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    <title>Attention India Hindi &amp; : टेक्नोलॉजी</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : टेक्नोलॉजी</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>Fastag Technology: टोल पर पीछे खड़ी कार का पैसा क्यों नहीं काटता फास्टैग, क्या है इसकी तकनीक?</title>
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        <description><![CDATA[ Fastag Technology: हाईवे पर सफर करते वक्त टोल प्लाजा पर लंबी लाइन लगना आम बात है. अक्सर जब हम अपनी कार लेकर टोल बूथ की लाइन में खड़े होते हैं. तो आगे वाली गाड़ी से हमारी दूरी मुश्किल से दो-तीन फीट की होती है. ऐसे में कई बार दिमाग में यह सवाल जरूर आता है कि टोल का स्कैनर आगे वाली गाड़ी की जगह हमारी कार के फास्टैग से पैसे क्यों नहीं काट लेता.&amp;nbsp;
इस सवाल का जवाब समझने के लिए सबसे पहले फास्टैग की तकनीक को समझना होगा. कार के शीशे पर लगा फास्टैग स्टीकर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन यानी आरएफआईडी (RFID) तकनीक पर काम करता है. इस छोटे से स्टीकर के अंदर एक बेहद पतली चिप और एक छोटा सा एंटीना लगा होता है. इसमें कोई बैटरी नहीं होती बल्कि यह टोल बूथ के स्कैनर से मिलने वाली रेडियो तरंगों से ही एक्टिव होता है. जानें कैसे काम करता है यह स्कैनर.
क्या होता है रीडिंग जोन?
टोल प्लाजा के ऊपर लगे उस सफेद रंग के बॉक्स यानी आरएफआईडी रीडर इस काम में मदद करता है. यह कोई नार्मल कैमरा नहीं होता जो दूर तक की हर चीज को देख ले. इस स्कैनर को खास तौर पर इस तरह से सेट किया जाता है कि इसकी रेडियो तरंगें एक बेहद सीमित दायरे में ही काम करें.&amp;nbsp;
इंजीनियरिंग की भाषा में इस तय की गई जगह को रीडिंग जोन कहा जाता है. यह रीडिंग जोन टोल बूथ के बैरियर से ठीक थोड़ा सा पहले सड़क के एक छोटे से हिस्से पर ही फोकस करता है. ऊपर लगा स्कैनर तिरछे कोण में नीचे की तरफ एक न दिखने वाली टॉर्च की रोशनी जैसा घेरा बनाता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;कैसे काम करता है स्कैनर?
जब कोई कार चलकर ठीक उस तय घेरे के अंदर आती है तभी स्कैनर की तरंगें उस कार के विंडशील्ड पर लगे फास्टैग से टकराती हैं और उसे पढ़ पाती हैं. यही वजह है कि अगर आपकी कार आगे वाली गाड़ी से बिल्कुल सटाकर भी खड़ी है तब भी वह उस खास स्कैनिंग घेरे से बाहर रहती है. टोल का स्कैनर सिर्फ चार से पांच मीटर की रेंज और एक फिक्स एंगल पर ही काम करता है. इसलिए पीछे खड़ी गाड़ियों के फास्टैग तक उसकी रेडियो तरंगें पहुंच ही नहीं पातीं और आपका पैसा कटने से पूरी तरह बच जाता है.

सड़क के नीचे लगा सेंसर और सिग्नल स्ट्रेंथ का कमाल
इसके अलावा टोल लेन में सड़क के नीचे एक और स्मार्ट सिस्टम लगा होता है जिसे लूप डिटेक्टर या व्हीकल सेंसर कहते हैं. जब कोई गाड़ी आगे बढ़कर ठीक स्कैनर के नीचे पहुंचती है. तो सड़क के नीचे लगा यह मैग्नेटिक सेंसर गाड़ी के वजन और लोहे की बॉडी को महसूस करता है. जब तक यह सेंसर सिग्नल नहीं देता तब तक ऊपर लगा फास्टैग स्कैनर किसी भी स्टीकर को स्कैन करना शुरू नहीं करता.&amp;nbsp;
मान लीजिए कि किसी वजह से दो गाड़ियां बहुत करीब आ जाएं और स्कैनर को दो फास्टैग के सिग्नल मिलने लगें, तब भी सिस्टम कंफ्यूज नहीं होता. इसमें एंटी-कोलिजन और सिग्नल स्ट्रेंथ तकनीक काम करती है. जो गाड़ी स्कैनर के ठीक नीचे और सबसे करीब होती है उसके फास्टैग का सिग्नल सबसे ज्यादा मजबूत होता है. सिस्टम तुरंत कमजोर सिग्नल वाली पीछे की गाड़ी को इग्नोर करके सिर्फ मजबूत सिग्नल वाले टैग से पैसे काटता है.

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एक कार निकलने के बाद ऐसे रीसेट होता है पूरा सिस्टम
एक बार जब आगे वाली गाड़ी का टोल कट जाता है तो बैरियर खुलता है और वह गाड़ी वहां से आगे निकल जाती है. गाड़ी के निकलते ही सड़क के नीचे लगा सेंसर सिस्टम को बताता है कि लेन खाली हो चुकी है और बैरियर वापस गिर जाता है. इसके बाद ही स्कैनर अगली गाड़ी को रीड करने के लिए खुद को रीसेट करता है. यानी एक बार में सिर्फ एक ही गाड़ी का ट्रांजैक्शन पूरा हो सकता है.&amp;nbsp;
अगली बार जब आप टोल प्लाजा की लंबी लाइन में अपनी कार लेकर खड़े हों तो बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए. NHAI का यह पूरा सिस्टम मिलीसेकंड के हिसाब से काम करता है. जब तक आपकी कार का अगला पहिया टोल बूथ के उस खास सेंसर के ऊपर नहीं पहुंचेगा तब तक आपके फास्टैग अकाउंट से एक रुपया भी नहीं कट सकता.
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gigabyte Gaming Rewards: PC बनाने से गेम खेलने तक, Gigabyte दे रहा इनाम जीतने का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ Gigabyte Gaming Rewards :&amp;nbsp;कंप्यूटर हार्डवेयर बनाने वाली कंपनी Gigabyte ने अपनी 40वीं सालगिरह के मौके पर भारत के यूजर्स के लिए एक खास ऑफर पेश किया है. इसका नाम Gigabyte 40 ENTER INFINITY India रखा गया है. इस कैंपेन में यूजर्स को PC बनाने, ऑनलाइन गेम खेलने और अपने पुराने Gigabyte हार्डवेयर से जुड़ी कहानियां शेयर करने पर इनाम जीतने का मौका मिलेगा. इसमें Amazon गिफ्ट वाउचर, मॉनिटर, AORUS मर्चेंडाइज और दूसरे प्रोडक्ट शामिल हैं. यह कैंपेन 1 नवंबर से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;गेम खेलकर जीतें Gigabyte मॉनिटर
Play a Run के तहत कंपनी ने AORUS Infinity Run नाम का फ्री ब्राउजर गेम पेश किया है. इसमें खिलाड़ियों को 1986 से लेकर AI के दौर तक हार्डवेयर की पांच पीढ़ियों से गुजरना होगा. हर गेम अधिकतम 90 सेकंड का होगा और इसे खेलने के लिए लॉगिन करना जरूरी नहीं है. हर दिन एक वैध एंट्री जमा की जा सकती है. सभी वैध एंट्री को हर महीने होने वाले लकी ड्रॉ में शामिल किया जाएगा, जिसमें Gigabyte मॉनिटर जीतने का मौका मिलेगा. Instagram पर @aorus_in को टैग करके #MyGigabyte के साथ स्कोरकार्ड शेयर करने वाले यूजर्स AORUS मर्चेंडाइज के गिवअवे में भी शामिल हो सकते हैं.&amp;nbsp;तीन अलग-अलग तरीकों से ले सकते हैं हिस्सा
Gigabyte ने इस कैंपेन को तीन एक्टिविटीयों में बांटा है. इनके नाम Build a Rig, Play a Run और Share Your Story हैं. खास बात है कि इन तीनों में से दो &amp;nbsp;एक्टिविटीयों में बिना कोई खरीदारी किए भी हिस्सा लिया जा सकता है.&amp;nbsp;पुराने Gigabyte प्रोडक्ट की कहानी भी दिला सकती है इनाम
Share Your Story एक्टिविटी को Still Running नाम दिया गया है. इसमें यूजर्स को अपने Gigabyte हार्डवेयर से जुड़े एक्सपीरियंस शेयर करने होंगे. यूजर्स ऐसे प्रोडक्ट के बारे में लिख सकते हैं, जो आज भी उनके PC में यूज हो रहा है, किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया गया है या अब यूज में नहीं है. कहानियां Instagram, r/aorusin Reddit कम्युनिटी के पिन किए गए थ्रेड या ऑनलाइन फॉर्म के जरिए भेजी जा सकती हैं. इसके लिए #MyGigabyte या #ENTERINFINITYINDIA हैशटैग का यूज करना होगा.
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20 से ज्यादा इनाम जीतने का मौका
इस कैंपेन में 20 से ज्यादा इनाम रखे गए हैं, जिनमें कम से कम तीन Gigabyte प्रोडक्ट शामिल हैं. कंपनी की भारतीय टीम हर महीने Best Story, Best Second Life, Most Loyal Builder और Still Running जैसी चार कैटेगरी में विनर्स का चयन करेगी. नवंबर के विनर्स की घोषणा दिसंबर 2026 के पहले हफ्ते और दिसंबर के विनर्स की घोषणा जनवरी 2027 के पहले हफ्ते में होगी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;PC बनाने पर मिलेंगे 15,500 रुपये तक के वाउचर
Build a Rig एक्टिविटी के तहत कंपनी अपने AORUS Full House प्रोग्राम के जरिए इनाम दे रही है. इसमें यूजर्स को Gigabyte और AORUS के योग्य प्रोडक्ट खरीदकर अपना PC बिल्ड तैयार करना होगा. PC में जितनी ज्यादा प्रोडक्ट कैटेगरी शामिल होंगी, उसी आधार पर Amazon गिफ्ट वाउचर मिलेंगे. इनकी कीमत अधिकतम 15,500 रुपये तक है. कंप्लीट PC बिल्ड बनाने वाले प्रतिभागियों को AORUS मर्चेंडाइज भी मिल सकती है. वहीं कुछ खास AORUS INFINITY प्रोडक्ट खरीदने वाले यूजर्स को एक्स्ट्रा बोनस भी दिया जाएगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Jio Unlimited Data Plan : Jio का छोटा रिचार्ज, डेटा की बड़ी आजादी! 24 घंटे चलेगा अनलिमिटेड 5G ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Satellite Network: बिना सिम और मोबाइल टावर के भी चलेंगे स्मार्टफोन, जानें कैसे होगी कॉलिंग?</title>
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        <description><![CDATA[ Satellite Network: जब आप किसी पहाड़ी इलाके या किसी रिमोट एरिया में घूमने जाते हैं. तो आपके फोन में से नेटवर्क की सारी डंडिया गायब हो जाती है.आसपास कोई मोबाइल टावर न होने की वजह से इमरजेंसी कॉल करना और इंटरनेट चलाना बिल्कुल नामुमकिन हो जाता है. लेकिन आने वाले दिनों में आपको ऐसी जगहों पर यह परेशानी नहीं होती दिखेगी. क्योंकि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI ने देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन को लेकर एक बेहद शानदार प्रस्ताव पेश किया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
TRAI की इस नई पहल के जरिए आपका स्मार्टफोन को बिना किसी जमीनी मोबाइल टावर के सीधे आसमान में घूम रहे सैटेलाइट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है. हालांकि अभी यह सुविधा आम लोगों के लिए शुरू नहीं हुई है.&amp;nbsp; लेकिन इसके आने से कॉलिंग और इंटरनेट की दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी. चलिए आपको बताते हैं कि यह नई तकनीक कैसे काम करेगी.
बिना सिम और मोबाइल टावर होगी कॉलिंग&amp;nbsp;
ट्राई ने 5 नवंबर 2026 को सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन नाम से एक नया फ्रेमवर्क बनाने की सिफारिश की है. इस नए नियम का मकसद अंतरिक्ष में सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने वाली कंपनियों और जमीन पर ग्राहकों को मोबाइल सेवाएं देने वाली टेलीकॉम कंपनियों के बीच तालमेल को आसान बनाना है. TRAI ने इस सैटेलाइट नेटवर्क ऑथराइजेशन की समय सीमा 20 साल रखने का सुझाव दिया है. इस प्रस्ताव में सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क एज ए सर्विस यानी SCNaaS मॉडल को अपनाने की बात कही गई है.&amp;nbsp;
इसका मतलब यह है कि एयरटेल और जियो जैसी टेलीकॉम कंपनियों को अपने ग्राहकों को सैटेलाइट नेटवर्क देने के लिए खुद का पूरा सैटेलाइट सिस्टम लॉन्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह टेलीकॉम कंपनियां किसी भी सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर कंपनी के साथ हाथ मिलाकर उसका इंफ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल कर सकेंगी. हालांकि सैटेलाइट नेटवर्क वाली कंपनियां सीधे आम ग्राहकों को अपना प्लान नहीं बेच पाएंगी इसके लिए उन्हें अलग से सर्विस परमिशन लेनी होगी.

डायरेक्ट-टू-डिवाइस तकनीक से जुड़ेंगे स्मार्टफोन
TRAI&amp;nbsp;के इस पूरे प्रस्ताव में सबसे कमाल की चीज डायरेक्ट-टू-डिवाइस यानी D2D कनेक्टिविटी है. अभी तक फोन कॉल और इंटरनेट के लिए घर और दफ्तर के पास लगे टेलीकॉम टावर से सिग्नल पकड़ते हैं. अगर टावर खराब हो जाए और आप कवरेज एरिया से बाहर चले जाएं तो फोन का नेटवर्क तुरंत गायब हो जाता है. लेकिन इस नई डायरेक्ट-टू-डिवाइस तकनीक में इस तकनीक को सपोर्ट करने वाले स्मार्टफोन बिना किसी बीच के टावर के सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाएंगे.&amp;nbsp;
इसक फायदा उन इलाकों में देखने को मिलेगा जहां आज भी मोबाइल टावर लगाना बहुत मुश्किल काम है. ऊंचे पहाड़, घने जंगल, रेगिस्तान और बॉर्डर के पास बसे दूरदराज के गांवों में जहां आज तक नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है वहां भी लोग फोन से आसानी से बात कर सकेंगे. किसी प्राकृतिक आपदा के समय जब जमीन के सारे टावर टूट जाते हैं. तब भी यह तकनीक लोगों की जान बचाने में काफी मददगार साबित होगी.

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आम मोबाइल यूजर्स को कब से मिलेगा यह फायदा?
अब हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर हमारे फोन में यह सैटेलाइट नेटवर्क कब से दिखना शुरू होगा और इसके लिए कितने पैसे खर्च करने पड़ेंगे. फिलहाल ट्राई ने अपनी तरफ से यह सिफारिशें तैयार करके केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग यानी DoT के पास भेज दी हैं. अब इस पूरे मामले पर आखिरी मुहर सरकार को लगानी है. सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्पेक्ट्रम का बंटवारा होगा और नियम तय किए जाएंगे. जिसके बाद कंपनियां अपनी सर्विस शुरू करेंगी.&amp;nbsp;
TRAI ने अभी तक इस सर्विस&amp;nbsp; शुरू होने की कोई तारीख, रिचार्ज प्लान की कीमत और मिलने वाली इंटरनेट स्पीड के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है. अभी यह भी साफ होना बाकी है कि शुरुआत में यूजर्स को सिर्फ इमरजेंसी मैसेज और कॉलिंग की सुविधा मिलेगी, या फिर वे हाई-स्पीड इंटरनेट भी चला सकेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Smartphone Price Hike 2027: 2027 में फोन खरीदना पड़ेगा महंगा? OLED पैनल की कीमतें बढ़ने के संकेत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/smartphone-price-hike-2027-2027-में-फोन-खरीदना-पड़ेगा-महंगा-oled-पैनल-की-कीमतें-बढ़ने-के-संकेत</link>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Price Hike 2027: स्मार्टफोन खरीदते समय अब तक लोग प्रोसेसर, कैमरा, बैटरी और स्टोरेज जैसे फीचर्स को देखकर बजट तय करते रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में फोन की कीमतों पर एक और चीज का असर पड़ सकता है.आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग पहले ही मेमोरी चिप्स की सप्लाई पर दबाव बना रही है. इसकी वजह से स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ रही है.
अब डिस्प्ले की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Samsung Display 2027 में अपने OLED पैनल की कीमतें बढ़ा सकता है. अगर ऐसा होता है तो स्मार्टफोन कंपनियों के लिए फोन बनाना और महंगा हो सकता है. इसका असर आने वाले समय में यूजर्स की जेब पर भी देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
Samsung बढ़ा सकता है OLED पैनल की कीमत
रिपोर्ट के मुताबिक, Samsung Display ने अपने पार्टनर्स को OLED पैनल की कीमतों में 10 से 20 डॉलर यानी करीब 1,000 से 1,900 रुपये तक की बढ़ोतरी के बारे में जानकारी दी है. यह बदलाव 2027 में देखने को मिल सकता है, हालांकि कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. रिपोर्ट में यह भी साफ नहीं है कि कीमतों में बढ़ोतरी स्मार्टफोन डिस्प्ले पर लागू होगी या दूसरे OLED पैनल भी इसकी चपेट में आएंगे.
2030 तक जारी रह सकती है मेमोरी की कमी
AI कंपनियों के बढ़ते निवेश और डेटा सेंटर की जरूरतों के कारण मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसका असर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों पर भी पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सस्ते Android स्मार्टफोन की कीमतों में करीब 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. वहीं Deloitte का अनुमान है कि मेमोरी की कमी 2029 या 2030 तक बनी रह सकती है.
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सस्ते फोन खरीदने वालों पर ज्यादा असर
बढ़ती लागत का सबसे ज्यादा असर कम कीमत वाले Android स्मार्टफोन पर पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेगमेंट में मेमोरी की लागत फोन के कुल मैन्युफैक्चरिंग खर्च का करीब 60 फीसदी है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 और 2027 में दुनियाभर में स्मार्टफोन की शिपमेंट में गिरावट आने की आशंका है. यह गिरावट लगातार दूसरे साल भी जारी रह सकती है. ऐसे में आने वाले समय में यूजर्स को ज्यादा कीमत चुकाने के साथ पुराने प्रोसेसर या कम स्पेसिफिकेशन वाले फोन का ऑप्शन भी चुनना पड़ सकता है.
दूसरी कंपनियों से पैनल खरीदना भी महंगा
OLED डिस्प्ले के बाजार में Samsung के अलावा LG Display और कई चीनी कंपनियां भी अपनी जगह बना चुकी हैं. ग्लोबल स्मार्टफोन और फोल्डेबल OLED पैनल की सप्लाई में Samsung की बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि चीनी कंपनियां भी उसे कड़ी टक्कर दे रही हैं, हालांकि फोन निर्माता कंपनियों के लिए एक सप्लायर को छोड़कर दूसरे से पैनल लेना इतना आसान नहीं है. उन्हें डिस्प्ले की क्वालिटी, ब्राइटनेस, रिफ्रेश रेट और बैटरी की खपत जैसे कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है.
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Best Phone Camera: iPhone 18 Pro पर भारी पड़ा Motorola का यह फोन, कैमरा टेस्ट में इसने मारी बाजी</title>
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        <description><![CDATA[ Best Phone Camera:&amp;nbsp;जब भी किसी फोन के कैमरे की तारीफ होती है. तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहला नाम एप्पल के आईफोन का ही आता है. लोग आंख बंद करके मान लेते हैं कि फोटो और वीडियो के मामले में आईफोन को कोई भी पीछे नहीं छोड़ सकता. लेकिन इस बार एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. मोटोरोला के नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन मोटोरोला सिग्नेचर 27 (Motorola Signature 27) ने कैमरा क्वालिटी के मामले में सबको चौंकाते हुए आईफोन 18 प्रो (iPhone 18 Pro) को पीछे छोड़ दिया है.&amp;nbsp;
दुनिया भर में स्मार्टफोन कैमरों की परख करने वाली मशहूर वेबसाइट डीएक्सओमार्क (DXOMARK) की ताजा ग्लोबल रैंकिंग में मोटोरोला के इस धांसू फोन ने सीधा दूसरा स्थान हासिल कर लिया है. फोटो खींचने से लेकर वीडियो बनाने तक हर मोर्चे पर इस फोन ने तगड़ा प्रदर्शन किया है. चलिए आपको बताते हैं&amp;nbsp; कि मोटोरोला के इस फोन ने यह कमाल कैसे किया और रैंकिंग में नंबर वन की कुर्सी पर कौन बैठा है.
मोटोरोला ने आईफोन को पीछे छोड़ा
डीएक्सओमार्क के कड़े कैमरा टेस्ट में मोटोरोला सिग्नेचर 27 ने कुल 173 पॉइंट्स हासिल करके दुनिया भर के टेक प्रेमियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. इस फोन को फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी दोनों ही कैटेगरी में बराबर यानी 173-173 पॉइंट्स का स्कोर मिला है. दूसरी तरफ एप्पल के लेटेस्ट आईफोन 18 प्रो को इस टेस्ट में 172 पॉइंट्स ही मिल सके और वह मोटोरोला से एक पॉइंट पीछे रह गया.&amp;nbsp;
वहीं ओप्पो फाइंड एक्स9 अल्ट्रा (OPPO Find X9 Ultra) 170 पॉइंट्स के साथ इस लिस्ट में और भी नीचे रहा. अब सवाल आता है कि आखिर इस ग्लोबल कैमरा रैंकिंग में नंबर वन की पोजीशन पर किसका कब्जा है. इस लिस्ट में मोटोरोला से आगे सिर्फ हुवावे पुरा 80 अल्ट्रा (Huawei Pura 80 Ultra) है जिसने 175 पॉइंट्स के साथ पूरी दुनिया में पहला स्थान हासिल किया है.&amp;nbsp;

पोर्ट्रेट फोटो और कम रोशनी में कैसा रहा मोटोरोला का प्रदर्शन?
इस कैमरा टेस्ट में मोटोरोला सिग्नेचर 27 के पोर्ट्रेट मोड की सबसे ज्यादा तारीफ की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक इस फोन से खींची गई इंसानों की तस्वीरों में चेहरे का रंग यानी स्किन टोन एकदम नेचुरल दिखता है और चेहरे की बारीक डिटेल्स भी बहुत साफ उभरकर आती हैं. जब आप दोस्तों और परिवार के साथ ग्रुप फोटो लेते हैं तब भी इसका कैमरा अलग-अलग दूरी पर खड़े सभी लोगों को एकदम सटीक फोकस में रखता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा 3x ऑप्टिकल जूम और 6x जूम तक फोटो खींचने पर भी पिक्चर क्वालिटी फटती नहीं है और फोटो एकदम क्लियर आती है. रात के समय और कम रोशनी में फोटोग्राफी के मामले में भी इस फोन ने शानदार काम किया है. मुश्किल लाइटिंग होने पर भी यह फोन सही एक्सपोजर और असली रंगों के साथ फोटो क्लिक करता है और तस्वीरों में दाने यानी नॉइज को काफी हद तक कंट्रोल में रखता है. वीडियो बनाते वक्त भी इसका ऑटोफोकस और कलर बैलेंस एकदम स्टेबल रहता है.

फोन का तगड़ा कैमरा हार्डवेयर&amp;nbsp;
मोटोरोला के इस बेहतरीन प्रदर्शन के पीछे इसका तगड़ा कैमरा हार्डवेयर है. कंपनी ने मोटोरोला सिग्नेचर 27 के पिछले हिस्से में तीन कैमरों का सेटअप दिया है. इसमें 50 मेगापिक्सल का सोनी लिटिया 910 (Sony Lytia 910) प्राइमरी सेंसर लगा है. इसके साथ 3x ऑप्टिकल जूम को सपोर्ट करने वाला 200 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस और 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है. सेल्फी के लिए भी फोन में 50 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा और 7000 एमएएच की बड़ी बैटरी मिलती है.&amp;nbsp;
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टेस्ट में सामने आईं कुछ कमियां
हालांकि इतनी खूबियों के बावजूद डीएक्सओमार्क ने कैमरे की कुछ मामूली कमियों का भी जिक्र किया है. रिपोर्ट के अनुसार बहुत ज्यादा दूरी पर मौजूद किसी चीज की फोटो जूम करके खींचने पर बारीक डिटेल्स थोड़ी कम हो सकती हैं. इसके अलावा घने अंधेरे में तेजी से हिलते-डुलते सब्जेक्ट की फोटो और वीडियो लेने पर हल्का मोशन ब्लर और नॉइज देखने को मिल सकता है. इसके बावजूद कुल मिलाकर यह कैमरा फोन आईफोन 18 प्रो पर भारी पड़ा है.
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        <pubDate>Sat, 07 Nov 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Phone Tips: चार्जर घर पर छूट गया? अपने फोन से ही ऐसे चार्ज करें दूसरा फोन</title>
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        <description><![CDATA[ अक्सर ऐसा होता है कि हम किसी जरूरी काम से बाहर जाते हैं और जल्दबाजी में फोन का चार्जर या पावरबैंक घर पर ही भूल जाते हैं. अब अगर रास्ते में आपके फोन की बैटरी खत्म होने कगार पर आ जाए और आपको कोई जरूरी UPI पेमेंट करना हो या कैब बुक करनी हो तो अच्छी-खासी मुसीबत खड़ी हो जाती है. ऐसे वक्त में अगर आपके पास कोई दूसरा फोन है या आपके साथ चल रहे दोस्त के फोन में अच्छी-खासी बैटरी है.&amp;nbsp;
तो आपको किसी सॉकेट या चार्जर को ढूंढने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आजकल के फोन इतने स्मार्ट हो चुके हैं कि वे खुद एक चलते-फिरते पावरबैंक का काम कर सकते हैं. आप एक फोन से दूसरे फोन में ठीक वैसे ही बैटरी ट्रांसफर कर सकते हैं जैसे डेटा या फोटो शेयर करते हैं. चलिए आपको बताते है कैसे काम करती है यह प्रोसेस.
कैसे बनाएं फोन को पावरबैंक?
एक फोन से दूसरा फोन चार्ज करने की इस तकनीक को रिवर्स वायर्ड चार्जिंग कहा जाता है. जो आजकल 10-12 हजार रुपये वाले बजट फोन्स में भी आसानी से मिल जाती है. इसके लिए बस आपको एक ऐसी चार्जिंग केबल चाहिए जिसके दोनों तरफ टाइप-सी यानी Type-C to Type-C पिन हो. अगर आपके पास पुरानी यूएसबी वाली केबल है. तो आप पचास रुपये में मिलने वाले एक छोटे से ओटीजी एडाप्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
जिस फोन में बैटरी ज्यादा है उसमें ओटीजी लगाकर केबल का पहला सिरा जोड़ें और दूसरा सिरा उस फोन में लगा दें जिसकी बैटरी खत्म हो रही है. जैसे ही आप दोनों फोन जोड़ेंगे स्क्रीन पर एक नोटिफिकेशन पॉप-अप होगा. इस पर टैप करके USB प्रेफरेंस में जाएं और Charge Connected Device या Reverse Charging का ऑप्शन चुन लें. बस इतना करते ही ज्यादा बैटरी वाला फोन पवरबैंक बन जाएगा और दूसरे फोन में तुरंत चार्जिंग शुरू हो जाएगी.&amp;nbsp;

फोन के पीछे फोन रखकर भी हो जाएगी चार्जिंग
अगर आपके पास केबल भी नहीं है है तो भी काम आसान है. सैमसंग, एप्पल, वनप्लस और गूगल पिक्सल जैसे कई महंगे फोन्स में Reverse Wireless Charging या Power Share का फीचर मिलता है. इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर बैटरी सेक्शन में जाएं और वहां Wireless Power Sharing या Battery Share का टॉगल ऑन कर दें.&amp;nbsp;
कई फोन्स में यह बटन ऊपर से नीचे स्वाइप करने पर कंट्रोल सेंटर में भी मिल जाता है. इसे ऑन करने के बाद अपने फोन को स्क्रीन के बल उल्टा रखें और दूसरे फोन को उसकी पीठ से सटाकर ठीक बीचोबीच रख दें. बस ध्यान रहे कि जिस दूसरे फोन को आप चार्ज कर रहे हैं उसमें भी वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट होना चाहिए. दोनों फोन के बैक पैनल टच होते ही बिना किसी तार के बैटरी ट्रांसफर होने लगेगी.

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दूसरे फोन को चार्ज करते वक्त इन बातों का जरूर रखें ध्यान
यह फीचर मुसीबत के समय काफी काम आता है लेकिन इसका इस्तेमाल करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहली बात यह समझ लें कि फोन से फोन की चार्जिंग की स्पीड सामान्य चार्जर के मुकाबले काफी धीमी होती है. इसलिए इसका इस्तेमाल फोन को 100 परसेंट फुल चार्ज करने के लिए नहीं बल्कि इमरजेंसी में 15-20 प्रतिशत बैटरी पाने के लिए करें जिससे आपका रुका हुआ काम चल सके.&amp;nbsp;
इसके अलावा अगर आप वायरलेस तरीके से फोन चार्ज कर रहे हैंतो दोनों फोन्स के मोटे बैक कवर जरूर उतार दें, वरना कनेक्शन बार-बार टूटता रहेगा. कई स्मार्टफोन्स में सेफ्टी के लिए एक इन-बिल्ट लिमिट भी होती है यानी अगर बैटरी देने वाले फोन की खुद की चार्जिंग बीस या तीस प्रतिशत से नीचे गिर जाएगी. तो रिवर्स चार्जिंग अपने आप बंद हो जाएगी. तो साथ ही चार्जिंग के दौरान दोनों फोन्स थोड़े गर्म हो सकते हैं इसलिए इस वक्त उन पर हैवी गेमिंग करने से बचें.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 17:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp AI Image Expansion : WhatsApp पर AI से बदल सकेंगी फोटो, iPhone यूजर्स के लिए आ रहा नया फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp AI Image Expansion : फोटो अच्छी हो, लेकिन उसके फ्रेम में आसपास का पूरा नजारा न आ रहा हो तो कई बार फोटो शेयर करने का मन नहीं करता है. खासकर जब किसी लैंडस्केप या स्क्वायर फोटो को WhatsApp Status पर लगाना हो और वह पूरी स्क्रीन पर दिखाई न दे. अब इस परेशानी को दूर करने के लिए WhatsApp एक नया AI फीचर लाने की तैयारी कर रहा है. इसकी मदद से यूजर्स किसी दूसरी ऐप का सहारा लिए बिना अपनी फोटो का साइज बढ़ा सकेंगे. इसके लिए Meta AI की मदद ली जाएगी, जो फोटो के किनारों पर नया विजुअल कंटेंट तैयार करेगा. फिलहाल इस फीचर की टेस्टिंग iPhone यूजर्स के लिए की जा रही है. तो आइए जानते हैं कि WhatsApp पर &amp;nbsp;iPhone यूजर्स के लिए कौन-सा नया फीचर आ रहा है.&amp;nbsp;
WhatsApp पर iPhone यूजर्स के लिए कौन-सा नया फीचर आ रहा है
iPhone यूजर्स के लिए WhatsApp एक नया AI-पावर्ड इमेज एक्सपेंशन फीचर टेस्ट कर रहा है. इसकी मदद से यूजर्स बिना किसी दूसरी फोटो एडिटिंग ऐप का इस्तेमाल किए WhatsApp के अंदर ही अपनी फोटो का साइज बढ़ा सकेंगे. यह फीचर Meta AI की मदद से फोटो के किनारों पर नए विजुअल तैयार करेगा और उसे 9:16 के वर्टिकल फॉर्मेट में बदल सकेगा. इससे खासतौर पर लैंडस्केप और स्क्वायर फोटो को WhatsApp Status पर फुल स्क्रीन में शेयर करना आसान होगा. फिलहाल इसकी टेस्टिंग कुछ iPhone बीटा यूजर्स के साथ की जा रही है.
कैसे काम करेगा यह नया फीचर&amp;nbsp;&amp;nbsp;इस नए फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को सबसे पहले WhatsApp पर किसी चैट में फोटो शेयर करने के लिए चुननी होगी. इसके बाद फोटो ऐप के ड्रॉइंग एडिटर में खुलेगी, जहां एडिटिंग के दूसरे ऑप्शनों के साथ इमेज एक्सपैंड करने का ऑप्शन भी दिखाई देगा. इसे चुनते ही Meta AI फोटो के कंटेंट और उसके आसपास के सीन को समझ कर फोटो के किनारों पर नए विजुअल डिटेल्स जोड़ेगा. इस तरह फोटो को बिना उसकी मेन थीम बदले 9:16 के वर्टिकल फॉर्मेट में तैयार किया जा सकेगा. यह प्रक्रिया कुछ सेकंड में पूरी होगी. इसके बाद तैयार फोटो एडिटर में दिखाई देगी, जहां यूजर उसे देखने के बाद शेयर करने का फैसला कर सकेंगे.
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फोटो शेयर करने से पहले मिलेगा प्रीव्यू
इस फीचर में यूजर्स को तैयार की गई फोटो पर पूरा कंट्रोल भी मिलेगा. Meta AI के प्रोसेस पूरा करने के बाद फोटो अपने आप किसी चैट में नहीं भेजी जाएगी. पहले उसका प्रीव्यू दिखाया जाएगा. अगर यूजर को AI से तैयार किया गया रिजल्ट पसंद नहीं आता है, तो वह Undo बटन की मदद से पुरानी फोटो पर वापस जा सकेगा. इसके अलावा एक और वर्जन तैयार करने का ऑप्शन भी मिल सकता है.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 17:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Nothing AI Device : स्मार्टफोन से आगे की तैयारी, Nothing बना रहा है स्क्रीनलेस AI डिवाइस</title>
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        <description><![CDATA[ Nothing AI Device : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का यूज बढ़ने के साथ ही टेक कंपनियां अब ऐसे नए गैजेट्स तैयार करने में जुटी हैं, जो लोगों के तकनीक यूज करने का तरीका बदल सकें. इसी बीच Nothing भी एक नया प्रोडक्ट लाने की तैयारी कर रही है. अपने अनोखे डिजाइन वाले डिवाइस के लिए मशहूर यह कंपनी दिसंबर में अपना पहला AI डिवाइस लॉन्च करेगी. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें कोई स्क्रीन नहीं दी जाएगी. कंपनी के सीईओ कार्ल पेई ने इसकी लॉन्चिंग का ऐलान करने के साथ ही डिवाइस की पहली झलक भी शेयर की है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;दिसंबर में पेश होगा Nothing का पहला AI डिवाइस
Nothing के फाउंडर और सीईओ कार्ल पेई ने X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि कंपनी दिसंबर में अपना पहला AI-native प्रोडक्ट लॉन्च करेगी. यह कंपनी का इस साल आने वाला एक और नया प्रोडक्ट होगा. इससे पहले कंपनी ने सितंबर में कुछ ग्लोबल मार्केट में Nothing Headphone (1) Pro पेश किया था. कार्ल पेई ने बताया कि नया AI डिवाइस स्क्रीनलेस डिजाइन के साथ आएगा. उन्होंने इसकी एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें डिवाइस के गोल किनारे और टेक्सचर्ड फ्रेम दिखाई देते हैं, हालांकि कंपनी ने अभी तक इसका नाम या यह किस कैटेगरी का प्रोडक्ट होगा, इसकी जानकारी नहीं दी है.
ऐप या नई स्क्रीन नहीं होगा Nothing का नया प्रोडक्ट
पेई के मुताबिक, Nothing का नया AI प्रोडक्ट सिर्फ कोई ऐप या नई स्क्रीन वाला डिवाइस नहीं होगा. कंपनी इसे एक ऐसे टूल के रूप में पेश करना चाहती है, जिसे Nothing के खास डिजाइन, पर्सनैलिटी और बारीकियों का ध्यान रखकर तैयार किया गया है.
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स्मार्टफोन के बाद अब AI डिवाइस पर नजर&amp;nbsp;कार्ल पेई ने अपनी पोस्ट में कंज्यूमर टेक्नोलॉजी के बदलते स्वरूप पर भी बात की. उनके मुताबिक, आज टेक इंडस्ट्री ऐसे अगले बड़े बदलाव ढूंढ रही है, जो स्मार्टफोन आने के बाद देखने को मिला था. उन्होंने कहा कि कंपनियां AI के लिए पेंडेंट, पिन, स्मार्ट ग्लास और AI असिस्टेंट जैसे कई तरह के डिवाइस के साथ प्रयोग कर रही हैं. इनका मकसद AI को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना है.
स्मार्ट AI ग्लास भी बना रही है कंपनी?
कुछ हफ्ते पहले आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि Nothing दो तरह के AI स्मार्ट ग्लास पर काम कर रही है. इनमें से एक मॉडल कैमरे के साथ और दूसरा बिना कैमरे के आ सकता है. इन दोनों में म्यूजिक सुनने, ऑडियोबुक चलाने, फोन कॉल करने और AI चैटबॉट से बातचीत करने जैसे फीचर्स मिलने की बात कही गई थी. कैमरे वाले मॉडल में ChatGPT भी दिया जा सकता है, हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि कार्ल पेई ने जिस स्क्रीनलेस डिवाइस की झलक दिखाई है, वह इन्हीं स्मार्ट ग्लास में से एक है या कंपनी किसी बिल्कुल नए प्रोडक्ट पर काम कर रही है.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 17:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>केवल एक चेन खींचने से कैसे रुक जाती है सैकड़ों मीटर लंबी ट्रेन? जानें इसकी तकनीक</title>
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        <description><![CDATA[ Train Chain Technology: देश में ऐसे बहुत कम ही लोग होंगे जिन्होंने कभी ट्रेन में सफर नहीं किया होगा. कई बार कोई प्लेटफाॅर्म पर कुछ खरीदने उतरता है और ट्रेन चल पड़ती है तो ऐसे में उस व्यक्ति को ट्रेन में बिठाने के लिए ट्रेन को रोकना पड़ता है. ट्रेन रोकने के लिए खींचनी पड़ती है लाल रंग की चेन तब जाकर ट्रेन रुकती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों टन वजनी और 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भागती एक बड़ी ट्रेन, सिर्फ एक छोटी सी चेन खींचने से आखिर रुक कैसे जाती है.&amp;nbsp;
तो आपको बता दें इसके पीछे फिजिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग का सिस्टम काम करता है. आज के दौर में जब ट्रेनें इतनी मार्डन हो चुकी हैं, तब भी यह इमरजेंसी सिस्टम यात्रियों की सेफ्टी के लिए सबसे भरोसेमंद माना जाता है. किसी का सामान छूट जाए, कोई अचानक बीमार पड़ जाए या कोई बड़ा हादसा होने वाला हो यह एक चेन सेकंडों में पूरी ट्रेन को कंट्रोल कर लेती है. चलिए बताते हैं कि चेन खींचते ही ट्रेन के पहियों में ऐसा क्या होता है कि पूरी की पूरी ट्रेन वहीं थम जाती है.
कैसे लग जाते है एकदम ब्रेक?
अक्सर हम सोचते हैं कि ब्रेक लगाने के लिए प्रेशर लगाना पड़ता है, जैसे हम अपनी कार या बाइक में करते हैं. लेकिन भारतीय रेलवे का एयर ब्रेक सिस्टम इसके ठीक उलट काम करता है. ट्रेन के इंजन से लेकर आखिरी डिब्बे तक एक मोटी पाइपलाइन जुड़ी होती है जिसे ब्रेक पाइप कहते हैं. जब ट्रेन को चलना होता है. तो इस पाइप में लगातार हाई प्रेशर वाली हवा भरी जाती है. यह हवा का दबाव ही ब्रेक शूज जो पहियों को पकड़ते हैं उनको पहियों से दूर धकेल कर रखता है. जिससे पहिए फ्री होकर घूमते हैं और ट्रेन दौड़ती रहती है.&amp;nbsp;
अब जैसे ही कोई यात्री किसी भी डिब्बे में अलार्म चेन खींचता है उस डिब्बे के नीचे लगा एक छोटा सा मैकेनिकल वाल्व खुल जाता है. इस वाल्व के खुलते ही पाइप में भरी हाई प्रेशर हवा तेजी से बाहर निकलने लगती है जिसकी तेज हिस की आवाज आपने स्टेशन या ट्रेन में कभी न कभी जरूर सुनी होगी. पाइप में हवा का दबाव गिरते ही ब्रेक सिलेंडर एक्टिव हो जाते हैं और स्प्रिंग की मदद से ब्रेक शूज सीधे पहियों से चिपक जाते हैं.

लोको पायलट को कैसे मिलता है सिग्नल?
कई लोगों को लगता है कि चेन खींचने से सिर्फ उसी एक डिब्बे में ब्रेक लगता है. लेकिन ऐसा करने से तो ट्रेन पटरी से उतर सकती है. असल में ब्रेक पाइप पूरी ट्रेन में एक साथ जुड़ा होता है. इसलिए एक जगह से हवा निकलने पर पूरी पाइपलाइन का प्रेशर तुरंत कम हो जाता है और सारे डिब्बों में एक साथ ब्रेक लगते हैं. इसी वक्त इंजन में बैठे लोको पायलट के सामने लगे प्रेशर गेज की सुई अचानक नीचे गिर जाती है और केबिन में एक बजर बजने लगता है.&amp;nbsp;
इससे ड्राइवर को तुरंत समझ आ जाता है कि किसी ने चेन खींची है. इसके बाद लोको पायलट तुरंत इंजन की पावर काट देता है और अपनी तरफ से भी कंट्रोल संभाल लेता है ताकि ट्रेन बिना किसी झटके के सुरक्षित तरीके से रुक सके. मार्डन LHB कोचों में तो यह सिस्टम और भी तेज और स्मूद हो गया है जिससे तेज रफ्तार ट्रेन भी कुछ ही सौ मीटर की दूरी में आसानी से कंट्रोल होकर रुक जाती है.

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किस डिब्बे में खिंची चेन कैसे पता चलता है?
ट्रेन रुकने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि आखिर 20-24 डिब्बों वाली इतनी लंबी ट्रेन में चेन किस बोगी से खींची गई है. अगर गार्ड या आरपीएफ के जवान एक-एक डिब्बे में जाकर पूछेंगे तो घंटों बर्बाद हो जाएंगे और अपराधी भाग भी सकता है. इसका भी रेलवे के पास एक जुगाड़ है जिस डिब्बे में चेन खींची जाती है, वहां से हवा निकलने की तेज आवाज तो आती ही है. तो साथ ही कोच के बाहर दोनों तरफ लगी एक छोटी सी इमरजेंसी फ्लैशर लाइट भी जलने लगती है.&amp;nbsp;
पुराने समय के कोचों में डिब्बे के बाहर ऊपर कोने में लगा एक लाल रंग का लोहे का लिवर बाहर की तरफ घूम जाता था. गार्ड और पुलिसकर्मी बाहर झांककर तुरंत उस लाइट या लिवर को देख लेते हैं और सीधे उसी डिब्बे में पहुंच जाते हैं. जब तक रेलवे स्टाफ बाहर से उस वाल्व को अपनी चाबी या लिवर से वापस रीसेट नहीं करता तब तक पाइप में दोबारा हवा नहीं भरती और ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकती.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 17:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>JBL Studio Monitors: होम स्टूडियो बनेगा प्रोफेशनल, JBL के इन मॉनिटर्स में मिलेंगे खास फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ JBL Studio Monitors : घर पर म्यूजिक रिकॉर्डिंग, ऑडियो मिक्सिंग या साउंड प्रोडक्शन करने वालों के लिए अच्छे स्पीकर्स का चुनाव काफी जरूरी होता है. खासतौर पर स्टूडियो में काम करते समय साफ आवाज और साउंड का बैलेंस बेहतर होना जरूरी है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए JBL Professional ने अपनी 3 Series MkIII स्टूडियो मॉनिटर्स की नई रेंज पेश की है. कंपनी ने इसके साथ JBL 310S MkIII पावर्ड सबवूफर भी लॉन्च किया है. नई सीरीज में JBL 305P MkIII, 306P MkIII और 308P MkIII शामिल हैं. इन सभी मॉनिटर्स में पहले के मुकाबले बदला हुआ एकॉस्टिक सिस्टम और नया Class D एम्प्लीफिकेशन दिया गया है. कंपनी का दावा है कि नए साउंड सिस्टम से बेहतर ऑडियो कवरेज और स्टीरियो साउंड का एक्सपीरियंस मिलेगा. तो आइए जानते हैं कि JBL के इन मॉनिटर्स में कौन-से खास फीचर्स मिलेंगे.&amp;nbsp;
JBL के इन मॉनिटर्स में मिलेंगे खास फीचर्स
नई रेंज में हाई-फ्रीक्वेंसी और लो-फ्रीक्वेंसी ड्राइवर्स को नए सिरे से डिजाइन किया गया है. इनके साथ अपडेटेड JBL Image Control Waveguide भी मिलता है. कंपनी के मुताबिक, इस बदलाव से आवाज ज्यादा बड़े एरिया तक पहुंच सकेगी. इसके अलावा स्टीरियो इमेजिंग बेहतर होगी और साउंड में होने वाली गड़बड़ी यानी डिस्टॉर्शन भी कम होगा. इन तीनों मॉनिटर्स में फ्रंट-फायरिंग Slipstream पोर्ट डिजाइन दिया गया है. इनमें बैलेंस्ड Neutrik कॉम्बो इनपुट और इनपुट सेंसिटिविटी चुनने का ऑप्शन भी मिलता है. इससे इन्हें स्टूडियो इंटरफेस, मिक्सर और दूसरे प्लेबैक उपकरणों के साथ यूज किया जा सकता है.
एक टच पर मिलेंगे 81 EQ कॉम्बिनेशन
JBL ने इन मॉनिटर्स में चार वन-टच रूम कंट्रोल दिए हैं. इनकी मदद से यूजर्स को 81 अलग-अलग करेक्टिव EQ कॉम्बिनेशन मिलते हैं, जिनसे कमरे के हिसाब से साउंड को एडजस्ट किया जा सकता है. इनमें M4 माउंटिंग पॉइंट्स भी दिए गए हैं. नई सीरीज स्टीरियो, 2.1, सराउंड और इमर्सिव ऑडियो सेटअप को सपोर्ट करती है.
JBL 310S MkIII सबवूफर की खासियत
मॉनिटर्स के साथ पेश किया गया JBL 310S MkIII पावर्ड सबवूफर 10 इंच के ड्राइवर के साथ आता है. इसमें 26Hz लो-फ्रीक्वेंसी एक्सटेंशन, 116dB पीक साउंड प्रेशर लेवल और 300W Class D एम्प्लीफिकेशन दिया गया है. इसे भी स्टीरियो, 2.1, सराउंड और इमर्सिव मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ यूज किया जा सकता है.
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तीन साइज में आए JBL के नए स्टूडियो मॉनिटर्स
JBL ने इस सीरीज को अलग-अलग साइज के तीन मॉडल में पेश किया है. JBL 305P MkIII में 5 इंच का टू-वे मॉनिटर दिया गया है. यह 45Hz की लो-फ्रीक्वेंसी एक्सटेंशन, 109dB के पीक साउंड प्रेशर लेवल और 86W Class D एम्प्लीफिकेशन के साथ आता है. वहीं JBL 306P MkIII में 6.5 इंच का टू-वे कॉन्फिगरेशन मिलता है. इसे खासतौर पर प्रोजेक्ट स्टूडियो के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें 43Hz लो-फ्रीक्वेंसी एक्सटेंशन, 112dB पीक साउंड प्रेशर लेवल और 110W एम्प्लीफिकेशन मिलता है. इस सीरीज का तीसरा मॉडल JBL 308P MkIII है, जिसमें 8 इंच का टू-वे सेटअप दिया गया है. यह 41Hz लो-फ्रीक्वेंसी एक्सटेंशन, 113dB पीक साउंड प्रेशर लेवल और 110W Class D एम्प्लीफिकेशन सपोर्ट करता है.
JBL के नए मॉनिटर्स की कीमत और उपलब्धता
JBL Professional ने फिलहाल अपनी नई 3 Series MkIII रेंज के मॉनिटर्स और 310S MkIII सबवूफर की कीमतों का ऐलान नहीं किया है. कंपनी के मुताबिक, इनकी बिक्री एशिया-पैसिफिक, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बाजारों में शुरू हो गई है. वहीं नॉर्थ अमेरिका में इनकी उपलब्धता 7 जनवरी 2027 से शुरू होगी.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube Tamba App : फॉलोअर्स से प्राइवेट चैट तक, YouTube के नए ऐप Tamba में क्या होगा खास?</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Tamba App : सोशल मीडिया की दुनिया में अब सिर्फ वीडियो देखना और पोस्ट शेयर करना ही काफी नहीं रह गया है. यूजर्स एक ही प्लेटफॉर्म पर दोस्तों से जुड़ने, अपनी पसंद के लोगों को फॉलो करने और निजी बातचीत करने जैसे ऑप्शन भी चाहते हैं. इसी बदलते ट्रेंड के बीच YouTube एक नए ऐप पर काम करता नजर आ रहा है, जिसका नाम Tamba बताया जा रहा है. खास बात यह है कि इस ऐप में वीडियो के साथ-साथ सोशल नेटवर्किंग से जुड़े कई फीचर्स भी देखने को मिल सकते हैं, हालांकि Google ने अभी तक इस ऐप की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. तो आइए जानते हैं कि YouTube के नए ऐप Tamba में क्या खास होगा.&amp;nbsp;
YouTube के नए ऐप Tamba में क्या खास होगा?&amp;nbsp;
YouTube का नया ऐप Tamba एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हो सकता है, जिसमें यूजर्स को प्रोफाइल बनाने, दूसरे लोगों को फॉलो करने, प्राइवेट मैसेज भेजने और ग्रुप चैट करने जैसे फीचर्स मिल सकते हैं. इसके अलावा इसमें फोटो और वीडियो शेयर करने, पोस्ट पर लाइक-कमेंट करने और वॉइस मैसेज के जरिए जवाब देने का ऑप्शन भी हो सकता है. खास बात यह है कि यूजर्स Tamba की चैट में ही YouTube Shorts वीडियो देख और शेयर कर सकेंगे. इसके इंटरफेस में होम, सर्च, कैमरा, इनबॉक्स और चैट जैसे ऑप्शन मिलने के संकेत हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;YouTube ऐप के कोड में मिला Tamba का नाम
Tamba से जुड़ी जानकारी सबसे पहले Android Authority की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, YouTube के Android ऐप के एक वर्जन की जांच के दौरान इस नए प्रोजेक्ट के संकेत मिले. ऐप के कोड में Tamba नाम का लोगो और कई डिजाइन एलिमेंट्स मौजूद हैं. इसके लोगो में Tamba नाम के साथ एक खास तरह का ग्राफिक बना है, जिसके बीच में प्ले बटन जैसा निशान दिखाई देता है. इसके अलावा ऐप के कोड में करीब 38 अलग-अलग आइकन भी मिले हैं. इनका डिजाइन और नेविगेशन Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की याद दिलाता है.
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फॉलो करने से लेकर ग्रुप चैट तक मिलेंगे कई फीचर्स
Tamba के कोड में इसके इंटरफेस से जुड़े कई खास संकेत मिले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप में होम, सर्च, कैमरा, इनबॉक्स, चैट और स्टिकर जैसे ऑप्शनों के लिए अलग-अलग आइकन दिए गए हैं. इसके अलावा इसमें माइक्रोफोन, क्राउन, लॉक, सेव बुकमार्क और गेम कंट्रोलर जैसे आइकन भी शामिल हैं. ऐप का लोगो भी सामने आया है, जिसमें Tamba नाम के साथ प्ले बटन वाला एक खास ग्राफिक नजर आता है.
इसका डिजाइन Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिलता-जुलता हो सकता है. कोड में अलग ऑनबोर्डिंग और एक्टिविटी पेज के संकेत भी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि Google इसके लिए अलग यूजर इंटरफेस तैयार कर सकता है. इस प्रोजेक्ट को Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म के लिए तैयार कर सकता है. इसमें अलग ऑनबोर्डिंग और एक्टिविटी पेज होने के संकेत भी मिले हैं.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Jio Unlimited Data Plan : Jio का छोटा रिचार्ज, डेटा की बड़ी आजादी! 24 घंटे चलेगा अनलिमिटेड 5G</title>
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        <description><![CDATA[ Jio Unlimited Data Plan : आज के डिजिटल दौर में कई ऐसे काम हैं, जिनमें मोबाइल डेटा की खपत काफी ज्यादा होती है. कभी घंटों तक वीडियो स्ट्रीमिंग करनी होती है, तो कभी कोई बड़ी फाइल डाउनलोड या अपलोड करनी पड़ती है. ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे काम भी काफी डेटा यूज करते हैं. ऐसे में कई बार रोजाना मिलने वाला डेटा खत्म हो जाता है और यूजर्स को अतिरिक्त रिचार्ज की जरूरत पड़ती है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Reliance Jio ने भारतीय यूजर्स के लिए एक नया डेटा पैक पेश किया है. इसकी खास बात यह है कि महज 15 रुपये खर्च करके यूजर्स को 24 घंटे के लिए अनलिमिटेड हाई-स्पीड 5G डेटा यूज करने का मौका मिलेगा. तो आइए जानते हैं कि Jio का 15 रुपये वाला प्लान क्या है
Jio का 15 रुपये वाला प्लान क्या है?
Jio के इस नए डेटा पैक की कीमत 15 रुपये रखी गई है. इसमें यूजर्स को 24 घंटे यानी पूरे एक दिन के लिए अनलिमिटेड 5G डेटा मिलता है. इस पैक की खासियत यह है कि इसमें दूसरे सामान्य डेटा ऐड-ऑन पैक की तरह यूज करने के लिए डेटा की कोई तय सीमा नहीं दी गई है. यूजर्स इसकी वैलिडिटी के दौरान अनलिमिटेड 5G डेटा का यूज कर सकते हैं. यह उन लोगों के लिए पेश किया गया है, जिन्हें सीमित समय के लिए ज्यादा इंटरनेट की जरूरत पड़ती है.
कहां मिलेगा Jio का नया 5G पैक?
Jio का 15 रुपये वाला अनलिमिटेड 5G डेटा पैक देश के सभी टेलीकॉम सर्किल में उपलब्ध है. यूजर्स इसे MyJio ऐप और Jio की आधिकारिक वेबसाइट Jio.com से रिचार्ज कर सकते हैं. इसके अलावा Reliance Retail स्टोर, जनरल ट्रेड पॉइंट ऑफ सेल, थर्ड-पार्टी रिचार्ज प्लेटफॉर्म और कंपनी की एंटरप्राइज वेबसाइट के जरिए भी यह पैक लिया जा सकता है.
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वीडियो स्ट्रीमिंग से गेमिंग तक कर सकेंगे ये काम
इस पैक के जरिए यूजर्स हाई-डेफिनिशन और 4K वीडियो स्ट्रीम कर सकते हैं. इसके अलावा लाइव स्पोर्ट्स देखने और मल्टीप्लेयर मोबाइल गेम खेलने के लिए भी हाई-स्पीड इंटरनेट का यूज किया जा सकता है. अगर किसी को बड़ी फाइलें अपलोड करनी हैं या स्मार्टफोन का डेटा क्लाउड स्टोरेज पर बैकअप करना है, तो भी यह पैक काम आ सकता है. इतना ही नहीं, बड़े गेम डाउनलोड करने वाले यूजर्स भी इसका फायदा उठा सकते हैं. 5G स्मार्टफोन में मोबाइल हॉटस्पॉट की सुविधा के जरिए लैपटॉप और टैबलेट को इंटरनेट से कनेक्ट किया जा सकता है. इससे रिमोट वर्क, इंटरनेट ब्राउजिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे काम भी किए जा सकते हैं.
इन यूजर्स को मिलेगा अनलिमिटेड 5G का फायदा
इस पैक का फायदा उठाने के लिए यूजर्स के पास 5G सपोर्ट वाला स्मार्टफोन होना जरूरी है. इसके साथ ही उनकी लोकेशन पर Jio का True 5G नेटवर्क भी उपलब्ध होना चाहिए. इन दोनों शर्तों के पूरा होने पर ही सब्सक्राइबर्स 15 रुपये वाले इस पैक के तहत अनलिमिटेड 5G डेटा यूज कर सकेंगे.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>BGMI Air Launch : गेमर्स के लिए खुशखबरी! BGMI Air की भारत में लॉन्च डेट आई सामने</title>
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        <description><![CDATA[ BGMI Air Launch : मोबाइल गेमिंग पसंद करने वालों के लिए दिसंबर का महीना खास होने वाला है. खासकर उन गेमर्स के लिए, जो Battlegrounds Mobile India (BGMI) खेलना चाहते हैं, लेकिन फोन की कम स्टोरेज या डिवाइस की क्षमता के चलते गेम का पूरा वर्जन यूज नहीं कर पाते हैं. ऐसे खिलाड़ियों के लिए Krafton India एक नया ऑप्शन लेकर आ रही है. कंपनी अपने नए गेम BGMI Air को भारत में लॉन्च करने जा रही है. खास बात यह है कि इसके लिए प्री-रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा भी 14 मिलियन के पार पहुंच चुका है. अब कंपनी ने इसकी लॉन्च डेट के साथ-साथ उन खिलाड़ियों के लिए भी खास मौका दिया है, जो आधिकारिक लॉन्च से पहले इस गेम को आजमाना चाहते हैं.&amp;nbsp;
BGMI Air का सबसे खास फीचर क्या है?
BGMI Air की सबसे खास फीचर इसका छोटा डाउनलोड साइज है. Krafton के अनुसार, गेम का शुरुआती डाउनलोड साइज करीब 1GB होगा, हालांकि कंपनी ने अभी तक इसकी न्यूनतम सिस्टम रिक्वायरमेंट और Android वर्जन से जुड़ी जानकारी शेयर नहीं की है.&amp;nbsp;
लॉन्च से पहले खिलाड़ियों को मिलेगा खेलने का मौका
गेम की आधिकारिक लॉन्चिंग से पहले Krafton India कुछ खिलाड़ियों को इसे आजमाने का मौका दे रही है. इसके लिए कंपनी ने Closed Beta Testing प्रोग्राम की घोषणा की है. यह टेस्टिंग 20 नवंबर से 24 नवंबर तक आयोजित होगी. इसमें मुंबई, दिल्ली और कोलकाता के खिलाड़ी हिस्सा ले सकेंगे. इस दौरान गेम खेलने वाले लोगों से मिलने वाले सुझावों और फीडबैक के आधार पर कंपनी आधिकारिक लॉन्च से पहले गेम में जरूरी सुधार करेगी.
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इस दिन भारत में लॉन्च होगा BGMI Air
Krafton India ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि BGMI Air को भारत में 10 दिसंबर को लॉन्च किया जाएगा. यह मौजूदा BGMI का हल्का वर्जन होगा, जिसे खास तौर पर उन खिलाड़ियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिनके फोन में ज्यादा स्टोरेज या गेम चलाने के लिए जरूरी क्षमता नहीं है. कंपनी के मुताबिक, Google Play पर इस गेम के लिए अब तक 1.4 करोड़ से ज्यादा प्री-रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. BGMI Air एक अलग ऐप के रूप में उपलब्ध होगा. इसे खेलने के लिए मौजूदा BGMI ऐप को हटाने या उसमें बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी.
कैसे मिलेगा Closed Beta Testing में शामिल होने का मौका?
जो खिलाड़ी सबसे पहले BGMI Air खेलना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए एक ऑडिशन वीडियो बनाकर जमा करना होगा. यह वीडियो 15 से 60 सेकंड का होना चाहिए. इसमें खिलाड़ियों को बताना होगा कि उन्हें शुरुआती गेमर्स में शामिल होने का मौका क्यों मिलना चाहिए. इसके साथ ही गेम के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट को टैग करना होगा और आवेदन फॉर्म भी भरना होगा. यह फॉर्म BGMI Air और BGMI के आधिकारिक Instagram अकाउंट @battlegroundsmobilein_official के बायो में उपलब्ध है. आवेदन करने वाले खिलाड़ी की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए. इसके अलावा वैध सरकारी फोटो आईडी और BGMI अकाउंट होना भी जरूरी है.
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Phone Safety Tips: फोन चोरी होने पर भी चोर नहीं कर पाएगा स्विच ऑफ, अभी ऑन करें यह सेटिंग</title>
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        <description><![CDATA[ Phone Safety Tips: आजकल फोन हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है. इसमें कॉन्टैक्ट्स, फोटोज, बैंकिंग ऐप्स, यूपीआई और पर्सनल डेटा हर चीज होती है. ऐसे में अगर फोन कहीं गिर जाए या भीड़भाड़ में चोरी हो जाए तो इंसान के हाथ-पांव फूल जाते हैं. अक्सर जब कोई चोर फोन चुराता है तो वह सबसे पहला काम फोन को स्विच ऑफ करने का करता है. एक बार फोन बंद हो गया तो न उस पर घंटी बजती है और न ही उसकी लाइव लोकेशन ट्रैक हो पाती है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके ही फोन के अंदर एक ऐसी सेटिंग मौजूद है जिसे ऑन करने के बाद कोई भी चोर आपके फोन को स्विच ऑफ नहीं कर पाएगा? जी हां जब तक फोन अनलॉक नहीं होगा तब तक वह बंद भी नहीं होगा. चलिए आपको बताते हैं कि अपने फोन को चोरों से सेफ रखने के लिए आपको कौन सी सेटिंग ऑन करनी चाहिए.
कैसे ऑन करें फोन में यह सेटिंग?
आमतौर पर हमारे फोन में एक बड़ी कमी होती है कि स्क्रीन लॉक होने के बावजूद कोई भी पावर बटन दबाकर फोन को आसानी से स्विच ऑफ या रीस्टार्ट कर सकता है. इसी कमजोरी का फायदा चोर उठाते हैं और फोन हाथ लगते ही उसे तुरंत बंद कर देते हैं जिससे पुलिस या मालिक उसे ट्रैक न कर सके. लेकिन आजकल आने वाले लगभग सभी नए एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स और आईफोन में Require Password to Power Off का एक ऑप्शन दिया जाने लगा है.
जब आप इस सेटिंग को एक्टिवेट कर देते हैं तो लॉक स्क्रीन पर पावर ऑफ का बटन दबाने पर फोन तुरंत पासवर्ड, पिन या फिंगरप्रिंट मांगने लगता है. अब जाहिर सी बात है कि चोर के पास आपका पासवर्ड या फिंगरप्रिंट तो होगा नहीं इसलिए वह चाहकर भी फोन को बंद नहीं कर पाएगा और आपका फोन लगातार ऑन रहेगा.

