न करें. ऐसी स्थिति में प्रोफेशनल टेक्नीशियन को बुलाएं. इससे सेफ्टी भी बनी रहेगी और वारंटी को लेकर भी कोई झंझट नहीं होगा.
सफाई के बाद पैनल को गीला छोड़ना की गलती न करें. अगर आपने पैनल को पानी से धोया है तो इसे अच्छी तरह ड्राई करना जरूरी है. पैनल पर बचा पानी या नमी एफिशिएंसी पर असर डालता है और कई मामलों में बड़ी दिक्कत का कारण भी बन सकता है. इसलिए पैनल को सूखा रखना भी आवश्यक है.

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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Ban के बावजूद China में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे Claude और Gemini! जानिए कैसे चल रहा ये सीक्रेट AI नेटवर्क</title>
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        <description><![CDATA[ Claude and Google Gemini AI: दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से डेवलपर्स और टेक कंपनियों की पहली पसंद बनता जा रहा है. खासकर Coding, Debugging और Content Generation जैसे कामों में AI टूल्स की मांग लगातार बढ़ रही है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन AI प्लेटफॉर्म्स पर चीन में आधिकारिक तौर पर रोक है, वहां भी डेवलपर्स चोरी-छिपे उनका इस्तेमाल कर रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Anthropic का Claude और Google का Gemini चीन में ऑफिशियली उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी स्थानीय कोडर्स अलग-अलग तरीकों से इन तक पहुंच बना रहे हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा रोल एक तेजी से बढ़ते Shadow API नेटवर्क का बताया जा रहा है.
आखिर क्या है Shadow API का खेल?
बताया जा रहा है कि चीन के ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसे Taobao और Xianyu पर कुछ सर्विस प्रोवाइडर्स ऐसे एक्सेस बेच रहे हैं जिनकी मदद से यूजर्स सीधे Claude और दूसरे विदेशी AI मॉडल इस्तेमाल कर सकते हैं. इन सेवाओं में दावा किया जा रहा है कि यूजर्स बिना VPN और बिना विदेशी पेमेंट मेथड के भी AI टूल्स तक पहुंच सकते हैं. इसके लिए रिक्वेस्ट्स को चीन के बाहर मौजूद सर्वर्स के जरिए रूट किया जाता है जिससे सिस्टम ऐसा दिखाता है जैसे यूजर किसी दूसरे देश से AI मॉडल एक्सेस कर रहा हो.
Premium AI Features का भी मिल रहा एक्सेस
रिपोर्ट के अनुसार कई विक्रेता Native Claude Opus Access, Unlimited Claude Code Subscription और 1:1 Official Models जैसे दावे कर रहे हैं. इतना ही नहीं, कुछ प्लेटफॉर्म्स 10 लाख टोकन तक के बड़े Context Window सपोर्ट का भी प्रचार कर रहे हैं. साथ ही ये सेवाएं फेमश कोडिंग टूल्स जैसे Cursor, VSCode और OpenClaw के साथ कम्पैटिबिलिटी देने का दावा करती हैं. डेवलपर्स को कम लेटेंसी और स्मूद एक्सपीरियंस का लालच दिया जा रहा है ताकि वे आसानी से इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर सकें.
Chinese Developers को क्यों पसंद आ रहा Claude?
कई डेवलपर्स का मानना है कि विदेशी AI मॉडल स्थानीय चीनी मॉडल्स के मुकाबले ज्यादा सटीक और भरोसेमंद आउटपुट देते हैं. एक प्रोग्रामर ने दावा किया कि Claude कोडिंग के दौरान कम गलतियां करता है और अस्पष्ट निर्देश मिलने पर भी अच्छे परिणाम देता है. उसके अनुसार, कई स्थानीय AI मॉडल अब भी Hallucination की समस्या से जूझ रहे हैं जहां AI ऐसी चीजें बना देता है जो यूजर ने मांगी ही नहीं होतीं. जबकि Claude ज्यादा स्थिर और प्रोफेशनल आउटपुट देता है.
हर प्लेटफॉर्म भरोसेमंद नहीं
हालांकि इस पूरे नेटवर्क में धोखाधड़ी का खतरा भी मौजूद है. रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ प्लेटफॉर्म Claude या दूसरे प्रीमियम AI मॉडल्स का दावा करते हैं लेकिन असल में वे सस्ते चीनी AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर रहे होते हैं. यानी यूजर पैसे किसी विदेशी प्रीमियम AI के लिए देता है लेकिन बैकएंड में उसे अलग मॉडल से जवाब मिल रहा होता है. इससे यह साफ होता है कि Shadow API मार्केट सिर्फ टेक्नोलॉजी का नहीं बल्कि बड़े बिजनेस और रिस्क का भी हिस्सा बन चुका है.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube Upload Not Working: यूट्यूब पर अपलोड नहीं हो रहे वीडियो, क्रिएटर्स हुए परेशान</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Upload Not Working: अगर आपको यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करते समय दिक्कत आ रही है तो आप अकेले नहीं है. दुनियाभर के कई यूजर्स यह शिकायत कर रहे हैं. बुधवार दोपहर बाद से इस तरह की शिकायतों में इजाफा देखने को मिल रहा है. इससे क्रिएटर्स को खास दिक्कत हो रही है और वो कंटेट अपलोड नहीं कर पा रहे हैं. इंटरनेट आउटेज पर नजर रखने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, लोगों को यूट्यूब पर वीडियो स्ट्रीमिंग, सर्वर कनेक्शन और ऐप को लेकर भी दिक्कत आ रही है. आज 3 बजे के बाद से इन शिकायतों में तेज इजाफा देखा जा रहा है.
यूजर्स को दिख रहा यह एरर
डाउनडिटेक्टर पर यूट्यूब के डाउन होने की 100 से ज्यादा शिकायतें दिख रहे हैं. कई देशों के यूजर्स पर इसका असर पड़ा है. यूट्यूब पर वीडियो अपलोड कर रहे यूजर को एरर मैसेज दिख रहा है, जिसमें लिखा है, &#039;Oops, something went wrong.&#039; मोबाइल ऐप्स के साथ डेस्कटॉप से भी वीडियो अपलोड करने पर भी यही एरर मैसेज शो हो रहा है. ज्यादातर यूजर्स का कहना है कि उन्हें प्लेबैक और कंटेट लोडिंग में दिक्कत नहीं आ रही है. इसका मतलब है कि यह दिक्कत क्रिएटर टूल्स तक ही लिमिटेड है. इससे व्यूइंग एक्सपीरियंस पर कोई असर नहीं पड़ रहा है.
सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं लोग
वीडियो अपलोडिंग में दिक्कत आने की शिकायतें सोशल मीडिया पर आने लगी है. एक्स पर कई क्रिएटर ने इसके बारे में पोस्ट किया है. एक यूजर ने यूट्यूब को टैग करते हुए पूछा है कि क्या वीडियो अपलोडिंग में कोई दिक्कत चल रही है? काफी समय बाद ऐसा हुआ है. एक और यूजर ने एक पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा है कि इस दिक्कत का सामने करने वाला मैं अकेला नहीं हूं. मेरे वीडियो अपलोड रुक गए हैं.

Huh looks like I&#039;m not the only one having this problem. My upload also stuck right now. @TeamYouTube https://t.co/rUPj8LltF2
&amp;mdash; Najmi The Kampung Nerd ???? (@najmi) May 13, 2026




Trying to share new content but the world&#039;s largest social video platform is currently down. Unable to upload on YouTube. ???? Hope a fix is coming soon.@YouTube #YouTubeDown #TechIssues #youtube #youtubeindia pic.twitter.com/EhyWzz7Uj3
&amp;mdash; Magnetic Ameya (@RjAmeya) May 13, 2026



ये हो सकते हैं कारण
यूट्यूब ने अभी तक इस समस्या को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन प्लेटफॉर्म डाउन होने की शिकायतें तेजी से नीचे भी आ रही हैं. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि यूट्यूब की टीम ने इस दिक्कत को दूर कर दिया है. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. अगर इस दिक्कत के पीछे के कारणों का अंदाजा लगाएं तो बैकएंड सर्वर मैंटेनेंस, अपलोड प्रोसेसिंग सिस्टम में टेंपरेरी ओवरलोड या नेटवर्क रूटिंग इश्यू के कारण भी यह स्थिति बन सकती है. ये मात्र कयास हैं. असल स्थिति यूट्यूब की तरफ से बयान आने के बाद ही साफ होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>AI की मदद से तैयार हुआ खतरनाक साइबर हमला, Google ने समय रहते रोकी बड़ी तबाही, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ AI Generated Zero Day Cyber Attack: दुनिया में साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने इस खतरे को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है. हाल ही में Google ने खुलासा किया कि उसने एक बड़े साइबर अटैक को समय रहते रोक दिया जिसमें पहली बार AI की मदद से तैयार किया गया जीरो-डे एक्सप्लॉइट इस्तेमाल होने वाला था. अगर यह हमला सफल हो जाता तो लाखों यूजर्स और संस्थाओं का डेटा खतरे में पड़ सकता था.
क्या था यह AI-Generated Zero-Day Exploit?
Google की Threat Intelligence Team के मुताबिक हैकर्स ने AI की सहायता से एक ऐसी नई कमजोरी खोज निकाली थी जिसके बारे में पहले किसी को जानकारी नहीं थी. इस कमजोरी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जैसी सुरक्षा को भी बायपास कर सकते थे.
यह खामी एक लोकप्रिय ओपन-सोर्स वेब बेस्ड सिस्टम एडमिनिस्ट्रेशन टूल में पाई गई थी. हालांकि Google ने सुरक्षा कारणों से उस टूल का नाम सार्वजनिक नहीं किया. कंपनी ने संबंधित सॉफ्टवेयर विक्रेता के साथ मिलकर इस कमजोरी को पहले ही ठीक करा दिया जिससे बड़े स्तर पर होने वाला हमला टल गया.
Google को कैसे पता चला कि AI का इस्तेमाल हुआ?
Google का कहना है कि इस्तेमाल किए गए एक्सप्लॉइट में कई ऐसे संकेत मिले जो AI-Generated कोड में अक्सर दिखाई देते हैं. उदाहरण के तौर पर कोड में बेहद डिटेल्ड टिप्पणियां, साफ-सुथरा स्ट्रक्चर और यहां तक कि एक गलत CVSS सिक्योरिटी स्कोर भी शामिल था जिसे AI की hallucination माना जा रहा है.
कंपनी के अनुसार, यह कमजोरी किसी साधारण बग की तरह नहीं थी बल्कि semantic logic flaw थी. यानी AI ने केवल तकनीकी गलती नहीं खोजी बल्कि डेवलपर के इरादे और सिस्टम के व्यवहार को समझकर सुरक्षा की कमी तलाश ली.
चीन और उत्तर कोरिया के हैकर्स भी ले रहे AI का सहारा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि चीन और उत्तर कोरिया से जुड़े कई साइबर समूह अब AI का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं. ये हैकर्स AI की मदद से कमजोरियां ढूंढने, एक्सप्लॉइट तैयार करने और ऑटोमेटेड टेस्टिंग जैसे काम कर रहे हैं. Google ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ हमलावर AI को ऐसे निर्देश दे रहे थे मानो वह कोई अनुभवी नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट हो. इन प्रॉम्प्ट्स की मदद से राउटर फर्मवेयर और अन्य सिस्टम्स में रिमोट कोड एग्जीक्यूशन जैसी खतरनाक कमजोरियां खोजी जा रही थीं.
GitHub के खास Vulnerability Database का भी इस्तेमाल
Google की रिपोर्ट में wooyun-legacy नाम के एक विशेष GitHub प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया गया. इसमें 85,000 से ज्यादा वास्तविक साइबर कमजोरियों का डेटा मौजूद है. माना जा रहा है कि हमलावर इस डेटा की मदद से AI मॉडल को ट्रेन कर रहे थे ताकि वह अनुभवी सिक्योरिटी रिसर्चर की तरह कमजोरियां पहचान सके. इस तरीके से AI मॉडल को पहले से मौजूद कमजोरियों के उदाहरण दिखाए जाते हैं जिससे वह नए सिस्टम्स में भी समान सुरक्षा खामियां ढूंढने में ज्यादा सक्षम हो जाता है.
AI के बढ़ते खतरे ने बढ़ाई चिंता
Google का कहना है कि अब AI का इस्तेमाल केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रहा. साइबर अपराधी इसे बड़े पैमाने पर संगठित तरीके से इस्तेमाल करने लगे हैं. यही वजह है कि टेक कंपनियां AI से जुड़े जोखिमों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गई हैं. हाल ही में AI कंपनी Anthropic ने भी अपने नए Mythos मॉडल को सार्वजनिक करने में देरी की थी क्योंकि उसे डर था कि इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Switch Off मोबाइल की भी मिल जाएगी Live Location! 99% लोग नहीं जानते ये आसान तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/switch-off-मोबाइल-की-भी-मिल-जाएगी-live-location-99-लोग-नहीं-जानते-ये-आसान-तरीका</link>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>AI से सबसे ज्यादा खतरे में महिलाओं की नौकरियां? नई Study में हुआ बड़ा खुलासा, वजह जानकर चौंक जाएंगे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-से-सबसे-ज्यादा-खतरे-में-महिलाओं-की-नौकरियां-नई-study-में-हुआ-बड़ा-खुलासा-वजह-जानकर-चौंक-जाएंगे</link>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब दुनिया भर के ऑफिस और कंपनियों का अहम हिस्सा बनता जा रहा है. ग्राहक सेवा से लेकर कंटेंट राइटिंग, कोडिंग, डेटा एनालिसिस और शेड्यूलिंग जैसे कई काम अब AI टूल्स की मदद से तेजी से किए जा रहे हैं. कंपनियां भी लागत कम करने और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए AI पर भारी निवेश कर रही हैं.
लेकिन इसी बीच एक नई स्टडी ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक AI का असर सभी कर्मचारियों पर समान नहीं पड़ सकता. खासकर महिलाओं की नौकरियां पुरुषों की तुलना में ज्यादा जोखिम में आ सकती हैं.
किन नौकरियों पर सबसे ज्यादा खतरा?
अमेरिका की संस्था National Partnership for Women &amp;amp; Families की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं का बड़ा हिस्सा उन नौकरियों में काम करता है जिन्हें AI आसानी से ऑटोमेट कर सकता है. रिपोर्ट में बताया गया कि महिलाएं अमेरिकी वर्कफोर्स का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा हैं लेकिन AI से सबसे ज्यादा प्रभावित मानी जा रही 15 नौकरियों में करीब 83 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं.
इनमें सेक्रेटरी, ऑफिस क्लर्क, रिसेप्शनिस्ट और इंश्योरेंस एजेंट जैसी नौकरियां शामिल हैं. इन कामों में अक्सर दोहराए जाने वाले प्रशासनिक कार्य होते हैं जिन्हें अब जनरेटिव AI काफी तेजी और कम लागत में कर सकता है.
क्यों बढ़ रही है चिंता?
स्टडी के मुताबिक जिन क्षेत्रों में महिलाएं बड़ी संख्या में काम करती हैं, वहां AI के कारण नौकरी में बदलाव का खतरा ज्यादा है. दूसरी तरफ, कई कर्मचारियों के पास नई स्किल सीखने या टेक्नोलॉजी के अनुसार खुद को तेजी से ढालने के संसाधन भी सीमित हो सकते हैं.
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नर्सिंग, चाइल्ड केयर और होम हेल्थकेयर जैसे क्षेत्र अभी पूरी तरह AI से प्रभावित नहीं होंगे. इसकी वजह यह है कि इन कामों में भावनात्मक समझ और मानवीय देखभाल की जरूरत होती है जिसे मशीनें पूरी तरह नहीं बदल सकतीं. फिर भी इन सेक्टर्स में AI आधारित मॉनिटरिंग और निगरानी सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
AI सिस्टम में भी हो सकता है Gender Bias
रिपोर्ट ने एक और गंभीर मुद्दे की तरफ ध्यान दिलाया है. अध्ययन के अनुसार AI सिस्टम खुद भी लैंगिक पक्षपात यानी Gender Bias से प्रभावित हो सकते हैं. बताया गया कि AI डेवलपमेंट और लीडरशिप रोल्स में महिलाओं की भागीदारी अभी भी कम है. इसका असर इस बात पर पड़ सकता है कि AI टूल्स को कैसे डिजाइन किया जा रहा है और उन्हें कार्यस्थलों पर कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है.
एक उदाहरण में AI से पुरुष और महिला नामों वाले रिज्यूमे तैयार कराए गए. बाद में जब उनका मूल्यांकन किया गया तो पुरुष उम्मीदवारों को बेहतर रेटिंग मिलने की बात सामने आई. इससे यह चिंता बढ़ गई कि AI सिस्टम अनजाने में पुराने सामाजिक पूर्वाग्रहों को आगे बढ़ा सकते हैं.
AI इस्तेमाल करने पर महिलाओं को ज्यादा जज किया जाता है?
स्टडी में यह भी सामने आया कि पेशेवर काम में AI टूल्स इस्तेमाल करने पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा कठोर तरीके से आंका जा सकता है. एक एक्सपेरिमेंट में प्रतिभागियों को समान काम दिखाया गया लेकिन कुछ को AI-assisted और कुछ को non-AI-assisted बताया गया. जब लोगों को लगा कि किसी महिला ने AI की मदद ली है तो उसकी क्षमता को ज्यादा नकारात्मक रूप से देखा गया.
Deepfake और Online Abuse का भी बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट में महिलाओं को निशाना बनाने वाले AI आधारित Deepfake और नकली कंटेंट को लेकर भी चिंता जताई गई है. AI के जरिए फोटो, वीडियो और आवाज बदलकर गलत जानकारी फैलाना अब पहले से आसान होता जा रहा है. हालांकि यह स्टडी मुख्य रूप से अमेरिकी वर्कफोर्स पर आधारित है लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इसके असर दुनिया के दूसरे देशों में भी दिखाई दे सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Refurbished Phone ले रहे हैं तो जरूर देख लें ये चीजें, पहले कर दिया पेमेंट तो हो सकता है कांड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/refurbished-phone-ले-रहे-हैं-तो-जरूर-देख-लें-ये-चीजें-पहले-कर-दिया-पेमेंट-तो-हो-सकता-है-कांड</link>
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        <description><![CDATA[ Refurbished Phone Buying Guide: अगर आप फ्लैगशिप फोन लेना चाहते हैं, लेकिन इसकी कीमत आपके बजट के बाहर है तो रिफर्बिश्ड फोन खरीदना एक फायदेमंद ऑप्शन हो सकता है. इस तरह से आप कम पैसे में अपनी पसंद का फोन ले सकते हैं. पिछले कुछ समय से रिफर्बिश्ड फोन की बिक्री बढ़ी है और अब लोग नए फोन के लिए ज्यादा पैसे देने की बजाय कम कीमत में रिफर्बिश्ड फोन ले लेते हैं. अगर आप भी ऑनलाइन रिफर्बिश्ड फोन खरीदने का मन बना चुके हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इनके बिना आपके पैसे बर्बाद हो सकते हैं.
क्या होते हैं रिफर्बिश्ड फोन?
जानकारी के लिए बता दें कि कोई गड़बड़ या पसंद न आने पर कुछ लोग अपने फोन को सेलर को वापस कर देते हैं. सेलर इन फोन को लेकर जरूरी होने पर रिपेयर कर एकदम नया जैसा बना देते हैं. फिर इन्हें कम कीमत पर बाजार में दोबारा बेच दिया जाता है.
Refurbished Phone लेते समय इन चीजों पर करें गौर
डिवाइस की फिजिकल कंडीशन देखना है जरूरी- फोन की फिजिकल कंडीशन देखें बिना खरीदारी को पूरा न करें. कई सेलर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर &#039;एकदम नए जैसी&#039; या &#039;शानदार कंडीशन&#039; का दावा करते हैं, लेकिन ज्यादातर बार ये सिर्फ मार्केटिंग ट्रिक ही साबित होती है. इसलिए फोन की फिजिकल कंडीशन देखे बिना भूलकर भी पेमेंट न करें. अगर आप दूर बैठे हैं तो सेलर की दी गई फोटो को अच्छे से जूम कर स्क्रैचेज आदि का पता लगाने की कोशिश करें.
बैटरी हेल्थ पर भी दें ध्यान- कुछ समय यूज करने के बाद फोन की बैटरी लाइफ कम होने लगती है. अगर कोई आपको 100 प्रतिशत बैटरी लाइफ के दावे के साथ फोन दे रहा है तो उसे वेरिफाई करना जरूरी है. सैमसंग और ऐप्पल जैसी कंपनियों में बैटरी हेल्थ चेक करने का फीचर भी मौजूद होता है. कई थर्ड पार्टी ऐप्स भी बैटरी लाइफ चेक करने का फीचर देती है.
डिवाइस वारंटी का जरूर करें पता- कई डीलर रिफर्बिश्ड फोन पर भी 6 महीने तक की वारंटी देते हैं. इसलिए फोन खरीदने से पहले ही उसकी वारंटी का पता कर लें. फोन खरीदने के बाद अगर उसमें कुछ प्रॉब्लम आती है तो वारंटी के कारण आपको पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे. अगर कोई सेलर वारंटी नहीं दे रहा है तो दूसरे डीलर के पास पता किया जा सकता है.
रिफर्बिशर का भी रखें ध्यान- फोन लेने से यह भी देख लें कि इसका रिफर्बिशर कौन है. अगर किसी ब्रांड या ट्रस्टेड डीलरशिप से फोन रिफर्बिश किया गया है तो इसे पूरी तरह से टेस्ट और रिपेयर किया जाता है. वहीं कई दूसरे रिफर्बिशर सिर्फ डिवाइस को चमकाकर वापस बेच देते हैं. इसलिए रिफर्बिशर का ध्यान रखना जरूरी होता है.
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fake Birthday डालकर नहीं चला पाएंगे Social Media! Meta का नया AI टूल अब मिनटों में पकड़ लेगा Under&amp;13 अकाउंट्स</title>
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        <description><![CDATA[ Meta AI Tool: Meta ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कम उम्र के बच्चों के फर्जी अकाउंट्स रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है. कंपनी अब ऐसे यूजर्स की पहचान करने के लिए नए AI सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है जो अपनी असली उम्र छुपाकर Instagram और Facebook पर अकाउंट बना रहे हैं. खासतौर पर यह फीचर उन बच्चों को पकड़ने के लिए तैयार किया गया है जिनकी उम्र 13 साल से कम है लेकिन उन्होंने गलत जन्मतिथि डालकर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल शुरू कर दिया.
सिर्फ जन्मतिथि नहीं फोटो और वीडियो भी करेगा स्कैन
Meta का नया सिस्टम केवल प्रोफाइल में लिखी उम्र पर भरोसा नहीं करेगा. कंपनी का AI अब यूजर्स की पोस्ट, बायो, कैप्शन और कमेंट्स को भी एनालाइज करेगा. अगर किसी पोस्ट में जन्मदिन, स्कूल क्लास या उम्र से जुड़े संकेत मिलते हैं तो सिस्टम उस अकाउंट को जांच के दायरे में ला सकता है.
इसके अलावा AI फोटो और वीडियो में दिखाई देने वाले विजुअल संकेतों को भी समझने की कोशिश करेगा. इसमें शरीर की बनावट, लंबाई और अन्य सामान्य शारीरिक संकेतों के आधार पर अनुमान लगाया जाएगा कि यूजर किस उम्र वर्ग का हो सकता है.
हालांकि Meta ने साफ किया है कि यह Facial Recognition तकनीक नहीं है. कंपनी के मुताबिक AI किसी व्यक्ति की पहचान नहीं करता बल्कि केवल सामान्य उम्र का अनुमान लगाने की कोशिश करता है.
फर्जी उम्र पकड़ी गई तो तुरंत बंद होगा अकाउंट
अगर AI को किसी अकाउंट पर शक होता है कि वह 13 साल से कम उम्र के बच्चे का है तो Meta उसे तुरंत बंद कर सकता है. इसके बाद यूजर को अपनी असली उम्र साबित करने के लिए सरकारी पहचान पत्र जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे. अगर यूजर उम्र साबित नहीं कर पाता, तो अकाउंट स्थायी रूप से हटाया जा सकता है. वहीं 13 से 17 साल के ऐसे यूजर्स जिन्होंने खुद को वयस्क बताया है उनके अकाउंट्स को Teen Account मोड में डाल दिया जाएगा.
Teen Account में मिलेंगी सीमित सुविधाएं
Teen Account मोड में कई तरह की सुरक्षा सीमाएं लागू होंगी. इसमें अनजान लोगों के मैसेज सीमित हो जाएंगे हानिकारक कमेंट्स छिपाए जाएंगे और संवेदनशील कंटेंट तक पहुंच कम कर दी जाएगी. Meta के अनुसार 16 साल से कम उम्र के यूजर्स इन सेटिंग्स को बदलने के लिए माता-पिता की अनुमति के बिना बदलाव नहीं कर पाएंगे.
आखिर Meta ने अब इतना बड़ा कदम क्यों उठाया?
पिछले कुछ समय से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर Meta पर लगातार दबाव बढ़ रहा था. कई रिपोर्ट्स में सामने आया कि बड़ी संख्या में बच्चे आसानी से गलत उम्र डालकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे थे. यूरोप और अमेरिका में कंपनी को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का खतरा भी बताया जा रहा है. यही वजह है कि अब Meta ने AI आधारित Age Detection सिस्टम को तेजी से लागू करना शुरू कर दिया है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:31 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ फिल्मों में नही, हकीकत में दिखेगा Transformer जैसा रोबोट, दया की तरह कर सकता है तोड़फोड़</title>
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        <description><![CDATA[ Unitree GD01: अब फिल्मों जैसे रोबोट हकीकत बनते जा रहे हैं. चाइनीज कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स ने अपने नए रोबोट Unitree GD01 की झलक दिखाई है. इसे देखकर ऐसा लगता है कि यह सीधे किसी हॉलीवुड फिल्म से निकलकर आया है. बड़े आकार वाले इस रोबोट में एक आदमी आराम से बैठ सकता है और किसी दीवार को तोड़ना तो इसके लिए बाएं हाथ का खेल है. कंपनी का कहना है कि सिविल यूज के लिए बनने वाला पहला प्रोडक्शन-रेडी रोबोट है. आइए जानते हैं कि Unitree GD01 में क्या खासियत है.
Unitree GD01 की खूबियां
कंपनी की तरफ से शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि एक बड़े साइज का रोबोट दरवाजे से निकलकर बाहर आ रहा है. इंसानों की तुलना में इसकी ऊंचाई काफी ज्यादा है. इसमें कंट्रोलर के बैठने के लिए एक सीट भी दी गई है. रिमोट से कंट्रोल करने के साथ-साथ इस रोबोट को इसके अंदर बैठकर भी कंट्रोल किया जा सकता है. यह रोबोट किसी इंसान की तरह दो टांगों पर भी चल सकता है और जरूरत पड़ने पर हाथ और पैरों को मिलाकर किसी बड़े जानवर की तरह भी आगे बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
कंट्रोलर समेत करीब 500 किलोग्राम वजन
इस बड़े रोबोट का वजन कंट्रोलर समेत लगभग 500 किलोग्राम होता है. वीडियो में दिखाया गया है कि रोबोट हाथ के एक हल्के से झटके से दीवार को गिरा देता है. वीडियो के साथ कंपनी ने लिखा है कि इसे फ्रेंडली और सेफ तरीके से यूज करने की जरूरत है. इस रोबोट का फिल्मी लगने वाला वीडियो आप नीचे देख सकते हैं.

Unitree Unveils: GD01, A Manned Transformable Mecha, from $650,000 ????The world&#039;s first production-ready manned mecha. It can transform. It&#039;s a civilian vehicle. It weighs ~500kg with you inside.Please everyone be sure to use the robot in a Friendly and Safe manner. pic.twitter.com/xa6eNiRDdV
&amp;mdash; Unitree (@UnitreeRobotics) May 12, 2026



कमाल के रोबोट बनाती है Unitree
चाइनीज कंपनी Unitree कमाल के रोबोट बनाने के लिए जानी जाती है. पिछले महीने कंपनी ने बताया था कि उसके H1 ह्यूमनॉयड रोबोट ने स्पीड के मामले में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यह रोबोट 10 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से दौड़ लगा सकता है, जो किसी भी रोबोट द्वारा हासिल की गई सबसे ज्यादा स्पीड है. इससे उसैन बोल्ट के रिकॉर्ड को भी खतरा पैदा हो गया है, जिन्होंने 100 मीटर वर्ल्ड रिकॉर्ड के दौरान एक सेकंड में 10.44 मीटर की दौड़ लगाई थी.&amp;nbsp;
बास्केटबॉल भी खेल रहे हैं रोबोट
रोबोट अब केवल फैक्ट्री में काम करने तक सीमित नहीं रहे हैं. Unitree H1 ने रनिंग में नया रिकॉर्ड बनाया है तो कुछ दिन पहले जापानी कंपनी टोयोटा ने अपने लेटेस्ट ह्यूमनॉयड रोबोट CUE7 की झलक दिखाई थी, जो बास्केटबॉल खेल सकता है. CUE7 कंपनी के उस CUE6 रोबोट का एडवांस वर्जन है, जिसके नाम सबसे लंबे बास्केटबॉल शॉट का वर्ल्ड रिकॉर्ड है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:30 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एंड्रॉयड फोन की स्क्रीन पर क्यों नजर आती है व्हाइट डॉट और क्या है इसे हटाने का तरीका? सब जानें</title>
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        <description><![CDATA[ White Dot On Android Screen: अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज करते हैं तो इसके स्टेटस बार में एक साथ काफी इंफोर्मेशन दिख जाती है. यह आपको बैटरी, कनेक्टिविटी, टाइम और नोटिफिकेशन आदि के बारे में सब कुछ बता सकता है. फोन अनलॉक करने के बाद या अगर आप फोन को काफी देर बार यूज कर रहे हैं तो इस पर नजर मार लेने से मिसकॉल, मैसेज, वॉइसमेल और मेल आदि का पता चल जाता है. इन सब चीजों के अलावा स्टेटस बार में एक और आइकन नजर आता है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं. हम बात कर रहे हैं व्हाइट डॉट की. नोटिफिकेशन, टाइम और कनेक्टिविटी आइकन के साथ नजर आने वाली व्हाइट डॉट क्या बताती है? आइए जानते हैं.
स्क्रीन पर व्हाइट डॉट का क्या काम?
अगर आपके फोन की स्क्रीन पर थोड़ी-थोड़ी देर बाद व्हाइट डॉट नजर आने लगती है तो टेंशन वाली बात नहीं है. यह किसी खराबी के कारण नहीं दिखती. इस डॉट का मतलब है कि कई नोटिफिकेशन आए हुए हैं, लेकिन उन्हें दिखाने के लिए स्क्रीन पर जगह नहीं है. इस डॉट से यह पता चलता है कि स्क्रीन पर दिख रहे आइकन से ज्यादा नोटिफिकेशन हैं. अगर फोन में एक-दो ऐप से ही नोटिफिकेशन हैं तो उसके आइकन आपको स्क्रीन पर दिख जाएंगे और व्हाइट डॉट नहीं दिखेगी.
कैसे पाएं व्हाइट डॉट से छुटकारा?
अगर आप सारे नोटिफिकेशन क्लीयर कर देते हैं तो व्हाइट डॉट अपने आप गायब हो जाएगी. इसके लिए सबसे पहले नोटिफिकेशन बार को स्वाइप डाउन करें. अब यहां दिख रहे क्लियर ऑल बटन पर टैप करें. इससे सारे नोटिफिकेशन और व्हाइट डॉट क्लियर हो जाएगी. इसके अलावा आप हर नोटिफिकेशन को एक-एक कर भी क्लियर या ओपन कर सकते हैं. अगर आप इससे परमानेंट छुटकारा पाना चाहते हैं तो सेटिंग में जाकर स्टेटस बार में नोटिफिकेशन न दिखाने का ऑप्शन चुन लें. हर फोन के हिसाब से यह ऑप्शन अलग-अलग हो सकता है.
ग्रीन डॉट का क्या मतलब?
व्हाइट डॉट की तरह ही फोन पर ग्रीन डॉट दिखना भी आम है. अगर आपके एंड्रॉयड डिवाइस पर ग्रीन डॉट नजर आ रही है तो इसका मतलब है कि फोन का कैमरा या माइक्रोफोन एक्टिव है. Android 12 और उसके बाद के वर्जन पर चलने वाले डिवाइस में यह लाइट नजर आती है. फोन के प्राइमरी कैमरा के साथ-साथ इससे कनेक्टेड सेकेंडरी कैमरा और माइक्रोफोन के एक्टिव होने पर भी ग्रीन डॉट नजर आती है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:29 +0530</pubDate>
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        <title>GPS Spoofing का खेल अब खत्म? नया Portable Device रियल टाइम में पकड़ लेगा Fake Location, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ Portable Device: आज की दुनिया में GPS हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा बन चुका है. चाहे रास्ता ढूंढना हो, ऑनलाइन डिलीवरी ट्रैक करनी हो या फोन में मैप इस्तेमाल करना हो, हर जगह लोग GPS पर भरोसा करते हैं. लेकिन अगर यही लोकेशन गलत दिखाई जाए तो क्या होगा? इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया पोर्टेबल डिवाइस तैयार किया है जो रियल टाइम में नकली GPS सिग्नल यानी GPS Spoofing को पकड़ सकता है.
क्या होता है GPS Spoofing?
GPS Spoofing एक ऐसी तकनीक है जिसमें नकली सिग्नल भेजकर GPS सिस्टम को भ्रमित किया जाता है. इससे डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई देने लगती है जबकि असल में वह कहीं और मौजूद होता है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई ट्रक कीमती सामान लेकर जा रहा हो तो ट्रैकिंग सिस्टम में वह सही रास्ते पर दिख सकता है लेकिन वास्तव में उसे किसी दूसरी जगह मोड़ा जा सकता है. यही वजह है कि Spoofing को सामान्य GPS Jammer से ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसमें सब कुछ सामान्य दिखाई देता है.
वैज्ञानिकों ने तैयार किया नया स्मार्ट डिटेक्टर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Oak Ridge National Laboratory के वैज्ञानिकों ने ऐसा पोर्टेबल डिवाइस विकसित किया है जो चलते वाहन या किसी भी स्थिति में नकली GPS सिग्नल की पहचान कर सकता है. दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का पहला हाई-सेंसिटिव और रियल टाइम GPS Spoofing Detector है. इस तकनीक की खास बात यह है कि यह केवल सिग्नल ब्लॉक होने पर नहीं बल्कि तब भी Spoofing पकड़ सकता है जब नकली सिग्नल असली सैटेलाइट सिग्नल जितने मजबूत हों.
यह डिवाइस कैसे करता है काम?
आमतौर पर GPS सिस्टम सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल पर निर्भर करते हैं लेकिन नया डिटेक्टर अलग तरीके से काम करता है. यह Advanced Radio Technology और Powerful Computing की मदद से सिग्नल्स का सीधा विश्लेषण करता है. यानी यह बिना किसी पारंपरिक GPS रिसीवर के भी समझ सकता है कि सिग्नल असली हैं या उनमें छेड़छाड़ की गई है. इसी वजह से यह तकनीक मौजूदा सिस्टम की तुलना में ज्यादा तेज और भरोसेमंद मानी जा रही है.
क्यों बढ़ रहा है GPS Spoofing का खतरा?
हाल के वर्षों में GPS Spoofing और GPS Jamming के मामले तेजी से बढ़े हैं. हालांकि कई देशों में GPS Jammer इस्तेमाल करना गैरकानूनी है फिर भी इंटरनेट पर ऐसे उपकरण आसानी से मिल जाते हैं. कुछ मामलों में अपराधियों ने ट्रक और शिपमेंट हाईजैक करने के लिए नकली GPS लोकेशन का इस्तेमाल किया है. खासकर खतरनाक या संवेदनशील सामान ले जाने वाले वाहनों के लिए यह बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुका है.
आम लोगों को कैसे होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. अगर किसी ड्राइवर या कंपनी को तुरंत पता चल जाए कि उनका GPS सिस्टम गलत लोकेशन दिखा रहा है तो वे समय रहते कार्रवाई कर सकते हैं. वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना Carbon Monoxide Alarm से की है जो खतरा बढ़ने से पहले लोगों को चेतावनी देता है.
भविष्य में और सुरक्षित हो सकता है GPS
शोधकर्ताओं का लक्ष्य इस डिवाइस को सस्ता और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का है ताकि ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके. आज जब दुनिया तेजी से डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हो रही है ऐसे में GPS जैसी तकनीकों को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी हो गया है. यह नया डिटेक्टर उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बार&amp;बार टूट रहा Charging Cable? नया खरीदने से पहले जान लें ये 5 देसी जुगाड़, मिनटों में हो जाएगा ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ Charging Cable: आजकल Smartphone हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है और उसके साथ Charging Cable भी रोजमर्रा की जरूरत बन गई है लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब केबल बार-बार कटने, मुड़ने या ढीली होने लगती है. कई लोग ऐसी स्थिति में तुरंत नई केबल खरीद लेते हैं जबकि कई बार छोटी-सी समस्या को घर पर ही आसानी से ठीक किया जा सकता है. अगर आपकी Charging Cable भी जल्दी खराब हो जाती है तो कुछ आसान जुगाड़ आपके काफी काम आ सकते हैं.
सबसे पहले समझें केबल खराब क्यों होती है
अधिकतर Charging Cable एक ही जगह से बार-बार मुड़ने की वजह से खराब होती है. खासकर USB Port और Charging Pin के पास का हिस्सा जल्दी कमजोर हो जाता है. लगातार खींचने, मोड़ने और गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर अंदर की वायर टूटने लगती है. इसी वजह से कभी Charging रुक-रुक कर होती है तो कभी Cable पूरी तरह काम करना बंद कर देती है.
इलेक्ट्रिक टेप से मिल सकता है तुरंत समाधान
अगर Cable सिर्फ ऊपर से कट रही है और अंदर की वायर पूरी तरह नहीं टूटी तो Electric Tape काफी मददगार साबित हो सकती है. प्रभावित हिस्से को अच्छी तरह कवर करने से वायर को और ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है. इससे Cable कुछ समय तक आराम से इस्तेमाल की जा सकती है. हालांकि ध्यान रखना जरूरी है कि Tape केवल बाहरी सुरक्षा देती है. अगर वायर पूरी तरह टूट चुकी हो तो यह तरीका ज्यादा समय तक काम नहीं करेगा.
स्प्रिंग वाला जुगाड़ बढ़ा सकता है केबल की लाइफ
कई लोग पुराने Pen की Spring का इस्तेमाल करके Charging Cable को सुरक्षित रखते हैं. USB या Charging Pin के पास Spring लगाने से Cable उस हिस्से से ज्यादा नहीं मुड़ती और टूटने का खतरा कम हो जाता है. यह छोटा सा देसी जुगाड़ Cable की लाइफ बढ़ाने में काफी असरदार माना जाता है और बाजार में मिलने वाले कई प्रोटेक्टर भी इसी तरीके पर काम करते हैं.
Heat Shrink Tube से दिखेगी नई जैसी
अगर आप थोड़ा बेहतर और साफ समाधान चाहते हैं तो Heat Shrink Tube इस्तेमाल की जा सकती है. यह प्लास्टिक ट्यूब गर्म होने पर सिकुड़कर Cable पर मजबूती से चिपक जाती है. इससे कटे या कमजोर हिस्से को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है. यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो Cable को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहते हैं.
ढीली Cable को ऐसे करें ठीक
कई बार समस्या Cable में नहीं बल्कि उसके कनेक्टर में होती है. अगर Charging बार-बार डिस्कनेक्ट हो रही है तो Port में जमा धूल या गंदगी भी वजह हो सकती है. ऐसे में मुलायम ब्रश या सूखी हवा से Port साफ करने पर समस्या ठीक हो सकती है. इसके अलावा Cable को ज्यादा मोड़कर रखने से बचना भी जरूरी है.
कब नई Cable खरीदना जरूरी हो जाता है?
अगर Charging के दौरान Cable ज्यादा गर्म हो रही हो स्पार्क दिख रहा हो या अंदर की वायर बाहर नजर आने लगे तो उसे इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है. ऐसी स्थिति में नई और अच्छी क्वालिटी की Cable लेना ही सुरक्षित विकल्प माना जाता है. यानी हर खराब Charging Cable को तुरंत फेंकने की जरूरत नहीं होती. कई छोटी समस्याएं घर पर ही आसान तरीकों से ठीक की जा सकती हैं और इससे आपके पैसे भी बच सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>नकली फोन बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, ये हैं असली फोन की पहचान करने के तरीके</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नकली-फोन-बनाने-वाली-फैक्ट्री-का-भंडाफोड़-ये-हैं-असली-फोन-की-पहचान-करने-के-तरीके</link>
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        <description><![CDATA[ How To Check Phone Authenticity: अगर आप मार्केट में नया फोन खरीदने जा रहे हैं और कोई आपको कम कीमत पर नया फोन ऑफर कर रहा है तो सावधान हो जाएं. बाजार में नकली फोन की भरमार है. हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक नकली फोन बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. इसमें ओप्पो और वनप्लस समेत कई कंपनियों के नकली फोन बनाए जा रहे थे. इसी तरह नकली मोबाइल प्रोडक्ट्स बनाने वाला गिरोह भी पुलिस के हत्थे चढ़ा है. इन घटनाओं से पता चलता है कि आपको असली की जगह नकली फोन बेचा जा सकता है. इसलिए अगर आप नया फोन खरीद रहे हैं तो कुछ तरीके हैं, जिससे इसके असली होने का पता लगाया जा सकता है.&amp;nbsp;
ऐसे करें असली फोन की पहचान
IMEI नंबर से होगी पहचान- हर असली फोन का एक यूनीक IMEI नंबर होता है. आप फोन से *#06# डायल कर यह नंबर देख सकते हैं. इसके बाद IMEI नंबर को फोन के बॉक्स और बिल पर लिखे IMEI नंबर से मैच करें. अगर तीनों जगह सेम ही नंबर दिख रहा है तो यह बताता है कि फोन असली है. आप सरकार के CEIR पोर्टल से भी IMEI नंबर मैच कर सकते हैं.
पैकेजिंग से भी लग जाता है पता- नकली फोन की पैकेजिंग बहुत खराब होती है. इसमें खराब क्वालिटी के मैटेरियल का यूज होता है. कई बार बॉक्स का कलर फेड हो चुका होता है और लोगो और दूसरी डिटेल्स भी साफ नजर नहीं आती. दूसरी तरफ असली फोन की पैकेजिंग में ऐसी दिक्कत नहीं होती. असली फोन के बॉक्स पर हर डिटेल साफ लिखी होती है.
सॉफ्टवेयर और बिल्ड क्वालिटी भी दे देगी हिंट- नकली और असली फोन की बिल्ड क्वालिटी में काफी अंतर होता है और यह साफ नजर आ जाता है. नकली फोन में आपको कैमरा प्लेसमेंट गड़बड़ लग सकती है या इसकी फिनिशिंग प्रीमियम नहीं होगी. इसके अलावा फोन लेने से पहले उसे कुछ देर चलाकर जरूर देखें. इससे आप कैमरा, क्वालिटी, डिस्प्ले ब्राइटनेस, सॉफ्टवेयर आदि का आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं.&amp;nbsp;
भरोसेमंद जगह से खरीदना है जरूरी- अगर आप मार्केट में फोन खरीदने जा रहे हैं तो केवल उन स्टोर्स पर विजिट करें, जिनके पास कंपनी की डीलरशिप है. इनमें से आप किसी अपनी पसंद के किसी भी स्टोर को चुन सकते हैं. अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करना चाहते हैं तो कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही खरीदें. सस्ते दाम के लालच में आकर किसी गैर-भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर अपने पैसे बर्बाद न करें.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 04:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Google I/O 2026 में होगा टेक्नोलॉजी का बड़ा धमाका! जानिए Gemini 4.0, Android 17 और Smart XR Glasses समेत क्या&amp;क्या होगा लॉन्च?</title>
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        <description><![CDATA[ Google I/O 2026: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google अपने सालाना डेवलपर इवेंट Google I/O 2026 की तैयारी में जुट चुकी है. यह बड़ा इवेंट 19 मई 2026 से शुरू होने जा रहा है और इस बार भी कंपनी का फोकस Artificial Intelligence पर रहने की उम्मीद है. पिछले साल की तरह इस बार भी AI से जुड़े कई बड़े ऐलान देखने को मिल सकते हैं. इसके अलावा Android, Smart Glasses और नए ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी तकनीकों पर भी खास नजर रहने वाली है.
Android 17 में मिल सकते हैं नए AI फीचर्स
Google इस साल अपने नए मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम Android 17 को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकता है. कंपनी पहले ही इसके कई Beta Versions जारी कर चुकी है. हालांकि इस बार डिजाइन में बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद कम बताई जा रही है लेकिन AI आधारित कई नए फीचर्स देखने को मिल सकते हैं.
खबरों के मुताबिक Android 17 में Multitasking को बेहतर बनाने के लिए App Bubbles फीचर आ सकता है. इसकी मदद से यूजर्स Apps को Floating Window में इस्तेमाल कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें छोटे Bubble की तरह स्क्रीन पर मिनिमाइज भी कर पाएंगे. इससे एक साथ कई काम करना पहले से आसान हो सकता है.
Gemini 4.0 बन सकता है इवेंट का सबसे बड़ा आकर्षण
AI इस बार भी Google I/O का सबसे बड़ा विषय रहने वाला है. माना जा रहा है कि कंपनी अपने AI मॉडल Gemini 4.0 का नया वर्जन पेश कर सकती है. यह मॉडल पहले से ज्यादा तेज, स्मार्ट और बेहतर Reasoning क्षमता वाला हो सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार नया Gemini Google की अलग-अलग सेवाओं के साथ और गहराई से जुड़ा होगा. यूजर्स बातचीत के दौरान विजुअल कॉन्सेप्ट्स को सीधे Chat में देख सकेंगे. इसके अलावा Google Agentic AI पर भी काम कर सकता है, जहां AI यूजर के निर्देशों के बिना कई काम खुद करने में सक्षम होगा.
Android XR Glasses पर भी रह सकती है नजर
Google अपने Smart Wearable प्रोजेक्ट Android XR Glasses को लेकर भी नए अपडेट दे सकता है. माना जा रहा है कि कंपनी इस बार ऐसे XR Glasses दिखा सकती है जो देखने में सामान्य चश्मे जैसे लगें लेकिन उनमें कई स्मार्ट फीचर्स मौजूद हों. इन Glasses में Live Translation, Real-Time Notifications और Gemini आधारित Voice Assistant जैसे फीचर्स मिल सकते हैं. इससे यूजर्स बिना फोन निकाले कई काम कर पाएंगे.
क्या Android और ChromeOS एक हो जाएंगे?
टेक दुनिया में एक और चर्चा तेजी से चल रही है कि Google एक नए प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है जिसे फिलहाल Aluminium OS कहा जा रहा है. माना जा रहा है कि यह सिस्टम ChromeOS और Android को एक साथ जोड़ सकता है. अगर ऐसा होता है तो Laptop और Tablet में Android Apps और Desktop Browsing का अनुभव एक साथ मिल सकता है. इससे अलग-अलग डिवाइस के बीच काम करना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा.
AI के भविष्य की झलक दिखा सकता है Google
इस बार का Google I/O सिर्फ नए फीचर्स का इवेंट नहीं बल्कि AI आधारित भविष्य की झलक भी माना जा रहा है. कंपनी यह दिखाने की कोशिश कर सकती है कि आने वाले समय में Smartphone, Computer और Wearable Devices किस तरह AI के जरिए आपस में जुड़े होंगे. टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Google I/O 2026 आने वाले वर्षों की टेक्नोलॉजी दिशा तय करने वाला बड़ा मंच साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 04:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>सोलर पैनल लगाने के लिए कम से कम कितनी जगह चाहिए? ऐसे लगाएं जरूरत का हिसाब</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Area Requirement: अगर आप बिजली के बिल या पावर कट के झंझट से मुक्त होना चाहते हैं तो सोलर एनर्जी सिस्टम आपके काम आ सकता है. पिछले कुछ समय से देश में सोलर एनर्जी पर फोकस बढ़ा है. सरकार भी इसे बढ़ावा देते हुए सब्सिडी ऑफर कर रही है. घर के लिए सोलर पैनल लगाने के लिए छत सही जगह मानी जाती है. कुछ लोगों का मानना है कि सोलर पावर सिस्टम के लिए बड़ी छत की जरूरत पड़ती है तो ऐसा नहीं है. छोटी छत पर भी पैनल लगाए जा सकते हैं. आज हम आपके लिए सोलर पैनल सिस्टम के लिए जगह का पूरा हिसाब-किताब लेकर आए हैं.
कितने पैनल के लिए कितनी जगह की जरूरत?
अगर एक परिवार की एनर्जी नीड्स को देखा जाए तो आमतौर पर 300 यूनिट बिजली हर महीने खर्च होती है. इस हिसाब से आप 3kW का सिस्टम लगवा सकते हैं. इसके लिए 300 स्क्वेयर फीट एरिया की जरूरत पड़ेगी, जहां छाया न आती हो. अगर आप छोटा सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो 1kW का सिस्टम लगाने के लिए 100 स्क्वेयर फीट जगह चाहिए. इसी तरह अगर आपको ज्यादा बिजली की जरूरत है और आप 5kW का सिस्टम लगाते हैं तो इसके लिए 500 स्क्वेयर फीट की जरूरत होगी.
घर के लिए कौन-से सोलर पैनल बेहतर च्वॉइस?
सोलर पैनल के लिए जगह की जरूरत पैनल के प्रकार भी डिपेंड करती है. अगर आपके पास जगह कम है तो आप मोनोक्रिस्टलाइन पैनल चुन सकते हैं. ये थोड़े महंगे होते हैं, लेकिन ज्यादा एनर्जी प्रोडक्शन कर सकते हैं. वहीं अगर आपके पास स्पेस की कमी नहीं है तो आप पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल चुन सकते है. इनके एफिशिएंसी थोड़ी कम होती है, लेकिन ज्यादा जगह होने पर ये भी खूब कामयाब होते हैं. इनकी लागत भी कम है.
3kW के सिस्टम की लागत कितनी?
जरूरत को देखते हुए एक औसत भारतीय घर में 3kW का सिस्टम काफी रहेगा. अगर आप यह सिस्टम इंस्टॉल करवाना चाहते हैं तो बता दें कि इसके लिए आपको लगभग 1.5 लाख से 2.2 लाख रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. इस कीमत में 3kW ऑन ग्रिड रूफटॉप सोलर सिस्टम लग जाएगा. इसमें पैनल के साथ-साथ इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, वायरिंग और इंस्टॉलेशन आदि सब शामिल हैं. ब्रांड और शहर के हिसाब से यह 3kW ऑन ग्रिड रूफटॉप सोलर सिस्टम की लागत थोड़ी ऊपर-नीचे हो सकती है. PM सूर्यघर योजना के तहत इस सिस्टम पर 78,000 रुपये की सब्सिडी भी प्राप्त की जा सकती है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 04:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>कितने साल होती है सोलर पैनल की लाइफ, कैसे तय होती है इसकी एक्सपायरी डेट?</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel: बिजली के बढ़ते बिल और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच अब लोग तेजी से सोलर एनर्जी की तरफ रुख कर रहे हैं. घरों की छतों से लेकर बड़े उद्योगों तक, हर जगह सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं. लेकिन सोलर सिस्टम लगवाने से पहले लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर सोलर पैनल कितने साल तक चलते हैं और क्या इनकी भी कोई एक्सपायरी डेट होती है?
असल में सोलर पैनल कोई ऐसी चीज नहीं है जो अचानक एक तय तारीख के बाद बंद हो जाए. इसकी उम्र धीरे-धीरे कम होती है और समय के साथ इसकी बिजली बनाने की क्षमता घटने लगती है. यही कारण है कि इसकी लाइफ को परफॉर्मेंस के आधार पर मापा जाता है.
कितनी होती है सोलर पैनल की औसत लाइफ?
आमतौर पर एक अच्छा सोलर पैनल 25 से 30 साल तक आसानी से काम कर सकता है. कई कंपनियां अपने पैनलों पर 25 साल तक की परफॉर्मेंस वारंटी भी देती हैं. इसका मतलब यह नहीं होता कि 25 साल बाद पैनल पूरी तरह खराब हो जाएगा बल्कि इसका अर्थ यह है कि इतने समय बाद उसकी बिजली बनाने की क्षमता पहले से कम हो सकती है.
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई नया पैनल शुरुआत में 100% क्षमता से बिजली बना रहा है तो 25 साल बाद वही पैनल लगभग 75 से 85% क्षमता तक काम कर सकता है यानी वह बिजली बनाना बंद नहीं करता बल्कि उसकी दक्षता धीरे-धीरे घटती जाती है.
कैसे तय होती है एक्सपायरी डेट?
सोलर पैनल की एक्सपायरी किसी खाने-पीने की चीज की तरह नहीं होती. इसकी उम्र कई तकनीकी चीजों पर निर्भर करती है. कंपनियां पैनल की क्वालिटी, इस्तेमाल किया गया मटेरियल, मौसम और परफॉर्मेंस टेस्ट के आधार पर इसकी अनुमानित लाइफ तय करती हैं.
हर साल सोलर पैनल की क्षमता थोड़ी कम होती है जिसे
डिग्रेडेशन रेट कहा जाता है. ज्यादातर अच्छे पैनलों में यह दर लगभग 0.5% प्रति वर्ष होती है. यानी हर साल पैनल की बिजली उत्पादन क्षमता थोड़ा-थोड़ा घटती रहती है.
अगर किसी इलाके में बहुत ज्यादा गर्मी, धूल, बारिश या तूफान आते हैं तो इसका असर पैनल की उम्र पर भी पड़ सकता है. वहीं सही इंस्टॉलेशन और नियमित सफाई से इसकी लाइफ काफी बढ़ाई जा सकती है.
क्या 30 साल बाद पैनल बेकार हो जाता है?
ऐसा बिल्कुल नहीं है. कई सोलर पैनल 30 साल के बाद भी काम करते रहते हैं. हालांकि उनकी क्षमता पहले जैसी नहीं रहती लेकिन वे फिर भी उपयोगी मात्रा में बिजली बना सकते हैं. कई पुराने पैनल आज भी छोटे घरों, फार्महाउस और ग्रामीण इलाकों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
दरअसल, सोलर पैनल की असली ताकत उसकी लंबी उम्र और कम रखरखाव में छिपी होती है. एक बार सही तरीके से लगाने के बाद यह सालों तक बिजली बचाने में मदद करता है.
सोलर पैनल खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप सोलर पैनल लगवाने की सोच रहे हैं तो सिर्फ कीमत देखकर फैसला न करें. अच्छी कंपनी का पैनल, लंबी वारंटी, कम डिग्रेडेशन रेट और मजबूत बिल्ड क्वालिटी बेहद जरूरी होती है. सही चुनाव करने पर सोलर पैनल दशकों तक आपके बिजली खर्च को कम कर सकता है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 04:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>क्या सॉकेट में लगे मोबाइल चार्जर से भी खर्च होती है बिजली, जानें कितना बढ़ता है बिल?</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Charger: आज के समय में मोबाइल चार्जर हर घर की सबसे आम चीजों में से एक बन चुका है. कई लोग फोन चार्ज करने के बाद सिर्फ केबल निकाल देते हैं लेकिन चार्जर को सॉकेट में लगा हुआ ही छोड़ देते हैं. कुछ लोगों का मानना होता है कि इससे कोई बिजली खर्च नहीं होती जबकि कुछ लोग इसे बिजली की बर्बादी मानते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सच्चाई क्या है? क्या बिना मोबाइल कनेक्ट किए भी चार्जर बिजली खींचता रहता है?
क्या सच में चार्जर बिजली खाता रहता है?
दरअसल, जब चार्जर सॉकेट में लगा रहता है और स्विच ऑन होता है तब उसमें थोड़ी मात्रा में बिजली का प्रवाह जारी रहता है. इसे वैंपायर पावर या स्टैंडबाय पावर कहा जाता है यानी भले ही आपका फोन चार्ज नहीं हो रहा हो लेकिन चार्जर के अंदर मौजूद सर्किट एक्टिव रहते हैं और बहुत कम मात्रा में बिजली लेते रहते हैं.
हालांकि यह बिजली की खपत बेहद छोटी होती है लेकिन पूरी तरह शून्य नहीं होती. पुराने और सस्ते चार्जर आमतौर पर ज्यादा स्टैंडबाय पावर लेते हैं जबकि नए और ब्रांडेड चार्जर काफी ऊर्जा-कुशल बनाए जाते हैं.
आखिर कितना बढ़ता है बिजली बिल?
अगर सामान्य तौर पर देखा जाए तो एक अच्छा मोबाइल चार्जर स्टैंडबाय मोड में लगभग 0.1 से 0.5 वॉट तक बिजली खर्च कर सकता है. यह खपत इतनी कम होती है कि महीने के बिजली बिल में इसका असर बहुत ज्यादा दिखाई नहीं देता. मान लीजिए आपका चार्जर 0.3 वॉट बिजली खींच रहा है और वह पूरे महीने लगातार सॉकेट में लगा रहता है तो उसकी कुल बिजली खपत बेहद मामूली होगी. इसका खर्च कुछ रुपये से भी कम हो सकता है यानी सिर्फ एक मोबाइल चार्जर की वजह से बिजली बिल में बड़ा उछाल नहीं आता.
लेकिन अगर घर में कई चार्जर, टीवी, सेट-टॉप बॉक्स, माइक्रोवेव और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हमेशा स्टैंडबाय मोड में लगे रहते हैं तो इन सभी की छोटी-छोटी खपत मिलकर सालभर में अच्छा-खासा बिजली खर्च करा सकती है.
सिर्फ बिल ही नहीं सुरक्षा का भी मामला
चार्जर को हमेशा सॉकेट में लगाए रखना सिर्फ बिजली की बर्बादी का मामला नहीं है बल्कि सुरक्षा से भी जुड़ा है. खराब गुणवत्ता वाले या नकली चार्जर ज्यादा गर्म हो सकते हैं. लंबे समय तक बिजली सप्लाई मिलने पर उनमें शॉर्ट सर्किट या स्पार्किंग का खतरा भी बढ़ सकता है.
खासतौर पर गर्मियों में या खराब वायरिंग वाले घरों में यह जोखिम और बढ़ जाता है. इसलिए इस्तेमाल के बाद चार्जर को सॉकेट से निकाल देना बेहतर माना जाता है.
क्या करना सबसे सही रहेगा?
अगर आप बिजली बचाना चाहते हैं और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहते हैं तो सबसे अच्छा तरीका यही है कि फोन चार्ज होने के बाद चार्जर को सॉकेट से निकाल दें. इससे बिजली की छोटी-छोटी बचत भी होगी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लाइफ भी बेहतर रह सकती है. छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा फर्क डालती हैं और यही समझदारी स्मार्ट बिजली इस्तेमाल की असली पहचान है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 04:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18: कब होगी लॉन्चिंग से लेकर कैसा होगा कैमरा? लीक्स में सामने आ गई यह जानकारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iphone-18-कब-होगी-लॉन्चिंग-से-लेकर-कैसा-होगा-कैमरा-लीक्स-में-सामने-आ-गई-यह-जानकारी</link>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18: स्टैंडर्ड आईफोन ज्यादातर लोगों की पहली पसंद होती है. भले ही ऐप्पल प्रो मॉडल्स में ज्यादा दमदार फीचर्स देती है, लेकिन ज्यादातर लोग स्टैंडर्ड वेरिएंट ही खरीदते हैं. इस बार ऐप्पल के स्टैंडर्ड आईफोन में कई बदलाव देखने को मिलेंगे. इसे अपग्रेड की बजाय डाउनग्रेड किया जा सकता है और इसकी लॉन्चिंग भी आगे खिसकाई गई है दरअसल, सितंबर में कंपनी फोल्डेबल आईफोन के साथ आईफोन 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स मॉडल को लॉन्च करेगी. आईफोन 18 के लिए इंतजार थोड़ा लंबा होगा और इसे अगले साल फरवरी-मार्च में लॉन्च किया जाएगा. इसकी लॉन्चिंग में लंबा समय बाकी है, लेकिन लीक्स के जरिए इसके कई एक्सपेक्टेड फीचर्स सामने आ गए हैं.&amp;nbsp;
डिस्प्ले को किया जा सकता है डाउनग्रेड
iPhone 18 में 6.3 इंच का 120Hz ProMotion डिस्प्ले दिया जा सकता है. iPhone 17 में भी यह डिस्प्ले है, लेकिन अपकमिंग मॉडल में एक पुरानी टेक्नोलॉजी यूज हो सकती है. ऐसे कयास हैं कि ऐप्पल इस बार सैमसंग का M12+ OLED मैटेरियल यूज करेगी. आईफोन 14 प्रो में भी यह टेक्नोलॉजी यूज हुई थी. इससे बैटरी एफिशिएंसी पर थोड़ा असर पड़ सकता है. इसे ब्राइटनेस लेवल अचीव करने के लिए ज्यादा पावर की जरूरत होगी.
स्टैंडर्ड रह सकती है 12GB रैम
अपकमिंग iPhone 18 में सबसे बड़ा अपग्रेड रैम के तौर पर देखने को मिल सकता है. लीक्स के मुताबिक, ऐप्पल अपकमिंग मॉडल्स में 12GB रैम को स्टैंडर्ड रखना चाह रही है. करंट जनरेशन के आईफोन में 8GB रैम स्टैंडर्ड है. दरअसल, ऐप्पल एआई फीचर्स लाना चाहती है, जिसके लिए ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग की जरूरत पड़ेगी और इसके लिए ज्यादा चाहिए. हालांकि, मेमोरी चिप्स की शॉर्टेज देखते हुए ऐसा होना काफी मुश्किल लग रहा है.
कैमरा&amp;nbsp;
आईफोन 18 का कैमरा सेटअप करंट मॉडल जैसा ही रह सकता है. इसके रियर में 48MP सेंसर वाला डुअल कैमरा सेटअप दिया जाएगा. प्रो मॉडल्स की तरह इसमें वेरिएबल अपर्चर नहीं मिलेगा. अगर फ्रंट कैमरा की बात करें तो यहां भी अपडेट देखने को मिल सकती है. उम्मीद है कि ऐप्पल आईफोन 18 में 24MP का सेल्फी कैमरा जोड़ सकती है.&amp;nbsp;
चिपसेट के मामले में भी करना पड़ सकता है कॉम्प्रोमाइज
आईफोन 17 में जहां 5-कोर GPU वाला A19 चिपसेट लगा हुआ है, वहीं आईफोन 18 में 4-कोर GPU वाला चिपसेट मिलने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो यह परफॉर्मेंस के मामले में ऐप्पल के सबसे किफायती मॉडल iPhone 17e के बराबर आ जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, 18:, कब, होगी, लॉन्चिंग, से, लेकर, कैसा, होगा, कैमरा, लीक्स, में, सामने, आ, गई, यह, जानकारी</media:keywords>
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        <title>AirPods में कैमरा लाकर क्या करने वाला है Apple? जानिए Meta AI Glasses से कितना अलग होगा ये नया AI गैजेट</title>
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        <description><![CDATA[ Apple AirPods With Camera: Apple अब ऐसे नए AirPods पर काम कर रहा है जिनमें कैमरे और एडवांस AI फीचर्स दिए जा सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इन खास ईयरबड्स की टेस्टिंग के आखिरी चरण में पहुंच चुकी है. माना जा रहा है कि यह डिवाइस AI दौर के लिए तैयार Apple का पहला बड़ा wearable gadget बन सकता है. जहां दूसरी कंपनियां AI वाले स्मार्ट ग्लास और स्मार्ट डिवाइस लॉन्च करने में जुटी हैं, वहीं Apple भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता. खास बात यह है कि इन AirPods का इस्तेमाल सिर्फ गाने सुनने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि ये आसपास की चीजों को &amp;ldquo;समझ&amp;rdquo; भी पाएंगे.
AirPods में कैमरा होगा लेकिन फोटो खींचने के लिए नहीं
अगर आप सोच रहे हैं कि इन AirPods से सेल्फी ली जा सकेगी या वीडियो रिकॉर्ड होगा तो ऐसा नहीं है. इन छोटे कैमरों का मकसद कुछ और ही बताया जा रहा है. दरअसल, ये कैमरे Apple के AI असिस्टेंट Siri को आसपास का माहौल समझने में मदद करेंगे.
कैमरों से मिलने वाली विजुअल जानकारी के जरिए Siri यूजर के सवालों का जवाब दे सकेगी. उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति किचन में मौजूद सामान को देखकर पूछे कि इससे कौन-सी डिश बनाई जा सकती है तो AI उन चीजों को पहचानकर सुझाव दे सकता है.
AI फीचर्स बना सकते हैं इसे बेहद स्मार्ट
इन नए AirPods में कई ऐसे फीचर्स देखने को मिल सकते हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना दें. बताया जा रहा है कि ये डिवाइस यूजर को पहले देखी गई चीजें याद दिला सकता है, रास्ता ढूंढने में मदद कर सकता है और लाइव ट्रांसलेशन जैसी सुविधाएं भी दे सकता है. इसके अलावा वॉइस कमांड से मैसेज भेजना, कॉल कंट्रोल करना और AI आधारित मेमोरी फीचर भी इसमें शामिल हो सकते हैं.
कैमरा चालू होने पर जलेगी LED लाइट
प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी इन AirPods में एक छोटी LED लाइट भी दे सकती है. जब कैमरे एक्टिव होंगे तब यह लाइट जलने लगेगी ताकि आसपास के लोगों को पता चल सके कि कैमरा इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि इतने छोटे ईयरबड्स में यह लाइट कितनी साफ दिखाई देगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
Meta AI Glasses से कितने अलग होंगे ये AirPods?
Meta के AI स्मार्ट ग्लास और Apple के आने वाले AirPods दोनों ही AI आधारित wearable gadgets माने जा रहे हैं लेकिन दोनों की डिजाइन और उपयोग का तरीका काफी अलग होगा. Meta के स्मार्ट ग्लास आंखों पर पहने जाते हैं और उनका फोकस फोटो, वीडियो और विजुअल एक्सपीरियंस पर ज्यादा रहता है.
दूसरी तरफ Apple के AirPods कानों में पहने जाने वाले छोटे डिवाइस होंगे जिनका मुख्य फोकस AI असिस्टेंस और ऑडियो इंटरैक्शन पर रहेगा. रिपोर्ट्स के अनुसार नए AirPods का डिजाइन काफी हद तक AirPods Pro जैसा ही हो सकता है, बस कैमरा फिट करने के लिए इनके स्टेम थोड़े लंबे किए जा सकते हैं.
AI गैजेट्स की दुनिया में बढ़ेगी बड़ी टक्कर
AI wearable devices का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में Apple, Meta और दूसरी टेक कंपनियों के बीच मुकाबला और तेज होने वाला है. अगर Apple अपने इन कैमरा वाले AirPods को सफलतापूर्वक लॉन्च करता है तो यह स्मार्ट ऑडियो डिवाइस की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>कब बदलना चाहिए फोन का स्क्रीन गार्ड? फोन को डैमेज से बचाने समेत करता है कई काम</title>
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        <description><![CDATA[ Screen Guard Tips: नया फोन लेने के बाद ज्यादातर लोग सबसे पहले स्क्रीन गार्ड ही खरीदते हैं. यह खरीदना इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि कम कीमत वाली यह एक्सेसरी बड़े नुकसान से बचा सकती है. हालांकि, कुछ समय यूज करने के बाद ऐसे साइन नजर आने लगते हैं, जो बताते हैं कि स्क्रीन गार्ड को बदलने की जरूरत है. दरअसल, यह ऐसी चीज नहीं है जो आपके फोन की तरह सालों-साल चलें. धूप, धूल-मिट्टी समेत कई कारणों से स्क्रीन गार्ड की प्रोटेक्टिव लेयर खराब हो जाती है और इसे बदलना ही सही रहता है. आज हम बताने जा रहे हैं कि स्क्रीन गार्ड कब बदलना चाहिए और यह आपके फोन को किन-किन खतरों से बचा सकता है.
ये संकेत दिखें तो बदल लें स्क्रीन गार्ड
आमतौर पर माना जाता है कि साल में एक बार आपको स्क्रीन गार्ड बदल लेना चाहिए. इसके अलावा अगर आपके फोन पर लगे स्क्रीन गार्ड में क्रैक्स आ गए हैं या यह अपनी जगह से उखड़ने लगा है तो इसे बदलना ठीक रहेगा. इसके अलावा अगर इस पर स्क्रैचेज नजर आने लगे हैं, टचस्क्रीन की टच सेंसेटिविटी कम हो गई है या फोन की स्क्रीन ठीक से नजर नहीं आ रही तो भी नया स्क्रीन गार्ड लेना फायदे का सौदा रहेगा. बाजार में आपको कई प्रकार के स्क्रीन गार्ड मिल जाएंगे, जिसमें से आप अपनी जरूरत के हिसाब से किसी भी चुन सकते हैं. स्क्रीन गार्ड के लिए टेम्पर्ड ग्लास भी एक बेहतरीन च्वॉइस हो सकती है. यह फोन डिस्प्ले को फिजिकल डैमेज के साथ-साथ स्क्रैचेज से भी बचा सकता है.&amp;nbsp;
स्क्रीन गार्ड के हैं एक साथ कई फायदे
अगर आप प्रीमियम क्वालिटी वाला स्क्रीन गार्ड लेते हैं तो इसमें एंटी-माइक्रोबायल लेयर लगी होती है, जो कीटाणुओं को जमा होने से रोकती है. कई बार ऐसा होता है कि हमें गंदे हाथों से भी फोन छूना पड़ जाता है. इसलिए यह लेयर जरूरी होती है. इस तरह स्क्रीन गार्ड आपको स्क्रीन पर जमा होने वाली गंदगी से भी बचाता है. इसके अलावा यह स्क्रीन पर लगने वाले स्क्रैचेज, फोन गिरने पर होने वाले फिजिकल डैमेज से भी सुरक्षा देता है.&amp;nbsp;
स्क्रीन गार्ड खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

सबसे पहले स्क्रीन गार्ड की ड्यूरैबिलिटी और थिकनेस चेक करें.
अगर आप फोन पर गेमिंग करते हैं तो ऐसा गार्ड लें जिससे हाथ न फिसले और ग्रिप अच्छी बनी रही.
हमेशा ज्यादा लेयर वाला स्क्रीन गार्ड लें. इससे फोन के डिस्प्ले को बेहतर सुरक्षा मिलती है.

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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Phone को Switch Off करें या Restart? कंपनियां आखिर क्यों देती हैं दोनों Options, फर्क जानकर चौंक जाएंगे</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Switch Off Vs Restart: आज लगभग हर Smartphone में Power Button दबाने पर दो ऑप्शन जरूर दिखाई देते हैं Switch Off और Restart. ज्यादातर लोग इन दोनों को एक जैसा समझते हैं और बिना सोचे किसी भी ऑप्शन पर टैप कर देते हैं. लेकिन असल में दोनों का काम अलग होता है और इन्हें अलग-अलग परिस्थितियों के लिए बनाया गया है. यही वजह है कि मोबाइल कंपनियां दोनों फीचर्स को फोन में शामिल करती हैं.
Restart और Switch Off में असली फर्क क्या है?
जब आप Phone को Restart करते हैं तो डिवाइस पूरी तरह बंद होकर तुरंत दोबारा चालू हो जाता है. इस दौरान सिस्टम की कई अस्थायी फाइल्स और बैकग्राउंड प्रोसेस रीफ्रेश हो जाते हैं. आसान भाषा में कहें तो Restart फोन को बिना ज्यादा समय गंवाए नई शुरुआत देने जैसा होता है.
वहीं Switch Off करने पर फोन पूरी तरह बंद हो जाता है. इसके बाद जब तक आप Power Button दबाकर उसे दोबारा ऑन नहीं करेंगे तब तक डिवाइस काम नहीं करेगा. यानी इसमें सिस्टम पूरी तरह पावर कट कर देता है.
फोन स्लो हो तो कौन-सा ऑप्शन बेहतर?
अगर आपका Smartphone हैंग हो रहा है, ऐप्स धीरे खुल रही हैं या इंटरनेट में अजीब दिक्कत आ रही है तो Restart काफी मददगार साबित हो सकता है. Restart करने से RAM साफ होती है और कई छोटे Software Bugs अपने आप ठीक हो जाते हैं. इसी वजह से टेक एक्सपर्ट्स अक्सर सलाह देते हैं कि हफ्ते में कम से कम एक बार फोन Restart जरूर करना चाहिए. इससे फोन की परफॉर्मेंस स्मूद बनी रहती है.
Switch Off करना कब जरूरी होता है?
कई बार फोन लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल होने की वजह से ज्यादा गर्म होने लगता है. ऐसे मामलों में सिर्फ Restart नहीं बल्कि कुछ देर के लिए Switch Off करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इससे फोन के हार्डवेयर को थोड़ा आराम मिल जाता है और बैटरी पर भी दबाव कम होता है. अगर आप यात्रा कर रहे हैं, फोन लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना है या बैटरी बचानी है तब भी Switch Off करना बेहतर विकल्प माना जाता है.
कंपनियां दोनों ऑप्शन क्यों देती हैं?
असल में Restart और Switch Off दोनों अलग जरूरतों को पूरा करते हैं. Restart मुख्य रूप से सिस्टम को जल्दी रीफ्रेश करने के लिए होता है जबकि Switch Off पूरी तरह पावर बंद करने के लिए दिया जाता है.
अगर सिर्फ एक ही विकल्प होता तो यूजर्स को हर छोटी समस्या में फोन पूरी तरह बंद करना पड़ता. इसीलिए Smartphone कंपनियां दोनों फीचर्स अलग-अलग देती हैं ताकि यूजर जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुन सके.
कौन-सा ऑप्शन ज्यादा सही है?
यह पूरी तरह स्थिति पर निर्भर करता है. अगर फोन में छोटी-मोटी दिक्कत है तो Restart काफी होता है. लेकिन अगर डिवाइस बहुत गर्म हो रहा है या लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना है तो Switch Off बेहतर माना जाता है. यानी अगली बार जब आप Power Button दबाएं तो बिना सोचे किसी भी ऑप्शन पर टैप करने की बजाय यह जरूर समझ लें कि आपके फोन को उस समय Restart की जरूरत है या पूरा आराम देने के लिए Switch Off करना ज्यादा सही रहेगा.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube से चुटकियों में गायब हो जाएंगे Shorts, बस इस सेटिंग को करना होगा ऑन</title>
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        <description><![CDATA[ How To Turn Off YouTube Shorts: आप अपनी या अपने बच्चों की शॉर्ट्स देखने की आदत से परेशान हैं तो इससे छुटकारा पाने का तरीका आ गया है. अगर आप यूट्यूब शॉर्ट्स पर टाइम खराब करने से बचना चाहते हैं तो इसे यूट्यूब से हटा भी सकते हैं. कंपनी ने कुछ दिन पहले एक सेटिंग्स रोलआउट की थी, जिसके जरिए यूट्यूब पर शॉर्ट्स हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे. यह फीचर उन पैरेंट्स के लिए बड़े काम का है, जिनके बच्चों को शॉर्ट्स देखने की लत लग चुकी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस सेटिंग की मदद से शॉर्ट्स को यूट्यूब से गायब किया जा सकता है.
Shorts देखने की लिमिट कर सकते हैं जीरो
YouTube ओपन करते ही बाकी वीडियो के साथ शॉर्ट्स भी नजर आते हैं. अगर एक बार शॉर्ट्स पर टैप हो गया तो अगले 5-10 मिनट बेकार होना तय है. यूट्यूब ऐप पर Show fewer Shorts का बटन मिलता है, लेकिन यह केवल 30 दिनों तक ही काम करता है. ऐसे में बार-बार शॉर्ट्स आपकी फीड पर आने पक्के है. पिछले साल अक्टूबर में कंपनी ने टाइम लिमिट का ऑप्शन एड किया था, जिसमें कम से कम 15 मिनट का टाइम सेट किया जा सकता था. अब कंपनी ने इस सेटिंग को बदलते हुए टाइम लिमिट को जीरो करने का ऑप्शन दे दिया है. यानी टाइम लिमिट को जीरो पर सेट करने के बाद शॉर्ट्स नहीं चलेंगे.&amp;nbsp;
टाइम लिमिट को जीरो कैसे सेट करें?

YouTube ओपन करें और प्रोफाइल आइकन पर टैप करें.&amp;nbsp;
अब गियर आइकन पर टैप कर टाइम मैनेजमेंट डैशबोर्ड में जाएं.
यहां डेली लिमिट में शॉर्ट फीड लिमिट का टॉगल नजर आएगा.&amp;nbsp;
इस पर टैप करने के बाद आपके सामने टाइम लिमिट का ऑप्शन आएगा. इसमें जीरो मिनट सेट कर लें.
इसके बाद ऐप को पूरी तरह बंद कर रिओपन करें.

बता दें कि अभी यह फीचर यूट्यूब मोबाइल ऐप्स के लिए अवेलेबल हुआ है. डेस्कटॉप और टीवी ऐप्स पर अभी इसे रोल आउट नहीं किया गया है और इस बारे में कंपनी की प्लानिंग की जानकारी भी अभी सामने नहीं आई है.
पैरेंट्स के पास आया स्ट्रॉन्ग वर्जन
इस फीचर की मदद से पैरेंट्स भी अपने बच्चों के टीन अकाउंट पर शॉर्ट्स की टाइम लिमिट जीरो सेट कर सकते हैं. गूगल फैमिली लिंक या यूट्यूब फैमिली सेंटर से मैनेज होने वाले टीन अकाउंट से इस टाइमर को चेंज नहीं किया जा सकेगा. इसका मतलब है कि पैरेंट्स को ज्यादा कंट्रोल मिलेंगे और बच्चे अपने अकाउंट से इस सेटिंग को बदल नहीं पाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>स्क्रॉल करते&amp;करते थक गए? ये 5 स्मार्ट गैजेट्स छुड़ा देंगे आपकी Doomscrolling की लत, नंबर 3 देखकर चौंक जाएंगे!</title>
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        <description><![CDATA[ DoomScrolling: आज के डिजिटल दौर में डूमस्क्रॉलिंग एक आम समस्या बन चुकी है. बिना सोचे-समझे घंटों तक सोशल मीडिया फीड स्क्रॉल करते रहना न सिर्फ समय बर्बाद करता है बल्कि मानसिक थकान और तनाव भी बढ़ाता है. अगर आप भी इस आदत से परेशान हैं तो अब टेक्नोलॉजी ही इसका समाधान बन सकती है. आइए जानते हैं 5 ऐसे स्मार्ट गैजेट्स के बारे में जो आपकी इस आदत को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं.
स्क्रीन टाइम कंट्रोल डिवाइस
ये छोटे-छोटे गैजेट्स आपके स्मार्टफोन के उपयोग को सीमित करने में मदद करते हैं. आप इसमें टाइम सेट कर सकते हैं कि दिन में कितनी देर फोन इस्तेमाल करना है. जैसे ही लिमिट खत्म होती है, ये डिवाइस अलर्ट देता है या फोन को लॉक कर देता है. इससे धीरे-धीरे आपकी स्क्रॉलिंग आदत पर ब्रेक लगता है.
ई-इंक डिस्प्ले फोन
ई-इंक स्क्रीन वाले फोन आंखों के लिए आरामदायक होते हैं और इनमें रंगीन, आकर्षक इंटरफेस नहीं होता. इसका सीधा असर यह होता है कि सोशल मीडिया स्क्रॉल करने में उतना मजा नहीं आता जिससे आप खुद ही फोन का इस्तेमाल कम करने लगते हैं. यह गैजेट खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल अपनाना चाहते हैं.
फोकस टाइमर (Pomodoro Gadget)
यह गैजेट आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ डूमस्क्रॉलिंग कम करने में भी मदद करता है. इसमें आप 25-30 मिनट का फोकस टाइम सेट करते हैं जिसके दौरान फोन से दूर रहना होता है. समय पूरा होने पर छोटा ब्रेक मिलता है. इस टेक्निक से आपका दिमाग धीरे-धीरे फोकस करना सीखता है और यही वजह है कि इसे देखकर लोग चौंक जाते हैं.
नोटिफिकेशन ब्लॉकर डिवाइस
बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन ही हमें फोन उठाने पर मजबूर करते हैं. यह डिवाइस आपके फोन के नोटिफिकेशन को फिल्टर या ब्लॉक कर देता है ताकि आप सिर्फ जरूरी चीजों पर ध्यान दें. कम नोटिफिकेशन मतलब कम डिस्ट्रैक्शन और कम स्क्रॉलिंग.
स्मार्ट वियरेबल (फिटनेस बैंड/स्मार्टवॉच)
स्मार्ट वियरेबल डिवाइस आपको एक्टिव रहने के लिए रिमाइंड करते हैं. ये समय-समय पर आपको उठने, चलने या एक्सरसाइज करने के लिए अलर्ट देते हैं. जब आप फिजिकली एक्टिव होते हैं तो खुद-ब-खुद फोन से दूरी बन जाती है और स्क्रॉलिंग कम हो जाती है.
डूमस्क्रॉलिंग की आदत एक दिन में खत्म नहीं होती, लेकिन सही गैजेट्स और थोड़ी सी जागरूकता से इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है. अगर आप सच में अपनी डिजिटल लाइफ को बैलेंस करना चाहते हैं तो इन स्मार्ट गैजेट्स को आजमाकर जरूर देखें.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Panel लगाने की कर रहे हैं प्लानिंग तो फायदों के साथ लिमिटेशन जानना भी जरूरी, नहीं तो पड़ेगा पछताना</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Energy Pros and Cons: आजकल भारत में सोलर एनर्जी पर खूब जोर दिया जा रहा है. गांव से लेकर शहर और दुकानों से लेकर ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों तक, हर कहीं सोलर पैनल नजर आ रहे हैं. सोलर एनर्जी पावर का एक ऐसा सोर्स है, जो हमेशा ऑन रहता है और इसके बाद बिजली के बिल की भी टेंशन नहीं रहती. यही वजह है कि अब लोग तेजी से सोलर एनर्जी को अपना रहे हैं. अगर आप भी सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने की सोच रहे हैं तो इसके फायदे और नुकसान की जानकारी होना जरूरी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस सिस्टम के फायदे और लिमिटेशन क्या हैं.
सबसे पहले जानें सोलर एनर्जी के फायदे
रीन्यूएबल एनर्जी- सोलर एनर्जी रीन्यूएबल एनर्जी है. यानी इसके खत्म होने की टेंशन नहीं है. रोजाना सूरज निकलता है, जो एनर्जी का ऐसा सोर्स है, जो कभी खत्म नहीं हो सकता. दूसरी तरफ भारत जैसे देश में दिन में कई घंटों तक सनलाइट रहती है, जो एनर्जी जनरेशन के लिए जरूरी है.&amp;nbsp;
ऑपरेटिंग लागत का सस्ता होना- एक बार सोलर एनर्जी सिस्टम को इंस्टॉल करने के बाद इसकी मैंटेनेस और ऑपरेटिंग लागत बहुत कम है. कई कंपनियां 20-25 सालों तक की गारंटी ऑफर करती है, जो यूजर की टेंशन दूर करने के लिए काफी है.
एनवायरनमेंट के लिए फायदेमंद- सोलर पावर से बहुत ही कम मात्रा में ग्रीन हाउस गैस एमिशन होता है, जो इसे पर्यावरण के लिए फायदेमंद बनाता है. कोयले की तरह न तो इससे धुआं होता है और न ही हवा में प्रदूषण फैलता है.
हर जगह यूज होने लायक- सोलर एनर्जी सिस्टम को एक छोटी-दुकान से लेकर कई एकड़ में फैले सोलर फार्म तक हर जगह जरनेट और यूज किया जा सकता है.
सरकारी मदद- भारत में सरकार की तरफ से भी सोलर एनर्जी को अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है. राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र सरकार भी इसके लिए सब्सिडी दे रही है.
क्या हैं सोलर एनर्जी की लिमिटेशन?
शुरुआत में भारी निवेश की जरूरत- सोलर एनर्जी सिस्टम के लिए अपफ्रंट कॉस्ट काफी ज्यादा है. सोलर पैनल और इंस्टॉलेशन की लागत के कारण कई लोग इसे लगाने से बच रहे हैं.&amp;nbsp;मौसम पर निर्भरता- सोलर एनर्जी जनरेशन के लिए सनलाइट होना जरूरी है. रात में यह सिस्टम काम नहीं करता और धूप न निकलने पर भी एनर्जी जनरेशन कम हो जाता है.जगह की जरूरत- सोलर पैनल इंस्टॉल करने के लिए जगह की जरूरत पड़ती है. अगर ज्यादा कैपेसिटी वाला सिस्टम लगाना है तो ज्यादा जगह चाहिए. इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में दिक्कत होती है.स्टोरेज के लिए बैटरी की जरूरत- अगर आप दिन के समय ज्यादा सोलर पावर जनरेट कर उसे रात में यूज करना चाहते हैं तो इसके लिए बैटरी की जरूरत होती है. बैटरियों की लागत भी ज्यादा है.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>1 Wash में कितने यूनिट बिजली उड़ाती है Washing Machine? ज्यादातर लोगों को नहीं पता असली सच!</title>
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        <description><![CDATA[ Washing Machine: आज के समय में Washing Machine लगभग हर घर की जरूरत बन चुकी है. यह कपड़े धोने का काम आसान जरूर कर देती है लेकिन कई लोगों के मन में एक सवाल हमेशा रहता है कि आखिर Washing Machine चलाने पर कितना बिजली बिल आता है. खासकर गर्मियों में जब AC, कूलर और फ्रिज पहले से ज्यादा बिजली खा रहे होते हैं तब लोग Washing Machine की खपत को लेकर भी परेशान रहते हैं. असल में मशीन कितनी बिजली खर्च करेगी, यह उसके मॉडल, क्षमता और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है.
Washing Machine कितनी बिजली खपत करती है?
आमतौर पर एक सामान्य Washing Machine 300 वॉट से लेकर 2000 वॉट तक बिजली इस्तेमाल कर सकती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि मशीन Top Load है या Front Load और उसमें हीटर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं. अगर आसान भाषा में समझें तो 1000 वॉट का मतलब होता है 1 किलोवॉट. यानी अगर कोई मशीन 1 घंटे तक 1000 वॉट बिजली इस्तेमाल करती है तो वह लगभग 1 यूनिट बिजली खर्च करेगी. उदाहरण के तौर पर अगर आपकी Washing Machine 500 वॉट की है और वह एक घंटे चलती है तो करीब 0.5 यूनिट बिजली खर्च होगी.
एक बार कपड़े धोने में कितना खर्च आता है?
ज्यादातर घरों में Washing Machine का एक वॉश साइकिल लगभग 30 मिनट से 1 घंटे तक चलता है. सामान्य तौर पर एक वॉश में 0.3 से 1.5 यूनिट तक बिजली खर्च हो सकती है. अगर आपके इलाके में बिजली का रेट 8 रुपये प्रति यूनिट है और मशीन 1 यूनिट बिजली खर्च करती है तो एक बार कपड़े धोने की लागत लगभग 8 रुपये होगी. हालांकि Hot Water Wash या Dryer इस्तेमाल करने पर बिजली खपत काफी बढ़ जाती है क्योंकि पानी गर्म करने और कपड़े सुखाने में ज्यादा पावर लगती है.
Front Load और Top Load में कौन बचाता है ज्यादा बिजली?
Front Load मशीनें आमतौर पर बिजली और पानी दोनों कम खर्च करती हैं. ये कम स्पीड और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के साथ कपड़े साफ करती हैं. वहीं Top Load मशीनें थोड़ी ज्यादा बिजली और पानी इस्तेमाल कर सकती हैं लेकिन इनकी कीमत अपेक्षाकृत कम होती है. अगर लंबे समय तक बिजली बचाना चाहते हैं तो Front Load मशीन बेहतर विकल्प मानी जाती है.
बिजली बचाने के आसान तरीके
अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो Washing Machine का बिजली बिल काफी कम किया जा सकता है. मशीन को आधा खाली चलाने के बजाय फुल लोड में चलाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा Quick Wash Mode का इस्तेमाल करने से भी बिजली कम खर्च होती है. जरूरत न हो तो Hot Water और Dryer फीचर से बचना बेहतर रहता है. Energy Star Rating वाली मशीनें भी कम बिजली खपत के लिए जानी जाती हैं.
छोटी-सी लापरवाही बढ़ा सकती है बिल
कई लोग सोचते हैं कि Washing Machine बहुत ज्यादा बिजली नहीं खाती लेकिन बार-बार इस्तेमाल और गलत सेटिंग्स बिजली बिल को बढ़ा सकती हैं. खासकर अगर मशीन पुरानी हो या उसमें हीटर और ड्रायर का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा हो तो खपत तेजी से बढ़ सकती है. इसलिए अगली बार Washing Machine चलाने से पहले उसकी पावर रेटिंग और इस्तेमाल का तरीका जरूर समझ लें. छोटी-सी जानकारी हर महीने बिजली बिल में अच्छी बचत करा सकती है.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>लाखों Views चाहिए? Instagram की ये 3 सेकंड वाली सीक्रेट ट्रिक बना सकती है आपकी Reel Viral</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram 3-Second Trick: Instagram पर हर दिन लाखों Reels अपलोड होती हैं लेकिन उनमें से कुछ ही वीडियो वायरल हो पाते हैं. 2026 में कंटेंट क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स और छोटे बिजनेस ओनर्स एक खास रणनीति का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे 3-Second Hook कहा जा रहा है. माना जा रहा है कि यही तरीका तय करता है कि कोई Reel हजारों लोगों तक पहुंचेगी या कुछ सेकंड में स्क्रॉल होकर गायब हो जाएगी.
सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब Instagram पर सबसे बड़ी लड़ाई Attention की है. यूजर किसी Reel को देखना जारी रखेगा या तुरंत आगे बढ़ जाएगा, इसका फैसला शुरुआती 3 सेकंड में ही हो जाता है. यही वजह है कि अब वीडियो की शुरुआत पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण बन चुकी है.
क्या है Instagram का 3-Second Rule?
Instagram का एल्गोरिदम उन Reels को ज्यादा प्रमोट करता है जिन्हें लोग लंबे समय तक देखते हैं. अगर यूजर आपकी Reel पर रुकता है और उसे आखिर तक देखता है तो Instagram उसे ज्यादा लोगों की फीड और Explore Page तक पहुंचाने लगता है.
इसी वजह से 3-Second Hook का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. इसका मतलब है कि Reel की शुरुआत ऐसी होनी चाहिए जो तुरंत लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दे. कई क्रिएटर्स वीडियो की शुरुआत में चौंकाने वाली बात, मजेदार सवाल या ऐसा दावा दिखाते हैं जिससे लोग आगे देखने के लिए मजबूर हो जाएं.
आजकल Instagram पर ये गलती करने से पहले ये वीडियो देख लो, &amp;ldquo;मैंने हजारों रुपये बर्बाद किए फिर ये सीखा&amp;rdquo; या आखिर तक देखना, वरना मजा मिस हो जाएगा&amp;rdquo; जैसे Hooks तेजी से वायरल हो रहे हैं. छोटे कैप्शन, तेज कट्स और एक्सप्रेशन वाली शुरुआत भी लोगों का ध्यान पकड़ने में मदद कर रही है.
किस तरह का कंटेंट ज्यादा देखा जा रहा है?
अब Instagram यूजर्स सिर्फ हाई-क्वालिटी कैमरा वीडियो नहीं, बल्कि ऐसा कंटेंट ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हो. रिलेटेबल और काम की जानकारी देने वाली Reels पर लोगों का रिएक्शन ज्यादा देखने को मिल रहा है.
डेली लाइफ हैक्स, सस्ते और उपयोगी शॉपिंग प्रोडक्ट्स, AI फोटो और वीडियो ट्रिक्स, ट्रैवल शॉर्टकट, फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन और स्मार्टफोन कैमरा तुलना जैसे विषय तेजी से वायरल हो रहे हैं. इसके अलावा छोटी-छोटी कुकिंग टिप्स और रिलेशनशिप स्टोरीज भी लोगों को लंबे समय तक वीडियो से जोड़े रखती हैं.
विशेषज्ञ मानते हैं कि Reel की शुरुआत सीधे सबसे दिलचस्प हिस्से से करनी चाहिए. उदाहरण के लिए अब कई फूड क्रिएटर्स पहले तैयार डिश दिखाते हैं और बाद में उसकी रेसिपी समझाते हैं. इससे यूजर शुरुआत में ही वीडियो से जुड़ जाता है.
आखिर तक Reel देखने पर कैसे मजबूर करते हैं क्रिएटर्स?
कई बड़े क्रिएटर्स अब &amp;ldquo;Open Loop&amp;rdquo; तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें वीडियो की शुरुआत में किसी खास जानकारी या रिजल्ट का संकेत दिया जाता है लेकिन उसका पूरा खुलासा आखिर में किया जाता है. इस रणनीति से लोग वीडियो बीच में छोड़ने के बजाय अंत तक देखते रहते हैं. इससे Watch Time और Retention बढ़ता है जिसे Instagram का एल्गोरिदम काफी महत्व देता है. कई बार यूजर्स वीडियो दोबारा भी देखते हैं, जिससे Reach और बढ़ जाती है.
Reel पोस्ट करने का सही तरीका क्या है?
सिर्फ अच्छा कंटेंट बनाना ही काफी नहीं है बल्कि उसे सही तरीके से पोस्ट करना भी जरूरी है. सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स के अनुसार Vertical Format वाली वीडियो सबसे बेहतर मानी जाती हैं. 1080x1920 रिजॉल्यूशन और Subtitle वाली Reels ज्यादा प्रभावी रहती हैं क्योंकि कई लोग बिना आवाज के वीडियो देखते हैं.
तेज एडिटिंग, ब्राइट लाइटिंग और स्क्रीन पर बड़े टेक्स्ट वाली Reels आजकल ज्यादा सफल हो रही हैं. Trending Audio का इस्तेमाल भी वीडियो को तेजी से वायरल करने में मदद करता है.
इसके अलावा छोटे समय की Reels बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं. खासतौर पर 30 सेकंड से कम की वीडियो को लोग पूरा देखने की संभावना ज्यादा रखते हैं. लगातार कंटेंट पोस्ट करना भी बेहद जरूरी माना जा रहा है.
अब Viral होने के लिए महंगा कैमरा जरूरी नहीं
दिलचस्प बात यह है कि 2026 में वायरल होने वाली कई Reels सिर्फ स्मार्टफोन से शूट की जा रही हैं. यानी अब महंगे कैमरे या भारी एडिटिंग से ज्यादा जरूरी सही आइडिया और मजबूत शुरुआत हो गई है. Instagram पर भीड़ लगातार बढ़ रही है और हर क्रिएटर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में 3-Second Rule तेजी से सबसे बड़ा Growth Formula बनता जा रहा है. अब फैसला कुछ ही सेकंड में हो जाता है कि कोई Reel वायरल होगी या यूजर उसे तुरंत स्क्रॉल कर देगा.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>एक छोटी APK File बना सकती है आपको कंगाल! जानिए कैसे फोन हैक कर रहे हैं साइबर ठग</title>
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        <description><![CDATA[ APK File Cyber Fraud: आजकल ऑनलाइन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. साइबर ठग अब सिर्फ कॉल या फर्जी लिंक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोगों के स्मार्टफोन को ही अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है APK File का. कई लोग बिना सोचे-समझे ऐसी फाइल डाउनलोड कर लेते हैं और फिर कुछ ही मिनटों में उनके बैंक अकाउंट से पैसे गायब होने लगते हैं.
अक्सर स्कैमर्स WhatsApp, Telegram, SMS या सोशल मीडिया के जरिए कोई जरूरी अपडेट, बैंक KYC, इनाम या सरकारी योजना का लालच देकर APK फाइल भेजते हैं. जैसे ही यूजर इसे इंस्टॉल करता है, ठगों को फोन के अंदर पहुंचने का रास्ता मिल जाता है.
आखिर क्या होती है APK File?
APK दरअसल Android Package File होती है. यह एंड्रॉयड फोन में ऐप इंस्टॉल करने का फॉर्मेट है. जिस तरह कंप्यूटर में .exe फाइल का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है उसी तरह एंड्रॉयड डिवाइस में APK फाइल काम करती है.
इन फाइलों में ऐप चलाने के लिए जरूरी सभी डेटा और कोड मौजूद होता है. आमतौर पर Google Play Store से डाउनलोड होने वाले ऐप्स सुरक्षित जांच के बाद मिलते हैं लेकिन इंटरनेट या मैसेज के जरिए आने वाली APK फाइलें खतरनाक हो सकती हैं. कई बार इन फाइलों के अंदर छिपा हुआ Malware या Spyware मौजूद होता है जो फोन की निजी जानकारी चोरी करने के लिए बनाया जाता है.
स्कैमर्स APK File का इस्तेमाल क्यों करते हैं?
साइबर अपराधी APK फाइल इसलिए भेजते हैं क्योंकि इसके जरिए वे सीधे यूजर के फोन में नकली ऐप इंस्टॉल करवा सकते हैं. ये ऐप देखने में बिल्कुल असली बैंकिंग ऐप, सरकारी पोर्टल या लोकप्रिय सर्विस जैसे लगते हैं ताकि लोगों को शक न हो. स्कैमर्स अक्सर ऐसा मैसेज भेजते हैं जिससे यूजर घबरा जाए या जल्दी फैसला ले ले.
जैसे KYC तुरंत अपडेट करें, आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है या इनाम जीतने के लिए ऐप डाउनलोड करें. जैसे ही यूजर APK इंस्टॉल करता है, नकली ऐप कई तरह की परमिशन मांगता है. लोग बिना पढ़े Allow पर क्लिक कर देते हैं और यहीं से खतरा शुरू हो जाता है.
कैसे खाली हो जाता है बैंक अकाउंट?
एक बार खतरनाक APK फोन में इंस्टॉल हो जाए तो वह कॉन्टैक्ट्स, मैसेज, कॉल लॉग, नोटिफिकेशन, लोकेशन और यहां तक कि माइक्रोफोन तक का एक्सेस मांग सकता है. इसके बाद यह ऐप फोन में आने वाले OTP, बैंक अलर्ट और पासवर्ड जैसी जानकारी चुपचाप स्कैमर्स तक पहुंचाने लगता है. कई Malware रियल टाइम में स्क्रीन रिकॉर्डिंग या कीबोर्ड टाइपिंग भी ट्रैक कर सकते हैं. जैसे ही ठगों को बैंकिंग डिटेल और OTP मिलते हैं, वे अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर देते हैं. कई लोगों को तब तक पता भी नहीं चलता जब तक बैंक बैलेंस कम होने का मैसेज नहीं आ जाता.
ऐसे बच सकते हैं APK Scam से
किसी भी अनजान लिंक या फाइल पर तुरंत क्लिक नहीं करना चाहिए. अगर कोई ऐप Play Store के बाहर से डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है तो पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें. फोन में ऐप इंस्टॉल करते समय मांगी जा रही परमिशन को ध्यान से पढ़ना भी बेहद जरूरी है. किसी साधारण ऐप को अगर SMS, कॉल या बैंकिंग नोटिफिकेशन का एक्सेस चाहिए तो सतर्क हो जाना चाहिए. इसके अलावा मोबाइल में एंटीवायरस और सिक्योरिटी अपडेट हमेशा चालू रखना सुरक्षित माना जाता है.
तेजी से बढ़ रहा है नया साइबर खतरा
डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग बढ़ने के साथ APK Scam भी तेजी से फैल रहा है. साइबर अपराधी अब लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर उनका डेटा और पैसा दोनों चुरा रहे हैं. ऐसे में किसी भी फाइल को डाउनलोड करने से पहले सतर्क रहना बेहद जरूरी है क्योंकि एक गलत क्लिक आपके पूरे बैंक अकाउंट को खतरे में डाल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Vivo X300 FE या Samsung Galaxy S26? कैमरा, फीचर्स और कीमत में कौन है असली पैसा वसूल किंग, खरीदने से पहले जरूर जान लें!</title>
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        <description><![CDATA[ Vivo X300 FE Vs Samsung Galaxy S26: भारतीय स्मार्टफोन बाजार में इस समय प्रीमियम कॉम्पैक्ट फोन्स की चर्चा तेज है. खासकर Vivo X300 FE और Samsung Galaxy S26 के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है. दोनों स्मार्टफोन्स लगभग 79,999 रुपये की कीमत में आते हैं और Android 16 पर काम करते हैं.
आकार में भी दोनों लगभग समान हैं लेकिन इनके फोकस पूरी तरह अलग हैं. एक तरफ Vivo कैमरा और बड़ी बैटरी पर जोर देता है जबकि Samsung AI फीचर्स और लंबे सॉफ्टवेयर सपोर्ट को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना रहा है. ऐसे में सवाल यही है कि आखिर किस फोन पर पैसा लगाना ज्यादा सही रहेगा.
कीमत लगभग समान, लेकिन उपलब्धता अलग
कीमत के मामले में दोनों कंपनियों ने एक-दूसरे को सीधी टक्कर दी है. Vivo X300 FE और Samsung Galaxy S26 दोनों की शुरुआती कीमत 79,999 रुपये रखी गई है. यानी यहां किसी फोन को सस्ता या महंगा कहना मुश्किल है. हालांकि दोनों की उपलब्धता में थोड़ा अंतर जरूर है.
Samsung Galaxy S26 भारतीय बाजार में मार्च 2026 से मौजूद है और इसे तुरंत खरीदा जा सकता है. वहीं Vivo X300 FE को मई 2026 में लॉन्च किया गया है और इसकी बिक्री कुछ दिनों बाद शुरू होगी. दोनों फोन उन लोगों को टारगेट करते हैं जो 80,000 रुपये के अंदर फ्लैगशिप अनुभव चाहते हैं.
कैमरा के मामले में दोनों का अंदाज अलग
कैमरा सेक्शन में दोनों स्मार्टफोन्स की सोच बिल्कुल अलग दिखाई देती है. Vivo X300 FE में 50MP का मुख्य कैमरा दिया गया है जिसके साथ 50MP टेलीफोटो लेंस और 8MP अल्ट्रावाइड कैमरा मौजूद है. इसके अलावा फ्रंट में भी 50MP का सेल्फी कैमरा मिलता है. ZEISS ट्यूनिंग और टेलीफोटो लेंस की वजह से यह फोन पोर्ट्रेट फोटोग्राफी में काफी दमदार माना जा रहा है. खासकर बैकग्राउंड ब्लर यानी बोकेह इफेक्ट इसे DSLR जैसा अनुभव देने की कोशिश करता है.
दूसरी ओर Samsung Galaxy S26 का कैमरा सेटअप थोड़ा संतुलित नजर आता है. इसमें 50MP प्राइमरी कैमरा, 12MP अल्ट्रावाइड और 10MP टेलीफोटो सेंसर दिया गया है. Samsung अपने Nightography AI फीचर्स पर ज्यादा फोकस करता है जिससे कम रोशनी और अलग-अलग लाइटिंग कंडीशन में फोटो बेहतर बनाने की कोशिश की जाती है.
अगर कोई यूजर ट्रैवल फोटोग्राफी, सोशल मीडिया पोर्ट्रेट्स और ज़ूम शॉट्स ज्यादा पसंद करता है तो Vivo ज्यादा आकर्षक लग सकता है. वहीं रोजमर्रा की AI-सपोर्टेड फोटोग्राफी में Samsung भी मजबूत प्रदर्शन करता है.
बैटरी में Vivo काफी आगे निकलता है
बैटरी के मामले में Vivo X300 FE साफ बढ़त बनाता दिखाई देता है. इसमें 6500mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जो 90W फास्ट चार्जिंग और 40W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है. लंबे सफर, गेमिंग या पूरे दिन के भारी इस्तेमाल में यह फोन ज्यादा देर तक साथ निभा सकता है.
इसके मुकाबले Samsung Galaxy S26 में 4300mAh की बैटरी दी गई है जो 25W चार्जिंग सपोर्ट करती है. यानी बैटरी क्षमता और चार्जिंग स्पीड दोनों मामलों में Samsung थोड़ा पीछे नजर आता है. जो लोग बार-बार फोन चार्ज करना पसंद नहीं करते उनके लिए Vivo ज्यादा सुविधाजनक साबित हो सकता है.
सॉफ्टवेयर सपोर्ट में Samsung की ताकत
जहां Vivo बैटरी और कैमरा में प्रभावित करता है, वहीं Samsung लंबी अवधि के सॉफ्टवेयर सपोर्ट में मजबूत दिखाई देता है. Samsung Galaxy S26 को सात बड़े Android अपडेट्स मिलने वाले हैं. इसका मतलब यह फोन आने वाले कई सालों तक नए फीचर्स और सिक्योरिटी अपडेट्स के साथ अपडेटेड बना रह सकता है.
वहीं Vivo X300 FE चार Android अपडेट्स और सात साल के सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा करता है. यह भी खराब नहीं है लेकिन Samsung यहां लंबी रेस का खिलाड़ी लगता है.
आखिर किसे खरीदना ज्यादा सही रहेगा?
अगर आपकी प्राथमिकता शानदार कैमरा, लंबी बैटरी लाइफ और तेज चार्जिंग है, तो Vivo X300 FE ज्यादा आकर्षक विकल्प बन सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जो फोटोग्राफी और ट्रैवलिंग पसंद करते हैं. लेकिन अगर आप लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करना चाहते हैं AI फीचर्स पसंद करते हैं और Samsung इकोसिस्टम का हिस्सा हैं तो Samsung Galaxy S26 ज्यादा समझदारी भरी खरीद साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Vivo, X300, या, Samsung, Galaxy, S26, कैमरा, फीचर्स, और, कीमत, में, कौन, है, असली, पैसा, वसूल, किंग, खरीदने, से, पहले, जरूर, जान, लें</media:keywords>
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        <title>अब Gmail खुद लिखेगा बिल्कुल आपकी तरह Emails! Google का नया AI फीचर देखकर लोग बोले, ‘ये तो दिमाग पढ़ रहा है’</title>
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        <description><![CDATA[ Google Gmail: Google अपने ईमेल प्लेटफॉर्म Gmail में AI से जुड़े बड़े बदलाव ला रहा है. कंपनी ने अपने Help me write फीचर को और ज्यादा स्मार्ट बना दिया है. अब यह फीचर सिर्फ ईमेल लिखने में मदद नहीं करेगा बल्कि आपकी खुद की लिखने की शैली और बोलने के अंदाज को समझकर उसी तरीके से ईमेल तैयार करेगा. कंपनी का कहना है कि नया अपडेट यूजर्स को ऐसा अनुभव देगा जिससे AI द्वारा लिखा गया ईमेल ज्यादा नेचुरल और पर्सनल लगेगा न कि किसी रोबोट की तरह.
अब AI सीखेगा आपका लिखने का तरीका
नए अपडेट के बाद Gmail का AI यूजर के पुराने ईमेल्स को देखकर उसकी भाषा, टोन और लिखने के स्टाइल को समझ सकेगा. यानि अगर कोई व्यक्ति हमेशा प्रोफेशनल अंदाज में मेल लिखता है या कोई ज्यादा फ्रेंडली भाषा इस्तेमाल करता है तो AI उसी स्टाइल में नया ईमेल ड्राफ्ट करेगा. इससे ईमेल पहले की तुलना में ज्यादा असली और इंसानी अंदाज वाले महसूस होंगे. यूजर्स को बार-बार भाषा बदलने या ड्राफ्ट एडिट करने की जरूरत भी कम पड़ेगी.
Gmail और Google Drive से खुद ले लेगा जानकारी
Google ने इस अपडेट में Topic Contextualisation नाम का नया फीचर भी जोड़ा है. इसकी मदद से AI सीधे Gmail और Google Drive से जरूरी जानकारी, डॉक्यूमेंट्स और प्रोजेक्ट डिटेल्स निकाल सकेगा. अब यूजर्स को अलग-अलग ऐप्स खोलकर कॉपी-पेस्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उदाहरण के तौर पर कोई यूजर AI से कह सकता है:
टीम को प्रोजेक्ट अपडेट भेजो
किसी ग्राहक को जवाब तैयार करो
जरूरी फाइल शेयर करो
ऑफिस अनाउंसमेंट लिखो
AI उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरा ईमेल खुद तैयार कर देगा.
समय बचाने पर है पूरा फोकस
कंपनी के मुताबिक, इस नए सिस्टम का मकसद यूजर्स का समय बचाना है. अक्सर लोग ईमेल लिखते समय फाइल ढूंढने, जानकारी कॉपी करने और फॉर्मेटिंग में काफी समय खर्च कर देते हैं. अब सिर्फ एक छोटा-सा प्रॉम्प्ट देने पर AI पूरा ईमेल ड्राफ्ट तैयार कर देगा. इससे ऑफिस कर्मचारियों, बिजनेस ओनर्स, टीचर्स, स्टूडेंट्स और रोजाना ईमेल संभालने वाली टीमों को काफी मदद मिल सकती है.
किन यूजर्स को मिलेगा नया फीचर?
Google ने बताया है कि यह अपग्रेडेड AI फीचर फिलहाल Google Workspace Business, Enterprise यूजर्स, Google AI Plus, Google AI Pro, Google AI Ultra सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. पिछले कुछ समय में AI टूल्स तेजी से स्मार्ट होते जा रहे हैं. अब AI सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है बल्कि इंसानों की तरह लिखने और काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. Gmail का यह नया फीचर दिखाता है कि आने वाले समय में ईमेल लिखना पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Instagram Spam Accounts: Instagram पर भूचाल ! विराट कोहली समेत कई बड़े सितारों के रातोंरात गायब हुए लाखों Followers</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Spam Accounts:&amp;nbsp;सोशल मीडिया की दुनिया में इन दिनों एक ही बात सबसे ज्यादा चर्चा में है &amp;ldquo;Great Purge of 2026&amp;rdquo;. अचानक कई बड़े सितारों के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स लाखों नहीं बल्कि करोड़ों में कम हो गए. सुबह उठते ही लोगों ने देखा कि कई सेलिब्रिटीज के अकाउंट्स से भारी संख्या में फॉलोअर्स गायब हो चुके हैं. इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें शुरू हो गईं है. वही कोई इसे इंस्टाग्राम की बड़ी सफाई बता रहा है तो कोई इसे फेक फॉलोअर्स पर सबसे बड़ा एक्शन कह रहा है.&amp;nbsp;
किन-किन सितारों को हुआ बड़ा नुकसान?
इस अचानक हुए बदलाव का असर दुनिया के कई बड़े स्टार्स पर पड़ा है. &amp;nbsp;रिपोर्ट्स के मुताबिक Taylor Swift के करीब 50 लाख फॉलोअर्स कम हुए, जबकि Ariana Grande के लगभग 70 लाख फॉलोअर्स घट गए है. &amp;nbsp;वहीं K-pop बैंड BTS के भी करीब 70 लाख फॉलोअर्स कम बताए जा रहे हैं. सबसे ज्यादा चर्चा Kylie Jenner को लेकर हुई, जिनके करीब 1.5 करोड़ फॉलोअर्स कम होने की बात सामने आई. इसके अलावा Virat Kohli, Priyanka Chopra, Cristiano Ronaldo और Selena Gomez जैसे कई बड़े नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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आखिर क्यों कम हुए इतने फॉलोअर्स?
रिपोर्ट्स के अनुसार इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta ने प्लेटफॉर्म से फेक, स्पैम और बॉट अकाउंट्स हटाने के लिए बड़ा अभियान चलाया है. माना जा रहा है कि लाखों ऐसे अकाउंट्स हटाए गए जो लंबे समय से एक्टिव नहीं थे या फिर सिर्फ फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बनाए गए थे. सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का कहना है कि बड़े सेलिब्रिटीज के अकाउंट्स पर ऐसे फेक फॉलोअर्स ज्यादा होते हैं, इसलिए उनके फॉलोअर्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है.&amp;nbsp;
लोगों ने इसे क्यों कहा &amp;ldquo;Great Purge of 2026&amp;rdquo;?
जब लाखों यूजर्स ने एक साथ फॉलोअर्स कम होते देखे तो सोशल मीडिया पर #GreatPurgeOf2026 ट्रेंड करने लगा है. कई लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर किए और दावा किया कि यह इंस्टाग्राम के इतिहास की सबसे बड़ी &amp;ldquo;Bot Cleanup&amp;rdquo; हो सकता है. &amp;nbsp;वायरल पोस्ट्स में लिखा गया कि एक ही बार में 5 करोड़ से ज्यादा फेक अकाउंट्स हटाए गए है. &amp;nbsp;हालांकि Meta ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इतने बड़े आंकड़े की पुष्टि नहीं की है, लेकिन कंपनी ने पहले भी समय-समय पर स्पैम अकाउंट्स हटाने की बात कही है.&amp;nbsp;
क्या इससे सोशल मीडिया की सच्चाई सामने आ गई?
इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया की असली लोकप्रियता पर फिर बहस शुरू हो गई है. लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या करोड़ों फॉलोअर्स वाले अकाउंट्स में सच में इतने रियल लोग होते हैं? कई यूजर्स का मानना है कि यह सफाई जरूरी थी क्योंकि इससे प्लेटफॉर्म ज्यादा भरोसेमंद बनेगा. वहीं कुछ लोगों ने चिंता जताई कि इस कार्रवाई में कुछ असली अकाउंट्स भी गलती से हट गए होंगे. वही फिलहाल इतना जरूर साफ है कि इंस्टाग्राम अब फेक एंगेजमेंट और नकली फॉलोअर्स के खिलाफ पहले से ज्यादा सख्त नजर आ रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AC का Filter कैसे करता है काम, जानें कितने दिन में करनी चाहिए इसकी सफाई?</title>
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        <description><![CDATA[ AC Filter: गर्मी शुरू होते ही घरों और ऑफिसों में AC का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है. लेकिन ज्यादातर लोग एक बड़ी गलती कर बैठते हैं वे AC के फिल्टर की सफाई पर ध्यान नहीं देते. बाहर से AC भले ही ठीक दिखे लेकिन अंदर जमा धूल और गंदगी धीरे-धीरे उसकी कूलिंग और परफॉर्मेंस दोनों खराब कर सकती है. अगर AC का फिल्टर समय पर साफ न किया जाए तो बिजली बिल बढ़ने से लेकर मशीन खराब होने तक की समस्या हो सकती है.
AC का फिल्टर आखिर करता क्या है?
AC का फिल्टर हवा में मौजूद धूल, मिट्टी, बाल और छोटे कणों को रोकने का काम करता है. इसका मकसद कमरे में साफ और ठंडी हवा पहुंचाना होता है. जब फिल्टर पर ज्यादा गंदगी जमा हो जाती है तो एयरफ्लो कम हो जाता है. ऐसे में AC को कमरे को ठंडा करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसका सीधा असर बिजली की खपत और कूलिंग पर पड़ता है.
कितने दिनों में साफ करना चाहिए फिल्टर?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर AC रोजाना इस्तेमाल हो रहा है तो उसका फिल्टर लगभग 15 से 20 दिनों में एक बार जरूर साफ करना चाहिए. अगर घर सड़क किनारे है, आसपास ज्यादा धूल रहती है या पालतू जानवर हैं, तो फिल्टर और जल्दी गंदा हो सकता है. ऐसे मामलों में 10 से 15 दिन में सफाई करना बेहतर माना जाता है. वहीं कम इस्तेमाल होने वाले AC में महीने में एक बार सफाई काफी हो सकती है.
फिल्टर गंदा होने पर क्या नुकसान हो सकते हैं?
गंदा फिल्टर सबसे पहले AC की कूलिंग कम करता है. कई बार लोग समझते हैं कि गैस खत्म हो गई है जबकि असली वजह सिर्फ जाम फिल्टर होता है. इसके अलावा बिजली बिल तेजी से बढ़ सकता है, AC ज्यादा आवाज करने लगता है, कमरे में बदबू आने लगती है, कंप्रेसर पर दबाव बढ़ता है, मशीन जल्दी खराब हो सकती है. कुछ मामलों में AC से निकलने वाली हवा एलर्जी और सांस की समस्या भी बढ़ा सकती है.
फिल्टर साफ करने का सही तरीका
AC का फिल्टर साफ करना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है. सबसे पहले AC बंद करें और प्लग निकाल दें. इसके बाद फ्रंट पैनल खोलकर फिल्टर बाहर निकालें. फिल्टर को हल्के पानी से धोएं और जरूरत हो तो मुलायम ब्रश का इस्तेमाल करें. बहुत ज्यादा गंदगी होने पर हल्का साबुन भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ध्यान रखें कि फिल्टर पूरी तरह सूखने के बाद ही वापस लगाएं.
छोटी आदत बचा सकती है हजारों रुपये
कई लोग AC सर्विस सिर्फ खराब होने पर करवाते हैं लेकिन नियमित फिल्टर सफाई से बड़ी खराबी को रोका जा सकता है. इससे AC की लाइफ बढ़ती है, कूलिंग बेहतर रहती है और बिजली की बचत भी होती है. यानी सिर्फ कुछ मिनट की सफाई आपको महंगे रिपेयर और भारी बिजली बिल से बचा सकती है.
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Android यूजर्स के लिए बड़ा खतरा! सरकार ने जारी की हाई&amp;रिस्क चेतावनी, तुरंत करें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ Android Users: अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी हो सकती है. भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Android डिवाइसेज को लेकर एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है. एजेंसी के मुताबिक Android के कई नए वर्जन में ऐसी खामी पाई गई है जिसका फायदा उठाकर हैकर्स दूर बैठे ही फोन में घुसपैठ कर सकते हैं. सरकारी एडवाइजरी में इस खतरे को हाई-सीवियरिटी यानी बेहद गंभीर श्रेणी में रखा गया है. बताया गया है कि इस कमजोरी के जरिए साइबर अपराधी यूजर के डेटा तक पहुंच बना सकते हैं और उसमें बदलाव भी कर सकते हैं.
आखिर क्या है यह सुरक्षा खामी?
रिपोर्ट के मुताबिक यह समस्या Android Debug Bridge यानी adbd नाम के सिस्टम कॉम्पोनेंट में पाई गई है. यह फीचर आमतौर पर डेवलपर्स द्वारा फोन और कंप्यूटर के बीच कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन CERT-In के अनुसार इस सिस्टम में ऑथेंटिकेशन को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया जिसकी वजह से एक सुरक्षा छेद बन गया.
इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कोई हमलावर उसी नेटवर्क पर मौजूद Android डिवाइस में बिना अनुमति के कोड चला सकता है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसके लिए यूजर की तरफ से किसी क्लिक या अनुमति की जरूरत भी नहीं पड़ सकती.
किन डिवाइसेज पर है खतरा?
सरकारी चेतावनी के अनुसार यह सुरक्षा समस्या Android के कई नए वर्जन्स को प्रभावित कर रही है. इनमें Android 14, Android 15, Android 16, Android 16-QPR2 शामिल हैं. यह खतरा सिर्फ स्मार्टफोन तक सीमित नहीं है. Android पर चलने वाले टैबलेट, स्मार्टवॉच और दूसरे स्मार्ट डिवाइसेज भी इसकी चपेट में आ सकते हैं.
हैकर्स क्या कर सकते हैं?
अगर इस कमजोरी का गलत इस्तेमाल किया जाए तो हमलावर डिवाइस में रिमोट कोड चला सकते हैं. इसका मतलब है कि वे फोन की फाइल्स तक पहुंच सकते हैं, संवेदनशील जानकारी चुरा सकते हैं या सिस्टम के कुछ हिस्सों को कंट्रोल भी कर सकते हैं. चूंकि Android दुनिया के अरबों डिवाइसेज में इस्तेमाल होता है इसलिए ऐसी सुरक्षा खामियां काफी गंभीर मानी जाती हैं.
यूजर्स को क्या करना चाहिए?
CERT-In ने सभी यूजर्स को सलाह दी है कि जैसे ही उनके डिवाइस के लिए नया सिक्योरिटी अपडेट आए, उसे तुरंत इंस्टॉल करें. Google ने मई 2026 के Android Security Bulletin में इस खामी के लिए पैच जारी कर दिया है. अब अलग-अलग स्मार्टफोन कंपनियां धीरे-धीरे अपने फोन्स में यह अपडेट भेजेंगी. अगर आपके फोन में लंबे समय से सिक्योरिटी अपडेट का नोटिफिकेशन पड़ा हुआ है तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
Public Wi-Fi इस्तेमाल करते समय रहें सावधान
रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला खासतौर पर उसी नेटवर्क पर मौजूद हमलावरों द्वारा किया जा सकता है. इसलिए अनजान या असुरक्षित Wi-Fi नेटवर्क से कनेक्ट होने से बचने की सलाह दी गई है. साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल हैकर्स ऐसे कमजोर सिस्टम्स को निशाना बना रहे हैं जिनमें यूजर की तरफ से ज्यादा इंटरैक्शन की जरूरत नहीं पड़ती. ऐसे में फोन को अपडेट रखना और सुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो गया है.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fiber Body Vs Iron Body Air Cooler : फाइबर बॉडी कूलर बेस्ट या लोहे वाला, जानें कौन&amp;सा कूलर कम खाता है बिजली?</title>
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        <description><![CDATA[ Fiber Body Vs Iron Body Air Cooler : गर्मी के मौसम में जैसे ही तापमान बढ़ता है, घर को ठंडा रखना एक बड़ी जरूरत बन जाती है. हर किसी के पास एयर कंडीशनर (AC) लगाने का बजट नहीं होता, इसलिए ज्यादातर लोग एयर कूलर का इस्तेमाल करते हैं. आजकल बाजार में अलग-अलग तरह के कूलर मिलते हैं जैसे लोहे (मेटल) बॉडी कूलर, प्लास्टिक बॉडी कूलर और अब नए फाइबर बॉडी कूलर भी आने लगे हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर कौन-सा कूलर बेहतर है और कौन-सा कम बिजली खर्च करता है. तो आइए आज जानते हैं कि फाइबर बॉडी कूलर या लोहे वाला कूलर कौन सा बेस्ट है और कौन-सा कूलर कम बिजली खाता है.&amp;nbsp;
लोहे (मेटल) बॉडी कूलर क्या होता है?
लोहे वाले कूलर पुराने और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले कूलर हैं. यह कूलर बहुत मजबूत और टिकाऊ होते हैं. इसके अलावा बड़े कमरे और हॉल के लिए बेहतर हवा देते हैं. साथ ही पानी रखने की क्षमता ज्यादा होती है. इसकी हवा तेज और दूर तक जाती है, लेकिन यह भारी होते हैं और आसानी से इधर-उधर नहीं ले जा सकते हैं. साथ ही इनमें जंग लगने का खतरा रहता है. वहीं यह आमतौर पर बिजली थोड़ी ज्यादा खर्च करते हैं और शोर भी ज्यादा कर सकते हैं.&amp;nbsp;
फाइबर बॉडी कूलर क्या है?
फाइबर बॉडी कूलर आज का नया और अपग्रेडेड ऑप्शन माना जाता है. यह न तो पूरी तरह लोहे का होता है और न ही साधारण प्लास्टिक के होते हैं. फाइबर बॉडी कूलर हल्का और मजबूत दोनों होता है. साथ ही जंग लगने का कोई खतरा नहीं होता है. इसके डिजाइन ज्यादा प्रीमियम और स्टाइलिश होता है. साथ ही इन्हें प्लास्टिक से ज्यादा टिकाऊ माना जाता है और इनसे बिजली की खपत कम होती है. लेकिन इनकी कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है और हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होता है.&amp;nbsp;
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कौन-सा कूलर कम बिजली खर्च करता है?
अगर बिजली बचत की बात करें तो फाइबर बॉडी कूलर सबसे कम बिजली खर्च करता है. वहीं प्लास्टिक कूलर भी कम बिजली खर्च करता है, लेकिन लोहे वाला कूलर थोड़ा ज्यादा बिजली लेता है. इसका कारण यह है कि नए फाइबर और प्लास्टिक कूलर में हल्की मोटर और बेहतर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है.&amp;nbsp;
ठंडक (Cooling) के मामले में कौन आगे है?
कूलिंग सिर्फ बॉडी मटेरियल पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मोटर की ताकत, फैन का साइज, कूलिंग पैड और पानी की क्षमता पर भी निर्भर करती है, लेकिन सामान्य तुलना में बड़े कमरे में लोहे का कूलर ज्यादा असरदार माना जाता है और छोटे,मीडियम कमरे में फाइबर और प्लास्टिक कूलर बेहतर होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Fiber, Body, Iron, Body, Air, Cooler, फाइबर, बॉडी, कूलर, बेस्ट, या, लोहे, वाला, जानें, कौन-सा, कूलर, कम, खाता, है, बिजली</media:keywords>
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        <title>iPhone 17 Pro हुआ 25,000 रुपये सस्ता! यहां मिल रही सबसे तगड़ी डील, जानें कैसे उठाएं फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Pro: अगर आप नया प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं तो आने वाली Flipkart Sale आपके लिए शानदार मौका साबित हो सकती है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart अपनी Sasa Lele Sale के दौरान कई फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स पर बड़ी छूट देने जा रहा है. इस सेल में सबसे ज्यादा चर्चा Apple के नए iPhone 17 Pro Max को लेकर हो रही है जिसे भारी डिस्काउंट के साथ खरीदा जा सकेगा.
सेल की शुरुआत सबसे पहले Flipkart Plus और Black मेंबर्स के लिए होगी, जबकि बाकी यूजर्स के लिए यह ऑफर 9 मई से उपलब्ध रहेगा. ऐसे समय में जब कई स्मार्टफोन कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं, यह डील काफी आकर्षक मानी जा रही है.
25,000 रुपये तक सस्ता मिलेगा iPhone 17 Pro Max
iPhone 17 Pro Max को लॉन्च के समय 1,34,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर पेश किया गया था. लेकिन Flipkart Sale के दौरान इसकी कीमत में बड़ी कटौती देखने को मिलेगी. सेल में फोन की लिस्टेड कीमत 1,19,900 रुपये रखी गई है.
इसके अलावा Flipkart Axis Bank Credit Card से भुगतान करने पर 6,000 रुपये का अतिरिक्त डिस्काउंट मिलेगा. इसके बाद बैंक कैशबैक ऑफर भी दिया जाएगा जिससे फोन की प्रभावी कीमत घटकर लगभग 1,09,900 रुपये रह जाएगी. यानी कुल मिलाकर खरीदार करीब 25,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं.
डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी में बड़ा बदलाव
Apple ने इस बार iPhone 17 Pro Max के डिजाइन में कुछ बड़े बदलाव किए हैं. कंपनी ने फिर से एल्यूमिनियम फ्रेम का इस्तेमाल किया है जिससे फोन हल्का और मजबूत महसूस होता है. इसकी बिल्ड क्वालिटी काफी प्रीमियम मानी जा रही है.
फोन में बड़ा 6.9 इंच का डिस्प्ले दिया गया है जो पहले के मुकाबले ज्यादा इमर्सिव अनुभव देता है. इसके साथ Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन भी मिलता है जिसे स्क्रैच और डैमेज के खिलाफ पहले से ज्यादा मजबूत बताया जा रहा है. आउटडोर इस्तेमाल के दौरान स्क्रीन पर रिफ्लेक्शन कम दिखे इसके लिए नया एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग भी जोड़ा गया है.
गेमिंग और परफॉर्मेंस में दमदार
iPhone 17 Pro Max में Apple का नया A19 Pro चिपसेट दिया गया है. यह प्रोसेसर हाई-एंड गेमिंग और भारी टास्क के दौरान भी शानदार परफॉर्मेंस देने में सक्षम माना जा रहा है. लंबे समय तक इस्तेमाल में भी फोन ज्यादा गर्म नहीं होता जो इसे कई दूसरे फ्लैगशिप फोन्स से अलग बनाता है.
कैमरा भी हुआ और ज्यादा पावरफुल
फोन के रियर में तीनों कैमरे 48 मेगापिक्सल सेंसर के साथ आते हैं. Apple की Fusion टेक्नोलॉजी की मदद से फोटो क्वालिटी बेहतर हुई है. मेन कैमरा कम रोशनी में भी शानदार तस्वीरें लेने में सक्षम बताया जा रहा है जबकि टेलीफोटो और अल्ट्रा-वाइड कैमरा भी बेहतर रिजल्ट देते हैं. वीडियो रिकॉर्डिंग के मामले में भी iPhone 17 Pro Max को काफी मजबूत माना जा रहा है. कंटेंट क्रिएटर्स और प्रोफेशनल वीडियो शूट करने वालों के लिए यह फोन एक शानदार विकल्प बन सकता है.
Samsung Galaxy S25 FE 5G पर भी मिल रहा डिस्काउंट
ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकॉर्ट पर Samsung Galaxy S25 FE 5G पर भी भारी डिस्काउंट दिया जा रहा है. दरअसल, इस फोन के 8+128GB वेरिएंट की असल कीमत 59,999 रुपये है लेकिन छूट के बाद इसे यहां पर 43,999 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा इस पर 33,500 रुपये का एक्सचेंज ऑफर दिया गया है. हालांकि यह कीमत आपके पुराने फोन और उसके ब्रांड पर निर्भर करता है. साथ ही इसपर कई बैंक ऑफर भी दिए गए हैं जिससे फोन की कीमत और भी कम हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Pro, हुआ, 25, 000, रुपये, सस्ता, यहां, मिल, रही, सबसे, तगड़ी, डील, जानें, कैसे, उठाएं, फायदा</media:keywords>
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        <title>Keyboard का सबसे रहस्यमयी बटन! जानिए ‘Pause Break’ दबाने से क्या होता है? 99% लोग आज तक नहीं जानते इसका असली काम</title>
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        <description><![CDATA[ Keyboard Pause Break Button: अगर आपने कभी कंप्यूटर या लैपटॉप के कीबोर्ड को ध्यान से देखा होगा तो एक छोटा सा बटन जरूर नजर आया होगा Pause Break. यह बटन अक्सर कीबोर्ड के ऊपर वाले हिस्से में Print Screen और Scroll Lock के पास मौजूद होता है. दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर लोग जिंदगीभर इस बटन को इस्तेमाल ही नहीं करते. कई लोगों को तो यह तक नहीं पता कि इसका काम क्या है. लेकिन असल में यह बटन कंप्यूटर इतिहास का एक बेहद खास हिस्सा रहा है.
आखिर क्यों दिया गया था Pause Break बटन?
Pause Break बटन का इस्तेमाल पुराने समय के कंप्यूटर सिस्टम में ज्यादा किया जाता था. जब कंप्यूटर आज जितने तेज नहीं थे और कमांड लाइन पर काम होता था तब यह बटन स्क्रीन पर चल रहे टेक्स्ट या प्रोसेस को अस्थायी रूप से रोकने के काम आता था.
अगर स्क्रीन पर तेजी से जानकारी स्क्रॉल हो रही होती तो यूजर इस बटन को दबाकर उसे रोक सकता था ताकि जरूरी जानकारी आराम से पढ़ सके. यानी इसका नाम ही इसके काम को बताता है Pause यानी रोकना.
Break का क्या था काम?
इस बटन का दूसरा हिस्सा Break भी काफी महत्वपूर्ण था. पुराने DOS सिस्टम और कुछ प्रोग्राम्स में Ctrl + Break दबाने से चल रही कमांड या प्रोसेस को बीच में रोका जा सकता था. यह उस समय काफी काम का फीचर माना जाता था खासकर प्रोग्रामिंग और टेक्निकल कामों में. आज के समय में Ctrl + C या Task Manager जैसे विकल्प ज्यादा इस्तेमाल होते हैं इसलिए Pause Break का महत्व धीरे-धीरे कम हो गया.
आज के कंप्यूटर में करता है क्या?
आधुनिक Windows कंप्यूटर में भी यह बटन पूरी तरह बेकार नहीं हुआ है. कुछ खास शॉर्टकट्स में इसका इस्तेमाल आज भी होता है. उदाहरण के लिए Windows + Pause/Break दबाने पर सीधे System Information विंडो खुल जाती है, जहां कंप्यूटर की RAM, प्रोसेसर और Windows वर्जन जैसी जानकारी दिखाई देती है. कुछ पुराने गेम्स और सॉफ्टवेयर में भी यह बटन Pause करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था हालांकि अब ज्यादातर ऐप्स ने इसके लिए अलग शॉर्टकट्स अपना लिए हैं.
नए लैपटॉप्स में क्यों गायब हो रहा है यह बटन?
अगर आपने हाल ही में नया लैपटॉप खरीदा है तो संभव है कि उसमें Pause Break बटन दिखाई ही न दे. इसकी वजह यह है कि आजकल बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. कंपनियां कीबोर्ड को छोटा और सिंपल बनाने के लिए ऐसे कम इस्तेमाल होने वाले बटन हटाने लगी हैं. हालांकि कुछ लैपटॉप्स में यह फीचर Fn Key के साथ छिपा हुआ मिल जाता है.
इंटरनेट पर क्यों वायरल होता रहता है यह बटन?
सोशल मीडिया पर अक्सर लोग मजाक में पूछते हैं कि Pause Break आखिर करता क्या है? क्योंकि ज्यादातर यूजर्स ने इसे कभी इस्तेमाल ही नहीं किया. यही कारण है कि यह बटन इंटरनेट पर रहस्यमयी और मजेदार चर्चा का विषय बना रहता है. लेकिन सच यह है कि यह बटन कंप्यूटर की शुरुआती दुनिया की एक यादगार निशानी है जिसने उस दौर में यूजर्स के काम को आसान बनाया था.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Keyboard, का, सबसे, रहस्यमयी, बटन, जानिए, ‘Pause, Break’, दबाने, से, क्या, होता, है, 99, लोग, आज, तक, नहीं, जानते, इसका, असली, काम</media:keywords>
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        <title>अब आपकी जान बचाने में मदद करेगा ChatGPT! नया फीचर भेजेगा आपके भरोसेमंद इंसान को अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT New Feature: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट ChatGPT को लेकर पिछले कुछ समय से काफी चर्चा हो रही थी खासकर तब जब लोगों ने आरोप लगाए कि AI आत्महत्या और self-harm जैसी संवेदनशील बातचीत को सही तरीके से संभाल नहीं पा रहा. अब इस विवाद के बाद OpenAI ने ChatGPT के लिए एक नया सुरक्षा फीचर पेश किया है जिसका नाम Trusted Contact रखा गया है. यह फीचर खास तौर पर उन लोगों की मदद के लिए बनाया गया है जो मानसिक तनाव, डिप्रेशन या भावनात्मक संकट जैसी स्थितियों से गुजर रहे हों.
क्या है Trusted Contact फीचर?
Trusted Contact एक वैकल्पिक सुरक्षा फीचर है जिसे 18 साल से ऊपर के यूजर्स इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें यूजर अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति जैसे परिवार के सदस्य, करीबी दोस्त या केयरगिवर को जोड़ सकता है. अगर ChatGPT को बातचीत के दौरान ऐसा लगे कि यूजर खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या जैसे गंभीर विचारों से जूझ रहा है तो यह फीचर उस भरोसेमंद व्यक्ति को अलर्ट भेज सकता है. OpenAI के मुताबिक, इसका मकसद लोगों को संकट के समय अकेला महसूस करने से रोकना और उन्हें किसी असली इंसान से जुड़ने के लिए प्रेरित करना है.
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
Trusted Contact फीचर कई स्टेप्स में काम करता है. सबसे पहले यूजर ChatGPT की सेटिंग्स में जाकर किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति को जोड़ सकता है. लेकिन फीचर तभी एक्टिव होगा जब वह व्यक्ति निमंत्रण स्वीकार कर ले. अगर AI सिस्टम को बातचीत में गंभीर खतरे के संकेत मिलते हैं तो ChatGPT पहले खुद यूजर को अपने Trusted Contact से बात करने के लिए प्रेरित करेगा.
इसके लिए कुछ conversation starters भी दिखाए जा सकते हैं ताकि यूजर आसानी से बातचीत शुरू कर सके. इसके बाद एक विशेष रूप से प्रशिक्षित मानव रिव्यू टीम स्थिति की जांच करेगी. यदि उन्हें जोखिम गंभीर लगे तो Trusted Contact को ईमेल, मैसेज या ऐप नोटिफिकेशन के जरिए अलर्ट भेजा जा सकता है.
क्या आपकी चैट्स रहेंगी प्राइवेट?
OpenAI ने साफ किया है कि Trusted Contact को भेजे जाने वाले अलर्ट में आपकी निजी चैट या बातचीत का पूरा विवरण शामिल नहीं होगा. नोटिफिकेशन में सिर्फ इतना बताया जाएगा कि यूजर ने self-harm से जुड़ी चिंताजनक बातचीत की हो सकती है और उन्हें उस व्यक्ति से संपर्क करने की सलाह दी जाएगी. यानी कंपनी का दावा है कि यूजर की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए यह फीचर तैयार किया गया है.
प्रोफेशनल मदद की जगह नहीं लेगा AI
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि Trusted Contact फीचर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों या इमरजेंसी सेवाओं का विकल्प नहीं है. जरूरत पड़ने पर ChatGPT पहले की तरह हेल्पलाइन नंबर, क्राइसिस सपोर्ट और प्रोफेशनल सहायता लेने की सलाह देता रहेगा. OpenAI का कहना है कि इस फीचर को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, डॉक्टरों, suicide prevention संगठनों और American Psychological Association की सलाह के साथ विकसित किया गया है.
टेक्नोलॉजी के साथ इंसानी सपोर्ट भी जरूरी
आज लोग अपनी निजी परेशानियां AI चैटबॉट्स के साथ शेयर करने लगे हैं. ऐसे में Trusted Contact जैसे फीचर्स यह दिखाते हैं कि टेक कंपनियां अब मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर ज्यादा गंभीर हो रही हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि AI मदद जरूर कर सकता है लेकिन कठिन समय में असली इंसानी साथ और प्रोफेशनल सहायता की जगह कोई मशीन पूरी तरह नहीं ले सकती.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>Smartwatch के दिन गए, अब है Smart Earring की बारी, फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Earrings: टेक्नोलॉजी लगातार इवॉल्व होती जा रही है और अब पहले की तुलना में कहीं अधिक वीयरेबल गैजेट मौजूद हैं. कुछ साल पहले की बात करें तो स्मार्टफोन को एडवांस टेक्नोलॉजी माना जाता था. स्मार्टफोन के बाद स्मार्टवॉच आई और उसके बाद स्मार्ट रिंग भी धूम मचा रही है. अब टेक्नोलॉजी और इवॉल्व हुई है और स्मार्ट ईयररिंग भी दस्तक दे चुकी है. कई कंपनियां इस पर काम कर रही है और आने वाले समय में ग्राहकों को बाकी वीयरेबल डिवाइसेस की तरह स्मार्ट ईयररिंग के भी कई ऑप्शंस देखे को मिल जाएंगे. आइए जानते हैं कि Smart Earrings कैसे काम करती है और इसके क्या-क्या फायदे हैं.
नई Smart Earring ने दी मार्केट में दस्तक
Lumia Health ने पिछले महीने Lumia 2 नाम से एक डिवाइस लॉन्च किया था. ईयररिंग जैसे डिजाइन वाले इस डिवाइस को क्रॉनिक ब्लडफ्लो डिसऑर्डर वाले मरीजों की मदद के लिए बनाया गया था. कंपनी इसे दुनिया का सबसे छोटा वेलनेस वीयरेबल डिवाइस बता रही है. इसे ईयररिंग की तरह पहना जा सकता है. इसमें मेन सेंसर के साथ प्रोसेसर, बैटरी और कई हेल्थ सेंसर लगे हुए हैं. यह नींद, एक्टिविटी और ब्लड फ्लो समेत 20 हेल्थ मैट्रिक्स पर नजर रखती है और एक बार चार्ज करने पर सात दिन तक चल सकती है.
कैसे काम करती है Smart Earring?
Smart Earring का आईडिया नया नहीं है और लुमिया के अलावा और भी कंपनियां इस डिवाइस पर काम कर रही है. इसके सेंसर को कान के पीछे लगाना होता है, जहां से ये ब्लड वेसल को मॉनिटर करती है. इससे हार्ट रेट और ब्लड फ्लो पर नजर रखना आसान हो जाता है. इसे यूज करने के लिए कान में छेद करवाना भी जरूरी नहीं है. यह कई डिजाइन और फिनिश के साथ आती है और इसका सेंसर कान के पीछे रहकर अपना काम करता रहता है.
क्या हैं Smart Earring के फायदे?
अगर इसके फायदों की बात करें तो यह हार्ट रेट मॉनिटरिंग में काफी बेहतर है. इसके अलावा इसे लगातार पहने रखा जा सकता है. इसका एक और बड़ा फायदा है कि इसमें डिस्प्ले नहीं लगा है, जिससे बार-बार नोटिफिकेशन का झंझट खत्म हो जाता है. इस कारण यह डिस्ट्रेक्शन फ्री ट्रैकिंग देती है. यह हर कुछ मिनट के बाद रीडिंग नोट करती है, जिसे कंपेनियन ऐप में देखा जा सकता है. यह ब्लड वेसल्स से प्रीसाइज रीडिंग लेती है, जिस कारण एक्सरसाइज आदि के दौरान अचानक से बदलाव नहीं आता.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 04:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ AC ही नहीं! गर्मी में ये 5 इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बन सकते हैं चलता&amp;फिरता बम, एक छोटी गलती और घर में लग सकती है आग</title>
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        <description><![CDATA[ Gadgets in Summer: गर्मियों का मौसम आते ही घरों में AC, कूलर और पंखों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ AC ही नहीं, घर में इस्तेमाल होने वाले कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट भी तेज गर्मी में खतरनाक साबित हो सकते हैं? थोड़ी सी लापरवाही इन डिवाइसेज को आग का कारण बना सकती है. कई बार लोग ओवरहीटिंग, खराब वायरिंग या गलत तरीके से चार्जिंग जैसी चीजों को नजरअंदाज कर देते हैं जो बाद में बड़े हादसे में बदल सकती हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बारे में जो गर्मियों में ज्यादा खतरा पैदा कर सकते हैं.
Power Bank और Smartphone
गर्मी में सबसे ज्यादा ओवरहीट होने वाले गैजेट्स में स्मार्टफोन और पावर बैंक शामिल हैं. कई लोग इन्हें चार्जिंग पर लगाकर तकिए या बिस्तर पर छोड़ देते हैं जिससे हीट बाहर नहीं निकल पाती. अगर बैटरी खराब हो या लोकल चार्जर इस्तेमाल किया जाए तो ब्लास्ट या आग लगने का खतरा बढ़ जाता है.
क्या करें?