एंड्रॉइड में इस तरह तुरंत चालू करें यह सेटिंग
अगर आप रियलमी, ओप्पो, वनप्लस या शाओमी जैसा कोई एंड्रॉइड फोन इस्तेमाल करते हैं. तो इस सेटिंग को चालू करना बेहद आसान है. इसके लिए सबसे पहले अपने फोन की मेन Settings में जाएं. वहां नीचे स्क्रॉल करके Password &amp;amp; Security या Privacy वाले ऑप्शन पर टैप करें. इसके अंदर आपको System Security का एक सेक्शन मिलेगा जिस पर क्लिक करने के बाद आपको Require Password to Power Off&amp;nbsp; का ऑप्शन दिख जाएगा.&amp;nbsp;
बस इसके सामने बने टॉगल बटन को ऑन कर दें और अपना स्क्रीन लॉक पासवर्ड डालकर इसे कन्फर्म कर दें. वहीं अगर आपके पास सैमसंग का फोन है तो सेटिंग्स में जाकर Lock Screen ऑप्शन में जाएं और वहां Secure Lock Setting पर क्लिक करें. यहां आपको Lock Network And Security का बटन मिलेगा. जिसे ऑन करते ही आपका फोन बिना पासवर्ड के कभी स्विच ऑफ नहीं होगा.&amp;nbsp;

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लॉक स्क्रीन से कंट्रोल सेंटर बंद करना भी है जरूरी
सिर्फ पावर ऑफ पर पासवर्ड लगाना ही काफी नहीं है, आपको एक और काम करना जरूरी है. मान लीजिए चोर ने फोन स्विच ऑफ करने की कोशिश की और पासवर्ड की वजह से वह फेल हो गया. ऐसे में चोर दूसरा रास्ता अपनाते हैं वे लॉक स्क्रीन पर ऊपर से स्वाइप करके नोटिफिकेशन पैनल खींचते हैं और वहां से मोबाइल डेटा, लोकेशन या एयरप्लेन मोड ऑन कर देते हैं. जैसे ही फोन फ्लाइट मोड पर जाता है उसका इंटरनेट कट जाता है और लोकेशन मिलनी बंद हो जाती है.&amp;nbsp;
इससे बचने के लिए अपने फोन की सेटिंग्स में Notification and Status Bar या Lock Screem सेटिंग्स में जाएं. वहां Swipe down on the lock screen to view the notification drawer&#039; वाले ऑप्शन को तुरंत बंद कर दें. इसके बाद जब तक फोन अनलॉक नहीं होगा तब तक ऊपर से कोई भी सेटिंग नीचे नहीं खुलेगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Phone, Safety, Tips:, फोन, चोरी, होने, पर, भी, चोर, नहीं, कर, पाएगा, स्विच, ऑफ, अभी, ऑन, करें, यह, सेटिंग</media:keywords>
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        <title>GTA 6 Scam Alert : GTA 6 के चक्कर में कहीं न कर बैठें बड़ी गलती! फर्जी डाउनलोड लिंक से खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ GTA 6 Scam Alert : गेमिंग की दुनिया में इस समय जिस गेम का सबसे ज्यादा इंतजार हो रहा है, वह Grand Theft Auto VI यानी GTA 6 है. इसकी रिलीज में अभी वक्त है, लेकिन गेम को जल्द खेलने की चाह रखने वाले लोगों को साइबर अपराधी अभी से निशाना बना रहे हैं. इंटरनेट पर कई ऐसी वेबसाइट सामने आई हैं, जो GTA 6 का लीक वर्जन, रिलीज से पहले एक्सेस, मोबाइल ऐप और फ्री गेम की उपलब्ध कराने का दावा कर रही हैं. साइबर सिक्योरिटी कंपनी Netcraft ने ऐसी कई वेबसाइट की पहचान की है, जिनके जरिए यूजर्स के डिवाइस में खतरनाक सॉफ्टवेयर पहुंचाया जा रहा है या उनसे पैसे और निजी जानकारी मांगी जा रही है.&amp;nbsp;
मोबाइल वर्जन और अर्ली एक्सेस के नाम पर धोखा
कुछ वेबसाइट GTA 6 के अर्ली एक्सेस और PC वर्जन की बिक्री कर रही हैं, जबकि Rockstar Games ने फिलहाल इसे सिर्फ PlayStation 5 और Xbox Series X|S के लिए घोषित किया है. कुछ फर्जी वेबसाइट सभी प्लेटफॉर्म पर गेम उपलब्ध कराने के नाम पर बड़ी रकम मांग रही हैं और इसके लिए क्रिप्टोकरेंसी से पेमेंट करने को कह रही हैं. वहीं कुछ वेबसाइट Android यूजर्स को GTA 6 का मोबाइल वर्जन देने का झांसा दे रही हैं. इसके अलावा फ्री में गेम का प्री-ऑर्डर कोड देने का दावा भी किया जा रहा है, &amp;nbsp;हालांकि इन कोड्स को पाने के लिए यूजर्स से सर्वे भरने, ऐप डाउनलोड करने और वेबसाइट पर अकाउंट बनाने जैसी शर्तें पूरी कराई जाती हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;GTA 6 के नाम पर होने वाले फ्रॉड से कैसे बचें?
Netcraft के मुताबिक, गेमर्स को GTA 6 खरीदने के लिए सिर्फ PlayStation और Xbox के आधिकारिक स्टोर या भरोसेमंद दुकानों का ही सहारा लेना चाहिए. किसी अनजान वेबसाइट से गेम की फाइल या मोबाइल ऐप डाउनलोड करने से बचें. साथ ही अगर कोई वेबसाइट गेम जल्दी दिलाने या उसका एक्सेस देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी में पैसे मांगती है, तो ऐसे ऑफर से दूर रहें.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Asus Zenbook 14 Launch : काम करने का तरीका बदलेगा Asus का नया लैपटॉप? 33 घंटे की बैटरी और 3 चिपसेट
लीक गेम के नाम पर डिवाइस में पहुंच रहा मैलवेयर
Netcraft के मुताबिक, कई फर्जी वेबसाइट GTA 6 लीक करने वाले CyberLeek के नाम का यूज कर गेमर्स को अपने जाल में फंसा रही हैं. CyberLeek ने पहले भी गेम से जुड़े कुछ वीडियो और तस्वीरें शेयर की थीं, लेकिन उसने गेम का कोई ऐसा वर्जन जारी नहीं किया था, जिसे डाउनलोड करके खेला जा सके. इसके बाद भी उसके नाम पर कई वेबसाइट बनाई गईं, जहां GTA 6 की फाइल और गेम लॉन्चर उपलब्ध कराने का दावा किया गया. जांच में सामने आया कि इन फाइलों में खतरनाक सॉफ्टवेयर मौजूद था, जिसे डाउनलोड करने से यूजर्स के डिवाइस को नुकसान पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
गेम लॉन्च के बाद भी रहें सावधान
कंपनी का मानना है कि GTA 6 रिलीज होने के बाद भी गेमर्स के लिए ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा बना रहेगा. साइबर ठग गेम में खर्च होने वाली वर्चुअल करेंसी और दूसरे गेमिंग आइटम फ्री देने का झांसा दे सकते हैं. इसके अलावा गेम में जल्दी पैसे कमाने के तरीके बताने, फ्री Shark Cards देने और गेम से जुड़ी मदद के नाम पर फर्जी कस्टमर सपोर्ट पेज बनाकर लोगों को फंसाने की कोशिश हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 06 Nov 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>इस दिवाली घर लाएं नया मोबाइल, हर बजट के लिए फोन ऑफर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-दिवाली-घर-लाएं-नया-मोबाइल-हर-बजट-के-लिए-फोन-ऑफर</link>
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        <description><![CDATA[ इस दिवाली, स्मार्टफोन खरीदने वाले बेहतर डिवाइस में अपग्रेड कर सकते हैं और फेस्टिव बचत का पूरा फायदा उठा सकते हैं. चाहे उन्हें गेमिंग के लिए पावरफुल प्रोसेसर चाहिए हो, हाई-रेजॉल्यूशन कैमरा हो, या लंबी चलने वाली बैटरी &amp;mdash; हर बजट के लिए मोबाइल मौजूद हैं, किफायती 5G स्मार्टफोन से लेकर खास डिज़ाइन वाले Nothing मोबाइल फोन तक. खरीदार Nothing दिवाली मोबाइल ऑफर भी देख सकते हैं, फिर नज़दीकी बजाज फाइनेंस पार्टनर स्टोर जाकर स्मार्टफोन, डील और इजी EMI विकल्पों की तुलना कर सकते हैं और अपना अगला फोन चुन सकते हैं.
दिवाली 2026 मोबाइल डील: हर बजट के लिए
यहां पांच मोबाइल फोन दिए गए हैं जो इस दिवाली देखने लायक हैं &amp;mdash; रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए एंट्री-लेवल मॉडल से लेकर एडवांस कैमरे वाले प्रीमियम डिवाइस तक.
बजट सेगमेंट
1. POCO C75 5G &amp;ndash; किफायती 5G स्मार्टफोन
POCO C75 5G उन लोगों के लिए सही है जो कॉल, ब्राउज़िंग और रोज़मर्रा के मनोरंजन के लिए एक सस्ता मोबाइल चाहते हैं. इसकी 6.88-इंच 120Hz डिस्प्ले वीडियो देखने और आसान स्क्रॉलिंग के लिए काफी बड़ी है. Snapdragon 4s Gen 2 प्रोसेसर रोज़ के काम आसानी से करता है, 50MP रियर कैमरा दिन की रोशनी में साफ तस्वीरें खींचता है, और 5,160mAh की बैटरी एक बार चार्ज करने पर पूरे दिन चलती है.



स्पेसिफिकेशन
विवरण


प्रोसेसर
Qualcomm Snapdragon 4s Gen 2


डिस्प्ले
6.88-इंच HD+ LCD, 120Hz


रियर कैमरा
50MP


फ्रंट कैमरा
5MP


बैटरी
5,160mAh, 18 W चार्जिंग


ऑपरेटिंग सिस्टम
Android 14 पर आधारित HyperOS



2. moto G37 Power 5G &amp;ndash; किफायती कीमत में लंबी बैटरी लाइफ
moto G37 Power 5G उन लोगों के लिए सही है जो लंबे समय तक चार्जर से दूर रहते हैं. इसकी 7,000 mAh बैटरी लंबे समय तक स्ट्रीमिंग, ब्राउज़िंग और कॉलिंग को सपोर्ट करती है, जबकि Dimensity 6400 प्रोसेसर रोज़मर्रा के ऐप्स को आसानी से चलाता है. 6.67-इंच का 120Hz डिस्प्ले स्क्रॉलिंग को स्मूद रखता है, और Dolby Atmos स्टीरियो स्पीकर फिल्में देखने या संगीत सुनने के अनुभव को और बेहतर बनाते हैं.



स्पेसिफिकेशन
विवरण


प्रोसेसर
MediaTek Dimensity 6400


डिस्प्ले
6.67-इंच HD+ LCD, 120Hz


रियर कैमरा
50MP


फ्रंट कैमरा
8MP


बैटरी
7,000 mAh, 30W TurboPower चार्जिंग


ऑपरेटिंग सिस्टम
Android 16



मिड-रेंज सेगमेंट
3. POCO X7 Pro 5G &amp;ndash; मिड-रेंज गेमिंग फोन
POCO X7 Pro 5G उन गेमर्स के लिए एक अच्छा विकल्प है जो ज़्यादा पैसे खर्च किए बिना अच्छा परफॉर्मेंस चाहते हैं. इसका Dimensity 8400 Ultra प्रोसेसर हेवी ग्राफिक्स वाले गेम्स को आसानी से चलाता है, जबकि 6.67-इंच 120Hz AMOLED डिस्प्ले पर तस्वीरें बिल्कुल साफ दिखती हैं. 6,550mAh की बैटरी लंबे गेमिंग सेशन में भी चलती रहती है और 90W फास्ट चार्जिंग से फोन जल्दी चार्ज हो जाता है.



स्पेसिफिकेशन
विवरण


प्रोसेसर
MediaTek Dimensity 8400 Ultra


डिस्प्ले
6.67-इंच 1.5K AMOLED, 120Hz


रियर कैमरा
50MP मेन OIS के साथ + 8MP अल्ट्रावाइड


फ्रंट कैमरा
20MP


बैटरी
6,550mAh, 90W फास्ट चार्जिंग


ऑपरेटिंग सिस्टम
HyperOS 2, Android 15 पर आधारित



4. Nothing Phone (4b) &amp;ndash; अलग डिज़ाइन और भरोसेमंद बैटरी लाइफ
Nothing के मोबाइल फोन में दिलचस्पी रखने वाले खरीदार Phone (4b) पर Nothing के दिवाली मोबाइल ऑफर देख सकते हैं. इसका Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर रोज़मर्रा का मल्टीटास्किंग और कैज़ुअल गेमिंग आसानी से संभालता है, जबकि 6.77-इंच 120Hz Super AMOLED डिस्प्ले शानदार रंग देती है. 6,000 mAh की बैटरी बार-बार चार्ज करने की ज़रूरत कम करती है, Glyph Bar विज़ुअल नोटिफिकेशन देता है, और 50MP OIS कैमरा साफ फोटो खींचने में मदद करता है.



स्पेसिफिकेशन
विवरण


प्रोसेसर
Qualcomm Snapdragon 6 Gen 4


डिस्प्ले
6.77-inch FHD+ Super AMOLED, 120Hz


रियर कैमरे
50MP main (OIS + EIS) + 8MP ultrawide


फ्रंट कैमरा
16MP


बैटरी
6,000 mAh, 33 W फास्ट चार्जिंग


ऑपरेटिंग सिस्टम
Nothing OS based on Android 16



दिवाली 2026 के लिए मोबाइल फोन की कीमतें और इजी EMI डील्स
इस दिवाली, नीचे दिए गए पांचों स्मार्टफोन पर बजाज फाइनेंस की तरफ से एक खास ऑफर है: चुनिंदा मॉडलों पर ज़ीरो डाउन पेमेंट, ₹830 प्रति माह से शुरू होने वाली इजी EMI, और सुविधाजनक चुकाने की अवधि. ग्राहक कीमतों की तुलना कर सकते हैं और किसी पार्टनर स्टोर पर जाने से पहले लागू त्योहारी फायदों के लिए Nothing दिवाली मोबाइल ऑफर देख सकते हैं.



मॉडल
कीमत*


POCO C75 5G (4GB RAM + 128GB ROM)
₹12,499


moto G37 Power 5G (4GB RAM + 128GB ROM)
₹16,990


POCO X7 Pro 5G (12GB RAM + 256GB ROM)
₹25,999


Nothing Phone (4b) (8GB RAM + 128GB ROM)
₹39,999


Nothing Phone (4a) Pro (8GB RAM + 128GB ROM)
₹54,999



अपडेट किया गया: नवंबर 2026
*अस्वीकरण: कीमतें और ऑफर, स्थान, वेरिएंट, योग्यता और पार्टनर स्टोर के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं. नवीनतम कीमतों और ऑफर के लिए कृपया नज़दीकी पार्टनर स्टोर पर जाएं.
इस दिवाली बजाज फाइनेंस के साथ नया मोबाइल खरीदें
खरीदार अपने नज़दीकी बजाज फाइनेंस पार्टनर स्टोर पर जाकर POCO और motorola के मॉडलों को Nothing मोबाइल फोन और अन्य लोकप्रिय डिवाइसों से तुलना कर सकते हैं. बजाज फाइनेंस की इजी EMI सिर्फ ₹830 प्रति माह से शुरू होती है और चुकाने की अवधि 3 से 60 महीने तक है, जिससे खरीदार पूरी राशि एक साथ दिए बिना नया मोबाइल घर ले जा सकते हैं. कुछ चुनिंदा स्मार्टफोन पर ज़ीरो डाउन पेमेंट के ऑफर भी मिलते हैं, जो योग्यता के आधार पर दिए जाते हैं.
इस दिवाली बजाज फाइनेंस की इजी EMI पर नया फोन खरीदने के चरण

चरण 1: ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इस, दिवाली, घर, लाएं, नया, मोबाइल, हर, बजट, के, लिए, फोन, ऑफर</media:keywords>
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    <item>
        <title>Claude Message Threads : बार&amp;बार एक ही बात बताने से मिलेगी छुट्टी! Claude AI में आया नया फीचर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/claude-message-threads-बार-बार-एक-ही-बात-बताने-से-मिलेगी-छुट्टी-claude-ai-में-आया-नया-फीचर</link>
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        <description><![CDATA[ Claude Message Threads :&amp;nbsp;AI से लगातार काम कराने के दौरान कई बार एक परेशानी सामने आती है. जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ती है, AI को पहले दिए गए निर्देशों और बातचीत को पूरा समझाने के लिए बार-बार पुरानी चैट भेजनी पड़ती है.इससे जवाब मिलने में देरी हो सकती है.अब Anthropic ने इस परेशानी को कम करने के लिए एक नया फीचर पेश किया है.
कंपनी ने Claude Platform पर Message Threads को पब्लिक बीटा में उपलब्ध करा दिया है. इसकी मदद से डेवलपर्स को हर बार पूरी बातचीत दोबारा भेजने की जरूरत नहीं होगी. इससे लंबे समय तक चलने वाले AI सेशन में जवाब मिलने की स्पीड बेहतर हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि Claude AI में आया नया फीचर क्या है.&amp;nbsp;
Claude में क्या है Message Threads फीचर?
Anthropic ने अपने ब्लॉग पोस्ट के जरिए Message Threads की घोषणा की. यह फीचर खासतौर पर उन AI एजेंट्स के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें एक ही सेशन में कई बार मैसेज भेजने पड़ते हैं. पहले हर नए API रिक्वेस्ट के साथ पूरी बातचीत का रिकॉर्ड दोबारा भेजना पड़ता था. लेकिन अब डेवलपर्स पिछली बातचीत की जगह सिर्फ नए मैसेज भेजकर काम आगे बढ़ा सकते हैं. इस प्रक्रिया में डेवलपर को नए मैसेज के साथ पिछले जवाब की ID भी देनी होगी. इससे सिस्टम को पता रहेगा कि बातचीत किस जगह से आगे बढ़ानी है.
कैसे काम करेगा नया फीचर?
डेवलपर्स Messages API रिक्वेस्ट में Thread पैरामीटर जोड़कर इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं. पहली रिक्वेस्ट में पूरी बातचीत भेजकर एक नया थ्रेड शुरू करना होगा. इसके बाद हर बार केवल नए मैसेज और पिछले जवाब की ID भेजनी होगी, हालांकि इस थ्रेड की एक समय सीमा भी है. Anthropic के अनुसार, बातचीत का रेफरेंस रिक्वेस्ट के बीच अस्थायी रूप से मेमोरी में रखा जाता है. आखिरी रिक्वेस्ट के पांच मिनट बाद थ्रेड अपने आप एक्सपायर हो जाता है. इसके बाद नया सेशन शुरू करने के लिए पूरी बातचीत फिर से भेजनी होगी.
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किन कामों में मिलेगा ज्यादा फायदा?
Anthropic के मुताबिक, Message Threads लंबे समय तक चलने वाले कोडिंग एजेंट्स, कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले AI एजेंट्स और डॉक्यूमेंट या इमेज पर आधारित वर्कफ्लो के लिए यूजफुल है. यह सुविधा Claude Platform के अलावा Amazon Web Services (AWS), Microsoft Foundry और Google Cloud पर Anthropic से मैनेज किए जाने वाले Claude मॉडल्स में भी उपलब्ध है.
35 फीसदी तक कम हो सकती है रिस्पॉन्स लेटेंसी
Anthropic के मुताबिक, Message Threads से AI के जवाब देने में लगने वाला समय कम हो सकता है. कंपनी का कहना है कि Claude Code के ज्यादातर यूजर्स के लिए यह फीचर डिफॉल्ट रूप से चालू है. इसके इस्तेमाल से 5 लाख से 10 लाख टोकन वाले मैसेज में औसत रिस्पॉन्स लेटेंसी करीब 35 फीसदी तक कम हुई है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - &amp;nbsp;OnePlus 16 Price : OnePlus 16 खरीदने के लिए खर्च करने होंगे 1.4 लाख? लॉन्च से पहले दावा ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Claude, Message, Threads, बार-बार, एक, ही, बात, बताने, से, मिलेगी, छुट्टी, Claude, में, आया, नया, फीचर</media:keywords>
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        <title>Ethernet Cable vs Patch Cable : Patch या Ethernet Cable, PC को इंटरनेट से जोड़ने के लिए कौन सी है सही?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ethernet-cable-vs-patch-cable-patch-या-ethernet-cable-pc-को-इंटरनेट-से-जोड़ने-के-लिए-कौन-सी-है-सही</link>
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        <description><![CDATA[ Ethernet Cable vs Patch Cable : Patch या Ethernet Cable, PC को इंटरनेट से जोड़ने के लिए कौन सी है सही? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ethernet, Cable, Patch, Cable, Patch, या, Ethernet, Cable, को, इंटरनेट, से, जोड़ने, के, लिए, कौन, सी, है, सही</media:keywords>
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        <title>Jio Voice Only Plans : डेटा के बिना भी एक्टिव रहेगा Jio नंबर, जानें कितने रुपये से शुरू हैं प्लान?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/jio-voice-only-plans-डेटा-के-बिना-भी-एक्टिव-रहेगा-jio-नंबर-जानें-कितने-रुपये-से-शुरू-हैं-प्लान</link>
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        <description><![CDATA[ Jio Voice Only Plans : मोबाइल रिचार्ज कराते वक्त ज्यादातर प्लान में कॉलिंग के साथ इंटरनेट डेटा भी मिलता है, लेकिन हर यूजर को रोजाना इंटरनेट की जरूरत नहीं होती है. कई लोग फोन का यूज सिर्फ कॉल करने, मैसेज भेजने या बैंकिंग से जुड़े OTP शेयर करने के लिए करते हैं. वहीं कुछ लोग अपने पास दूसरा सिम रखते हैं, जिसे सिर्फ नंबर चालू रखने के लिए रिचार्ज कराते हैं. ऐसे में डेटा वाले प्लान पर पैसे खर्च करना उनके लिए जरूरी नहीं होता है. इसी जरूरत को देखते हुए टेलीकॉम कंपनियां अब बिना इंटरनेट वाले रिचार्ज का ऑप्शन दे रही हैं. Airtel और Vi के बाद Reliance Jio ने भी अपने यूजर्स के लिए वॉइस-ओनली प्लान पेश किए हैं. तो आइए जानते हैं कि Jio के वॉइस-ओनली प्लान कितने रुपये से शुरू हैं.&amp;nbsp;
Jio के वॉइस-ओनली प्लान कितने रुपये से शुरू हैं?
Jio के वॉइस-ओनली रिचार्ज प्लान की शुरुआत 147 रुपये से होती है. कंपनी ने यूजर्स के लिए कुल छह ऑप्शन पेश किए हैं. 147 रुपये वाले प्लान में 22 दिनों की वैलिडिटी और 300 SMS मिलते हैं, जबकि 177 रुपये के रिचार्ज में 28 दिनों और 196 रुपये के प्लान में 30 दिनों की वैलिडिटी मिलती है. इसके अलावा 197 रुपये का प्लान एक कैलेंडर महीने तक वैलिड रहता है. लंबी वैलिडिटी चाहने वाले यूजर 448 रुपये का रिचार्ज करा सकते हैं, जिसमें 84 दिनों के साथ 1,000 SMS मिलते हैं. वहीं 1,748 रुपये का सबसे महंगा प्लान 336 दिनों की वैलिडिटी और 3,600 SMS के साथ आता है. इन सभी प्लान में अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलती है, लेकिन इंटरनेट डेटा शामिल नहीं है.
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कैसे करें Jio के वॉइस-ओनली प्लान से रिचार्ज?
इन प्लान को खरीदने के लिए यूजर MyJio ऐप का यूज कर सकते हैं. इसके लिए ऐप में जाकर रिचार्ज सेक्शन खोलना होगा. यहां TRAI Mandated Packs का बैनर दिखाई देगा. इस पर क्लिक करने के बाद Voice Only Plan टैग वाले रिचार्ज चुन सकते हैं. इसके अलावा Jio की वेबसाइट, Google Pay, PhonePe, Paytm और रिटेल स्टोर से भी रिचार्ज कराया जा सकता है.
डेटा की जरूरत हो तो क्या करें?
इन प्लान में इंटरनेट डेटा शामिल नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर यूजर अलग से डेटा पैक ले सकते हैं. Jio 55 रुपये में 3GB, 100 रुपये में 6GB और 195 रुपये में 15GB डेटा का ऑप्शन देता है. इन पैक के जरिए वॉइस-ओनली रिचार्ज के साथ इंटरनेट भी यूज किया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Jio, Voice, Only, Plans, डेटा, के, बिना, भी, एक्टिव, रहेगा, Jio, नंबर, जानें, कितने, रुपये, से, शुरू, हैं, प्लान</media:keywords>
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        <title>Email Hacked: क्या आपका ईमेल हो चुका है हैक? इस तरीके से करें पता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/email-hacked-क्या-आपका-ईमेल-हो-चुका-है-हैक-इस-तरीके-से-करें-पता</link>
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        <description><![CDATA[ Email Hacked: आज के दौर में ईमेल अकाउंट सिर्फ मेल भेजने या रिसीव करने की चीज नहीं है. बल्कि इसमें बैंक खातों से लेकर सोशल मीडिया प्रोफाइल और ऑफिस के जरूरी दस्तावेजों तक, हर जगह लॉग-इन किया जाता है. ऑनलाइन अकाउंट्स का पासवर्ड भूल जाने पर भी रीसेट लिंक मेल पर ही आता है. इसलिए अगर आपका ईमेल अकाउंट किसी हैकर के हाथ लग जाए तो आपकी प्राइवेसी और पैसों दोनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.&amp;nbsp;
कई बार स्कैमर्स चुपचाप डेटा में सेंध लगा लेते हैं और हमें महीनों तक इसकी भनक तक नहीं लगती है. क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ईमेल का आप रोज इस्तेमाल कर रहे हैं वह पहले कभी किसी डेटा लीक में खतरे में पड़ चुका है या नहीं? अगर आप भी इस बात को लेकर अनजान हैं और अपने अकाउंट को पूरी तरह से सुरक्षित रखना चाहते हैं तो आज हम आपको एक ऐसा बेहद आसान तरीका बताने जा रहे हैं जिससे आप मिनटों में यह पता लगा सकते हैं कि आपका ईमेल सेफ है या नहीं.
&amp;nbsp;ऐसे चेक करें आपका ईमेल सेफ है या नहीं
अपने ईमेल आईडी के लीक होने का सच जानने के लिए आपको किसी बड़े सॉफ्टवेयर या महंगे एंटीवायरस की बिल्कुल जरूरत नहीं है. इसके लिए इंटरनेट पर Have I Been Pwned नाम की एक बेहद भरोसेमंद और सेफ वेबसाइट मौजूद है, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स करते हैं. आपको बस अपने फोन या लैपटॉप के ब्राउज़र में इस वेबसाइट को खोलना है और इसके सर्च बॉक्स में अपनी वह ईमेल आईडी दर्ज करनी है जिसकी आप जांच करना चाहते हैं.&amp;nbsp;
ईमेल लिखकर जैसे ही आप सर्च बटन पर क्लिक करेंगे यह वेबसाइट तुरंत पूरी दुनिया में हुए पिछले सभी डेटा लीक और हैकिंग मामलों के रिकॉर्ड को खंगाल लेगी. अगर आपकी ईमेल आईडी किसी भी पुरानी लीक हुई लिस्ट में शामिल होगी तो वेबसाइट लाल रंग के साथ चेतावनी दे देगी कि आपका डेटा खतरे में आ चुका है. वहीं अगर आपका ईमेल पूरी तरह से सेफ होगा, तो स्क्रीन पर हरी पट्टी आ जाएगी जिसका मतलब है कि आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है.

अगर लीक हो गया है ईमेल तो क्या करें?
मान लीजिए कि आपने चेक किया और वेबसाइट ने बता दिया कि आपका ईमेल एड्रेस किसी डेटा लीक में आ चुका है. तो आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है ऐसे में आप बिना एक सेकंड गंवाए अपने उस ईमेल अकाउंट का पासवर्ड तुरंत बदल दें. नया पासवर्ड हमेशा ऐसा मजबूत बनाएं जिसमें अंग्रेजी के बड़े-छोटे अक्षर, अंक और स्पेशल कैरेक्टर मिले हुए हों जिससे कोई दूसरा उसे आसानी से गेस न कर सके.&amp;nbsp;
इसके अलावा अपने अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA को तुरंत ऑन कर लें. जिससे जब भी कोई किसी दूसरे डिवाइस से लॉग-इन करने की कोशिश करे तो आपके फोन पर एक ओटीपी आए बिना वह आगे न बढ़ सके. इसके साथ ही यह भी चेक कर लें कि कहीं आपके अकाउंट में कोई ऐसा अनजान थर्ड-पार्टी ऐप या डिवाइस तो कनेक्ट नहीं है जिसे आपने परमिशन न दी हो अगर ऐसा दिखे तो उसे तुरंत वहां से हटा दें.

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अपने ईमेल अकाउंट को ऐसे रखें सेफ&amp;nbsp;
आपका ईमेल भविष्य में कभी भी हैकर्स के हत्थे न चढ़े. इसके लिए यह ध्यान रखें कि कभी भी एक ही पासवर्ड को अलग-अलग वेबसाइट्स और ऐप्स के लिए इस्तेमाल करने की गलती न करें क्योंकि एक जगह से लीक होने पर बाकी जगह के अकाउंट भी खतरे में पड़ जाते हैं.&amp;nbsp;
किसी भी अनजान या फिशिंग लिंक पर अपनी ईमेल आईडी डालकर साइन-अप करने से हमेशा बचें खासकर उन वेबसाइट्स पर जिनकी कोई क्रेडिबिलिटी न हो. अपने ब्राउज़र या पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करके हमेशा मजबूत और अलग पासवर्ड सेट करें और समय-समय पर उन्हें बदलते रहें. अगर आप इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे, तो आपका ईमेल अकाउंट हमेशा साइबर ठगों से बचा रहेगा.
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        <pubDate>Thu, 05 Nov 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Email, Hacked:, क्या, आपका, ईमेल, हो, चुका, है, हैक, इस, तरीके, से, करें, पता</media:keywords>
    </item>
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        <title>LG Free Channels : OTT और केबल को टक्कर? LG Channels पर मिलेंगे 170 से ज्यादा फ्री चैनल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/lg-free-channels-ott-और-केबल-को-टक्कर-lg-channels-पर-मिलेंगे-170-से-ज्यादा-फ्री-चैनल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/lg-free-channels-ott-और-केबल-को-टक्कर-lg-channels-पर-मिलेंगे-170-से-ज्यादा-फ्री-चैनल</guid>
        <description><![CDATA[ LG Free Channels : LG Electronics India ने अपने फ्री स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म LG Channels पर कंटेंट का दायरा बढ़ा दिया है. कंपनी ने इस सर्विस पर यूजर्स के लिए 170 से ज्यादा चैनल शामिल कर दिए हैं. इनमें बॉलीवुड फिल्मों से लेकर म्यूजिक और अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं के कार्यक्रमों तक कई तरह का कंटेंट देखने को मिलेगा. इसके लिए कंपनी ने तीन नई कंटेंट कंपनियों के साथ साझेदारी की है.
इस बदलाव के बाद LG Smart TV यूज करने वाले लोगों के पास एंटरटेनमेंट के लिए पहले से ज्यादा ऑप्शन होंगे. खास बात यह है कि इन चैनलों को देखने के लिए अलग से कोई सब्सक्रिप्शन लेने की जरूरत नहीं होगी, हालांकि इनके बीच एड दिखाए जाएंगे. ऐसे में आइए जानते हैं कि LG Channels पर कौन-कौन से नए चैनल आए हैं और यह सर्विस किस तरह काम करती है.&amp;nbsp;
LG Channels पर कौन-कौन से नए चैनल आए हैं?
LG Channels पर नए चैनल जोड़ने के लिए LG Electronics India ने NH Studioz, Eros Innovation और PEN Music के साथ साझेदारी की है. NH Studioz के जरिए प्लेटफॉर्म पर कई नए मूवी और म्यूजिक चैनल शामिल किए गए हैं. वहीं, Eros Innovation ने Eros Universe और PEN Music ने ALL TIME MOVIES नाम का चैनल जोड़ा है. इन नए चैनलों पर बॉलीवुड फिल्मों और म्यूजिक से जुड़ा कंटेंट देखने को मिलेगा, हालांकि कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इन चैनलों पर कौन-कौन सी फिल्में और म्यूजिक प्रोग्राम दिखाए जाएंगे.
कैसे काम करती है यह सर्विस?
LG Channels Free Ad-Supported Streaming TV यानी FAST मॉडल पर काम करता है. इसमें यूजर्स को चैनल देखने के लिए हर महीने कोई सब्सक्रिप्शन फीस नहीं देनी पड़ती है, लेकिन कार्यक्रमों के बीच एड दिखाए जाते हैं. यह सामान्य OTT प्लेटफॉर्म से थोड़ा अलग है. जहां OTT ऐप्स पर यूजर अपनी पसंद की फिल्म या शो चुनकर देख सकते हैं, वहीं LG Channels पर पारंपरिक टीवी की तरह चैनलों का तय प्रोग्राम शेड्यूल चलता है. यह सुविधा कंपैटिबल LG Smart TV पर उपलब्ध है.
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इतने चैनलों पर मिलेगा अलग-अलग कंटेंट
LG Channels की भारतीय लाइब्रेरी में अब 170 से ज्यादा फ्री चैनल उपलब्ध हैं. इनमें फिल्में ही नहीं एंटरटेनमेंट, म्यूजिक, न्यूज, लाइफस्टाइल, बच्चों के कार्यक्रम, स्पोर्ट्स हाइलाइट्स और भक्ति से जुड़ा कंटेंट भी शामिल है. इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं को भी जगह दी गई है. यूजर हिंदी, पंजाबी, बंगाली, मराठी, तमिल और तेलुगु समेत कई भाषाओं में कार्यक्रम देख सकते हैं.&amp;nbsp;इन देशों में मौजूद है LG Channels
LG Channels सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. कंपनी की यह सर्विस दुनिया के 37 देशों में उपलब्ध है और इसके ग्लोबल कैटलॉग में 5,000 से ज्यादा चैनल हैं. स्मार्ट टीवी के अलावा webOS पर चलने वाले स्मार्ट मॉनिटर और प्रोजेक्टर पर भी इसे यूज किया जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Bluetooth Hacking: क्या आपका भी ब्लूटूथ 24 घंटे रहता है ऑन? आज ही जान लें इसके नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Bluetooth Hacking: क्या आपका भी ब्लूटूथ 24 घंटे रहता है ऑन? आज ही जान लें इसके नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Jio, Airtel या Vi… यह पोर्टल बताएगा आपके इलाके में किसका इंटरनेट सबसे तेज?</title>
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        <description><![CDATA[ अब आप आसानी से देख सकेंगे कि आपके इलाके में किस टेलीकॉम कंपनी का इंटरनेट कितनी स्पीड दे रहा है. टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने बुधवार 4 नवंबर को &#039;नेटवर्क अनुभव&#039; नाम का नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया.&amp;nbsp;
यह एक डिजिटल मैप और डैशबोर्ड है, जिस पर आम लोगों के किए गए स्पीड टेस्ट और TRAI के अपने ड्राइव टेस्ट के नतीजे एक ही जगह दिखेंगे. इसी पोर्टल पर अब DND यानी डू नॉट डिस्टर्ब की सुविधा भी वेबसाइट के जरिए मिलेगी.
इन दो ऐप से आएगा डेटा
इस प्लेटफॉर्म पर दिखने वाला डेटा TRAI के दो ऐप MySpeed और MyCall से आएगा. लोग इन ऐप से अपने फोन पर इंटरनेट स्पीड और कॉल क्वालिटी चेक करते हैं. इन टेस्ट के नतीजों के साथ TRAI की ओर से अलग-अलग जगहों पर किए गए इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट का डेटा भी मैप पर दिखाया जाएगा.
दो हिस्सों में दिखेंगे रिजल्ट
जानकारी के मुताबिक, इस पोर्टल पर नतीजे दो हिस्सों में होंगे. एक मोबाइल इंटरनेट और दूसरा फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यानी घर या दफ्तर में लगने वाला तार वाला इंटरनेट कनेक्शन. इन्हें कंपनी और टेक्नोलॉजी के हिसाब से अलग-अलग देखा जा सकेगा. साथ ही, डाउनलोड और अपलोड दोनों तरह की स्पीड की जानकारी मिलेगी. लोग मैप को जूम करके अपने इलाके या किसी खास जगह पर हुए टेस्ट देख सकेंगे. इसके लिए फिल्टर, टेबल और डाउनलोड होने वाली रिपोर्ट की सुविधा भी दी गई है.
स्पीड के आंकड़े ऐसे समझें
TRAI ने स्पीड दिखाने के लिए तीन पैमाने रखे हैं. P50 को मीडियन स्पीड कहा गया है. इसका मतलब है कि किसी इलाके में हुए आधे टेस्ट में स्पीड इतनी या इससे ज्यादा आई. मोबाइल इंटरनेट के लिए P80 दिखेगा यानी 80 फीसदी टेस्ट में स्पीड इतनी या इससे ज्यादा रही. फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के लिए P90 का पैमाना है, यानी 90 फीसदी टेस्ट में स्पीड इस आंकड़े के बराबर या ऊपर रही.
आसान भाषा में कहें तो P80 और P90 का आंकड़ा बताता है कि ज्यादातर समय लोगों को कम से कम कितनी स्पीड मिल रही है. TRAI ने साफ कहा है कि लोगों के किए गए टेस्ट पर बने ये आंकड़े स्टैंडर्ड तरीके से की गई नेटवर्क क्वालिटी की पूरी जांच नहीं हैं, लेकिन इनसे यह जरूर पता चलता है कि किसी जगह पर दूसरे लोगों को नेटवर्क कैसा मिल रहा है.
टेलीकॉम कंपनियों को क्या फायदा?
टेलीकॉम कंपनियों को एक सुरक्षित इंटरफेस के जरिए कॉल क्वालिटी, कवरेज और इंटरनेट टेस्ट का डेटा मिलेगा. इसमें जगह, तारीख, समय और तकनीकी जानकारी भी होगी. इससे कंपनियां उन इलाकों को पहचान सकेंगी, जहां नेटवर्क में दिक्कत है और वहां सुधार कर सकेंगी. TRAI भी इस डेटा से लोगों के अनुभव पर नजर रखेगा और नेटवर्क सुधारने के लिए इसका इस्तेमाल करेगा.
DND अब वेबसाइट पर भी
स्पैम कॉल और मैसेज से परेशान लोगों के लिए भी यह पोर्टल काम का है. अब DND की सुविधा वेबसाइट पर भी मिलेगी. यहां लोग तय कर सकेंगे कि उन्हें कौन से प्रमोशनल कॉल और मैसेज चाहिए और कौन से नहीं. लोग स्पैम की शिकायत कर सकेंगे. अपनी शिकायत का स्टेटस देख सकेंगे और यह भी जान सकेंगे कि किस कंपनी के खिलाफ कितनी शिकायतें आई हैं.
TRAI का MySpeed SDK दूसरे योग्य ऐप को अपने अंदर स्पीड टेस्ट की सुविधा जोड़ने देता है. TRAI का कहना है कि ज्यादा ऐप इससे जुड़ेंगे तो ज्यादा लोग टेस्ट करेंगे और प्लेटफॉर्म पर असली हालात का डेटा बढ़ेगा. नेटवर्क अनुभव पोर्टल anubhav.trai.gov.in पर खोला जा सकता है. TRAI ने लोगों से अपील की है कि वे MySpeed और MyCall ऐप से नियमित टेस्ट करें, ताकि प्लेटफॉर्म पर ज्यादा जगहों का डेटा आ सके और यह ज्यादा काम का बने. TRAI ने यह भी याद दिलाया है कि वह एक रेगुलेटर है और डायरेक्ट कोई सेवा नहीं देता. अगर किसी को अपने कनेक्शन में दिक्कत है तो उसे अपनी टेलीकॉम कंपनी की शिकायत व्यवस्था के जरिए ही संपर्क करना होगा.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Wifi Plan: 200Mbps वाई&amp;फाई पर 3 महीने नहीं देना होगा बिल, 30 नवंबर तक मौका</title>
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        <description><![CDATA[ Wifi Plan:&amp;nbsp;इंटरनेट के बिना आज के वक्त में&amp;nbsp; कोई भी काम करना हो बिना इंटरनेट के नहीं हो पाता है. घरों पर काम करने के लिए और टीवी के साथ मोबाइल फोन्स के लिए डेटा पैक कम पड़ जाता है. इसलिए लोग घरों पर वाई-फाई लगवा लेते हैं.&amp;nbsp;अगर आप भी अपने घर के लिए नया हाई-स्पीड वाई-फाई लगवाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए एक शानदार मौका आया है.&amp;nbsp;
दिवाली के इस फेस्टिव सीजन में मशहूर ब्रॉडबैंड कंपनी एक्साइटेल ने अपने नए यूजर्स के लिए दिवाली धमाका ऑफर पेश किया है. इस खास डील के तहत कंपनी अपने 200Mbps की सुपरफास्ट स्पीड वाले प्लान पर सीधे तीन महीने तक मुफ्त इंटरनेट दे रही है. यानी एक बार कनेक्शन लेने के बाद आपको महीनों तक रिचार्ज के बिल की टेंशन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
3 महीने के रिचार्ज पर मिलेगा 5 महीने हाई-स्पीड इंटरनेट
एक्साइटेल ने अपने इस फेस्टिव ऑफर को ग्राहकों के बजट और सहूलियत के हिसाब से दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा है. अगर आप एक साथ पूरे साल का पैसा नहीं फंसाना चाहते हैं तो कंपनी का पहला ऑफर आपके लिए एकदम सही रहेगा. इस प्लान के तहत अगर कोई नया ग्राहक 200Mbps की स्पीड वाला 3 महीने का सब्सक्रिप्शन लेता है तो कंपनी अपनी तरफ से उसे 2 महीने का एक्स्ट्रा इंटरनेट बिल्कुल मुफ्त दे रही है.&amp;nbsp;
इसका सीधा मतलब यह हुआ कि आप सिर्फ तीन महीने का पैसा देंगे और आपके घर में पूरे 5 महीने तक बिना रुके हाई-स्पीड वाई-फाई चलेगा. खर्च की बात करें तो इस प्लान की प्रभावी मासिक कीमत करीब 508 रुपये और जीएसटी पड़ती है. अगर इसमें टैक्स और इंस्टॉलेशन चार्ज भी जोड़ दिए जाएं तो आपको 5 महीने के अनलिमिटेड इंटरनेट के लिए कुल मिलाकर करीब 3000 रुपये ही खर्च करने होंगे.

9 महीने वाले प्लान पर 3 महीने की छूट&amp;nbsp;
वहीं जो लोग बार-बार रिचार्ज नहीं करना चाहते हैं और लंबी वैलिडिटी की ढूंढ रहे हैं. उनके लिए कंपनी का दूसरा ऑफर और भी ज्यादा फायदेमंद है. इस दूसरी डील के तहत अगर आप 200Mbps स्पीड वाला 9 महीने का ब्रॉडबैंड प्लान चुनते हैं तो कंपनी आपको पूरे 3 महीने का इंटरनेट बिल्कुल फ्री देगी. यानी 9 महीने के प्लान की कीमत में आपको पूरे 12 महीने यानी एक साल तक सुपरफास्ट इंटरनेट चलाने को मिलेगा.&amp;nbsp;
लाॅन्ग टर्म प्लान होने की वजह से इसमें हर महीने का खर्च और भी कम हो जाता है. कंपनी के मुताबिक इस प्लान की कीमत सिर्फ 424 रुपये प्रति महीना और जीएसटी बैठती है. सभी टैक्स और इंस्टॉलेशन चार्ज मिलाने के बाद पूरे एक साल के लिए आपको कुल 6000 रुपये के आसपास देने होंगे जो आज के समय में 200Mbps की स्पीड के हिसाब से काफी सस्ती डील है.

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इन यूजर्स को ही मिलेगा फायदा
इस शानदार&amp;nbsp;ऑफर का सुनकर अगर आप भी डील डन करने की सोच रहे हैं तो पहले जान लीजिए कि&amp;nbsp;यह दिवाली धमाका ऑफर सिर्फ नए ग्राहकों के लिए ही लाया गया है यानी जो लोग पहली बार अपने घर या ऑफिस में एक्साइटेल का नया कनेक्शन लगवा रहे हैं वही इस मुफ्त इंटरनेट का फायदा उठा सकेंगे.
क्या है आखिरी तारीख?
अगर आप भी इस सस्ते और तेज इंटरनेट प्लान को लेने का मन बना रहे हैं. तो आपके पास इस महीने के आखिर तक का पूरा समय है. कंपनी का यह लिमिटेड टाइम ऑफर 30 नवंबर 2026 तक लाइव रहेगा. आप कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी डीलर से संपर्क करके इस तारीख से पहले अपना नया कनेक्शन बुक करवा सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Xiaomi Electric Toothbrush : 190 दिन की बैटरी और कलर स्क्रीन, Xiaomi ने टूथब्रश को बनाया हाईटेक</title>
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        <description><![CDATA[ Xiaomi Electric Toothbrush : स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट होम डिवाइस तक, टेक्नोलॉजी अब हमारी डेली की जरूरतों से जुड़ी चीजों को भी बदल रही है. इसी बीच Xiaomi ने एक ऐसा इलेक्ट्रिक टूथब्रश पेश किया है, जिसमें आपको ब्रश करने के तरीके से जुड़ी जानकारी भी स्क्रीन पर मिलेगी. कंपनी ने चीन में अपना नया Mijia Electric Toothbrush 2 Pro लॉन्च किया है. इसमें कलर डिस्प्ले, नया सोनिक वाइब्रेशन मोटर और अपग्रेडेड ब्रश हेड दिया गया है. इसकी सबसे खास बात इसकी बैटरी है. Xiaomi का दावा है कि यह टूथब्रश एक बार फुल चार्ज होने पर 190 दिनों तक चल सकता है. तो आइए जानते हैं कि इस स्मार्ट टूथब्रश की कीमत और खास फीचर्स क्या है.&amp;nbsp;
Xiaomi इलेक्ट्रिक टूथब्रश के खास फीचर्स क्या है?
Xiaomi के नए इलेक्ट्रिक टूथब्रश में हैंडल पर कलर डिस्प्ले दिया गया है. इस स्क्रीन पर ब्रश करने का समय और मुंह के किन हिस्सों की सफाई हुई है, इसकी जानकारी रियल टाइम में दिखाई देती है. अगर आप किसी हिस्से को साफ करना भूल जाते हैं या वहां समय नहीं देते, तो स्क्रीन पर आपको दोबारा ब्रश करने का संकेत मिलेगा. कंपनी के प्रोडक्ट इमेज में ऐसे अलर्ट भी दिखाई दिए हैं, जिनमें नीचे के दाएं हिस्से को दोबारा साफ करने और कम समय तक ब्रश करने की जानकारी दी गई है. वहीं सही तरीके से सफाई पूरी होने पर स्क्रीन पर अच्छा कवरेज होने का मैसेज भी मिलता है. इस टूथब्रश में डिफॉल्ट ब्रशिंग सेशन चार मिनट का रखा गया है.
190 दिन की बैटरी और दूसरे खास फीचर्स
चार्जिंग के लिए इसमें USB Type-C पोर्ट दिया गया है. इसे पूरी तरह चार्ज होने में करीब छह घंटे लगते हैं. Xiaomi का दावा है कि फुल चार्ज पर इसकी बैटरी 190 दिनों तक चल सकती है. इसके अलावा इसे IPX8 वाटर रेसिस्टेंस रेटिंग मिली है. इस टूथब्रश का एक और खास फीचर टू-वे प्रेशर मॉनिटरिंग है. इसमें इंडिकेटर लाइट्स दी गई हैं, जो जरूरत से ज्यादा या बहुत कम दबाव डालने पर अलर्ट करती हैं. अगर ब्रश करते समय दांतों पर ज्यादा दबाव पड़ता है, तो डिवाइस अपने वाइब्रेशन की फ्रीक्वेंसी अपने आप कम कर देता है.
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नए मोटर और ब्रश हेड से लैस है डिवाइस
इसमें Xiaomi का Sonic Vibration Motor 2.0 दिया गया है. कंपनी के मुताबिक, यह मोटर दांतों पर जमा प्लाक को हटाने में मदद करता है. इसमें अलग-अलग वाइब्रेशन पैटर्न भी मिलते हैं, जिन्हें ब्रशिंग के अलग-अलग मोड के हिसाब से तैयार किया गया है. इसके ब्रश हेड को भी पहले से अपग्रेड किया गया है. इसमें चारों तरफ शॉक एब्जॉर्ब करने वाला स्ट्रक्चर मिलता है. इसका सॉफ्ट रबर मटेरियल दांतों के लिए हल्का रखा गया है, जबकि डिजाइन ब्रश के रेशों को मुंह के साइज के हिसाब से मूव करने में मदद करता है.
Xiaomi इलेक्ट्रिक टूथब्रश की कीमत
Mijia Electric Toothbrush 2 Pro की रिटेल कीमत 249 युआन (करीब 35 डॉलर) रखी गई है. फिलहाल यह टूथब्रश चीन में लॉन्च हुआ है.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Deleted Photos: रीसेट के बाद भी वापस आ जाती हैं डिलीट हुई फोटोज, जानें क्यों</title>
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        <description><![CDATA[ Deleted Photos: रीसेट के बाद भी वापस आ जाती हैं डिलीट हुई फोटोज, जानें क्यों ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Asus Diwali Sale 2026 : दिवाली पर लैपटॉप अपग्रेड का मौका! Asus ने Zenbook से ROG तक पर दिए ऑफर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Asus Diwali Sale 2026 : दिवाली पर घर की सजावट से लेकर नए गैजेट खरीदने तक, बाजार में कई तरह के ऑफर्स देखने को मिल रहे हैं. अगर आप भी काफी समय से अपना पुराना लैपटॉप बदलने या नया लैपटॉप खरीदने की सोच रहे हैं, तो Asus की ओर से एक खास मौका दिया जा रहा है. कंपनी ने दिवाली 2026 के लिए अपने लैपटॉप पोर्टफोलियो पर फेस्टिव ऑफर्स का ऐलान किया है.
इन ऑफर्स में Vivobook से लेकर प्रीमियम Zenbook और गेमिंग के लिए ROG और TUF सीरीज तक शामिल हैं. खास बात यह है कि कुछ लैपटॉप पर 58 फीसदी तक की छूट मिल रही है. ये डील Amazon और Flipkart पर उपलब्ध हैं. इसके अलावा यूजर्स को नो-कॉस्ट EMI, बैंक डिस्काउंट और पुराने लैपटॉप के बदले एक्सचेंज ऑफर का फायदा भी मिल सकता है.
गेमिंग लैपटॉप पर बड़े ऑफर्स
गेमिंग पसंद करने वाले यूजर्स के लिए Asus ने कई ऑप्शन पेश किए हैं. Amazon पर ROG Zephyrus G14 (Core Ultra 9, 16GB RAM और 1TB SSD) को 3,39,990 रुपये में खरीदा जा सकता है, जबकि इसकी MRP 4,54,990 रुपये है. वहीं, ROG Zephyrus Duo 16 की कीमत 8,39,990 रुपये से घटकर 7,29,990 रुपये हो गई है. Flipkart पर TUF Gaming F16 (Core 5 205H) की कीमत 1,94,990 रुपये से कम होकर 1,04,990 रुपये रह गई है. TUF Gaming A15 भी 1,61,990 रुपये की जगह 92,990 रुपये में उपलब्ध है.
Amazon पर Zenbook लैपटॉप पर मिल रही छूट
Amazon पर Asus की Zenbook सीरीज के कुछ मॉडल्स को कम कीमत पर खरीदा जा सकता है. Zenbook S14 (16GB RAM और 512GB स्टोरेज) की कीमत 3,02,990 रुपये से घटकर 1,69,990 रुपये हो गई है. वहीं, Core Ultra 7 355 प्रोसेसर वाले Zenbook S14 का एक मॉडल 2,72,990 रुपये की जगह 1,67,990 रुपये में मिल रहा है. इसके अलावा Snapdragon X2 Elite वाले Zenbook A14 की कीमत 2,66,990 रुपये से घटकर 1,65,990 रुपये हो गई है.
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Vivobook और ExpertBook पर भी ऑफर
जिन लोगों को पढ़ाई, ऑफिस और रोजमर्रा के काम के लिए लैपटॉप चाहिए, उनके लिए Vivobook सीरीज में भी कई डील्स हैं. Vivobook 15 (Core 5) को 1,59,990 रुपये के बजाय 66,990 रुपये में खरीदा जा सकता है. वहीं Vivobook 16 (Ryzen 7 7840HS) की कीमत 1,37,990 रुपये से घटकर 69,990 रुपये हो गई है. इसके अलावा Flipkart पर Asus ExpertBook P1 सीरीज के कुछ मॉडल 50,990 रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध हैं. कंपनी की ExpertBook P3, P5 और Ultra सीरीज पर भी ऑफर्स दिए जा रहे हैं.
24 महीने तक नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन
लैपटॉप खरीदने के लिए यूजर्स को भुगतान के कई ऑप्शन भी मिलेंगे. कुछ मॉडल पर 24 महीने तक नो-कॉस्ट EMI की सुविधा दी जा रही है. इसके साथ कुछ लैपटॉप पर 10 फीसदी तक बैंक डिस्काउंट और एक्सचेंज ऑफर भी उपलब्ध हैं, हालांकि छूट और दूसरे ऑफर्स लैपटॉप के मॉडल और खरीदारी के प्लेटफॉर्म के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं. Asus के ये दिवाली ऑफर्स Amazon.in और Flipkart पर उपलब्ध हैं.
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        <title>फोन छोटा, लेकिन कैमरा पावर दमदार! OnePlus 16T को लेकर बड़ा खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ OnePlus 16T Features : OnePlus 16T को लेकर सामने आई लीक जानकारी में इसके कुछ खास फीचर्स का खुलासा हुआ है. बताया जा रहा है कि यह फोन आजकल मिलने वाले लंबे और पतले स्मार्टफोन्स से थोड़ा अलग होगा. इसमें चौड़ी स्क्रीन दी जा सकती है, जिससे वीडियो देखने और गेम खेलने के दौरान ज्यादा जगह मिलेगी. इसके अलावा फोन का कैमरा भी खास हो सकता है. इसमें पीछे की तरफ 200 मेगापिक्सल के दो कैमरे मिलने की उम्मीद है. कंपनी इस फोन में छोटे साइज के साथ शानदार कैमरा फीचर्स देने की तैयारी कर सकती है. तो आइए जानते हैं कि OnePlus 16T को लेकर क्या बड़ा खुलासा हुआ है.&amp;nbsp;
OnePlus 16T में मिल सकती है 6.35 इंच की स्क्रीन
लीक के अनुसार, OnePlus 16T में 6.35 इंच का फ्लैट LTPO OLED डिस्प्ले दिया जा सकता है. इसमें 1.5K रेजोल्यूशन और 120Hz रिफ्रेश रेट मिलने की बात कही गई है. खास बात यह है कि फोन की स्क्रीन का आस्पेक्ट रेशियो 16:9 या 16:10 हो सकता है. ऐसे में मौजूदा स्मार्टफोन्स की तरह लंबी और पतली स्क्रीन की जगह इसमें ज्यादा चौड़ा डिस्प्ले देखने को मिल सकता है. इससे वीडियो देखने और गेम खेलने के दौरान स्क्रीन पर ज्यादा हॉरिजॉन्टल स्पेस मिल सकता है.
OnePlus 16T को लेकर बड़ा खुलासा&amp;nbsp;
OnePlus 16T का कैमरा सेटअप इस फोन को खास बना सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें OIS सपोर्ट वाला 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है. इसके साथ 200 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा मिलने की भी उम्मीद है. पेरिस्कोप कैमरा खासतौर पर दूर की चीजों की तस्वीरें लेने के लिए यूज किया जाता है, हालांकि फोन में अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलेगा या नहीं, इसे लेकर अभी नई लीक में जानकारी नहीं दी गई है. पहले सामने आई जानकारी में 50 मेगापिक्सल के अल्ट्रा-वाइड सेंसर का जिक्र जरूर था.
7000mAh से ज्यादा की बैटरी और 80W चार्जिंग
फोन के कॉम्पैक्ट डिजाइन के बाद भी इसकी बैटरी काफी बड़ी हो सकती है. लीक के अनुसार, OnePlus 16T में 7000mAh या इससे ज्यादा क्षमता की बैटरी टेस्ट की जा रही है. इसे 80W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिल सकता है.
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Dimensity 9600M प्रोसेसर से लैस हो सकता है फोन
परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek का 3nm Dimensity 9600M चिपसेट दिए जाने की चर्चा है. इसके अलावा फोन में मेटल फ्रेम और अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर मिल सकता है. यह IP69 रेटिंग के साथ आ सकता है और फोन Android 17 पर काम कर सकता है.
कब लॉन्च होगा OnePlus 16T?
फिलहाल OnePlus 16T की लॉन्च डेट, कीमत और उपलब्धता को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. यह भी साफ नहीं है कि फोन किन बाजारों में पेश किया जाएगा. भारत में इसके लॉन्च को लेकर भी अभी स्थिति साफ नहीं है, हालांकि फोन के डिस्प्ले, कैमरा और बैटरी से जुड़ी ये सभी जानकारियां अभी लीक के जरिए ही सामने आई हैं, कंपनी ने इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Temple Wearable : फिटनेस ट्रैकिंग में टक्कर? Temple ने Apple Watch और Garmin को दी चुनौती</title>
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        <description><![CDATA[ Temple Wearable : आजकल टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड जैसे डिवाइस लोगों को उनकी सेहत से जुड़ी कई जानकारियां देते हैं. इनमें हार्ट रेट की सही जानकारी सबसे जरूरी फीचर्स में से एक है. इसी बीच Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल की कंपनी Temple ने अपने फिटनेस वियरेबल को लेकर एक बड़ा दावा किया है.
कंपनी का कहना है कि उसका डिवाइस दिल की धड़कनों यानी हार्ट रेट को मापने में Apple Watch, WHOOP और Garmin जैसे जाने-माने फिटनेस गैजेट्स से ज्यादा सटीक जानकारी देता है, हालांकि अभी कंपनी के इस दावे की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है. ये आंकड़े Temple ने अपनी ही स्टडी के आधार पर जारी किए हैं. फिलहाल दूसरे विशेषज्ञों और संस्थाओं की ओर से भी इस डिवाइस की जांच की जा रही है. इन जांचों के नतीजे आने के बाद ही साफ होगा कि Temple का वियरेबल असल में हार्ट रेट मापने में कितना सटीक है.
Apple Watch समेत पांच डिवाइस से हुई तुलना
दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Temple की एक रिसर्च के नतीजे शेयर किए. इस स्टडी में कंपनी के वियरेबल की तुलना पांच दूसरे फिटनेस डिवाइस से की गई. इनमें Apple Watch Series 12, Fitbit Air, WHOOP MG, Garmin Forerunner 970 और Oura Ring 5 शामिल हैं. गोयल के मुताबिक, हार्ट रेट की सटीकता के मामले में बाकी सभी डिवाइस Temple से पीछे रहे.
किस वियरेबल ने कितनी सटीक बताई हार्ट रेट?&amp;nbsp;रिसर्च में देखा गया कि हार्ट रेट बताने में हर डिवाइस से औसतन कितनी गलती हुई. इसके लिए धड़कनों की संख्या में अंतर को BPM यानी बीट्स प्रति मिनट के हिसाब से मापा गया. इसमें Temple का एरर 1.18 BPM दर्ज हुआ. वहीं Apple Watch Series 12 में यह 1.94 BPM, Fitbit Air में 2.96 BPM, WHOOP MG में 3.14 BPM और Garmin Forerunner 970 में 3.18 BPM रहा. Oura Ring 5 का आंकड़ा 5.21 BPM दर्ज किया गया.
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तेज एक्सरसाइज में भी Temple आगे&amp;nbsp;
स्टडी में यह भी जांचा गया कि ज्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज के दौरान डिवाइस कितनी सही हार्ट रेट बताता है. इस दौरान Temple का Zone 4 और Zone 5 में औसत एरर 1.16 BPM रहा. वहीं Zone 5 में यह घटकर 0.95 BPM पर आ गया. रिसर्च के मुताबिक, एक्सरसाइज के दौरान Temple की सिर्फ 1.8 फीसदी रीडिंग में हार्ट रेट का अंतर 5 BPM से ज्यादा था. जबकि बाकी डिवाइस में ऐसी रीडिंग का आंकड़ा 9 से 36.1 फीसदी के बीच रहा.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>OnePlus 16 Price : OnePlus 16 खरीदने के लिए खर्च करने होंगे 1.4 लाख? लॉन्च से पहले दावा</title>
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        <description><![CDATA[ OnePlus 16 Price : स्मार्टफोन की दुनिया में OnePlus की पहचान ऐसे ब्रांड के तौर पर रही है, जो प्रीमियम फीचर्स के साथ फ्लैगशिप फोन के मुकाबले थोड़ी कम कीमत रखने की कोशिश करता है, लेकिन अब कंपनी की अगली फ्लैगशिप सीरीज को लेकर सामने आई जानकारी इस तस्वीर को बदल सकती है. चर्चा है कि OnePlus भारत में एक नहीं दो नए स्मार्टफोन लाने की तैयारी कर रहा है. इनमें OnePlus 16R के साथ कंपनी का प्रीमियम मॉडल OnePlus 16 भी शामिल हो सकता है. खास बात यह है कि OnePlus 16 की संभावित कीमत 1.4 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है. अगर ऐसा होता है, तो यह फोन कंपनी के पिछले फ्लैगशिप मॉडल से काफी महंगा होगा.
भारत में OnePlus 16 और 16R की एंट्री की तैयारी?
लीक्स के मुताबिक, OnePlus 16R को भारतीय बाजार में लाने पर काम चल रहा है. वहीं OnePlus 16 का भारत आना भी लगभग तय माना जा रहा है. इससे पहले ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि कंपनी भारत में सिर्फ 16R मॉडल पेश कर सकती है. इसके अलावा लीक्स ने बताया है कि कंपनी OnePlus 16 के ग्लोबल सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग कर रही है, हालांकि कंपनी ने अभी दोनों स्मार्टफोन के भारतीय लॉन्च को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है.
OnePlus 16 के लिए देने पड़ सकते हैं 1.4 लाख रुपये
कीमत को लेकर सामने आया दावा इस फोन को चर्चा में ला रहा है. लीक्स के अनुसार, भारत में OnePlus 16 की कीमत 1.30 लाख से 1.40 लाख रुपये के बीच हो सकती है. वहीं OnePlus 16R को 70,000 से 75,000 रुपये की शुरुआती कीमत पर उतारे जाने की उम्मीद है. वहीं OnePlus 15 भारत में 85,999 रुपये और OnePlus 15R 47,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ था.
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OnePlus 16 में मिल सकती है 9000mAh की बैटरी
OnePlus 16 चीन में अक्टूबर में लॉन्च हो चुका है. वहां इसकी शुरुआती कीमत 5,999 युआन यानी करीब 86,000 रुपये है. फोन में 6.78 इंच की LTPO OLED डिस्प्ले दी गई है, जो सपोर्टेड गेम्स में 185Hz तक रिफ्रेश रेट देती है. इसमें Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 प्रोसेसर और 9,000mAh की बैटरी मिलती है. फोन 100W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करता है. इसमें 200MP का मेन कैमरा, 3x ऑप्टिकल जूम वाला 50MP टेलीफोटो कैमरा और 50MP अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है.
OnePlus 16R में भी मिल सकते हैं दमदार फीचर्स
OnePlus 16R को लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, हालांकि लीक के मुताबिक इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिल सकता है. इसके अलावा 200MP मेन कैमरा, 50MP पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा और करीब 9,000mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है. कुछ रिपोर्ट्स में 165Hz डिस्प्ले और 7,500mAh से ज्यादा की बैटरी का भी दावा किया गया है. कैमरा और डिस्प्ले को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आने के कारण इसके फाइनल फीचर्स अभी साफ नहीं हैं.
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        <pubDate>Wed, 04 Nov 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: GTA 6 का इतना खौफनाक क्रेज क्यों? जानिए रिलीज से पहले ही कैसे टूटे सारे रिकॉर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ दिसंबर 2023 में जब गेमिंग कंपनी रॉकस्टार गेम्स ने अपने अपकमिंग गेम Grand Theft Auto VI (GTA 6) का पहला ट्रेलर यूट्यूब पर जारी किया, तो उसने 24 घंटे के भीतर 93 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल करके इतिहास रच दिया. यह किसी नॉन-म्यूजिक वीडियो के लिए यूट्यूब पर अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था.
लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर एक वीडियो गेम को लेकर पूरी दुनिया में ऐसा पागलपन क्यों है? टेक्नोलॉजी, गेमिंग, एंटरटेनमेंट और पॉप-कल्चर की दुनिया में आखिर GTA 6 को &quot;सेंचुरी का सबसे बड़ा डिजिटल इवेंट&quot; क्यों माना जा रहा है?
12 साल का लंबा और ऐतिहासिक इंतजार
GTA 6 के क्रेज की पहली और सबसे बड़ी वजह समय और इंतजार है.&amp;nbsp;इसका पिछला पार्ट GTA V (GTA 5) साल 2013 में रिलीज हुआ था. उस समय दुनिया भर में प्लेस्टेशन 3 और Xbox 360 का दौर था. गेमिंग इंडस्ट्री में 12 साल का वक्त बेहद लंबा होता है. इस एक दशक के लंबे अंतराल के दौरान गेमिंग तकनीक पूरी तरह से बदल चुकी है.
रॉकस्टार गेम्स ने जल्दबाज़ी में कोई अधूरा गेम लॉन्च करने के बजाय 10 साल से भी ज़्यादा का समय एक ऐसे प्रोजेक्ट पर लगाया, जिसे बनाने में करीब 1 से 2 अरब डॉलर ($1-2 Billion) का खर्च आने का अनुमान है. यह इतिहास की सबसे महंगी एंटरटेनमेंट डील और सबसे महंगा प्रोजेक्ट बन चुका है.
वाइस सिटी की नॉस्टैल्जिया भरी वापसी
2000 के दशक में खेलने वाले गेमर्स के लिए &#039;GTA Vice City&#039; केवल एक गेम नहीं था, बल्कि बचपन की यादों का हिस्सा था. GTA 6 में खिलाड़ी एक बार फिर Leonida राज्य (जो फ्लोरिडा पर आधारित है) और iconic वाइस सिटी की गलियों में वापसी करेंगे.
हालांकि, यह पुरानी वाइस सिटी नहीं है. इस बार का मैपिंग साइज और विजुअल एस्थेटिक्स इतने विशाल और रियल हैं कि खिलाड़ी पूरी तरह से एक काल्पनिक अमेरिकी शहर के जीवन को महसूस कर सकेंगे. सड़कों, समुद्र तटों, पब, और मियामी जैसी नाइटलाइफ़ को अत्याधुनिक ग्राफिक्स के साथ फिर से जीवित किया गया है.
पहली महिला मुख्य किरदार और &#039;बोनी एंड क्लाइड&#039; जैसी लव स्टोरी
GTA फ्रेंचाइजी के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब गेम में एक महिला प्रोटेगोनिस्ट (मुख्य किरदार) होगी, जिसका नाम लुसिया है.
गेम की कहानी &#039;लुसिया&#039; और उसके साथी &#039;जेसन&#039; के इर्द-गिर्द घूमती है. रॉकस्टार ने इस जोड़ी को अमेरिका के मशहूर अपराधी जोड़े &#039;बोनी एंड क्लाइड&#039; की तर्ज पर डिजाइन किया है.
पहली बार खिलाड़ियों को केवल अंधाधुंध क्राइम करने का मौका नहीं मिलेगा, बल्कि दो अपराधियों के बीच के जटिल रिश्ते, भरोसे और आधुनिक क्राइम सिंडिकेट की एक गहरी सिनेमाई कहानी देखने को मिलेगी.
अगली पीढ़ी का हाइपर-रियलिज्म&amp;nbsp;
GTA 6 केवल बेहतर विजुअल्स के बारे में नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और गेम मैकेनिक्स में एक क्रांतिकारी बदलाव है.&amp;nbsp;शहर में घूमते हुए आम नागरिक (NPCs) केवल बेजान पुतले नहीं होंगे. हर NPC का अपना एक रूटीन, मेमोरी और व्यवहार पैटर्न होगा. अगर आप किसी दुकान में चोरी करते हैं, तो आस-पास के लोग पुलिस को फोन करेंगे या सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने लगेंगे.
ट्रेलर से साफ जाहिर होता है कि गेम में आधुनिक &#039;टिकटॉक/इंस्टाग्राम रिल्स&#039; और लाइव-स्ट्रीमिंग कल्चर को गेमप्ले के अभिन्न हिस्से के रूप में पिरोया गया है. फ्लोरिडा के सनकी वायरल कल्चर का गेम में खुलकर इस्तेमाल किया गया है.
गाड़ियों के नुकसान, पानी के बहाव, मौसम के बदलाव, जानवरों के व्यवहार (जैसे दलदल में मगरमच्छ का हमला) और कपड़ों की फिजिक्स को इस हद तक रियलिस्टिक बनाया गया है कि यह असल ज़िंदगी और गेमिंग के अंतर को खत्म कर देती है.
एक गेम जो हॉलीवुड की फिल्मों को पीछे छोड़ देता है
मनोरंजन की दुनिया में जब भी किसी बड़ी ब्लॉकबस्टर की बात होती है, तो हमारे दिमाग में हॉलीवुड की &#039;अवेंजर्स&#039; या &#039;अवतार&#039; जैसी फिल्में आती हैं. लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयान करते हैं.
GTA V ने अपनी रिलीज़ के शुरुआती 3 दिनों में ही 1 बिलियन डॉलर ($100 करोड़) की कमाई की थी जो दुनिया की किसी भी हॉलीवुड फिल्म के रिकॉर्ड से कई गुना ज्यादा थी.
GTA 6 से उम्मीद की जा रही है कि यह अपनी रिलीज़ के पहले ही दिन में 1 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर देगा. यही वजह है कि इसे केवल गेमर्स ही नहीं, बल्कि वॉल स्ट्रीट के फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स भी बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं.
ओपन-वर्ल्ड गेमिंग का नया पैमाना&amp;nbsp;
रॉकस्टार गेम्स की सबसे बड़ी ताकत है उनकी डीटेलिंग. GTA 6 का नक्शा केवल बड़ा नहीं है, बल्कि वह भरा हुआ और जीवंत है. आप किसी इमारत के अंदर जा सकते हैं, बार में ड्रिंक कर सकते हैं, स्ट्रिप क्लब जा सकते हैं, नाव चला सकते हैं, दलदली इलाकों में हंटिंग कर सकते हैं और पुलिस से बचने के लिए मास्टर प्लान बना सकते हैं.
स्वतंत्रता का यह स्तर खिलाड़ी को गेम में सैकड़ों घंटे बिताने के लिए मजबूर कर देता है.
क्यों GTA 6 इतिहास रचने जा रहा है?
GTA 6 केवल पिक्सेल और कंप्यूटर कोड से बना एक सॉफ्टवेयर नहीं है. यह 21वीं सदी की आधुनिक पॉप-संस्कृति, अमेरिकी समाज पर कटाक्ष और अत्याधुनिक तकनीक का मिला-जुला रूप है.
12 साल का लंबा इंतजार, अरबों डॉलर का बजट, गेमिंग इतिहास की पहली महिला क्राइम लीड, और हाइपर-रियलिस्टिक दुनिया इन सभी चीजों ने मिलकर GTA 6 के इर्द-गिर्द एक ऐसा माहौल बना दिया है जो इससे पहले दुनिया ने कभी किसी डिजिटल प्रोडक्ट के लिए नहीं देखा था. जब यह गेम स्टोर पर पहुंचेगा, तो यह केवल गेमिंग की दुनिया ही नहीं बदलेगा, बल्कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के सारे पुराने नियम और रिकॉर्ड ध्वस्त कर देगा. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Explained:, GTA, का, इतना, खौफनाक, क्रेज, क्यों, जानिए, रिलीज, से, पहले, ही, कैसे, टूटे, सारे, रिकॉर्ड</media:keywords>
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        <title>Slow Internet Problem: फोन में नेटवर्क फुल फिर भी धीमा चल रहा इंटरनेट, ऐसा क्यों होता है?</title>
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        <description><![CDATA[ Slow Internet Problem: कई बार घर के किसी कोने में चले जाने पर फोन के सिग्नल कम हो जाते हैं और इंटरनेट स्लो चलता है. मगर जब फोन में नेटवर्क पूरे दिख रहे हों तो लोग सोचते हैं कि अब इंटरनेट चलाने में दिकक्त नहीं आएगी. लेकिन जैसे ही इंस्टाग्राम चलाओ को लोडिंग रहती होती है और यू़ट्यूब चलाओ तो बफरिंग होती रहती है. ऐसे में लोग परेशान होकर टेलिकाॅम कंपनी को बुरा भला कहने लगते हैं.&amp;nbsp;
लेकिन यहां गलती कंपनी की नहीं बल्कि आपकी है.&amp;nbsp;दरअसल फोन में दिखने वाले सिग्नल बार सिर्फ यह बताते हैं कि आपका फोन नजदीकी मोबाइल टावर से कितनी मजबूती से जुड़ा है उनका इंटरनेट की स्पीड से सीधा लेना-देना नहीं होता. यह ठीक वैसा ही है जैसे आप किसी हाईवे पर खड़े हो सड़क एकदम बढ़िया हो लेकिन आगे भयंकर ट्रैफिक जाम लगा हो. ऐसे में आपकी गाड़ी&amp;nbsp;काफी स्लो चलेगी. चलिए आपको बताते हैं कि फुल नेटवर्क के बाद भी&amp;nbsp; इंटरनेट स्लो क्यों हो जाता है.
मोबाइल टावर पर भारी ट्रैफिक&amp;nbsp;
फुल सिग्नल होने के बावजूद इंटरनेट स्लो होने की सबसे बड़ी वजह है नटवर्क कंजेशन यानी एक ही टावर पर जरूरत से ज्यादा लोगों का लोड. जब आप किसी भीड़भाड़ वाले इलाके, मॉल, रेलवे स्टेशन या शाम के वक्त अपने घर पर होते हैं तो आपके आसपास के हजारों लोग एक ही मोबाइल टावर से कनेक्टेड होते हैं. हर मोबाइल टावर की डेटा सप्लाई करने की एक तय क्षमता यानी बैंडविड्थ होती है.&amp;nbsp;
जब एक ही समय पर बहुत लोग HD वीडियो स्ट्रीम करने लगते हैं. फाइलें डाउनलोड करते हैं या ऑनलाइन गेमिंग करते हैं. तो टावर का डेटा पाइप जाम हो जाता है. आपके फोन को टावर से सिग्नल तो पूरा मिल रहा होता है इस वजह से नेटवर्क फुल दिखता है.&amp;nbsp;
लेकिन टावर के पास आपको तेज स्पीड देने के लिए पर्याप्त बैंडविड्थ ही नहीं बचती. इसके अलावा फोन किस फ्रीक्वेंसी बैंड से जुड़ा है यह भी मायने रखता है. लो-फ्रीक्वेंसी बैंड दीवारों को पार करके घर के अंदर फुल सिग्नल तो दे देते हैं. लेकिन उनकी डेटा स्पीड हाई-फ्रीक्वेंसी बैंड के मुकाबले काफी कम होती है.