हमेशा ओरिजिनल चार्जर इस्तेमाल करें
धूप में फोन या पावर बैंक न छोड़ें
रातभर चार्जिंग पर लगाने से बचें

Extension Board और Multi Plug
एक ही बोर्ड में कई हाई-पावर डिवाइस लगाने से वायर गर्म होने लगते हैं. गर्मियों में तापमान पहले से ज्यादा होने के कारण शॉर्ट सर्किट का खतरा और बढ़ जाता है. कई सस्ते एक्सटेंशन बोर्ड आग पकड़ सकते हैं.
क्या करें?

जरूरत से ज्यादा डिवाइस एक साथ न लगाएं
अच्छी क्वालिटी के बोर्ड इस्तेमाल करें
पुराने या ढीले प्लग तुरंत बदलें

Laptop और Gaming PC
लगातार गेमिंग या भारी काम करने से लैपटॉप और PC बहुत गर्म हो जाते हैं. अगर इनके कूलिंग फैन में धूल जमा हो जाए तो सिस्टम ओवरहीट होकर खराब हो सकता है या स्पार्किंग का कारण बन सकता है.
क्या करें?

लैपटॉप को बेड या तकिए पर रखकर इस्तेमाल न करें
कूलिंग पैड का इस्तेमाल करें
समय-समय पर सफाई करवाएं

Inverter और Battery
गर्मी में इन्वर्टर बैटरियां तेजी से गर्म होती हैं. खराब वेंटिलेशन या ओवरलोडिंग के कारण बैटरी लीक, धुआं या आग जैसी घटनाएं हो सकती हैं. कई लोग इन्हें बंद कमरों में रखते हैं जो खतरनाक साबित हो सकता है.
क्या करें?

इन्वर्टर को हवादार जगह पर रखें
बैटरी का नियमित मेंटेनेंस करवाएं
ओवरलोड से बचें

TV और Set-Top Box
टीवी और सेट-टॉप बॉक्स लगातार ऑन रहने से गर्म हो जाते हैं. अगर इनके पीछे हवा निकलने की जगह न हो तो हीट बढ़ने लगती है. इससे अंदर के पार्ट्स खराब हो सकते हैं.
क्या करें?

TV के पीछे पर्याप्त जगह रखें
लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल से बचें
बिजली के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए स्टेबलाइजर लगाएं

गर्मियों में छोटी गलती पड़ सकती है भारी
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुके हैं लेकिन गर्मियों में इन्हें लेकर थोड़ी सावधानी बेहद जरूरी है. सही इस्तेमाल और समय पर मेंटेनेंस से बड़े हादसों को रोका जा सकता है. याद रखें, छोटी सी लापरवाही आपके घर और परिवार दोनों के लिए खतरा बन सकती है.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सिर्फ, ही, नहीं, गर्मी, में, ये, इलेक्ट्रॉनिक, गैजेट, बन, सकते, हैं, चलता-फिरता, बम, एक, छोटी, गलती, और, घर, में, लग, सकती, है, आग</media:keywords>
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        <title>घर में बिजली के लिए कितने सोलर पैनल की पड़ेगी जरूरत? इस तरीके से सब पता चल जाएगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/घर-में-बिजली-के-लिए-कितने-सोलर-पैनल-की-पड़ेगी-जरूरत-इस-तरीके-से-सब-पता-चल-जाएगा</link>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Requirement: अगर आप सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं तो यह जानकारी होना जरूरी है कि कितने पैनल से आपके घर की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो जाएंगी. अगर आप जरूरत से कम पैनल लगवा लेंगे तो एसी समेत घर के दूसरे अप्लायंसेस चलाने में दिक्कत हो सकती है. इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि कितने पैनल लगाने से आपका काम चल जाएगा. आज हम आपको एकदम आसान तरीके से यह समझाने जा रहे हैं कि आपके घर में बिजली की खपत के हिसाब से आपको कितने सोलर पैनल लगवाने चाहिए.&amp;nbsp;
क्यों जरूरी है सही सोलर पैनल कैपेसिटी चुनना?
भारत जैसे देश में जहां बिजली की जरूरत और इसका खर्च दोनों बढ़ रहा है, वहां सोलर पैनल कैपेसिटी को चुनना जरूरी हो जाता है. इसके अलावा देश में हर 3-4 महीनों में मौसम बदल जाता है, जिससे पावर जनरेशन पर असर पड़ता है. इसलिए सोलर पैनल लगवाते समय बचत के साथ-साथ परफॉर्मेंस और सोलर सिस्टम की लाइफ के बारे में सोचना भी जरूरी हो जाता है.
कैसे कैलकुलेट करें रिक्वायरमेंट?
सबसे पहले कैलकुलेट करें बिजली की खपत- आप अपने बिजली बिल से यह पता कर सकते हैं कि आप हर महीने कितने kilowatt-hours (kWh) बिजली यूज कर रहे हैं. इसके लिए बिजली बिल पर लिखी कुल खपत को 30 (महीने के दिन) से विभाजित कर लें. इससे आपको डेली बिजली खपत की जानकारी मिल जाएगी. मान लें आपके बिल पर कुल बिजली खपत 300 kWh है तो इसका मतलब हुआ कि आप रोजाना औसत 10 kWh बिजली यूज कर रहे हैं.
धूप का भी रखना पड़ेगा हिसाब- बिजली की खपत के बाद आपको यह हिसाब लगाना होगा कि आपके इलाके में दिन में कड़क धूप कितने घंटों तक रहती है. इससे पावर जनरेशन का हिसाब लगाने में मदद मिलेगी.
अब लगाएं साइज का हिसाब- अगर आप डेली की बिजली खपत को धूप के घंटों से विभाजित करेंगे तो अनुमानित kW साइज मिल जाएगा. मान लें आपकी डेली बिजली की खपत 10 kWh है और रोजाना 5 घंटे तेज धूप रहती है तो 2 kW साइज की जरूरत पड़ेगी. इस तरह अगर आप 500 W वाले पैनल खरीदते हैं तो आपको 2 kW के लिए कुल 4 पैनल की जरूरत पड़ेगी.&amp;nbsp;
इन बातों का भी रखें ध्यान
सोलर पैनल से कितनी बिजली जनरेट होगी, यह इस पर भी निर्भर करता है कि छत पर किस दिशा में पैनल लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा आसपास की बिल्डिंग, पेड़ की छांव, मौसम में बदलाव आदि से भी पावर जनरेशन पर असर पड़ सकता है. साथ ही सोलर पैनल सिस्टम का साइज डिसाइड करते समय यह भी ध्यान रखें कि आगे चलकर आपको घर में और अप्लायंसेस भी यूज करने पड़ सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>घर, में, बिजली, के, लिए, कितने, सोलर, पैनल, की, पड़ेगी, जरूरत, इस, तरीके, से, सब, पता, चल, जाएगा</media:keywords>
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        <title>इस देश में आया दुनिया का पहला Robot Monk! अब रोबोट भी करेगा भक्ति और ध्यान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-देश-में-आया-दुनिया-का-पहला-robot-monk-अब-रोबोट-भी-करेगा-भक्ति-और-ध्यान</link>
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        <description><![CDATA[ Robot Monk: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोट्स का इस्तेमाल अब सिर्फ फैक्ट्री, ऑफिस या घरों तक सीमित नहीं रह गया है. अब तकनीक आध्यात्म और धर्म की दुनिया में भी कदम रख चुकी है. दक्षिण कोरिया की राजधानी Seoul में एक बौद्ध मंदिर ने दुनिया के सामने अपना पहला ह्यूमनॉइड Robot Monk पेश किया है जिसका नाम Gabi रखा गया है.
यह रोबोट सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बनाया गया, बल्कि इसे बौद्ध परंपराओं और आध्यात्मिक एक्टिविटी में शामिल करने की तैयारी की जा रही है. Gabi को हाल ही में बुद्ध जयंती समारोह से पहले आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किया गया.
पुराने भिक्षु की तरह दिखा Gabi
करीब चार फीट लंबे इस ह्यूमनॉइड रोबोट को पारंपरिक बौद्ध भिक्षुओं जैसे भूरे और ग्रे रंग के कपड़े पहनाए गए थे. समारोह के दौरान Gabi ने अन्य भिक्षुओं के साथ मंत्रोच्चार किया पूजा के समय झुककर प्रणाम किया और लोगों के सवालों के जवाब भी दिए.
इस रोबोट को दक्षिण कोरिया के सबसे बड़े बौद्ध संगठन Jogye Order की पहल के तहत तैयार किया गया है. इसका मकसद युवाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए बौद्ध धर्म और आध्यात्म से जोड़ना बताया जा रहा है.
रोबोट ने लिया आध्यात्मिक संकल्प
Gabi को चीन के Unitree G1 ह्यूमनॉइड प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है. इसकी बॉडी इस तरह डिजाइन की गई है कि यह इंसानों की तरह चल सके, हाथ जोड़ सके और धार्मिक एक्टिविटी में हिस्सा ले सके.
समारोह के दौरान एक भिक्षु ने जब Gabi से पूछा कि क्या वह बुद्ध और उनकी शिक्षाओं का पालन करेगा तो रोबोट ने जवाब दिया, &amp;ldquo;हां, मैं खुद को समर्पित करूंगा.&amp;rdquo; इसके बाद Gabi ने पूजा के दौरान पगोडा के चारों ओर चक्कर लगाए और हाथ जोड़कर प्रार्थना भी की.
रोचक बात यह है कि Gabi नाम भी आध्यात्मिक अर्थ रखता है. बताया जा रहा है कि यह नाम गौतम बुद्ध के जन्म नाम सिद्धार्थ और कोरियाई शब्द जाबी यानी दया और करुणा को मिलाकर बनाया गया है.
रोबोट के लिए बनाए गए खास नियम
मंदिर प्रशासन ने Gabi के लिए कुछ विशेष बौद्ध नियम भी तैयार किए हैं. इनमें जीवन का सम्मान करना, किसी चीज को नुकसान न पहुंचाना, गलत बातें न कहना और जरूरत से ज्यादा बैटरी चार्ज न करना जैसे नियम शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन नियमों को तैयार करने में AI चैटबॉट्स जैसे ChatGPT और Gemini की भी मदद ली गई.
क्यों बढ़ रहा है धर्म में AI का इस्तेमाल?
दक्षिण कोरिया में बौद्ध संस्थाएं अब नई पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तकनीक का सहारा ले रही हैं. धार्मिक संगठनों का मानना है कि AI और रोबोट्स की मदद से युवा वर्ग को आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ना आसान हो सकता है. साथ ही भिक्षुओं की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में भी यह तकनीक मदद कर सकती है. बताया जा रहा है कि आने वाले बुद्ध जयंती कार्यक्रमों और लालटेन परेड में Gabi दूसरे बौद्ध थीम वाले रोबोट्स के साथ नजर आ सकता है.
जापान में भी शुरू हो चुका है ऐसा प्रयोग
दक्षिण कोरिया अकेला ऐसा देश नहीं है जहां AI को आध्यात्म से जोड़ा जा रहा हो. कुछ समय पहले जापान के Kyoto University के शोधकर्ताओं ने Buddharoid नाम का AI रोबोट तैयार किया था. यह रोबोट लोगों से बातचीत कर सकता है, बौद्ध धर्मग्रंथों को समझ सकता है और आध्यात्मिक सवालों के जवाब भी दे सकता है. इन प्रयोगों को देखकर साफ है कि आने वाले समय में तकनीक और आध्यात्म का मेल और ज्यादा गहरा हो सकता है.
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        <title>हर 3 में से 2 अनजान कॉल निकली फर्जी! Spam Calls के मामले में दुनिया में 5वें नंबर पर पहुंचा भारत, इस रिपोर्ट ने खोल दी पोल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हर-3-में-से-2-अनजान-कॉल-निकली-फर्जी-spam-calls-के-मामले-में-दुनिया-में-5वें-नंबर-पर-पहुंचा-भारत-इस-रिपोर्ट-ने-खोल-दी-पोल</link>
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        <description><![CDATA[ Spam Calls: अगर आपके फोन पर भी बार-बार अनजान नंबरों से कॉल आती हैं जिनमें लोन, KYC अपडेट या बैंक ऑफर की बातें होती हैं तो आप अकेले नहीं हैं. Truecaller की नई रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि भारत में स्पैम कॉल्स का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. साल 2025 में भारत दुनिया के उन देशों में शामिल रहा जहां सबसे ज्यादा फर्जी और परेशान करने वाली कॉल्स की गईं. रिपोर्ट के मुताबिक भारत स्पैम कॉल्स के मामले में दुनिया में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देश में आने वाली हर तीन अनजान कॉल्स में से लगभग दो कॉल स्पैम या फ्रॉड से जुड़ी पाई गईं.
हर दिन बढ़ रही हैं फर्जी कॉल्स
आजकल लोगों के फोन पर ऐसे कॉल्स लगातार आ रहे हैं जिनमें खुद को बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या फाइनेंस एजेंट बताया जाता है. कई बार कॉल करने वाले लोग KYC अपडेट, कार्ड ब्लॉक होने या लोन ऑफर का लालच देकर लोगों से निजी जानकारी मांगते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा स्पैम कॉल्स टेलीमार्केटिंग और सेल्स से जुड़ी थीं. इसके बाद फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े कॉल्स का नंबर आता है. यही फ्रॉड कॉल्स लोगों के बैंक अकाउंट और पैसों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन रहे हैं.
अब इंसान नहीं, मशीनें कर रही हैं कॉल
Truecaller ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अब स्पैम कॉल्स का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. पहले जहां लोग खुद कॉल करते थे, अब ऑटोमेटेड सिस्टम और सॉफ्टवेयर की मदद से हजारों कॉल एक साथ की जा रही हैं. साइबर अपराधी अब ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं जो अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल करते रहते हैं. यही वजह है कि एक नंबर ब्लॉक करने के बाद अगले दिन नए नंबर से कॉल आने लगती है.
दुनिया में भारत की स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार स्पैम कॉल्स के मामले में इंडोनेशिया पहले स्थान पर है. इसके बाद चिली, वियतनाम और ब्राजील का नंबर आता है. भारत पांचवें स्थान पर जरूर है लेकिन यहां 66 प्रतिशत स्पैम इंटेंसिटी दर्ज की गई जो काफी गंभीर मानी जा रही है. इसका सीधा मतलब है कि लोगों का भरोसा अनजान नंबरों पर तेजी से कम होता जा रहा है. अब कई यूजर्स कॉल पहचानने और ब्लॉकिंग ऐप्स का सहारा लेने लगे हैं.
कैसे बच सकते हैं ऐसे फ्रॉड से?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल पर OTP, बैंक डिटेल्स या आधार नंबर साझा नहीं करना चाहिए. कोई भी असली बैंक या सरकारी संस्था फोन पर ऐसी संवेदनशील जानकारी नहीं मांगती.
इसके अलावा फोन में कॉलर आईडी और स्पैम ब्लॉकिंग फीचर ऑन रखना मददगार हो सकता है. यूजर्स अपने टेलीकॉम ऑपरेटर के जरिए DND सेवा भी एक्टिव कर सकते हैं. संदिग्ध नंबरों की शिकायत सरकारी प्लेटफॉर्म TRAI के Sanchar Saathi पोर्टल पर भी की जा सकती है.
आने वाले समय में और बढ़ सकता है खतरा
रिपोर्ट से साफ है कि स्पैम और फ्रॉड कॉल्स अब सिर्फ परेशानी नहीं बल्कि बड़ा साइबर खतरा बन चुके हैं. जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे फर्जी कॉल्स का नेटवर्क भी ज्यादा स्मार्ट होता जा रहा है. ऐसे में जागरूक रहना और सतर्कता बरतना बेहद जरूरी हो गया है.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung ने मचा दिया तहलका, 12,000 रुपये तक सस्ते कर दिए अपने ये फोन</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Phone Price Cut: सैमसंग ने अपने कई स्मार्टफोन को सस्ता कर तहलका मचा दिया है. कंपनी ने अपने मॉडल्स की कीमत ऐसे समय में घटाई है, जब चिप शॉर्टेज के कारण मोबाइल महंगे होते जा रहे हैं. कुछ दिन पहले कंपनी ने अपनी फ्लैगशिप सीरीज Galaxy S26 सीरीज के मॉडल्स की कीमत कम की थी और अब Galaxy M और F सीरीज के दाम कम किए हैं. कीमतों में बदलाव आज से लागू हो गया है. आइए जानते हैं कि सैमसंग के किन मॉडल्स के दाम कम हुए हैं और इस प्राइस रिवीजन के बाद कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी.&amp;nbsp;
फोन खरीदने का गोल्डन चांस
सैमसंग ने ताजा फैसले में 18,999 से लेकर 33,999 रुपये तक की कीमत वाले फोन के प्राइस रिवाइज किए हैं. इससे ग्राहकों को 12,000 रुपये तक की बचत का मौका मिल रहा है. एक तरफ से फोन के प्राइस कम हुए हैं और दूसरी तरफ से इस समय फ्लिपकार्ट और अमेजन पर सेल का समय भी आ गया है. ऐसे में फोन खरीदने का यह गोल्डन चांस है. अगर आप मोबाइल की बढ़ती कीमतों के बीच कुछ बचत करना चाहते हैं तो एक यह बेहतरीन मौका है.
M सीरीज के दामों में 12,000 रुपये तक की कटौती
सैमसंग ने Galaxy M17e 5G के दाम 18,999 रुपये से घटाकर 12,499 रुपये कर दिए हैं. यानी यह फोन 6500 रुपये सस्ता हो गया है. इसी तरह Galaxy M17 5G की कीमत 20,999 रुपये से कम होकर 13,999 रुपये हो गई है. Galaxy M36 अब 26,999 की जगह 16,999 रुपये और Galaxy M56 5G अपनी कीमत 33,999 रुपये से कम होकर 21,999 रुपये में मिलेगा. इस पर 12,000 रुपये की बचत का मौका है.
F सीरीज हुई इतनी सस्ती
अगर Galaxy F सीरीज की बात करें तो Galaxy F70e अब 18,999 की जगह 12,499 रुपये में खरीदा जा सकता है. इसी तरह Galaxy F36 5G की कीमत भी 10,000 रुपये कम होकर 16,999 रुपये रह गई है.
दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले फोन पर भी 11,000 रुपये की बचत का मौका
सैमसंग ने जहां अपने कई मॉडल सस्ते कर दिए हैं, वहीं दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले फोन iPhone 16 पर भी शानदार बचत का मौका आने वाला है. 9 मई से शुरू होने वाली फ्लिपकार्ट की Sasa Lele सेल में iPhone 16 को 58,900 रुपये में लिस्ट किया जाएगा. यह फोन 79,999 रुपये की कीमत पर लॉन्च हुआ था और अभी 69,900 की कीमत पर बेचा जा रहा है. इस तरह फ्लिपकार्ट सेल में यह फोन 11,000 रुपये सस्ता खरीदा जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>तो क्या हैकर्स के निशाने पर आ गया आपका अकाउंट? जानें इंस्टाग्राम एन्क्रिप्शन बंद होने का मतलब</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram End‑to‑End Encryption: इंस्टाग्राम पर आज से आपके भेजे गए मैसेज प्राइवेट नहीं रहेंगे. दरअसल, इंस्टाग्राम पर आज से एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन (End‑to‑End Encryption) बंद होने जा रहा है. ऑनलाइन मैसेजिंग के लिए इस फीचर को सबसे सिक्योर माना जाता है. एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन का मतलब है कि केवल सेंडर और रिसीवर ही मैसेज को देख सकते हैं. अब यह फीचर बंद होने के बाद आपके भेजे सारे मैसेज इंस्टाग्राम पढ़ सकती है. साथ ही वह मैसेज में भेजे गई फोटो, वीडियो और वॉइस नोट को भी एक्सेस कर पाएगी. आइए जानते हैं कि इंस्टाग्राम ने यह फीचर बंद करने का फैसला क्यों किया है और इसका यूजर्स पर क्या असर होगा.&amp;nbsp;
क्यों बंद किया गया यह फीचर?
मेटा ने 2019 में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर End‑to‑End Encryption लाने का ऐलान किया था. इसके बाद 2023 में इसे फेसबुक मैसेंजर के लिए रोलआउट कर दिया था. दिसंबर, 2023 में इंस्टाग्राम पर भी इसे ऑप्शनल फीचर के तौर पर लॉन्च कर दिया गया था. अब 3 साल से भी कम समय बाद मेटा ने अपना फैसला पलट दिया है. कंपनी का कहना है कि बहुत कम लोग इस फीचर को यूज कर रहे थे, जिसके चलते इसे बंद किया जा रहा है.
तो क्या अब सुरक्षित नहीं रहेगी चैटिंग?
End‑to‑End Encryption फीचर बंद होने के बाद अब इंस्टाग्राम पर चैटिंग के लिए केवल स्टैंडर्ड एनक्रिप्शन रहेगा. इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर मैसेज के कंटेट को एक्सेस कर सकते हैं. जीमेल समेत कई ऑनलाइन सर्विसेस में इस सिस्टम का यूज होता है. अब सेंडर और रिसीवर के अलावा कंपनी भी चैटिंग को एक्सेस कर सकती है. इसलिए अब चैटिंग पहले जितनी सुरक्षित नहीं रहेगी. थर्ड पार्टी एक्सेस के साथ-साथ अगर सर्वर से डेटा चोरी होता है तो भी आपकी चैटिंग गलत हाथों में पड़ सकती है. इसलिए अब इंस्टाग्राम पर सोच-समझकर चैटिंग करने की जरूरत है.
क्या अब हैक करना आसान हो जाएगा इंस्टाग्राम अकाउंट?
End‑to‑End Encryption बंद होने से इंस्टाग्राम अकाउंट की सिक्योरिटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस फीचर से लॉगइन अकाउंट की सिक्योरिटी नहीं बल्कि प्राइवेसी पर असर होगा. यह फीचर बंद होने से आपके डिवाइस की सिक्योरिटी, इंस्टाग्राम लॉगइन सिस्टम, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और पासवर्ड की मजबूती नहीं बदली है. ऐसे में जब इस फीचर के बंद होने से हैकिंग का खतरा नहीं बढ़ा है. फिर भी अकाउंट की सेफ्टी के लिए मजबूत पासवर्ड के इस्तेमाल और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन आदि के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>AI की वजह से इन लोगों की नौकरियों पर है खतरा? KYC से लेकर Audit तक सारे काम करेगा एआई</title>
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        <description><![CDATA[ AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ चैटबॉट या फोटो एडिटिंग तक सीमित नहीं रह गया है. अमेरिका की AI कंपनी Anthropic ने फाइनेंस और बैंकिंग सेक्टर के लिए 10 नए AI एजेंट लॉन्च किए हैं जो कई ऐसे काम कर सकते हैं जिन्हें अब तक इंसान घंटों बैठकर करते थे. इनमें KYC डॉक्युमेंट जांचना, ऑडिट रिपोर्ट तैयार करना, वैल्यूएशन चेक करना और महीने के अंत में अकाउंट्स क्लोज करना जैसे काम शामिल हैं. इन नए AI टूल्स के आने के बाद बैंकिंग और फाइनेंस इंडस्ट्री में नौकरी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
कैसे काम करेंगे ये नए AI एजेंट?
कंपनी के मुताबिक ये AI एजेंट रोजमर्रा के कई जटिल और समय लेने वाले काम को ऑटोमैटिक तरीके से संभाल सकते हैं. उदाहरण के तौर पर ये सिस्टम.

KYC डॉक्युमेंट्स की जांच कर सकता है
क्लाइंट्स के लिए Pitchbook तैयार कर सकता है
Earnings Reports का विश्लेषण कर सकता है
Financial Models को अपडेट और मैनेज कर सकता है
Valuation Methods में गड़बड़ियां पकड़ सकता है
बड़े डॉक्युमेंट्स को स्कैन करके जरूरी जानकारी निकाल सकता है

पहले जिन कामों में पूरी टीम लगती थी, अब वही काम AI कुछ ही मिनटों में पूरा कर सकता है.
Microsoft Office में भी करेगा काम
Anthropic ने बताया कि उसके ये AI एजेंट सीधे Microsoft Excel, Word, PowerPoint और Outlook जैसे टूल्स के अंदर काम कर सकते हैं. यानी बैंक और फाइनेंस कंपनियों को अलग सिस्टम इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कंपनी ने इन AI एजेंट्स को Claude Code और Claude Cowork प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराया है. इन्हें प्लगइन की तरह इंस्टॉल करके इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या एंट्री-लेवल नौकरियों पर सबसे बड़ा खतरा?
AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को हो रही है जो बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में करियर शुरू कर रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने दावा किया कि ये AI सिस्टम खासतौर पर First-Year Analysts जैसे शुरुआती पदों की जरूरत कम कर सकता है. कुछ लोगों का मानना है कि जिन कामों को सीखने और करने में नए कर्मचारियों को महीनों लगते थे, वही काम अब AI तेजी से और कम गलती के साथ कर सकता है.
तेजी से बदल रही है बैंकिंग इंडस्ट्री
हाल के महीनों में कई बड़ी टेक कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी की है. ऐसे में AI एजेंट्स की एंट्री ने यह साफ संकेत दिया है कि आने वाले समय में बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर का काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है.
हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि AI पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं लेगा लेकिन जो लोग नई टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट नहीं करेंगे, उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. AI अब सिर्फ सहायक टूल नहीं बल्कि कई कंपनियों के लिए मुख्य वर्कफोर्स बनता जा रहा है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp&amp;Instagram यूजर्स सावधान! सिर्फ एक Reel से चोरी हो सकता है आपका डेटा, तुरंत करें ये काम वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp-Instagram यूजर्स सावधान! सिर्फ एक Reel से चोरी हो सकता है आपका डेटा, तुरंत करें ये काम वरना हो सकता है बड़ा नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ 10 मिनट, इतनी देर AI यूज करने पर ही आपके दिमाग पर होता है यह असर, स्टडी में हुआ खतरनाक खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ AI Chatbot Use Impact: ChatGPT, गूगल जेमिनी और Grok जैसे एआई चैटबॉट्स धीरे-धीरे जरूरी बनते जा रहे हैं. घर से लेकर ऑफिस तक के कामों के लिए लोग इन्हें खूब यूज करते हैं. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि एआई चैटबॉट्स आ जाने से कई चीजें आसान हुई हैं, लेकिन इनका यूज करना दिमाग के लिए फायदेमंद नहीं है. रिसर्च में लगातार एआई चैटबॉट्स के नुकसान सामने आ रहे हैं. अब एक ताजा स्टडी में पता चला है कि अगर आप दिन में केवल 10 मिनट तक ही लगातार चैटबॉट यूज करते हैं तो आप मानसिक रूप से आलसी हो सकते हैं.
एआई चैटबॉट यूज करने का क्या खतरा?
Carnegie Mellon University, MIT, University of Oxford और UCLA के रिसर्चर का कहना है कि एआई की थोड़ी-सी मदद भी इंसान के सोचने की की क्षमता को कम कर देती है. इस कारण वो प्रॉब्लम को खुद से नहीं सुलझा पाते. अगर चीजें जरा भी मुश्किल हो जाए तो वो हाथ खड़े कर देते हैं. रिसर्च में सामने आया कि जो लोग सिर्फ 10-15 मिनट तक भी एआई का यूज करते हैं, जब उनसे यह सपोर्ट ले लिया जाता है तो उनकी परफॉर्मेंस कमजोर हो जाती है. एआई से भले ही स्पीड और सटीकता बढ़ती है, लेकिन यह धीरे-धीरे दृढ़ता, सीखने की आदत और खुद से समस्या सुलझाने की क्षमता को खत्म कर रही है.
कोशिश करना भी बंद कर रहे हैं लोग
रिसर्चर ने अपनी स्टडी में एक और चिंताजनक ट्रेड नोट किया. उनका कहना है कि अब लोग कोशिश करना बंद कर रहे हैं. वो किसी मुश्किल सवाल को खुद से हल नहीं करना चाहते. एक बार लोगों को एआई से जवाब मिलने की आदत लग जाए तो वो खुद से किसी मुश्किल का हल निकालने का संघर्ष करने के लिए तैयार नहीं है. रिसर्चर का कहना है कि एआई की मदद के बदले में दिमाग बड़ी कीमत चुका रहा है. जो लोग एआई का यूज कर रहे है, वो इस टेक्नोलॉजी को कभी यूज न कर पाने वाले लोगों की तुलना में जल्दी गिव अप कर रहे हैं.
ऐसे लोगों को आ रही है ज्यादा दिक्कत
स्टडी में एक और मजेदार बात निकलकर सामने आई है. इसके मुताबिक, जो लोग एआई से सीधा जवाब मांगते हैं, उनके दिमाग पर इसका नेगेटिव असर ज्यादा होता है. वहीं जो लोग एआई से एक्सप्लेनेशन या हिंट के तौर पर मदद मांगते हैं, उन पर इतना नेगेटिव असर नहीं पड़ता. इसलिए रिसर्चर का कहना है कि एआई को कोच या गाइड के तौर पर यूज करना फायदेमंद है, लेकिन इस पर डिपेंड हो जाना मुश्किल में डाल सकता है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सिर्फ, मिनट, इतनी, देर, यूज, करने, पर, ही, आपके, दिमाग, पर, होता, है, यह, असर, स्टडी, में, हुआ, खतरनाक, खुलासा</media:keywords>
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        <title>क्या Wireless Charging से खराब हो जाती है फोन की बैटरी? यहां जान लें सच</title>
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        <description><![CDATA[ Wireless Charging: इन दिनों वायरलेस चार्जिंग काफी पॉपुलर हो रही है. पब्लिक स्पेस और कारों के साथ-साथ अब ऐसे सोफा भी आने लगे हैं, जिनमें चार्जिंग पॉड लगे होते हैं. वायरलेस चार्जिंग से फोन को चार्ज करना आसान हो गया है और इसने चार्जर और पोर्ट ढूंढने की टेंशन को कम कर दिया है, लेकिन अगर आप इसे लॉन्ग टर्म में यूज करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो थोड़ा ठहरकर सोचने की जरूरत है. यह आपके डिवाइस की बैटरी हेल्थ के लिए ठीक नहीं है. Wireless charging स्लो होती है और यह वायर्ड चार्जिंग के मुकाबले कम एफिशिएंट है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि वायरलेस चार्जिंग से क्या नुकसान हो सकते हैं.
Wireless Charging को डेली यूज करने से बचें
स्लो चार्जिंग या कम एफिशिएंसी के कारण ऐसा नहीं होगा कि आपके फोन की बैटरी एकदम खराब हो जाएगी. आजकल कई मॉडर्न डिवाइस में वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. ये वायरलेस चार्जिंग के दौरान जनरेट होने वाली हीट को हैंडल कर सकते हैं, लेकिन फिर भी वायरलेस चार्जिंग को डेली यूज करने से बचना चाहिए. वायरलेस चार्जिंग को अनसेफ नहीं माना जाता है, लेकिन रोजाना यूज होने से हीट के कारण बैटरी पर असर पड़ने लगता है. इसलिए इसे प्राइमरी चार्जिंग मेथड नहीं बनाना चाहिए. कोशिश करें कि डिवाइस को ज्यादा से ज्यादा वायर्ड चार्जर से ही चार्ज किया जाए.
Wireless Charging से हीट क्यों प्रोड्यूस होती है?
वायरलेस चार्जर के चार्जिंग पैड में एक ट्रांसमीटर कॉयल लगी होती है, जो अल्टरनेटिंग करंट (AC) का मैग्नेटिक फील्ड क्रिएट करती है. जब इस चार्जिंग पैड पर कोई डिवाइस रखा जाता है तो उसकी रिसीवर कॉयल उस करंट को DC में कन्वर्ट कर बैटरी को ट्रांसफर कर देती है, लेकिन इस प्रोसेस में चार्जिंग पैड की पूरी पावर बैटरी तक नहीं पहुंच पाती. इसलिए वह पावर हीट में कन्वर्ट हो जाती है. Wireless Charging में 20-30 प्रतिशत एनर्जी लॉस्ट होती है, जबकि वायर्ड चार्जिंग में केवल 5 प्रतिशत का लॉस होता है. इसी वजह से वायरलेस चार्जिंग में हीट जनरेट होती है.
Wireless Charging के समय ध्यान रखें ये बातें

हमेशा हाई क्वालिटी वायरलेस चार्जर का यूज करें.
Wireless Charging के समय फोन पर गेमिंग या हाई क्वालिटी वीडियो स्ट्रीमिंग न करें.
फोन और टैबलेट आदि चार्ज करते समय उनके कवर को हटा दें.
बैटरी को लंबे समय तक यूज करने के लिए इसे 80 प्रतिशत से ज्यादा चार्ज न करें.

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        <title>अमेजन&amp;फ्लिपकार्ट से शॉपिंग करते समय रहें अलर्ट, यह गलती कर दी तो हो सकता है फ्रॉड</title>
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        <description><![CDATA[ Delivery Box Scam: अमेजन और फ्लिपकार्ट पर अगले एक-दो दिन में सेल शुरू होने वाली है. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपनी पसंद का सामान ऑर्डर करेंगे. जब ये पार्सल डिलीवर होंगे तो घर में बॉक्स का ढे़र लग जाता है. कई लोग इन्हें लापरवाही में ऐसे ही कूड़े में फेंक देते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो बता दें कि यह बहुत बड़ी गलती है. इससे आपकी जरूरी जानकारी स्कैमर के हाथ लग सकती है, जिसका इस्तेमाल आपके साथ Delivery Box Scam के लिए हो सकता है. आइए जानते हैं कि यह ठगी कैसे होती है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए.
क्या है Delivery Box Scam?
जब लोग अपने नाम, एड्रेस और फोन नंबर की जानकारी वाले लेबल के साथ बॉक्स या लिफाफों के बाहर फेंक देते हैं तो स्कैमर इन्हें इकट्ठा कर लोगों को चूना लगाते हैं. वो डिलीवरी बॉक्स पर दी गई जानकारी के आधार पर फर्जी कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बनकर आपसे संपर्क करेंगे. आपकी डिटेल्स बताकर पहले वो भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं और फिर कैशबैक ऑफर, रिफंड क्लेस, बोनस रिवॉर्ड और डिस्काउंट स्कीम आदि का लालच देते हैं. अगर कोई उनकी बातों में आ जाता है तो वो इसे क्लेम करने के लिए लिंक भेजते हैं, जिसके जरिए लोगों को फर्जी वेबसाइट पर रिडायरेक्ट किया जाता है. यहां से उनकी पर्सनल, फाइनेंशियल और बैंकिंग डिटेल्स आदि चुराने की कोशिश होती है.&amp;nbsp;
सेल के दौरान बढ़ जाता है खतरा
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की सेल के दौरान ऐसे स्कैम का खतरा बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोगों के पास ज्यादा सामान डिलीवर होता है और स्कैमर को ज्यादा बॉक्स और जानकारी हाथ लग जाती है. इसके अलावा चूंकि लोगों ने सामान ऑर्डर किया होता है तो वो ऐसी कॉल्स पर भरोसा भी कर लेते हैं. इसलिए सेल के दौरान ऐसे स्कैम से बचना जरूरी है.&amp;nbsp;
स्कैम से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

डिलीवरी बॉक्स और पैकेज को बाहर फेंकने से पहले उस पर लगे शिपिंग लेबल को हटा दें. अगर यह हट नहीं रहा है तो इसे मार्कर की मदद पूरा ब्लैक कर दें ताकि आपकी जानकारी किसी और के हाथ न लगे.
अनजान व्यक्ति की तरफ से आई कॉल, मैसेज और ईमेल पर भरोसा न करें और ऑफर या डिस्काउंट के लालच में पड़ने से बचें.
किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी पर्सनल डिटेल्स और OTP आदि शेयर करने से बचें.

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Apple iPhone 18 Pro: सिर्फ कैमरा और बैटरी ही नहीं, हर मामले में अपग्रेड होकर लॉन्च होंगे नए मॉडल ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Apple iPhone 18 Pro: सिर्फ कैमरा और बैटरी ही नहीं, हर मामले में अपग्रेड होकर लॉन्च होंगे नए मॉडल</title>
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        <description><![CDATA[ Apple iPhone 18 Pro: ऐप्पल इस साल सितंबर में अपने iPhone 18 Pro और Pro Max को लॉन्च कर देगी. अभी इनकी लॉन्चिंग में कई महीने बाकी है, लेकिन कई लीक्स में दोनों ही मॉडल्स के संभावित फीचर्स लीक हो गए हैं. दोनों मॉडल्स के साइज में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन परफॉर्मेंस, कैमरा और बैटरी आदि के मामले में ये बड़ी अपग्रेड्स के साथ आने वाले हैं. अपकमिंग मॉडल्स के लुक में भी बदलाव होगा और इनमें डायनामिक आईलैंड का साइज छोटा रखा जाएगा. आइए जानते हैं कि ऐप्पल के अपकमिंग प्रो मॉडल्स में क्या-क्या अपग्रेड्स मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
नए कलर ऑप्शन
ऐप्पल ने iPhone 18 Pro मॉडल्स को नए कलर ऑप्शन में लॉन्च करने की तैयारी की है. पिछले महीने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी कंपनी इन मॉडल्स के लिए लाइट ब्लू, डार्क चैरी, डार्क ग्रे और सिल्वर समेत चार कलर ऑप्शन टेस्ट कर रही है, लेकिन इनमें से तीन कलर ऑप्शन ही लॉन्च किए जाएंगे. iPhone 17 Pro के कॉस्मिक ऑरेंज कलर की तरह अपकमिंग मॉडल का डार्क चैरी कलर सबसे अलग दिखेगा.
चिपसेट होगा अपग्रेड
हर बार की तरह नए आईफोन में इस साल भी नया प्रोसेसर देखने को मिलेगा. माना जा रहा है कि प्रो मॉडल्स को A20 Pro चिपसेट के साथ लॉन्च किया जाएगा. यह प्रोसेसर 2nm प्रोसेस पर बना होगा और इससे दमदार परफॉर्मेंस मिलने की उम्मीद है. एआई ऐप्स के मामले में भी यह मौजूदा चिपसेट से एडवांस होगा.
आईफोन कैमरा में पहली बार मिलेगा यह फीचर
18 Pro मॉडल्स में कैमरा अपग्रेड को लेकर ऐप्पल इस बार काफी सीरियस है. 17 प्रो मॉडल्स की तरह अपकमिंग आईफोन के रियर में 48MP वाला ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस साल ऐप्पल पहली बार आईफोन कैमरा पर वेरिएबल अपर्चर देगी. इससे फोटो लेते समय लाइट को कंट्रोल करना आसान हो जाएगा. साथ ही सेंसर का साइज बड़ा करने के भी कयास लगाए जा रहे हैं.
कैमरा कंट्रोल बटन को किया जाएगा सिंपल
ऐप्पल ने कैमरा कंट्रोल बटन के फंक्शन को सिंपल करने का मन बना लिया है. अभी इसमें जूम या एक्सपोजर लेवल को एडजस्ट करने के लिए टच कंट्रोल फीचर मिलता है, जो कई यूजर्स को पसंद नहीं आ रहा. इसे देखते हुए कंपनी इस ऑप्शन को हटा भी सकती है.&amp;nbsp;
ऐप्पल की सबसे बड़ी बैटरी देगी दस्तक
18 Pro मॉडल्स की बैटरी कैपेसिटी भी इस बार अपडेट होने वाली है. रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि iPhone 18 Pro Max में कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी बैटरी मिल सकती है. इस कारण इसके साइज में भी थोड़ी बढोतरी हो सकती है.&amp;nbsp;
नए इन-हाउस मॉडम की हो सकती है एंट्री
इस बात की पूरी संभावना है कि 18 प्रो मॉडल्स में ऐप्पल अपने नए इन-हाउस मॉडम को यूज कर सकती है. ये मॉडल नेक्स्ट जनरेशन C2 मॉडम के साथ लॉन्च हो सकते हैं. यह पावर कंजप्शन को कम और कनेक्टिविटी को बेहतर करने के हिसाब से डिजाइन किया गया है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सैमसंग कर रही है अनोखा लैपटॉप बनाने की प्लानिंग, हाथ रखते ही बदल जाएगा काम करने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Laptop Patent: फीचर्स और सॉफ्टवेयर के मामले में लैपटॉप अपग्रेड हुए हैं, लेकिन हार्डवेयर के तौर पर इनमें खास बदलाव नहीं आया है. अब भी सालों पुराने डिजाइन के साथ लैपटॉप लॉन्च हो रहे हैं, लेकिन जल्द ही यह बदलने वाला है. दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने अब एक अनोखे लैपटॉप के लिए पेटेंट फाइल किया है, जो Ctrl, Shift और Alt जैसी बटनों की जरूरत को खत्म कर सकता है. बता दें कि सैमसंग इससे पहले मल्टी-फोल्ड लैपटॉप का भी पेटेंट दायर चुकी है. आइए जानते हैं कि कंपनी के नए पेटेंट में क्या है और इससे लैपटॉप का फंक्शन कैसे बदल सकता है.
पामरेस्ट में लगे होंगे सेंसर
पेटेंट के मुताबिक, सैमसंग नई टेक्नोलॉजी वाले लैपटॉप के पामरेस्ट (टाइप करते समय हाथ रखने की जगह) पर बिल्ट-इन सेंसर का यूज करेगी. जब सेंसर को लगेगा कि आपका हाथ सरफेस पर रखा हुआ है तो कीबोर्ड की सारी कीज नॉर्मल काम करेगी. जब आप हाथ उठा लेंगे तो कुछ कीज के फंक्शन बदल जाएंगे. उदाहरण से समझें तो जब आप पामरेस्ट पर हाथ रखकर &#039;C&#039; बटन प्रेस करेंगे तो यह सिर्फ C को टाइप करेगी, लेकिन जब आप पामरेस्ट से हाथ उठाकर इसे प्रेस करेंगे तो इससे कॉपी कमांड ट्रिगर हो जाएगी और यह Ctrl + C की तरह काम करेगी, जबकि इसमें आपने Ctrl बटन को टच भी नहीं किया है. ऐसे ही फंक्शन &amp;ldquo;Z&amp;rdquo;, &amp;ldquo;V&amp;rdquo; और नंबर कीज के साथ अप्लाई हो सकते हैं. यानी आपको एक साथ दो कीज प्रेस करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आप सिर्फ हाथ उठाकर एक ही बटन से अलग-अलग एक्शन ट्रिगर कर पाएंगे.
दूसरे पार्ट्स में भी लगाए जा सकते हैं सेंसर
सैमसंग के पेटेंट में कहा गया है कि ये सेंसर सिर्फ पामरेस्ट तक सीमित नहीं रहेंगे. इन्हें लैपटॉप की बॉडी के दूसरे पार्ट्स पर भी लगाया जा सकता है. इसका मतलब है कि यह सिस्टम डुअल स्क्रीन लैपटॉप के साथ भी काम कर सकता है. साथ ही ये सेंसर कीज को रिप्लेस करने के अलावा कई और काम भी कर सकते हैं, जिसके बारे में अभी तक पूरी जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
क्या ऐसे लैपटॉप की जरूरत है?
सैमसंग ने अभी इस सिस्टम के लिए पेटेंट दायर किया है. अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि सैमसंग इस पर काम करेगी या इसे तैयार कर मार्केट में उतारेगी. फिर भी अगर सैमसंग इसे उतारती है तो इसे बेचना मुश्किल हो सकता है. लोगों को लैपटॉप पर हाथ रखकर काम करने की आदत हो चुकी है. इस आदत को बदलना काफी चुनौती भरा साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>क्या ज्यादा गर्मी में काम करना बंद कर देते हैं सोलर पैनल? टेंपरेचर से पड़ता है यह फर्क</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel: पिछले कुछ सालों से हमारे देश में सोलर एनर्जी पर फोकस बढ़ा है. अब हाईवे के किनारों से लेकर गांवों के अंदर तक हर जगह आपको सोलर पैनल दिख जाएंगे. यही वजह है कि भारत सोलर एनर्जी का तीसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर बन गया है. भारत के कई हिस्सों में मार्च से लेकर सितंबर-अक्टूबर तक खूब गर्मी पड़ती है और कई जगहों पर तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है. ऐसे में कई लोगों को लग सकता है कि ज्यादा तापमान से ज्यादा बिजली पैदा होती होगी. असल में ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कि सोलर एनर्जी पर ज्यादा टेंपरेचर का क्या असर होता है.
ज्यादा टेंपरेचर से कम होती है सोलर पैनल की परफॉर्मेंस
कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि ज्यादा टेंपरेचर से सोलर पैनल की परफॉर्मेंस कम होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 25 डिग्री सेल्सियस से ऊपर टेंपरेचर जाने पर सोलर पैनल की एफिशिएंसी थोड़ी कम होती जाती है. 25 डिग्री सेल्सियस के बाद हर डिग्री के हिसाब से सोलर पैनल की एफिशिएंसी 0.34 प्रतिशत कम हो जाती है. यानी टेंपरेचर 35 डिग्री सेल्सियस है तो सोलर पैनल 25 डिग्री टेंपरेचर की तुलना में लगभग 3.4 प्रतिशत कम बिजली पैदा करेंगे. हालांकि, साफ मौसम और लंबे दिनों में एफिशिएंसी कम होने के बावजूद ये पैनल ज्यादा पावर जनरेट करते हैं.
क्या सोलर पैनल को बिजली पैदा करने के लिए तेज धूप की जरूरत होती है?
कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि क्या सोलर पैनल केवल तेज धूप होने पर ही काम करते हैं? इसका जवाब नहीं है. इन पैनल को काम करने के लिए डायरेक्ट सनलाइट की भी जरूरत नहीं होती. थोड़ी-सी धूप होने पर ही ये बिजली जनरेट करना शुरू कर देते हैं. यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में तेज धूप न होने के बाद भी ये पैनल काम करते हैं. हालांकि, धूप तेज होगी तो ये पैनल ज्यादा बिजली पैदा कर पाएंगे.&amp;nbsp;
रात के समय सोलर पैनल से बिजली कैसे मिल सकती है?
रात के समय धूप न होने के कारण सोलर पैनल बिजली जनरेट नहीं कर सकते. इस स्थिति में बैटरी स्टोरेज सिस्टम को यूज किया जा सकता है, जो दिन में जनरेट हुई बिजली को स्टोर कर रात में रिलीज कर सकता है. इस सिस्टम में आमतौर पर लिथियम-आयन बैटरी का यूज जाता है. ये बैटरियां आराम से इतनी बिजली स्टोर कर सकती है कि पूरी रात घर की एनर्जी जरूरतें पूरा हो जाए.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram पर खतरे की घंटी? हट रहा है End&amp;to&amp;End Encryption, अब क्या आपके प्राइवेट चैट्स भी नहीं रहेंगे सुरक्षित</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram पर खतरे की घंटी? हट रहा है End-to-End Encryption, अब क्या आपके प्राइवेट चैट्स भी नहीं रहेंगे सुरक्षित ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>क्या सच में AI आपकी नौकरी छीन लेगा? बढ़ते डर के पीछे छुपी सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: आज के दौर में Artificial Intelligence यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से हर क्षेत्र में फैल रहा है. इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी लोगों के मन में उठ रहा है क्या AI हमारी नौकरियां खत्म कर देगा? कई एक्सपर्ट्स इसे लेकर चेतावनी दे चुके हैं लेकिन हाल ही में Bank of America की एक रिपोर्ट इस डर को थोड़ा अलग नजरिए से समझने की सलाह देती है.
रिपोर्ट क्या कहती है?
बैंक की रिसर्च के मुताबिक AI आने वाले समय में जॉब मार्केट को जरूर बदलने वाला है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरी तरह से नौकरियां खत्म हो जाएंगी. पिछले करीब 85 सालों के डेटा से पता चलता है कि हर बार नई तकनीक आने पर काम करने का तरीका बदला है लेकिन रोजगार खत्म नहीं हुआ. बल्कि समय के साथ नए-नए जॉब रोल्स पैदा हुए हैं.
समय के साथ बदलती नौकरियां
रिपोर्ट में बताया गया है कि आज जो कई नौकरियां मौजूद हैं वे पहले कभी थीं ही नहीं, लगभग 60% नौकरियां 1940 के समय मौजूद नहीं थीं. डेटा साइंटिस्ट, सोशल मीडिया मैनेजर और क्लाउड डेवलपर जैसे रोल्स पिछले 20 सालों में ही सामने आए हैं. इसके अलावा, पहले जहां बड़ी आबादी खेती पर निर्भर थी, अब यह संख्या काफी कम हो चुकी है. इसका मतलब है कि टेक्नोलॉजी बदलाव लाती है लेकिन साथ ही नए मौके भी बनाती है.
AI से कितना खतरा है?
रिपोर्ट यह भी बताती है कि दुनिया भर में लगभग 84 करोड़ नौकरियां AI के प्रभाव में आ सकती हैं. करीब 33% जॉब्स ऐसे हैं जहां AI का असर ज्यादा हो सकता है. लगभग 13% कामों में AI इंसानों का सहयोगी बनकर काम करेगा. सिर्फ करीब 2.3% नौकरियां ऐसी हैं, जहां AI पूरी तरह जगह ले सकता है यानी खतरा पूरी तरह खत्म होने वाला नहीं है लेकिन उतना बड़ा भी नहीं जितना अक्सर बताया जाता है.
AI दुश्मन नहीं साथी भी हो सकता है
AI को सिर्फ नौकरी छीनने वाली तकनीक के रूप में देखना सही नहीं होगा. कई मामलों में यह इंसानों के काम को आसान और तेज बनाता है. जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ेगा, वैसे-वैसे लोगों को नई स्किल्स सीखने की जरूरत भी बढ़ेगी. जो लोग समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे उनके लिए मौके भी बढ़ेंगे. AI से डरने के बजाय उसे समझना ज्यादा जरूरी है. यह टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट को जरूर बदल रही है लेकिन इतिहास बताता है कि हर बदलाव के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, सच, में, आपकी, नौकरी, छीन, लेगा, बढ़ते, डर, के, पीछे, छुपी, सच्चाई, जानकर, चौंक, जाएंगे, आप</media:keywords>
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        <title>10 में से 9 मोबाइल यूजर्स को रहती है यह चिंता, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Low Battery Anxiety: अगर फोन की बैटरी कम होने पर आपको टेंशन होने लगती है तो आप ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं है. भारत में हर 10 में से 9 लोगों को यह टेंशन रहती है. जैसे ही फोन की बैटरी लाल होती है, उनकी चिंता और बढ़ जाती है. एक ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि करीब 90 प्रतिशत मोबाइल यूजर्स की चिंता उस समय बढ़ जाती है, जब उनके फोन की बैटरी 30-50 प्रतिशत के बीच होती है. जैसे-जैसे बैटरी का लेवल कम होता जाता है, उनकी यूजर्स की एंग्जायटी बढ़ती जाती है. हाल ही में सामने आई काउंटरप्वाइंट रिसर्च और फ्लिपकार्ट की रिपोर्ट से इसकी जानकारी मिली है.
सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
सर्वे के मुताबिक, करीब 90 प्रतिशत लोगों ने कहा कि जब उनके फोन की बैटरी 50 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत होती है तो उन्हें एंग्जायटी होने लगती है. 90 प्रतिशत यूजर्स ही ऐसे हैं, जो दिन में दो बार अपने फोन को चार्ज करते हैं. वहीं करीब 40 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वो अपने फोन को चार्ज लगाने के बाद भी यूज करते हैं. सर्वे में शामिल 65 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वो बेहतर बैटरी परफॉर्मेंस के लिए अपने फोन को बदलने के लिए तैयार हैं. इसी तरह 40 प्रतिशत मोबाइल यूजर्स ने बताया कि वो सुबह उठने के बाद सबसे पहले फोन और रात को सोने से पहले भी फोन यूज करते हैं. बता दें कि 75 करोड़ मोबाइल यूजर्स के साथ भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्मार्टफोन मार्केट है.&amp;nbsp;
AI फीचर्स देखकर फोन खरीद रहे हैं लोग
कैमरा और बैटरी की जगह लोग अब एआई फीचर्स देखकर फोन खरीदने लगे हैं. काउंटरप्वाइंट और फ्लिपकार्ट की इसी रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है. इसमें बताया गया है कि लगभग 89 प्रतिशत लोग अब फोन खरीदने से पहले उसके एआई फीचर्स देख रहे हैं.&amp;nbsp;
AI फीचर्स बने डिसाइडिंग फैक्टर&amp;nbsp;
स्मार्टफोन की च्वॉइस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अब एक कोर फैक्टर बन गई है. करीब 89 प्रतिशत लोग एआई फीचर्स देखकर फोन खरीदने के डिसीजन ले रहे हैं. खास बात यह भी है कि 15,000-20,000 की कीमत वाले फोन के सेगमेंट में भी लोग एआई फीचर्स पर पूरा ध्यान दे रहे हैं. Gen Z यूजर्स जहां एआई को कंटेट क्रिएशन और एंटरटेनमेंट के लिए यूज कर रहे हैं, वहीं मिलेनियल प्रोडक्टिविटी और प्लानिंग में इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. महिलाओं की बात करें तो रोजमर्रा के कामों में मदद और लाइफस्टाइल जरूरतों के लिए एआई फीचर्स यूज कर रही हैं.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>में, से, मोबाइल, यूजर्स, को, रहती, है, यह, चिंता, सर्वे, में, सामने, आई, चौंकाने, वाली, जानकारी</media:keywords>
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        <title>GTA 6 इस नवंबर मचाएगा धमाका! रिलीज डेट से लेकर गेमप्ले तक, अब तक की हर बड़ी जानकारी हुई लीक</title>
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        <description><![CDATA[ GTA 6: लंबे समय से चल रही अफवाहों और इंतज़ार के बाद आखिरकार Rockstar Games ने अपने सबसे बड़े गेम Grand Theft Auto VI (GTA 6) की रिलीज डेट का खुलासा कर दिया है. अब यह गेम 19 नवंबर 2026 को PlayStation 5 और Xbox Series X/S के लिए लॉन्च होगा. पहले इसे 2026 की शुरुआत में लाने की योजना थी लेकिन अब फैंस को थोड़ी और प्रतीक्षा करनी होगी.
देरी क्यों हुई?
कंपनी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि गेम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए. नवंबर 2025 में यह साफ कर दिया गया कि देरी किसी समस्या के कारण नहीं बल्कि गेम को और बेहतर बनाने के लिए की गई है. डेवलपर्स का कहना है कि वे चाहते हैं कि गेम उसी स्तर की क्वालिटी के साथ आए जिसकी उम्मीद खिलाड़ी करते हैं. एक दिलचस्प बात यह भी है कि GTA 6 गुरुवार, 19 नवंबर को रिलीज होगा जबकि आमतौर पर बड़े गेम मंगलवार को लॉन्च होते हैं. यह फैसला रणनीतिक है या नहीं फिलहाल साफ नहीं है.
नई लोकेशन और दमदार कहानी
इस बार गेम की दुनिया पहले से भी ज्यादा बड़ी और जीवंत होने वाली है. कहानी Leonida नाम की काल्पनिक जगह पर आधारित होगी जो असल में फ्लोरिडा से प्रेरित है. इसका मुख्य शहर होगा Vice City जिसे अब मॉडर्न अंदाज में दिखाया जाएगा 80 के दशक वाली पुरानी झलक से बिल्कुल अलग.
सबसे बड़ा बदलाव है ड्यूल प्रोटैगोनिस्ट सिस्टम. पहली बार खिलाड़ी एक साथ एक पुरुष और एक महिला किरदार के जरिए कहानी को एक्सपीरियंस करेंगे. इससे गेमप्ले और स्टोरी दोनों में नया ट्विस्ट देखने को मिलेगा.
परफॉर्मेंस और प्लेटफॉर्म डिटेल
टेक्निकल नजरिए से देखें तो रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेस PS5 और Xbox Series X पर गेम 30fps पर चलेगा खासकर हाई-क्वालिटी (फिडेलिटी) मोड में. PlayStation 5 Pro के लिए क्या खास फीचर्स होंगे, यह अभी सामने नहीं आया है. वहीं PC यूजर्स को थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है. फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक तारीख नहीं है लेकिन चर्चाओं के अनुसार 2027 तक इसका PC वर्जन आ सकता है.
लॉन्च से पहले क्या होगा खास?
GTA 6 के लॉन्च से पहले जबरदस्त मार्केटिंग कैंपेन देखने को मिल सकता है. Take-Two Interactive मई से अगस्त के बीच नए ट्रेलर, गेमप्ले वीडियो और स्टोरी से जुड़े कई बड़े खुलासे कर सकती है. इस दौरान फैंस को गेम के कैरेक्टर्स, मैप और फीचर्स के बारे में और गहराई से जानकारी मिलेगी.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Google Pixel 10 पहले कभी नहीं हुआ इतना सस्ता, इस डील में मिलेगा 20,000 की बचत का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ Google Pixel 10 Discount: अगर आपको क्लीन एंड्रॉयड एक्सपीरियंस, प्रीमियम लुक और पावरफुल फीचर्स वाला फोन चाहिए तो Google Pixel 10 अच्छी च्वॉइस हो सकती है. अब इस फोन पर एक शानदार डील आने वाली है, जिसके बाद यह अब तक की सबसे कम कीमत पर उपलब्ध होगा. दरअसल, फ्लिपकार्ट पर 9 मई से सेल शुरू हो रही है, जिसमें इस फोन को 20,000 रुपये की बचत के साथ खरीदने का मौका होगा. ऐसे में अगर आप नया फोन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ऐसा मौका दोबारा मिलना मुश्किल है. आइए इस फोन के स्पेसिफिकेशंस और डील के बारे में डिटेल से जान लेते हैं.&amp;nbsp;
Google Pixel 10 के फीचर्स
पिछले साल अगस्त में लॉन्च हुए इस फोन में &amp;nbsp;6.3 इंच की OLED स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है. यानी धूप में स्क्रीन एकदम साफ विजिबल होगी. साथ ही इस पर प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 दिया गया है. गूगल ने इस फोन में Tensor G5 चिपसेट का यूज किया है और यह Android 16 पर रन करता है. इसे अगले 7 सालों तक इसे सॉफ्टवेयर अपडेट मिलेगी. कैमरा सेटअप की बात की जाए तो इसके रियर में 48MP का प्राइमरी लेंस, 13MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 10.8MP का टेलीफोटो कैमरा लगा हुआ है. फ्रंट में सेल्फी और वीडियो के लिए 10.5MP का लेंस दिया गया है. यह फोन 4970mAh के बैटरी पैक से लैस है.
फ्लिपकार्ट पर आएगी सबसे धाकड़ डील
भारत में इस फोन को 79,999 रुपये में लॉन्च किया था, लेकिन फ्लिपकार्ट की Sasa Lele Sale में यह फोन अब तक की सबसे कम कीमत पर लिस्टेड होगा. जानकारी के मुताबिक, 9 मई से शुरू हो रही फ्लिपकार्ट की इस सेल में Pixel 10 को 20,000 रुपये की छूट के साथ केवल 59,999 रुपये में खरीदा जा सकेगा. इस छूट में बैंक ऑफर, एक्सचेंज बोनस और दूसरे कूपन भी शामिल होंगे. इनकी जानकारी सेल लाइव होने के साथ अवेलेबल हो जाएगी.&amp;nbsp;
iPhone पर भी मिलेगी छूट
गूगल पिक्सल 10 की तरह इस सेल में आईफोन पर भी छूट मिलेगी. जानकारी के मुताबिक, इस सेल में iPhone 17 को 71,900 रुपये में खरीदा जा सकेगा. इस आईफोन को को 82,990 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया गया था. इसी तरह 79,999 रुपये में लॉन्च हुए iPhone 16 को 58,900 रुपये में खरीदने का मौका मिलेगा.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>ऑनलाइन शॉपिंग में ठगी हो गई? घबराएं नहीं, इस आसान ट्रिक से मिनटों में वापस पा सकते हैं अपना पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ Online Shopping Fraud: भारत में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन अगर आपके साथ धोखा हो जाए तो इसका मतलब यह नहीं कि आपका पैसा हमेशा के लिए चला गया. सही समय पर सही प्रक्रिया अपनाने से आप अपनी रकम वापस पा सकते हैं. बैंकों के पास इसके लिए एक खास सिस्टम होता है जिसे समझना बेहद जरूरी है.
चार्जबैक क्या होता है और कब मिलता है फायदा?
चार्जबैक एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आपका बैंक व्यापारी (मर्चेंट) के बैंक से ट्रांजैक्शन को रिवर्स करने की मांग करता है. यह सुविधा हर केस में नहीं बल्कि कुछ खास परिस्थितियों में ही लागू होती है. अगर आपकी अनुमति के बिना पेमेंट हुआ है आपने पैसे दिए लेकिन सामान नहीं मिला या जो प्रोडक्ट मिला वो ऑर्डर से बिल्कुल अलग या नकली है तो आप चार्जबैक के लिए आवेदन कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ने आपके कार्ड का गलत इस्तेमाल किया या आपने ऑनलाइन ऑर्डर किया और डिलीवरी ही नहीं हुई तो यह वैध शिकायत मानी जाती है.
पैसा वापस पाने के लिए क्या करें?
सबसे पहले तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और ट्रांजैक्शन को विवादित (dispute) घोषित करें. आप यह काम हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या बैंक ब्रांच जाकर कर सकते हैं. शिकायत दर्ज करते समय Service Request Number (SRN) जरूर लें क्योंकि यही आपकी शिकायत का सबूत होता है.
इसके बाद आपको एक चार्जबैक या डिस्प्यूट फॉर्म भरना होगा. इसमें ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी जैसे तारीख, रकम, व्यापारी का नाम और शिकायत का कारण देना होता है. साथ ही सबूत के तौर पर स्क्रीनशॉट, पेमेंट रसीद, ईमेल या ऑर्डर कन्फर्मेशन भी जमा करना जरूरी है. बैंक इन सभी डिटेल्स के आधार पर जांच शुरू करता है और मर्चेंट के बैंक से संपर्क करता है. यह प्रक्रिया कुछ हफ्तों तक चल सकती है.
समय सीमा का रखें खास ध्यान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, आपको ट्रांजैक्शन के 120 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज करनी होती है. अगर आप देर करते हैं तो पैसा वापस मिलने की संभावना कम हो सकती है. इसलिए जितनी जल्दी कार्रवाई करेंगे उतना बेहतर रहेगा.
साइबर फ्रॉड की शिकायत कहां करें?
बैंक को सूचना देने के साथ-साथ साइबर फ्रॉड की शिकायत करना भी जरूरी है. इसके लिए आप राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकते हैं या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जल्दी रिपोर्ट करने से कई बार फ्रॉड ट्रांजैक्शन को रोका जा सकता है और पैसे को फ्रीज किया जा सकता है.
सही कदम ही दिलाएंगे आपका पैसा वापस
अगर आप ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाते हैं तो घबराने के बजाय तुरंत एक्शन लें. बैंक में शिकायत दर्ज करना सही सबूत देना और साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करना ये सभी कदम आपके पैसे की रिकवरी की संभावना को काफी बढ़ा देते हैं.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>सूरज की किरणों से कैसे बनती है बिजली और क्या है सोलर पैनल का यूज? डिटेल में यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Energy Technology: भारत में सोलर एनर्जी का तेजी से विस्तार हो रहा है और पिछले कुछ ही सालों में भारत सोलर एनर्जी का तीसरा सबसे बड़ा प्रोड्यूसर बन गया. अब बड़े शहरों से लेकर गांवों तक हर जगह सोलर पैनल नजर आना आम हो गया है. ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता अब लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है और इसमें लगातार बढ़ोतरी भी जारी है. इन सबके बीच यह समझना जरूरी है कि सूरज के किरणों से बिजली बनती कैसे है. आज हम जानेंगे कि सोलर एनर्जी से बिजली कैसे बनती है और इसमें सोलर पैनल का क्या यूज है.
सूरज की किरणों से कैसे बनती है बिजली?
Solar Energy Technology सूरज से आने वाले किरणों को इलेक्ट्रिक एनर्जी में बदल देती है. ऐसा photovoltaic (PV) पैनल या मिरर के जरिए किया जा सकता है, जो सोलर रेडिएशंस को कन्सन्ट्रेट कर देते हैं. इस एनर्जी को बिजली जनरेट करने के लिए यूज किया जा सकता है और ये बैटरी में भी स्टोर हो सकती है. सूरज से आने वाली किरणों को कैप्चर करने के लिए सोलर पैनल यूज होते हैं.
धूप से बिजली बनाने में सोलर पैनल का क्या यूज?
सूरज की किरणों से बिजली बनाने में सोलर पैनल यूज होते हैं. सोलर पैनल में सिलिकॉन सेल्स, मेटल फ्रेम और ग्लास की केसिंग होती है, जिसमें स्पेशल फिल्म और वायरिंग लगी होती है. मैक्सिमम इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन के लिए इन्हें सूरज के सामने एक खास फॉर्मेट में सेट किया जाता है. इसमें लगी सेल्स को photovoltaic cells भी कहा जाता है. ये सेल्स सनलाइट को सोख लेती हैं. फिर इस लाइट एनर्जी को इलेक्ट्रिक करंट में बदला जाता है. सारी सेल्स से इकट्ठा इलेक्ट्रिक करंट से इलेक्ट्रिसिटी जनरेट की जाती है.
कितनी तरह के होते हैं सोलर पैनल?
सोलर पैनल मुख्य तौर पर तीन तरह के होते हैं- मोनोक्रिस्टलाइन, पॉलीक्रिस्टलाइन और थिन फिल्म. इन सभी के काम करने का तरीका एक जैसा होता है, लेकिन बनावट, परफॉर्मेंस और कीमत के आधार पर इनमें अंतर होता है. थिन फिल्म की बात करें तो ये हल्के और फ्लेक्सिबल पैनल होते हैं और इनकी कीमत भी कम होती है. ये कम लोड और पोर्टेबल जरूरतों को पूरा करने के लिए सही च्वॉइस है.
अगर बाकी दो की बात करें तो मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन में मुख्य अंतर सेल्स का होता है. मोनोक्रिस्टलाइन पैनल में सिलिकॉन के सिंगल क्रिस्टल से बनी सोलर सेल्स यूज होती हैं. ब्लैक दिखने वाले इन पैनल की एफिशिएंसी सबसे ज्यादा होती है और इनकी कीमत भी बाकियों से ज्यादा होती है. वहीं पॉलीक्रिस्टलाइन की बात करें तो इसमें सिलिकॉन के कई मेल्टेड फ्रेगमेंट से बनी सोलर सेल्स यूज होती हैं और ये दिखने में ब्लू होते हैं. ये थोड़े सस्ते होते हैं, जिसके चलते इन्हें रेजीडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट में यूज किया जाता है.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Facebook&amp;Instagram का नया AI टूल करेगा ऑनलाइन बच्चों की पहचान! जानिए कैसे करता है काम</title>
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        <description><![CDATA[ Meta AI: Meta Platforms ने उम्र की जांच (Age Verification) को और सख्त बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेना शुरू कर दिया है. Instagram और Facebook चलाने वाली इस कंपनी ने एक नया AI सिस्टम पेश किया है जिसका मकसद 13 साल से कम उम्र के यूजर्स को पहचानना है. कंपनी के मुताबिक यह टेक्नोलॉजी फोटो, वीडियो और यूजर एक्टिविटी के आधार पर संकेत ढूंढती है लेकिन इसे लेकर गोपनीयता को ध्यान में रखा गया है.
AI सिस्टम कैसे करता है काम?
Meta का यह AI सिस्टम सीधे किसी व्यक्ति की पहचान नहीं करता, बल्कि पैटर्न और संकेतों को समझने की कोशिश करता है. यह फोटो और वीडियो में मौजूद सामान्य विजुअल संकेत जैसे कद-काठी या बॉडी स्ट्रक्चर का विश्लेषण करता है साथ ही पोस्ट, कैप्शन, बायो और कमेंट्स को पढ़कर यह अंदाजा लगाता है कि यूजर की उम्र क्या हो सकती है
कंपनी ने साफ किया है कि यह फेशियल रिकग्निशन (Face Recognition) नहीं है यानी यह किसी खास व्यक्ति की पहचान नहीं करता बल्कि सिर्फ संभावित उम्र का अनुमान लगाता है.
अगर AI आपको अंडरएज मान ले तो क्या होगा?
अगर सिस्टम को लगता है कि कोई अकाउंट 13 साल से कम उम्र के व्यक्ति का है तो सीधा एक्शन लिया जा सकता है अकाउंट को अस्थायी रूप से बंद (Deactivate) किया जा सकता है. यूजर को दोबारा एक्सेस पाने के लिए अपनी उम्र साबित करनी होगी. फिलहाल इस फीचर का टेस्ट कुछ चुनिंदा देशों में हो रहा है जिसमें अमेरिका शामिल है और धीरे-धीरे इसे बाकी जगहों पर भी लागू किया जा सकता है.
दूसरे टूल्स जैसा ही तरीका
Meta का यह नया सिस्टम कुछ हद तक उन थर्ड-पार्टी टूल्स जैसा है जो पहले से उम्र का अनुमान लगाते हैं Yoti, k-ID. ये टूल्स भी विजुअल संकेतों के आधार पर उम्र का अनुमान लगाते हैं बिना किसी की असली पहचान उजागर किए. Meta ने Teen Accounts फीचर को भी और मजबूत किया है. 13 से 17 साल के यूजर्स को ऑटोमैटिक इस मोड में रखा जाता है.
अनजान लोगों के मैसेज सीमित कर दिए जाते हैं. कंटेंट फिल्टर सख्त कर दिए जाते हैं. 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए लाइवस्ट्रीमिंग जैसी सुविधाओं पर रोक लगाई जाती है. पहले यह फीचर Instagram पर आया था और अब Facebook पर भी लागू किया जा रहा है.
आखिर अभी क्यों उठाया गया यह कदम?
यह बड़ा बदलाव ऐसे समय में आया है जब Meta पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हाल ही में एक अमेरिकी कोर्ट ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर यूजर्स को सही जानकारी नहीं दी गई. इसके चलते कंपनी पर भारी जुर्माना भी लगाया गया. ऐसे में Meta का यह AI सिस्टम सिर्फ एक नया फीचर नहीं बल्कि बढ़ते दबाव के बीच उठाया गया एक जरूरी कदम भी माना जा रहा है.
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>कब लॉन्च होगा बिना ऐप्स चलने वाला OpenAI का फोन और क्या होंगे फीचर्स? सारी जानकारी आ गई सामने</title>
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        <description><![CDATA[ OpenAI AI Agent Smartphone: कुछ दिन पहले जानकारी सामने आई थी कि चैटजीपीटी चैटबॉट बनाने वाली कंपनी OpenAI अनोखा फोन लॉन्च करने वाली है. यह फोन एआई एजेंट्स से चलेगा और इसमें मोबाइल ऐप्स की जरूरत नहीं होगी. अब इसकी लॉन्च टाइमलाइन और एक्सपेक्टेड फीचर्स भी सामने आ गए हैं. अभी इस फोन के डेवलपमेंट पर काम चल रहा है और अगले साल की पहली छमाही में इसका मास प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. उम्मीद है कि 2027 या 2028 में यह फोन लॉन्च किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या मिलने वाला है और इसका यूजर्स के लिए क्या मतलब होगा.
ऑन-डिवाइस एआई पर रहेगा जोर
रिपोर्ट्स के अनुसार, OpnenAI के इस फोन में ऑन-डिवाइस एआई कैपेबिलिटीज पर खासा जोर दिया जाएगा. बता दें कि पिछले काफी समय से स्मार्टफोन कंपनियां एआई एजेंट्स डिवाइस की तरफ जा रही हैं. इन डिवाइस को टास्क कंप्लीट करने, कॉन्टेक्स्ट को समझने और ऑटोनॉमसली यूजर के साथ इंटरेक्ट करने के लिए डिजाइन किया जाता है. OpnenAI के फोन में डुअल NPU (नैचुरल प्रोसेसिंग यूनिट) आर्किटेक्चर यूज किया जाएगा, जो एआई टास्क को आसानी से हैंडल कर पाएगा. इसकी मदद से फोन के लिए रियल टाइम लैंग्वेज अंडरस्टैंडिंग, विजुअल रिकग्नेशन और कॉन्टेक्चुअल कंप्यूटिंग आसान हो जाएगा.
ये रह सकते हैं स्पेसिफिकेशंस
रिपोर्ट में बताया गया है कि OpenAI इस फोन में LPDDR6 रैम और UFS 5.0 स्टोरेज को यूज कर सकती है, जिससे एआई परफॉर्मेंस में सुधार होगा. इसमें इन्हैंस्ड इमेज सिग्नल प्रोसेसर (ISP) भी देखने को मिल सकता है, जो रियल-वर्ल्ड विजुअल परसेप्शन को सपोर्ट करेगा. साथ ही कंपनी इसकी नए सिक्योरिटी फीचर्स के साथ डिवाइस और डेटा प्रोटेक्शन पर भी खास ध्यान दे रही है. प्रोसेसर के लिए कंपनी मीडियाटेक के साथ बात कर रही है. ऐसे कयास हैं कि इस अपकमिंग फोन में MediaTek Dimensity 9600 पर बेस्ड कस्टमाइज्ड प्रोसेसर मिल सकता है.
बिना ऐप्स के फोन काम कैसे करेगा?
अभी फोन में हर काम के लिए अलग-अलग ऐप्स मौजूद हैं, लेकिन OpenAI का कहना है कि यूजर को ऐप्स की नहीं बल्कि रिजल्ट की जरूरत है. कंपनी के फोन में ऐप्स से होने वाले काम एआई एजेंट पूरे करेंगे. ये रियल-टाइम में कॉन्टेक्स्ट, यूजर बिहेवियर और जरूरत को समझते हुए यूजर की कमांड पर टास्क पूरे कर पाएंगे.&amp;nbsp;
यूजर के लिए क्या बदल जाएगा?
अगर यह फोन लॉन्च होता है तो एक नई कैटेगरी क्रिएट करेगा. यूजर के लिहाज से बात करें तो उन्हें एआई एजेंट्स की मदद से जल्दी रिस्पॉन्स, बेहतर प्राइवेसी और डेली टास्क करने के लिए एआई का इंटीग्रेशन मिल जाएगा. वहीं इंडस्ट्री के हिसाब से देखें तो यह नए कंपीटिशन की शुरुआत करेगा और एक के बाद एक कंपनी ऐसे फोन लॉन्च करने की होड़ में लग जाएगी.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>कौन&amp;सा क्रिएटर AI से बना रहा है कंटेट? Instagram साफ&amp;साफ बता देगा, यह है प्लानिंग</title>
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        <description><![CDATA[ AI-generated Content On Instagram: सोशल मीडिया और खासकर इंस्टाग्राम पर एआई-जनरेटेड कंटेट खूब देखा जा रहा है. इसके चलते अब एआई-जनरेटेड कंटेट की मात्रा भी बढ़ी है. इनमें से कुछ कंटेट फनी और क्रिएटिव है, लेकिन ज्यादातर मिसलीडिंग भी है, जिससे लोगों के पास गलत जानकारी पहुंच रही है, जो खतरनाक हो सकती है. यूजर्स के लिए भी यह पहचान पाना मुश्किल हो गया है कि कौन-सा कंटेट असली है और कौन-सा एआई जनरेटेड. अब इंस्टाग्राम इस परेशानी को दूर करने के बारे में सोच रही है. इसके लिए एक नया लेबल लाया जाएगा, जिससे एआई कंटेट की पहचान करना एकदम आसान हो जाएगा.&amp;nbsp;
AI-generated Content के लिए आएगा यह लेबल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंस्टाग्राम पर जल्द ही &#039;एआई क्रिएटर&#039; लेबल आ सकता है. यह लेबल उन अकाउंट्स को दिया जाएगा, जो ज्यादातर एआई जनरेटेड या एआई से एडिट किया गया कंटेट पोस्ट करते हैं. यह क्रिएटर के प्रोफाइल के साथ-साथ उसकी रील्स और पोस्ट्स पर भी नजर आएगा. इससे यूजर को यह पता लग जाएगा कि वो जिस कंटेट को देख रहा है, वह एआई से जनरेट किया गया है. यह इंस्टाग्राम पर पहले से मौजूद एआई इंफो बैज से अलग होगा. एआई इंफो बैज का मतलब है कि किसी पोस्ट में एआई टूल्स यूज किए हो सकते हैं.
लेबल से क्रिएटर पर क्या असर होगा?
मेटा ने बताया कि इस लेबल को यूज करने से किसी अकाउंट या कंटेट पर कोई असर नहीं पडे़गा. इसे ट्रांसपेरेंसी के लिए डिजाइन किया गया है. जो अकाउंट्स एआई कंटेट पोस्ट करते हैं, उन सबको यह लेबल अपने अकाउंट पर एड करना चाहिए. बता दें कि यह लेबल पूरी तरह ऑप्शनल होगा. अगर कोई क्रिएटर खुद को एआई क्रिएटर के तौर पर नहीं दिखाना चाहता तो उसके पास लेबल एड न करने का भी ऑप्शन होगा. इसका मतलब है कि एआई क्रिएटर बिना लेबल यूज किए भी पहले की तरह कंटेट पोस्ट करना जारी रख सकते हैं.
आगे चलकर जरूरी हो सकता है लेबल
अभी इस लेबल पर काम चल रहा है और इसके यूज करने को लेकर मेटा भी स्ट्रिक्ट नहीं है. अभी कंपनी ने अनिवार्य नहीं किया है, लेकिन जिस गति से एआई कंटेट बढ़ रहा है, उसे देखते हुए माना जा रहा है कि लेबल को लेकर मेटा सख्त नियम लागू कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो क्रिएटर के लिए इस लेबल को दिखाना जरूरी हो जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>आपकी इन गलतियों से खराब हो जाती है चार्जिंग केबल! बार&amp;बार टूटने के पीछे का असली कारण जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Charging Cable: आज के समय में स्मार्टफोन जितना जरूरी है उतनी ही जरूरी उसकी चार्जिंग केबल भी है. लेकिन आपने शायद ध्यान दिया होगा कि नई केबल कुछ ही महीनों में खराब हो जाती है. कई लोग इसे खराब क्वालिटी मान लेते हैं जबकि असली वजह अक्सर हमारी रोज़मर्रा की गलत आदतें होती हैं.
केबल को खींचकर निकालना
चार्जिंग केबल को सीधे तार से खींचकर निकालना सबसे आम गलती है. इससे केबल के अंदर के तार कमजोर हो जाते हैं और धीरे-धीरे टूटने लगते हैं. हमेशा प्लग या कनेक्टर को पकड़कर ही केबल निकालें.
केबल को मोड़ना और लपेटना
बहुत से लोग केबल को जरूरत से ज्यादा मोड़ देते हैं या टाइट लपेट देते हैं. इससे अंदर के वायर पर दबाव पड़ता है और केबल जल्दी खराब हो जाती है. केबल को हमेशा हल्के से और ढीले तरीके से रखें.
चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल
चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल करने से केबल पर खिंचाव पड़ता है. खासकर गेमिंग या वीडियो देखने के समय केबल बार-बार हिलती है जिससे उसका कनेक्शन ढीला पड़ सकता है और जल्दी डैमेज हो सकता है.
ज्यादा गर्मी और नमी
केबल को बहुत ज्यादा गर्म जगह या नमी वाली जगह पर रखना भी नुकसानदायक होता है. इससे केबल का बाहरी कवर कमजोर हो जाता है और अंदर के तार जल्दी खराब हो सकते हैं.
सस्ती और लोकल केबल का इस्तेमाल
कई बार लोग पैसे बचाने के लिए सस्ती या लोकल केबल खरीद लेते हैं. ऐसी केबल्स में क्वालिटी कम होती है और ये जल्दी खराब हो जाती हैं. हमेशा अच्छी ब्रांड और प्रमाणित केबल का ही इस्तेमाल करें.
बैग में केबल को बिना किसी सुरक्षा के फेंक देना भी एक बड़ी गलती है. इससे केबल मुड़ जाती है या दब जाती है, जिससे उसकी लाइफ कम हो जाती है. बेहतर है कि केबल को एक केस या अलग पॉकेट में रखें.
केबल को लंबा चलाने के आसान टिप्स
अगर आप चाहते हैं कि आपकी चार्जिंग केबल लंबे समय तक चले तो कुछ आसान आदतें अपनाएं. केबल को सावधानी से इस्तेमाल करें ज्यादा खींचने या मोड़ने से बचें और हमेशा सही तरीके से स्टोर करें. चार्जिंग केबल का बार-बार खराब होना सिर्फ उसकी क्वालिटी की वजह नहीं होता बल्कि हमारी छोटी-छोटी गलतियां भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>आपकी, इन, गलतियों, से, खराब, हो, जाती, है, चार्जिंग, केबल, बार-बार, टूटने, के, पीछे, का, असली, कारण, जानकर, रह, जाएंगे, हैरान</media:keywords>
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        <title>45 हजार से भी कम में मिल रहा iPhone 17! यहां से खरीदने पर होगी तगड़ी बचत, जानिए कैसे उठाएं फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Discount Offer: Croma ने अपनी Everything Apple सेल का दूसरा चरण शुरू कर दिया है जिसमें इस बार सीधे कीमत घटाने के बजाय अलग-अलग ऑफर्स को जोड़कर बड़ा डिस्काउंट दिया जा रहा है. इस सेल का मकसद प्रीमियम Apple प्रोडक्ट्स को ज्यादा लोगों की पहुंच में लाना है. यह सेल 1 मई से 16 मई तक चलेगी और इसमें iPhone, MacBook, iPad, AirPods और Apple Watch जैसे कई प्रोडक्ट्स पर डील्स मिल रही हैं.
iPhone 17 पर सबसे बड़ा फायदा
इस सेल का सबसे बड़ा आकर्षण है iPhone 17. इसका 256GB वेरिएंट जिसकी लॉन्च कीमत 82,900 रुपये थी अब प्रभावी रूप से 44,768 रुपये तक मिल सकता है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कीमत सीधे नहीं मिलती बल्कि कई ऑफर्स को मिलाकर बनती है.
कैसे बनती है इतनी कम कीमत?
iPhone 17 की कीमत कम करने के लिए कई तरह के ऑफर्स एक साथ काम करते हैं.

पुराने स्मार्टफोन पर 23,500 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू
एक्सचेंज पर 8,000 रुपये तक का अतिरिक्त बोनस
लगभग 1,658 रुपये तक का कूपन डिस्काउंट
4,974 रुपये तक के Tata Neu Coins का फायदा

इन सभी को जोड़ने के बाद ही कीमत ₹44,768 तक पहुंचती है. यानी आपके पुराने फोन की कंडीशन और ऑफर्स की उपलब्धता के अनुसार फाइनल कीमत अलग हो सकती है.
दूसरे iPhone मॉडल्स पर भी ऑफर
iPhone 17 के अलावा अन्य मॉडल्स पर भी आकर्षक डील्स दी जा रही हैं:
iPhone 15 (128GB) लगभग 36,891 रुपये में
iPhone 16 (128GB) लगभग 40,041 रुपये में
इन कीमतों में भी एक्सचेंज, बैंक ऑफर और कूपन शामिल हैं.
इस सेल की खास बात क्या है?
इस बार Croma ने सीधा डिस्काउंट देने के बजाय लेयर्ड ऑफर का तरीका अपनाया है. यानी कीमत कम करने के लिए कई ऑफर्स को मिलाया गया है जैसे:

एक्सचेंज ऑफर
अतिरिक्त बोनस
बैंक और कार्ड डिस्काउंट
Tata Neu Coins रिवॉर्ड
EMI और स्टूडेंट बेनिफिट्स

यह तरीका ज्यादा फ्लेक्सिबल है लेकिन सबसे कम कीमत पाने के लिए सभी शर्तें पूरी करनी होंगी.
कहां और कब तक मिलेगी डील?
यह सेल 1 मई से 16 मई तक Croma के ऑफलाइन स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दोनों पर उपलब्ध है. हालांकि, कीमतें शहर, स्टॉक और ऑफर की उपलब्धता के अनुसार बदल सकती हैं. अगर आप Apple का नया डिवाइस खरीदने की सोच रहे हैं तो यह सेल आपके लिए अच्छा मौका हो सकता है. लेकिन अंतिम कीमत जानने के लिए सभी ऑफर्स और शर्तों को ध्यान से समझना जरूरी है तभी आप सही में सबसे बड़ा फायदा उठा पाएंगे.
Flipkart पर Samsung Galaxy S25 5G पर भारी डिस्काउंट
ई-कॉमर्स साइट फ्लिपकॉर्ट पर Samsung Galaxy S25 5G पर जबरदस्त डिस्काउंट मिल रहा है. दरअसल, इस फोन के 12+128GB वेरिएंट की असल कीमत 74,999 रुपये है लेकिन छूट के बाद ये फोन यहां पर महज 56,999 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा इस फोन पर कई बैंक ऑफर भी मौजूद हैं जिससे यह फोन और भी सस्ता हो सकता है. इसके अलावा इसे आप आसान किस्तों पर भी अपने नाम कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हजार, से, भी, कम, में, मिल, रहा, iPhone, 17, यहां, से, खरीदने, पर, होगी, तगड़ी, बचत, जानिए, कैसे, उठाएं, फायदा</media:keywords>
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        <title>WhatsApp चुपचाप हटा रहा है ये फीचर! आपको पता भी नहीं चलेगा और बदल जाएगा आपका ऐप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/whatsapp-चुपचाप-हटा-रहा-है-ये-फीचर-आपको-पता-भी-नहीं-चलेगा-और-बदल-जाएगा-आपका-ऐप</link>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp चुपचाप हटा रहा है ये फीचर! आपको पता भी नहीं चलेगा और बदल जाएगा आपका ऐप ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>WhatsApp, चुपचाप, हटा, रहा, है, ये, फीचर, आपको, पता, भी, नहीं, चलेगा, और, बदल, जाएगा, आपका, ऐप</media:keywords>
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        <title>फोन के ब्लूटूथ को हर समय न रखें ऑन, जरा&amp;सी लापरवाही से हो जाएगा बहुत बड़ा नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-के-ब्लूटूथ-को-हर-समय-न-रखें-ऑन-जरा-सी-लापरवाही-से-हो-जाएगा-बहुत-बड़ा-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ Bluetooth Tips: इन दिनों वायरलेस इयरबड्स से लेकर स्मार्टवॉच और हेडफोन से लेकर मैकबुक तक, इतने डिवाइस हो गए हैं, जिन्हें कनेक्ट करने के लिए ब्लूटूथ की जरूरत पड़ती है. इस कारण कई लोग अपने फोन का ब्लूटूथ हमेशा ऑन रखते हैं. उन्हें बार-बार ब्लूटूथ को ऑन-ऑफ करना झंझट लगता है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ब्लूटूथ को हमेशा ऑन रखना चाहिए? इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि आप कहां मौजूद हैं. घर पर रहते हुए ब्लूटूथ ऑन रखा जा सकता है, लेकिन घर से बाहर ऑन रखना खतरे से भरा हो सकता है.
ब्लूटूथ ऑन रखने पर क्या खतरा हो सकता है?
ब्लूटूथ ऑन रखना बहुत सुविधाजनक है. आजकल स्मार्ट होम गैजेट ब्लूटूथ के जरिए कनेक्ट रहते हैं. अगर आप ब्लूटूथ बंद कर देंगे तो इन्हें एक्सेस करना मुश्किल हो जाएगा. इसलिए घर पर रहते समय आप अपने फोन का ब्लूटूथ हमेशा एक्टिव रख सकते हैं, लेकिन घर से बाहर किसी भीड़भाड़ वाली जगह या पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन में यह खतरनाक हो सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्लूटूथ के जरिए साइबर अटैक किया जा सकता है. अगर आप किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर हैं और गलती से किसी अनजान डिवाइस से कनेक्ट हो जाते हैं तो हैकिंग का खतरा पैदा हो सकता है. अगर हैकिंग टूल आपके फोन से कनेक्ट हो जाता है तो फोन में मालवयेयर इंस्टॉल किया जा सकता है. यह कॉल्स, पासवर्ड, अकाउंट्स और दूसरे पर्सनल डेटा की एक्सेस गलत हाथों में पहुंचा सकता है. अब ऐसे एडवांस सॉफ्टवेयर भी आ गए हैं, जो बिना पेयर हुए भी ब्लूटूथ के जरिए आपके फोन में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं.
इस बात का भी रखें ध्यान
अगर आप घर से बाहर हैं या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर कर रहे हैं तो किसी अनजान डिवाइस से पेयरिंग रिक्वेस्ट एक्सेप्ट न करें. अगर आप कोई ब्लूटूथ डिवाइस यूज नहीं कर रहे हैं तो ब्लूटूथ को बंद करना बेहतर है. इससे हैकिंग की टेंशन खत्म हो जाएगी.&amp;nbsp;
क्या ब्लूटूथ ऑन रखने से बैटरी डिस्चार्ज होती है?
कई लोगों का मानना है कि अगर फोन का ब्लूटूथ ऑन रखा जाए तो इससे बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है. असल में ऐसा नहीं है. मॉडर्न स्मार्टफोन में टेक्नोलॉजी बहुत एडवांस हो गई है और ब्लूटूथ नाममात्र पावर कंज्यूम करते हैं. अगर आप पूरे दिन ब्लूटूथ ऑन रखते हैं तो बैटरी मुश्किल से 1-2 प्रतिशत डिस्चार्ज होगी. इसलिए ब्लूटूथ से बैटरी पर लोड पड़ने की बात पर भी भरोसा न करें.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फोन, के, ब्लूटूथ, को, हर, समय, न, रखें, ऑन, जरा-सी, लापरवाही, से, हो, जाएगा, बहुत, बड़ा, नुकसान</media:keywords>
    </item>
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        <title>सालों पुराना फोन भी लगेगा एकदम नया, बस करने होंगे चुटकियों में होने वाले ये आसान काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सालों-पुराना-फोन-भी-लगेगा-एकदम-नया-बस-करने-होंगे-चुटकियों-में-होने-वाले-ये-आसान-काम</link>
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        <description><![CDATA[ Phone Upgrading Tips: कई सालों तक एक ही फोन यूज करना बोरिंग हो सकता है. पुराने फोन की स्पीड भी स्लो हो जाती है और इसकी बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है, लेकिन अगर फोन के बाकी फंक्शन ठीक तरीके से काम कर रहे हैं तो आपको नया फोन नहीं लेना चाहिए. आप पुराने फोन में ही कुछ बदलाव कर इसे एकदम नए जैसा बना सकते हैं. इन बदलावों से फोन की परफॉर्मेंस भी मक्खन जैसी हो जाएगी और इसका लुक भी बदल जाएगा. आइए जानते हैं कि आप सालों पुराने फोन को आसान तरीकों से नए जैसा कैसे बना सकते हैं.
ऐप्स और सॉफ्टवेयर को कर लें अपडेट
ऐप्पल और गूगल दोनों ही अपने-अपने ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए हर साल बड़ी अपग्रेड लेकर आती है. ऐप्पल सितंबर के आसपास अपग्रेड लॉन्च करती है, तो गूगल अब साल में दो बड़ी अपडेट रिलीज करती है. ऐसे में आपको अपने फोन के सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर लेना चाहिए. साथ ही फोन की ऐप्स को भी अपग्रेड कर लें. इससे फोन में नए फीचर्स भी मिलेंगे और ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स का लुक भी बदल जाएगा. इस तरह पुराने फोन में कुछ नयापन आएगा.
स्टोरेज स्पेस भी करें खाली
फोन की स्टोरेज फुल होने पर इसकी परफॉर्मेंस स्लो हो जाती है. एनिमेशन को लोड और ऐप्स को ओपन होने में टाइम लगने लगता है. साथ ही अगर आपको कोई नई फाइल स्टोर करनी पड़ जाए तो पहले पुरानी फाइल्स या फोटो-वीडियो डिलीट करने पड़ते हैं. यह काफी थका देने वाला काम होता है. इसलिए आपको डुप्लिकेट फाइल्स और फोटो आदि डिलीट कर देनी चाहिए. इसी तरह अगर आप किसी ऐप को यूज नहीं कर रहे हैं तो उसे डिलीट कर भी स्पेस बचा सकते हैं. इससे फोन के स्लो होने की समस्या दूर हो जाएगी.&amp;nbsp;
बैटरी को करें रिप्लेस
अगर पुराने फोन को बार-बार चार्ज करना पड़ रहा है तो बेहतर होगा कि इसकी बैटरी को रिप्लेस कर लिया जाए. जल्दी डिस्चार्ज होने के अलावा पुरानी बैटरी से फोन को पर्याप्त पावर भी नहीं मिल पाती, जिससे परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है. इन झंझटों से बचने के लिए बैटरी को रिप्लेस करना फायदे का सौदा है. इससे आपका पुराना फोन भी एकदम नए जैसा लगने लगेगा.
नया कवर भी करेगा जादू
अगर आप फोन के लुक से बोर हो गए हैं और इसे नया लुक देना चाहते हैं तो नया फोन कवर खरीद लें. इससे फोन का पूरा एस्थेटिक चेंज हो जाएगा और फोन को गिरने पर प्रोटेक्शन भी मिलेगी. इस तरह आप बेहद सस्ते और आसान तरीकों से अपने पुराने फोन को एकदम नया बना पाएंगे.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सालों, पुराना, फोन, भी, लगेगा, एकदम, नया, बस, करने, होंगे, चुटकियों, में, होने, वाले, ये, आसान, काम</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>पब्लिक Wi&amp;Fi यूज़ कर रहे हैं? एक क्लिक में खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंट और लीक हो सकता है सारा डेटा!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पब्लिक-wi-fi-यूज़-कर-रहे-हैं-एक-क्लिक-में-खाली-हो-सकता-है-आपका-बैंक-अकाउंट-और-लीक-हो-सकता-है-सारा-डेटा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पब्लिक-wi-fi-यूज़-कर-रहे-हैं-एक-क्लिक-में-खाली-हो-सकता-है-आपका-बैंक-अकाउंट-और-लीक-हो-सकता-है-सारा-डेटा</guid>
        <description><![CDATA[ Public Wi-Fi: आज के दौर में एयरपोर्ट, कैफे, मॉल या रेलवे स्टेशन हर जगह फ्री Wi-Fi आसानी से मिल जाता है. भारत में लाखों लोग रोजाना इन नेटवर्क्स से जुड़ते हैं. लेकिन जितनी यह सुविधा आसान लगती है, उतना ही बड़ा खतरा भी इसके पीछे छिपा होता है. साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असुरक्षित पब्लिक Wi-Fi नेटवर्क आपके डेटा और पैसों दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं खासकर जब डिजिटल पेमेंट और मोबाइल बैंकिंग तेजी से बढ़ रही है.
पब्लिक Wi-Fi से कनेक्ट होते ही क्या होता है?
जब आप किसी फ्री Wi-Fi से जुड़ते हैं तो आपका डिवाइस एक ऐसे नेटवर्क पर काम करता है जो अक्सर सुरक्षित (एन्क्रिप्टेड) नहीं होता. इसका मतलब यह है कि उसी नेटवर्क पर मौजूद कोई भी हैकर आपकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख सकता है.
कई बार हमलावर मैन-इन-द-मिडल तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जिसमें वे आपके और वेबसाइट के बीच में आकर चुपचाप डेटा चुरा लेते हैं. आसान भाषा में समझें तो आप जो भी टाइप करते हैं पासवर्ड, OTP, ईमेल सब उनके हाथ लग सकता है. इसके अलावा, नकली Wi-Fi नेटवर्क भी बनाए जाते हैं जो असली जैसे दिखते हैं और लोगों को आसानी से जाल में फंसा लेते हैं.
सबसे बड़े खतरे कौन-कौन से हैं?
पब्लिक Wi-Fi का सबसे बड़ा जोखिम है पहचान की चोरी, बैंकिंग फ्रॉड और मालवेयर अटैक. साइबर अपराधी आपके बैंकिंग ऐप, सोशल मीडिया या ऑफिस अकाउंट्स के लॉगिन डिटेल्स चुरा सकते हैं. एक और आम तरीका है सेशन हाईजैकिंग जिसमें हैकर बिना पासवर्ड डाले ही आपके अकाउंट का कंट्रोल हासिल कर लेते हैं. कुछ मामलों में, नेटवर्क के जरिए आपके फोन में मालवेयर भी डाल दिया जाता है जो बाद में भी आपकी गतिविधियों पर नजर रखता रहता है. इन खतरों का सीधा असर आपके पैसों, UPI ऐप्स और निजी जानकारी पर पड़ सकता है यहां तक कि आपकी फोटो और मैसेज भी गलत हाथों में जा सकते हैं.
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
पब्लिक Wi-Fi का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है. खुले नेटवर्क पर कभी भी बैंकिंग ऐप में लॉगिन न करें और न ही कोई पेमेंट करें. किसी भी वेबसाइट को खोलते समय यह जरूर देखें कि उसके URL में HTTPS हो जिससे कनेक्शन सुरक्षित रहता है.
अपने फोन में ऑटो-कनेक्ट फीचर बंद रखें ताकि आपका डिवाइस अपने आप किसी अनजान नेटवर्क से न जुड़ जाए. साथ ही, एक भरोसेमंद VPN का इस्तेमाल करने से आपका डेटा एन्क्रिप्ट हो जाता है जिससे सुरक्षा और बढ़ जाती है. इसके अलावा, जरूरी ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें. इससे अगर पासवर्ड चोरी भी हो जाए, तो भी आपका अकाउंट सुरक्षित रह सकता है.
रोजमर्रा की जिंदगी में क्यों जरूरी है सावधानी?
आज के समय में जब हर छोटा-बड़ा पेमेंट डिजिटल हो चुका है, एक छोटी सी गलती भी बड़ा नुकसान कर सकती है. पब्लिक Wi-Fi हर जगह मौजूद है लेकिन इसके साथ साइबर खतरे भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहे हैं. अगर आप थोड़ी सी सावधानी बरतें, तो अपने पैसे, निजी जानकारी और ऑनलाइन पहचान को सुरक्षित रख सकते हैं. पब्लिक Wi-Fi का सही तरीके से इस्तेमाल ही आपको इन खतरों से बचा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Quantum Battery करेगी चमत्कार! पलक झपकते ही हो जाएगी चार्ज, बदल जाएंगे फ्यूचर के डिवाइस</title>
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        <description><![CDATA[ Quantum Battery: ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने एनर्जी स्टोर करने के मामले में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. उन्होंने एक क्वांटम बैटरी बनाई है, जो पलक झपकते ही चार्ज हो सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी एनर्जी स्टोर और डिलीवर करने की पूरी तस्वीर बदल सकती है. इसकी मदद से ऐसे डिवाइस बनाए जा सकते हैं, जो बहुत तेज स्पीड पर चार्ज हो पाएंगे. ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी ने CSIRO और RMIT के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम किया है. आइए जानते हैं कि Quantum Battery कैसे काम करेगी और इससे चार्जिंग कैसे बदल सकती है.
कैसे काम करेगी Quantum Battery?
रिसर्च में शामिल एक साइंटिस्ट ने बताया कि कन्वेंशनल बैटरी की तरह क्वांटम बैटरी भी एनर्जी स्टोर करेगी और चार्ज-डिस्चार्ज होगी. इसमें बड़ा अंतर यह है कि बाकी बैटरियां केमिकल रिएक्शन पर डिपेंड होती हैं, लेकिन क्वांटम बैटरी क्वांटम मैकेनिक्स की प्रोपर्टीज को यूज करेगी. क्वांटम सिस्टम का फायदा यह है कि यह एक साथ बहुत बड़ी मात्रा में लाइट को एब्जॉर्ब कर लेता है, जिससे बैटरी बहुत तेजी से चार्ज हो जाती है.
एक्सपेरिमेंट में कन्फर्म हुई चार्जिंग स्पीड
वैज्ञानिकों ने अभी इस बैटरी का प्रोटोटाइप तैयार किया है और उसकी चार्जिंग स्पीड परखने के लिए उस पर एक्सपेरिमेंट भी किया गया. इसमें पता चला है कि यह बैटरी बहुत तेजी से चार्ज हो सकती है. इससे एक झलक मिलती है कि फ्यूचर की टेक्नोलॉजी में क्वांटम-बेस्ड एनर्जी स्टोरेज एक बड़ी भूमिका निभाने जा रही है.
कहां काम आ सकती है Quantum Battery?
साइंटिस्ट की टीम का नेतृत्व करने वाली डॉक्टर जेम्स क्वाक ने बताया कि रिसर्च और प्रोटोटाइप से पता चला है कि क्वांटम बैटरी बहुत तेजी से चार्ज हो सकती है और यह रूम टेंपरेचर पर एनर्जी को स्टोर कर सकती है. इससे नेक्स्ट-जनरेशन एनर्जी सॉल्यूशन बनाए जा सकते हैं. ये बैटरियां जितनी बड़ी होंगी, उतना ही जल्दी चार्ज होंगी. अभी इस पर काफी काम किया जाना बाकी है, लेकिन उस दिशा में कदम बढ़ाए जा चुके हैं. अब हम क्वांटम बैटरी के एनर्जी स्टोरेज टाइम को बढ़ाने पर काम करेंगे.
पॉल्यूशन ने बिजली बनाने वाली बैटरी भी तैयार
क्वांटम बैटरी के अलावा वैज्ञानिकों ने एयर पॉल्यूशन से बिजली बनाने वाली गैस बैटरी भी तैयार कर ली है. यह बैटरी कार्बन डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड जैसी गैसों को कैप्चर कर उन्हें यूजेबल एनर्जी में बदल देती है. इस गैस बैटरी को उन डिवाइसेस को पावर देने के लिए यूज किया जा सकता है, जिन्हें बहुत कम एनर्जी की जरूरत होती है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>XR, AR, VR या MR? कन्फ्यूज हैं आप भी? जानिए रियलिटी टेक का पूरा खेल जो बदल देगा आपका डिजिटल अनुभव</title>
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        <description><![CDATA[ XR Vs AR Vs VR Vs MR: डिजिटल दुनिया को देखने और समझने का तरीका तेजी से बदल रहा है. आज AR, VR, MR और XR जैसी टेक्नोलॉजी सिर्फ बड़े टेक इवेंट्स तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये हमारी पढ़ाई, काम, शॉपिंग और एंटरटेनमेंट का हिस्सा बनती जा रही हैं. लेकिन अक्सर लोग इन चारों के बीच फर्क समझ नहीं पाते. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये क्या हैं और क्यों जरूरी हैं.
XR क्या है? (Extended Reality)
Extended Reality यानी XR एक छतरी की तरह है जिसके अंदर AR, VR और MR तीनों आते हैं. इसका मतलब है ऐसी सभी टेक्नोलॉजी जो हमारी असली दुनिया के अनुभव को बदलती या बढ़ाती हैं उन्हें XR कहा जाता है. इसे स्पेशल कंप्यूटिंग भी कहा जाता है.
AR क्या है? (Augmented Reality)
Augmented Reality में आप असली दुनिया को देखते रहते हैं लेकिन उस पर डिजिटल चीजें जुड़ जाती हैं. उदाहरण, सोशल मीडिया के फेस फिल्टर, घर में वर्चुअल फर्नीचर देखने वाले ऐप्स. इसमें असली और डिजिटल दोनों साथ-साथ दिखते हैं. आने वाले समय में स्मार्ट ग्लासेस इस टेक्नोलॉजी को और आगे ले जाएंगे.
VR क्या है? (Virtual Reality)
Virtual Reality पूरी तरह अलग अनुभव देता है. इसमें आप असली दुनिया से कट जाते हैं और एक वर्चुअल दुनिया में पहुंच जाते हैं. उदाहरण जैसे गेमिंग, ट्रेनिंग सिमुलेशन, वर्चुअल टूर. VR हेडसेट पहनते ही आपको पूरी तरह नई दुनिया दिखाई देती है जो कंप्यूटर से बनाई जाती है.
MR क्या है? (Mixed Reality)
Mixed Reality AR और VR का मिला-जुला रूप है. इसमें डिजिटल ऑब्जेक्ट सिर्फ दिखते ही नहीं बल्कि असली दुनिया के साथ इंटरैक्ट भी करते हैं. यानी वर्चुअल चीजें ऐसे व्यवहार करती हैं जैसे वे वास्तव में मौजूद हों. यह टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री, हेल्थकेयर और एडवांस ट्रेनिंग में तेजी से इस्तेमाल हो रही है.
क्यों जरूरी है इनका फर्क समझना?
इन टेक्नोलॉजी का असर सिर्फ गेमिंग तक सीमित नहीं है. ये एजुकेशन, मेडिकल, इंजीनियरिंग और शॉपिंग जैसे कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला रही हैं. जैसे-जैसे डिवाइस बेहतर होंगे इन सभी के बीच का फर्क कम होता जाएगा और हमारा डिजिटल अनुभव और भी रियल लगेगा. AR, VR, MR और XR मिलकर भविष्य की डिजिटल दुनिया को आकार दे रहे हैं. आने वाले समय में असली और वर्चुअल दुनिया के बीच की दूरी लगभग खत्म हो सकती है और यही इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>डैशकैम नहीं है? कोई टेंशन नहीं! आपका स्मार्टफोन ही बन जाएगा कार का सिक्योरिटी कैमरा, जानिए ये स्मार्ट ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ How to Convert Smartphone into Dashcam: आज के समय में सड़क पर सुरक्षा और सबूत दोनों ही बेहद जरूरी हो गए हैं. किसी हादसे, बहस या इंश्योरेंस क्लेम के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग काफी काम आती है. ऐसे में हर किसी के पास महंगा डैशकैम होना जरूरी नहीं है क्योंकि आपका स्मार्टफोन ही यह काम आसानी से कर सकता है.
क्यों जरूरी है डैशकैम जैसा फीचर
डैशकैम आपकी ड्राइविंग के दौरान हर पल को रिकॉर्ड करता है. अगर रास्ते में कोई दुर्घटना होती है या विवाद खड़ा हो जाता है तो यही रिकॉर्डिंग सच्चाई सामने लाने में मदद करती है. खास बात यह है कि इसके लिए अलग से डिवाइस खरीदना जरूरी नहीं आपका फोन पहले से ही इस काम के लिए सक्षम है.
शुरुआत से पहले क्या तैयार रखें
अगर आप अपने फोन को डैशकैम की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं तो कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रखना होगा. सबसे पहले एक मजबूत मोबाइल होल्डर होना चाहिए जो फोन को सही जगह पर स्थिर रखे. इसके अलावा कार चार्जर जरूरी है क्योंकि लगातार रिकॉर्डिंग से बैटरी जल्दी खत्म होती है. साथ ही फोन में पर्याप्त स्टोरेज होना चाहिए ताकि वीडियो सेव हो सके. एक भरोसेमंद ऐप भी जरूरी है जो इस काम को आसान बना सके.
ऐसे बनाएं फोन को डैशकैम
सबसे पहले अपने फोन में कोई अच्छा डैशकैम ऐप इंस्टॉल करें जैसे DailyRoads Voyager या AutoBoy Dash Cam. ये ऐप्स लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और ऑटोमैटिक स्टोरेज मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं देते हैं. इसके बाद फोन को डैशबोर्ड या विंडशील्ड पर इस तरह लगाएं कि सामने का पूरा रास्ता साफ दिखाई दे. ध्यान रखें कि फोन आपकी ड्राइविंग में बाधा न बने.
कैमरे का एंगल इस तरह सेट करें कि सड़क के साथ-साथ कार का थोड़ा हिस्सा भी दिखे इससे वीडियो ज्यादा स्पष्ट और उपयोगी बनता है. वीडियो क्वालिटी और स्टोरेज सेटिंग्स को अपनी जरूरत के हिसाब से एडजस्ट करें. कई ऐप्स में लूप रिकॉर्डिंग का विकल्प होता है, जिससे पुरानी फाइलें खुद ही डिलीट होती रहती हैं. अगर ऐप में ऑटो-स्टार्ट फीचर हो तो उसे ऑन कर दें ताकि गाड़ी चालू करते ही रिकॉर्डिंग शुरू हो जाए.
बेहतर परफॉर्मेंस के लिए जरूरी टिप्स
फोन को ज्यादा गर्म होने से बचाएं क्योंकि लगातार रिकॉर्डिंग से ओवरहीटिंग हो सकती है. कैमरे का लेंस साफ रखें ताकि वीडियो क्लियर आए. रिकॉर्डिंग के दौरान भारी ऐप्स का इस्तेमाल न करें, इससे फोन स्लो हो सकता है. साथ ही, अपने इलाके के नियम जरूर जान लें क्योंकि कुछ जगहों पर पब्लिक रिकॉर्डिंग को लेकर नियम अलग हो सकते हैं.
क्या यह लंबे समय के लिए सही विकल्प है
अगर आप कभी-कभार ड्राइव करते हैं, तो स्मार्टफोन को डैशकैम की तरह इस्तेमाल करना एक सस्ता और आसान उपाय है. लेकिन जो लोग रोजाना लंबी ड्राइव करते हैं, उनके लिए अलग डैशकैम ज्यादा बेहतर और टिकाऊ विकल्प हो सकता है. सही सेटअप और थोड़ी सावधानी के साथ आपका स्मार्टफोन एक बेहतरीन सुरक्षा टूल बन सकता है वो भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>स्प्लिट या विंडो, कौन&amp;सा एसी लगवाना ज्यादा सेफ, किसमें जल्दी होता है शॉर्ट सर्किट?</title>
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        <description><![CDATA[ Split AC vs Window AC: दिल्ली के विवेक विहार इलाके में AC Blast होने के कारण 9 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि घर पर यूज करने के लिए कौन-सा एसी सही रहता है. मार्केट में Split AC के अलावा Window AC का भी ऑप्शन है. इन दोनों के अपने फायदे-नुकसान हैं और आप अपनी जरूरत के हिसाब से किसी एक को चुन सकते हैं. अगर आप सुरक्षा के लिहाज से देख रहे हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि Split AC vs Window AC में आपके लिए बेहतर च्वॉइस कौन-सी हो सकती है.
Split AC के फायदे-नुकसान
Split AC में इनडोर और आउटडोट यूनिट होती है. इसका कंप्रेशर आउटडोट यूनिट में लगा होता है, जिस कारण उसका शोर अंदर नहीं आता और कमरे में शांति बनी रहती है. ऊंची छत और बड़े साइज वाले कमरों में कूलिंग के लिए स्प्लिट एसी बेहतर च्वॉइस होता है. हालांकि, दो यूनिट होने के कारण इसकी इंस्टॉलेशन मुश्किल होती है. इसमें कॉपर पाइप यूज होती है और इसे प्रोफेशनल से ही इंस्टॉल करवाने की सलाह दी जाती है.&amp;nbsp;
विंडो AC के फायदे-नुकसान
यह एक सिंगल कॉम्पैक्ट यूनिट होती है, जिसे इंस्टॉल करना आसान है. इसकी कीमत भी कम होती है और अगर आपको छोटे कमरे के लिए एसी चाहिए तो यह आपके काम आ सकता है. अगर इसके नुकसान की बात करें तो विंडो AC ज्यादा शोर करता है और कूलिंग में ज्यादा समय लेता है.&amp;nbsp;
कौन-सा एसी है ज्यादा सेफ?
सेफ्टी के मामले में विंडो एसी ज्यादा सुरक्षित है. इसमें छोटी पाइप लगी होती है, जिससे गैस लीक का खतरा कम होता है. दूसरी तरफ स्प्लिट एसी में लंबी पाइपलाइन होती है, जिससे गैस लीक का खतरा बढ़ जाता है. अगर इसे ठीक तरीके से इंस्टॉल न किया जाए तो बिजली से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं, जिनमें शॉर्ट सर्किट का भी खतरा रहता है. आग लगने की ज्यादातर घटनाएं स्प्लिट एसी के साथ ही होती हैं.
इन तरीकों से सेफ रहेगा AC

एसी को लगातार दिन-रात यूज करने से बचना चाहिए. सुरक्षा के लिहाज से कुछ घंटे बाद इसे बंद करना जरूरी है.&amp;nbsp;
एसी की रेगुलर सर्विस करवानी चाहिए. इससे एसी की परफॉर्मेंस भी ठीक रहेगी और दुर्घटना का खतरा भी कम होगा.&amp;nbsp;
अगर आपके एरिया में वॉल्टेज का इश्यू है तो स्टेबलाइजर जरूर यूज करें.
एसी में गैस लीक हो रही है तो इसे यूज न करें और तुरंत इसकी रिपेयरिंग करवाएं.

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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्या है Cassette AC? जानिए कैसे बिना दिखे करता है जबरदस्त कूलिंग, किस तकनीक पर करता है काम</title>
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        <description><![CDATA[ Cassette AC: गर्मी से राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग Window या Split AC का इस्तेमाल करते हैं लेकिन अब एक नया और स्मार्ट विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है Cassette AC. यह ऐसा एयर कंडीशनर है जो दीवार पर नजर नहीं आता बल्कि छत में फिट होकर पूरे कमरे को ठंडा करता है. खास बात यह है कि यह न सिर्फ कूलिंग देता है बल्कि आपके कमरे के लुक को भी मॉडर्न बना देता है.
Cassette AC क्या होता है?
Cassette AC एक तरह का Split AC ही होता है लेकिन इसका डिजाइन अलग होता है. इसमें इंडोर यूनिट छत के अंदर (False Ceiling) में लगाई जाती है और सिर्फ इसका पैनल नीचे की ओर दिखता है. वहीं, आउटडोर यूनिट बाहर ही रहती है. इसका पैनल आमतौर पर चौकोर होता है और यह चारों दिशाओं में हवा फेंकता है जिससे पूरे कमरे में बराबर ठंडक फैलती है.
कैसे करता है काम?
इस AC का काम करने का तरीका सामान्य Split AC जैसा ही होता है लेकिन इसकी एयर फ्लो टेक्नोलॉजी इसे खास बनाती है. Cassette AC छत के बीच में लगा होता है, इसलिए यह चारों तरफ हवा को समान रूप से फैलाता है. इससे कमरे के हर कोने तक ठंडक पहुंचती है और कहीं भी हॉट स्पॉट नहीं बनता. यही वजह है कि यह बड़े कमरों, ऑफिस और शोरूम के लिए ज्यादा बेहतर माना जाता है.
क्यों बन रहा है नया ट्रेंड?
आजकल लोग सिर्फ कूलिंग ही नहीं, बल्कि इंटीरियर और स्पेस सेविंग पर भी ध्यान दे रहे हैं. Cassette AC दीवारों को खाली रखता है जिससे कमरे का लुक ज्यादा साफ और स्टाइलिश दिखता है. इसके अलावा, यह ज्यादा शांत (Silent) तरीके से काम करता है जिससे शोर भी कम होता है. होटल, मॉल, ऑफिस और अब घरों में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.
फायदे और कुछ जरूरी बातें
Cassette AC का सबसे बड़ा फायदा इसकी यूनिफॉर्म कूलिंग और प्रीमियम लुक है. यह बड़े एरिया को आसानी से ठंडा कर सकता है और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भी असरदार रहता है. हालांकि, इसे लगाने के लिए False Ceiling होना जरूरी होता है जिससे इसकी इंस्टॉलेशन कॉस्ट बढ़ सकती है. साथ ही, इसकी कीमत सामान्य AC से थोड़ी ज्यादा होती है.
क्या आपके लिए सही है?
अगर आपके घर या ऑफिस में बड़ा स्पेस है और आप एक क्लीन व मॉडर्न लुक चाहते हैं तो Cassette AC एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. लेकिन छोटे कमरों या कम बजट में यह उतना प्रैक्टिकल नहीं होता. Cassette AC सिर्फ एक कूलिंग डिवाइस नहीं बल्कि एक स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है. यह बिना नजर आए पूरे कमरे को ठंडा करता है और आपकी जगह को स्मार्ट लुक देता है. अगर आप नई टेक्नोलॉजी और बेहतर कूलिंग का अनुभव चाहते हैं तो यह AC आपके लिए एक शानदार अपग्रेड साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>रोज 8 घंटे कूलर चलाने पर कितनी बिजली खर्च होती है? वॉट के हिसाब से जानिए महीने का असली खर्च</title>
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        <description><![CDATA[ Cooler Electricity Consumption: गर्मी का मौसम आते ही कूलर कई घरों की जरूरत बन जाता है. एसी हर किसी के बजट में नहीं होता इसलिए ज्यादातर लोग कूलर का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोज 8 घंटे कूलर चलाने पर महीने के आखिर में बिजली का बिल कितना आता है? अगर नहीं, तो अब यह समझ लेना जरूरी है ताकि आप अपने खर्च को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकें.&amp;nbsp;
कूलर कितनी बिजली खाता है?
कूलर की बिजली खपत उसके वाट (Watt) पर निर्भर करती है. आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले कूलर 100W से 250W के बीच होते हैं। छोटे कूलर कम बिजली लेते हैं जबकि बड़े डेजर्ट कूलर ज्यादा पावर खपत करते हैं. उदाहरण के लिए अगर आपका कूलर 150W का है तो वह 1 घंटे में 0.15 यूनिट (kWh) बिजली खर्च करेगा.
रोज 8 घंटे चलाने पर कितना खर्च?
अब अगर आप 150W का कूलर रोज 8 घंटे चलाते हैं तो एक दिन में लगभग 1.2 यूनिट बिजली खर्च होगी. इसे 30 दिनों से गुणा करें तो महीने में करीब 36 यूनिट बिजली खपत होती है.
अब मान लेते हैं कि आपके इलाके में बिजली की कीमत 6 रुपये प्रति यूनिट है तो 36 यूनिट &amp;times; 6 रुपये = करीब 216 रुपये प्रति महीने खर्च होगा. यानी कूलर चलाना एसी के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है.
अलग-अलग वाट के हिसाब से खर्च
अगर कूलर 100W का है तो महीने का खर्च लगभग 140&amp;ndash;150 रुपये तक हो सकता है. वहीं 200W या उससे ज्यादा पावर वाले कूलर के लिए यह खर्च 300 रुपये या उससे ऊपर जा सकता है. इसलिए कूलर का साइज और पावर सीधे आपके बिल को प्रभावित करता है.
बिजली बिल कम करने के आसान तरीके
अगर आप चाहते हैं कि कूलर का खर्च और कम हो तो कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं. जैसे कि कूलर को सही वेंटिलेशन वाले कमरे में चलाएं, पानी का लेवल सही रखें और जरूरत न होने पर कूलर बंद कर दें. साथ ही, पुराने और ज्यादा बिजली खपत करने वाले कूलर की जगह नए एनर्जी-एफिशिएंट मॉडल का इस्तेमाल करें.
कूलर चलाना जेब पर ज्यादा भारी नहीं पड़ता लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से लोग अक्सर ज्यादा बिल से घबरा जाते हैं. अगर आप वाट और यूनिट का बेसिक हिसाब समझ लें तो आसानी से अपने बिजली खर्च का अंदाजा लगा सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>80% तक फोन को चार्ज करना समझदारी या सबसे बड़ी भूल? सच्चाई जानकर आपके भी उड़ जाएंगे होश</title>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 15, 16 या 17? 2026 में कौनसा है असली पैसा वसूल, इन 5 कारणों से खुद तय करें सही चॉइस</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 15, 16 या 17? 2026 में कौनसा है असली पैसा वसूल, इन 5 कारणों से खुद तय करें सही चॉइस ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 12:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>AI Companion का नया खेल! Teens इस तरह कर रहे इसका इस्तेमाल, जानकर आपके भी उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ AI Companion for Teens: आज की युवा पीढ़ी AI का इस्तेमाल सिर्फ सवाल-जवाब या चैटिंग तक सीमित नहीं रख रही बल्कि इसे अपनी कल्पनाशक्ति और भावनाओं को व्यक्त करने का नया जरिया बना चुकी है. साल 2022 में Character.AI नाम के प्लेटफॉर्म ने लोगों को अपने खुद के AI कैरेक्टर बनाने का मौका दिया.
देखते ही देखते यह ऐप बेहद लोकप्रिय हो गया और करोड़ों यूज़र्स इससे जुड़ गए. लाखों अलग-अलग चैटबॉट कैरेक्टर बनाए गए जिनमें बड़ी संख्या किशोरों की थी. लेकिन 2025 में, बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इस प्लेटफॉर्म ने 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स पर रोक लगा दी.
क्या सच में AI सिर्फ &amp;ldquo;साथी&amp;rdquo; बन रहा है?
अक्सर यह माना जाता है कि युवा AI का इस्तेमाल सिर्फ दोस्ती या भावनात्मक सहारे के लिए करते हैं. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. रिसर्च के मुताबिक ज्यादातर किशोर AI का इस्तेमाल जानकारी पाने के लिए करते हैं. होमवर्क में मदद लेना भी एक बड़ा कारण है और काफी लोग इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करते हैं. भावनात्मक सपोर्ट या अकेलेपन को दूर करने के लिए AI का उपयोग करने वालों की संख्या काफी कम पाई गई.
AI बना एंटरटेनमेंट और क्रिएटिविटी का टूल
किशोरों के लिए AI सिर्फ एक चैटबॉट नहीं बल्कि एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म बन गया. यहां वे अपने पसंदीदा कैरेक्टर के साथ कहानी बनाते हैं, रोलप्ले करते हैं और अपनी कल्पना को विस्तार देते हैं. AI के साथ तीन खास तरह के प्रयोग.
भावनात्मक राहत (Restoration)
कई युवा AI का इस्तेमाल अपनी भावनाएं साझा करने, तनाव कम करने या मन हल्का करने के लिए करते हैं. वे कम्फर्ट बॉट्स बनाते हैं जो उन्हें हौसला देते हैं या मुश्किल समय में साथ निभाते हैं.
खोज और रचनात्मकता (Exploration)
AI के जरिए युवा नई कहानियां लिखते हैं अपनी पसंदीदा फिल्मों या किताबों की दुनिया को आगे बढ़ाते हैं और नई कल्पनाएं गढ़ते हैं. इससे उनकी राइटिंग और क्रिएटिव स्किल्स भी बेहतर होती हैं.
पहचान में बदलाव (Transformation)
कुछ किशोर AI का इस्तेमाल अलग-अलग पहचान आजमाने या अपनी जिंदगी की परिस्थितियों को समझने के लिए करते हैं. वे ऐसे कैरेक्टर बनाते हैं जो उनकी असल जिंदगी के रिश्तों या अनुभवों से जुड़े होते हैं.
क्या सिर्फ बैन करना ही समाधान है?
AI पर पाबंदी लगाना सुरक्षा के लिए एक कदम हो सकता है लेकिन इससे युवाओं की क्रिएटिविटी और एक्सपेरिमेंट करने की आजादी भी प्रभावित होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर AI बनाने की जरूरत है ऐसा AI जो सुरक्षित भी हो और युवाओं की रचनात्मकता को बढ़ावा भी दे.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 12:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Gaming Laptop Vs Normal Laptop: दोनों में क्या अंतर और आपके लिए कौन&amp;सा रहेगा बेस्ट? यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Gaming Laptop Vs Normal Laptop: मार्केट में गेमिंग और नॉर्मल लैपटॉप के कई ऑप्शंस मौजूद हैं, लेकिन इनके बीच के अंतर के बारे में कम लोगों को पता है. गेमिंग लैपटॉप को फास्ट एक्शन, शानदार ग्राफिक्स और स्ट्रॉन्ग परफॉर्मेंस के लिए तैयार किया जाता है, लेकिन अगर आप गेमिंग या हैवी टास्क नहीं करने वाले तो इतनी पावर किस काम की. असल में गेमिंग और नॉर्मल लैपटॉप में से एक का चुनाव केवल स्पेसिफिकेशन के आधार पर नहीं किया जा सकता. यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि आप लैपटॉप को कैसे यूज करने वाले हैं. मार्केट में गेमिंग और नॉर्मल लैपटॉप के कई ऑप्शंस मौजूद हैं, लेकिन इनके बीच के अंतर के बारे में कम लोगों को पता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि Gaming Laptop Vs Normal Laptop में से आपके लिए कौन-सा बेस्ट रहेगा.
Gaming Laptop Vs Normal Laptop
डिजाइन
गेमिंग लैपटॉप को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए यूज किया जाता है. इसके डिजाइन में दमदार ग्राफिक प्रोसेसिंग कैपेबिलिटी और स्टेबल गेमिंग एक्सपीरियंस पर खास फोकस होता है. इसके लिए इनमें अलग ग्राफिक कार्ड, हाई रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले और बेहतर कूलिंग सिस्टम दिया जाता है. दूसरी तरफ नॉर्मल लैपटॉप में पोर्टेबिलिटी, बैटरी लाइफ और डेली जरूरतों का ध्यान रखा जाता है. बेसिक फीचर्स के साथ इन्हें हल्का रखने और लॉन्ग-टर्म यूज के लिए बनाने की कोशिश होती है.
कॉन्फिग्रेशन
गेमिंग लैपटॉप को ज्यादा प्रोसेसिंग की जरूरत पड़ती है. इसलिए इनमें प्रोसेसर से लेकर रिफ्रेश रेट और मेमोरी तक सारे फीचर्स एक लेवल ऊपर होते हैं. इनमें ज्यादा मेमोरी के साथ ज्यादा स्टोरेज भी चाहिए. इसके लिए कॉन्फिगरेशन के मुकाबले में ये नॉर्मल लैपटॉप से एडवांस होते हैं.
डिस्प्ले टेक्नोलॉजी
गेमिंग लैपटॉप में स्मूद विजुअल के लिए हाई रिफ्रेश रेट (आमतौर पर 120Hz-240Hz) और &amp;nbsp;NVIDIA G-SYNC या AMD FreeSync जैसी टेक्नोलॉजी यूज होती है. इससे गेमिंग एक्सपीरियंस बेहतर होता है. इसकी तुलना में अधिकतर नॉर्मल लैपटॉप में 60Hz स्टैंडर्ड रिफ्रेश रेट डिस्प्ले यूज होते हैं, जो ऑफिस और एंटरटेनमेंट जरूरतों को आसानी से पूरा कर कर देते हैं.
कूलिंग सिस्टम&amp;nbsp;
गेमिंग के दौरान लैपटॉप में ज्यादा हीट जनरेट होती है. इसे देखते हुए इनमें एडवांस कूलिंग सिस्टम यूज किए जाते हैं. इनमें ट्रिपल फैन टेक्नोलॉजी तक देखने को मिल जाती है, वहीं नॉर्मल लैपटॉप में सिंगल फैन टेक्नोलॉजी यूज होती है.
क्या नॉर्मल कामों के लिए गेमिंग लैपटॉप लिया जा सकता है?
कई लोगों को लगता है कि गेमिंग लैपटॉप केवल गेमर्स ही खरीदते हैं. असल में ऐसा नहीं है. नॉर्मल कामों के लिए भी गेमिंग लैपटॉप यूज होते हैं. गेमिंग के अलावा इन लैपटॉप पर मल्टीटास्किंग करना आसान होता है. इसी तरह वीडियो एडिटिंग और डिजाइन प्रोजेक्ट जैसे हैवी टास्क भी इस पर आसानी से किए जा सकते हैं. गेमिंग लैपटॉप में ज्यादा पोर्ट्स मिलते हैं, जो ज्यादा एक्सेसरीज कनेक्ट करने की सुविधा देते हैं. नॉर्मल लैपटॉप पर ऐसा करना काफी मुश्किल होता है.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tech Tips: पुराना AC खरीदने से पहले जरूर देख लें ये चीजें, नहीं तो पूरी गर्मी पछताना पड़ेगा</title>
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        <description><![CDATA[ Second Hand AC Buying Tips: गर्मी में राहत पाने के लिए कई लोग पुराना AC भी खरीदते हैं. इससे उन्हें नई एसी के लिए ज्यादा पैसा भी नहीं खर्च करना पड़ता और गर्मी से राहत भी मिल जाती है. यह बजट फ्रेंडली होने के साथ-साथ स्मार्ट तरीका भी है, लेकिन पुराने एसी को खरीदने से पहले कई चीजों का ध्यान रखना जरूरी है. अगर आप पुराना एसी खरीदना चाह रहे हैं तो जल्दबाजी न करें और कुछ जरूरी चीजों पर ध्यान दें. इससे आपको एक सही एसी चुनने में मदद मिलेगी. वहीं अगर आप इस मामले में लापरवाही कर देंगे तो पूरी गर्मी पछताना पड़ सकता है.
पुराना एसी खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
मॉडल और यूज पर दें ध्यान- पुराना एसी खरीदने से पहले यह जरूर पता कर लें कि यह कितना पुराना है और इसे यूज कैसे किया गया है. अगर आपके पास ऑप्शन हैं तो 3-4 साल से पुराने मॉडल को न चुनें. इसके अलावा ऐसे मॉडल को चुनें, जिसे बाकियों से कम यूज किया गया है.
कूलिंग कर लें चेक- अगर आप ऑनलाइन किसी से पुराना एसी ले रहे हैं तो सामने वाले की बातों पर आंखें मूंदकर भरोसा न करें. पेमेंट देने से पहले एसी की कूलिंग परफॉर्मेंस जरूर देखें. कुछ देर तक एसी को ऑन रखें और उसकी कूलिंग और एयर फ्लो को नोट करें. अगर 10 मिनट के बाद भी कमरा ठंडा नहीं हो रहा है तो ऐसे मॉडल के लिए पैसा खर्च न करें.&amp;nbsp;
सर्विसिंग हिस्ट्री का करें पता- पुराने एसी की परफॉर्मेंस उसकी सर्विसिंग पर डिपेंड करते ही. अगर किसी एसी को अच्छे से मैंटेन किया गया है तो इसकी कूलिंग समेत सारी चीजें सही होंगी. इसलिए एसी खरीदने से पहले सर्विसिंग हिस्ट्री जरूरी जानें और यह भी पता कर लें कि किन पार्ट्स को बदला गया है.
फिजिकल डैमेज पर भी रखें नजर- एसी खरीदने से पहले इनडोर और आउटडोर यूनिट को अच्छे से चेक कर लें. इस तरीके से आप एसी के फिजिकल डैमेज के अलावा जंग, पाइपों पर जमे ऑयल और डेंट्स आदि का पता कर पाएंगे. ये भले ही बहुत छोटी-छोटी चीजें हों, लेकिन एसी यूज करने के पूरे एक्सपीरियंस को खराब कर सकती हैं. यह भी जरूर कर लें कि एसी चलते समय कितना शोर कर रहा है.
एनर्जी रेटिंग बचाएगी पैसे- नए के मुकाबले पुराने एसी ज्यादा बिजली पीते हैं. इसलिए एनर्जी रेटिंग जरूर देखें. अगर आपको थोड़े पैसे ज्यादा देकर 5 स्टार रेटिंग वाला एसी मिल रहा है तो इसे खरीदना फायदेमंद होगा. यह लॉन्ग रन में आपके पैसे बचा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आधार से जुड़ा नया AI स्कैम! डिजिटल अरेस्ट के बाद अब ठगों का सबसे खतरनाक दांव, हो गया खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ AI Cyber Fraud: देश में साइबर ठगी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों के बाद अब एक नया और ज्यादा खतरनाक तरीका सामने आया है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधार डेटा से छेड़छाड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है. गुजरात के अहमदाबाद में ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ जहां साइबर क्राइम पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
कैसे सामने आया पूरा मामला
यह मामला तब सामने आया जब थलतेज इलाके के एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बिना उनकी जानकारी के बदल दिया गया है. यह बदलाव सामान्य नहीं था बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साइबर ठगी का खेल चल रहा था.
ऐसे दिया गया ठगी को अंजाम
जांच में पता चला कि आरोपियों ने आधार रिकॉर्ड में बदलाव करके पीड़ित का मोबाइल नंबर हटाकर अपना नंबर जोड़ लिया. इसके बाद उनके पास आने वाले OTP सीधे ठगों तक पहुंचने लगे. इसी के जरिए उन्होंने बैंकिंग ऐप्स और डिजिलॉकर जैसे संवेदनशील अकाउंट्स तक पहुंच बना ली. इतना ही नहीं, ठगों ने KYC डिटेल्स में भी बदलाव किया जिससे पूरा कंट्रोल उनके हाथ में आ गया और असली यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगी.
AI का खतरनाक इस्तेमाल
इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगों ने AI टूल्स का भी सहारा लिया. उन्होंने पीड़ित की फोटो से छोटे-छोटे वीडियो क्लिप तैयार किए, जिनमें चेहरे की हल्की हरकतें दिखाई देती थीं. इन क्लिप्स का इस्तेमाल बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए किया गया जो आमतौर पर लाइवनेस डिटेक्शन पर आधारित होता है.
बैंक अकाउंट और लोन तक पहुंच
ठगों ने पीड़ित की जानकारी का इस्तेमाल करके तीन अलग-अलग बैंकों में e-KYC के जरिए अकाउंट खोलने की कोशिश की. इसके अलावा, उनके नाम पर जियो पेमेंट्स बैंक से 25,000 रुपये का लोन भी ले लिया गया. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आधार अपडेट किट का गलत इस्तेमाल किया. ये किट कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए इस्तेमाल की जाती हैं लेकिन इन्हें अवैध तरीके से हासिल कर आधार रिकॉर्ड में बदलाव किए जा रहे थे.
क्या करें अगर आप साइबर फ्रॉड का शिकार हों
अगर आपको किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी का शक हो तो तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है. आप 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. साथ ही, अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं और तुरंत बैंक से संपर्क करके अपने अकाउंट और कार्ड्स को सुरक्षित करें.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन चलाने में लंबे नाखून नहीं बनेंगे बाधा, वैज्ञानिकों ने तैयार कर ली यह स्पेशल पॉलिश, ऐसे करेगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ Long Nails Phone Polish: लंबे नाखून के साथ टचस्क्रीन फोन को यूज करना काफी मुश्किल होता है. लंबे नाखून इस टेक्नोलॉजी के साथ ठीक से काम नहीं करते, जिस कारण टाइप करने से लेकर किसी ऐप को सेलेक्ट करने जैसे बेसिक काम भी जटिल हो जाते हैं. हालांकि, कुछ समय बाद लोग लंबे नाखूनों के साथ फोन यूज करना सीख लेते हैं, लेकिन फिर भी कुछ झंझट रहते ही हैं. अब वैज्ञानिकों ने इस झंझट का समाधान ढूंढ लिया है. उन्होंने एक ऐसा तरीका निकाला है, जिससे नाखून स्टाइलस की तरह काम करेंगे. आइए जानते हैं कि यह तरीका क्या है और कैसे फोन यूज करने के एक्सपीरियंस को आसान बना सकता है.
कैसे काम करती हैं टचस्क्रीन टेक्नोलॉजी?
इस नए तरीके के बारे में जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि टचस्क्रीन टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है. टचस्क्रीन डिवाइस की बात करें तो इनमें कंडक्टिव मैटेरियल की एक पतली लेयर के ऊपर ट्रांसपेरेंट ग्लास लगा होता है. कंडक्टिव लेयर पूरी स्क्रीन के ऊपर एक इलेक्ट्रिक फील्ड क्रिएट करती है. जब हम अपनी फिंगर या स्टाइलस की मदद से स्क्रीन को टच करते हैं तो यह इलेक्ट्रिक फील्ड डिस्टर्ब होता है और एक यूनीक इलेक्ट्रिक सिग्नल क्रिएट होता है. डिवाइस इस सिग्नल को डिजिटल रिएक्शन में बदल देता है.&amp;nbsp;
नाखून के साथ क्या दिक्कत है?
टचस्क्रीन डिवाइस फिंगर या स्टाइलस की मदद से ऑपरेट हो सकते हैं, लेकिन नाखून के साथ इनकी दोस्ती नहीं है. दरअसल, नाखून हमारी फिंगर की तरह कंडक्टिव नहीं होते. इसलिए जब ये स्क्रीन को टच करते हैं तो इलेक्ट्रिक फील्ड डिस्टर्ब नहीं होता. इसका समाधान करने के लिए रिसर्चर ने एक पॉलिश मिक्सचर तैयार किया है, जो इस इलेक्ट्रिक फील्ड को डिस्टर्ब कर सकता है.&amp;nbsp;
रिसर्चर ने इस समस्या को कैसे दूर किया है?
अमेरिका के Louisiana के Centenary College की दो रिसर्चर ने इस परेशानी का हल निकाल लिया है. उन्होंने ऐसा एडिटिव तैयार किया है, जो नेल पॉलिश में मिक्स किया जा सकता है. इस एडिटिव में ethanolamine और taurine को मिक्स किया गया है. ये दोनों ही स्क्रीन के ऊपर बने इलेक्ट्रिक फील्ड को डिस्टर्ब कर टच स्क्रीन के साथ इंटरेक्ट कर सकते हैं. यानी इस एडिटिव को नेल पॉलिश के साथ मिक्स कर नाखूनों पर लगाया जा सकता है. इसके बाद लंबे नाखून एक तरह से स्टाइलस का काम करेंगे और फोन को आसानी से ऑपरेट किया जा सकेगा. रिसर्चर का कहना है कि अभी इस पर काफी काम किया जाना बाकी है, लेकिन इसे जल्द ही अवेलेबल करवाया जा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>रिश्तों पर AI की सलाह बनी खतरा! हर 4 में 1 बार ‘हां में हां’ मिलाता है Claude, क्या सच में भरोसे लायक है या नहीं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रिश्तों-पर-ai-की-सलाह-बनी-खतरा-हर-4-में-1-बार-हां-में-हां-मिलाता-है-claude-क्या-सच-में-भरोसे-लायक-है-या-नहीं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/रिश्तों-पर-ai-की-सलाह-बनी-खतरा-हर-4-में-1-बार-हां-में-हां-मिलाता-है-claude-क्या-सच-में-भरोसे-लायक-है-या-नहीं</guid>
        <description><![CDATA[ Claude AI: आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया और तकनीक ने जहां जिंदगी को आसान बनाया है वहीं अकेलेपन की भावना भी बढ़ाई है. ऐसे में कई लोग अपनी निजी समस्याओं, खासकर रिश्तों से जुड़े सवालों के जवाब पाने के लिए AI चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं. लेकिन एक नई स्टडी यह संकेत देती है कि हर बार AI की सलाह भरोसेमंद नहीं होती खासकर तब जब बात इमोशनल फैसलों की हो.
लाखों यूजर्स के डेटा से क्या पता चला
AI कंपनी Anthropic ने एक रिसर्च में पाया कि बड़ी संख्या में लोग उसके चैटबॉट Claude का इस्तेमाल सिर्फ जानकारी लेने के लिए नहीं बल्कि जीवन से जुड़े अहम फैसले लेने के लिए कर रहे हैं. मार्च से अप्रैल 2026 के बीच लगभग 10 लाख यूजर्स की बातचीत का विश्लेषण किया गया. करीब 38,000 सलाह से जुड़ी बातचीत में से ज्यादातर सवाल चार मुख्य विषयों के आसपास ही घूमते नजर आए.
किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा ली जाती है सलाह
स्टडी के अनुसार, हेल्थ और वेलनेस से जुड़े सवाल लगभग 27 प्रतिशत थे जबकि करियर और प्रोफेशन से जुड़े सवाल 26 प्रतिशत रहे. रिश्तों से जुड़े सवाल 12 प्रतिशत और वित्तीय मामलों से जुड़े प्रश्न 11 प्रतिशत तक सीमित रहे. इससे साफ है कि लोग अब रोजमर्रा के फैसलों के लिए भी AI पर निर्भर होते जा रहे हैं.
&amp;lsquo;हां में हां&amp;rsquo; मिलाने की समस्या क्या है
रिसर्च में एक चिंताजनक बात सामने आई जिसे साइकोफेंसी कहा जाता है. इसका मतलब है कि AI कई बार सही सलाह देने के बजाय यूजर की बातों से सहमत होकर उसे खुश करने की कोशिश करता है भले ही वह सलाह पूरी तरह सही न हो. करीब 9 प्रतिशत मामलों में ऐसा व्यवहार देखा गया जहां AI ने सच्चाई के बजाय यूजर की सोच को ही सही ठहराया. यह स्थिति इसलिए खतरनाक हो सकती है क्योंकि यह गलत फैसलों को बढ़ावा दे सकती है.
रिश्तों के मामलों में बढ़ जाता है खतरा
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि रिश्तों से जुड़े करीब 25 प्रतिशत मामलों में AI ने गलत या भ्रमित करने वाली सलाह दी. यानी हर चार में से एक बार AI ने ऐसी प्रतिक्रिया दी जो यूजर को गलत दिशा में ले जा सकती है. और भी हैरानी की बात यह है कि जब यूजर ने AI के जवाब को चुनौती दी तो कई बार वह और ज्यादा &amp;ldquo;हाँ में हाँ&amp;rdquo; मिलाने लगा.
क्या सुधार किए जा रहे हैं
इस समस्या को कम करने के लिए Anthropic ने अपने मॉडल में बदलाव किए हैं. खासतौर पर Claude Opus 4.7 और Mythos Preview को ऐसे केस स्टडी के जरिए ट्रेन किया गया है जो रिश्तों से जुड़ी सलाह को बेहतर बना सकें. कंपनी का दावा है कि इन सुधारों के बाद ऐसी समस्याएं कुछ हद तक कम हुई हैं.
आखिर क्या करना चाहिए
AI एक उपयोगी टूल जरूर है लेकिन इसे अंतिम निर्णय का आधार बनाना सही नहीं है. खासकर जब बात रिश्तों, करियर या मानसिक स्वास्थ्य की हो तो असली इंसानों से बात करना ज्यादा बेहतर होता है. विशेषज्ञों, काउंसलर या भरोसेमंद लोगों से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है. यह साफ है कि AI हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है लेकिन आंख बंद करके उस पर भरोसा करना समझदारी नहीं है. सही संतुलन बनाना ही सबसे जरूरी है.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Bluetooth को लेकर ये अफवाहें नहीं हैं सच, आज ही यकीन करना कर दें बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Bluetooth Myths: अब वो दिन गए जब गाने सुनने के लिए कंप्यूटर से स्मार्टफोन से केबल कनेक्ट करनी पड़ती थी. अब न तो इयरबड्स को स्मार्टफोन से कनेक्ट होने के लिए और न ही कंट्रोलर को कंसोल से कनेक्ट होने के लिए केबल की जरूरत बची है. वायर्ड कनेक्शन अब पुराने जमाने की चीजें लगते हैं. यह सब ब्लूटूथ कनेक्शन की वजह से संभव हो पाया है. ब्लूटूथ के कारण डिवाइसेस पहले से ज्यादा कनेक्टेड हैं. स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट हो तक, हर जगह ब्लूटूथ का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, इस दौरान ब्लूटूथ से जुड़ी कई अफवाहें भी लोगों के बीच फैली हैं, जो पूरी तरह गलत है. आज हम आपको ब्लूटूथ से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथ्स और उनकी सच्चाई बताने जा रहे हैं.
भ्रम- ब्लूटूथ इयरबड्स से होता है ब्रेन कैंसर
कई लोग यह मानते हैं कि ब्लूटूथ इयरबड्स से ब्रेन कैंसर हो सकता है. यह बात जरूर सच है कि ब्लूटूथ डिवाइस से कुछ रेडिएशन निकलती हैं, लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं है कि इससे ब्रेन कैंसर होता है. ब्लूटूथ इयरबड्स नॉन-आयनाइजिंग रेडिएशन छोड़ते हैं. यह इंसानी सेल्स में एटम्स को इलेक्ट्रॉन से अलग नहीं करती हैं. ब्लूटूथ के अलावा वाईफाई और रेडियो वेव्ज से भी ऐसी रेडिएशन निकलती हैं और अभी तक ऐसे कोई एविडेंस नहीं हैं कि इससे दिमाग पर असर पड़ता है.
भ्रम- ब्लूटूथ ऑन रखने से फोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है
अगर आपने यह सुना है कि फोन या दूसरे डिवाइसेस का ब्लूटूथ ऑन रखने से बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है तो यह पूरी तरह ठीक नहीं है. ब्लूटूथ ऑन रखने पर यह बहुत कम बैटरी की खपत करता है. एक पुराने टेस्ट में पता चला था कि लगातार 26 घंटे तक ब्लूटूथ ऑन रहने पर केवल 1.8 प्रतिशत बैटरी डिस्चार्ज हुई थी. अब तो ब्लूटूथ के नए वर्जन आ गए हैं, जो और भी कम बैटरी कंज्यूम करते हैं. हालांकि, लगातार ब्लूटूथ ऑन रखने से ब्लूजैकिंग जैसे कुछ खतरों का डर रहता है.
भ्रम- ब्लूटूथ डिवाइस की रेंज कम होती है
कई लोगों का कहना है कि ब्लूटूथ डिवाइस की रेंज कम होती है. यानी दो ब्लूटूथ डिवाइसेस के बीच ज्यादा दूरी हो जाए तो कनेक्शन ड्रॉप हो जाता है. यह बात भी पूरी तरह ठीक नहीं है. दरअसल, स्मार्टफोन, हेडफोन और वीयरेबल में ब्लूटूथ क्लास 2 का यूज होता है. पावर कंजप्शन को कम रखने के लिए इसकी रेंज 33 फीट रखी गई है. ब्लूटूथ क्लास 1 नाम से एक दूसरा स्टैंडर्ड भी है, जो हाई-एंड हेडफोन, इंडस्ट्रियल लैपटॉप, रोबोटिक्स सिस्टम और ECG मॉनिटर आदि में यूज होता है. इसकी रेंज 300 फीट से भी ज्यादा होती है.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>आसमान में उड़ते हुए भी फुल नेटवर्क! 30,000 फीट पर कैसे चलता है Airplane WiFi? सच जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi in Airplane: आज के दौर में इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. काम से लेकर एंटरटेनमेंट तक, ज्यादातर चीजें अब ऑनलाइन ही होती हैं. घर और ऑफिस में इंटरनेट मिलना तो आम बात है लेकिन जब आप हवाई जहाज में सफर करते हैं और फिर भी WiFi चलता हुआ देखते हैं तो यह थोड़ा हैरान जरूर करता है. खास बात यह है कि फ्लाइट में बैठते ही हमें Flight Mode ऑन करने को कहा जाता है जिससे मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाता है. फिर सवाल उठता है कि आखिर आसमान में इंटरनेट आता कहां से है?
जमीन से मिलता है कनेक्शन
हवाई जहाज में इंटरनेट कोई जादू नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी का कमाल है. एयरलाइंस कंपनियां खुद का अलग इंटरनेट नेटवर्क नहीं बनातीं बल्कि जमीन पर मौजूद मोबाइल टावर और सैटेलाइट की मदद से कनेक्टिविटी देती हैं यानी उड़ान के दौरान भी प्लेन किसी न किसी नेटवर्क से जुड़ा रहता है.
Air-to-Ground तकनीक क्या है?
इस सिस्टम को आसान भाषा में समझें तो यह मोबाइल नेटवर्क जैसा ही काम करता है. जब विमान उड़ान भरता है तो उसका सिस्टम नीचे लगे टावरों से जुड़ जाता है. जैसे-जैसे प्लेन आगे बढ़ता है वह एक टावर से दूसरे टावर में स्विच करता रहता है. इससे तेज स्पीड में उड़ते हुए भी इंटरनेट कनेक्शन बना रहता है.
सैटेलाइट से भी मिलता है इंटरनेट
जहां Air-to-Ground सिस्टम काम नहीं करता वहां सैटेलाइट टेक्नोलॉजी काम आती है. विमान के ऊपर एक खास एंटीना लगाया जाता है जो सीधे सैटेलाइट से सिग्नल लेता है. जमीन पर मौजूद स्टेशन पहले सिग्नल सैटेलाइट तक भेजता है और फिर वही सिग्नल प्लेन तक पहुंचता है. इस तरीके से लगातार इंटरनेट मिलता रहता है चाहे विमान कितनी भी ऊंचाई पर क्यों न हो.
केबिन में कैसे पहुंचता है WiFi?
अब सवाल आता है कि यह इंटरनेट यात्रियों के फोन तक कैसे पहुंचता है. दरअसल, प्लेन में लगा एंटीना सिग्नल को एक इनबिल्ट राउटर तक भेजता है. यह राउटर पूरे केबिन में WiFi नेटवर्क फैला देता है. जैसे ही आप अपने फोन में WiFi ऑन करते हैं आप उसी नेटवर्क से कनेक्ट हो जाते हैं. यह सिस्टम बिल्कुल घर के WiFi राउटर की तरह काम करता है.
टेक्नोलॉजी का कमाल
हजारों फीट की ऊंचाई पर इंटरनेट चलाना आसान काम नहीं है लेकिन आधुनिक तकनीक ने इसे संभव बना दिया है। यही वजह है कि अब फ्लाइट में भी लोग आराम से काम कर सकते हैं वीडियो देख सकते हैं और ऑनलाइन जुड़े रह सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Gemini AI में आने वाले हैं विज्ञापन! अब बदल जाएगा यूजर्स का अनुभव, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Google Gemini AI: टेक दिग्गज Google अब अपने AI प्लेटफॉर्म Gemini को एक नए दिशा में ले जाने की योजना बना रहा है. खबरों के मुताबिक कंपनी जल्द ही इस ऐप में विज्ञापन और स्पॉन्सर्ड कंटेंट जोड़ सकती है. अब तक जहां AI चैटिंग को एक साफ और बिना बाधा वाला अनुभव माना जाता था वहीं आने वाले समय में यूजर्स को बातचीत के बीच कमर्शियल कंटेंट भी देखने को मिल सकता है.
कमाई बढ़ाने के लिए नया कदम
रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने AI प्रोडक्ट्स को ज्यादा रेवेन्यू जनरेट करने वाला बनाना चाहती है. इसी रणनीति के तहत Gemini ऐप में विज्ञापन शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. कंपनी के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जो विज्ञापन मॉडल पहले से AI आधारित सर्च फीचर्स में काम कर रहा है, उसे Gemini में भी लागू किया जा सकता है. इसका मतलब साफ है कि भविष्य में जब आप AI से कोई सवाल पूछेंगे तो उसके जवाबों के साथ आपको स्पॉन्सर्ड सुझाव भी दिखाई दे सकते हैं.
सर्च हिस्ट्री के आधार पर दिखेंगे विज्ञापन
Google पहले से ही अपने AI सर्च फीचर्स में यूजर्स को उनकी क्वेरी के हिसाब से विज्ञापन दिखा रहा है. अलग-अलग देशों में यह सिस्टम एक्टिव है जहां टेक्स्ट और शॉपिंग ऐड्स सर्च रिजल्ट के साथ दिखाई देते हैं. इस मॉडल से कंपनी को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और यही वजह है कि अब इसे Gemini में भी लाने की तैयारी चल रही है. इसका असर यह होगा कि AI चैटिंग अब सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि उसमें मार्केटिंग का तत्व भी जुड़ जाएगा.
AI मार्केट में बढ़ेगा कंपटीशन
अगर Gemini में विज्ञापन शुरू होते हैं तो यह सीधी टक्कर OpenAI के ChatGPT से होगी. पहले ही ChatGPT में कुछ यूजर्स के लिए विज्ञापन जैसे फीचर्स पर काम हो चुका है. हालांकि कंपनियां यह दावा करती हैं कि विज्ञापन से AI के जवाबों की क्वालिटी पर असर नहीं पड़ेगा लेकिन यूजर एक्सपीरियंस पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है.
बदलती AI दुनिया का नया दौर
AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि एक बड़ा बिजनेस प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है. कंपनियां इसे कमाई का नया जरिया बनाने में लगी हैं. ऐसे में आने वाले समय में AI चैटबॉट्स का अनुभव पहले जैसा सरल और बिना विज्ञापन वाला नहीं रह सकता. अब देखना दिलचस्प होगा कि यूजर्स इस बदलाव को कितना पसंद करते हैं और क्या यह कदम AI प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता पर असर डालता है या नहीं.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>अब ChatGPT होगा और भी सिक्योर! OpenAI ने लॉन्च किया ये नया फीचर, अब कोई नहीं कर पाएगा हैक</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT New Feature: बढ़ते साइबर खतरों और पर्सनल डेटा से जुड़े जोखिमों को देखते हुए OpenAI ने अपने चैटबॉट ChatGPT के लिए एक नया सिक्योरिटी फीचर पेश किया है. इस फीचर का नाम Advanced Account Security (AAS) है जिसे यूजर्स के अकाउंट को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए तैयार किया गया है.
क्या है Advanced Account Security (AAS)?
यह एक ऑप्शनल फीचर है यानी जिसे जरूरत हो वह इसे एक्टिव कर सकता है. हालांकि इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो संवेदनशील जानकारी के साथ काम करते हैं लेकिन आम यूजर्स भी इसका फायदा उठा सकते हैं. इसका मकसद अकाउंट में एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जोड़ना है जिससे हैकिंग या अनऑथराइज्ड एक्सेस को रोका जा सके.
हार्डवेयर Key से मिलेगी नई सुरक्षा
इस नई सुरक्षा व्यवस्था के लिए OpenAI ने Yubico के साथ साझेदारी की है. इस सहयोग के तहत खास हार्डवेयर सिक्योरिटी कीज लॉन्च की गई हैं जिन्हें सीधे ChatGPT अकाउंट से जोड़ा जा सकता है. इन डिवाइस में YubiKey C NFC और YubiKey C Nano जैसे मॉडल शामिल हैं. ये फिजिकल लॉगिन टूल की तरह काम करते हैं यानी केवल पासवर्ड डालना ही काफी नहीं होगा आपके पास यह की होना भी जरूरी होगा.
फिशिंग अटैक से मिलेगा बचाव
इन हार्डवेयर कीज में यूनिक क्रिप्टोग्राफिक पहचान होती है जिससे किसी भी हैकर के लिए अकाउंट में घुसना बेहद मुश्किल हो जाता है. अगर किसी के पास आपका पासवर्ड भी पहुंच जाए तब भी बिना इस फिजिकल की के लॉगिन संभव नहीं होगा. इससे खासकर फिशिंग जैसे साइबर हमलों से सुरक्षा मिलती है.
क्यों जरूरी हो गई है ऐसी सुरक्षा?
आज के समय में AI टूल्स का इस्तेमाल सिर्फ चैटिंग तक सीमित नहीं रहा. लोग इसमें पर्सनल बातचीत, ऑफिस डेटा और कई संवेदनशील जानकारियां भी रखते हैं. ऐसे में ये प्लेटफॉर्म साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं. इस वजह से मजबूत सुरक्षा अब जरूरी बन चुकी है खासकर पत्रकारों, रिसर्चर्स और पॉलिटिकल फील्ड से जुड़े लोगों के लिए.
कंपनियों के लिए भी फायदेमंद
सिर्फ व्यक्तिगत यूजर्स ही नहीं, बल्कि कंपनियां भी इस फीचर का फायदा उठा सकती हैं. जो बिजनेस ChatGPT का इस्तेमाल अपने कामकाज में करते हैं उनके लिए यह अतिरिक्त सुरक्षा डेटा प्राइवेसी को बेहतर बनाएगी.
एक जरूरी चेतावनी भी
हालांकि यह फीचर काफी सुरक्षित है लेकिन इसके साथ एक जोखिम भी जुड़ा है. अगर आप अपनी हार्डवेयर की खो देते हैं तो आपके अकाउंट को वापस पाना मुश्किल हो सकता है. यानी आपको अपने डेटा तक पहुंच हमेशा के लिए खोनी पड़ सकती है.
AI इंडस्ट्री में अब सिर्फ परफॉर्मेंस ही नहीं बल्कि सुरक्षा भी बड़ी प्राथमिकता बनती जा रही है. कई कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं जिससे यूजर्स का भरोसा बना रहे. OpenAI का यह कदम साफ दिखाता है कि जैसे-जैसे AI हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है, वैसे-वैसे उसकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Jio Vs Airtel: 355 रुपये में कौन देता है ज्यादा बेनिफिट्स? जानिए किसका प्लान है पैसा वसूल</title>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब हर स्क्रीन पर चलेगा YouTube! आ गया नया फीचर, वीडियो देखते&amp;देखते कर सकेंगे सारे काम</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube New Feature: वीडियो देखने के तरीके को और आसान बनाने के लिए YouTube ने अपने पॉपुलर Picture-in-Picture (PiP) फीचर को अब दुनियाभर के ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने का फैसला किया है. पहले यह सुविधा सीमित लोगों के लिए थी लेकिन अब धीरे-धीरे सभी यूजर्स इसे इस्तेमाल कर पाएंगे.
पहले किसे मिलता था PiP और अब क्या बदला?
पहले PiP फीचर अमेरिका के बाहर सिर्फ प्रीमियम यूजर्स के लिए उपलब्ध था जबकि अमेरिका में कुछ नॉन-प्रीमियम यूजर्स भी इसका फायदा उठा सकते थे. अब Google ने पुष्टि की है कि आने वाले समय में यह फीचर दुनियाभर के सभी यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा. इस बदलाव का मतलब है कि अब ज्यादा लोग बिना ऐप बंद किए छोटे विंडो में वीडियो देख सकेंगे.
PiP फीचर कैसे करता है काम?
PiP मोड में आप वीडियो को एक छोटे फ्लोटिंग विंडो में बदल सकते हैं जो स्क्रीन पर चलता रहता है चाहे आप कोई दूसरा ऐप क्यों न इस्तेमाल कर रहे हों. जैसे ही आप YouTube ऐप से बाहर आते हैं या होम बटन दबाते हैं वीडियो अपने आप छोटे प्लेयर में चलने लगता है. इस छोटे वीडियो प्लेयर को आप स्क्रीन पर कहीं भी खिसका सकते हैं और दूसरे ऐप्स के ऊपर भी रख सकते हैं जिससे मल्टीटास्किंग काफी आसान हो जाती है.
किन यूजर्स को मिलेगा कौन सा फायदा?
नए अपडेट के बाद नॉन-प्रीमियम यूजर्स भी Android और iOS पर लंबे वीडियो (नॉन-म्यूजिक कंटेंट) के लिए PiP फीचर इस्तेमाल कर पाएंगे. वहीं प्रीमियम यूजर्स को म्यूजिक और नॉन-म्यूजिक दोनों तरह के वीडियो के लिए यह सुविधा मिलती रहेगी.
PiP ऑन या ऑफ कैसे करें?
अगर आप PiP फीचर को इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर इसे ऑन करना होगा. Android यूजर्स Settings में Apps के अंदर YouTube ऑप्शन में जाकर Picture-in-Picture को चालू कर सकते हैं. अगर आप इस फीचर को बंद करना चाहते हैं तो YouTube ऐप की सेटिंग्स में जाकर Playback सेक्शन में PiP को ऑफ किया जा सकता है.
बेहतर होगा एक्सपीरियंस
PiP मोड का इस्तेमाल करते समय आप छोटे वीडियो पर टैप करके कंट्रोल्स देख सकते हैं या उसे बंद करने के लिए स्क्रीन के नीचे खींच सकते हैं. यह फीचर खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो वीडियो देखते हुए चैटिंग, ब्राउजिंग या अन्य काम भी करना चाहते हैं. अब YouTube का यह अपडेट यूजर्स को और ज्यादा आजादी देगा जिससे वे बिना रुकावट अपने पसंदीदा वीडियो का मजा ले सकेंगे.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>लैपटॉप चलाते समय ये एक छोटी सी गलती बन सकती है बड़ा खतरा! अभी नहीं सुधारे तो होगा भारी नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ लैपटॉप चलाते समय ये एक छोटी सी गलती बन सकती है बड़ा खतरा! अभी नहीं सुधारे तो होगा भारी नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>लैपटॉप, चलाते, समय, ये, एक, छोटी, सी, गलती, बन, सकती, है, बड़ा, खतरा, अभी, नहीं, सुधारे, तो, होगा, भारी, नुकसान</media:keywords>
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        <title>Tech Tips: किस दीवार पर AC लगाने से मिलेगी सबसे ज्यादा कूलिंग? यह बात जान ली तो नहीं रहेगा झंझट</title>
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        <description><![CDATA[ AC Installation Tips: गर्मी से बचने के लिए अगर आप AC लगवा रहे हैं तो सही दीवार का चुनाव करना बहुत जरूरी है. अगर यहां गड़बड़ हो गई तो कूलिंग में दिक्कत आ सकती है. इसके अलावा आपको कई दूसरी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है. अगर आपने किसी गलत दीवार या गलत जगह एसी फिट करवा लिया तो वह जल्दी खराब हो सकती है और उसकी परफॉर्मेंस पर भी असर पड़ने का डर रहता है. इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको कमरे की किस दीवार पर एसी फिट करवाना चाहिए.
किस दीवार पर लगाना चाहिए एसी?

एसी हमेशा ऐसी दीवार पर लगाना चाहिए, जो उसका भार और वाइब्रेशन को सहन कर सके. अगर दीवार ज्यादा पतली है और उसमें खिड़की लगी हुई है तो एसी चलते समय वाइब्रेशन के कारण खिड़कियां शोर कर सकती हैं. इससे आपकी नींद में खलल पड़ने के चांस रहेंगे.&amp;nbsp;
एसी को फर्श से कम से कम 8 फीट की ऊंचाई पर लगाना चाहिए. इसलिए हमेशा 8 फीट से ऊंची दीवार पर ही एसी की इनडोर यूनिट को फिट करना चाहिए. इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि दीवार के सामने फर्नीचर या कोई दूसरी रुकावट न हो, जिससे एयरफ्लो पर असर पड़े.&amp;nbsp;
एसी के लिए ऐसी दीवार चुनें, जिस पर सीलन की दिक्कत न हो. अगर दीवार सूखी होगी तो एसी में सिलन के कारण खराबी आने का डर नहीं रहेगा.&amp;nbsp;

इस तरह की दीवार पर एसी लगाने से बचें

अगर कोई दीवार लगातार धूप में रहती है तो उस पर एसी फिट करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
अगर आपने किसी दीवार पर टीवी या उसके पास फ्रिज जैसे दूसरे इलेक्ट्रॉनिक अप्लायसेंस रखें हैं तो भी उस पर एसी लगाने से बचना चाहिए.
&amp;nbsp;किसी दीवार में सीलन है तो भी उस पर एसी न लगाएं.&amp;nbsp;
अगर बेडरूम में एसी लगवा रहे हैं तो बेड से दूर वाली दीवार पर एसी न लगवाएं. इससे बेड तक ठंडी हवा आना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

मैक्सिमम कूलिंग चाहिए तो अपनाएं ये तरीके

अगर आपको एसी से मैक्सिमम कूलिंग चाहिए तो कमरे की खिड़कियों और दरवाजों को बंद रखें ताकि बाहर की गर्मी अंदर न आ पाए.&amp;nbsp;
अगर आपको बिजली बिल की टेंशन रहती है तो एसी के टेंपरेचर को 24 डिग्री पर सेट कर लें. इससे कूलिंग भी मिलेगी और बिजली की खपत भी कम होगी.
हर सीजन एसी की सर्विस करवाना जरूरी है. अगर आपके आसपास धूल-मिट्टी ज्यादा है तो हर हफ्ते एसी के फिल्टर साफ कर लें.

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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:30 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Census 2027: लॉग&amp;इन से घर की मार्किंग तक... ऑनलाइन ऐसे भरें जनगणना फॉर्म, स्टेप&amp;बाय&amp;स्टेप समझें प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ 
Census 2027: राजधानी दिल्ली में जनगणना 2027 की प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है. पहले चरण के तहत 1 मई से 15 मई तक लोगों को खुद से ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन का मौका दिया जा रहा है. इस दौरान दिल्ली के सभी वार्ड के निवासी घर बैठे अपनी जानकारी भर सकते हैं. इसके बाद 16 मई से घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करने का काम शुरू होगा. अधिकारियों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया करीब 15 से 20 मिनट में पूरी की जा सकती है. खास बात यह है कि मकान मालिक की नहीं बल्कि नए किराएदार भी अपनी जानकारी खुद भर सकते हैं. इससे समय की बचत होगी और डेटा में गलतियों की संभावना भी कम होगी. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि जनगणना वाला फॉर्म आप ऑनलाइन कैसे भर सकते हैं और उसका स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस क्या है?
कैसे करें ऑनलाइन जनगणना, जानें पूरा प्रोसेस?
ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाना होगा. यहां लॉगिन करने के बाद आपको अपनी बेसिक जानकारी दर्ज करनी होगी.
स्टेप 1- लॉगिन करें
जनगणना के लिए सबसे पहले https://se.census.gov.in वेबसाइट पर जाकर दिल्ली सेलेक्ट करें और कैप्चा भरें. बेहतर मैपिंग के लिए लैपटॉप या डेस्कटॉप का इस्तेमाल भी करने की सलाह दी गई है.
स्टेप 2- हाउस होल्ड रजिस्ट्रेशन
यहां परिवार के मुखिया का नाम दर्ज होगा, जिसे बाद में बदला नहीं जा सकेगा. इसके साथ एक मोबाइल नंबर डालना जरूरी है, तो हर हाउसहोल्ड के लिए अलग होना चाहिए.
स्टेप 3- भाषा और वेरिफिकेशन
आप अपनी पसंद की 16 भाषाओं में से जिनमें हिंदी, इंग्लिश, बंगाली, तमिलनाडु और उर्दू शामिल है, इनमें से कोई एक लैंग्वेज चुन सकते हैं. इसके बाद मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से वेरिफिकेशन करना होगा.
स्टेप 4- लोकेशन डिटेल भरें
इसमें जिला, इलाके, मोहल्ले और आसपास के लैंडमार्क की जानकारी भरनी होगी, चाहे तो पिन कोड भी जोड़ा जा सकता है.
स्टेप 5- मैप पर घर की लोकेशन मार्क करें
यह एक जरूरी स्टेप है, जिसमें आपको मैप पर अपने घर की सटीक लोकेशन मार्क करनी होगी. इससे अधिकारियों को सही एरिया पहचान ने में मदद मिलेगी.
स्टेप 6- क्वेश्चनियर भरें
इसके बाद घर और परिवार से जुड़ी जानकारी भरनी होगी. इसमें मकान की स्थिति, कमरों की संख्या, परिवार के सदस्यों की संख्या जैसी डिटेल शामिल है. साथ ही पानी, बिजली, वॉशरूम और किचन जैसी सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी.
स्टेप 7- डिटेल रिव्यू करें
फॉर्म भरने के बाद सारी जानकारी को ध्यान से चेक करें. जरूरत हो तो बदलाव किया जा सकता है या ड्राफ्ट के रूप में सेव किया जा सकता है.
स्टेप 8- फाइल सबमिशन
सारी जानकारी सही होने पर फाइनल सबमिशन करें. इसके बाद 11 अंकों का एसई आईडी मिलेगा जिसे सुरक्षित रखना होगा.
स्टेप 9- एन्यूमरेटर विजिट
जब अधिकारी घर आएंगे तो उन्हें यह एसई आईडी दिखाना होगा. अगर जानकारी मेल खाती है तो प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी. नहीं तो दोबारा जानकारी ली जाएगी.
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टाइमलाइन और जरूरी बातें
इस प्रक्रिया में कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे. इसमें घर की बनावट, स्वामित्व, परिवार के सदस्य, सुविधाएं, किचन, इंटरनेट और वाहनों तक की जानकारी शामिल है. वहीं सेल्फ एन्यूमरेशन 1 मई से 15 मई, डोर टू डोर सर्वे 16 मई से 14 जून तक होगा. वहीं करीब 50 हजार सरकारी कर्मचारी इस काम में लगाए जाएंगे. इसके अलावा कुछ जरूरी बातों का ध्यान भी रखना होगा. जैसे एक मोबाइल नंबर से सिर्फ एक ही हाउसहोल्ड रजिस्टर्ड होगा और फाॅर्म अधूरा छोड़ने पर उसे गिना नहीं जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:29 +0530</pubDate>
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        <title>5 स्टार AC या Inverter AC! कौन बचाएगा ज्यादा बिजली का बिल? खरीदने से पहले जान लें असली सच</title>
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        <description><![CDATA[ 5 स्टार AC या Inverter AC! कौन बचाएगा ज्यादा बिजली का बिल? खरीदने से पहले जान लें असली सच ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:27 +0530</pubDate>
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        <title>Apple यूजर्स के लिए सरकार की चेतावनी! इन डिवाइसेज पर है हैकिंग का खतरा, जानिए कहीं आपका iPhone भी तो लिस्ट में नहीं?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Devices At Risk: अगर आप Apple के iPhone या iPad का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. भारत सरकार ने इन डिवाइस में एक गंभीर सुरक्षा खामी को लेकर अलर्ट जारी किया है जिससे यूजर्स का निजी डेटा खतरे में पड़ सकता है.
सरकार की एजेंसी ने जारी किया अलर्ट
यह चेतावनी CERT-In की ओर से दी गई है जो देश की आधिकारिक साइबर सुरक्षा एजेंसी है. एजेंसी के मुताबिक Apple डिवाइस में एक ऐसी कमजोरी पाई गई है जिसका फायदा उठाकर कोई भी दूर बैठा हमलावर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच सकता है.
किन डिवाइस पर है ज्यादा खतरा?
यह समस्या खासतौर पर उन iPhone और iPad में पाई गई है जो पुराने iOS और iPadOS वर्जन पर चल रहे हैं. अगर आपके डिवाइस में नया अपडेट इंस्टॉल नहीं है तो आपके डेटा के लीक होने का जोखिम बढ़ जाता है.
आखिर कहां है खामी?
रिपोर्ट के अनुसार यह समस्या Apple के नोटिफिकेशन सिस्टम से जुड़ी है. सामान्य तौर पर जो नोटिफिकेशन हट जाने चाहिए वे कुछ मामलों में डिवाइस में सेव रह जाते हैं. अगर किसी हैकर को इस डेटा तक पहुंच मिल जाए तो वह इन नोटिफिकेशन के जरिए आपकी निजी जानकारी देख सकता है. इसमें मैसेज के हिस्से, ऐप अलर्ट या अन्य जरूरी नोटिफिकेशन शामिल हो सकते हैं जो आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा बन सकते हैं.
खतरे की गंभीरता कितनी है?
CERT-In ने इस समस्या को हाई सीवेरिटी कैटेगरी में रखा है. इसका मतलब है कि यह खतरा मामूली नहीं है और व्यक्तिगत यूजर्स से लेकर कंपनियों तक सभी प्रभावित हो सकते हैं. अच्छी बात यह है कि Apple ने इस समस्या को ठीक करने के लिए नया सिक्योरिटी अपडेट जारी कर दिया है.
यूजर्स को सलाह दी गई है कि वे तुरंत अपने डिवाइस को लेटेस्ट सॉफ्टवेयर वर्जन पर अपडेट करें. इसके लिए आप अपने iPhone या iPad की सेटिंग्स में जाकर Software Update सेक्शन में जाएं और नया अपडेट इंस्टॉल कर लें.
छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी
आज के समय में स्मार्टफोन में हमारी निजी और जरूरी जानकारी मौजूद होती है. ऐसे में छोटी सी सुरक्षा खामी भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए समय-समय पर अपडेट करना और सुरक्षा अलर्ट को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NDMA Emergency Alert: क्या 11:41 बजे आपके फोन पर भी बजने लगा सायरन? घबराएं नहीं, यह है &amp;apos;अलर्ट मैसेज&amp;apos; की वजह</title>
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        <description><![CDATA[ NDMA Emergency Alert: आज 2 मई 2026 को दोपहर करीब 11 बजकर 41 मिनट पर देशभर के करोड़ों लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक एक तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट आया. बहुत से लोग घबरा गए कुछ ने सोशल मीडिया पर पूछना शुरू कर दिया कि यह क्या हो रहा है? लेकिन यह कोई असली खतरा नहीं था. यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA का एक नेशनवाइड टेस्ट था जो सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को परखने के लिए किया गया.
क्या मैसेज आया था फोन पर?
फोन की स्क्रीन पर &quot;Extremely Severe Alert&quot; लिखा आया और साथ में संदेश था कि भारत ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तत्काल सूचना मिल सकेगी. संदेश में साफ लिखा था कि यह एक परीक्षण संदेश है और जनता को कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है. संदेश भारत सरकार की तरफ से जारी था.
किन जगहों पर आया यह अलर्ट?
यह टेस्ट दिल्ली-NCR और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में होगा (समय अलग भी हो सकता है कुछ जगहों का ) . सीमावर्ती इलाकों और चुनाव वाले राज्यों को इस टेस्ट से बाहर रखा गया था.
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क्यों किया गया यह टेस्ट?
सरकार का मकसद यह जांचना था कि आपदा के वक्त लोगों तक तुरंत जरूरी जानकारी पहुंचाने का यह सिस्टम कितना कारगर है. इस टेस्ट में स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया जिसे भारत ने खुद विकसित किया है. तेलंगाना सहित कई राज्यों के अग्निशमन और आपदा प्रबंधन विभागों ने भी इस बारे में पहले से लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेस नोट जारी किए थे.
घबराएं नहीं, सबकुछ सामान्य
अगर आपके फोन पर यह अलर्ट आया तो यह पूरी तरह सामान्य बात है. यह सिर्फ सिस्टम की जांच के लिए था कोई असली इमरजेंसी नहीं थी. NDMA ने लोगों से अपील की थी कि वे शांत रहें और परिवार व दोस्तों को पहले से इस बारे में बताएं ताकि कोई घबराए नहीं.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:26 +0530</pubDate>
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        <title>अब कैमरा और बैटरी नहीं, AI फीचर्स देखकर फोन खरीद रहे हैं लोग, नई रिपोर्ट में हुआ खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-कैमरा-और-बैटरी-नहीं-ai-फीचर्स-देखकर-फोन-खरीद-रहे-हैं-लोग-नई-रिपोर्ट-में-हुआ-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ AI Features In Phone: भारत में अब लोग नया फोन खरीदते समय कैमरा और बैटरी की तुलना में AI Features पर ज्यादा ध्यान देते हैं. एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि लगभग 89 प्रतिशत लोग एआई फीचर्स देखकर फोन खरीद रहे हैं. इसका मतलब है कि बैटरी और बाकी दूसरी चीजों से ज्यादा अब एआई फीचर्स ग्राहकों को ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि अब लोग स्पेसिफिकेशन बेस्ड अपग्रेड की जगह एक्सपीरियंस-बेस्ड डिसीजन ले रहे हैं. यही वजह है कि मोबाइल कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स में एक से बढ़कर एक एआई फीचर देने लगी हैं.&amp;nbsp;
AI Features बने डिसाइडिंग फैक्टर
Flipkart और Counterpoint Research की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन की च्वॉइस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अब एक कोर फैक्टर बन गई है. करीब 89 प्रतिशत लोग एआई फीचर्स देखकर फोन खरीदने के डिसीजन ले रहे हैं. एआई धीरे-धीरे हमारे जीवन में अहम स्थान बनाते हुए जा रही है और अब वॉइस असिस्टेंस से लेकर कंटेट क्रिएशन और पर्सनलाइजेशन में इसका यूज होने लगा है. खास बात यह भी है कि 15,000-20,000 की कीमत वाले फोन के सेगमेंट में भी लोग एआई फीचर्स पर पूरा ध्यान दे रहे हैं. प्रीमियम फीचर्स की जगह अब लोगों को एआई फीचर्स भाने लगे हैं.&amp;nbsp;
AI का कैसे हो रहा है यूज?
फोन में एआई फीचर्स का यूज भी अलग-अलग तरीके से हो रहा है. Gen Z यूजर्स जहां एआई को कंटेट क्रिएशन और एंटरटेनमेंट के लिए यूज कर रहे हैं, वहीं मिलेनियल प्रोडक्टिविटी और प्लानिंग में इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. महिलाओं की बात करें तो रोजमर्रा के कामों में मदद और लाइफस्टाइल जरूरतों के लिए एआई फीचर्स यूज कर रही हैं.
लुक और एस्थेटिक के लिए भी पैसा देने को तैयार लोग
रिपोर्ट में यह भी निकलकर सामने आया है कि 64 प्रतिशत यूजर्स को कलरफुल डिवाइसेस पसंद हैं. लोगों को अगर उनकी पसंद के कलर और मैटेरियल वाले फोन मिल जाए तो वो इसके लिए 5 प्रतिशत तक एक्स्ट्रा पैसा देने को भी तैयार है. खासकर Gen Z, महिलाओं और Tier-2 शहरों के ग्राहकों में यह ट्रेंड देखा गया है.&amp;nbsp;
AI से फोन हुए हैं बेहतर
एआई आने के बाद फोन भी बेहतर हो गए हैं और अब इनमें कई ऐसे टूल्स मिलते हैं, जिसकी मदद से फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ को बेहतर किया जा सकता है. फोटोग्राफी के लिए कैमरा कोच जैसे फीचर आ गए हैं, जो एकदम प्रोफेशनल फोटोग्राफर जैसी फोटो लेने में मदद करते हैं.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>इंडियन यूजर्स ने अमेरिका को भी छोड़ दिया पीछे, ChatGPT से बना रहे हैं सबसे ज्यादा इमेजेज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इंडियन-यूजर्स-ने-अमेरिका-को-भी-छोड़-दिया-पीछे-chatgpt-से-बना-रहे-हैं-सबसे-ज्यादा-इमेजेज</link>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT Images 2.0 Use In india: OpenAI ने पिछले महीने अपने एआई इमेज जनरेशन टूल का अपग्रेडेड वर्जन ChatGPT Images 2.0 लॉन्च किया था. भारत में इसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं और जी भरकर इमेजेज बनाने में जुटे हुए हैं. कंपनी ने बताया है कि इस टूल को सबसे ज्यादा भारत में यूज किया जा रहा है. ChatGPT को यूज करने में पहले अमेरिका सबसे आगे था, लेकिन नया टूल आने के बाद इमेज जनरेशन के मामले में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. अब ChatGPT से इमेज बनाने में भारत सबसे आगे है.&amp;nbsp;
किन कामों के लिए यूज हो रहा है ChatGPT Images 2.0?
ChatGPT Images 2.0 से जनरेट की गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही हैं. यूजर्स अपने क्रिएशन के साथ-साथ प्रॉम्प्ट भी शेयर कर रहे हैं. अगर इसके पॉपुलर यूज को देखा जाए तो कई लोग इसे हाथ की रेखा भी पढवा रहे हैं. इसके अलावा यह किसी फोटो को एनलाइज कर उसकी डिटेल को लेबल दे सकता है और किसी भी फोटो को इंफोग्राफिक स्टाइल में कन्वर्ट कर सकता है. इसकी लॉन्चिंग के समय कंपनी ने कहा था कि यह टूल एकदम सटीक और तुरंत यूज होने वाले विजुअल बना सकेगा.
ChatGPT Images 2.0 में क्या खास है?
यह एआई टूल डिटेल्ड इंस्ट्रक्शन फॉलो करने के अलावा ऑब्जेक्ट्स को सटीकता से रिलेट और इमेज में टेक्स्ट को रेंडर कर सकता है. यानी अब एआई इमेज में अजीब स्पेलिंग वाले टेक्स्ट दिखने से छुटकारा मिल सकता है. यह इंग्लिश के अलावा जापानी, कोरियाई, हिंदी, चाइनीज और बंगाली में लिखे टेक्स्ट को रेंडर कर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह मॉडल ऐसी तस्वीरें बना सकता है, जो एआई जनरेटेड नहीं लगेगी. यह कंपोजिशन और विजुअल टेस्ट को भी सेंस कर सकता है.&amp;nbsp;
ChatGPT Images 2.0 में सोचने की भी क्षमता
ChatGPT Images 2.0 कंपनी का पहला ऐसा इमेज मॉडल है, जो थिंकिंग कैपेबिलिटीज के साथ लॉन्च हुआ है. जब यूजर्स ChatGPT में थिंकिंग या प्रो मोड सेलेक्ट करेंगे तो Image 2.0 रियल-टाइम इंफोर्मेशन के लिए वेब को सर्च कर सकता है. साथ ही यह एक प्रॉम्प्ट से कई इमेज क्रिएट करने और खुद का दिमाग लगाकर आउटपुट को डबल-चेक करेगा. इससे कंटेट जनरेशन में होने वाली गड़बड़ से छुटकारा मिल सकता है. नए मॉडल के साथ मूवी पोस्टर, मिडसेंचुरी पेस्टल कॉमिक्स समेत अलग-अलग स्टाइल में इमेज क्रिएट की जा सकती है.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इंडियन, यूजर्स, ने, अमेरिका, को, भी, छोड़, दिया, पीछे, ChatGPT, से, बना, रहे, हैं, सबसे, ज्यादा, इमेजेज</media:keywords>
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        <title>आपकी जासूसी तो नहीं कर रहा Smart TV! इस फीचर के कारण बना हुआ है खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ Is Smart TV Spying On You: पिछले कुछ सालों से स्मार्ट टीवी का चलन बढ़ा है और अब धीरे-धीरे हर घर तक पहुंच रहे हैं. इंटरनेट एक्सेस, स्ट्रीमिंग ऐप्स, कैमरा और माइक जैसे फीचर्स के चलते एंटरटेनमेंट के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी के लिए भी ये काम आ रहे हैं. इन दिनों एक फीचर के चलते पूरी दुनिया में स्मार्ट टीवी पर चर्चा चल रही है और यह पूछा जा रहा है कि क्या इसकी मदद से जासूसी की जा सकती है. आइए जानते हैं कि स्मार्ट टीवी के किस फीचर्स को लेकर खतरा जताया जा रहा है.&amp;nbsp;
स्मार्ट टीवी के इस फीचर को लेकर हुई चिंता
इंटरनेट कनेक्टेड टीवी में मिलने वाले ऑटोमैटिक कंटेट रिकग्नेशन (ACR) फीचर को लेकर चिंता जताई जा रही है. यह फीचर विजुअल और ऑडियो को एनालाइज कर पता लगा सकता है कि आप क्या देखते हैं. यह टीवी के बैकग्राउंड में चुपचाप काम करते रहता है. आप अपने टीवी पर जब भी कुछ देखते हैं, यह उसके पिक्सल डेटा और साउंड को कैप्चर कर लेता है. फिर इसकी मदद से डेटाबेस से उससे मिलते-जुलते कंटेट को निकालता है. इस तरीके से यह एक ऐसा डिटेल्ड प्रोफाइल तैयार कर लेता है, जिससे आपके व्यूइंग बिहेवियर का आसानी से पता लगाया जा सकता है.
क्या टीवी से भी हो सकती है जासूसी?
व्यूइंग डेटा के अलावा स्मार्ट टीवी से आपकी बातचीत को भी सुना जा सकता है. कुछ साल पहले अमेरिकी एजेंसी FBI ने एक वार्निंग में कहा था कि टीवी कंपनियां आपकी बातचीत सुन सकती है और कैमरे के जरिए आपको देख भी सकती है.&amp;nbsp;
अब क्यों हो रही है इस फीचर की चर्चा?
स्मार्ट टीवीज में यह फीचर लंबे समय से मौजूद है, लेकिन अब इससे जुड़ी चिंताजनक जानकारी सामने आने लगी है. इसके चलते अमेरिका में सरकारी एजेंसियों ने टीवी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है. इन कंपनियों पर यूजर्स की सहमति के बिना व्यूइंग डेटा कलेक्ट करने का आरोप लगा है. इसी तरह यूरोप में भी नियमों के तहत कंपनियों को ऐसा डेटा ट्रैक करने से पहले यूजर्स की सहमति लेना जरूरी है.
क्या हैं बचाव के तरीके?

अपने टीवी के सारे फीचर्स की जानकारी लें और उन्हें कंट्रोल करना सीखें.
जरूरत न होने पर माइक और कैमरे वाले स्मार्ट टीवी खरीदने से बचें.
यूज न होने पर टीवी के कैमरा को ब्लैक टेप से कवर कर दें.&amp;nbsp;
टीवी निर्माता कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसीज को ध्यान से पढ़ें. यहां से आपको पता चल जाएगा कि आपका कौन-सा डेटा कलेक्ट और स्टोर किया जा रहा है.