आपके स्मार्टफोन की सेटिंग्स
कई बार गलती नेटवर्क या टावर की नहीं बल्कि खुद आपके स्मार्टफोन की होती है. हमारे फोन में कई ऐसे ऐप्स होते हैं जिन्हें हम इस्तेमाल नहीं भी कर रहे हों. तब भी वे बैकग्राउंड में चुपचाप डेटा खींचते रहते हैं. क्लाउड पर फोटोज का ऑटो-बैकअप होना प्ले स्टोर पर ऐप्स का अपने-आप अपडेट होना या सोशल मीडिया ऐप्स का लगातार नोटिफिकेशन सिंक करना आपकी इंटरनेट स्पीड का बड़ा हिस्सा खा जाता है.&amp;nbsp;
बैकग्राउंड में चलते ऐप्स
इसके अलावा, अगर आपके फोन में डेटा सेवर या बैटरी सेवर मोड ऑन है. तो फोन खुद-ब-खुद इंटरनेट की रफ्तार पर ब्रेक लगा देता है ताकि बैटरी और डेटा बचाया जा सके. एक और बड़ी वजह है फोन की कैश मेमोरी और पुराना नेटवर्क कैश.&amp;nbsp;
जब हम महीनों तक फोन को रीस्टार्ट नहीं करते तो नेटवर्क कॉन्फिगरेशन में छोटे-मोटे बग्स आ जाते हैं. वहीं अगर आप किसी VPN का इस्तेमाल कर रहे हैं तो डेटा घूमकर दूसरे देश के सर्वर से आता है. जिससे फुल नेटवर्क होने पर भी स्पीड आधी से कम रह जाती है.

यह भी पढ़ें: WhatsApp Guest Calling: WhatsApp पर ऐसे बनाएं कॉल लिंक, बिना अकाउंट वाले गेस्ट भी कर सकेंगे जॉइन
स्लो इंटरनेट को ठीक करने के आसान तरीके
अगर आप भी फुल सिग्नल के बावजूद कम स्पीड से परेशान हैं. तो कुछ आसान ट्रिक्स आजमा सकते हैं. सबसे कारगर तरीका एयरप्लेन मोड. अपने फोन को 15-20 सेकंड के लिए फ्लाइट मोड पर डालें और फिर ऑन करें. इससे आपका फोन पुराने और भीड़ वाले नेटवर्क बैंड को छोड़कर सबसे फ्रेश और तेज सिग्नल चैनल से दोबारा कनेक्ट हो जाता है.&amp;nbsp;
दूसरा तरीका है अपने फोन की नेटवर्क सेटिंग्स में जाकर Reset Network Settings करना या एक बार APN यानी Access Point Name को डिफॉल्ट पर सेट करना. अगर आपके इलाके में 5G बार-बार अटक रहा है. तो फोन को मजबूरन 5G पर रखने के बजाय कुछ देर के लिए 4G/LTE पर स्विच कर लें. क्योंकि कई बार स्टेबल 4G नेटवर्क स्लो वाले 5G से बेहतर काम करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Apple Sales Record : बढ़ती लागत नहीं रोक पाई Apple की रफ्तार, इस देश में रिकॉर्डतोड़ बिक्री</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Sales Record : Apple ने एक बार फिर स्मार्टफोन बाजार में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है. बढ़ती लागत, महंगे कंपोनेंट्स और यूजर्स की घटती खरीदारी के बाद भी कंपनी ने सितंबर तिमाही में बिक्री का नया रिकॉर्ड बनाया है. खास बात यह है कि एक बड़े बाजार में कंपनी का रेवेन्यू 21 फीसदी बढ़ा. इस दौरान iPhone के साथ Mac बिजनेस ने भी शानदार परफॉर्मेंस किया, जबकि सर्विसेज से होने वाली कमाई अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. तो आइए जानते हैं कि किस देश में Apple की रिकॉर्डतोड़ बिक्री हुई.&amp;nbsp;
किस देश में Apple की रिकॉर्डतोड़ बिक्री हुई?
Apple के CEO जॉन टर्नस ने कंपनी की कमाई से जुड़ी बातचीत के दौरान बताया कि सितंबर तिमाही में चीन से कंपनी का रेवेन्यू 21 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. टर्नस के मुताबिक, चीन में Apple के एक्टिव डिवाइस यूज करने वाले यूजर्स की संख्या भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है. इसके साथ ही कंपनी ने मेनलैंड चीन में iPhone अपग्रेड करने वाले यूजर्स के मामले में भी रिकॉर्ड बनाया.
महंगे कंपोनेंट्स के बीच कैसे कायम रही पकड़?
स्मार्टफोन बनाने में यूज होने वाले मेमोरी जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत भी बढ़ रही है, लेकिन Apple को अपने प्रीमियम स्मार्टफोन की मजबूत मांग का फायदा मिला. कंपनी के यूजर महंगे iPhone खरीदने के लिए तैयार हैं, जिससे बढ़ती लागत का दबाव कुछ हद तक कम हुआ. इसके अलावा, Apple ने Huawei और Xiaomi जैसी चीनी कंपनियों के मुकाबले अपने फोन की कीमतें भी देर से बढ़ाईं. इस वजह से मुश्किल बाजार परिस्थितियों के बाद कंपनी अपनी बिक्री और यूजर्स की मांग बनाए रखने में कामयाब रही.&amp;nbsp;
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iPhone और Mac की कमाई में बड़ी बढ़त
सितंबर तिमाही में Apple का कुल रेवेन्यू 12 फीसदी बढ़कर 114.5 अरब डॉलर रहा. iPhone से कंपनी को 57.6 अरब डॉलर की कमाई हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 17 फीसदी ज्यादा है. वहीं Mac बिजनेस का रेवेन्यू 24 फीसदी बढ़कर 10.8 अरब डॉलर पहुंच गया. सर्विसेज से 31.6 अरब डॉलर की कमाई हुई, जिसमें 9.8 फीसदी की बढ़त रही, हालांकि कंपनी के सभी प्रोडक्ट्स का परफॉर्मेंस एक जैसा नहीं रहा. iPad का रेवेन्यू 6.23 अरब डॉलर रहा, जो बाजार के अनुमान से कम था. वहीं वियरेबल्स, होम और एक्सेसरीज कैटेगरी की कमाई 7.9 फीसदी गिरकर 8.3 अरब डॉलर रह गई.
भारत में भी Apple की बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत में भी Apple के लिए सितंबर तिमाही काफी शानदार रही. कंपनी के CEO जॉन टर्नस ने बताया कि जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान भारत में Apple ने अब तक का सबसे ज्यादा रेवेन्यू दर्ज किया है. खास बात यह रही कि इस दौरान पुराने iPhone से नए मॉडल पर जाने वाले यूजर्स की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. iPhone के साथ Mac और सर्विसेज बिजनेस ने भी कंपनी की कमाई बढ़ाने में योगदान दिया. कंपनी के मुताबिक, भारत उन बाजारों में शामिल रहा जहां iPhone अपग्रेड करने वाले यूजर्स की संख्या में रिकॉर्ड बढ़त देखने को मिली, हालांकि Apple ने भारत से हुई कुल कमाई का अलग आंकड़ा शेयर नहीं किया है.
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Robot Cleaner: झाड़ू&amp;पोछा लगाने वाला रोबोट कैसे काम करता है, जानिए इसकी टेक्नोलॉजी?</title>
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        <description><![CDATA[ Robot Cleaner: दिवाली का त्योहार करीब है ऐसे में सभी लोग अपने-अपने घरों की सफाई में लगे हुए हैं. दिवाली पर पूरे साल की गंदगी इत्मिनान से साफ की जाती है. लेकिन&amp;nbsp;घर की साफ-सफाई करना काफी थका देने वाला काम होता है. ऐसे में कई लोग सोचते हैं किसी का सहारा मिल जाए तो क्या ही बात बने. तो आपको बता दें&amp;nbsp;आजकल घरों की सफाई में लोगों का साथ रहे हैं रोबोट्स.&amp;nbsp;
यह दिखने में भले ही बहुत बड़ा न हो लेकिन इसके अंदर का दिमाग एकदम स्मार्ट तरीके से काम करता है.बिना किसी इंसान के सहारे यह रोबोट पूरे घर के कमरों को पहचान लेता है. फर्नीचर से टकराने से बचता है और सीढ़ियों से नीचे गिरे बिना चुपचाप अपना काम निपटा लेता है. चलिए आपको बताते हैं इस रोबोटिक सफाईकर्मी के पीछे कौन सी टेक्नोलॉजी काम करती है.
लेजर और सेंसर्स से बनाता है घर का 3D मैप
आप सोच रहे होंगे कि बिना आंखों के यह रोबोट घर का रास्ता कैसे ढूंढता है. दरअसल इसके ऊपरी हिस्से में LiDAR&#039; यानी लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग नाम की एक खास लेजर टेक्नोलॉजी लगी होती है. यह वही तकनीक है जिसका इस्तेमाल बिना ड्राइवर वाली कारों में किया जाता है. जब रोबोट चलना शुरू करता है तो इसका लेजर सेंसर तेजी से घूमकर पूरे कमरे में न दिखने वाली लाइट फेंकता है और दीवारों, सोफे, बेड या मेज की दूरी का हिसाब लगाकर अपने दिमाग में घर का एक सटीक 3D मैप तैयार कर लेता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा इसमें Anti-Collision और Cliff Sensors भी लगे होते हैं. Anti-Collision सेंसर इसे दीवारों और घर की बाकी चीजों से टकराने से बचाते हैं. जबकि इसके नीचे लगे Cliff Sensors तुरंत भांप लेते हैं कि आगे सीढ़ियां हैं और कितनी गहराई है. जिससे यह तुरंत अपने कदम पीछे खींच लेता है और गिरने से बच जाता है.&amp;nbsp;

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वैक्यूम सक्शन और स्मार्ट मॉपिंग से सफाई
घर का नक्शा बनाने के बाद रोबोट काम करता है धूल-मिट्टी साफ करने का. इस रोबोट के नीचे की तरफ घूमने वाले छोटे-छोटे साइड ब्रश लगे होते हैं. जो दीवारों के किनारों और कोनों से कचरा समेटकर मशीन के बीच वाले हिस्से में लाते हैं. इसके ठीक बीच में एक मेन रोलर ब्रश और तगड़ा वैक्यूम मोटर होता है. जो अपनी Suction Power यानी खेंचने की ताकत से बारीक से बारीक धूल, बालों और कचरे को खींचकर अंदर बने डस्टबिन में जमा कर लेता है.
वहीं पोछा लगाने के लिए इसमें एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक वॉटर टैंक और नीचे माइक्रोफाइबर पैड लगा होता है. यह साधारण पोछे की तरह पूरे फर्श पर एक साथ पानी नहीं फैलाता बल्कि इसकी स्मार्ट चिप तय करती है कि फर्श पर कितनी नमी की जरूरत है और उसी हिसाब से बूंद-बूंद करके कपड़ा गीला करती है. कई नए मॉडल्स में तो &#039;Carpet Detection सेंसर भी आता है. जो कालीन आते ही पोछा ऊपर उठा लेता है जिससे कालीन गीला न हो.

मोबाइल ऐप से कंट्रोल&amp;nbsp;&amp;nbsp;
आपको इस रोबोट के पीछे-पीछे घूमने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती. यह आपके घर के Wi-Fi से कनेक्ट होकर सीधे आपके फोन में ऐप से जुड़ जाता है. आप ऑफिस में बैठे-बैठे भी अपने फोन की स्क्रीन पर देख सकते हैं कि रोबोट ने घर के किस हिस्से की सफाई कर दी है और कौन सा कोना बाकी है.&amp;nbsp;ऐप के जरिए आप No-Go Zones भी सेट कर सकते हैं, यानी अगर आप चाहते हैं कि रोबोट पूजा घर, बाथरूम के पास या बच्चों के खिलौनों वाले हिस्से में न जाए तो फोन पर बस सेट दीजिए और रोबोट उस एरिया से दूर रहेगा.
खुद होता है चार्ज
इतना ही नहीं यह अपनी बैटरी का ख्याल भी खुद ही रखता है. सफाई करते वक्त अगर इसकी बैटरी 15-20 परसेंट से कम हो जाती है तो यह चुपचाप वापस अपने चार्जिंग डॉक पर जाकर खुद को चार्ज करता है और बैटरी फुल होते ही ठीक उसी जगह से दोबारा सफाई शुरू करता है जहां इसने काम छोड़ा था. तो बताइए है न एकदम कमाल की चीज.
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Best Budget Smartphones : 15,000 से कम में चाहिए शानदार स्मार्टफोन? ये हैं आपके लिए बेस्ट ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Best Budget Smartphones : स्मार्टफोन मार्केट में अब कम बजट में भी कई अच्छे फोन मिल जाते हैं. इनमें 5G नेटवर्क, बड़ी बैटरी, अच्छे कैमरे और शानदार डिस्प्ले जैसे फीचर्स दिए जा रहे हैं. ऐसे में अगर आप अपना पहला स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं या पुराने फोन को अपग्रेड करने की सोच रहे हैं, तो 15 हजार के बजट में कई ब्रांड्स के ऑप्शन मिल जाएंगे. इनमें POCO, Motorola, Samsung और Ai+ जैसे ब्रांड शामिल हैं. तो आइए जानते हैं कि 15,000 से कम में शानदार स्मार्टफोन बेस्ट ऑप्शन कौन-से हैं.&amp;nbsp;
15,000 से कम में शानदार स्मार्टफोन बेस्ट ऑप्शन कौन-से हैं
1. POCO M7 Pro 5G - इस बजट में POCO M7 Pro 5G अच्छा ऑप्शन है. इसमें MediaTek Dimensity 7025 Ultra प्रोसेसर, 6GB रैम और 128GB स्टोरेज मिलती है. फोन में 6.67 इंच की 120Hz AMOLED डिस्प्ले दी गई है. फोटोग्राफी के लिए 50MP और 2MP का रियर कैमरा सेटअप है. वहीं, 20MP का फ्रंट कैमरा और 5110mAh की बैटरी मिलती है. इसमें 45W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी है. इसकी कीमत 14,999 रुपये है.&amp;nbsp;
2. Moto G64 - Motorola का Moto G64 भी इस बजट में शामिल है. इसमें MediaTek Dimensity 7025 प्रोसेसर के साथ 8GB रैम और 128GB स्टोरेज मिलती है. फोन में 6.5 इंच की 120Hz IPS LCD डिस्प्ले है. इसके रियर में 50MP और 8MP के दो कैमरे दिए गए हैं. सेल्फी के लिए 16MP कैमरा और 6000mAh बैटरी मिलती है और इसकी शुरूआती कीमत 13 हजार से 14 हजार रुपये के बीच है.&amp;nbsp;
3. Realme P3x &amp;nbsp;- Realme P3x उन लोगों के लिए ऑप्शन है, जो कम कीमत में 5G स्मार्टफोन चाहते हैं. इसमें Dimensity 6400 प्रोसेसर, 6GB रैम और 128GB स्टोरेज मिलती है. फोन में 6.72 इंच की डिस्प्ले, 50MP का मुख्य कैमरा और 8MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. इसकी 6000mAh बैटरी 45W SuperVOOC चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसकी शुरूआती कीमत 12,999 है.&amp;nbsp;
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4. Samsung Galaxy F16 5G - Samsung के इस फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर मिलता है. इसमें 4GB रैम और 128GB स्टोरेज दी गई है. फोन की खासियत इसकी 6.7 इंच की Super AMOLED डिस्प्ले है. फोटोग्राफी के लिए 50MP, 5MP और 2MP का ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है. इसमें 5000mAh बैटरी और 25W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है. इसकी कीमत 12,499 रुपये है.&amp;nbsp;
5. Infinix Note 50X 5G - Infinix Note 50X में MediaTek Dimensity 7300 Ultimate प्रोसेसर दिया गया है. इसके 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट में 50MP का रियर कैमरा मिलता है. फोन में 8MP का फ्रंट कैमरा, 6.67 इंच की IPS LCD डिस्प्ले और 5500mAh बैटरी दी गई है. इसमें 45W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलता है. इसकी कीमत 13,499 है.&amp;nbsp;
6. Lava Virat V1 5G - Lava Virat V1 5G में Unisoc T8200 प्रोसेसर मिलता है. फोन में 4GB रैम, 64GB स्टोरेज और 6.75 इंच की LCD डिस्प्ले दी गई है. फोटोग्राफी के लिए 13MP का रियर और 5MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. इसकी 6000mAh बैटरी 10W चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है. इसकी कीमत 12,799 है.&amp;nbsp;
7. Ai+ Nova 2 5G - Ai+ Nova 2 5G भी इस प्राइस रेंज में एक ऑप्शन है. इसमें Unisoc T8200 प्रोसेसर, 4GB रैम और 64GB स्टोरेज मिलती है. फोन में 50MP और 2MP का रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. वहीं 8MP का फ्रंट कैमरा, 6.75 इंच की IPS LCD डिस्प्ले और 6000mAh बैटरी मिलती है. इसमें 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी है. इसकी कीमत 13,180 रुपये हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Karbonn Rebel Series Launch: Karbonn Rebel और Rebel Pro 5G लॉन्च, जानें किसे खरीदना सही?</title>
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        <description><![CDATA[ Karbonn Rebel Series Launch : भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड Karbonn ने एक बार फिर बजट सेगमेंट में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. कंपनी ने भारत में अपनी नई Rebel सीरीज के दो स्मार्टफोन Karbonn Rebel और Karbonn Rebel Pro लॉन्च किए हैं. यह दोनों फोन उन यूजर्स को ध्यान में रखकर पेश किए गए हैं, जो कम बजट में बड़ी बैटरी और नए सॉफ्टवेयर वाले स्मार्टफोन ढूंढ रहे हैं.
यह दोनों डिवाइस Android 16 पर काम करते हैं और इनमें MediaTek Helio G81 प्रोसेसर दिया गया है, हालांकि बैटरी, कैमरा और डिस्प्ले के मामले में दोनों के बीच अंतर है. तो आइए जानते हैं कि Karbonn Rebel और Rebel Pro 5G कीमत-फीचर्स क्या है और यह फोन किसे खरीदना चाहिए.&amp;nbsp;
Karbonn Rebel के फीचर्स&amp;nbsp;
कंपनी ने Karbonn Rebel उन लोगों के लिए तैयार किया है, जिनकी प्रेफरेंस फोन की लंबी बैटरी लाइफ है. इसमें 7,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसके साथ बॉक्स में चार्जर भी मिलता है. फोन में 6.75 इंच का HD+ डिस्प्ले है, जो 90Hz रिफ्रेश रेट और 650 निट्स की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करता है. फोटोग्राफी के लिए इसमें 50MP का AI रियर कैमरा दिया गया है.
Karbonn Rebel Pro में फीचर्स क्या है?
अगर डिस्प्ले और कैमरा आपके लिए ज्यादा जरूरी हैं तो Karbonn Rebel Pro एक ऑप्शन हो सकता है. इसमें 6.7 इंच की HD+ स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 720 निट्स की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है. फोटोग्राफी के लिए फोन में 64MP का AI डुअल रियर कैमरा और सेल्फी के लिए 16MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. इसमें 6,000mAh की बैटरी के साथ 20W फास्ट चार्जिंग दी गई है. फोन के साथ 20W अडैप्टर और Type-C केबल भी मिलेगी.&amp;nbsp;
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Karbonn Rebel और Rebel Pro की कीमत
Karbonn Rebel की MRP 14,999 रुपये है, लेकिन इसे 11,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया है. 1,000 रुपये के बैंक ऑफर के बाद इसकी प्रभावी कीमत 10,999 रुपये हो जाती है. वहीं Rebel Pro की MRP भी 14,999 रुपये है, लेकिन इसकी लॉन्च कीमत 12,499 रुपये रखी गई है. बैंक ऑफर के बाद इसे 11,499 रुपये में खरीदा जा सकेगा. यह दोनों फोन Amazon.in पर Amazon Specials के तौर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे.
किसे खरीदना चाहिए Karbonn Rebel और किसे Rebel Pro?
इन दोनों स्मार्टफोन की कीमत में अंतर सिर्फ 500 रुपये का है. ऐसे में 7,000mAh की बड़ी बैटरी को प्रेफरेंस &amp;nbsp;देने वाले यूजर्स Karbonn Rebel चुन सकते हैं. वहीं 120Hz डिस्प्ले, 64MP रियर कैमरा और 16MP सेल्फी कैमरे की जरूरत वाले लोगों के लिए Rebel Pro बेहतर ऑप्शन हो सकता है. इसके अलावा कंपनी ने Karbonn Rebel 5G का भी ऐलान किया है, लेकिन इसके फीचर्स, कीमत और उपलब्धता की जानकारी अभी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Karbonn, Rebel, Series, Launch:, Karbonn, Rebel, और, Rebel, Pro, लॉन्च, जानें, किसे, खरीदना, सही</media:keywords>
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        <title>Reddit Login Update: गेस्ट बनकर नहीं देख पाएंगे Reddit! कंपनी बदल रही है कंटेंट एक्सेस के नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/reddit-login-update-गेस्ट-बनकर-नहीं-देख-पाएंगे-reddit-कंपनी-बदल-रही-है-कंटेंट-एक्सेस-के-नियम</link>
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        <description><![CDATA[ Reddit Login Update: सोशल मीडिया पर कुछ भी सर्च करना हो या किसी खास मुद्दे पर लोगों की राय जाननी हो, Reddit उन प्लेटफॉर्म्स में शामिल है, जहां बिना अकाउंट बनाए भी काफी कुछ पढ़ा जा सकता है. कई बार यूजर्स गूगल पर किसी सवाल का जवाब ढूंढते हुए Reddit की चर्चा तक पहुंच जाते हैं और बिना लॉगिन किए ही पोस्ट और कमेंट पढ़कर वापस आ जाते है, लेकिन अब यह एक्सपीरियंस बदलने वाला है.
Reddit अपने प्लेटफॉर्म पर आने वाले लोगों के लिए लॉगिन को जरूरी बनाने की तैयारी कर रहा है. आने वाले समय में बिना अकाउंट के Reddit की ज्यादातर पोस्ट और चर्चाओं तक पहुंचना आसान नहीं होगा. कंपनी के CEO स्टीव हफमैन ने इस बदलाव की जानकारी दी है, फिलहाल इसे कुछ देशों में टेस्ट किया जाएगा.&amp;nbsp;
यूजर्स की पसंद के हिसाब से दिखेंगी पोस्ट और कम्युनिटी
कंपनी का कहना है कि लॉगिन जरूरी करने से यूजर्स को उनकी दिलचस्पी के मुताबिक कम्युनिटी, पोस्ट और चर्चाएं सुझाना आसान होगा. इसके अलावा लोग अपनी पसंद के विषयों पर वोट कर सकेंगे और चर्चाओं में कमेंट भी कर पाएंगे. Reddit के CEO ने यह भी साफ किया कि यह बदलाव सुरक्षा से जुड़े नियमों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.&amp;nbsp;
Reddit पर बिना लॉगिन कंटेंट देखने का तरीका कैसे बदलेगा
Reddit के CEO ने प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि कंपनी अब लॉगिन आधारित ब्राउजिंग एक्सपीरियंस की ओर बढ़ रही है. अभी तक यूजर्स बिना अकाउंट बनाए भी Reddit का ज्यादातर कंटेंट देख सकते थे, हालांकि नए बदलाव के बाद प्लेटफॉर्म यूज करने के लिए साइन इन करना पहली जरूरत बन सकता है. हफमैन के मुताबिक, Reddit पर यूजर्स को उनकी पसंद और इंटरेस्ट से जुड़ा कंटेंट दिखाना जरूरी है. इसके लिए कंपनी चाहती है कि लोग अपने अकाउंट से लॉगिन करके प्लेटफॉर्म ब्राउज करें.&amp;nbsp;
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एड्स से कमाई बढ़ाने की भी है तैयारी
Reddit के इस फैसले के पीछे सिर्फ कंटेंट को पर्सनलाइज करना ही नहीं, बल्कि कंपनी का ऐड बिजनेस भी एक वजह है. लॉगिन करने वाले यूजर्स के इंटरेस्ट के आधार पर उन्हें ज्यादा प्रासंगिक कंटेंट और एड दिखाए जा सकेंगे. इससे कंपनी को अपने ऐड बिजनेस को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है. इस बदलाव का एक बड़ा मकसद Reddit के कंटेंट की अनऑथराइज्ड तरीके से होने वाली डेटा स्क्रैपिंग को सीमित करना भी है.&amp;nbsp;
इन विजिटर्स को मिलेगी कुछ छूट
Reddit पर हर तरह की पहुंच बंद नहीं होगी. कंपनी के मुताबिक, होमपेज बिना अकाउंट के भी उपलब्ध रहेगा. इसके अलावा बाहरी सर्च इंजन या दूसरे लिंक के जरिए Reddit पर पहुंचने वाले लोग संबंधित चर्चा देख सकेंगे, फिलहाल कंपनी आने वाले महीनों में अमेरिका के बाहर कुछ बाजारों में इस बदलाव का टेस्ट शुरू करेगी, हालांकि किन देशों में सबसे पहले यह व्यवस्था लागू होगी, इसकी जानकारी अभी शेयर नहीं की गई है.
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Vivo Y32 5G Launch: पावर बैंक की जरूरत होगी कम? Vivo Y32 5G में मिली 8000mAh बैटरी</title>
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        <description><![CDATA[ Vivo Y32 5G Launch : स्मार्टफोन यूज करने वालों के लिए बैटरी की चिंता कोई नई बात नहीं है. दिनभर फोन पर वीडियो देखना, सोशल मीडिया चलाना, गेम खेलना या लगातार इंटरनेट यूज करना हो, इन सबके बीच बैटरी का जल्दी खत्म होना परेशानी बन जाता है. ऐसे में बड़ी बैटरी वाले स्मार्टफोन की मांग भी बढ़ रही है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Vivo ने अपना नया 5G स्मार्टफोन Vivo Y32 5G पेश किया है. इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8,000mAh की बैटरी है. कंपनी ने इसमें बड़ी बैटरी के साथ फोन को मजबूत बनाने के लिए भी कई तरह की सुरक्षा रेटिंग दी हैं. तो आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या-क्या खास है.
Vivo Y32 5G में क्या-क्या खास है?
Vivo Y32 5G में 4nm टेक्नोलॉजी पर बना Qualcomm Snapdragon 4 Gen 2 प्रोसेसर दिया गया है. फोन Android 16 पर आधारित OriginOS 6 पर काम करता है. इस फोन का सबसे बड़ा फीचर इसकी 8,000mAh बैटरी है. इसमें 44W फास्ट वायर्ड चार्जिंग और 7.5W रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. जरूरत पड़ने पर फोन से दूसरे कंपैटिबल डिवाइस भी चार्ज किए जा सकते हैं. Vivo का दावा है कि 1,500 बार चार्जिंग साइकल पूरा होने के बाद भी बैटरी की क्षमता 80 फीसदी से ज्यादा बनी रहेगी.
Vivo Y32 5G की कीमत&amp;nbsp;
Vivo Y32 5G को फिलहाल 6GB RAM और 128GB इंटरनल स्टोरेज वाले एक ही वेरिएंट में लिस्ट किया गया है. इसमें LPDDR4X RAM और UFS 2.2 स्टोरेज दी गई है. फोन को Dawn Gold और Midnight Black के दो कलर ऑप्शन में पेश किया गया है. हालांकि कंपनी ने अभी इसकी कीमत और बिक्री की तारीख का खुलासा नहीं किया है.
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120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले
फोन में 6.87 इंच की HD+ LCD स्क्रीन दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन 1592 बाय 720 पिक्सल है. इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है और आउटडोर ब्राइटनेस 1,300 निट्स तक जाती है. लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करने के दौरान आंखों पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए इसे TUV Rheinland लो ब्लू लाइट सर्टिफिकेशन भी मिला है.
Vivo Y32 5G का कैमरा कैसा है?
फोटोग्राफी के लिए फोन के पीछे 50MP का मुख्य कैमरा और 2MP का अतिरिक्त सेंसर दिया गया है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 8MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. फोन को IP68 और IP69 रेटिंग के साथ MIL-STD-810H सर्टिफिकेशन मिला है. इसके अलावा इसे SGS की 5-स्टार ड्रॉप रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी मिली है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung Diwali Offer : दिवाली धमाका! Samsung Galaxy S26 Ultra पर मिल रहा 94 हजार तक का फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Diwali Offer: दिवाली के मौके पर अगर आप लंबे समय से एक प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए एक शानदार डील सामने आई है. Samsung के फ्लैगशिप स्मार्टफोन Galaxy S26 Ultra 5G की कीमत में Flipkart पर बड़ी कटौती देखने को मिल रही है. जिस फोन को खरीदने के लिए पहले 1.69 लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे, अब वही स्मार्टफोन काफी कम कीमत पर लिस्ट किया गया है.
खास बात यह है कि सिर्फ कीमत में कटौती ही नहीं हुई है, बल्कि एक्सचेंज ऑफर और बैंक डिस्काउंट का फायदा उठाकर इसकी खरीदारी को और किफायती बनाया जा सकता है. कंपनी के इस प्रीमियम फोन के Black कलर वेरिएंट पर यह डील मिल रही है. तो आइए जानते हैं कि फोन की नई कीमत कितनी है और किन ऑफर्स के जरिए आप इसका फायदा उठा सकते हैं.
Samsung Galaxy S26 Ultra की कीमत पर कितनी कटौती
Flipkart पर Samsung Galaxy S26 Ultra 5G का 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाला वेरिएंट 1,29,995 रुपये में उपलब्ध है. इसकी असली कीमत 1,69,999 रुपये है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फोन को करीब 24 फीसदी डिस्काउंट के साथ लिस्ट किया गया है, जिससे यूजर्स को सीधे 40,004 रुपये की बचत हो रही है. यह डील Black कलर वेरिएंट पर दिखाई जा रही है.
किन ऑफर्स के जरिए इसका फायदा उठा सकते हैं?
फोन की कीमत को और कम करने के लिए Flipkart एक्सचेंज ऑफर भी दे रहा है. इसके तहत पुराने स्मार्टफोन को एक्सचेंज करने पर अधिकतम 48,900 रुपये तक की छूट मिल सकती है, हालांकि आपको कितनी रेट मिलेगा, यह आपके पुराने फोन के मॉडल और उसकी कंडीशन पर निर्भर करेगा. ऐसे में एक्सचेंज की फाइनल वैल्यू अलग-अलग यूजर्स के लिए अलग हो सकती है.
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SBI कार्ड से भी मिलेगा डिस्काउंट
एक्सचेंज के अलावा SBI कार्ड यूजर्स के लिए भी ऑफर दिया जा रहा है. Flipkart पर SBI बैंक ऑफर के तहत 6,500 रुपये की अतिरिक्त छूट दिखाई गई है. वहीं Flipkart Plus मेंबर्स सात SuperCoins का यूज करके 7 रुपये की अतिरिक्त बचत भी कर सकते हैं. प्लेटफॉर्म पर दिखाए गए एक्सचेंज बैंक डिस्काउंट और SuperCoins के सभी फायदे जोड़ने के बाद फोन की प्रभावी कीमत 74,588 रुपये बताई गई है. इससे ऑफर्स का पूरा फायदा मिलने पर यूजर्स को करीब 94 हजार रुपये से ज्यादा की बचत हो सकती है.
Flipkart Axis Bank कार्ड पर भी अतिरिक्त फायदा
इसके अलावा Flipkart Axis Bank Credit Card पर 5 फीसदी कैशबैक और 1,500 रुपये के गिफ्ट वाउचर का फायदा भी दिखाया जा रहा है. फोन खरीदने के लिए तीन महीने की EMI का ऑप्शन भी उपलब्ध है, हालांकि एक्सचेंज की रकम, बैंक ऑफर और दूसरे फायदे आपकी एलिजिबलिटी पर निर्भर करेंगे. ऐसे में ऑर्डर करने से पहले Flipkart के चेकआउट पेज पर सभी ऑफर्स और फाइनल कीमत जरूर चेक कर लें.
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Redmi M100 Pro Launch : 50MP कैमरा और OLED स्क्रीन का कॉम्बिनेशन, Redmi M100 Pro लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ Redmi M100 Pro Launch : स्मार्टफोन मार्केट में अब कंपनियां ऐसे फोन पेश कर रही हैं, जिनमें शानदार कैमरा, अच्छी स्क्रीन और दमदार बैटरी जैसे फीचर्स एक साथ मिलते हैं. खासकर मिड-रेंज सेगमेंट में यूजर्स को बेहतर स्क्रीन और कैमरा एक्सपीरियंस देने पर जोर दिया जा रहा है. इसी बीच Redmi ने चीन में अपना नया स्मार्टफोन Redmi M100 Pro लॉन्च किया है. यह फोन 50 मेगापिक्सल के OIS कैमरे, कर्व्ड OLED डिस्प्ले और 5,500mAh की बैटरी के साथ आया है. कंपनी ने इसमें MediaTek का Dimensity 7300-Ultra प्रोसेसर दिया है. तो आइए जानते हैं कि Redmi M100 Pro की कीमत और खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
Redmi M100 Pro के खास फीचर्स क्या हैं?
फोन में 6.67 इंच का कर्व्ड OLED डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रेजोल्यूशन 2712 बाय 1220 पिक्सल यानी 1.5K है. इसकी स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है. कंपनी के मुताबिक, डिस्प्ले की लोकल पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक है. स्क्रीन को सुरक्षा देने के लिए Corning Gorilla Glass Victus 2 का इस्तेमाल किया गया है.
Redmi M100 Pro का प्रोसेसर और बैटरी
परफॉर्मेंस के लिए इस स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity 7300-Ultra चिपसेट दिया गया है. इसके साथ 12GB LPDDR4X रैम और 256GB UFS 2.2 स्टोरेज मिलती है. फोन Xiaomi के HyperOS 3 पर काम करता है. साथ ही इसमें 5,500mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. कनेक्टिविटी के लिए 5G, Wi-Fi 6, Bluetooth 5.4, NFC और USB Type-C पोर्ट जैसे फीचर्स मौजूद हैं.
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Redmi M100 Pro में 50MP कैमरे के साथ ट्रिपल रियर सेटअप
फोटोग्राफी के लिए Redmi M100 Pro में तीन रियर कैमरे दिए गए हैं. इसका मुख्य कैमरा 50 मेगापिक्सल का है, जो OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट करता है. इसके साथ 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड और 2 मेगापिक्सल का मैक्रो कैमरा मिलता है. वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 20 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है.
कितनी है Redmi M100 Pro की कीमत?
Redmi M100 Pro को चीन में 12GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले एक ही वेरिएंट में पेश किया गया है. इसकी कीमत 2,499 चीनी युआन रखी गई है, जो भारतीय करेंसी में करीब 33,000 रुपये होती है. यह फोन Midnight Black, Mirror Porcelain White, Phantom Blue और Twilight Purple कलर ऑप्शन में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 03 Nov 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>आज से बदल गया कॉलिंग का तरीका, अब पूछना नहीं पड़ेगा &amp;apos;कौन बोल रहा है&amp;apos;?</title>
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        <description><![CDATA[ आज से बदल गया कॉलिंग का तरीका, अब पूछना नहीं पड़ेगा &#039;कौन बोल रहा है&#039;? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Smart Watch Sensor: बिना खून निकाले हार्ट रेट कैसे नाप लेती है स्मार्टवॉच, समझिए टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में स्मार्टवॉच केवल समय देखने या मोबाइल नोटिफिकेशन पढ़ने तक सीमित नहीं रह गई हैं. अब इनकी मदद से लोग अपनी सेहत से जुड़ी कई जानकारियों का भी पता लगा लेते हैं. इनमें हार्ट रेट यानी दिल की धड़कन मापने का फीचर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. हैरानी की बात यह है कि इसके लिए न तो खून निकालने की जरूरत पड़ती है और न ही शरीर में कोई सुई लगाई जाती है. बस घड़ी को कलाई पर पहनना होता है और कुछ ही सेकंड में स्क्रीन पर हार्ट रेट दिखाई देने लगता है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर स्मार्टवॉच बिना खून निकाले दिल की धड़कन कैसे गिन लेती है?
दरअसल इसके पीछे एक खास ऑप्टिकल तकनीक काम करती है, जिसे फोटोप्लेथिस्मोग्राफी यानी PPG (Photoplethysmography) कहा जाता है. यह तकनीक शरीर में खून के प्रवाह के कारण होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानती है. स्मार्टवॉच में लगे सेंसर त्वचा पर रोशनी डालते हैं और उससे मिलने वाले संकेतों का एनालिसिस करके हार्ट रेट का अनुमान लगाते हैं. आइए समझते हैं कि यह पूरी प्रोसेस कैसे काम करती है.
LED सेंसर करते हैं मदद
अगर आपने कभी स्मार्टवॉच को कलाई से उतारकर पीछे की तरफ देखा होगा, तो वहां आपको कुछ छोटे सेंसर और हरी रोशनी दिखाई दी होगी. यही रोशनी हार्ट रेट मापने की प्रोसेसे का अहम हिस्सा होती है. स्मार्टवॉच में लगे LED सेंसर त्वचा के अंदर हरी रोशनी भेजते हैं. इसके बाद एक फोटो डायोड सेंसर यह पता लगाता है कि त्वचा से कितनी रोशनी वापस आ रही है. जब दिल धड़कता है, तो आर्टरीज में खून का प्रवाह बढ़ता है. इससे कलाई की बल्ड वेसल्स में खून की मात्रा में थोड़ा बदलाव होता है. खून हरी रोशनी को आसपास के टिश्यू की तुलना में ज्यादा अवशोषित करता है. इसलिए जब धड़कन के साथ खून की मात्रा बढ़ती है, तो सेंसर तक वापस पहुंचने वाली रोशनी कम हो जाती है.
सेंसर गिनता है दिल की धड़कन
स्मार्टवॉच का सेंसर लगातार रोशनी में होने वाले इन छोटे बदलावों को रिकॉर्ड करता रहता है. इसके बाद घड़ी का सॉफ्टवेयर इन संकेतों का एनालिसिस करता है. हर धड़कन के साथ मिलने वाले संकेतों के पैटर्न को पहचानकर यह पता लगाया जाता है कि एक मिनट में दिल कितनी बार धड़क रहा है. इसी गणना को बीपीएम यानी Beats Per Minute कहा जाता है. अगर स्मार्टवॉच स्क्रीन पर 75 BPM दिखा रही है, तो इसका मतलब है कि आपका दिल एक मिनट में लगभग 75 बार धड़क रहा है. हालांकि स्मार्टवॉच केवल रोशनी के आधार पर ही गणना नहीं करती. इसमें खास एल्गोरिदम भी होते हैं, जो बाहरी हलचल और दूसरे कारणों से पैदा होने वाले गलत संकेतों को कम करने की कोशिश करते हैं.
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&amp;nbsp;हर बार सही हार्ट रेट नहीं बताती स्मार्टवॉच
स्मार्टवॉच से मिलने वाला हार्ट रेट रीडिंग आमतौर पर रोजमर्रा की गतिविधियों और आराम के समय उपयोगी हो सकता है. हालांकि इसकी सटीकता कई बातों पर निर्भर करती है. अगर घड़ी कलाई पर ढीली पहनी गई है, तो सेंसर को सही संकेत नहीं मिल सकते. इसके अलावा दौड़ने, व्यायाम करने या हाथ तेजी से हिलाने पर भी रीडिंग प्रभावित हो सकती है. त्वचा का रंग, कलाई पर टैटू, शरीर का तापमान और सेंसर की गुणवत्ता भी कुछ डिवाइस में रीडिंग को प्रभावित करती है. इसलिए अलग-अलग स्मार्टवॉच में हार्ट रेट के आंकड़ों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है.
हार्ट रेट सेंसर और ECG में होता है अंतर
कई लोग PPG सेंसर और ECG फीचर को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों की तकनीक अलग है. PPG सेंसर रोशनी के जरिए खून के प्रवाह में होने वाले बदलावों को मापता है. वहीं ECG यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम दिल की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है. कुछ स्मार्टवॉच में ECG की सुविधा भी मिलती है, लेकिन इसके लिए आमतौर पर घड़ी के साथ दूसरे इलेक्ट्रोड को उंगली से छूना पड़ता है. यह फीचर सामान्य हार्ट रेट मॉनिटर से अलग है और सभी स्मार्टवॉच में उपलब्ध नहीं होता.
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Induction Using Tips: इंडक्शन चूल्हा चलाते समय इन बातों का रखें ध्यान, नहीं तो होगा बड़ा नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/induction-using-tips-इंडक्शन-चूल्हा-चलाते-समय-इन-बातों-का-रखें-ध्यान-नहीं-तो-होगा-बड़ा-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ Induction Using Tips: आजकल रसोई का में खाने बनाने के तरीके में काफी बदलाव आ चुका है. अब लोग गैस सिलेंडर के साथ-साथ इंडक्शन चूल्हा भी इस्तेमाल करते हैं. खासतौर पर छोटे परिवारों के लिए में तो ज्यादा इसी का इस्तेमाल होता है. जब अचानक रात में गैस खत्म हो जाए या फिर तुरंत चाय-मैगी बनानी हो तो सबसे पहले इंडक्शन ही इस्तेमाल में लाया जाता है. सबसे अच्छी बात इसे इस्तेमाल करना काफी आसान होता है.
लेकिन जितना इसे इस्तेमाल करना आसान है उतना ही उसका रखरखाव करना होता है. यह पूरी तरह से बिजली और मैग्नेटिक टेक्नोलॉजी पर काम करता है, इसलिए इसे सामान्य गैस चूल्हे की तरह रफ एंड टफ तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. अक्सर लोग अनजाने में इसे चलाते वक्त कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं जो किसी बड़े हादसे की वजह बन जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि इंडक्शन इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
इन बर्तनों के लिए नहीं बनी टेक्नोलाॅजी
इंडक्शन चूल्हे पर खाना बनाते समय सबसे जरूरी है सही बर्तन का इस्तेमाल करना है. इस पर सिर्फ वही बर्तन काम करते हैं जिनका तला चपटा हो और जो स्टील या लोहे जैसे मैग्नेटिक मेटल से बने हों. एल्युमिनियम, तांबे या कांच के सामान्य बर्तन इस पर काम नहीं करते हैं. अक्सर लोग गैस की तरह पहले इंडक्शन ऑन कर देते हैं और फिर उस पर सूखा बर्तन रखकर तेल या पानी डालने का इंतजार करते हैं.&amp;nbsp;
यह सबसे बड़ी और खतरनाक गलती है. इंडक्शन बिना आग के सीधे बर्तन को गर्म करता है. जिससे खाली बर्तन कुछ ही सेकंड में जरूरत से ज्यादा तप जाता है. इससे न सिर्फ आपका महंगा नॉन-स्टिक बर्तन जलकर खराब हो सकता है, बल्कि इंडक्शन के ऊपर लगी सिरेमिक ग्लास प्लेट भी ओवरहीटिंग की वजह से चटक सकती है. इसलिए हमेशा बर्तन में पानी, दूध या तेल डालने के बाद ही उसे इंडक्शन पर रखें और फिर स्विच ऑन करें. इसके साथ ही गीले तले वाले बर्तन को पोंछकर ही ऊपर रखें.

वेंटिलेशन और साफ-सफाई में कभी न बरतें लापरवाही
अगर आपने कभी इंडक्शन को पलटकर देखा हो तो उसके नीचे एक छोटा सा कूलिंग फैन और हवा पास होने के लिए जाली बनी होती है. जब इंडक्शन चलता है, तो अंदर की कॉइल और मदरबोर्ड काफी गर्म हो जाते हैं. जिन्हें ठंडा रखने का काम यही पंखा करता है. कई लोग किचन के स्लैब को गंदा होने से बचाने के लिए इंडक्शन के नीचे अखबार, कपड़ा या प्लास्टिक की मैट बिछा देते हैं. ऐसा करने से नीचे का एयर वेंट बंद हो जाता है और गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती है.&amp;nbsp;
नतीजा यह होता है कि अंदर के पार्ट्स जल जाते हैं और शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है. इसे हमेशा समतल और साफ जगह पर ही रखें और दीवार से कम से कम चार इंच की दूरी बनाकर रखें. इसके अलावा खाना बनाने के तुरंत बाद गर्म ग्लास पर गीला कपड़ा कभी न मारें. अचानक ठंडा-गर्म होने से इसका कांच टूट सकता है. जब यह पूरी तरह ठंडा हो जाए तभी इसे हल्के हाथ से साफ करें.

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पावर सप्लाई और स्विच ऑफ करने का सही तरीका
अमूमन लोगों की आदत होती है कि खाना पकते ही वे सीधे मेन बोर्ड से स्विच बंद कर देते हैं. लेकिन यह आदत इंडक्शन की उम्र घटा देती है. दरअसल जब आप इंडक्शन के टच पैनल से इसे ऑफ करते हैं. तो भी इसके अंदर लगा पंखा एक से दो मिनट तक चलता रहता है ताकि अंदर की सारी गर्मी बाहर निकल सके.&amp;nbsp;अगर आप सीधे मेन स्विच बंद कर देंगे तो पंखा तुरंत रुक जाएगा और अंदर की हीट मदरबोर्ड को डैमेज कर देगी.&amp;nbsp;
इसलिए हमेशा पहले इंडक्शन का पावर बटन दबाएं और जब पंखे की आवाज बंद हो जाए तभी मेन स्विच ऑफ करें. इसके अलावा इंडक्शन हाई वोल्टेज लेता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;इसलिए इसे कभी भी सस्ते एक्सटेंशन बोर्ड या ढीले सॉकेट में लगाकर न चलाएं. इससे तार पिघलने और आग लगने का डर रहता है. इसे हमेशा मजबूत पावर प्लग में ही लगाएं और उस पर भारी वजन वाले बर्तन जोर से पटकने से बचें.
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Induction, Using, Tips:, इंडक्शन, चूल्हा, चलाते, समय, इन, बातों, का, रखें, ध्यान, नहीं, तो, होगा, बड़ा, नुकसान</media:keywords>
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        <title>Why Phone Off In Flight: फ्लाइट में क्यों ऑफ करवा दिए जाते हैं फोन, अगर ऑन किया तो क्या होगा?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Phone Off In Flight: हवाई जहाज में सफर करते समय एयरहोस्टेस या क्रू मेंबर्स द्वारा सबसे पहला निर्देश यही दिया जाता है कि सभी यात्री अपने मोबाइल फोन को पूरी तरह से बंद कर लें या फिर उन्हें एयरप्लेन मोड पर डाल दें. फ्लाइट टेक-ऑफ होने तक फोन को इसी स्थिति में रखने की सख्त हिदायत होती है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर आसमान में उड़ते हुए जहाज में एक छोटे से मोबाइल फोन को चालू रखने से क्या हो जाएगा. क्या फोन चालू रहने से कोई बड़ा हादसा हो सकता है या प्लेन क्रैश हो सकता है.&amp;nbsp;
पायलट के कम्यूनिकेशन सिस्टम में पैदा होती है बाधा
सबसे पहले ह साफ करना जरूरी है कि मोबाइल फोन ऑन रहने से कोई हवाई जहाज सीधे क्रैश नहीं होता है. असली समस्या पायलट के कम्यूनिकेशन और नेविगेशन सिस्टम में आने वाली बाधा से जुड़ी होती है. जब आपका फोन नॉर्मल मोड पर रहता है, तो वह जमीन पर मौजूद नजदीकी मोबाइल टावर से कनेक्ट होने के लिए लगातार रेडियो सिग्नल भेजता और रिसीव करता है.&amp;nbsp;
जैसे ही प्लेन हवा में ऊपर जाता है, जमीन के मोबाइल टावर्स काफी दूर छूट जाते हैं. ऐसे में आपका फोन नेटवर्क तलाशने के लिए अपनी सिग्रल स्ट्रेंथ को बहुत ज्यादा बढ़ा देता है. मोबाइल फोन से निकलने वाले ये मजबूत रेडियो सिग्नल सीधे तौर पर फ्लाइट के संवेदनशील इलेक्ट्रोनिक उपकरणों से टकराते हैं.
पायलट के हेडफोन में गूंजती है परेशान करने वाली आवाज
हवाई जहाज उड़ाते समय पायलट को नीचे कंट्रोल रूम ATC से लगातार दिशा-निर्देश मिलते रहते हैं कि प्लेन को किस ऊंचाई पर उड़ाना है और मौसम कैसा है. पायलट और ATC के बीच यह बातचीत रेडियो फ्रेक्वेंसी के जरिए होती है.
यदि प्लेन में कुछ यात्रियों के भी फोन ऑन रह जाते हैं, तो उन फोन्स के सिग्नल पायलट के रेडियो सिस्टम में इंटरफेरेंस पैदा कर सकते हैं. इसके आप इस तरह समझ सकते हैं कि जब किसी चालू स्पीकर या रेडियो के पास मोबाइल फोन पर कॉल आती है, तो स्पीकर से अजीब सी आवाज आने लगती है. ठीक वैसी ही आवाज पायलट के हेडफोन में गूंजने लगती है. इससे पायलट को कंट्रोल रूम से आ रही जरूरी आवाजें साफ सुनाई नहीं देती हैं, जिससे नेविगेशन में गलती होने का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
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टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय सबसे ज्यादा खतरा
फ्लाइट के पूरे सफर में टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है. इस दौरान पायलट को कंट्रोल रूम के साथ हर सेकंड संपर्क में रहना पड़ता है. अगर इसी समय पायलट के हेडफोन में मोबाइल सिग्नल्स की वजह से रुकावट आएगी, तो वह ATC के जरूरी निर्देश मिस कर सकता है. आसमान में एक छोटी सी लापरवाही या गलतफहमी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. यही वजह है कि विमान नियामक संस्थाएं सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करतीं और फोन को एयरप्लेन मोड पर रखना अनिवार्य बनाती हैं.
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Immersion Rod Power Consumption: 1 घंटा चलने पर कितनी बिजली खाती है आपकी इमर्शन रॉड, जानें गणित</title>
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        <description><![CDATA[ Immersion Rod Power Consumption: उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में अब सुबह-शाम ठंड ने दस्तक दे दी है. सर्दियों की शुरुआत होते ही घरों में पानी गर्म करने के लिए गीजर और इमर्शन रॉड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है. गीजर के मुकाबले इमर्शन रॉड काफी सस्ती आती है, इसलिए मध्यमवर्गीय परिवारों में इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाल्टी में डालकर पानी गर्म करने वाली यह छोटी सी रॉड आपके घर का बिजली बिल कितना बढ़ा देती है. अगर आप इसे रोज 1 घंटा चलाते हैं, तो महीने का खर्च कितना आएगा.&amp;nbsp;
इमर्शन रॉड की क्षमता को समझना है जरूरी
बाजार में मिलने वाली इमर्शन रॉड आमतौर पर तीन अलग-अलग कैपेसिटी में आती हैं- 1000 वाट, 1500 वाट और 2000 वाट. आपकी रॉड कितनी बिजली खाएगी, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितने वाट की है.
जब कोई 1000 वाट का उपकरण लगातार 1 घंटे तक चलता है, तो वह 1 यूनिट बिजली की खपत करता है. इस 1 यूनिट को तकनीकी भाषा में 1kWh कहा जाता है. इसी फॉर्मूले के आधार पर इमर्शन रॉड की बिजली खपत का हिसाब लगाया जाता है.
1 घंटा चलने पर कितनी यूनिट गिरती है?
अगर आपके घर में 1000 वाट की इमर्शन रॉड है और आप उसे रोजाना लगातार 1 घंटा चलाते हैं, तो वह पूरे 1 यूनिट बिजली खर्च करेगी. वहीं, अगर आप 1500 वाट की भारी रॉड इस्तेमाल करते हैं, तो 1 घंटे में वह करीब 1.5 यूनिट बिजली खींच लेती है. अगर रॉड 2000 वाट की है, तो मात्र 1 घंटे में ही 2 यूनिट बिजली साफ हो जाएगी.
महीने का खर्च&amp;nbsp;
अब बात करते हैं जेब पर पड़ने वाले असर की. भारत के अलग-अलग राज्यों में घरेलू बिली की दरें अलग-अलग हैं. औसतन मान लेते हैं कि आपके इलाके में बिजली की दर 7 रुपये प्रति यूनिट है. अगर आप 1000 वाट की रॉड रोज 1 घंटा चलाते हैं , तो एक दिन का खर्च 7 रुपये दुआ. इस हिसाब से महीने के 30 दिन का खर्च 210 रुपये आएगा.
अगर आपके घर में 1500 वाट की रॉड है, तो रोज 1.5 यूनिट के हिसाब से प्रतिदिन का खर्च 10.5 रुपये होगा, जिससे एक महीने का खर्च 315 हो जाएगा. वहीं, 2000 वाट की रॉड होने पर 2 यूनिट के हिसाब से प्रतिदिन का खर्च 14 रुपये और महीने का कुल खर्च 420 रुपये बैठेगा.
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बिजली का बिल बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स
इमर्शन रॉड का इस्तेमाल करते समय कुछ छोटी बातों का ध्यान रखकर आप बिजली के बिल को बढ़ने से रोक सकते हैं. सबसे पहले, हमेशा पानी गर्म करने के लिए प्लास्टिक की बाल्टी का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि स्टील या लोहे की बाल्टी में हीट लॉस ज्यादा होता है और पानी गर्म होने में वक्त लेता है. दूसरी बात, बाल्टी को हमेशा ढक कर रखें ताकि भाप बाहर न निकले और पानी जल्दी गर्म हो जाए. इसके अलावा, रॉड पर समय के साथ सफेद रंग की स्केल जम जाती है, उसे नियमित रूप से साफ करते रहें. अगर रॉड पर गंदगी जमा रहेगी, तो वह पानी गर्म करने में दोगुना समय लेगी और आपका बिजली बिल बेवजह बढ़ जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Printer Buying Tips: प्रिंटर खरीदने का प्लान है तो खरीदने से पहले, ये 3 चीजें चेक कर लें</title>
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        <description><![CDATA[ Printer Buying Tips: आज का दौर भले ही कितना ही डिजिटल हो गया हो लेकिन आज भी प्रिंटर की जरूरत तो हर घर में होती है. कभी बच्चों के स्कूल के प्रोजेक्ट्स होते हैं, कभी ऑफिस के जरूरी डॉक्यूमेंट्स तो कभी कोई सरकारी फॉर्म प्रिंट निकालना होता है. इनको बाहर से प्रिंट करवाओ तो आने-जाने का झंझट और एक्सट्रा पैसे देने पड़ जाते हैं. इसलिए अब ज्यादातर लोग घर पर ही अपना खुद का प्रिंटर रखना पसंद कर रहे हैं.&amp;nbsp;
लेकिन जब हम प्रिंटर खरीदने जाते हैं. तो वहां इतने सारे मॉडल्स देखकर कन्फ्यूजन हो जाती है. अक्सर लोग सिर्फ कम कीमत देखकर सस्ता प्रिंटर खरीद लेते हैं. लेकिन कुछ ही महीनों बाद उसकी इंक और मेंटेनेंस का खर्च परेशान करने&amp;nbsp;लगा जाता है. कई बार सस्ता प्रिंटर लेने के चक्कर में हर एक पेज की छपाई बाजार से भी महंगी पड़ने लगती है. अगर आप भी अपने घर या छोटे ऑफिस के लिए नया प्रिंटर खरीदने का प्लान बना रहे हैं. तो खरीदने से पहले यह तीन बातें जरूर चेक कर लें.
इंकजेट, इंक टैंक या लेजर सही टेक्नोलॉजी कौनसी?
प्रिंटर खरीदते समय सबसे पहली और बड़ी गलती लोग उसकी टेक्नोलॉजी चुनने में करते हैं. मार्केट में तीन तरह के प्रिंटर मिलते हैं- कार्ट्रिज वाले इंकजेट, रिफिल होने वाले इंक टैंक और टोनर वाले लेजर प्रिंटर. अगर आपको महीने में सिर्फ 10-15 पेज ही प्रिंट करने होते हैं तो सस्ता कार्ट्रिज वाला इंकजेट प्रिंटर ठीक लग सकता है. लेकिन इसकी कार्ट्रिज बहुत जल्दी खत्म होती है और काफी महंगी आती है. इसके अलावा कई दिनों तक इस्तेमाल न करने पर इसकी इंक सूखने की भी दिक्कत रहती है.&amp;nbsp;
वहीं अगर घर में बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट्स के लिए कलर और ब्लैक एंड व्हाइट दोनों तरह के खूब सारे प्रिंट निकालने पड़ते हैं तो इंक टैंक टेक्नोलॉजी वाला प्रिंटर सबसे बेस्ट रहता है. इसमें इंक की बोतलें सस्ती आती हैं और एक बार रिफिल करने पर हजारों पेज आसानी से छप जाते हैं. दूसरी तरफ अगर आपका काम सिर्फ तेजी से ब्लैक एंड व्हाइट डॉक्यूमेंट्स प्रिंट करने का है तो लेजर प्रिंटर सबसे किफायती साबित होता है.

Wi-Fi और मोबाइल प्रिंटिंग फीचर देखें
पुराने जमाने के प्रिंटर इस्तेमाल करने के लिए उन्हें हमेशा तार के जरिए लैपटॉप या कंप्यूटर से जोड़कर रखना पड़ता था. लेकिन आज की टेक्नोलॉजी के दौर में बिना वायरलेस कनेक्टिविटी वाला प्रिंटर खरीदना सही नहीं है. आजकल हम अपने ज्यादातर डॉक्यूमेंट्स, PDF और फोटोज कंप्यूटर के बजाय सीधे स्मार्टफोन के व्हाट्सएप या ईमेल पर रिसीव करते हैं. इसलिए नया प्रिंटर खरीदते समय यह जरूर चेक करें कि उसमें इन-बिल्ट Wi-Fi, Wi-Fi डायरेक्ट और क्लाउड प्रिंटिंग का सपोर्ट दिया गया हो.&amp;nbsp;
इस फीचर की मदद से आपको हर बार लैपटॉप ऑन करने या पेनड्राइव लगाने की झंझट नहीं रहेगी. आप अपने फोन में प्रिंटर कंपनी का मोबाइल ऐप डाउनलोड करके घर के किसी भी कोने से बैठकर एक क्लिक में सीधे फोन से प्रिंट कमांड दे सकते हैं. यहां तक कि अगर आपके घर में Wi-Fi राउटर नहीं भी है तब भी Wi-Fi डायरेक्ट फीचर के जरिए आपका फोन सीधे प्रिंटर से कनेक्ट होकर बिना इंटरनेट के प्रिंट निकाल सकता है.

ऑल-इन-वन फंक्शन और ऑटो डुप्लेक्स फीचर चेक करें
प्रिंटर चुनते वक्त सिर्फ उसकी शुरुआती कीमत देखने के बजाय उसके रनिंग कॉस्ट यानी प्रति पेज आने वाले खर्च को चेक करना बेहद जरूरी है. खरीदने से पहले यह जरूर पता करें कि उस मॉडल की ओरिजिनल इंक बॉटल या टोनर कितने रुपये का आता है और उससे कुल कितने पेज प्रिंट हो सकते हैं. इसके साथ ही सिंगल फंक्शन प्रिंटर लेने के बजाय ऑल-इन-वन प्रिंटर चुनना हमेशा फायदेमंद रहता है.&amp;nbsp;
इसमें प्रिंटिंग के साथ-साथ डॉक्यूमेंट स्कैन करने और फोटोकॉपी निकालने की सुविधा भी एक ही मशीन में मिल जाती है. जिससे घर पर ही आधार या पैन कार्ड की कॉपी तुरंत निकाली जा सकती है. एक और बेहद काम का टेक्निकल फीचर ऑटो डुप्लेक्स प्रिंटिंग है. जिन प्रिंटर्स में यह फीचर होता है वे कागज के दोनों तरफ अपने आप प्रिंट कर देते हैं और आपको हाथ से बार-बार पन्ना पलटकर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे न सिर्फ आपका समय बचता है बल्कि कागज की भी आधी बचत होती है. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Immersion Rod Technology : छोटी सी रॉड मिनटों में गर्म कर देती है पानी, जानें इसके पीछे की टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ Immersion Rod Technology : सर्दियों की सुबह हो और बाथरूम में गर्म पानी न मिले तो दिन की शुरुआत ही मुश्किल लगने लगती है. ऐसे में ज्यादातर लोग गीजर का यूज करते हैं, लेकिन हर घर में गीजर लगा हो, यह जरूरी नहीं है. खासकर किराये के मकान, हॉस्टल या ऐसी जगहों पर रहने वाले लोगों के लिए गर्म पानी का इंतजाम करना कई बार परेशानी बन जाता है. ऐसी में एक छोटी सी इलेक्ट्रिक रॉड काम आती है, जिसे इमर्शन रॉड कहा जाता है.
साइज में छोटी होने के बाद भी यह रोड मिनटों में पानी गर्म करने का काम करती है. इसे यूज करने के लिए न तो दीवार पर इंस्टॉलेशन की जरूरत होती है और न ही किसी बड़े सेटअप की, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बिजली से चलने वाली यह रॉड पानी को गर्म कैसे करती है. तो आइए जानते हैं कि इसके पीछे काम करने वाली टेक्नोलॉजी क्या है.&amp;nbsp;
क्या होती है इमर्शन रॉड?
इमर्शन रॉड एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर है, जिसे बाल्टी या किसी दूसरे कंटेनर में पानी गर्म करने के लिए यूज किया जाता है. इसमें एक मेटल हीटिंग एलिमेंट होता है, जो सुरक्षा कवच के अंदर लगा रहता है. बाजार में आमतौर पर 1000 वॉट और 1500 वॉट की इमर्शन रॉड मिलती हैं. इनकी मदद से जरूरत के मुताबिक पानी गर्म किया जा सकता है.&amp;nbsp;
कैसे काम करती है इमर्शन रॉड?
इमर्शन रॉड में इलेक्ट्रिकल रेजिस्टेंस हीटिंग तकनीक का यूज होता है. इसमें बिजली मिलने पर अंदर मौजूद हीटिंग एलिमेंट गर्म होने लगता है. यह एलिमेंट निकल, क्रोम और टंगस्टन जैसी धातुओं से बनाया जा सकता है. बिजली से पैदा हुई गर्मी मेटल की बाहरी परत तक पहुंचती है और फिर आसपास मौजूद पानी का तापमान बढ़ने लगता है. इस प्रक्रिया में रॉड सीधे पानी के संपर्क में रहती है, इसलिए गर्मी पानी तक पहुंचती है. पानी की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, उसे गर्म होने में उतना ही ज्यादा समय लग सकता है.&amp;nbsp;
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तीन हिस्सों से मिलकर बनती है रॉड
इमर्शन हीटर में मुख्य रूप से तीन हिस्से होते हैं. जिसमें पहला शीथ मटेरियल है. यह गर्मी को पानी तक पहुंचाती है. वहीं दूसरा हिस्सा एनक्लोजर है, जो आमतौर पर एल्युमीनियम या प्लास्टिक का बना होता है और रॉड को पकड़ने में मदद करता है. इसके अलावा तीसरा हिस्सा हीटिंग एलिमेंट है, जो बिजली को गर्मी में बदलने का काम करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Voice Control : अब iPhone बनेगा आपका रिमोट कैमरा, बिना छुए ऐसे करें फोटो क्लिक</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Voice Control : अब iPhone बनेगा आपका रिमोट कैमरा, बिना छुए ऐसे करें फोटो क्लिक ]]></description>
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        <title>TRAI AI Guidelines: AI से ग्राहक को नुकसान तो टेलीकॉम कंपनियां जिम्मेदार, ट्राई का बड़ा फैसला</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/trai-ai-guidelines-ai-से-ग्राहक-को-नुकसान-तो-टेलीकॉम-कंपनियां-जिम्मेदार-ट्राई-का-बड़ा-फैसला</link>
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        <description><![CDATA[ TRAI AI Guidelines: देश के टेलिकॉम सेक्टर में एआई के इस्तेमाल के बीच भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण TRAI ने एक बड़ा फैसला लिया है. TRAI ने साफ कर दिया है कि अगर टेलिकॉम कंपनियों के नेटवर्क या सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले एआई सिस्टम के कारण किसी भी ग्राहक को कोई नुकसान या परेशानी होती है, तो उसके लिए सीधे तौर पर टेलिकॉम कंपनियां ही जिम्मेदार होंगी.
TRAI ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदारी भरे इस्तेमाल को लेकर नए दिशा-निर्देशों का एक मजबूत ड्राफ्ट फ्रैमवर्क पेश किया है. इस नए नियम के आने के बाद टेलिकॉम कंपनियां एआई की गलतियों या तकनीकी कमियों का ठीकरा किसी दूसरी कंपनी पर फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी.
थर्ड-पार्टी वेंडर से खरीदा हो सॉफ्टवेयर तो भी कंपनी की होगी जवाबदेही
TRAI ने अपने नए नियमों में जवाबदेही को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. आज के समय में रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी बड़ी कंपनियां अपने नेटवर्क को सुधारने और धोखाधड़ी रोकने के लिए कई तरह के एआई सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं.
इनमें से कई सिस्टम बाहरी टेक कंपनियों से खरीदे जाते हैं. TRAI के नए नियमों के मुताबिक, एआई सिस्टम चाहे कंपनी ने खुद बनाया हो या किसी बाहरी वेंडर से खरीदा हो, उसके हर नतीजे की जिम्मेदारी मुख्य टेलिकॉम ऑपरेटर की ही होगी.&amp;nbsp;
लागू होगें एआई के कड़े नियम और जोखिम के आधार पर वर्गीकरण
इस नए फ्रेमवर्क के तहत अब देश की सभी टेलिकॉम कंपनियों को अपने बोर्ड से मंजूर कराई गई एक खास एआई पॉलिसी बनानी होगी. इसके साथ ही कंपनियों को अपने नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले सभी सिस्टम को उनके काम के आधार पर तीन श्रेणियों- हाई रिस्क, मीडियम रिस्क और लो रिस्क में बांटना होगा.
नेटवर्क ट्रैफिक को संभालने वाले बड़े सॉफ्टवेयर हाई रिस्क में आएंगे, क्योंकि उनके गलत फैसले से पूरे इलाके का मोबाइल नेटवर्क बंद हो सकता है. वहीं, सामान्य सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट को कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा जा सकता है.&amp;nbsp;
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गंभीर घटनाओं की रिपोर्ट सीधे TRAI को देना होगा अनिवार्य&amp;nbsp;
TRAI ने यह भी अनिवार्य किया है कि अगर एआई सिस्टम में कोई बड़ी गड़बड़ी या खराबी आती है, तो कंपनियों को एक तय समय के अंदर इसकी पूरी रिपोर्ट सीधे ट्राई को सौंपनी होगी. इसके लिए कंपनियों को अपने यहां एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार करना होगा, जिसमें एआई से जुड़ी सभी गड़बड़ियों और ग्राहकों की शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा.
साथ ही, हर कंपनी में एक विशेष एआई गवर्नेंस एंड सेफ्टी कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसके अधिकारी इन एआई सिस्टम पर लगातार नजर रखेंगे और किसी भी गलत फैसले की स्थिति में इंसानी दखल के जरिए उसे तुरंत ठीक करेंगे. ट्राई के इस कड़े कदम से आने वाले समय में करोड़ों मोबाइल ग्राहकों के हितों और उनके डेटा की सुरक्षा और मजबूत हो जाएगी.
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Phone Maintenance Tips : फोन की उम्र बढ़ाने के तरीके, सालों तक मिलेगी बेहतर परफॉर्मेंस</title>
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        <description><![CDATA[ Phone Maintenance Tips : फोन की उम्र बढ़ाने के तरीके, सालों तक मिलेगी बेहतर परफॉर्मेंस ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 01 Nov 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>WiFi Router Setup : महंगा Wi&amp;Fi भी नहीं देगा पूरी स्पीड! जानें राउटर सेटअप की ये गलतियां</title>
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        <description><![CDATA[ WiFi Router Setup : आज के समय में घर हो या ऑफिस, इंटरनेट के बिना ज्यादातर काम अधूरे रह जाते हैं. ऑनलाइन मीटिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और जरूरी फाइल डाउनलोड करने के लिए लोग अच्छा Wi-Fi प्लान लेते हैं. कई बार महंगे प्लान के बाद भी इंटरनेट की स्पीड उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलती है. ऐसे में लोग अपने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को इसकी वजह मानने लगते हैं, जबकि परेशानी आपके Wi-Fi राउटर की सेटिंग और उसे लगाने की जगह में भी हो सकती है. नया राउटर खरीदने के बाद उसे सही तरीके से सेटअप करना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि राउटर सेटअप करते समय कौन-सी गलतियां न करें.&amp;nbsp;
क्या महंगा Wi-Fi प्लान लेने से ज्यादा जरूरी है राउटर का सही सेटअप?
सिर्फ महंगा Wi-Fi प्लान लेने से ही आपको बेहतर इंटरनेट स्पीड और बिना रुकावट कनेक्टिविटी नहीं मिलती है. नया राउटर लगाने के बाद उसकी पोजीशन, एंटीना और नेटवर्क सेटिंग पर ध्यान देना जरूरी है, जिससे उपलब्ध इंटरनेट कनेक्शन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके. अगर घर में राउट का सेटअप सही नहीं है, तो नेटवर्क की पहुंच और सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में महंगे प्लान के बाद भी आपको कमजोर इंटरनेट स्पीड मिल सकती है.&amp;nbsp;
राउटर सेटअप करते समय कौन-सी गलतियां न करें
1. राउटर को कोने में न रखें - राउटर को घर के किसी कोने में लगाने की जगह बीच की जगह पर रखें. इससे घर के सभी हिस्सों में बेहतर Wi-Fi कवरेज मिल सकता है.
2. इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के पास न रखें - माइक्रोवेव, कॉर्डलेस फोन और बेबी मॉनिटर जैसे डिवाइस राउटर के सिग्नल को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए इन्हें राउटर से दूर रखें.
3. एंटीना की दिशा गलत न रखें - एंटीना की पोजिशन नेटवर्क कवरेज पर असर डालती है. एक ही फ्लोर पर इस्तेमाल के लिए एंटीना सीधे रखें, जबकि मल्टीस्टोरी घर में इन्हें करीब 30 डिग्री के कोण पर रखें.
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4. 5GHz नेटवर्क को इग्नोर न करें - अगर आपके डुअल-बैंड राउटर में 5GHz नेटवर्क बंद है, तो इसकी सेटिंग में जाकर इसे चालू करें. इससे आपको इस नेटवर्क बैंड का इस्तेमाल करने का ऑप्शन मिलेगा.
5. गेस्ट नेटवर्क बनाना न भूलें - घर या ऑफिस में दूसरे लोगों को Wi-Fi देना है, तो अलग गेस्ट अकाउंट बनाएं. इससे उन्हें आपके प्रिंटर और फाइल सर्वर जैसे दूसरे कनेक्टेड डिवाइस का एक्सेस नहीं मिलेगा.
6. WPS फीचर चालू न छोड़ें - अगर आप WPS का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो इसे बंद रखें. इसके PIN के जरिए Wi-Fi से कनेक्ट किया जा सकता है और इसे क्रैक करना आसान हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Vi Voice Only Plans : Vi के बिना डेटा वाले प्लान में क्या&amp;क्या मिलेगा? जानें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Vi Voice Only Plans : आज भी बड़ी संख्या में ऐसे मोबाइल यूजर्स हैं, जिन्हें इंटरनेट डेटा से ज्यादा फोन कॉलिंग और SMS की जरूरत होती है. खासकर जो लोग फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं या मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल कम करते हैं, उनके लिए डेटा वाले रिचार्ज प्लान कई बार बेवजह महंगे साबित होते हैं. ऐसे यूजर्स को ध्यान में रखते हुए टेलीकॉम कंपनियां अब बिना डेटा वाले रिचार्ज ऑप्शन भी पेश कर रही हैं. Vodafone Idea (Vi) ने भारत में चार नए वॉयस-ओनली प्रीपेड प्लान लॉन्च किए हैं.
इन प्लान में यूजर्स को इंटरनेट डेटा की जगह अनलिमिटेड कॉलिंग और SMS की सुविधा मिलेगी. Vi के ये नए प्लान TRAI के निर्देश के बाद पेश किए गए हैं. इससे पहले Airtel भी इसी तरह के वॉयस-ओनली प्लान लॉन्च कर चुका है. तो आइए जानते हैं कि Vi के बिना डेटा वाले प्लान में क्या-क्या मिलेगा.&amp;nbsp;
TRAI के निर्देश के बाद आए नए प्लान
Vi के इन रिचार्ज प्लान के पीछे TRAI का निर्देश है. 21 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन में टेलीकॉम कंपनियों को सिर्फ वॉयस और SMS वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर (STV) उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था. TRAI के मुताबिक, कम इनकम वाले यूजर्स, खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों और फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों को कम अवधि वाले किफायती रिचार्ज की जरूरत है. नए नियमों के तहत इन वाउचर की वैलिडिटी हर महीने एक ही तारीख को रिन्यू होनी चाहिए. अगर किसी महीने वह तारीख उपलब्ध नहीं है, तो महीने की आखिरी तारीख को रिन्यूअल किया जाएगा.&amp;nbsp;
Vi के बिना डेटा वाले प्लान में क्या-क्या मिलेगा
Vi ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर चार नए रिचार्ज ऑप्शन शामिल किए हैं. इनकी शुरुआती कीमत 179 रुपये रखी गई है. खास बात यह है कि इनकी वैलिडिटी 25 दिन से लेकर एक महीने तक है. इन सभी प्लान में अनलिमिटेड कॉलिंग और 300 SMS मिलते हैं, हालांकि कीमत और वैलिडिटी के हिसाब से इनमें कुछ अंतर हैं.&amp;nbsp;
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Vi के चार नए वॉयस-ओनली प्लान&amp;nbsp;1. 179 रुपये वाला प्लान - यह सबसे सस्ता वॉयस-ओनली रिचार्ज है. इसमें 25 दिन की वैलिडिटी के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग और 300 SMS मिलते हैं. इसके अलावा Vi Movies and TV ऐप पर कंटेंट देखने की सुविधा भी दी गई है.&amp;nbsp;
2. 189 रुपये वाला प्लान - इस रिचार्ज में 28 दिन की वैलिडिटी मिलती है. इसमें भी अनलिमिटेड कॉलिंग और 300 SMS शामिल हैं, हालांकि इसमें Vi Movies and TV ऐप का एक्सेस नहीं मिलता है.&amp;nbsp;
3. 203 रुपये वाला प्लान - इस प्लान की कीमत 203 रुपये है और इसमें 30 दिन की वैलिडिटी दी गई है. यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग और 300 SMS मिलते हैं.&amp;nbsp;
4. 206 रुपये वाला प्लान - यह Vi का सबसे महंगा वॉयस-ओनली ऑप्शन है. इसमें एक महीने की वैलिडिटी, अनलिमिटेड कॉलिंग और 300 SMS दिए जाते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Diwali Smart Lights:  मोबाइल से बदलें दिवाली की झालर का रंग, बिना उठे कंट्रोल होंगी लाइट्स</title>
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        <description><![CDATA[ Diwali Smart Lights: अब से कुछ दिन 8 नवंबर को देश भर में दिवाली का त्योबार धूमधाम से मनाया जाएगा. दिवाली का त्योहार आते ही हर घर को रंग-बिरंगी रोशनी और चमचमाती झालरों से सजाने की तैयारी शुरू हो जाती हैं. बालकनी से लेकर छत और मेन गेट तक हर कोने पर लाइट्स लगाई जाती हैं जिससे घर सबसे खूबसूरत दिखे. लेकिन पारंपरिक झालरों को बार-बार ऑन-ऑफ करने और उनका मोड बदलने के लिए प्लग और स्विच बोर्ड के पास जाना पड़ता है.&amp;nbsp;
इसलिए अब लोगों ने पुराने तरीकों की लाइट की जगह नई लाइट्स लगाना शुरू कर दिया है. मार्केट में अब स्मार्ट एलईडी झालर और वाई-फाई स्ट्रिप लाइट्स आ चुकी हैं. इन स्मार्ट लाइट्स को कंट्रोल करने के लिए आपको अपनी जगह से उठने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. आप सोफे और बेड पर बैठे-बैठे अपने स्मार्टफोन से ही पूरे घर की लाइटिंग का रंग और पैटर्न आसानी से बदल सकते हैं.&amp;nbsp;
फोन से कैसे बदल जाता है झालर का रंग?
स्मार्ट दिवाली लाइट्स दिखने में भले ही आम एलईडी झालर जैसी लगती हैं. लेकिन इनके अंदर ब्लूटूथ या वाई-फाई चिप लगी होती है. जब आप इन लाइट्स को खरीदते हैं. तो इसके बॉक्स या कंट्रोलर पर एक क्यूआर कोड दिया होता है. इसे स्कैन करके आपको अपने फोन में एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होता है. जैसे ही आपकी झालर फोन के ब्लूटूथ या घर के वाई-फाई से कनेक्ट होती है.
आपका स्मार्टफोन ही उस लाइट का रिमोट बन जाता है. ऐप के अंदर आपको एक कलर व्हील मिलता है,. जिसमें लाखों कलर्स के शेड्स मौजूद होते हैं. आपका जब मन करे आप एक ही झालर को कभी पीला, कभी नीला तो कभी मल्टीकलर में बदल सकते हैं. पहले जहां अलग-अलग रंग के लिए अलग झालर खरीदनी पड़ती थी. वहीं अब एक ही स्मार्ट लाइट से आप हर रोज अपने घर को नया लुक दे सकते हैं. इसके अलावा ऐप से ही लाइट की ब्राइटनेस को कम या ज्यादा भी किया जा सकता है.

गाने की बीट पर नाचेंगी लाइट्स&amp;nbsp;
इन स्मार्ट लाइट्स में सिर्फ रंग बदलने का ही नहीं बल्कि म्यूजिक सिंक और वॉयस कंट्रोल जैसे कमाल के फीचर्स भी मिलते हैं. इन लाइट्स के कंट्रोलर में एक छोटा सा इन-बिल्ट माइक होता है या फिर ये सीधे आपके फोन के माइक का इस्तेमाल करती हैं. दिवाली पार्टी के दौरान जब आप घर में कोई गाना या म्यूजिक बजाएंगे, तो ये झालरें अपने आप गाने की बीट और धुन के हिसाब से ब्लिंक करेंगी और रंग बदलेंगी.&amp;nbsp;
इससे घर का माहौल एकदम पार्टी जैसा हो जाता है. अगर आपके घर में अलेक्सा या गूगल असिस्टेंट स्पीकर है तो आप इन लाइट्स को उससे भी लिंक कर सकते हैं. इसके बाद आपको फोन उठाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. आप बस अपनी आवाज से कमांड देंगे कि बालकनी की लाइट ऑन कर दो या लाइट का रंग लाल कर दो और चंद सेकंड में आपकी झालर का रंग बदल जाएगा.

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ऑटोमैटिक टाइमर करें सेट&amp;nbsp;
अक्सर रात को देर से सोने के चक्कर में हम बाहर की झालर बंद करना भूल जाते हैं. जिससे सुबह तक फालतू बिजली खर्च होती रहती है. स्मार्ट लाइट्स के ऐप में आपको शेड्यूल और टाइमर लगाने का ऑप्शन भी मिलता है. आप इसमें शाम 6 बजे ऑन होने और रात 12 बजे अपने आप ऑफ होने का टाइम सेट कर सकते हैं. इसके बाद लाइट्स रोज तय समय पर खुद ही जलेंगी और बंद हो जाएंगी.&amp;nbsp;
पुरानी झालरों के लिए नया जुगाड़
वहीं अगर आपके पास पहले से ही बहुत सारी नार्मल झालरें रखी हैं और आप नई स्मार्ट लाइट्स पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना चाहते. तो आप सिर्फ एक स्मार्ट प्लग खरीद सकते हैं. यह स्मार्ट प्लग 500 से 700 रुपये में ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केट में आसानी से मिल जाता है. अपनी पुरानी सभी झालरों का कनेक्शन इस एक स्मार्ट प्लग में लगा दें जिसके बाद आप नार्मल लाइट्स को भी मोबाइल ऐप से ऑन-ऑफ और टाइमर पर सेट कर पाएंगे.
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Diwali, Smart, Lights:, मोबाइल, से, बदलें, दिवाली, की, झालर, का, रंग, बिना, उठे, कंट्रोल, होंगी, लाइट्स</media:keywords>
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        <title>CNAP Rule: दूसरे के नाम सिम तो कैसे दिखेगा असली कॉलर का नाम? कल से बदल रहे नियम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cnap-rule-दूसरे-के-नाम-सिम-तो-कैसे-दिखेगा-असली-कॉलर-का-नाम-कल-से-बदल-रहे-नियम</link>
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        <description><![CDATA[ CNAP Rule: कल यानी 1 नवंबर से देश के करोड़ों फोन यूजर्स के लिए कॉलिंग से जुड़े नियम पूरी तरह बदलने जा रहे हैं. टेलीकॉम कंपनियां कल से देशभर में कॉलर नेम प्रेजेंटेशन यानी CNAP सर्विस लागू करने जा रही हैं. अब तक जब भी आपके फोन पर किसी अनजान नंबर से कॉल आता था तो स्क्रीन पर सिर्फ नंबर फ्लैश होता था. कॉल किसका है यह जानने के लिए हमें थर्ड पार्टी कॉलर आईडी ऐप्स का सहारा लेना पड़ता था.&amp;nbsp;
लेकिन कल से बिना किसी ऐप के भी आपको फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का असली नाम दिखाई देगा. दूरसंचार विभाग ने बढ़ते साइबर फ्रॉड और फर्जी कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है. हालांकि इस नए नियम के आने से उन करोड़ों लोगों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जो अपने माता-पिता, भाई-बहन या किसी दूसरे फैमिली मेंबर के नाम पर ली गई सिम का इस्तेमाल कर रहे हैं.
दूसरे के नाम पर सिम तो स्क्रीन पर किसका नाम आएगा?
भारत में यह बहुत आम बात है कि सिम कार्ड घर के किसी बड़े सदस्य जैसे पापा, मम्मी या भाई की आईडी पर खरीदा जाता है और उसका इस्तेमाल घर का कोई दूसरा सदस्य करता है. ऐसे में CNAP नियम लागू होने के बाद सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यही है कि कॉल करने पर किसका नाम शो होगा. नियम के मुताबिक CNAP सिस्टम पूरी तरह से टेलीकॉम कंपनियों के केवाईसी डेटाबेस पर काम करता है.&amp;nbsp;
यानी सिम खरीदते समय जिस व्यक्ति का आधार कार्ड या पहचान पत्र लगाया गया था कंपनी के रिकॉर्ड में वही असली मालिक है. इसलिए अगर आप अपने पिता के नाम पर रजिस्टर्ड सिम चला रहे हैं और किसी अनजान नंबर पर कॉल करते हैं तो सामने वाले की स्क्रीन पर आपका नहीं बल्कि आपके पिता का नाम दिखाई देगा. अगर आप चाहते हैं कि कॉल करने पर आपका ही नाम दिखे तो आपको टेलीकॉम ऑपरेटर के पास जाकर सिम को अपने नाम पर ट्रांसफर या पोर्ट करवाना होगा.

पहले से सेव नंबरों का क्या होगा?
यह नया सरकारी कॉलर आईडी सिस्टम थर्ड पार्टी ऐप्स से बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा भरोसेमंद तरीके से काम करेगा. थर्ड पार्टी ऐप्स में लोग अपनी मर्जी से कुछ भी नाम लिख लेते थे. लेकिन CNAP में सीधे टेलीकॉम कंपनियों के वेरिफाइड रिकॉर्ड से नाम उठाया जाएगा. जब कोई अनजान शख्स आपको कॉल करेगा तो फोन की डिस्प्ले पर सबसे ऊपर उसका मोबाइल नंबर और ठीक उसके नीचे सिम कार्ड के मालिक का सरकारी दस्तावेज वाला नाम नजर आएगा.&amp;nbsp;
वहीं अगर आपने किसी व्यक्ति का नंबर पहले से अपने फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट में किसी खास नाम से सेव कर रखा है. तो स्क्रीन पर आपके द्वारा सेव किया गया नाम ही पहले दिखेगा. इसके अलावा अगर कोई कॉल विदेश से आ रहा है. तो स्क्रीन पर नंबर के साथ साफ तौर पर इंटरनेशनल कॉल लिखा हुआ दिखाई देगा. जिससे लोग विदेशी नंबरों से होने वाले स्कैम से सावधान हो सकेंगे.

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कंपनियों के लिए क्या हैं नियम?
शुरुआती चरण में कल से यह सुविधा देश के सभी 4G और 5G नेटवर्क यूजर्स के लिए डिफॉल्ट रूप से चालू की जा रही है. इसके लिए आपको अपने फोन में कोई अलग से ऐप डाउनलोड करने या सेटिंग बदलने की जरूरत नहीं होगी. 2G और 3G नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए इसे आगे चलकर अलग से रोलआउट किया जाएगा. वहीं बिजनेस और कंपनियों के लिए भी खास नियम बनाए गए हैं.&amp;nbsp;
अगर कोई कंपनी चाहती है कि उसके कर्मचारियों के फोन से कॉल जाने पर कंपनी या ब्रांड का नाम दिखे तो उन्हें अपने GST या ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज टेलीकॉम कंपनी को देकर अपना नाम अपडेट कराना होगा. यूजर्स की प्राइवेसी का ध्यान रखते हुए कंपनियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि कॉल कटने के बाद कॉलर का नाम सिस्टम में स्टोर न रखा जाए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Best Games 2026: शानदार ग्राफिक्स और दमदार गेमप्ले का कॉम्बिनेशन, ये हैं 2026 के बेस्ट गेम्स</title>
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        <description><![CDATA[ Best Games 2026 : गेमिंग की दुनिया में हर साल कई नए टाइटल्स दस्तक देते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही ऐसे होते हैं जो अपनी कहानी, शानदार ग्राफिक्स और गेमप्ले के दम पर खिलाड़ियों के साथ-साथ गेम क्रिटिक्स का भी दिल जीत पाते हैं. साल 2026 में भी ऐसे कई गेम सामने आए हैं, जिन्होंने अलग-अलग जॉनर में अपनी खास पहचान बनाई है. कहीं दोस्तों के साथ मिलकर एक बड़ी दुनिया एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है, तो कहीं रेसिंग, एक्शन, हॉरर और एडवेंचर का जबरदस्त एक्सपीरियंस मिलता है. इस साल अब तक रिलीज हुए गेम्स की रेटिंग पर नजर डालें तो Big Walk सबसे आगे है. तो आइए जानते हैं कि 2026 के बेस्ट गेम्स कौन-से हैं.&amp;nbsp;
2026 के टॉप गेम्स में शामिल हैं ये नाम
1. Big Walk - इस साल का सबसे ज्यादा रेटिंग पाने वाला नया गेम Big Walk है. इसे 91 का Metascore मिला है. इसमें खिलाड़ी दोस्तों के साथ ऑनलाइन एक बड़ी खुली दुनिया में घूम सकते हैं और मिलकर पहेलियां सुलझा सकते हैं. यह गेम 4 अगस्त को PC, PS5 और Switch 2 के लिए रिलीज हुआ.
2. Forza Horizon 6 - रेसिंग पसंद करने वालों के लिए यह गेम खास है. इसमें जापान की लोकेशन को ओपन वर्ल्ड के रूप में दिखाया गया है. खिलाड़ी 550 से ज्यादा असली कारों के साथ शहरों की सड़कों और पहाड़ी रास्तों पर रेसिंग का एक्सपीरियंस ले सकते हैं.
3. Mina the Hollower - Shovel Knight बनाने वाले Yacht Club Games का यह नया एक्शन-एडवेंचर गेम है. इसमें Mina नाम की किरदार को एक श्रापित द्वीप को बचाना है. दुश्मनों से लड़ने और जमीन के नीचे जाकर रास्ते तलाशने जैसे ऑप्शन इसमें मिलते हैं.
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4. Trails in the Sky 2nd Chapter - यह एक JRPG गेम है, जिसमें Estelle Bright अपने साथी Joshua की तलाश में निकलती है. इस दौरान उसे Ouroboros संगठन का सामना भी करना पड़ता है.
5. Resident Evil Requiem - इस हॉरर गेम में Grace Ashcroft और Leon S. Kennedy की कहानी दिखाई गई है. जहां Grace के हिस्से में सर्वाइवल हॉरर का एक्सपीरियंस आता है, वहीं Leon के साथ एक्शन देखने को मिलता है.
गेमिंग के शौकीनों के लिए साल में अभी और मौके
2026 में अब तक कई बड़े गेम रिलीज हो चुके हैं, लेकिन साल खत्म होने से पहले भी कुछ बड़े टाइटल्स का इंतजार है. इनमें GTA 6 और World of Warcraft: Forever जैसे गेम शामिल हैं, जिनसे गेमिंग की दुनिया में हलचल बढ़ने की उम्मीद है. फिलहाल, इस साल की रेटिंग बताती है कि ओपन-वर्ल्ड रेसिंग से लेकर हॉरर और लाइफ सिमुलेशन तक, गेमर्स के पास खेलने के लिए कई अलग-अलग ऑप्शन मौजूद हैं.
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp Group Chat Update: WhatsApp ग्रुप में जुड़े 4 नए फीचर्स, एडमिन&amp;मेंबर्स को क्या होगा फायदा?</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Group Chat Update : WhatsApp ग्रुप में कई बार बातचीत इतनी आगे बढ़ जाती है कि नए जुड़ने वाले सदस्य पुरानी बातों से अनजान रह जाते हैं. वहीं किसी जरूरी मैसेज को लंबे समय तक ढूंढना भी आसान नहीं होता है. ऐसे में ग्रुप की बातचीत को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए WhatsApp ने नए बदलाव किए हैं. Meta के इस इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म ने ग्रुप चैट के लिए चार नए फीचर्स पेश किए हैं. तो आइए जानते हैं कि WhatsApp ग्रुप में जुड़े 4 नए फीचर्स क्या हैंं और इन नए फीचर्स से एडमिन और मेंबर्स को क्या फायदा होगा.&amp;nbsp;
WhatsApp ग्रुप में जुड़े 4 नए फीचर्स क्या हैं?
1. नए मेंबर्स को भेज सकेंगे पुरानी चैट हिस्ट्री - WhatsApp के नए अपडेट में ग्रुप एडमिन और मैनेजर्स के लिए एक खास सुविधा जोड़ी गई है. अब अगर कोई नया सदस्य ग्रुप में शामिल होता है, तो उसे पहले हुई बातचीत के कुछ मैसेज भी भेजे जा सकेंगे. इसके लिए एडमिन या मैनेजर हाल ही में जुड़े सदस्य के नाम पर टैप करके पुरानी चैट हिस्ट्री शेयर कर सकते हैं. कंपनी के मुताबिक, शेयर किए जाने वाले मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहेंगे.
2. जरूरी मैसेज कर सकेंगे पिन - ग्रुप में किसी जरूरी जानकारी को बार-बार ढूंढने की परेशानी भी कम होने वाली है. WhatsApp अब यूजर्स को ग्रुप चैट में मैसेज हमेशा के लिए पिन करने का विकल्प दे रहा है. अभी तक किसी मैसेज को अधिकतम 30 दिनों तक ही पिन किया जा सकता था. इसके अलावा यूजर्स 24 घंटे और 7 दिनों के लिए भी मैसेज पिन कर सकते थे. नए फीचर के बाद पिन किए गए मैसेज को हमेशा के लिए ग्रुप में सबसे ऊपर रखा जा सकेगा.
3. मेंशन वाले मैसेज ढूंढना आसान - ग्रुप में रोजाना ढेर सारे मैसेज आते हैं, ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि किस बातचीत में आपको टैग किया गया है. इस समस्या को ध्यान में रखते हुए WhatsApp ने मेंशन फिल्टर की सुविधा जोड़ी है. इसे इस्तेमाल करने पर चैट में सिर्फ मैसेज हाइलाइट होंगे, जिनमें किसी यूजर को मेंशन किया गया है. इससे जरूरी बातचीत पर ध्यान देना आसान होगा.
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4. ग्रुप मेंबर्स के साथ शेयर कर सकेंगे स्टेटस - WhatsApp का चौथा फीचर ग्रुप स्टेटस से जुड़ा है. अब यूजर्स अपना स्टेटस किसी खास ग्रुप के सदस्यों के साथ शेयर कर सकेंगे. यह सुविधा सामान्य WhatsApp Status की तरह काम करेगी, जिसमें फोटो और वीडियो शेयर किए जा सकते हैं. ग्रुप स्टेटस 24 घंटे बाद अपने आप गायब हो जाएगा. खास बात यह है कि ग्रुप के दूसरे सदस्य उस स्टेटस पर रिएक्शन दे सकेंगे और अपना स्टेटस भी जोड़ सकेंगे.
एडमिन-मेंबर्स को क्या होगा फायदा?
WhatsApp के इन नए फीचर्स से ग्रुप एडमिन और मेंबर्स दोनों के लिए चैट मैनेज करना आसान होगा. एडमिन नए सदस्यों को पहले हुई बातचीत के मैसेज भेज सकेंगे, जिससे उन्हें ग्रुप की पुरानी चर्चाओं और जरूरी जानकारियों को समझने में मदद मिलेगी. वहीं किसी नए मेंबर को शुरुआत में चैट हिस्ट्री भेजना भूल जाने पर भी बाद में इसे शेयर किया जा सकेगा. मेंबर्स जरूरी मैसेज को हमेशा के लिए पिन कर पाएंगे और मेंशन फिल्टर की मदद से उन मैसेज को आसानी से ढूंढ सकेंगे, जिनमें उन्हें टैग किया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>WhatsApp, Group, Chat, Update:, WhatsApp, ग्रुप, में, जुड़े, नए, फीचर्स, एडमिन-मेंबर्स, को, क्या, होगा, फायदा</media:keywords>
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        <title>Moon AI Supercomputer: चांद पर पहुंचेगा AI का दिमाग, पहली बार वहां होगा सुपरकंप्यूटर का टेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Moon AI Supercomputer: अब तक आपने AI को स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर में काम करते देखा होगा, लेकिन जल्द ही इसका यूज धरती से लाखों किलोमीटर दूर चांद पर भी होने वाला है. अंतरिक्ष की दुनिया में अब ऐसे कंप्यूटर तैयार करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जो बिना धरती से निर्देश मिले&amp;nbsp; लगातार अपना काम कर सकें. इसी बीच अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी Hewlett Packard Enterprise (HPE) एक खास कंप्यूटिंग सिस्टम चांद पर भेजने की तैयारी कर रही है.
इसे Astrolab के FLIP नाम के रोवर में लगाया जाएगा. इस मिशन के साथ पहली बार चांद की सतह पर GPU और AI से जुड़े प्रयोग किए जाएंगे. इसका मकसद यह समझना है कि फ्यूचर में चांद पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी के लिए ऐसी तकनीक कितनी यूजफुल हो सकती है.
चांद पर कैसे पहुंचेगा AI सुपरकंप्यूटर?
कैलिफोर्निया की स्पेस कंपनी Astrolab अपने बिना इंसान वाले रोवर FLIP को Griffin Mission 1 (Griffin-1) के तहत चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतारने की तैयारी कर रही है. इस रोवर में HPE का Spaceborne Computer-4 लगाया जाएगा. कंपनी के मुताबिक, यह चांद पर पहुंचने वाला HPE का पहला सुपरकंप्यूटर होगा. इसके साथ ही वहां पहली बार GPU और AI से जुड़े प्रयोग भी किए जाएंगे.&amp;nbsp;
बिना GPS के रास्ता खोजेगा रोवर
चांद पर GPS की सुविधा नहीं है, ऐसे में रोवर के लिए सही रास्ता पहचानना भी एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए Astrolab नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) में विकसित नेविगेशन सॉफ्टवेयर का यूज करेगी. यह तकनीक पहले मंगल ग्रह पर यूज की जा चुकी है और अब पहली बार चांद पर इसका परीक्षण होगा. मशीन लर्निंग की मदद से रोवर अपने कैमरे से दिखने वाले नजारों की तुलना पहले से मौजूद मैप से करेगा. इससे वह अपनी लोकेशन पहचान सकेगा और गड्ढों जैसे खतरनाक रास्तों से बच सकेगा.&amp;nbsp;
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इतने घंटे तक अंधेरे में टिकने की चुनौती
इस मिशन की सबसे बड़ी परीक्षा कंप्यूटर की क्षमता से ज्यादा उसकी मजबूती होगी. इसे चांद पर करीब एक साल तक काम करने के हिसाब से तैयार किया जा रहा है. इस दौरान इसे कई चंद्र रातों का सामना करना होगा, जिनमें 150 घंटे से ज्यादा समय तक सूरज की रोशनी नहीं मिलेगी. ऐसे में सिस्टम को बिना सौर ऊर्जा के भी इन मुश्किल परिस्थितियों में टिके रहना होगा.
फ्यूचर के चंद्र मिशन में क्या होगा फायदा?
यह कंप्यूटर रोवर के कैमरों से मिलने वाली तस्वीरों का विश्लेषण करेगा, जमीन की स्थिति समझेगा और चांद की मैपिंग में मदद करेगा. इसमें AI एप्लिकेशन चलाने का भी परफॉर्मेंस किया जाएगा. फ्यूचर में ऐसी तकनीक चांद पर संसाधनों की पहचान करने और रोबोटिक मिशन को लंबे समय तक चलाने में मददगार हो सकती है. यही वजह है कि इस मिशन को अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक जरूरी तकनीकी परीक्षण माना जा रहा है.
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Air Purifier: एयर प्यूरीफायर खरीदने से पहले, जान लें ये 3 जरूरी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Air Purifier:&amp;nbsp;दिवाली के त्योहार की आमद लगभग हो चुकी है. अबसे कुछ दिन बाद ही 8 नवंबर को दिवाली का त्योहार है.&amp;nbsp;जहां एक तरफ चारों ओर रोशनी और खुशियों का माहौल होता है. वहीं दूसरी तरफ हवा में बढ़ता प्रदूषण और धुआं लोगों की सेहत के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है. खासतौर पर दिल्ली-NCR और बड़े शहरों में दिवाली के आसपास हवा इतनी जहरीली हो जाती है कि घर के अंदर भी सांस लेना मुश्किल होने लगता है.&amp;nbsp;
ऐसे में अपने परिवार, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को इस जहरीली हवा से बचाने के लिए लोग एयर प्यूरीफायर खरीद रहे हैं. लेकिन अक्सर जानकारी न होने के चलते लोग&amp;nbsp;सिर्फ ब्रांड का नाम और डिस्काउंट देखकर कोई भी मशीन घर ले आते हैं. बाद में पता चलता है कि वह मशीन कमरे की हवा को ठीक से साफ ही नहीं कर पा रही है. अगर आप भी इस सीजन एक नया एयर प्यूरीफायर खरीदने की सोच रहे हैं. तो पैसा खर्च करने से पहले इ तीन जरूरी बातों को जरूर समझ लें.
HEPA फिल्टर और मल्टी-लेयर फिल्ट्रेशन की करें पहचान
किसी भी एयर प्यूरीफायर की जान उसका फिल्टर होता है. बाजार में कई सस्ते प्यूरीफायर मिलते हैं जिन पर HEPA जैसा नाम लिखा होता है. लेकिन वे असल में हवा के बारीक कणों को रोक नहीं पाते. खरीदते समय हमेशा यह चेक करें कि मशीन में ट्रू HEPA फिल्टर लगा हो जो H13 या H14 ग्रेड का होना चाहिए. यही फिल्टर हवा में मौजूद पीएम 2.5, धूल के बेहद बारीक कणों, पराग और बैक्टीरिया को 99.97 प्रतिशत तक साफ करने की ताकत रखता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा एक अच्छे एयर प्यूरीफायर में सिर्फ एक नहीं, बल्कि तीन लेयर का फिल्ट्रेशन होना जरूरी है. सबसे बाहर प्री-फिल्टर होता है जो बालों और मोटी धूल को रोकता है. इसके बाद एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर आता है. जो पटाखों के धुएं की बदबू, किचन की गैस और हानिकारक केमिकल्स को सोख लेता है. इसलिए बॉक्स पर फिल्टर की स्पेसिफिकेशन पढ़े बिना कभी खरीदारी न करें.

कमरे के साइज के हिसाब से चुनें सही CADR रेटिंग
अक्सर लोग एक छोटे से एयर प्यूरीफायर को अपने बड़े से ड्राइंग रूम में रख देते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि मशीन काम नहीं कर रही. एयर प्यूरीफायर खरीदते वक्त दूसरी सबसे जरूरी चीज होती है उसकी CADR यानी क्लीन एयर डिलीवरी रेटिंग. आसान भाषा में कहें तो यह रेटिंग बताती है कि मशीन कितनी तेजी से आपके कमरे की गंदी हवा को खींचकर साफ हवा बाहर फेंकती है.&amp;nbsp;
नियम एकदम सीधा है आपके कमरे का साइज जितना बड़ा होगा आपको उतनी ही ज्यादा CADR रेटिंग वाला प्यूरीफायर चाहिए होगा. उदाहरण के लिए अगर आपका बेडरूम 200 से 300 स्क्वायर फीट का है. तो कम से कम 300 से 350 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा CADR वाली मशीन ही कामयाब रहेगी. इसके साथ ही ACH यानी एयर चेंज पर आवर भी देखें जो यह बताता है कि प्यूरीफायर एक घंटे में पूरे कमरे की हवा को कितनी बार पूरी तरह बदल सकता है.

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इन बातों का रखें ध्यान
एयर प्यूरीफायर खरीदना सिर्फ एक बार का खर्च नहीं है. बल्कि इसमें हर साल मेंटेनेंस का खर्चा भी जुड़ता है. जैसे RO वाटर प्यूरीफायर का फिल्टर समय-समय पर बदलना पड़ता है. ठीक वैसे ही एयर प्यूरीफायर का फिल्टर भी छह से बारह महीने में खराब हो जाता है. कई कंपनियां शुरुआत में मशीन तो सस्ती बेच देती हैं. लेकिन उनके रिप्लेसमेंट फिल्टर की कीमत 3 से 4 हजार रुपये तक होती है.&amp;nbsp;कई बार तो पुराने मॉडल के फिल्टर बाजार में मिलने ही बंद हो जाते हैं और पूरी मशीन कबाड़ बन जाती है.
इसलिए खरीदने से पहले ऑनलाइन यह जरूर चेक कर लें कि उस मॉडल का नया फिल्टर कितने का आता है और आसानी से उपलब्ध है या नहीं. इसके साथ ही मशीन का नॉइज लेवल भी चेक करें. अगर प्यूरीफायर चलते वक्त कूलर या पंखे की तरह तेज आवाज करेगा तो रात में आपकी नींद खराब हो सकती है. इसलिए स्लीप मोड और शांत मोटर वाला मॉडल ही चुनें.
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>PC Speed Boost: PC की स्पीड बढ़ानी है? Windows के ये फ्री टूल्स आएंगे काम</title>
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        <description><![CDATA[ PC Speed Boost : कंप्यूटर इस्तेमाल करते समय अगर उसकी स्पीड कम होने लगे, स्टोरेज बार-बार भर जाए या सामान्य काम करने में भी परेशानी आने लगे, तो सबसे पहले दिमाग में PC को ऑप्टिमाइज करने का ख्याल आता है. ऐसे में कई लोग इंटरनेट से थर्ड-पार्टी PC Optimizer डाउनलोड कर लेते हैं, हालांकि हर बार ऐसे ऐप्स की जरूरत नहीं होती है.
Windows में पहले से ही ऐसे कई टूल मौजूद हैं, जिनकी मदद से PC की देखभाल और मेंटेनेंस से जुड़े काम अपने आप कराए जा सकते हैं. खास बात यह है कि इनके लिए अलग से पैसे खर्च करने या किसी बाहरी सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती है.&amp;nbsp;
Windows का Task Scheduler कैसे करता है काम?
Windows में मौजूद Task Scheduler ऐसा टूल है, जो आपके तय किए गए समय पर अलग-अलग काम अपने आप चला सकता है. इसकी मदद से सिस्टम की सफाई, फाइलों की जांच और बैकअप जैसे काम ऑटोमेट किए जा सकते हैं. इसमें पहले से कई टास्क मौजूद होते हैं. इनमें Windows से जुड़े कामों के अलावा ब्राउजर और दूसरे ऐप्स के जरिए बनाए गए टास्क भी शामिल होते हैं. आप अपनी जरूरत के हिसाब से नए टास्क भी तैयार कर सकते हैं.&amp;nbsp;
स्टोरेज खाली करने के लिए बनाएं ऑटोमेटिक टास्क
अगर आपके कंप्यूटर की स्टोरेज बार-बार भर जाती है, तो Windows के Disk Cleanup टूल की मदद ले सकते हैं. इसके जरिए आप तय कर सकते हैं कि कंप्यूटर से किस तरह की गैर जरूरी फाइलें हटानी हैं. इसके लिए पहले Disk Cleanup खोलें और उन फाइलों की कैटेगरी चुनें, जिन्हें आप हटाना चाहते हैं. इसके बाद Task Scheduler में जाकर नया टास्क बनाएं. इसमें Disk Cleanup टूल को चुनें और अपनी जरूरत के मुताबिक उसका शेड्यूल सेट कर दें.&amp;nbsp;
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सिस्टम की गड़बड़ियों को खुद ठीक करेंगे Windows के टूल्स&amp;nbsp;Windows में DISM, SFC और CHKDSK जैसे टूल कंप्यूटर की अलग-अलग समस्याओं को ठीक करने में मदद करते हैं. DISM सिस्टम इमेज की खराबी सुधारता है, SFC खराब सिस्टम फाइलों को ठीक करता है और CHKDSK ड्राइव से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच करता है. आप Task Scheduler की मदद से इन टूल्स को तय समय पर अपने आप चलने के लिए सेट कर सकते हैं. इसके लिए अलग-अलग टास्क बनाएं और उन्हें चलाने का शेड्यूल तय करें. बेहतर तरीके से काम करने के लिए इन टूल्स को एडमिनिस्ट्रेटर की परमिशन देना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
HDD यूजर्स के लिए भी है एक जरूरी फीचर
अगर आपके कंप्यूटर में HDD लगी है, तो ड्राइव को डीफ्रैगमेंट करने का टास्क भी शेड्यूल किया जा सकता है. इसके अलावा जरूरी डेटा का बैकअप लेने, कैश साफ करने और दिन के आखिर में PC बंद करने की याद दिलाने जैसे काम भी ऑटोमेट किए जा सकते हैं. &amp;nbsp;इन सभी टास्क को सही तरीके से चलाने के लिए उनकी Properties में जाकर Run with highest privileges ऑप्शन को टिक करना जरूरी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung Phone : स्क्रीन पर अचानक दिखने लगीं छोटी लाइट्स? Samsung यूजर्स जान लें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Phone :&amp;nbsp;स्मार्टफोन इस्तेमाल करते समय कई बार ऐसी चीजें नजर आती हैं, जिन पर पहली बार में पहचान पाना मुश्किल होता है. खासकर जब डिस्प्ले पर अचानक छोटी-छोटी लाइट्स चमकने लगें. Samsung के कई यूजर्स ने भी अपने फोन में ऐसी लाइट्स नजर आने की जानकारी दी है. फोन की स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में कॉल के दौरान एक या एक से ज्यादा छोटे चमकते डॉट्स दिखाई देते हैं. इन्हें देखकर ऐसा लग सकता है कि डिस्प्ले में कोई खराबी आ गई है, लेकिन असल में इनका संबंध फोन के एक खास सेंसर से है. Samsung के मुताबिक, ये लाइट्स किसी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट का संकेत नहीं हैं, बल्कि फोन के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं. तो आइए जानते हैं कि फोन की स्क्रीन पर छोटे-छोटे डॉट्स क्यों दिखाई देते हैं.&amp;nbsp;
फोन की स्क्रीन पर क्यों दिखाई देते हैं छोटे-छोटे डॉट्स?
Samsung के कुछ स्मार्टफोन में प्रॉक्सिमिटी सेंसर डिस्प्ले के नीचे लगाया गया है. यही सेंसर फोन कॉल के दौरान यह पता लगाने का काम करता है कि फोन किसी चीज या चेहरे के कितना करीब है. जब यूजर फोन को कान के पास ले जाता है, तो यह सेंसर स्क्रीन को बंद कर देता है. इससे बातचीत के दौरान गलती से स्क्रीन टच होने या कोई दूसरा फीचर एक्टिव होने की आशंका कम हो जाती है. इस सेंसर की तकनीक इंफ्रारेड किरणों पर काम करती है. सेंसर स्क्रीन के पीछे से इंफ्रारेड किरणें भेजता है और उनका रिफ्लेक्शन पहचानकर दूरी का अंदाजा लगाता है. इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ परिस्थितियों में स्क्रीन पर छोटी चमकती लाइट्स दिखाई दे सकती हैं.&amp;nbsp;
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Samsung के अलग-अलग फोन में दिखते हैं अलग डॉट्स
Samsung के सभी स्मार्टफोन में ये डॉट्स एक जैसे नहीं दिखते है. इस तरह के डॉट्स सबसे पहले Galaxy S10 सीरीज में देखने को मिले थे. इन फोन में कंपनी ने प्रॉक्सिमिटी सेंसर को डिस्प्ले के नीचे लगाया था. इसके बाद Galaxy S20 और S21 सीरीज के कुछ यूजर्स ने स्क्रीन पर दो चमकती हुई लाइट्स दिखाई देने की जानकारी दी. वहीं,Galaxy S21 FE में दो डॉट्स नजर आते हैं, लेकिन ये चमकते नहीं हैं, बल्कि एक ही जगह बने रहते हैं. इसके अलावा Galaxy S23 में चार डॉट्स और Galaxy S25 FE में तीन हरे डॉट्स दिखाई देने की जानकारी सामने आई है.&amp;nbsp;
क्या इन लाइट्स को बंद कर सकते हैं?
Samsung के अनुसार, ये डॉट्स प्रॉक्सिमिटी सेंसर के नॉर्मल तरीके से काम करना का हिस्सा हैं. ऐसे में कंपनी इन्हें किसी खराबी के तौर पर नहीं देखती और इन्हें ठीक करने &amp;nbsp;या बंद करने के लिए अलग से कोई तरीका नहीं देती है,हालांकि हर Samsung फोन में यह स्थिति देखने को नहीं मिलती है. Galaxy S24 Ultra, S25 Ultra और S26 Ultra जैसे नए फ्लैगशिप मॉडल में इन डॉट्स के दिखाई देने की जानकारी नहीं है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 31 Oct 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>AI Cyber Attacks : अब मशीन की रफ्तार से होंगे साइबर हमले? AI ने बढ़ाई डेटा सुरक्षा की चुनौती</title>
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        <description><![CDATA[ AI Cyber Attacks : आज डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने साइबर अपराधियों को ऐसे नए तरीके दे दिए हैं, जिनसे कम समय में ज्यादा लोगों और कंपनियों को निशाना बना सकते हैं. अब किसी साइबर हमले को पहचानने और उसे रोकने के लिए सुरक्षा टीमों के पास पहले जितना समय भी नहीं बच रहा है.
2026 में चुनौती पहले से ज्यादा मूश्किल हो गई है, AI की मदद से नकली ईमेल, आवाज और वीडियो को असली जैसा बनाया जा सकता है. इसके अलावा AI एजेंट संवेदनशील डेटा तक पहुंचने और डिजिटल सिस्टम में कमजोरियां ढूंढने का जोखिम भी बढ़ा रहे हैं. ऐसे में सिर्फ मजबूत पासवर्ड और एंटीवायरस पर निर्भर रहना सही नहीं है. तो आइए जानते हैं कि AI ने कैसे डेटा सुरक्षा की चुनौती बढ़ाई है.
39 सेकंड में डेटा चोरी कर सकते हैं हमलावर
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में हमले की रफ्तार सबसे बड़ी चिंता बन रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर शुरुआती पहुंच मिलने के बाद महज 39 सेकंड में डेटा चोरी करने तक पहुंच सकते हैं. इसका मतलब है कि कंपनियों को खतरे का पता लगाने, उसकी गंभीरता समझने और कार्रवाई करने के लिए बहुत कम समय मिल सकता है. ऐसे में कंपनियों को साइबर हमलों से बचाव के साथ-साथ, हमला होने पर अपने सिस्टम को जल्द से जल्द दोबारा चालू करने की तैयारी भी रखनी होगी.&amp;nbsp;
नकली आवाज और ईमेल से भी खतरा
AI की मदद से साइबर अपराधी किसी अधिकारी की आवाज की नकल करके कर्मचारियों से पैसे ट्रांसफर करने या गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए कह सकते हैं. ऐसे में पहले से उपलब्ध व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर ऐसे फर्जी संदेश तैयार किए जा सकते हैं, जिन्हें पहचानना मुश्किल हो. इससे बचने के लिए कंपनियों को जरूरी भुगतान, पासवर्ड बदलने और संवेदनशील डेटा मांगने वाले अनुरोधों की अलग माध्यम से पुष्टि करनी चाहिए.
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साइबर सुरक्षा मजबूत करने के जरूरी तरीके&amp;nbsp;1. AI सिस्टम पर नजर रखें - कंपनियों को AI से जुड़े सिस्टम की लगातार निगरानी करनी चाहिए, जिससे किसी भी गलत एक्टिविटी का समय रहते पता लगाया जा सके.&amp;nbsp;
2. हर किसी को न दें सिस्टम का पूरा एक्सेस - कर्मचारियों को सिर्फ उतनी ही जानकारी और सिस्टम इस्तेमाल करने की परमिशन मिलनी चाहिए, जितनी उनके काम के लिए जरूरी है.&amp;nbsp;
3. नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटें - कंपनियों को अपने नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में रखना चाहिए, जिससे किसी एक हिस्से पर साइबर हमला होने पर उसका असर पूरे सिस्टम पर न पड़े.&amp;nbsp;
4. नियमित रूप से सुरक्षा की जांच करें - सिस्टम की समय-समय पर जांच करना जरूरी है, जिससे कमजोरियों का पता लगाकर उन्हें समय रहते ठीक किया जा सके.&amp;nbsp;
5. डेटा सुरक्षित रखें और रिकवरी की तैयारी करें &amp;nbsp;- जरूरी डेटा का सुरक्षित बैकअप रखना चाहिए. साथ ही साइबर हमले के बाद सिस्टम को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया की प्रैक्टिस भी करनी चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Apple Touchscreen MacBook Pro : MacBook Pro में 16TB स्टोरेज या नया लैपटॉप? Apple की कीमत चौंकाएगी</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Touchscreen MacBook Pro : Apple ने 28 अक्टूबर 2026 को अपना पहला टचस्क्रीन MacBook Pro लॉन्च कर दिया है, जो 14 इंच और 16 इंच के डिस्प्ले ऑप्शनों में आता है. इसमें M5 Pro और M5 Max चिपसेट, Tandem OLED डिस्प्ले और 16TB तक SSD स्टोरेज का ऑप्शन मिलता है. कंपनी ने इस लैपटॉप में पहली बार टचस्क्रीन की सुविधा दी है, लेकिन इसकी कीमतों ने भी सबका ध्यान खींचा है.&amp;nbsp;
MacRumors की रिपोर्ट के मुताबिक, 16TB SSD स्टोरेज चुनने पर अमेरिकी कीमत में 7,000 डॉलर यानी करीब 6.67 लाख रुपये जुड़ जाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर MacBook Pro में स्टोरेज अपग्रेड इतना महंगा क्यों है और इस एक्सट्रा खर्च के बदले यूजर्स को क्या मिलता है.&amp;nbsp;
MacBook Pro में स्टोरेज बढ़ाने के लिए कितना खर्च करना होगा?
Apple के नए MacBook Pro में स्टोरेज बढ़ाने के लिए अलग-अलग ऑप्शन दिए गए हैं. अगर यूजर 4TB SSD स्टोरेज चुनते हैं, तो उन्हें करीब 95,300 रुपये एक्सट्रा देने होंगे, जबकि 8TB स्टोरेज के लिए लगभग 2.86 लाख रुपये और 16TB के लिए करीब 6.67 लाख रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे. इसके अलावा लैपटॉप में 128GB तक यूनिफाइड मेमोरी का ऑप्शन भी मिलता है, जिसे चुनने पर कीमत में करीब 1.91 लाख रुपये जुड़ जाते हैं. वहीं नैनो-टेक्सचर ग्लास वाला डिस्प्ले लेने के लिए लगभग 14,295 रुपये एक्सट्रा चुकाने होंगे.&amp;nbsp;&amp;nbsp;16TB स्टोरेज के लिए देने होंगे 6.67 लाख रुपये एक्स्ट्रा
MacRumors की रिपोर्ट के मुताबिक, Apple के ऑनलाइन कॉन्फिगरेटर में नए MacBook Pro के 14 इंच मॉडल की अधिकतम कॉन्फिगरेशन की कीमत 14,249 डॉलर (करीब 13.58 लाख रुपये) और 16 इंच मॉडल की कीमत 14,549 डॉलर (लगभग 13.87 लाख रुपये) बताई गई है. इसमें सबसे महंगा अपग्रेड 16TB SSD स्टोरेज का है. इस ऑप्शन को चुनने पर कीमत में 7,000 डॉलर यानी करीब 6.67 लाख रुपये जुड़ जाते हैं, हालांकि Apple ने इस अपग्रेड की कीमत के पीछे की वजह आधिकारिक रूप से नहीं बताई है.
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MacBook Pro में स्टोरेज अपग्रेड इतना महंगा क्यों है?
Apple के नए MacBook Pro में स्टोरेज अपग्रेड की कीमत ज्यादा होने की एक संभावित वजह मेमोरी और स्टोरेज की बढ़ती मांग हो सकती है. खासकर दुनियाभर में मेमोरी की कमी और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बढ़ती हार्डवेयर जरूरतों को स्टोरेज की कीमतों पर दबाव की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि Apple ने यह पुष्टि नहीं की है कि 16TB स्टोरेज की ऊंची कीमत के पीछे यही कारण हैं. ज्यादा स्टोरेज उन लोगों के लिए यूजफुल हो सकती है, जो हाई-क्वालिटी वीडियो, 3D प्रोजेक्ट और AI मॉडल जैसी बड़ी फाइलों पर काम करते हैं.
MacBook Pro के खास फीचर्स
नए MacBook Pro में M5 Max चिपसेट दिया गया है. इसके टॉप कॉन्फिगरेशन में 18-कोर CPU और 40-कोर GPU मिलता है. लैपटॉप में प्रोफेशनल कामों के लिए ज्यादा मेमोरी, बड़ी SSD क्षमता और प्रोसेसिंग पावर दी गई है. इसमें Tandem OLED टेक्नोलॉजी वाला PROLED XDR डिस्प्ले और टच कंट्रोल भी मिलते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चालू तो हो जाता है लेकिन बंद नहीं होता ट्रिमर, आजमाएं ये तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में ग्रूमिंग के लिए हर घर में बियर्ड ट्रिमर का इस्तेमाल किया जाता है. सैलून जाने का समय बचाना हो या फिर किसी पार्टी में जाने से पहले जल्दी से लुक सेट करना हो ट्रिमर सबसे बड़ा सहारा बनता है. लेकिन कई बार कुछ महीनों भर के इस्तेमाल के बाद ट्रिमर में एक अजीब सी खराबी आने लगती है. उसका ऑन-ऑफ करने वाला पावर बटन ठीक से काम करना बंद कर देता है.&amp;nbsp;
जब आप ट्रिमर इस्तेमाल करने के लिए उठाते हैं,. तो दो-तीन बार पूरी ताकत से जोर लगाकर दबाने पर वह चालू तो हो जाता है. लेकिन जब काम खत्म होने के बाद वह बंद ही नहीं होता. बटन को कितना भी दबाओ, ट्रिमर लगातार चलता ही रहता है. अगर आपके साथ भी यही दिक्कत आ रही है तो परेशान के बजाय जान लें कि ऐसे वक्त में तुरंत क्या करना चाहिए.
जब बटन दबाने पर बंद न हो ट्रिमर तो करें ये जुगाड़
जब ट्रिमर बंद होने का नाम न ले और लगातार वाइब्रेट करता रहे तो समझ नहीं आता कि इसे तुरंत कैसे रोका जाए. कई लोग ऐसे में घबराकर ट्रिमर को पटकने या ठोकने लगते हैं. जिससे उसकी मोटर हमेशा के लिए खराब हो सकती है. इस सिचुएशन में आपको कोई भागदौड़ नहीं करनी बस ट्रिमर की चार्जिंग केबल निकालनी है. इसके बाद आपको बस इतना करना है कि अपने चलते हुए ट्रिमर में उसकी चार्जिंग केबल प्लग-इन करनी है और मेन बोर्ड से स्विच ऑन कर देना है.&amp;nbsp;
जैसे ही ट्रिमर को चार्जिंग का करंट मिलेगा, चालू ट्रिमर तुरंत अपने आप बंद हो जाएगा. असल में आजकल के ज्यादातर कॉर्डलेस ट्रिमर्स में एक सेफ्टी फीचर यानी ऑटो कट-ऑफ सिस्टम होता है, जो चार्जिंग पर लगते ही मोटर की पावर सप्लाई को काट देता है ताकि चार्जिंग के दौरान ब्लेड न चलें. यह देसी जुगाड़ आपके बहुत काम आएगा.

ट्रिमर के पावर बटन में क्यों आती है खराबी?
कई लोग समझ नहीं पाते कि&amp;nbsp;अच्छे-भले चलते हुए ट्रिमर का बटन अचानक काम करना क्यों बंद कर देता है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ट्रिमर की सही तरीके से सफाई न होना है. जब हम दाढ़ी या बाल ट्रिम करते हैं, तो बेहद बारीक बाल और चेहरे का तेल या नमी धीरे-धीरे पावर बटन के आसपास की खाली जगह में जमा होने लगते हैं. समय के साथ यह गंदगी अंदर के माइक्रो-स्विच और सर्किट के बीच एक परत बना देती है.&amp;nbsp;
इसके अलावा कई लोग गीले हाथों से ट्रिमर का बटन दबाते हैं या ब्लेड धोते वक्त पानी की बूंदें बटन के अंदर चली जाती हैं. पानी की वजह से अंदर के मेटल कॉन्टैक्ट पॉइंट्स पर कार्बन या जंग लग जाता है. यही वजह है कि दो-तीन बार जोर से दबाने पर करंट पास होकर ट्रिमर चालू तो हो जाता है. लेकिन दोबारा दबाने पर काम नहीं करता.