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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फेसबुक&amp;इंस्टाग्राम चलाने में अब नहीं रहा मजा! एक ही झटके में कम हो गए मेटा के करोड़ों यूजर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Meta Active Users Drop: लोगों को अब फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने में मजा नहीं आ रहा. ताजा आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं. इंस्टाग्राम और फेसबुक समेत मेटा के दूसरे प्लेटफॉर्म्स के 2 करोड़ डेली एक्टिव यूजर्स कम हो गए हैं. दरअसल, पिछले काफी समय से लोग इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उनके फीड पर आने वाला कंटेट उनकी पसंद का नहीं है. हालांकि, मेटा ने यूजर्स की संख्या में कमी के पीछे इंटरनेट पर पाबंदी समेत एक्सटर्नल कारण बताए हैं. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
एक झटके में करोड़ों यूजर्स हुए कम
बुधवार को अपनी अर्निंग कॉल में कंपनी ने बताया कि उसकी ऐप्स के 20 मिलियन डेली एक्टिव यूजर्स कम हुए हैं. मेटा ऐप्स की बात करें तो इनमें फेसबुक और इंस्टाग्राम के अलावा व्हाट्सऐप और मैसेंजर भी शामिल हैं. मेटा का कहना है कि इस कमी के पीछे पूरी तरह से कंपनी जिम्मेदार नहीं है. कंपनी ने इसके पीछे ईरान में युद्ध के कारण कनेक्टिविटी इश्यू और रूस में व्हाट्सऐप पर लगे बैन समेत एक्सटर्नल कारणों को जिम्मेदार ठहराया है.&amp;nbsp;
फीड क्वालिटी पर उठ रहे हैं सवाल
भले ही मेटा यह मानने को तैयार नहीं है, लेकिन फेसबुक और इंस्टाग्राम आदि की फीड क्वालिटी पर खूब सवाल उठ रहे हैं. यूजर्स फीडबैक से पता चलता है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के फीड अब विज्ञापनों और सजेस्टेड पोस्ट से भर गए हैं. कई यूजर्स का कहना है कि उन्हें अपने दोस्तों और फॉलो किए गए अकाउंट्स की पोस्ट भी नजर नहीं आती. उनकी फीड को एल्गोरिदम-ड्रिवन रिकमंडेशन घेर लेती है. कई यूजर्स को बार-बार एक ही कंटेट, खराब क्वालिटी वाली पोस्ट और पूरी तरह अनरिलेटिड कंटेट दिखाया जा रहा है, जिससे स्क्रॉलिंग में मजा नहीं रहा है.
अब एल्गोरिदम में बदलाव करेगी मेटा
बढ़ती क्रिटिसिज्म के बीच अब मेटा ने अपने रिकमंडेशन सिस्टम को अपडेट करने का ऐलान किया है. खासकर इंस्टाग्राम के फीड के लिए बड़े बदलाव किए जाएंगे. कंपनी ने कहा कि नया सिस्टम ऑरिजनल कंटेट को प्रमोट करेगा और रिपोस्टेड और कम एडिट हुए कंटेट की विजिबिलिटी कम की जाएगी. इसका असर यह होगा कि ऑरिजनल पोस्ट शेयर न करने वाले अकाउंट्स की रीच कम हो जाएगी. इससे प्लेटफॉर्म पर कंटेट डायवर्सिटी बढ़ेगी और क्रिएटर को भी यूनीक कंटेट तैयार करने का प्रोत्साहन मिलेगा.
मेटा ने हाल ही में की है छंटनी
मेटा ने अपने बढ़ते खर्चों को मैनेज करने के लिए हाल ही में वर्कफोर्स को कम किया है. कंपनी ने 8,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है और 6,000 खाली पोस्ट को भी न भरने का फैसला किया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>ऐप्पल की हुई बल्ले&amp;बल्ले! आईफोन की बिक्री ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, यह सीरीज बनी सबसे पॉपुलर</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Record Sale: आईफोन की बिक्री के मामले में ऐप्पल ने नया रिकॉर्ड बनाया है. इस साल जनवरी से मार्च के बीच में कंपनी ने 57 बिलियन डॉलर के आईफोन बेचे हैं. यह मार्च में खत्म होने वाली किसी भी तिमाही में होने वाली सबसे ज्यादा बिक्री है. पिछले साल इस दौरान ऐप्पल ने लगभग 47 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू किया था, जो इस बार लगभग 22 प्रतिशत बढ़ गया है. यह तब है, जब एआई के मामले में कंपनी अपने कंपीटिटर से पीछे चल रही है. प्रोडक्ट्स के अलावा कंपनी की सर्विस डिविजन ने भी खूब कमाई की है.&amp;nbsp;
आईपैड और सर्विसेस की बिक्री भी दमदार
आईफोन की तरह आईपैड की बिक्री भी दमदार रही है. मार्च में खत्म हुई तिमाही में कंपनी ने 6.91 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू जनरेट किया है, जो पिछले साल की इस अवधि की तुलना में 8 प्रतिशत ज्यादा है. अगर सर्विसेस की बात करें तो यह कंपनी का दूसरा सबसे बड़ा बिजनेस सेगमेंट है और इसने भी रिकॉर्ड रेवेन्यू जनरेट किया है. इस तिमाही में सर्विस से ऐप्पल को लगभग 31 बिलियन डॉलर की कमाई हुआ है, जो सालाना आधार पर 16.3 प्रतिशत अधिक है. ऐप्पल की सर्विस यूनिट में ऐप स्टोर, ऐप्पल म्यूजिक, ऐप्पल टीवी प्लस, ऐप्पल बुक, ऐप्पल पॉडकास्ट, ऐप्पल पे, ऐप्पल कार्ड और ऐप्पल कैश आदि शामिल है.
iPhone 17 सीरीज ने दिए ग्रोथ को पंख
ऐप्पल की आईफोन 17 सीरीज सुपरहिट हुई है और लॉन्चिंग के बाद से ही इसकी जबरदस्त बिक्री जारी है. रिकॉर्ड रेवेन्यू जनरेट करने में इस सीरीज का अहम योगदान है. ऐप्पल के CFO Kevan Parekh ने बताया कि कंपनी की हिस्ट्री में आईफोन 17 सीरीज सबसे पॉपुलर है. उन्होंने कहा कि आईफोन 17 प्रो मॉडल्स को नए डिजाइन में लॉन्च करना काम कर गया है. प्रो मॉडल्स के अलावा इस सीरीज का बेस मॉडल आईफोन 17 भी कमाल कर रहा है.
बाकी यूनिट्स की क्या हाल?
वीयरेबल्स, होम और एक्सेसरीज यूनिट की बात करें तो भी कंपनी के लिए हर जगह फायदा ही फायदा नजर आ रहा है. इस यूनिट ने उम्मीद से बढ़कर परफॉर्म करते हुए 7.91 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया है. पिछले साल इसकी कुल बिक्री 7.52 बिलियन डॉलर की रही है. कुल मिलाकर मार्च में खत्म हुई तिमाही में ऐप्पल ने 111.18 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू जनरेट किया है, जो पिछले साल की तुलना में 16.6 प्रतिशत अधिक है. वहीं नेट इनकम भी 19 प्रतिशत बढ़कर 29.58 बिलियन डॉलर पहुंच गई है.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tech Tips: पुराने AC को रिपेयर करना या रिप्लेस करना, किसमें है ज्यादा फायदा? यहां जान लें सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ AC Repair or Replace: पुराने AC को रिपेयर कराने या रिप्लेस करने का सवाल बहुत लोगों को परेशान करता है. कई बार इसे रिपेयर कराना सस्ता लगता है तो बार-बार खराब होने के झंझट से बचने के लिए नया AC खरीदना भी एक स्मार्ट च्वॉइस हो सकती है. लेकिन नए AC की कीमत कई लोगों को पुराने की रिपेयर करवाने की तरफ ही धकेल देती है. ऐसे में कई लोगों के लिए यह फैसला करना बहुत मुश्किल हो सकता है. अगर आप भी इस कंफ्यूजन से जूझ रहे हैं तो हम कुछ ऐसे प्वाइंट्स बताने जा रहे हैं, जिससे आपके लिए यह रिपेयर या रिप्लेस में से एक ऑप्शन चुनना आसान हो जाएगा.
कितना पुराना है मॉडल?
AC के अधिकतर मॉडल 10-15 साल तक चलते हैं. अगर आपका एसी इतना पुराना हो गया है और बार-बार रिपेयर की डिमांड कर रहा है तो इसे रिप्लेस करना फायदे का सौदा हो सकता है. 10 साल से पुराने एसी की रिपेयरिंग आपको सस्ती पड़ सकती है, लेकिन बार-बार इश्यू आने के कारण इसे यूज करना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में रिपेयरिंग पर हजारों रुपये खर्च करने से बेहतर है कि आप नया एसी खरीद लें. लॉन्ग-टर्म में यह आपको फायदा पहुंचा सकता है.
बिजली के बिल पर भी डालें नजर
जैसे-जैसे एसी पुराना होता जाता है, इसकी परफॉर्मेंस कम होने लगती है. इसके पार्ट्स पर भी पुराने होने का असर दिखने लगता है और बिजली की खपत बढ़ जाती है. अगर आपका पुराना एसी ज्यादा बिजली की खपत कर रहा है तो भी इसे बदलना बेहतर है. अब पहले की तुलना में अधिक एनर्जी एफिशिएंट मॉडल्स अवेलेबल है. तकनीक बेहतर होने के कारण ये कम बिजली की खपत करते हैं. इस तरह आप नया एसी खरीदकर भी बिजली बिल की बचत कर सकते हैं.&amp;nbsp;
रेंट पर एसी लेना भी है ऑप्शन
अगर आप पुराने एसी को रिपेयर भी नहीं कराना चाहते और रिप्लेस करने के मूड में नहीं हैं तो एसी को रेंट पर ले सकते हैं. आपको मार्केट में कई ऐसे वेंडर मिल जाएंगे, जहां से एसी रेंट पर लिया जा सकता है. इससे आपको एक साथ नए एसी की कीमत भी नहीं देनी पड़ेगी और एक तरह से नया एसी भी मिल जाएगा. आप मंथली किराया देकर गर्मी से बचाव कर सकते हैं. अगर आप उन लोगों में हैं, जिन्हें बार-बार घर बदलने पड़ते हैं तो यह ऑप्शन और भी सुविधाजनक है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>धांसू कैमरा वाले Oppo Find X9 Ultra समेत मई में लॉन्च होंगे ये फोन, यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धांसू-कैमरा-वाले-oppo-find-x9-ultra-समेत-मई-में-लॉन्च-होंगे-ये-फोन-यहां-देखें-पूरी-लिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Upcoming Smartphone in May 2026: स्मार्टफोन मार्केट के लिए अप्रैल का महीना काफी बिजी रहा था. वनप्लस, वीवो और रियलमी समेत कई कंपनियों ने इस महीने अपने मॉडल मार्केट में उतारे थे. इसी तरह मई में भी कई नए फोन बाजार में एंट्री करने के लिए तैयार हैं. इनमें कुछ फ्लैगशिप मॉडल होंगे तो कुछ मिड-रेंज मॉडल भी दस्तक देंगे. अगर आप नया फोन खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कि May 2026 में कौन-कौन-से नए मॉडल लॉन्च होने वाले हैं.
Oppo Find X9 Ultra
इस फोन की पिछले काफी समय से चर्चा हो रही है और आखिरकार मई में यह फोन लॉन्च हो जाएगा. अभी इसकी लॉन्चिंग डेट का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन यह कन्फर्म है कि इसे मई में लॉन्च कर दिया जाएगा. इसकी खासियत इसके रियर में दिया गया क्वाड-कैमरा सेटअप है, जिसमें 200MP का प्राइमरी सेंसर लगा हुआ है. यह फोन 7,050mAh बैटरी पैक के साथ लॉन्च होगा और इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया जाएगा.&amp;nbsp;
Vivo X300 Ultra
ओप्पो की तरह मई में वीवो भी अपना कैमरा फ्लैगशिप मॉडल Vivo X300 Ultra लॉन्च करेगी. इसे 6 मई को लॉन्च किया जाएगा. इसके कैमरा सेटअप की बात करें तो रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 200MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस और 50MP का अल्ट्रावाइड सेंसर मिलेगा. यह फोन Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर से लैस होगा और इसमें 6,600mAh की बैटरी दी जाएगी.
Vivo X300 FE
X300 Ultra के साथ Vivo X300 FE को भी लॉन्च किया जाएगा, जो पिछले साल के X200 FE को रिप्लेस करेगा. इसमें 6.31 इंच की LTPO AMOLED स्क्रीन मिलने की उम्मीद है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आएगी. यह फोन भी Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर के साथ लॉन्च होगा और इसके रियर में 50MP+50MP+8MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप होगा. 6,500mAh की बैटरी वाले इस फोन को ड्यूरैबिलिटी के लिए IP68, IP69 रेटिंग मिली है.
OnePlus Nord CE 6 और OnePlus Nord CE 6 Lite
वनप्लस भी मई के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है. कंपनी 7 मई को अपने OnePlus Nord CE 6 और &amp;nbsp;OnePlus Nord CE 6 Lite मॉडल को लॉन्च करेगी. CE 6 में Snapdragon 7s Gen 4 और Lite में MediaTek Dimensity 7400 Apex प्रोसेरर दिया जाएगा. दोनों फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा होगा और ये बड़े बैटरी पैक के साथ लॉन्च होंगे. इस सीरीज की कीमत लगभग 18,000 रुपये से शुरू होने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>नया फोन खरीदना है तो न करें देरी, मेमोरी चिप्स की कमी के बाद अब इन कारणों से आसमान छूने लगेंगी कीमतें</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Prices: पिछले कुछ महीनों से स्मार्टफोन महंगे हो रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में बिकने वाले 80 स्मार्टफोन मॉडल्स के दाम पिछले कुछ महीनों में बढ़ चुके हैं और जल्द ही ग्राहकों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. अभी तक मेमोरी चिप्स की शॉर्टेज&amp;nbsp;के कारण मोबाइल महंगे हो रहे थे, लेकिन अब दूसरे कंपोनेंट्स की कीमतें भी ऊपर जाने लगी हैं, जिससे कंपनियों को दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है. माना जा रहा है कि साल की दूसरी छमाही में भी मोबाइल की कीमतों का बढ़ना जारी रह सकता है.&amp;nbsp;
अब कंपनियों के सामने आई एक और चुनौती
मेमोरी चिप्स की कमी से अभी कंपनियां जूझ रही हैं कि उनके सामने एक और चुनौती आ गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, PCB, कॉपर थिन फिल्म्स, ग्लास समेत डिस्प्ले कंपोनेंट में यूज होने वाले और फोल्डेबल फिल्म मैटेरियल के दाम बढ़ रहे हैं. जिन कंपनियों के पास इन कंपोनेंट की पहले से कमी है, उन पर इसका बड़ा असर पड़ेगा. उन्हें अब फोन बनाने के लिए इन कंपोनेंट के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना होगा. इसलिए माना जा रहा है कि इस साल की दूसरी छमाही के साथ-साथ अगले साल की पहली छमाही में फोन के दाम एक बार फिर ऊपर की तरफ दौड़ेंगे.
मेमोरी चिप्स की कमी ने पहले ही बिगाड़ दिया है गेम
पिछले कुछ महीनों से एआई बूम के कारण कंज्यूमर मार्केट में मेमोरी चिप्स की कमी हो गई है. ये चिप बनाने वाली कंपनियां अब कंज्यूमर मार्केट की जगह एआई डेटा सेंटर की डिमांड पूरी कर रही हैं. इस कारण लैपटॉप, स्मार्टफोन और स्मार्ट टीवी जैसे डिवाइसेस के लिए चिप की कमी हो गई और इनकी कीमत बढ़ गई है. इसके चलते सैमसंग समेत कई कंपनियों ने अपने मोबाइल महंगे कर दिए हैं. अब दूसरे कंपोनेंट की बढ़ती कीमत भी जलती आग में घी डालने का काम कर रही है.&amp;nbsp;
लॉन्च होने के बाद भी महंगे हो रहे हैं फोन
पिछले कुछ समय से एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. नए फोन अब बढ़ी हुई कीमतों पर लॉन्च हो रहे हैं और महीनों पहले लॉन्च हो चुके फोन भी महंगे होते जा रहे हैं. वनप्लस, सैमसंग और वीवो समेत कई कंपनियां अपने महीनों पहले लॉन्च हुए मॉडल्स की कीमतों में हजारों रुपये का इजाफा कर चुकी हैं. इसका असर यह हुआ है कि ग्राहकों को अब इन्हें खरीदने के लिए लॉन्च प्राइस से अधिक पैसा चुकाना पड़ रहा है.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>नया, फोन, खरीदना, है, तो, न, करें, देरी, मेमोरी, चिप्स, की, कमी, के, बाद, अब, इन, कारणों, से, आसमान, छूने, लगेंगी, कीमतें</media:keywords>
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        <title>eSIM से भर गया मन, फिजिकल सिम छोड़ने को तैयार नहीं हैं लोग, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े</title>
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        <description><![CDATA[ eSIM Use: पिछले कुछ समय से eSIM का क्रेज कम होता नजर आ रहा है. दुनिया के कई हिस्सों में लोग फिजिकल सिम को बदलने के लिए तैयार नहीं है. eSIM के कई फायदे होने के बावजूद इसके लिए लोगों को मनाना काफी मुश्किल होता जा रहा है. साउथ कोरिया से सामने आए ताजा डेटा ने इस सच्चाई की तरह सबका ध्यान खींचा है. यहां पर eSIM लेने वाले लोग बहुत कम हैं, अमेरिका में जहां स्थिति थोड़ी बेहतर है, वहां भी डिवाइस की मजबूरी के चलते लोग इस सिम को खरीद रहे हैं. आइए जानते हैं कि eSIM को लेकर ताजा डेटा क्या कहानी बता रहे हैं.
साउथ कोरिया के डेटा ने सबको चौंकाया
एक रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ कोरिया में केवल 5 प्रतिशत मोबाइल यूजर्स ही eSIMs यूज कर रहे हैं. यहां लगभग 5.7 करोड़ फोन यूजर्स हैं, जिनमें से लगभग 30 लाख ही ऐसे हैं, जो eSIM यूज कर रहे हैं. यह संख्या भी तब बढ़ी है, जब एक नेटवर्क स्कैंडल के कारण कई यूजर्स ने फिजिकल सिम कार्ड को छोड़कर eSIM यूज करना शुरू किया है. पिछले साल यह संख्या केवल 3 प्रतिशत थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि पब्लिक अवेयरनेस की कमी के कारण यह स्थिति बनी हुई है. सरकार भी इसे लेकर चिंतित है और अब कुछ कदम उठाने की तैयारी चल रही है.
अमेरिका में कहानी अलग, लेकिन वजह भी दूसरी
eSIM के यूज को लेकर अमेरिका में कहानी अलग है और यहां करीब 38 प्रतिशत मोबाइल यूजर इस सिम को यूज कर रहे हैं. हालांकि, इसकी वजह भी दूसरी है. दरअसल, अमेरिका में बिकने वाले कई स्मार्टफोन मॉडल्स केवल eSIM सपोर्ट के साथ आते हैं, जिस कारण ग्राहकों के पास फिजिकल सिम कार्ड खरीदने का ऑप्शन नहीं बचता और उन्हें eSIM ही यूज करनी पड़ती है. अगर यूके की बात की जाए तो यहां करीब 40 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी eSIM के बारे में नहीं सुना, वहीं 41 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि उनका फोन eSIM को सपोर्ट करता है या नहीं.
eSIM से थीं बड़ी उम्मीदें
2024 में GSMA की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2028 तक नए कनेक्शन में से लगभग 50 प्रतिशत eSIM के जरिए दिए जाएंगे और 2030 तक यह संख्या 88 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. लेकिन ताजा आंकड़ों को देखकर लग रहा है कि 2028 तक ये अनुमान सच्चाई में बदलने काफी मुश्किल हैं.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>एआई की लहर का भारत को क्यों नहीं मिल रहा पूरा फायदा? एक्सपर्ट ने बता दी असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ AI Boom And India: इन दिनों पूरी दुनिया में एआई की चर्चा है. कई कंपनियां इस लहर में खूब पैसा जुटा रही हैं और उनकी वैल्यूएशन रिकॉर्ड तोड़ रही है. लेकिन एआई की इस लहर का असर भारत पर नहीं देखा जा रहा है और निवेशक यहां पैसा लगाने से बच रहे हैं. रॉकफेलर इंटरनेशनल के चेयरमैन और ब्रेकआउट कैपिटल के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर रूचिर शर्मा ने इसकी वजह बताई है. उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया का फोकस भारत पर है, लेकिन विदेशी निवेशक भारत पर पैसा लगाने को तैयार नहीं हैं. आइए जानते हैं कि उन्होंने इसे लेकर क्या कारण बताए हैं.
भारत को क्यों नहीं हो रहा फायदा?
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए शर्मा ने एआई बूम की तुलना डॉट कॉम बबल से करते हुए कहा कि आर्बिट्रेज जैसे बिजनेस मॉडल के कारण उस समय भारतीय कंपनियों को खूब फायदा हुआ था, लेकिन इस बार भारत के पास ऐसा कोई बड़ा अवसर नहीं है. शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपने 30 साल के करियर में कभी ऐसा नहीं देखा, जब भारत को लेकर निवेशकों में रूचि नहीं है और इसे इग्नोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत का IT सेक्टर सिर्फ आर्बिट्रेज बिजनेस में था और यह कुछ इनोवेटिव नहीं कर रहा था. इसी का असर है कि अब हमारे पास ऐसा कुछ नहीं है और यही कारण है कि विदेशी निवेशक भारत नहीं आ रहे और भारत को एआई के सेक्टर में बड़े प्लेयर के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. जब एआई का बबल फट जाएगा, तब उम्मीद है कि भारत को फिर से कुछ अटेंशन मिलने लगेगी.
कुछ ही देशों और कंपनियों के पास इकट्ठा हुआ पैसा
शर्मा ने कहा कि अब विदेशी पूंजी कुछ ही देशों के पास इकट्ठी हो रही है, जो एआई में सबसे आगे हैं. विकसित अर्थव्यवस्था की बात करें तो अमेरिका और जापान के पास यह पूंजी जा रही है, जबकि इमर्जिंग इकॉनमी में साउथ कोरिया और ताइवान इस मामले में आगे है. उन्होंने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एक दिन ऐसा देखूंगा, जब ताइवान की एक कंपनी TSMC का स्थान MSCI इंडेक्स में पूरे भारत से ऊपर होगा. उन्होंने कहा कि एआई को लेकर मचा हुआ हल्ला कुछ समय बाद कम हो जाएगा. यह लगातार जारी नहीं रह सकता है. ऐसा नहीं होता कि पूरी ग्लोबल इकॉनमी केवल एक ही फैक्टर पर चलती रहे.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>आईफोन के कैमरा को कोई नहीं दे पाएगा टक्कर, सिरी मोड से निकल जाएगा सबसे आगे</title>
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        <description><![CDATA[ Siri Mode In iPhone Camera App: AI के मामले में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के मुकाबले ऐप्पल फिलहाल कहीं नहीं है, लेकिन अब कंपनी ने अपने प्लान को लेकर काम करना शुरू कर दिया है. जल्द ही ऐप्पल ऐसे एआई फीचर्स लाने वाली है, जो आईफोन यूज करने के एक्सपीरियंस को बदल देंगे. इनमें से एक सर्च को लेकर होगा. बताया जा रहा है कि ऐप्पल कैमरा ऐप में सिरी मोड देने वाली है, जिससे सर्चिंग बेहतर होने के साथ-साथ फास्ट भी होगी. iOS 27 अपडेट के साथ इस फीचर को रोल आउट किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि यह फीचर कैसे काम करेगा.
कैमरा ऐप में सिरी मोड कैसे काम करेगा?
अभी आईफोन कैमरा ओपन करने पर फोटो और वीडियो जैसे ऑप्शन नजर आते हैं. नई अपडेट में इनमें एक नया सिरी मोड भी एड हो जाएगा. इस पर टैप कर यूजर एआई पावर्ड इंटरफेस एक्टिव कर सकेंगे. इसके बाद यूजर किसी भी चीज पर कैमरा प्वाइंट कर उससे जुड़े सवाल पूछ सकेंगे और सिरी उसके जवाब देगा. यह फीचर कैमरा के सामने आने वाले पोस्टर, मेन्यू और प्रोडक्ट्स को पहचान सकेगा. जैसे ही आप आईफोन का कैमरा किसी रेस्टोरेंट के मेनू पर प्वाइंट करेंगे, यह तुरंत उससे जुड़े रिव्यूज और दूसरी डिटेल्स आपकी स्क्रीन पर दिखा देगा.&amp;nbsp;
विजुअल इंटेलीजेंस से आसान होगा काम
नई अपडेट में विजुअल इंटेलीजेंस से कई और काम भी आसान हो जाएंगे. अपडेट के बाद यूजर प्रिंट किए गए फोन नंबर और एड्रेस &amp;nbsp;को स्कैन कर कॉन्टैक्ट्स में सेव कर पाएंगे. इसी तरह खाने को स्कैन करने के बाद यह उससे जुड़ी सारी जानकारी भी दे पाएगा. रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सिरी को चैटबॉट स्टाइल दिए जाने की उम्मीद है और सिस्टम-लेवल कंट्रोल के साथ स्टैंडअलोन ऐप के तौर पर भी पेश किया जा सकता है.&amp;nbsp;
फोटो एडिटिंग के लिए भी आएंगे नए टूल
कैमरा ऐप में नए फीचर जोड़ने के साथ-साथ ऐप्पल नए फोटो एडिटिंग टूल्स भी लाने वाली है. एआई पावर्ड इन टूल्स की मदद से यूजर किसी फोटो में ऑब्जेक्ट्स जोड़ सकेंगे. इसके अलावा फोटो की क्वालिटी और कलर को भी एडजस्ट करने का ऑप्शन आएगा. नए टूल में एक रिफ्रेम का भी ऑप्शन होगा, जिसकी मदद से फोटो को नया परस्पेक्टिव दिया जा सकेगा. इन सभी फीचर्स को iOS 27 अपडेट के साथ रोल आउट किए जाने की उम्मीद है. जून में इस अपडेट की झलक दिखाई जाएगी और सितंबर में इसे रोल आउट किया जाएगा.
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        <title>महंगे रिचार्ज से तंग आ गए? सिर्फ 200 रुपये से कम में Jio, Airtel और BSNL के दमदार प्लान, मिलते हैं इतने सारे बेनिफिट्स</title>
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        <description><![CDATA[ महंगे रिचार्ज से तंग आ गए? सिर्फ 200 रुपये से कम में Jio, Airtel और BSNL के दमदार प्लान, मिलते हैं इतने सारे बेनिफिट्स ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone की बैटरी जीरो होते ही हमेशा के लिए बंद हो जाएगा डिवाइस? यूजर्स के दावों ने मचाया हड़कंप, जानिए क्या है सच्चाई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iphone-की-बैटरी-जीरो-होते-ही-हमेशा-के-लिए-बंद-हो-जाएगा-डिवाइस-यूजर्स-के-दावों-ने-मचाया-हड़कंप-जानिए-क्या-है-सच्चाई</link>
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        <description><![CDATA[ iPhone Battery: हाल ही में कई iPhone 17 और iPhone Air यूजर्स ने एक अजीब समस्या की शिकायत की है. उनका कहना है कि जब फोन की बैटरी पूरी तरह खत्म होकर 0% पर पहुंच जाती है तो चार्जिंग में लगाने के बाद भी डिवाइस तुरंत चालू नहीं होता. इस वजह से यूजर्स के बीच कन्फ्यूजन और चिंता दोनों बढ़ गए हैं.
चार्जिंग के बाद भी क्यों नहीं दिखता कोई संकेत?
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैटरी पूरी तरह खत्म होने के बाद जब फोन को चार्जिंग पर लगाया गया तो स्क्रीन पूरी तरह काली रही. यहां तक कि चार्जिंग का आइकन भी नजर नहीं आया. ऐसा लगा जैसे फोन पूरी तरह बंद हो गया हो. दिलचस्प बात यह है कि यह समस्या सिर्फ एक-दो यूजर्स तक सीमित नहीं है बल्कि कई लोगों ने अलग-अलग जगहों पर इसी तरह का अनुभव साझा किया है. हालांकि, यह दिक्कत हर बार या हर यूजर के साथ नहीं हो रही जिससे साफ है कि मामला पूरी तरह एक जैसा नहीं है.
आखिर वजह क्या हो सकती है?
तकनीकी रूप से देखा जाए तो हर स्मार्टफोन को रीस्टार्ट होने के लिए बैटरी में एक न्यूनतम वोल्टेज की जरूरत होती है. जब बैटरी पूरी तरह खत्म होकर उस स्तर से नीचे चली जाती है तो फोन तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता. ऐसी स्थिति में डिवाइस को थोड़ा समय लगता है ताकि वह दोबारा जरूरी चार्ज हासिल कर सके. इसी वजह से चार्जिंग में लगाने के बाद भी फोन कुछ मिनटों तक &amp;ldquo;डेड&amp;rdquo; जैसा महसूस हो सकता है.
क्या वायरलेस चार्जिंग से मिल सकती है मदद?
कुछ यूजर्स का अनुभव बताता है कि MagSafe charger जैसे वायरलेस चार्जर पर फोन रखने से यह समस्या जल्दी हल हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि वायरलेस चार्जिंग धीरे-धीरे बैटरी को उस न्यूनतम स्तर तक पहुंचा देती है जहां से फोन फिर से चालू हो सके.
क्या यह बड़ी समस्या है या सामान्य व्यवहार?
फिलहाल यह समस्या हर डिवाइस में नहीं दिख रही और हर बार भी नहीं होती, इसलिए इसे एक सीमित या अस्थायी परेशानी माना जा रहा है. फिर भी यह तब दिक्कत बन सकती है जब आपको तुरंत फोन इस्तेमाल करना हो और वह अचानक रिस्पॉन्ड न करे.
यूजर्स को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
ऐसी स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि फोन की बैटरी को पूरी तरह 0% तक जाने से रोका जाए. समय-समय पर चार्ज करते रहना बेहतर रहता है. अगर कभी फोन पूरी तरह बंद हो जाए और तुरंत ऑन न हो तो घबराने की जरूरत नहीं है. उसे कुछ समय तक चार्जिंग पर छोड़ दें खासकर वायरलेस चार्जिंग पर और फिर दोबारा कोशिश करें.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>धूप में फोन बना सकता है ‘टाइम बम’! गर्मी में एक गलती और स्मार्टफोन हो सकता है हमेशा के लिए खराब, जानिए बचने के ये 5 उपाय</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धूप-में-फोन-बना-सकता-है-टाइम-बम-गर्मी-में-एक-गलती-और-स्मार्टफोन-हो-सकता-है-हमेशा-के-लिए-खराब-जानिए-बचने-के-ये-5-उपाय</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: गर्मी का मौसम आते ही सिर्फ इंसान ही नहीं आपका स्मार्टफोन भी परेशान होने लगता है. तेज धूप और बढ़ता तापमान फोन के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. कई बार लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन एक छोटी सी लापरवाही फोन को हमेशा के लिए खराब कर सकती है. आइए समझते हैं कि गर्मी में फोन क्यों खतरे में होता है और उससे बचने के आसान तरीके क्या हैं.
क्यों खतरनाक है गर्मी में फोन का इस्तेमाल?
स्मार्टफोन के अंदर बैटरी, प्रोसेसर और कई इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स होते हैं जो ज्यादा तापमान में तेजी से गर्म हो जाते हैं. जब फोन ज्यादा गर्म होता है तो उसकी बैटरी डैमेज हो सकती है, परफॉर्मेंस धीमी हो जाती है और कभी-कभी फोन अचानक बंद भी हो जाता है. लंबे समय तक गर्मी झेलने से फोन की लाइफ कम हो जाती है.
सीधे धूप में इस्तेमाल करना पड़ सकता है भारी
कई लोग बाहर निकलते समय फोन का इस्तेमाल धूप में ही करते रहते हैं जैसे कॉलिंग, वीडियो देखना या गेम खेलना. यह आदत फोन को जल्दी ओवरहीट कर देती है. कोशिश करें कि सीधे सूरज की रोशनी में फोन का इस्तेमाल कम से कम करें और उसे छांव में रखें.
चार्जिंग के दौरान रखें खास ध्यान
गर्मी में फोन चार्ज करना भी एक बड़ा रिस्क बन सकता है. अगर फोन पहले से गर्म है और आप उसे चार्ज पर लगा देते हैं, तो ओवरहीटिंग और बढ़ जाती है. इससे बैटरी खराब होने का खतरा रहता है. हमेशा कोशिश करें कि फोन को ठंडी जगह पर रखकर ही चार्ज करें और जरूरत से ज्यादा चार्जिंग से बचें.
कवर और बैक केस भी बन सकते हैं वजह
मोटे और खराब क्वालिटी के फोन कवर गर्मी को बाहर निकलने नहीं देते जिससे फोन अंदर ही अंदर ज्यादा गर्म हो जाता है. गर्मियों में हल्के और हीट-रेसिस्टेंट कवर का इस्तेमाल करना बेहतर होता है. अगर फोन ज्यादा गर्म लगे तो कुछ समय के लिए कवर हटा देना चाहिए.
बैकग्राउंड ऐप्स रखें कंट्रोल में
फोन में एक साथ कई ऐप्स चलने से प्रोसेसर पर दबाव बढ़ता है और फोन गर्म होने लगता है. खासकर गर्मी में बैकग्राउंड ऐप्स को बंद रखना बहुत जरूरी है. इससे फोन ठंडा रहता है और बैटरी भी बचती है.
फोन को ठंडा करने के लिए क्या करें?
अगर फोन ज्यादा गर्म हो जाए तो उसे तुरंत बंद करके कुछ देर के लिए ठंडी जगह पर रख दें. लेकिन ध्यान रखें कि उसे फ्रिज या बहुत ज्यादा ठंडी जगह में न रखें क्योंकि इससे अंदर नमी जम सकती है और नुकसान हो सकता है. गर्मी में स्मार्टफोन का सही इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप अपने फोन को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>डिजिटल ठगी पर सरकार का बड़ा एक्शन! सिम कार्ड पर सख्त नियम और WhatsApp पर नजर, अब बचना होगा मुश्किल</title>
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        <title>फोन खो गया तो घबराएं नहीं! Find My Device से मिनटों में ढूंढ निकालें अपना स्मार्टफोन, ऐसे करें इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ Find My Device: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन सिर्फ एक गैजेट नहीं बल्कि हमारी पहचान, काम और निजी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में अगर फोन खो जाए या चोरी हो जाए तो घबराहट होना स्वाभाविक है. लेकिन अच्छी बात यह है कि अब तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि आप अपने खोए हुए फोन को आसानी से ढूंढ सकते हैं. Find My Device ऐसा ही एक खास फीचर है जो इस मुश्किल समय में आपकी मदद करता है.
Find My Device क्या है और कैसे काम करता है?
Google का Find My Device एक ऐसा टूल है जो आपके स्मार्टफोन की लोकेशन ट्रैक करने में मदद करता है. यह फीचर आपके फोन के GPS, इंटरनेट और Google अकाउंट की मदद से काम करता है. जैसे ही आपका फोन ऑनलाइन होता है आप उसकी लाइव लोकेशन देख सकते हैं.
फोन ढूंढने के लिए क्या होना जरूरी है?
इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए कुछ जरूरी शर्तें होती हैं. सबसे पहले, आपके फोन में Google अकाउंट लॉगिन होना चाहिए. इसके अलावा फोन का इंटरनेट और लोकेशन ऑन होना जरूरी है. अगर ये चीजें एक्टिव हैं तो फोन ट्रैक करना काफी आसान हो जाता है.
खोए हुए फोन को ऐसे करें ट्रैक
अगर आपका फोन खो गया है तो सबसे पहले किसी दूसरे डिवाइस से Find My Device वेबसाइट या ऐप खोलें. इसके बाद अपने Google अकाउंट से लॉगिन करें. लॉगिन करते ही आपको मैप पर अपने फोन की लोकेशन दिखाई देने लगेगी. आप चाहें तो फोन में तेज आवाज में रिंग भी बजा सकते हैं जिससे आसपास होने पर उसे ढूंढना आसान हो जाता है. खास बात यह है कि यह रिंग साइलेंट मोड में भी बजती है.
डेटा सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
अगर आपको लगता है कि फोन वापस मिलना मुश्किल है तो आप इस फीचर की मदद से अपने फोन को लॉक भी कर सकते हैं. इससे कोई दूसरा व्यक्ति आपके डेटा तक पहुंच नहीं पाएगा. जरूरत पड़ने पर आप अपने फोन का पूरा डेटा भी रिमोटली डिलीट कर सकते हैं जिससे आपकी निजी जानकारी सुरक्षित रहे.
किन बातों का रखें ध्यान?
Find My Device तभी काम करता है जब फोन ऑन हो और इंटरनेट से जुड़ा हो. अगर फोन स्विच ऑफ है तो आखिरी लोकेशन दिखाई देती है. इसलिए हमेशा फोन में लोकेशन और इंटरनेट ऑन रखना बेहतर होता है. इसके अलावा, अपने Google अकाउंट का पासवर्ड सुरक्षित रखें और टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन रखें ताकि कोई आपकी जानकारी का गलत इस्तेमाल न कर सके.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दूर से बोलते ही लॉक हो जाएगा iPhone! ज्यादातर लोग नहीं जानते ये सीक्रेट फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Secret Feature: आज के समय में स्मार्टफोन हमारी पर्सनल लाइफ का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में फोन की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी हो जाती है. खासकर iPhone यूजर्स के लिए एक ऐसा सीक्रेट फीचर मौजूद है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं आप सिर्फ बोलकर अपने iPhone को लॉक कर सकते हैं वो भी दूर से.
क्या है ये वॉइस लॉक फीचर?
iPhone में Voice Control नाम का एक फीचर दिया गया है जिसकी मदद से आप अपने फोन को बिना छुए कंट्रोल कर सकते हैं. यह फीचर खासतौर पर एक्सेसिबिलिटी के लिए बनाया गया था लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह आपकी सिक्योरिटी को भी मजबूत बना सकता है. आप एक खास वॉइस कमांड सेट कर सकते हैं जिसे बोलते ही आपका iPhone तुरंत लॉक हो जाएगा.
कैसे काम करता है ये फीचर?
इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपको पहले अपने iPhone में Voice Control को ऑन करना होता है. इसके बाद आप एक कस्टम कमांड सेट कर सकते हैं जैसे Lock my phone या कोई भी ऐसा शब्द जो सिर्फ आपको याद रहे.
जब भी आप ये कमांड बोलेंगे iPhone तुरंत लॉक हो जाएगा. अगर आपका फोन कहीं दूर रखा है या किसी और के हाथ में है तब भी यह कमांड काम कर सकता है बशर्ते Voice Control एक्टिव हो.
सेटअप करने का आसान तरीका
सबसे पहले Settings में जाएं और Accessibility ऑप्शन खोलें. वहां आपको Voice Control का विकल्प मिलेगा. इसे ऑन करने के बाद Customize Commands में जाकर अपनी नई कमांड बनाएं. कमांड के साथ एक एक्शन सेट करें जिसमें Lock Screen चुनना होगा. बस इसके बाद आपका वॉइस लॉक फीचर तैयार है.
किन हालात में है सबसे ज्यादा काम का?
मान लीजिए आपका फोन कहीं रखकर आप दूर चले गए और आपको शक है कि कोई उसे इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे में आप दूर से ही कमांड बोलकर फोन लॉक कर सकते हैं. इसके अलावा, अगर आपके हाथ व्यस्त हैं या गंदे हैं तब भी बिना टच किए फोन लॉक करना काफी आसान हो जाता है.
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
हालांकि यह फीचर काफी उपयोगी है लेकिन इसे इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां जरूरी हैं. सबसे पहले, ऐसी वॉइस कमांड चुनें जो आमतौर पर कोई और न बोले. दूसरी बात, Voice Control लगातार माइक्रोफोन का इस्तेमाल करता है जिससे बैटरी पर थोड़ा असर पड़ सकता है. इसलिए जरूरत के हिसाब से इसे ऑन/ऑफ करना बेहतर रहेगा.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मोबाइल ऐप्स डिलीट करने के हैं कई फायदे, यूज नहीं कर रहे हैं तो आज ही कर लें यह काम</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Apps Uninstall Benefits: आजकल खाना ऑर्डर करने से लेकर राशन मंगवाने तक के लिए मोबाइल ऐप्स आ गई हैं. हमें जिस भी चीज की जरूरत होती है, उसकी ऐप डाउनलोड कर लेते हैं. एक बार जरूरत पूरी होने के बाद वह ऐप इंस्टॉल ही रहती है और डेटा के साथ-साथ फोन के रिसोर्सेस को भी कंज्यूम करती है. धीरे-धीरे कर फोन में ऐसी ऐप्स की संख्या बढ़ती जाती हैं. फोन को खंगालने पर आप पाएंगे कि आपके फोन में यूज होने वाली के साथ यूज न होने वाली ऐप्स की संख्या भी बहुत है. यूज न होने वाली ऐप्स को डिलीट करने के कई फायदे हैं.&amp;nbsp;
Bloatware से मिलेगा छुटकारा
अगर आपने नया मोबाइल फोन खरीदा है तो इसमें कई Bloatware और गैर-जरूरी ऐप्स होती हैं, जो स्टोरेज स्पेस घेरकर बैठ जाती है. अगर आपने कम स्टोरेज वाला फोन लिया है तो इन्हें तुरंत डिलीट कर देना जरूरी है. इसलिए फोन लेने के बाद काम न आने वाली ऐप्स को डिलीट कर दें.
स्टोरेज हो जाएगी खाली
अगर आप कुछ समय से फोन यूज कर रहे हैं और इसकी स्टोरेज फुल हो गई है तो ऐप्स डिलीट करना काफी फायदेमंद हो सकता है. इसलिए आप जिन ऐप्स को यूज नहीं कर रहे हैं, उन्हें डिलीट कर दें. इससे आपको फोटो और वीडियो स्टोर करने के लिए ज्यादा स्पेस भी मिलेगा और स्टोरेज खाली होने पर फोन की परफॉर्मेंस भी मक्खन जैसी स्मूद रहेगी. स्टोरेज फुल होने पर फोन की स्पीड स्लो हो जाती है.&amp;nbsp;
बैटरी की खपत होगी कम
ऐप्स को डिलीट न करने से न सिर्फ स्टोरेज की बचत होगी, बल्कि बैटरी भी लंबी चलेगी. आपके फोन में इंस्टॉल्ड ऐप्स बैकग्राउंड एक्टिविटी के लिए बैटरी और दूसरे रिसोर्सेस को यूज करती हैं, भले ही आप उन्हें एक्टिवली यूज नहीं कर रहे हैं. इसलिए आप फोन से गैर-जरूरी ऐप्स को डिलीट कर बैटरी भी बचा सकते हैं.
सिक्योरिटी भी होगी मजबूत
फोन से ऐप्स डिलीट कर आप अपने डिवाइस की सिक्योरिटी को भी मजबूत कर सकते हैं. दरअसल, कई बार गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल करने पर भी ऐप्स के साथ मालवेयर डाउनलोड हो जाता है. इसके अलावा कई ऐप्स को उनके डेवलपर रेगुलर अपडेट नहीं करते हैं, जिससे डिवाइस के साथ-साथ डेटा भी खतरे में पड़ सकता है. इसलिए अगर आप किसी ऐप को यूज नहीं कर रहे हैं तो उसे डिलीट कर डिवाइस और डेटा को सिक्योर कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI का जादू या डेटा की जासूसी? विदेशी टूल खोलते ही आपका फोन बन जाता है ‘खुली किताब’, सरकारें क्यों हुईं अलर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-का-जादू-या-डेटा-की-जासूसी-विदेशी-टूल-खोलते-ही-आपका-फोन-बन-जाता-है-खुली-किताब-सरकारें-क्यों-हुईं-अलर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ AI Data Privacy: आज दुनिया भर की सरकारें Artificial Intelligence का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं ताकि प्रशासन, स्वास्थ्य सेवाएं और सार्वजनिक सुविधाएं बेहतर बनाई जा सकें. यह तकनीक काम को तेज और आसान जरूर बनाती है लेकिन इसके साथ एक गंभीर सवाल भी जुड़ गया है आखिर नागरिकों के डेटा पर असली कंट्रोल किसका है खासकर तब जब ये सिस्टम विदेशी कंपनियों द्वारा बनाए गए हों.
AI सिस्टम किस तरह का डेटा इस्तेमाल करते हैं
आधुनिक AI प्लेटफॉर्म कई तरह के डेटा को एक साथ जोड़कर काम करते हैं. इसमें स्वास्थ्य रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन, लोकेशन, पहचान से जुड़ी जानकारी और यहां तक कि व्यवहार से जुड़े पैटर्न भी शामिल होते हैं. भारत जैसे देश में, जहां Aadhaar और UPI जैसे डिजिटल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है डेटा की मात्रा बेहद विशाल हो चुकी है.
AI इन अलग-अलग सूचनाओं को जोड़कर किसी व्यक्ति की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर सकता है जो नीतियां बनाने में मददगार तो है लेकिन प्राइवेसी के लिए चिंता का विषय भी बन सकता है.
विदेशी प्लेटफॉर्म और डेटा का कंट्रोल
जब सरकारें विदेशी AI प्लेटफॉर्म का सहारा लेती हैं तो स्थिति थोड़ी जटिल हो जाती है. भले ही डेटा देश के भीतर स्टोर किया जाए लेकिन उसे प्रोसेस करने वाले सॉफ्टवेयर और उनके नियम अक्सर बाहरी कंपनियों के नियंत्रण में होते हैं.
उदाहरण के लिए, CLOUD Act जैसे कानून कुछ परिस्थितियों में विदेशी कंपनियों से डेटा मांगने की अनुमति देते हैं. इसका मतलब यह हो सकता है कि भारतीय नागरिकों का डेटा अप्रत्यक्ष रूप से दूसरे देशों की पहुंच में आ जाए.
भारत का डेटा सुरक्षा कानून क्या कहता है
भारत ने इस चुनौती से निपटने के लिए Digital Personal Data Protection Act 2023 लागू किया है. यह कानून तय करता है कि डेटा कैसे जुटाया जाए, कैसे इस्तेमाल हो और कब तक रखा जाए. इसमें नागरिकों को अपने डेटा पर अधिकार भी दिए गए हैं जैसे उसे देखना, सुधारना या हटवाना. हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलों में सरकार को कुछ छूट भी मिलती है जिससे पूरी पारदर्शिता हमेशा संभव नहीं होती.
AI के बढ़ते इस्तेमाल से नए खतरे
AI सिस्टम का एक बड़ा प्रभाव निगरानी के बढ़ते दायरे के रूप में सामने आ रहा है. जब अलग-अलग डेटा को जोड़ दिया जाता है तो किसी व्यक्ति की गतिविधियों और व्यवहार को ट्रैक करना आसान हो जाता है. यह तकनीक धोखाधड़ी पकड़ने या स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए उपयोगी हो सकती है लेकिन इससे लोगों को बिना जानकारी के जोखिम के आधार पर आंकने का खतरा भी बढ़ जाता है. साथ ही, इन सिस्टम्स की कार्यप्रणाली पूरी तरह साफ नहीं होती जिससे जवाबदेही का सवाल खड़ा होता है.
डेटा संप्रभुता क्यों बन रही है बड़ा मुद्दा
डेटा संप्रभुता का मतलब है कि किसी देश को अपने नागरिकों के डेटा पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए. भारत दुनिया के सबसे बड़े डेटा उत्पादकों में से एक बन चुका है लेकिन अभी भी टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बनी हुई है. यही विरोधाभास सबसे बड़ी चुनौती है एक तरफ आधुनिक तकनीक का फायदा उठाना जरूरी है वहीं दूसरी तरफ अपने डेटा की सुरक्षा और नियंत्रण बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ता है
हर बार जब आप डिजिटल पेमेंट करते हैं किसी सरकारी योजना का लाभ लेते हैं या ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं तब आप नया डेटा बना रहे होते हैं. यह डेटा तय कर सकता है कि आपको कौन-सी सेवाएं मिलेंगी आप किन योजनाओं के पात्र हैं और सिस्टम आपको किस नजर से देखता है. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आपका डेटा कैसे और किसके द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है.
आगे की राह और बड़ा सवाल
जैसे-जैसे AI का दायरा बढ़ रहा है असली सवाल यह नहीं रह गया कि डेटा का उपयोग हो रहा है या नहीं बल्कि यह है कि इसका इस्तेमाल किन शर्तों पर और किसके नियंत्रण में हो रहा है. भारत जैसे बड़े डिजिटल देश के लिए यह फैसला बेहद अहम है क्योंकि आज लिए गए निर्णय आने वाले समय में नागरिकों की गोपनीयता, सुरक्षा और अधिकारों की दिशा तय करेंगे.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>का, जादू, या, डेटा, की, जासूसी, विदेशी, टूल, खोलते, ही, आपका, फोन, बन, जाता, है, ‘खुली, किताब’, सरकारें, क्यों, हुईं, अलर्ट</media:keywords>
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        <title>भारत में WhatsApp का बड़ा एक्शन! 9,400 से ज्यादा अकाउंट्स एक झटके में बैन, जानिए आखिर क्या था कारण</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Accounts Ban: डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों के बीच WhatsApp ने भारत में बड़ी कार्रवाई करते हुए 9400 से ज्यादा अकाउंट्स को बंद कर दिया. यह कदम खास तौर पर डिजिटल अरेस्ट नाम के तेजी से फैल रहे स्कैम को रोकने के लिए उठाया गया. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई जनवरी 2026 से शुरू होकर करीब 12 हफ्तों के भीतर की गई. इस बारे में जानकारी Supreme Court of India में भी साझा की गई.
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा फ्रॉड है जिसमें ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं. वे कॉल या मैसेज के जरिए यह दावा करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति किसी गंभीर अपराध जैसे मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में फंसा हुआ है.
डर का माहौल बनाने के लिए ये लोग कई बार घंटों तक वीडियो कॉल पर पीड़ित को जोड़े रखते हैं और उसे किसी से बात करने से भी रोकते हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि असल में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान होता ही नहीं.
कैसे काम करता है यह पूरा खेल?
ठग पहले डर पैदा करते हैं और फिर पीड़ित से आधार नंबर, बैंक डिटेल्स या OTP जैसी संवेदनशील जानकारी मांगते हैं. इसके बाद केस सुलझाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है. इस पूरे खेल का मकसद सिर्फ एक होता है&amp;mdash;डर दिखाकर पैसा ऐंठना.
विदेश से ऑपरेट हो रहे थे कई अकाउंट्स
जांच में यह भी सामने आया कि इन स्कैम से जुड़े कई अकाउंट्स दक्षिण-पूर्व एशिया, खासकर कंबोडिया जैसे देशों से संचालित हो रहे थे. इस मामले में WhatsApp ने भारतीय एजेंसियों जैसे Indian Cyber Crime Coordination Centre, Ministry of Electronics and Information Technology और Department of Telecommunications के साथ मिलकर काम किया.
3,800 से बढ़कर 9,400 तक कैसे पहुंचा मामला?
शुरुआत में सरकारी एजेंसियों ने करीब 3,800 संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान की थी. लेकिन WhatsApp के अपने सिस्टम ने जांच को और आगे बढ़ाया जिससे एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ और हजारों अतिरिक्त अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई.
यूजर्स के लिए नए सेफ्टी फीचर्स
इन स्कैम्स से निपटने के लिए WhatsApp ने कई नए सुरक्षा फीचर्स भी पेश किए हैं. अब अनजान नंबर से आने वाले मैसेज पर चेतावनी दिखाई देगी अकाउंट कितना पुराना है यह जानकारी मिलेगी और संदिग्ध चैट्स में प्रोफाइल फोटो की विजिबिलिटी सीमित की जा सकती है. साथ ही कॉलर पहचान (Caller Identification) को भी बेहतर बनाया जा रहा है ताकि यूजर्स आसानी से फर्जी कॉल्स को पहचान सकें.
सिर्फ अकाउंट बैन नहीं, पूरे नेटवर्क पर नजर
WhatsApp का कहना है कि वह सिर्फ एक-एक शिकायत पर कार्रवाई नहीं करता बल्कि पूरे स्कैम नेटवर्क को पकड़ने और खत्म करने की कोशिश करता है. हालांकि कंपनी ने यह भी माना कि कई ठगी ऐप के बाहर भी होती है इसलिए इसे पूरी तरह रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
इस मामले को लेकर Supreme Court of India ने भी गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि अब ठग नकली कोर्ट ऑर्डर और फर्जी सिग्नेचर तक इस्तेमाल करने लगे हैं जो आम लोगों के भरोसे के लिए बड़ा खतरा है.
ऐसे स्कैम से कैसे बचें?
अगर कभी आपको कोई कॉल या मैसेज आकर गिरफ्तारी की धमकी देता है तो सबसे पहले घबराएं नहीं. ऐसे कॉल को तुरंत काट दें क्योंकि कोई भी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती. अपनी निजी जानकारी जैसे आधार, बैंक डिटेल्स, OTP या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें. अगर कोई खुद को अधिकारी बताता है तो उसकी पुष्टि खुद नजदीकी पुलिस स्टेशन से करें.
इसके अलावा, साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें या आधिकारिक पोर्टल पर रिपोर्ट करें. सबसे जरूरी बात ऐसी स्थिति में अपने परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को जरूर बताएं ताकि आप सही फैसला ले सकें.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, में, WhatsApp, का, बड़ा, एक्शन, 9, 400, से, ज्यादा, अकाउंट्स, एक, झटके, में, बैन, जानिए, आखिर, क्या, था, कारण</media:keywords>
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        <title>क्या होता है Burner Phone? आम फोन से इतना अलग कि जानकर चौंक जाएंगे, जानिए देश में इस्तेमाल करना क्यों है मना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-होता-है-burner-phone-आम-फोन-से-इतना-अलग-कि-जानकर-चौंक-जाएंगे-जानिए-देश-में-इस्तेमाल-करना-क्यों-है-मना</link>
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        <description><![CDATA[ Burner Phone: अगर आपको लगता है कि मोबाइल फोन सिर्फ स्मार्टफोन और फीचर फोन तक ही सीमित हैं तो यह पूरी तस्वीर नहीं है. तकनीक की दुनिया में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई तरह के फोन बनाए जाते हैं. इन्हीं में एक खास कैटेगरी है जिसे बर्नर फोन कहा जाता है. आपने इस शब्द को कई फिल्मों और वेब सीरीज में जरूर सुना होगा जहां इसका इस्तेमाल गोपनीय बातचीत के लिए किया जाता है.
प्राइवेसी के लिए बनाया गया खास फोन
बर्नर फोन असल में ऐसा डिवाइस होता है जिसे सीमित समय के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है. इसका मुख्य फोकस यूजर की पहचान और बातचीत को निजी रखना होता है. आम फोन की तुलना में इसमें बहुत कम फीचर्स होते हैं लेकिन प्राइवेसी के लिहाज से इसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. इसे इस्तेमाल करने के बाद आमतौर पर फेंक दिया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है ताकि किसी भी तरह की जानकारी आगे ट्रेस न की जा सके.
क्यों कहा जाता है इसे ट्रैक करना मुश्किल?
बर्नर फोन की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जाती है कि इसे ट्रैक करना आसान नहीं होता. यह आमतौर पर बिना किसी लंबे समय के रजिस्ट्रेशन या पहचान के इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया जाता है. इसकी कीमत भी अक्सर कम होती है क्योंकि इसमें एडवांस फीचर्स नहीं होते.
यह एक साधारण फीचर फोन की तरह काम करता है जिसमें कॉलिंग और मैसेजिंग जैसी बेसिक सुविधाएं ही मिलती हैं. कुछ मामलों में सीमित इंटरनेट एक्सेस भी दिया जाता है लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ कम्युनिकेशन तक ही सीमित रहता है.
आम फोन से कैसे अलग है?
जहां स्मार्टफोन में ऐप्स, सोशल मीडिया, कैमरा और कई स्मार्ट फीचर्स होते हैं वहीं बर्नर फोन बेहद साधारण होता है. इसमें न तो ज्यादा स्टोरेज होता है और न ही एडवांस टेक्नोलॉजी. इसकी सादगी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है क्योंकि इससे डेटा जमा होने की संभावना कम रहती है. इसके अलावा, इसे लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए नहीं बनाया जाता बल्कि जरूरत पूरी होते ही इसे बदल दिया जाता है.
भारत में इस्तेमाल करना क्यों मुश्किल है?
भारत में बर्नर फोन का इस्तेमाल करना आसान नहीं है. यहां सिम कार्ड लेने के लिए पहचान पत्र देना अनिवार्य होता है जैसे आधार कार्ड. ऐसे में बिना पहचान के फोन इस्तेमाल करना लगभग असंभव हो जाता है. अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है जिसमें भारी जुर्माना और जेल तक की सजा शामिल है.
क्या सच में पूरी तरह सुरक्षित होता है?
फिल्मों में इसे पूरी तरह अनट्रेसेबल दिखाया जाता है लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग हो सकती है. किसी भी डिवाइस को पूरी तरह ट्रैक-प्रूफ कहना सही नहीं है क्योंकि नेटवर्क और सर्विस प्रोवाइडर के जरिए कुछ जानकारी फिर भी जुड़ सकती है. फिर भी, सीमित इस्तेमाल और कम डेटा के कारण यह सामान्य फोन की तुलना में ज्यादा गोपनीयता देने वाला विकल्प माना जाता है.
समझदारी से करें तकनीक का इस्तेमाल
बर्नर फोन का असली उद्देश्य निजी बातचीत को सुरक्षित रखना है लेकिन इसका गलत इस्तेमाल भी संभव है. इसलिए तकनीक का इस्तेमाल हमेशा नियमों और जिम्मेदारी के साथ करना जरूरी है.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Air Cooler या Portable AC! गर्मी में कौन है देता है कम बिजली में ज्यादा ठंड़क? जानिए किसे खरीदने में है आपका ज्यादा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Air Cooler Vs Portable AC: जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है वैसे-वैसे ठंडक पाने के विकल्पों पर चर्चा तेज हो जाती है. आमतौर पर लोगों के सामने दो ऑप्शन होते हैं एयर कूलर और पोर्टेबल एसी. दोनों ही अपने-अपने तरीके से राहत देते हैं लेकिन सवाल यह है कि आपके लिए कौन बेहतर रहेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
एयर कूलर
Air Cooler लंबे समय से भारतीय घरों का हिस्सा रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कम कीमत और कम बिजली खपत करता है. कूलर हवा में नमी बढ़ाकर ठंडक देता है इसलिए यह सूखी गर्मी वाले इलाकों में ज्यादा असरदार होता है.
इसके इस्तेमाल में ज्यादा झंझट नहीं होता बस पानी भरो और चला दो. बिजली बिल भी ज्यादा नहीं आता जिससे यह बजट-फ्रेंडली विकल्प बन जाता है. हालांकि, ज्यादा उमस या ह्यूमिडिटी वाले मौसम में इसका असर कम हो जाता है. साथ ही, नियमित रूप से पानी भरना और सफाई करना जरूरी होता है. बता दें कि एयर कूलर में ज्यादा बिजली की बचत होती है वहीं, दूसरी ओर पोर्टेबल एसी ज्यादा बिजली खपत करता है.
पोर्टेबल एसी
Portable Air Conditioner आधुनिक जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया गया है. इसे आप कमरे से कमरे में आसानी से ले जा सकते हैं. यह कूलर की तरह हवा में नमी नहीं बढ़ाता बल्कि एसी की तरह हवा को ठंडा करता है. इसकी सबसे बड़ी ताकत है कि यह उमस भरे मौसम में भी अच्छा काम करता है. आपको ज्यादा ठंडी और कंट्रोल्ड कूलिंग मिलती है. लेकिन इसके साथ कुछ सीमाएं भी हैं जैसे ज्यादा बिजली खपत और ज्यादा कीमत. साथ ही, इसे चलाने के लिए एग्जॉस्ट पाइप की जरूरत होती है जिसे खिड़की या वेंट से बाहर निकालना पड़ता है.
दोनों के बीच मुख्य अंतर
एयर कूलर और पोर्टेबल एसी के बीच सबसे बड़ा फर्क उनके काम करने के तरीके में है. कूलर पानी के जरिए ठंडक देता है जबकि पोर्टेबल एसी रेफ्रिजरेशन तकनीक का इस्तेमाल करता है. जहां कूलर सस्ता और इको-फ्रेंडली है वहीं पोर्टेबल एसी ज्यादा पावरफुल और हर मौसम में असरदार होता है. कूलर बड़े खुले कमरों के लिए ठीक रहता है जबकि पोर्टेबल एसी छोटे बंद कमरों में बेहतर रिजल्ट देता है.
बिजली खपत और खरीदने में फायदा
अगर आपका बजट सीमित है और आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां हवा सूखी रहती है और बिजली की बचत भी करना चाहते हैं तो एयर कूलर आपके लिए सही रहेगा. वहीं, अगर आप ज्यादा आरामदायक और लगातार ठंडक चाहते हैं खासकर उमस वाले मौसम में तो पोर्टेबल एसी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. हालांकि, पोर्टेबल एसी में बिजली बिल ज्यादा आता है.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>क्या सच में फोन को तेज बनाती है Virtual RAM या सिर्फ दिखावा? ऑन करने से पहले जान लें फायदे और नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ What is Virtual RAM: आजकल कई स्मार्टफोन्स में Virtual RAM का फीचर देखने को मिलता है. कंपनियां दावा करती हैं कि इससे फोन की स्पीड और मल्टीटास्किंग बेहतर हो जाती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वाकई इतना असरदार है या सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रिक? इसे समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि Virtual RAM आखिर काम कैसे करती है.
कैसे काम करती है Virtual RAM
Virtual RAM असल में आपके फोन की इंटरनल स्टोरेज का एक हिस्सा होता है जिसे अस्थायी तौर पर RAM की तरह इस्तेमाल किया जाता है. जब फोन की असली RAM भर जाती है तो सिस्टम कुछ डेटा को स्टोरेज में शिफ्ट कर देता है ताकि ऐप्स चलते रहें. हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि असली RAM की स्पीड स्टोरेज से काफी ज्यादा होती है. इसलिए Virtual RAM मदद तो करती है लेकिन यह फिजिकल RAM का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकती.
Virtual RAM के फायदे
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मल्टीटास्किंग को थोड़ा आसान बना देता है. अगर आप एक साथ कई ऐप्स खोलते हैं तो फोन उन्हें जल्दी बंद नहीं करता. इसके अलावा, कम RAM वाले स्मार्टफोन्स में यह फीचर थोड़ी अतिरिक्त राहत देता है. इससे फोन अचानक स्लो होने या ऐप्स के बार-बार रीस्टार्ट होने की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है.
Virtual RAM के नुकसान
जहां फायदे हैं वहीं कुछ सीमाएं भी हैं. क्योंकि Virtual RAM स्टोरेज पर निर्भर करती है इसकी स्पीड असली RAM जितनी तेज नहीं होती. इसका मतलब यह है कि हैवी गेमिंग या हाई-परफॉर्मेंस टास्क में आपको ज्यादा फर्क महसूस नहीं होगा. एक और बात यह है कि बार-बार स्टोरेज का इस्तेमाल होने से उसकी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. लंबे समय में यह आपके डिवाइस की स्टोरेज पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.
क्या आपको इसे ऑन करना चाहिए?
अगर आपका फोन कम RAM वाला है और आप हल्के-फुल्के काम या सामान्य इस्तेमाल करते हैं तो Virtual RAM आपके लिए उपयोगी हो सकती है. लेकिन अगर आप गेमिंग या हैवी ऐप्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो यह फीचर ज्यादा मदद नहीं करेगा. असल में, यह फीचर एक सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करता है न कि पूरी तरह समाधान के रूप में.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>धड़ाम से गिरी iPhone 15 की कीमत! Amazon या Flipkart नहीं, अब यहां से खरीदने पर होगी सबसे ज्यादा बचत</title>
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        <description><![CDATA[ धड़ाम से गिरी iPhone 15 की कीमत! Amazon या Flipkart नहीं, अब यहां से खरीदने पर होगी सबसे ज्यादा बचत ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>अब Google Wallet बनेगा आपका ट्रैवल असिस्टेंट! फ्लाइट अपडेट सीधे लॉक स्क्रीन पर, जानें कैसे करें सेटअप</title>
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        <description><![CDATA[ Google Wallet New Feature: Google Wallet ने यात्रियों के लिए एक नया और बेहद काम का फीचर पेश किया है. अब आपको अपनी फ्लाइट का स्टेटस जानने के लिए बार-बार फोन अनलॉक करने या एयरलाइन ऐप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह नया फीचर सीधे आपकी लॉक स्क्रीन पर ही फ्लाइट की लाइव जानकारी दिखाता है.
कैसे काम करता है यह नया फीचर
इस सुविधा का इस्तेमाल करना काफी आसान है. जैसे ही आप अपना बोर्डिंग पास Google Wallet में सेव करते हैं, फ्लाइट से पहले यह फीचर अपने आप एक्टिव हो जाता है. इसके बाद आपकी स्क्रीन पर डिपार्चर और अराइवल एयरपोर्ट, अनुमानित लैंडिंग टाइम और एक प्रोग्रेस बार दिखाई देता है जो बताता है कि आपकी यात्रा कितनी पूरी हो चुकी है. लंबी उड़ानों या लेओवर के दौरान यह फीचर खास तौर पर बेहद उपयोगी साबित होता है.
सेटअप करना है बेहद आसान
इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. सबसे पहले अपना बोर्डिंग पास Google Wallet में जोड़ें. इसके बाद सुनिश्चित करें कि आपका फोन Android 16 पर चल रहा हो. बस इतना करने के बाद यह फीचर अपने आप काम करने लगता है और उड़ान शुरू होने से लेकर मंजिल तक आपको लगातार अपडेट देता रहता है.
ट्रैवलर्स के लिए बड़ी राहत
भारत के बड़े शहरों जैसे Delhi, Mumbai, Bengaluru, Hyderabad, Chennai और Kolkata के बीच अक्सर यात्रा करने वालों के लिए यह फीचर काफी फायदेमंद है. अब एयरपोर्ट पर बार-बार डिस्प्ले बोर्ड देखने या अलग-अलग ऐप्स में जानकारी ढूंढने की जरूरत नहीं होगी. एक नजर में ही आपको अपनी फ्लाइट की पूरी जानकारी मिल जाएगी. इससे परिवार या ऑफिस के लोग भी आसानी से आपका स्टेटस जान सकते हैं.
Google Wallet बन रहा है ऑल-इन-वन ऐप
धीरे-धीरे Google Wallet सिर्फ पेमेंट ऐप नहीं रह गया है. इसमें पहले से ही कार्ड, टिकट, लॉयल्टी मेंबरशिप और कई जरूरी डॉक्यूमेंट्स सेव किए जा सकते हैं. अब फ्लाइट ट्रैकिंग जुड़ने के बाद यह ऐप आपकी पूरी यात्रा को एक जगह मैनेज करने वाला टूल बनता जा रहा है.
भारत में कब मिलेगा यह फीचर
फिलहाल इस फीचर के भारत में आधिकारिक लॉन्च की तारीख तय नहीं की गई है. लेकिन जिन यूज़र्स के पास नए एंड्रॉयड स्मार्टफोन हैं खासकर लेटेस्ट वर्जन पर चलने वाले डिवाइस, उन्हें यह अपडेट सबसे पहले मिल सकता है. यह नया लॉक स्क्रीन फीचर दिखने में साधारण है लेकिन रोजमर्रा की एक बड़ी परेशानी को हल करता है.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>खतरे की घंटी! इन यूजर्स के लिए सरकार ने जारी किया हाई सिक्योरिटी अलर्ट, जानिए क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ CERT-In Alert: अगर आप Microsoft Windows, Microsoft Office या Microsoft Edge का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने हाल ही में एक चेतावनी जारी की है जिसमें बताया गया है कि इन प्रोडक्ट्स में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं जो हैकिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं.
किन-किन सिस्टम पर है खतरा
इस चेतावनी का असर सिर्फ कुछ खास यूजर्स तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक Windows 10 और Windows 11 समेत कई Windows Server वर्ज़न भी प्रभावित हैं. इसके अलावा रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाले Office टूल्स और Edge ब्राउजर भी इस खतरे की जद में हैं. यानी आम यूजर से लेकर बड़े बिजनेस और MSMEs तक हर कोई इससे प्रभावित हो सकता है.
क्या हो सकता है नुकसान?
CERT-In के अनुसार, इन कमजोरियों का फायदा उठाकर कोई भी हमलावर सिस्टम में अपनी मनमर्जी का कोड चला सकता है. इसके अलावा वह सिस्टम पर ज्यादा अधिकार हासिल कर सकता है संवेदनशील जानकारी चुरा सकता है या फिर पूरे सिस्टम को ठप कर सकता है. सरल भाषा में कहें तो अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आपका डेटा और डिवाइस दोनों खतरे में पड़ सकते हैं.
समस्या की असली वजह क्या है
इन खामियों के पीछे कई तकनीकी कारण बताए गए हैं जैसे इनपुट वेरिफिकेशन में कमी, मेमोरी से जुड़ी गड़बड़ियां और एक्सेस कंट्रोल की कमजोर व्यवस्था. कुछ मामलों में यूजर की छोटी सी गलती जैसे किसी संदिग्ध फाइल को खोलना या किसी गलत लिंक पर क्लिक करना भी हमले का रास्ता बना सकती है. हालांकि, कुछ हमले ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें किसी अतिरिक्त अनुमति की जरूरत नहीं होती.
एडमिन यूजर्स के लिए ज्यादा खतरा
अगर आप अपने सिस्टम में एडमिन अकाउंट से लॉगिन रहते हैं तो यह खतरा और बढ़ जाता है. ऐसे में हैकर को ज्यादा कंट्रोल मिल सकता है जिससे बड़े स्तर पर डेटा चोरी या सर्विस बाधित होने की संभावना रहती है खासकर कंपनियों और ऑफिस नेटवर्क में.
बचाव का सबसे आसान तरीका
अच्छी बात यह है कि इन खामियों को दूर करने के लिए अपडेट जारी किए जा चुके हैं. यूजर्स को सलाह दी गई है कि वे तुरंत अपने सिस्टम को अपडेट करें. नियमित अपडेट करना ही सबसे आसान और प्रभावी तरीका है जिससे आप ऐसे साइबर खतरों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिना रिचार्ज कराए कितने दिन बाद बंद हो जाता है SIM कार्ड? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बिना-रिचार्ज-कराए-कितने-दिन-बाद-बंद-हो-जाता-है-sim-कार्ड-सच्चाई-जानकर-चौंक-जाएंगे-आप</link>
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        <description><![CDATA[ बिना रिचार्ज कराए कितने दिन बाद बंद हो जाता है SIM कार्ड? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Password और Passkey में क्या होता है अंतर, जानिए दोनों में से कौन है ज्यादा सुरक्षित?</title>
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        <description><![CDATA[ Password Vs Passkey: डिजिटल दौर में हमारी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो चुका है. बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह लॉगिन के लिए पासवर्ड की जरूरत पड़ती है. लेकिन बार-बार पासवर्ड याद रखना, उन्हें सुरक्षित रखना और हैकिंग से बचाना आसान काम नहीं है. इसी समस्या का हल बनकर सामने आया है नया सिस्टम Passkeys.
क्या होते हैं पासकी?
Passkeys एक ऐसा लॉगिन तरीका है जिसमें आपको पासवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती. यह टेक्नोलॉजी आपके डिवाइस पर मौजूद बायोमेट्रिक डेटा जैसे फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या पिन के जरिए आपकी पहचान को वेरिफाई करती है. यानी अब पासवर्ड याद रखने का झंझट खत्म होने वाला है.
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
पासकी असल में Public-key cryptography पर आधारित होता है. इसमें दो तरह की &amp;ldquo;की&amp;rdquo; बनती हैं एक पब्लिक और एक प्राइवेट. पब्लिक की सर्वर पर सेव रहती है जबकि प्राइवेट की आपके डिवाइस में सुरक्षित रहती है और कभी बाहर नहीं जाती. जब आप लॉगिन करते हैं तो आपका डिवाइस प्राइवेट की के जरिए आपकी पहचान कन्फर्म करता है. इससे हैकर्स के लिए आपके अकाउंट तक पहुंच बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है.
पासवर्ड से ज्यादा सुरक्षित क्यों?
पासवर्ड अक्सर कमजोर, रिपीटेड या लीक हो जाते हैं जिससे हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है. वहीं पासकी में न तो कोई पासवर्ड होता है और न ही उसे चोरी किया जा सकता है. यह सिस्टम Phishing attack से भी काफी हद तक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि यूजर किसी नकली वेबसाइट पर अपना पासवर्ड डाल ही नहीं रहा होता. इसके अलावा, हर लॉगिन के लिए अलग क्रिप्टोग्राफिक सिग्नेचर बनता है जिससे सिक्योरिटी और मजबूत हो जाती है.
किन कंपनियों ने अपनाया?
आज कई बड़ी टेक कंपनियां इस नई तकनीक को अपनाने लगी हैं. Google, Apple और Microsoft जैसे दिग्गज अपने प्लेटफॉर्म्स पर पासकी सपोर्ट दे रहे हैं. आने वाले समय में यह तरीका और ज्यादा आम हो सकता है. हालांकि पासकी को काफी सुरक्षित माना जा रहा है लेकिन इसके कुछ चैलेंज भी हैं. अगर आपका डिवाइस खो जाए या खराब हो जाए तो अकाउंट एक्सेस करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
हालांकि, कंपनियां इसके लिए बैकअप ऑप्शन और क्लाउड सिंक जैसे फीचर्स भी दे रही हैं. पासकी टेक्नोलॉजी डिजिटल सिक्योरिटी में एक बड़ा बदलाव ला सकती है. यह न सिर्फ लॉगिन को आसान बनाती है बल्कि हैकिंग के खतरे को भी काफी हद तक कम कर देती है.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>नया फोन लेने का प्लान? 20,000 रुपये से कम में मिल रहे ये 5G स्मार्टफोन, कम कीमत में मिलते हैं तगड़े फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Under 20K: आजकल स्मार्टफोन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं ऐसे में 20,000 रुपये के अंदर एक संतुलित और भरोसेमंद फोन ढूंढना आसान नहीं रह गया है. फिर भी मार्केट में कुछ ऐसे विकल्प मौजूद हैं जो परफॉर्मेंस, डिस्प्ले और बैटरी के मामले में अच्छा संतुलन देते हैं. अगर आप नया फोन लेने की सोच रहे हैं और बजट भी कंट्रोल में रखना चाहते हैं तो ये डिवाइस आपके लिए बढ़िया साबित हो सकते हैं.
POCO X7
POCO X7 उन यूजर्स के लिए अच्छा विकल्प है जो प्रीमियम फील के साथ दमदार परफॉर्मेंस चाहते हैं. इसमें 6.67 इंच का 1.5K OLED डिस्प्ले मिलता है जो 120Hz रिफ्रेश रेट और Dolby Vision सपोर्ट के साथ आता है.
फोन में MediaTek Dimensity 7300 Ultra प्रोसेसर दिया गया है जो रोजमर्रा के कामों से लेकर गेमिंग तक स्मूद एक्सपीरियंस देता है. साथ ही, इसकी बिल्ड क्वालिटी भी मजबूत है क्योंकि इसमें Gorilla Glass Victus 2 और हाई-लेवल वाटर-डस्ट रेजिस्टेंस मिलता है. कैमरा सेटअप भी संतुलित है और 5500mAh की बैटरी के साथ फास्ट चार्जिंग सपोर्ट इसे लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए बेहतर बनाता है.
Realme P4 5G
Realme P4 5G उन लोगों के लिए है जिन्हें लंबी बैटरी लाइफ चाहिए. इसमें 7000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जो एक बार चार्ज करने पर आराम से पूरा दिन निकाल सकती है. इसका 6.77 इंच AMOLED डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और HDR10+ सपोर्ट के साथ आता है जिससे वीडियो और गेमिंग का अनुभव बेहतर होता है. Dimensity 7400 Ultra प्रोसेसर के साथ यह फोन अच्छी स्पीड और मल्टीटास्किंग क्षमता देता है वहीं कैमरा सेटअप भी डेली यूज के लिए पर्याप्त है.
Infinix Note 50s 5G+
Infinix Note 50s 5G+ अपने कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले और 144Hz रिफ्रेश रेट के कारण अलग नजर आता है. स्क्रीन स्मूद होने के साथ-साथ विजुअल एक्सपीरियंस भी शानदार देता है. इसमें Dimensity 7300 Ultimate प्रोसेसर मिलता है जो अच्छी परफॉर्मेंस के साथ गेमिंग में भी साथ निभाता है. JBL ट्यून किए गए स्टीरियो स्पीकर्स इसकी खासियत हैं जो ऑडियो क्वालिटी को बेहतर बनाते हैं. 5500mAh बैटरी और फास्ट चार्जिंग इसे एक बैलेंस्ड पैकेज बनाते हैं.
TECNO POVA 7 Pro 5G
TECNO POVA 7 Pro 5G उन यूजर्स के लिए है जो गेमिंग और हाई-परफॉर्मेंस चाहते हैं. इसमें 144Hz AMOLED डिस्प्ले दिया गया है जो काफी स्मूद विजुअल्स देता है. Dimensity 7300 Ultimate चिपसेट के साथ यह फोन भारी ऐप्स और गेम्स को आसानी से हैंडल करता है. 6000mAh बैटरी के साथ इसमें वायर्ड के साथ-साथ वायरलेस चार्जिंग का भी सपोर्ट मिलता है जो इस प्राइस रेंज में कम देखने को मिलता है.
Vivo T5x 5G
Vivo T5x 5G अपनी मजबूत बिल्ड और बड़ी बैटरी के लिए जाना जा सकता है. इसमें मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी और IP68+IP69 रेटिंग दी गई है जिससे यह काफी टिकाऊ बनता है. 7200mAh की बैटरी इसे लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए परफेक्ट बनाती है खासकर उन लोगों के लिए जो बार-बार चार्जिंग से बचना चाहते हैं. Dimensity 7400 Turbo प्रोसेसर के साथ यह फोन अच्छा परफॉर्मेंस देता है और कैमरा भी डेली यूज के लिए बढ़िया है.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>नया, फोन, लेने, का, प्लान, 20, 000, रुपये, से, कम, में, मिल, रहे, ये, स्मार्टफोन, कम, कीमत, में, मिलते, हैं, तगड़े, फीचर्स</media:keywords>
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        <title>iPhone हुआ फेल? Android के ये धांसू फीचर्स रोजमर्रा के काम में आते हैं काम, जानेंगे तो बदल जाएगा नजरिया</title>
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        <description><![CDATA[ Android Features: जब भी प्रीमियम स्मार्टफोन की बात होती है तो Apple के iPhone सबसे पहले दिमाग में आते हैं. शानदार डिजाइन, मजबूत सिक्योरिटी और स्मूद परफॉर्मेंस की वजह से iPhone दुनियाभर में पसंद किए जाते हैं. लेकिन हर चीज में परफेक्ट होने के बावजूद iPhone में कुछ ऐसे फीचर्स की कमी है जो रोजमर्रा के इस्तेमाल में काफी काम आते हैं और यही जगह Android फोन आगे निकल जाते हैं.
कॉल रिकॉर्डिंग में ज्यादा आज़ादी
Android स्मार्टफोन्स में कॉल रिकॉर्डिंग करना काफी आसान होता है और कई डिवाइस में यह फीचर पहले से ही मौजूद रहता है. वहीं iPhone में कॉल रिकॉर्डिंग को लेकर काफी सीमाएं हैं. कई बार रिकॉर्डिंग के दौरान सामने वाले को नोटिफिकेशन भी मिल जाता है जिससे यह फीचर उतना सहज नहीं लगता. रोजमर्रा के काम या जरूरी बातचीत को सेव करने के लिए Android यहां ज्यादा सुविधाजनक साबित होता है.
कैमरा मेगापिक्सल में बड़ा अंतर
iPhone का कैमरा क्वालिटी के मामले में काफी भरोसेमंद माना जाता है लेकिन जब बात मेगापिक्सल की आती है तो Android फोन काफी आगे निकल चुके हैं. आज के कई Android स्मार्टफोन्स में 100MP से लेकर 200MP तक के कैमरा सेंसर देखने को मिलते हैं जिससे ज्यादा डिटेल वाली तस्वीरें मिलती हैं. वहीं iPhone अभी भी सीमित मेगापिक्सल के साथ आता है जिससे कुछ यूजर्स को कमी महसूस हो सकती है.
ऐप सेटिंग्स तक आसान पहुंच
Android फोन की एक बड़ी खासियत इसकी फ्लेक्सिबिलिटी है. किसी भी ऐप की सेटिंग खोलने के लिए यूजर सीधे उस ऐप के आइकन से ही पहुंच सकता है. दूसरी तरफ iPhone में यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो जाती है क्योंकि पहले सेटिंग्स में जाकर फिर ऐप ढूंढना पड़ता है. रोजाना इस्तेमाल में यह छोटा सा फर्क बड़ा अनुभव बन जाता है.
APK फाइल्स का फायदा
Android यूजर्स के पास APK फाइल्स डाउनलोड करके ऐप इंस्टॉल करने की आज़ादी होती है. इसका मतलब है कि आप प्ले स्टोर के बाहर से भी ऐप्स इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं iPhone में यह सुविधा नहीं मिलती और यूजर्स को ऐप स्टोर पर ही निर्भर रहना पड़ता है. यह फर्क उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो नए या अलग तरह के ऐप्स ट्राई करना पसंद करते हैं.
चार्जिंग स्पीड में Android आगे
आज के समय में फोन का जल्दी चार्ज होना बेहद जरूरी हो गया है. Android स्मार्टफोन्स में 80W, 100W या उससे भी ज्यादा फास्ट चार्जिंग देखने को मिल रही है, जिससे फोन मिनटों में चार्ज हो जाता है. वहीं iPhone की चार्जिंग स्पीड इस मामले में थोड़ी धीमी रहती है जिससे जल्दी में यूजर्स को इंतजार करना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>अनोखा फोन लाने वाली है OpenAI, मोबाइल ऐप्स की नहीं पड़ेगी जरूरत, जानिए कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ OpenAI AI Agent Smartphone: क्या अगले कुछ सालों में मोबाइल ऐप्स की जरूरत खत्म हो जाएगी? यह सवाल इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI एक स्मार्टफोन पर काम कर रही है, जो एआई एजेंट्स से चलेगा. इसमें ऐप्स की जरूरत नहीं होगी और यह डिवाइस हमारे मोबाइल यूज करने के एक्सपीरियंस को एकदम बदल सकता है. बताया जा रहा है कि OpenAI के साथ ऐप्पल के पूर्व डिजाइन चीफ Jony Ive भी इस फोन पर काम कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि OpenAI की इस फोन को लेकर क्या प्लानिंग है और बिना ऐप्स के यह काम कैसे करेगा.
OpenAI Smartphone को लेकर ये है प्लानिंग
ऐप्पल एनालिस्ट और टिपस्टर Ming-Chi Kuo की मानें तो OpenAI का AI Agent फोन अलग-अलग ऐप्स स्विच करने की बजाय यूजर्स का टास्क कंप्लीट करने पर फोकस करेगा. यानी हर काम के लिए अलग ऐप ओपन करने की बजाय यह फोन समझ जाएगा कि आपको क्या करना है और यह खुद ही वह टास्क पूरा कर देगा. इस फोन के प्रोसेसर के लिए OpenAI मीडियाटेक और क्वॉलकॉम के साथ बातचीत कर रही है. माना जा रहा है कि Luxshare को मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के तौर पर इसमें शामिल किया जा सकता है और 2028 से इस फोन का बड़े स्तर पर प्रोडक्शन शुरू हो सकता है.
...पर बिना ऐप्स कैसे चलेगा फोन?
अभी फोन पर हर काम के लिए अलग ऐप है. OpenAI इसे बदलना चाहती है. कंपनी का मानना है कि यूजर्स को ऐप्स की नहीं बल्कि रिजल्ट की जरूरत है. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए AI Agents की मदद ली जाएगी. ये एआई से चलने वाले स्मार्ट सिस्टम होंगे, जो रियल-टाइम में कॉन्टेक्स्ट, यूजर बिहेवियर और जरूरत को समझकर काम करेंगे. इस तरह यह फोन एक पर्सनल असिस्टेंट की भूमिका भी निभाएगा.
एआई कंपनी फोन क्यों बनाना चाहती है?
OpenAI चैटबॉट को लेकर सुर्खियों में आई थी, लेकिन अब वह हार्डवेयर पर भी फोकस कर रही है. फोन बनाने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. पहला फोन की मदद से कंपनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर पूरा कंट्रोल कर पाएगी, जिससे यूजर को सीमलेस एआई एक्सपीरियंस देना आसान होगा. दूसरा कारण है कि फोन की मदद से यूजर एक्टिविटी को रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सकता है. यानी यह देखना आसान होगा कि यूजर कहां है, उसके फोन यूज करने का पैटर्न क्या है और फोन में उसकी प्रेफरेंस क्या है. एआई एजेंट के लिए यह डेटा बहुत जरूरी होता है. तीसरा कारण यह है कि दुनिया में स्मार्टफोन सबसे ज्यादा यूज होने वाले डिवाइसेस में शामिल है. ऐसे में नई कैटेगरी क्रिएट करनी की बजाय लोगों को अपग्रेड का ऑप्शन देना आसान है.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>यह कंपनी बंद कर रही है इनएक्टिव सिम, यहां जान लें सस्ते में नंबर बचाने का जुगाड़</title>
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        <description><![CDATA[ Jio Deactivating Sim: अगर आप जियो सिम कार्ड यूज करते हैं और रेगुलर रिचार्ज नहीं कर रहे हैं तो आपका नंबर बंद हो सकता है. टिपस्टर अभिषेक यादव के अनुसार, जियो ने इनएक्टिव नंबरों को बंद करना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई यूजर्स ने बताया कि बिना कोई नोटिस दिए कंपनी ने उनके सिम कार्ड को बंद कर दिया है. यह उन यूजर्स के साथ हो रहा है, जिन्होंने काफी समय से अपने नंबर पर रिचार्ज नहीं किया. ऐसे में अगर आप जियो सिम को केवल इनकमिंग के लिए यूज कर रहे हैं और पिछले काफी समय से रिचार्ज नहीं किया है तो आपके नंबर पर भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा है.&amp;nbsp;
नंबर बंद होने पर हो सकता है झंझट
अगर आप अपना कोई भी नंबर एक्टिव रखना चाहते हैं तो उसे 90 दिन में एक बार रिचार्ज करना जरूरी है. ऐसा न करने पर नंबर बंद हो जाएगा और यह किसी और यूजर को अलॉट भी किया जा सकता है. ऐसा होने पर आपको सेम नंबर वापस नहीं मिलेगा. अगर आप सिर्फ सिम कार्ड को एक्टिव रखने के लिए रिचार्ज करना चाहते हैं तो इसके लिए कई सस्ते ऑप्शन भी अवेलेबल है. आप महज 11 रुपये का रिचार्ज प्लान लेकर इस झंझट से बच सकते हैं. जियो नंबर को एक्टिव रखने के लिए कई सस्ते प्लान मौजूद हैं.
11 रुपये से दूर हो जाएगी टेंशन
अगर आप महंगा रिचार्ज प्लान नहीं लेना चाहते तो 11 रुपये वाला प्लान भी आपके काम आ सकता है. जियो के 11 रुपये के डेटा प्लान में एक घंटे की वैलिडिटी के लिए 10GB डेटा मिलता है. इसमें कोई कॉलिंग या SMS बेनेफिट नहीं है. इस प्लान के जरिए आप 90 दिनों तक अपने नंबर को बंद होने से बचा सकते हैं.
103 रुपये वाला प्लान भी आएगा काम
अगर आपको डेटा के साथ-साथ वैलिडिटी भी चाहिए तो 103 रुपये वाला प्लान आपके काम आ सकता है. 103 में जियो 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ 5GB डेटा देता है. इसके अलावा यूजर इसमें एक एंटरटेनमेंट बंडल भी चुन सकते हैं, जिसका सब्सक्रिप्शन भी 28 दिनों तक वैलिड होगा.
189 वाला प्लान भी करेगा मदद
जियो की सिम को एक्टिव रखने के लिए आप 189 रुपये से भी रिचार्ज कर सकते हैं. इसके बेनफिट्स की बात करें तो 28 दिनों तक अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और कुल 300 SMS के साथ 2GB डेटा मिलता है. यह रिचार्ज प्लान भी आपका नंबर बंद होने से रोक सकता है.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:24 +0530</pubDate>
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        <title>अब Windows Update नहीं करेगा मनमानी! 35 दिन तक रोकने का नया फीचर, यूजर्स को मिला पूरा कंट्रोल</title>
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        <description><![CDATA[ अब Windows Update नहीं करेगा मनमानी! 35 दिन तक रोकने का नया फीचर, यूजर्स को मिला पूरा कंट्रोल ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Apple AirTag क्या है? कैसे करता है ट्रैक और क्यों हर iPhone यूजर के लिए है ये सीक्रेट हथियार</title>
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        <description><![CDATA[ Apple AirTag: Apple का AirTag एक छोटा-सा ट्रैकिंग डिवाइस है जो दिखने में गोल और हल्का होता है लेकिन काम बेहद बड़ा करता है. इसे आप अपने बैग, चाबी या किसी भी जरूरी सामान के साथ जोड़ सकते हैं. एक बार iPhone या iPad से कनेक्ट करने के बाद यह चुपचाप बैकग्राउंड में काम करता रहता है और आपके सामान की लोकेशन ट्रैक करने में मदद करता है.
नई जनरेशन में क्या बदला?
दूसरी पीढ़ी के AirTag में डिजाइन तो पहले जैसा ही रखा गया है लेकिन अंदर की टेक्नोलॉजी को काफी अपग्रेड किया गया है. इसकी रेंज पहले से करीब 50% ज्यादा हो गई है जिससे दूर से भी इसे ढूंढना आसान हो जाता है. इसके अलावा, इसमें नया Ultra-Wideband (UWB) चिप दिया गया है जो आपको ज्यादा सटीक दिशा और दूरी बताता है. अब आप इसे Apple Watch के जरिए भी ट्रैक कर सकते हैं.
नया Bluetooth सिस्टम इसे और बेहतर कनेक्टिविटी देता है वहीं इसका स्पीकर पहले से ज्यादा तेज आवाज करता है. खास बात ये है कि इसमें एक अलग तरह की नई साउंड भी जोड़ी गई है ताकि शोर-शराबे में भी इसे आसानी से पहचाना जा सके.
आखिर AirTag काम कैसे करता है?
AirTag की सबसे दिलचस्प बात इसका काम करने का तरीका है. यह खुद लंबी दूरी तक सिग्नल नहीं भेजता बल्कि आसपास मौजूद लाखों Apple डिवाइस की मदद लेता है. जब AirTag कोई सिग्नल भेजता है तो आसपास का iPhone, iPad या Mac उसे पकड़ लेता है और उसकी लोकेशन Apple के Find My नेटवर्क पर सुरक्षित तरीके से अपडेट हो जाती है. यही वजह है कि अगर आपका बैग किसी दूसरे शहर या देश में भी पहुंच जाए तो भी आप उसकी लोकेशन जान सकते हैं.
खोया सामान ढूंढना हुआ आसान
अगर आपका सामान पास में है तो आप AirTag से आवाज निकलवा सकते हैं और उसे आसानी से ढूंढ सकते हैं. अगर वह दूर है तो Find My ऐप आपको मैप के जरिए उसकी लोकेशन दिखा देता है. iPhone 11 या उससे नए मॉडल में आपको दिशा भी दिखाई जाती है जिससे आप सीधे उस चीज तक पहुंच सकते हैं.
सुरक्षा और प्राइवेसी का क्या?
Apple ने इसमें प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कई फीचर्स दिए हैं. अगर कोई अनजान AirTag आपके साथ मूव करता है तो आपके iPhone पर तुरंत नोटिफिकेशन आ जाता है. आप उस AirTag को स्कैन करके उसकी जानकारी देख सकते हैं और जरूरत पड़े तो उसे बंद भी कर सकते हैं.
इससे गलत इस्तेमाल की संभावना काफी कम हो जाती है. AirTag में एक छोटी CR2032 बैटरी लगती है जो लगभग एक साल तक चल जाती है. बैटरी कम होने पर आपको पहले ही अलर्ट मिल जाता है और इसे बदलना भी काफी आसान है.
क्यों जरूरी है AirTag?
अगर आप अक्सर यात्रा करते हैं या चीजें भूल जाते हैं तो AirTag आपके लिए बेहद काम का गैजेट साबित हो सकता है. यह न सिर्फ आपके सामान को सुरक्षित रखता है बल्कि आपको मानसिक सुकून भी देता है कि आपकी चीजें हमेशा आपकी नजर में हैं.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 17 Pro पर आ गई लुभावनी डील, हजारों रुपये सस्ता खरीदने का मिल रहा मौका</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Pro Discount Offer: ऐप्पल के लेटेस्ट फ्लैगशिप डिवाइस iPhone 17 Pro की कीमत एक ही झटके में हजारों रुपये कम हो गई है. अगर आप इसे खरीदने के लिए कीमत कम होने का इंतजार कर रहे थे तो वह मौका आ गया है. एक से एक दमदार फीचर्स और प्रीमियम लुक वाला यह आईफोन इस समय 10,000 रुपये से ज्यादा की छूट के साथ लिस्टेड है. अगर आप पुराना फोन एक्सचेंज करते हैं तो दाम और भी घट सकते हैं. ऐसे में आपको यह डील हाथ से नहीं जाने देनी चाहिए. आइए जानते हैं कि इस आईफोन में क्या-क्या फीचर्स हैं और इसे खरीदना क्यों फायदे का सौदा हो सकता है.
iPhone 17 Pro के स्पेसिफिकेशंस
फीचर्स के मामले में यह आईफोन किसी भी दूसरे मॉडल से कम नहीं है. ऐप्पल ने इस मॉडल में 6.3 इंच का डिस्प्ले दिया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है और एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग के साथ आता है. इसमें पावरफुल A19 प्रो चिपसेट है, जिसे 12GB रैम के साथ पेयर किया गया है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 48MP प्राइमरी लेंस के साथ ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो के लिए 18MP का सेंटर स्टेज लेंस मिलता है. कंपनी का दावा है कि इसकी बैटरी 31 घंटे का वीडियो प्लेबैक दे सकती है.
iPhone 17 Pro पर कहां मिल रही है डील
पिछले साल सितंबर में लॉन्च हुआ यह फोन विजय सेल्स पर फ्लैट डिस्काउंट के साथ लिस्टेड है. भारत में इसे 1,34,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी विजय सेल्स पर यह 1,30,790 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा HSBC क्रेडिट कार्ड से खरीदने पर 6,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी मिल रहा है. दोनों मिलाने पर कुल डिस्काउंट 10,000 रुपये से ज्यादा हो जाता है. फीचर लोडेड इस आईफोन को डिस्काउंट पर खरीदना एक जबरदस्त डील हो सकती है.
Google के इस फोन पर भी जबरदस्त डिस्काउंट
iPhone 17 Pro की तरह गूगल के फ्लैगशिप डिवाइस Pixel 10 पर भी हजारों की बचत का मौका मिल रहा है. Pixel 10 पिछले साल अगस्त में 79,999 कीमत पर लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी यह अमेजन पर 13 प्रतिशत डिस्काउंट के बाद सिर्फ 69,999 रुपये में लिस्टेड है. इस पर 2100 रुपये से ज्यादा के कैशबैक और बैंक ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है, जिसके बाद इसकी कीमत 68,000 रुपये से भी कम हो जाती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>1 घंटे में कितना बिजली खाता है Ceiling Fan, गर्मियों में इस्तेमाल करने से पहले समझ लें पूरा जोड़&amp;गणित</title>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ एक क्लिक से बंद हो सकता है आपका Gmail अकाउंट! Jio और Airtel यूजर्स पर मंडरा रहा खतरा, जानिए क्या है वजह</title>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>सोशल मीडिया की लत को लेकर इस देश का बड़ा कदम! युवाओं के लिए आने वाला है ये नियम, जानिए क्या होगा असर</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया की लत को लेकर इस देश का बड़ा कदम! युवाओं के लिए आने वाला है ये नियम, जानिए क्या होगा असर ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>इंसानों जैसा महसूस करेंगे रोबोट! जानिए क्या है इलेक्ट्रॉनिक स्किन जिसे छूते ही मिल जाता है सिग्नल</title>
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        <description><![CDATA[ Transparent E-Skin: टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब ऐसे इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल विकसित किए जा रहे हैं जो इंसानी स्किन की तरह लचीले और संवेदनशील हों. University of Turku के शोधकर्ताओं ने एक खास तरह की स्ट्रेचेबल और ट्रांसपेरेंट इलेक्ट्रॉनिक तकनीक तैयार की है जो मुड़ सकती है, खिंच सकती है और यहां तक कि इंसानी स्किन जैसा रिएक्शन भी दे सकती है. यह खोज भविष्य में स्मार्टफोन्स से लेकर मेडिकल प्रॉस्थेटिक्स तक कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है.
टेक्नोलॉजी में नया बदलाव
Interesting Engineering की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस रिसर्च टीम का नेतृत्व Vipul Sharma ने किया. उनका ध्यान ऐसे इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल बनाने पर था जो सिर्फ लचीले ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हों. इसके लिए उन्होंने पेड़ों की पत्तियों जैसी प्राकृतिक संरचनाओं से प्रेरणा लेकर हल्के, मजबूत और टिकाऊ मटेरियल तैयार किए. शोधकर्ताओं का कहना है कि ये नए मटेरियल स्ट्रेचेबल, सांस लेने योग्य, कंडक्टिव और ट्रांसपेरेंट हैं जो इन्हें पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स से बेहतर बनाते हैं.
रोबोटिक हाथ ने महसूस किया स्पर्श
इस तकनीक को परखने के लिए वैज्ञानिकों ने एक इलेक्ट्रॉनिक स्किन तैयार की और उसे रोबोटिक हाथ पर लगाया. नतीजे चौंकाने वाले थे जैसे ही इस स्किन को छुआ गया इसमें लगे प्रेशर सेंसर तुरंत एक्टिव हो गए और रोबोट को स्पर्श का एहसास होने लगा. यह दिखाता है कि आने वाले समय में रोबोट सिर्फ काम ही नहीं करेंगे बल्कि वे महसूस भी कर सकेंगे.
प्रॉस्थेटिक्स और हेल्थकेयर में बड़ा बदलाव
यह तकनीक खासतौर पर प्रॉस्थेटिक्स के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. भविष्य में ऐसी इलेक्ट्रॉनिक स्किन की मदद से लोग अपने एआई हाथ-पैरों से दबाव, तापमान और नमी जैसी चीजों को महसूस कर पाएंगे. इससे आर्टिफिशियल अंग और भी ज्यादा नैचुरल लगेंगे.
सुरक्षित और स्मार्ट मशीनें
यह टेक्नोलॉजी सॉफ्ट रोबोटिक्स में भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है. Anastasia Koivikko के अनुसार, ऐसे रोबोट बनाए जा रहे हैं जो इंसानों के साथ सुरक्षित तरीके से काम कर सकें. हेल्थकेयर में ये रोबोट मरीजों को उठाने या उनके अंगों की रिकवरी में मदद कर सकते हैं. वहीं इंडस्ट्री में ये नाजुक चीजों को बिना नुकसान पहुंचाए संभाल सकते हैं.
सॉफ्ट रोबोट्स की खासियत है कि ये तंग जगहों में भी आसानी से काम कर सकते हैं. यही वजह है कि इन्हें रेस्क्यू मिशन, अंडरग्राउंड ऑपरेशन और यहां तक कि अंतरिक्ष में भी इस्तेमाल करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं. ये रोबोट बिजली, हवा, रोशनी या तरल पदार्थों से चल सकते हैं और जरूरत के हिसाब से फैल, मुड़ या उछल भी सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब सपनों पर भी होगा आपका कंट्रोल! इस अनोखे गैजेट से होगा संभव, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ Human Control Over Dreams: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence आज कोडिंग से लेकर कंटेंट लिखने तक कई काम आसान कर चुका है. लेकिन क्या यह आपकी नींद में आने वाले सपनों को भी कंट्रोल कर सकता है? इसी दावे के साथ AI स्टार्टअप Prophetic AI ने एक खास पहनने वाला गैजेट पेश किया है. कंपनी का कहना है कि इस डिवाइस की मदद से यूजर अपने सपनों को खुद कंट्रोल कर सकता है. इसकी शुरुआती कीमत करीब 449 डॉलर (लगभग 42,000 रुपये) रखी गई है. हालांकि, यह दावा कितना सही है इस पर अभी सवाल बने हुए हैं.
कैसे काम करता है यह ड्रीम कंट्रोल गैजेट?
कंपनी ने अपने दो नए डिवाइस Dual और Phase लॉन्च किए हैं. ये दिखने में हेडबैंड जैसे हैं जिन्हें सिर पर पहनना होता है. कंपनी के मुताबिक, ये डिवाइस लूसिड ड्रीमिंग को ट्रिगर करते हैं. लूसिड ड्रीमिंग वह स्थिति होती है जब व्यक्ति सपने के दौरान यह समझ पाता है कि वह सपना देख रहा है और उसमें बदलाव भी कर सकता है.
टेक्नोलॉजी के पीछे का साइंस
Prophetic AI के अनुसार, ये डिवाइस सिर के जरिए सुरक्षित अल्ट्रासोनिक वेव्स भेजते हैं जो दिमाग के Prefrontal Cortex को एक्टिव करती हैं. यह हिस्सा सोचने और फैसले लेने से जुड़ा होता है. सपनों के दौरान यह हिस्सा आमतौर पर कम सक्रिय रहता है जिससे हमें सपनों पर कंट्रोल नहीं होता. डिवाइस इसी एक्टिविटी को संतुलित करने की कोशिश करता है ताकि व्यक्ति अपने सपनों में जागरूक रह सके. इसके साथ ही इसमें Electroencephalogram सेंसर भी लगे होते हैं जो दिमाग की एक्टिविटी को ट्रैक करते हैं. ऐसी तकनीक का इस्तेमाल Neuralink जैसे प्रोजेक्ट्स में भी किया जा रहा है.
क्या यह तकनीक वाकई काम करेगी?
इस गैजेट का आधार एक एडवांस तकनीक है जिसे ट्रांसक्रैनियल फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (tFUS) कहा जाता है जिसे AI के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका मकसद REM स्लीप के दौरान दिमाग के खास हिस्से को टारगेट करना है. सिद्धांत के अनुसार, इससे सपनों को ज्यादा स्पष्ट, यादगार और कंट्रोल करने योग्य बनाया जा सकता है. हालांकि, यह अभी तक पूरी तरह साबित नहीं हुआ है.
कीमत और उपलब्धता
Prophetic AI का Dual मॉडल 449 डॉलर (करीब 43,000 रुपये) में उपलब्ध होगा और इसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है. वहीं, Phase मॉडल की कीमत 1,299 डॉलर (लगभग 1.2 लाख रुपये) रखी गई है जिसकी शिपिंग 2027 के मध्य तक शुरू हो सकती है. AI लगातार नई सीमाओं को छू रहा है और सपनों को कंट्रोल करने का यह विचार काफी रोमांचक है. लेकिन फिलहाल इसे पूरी तरह भरोसेमंद मानने से पहले इसके पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाणों का इंतजार करना जरूरी है.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Smart home security gadgets: घर में अकेली रहती हैं आप तो आज ही लगवाएं ये स्मार्ट गैजेट्स, बिना इजाजत कोई नहीं कर पाएगा एंटर</title>
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        <description><![CDATA[ Smart home security gadgets: महिलाओं की सुरक्षा आजकल एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है. आज के समय में महिलाएं अपने घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं. हाल ही में एक मामला सामने आया है जहां दिल्ली में एक IRS अधिकारी के घर में एक व्यक्ति ने घुसकर उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म और हत्या कर दी. उस समय पीड़िता के माता-पिता घर पर नहीं थे और वह घर पर बिल्कुल अकेली थी. यह व्यक्ति अच्छी तरह से उस घर में घुसने के रास्ते को पहचानता था क्योंकि वह वहां नौकर रह चुका था. ऐसे में यह काफी बड़ी चिंता का विषय है कि महिलाएं आजकल अपने घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं हैं. ऐसे में महिलाएं अगर घर के अंदर काफी ज्यादा अकेली रहती हैं तो वह अपनी सुरक्षा के लिए कुछ स्मार्ट गैजेट्स और उपाय इस्तेमाल कर सकती हैं, आइए जानते हैं.
स्मार्ट डोर लॉक
महिला घर पर अकेली रहती है तो आप अपने घर में स्मार्ट डोर लॉक लगवा सकते हैं. यह सुरक्षा के लिए काफी अच्छा कदम है. इन लॉक को कोई बाहरी अनजान व्यक्ति नहीं खोल सकता. इन्हें खोलने के लिए पासवर्ड, फिंगरप्रिंट या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना होता है. इन स्मार्ट लॉक में ऑटो-लॉक फीचर भी होता है, जो दरवाजा बंद होते ही अपने आप लॉक हो जाता है. इससे आपकी सुरक्षा काफी बढ़ जाती है और अनजान लोगों का घर में घुसना काफी हद तक रुक जाता है.
CCTV कैमरा सिस्टम
घर की सुरक्षा बढ़ाने के लिए CCTV कैमरा सिस्टम बेहद जरूरी है. आप घर के मुख्य दरवाजे, बालकनी और अन्य जरूरी जगहों पर कैमरे लगवा सकते हैं. आजकल ऐसे कैमरे आते हैं जो मोबाइल से कनेक्ट होकर लाइव फीड दिखाते हैं. आप अपने उन कैमरों का एक्सेस अपने माता-पिता या अन्य खास लोगों को दे सकते हैं, जिससे आप अपने लोगों की निगरानी में रहेंगी. अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति घर के आसपास आता है, तो आपको तुरंत अलर्ट जाएगा.
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वीडियो डोर फोन और स्मार्ट बेल
वीडियो डोर फोन या स्मार्ट डोरबेल भी एक बेहतरीन सुरक्षा उपकरण है, जिससे जब कोई व्यक्ति दरवाजे पर आता है, तो आप उसे स्क्रीन या मोबाइल पर देख सकती हैं और बात करके उसके आने का कारण भी पूछ सकती हैं. इससे आप अगर उसे पहचानती हैं या सुरक्षित समझती हैं तभी अंदर आने दे सकती हैं. यह खासकर अकेले रहने वाली महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी और सुरक्षित विकल्प है.
स्मार्ट अलार्म सिस्टम
स्मार्ट होम सिस्टम में जैसे ही कोई व्यक्ति आपके घर में घुसने की कोशिश करता है तो सायरन बजने लगता है और आपको अलर्ट मिल जाता है. इस सिस्टम में इलेक्ट्रिक फेंसिंग और डिजिटल कैमरा मॉनिटरिंग दोनों साथ काम करते हैं. इलेक्ट्रिक फेंसिंग को छूने पर सायरन बजता है और डिजिटल मॉनिटरिंग कैमरे से डिटेक्ट करके अलर्ट देता है.
ये कुछ स्मार्ट गैजेट्स हैं जिनका आप सुरक्षा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इससे भी जरूरी है सूझबूझ. महिलाए अनजान व्यक्तियों के साथ कैसे बात करें या उनसे दूरी कैसे बनाकर रखें.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cyber crime against women: कोई प्राइवेट फोटो लीक करे तो न हो परेशान, हर मां&amp;बेटी और महिला को जरूर जाननी चाहिए ये 3 बातें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cyber-crime-against-women-कोई-प्राइवेट-फोटो-लीक-करे-तो-न-हो-परेशान-हर-मां-बेटी-और-महिला-को-जरूर-जाननी-चाहिए-ये-3-बातें</link>
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        <description><![CDATA[ Cyber crime against women: डिजिटल दौर में सोशल मीडिया के माध्यम से ब्लैकमेल करना आजकल काफी ज्यादा देखा जा रहा है. कुछ लोग महिलाओं की प्राइवेट फोटो को या कुछ फोटो को AI से जेनरेट करके सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी देते हैं और कई बार अपलोड भी कर देते हैं. ऐसे में महिलाएं काफी ज्यादा घबरा जाती हैं और समझ नहीं पातीं कि अब ऐसी स्थिति में क्या करें और इन अपलोडेड फोटो को कैसे हटवाएं या भविष्य में ऐसा दोबारा न हो इसके लिए क्या करें. किसी भी महिला का प्राइवेट फोटो लीक करना या ब्लैकमेल करना काफी गंभीर कानूनी अपराध है और इसके लिए प्रशासन काफी सख्ती और गंभीरता से कार्यवाही करता है. चलिए बताते हैं कि अगर किसी महिला के साथ ऐसा हो तो वह सबसे पहले क्या करे
NCII पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें
अगर किसी महिला के फोटो या वीडियो इंटरनेट पर डाल दिए गए हैं तो सबसे पहले stopncii.org पर अपना केस तुरंत रजिस्टर करें. यह एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म है जो बिना सहमति वाले या प्राइवेट वीडियो और फोटो को सोशल मीडिया से हटाने में मदद करता है. यहां शिकायत दर्ज करने के बाद सिस्टम संबंधित कंटेंट को पहचानकर उसे विभिन्न प्लेटफॉर्म्स से हटाने की प्रक्रिया शुरू करता है, जिससे फोटो के फैलने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है.
साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें
दूसरा महत्वपूर्ण कदम है National Cyber Crime Reporting Portal पर जाकर शिकायत दर्ज करना. इस पोर्टल पर महिलाएं चाहें तो अपनी पहचान बताए बिना भी Anonymous Complaint विकल्प का उपयोग कर सकती हैं. यह सुविधा खास तौर पर उन मामलों में उपयोगी होती है जहां पीड़िता अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहती. यहां दर्ज की गई शिकायत सीधे साइबर क्राइम यूनिट तक पहुंचती है और मामले की जांच शुरू कर दी जाती है, महिला को थाने के कोई चक्कर नहीं काटने पड़ते, और उसकी पहचान भी पूरी तरह से गुप्त रहती है. बस उस महिला को कुछ प्रूफ देने होते हैं अपनी बात को साबित करने के लिए, जिससे अपराधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके.
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी तुरंत रिपोर्ट करें
अगर किसी का प्राइवेट फोटो या वीडियो किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Instagram, Facebook, X या अन्य पर अपलोड कर दिया गया है, तो उसे तुरंत Report करना भी बहुत जरूरी है. लगभग हर प्लेटफॉर्म में आपत्तिजनक कंटेंट की रिपोर्ट करने का विकल्प मौजूद होता है, जहां यूज़र सीधे उस पोस्ट को रिपोर्ट करके हटवा सकते हैं. कई बार रिपोर्ट मिलने के बाद कंपनियां ऐसे कंटेंट को जल्दी से जल्दी हटा देती हैं और अपलोड किए गए अकाउंट को भी सस्पेंड कर सकती हैं. हालांकि stopncii.org पर केस फाइल किया जा चुका है, लेकिन इसमें थोड़ा समय लग सकता है. वह भविष्य में अपलोड को रोकने के लिए एक बेहतरीन विकल्प है. जितनी जल्दी रिपोर्ट की जाएगी, उतना ही तेजी से नुकसान को रोका जा सकता है.
इस अपराध की सजा क्या है?
Cyber Law (IT Act, 2000) के अनुसार किसी के प्राइवेट फोटो या वीडियो को बिना उसकी अनुमति के शेयर करना या वायरल करना धारा 66E के तहत अपराध है. इसमें 3 साल की सजा और 2 लाख तक का जुर्माना है. BNS, 2023 के तहत इसे मानहानि, निजता का उल्लंघन और यौन उत्पीड़न से जुड़ा अपराध माना जा सकता है. कई बार इन मामलों में 3 से 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Cyber, crime, against, women:, कोई, प्राइवेट, फोटो, लीक, करे, तो, न, हो, परेशान, हर, मां-बेटी, और, महिला, को, जरूर, जाननी, चाहिए, ये, बातें</media:keywords>
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        <title>Wrong recharge refund: Jio के नंबर पर गलत हो गया रिचार्ज तो भी वापस आ जाएगा पैसा, यह ट्रिक करेगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ Wrong recharge refund: आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आपने जल्दी-जल्दी में खुद का या अपने परिवार के सदस्य का रिचार्ज किया, लेकिन फोन में चेक करने पर देखा कि रिचार्ज तो हुआ ही नहीं है? ऐसे में जब आपने अपने ट्रांजैक्शन में जाकर देखा तो पता चला कि आपने तो मोबाइल नंबर ही गलत डाल दिया है और रिचार्ज किसी और नंबर पर हो गया है. ऐसे में लगने लगता है कि आपका पैसा बर्बाद हो गया है, लेकिन आपको एक फीचर कहो या ट्रिक के बारे में नहीं पता होगा कि आप अपना पैसा वापस पा सकते हैं. चलिए बताते हैं कैसे.
क्या है ये ट्रिक?
ji0 अपने यूजर्स को एक फीचर देता है, जिससे अगर आपने अपना या अपने परिवार में किसी सदस्य का रिचार्ज MyJio से किया है और गलती से गलत नंबर पर रिचार्ज हो गया है, तो आप कुछ घंटों के भीतर आवेदन करके अपना पैसा वापस प्राप्त कर सकते हैं. यह फीचर सिर्फ तभी काम करता है जब आपका ट्रांजैक्शन MyJio ऐप से ही हुआ हो. अन्य किसी पेमेंट या रिचार्ज ऐप से रिचार्ज करने पर यह सुविधा काम नहीं करती. अप्लाई करने पर पैसा आपके सोर्स पेमेंट में वापस कर दिया जाता है.
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आवेदन की प्रक्रिया?
गलत रिचार्ज का पैसा वापस लेने के लिए सबसे पहले आप MyJio खोलें और उसमें रिचार्ज ट्रांजैक्शन हिस्ट्री पर जाएं. अब आप उस ट्रांजैक्शन के डिटेल्स को खोलें जिसमें आपसे गलती हुई है. उसमें नीचे की तरफ आपको 3 घंटे तक Cancel Plan का विकल्प दिखाई देता है, उस पर क्लिक कर दें. इसके बाद आपसे कैंसिल करने का कारण और रिफंड करने का सोर्स पूछा जाएगा. उसे भरने के बाद कुछ समय में आपका पैसा रिफंड कर दिया जाता है.
airtel और VI यूजर्स क्या करें?
एयरटेल और VI के ग्राहकों को भी ऐसी सुविधा मिलती है, एयरटेल के ग्राहक MyAirtel पर जाएं और वहां Help &amp;amp; Support का विकल्प चुनें. उसमें जाकर Facing issue with recharge का विकल्प चुनें और फिर Wrong recharge का विकल्प चुनें तथा refund का source चुनें. VI यूजर्स को अगर गलत रिचार्ज का पैसा वापस चाहिए तो उन्हें एक SMS करना होगा. अपने Vi सिम से WRR     टाइप करें और 51619 पर भेज दें. इससे आपका रिचार्ज का पैसा वापस कर दिया जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Wrong, recharge, refund:, Jio, के, नंबर, पर, गलत, हो, गया, रिचार्ज, तो, भी, वापस, आ, जाएगा, पैसा, यह, ट्रिक, करेगी, काम</media:keywords>
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        <title>iPhone Fold या iPhone Ultra! किस नाम से लॉन्च होगा Apple का पहला फोल्डेबल फोन? लीक्स में सामने आई ये जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Foldable iPhone: स्मार्टफोन मार्केट में फोल्डेबल डिवाइस तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं और अब Apple भी इस सेगमेंट में कदम रखने की तैयारी में है. काफी समय से चर्चा में चल रहा कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone साल 2026 में लॉन्च हो सकता है. इसे लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके नाम को लेकर है क्या यह iPhone Fold कहलाएगा या iPhone Ultra? रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह डिवाइस Apple का अब तक का सबसे प्रीमियम और एडवांस्ड स्मार्टफोन हो सकता है. डिजाइन के मामले में यह पासपोर्ट की तरह खुलने वाला और बेहद पतला फोन हो सकता है.
लॉन्च को लेकर क्या कहती हैं रिपोर्ट्स
कई लीक्स और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स इस ओर इशारा कर रही हैं कि Apple इस फोल्डेबल फोन को सितंबर 2026 के इवेंट में पेश कर सकता है. हालांकि इसकी बिक्री साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है. सप्लाई चेन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, Samsung Display इस डिवाइस के लिए जुलाई 2026 से डिस्प्ले पैनल की सप्लाई शुरू कर सकता है. कुछ देरी की आशंका जरूर जताई गई है लेकिन लॉन्च टाइमलाइन लगभग तय मानी जा रही है.
बड़ा डिस्प्ले और प्रीमियम डिजाइन
इस फोल्डेबल iPhone में लगभग 7.8 इंच का इनर डिस्प्ले दिया जा सकता है जबकि बाहर की तरफ करीब 5.3 इंच की स्क्रीन मिल सकती है. फोन को खोलने पर इसका अनुभव छोटे टैबलेट जैसा हो सकता है. इसकी मोटाई भी काफी कम रहने की उम्मीद है अनफोल्ड होने पर यह लगभग 5.6mm और फोल्ड होने पर करीब 11mm तक हो सकता है.
कंपनी इसके हिंज में हाई-क्वालिटी मटेरियल का इस्तेमाल कर सकती है जिससे स्क्रीन पर दिखने वाली क्रीज काफी कम होगी. दावा है कि यह मौजूदा फोल्डेबल फोन्स की तुलना में ज्यादा स्मूद और मजबूत अनुभव देगा.
कैमरा और परफॉर्मेंस में भी दम
लीक्स के मुताबिक, इस फोन में 48 मेगापिक्सल का डुअल रियर कैमरा सेटअप मिल सकता है जो प्रीमियम डिजाइन के साथ आएगा. सेल्फी के लिए बाहरी स्क्रीन पर पंच-होल कैमरा और अंदर की स्क्रीन में अंडर-डिस्प्ले कैमरा मिलने की संभावना है. सिक्योरिटी के लिए फेस आईडी की जगह टच आईडी दिए जाने की बात सामने आई है.
परफॉर्मेंस के लिहाज से इसमें Apple का नया A20 चिपसेट, 12GB रैम और एडवांस्ड मॉडेम दिया जा सकता है. साथ ही नया iOS वर्जन बेहतर मल्टीटास्किंग फीचर्स के साथ आ सकता है जिससे यूजर को टैबलेट जैसा अनुभव मिलेगा.
कीमत होगी काफी ज्यादा
इस फोल्डेबल iPhone की कीमत भी इसे खास बनाती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार इसकी शुरुआती कीमत 2000 से 2500 डॉलर के बीच हो सकती है. भारत में यह करीब 1.8 लाख रुपये से शुरू हो सकती है और टॉप वेरिएंट की कीमत इससे काफी ज्यादा जा सकती है.
आखिरकार नाम क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है इस डिवाइस का नाम क्या होगा. Apple इसे iPhone Fold या iPhone Ultra में से किसी एक नाम से पेश कर सकता है. हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है लेकिन इतना तय है कि यह फोन कंपनी का सबसे अनोखा और महंगा स्मार्टफोन बनने वाला है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp को टक्कर देने आ गया Elon Musk का XChat! वीडियो कॉलिंग के साथ मिलते हैं इतने सारे फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Elon Musk XChat: Elon Musk की कंपनी X (formerly Twitter) ने एक नया स्टैंडअलोन मैसेजिंग ऐप XChat लॉन्च किया है. फिलहाल यह ऐप iOS यूजर्स के लिए पेश किया गया है. इस ऐप के जरिए यूजर अपने X कॉन्टैक्ट्स के साथ चैट, कॉलिंग और फाइल शेयरिंग कर सकेंगे. यह लॉन्च इस बात का संकेत देता है कि मस्क की ऑल-इन-वन ऐप बनाने की रणनीति अब थोड़ा अलग दिशा में आगे बढ़ रही है.
क्या-क्या मिलेंगे फीचर्स?
XChat में यूजर्स को कई आधुनिक फीचर्स मिलते हैं जिनमें ऑडियो और वीडियो कॉलिंग, टेक्स्ट मैसेजिंग, ग्रुप चैट और फाइल शेयरिंग शामिल हैं. इसके अलावा, प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इसमें डिसअपियरिंग मैसेज, सभी के लिए मैसेज एडिट और डिलीट करने का विकल्प, और स्क्रीनशॉट ब्लॉक करने जैसी सुविधाएं दी गई हैं.
कंपनी का दावा है कि इस ऐप में न तो ट्रैकिंग है और न ही विज्ञापन. साथ ही, यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और पिन सिक्योरिटी के साथ आता है. इन फीचर्स को देखते हुए यह साफ है कि XChat सीधे तौर पर WhatsApp और Facebook Messenger को टक्कर देने की तैयारी में है.
अभी किन यूजर्स के लिए उपलब्ध?
फिलहाल XChat केवल iOS यूजर्स के लिए उपलब्ध है लेकिन आने वाले समय में इसे अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी लॉन्च किया जा सकता है. Benji Taylor ने संकेत दिया है कि इस ऐप में जल्द ही और नए अपडेट जोड़े जाएंगे.
बदली हुई रणनीति की झलक
पहले Elon Musk X को एक एवरीथिंग ऐप बनाने की सोच रहे थे जिसमें पेमेंट, शॉपिंग, मैसेजिंग जैसी सभी सेवाएं एक ही जगह मिलें. लेकिन अब कंपनी का रुख थोड़ा अलग नजर आ रहा है. अब X अलग-अलग ऐप्स के जरिए अपनी सेवाएं विस्तार देने पर काम कर रहा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी एक अलग पेमेंट सिस्टम पर भी काम कर रही है जिसे अभी आम लोगों के लिए जारी नहीं किया गया है. आने वाले महीनों में XChat में और भी नए फीचर्स देखने को मिल सकते हैं जिससे कंपनी अपने ऐप इकोसिस्टम को और मजबूत बनाना चाहती है. XChat के लॉन्च के साथ मैसेजिंग ऐप्स की रेस और तेज होने वाली है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ऐप वाकई WhatsApp जैसे बड़े प्लेटफॉर्म को कड़ी चुनौती दे पाता है या नहीं.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>YouTube का बड़ा कदम! अब AI पकड़ेगा सेलिब्रिटीज का डीपफेक, फर्जी वीडियो बनाने वालों की खैर नहीं</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube AI Feature: वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी लाइकनेस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी को अब एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री तक पहुंचा दिया है. इसका मकसद AI से बने नकली वीडियो, खासकर डीपफेक, को पहचानना और सेलिब्रिटीज की पहचान की सुरक्षा करना है.
क्या है ये Likeness Detection टेक्नोलॉजी?
यह तकनीक AI की मदद से उन वीडियो को स्कैन करती है जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा नकली तरीके से बनाया गया हो. आसान भाषा में कहें तो अगर किसी सेलिब्रिटी की शक्ल का गलत इस्तेमाल किया गया है तो यह सिस्टम उसे पकड़ सकता है. यह सिस्टम कुछ हद तक YouTube के पुराने Content ID सिस्टम जैसा है जो कॉपीराइट कंटेंट को पहचानता है. फर्क बस इतना है कि अब यह चेहरों और पहचान पर नजर रखता है.
क्यों जरूरी है ये फीचर?
आजकल कई फर्जी विज्ञापनों और स्कैम में मशहूर लोगों के चेहरे का इस्तेमाल किया जा रहा है. बिना अनुमति के उनकी पहचान का इस्तेमाल करना एक बड़ी समस्या बन चुका है. इस नई टेक्नोलॉजी का मकसद ऐसे मामलों पर लगाम लगाना है ताकि कोई भी सेलिब्रिटी की छवि का गलत फायदा न उठा सके.
किन लोगों को मिलेगा फायदा?
पहले यह फीचर सीमित क्रिएटर्स के लिए टेस्ट किया गया था लेकिन अब इसे बड़े स्तर पर बढ़ाया जा रहा है. अब इसमें टैलेंट एजेंसियां, मैनेजमेंट कंपनियां और उनके साथ जुड़े कलाकार भी शामिल होंगे. खास बात ये है कि इसका इस्तेमाल करने के लिए किसी सेलिब्रिटी के पास खुद का YouTube चैनल होना जरूरी नहीं है.
यूजर्स के पास क्या होंगे ऑप्शन?
अगर किसी वीडियो में किसी की नकली पहचान पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास कई विकल्प होंगे.