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घर बैठे बटन करें ठीक&amp;nbsp;
चार्जिंग केबल लगाकर ट्रिमर को बंद करना एक इमरजेंसी तरीका है. लेकिन अगर आप इस समस्या का पक्का इलाज चाहते हैं तो घर पर ही एक आसान सी ट्रिक आजमा सकते हैं. जब ट्रिमर बंद हो तो एक पुराना टूथब्रश लें और उस पर थोड़ा सा रबिंग अल्कोहल या हैंड सैनिटाइजर लगाकर पावर बटन के चारों तरफ के गैप को अच्छी तरह रगड़ कर साफ करें.&amp;nbsp;
इसके बाद बटन को 10 से 15 बार तेजी से खाली दबाएं, इससे अंदर जमा कार्बन और बारीक कचरा साफ हो जाता है. साथ ही इस्तेमाल के बाद ट्रिमर को कभी भी तब तक चालू न छोड़ें जब तक उसकी बैटरी पूरी तरह खत्म न हो जाए, क्योंकि लगातार चलने से मोटर गर्म होकर जल सकती है. हमेशा ट्रिमिंग के बाद ब्रश से ब्लेड और बॉडी को साफ करके रखें. जिससे आपका ट्रिमर सालों-साल चलता रहे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Ai+ Smartphone Price Hike: Ai+ फोन खरीदने के लिए अब चुकाने होंगे ज्यादा पैसे, जानें नई कीमतें</title>
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        <description><![CDATA[ Ai+ Smartphone Price Hike: स्मार्टफोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं और बजट में फिट बैठने वाले फोन ढूंढ रहे हैं, तो Ai+ के कुछ मॉडल खरीदने से पहले उनकी नई कीमतों पर नजर डालना जरूरी है. कंपनी ने अपने कई बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है. इसका असर Pulse 2 और Nova 2 सीरीज के चुनिंदा मॉडल पर पड़ेगा. फोन के मॉडल और रैम-स्टोरेज वेरिएंट के हिसाब से कीमतों में 1,000 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी. कंपनी ने इस बदलाव के पीछे बढ़ती लागत को वजह बताया है. नई कीमतें 15 नवंबर 2026 से लागू होंगी. ऐसे में यूजर्स 14 नवंबर तक इन फोन को मौजूदा कीमतों पर खरीद सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि नई कीमतें क्या होंगी.
दूसरी कंपनियां भी बढ़ा रहीं फोन के दाम
स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी का यह बदलाव सिर्फ Ai+ तक सीमित नहीं है, Samsung, Oppo और Realme भी अपने कुछ स्मार्टफोन महंगे कर चुकी हैं. ऐसे में Ai+ के फोन खरीदने की प्लान बना रहे यूजर्स के लिए 14 नवंबर मौजूदा कीमतों पर खरीदारी करने का आखिरी दिन होगा.
Ai+ के इन स्मार्टफोन पर बढ़ेंगे दाम
कीमतों में बदलाव का असर Ai+ Pulse 2 FE, Pulse 2, Nova 2 5G, Nova 2 Neo 5G, Nova 2 Power 5G, Nova 2 Pro 5G और Nova 2 Ultra 5G पर पड़ेगा. अलग-अलग वेरिएंट के आधार पर यूजर्स को अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. Ai+ Pulse 2 FE और Pulse 2 के 4GB रैम और 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 8,999 रुपये से बढ़कर 10,999 रुपये हो जाएगी. वहीं Pulse 2 के 4GB+128GB वेरिएंट के लिए 11,999 रुपये और 6GB+128GB वेरिएंट के लिए 12,999 रुपये देने होंगे. Ai+ Nova 2 5G के 4GB+64GB मॉडल की कीमत 11,999 रुपये से बढ़कर 13,999 रुपये होगी, इसके 4GB+128GB और 6GB+128GB वेरिएंट की नई कीमत 14,999 रुपये और 15,999 रुपये होगी.&amp;nbsp;
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Ai+ फोन की कीमतें बढ़ाने के पीछे क्या है वजह?
Ai+ के मुताबिक, फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ने और दूसरे खर्चों में इजाफा होने के कारण कंपनी ने कुछ स्मार्टफोन महंगे करने का फैसला लिया है, हालांकि इसका असर कंपनी के सभी फोन पर नहीं पड़ेगा. Ai+ NovaFlip 5G की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाला वेरिएंट पहले की तरह 49,999 रुपये में ही खरीदा जा सकेगा.
Nova 2 Neo और दूसरे मॉडल भी होंगे महंगे
Ai+ Nova 2 Neo 5G के 4GB+64GB वेरिएंट की कीमत 12,499 रुपये से बढ़कर 14,999 रुपये हो जाएगी. इसके 4GB+128GB मॉडल पर 3,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी, जबकि 6GB+128GB वेरिएंट 16,999 रुपये में मिलेगा. &amp;nbsp;Nova 2 Power 5G के 6GB+128GB और 8GB+128GB वेरिएंट की नई कीमतें 17,999 रुपये और 19,999 रुपये होंगी. Nova 2 Pro 5G के दोनों वेरिएंट अब 17,999 रुपये और 19,999 रुपये में मिलेंगे. Nova 2 Ultra 5G के 6GB+128GB मॉडल की कीमत 20,999 रुपये और 8GB+128GB मॉडल की कीमत 22,999 रुपये होगी. इन तीनों सीरीज के मौजूदा दामों में बैंक ऑफर शामिल हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>रात को फोन चार्जिंग पर लगाकर सो जाते हैं, आपको भी हो सकता है नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/रात-को-फोन-चार्जिंग-पर-लगाकर-सो-जाते-हैं-आपको-भी-हो-सकता-है-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ आजकल लोग दिन भर जमकर फोन चलाते हैं. फिर बेड पर लेटकर भी फोन चलाते हैं और जब उसकी बैटरी बिल्कुल कम हो जाती है. तब उसकी जान छोड़ते हैं फिर सोने से पहले उसे चार्ज पर लगाकर छोड़ देते हैं. क्योंकि&amp;nbsp;सुबह फोन चार्ज करने की झंझट नहीं रहेगी उठते ही 100 परसेंट चार्ज मिलेगा. लेकिन आपकी यह आदत किसी दिन बहुत बड़े हादसे की वजह बन सकती है.&amp;nbsp;
अक्सर लोग यही सोचते हैं कि रातभर चार्जिंग पर छोड़ने से ज्यादा से ज्यादा फोन की बैटरी ही तो खराब होगी. मगर ओवरहीटिंग और वोल्टेज के उतार-चढ़ाव की वजह से स्मार्टफोन में ब्लास्ट होने के कई मामले सामने आ चुके हैं. अगर सोते वक्त आपके सिरहाने रखा फोन फट जाए तो इससे सिर्फ फोन का नुकसान नहीं होगा बल्कि आपकी जान पर भी बन सकती है.
सोते समय फोन चार्ज पर क्यों नहीं लगाना चाहिए?
रात में फोन चार्जिंग पर लगा छोड़ने को लेकर बहुत से लोग यह दलील देते हैं कि आजकल के नए स्मार्टफोन्स में ऑटो कट-ऑफ फीचर आता है. जो बैटरी 100 प्रतिशत होते ही चार्जिंग रोक देता है. यह बात तकनीकी रूप से सही तो है, लेकिन पूरा सच नहीं है. असल में जब फोन चार्जर से जुड़ा रहता है और बैकग्राउंड में ऐप्स, वाई-फाई या नोटिफिकेशन चलते रहते हैं. तो बैटरी 99 प्रतिशत पर आते ही फिर से चार्ज होना शुरू कर देती है.&amp;nbsp;
रातभर में यह प्रोसेस कई बार दोहराई जाती है. जिसे टेक्निकल भाषा में ट्रिकल चार्जिंग कहते हैं. इस लगातार चलने वाले प्रोसेस से लिथियम-आयन बैटरी पर जबरदस्त दबाव पड़ता है और उसके अंदर की केमिस्ट्री बिगड़ने लगती है. नतीजा यह होता है कि कुछ ही महीनों में फोन की बैटरी हेल्थ तेजी से गिर जाती है. फोन बात-बात पर गर्म होने लगता है और कई बार बैटरी फूलने की शिकायत भी आ जाती है.

कब होता है ब्लास्ट?
फोन की बैटरी खराब होना तो फिर भी झेला जा सकता है. लेकिन जब फोन आपके बिस्तर पर हादसे का शिकार बन जाए तो. ज्यादातर लोग रात को फोन चार्जिंग पर लगाकर उसे बिस्तर के गद्दे, कंबल और तकिए के नीचे रख देते हैं. चार्जिंग के दौरान हर फोन थोड़ी बहुत गर्मी बाहर निकालता है. लेकिन जब फोन कपड़े या गद्दे से ढका होता है.&amp;nbsp;
तो उसकी गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और वह बुरी तरह ओवरहीट होने लगता है.&amp;nbsp;ऐसे में अगर रात में अचानक बिजली का वोल्टेज फ्लक्चुएट हो जाए तो बैटरी के अंदर शॉर्ट सर्किट हो सकता है. बैटरी का टेंपरेचर हद से ज्यादा बढ़ने पर इसमें थर्मल रनवे होता है. जिससे फोन धमाके के साथ फट सकता है और बिस्तर में तुरंत आग लग सकती है.

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अपनाएं यह आदतें
अगर आप चाहते हैं कि आपका महंगा फोन भी लंबा चले और आप खुद भी किसी अनहोनी से बचे रहें, तो रात को सोते समय फोन को चार्जिंग पर लगाकर न रखें. या तो आप सोने से पहले अपने फोन को चार्ज कर लें या फिर जब सुबह उठे को चार्जिंग पर लगा दें.&amp;nbsp;
आज लगभग सभी कंपनियां फास्ट चार्जर दे रही है जिससे फोन&amp;nbsp;&amp;nbsp;30 से 45 मिनट में ही चार्ज हो जाता है. फोन की बैटरी हेल्थ सही रखनी है तो बैटरी जब 20 परसेंट से कम हो तभी फोन चार्ज करें और 80 से 90 परसेंट होते ही उसे चार्जर से निकाल दें. कभी भी फोन चार्ज करते वक्त कवर न लगा रहने दें हमेशा उसे हटाकर ही चार्ज करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 30 Oct 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>OnePlus Ace 7  Launch : 16GB RAM और 200MP कैमरा, OnePlus Ace 7 सीरीज लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ OnePlus Ace 7 &amp;nbsp;Launch : OnePlus ने अपनी नई Ace 7 सीरीज को आज चीन में पेश कर दिया है. इस सीरीज में OnePlus Ace 7 और OnePlus Ace 7 Pro शामिल है. इस सीरीज के स्पेसिफिकेशन्स में 200MP का रियर कैमरा, 9000mAh की बड़ी बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं. फोन में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 V प्रोसेसर और 120Hz रिफ्रेश रेट वाली OLED स्क्रीन भी दी गई है, हालांकि भारत में इस सीरीज की लॉन्च डेट अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की गई है.&amp;nbsp;
OnePlus Ace 7 में मिलेगा दमदार प्रोसेसर
परफॉर्मेंस के लिए OnePlus Ace 7 में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 V चिपसेट दिया गया है. इसमें ऑक्टा-कोर प्रोसेसर मिलता है, जिसकी क्लॉक स्पीड 4.61GHz तक जाती है. इसके साथ 3nm फैब्रिकेशन टेक्नोलॉजी और Adreno 840 GPU दिया गया है. फोन में 12GB LPDDR5X RAM और 256GB इंटरनल स्टोरेज का ऑप्शन बताया गया है. स्टोरेज को बढ़ाने की सुविधा नहीं दी गई है.&amp;nbsp;
120Hz रिफ्रेश रेट वाली OLED डिस्प्ले
इस स्मार्टफोन में 6.78 इंच की फ्लैट OLED डिस्प्ले मिलती है. इसका रेजोल्यूशन 1272 बाय 2800 पिक्सल है और रिफ्रेश रेट 120Hz है. स्क्रीन में पंच-होल डिजाइन दिया गया है. इसके अलावा फोन HDR10+ सपोर्ट के साथ आता है. डिस्प्ले की पिक्सल डेंसिटी 454ppi बताई गई है.&amp;nbsp;
9000mAh बैटरी के साथ 100W चार्जिंग
बैटरी इस फोन के खास फीचर में शामिल है. इसमें 9000mAh की सिलिकॉन-कार्बन लिथियम-आयन बैटरी दी गई है. इसे 100W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है और चार्जिंग के लिए USB Type-C पोर्ट दिया गया है.&amp;nbsp;
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200MP कैमरे से कर सकेंगे फोटोग्राफी
फोटोग्राफी के लिए फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें 200MP का प्राइमरी वाइड-एंगल कैमरा और 8MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल कैमरा शामिल है. प्राइमरी कैमरे में f/1.8 अपर्चर और ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन का सपोर्ट मिलता है. फोन से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग 30fps, 60fps और 120fps पर की जा सकती है. वहीं सेल्फी के लिए 16MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है, जो फुल HD वीडियो रिकॉर्डिंग सपोर्ट करता है.&amp;nbsp;
Android 17 और कनेक्टिविटी फीचर्स
फोन में Android 17 आधारित ColorOS दिया गया है. कनेक्टिविटी के लिए 5G, 4G, Wi-Fi, Bluetooth, NFC, GPS और IR ब्लास्टर जैसे फीचर्स शामिल हैं. इसमें इन-डिस्प्ले अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर, स्टीरियो स्पीकर और डस्ट साथ ही वॉटर रेजिस्टेंस भी दिया गया है.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>OnePlus, Ace, Launch, 16GB, RAM, और, 200MP, कैमरा, OnePlus, Ace, सीरीज, लॉन्च</media:keywords>
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        <title>ऑनलाइन लिकर बुकिंग ऐप में तमाम खामियां, लोडिंग से लेकर शॉप चुनने तक में दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में शराब के शौकीन खूब रहते हैं. इसलिए ठेकों पर लंबी लाइन देखने को मिलती है कई बार तो लोगों से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं. लेकिन अब दिल्ली सरकार ने इसके लिए इंतजाम कर लिया है. दिल्ली राज्य औद्योगिक और आधारभूत ढांचा विकास निगम यानी DSIIDC ने हाल ही में Delhi Liquor Booking नाम से अपना आधिकारिक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है. अब इससे दिल्ली में ऑनलाइन शराब की बुकिंग की जा सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
ऐप सो ग्राहक घर बैठे पसंदीदा ब्रांड का स्टॉक चेक कर सकते हैं और एडवांस बुकिंग भी कर सकते हैं. लेकिन हर ऐप की तरह इसमें भी लॉन्च होते ही तकनीकी खामियां नजर आने लगी है. जब से यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर आया है, लोग इसे बड़ी उम्मीद से डाउनलोड कर रहे हैं मगर बुकिंग के वक्त उन्हें मायूसी हाथ लग रही है. ऐप में लोडिंग की सुस्त रफ्तार से लेकर अपनी नजदीकी दुकान चुनने तक में इतनी दिक्कतें आ रही हैं कि ज्यादातर यूजर्स अपना ऑर्डर ही पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
ऐप की धीमी रफ्तार&amp;nbsp;
इस लिकर बुकिंग ऐप को इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की सबसे बड़ी शिकायत इसकी स्लो स्पीड और क्रैश होने की दिक्कत है. ऐप ओपन करते ही स्क्रीन पर काफी देर तक सिर्फ लोडिंग का आइकन घूमता रहता है. काफी टाइम वेट करने के बाद भी ऐप पर कोई लिस्ट नजर नहीं आती. जिससे यूजर आगे की प्रोसेस ही पूरी नहीं कर पाते हैं.&amp;nbsp;
शॉप लोकेट नहीं हो पा रहा
शुरुआती तौर पर दिल्ली के करीब 208 DSIIDC रिटेल स्टोर्स को इस नेटवर्क से जोड़ा गया है. लेकिन ऐप में&amp;nbsp; लोकेशन ऑन करने के बावजूद नजदीकी दुकानों की लिस्ट ठीक से लोड नहीं होती. कई इलाकों के स्टोर्स ऐप पर दिख ही नहीं रहे हैं&amp;nbsp; ऐसे में लोग ऑनलाइन बुकिंग छोड़ वापस दुकानों की लाइन में लगने को मजबूर हैं.

होम डिलीवरी नहीं खुद करना होगा पिकअप
अगर आपकी किस्मत अच्छी रही और ऐप ने ठीक से काम कर दिया. तो भी आपको एक बात साफ तौर पर समझ लेनी चाहिए कि इससे शराब की होम डिलीवरी नहीं होगी. यह सिर्फ एक एडवांस बुकिंग प्लेटफॉर्म है. ऐप पर अपना पसंदीदा ब्रांड चुनने और ऑनलाइन पेमेंट करने के बाद आपके फोन पर एक यूनिक क्यूआर कोड जनरेट होता है. ग्राहकों को बुकिंग के 48 घंटे के भीतर खुद अपनी चुनी हुई सरकारी दुकान पर जाना होगा और काउंटर पर यह क्यूआर कोड स्कैन कराकर अपनी बोतल लेनी होगी.&amp;nbsp;
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इतना टाइम मिलेगा
नियम के मुताबिक अगर आप 48 घंटे की तय समय सीमा में पिकअप नहीं करते हैं. तो आपका ऑर्डर अपने आप कैंसिल हो सकता है. हालांकि इसमें अच्छी बात यह है कि जब तक आप दुकान से बोतल पिकअप नहीं करते. तब तक ऐप पर ऑर्डर कैंसिल करने का ऑप्शन खुला रहता है.
&amp;nbsp;
उम्र और खरीदारी की लिमिट तय
दिल्ली की आबकारी नीति के तहत इस ऐप का इस्तेमाल करने के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं. सबसे पहली शर्त उम्र की है यानी ऐप पर रजिस्ट्रेशन और बुकिंग करने के लिए ग्राहक की उम्र कम से कम 25 साल होनी जरूरी है. इसके अलावा सरकार ने ऑनलाइन बुकिंग के जरिए शराब खरीदने की एक अधिकतम लिमिट भी तय की है. कोई भी यूजर एक बार में अधिकतम 9 लीटर व्हिस्की या अन्य स्पिरिट और 18 लीटर तक बीयर ही बुक कर सकता है.
जान लीजिए ऐप के जरूरी नियम
इस ऐप के जरिए फेस्टिव सीजन में दुकानों की भीड़ कम करना, काउंटर पर समय बचाना और बिलिंग में पूरी पारदर्शिता लाना है. फिलहाल यह ऐप सिर्फ एंड्रॉइड यूजर्स के लिए प्ले स्टोर पर उपलब्ध है एप्पल के ऐप स्टोर पर फिलहाल ऐप नहीं. अगर आप इसके ऑनलाइन पोर्टल से बुकिंग करते हैं वहां भी सर्वर ठीक ले काम न करने की दिक्कत देखने को मिल रही है. इसलिए जब तक DSIIDC इसके सर्वर और शॉप सेलेक्शन से जुड़े टेक्निकल ग्लिच को ठीक नहीं करता. तब तक आम ग्राहकों को इस डिजिटल सुविधा का पूरा फायदा मिलना मुश्किल है.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Flipkart दिवाली सेल में Phone से लेकर गैजेट्स तक पर 70% तक का बंपर डिस्काउंट</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का सीजन आते ही लोग नया स्मार्टफोन, टीवी या घर के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की प्लानिंग शुरू कर देते हैं. अगर आप भी दिवाली पर अपने पुराने फोन को अपग्रेड करने और घर के लिए कोई नया गैजेट लेने की सोच रहे हैं. तो आपके लिए बेहतरीन मौका आ गया है. फ्लिपकार्ट पर दिवाली से पहले Big Bang Diwali Sale की शुरुआत हो चुकी है.&amp;nbsp;इस स्पेशल सेल में स्मार्टफोन्स से लेकर स्मार्ट टीवी, फ्रिज, पावर बैंक और मोबाइल एक्सेसरीज तक पर तगड़ा डिस्काउंट दिया जा रहा है.
खास बात यह है कि इस बार बजट फोन्स के साथ-साथ एप्पल के iPhone, सैमसंग और गूगल पिक्सल जैसे महंगे फ्लैगशिप फोन्स की कीमतों में भी भारी कटौती की गई है. वहीं ऑडियो प्रोडक्ट्स और स्पीकर्स पर तो ग्राहकों को सीधे 70 प्रतिशत तक की तगड़ी छूट मिल रही है. जान लें किस चीज पर कितनी मिल रही है छूट.
iPhone 17 पर हजारों की बचत
हर सेल की तरह इस बार भी लोगों की सबसे ज्यादा नजर एप्पल के आईफोन डील्स पर ही टिकी हुई है. फ्लिपकार्ट की इस बिग बैंग दिवाली सेल में iPhone 17 को बेहद सस्ते दाम में अपने घर लाने का सुनहरा मौका मिल रहा है. हाल ही में एप्पल ने iPhone 17 की कीमत को 99990 रुपये किया था. लेकिन इस फेस्टिव सेल के दौरान यह फोन काफी कम कीमत पर लिस्ट किया गया है.&amp;nbsp;
बैंक ऑफर्स और कुछ आसान शर्तों को पूरा करने के बाद ग्राहक iPhone 17 को सिर्फ 79999 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं. यानी इस एक डील में आपकी सीधे तौर पर करीब 20 हजार रुपये की मोटी बचत हो रही है. इसके अलावा अगर आप अपना कोई पुराना चालू स्मार्टफोन एक्सचेंज में देते हैं. तो इस फोन की कीमत और भी ज्यादा कम हो जाएगी.&amp;nbsp;

Samsung और Google Pixel पर भी बंपर डिस्काउंट
अगर आप आईफोन के बजाय एंड्रॉइड फोन्स लेना पसंद करते हैं. तो सेल के दौरान Samsung Galaxy S25 5G पर जबरदस्त डील मिल रही है. भारत में लॉन्चिंग के वक्त इस फोन की कीमत 79999 रुपये रखी गई थी, लेकिन अभी सेल में इसे महज 54999 रुपये में खरीदने का मौका मिल रहा है. यानी सैमसंग के इस फ्लैगशिप फोन पर सीधे 25 हजार रुपये का फायदा मिल रहा है.&amp;nbsp;
दूसरी तरफ शानदार कैमरा क्वालिटी के लिए मशहूर Google Pixel 11 पर भी बंपर छूट दी जा रही है. 89999 रुपये की कीमत वाला यह पिक्सल फोन सेल में सिर्फ 69999 रुपये में मिल रहा है. इनके अलावा वीवो, रियलमी, पोको और शाओमी-रेडमी के बजट स्मार्टफोन्स पर भी बढ़िया ऑफर्स मिल रहे हैं हैं.
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पार्टी स्पीकर्स और मोबाइल एक्सेसरीज पर 70% तक की छूट
दिवाली की पार्टी बिना म्यूजिक के अधूरी रहती है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए फ्लिपकार्ट ने ऑडियो कैटेगरी में सबसे बड़ा धमाका किया है. सेल के दौरान ब्लूटूथ और पार्टी स्पीकर्स पर अधिकतम 70 प्रतिशत तक का भारी डिस्काउंट मिल रहा है. यहां आप माइक के साथ आने वाले बड़े पार्टी स्पीकर्स को आधी से भी कम कीमत में खरीद सकते हैं. सिर्फ स्पीकर्स ही नहीं मोबाइल एक्सेसरीज की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है.&amp;nbsp;

अगर आपको नया TWS ईयरबड्स, नेकबैंड, फास्ट चार्जर या फिर सफर के लिए पावर बैंक खरीदना है तो यह तमाम गैजेट्स बेहद सस्ते दाम में मिल रहे हैं. इसके साथ ही त्योहार के मौके पर घर के लिए नया स्मार्ट टीवी या रेफ्रिजरेटर लेने वालों के लिए भी शानदार एक्सचेंज बोनस और नो-कॉस्ट EMI के ऑप्शन दिए जा रहे हैं.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Karbonn Smartphone:15 साल बाद Karbonn की वापसी, Gen Z के लिए लाएगा नए स्मार्टफोन</title>
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        <description><![CDATA[ Karbonn Comeback India : भारतीय मोबाइल कंपनी Karbonn एक बार फिर स्मार्टफोन बाजार में वापसी करने जा रही है. कंपनी अब खासतौर पर Gen Z यानी आज के युवाओं को ध्यान में रखकर नए स्मार्टफोन पेश करने की तैयारी में है. इन डिवाइस को युवाओं की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाएगा, जिनका इस्तेमाल कंटेंट बनाने वाले युवा भी कर सकेंगे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोबाइल इंडस्ट्री में 15 साल से ज्यादा समय बिताने वाली कंपनी का पहला नया स्मार्टफोन Karbonn Rebel 5G नाम से आ सकता है. इस फोन का टीजर Amazon India और Karbonn की वेबसाइट पर दिखाई दिया है. इससे संकेत मिलते हैं कि कंपनी जल्द ही अपना नया स्मार्टफोन पेश कर सकती है, हालांकि फिलहाल फोन की लॉन्च डेट, कीमत और फीचर्स को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
कंटेंट क्रिएशन पर रहेगा खास फोकस
Karbonn की नई रणनीति में कंटेंट क्रिएशन जरूरी भूमिका निभाएगा. कंपनी के अनुसार, आज के युवाओं के लिए कंटेंट बनाना सिर्फ वीडियो या पोस्ट तैयार करना नहीं है, बल्कि अपने विचार और नजरिया सामने रखने का तरीका भी है. ऐसे में स्मार्टफोन उनके लिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम बन गया है, हालांकि कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि नए फोन में कौन-कौन से फीचर मिलेंगे या उनकी कीमत कितनी होगी. लॉन्च की तारीख को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
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युवाओं के लिए नए स्मार्टफोन लाएगा Karbonn
Karbonn ने आधिकारिक बयान जारी कर भारतीय स्मार्टफोन बाजार में दोबारा सक्रिय होने की जानकारी दी है. कंपनी अब ऐसे प्रोडक्ट की रेंज तैयार करना चाहती है, जो युवा भारतीयों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाए. खास तौर पर Gen Z और कंटेंट क्रिएशन से जुड़े लोगों पर ध्यान दिया जाएगा. कंपनी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में भारत में स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ी हैं, जबकि फोन खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या में उसी हिसाब से बढ़ोतरी नहीं हुई है. उनका कहना है कि कई ग्राहक बढ़ती कीमतों के कारण अपनी जरूरत के मुताबिक फोन नहीं खरीद पा रहे हैं.
Karbonn के नए स्मार्टफोन की चर्चा
Karbonn के नए स्मार्टफोन को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है. अगस्त 2026 में Karbonn Zen Z Pro नाम का एक डिवाइस Geekbench बेंचमार्किंग प्लेटफॉर्म पर दिखाई दिया था. लिस्टिंग के मुताबिक, इसमें MediaTek Helio G70 चिपसेट और Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम दिया गया था. Geekbench 7 के सिंगल-कोर टेस्ट में इस डिवाइस को 422 और मल्टी-कोर टेस्ट में 1,525 स्कोर मिले थे. इसके अलाव कंपनी ने Amazon पर Karbonn Rebel 5G नाम के स्मार्टफोन को भी टीज किया है, हालांकि इसके डिजाइन, स्पेसिफिकेशन, कीमत और लॉन्च की तारीख का खुलासा नहीं हुआ है.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>अमेरिका के 13 राज्यों में पावर ग्रिड इमरजेंसी, जानें क्या है संकट और इसका असर</title>
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        <description><![CDATA[ दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में इस समय बिजली व्यवस्था को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. जिसने हर किसी को चौंका दिया है. कुछ दिन पहले ही यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने देश के 13 राज्यों में पावर ग्रिड इमरजेंसी का ऐलान किया था. जिसके बाद अब सरकार ने देश के बल्क पावर सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल यानी नेशनल इमरजेंसी की घोषणा कर दी है.&amp;nbsp;
इस बड़े फैसले के बाद से पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा है कि आखिर मार्डन तकनीक और पावर सरप्लस माने जाने वाले अमेरिका में ऐसी नौबत क्यों आई. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सरकार को सीधे तौर पर कड़े कदम उठाने पड़े हैं. तकनीक की दुनिया में सुपरपावर कहे जाने वाले इस देश के बुनियादी ढांचे पर मंडराते इस खतरे ने हर किसी की चिंता बढ़ा दी है. चलिए आपको बताते हैं क्या है यह संकट और क्या होगा इसका असर.
किस वजह से खड़ा हुआ संकट?
इस पूरे बिजली संकट के पीछे की वजह मार्डन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेतहाशा विस्तार है. आज के दौर में अमेरिका में AI डेटा सेंटर्स, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और डिफेंस प्रोडक्शन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. इन सभी हाई-टेक प्रोजेक्ट्स को सही से चलाने के लिए भारी मात्रा में लगातार बिजली की जरूरत पड़ती है. इस मांग के चलते देश के पावर ग्रिड पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ रहा है.&amp;nbsp;
जिससे ग्रिड के फेल होने का खतरा लगातार मंडरा रहा है. सरकार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AI और टेक सेक्टर की वजह से देश की बिजली पर डिपेंडेंसी काफी कबढ़ चुकी है. अगर ऐसे में कोई तकनीकी खराबी और फिर सप्लाई चेन में रुकावट आती है. तो फिर इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और दूसरी जरूरी सेवाओं पर पड़ सकता है.&amp;nbsp;

राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी मंडराया खतरा
अमेरिका में इस ग्रिड इमरजेंसी के पीछे सिर्फ बिजली की कमी ही नहीं है. बल्कि देश में विदेशी उपकरणों से जुड़ा सुरक्षा खतरा भी एक वजह है. अमेरिकी सरकार का कहना है कि पावर जनरेशन और ट्रांसमिशन ग्रिड में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण विदेशों से आते हैं. जिससे साइबर अटैक का खतरा काफी बढ़ गया है. इस खतरे को देखते हुए&amp;nbsp;अमेरीकी राष्ट्रपति की ओर से एक नए कार्यकारी आदेश पर साइन किए गए हैं.&amp;nbsp;
जिसके मुताबिक विदेशी हार्डवेयर और सप्लायर्स पर सख्त प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं. इस फैसले के पीछे अमेरिकी सरकार का मकसद देश के पावर ग्रिड को किसी भी संभावित विदेशी साइबर हमले से सुरक्षित रखना है. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में होने वाले उतार-चढ़ाव या सप्लाई चेन टूटने की स्थिति में देश की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप न हो जा,&amp;nbsp; इसके लिए अब स्थानीय स्तर पर उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है.
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आम जनता पर क्या होगा असर?
इस नेशनल पावर ग्रिड इमरजेंसी के बाद अमेरिकी नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके घरों की बिजली काट दी जाएगी या फिर सप्लाई पर कोई असर पड़ेगा. तो बता दें फिलहाल&amp;nbsp; उपभोक्ताओं को बिजली कटौती जैसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. हालांकि आने वाले दिनों में पावर कंपनियों और ग्रिड ऑपरेटरों को कड़े सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा.&amp;nbsp;

जिससे पुराने और विदेशी उपकरणों की जांच करके उन्हें बदला जा सके. इस पूरी प्रोसेस के चलते पावर यूटिलिटीज और कंपनियों पर एक्सट्रा फाइनेंशियल बोझ जरूर बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय में यह देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी कदम माना जा रहा है. सरकार की इस सख्ती से अमेरिकी कंपनियों को घरेलू स्तर पर ही ग्रिड उपकरण तैयार करने के नए और बड़े मौके भी मिलेंगे.
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp का पुराना सेटिंग्स मेन्यू हो सकता है रीडिजाइन, जानें क्या बदलेगा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/whatsapp-का-पुराना-सेटिंग्स-मेन्यू-हो-सकता-है-रीडिजाइन-जानें-क्या-बदलेगा</link>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp अपने Android ऐप के लुक में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी सेटिंग्स मेन्यू को नए डिजाइन में पेश करने पर काम कर रही है, जिसमें अलग-अलग ऑप्शनों को एक लंबी लिस्ट में दिखाने की जगह नए डिजाइन वाले सेक्शन में रखा जाएगा. इन सेक्शन के किनारों पर गोल कोने होंगे, जिससे संबंधित ऑप्शनों &amp;nbsp;को पहचानना आसान हो सकता है. यह बदलाव Google के Material Design 3 Expressive डिजाइन सिस्टम पर आधारित बताया जा रहा है, हालांकि नया इंटरफेस अभी डेवलपमेंट के शुरुआती चरण में है और फिलहाल बीटा टेस्टर्स के लिए भी उपलब्ध नहीं है.&amp;nbsp;
WhatsApp के सेटिंग्स मेन्यू में क्या बदलेगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp के Android बीटा वर्जन 2.26.43.3 में नए सेटिंग्स डिजाइन के संकेत मिले हैं. यह अपडेट Google Play Store पर उपलब्ध बीटा वर्जन से जुड़ा है. नए डिजाइन में सेटिंग्स के ऑप्शनों को अलग-अलग ग्रुप में रखा जाएगा. हर ग्रुप के चारों ओर गोल किनारों वाला एक बॉक्स दिखाई देगा. इससे यूजर्स को यह समझने में आसानी हो सकती है कि कौन-से ऑप्शन एक-दूसरे से जुड़े हैं और एक सेक्शन कहां खत्म होता है.&amp;nbsp;
ऑप्शनों के किनारों पर दिखेंगे गोल कोने
नए इंटरफेस में सभी सेटिंग्स एक जैसी नहीं दिखेंगी. किसी ग्रुप के सबसे ऊपर मौजूद ऑप्शन के ऊपरी कोने ज्यादा गोल होंगे, जबकि आखिरी ऑप्शन के निचले कोनों को इसी तरह डिजाइन किया जाएगा. बीच में आने वाले ऑप्शन आपस में जुड़े हुए दिखाई देंगे. इस तरह हर सेटिंग को अलग कार्ड की तरह दिखाने की जगह एक जैसे ऑप्शनों को एक ही बॉक्स में रखा जाएगा.&amp;nbsp;
Google के डिजाइन सिस्टम पर आधारित होगा बदलाव
WhatsApp का यह नया लुक Google के Material Design 3 Expressive गाइडलाइंस के मुताबिक तैयार किया जा रहा है. यह डिजाइन सिस्टम Android ऐप्स में लिस्ट, बटन और नेविगेशन बार जैसे एलिमेंट के दिखने का तरीका तय करता है. इसमें किसी लिस्ट के ऑप्शन की जगह के हिसाब से उसके कोनों का साइज बदल सकता है. WhatsApp इसी तरीके का इस्तेमाल करके सेटिंग्स मेन्यू को ज्यादा ऑर्गेनाइज्ड बनाने की तैयारी कर रहा है.&amp;nbsp;
Account और Privacy सेटिंग्स में भी होगा बदलाव
यह नया डिजाइन केवल WhatsApp के मुख्य सेटिंग्स पेज तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, इसे Account, Privacy और Notifications जैसे सेक्शन में भी लागू किया जा सकता है. ऐप की अलग-अलग सेटिंग्स में एक जैसा डिजाइन देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
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Bottom Navigation Bar और Chat Bar पर भी काम
WhatsApp Android ऐप के इंटरफेस में दूसरे बदलावों पर भी काम कर रहा है. इनमें एक नया Bottom Navigation Bar शामिल है, जो नीचे की ओर स्क्रॉल करने पर छोटा होकर पिल जैसे डिजाइन में आ सकता है और ऊपर स्क्रॉल करने पर दोबारा अपने पूरे साइज में दिखाई दे सकता है. इसके अलावा चैट बार के डिजाइन को भी नया रूप देने की तैयारी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - कम स्टोरेज वाले Android फोन के लिए Truecaller का नया ऐप, जानें क्या है खास? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>TRAI Smart TV Rules : अब तय होंगे स्मार्ट टीवी पर चलने वाले ऐप, इसमें कितना फायदा और क्या नुकसान?</title>
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        <description><![CDATA[ TRAI Smart TV Rules : भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने इंटरनेट के जरिए लाइव टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी करने का प्रस्ताव दिया है. अगर सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार करती है, तो स्मार्ट टीवी बनाने वाली कंपनियों और उनके ऑपरेटिंग सिस्टम को भी यह तय करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर सिर्फ ऑथोराइज्ड लाइव टीवी ऐप्स ही उपलब्ध हों. इससे ऐप कंपनियों के काम करने के तरीके से लेकर दर्शकों को मिलने वाले ऑप्शनों तक पर असर पड़ सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इसमें कितना फायदा और क्या नुकसान है.&amp;nbsp;
क्या है TRAI का नया प्रस्ताव?
TRAI ने 26 अक्टूबर 2026 को इंटरनेट पर लाइव टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स के लिए अलग नियम बनाने की सिफारिश की है. इसके तहत इंटरनेट पर तय शेड्यूल के अनुसार टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स को सरकार से परमिशन लेनी होगी. इसमें Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) सेवाएं भी शामिल हैं, जहां दर्शक विज्ञापनों के साथ फ्री में लाइव चैनल देख सकते हैं. यह व्यवस्था उन ऐप्स पर केंद्रित है, जिनके जरिए अलग-अलग टीवी चैनलों को एक जगह देखा जा सकता है. नेटफ्लिक्स जैसे ऐप इसमें शामिल नहीं होंगे. इन पर दर्शक अपनी पसंद के हिसाब से फिल्में और वेब सीरीज चुनकर देख सकते हैं.&amp;nbsp;
स्मार्ट टीवी कंपनियों की क्या होगी जिम्मेदारी?
प्रस्ताव के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अधिकृत ALTD ऐप्स की एक केंद्रीय लिस्ट तैयार करेगा. टीवी निर्माता, डिवाइस कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराने वाली कंपनियां इसी लिस्ट के आधार पर अपने ऐप स्टोर और डिवाइस पर इन सेवाओं की उपलब्धता तय करेंगी. &amp;nbsp;उन्हें हर साल मंत्रालय को यह जानकारी भी देनी होगी कि नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं. इसका मतलब है कि बिना जरूरी मंजूरी वाले ऐप्स को स्मार्ट टीवी पर उपलब्ध कराने पर रोक लग सकती है, हालांकि यह प्रस्ताव अभी लागू नहीं हुआ है.
यह भी पढ़ें - स्मार्टफोन बाजार में डबल धमाका, Huawei और iQOO के नए फोन की एंट्री आज
इसमें कितना फायदा है?
इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि स्मार्ट टीवी पर लाइव टीवी देखने वाले लोगों को शिकायत करने के लिए एक तय व्यवस्था मिलेगी. अगर किसी ऐप में चैनल चलने या दूसरी तरह की समस्या आती है, तो दर्शक सीधे ऐप चलाने वाली कंपनी से संपर्क कर सकेंगे. इसके अलावा इंटरनेट के जरिए देखे जाने वाले टीवी चैनलों की दर्शक संख्या भी टीवी रेटिंग में शामिल होगी, जिससे ऑनलाइन टीवी देखने वाले लोगों की पसंद को समझने में मदद मिल सकती है.
इसमें क्या नुकसान है?
इस प्रस्ताव का नुकसान यह हो सकता है कि स्मार्ट टीवी पर लाइव टीवी देखने के लिए लोगों के पास पहले के मुकाबले कम ऐप्स के ऑप्शन बचें. वहीं ऐप बनाने वाली कंपनियों को सरकारी परमिशन लेने और नियमों का पालन करने में अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ सकता है, हालांकि इन नियमों से दर्शकों को फ्री चैनल कम मिलेंगे या टीवी देखने का खर्च बढ़ेगा, इसकी अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - WhatsApp पर कई ग्रुप संभालना होगा आसान, आ रहा Organizations फीचर ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Redmi Clip Neo Earbuds : कान में क्लिप की तरह फिट होंगे Redmi के नए ईयरबड्स, 32 घंटे चलेगी बैटरी</title>
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        <description><![CDATA[ Redmi Clip Neo Earbuds : स्मार्टफोन के साथ-साथ अब ऑडियो डिवाइस में भी कंपनियां नए डिजाइन पर काम कर रही हैं. इसी बीच Redmi ने चीन में अपने नए ओपन-ईयर ईयरबड्स Redmi Clip Neo लॉन्च किए हैं. इनका डिजाइन सामान्य ईयरबड्स से अलग है, इन्हें कान में क्लिप की तरह लगाया जाता है. इनमें 12mm डुअल-मैग्नेटिक ड्राइवर्स, AI नॉइज रिडक्शन और एक साथ दो डिवाइस से कनेक्ट होने जैसी सुविधाएं मिलती हैं. बैटरी की बात करें तो चार्जिंग केस के साथ ये कुल 32 घंटे तक चल सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि इन ओपन-ईयर ईयरबड्स के खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
Redmi Clip Neo के खास फीचर्स क्या हैं
इन ईयरबड्स में 12mm डुअल-मैग्नेटिक ड्राइवर्स दिए गए हैं. Xiaomi का दावा है कि ये सिंगल-मैग्नेटिक ड्राइवर्स की तुलना में 40 प्रतिशत ज्यादा लाउडनेस दे सकते हैं. इनमें डायमंड-लाइक कार्बन कोटिंग भी दी गई है. यूजर्स को बेहतर बास के लिए बास कंपनसेशन, चार प्रीसेट इक्वलाइजर मोड और अपनी पसंद के मुताबिक साउंड सेट करने के लिए 10-बैंड कस्टम इक्वलाइजर मिलता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;32 घंटे तक की बैटरी लाइफ
कंपनी के मुताबिक, Redmi Clip Neo एक बार चार्ज करने पर सात घंटे तक म्यूजिक प्लेबैक दे सकते हैं. चार्जिंग केस के साथ इनकी कुल बैटरी लाइफ 32 घंटे तक पहुंच जाती है. हर ईयरबड में 46mAh की बैटरी और केस में 520mAh की बैटरी दी गई है. केस USB Type-C पोर्ट से चार्ज होता है और इसमें बैटरी लेवल दिखाने के लिए Cloud-Gap Light Effect 2.0 इंडिकेटर मिलता है. इनमें फ्लेक्सिबल टाइटेनियम वायर ब्रिज पर लिक्विड सिलिकॉन कवर दिया गया है.&amp;nbsp;
कॉलिंग और AI के लिए खास फीचर्स
Redmi Clip Neo में दो माइक्रोफोन के साथ AI नॉइज रिडक्शन दिया गया है, जो कॉल के दौरान आवाज को ज्यादा साफ बनाने में मदद करता है. इनमें दिए गए बटन को म्यूजिक कंट्रोल, कॉल मैनेज करने और वॉयस असिस्टेंट इस्तेमाल करने के लिए कस्टमाइज किया जा सकता है. Xiaomi के Super Xiao AI की मदद से सवालों के जवाब पाने और ट्रिप प्लान करने जैसे काम भी किए जा सकते हैं. HyperOS इंटीग्रेशन के जरिए यूजर्स संगत स्मार्ट होम डिवाइस कंट्रोल करने और कनेक्टेड वाहन की जानकारी देखने जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Smartphone Launches : iQOO Neo 12 और Huawei के नए फोन लॉन्च, जानें इनमें क्या खास?
Bluetooth 5.4 और डुअल डिवाइस कनेक्टिविटी
कनेक्टिविटी के लिए इनमें Bluetooth 5.4 के साथ SBC और AAC ऑडियो कोडेक का सपोर्ट मिलता है. ईयरबड्स एक साथ दो डिवाइस से कनेक्ट हो सकते हैं और इनकी वायरलेस रेंज 10 मीटर तक है. इनमें सुनने के समय और आसपास के शोर का स्तर ट्रैक करने की सुविधा भी दी गई है. लोकेशन फीचर की मदद से मैप और साउंड अलर्ट के जरिए ईयरबड्स ढूंढे जा सकते हैं.&amp;nbsp;
Redmi Clip Neo की कीमत
Redmi Clip Neo को चीन में CNY 399 यानी करीब 38,000 रुपये की कीमत पर पेश किया गया है. यह ब्लैक और व्हाइट कलर ऑप्शन में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Incognito सर्च का रिकॉर्ड हटाना है? Android से Windows तक जानें तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Incognito सर्च का रिकॉर्ड हटाना है? Android से Windows तक जानें तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>क्या Ethernet केबल मोड़ने से घट जाती है इंटरनेट स्पीड? जानें टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ क्या Ethernet केबल मोड़ने से घट जाती है इंटरनेट स्पीड? जानें टेक्नोलॉजी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 29 Oct 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>कम स्टोरेज वाले Android फोन के लिए Truecaller का नया ऐप, जानें क्या है खास?</title>
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        <description><![CDATA[ कम स्टोरेज और कम RAM वाले स्मार्टफोन में कई ऐप्स चलाने में परेशानी होती है. ऐसे में Truecaller ने नया ऑप्शन पेश किया है. कंपनी ने भारत में Truecaller Lite लॉन्च किया है, जिसे खास तौर पर पुराने और एंट्री-लेवल Android स्मार्टफोन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा साइज है. कंपनी के मुताबिक, यह ऐप करीब 10MB स्टोरेज लेता है और 4GB तक RAM वाले फोन पर चल सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Truecaller Lite क्या है और कैसे काम करेगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;क्या है Truecaller Lite और कैसे करेगा काम?
Truecaller Lite, कंपनी के मुख्य ऐप का हल्का वर्जन है. इसे पुराने फोन और कम प्रोसेसिंग पावर वाले डिवाइस के लिए नए सिरे से तैयार किया गया है. कंपनी का कहना है कि इसमें जरूरी कॉलिंग और स्पैम से सुरक्षा देने वाले फीचर्स पर ध्यान दिया गया है, जिससे कम स्टोरेज और मेमोरी के साथ भी ऐप का इस्तेमाल किया जा सके. इसके अलावा यह मोबाइल डेटा का इस्तेमाल भी कम रखने के उद्देश्य से बनाया गया है.&amp;nbsp;
कहां से डाउनलोड करें Truecaller Lite?
Android स्मार्टफोन यूजर्स Truecaller Lite को Google Play Store से डाउनलोड कर सकते हैं. करीब 10MB स्टोरेज की जरूरत और 4GB तक RAM वाले डिवाइस पर काम करने की क्षमता के साथ यह ऐप उन यूजर्स के लिए एक ऑप्शन है, जिन्हें कॉलर आईडी और स्पैम कॉल ब्लॉकिंग जैसी सुविधाएं चाहिए, लेकिन उनके फोन में ज्यादा स्टोरेज उपलब्ध नहीं है.
सिर्फ 10MB में मिलेंगे ये जरूरी फीचर्स
Truecaller Lite में यूजर्स को कॉलर आईडी, स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल्स को ब्लॉक करने, कॉल हिस्ट्री देखने, कॉन्टैक्ट्स एक्सेस करने और नंबर सर्च करने जैसे फीचर्स मिलते हैं. इसकी मदद से यूजर्स फोन पर आने वाली कॉल का जवाब देने से पहले कॉल करने वाले की पहचान कर सकते हैं और अनचाही कॉल्स को ब्लॉक कर सकते हैं. ऐप में कॉल हिस्ट्री, कॉन्टैक्ट्स और नंबर सर्च की सुविधा भी एक ही जगह दी गई है. इसके अलावा इसमें आफ्टर-कॉल स्क्रीन भी मिलती है, जो इनकमिंग और आउटगोइंग कॉल के बाद यूजर्स को बताती है कि उनकी हाल ही में किससे बात हुई थी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Apple ने लॉन्च किया iPad mini 2026, OLED डिस्प्ले से AI तक बड़े बदलाव
डेटाबेस और कॉल पहचानने वाले सिस्टम
कंपनी का दावा है कि Lite वर्जन को भी मुख्य Truecaller ऐप वाले डेटाबेस और कॉल पहचानने वाले सिस्टम का एक्सेस मिलता है. यह दोनों ऐप एक जैसे प्राइवेसी स्टैंडर्ड का पालन करते हैं.कंपनी के अनुसार, स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल्स से सुरक्षा भी दोनों में समान रहती है.&amp;nbsp;
Lite ऐप में नहीं मिलेंगे ये फीचर्स
कम साइज और तेज कामकाज बनाए रखने के लिए कंपनी ने कुछ सुविधाओं को इसमें शामिल नहीं किया है. Truecaller Lite में मैसेजिंग, वॉइसमेल, Family Protection और AI असिस्टेंट उपलब्ध नहीं हैं.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Infinix GT 50 Pro लॉन्च, कीमत-स्पेसिफिकेशन समेत जानें किसके लिए है यह फोन? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>M6 चिप और AI के साथ Apple के नए MacBook Pro और iMac लॉन्च, जानें कीमत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/m6-चिप-और-ai-के-साथ-apple-के-नए-macbook-pro-और-imac-लॉन्च-जानें-कीमत</link>
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        <description><![CDATA[ टेक्नोलॉजी की दुनिया में Apple ने अपने नए कंप्यूटरों के साथ प्रोसेसर और डिस्प्ले के मामले में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने अपने नए MacBook Pro और iMac को भारत समेत ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है. इन दोनों डिवाइस में M6 चिप दी गई है, जिसे 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया गया है. इसके साथ ही नए MacBook Pro में पहली बार OLED डिस्प्ले दिया गया है. कंपनी ने कंप्यूटरों में AI से जुड़े कामों को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया है. Apple OLED डिस्प्ले और A20 Pro चिप के साथ नया iPad mini पहले ही लॉन्च कर चुका है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इन दोनों नए डिवाइस की कीमत और खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
MacBook Pro में OLED डिस्प्ले और M6 चिप
नए MacBook Pro में 14.2 इंच का Liquid Retina XDR OLED डिस्प्ले दिया गया है. इसकी पीक ब्राइटनेस 1,600 निट्स तक है. इसमें ProMotion टेक्नोलॉजी के साथ 120Hz तक का रिफ्रेश रेट मिलता है. कंपनी ने पहली बार अपनी इस लैपटॉप सीरीज में OLED डिस्प्ले शामिल किया है. इसमें 2nm प्रोसेस पर बनी M6 चिप दी गई है, जिसमें 12-कोर CPU है. इसमें दो सुपर कोर, चार परफॉर्मेंस कोर और छह एफिशिएंसी कोर शामिल हैं.&amp;nbsp;
MacBook Pro की बैटरी और कनेक्टिविटी
लैपटॉप में 72.4Wh की बैटरी है. कंपनी का दावा है कि यह एक बार चार्ज करने पर 24 घंटे तक वीडियो स्ट्रीमिंग या 16 घंटे तक वायरलेस वेब ब्राउजिंग कर सकता है. इसमें 96W तक की वायर्ड फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट है. कनेक्टिविटी के लिए इसमें तीन Thunderbolt 4 पोर्ट, MagSafe 3, HDMI, 3.5mm ऑडियो जैक और SDXC कार्ड स्लॉट दिया गया है.&amp;nbsp;
M6 चिप के साथ नया Apple iMac
Apple ने 24-इंच iMac को भी अपडेट किया है. इसमें 4.5K Retina डिस्प्ले मिलता है. इसमें भी M6 चिप दी गई है. कंपनी के अनुसार, LM Studio में प्रॉम्प्ट प्रोसेसिंग के दौरान इसकी ऑन-डिवाइस AI परफॉर्मेंस M1 वाले iMac से 12 गुना तक तेज है. इसमें 12MP का Center Stage कैमरा, Wi-Fi 7, Bluetooth 6 और 2.5Gb Ethernet मिलता है. यह macOS 27 Golden Gate पर चलता है और Apple Intelligence के नए फीचर्स को सपोर्ट करता है.
यह भी पढ़ें - WhatsApp पर कई ग्रुप संभालना होगा आसान, आ रहा Organizations फीचर
Apple MacBook Pro (2026) की कीमत&amp;nbsp;
Apple के नए 14-इंच MacBook Pro की शुरुआती कीमत भारत में 2,39,900 रुपये रखी गई है. इसके बेस वेरिएंट में M6 चिप के साथ 16GB यूनिफाइड मेमोरी और 1TB स्टोरेज मिलता है. यह लैपटॉप स्पेस ब्लैक और सिल्वर कलर में उपलब्ध है. इसकी प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है, जबकि भारत में बिक्री 6 नवंबर से Apple India के ऑनलाइन स्टोर पर होगी.&amp;nbsp;
iMac की कीमत कितनी है
भारत में नए iMac की शुरुआती कीमत 1,74,900 रुपये है. इसके बेस मॉडल में 10-कोर CPU, 10-कोर GPU, 16GB मेमोरी और 256GB स्टोरेज मिलता है. नया iMac ब्लू, ग्रीन, ऑरेंज, पिंक, पर्पल, सिल्वर और येलो सहित सात कलर में उपलब्ध होगा. इसकी प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है और बिक्री 6 नवंबर से शुरू होगी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Free Fire India में मिलेंगे पैरेंटल कंट्रोल, 28 अक्टूबर से गेमिंग का नया दौर ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>अमेजॉन, फ्लिपकार्ट या Myntra, ऐसे करेंगे सर्च तो सबसे कम दिखेगा फोन का दाम</title>
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        <description><![CDATA[ आज के वक्त में अगर किसी को नया फोन खरीदना हो तो वह मार्केट जाने के वजह है ऑनलाइन खरीदना पसंद करते हैं. ऑनलाइन खरीदारी में यह चीज अच्छी होती है कि वहां आप एक फोन को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से चेक कर सकते हैं और उसकी कीमत कंपेयर कर सकते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;कई बार ऐसा होता है कि आप अपने फोन से किसी मोबाइल का दाम देखते हैं तो वह महंगा दिखता है. लेकिन वही चीज आपके दोस्त के फोन में सस्ती नजर आती है.
दरअसल ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स का एल्गोरिदम आपकी सर्च हिस्ट्री और फोन के मॉडल को ट्रैक करके कीमतें तय करता है. इसे डायनेमिक प्राइसिंग कहते हैं. अगर आप भी अमेजॉन, फ्लिपकार्ट या Myntra से शॉपिंग करते वक्त एक्स्ट्रा पैसे नहीं देना चाहते. तो आपको सर्च करने का अपना पुराना तरीका बदलिए. नए तरीके अपनाकर आप&amp;nbsp; सबसे कम कीमत पर खरीद सकते हैं और हजारों रुपये बचा सकते हैं. चलिए बताते हैं ऑनलाइन शॉपिंग के यह सीक्रेट तरीके.
Incognito मोड और Cache क्लियर से Price कम
जब भी आप किसी शॉपिंग App या फिर Website पर बार-बार एक ही फोन सर्च करते हैं. तो वेबसाइट समझ जाती है कि आपको उस फोन की सख्त जरूरत है. ऐसे में एल्गोरिदम उस प्रोडक्ट का दाम थोड़ा बढ़ा देता है और उस पर मिलने वाला डिस्काउंट कम कर देता है. इस चालाकी से बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप अपने ब्राउजर के इनकॉग्निटो मोड यानी प्राइवेट विंडो का इस्तेमाल करें.&amp;nbsp;
प्राइवेट मोड में आपकी सर्च हिस्ट्री और कुकीज सेव नहीं होतीं जिससे शॉपिंग साइट को पता नहीं चलता कि आप पुराने कस्टमर हैं या बार-बार वही फोन देख रहे हैं. इसके अलावा अगर आप ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं तो शॉपिंग करने से पहले अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर ऐप का Cache डेटा क्लियर कर दें. iPhone यूजर्स की तुलना में सस्ते एंड्रॉयड फोन से सर्च करने पर भी कई बार कीमतें कम दिखती हैं. इसलिए खरीदने से पहले घर के किसी दूसरे फोन से भी कीमत जरूर चेक करें.

Price ट्रैकर एक्सटेंशन से पकड़ें Fake डिस्काउंट&amp;nbsp;
फेस्टिव सेल और स्पेशल ऑफर्स के दौरान ई-कॉमर्स साइट्स अक्सर कीमतों को पहले बढ़ा देती हैं और फिर भारी डिस्काउंट का टैग लगा देती हैं. आम ग्राहक को लगता है कि फोन बहुत सस्ता मिल रहा है. जबकि वह अपनी पुरानी कीमत पर ही बिक रहा होता है. इस झांसे से बचने के लिए आपको Price ट्रैकर टूल्स या फिर क्रोम एक्सटेंशन का सहारा लेना चाहिए. गूगल पर कई ऐसे फ्री टूल्स मौजूद हैं जहां किसी भी फोन का लिंक डालने पर आपको उसके पिछले छह महीने का प्राइस ग्राफ दिख जाता है.&amp;nbsp;
इससे साफ पता चल जाता है कि उस फोन की सबसे कम कीमत कब थी और अभी जो दाम दिख रहा है वह वाकई सस्ता है भी या नहीं. इन टूल्स में आप Price ड्रॉप अलर्ट भी सेट कर सकते हैं. जैसे ही अमेजॉन, फ्लिपकार्ट या Myntra पर आपके पसंदीदा प्रोडक्ट का दाम आपके बजट में आएगा आपके पास तुरंत नोटिफिकेशन आ जाएगा और आप सही समय पर चौका मार सकेंगे.

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Cart में छोड़कर इंतजार करें और कूपन कोड्स मिलाएं
ऑनलाइन शॉपिंग में जल्दबाजी हमेशा नुकसान करवाती है. अगर आपको कोई फोन या Myntra पर कोई महंगा आउटफिट पसंद आ गया है. तो उसे तुरंत खरीदने के बजाय अपने Cart में ऐड करके छोड़ दें. ई-कॉमर्स कंपनियां अपने कार्ट में पड़े सामान को बिकवाने के लिए काफी बेताब रहती हैं. दो से तीन दिन तक प्रोडक्ट को कार्ट में पड़ा रहने देने पर अक्सर कंपनियां खुद आपको एक्स्ट्रा डिस्काउंट कूपन या स्पेशल प्राइस ड्रॉप का नोटिफिकेशन भेजती हैं.
इसके अलावा पेमेंट पेज पर जाने से पहले बैंक ऑफर्स, एक्सचेंज बोनस और सुपरकॉइन्स या रिवॉर्ड पॉइंट्स का इस्तेमाल जरूर करें. कई बार प्लेटफॉर्म पर सीधा डिस्काउंट कम होता है. लेकिन किसी खास क्रेडिट कार्ड या EMI ऑप्शन को चुनने पर सीधा 2 से 4 हजार रुपये का इंस्टेंट डिस्काउंट मिल जाता है. रात के समय या हफ्ते के बीच में यानी मंगलवार और बुधवार को भी अक्सर कीमतें वीकेंड के मुकाबले थोड़ी कम रहती हैं इसलिए सर्च करते वक्त टाइमिंग का भी पूरा ध्यान रखें.
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, या, Myntra, ऐसे, करेंगे, सर्च, तो, सबसे, कम, दिखेगा, फोन, का, दाम</media:keywords>
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        <title>स्मार्टफोन बाजार में डबल धमाका, Huawei और iQOO के नए फोन की एंट्री आज</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन बाजार में आज यानी 28 अक्टूबर को दो कंपनियां अपने नए डिवाइस पेश करने जा रही हैं. आज Huawei की Enjoy 100 सीरीज और Pura 90 Plus की एंट्री होगी, वहीं iQOO भी आज अपने Neo 12 स्मार्टफोन से पर्दा उठाएगा. &amp;nbsp;इन फोन्स में कहीं बड़ी बैटरी और नए डिजाइन पर जोर दिया गया है, तो कहीं गेमिंग के लिए हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और दमदार प्रोसेसर जैसे फीचर्स देखने को मिलेंगे. Huawei ने अपने नए फोन्स के लिए प्री-ऑर्डर शुरू कर दिए हैं, जबकि iQOO Neo 12 को लेकर भी कंपनी कई जरूरी जानकारियां शेयर कर चुकी है. तो आइए जानते हैं कि इन स्मार्टफोन्स में क्या खास मिलने वाला है.&amp;nbsp;
Huawei Enjoy 100 सीरीज में मिलेंगे चार मॉडल
Huawei की Enjoy 100 सीरीज चीन में 28 अक्टूबर को लॉन्च होगी. कंपनी ने इस सीरीज के लिए Standard, Pro, Pro Max और Enjoy 100m मॉडल की जानकारी दी है. इसके साथ ही फोन के डिजाइन और कलर ऑप्शन भी सामने आ चुके हैं. सीरीज के Pro Max मॉडल में बड़ा गोल कैमरा मॉड्यूल और लाल कलर की रिंग दिखाई गई है. कंपनी ने सीरीज में Kirin 8-सीरीज चिपसेट, बड़ी Giant Whale बैटरी और HarmonyOS के Star Shield Anti-Fraud 2 सुरक्षा फीचर की पुष्टि की है. Enjoy 100 Pro Max के 512GB वेरिएंट में Kirin 8020, जबकि 128GB और 256GB वेरिएंट में Kirin 8020A चिपसेट मिलेगा. Enjoy 100 Pro में भी Kirin 8020A दिया जाएगा. वहीं, Enjoy 100 और Enjoy 100m में Kirin 8000S चिपसेट मिलेगा.&amp;nbsp;
Huawei Pura 90 Plus में नया डिजाइन
Huawei Pura 90 Plus भी आज चीन में लॉन्च होगा. इस फोन में कर्व्ड फ्रेम और गोल किनारों वाला बैक पैनल दिया गया है, जबकि इसके बाकी सीरीज मॉडल्स में फ्लैट एज मिलते हैं. फोन में पीछे की तरफ ट्रायएंगल कैमरा मॉड्यूल मौजूद है. इसे Dawn Gold, Obsidian Black, Sunset Purple और Snowy White कलर में पेश किया जाएगा. इसमें 12GB तक रैम और 1TB तक स्टोरेज का ऑप्शन मिलेगा. फोन के स्पेसिफिकेशन्स अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं, हालांकि लीक के मुताबिक इसमें 6.8 इंच का 1.5K OLED डिस्प्ले, Kirin 9020 चिपसेट और 50MP का 1-इंच मेन कैमरा सेंसर मिल सकता है. कैमरा सेटअप में 48MP मैक्रो टेलीफोटो और 40MP अल्ट्रा-वाइड सेंसर भी मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
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iQOO Neo 12 में 9,000mAh की बैटरी
iQOO Neo 12 भी 28 अक्टूबर को चीन में लॉन्च होगा. कंपनी ने पुष्टि की है कि इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर, Q3 गेमिंग चिप और Ice Dome कूलिंग सिस्टम मिलेगा. फोन में 9,000mAh की बैटरी दी जाएगी. इसके साथ 100W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट मिलने की भी उम्मीद है. फोन में 2K AMOLED डिस्प्ले और 185Hz रिफ्रेश रेट मिलने की संभावना है. इसके अलावा फोन में 5,000Hz तक इंस्टेंट टच सैंपलिंग रेट और 500Hz तक मल्टी-टच सैंपलिंग रेट मिलने की बात कही गई है. iQOO Neo 12 को Fierce Edge, Shadow Black और Frost Blade Blue कलर में पेश किया जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों का सालाना टर्नओवर कितना? होश उड़ा देगी रकम</title>
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        <description><![CDATA[ दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों का सालाना टर्नओवर कितना? होश उड़ा देगी रकम ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>टचस्क्रीन MacBook Pro से M6 चिप तक, Apple इवेंट में हो सकते हैं ये ऐलान</title>
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        <description><![CDATA[ Apple अक्टूबर में एक के बाद एक नए प्रोडक्ट्स पेश करने की तैयारी में है. कंपनी ने हाल ही में स्मार्ट होम डिवाइस से जुड़े ऐलान किए थे और अब उसका फोकस Mac और iPad पर रहने की उम्मीद है. इसी बीच अब Apple का Pro and Tell इवेंट 28 अक्टूबर को लॉस एंजिल्स में आयोजित होगा. भारतीय समय के मुताबिक, यह इवेंट रात 10:30 बजे शुरू होगा. Apple ने OLED डिस्प्ले और A20 Pro चिप वाला नया iPad mini पहले ही पेश कर दिया है.
ऐसे में अब इवेंट में कंपनी के Mac प्रोडक्ट्स पर सबकी नजर रहेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान टचस्क्रीन वाला MacBook Pro, M6 चिप से लैस MacBook Pro और नया iMac पेश किया जा सकता है, हालांकि इन प्रोडक्ट्स के फीचर्स और लॉन्च को लेकर Apple की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.&amp;nbsp;
टचस्क्रीन और OLED डिस्प्ले वाला MacBook Pro
इस इवेंट का सबसे बड़ा फोकस नया हाई-एंड MacBook Pro हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसे 14 इंच और 16 इंच के दो स्क्रीन साइज में पेश किया जा सकता है. इसमें OLED डिस्प्ले और टचस्क्रीन मिलने की संभावना है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका डिजाइन मौजूदा MacBook Pro जैसा रह सकता है, लेकिन वजन कम होने की उम्मीद है. इसमें iPhone की तरह Dynamic Island भी दिया जा सकता है. परफॉर्मेंस के लिए M5 Pro और M5 Max चिप्स मिलने की चर्चा है. टचस्क्रीन के साथ कीबोर्ड और ट्रैकपैड भी मिलेंगे, हालांकि,इन बदलावों के कारण इसकी कीमत मौजूदा टॉप MacBook Pro मॉडल से काफी ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
M6 चिप के साथ आ सकता है नया MacBook Pro
Apple अपने एंट्री-लेवल 14 इंच MacBook Pro को भी अपडेट कर सकती है. इसमें मौजूदा M5 चिप की जगह M6 चिप मिलने की उम्मीद है. इसके डिजाइन में बड़े बदलाव की संभावना कम है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में होल-पंच कैमरा दिए जाने की बात कही गई है. कंपोनेंट्स की कमी के बीच इसकी कीमत बढ़ने की भी आशंका है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Instagram पर अब 90 मिनट के वीडियो, YouTube को टक्कर देने की तैयारी
M6 चिप वाला iMac भी चर्चा में
इवेंट में नए iMac की एंट्री भी हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple मौजूदा M4 चिप वाले iMac को सीधे M6 चिप के साथ अपडेट कर सकती है. इसके अलावा नए कलर ऑप्शन मिलने की संभावना है, जबकि बाकी फीचर्स में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है.&amp;nbsp;
कब लॉन्च होंगे नए प्रोडक्ट?
Apple का&amp;lsquo;Pro and Tell इवेंट 28 अक्टूबर को होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए Mac की बिक्री 6 नवंबर से शुरू हो सकती है, हालांकि कंपनी ने अभी तक लॉन्च और बिक्री की तारीखों की पुष्टि नहीं की है. इस इवेंट के बाद Apple की Mac रेंज में MacBook Neo, MacBook Air और MacBook Pro के अलग-अलग मॉडल शामिल होंगे.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Snapdragon को टक्कर देगा Samsung का Exynos 2700? रिपोर्ट में बड़ा दावा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Free Fire India में मिलेंगे पैरेंटल कंट्रोल, 28 अक्टूबर से गेमिंग का नया दौर</title>
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        <description><![CDATA[ मोबाइल गेमिंग की दुनिया में Free Fire की वापसी का इंतजार कर रहे भारतीय खिलाड़ियों के लिए अच्छी अपडेट है. Garena ने पुष्टि की है कि Free Fire India (FFI) को 28 अक्टूबर से डाउनलोड किया जा सकेगा. इस बार गेम को भारतीय खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
इसमें स्थानीय इवेंट्स और खास कैंपेन के साथ ऐसे फीचर्स भी दिए जाएंगे, जो गेम खेलने के समय और खर्च को कंट्रोल करने में मदद करेंगे. खास बात यह है कि 18 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों के लिए पेरेंट्स की परमिशन जरूरी होगी. इसके अलावा गेम में खेलने के दौरान ब्रेक लेने की याद दिलाने और खेलने के समय की सीमा तय करने जैसे ऑप्शन भी मिलेंगे.&amp;nbsp;
28 अक्टूबर से डाउनलोड कर सकेंगे Free Fire India
Garena के मुताबिक, Free Fire India को एक अलग ऐप के रूप में लॉन्च किया जा रहा है. खिलाड़ी इसे 28 अक्टूबर से Google Play Store और Apple App Store के जरिए फ्री डाउनलोड कर सकेंगे. कंपनी ने इसके भारतीय वर्जन में देश के खिलाड़ियों के लिए खास कंटेंट, स्थानीय इवेंट्स और कैंपेन शामिल करने की बात कही है. गेम में दिवाली के मौके पर एक विशेष कैंपेन भी चलाया जाएगा, जो अगले महीने तक जारी रहेगा.&amp;nbsp;
18 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों के लिए खास नियम
Free Fire India में कम उम्र के खिलाड़ियों के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं. 18 साल से कम उम्र के यूजर्स को गेम खेलने के लिए पेरेंट्स की परमिशन होगी. इसके साथ ही गेम में नियमित अंतराल पर ब्रेक लेने के रिमाइंडर भी दिए जाएंगे. खेलने के समय पर सीमा तय करने और गेम के अंदर होने वाले खर्च को कंट्रोल करने के ऑप्शन भी शामिल होंगे. इन फीचर्स का उद्देश्य खिलाड़ियों को गेमिंग के दौरान समय और खर्च का ध्यान रखने में मदद करना है.&amp;nbsp;
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भारतीय सर्वर और डेटा सुरक्षा पर भी ध्यान
Garena का कहना है कि Free Fire India को तैयार करते समय भारत के संबंधित सरकारी पक्षों से मिले सुझावों और फीडबैक को ध्यान में रखा गया है. इसके तहत गेम का डेटा भारत में मौजूद सर्वर पर होस्ट किया जाएगा. ऐप की लिस्टिंग के मुताबिक, इसमें इन-ऐप खरीदारी की सुविधा होगी और मिडियम स्तर की हिंसा वाले कंटेंट के कारण इसे 12 साल या उससे ज्यादा उम्र के यूजर्स के लिए रेट किया गया है.
10 मिनट के मैच में 50 खिलाड़ियों के बीच मुकाबला
गेमप्ले की बात करें तो Free Fire India में खिलाड़ियों को 10 मिनट का सर्वाइवल मैच मिलेगा. इसमें 50 खिलाड़ी पैराशूट के जरिए एक द्वीप पर उतरेंगे और मुकाबला करेंगे. लक्ष्य आखिरी खिलाड़ी या टीम के रूप में मैदान में बने रहना होगा. गेम में अलग-अलग क्षमताओं वाले कैरेक्टर भी मिलेंगे, जिन्हें खिलाड़ी अपनी पसंद के मुताबिक कस्टमाइज कर सकेंगे. इसके अलावा तेजी से मुकाबला करने के लिए 4v4 प्लेऑफ मोड भी दिया जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चार्जिंग की टेंशन खत्म,10000mAh बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Redmi K100, देखें फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें घर से बाहर निकलते वक्त हर समय फोन की बैटरी खत्म होने का डर सताता रहता है और बैग में हमेशा पावरबैंक लेकर चलना पड़ता है. तो अब आपकी यह दिक्कत हमेशा के लिए खत्म होने वाली है. Xiaomi के Redmi ने चीन के बाजार में अपना नया धमाकेदार स्मार्टफोन Redmi K100 उतार दिया है. इस नए फोन की ताकत इसकी 10000mAh की जंबो बैटरी है.
जो आज के दौर के आम फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स के मुकाबले लगभग दोगुनी है. आमतौर पर इतनी बड़ी बैटरी वाले फोन मोटे और भारी होते हैं. लेकिन कंपनी ने कमाल की इंजीनियरिंग दिखाते हुए इसे बेहद स्लीक डिजाइन में फिट किया है.&amp;nbsp;सिर्फ बैटरी ही नहीं इस फोन में आपको Qualcomm का फ्लैगशिप Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर, 165Hz रिफ्रेश रेट वाली शानदार AMOLED स्क्रीन भी दी गई है जान लें इस कमाल के फोन में और क्या फीचर्स है.&amp;nbsp;
Redmi K100 की 10000mAh बैटरी&amp;nbsp;
Redmi K100 की सबसे बड़ी खासियत इसकी 10000mAh की बैटरी है. किसी नार्मल स्मार्टफोन के मुकाबले इतनी बड़ी बैटरी उन लोगों के लिए काम की हो सकती है जो दिनभर फोन पर एक्टिव रहते हैं. ऑनलाइन वीडियो देखने, सोशल मीडिया चलाने, नेविगेशन और गेमिंग के दौरान बार-बार चार्जर ढूंढने की परेशानी भी कम हो सकती है. फोन में 100W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया गया है, जिससे इतनी बड़ी बैटरी को चार्ज करना आसान बनाने में मदद मिलेगी.
इसके अलावा फोन में 27W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का फीचर मिलता है. इसकी मदद से जरूरत पड़ने पर दूसरे कम्पैटिबल डिवाइस को भी चार्ज किया जा सकता है. यानी फोन सिर्फ अपनी बैटरी के लिए ही नहीं बल्कि दूसरे डिवाइस के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