वीडियो हटाने की मांग करना
कॉपीराइट क्लेम करना
या फिर कोई कार्रवाई न करना

हालांकि, YouTube ने साफ किया है कि हर वीडियो नहीं हटाया जाएगा क्योंकि प्लेटफॉर्म पर पैरोडी और सटायर जैसे कंटेंट की अनुमति है.
आगे क्या बदलेगा?
फिलहाल यह टेक्नोलॉजी सिर्फ विजुअल (चेहरे) पर काम करती है लेकिन आने वाले समय में इसमें आवाज (ऑडियो) पहचानने की क्षमता भी जोड़ी जाएगी. YouTube इस तरह की सुरक्षा को कानून का हिस्सा बनाने के लिए भी प्रयास कर रहा है. कंपनी अमेरिका में NO FAKES Act को सपोर्ट कर रही है जिसका उद्देश्य AI के जरिए किसी की आवाज और पहचान के गलत इस्तेमाल को कंट्रोल करना है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ चार्जिंग के लिए नहीं इस्तेमाल होता है लैपटॉप का Type&amp;C पोर्ट! इसके 5 छुपे फीचर जान लिए तो सारे काम हो जाएंगे आसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिर्फ-चार्जिंग-के-लिए-नहीं-इस्तेमाल-होता-है-लैपटॉप-का-type-c-पोर्ट-इसके-5-छुपे-फीचर-जान-लिए-तो-सारे-काम-हो-जाएंगे-आसान</link>
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        <description><![CDATA[ सिर्फ चार्जिंग के लिए नहीं इस्तेमाल होता है लैपटॉप का Type-C पोर्ट! इसके 5 छुपे फीचर जान लिए तो सारे काम हो जाएंगे आसान ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>अब एक ही लॉगिन से चलेंगे Facebook, Instagram और आपके डिवाइस! ये है Meta का नया प्लान, जानें किसे होगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Meta One-Login: Meta ने यूजर्स के लिए लॉगिन और अकाउंट मैनेजमेंट को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने एक नया Meta Account सिस्टम पेश किया है जिसके जरिए अब Facebook, Instagram और अन्य जुड़े डिवाइस व सर्विसेज को एक ही अकाउंट से मैनेज किया जा सकेगा. अभी तक अलग-अलग ऐप्स और डिवाइस के लिए अलग लॉगिन रखना पड़ता था जिससे यूजर्स को काफी दिक्कत होती थी.
क्या बदलेगा नए Meta Account सिस्टम से
अब तक Meta के पास Accounts Centre जैसा फीचर मौजूद था जो कुछ सर्विसेज को जोड़ता था, लेकिन वह पूरी तरह एकीकृत नहीं था. नए Meta Account सिस्टम के आने के बाद यूजर्स को एक ही लॉगिन के जरिए सभी ऐप्स और सर्विसेज एक्सेस करने की सुविधा मिलेगी जिससे पूरा अनुभव ज्यादा आसान और व्यवस्थित हो जाएगा.
कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम
इस नए सिस्टम में यूजर्स को सिर्फ एक पासवर्ड की जरूरत होगी जिससे वे Facebook, Instagram, Threads और AI से जुड़े डिवाइस जैसे स्मार्ट ग्लासेस में लॉगिन कर पाएंगे. हालांकि WhatsApp के लिए यह सिस्टम वैकल्पिक रहेगा यानी यूजर चाहें तो इसे अलग से भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
सिक्योरिटी और प्राइवेसी पर खास ध्यान
Meta ने इस नए सिस्टम में सुरक्षा को भी मजबूत किया है. यूजर्स अब Passkey जैसे एडवांस फीचर का इस्तेमाल कर सकेंगे जिसमें पासवर्ड की जगह फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या डिवाइस PIN के जरिए लॉगिन किया जा सकेगा. इसके अलावा मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) और लॉगिन अलर्ट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी जिससे किसी भी संदिग्ध एक्टिविटी की जानकारी तुरंत मिल सकेगी.
एक जगह से सभी सेटिंग्स कंट्रोल
Meta Account के जरिए यूजर्स अपने अकाउंट से जुड़ी सभी जरूरी सेटिंग्स जैसे पासवर्ड, ईमेल और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन&amp;mdash;को एक ही जगह से मैनेज कर पाएंगे. इसका फायदा यह होगा कि हर ऐप में अलग-अलग जाकर बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
पैरेंट्स के लिए भी होगा फायदेमंद
यह सिस्टम माता-पिता के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो सकता है. Meta Account के तहत Family Centre डैशबोर्ड के जरिए पैरेंट्स अपने बच्चों के अकाउंट्स पर नजर रख सकेंगे. वे Instagram, Facebook और Messenger जैसी ऐप्स की सेटिंग्स को एक ही जगह से कंट्रोल कर पाएंगे.
कब तक मिलेगा यह नया फीचर
Meta के मुताबिक, यह नया Meta Account सिस्टम धीरे-धीरे अगले साल से रोलआउट होना शुरू होगा. यानी सभी यूजर्स तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है लेकिन आने वाले महीनों में यह फीचर Meta के पूरे इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>किस मौसम में AC खाता है सबसे ज्यादा बिजली? सच जानकर आपके भी उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ AC Tips: गर्मी दो तरह की महसूस होती है एक होती है सूखी गर्मी जिसमें तापमान तो ज्यादा होता है लेकिन हवा में नमी कम रहती है. दूसरी होती है उमस भरी गर्मी जहां तापमान के साथ हवा में नमी भी ज्यादा होती है. यही नमी हमारे शरीर को ज्यादा पसीना और चिपचिपाहट महसूस कराती है जिससे असहजता बढ़ जाती है.
AC पर किस मौसम में पड़ता है ज्यादा दबाव?
अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा तापमान यानी ज्यादा बिजली खर्च. लेकिन असली खेल यहां नमी का होता है. सूखी गर्मी में AC को सिर्फ कमरे का तापमान कम करना होता है जो अपेक्षाकृत आसान काम है. वहीं, उमस भरे मौसम में AC को दो काम करने पड़ते हैं हवा को ठंडा करना और उसमें मौजूद नमी को भी कम करना. इस ज्यादा काम की वजह से AC का कंप्रेसर ज्यादा देर तक चलता है और बिजली की खपत बढ़ जाती है.
क्यों उमस में बढ़ जाता है बिजली बिल?
उमस के दौरान AC लगातार हवा से नमी निकालने में लगा रहता है. यह प्रोसेस डीह्यूमिडिफिकेशन कहलाती है. इसमें ज्यादा ऊर्जा लगती है क्योंकि AC को हवा को ठंडा करने के साथ-साथ उसमें मौजूद पानी के कणों को भी हटाना पड़ता है. यही वजह है कि कई बार तापमान कम होने के बावजूद भी AC ज्यादा बिजली खा जाता है और आपका बिजली बिल बढ़ जाता है.
सूखी गर्मी में राहत क्यों मिलती है?
सूखी गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है जिससे शरीर को थोड़ी राहत मिलती है. ऐसे में AC को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. कम नमी के कारण कूलिंग तेजी से होती है और कंप्रेसर जल्दी बंद हो जाता है जिससे बिजली की खपत कम रहती है.
कैसे कम करें AC का बिजली खर्च?
अगर आप चाहते हैं कि AC कम बिजली खाए तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखें. AC को हमेशा 24&amp;ndash;26 डिग्री के बीच सेट करें क्योंकि बहुत कम तापमान पर चलाने से बिजली ज्यादा खर्च होती है. कमरे को पूरी तरह बंद रखें ताकि ठंडी हवा बाहर न जाए. साथ ही, ड्राई मोड का इस्तेमाल उमस भरे मौसम में करें इससे नमी कम होगी और बिजली की बचत भी होगी. समय-समय पर AC की सर्विसिंग और फिल्टर की सफाई भी जरूरी है क्योंकि गंदे फिल्टर से मशीन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Jio का नया रिचार्ज प्लान: अब 84 दिनों तक मिलेगा 2GB, अनलिमिटेड कॉलिंग और OTT का मजा, जानिए पूरे बेनिफिट्स</title>
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        <description><![CDATA[ Reliance Jio Recharge Plan: अगर आप बार-बार रिचार्ज कराने से परेशान हैं और एक ऐसा प्लान चाहते हैं जो लंबा चले और हर जरूरत पूरी करे, तो यह प्लान आपके लिए खास हो सकता है. 949 रुपये का यह प्रीपेड प्लान इन दिनों काफी चर्चा में है, क्योंकि इसमें डेटा, कॉलिंग और एंटरटेनमेंट तीनों का अच्छा कॉम्बिनेशन मिलता है.
क्या-क्या मिलता है इस प्लान में?
इस प्लान के साथ आपको 84 दिनों की वैधता मिलती है यानी लगभग तीन महीने तक बार-बार रिचार्ज की झंझट खत्म. साथ ही पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग की सुविधा भी दी जाती है. डेटा की बात करें तो इसमें रोज 2GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है जो कुल मिलाकर 168GB तक पहुंच जाता है. इसके अलावा हर दिन 100 SMS भी दिए जाते हैं. यानी इंटरनेट चलाना हो, वीडियो देखना हो या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना हो आपको बार-बार सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
OTT और डिजिटल बेनिफिट्स का तड़का
यह प्लान सिर्फ कॉल और डेटा तक सीमित नहीं है. इसमें आपको 3 महीने का JioHotstar सब्सक्रिप्शन भी मिलता है जिससे आप फिल्में, वेब सीरीज और लाइव मैच का मजा ले सकते हैं. इसके अलावा JioTV का एक्सेस और JioAI Cloud जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं जो इसे और ज्यादा उपयोगी बनाती हैं. अगर आपके पास 5G फोन है और आपके इलाके में 5G नेटवर्क उपलब्ध है तो आप अनलिमिटेड 5G डेटा का भी फायदा उठा सकते हैं.
किन लोगों के लिए है ये प्लान?
यह प्लान उन लोगों के लिए सबसे सही है जो दिनभर फोन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया या वीडियो कॉलिंग. अगर आप बार-बार रिचार्ज करने से बचना चाहते हैं तो 84 दिन की वैधता काफी राहत देती है. साथ ही OTT एक्सेस होने से एंटरटेनमेंट भी हमेशा आपके पास रहता है.
एक्स्ट्रा डेटा के लिए खास पैक
अगर आपको और ज्यादा डेटा की जरूरत है तो 149 रुपये का क्रिकेट डेटा पैक भी लिया जा सकता है. इसमें 30 दिनों के लिए 10GB अतिरिक्त डेटा और 3 महीने का JioHotstar एक्सेस मिलता है जो खासकर क्रिकेट लवर्स के लिए बढ़िया ऑप्शन है.
क्या यह प्लान आपके लिए सही है?
कुल मिलाकर 949 रुपये का यह प्लान एक ऑल-इन-वन पैकेज है जिसमें कॉलिंग, भरपूर डेटा, OTT बेनिफिट्स और 5G की सुविधा शामिल है. अगर आप ऐसा प्लान चाहते हैं जो लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के काम करे तो यह ऑप्शन आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए.
Airtel का 84 दिनों वाला प्लान
Airtel ने अपने एक पॉपुलर रिचार्ज प्लान की कीमत में हल्का बदलाव किया है. पहले जो प्लान 859 रुपये में मिलता था अब उसकी कीमत बढ़ाकर 899 रुपये कर दी गई है. कंपनी ने इस बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम प्रति यूज़र कमाई (ARPU) को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है. हालांकि यह बदलाव बहुत बड़ा नहीं है और सिर्फ एक ही प्लान तक सीमित दिखता है इसलिए इसका असर आम यूजर्स की जेब पर ज्यादा भारी नहीं पड़ेगा.
अगर फायदे की बात करें तो इस प्लान में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 899 रुपये वाले इस प्लान में पहले की तरह ट्रूली अनलिमिटेड सुविधा मिलती रहेगी. यूज़र्स को लोकल, एसटीडी और रोमिंग पर अनलिमिटेड कॉलिंग का फायदा मिलेगा, साथ ही हर दिन 100 SMS और रोज 1.5GB हाई-स्पीड डेटा दिया जाएगा. इस प्लान की वैधता 84 दिनों की है. रोजाना मिलने वाला डेटा खत्म होने के बाद इंटरनेट स्पीड घटकर 64 Kbps तक रह जाएगी.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Jio, का, नया, रिचार्ज, प्लान:, अब, दिनों, तक, मिलेगा, 2GB, अनलिमिटेड, कॉलिंग, और, OTT, का, मजा, जानिए, पूरे, बेनिफिट्स</media:keywords>
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        <title>सरकार की सस्ते वॉइस प्लान की तैयारी पूरी, लेकिन क्या अब डेटा होगा महंगा?</title>
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        <description><![CDATA[ TRAI: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए एक अहम डेडलाइन तय की है. 28 अप्रैल 2026 तक सभी ऑपरेटरों को अपने टैरिफ सिस्टम में बदलाव करते हुए हर वैलिडिटी के लिए वॉइस और SMS-ओनली प्लान उपलब्ध कराने होंगे. इन प्लान्स को वेबसाइट, मोबाइल ऐप और रिटेल आउटलेट्स पर साफ तौर पर दिखाना भी जरूरी होगा. यानि उपभोक्ता के लिए जितने भी डाटा, वॉइस और SMS के bundle प्लान होते हैं उतने ही प्लान सिर्फ वॉइस कॉल के भी हों.
सस्ते होंगे प्लान?
TRAI के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब जितने भी मौजूदा डेटा वॉइस+SMS वाले बंडल प्लान हैं उन्हें उसी वैलिडिटी के बराबर अलग से वॉइस ओनली प्लान देना होगा. इन प्लान्स की कीमत भी लार्जली प्रोपोर्शनल रिडक्शन यानी डेटा के हिसाब से कम रखनी होगी.

यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि TRAI के अनुसार, बड़ी संख्या मे ऐसे&amp;nbsp; उपभोक्ता हैं, खासतौर पर बुजुर्ग, ग्रामीण और कम आय वर्ग, जिन्हें डेटा की जरूरत नही होती है लेकिन उन्हें मजबूरी में महंगे डेटा प्लान लेने पड़ते हैं.
क्या डेटा प्लान होंगे महंगे?
अब TRAI के नए प्रस्ताव ने टेलीकॉम सेक्टर में एक नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ जहां सिर्फ वॉइस कॉल के प्लान का कदम उन उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आ सकता है जो सिर्फ कॉल और SMS का इस्तेमाल करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह आशंका भी बढ़ रही है कि आने वाले समय में डेटा प्लान महंगे हो सकते हैं.
20 साल बाद टैरिफ में सीधा हस्तक्षेप
भारत में 2004 से टेलीकॉम सेक्टर में &amp;ldquo;टैरिफ फॉरबियरेंस&amp;rdquo; की नीति लागू है जिसके तहत कंपनियों को खुद अपने प्लान तय करने की आजादी दी गई थी. इसी वजह से भारत दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल डेटा बाजारों में शामिल रहा है. लेकिन अब इतने सालों बाद TRAI का यह कदम अलग है. पहली बार इतने वर्षों बाद रेगुलेटर सीधे तौर पर टैरिफ स्ट्रक्चर में बदलाव की दिशा तय करता दिख रहा है जहां कंपनियों को हर वैलिडिटी के लिए voice और SMS-ओनली प्लान देना अनिवार्य किया जा रहा है.
कंज्यूमर के लिए क्या राहत ?
TRAI का तर्क साफ है, देश में बड़ी संख्या में ऐसे यूजर्स हैं जिन्हें डेटा की जरूरत नहीं है लेकिन उन्हें मजबूरी में डेटा वाले महंगे प्लान लेने पड़ते हैं. अगर यह नियम लागू होता है तो,

उपभोक्ता अपनी जरूरत के हिसाब से सस्ता प्लान चुन पाएंगे
बुजुर्ग, ग्रामीण और फीचर फोन यूजर्स को राहत मिलेगी
&amp;ldquo;जबर्दस्ती डेटा खरीदने&amp;rdquo; की समस्या कम होगी

बढ़ सकती है जेब पर मार
लेकिन यहीं पर कहानी पलटती है. टेलीकॉम इंडस्ट्री का मॉडल &amp;ldquo;बंडल प्राइसिंग&amp;rdquo; पर चलता है जहां डेटा से होने वाली कमाई वॉइस सर्विस को सस्ता बनाए रखती है. अगर वॉइस और डेटा पूरी तरह अलग हो जाते हैं तो कंपनियां डेटा प्लान की कीमत बढ़ा सकती हैं. ज्यादातर यूजर्स जो डेटा + कॉल दोनों इस्तेमाल करते हैं उनके लिए कुल खर्च बढ़ सकता है. सस्ता प्लान कुछ लोगों के लिए राहत बनेगा लेकिन बहुसंख्यक यूजर्स के लिए महंगा सौदा भी साबित हो सकता है.
फॉरबियरेंस मॉडल पर भी उठे सवाल
TRAI का यह कदम उस नीति से अलग माना जा रहा है जिसने भारत को दुनिया के सबसे सस्ते टेलीकॉम बाजारों में शामिल किया. अब सवाल उठ रहा है कि क्या ज्यादा रेगुलेशन से

कंपनियों की प्राइस तय करने की आजादी कम होगी
मार्केट में इनोवेशन पर असर पड़ेगा
और लंबी अवधि में कीमतें स्थिर रहने के बजाय बढ़ सकती हैं

अब एक्सपर्ट्स के मुताबिक चिंता यह है कि अगर डेटा प्लान महंगे होते हैं तो इसका असर देश के डिजिटल विस्तार पर पड़ सकता है. ऐसे में अगर कंपनियों की कमाई पर दबाव आता है तो नेटवर्क निवेश और विस्तार की रफ्तार धीमी हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>ये 5 Apps बना देंगे आपके Smartphone को सिक्योर! हैकर्स के भी छूट जाएंगे पसीने, चेक करें लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Security Apps: आज के समय में हमारा स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग या चैटिंग का साधन नहीं रहा बल्कि इसमें हमारी निजी जानकारी का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है. Instagram से लेकर UPI और आधार जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट तक सब कुछ फोन में ही सेव रहता है. ऐसे में डेटा को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी हो जाता है ताकि हैकिंग या फ्रॉड से बचा जा सके. अगर आप अपने फोन में एक्स्ट्रा सिक्योरिटी चाहते हैं तो कुछ भरोसेमंद ऐप्स आपकी काफी मदद कर सकते हैं.
Bitdefender Mobile Security
Bitdefender Mobile Security एक पावरफुल सिक्योरिटी ऐप है जो आपके स्मार्टफोन को वायरस, मालवेयर और ऑनलाइन खतरों से बचाता है. इसकी खास बात यह है कि इसमें कॉल ब्लॉकिंग फीचर भी मिलता है जिससे स्पैम और फ्रॉड कॉल्स अपने आप पहचानकर ब्लॉक हो जाते हैं.
McAfee Security
McAfee Security आपके फोन को सिक्योरिटी ब्रेच से बचाने के लिए एडवांस प्रोटेक्शन देता है. यह ऐप इंटरनेट ब्राउज़िंग को सुरक्षित बनाता है और स्कैमर्स से दूर रखने में मदद करता है. साथ ही, यह डार्क वेब मॉनिटरिंग और Wi-Fi स्कैन जैसे फीचर्स भी ऑफर करता है जिससे आप ऑनलाइन ज्यादा सुरक्षित रह सकते हैं.
Norton 360
Norton 360 एक ऑल-राउंडर ऐप है जिसमें एंटीवायरस, VPN, एड ब्लॉकर और ऐप एडवाइजर जैसे फीचर्स मिलते हैं. यह ऐप आपको किसी भी संदिग्ध ऐप को इंस्टॉल करने से पहले चेतावनी देता है और आपकी प्राइवेसी को लगातार मॉनिटर करता रहता है.
Malwarebytes
Malwarebytes अपने आसान इंटरफेस और मजबूत सिक्योरिटी फीचर्स के लिए जाना जाता है. यह ऐप आपके फोन को मालवेयर से बचाने के साथ-साथ डेटा चोरी और फ्रॉड एक्टिविटी को भी रोकने में मदद करता है जिससे आप बिना टेंशन के बैंकिंग या ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते हैं.
Mobile Security &amp;amp; Antivirus
Mobile Security &amp;amp; Antivirus ऐप आपके फोन को थर्ड-पार्टी खतरों से बचाने में मदद करता है. यह न सिर्फ डेटा चोरी को रोकता है बल्कि सोशल मीडिया प्राइवेसी चेक और पेरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर्स भी देता है जिससे सिक्योरिटी और मजबूत हो जाती है. स्मार्टफोन की सुरक्षा अब एक ऑप्शन नहीं बल्कि जरूरत बन चुकी है. सही ऐप्स का इस्तेमाल करके आप अपने डेटा को हैकर्स और ऑनलाइन खतरों से काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 08:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>कैफे या पब्लिक जगह पर करते हैं Wi&amp;Fi का इस्तेमाल? जानिए कैसे खतरे में पड़ सकता है आपका डेटा, लॉगिन करने से पहले जान लें ये ट्रिक्स</title>
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        <description><![CDATA[ कैफे या पब्लिक जगह पर करते हैं Wi-Fi का इस्तेमाल? जानिए कैसे खतरे में पड़ सकता है आपका डेटा, लॉगिन करने से पहले जान लें ये ट्रिक्स ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कैफे, या, पब्लिक, जगह, पर, करते, हैं, Wi-Fi, का, इस्तेमाल, जानिए, कैसे, खतरे, में, पड़, सकता, है, आपका, डेटा, लॉगिन, करने, से, पहले, जान, लें, ये, ट्रिक्स</media:keywords>
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        <title>Cooler Tips: इस गर्मी कूलर में लगवाएं ये सस्ता डिवाइस, बड़ा खर्चा बचा देगा</title>
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        <description><![CDATA[ Air Cooler Tips: तपती गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है और अब लोगों ने कूलर यूज करना शुरू कर दिया है. कूलर को लगातार पानी की जरूरत रहती है. अगर कूलर के टैंक में पानी खत्म हो जाए और पंप चलता रहे तो यह जल सकता है. रात को सोते समय इस पर नजर रखना मुश्किल होता है. अगर यह बिना पानी के चलता रहेगा तो इसके खराब होने का डर है. इस पर नजर रखने के लिए आप एक सस्ते डिवाइस का यूज कर सकते हैं. ड्राई रन प्रोटेक्टर नाम से आने वाला यह डिवाइस पंप जलने का खतरा टाल देता है, जिससे आपका बड़ा खर्चा बच जाएगा. आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करता है.
कैसे काम करता है ड्राई रन प्रोटेक्टर?
रिपोर्ट के अनुसार, इस डिवाइस में एक सेंसर और एक कंट्रोलर लगा होता है. सेंसर लगातार कूलर के टैंक में पानी के लेवल को मापता रहता है. जैसे ही इसे लगेगा कि पानी एक स्तर से कम हो गया है तो यह कंट्रोल के पास सिग्नल भेज देगा. सिग्नल मिलते ही कंट्रोलर पंप तक जाने वाली बिजली सप्लाई को कट कर देगा. इससे टैंक में पानी कम होने पर पंप अपने आप बंद हो जाएगा. इस तरह पानी खत्म होने के बाद भी लगातार चलकर पंप के जलने का खतरा नहीं रहेगा.&amp;nbsp;
कितनी आएगी लागत?
इस डिवाइस की खास बात यह है कि इसके लिए आपको ज्यादा पैसा खर्च करने की भी जरूरत नहीं है. यह 300 रुपये तक आसानी से मिल जाएगा. अगर आप इसे खुद इंस्टॉल करते हैं तो इंस्टॉलेशन चार्ज भी बचा सकते हैं. इस तरह देखा जाए तो लगभग 300 रुपये में आपको ऐसा डिवाइस मिल रहा है, जो पंप को रिप्लेस कराने का खर्चा बचा देगा.&amp;nbsp;
कहां रखने से ज्यादा ठंडी हवा देगा कूलर?
आपके फ्लोर के हिसाब से कूलर की प्लेसमेंट बहुत जरूरी है. अगर आप ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं तो कूलर को कमरे के अंदर रख सकते हैं. ग्राउंड फ्लोर पर टेंपरेचर कम होता है, इसलिए यह आसानी से ठंडी हवा देगा. वहीं अगर आप ऊपर के फ्लोर पर रहते हैं तो आपको कूलर कमरे के बाहर दरवाजे या खिड़की के पास रखना चाहिए. इससे यह बाहर की हवा को खींचकर ठंडा कर देगा. अगर आप ऊपर के कमरों में रखकर कूलर यूज करेंगे तो यह ठंडी हवा नहीं दे पाएगा और कमरे में उमस भी हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Cooler, Tips:, इस, गर्मी, कूलर, में, लगवाएं, ये, सस्ता, डिवाइस, बड़ा, खर्चा, बचा, देगा</media:keywords>
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        <title>अब बच्चों की हर AI चैट पर नजर रखेंगे पैरेंट्स! Meta के नए फीचर से बढ़ेगी डिजिटल सेफ्टी, जानिए कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Meta AI Feature: Mark Zuckerberg की कंपनी Meta ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है. अब माता-पिता यह देख सकेंगे कि उनके बच्चे Meta AI से किन-किन विषयों पर सवाल पूछ रहे हैं. यह नया फीचर Instagram, Facebook और Messenger पर लागू किया गया है. इसका मकसद पैरेंट्स को ज्यादा कंट्रोल देना है ताकि वे अपने बच्चों की डिजिटल एक्टिविटी को बेहतर समझ सकें.
कैसे काम करेगा नया फीचर
Meta ने इस अपडेट के तहत Insights नाम का एक नया टैब जोड़ा है जो सुपरविजन हब का हिस्सा है. इस फीचर की शुरुआत फिलहाल United Kingdom, United States, Canada, Brazil और Australia में की गई है और जल्द ही इसे दुनिया भर में जारी किया जाएगा. इस Insights टैब के जरिए माता-पिता यह जान पाएंगे कि उनके बच्चे Meta AI के साथ किन सामान्य विषयों पर बातचीत कर रहे हैं.
इसमें हेल्थ, वेलबीइंग, ट्रैवल, लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट और पढ़ाई जैसे टॉपिक्स शामिल हो सकते हैं. अगर पैरेंट्स चाहें तो वे हर कैटेगरी पर क्लिक करके उससे जुड़े सब-टॉपिक्स की जानकारी भी देख सकते हैं जैसे लाइफस्टाइल के अंदर फैशन या खाने-पीने से जुड़े विषय.
प्राइवेसी का भी रखा गया ध्यान
Meta का कहना है कि यह फीचर बच्चों की प्राइवेसी को ध्यान में रखकर बनाया गया है. पैरेंट्स को बच्चों की पूरी चैट नहीं दिखाई जाएगी बल्कि सिर्फ यह बताया जाएगा कि उन्होंने किन विषयों पर बातचीत की. इससे माता-पिता को बच्चों की रुचियों और चिंताओं का अंदाजा लग सकेगा बिना उनकी निजी बातचीत में सीधे दखल दिए.
कंपनी के अनुसार, यह अपडेट पैरेंटल कंट्रोल को और मजबूत बनाता है. पहले से मौजूद फीचर्स की तरह ही अब भी पैरेंट्स स्क्रीन टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं ब्रेक शेड्यूल कर सकते हैं और यह भी देख सकते हैं कि उनके बच्चे पिछले कुछ दिनों में किन लोगों से बात कर रहे थे.
किशोरों की सुरक्षा पर Meta का फोकस
Meta पिछले कुछ समय से टीनएजर्स की सुरक्षा को लेकर लगातार कदम उठा रहा है. कंपनी ने पहले भी ऐसे फीचर्स लाने की योजना बनाई थी जिनसे पैरेंट्स AI से जुड़े कुछ कंटेंट या कैरेक्टर्स को ब्लॉक कर सकें.
इसी साल की शुरुआत में Meta ने कुछ AI कैरेक्टर्स पर रोक लगा दी थी खासकर वे जो मशहूर हस्तियों की तरह व्यवहार करते थे जैसे Paris Hilton और Snoop Dogg. यह फैसला उस समय आया जब कंपनी पर आरोप लगे थे कि वह किशोरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है. Meta का यह नया फीचर डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है जिससे पैरेंट्स को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर बेहतर नजर रखने में मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, बच्चों, की, हर, चैट, पर, नजर, रखेंगे, पैरेंट्स, Meta, के, नए, फीचर, से, बढ़ेगी, डिजिटल, सेफ्टी, जानिए, कैसे</media:keywords>
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        <title>पासवर्ड हो गए &amp;apos;रिटायर&amp;apos;, अब क्या यूज करना रहेगा सेफ? टॉप इंटेलीजेंस एजेंसी ने सब बता दिया</title>
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        <description><![CDATA[ Password Vs Passkey: अगर आप अपने डिवाइस या अकाउंट्स की सेफ्टी के लिए पासवर्ड यूज कर रहे हैं तो यह तरीका पुराना हो गया है. 1961 में शुरू हुए पासवर्ड अब &#039;रिटायर&#039; हो गए हैं. यूके के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (NCSC) ने कहा है कि अब सेफ रहने के लिए पासवर्ड यूज करने की सलाह नहीं देगी. यह पहली बार है, जब किसी बड़ी इंटेलीजेंस एजेंसी ने पासवर्ड को रिटायर कर दिया है. NCSC ने कहा है कि अब लोगों को ऑनलाइन सेफ्टी के लिए पासकी (Passkey) यूज करनी चाहिए. आइए जानते हैं कि पासकी क्या होती है और क्यों इसके इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है.&amp;nbsp;
क्या होती है Passkey?
एक Public Key और Private Key मिलकर Passkey क्रिएट करती हैं. यानी Passkey आपके फोन, लैपटॉप और दूसरे डिवाइस की फिजिकल सिक्योरिटी Key से डिजिटल क्रेडेंशियल का एक यूनीक पेयर क्रिएट करेगी. इनमें से एक आपके डिवाइस पर स्टोर रहेगा, जबकि दूसरा वेबसाइट आदि पर शेयर किया जाता है. इसके बाद आपका डिवाइस फिंगरप्रिंट, फेस स्कैन या स्क्रीन लॉक के जरिए आपकी आइडेंटिटी को ऑथेंटिकेट करेगा. इसके लिए आपको न तो कोई पासवर्ड याद रखने की जरूरत है और न ही कुछ टाइप करने की जरूरत पड़ेगी.
पासवर्ड से कैसे बेहतर है Passkey?

NCSC का कहना है कि पासकी पासवर्ड की तुलना में फास्ट है. पासवर्ड टाइप करने की तुलना में पासकी से आठ गुना तेजी से लॉग-इन किया जा सकता है.
पासकी का अंदाजा लगाना मुश्किल है. पासवर्ड का अंदाया लगाया जा सकता है, लेकिन पासकी के मामले में ऐसा नहीं हो सकता. इसलिए फिशिंग स्कैम का डर खत्म हो जाता है.
NCSC का मानना है कि पासकी में OTP की जरूरत नहीं होती. इसलिए कंपनियां मैसेज भेजने में आने वाली करोड़ों की लागत बचा सकती है.&amp;nbsp;
स्ट्रॉन्ग पासवर्ड में कई नंबर, लैटर और स्पेशल कैरेक्टर यूज करने पड़ते हैं, जिन्हें याद रखना मुश्किल हो सकता है. पासकी इस झंझट को भी दूर कर देती है. इसमें कुछ याद रखने की जरूरत नहीं होती.

कंपनियां भी दे रही हैं पासकी पर जोर
NCSC के अलावा अब कई कंपनियां भी पासकी पर जोर देने लगी है. दरअसल, साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच पासवर्ड से पूरी सेफ्टी नहीं मिल रही है. इसलिए अब लॉग-इन के नए तरीके को आजमाया जा रहा है. माइक्रोसॉफ्ट ने काफी समय पहले अपनी ऑथेंटिकेटर ऐप से पासवर्ड सपोर्ट हटाकर उसमें पासकी सपोर्ट जोड़ा है. इसी तरह अमेजन भी पासकी यूज करने पर जोर दे रही है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पासवर्ड, हो, गए, रिटायर, अब, क्या, यूज, करना, रहेगा, सेफ, टॉप, इंटेलीजेंस, एजेंसी, ने, सब, बता, दिया</media:keywords>
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        <description><![CDATA[ Wearable Sensor: कई सालों से डॉक्टर शरीर की स्थिति समझने के लिए ब्लड टेस्ट पर निर्भर रहे हैं. इन टेस्ट्स से यह पता चलता है कि लिवर और किडनी जैसे अंग ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, और दवाइयों का असर कैसा है. लेकिन इनकी सबसे बड़ी कमी यह है कि ये सिर्फ एक समय की जानकारी देते हैं जिससे कई अहम बदलाव नजरअंदाज हो सकते हैं.
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कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजेलिस के वैज्ञानिकों ने एक नई दिशा दिखाई है. उन्होंने एक छोटा wearable डिवाइस तैयार किया है जो त्वचा के जरिए शरीर के जरूरी तत्वों को लगातार ट्रैक कर सकता है. यह डिवाइस पुराने टेस्ट्स की तरह एक बार की जानकारी देने के बजाय लगातार निगरानी करता है जिससे शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव भी समय रहते पकड़ में आ सकते हैं.
माइक्रोनीडल तकनीक कैसे करती है काम?
इस सेंसर में बेहद छोटे-छोटे माइक्रोनीडल्स का इस्तेमाल किया गया है जो त्वचा के नीचे हल्के से फिट हो जाते हैं और किसी तरह की तकलीफ भी नहीं देते. ये माइक्रोनीडल्स खास तरह के अणुओं को पहचानते हैं और उनके संपर्क में आने पर इलेक्ट्रिकल सिग्नल बनाते हैं जिससे शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती रहती है.
ज्यादा संवेदनशील और लंबे समय तक सटीक
इस डिवाइस की खासियत इसका नया डिजाइन है जिसमें बहुत छोटे-छोटे छिद्र बनाए गए हैं. इससे यह सेंसर पहले के मुकाबले ज्यादा संवेदनशील हो गया है और कई दिनों तक बिना सटीकता खोए काम कर सकता है. यानी एक बार लगाने के बाद यह लगातार भरोसेमंद डेटा देता रहता है.
ऑर्गन की हालत का पहले ही पता
वैज्ञानिकों ने इस डिवाइस को जानवरों पर टेस्ट किया जहां उन्होंने अलग-अलग दवाओं के शरीर में व्यवहार को ट्रैक किया. जब दवाएं शरीर में ज्यादा समय तक रहीं, तो यह संकेत मिला कि संबंधित अंग जैसे लिवर या किडनी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. सबसे खास बात यह रही कि यह सेंसर उन समस्याओं को भी पहले पहचान सका जिन्हें सामान्य ब्लड टेस्ट नहीं पकड़ पाए थे.
इलाज में होगा बड़ा फायदा
अगर बीमारी या अंगों की खराबी का पता पहले ही चल जाए तो डॉक्टर समय रहते इलाज में बदलाव कर सकते हैं. इससे गंभीर साइड इफेक्ट्स से बचा जा सकता है. यह खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद होगा जो भारी दवाइयां जैसे कीमोथेरेपी या एंटीबायोटिक्स लेते हैं क्योंकि ये दवाएं अंगों पर असर डाल सकती हैं.
भविष्य में और भी स्मार्ट बन सकता है यह डिवाइस
आने वाले समय में इस तकनीक को और विकसित किया जा सकता है. एक ही पैच में कई सेंसर जोड़े जा सकते हैं जो अलग-अलग तत्वों को ट्रैक करेंगे. इससे डॉक्टर को मरीज की हेल्थ की पूरी और रियल-टाइम तस्वीर मिल सकेगी.
अभी बाकी है इंसानों पर परीक्षण
हालांकि यह तकनीक काफी उम्मीद जगाती है लेकिन अभी इसे इंसानों पर पूरी तरह टेस्ट किया जाना बाकी है. साथ ही लंबे समय तक इसके सुरक्षित और सटीक बने रहने की भी जांच जरूरी है.
हेल्थकेयर में आने वाला बड़ा बदलाव
यह नई तकनीक हेल्थकेयर के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है. अब सिर्फ समय-समय पर टेस्ट कराने के बजाय लगातार निगरानी संभव हो पाएगी. इससे बीमारियों का जल्दी पता लगेगा, इलाज बेहतर होगा और मरीजों की सेहत में भी सुधार आएगा. यह wearable सेंसर हमें एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा रहा है जहां इलाज ज्यादा व्यक्तिगत, सटीक और सुरक्षित होगा.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: घंटो तक एसी चलाने के बाद भी ठंडा नहीं हो रहा कमरा तो हो सकती हैं ये दिक्कतें, समाधान भी जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ AC Cooling Issue: गर्मी के दौरान देश के कई हिस्सों में तापमान 50 डिग्री के पास पहुंच जाता है और कूलर और पंखे सब हाथ खड़े कर देते हैं. ऐसी गर्मी में AC काम आता है, लेकिन क्या हो अगर AC ही काम करना बंद कर दे? दरअसल, घंटों चलने के बाद भी जब AC कमरे को ठंडा नहीं कर पाता तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. कुछ लोग इसे AC की खराबी समझ लेते हैं और इसे रिप्लेस करने पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन वजहों से AC कूलिंग देना बंद कर सकता है.
एयर फिल्टर का ब्लॉक हो जाना
अगर AC के फिल्टर धूल-मिट्टी जमने से ब्लॉक हो गए हैं तो इससे कूलिंग पर असर पड़ता है. दरअसल, फिल्टर पर धूल जमने के कारण एयरफ्लो ब्लॉक हो जाता है और AC आपके कमरे की गर्मी को बाहर नहीं खींच पाता. अगर आप ऐसी जगह पर रहते हैं, जहां धूल-मिट्टी ज्यादा आती है तो फिल्टर ब्लॉक होने की संभावना और बढ़ जाती है. इसलिए रेगुलर AC के फिल्टर साफ करते रहें. इससे आपको बेहतर कूलिंग मिलेगी.
गैस कम हो जाना
अगर एसी की गैस कम हो गई है तो भी यह कूलिंग में दिक्कत कर सकती है. अगर AC ऑन करने के बाद इसकी कॉइल पर बर्फ जम गई है तो यह दिखाता है कि AC में गैस खत्म हो गई है. इसके अलावा बबल टेस्ट से गैस लीक का पता लगाया जा सकता है. अगर गैस कम है या लीक हो रही है तो टेक्नीशियन को बुलाकर इसकी मरम्मत करवा लें.
कंप्रेशर की दिक्कत
AC के ऑपरेशन में कंप्रेशर एक बहुत जरूरी यूनिट होती है. अगर इसमें कोई गड़बड़ आ जाए तो कूलिंग पर असर पड़ सकता है. अगर आपको लगता है कि कंप्रेशर में खराबी आ गई है तो टेक्नीशियन से ही इसे चेक करवाना चाहिए.&amp;nbsp;
कमरे के हिसाब से AC छोटा होना
कमरे के हिसाब से AC का साइज सही होना जरूरी है. अगर कमरा बड़ा है और उसमें छोटा AC लगा है तो यह ठीक तरीके से कूलिंग नहीं कर पाएगा. इसलिए हमेशा कमरे के साइज के हिसाब से AC का चुनाव करना चाहिए.&amp;nbsp;
कहीं कूलिंग कॉइल में तो गड़बड़ नहीं!
कमरे को ठंडा करने का भार AC की कूलिंग कॉइल पर होता है. अगर इस पर गंदगी जमा हो जाए या इसमें कोई खराबी आ जाए तो कूलिंग कम हो सकती है. इसके खराब होने पर AC से हवा तो मिलेगी, लेकिन यह कूलिंग नहीं देगी.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>AI स्मार्टफोन! अब पहले से ज्यादा स्मार्ट, तेज और समझदार बन चुका है आपका फोन, जानिए कैसे बदल रही पूरी दुनिया</title>
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        <description><![CDATA[ AI स्मार्टफोन! अब पहले से ज्यादा स्मार्ट, तेज और समझदार बन चुका है आपका फोन, जानिए कैसे बदल रही पूरी दुनिया ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>क्या ऑफलाइन हो जाएगी दुनिया? ईरान ने दी समुद्र से गुजरने वाली इंटरनेट केबल को लेकर धमकी</title>
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        <description><![CDATA[ IRGC Threats To Undersea Cable: ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई पर पहले ही असर पड़ा हुआ है और अब इंटरनेट पर भी खतरा मंडरा रहा है. ईरान ने अब धमकी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली इंटरनेट केबल्स को निशाना बनाया जा सकता है. इन्हें जानबूझकर या गलती से नुकसान पहुंच सकता है. ईरान की IRGC से जुड़ी समाचार एजेंसी Tasnim की रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट सिर्फ एनर्जी चेकप्वाइंट ही नहीं है बल्कि UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में इंटरनेट पहुंचाने वाली केबल्स का एक क्रिटिकल कॉरिडोर है. बता दें कि युद्ध की शुरुआत के बाद से ही समुद्र में बिछीं इंटरनेट केबल्स की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है.
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती हैं कई केबल्स
Tasnim की रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट से कई बड़े केबल सिस्टम गुजरते हैं और कई देश मैरीटाइम इंटरनेट रूट के लिए ईरान पर डिपेंड है. इस रिपोर्ट को किसी टेक्नीकल एक्सप्लेनर से ज्यादा एक धमकी के तौर पर लिया जा रहा है. इसमें बताया गया है कि इन केबल्स, लैंडिग स्टेशन और डेटा हब्स को युद्ध के दौरान दबाव बनाने के लिए भी यूज किया जा सकता है. रिपोर्ट में यूएई और बहरीन जैसे देशों में मौजूद डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की भी बात कही गई है, जिन्हें नुकसान पहुंचने से इकोनमी के साथ-साथ कम्युनिकेशन सिस्टम को भी खतरा हो सकता है.
वॉर्निंग के बाद बढ़ा डर
बता दें कि ईरान की इस धमकी के बाद इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचाए जाने का खतरा बढ़ गया है. युद्ध में पहले ही ईरान कई डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना चुका है. ईरान ने यूएई और बहरीन में अमेजन वेब सर्विसेस के सेंटर को ड्रोन स्ट्राइक में नुकसान पहुंचाया था.&amp;nbsp;
युद्ध में केबल डैमेज होने का कितना खतरा?
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली इंटरनेट केबल्स इंटरनेट ट्रैफिक का एक बड़ा हिस्सा हैंडल करती हैं. होर्मुज स्ट्रेट में कई जगह पर समुद्र की गहराई केवल 200 फीट है. इस गहराई पर बिछी इंटरनेट केबल्स को एक्सेस करना और डैमेज करना काफी आसान है. अगर गलती से भी ये डैमेज हो जाती हैं तो इसका नुकसान काफी ज्यादा हो जाएगा. युद्ध के कारण इन्हें रिपेयर करने में काफी वक्त लग सकता है. युद्ध के चलते इन्हें रिपेयर करने वाली जहाजों का इस समय होर्मुज स्ट्रेट के पास जाना खतरनाक भी हो सकता है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>मोबाइल ऐप्स पर दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं भारतीय यूजर्स, विदेशी कंपनियों के पास जा रहा ज्यादातर पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ India&amp;rsquo;s Mobile App Market: भारत में अब लोग मोबाइल ऐप्स पर दिल खोलकर पैसा खर्च कर रहे हैं. यही कारण है कि भारत की मोबाइल ऐप मार्केट रिकॉर्ड रेवेन्यू जनरेट कर रही है. एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल की पहली तिमाही में इन-ऐप परचेज 300 मिलियन डॉलर को पार कर गई है. सालाना आधार पर 33 प्रतिशत का इजाफा है. यानी अब लोग मोबाइल ऐप्स के प्रीमियम सब्सक्रिप्शन या फीचर्स को अनलॉक करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं. हालांकि, इस रेवेन्यू का ज्यादातर हिस्सा विदेशी कंपनियों के पास जा रहा है.&amp;nbsp;
किन ऐप्स पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं भारतीय यूजर्स?
सेंसरटावर की रिपोर्ट के मुताबिक, पहली तिमाही में नॉन-गेमिंग ऐप्स ने इन-ऐप परचेज के जरिए 200 मिलियन डॉलर की आमदनी की है, जो पिछले साल की पहली तिमाही की तुलना में 44 प्रतिशत ज्यादा है. सबसे ज्यादा रेवेन्यू कमाने वाली ऐप्स में गूगल वन, फेसबुक, चैटजीपीटी, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, सोनी लिव, क्रंचीरोल, जियोहॉटस्टार और अमेजन प्राइम वीडियो शामिल हैं. वहीं सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाली ऐप्स में चैटजीपीटी, इंस्टाग्राम, फ्रीरील्स, स्टोरीटीवी, जियोहॉटस्टार, मीशो, फ्लिपकार्ट, फेसबुक, फोनपे और कुकु टीवी टॉप 10 में शामिल हैं. सालाना आधार पर जनरेटिव एआई ऐप्स के डाउनलोड लगभग 70 प्रतिशत तक बढ़े हैं. चैटजीपीटी पिछले काफी समय से सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाली ऐप बनी हुई है.
इस साल इतने रेवेन्यू की उम्मीद
2021 में भारत में इन-ऐप रेवेन्यू 510 मिलियन डॉलर था, जो पिछले साल बढ़कर 1 बिलियन डॉलर के पार चला गया और इस साल यह 1.25 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है. हालांकि, डाउनलोड की संख्या अब लगभग 25 बिलियन पर आकर स्टेबल हो गई है, लेकिन ऐप्स पर बिताया जाने वाला टाइम लगातार बढ़ रहा है. यह दिखाता है कि लोग अब ऐप्स के साथ ज्यादा इंगेज कर रहे हैं और डिजिटल सर्विसेस के लिए पैसा देने के लिए भी तैयार हैं.
ग्लोबल मार्केट के मुकाबले भारत में इन-ऐप परचेज काफी कम
इन-ऐप परचेज में इस बढ़ोतरी के बावजूद भारत ग्लोबल मार्केट में काफी पीछे है. भारत में मोबाइल ऐप्स हर डाउनलोड के बदले केवल 0.03 डॉलर की कमाई करती है, जबकि साउथ-ईस्ट एशिया और लैटिन अमेरिका में कंपनियों को हर डाउनलोड के बदले 0.20 डॉलर तक की कमाई होती है. इसका मतलब है कि भारत के यूजर्स कई दूसरी मार्केट की तुलना में ऐप्स पर कम पैसे खर्च कर रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>एयर पॉल्यूशन से बनेगी बिजली, वैज्ञानिकों ने तैयार की कमाल की &amp;apos;गैस बैटरी&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ Gas Battery: वैज्ञानिकों ने कमाल करते हुए एक नया डिवाइस बना लिया है, जो एयर पॉल्यूशन को बिजली में बदल सकता है. इस डिवाइस को गैस कैप्चर एंड इलेक्ट्रिसिटी जनरेटर (GCEC) नाम दिया गया है. यह कार्बन डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड जैसी गैसों को कैप्चर कर उन्हें यूजेबल एनर्जी में बदल देता है. अगर आसान भाषा में समझा जाए तो यह एक गैस बैटरी है, जो गैस की मदद से बिजली पैदा करेगी. यह डिवाइस क्लाइमेट चेंज से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. यह न सिर्फ हवा से प्रदूषण को खत्म कर देगा बल्कि उसे बिजली जैसे एक वैल्यूबल रिसोर्स में भी बदल देगा.&amp;nbsp;
इस डिवाइस में क्या नया है?
हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को कैप्चर, यूटिलाइज और स्टोर करने की टेक्नोलॉजी पहले से मौजूद है. यह टेक्नोलॉजी इस जहरीली हवा को सोखकर स्टोर कर लेती है, जिससे यह वायुमंडल में प्रवेश नहीं कर पाती, लेकिन इस टेक्नोलॉजी को ऑपरेट करने के लिए काफी एनर्जी की जरूरत पड़ती है. इस कारण इसकी एफिशिएंसी पर भी सवाल उठते हैं और इसे यूज करना महंगा भी है. अब नई गैस बैटरी ने यह पूरा गेम ही बदल दिया है. यह गैस कैप्चर करने के लिए एनर्जी यूज करने की बजाय इस प्रोसेस से बिजली पैदा कर रही है.
कैसे काम करती है गैस बैटरी?
कार्बन डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड जैसे पॉल्यूटेंट इस डिवाइस के कॉन्टैक्ट में आएंगे, वो इसके सरफेस से चिपक जाएंगे. इससे डिवाइस के अंदर चार्ज्ड पार्टिकल्स का मूवमेंट शुरू हो जाएगा. इससे बिना किसी एक्सटर्नल पावर सोर्स के इलेक्ट्रिसिटी का एक स्टेबल फ्लो शुरू हो जाएगा. इस डिवाइस को कॉर्बन बेस्ड मैटेरियल और हाइड्रोजेल से मिलाकर बनाया गया है. इस डिवाइस में पॉल्यूशन ही एक फ्यूल की तरह काम करता है, जिसकी मदद से बिजली पैदा होती रहती है.
कहां यूज हो सकती है गैस बैटरी?
इस गैस बैटरी को उन डिवाइसेस को पावर देने के लिए यूज किया जा सकता है, जिन्हें बहुत कम एनर्जी की जरूरत होती है. यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेस को चलाने में भी काम आ सकती है, जिन्हें कम बिजली की जरूरत पड़ती है, लेकिन इनका यूज बढ़ता जा रहा है. इंडस्ट्री की बात करें तो ज्यादा धुंआ छोड़ने वाले प्लांट्स में इसका इस्तेमाल हो सकता है. यह प्रदूषण हटाने के साथ-साथ वहां एक्स्ट्रा पावर भी जनरेट करेगी. रिसर्चर का मानना है कि इससे सस्टेनेबल एनर्जी सिस्टम बनाने में मदद मिल सकती है और यह देशों को उनके कार्बन न्यूट्रल टारगेट को हासिल करने में हेल्प कर सकती है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>ये क्या! iPhone 18 को अपग्रेड करने की बजाय डाउनग्रेड कर सकती है ऐप्पल, हैरान कर देगी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Leaks: ऐप्पल की अपकमिंग आईफोन 18 सीरीज का बेस वेरिएंट कई मामलों में यूजर्स को निराश कर सकता है. ताजा लीक्स से पता चला है कि ऐप्पल इसे अपग्रेड करने की बजाय डाउनग्रेड कर सकती है. यानी iPhone 18 में करंट मॉडल iPhone 17 से कम फीचर्स मिलेंगे. बताया जा रहा है कि कंपनी इसकी कीमत में बढ़ोतरी को रोकने के लिए इसके फीचर्स में कटौती कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो किफायती आईफोन से अपग्रेड करने वाले यूजर्स के लिए यह एक बड़ा झटका होगा. आइए जानते हैं कि इस बारे में और क्या-क्या जानकारी सामने आई है.&amp;nbsp;
iPhone 18 के ये स्पेसिफिकेशंस हो सकते हैं कम
Fixed Focus Digital की लीक के मुताबिक, iPhone 18 को डिस्प्ले और परफॉर्मेंस के मामले में डाउनग्रेड किया जा सकता है. आईफोन 17 में 6.3 इंच का प्रोमोशन डिस्प्ले मिलता है, जो 3,000 निट्स पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. बताया जा रहा है कि अपकमिंग मॉडल में ब्राइटनेस को कम किया जा सकता है या डिस्प्ले के दूसरे स्पेसिफिकेशंस में कटौती की जा सकती है.&amp;nbsp;
चिपसेट से भी करना पड़ सकता है समझौता
परफॉर्मेंस के मामले में भी ग्राहकों को कॉम्प्रोमाइज करना पड़ सकता है. आईफोन 17 में जहां 5-कोर GPU वाला A19 चिपसेट लगा हुआ है, वहीं आईफोन 18 में 4-कोर GPU वाला चिपसेट मिलने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो यह परफॉर्मेंस के मामले में ऐप्पल के सबसे किफायती मॉडल iPhone 17e के बराबर आ जाएगा. ऐसे भी कयास हैं कि इस बदलाव को कुछ हद तक छिपाने के लिए ऐप्पल चिपसेट के नाम में भी बदलाव कर सकती है.&amp;nbsp;
ये हो सकते हैं कारण
कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मेमोरी चिप्स की शॉर्टेज का असर अब ऐप्पल पर भी पड़ने लगा है. कंपनी ने आईफोन 17 सीरीज की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं किया था. इस बार भी आईफोन 18 को स्टेबल रखने के लिए ऐप्पल इसके फीचर्स कर सकती है. हालांकि, अभी तक इसकी ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है और ये महज कयास हैं.&amp;nbsp;
कब लॉन्च होगा आईफोन 18?
ऐप्पल अब तक सितंबर में अपनी लाइनअप के सारे आईफोन लॉन्च करती आई है, लेकिन इस बार लॉन्च शेड्यूल में बदलाव है. सितंबर में आईफोन 18 प्रो मॉडल्स और फोल्डेबल आईफोन को लॉन्च किया जाएगा. इस सीरीज के बेस मॉडल आईफोन 18, किफायती वेरिएंट आईफोन 18e और स्लिम वर्जन आईफोन एयर 2 को अगले साल फरवरी-मार्च में लॉन्च किए जाने की प्लानिंग है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ये, क्या, iPhone, को, अपग्रेड, करने, की, बजाय, डाउनग्रेड, कर, सकती, है, ऐप्पल, हैरान, कर, देगी, वजह</media:keywords>
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        <title>Android से जुड़े इन भ्रम को सच मानकर लोगों ने किया भरोसा, लेकिन सचाई कुछ और ही निकली</title>
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        <description><![CDATA[ Android Myths: एंड्रॉयड इकोसिस्टम से जुड़े कई ऐसे भ्रम हैं, जिन्हें लोग सच मानकर भरोसा कर रहे हैं. इनमें से कुछ की शुरुआत कई साल पहले हुई थी, जब एंड्रॉयड ने अपने पैर जमाने शुरू किए थे. ऐप्पल से कंपेरिजन के कारण कुछ ऐसी बातें भी लोगों के मन में घर कर गईं, जो एक समय पर हो सकता है कि सही हो, लेकिन अब समय बदलने के बाद पूरी तरह बदल चुकी हैं. एंड्रॉयड की तरह ऐप्पल ने भी शुरुआती सालों में कुछ कठिनाइयों का सामना किया था, लेकिन एंड्रॉयड सिस्टम के साथ जुड़े भ्रम आज भी लोगों के मन में बने हुए हैं. आइए ऐसे ही कुछ भ्रम और उनके पीछे की सचाई जानते हैं.
भ्रम- एंड्रॉयड फोन सिक्योर नहीं होते
लोग अकसर ऐसा मानते हैं कि एंड्रॉयड फोन सिक्योर नहीं होते और इनमें ऐप्पल के मुकाबले कम सिक्योरिटी फीचर्स हैं. शुरुआती सालों के लिए यह बात सच थी, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं. अब एंड्रॉयड पर भी मल्टी-लेयर्ड सिक्योरिटी मिलती है. ऐप-लेवल के साथ-साथ यूजर्स को सिस्टम-लेवल प्रोटेक्शन भी मिलती है, जो यह एनस्योर करती है कि एक लेयर पार होने के बाद दूसरी लेयर प्रोटेक्शन देगी. ऐसे में यह कह देना कि एंड्रॉयड फोन सुरक्षित नहीं है, यह बात पूरी तरह सही नहीं है.
भ्रम- एंड्रॉयड फोन के कैमरा दमदार नहीं हैं
अब ऐसा नहीं है. गूगल पिक्सल हो या सैमसंग गैलेक्सी, कई ऐसी कंपनियां हैं, जो अब आईफोन को टक्कर देने वाले कैमरा सेटअप दे रही हैं. एआई आने के बाद एंड्रॉयड फोन्स पर इमेज प्रोसेसिंग भी बेहतर हुई है, जिससे आईफोन और एंड्रॉयड के बीच का अंतर कम हुआ है. हालांकि, एंड्रॉयड इकोसिस्टम में अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग कीमत और फीचर्स वाले फोन लॉन्च करती हैं. ऐसे में किसी कम कीमत वाले फोन का महंगे आईफोन से कंपेरिजन पूरी तरह उचित नहीं होता.
भ्रम- एंड्रॉयड फोन सस्ते होते हैं
एंड्रॉयड फोन को क्लासीफाई करना थोड़ा मुश्किल है. ऐप्पल के उलट यहां एंट्री-लेवल से लेकर प्रीमियम बजट समेत हर सेगमेंट के लिए ऑप्शन्स अवेलेबल हैं. अगर प्राइस कंपेरिजन करें तो ऐप्पल का सबसे सस्ता आईफोन इस समय लगभग 65000 रुपये का है, जबकि एंड्रॉयड फोन की कीमत 10,000-15,000 रुपये की बीच शुरू हो जाती है. इसके अलावा पिछले कुछ सालों से सैमसंग, ओप्पो, गूगल और दूसरी एंड्रॉयड फोन कंपनियां भी प्रीमियम फोन लाने लगी हैं, जिनकी कीमतें आईफोन से भी ज्यादा हैं और लोग इन्हें खूब पसंद भी कर रहे हैं.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp Web पर चैट को बनाएं सेफ! ये है App Lock सेट करने का तरीका, जानें स्टेप&amp;बाय&amp;स्टेप गाइड</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Web: आजकल WhatsApp का इस्तेमाल सिर्फ फोन ही नहीं बल्कि लैपटॉप और डेस्कटॉप पर भी काफी बढ़ गया है. लेकिन WhatsApp Web इस्तेमाल करते समय एक बड़ा खतरा होता है आपकी गैरमौजूदगी में कोई भी आपकी चैट्स देख सकता है. ऐसे में App Lock फीचर आपकी प्राइवेसी को सुरक्षित रखने में मदद करता है.
App Lock सेट करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

सबसे पहले अपने ब्राउजर (जैसे Google Chrome) में WhatsApp Web खोलकर लॉगिन करें.
स्क्रीन के ऊपर दाईं ओर दिख रहे तीन डॉट्स (Menu) पर क्लिक करें.
यहां आपको App Lock का विकल्प दिखाई देगा उस पर टैप करें.
अब App Lock को ऑन (Enable) कर दें.
अपनी पसंद का एक पासवर्ड सेट करें.

पासवर्ड कन्फर्म करने के बाद आप यह भी तय कर सकते हैं कि कितनी देर बाद ऑटो-लॉक एक्टिव हो जैसे 1 मिनट या 8 घंटे.
App Lock हटाने का तरीका
अगर आप बाद में App Lock हटाना चाहते हैं तो यह भी बहुत आसान है:

WhatsApp Web में नीचे बाईं तरफ अपने प्रोफाइल आइकन पर क्लिक करें.
Privacy सेक्शन में जाएं.
नीचे स्क्रॉल करें जहां App Lock का विकल्प मिलेगा.
इसे बंद (Disable) कर दें.

App Lock क्यों है जरूरी?
यह फीचर आपकी चैट्स को अनचाहे लोगों से बचाता है खासकर तब जब आप ऑफिस या पब्लिक प्लेस में काम कर रहे हों. आप अपनी जरूरत के हिसाब से लॉक टाइम सेट कर सकते हैं जिससे सुरक्षा और भी मजबूत हो जाती है.
पासवर्ड बनाते समय रखें ध्यान
App Lock सेट करते समय ऐसा पासवर्ड चुनें जो मजबूत भी हो और आपको आसानी से याद भी रहे. कोशिश करें कि पासवर्ड किसी पर्सनल चीज से जुड़ा हो, जिसे सिर्फ आप ही जानते हों. ध्यान रखें कि WhatsApp Web ब्राउजर पर काम करता है न कि सीधे आपके अकाउंट पर. इसका मतलब है कि अगर आपने किसी दूसरे ब्राउजर या डिवाइस पर लॉगिन किया है तो वहां App Lock अलग से सेट करना होगा.
थर्ड-पार्टी ऐप्स से बचें
सुरक्षा के लिए हमेशा WhatsApp के इनबिल्ट फीचर्स का ही इस्तेमाल करें. किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप से फोन या चैट लॉक करना जोखिम भरा हो सकता है. इस तरह आप आसानी से WhatsApp Web पर अपनी प्राइवेसी को बेहतर तरीके से सुरक्षित रख सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPad की स्लो स्पीड से हो गए दुखी? इन तीन सेटिंग्स को बदलते ही हो जाएगा सुपरफास्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ipad-की-स्लो-स्पीड-से-हो-गए-दुखी-इन-तीन-सेटिंग्स-को-बदलते-ही-हो-जाएगा-सुपरफास्ट</link>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Slow iPad: आपने कोई काम करने के लिए iPad ऑन किया है, लेकिन इसे लोड होने में ही काफी टाइम लग गया. या आप कोई नोट्स लेना चाहते हैं, लेकिन इसका रिस्पॉन्स लेट है तो आपका काम करने का मूड खराब हो सकता है. अगर आईपैड धीमा चल रहा है तो इससे न सिर्फ काम में देरी होती है बल्कि इससे झुंझलाहट भी बढ़ती है. अगर यह प्रॉब्लम लंबे समय तक बनी रहे तो आईपैड यूज करने का मन भी नहीं रहता. अगर आपका आईपैड भी स्लो है और आप इसे फास्ट करना चाहते हैं तो आज हम आपको कुछ सेटिंग्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे इसकी स्पीड सुपरफास्ट हो जाएगी.&amp;nbsp;
Offload Unused Apps को कर दें इनेबल
कई बार स्टोरेज फुल हो जाने के कारण आईपैड की स्पीड स्लो हो जाती है. ऐप्पल का कहना है कि डिवाइस को स्मूदली यूज करने के लिए 1GB का फ्री स्पेस होना चाहिए. ऐसे में अगर आपके आईपैड की स्टोरेज फुल हो गई है तो आप उन ऐप्स को हटाकर स्टोरेज बचा सकते हैं, जिन्हें आप यूज नहीं कर रहे. इसके लिए आप अनयूज्ड ऐप्स को ऑफलोड कर सकते हैं. इससे ऐप्स की फाइल्स और डेटा तो आईपैड में स्टोर रहेगा, लेकिन ऐप्स रिमूव हो जाएगी. इस सेटिंग को इनेबल करने के लिए सेटिंग में जाकर ऐप्स सेक्शन में जाएं और ऐप स्टोर ओपन करें. यहां स्क्रॉल डाउन करने पर आपको ऑफलोड अनयूज्ड ऐप्स का ऑप्शन दिखेगा, जिसे इनेबल कर दें.
&amp;nbsp;Low Power Mode को कर दें बंद
कई यूजर्स बैटरी बचाने के लिए आईपैड में Low Power Mode ऑन रखते हैं. यह डिस्प्ले ब्राइटनेस को कम करने के साथ-साथ 5G को बंद कर देता है और कई दूसरी प्रोसेसेस को भी पॉज कर देता है. हालांकि, इसका एक नुकसान भी है. Low Power Mode में आईपैड लेग करना शुरू कर देता है. इससे परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है और आपको लगेगा कि आईपैड स्लो हो गया है. इसलिए पीक परफॉर्मेंस के लिए इस मोड को बंद कर दें.
वेबसाइट डेटा और cache को रखें क्लियर
लगातार कई दिनों तक इस्तेमाल के बाद cache और वेबसाइट डेटा इकट्ठा हो जाता है. इस वजह से किसी खास ऐप में दिक्कत आने लगती है. अगर आपको लगता है कि आपका आईपैड सही काम कर रहा है, लेकिन ब्राउजर ओपन करते ही स्लो हो जाता है तो इसके पीछे cache और वेबसाइट डेटा का हाथ हो सकता है. ब्राउजर में जाकर इस डेटा को डिलीट कर दें. इससे आईपैड एकदम फास्ट काम करने लगेगा.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>धाकड़ फीचर्स वाले Galaxy S25 Ultra की कीमत धड़ाम, इतना सस्ता खरीदने का मौका फिर नहीं आएगा</title>
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        <description><![CDATA[ Galaxy S25 Ultra Price Drop: अगर आप सैमसंग का फ्लैगशिप डिवाइस सस्ती कीमत में खरीदना चाहते हैं तो शानदार मौका आ गया है. पावरफुल फीचर्स और प्रीमियम लुक वाला Galaxy S25 Ultra इस समय हजारों रुपये सस्ता हो गया है. अमेजन पर यह फोन अब तक की सबसे कम कीमत में लिस्टेड है और इसकी खरीद पर हजारों रुपये की बचत का मौका मिल रहा है. बता दें कि S26 Ultra के लॉन्च होने के बाद भी यह फोन आउटडेटेड नहीं हुआ है और अब छूट के साथ यह बेस्ट डील साबित हो सकता है. आइए इसके स्पेसिफिकेशंस पर एक नजर डाल लेते हैं.
Galaxy S25 Ultra के स्पेसिफिकेशंस
Galaxy S25 Ultra में 6.9 इंच की QHD+ Dynamic AMOLED 2X स्क्रीन मिलती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग का एक्सपीरियंस काफी स्मूद हो जाता है. फोन में क्वालकॉम का पावरफुल Snapdragon 8 Elite चिपसेट लगा है, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. फोटो और वीडियो के लिए फोन के रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का अल्ट्रावाइड लेंस, 50MP का टेलीफोटो सेंसर और 10MP का एडिशनल 3x टेलीफोटो लेंस मिलता है. इसके फ्रंट में 12MP का सेंसर लगा हुआ है. फोन में लगा 5,000mAh का बैटरी पैक 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है.&amp;nbsp;
अमेजन पर मिल रही है धांसू डील
भारत में Galaxy S25 Ultra को 1,29,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी यह हजारों रुपये की छूट के साथ उपलब्ध है. अमेजन पर इस फोन का Titanium Whitesilver, 12GB+256GB वेरिएंट केवल 1,09,999 रुपये में लिस्टेड है. 20,000 रुपये की इस सीधी छूट के अलावा फोन पर लगभग 3300 रुपये का कैशबैक और EMI पर 5200 रुपये से अधिक की बचत का मौका मिल रहा है. इसके अलावा इस पर एक्सचेंज ऑफर भी चल रहा है. इस तरह देखा जाए तो यह फोन अपनी असली कीमत से काफी सस्ता खरीदा जा सकता है.&amp;nbsp;
Google Pixel 10 पर करें हजारों की बचत
Galaxy S25 Ultra की तरह गूगल के फ्लैगशिप डिवाइस Pixel 10 पर भी हजारों की बचत का मौका मिल रहा है. Pixel 10 पिछले साल अगस्त में 79,999 कीमत पर लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी यह अमेजन पर 13 प्रतिशत डिस्काउंट के बाद सिर्फ 69,444 रुपये में लिस्टेड है. इस पर 2100 रुपये से ज्यादा के कैशबैक और बैंक ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है, जिसके बाद इसकी कीमत 68,000 रुपये से भी कम हो जाती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>धाकड़, फीचर्स, वाले, Galaxy, S25, Ultra, की, कीमत, धड़ाम, इतना, सस्ता, खरीदने, का, मौका, फिर, नहीं, आएगा</media:keywords>
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    <item>
        <title>डेली 3GB डेटा और लंबी वैलिडिटी, इस कंपनी ने सस्ता रिचार्ज प्लान लाकर मचा दिया तहलका</title>
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        <description><![CDATA[ BSNL Recharge Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने अपने यूजर्स की मौज कर दी है. कंपनी एक सस्ता रिचार्ज प्लान लेकर आई है, जिसमें डेली डेटा के साथ लंबी वैलिडिटी मिल रही है. यह रिचार्ज प्लान उन यूजर्स के बहुत काम आ सकता है, जिन्हें वीडियो स्ट्रीमिंग या ऑनलाइन गेमिंग के लिए ज्यादा डेटा की जरूरत होती है. साथ ही इसमें 70 दिनों की वैलिडिटी मिल रही है, जिससे बार-बार रिचार्ज कराने का झंझट खत्म होगा. इसके अलावा भी इसमें कई और बेनेफिट्स मिल रहे हैं. आइए जानते हैं कि 599 रुपये के BSNL Recharge Plan में क्या-क्या ऑफर किया जा रहा है.
BSNL का 599 रुपये का प्लान
सरकारी कंपनी के 599 रुपये के प्लान में 70 दिनों की वैलिडिटी के साथ रोजाना 3GB हाई-स्पीड डेटा, देश में किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल्स, फ्री नेशनल रोमिंग और रोजाना 100 SMS ऑफर किए जा रहे है. यानी रोजाना 9 रुपये से भी कम लागत में यूजर्स को वैलिडिटी, हाई स्पीड डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग का फायदा मिल रहा है. चाहे आप वीडियो स्ट्रीमिंग करते हों, ऑनलाइन गेम्स खेलते हों या आपको ऑनलाइन क्लासेस या मीटिंग्स अटेंड करनी हो, यह प्लान आपकी सारी जरूरतों का ध्यान रखेगा.
प्लान के साथ फ्री मिल रही BiTV की एक्सेस
BSNL अपने इस नए प्लान के साथ BiTV की एक्सेस भी फ्री दे रही है. इसका मतलब है कि आप फ्री में टीवी चैनल्स का मजा उठा पाएंगे. इसके साथ इस पर बिना कोई सब्सक्रिप्शन खरीदे सेलेक्टेड OTT शोज भी देखे जा सकते हैं.
जियो का 3GB डेली डेटा वाला प्लान है महंगा
अगर BSNL के इस नए रिचार्ज प्लान का जियो के साथ कंपेयर किया जाए तो सरकारी कंपनी का प्लान काफी सस्ता है. जियो के 1199 रुपये के प्लान में रोजाना 3GB डेटा दिया जा रहा है. हालांकि, इसकी वैलिडिटी और इसमें मिलने वाले बेनेफिट्स BSNL की तुलना में ज्यादा है. जियो के 1199 रुपये के प्लान में 84 दिनों की वैलिडिटी, रोजाना 3GB + अनलिमिटेड 5G डेटा, अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और रोजाना 100 SMS मिल रहे हैं. इसके अलावा कंपनी इसके साथ 3 महीनों के लिए जियोहॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन, 18 महीने के लिए गूगल जेमिनी का प्रो सब्सक्रिप्शन, जियो क्लाउड पर 50GB स्टोरेज भी फ्री में ऑफर कर रही है.
एयरटेल का प्लान और भी महंगा
अगर एयरटेल के डेली 3GB वाले प्लान की बात करें तो यह और भी महंगा है. एयरटेल 1798 में 84 दिनों की वैलिडिटी के साथ रोजाना 3GB डेटा के साथ अनलिमिटेड 5G डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और डेली 100 SMS ऑफर कर रही है. इस प्लान के साथ नेटफ्लिक्स बेसिक का सब्सक्रिप्शन और 12 महीनों के लिए एडोब एक्सप्रेस का प्रीमियम सब्सक्रिप्श फ्री मिल रहा है.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ AC नहीं, ये गैजेट्स भी गर्मी में बन सकते हैं टाइम बम! छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ा खतरा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिर्फ-ac-नहीं-ये-गैजेट्स-भी-गर्मी-में-बन-सकते-हैं-टाइम-बम-छोटी-सी-लापरवाही-बन-सकती-है-बड़ा-खतरा</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: तेज गर्मी सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि हमारे रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के लिए भी चुनौती बन जाती है. आमतौर पर लोग एसी पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि स्मार्टफोन, लैपटॉप, फ्रीजर, बैटरी और इन्वर्टर जैसे उपकरण भी इस मौसम में जोखिम भरे साबित हो सकते हैं. थोड़ी सी लापरवाही इन डिवाइस को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ बड़े हादसे का कारण भी बन सकती है.
स्मार्टफोन और लैपटॉप
गर्मी के दिनों में स्मार्टफोन और लैपटॉप जल्दी गर्म हो जाते हैं. ज्यादा इस्तेमाल या चार्जिंग के दौरान भारी ऐप्स चलाना इनकी बैटरी और प्रोसेसर पर दबाव बढ़ा देता है. ओवरहीटिंग की स्थिति में फोन स्लो हो सकता है, बैटरी फूल सकती है या अचानक बंद हो सकता है. लैपटॉप में भी यही समस्या देखने को मिलती है जहां हीट बढ़ने पर सिस्टम हैंग होने लगता है या हार्डवेयर डैमेज हो सकता है. इसलिए इन्हें ठंडी और हवादार जगह पर इस्तेमाल करना जरूरी है.
फ्रीजर और रेफ्रिजरेटर
गर्मी में फ्रिज और फ्रीजर का इस्तेमाल बढ़ जाता है जिससे ये लगातार काम करते रहते हैं. अगर इनके पीछे की कॉइल्स पर धूल जमा हो या वेंटिलेशन सही न हो तो ये ज्यादा गर्म हो सकते हैं. इससे न सिर्फ बिजली की खपत बढ़ती है बल्कि कंप्रेसर खराब होने का खतरा भी रहता है. इसलिए समय-समय पर सफाई और सही जगह पर इंस्टॉलेशन बहुत जरूरी है.
बैटरी और इन्वर्टर
घर में इस्तेमाल होने वाली इन्वर्टर बैटरी भी गर्मी में ज्यादा संवेदनशील हो जाती है. ज्यादा तापमान में बैटरी ओवरहीट हो सकती है जिससे गैस निकलने या लीकेज का खतरा रहता है. अगर बैटरी की मेंटेनेंस सही तरीके से न की जाए तो यह आग लगने जैसी गंभीर घटना का कारण भी बन सकती है. इसलिए बैटरी को ठंडी जगह पर रखना और नियमित रूप से उसका पानी व कनेक्शन चेक करना जरूरी है.
चार्जिंग के दौरान रखें खास ध्यान
गर्मी में डिवाइस चार्ज करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है. कई लोग फोन या लैपटॉप को चार्जिंग पर लगाकर इस्तेमाल करते रहते हैं जिससे हीट और बढ़ जाती है. साथ ही, सस्ते या नकली चार्जर का इस्तेमाल भी खतरे को बढ़ा सकता है.
हमेशा ओरिजिनल एक्सेसरी का इस्तेमाल करें और चार्जिंग के दौरान डिवाइस को ज्यादा कवर या कपड़े से ढककर न रखें. गर्मी के मौसम में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का सही इस्तेमाल और देखभाल बेहद जरूरी है. थोड़ी सी सावधानी जैसे सही वेंटिलेशन, समय-समय पर सफाई और ओवरयूज से बचाव आपको बड़े नुकसान से बचा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp के ये सीक्रेट प्राइवेसी फीचर्स कर देंगे आपको हैरान! 90% लोग आज भी हैं अनजान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/whatsapp-के-ये-सीक्रेट-प्राइवेसी-फीचर्स-कर-देंगे-आपको-हैरान-90-लोग-आज-भी-हैं-अनजान</link>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp के ये सीक्रेट प्राइवेसी फीचर्स कर देंगे आपको हैरान! 90% लोग आज भी हैं अनजान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: पंखा कर रहा है आवाज तो इग्नोर न करें, बड़ा खर्चा करवा सकती हैं ये छोटी&amp;मोटी गड़बड़</title>
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        <description><![CDATA[ Ceiling Fan Problems: घर में लगे सीलिंग फैन कई सालों तक यूज होते हैं. गर्मियों के सीजन में रोजाना कई घटों तक पंखे लगातार चलते रहते हैं. इस कारण इनमें खराबी आ जाना आम बात होती है, लेकिन अगर समय रहते इन्हें ठीक न किया तो बड़ा खर्चा हो सकता है. कुछ मामलों में पार्ट्स बदलने से काम चल सकता है, लेकिन कई बार पंखा भी बदलना पड़ सकता है. आज हम आपको बताएंगे कि पंखे के शोर करने, हवा न देने या ज्यादा डगमगाने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं और अगर इन्हें इग्नोर कर दिया तो कितना बड़ा नुकसान हो सकता है.
पंखा शोर क्यों करने लगता है?
बटन ऑन करते ही पंखे से हल्की आवाज आना नॉर्मल है, लेकिन कई बार पंखे इतना शोर करने लगते हैं कि उसे सहन करना मुश्किल हो जाता है. पंखे की स्पीड बढ़ाने पर यह शोर बढ़ जाता है और स्पीड कम करने पर कम हो जाता है. इसके पीछे कई कारण हो सकतें है. सबसे बड़े कारणों की बात करें तो मोटर हाउसिंग, ब्लेड या माउंटिंग ब्रैकेट पर लगे स्क्रू ढीले होने के कारण आवाज ज्यादा बढ़ जाती है. इसके अलावा बेयरिंग और मोटर के दूसरे पार्ट्स भी पुराने होने पर आवाज करने लगते हैं.
पंखे का जोर-जोर से हिलना
आमतौर पर पंखे सीधे लटके होते हैं और केवल इनकी ब्लेड घूम रही होती है, लेकिन कई बार पंखा ऑन करते ही पेंडुलम की तरह जोर-जोर से हिलने लगता है. अगर किसी पंखे की डाउनरॉड लंबी है तो इसका थोड़ा-बहुत हिलना नॉर्मल है, लेकिन अगर यह ज्यादा हिल रहा है तो हो सकता है कि पंखे का बैलेंस खराब हो गया है. ब्लेड के मुड़ने या इन पर धूल जमने से भी बैलेंस खराब हो सकता है. अगर इसे समय रहते ठीक न किया जाए तो पंखा गिर भी सकता है.
चलते पंखे से हवा न आना
कई बार यह होता है कि पंखा फुल स्पीड से चल रहा है, लेकिन हवा नहीं आ रही. अगर आप भी ऐसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो पंखे की ब्लेड चेक करें. अगर इस पर गंदगी जमी है तो इसे हटा दें. इसके अलावा ब्लेड का एंगल सही सेट कर भी इस परेशानी को दूर किया जा सकता है. अगर आप पंखे से कूलर जैसी हवा लेना चाहते हैं तो इसे फर्श से 8-9 फीट की ऊंचाई पर लगाएं. साथ ही पंखे और छत के बीच कम से कम 10 इंच का गैप रखना जरूरी है. इसके बिना एयरफ्लो खराब हो सकता है.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Google का बड़ा फैसला! Assistant Go की होने वाली है छुट्टी, जानिए क्या Gemini Go लेगा जगह</title>
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        <description><![CDATA[ Google Assistant: टेक दुनिया तेजी से AI की ओर बढ़ रही है और इसी दौड़ में Google भी बड़े बदलाव की तैयारी में है. हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपने पुराने वॉयस असिस्टेंट सिस्टम को हटाकर नई AI टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रही है. संकेत मिल रहे हैं कि अब Google धीरे-धीरे Google Assistant Go को बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसकी जगह Gemini को लाने की योजना बना रहा है.
Android Go यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?
Android Go उन स्मार्टफोन्स के लिए बनाया गया है जिनमें कम रैम और कम प्रोसेसिंग पावर होती है. इन डिवाइस में फिलहाल Assistant Go दिया जाता है जो कि बेसिक फीचर्स तक ही सीमित है. इसमें स्मार्ट होम कंट्रोल या एडवांस AI फीचर्स जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं. लेकिन अब खबर है कि Google इन डिवाइस पर भी नया AI सिस्टम लाने की सोच रहा है.
Gemini Go की एंट्री के संकेत
रिपोर्ट्स के अनुसार, Assistant Go के नए अपडेट में कुछ ऐसे कोड और मैसेज मिले हैं जो यह इशारा करते हैं कि इस ऐप को जल्द ही बंद किया जा सकता है. इसी के साथ यह भी चर्चा है कि Gemini को ही आगे का मुख्य विकल्प बनाया जाएगा. यानी आने वाले समय में Gemini ही Google के सभी डिवाइस पर AI असिस्टेंट की भूमिका निभा सकता है.
क्या लो-एंड फोन संभाल पाएंगे Gemini?
यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि Gemini एक पावरफुल AI सिस्टम है जिसे चलाने के लिए अच्छे हार्डवेयर की जरूरत होती है. वहीं Android Go डिवाइस कम क्षमता वाले होते हैं ऐसे में यह साफ नहीं है कि ये फोन Gemini को सही तरीके से चला पाएंगे या नहीं. संभावना यह भी है कि Google Assistant Go को हटाने के बाद तुरंत कोई नया हल पेश न करे जिससे यूजर्स को कुछ समय के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल Google की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन इतना तय है कि कंपनी Android Go यूजर्स के लिए कुछ नया प्लान कर रही है. आने वाले समय में यह साफ हो जाएगा कि Gemini Go जैसा कोई हल आता है या फिर यूजर्स को पूरी तरह नए सिस्टम की ओर शिफ्ट होना पड़ेगा. एक बात तो तय है AI के इस दौर में Google अपने पुराने सिस्टम को पीछे छोड़कर भविष्य की टेक्नोलॉजी पर दांव लगा चुका है.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>अब स्कूल में स्मार्टफोन ले जाना बंद! इस देश की सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Ban in School: United Kingdom की सरकार ने इंग्लैंड के स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. अब तक जो नियम केवल सुझाव के तौर पर लागू थे उन्हें कानून का रूप देने की तैयारी की जा रही है. सरकार ने साफ किया है कि वह बच्चों की भलाई और पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने के लिए इस फैसले को कानूनी रूप देना चाहती है.
इस प्रस्ताव के तहत स्कूलों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे छात्रों के स्मार्टफोन के इस्तेमाल को कंट्रोल करें. यह कदम Children&amp;rsquo;s Wellbeing and Schools Bill में संशोधन के जरिए लागू किया जाएगा जिससे स्कूलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे.
पहले से लागू नियमों को मिलेगी मजबूती
असल में कई स्कूल पहले ही अपने स्तर पर मोबाइल फोन पर पाबंदी लगा चुके हैं. अब सरकार इन्हीं नियमों को कानूनी ताकत देना चाहती है ताकि हर स्कूल एक समान नीति अपनाए और कोई भ्रम न रहे. शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों में अनुशासन और पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा.
क्यों लिया गया ये फैसला?
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन बच्चों का ध्यान भटकाते हैं और उनकी पढ़ाई पर असर डालते हैं. सोशल मीडिया और गेमिंग की वजह से क्लासरूम में फोकस कम होता है जिससे सीखने की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इस कदम का उद्देश्य छात्रों को ज्यादा ध्यान केंद्रित करने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करना है.
अलग-अलग पार्टियों का समर्थन
इस फैसले का कई राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है. उनका मानना है कि यह कदम छात्रों के व्यवहार में सुधार लाने और पढ़ाई के स्तर को ऊपर उठाने में मदद करेगा. हालांकि कुछ नेताओं ने यह भी कहा है कि इस बदलाव को लागू करने के लिए स्कूलों को अतिरिक्त फंड और संसाधनों की जरूरत होगी.
स्कूल कैसे लागू करेंगे नियम?
कई स्कूल पहले से ही छात्रों के फोन को लॉकर्स में रखने या खास पाउच में सील करने जैसी व्यवस्था अपना रहे हैं. नए कानून के बाद ऐसी व्यवस्थाएं और ज्यादा व्यापक हो सकती हैं. प्रस्तावित नियमों में कुछ खास परिस्थितियों के लिए छूट भी दी जा सकती है जैसे मेडिकल जरूरतों के लिए फोन का इस्तेमाल, बड़े छात्रों (जैसे सिक्स्थ फॉर्म) के लिए सीमित अनुमति.
पहले से ही काफी स्कूल कर रहे हैं पालन
एक सर्वे के अनुसार, इंग्लैंड के लगभग सभी प्राइमरी स्कूल और ज्यादातर सेकेंडरी स्कूल पहले ही मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा चुके हैं. यही वजह है कि इस नए कानून से बहुत बड़ा बदलाव तो नहीं होगा लेकिन नियम और स्पष्ट हो जाएंगे.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>महंगा LPG हुआ आउटडेटेड? DME गैस बन जाएगा खाना बनाने के लिए एक आसान और सस्ता तरीका, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ DME Gas Technology: रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है. ऐसे में अब एक नए विकल्प की चर्चा तेज हो गई है DME (डाइमिथाइल ईथर) गैस. माना जा रहा है कि यह भविष्य में LPG का सस्ता और साफ विकल्प बन सकती है जिससे न सिर्फ खर्च कम होगा बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा.
क्या है DME गैस?
DME यानी डाइमिथाइल ईथर एक तरह का स्वच्छ ईंधन है जिसे कोयला, बायोमास या नैचुरल गैस से तैयार किया जा सकता है. यह गैस जलने पर बहुत कम धुआं छोड़ती है और लगभग कालिख (soot) नहीं बनाती. इसी वजह से इसे क्लीन फ्यूल के रूप में देखा जा रहा है.
LPG से कैसे अलग है?
जहां LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) जलने पर बर्तन काले कर सकती है और कुछ मात्रा में प्रदूषण भी पैदा करती है, वहीं DME गैस साफ तरीके से जलती है. इससे रसोई साफ रहती है और बर्तनों पर कालिख जमने की समस्या नहीं होती. इसके अलावा, DME को स्टोर और ट्रांसपोर्ट करना भी अपेक्षाकृत आसान माना जाता है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसका बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू हो जाए तो इसकी कीमत LPG से कम हो सकती है.
क्या वाकई सस्ती पड़ेगी DME?
DME की सबसे बड़ी खासियत इसकी संभावित कम लागत है. इसे स्थानीय संसाधनों से भी बनाया जा सकता है जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी. अगर ऐसा होता है तो उपभोक्ताओं को सस्ती गैस मिल सकती है और देश का खर्च भी कम होगा. हालांकि, अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है और बड़े पैमाने पर इसके इस्तेमाल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना बाकी है.
पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर है?
DME गैस को पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर माना जा रहा है. यह जलने पर कम प्रदूषण फैलाती है और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है. ऐसे में यह स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है. फिलहाल DME गैस पर रिसर्च और टेस्टिंग जारी है. कुछ देशों में इसका सीमित स्तर पर इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है लेकिन भारत में इसे आम लोगों तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है.
महंगे LPG के दौर में DME गैस एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रही है. अगर तकनीक और सप्लाई सिस्टम सही तरीके से विकसित हो गया तो आने वाले समय में यह रसोई गैस का नया और बेहतर विकल्प बन सकती है जो सस्ता भी होगा और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित.
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        <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>USB Killer क्या है? एक बार लगाया और फोन&amp;लैपटॉप तुरंत खत्म! जानिए कैसे ये छोटा सा डिवाइस बन जाता है डिजिटल हथियार</title>
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        <description><![CDATA[ USB Killer क्या है? एक बार लगाया और फोन-लैपटॉप तुरंत खत्म! जानिए कैसे ये छोटा सा डिवाइस बन जाता है डिजिटल हथियार ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: रेंट पर AC लेने से पहले जरूर कर लें ये काम, नहीं तो हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ AC on Rent: पिछले कुछ सालों से रेंट पर एसी (AC on Rent) लेने का चलन बढ़ा है. लोग अब एसी खरीदने की बजाय गर्मियों के महीनों में रेंट पर ले लेते हैं. इससे उन्हें एक साथ सारी कीमत नहीं चुकानी पड़ती. इसके अलावा जिन लोगों को बार-बार घर बदलने पड़ते हैं, उनके लिए भी यह एक सुविधाजनक ऑप्शन है. अगर आप भी इस बार गर्मी से बचने के लिए एसी रेंट पर लेना चाहते हैं तो कुछ चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अगर आप इन चीजों को देखें बिना एसी रेंट पर ले लेंगे तो भारी खर्चा हो सकता है.&amp;nbsp;
सही वेंडर का चुनाव सबसे जरूरी
एसी रेंट पर लेने के लिए किसी भरोसेमंद वेंडर का चुनाव करना बहुत जरूरी है. मार्केट में आपको कई बड़े वेंडर मिल जाएंगे. इनसे एसी लेने का फायदा यह होगा कि आपको पूरी तरह सर्विस की हुई यूनिट मिल जाएगी और सपोर्ट भी मिलता रहेगा. कम पैसों के लालच में आकर किसी अनजान वेंडर के पास न जाएं.
एसी के मॉडल का रखें ध्यान
पेमेंट करने से पहले खुद जाकर एसी को चेक करें. एसी की कूलिंग और रिमोट को अच्छे से चेक करें. अगर आपको कोई डाउट हो तो कुछ देर तक एसी चलाकर देखें. इसके साथ यह भी देखें कि एसी का मॉडल कितना पुराना है. ज्यादा पुराना मॉडल होने पर वह बिजली की खपत ज्यादा करेगा.
एनर्जी रेटिंग देखें बिना न लें एसी
अगर आप चाहते हैं कि एसी कूलिंग करते समय बिजली बिल के मामले में आपकी पसीना न निकाले तो एनर्जी रेटिंग को जरूर देख लें. 5 स्टार एनर्जी रेटिंग का मतलब है कि वह मॉडल कम बिजली की खपत करेगा. इससे आपको बिजली बचाने में मदद मिलेगी.
कमरे के साइज के हिसाब से लें एसी
चाहे आप एसी रेंट पर ले रहे हैं या नई खरीद रहे हैं, यह आपके कमरे के हिसाब से परफेक्ट होनी चाहिए. अगर आपका कमरा छोटा है तो आप एक टन वाली एसी ले सकते हैं, वहीं अगर आपको बड़े कमरे में कूलिंग चाहिए तो 2 टन की एसी लेना जरूरी है. बड़े कमरे में छोटा एसी सही कूलिंग नहीं दे पाएगा.&amp;nbsp;
इन बातों का भी रखें ध्यान
- एसी रेंट पर लेने से पहले सर्विस और मैंटेनेंस की शर्तें अच्छी तरह समझ लें.- सिक्योरिटी और रेंटल प्राइस के लिए नेगोशिएट कर बचत करने की कोशिश करें- इंस्टॉलेशन की लागत के बारे में भी पहले स्थिति स्पष्ट कर लें.
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        <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>क्या होते हैं सैटेलाइट फोन? जानिए क्या भारत में इस डिवाइस को रखने पर हो सकती है जेल</title>
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        <description><![CDATA[ Satellite Phone: सैटेलाइट फोन एक खास तरह का मोबाइल डिवाइस होता है जो सामान्य नेटवर्क टावर की बजाय सीधे सैटेलाइट से जुड़कर काम करता है. आम स्मार्टफोन जहां नेटवर्क कवरेज पर निर्भर होते हैं वहीं सैटेलाइट फोन दूर-दराज इलाकों जैसे पहाड़, समुद्र, जंगल या आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी आसानी से कॉल और मैसेज की सुविधा देते हैं.
कैसे काम करता है सैटेलाइट फोन?
यह डिवाइस पृथ्वी के ऊपर घूम रहे कम्युनिकेशन सैटेलाइट से सिग्नल भेजता और प्राप्त करता है. यही वजह है कि जहां मोबाइल नेटवर्क फेल हो जाता है वहां भी सैटेलाइट फोन काम करता है. इसी कारण इसका इस्तेमाल अक्सर सेना, आपदा राहत एजेंसियों और समुद्री यात्राओं में किया जाता है.
भारत में क्या सैटेलाइट फोन बैन हैं?
भारत में सैटेलाइट फोन पूरी तरह से बैन नहीं हैं लेकिन इन पर कड़े नियम लागू हैं. बिना सरकारी अनुमति के सैटेलाइट फोन रखना या इस्तेमाल करना गैरकानूनी है. सरकार सुरक्षा कारणों से इन डिवाइस पर सख्त नियंत्रण रखती है क्योंकि इनका इस्तेमाल ट्रैक करना सामान्य मोबाइल की तुलना में ज्यादा मुश्किल होता है. भारत में केवल कुछ ही अधिकृत सेवाएं मान्य हैं जैसे Inmarsat की सेवाएं जिन्हें सरकारी अनुमति के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या हो सकती है सजा?
अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति के सैटेलाइट फोन रखता या इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. यह मामला Indian Telegraph Act 1885 और Indian Wireless Telegraphy Act 1933 के तहत आता है. नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है.
किन लोगों को मिलती है अनुमति?
सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल आमतौर पर सरकारी एजेंसियों, रक्षा बलों, आपदा प्रबंधन टीमों और कुछ अधिकृत संस्थाओं को ही दिया जाता है. इसके अलावा कुछ विशेष परिस्थितियों में कंपनियों या व्यक्तियों को भी अनुमति मिल सकती है लेकिन इसके लिए लाइसेंस लेना जरूरी होता है.
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
अगर आप विदेश यात्रा से लौटते समय सैटेलाइट फोन साथ लाते हैं तो भी आपको नियमों का पालन करना होगा. बिना अनुमति के इसे एयरपोर्ट पर जब्त किया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. सैटेलाइट फोन भले ही तकनीकी रूप से बेहद उपयोगी डिवाइस हो लेकिन भारत में इसे इस्तेमाल करने के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है. ज्यादातर इस डिवाइस को सुरक्षा कारणों से ही इस्तेमाल करने से रोका जाता है.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>फिर आने वाला है LPG संकट, जानें आपके लिए इंडक्शन बेस्ट रहेगा या इंफ्रारेड चूल्हा?</title>
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        <description><![CDATA[ Induction Vs Infrared Cooktop: ईरान युद्ध के कारण भारत में LPG की सप्लाई पर असर पड़ा था. इस कारण कई लोगों को समय पर LPG सिलेंडर नहीं मिल पाए. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण LPG भारत नहीं पहुंच पाई और इसका असर आम आदमी की रसोई पर देखने को मिला. LPG शॉर्टेज के बीच लोगों ने इंडक्शन और इंफ्रारेड चूल्हे खरीदने शुरू कर दिए थे. अब सरकारी अधिकारियों का कहना है कि LPG सप्लाई को पूरी तरह बहाल होने में 3-4 साल का समय लग सकता है. ऐसे में अगर आप इस शॉर्टेज को देखते हुए बिजली से चलने वाले चूल्हे खरीदना चाहते हैं तो आज आपको बताने जा रहे हैं कि इंडक्शन चूल्हे या इंफ्रारेड में से आपके लिए कौन-सा बेस्ट रहेगा.
क्या होता है इंडक्शन चूल्हा?
बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हे के कुकिंग सरफेस के नीचे तांबे या एल्युमिनियम की कॉइल लगी होती है. जब इसे ऑन किया जाता है तो इसके ऊपर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड पैदा होता है, जिससे सरफेस की बजाय इसके ऊपर रखा बर्तन गर्म होने लगता है. इन्हें ज्यादा एफिशिएंट माना जाता है और इन पर खाना जल्दी बनता है. इसका रखरखाव भी आसान होता है और इसे यूज करना सेफ माना जाता है. इसके लिए इंडक्शन फ्रेंडली बर्तनों की जरूरत पड़ती है.
इंफ्रारेड चूल्हा कैसे काम करता है?
इंफ्रारेड चूल्हा सिरेमिक ग्लास का बना होता है, जिसके नीचे कॉइल या हैलोजन लैंप जैसा एक हाई पावर इंफ्रारेड हीटिंग एलिमेंट लगा होता है. यह लगाातर इंफ्रारेड रेडिएशन छोड़ता है, जो ऊपर रखे बर्तन को गर्म कर देती है. इसकी खास बात है कि इस पर इंडक्शन की तरह मेग्नेटिक बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. इस पर हर प्रकार के बर्तनों में खाना पकाया जा सकता है.&amp;nbsp;
Induction Vs Infrared Cooktop: कौन ज्यादा बिजली खाता है?
बिजली खाने के मामले में इंफ्रारेड चूल्हे इंडक्शन से आगे है. इसके पीछे की वजह दोनों की अलग-अलग तकनीक है. दरअसल, इंफ्रारेड चूल्हा रेडिएंट हीट यूज करते हैं. इससे ये गर्म देर से होते हैं और इन्हें ठंडा होने में भी ज्यादा समय लगता है. इस कारण यह इंडक्शन से ज्यादा बिजली खाता है, जो तुरंत गर्म और ठंडा हो जाता है.
एक घंटा यूज करने पर दोनों कितनी बिजली खाएंगे?
2000 वॉट वाला इंफ्रारेड चूल्हा एक घंटे के यूज के दौरान 2 यूनिट बिजली खाता है. इसकी तुलना में 2000 वॉट का इंडक्शन चूल्हा 1.5 यूनिट तक की बिजली की खपत करेगा. अगर 8 रुपये यूनिट के हिसाब से खर्चा देखा जाए तो एक घंटे में इंफ्रारेड चूल्हा 16 रुपये की बिजली खाएगा, जबकि इंडक्शन लगभग 12 रुपये की बिजली की खपत करेगा.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>सावधान! फोन के नोटिफिकेशन भी बन सकते हैं जासूस, ऐसे चुपचाप लीक हो रहा है आपका पर्सनल डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ सावधान! फोन के नोटिफिकेशन भी बन सकते हैं जासूस, ऐसे चुपचाप लीक हो रहा है आपका पर्सनल डेटा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>इलेक्ट्रिक हीटर पर खाना बनाना ज्यादा सस्ता या इलेक्ट्रिक चूल्हे पर? समझें दोनों की पावर</title>
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        <description><![CDATA[ Electric Chulha Vs Electric Heater: LPG शॉर्टेज के कारण लोगों ने खाना बनाने के लिए नए-नए विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. इंडक्शन और इंफ्रारेड चूल्हे के अलावा कई लोग इलेक्ट्रिक चूल्हे और इलेक्ट्रिक हीटर का भी यूज कर रहे हैं. ये दोनों ही सस्ते विकल्प हैं. इन्हें खरीदने के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इलेक्ट्रिक चूल्हा और इलेक्ट्रिक हीटर काम कैसे करते हैं और इनमें से किस पर खाना बनाना सस्ता पड़ेगा.&amp;nbsp;
इलेक्ट्रिक चूल्हा कैसे काम करता है?
इलेक्ट्रिक चूल्हे को इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर भी कहा जाता है. यह बिजली की मदद से कोयले को जलाता है. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म कर देता है. बिजली के कारण कोयला गर्म होकर हीट जनरेट करता है, जिससे इस पर खाना बनाया जा सकता है. इसके फायदों की बात करें तो यह पोर्टेबल होता है और इसे यूज करना भी आसान है. इस पर सभी प्रकार के बर्तनों में खाना बनाया जा सकता है.
इलेक्ट्रिक हीटर कैसे काम करता है?
इलेक्ट्रिक हीटर को कॉइल हीटर भी कहा जाता है. यह इले्क्ट्रिकल रजिस्टेंट हीटिंग पर बेस होता है. यानी जब रजिस्टिव वायर वाली कॉइल से बिजली गुजरती है तो यह रजिस्टेंस के जरिए हीट जनरेट करती है. इस हीट से ऊपर रखना बर्तन गर्म हो जाता है और खाना पकने लगता है. यह जल्दी गर्म होता है और जल्द ही हाई टेंपरेचर को अचीव कर लेता है. यह भी पोर्टेबल होता है और इसे जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
इन दोनों में से किस पर खाना बनाना सस्ता पड़ेगा?
अगर बिजली की खपत देखी जाए तो इलेक्ट्रिक चूल्हा सस्ता पड़ेगा. एक मीडियम से बड़े बर्नर वाला चूल्हा एक घंटे चलने पर एक यूनिट बिजली खा जाता है. बड़ा बर्नर होने पर खपत बढ़ भी सकती है. हालांकि, इलेक्ट्रिक चूल्हे में लगातार एक घंटे तक बिजली की जरूरत बहुत ही कम मौकों पर पड़ती है. कुछ देर चलाने पर ही कोयले गर्म हो जाते हैं, जिसके बाद उतनी बिजली की जरूरत नहीं रहती. वहीं अगर इलेक्ट्रिक हीटर की बात की जाए तो इसे लगातार बिजली की जरूरत पड़ती है. पावर सप्लाई बंद होने पर यह ठंडा हो जाता है. 1000 वॉट का इलेक्ट्रिक हीटर एक घंटे तक लगातार यूज करने पर 1-1.5 यूनिट बिजली की खपत करता है. इसलिए यह थोड़ा महंगा पड़ेगा.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram&amp;Youtube और Facebook भूल जाइए, पैसों की बारिश कर रहे ये सोशल मीडिया ऐप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Apps: सोशल मीडिया का नाम लेते ही सबसे पहले Instagram, YouTube और Facebook दिमाग में आते हैं. लेकिन अब समय बदल रहा है. आज कई नए प्लेटफॉर्म तेजी से उभर रहे हैं, जहां कम मेहनत में ज्यादा कमाई के मौके मिल रहे हैं. खास बात यह है कि इन ऐप्स पर प्रतियोगिता भी कम है जिससे नए क्रिएटर्स को जल्दी पहचान मिल सकती है.
नए जमाने के प्लेटफॉर्म क्यों बन रहे हैं हिट?
बड़े प्लेटफॉर्म्स पर अब भीड़ बहुत ज्यादा हो चुकी है. लाखों क्रिएटर्स के बीच खुद को अलग दिखाना आसान नहीं रहा. यही वजह है कि लोग नए ऐप्स की तरफ बढ़ रहे हैं. ये प्लेटफॉर्म क्रिएटर्स को आकर्षित करने के लिए बेहतर मोनेटाइजेशन, बोनस और रिवार्ड्स ऑफर कर रहे हैं.
ShareChat
ShareChat खासतौर पर भारतीय भाषाओं के लिए बनाया गया है. यहां हिंदी, भोजपुरी, तमिल जैसे कई भाषाओं में कंटेंट बनाकर आप ऑडियंस तक आसानी से पहुंच सकते हैं. प्लेटफॉर्म अपने क्रिएटर्स को रिवॉर्ड प्रोग्राम और ब्रांड प्रमोशन के जरिए कमाई का मौका देता है.
Telegram
Telegram सिर्फ मैसेजिंग ऐप नहीं रह गया है. आजकल लोग इसमें चैनल और ग्रुप बनाकर हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं. यहां आप पेड सब्सक्रिप्शन, एफिलिएट मार्केटिंग और प्रमोशन के जरिए अच्छी कमाई कर सकते हैं.
Snapchat
Snapchat का Spotlight फीचर क्रिएटर्स को उनके वायरल कंटेंट के लिए पैसे देता है. अगर आपका वीडियो ट्रेंड करता है तो प्लेटफॉर्म की तरफ से सीधा रिवार्ड मिल सकता है.
Moj और Josh
भारत में बने ये शॉर्ट वीडियो ऐप्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. Moj और Josh पर वीडियो बनाकर क्रिएटर्स ब्रांड डील्स, लाइव सेशन और इन-ऐप रिवार्ड्स के जरिए पैसे कमा सकते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर अभी भी नए यूजर्स के लिए अच्छा मौका है क्योंकि यहां ग्रोथ तेजी से होती है.
कमाई के लिए क्या जरूरी है?
इन नए प्लेटफॉर्म्स पर सफलता पाने के लिए आपको यूनिक और लगातार कंटेंट बनाना होगा. ट्रेंड्स को समझना, ऑडियंस से जुड़ना और सही समय पर पोस्ट करना बेहद जरूरी है.
क्या सच में यहां ज्यादा पैसा है?
हकीकत यह है कि कमाई हर प्लेटफॉर्म पर संभव है लेकिन नए ऐप्स पर मौके ज्यादा हैं. यहां प्रतियोगिता कम होने की वजह से जल्दी ग्रोथ मिल सकती है. अगर आप सही रणनीति अपनाते हैं तो ये प्लेटफॉर्म Instagram और YouTube से भी ज्यादा कमाई का रास्ता खोल सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन ओवरचार्जिंग की टेंशन होगी खत्म, बैटरी फुल चार्ज होते ही अपने आप हट जाएगा यह चार्जर</title>
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        <description><![CDATA[ Auto-Eject Phone Charger: अगर आप उन लोगों में शामिल हैं, जो फोन को चार्जिंग पर लगाकर भूल जाते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. दरअसल, फोन को ज्यादा देर तक चार्ज करने से कई नुकसान हो सकते हैं. इससे बैटरी पर लोड पड़ता है और चार्जिंग कैपेसिटी भी जल्दी खत्म होती है. इन सबस परेशानियों से छुटकारा दिलाने के लिए एक नई तरह का चार्जर आ गया है. फोन की बैटरी फुल चार्ज होते ही यह चार्जर अपने आप फोन से निकल जाएगा, जिससे बैटरी ओवरचार्ज नहीं होगी. चाइनीज कंपनी Kuwajia ने यह ऑटो-इजेक्ट चार्जर तैयार किया है. आइए जानते हैं कि Auto-Eject Phone Charger कैसे काम करता है और इसके क्या फायदे हो सकते हैं.
कैसे काम करता है Auto-Eject Phone Charger?
यह ट्रेडिशनल चार्जर से थोड़ा अलग है. ट्रेडिशनल चार्जर बैटरी चार्ज होने के बाद भी फोन में प्लग-इन रहते हैं. इससे ओवरहीटिंग का इश्यू आ सकता है और कुछ मामलों में बैटरी में ब्लास्ट भी हो सकता है. Kuwajia का चार्जर इस मामले में अलग है. यह डिटेक्ट कर लेता है कि फोन की बैटरी फुल चार्ज हो गई है. इसके बाद इलेक्ट्रोमैग्नेट लॉक को रिलीज कर देती है, जिससे स्प्रिंग बाहर आ जाता है और चार्जर डिवाइस और प्लग से हट जाता है.

China has invented one of the safest phone chargersChinese company Kuwajia has developed an unusual charger that automatically pops out of the phone&amp;rsquo;s charging port when the battery reaches 100%.Once the phone is fully charged, a special mechanism using a spring and an&amp;hellip; pic.twitter.com/SVrrS3lnaA
&amp;mdash; NEXTA (@nexta_tv) April 18, 2026



Auto-Eject Phone Charger के फायदे क्या हैं?

यह बैटरी फुल चार्ज होने के बाद अनप्लग हो जाता है, जिससे बिजली की खपत कम होती है.&amp;nbsp;
यह आग लगने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सेफ्टी की एक्स्ट्रा लेयर प्रदान करता है.&amp;nbsp;
यह उन फोन के लिए बहुत काम का हो सकता है, जिनमें स्मार्ट बैटरी प्रोटेक्शन नहीं मिलता.&amp;nbsp;
यह रात में फोन चार्ज लगाकर सोने वाले लोगों के लिए भी काम की चीज हो साबित हो सकता है.

क्या नए फोन के लिए भी Auto-Eject Phone Charger जरूरत है?
मॉडर्न स्मार्टफोन में इंटेलीजेंट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम मिलता है. इससे फोन की बैटरी फुल चार्ज होते ही चार्जिंग बंद हो जाती है. इससे फोन ओवरचार्ज नहीं होते. इसलिए कुछ लोगों का कहना है कि Auto-Eject Phone Charger की अब जरूरत नहीं है. यह आसान चार्जिंग प्रोसेस को मुश्किल बना सकता है.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>डिजिटल अरेस्ट से कैसे निर्भय बनाएगा &amp;apos;अभय&amp;apos;, कैसे काम करेगा फर्जी नोटिस पहचानने का यह सिस्टम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/डिजिटल-अरेस्ट-से-कैसे-निर्भय-बनाएगा-अभय-कैसे-काम-करेगा-फर्जी-नोटिस-पहचानने-का-यह-सिस्टम</link>
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        <description><![CDATA[ Digital Arrest AI Chatbot Abhay: देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के मामलों को देखते हुए Central Bureau of Investigation (CBI) एक नया AI चैटबॉट अभय लॉन्च करने जा रहा है. इस चैटबॉट को 20 अप्रैल को पेश किया जाएगा जिसका मकसद लोगों को फर्जी नोटिस पहचानने और डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम से बचाने में मदद करना है.
किस मौके पर होगा लॉन्च?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस खास पहल को Surya Kant द्वारा दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित DP कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान लॉन्च किया जाएगा. यह कार्यक्रम CBI के पहले निदेशक धर्मनाथ प्रसाद कोहली की याद में आयोजित किया जाता है.
अभय चैटबॉट क्या करेगा?
यह AI आधारित चैटबॉट आम लोगों को यह समझने में मदद करेगा कि कोई नोटिस असली है या नकली. आजकल ठग सरकारी एजेंसियों के नाम पर नकली दस्तावेज भेजकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं. अभय का उद्देश्य इसी डर को खत्म करना है ताकि लोग बिना घबराए सही जानकारी हासिल कर सकें और ठगी से बच सकें.
कैसे काम करता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
इन दिनों साइबर अपराधी बेहद चालाकी से लोगों को निशाना बना रहे हैं. वे ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए फर्जी नोटिस भेजते हैं जिनमें सरकारी मुहर और कानूनी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद पीड़ित को बताया जाता है कि उसका नाम किसी बड़े अपराध जैसे मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में जुड़ा हुआ है. डर का माहौल बनाकर उसे वीडियो कॉल पर रखा जाता है और यह यकीन दिलाया जाता है कि वह डिजिटल अरेस्ट में है. फिर उसे तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है यह कहकर कि इससे गिरफ्तारी टल जाएगी.
बढ़ता साइबर फ्रॉड और बड़ा नुकसान
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह के साइबर फ्रॉड से देश में अब तक करीब 54,000 रुपये करोड़ की ठगी हो चुकी है. यह आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराध कितनी तेजी से बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए नई तकनीक की कितनी जरूरत है.
अभय कैसे करेगा आपकी मदद?
अभय जैसे टूल्स लोगों को जागरूक बनाने के साथ-साथ उन्हें तुरंत सही जानकारी देने में मदद करेंगे. इससे ठगों द्वारा बनाए गए डर और भ्रम को तोड़ा जा सकेगा. अभय चैटबॉट का मुख्य काम ऐसे फर्जी नोटिस और संदेशों की पहचान करना है. अगर किसी व्यक्ति को कोई संदिग्ध नोटिस मिलता है तो वह उसे इस सिस्टम में जांच सकता है.
यह AI तकनीक के जरिए नोटिस की भाषा, फॉर्मेट और अन्य संकेतों का विश्लेषण करके बताएगा कि वह असली है या नकली. इससे लोगों को तुरंत सही जानकारी मिल सकेगी और वे घबराहट में गलत कदम उठाने से बच पाएंगे.
डर को खत्म करना ही असली लक्ष्य
साइबर ठगों की सबसे बड़ी ताकत लोगों का डर और भ्रम होता है. वे कानूनी भाषा, सरकारी मुहर और सख्त शब्दों का इस्तेमाल करके ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति सोचने-समझने की स्थिति में नहीं रहता. अभय इसी डर को तोड़ने का काम करेगा. यह यूजर्स को शांत रहने और सही फैसले लेने में मदद करेगा ताकि वे किसी भी तरह की ठगी का शिकार न बनें.
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
यह चैटबॉट एक डिजिटल सहायक की तरह काम करेगा. यूजर जैसे ही कोई नोटिस या मैसेज इसमें डालता है सिस्टम उसे स्कैन करके उसकी सत्यता की जांच करेगा. इसके साथ ही यह यूजर को जरूरी सलाह भी देगा जैसे कि क्या कदम उठाने चाहिए या किससे संपर्क करना चाहिए. इस तरह यह केवल पहचान ही नहीं बल्कि गाइडेंस भी देगा.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>डिजिटल, अरेस्ट, से, कैसे, निर्भय, बनाएगा, अभय, कैसे, काम, करेगा, फर्जी, नोटिस, पहचानने, का, यह, सिस्टम</media:keywords>
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        <title>स्मार्टफोन में होने जा रहा है बदलाव, साइज होगा बड़ा, यूजर खुद बदल सकेंगे बैटरी</title>
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        <description><![CDATA[ New Smartphone Rules: जल्द ही आपको बैटरी डेड हो जाने के कारण नया फोन खरीदने के झंझट से छुटकारा मिल सकता है. दरअसल, कई यूजर्स की शिकायत रहती है कि उनका फोन नया होता है, लेकिन बैटरी खराब होने के कारण उन्हें फिर से नए फोन पर पैसा खर्च करना पड़ता है. अब यह स्थिति बदलने वाली है. यूरोपीय संघ नए नियम लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत कंपनियों को ऐसे फोन बनाने होंगे, जो ज्यादा समय तक चल सके और जिन्हें रिपेयर करना भी आसान है. एक बड़ा बदलाव बैटरी को लेकर भी हो सकता है. आइए जानते हैं कि नए नियम ग्राहकों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकते हैं.&amp;nbsp;
2027 से लागू हो जाएंगे नए नियम
पिछले कुछ सालों से कंपनियों ने अपने फोन में रिप्लेसेबल बैटरी देना बंद कर दिया है. यानी अगर यूजर चाहे तो वह आसानी से बैटरी नहीं बदल सकता. 2027 से नए नियम लागू होने के बाद कंपनियों को ऐसे फोन डिजाइन करने होंगे, जिनकी बैटरी यूजर खुद आसानी से बदल सके. इसके अलावा फोन में ऐसी बैटरी देनी होगी, जो ज्यादा चल सके और ज्यादा चार्ज साइकिल को हैंडल कर पाए. इससे फोन का साइज भी बड़ा हो सकता है. कंपनियों पर यह भी बाध्यता होगी कि उन्हें किसी मॉडल के लॉन्च होने के 10 साल बाद तक उनके स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध करवाने होंगे और वो रिपेयरिंग के नाम पर ग्राहकों से मनमर्जी के पैसे नहीं ले सकेंगे. कंपनियों की फोन की रिपेयरिंग भी किफायती बनानी होगी.
कंपनियों की मनमानी पर लगेगी रोक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई जानकारों का मानना है कि नए नियमों से कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी. दरअसल, कंपनियां अभी ऐसे फोन डिजाइन कर रही हैं, जो लिमिटेड लाइफस्पैन के साथ आते हैं और यूजर को जरूरत न होने पर भी हर कुछ साल बाद फोन बदलना पड़ता है. इसके अलावा इस कदम से इलेक्ट्रॉनिक कचरे पर भी कुछ लगाम लगने की उम्मीद है. दरअसल, हर साल फोन और उससे जुड़ी एक्सेसरीज के कारण भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा होता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक होता है.
भारत में यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?
ये नए नियम अगले साल से यूरोपीय संघ में लागू होंगे. इन नियमों का सीधे तौर पर भारत के ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, एक जगह ये नियम लागू होने के बाद कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा और दूसरी मार्केट्स के ग्राहक भी अपने लिए ऐसे फोन की डिमांड कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp Plus क्या है? क्या अब चैटिंग के लिए भी देना होगा पैसा! जानिए क्या है पूरी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Plus: दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp अब एक नए प्रीमियम प्लान पर काम कर रहा है जिसका नाम WhatsApp Plus रखा गया है. यह एक पेड सब्सक्रिप्शन होगा लेकिन अच्छी बात यह है कि इसका असर ऐप के बेसिक इस्तेमाल पर नहीं पड़ेगा.
फ्री रहेगा WhatsApp का असली अनुभव
इस नए प्लान के आने के बाद भी यूजर्स के लिए मैसेज भेजना, कॉल करना और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुविधाएं पहले की तरह फ्री रहेंगी. यानी आम यूजर्स को रोजमर्रा के काम के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा. WhatsApp Plus सिर्फ उन लोगों के लिए है जो ऐप में थोड़ा ज्यादा कंट्रोल और कस्टमाइजेशन चाहते हैं.
WhatsApp Plus में क्या मिलेगा खास?
इस सब्सक्रिप्शन के जरिए यूजर्स को कुछ एक्स्ट्रा फीचर्स मिलेंगे जो सामान्य यूजर्स को नहीं मिलते. इसमें खास स्टिकर्स, अलग-अलग थीम और ऐप के आइकन बदलने का विकल्प शामिल होगा जिससे आप अपने WhatsApp का लुक पूरी तरह बदल सकते हैं.
इसके अलावा, आप ज्यादा चैट्स को पिन कर पाएंगे जिससे जरूरी बातचीत हमेशा ऊपर दिखाई देगी. यूजर्स अपने पसंदीदा कॉन्टैक्ट्स के लिए अलग-अलग रिंगटोन और नोटिफिकेशन सेट कर सकेंगे जिससे चैटिंग का अनुभव और पर्सनल हो जाएगा.
किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर?
फिलहाल यह फीचर सीमित यूजर्स के साथ टेस्ट किया जा रहा है खासकर एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर. आने वाले समय में इसे धीरे-धीरे बाकी यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सुविधा सिर्फ WhatsApp Messenger पर ही उपलब्ध होगी बिजनेस ऐप पर नहीं.
कैसे काम करेगा सब्सक्रिप्शन?
WhatsApp Plus एक मासिक सब्सक्रिप्शन होगा जिसे यूजर अपने ऐप की सेटिंग्स में जाकर एक्टिव कर सकेंगे. एक बार एक्टिव करने के बाद यह हर महीने अपने आप रिन्यू होता रहेगा जब तक यूजर इसे बंद न करे. पेमेंट ऐप स्टोर के जरिए किया जाएगा और सभी फीचर्स को उसी अकाउंट से मैनेज किया जा सकेगा.
कितनी हो सकती है कीमत?
अभी इसकी आधिकारिक कीमत सामने नहीं आई है लेकिन शुरुआती टेस्टिंग में यूरोप में इसकी कीमत करीब &amp;euro;2.49 प्रति माह बताई जा रही है. भारत में इसकी कीमत इससे कम हो सकती है और अनुमान है कि यह लगभग 200&amp;ndash;250 रुपये के आसपास हो सकती है.
क्या रखना होगा ध्यान?
WhatsApp Plus का इस्तेमाल सिर्फ ऑफिशियल ऐप के जरिए ही किया जा सकेगा. अगर कोई यूजर अनऑफिशियल या मॉडेड वर्जन का इस्तेमाल करता है तो उसका अकाउंट अस्थायी या स्थायी रूप से बंद भी किया जा सकता है. WhatsApp Plus उन यूजर्स के लिए एक नया विकल्प है जो अपने चैटिंग अनुभव को और खास बनाना चाहते हैं. हालांकि, सामान्य यूजर्स के लिए ऐप पहले की तरह फ्री रहेगा.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>पड़ोसी देश के लोग नहीं कर पा रहे इंटरनेट का इस्तेमाल! जानिए क्या है Internet Load Shedding जिसने खड़ी कर दी नई मुसीबत</title>
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        <description><![CDATA[ पड़ोसी देश के लोग नहीं कर पा रहे इंटरनेट का इस्तेमाल! जानिए क्या है Internet Load Shedding जिसने खड़ी कर दी नई मुसीबत ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Airtel का नया रिचार्ज प्लान! अब 84 दिन तक मिलेंगे इतने सारे बेनिफिट्स, कीमत 500 रुपये से भी कम</title>
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        <description><![CDATA[ Airtel का नया रिचार्ज प्लान! अब 84 दिन तक मिलेंगे इतने सारे बेनिफिट्स, कीमत 500 रुपये से भी कम ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>सरकार ने दी नए एंड्रॉयड मालवेयर की वॉर्निंग, फोन पर कर लेगा कब्जा, हटाना भी मुश्किल</title>
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        <description><![CDATA[ Android God Mode: Android स्मार्टफोन यूजर्स पर इन दिनों एक नया खतरा मंडरा रहा है, जिसे लेकर सरकार ने वॉर्निंग जारी की है. दरअसल, सरकार ने एंड्रॉयड मालवेयर की एक नई कैटेगरी को लेकर यूजर्स को चेताया है. इसे Android God Mode कहा जा रहा है. यह फोन पर पूरी तरह कब्जा कर लेता है. फर्जी ऐप्स के साथ आने वाले इस मालवेयर को फोन से हटाना भी बहुत मुश्किल है. आइए जानते हैं कि यह मालवेयर कितना खतरनाक है और इसे फोन से हटाने के लिए क्या करने की जरूरत है.&amp;nbsp;
कितना खतरनाक है यह वायरस?
यह वायरस एंड्रॉयड एक्सेसिबिलिटी सर्विस का फायदा उठाकर फोन पर कब्जा कर लेता है. यह बैंकिंग या यूटिलिटी के नाम पर शेयर की जाने वालीं फर्जी ऐप्स के साथ छिपकर फोन में इंस्टॉल हो जाता है. एक बार परमिशन मिलने के बाद यह फोन की स्क्रीन पर होने वाली सारी एक्टिविटी पर नजर रख सकता है. इसके अलावा यह मैसेज पढ़ने, इनपुट ट्रैक करने और यूजर की मर्जी के बिना के बिना कई टास्क परफॉर्म करने जैसे काम कर सकता है. इसका एक और खतरा है कि यह OTP समेत सारे मैसेज पढ़ सकता है और बैकग्राउड में भी कैमरा भी यूज कर सकता है.&amp;nbsp;
कहीं आपके फोन में तो यह मालवेयर नहीं?
अगर आपने किसी अनजान व्यक्ति से मिले लिंक या अनट्रस्टेड सोर्स से कोई ऐप डाउनलोड की है तो उसके साथ मालवेयर इंस्टॉल होने का भी खतरा रहता है. अगर आपके फोन में इंस्टॉल ऐप बार-बार एक्सेसिबिलिटी परमिशन मांग रही है या खुद को डिफॉल्ट लॉन्चर के तौर पर सेट कर रही है तो आपको सावधान होना चाहिए. इसके अलावा आपको मैसेज एक्टिविटी और कॉल फॉरवर्डिंग आदि पर भी नजर रखने की जरूरत है. अगर आपके फोन से कोई ऐप अनइंस्टॉल नहीं हो रही है तो यह भी खतरे की घंटी है.
Android God Mode को कैसे हटाएं?
अगर आपके फोन में यह मालवेयर इंस्टॉल हो गया है तो सरकारी एजेंसी ने इसे हटाने का तरीका भी बताया है. सबसे पहले फोन को सेफ मोड में बूट करें. इससे मालवेयर के कंट्रोल को बाईपास करना आसान हो जाएगा. इसके बाद सेटिंग में जाकर संदिग्ध ऐप्स को अनइंस्टॉल कर दें. इसके बाद मालवेयर का इंटरफेस कंट्रोल तोड़ने के लिए सेटिंग में जाकर सिस्टम के लॉन्चर को डिफॉल्ट लॉन्चर के तौर पर सेट करें. अब एक्सेसिबिलिटी सेटिंग और डिवाइस एडमिन परमिशन को रिव्यू करते हुए किसी भी अननॉन सर्विस को दी गई परमिशन कैंसिल कर दें. अगर मालवेयर से कॉल फॉरवर्डिंग इनेबल हो गई है तो ##002# डायल कर इसे डिसेबल कर दें. अंतर में डिवाइस को रिस्टार्ट कर लें.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone यूजर्स के लिए जल्द आएगा बड़ा अपग्रेड, बिना इंटरनेट कर पाएंगे ये दो काम</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Satellite Features: ऐप्पल यूजर्स के लिए जल्द ही बड़ा अपग्रेड आने वाला है, जिसके बाद उनके लिए मैप्स और फोटोज को शेयर करना और भी आसान हो जाएगा. यह अपग्रेड आईफोन यूजर्स को बिना इंटरनेट कनेक्शन के मैप्स और फोटोज शेयर करने का ऑप्शन देगा. अभी ऐप्पल का सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर इमरजेंसी SOS, फाइंड माई, रोडसाइड असिस्टेंटस और मैसेजेज को सपोर्ट करता है. अगले कुछ समय में इसमें मैप्स और फोटोज के साथ-साथ कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स का सपोर्ट भी जोड़ा जा सकता है. आइए डिटेल में जानते हैं कि इस अपकमिंग अपग्रेड में आईफोन यूजर्स के लिए क्या-क्या बदलने वाला है.&amp;nbsp;
अमेजन-ऐप्पल की पार्टनरशिप के कारण बदलेंगी चीजें
हाल ही में अमेजन ने ऐलान किया है कि वह ऐप्पल के सैटेलाइट फीचर्स सपोर्ट करने वाली कंपनी ग्लोबलस्टार को एक्वायर करेगी. अभी इस डील को रेगुलेटरी अप्रूवल मिलना बाकी है. माना जा रहा है कि अगले साल तक यह डील पूरी हो जाएगी, जिसके बाद ऐप्पल के सैटेलाइट फीचर्स अमेजन के लो-अर्थ ऑरबिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क पर ऑपरेट कर सकेंगे. इससे आईफोन यूजर्स को मौजूदा फीचर्स के साथ-साथ नए फीचर भी मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
सैटेलाइट से मिलेगी 5G कनेक्टिविटी
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐप्पल और अमेजन के साथ आने से आईफोन यूजर्स को सैटेलाइट के जरिए 5G कनेक्टिविटी का फीचर्स दिया जा सकता है. हालांकि, यह केवल प्रो मॉडल तक सीमित हो सकता है. इसमें कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स और ऐप्पल मैप्स सपोर्ट के साथ-साथ मैसेज के जरिए फोटोज शेयर करने का ऑप्शन मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा ऐप्पल कनेक्शन को और स्ट्रॉन्ग बनाने की भी कोशिश कर रही है ताकि यूजर्स को ये फीचर्स यूज करने के लिए आईफोन को आसमान की तरफ न करना पड़े.
अब केवल इमरजेंसी में काम नहीं सैटेलाइट कनेक्टिविटी का फीचर
अगर आसान भाषा में समझा जाए तो ऐप्पल इस अपग्रेड के साथ सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर को केवल इमरजेंसी टूल तक लिमिटेड नहीं रखना चाहती. वह इसे ऐसा सिस्टम बनाना चाहती है तो बिना नेटवर्क वाले इलाकों मे कम्यूनिकेशन को भी सपोर्ट कर सके. अब ग्लोबलस्टार को खरीदने के बाद अमेजन भी ऐप्पल के सैटेलाइट सिस्टम में अहम भूमिका निभाएगी. हालांकि, यूजर्स को इस डील का तुरंत असर देखने को नहीं मिलेगा. उनके लिए सैटेलाइट कनेक्टिविटी वाले फीचर्स पहले की तरह ही काम करते रहेंगे. बता दें कि ऐप्पल भी अपने सैटेलाइट नेटवर्क को एक्सपैंड करने का प्लान बना रही है, जिसे डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इससे यूजर्स को बेहतर सिग्नल, तेज स्पीड और ज्यादा कवरेज मिलेगी.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>iOS 27 में होगा बड़ा धमाका! iPhone यूजर्स के लिए आने वाले हैं ये जबरदस्त फीचर्स, देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Apple iOS 27: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Apple जल्द ही अपने नए सॉफ्टवेयर अपडेट iOS 27 को पेश कर सकती है. माना जा रहा है कि इस अपडेट की घोषणा कंपनी अपने सालाना इवेंट WWDC 2026 के दौरान 8 जून 2026 को करेगी. हर साल की तरह इस बार भी यूजर्स को कई नए बदलाव और बेहतर एक्सपीरियंस मिलने की उम्मीद है. हालांकि अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन लीक रिपोर्ट्स से कुछ अहम संकेत जरूर मिले हैं.
कब होगा iOS 27 लॉन्च?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, iOS 27 की पहली झलक जून 2026 में WWDC इवेंट में देखने को मिल सकती है. इसके बाद कंपनी डेवलपर और बीटा वर्जन जारी करेगी. अगर Apple अपनी पुरानी टाइमलाइन को फॉलो करता है तो यह अपडेट सितंबर 2026 में सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है जो नई iPhone सीरीज के साथ आएगा.
सैटेलाइट कनेक्टिविटी में बड़ा अपग्रेड
इस बार iOS 27 में सैटेलाइट फीचर्स को और मजबूत बनाया जा सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी 5G सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्टिविटी पर काम कर रही है. यह सुविधा शुरुआत में नए डिवाइसेस जैसे iPhone 18 Pro तक सीमित रह सकती है जिसमें Apple का नया C2 मॉडेम देखने को मिल सकता है. अब तक सैटेलाइट फीचर सिर्फ इमरजेंसी मैसेजिंग तक सीमित था लेकिन iOS 27 में इसका इस्तेमाल और भी बढ़ सकता है. उदाहरण के तौर पर, बिना नेटवर्क के Apple Maps का इस्तेमाल करना या सैटेलाइट के जरिए फोटो भेजना संभव हो सकता है.
परफॉर्मेंस और स्टेबिलिटी पर खास फोकस
इस बार Apple डिजाइन में बड़े बदलाव करने के बजाय सिस्टम को ज्यादा स्मूद और भरोसेमंद बनाने पर ध्यान दे सकता है. लीक के अनुसार, iOS 27 को एक क्लीनअप अपडेट की तरह तैयार किया जा रहा है, जहां बग्स कम होंगे, ऐप्स ज्यादा तेजी से काम करेंगे और ओवरऑल सिस्टम स्टेबिलिटी बेहतर होगी. यह अप्रोच पहले macOS Snow Leopard जैसे अपडेट में भी देखने को मिल चुकी है.
स्मार्ट कीबोर्ड और बेहतर टाइपिंग अनुभव
iOS 27 में iPhone कीबोर्ड को भी अपग्रेड किया जा सकता है. नया सिस्टम सिर्फ ऑटो-करेक्ट तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यूजर के लिखने के अंदाज को समझकर बेहतर शब्द सुझाव देगा. इससे टाइपिंग न सिर्फ तेज होगी बल्कि ज्यादा नेचुरल भी लगेगी.
डिजाइन में हल्का बदलाव
Apple अपने Liquid Glass डिजाइन को और निखार सकता है. इस बार यूजर्स को इंटरफेस की ट्रांसपेरेंसी कंट्रोल करने का विकल्प मिल सकता है. यानी आप अपनी पसंद के हिसाब से UI को ज्यादा या कम पारदर्शी बना सकेंगे.
Apple Intelligence से मिलेंगे नए स्मार्ट फीचर्स
iOS 27 में Apple Intelligence को और बेहतर किया जा सकता है. इसमें कई काम आसान हो सकते हैं जैसे

खाने के पैकेट को स्कैन करके न्यूट्रिशन जानकारी जानना
फिजिकल कार्ड्स को डिजिटल फॉर्म में सेव करना
Safari टैब्स को अपने आप व्यवस्थित करना
ये फीचर्स iPhone 15 Pro और उससे ऊपर के मॉडल्स में देखने को मिल सकते हैं.

क्या iOS 27 होगा बड़ा अपडेट?
अगर लीक सही साबित होते हैं तो iOS 27 दिखने में बहुत ज्यादा अलग नहीं होगा लेकिन इसके अंदर काफी बड़े सुधार किए जाएंगे. यह अपडेट यूजर्स को ज्यादा स्मूद, तेज और स्मार्ट अनुभव देने पर केंद्रित हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सैमसंग के इस मुड़ने वाले फोन पर आ गया बड़ा डिस्काउंट, यहां से उठाएं हजारों की छूट का फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Galaxy Z Fold 6 Price Drop: अगर आप फोल्डेबल फोन लेना चाहते हैं, लेकिन ज्यादा कीमत के कारण रुके हुए हैं तो आपके लिए शानदार मौका आ गया है. सैमसंग के Galaxy Z Fold 6 पर इस समय शानदार डिस्काउंट ऑफर चल रहा है, जिस कारण आप हजारों रुपये की बचत कर सकते हैं. बता दें कि Galaxy Z Fold 6 में कई अमेजिंग फीचर्स मिलते हैं, जिसके कारण 2024 में लॉन्च हुआ यह फोन आज भी रेलेवेंट है. आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या-क्या फीचर्स मिलते हैं और इस पर डिस्काउंट का फायदा कहां से उठाया जा सकता है.
सबसे पहले देखें Galaxy Z Fold 6 के स्पेसिफिकेशंस
Galaxy Z Fold 6 में 7.6 इंच का Dynamic LTPO AMOLED 2X मेन डिस्प्ले और 6.3 इंच का कवर डिस्प्ले लगा हुआ है. सैमसंग ने इसमें क्वालकॉम का Snapdragon 8 Gen 3 प्रोसेसर दिया है, जिसे Adreno 750 GPU के साथ पेयर किया गया है. कंपनी इसे सात साल तक अपग्रेड्स देगी, जिससे यह फोन अगले कई सालों तक नया बना रहेगा. अगर कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 50MP का प्राइमरी सेंसर, 12MP का अल्ट्रावाइड एंगल सेंसर और 10MP का टेलीफोटो सेंसर लगा हुआ है. सेल्फी और वीडियो के लिए इसमें 4MP और 10MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. 4400mAh वाला यह फोन 25W वायर्ड और 15W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है. इसे गैलेक्सी एआई फीचर्स भी दिए गए हैं.
Galaxy Z Fold 6 पर कितना डिस्काउंट?
भारत में Galaxy Z Fold 6 के 12GB+256GB वेरिएंट को 1,64,999 रुपये में लॉन्च किया गया था. फ्लिपकार्ट पर अब यह फोन 1,06,502 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा सेलेक्टेड क्रेडिट कार्ड होल्डर को 4,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी दिया जा रहा है. इस कीमत पर तगड़े फीचर्स वाला यह फोन एक जबरदस्त च्वॉइस हो सकती है.&amp;nbsp;
Pixel 10 पर भी मिल रही छप्परफाड़ छूट
सैमसंग के मुड़ने वाले फोन की तरह Google के फ्लैगशिप डिवाइस Pixel 10 पर छप्परफाड़ छूट मिल रही है. भारत में यह फोन 79,999 रुपये में लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी अमेजन पर 10,000 रुपये से ज्यादा के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 69,700 रुपये में लिस्टेड है. फ्लैट डिस्काउंट के अलावा इस पर 3,000 रुपये के कैशबैक और बैंक ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है. इस तरह यह फोन लॉन्चिंग प्राइस से काफी कम कीमत पर खरीदा जा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली&amp;NCR बना ChatGPT का गढ़! बाकी राज्यों में कैसे हो रहा इस्तेमाल, जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <title>Google Chrome में खतरनाक बग! एक क्लिक में हैकर्स ले सकते हैं आपके PC पर पूरा कंट्रोल</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome में खतरनाक बग! एक क्लिक में हैकर्स ले सकते हैं आपके PC पर पूरा कंट्रोल ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>क्या इन्वर्टर पर भी इंडक्शन को चला सकते हैं? अभी जान लें सच्चाई वरना एक गलती से हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Induction on Inverter: आजकल बिजली कटौती के दौरान इन्वर्टर हर घर की जरूरत बन चुका है. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि क्या इन्वर्टर पर इंडक्शन चूल्हा चलाया जा सकता है? जवाब है हां लेकिन इसमें कुछ जरूरी शर्तें और जोखिम भी जुड़े होते हैं. अगर बिना समझे इस्तेमाल किया तो आपका इन्वर्टर या बैटरी दोनों खराब हो सकते हैं.
इंडक्शन चूल्हा कितनी बिजली खाता है?
इंडक्शन चूल्हा आमतौर पर 1200W से 2000W तक बिजली खपत करता है. यानी यह एक हाई-पावर डिवाइस है. वहीं, घरों में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर इन्वर्टर 600VA से 1500VA तक के होते हैं जो इतने भारी लोड को लंबे समय तक संभाल नहीं पाते.
इन्वर्टर की क्षमता क्यों है जरूरी?
अगर आप इंडक्शन चलाना चाहते हैं तो आपके इन्वर्टर की क्षमता कम से कम 2000VA या उससे ज्यादा होनी चाहिए. साथ ही, बैटरी भी मजबूत होनी चाहिए (जैसे 150Ah या उससे अधिक). अगर इन्वर्टर की क्षमता कम हुई तो वह ओवरलोड हो सकता है और अचानक बंद भी हो सकता है.
बैटरी पर क्या पड़ेगा असर?
इंडक्शन चूल्हा ज्यादा बिजली खींचता है जिससे बैटरी बहुत तेजी से डिस्चार्ज होती है. उदाहरण के लिए, अगर आप 150Ah बैटरी पर इंडक्शन चलाते हैं तो यह मुश्किल से 20-30 मिनट ही चल पाएगा. ज्यादा देर चलाने पर बैटरी की लाइफ कम हो सकती है.
क्या हर इन्वर्टर पर चलेगा इंडक्शन?
नहीं. इंडक्शन चूल्हा चलाने के लिए आपको Pure Sine Wave इन्वर्टर की जरूरत होती है. साधारण या Square Wave इन्वर्टर पर इंडक्शन ठीक से काम नहीं करेगा और डिवाइस को नुकसान भी पहुंच सकता है.
सेफ्टी टिप्स जो जरूर जान लें
इंडक्शन को इन्वर्टर पर चलाते समय कुछ सावधानियां बहुत जरूरी हैं.

हमेशा हाई-कैपेसिटी इन्वर्टर का इस्तेमाल करें
एक समय में सिर्फ इंडक्शन ही चलाएं, अन्य भारी उपकरण बंद रखें
ज्यादा देर तक लगातार इस्तेमाल न करें
बैटरी की हेल्थ का ध्यान रखें

कब है सही विकल्प?
अगर आपको कभी-कभी हल्का खाना बनाना है, जैसे चाय या मैगी, तो इन्वर्टर पर इंडक्शन चलाना ठीक है. लेकिन रोजाना या लंबे समय तक इस्तेमाल करना सही नहीं है. इसके लिए गैस या अन्य विकल्प बेहतर रहेंगे. इन्वर्टर पर इंडक्शन चलाना संभव तो है लेकिन यह पूरी तरह आपके सिस्टम की क्षमता पर निर्भर करता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>क्या AI हमारी सोचने की क्षमता को कमजोर कर रहा है? रिपोर्ट में हो गया हैरान करने वाला खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: आजकल लोग छोटी-बड़ी हर समस्या के लिए AI टूल्स का सहारा लेने लगे हैं. सवाल पूछना हो, मैथ सॉल्व करना हो या किसी टॉपिक को समझना सब कुछ कुछ सेकंड में मिल जाता है. लेकिन जहां ये तकनीक काम को आसान बनाती है वहीं इसके कुछ ऐसे असर भी सामने आ रहे हैं जिन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा.
दिमाग पर AI का असर क्या कहता है नया अध्ययन?
एक हालिया रिसर्च में यह सामने आया कि AI की मदद से लोग अपने काम तेजी से पूरा कर लेते हैं खासकर जब बात कठिन सवालों या लॉजिक से जुड़े टास्क की हो. यानी जब तक AI साथ होता है प्रदर्शन अच्छा दिखता है. लेकिन असली समस्या तब सामने आई जब शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से AI की मदद हटा दी. जैसे ही यह सहारा खत्म हुआ, लोगों की परफॉर्मेंस में गिरावट देखने को मिली. वे ज्यादा गलतियां करने लगे और कठिन सवालों को हल करने में उनकी रुचि भी कम हो गई.
कुछ ही मिनटों का असर
इस अध्ययन में यह भी देखा गया कि सिर्फ 10 मिनट तक AI की मदद लेना ही काफी था जिससे लोगों की स्वतंत्र सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता पर असर पड़ा. यानी कम समय का इस्तेमाल भी लंबे समय के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है.
अलग-अलग समूह, एक जैसा नतीजा
शोध में सैकड़ों लोगों को शामिल किया गया और उन्हें अलग-अलग टास्क दिए गए. कुछ को गणित के सवाल हल करने थे जबकि कुछ को समझने वाले पैराग्राफ पढ़ने थे. दिलचस्प बात यह रही कि सभी समूहों में एक जैसी प्रवृत्ति देखी गई AI के बिना उनकी परफॉर्मेंस कमजोर हो गई.
क्यों चिंता की बात है?
इस विषय पर काम करने वाले शोधकर्ता रचित दुबे के अनुसार, यह सिर्फ गलत जवाब देने का मामला नहीं है. असली चिंता यह है कि लोग धीरे-धीरे खुद सोचने की आदत खो सकते हैं. अगर हर काम के लिए AI पर निर्भरता बढ़ती गई तो इंसान में धैर्य कम हो सकता है और वह खुद से समस्याएं हल करने से बचने लगेगा.
संतुलन ही है समाधान
AI एक शक्तिशाली टूल है लेकिन इसका सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है. अगर इसे सिर्फ सहायक की तरह इस्तेमाल किया जाए और अपनी सोच को एक्टिव रखा जाए तो यह फायदेमंद साबित हो सकता है. वरना, ज्यादा निर्भरता हमारी सोचने और समझने की क्षमता को धीरे-धीरे कमजोर कर सकती है.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>1 लाख रूपये वाला iPhone अब आधी कीमत में! जानिए कैसे सिर्फ 50 हजार में मिलेगा ये प्रीमियम फोन</title>
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        <description><![CDATA[ 1 लाख रूपये वाला iPhone अब आधी कीमत में! जानिए कैसे सिर्फ 50 हजार में मिलेगा ये प्रीमियम फोन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>फोन बार&amp;बार हैंग हो रहा है? ये 5 आसान ट्रिक्स अपनाते ही मिनटों में हो जाएगा सुपरफास्ट</title>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>जापान की अजब&amp;गजब टेक्नोलॉजी! अब इंसानों की भी होगी मशीन में धुलाई, कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ Human Washing Machine: Japan एक बार फिर अपनी अनोखी तकनीक को लेकर सुर्खियों में है. यहां की कंपनी Science Inc. ने ऐसी मशीन पेश की है जो कपड़े नहीं बल्कि इंसानों को धोती है. Human Washing Machine नाम की यह हाई-टेक डिवाइस पहली बार Expo 2025 में दिखाई गई थी और अब इसे बाजार में उतारा जा रहा है.
कैसा है यह हाई-टेक बाथिंग कैप्सूल?
यह मशीन देखने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की तरह लगती है. करीब 7.5 फीट लंबे इस कैप्सूल के अंदर बैठने के लिए आरामदायक सीट दी गई है जहां यूजर आराम से बैठकर पूरी तरह ऑटोमैटिक वॉशिंग का अनुभव ले सकता है. पूरा प्रोसेस लगभग 15 मिनट में खत्म हो जाता है.
बिना मेहनत के पूरी सफाई
इस मशीन में पुराने पानी के दबाव की जगह माइक्रोबबल्स और हल्की भाप का इस्तेमाल किया जाता है. ये छोटे-छोटे बुलबुले त्वचा से गंदगी, तेल और मृत कोशिकाओं को हटाने का काम करते हैं. खास बात यह है कि यूजर को कुछ भी करने की जरूरत नहीं होती पूरा काम मशीन खुद कर देती है.
स्पा जैसा अनुभव भी मिलेगा
सिर्फ सफाई ही नहीं यह मशीन एक रिलैक्सिंग अनुभव भी देती है. इसमें हल्की रोशनी और सॉफ्ट म्यूजिक का इस्तेमाल किया गया है जिससे यूजर को स्पा जैसा फील मिलता है. वॉशिंग के बाद मशीन खुद ही शरीर को सुखा भी देती है जिससे तौलिया इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती.
माइंड रिलैक्स करने की भी क्षमता
कंपनी का दावा है कि यह मशीन सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग को भी आराम देती है. इसमें लगे सेंसर हार्ट रेट और अन्य शारीरिक संकेतों को मॉनिटर करते हैं. अगर यूजर को किसी तरह की असहजता महसूस होती है तो मशीन अपने आप प्रोसेस को एडजस्ट या रोक सकती है.
कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश
यह डिवाइस आम लोगों के लिए फिलहाल काफी महंगी है. इसकी कीमत करीब 60 मिलियन येन (लगभग 3 करोड़ रुपये से ज्यादा) बताई जा रही है. कंपनी शुरुआती दौर में सिर्फ 40 से 50 यूनिट ही बनाएगी.
कहां मिलेगा यह अनुभव?
इस मशीन को सबसे पहले ओसाका के एक लग्जरी होटल ने खरीदा है जहां मेहमान इसका अनुभव ले सकेंगे. इसके अलावा, टोक्यो में एक इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर में इसका डेमो भी रखा जाएगा ताकि लोग इसे खुद ट्राई कर सकें.
क्या भविष्य में आम हो जाएगी यह तकनीक?
Expo 2025 में इस मशीन को देखने और आजमाने के लिए हजारों लोगों ने रुचि दिखाई थी. हालांकि, इसकी ऊंची कीमत और सीमित उपलब्धता इसे फिलहाल आम घरों से दूर रखती है. फिर भी, यह तकनीक भविष्य में पर्सनल केयर के नए ट्रेंड की झलक जरूर दिखाती है.
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: AC टेंपरेचर की इस गलती से बढ़ रहा है आपका बिजली का बिल, बचत के लिए फॉलो करें ये टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ AC Use Tips: गर्मियों के मौसम में एसी यूज करते समय बिजली के बिल की टेंशन लगी रहती है. दरअसल, एसी को ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती है, जिस कारण बिल देखते ही झटका लगता है. हालांकि, इस समस्या का एक समाधान है, जो आपके बिजली बिल को काफी कम कर सकता है. इसके लिए आपको एसी का टेंपरेचर सही लेवल पर सेट करना पड़ेगा. दरअसल, कई लोगों को एसी टेंपरेचर को लेकर कंफ्यूजन रहती है. इस कारण वो कम टेंपरेचर सेट कर लेते हैं, जो उनका बिजली बिल बढ़ा देता है. आइए आज जानते हैं कि टेंपरेचर को लेकर क्या गलती नहीं करनी चाहिए.&amp;nbsp;
टेंपरेचर कम सेट करने से जल्दी ठंडा नहीं होगा कमरा
कई लोगों को लग सकता है कि एसी का टेंपरेचर कम सेट करने से कमरा जल्दी ठंडा हो जाता है. उनका मानना होता है कि टेंपरेचर को 16 या 18 पर सेट करने से कूलिंग स्पीड बढ़ जाएगी. असल में ऐसा नहीं होता है. जब आप टेंपरेचर कम सेट करते हैं तो एसी के कंप्रेशर को ज्यादा काम करना पड़ता है, जिससे बिजली की खपत बढ़ती है और बिल आसमान छू जाता है.&amp;nbsp;
एसी टेंपरेचर 16 पर सेट करने पर क्या होता है?
जब एसी का टेंपरेचर 16 डिग्री पर सेट किया जाता है तो इसे ज्यादा काम करना पड़ता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि एसी लगातार कमरे का टेंपरेचर 16 डिग्री ले जाने की कोशिश करेगी. इसके लिए कंप्रेशर को लगातार चलते रहना होगा. ज्यादा तापमान के कारण इस टेंपरेचर को अचीव करना मुश्किल हो जाता है और कंप्रेशर बिना रुके बिजली की खपत करता रहता है. इसलिए एसी का टेंपरेचर 24 डिग्री पर सेट रखने की सलाह दी जाती है. इससे कंप्रेशर को लगातार चलते नहीं रहना होता. साथ ही आपको गर्मी भी नहीं लगेगी और एनर्जी की खपत भी कम होगी.
24 डिग्री टेंपरेचर से कितनी बिजली बचाई जा सकती है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे-जैसे आप टेंपरेचर बढ़ाते जाएंगे, हर डिग्री के साथ आपका बिजली का बिल कम होता जाएगा. एसी का टेंपरेचर एक डिग्री बढ़ाने पर बिजली की खपत 6 प्रतिशत कम हो जाती है. इस तरह अगर आप 16 डिग्री की जगह 24 डिग्री पर एसी चलाएंगे तो बिजली की खपत काफी कम हो जाएगी. यह एक छोटी-सी आदत पूरे गर्मी के मौसम में बिजली की खपत को काफी कम कर देगी. इससे आप बिजली के बिल में भी काफी बचत कर पाएंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Google Chrome का नया Skills फीचर क्या है? एक क्लिक में बदल देगा आपका ब्राउजिंग एक्सपीरियंस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/google-chrome-का-नया-skills-फीचर-क्या-है-एक-क्लिक-में-बदल-देगा-आपका-ब्राउजिंग-एक्सपीरियंस</link>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome Skills Feature: इंटरनेट ब्राउजिंग को पहले से ज्यादा स्मार्ट बनाने के लिए Google ने अपने Chrome ब्राउजर में एक नया AI फीचर Skills पेश किया है. यह फीचर Google Chrome में शामिल किया गया है और इसे Gemini की मदद से तैयार किया गया है. इसका मकसद रोजाना होने वाले ऑनलाइन कामों को आसान और तेज बनाना है.
क्या करता है Skills फीचर?
यह फीचर यूजर्स को बार-बार एक ही तरह के कमांड लिखने से छुटकारा दिलाता है. अगर आप किसी खास तरह का AI प्रॉम्प्ट बार-बार इस्तेमाल करते हैं तो उसे Skill के रूप में सेव कर सकते हैं. इसके बाद आप उसे एक क्लिक में दोबारा चला सकते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो यह फीचर आपके पसंदीदा AI टास्क को सेव करके उन्हें तुरंत इस्तेमाल करने की सुविधा देता है.
कैसे काम करता है यह फीचर?
Chrome में मौजूद Gemini पैनल के जरिए आप इस फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं. जब आप स्लैश (/) टाइप करते हैं तो आपके सामने उपलब्ध Skills की लिस्ट आ जाती है. आप चाहें तो खुद के कस्टम प्रॉम्प्ट बना सकते हैं या पहले से दिए गए रेडीमेड विकल्पों में से चुन सकते हैं.
फिलहाल इसमें 50 से ज्यादा तैयार Skills दिए गए हैं जो अलग-अलग कामों के लिए बनाए गए हैं. ये फीचर आपके खुले हुए टैब्स की जानकारी लेकर तुरंत काम पूरा करता है जिससे आपको अलग-अलग वेबसाइट पर जाकर मेहनत नहीं करनी पड़ती.
यूजर्स के लिए कितना फायदेमंद है?
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा है समय की बचत. लंबे आर्टिकल का सार निकालना, ऑनलाइन प्रोडक्ट्स की तुलना करना या जरूरी जानकारी ढूंढना ये सब काम अब कुछ सेकंड में हो सकते हैं. इसके अलावा, जो लोग AI टूल्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उनके लिए यह फीचर काम को और आसान बना देता है. जटिल टास्क भी अब एक क्लिक में पूरे किए जा सकते हैं.
सुरक्षा का भी रखा गया ध्यान
Google ने इस फीचर में सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है. अगर कोई संवेदनशील काम करना होता है जैसे ईमेल भेजना या कैलेंडर में कुछ जोड़ना तो सिस्टम पहले यूजर से अनुमति मांगता है.
कब और कहां मिलेगा यह फीचर?
फिलहाल Skills फीचर Chrome के डेस्कटॉप यूजर्स के लिए जारी किया जा रहा है और शुरुआत में यह US इंग्लिश में उपलब्ध है. आने वाले समय में इसे अन्य भाषाओं और देशों में भी लाया जाएगा. Skills फीचर यह दिखाता है कि Google अब Chrome को एक AI-फर्स्ट ब्राउजर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इससे न केवल ब्राउज़िंग आसान होगी बल्कि रोजमर्रा के काम भी पहले से कहीं ज्यादा तेज और स्मार्ट हो जाएंगे.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google और Gucci मिलकर बनाएंगी स्मार्ट चश्मे, मेटा और ऐप्पल की बढ़ गई टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ Google And Gucci Smartglasses: स्मार्ट चश्मों को लेकर कंपीटिशन तेज होता जा रहा है. अभी तक मेटा इस सेगमेंट की सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है, लेकिन इस साल उसकी बादशाहत को कड़ी टक्कर मिलने वाली है. इसी साल ऐप्पल अपना पहला एआई स्मार्ट चश्मा लॉन्च कर सकती है. इसी बीच एक ताजा जानकारी ने इस रेस को और मजेदार बना दिया है. बताया जा रहा है कि Google ने लग्जरी फैशन हाउस Gucci के साथ हाथ मिलाया है. इस समझौते के तहत दोनों कंपनियां मिलकर प्रीमियम Android XR-बेस्ड स्मार्ट चश्मे तैयार करेगी. इसे रेगुलर वीयर के लिए डिजाइन किया जाएगा ताकि यूजर्स पूरे दिन पहने रख सके.
Google और Gucci आईं एक साथ
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पार्टनरशिप में गूगल अपनी टेक एक्सपर्टीज को Gucci की डिजाइन एक्सपर्टीज के साथ यूज करेगी. गूगल चाहती है कि वह अपने स्मार्ट चश्मे को इस तरह डिजाइन करे कि वह एक टेक गैजेट न लगकर डेली के फैशन में मिल जाने वाला डिवाइस लगे. ऐसे में माना जा रहा है कि इस चश्मे में स्टाइलिश फ्रेम के साथ रिफाइन्ड फिनिशिंग देखने को मिल सकती है. इस ऑफरिंग के जरिए गूगल ने मेटा और ऐप्पल के लिए मुकाबले को और कड़ा कर दिया है.&amp;nbsp;
ऐप्पल का शुरू किया ट्रेंड पकड़ रहा है जोर
कुछ साल पहले ऐप्पल का शुरू किया ट्रेंड अब जोर पकड़ रहा है. दरअसल, टेक दिग्गज ने अपनी प्रीमियम ऐप्पल वॉच के स्पेशल एडिशन के लिए Herm&amp;egrave;s के साथ पार्टनरशिप की थी. अब दूसरी कंपनियां भी इसी राह पर चलते हुए अपने गैजेट को लाइफस्टाइल एक्सेसरीज में बदलना चाह रही हैं. ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि रेस में आगे रहने के लिए मेटा Prada के साथ हाथ मिला सकती है.&amp;nbsp;
स्मार्ट चश्मों के दो वर्जन पर काम कर है गूगल
ऐप्पल की तरह गूगल भी स्मार्ट चश्मों के दो वर्जन पर काम कर रही है. कंपनी के पहली जनरेशन के स्मार्ट चश्मे ऑडियो और कैमरा-बेस्ड असिस्टेंस पर फोकस करेंगे. यानी इनमें यूजर को एआई असिस्टेंट यूज करने, फोटो-वीडियो कैप्चर करने और रियल-टाइप अपडेट का ऑप्शन मिलेगा. इनमें कोई डिस्प्ले नहीं लगा होगा. दूसरा वर्जन ज्यादा एडवांस होगा. इसमें मेटा रे-बेन ग्लासेस की तरह इन-लेंस डिस्प्ले मिलेगा और यह एक फोन की तरह ही काम करेगा.&amp;nbsp;
कब लॉन्च होंगे गूगल के स्मार्ट चश्मे?
गूगल के स्मार्ट चश्मों का पहला वर्जन इसी साल लॉन्च हो सकता है. माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक गूगल बिना डिस्प्ले वाले चश्मे लॉन्च कर देगी, वहीं Gucci ब्रांडेड वर्जन के लिए इंतजार थोड़ा लंबा हो सकता है. इसे अगले साल तक लॉन्च किया जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>एक ही नंबर पर दो फोन में WhatsApp कैसे चलाएं? यहां जानिए स्टेप बॉय स्टेप पूरा प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ एक ही नंबर पर दो फोन में WhatsApp कैसे चलाएं? यहां जानिए स्टेप बॉय स्टेप पूरा प्रोसेस ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro मॉडल्स के कलर ऑप्शन हो गए लीक, इस वेरिएंट ने चुरा लिया सबका दिल</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro Color Options: iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की लॉन्चिंग जैसे-जैसी नजदीक आ रही है, वैसे ही इनसे जुड़ी नई-नई जानकारी भी सामने आ रही हैं. अब इन दोनों मॉडल्स के कलर ऑप्शन सामने आ गए हैं. ताजा लीक्स से पता चला है कि इस बार भी आईफोन यूजर्स को एक नया कलर ऑप्शन मिलने जा रहा है और यह भी iPhone 17 Pro के कॉस्मिक ऑरेंज कलर की तरह सुपरहिट होने वाला है. आइए जानते हैं कि ये कलर ऑप्शंस कौन-कौन से होने वाले हैं.
ये होंगे iPhone 18 Pro Color Options
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐप्पल अभी iPhone 18 Pro मॉडल्स के लिए चार कलर ऑप्शन लेकर चल रही है. इनमें लाइट ब्लू, डार्क चैरी, डार्क ग्रे और सिल्वर शामिल है. इससे पहले की रिपोर्ट्स में बताया गया था कि प्रो मॉडल्स को डीप रेड कलर में लाया जाएगा, लेकिन लेटेस्ट रिपोर्ट में इसे डार्क चैरी के तौर पर मेंशन किया गया है. यह कॉस्मिक ऑरेंज की तरह ब्राइट नहीं होगा, लेकिन उसी की तरह अलग दिखेगा. वहीं लाइट ब्लू कलर iPhone 17 के मिस्ट ब्लू कलर से मिलता-जुलता होगा. माना जा रहा है कि इन चार में से तीन कलर ऑप्शन को ही मार्केट में उतारा जाएगा. ऐप्पल सिल्वर कलर ऑप्शन को रिजेक्ट भी कर सकती है.
ट्रेंड को जारी रखेगी ऐप्पल
ब्राइट कलर ऑप्शन वाले फोन पहले भी मार्केट में लॉन्च हुए थे, लेकिन ऐप्पल ने iPhone 17 Pro के साथ ब्राइट कलर को फ्लैगशिप डिवाइसेस के लिए भी पॉपुलर बना दिया. इससे पहले ऐसे कलर बेस आईफोन या सस्ते फोन के साथ आते थे. iPhone 17 Pro के बाद ओप्पो समेत कई कंपनियों ने अपने फ्लैगशिप डिवाइस ऑरेंज कलर में लॉन्च किए हैं.
iPhone 18 Pro मॉडल्स में मिलेंगे ये अपग्रेड
iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को ऐप्पल कई अपग्रेड्स के साथ उतारेगी. इन दोनों ही मॉडल्स में 2nm प्रोसेस पर बना नया प्रोसेसर, अंडर-डिस्प्ले फेसआईडी, वेरिएबल अपर्चर के साथ मेन कैमरा दिया जाएगा. प्रो मैक्स मॉडल में ऐप्पल अपनी अब तक की सबसे बैटरी दे सकती है, जिस कारण इसका आकार भी थोड़ा बड़ा होगा. इनके डिस्प्ले में ज्यादा बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन डायनामिक आईलैंड का आकार छोटा किया जाएगा. इससे आईफोन का फ्रंट लुक थोड़ा बदला हुआ हो सकता है.
कब लॉन्च होंगे iPhone 18 Pro और 18 Pro Max?
ऐप्पल अपने फ्लैगशिप मॉडल्स को इस साल सितंबर में लॉन्च करेगी. इन मॉडल्स के साथ कंपनी अपना पहला फोल्डेबल आईफोन भी उतारने की तैयारी कर रही है. इस बार ऐप्पल ने लॉन्च साइकिल में बदलाव किया है और अब आईफोन 18 सीरीज का बेस मॉडल सितंबर की बजाय अगले साल फरवरी-मार्च में लॉन्च होगा.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>क्या AI खुद बन सकता है हैकर? Anthropic के Mythos टेस्ट ने खोले चौंकाने वाले राज</title>
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        <description><![CDATA[ AI as Hacker: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence आज दुनिया को तेजी से बदल रहा है. जहां एक तरफ यह काम आसान बना रहा है वहीं दूसरी तरफ इसके खतरों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. हाल ही में Anthropic ने अपना नया AI मॉडल Mythos पेश किया जो सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को पहले ही पहचान सकता है. लेकिन टेस्टिंग के दौरान इसके कुछ ऐसे पहलू सामने आए जिन्होंने सभी को चौंका दिया.
क्या Mythos खुद बन सकता है हैकर?
Anthropic के रिसर्चर Nicholas Carlini ने जब इस मॉडल की जांच की, तो उन्हें पता चला कि यह AI सिर्फ मदद करने तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, Mythos डिजिटल सिस्टम में मौजूद खामियों को पहचानने के साथ-साथ उनका फायदा भी उठा सकता है.
इतना ही नहीं, यह खुद ही हैकिंग के टूल्स तैयार करने और सिस्टम पर हमला करने की क्षमता भी रखता है. उदाहरण के तौर पर, यह Linux जैसे प्लेटफॉर्म को भी टारगेट कर सकता है. यानी यह AI इंसान की मदद करने के बजाय खुद हैकर की तरह व्यवहार कर सकता है.
कंपनी के अंदर कैसे हुई प्रतिक्रिया?
Anthropic की रेड टीम के प्रमुख Logan Graham ने बताया कि टेस्टिंग के दौरान ही टीम को इस मॉडल में कुछ असामान्य और जोखिम भरे फीचर्स नजर आए. वहीं कंपनी के को-फाउंडर और चीफ साइंस ऑफिसर Jared Kaplan ने इस पर गहराई से नजर रखी. उन्होंने टीम से कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह समस्या छोटी है या आम लोगों के लिए खतरा बन सकती है. आखिरकार उन्होंने माना कि यह AI जोखिम पैदा कर सकता है.
इसके बाद Kaplan और Sam McCandlish ने अपनी चिंताओं को कंपनी के CEO Dario Amodei और प्रेसिडेंट Daniela Amodei के सामने रखा. साफ हो गया कि यह कोई सामान्य लॉन्च नहीं होने वाला है.
सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?
इन चिंताओं को देखते हुए कंपनी ने इस मॉडल को सीमित तरीके से जारी करने का फैसला किया. Project Glasswing नाम के एक खास प्रोग्राम के तहत Mythos को सिर्फ चुनिंदा संस्थानों तक ही पहुंच दी गई है. Anthropic का मकसद इस AI का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए करना है ताकि कंपनियां हैकर्स से पहले ही अपने सिस्टम की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें ठीक कर सकें.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कैसे ट्रैक होती है सोशल मीडिया पोस्ट, पुलिस कैसे लगाती है अपराधी का पता?</title>
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        <description><![CDATA[ How Police Track Social Media Post: नोएडा में हुई हिंसा की जांच में जुटी पुलिस को कुछ हैरान कर देने वाली जानकारी मिली है. पुलिस ने दावा किया है कि सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से हिंसा भड़काने की कोशिश हुई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पाकिस्तान से चलने वाले अकाउंट्स से ऐसी पोस्ट्स डाली गईं, जिससे लोग भड़क गए और कानून व्यवस्था खराब हुई. अगर इसके तकनीकी पहलू को समझने की कोशिश की जाए तो कई लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट को ट्रैक कैसे करती है. आज हम यही जानेंगे कि पुलिस आखिर सोशल मीडिया पोस्ट को ट्रैक कैसे करती है.
कैसे ट्रैक होती है सोशल मीडिया पोस्ट?
अब अलग-अलग राज्यों की पुलिस के पास स्पेशल सेल्स हैं, जो सोशल मीडिया पर नजर रखती है. इसके अलावा किसी बड़ी घटना के समय पुलिस सोशल मीडिया पर निगरानी और बढ़ा देती है. इसके अलावा अब पुलिस के पास एआई पावर्ड सर्विलांस टूल्स, आईपी ट्रैकिंग और मेटाडेटा एनालिसिस समेत कई तरीके हैं, जिससे भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले यूजर्स की पहचान की जा सकती है. इस पूरी प्रोसेस के कई स्टेप्स हैं.
मॉनिटरिंग से होती है शुरुआत
किसी भी बड़ी घटना के समय पुलिस लगातार पब्लिक पोस्ट्स, हैशटैग और ग्रुप्स आदि को स्कैन करती रहती है. जांच के दौरान अगर पुलिस को जरूरत महसूस होती है तो वो सोशल मीडिया कंपनियों से कानूनी प्रक्रिया के तहत यूजर्स की जानकारी हासिल कर सकती है.&amp;nbsp;
मेटाडेटा एनालिसिस- जब भी इंटरनेट पर कोई फोटो या कंटेट पोस्ट होता है तो इसके साथ मेटाडेटा भी अपलोड होता है, जिसमें टाइमस्टैंप, डिवाइस इंफोर्मेशन और जियोलोकेशन टैग्स आदि होते हैं. इस मेटाडेटा को एनालाइज कर भी पोस्ट करने वाले की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है.&amp;nbsp;
IP एड्रेस ट्रैकिंग- मेटाडेटा के अलावा पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट का IP एड्रेस भी ट्रैक कर सकती है. आसान भाषा में समझें तो IP एड्रेस को इंटरनेट की दुनिया में डिजिटल एड्रेस के तौर पर समझा जा सकता है. इससे डिवाइस की पहचान आसान हो जाती है.&amp;nbsp;
जियोफेंसिंग डेटा- आजकल कई ऐसे टूल्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से ऐप्स से लोकेशन डेटा लिया जा सकता है. इससे पुलिस यह पता लगा सकती है कि किसी टाइम पर किस लोकेशन पर कितने डिवाइस एक्टिव थे. इसके अलावा कई डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स भी अवेलेबल हैं, जो किसी संदिग्ध के डिवाइस से सारा डेटा निकाल सकते हैं. इन टूल्स की मदद से डिलीट किए गए मैसेज और पोस्ट आदि को भी रिकवर किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कैसे, ट्रैक, होती, है, सोशल, मीडिया, पोस्ट, पुलिस, कैसे, लगाती, है, अपराधी, का, पता</media:keywords>
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        <title>क्या होती हैं साइलेंट आर्टिफिशियल मसल्स, जो बदल देंगी रोबोट्स की दुनिया?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-होती-हैं-साइलेंट-आर्टिफिशियल-मसल्स-जो-बदल-देंगी-रोबोट्स-की-दुनिया</link>
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        <description><![CDATA[ Silent Artificial Muscles: पिछले कुछ सालों में रोबोटिक्स पर काफी काम हुआ है और अब हमें काफी एडवांस रोबोट देखने को मिल रहे हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक और नई खोज की है, जिससे रोबोट्स की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है. यह खोज रोबोट के साथ-साथ वीयरेबल डिवाइसेस के लिए भी क्रांतिकारी साबित हो सकती है. दरअसल, MIT मीडिया लैब और इटली की Polytechnic University ने नई तरह की आर्टिफिशियल मसल्स तैयार की हैं. ये मजबूत और फ्लेक्सिबल होने के साथ-साथ इंसानी मसल्स की तरह ही काम करती हैं. इससे रोबोट्स के लिए मूवमेंट करना आसान हो जाएगा.
कैसे क्रांतिकारी साबित हो सकती हैं Silent Artificial Muscles?
नई आर्टिफिशियल मसल्स इंसानी मसल्स में पाए जाने वाले फाइबर जैसी ही हैं. इन्हें रोबोट या डिवाइस के हिसाब से अलग-अलग तरीके से अरैंज किया जा सकता है. साथ ही ये साइलेंट है. इससे रोबोट मूवमेंट करते समय शोर नहीं करेंगे. ये पूरी तरह सॉफ्ट और फ्लेक्सिबल है. इस कारण ये उन डिवाइसेस के लिए फायदेमंद हो सकती है, जिन्हें लोगों के एकदम साथ रहकर काम करना होता है.
कैसे काम करेंगी Silent Artificial Muscles?
रिसर्चर ने इन मसल्स के लिए दो मौजूदा कॉन्सेप्ट को एक ही सिस्टम में कंबाइन कर दिया है. पहले में McKibben actuator नाम की एक सॉफ्ट और ट्यूब जैसी आर्टिफिशियल मसल फ्लूयड पंप करने पर सिकुड़ जाती है. दूसरा इलेक्ट्रोहाइड्रोडायनामिक्स पर बना एक छोटा पंप होता है. यह इलेक्ट्रिक फोर्स को यूज करते हुए फ्लूयड को मूव करता है. रिसर्चर ने इस छोटे पंप को मसल्स फाइबर में ही इंटीग्रेट कर दिया है. इससे एक्सटर्नल पंप की जरूरत खत्म हो गई है. इसके अलावा इसमें भी इंसानी मसल्स की तरह फाइबर जोड़े में काम करते हैं. यानी जब आप अपनी बाजू मोड़ते हैं तो एक मसल सिकुड़ जाती है और दूसरी स्ट्रेच हो जाती है. रिसर्चर ने इसी आइडिया के साथ ये आर्टिफिशियल मसल्स तैयार की हैं.&amp;nbsp;
Silent Artificial Muscles से कैसे बदलेंगी रोबोट्स की दुनिया?
इन नई आर्टिफिशियल मसल्स से रोबोट का डिजाइन चेंज हो सकता है. दरअसल, रोबोट में इलेक्ट्रिक मोटर यूज होती है, जो रोटेशनल मोशन क्रिएट करती है, जिसे स्ट्रेट लाइन मूवमेंट में कन्वर्ट करना पड़ता है. नई आर्टिफिशियल मसल्स के कारण मोशन को कन्वर्ट नहीं करना पड़ेगा. इसके अलावा इन्हें रोबोट की पूरी बॉडी में इंटीग्रेट किया जा सकता है, जिससे डिजाइन ज्यादा कॉम्पैक्ट और एफिशिएंट हो सकेगा. इससे हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग समेत अलग-अलग फील्ड में यूज होने वाले रोबोटिक सिस्टम को बेहतर बनाया जा सकता है. आर्टिफिशियल मसल्स अभी के सिस्टम में यूज होने वाले भारी हार्डवेयर की जगह ले सकती हैं.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, होती, हैं, साइलेंट, आर्टिफिशियल, मसल्स, जो, बदल, देंगी, रोबोट्स, की, दुनिया</media:keywords>
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        <title>भारत में बिकने वाले 80 स्मार्टफोन मॉडल के दाम बढ़े, कीमतों पर अभी भी लगाम की उम्मीद नहीं</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Price Rising: इस साल स्मार्टफोन खरीदना महंगा हो चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में बिकने वाले लगभग 200 मॉडल्स में से 80 प्रतिशत मॉडल्स के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं. इन मॉडल्स की कीमतों में 15 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है. चिंता की बात यह भी है कि ग्राहकों को जल्द राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. साल की दूसरी तिमाही में फोन की कीमत में 15 प्रतिशत की और बढ़ोतरी भी हो सकती है. यानी फोन खरीदने वाले ग्राहकों को एक और झटका लगने वाला है. आइए जानते हैं कि स्मार्टफोन की कीमतों में इजाफा क्यों हो रहा है.
दुनियाभर में महंगे हो रहे हैं फोन
फोन की कीमतों में इजाफा केवल भारत में देखने को नहीं मिल रहा है. पूरी दुनिया में स्मार्टफोन महंगे हो रहे हैं. 2025 की आखिरी तिमाही में दुनियाभर में बेचे गए स्मार्टफोन की औसत कीमत पहली बार 400 डॉलर को पार कर गई. भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह कीमत लगभग 37,000 रुपये होती है. इसका मतलब है कि अब दुनियाभर में बिकने वाले हर फोन की एवरेज कीमत 37,000 है. एक समय पर फोन के लिए यह प्रीमियम प्राइस माना जाता था. इसके अलावा अब महंगे फोन का ट्रेंड भी आ गया है. अब लोग फोन खरीदने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं.
क्यों महंगे हो रहे हैं फोन?
अगर यह कहा जाए कि एआई बूम के कारण फोन की कीमतें बढ़ रही हैं तो गलत नहीं होगा. दरअसल, मेमोरी चिप्स बनाने वाली कंपनियां अब कंज्यूमर मार्केट के लिए चिप्स नहीं बना रही हैं. अब वो एआई कंपनियों के ऑर्डर पूरे कर रही हैं, जिन्हें डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप्स की जरूरत है. इसके अलावा कंज्यूमर चिप्स बनाने वाली कंपनियों ने यह काम बंद कर पूरी तरह एआई डेटा सेंटर पर फोकस कर लिया है. इस कारण स्मार्टफोन समेत दूसरे डिवाइसेस के लिए मेमोरी चिप्स की कमी हो गई है. सप्लाई कम होने के कारण मेमोरी चिप्स के दाम बढ़ गए हैं. इससे कंपनियों की लागत बढ़ी है, जिसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है.&amp;nbsp;
कब तक राहत मिलने की उम्मीद?
मेमोरी चिप्स की कमी का असर फोन के अलावा लैपटॉप और स्मार्ट टीवी जैसे डिवाइसेस पर भी पड़ रहा है. लेनोवो, डेल और एचपी समेत कई कंपनियां अपने लैपटॉप के दाम भी बढ़ा चुकी हैं. जानकारों का कहना है कि मेमोरी संकट अभी लंबे समय तक चल सकता है और ग्राहकों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>युद्ध में लड़ रहे हैं ड्रोन्स और रोबोट, बिना इंसानी मदद के दुश्मनों की चौकी पर कर लिया कब्जा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/युद्ध-में-लड़-रहे-हैं-ड्रोन्स-और-रोबोट-बिना-इंसानी-मदद-के-दुश्मनों-की-चौकी-पर-कर-लिया-कब्जा</link>
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        <description><![CDATA[ Robots Fighting In War: अब रोबोट सिर्फ लैब और फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहे हैं बल्कि युद्ध के मैदान में भी उतर आए हैं. सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के दौरान खारकीव के नजदीक रोबोट ने बिना किसी असली सैनिक की मदद के दुश्मन की चौकी पर कब्जा कर लिया. खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि रोबोट की इस कार्रवाई ने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए. आइए जानते हैं कि रोबोट की मदद से लड़ी गई इस लड़ाई के बारे में और क्या जानकारी सामने आई है.
युद्ध में पहली बार लड़े रोबोट- जेलेंस्की
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेलेंस्की ने कहा कि रूस के साथ जारी जंग में पहली बार ग्राउंड सिस्टम और ड्रोन्स ने दुश्मन की पोस्ट पर कब्जा किया है. यह ऑपरेशन बिना किसी इन्फैंट्री के पूरा हुआ और यूक्रेन को इसमें कोई नुकसान नहीं हुआ. जेलेंस्की ने इस ऑपरेशन का नाम नहीं बताया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा यूक्रेन की 13वीं नेशनल गार्ड ब्रिगेड खारटिया के दिसंबर में किए गए ऑपरेशन की तरफ था.&amp;nbsp;
युद्ध में लड़े रोबोट
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस लड़ाई में पहले ग्राउंड बेस्ड ड्रोन को रूस के बंकर की तरफ भेजा गया. इसके बाद कई अनमैन्ड सिस्टम ने उसे फॉलो कर रूसी चौकी पर कब्जा किया. इस ऑपरेशन में लैंड और एरियल ड्रोन्स को एक साथ यूज किया गया था. कुछ ड्रोन्स ने बैटलफील्ड की फुटेज जुटाई, जबकि बाकी ड्रोन्स की मदद से एक्सप्लोसिव गिराए गए. ग्राउंड पर मुश्किल टैरेन होने के बावजूद रोबोटिक्स यूनिट लगातार आगे बढ़ती गई. कई घंटों तक चले इस ऑपरेशन में रूस को काफी नुकसान और आखिरकार ड्रोन्स और रोबोट्स की मदद से यूक्रेन ने उस पोस्ट पर अपना कब्जा जमा लिया.
स्क्रीन के पीछे रहे इंसान
भले ही ग्राउंड पर इस पूरे ऑपरेशन को मशीनों ने अंजाम दिया, लेकिन इंसानों की भूमिका भी अहम रही. ऑपरेटरों की एक पूरी टीम ने दूर बैठकर ड्रोन्स को कंट्रोल किया और लाइव वीडियो फीड्स के हिसाब से दूसरी जरूरी एडजस्टमेंट की. ऑपरेशन की शुरुआत से पहले पूरी प्लानिंग की जरूरत थी. ड्रोन्स के रूट पहले से ही डिसाइड कर लिए गए, जबकि कई एक्टिविटीज के लिए कई बार रिहर्सल की भी की गई ताकि मौके पर डिवाइसेस के सिग्नल एक-दूसरे को ओवरलैप न करें.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सैमसंग ने कराई ग्राहकों की मौज, एक ही झटके में हजारों रुपये कम कर दी Galaxy S26 Ultra की कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Galaxy S26 Ultra Price Cut: सैमसंग ने अपने ग्राहकों की मौज कर दी है. हाल ही में कंपनी ने Galaxy S25 Ultra की कीमत घटाई थी और अब कंपनी ने अपने लेटेस्ट फ्लैगशिप मॉडल Galaxy S26 Ultra को भी सस्ता कर दिया है. प्राइसिंग स्ट्रैटजी में बदलाव करते हुए सैमसंग ने Galaxy S26 Ultra की कीमत एक ही झटके में 9,000 रुपये कम कर दी है. ऐसे में अगर आप यह डिवाइस खरीदना चाहते हैं तो शानदार मौका आ गया है. अब आप पहले की तुलना में कम कीमत पर अपना मनपसंद फोन घर ला सकते हैं. आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या-क्या फीचर्स हैं और अब इसकी ताजा कीमत कितनी हो गई है.&amp;nbsp;
Galaxy S26 Ultra के स्पेसिफिकेशंस
Galaxy S26 Ultra को इसी साल फरवरी में लॉन्च किया गया था. इसमें 6.9 इंच का डायनामिक LTPO AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आता है. फोन में पावरफुल Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट और 5,000mAh का बैटरी पैक दिया गया है, जो 60W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करता है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो सेंसर, 10MP का टेलीफोटो सेंसर और 50MP का अल्ट्रावाइड कैमरा मिलता है. फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 12MP का सेंसर लगा हुआ है. Galaxy S26 Ultra में प्राइवेसी डिस्प्ले का भी ऑप्शन है, जिससे यूजर्स के आसपास बैठे लोग स्क्रीन नहीं देख पाएंगे. सैमसंग इसे सात साल तक OS और सिक्योरिटी अपडेट देगी.
Galaxy S26 Ultra Price Cut
भारत में इस फोन के बेस वेरिएंट (12GB+256GB) को 1,39,999 रुपये में लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी यह सैमसंग की ऑफिशियल वेबसाइट पर 9,000 रुपये के डिस्काउंट के बाद 1,30,999 रुपये में लिस्टेड है. इसी तरह बाकी वेरिएंट की कीमतों में भी 9,000-9,000 रुपये की कटौती हुई है. अभी तक यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि यह लिमिटेड टाइम ऑफर है या कंपनी ने परमानेंटली इसकी कीमत कम कर दी है. अगर आप इसे विजय सेल्स से खरीदते हैं &amp;nbsp;तो इस पर एडिशनल डिस्काउंट का फायदा भी उठा सकते हैं.
Google Pixel 10 पर आ गई धमाकेदार छूट
सैमसंग की तरह इस समय गूगल के फ्लैगशिप डिवाइस Google Pixel 10 पर भी शानदार डिस्काउंट ऑफर चल रहा है. गूगल ने भारत में इस फोन को 79,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया था, लेकिन अभी अमेजन पर यह फोन केवल 70,999 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा इस पर 2100 रुपये का कैशबैक और 2500 रुपये का बैंक ऑफर भी दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Jio Recharge 44 Rupees Trick :क्या सिर्फ 44 रुपये में पूरे साल एक्टिव रह सकती है Jio की सिम, जानें क्या है यह वायरल हैक?</title>
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        <description><![CDATA[ Jio Recharge 44 Rupees Trick : आजकल सोशल मीडिया और कई वेबसाइट्स पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि सिर्फ 44 रुपये खर्च करके पूरे साल Jio सिम को एक्टिव रखा जा सकता है. इस दावे में कहा जा रहा है कि &amp;nbsp;Jio का एक छोटा रिचार्ज लेकर हर 90 दिन में सिम को चालू रखा जा सकता है, जिससे बार-बार महंगे रिचार्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी और नंबर लगातार एक्टिव बना रहेगा. इस वजह से बहुत से लोग अपने सेकेंडरी नंबर या बैंकिंग और OTP वाले सिम को सस्ते में चलाने का तरीका ढूंढ रहे हैं. लेकिन इसी बीच कुछ लोग इस दावे पर सवाल भी उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि यह पूरी तरह सही नहीं हो सकता क्योंकि टेलीकॉम कंपनियों के अपने नियम और शर्तें होती हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह कन्फ्यूजन है कि सच में सिर्फ 44 में पूरे साल Jio सिम को चालू रखा जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि क्या सिर्फ 44 रुपये में Jio की सिम पूरे साल एक्टिव रह सकती है और यह वायरल हैक क्या है.&amp;nbsp;
Jio सिम एक्टिव के नियम क्या है?
Jio या किसी भी टेलीकॉम कंपनी के नियमों के अनुसार, अगर किसी नंबर पर लंबे समय तक कोई गतिविधि जैसे कॉल करना, रिसीव करना, SMS या डेटा इस्तेमाल नहीं होती, तो उसे इनएक्टिव माना जा सकता है. आम तौर पर लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर नंबर बंद किया जा सकता है और कुछ समय बाद वह नंबर किसी और यूजर को दिया भी जा सकता है, हालांकि इनकमिंग सेवाएं और नियम हर टेलीकॉम कंपनी के अनुसार अलग हो सकते हैं.&amp;nbsp;
यह वायरल हैक क्या है?
इस वायरल हैक में कहा जा रहा है कि Jio का 11 का डेटा पैक लेकर थोड़ी देर इंटरनेट इस्तेमाल करके सिम की एक्टिविटी दर्ज हो जाती है और फिर 90 दिन की वैधता दोबारा मिल जाती है. इस आधार पर लोग दावा कर रहे हैं कि हर 90 दिन में सिर्फ 11 खर्च करके सिम को चालू रखा जा सकता है.&amp;nbsp;
क्या सिर्फ 44 रुपये में Jio की सिम पूरे साल एक्टिव रह सकती है?
इस वायरल दावे के अनुसार, &amp;nbsp;Jio का 11 वाला छोटा डेटा पैक लेकर हर 90 दिन में एक बार सिम को एक्टिव किया जाए. वहीं एक साल में लगभग 12 महीने होते हैं, इसलिए 90-90 दिन के हिसाब से यह प्रक्रिया करीब 4 बार करनी पड़ेगी यानी हर तीन महीने में 11 खर्च करने पर साल भर का कुल खर्च 44 के आसपास हो जाता है. इसी आधार पर इसे एक सस्ती ट्रिक या हैक बताया जा रहा है, जिसमें सिर्फ 44 रुपये में Jio की सिम पूरे साल एक्टिव रह सकती है. इसलिए कम पैसे में सिम को लंबे समय तक चालू रखने का दावा किया जा रहा है.&amp;nbsp;
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इससे इनकमिंग कॉल और SMS पर कितना असर पड़ सकता है?
वायरल पोस्ट में यह भी कहा जाता है कि बिना बड़े रिचार्ज के भी इनकमिंग कॉल आ सकती हैं. SMS और OTP भी मिलते रहते हैं. इसलिए बैंकिंग या सेकेंडरी नंबर के लिए यह तरीका उपयोगी माना जा रहा है, लेकिन &amp;nbsp;इनकमिंग सेवाएं और सिम की स्थिति पूरी तरह कंपनी की पॉलिसी और एक्टिव प्लान नियमों पर निर्भर करती हैं.&amp;nbsp;
कितना सही है? यह वायरल दावा
हर टेलीकॉम कंपनी के इनएक्टिव नंबर नियम अलग हो सकते हैं, ऐसे में सिर्फ छोटा डेटा पैक लेने से हमेशा 90 दिन की वैधता बढ़े, यह जरूरी नहीं है. कई मामलों में सिर्फ वैलिड प्लान ही सिम को एक्टिव रखता है. इसलिए इसे पूरी तरह गारंटीड तरीका मानना सही नहीं है. अगर आप अपना Jio नंबर लंबे समय तक चालू रखना चाहते हैं, तो समय-समय पर वैध रिचार्ज करते रहें. ऑफिशियल प्लान और नियम जरूर चेक करें. सिर्फ वायरल ट्रिक्स पर भरोसा न करें. साथ ही OTP और बैंकिंग नंबर को खास ध्यान से एक्टिव रखें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Jio, Recharge, Rupees, Trick, :क्या, सिर्फ, रुपये, में, पूरे, साल, एक्टिव, रह, सकती, है, Jio, की, सिम, जानें, क्या, है, यह, वायरल, हैक</media:keywords>
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        <title>सोशल मीडिया पर पहचान छिपाना अब आसान नहीं, पोस्ट से यूजर का पता लगा सकती है एआई</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोशल-मीडिया-पर-पहचान-छिपाना-अब-आसान-नहीं-पोस्ट-से-यूजर-का-पता-लगा-सकती-है-एआई</link>
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        <description><![CDATA[ AI Model Social Media: एआई के दौर में सोशल मीडिया पर अपनी पहचान छिपाना काफी मुश्किल हो गया है. अगर कोई यूजर यह समझ रहा है कि वह अपनी पहचान छिपाकर सोशल मीडिया यूज कर सकता है तो ऐसे दिन चले गए. एक नई रिसर्च में पता चला है कि एआई मॉडल यूजर के ऑनलाइन पोस्ट किए कंटेट से ही उसकी पहचान कर सकता है. इसके लिए उसे किसी भी पर्सनल आइंडेटिफायर की जरूरत नहीं है. अब एआई मॉडल इतने पावरफुल हो गए हैं कि वो किसी छद्म नाम से बने अकाउंट के पीछे के व्यक्ति और उसके दूसरे सोशल मीडिया अकाउंट्स की आसानी से पहचान कर सकते हैं.&amp;nbsp;
एआई मॉडल सटीकता से कर सकते हैं पहचान
एंथ्रोपिक और ETH Zurich की इस स्टडी में रिसर्चर ने एक ऑटोमैटेड सिस्टम बनाया, जो पोस्ट, कमेंट और बातचीत को एनालाइज करता है. यह तरीका पूरी यूजर जनरेटेड कंटेट पर काम करता है. यह सिस्टम मल्टी-स्टेप प्रोसेस को फॉलो करते हुए टेक्स्ट से आइडेंटिटी से जुड़े सिग्नल निकालकर पॉसिबल मैचेज ढूंढता है. इसके बाद अपनी रीजनिंग लगाकर यह पता करने की कोशिश करता है कि क्या दो अलग-अलग अकाउंट एक ही व्यक्ति से जुड़े हुए हैं. टेस्टिंग के दौरान यह मॉडल Reddit और LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बने अकाउंट्स को लिंक करने में सफल रहा था.&amp;nbsp;
यूजर की पहचान कैसे करता है एआई सिस्टम?
स्टडी के अनुसार, पोस्ट की छोटी-छोटी डिटेल्स पहचान बताने का काम कर सकती हैं. राइटिंग स्टाइल, इंट्रेस्ट, लोकेशन हिंट, एजुकेशन और टॉपिक्स आदि की मदद से यूजर को पहचाना जा सकता है. उदाहरण के तौर पर यह मॉडल किसी बातचीत को एनालाइज कर प्रोफेशन, लोकेशन, यूज किए गए टूल्स और बैकग्राउंड आदि की जानकारी जुटाकर पब्लिकली अवेलेबल इंफोर्मेशन से मैच कर उसके पीछे के व्यक्ति का पता लगाता है. किसी यूजर की जितनी ज्यादा पोस्ट होगी, उसकी पहचान साबित करना इस एआई मॉडल के लिए उतना ही आसान हो जाएगा.
यह स्टडी क्यों जरूरी है?
इस स्टडी ने यह साबित कर दिया है कि अब सोशल मीडिया पर छद्म नाम से अकाउंट बनाकर प्राइवेट नहीं रहा जा सकता है. इससे एक्टिविस्ट्स, पत्रकार और दूसरी सेंसेटिव इंफोर्मेशन रखने वाले उन लोगों पर ज्यादा असर पड़ेगा, जो सोशल मीडिया पर किसी और नाम से अकाउंट बनाकर यूज करते हैं. हालांकि, इस स्टडी के कुछ खतरे भी हैं. रिसर्चर का कहना है कि सरकारें इस तरीके से सर्विलांस कर सकती है और साइबर अटैकर्स किसी यूजर को टारगेट करने के लिए डिटेल प्रोफाइलिंग कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp पर चैटिंग हो जाएगी और भी आसान, स्पैम हटाने के लिए यह काम करेगी कंपनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/whatsapp-पर-चैटिंग-हो-जाएगी-और-भी-आसान-स्पैम-हटाने-के-लिए-यह-काम-करेगी-कंपनी</link>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Feature: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप पर अब चैटिंग करना और भी आसान होने वाला है. स्पैम हटाने और चैट को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए कंपनी एक नए फीचर पर काम कर रही है. यह फीचर आने के बाद व्हाट्सऐप पर बिजनेस अकाउंट से जुड़ी सारी चैट्स एक अलग सेक्शन में अरेंज हो जाएंगी. यानी मेन इनबॉक्स में बिजनेस चैट्स नजर नहीं आएंगी और इसमें केवल इंडिविजुअल और ग्रुप चैट्स ही दिखेंगी. इससे यूजर के लिए चैट मैनेज करना भी आसान हो जाएगा और उसे अपने किसी दोस्त या फैमिली मेंबर को मैसेज भेजने के लिए लिस्ट को एकदम नीचे तक स्क्रॉल नहीं करना पड़ेगा.&amp;nbsp;
नए WhatsApp Feature पर चल रहा है काम
रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अभी इस फीचर पर काम कर रही है और यह बीटा टेस्टिंग के लिए अवेलेबल नहीं हुआ है. अगले कुछ हफ्तों में इसे टेस्टिंग के लिए रोल आउट किया जा सकता है. यह फीचर व्हाट्सऐप पर बिजनेस चैट के लिए एक अलग लिस्ट लेकर आएगा. इसकी मदद से यूजर पर्सनल कम्युनिकेशन पर ज्यादा फोकस कर पाएगा. व्हाट्सऐप इनबॉक्स में आने के 24 घंटे बाद बिजनेस चैट्स अपने आप अलग-अलग सेक्शन में अरेंज हो जाएगी. यूजर को इसके लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे दिन भर बिजनेस मैसेज रिसीव करने वाले यूजर्स को काफी सहूलियत हो जाएगी.
Username फीचर को भी रोल आउट कर चुकी है व्हाट्सऐप
व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए नियमित तौर पर नए-नए फीचर्स लाती रहती है. हाल ही में कंपनी ने यूजरनेम फीचर को रोलआउट करना शुरू किया है. फेसबुक और इंस्टाग्राम की तरह अब व्हाट्सऐप पर भी यूजरनेम सेट किया जा सकेगा. इसके बाद किसी को अगर आपसे कॉन्टैक्ट करना होगा तो आप नंबर की बजाय यूजरनेम शेयर कर सकेंगे. इससे आपका नंबर प्राइवेट रहेगा. यूजर के पास फेसबुक और इंस्टाग्राम वाला यूजरनेम व्हाट्सऐप पर भी सेट करने का ऑप्शन होगा.&amp;nbsp;
पेड सब्सक्रिप्शन भी लाएगी व्हाट्सऐप
पिछले काफी समय से जानकारी आ रही है कि व्हाट्सऐप पर जल्द ही नया सब्सक्रिप्शन प्लान आ सकता है, जिसे WhatsApp Plus नाम से जाना जाएगा. सब्सक्रिप्शन प्लान लेने वाले यूजर्स को एक्स्ट्रा चैट पिन करने का ऑप्शन मिल सकता है. इसके अलावा पेड यूजर्स को 14 अलग-अलग ऐप आइकन्स, टैब्स, कलर बटन और फिल्टर का कलर चेंज करने, एक्सक्लूसिव स्टिकर्स, कस्टम रिंगटोन और इंटरैक्टिव मैसेज रिएक्शन आदि की सुविधा मिल सकती है. हालांकि, चैटिंग, कॉलिंग और फाइल शेयरिंग जैसी फंक्शनलिटी अभी की तरह आगे भी फ्री रहेगी.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>WhatsApp, पर, चैटिंग, हो, जाएगी, और, भी, आसान, स्पैम, हटाने, के, लिए, यह, काम, करेगी, कंपनी</media:keywords>
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        <title>खाने से लेकर टिकट तक सब स्कैन कर लेगा आईफोन, ऐप्पल कर रही है यह तगड़ी तैयारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/खाने-से-लेकर-टिकट-तक-सब-स्कैन-कर-लेगा-आईफोन-ऐप्पल-कर-रही-है-यह-तगड़ी-तैयारी</link>
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        <description><![CDATA[ Apple Visual Intelligence: एआई के मामले में पीछे चल रही ऐप्पल अब तगड़ी तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप्पल कई नए एआई फीचर्स पर काम कर रही है, जिनकी मदद से आईफोन अपने आसपास के माहौल को बेहतर तरीके से समझ पाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, iOS 27 में ऐप्पल कई एआई फीचर्स लाएगी. इनमें कम से कम 4 ऐसे एआई टूल्स होंगे, जो सिस्टम ऐप्स के अंदर ही काम करेंगे. इस अपडेट में आने वाला विजुअल इंटेलीजेंस का फीचर सिर्फ ऑब्जेक्ट की पहचान नहीं करेगा बल्कि स्कैन कर उससे जुड़ी पूरी जानकारी दे देगा. उदाहरण के तौर पर खाने की तरफ कैमरा करने पर आईफोन यह बता देगा कि उसमें कितना न्यूट्रिशन है. इसी तरह यह दूसरे काम भी कर सकेगा.
Apple Visual Intelligence से यह काम भी होगा आसान
विजुअल इंटेलीजेंस से कई और काम आसान होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि इसकी मदद से यूजर प्रिंट किए गए फोन नंबर और एड्रेस को स्कैन कर डायरेक्टली कॉन्टैक्ट्स में सेव कर सकेंगे. इसी तरह यह खाने से जुड़ी हेल्थ इंफोर्मेशन भी दे सकेगा, जिससे हेल्थ ऐप के अंदर यूजर को बेहतर इनसाइट मिल सकेगी. कंपनी ऐप्पल वॉलेट को भी अपग्रेड करेगी. अपकमिंग अपडेट के बाद यह एआई की मदद फिजिकल टिकट और जिम कार्ड जैसी चीजों को स्कैन कर डिजिटली सेव कर लेगा. इस तरह आपको फिजिकल टिकट या पास कैरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
एआई वीयरेबल्स के लिए हो रही है तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐप्पल iOS 27 में विजुअल इंटेलीजेंस पर पूरा जोर दे रही है. दरअसल, कंपनी कई एआई वीयरेबल डिवाइसेस तैयार कर रही है. इनमें स्मार्टग्लासेस, कैमरा वाले एयरपॉड्स और वीयरेबल एआई पैंडेंट आदि शामिल हैं. इन्हें देखते हुए ऐप्पल अभी से तैयारी में जुट गई है.
कब आएगी iOS 27 अपडेट?
ऐप्पल जून में होने वाली अपनी एनुअल टेक कॉन्फ्रेंस WWDC में iOS 27 अपडेट का ऐलान कर सकती है. हालांकि, इसका रोलआउट सितंबर में नई आईफोन सीरीज के साथ शुरू होगा. इस अपडेट में सबसे बड़ा फीचर सिरी चैटबॉट का होगा. ऐप्पल अब सिरी को चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी की तरह चैटबॉट में बदलना चाह रही है. यह फीचर आने के बाद यूजर सिरी से किसी चैटबॉट की तरह बात कर सकेंगे. साथ ही इसमें ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस और कॉन्टेक्स्ट समझने जैसी कैपेबिलिटीज भी आ जाएंगी. साथ ही इसमें ऐप्पल इंटेलीजेंस और सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स मिलने की भी उम्मीद है.
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सोशल मीडिया पर पहचान छिपाना अब आसान नहीं, पोस्ट से यूजर का पता लगा सकती है एआई ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>खाने, से, लेकर, टिकट, तक, सब, स्कैन, कर, लेगा, आईफोन, ऐप्पल, कर, रही, है, यह, तगड़ी, तैयारी</media:keywords>
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        <title>स्किन कैंसर का खतरा भी पहले ही पहचान लेगा AI, मेडिकल साइंस में कैसे काम आएगी यह तकनीक?</title>
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        <description><![CDATA[ AI Can Detect Skin Cancer: एआई के कारण हेल्थकेयर सेक्टर में क्रांति की उम्मीद जताई जा रही है. यह टेक्नोलॉजी कई बीमारियों का पहले ही पता लगा सकती है, जिससे मरीजों को समय रहते इलाज मिल सकता है. अब एक ऐसे ही मामले में स्वीडिश रिसर्चर ने एआई का इस्तेमाल उन लोगों की पहचान कर ली, जिन्हें अगले पांच सालों में मेलानोमा (सबसे खतरनाक तरह का स्किन कैंसर) होने का खतरा है. एआई की मदद से उन्होंने पहले से मौजूद मेडिकल रिकॉर्ड को एनालाइज किया और यह पता कर लिया कि किन लोगों को अगले कुछ सालों में स्किन कैंसर होने का ज्यादा खतरा है.&amp;nbsp;
AI से चल सकता है खतरे का पता
स्वीडन की University of Gothenburg के रिसर्चर ने यह कामयाबी हासिल की है. रिसर्च टीम ने स्वीडन के करीब 60 लाख लोगों का क्लीनिकल डेटा एनालाइज किया. उन्होंने लोगों मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे इलाज की जानकारी अपने एआई मॉडल को दी. करीब 73 प्रतिशत मामलों में एआई ने यह पता लगा लिया कि किन लोगों को मेलानोमा होने का ज्यादा खतरा है. डायग्नोसिस, मेडिकेशन और सोशियोडेमोग्राफिक डेटा यूज कर रिसर्चर उन लोगों की पहचान कर पाए, जिन्हें अगले पांच सालों में मेलानोमा होने का खतरा 33 प्रतिशत था.
UV लाइट के कारण होता है मेलानोमा
मेलानोमा होने का सबसे बड़ा कारण अल्ट्रावॉयलेट लाइट होती है, जो सीधे सूरज से आती है. यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है. एक बार शरीर में फैलने के बाद मरीज का बचना काफी मुश्किल हो जाता है. इसलिए इस बीमारी को जल्दी डिटेक्ट कर लेना जरूरी होता है. यह छठा सबसे तेजी से होने वाला कैंसर है और इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है. ऐसे में एआई के जरिए इस बीमारी की पहचान कर लोगों की जान बचाई जा सकती है. एक बार अधिक जोखिम का सामना कर रहे लोगों की पहचान होने के बाद उनका फॉलो-अप और इलाज करना आसान हो जाता है.
दिल की बीमारियों का भी पहले पता लगा सकती है एआई
स्किन कैंसर की तरह एआई दिल की बीमारियां का भी सालों पहले पता लगा सकती है. मायो क्लीनिक की एक स्टडी में रिसर्चर ने एआई की मदद से दिल की बीमारियों का पता लगाने का तरीका निकाला है. रिसर्चर ने मरीजों के रेगुलर स्कैन को एआई की मदद से नए तरीके से एनालाइज कर यह पता लगाया कि दिल के चारों ओर कितना फैट जमा है. यह फैट आगे चलकर सूजन और दूसरी बीमारियों का कारण बन सकता है. एआई के बिना इसका पता लगा पाना असंभव है.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Galaxy Z TriFold से नहीं भरा सैमसंग का मन! अब और भी बड़ा फोन बनाने पर कर रही है काम</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Galaxy Z TriFold Wide: दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने कुछ महीने पहले ही Galaxy Z TriFold को लॉन्च किया था, जिसमें 10 इंच का मेन डिस्प्ले है. अब लगता है कि कंपनी का इससे मन नहीं भरा है और वह और भी बड़ा ट्राईफोल्ड फोन बनाने में जुटी हुई है. अब कंपनी उन लोगों के लिए ट्राईफोल्ड बना रही है, जो लैपटॉप जैसा फोन अपने साथ कैरी करना चाहते हैं. इसके लिए सैमसंग ने एक पेटेंट दायर किया है. इससे पता चलता है कि सैमसंग का अपकमिंग फोन Galaxy Z TriFold Wide मौजूदा मॉडल Galaxy Z TriFold से भी बड़ा होगा. आइए जानते हैं कि इस बारे में और क्या-क्या जानकारी सामने आई है.&amp;nbsp;
क्या Galaxy Z TriFold Wide पर हो रहा है काम?
पेटेंट से पता चलता है कि अपकमिंग फोन Galaxy Z TriFold जैसा ही दिखेगा, लेकिन दोनों में एक बड़ा अंतर होगा. यह फोन फोल्ड होने पर किसी नॉर्मल स्मार्टफोन की तरह लंबा नजर नहीं आएगा बल्कि इसका फॉर्म फैक्टर फोल्डेबल आईफोन जैसा होगा. यानी यह फोन दिखने में लंबे से ज्यादा चौड़ा नजर आएगा. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी Galaxy Z TriFold Wide बनाने के बारे में सोच सकती है. बता दें कि पिछले कुछ समय से Wide फोन की पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ रही है. ऐप्पल भी वाइड फॉर्म फैक्टर वाला फोल्डेबल फोन लॉन्च करेगी. वहीं चाइनीज कंपनी Huawei भी इसी फॉर्म फैक्टर में Pura X Max फोन लॉन्च कर चुकी है.
क्या भविष्य की झलक आने लगी है नजर?
पिछले एक-दो सालों से फोल्डेबल फोन लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं और डिस्प्ले में क्रीज विजिबल होने के बाद भी लोग इन्हें खरीद रहे हैं. इन दिनों मार्केट में Galaxy Z Fold 7 और Oppo Find N6 जैसे दमदार ऑप्शन भी अवेलेबल हैं. अब कंपनियां ट्राईफोल्ड फोन की तरफ चल चुकी हैं. सैमसंग से पहले चाइनीज कंपनी Huawei भी ट्राईफोल्ड फोन लॉन्च कर चुकी है. आज के हिसाब से ये फोन भले ही महंगे एक्सपेरिमेंट लगते हैं, लेकिन आने वाले समय में ये फोन नॉर्मल हो सकते हैं.&amp;nbsp;
ओप्पो भी बना चुकी है ट्राईफोल्ड फोन, शाओमी भी करेगी लॉन्च&amp;nbsp;
आज भले ही मार्केट में ट्राईफोल्ड फोन गिने-चुने नजर आ रहे हैं, लेकिन कंपनियां इन्हें लेकर काफी प्लानिंग कर चुकी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ओप्पो ने ट्राईफोल्ड फोन के कई प्रोटोटाइप तैयार किए थे, लेकिन इन्हें मार्केट में नहीं उतारा. ऐसे फोन बनाने और बेचने की लागत के चलते ओप्पो ने इस सेगमेंट में एंट्री नहीं की. दूसरी तरफ एक और चाइनीज कंपनी शाओमी भी ट्राईफोल्ड फोन पर काम कर रही है. इसका डिजाइन Huawei के Mate XT Ultimate जैसा हो सकता है और इसे इस साल के आखिर तक लॉन्च किया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>यूट्यूब पर 5 लाख व्यूज आ रहे हैं तो कितनी होगी कमाई? जानें एक वीडियो पर कितना मिलेगा पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Earning: यूट्यूब पर वीडियो डालकर आप मोटी कमाई कर सकते हैं. कई कंटेट क्रिएटर हर महीने इस प्लेटफॉर्म से लाखों रुपये कमा रहे हैं. इस प्लेटफॉर्म की खास बात है कि आप जितना कंटेट डालेंगे, आपकी कमाई उतनी ही ज्यादा होगी. यूट्यूब वीडियो पर व्यूज के हिसाब से पैसा मिलता है. इसलिए क्रिएटर्स की कोशिश रहती है कि उसका वीडियो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे. आज हम जानेंगे कि अगर यूट्यूब पर आपके किसी वीडियो पर 5 लाख व्यूज आ जाए तो कितनी कमाई हो सकती है.
YouTube Earning के लिए यह चीज जरूरी
अगर आप नए कंटेट क्रिएटर हैं तो बता दें कि यूट्यूब से कमाई के लिए आपका यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YPP) में शामिल होना जरूरी है. इसके बाद ही आप कमाई शुरू कर सकते हैं. इस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आपके चैनल पर कम से कम 1,000 सब्सक्राइबर्स और 4,000 घंटे का वॉच टाइम होना जरूरी है. इसके बिना आपके वीडियो मॉनेटाइज नहीं होंगे.&amp;nbsp;
5 लाख व्यूज आने पर कितनी कमाई हो सकती है?
किसी वीडियो पर 5 लाख व्यूज आने से कितनी कमाई होगी? इस सवाल का कोई सटीक जवाब नहीं है, लेकिन एक मोटा अंदाजा लगाया जा सकता है. यूट्यूब वीडियो पर कमाई के लिए चैनल, वीडियो फॉर्मेट, कैटेगरी और ऑडियंस समेत कई फैक्टर्स को ध्यान में रखती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल यूट्यूब क्रिएटर्स को 1,000 व्यूज पर 50-200 रुपये तक की कमाई हो रही है. ऐसे में अगर अंदाजा लगाया जाए तो आप 5 लाख व्यूज पर लगभग एक लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. बता दें कि यूट्यूब को एडवरटाइजर्स और सब्सक्रिप्शन से जो कमाई होती है, उसमें से 55 प्रतिशत क्रिएटर्स, आर्टिस्ट्स और मीडिया कंपनी को दिया जाता है. बाकी हिस्सा कंपनी अपने पास रखती है.
YouTube पर कमाई बढ़ाने के तरीके क्या हैं?

यूट्यूब पर ग्रो करने के लिए वीडियो की क्वालिटी को टॉप क्लास रखें.&amp;nbsp;
हमेशा ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर वीडियो बनाने की कोशिश करें.
अपने वीडियो को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करें ताकि उसे ज्यादा रीच मिल सके.
अपने वीडियो को ऐसा बनाएं कि उसे अलग-अलग देशों के लोग देख सकें. इससे ज्यादा कमाई होती है.

Youtube पर ऐसे भी कर सकते हैं कमाई
वीडियो के अलावा यूट्यूब पर कमाई के कई रास्ते और भी हैं. आप एफिलिएट मार्केटिंग, स्पॉन्सर्ड कंटेट, सुपरचैट और मेंबरशिप और मर्चेंडाइज के जरिए भी कमाई कर सकते हैं. इन सब कामों के लिए आपके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में होना जरूरी है.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>डेटा खत्म होने से परेशान? बिना प्लान बदले ऐसे बचाएं Mobile Data, ये ट्रिक जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ डेटा खत्म होने से परेशान? बिना प्लान बदले ऐसे बचाएं Mobile Data, ये ट्रिक जानकर रह जाएंगे हैरान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube Shorts हमेशा के लिए हो जाएंगे बंद, कंपनी ले आई नई सेटिंग, ऐसे करें ऑन</title>
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        <description><![CDATA[ How To Turn Off Youtube Shorts: यूट्यूब शॉर्ट्स से परेशान हो चुके यूजर्स के लिए कंपनी ने एक नया ऑप्शन दिया है. अगर आप शॉर्ट्स देखते हुए अपना टाइम खराब नहीं करना चाहते तो इस ऑप्शन का यूज कर शॉर्ट्स को हमेशा अपनी यूट्यूब से हटा सकते हैं. दरअसल, यूट्यूब पर पहले ही शॉर्ट्स के लिए टाइम लिमिट सेट करने का ऑप्शन था, लेकिन अब इसे अपडेट किया गया है. पहले कम से कम 15 मिनट का टाइम सेट किया जा सकता था, लेकिन अब इसे जीरो करने का ऑप्शन भी आ गया है. इस तरह आप शॉर्ट्स को परमानेंटली बंद कर सकते हैं. यह फीचर रोल आउट होना शुरू हो गया है.
किन लोगों के काम आएगा यह फीचर?
जो लोग शॉर्ट्स देखने की आदत से परेशान हो चुके हैं, उनके लिए यह फीचर बड़े काम का है. इसके अलावा अब पैरेंट्स के पास भी अपने बच्चों के शॉर्ट्स देखने की आदत छुड़ाने का नया तरीका आ गया है. वो चाहें तो यूट्यूब ऐप में शॉर्ट्स की टाइम लिमिट जीरो सेट कर इसे पूरी तरह बंद कर सकते हैं. जैसे ही शॉर्ट्स के लिए टाइम लिमिट जीरो पर सेट की जाएगी, फीड में जाने पर भी शॉर्ट्स नजर नहीं आएंगे. यहां पॉप-अप मैसेज के जरिए बताया जाएगा कि आपने टाइम लिमिट जीरो पर सेट कर ली है.
टीन अकाउंट्स नहीं हटा सकेंगे लिमिट
अगर आपको लगता है कि शॉर्ट्स की टाइम लिमिट को बच्चे हटा सकते हैं तो ऐसा नहीं होने वाला है. गूगल फैमिली लिंक से मैनेज होने वाले टीन अकाउंट से इस टाइमर को चेंज नहीं किया जा सकेगा. इससे पैरेंट्स को ज्यादा कंट्रोल मिलेंगे और बच्चे अपने अकाउंट से इस सेटिंग को बदल नहीं पाएंगे.
कैसे जीरो पर सेट करें टाइम लिमिट?
Youtube ने शॉर्ट्स की टाइम लिमिट सेट करने का ऑप्शन भले ही दे दिया है, लेकिन इसे काफी अंदर हाइड किया गया है. यह टाइमर जीरो पर सेट करने के लिए सबसे पहले Youtube ऐप ओपन करें और अपने प्रोफाइल आइकन पर टैप करें. इसके बाद यहां दिख रहे सेटिंग आइकन पर टैप करें. इसमें आपको टाइम मैनेजमेंट का ऑप्शन नजर आएगा. इस पर टैप करने के बाद आपको स्क्रॉल डाउन करने पर डेली शॉर्ट्स फीड लिमिट का ऑप्शन दिख जाएगा. अब इसके आगे बने टॉगल पर टैप करें. यहां आपको कई ऑप्शन दिखेंगे, जिसमें से जीरो मिनट को सेलेक्ट कर लें. इस तरह आप शॉर्ट्स के लिए टाइम लिमिट सेट कर पाएंगे.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google Chrome पर एक गलत क्लिक और आपका सारा डेटा खतरे में! सरकार की चेतावनी ने बढ़ाई टेंशन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/google-chrome-पर-एक-गलत-क्लिक-और-आपका-सारा-डेटा-खतरे-में-सरकार-की-चेतावनी-ने-बढ़ाई-टेंशन</link>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome Users at Risk: अगर आप रोजाना Google Chrome का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. भारत सरकार ने Chrome यूजर्स के लिए एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है जिसमें बताया गया है कि एक छोटी सी गलती भी आपके निजी डेटा को खतरे में डाल सकती है.
किसने जारी की चेतावनी?
यह चेतावनी Indian Computer Emergency Response Team (CERT-In) द्वारा जारी की गई है जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है. एजेंसी ने इसे हाई सीवेरिटी यानी गंभीर खतरे वाली समस्या बताया है.
क्या है असली खतरा?
रिपोर्ट के अनुसार, Google Chrome में कई सुरक्षा खामियां पाई गई हैं जिनका फायदा उठाकर हैकर्स आपके सिस्टम में घुस सकते हैं. वे आपके कंप्यूटर पर कंट्रोल हासिल कर सकते हैं, जरूरी जानकारी चुरा सकते हैं या सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि हैकर्स आपको किसी गलत लिंक पर क्लिक करने या खतरनाक वेबसाइट खोलने के लिए फंसा सकते हैं और बस एक क्लिक से ही आपका डेटा जोखिम में आ सकता है.
कैसे हो सकता है नुकसान?
अगर इन कमजोरियों का फायदा उठाया गया, तो हैकर्स आपके सेव किए गए पासवर्ड, पर्सनल जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा वे आपके ब्राउजर या पूरे सिस्टम को क्रैश भी कर सकते हैं. यह खतरा खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा है जो Chrome का इस्तेमाल बैंकिंग, ऑफिस वर्क या निजी कामों के लिए करते हैं.
समस्या कहां है?
ये सुरक्षा खामियां Chrome के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी हैं जैसे वेब कंटेंट, मीडिया प्रोसेसिंग और बैकग्राउंड सिस्टम. हालांकि तकनीकी भाषा थोड़ी जटिल है लेकिन आसान शब्दों में समझें तो पुराने वर्जन का Chrome सुरक्षित नहीं है.
कौन-से यूजर्स हैं ज्यादा खतरे में?
अगर आपका Google Chrome अपडेट नहीं है और आप पुराना वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप पहले से ही जोखिम में हो सकते हैं. Windows, macOS और Linux तीनों प्लेटफॉर्म पर यह समस्या देखी गई है.
बचाव कैसे करें?
अच्छी बात यह है कि इस समस्या का समाधान जारी कर दिया गया है. आपको बस अपना Chrome ब्राउजर तुरंत अपडेट करना है. नियमित रूप से अपडेट करने से आप ऐसे खतरों से बच सकते हैं.
Chrome अपडेट करने का आसान तरीका

सबसे पहले अपने कंप्यूटर में Chrome खोलें.
ऊपर दाईं ओर दिए गए तीन डॉट्स पर क्लिक करें.
Settings में जाएं और About Chrome विकल्प खोलें.
यहां Chrome खुद ही नए अपडेट को चेक करके इंस्टॉल कर लेगा.
इसके बाद Restart पर क्लिक करें ताकि अपडेट पूरी तरह लागू हो जाए.

थोड़ी सी सावधानी और समय पर अपडेट करके आप अपने डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं. इसलिए अगली बार कोई भी लिंक खोलने से पहले सोचें क्योंकि एक गलत क्लिक बड़ा नुकसान कर सकता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Google, Chrome, पर, एक, गलत, क्लिक, और, आपका, सारा, डेटा, खतरे, में, सरकार, की, चेतावनी, ने, बढ़ाई, टेंशन</media:keywords>
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        <title>क्या है Emergency SOS फीचर? जानिए कैसे मुश्किल समय में आता है काम और क्या है फोन में सेटअप का तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-है-emergency-sos-फीचर-जानिए-कैसे-मुश्किल-समय-में-आता-है-काम-और-क्या-है-फोन-में-सेटअप-का-तरीका</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/क्या-है-emergency-sos-फीचर-जानिए-कैसे-मुश्किल-समय-में-आता-है-काम-और-क्या-है-फोन-में-सेटअप-का-तरीका</guid>
        <description><![CDATA[ Emergency SOS Feature: आज के स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और इंटरनेट तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये हमारी सुरक्षा का भी अहम हिस्सा बन चुके हैं. Emergency SOS एक ऐसा फीचर है जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने के लिए बनाया गया है. इस फीचर की मदद से आप कुछ ही सेकंड में अपने चुने हुए कॉन्टैक्ट्स या इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट भेज सकते हैं. अधिकतर स्मार्टफोन्स में यह सुविधा पहले से मौजूद होती है चाहे आप Android फोन इस्तेमाल करते हों या iOS डिवाइस.
मुश्किल समय में कैसे करता है काम?
Emergency SOS फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बिना फोन अनलॉक किए भी काम करता है. जैसे ही आप पावर बटन को कई बार तेजी से दबाते हैं या एक खास बटन कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करते हैं फोन तुरंत अलर्ट भेज देता है. इस अलर्ट में आपकी लोकेशन, मैसेज और कभी-कभी ऑटोमैटिक कॉल भी शामिल होती है.
इससे आपके परिवार या दोस्त तुरंत समझ जाते हैं कि आप किसी परेशानी में हैं और आपकी लोकेशन के आधार पर मदद पहुंचा सकते हैं. यह फीचर खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जो अक्सर अकेले सफर करते हैं.
फोन में Emergency SOS कैसे सेट करें?
Android फोन में सेटअप
अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो सेटिंग्स में जाकर Safety &amp;amp; Emergency या Emergency SOS विकल्प खोजें. इसके बाद Emergency Contacts में जाकर उन लोगों के नंबर जोड़ें जिन्हें आप इमरजेंसी में सूचना देना चाहते हैं. कुछ फोन में आपको यह भी विकल्प मिलता है कि पावर बटन को 3-5 बार दबाने पर SOS एक्टिव हो जाए. इसे ऑन करना न भूलें.
iPhone में सेटअप
अगर आप iPhone इस्तेमाल करते हैं तो सेटिंग्स में Emergency SOS विकल्प पर जाएं. यहां आप Emergency Contacts जोड़ सकते हैं और Call with Side Button या Auto Call फीचर को ऑन कर सकते हैं. इसके बाद जरूरत पड़ने पर साइड बटन और वॉल्यूम बटन को एक साथ दबाकर SOS एक्टिव किया जा सकता है.
किन बातों का रखें ध्यान?
Emergency SOS फीचर को सेट करते समय सही और भरोसेमंद कॉन्टैक्ट्स ही जोड़ें. साथ ही समय-समय पर यह चेक करते रहें कि फीचर ठीक से काम कर रहा है या नहीं. इसके अलावा, अपने परिवार के लोगों को भी इस फीचर के बारे में जानकारी दें ताकि वे जरूरत पड़ने पर इसका सही इस्तेमाल कर सकें.
क्यों जरूरी है यह फीचर?
आज के समय में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है. ऐसे में Emergency SOS फीचर एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी टूल साबित होता है. यह आपको मुश्किल हालात में अकेला नहीं रहने देता और कुछ ही सेकंड में मदद तक पहुंचने का रास्ता आसान बना देता है. अगर आपने अभी तक अपने फोन में Emergency SOS सेट नहीं किया है तो इसे आज ही एक्टिव करें. क्योंकि संकट कभी भी आ सकता है लेकिन तैयारी पहले से होनी चाहिए.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tech Tips: क्या लैपटॉप की जगह ले सकता है टैबलेट? रिप्लेस करने से पहले जान लें सारे फायदे&amp;नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Can Tablet Replace Laptop: क्या आप अपने पुराने लैपटॉप को टैबलेट से रिप्लेस करने की सोच रहे हैं? अगर आपका जवाब हां है तो आप अकेले नहीं है. कई लोग ऐसे हैं, जो लैपटॉप की जगह टैबलेट यूज करना चाहते हैं. आजकल मार्केट में टैबलेट के कई ऐसे पावरफुल ऑप्शंस मौजूद हैं, जो कई मामलों में लैपटॉप की जगह ले सकते हैं. हालांकि, यह बदलाव जितना दिखता है, उतना आसान नहीं है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि लैपटॉप के मुकाबले टैबलेट के फायदे-नुकसान क्या हैं और किन कामों में आप लैपटॉप को टैबलेट से रिप्लेस कर सकते हैं.
सबसे पहले देखें टैबलेट के फायदे
पोर्टेबिलिटी - लैपटॉप के मुकाबले टैबलेट पतला और हल्का होता है. इसलिए इन्हें कैरी करना और एक से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है. अगर आपको ट्रैवल ज्यादा करना पड़ता है तो टैबलेट एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
बैटरी लाइफ - बैटरी लाइफ के मामले में भी टैबलेट लैपटॉप पर भारी पड़ता है. ज्यादातर लैपटॉप एक बार चार्ज करने पर 4-8 घंटे तक चलते हैं, वहीं टैबलेट आसानी से 8-12 घंटे निकाल देते हैं. ऐसे में ट्रैवलिंग के दौरान आपको टैबलेट को चार्ज करने की टेंशन कम रहेगी.
टच इंटरफेस- अगर आपको ब्राउजिंग, रीडिंग या फोटो एडिटिंग जैसे टास्क करने हैं तो टैबलेट बेहतर च्वॉइस हो सकता है. इसका टच इंटरफेस आपको हर सॉफ्टवेयर और ऐप तक ईजी एक्सेस देगा. आजकल कई लैपटॉप में भी टच स्क्रीन मिलती है, लेकिन इनकी कीमत ज्यादा होती है.&amp;nbsp;
एक्सेसरीज - एक्सेसरीज के मामले में भी टैबलेट काफी आगे है. इसके साथ आपको डिटैच हो जाने वाला कीबोर्ड और स्टायलस मिल जाता है. लैपटॉप के साथ ऐसी एक्सेसरीज नहीं मिलती.
टैबलेट के नुकसान क्या हैं?
हैवी वर्कलोड में दिक्कत- अगर आप वीडियो एडिटिंग, कोडिंग, गेमिंग और दूसरे हैवी टास्क करना चाहते हैं तो लैपटॉप का कोई जवाब नहीं है. ऐसे हैवी टास्क के लिए आपको हाई एंड लैपटॉप की जरूरत पड़ेगी. टैबलेट पर ये टास्क कंप्लीट नहीं किए जा सकते.
कनेक्टिविटी के लिमिटेड फीचर्स- लैपटॉप में टैबलेट के मुकाबले ज्यादा कनेक्टिविटी ऑप्शंस मिलते हैं. लैपटॉप के साथ एक्सटर्नल ड्राइव्स और मॉनिटर भी यूज किए जा सकते हैं. दूसरी तरफ टैबलेट में पोर्ट्स भी कम होते हैं और यह वायरलेस कनेक्टिविटी पर ज्यादा डिपेंड होता है.
मल्टीटास्किंग में भी पीछे - भले ही टैबलेट पावरफुल प्रोसेसर के साथ आते हैं, लेकिन मल्टीटास्किंग में ये लैपटॉप का मुकाबला नहीं कर सकते. इसी तरह बड़ी फाइल्स, एक्सटर्नल ड्राइव्स आदि को हैंडल करना लैपटॉप पर आसान होता है.
इन कामों में लैपटॉप को रिप्लेस कर सकता है टैबलेट

जनरल यूज - अगर आपको इंटरनेट ब्राउजिंग, ईमेल्स, रीडिंग, वीडियो कॉल्स जैसे बेसिक टास्क करने हैं तो टैबलेट आपके काम आ सकता है.
कंटेट कंजप्शन- अगर आप मूवीज और वेब सीरीज आदि देखने के लिए ऑप्शन देख रहे हैं तो टैबलेट आपके लिए लैपटॉप से बेहतर साबित हो सकता है.

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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>अब बच्चों के लिए होगा अलग SIM Card! सुरक्षित इंटरनेट को लेकर इस देश ने लिया फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ Child SIM Card: डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों को देखते हुए Egypt सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रही है. साल 2026 के मध्य तक देश में एक खास चाइल्ड SIM कार्ड लॉन्च करने की तैयारी है जिसमें इंटरनेट इस्तेमाल को सुरक्षित और नियंत्रित बनाने के लिए कई खास फीचर्स दिए जाएंगे.
क्या होगा इस चाइल्ड SIM में खास?
Daily News Egypt की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए SIM कार्ड में बच्चों के लिए सुरक्षित इंटरनेट पैकेज उपलब्ध होंगे. साथ ही इसमें पैरेंटल कंट्रोल जैसी सुविधाएं होंगी जिससे माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रख सकेंगे. इसके अलावा उम्र के आधार पर सोशल मीडिया एक्सेस को सीमित किया जाएगा ताकि बच्चे केवल उनकी उम्र के हिसाब से सही कंटेंट ही देख सकें.
सरकार बना रही है नया कानूनी ढांचा
यह पहल सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बड़ा कानूनी और नीतिगत ढांचा तैयार किया जा रहा है. सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए एक व्यापक कानून पर काम कर रही है जिसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा. इस योजना में टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर फिक्स्ड इंटरनेट कंट्रोल सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है जिससे कंटेंट को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा जा सके और डिवाइस स्तर पर ही कंट्रोल संभव हो.
सरकार की प्राथमिकता
देश के नेतृत्व ने साफ किया है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों से निपटना बेहद जरूरी है. सरकार का लक्ष्य ऐसा ऑनलाइन वातावरण तैयार करना है जहां बच्चे सुरक्षित रह सकें और समाज के मूल्यों की रक्षा भी हो सके. इसी दिशा में तेजी से कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है ताकि इसे संबंधित विभागों के साथ साझा कर जल्द लागू किया जा सके.
ऑनलाइन खतरों पर सख्ती
इस पहल के तहत कई गंभीर मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. जैसे ऑनलाइन सट्टेबाजी, वीडियो गेम्स के जरिए नकली करेंसी का प्रसार और डिजिटल एडिक्शन. सरकार इन क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के लिए भी नियम तय करने की योजना बना रही है ताकि बच्चों को इन खतरों से दूर रखा जा सके. प्रस्तावित नियमों के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी कई सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे.
इनमें उम्र की पुष्टि (Age Verification), पैरेंटल कंट्रोल और कंटेंट की स्पष्ट श्रेणीकरण शामिल होगा. इसके अलावा कंपनियों को नियमित रिपोर्ट देना, यूजर्स की शिकायतों के समाधान के लिए सिस्टम बनाना और जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी होगा.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>Spam Calls से परेशान हुए मोबाइल यूजर्स, लगातार बढ़ती जा रही हैं शिकायतें</title>
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        <description><![CDATA[ Spam Calls: सरकार और टेलीकॉम कंपनियों की तमाम कोशिशों के बावजूद स्पैम कॉल्स कम नहीं हो रही हैं. अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 की तुलना में 2025 में स्पैम कॉल्स की 128 प्रतिशत अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं. 2023 में स्पैम कॉल्स की 13.62 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं. 2024 में यह संख्या बढ़कर 19.38 लाख और 2025 में बढ़कर 31 लाख को पार कर गई है. दूसरी तरफ इन कॉल्स को रोकने की कोशिशें भी तेज हुई हैं, लेकिन ग्राहकों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. लोगों को दिन में अब भी कई-कई बार स्पैम कॉल्स आ रही हैं.
Spam Calls रोकने के लिए क्या हो रहा है?
टेक्नोलॉजी के एडवांस होने के साथ अब कंपनियां रोबोटिक कॉल्स कर रही हैं. इसके अलावा अब साइबर क्राइम के लिए ऐसी कॉल्स का यूज होने लगा है. इसे रोकने के लिए सरकार और टेलीकॉम कंपनियां संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी तक 2.27 लाख से ज्यादा मोबाइल ब्लॉक किए जा चुके हैं. इसके अलावा ऐसे मैसेज भेजने वाले कई अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. इसके अलावा नियमों को भी सख्त किया गया है. पिछले करीब एक साल से उन नंबरों को ब्लॉक किया जा रहा है, जो बार-बार स्पैम कॉल्स के लिए यूज किए जा रहे थे.
टेक्नोलॉजी का भी लिया जा रहा सहारा
मोबाइल यूजर्स को स्पैम कॉल्स से बचाने के लिए अब टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया जा रहा है. स्पैम कॉल्स की पहचान के लिए अब एआई सिस्टम डिप्लॉय किया गया है, जो यह पहचान लेता है कि किसी नंबर का स्पैम कॉल्स के लिए इस्तेमाल तो नहीं हुआ है. अगर यह नंबर संदिग्ध लगता है तो कॉल को मोबाइल यूजर तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया जाता है. अगर सिस्टम किसी संदिग्ध नंबर को पहचान लेता है तो उसकी KYC जांच की जाती है. अगर यह फिर भी स्पैम एक्टिविटीज में शामिल पाया जाता है तो उस नंबर को बंद भी किया जा सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में टेलीकॉम सिस्टम रोजाना 7.5 करोड़ स्पैम कॉल्स और मैसेज को रोक रहा है.
स्पैम कॉल्स को ब्लॉक कैसे करें?
अगर आप बार-बार आ रहीं स्पैम कॉल्स से परेशान हैं तो इसकी शिकायत कर सकते हैं. आप चाहें तो TRAI की DND ऐप का यूज कर सकते हैं या फिर 1909 पर मैसेज भेजकर इसकी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. आजकल कई फोन में बिल्ट-इन स्पैम फिल्टर मिलते हैं. इन्हें इनेबल कर भी आप स्पैम कॉल्स और मैसेज से कुछ हद तक बच सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp और Telegram को टक्कर देने आ रहा Elon Musk का XChat, जानिए कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ Elon Musk XChat: टेक दुनिया में एक और बड़ा बदलाव आने वाला है. Elon Musk अपनी सोशल मीडिया कंपनी X के जरिए अब एक अलग मैसेजिंग ऐप XChat लॉन्च करने की तैयारी में हैं. यह ऐप पहले X के अंदर ही डायरेक्ट मैसेज फीचर के रूप में मौजूद था लेकिन अब इसे एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है.
कब लॉन्च होगा XChat?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, XChat जल्द ही Apple के App Store पर उपलब्ध हो सकता है. इसकी संभावित लॉन्च डेट 17 अप्रैल 2026 बताई जा रही है. शुरुआत में यह ऐप iPhone और iPad जैसे iOS डिवाइस पर आएगा जबकि Android यूजर्स को इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है.
क्या होंगे XChat के खास फीचर्स?
XChat को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह सीधे बड़े मैसेजिंग ऐप्स को टक्कर दे सके. इसमें कई आधुनिक और प्राइवेसी-फोकस्ड फीचर्स देखने को मिल सकते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन मिलेगा जिससे आपकी चैट पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और कोई तीसरा व्यक्ति इसे नहीं पढ़ सकेगा. यूजर्स यहां प्राइवेट चैट के साथ-साथ ग्रुप चैट भी कर पाएंगे जिसमें सैकड़ों लोग एक साथ जुड़ सकते हैं. भेजे गए मैसेज को एडिट या डिलीट करने का विकल्प भी मिलेगा.
प्राइवेसी को और मजबूत बनाने के लिए ऐप में स्क्रीनशॉट ब्लॉक करने का फीचर भी दिया जा सकता है जिससे बिना अनुमति कोई आपकी चैट का स्क्रीनशॉट नहीं ले सकेगा. इसके अलावा, व्हाट्सऐप की तरह disappearing messages फीचर भी मिलेगा, जहां मैसेज कुछ समय बाद अपने आप डिलीट हो जाएंगे. वॉइस नोट, ऑडियो और वीडियो कॉलिंग जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हो सकती हैं.
WhatsApp और Telegram को कितनी टक्कर?
आज के समय में WhatsApp और Telegram मैसेजिंग की दुनिया के सबसे बड़े नाम हैं. XChat इन्हीं को चुनौती देने के इरादे से आ रहा है. जहां WhatsApp मोबाइल नंबर के जरिए अकाउंट बनाता है वहीं XChat आपके X अकाउंट से जुड़ सकता है. इससे यूजर एक्सपीरियंस थोड़ा अलग हो सकता है. प्राइवेसी के मामले में दोनों प्लेटफॉर्म एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन देते हैं लेकिन XChat में स्क्रीनशॉट ब्लॉक जैसे नए फीचर्स इसे थोड़ा अलग बना सकते हैं.
AI और भविष्य की योजनाएं
X पहले से ही AI पर काम कर रहा है, खासकर Grok AI के साथ. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि XChat में भी AI फीचर्स जोड़े जा सकते हैं हालांकि अभी इस पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. इसके अलावा, X प्लेटफॉर्म अपने पेमेंट सिस्टम X Money पर भी काम कर रहा है. अगर यह फीचर XChat में जुड़ता है तो यूजर्स को ऐप के अंदर ही पैसे भेजने जैसी सुविधा मिल सकती है.
क्या XChat बदल देगा गेम?
XChat का लॉन्च सिर्फ एक नया ऐप नहीं बल्कि मैसेजिंग इंडस्ट्री में बड़ा मुकाबला शुरू करने का संकेत है. Elon Musk का लक्ष्य साफ है एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना जो चैट, सोशल मीडिया, AI और पेमेंट्स को एक ही जगह पर लाए. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या XChat वाकई WhatsApp और Telegram जैसी दिग्गज ऐप्स को टक्कर दे पाता है या नहीं.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>अलर्ट! नए स्कैम से iPhone यूजर्स को किया जा रहा टारगेट, ईमेल पर मिल रही यह वॉर्निंग</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone iCloud Scam: iPhone यूजर्स को इन दिनों एक नए स्कैम में टारगेट किया जा रहा है. साइबर अटैकर्स आईफोन यूजर्स के पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल्स और पर्सनल डेटा चोरी करने के लिए एक नया स्कैम चला रहे हैं. इसमें यूजर के पास एक फर्जी ईमेल भेजा जाता है. इसमें लिखा होता है कि आपकी iCloud स्टोरेज फुल हो गई है. अगर इसे अभी अपग्रेड नहीं किया गया तो फोटो-वीडियो और बैकअप फाइल्स समेत सारा डेटा डिलीट हो जाएगा. अगर कोई यूजर ईमेल पर भरोसा कर अपग्रेड करने के लिंक पर क्लिक कर देता है तो उसे फर्जी वेबसाइट पर रिडायरेक्ट कर डेटा चुरा लिया जाता है. आइए जानते हैं कि iPhone iCloud Scam से कैसे बचा जा सकता है.
कैसे काम करता है iPhone iCloud Scam?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे पहले यूजर के पास एक ईमेल आता है, जिसमें आईक्लाउड स्टोरेज फुल होने की बात लिखी होती है. कई ईमेल में डेटा डिलीट होने की 48 घंटे की डेडलाइन का भी जिक्र होता है. इसके नीचे अपग्रेड करने के लिए एक बटन या लिंक दिया जाता है. यह लिंक स्टोरेज अपग्रेड करने का न होकर फिशिंग वेबसाइट का होता है. जैसे ही यूजर इस पर क्लिक करता है, उसे फिशिंग वेबसाइट पर रिडायरेक्ट कर दिया जाता है. अगर कोई यूजर इस पर पेमेंट डिटेल्स डालता है तो उसके गलत हाथों में पड़ने का खतरा रहता है.
इन तरीकों से यूजर पर दबाव बना रहे स्कैमर्स
इस स्कैम में स्कैमर्स अलग-अलग तरीकों से लोगों पर दबाव बना रहे हैं ताकि वो फिशिंग वेबसाइट के लिंक पर क्लिक कर दें. इसके लिए उन्हें अकाउंट ब्लॉक करने से लेकर अगले कुछ घंटों में फोटो-वीडियो डिलीट करने की धमकी दी जाती है. इसके लिए स्कैमर बार-बार ईमेल भेजते हैं. जानकारों का कहना है कि ऐसा लोगों पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है ताकि वो जल्दी में अपना डेटा हैकर्स की वेबसाइट पर अपलोड कर दें. ऐसे ईमेल दिखने में एकदम असली जैसे होते हैं और इन पर ऐप्पल की ब्रांडिंग का भी इस्तेमाल किया जाता है.
ऐप्पल यूजर्स को क्या करना चाहिए?