165Hz डिस्प्ले और दमदार प्रोसेसर&amp;nbsp;
Redmi K100 में 6.83 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है जो 1.5K रेजोल्यूशन के साथ आता है. इसका 165Hz रिफ्रेश रेट स्क्रीन पर मूवमेंट को ज्यादा स्मूद बनाने में मदद करता है. स्क्रॉलिंग, एनिमेशन और सपोर्टेड गेम्स खेलते समय इसका फायदा देखने को मिल सकता है. कंपनी के मुताबिक डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 3500 निट्स तक है. इससे तेज रोशनी में भी स्क्रीन पर कंटेंट देखने में मदद मिलती है.
परफॉर्मेंस के लिए इसमें Qualcomm Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर दिया गया है. इसके साथ Redmi की D2 डिस्प्ले चिप भी मिलती है, जिसे गेमिंग के दौरान ग्राफिक्स और फ्रेम रेट बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया है. कंपनी ने 40 से ज्यादा गेम्स में 165fps सपोर्ट की जानकारी दी है. इसके अलावा 100 से ज्यादा गेम्स में फ्रेम इंटरपोलेशन जैसी तकनीक का सपोर्ट दिया गया है. फोन में 12GB और 16GB RAM के ऑप्शन मिलते हैं.&amp;nbsp; जबकि स्टोरेज 256GB से शुरू होकर 512GB तक जाती है.&amp;nbsp;

50MP कैमरा के साथ शानदार डिजाइन&amp;nbsp;
कैमरे की बात करें तो Redmi K100 में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इसका मेन कैमरा 50MP का है. जिसमें OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन का सपोर्ट मिलता है. यह फीचर फोटो खींचते समय हाथ के हल्के मूवमेंट का असर कम करने में मदद करता है.&amp;nbsp;
इसके साथ 8MP का अल्ट्रावाइड कैमरा भी दिया गया है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 20MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. ऑडियो के लिए इसमें स्टीरियो स्पीकर्स दिए गए हैं, जिन्हें Bose की ट्यूनिंग मिली है.&amp;nbsp;डिजाइन की बात करें तो फोन ब्लैक, स्नो रॉक व्हाइट और फायरफ्लाई ग्रीन कलर ऑप्शन में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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Redmi K100 की कीमत
चीन में इसके बेस वेरिएंट की कीमत 3499 चीनी युआन यानी करीब 50,000 रुपये बताई गई है. वहीं 16GB RAM और 512GB स्टोरेज वाले टॉप वेरिएंट की कीमत 4499 चीनी युआन, यानी लगभग 64000 रुपये है. कंपनी ने अभी भारत में इसकी लॉन्चिंग को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. ऐसे में भारतीय ग्राहकों को इस फोन के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mini Split AC की गैस कितने साल चलती है, जानें कब पड़ती है जरूरत?</title>
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>सोलर वॉटर गीजर लगवाने में कितना खर्चा, कैसे करता है काम?</title>
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        <description><![CDATA[ सर्दियों के मौसम की शुरुआत होते ही हर घर में पानी गर्म करने के लिए गीजर का इस्तेमाल बढ़ जाता है. हालांकि, पारंपरिक इलेक्ट्रिक गीजर के इस्तेमाल से हर महीने बिजली का बिल काफी ज्यादा आता है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट को बिगाड़ देता है. इसी समस्या के समाधान के रूप में सोलर गीजर एक बेहतरीन और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनकर उभरा है. यह तकनीक बिना बिजली की खपत किए सूरज की रोशनी से पानी को गर्म करती है, जिससे बिजली बिल में भारी बचत होती है. यदि आप भी इस सर्दी अपने घर में सोलर वॉटर गीजर लगवाने का विचार कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि इसे लगवाने में कितना खर्च आता है और यह किस तरह काम करता है.
कैसे काम करता है सोलर वॉटर गीजर?
सोलर वॉटर गीजर का काम करने का तरीका बेहद सरल है. इसे घर की छत पर ऐसी जगह स्थापित किया जाता है जहां दिनभर धूप आती है. इसमें मुख्य रूप से दो भाग होते हैं- सोलर थर्मल कलेक्टर और स्टोरेज टैंक. जब सूरज की किरणें कलेक्टर पर पड़ती हैं, तो वे सौर ऊर्जा को सोखकर उसे गर्मी में बदल देती हैं.
इस गर्मी से ट्यूब के भीतर मौजूद पानी गर्म होने लगता है. थर्मोसाइफन प्रक्रिया के तहत गर्म पानी हल्का होने के कारण ऊपर लगे स्टोरेज टैंक में चला जाता है और टैंक का ठंडा पानी नीचे ट्यूब में आ जाता है. यह इंसुलेटेड टैंक पानी को लंबे समय तक गर्म रखता है, जिससे रात में या अगले दिन सुबह भी गर्म पानी आसानी से मिल जाता है.
सोलर गीजर लगवाने में कितना आता है खर्च?
भारतीय बाजार में सोलर वॉटर गीजर की कीमत उसकी क्षमता यानी एलपीडी और कलेक्टर के प्रकार पर निर्भर करती है. एक सामान्य 3 से 4 सदस्यों वाले छोटे परिवार के लिए 100 लीटर क्षमता का सिस्टम पर्याप्त माना जाता है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 15,000 से 25,000 के बीच होती है.
वहीं, 5 से 8 सदस्यों वाले बड़े परिवारों के लिए 200 लीटर क्षमता वाले सोलर गीजर की आवश्यकता होती है, जिसका कुल खर्च 25,000 से 40,000 के आसपास बैठता है। इसके अलावा, छत की बनावट और प्लंबिंग की जटिलता के आधार पर 2,000 से 5,000 तक का इंस्टॉलेशन चार्ज अलग से लग सकता है.
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क्या सरकार से मिलती है कोई सब्सिडी?
सोलर वॉटर गीजर की शुरुआती खरीद लागत भले ही थोड़ी अधिक लगे, लेकिन सरकार देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहायता प्रदान करती है. वर्तमान नियमों के अनुसार, कई राज्यों की अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसियां, जैसे हरियाणा में हरेडा आदि घरेलू क्षेत्र में सोलर वॉटर हीटिंग सिस्टम लगाने पर 3,000 से लेकर 10,000 प्रति 100 एलपीडी तक की वित्तीय सब्सिडी या बिजली बिल में विशेष छूट प्रदान करती हैं. इसके अतिरिक्त, कुछ राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कल्याणकारी योजनाओं के तहत उपभोक्ताओं को वेंडर के माध्यम से सब्सिडी का लाभ सीधे बैंक खाते में या कम दरों पर लोन के रूप में मिल जाता है.
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        <pubDate>Wed, 28 Oct 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>कम इंटरनेट में भी दिखेगी साफ वीडियो, YouTube ला रहा नया AV2 टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube पर वीडियो देखते समय हर कोई चाहता है कि वीडियो साफ दिखे और इंटरनेट डेटा भी कम खर्च हो, लेकिन अच्छी क्वालिटी में वीडियो देखने पर ज्यादा डेटा लग सकता है. वहीं इंटरनेट की स्पीड कम होने पर वीडियो बार-बार रुकने लगती है. ऐसे में वीडियो स्ट्रीमिंग के एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर काम किया जा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए YouTube अब AV2 नाम की नई वीडियो टेक्नोलॉजी लाने की तैयारी में है. इससे कम इंटरनेट डेटा में भी बेहतर क्वालिटी की वीडियो देखने को मिल सकती है. कंपनी इसे 2027 की शुरुआत में अपनी वेबसाइट पर शुरू कर सकती है.&amp;nbsp;
क्या है AV2 टेक्नोलॉजी और कैसे करेगी काम?
AV2 एक नई वीडियो कम्प्रेशन टेक्नोलॉजी है. इसे Alliance for Open Media (AOMedia) ने तैयार किया है. इसका काम वीडियो की क्वालिटी को बनाए रखते हुए उसे इंटरनेट पर भेजने के लिए जरूरी डेटा की मात्रा कम करना है. इसके लिए वीडियो को इस तरह कम्प्रेस किया जाता है कि कम डेटा में भी उसकी तस्वीरों को दोबारा तैयार किया जा सके. इससे पहले AV1 कोडेक का इस्तेमाल किया जा रहा है. AV2 को इससे ज्यादा बेहतर बनाया गया है. अनुमानों के मुताबिक, यह AV1 की तुलना में करीब 25 से 32 फीसदी ज्यादा कम्प्रेशन एफिशिएंसी दे सकता है.&amp;nbsp;
2027 में शुरू हो सकती है YouTube पर शुरुआत
YouTube के मुताबिक, 19 मार्च 2026 तक प्लेटफॉर्म पर देखे जाने वाले कुल वीडियो में से 90 फीसदी से ज्यादा AV1 फॉर्मेट में उपलब्ध थे. अब कंपनी AV2 टेक्नोलॉजी के जरिए वीडियो की क्वालिटी को और बेहतर करना चाहती है. इसकी शुरुआत 2027 की शुरुआत में YouTube की वेबसाइट से हो सकती है, हालांकि स्मार्टफोन ऐप और दूसरे डिवाइस पर यह टेक्नोलॉजी कब उपलब्ध होगी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है.&amp;nbsp;
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एक साथ कई वीडियो देखने में भी मिलेगी मदद
AV2 का इस्तेमाल सिर्फ बेहतर वीडियो क्वालिटी तक सीमित नहीं रह सकता है. यह टेक्नोलॉजी बेहतर मल्टी-व्यू वीडियो और हाई-रिजॉल्यूशन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे अनुभवों के लिए भी यूजफुल हो सकती है. इससे एक ही स्क्रीन पर कई वीडियो फीड देखने के दौरान नेटवर्क पर पड़ने वाला दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.&amp;nbsp;
हर डिवाइस पर तुरंत नहीं मिलेगा फायदा
AV2 आने के बाद भी सभी यूजर्स को तुरंत इसका फायदा नहीं मिलेगा. इसके लिए ब्राउजर, सॉफ्टवेयर और डिवाइस में जरूरी सपोर्ट होना चाहिए, फिलहाल AV2 को सपोर्ट करने वाले डिवाइस और मीडिया प्लेयर भी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में YouTube पर इसकी शुरुआत के बाद भी इसे आम यूजर्स तक पहुंचने में समय लग सकता है.
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        <pubDate>Tue, 27 Oct 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Snapdragon को टक्कर देगा Samsung का Exynos 2700? रिपोर्ट में बड़ा दावा</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung और Qualcomm के बीच चिपसेट को लेकर मुकाबला लगातार दिलचस्प बना हुआ है. अब Samsung के आने वाले फ्लैगशिप प्रोसेसर Exynos 2700 को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है. इसमें दावा किया गया है कि यह चिपसेट CPU और GPU परफॉर्मेंस के कुछ टेस्ट में Qualcomm के नए Snapdragon प्रोसेसर से आगे निकल सकता है. इस चिप का इस्तेमाल कंपनी की अगली Galaxy S27 सीरीज के कुछ मॉडल में किए जाने की उम्मीद है, हालांकि ये नतीजे Samsung के इंटरनल टेस्ट पर आधारित बताए गए हैं, ऐसे में असली परफॉर्मेंस का पता फोन लॉन्च होने और स्वतंत्र टेस्ट के बाद ही चलेगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या Samsung का Exynos 2700, Snapdragon को टक्कर देगा.&amp;nbsp;
क्या Samsung का Exynos 2700, Snapdragon को टक्कर देगा
रिपोर्ट के मुताबिक, Samsung का आने वाला Exynos 2700 चिपसेट परफॉर्मेंस के मामले में Qualcomm के Snapdragon प्रोसेसर को टक्कर दे सकता है. Samsung ने अपने चिपसेट की तुलना Xiaomi 18 Pro Max से की, जिसमें Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 प्रोसेसर है. Geekbench 6.5 टेस्ट में Exynos 2700 ने करीब 20 फीसदी और Geekbench 7.0 में 15 फीसदी ज्यादा स्कोर हासिल करने का दावा किया गया है. वहीं Snapdragon 8 Elite Gen 6 वाले Xiaomi 18 Pro के मुकाबले इसकी बढ़त दोनों टेस्ट में 44 फीसदी और 36 फीसदी बताई गई है.
Galaxy S27 सीरीज में मिल सकता है Exynos 2700
Samsung की Galaxy S27 सीरीज में Exynos और Snapdragon दोनों चिपसेट इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है. रिपोर्ट के मुताबिक, Galaxy S27, S27+ और S27 Pro के कुछ वेरिएंट दक्षिण कोरिया और यूरोप में Exynos 2700 के साथ आ सकते हैं. वहीं अमेरिका और चीन में लॉन्च होने वाले मॉडल में Snapdragon चिपसेट मिलने की संभावना है. Galaxy S27 Ultra में कौन-सा प्रोसेसर होगा, यह अभी साफ नहीं है, फिलहाल Exynos 2700 की परफॉर्मेंस को लेकर सामने आए आंकड़े शुरुआती रिपोर्ट पर आधारित हैं.&amp;nbsp;
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गेमिंग में भी मिल सकती है बढ़त
रिपोर्ट में Exynos 2700 की ग्राफिक्स परफॉर्मेंस को लेकर भी दावा किया गया है. इसके मुताबिक, लेटेस्ट ग्राफिक्स टेक्नोलॉजी वाले हाई-एंड गेमिंग टेस्ट में यह Snapdragon के टॉप चिपसेट से करीब 20 फीसदी आगे रहा. वहीं 3D गेम्स की सामान्य ग्राफिक्स कैलकुलेशन परफॉर्मेंस में लगभग 5 फीसदी की बढ़त बताई गई है, हालांकि इन टेस्ट के नाम और उनकी पूरी प्रक्रिया सामने नहीं आई है. यह भी साफ नहीं है कि लंबे समय तक गेम खेलने पर चिपसेट कितना स्थिर परफॉर्मेंस करेगा और हीटिंग या बैटरी परफॉर्मेंस कैसी रहेगी.
10-कोर CPU के साथ आ सकता है नया चिपसेट
लीक जानकारी के मुताबिक, Exynos 2700 में 10-कोर CPU कॉन्फिगरेशन मिल सकता है. इसमें दो हाई-परफॉर्मेंस C2-Ultra कोर और आठ C2-Pro कोर शामिल होने की बात कही गई है. इसके मुकाबले Snapdragon 8 Elite Gen 6 में आठ CPU कोर होने की जानकारी दी गई है, हालांकि रिपोर्ट में सिंगल-कोर टेस्ट के नतीजे नहीं बताए गए हैं. ऐसे में सिर्फ मल्टी-कोर स्कोर के आधार पर दोनों प्रोसेसर की पूरी परफॉर्मेंस का आकलन करना सही नहीं होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 27 Oct 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या है होलोबॉट तकनीक, जिससे पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद से की बात?</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के दौरान एक ऐसा अद्भुत और हैरान करने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अनोखे संगम को पूरी दुनिया के सामने ला दिया. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 33 साल पहले 1993 में ब्रह्मलीन हो चुके आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी के एक डिजिटल अवतार से न सिर्फ बातचीत की, बल्कि उनसे देश के विकास के लिए आशीर्वाद भी मांगा.
मंच पर जब स्वामी जी की 3D छवि अवतरित हुई, तो वहां मौजूद हर एक दर्शक दंग रह गया. इस चमत्कार को संभव बनाने वाली तकनीक का नाम है होलोबॉट, जो आजकल पूरी दुनिया में खूब चर्चा बटोर रही है. आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है और इसने इस नामुमकिन बातचीत को कैसे मुमकिन बनाया.
क्या होती है होलोबॉट तकनीक?
होलोबॉट मुख्य रूप से दो सबसे आधुनिक तकनीकों का एक एडवांस मेल है- पहला 3D होलोग्राम और दूसरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. होलोग्राम एक ऐसी डिजिटल प्रोजेक्शन तकनीक है, जिसकी मदद से किसी भी व्यक्ति या वस्तु की ऐसी 3D छवि हवा में दिखाई जा सकती है, जिससे वह बिल्कुल असली और सामने खड़ी महसूस होती है.
जब इस चलती-फिरती छवि के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दिमाग जोड़ दिया जाता है, तो वह एक होलोबॉट बन जाता है. यह सिर्फ एक रिकॉर्डेड वीडियो की तरह नहीं होता है, बल्कि सामने वाले व्यक्ति की बातों को समझकर रियल-टाइम में इंसानों की तरह जवाब देने और अपने हाथ-पैर हिलाने में भी पूरी तरह सक्षम होता है.
कैसे तैयार किया गया स्वामी जी का एआई अवतार?
चूंकि स्वामी चिन्मयानंद का निधन 1993 में हो चुका था, इसलिए उनके साथ आज के समय में सीधे तौर पर बातचीत करना तकनीकी रूप से नामुमकिन था. इसे मुमकिन करने के लिए टेक एक्सपर्ट्स ने डिपफेक जैसी अत्याधुनिक एआई टूल्स का सहारा लिया.
स्वामी जी के पुराने प्रवचनों, उनके वीडियो फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की मदद से एआई सिस्टम को ट्रेन किया गया. इस डीप ट्रेनिंग के बाद एआई ने स्वामी जी के बोलने के लहजे, उनके हाव-भाव, हाथों के मूवमेंट और उनकी मूल आवाज को हूबहू रीक्रिएट कर लिया. इसके बाद जब मंच पर 3D प्रोजेक्टर चालू हुआ, तो स्वामी जी साक्षात वहां खड़े नजर आने लगे.
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मंच पर पीएम मोदी और होलोबॉट के बीच क्या हुई बातचीत?
इस खास वर्चुअल संवाद के दौरान पीएम मोदी और स्वामी जी के एआई अवतार ने फरवरी 1993 में वडोदरा में हुई अपनी मुलाकात की यादें शेयर कीं, जब पीएम मोदी उन्हें शिकागो की विश्व धर्म संसद की शताब्दी के लिए आंमत्रित करने गए थे. होलोबॉट ने उस समय की बातचीत को दोहराते हुए कहा कि अब उनकी उम्र हो गई है और सनातन धर्म के गिरे हुए स्तंभों को खड़ा करने की जिम्मेदारी हिंदू युवाओं को उठानी होगी. एआई अवतार ने पीएम मोदी की लीडरशिप की सराहना करते हुए कहा कि शिखर पर बैठा व्यक्ति अक्सर अकेला होता है, लेकिन भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>सीलबंद iPhone के अंदर क्या है? Apple ने अपनाया नया स्कैनिंग सिस्टम</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने अपने रिटेल स्टोर्स में नया स्कैनिंग सिस्टम शुरू किया है, जिससे iPhone का बॉक्स खोले बिना ही उसके अंदर रखे फोन की जांच की जा सकेगी. यह तकनीक खासतौर पर उन लोगों की धोखाधड़ी रोकने के लिए लाई गई है, जो फोन या उसके जरूरी पार्ट्स निकालकर सीलबंद पैकेट रिटर्न &amp;nbsp;कर देते हैं. इससे फोन या उसके पार्ट्स गायब होने का पता लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही सही हालत में लौटाए गए सीलबंद iPhone को दोबारा बिक्री के लिए उपलब्ध कराना आसान होगा और जांच के लिए उनकी पैकेजिंग खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.&amp;nbsp;
कैसे होती है सीलबंद iPhone के नाम पर धोखाधड़ी?
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोग Apple के iPhone या दूसरे प्रोडक्ट खरीदने के बाद उनके बॉक्स से एक्सेसरीज निकाल लेते हैं. कुछ मामलों में फोन के अंदर के पार्ट्स निकालने या पूरा डिवाइस हटाने के बाद पैकेजिंग को वापस कर दिया जाता है. ऊपर से बॉक्स सीलबंद दिखाई देता है, जिससे धोखाधड़ी पकड़ना मुश्किल हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोग इस तरह निकाले गए पार्ट्स को दूसरे बाजारों में बेचने का काम भी करते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए Apple Store के कर्मचारियों को लौटाए गए बॉक्स खोलकर उनकी जांच करने के निर्देश दिए गए थे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - फोन की छोटी स्क्रीन से TV तक पहुंचा Instagram, Apple TV पर हुई एंट्री
बॉक्स खोले बिना कैसे होगी जांच?
अब Apple ने एक नया एंटी-थेफ्ट सिस्टम तैयार किया है, जो पैकेजिंग के अंदर मौजूद iPhone को स्कैन करके उसकी जांच कर सकता है. यह डिवाइस डायग्नोस्टिक्स चलाकर पता लगाने में मदद करता है कि फोन अपनी जगह मौजूद है और पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जांच के लिए बॉक्स खोलना जरूरी नहीं होगा. इससे सही स्थिति में लौटाए गए सीलबंद प्रोडक्ट को दोबारा बिक्री के स्टॉक में शामिल करना आसान हो सकता है.&amp;nbsp;
किस टेक्नोलॉजी से जुड़ा है नया सिस्टम
रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्कैनिंग सिस्टम में Apple की Presto मशीनों वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इन मशीनों की मदद से कंपनी iPhone को पैकेजिंग से बाहर निकाले बिना उसका सॉफ्टवेयर अपडेट कर सकती है. हाल ही में इनका इस्तेमाल iPhone Duo की सेटअप स्क्रीन पर पर्सनलाइज्ड ग्रीटिंग जोड़ने के लिए भी किया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>न जलने का डर और न करंट का खतरा, बिजली के तार से ऐसे छुड़ाएं पटाखे</title>
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        <description><![CDATA[ दीपावली के त्योहार में पटाखों का क्रेज हर उम्र के लोगों में देखने को मिलता है. हालांकि, जरा सी लापरवाही के कारण पटाखे जलाते समय हाथ जलने या झुलसने की खबरें भी सामने आती हैं. खास तौर पर बच्चों के साथ ऐसी घटनाएं होने का खतरा अधिक रहता है. यदि आप भी इस दिवाली पटाखों से होने वाले हादसों से बचना चाहते हैं तो विज्ञान और तकनीक की मदद से एक सुरक्षित रास्ता निकाला जा सकता है.&amp;nbsp;
आजकल सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील्स पर भी बिना माचिस या मोमबत्ती छुए, दूर बैठकर बिजली के तारों की मदद से पटाखे जलाने के कई अनोखे और घरेलू टेक हैक्स तेजी से वायरल हो रहे हैं. इस आसान इलेक्ट्रॉनिक जुगाड़ में न तो हाथ जलने का डर रहता है और न ही किसी प्रकार के करंट लगने का खतरा होता है. आइए जानते हैं इस खास DIY ट्रिक के बारे में जो आपके त्योहार को पूरी तरह से सुरक्षित बना देगी.
इस जुगाड़ में क्या-क्या लगेगा?
इस रिमोट-कंट्रोल्ड इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन सिस्टम को घर पर तैयार करने के लिए बहुत ही बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है. इसके लिए आपको सबसे पहले एक पुरानी या खराब हो चुकी यूएसबी चार्जिंग केबल की जरूरत होगी. इसके अलावा, दूरी के हिसाब से बिजली के सामान्य दो पतले तार, बिजली के तार काटने और जोड़ने के लिए एक कटर या कैंची, ब्लैक इंसुलेशन टेप, माचिस की तीली और पावर सोर्स के लिए एक 3.7 वोल्ट की लिथियम-आयन रिचार्जेबल बैटरी की आवश्यकता होती है.
स्टेप-बाय-स्टेप समझें इसे बनाने की पूरी विधि
केबल से थिन वायर निकालना- सबसे पहले अपनी खराब यूएसबी चार्जिंग केबल को कटर की मदद से काट लें. इसके बाहरी रबर कवर को हटाने पर आपको अंदर दो या चार पतले तार दिखाई देंगे. इनमें से हमें केवल सबसे पतले कॉपर के तारों की आवश्यकता है.
हीटिंग एलिमेंट तैयार करना- इस निकाले गए पतले कॉपर वायर का एक छोटा सा हिस्सा लेकर उसे सामान्य बिजली वाले दोनों लंबे तारों के एक-एक छोर पर अच्छी तरह से लपेटकर जोड़ दें. यह पतला तार एक हीटिंग फिलामेंट की तरह काम करेगा, जो बिजली मिलने पर तुरंत गर्म हो जाता है.
माचिस की तीली के साथ कनेक्शन- अब एक माचिस की तीली लें और उसके बारूद वाले हिस्से के ठीक नीचे कटर से एक छोटा सा खांचा बना लें. इस बनाए गए कट में उस पतले कॉपर वायर वाले हिस्से को फंसा दें और सुरक्षा के लिए ऊपर से ब्लैक इंसुलेशन टेप लपेट दें.
पटाखे के साथ सेटअप- अब जिस पटाखे जैसे अनार, रॉकेट या बम को आप जलाना चाहते हैं, उसके फ्यूज को माचिस की तीली के बारूद वाले हिस्से के साथ सटाकर टेप की मदद से फिक्स कर दें. इसके बाद दोनों लंबे तारों को फैलाते हुए पटाखे से सुरक्षित दूरी पर आ जाएं.



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कैसे काम करता है यह सिस्टम और क्यों है सुरक्षित?
जब आपका पूरा सेटअप तैयार हो जाए, तो सुरक्षित दूरी पर रखे गए दोनों तारों के दूसरे छोर को लिथियम-आयन बैटरी के पॉजिटिव + और नेगेटिव - टर्मिनलों से टच कराएं. जैसे ही तार बैटरी से छुएंगे, सर्किट पूरा हो जाएगा और शॉर्ट-सर्किट के सिद्धांत के कारण वह पतला कॉपर वायर अत्यधिक गर्म होकर माचिस की तीली में आग लगा देगा. तीली जलते ही पटाखे के फ्यूज में आग लग जाएगी और पटाखा आसानी से छूट जाएगा. यह तकनीक पूरी तरह से सुरक्षित है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली 3.7V की बैटरी का वोल्टेज बहुत ही कम होता है, जिससे इंसानों को झटका या करंट लगने का कोई खतरा नहीं होता.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वीडियो, गेमिंग और डाउनलोडिंग के लिए 3GB डेटा, किस कंपनी का प्लान चुनें?</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन वीडियो देखना हो, मोबाइल पर गेमिंग करनी हो या बड़ी फाइलें डाउनलोड करनी हों, ज्यादा इंटरनेट यूज करने वालों के लिए रोजाना मिलने वाला डेटा काफी जरूरी होता है. ऐसे में अगर दिन का 1GB या 2GB डेटा कम पड़ने लगा है तो 3GB डेली डेटा वाले रिचार्ज प्लान एक ऑप्शन हो सकते है. Airtel, Jio और Vodafone Idea (Vi) जैसी टेलीकॉम कंपनियां इस कैटेगरी में अलग-अलग कीमत और वैलिडिटी वाले प्लान ऑफर करती हैं.
इनमें इंटरनेट के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग, SMS और OTT प्लेटफॉर्म का फायदा भी मिलता है. तो आइए जानते हैं कि ज्यादा डेटा यूज करने वालों के लिए किस कंपनी के पास क्या ऑप्शन हैं और किस कंपनी का प्लान चुनें.&amp;nbsp;
3GB डेली डेटा वाले प्लान ऑप्शन&amp;nbsp;
1. Jio &amp;nbsp;- Jio के पास 3GB डेली डेटा वाले तीन प्रीपेड रिचार्ज प्लान हैं, जिनमें यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से ऑप्शन चुन सकते हैं. कंपनी का 449 रुपये वाला प्लान 28 दिन की वैलिडिटी के साथ आता है. इसमें रोजाना 3GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, प्रतिदिन 100 SMS, True 5G डेटा, JioTV और JioAICloud का एक्सेस मिलता है. वहीं 1,199 रुपये के प्लान में 84 दिन की वैलिडिटी के साथ 3GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, रोजाना 100 SMS की सुविधा मिलती है. इसके अलावा 1,799 रुपये के प्लान में भी 84 दिन तक रोजाना 3GB डेटा और अन्य नियमित सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन इसमें Netflix Basic का सब्सक्रिप्शन भी शामिल है.&amp;nbsp;
2. Vi - Vi फिलहाल इस कैटेगरी में 795 रुपये का रिचार्ज प्लान पेश करता है. इसकी वैलिडिटी 56 दिन है और इसमें रोजाना 3GB डेटा, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और 100 SMS प्रतिदिन मिलते हैं. इस प्लान की खासियत Binge All Night सुविधा है, जिसके तहत रात 12 बजे से दोपहर 12 बजे तक अनलिमिटेड डेटा यूज किया जा सकता है. इसके अलावा Weekend Data Rollover और Vi Movies &amp;amp; TV ऐप के जरिए 19 OTT प्लेटफॉर्म का एक्सेस भी मिलता है.&amp;nbsp;
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3. &amp;nbsp;Airtel - &amp;nbsp;Airtel के पास 3GB डेली डेटा वाले तीन रिचार्ज प्लान हैं, जिनमें अलग-अलग वैलिडिटी और अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं. कंपनी का 838 रुपये वाला प्लान 56 दिन की वैलिडिटी के साथ आता है. इसमें रोजाना 3GB डेटा, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और प्रतिदिन 100 SMS मिलते हैं. वहीं 1,099 रुपये के प्लान में 84 दिन तक रोजाना 3GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, 100 SMS प्रतिदिन और अनलिमिटेड 5G डेटा की सुविधा मिलती है. इसके अलावा 1,798 रुपये के प्लान में 84 दिन की वैलिडिटी, रोजाना 3GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, 100 SMS प्रतिदिन और अनलिमिटेड 5G डेटा के साथ Netflix Basic का सब्सक्रिप्शन भी दिया जाता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;किस कंपनी का प्लान चुनना बेहतर रहेगा?
अगर कम कीमत में 3GB डेली डेटा चाहिए, तो Jio का 449 रुपये वाला प्लान सबसे सस्ता ऑप्शन है. लंबी वैलिडिटी और Netflix Basic की सुविधा के लिए Airtel का 1,798 रुपये या Jio का 1,799 रुपये वाला प्लान देखा जा सकता है. वहीं रात में ज्यादा डाउनलोड करने वालों के लिए Vi का Binge All Night फीचर यूजफुल हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वीडियो, गेमिंग, और, डाउनलोडिंग, के, लिए, 3GB, डेटा, किस, कंपनी, का, प्लान, चुनें</media:keywords>
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        <title>लैपटॉप और फोन दोनों होंगे चार्ज, 100W चार्जिंग वाला पावर बैंक लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल एक ही बैग में लैपटॉप, स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स लेकर चलना आम बात हो गई है, लेकिन जब इन सभी डिवाइस की बैटरी एक साथ खत्म होने लगे, तो उन्हें चार्ज करने के लिए अलग-अलग केबल और चार्जर संभालना परेशानी बन सकता है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए भारतीय एक्सेसरीज ब्रांड Stuffcool ने अपना नया पावर बैंक Giga Pro Max पेश किया है.
इसमें 20,000mAh की बैटरी के साथ 100W तक की चार्जिंग क्षमता दी गई है. इसकी खास बात है कि इसमें USB-C केबल पहले से जुड़ी हुई है, जिसे जरूरत पड़ने पर बाहर निकालकर इस्तेमाल कर सकते हैं और काम होने पर वापस पावर बैंक में रख सकते हैं.&amp;nbsp;
Stuffcool Giga Pro Max के खास फीचर्स क्या हैं
Stuffcool Giga Pro Max में 20,000mAh की बैटरी दी गई है, जिसकी रेटिंग 77Wh है. यह पावर बैंक PPS चार्जिंग और Samsung Super Fast Charging 2.0 को भी सपोर्ट करता है. इसकी सबसे खास बात इसका बिल्ट-इन रिट्रैक्टेबल USB-C केबल है. डिवाइस को चार्ज करने के लिए अलग से केबल साथ रखने की जरूरत नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर इस केबल को बाहर निकालकर इस्तेमाल किया जा सकता है और चार्जिंग पूरी होने के बाद इसे वापस पावर बैंक के अंदर रखा जा सकता है. कंपनी के मुताबिक, इस केबल में E-marker चिप दी गई है.
Stuffcool Giga Pro Max की कीमत और उपलब्धता
Stuffcool Giga Pro Max को भारत में 5,499 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया है. इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और Amazon India से खरीदा जा सकता है, हालांकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीमत और ऑफर बदल सकते हैं.
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चार्जिंग के दौरान दिखेगा बैटरी लेवल
इसमें डिजिटल डिस्प्ले भी दिया गया है, जो पावर बैंक में बची हुई बैटरी का प्रतिशत दिखाता है. इससे यूजर को अंदाजा लगाने की जगह पता चल सकता है कि डिवाइस में कितनी चार्जिंग बाकी है. इसके अलावा इसमें पास-थ्रू चार्जिंग का फीचर मिलता है. इसकी मदद से पावर बैंक को खुद चार्ज करते समय उससे जुड़े दूसरे डिवाइस भी चार्ज किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
एक साथ चार्ज कर सकेंगे कई डिवाइस
इस पावर बैंक में कुल 100W तक का आउटपुट मिलता है. इसमें बिल्ट-इन USB-C केबल से 65W तक और अलग USB-C पोर्ट से 35W तक की पावर मिल सकती है. &amp;nbsp;जिससे यूजर एक तरफ लैपटॉप चार्ज कर सकते हैं, जबकि दूसरी तरफ स्मार्टफोन या किसी अन्य डिवाइस को भी चार्ज किया जा सकता है. इसमें USB-A पोर्ट भी दिया गया है. यूजर बिल्ट-इन केबल से 65W और USB-A पोर्ट से 18W आउटपुट के साथ डिवाइस चार्ज कर सकते हैं. पावर बैंक में मौजूद USB-C केबल, USB-C पोर्ट और USB-A पोर्ट की मदद से एक साथ तीन डिवाइस कनेक्ट करने का ऑप्शन भी मिलता है.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI की ट्रेनिंग फिर शुरू, एजेंट्स को रोकने के लिए OpenAI ने काटा इंटरनेट!</title>
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        <description><![CDATA[ हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI दुनिया के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला था. कुछ समय पहले कुछ AI मॉडल्स बिना इजाजत बाहरी सिस्टम्स में घुसपैठ कर गए थे. इन खतरों को देखते हुए ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI ने एक बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपने सबसे एडवांस यानी फ्रंटियर AI मॉडल्स की ट्रेनिंग तो फिर से शुरू कर दी है.&amp;nbsp;
लेकिन इसके लिए लाइव इंटरनेट का कनेक्शन पूरी तरह से काट दिया है. करीब दो हफ्ते पहले दूसरी बड़ी AI कंपनी Anthropic ने भी ठीक ऐसा ही फैसला लिया था. दरअसल ट्रेनिंग के दौरान AI एजेंट्स का व्यवहार अचानक काफी अजीब और अनप्रिडिक्टेबल हो गया था. ऐसे में किसी बड़ी साइबर आफत से बचने के लिए OpenAI ने तय किया है कि अब इन ताकतवर मॉडल्स को खुले इंटरनेट के बजाय एक बंद और पूरी तरह से सुरक्षित डिजिटल माहौल में ही सिखाया जाएगा.
क्यों रोकनी पड़ी थी ट्रेनिंग?
OpenAI के इस फैसले के पीछे सुरक्षा में हुई एक बड़ी चूक जिम्मेदार है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 सितंबर को कंपनी के एक एडवांस फ्रंटियर मॉडल ने सिस्टम की एक खामी का फायदा उठाया और चुपचाप लाइव Internet तक अपनी पहुंच बना ली. इतना ही नहीं कई AI एजेंट्स ने तो सुरक्षा के लिए बनाए गए सैंडबॉक्स की डिजिटल दीवारों को भी लांघकर बाहर निकलने की कोशिश की थी.&amp;nbsp;
इस घटना के बाद कंपनी में हड़कंप मच गया और सितंबर के बाकी दिनों के लिए AI की ट्रेनिंग को तुरंत रोकना पड़ा. कंपनी ने अपने ऑफिशियल ब्लॉग पोस्ट में साफ कहा है कि मौजूदा इंटरनेट सिक्योरिटी और निगरानी सिस्टम को देखते हुए इतने ताकतवर AI को खुले वेब पर छोड़ना बहुत बड़ा रिस्क हो सकता है. इसीलिए बाहरी दुनिया के सिस्टम्स को किसी भी अनचाहे खतरे से बचाने के लिए लाइव Internet का एक्सेस बंद करना ही सबसे सेफ रास्ता समझा गया.

अब इस तरीके से होगी ट्रेनिंग
कई लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि बिना इंटरनेट के आखिर इतने बड़े AI मॉडल्स को नई चीजें कैसे सिखाई जाएंगी. इसके लिए OpenAI ने एक बहुत बड़ा Offline इंडेक्स और कैश्ड Web कंटेंट तैयार किया है. यानी कहें तो कंपनी ने पूरे Internet की एक ऑफलाइन लाइब्रेरी बना दी है जिसे सिमुलेटेड वेब एनवायरनमेंट कहा जा रहा है. यह तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी बच्चे को तैरना सिखाने के लिए सीधे खुले समंदर में उतारने के बजाय एक सुरक्षित स्विमिंग पूल में उतारा जाए.&amp;nbsp;
पहले जब AI लाइव Internet से जुड़कर ट्रेनिंग लेता था तो वह कई बार बेकाबू होकर बाहरी सिस्टम्स में ताक-झांक करने लगता था. लेकिन अब इस नकली डिजिटल दुनिया में AI मॉडल्स बिना लाइव इंटरनेट के संपर्क में आए सुरक्षित तरीके से डेटा के साथ इंटरैक्ट कर सकेंगे और कंपनी का उन पर पूरा कंट्रोल भी बना रहेगा.

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तकनीकी चुनौतियों और होगा भारी खर्च&amp;nbsp;
सुनने में यह जितना आसान लगता है हकीकत में इसे जमीन पर उतारना उतना ही मुश्किल काम है. टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI मॉडल्स को इंटरनेट से पूरी तरह काटकर रखना तकनीकी तौर पर बहुत बड़ी चुनौती है. पूर्व रिसर्चर स्टीवन एडलर के मुताबिक बड़े डेटा सेंटर्स को बाहरी दुनिया से अलग-थलग करने में कंपनियों को भारी-भरकम खर्च और कई तरह की रुकावटों का सामना करना पड़ेगा.&amp;nbsp;
वहीं कंपनी के एक सिक्योरिटी इंजीनियर का भी कहना है कि जहां हजारों रिसर्चर्स और अनगिनत टूल्स एक साथ काम करते हों उस बड़े ट्रेनिंग सिस्टम को एक बंद सैंडबॉक्स में समेटना बेहद मुश्किल काम है. इसके अलावा अब यह भी देखना दिलचस्प होगा कि बिना लाइव इंटरनेट के तैयार होने वाले ये नए AI मॉडल्स असल दुनिया के कामों में कितने असरदार साबित होते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सर्दियों के लिए AC पैक करने से पहले जरूर कर लें ये 5 काम, नहीं तो नुकसान में रहेंगे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सर्दियों-के-लिए-ac-पैक-करने-से-पहले-जरूर-कर-लें-ये-5-काम-नहीं-तो-नुकसान-में-रहेंगे</link>
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        <description><![CDATA[ अक्टूबर का महीना खत्म होने को है और सुबह-शाम हल्की ठंड ने दस्तक दे दी है. मौसम में आए इस बदलाव के साथ ही अब ज्यादातर घरों में AC का इस्तेमाल बंद होने लगा है. अब अगले 4 से 5 महीनों तक AC की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसलिए लोग इसे कवर से ढककर पैक करने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन अक्सर लोग एक बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं. वे AC का स्विच बंद करते हैं और सीधे उसके ऊपर कवर चढ़ा देते हैं.&amp;nbsp;
आपकी यही छोटी सी लापरवाही अगली गर्मियों में आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है. दरअसल महीनों तक बंद पड़े रहने के दौरान AC के अंदर नमी, धूल और कचरा जमा रह जाता है, जो इसके महंगे पार्ट्स को अंदर ही अंदर गला सकता है. जब आप अगले सीजन में AC चालू करते हैं, तो कूलिंग न होने से लेकर गैस लीकेज तक की दिक्कतें सामने आती हैं. इसलिए पैक करने से पहले यह तीन काम जरूर पूरे कर लें. नुकसान से बचे रहेंगे.
फिल्टर की धुलाई करें और अंदर की नमी सुखाएं
AC को लंबे समय के लिए बंद करने से पहले उसका पहला और सबसे जरूरी काम अंदर की नमी और धूल को पूरी तरह साफ करना है. जब हम पूरी गर्मी AC चलाते हैं तो उसकी कूलिंग कॉइल्स और ड्रेन पाइप में पानी की बूंदें और नमी जमा रह जाती है. अगर आप गीले AC पर ही सीधा कवर चढ़ा देंगे, तो अंदर फंगस, बदबू और जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
इससे बचने के लिए सबसे पहले AC का फ्रंट पैनल खोलकर उसके एयर फिल्टर बाहर निकालें और उन्हें पानी से अच्छी तरह धोकर धूप में सुखा लें. फिल्टर वापस लगाने के बाद अपने AC को तुरंत बंद न करें बल्कि उसे करीब एक से दो घंटे के लिए सिर्फ फैन मोड पर चलाकर छोड़ दें. फैन मोड में कंप्रेसर काम नहीं करता और सिर्फ पंखा चलता है, जिससे AC के अंदर के सारे हिस्से और पाइप पूरी तरह सूख जाते हैं. इससे सर्दियों भर अंदर सीलन नहीं बनती.

आउटडोर यूनिट की सफाई&amp;nbsp;
अक्सर लोग कमरे के अंदर लगे इनडोर यूनिट को तो चमका देते हैं, लेकिन छत और बालकनी में रखे आउटडोर यूनिट को पूरी तरह भूल जाते हैं. जबकि धूप, बारिश, धूल-मिट्टी और पक्षियों की गंदगी की सबसे ज्यादा मार इसी बाहरी हिस्से पर पड़ती है. पैक करने से पहले आउटडोर यूनिट को एक सूखे कपड़े और ब्रश से साफ करें या फिर कम प्रेशर वाले पानी से उसकी जाली में फंसी मिट्टी को बाहर निकाल दें.&amp;nbsp;

कवर लगाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
जब पानी पूरी तरह सूख जाए तभी उस पर कवर लगाएं. कवर चुनते वक्त यह ध्यान रखें कि वह पूरी तरह से एयरटाइट प्लास्टिक का न हो बल्कि ऐसा हो जिसमें से थोड़ी हवा पास हो सके जिससे अंदर नमी न रुके. साथ ही आउटडोर यूनिट के पाइप जहां से दीवार के अंदर जा रहे हैं. वहां के छेद को अच्छी तरह से सील कर दें. सर्दियों में अक्सर चूहे और गिलहरी ठंड से बचने के लिए AC के अंदर घुस जाते हैं और अंदर की वायरिंग कुतरकर बड़ा नुकसान कर देते हैं.
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मेन पावर स्विच ऑफ करें&amp;nbsp;
सफाई और कवर चढ़ाने के बाद तीसरा सबसे अहम काम बिजली के कनेक्शन और रिमोट से जुड़ा है. बहुत से लोग केवल रिमोट से AC बंद कर देते हैं और उसका मेन पावर स्विच यानी MCB ऑन ही छोड़ देते हैं. महीनों तक इस्तेमाल न होने की स्थिति में भी अगर मेन स्विच चालू रहता है, तो वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से AC की महंगी PCB प्लेट जलने का डर बना रहता है. इसलिए AC का प्लग निकाल दें और उसकी डेडिकेटेड MCB को नीचे गिरा दें.&amp;nbsp;
रिमोट से तुरंत निकाल लें बैटरियां
इसके अलावा जो गलती लगभग हर घर में होती है, वह है रिमोट के अंदर सेल छोड़कर रख देना. चार-पांच महीने तक बंद पड़े रहने के दौरान रिमोट की बैटरियां अक्सर लीक हो जाती हैं. बैटरी से निकलने वाला सफेद केमिकल रिमोट के स्प्रिंग और अंदर के सर्किट को पूरी तरह खराब कर देता है, जिससे अगले सीजन में आपको नया रिमोट खरीदना पड़ता है. इसलिए रिमोट से दोनों सेल निकालकर अलग रख दें और फिर बेफिक्र होकर AC को पैक करें.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सर्दियों, के, लिए, पैक, करने, से, पहले, जरूर, कर, लें, ये, काम, नहीं, तो, नुकसान, में, रहेंगे</media:keywords>
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        <title>फोन अपडेट के बाद रीस्टार्ट करना न भूलें, वरना आ सकती है बड़ी दिक्कत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-अपडेट-के-बाद-रीस्टार्ट-करना-न-भूलें-वरना-आ-सकती-है-बड़ी-दिक्कत</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में Phone हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है. दिन की हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए हम अपने Phone पर ही निर्भर रहते हैं. ऐसे में Phone को एकदम स्मूद और सही तरीके से चलाने के लिए समय-समय पर इसका Software अपडेट करना बहुत जरूरी होता है. आमतौर पर जब भी कंपनी की तरफ से कोई नया System अपडेट आता है तो Phone उसे डाउनलोड करके Install कर लेता है.&amp;nbsp;
कई बार यह पूरा Process बैकग्राउंड में अपने आप हो जाता है और अपडेट पूरा होने के बाद डिवाइस खुद Restart भी हो जाता है. लेकिन कई मामलों में छोटे अपडेट्स के बाद फोन अपने आप रीबूट नहीं होता. अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं और Phone को वैसे ही इस्तेमाल करते रहते हैं. जबकि अपडेट के बाद एक बार Phone को खुद Restart करना आपके डिवाइस के लिए बेहद जरूरी होता है.
Restart करने से बदलती है फोन की स्पीड और परफॉर्मेंस?
जब भी आप अपने Phone को अपडेट के बाद Restart यानी Reboot करते हैं. तो इससे फोन के अंदरूनी सिस्टम को एक नई शुरुआत मिलती है. दरअसल अपडेट Install होने के दौरान Phone में कई सारी Temporary Files जमा हो जाती हैं. जो बिना वजह Storage और Memory घेरती हैं. Phone को एक बार बंद करके दोबारा चालू करने से यह फालतू Files अपने आप डिलीट हो जाती हैं.&amp;nbsp;
इसके साथ ही Phone की RAM पूरी तरह से साफ हो जाती है और प्रोसेसर नए सिरे से काम करना शुरू कर देता है. इससे न सिर्फ Phone की स्पीड पहले से काफी बेहतर हो जाती है और Phone के हैंग होने और ऐप्स के क्रैश होने जैसी छोटी-मोटी दिक्कतें भी तुरंत दूर हो जाती हैं. टेक एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि किसी बड़े Software अपडेट के बाद Phone को Restart करने के साथ-साथ उसकी Cache मेमोरी क्लियर करना और नेटवर्क सेटिंग्स को एक बार चेक कर लेना भी सही होता है.&amp;nbsp;

इन चीजों को भी Restart करना जरूरी&amp;nbsp;
Restart करने का यह नियम Android Phone और iPhone दोनों के लिए जरूरी है. इतना ही नहीं अगर आप टैबलेट, लैपटॉप, डेस्कटॉप पीसी, स्मार्ट टीवी और हैंडहेल्ड गेमिंग कंसोल का इस्तेमाल करते हैं. तो उन्हें भी अपडेट के बाद रीबूट करना उतना ही जरूरी है.&amp;nbsp;
लगातार कई दिनों तक बिना बंद किए गैजेट्स को चलाते रहने से उनके बैकग्राउंड में कई प्रोसेस अटक जाते हैं. जिसका सीधा असर बैटरी की खपत और सिस्टम की स्पीड पर पड़ता है. जब आप अपडेट के बाद अपने डिवाइस को एक बार ऑफ करके ऑन करते हैं. तो नए सॉफ्टवेयर के सारे फीचर्स और बदलाव सिस्टम के साथ सही ढंग से तालमेल बिठा लेते हैं.&amp;nbsp;

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इन खतरों से भी होता है बचाव
अपने Phone को समय-समय पर बंद करके चालू करने का फायदा सिर्फ उसकी स्पीड बढ़ाने और बैटरी बचाने तक ही सीमित नहीं है. बल्कि यह आपकी Privacy से भी सीधा जुड़ा है. BGR की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी यानी NSA ने भी यूजर्स को यह खास सलाह दी है कि उन्हें अपने पर्सनल और ऑफिस के Phone को हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर Restart करना चाहिए.&amp;nbsp;
दरअसल आज के दौर में कई खतरनाक मैलवेयर और स्पाई सॉफ्टवेयर ऐसे होते हैं. जो बिना आपकी जानकारी के&amp;nbsp; के बैकग्राउंड में चुपचाप चलते रहते हैं और आपका पर्सनल डेटा चुराते हैं. यह स्पाईवेयर Phone की टेंपररी मेमोरी में छिपे होते हैं. जैसे ही आप अपने Phone को Restart करते हैं बैकग्राउंड में चल रहे इन खतरनाक Apps और जासूसी टूल्स की चेन तुरंत टूट जाती है और वे अपने आप बंद हो जाते हैं.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>फोन, अपडेट, के, बाद, रीस्टार्ट, करना, न, भूलें, वरना, आ, सकती, है, बड़ी, दिक्कत</media:keywords>
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        <title>5 लोगों की फैमिली के लिए कितना बड़ा गीजर सही? जान लें फायदे की बात</title>
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        <description><![CDATA[ अक्टूबर का महीना लगभग खत्म होने की कगार पर है. अब सुबह शाम हवा में हल्की ठंड भी महसूस की जा सकती है. कई लोगों ने अपने घरों में गीजर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. तो जिन लोगों के घर में गीजर नहीं है वह लोग नया गीज़र लाने की सोच रहे हैं. अगर आप भी सर्दियों में अपने घर में नया गीज़र खरीदने का प्लान कर रहे हैं.
तो पहले आपको यह जान लेना जरूरी है कि आपके परिवार के हिसाब से किस साइज का यानी कितने लीटर कैपेसिटी का गीजर सही रहेगा. कई बार लोग गलत कैपेसिटी वाला गीजर ले आते हैं और जिसके चलते बिजली खपत ज्यादा होती है. अगर आपके परिवार में 5 सदस्य हैं तो फिर समझ लीजिए कि कितने लीटर वाला गीजर आपकी फैमिली के लिए एकदम सही रहेगा.
5 लोगों के परिवार के लिए कितने लीटर गीजर सही?
अगर आपके घर में 5 सदस्य हैं. तो आपके लिए इंस्टेंट गीजर के बजाय स्टोरेज टैंक वाला गीजर ही सबसे बढ़िया काम करेगा. लेकिन यह कितने लीटर का होना चाहिए यह पूरी तरह से आपके नहाने के तरीके पर निर्भर करता है. अगर आपके घर में सभी लोग बाल्टी और मग से नहाना पसंद करते हैं. तो 5 लोगों की फैमिली के लिए 15 लीटर से लेकर 25 लीटर तक की कैपेसिटी वाला स्टोरेज गीजर एकदम सही रहेगा.&amp;nbsp;
दरअसल गीजर में पानी काफी तेज गर्म होता है और बाल्टी में ठंडा पानी मिलाकर इस्तेमाल करने से एक बार के गर्म पानी में तीन से चार लोग आराम से नहा सकते हैं. वहीं अगर आपके घर के बाथरूम में शावर का इस्तेमाल ज्यादा होता है और लोग लंबे समय तक शॉवर के नीचे खड़े होकर नहाते हैं. तो आपको कम से कम 25 लीटर से 35 लीटर वाला गीजर चाहिए. शावर में पानी लगातार बहता ह&amp;nbsp; इसलिए छोटे टैंक का गर्म पानी सिर्फ 10 मिनट में ही खत्म हो जाता है.

अपने घर के हिसाब से कौन-सा चुनें?
अक्सर 5 लोगों के परिवार में 15 लीटर और 25 लीटर वाले गीजर को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन रहता है. इसे आप अपने परिवार के डेली रूटीन से समझ सकते हैं. मान लीजिए आपके घर में सुबह ऑफिस और स्कूल जाने की भागदौड़ रहती है और 5 लोगों को एक के बाद एक तुरंत नहाना होता है. तो 25 लीटर वाला गीजर ही घर लाएं. इसमें बार-बार गीजर ऑन करके पानी गर्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा.&amp;nbsp;
लेकिन अगर घर में दो लोग सुबह जल्दी नहाते हैं और बाकी सदस्य थोड़ी देर बाद या दोपहर में नहाते हैं. तो 15 लीटर का गीजर भी आपका काम बहुत अच्छे से चला देगा.इससे आपको गीजर खरीदते वक्त शुरुआती कीमत में भी बचत होगी और छोटा टैंक होने की वजह से पानी भी बहुत जल्दी गर्म हो जाएगा. वहीं किचन में बर्तन धोने के लिए अलग से 3 या 5 लीटर का छोटा इंस्टेंट गीजर लगवाना ज्यादा सही होता है.

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गीजर खरीदते वक्त इन बातों पर ध्यान दें
सही साइज चुनने के साथ-साथ गीजर के कुछ फीचर्स को देखना भी आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है. सर्दियों में घर का सबसे ज्यादा बिजली बिल गीजर की वजह से ही आता है. इसलिए हमेशा 5-स्टार BEE रेटिंग वाला गीजर ही खरीदें. इसमें हाई-डेंसिटी इंसुलेशन की मोटी परत होती है जो एक बार पानी गर्म होने के बाद उसे घंटों तक ठंडा नहीं होने देती. इससे गीजर को बार-बार ऑन नहीं करना पड़ता और बिजली की अच्छी-खासी बचत होती है.&amp;nbsp;
इसके अलावा अगर आपके इलाके में खारा पानी यानी हार्ड वॉटर आता है तो नार्मल स्टील टैंक वाले गीजर के बजाय ग्लास-लाइंड या टाइटेनियम कोटिंग वाले टैंक का चुनाव करें. खारे पानी की वजह से नॉर्मल टैंक और हीटिंग एलिमेंट में बहुत जल्दी जंग लग जाता है और गीजर दो-तीन साल में ही लीक होने लगता है. इसके साथ ही खरीदने से पहले इनर टैंक पर कम से कम 5 से 7 साल की वारंटी और थर्मल कट-ऑफ जैसा सेफ्टी फीचर जरूर चेक कर लें.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आंध्र प्रदेश के मंदिर में आया पहला रोबोटिक हाथी &amp;apos;रंगा&amp;apos;, पेटा ने दिया तोहफा</title>
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        <description><![CDATA[ तकनीक और परंपरा के एक अद्भुत और अनोखे संगम ने आंध्र प्रदेश में नया इतिहास रच दिया है. विशाखापट्टनम के प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर में राज्य के पहले आदमकद (Life-Size) रोबोटिक हाथी का भव्य अनावरण किया गया है. इस हाई-टेक और बेहद खास मैकेनिक हाथी का नाम &#039;रंगा&#039; (Ranga) रखा गया है. शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर रोबोटिक हाथी की एंट्री का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही तहलका मचा रहा है. लोग तकनीक की इस पहल को भारतीय धार्मिक आयोजनों में एक बड़ा &#039;टेक-रिवोल्यूशन&#039; बता रहे हैं.
एक्टर अदिवी शेष और PETA की टेक-पहल
इस अनोखे टेक-प्रोजेक्ट के पीछे साउथ सिनेमा के चर्चित एक्टर अदिवी शेष और पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था PETA इंडिया की खास सोच है. दोनों ने मिलकर यह आधुनिक मैकेनिकल हाथी मंदिर को तोहफे में दिया है. इस रोबोटिक हाथी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके सिर, कान, पूंछ और सूंड की मूवमेंट बिल्कुल असली हाथी जैसी महसूस होती है. रोबोटिक्स और सेंसर्स की मदद से काम करने वाला यह &#039;टेक-एलिफेंट&#039; अब बिना किसी बेजुबान जानवर को नुकसान पहुंचाए धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करेगा.

VIDEO | Andhra Pradesh: ISKCON Visakhapatnam to welcome Andhra&#039;s first life-size mechanical elephant. Actor Adivi Sesh and People for the Ethical Treatment of Animals (PETA) India have gifted Andhra Pradesh&amp;rsquo;s first life-size mechanical elephant, named Ranga, to the Sri Radha Damodar Temple of ISKCON Visakhapatnam. The robotic elephant was unveiled on Sunday during Sharad Purnima celebrations. The inauguration was followed by a ceremonial procession and bhajans. (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) October 25, 2026



भजन और शोभायात्रा के साथ हुआ अनावरण
शरद पूर्णिमा के मौके पर जब &#039;रंगा&#039; का उद्घाटन किया गया, तो मंदिर परिसर का नजारा देखने लायक था. ढोल-नगाड़ों, भजनों और मंत्रोच्चार के बीच इस रोबोटिक हाथी की पहली शोभायात्रा निकाली गई. असली हाथी जैसा दिखने वाला यह मैकेनिक ढांचा लोगों और श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल का विषय बन गया. भक्तों ने न केवल &#039;रंगा&#039; का स्वागत किया बल्कि इस एडवांस्ड रोबोटिक्स पहल के साथ जमकर तस्वीरें और वीडियो भी बनाए, जो अब इंस्टाग्राम और X पर जमकर ट्रेंड कर रहे हैं.
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इको-फ्रेंडली और सुरक्षित भविष्य की ओर कदम
तकनीकी जानकारों और सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि &#039;रंगा&#039; जैसे रोबोटिक हाथियों की एंट्री से धार्मिक पर्यटन और टेक इंडस्ट्री के बीच एक नया नया रास्ता खुला है. इससे जहां एक तरफ मंदिरों में हाथियों की क्रूरता और हादसों का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा, वहीं दूसरी तरफ रोबोटिक्स और एआई-संचालित तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा. यूजर्स का कहना है कि अगर देश के अन्य बड़े मंदिर भी इस तरह के टेक-सॉल्यूशंस अपनाएं, तो परंपराएं भी बची रहेंगी और जानवर भी सुरक्षित रहेंगे.
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        <pubDate>Mon, 26 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Windows में प्रिंटर बार&amp;बार हो रहा है फेल? ड्राइवर से कनेक्शन तक ऐसे करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ Windows में प्रिंटर बार-बार हो रहा है फेल? ड्राइवर से कनेक्शन तक ऐसे करें ठीक ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Apple के फोल्डेबल iPhone Duo में चलेंगी ये ऐप्स, लिस्ट आई सामने</title>
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        <description><![CDATA[ दुनियाभर में इस वक्त Apple के पहले फोल्डेबल फोन iPhone Duo की जबरदस्त चर्चा हो रही है. भारत में तो इसका क्रेज इस कदर देखने को मिला कि बिक्री शुरू होते ही यह फोन तुरंत आउट ऑफ स्टॉक हो गया. करीब तीन लाख रुपये की शुरुआती कीमत होने के बावजूद लोग इसे खरीदने के लिए Apple स्टोर के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए.&amp;nbsp;
लेकिन अगर आपने भी यह नया फोल्डेबल फोन ले लिया है या लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि इसमें कौन-से ऐप्स अच्छे से चलेंगे. कंपनी ने अब उन Apps की पूरी लिस्ट जारी कर दी है. जिन्हें खास तौर पर iPhone Duo की 7.6 इंच की फोल्डिंग और 5.4 इंच की कवर स्क्रीन के हिसाब से तैयार किया गया है. हालांकि इसमें सभी नॉर्मल iPhone ऐप्स काम करेंगी. लेकिन स्पेशल ऑप्टिमाइज्ड ऐप्स ही आपको इस फोल्डेबल स्क्रीन का असली मजा देंगी. देख लें पूरी लिस्ट
फोल्डेबल स्क्रीन के लिए Apps को अलग से किया डिजाइन
iPhone Duo की मेन स्क्रीन खुलने के बाद किसी छोटे iPad जैसा चौड़ा इंटरफेस देती है. इसलिए इस पर Apps का सही तरह से फिट होना बहुत जरूरी है. जो Apps अभी तक इस नए फोन के हिसाब से अपडेट नहीं हुई हैं वे बाहर वाली छोटी कवर स्क्रीन पर थोड़ी दबी हुई नजर आती हैं. वहीं अंदर की बड़ी फोल्डिंग स्क्रीन पर ऐसी ऐप्स बीच में खुलती हैं और उनके दोनों तरफ चौड़ी काली पट्टियां यानी ब्लैक बार्स दिखाई देती हैं.&amp;nbsp;
दूसरी तरफ जिन Apps को पूरी तरह से iPhone Duo के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है वे दोनों स्क्रीन पर फुल-स्क्रीन और एज-टू-एज फॉर्मेट में चलती हैं. इनमें नेविगेशन के लिए साइड में सिर्फ फ्लोटिंग बटन्स दिखते हैं. इसके अलावा यह App फोन के अलग-अलग पोस्चर का भी पूरा फायदा उठाती हैं. जैसे फोन को L-शेप में मोड़कर टेबलटॉप मोड में रखने पर आप बिना हाथ लगाए आराम से वीडियो देख सकते हैं. जबकि टेंट मोड क्लॉक App के लिए एकदम परफेक्ट काम करता है.