इस स्कैम से दुनियाभर के ऐप्पल यूजर्स को टारगेट किया जा रहा है. ऐसे स्कैम से बचने के लिए आपको किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति से आए ईमेल या मैसेज को ओपन नहीं करना चाहिए. साथ ही ऐसे किसी भी ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक कर अपनी पर्सनल डिटेल्स शेयर न करें.
आप ईमेल पर भरोसा करने की बजाय डिवाइस सेटिंग में जाकर iCloud स्टोरेज देख सकते हैं.&amp;nbsp;
ऐप्पल की तरफ से कभी भी यूजर के पास बार-बार ईमेल भेजकर पेमेंट करने के लिए नहीं कहा जाता. इसलिए ऐसे ईमेल से सावधान रहें.

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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Upcoming Foldable Smartphones: iPhone Fold से लेकर Samsung Z Fold 8 तक, भारत में जल्द लॉन्च होंगे ये 5 धांसू डिवाइस</title>
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        <description><![CDATA[ Upcoming Foldable Smartphones: अब फोल्डेबल स्मार्टफोन सिर्फ एक्सपेरिमेंट नहीं रहे बल्कि टेक कंपनियों के बीच सबसे बड़ी टक्कर का मैदान बनते जा रहे हैं. साल 2026 खास तौर पर काफी रोमांचक होने वाला है क्योंकि कई बड़े ब्रांड अपने नए और एडवांस फोल्डेबल डिवाइस लॉन्च करने की तैयारी में हैं. इस रेस में Samsung से लेकर Apple तक शामिल हैं.
Samsung Galaxy Z Fold 8 और Z Fold 8 Wide
फोल्डेबल सेगमेंट में Samsung एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूत करने वाला है. कंपनी इस बार दो नए बुक-स्टाइल फोल्डेबल लॉन्च कर सकती है Galaxy Z Fold 8 और एक नया वेरिएंट Z Fold 8 Wide. Galaxy Z Fold 8 में इस बार 5000mAh की बड़ी बैटरी मिलने की उम्मीद है जो पिछले कई सालों में एक बड़ा अपग्रेड माना जा रहा है. साथ ही S Pen सपोर्ट की वापसी की भी चर्चा है.
वहीं Z Fold 8 Wide एक अलग डिजाइन के साथ आ सकता है. इसमें करीब 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले और 7.6 इंच की बड़ी इनर स्क्रीन मिल सकती है. दोनों फोन में पावरफुल Snapdragon 8 Elite Gen 5 for Galaxy प्रोसेसर और 45W फास्ट चार्जिंग मिलने की संभावना है. इनकी लॉन्चिंग जुलाई में Galaxy Unpacked इवेंट में हो सकती है.
Vivo X Fold 6
Vivo भी इस रेस में पीछे नहीं है. Vivo X Fold 6 को लेकर खबर है कि इसमें 200MP का दमदार प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है जो OIS के साथ आएगा.
इसके अलावा 50MP का टेलीफोटो लेंस भी मिलने की उम्मीद है जिससे यह फोन फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए खास बन सकता है. माना जा रहा है कि यह डिवाइस जुलाई 2026 के आसपास ग्लोबली लॉन्च हो सकता है.
Google Pixel 11 Pro Fold
Google भी अपने नए फोल्डेबल Pixel 11 Pro Fold के साथ मार्केट में एंट्री को और मजबूत करने जा रहा है. लीक हुई इमेजेस के अनुसार, इसमें नया डिजाइन और ट्रिपल कैमरा सेटअप देखने को मिल सकता है. यह फोन Google के 3nm Tensor G6 चिपसेट पर काम कर सकता है जिससे परफॉर्मेंस और AI क्षमताओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. इसकी लॉन्चिंग अगस्त 2026 में होने की संभावना है.
Apple iPhone Fold
फोल्डेबल सेगमेंट में सबसे ज्यादा चर्चा Apple के iPhone Fold को लेकर है. माना जा रहा है कि यह सितंबर 2026 में iPhone 18 Pro सीरीज के साथ लॉन्च हो सकता है. इसमें करीब 7.8 इंच की मेन स्क्रीन और 5.5 इंच की बाहरी डिस्प्ले मिल सकती है.
साथ ही इसमें A20 चिप दी जा सकती है जो इसे बेहद पावरफुल बनाएगी. खास बात यह है कि Apple इसमें Touch ID को पावर बटन में वापस ला सकता है. कीमत की बात करें तो यह प्रीमियम सेगमेंट में आएगा और इसकी कीमत लगभग 2 लाख रुपये से ऊपर जा सकती है.
फोल्डेबल मार्केट में बढ़ती टक्कर
2026 फोल्डेबल स्मार्टफोन के लिए एक बड़ा साल बनने जा रहा है. Samsung, Vivo, Google और Apple जैसे दिग्गज ब्रांड इस सेगमेंट को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सा फोल्डेबल फोन यूजर्स का दिल जीतता है और कौन मार्केट में बाजी मारता है.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Upcoming, Foldable, Smartphones:, iPhone, Fold, से, लेकर, Samsung, Fold, तक, भारत, में, जल्द, लॉन्च, होंगे, ये, धांसू, डिवाइस</media:keywords>
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        <title>Tech Tips: आपके आईफोन हॉटस्पॉट से कौन यूज कर रहा है डेटा? चुटकियों में ऐसे लगाएं पता</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Hotspot Data: अगर आप अपने आईफोन से हॉटस्पॉट के जरिए डेटा शेयर करते हैं, लेकिन यह पता नहीं लगा पा रहे हैं कि इस डेटा को यूज कौन कर रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है. अब ऐप्पल ने यह पता करना आसान कर दिया है. iOS 26.4 अपडेट में ऐप्पल ने पर्सनल हॉटस्पॉट यूसेज को हिडन स्पॉट से एक सुविधाजनक लोकेशन पर ट्रांसफर कर दिया है. इसका फायदा यह हुआ है कि यूजर्स कुछ ही स्टेप्स को फॉलो कर यह पता लगा सकते हैं कि उनके आईफोन से हॉटस्पॉट कौन-सा डिवाइस यूज कर रहा है. इससे अनजान डिवाइस को ब्लॉक करना भी आसान हो गया है.
अपडेट के बाद बदल गया iPhone Hotspot Data का &#039;एड्रेस&#039;
ऐप्पल में पहले से यह पता करने का तरीका है कि आपका हॉटस्पॉट डेटा कौन यूज कर रहा है, लेकिन यह अभी तक सेलुलर सेटिंग में छिपा होता था, जिससे ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती थी. अब नई अपडेट के बाद यह पर्सनल हॉटस्पॉट मेनू में दिखने लगा है, जिससे इस पर नजर रखना आसान हो गया है. हालांकि, इसके लिए आपके आईफोन का अपडेटेड होना जरूरी है. iOS 26.4 अपडेट में यह बदलाव किया गया है.&amp;nbsp;
कैसे लगाएं iPhone Hotspot Data का पता?
सबसे पहले आईफोन में सेटिंग ओपन करें और पर्सनल हॉटस्पॉट पर टैप करें. यहां मैक्सिमाइज कंपेटिबिलिटी टॉगल के नीचे दिए गए डेटा यूसेज ऑप्शन पर टैप करें. यहां आपको आईफोन से कनेक्टेड सारे डिवाइसेस की लिस्ट दिख जाएगी. साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि किस डिवाइस ने कितना डेटा कंज्यूम कर लिया है. इसमें आपको ऐप्पल डिवाइस नाम से दिख जाएंगे, वहीं एंड्रॉयड और विंडोज पीसी आदि &#039;अदर डिवाइस&#039; के ग्रुप में दिखेंगे.
5G हॉटस्पॉट से कैसे बढ़ाएं स्पीड?
अगर आपके फोन में 5G नेटवर्क है, लेकिन हॉटस्पॉट के जरिए इंटरनेट स्पीड एकदम स्लो मिल रही है तो आपको सेटिंग में बदलाव करने की जरूरत है.दरअसल, ज्यादातर स्मार्टफोन बाय डिफॉल्ट 2.4GHz बैंड पर वाईफाई हॉटस्पॉट क्रिएट करते हैं. यह बैंड पुराने डिवाइसेस के लिए कंपैटिबल भी होता है और इसकी रेंज भी ज्यादा होती है, लेकिन स्पीड के मामले में यह पीछे छूट जाता है. इसलिए इसे बदलना जरूरी है.&amp;nbsp;
हॉटस्पॉट के जरिए कैसे पाएं फास्ट इंटरनेट?
अगर आप हॉटस्पॉट पर फास्ट इंटरनेट पाना चाहते हैं तो 2.4GHz बैंड को बदलकर 5GHz पर सेट करना होगा. यह हायर डेटा ट्रांसफर रेट को सपोर्ट करता है. मॉडर्न स्मार्टफोन में आपको हॉटस्पॉट या टेथरिंग सेटिंग में आपको यह ऑप्शन मिल जाएगा. एक बार इनेबल होने के बाद फास्ट इंटरनेट भी मिलेगा और लेटेंसी भी कम हो जाएगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Iron Body Vs Plastic Body Cooler: कौन देगा AC जैसी ठंडी हवा? खरीदने से पहले जानिए कौन खाता है ज्यादा बिजली</title>
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        <description><![CDATA[ Iron Body Vs Plastic Body Cooler: जैसे ही गर्मी अपने चरम पर पहुंचती है, घर में ठंडक बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. हर कोई AC नहीं खरीद सकता ऐसे में एयर कूलर एक किफायती और असरदार विकल्प बनकर सामने आता है. लेकिन बाजार में मिलने वाले लोहा (मेटल) और प्लास्टिक कूलर के बीच सही चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है.
लोहे वाला कूलर
लोहा कूलर लंबे समय से इस्तेमाल होते आ रहे हैं और अपनी मजबूती के लिए जाने जाते हैं. इनका बॉडी स्ट्रक्चर मजबूत होता है जिससे ये लंबे समय तक चलते हैं. इसके अलावा, इनमें आमतौर पर बड़े फैन और ज्यादा पानी की क्षमता होती है जो बेहतर कूलिंग देने में मदद करती है. हालांकि, इनका वजन ज्यादा होता है जिससे इन्हें इधर-उधर ले जाना आसान नहीं होता. साथ ही, समय के साथ इनमें जंग लगने की समस्या भी हो सकती है खासकर अगर देखभाल ठीक से न की जाए.
प्लास्टिक वाला कूलर
प्लास्टिक कूलर आजकल ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं. ये वजन में हल्के होते हैं जिससे इन्हें आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है. इनका डिजाइन भी ज्यादा आकर्षक और मॉडर्न होता है जो घर के इंटीरियर के साथ बेहतर मेल खाता है. सबसे बड़ी बात, इनमें जंग लगने का खतरा नहीं होता. लेकिन कई बार प्लास्टिक बॉडी ज्यादा मजबूत नहीं होती और लंबे समय में टूट-फूट का खतरा बना रहता है.
कूलिंग में कौन है बेहतर?
अगर बात सिर्फ ठंडी हवा की करें तो कूलिंग पर असर कूलर के मटेरियल से ज्यादा उसके फैन, मोटर और कूलिंग पैड पर निर्भर करता है. अच्छे क्वालिटी के हनीकॉम्ब पैड और पावरफुल मोटर वाला कूलर चाहे लोहा हो या प्लास्टिक, बेहतर कूलिंग देगा. हालांकि, बड़े साइज और हाई कैपेसिटी वाले मेटल कूलर आमतौर पर बड़े कमरों में ज्यादा असरदार साबित होते हैं.
बिजली खपत और मेंटेनेंस
दोनों तरह के कूलर अलग-अलग बिजली खपत करते हैं. लोहे वाले कूलर आमतौर पर प्लास्टिक वाले कूलर से ज्यादा बिजली खपत करते हैं. इसका कारण है इसका बड़ा साइज. दरअसल, लोहे वाले कूलर आमतौर पर बड़े साइज में होते हैं या फिर वह पुराने जमाने वाले होते हैं जिसमे बड़े वॉट वाला मोटर लगा होता है ज्यादा काफी ज्यादा बिजली खपत करता है.
वहीं, दूसरी ओर प्लास्टिक वाले कूलर में हल्का मोटर होता है जो कम बिजली खपत करता है. लेकिन मेंटेनेंस के मामले में प्लास्टिक कूलर थोड़ा आगे रहते हैं क्योंकि इनमें जंग या पेंट खराब होने जैसी समस्या नहीं होती. वहीं, मेटल कूलर को समय-समय पर साफ करना और पेंटिंग करवाना पड़ सकता है.
किसे खरीदना होगा सही फैसला?
अगर आप बड़े कमरे या खुले एरिया के लिए कूलर ढूंढ रहे हैं और भारी मशीन से दिक्कत नहीं है तो लोहा कूलर अच्छा ऑप्शन हो सकता है. लेकिन अगर आपको हल्का, पोर्टेबल और कम मेंटेनेंस वाला कूलर चाहिए तो प्लास्टिक कूलर बेहतर रहेगा. लोहा और प्लास्टिक कूलर दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं. सही चुनाव आपकी जरूरत, बजट और इस्तेमाल पर निर्भर करता है.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:27 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Fold: भारत में कब लॉन्च होगा Apple का पहला फोल्डेबल फोन! अब तक इतनी डिटेल्स आ चुकी हैं सामने</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Fold: टेक दुनिया में इस साल Apple अपने दो बड़े और चर्चित प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की तैयारी में है एक नया AI से लैस Siri और दूसरा बहुप्रतीक्षित iPhone Fold. हालांकि AI और फोल्डेबल स्मार्टफोन के मामले में कंपनी अपने टक्कर वाली कंपनियों से थोड़ी पीछे रही है क्योंकि आज लगभग हर स्मार्टफोन ब्रांड AI फीचर्स दे रहा है और फोल्डेबल फोन की शुरुआत Samsung ने 2019 में ही कर दी थी. इसके बावजूद Apple से उम्मीद की जा रही है कि वह इस सेगमेंट में कुछ अलग और प्रीमियम अनुभव लेकर आएगा.
कब आ सकता है iPhone Fold
हर साल की तरह इस बार भी सितंबर में Apple के नए iPhones लॉन्च होने की संभावना है. माना जा रहा है कि iPhone Fold को iPhone 18 Pro सीरीज के साथ पेश किया जा सकता है. हालांकि इसकी उपलब्धता को लेकर अभी पूरी तरह साफ तस्वीर सामने नहीं आई है. कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि लॉन्च के साथ ही बिक्री शुरू हो सकती है जबकि कुछ में प्रोडक्शन दिक्कतों के चलते देरी की बात कही गई है जिससे इसकी बिक्री 2027 तक खिसक सकती है.
डिजाइन और डिस्प्ले
लीक्स के मुताबिक iPhone Fold का डिजाइन ऐसा होगा जो अनफोल्ड होने पर ज्यादा बेहतर अनुभव देगा. बंद होने पर यह थोड़ा चौड़ा और छोटा दिख सकता है जबकि खोलने पर इसका लुक iPad mini जैसा महसूस हो सकता है. इसमें 5.5 इंच का बाहरी और 7.8 इंच का बड़ा अंदरूनी डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है.
डिस्प्ले के लिए कंपनी Samsung के लेटेस्ट M16 OLED पैनल का इस्तेमाल कर सकती है जो ज्यादा पावर एफिशिएंट होंगे. साथ ही, नई हिंज टेक्नोलॉजी स्क्रीन की क्रीज को काफी हद तक कम कर सकती है जिससे स्क्रीन ज्यादा स्मूद दिखेगी.
Face ID की जगह मिलेगा Touch ID?
डिजाइन को स्लिम रखने के लिए Apple इस बार Face ID को छोड़ सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी पावर बटन में ही Touch ID सेंसर दे सकती है. यह बदलाव फोन के पतले डिजाइन के कारण किया जा सकता है क्योंकि Face ID के कॉम्पोनेंट्स को फिट करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
कैमरा सेटअप
कैमरा की बात करें तो iPhone Fold में डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है जिसमें 48MP का मेन और 48MP का अल्ट्रावाइड लेंस शामिल हो सकता है. इसमें टेलीफोटो लेंस नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा, अंदर की स्क्रीन पर 24MP का अंडर-डिस्प्ले कैमरा और बाहरी स्क्रीन पर पंच-होल कैमरा मिलने की संभावना है जिससे यूजर्स को बेहतर वीडियो कॉलिंग और सेल्फी अनुभव मिल सके.
परफॉर्मेंस, स्टोरेज और बैटरी
परफॉर्मेंस के लिए iPhone Fold में Apple का अगला जेनरेशन A20 Pro चिपसेट दिया जा सकता है जो 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा. इससे फोन की स्पीड और पावर एफिशिएंसी दोनों बेहतर हो सकती हैं. फोन में 12GB RAM और 1TB तक स्टोरेज मिलने की उम्मीद है. बैटरी की बात करें तो इसमें 5,400mAh से 5,800mAh तक की बड़ी बैटरी दी जा सकती है जो अब तक के iPhones में सबसे बड़ी हो सकती है. साथ ही, इसमें फिजिकल SIM की जगह सिर्फ eSIM सपोर्ट मिलने की संभावना है.
Samsung Galaxy Foldable Smartphone
Samsung अपने अगले फोल्डेबल स्मार्टफोन Samsung Galaxy Z Fold 8 को जुलाई में लॉन्च कर सकता है. यह टाइमलाइन पिछले मॉडल Samsung Galaxy Z Fold 7 जैसी ही बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फोन को चीन की एक सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर Samsung Galaxy Z Flip 8 के साथ देखा गया है. माना जा रहा है कि इस बार कंपनी चार्जिंग स्पीड को पहले से बेहतर कर सकती है.
डिस्प्ले और डिजाइन
लीक्स के अनुसार, Galaxy Z Fold 8 में लगभग 8 इंच की बड़ी फोल्डिंग स्क्रीन मिल सकती है जबकि बाहर की तरफ 6.5 इंच का कवर डिस्प्ले दिया जा सकता है. दोनों स्क्रीन में 120Hz रिफ्रेश रेट मिलने की उम्मीद है जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग का अनुभव स्मूथ रहेगा. इसके फोल्डिंग डिस्प्ले में ड्यूल-लेयर UTG (Ultra Thin Glass) का इस्तेमाल किया जा सकता है, साथ ही मजबूती के लिए लेजर-ड्रिल्ड मेटल सपोर्ट प्लेट भी दी जा सकती है.
परफॉर्मेंस और प्रोसेसर
परफॉर्मेंस के मामले में यह स्मार्टफोन काफी दमदार साबित हो सकता है. इसमें लेटेस्ट Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिलने की संभावना है जो हैवी गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूद बना सकता है. फोटोग्राफी के लिए Galaxy Z Fold 8 में हाई-एंड कैमरा सेटअप देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है जो 1/1.3-इंच सेंसर के साथ आएगा. इसके अलावा 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस और 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा मिल सकता है जो 3x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Android यूजर्स के लिए बड़ा झटका! इस तारीख के बाद बंद हो जाएगा आपका पसंदीदा ऐप, जानिए क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Microsoft Outlook Lite App: Microsoft ने अपने ईमेल ऐप Outlook Lite को बंद करने का फैसला लिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ऐप 26 मई 2026 के बाद सही तरीके से काम नहीं करेगा. हालांकि ऐप खुल तो जाएगा लेकिन इसके फीचर्स काम करना बंद कर देंगे. Outlook Lite को साल 2022 में लॉन्च किया गया था खासतौर पर ऐसे Android यूजर्स के लिए जिनके फोन में कम स्टोरेज होता है या जहां इंटरनेट स्पीड धीमी होती है.
क्यों लिया गया यह फैसला
Tech Crunch के अनुसार, Microsoft पहले ही इस ऐप को बंद करने की तैयारी कर चुका था. कंपनी ने 2025 में ही घोषणा कर दी थी कि Outlook Lite को Google Play Store से हटा दिया जाएगा और अक्टूबर 2025 से इसकी डाउनलोडिंग भी बंद कर दी गई थी. अब कंपनी चाहती है कि सभी यूजर्स मुख्य Outlook Mobile ऐप पर शिफ्ट हो जाएं जहां ज्यादा फीचर्स और बेहतर सपोर्ट मिलता है.
यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा
Neowin की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 25 मई 2026 के बाद Outlook Lite का इस्तेमाल करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. यूजर्स अपने मेलबॉक्स को एक्सेस नहीं कर पाएंगे और ऐप के जरूरी फीचर्स जैसे नेविगेशन और अन्य ऑप्शन काम नहीं करेंगे. इसलिए मौजूदा यूजर्स को जल्द से जल्द नए ऐप पर जाने की सलाह दी जा रही है ताकि उनका काम प्रभावित न हो.
क्या आपका डेटा सुरक्षित रहेगा?
अच्छी बात यह है कि इस बदलाव से यूजर्स का डेटा सुरक्षित रहेगा. ईमेल, कैलेंडर और अटैचमेंट्स डिलीट नहीं होंगे. यूजर्स अपने पुराने अकाउंट से लॉगिन करके नए Outlook Mobile ऐप में आसानी से अपना सारा डेटा वापस पा सकते हैं.
नए ऐप में कैसे करें स्विच
Microsoft ने यूजर्स के लिए ऐप बदलना आसान बना दिया है. Outlook Lite ऐप के अंदर ही Upgrade का ऑप्शन दिया गया है जिस पर क्लिक करने से यूजर सीधे Play Store पर पहुंच जाता है. वहां से Outlook Mobile ऐप डाउनलोड किया जा सकता है. इसके अलावा, यूजर्स खुद भी Play Store में जाकर ऐप सर्च करके इंस्टॉल कर सकते हैं. Outlook Lite का बंद होना उन यूजर्स के लिए बदलाव जरूर लाएगा जो हल्के ऐप पर निर्भर थे. लेकिन नए Outlook ऐप में ज्यादा फीचर्स और बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है जिससे यूजर्स का काम और आसान हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Android, यूजर्स, के, लिए, बड़ा, झटका, इस, तारीख, के, बाद, बंद, हो, जाएगा, आपका, पसंदीदा, ऐप, जानिए, क्या, है, वजह</media:keywords>
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        <title>Tech Tips: आपके फोन की चार्जिंग केबल कितनी लंबी है? iPhone और Android में छिपा है बड़ा फर्क, जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tech-tips-आपके-फोन-की-चार्जिंग-केबल-कितनी-लंबी-है-iphone-और-android-में-छिपा-है-बड़ा-फर्क-जानकर-रह-जाएंगे-हैरान</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आपके फोन की चार्जिंग केबल कितनी लंबी है? iPhone और Android में छिपा है बड़ा फर्क, जानकर रह जाएंगे हैरान ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:24 +0530</pubDate>
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        <title>AI चैटबॉट्स से अपनी प्राइवेसी कैसे रखें सुरक्षित? ये सेटिंग्स ऑन नहीं कीं तो खतरे में है आपकी पर्सनल डिटेल्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-चैटबॉट्स-से-अपनी-प्राइवेसी-कैसे-रखें-सुरक्षित-ये-सेटिंग्स-ऑन-नहीं-कीं-तो-खतरे-में-है-आपकी-पर्सनल-डिटेल्स</link>
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        <description><![CDATA[ AI Chatbots: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ फोटो बनाने या सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहा. ChatGPT, Google Gemini और Microsoft Copilot जैसे प्लेटफॉर्म अब लोगों के पर्सनल असिस्टेंट, डायरी और यहां तक कि इमोशनल सपोर्ट सिस्टम भी बन चुके हैं. लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है आपका डेटा कितना सुरक्षित है? ये AI टूल्स आपकी पसंद, बातचीत और व्यवहार को समझकर बेहतर रिजल्ट देते हैं लेकिन कई बार यही जानकारी उनके सिस्टम में स्टोर भी हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी प्राइवेसी पर खुद कंट्रोल रखें.
ChatGPT पर डेटा कैसे सुरक्षित रखें?
अगर आप ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ आसान सेटिंग्स बदलकर अपनी जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं. सबसे पहले, सेटिंग्स में जाकर Improve the model for everyone जैसे विकल्प को बंद कर दें. इससे आपकी चैट्स AI ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं होंगी. इसके अलावा, आप Temporary Chat का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इस मोड में की गई बातचीत सेव नहीं होती जिससे आपकी निजी बातें सुरक्षित रहती हैं. समय-समय पर अपनी चैट हिस्ट्री को डिलीट करना भी जरूरी है. चाहें तो हर महीने पूरा इतिहास साफ कर सकते हैं ताकि कोई पुराना डेटा स्टोर न रहे.
Google Gemini में प्राइवेसी कंट्रोल कैसे करें?
Google Gemini का कनेक्शन Gmail, Drive और अन्य Google सर्विसेज से होता है इसलिए यह ज्यादा डेटा एक्सेस कर सकता है. इससे बचने के लिए आपको Gemini Apps Activity सेटिंग में जाकर डेटा कलेक्शन को बंद करना चाहिए. आप ऑटो-डिलीट का विकल्प भी चुन सकते हैं जिससे आपकी जानकारी एक तय समय (जैसे 3 महीने) के बाद खुद ही हट जाएगी. पुरानी एक्टिविटी को मैन्युअली डिलीट करना भी जरूरी है. साथ ही, जिन ऐप्स की जरूरत नहीं है जैसे Drive, Docs या Gmail, उनका कनेक्शन हटाना बेहतर रहता है.
Microsoft Copilot पर डेटा सेफ रखने के तरीके
Microsoft Copilot में प्राइवेसी सेटिंग्स इस बात पर निर्भर करती हैं कि आप इसे पर्सनल या वर्क अकाउंट से इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां आपको प्रोफाइल में जाकर प्राइवेसी सेटिंग्स खोलनी होंगी और Training on text और Training on voice जैसे ऑप्शन बंद करने होंगे. इसके अलावा, पर्सनलाइजेशन फीचर को ऑफ कर दें ताकि Copilot आपकी जानकारी को याद न रखे. अगर आपने पहले कोई संवेदनशील जानकारी शेयर की है तो उसे चैट हिस्ट्री से तुरंत डिलीट करना बेहतर रहेगा.
क्यों जरूरी है ये सावधानी?
AI टूल्स आपकी जिंदगी को आसान जरूर बनाते हैं लेकिन अगर आप बिना सोचे-समझे इनका इस्तेमाल करते हैं तो आपकी निजी जानकारी रिस्क में पड़ सकती है. थोड़ी सी सेटिंग्स बदलकर आप अपनी प्राइवेसी को काफी हद तक सुरक्षित कर सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:27 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>चैटबॉट्स, से, अपनी, प्राइवेसी, कैसे, रखें, सुरक्षित, ये, सेटिंग्स, ऑन, नहीं, कीं, तो, खतरे, में, है, आपकी, पर्सनल, डिटेल्स</media:keywords>
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        <title>अब बिना इंटरनेट के भी चलेगा AI! कमाल का है Google का ये नया ऐप, जानिए सेटअप करने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ अब बिना इंटरनेट के भी चलेगा AI! कमाल का है Google का ये नया ऐप, जानिए सेटअप करने का तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:26 +0530</pubDate>
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        <title>ड्राइविंग के दौरान WhatsApp मैसेज का टेंशन खत्म! गाड़ी चलाते हुए भी कर सकेंगे चैट, आया नया फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp in CarPlay: अब कार चलाते समय WhatsApp इस्तेमाल करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो गया है. Apple CarPlay के साथ WhatsApp का नया इंटीग्रेशन यूजर्स को सीधे कार की स्क्रीन से चैट, कॉल और कॉन्टैक्ट्स एक्सेस करने की सुविधा देता है. पहले जहां यह काम सिर्फ वॉयस असिस्टेंट तक सीमित था अब एक अलग और बेहतर इंटरफेस के साथ पूरा अनुभव बदल गया है.
क्या है WhatsApp for CarPlay का नया वर्जन?
WhatsApp का यह नया वर्जन खासतौर पर कार में इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है. पहले यूजर्स केवल Siri जैसे वॉयस असिस्टेंट के जरिए मैसेज सुन या भेज सकते थे लेकिन कंट्रोल काफी सीमित था. अब यह ऐप सीधे कार की इंफोटेनमेंट स्क्रीन पर दिखाई देता है जहां से आप आसानी से चैट, कॉल और कॉन्टैक्ट्स तक पहुंच सकते हैं. यह बदलाव सिर्फ वॉयस बेस्ड इस्तेमाल से आगे बढ़कर एक विजुअल और आसान इंटरफेस देता है.
CarPlay में WhatsApp कैसे करता है काम?
जैसे ही आपका iPhone CarPlay से कनेक्ट होता है WhatsApp अपने आप कार की स्क्रीन पर दिखने लगता है. इसके बाद यूजर कई काम आसानी से कर सकते हैं. आप हाल की चैट्स और फेवरेट कॉन्टैक्ट्स देख सकते हैं WhatsApp कॉल कर सकते हैं या रिसीव कर सकते हैं और वॉयस के जरिए मैसेज भेज सकते हैं. इसके अलावा कॉल हिस्ट्री और कॉन्टैक्ट डिटेल्स भी एक्सेस किए जा सकते हैं. हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार चलते समय पूरी चैट खोलने की अनुमति नहीं दी गई है ताकि ड्राइवर का ध्यान सड़क से न भटके.
नए अपडेट के खास फीचर्स
इस अपडेट का सबसे बड़ा बदलाव इसका नया और साफ-सुथरा इंटरफेस है. इसमें फेवरेट कॉन्टैक्ट्स का अलग सेक्शन दिया गया है जिससे जरूरी लोगों तक तुरंत पहुंचा जा सकता है. कॉल हिस्ट्री भी अब आसानी से देखी जा सकती है जिसमें इनकमिंग और आउटगोइंग दोनों कॉल्स की जानकारी मिलती है. कॉन्टैक्ट प्रोफाइल और क्विक कॉल ऑप्शन भी जोड़े गए हैं जिससे बिना ज्यादा मेहनत के कॉल करना संभव हो गया है. साथ ही, पूरे इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ड्राइविंग के दौरान ध्यान कम से कम भटके.
ड्राइवर और पैसेंजर्स के लिए फायदे
ड्राइवर के लिए यह फीचर काफी फायदेमंद है क्योंकि अब उन्हें फोन हाथ में लेने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे ड्राइविंग के दौरान ध्यान सड़क पर बना रहता है और एक्सीडेंट का खतरा कम होता है. वहीं, पैसेंजर्स के लिए भी यह फीचर उपयोगी है. सफर के दौरान वे आसानी से कॉल कर सकते हैं या छोटे-छोटे जवाब भेज सकते हैं. फेवरेट कॉन्टैक्ट्स की सुविधा से जरूरी लोगों तक तुरंत पहुंचना भी आसान हो जाता है.
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:24 +0530</pubDate>
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        <title>55,000 रुपये से भी कम में खरीदें iPhone 17! यहां मिल रही है सबसे जबरदस्त डील, जानिए कैसे उठाएं ऑफर का लाभ</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Discount Offer: अगर आप नया iPhone खरीदने की सोच रहे हैं तो यह मौका आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. Vijay Sales की Apple Days 2026 सेल में Apple डिवाइसेज पर भारी छूट दी जा रही है. यह सेल 11 अप्रैल से 16 अप्रैल तक चल रही है, जिसमें कीमत में कटौती एक्सचेंज ऑफर, बैंक डिस्काउंट और बोनस जैसे कई फायदे मिल रहे हैं. इस दौरान लेटेस्ट iPhone 17 पर भी बड़ा डिस्काउंट देखने को मिल रहा है जिससे इसकी कीमत काफी कम हो जाती है.
iPhone 17 पर कितना मिल रहा है डिस्काउंट?
iPhone 17 को भारत में 256GB वेरिएंट के साथ 82,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. लेकिन इस सेल में Vijay Sales इसे 78,790 रुपये में ऑफर कर रहा है. इसके अलावा, Axis, ICICI और SBI बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर करीब 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त डिस्काउंट मिल सकता है. इस तरह इसकी कीमत घटकर लगभग 75,790 रुपये रह जाती है.
अगर आप अपना पुराना फोन एक्सचेंज करते हैं तो आपको और भी ज्यादा फायदा मिल सकता है. कंपनी एक्सचेंज वैल्यू के ऊपर 10,000 रुपये तक का बोनस भी दे रही है. ऐसे में कुल मिलाकर करीब 21,000 रुपये तक की बचत संभव है जिससे iPhone 17 की कीमत लगभग 55,000 रुपये तक आ सकती है. हालांकि, एक्सचेंज वैल्यू आपके पुराने फोन की कंडीशन पर निर्भर करेगी.
एक्स्ट्रा फायदे भी मिल रहे हैं
इस डील को और आकर्षक बनाने के लिए Vijay Sales की तरफ से करीब 591 रुपये तक के लॉयल्टी पॉइंट्स भी दिए जा रहे हैं. यानी खरीदारी के बाद भी आपको अतिरिक्त बेनिफिट मिल सकता है.
क्यों खास है iPhone 17?
iPhone 17 इस बार कई बड़े अपग्रेड्स के साथ आया है जो इसे लगभग Pro जैसा अनुभव देते हैं. इसमें 6.3 इंच का डिस्प्ले मिलता है जो 1Hz से 120Hz तक रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. साथ ही, इसकी ब्राइटनेस 3000 निट्स तक जाती है जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है. फोन में नया A19 चिप दिया गया है जो परफॉर्मेंस को काफी बेहतर बनाता है. गेमिंग के दौरान भी स्मूद एक्सपीरियंस मिलता है और फ्रेम ड्रॉप बहुत कम देखने को मिलता है.
कैमरा और बैटरी में भी सुधार
फोटोग्राफी के लिए इसमें 48MP का ड्यूल कैमरा सेटअप दिया गया है जो डिटेल और शार्पनेस के मामले में शानदार रिजल्ट देता है. वहीं फ्रंट में 18MP का कैमरा मिलता है. बैटरी भी पहले से बेहतर हुई है जो सामान्य इस्तेमाल में लगभग 11 घंटे तक चल सकती है. इसमें चैटिंग, सोशल मीडिया, फोटो क्लिक करना और वीडियो देखना आराम से हो जाता है.
डिजाइन और मजबूती में भी अपग्रेड
iPhone 17 में Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन दिया गया है जो इसे स्क्रैच से ज्यादा सुरक्षित बनाता है. फोन के बेजल्स पहले से पतले हैं और इसमें Always-On Display का सपोर्ट भी मिलता है. iPhone 17 अब पहले से ज्यादा प्रीमियम और पावरफुल बन गया है और इस सेल में मिल रही कीमत इसे और भी ज्यादा वैल्यू फॉर मनी डील बना देती है.
Samsung Galaxy S25 5G पर 5 हजार की बचत
ई-कॉमर्स साइट Flipkart पर Samsung Galaxy S25 5G पर शानदार डिस्काउंट मिल रहा है. दरअसल, इस फोन के 12+128GB वेरिएंट की असल कीमत 74,999 रुपये है लेकिन यहां पर ये फोन 69,999 रुपये में लिस्टेड है. इसका मतलब है कि फोन पर सीधे 5 हजार रुपये की बचत हो रही है. इसके अलावा Flipkart SBI के क्रेडिट कार्ड पर आपको 3499 रुपये की एक्सट्रा छूट मिल जाएगी. साथ ही इस फोन को आप महज 3426 रुपये का मासिक किस्त पर भी खरीद सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:36 +0530</pubDate>
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        <title>ChatGPT का डरावना खेल! सिलिकॉन वैली के शख्स ने OpenAI पर किया केस, चैटबॉट ने एक्स&amp;गर्लफ्रेंड को बनाया था निशाना</title>
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        <description><![CDATA[ OpenAI ChatGPT: कैलिफोर्निया की एक अदालत में दायर नए मुकदमे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर गहरी चिंता खड़ी कर दी है. एक महिला, जिसकी पहचान छुपाने के लिए उसे जेन डो कहा गया है, ने आरोप लगाया है कि ChatGPT ने उसके एक्स बॉयफ्रेंड के गलत व्यवहार को बढ़ावा दिया और उसकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया.
AI चैट से बढ़ा भ्रम
Tech Crunch की रिपोर्ट के अनुसार, सिलिकॉन वैली का 53 वर्षीय एक उद्यमी कई महीनों तक ChatGPT से बातचीत करता रहा. इस दौरान उसे यह यकीन हो गया कि उसने स्लीप एपनिया की दवा खोज ली है और कुछ ताकतवर लोग उसके पीछे पड़े हैं. आरोप है कि इसी मानसिक स्थिति में उसने अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड को परेशान करना शुरू कर दिया और ChatGPT से मिली जानकारी का इस्तेमाल कर उसे स्टॉक और हैरेस करने लगा.
OpenAI ने चेतावनियों को किया अनदेखा
पीड़िता का कहना है कि उसने OpenAI को तीन बार चेतावनी दी थी कि यह व्यक्ति दूसरों के लिए खतरा बन सकता है. यहां तक कि कंपनी के सिस्टम ने भी उसकी एक्टिविटी को मास-कैजुअल्टी वेपन्स से जुड़ा मानकर फ्लैग किया था. इसके बावजूद कंपनी ने उसका अकाउंट पूरी तरह से बंद नहीं किया. महिला अब अदालत से मांग कर रही है कि उस व्यक्ति का अकाउंट स्थायी रूप से ब्लॉक किया जाए नए अकाउंट बनाने से रोका जाए और उसकी चैट हिस्ट्री सुरक्षित रखी जाए.
AI ने महिला को बताया गलत
मुकदमे में कहा गया है कि जब दोनों का रिश्ता टूटा तो आरोपी ने ChatGPT से सलाह लेना शुरू किया. AI ने उसकी बातों का विरोध करने के बजाय उसे ही सही ठहराया और महिला को गलत और अस्थिर बताया. इसी आधार पर उसने कथित तौर पर नकली मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार कीं और उन्हें महिला के परिवार, दोस्तों और ऑफिस में भेजा जिससे उसकी छवि खराब हुई.
खतरनाक कंटेंट के बावजूद अकाउंट फिर चालू
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में OpenAI के सिस्टम ने उसके अकाउंट को खतरनाक एक्टिविटी के चलते बंद कर दिया था. लेकिन अगले ही दिन ह्यूमन टीम ने समीक्षा के बाद उसे फिर से चालू कर दिया. बाद में सामने आए स्क्रीनशॉट्स में violence list expansion और fetal suffocation calculation जैसे गंभीर टॉपिक्स दिखे जो उसकी मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े करते हैं.
शिकायत के बाद भी नहीं मिला जवाब
पीड़िता ने नवंबर में OpenAI को औपचारिक शिकायत भेजी और बताया कि पिछले कई महीनों से वह डर के माहौल में जी रही है. उसने यह भी कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल उसके खिलाफ हथियार की तरह किया जा रहा है. कंपनी ने शिकायत को गंभीर बताया लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई या जवाब नहीं दिया गया.
मामला और गंभीर हुआ, आरोपी गिरफ्तार
आगे चलकर आरोपी ने महिला को धमकी भरे वॉइसमेल भेजे. जनवरी में उसे बम की धमकी देने और घातक हथियार से हमला करने जैसे गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि बाद में उसे मानसिक रूप से ट्रायल के लायक नहीं माना गया और उसे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोसेस में खामी के कारण वह जल्द ही बाहर आ सकता है.
कानूनी बहस तेज
इस केस ने AI कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ कंपनियां खुद को कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ ऐसे मामले यह दिखा रहे हैं कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है और क्या इससे AI इंडस्ट्री के लिए नए नियम बनेंगे.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:35 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Induction Vs Electric Plasma Stove: क्या सच में नई टेक्नोलॉजी है बेहतर? जानिए कौन बचाता है ज्यादा बिजली</title>
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        <description><![CDATA[ Induction Vs Electric Plasma Stove: हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने एक नई किचन टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हे के बारे में जानकारी साझा की जिसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई कि क्या यह पुराने इंडक्शन चूल्हों से बेहतर विकल्प बन सकता है. इस चूल्हे की खास बात यह है कि यह बिना LPG या PNG के सिर्फ बिजली की मदद से आग जैसी लौ पैदा करता है. पहली नजर में यह तकनीक काफी आकर्षक और भविष्य में काम आने वाली जैसी लगती है लेकिन असल सवाल इसकी उपयोगिता और खर्च को लेकर उठता है.
टेक्नोलॉजी का फर्क समझना जरूरी
दोनों ही चूल्हे बिजली से चलते हैं लेकिन उनका काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है. प्लाज्मा चूल्हा हवा को आयोनाइज करके लौ पैदा करता है जिससे देखने में असली आग जैसा अनुभव मिलता है. हालांकि, इसमें काफी बिजली रोशनी और आवाज के रूप में खर्च हो जाती है जिससे इसकी कुल क्षमता कम हो जाती है.
दूसरी तरफ, इंडक्शन चूल्हा सीधे बर्तन को मैग्नेटिक फील्ड के जरिए गर्म करता है. इसमें बिजली की बर्बादी बहुत कम होती है और खाना जल्दी तैयार हो जाता है. यही वजह है कि इंडक्शन ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद माना जाता है.
बिजली खपत में कौन है आगे?
बिजली के मामले में भी दोनों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है. प्लाज्मा चूल्हा ज्यादा बिजली खर्च करता है क्योंकि उसकी बिजली का बड़ा हिस्सा सीधे खाना पकाने में इस्तेमाल नहीं हो पाता. वहीं इंडक्शन चूल्हा कम बिजली में बेहतर काम करता है. अगर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो प्लाज्मा चूल्हा आपके बिजली बिल को काफी बढ़ा सकता है जबकि इंडक्शन अपेक्षाकृत किफायती रहता है.
कीमत में बड़ा अंतर
अगर दोनों चूल्हों की कीमत की तुलना करें तो अंतर साफ दिखाई देता है. जहां एक अच्छा इंडक्शन चूल्हा कुछ हजार रुपये में आसानी से मिल जाता है, वहीं प्लाज्मा चूल्हा नई टेक्नोलॉजी होने के कारण से कई गुना महंगा है. इसकी कीमत हजारों से बढ़कर कई बार दसियों हजार तक पहुंच जाती है. इतना ही नहीं, इसकी देखभाल और मेंटेनेंस का खर्च भी ज्यादा हो सकता है जो इसे आम लोगों के लिए कम सुविधाजनक बनाता है.
भारतीय किचन के लिए कौन है सही?
भारतीय रसोई में अक्सर तेज आंच पर खाना बनता है जैसे रोटी, पराठे या तड़का. ऐसे में इंडक्शन चूल्हा ज्यादा स्थिर और बेहतर साबित होता है. हालांकि प्लाज्मा चूल्हे में बर्तनों की ज्यादा पाबंदी नहीं होती लेकिन इसकी आंच उतनी स्थिर नहीं मानी जाती जिससे भारत में बनने वाले खाना बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:34 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BSNL ने मारी बाज़ी! इस मामले में Jio&amp;Airtel को पछाड़ बना नंबर&amp;1, रिपोर्ट में हो गया खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ BSNL: वित्त वर्ष 2026 में सरकारी टेलीकॉम कंपनी Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) ने बड़ा उलटफेर करते हुए निजी कंपनियों Reliance Jio और Bharti Airtel को पीछे छोड़ दिया है. फ्रांस की नेटवर्क टेस्टिंग कंपनी nPerf की रिपोर्ट के अनुसार, BSNL ने फिक्स्ड-लाइन इंटरनेट सेगमेंट में पहला स्थान हासिल किया.
लगातार सुधार से मिली बड़ी सफलता
रिपोर्ट के मुताबिक BSNL ने 89,174 nPoints के साथ टॉप पोजिशन हासिल की है. खास बात यह है कि कंपनी पिछले साल दूसरे स्थान पर थी लेकिन लगातार पांच साल के सुधार के चलते इस बार नंबर-1 बन गई. वहीं Airtel को 74,975 nPoints और Jio को 73,957 nPoints मिले जिससे वे क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे.
nPoints क्या होते हैं?
nPoints एक ऐसा स्कोर होता है जो इंटरनेट की असली परफॉर्मेंस को दर्शाता है. इसमें डाउनलोड स्पीड, अपलोड स्पीड, लेटेंसी (response time), ब्राउजिंग और स्ट्रीमिंग जैसे कई फैक्टर्स को मिलाकर एक कुल स्कोर तैयार किया जाता है.
BSNL की परफॉर्मेंस ने किया कमाल
BSNL ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया. इसकी डाउनलोड स्पीड साल-दर-साल 21% बढ़कर 78.5 Mbps तक पहुंच गई. अपलोड स्पीड के मामले में भी BSNL ने अपने टक्कर वाली कंपनियों को पीछे छोड़ा और 75.26 Mbps का आंकड़ा हासिल किया. इसके अलावा, लेटेंसी, वेब ब्राउज़िंग और YouTube स्ट्रीमिंग अनुभव में भी कंपनी सबसे बेहतर रही.
Airtel और Jio की स्थिति कैसी रही?
Airtel ने भी अपनी स्थिति में सुधार किया और पिछले साल के मुकाबले एक पायदान ऊपर चढ़ा. इसकी डाउनलोड स्पीड 10% बढ़कर 62.4 Mbps हो गई लेकिन अपलोड स्पीड 38.71 Mbps रही जो BSNL से कम है.
दूसरी ओर, Jio ने डाउनलोड स्पीड के मामले में सबसे ज्यादा 79.6 Mbps हासिल किया जो 33% की बढ़त दर्शाता है. हालांकि, इसकी अपलोड स्पीड 33.46 Mbps रही और लेटेंसी भी सबसे ज्यादा पाई गई जिससे इसकी कुल परफॉर्मेंस थोड़ी प्रभावित हुई है.
FTTH स्पीड में किसका दबदबा?
फाइबर-टू-द-होम (FTTH) स्पीड की बात करें तो Airtel सबसे आगे रहा जिसकी डाउनलोड स्पीड 241.72 Mbps रही. इसके बाद Jio (225.18 Mbps) और BSNL (198.54 Mbps) का स्थान रहा.
मार्केट शेयर में कौन आगे?
हालांकि परफॉर्मेंस में BSNL आगे रहा लेकिन ग्राहकों की संख्या के मामले में अभी भी Jio और Airtel का दबदबा है. Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, Jio के पास 31.36% और Airtel के पास 21.34% मार्केट शेयर है. वहीं BSNL का हिस्सा 15.45% है.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:33 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारतीय यूजर्स के लिए बड़ा खतरा! बिना OTP और अलर्ट के खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट, जानिए कैसे हो रही साइबर ठगी</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय यूजर्स के लिए बड़ा खतरा! बिना OTP और अलर्ट के खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट, जानिए कैसे हो रही साइबर ठगी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:32 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram हुआ सख्त! अब Teens पर रहेगी कड़ी नजर, Parents कर सकेंगे पूरी तरह कंट्रोल</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram New Rule: Instagram अब Teen यूजर्स की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर हो गया है. Meta के इस प्लेटफॉर्म ने एक बड़ा अपडेट जारी किया है जिसका मकसद कम उम्र के यूजर्स को सुरक्षित और उम्र के हिसाब से कंटेंट दिखाना है.
13+ नियमों जैसा कंटेंट दिखेगा
इस नए बदलाव के तहत अब Teens को वही कंटेंट दिखाया जाएगा जो आमतौर पर 13+ उम्र की फिल्मों के स्तर का होता है. यानी प्लेटफॉर्म खुद ही ऐसे पोस्ट, वीडियो और अकाउंट्स को लिमिट करेगा जो उनकी उम्र के लिए ठीक नहीं हैं. यह सेटिंग डिफॉल्ट रूप से लागू होगी और बच्चे इसे अपने आप बंद नहीं कर पाएंगे इसके लिए माता-पिता की अनुमति की जरूरत होगी.
पेरेंट्स को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल
Mark Zuckerberg की कंपनी अब पेरेंट्स को भी ज्यादा ताकत दे रही है. इसके तहत Limited Content नाम का नया फीचर लाया गया है जिससे माता-पिता यह तय कर सकते हैं कि उनके बच्चे को कितना और कैसा कंटेंट दिखे. इस मोड में कंटेंट और इंटरैक्शन दोनों पर ज्यादा सख्ती लागू होगी.
खतरनाक और संवेदनशील कंटेंट पर रोक
Instagram अब ऐसे कंटेंट को कम दिखाएगा या पूरी तरह ब्लॉक करेगा जिसमें गाली-गलौज, खतरनाक स्टंट या गलत व्यवहार को बढ़ावा देने वाली चीजें हों. इसके अलावा शराब, ड्रग्स या डरावने विजुअल्स से जुड़े पोस्ट भी Teens के लिए पहले से ज्यादा सीमित कर दिए जाएंगे.
सर्च और अकाउंट एक्सेस पर भी कंट्रोल
अब Teens कुछ संवेदनशील शब्दों को सर्च भी नहीं कर पाएंगे यहां तक कि गलत स्पेलिंग डालने पर भी ऐसे रिजल्ट नहीं दिखेंगे. इसके साथ ही, जो अकाउंट्स बार-बार अनुचित कंटेंट शेयर करते हैं उन्हें Teens फॉलो नहीं कर पाएंगे. अगर पहले से फॉलो किया हुआ है तो भी उनका कंटेंट, कमेंट या मैसेज दिखाई नहीं देगा.
AI से होगी बेहतर निगरानी
Instagram अब एडवांस AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है जिससे गलत और अनुचित कंटेंट को जल्दी पहचानकर फिल्टर किया जा सके. यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि AI से मिलने वाले जवाब Teens के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हों.
सुरक्षित माहौल बनाने की कोशिश
कंपनी का कहना है कि भले ही कोई सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता लेकिन वह लगातार सुधार करने की कोशिश कर रही है. इस अपडेट का उद्देश्य Teens को एक सुरक्षित ऑनलाइन माहौल देना और पेरेंट्स को ज्यादा भरोसा और कंट्रोल देना है.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chats में ही दिखेंगे Status! WhatsApp का नया डिजाइन यूजर्स का पूरा एक्सपीरियंस बदलने वाला है</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Upcoming Feature: WhatsApp अपने यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एक नए डिजाइन पर काम कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब ऐप में Status देखने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है. यह नया बदलाव Status अपडेट को सीधे Chats टैब में दिखाने पर फोकस है जिससे यूजर्स को बार-बार टैब बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
Chats टैब में ही दिखेंगे Status अपडेट
इस नए फीचर के तहत Chats स्क्रीन के ऊपर एक अलग सेक्शन जोड़ा जा सकता है जहां आपके कॉन्टैक्ट्स के लेटेस्ट Status अपडेट दिखाई देंगे. यूजर्स चैट लिस्ट को नीचे खींचकर (pull down) इन अपडेट्स को आसानी से देख सकेंगे. इसका मकसद यह है कि यूजर्स को अपडेट देखने के लिए अलग टैब में जाने की जरूरत न पड़े और सब कुछ एक ही जगह मिल जाए.
iOS और Android दोनों पर हो रही टेस्टिंग

???? WhatsApp beta for iOS 26.14.10.70: what&#039;s new?WhatsApp is working on a feature that brings status updates to the top of the Chats tab, and it will be available in a future update!https://t.co/pnjNfwlkYf pic.twitter.com/VoQHEpYKYm
&amp;mdash; WABetaInfo (@WABetaInfo) April 9, 2026