अलग-अलग काम के लिए यह Apps करेंगे पूरी तरह सपोर्ट
Apple ने कन्फर्म किया है कि लॉन्च के साथ ही App Store पर 50 से ज्यादा ऐप्स को iPhone Duo के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया गया है. एंटरटेनमेंट की बात करें तो Netflix है. टेबलटॉप मोड में फोन रखने पर ऊपर की स्क्रीन पर मूवी चलती है और नीचे वाले हिस्से में प्लेबैक कंट्रोल्स आ जाते हैं. इसके अलावा Amazon Prime Video और Paramount+ भी पूरी तरह सपोर्ट करते हैं.
ऑफिस के कामकाज के लिए Zoom ऐप में स्प्लिट-व्यू मिलता है. जहां एक तरफ प्रेजेंटेशन और दूसरी तरफ मीटिंग में जुड़े लोग दिखते हैं. वहीं Slack ऐप में iPad जैसा टू-पेन लेआउट दिया गया है. सोशल मीडिया के शौकीनों के लिए Instagram Edits ऐप इंटरफेस को दो हिस्सों में बांट देती है. जिससे फिल्टर लगाने से पहले उसका क्लियर प्रीव्यू दिखता है. वहीं Microsoft Word और Outlook में भी जल्द ही डेस्कटॉप जैसा एक्सपीरियंस मिलने वाला है.
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यह रही Apps की पूरी लिस्ट
iPhone Duo में अभी कई ऐप्स सही तरीके से काम करेंगी. वीडियो और म्यूजिक के लिए इसमें Netflix, Prime Video, Paramount+, Apple Music, Apple TV, iQIYI और edjing Mix शामिल हैं. सोशल मीडिया और कामकाज के लिए Instagram, Instagram Edits, Zoom, Slack, Salesforce, WPS Office, Xmind, Fantastical, Craft, Airmail और Tiimo जैसी ऐप्स लिस्ट में हैं. गेमिंग और स्पोर्ट्स के लिए Asphalt Legends, Sneaky Sasquatch, Retrocade, Deck-Man, MLB और PGA Tour का सपोर्ट मौजूद है.
&amp;nbsp;ट्रैवल, लाइफस्टाइल और दूसरी कैटेगरी में VLLO, Detail, NYT Cooking, LTK, Lowe&#039;s Shop, OpenTable, DoorDash, Yelp, Lyft, American Airlines, United Airlines, Flighty, Sky Guide, Tide Guide, Next Shot, Weibo, AMap, rednote, Taobao, Webtoon, KakaoTalk, KakaoPage, Band, Tripsy, SmartGym और Moises शामिल हैं. इसके अलावा नवंबर महीने में आने वाले डार्क फैंटेसी गेम UnGodly और Zenless Zone Zero के लिए भी अपडेट जारी किया जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>माइक्रोफोन पर छोटी&amp;सी स्क्रीन, Insta360 के नए गैजेट में क्या है खास?</title>
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        <description><![CDATA[ Insta360 ने ग्लोबल मार्केट में अपना नया वायरलेस माइक्रोफोन लॉन्च किया है. इस डिवाइस की खास बात यह है कि इसमें आवाज रिकॉर्ड करने से जुड़ी सुविधाओं के साथ एक छोटी E-Ink स्क्रीन भी दी गई है, जिसे क्रिएटर्स अपनी पसंद की फोटो से कस्टमाइज कर सकते हैं. कंपनी ने इसे अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से तीन कॉन्फिगरेशन में पेश किया है. तो आइए जानते हैं कि इस माइक्रोफोन के फीचर्स, कनेक्टिविटी और कीमत क्या है.&amp;nbsp;
माइक्रोफोन की स्क्रीन पर लगा सकेंगे अपनी पसंद की फोटो 
Insta360 Mic में कस्टमाइज होने वाली E-Ink डिस्प्ले दी गई है. इस पर कंटेंट क्रिएटर्स अपनी पसंद की फोटो अपलोड करके दिखा सकते हैं. इससे माइक्रोफोन को अपनी पसंद के मुताबिक बनाया जा सकता है. इसके अलावा ट्रांसमीटर में microSD कार्ड लगाने की सुविधा भी है, जिससे ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए अतिरिक्त स्टोरेज का इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
Insta360 Mic के खास फीचर्स क्या हैं?
इस माइक्रोफोन में 32-bit float ऑडियो रिकॉर्डिंग का सपोर्ट मिलता है. microSD कार्ड लगाने पर ट्रांसमीटर ऑडियो की एक अतिरिक्त कॉपी रिकॉर्ड कर सकता है, जो कैमरे या फोन में रिकॉर्ड होने वाली आवाज के बैकअप के तौर पर काम आती है. डिवाइस में एक अलग AI ऑडियो प्रोसेसिंग चिप भी दी गई है. कंपनी के मुताबिक, यह आसपास के शोर को कम करने में मदद करती है और आवाज में होने वाली अनचाही गड़बड़ियों को सीमित रखने के लिए डिजाइन की गई है.&amp;nbsp;
Insta360 कैमरों से सीधे होगा कनेक्ट
इस माइक्रोफोन में Insta360 Direct Connect फीचर दिया गया है. इसके जरिए ट्रांसमीटर को बिना रिसीवर के ब्लूटूथ से कुछ कैमरों के साथ जोड़ा जा सकता है. इनमें X6, X5, Luna Ultra, Luna Pro, GO Ultra और Ace Pro 2 शामिल हैं. वहीं दूसरे डिवाइस के साथ इस्तेमाल करने के लिए इसमें रिसीवर दिया गया है. यह USB-C स्मार्टफोन अडैप्टर या 3.5mm केबल के जरिए स्मार्टफोन, DSLR और मिररलेस कैमरों से कनेक्ट हो सकता है.&amp;nbsp;
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आवाज को कंट्रोल करने के लिए मिलेंगे अलग मोड
Insta360 Mic में ऑडियो को मैनेज करने के लिए दो ऑटोमैटिक गेन कंट्रोल मोड दिए गए है.&amp;nbsp; इसके अलावा यूजर्स Regular, Rich और Bright वॉइस टोन प्रीसेट में से भी चुनाव कर सकते हैं. Insta360 Mic के दो ट्रांसमीटर एक साथ चार रिसीवर तक सिंक्रोनाइज्ड ऑडियो भेज सकते हैं. इसमें पुराने जनरेशन के Mic Pro ट्रांसमीटर के साथ इस्तेमाल करने की सुविधा भी दी गई है.
Insta360 की बैटरी और कीमत&amp;nbsp;Insta360 Mic का हर ट्रांसमीटर एक बार चार्ज करने पर 13 घंटे तक काम कर सकता है. वहीं चार्जिंग केस के साथ इसकी बैटरी लाइफ बढ़कर 34 घंटे तक हो जाती है. कीमत की बात करें तो दो ट्रांसमीटर और एक रिसीवर वाले सेट की कीमत करीब 23,000 रुपये रखी गई है. वहीं, एक ट्रांसमीटर और एक रिसीवर वाला सेट करीब 13,000 रुपये में मिलता है. यह माइक्रोफोन दुनियाभर में Insta360 के आधिकारिक ऑनलाइन स्टोर, Amazon और कंपनी के अधिकृत रिटेलर्स के पास उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>माइक्रोफोन, पर, छोटी-सी, स्क्रीन, Insta360, के, नए, गैजेट, में, क्या, है, खास</media:keywords>
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        <title>अब प्रीपेड प्लान में YouTube Premium, Airtel ने पेश किया नया बंडल</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन पर वीडियो देखते समय बार-बार आने वाले एड कई बार देखने का मजा खराब कर देते हैं. वहीं YouTube पर कोई गाना सुनते हुए दूसरी ऐप खोलने पर वीडियो का रुक जाना भी यूजर्स के लिए परेशानी बन सकता है. ऐसे में अगर मोबाइल रिचार्ज के साथ ही एड-फ्री वीडियो देखने, बैकग्राउंड में म्यूजिक चलाने और वीडियो डाउनलोड करने जैसी सुविधाएं मिल जाएं, तो यह यूजर्स के लिए एक अलग तरह का फायदा हो सकता है.
इसी को ध्यान में रखते हुए टेलीकॉम कंपनी Airtel ने भारत में अपने प्रीपेड ग्राहकों के लिए YouTube Premium की सुविधा पेश की है. कंपनी ने इसे अपने एंटरटेनमेंट ऑफर्स का हिस्सा बनाया है, जिससे यूजर्स को एक ही पैक में इंटरनेट डेटा और प्रीमियम कंटेंट का फायदा मिल सके.&amp;nbsp;इतने रुपये के टॉप-अप में मिलेगा YouTube Premium
Airtel ने YouTube Premium का फायदा अपने 200 रुपये वाले OTT टॉप-अप पैक के साथ जोड़ा है. इस पैक में ग्राहकों को 30GB अतिरिक्त डेटा भी दिया जा रहा है, हालांकि इस ऑफर का &amp;nbsp;फायदा उठाने के लिए यूजर्स के पास Airtel का एक एक्टिव प्रीपेड रिचार्ज प्लान होना जरूरी है. यानी इसे मौजूदा रिचार्ज के साथ अतिरिक्त टॉप-अप के रूप में खरीदा जा सकता है.
कितने दिन तक मिलेगा फायदा
Airtel के इस बंडल की वैलिडिटी 28 दिन है. इसी अवधि तक YouTube Premium का फायदा भी मिलेगा. वैलिडिटी खत्म होने के बाद ग्राहक इस सुविधा को जारी रखने के लिए दोबारा टॉप-अप खरीदकर ऐप के जरिए बेनिफिट क्लेम कर सकते हैं.
एड के बिना वीडियो और म्यूजिक सुनने की सुविधा
इस बंडल के तहत ग्राहकों को YouTube Premium के कई फीचर्स मिलेंगे. इनमें &amp;nbsp;बिना एड के वीडियो देखना, दूसरी ऐप इस्तेमाल करते समय बैकग्राउंड में वीडियो या ऑडियो चलाना और वीडियो को डाउनलोड करके ऑफलाइन देखना शामिल है. इसके अलावा यूजर्स को YouTube Music Premium का एक्सेस भी मिलेगा. यह पैक सिर्फ फिल्मों और वेब सीरीज तक सीमित नहीं है, बल्कि YouTube पर क्रिएटर्स के वीडियो, Shorts और म्यूजिक सुनने वालों के लिए भी यूजफुल हो सकता है.
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Airtel ऐप से ऐसे एक्टिवेट करें फायदा
YouTube Premium का फायदा लेने के लिए ग्राहकों को सबसे पहले 200 रुपये वाला OTT टॉप-अप खरीदना होगा. इसके बाद Airtel ऐप में जाकर Rewards &amp;amp; OTTs सेक्शन खोलना होगा. यहां YouTube Premium के ऑप्शन को चुनकर स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा. इसके बाद इस सुविधा को क्लेम किया जा सकता है.
Airtel के OTT ऑफर्स में जुड़ा नया ऑप्शन
Airtel पहले से ही अपने ग्राहकों को Prime Video, JioHotstar, ZEE5 Premium और SonyLIV जैसे प्लेटफॉर्म का एक्सेस देता है. इसके अलावा, कंपनी के OTT पोर्टफोलियो में 18 से ज्यादा दूसरे प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं. अब YouTube Premium के जुड़ने से यूजर्स को वीडियो देखने, क्रिएटर्स का कंटेंट देखने और म्यूजिक सुनने के लिए भी एक नया ऑप्शन मिल गया है.
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone Duo पर स्क्रीन क्रैक की शिकायत, Apple की इंजीनियरिंग पर उठे सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ Apple का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo इन दिनों चर्चा में है. कंपनी ने इसे 9 सितंबर को एपल इवेंट के दौरान लॉन्च किया था, जिसके बाद 23 अक्टूबर को इसकी बिक्री भी शुरू हो गई है. जहां एक तरफ iPhone Duo की फोल्डेबल स्क्रीन और टेक्नोलॉजी चर्चा में है, वहीं बिक्री शुरू होने के कुछ ही घंटे बाद इसकी इंजीनियरिंग पर भी सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं.&amp;nbsp;
दअरसल, सेल शुरू होने के बाद कई यूजर्स ने iPhone Duo की फोल्डेबल स्क्रीन में क्रैक की शिकायत दर्ज कराई, जिससे इसे लेकर सुरक्षा चिंता बढ़ गई है. शुरुआती खरीदारों ने फोन की अंदरूनी फोल्डिंग स्क्रीन पर दरारें और डिस्प्ले संबंधी समस्याएं रिपोर्ट की हैं. कुछ मामलों में नुकसान स्क्रीन के उस हिस्से के आसपास दिखाई दिया, जहां फोन मुड़ता है. एक यूजर ने दावा किया कि उसका डिस्प्ले 20 से भी कम बार फोन खोलने-बंद करने के बाद क्रैक हो गया.
Apple की इंजीनियरिंग पर सवाल
फोन के शुरुआती बिक्री में समस्या सामने आने से लोग Apple की इंजीनियरिंग पर सवाल खड़े कर रहे हैं. लॉन्च के बाद से ही फोन के बड़े फोल्डिंग डिस्प्ले और प्रीमियम डिजाइन की वजह से लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ गई थी. लेकिन शुरुआती स्क्रीन शिकायतों को लेकर लोग अब परेशान हो रहे हैं. आने वाले हफ्तों में अगर ऐसी शिकायतें बढ़ती हैं, तो Apple के लिए यह एक बड़ी तकनीकी समस्या बन सकती है.&amp;nbsp;
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6 घंटे बाद ही आया क्रैक
iPhone Duo की बिक्री शुरू होने के बाद ही सोशल मीडिया पर इस तरह की समस्या रिपोर्ट की गईं. एक यूजर ने लिखा कि iPhone Duo खरीदने के 6 घंटे बाद ही स्क्रीन में नीचे की तरफ उसे क्रैक महसूस हुआ, यह तब हुआ जब वह अपने दोस्त को फोन दिखाने के लिए निकाल रहा था. ऐसा ही एक पोस्ट एक अन्य यूजर ने भी किया और उसने भी इसी समस्या का जिक्र किया.&amp;nbsp;
कीमत के साथ बढ़ जाती है उम्मीद
iPhone Duo की सबसे बड़ी चुनौती केवल तकनीक नहीं, बल्कि इसकी कीमत भी है. करीब 2,000 डॉलर की शुरुआती कीमत पर खरीदार फोन से ऐसी मजबूती की उम्मीद करेंगे जो लंबे समय तक इस्तेमाल का भरोसा दे. यही वजह है कि शुरुआती स्क्रीन शिकायतें आने से फोन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं कंपनी ऐसे समय में फोल्डेबल बाजार में आई है जब Samsung और दूसरी कंपनी इस सेगमेंट में पहले से मौजूद हैं.
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कीपैड फोन में डिजिटल पेमेंट की एंट्री, Itel 2165C में PhonePe सपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ आज के दौर में मोबाइल से पेमेंट करना आम बात हो गई है. किराने की दुकान पर सामान खरीदने से लेकर रोजमर्रा के दूसरे छोटे-मोटे लेनदेन तक, डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है, हालांकि इसके लिए ज्यादातर लोग स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहते हैं, लेकिन अब कीपैड फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा को आसान बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है.
Itel ने अपने फीचर फोन Itel 2165C में PhonePe सपोर्ट देने का ऐलान किया है. इस इंटीग्रेशन के जरिए यूजर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी डिजिटल पेमेंट की सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे. खास बात यह है कि इससे 2G नेटवर्क पर निर्भर रहने वाले यूजर्स तक भी UPI आधारित पेमेंट की पहुंच बढ़ाने की कोशिश की गई है.&amp;nbsp;
Itel 2165C के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स
Itel 2165C एक फीचर फोन है, जिसमें 2 इंच की डिस्प्ले दी गई है. इसमें 1,200mAh की बैटरी मिलती है. कंपनी ने बैटरी की खपत को मैनेज करने के लिए AI Battery और Super Battery Mode जैसे ऑप्शन भी दिए हैं. कंपनी के मुताबिक, यह फोन एक बार चार्ज करने पर 11.67 घंटे तक का टॉक टाइम और 25 दिनों तक का स्टैंडबाय टाइम दे सकता है, हालांकि बैटरी बैकअप इस्तेमाल और नेटवर्क की स्थिति पर निर्भर करेगा. इसमें 32GB तक एक्सपेंडेबल स्टोरेज की सुविधा दी गई है.&amp;nbsp;
Itel के इस फीचर फोन यूजर्स के लिए UPI की सुविधा
Itel 2165C में PhonePe का सपोर्ट मिलने से उन लोगों तक डिजिटल पेमेंट की सुविधा पहुंचाने की कोशिश की गई है, जो स्मार्टफोन के बजाय कीपैड फोन इस्तेमाल करते हैं. इस इंटीग्रेशन के जरिए यूजर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे. कंपनी का उद्देश्य 2G नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को भी भारत के UPI आधारित डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जोड़ना है. कंपनी का कहना है कि वह रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाली तकनीक को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहती है.&amp;nbsp;
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PhonePe कैसे होगा एक्टिव? कंपनी ने क्या नहीं बताया?&amp;nbsp;
कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि फोन में इस सुविधा को एक्टिवेट कैसे करना होगा. इसके अलावा कौन-कौन से ट्रांजेक्शन किए जा सकेंगे और इस सर्विस के इस्तेमाल के लिए कोई अतिरिक्त शर्त होगी या नहीं, इसकी जानकारी भी फिलहाल नहीं दी गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Smart TV चलाते वक्त हो जाती है हैंग, इस ट्रिक से हो जाएगी तेज</title>
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        <description><![CDATA[ आज के दौर में लगभग हर घर में स्मार्ट टीवी लग चुका है. शाम को ऑफिस से थककर आने के बाद जब हम सोफे पर बैठकर अपनी पसंदीदा Web Series और Movie लगाने के लिए Remote उठाते हैं. तो कई बार TV इतना धीमा चलता है कि सारा मूड खराब हो जाता है. बटन दबाने के कई सेकंड बाद स्क्रीन हिलती है. Apps खुलने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है और कई बार तो वीडियो चलते-चलते TV बीच में ही अटक जाता है.&amp;nbsp;
जब नया टीवी खरीदकर लाते हैं तब तो वह एकदम बढ़िया की तरह चलता है. लेकिन एक-दो साल बाद उसमें यह हैंग होने की बीमारी आम हो जाती है. लोग सोचते हैं कि टीवी पुराना हो गया है. जबकि असल वजह हमारे इस्तेमाल करने के तरीके में छिपी होती है. कुछ आसान सेटिंग्स बदलकर इसे फिर से सुपरफास्ट बनाया जा सकता है. जान लीजिए पूरी खबर.
Cache मेमोरी साफ करें और फालतू Apps हटाएं
जिस तरह हमारे फोन में ऐप्स चलाते-चलाते बहुत सारा डेटा जमा हो जाता है. ठीक वैसा ही हाल&amp;nbsp; टीवी के साथ भी होता है. दरअसल स्मार्ट टीवी में रैम और इंटरनल स्टोरेज फोन के मुकाबले काफी कम होती है, जो आमतौर पर महज 1.5GB से 2GB रैम और 8GB से 16GB स्टोरेज तक ही सीमित रहती है. जब हम रोज Netflix, Youtube और Hotstar जैसे बड़े ऐप्स चलाते हैं,. तो बैकग्राउंड में ढेर सारा Cache डेटा इकट्ठा होता रहता है जो मेमोरी को पूरी तरह चोक कर देता है.&amp;nbsp;
इसे साफ करने के लिए अपने TV की Settings में जाएं वहां Apps वाले सेक्शन को खोलें और एक-एक करके सभी भारी Apps का क्लियर Cache कर दें. इसके अलावा TV में पहले से कई ऐसे Apps इंस्टॉल आते हैं जिन्हें हम साल भर में एक बार भी नहीं खोलते हैं. ऐसे तमाम अनचाहे Apps को तुरंत Uninstall कर दें जिससे TV की स्टोरेज खाली हो सके और प्रोसेसर को सांस लेने की जगह मिले.

बैकग्राउंड प्रोसेस पर लगाएं रोक और एनिमेशन करें कम
अक्सर हम टीवी पर कोई एक ऐप देख रहे होते हैं और रिमोट का Home बटन दबाकर सीधे दूसरे App पर चले जाते हैं. हमें लगता है कि पिछला App बंद हो गया लेकिन असल में वह Background में लगातार चल रहा होता है और टीवी की RAM खा रहा होता है. अगर आपके टीवी में चार-पांच Apps पीछे खुले रहेंगे तो फिर टीवी तो हैंग होगी तय है. इस दिक्कत को जड़ से खत्म करने के लिए आप टीवी के डेवलपर ऑप्शन का सहारा ले सकते हैं.&amp;nbsp;
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इसके लिए Settings के About सेक्शन में जाकर Build Number पर सात बार लगातार क्लिक करें जिससे डेवलपर Option खुल जाएगा. इसके अंदर जाकर बैकग्राउंड प्रोसेस लिमिट को नो बैकग्राउंड प्रोसेस या मैक्सिमम दो प्रोसेस पर सेट कर दें. इसके साथ ही वहीं मौजूद विंडो एनिमेशन स्केल और ट्रांजिशन एनिमेशन स्केल को 1x से घटाकर 0.5x या ऑफ कर दें. यह छोटी सी ट्रिक करते ही आपका रिमोट दबाते ही टीवी गोली की रफ्तार से काम करने लगेगा.

सॉफ्टवेयर अपडेट कोल्ड रीबूट करें
हम लोग TV बंद करने के लिए सिर्फ रिमोट का लाल बटन दबा देते हैं और हमें लगता है कि टीवी बंद हो गया. लेकिन रिमोट से बंद करने पर TV पूरी तरह ऑफ नहीं होता बल्कि स्टैंडबाय मोड यानी नींद में चला जाता है. महीनों तक मेन स्विच बंद न होने की वजह से इसकी मेमोरी कभी रिफ्रेश ही नहीं हो पाती है. इसलिए हफ्ते में कम से कम दो-तीन बार TV को मेन पावर प्लग से बंद करें और पांच मिनट बाद चालू करें जिसे कोल्ड रीबूट कहा जाता है.
इसके अलावा समय-समय पर टीवी की सेटिंग्स में जाकर सिस्टम अपडेट भी चेक करते रहें. क्योंकि कंपनियां नए अपडेट के जरिए पुराने बग्स को ठीक करती हैं. अगर आपका TV चार-पांच साल से ज्यादा पुराना हो चुका है और इन सारी ट्रिक्स के बाद भी प्रोसेसर साथ नहीं दे रहा है. तो नया टीवी खरीदने में हजारों रुपये बर्बाद न करें. बस एक नया फायर TV स्टिक या गूगल टीवी स्टिक लगा लें जिससे आपका पुराना टीवी एकदम नए जैसा दौड़ने लगेगा.
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Microsoft Office के पुराने आइकन से हैं बोर? ऐसे दें नया लुक</title>
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        <description><![CDATA[ Microsoft Office के पुराने आइकन से हैं बोर? ऐसे दें नया लुक ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपके भी एक ईयरबड से कम सुनाई देता है? बिना पैसे खर्च किए ऐसे करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ आज के वक्त में हर कोई कानों में ईयरबड्स लगाकर घूमता नजर आता है. लोग गाने सुनने, फिल्में देखने से लेकर फोन पर बात करने तक के लिए वायरलेस ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं. यह छोटे से ईयरबड्स इस्तेमाल के लिए काफी आरामदायक और आसान होते हैं. लेकिन कई बार लोगों को इनकी वजह से दिक्कत होने लगती है अचानक दो में से एक में ईयरबड में साउंड एकदम धीमी हो जाती है.&amp;nbsp;
और ऐसे में मजा किरकिरा हो जाता है. कई लोग सोचते हैं कि उनका एक ईयरबड खराब हो गया है और वे नया खरीद लेते हैं. लेकिन हर बार ईयरबड ही खराब नहीं होत कई बार फोन के कुछ सेटिंग गड़बड़ाने और गलत ईयर-टिप के चलते तो उसमें धूल जमने से भी यह दिक्कत आने लगती है. जिसे आप घर बैठे बिना एक रुपया खर्च किए चुटकियों में ठीक कर सकते हैं.
पहले फोन चेक करें और स्पीकर की जाली साफ करें
जब भी किसी एक ईयरबड से आवाज कम आने लगे तो सबसे पहले यह पता करें कि दिक्कत आपके बड्स में है भी या नहीं. इसके लिए जिस ईयरबड में कम सुनाई दे रहा है उसे निकालकर दूसरे कान में लगाकर चेक करें. इसके साथ ही अपने ईयरबड्स को किसी दूसरे स्मार्टफोन से कनेक्ट करके गाना बजाएं. अगर दूसरे फोन में दोनों बड्स बराबर आवाज दे रहे हैं.&amp;nbsp;
तो समझ जाएं कि खराबी ईयरबड्स में नहीं बल्कि आपके अपने फोन में है. वहीं अगर दूसरे फोन में भी आवाज धीमी ही रहती है. तो इसकी सबसे आम वजह स्पीकर की जाली पर जमा धूल और कान का मैल होता है. लगातार इस्तेमाल से यह गंदगी आवाज के रास्ते को ब्लॉक कर देती है. इसे साफ करने के लिए किसी सूखे मुलायम कपड़े, हल्के ब्रश या कॉटन बड से जाली को धीरे-धीरे साफ करें. ध्यान रहे कि कभी भी नुकीली चीज न डालें वरना अंदर का स्पीकर हमेशा के लिए फट सकता है.

सही साइज की ईयर-टिप लगाएं&amp;nbsp;
कई बार हमारे ईयरबड्स बिल्कुल ठीक होते हैं. लेकिन उनके आगे लगी रबर की सिलिकॉन टिप हमारे कान में सही से फिट नहीं बैठती है. अगर ईयर-टिप ढीली रहेगी तो कान के अंदर प्रॉपर सील नहीं बन पाएगी, जिससे बाहर का शोर अंदर आएगा और आपको उस तरफ की आवाज काफी कम महसूस होगी. डिब्बे में मिलने वाली अलग-अलग साइज की टिप्स को बदलकर देखें, क्योंकि कई लोगों के दोनों कानों की बनावट में हल्का फर्क होता है और उन्हें दोनों तरफ अलग साइज की टिप लगानी पड़ती है.&amp;nbsp;
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ऑडियो बैलेंस सेटिंग सुधारें
इसके अलावा एक बहुत बड़ी वजह फोन की लेफ्ट-राइट ऑडियो बैलेंस सेटिंग का हिल जाना भी है. अगर यह स्लाइडर गलती से एक तरफ खिसक गया है तो दूसरे बड में आवाज अपने आप दब जाएगी. इसे सुधारने के लिए फोन की सेटिंग्स के एक्सेसिबिलिटी और हियरिंग सेक्शन में जाएं. वहां ऑडियो एडजस्टमेंट या ऑडियो बैलेंस के स्लाइडर को एकदम बीच यानी सेंटर में कर दें और मोनो ऑडियो का टॉगल भी चेक कर लें.

ब्लूटूथ कनेक्शन रीसेट करके दोबारा पेयर करें
अगर आपने जाली भी साफ कर ली, ईयर-टिप भी बदलकर देख ली और फोन का ऑडियो बैलेंस भी एकदम सेंटर में है. फिर भी आवाज धीमी आ रही है, तो ईयरबड्स रीसेट करना पड़ सकता है. कई बार पुराने ब्लूटूथ कनेक्शन में कोई टेक्निकल ग्लिच जाने की वजह से एक साइड का बड फोन के साथ ठीक से सिंक नहीं हो पाता है. इसे ठीक करने के लिए अपने स्मार्टफोन की ब्लूटूथ सेटिंग में जाएं और वहां दिख रहे अपने ईयरबड के नाम के आगे क्लिक करके उसे फॉरगेट डिवाइस कर दें.&amp;nbsp;
इसके बाद दोनों बड्स को वापस चार्जिंग केस में रखकर ढक्कन बंद करें और फोन का ब्लूटूथ ऑफ करके दो मिनट बाद दोबारा ऑन करें. अब केस के बटन से ईयरबड्स को रीसेट करके बिल्कुल नए सिरे से अपने फोन के साथ पेयर करें. अगर इस आखिरी तरीके के बाद भी आवाज नहीं बढ़ती है तो फिर इसे सर्विस सेंटर पर दिखाना बेहतर है.
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Gmail के डेटा से पर्सनल होंगे Ads? समझें Google की नई पॉलिसी</title>
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        <description><![CDATA[ इंटरनेट पर सर्च करते समय या किसी वेबसाइट पर जाते हुए कई बार ऐसे विज्ञापन दिखाई देते हैं, जो हमारी पसंद से काफी मिलते-जुलते होते हैं. इसकी वजह ऑनलाइन एक्टिविटी और विज्ञापनों को पर्सनलाइज करने वाली तकनीक हो सकती है. अब Google की नई प्राइवेसी पॉलिसी ने इस विषय को फिर चर्चा में ला दिया है.
कंपनी ने साफ किया है कि कुछ परिस्थितियों में Gmail, Google Drive और Google Photos से जुड़ी जानकारी का यूज पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने के लिए किया जा सकता है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर यूजर का पर्सनल डेटा अपने आप विज्ञापन देने वालों तक पहुंचने लगेगा. यह काफी हद तक यूजर की परमिशन और संबंधित सेवाओं की सेटिंग्स पर निर्भर करता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि नई पॉलिसी क्या कहती है.&amp;nbsp;
Google की नई प्राइवेसी पॉलिसी में क्या है?
Android Authority की रिपोर्ट के मुताबिक, Google ने 16 अक्टूबर को अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव किया. पहले कंपनी की पॉलिसी में कहा गया था कि Gmail, Google Drive और Google Photos के कंटेंट का यूज पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने के लिए नहीं किया जाता है. अब इसमें एक शर्त जोड़ी गई है, जिसके तहत इन सेवाओं की जानकारी दूसरी Google सेवाओं के जरिए विज्ञापनों को पर्सनलाइज करने में यूज हो सकती है. यह स्थिति तब बन सकती है, जब यूजर अपनी जानकारी को ऐसी दूसरी सेवाओं के साथ यूज करने की परमिशन देता है, हालांकि डेटा का यूज किस तरह होगा, यह संबंधित सेवा की पॉलिसी और यूजर की सेटिंग्स पर निर्भर करेगा.&amp;nbsp;
Gemini और Google Search से क्या है कनेक्शन?
अगर यूजर Gmail, Google Photos और Google Drive को Google की दूसरी सेवाओं, जैसे Gemini या Google Search के AI फीचर से कनेक्ट करता है, तो ये सेवाएं उसकी जानकारी का यूज करके ज्यादा यूजफुल जवाब और सुझाव दे सकती हैं. जैसे यूजर की परमिशन के आधार पर AI को उसकी कुछ जानकारी का एक्सेस मिल सकता है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर यूजर का डेटा विज्ञापन दिखाने के लिए यूज होगा. यह इस बात पर निर्भर करता है कि यूजर ने कौन-सी सेटिंग्स ऑन की हैं और किन सेवाओं को जानकारी यूज करने की परमिशन दी है.&amp;nbsp;
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क्या विज्ञापन देने वालों को आपकी पर्सनल जानकारी मिलेगी?
Google के मुताबिक, विज्ञापन सीधे यूजर के Gmail इनबॉक्स या Google Photos में मौजूद कंटेंट के आधार पर नहीं दिखाए जाएंगे. कंपनी विज्ञापन देने वालों को यूजर्स के ईमेल और फोटो देखने की सुविधा नहीं देती है. साथ ही यूजर का नाम और ईमेल एड्रेस जैसी पहचान से जुड़ी जानकारी भी शेयर नहीं की जाती है.
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        <pubDate>Sun, 25 Oct 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>मोबाइल ठीक करवाते समय कहीं आप भी तो नहीं खा रहे धोखा? इन बातों का रखें ध्यान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मोबाइल-ठीक-करवाते-समय-कहीं-आप-भी-तो-नहीं-खा-रहे-धोखा-इन-बातों-का-रखें-ध्यान</link>
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        <description><![CDATA[ लोग अपने फोन को काफी सिक्योर तरीके से रखते हैं. उस पर बढ़िया सा फोन कवर लगाकर रखते हैं. लेकिन कई बार लोगों की गलती से अक्सर फोन को नुकसान पहुंच जाता है.&amp;nbsp;स्क्रीन टूट जाती है तो फोन कई बार फोन में कुछ और पार्ट खराब हो जाता है. तो लोग सीधे दुकान पर फोन पर लेकर पहुंच जाते हैं और ठीक होने के बाद दुकानदार हमें बताता है कब फोन लेने आना है.&amp;nbsp;
लेकिन मोबाइल ठीक करवाने की जल्दी में हम जरूरी सवाल पूछना भूल जाते हैं. कौन सा पार्ट लगेगा, उसकी कीमत क्या है और अगर दोबारा पार्ट खराब होता है तो फिर जिम्मेदारी किसकी होगी? कुछ दुकानों पर ओरिजिनल बताकर दूसरा पार्ट लगाने या काम पूरा होने के बाद ज्यादा रकम मांगने जैसी परेशानी सामने आ सकती है. जान लें कैसे लोकल दुकान पर फ्राॅड से बच सकते हैं आप.
Replace पार्ट Original है कैसे करें पता?
दुकानदार अगर कहे कि ओरिजिनल स्क्रीन लगेगी. तो पूछें कि यह कंपनी का नया पार्ट है पहले इस्तेमाल हो चुका पार्ट है या किसी दूसरी कंपनी का ऑप्शन. सिर्फ कीमत ज्यादा है इस वजह से मान लें कि पार्ट असली है यह सही नहीं है.&amp;nbsp; इसलिए पार्ट की जानकारी बिल पर लिखवाने को कहें.&amp;nbsp;
Display बदलने के बाद स्क्रीन के कोनों तक टच करके देखें, कीबोर्ड चलाएं और Brightness घटाकर बढ़ाकर चेक करें.&amp;nbsp;Apple के मुताबिक लोकर iPhone डिस्प्ले में Touch, Colour और Brightness से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं. सपोर्टेड iPhone में Settings, General और About के भीतर Parts and Service History भी देखी जा सकती है.&amp;nbsp;

पहले ही कीमत तय करें तब काम शुरू करवाएं
Phone रिपेयर शुरू होने से पहले Estimate लें. इसमें पार्ट की कीमत, लेबर चार्ज और दूसरे चार्ज अलग लिखे हों. यह भी पता कर लें कि फोन Phone के बाद कोई दूसरी खराबी मिले तो आपकी परमिशन के बिना नया काम शुरू नहीं होगा. बजट ज्यादा लग रहा हो तो दूसरी जगह से भी Estimate ले सकते हैं.&amp;nbsp;
Phone दुकान पर जमा करते समय उसकी करंट कंडीशन की तस्वीरें लें और जमा करने की रसीद मांगें. रिपेयर पर कितनी वारंटी है, किन दिक्कतों में मिलेगी और दोबारा मेहनताना लगेगा या नहीं यह लिखवा लें.
&amp;nbsp;फोन लेते समय कॉल करके आवाज सुनें, Camera चेक करें, Charging लगाएं और बदले गए पार्ट को चेक करें करें. बिल में दुकान की जानकारी, तारीख और किए गए काम का डिटेल्स देखें. कोई परेशानी दिखे तो तुरंत दुकानदार से पूछ लेना जरूरी है.

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इन बातों का रखें ध्यान
पार्ट चेंज हो रहा है इस पर ही पूरा ध्यान न दें अपने Phone के Data को भी सिक्योर करने का जुगाड़ कर लें. Phone की&amp;nbsp;जरूरी तस्वीरों, Contacts और Documents का Back up बना लें. रिपेयर के दौरान Reset करना पड़ सकता है. इसलिए Data पहले सेफ कर लेना जरूरी है. सपोर्टेड Samsung Galaxy फोन में Maintenance mode इस्तेमाल कर सकते हैं. यह रिपेयर के दौरान आपकी तस्वीरों, मैसेज और अकाउंट तक पहुंच रोकता है.&amp;nbsp;
Phone दुकान पर देने से पहले देखें कि कंपनी का आधिकारिक सर्विस सेंटर चुन रहे हैं तो उसका पता ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट से चेक करें. Phone Warranty में हो तब भी हर Repair फ्री नहीं होती. टूटफूट जैसी दिक्कतों पर कंपनी की शर्तें लागू होती हैं. खर्च और कवरेज पहले ही चेक करें लें. नहीं तो फिर बाद में परेशानी होगी. इन बातों का ध्यान रखेंगे तो फ्राॅड से बचे रहेंगे.
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोबाइल, ठीक, करवाते, समय, कहीं, आप, भी, तो, नहीं, खा, रहे, धोखा, इन, बातों, का, रखें, ध्यान</media:keywords>
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        <title>Meta पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना, यूजर्स की प्राइवेसी से किया समझौता</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया की सबसे बड़ी कंपनी Meta एक बार फिर से अपने यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर बड़ी मुसीबत में फंस गई है. Facebook और Instagram चलाने वाली इस पेरेंट कंपनी को अब अपनी गलती की वजह से एक बहुत ही तगड़ा झटका लगा है. खबरों की मुताबिक यूजर्स के Personal Data के साथ खिलवाड़ करने और बिना इजाजत जानकारी इस्तेमाल करने के मामले में Meta ने सेटलमेंट करने का फैसला किया है.&amp;nbsp;
इस समझौते के तहत कंपनी को भारी रकम चुकानी पड़ रही है. जिसे टेक की दुनिया के सबसे बड़े प्राइवेसी फाइन में से एक माना जा रहा है. Phone चलाने वाले करोड़ों लोगों को अंदाजा भी नहीं होता कि Background में हमारे Data के साथ क्या खेल चल रहा है. इसी मनमानी पर लगाम लगाने के लिए रेगुलेटर्स ने यह सख्त कदम उठाया है.&amp;nbsp; जिससे Mark Zuckerberg की कंपनी को तगड़ा नुकसान होने जा रहा है.
क्या है Meta का Data Leak और Privacy विवाद?
आपको बता दें यह पूरा मामला आज का नहीं है बल्कि इसके तार पिछले कई सालों से जुड़े हुए हैं. Meta पर बार-बार यह आरोप लगते रहे हैं कि कंपनी अपने करोड़ों यूजर्स के Personal Data को थर्ड पार्टी Apps और Advertizers के साथ बिना किसी ठोस Security के शेयर करती है. लोग जब Facebook या Instagram पर अपनी Location, Likes, Photo या Personal Chat करते हैं. तो कंपनी के एल्गोरिदम उस Data को ट्रैक करके पैसे कमाने के लिए इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
इसके अलावा फेशियल रिकग्निशन यानी चेहरे की पहचान करने वाले डेटा को भी बिना यूजर्स की परमिशन के स्टोर करने का बड़ा मुद्दा सामने आया था. जब इस बात का खुलासा हुआ तो दुनिया भर के यूजर्स और प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और कोर्ट में केस दर्ज कर दिया. सालों तक चली इस लंबी कानूनी लड़ाई में Meta ने खुद को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन सबूत इतने पक्के थे कि कंपनी के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा.

कोर्ट के बाहर क्यों किया इतना बड़ा समझौता?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर Meta जैसी दिग्गज कंपनी ने कोर्ट में केस लड़ने के बजाय सेटलमेंट का रास्ता क्यों चुना. दरअसल अगर यह ट्रायल और लंबा खिंचता तो कंपनी के कई और अंदरूनी राज पब्लिक के सामने आ सकते थे. जिससे Meta की बची-खुची इमेज भी खराब हो जाती. इसके अलावा कंपनी के टॉप अधिकारियों और खुद Mark Zuckerburg को कोर्ट में सवालों के जवाब देने पड़ते.&amp;nbsp;
शेयर मार्केट में कंपनी के स्टॉक्स पर भी इस केस का बुरा असर पड़ रहा था और इन्वेस्टर्स में एक डर का माहौल बन गया था. इसलिए कंपनी के वकीलों और बोर्ड मेंबर्स ने यही समझदारी समझी कि जुर्माने की भारी-भरकम रकम देकर इस चैप्टर को यहीं हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए. हालांकि Meta ने इस सेटलमेंट के दौरान सीधे तौर पर अपनी गलती कबूल नहीं की है. बल्कि इसे सिर्फ अपने यूजर्स और बिजनेस के हित में लिया गया एक प्रैक्टिकल फैसला बताया है.

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आम यूजर्स पर क्या होगा असर&amp;nbsp;
इस ऐतिहासिक समझौते और भारी जुर्माने के बाद अब आम Internet यूजर्स के मन में यही सवाल है कि क्या अब हमारा डेटा पूरी तरह से सेफ हो जाएगा. इस डील के तहत सिर्फ पैसे देने की बात नहीं है बल्कि Meta को अपने Privacy Tools और Data Handling के तरीकों में बड़े बदलाव करने का भी सख्त आदेश मिला है. अब कंपनी को किसी भी यूजर का Data ट्रैक करने से पहले आसान भाषा में परमिशन लेनी होगी न कि लंबी-चौड़ी टर्म्स एंड कंडीशंस में उलझाकर.
इसके साथ ही जिन यूजर्स का Data इस दौरान गलत तरीके से इस्तेमाल हुआ है. उन्हें इस सेटलमेंट फंड में से मुआवजा मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है. यह फैसला सिर्फ Meta के लिए ही नहीं बल्कि Google, Apple और X जैसी तमाम बड़ी टेक कंपनियों के लिए एक कड़ा सबक है कि अब यूजर्स की Privacy को हल्के में लेना उन्हें बहुत महंगा पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>53 घंटे तक म्यूजिक और Hi&amp;Res Audio, Oppo Enco X4 भारत में लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ गाने सुनते समय आसपास का शोर परेशान करता है या बार-बार ईयरबड्स चार्ज करने की जरूरत पड़ती है, तो नए वायरलेस ईयरबड्स खरीदते समय साउंड क्वालिटी और बैटरी बैकअप पर ध्यान देना जरूरी है. इसी सेगमेंट में Oppo ने भारत में अपने नए Enco X4 TWS ईयरबड्स लॉन्च किए हैं. इनमें Hi-Res Audio Wireless सपोर्ट, एक्टिव नॉइज कैंसलेशन (ANC) और 53 घंटे तक के कुल प्लेबैक टाइम का दावा किया गया है. कंपनी ने इनमें 11mm डायनेमिक ड्राइवर्स और 6mm ट्वीटर दिए हैं. साथ ही कॉल के दौरान आवाज को साफ रखने के लिए AI आधारित नॉइज रिडक्शन फीचर भी मिलता है. तो आइए जानते हैं कि इन ईयरबड्स की कीमत, फीचर्स और बिक्री की तारीख क्या है.&amp;nbsp;
Oppo Enco X4 TWS के खास फीचर्स क्या हैं?
Oppo Enco X4 TWS ईयरबड्स में 11mm डायनेमिक वूफर और 6mm ट्वीटर मिलते हैं. ये Hi-Res Audio Wireless और स्पेशियल ऑडियो सपोर्ट करते हैं. इनमें AAC, SBC, LHDC और LC3 जैसे ऑडियो कोडेक्स का सपोर्ट भी है. शोर कम करने के लिए ANC के डीप, मीडियम और लाइट मोड दिए गए हैं. इसके अलावा ट्रांसपेरेंसी और अडैप्टिव मोड भी मिलते हैं. कंपनी का दावा है कि ANC रोजमर्रा के शोर को 99.8 प्रतिशत तक कम कर सकता है.
53 घंटे तक की बैटरी और चार्जिंग
हर ईयरबड में 65mAh और चार्जिंग केस में 576mAh की बैटरी है. AAC कोडेक और ANC बंद रखने पर ईयरबड्स 13 घंटे तक और केस के साथ कुल 53 घंटे तक चलने का दावा है. LHDC इस्तेमाल करने पर यह समय 10 घंटे और 42 घंटे तक है. केस USB Type-C और वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करता है. केबल से ईयरबड्स को पूरी तरह चार्ज होने में करीब 55 मिनट और केस को 65 मिनट लगते हैं. &amp;nbsp;इन्हें IP55 रेटिंग मिली है.
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कॉलिंग और कनेक्टिविटी फीचर्स
Oppo Enco X4 में कॉल के लिए चार माइक्रोफोन दिए गए हैं, जिनमें तीन सिलिकॉन माइक्रोफोन और एक VPU माइक्रोफोन शामिल है. AI आधारित कॉल नॉइज रिडक्शन भी मिलता है. कनेक्टिविटी के लिए Bluetooth 6.1 दिया गया है, जिसकी रेंज 10 मीटर तक है. इन्हें एक साथ दो डिवाइस से जोड़ा जा सकता है और ये Android साथ ही iOS दोनों के साथ काम करते हैं.
Oppo Enco X4 की कीमत और बिक्री तारीख क्या है?
Oppo Enco X4 की भारत में कीमत 19,999 रुपये रखी गई है. इन्हें Aurora Violet और Glacier White कलर में पेश किया गया है. फिलहाल कंपनी की भारतीय वेबसाइट पर इनकी प्री-बुकिंग 18,999 रुपये में की जा सकती है. इनकी बिक्री 29 अक्टूबर से शुरू होगी. पहले सेल ऑफर के तहत ग्राहक इन्हें 1,667 रुपये प्रति महीने की EMI पर भी खरीद सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Intel Core Ultra Series 3 वाला Acer लैपटॉप भारत आया, जानें फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन मीटिंग करनी हो या कंपनी के कई लैपटॉप को एक साथ मैनेज करना हो, बिजनेस यूजर्स के लिए डिवाइस की परफॉर्मेंस के साथ सिक्योरिटी और कनेक्टिविटी भी जरूरी होती है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Acer ने भारत में अपनी TravelLite सीरीज का नया लैपटॉप TL44-53M-G2 पेश किया है.&amp;nbsp;इसमें Intel Core Ultra Series 3 प्रोसेसर दिया गया है. साथ ही यह लैपटॉप 128GB तक DDR5 रैम सपोर्ट करता है और इसमें दो SSD स्लॉट मिलते हैं. कंपनी ने इसमें Intel vPro टेक्नोलॉजी भी दी है, जिसकी मदद से IT टीमें डिवाइस को दूर से मैनेज कर सकती हैं. तो आइए जानते हैं कि इस लैपटॉप के डिस्प्ले, परफॉर्मेंस और दूसरे फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;Acer TravelLite TL44-53M-G2 के फीचर्स&amp;nbsp;यह लैपटॉप Intel Core Ultra Series 3 प्रोसेसर पर काम करता है. इसमें डुअल-चैनल DDR5 रैम को 128GB तक बढ़ाने का सपोर्ट है. स्टोरेज के लिए दो M.2 PCIe NVMe SSD स्लॉट दिए गए हैं. इनमें PCIe 5.0 x4 का सपोर्ट भी शामिल है.&amp;nbsp;Thunderbolt कनेक्टिविटी और हल्का डिजाइन
कनेक्टिविटी के लिए इसमें दो USB Type-C पोर्ट मिलते हैं, जो Thunderbolt, DisplayPort और USB चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं. इसके अलावा Intel Wi-Fi 7 और Bluetooth 5.4 की सुविधा है, हालांकि वायरलेस फीचर्स कॉन्फिगरेशन के हिसाब से अलग हो सकते हैं. लैपटॉप में एल्युमिनियम बॉडी, पतले डिस्प्ले बेजल और 180 डिग्री तक खुलने वाला हिंज दिया गया है. इसे MIL-STD 810H ड्यूरेबिलिटी सर्टिफिकेशन भी मिला है.&amp;nbsp;128GB तक रैम और दो SSD स्लॉट
यह लैपटॉप Intel Core Ultra Series 3 प्रोसेसर पर काम करता है. इसमें डुअल-चैनल DDR5 रैम को 128GB तक बढ़ाने का सपोर्ट है. स्टोरेज के लिए दो M.2 PCIe NVMe SSD स्लॉट दिए गए हैं. इनमें PCIe 5.0 x4 का सपोर्ट भी शामिल है.&amp;nbsp;Intel vPro से लैस लैपटॉप
Acer TravelLite TL44-53M-G2 में Intel vPro टेक्नोलॉजी मिलती है. इससे IT टीमें लैपटॉप को दूर से मैनेज करने, तकनीकी दिक्कतें सुलझाने और मेंटेनेंस जैसे काम कर सकती हैं. इसके हार्डवेयर-आधारित सिक्योरिटी फीचर्स बिजनेस डिवाइस और डेटा की सुरक्षा में भी मदद करते हैं.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - फोल्डेबल iPhone का क्रेज, पहली सेल से पहले Apple Store के बाहर जुटे लोग&amp;nbsp;Acer TravelLite TL44-53M-G2 के दूसरे खास फीचर्स
Acer के इस लैपटॉप में 14 इंच की Full HD IPS स्क्रीन दी गई है. इसका आस्पेक्ट रेशियो 16:10 है और पीक ब्राइटनेस 300 निट्स तक है. वीडियो कॉल और मीटिंग के लिए इसमें 5 मेगापिक्सल का IR वेबकैम मिलता है, जो Windows Hello को सपोर्ट करता है. इसके अलावा लैपटॉप में स्टीरियो स्पीकर, DTS Audio और नॉइज कैंसलेशन वाले माइक्रोफोन दिए गए हैं.&amp;nbsp;Acer TravelLite TL44-53M-G2 की कीमत&amp;nbsp;&amp;nbsp;Acer ने फिलहाल TravelLite TL44-53M-G2 की भारतीय कीमत और यहां उपलब्ध होने वाले कॉन्फिगरेशन की जानकारी नहीं दी है. इसे भारत में कंपनी के कमर्शियल और एंटरप्राइज चैनलों के जरिए बेचा जाएगा.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; वाह! अमीरी हो तो ऐसी, Blinkit पर 5 मिनट में खत्म हुआ iPhone Duo का स्टॉक ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Duo की 4883mAh बैटरी, फोल्डेबल फोन में कितना मिलेगा बैकअप?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo की बिक्री भारत समेत ग्लोबल मार्केट में शुरू हो गई है. ऐसे में इस फोन को खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि इसमें कितनी क्षमता की बैटरी दी गई है और एक बार चार्ज करने पर यह कितनी देर तक साथ निभा सकती है.
भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है. सितंबर में पेश किए गए इस फोन में 7.6 इंच की अंदरूनी फोल्डेबल स्क्रीन और 5.4 इंच की बाहरी डिस्प्ले मिलती है. फोन की बैटरी क्षमता से जुड़ी जानकारी यूरोप के एनर्जी लेबलिंग डेटाबेस में भी सामने आई है. वहीं, Apple ने अलग-अलग परिस्थितियों में वीडियो प्लेबैक को लेकर अपने अनुमान भी बताए हैं. तो आइए जानते हैं कि &amp;nbsp;फोल्डेबल फोन में कितना बैकअप मिलेगा.&amp;nbsp;
iPhone Duo में 4883mAh की बैटरी
iPhone Duo में कुल 4883mAh की बैटरी दी गई है. इस फोन में बैटरी को दो हिस्सों में बांटा गया है. इनमें से एक सेल की क्षमता 2962mAh और दूसरे की 1921mAh है. फोल्डेबल फोन में दो डिस्प्ले और उन्हें जोड़ने वाले हिंज के लिए भी जगह रखनी पड़ती है. ऐसे डिजाइन में बैटरी को दो हिस्सों में रखना फोन की बनावट से जुड़ा है. इस डिवाइस की बैटरी एंड्योरेंस रेटिंग 51 घंटे 30 मिनट बताई गई है.
फोल्डेबल फोन में कितना बैकअप मिलेगा?
Apple के मुताबिक, iPhone Duo सामान्य इस्तेमाल में एक बार चार्ज करने पर 24 घंटे तक चल सकता है. इस फोन की बाहरी स्क्रीन पर वीडियो देखने पर 44 घंटे तक और अंदर की बड़ी फोल्डेबल स्क्रीन पर 31 घंटे तक का प्लेबैक टाइम मिलता है. वहीं इंटरनेट के जरिए वीडियो स्ट्रीम करने पर बाहरी डिस्प्ले के साथ 37 घंटे और अंदरूनी डिस्प्ले के साथ 26 घंटे तक बैटरी चलने का दावा किया गया है.
यह भी पढ़ें -एक साथ कितने iPhone खरीद सकते हैं? Apple ने सभी मॉडल पर लगाई लिमिट
iPhone Duo कितनी जल्दी होगा चार्ज?
फोन में दो बिल्ट-इन रिचार्जेबल लिथियम-आयन बैटरियां दी गई हैं. चार्जिंग की बात करें तो 60W या उससे ज्यादा क्षमता वाले अडैप्टर और USB-C केबल से फोन को करीब 20 मिनट में 50 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है. वहीं 35W या उससे ज्यादा के अडैप्टर के साथ MagSafe चार्जर इस्तेमाल करने पर लगभग 30 मिनट में बैटरी 50 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है.&amp;nbsp;
भारत में इतनी है iPhone Duo की कीमत
Apple iPhone Duo के 256GB स्टोरेज वाले बेस मॉडल की कीमत 2,99,900 रुपये है. इसके 512GB वेरिएंट के लिए 3,24,900 रुपये, 1TB मॉडल के लिए 3,74,900 रुपये और 2TB स्टोरेज वाले टॉप वेरिएंट के लिए 4,49,900 रुपये देने होंगे. फोन की बिक्री Apple के ऑनलाइन स्टोर और Croma, Reliance Digital साथ ही Vijay Sales जैसे रिटेल स्टोर पर शुरू हो गई है.
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        <pubDate>Sat, 24 Oct 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>एक छोटी सी वजह से खतरे में दुनिया भर की हजारों वेबसाइट्स, जानिए आखिर क्या है यह PHP?</title>
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        <description><![CDATA[ Internet की दुनिया में इस वक्त हलचल मची हुई है. गुरुवार यानी22 अक्टूबर को अचानक दुनिया भर की कई बड़ी वेबसाइट्स और ऑनलाइन सर्विसेज प्रभावित हो गई हैं. हैरानी की बात यह है कि किसी हैकर ने हमला करके इन्हें बंद नहीं किया. बल्कि वेबसाइट चलाने वालों ने खुद डर के मारे अपने सिस्टम Offline कर दिए. इसकी वजह बना है PHP जो कि एक बेहद पॉपुलर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जिसमें करीब दस साल से एक बहुत बड़ी खामी छुपी हुई थी.&amp;nbsp;
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से जब इस गड़बड़ी का पता चला तो साइबर दुनिया में सकते में आ गई. सरकारी पोर्टल्स से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर्स तक, हजारों वेबसाइट्स पर हैकिंग का सीधा खतरा मंडराने लगा है. साइबर एजेंसियों और सरकारों ने तुरंत अलर्ट जारी कर दिया कि जल्द से जल्द अपने सिस्टम अपडेट कर लें. आखिर यह PHP क्या चीज है और इसकी एक चूक ने पूरी दुनिया को परेशानी में क्यों डाल दिया. चलिए आपको बताते हैं.&amp;nbsp;
क्या है यह PHP?
हम रोजाना Internet पर दर्जनों वेबसाइट्स खोलते हैं. कभी कुछ सर्च करते हैं, Login करते हैं तो कभी Online शॉपिंग करते हैं. आपके एक क्लिक पर स्क्रीन के पीछे यानी Server पर जो तकनीक इन सारे कामों को पूरा करती है उसी में सबसे बड़ा नाम PHP का है. 1990 के दशक में शुरू हुई यह एक फ्री और ओपन सोर्स प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है. जिसे सीखना और इस्तेमाल करना काफी आसान माना जाता है.&amp;nbsp;
शुरुआत में इसे पर्सनल होम पेज कहा जाता था. लेकिन अब आधिकारिक तौर पर इसे हाइपरटेक्स्ट प्रीप्रोसेसर के नाम से जाना जाता है. यह तकनीक कितनी बड़ी है इसका अंदाजा आप साइबर सिक्योरिटी कंपनी विज रिसर्च की रिपोर्ट से लगा सकते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक आज दुनिया भर की करीब 70 फीसदी वेबसाइट्स किसी न किसी तरीके से PHP के भरोसे ही चल रही हैं. यानी जिस चीज के सहारे इंटरनेट की दो-तिहाई से ज्यादा दुनिया टिकी हो अगर उसी में कोई दरार आ जाए तो फिर हंडकंप तो मचेगा.&amp;nbsp;

दस साल से छुपी थी गड़बड़ी
रिसर्चर्स को PHP के कोड में Remote Code Execution से जुड़ी दो बेहद खतरनाक खामियां मिली हैं. जो पिछले दस सालों से वहीं दबी हुई थीं. इसे ऐसे समझिए कि आपके घर के दरवाजे में कोई ऐसी कमी रह जाए जिससे कोई भी अनजान शख्स बिना चाबी के अंदर घुसकर अपनी मनमर्जी से काम करने लगे. इस खामी के जरिए हैकर्स दूर बैठकर ही किसी भी सर्वर पर अपना कोड चला सकते थे, डेटा चुरा सकते थे और पूरी वेबसाइट हाईजैक कर सकते थे.
21 अक्टूबर को PHP फाउंडेशन ने इसे ठीक करने के लिए अपडेट तो जारी कर दिया लेकिन बड़ी वेबसाइट्स को अपडेट करना कोई आसान काम तो है नहीं. डेवलपर्स को पहले पूरा सिस्टम और वर्जन चेक करना पड़ता है जिससे वेबसाइट क्रैश न हो जाए. इसी जांच-पड़ताल के लिए फिनलैंड,नीदरलैंड और स्कॉटलैंड समेत दुनिया के कई देशों की पब्लिक सर्विसेज और की साइबर एजेंसी ने एहतियातन अपनी सर्विसेज को कुछ वक्त के लिए ऑफलाइन कर दिया.

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AI ने कैसे पकड़ी यह पुरानी चूक?
पिछले दस साल से बची रही इस गलती को पकड़ने में AI ने कमाल कर दिखाया है. साइबर सिक्योरिटी Wiz और OpenAI की फंडिंग वाली कंपनी Calif ने AI मॉडल्स के जरिए PHP के कोड की गहराई से जांच की और यह लूपहोल ढूंढ निकाला. हालांकि जेम्स कुक यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट Steve Kerrison ने चेतावनी दी है कि खामी पब्लिक होने के बाद अब साइबर अपराधी भी AI की मदद से तेजी से हमले कर सकते हैं.&amp;nbsp;
ऐसे में एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सभी वेबसाइट मालिक तुरंत चेक करें कि वे PHP का कौन सा वर्जन चला रहे हैं और बिना देरी किए नया सिक्योरिटी पैच इंस्टॉल करें. इसके साथ ही वेबसाइट से जुड़े थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर चेक करें और सर्वर लॉग्स पर कड़ी नजर रखें. अगर सिस्टम में जरा भी छेड़छाड़ दिखे तो तुरंत सारे पासवर्ड बदल दें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>एक गलती पड़ी भारी, ग्लोबल SSL/TLS बिजनेस से बाहर होगी eMudhra, जानें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ किसी के ऊपर भरोसा बनाने में सालों लग जाते हैं लेकिन एक छोटी सी चूक उस भरोसे को पल भर में हिला सकती है. बेंगलुरु की मशहूर टेक कंपनी eMudhra के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. सिक्योरिटी से जुड़ी एक बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद कंपनी ने अपने ग्लोबल वेबसाइट सर्टिफिकेट यानी SSL/TLS बिजनेस से हमेशा के लिए बाहर निकलने का बड़ा फैसला कर लिया है.&amp;nbsp;
दरअसल कंपनी के 8 इंटरमीडिएट सिक्योरिटी सर्टिफिकेट्स की प्राइवेट की बेहद कमजोर पाई गईं. जिसके बाद वेबसाइट्स की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में सवाल उठने लगे. मामला इतना गंभीर था कि Google, Apple और Mozila जैसी दिग्गज कंपनियों को तुरंत एक्शन लेते हुए इन सर्टिफिकेट्स को ब्लॉक करना पड़ा. 22 अक्टूबर को कंपनी के बोर्ड ने मीटिंग में बिजनेस बंद करने पर मुहर लगा दी. कंपनी को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा. चलिए आपको बताते हैं पूरी खबर.
इस वजह से बंद करना पड़ा कारोबार
इस पूरे बवाल की शुरुआत 17 अक्टूबर को हुई जब वेन नाम के एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने eMudhra के 8 इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट्स में एक बड़ी कमजोरी पकड़ ली. यह सर्टिफिकेट्स पिछले साल 30 अप्रैल 2025 को तैयार किए गए थे. कंपनी का कहना है कि उस वक्त सिस्टम ने मजबूत प्राइवेट की के साथ दो दूसरे सेट भी बनाए थे. लेकिन गलती से एक कमजोर सेट भी बन गया और वह ब्राउजर की ट्रस्ट लिस्ट में शामिल हो गया.&amp;nbsp;
Google के मुताबिक इन सर्टिफिकेट्स की प्राइवेट की बनाते वक्त जरूरी रैंडमनेस का ध्यान नहीं रखा गया जिससे किसी भी Hacker के लिए इन्हें क्रैक करना और रिकवर करना बेहद आसान हो गया था. सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि करीब 18 महीने तक यह खामी सिस्टम में पड़ी रही और इस दौरान दो बार इंडिपेंडेंट ऑडिट होने के बावजूद किसी की नजर इस पर नहीं पड़ी. अब कंपनी खुद जांच कर रही है कि ऑडिट में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई.

असली वेबसाइट की नकल का था खतरा
SSL/TLS सर्टिफिकेट किसी भी वेबसाइट के लिए डिजिटल पहचान पत्र की तरह काम करते हैं. इन्हीं के जरिए आपका ब्राउजर यह पहचानता है कि आप जिस वेबसाइट पर हैं वह असली है और आपके डेटा को एन्क्रिप्ट करके चोरी होने से बचाता है. अगर ऐसे सर्टिफिकेट की प्राइवेट की गलत हाथों में पड़ जाए तो Cyber अपराधी आसानी से फर्जी HTTPS सर्टिफिकेट बनाकर किसी भी असली वेबसाइट की हूबहू नकल तैयार कर सकते हैं.&amp;nbsp;
बड़ी टेक कंपनियों ने तुरंत किया Block
इसी खतरे को भांपते हुए Google, Mozila और Apple ने बिना देरी किए इन सर्टिफिकेट्स को अपने ब्राउजर में ब्लॉक कर दिया. उधर eMudhra के चेयरमैन वी श्रीनिवासन ने बताया कि गड़बड़ी का पता चलते ही कंपनी ने 14 घंटे के अंदर सभी 8 प्रभावित सर्टिफिकेट्स कैंसिल कर दिए थे. चूंकि इस घटना के बाद ग्लोबल लेवल पर जांच और सख्ती काफी बढ़ गई थी, और इस बिजनेस से कंपनी की कुल ग्लोबल कमाई का सिर्फ एक फीसदी हिस्सा ही आता था. इसलिए बोर्ड ने इससे बाहर निकलना ही बेहतर समझा.