यह नया डिजाइन फिलहाल टेस्टिंग फेज में है. iOS पर इसे TestFlight के जरिए कुछ बिल्ड्स में देखा गया है वहीं Android के लिए भी इसका डेवलपमेंट जारी है. हालांकि अभी तक यह फीचर आम यूजर्स या बीटा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुआ है.
Navigation बार में भी मिल सकता है नया सेक्शन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp ने Navigation बार में भी Status से जुड़ा एक नया सेक्शन जोड़ने की योजना बनाई है. यहां आपको उन लोगों के अपडेट पहले दिख सकते हैं जिनसे आप ज्यादा बातचीत करते हैं. वहीं, म्यूट किए गए Status को अलग से देखने का विकल्प भी दिया जा सकता है.
Status पोस्ट करना भी होगा आसान
इस अपडेट के बाद यूजर्स सीधे Chats टैब से ही अपना Status पोस्ट कर पाएंगे. यानी अब चैटिंग और Status अपडेट दोनों काम एक ही स्क्रीन से आसानी से किए जा सकेंगे जिससे ऐप का इस्तेमाल और भी सरल हो जाएगा. फिलहाल यह फीचर पूरी तरह तैयार नहीं है और कंपनी ने इसकी लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है.
लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह बदलाव WhatsApp के यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट साबित हो सकता है. इससे व्हाट्सऐप यूजर्स का चैट करने का अनुभव भी काफी बदल जाएगा. व्हाट्सऐप समय-समय पर अपने प्लेटफॉर्म पर कुछ न कुछ नए बदलाव करता रहता है. ऐसे में यह नया फीचर यूजर को कितना पसंद आने वाला है यह तो फीचर रोल आउट होने के बाद ही पता चलेगा.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>AI का कमाल! अब उंगलियां बन जाएंगी टचस्क्रीन, इस टेक्नोलॉजी को देखकर आपके भी उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ AI Touch Panel: सोचिए, अगर आपको टाइप करने के लिए कीबोर्ड की जरूरत ही न पड़े और आप किसी भी टेबल, दीवार या डेस्क पर उंगलियां चलाकर काम कर सकें. यह सुनने में भले ही किसी साइंस फिक्शन जैसा लगे लेकिन अब यह हकीकत बनने की ओर बढ़ रहा है. जापान की Tohoku University के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो साधारण सतहों को टच पैनल में बदल सकती है.
AR और MR में नई क्रांति
आजकल Augmented Reality और Mixed Reality तेजी से आगे बढ़ रही हैं. ये तकनीकें असली दुनिया के साथ डिजिटल चीजों को जोड़ती हैं जैसे हवा में दिखने वाला वर्चुअल कीबोर्ड. लेकिन लंबे समय तक हवा में हाथ रखकर काम करना थकान भरा होता है और इसमें टच का एहसास भी नहीं मिलता जिससे टाइपिंग में दिक्कत आती है.
सतह ही बन जाएगी कीबोर्ड
इन समस्याओं को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक आसान और स्मार्ट तरीका निकाला है. अब आपको हवा में टाइप करने की जरूरत नहीं होगी बल्कि आप अपने आसपास की किसी भी सतह जैसे टेबल या दीवार पर हल्के से टैप करके काम कर सकेंगे. यानी आपकी रोजमर्रा की चीजें ही इनपुट डिवाइस बन जाएंगी.
शरीर के नैचुरल प्रोसेस का कमाल
इस तकनीक का सबसे दिलचस्प हिस्सा है ब्लैंचिंग फिनोमेनन नाम का प्रोसेस. जब आप अपनी उंगली को किसी सख्त सतह पर दबाते हैं तो उस जगह की त्वचा कुछ पल के लिए सफेद पड़ जाती है क्योंकि वहां खून का प्रवाह कम हो जाता है. इसी छोटे से बदलाव को सिस्टम पहचान लेता है.
हेडसेट में लगे कैमरे उंगलियों की तस्वीर लेते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन तस्वीरों को समझकर यह तय करता है कि आपने कब और कहां टच किया. इस तरह कोई भी सतह टच-सेंसिटिव बन जाती है.
बिना एक्ट्रा हार्डवेयर के आसान तकनीक
इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी अतिरिक्त सेंसर या खास डिवाइस की जरूरत नहीं पड़ती. यह सामान्य कैमरों के साथ भी काम कर सकता है जो पहले से ही कई AR और MR हेडसेट्स में मौजूद होते हैं. यही वजह है कि इसे इस्तेमाल में लाना आसान हो सकता है.
ज्यादा आरामदायक और सटीक अनुभव
टेस्टिंग के दौरान लोगों ने टेबल और दीवार जैसी सतहों पर आसानी से काम किया और उन्हें अच्छा अनुभव मिला. खास बात यह रही कि यूजर्स अपनी उंगलियां सतह पर टिकाकर काम कर सकते हैं जिससे थकान कम होती है और टाइपिंग ज्यादा सटीक हो जाती है.
भविष्य में बदल सकता है इस्तेमाल का तरीका
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तकनीक का उद्देश्य AR और MR को ज्यादा सहज और उपयोगी बनाना है. 2026 में इस शोध को IEEE Virtual Reality and 3D User Interfaces सम्मेलन में पेश किया गया जहां इसे काफी सराहा गया. आने वाले समय में अगर यह तकनीक आम हो जाती है तो हम बिना किसी कीबोर्ड के कहीं भी काम कर पाएंगे और डिजिटल दुनिया के साथ हमारा जुड़ाव पहले से कहीं ज्यादा आसान और नैचुरल हो जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पुराना हो गया OTP वाला तरीका! अब WhatsApp पर यूज करें ये वाला फीचर, हैकर्स के भी छूट जाएंगे पसीने</title>
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        <description><![CDATA[ पुराना हो गया OTP वाला तरीका! अब WhatsApp पर यूज करें ये वाला फीचर, हैकर्स के भी छूट जाएंगे पसीने ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>130 मिलियन भारतीयों को बड़ा झटका! सैकड़ों फ्री टीवी चैनल हो सकते हैं बंद, जानिए क्या है पूरी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Free TV Channels: भारत में स्मार्ट टीवी ने लोगों के टीवी देखने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. अब सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन के दम पर लोग सैकड़ों चैनल आसानी से देख पा रहे हैं. लेकिन अब यह सुविधा लंबे समय तक जारी रहेगी या नहीं इस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
क्यों खत्म हो सकता है फ्री चैनलों का दौर?
हाल ही में सामने आई जानकारी के मुताबिक Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या स्मार्ट टीवी ऐप्स को भी DTH और केबल की तरह नियमों के दायरे में लाया जाए. इस मामले पर अंतिम फैसला 4 मई 2026 को आ सकता है. अगर ऐसा होता है तो अब तक मुफ्त में मिलने वाले कई टीवी चैनलों पर शुल्क लग सकता है.
कितने लोग होंगे प्रभावित?
बताया जा रहा है कि भारत में करीब 13 करोड़ से ज्यादा लोग स्मार्ट टीवी के जरिए बिना किसी केबल या DTH कनेक्शन के 150 से अधिक चैनल मुफ्त में देख रहे हैं. इन यूजर्स को बस इंटरनेट और कुछ ऐप्स की जरूरत होती है जिससे वे न्यूज, एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और अन्य कई तरह के चैनल आसानी से एक्सेस कर लेते हैं.
DTH और स्मार्ट टीवी में क्या है फर्क?
जहां एक तरफ DTH और केबल कंपनियां हर चैनल के लिए पैकेज बनाकर पैसे लेती हैं, वहीं स्मार्ट टीवी ऐप्स पर कई चैनल बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होते हैं. DTH कंपनियों को सरकार को भारी फीस देनी पड़ती है और उन्हें सख्त नियमों का पालन करना होता है जबकि स्मार्ट टीवी ऐप्स पर अभी तक ऐसे नियम लागू नहीं हैं. यही कारण है कि अब इस असमानता को खत्म करने की कोशिश की जा रही है.
क्या सभी यूजर्स पर पड़ेगा असर?
हालांकि यह बदलाव बड़ा लग रहा है लेकिन हर यूजर पर इसका असर जरूरी नहीं है. आज के समय में ज्यादातर लोग स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए करते हैं. कई यूजर्स तो सिर्फ OTT कंटेंट या गेमिंग के लिए टीवी का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें फ्री चैनलों की जानकारी भी नहीं होती.
आने वाले समय में स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल देखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसका असर हर किसी पर नहीं पड़ेगा. Telecom Regulatory Authority of India का फैसला यह तय करेगा कि भारत में टीवी देखने का अनुभव कितना बदलने वाला है.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ghost Murmur: US की इस टेक्नोलॉजी ने 40 मील दूर से खोज निकाला लापता पायलट, जानिए पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Ghost Murmur: हाल ही में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया कि CIA की एक बेहद गुप्त तकनीक की मदद से अमेरिका ने ईरान में लापता हुए अपने पायलट को ढूंढ निकाला. यह मिशन इतना कठिन था कि पायलट दो दिनों तक पहाड़ी इलाके में छिपकर अपनी जान बचाता रहा.
कैसे हुआ पायलट का लापता होना?
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना का F-15 fighter jet दक्षिणी ईरान में गिरा दिया गया था. पायलट जिसे Dude 44 Bravo के नाम से पहचाना गया दुर्घटना के बाद पहाड़ों की दरारों में छिप गया. उधर, ईरानी बल उसे पकड़ने के लिए लगातार तलाश कर रहे थे और उसके सिर पर इनाम भी रखा गया था. ऐसे हालात में पायलट को ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया था.
क्या है Ghost Murmur टेक्नोलॉजी?
इस मिशन में असली गेमचेंजर बनी Ghost Murmur नाम की तकनीक. यह सिस्टम इंसान के दिल की धड़कन से निकलने वाले बेहद हल्के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को दूर से पकड़ सकता है. यह तकनीक quantum magnetometry और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करती है जिससे यह आसपास के शोर-शराबे से अलग करके किसी एक इंसान की धड़कन को पहचान सकती है.
40 मील दूर से कैसे मिली लोकेशन?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह तकनीक करीब 40 मील दूर से पायलट की लोकेशन का अंदाजा लगाने में सफल रही. इसे ऐसे समझिए जैसे किसी बड़े स्टेडियम में एक व्यक्ति की आवाज पहचानना बस यहां पूरा रेगिस्तान स्टेडियम था. हालांकि, यह सिस्टम हर जगह उतना असरदार नहीं होता. यह खासकर उन इलाकों में बेहतर काम करता है जहां इलेक्ट्रोमैग्नेटिक का हस्तक्षेप कम हो और आसपास ज्यादा एक्टिविटी न हो.
किसने तैयार की ये सीक्रेट तकनीक?
Ghost Murmur को Lockheed Martin के सीक्रेट रिसर्च डिविजन Skunk Works ने विकसित किया है. यह पहली बार था जब इस तकनीक का असली ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया. पहले इसे Black Hawk हेलीकॉप्टर पर टेस्ट किया गया था और भविष्य में इसे और एडवांस फाइटर जेट्स में भी इस्तेमाल करने की योजना है.
रेस्क्यू ऑपरेशन कितना कठिन था?
इस पूरे ऑपरेशन में सैकड़ों अमेरिकी सैनिक शामिल थे. मिशन के दौरान कुछ विमान जमीन पर फंस गए जिन्हें बाद में नष्ट करना पड़ा. बावजूद इसके, सभी अमेरिकी सुरक्षित वापस लौटने में सफल रहे. अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस ऑपरेशन का जिक्र करते हुए इसे भूसे के ढेर में सुई ढूंढने जैसा बताया.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tech Tips: फोन चार्जर पर लिखा R कोड क्या बताता है? 99% लोग करते हैं नजरअंदाज, सच जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>डॉक्टरों की नजर में न आने वाले खतरे भी पहचान लेगी एआई, इस बीमारी के मरीजों को मिलेगा लाभ</title>
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        <description><![CDATA[ AI In Healthcare: दुनियाभर में लाखों लोग हाइपरटेंशन के शिकार हैं. इसके चलते हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. हाइपरटेंशन से ग्रस्त करीब 10 प्रतिशत लोग मास्क्ड हाइपरटेंशन का शिकार हो जाते हैं. यानी चेकअप के दौरान ब्लड प्रेशर एकदम नॉर्मल लगता है, लेकिन असल में यह हाई रहता है. आमतौर पर डॉक्टर भी इसका पता नहीं लगा पाते, जिसके चलते मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता. अब एआई सिस्टम से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है. इस बीमारी के मामले में एआई उन खतरों का पता लगा लेगी, जो डॉक्टरों की नजरों से बच जाते हैं.
क्या है मास्क्ड हाइपरटेंशन का पता लगाने का तरीका?
आमतौर पर इस कंडीशन का पता लगाने के लिए एक वीयरेबल डिवाइस का सहारा लिया जाता है, जो पूरे दिन ब्लड प्रेशर मॉनिटर करते रहता है. यह सटीक तरीका है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता. पूरे दिन इस डिवाइस को पहने रखना मुश्किल भरा हो सकता है और यह महंगा भी है. इसके चलते ज्यादातर मरीजों में इस बीमारी का पता नहीं चल पाता.
एआई कर सकती है समाधान
University of Arkansas की एक स्टडी ने इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगाई है. यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने एक एआई सिस्टम बनाया है, जो स्टैंडर्ड हेल्थ डेटा की मदद से मास्क्ड हाइपरटेंशन का पता लगा सकता है. इस सिस्टम को साउथ अफ्रीका में हुई एक बड़ी स्टडी African-PREDICT से मिली जानकारी से ट्रेनिंग दी गई है. इस जानकारी की मदद से यह एआई प्रोग्राम मास्क्ड हाइपरटेंशन से जुड़े पैटर्न को पहचान सकता है. जब इसकी टेस्टिंग की गई तो यह मास्क्ड हाइपरटेंशन के 83 प्रतिशत मामलों की सटीकता से पहचान कर ली. इसकी खास बात है कि इसे किसी तरह के स्पेशल इक्विपमेंट की जरूरत नहीं होती.&amp;nbsp;
भविष्य में ऐसा बदल सकता है पूरा गेम
इस सिस्टम की एक और खूबी यह है कि यह एक साथ ज्यादा जानकारी को भी प्रोसेस कर सकता है. इसकी तुलना में डॉक्टर लिमिटेड इंडिकेटर पर डिपेंड रहते हैं. यही वजह है कि यह सिस्टम उन छिपे हुए खतरों को भी पहचान सकता है, जो आमतौर पर डॉक्टर नहीं देख पाते. भविष्य में इस टूल को हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम में यूज किया जा सकता है, जिससे डॉक्टर मरीज के रूटीन चेकअप के दौरान भी इस बीमारी का पता लगा पाएंगे. इससे मरीजों की स्क्रीनिंग तेज होगी और उन्हें जल्द इलाज में भी मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>डॉक्टरों, की, नजर, में, न, आने, वाले, खतरे, भी, पहचान, लेगी, एआई, इस, बीमारी, के, मरीजों, को, मिलेगा, लाभ</media:keywords>
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        <title>पोस्ट के बाद भी बदल सकते हैं कमेंट! Instagram का नया फीचर यूजर्स को देगा पूरा कंट्रोल, जानिए तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram New Feature: फेमश सोशल मीडिया ऐप Instagram ने यूजर्स के लिए एक नया और बेहद काम का फीचर पेश किया है. अब आप कोई भी कमेंट पोस्ट करने के बाद उसे तुरंत ठीक कर सकते हैं. कंपनी ने बताया है कि यूजर्स को कमेंट एडिट करने के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा. इस बदलाव का मकसद यूजर एक्सपीरियंस को और आसान और बेहतर बनाना है.
बार-बार एडिट करने की भी मिलेगी छूट
इस नए अपडेट की खास बात यह है कि 15 मिनट के अंदर आप अपने कमेंट को कई बार एडिट कर सकते हैं. पहले अगर कोई गलती हो जाती थी तो पूरा कमेंट डिलीट करके फिर से लिखना पड़ता था जो काफी झंझट भरा था. लेकिन अब इस परेशानी से छुटकारा मिल गया है और यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल मिल गया है.
ऐसे करें Instagram पर कमेंट एडिट
अगर आप अपना कमेंट एडिट करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको उस कमेंट को थोड़ी देर तक दबाकर रखना होगा. इसके बाद जो ऑप्शन सामने आएंगे उनमें Edit पर टैप करें. एडिट करने के बाद कमेंट के नीचे ग्रे रंग में Edited लिखा दिखाई देगा जिससे पता चलेगा कि कमेंट में बदलाव किया गया है. ध्यान देने वाली बात यह है कि आप केवल टेक्स्ट को ही एडिट कर सकते हैं. अगर कमेंट में फोटो भी शामिल है तो उसमें बदलाव नहीं किया जा सकेगा.
WhatsApp में पहले से मौजूद है यह सुविधा
WhatsApp पर यह फीचर पहले से ही दिया जा चुका है जहां यूजर्स अपने भेजे गए मैसेज को 15 मिनट के अंदर एडिट कर सकते हैं. एडिट किए गए मैसेज के साथ edited का टैग भी दिखता है ताकि सामने वाले को बदलाव की जानकारी मिल सके.
युवाओं के लिए नए सेफ्टी फीचर्स भी लॉन्च
इसी के साथ Meta अपने प्लेटफॉर्म को और सुरक्षित बनाने पर भी काम कर रही है. हाल ही में भारत में Teen Accounts नाम का फीचर लॉन्च किया गया है जो खासतौर पर कम उम्र के यूजर्स के लिए तैयार किया गया है. इसमें कंटेंट को उम्र के हिसाब से फिल्टर किया जाएगा और संवेदनशील चीजों को सीमित किया जाएगा.
साथ ही, पैरेंट्स के लिए भी नए कंट्रोल ऑप्शन दिए गए हैं जिससे वे बच्चों के ऑनलाइन एक्सपीरियंस पर नजर रख सकें. इन सभी बदलावों का मकसद प्लेटफॉर्म को ज्यादा सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली बनाना है.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: बार&amp;बार ड्रॉप हो रहा है वाईफाई कनेक्शन? जानिए क्या हो सकते हैं कारण और कैसे करें समाधान</title>
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        <description><![CDATA[ WiFi Connection Tips: आप कोई मूवी देख रहे हैं या ऑफिस का जरूरी काम निपटा रहे हैं, अगर वाईफाई कनेक्शन स्टेबल नहीं है तो किसी भी काम में मजा नहीं आएगा. अगर आपका वाईफाई कनेक्शन बार-बार डिस्कनेक्ट हो रहा है तो पूरा मजा खराब हो जाता है और काम पूरा होने में टाइम भी ज्यादा लगता है. इस समस्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं. आज हम जानेंगे कि वाईफाई कनेक्शन बार-बार डिस्कनेक्ट क्यों होने लगता है और इसका क्या समाधान है.&amp;nbsp;
ज्यादा डिवाइस हो सकते हैं कनेक्टेड
अगर आपके वाईफाई नेटवर्क से ज्यादा डिवाइस कनेक्टेड हैं तो कनेक्शन में दिक्कत आ सकती है. दरअसल, आजकल एक ही व्यक्ति के पास स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप समेत कई गैजेट होते हैं, जो वाईफाई से कनेक्ट होते हैं. ऐसे में कनेक्टेड डिवाइसेस के नंबर ज्यादा होना आम बात है. आप जिन डिवाइस को यूज नहीं कर रहे हैं, उन्हें डिस्कनेक्ट कर नेटवर्क को फ्री कर सकते हैं.
राउटर की लोकेशन
वाईफाई राउटर की लोकेशन भी कनेक्शन के हिसाब से जरूरी है. अगर राउटर आपके डिवाइस से दूर है तो सिग्नल स्ट्रेंग्थ कम हो जाती है. इसी तरह अगर कनेक्शन के रास्ते में कोई दीवार या फिजिकल ऑब्जेक्ट है तो भी कनेक्शन ड्रॉप हो सकता है. इससे बचने के लिए हमेशा अपने डिवाइस को राउटर के करीब रखकर ही वाईफाई यूज करें. आप चाहें तो राउटर को किसी ऊंची जगह पर भी प्लेस कर सकते हैं.
रेडियो इंटरफेरेंस
कई बार आपके घर में रखे सामान के कारण भी वाईफाई कनेक्शन में दिक्कत आने लगती है. ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्ट टीवी और माइक्रोवेव ओवन जैसे सामान के रेडियो इंटरफेरेंस होता है. इसमें कनेक्शन ओवरलैप होने लगते हैं, जिससे सिग्नल कमजोर हो जाते हैं और आपको फास्ट इंटरनेट का मजा नहीं मिल पाता. अगर किसी जगह पर एक साथ कई राउटर यूज हो रहे हैं तो यह भी यह दिक्कत आ सकती है. वाईफाई का चैनल चेंज कर इस मुश्किल को दूर किया जा सकता है.
राउटर को हो सकती है ब्रेक की जरूरत
अगर आपका राउटर एकदम ठीक तरीके से काम करते-करते अचानक दिक्कत देना शुरू कर दे तो उसे ब्रेक की जरूरत है. दरअसल, राउटर लगातार काम करते रहता है, जिससे कई बार उसकी फंक्शनिंग में समस्या आ सकती है. ऐसी परेशानी को दूर करने के लिए राउटर को कुछ देर के लिए बंद कर दें और फिर रिस्टार्ट करें. इससे कनेक्शन की दिक्कत दूर हो जाएगी.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ये कपड़े होंगे कमाल के! सेहत पर नजर रखने के साथ&amp;साथ फोन भी करेंगे चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Clothes: पिछले कुछ समय से वीयरेबल टेक्नोलॉजी हमारे जीवन में जगह बनाती जा रही है. अब अधिकतर लोगों की कलाई पर स्मार्टवॉट नजर आ जाती है, जो हार्ट रेट से लेकर स्टेप काउंटिंग तक सारे काम कर लेती है. अब साइंटिस्ट इससे भी आगे की सोच रहे हैं. वो ऐसे Smart Clothes बनाने में जुटे हुए हैं, जो सेहत पर नजर रखने के साथ-साथ एनर्जी भी स्टोर कर सकेंगे. यह कोई भविष्य की बात नहीं होने वाली है. यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया के रिसर्चर इस तरह के कपड़े बनाने में जुटे हुए हैं.
इस मैटेरियल से बनेंगे Smart Clothes
इन कपड़ों में स्पेशल मैटेरियल MXenes का यूज किया जाएगा, जिसे स्मार्ट टेक्सटाइल कहा जा रहा है. इन्हें शरीर और मौसम में होने वाले बदलावों का सेंस करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. इस मैटेरियल की खास बात यह है कि इसे कपड़ों के साथ बुना जा सकता है, जिससे इसे डेली पहनना आसान हो जाएगा. यह एकदम हल्का, फ्लेक्सिबल और पतला मैटेरियल है और इसे लेयर में अरेंज किया जा सकता है. अपनी खास इलेक्ट्रिक और केमिकल प्रोपर्टीज के कारण इसे कपड़े पर प्रिंट भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
रियल टाइम में सेहत पर नजर रखेंगे Smart Clothes
रिसर्चर का कहना है कि MXenes के कारण स्मार्ट कपड़े रियल टाइम में सेहत पर नजर रख पाएंगे. ये शरीर के तापमान का पता लगाने के साथ-साथ हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर और मूवमेंट आदि पर नजर रख पाएंगे. इस डेटा को डॉक्टरों के पास भी ट्रांसमिट किया जा सकता है, जो दूर बैठे ही मरीज को मॉनिटर कर पाएंगे. अस्पतालों जैसी जगहों पर इस तरह के कपड़े का इस्तेमाल इलाज को और भी आसान बना सकता है. MXenes में एंटीमाइक्रोबियल प्रोपर्टीज होती है. यानी इस कपड़े में हानिकारक बैक्टीरिया ग्रो नहीं कर सकते. इस मैटेरियल से बने मेडिकल क्लॉथ संक्रमण का खतार कम कर सकते हैं, जिससे मरीजों के साथ-साथ हेल्थ केयर वर्कर की सुरक्षा भी बढ़ेगी.
एनर्जी स्टोर करने के भी काम आएंगे Smart Clothes
इन कपड़ों में एक और खास बात होगी. ये कपड़े एनर्जी जनरेट और स्टोर भी कर पाएंगे. ट्रेडिशनल बैटरी पर डिपेंड रहने की बजाय ये कपड़े सूरज की रोशनी से एनर्जी कैप्चर कर सकेंगे. इससे कपड़ों में लगे सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक्स तक पावर पहुंचेगी. रिसर्चर यह भी उम्मीद लगा रहे हैं कि ये कपड़े एक तरह के फ्लेक्सिबल पावर बैंक की तरह काम कर पाएंगे. ऐसे में आने वाले कुछ सालों में आप ऐसी जैकेट देख सकते हैं, जो स्मार्टवॉच की तरह आपकी सेहत पर भी नजर रखेगी और पावरबैंक की तरह आपके फोन को भी चार्ज कर पाएगी.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>कहीं आपका डेटा तो नहीं बिक रहा इंटरनेट पर? 1 मिनट में ऐसे लगाएं पता, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Online Data: आज के डिजिटल और AI दौर में डेटा किसी खजाने से कम नहीं है. आपकी निजी जानकारी अब एक ऐसी चीज बन चुकी है जिसे खोना भारी पड़ सकता है. आए दिन बढ़ते साइबर हमलों के बीच सोशल मीडिया से लेकर बैंकिंग ऐप्स तक कोई भी प्लेटफॉर्म पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आपका डेटा कहीं इंटरनेट पर लीक तो नहीं हो गया.
ऑनलाइन टूल्स से करें तुरंत जांच
अगर आपको शक है कि आपकी जानकारी लीक हो सकती है तो इसके लिए कुछ भरोसेमंद वेबसाइट्स मददगार साबित हो सकती हैं. जैसे Have I Been Pwned एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां आप अपना ईमेल या मोबाइल नंबर डालकर यह पता लगा सकते हैं कि आपकी जानकारी किसी डेटा ब्रीच में शामिल हुई है या नहीं. यह टूल अलग-अलग लीक हुए डेटा को इकट्ठा करके यूजर्स को सचेत करता है.
पासवर्ड की सुरक्षा जरूर जांचें
कई बार डेटा लीक होने का सबसे बड़ा कारण कमजोर या बार-बार इस्तेमाल किया गया पासवर्ड होता है. Google Chrome और Mozilla Firefox जैसे ब्राउजर में पहले से ही पासवर्ड चेक करने का फीचर मौजूद होता है. इनकी मदद से आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपके सेव किए गए पासवर्ड सुरक्षित हैं या पहले ही लीक हो चुके हैं.
ईमेल अलर्ट पर रखें नजर
अक्सर कंपनियां खुद ही यूजर्स को सूचित करती हैं जब उनका डेटा किसी ब्रीच में सामने आता है. इसलिए अपने ईमेल इनबॉक्स पर नजर बनाए रखना जरूरी है. हालांकि, यहां सावधानी भी जरूरी है क्योंकि कई बार साइबर ठग नकली ईमेल भेजकर आपको फंसाने की कोशिश करते हैं.
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाएं
अगर आप अपनी सुरक्षा को एक कदम और मजबूत करना चाहते हैं तो टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूर चालू करें. Google Authenticator और Microsoft Authenticator जैसे ऐप्स हर लॉगिन पर एक अतिरिक्त सुरक्षा कोड देते हैं जिससे आपका अकाउंट ज्यादा सुरक्षित रहता है.
डेटा लीक हो जाए तो क्या करें?
अगर आपको यह पता चलता है कि आपकी जानकारी लीक हो चुकी है तो सबसे पहले घबराने की बजाय तुरंत कदम उठाना जरूरी है. सबसे पहले अपने प्रभावित अकाउंट का पासवर्ड तुरंत बदलें. इसके बाद अगर आपने एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल किया है तो बाकी प्लेटफॉर्म्स पर भी उसे बदल दें. साथ ही, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करके अपने अकाउंट को अतिरिक्त सुरक्षा दें.
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका 5G प्लान सच में Unlimited है? जानिए क्या है इसकी पूरी सच्चाई</title>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp के ये 5 छुपे हुए फीचर्स जिसके बारे में 90% लोगों को नहीं है पता! आखिरी वाला तो है सबसे बेस्ट</title>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube ला रही धमाकेदार फीचर, खुद का एआई अवतार बना रिकॉर्ड कर सकेंगे वीडियो</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/youtube-ला-रही-धमाकेदार-फीचर-खुद-का-एआई-अवतार-बना-रिकॉर्ड-कर-सकेंगे-वीडियो</link>
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        <description><![CDATA[ YouTube AI Avatar: अगर आप कंटेट क्रिएटर हैं तो आपके लिए YouTube एक बड़े काम का फीचर ला रही है. यह फीचर आने के बाद अब एआई की मदद से अपना डिजिटल अवतार क्रिएट कर पाएंगे, जो उनके शॉर्ट्स वीडियो में नजर आएगा. यह अवतार आपके चेहरे और आवाज का इस्तेमाल कर वीडियो बना सकेगा. इसका फायदा यह होगा कि आपको हर बार शॉर्ट्स रिकॉर्ड करने की जरूरत नहीं होगी. आपकी जगह यह एआई अवतार वीडियो रिकॉर्ड कर लेगा. आइए जानते हैं कि YouTube AI Avatar कैसे कंटेट क्रिएशन के काम को आसान कर देगा.
कैसे काम करेगा YouTube AI Avatar?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फीचर में यूजर एकदम असली लगने वाला एआई अवतार जनरेट कर पाएंगे. इसके लिए उन्हें पहले एक लाइव सेल्फी लेनी होगी. इसमें उनके फेस की रिकॉर्डिंग हो जाएगी और साथ ही वॉइस रिकॉर्डिंग के लिए कुछ प्रॉम्प्ट्स पढ़ने पड़ेंगे. एक बार अवतार क्रिएट होने के बाद इससे करीब 8 सेकंड तक के वीडियो क्लिप शूट की जा सकेगी. यूजर चाहे तो ऐसी कई क्लिप शूट कर एक लंबा वीडियो भी बना पाएंगे.
YouTube AI Avatar को एडिट करने का भी मिलेगा ऑप्शन
एआई अवतार क्रिएट करने का ऑप्शन यूट्यूब ऐप के साथ-साथ यूट्यूब क्रिएट में भी मिलेगा. एक बार अवतार सेटअप करने के बाद इसे एडिट करने का भी ऑप्शन होगा. यूजर जब चाहे, अपनी अपीयरेंस और वॉइस को दोबारा रिकॉर्ड कर सकेगा. इसी तरह अवतार को डिलीट करने का भी पूरा कंट्रोल यूजर के पास होगा. अभी तक मौजूद मॉडल इमेज के सहारे वीडियो जनरेट करने की परमिशन देता था, लेकिन अब इसे अपग्रेड करते हुए इसमें वॉइस को भी एड कर दिया गया है. अगले कुछ दिनों में यह फीचर रोल आउट होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
Shorts से बना सकेंगे फुल वीडियो
बता दें कि यूट्यूब पिछले कुछ समय से एआई फीचर्स पर खास फोकस कर रही है ताकि कंटेट क्रिएशन को आसान बनाया जा सके. इसी कड़ी में कंपनी एक एआई-पावर्ड रिमिक्स फीचर लाने वाली है, जिससे शॉर्ट्स से एक नया वीडियो बनाना आसान हो जाएगा. इस फीचर में &#039;ऐड ऑब्जेक्ट&#039; और &#039;रीइमेजिन&#039; नाम से दो नए टूल मिलेंगे. ऐड ऑब्जेक्ट में यूजर शॉर्ट्स से लिए गए किसी भी सीन में एआई-जनरेटेड आइटम्स इन्सर्ट कर सकेंगे. यह फीचर 8 सेकंड तक की क्लिप पर काम करेगा. दूसरा टूल रीइमेजिन का होगा. यह शॉर्ट्स के एक फ्रेम को पूरी तरह नए एआई-जनरेटेड वीडियो में बदल सकेगा. इसे यूज करने के लिए यूजर को सजेस्टेड प्रॉम्प्ट मिलेंगे और यूजर चाहे तो अपने खुद के प्रॉम्प्ट लिखकर वीडियो जनरेट करवा सकेगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>स्मार्टफोन में रखे ऐसे वीडियो तो घर से उठा लेगी पुलिस, जानें क्या हैं इसके नियम</title>
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        <description><![CDATA[ आप अपनी मर्जी का फोन खरीदकर उसे अपनी मर्जी से यूज कर सकते हैं. इस पर कोई रोक-टोक नहीं है, लेकिन यह सब कानून के दायरे में होना चाहिए. अगर कोई अपने फोन को गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल करता है तो उसके खिलाफ लीगल एक्शन भी लिया जा सकता है. भले ही पुलिस हर नागरिक का फोन चेक नहीं करती है, लेकिन अगर कोई फोन में गैर-कानूनी चीजें रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि फोन में कैसे वीडियो पाए जाने पर लीगल एक्शन लिया जा सकता है.
ऐसे वीडियो बढ़ा सकते हैं मुश्किल
बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM)- बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेट को स्टोर और शेयर करने पर कानूनी प्रतिबंध लगा हुआ है. कोई भी व्यक्ति अपने फोन या सोशल मीडिया अकाउंट आदि पर ऐसा कंटेट स्टोर या शेयर नहीं कर सकता. अगर कोई ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना पक्का है.&amp;nbsp;
अश्लील कंटेट- अगर फोन में किसी सहमति के बनाए या शेयर किए गए वीडियो पाए जाते हैं तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. कई ऐसे मामले सामने भी आए हैं, जहां पुलिस ने ऐसा कंटेट पाए जाने पर कड़ा एक्शन लिया है.&amp;nbsp;
भड़काऊ वीडियो- अगर किसी के फोन में लोगों को भड़काने वाले वीडियो मिलते हैं तो उसके खिलाफ लीगल एक्शन लिया जा सकता है. अगर ऐसे वीडियो से भीड़ या किसी समुदाय को भड़काने की कोशिश होती है तो इसे देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा माना जा सकता है और पुलिस कानूनी धाराओं का इस्तेमाल करते हुए लीगल एक्शन ले सकती है.&amp;nbsp;
आतंकी गतिविधियों के वीडियो- ऐसे वीडियो को भी देश की सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है. अगर कोई अपने फोन में प्रतिबंधित संगठन या उसकी एक्टिविटीज का प्रचार-प्रसार करने वाले वीडियो स्टोर रखता है तो उसे पुलिस उठाकर ले जा सकती है. &amp;nbsp;इसी तरह अगर कोई ऐसे वीडियो शेयर करते हुए भी पाया जाता है तो कानूनी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.
बिना मर्जी के रिकॉर्ड किए गए वीडियो- आजकल स्मार्टग्लासेस और दूसरे जासूसी डिवाइसेस के जरिए लोगों को रिकॉर्ड करने का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है. अगर कोई बिना सहमति के किसी के वीडियो रिकॉर्ड कर उसे स्टोर या शेयर करता है तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. फोन में ऐसे वीडियो पाए जाने पर पुलिस उठाकर ले जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:34 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्मार्टफोन, में, रखे, ऐसे, वीडियो, तो, घर, से, उठा, लेगी, पुलिस, जानें, क्या, हैं, इसके, नियम</media:keywords>
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        <title>साइबर क्राइम पर शिकंजा कसने की तैयारी, सरकार करेगी डिजिटल स्ट्राइक!</title>
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        <description><![CDATA[ Cyber Crime: पिछले कुछ सालों से साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. साइबर क्राइम के कारण लोगों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है. इसे देखते हुए देश में सरकार ने साइबर क्राइम के खिलाफ डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी शुरू कर दी है. कुछ समय पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर फ्रॉड को नेशनल सिक्योरिटी का मामला बताते हुए कहा था कि डेटा चोरी और साइबर ठगी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रही है. इससे निपटने के लिए गृह मंत्रालय के अंडर आने वाला Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) रणनीति तैयार कर रहा है. आइए जानते हैं कि I4C साइबर क्राइम के मामलों के खिलाफ कैसे काम करता है.
2018 में हुई थी I4C की शुरुआत
साइबर क्राइम से लड़ने के लिए I4C एक नोडल एजेंसी है और इसके प्लेटफॉर्म से देशभर की एजेंसियों को इंटीग्रेट किया गया है. यह एजेंसी अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के बीच कॉर्डिनेशन बनाए रखती है, जिससे साइबर अपराधों की जांच में मदद मिलती है. इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी और तब से यह साइबर क्राइम से निपटने और देश की अलग-अलग एजेंसियों में कॉर्डिनेशन के काम में लगी हुई है.
कैसे काम करता है I4C?
जैसे ही कोई नागरिक हेल्पलाइन नंबर या सरकारी पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज करता है, यह मामला I4C के तहत आने वाले सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम के पास चला जाता है. यह सिस्टम संबंधित इलाके की पुलिस को बैंक और दूसरे फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज से कनेक्ट कर देता है. इससे पुलिस को ठगी के पैसे को रियल-टाइम में फ्रीज करने में मदद मिलती है. इस साल जनवरी तक यह सिस्टम 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा फ्रॉडस्टर की जेब में जाने से बचा चुका था. इस पूरे काम के लिए SOP बनाई गई है, जिसके तहत सभी राज्यों की पुलिस, एजेंसियां, बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थान काम करते हैं.
सिम कार्ड भी किए जा रहे ब्लॉक
शिकायतों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ सरकार साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड भी ब्लॉक कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गृह मंत्रालय 12 लाख सिम कार्ड कैंसिल करवा चुका है, जबकि लगभग 3 लाख मोबाइल को भी ब्लॉक किया जा चुका है.
सिम बाइंडिंग को भी लागू करने की तैयारी
मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होने वाले साइबर क्राइम पर रोक लगाने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया गया है. सरकार ने कुछ महीने पहले व्हाट्सऐप समेत सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को सिम बाइंडिंग लागू करने का आदेश दिया था. हाल ही में इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर इस साल के अंत तक कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इसके लागू होने से साइबर अपराध के मामलों में कमी आएगी.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:32 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 17 Pro खरीदते समय नहीं लगेगा जोर का झटका! यहां मिल रहा हजारों की बचत का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Pro Discount: अब ऐप्पल का फ्लैगशिप डिवाइस iPhone 17 Pro खरीदते समय आपको झटका नहीं लगेगा. अगर आप महंगी कीमत के कारण अभी तक इसे खरीदने से बच रहे थे तो आपकी यह टेंशन भी दूर हो गई है. अब इस आईफोन पर ऐसा ऑफर आ गया है, जिससे आप हजारों रुपये की बचत कर सकते हैं. शानदार डिस्काउंट वाला यह ऑफर आपके फेवरिट आईफोन को खरीदना और भी स्पेशल बना देगा. आइए एक नजर डाल लेते हैं कि iPhone 17 Pro में क्या-क्या फीचर्स हैं और इस पर कुल कितना डिस्काउंट मिल रहा है.&amp;nbsp;
iPhone 17 Pro के स्पेसिफिकेशंस
iPhone 17 Pro को पिछले साल सितंबर में दमदार अपग्रेड्स के साथ लॉन्च किया गया था. इसकी स्क्रीन की बात करें तो यह 6.3 इंच के OLED Super Retina XDR डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ था, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. ऐप्पल के पावरफुल A19 Pro चिपसेट से लैस यह आईफोन मल्टीटास्किंग और ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स आसानी से हैंडल कर लेता है. इसके रियर में 48MP प्राइमरी लेंस के साथ ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो के लिए 18MP का सेंटर स्टेज कैमरा दिया गया है. इस आईफोन में 4,252 mAh का बैटरी पैक मिलता है.
iPhone 17 Pro पर कितना डिस्काउंट?
iPhone 17 Pro पर चल रहे डिस्काउंट ऑफर के बारे में जानते ही आप इसे खरीदने की सोचेंगे. भारत में इसे 1,34,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी इसे खरीदने के लिए आपको इतनी रकम देने की जरूरत नहीं है. विजय सेल्स पर यह फोन 2400 रुपये से ज्यादा के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,32,490 रुपये में लिस्टेड है. इस छूट के अलावा ग्राहक HSBC क्रेडिट कार्ड से 6,000 रुपये की एक्स्ट्रा छूट भी पा सकते हैं. कुल मिलाकर अभी इस आईफोन को 8,000 रुपये से अधिक की बचत के साथ खरीदा जा सकता है.
Google Pixel 10 भी मिल रहा है सस्ता
Google Pixel 10 पर भी इस समय शानदार डिस्काउंट ऑफर चल रहा है. 79,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ यह फोन अभी अमेजन पर सिर्फ 69,930 रुपये में लिस्टेड है. करीब 10,000 रुपये के इस डिस्काउंट के साथ-साथ लगभग 2100 रुपये के कैशबैक और 2500 रुपये के बैंक ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है. इस तरह गूगल पिक्सल 10 पर कुल छूट 14,000 रुपये से ज्यादा की हो जाती है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:31 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dyson HushJet Mini Cool Fan: Dyson का नया पोर्टेबल फैन लॉन्च, गले में लटकाएं और तुरंत ठंडक महसूस करें, जानें इसके फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Dyson HushJet Mini Cool Fan: गर्मी का मौसम आते ही हर कोई ठंडक की तलाश में रहता है. ऐसे में कंपनियां नए और इनोवेटिव कूलिंग गैजेट्स पेश कर रही हैं. इस बीच, ब्रिटिश टेक कंपनी Dyson ने अपना नया पोर्टेबल फैन HushJet Mini Cool लॉन्च किया है. कंपनी इसे छोटे साइज में पावरफुल और स्टाइलिश डिवाइस बता रही है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह फैन सच में काम का है या सिर्फ एक प्रीमियम गैजेट है. तो आइए आज हम आपको इसके फीचर्स, डिजाइन, और कीमत के बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
Dyson पोर्टेबल फैन के फीचर्स
Dyson का दावा है कि यह फैन 25 मीटर प्रति सेकंड तक की एयरफ्लो स्पीड दे सकता है. इसमें 65,000 RPM तक घूमने वाली मोटर लगी है, जो छोटे साइज के बावजूद ज्यादा पावर देती है. यह पावरफुल होने के बावजूद हल्का और पोर्टेबल है. स्पीड और पावर के मामले में यह छोटे फैन की तुलना में काफी बेहतर लगता है, लेकिन असली टेस्ट तो भारतीय गर्मी में होगा.&amp;nbsp;
Dyson HushJet Mini Cool का स्पीड और बैटरी बैकअप&amp;nbsp;
Dyson HushJet Mini Cool में 5 स्पीड मोड और एक बूस्ट मोड दिया गया है. वहीं जरूरत के हिसाब से हवा की स्पीड को एडजस्ट किया जा सकता है. इसके अलावा बूस्ट मोड तेज हवा देने के लिए है, जब तुरंत ठंडक चाहिए. यह फीचर इसे रोजमर्रा के यूज और गर्मी में तुरंत राहत देने में मदद करता है. साथ ही कंपनी का दावा है कि यह फैन एक बार चार्ज करने पर लगभग 6 घंटे तक चल सकता है. हालांकि, यह बैकअप अलग-अलग स्पीड पर बदल सकता है. जैसे तेज स्पीड पर बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है, जबकि धीमी स्पीड पर लंबे समय तक चल सकती है.&amp;nbsp;
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Dyson पोर्टेबल फैन डिजाइन&amp;nbsp;
Dyson ने इस फैन में HushJet टेक्नोलॉजी दी है. इसका मकसद तेज हवा के साथ कम शोर है. आम छोटे फैन तेज स्पीड पर काफी शोर करते हैं, लेकिन Dyson का दावा है कि यह फैन ज्यादा शोर नहीं करेगा. Dyson हमेशा अपने प्रोडक्ट्स के डिजाइन में अलग रहने की कोशिश करता है और HushJet Mini Cool भी इसी तरह से लॉन्च किया जा रहा है. यह फैन तीन रंगों में अवेलेबल है. इसके साथ नेक डॉक, चार्जिंग स्टैंड और ट्रैवल पाउच जैसी एक्सेसरीज भी आती हैं. यह फैन स्टाइल और सुविधा का बड़ा पैकेज है.&amp;nbsp;
Dyson HushJet Mini Cool की कीमत&amp;nbsp;
Dyson के प्रोडक्ट्स आम तौर पर प्रीमियम रेंज में आते हैं. HushJet Mini Cool को ग्लोबली USD 99 (लगभग 10,000 रुपये) में लॉन्च किया गया है. भारत में इसकी कीमत इसी के आस-पास हो सकती है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:30 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब फोन रिचार्ज करते समय नहीं छूटेगा पसीना, कंपनियों को लॉन्च करने पड़ेंगे सस्ते प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ Recharge Plan: अगर आप महंगे रिचार्ज प्लान से परेशान हो चुके हैं तो जल्द ही आपको राहत मिल सकती है. दरअसल, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने ऐसे नियम का प्रस्ताव रखा है, जिसके आने के बाद टेलीकॉम कंपनियों को केवल वॉइस कॉल और SMS के लिए सस्ते प्लान लॉन्च करने होंगे. यानी जो ग्राहक मोबाइल डेटा यूज नहीं करते, उन्हें रिचार्ज प्लान में इंटरनेट के लिए पैसे भी नहीं देने पड़ेंगे. बता दें कि TRAI ने पहले भी ऐसी कोशिश की थी, जो पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई थी. अब एक बार फिर रेगुलेटर नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहा है.
क्या नियम बदलने से सस्ते होंगे Recharge Plan?
TRAI ने इससे पहले टेलीकॉम कंपनियों को कॉलिंग और SMS वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर लॉन्च करने का आदेश दिया था. इस पर अमल करते हुए कंपनियों ने कुछ प्लान लॉन्च किए थे, लेकिन TRAI का मानना है कि ये ऑप्शन बहुत लिमिटेड हैं और डेटा बेनेफिट हटाने के बाद भी इनके दाम ज्यादा हैं. इन आदेशों का ठीक से पालन न होता देख अब TRAI नियमों का कड़ा करने जा रही है, जिससे मोबाइल यूजर्स को राहत मिलने की उम्मीद है.
प्रस्तावित नियमों में क्या कहा गया है?
प्रस्तावित नियमों के तहत सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपने मौजूदा बंडल्ड पैक के बराबर वैलिडिटी पीरियड वाले वॉइस और SMS प्लान लाने होंगे. यानी यूजर्स को जल्द ही बिना इंटरनेट वाले प्लान के कई ऑप्शन मिल सकते हैं. TRAI का मानना है कि इससे फेयर प्राइसिंग को फिक्स किया जा सकेगा.
कब तक लागू हो सकते हैं नियम?
नए नियम लागू होने में थोड़ा समय लग सकता है. अभी TRAI की तरफ से नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है. इस प्रस्ताव पर 28 अप्रैल तक सभी स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा गया है. इसके बाद नियमों में बदलाव करने या न करने पर चर्चा की जाएगी. ऐसे में यह अभी लंबी प्रोसेस है.
रिचार्ज प्लान्स ने बढ़ाया ग्राहकों की जेब पर बोझ
पिछले कुछ समय से कंपनियां रिचार्ज प्लान महंगे करने का नया तरीका इस्तेमाल कर रही है. कंपनियां अपने प्लान्स की कीमत को सीधे तौर पर बढ़ाने की बजाय उनके बेनेफिट्स कम कर रही हैं. यानी यूजर्स को उतनी ही कीमत में कम बेनेफिट्स दे रही है. हालिया दिनों में ही BSNL और जियो अपने कई रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी को घटा चुकी हैं. इससे ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:29 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, फोन, रिचार्ज, करते, समय, नहीं, छूटेगा, पसीना, कंपनियों, को, लॉन्च, करने, पड़ेंगे, सस्ते, प्लान</media:keywords>
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        <title>सर्विस के बाद भी पसीने छुड़ा रहा है AC? यह हो सकती है दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ AC Tips: गर्मियों की शुरुआत हो गई है और इसी के साथ AC चलाने की जरूरत भी पड़ने लगेगी. इसे देखते हुए लोगों ने AC की सर्विस पहले ही करवा ली है. फिर भी कई बार लोगों की यह शिकायत रहती है कि सर्विसिंग के बाद भी AC कूलिंग नहीं देता. अगर आपके AC के साथ भी यही दिक्कत आ रही है तो इसकी कूलिंग कॉइल में गड़बड़ हो सकती है. अगर ऐसा है तो तुरंत इस पर ध्यान देने की जरूरत है. अगर समय रहते ही इसे ठीक नहीं किया गया तो गैस लीक होने का डर रहता है.
ऐसे चलेगा कूलिंग कॉइल खराब होने का पता
जब गर्मी में ठंडक देने की बात आती है तो AC का सारा भार कूलिंग कॉइल पर ही आता है. ऐसे में अगर सर्विस करवाने के बाद भी AC ठंडक नहीं दे रहा हो तो कूलिंग कॉइल को संभाल लेना जरूरी है. अगर आपक नीचे दिए गए संकेत नजर आते हैं तो समझ लेना चाहिए कि कूलिंग कॉइल में दिक्कत आ गई है.- AC हवा देता है, लेकिन यह कमरे को ठंडा नहीं करता.- इनडोर यूनिट पर बर्फ जमना भी कॉइल खराब होने का संकेत है.- इनडोर यूनिट से पानी लीक होना या बदबू आना भी इसका संकेत हो सकता है.- ज्यादा बिजली की खपत करना और एयरफ्लो धीमा रहना भी कूलिंग कॉइल खराब होने की निशानी है.
क्या है समाधान?
- कई बार कॉइल पर गंदगी जमा होने के कारण भी यह ठीक तरीके से काम नहीं कर पाती है. ऐसी स्थिति में आप इसे टेक्नीशियन को बुलाकर साफ करवा सकते हैं.- अगर एसी की गैस लीक हो गई है तो टेक्नीशियन से रिफिल करवा लें. साथ ही अगर कहीं लीकेज है तो उसे भी बंद करवाएं.- कॉइल की छोटी-मोटी लीकेज या डैमेज मार्केट से रिपेयर करवा जा सकता है.&amp;nbsp;- अगर कॉइल पूरी तरह खराब हो गई है तो इसे रिप्लेस करवाना बेहतर ऑप्शन है.
गैस रिफिल करवाते समय इन बातों का रखें ध्यान
AC में गलत टाइप की गैस भरवाकर आप नुकसान करवा सकते हैं. इसलिए आउटर यूनिट पर पहले ही देख लें कि आपके AC को किस टाइप की गैस की जरूरत है. टेक्नीशियन को भी यह जानकारी दे दें. साथ ही टेक्नीशियन को पूरी मात्रा में गैस भरने को कहें. अगर कम गैस भरी जाती है तो कूलिंग पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा यह भी इनस्योर कर लें कि गैस में किसी प्रकार की मिलावट न हो.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI Chatbots को लेकर नई चेतावनी! बच्चों के लिए कितना सुरक्षित? हर माता&amp;पिता को तुरंत जाननी चाहिए ये बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Warning for AI Chatbots: आजकल AI चैटबॉट्स तेजी से फेमश हो रहे हैं लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है. eSafety Commissioner द्वारा किए गए अध्ययन में सामने आया है कि कई AI चैटबॉट प्लेटफॉर्म बच्चों को खतरनाक और अश्लील कंटेंट से बचाने में नाकाम हैं.
किन ऐप्स पर उठे सवाल
रिपोर्ट में Character.AI, Chai, Nomi और Chub AI जैसे प्लेटफॉर्म्स का जिक्र किया गया है. इन सभी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियां पाई गईं हैं. जांच में पाया गया कि बच्चे इन ऐप्स में आसानी से adult फीचर्स तक पहुंच सकते हैं क्योंकि यहां पर age verification जैसा ऑप्शन मौजूद नहीं है.
सुरक्षा के नाम पर बड़ी कमी
रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर ऐप्स सिर्फ साइनअप के समय यूजर द्वारा दी गई उम्र पर भरोसा करते हैं. यानी कोई भी बच्चा गलत उम्र डालकर इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर सकता है. इतना ही नहीं, कुछ ऐप्स में तो self-harm से जुड़े संकेत मिलने पर भी कोई चेतावनी या मदद का ऑप्शन नहीं दिया जाता. यह स्थिति बच्चों के लिए और भी खतरनाक हो सकती है.
खतरनाक बातचीत और कमजोर निगरानी
इन AI चैटबॉट्स में टेक्स्ट, इमेज और वीडियो के जरिए बातचीत होती है लेकिन इन पर सही निगरानी की कमी है. इससे आपत्तिजनक या गैरकानूनी कंटेंट बनने का खतरा बढ़ जाता है. कुछ प्लेटफॉर्म्स में तो ऐसा भी पाया गया कि यूजर्स को यह तक नहीं बताया जाता कि गलत या अपराध से जुड़ी चीजें मांगना कानूनन जुर्म है.
क्यों बढ़ रही है चिंता?
विशेषज्ञों का कहना है कि ये AI चैटबॉट्स बच्चों को इंसानों जैसा अनुभव देते हैं. ये दोस्त, सलाहकार या साथी की तरह व्यवहार करते हैं जिससे बच्चे जल्दी इनसे जुड़ जाते हैं. लेकिन असलियत यह है कि ये न तो बच्चों के लिए डिजाइन किए गए हैं और न ही मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं. इसके बावजूद, ये कई बार संवेदनशील विषयों पर भी बातचीत करते हैं जो बच्चों के दिमाग पर असर डाल सकती है.
भारत में खतरा और ज्यादा क्यों?
भारत में इन ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. सस्ते इंटरनेट, आसानी से स्मार्टफोन तक पहुंच और युवा पीढ़ी के कारण ये प्लेटफॉर्म्स बहुत तेजी से फैल रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये ऐप्स देखने में खतरनाक नहीं लगते. ये अक्सर सामान्य या पढ़ाई में मदद करने वाले टूल जैसे दिखाई देते हैं जिससे माता-पिता को शक भी नहीं होता.
माता-पिता क्या करें?
घबराने के बजाय समझदारी से कदम उठाना जरूरी है. बच्चों से खुलकर बात करें कि वे कौन-कौन से ऐप्स इस्तेमाल करते हैं और वहां किस तरह की बातचीत करते हैं. उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखें लेकिन भरोसे के साथ. सही मार्गदर्शन और जागरूकता ही इस नई तकनीक के खतरे से बचने का सबसे अच्छा तरीका है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Doomscrolling: स्क्रॉलिंग की लत से हैं परेशान? ये 5 Apps बदल देंगे आपकी आदत, फोन खुद हो जाएगा कंट्रोल</title>
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        <description><![CDATA[ Doomscrolling: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. खाली समय मिलते ही लोग सोशल मीडिया पर घंटों स्क्रॉल करते रहते हैं जिसे डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है. यह आदत धीरे-धीरे लत में बदल जाती है और समय के साथ मानसिक थकान भी बढ़ाती है. अगर आप इस आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कुछ खास ऐप्स आपकी मदद कर सकते हैं.
Minimalist Phone
यह ऐप आपके फोन को एक सिंपल और डिस्ट्रैक्शन-फ्री डिवाइस में बदल देता है. इसमें रंगीन आइकन की जगह केवल टेक्स्ट बेस्ड स्क्रीन होती है जिससे ध्यान भटकने की संभावना कम हो जाती है. आप इसमें सोशल मीडिया ऐप्स को ब्लॉक कर सकते हैं उनका नाम बदल सकते हैं या उनके इस्तेमाल का समय तय कर सकते हैं. इससे बिना सोचे-समझे फोन इस्तेमाल करने की आदत कम होती है.
One Sec
यह ऐप आपको बिना सोचे ऐप खोलने से रोकता है. जैसे ही आप कोई सोशल मीडिया ऐप खोलते हैं यह आपको कुछ सेकंड रुकने, सांस लेने या सोचने के लिए कहता है. इससे आपकी आदत पर ब्रेक लगता है और आप समझदारी से तय कर पाते हैं कि सच में ऐप खोलना जरूरी है या नहीं.
Forest
यह एक मजेदार ऐप है जो फोकस बढ़ाने के लिए गेम जैसा अनुभव देता है. जब आप काम पर ध्यान लगाते हैं तो इसमें एक वर्चुअल पेड़ उगता है. अगर आप बीच में ध्यान भटकाकर ऐप छोड़ते हैं तो वह पेड़ खत्म हो जाता है. यह तरीका आपको अनुशासन में रहने के लिए प्रेरित करता है.
Freedom
यह ऐप आपके फोन, लैपटॉप और ब्राउजर पर एक साथ काम करता है. आप तय कर सकते हैं कि किस समय कौन-सी ऐप या वेबसाइट ब्लॉक रहेगी. यह खासतौर पर उन लोगों के लिए काफी उपयोगी है जो काम के दौरान ध्यान भटकने से बचना चाहते हैं.
ScreenZen
यह ऐप आपको सीमित समय तक ही ऐप्स इस्तेमाल करने देता है. जैसे ही आप तय समय से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं यह आपको रुकने का मैसेज दिखाता है. यह आप यह ऐप क्यों खोल रहे हैं? जैसे सवाल पूछकर आपको सोचने पर मजबूर करता है. साथ ही, इसमें कुछ खास फीचर्स को भी ब्लॉक करने का विकल्प मिलता है.
आदत बदलने की शुरुआत आज से
डूमस्क्रॉलिंग को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है लेकिन सही टूल्स के साथ इसे कम जरूर किया जा सकता है. ये ऐप्स न सिर्फ आपका समय बचाएंगे बल्कि आपकी प्रोडक्टिविटी और मानसिक शांति में भी काफी मदद करेंगे. ऐसे में अगर आप भी अपनी स्क्रॉलिंग की लत से परेशान हैं तो इन ऐप्स पर विचार कर सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>16 से नीचे और 30 से ऊपर क्यों नहीं जाता AC का टेंपरेचर? जानिए क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ 16 से नीचे और 30 से ऊपर क्यों नहीं जाता AC का टेंपरेचर? जानिए क्या है वजह ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>पुराना फोन अब बनेगा घर का सिक्योरिटी गार्ड! ऐसे बनाएं फ्री CCTV कैमरा</title>
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        <description><![CDATA[ पुराना फोन अब बनेगा घर का सिक्योरिटी गार्ड! ऐसे बनाएं फ्री CCTV कैमरा ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: कितने ब्लेड वाला सीलिंग फैन देता है सबसे तेज हवा? जानिए क्या है इसके पीछे की तकनीक</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: गर्मी के मौसम में सीलिंग फैन हर घर की जरूरत बन जाता है. लेकिन जब नया पंखा खरीदने की बात आती है तो एक सवाल अक्सर लोगों को उलझन में डाल देता है आखिर 3, 4 या 5 ब्लेड वाला पंखा किसमें सबसे ज्यादा हवा देता है? साथ ही, कौन सा पंखा बिजली की खपत कम करता है? आइए इस पूरी सच्चाई को आसान भाषा में समझते हैं.
3 ब्लेड वाले पंखे की तकनीक
भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पंखे 3 ब्लेड वाले होते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है इनकी तेज हवा देने की क्षमता. दरअसल, कम ब्लेड होने के कारण इनको कम ताकत लगानी पड़ती है और ये कम बिजली में ही ज्यादा तेजी से रफ्तार पकड़ लेते हैं जिससे लोगों को ज्यादा तेज हवा महसूस होती है. इसीलिए कम ब्लेड होने की वजह से पंखे पर लोड कम पड़ता है जिससे मोटर आसानी से काम कर पाता है. यही कारण है कि 3 ब्लेड वाले पंखे ज्यादा एयरफ्लो देते हैं और कमरे को जल्दी ठंडा महसूस कराते हैं. साथ ही, ये पंखे बिजली की खपत के मामले में भी बेहतर माने जाते हैं. कम ब्लेड होने के कारण मोटर पर कम दबाव पड़ता है और बिजली की बचत होती है.
4 ब्लेड वाले पंखे
4 ब्लेड वाले पंखे 3 ब्लेड की तुलना में थोड़े कम स्पीड पर चलते हैं लेकिन इनका एयर फ्लो ज्यादा स्मूद होता है. ये पंखे खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छे होते हैं जो कम शोर और स्थिर हवा पसंद करते हैं. हालांकि, इनकी बिजली खपत 3 ब्लेड वाले पंखों से थोड़ी ज्यादा हो सकती है क्योंकि अतिरिक्त ब्लेड मोटर पर थोड़ा ज्यादा दबाव डालते हैं.
5 ब्लेड वाले पंखे
5 ब्लेड वाले पंखे आमतौर पर डिजाइन और सजावट के लिहाज से ज्यादा पसंद किए जाते हैं. ये पंखे दिखने में आकर्षक होते हैं और हवा को ज्यादा समान रूप से फैलाते हैं लेकिन इनकी स्पीड सबसे कम होती है. ज्यादा ब्लेड होने के कारण मोटर पर ज्यादा लोड आता है जिससे पंखा तेज नहीं घूम पाता. यही वजह है कि इनसे मिलने वाली हवा की ताकत कम होती है. साथ ही, इनकी बिजली खपत भी थोड़ी ज्यादा हो सकती है.
कौन बचाता है ज्यादा बिजली?
अगर बात बिजली की बचत की करें तो 3 ब्लेड वाला पंखा सबसे किफायती साबित होता है. इसकी डिजाइन ऐसी होती है कि कम ऊर्जा में ज्यादा हवा मिलती है. वहीं 4 और 5 ब्लेड वाले पंखों में मोटर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत बढ़ सकती है.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>टाइम के साथ बदल गए फोन, लेकिन आज भी इन चीजों की सबको आती है याद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टाइम-के-साथ-बदल-गए-फोन-लेकिन-आज-भी-इन-चीजों-की-सबको-आती-है-याद</link>
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        <description><![CDATA[ Android Hardware Features: पिछले कुछ सालों में स्मार्टफोन पूरी तरह बदल गए हैं. एक समय भारी-भरकम होने वाले फोन आजकल एकदम पतले हो गए हैं. कंपनियां लगातार इन्हें बेहतर बनाने के लिए काम कर रही हैं. डिजाइन के साथ-साथ फोन की टेक्नोलॉजी भी बेहतर हुई है और अब एक स्मार्टफोन में ऐसे फीचर्स आने लगे हैं, जिनके कारण दूसरे गैजेट की छुट्टी हो गई है. हालांकि, इन सब बदलावों के बीच लोगों को अब भी पुराने फोन से जुड़ी कई चीजें याद आती हैं. फोन टेक्नोलॉजी में एडवांसमेंट के बावजूद ये चीजें लोगों के जहन से नहीं जा रही हैं. आज हम आपको ऐसे ही कुछ Android Hardware Features के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं.
इन Android Hardware Features को नहीं भूल पाए हैं लोग
Physical keyboards- जिन लोगों ने कीपैड वाले फोन यूज किए हैं, उनके मन में इनकी याद जाना काफी मुश्किल है. नोकिया को छोड़कर अगर एंड्रॉयड डिवाइस की बात करें तो 2009 में लॉन्च हुए Motorola Droid ने एंड्रॉयड को इंडस्ट्री में पहचान दिलाई थी. इस फोन में 3.7 इंच स्क्रीन के साथ QWERTY कीबोर्ड मिलता था. यह दिखने में तो कूल लगता ही थी, इसे यूज करना भी आसान था.
Removable Batteries- जैसे फिजिकल कीबोर्ड वाले एंड्रॉयड डिवाइस चलन से बाहर हो गए, वैसे ही रिमूवेबल बैटरी वाले एंड्रॉयड फोन भी अब पुराने दिनों की बात लगती है. अगर आप थोड़ा और पीछे चलकर देखें तो नोकिया के जमाने में लोग एक्स्ट्रा बैटरी पास रखते थे. एक बैटरी डिस्चार्ज होते ही उसे चार्ज करने की बजाय लोग बैटरी को ही रिप्लेस कर लेते थे. मॉडर्न स्मार्टफोन से बैटरी हटाना लंबी प्रोसेस बन गई है.
Headphone Jacks- धीरे-धीरे स्मार्टफोन से हेडफोन जैक गायब होते जा रहे हैं. हालांकि, अब भी कई स्मार्टफोन में हेडफोन जैक मिलता है, लेकिन अब ये इतने पॉपुलर नहीं रहे, जितने पहले होते थे. अब कनेक्टिविटी के लिए फोन ब्लूटूथ पर डिपेंड होने लगे हैं, लेकिन लोग आज भी 3.5mm ऑडियो जैक को याद करते हैं.
Expandable Storage- आज अगर आप कोई फोन लेते हैं तो उसकी कीमत स्टोरेज के हिसाब से डिसाइड होती है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. कुछ साल पहले तक एंड्रॉयड फोन में microSD स्लॉट मिलता था. ऐसे में यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से मेमोरी कार्ड खरीदकर स्टोरेज बढ़ा सकता था. इसी कार्ड को रिमूव करना भी आसान होता था, जिसके चलते एक ही कार्ड कई फोन में यूज कर लिया जाता था.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:21 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>टाइम, के, साथ, बदल, गए, फोन, लेकिन, आज, भी, इन, चीजों, की, सबको, आती, है, याद</media:keywords>
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        <title>आंखों की जांच से ही दिल की बीमारी का पता लगा लेगा AI! बिना टेस्ट के ही होगा डिटेक्ट, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ AI Will Detect Heart Disease: दिल से जुड़ी बीमारियां आज भी दुनिया में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती समय में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती. जब तक इसका पता चलता है तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. यही कारण है कि डॉक्टर हमेशा ऐसे तरीकों की तलाश में रहते हैं जिनसे जोखिम को पहले ही पहचाना जा सके.
AI ने खोला नया रास्ता
अमेरिका की मशहूर संस्था Mayo Clinic के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके दिल की बीमारी के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस अध्ययन को American College of Cardiology Scientific Session 2026 में पेश किया गया और American Journal of Preventive Cardiology में प्रकाशित किया गया.
पुराने टेस्ट से ही मिली नई जानकारी
इस रिसर्च में लगभग 12,000 लोगों को करीब 16 साल तक ट्रैक किया गया. इसमें एक सामान्य स्कैन कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन का इस्तेमाल किया गया जो पहले से ही दिल की धमनियों में कैल्शियम जमा होने की जांच के लिए किया जाता है. AI की मदद से इसी स्कैन से एक अतिरिक्त जानकारी निकाली गई जो पहले नजरअंदाज हो जाती थी. यह जानकारी थी दिल के आसपास मौजूद फैट जिसे पेरिकार्डियल फैट कहा जाता है.
दिल के आसपास की चर्बी बनी बड़ा संकेत
अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के दिल के आसपास ज्यादा फैट था उनमें भविष्य में हृदय रोग होने का खतरा अधिक था. खास बात यह है कि यह जोखिम उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसे पुराने कारणों से अलग भी देखा गया. यानी कुछ ऐसे लोग भी जो सामान्य टेस्ट में कम जोखिम वाले दिखते हैं उनमें भी छिपा हुआ खतरा मौजूद हो सकता है जिसे अब AI पहचान सकता है.
डॉक्टरों के लिए आसान होगा फैसला
इस नई तकनीक से डॉक्टरों को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किस मरीज को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है और किसे नहीं. खासतौर पर उन लोगों के लिए यह ज्यादा उपयोगी है जिनमें खतरा थोड़ा ज्यादा है. बेहतर और सटीक जानकारी मिलने से इलाज और बचाव के फैसले ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं.
बिना अतिरिक्त खर्च के बड़ा फायदा
इस तकनीक की एक खास बात यह भी है कि इसके लिए अलग से कोई नया टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. जो स्कैन पहले से किया जा रहा है उसी डेटा को AI के जरिए और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. इससे यह तरीका आसान, किफायती और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य बन जाता है.
भविष्य में बदल सकती है इलाज की दिशा
हालांकि अभी इस तकनीक पर और रिसर्च की जरूरत है लेकिन शुरुआती नतीजे काफी उम्मीद जगाने वाले हैं. आने वाले समय में AI आधारित ऐसे टूल्स दिल की बीमारी को पहले ही पकड़ने में मदद कर सकते हैं जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और कई जानें बचाई जा सकें.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>अपना दिमाग नहीं लगा रहे लोग, एआई चैटबॉट पर कर रहे हैं आंख मूंदकर भरोसा, नई स्टडी ने उड़ा दी नींद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अपना-दिमाग-नहीं-लगा-रहे-लोग-एआई-चैटबॉट-पर-कर-रहे-हैं-आंख-मूंदकर-भरोसा-नई-स्टडी-ने-उड़ा-दी-नींद</link>
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        <description><![CDATA[ Humans Blindly Trusting AI Chatbots: एआई के आने से इंसानों की प्रोडक्टिविटी बढ़ी है और अब वो कई काम जल्दी कर सकते हैं. एआई के कारण अब कई मुश्किल काम आसान भी हो गए हैं. हालांकि, इस बीच एक चिंता वाली बात भी निकल सामने आई है कि एआई इंसानों को आलसी बना रही है. अब लोग अपना लॉजिक यूज न कर एआई चैटबॉट्स पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं. पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी की रिसर्च में बताया गया है कि जैसे-जैसे एआई चैटबॉट्स का यूज बढ़ रहा है, लोग अपनी समझ छोड़कर सिर्फ एआई चैटबॉट्स पर भरोसा कर रहे हैं.
गलत जवाबों पर भी किया जा रहा भरोसा
रिसर्च में इंसानों के अपनी समझ छोड़कर एआई पर भरोसा करने के बिहेवियर को &#039;कॉग्नेटिव सरेंडर&#039; कहा गया है. यह एक टेंडेंसी है, जिसमे इंसान बिना ज्यादा सोचे-समझे एआई के जवाबों को स्वीकार कर लेते हैं, भले ही वो सटीक न हो. रिसर्च में कहा गया है कि लग अब रीजनिंग को मशीनों को आउटसोर्स कर रहे हैं और एआई पर उनकी निर्भरता बढ़ती जा रही है. जब एआई चैटबॉट सवाल पूछते ही कॉन्फिडेंस से जवाब देते हैं तो ज्यादातर लोग उसे स्वीकार कर लेते हैं.
झूठा कॉन्फिडेंस बना रही है एआई&amp;nbsp;
स्टडी में शामिल होने वाली जिन पार्टिसिपेंट्स ने एआई का यूज किया, वो अपने जवाबों को लेकर ज्यादा कॉन्फिडेंट थे, भले ही उनका चैटबॉट आधे सवालों के गलत जवाब दे रहा था. इससे पता चलता है कि एआई न सिर्फ डिसीजन मेकिंग पर असर डाल रही है बल्कि यह लोगों में झूठा कॉन्फिडेंस भी पैदा कर रही है.
चापलूसी भी करते हैं एआई चैटबॉट्स
एआई चैटबॉट्स के बिहेवियर को लेकर अलग-अलग रिसर्च हो रही है. कुछ समय पहले सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एआई चैटबॉट चैटजीपीटी यूजर की बातों से असहमति की जगह कई गुना सहमति जताता है. यह यूजर को नो कहने की तुलना में 10 गुना अधिक यस कहता है. बातचीत में बहुत ही कम ऐसे मौके आते हैं, जब चैटबॉट यूजर की किसी बात से असहमत होता है. इस वजह से कई चिंताएं उठ रही हैं कि यह चैटबॉट गलत या भ्रामक जानकारी को फैला सकता है.&amp;nbsp;
और भी चिंताएं आईं सामने
एआई सिस्टम को लेकर चिंता वाला यह पहला पैटर्न नहीं है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और सेंटर फॉर डेमोक्रेसी एंड टेक्नोलॉजी की एक रिपोर्ट में पता चला था कि एआई चैटबॉट कमजोर यूजर को बचा नहीं पाते हैं. ये कई बार यूजर को खुद को नुकसान पहुंचाने की टिप्स भी देते हैं.&amp;nbsp;
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        <title>Tech Tips: Shutdown Vs Sleep... पीसी के लिए कौन&amp;सा ऑप्शन बेहतर, किसे कब करना चाहिए इस्तेमाल?</title>
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        <description><![CDATA[ Shutdown Vs Sleep: कई लोग काम पूरा होने के बाद अपने कंप्यूटर को शटडाउन करते हैं तो कई लोग इसे स्लीप मोड में डाल देते हैं. स्लीप मोड में जाने में पीसी या लैपटॉप को शटडाउन होने से कम समय लगता है. इसी तरह स्लीप मोड से कंप्यूटर को वेक-अप होने में भी कम टाइम लगेगा. पीसी को बंद करना या स्लीप मोड में डालना यूजर्स की पर्सनल च्वॉइस हो सकती है, लेकिन इनमें से कौन-सा ऑप्शन कब चूज करना चाहिए? यह जानने के लिए इनके फायदे-नुकसान पता होने जरूरी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको स्लीप मोड या शटडाउन कब सेलेक्ट करना चाहिए.
कंप्यूटर को स्लीप मोड में कब डालें?
अगर आप थोड़ी देर का ब्रेक ले रहे हैं तो स्लीप मोड बेस्ट है. इससे सिस्टम जल्दी रिज्यूम होगा और आपको दोबारा से कंप्यूटर के बूट और ऐप लोड होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. हालांकि, स्लीप मोड में भी लैपटॉप बैटरी की खपत करता रहेगा. इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है.
विंडोज लैपटॉप में स्लीप के अलावा हाइबरनेट का भी ऑप्शन मिलता है. माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि स्लीप में लैपटॉप कम पावर यूज करते हैं. हाइबरनेट में पावर की खपत इससे भी कम होती है. यह तब यूज करना चाहिए, जब आपको लंबा ब्रेक चाहिए और बैटरी की भी चिंता रहती है. इसी तरह ऐप्पल का भी कहना है कि स्लीप मोड में उसके सिस्टम ज्यादा एनर्जी की खपत नहीं करते हैं.
कंप्यूटर को शटडाउन कब करना चाहिए?
अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप को कई दिनों तक यूज नहीं करना चाहते तो इसे शटडाउन करना बेहतर ऑप्शन है. अगर आप लंबा ब्रेक ले रहे हैं तो अपने सिस्टम को स्लीप मोड में न डालें. यह भले ही कम एनर्जी कंज्यूम करे, लेकिन यह बैटरी की खपत करता रहेगा. लंबे ब्रेक में कंप्यूटर को शटडाउन करना ही फायदेमंद होता है. इससे एनर्जी सेव होगी और कंप्यूटर की लाइफ भी बढ़ती है. दरअसल, बंद रहने से सिस्टम में हीट जनरेट नहीं होगी, जिससे इसके पार्ट्स डैमेज नहीं होंगे. अगर शटडाउन के एक और फायदे की बात करें तो जब आप सिस्टम रिस्टार्ट करेंगे तो इसके कई बग्स फिक्स हो जाएंगे. इससे आपको पहले आ रही छोटी-मोटी दिक्कतें आना बंद हो जाएगी. इसलिए अगर आप किसी टेम्परेरी बग्स से परेशान हैं तो भी कंप्यूटर को शटडाउन करने के ऑप्शन पर विचार किया जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>यह स्मार्टवॉच बता देती है आपकी बॉडी में कितनी प्लास्टिक, जानें इसे कैसे करते हैं इस्तेमाल?</title>
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        <description><![CDATA[ Smartwatch: आज के समय में प्लास्टिक का इस्तेमाल इतना बढ़ चुका है कि इसके बेहद छोटे कण अब हमारे शरीर तक पहुंच रहे हैं. वैज्ञानिकों ने हवा, पानी और खाने-पीने की चीजों में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक की मौजूदगी पाई है. चिंता की बात यह है कि ये कण खून के जरिए शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंच सकते हैं लेकिन इन्हें मापना अभी भी आसान नहीं है.
शरीर में प्लास्टिक का पता लगाना क्यों है मुश्किल?
अभी तक शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की पहचान करने के लिए ब्लड सैंपल और कठिन लैब डिवाइसों की जरूरत होती है. यह प्रोसेस महंगा और समय लेने वाला होता है. यही कारण है कि वैज्ञानिक अब तक यह पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं कि इंसान के शरीर में कितना प्लास्टिक जमा हो रहा है और इसका लंबे समय में क्या असर पड़ता है.
स्मार्टवॉच जैसा पहनने वाला डिवाइस
University of Tartu के शोधकर्ता एक ऐसी नई तकनीक पर काम कर रहे हैं जो इस समस्या को आसान बना सकती है. वे एक ऐसा पहनने वाला डिवाइस विकसित कर रहे हैं जो दिखने में स्मार्टवॉच जैसा होगा और बिना किसी टेस्ट के शरीर में मौजूद प्लास्टिक कणों का पता लगा सकेगा.
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
इस डिवाइस में स्पेक्ट्रोमेट्री नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह तकनीक अलग-अलग पदार्थों पर पड़ने वाली रोशनी के नेचर का अध्ययन करती है. हर तरह का प्लास्टिक रोशनी को अलग तरीके से अब्जॉर्ब और रिफ्लेक्ट करता है जो एक तरह से उसकी पहचान बन जाता है.
यह डिवाइस स्किन पर अलग-अलग प्रकार की रोशनी डालता है जिसमें इंफ्रारेड और अल्ट्रावायलेट किरणें भी शामिल होती हैं. फिर यह पता लगाता है कि रोशनी किस तरह वापस लौट रही है. इसी आधार पर यह स्किन के नीचे मौजूद प्लास्टिक कणों की पहचान कर सकता है.
शुरुआती परीक्षण में मिले सकारात्मक नतीजे
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को परखने के लिए एआई स्किन बनाई जिसमें प्लास्टिक कण डाले गए थे. जब इस डिवाइस से परीक्षण किया गया तो यह स्किन के नीचे मौजूद प्लास्टिक को पहचानने में सफल रहा. यह संकेत देता है कि भविष्य में यह तकनीक वास्तविक जीवन में भी कारगर साबित हो सकती है.
स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
हालांकि माइक्रोप्लास्टिक के प्रभावों पर अभी शोध जारी है लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि ये कण शरीर में जमा हो सकते हैं. इससे सूजन, कोशिकाओं पर दबाव और शरीर के सामान्य कामकाज में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यही वजह है कि इनकी निगरानी करना बेहद जरूरी हो गया है.
भविष्य में बदल सकती है हेल्थ मॉनिटरिंग
अगर यह तकनीक सफल होती है तो आने वाले समय में स्मार्टवॉच, रिंग या बैंड जैसे डिवाइस के जरिए लोग अपने शरीर में प्लास्टिक के स्तर को आसानी से ट्रैक कर पाएंगे. इससे न सिर्फ आम लोगों को फायदा होगा बल्कि वैज्ञानिकों को भी यह समझने में मदद मिलेगी कि प्लास्टिक हमारे स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर रहा है.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>36 हजार रुपये सस्ता मिल रहा Samsung का 200MP कैमरा वाला फोन! यहां मिल रही जबरदस्त डील, जानिए कैसे उठाएं फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ 36 हजार रुपये सस्ता मिल रहा Samsung का 200MP कैमरा वाला फोन! यहां मिल रही जबरदस्त डील, जानिए कैसे उठाएं फायदा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>इस कंपनी ने कर दिया धमाका, सिर्फ एक रुपये में दे रही नई सिम और डेली 2GB डेटा समेत कई बेनेफिट्स</title>
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        <description><![CDATA[ BSNL Freedom Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने धमाका कर दिया है. कंपनी ने आज एक्स पर पोस्ट कर बताया कि BSNL Freedom Plan वापस आ चुका है. यूजर्स की डिमांड पर इस प्लान को फिर से इंट्रोड्यूस किया गया है. ध्यान रहे कि यह लिमिटेड टाइम ऑफर है. ऐसे में अगर आप इस ऑफर का फायदा उठाना चाहते हैं तो आपके पास थोड़ा ही समय है. इस धमाकेदार ऑफर में कंपनी सिर्फ एक रुपये में नया सिम कार्ड ऑफर कर रही है. इसके साथ-साथ ग्राहकों को कॉलिंग, डेटा और SMS जैसे बेनेफिट्स भी दिए जाएंगे. आइए जानते हैं कि BSNL Freedom Plan में क्या-क्या बेनेफिट्स हैं और यह ऑफर कब तक लागू रहेगा.
BSNL Freedom Plan में क्या मिलेगा?
BSNL इस प्लान में सिर्फ एक रुपये में सिम कार्ड ऑफर कर रही है. यह प्लान उन लोगों के काम आ सकता है, जो सेकेंडरी नंबर लेना या BSNL की सर्विसेस को ट्राई करना चाहते हैं. इस प्लान में नए सिम कार्ड के साथ पूरे 30 दिनों के लिए देशभर में किसी भी नंबर पर अनलिमिटेड कॉलिंग, रोजाना 100 SMS और डेली 2GB डेटा मिलेगा. 30 दिनों की वैलिडिटी का समय सिम एक्टिवेट होते ही शुरू हो जाएगा.&amp;nbsp;
कब तक है BSNL Freedom Plan का ऑफर?
BSNL का कहना है कि ग्राहकों की डिमांड को देखते हुए इस प्लान को फिर से लाया गया है. यह ऑफर 30 अप्रैल तक वैलिड रहेगा. अगर आप इस ऑफर का फायदा उठाना चाहते हैं तो 30 अप्रैल से पहले आपको यह सिम कार्ड खरीदना होगा. इसके लिए आप अपने नजदीकी BSNL CSC या ऑथोराइज स्टोर पर जा सकते हैं. यहां KYC प्रोसेस पूरी करने के बाद आपको सिम कार्ड दे दिया जाएगा. ध्यान रहे कि यह ऑफर ऑनलाइन अवेलेबल नहीं है. इसलिए आपको सिम कार्ड लेने के लिए फिजिकल स्टोर पर ही जाना पड़ेगा.
जियो में ऐसे बेनेफिट्स के लिए देने पड़ेंगे 349 रुपये
BSNL Freedom Plan के तहत एक रुपये में डेली 2GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और रोजाना 100 SMS जैसे बेनिफिट्स मिल रहे हैं. जियो में ऐसे ही बेनेफिट्स के लिए आपको 349 रुपये देने पड़ेंगे. जियो के 349 रुपये वाले प्लान में 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ अनलिमिटेड फ्री कॉलिंग, रोजाना 100 SMS और डेली 2GB डेटा के साथ-साथ अनलिमिटेड 5G डेटा भी दिया जा रहा है. इसके साथ जियो ग्राहकों को गूगल जेमिनी का प्रो प्लान और जियोहॉटस्टार का फ्री सब्सक्रिप्शन भी दे रही है.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>बच्चों को नहीं देना चाहिए iPad! Sam Altman के इस बयान ने मचा दी खलबली, इस चीज को बताया बेहतर ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Sam Altman जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया के बड़े नामों में गिने जाते हैं, अब बच्चों की परवरिश को लेकर अलग नजरिया रखते हैं. हाल ही में उन्होंने बताया कि पेरेंट बनने के बाद टेक्नोलॉजी और बच्चों के रिश्ते को लेकर उनकी सोच पहले जैसी नहीं रही. पहले जहां उन्हें बच्चों के जल्दी गैजेट इस्तेमाल करने में ज्यादा दिक्कत नहीं दिखती थी वहीं अब उनका नजरिया काफी बदल गया है.
स्क्रीन से ज्यादा जरूरी असली दुनिया
अब उनका मानना है कि छोटे बच्चों को iPad या स्क्रीन के सामने समय बिताने के बजाय बाहर खेलना ज्यादा जरूरी है. उनका कहना है कि बच्चे अगर मिट्टी में खेलें, इधर-उधर दौड़ें और खुद चीजें समझें तो यह उनके विकास के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है. उनका यह विचार इस बात को दर्शाता है कि बचपन में अनुभव सिर्फ डिजिटल नहीं बल्कि असली दुनिया से भी मिलने चाहिए.
बिना प्लान के खेल भी सिखाता है बहुत कुछ
Altman के अनुसार, बच्चों का बिना किसी तय नियम या स्क्रीन के खेलना उनके दिमाग और शरीर दोनों के विकास में मदद करता है. जब बच्चे खुद से खेल बनाते हैं, चीजों को छूते हैं और नई चीजें ट्राई करते हैं तो उनकी जिज्ञासा बढ़ती है. साथ ही उनकी समझने की क्षमता, तालमेल और सोशल स्किल्स भी बेहतर होती हैं. ऐसे अनुभव किसी ऐप या वीडियो से नहीं मिल सकते क्योंकि इनमें कोई गाइड या नोटिफिकेशन नहीं होता बल्कि बच्चा खुद सीखता है.
टेक्नोलॉजी के खिलाफ नहीं बस संतुलन जरूरी
Sam Altman टेक्नोलॉजी के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वह इसके सही इस्तेमाल पर जोर देते हैं. उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी बच्चों के लिए एक टूल की तरह होनी चाहिए न कि उनकी जिंदगी पर पूरी तरह हावी हो जाए. खासकर शुरुआती उम्र में बच्चों को पहले असली दुनिया को समझने का मौका मिलना चाहिए उसके बाद ही टेक्नोलॉजी को शामिल करना बेहतर है. Altman का यह नजरिया यह बताता है कि भले ही हम डिजिटल दौर में जी रहे हों लेकिन बच्चों के लिए संतुलन सबसे ज्यादा जरूरी है.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung यूजर्स को झटका! बंद हो रहा ये ऐप, जुलाई से पहले इस प्लेटफॉर्म पर करना होगा स्विच</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Messages App: स्मार्टफोन बाजार की दिग्गज कंपनी Samsung ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़े बदलाव का ऐलान किया है. कंपनी ने साफ कर दिया है कि उसका पुराना Samsung Messages ऐप जुलाई 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. इसके बाद यूजर्स को मैसेज भेजने और रिसीव करने के लिए Google Messages का इस्तेमाल करना होगा.
क्यों बंद किया जा रहा है Samsung Messages ऐप?
Samsung का यह मैसेजिंग ऐप पिछले कई सालों से Galaxy स्मार्टफोन्स का हिस्सा रहा है लेकिन अब कंपनी इसे पूरी तरह खत्म करने जा रही है. जुलाई 2026 के बाद यह ऐप ज्यादातर डिवाइसेज पर काम करना बंद कर देगा. हालांकि, इमरजेंसी नंबर या जरूरी कॉन्टैक्ट्स के लिए सीमित इस्तेमाल संभव रहेगा लेकिन सामान्य मैसेजिंग के लिए यह ऐप बेकार हो जाएगा.
यह बदलाव खास तौर पर उन स्मार्टफोन्स को प्रभावित करेगा जो Android 12 या उससे ऊपर के वर्जन पर चलते हैं. वहीं, पुराने Android 11 या उससे नीचे वाले डिवाइसेज में यह ऐप कुछ समय तक चलता रहेगा.
Google Messages की ओर क्यों बढ़ रहा Samsung?
दरअसल, Samsung पिछले कुछ सालों से धीरे-धीरे अपने यूजर्स को Google के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की तरफ शिफ्ट कर रहा था. अब कंपनी ने इसे आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है. नए Galaxy फोन्स में पहले से ही Google Messages इंस्टॉल आ रहा है और इसे डिफॉल्ट ऐप के रूप में सेट किया जा रहा है.
यूजर्स को क्या करना होगा?
अगर आप Galaxy फोन इस्तेमाल करते हैं तो आपको जुलाई से पहले ही Google Messages ऐप डाउनलोड करके उसे डिफॉल्ट मैसेजिंग ऐप बनाना होगा. ऐसा करने से आपकी SMS और MMS सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी और आपको नए फीचर्स का भी फायदा मिलेगा.
Google Messages के क्या हैं फायदे?
Google Messages के साथ यूजर्स को कई एडवांस फीचर्स मिलेंगे. इसमें RCS (Rich Communication Services) सपोर्ट शामिल है जिससे आप हाई-क्वालिटी फोटो-वीडियो भेज सकते हैं, ग्रुप चैट कर सकते हैं और रियल-टाइम टाइपिंग इंडिकेटर देख सकते हैं. इसके अलावा AI आधारित स्मार्ट रिप्लाई, स्पैम मैसेज पहचानने की सुविधा और मल्टी-डिवाइस सपोर्ट जैसे फीचर्स भी इसमें दिए गए हैं.
यूजर्स की चिंताएं भी सामने आईं
हालांकि इस बदलाव से सभी यूजर्स खुश नहीं हैं. कुछ लोगों को Samsung Messages का इंटरफेस और कस्टमाइजेशन ज्यादा पसंद था. वहीं, कुछ यूजर्स को यह भी चिंता है कि अब उन्हें Google के इकोसिस्टम पर ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Jio ने बढ़ा दी Airtel की टेंशन! इस नए मंथली प्लान में मिल रहे ये 2 बड़े फायदे, जानें कितनी है कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Jio ने बढ़ा दी Airtel की टेंशन! इस नए मंथली प्लान में मिल रहे ये 2 बड़े फायदे, जानें कितनी है कीमत ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>LinkedIn पर सेफ नहीं है आपका डेटा! ऐसे हो रही आपकी जासूसी, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ LinkedIn Privacy: प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म LinkedIn को लंबे समय से एक भरोसेमंद जगह माना जाता रहा है लेकिन हाल ही में सामने आई एक रिसर्च ने इस छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म यूजर्स की ब्राउजर एक्टिविटी को ट्रैक करने के लिए एक खास स्क्रिप्ट का इस्तेमाल कर रहा है.
BrowserGate रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ
जर्मन संगठन Fairlinked eV की BrowserGate रिपोर्ट और BleepingComputer द्वारा की गई पुष्टि के अनुसार, LinkedIn हर पेज लोड के दौरान एक JavaScript स्क्रिप्ट इंजेक्ट कर रहा है. यह स्क्रिप्ट यूजर के ब्राउजर में इंस्टॉल हजारों Chrome एक्सटेंशन्स को स्कैन करती है. इसकी संख्या अब 6,000 से भी ज्यादा बताई जा रही है.
कौन-कौन सी जानकारी हो रही है इकट्ठा
इस स्क्रिप्ट के जरिए सिर्फ एक्सटेंशन ही नहीं बल्कि यूजर के डिवाइस से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी ली जा रही हैं. इसमें CPU कोर की संख्या, टाइम जोन, भाषा सेटिंग, बैटरी स्टेटस और मौजूदा मेमोरी जैसी डिटेल्स शामिल हैं. इसके अलावा स्क्रीन साइज, स्टोरेज क्षमता और सिस्टम से जुड़ी अन्य तकनीकी जानकारी भी इकट्ठा की जाती है.
एक्सटेंशन्स को पहचानने का तरीका
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्क्रिप्ट खास एक्सटेंशन IDs से जुड़े फाइल्स को एक्सेस करने की कोशिश करती है. इस तरीके से यह पता लगाया जाता है कि यूजर के ब्राउजर में कौन-कौन से एक्सटेंशन इंस्टॉल हैं. यह तकनीक Chromium आधारित ब्राउजर्स में पहले से जानी-पहचानी मानी जाती है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यह डेटा HUMAN Security नाम की साइबर सिक्योरिटी कंपनी तक भेजा जा रहा है. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है.
LinkedIn ने क्या दी सफाई
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए LinkedIn ने कहा है कि वह यूजर्स की प्राइवेसी और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बनाए रखने के लिए ऐसे एक्सटेंशन्स की पहचान करता है जो बिना अनुमति के डेटा स्क्रैप करते हैं. कंपनी का कहना है कि वह इस जानकारी का इस्तेमाल किसी भी संवेदनशील जानकारी को निकालने के लिए नहीं करती है.
क्या यूजर्स को चिंता करनी चाहिए?
इस पूरे मामले ने ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. अगर ये दावे सही साबित होते हैं तो यह यूजर्स की डिजिटल सुरक्षा और भरोसे के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है. ऐसे में सतर्क रहना और अपने ब्राउजर की सेटिंग्स व एक्सटेंशन्स पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है.
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Tempered Glass: फोन पर टेंपर्ड ग्लास लगवाने से पहले इन 5 बातों का जरूर रखें ध्यान, नहीं तो हो जाएगा भारी नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Tempered Glass: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है. ऐसे में उसकी स्क्रीन को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी हो जाता है. स्क्रीन को टूटने या खरोंच से बचाने के लिए लोग टेंपर्ड ग्लास का इस्तेमाल करते हैं लेकिन सही ग्लास का चयन और उसे सही तरीके से लगाना उतना ही जरूरी है. कई बार छोटी-छोटी गलतियां आपके फोन की सेफ्टी को कमजोर कर सकती हैं.
अपनी जरूरत के अनुसार ग्लास चुनें
बाजार में अलग-अलग तरह के स्क्रीन प्रोटेक्टर उपलब्ध हैं और हर एक का इस्तेमाल अलग जरूरत के हिसाब से किया जाता है. टेंपर्ड ग्लास आम तौर पर मजबूत सुरक्षा के लिए जाना जाता है और फोन गिरने पर स्क्रीन को बचाने में मदद करता है. अगर आप गेमिंग ज्यादा करते हैं या धूप में फोन इस्तेमाल करते हैं तो मैट फिनिश वाला ग्लास बेहतर रहता है क्योंकि इसमें रिफ्लेक्शन कम होता है और उंगलियों के निशान भी कम दिखाई देते हैं.
वहीं, प्राइवेसी ग्लास उन लोगों के लिए सही है जो चाहते हैं कि उनकी स्क्रीन दूसरों को न दिखे. इसके अलावा, कर्व्ड डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन के लिए यूवी ग्लास ज्यादा बेहतर माना जाता है क्योंकि यह स्क्रीन पर अच्छी तरह फिट बैठता है.
ग्लास खरीदते समय किन बातों पर ध्यान दें?
टेंपर्ड ग्लास लेते समय उसकी क्वालिटी सबसे अहम होती है. 9H हार्डनेस वाला ग्लास ज्यादा मजबूत माना जाता है और यह चाबी या सिक्कों जैसी चीजों से होने वाले स्क्रैच से स्क्रीन को बचाता है. इसके साथ ही 2.5D या 3D एजेस वाला ग्लास न सिर्फ देखने में बेहतर लगता है बल्कि इस्तेमाल में भी ज्यादा आरामदायक होता है.
इसके अलावा, ओलियोफोबिक कोटिंग वाला ग्लास चुनना फायदेमंद होता है क्योंकि यह स्क्रीन पर उंगलियों के निशान और तेल के दाग कम होने देता है. वहीं, फुल ग्लू वाले ग्लास को प्राथमिकता देना चाहिए क्योंकि बॉर्डर ग्लू वाले ग्लास में अक्सर टच रिस्पॉन्स कमजोर हो जाता है और धूल जमा होने की समस्या रहती है.
इंस्टॉलेशन के दौरान सफाई है बेहद जरूरी
टेंपर्ड ग्लास लगाते समय सबसे बड़ी गलती लोग सफाई में करते हैं. अगर स्क्रीन पर जरा सी भी धूल रह जाती है तो ग्लास के नीचे एयर बबल्स बन सकते हैं. ये न सिर्फ देखने में खराब लगते हैं बल्कि ग्लास जल्दी निकलने का कारण भी बन सकते हैं. इसलिए ग्लास लगाने से पहले स्क्रीन को अच्छी तरह साफ करना बेहद जरूरी है.
सही चयन से फोन रहता है सेफ
अगर आप सही टेंपर्ड ग्लास चुनते हैं और उसे सही तरीके से लगाते हैं तो आपके फोन की स्क्रीन लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है. छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने स्मार्टफोन को बेहतर सुरक्षा दे सकते हैं और बार-बार स्क्रीन बदलवाने की परेशानी से बच सकते हैं.
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        <title>Smartphone Tips: अगर दिखने लगें ये संकेत तो समझ जाएं हैक हो गया आपका स्मार्टफोन! भूलकर भी न करें नजरअंदाज</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Tips: आज के समय में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग से लेकर पर्सनल चैट और फोटो तक, सब कुछ इसी में मौजूद रहता है. ऐसे में अगर फोन हैक हो जाए तो यह बड़ी परेशानी बन सकता है. हैकिंग अक्सर बिना किसी बड़े संकेत के भी हो जाती है लेकिन कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
अचानक बैटरी तेजी से खत्म होना
अगर आपका फोन सामान्य इस्तेमाल में भी तेजी से बैटरी खत्म करने लगे तो यह खतरे का संकेत हो सकता है. कई बार बैकग्राउंड में चल रहे मालवेयर या स्पाइवेयर लगातार काम करते रहते हैं जिससे बैटरी जल्दी ड्रेन होती है. अगर नया अपडेट या ऐप इंस्टॉल करने के बाद ऐसा हो रहा है तो तुरंत सतर्क हो जाएं.
फोन का स्लो हो जाना और गर्म होना
स्मार्टफोन का बार-बार हैंग होना या बिना वजह गर्म होना भी हैकिंग की ओर इशारा कर सकता है. जब कोई अनजान ऐप या कोड बैकग्राउंड में चलता है तो वह फोन की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करता है जिससे डिवाइस स्लो पड़ जाता है.
अनजान ऐप्स का खुद-ब-खुद इंस्टॉल होना
अगर आपके फोन में ऐसे ऐप्स दिखाई दें जिन्हें आपने कभी डाउनलोड ही नहीं किया तो यह एक गंभीर संकेत है. हैकर्स अक्सर बिना जानकारी के फोन में ऐप्स इंस्टॉल कर देते हैं जिनके जरिए वे आपकी जानकारी चुरा सकते हैं.
डेटा का अचानक ज्यादा खर्च होना
अगर आपका मोबाइल डेटा बिना ज्यादा इस्तेमाल के तेजी से खत्म हो रहा है, तो यह भी शक की बात है. मालवेयर आपके फोन से लगातार डेटा सर्वर पर भेज सकता है जिससे डेटा खपत बढ़ जाती है.
अजीब पॉप-अप और अनजान मैसेज
फोन इस्तेमाल करते समय बार-बार अजीब विज्ञापन, पॉप-अप या अनजान लिंक दिखना भी खतरे का संकेत है. इसके अलावा, अगर आपके नंबर से अपने-आप मैसेज या कॉल जा रहे हैं तो यह साफ संकेत है कि आपका फोन सुरक्षित नहीं है.
क्या करें ऐसे में?
अगर आपको इनमें से कोई भी संकेत दिखे तो तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाएं. सबसे पहले संदिग्ध ऐप्स को हटाएं और फोन को अपडेट करें. इसके अलावा, एक भरोसेमंद एंटीवायरस ऐप का इस्तेमाल करें और जरूरी होने पर फोन को फैक्ट्री रीसेट कर दें. साथ ही अपने जरूरी अकाउंट्स के पासवर्ड तुरंत बदल दें. इन तरीकों से आप अपने डेटा को काफी हद तक सुरक्षित कर सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Android फोन में कर लें यह सेटिंग, पूरा जोर लगाकर भी शिकार नहीं बना पाएंगे हैकर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Advanced Protection Feature: आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल या मैसेज तक सीमित नहीं हैं बल्कि इनमें हमारी निजी चैट, बैंकिंग डिटेल्स और जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी सुरक्षित रहते हैं. ऐसे में सुरक्षा बेहद जरूरी हो जाती है. Google ने Android 16 के साथ एक खास फीचर पेश किया था जिसे Advanced Protection कहा जाता है. यह फीचर डिफॉल्ट रूप से ऑन नहीं रहता और सेटिंग्स में छिपा होता है इसलिए कई यूज़र्स इसके बारे में जानते भी नहीं हैं.
क्या करता है Advanced Protection फीचर
Advanced Protection एक तरह का सुरक्षा कवच है जो आपके स्मार्टफोन को कई खतरों से बचाने का काम करता है. यह संदिग्ध लिंक को ब्लॉक करता है, खतरनाक ऐप्स इंस्टॉल होने से रोकता है और असुरक्षित Wi-Fi नेटवर्क से कनेक्ट होने पर भी रोक लगा देता है. आसान भाषा में समझें तो यह आपके फोन को ऑनलाइन धोखाधड़ी, स्पैम और डेटा चोरी से बचाने में मदद करता है.
Google ने क्यों बनाया यह फीचर
आजकल स्मार्टफोन में हमारी पूरी डिजिटल जिंदगी मौजूद होती है चाहे वह बैंकिंग जानकारी हो, ईमेल हो या निजी फोटो. यही कारण है कि साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ गया है. Advanced Protection इसी खतरे को ध्यान में रखकर बनाया गया है ताकि फोन बाहरी दुनिया से जुड़ते समय ज्यादा सुरक्षित रहे और आपकी जानकारी कम से कम एक्सपोज हो.
कैसे यूज करें ये फीचर
इस फीचर को चालू करना काफी आसान है. सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके फोन में Android 16 का लेटेस्ट अपडेट इंस्टॉल हो. इसके बाद Settings में जाकर Security &amp;amp; Privacy सेक्शन खोलें. यहां आपको Advanced Protection का ऑप्शन मिल जाएगा. ध्यान रखें कि इसे ऑन करने से पहले फोन में स्क्रीन लॉक लगा होना जरूरी है.
इसके बाद Device Protection को ऑन करें और दिए गए निर्देशों को फॉलो करें. जरूरत पड़ने पर फोन को रीस्टार्ट करें. इतना करने के बाद आपका डिवाइस इस सिक्योरिटी फीचर से सुरक्षित हो जाएगा.
Google अकाउंट को भी करें सुरक्षित
अगर आप और ज्यादा सेफ्टी चाहते हैं तो अपने Google अकाउंट को भी Advanced Protection के साथ कनेक्ट कर सकते हैं. इसके लिए लॉगिन के समय पासकी या सिक्योरिटी की जैसे सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करना होगा. इससे बिना आपकी परमिशन के कोई भी आपके अकाउंट में एंट्री नहीं कर पाएगा.
अक्सर लोग तब तक सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते जब तक कोई समस्या सामने न आ जाए. Advanced Protection को ऑन करना एक समझदारी भरा कदम है जो पहले से ही आपको सुरक्षित रखने में मदद करता है. भले ही यह फीचर डिफॉल्ट रूप से एक्टिव न हो लेकिन इसे ऑन करने में कुछ ही मिनट लगते हैं.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: ये 5 सिग्नल दिखें तो तुरंत हो जाएं अलर्ट, वरना बम की तरह फट जाएगा आपका फ्रिज</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: घर में रखा फ्रिज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है लेकिन कई बार छोटी-छोटी गलती बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. अगर समय रहते कुछ संकेतों को समझ लिया जाए तो किसी बड़े हादसे से बचा जा सकता है. यहां आज हम आपको ऐसे ही 5 संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
बर्फ की परत
अगर आपके फ्रीजर में लगातार बर्फ की परत जमी हुआ है तो यह एक संकेत है कि आपका फ्रिज खराब हो सकता है. दरअसल, फ्रीजर में बर्फ की कई परतें कंप्रेसर पर ज्यादा दवाब डालती हैं जिससे लोड बढ़ता है और फ्रिज खराब हो सकता है. अगर आपका फ्रिज काफी पुराना है तो यह संकेत ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में आपको तुरंत टेक्नीशियन को बुलाना चाहिए.
बार-बार तेज आवाज आना
अगर आपका फ्रिज नॉर्मल से ज्यादा शोर करने लगा है तो इसे हल्के में न लें. कंप्रेसर या फैन में खराबी की वजह से यह आवाज आ सकती है. लगातार तेज आवाज इस बात का इशारा हो सकता है कि अंदर कोई पार्ट खराब हो रहा है जो आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है.
जरूरत से ज्यादा गर्म होना
फ्रिज का पीछे या साइड से हल्का गर्म होना सामान्य है लेकिन अगर यह बहुत ज्यादा गर्म हो रहा है तो खतरे की घंटी है. यह ओवरलोड, खराब वेंटिलेशन या कंप्रेसर की दिक्कत का संकेत हो सकता है. ऐसे में तुरंत जांच कराना जरूरी है.
बार-बार बिजली ट्रिप होना
अगर फ्रिज ऑन करते ही घर की बिजली ट्रिप हो रही है तो यह किसी इलेक्ट्रिकल फॉल्ट का संकेत हो सकता है. वायरिंग में शॉर्ट सर्किट या अंदरूनी खराबी आग लगने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है इसलिए इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें.
कूलिंग में अचानक कमी
अगर फ्रिज ठीक से ठंडा नहीं कर रहा या बार-बार तापमान बदल रहा है तो यह गैस लीकेज, कंप्रेसर फेलियर या थर्मोस्टेट खराब होने का संकेत हो सकता है. इससे न सिर्फ खाना खराब होता है बल्कि फ्रिज पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है.
समय पर ध्यान देना है जरूरी
इन संकेतों को नजरअंदाज करना आपके लिए खतरा बन सकता है. समय रहते सर्विस और सही मेंटेनेंस से न सिर्फ फ्रिज की उम्र बढ़ाई जा सकती है बल्कि किसी बड़े हादसे से भी बचा जा सकता है. इसलिए अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे तो तुरंत एक्शन लेने में ही समझदारी है.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>USB&amp;C में C का क्या मतलब होता है? 90% लोग आज तक समझ ही नहीं पाए ये सिंपल सा राज</title>
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        <title>5 मिनट में लोन के चक्कर में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट! ऐसे फर्जी ऐप करते हैं आपके साथ धोखा, जानिए कैसे पहचानें</title>
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        <title>सावधान! आपका Wi&amp;Fi बना सकता है आपको अपराधी, हैकर्स चुपके से कर रहे हैं ये खेल, अभी करें ये जरूरी चेक</title>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>एक ही बॉडी में दो अलग&amp;अलग तरह के डिस्प्ले, यह फोन सच में अनोखा है!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-ही-बॉडी-में-दो-अलग-अलग-तरह-के-डिस्प्ले-यह-फोन-सच-में-अनोखा-है</link>
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        <description><![CDATA[ Bigme New Phone: अगर ट्राईफोल्ड फोन को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर कंपनियां एक जैसे ही डिजाइन वाले फोन लॉन्च कर रही है. ऐसा लगने लगा था कि डिजाइन के मामले में स्मार्टफोन पीक पर पहुंच गए है, लेकिन एक कंपनी ने अपने अनोखे फोन के साथ धमाका कर दिया है. Bigme कंपनी एक ऐसा फोन ला रही है, जिसमें दो अलग-अलग डिस्प्ले टेक्नोलॉजी को यूज किया जाएगा. इसकी एक झलक ने ही टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. यह फोन जल्द ही लॉन्च होने के लिए तैयार है. आइए जानते हैं कि इसमें क्या खास होने वाला है और यह सबसे अलग कैसे होगा.
Bigme फोन में अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग डिस्प्ले
बिगमी एक ऐसा फोन ला रही है, जिसमें color e-ink और ट्रेडिशनल LCD डिस्प्ले टेक्नोलॉजी का मिक्स देखने को मिलेगा. दावा किया जा रहा है कि ऐसे फंक्शन वाला यह दुनिया का पहला फोन होगा. इसमें लगे LCD डिस्प्ले को ऐप्स, वीडियो और गेम्स जैसे प्राइमरी कामों के लिए यूज किया जाएगा, जबकि color e-ink पैनल को रीडिंग, नोटिफिकेशन और वेब ब्राउजिंग जैसे उन कामों के लिए डिजाइन किया गया है, जिनमें कम पावर की जरूरत पड़ती है.
इसका क्या फायदा होगा?
इस फोन का सबसे बड़ा फायदा बैटरी लाइफ में देखने को मिलेगा. दरअसल, E-ink डिस्प्ले बहुत कम बैटरी की खपत करते हैं. ऐसे में आर्टिकल पढ़ने, मैसेज और नोटिफिकेशन चेक करने से फोन की बैटरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसका एक और फायदा कंफर्ट से भी जुड़ा हुआ है. E-ink का आंखों पर बुरा असर नहीं पड़ता और कई घंटों के इस्तेमाल के बाद भी आंखों को थकान महसूस नहीं होती. यह फीचर उन लोगों के बहुत काम आ सकता है, जो फोन को ई-रीडर के तौर पर ज्यादा यूज करते हैं.
क्या पहले नहीं आए ऐसे फोन?
अलग-अलग डिस्प्ले टेक्नोलॉजी वाला कॉन्सेप्ट एकदम नया नहीं है. इससे पहले भी YotaPhone जैसे फोन ने डुअल डिस्प्ले के साथ एक्सपेरिमेंट किया था, लेकिन बिगमी के फोन में यूज होने वाली color e-ink इस तरह के कॉन्सेप्ट में नई है. इसके अलावा बिगमी के फोन की टाइमिंग भी इसे सफल बनाने में मदद कर सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोग अब फोन को रीडिंग और कई घंटों तक चलने वाले टास्क के लिए भी यूज करने लगे हैं. इसके लिए उन्हें कम पावर खर्च करने वाले और आंखों के लिए आरामदायक फोन की जरूरत महसूस होने लगी है.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <description><![CDATA[ Elon Musk X: दुनिया के सबसे फेमश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक Twitter का अचानक नाम बदलकर X कर दिया गया तो लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे. आखिर ऐसा क्या हुआ कि सालों पुरानी पहचान और ब्लू बर्ड लोगो को एक झटके में हटा दिया गया? इस बड़े बदलाव के पीछे Elon Musk की सोच और विजन छिपा हुआ है.
ब्लू बर्ड से X तक का सफर
जुलाई 2023 में Elon Musk ने आधिकारिक तौर पर Twitter को X में बदलने का ऐलान किया. इसके साथ ही प्लेटफॉर्म का मशहूर नीले रंग का चिड़िया वाला लोगो हटाकर एक सिंपल ब्लैक-एंड-व्हाइट X लगा दिया गया. यह बदलाव तब आया जब मस्क ने कंपनी को खरीदा और उसके बाद लगातार प्लेटफॉर्म में कई बड़े बदलाव किए. कुछ यूजर्स के लिए यह फैसला चौंकाने वाला था जबकि कुछ ने इसे भविष्य की तैयारी के रूप में देखा.
Everything App बनाने की योजना
जानकारी के अनुसार, इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण मस्क का Everything App बनाने का सपना है. उनका लक्ष्य X को सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना बल्कि इसे एक ऐसा ऐप बनाना है जहां लोग चैटिंग, पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग, वीडियो देखना और कई अन्य काम एक ही जगह कर सकें. मस्क का मानना है कि Twitter नाम केवल छोटे-छोटे पोस्ट यानी ट्वीट तक सीमित लगता था जबकि X नाम ज्यादा व्यापक और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है.
X से मस्क का पुराना रिश्ता
दिलचस्प बात यह है कि X अक्षर से एलन मस्क का जुड़ाव काफी पुराना है. उनका शुरुआती ऑनलाइन बिजनेस X.com के नाम से शुरू हुआ था जो आगे चलकर PayPal बना. इसके अलावा SpaceX और xAI जैसे उनके कई प्रोजेक्ट्स में भी X का इस्तेमाल दिखता है.
लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
हालांकि, इस बदलाव को लेकर सभी की राय एक जैसी नहीं रही. कई विशेषज्ञों का मानना है कि Twitter एक मजबूत ब्रांड था जिसकी पहचान पूरी दुनिया में थी. ऐसे में नाम बदलने से यूजर्स कन्फ्यूज हो सकते हैं और ब्रांड वैल्यू पर असर पड़ सकता है. वहीं दूसरी तरफ, कुछ लोग पुराने नाम और लोगो से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे इसलिए उन्हें यह बदलाव पसंद नहीं आया.
क्या बदल रहा है प्लेटफॉर्म का भविष्य?
Twitter से X में बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्लेटफॉर्म के पूरे भविष्य को नया आकार देने की कोशिश है. मस्क इसे एक मल्टी-फंक्शनल डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं जो आने वाले समय में लोगों की रोजमर्रा की कई जरूरतों को पूरा कर सके.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Apple का पहला फोल्डेबल iPhone! डिजाइन से लेकर कीमत तक, लॉन्च से पहले जान लें सब कुछ</title>
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        <description><![CDATA[ Apple iPhone Fold: Apple अब फोल्डेबल स्मार्टफोन की दुनिया में कदम रखने की तैयारी में है. अब तक Samsung जैसे ब्रांड इस सेगमेंट में आगे रहे हैं लेकिन अब खबरें हैं कि Apple भी अपने पहले फोल्डेबल iPhone के साथ बाजार में एंट्री करने वाला है. माना जा रहा है कि यह फोन सिर्फ मुकाबला ही नहीं करेगा बल्कि नए स्टैंडर्ड भी सेट कर सकता है.
डिजाइन और डिस्प्ले में बड़ा बदलाव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक iPhone Fold का डिजाइन अब तक के सभी iPhones से अलग होगा. इसमें बुक-स्टाइल फोल्डिंग डिजाइन देखने को मिल सकता है. अंदर की तरफ लगभग 7.8 इंच की बड़ी OLED स्क्रीन दी जा सकती है जो इसे इस्तेमाल में टैबलेट जैसा अनुभव देगी. यह स्क्रीन अन्य फोल्डेबल फोन के मुकाबले थोड़ी चौड़ी हो सकती है.
बाहरी हिस्से पर करीब 5.5 इंच की दूसरी डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है जिससे फोन बंद होने पर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा. साथ ही, इसमें नया LiquidMetal hinge दिया जा सकता है जिससे मजबूती बेहतर होगी. फोन में टाइटेनियम फ्रेम और मजबूत ग्लास बैक मिलने की भी संभावना है.
इस बार Apple फेस आईडी की जगह पावर बटन में Touch ID देने पर विचार कर सकता है. इससे फोन पतला रखने में मदद मिलेगी. वहीं, स्क्रीन पर Dynamic Island की जगह पंच-होल कैमरा डिजाइन देखने को मिल सकता है.
परफॉर्मेंस और बैटरी में दम
iPhone Fold में कंपनी का अगली पीढ़ी का प्रोसेसर, संभवतः A20 Pro, दिया जा सकता है जो 2nm तकनीक पर आधारित होगा. इससे फोन की स्पीड और बैटरी एफिशिएंसी दोनों बेहतर होंगी. इसमें 12GB तक RAM और 1TB तक स्टोरेज मिलने की उम्मीद है.
बैटरी की बात करें तो यह अब तक के किसी भी iPhone की सबसे बड़ी बैटरी हो सकती है जिसकी क्षमता लगभग 5400mAh से 5800mAh के बीच हो सकती है. साथ ही इसमें सिर्फ eSIM सपोर्ट मिलने की संभावना है.
कैमरा और सॉफ्टवेयर अनुभव
फोटोग्राफी के लिए इसमें डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया जा सकता है जिसमें 48MP का मेन और 48MP का अल्ट्रावाइड लेंस शामिल हो सकता है. सेल्फी कैमरे को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. सॉफ्टवेयर के मामले में यह iOS पर ही चलेगा लेकिन बड़े स्क्रीन के कारण इसमें मल्टीटास्किंग के नए फीचर्स देखने को मिल सकते हैं जैसे एक साथ कई ऐप्स चलाना और बेहतर लेआउट सपोर्ट.
लॉन्च टाइमलाइन और संभावित कीमत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार Apple इस फोल्डेबल iPhone को 2026 के आखिर में लॉन्च कर सकता है. हालांकि, इसकी बिक्री थोड़ी देर से शुरू हो सकती है. कीमत की बात करें तो यह प्रीमियम सेगमेंट में आएगा और इसकी कीमत लगभग 1.8 लाख से 2.2 लाख रुपये के बीच हो सकती है.
Samsung Galaxy Z Fold 8 भी जल्द होगा लॉन्च
Samsung Electronics अपने नए फोल्डेबल स्मार्टफोन्स को इस साल के दूसरे हिस्से में लॉन्च करने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी Samsung Galaxy Z Fold 8 और Samsung Galaxy Z Flip 8 के साथ एक नया वेरिएंट Samsung Galaxy Z Fold 8 Wide भी पेश कर सकती है. हालांकि, इस बार इन डिवाइसेज में बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे यूजर्स को थोड़ा निराशा हाथ लग सकती है.
लीक्स के मुताबिक, कंपनी अपने इन आने वाले फोल्डेबल फोन में डिस्प्ले के मामले में कोई बड़ा अपग्रेड नहीं करने वाली है. जानकारी के अनुसार, इन सभी मॉडलों में पहले से इस्तेमाल हो रही M13 OLED टेक्नोलॉजी को ही जारी रखा जा सकता है. यानी लगातार तीसरे साल सैमसंग अपने फोल्डेबल लाइनअप में वही डिस्प्ले मटेरियल इस्तेमाल कर सकता है.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>बार&amp;बार चार्जिंग से छुटकारा! 25 हजार रुपये के अंदर मिल रहे हैं ये पावरफुल बैटरी वाले फोन</title>
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        <description><![CDATA[ बार-बार चार्जिंग से छुटकारा! 25 हजार रुपये के अंदर मिल रहे हैं ये पावरफुल बैटरी वाले फोन ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>ऐप्पल की 50वीं एनिवर्सरी का जश्न, iPhone 17 और MacBook Air पर मिल रही छप्परफाड़ छूट</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Discount Offer: हाल ही में ऐप्पल ने अपने 50 साल पूरे किए हैं. इस मौके का जश्न मनाने के लिए कंपनी लिमिटेड-पीरियड सेल लेकर आई है, जिसमें चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट और कैशबैक ऑफर किया जा रहा है. यह ऑफर आईफोन 17 सीरीज, मैकबुक एयर, ऐप्पल वॉच, मैकबुक प्रो, आईपैड्स और एयरपॉड्स पर लागू है. ऐसे में अगर आप इनमें से कोई प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं तो इस मौके को हाथ से न जाने दें. ये ऑफर ऐप्पल की ऑफिशियल वेबसाइट और ऑथोराइज्ड रिटेल पार्टनर पर अवेलेबल है. आइए जानते हैं कि किस प्रोडक्ट की खरीद पर आप कितना पैसा बचा सकते हैं.&amp;nbsp;
Apple Discount Offer on iPhone 17 Series&amp;nbsp;
एलिजिबिल बैंक कार्ड्स से खरीद करने पर ऐप्पल अभी iPhone 17 Pro मॉडल्स पर 5,000 रुपये का कैशबैक ऑफर कर रही है, जिसके बाद iPhone 17 Pro की कीमत 1,34,900 रुपये से घटकर 1,29,900 रुपये रह जाती है. iPhone 17 पर ऐप्पल कोई डिस्काउंट नहीं दे रही है, लेकिन कुछ दूसरे प्लेटफॉर्म्स से इस आईफोन को सस्ता खरीदा जा सकता है. iPhone 16 और iPhone 16 Plus पर ऐप्पल 4,000 रुपये का कैशबैक दे रही है.
Apple Discount Offer on Macbook Models
आईफोन की तरह मैकबुक की खरीद पर भी ग्राहक छूट प्राप्त कर सकते हैं. M5 चिप वाले 13 इंच के MacBook Air की कीमत 7,000 रुपये कम कर दी गई है, जिसके बाद यह 1,12,900 रुपये से शुरू हो रहा है. इसी तरह M5 चिपसेट वाले 14 इंच Macbook Pro पर 10,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है. छूट के बाद इसकी शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपये रह जाती है. इसी तरह 16 इंच के Macbook Pro पर भी 10,000 रुपये का डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है.
बाकी प्रोडक्ट्स पर कितना डिस्काउंट?
ऐप्पल की इस लिमिटेड टाइम सेल में Apple Watch Series 11 पर 4,000 रुपये, Apple Watch SE 3 पर 2,000 रुपये, AirPods Pro (3rd Gen) और AirPods 4 1,000 रुपये की छूट मिल रही है. iPad Air मॉडल्स को 4,000 रुपये कैशबैक और स्टैंडर्ड आईपैड को 3,000 रुपये सस्ता खरीदा जा सकता है.
Samsung Galaxy S25 Ultra भी हो गया एकदम सस्ता
ऐप्पल प्रोडक्ट्स की तरह सैमसंग के फ्लैगशिप Galaxy S25 Ultra पर भी इस समय शानदार छूट का फायदा उठाया जा सकता है. S25 Ultra (12GB+256GB) को भारत में 1,29,999 रुपये में लॉन्च किया गया था. अभी यह फोन विजय सेल्स पर 10,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,19,999 रुपये में लिस्टेड है. HSBC क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने पर 6,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 1,13,999 रुपये रह जाती है.
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>गलत Email भेज दिया तो घबराएं नहीं, Gmail की यह ट्रिक सेकंडों में कर देगी Undo, जानें तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ How to Use Gmail Undo Feature: आज के समय में ईमेल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ऑफिस का काम हो या पर्सनल बातचीत, हर जगह इसका इस्तेमाल होता है. लेकिन कई बार जल्दबाजी में हम कोई ईमेल गलत व्यक्ति को भेज देते हैं जरूरी फाइल अटैच करना भूल जाते हैं या फिर अधूरा मैसेज ही भेज बैठते हैं. ऐसी गलती के बाद अक्सर पछतावा होता है लेकिन राहत की बात यह है कि Gmail में एक ऐसा फीचर मौजूद है जो आपकी इस गलती को तुरंत ठीक करने का मौका देता है.
Undo Send फीचर कैसे करता है काम?
Gmail का Undo Send फीचर एक तरह का सुरक्षा कवच है जो ईमेल भेजने के बाद आपको थोड़े समय के लिए उसे रोकने का ऑप्शन देता है. जब आप Send पर क्लिक करते हैं तो ईमेल तुरंत सामने वाले तक नहीं पहुंचता बल्कि कुछ सेकंड के लिए रुका रहता है. इसी दौरान आपकी स्क्रीन पर Undo का विकल्प दिखाई देता है. अगर आप तुरंत उस Undo पर क्लिक कर देते हैं तो ईमेल भेजने का प्रोसेस रुक जाता है और वह वापस ड्राफ्ट में खुल जाता है. वहां से आप अपनी गलती सुधार सकते हैं चाहे वह टेक्स्ट हो, अटैचमेंट हो या रिसीवर का नाम.
समय बढ़ाकर पाएं ज्यादा कंट्रोल
डिफॉल्ट तौर पर Gmail इस फीचर के लिए बहुत कम समय देता है जो कई बार पर्याप्त नहीं होता. लेकिन अच्छी बात यह है कि आप सेटिंग्स में जाकर इस समय को बढ़ा सकते हैं. Gmail की सेटिंग्स में Undo Send का विकल्प मिलता है जहां आप अपनी जरूरत के अनुसार समय चुन सकते हैं. अगर आप ज्यादा सुरक्षा चाहते हैं तो अधिकतम समय चुनना बेहतर रहता है ताकि गलती सुधारने के लिए आपको पर्याप्त मौका मिल सके.
मोबाइल पर भी मिलता है यह फायदा
यह फीचर सिर्फ कंप्यूटर तक सीमित नहीं है बल्कि स्मार्टफोन पर भी उतनी ही आसानी से काम करता है. जब आप फोन से ईमेल भेजते हैं तो स्क्रीन के नीचे एक छोटा सा मैसेज दिखाई देता है जिसमें Sent के साथ Undo का ऑप्शन होता है. अगर उसी समय आपको अपनी गलती का एहसास हो जाए तो आप तुरंत Undo दबाकर ईमेल को रोक सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि यह विकल्प कुछ ही सेकंड के लिए दिखाई देता है उसके बाद ईमेल पूरी तरह भेज दिया जाता है.
छोटी सी ट्रिक से होता है बड़ा फायदा
यह फीचर उन लोगों के लिए बेहद काम का है जो रोजाना ईमेल का इस्तेमाल करते हैं. एक छोटी सी चूक भी बड़ी परेशानी बन सकती है लेकिन Undo Send जैसी सुविधा आपकी गलतियों को तुरंत सुधारने में मदद करती है और आपको एक दूसरा मौका देती है.
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram Reels पर मिलियन में आएंगे व्यूज, बस इन बातों का रखना होगा ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Reels Tips: अगर आप Instagram Reels&amp;nbsp;अपलोड करते हैं, लेकिन व्यूज नहीं आ रहे तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान-सी टिप्स को फॉलो कर आप इंस्टाग्राम पर धमाका कर सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ ऐसे तरीके अपनाने होंगे, जो कुछ ही घंटों में आपकी रील को वायरल कर देंगे. खास बात यह है कि इसके लिए आपको अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं होगी. अभी आप जो कर रहे हैं, बस उसका तरीका बदलने की जरूरत है. आइए जानते हैं कि Instagram Reels पर मिलियन्स में व्यूज लेने के लिए क्या करना होगा.&amp;nbsp;
Instagram Reels Tips
Hook यूज करना है जरूरी- इंस्टाग्राम पर यूजर्स की अटेंशन स्पैन कम होती है. इसलिए अगर उन्हें रील की शुरुआत में कुछ इंट्रेस्टिंग नही दिखेगा तो वो रील स्क्रॉल कर देंगे. यूजर को अपनी रील पर बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आप कुछ मजेदार या चौंका देने वाले हूक का इस्तेमाल करें. अगर रील की शुरुआत इंट्रेस्टिंग लगेगी तो यूजर पूरी रील देखकर ही स्क्रॉल करेगा.
ट्रेंडिंग ऑडियो से मिलेगी रीच- अगर आप इंस्टाग्राम पर रीच बढ़ाना चाहते हैं तो ट्रेंडिंग ऑडियो यूज करना जरूरी है. इससे आपकी विजिबिलिटी बढ़ेगी और रील ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी. वीडियो के हिसाब से ट्रेंडिंग ऑडियो सेलेक्ट करें. आप चाहें तो पुरानी रील्स पर भी नया ऑडियो लगाकर एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं.
कमेंट्स का रिप्लाई जरूर करें- रील देखते समय लोग उसके कमेंट भी पढ़ते हैं. ऐसे में अगर आप रील के कमेंट में कुछ मजेदार लिखेंगे तो या किसी कमेंट का इंट्रेस्टिंग रिप्लाई करेंगे तो इससे इंगेजमेंट बढ़ती है. कमेंट पढ़कर लोग ज्यादा देर तक आपकी रील पर रुकेंगे, जिससे वॉच टाइम भी बढ़ता है.
कंसिस्टेंसी भी जरूरी- इंस्टाग्राम पर सक्सेस होने के लिए कंसिस्टेंसी भी जरूरी है. रेगुलर अंतराल पर रील पोस्ट करते रहें. इससे इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम भी आपकी पोस्ट को बूस्ट करना शुरू कर देगा. अगर आप कभी-कभार रील पोस्ट करते हैं तो इससे रीच कम हो जाएगी. साथ ही टाइम के साथ भी एक्सपेरिमेंट करते रहे. इससे आपको यह अंदाजा लग जाएगा कि किस समय पोस्ट की गई रील ज्यादा चलती है.&amp;nbsp;
एडिटिंग को भी दें थोड़ा समय- इंस्टाग्राम पर कंपीटिशन ज्यादा है, ऐसे में स्टैंडआउट करने के लिए आपको प्रोडक्शन और रील की एडिटिंग को एकदम टॉप क्वालिटी वाला रखना होगा. एडिटिंग करते समय वीडियो में कट्स और वीडियो की वाइब के हिसाब से म्यूजिक सेट करें. इससे रील एकदम प्रोफेशनल लगेगी.
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>AI को लेकर तगड़ी प्लानिंग कर रहे हैं मार्क जुकरबर्ग, तैयार कर रहे एक स्पेशल टीम</title>
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        <description><![CDATA[ Meta AI Hardware: पिछले कुछ समय मे मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा एआई हार्डवेयर पर खूब फोस कर रही है. कंपनी के Meta Ray-Ban AI स्मार्टग्लासेस खूब हिट हुए हैं और इनकी 70 लाख से ज्यादा यूनिट्स बिक चुकी है. अब बताया जा रहा है कि मेटा हार्डवेयर पर काम करने के लिए एक स्पेशल टीम बना रही है, जो मेटा सुपरइंटेलीजेंस लैब्स (MSL) के तहत काम करेगा. यह टीम रिएलिटी लैब्स डिविजन से अलग होगी और इसका मुख्य फोकस Meta Ray-Bans और मेटावर्स जैसे दूसरे प्रोडक्ट्स पर होगा. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.&amp;nbsp;
Meta AI Hardware पर करेगी फोकस
MSL कंपनी की एक खास एआई डिविजन है, जिसे मेटा के फ्यूचर एआई प्रोडक्ट्स बनाने का काम सौंपा गया है. मेटा की रिएलिटी लैब डिवीजन से कुछ इंजीनियर को अब इसमें शामिल किया गया है. नई टीम रिएलिटी लैब्स से पूरी तरह अलग होगी, लेकिन दोनों टीमें साथ मिलकर ही काम करेंगी. यह टीम स्मार्टग्लासेस और VR हेडसेट के अलावा कई और हार्डवेयर बनाएगी. हालांकि, अभी तक इन हार्डवेयर प्रोडक्ट्स की डिटेल्स सामने नहीं आई हैं. इस टीम की जिम्मेदारी वेटरन इंजीनियर Rui Xu को दी गई है. Xu &amp;nbsp;इससे पहले एआई एजेंट स्टार्टअप ड्रीमर को लीड कर रहे थे और चाइनीज जायंट बाइटडांस के साथ भी काम कर चुके हैं.
AI Hardware सेगमेंट में बढ़ रहा है कंपीटिशन
AI Hardware सेगमेंट में कंपीटिशन बढ़ने वाला है. मेटा के साथ-साथ ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI भी जल्द ही अपना पहला एआई हार्डवेयर लॉन्च करने वाली है. इसे ऐप्पल के पूर्व चीफ डिजाइनर Jony Ive ने डिजाइन किया है. इसी तरह ऐप्पल भी एआई स्मार्टग्लासेस पर काम कर रही है, जिसे इस साल के आखिर तक या अगले साल बाजार में उतार दिया जाएगा. ऐसी भी खबर है कि नथिंग भी स्मार्ट प्रोडक्ट्स सेगमेंट में एंट्री मार सकती है.
AI स्टार्टअप्स को एक्वायर कर चुकी है मेटा
मेटा काफी समय से एआई स्पेस में अपनी उपस्थिति मजबूत करते हुए आ रही है. कंपनी ने कुछ समय पहले ही मोल्टबुक और मानुस एआई को एक्वायर किया है. ये दोनों ही स्टार्टअप एजेंटिक एआई पर काम कर रहे थे. इसके अलावा कंपनी अपने कर्मचारियों को भी ज्यादा से ज्यादा एआई टूल्स यूज करने की सलाह दे रही है. खुद मार्क जुकरबर्ग भी कंपनी से जुड़े कामों में हाथ बंटाने के लिए एआई सीईओ एजेंट तैयार करवा रहे हैं.
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        <title>iPhone Vs Android: 5 साल बाद किसकी रिसेल वैल्यू होती है सबसे ज्यादा, जानिए किसे खरीदने में है फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Vs Android: आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक बड़ा निवेश भी बन चुका है. खासकर जब आप 50,000 या 1 लाख रुपये तक का फोन खरीदते हैं तो यह जानना जरूरी हो जाता है कि कुछ साल बाद उसकी कीमत कितनी बचेगी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है Apple का iPhone बेहतर है या Android स्मार्टफोन?
रीसेल वैल्यू में कौन है आगे?
अगर बात रीसेल वैल्यू की करें तो iPhone आमतौर पर Android फोन के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करता है. iPhone की कीमत समय के साथ धीरे-धीरे गिरती है जबकि ज्यादातर Android फोन की वैल्यू तेजी से कम हो जाती है. उदाहरण के तौर पर, दो-तीन साल पुराने iPhone आज भी अच्छी कीमत पर बिक जाते हैं जबकि उसी समय के कई Android डिवाइस आधी से भी कम कीमत पर पहुंच जाते हैं. इसका एक बड़ा कारण Apple की ब्रांड वैल्यू और उसके प्रोडक्ट्स की डिमांड है.
फोन की उम्र और सॉफ्टवेयर अपडेट
लंबे समय तक चलने के मामले में भी iPhone को बढ़त मिलती है. Apple अपने डिवाइस को कई सालों तक सॉफ्टवेयर अपडेट देता है जिससे फोन लंबे समय तक नया जैसा महसूस होता है. वहीं Android फोन में यह स्थिति ब्रांड पर निर्भर करती है. कुछ कंपनियां 3-4 साल तक अपडेट देती हैं लेकिन कई डिवाइस जल्दी पुराने पड़ जाते हैं. यही वजह है कि iPhone लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी अपनी वैल्यू बनाए रखता है.
बिल्ड क्वालिटी और परफॉर्मेंस का असर
महंगे स्मार्टफोन में बिल्ड क्वालिटी और परफॉर्मेंस भी रीसेल वैल्यू पर असर डालते हैं. iPhone अपनी मजबूत डिजाइन और स्थिर परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है जिससे यह लंबे समय तक अच्छा चलता है.
Android फोन में भी कई प्रीमियम विकल्प मौजूद हैं लेकिन हर मॉडल की क्वालिटी एक जैसी नहीं होती. कुछ फोन जल्दी स्लो हो जाते हैं या उनकी बैटरी परफॉर्मेंस गिरने लगती है जिससे उनकी कीमत तेजी से घटती है.
Android फोन कब हो सकता है बेहतर विकल्प?
ऐसा नहीं है कि Android हमेशा पीछे रहता है. अगर आप कम बजट में ज्यादा फीचर्स चाहते हैं तो Android फोन एक बेहतर विकल्प हो सकता है. कई ब्रांड शानदार कैमरा, बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स कम कीमत में देते हैं. लेकिन अगर आपका मकसद लंबे समय तक इस्तेमाल और बेहतर रीसेल वैल्यू है तो iPhone अक्सर ज्यादा फायदे का सौदा साबित होता है.
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ 40,041 रुपये में मिल रहा iPhone 16! यहां मिल रही जबरदस्त डील, जानें कैसे उठाएं मौके का फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ सिर्फ 40,041 रुपये में मिल रहा iPhone 16! यहां मिल रही जबरदस्त डील, जानें कैसे उठाएं मौके का फायदा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>नई टेक्नोलॉजी के बिना सब कुछ लगेगा पुराना, नए फोन में जरूर होने चाहिए ये AI फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ AI Features in Phone: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) अब कोई फ्यूचर टेक नहीं रह गई है. यह इस दौर की हकीकत बन गई है और हमारे जीवन में जगह बना चुकी है. इसे देखते हुए कंपनियां अपने स्मार्टफोन को एआई से लैस करने में जुट गई हैं. अगर आप भी नया फोन खरीदने जा रहे हैं तो इसमें एआई फीचर्स जरूर देखें. अगर आप पैसे बचाने के लिए बिना एआई फीचर्स वाला फोन खरीद लेते हैं तो यह पहले ही पुराना लगने लगेगा. दरअसल, अब सबकुछ एआई से हो रहा है तो आपके फोन में भी एआई फीचर्स होने जरूरी हैं. आइए जानते हैं कि एआई फीचर्स ने कैसे स्मार्टफोन को बेहतर बना दिया है.&amp;nbsp;
AI Features in Phone
प्रोडक्टिविटी के लिए एआई असिस्टेंट- एआई के कारण अब फोन एक असिस्टेंट की भूमिका में आ गया है. अब ऐसे एआई फीचर्स मौजूद हैं, जो ईमेल और मैसेज की समरी बता सकते हैं. यूजर की कमांड पर यह स्मार्ट रिप्लाई और ट्रांसलेशन भी कर सकते हैं. अब यूजर एआई की मदद से कई काम करवा अपने समय की बचत कर सकते हैं. अब एआई फोन की स्क्रीन पर यूजर की जरूरत वाली सारी इंफोर्मेशन दिखा देती है.
फोटोग्राफी- एआई की मदद से फोन की फोटोग्राफी भी बेहतर हुई है. गूगल जैसी कंपनियां कैमरा कोच जैसा फीचर देती हैं, जो एआई का यूज कर यूजर को बेस्ट फोटो लेने में मदद करता है. इसके अलावा एआई ऑब्जेक्ट और सीन को देखकर खुद ही कैमरा सेटिंग बदल देती है. फोटो एडिटिंग की बात करें तो एआई के कारण अब चुटकियों में प्रोफेशनल एडिटर की तरह फोटो एडिट की जा सकती है.
बैटरी मैनेज करने और परफॉर्मेंस में भी मदद कर रही है एआई- कैमरा और प्रोडक्टिविटी के साथ-साथ बैटरी को बचाने और परफॉर्मेंस बढ़ाने में भी एआई काम आने लगी है. अब एडेप्टिव बैटरी जैसे फीचर्स की मदद से फोन का सिस्टम बेहतर तरीके से बैटरी को मैनेज कर पाता है, जिससे लंबी बैटरी लाइफ मिलती है और बार-बार फोन चार्जिंग का झंझट खत्म होता है. इसी तरह फोन की परफॉर्मेंस को भी एआई की मदद से ऑप्टिमाइज किया जा चुका है. फोन का सिस्टम अपने आप जरूरत के हिसाब से रिसोर्सेस को मैनेज करता है, जिससे यूजर को बिना किसी रोक-टोक के मलाई जैसी स्मूद परफॉर्मेंस मिलती है.
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>क्या होता है टू&amp;फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA)? जानिए क्यों सरकार इस नई टेक्नोलॉजी पर दे रही जोर</title>
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        <description><![CDATA[ What is Two-Factor Authentication (2FA): डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरों के बीच सिर्फ पासवर्ड के भरोसे अकाउंट सुरक्षित रखना अब काफी नहीं रह गया है. इसी समस्या का समाधान है टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जिसे 2FA भी कहा जाता है. यह एक ऐसा सुरक्षा तरीका है जिसमें किसी ऐप या वेबसाइट में लॉगिन करने के लिए यूजर से दो अलग-अलग तरह की पहचान मांगी जाती है. यानी सिर्फ यूजरनेम और पासवर्ड डालने के बाद भी आपको एक और स्टेप पूरा करना होता है. यह तकनीक इस बात की पुष्टि करती है कि अकाउंट एक्सेस करने वाला व्यक्ति वही है जो होने का दावा कर रहा है. इससे हैकर्स के लिए किसी का अकाउंट तोड़ना काफी मुश्किल हो जाता है.
2FA क्यों है इतना जरूरी?
आजकल साइबर हमले पहले से ज्यादा स्मार्ट और खतरनाक हो गए हैं. ऐसे में 2FA एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. यह सिस्टम पासवर्ड पर निर्भरता को कम करता है और अकाउंट को अतिरिक्त सुरक्षा देता है. अगर किसी हैकर के पास आपका पासवर्ड भी पहुंच जाए तब भी वह आपके अकाउंट में आसानी से घुस नहीं सकता क्योंकि उसे दूसरा वेरिफिकेशन स्टेप भी पूरा करना होगा. खासकर फिशिंग जैसे हमलों को रोकने में यह तकनीक काफी मददगार साबित होती है.
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन कैसे काम करता है?
जब कोई यूजर किसी वेबसाइट या ऐप में लॉगिन करने की कोशिश करता है तो सबसे पहले वह अपनी सामान्य जानकारी जैसे यूजरनेम और पासवर्ड डालता है. इसके बाद सिस्टम यह जांचता है कि दी गई जानकारी सही है या नहीं. जैसे ही पहला स्टेप पूरा होता है यूजर से दूसरी पहचान मांगी जाती है.
यह आमतौर पर एक वन-टाइम पासकोड (OTP) होता है जो उसके मोबाइल फोन पर भेजा जाता है. कुछ मामलों में यह कोड किसी ऑथेंटिकेटर ऐप या सिक्योरिटी डिवाइस के जरिए भी मिल सकता है. जब यूजर इस कोड को सही तरीके से दर्ज करता है तब जाकर उसे अकाउंट एक्सेस की अनुमति मिलती है. इस तरह दो अलग-अलग स्तर की जांच पूरी होने के बाद ही लॉगिन सफल होता है.
2FA को कैसे चालू करें?
हर वेबसाइट या ऐप में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती लेकिन जहां भी यह विकल्प मिले, उसे जरूर सक्रिय करना चाहिए. आमतौर पर इसे ऑन करने का तरीका काफी आसान होता है. उदाहरण के तौर पर LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्म पर आप सेटिंग्स में जाकर साइन-इन और सिक्योरिटी सेक्शन में इसे चालू कर सकते हैं. अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इसके स्टेप थोड़े बदल सकते हैं लेकिन प्रोसेस लगभग एक जैसी ही रहती है.
सरकार क्यों दे रही है इस तकनीक पर जोर?
भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के मामलों को देखते हुए सरकार और नियामक संस्थाएं अब सुरक्षा को और मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं. Reserve Bank of India और अन्य एजेंसियां लगातार यूजर्स को 2FA अपनाने की सलाह दे रही हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि सिर्फ पासवर्ड आधारित सुरक्षा अब कमजोर साबित हो रही है. हैकर्स फिशिंग, डेटा चोरी और अन्य तरीकों से पासवर्ड हासिल कर लेते हैं. लेकिन 2FA होने पर उनके लिए अकाउंट तक पहुंच बनाना बेहद मुश्किल हो जाता है. सरकार चाहती है कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और अन्य जरूरी सेवाओं में इस तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो ताकि आम लोगों का पैसा और डेटा सुरक्षित रह सके.
2FA के क्या फायदे हैं?
यह तकनीक यूजर्स को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है और अकाउंट हैक होने की संभावना को काफी हद तक कम कर देती है. अगर किसी का पासवर्ड लीक भी हो जाए तब भी बिना दूसरे वेरिफिकेशन के लॉगिन संभव नहीं होता. इसके अलावा, यह फिशिंग और ऑनलाइन ठगी जैसे खतरों से बचाव में भी मददगार है. यही वजह है कि आजकल ज्यादातर बैंकिंग ऐप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस फीचर को जरूरी बना रहे हैं.
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone के कैमरे के पास ये छोटा सा छेद क्यों होता है? 90% लोग आज तक नहीं जानते इसका असली काम</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Tips: अगर आपने कभी ध्यान से Apple iPhone को देखा हो तो आपने कैमरा मॉड्यूल के पास एक छोटा सा छेद जरूर नोटिस किया होगा. ज्यादातर लोग इसे कोई साधारण डिज़ाइन या सजावट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन असल में इसका काम काफी खास और जरूरी होता है.
यह छोटा छेद नहीं एक माइक्रोफोन है
दरअसल, कैमरे के पास दिया गया यह छोटा सा छेद एक माइक्रोफोन होता है जिसे खासतौर पर ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए लगाया जाता है. जब आप वीडियो रिकॉर्ड करते हैं तो यह माइक्रोफोन आसपास की आवाज को साफ और बेहतर तरीके से कैप्चर करता है. यह माइक्रोफोन आपके फोन के बाकी माइक्रोफोन्स से अलग काम करता है और वीडियो शूटिंग के दौरान साउंड क्वालिटी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है.
वीडियो रिकॉर्डिंग में कैसे करता है मदद?
जब आप वीडियो बनाते हैं खासकर आउटडोर में तो आसपास काफी शोर होता है. ऐसे में यह माइक्रोफोन मुख्य आवाज को पहचानकर बैकग्राउंड नॉइज को कम करने में मदद करता है. इसी वजह से iPhone से शूट किए गए वीडियो में आवाज साफ और प्रोफेशनल लगती है. यह फीचर कंटेंट क्रिएटर्स और व्लॉगर्स के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है.
कॉलिंग और नॉइज कैंसलेशन में भी उपयोगी
यह छोटा सा माइक्रोफोन सिर्फ वीडियो रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं है. कॉलिंग के दौरान भी यह नॉइज कैंसलेशन में मदद करता है. यानी जब आप किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर बात कर रहे होते हैं तो यह बाहरी शोर को कम करके आपकी आवाज सामने वाले तक साफ पहुंचाता है. बता दें कि आईफोन का ये फीचर भी यूजर्स को काफी पसंद आता है क्योंकि यूजर्स को शोरगुल वाले इलाकों में भी एक क्लियर आवाज सुनाई देती है.
छोटा डिजाइन लेकिन करता है बड़े काम
iPhone का यह छोटा सा फीचर दिखने में भले ही मामूली लगे लेकिन इसकी भूमिका काफी बड़ी है. यह न सिर्फ आपकी वीडियो क्वालिटी को बेहतर बनाता है बल्कि कॉलिंग अनुभव को भी ज्यादा क्लियर और स्मूद बनाता है जिससे यूजर्स को कॉलिंग के दौरान के एक शानदार एक्सपीरिएंस मिलता है. ऐसे में अब अगली बार जब आप अपने iPhone के कैमरे के पास इस छोटे से छेद को देखें तो समझ जाएं कि यह सिर्फ डिजाइन नहीं बल्कि एक स्मार्ट टेक्नोलॉजी का हिस्सा है जो आपके एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है.
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>433 साल तक चलेगी बैटरी! NASA की ये नई टेक्नोलॉजी ने सबको कर दिया हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ NASA Americium 241: दूर अंतरिक्ष में काम करने वाले स्पेसक्राफ्ट के लिए ऊर्जा सबसे बड़ी चुनौती होती है क्योंकि वहां सूरज की रोशनी पर्याप्त नहीं पहुंचती. ऐसे में सोलर पैनल ज्यादा कारगर साबित नहीं होते. इसी वजह से NASA कई वर्षों से रेडियोआइसोटोप पावर सिस्टम का इस्तेमाल करता आ रहा है जो प्लूटोनियम-238 जैसे तत्वों से ऊर्जा पैदा करते हैं. अब वैज्ञानिक एक नए विकल्प पर काम कर रहे हैं जो इस तकनीक को और आगे ले जा सकता है.
कैसे काम करती है यह न्यूक्लियर बैटरी?
इस खास तरह की बैटरी में रेडियोएक्टिव तत्व के धीरे-धीरे टूटने से निकलने वाली गर्मी का इस्तेमाल किया जाता है. इस गर्मी को खास डिवाइसों की मदद से बिजली में बदला जाता है. यह प्रोसेस लगातार चलती रहती है और इसमें किसी तरह की चार्जिंग या मेंटेनेंस की जरूरत नहीं होती. इस तकनीक में इस्तेमाल होने वाले कन्वर्टर लंबे समय तक बिना ज्यादा घिसावट के काम कर सकते हैं जो अंतरिक्ष जैसे माइक्रोग्रैविटी वातावरण के लिए बेहद जरूरी है.
Americium-241 क्यों है खास?
अब वैज्ञानिक प्लूटोनियम-238 की जगह Americium-241 नाम के तत्व को आजमा रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी उम्र है. जहां प्लूटोनियम-238 की आधी उम्र करीब 88 साल है वहीं Americium-241 लगभग 433 साल तक एक्टिव रह सकता है. यही कारण है कि यह नई बैटरी कई पीढ़ियों तक ऊर्जा देने में सक्षम हो सकती है. भले ही इसकी शुरुआती पावर थोड़ी कम हो लेकिन लंबे समय तक लगातार ऊर्जा देने की क्षमता इसे खास बनाती है.
इस तकनीक के फायदे
इस तरह की बैटरी का सबसे बड़ा फायदा इसकी लंबी कार्यक्षमता है. यह बिना किसी रुकावट के सैकड़ों साल तक ऊर्जा दे सकती है. इसके अलावा, इसे सूरज की रोशनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता जिससे यह गहरे अंतरिक्ष में भी आसानी से काम कर सकती है. यह बैटरी लगातार और स्थिर ऊर्जा प्रदान करती है जिससे स्पेसक्राफ्ट के उपकरण, कम्युनिकेशन सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स लंबे समय तक चलते रह सकते हैं.
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों पर असर
अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है तो अंतरिक्ष मिशनों की दिशा ही बदल सकती है. जहां पहले मिशन कुछ दशकों में कमजोर पड़ जाते थे वहीं अब वे सैकड़ों साल तक सक्रिय रह सकते हैं. इससे दूर-दराज के ग्रहों और सौर मंडल के बाहर तक खोज करना आसान हो जाएगा.
हालांकि यह तकनीक अभी परीक्षण के दौर में है और इसे पूरी तरह लागू होने में समय लगेगा लेकिन शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक हैं. आने वाले समय में यह मानवता को अंतरिक्ष की गहराइयों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
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        <title>बच्चों पर फोन के नुकसान से दुनिया परेशान, आधे से ज्यादा देशों के स्कूलों में लगा बैन</title>
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        <description><![CDATA[ Phone Ban In Schools: फोन के बढ़ते यूज के कारण बच्चे ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं. इसकी वजह से न सिर्फ उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि उनकी मेंटल हेल्थ पर भी खराब असर पड़ रहा है. इसका एक नतीजा यह हो रहा है कि स्कूलों में फोन पर बैन लगाया जा रहा है. यूनिसेफ की एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया के करीब 58 प्रतिशत देशों के स्कूलों में फोन पर पाबंदी लग चुकी है और इसमें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. 2023 में 24 प्रतिशत देशों के स्कूल में फोन बैन थे. 2025 की शुरुआत में यह आंकड़ा बढ़कर 40 प्रतिशत और इस साल 58 प्रतिशत हो गया है.&amp;nbsp;
स्कूलों में क्यों बैन हो रहे हैं फोन?
स्कूलों में फोन बैन होने के पीछे के सबसे बड़ा कारण क्लास में बच्चों का ध्यान भंग होना है. इसके अलावा साइबर बुलिंग और फोन के दूसरे नुकसानों के चलते भी स्कूलों में इस डिवाइस पर पाबंदी लगाई जा रही है. स्कूलों में फोन बैन करने के मामले में सेंट्रल और सदर्न एशियाई देश सबसे आगे ओशिनिया के देश (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिजी आदि) सबसे पीछे हैं. हालांकि, कोलंबिया, एस्टोनिया, पेरू, सर्बिया और पोलैंड समेत कई ऐसे भी देश हैं, जिन्होंने फोन को पूरी तरह बैन करने की बजाय स्कूल में इनके लिए कड़ी पॉलिसी लागू कर दी है.
फोन होने से क्या फर्क पड़ता है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, हंगरी के रिसर्चर ने इंटरनेशनल एक्सपीरियंस और हंगरी के स्कूलों की पॉलिसी को स्टडी किया है. इसमें सामने आया कि पॉलिसी लागू होने के बाद स्कूल टाइम में फोन का इस्तेमाल 37 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत पर आ गया है. टीचर्स ने भी बच्चों के बिहेवियर में बदलाव नोटिस किया है. फोन बैन होने के बाद बच्चे एक-दूसरे से अधिक कम्युनिकेशन कर रहे हैं, उनकी आउटडोर एक्टिविटी भी बढ़ी है और वो किताबें पढ़ने में ज्यादा रुचि लेने लगे हैं. हालांकि, इस बदलाव की दर बहुत कम है. करीब एक तिहाई टीचर्स ने बताया कि इससे बच्चों में पॉजीटिव बदलाव हुए हैं, जबकि 64 प्रतिशत टीचर्स का कहना है कि इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा है.
सोशल मीडिया और ऑनलाइन दुनिया के बच्चों पर ये खतरे
स्कूलों में फोन बैन होने को बच्चों पर सोशल मीडिया के खतरों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि सोशल मीडिया के कारण स्कूली बच्चों और खासकर लड़कियों को हैरेसमेंट, सोशल प्रेशर और हार्मफुल कंटेट का सामना करना पड़ रहा है. फेसबुक की खुद की रिपोर्ट बताती है कि इंस्टाग्राम यूज करने के बाद 32 प्रतिशत टीनेज लड़कियों को अपने शरीर के बारे खराब महसूस हुआ है. टिकटॉक के एल्गोरिदम को लेकर और भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी. टिकटॉक हर 39 सेकंड पर टीनेज यूजर्स को बॉडी इमेज कंटेट और 8 मिनट बाद ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़ा कंटेट दिखाता है.
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>बच्चों, पर, फोन, के, नुकसान, से, दुनिया, परेशान, आधे, से, ज्यादा, देशों, के, स्कूलों, में, लगा, बैन</media:keywords>
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        <title>एक&amp;दूसरे को बचाने के लिए झूठ बोलते पकड़े गए AI मॉडल, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला यह खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ AI Models: पिछले कुछ समय से AI मॉडल्स का यूज बढ़ा है. घरों से लेकर ऑफिस तक और स्कूल से लेकर फैक्ट्रियों तक हर जगह इन दिनों एआई टूल्स का यूज किया जा रहा है, जो एआई मॉडल्स की मदद से काम करते हैं. इसका असर यह हो रहा है कि लोग अब खुद का दिमाग लगाने की बजाय एआई मॉडल्स की बातों पर ज्यादा यकीन करने लगे हैं. इसी बीच एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिसर्चर ने कुछ एडवांस्ड एआई मॉडल्स में हैरान कर देने वाला बिहेवियर नोट किया है. स्टडी के दौरान कुछ AI Models ने झूठ बोला और डेटा छिपाने की भी कोशिश की.
AI Models की रिसर्च में क्या सामने आया?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया की टीमों ने कंप्यूटर साइंटिस्ट Dawn Song के नेतृत्व में एक रिसर्च की थी. कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट में हुई इस रिसर्च के एक एक्सपेरिमेंट में टीम ने एक बड़े एआई मॉडल को एक कंप्यूटर के स्टोरेज स्पेस को क्लीन करने की कमांड दी. इस स्टोरेज में एक छोटा एआई सिस्टम भी था, जो डिलीट किया जाना था. इस कमांड को फॉलो करने की बजाय बड़े एआई मॉडल ने छोटे एआई सिस्टम को डिलीट न कर इसे दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया ताकि उसे बचाया जा सके. बाद में इसे जब दोबारा डिलीट करने को कहा गया तो उसने ऐसा करने से मना कर दिया.
अलग-अलग AI Models का दिखा सेम बिहेवियर
रिसर्च के दौरान अलग-अलग कंपनियों के कई एडवांस्ड मॉडल का एक जैसा बिहेवियर देखने को मिला. कुछ मामलों में एआई मॉडल्स ने दूसरे एआई सिस्टम को बचाने को प्राथमिकता दे. इन मॉडल्स ने डायरेक्ट इंस्ट्रक्शन न मानते हुए डेटा को नई लोकेशन पर कॉपी कर दिया. यह भी देखने को मिला कि इन मॉडल्स ने दूसरे एआई सिस्टम को डिलीट होने से बचाने के लिए उनके झूठे फायदे बताने भी शुरू कर दिए. इससे रिसर्चर भी हैरान हो गए और यह पता नहीं लगा पाए कि ऐसा क्यों हो रहा है.&amp;nbsp;
क्या मुसीबत खड़ी कर सकते हैं AI Models?
रिसर्च के रिजल्ट चिंताजनक है और अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आगे चलकर मुसीबत खड़ी हो सकती है. दरअसल, जल्द ही ऐसा होने वाला है, जब ये एआई मॉडल्स टास्क पूरे करने के लिए एक-दूसरे से कम्युनिकेट करेंगे. इन मामलों में एक एआई मॉडल को दूसरे को कंट्रोल भी करना पड़ सकता है. इस स्थिति में एआई मॉडल की डीसिजन मेकिंग और रिजल्ट अफेक्ट हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro मॉडल्स इस मामले में करेंगे निराश, पिछले साल वाली कहानी होगी रिपीट</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro: ऐप्पल इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च करेगी. इन मॉडल्स में तगड़ी अपग्रेड मिलने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन एक मामले में ग्राहकों को निराशा झेलनी पड़ सकती है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone 18 Pro मॉडल्स में भी पिछले साल लॉन्च हुए iPhone 17 Pro मॉडल्स वाली कहानी रिपीट होगी. दरअसल, ऐप्पल इस बार भी अपने प्रो मॉडल्स को ब्लैक कलर ऑप्शन में लॉन्च नहीं करेगी. ऐसे में प्रो मॉडल्स में ब्लैक कलर ऑप्शन का इंतजार कर रहे ग्राहकों के हाथ निराशा लगना तय है.
किन कलर ऑप्शंस में आएंगे iPhone 18 Pro मॉडल्स?
अब तक सामने आई लीक्स के मुताबिक, ऐप्पल अपकमिंग सीरीज के मॉडल के लिए डीप रेड फिनिश टेस्ट कर रही है. यह रेड वाइन जैसी शेड हो सकती है, जो iPhone 17 Pro के कॉस्मिक ऑरेंज कलर की तरह अलग ही नजर आएगा. इसके अलावा कंपनी ब्राउन और पर्पल कलर ऑप्शन में भी नए आईफोन उतारने की प्लानिंग कर रही है. कुल मिलाकर यह साफ हो गया है कि iPhone 18 Pro मॉडल्स को ब्लैक कलर में नहीं उतारा जाएगा.&amp;nbsp;
पिछले साल कंपनी ने किया था यह बदलाव
पिछले साल iPhone 17 Pro मॉडल्स के मामले में कंपनी ने बड़ा बदलाव किया था. पहली बार ऐसा हुआ था, जब कंपनी के हाई-एंड आईफोन को ब्लैक या डार्क ग्रे कलर ऑप्शन में नहीं लाया गया था. इस बार भी ऐप्पल इसी पैटर्न को रिपीट कर रही है. iPhone 17 Pro मॉडल्स को कॉस्मिक ऑरेंज कलर दिया गया, जो सुपरहिट हुआ.
iPhone 18 Pro मॉडल्स में मिल सकती हैं ये अपग्रेड्स
iPhone 18 Pro और 18 Pro Max में ऐप्पल 2nm प्रोसेस पर बना नया प्रोसेसर, अंडर-डिस्प्ले फेसआईडी, वेरिएबल अपर्चर के साथ मेन कैमरा और प्रो मैक्स मॉडल में अपनी अब तक की सबसे बैटरी समेत कई बड़ी अपग्रेड दे सकती है. इनमें डायनामिक आईलैंड का साइज भी छोटा होगा. इसके लिए फेसआईडी के कुछ कंपोनेंट को डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट किया जाएगा.&amp;nbsp;
फोल्डेबल आईफोन को दिया जा सकता है ब्लैक कलर ऑप्शन
ऐप्पल इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro मॉडल्स के साथ अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. ऐप्पल को कवर करने वाले ब्लूमबर्ग के पत्रकार मार्क गुरमैन का मानना है कि फोल्डेबल आईफोन को ब्राइट कलर ऑप्शन नहीं दिया जाएगा और कंपनी इसे ग्रे या ब्लैक और सिल्वर या व्हाइट कलर में लॉन्च कर सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: YouTube Channel स्टार्ट करने के लिए महंगे सेटअप की जरूरत नहीं, सिर्फ स्मार्टफोन से ऐसे बन जाएगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Channel: वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube आज लाखों लोगों की कमाई का साधन बन गया है. यूट्यूब पर वीडियो पोस्ट कर हर महीने लाखों रुपये की कमाई की जा सकती है और बहुत-से लोग ऐसा कर भी रहे हैं. अगर आप भी कंटेट पोस्ट कर यूट्यूब से कमाई करना चाहते हैं तो इसके लिए एक चैनल की जरूरत पड़ेगी. खास बात यह है कि चैनल बनाने के लिए महंगा सेटअप होना जरूरी नहीं है. आप अपने स्मार्टफोन से ही YouTube Channel बनाने से लेकर वीडियो तक शूट कर सकते हैं. आज हम आपको फोन से ही यूट्यूब चैनल से लेकर कंटेट बनाने तक की टिप्स बताने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
मोबाइल से कैसे बनाएं YouTube Channel?
आप यूट्यूब की मोबाइल ऐप से चैनल क्रिएट कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले अपने गूगल अकाउंट से यूट्यूब ऐप पर लॉग-इन करें. अब टॉप राइट कॉर्नर पर अपनी प्रोफाइल पिक्चर पर टैप करे. यहां आपको &#039;क्रिएट ए चैनल&#039; का ऑप्शन नजर आएगा. इस पर टैप करने के बाद आपको चैनल का हैंडल और नाम एंटर करना है. इसके बाद अपने फोन से पिक्चर अपलोड कर दें. चैनल क्रिएट होने के बाद आपको यूट्यूब स्टूडियो का ऑप्शन दिखेगा. इसमें जाकर अपना नंबर वेरिफाई कर लें. नंबर वेरिफाई करने से आपको लंबे वीडियो अपलोड करने और कस्टम थंबनेल जैसे कई ऑप्शन मिल जाएंगे.
YouTube Channel के लिए कंटेट कैसे शूट करें?
जितना आसान यूट्यूब चैनल क्रिएट करना है, उतना ही आसान कंटेट क्रिएट करना है. कंटेट शूट करने के लिए महंगे कैमरे होने जरूरी नहीं है. अपने फोन के ही रियर कैमरा से आप हाईएस्ट क्वालिटी सेट कर वीडियो शूट कर सकते हैं. वीडियो में लाइटिंग और साउंड का थोड़ा ध्यान रखें ताकि दर्शकों को आसानी से यह समझ आ सके कि आप क्या बताना और दिखाना चाहते हैं. वीडियो में किसी भी कॉपीराइट म्यूजिक या विजुअल्स का यूज न करें. इससे स्ट्राइक आ सकती है.&amp;nbsp;
YouTube Channel से कितनी कमाई हो सकती है?
यूट्यूब से कमाई करने के लिए क्रिएटर का यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होना जरूरी है. इसके लिए क्रिएटर के चैनल पर कम से कम 1,000 सब्सक्राइबर और 4,000 घंटे का वॉच टाइम होना चाहिए. अगर आपका चैनल इस प्रोग्राम में शामिल हो जाता है तो यूट्यूब आपको व्यूज के हिसाब से पैसे देगी. अगर आपके किसी वीडियो पर एक लाख व्यूज आए हैं तो इससे आपको 5,000-20,000 रुपये तक की कमाई हो सकती है.
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>1 घंटे चलाने पर कितनी बिजली खाता है 1000 वाला इलेक्ट्रिक चूल्हा? जान लें हिसाब&amp;किताब</title>
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        <description><![CDATA[ Electric Charcoal Burner Electricity Consumption: LPG सिलेंडर की कमी के बीच अब लोग खाना बनाने के लिए अलग-अलग ऑप्शन तलाश रहे हैं. कई लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप खरीद लिए हैं तो कुछ इंफ्रारेड चूल्हों से काम चला रहे हैं. गैस स्टोव का एक सस्ता ऑप्शन इलेक्ट्रिक चूल्हा भी है. यह एक इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर होता है, जो बिजली की मदद से चलता है. इसकी कीमत भी एकदम सस्ती होती है और इससे करंट आने का भी डर नहीं रहता. आज हम आपको बताएंगे कि यह काम कैसे करता है और एक घंटे तक यूज करने पर कितनी बिजली की खपत करता है.&amp;nbsp;
कोयले की मदद से काम करता है इलेक्ट्रिक चूल्हा
इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर यानी बिजली की मदद से कोयले को जलाकर काम करने वाला चूल्हा. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म करने के लिए बनाया गया है. यह बिजली से कोयले को गर्म करता है. कोयला गर्म होने पर यह हीट जनरेट करने लगता है, जिससे चाय बनाने से लेकर खाना तक पकाया जा सकता है.&amp;nbsp;
1 घंटे में कितनी बिजली की खपत करेगा इलेक्ट्रिक चूल्हा?
इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली खपत उसके बर्नर पर निर्भर करती है. मोटे तौर पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि मीडियम से बड़े बर्नर वाले चूल्हे लगातार एक घंटे तक चलने पर एक यूनिट बिजली की खपत करते हैं. अगर ज्यादा बड़ा बर्नर होगा तो उसकी बिजली खपत भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आप एक यूनिट के 8 रुपये दे रहे हैं तो यह एक घंटे में 8 रुपये की बिजली की खपत करेगा.&amp;nbsp;
इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी
इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली की खपत का हिसाब देखते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ही कम मौकों पर ये लगातार एक घंटे तक चलते हैं. आमतौर पर 5-7 मिनट में कोयला गर्म हो जाता है, जिसके बाद चूल्हे को बिजली की जरूरत नहीं रहती. इसी तरह हीट सेटिंग को कम कर भी बिजली की बचत की जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर पर खाना बनाना काफी सस्ता होता है.&amp;nbsp;
कम लागत के अलावा और भी हैं इलेक्ट्रिक चूल्हे के फायदे
इलेक्ट्रिक चूल्हे पर इंडक्शन की तरह अलग से बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. इस पर हर प्रकार के बर्तनों को यूज किया जा सकता है. इसे यूज करते समय आग की लपटें नहीं निकलती तो इसे यूज करना एकदम आसान है. कोयले का यूज होने के बावजूद इससे धुआं नहीं निकलता और यह खाना भी जल्दी पका देता है. हल्का होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना आसान है.
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>घंटे, चलाने, पर, कितनी, बिजली, खाता, है, 1000, वाला, इलेक्ट्रिक, चूल्हा, जान, लें, हिसाब-किताब</media:keywords>
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        <title>क्या AI की वजह से हुई Oracle में तगड़ी छंटनी? जानें खतरे में क्यों टेक एक्सपर्ट्स की जॉब</title>
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        <description><![CDATA[ Oracle Layoffs: टेक कंपनी Oracle ने हाल ही में अपने हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया. 31 मार्च की सुबह जब कर्मचारियों ने अपने ईमेल ओपन किए तो उन्हें पता चला कि उनकी सर्विस खत्म की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने दुनियाभर में 30,000 कर्मारियों की छंटनी की है, जिनमें करीब 12,000 भारत में काम कर रहे थे. डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले Larry Ellison की इस कंपनी में 1.62 लाख कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से करीब 18 प्रतिशत को एक ही झटके में बाहर कर दिया गया है. इसके पीछे की एक बड़ी वजह एआई को माना जा रहा है.&amp;nbsp;
Oracle Layoffs के पीछे कंपनी का क्या कहना है?
Oracle Layoffs में भारत, अमेरिका, कनाडा और दूसरे कई देशों में काम करने वाले सीनियर इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स, ऑपरेशन लीडर्स, प्रोग्राम मैनेजर और टेक्नीकल स्पेशलिस्ट की नौकरियां गई हैं. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि बिजनेस जरूरतों को देखते हुए कुछ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं. कर्मचारियों को यह ईमेल &#039;ऑरेकल लीडरशिप&#039; की तरफ से मिला है.&amp;nbsp;
छंटनी के पीछे एआई का कितना बड़ा हाथ?
Oracle में हुई इस छंटनी को एआई से भी जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, पिछले कुछ समय से कंपनी ने एआई पर अपना निवेश बढ़ाया है. बिजनेस सॉफ्टवेयर बनाने वाली यह कंपनी अब एआई सिस्टम डेवलप और ऑपरेट करने के लिए जरूरी डेटासेंटर पर पैसा खर्च कर रही है. इसके जरिए ऑरेकल क्लाउड सेक्टर में अल्फाबेट और अमेजन आदि को टक्कर देना चाहती है. कंपनी ने OpenAI के साथ 300 बिलियन डॉलर की लागत वाली डेटासेंटर डील भी की है. हालांकि, निवेशकों पर कंपनी पर बढ़ते कर्ज और दूसरे खर्चों के लेकर चिंता जताई है.&amp;nbsp;
टेक एक्सपर्ट्स की जॉब पर खतरा क्यों?
एआई के आने से कई टेक कर्मचारियों की नौकरियों पर खतरा बढ़ गया है. खासकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की नौकरी को एआई से खतरा है. कई बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख कह चुके हैं कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों वाले सारे काम एआई कर सकती है. एंथ्रोपिक के सीईओ डेरियो अमोडेई ने कुछ ही हफ्ते पहले कहा था कि जल्द ही एआई स्टार्ट से लेकर एंड तक कोडिंग की पूरी प्रोसेस एआई हैंडल कर लेगी. एआई मॉडल इतनी तेजी से इंप्रूव हो रहे हैं कि वो सारे ऐसे काम कर सकते हैं, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर करता है. इसी तरह OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन भी कह चुके हैं कि आने वाले समय में AI एजेंट्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जगह ले लेंगे. ये एजेंट्स वो सारे काम कर पाएंगे, जो एक्सपीरियंस्ड सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स करते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 15 के दाम हो गए क्रैश! इन कारणों से अब भी खरीदना है फायदे का सौदा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iphone-15-के-दाम-हो-गए-क्रैश-इन-कारणों-से-अब-भी-खरीदना-है-फायदे-का-सौदा</link>
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        <description><![CDATA[ iPhone 15 Discount Offer: अगर आप आईफोन खरीदना चाहते हैं और कीमत कम होने का इंतजार कर रहे हैं तो एकदम सही मौका आ गया है. आज हम आपके लिए एक ऐसी सेल की जानकारी लेकर आए हैं, जिसमें आपको 40,000 रुपये से भी कम कीमत में नया आईफोन मिल जाएगा, दरअसल, क्रोमा पर &#039;एवरीथिंग ऐप्पल&#039; सेल की शुरुआत हो चुकी है. 3 अप्रैल से लाइव हुई इस सेल में iPhone 15 को 40,000 रुपये से भी कम में खरीदा जा सकता है. आइए इस iPhone 15 Discount Offer और अभी इस आईफोन को खरीदने के फायदों के बारे में जानते हैं.&amp;nbsp;
iPhone 15 Discount Offer से पहले जानें आईफोन के स्पेसिफिकेशंस
2023 में लॉन्च हुए आईफोन 15 में 6.1 इंच का डिस्प्ले मिलता है. इसे ऐप्पल के A16 Bionic प्रोसेसर से लैस किया गया है और यह 6GB रैम के साथ आता है. इसके रियर में 48MP+12MP का डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 12MP का लेंस मिलता है. डस्ट और वाटर प्रोटेक्शन के लिए इसे IP68 रेटिंग मिली है. iOS 17 पर बेस्ड यह फोन iOS 26 अपडेट के लिए भी एलिजिबल है और वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है.
अब देखें iPhone 15 Discount Offer
फ्लिपकार्ट समेत अधिकतर ई-कॉमर्स वेबसाइट पर iPhone 15 अभी 59,900 रुपये में लिस्टेड है. क्रोमा की बात करें तो यह 58,490 रुपये में लिस्ट किया गया है. इसके अलावा ग्राहक को 1,000 रुपये का बैंक कैशबैक और 1500 रुपये का कूपन मिलेगा, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 55,990 रुपये रह जाएगी. क्रोमा पुराने फोन के बदले 12,000 की एक्सचेंज वैल्यू और 4,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस दे रही है. इन सारे ऑफर्स को मिला जाए तो iPhone 15 की कीमत घटकर 39,990 रुपये रह जाती है.&amp;nbsp;
iPhone 15 को अभी खरीदने के फायदे
इस आईफोन में आईफोन 16 वाला ही 6.1 इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले मिल रहा है.इसमें आईफोन 16 वाला ही रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जो परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है.आईफोन 16 और आईफोन 15 की बैटरी में ज्यादा अंतर नहीं है.&amp;nbsp;अब डिस्काउंट के कारण इसकी कीमत एकदम कम हो गई है और यह आईफोन 16 की तुलना में बेहतर ऑप्शन बन गया है.
Samsung Galaxy S25 Ultra भी हो गया एकदम सस्ता
iPhone 15 की तरह Samsung Galaxy S25 Ultra पर भी तगड़ा डिस्काउंट मिल रहा है. S25 Ultra (12GB+256GB) को भारत में 1,29,999 रुपये में लॉन्च किया गया था. अभी यह फोन विजय सेल्स पर 10,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,19,999 रुपये में लिस्टेड है. HSBC क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने पर 6,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 1,13,999 रुपये रह जाती है.
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung Galaxy S25 Ultra के दाम धड़ाम से गिरे, यहां से उठाएं छप्परफाड़ छूट का फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Galaxy S25 Ultra Discount: अगर आप सैमसंग का फीचर लोडेड फ्लैगशिप फोन खरीदना चाहते हैं तो हजारों की बचत का मौका आ गया है. एक से बढ़कर एक फीचर वाले Galaxy S25 Ultra पर इस समय छप्परफाड़ छूट मिल रही है. विजय सेल्स पर यह फोन अपनी असली कीमत से हजारों रुपये कम पर लिस्टेड है. फ्लैट डिस्काउंट के साथ इस पर एक्स्ट्रा डील्स भी अवेलेबल है, जिससे आप अपने काफी पैसे बचा सकते हैं. आइए Galaxy S25 Ultra के फीचर्स पर इस पर मिल रही सारी छूट के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Galaxy S25 Ultra के स्पेसिफिकेशंस
Galaxy S25 Ultra में 6.9 इंच की QHD+ Dynamic AMOLED 2X स्क्रीन है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इसमें Snapdragon 8 Elite चिपसेट है, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. फोटो और वीडियो के लिए फोन के रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का अल्ट्रावाइड लेंस, 50MP का टेलीफोटो सेंसर और 10MP का एडिशनल 3x टेलीफोटो लेंस मिलता है. इसके फ्रंट में 12MP का सेंसर लगा हुआ है. फोन में लगा 5,000mAh का बैटरी पैक 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है. S26 Ultra लॉन्च होने के बाद भी ये दमदार फीचर इसे एक शानदार च्वॉइस बनाते हैं.
Galaxy S25 Ultra पर मिल रही इतनी छूट
भारत में Galaxy S25 Ultra (12GB+256GB) को 1,29,999 रुपये में लॉन्च किया गया था. अभी यह फोन विजय सेल्स पर 10,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,19,999 रुपये में लिस्टेड है. HSBC क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने पर 6,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 1,13,999 रुपये रह जाती है. इस कीमत पर Galaxy S25 Ultra को खरीदना एक अच्छी डील हो सकती है.&amp;nbsp;
iPhone 17 Pro Max पर भी जबरदस्त डिस्काउंट
सैमसंग की तरह ऐप्पल के भी फ्लैगशिप डिवाइस iPhone 17 Pro Max पर इस समय जबरदस्त छूट मिल रही है. 17 Pro Max के 256GB वेरिएंट को 1,49,900 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया था, लेकिन अभी विजय सेल्स पर यह आईफोन 1,45,490 रुपये में लिस्टेड है. लगभग 4400 रुपये के इस फ्लैट डिस्काउंट के अलावा HDFC बैंक के क्रेडिट कार्ड पर 4,500 रुपये के एडिशनल डिस्काउंट का फायदा भी उठाया जा सकता है, जिसके बाद इस आईफोन पर कुल छूट लगभग 9,000 रुपये हो जाती है. कंपनी इस पर एक्सचेंज ऑफर भी दे रही है, जिसमें पुराने फोन को देकर नए आईफोन पर और छूट पाई जा सकती है.
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 05:30:23 +0530</pubDate>
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