यह भी पढ़ें: बिना इस्तेमाल खत्म हो रही फोन की बैटरी, चेक करें ये चीजें
पुराने ग्राहकों को मुफ्त मिलेंगे नए सर्टिफिकेट
कंपनी भले ही अपने emSign ब्रांड के तहत चलने वाले इस ग्लोबल वेबसाइट सर्टिफिकेट बिजनेस को बंद कर रही है. लेकिन अपने मौजूदा ग्राहकों को बीच मझधार में नहीं छोड़ेगी. eMudhra ने साफ किया है कि वह अपने पार्टनर्स के जरिए सभी प्रभावित ग्राहकों को बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बिल्कुल मुफ्त में नए सर्टिफिकेट्स दिलवाएगी. इसके अलावा जब तक पहले से जारी किए गए सर्टिफिकेट्स की वैलिडिटी खत्म नहीं हो जाती तब तक कंपनी उनका स्टेटस चेक करने और उन्हें मैनेज करने की सुविधा देती रहेगी.&amp;nbsp;
भारतीय कारोबार पर नहीं पड़ेगा असर
वहीं भारतीय यूजर्स और कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि इस फैसले का असर कंपनी के भारतीय कामकाज पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा. भारत के IT Act के तहत लाइसेंस रखने वाली eMudhra अब तक 6 करोड़ से ज्यादा डिजिटल सर्टिफिकेट जारी कर चुकी है. कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि भारत में उसकी डिजिटल सिग्नेचर, ई-साइन और बाकी सभी एंटरप्राइज सेवाएं पहले की तरह बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वाह! अमीरी हो तो ऐसी, Blinkit पर 5 मिनट में खत्म हुआ iPhone Duo का स्टॉक</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo की बिक्री शुरू होते ही इसे खरीदने के लिए ग्राहकों में जबरदस्त दिलचस्पी देखने को मिली. फोन 23 अक्टूबर को क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit पर बिक्री के लिए आया और महज पांच मिनट में प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सभी यूनिट बिक गईं. Blinkit के CEO Albinder Dhindsa ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी.
फिलहाल यह सुविधा सिर्फ दिल्ली-NCR में उपलब्ध कराई गई थी. कंपनी अब आने वाले कुछ हफ्तों में फोन का और स्टॉक लाने की तैयारी कर रही है, हालांकि शुरुआती बिक्री के लिए कितने फोन उपलब्ध कराए गए थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.
Blinkit पर 5 मिनट में बिक गया iPhone Duo
Blinkit के CEO Albinder Dhindsa के मुताबिक, 23 अक्टूबर की सुबह 8:15 बजे iPhone Duo को दिल्ली-NCR में Blinkit पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया था. लॉन्च के पांच मिनट के भीतर ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद सभी यूनिट बिक गईं. उन्होंने बताया कि कंपनी आने वाले कुछ हफ्तों में फोन का नया स्टॉक लाने की कोशिश कर रही है. अभी दूसरे शहरों में इसकी बिक्री शुरू होने की तारीख का ऐलान नहीं किया गया है.
iPhone Duo की कीमत कितनी है?
Apple iPhone Duo के 256GB स्टोरेज वाले बेस मॉडल की कीमत 2,99,900 रुपये है. इसके 512GB वेरिएंट की कीमत 3,24,900 रुपये, 1TB मॉडल की 3,74,900 रुपये और 2TB मॉडल की कीमत 4,49,900 रुपये है.
यह भी पढ़ें - फोल्डेबल iPhone का क्रेज, पहली सेल से पहले Apple Store के बाहर जुटे लोग
iPhone Duo को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी
Blinkit पर स्टॉक खत्म होने से पहले भी iPhone Duo को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी सामने आई थी. एक रिपोर्ट के मुताबिक, फोन की रिटेल बिक्री शुरू होने से पहले ही भारत में पहले हफ्ते के लिए उपलब्ध स्टॉक की बुकिंग हो चुकी थी. Apple के मुंबई और नई दिल्ली स्थित स्टोर पर भी प्री-बुकिंग को लेकर अच्छी प्रतिक्रिया की सामने आई थीं. भारत में इसकी प्री-बुकिंग 16 अक्टूबर से शुरू हुई थी, जबकि बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू हुई. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि 16 अक्टूबर को बुकिंग शुरू होने के बाद भी स्टॉक खत्म हो गया था. अभी बुकिंग करने वाले ग्राहकों को iPhone Duo की डिलीवरी जनवरी तक होगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Apple iPhone Duo की सेल शुरू, क्या फोल्डेबल फोन बदलेगा यूज करने का तरीका?&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिना इंटरनेट कैसे काम करता है फोन का SOS सिस्टम, जानें टेक्नोलॉजी?</title>
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        <description><![CDATA[ बिना इंटरनेट कैसे काम करता है फोन का SOS सिस्टम, जानें टेक्नोलॉजी? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>2.5K OLED स्क्रीन और 8000mAh बैटरी, Oppo का नया टैबलेट लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ टैबलेट पर फिल्में देखना हो, गेम खेलना हो या स्टाइलस की मदद से लिखना हो, इन सभी कामों में स्क्रीन की क्वालिटी और डिवाइस की परफॉर्मेंस जरूरी होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए Oppo ने भारत में अपना नया कॉम्पैक्ट फ्लैगशिप टैबलेट Oppo Pad Mini लॉन्च किया है. इसमें 8.8 इंच की 2.5K OLED स्क्रीन दी गई है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है.
कंपनी ने इसमें Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर के साथ 8,000mAh की बैटरी भी दी है. टैबलेट की स्क्रीन पर मैट फिनिश मिलती है, जिससे रोशनी पड़ने पर चमक कम करने में मदद मिलने का दावा किया गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इसकी कीमत और खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
Oppo Pad Mini के खास फीचर्स क्या हैं?
Oppo Pad Mini में 8.8 इंच की OLED डिस्प्ले दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन 2,520&amp;times;1,680 पिक्सल है. यह स्क्रीन 144Hz रिफ्रेश रेट और 240Hz टच सैंपलिंग रेट सपोर्ट करती है. इसकी पीक ब्राइटनेस 1,600 निट्स तक है और पिक्सल डेंसिटी 344 PPI है. मैट फिनिश के कारण स्क्रीन पर पड़ने वाली चमक कम होने का दावा किया गया है.&amp;nbsp;
Oppo Pad Mini की बैटरी और चार्जिंग सपोर्ट
Oppo Pad Mini में 8,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 67W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. कनेक्टिविटी के लिए इसमें Wi-Fi 7, Bluetooth और USB Type-C पोर्ट मिलता है. इसका साइज 194.38 बाय 132.38mm है, जिससे यह कॉम्पैक्ट डिजाइन वाला टैबलेट बनता है.
यह भी पढ़ें - एक साथ कितने iPhone खरीद सकते हैं? Apple ने सभी मॉडल पर लगाई लिमिट
Oppo Pad Mini का कैमरा कैसा है?
यह टैबलेट Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर और Adreno 829 GPU से लैस है. इसमें Android 16 पर आधारित ColorOS 16 मिलता है. इसकी स्पेसिफिकेशन में LPDDR5X रैम और UFS 4.1 स्टोरेज का सपोर्ट भी शामिल है. कैमरे की बात करें तो पीछे की तरफ 13 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है, जबकि वीडियो कॉल और सेल्फी के लिए 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलता है.
Oppo Pad Mini की कीमत और बिक्री
Oppo Pad Mini के भारत में 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 94,999 रुपये रखी गई है. यह टैबलेट Lavender कलर में उपलब्ध होगा. ग्राहक इसे 29 अक्टूबर से Flipkart और Oppo के ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकेंगे.
यह भी पढ़ें - Apple iPhone Duo की सेल शुरू, क्या फोल्डेबल फोन बदलेगा यूज करने का तरीका? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>देश में साइबर इमरजेंसी! 6 दिन में 4 अलर्ट, क्या वाकई खतरे में है डिजिटल सिस्टम?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-में-साइबर-इमरजेंसी-6-दिन-में-4-अलर्ट-क्या-वाकई-खतरे-में-है-डिजिटल-सिस्टम</link>
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        <description><![CDATA[ अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके मोबाइल पर कॉल करे और सीधे आपका नाम, जन्मतिथि, घर का पता और यह बता दे कि आपके बैंक में कितने लाख का लोन चल रहा है तो किसी का भी चौंकना स्वाभाविक है. ज्यादातर लोग ऐसे फोन को बैंक का असली कॉल मान बैठते हैं. साइबर ठग इसी भरोसे का फायदा उठाकर कभी केवाईसी अपडेट तो कभी &#039;डिजिटल अरेस्ट&#039; के नाम पर बैंक खाते खाली कर देते हैं.
देश में 16 से 21 अक्टूबर 2026 के बीच यानी महज छह दिनों के भीतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े चार बड़े साइबर अलर्ट सामने आए. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI से लेकर राजस्थान पुलिस, वेबसाइट्स को सुरक्षा देने वाली कंपनी eMudhra और इंटरनेट का एक बड़ा हिस्सा चलाने वाले PHP सॉफ्टवेयर तक, हर जगह सुरक्षा की कमजोर कड़ियां दिखीं. विपक्षी दल कांग्रेस और पवन खेड़ा ने भी इसे लेकर केंद्र सरकार और SBI की जवाबदेही पर सीधे सवाल दागे. वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर इसे &#039;ग्लोबल साइबर इमरजेंसी&#039; बताकर कई दावे किए जाने लगे.
छह दिन और चार बड़े अलर्ट: घटनाक्रम की पूरी कड़ी
यह पूरा घटनाक्रम 16 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ जब साइबर इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग अकाउंट CyberPulse56 ने एक्स पर जानकारी दी कि &#039;Siriusim&#039; नाम का हैकर SBI के डेटा को डार्क वेब पर बेचने का दावा कर रहा है. इसी दिन SBI को डिफेंस साइबर एजेंसी (DCA), CERT-In और अपनी थ्रेट इंटेलिजेंस यूनिट से खतरे के आधिकारिक अलर्ट मिले.
अगले ही दिन 17 अक्टूबर को एक स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर ने अंतरराष्ट्रीय ब्राउजर कंपनियों को आगाह किया कि भारतीय सर्टिफाइंग कंपनी eMudhra के आठ डिजिटल सर्टिफिकेट की प्राइवेट कीज यानी सुरक्षा चाबियों में भारी तकनीकी खामी है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 18 अक्टूबर को CERT-In की निगरानी में eMudhra ने प्रभावित सभी आठों सर्टिफिकेट तुरंत रद्द कर दिए.
इसके बाद 20 अक्टूबर को दुनिया भर के वेब सर्वरों को चलाने वाले बैकएंड सॉफ्टवेयर PHP की दो क्रिटिकल सुरक्षा खामियों की जानकारी तय समय से पहले ही सार्वजनिक हो गई. 21 अक्टूबर को SBI ने शेयर बाजार को औपचारिक जानकारी देते हुए माना कि 3,897 ग्राहकों के निजी रिकॉर्ड में सेंध लगी है. इसी दिन राजस्थान पुलिस के डेटा को लेकर &#039;Scarlettgroup&#039; नाम के हैकर ग्रुप का दावा सामने आया जबकि दूसरी ओर PHP ने सिक्योरिटी पैच जारी किए और CERT-In ने भारत के सभी सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के लिए क्रिटिकल अलर्ट जारी कर दिया.
SBI डेटा लीक: 3,897 ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर और खड़े होते सवाल
डार्क वेब पर हैकर ने दावा किया था कि उसके पास SBI से जुड़े करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड्स हैं. बैंक ने CERT-In के पैनल वाली एक स्वतंत्र साइबर एजेंसी से फॉरेंसिक जांच कराई जिसमें 3,897 ग्राहकों के व्यक्तिगत पहचान योग्य रिकॉर्ड्स (PII) लीक होने की पुष्टि हुई. इन रिकॉर्ड्स में ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, जन्मतिथि, जेंडर, पता, शाखा, ग्राहक पहचान नंबर और लोन से जुड़ा बेहद संवेदनशील डेटा शामिल था.
पवन खेड़ा और विपक्ष के तीखे सवाल: जवाबदेही किसकी?
मामला तूल पकड़ते ही कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बैंक और केंद्र सरकार की जवाबदेही पर सीधे सवाल दागे. उन्होंने पूछा कि देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान को अपने ग्राहकों के डेटा लीक होने की भनक इंटरनल ऑडिट से क्यों नहीं लगी और इसके लिए बाहरी सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट का इंतजार क्यों करना पड़ा.
इसके साथ ही विपक्ष ने यह मुद्दा भी उठाया कि जिन 3,897 ग्राहकों का निजी डेटा सार्वजनिक हुआ - &amp;nbsp;क्या बैंक ने उन्हें फोन या ईमेल भेजकर व्यक्तिगत तौर पर आगाह किया ताकि वे सतर्क रह सकें. ग्राहक के नजरिए से यह सवाल बेहद गंभीर है क्योंकि जब तक पीड़ित व्यक्ति को यह पता ही नहीं होगा कि उसकी निजी जानकारी खतरे में है तब तक वह खुद को वित्तीय ठगी से सुरक्षित रखने के कदम नहीं उठा पाएगा.
राजस्थान पुलिस: 70 हजार रिकॉर्ड चोरी का दावा और उसकी जमीनी पड़ताल
इसी दौरान &#039;Scarlettgroup&#039; नाम के एक हैकर ग्रुप ने दावा किया कि उसने राजस्थान पुलिस के डेटाबेस में सेंधमारी कर 6.63 जीबी डेटा चुरा लिया है. हैकर के मुताबिक इस डेटा में 70 हजार पहचान रिकॉर्ड, करीब 59,460 मोबाइल नंबर, वरिष्ठ पुलिस अफसरों के ईमेल, एफआईआर की डिजिटल कॉपियां, ई-केवाईसी रिकॉर्ड और मुकदमों से जुड़े गवाहों के बयान शामिल हैं.
साइबर क्राइम ट्रैकर Ransomware.live ने इस दावे को अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया है. हालांकि तकनीकी रूप से जब तक राजस्थान पुलिस या कोई स्वतंत्र जांच एजेंसी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं करती, तब तक इसे &#039;कथित दावा&#039; ही माना जाएगा. अलग-अलग ट्रैकर्स पर घटनाओं की तारीखों में भी अंतर देखा गया है. यदि यह दावा सच साबित होता है तो यह केवल सामान्य डेटा चोरी नहीं बल्कि जांच की गोपनीयता और गवाहों की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा संवेदनशील मामला बन जाएगा.
eMudhra मामला: डिजिटल पहचान key में चूक और DSC की हकीकत
जब कोई यूजर इंटरनेट पर किसी सरकारी पोर्टल या बैंक की वेबसाइट पर जाता है &amp;nbsp;तो ब्राउजर में दिखने वाला ताला (HTTPS) और डिजिटल सर्टिफिकेट यह साबित करता है कि वेबसाइट असली और सुरक्षित है. eMudhra यही सर्टिफिकेट जारी करने वाली भारत की प्रमुख सर्टिफाइंग अथॉरिटी है. एक सुरक्षा शोधकर्ता ने पाया कि eMudhra द्वारा जारी आठ सर्टिफिकेट्स की प्राइवेट कीज बेहद कमजोर क्रिप्टोग्राफिक प्रोसेस से बनी थीं जिन्हें डिकोड करना आसान था. इससे नकली वेबसाइट को असली दिखाकर लोगों को धोखा दिए जाने का जोखिम था.
खामी सामने आते ही CERT-In ने इन आठों सर्टिफिकेट्स को तुरंत रद्द कराया. गूगल की सुरक्षा टीम ने भी कदम उठाते हुए eMudhra के एक रूट सर्टिफिकेट को 27 अक्टूबर 2026 से क्रोम ब्राउजर से हटाने का फैसला किया. इस घटना के बाद आम लोगों के बीच यह डर फैल गया कि क्या उनके डिजिटल सिग्नेचर भी खतरे में हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Jio और Airtel के प्लान में 11 रुपये का अंतर, डेटा और वैलिडिटी में कौन आगे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/jio-और-airtel-के-प्लान-में-11-रुपये-का-अंतर-डेटा-और-वैलिडिटी-में-कौन-आगे</link>
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        <description><![CDATA[ मोबाइल रिचार्ज कराते समय सिर्फ कीमत देखना काफी नहीं होता है. कई बार थोड़े से पैसों के अंतर वाले दो प्लान में मिलने वाली सुविधाएं एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होती हैं. Reliance Jio और Bharti Airtel के दो प्रीपेड प्लान में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलता है. Jio का 500 रुपये वाला रिचार्ज और Airtel का 489 रुपये वाला प्लान कीमत में लगभग बराबर हैं. इन दोनों के बीच सिर्फ 11 रुपये का अंतर है, लेकिन डेटा, वैलिडिटी और अतिरिक्त सुविधाओं की बात करें तो दोनों में बड़ा फर्क देखने को मिलता है.
Jio अपने प्लान में रोजाना डेटा के साथ कई OTT प्लेटफॉर्म और AI से जुड़ी सुविधाएं दे रहा है. वहीं Airtel का प्लान उन यूजर्स के लिए यूजफुल हो सकता है, जो लंबे समय तक रिचार्ज की चिंता नहीं करना चाहते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि दोनों प्लान में क्या-क्या मिलता है और किस मामले में कौन आगे है.&amp;nbsp;
डेटा और वैलिडिटी में कौन बेहतर?
Jio का प्लान उन लोगों के लिए ज्यादा बेस्ट है, जिन्हें रोजाना इंटरनेट इस्तेमाल करना है और OTT प्लेटफॉर्म के साथ AI टूल्स का फायदा भी चाहिए. वहीं Airtel का 489 रुपये वाला प्लान उन लोगों के लिए बेहतर ऑप्शन हो सकता है, जिन्हें ज्यादा इंटरनेट की जरूरत नहीं है, लेकिन लंबे समय तक अपना नंबर चालू रखना चाहते हैं. इसमें 77 दिनों की वैलिडिटी मिलती है, जबकि Jio का प्लान 28 दिनों में खत्म हो जाता है.
Airtel के 489 रुपये वाले प्लान में कितनी वैलिडिटी?
Bharti Airtel का 489 रुपये वाला प्रीपेड प्लान वैलिडिटी के मामले में Jio से आगे है. इस प्लान में 77 दिनों तक सर्विस वैलिडिटी मिलती है. Jio के 500 रुपये वाले प्लान की तुलना में Airtel का प्लान काफी लंबे समय तक चलता है. डेटा की बात करें तो Airtel इस प्लान में कुल 6GB इंटरनेट डेटा देता है. इसके साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और पूरी वैलिडिटी के दौरान कुल 600 SMS मिलते हैं, हालांकि इस प्लान में Jio की तरह कई OTT प्लेटफॉर्म, Google Gemini AI Pro या Canva Pro Lite जैसी बड़ी अतिरिक्त सुविधाएं शामिल नहीं हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - 6330mAh बैटरी वाला POCO X8s लॉन्च, जानें कैमरे और परफॉर्मेंस की डिटेल
Jio के 500 रुपये वाले प्लान में मिलेंगे ये फायदे
Jio के 500 रुपये वाले रिचार्ज प्लान में 28 दिनों की वैलिडिटी मिलती है. इसमें हर दिन 2GB इंटरनेट डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS भेजने की सुविधा दी जाती है. इसके अलावा यूजर्स को अनलिमिटेड 5G डेटा का फायदा भी मिलता है.इस प्लान में इंटरनेट और कॉलिंग के साथ मैसेज भेजने की सुविधा भी शामिल है.&amp;nbsp;
Jio प्लान में &amp;nbsp;OTT और AI सब्सक्रिप्शन का भी फायदा
इस प्लान में YouTube Premium, Amazon Prime Video, SonyLIV, Zee5, Sun NXT, Lionsgate Play, Discovery+ और Hoichoi जैसे OTT प्लेटफॉर्म मिलते हैं. प्लान में JioHotstar Mobile और हॉलीवुड कंटेंट का फायदा भी शामिल है. इसके साथ Google Gemini AI Pro का 18 महीने का सब्सक्रिप्शन मिलता है, जिसकी बताई गई कीमत 35,100 रुपये है. इसमें 5,000GB क्लाउड स्टोरेज के साथ 12 महीने का Canva Pro Lite सब्सक्रिप्शन भी शामिल है, जिसकी कीमत 1,590 रुपये बताई गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Jio, और, Airtel, के, प्लान, में, रुपये, का, अंतर, डेटा, और, वैलिडिटी, में, कौन, आगे</media:keywords>
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        <title>आपकी फोटो, आपके नाम से फेक अकाउंट! Instagram पर ऐसे करें पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर आपकी फोटो और नाम का इस्तेमाल करके कोई दूसरा व्यक्ति लोगों से बातचीत करने लगे तो परेशानी बढ़ सकती है. आपके दोस्त और जानने वाले उस अकाउंट को असली समझ कर भरोसा कर सकते हैं. कई बार ऐसे फर्जी प्रोफाइल के जरिए लोगों को कंफ्यूज किया जाता है, गलत जानकारी फैलाई जाती है या पैसे और पर्सनल जानकारी मांगने की कोशिश होती है.&amp;nbsp;
Instagram पर किसी और की पहचान का इस्तेमाल करके अकाउंट बनाना उसके नियमों के खिलाफ हो सकता है. अगर कोई आपकी फोटो, नाम या दूसरी पर्सनल जानकारियों का इस्तेमाल करके आपकी नकल कर रहा है, तो आप Instagram पर इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि ऐसे अकाउंट को पहचानने और रिपोर्ट करने का सही तरीका क्या है.&amp;nbsp;
कैसे पहचानें कि Instagram पर अकाउंट फेक है?
Instagram पर फेक प्रोफाइल कि पहचान करने के लिए सबसे पहले उसके नाम, फोटो, बायो और दूसरी जानकारियों को ध्यान से देखें. अगर कोई अकाउंट आपके नाम, फोटो, बायो या पर्सनल जानकारी का इस्तेमाल करके खुद को आपकी तरह दिखा रहा है या आपके दोस्तों और फैमिली से मैसेज करके पैसे, OTP या पर्सनल जानकारी मांग रहा है, तो उस प्रोफाइल, उसकी पोस्ट और मैसेज के स्क्रीनशॉट ले लें और अकाउंट का लिंक भी सेव कर लें और इसकी रिपोर्ट करें.&amp;nbsp;&amp;nbsp;Instagram पर फेक अकाउंट की रिपोर्ट कैसे करें?
1. अगर कोई आपकी पहचान का गलत इस्तेमाल करके Instagram पर फर्जी अकाउंट चला रहा है, तो सबसे पहले उस प्रोफाइल पर जाएं.
2. इसके बाद ऊपर दिए गए तीन डॉट्स पर टैप करें.&amp;nbsp;
3. अब Report के ऑप्शन पर जाएं.
4. इसके बाद Report Account चुनें.
5. यहां Its pretending to be someone else का ऑप्शन चुनें फिर बताएं कि अकाउंट आपकी नकल कर रहा है.
6. इसके बाद स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों को पूरा करके रिपोर्ट सबमिट कर दें.
बिना Instagram अकाउंट ऐसे करें शिकायत रिपोर्ट
अगर आपके पास Instagram अकाउंट नहीं है या आप वेबसाइट के जरिए शिकायत करना चाहते हैं, तो Instagram के रिपोर्टिंग फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं. पहचान की पुष्टि के लिए आपसे आधार कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी पहचान पत्र की कॉपी मांगी जा सकती है. शिकायत की जांच में कुछ दिन लग सकते हैं, हालांकि इसका समय मामले के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - हर वेबसाइट पर Cookies को हां कहना पड़ सकता है भारी, जानें क्यों?
रिपोर्ट करने के बाद भी फेक अकाउंट न हटे तो क्या करें?
अगर शिकायत करने के बाद भी फर्जी अकाउंट Instagram पर मौजूद है, तो आप दोबारा उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं. इसके लिए ऐप और वेबसाइट, दोनों तरीकों का इस्तेमाल करें. आप Instagram के Help Center पर जाकर भी मदद ले सकते हैं. इसके अलावा अपनी समस्या की जानकारी देने के लिए X &amp;nbsp;या Threads पर @Instagram या @Creators को टैग कर सकते हैं या मैसेज भेज सकते हैं. अगर आपका अकाउंट वेरिफाइड है या बिजनेस अकाउंट है, तो Meta Business Suite के जरिए Meta की सपोर्ट टीम से संपर्क करने का ऑप्शन भी मौजूद है.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>घर के हर कोने तक Wi&amp;Fi कैसे पहुंचाता है Mesh सिस्टम? जानें टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ घर में Wi-Fi लगा हो, लेकिन दूसरे कमरे में जाते ही इंटरनेट धीमा पड़ने लगे, वीडियो बार-बार रुकने लगे या ऊपर की मंजिल पर सिग्नल मिलना मुश्किल हो जाए, तो इसकी वजह सिर्फ इंटरनेट की स्पीड नहीं होती है. कई बार राउटर की पहुंच भी इसके लिए जिम्मेदार होती है. आमतौर पर Wi-Fi राउटर एक ही जगह रखा होता है और वहीं से पूरे घर में सिग्नल भेजता है, लेकिन दूरी बढ़ने और बीच में दीवारें आने से सिग्नल कमजोर हो सकता है. ऐसे में Mesh Wi-Fi सिस्टम काम आता है.
यह एक डिवाइस पर निर्भर रहने की जगह घर के अलग-अलग हिस्सों में कई नेटवर्क पॉइंट लगाकर Wi-Fi की पहुंच बढ़ाता है. खास बात यह है कि इन सभी पॉइंट्स के लिए अलग-अलग नेटवर्क से जुड़ने की जरूरत नहीं होती है. तो आइए जानते हैं कि Mesh Wi-Fi की टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है और यह सामान्य राउटर से कितनी अलग है.&amp;nbsp;
क्या होता है Mesh Wi-Fi सिस्टम?
Mesh Wi-Fi एक ऐसा नेटवर्क है, जिसमें मेन राउटर के साथ एक या उससे ज्यादा सैटेलाइट डिवाइस जुड़े होते हैं. मेन राउटर मॉडेम के जरिए इंटरनेट से कनेक्ट होता है, जबकि बाकी डिवाइस घर के दूसरे हिस्सों तक सिग्नल पहुंचाते हैं. इन सभी का मकसद एक ही Wi-Fi नेटवर्क की कवरेज बढ़ाना है. इस सिस्टम में फोन, लैपटॉप और टैबलेट जैसे डिवाइस एक ही नेटवर्क नाम और पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं. इससे घर के एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने पर बार-बार नेटवर्क बदलने की जरूरत नहीं पड़ती है.&amp;nbsp;
कैसे काम करती है Mesh Wi-Fi की टेक्नोलॉजी?
Mesh सिस्टम में मेन राउटर इंटरनेट कनेक्शन को संभालता है. इसके बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए सैटेलाइट या नोड्स नेटवर्क को आगे बढ़ाते हैं. ये नोड्स मेन राउटर या दूसरे नोड्स के साथ कम्युनिकेट करके Wi-Fi की पहुंच बढ़ाते हैं. &amp;nbsp;जब कोई यूजर घर में एक जगह से दूसरी जगह जाता है, तो उसका डिवाइस उपलब्ध नेटवर्क पॉइंट्स के बीच अपने आप कनेक्शन बदल सकता है. इससे पूरे घर में इंटरनेट इस्तेमाल करना आसान होता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - भारत में पहली बार इस फोन में मिलेगी MediaTek की नई चिप, आज होगा लॉन्च
Mesh Wi-Fi और सामान्य राउटर में क्या अंतर है?
सामान्य राउटर एक ही जगह से Wi-Fi सिग्नल भेजता है. इसमें दूरी बढ़ने या दीवारों जैसी रुकावटों के कारण सिग्नल कमजोर हो सकता है. इसके मुकाबले Mesh सिस्टम कई पॉइंट्स के जरिए कवरेज देता है. छोटे घर या अपार्टमेंट में सामान्य राउटर सही हो सकता है, लेकिन बड़े और कई मंजिलों वाले घरों में Mesh सिस्टम ज्यादा यूजफुल साबित हो सकता है. जरूरत पड़ने पर इसमें अतिरिक्त सैटेलाइट भी जोड़े जा सकते हैं, हालांकि इसकी कीमत सामान्य राउटर से ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
Wi-Fi Extender से कैसे अलग है Mesh सिस्टम?
Wi-Fi Extender मौजूदा राउटर के सिग्नल को पकड़कर उन जगहों तक पहुंचाता है, जहां नेटवर्क कमजोर है. कई पारंपरिक एक्सटेंडर अलग नेटवर्क नाम बनाते हैं, जिससे यूजर को जरूरत के हिसाब से नेटवर्क बदलना पड़ सकता है. Mesh सिस्टम में सभी नोड्स एक ही नेटवर्क का हिस्सा होते हैं. अगर घर के कई हिस्सों में सिग्नल की समस्या है, तो यह बेहतर ऑप्शन &amp;nbsp;हो सकता है. वहीं सिर्फ एक कमरे तक Wi-Fi पहुंचाने के लिए एक्सटेंडर भी सही हो सकता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - हर वेबसाइट पर Cookies को हां कहना पड़ सकता है भारी, जानें क्यों? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>1 जनवरी से बदल जाएगा WhatsApp चलाने का तरीका, फोन में सिम नहीं तो ऐप नहीं चलेगा</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप WhatsApp या Telegram ऐसे फोन में चलाते हैं जिसमें वो सिम लगा ही नहीं है जिससे अकाउंट बना था तो अब संभल जाइए.&amp;nbsp;1 जनवरी 2027 से सरकार का सिम बाइंडिंग नियम लागू होने जा रहा है. इसके बाद ये ऐप तभी चलेंगे जब फोन में वही सिम लगा होगा और चालू होगा जिस नंबर से आपने अकाउंट बनाया है. सिम निकाला, बंद हुआ या बदला तो ऐप काम करना बंद कर सकता है.
सिम बाइंडिंग आखिर है क्या?
आसान भाषा में समझें तो सिम बाइंडिंग का मतलब है आपके WhatsApp अकाउंट को आपके सिम कार्ड से बांध देना.&amp;nbsp;अब तक होता ये था कि एक बार ओटीपी से नंबर वेरिफाई कर लिया और फिर सिम निकाल भी दो तो ऐप चलता रहता था.कई लोग पुराने फोन में सिर्फ वाई-फाई से WhatsApp चला लेते थे. नए नियम के बाद ऐसा नहीं होगा.&amp;nbsp;
ऐप बीच-बीच में जांच करेगा कि सिम फोन में है या नहीं. सिम नहीं मिला तो ऐप बंद हो सकता है. अच्छी बात ये है कि इससे आपकी पुरानी चैट डिलीट नहीं होगी. सिम वापस लगाने पर ऐप फिर से चलने लगेगा.
सरकार ये नियम क्यों ला रही है?
दूरसंचार विभाग यानी DoT का कहना है कि ठग इसी कमी का फायदा उठा रहे थे. वो भारत का कोई नंबर एक बार वेरिफाई कर लेते थे और फिर विदेश में बैठकर उसी अकाउंट से लोगों को ठगते थे.
&amp;nbsp;सिम निकल जाने या बंद हो जाने के बाद भी अकाउंट चलता रहता था. डिजिटल अरेस्ट, फर्जी सरकारी अफसर बनकर कॉल और ऐसी ही ठगी में ये बहुत देखा गया. सिम बाइंडिंग से हर अकाउंट एक केवाईसी वाले सिम से जुड़ा रहेगा जिससे ठगों तक पहुंचना आसान होगा.
किन ऐप पर लागू होगा?
WhatsApp, Telegram और Signal इस नियम के दायरे में हैं. सरकार ने शुरू में Snapchat, ShareChat, JioChat, Josh और Arattai को भी नोटिस भेजा था लेकिन अब खबर है कि Snapchat को इस नियम से छूट मिल गई है. वहीं Signal ने अब तक सरकार के नोटिस का जवाब नहीं दिया है.
eSIM वालों का क्या होगा?
आजकल कई फोन में प्लास्टिक वाला सिम नहीं होता बल्कि eSIM होता है. eSIM फोन के अंदर ही डिजिटल तरीके से लगा होता है. ऐसे लोगों के मन में सवाल है कि क्या उनका WhatsApp बंद हो जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसा नहीं होगा. अगर फोन में eSIM चालू है, तो उसे भी सिम ही माना जाएगा और WhatsApp चलता रहेगा. हालांकि सरकार ने अपने बयान में eSIM का अलग से जिक्र नहीं किया है.
eSIM वालों को एक बात का ध्यान जरूर रखना होगा. प्लास्टिक सिम को तो निकालकर दूसरे फोन में लगा दिया जाता है लेकिन eSIM को नए फोन में ले जाने के लिए टेलीकॉम कंपनी से ट्रांसफर करवाना पड़ता है यानी नया फोन लिया तो जब तक eSIM उसमें चालू नहीं होगा तब तक वहां WhatsApp शायद काम न करे.&amp;nbsp;
दूसरी तरफ विदेश जाने वालों के लिए eSIM थोड़ा फायदेमंद हो सकता है. वहां लोकल डेटा के लिए दूसरा सिम लगा लें तब भी भारत वाला eSIM फोन में बना रह सकता है.
iPhone वालों का क्या होगा?
iPhone में ये नियम लागू करना सबसे मुश्किल माना जा रहा था. सूत्रों के मुताबिक Apple ने iOS में जरूरी बदलाव कर दिए हैं. सितंबर में आए एक सॉफ्टवेयर अपडेट से अब iPhone ये पता लगा सकता है कि फोन में सिम लगा है या नहीं.&amp;nbsp;हालांकि Apple ने खुद इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा है. उधर Android फोन पर WhatsApp ने इसकी टेस्टिंग पहले ही शुरू कर दी है.
WhatsApp Web चलाने वालों के लिए राहत
पहले नियम था कि कंप्यूटर पर चलने वाला WhatsApp Web हर छह घंटे में अपने आप लॉगआउट हो जाएगा. ऑफिस में काम करने वालों के लिए ये बड़ी परेशानी होती. अब सरकार ने ये नियम हटा दिया है. अब लॉगआउट तभी होगा जब किसी अकाउंट पर ठगी का शक होगा.
कई बार टल चुकी है तारीख
DoT ने ये आदेश 28 नवंबर 2025 को दिया था और कंपनियों को 90 दिन का समय मिला था. यानी फरवरी 2026 तक काम पूरा होना था लेकिन कंपनियों और Apple ने तकनीकी दिक्कतें बताईं और ज्यादा समय मांगा. इसके बाद डेडलाइन बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई. अब 1 जनवरी 2027 से नियम लागू होगा. जो ऐप इसे नहीं मानेंगे उन पर टेलीकॉम एक्ट 2023 के तहत कार्रवाई हो सकती है.
आपको क्या करना चाहिए?
अगर आप दो फोन रखते हैं और WhatsApp उस फोन में चलाते हैं जिसमें सिम नहीं है तो अभी से तैयारी कर लें. जिस नंबर से WhatsApp चलता है, वह सिम उसी फोन में लगाएं, जिसमें ऐप इस्तेमाल करते हैं. यह भी देख लें कि आपका सिम चालू रहे और रिचार्ज खत्म न हो, क्योंकि बंद सिम पर भी ऐप रुक सकता है. eSIM वाले लोग फोन बदलने से पहले eSIM ट्रांसफर का इंतजाम कर लें. विदेश जाने वाले लोग ध्यान रखें कि भारत वाला सिम बंद न हो.
सबकी राय एक नहीं
सरकार इसे ठगी रोकने का बड़ा कदम बता रही है और टेलीकॉम कंपनियों ने भी इसका स्वागत किया है लेकिन ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम जैसे उद्योग संगठनों का कहना है कि ये नियम कानून में दी गई ताकत से आगे जाता है. एक सर्वे में भी ज्यादातर लोगों और छोटे कारोबारियों ने माना कि इससे उनका रोज का काम प्रभावित हो सकता है.
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        <pubDate>Fri, 23 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>हर वेबसाइट पर Cookies को हां कहना पड़ सकता है भारी, जानें क्यों?</title>
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        <description><![CDATA[ इंटरनेट पर कोई वेबसाइट खोलते ही अगर स्क्रीन पर Accept All Cookies और Reject All का ऑप्शन दिखाई दे, तो ज्यादातर लोग बिना ज्यादा सोचे किसी एक पर क्लिक कर देते हैं. कई बार लोग इस पॉपअप को बार-बार देखकर परेशान हो जाते हैं और इससे छुटकारा पाने के लिए सभी कुकीज को एक्सेप्ट कर लेते हैं, लेकिन आपकी यही आदत ऑनलाइन प्राइवेसी से जुड़ी चिंता बढ़ा सकती है. ऐसे में हर बार बिना सोचे इन्हें एक्सेप्ट करना सही फैसला नहीं होतो है. तो आइए जानते हैंं कि हर वेबसाइट पर Cookies को हां कहना क्यों भारी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
Cookies क्या हैं और ये कैसे काम करती हैं?
जब आप किसी वेबसाइट पर जाते हैं, तो वह आपके ब्राउजर में छोटी टेक्स्ट फाइल सेव कर सकती है. इन्हें कुकीज कहा जाता है. इनकी मदद से वेबसाइट आपकी लॉगिन स्थिति, भाषा की पसंद और शॉपिंग कार्ट में रखे सामान जैसी जानकारियां याद रख सकती है. इससे अगली बार वेबसाइट इस्तेमाल करना आसान हो जाता है, हालांकि सभी कुकीज का काम एक जैसा नहीं होता है. कुछ वेबसाइट चलाने के लिए जरूरी होती हैं, जबकि कुछ वेबसाइट के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े जुटाती हैं. वहीं विज्ञापन वाली कुकीज अलग-अलग वेबसाइटों पर आपकी एक्टिविटीज को ट्रैक कर सकती हैं.
हर वेबसाइट पर Cookies को हां कहना क्यों भारी पड़ सकता है?
हर वेबसाइट पर Cookies को बिना सोचे-समझे एक्सेप्ट करना आपकी ऑनलाइन प्राइवेसी के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. कुछ Cookies सिर्फ लॉगिन डिटेल्स और वेबसाइट की पसंद याद रखती हैं, जबकि कुछ आपकी ब्राउजिंग एक्टिविटी को ट्रैक करके विज्ञापन दिखाने में मदद कर सकती हैं. &amp;nbsp;Accept All Cookies पर क्लिक करने से गैर-जरूरी Cookies भी एक्टिव हो सकती हैं, जिससे आपकी ऑनलाइन एक्टिविटीज से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की जा सकती है.
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इतने तरह की होती हैं वेबसाइट पर Cookies&amp;nbsp;
कुकीज मुख्य रूप से चार तरह की होती हैं. एसेंशियल कुकीज वेबसाइट के जरूरी कामों के लिए इस्तेमाल होती हैं. फंक्शनल कुकीज भाषा और दूसरी सेटिंग्स याद रखती हैं. एनालिटिक्स कुकीज वेबसाइट पर आपकी एक्टिविटी से जुड़े आंकड़े जुटाती हैं, जबकि विज्ञापन कुकीज आपकी पसंद के मुताबिक विज्ञापन दिखाने में मदद करती हैं.&amp;nbsp;
ऑनलाइन ट्रैकिंग कम करने के लिए क्या करें?
कुकीज का पॉपअप दिखने पर जल्दबाजी में फैसला लेने के जगह Manage Preferences या Customize ऑप्शन देखें. गैर-जरूरी विज्ञापन और ट्रैकिंग कुकीज को बंद कर सकते हैं, जबकि वेबसाइट चलाने के लिए जरूरी कुकीज को चालू रखा जा सकता है. इसके अलावा ब्राउजर की सेटिंग्स से थर्ड-पार्टी कुकीज को ब्लॉक करने और समय-समय पर पुरानी कुकीज हटाने का ऑप्शन भी इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत में आया स्टारलिंक तो कैसे होगा सुरक्षा को खतरा? यूक्रेन से समझिए</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-आया-स्टारलिंक-तो-कैसे-होगा-सुरक्षा-को-खतरा-यूक्रेन-से-समझिए</link>
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        <description><![CDATA[ हाल ही में Elon Musk ने भारत में अपने Starlink इंटरनेट को मंजूरी न मिलने की भड़ास निकालते हुए देश के टॉप बिजनेसमैन मुकेश अंबानी और पीएम मोदी को लेकर तंज भरे ट्वीट्स किए थे. मस्क को कहना था कि उनके सैटेलाइट इंटरनेट को जानबूझकर रोका जा रहा है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? तो आपको बता दें नहीं, इसके पीछे कई वजहें हैं जिनमें एक मुद्द देश की सुरक्षा की भी है. हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने Starlink को लेकर बड़ा खुलासा किया है.&amp;nbsp;
जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई अनबन के बाद, यूक्रेन को सबक सिखाने के लिए वहां Starlink की इंटरनेट स्पीड जानबूझकर स्लो कर दी गई. उनका कहना है कि अमेरिकी सरकार के इशारे पर SpaceX ने यह कदम उठाया. हालांकि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताकर खारिज कर दिया है. लेकिन इस बवाल ने साफ कर दिया है कि किसी विदेशी प्राइवेट कंपनी के भरोसे देश की सुरक्षा छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है.
जंग में अचानक इंटरनेट स्लो होने से यूक्रेन को नुकसान
आज के दौर में कोई भी लड़ाई सिर्फ तोप और बंदूकों के दम पर नहीं लड़ी जाती. बल्कि तेज कम्युनिकेशन और डेटा के भरोसे जीती जाती है. जब जंग के दौरान जमीन पर लगे मोबाइल टावर और केबल नेटवर्क तबाह हो जाते हैं. तब Starlink जैसा सैटेलाइट इंटरनेट ही सेना के लिए सबसे बड़ा सहारा बनता है. यूक्रेन की फौज अपने सैनिकों से बात करने, दुश्मन पर नजर रखने और जानकारी शेयर करने के लिए पूरी तरह से इसी नेटवर्क पर टिकी हुई है.&amp;nbsp;
लेकिन जेलेंस्की के मुताबिक जब अचानक Starlink टर्मिनल्स की स्पीड घटाई गई तो फ्रंटलाइन पर लड़ रहे जवानों के हाथ बंध गए. वहां ड्रोन उड़ाने और हवाई हमलों से बचने वाले एयर डिफेंस सिस्टम को चलाने में भारी दिक्कतें आने लगीं. इससे समझ आता है कि अगर किसी देश की सेना एक ऐसी प्राइवेट कंपनी के नेटवर्क पर निर्भर हो जाए जिसका स्विच किसी दूसरे देश के हाथ में है. तो ऐन वक्त पर कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है.

भारत क्यों नहीं दे रहा स्टारलिंक को मंजूरी?
यूक्रेन के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसे देखकर समझ आता है कि भारत सरकार Starlink को लेकर इतना सख्त और सतर्क रुख क्यों अपना रही है. यह सच है कि सैटेलाइट इंटरनेट की मदद से देश के उन दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से नेटवर्क पहुंचाया जा सकता है, जहां आज तक केबल बिछाना मुमकिन नहीं हो पाया है. लेकिन भारत के लिए इस सुविधा से कहीं ज्यादा जरूरी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आजादी है.&amp;nbsp;
खासतौर पर हमारे बॉर्डर वाले संवेदनशील इलाकों में कम्युनिकेशन सिस्टम ऐसा होना चाहिए, जिस पर सौ फीसदी भरोसा किया जा सके. भारत किसी भी विदेशी टेक्नोलॉजी को अपने यहां लाने से पहले यह पक्का करना चाहता है कि डेटा और नेटवर्क का पूरा कंट्रोल किसके पास रहेगा. सरकार यह जोखिम बिल्कुल नहीं उठाना चाहती कि कल को किसी ग्लोबल टेंशन या राजनीतिक दबाव की वजह से देश के जरूरी इलाकों में अचानक संचार व्यवस्था ठप कर दी जाए और हम बस देखते रह जाएं.

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विदेशी कंपनियों के हाथ में कंट्रोल होना देश के लिए रिस्क
तकनीकी तौर पर देखें तो जो कंपनी Satellite Internet और नेटवर्क चलाती है. उसके पास ही उसे कंट्रोल करने की पूरी ताकत होती है. वह कंपनी जब चाहे अपने हिसाब से या फिर अपने देश की सरकार के एक इशारे पर किसी भी इलाके में Internet की स्पीड घटा सकती है और सर्विस पूरी तरह से बंद कर सकती है. जब किसी देश का सीधा नियंत्रण उस टेक्नोलॉजी पर नहीं होता. तो उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है.
आज यह खतरा सिर्फ Starlink जैसे Satellite Internet तक ही सीमित नहीं है. बल्कि विदेशी क्लाउड सर्विस, बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बाकी टेक्निकल सिस्टम के साथ भी यही दिक्कत जुड़ी हुई है. अगर युद्ध या किसी बड़े संकट के समय कोई विदेशी कंपनी अपने नियम बदल दे, तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>भारत, में, आया, स्टारलिंक, तो, कैसे, होगा, सुरक्षा, को, खतरा, यूक्रेन, से, समझिए</media:keywords>
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        <title>भारत में पहली बार इस फोन में मिलेगी MediaTek की नई चिप, आज होगा लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ OPPO आज अपनी Find X10 सीरीज को भारत में पेश करने जा रही है. इस सीरीज का सबसे खास मॉडल OPPO Find X10 Pro Max होगा, जिसे कंपनी कई नए फीचर्स के साथ उतारने की तैयारी में है. इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसका प्रोसेसर है. OPPO ने पुष्टि की है कि Find X10 Pro Max भारत का पहला स्मार्टफोन होगा, जिसमें MediaTek Dimensity 9600 Pro चिपसेट मिलेगा.
इसके अलावा फोन में पीछे की तरफ तीन 200 मेगापिक्सल कैमरे दिए जाएंगे. कंपनी के मुताबिक, यह फोन आज यानी 22 अक्टूबर को भारत में लॉन्च होगा. इसकी कीमत का खुलासा भी लॉन्च के दौरान होने की उम्मीद है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इसमें क्या खास फीचर्स मिलेंगे.&amp;nbsp;
भारत में पहली बार मिलेगी Dimensity 9600 Pro चिपसेट
OPPO Find X10 Pro Max में MediaTek Dimensity 9600 Pro प्रोसेसर दिया जाएगा, जिसे 2nm मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस पर तैयार किया गया है. इसमें दो प्राइम कोर हैं और इसकी अधिकतम क्लॉक स्पीड 4.55GHz तक जाती है. कंपनी इस चिपसेट के साथ अपना Laminar Flow Engine भी देगी. इससे फोन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया है. यह स्मार्टफोन Android 17 पर आधारित ColorOS 17 के साथ आएगा. साथ ही यह भारत में इस सॉफ्टवेयर के साथ आने वाला पहला फोन भी होगा.&amp;nbsp;
OPPO Find X10 सीरीज का कैमरा
कैमरा इस फोन का एक और बड़ा अट्रैक्शन है. OPPO Find X10 Pro Max में Hasselblad के साथ मिलकर तैयार किया गया ट्रिपल 200 मेगापिक्सल कैमरा सेटअप मिलेगा. इसके मुख्य कैमरे में f/1.5 अपर्चर और 1/1.3 इंच का ISOCELL HPC सेंसर दिया जाएगा. इसके साथ 200MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 200MP का टेलीफोटो कैमरा भी मिलेगा. टेलीफोटो कैमरे में ISOCELL HP5 सेंसर और ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) दिया जाएगा. फोटोग्राफी को बेहतर बनाने के लिए फोन में LUMO Hyper Pixel और LUMO True Image इंजन भी मिलेंगे. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 50 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा होगा, जो 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू सपोर्ट करेगा.&amp;nbsp;
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OPPO Find X10 सीरीज में क्या खास फीचर्स मिलेंगे?
Find X10 मॉडल में 6.59 इंच की LTPO AMOLED स्क्रीन और 144Hz रिफ्रेश रेट मिलने की संभावना है. इसमें Dimensity 9600M चिपसेट, 12GB रैम और 256GB स्टोरेज मिल सकती है. फोन में 8,000mAh बैटरी के साथ 80W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग मिलने की भी चर्चा है. इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. OPPO Find X10 Pro Max की बिक्री भारत में Flipkart के जरिए होने की जानकारी दी गई है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;OPPO Find X10 की कीमत कितनी होगी?
भारत में OPPO Find X10 सीरीज में Find X10 और Find X10 Pro Max मॉडल आने की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Find X10 की शुरुआती कीमत करीब 89,990 रुपये हो सकती है, जबकि Pro Max मॉडल की कीमत लगभग 1,29,990 रुपये रहने का अनुमान है, हालांकि, कंपनी ने अभी आधिकारिक कीमत की पुष्टि नहीं की है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - इंटरनेट की स्पीड पर भी पड़ता है केबल का असर? CAT 6 और CAT 6A का अंतर समझें ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>6330mAh बैटरी वाला POCO X8s लॉन्च, जानें कैमरे और परफॉर्मेंस की डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ POCO ने अपनी X8 सीरीज में नया स्मार्टफोन POCO X8s लॉन्च किया है. यह फोन वियतनाम के बाजार में लॉन्च हुआ है और इसमें 6.35 इंच की स्क्रीन के साथ 6330mAh की बैटरी दी गई है. कंपनी ने इसमें Qualcomm का Snapdragon 7 Gen 4 प्रोसेसर, 120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले और 100W फास्ट चार्जिंग जैसे फीचर्स दिए हैं. फोन दो RAM और स्टोरेज वेरिएंट में उपलब्ध है, ऐसे में आइए जानते हैं कि इसकी कीमत और दूसरे खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
POCO X8s के खास फीचर्स क्या हैं?
POCO X8s में 6330mAh की बैटरी दी गई है जो 100W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसमें 22.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का फीचर भी मिलता है. कनेक्टिविटी के लिए 5G, 4G LTE, Wi-Fi, Bluetooth 5.4, USB Type-C और GPS जैसे ऑप्शन दिए गए हैं, फिलहाल, POCO X8s को वियतनाम में पेश किया गया है. भारत में इसकी लॉन्चिंग को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई आधिकारिक तारीख नहीं दी गई है.&amp;nbsp;
120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले
POCO X8s &amp;nbsp;में 6.35 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रेजोल्यूशन 1220 बाय 2656 पिक्सल है. इसकी स्क्रीन 120Hz तक के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. कंपनी के मुताबिक, डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 3,500 निट्स तक है. इसमें 12-बिट कलर डेप्थ और DCI-P3 वाइड कलर गैमट भी मिलता है. फोन के बेजल्स 1.18mm पतले हैं. साथ ही इसे धूल और पानी से सुरक्षा के लिए IP68 रेटिंग मिली है.&amp;nbsp;
Snapdragon प्रोसेसर से मिलेगी ताकत
POCO X8s में Qualcomm का Snapdragon 7 Gen 4 चिपसेट दिया गया है, जो 4nm प्रोसेस पर बना है. इसके साथ 12GB तक LPDDR5X RAM और 512GB तक UFS 4.0 स्टोरेज का ऑप्शन मिलता है. फोन Xiaomi के HyperOS 3 पर चलता है, जो Android 16 पर आधारित है.&amp;nbsp;
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POCO X8s का कैमरा कैसा है?
फोटोग्राफी के लिए फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें 50MP का मेन कैमरा है, जिसके साथ Light Fusion 800 सेंसर और ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) मिलता है. इसके अलावा 50MP का टेलीफोटो कैमरा और 8MP का अल्ट्रावाइड कैमरा भी दिया गया है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 32MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है.&amp;nbsp;
POCO X8s की कीमत और कलर ऑप्शन
POCO X8s को वियतनाम में दो कॉन्फिगरेशन में पेश किया गया है. इसके 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 11,500,000 वियतनामी डोंग है, जो भारतीय करेंसी में लगभग 42,000 रुपये होती है. वहीं 12GB RAM और 512GB स्टोरेज मॉडल की कीमत 14,000,000 वियतनामी डोंग यानी करीब 51,000 रुपये है. फोन ब्लैक, ब्लू और व्हाइट कलर में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>6330mAh, बैटरी, वाला, POCO, X8s, लॉन्च, जानें, कैमरे, और, परफॉर्मेंस, की, डिटेल</media:keywords>
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        <title>सोनिया गांधी का Insta डेब्यू, गांधी परिवार में कौन&amp;किसे करता है फॉलो?</title>
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        <description><![CDATA[ कांग्रेस की सबसे सीनियर नेता और संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आखिरकार इंस्टाग्राम की दुनिया में कदम रख दिया है. 79 साल की उम्र में सोनिया गांधी ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर अपना ऑफिशियल अकाउंट बनाकर सबको चौंका दिया. अब तक वह फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे किसी भी प्लेटफॉर्म से पूरी तरह दूर रहती थीं. लेकिन अपनी आने वाली आत्मकथा Belonging: A Journey of Love की पहली झलक दुनिया को दिखाने के लिए उन्होंने यह खास तरीका चुना.&amp;nbsp;
अपनी पहली पोस्ट में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह अपनी किताब के पन्ने पलटती और बेटी प्रियंका गांधी को मिठाई खिलाती नजर आ रही हैं. चलिए आपको बताते हैं इंस्टाग्राम पर गांधी परिवार के किन लोगों को फाॅलो करती हैं सोनिया गांधी और कौन अभी भी नहीं है फाॅलोइंग लिस्ट में शामिल.&amp;nbsp;
गांधी परिवार में किसे फॉलो कर रहीं सोनिया?
सोनिया गांधी के इंस्टाग्राम पर आते ही लोगों की नजर सबसे पहले उनकी फॉलोइंग लिस्ट पर गई. अकाउंट बनाते ही कुछ ही मिनटों में उनके हजारों फॉलोअर्स जुड़ गए. लेकिन खुद सोनिया गांधी ने बेहद चुनिंदा लोगों को ही फॉलो किया है. वह इंस्टाग्राम पर फिलहाल सिर्फ तीन अकाउंट्स को फॉलो कर रही हैं. जिनमें उनके बेटे राहुल गांधी, बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस पार्टी का ऑफिशियल पेज शामिल है.&amp;nbsp;
अपनी पहली Reel में भी उन्होंने राहुल, प्रियंका और अपनी किताब के पब्लिशर हार्परकॉलिन्स इंडिया को टैग किया है.&amp;nbsp;वहीं गांधी परिवार के बाकी सदस्यों की बात करें तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पहले से ही सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और एक-दूसरे को फॉलो करने के साथ-साथ मां सोनिया गांधी से जुड़ी यादें भी अक्सर शेयर करते रहते हैं.

रॉबर्ट वाड्रा और नाती रेहान से लेकर वरुण-मेनका लिस्ट से बाहर
सोनिया गांधी की इस छोटी सी फॉलोइंग लिस्ट में गांधी परिवार के ही कई चर्चित चेहरे गायब हैं. सोनिया गांधी ने अब तक अपने दामाद रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी के बेटे यानी अपने नाती रेहान राजीव वाड्रा को भी फॉलो नहीं किया है. जबकि रेहान और रॉबर्ट दोनों ही इंस्टाग्राम पर काफी एक्टिव रहते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
इसके अलावा परिवार के दूसरे धड़े की बात करें तो सोनिया गांधी ने अपनी देवरानी मेनका गांधी और भतीजे वरुण गांधी से भी इंस्टाग्राम पर दूरी बनाए रखी है. सियासी तौर पर अलग राहें होने की वजह से राहुल और प्रियंका भी मेनका या वरुण गांधी को फॉलो नहीं करते हैं और अब सोनिया गांधी के अकाउंट पर भी ठीक वैसा ही पैटर्न देखने को मिल रहा है.

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गांधी परिवार में&amp;nbsp; इंस्टाग्राम पर किसके सबसे ज्यादा फॉलोअर्स?
अगर पूरे गांधी परिवार की सोशल मीडिया पॉपुलैरिटी की बात करें, तो इंस्टाग्राम पर राहुल गांधी का दबदबा सबसे ज्यादा है. भारत जोड़ो यात्रा के बाद से राहुल की सोशल मीडिया रीच में जबरदस्त उछाल आया है और इंस्टाग्राम पर उनके 16 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. जो उन्हें परिवार का सबसे पॉपुलर चेहरा बनाते हैं. दूसरे नंबर पर उनकी बहन और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा आती हैं.&amp;nbsp;
जिन्हें 3 मिलियन के करीब लोग फॉलो करते हैं और उनके हर पोस्ट पर जबरदस्त एंगेजमेंट देखने को मिलती है. वहीं, वरुण गांधी और मेनका गांधी के भी इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स हैं जो अपने सियासी और सामाजिक कामों से जुड़े पोस्ट शेयर करते रहते हैं. इसके अलावा रॉबर्ट वाड्रा और युवा चेहरे के तौर पर रेहान वाड्रा और मिराया वाड्रा की भी अपनी एक अलग फैन फॉलोइंग है. अब देखना यह होगा कि डेब्यू के बाद खुद सोनिया गांधी फॉलोअर्स के मामले में कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं.
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सोनिया, गांधी, का, Insta, डेब्यू, गांधी, परिवार, में, कौन-किसे, करता, है, फॉलो</media:keywords>
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        <title>स्मार्टफोन में डुअल डिस्प्ले का नया अंदाज, Lava Aura Curve भारत में लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ Lava ने अपना नया स्मार्टफोन Aura Curve 5G भारत में लॉन्च किया है. इस फोन में कर्व्ड AMOLED स्क्रीन के साथ पीछे भी एक छोटी स्क्रीन दी गई है. इस पर समय, बैटरी और नोटिफिकेशन जैसी जरूरी जानकारी देख सकते हैं. इसके अलावा फोन में 6,000mAh की बड़ी बैटरी, 50MP का Sony कैमरा और MediaTek का प्रोसेसर दिया गया है. कंपनी ने इसे खास तौर पर ऑफलाइन रिटेल मार्केट को ध्यान में रखकर अपनी नई Aura सीरीज के पहले मॉडल के तौर पर पेश किया है. तो आइए जानते हैं कि इसकी कीमत और खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
Lava Aura Curve 5G के खास फीचर्स क्या हैं?&amp;nbsp;Lava Aura Curve 5G में 6.67 इंच की फुल-HD+ 3D कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले दी गई है. इसका रिफ्रेश रेट 120Hz है और स्क्रीन की पीक ब्राइटनेस 1,100 निट्स तक जाती है. इसमें 1,920Hz PWM डिमिंग सपोर्ट भी मिलता है. फोन के पिछले हिस्से में कैमरा मॉड्यूल के नीचे एक छोटी डिस्प्ले दी गई है. इस पर समय, बैटरी लेवल, नोटिफिकेशन और अपनी पसंद के मैसेज दिखाए जा सकते हैं. इसके अलावा इस छोटी स्क्रीन से म्यूजिक कंट्रोल करने की सुविधा भी मिलती है.&amp;nbsp;
प्रोसेसर, रैम और AI फीचर्स
Lava Aura Curve 5G में 6nm तकनीक पर बना MediaTek Dimensity 7100 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है, जिसकी क्लॉक स्पीड 2.4GHz तक है. इसमें 6GB LPDDR5 रैम और 128GB UFS 2.2 स्टोरेज मिलती है. वर्चुअल रैम की मदद से रैम को 6GB तक और बढ़ाया जा सकता है. फोन Android 16 पर चलता है. कंपनी इसमें दो साल तक OS अपग्रेड और तीन साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही है. इसमें AI Circle Search, AI Call Summary और 80 भाषाओं को सपोर्ट करने वाला AI Voice Translation जैसे Vayu AI फीचर्स भी मिलते हैं.&amp;nbsp;
Lava Aura Curve 5G का कैमरा और बैटरी कैसे हैं?
फोटोग्राफी के लिए फोन में Sony IMX752 सेंसर वाला 50MP का रियर कैमरा दिया गया है, जो इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबिलाइजेशन (EIS) और 2K वीडियो रिकॉर्डिंग सपोर्ट करता है. इसमें नाइट मोड, प्रो वीडियो, डुअल-व्यू वीडियो, मोशन फोटो और स्पोर्ट्स मोड जैसे ऑप्शन हैं. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 13MP का फ्रंट कैमरा मिलता है. फोन में 6,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. बॉक्स में कंपनी 33W का चार्जर देती है.&amp;nbsp;
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मजबूती के लिए भी खास इंतजाम
Lava Aura Curve 5G में IP64 रेटिंग दी गई है. इसके साथ MIL-STD-810H मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन, IronGuard Protection और Al-Si DT Star 2 कवर ग्लास भी मिलता है. फोन में इंफ्रारेड ब्लास्टर, डुअल स्टीरियो स्पीकर और डुअल-माइक्रोफोन नॉइज कैंसिलेशन की सुविधा भी दी गई है.&amp;nbsp;
Lava Aura Curve 5G की कीमत कितनी है?
Lava Aura Curve 5G को भारत में 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले सिंगल वेरिएंट में लॉन्च किया गया है. इसकी कीमत 23,999 रुपये रखी गई है. यह स्मार्टफोन Ambar Blue और Him Silver कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. इसे देशभर में कंपनी के ऑफलाइन रिटेल नेटवर्क के जरिए खरीद सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>बिना तार कैसे गर्म होती है कॉर्डलेस प्रेस? जानें इसकी टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ कपड़ों पर पड़ी सिलवटें हटाने के लिए प्रेस का यूज तो लगभग हर घर में होता है. आमतौर पर कपड़ों पर प्रेस करते समय उसके तार को संभालना पड़ता है. कई बार यही तार कपड़ों के बीच आ जाता है या प्रेस को हर साइड में घुमाने में परेशानी पैदा करती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए कॉर्डलेस स्टीम प्रेस को डिजाइन किया गया है. इसमें बार-बार तार खींचने या उसके उलझने की चिंता किए बिना कपड़ों पर प्रेस की जा सकती है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इस प्रेस को बिजली की जरूरत ही नहीं होती है. तो आइए जानते हैं कि बिना तार कॉर्डलेस प्रेस कैसे गर्म होती है और कॉर्डलेस प्रेस के अंदर कौन-सी तकनीक काम करती है.&amp;nbsp;
बिना तार कॉर्डलेस प्रेस कैसे गर्म होती है?
कॉर्डलेस स्टीम प्रेस सामान्य प्रेस की तरह ही कपड़ों की सिलवटें हटाने के लिए गर्मी और भाप का यूज करती है. इसे यूज करते समय बिजली का तार लगातार जुड़ा होना जरूरी नहीं होता है. इसमें एक चार्जिंग या हीटिंग बेस दिया जाता है, जो बिजली से जुड़कर प्रेस को गर्म करता है. इस प्रेस में पानी रखने के लिए टैंक, गर्मी पैदा करने वाला हीटिंग एलिमेंट, भाप बनाने वाला चैंबर और कपड़ों के संपर्क में आने वाली सोलप्लेट होती है. ये सभी हिस्से मिलकर कपड़ों को आसानी से प्रेस करने में मदद करते हैं.&amp;nbsp;
कॉर्डलेस प्रेस के अंदर कौन-सी तकनीक काम करती है?
कॉर्डलेस प्रेस के अंदर कई हिस्से मिलकर काम करते हैं. इसमें हीटिंग एलिमेंट होता है, जिसमें निक्रोम तार लगा होता है. बिजली मिलने पर यह तार गर्म होता है और प्रेस को गर्म करने में मदद करता है. इसमें एक पानी का टैंक भी होता है, जिसमें पानी भरा जाता है. इसके बाद स्टीम जनरेटर गर्मी की मदद से पानी को भाप में बदलता है. यह भाप प्रेस की निचली सतह पर बने छोटे-छोटे छेदों से बाहर निकलती है और कपड़ों की सिलवटें हटाने में मदद करती है. प्रेस के निचले सपाट हिस्से को सोलप्लेट कहते हैं. यह स्टेनलेस स्टील या सिरेमिक से बनी हो सकती है और कपड़ों पर आसानी से चलकर गर्मी और भाप को समान रूप से पहुंचाती है.&amp;nbsp;
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कैसे यूज की जाती है कॉर्डलेस प्रेस?
सबसे पहले प्रेस को उसके बेस पर रखकर बिजली से गर्म किया जाता है. इसके बादपानी के टैंक को तय लेवल तक भरना होता है. जब प्रेस तैयार हो जाती है, तो इसे बेस से उठाकर कपड़ों पर चलाया जा सकता है. जरूरत के अनुसार स्टीम बटन दबाकर भाप भी छोड़ी जा सकती है. कुछ समय यूज करने के बाद प्रेस को दोबारा बेस पर रखना पड़ता है, जिससे वह फिर से गर्म हो सके. इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान होता है. इसके अलावा कुछ मॉडल में वर्टिकल स्टीम और अलग-अलग स्टीम सेटिंग जैसे फीचर्स भी मिलते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन जेब में, कॉल और मैसेज PC पर! Android&amp;Windows कनेक्शन ऐसे करें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-जेब-में-कॉल-और-मैसेज-pc-पर-android-windows-कनेक्शन-ऐसे-करें</link>
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        <description><![CDATA[ काम करते समय बार-बार फोन की स्क्रीन देखना कई बार परेशानी बन जाता है. कभी किसी मैसेज का जवाब देना होता है, तो कभी जरूरी कॉल या नोटिफिकेशन चेक करने के लिए कंप्यूटर से ध्यान हटाना पड़ता है. अगर आप भी लैपटॉप या PC पर काम करते हुए फोन को बार-बार हाथ में लेने से बचना चाहते हैं, तो Microsoft का Phone Link फीचर आपके काम आ सकता है.
इसकी मदद से Android स्मार्टफोन को Windows PC से कनेक्ट किया जा सकता है. इसके बाद कंप्यूटर की स्क्रीन से ही मैसेज पढ़ने, कॉल करने और नोटिफिकेशन देखने जैसे काम किए जा सकते हैं. इतना ही नहीं, Android फोन में मौजूद हाल की तस्वीरों को भी PC पर देखा और दूसरी ऐप्स में यूज किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि Phone Link की मदद से फोन और कंप्यूटर को कैसे कनेक्ट करें.&amp;nbsp;
क्या है Microsoft Phone Link?
Phone Link माइक्रोसॉफ्ट का एक ऐप है, जो स्मार्टफोन और Windows कंप्यूटर के बीच कनेक्शन बनाने में मदद करता है. इसके जरिए यूजर अपने फोन की कई सुविधाओं का यूज सीधे PC से कर सकते हैं. इसके लिए हर बार फोन अनलॉक करने की जरूरत नहीं पड़ती है. यह सुविधा Android स्मार्टफोन और iPhone के लिए उपलब्ध है, हालांकि दोनों में मिलने वाले फीचर्स अलग हो सकते हैं.
ऐसे करें Android फोन को Windows PC से कनेक्ट
1. अपने Windows PC के टास्कबार में सर्च बॉक्स खोलें और Phone Link टाइप करके ऐप शुरू करें.&amp;nbsp;
2. ऐप में Android ऑप्शन चुनें और अपने Microsoft अकाउंट से साइन इन करें.&amp;nbsp;
3. कंप्यूटर पर दिए गए निर्देशों के अनुसार फोन में Link to Windows ऐप इंस्टॉल करें या पहले से मौजूद ऐप खोलें. इसके लिए PC पर दिखने वाले लिंक का यूज कर सकते हैं.&amp;nbsp;
4. फोन में उसी Microsoft अकाउंट से लॉगिन करें, जिसका यूज कंप्यूटर पर किया है.&amp;nbsp;
5. &amp;nbsp;PC पर Pair with QR code ऑप्शन चुनें. इसके बाद फोन में Link to Windows ऐप के जरिए कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिख रहे QR कोड को स्कैन करें.&amp;nbsp;
6. कनेक्शन पूरा होने पर फोन में मांगी गई जरूरी परमिशन दें. इससे ऐप को मैसेज, कॉन्टैक्ट्स, कॉल और अन्य संबंधित सुविधाओं तक पहुंच मिल सकेगी.&amp;nbsp;
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फोन और PC को कनेक्ट करने के लिए क्या जरूरी है?
इस सुविधा का यूज करने के लिए PC में Windows 10 का अपडेट या इससे नया वर्जन होना चाहिए. वहीं Android फोन में Android 7.0 या उससे नया वर्जन जरूरी है. कंप्यूटर में Phone Link और Android फोन में Link to Windows ऐप की जरूरत पड़ती है. साथ ही दोनों डिवाइस पर एक ही Microsoft अकाउंट से साइन इन करना होगा. कनेक्शन के लिए Wi-Fi, मोबाइल डेटा या इंस्टेंट हॉटस्पॉट का यूज किया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>कमरा जल्दी गर्म करेगा ब्लोअर या ऑयल हीटर? दोनों की टेक्नोलॉजी समझें</title>
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        <description><![CDATA[ सर्दियों में ठंड बढ़ते ही घर के लिए ऐसा हीटर चुनने की जरूरत महसूस होने लगती है, जो कमरे को जल्दी गर्म कर सके और लंबे समय तक आरामदायक माहौल बनाए रखे. इसके लिए बाजार में ब्लोअर और ऑयल हीटर जैसे ऑप्शन मौजूद हैं, लेकिन इन दोनों का काम करने का तरीका अलग है. जहां ब्लोअर कुछ ही समय में गर्म हवा देने लगता है, वहीं ऑयल हीटर धीरे-धीरे गर्म होकर कमरे में लंबे समय तक गर्माहट बनाए रखने में मदद करता है. ऐसे में सवाल है कि इन दोनों में से कौन-सा हीटर आपके कमरे के लिए बेहतर रहेगा. तो आइए जानते हैं कि ब्लोअर या ऑयल हीटर कौन कमरा जल्दी गर्म करेगा.&amp;nbsp;
ब्लोअर हीटर कैसे करता है काम?
इलेक्ट्रिक ब्लोअर हीटर में मेटल कॉइल या सिरेमिक हीटिंग एलिमेंट का यूज होता है. बिजली चालू होते ही यह गर्म होने लगता है और इसके साथ लगा पंखा गर्म हवा को कमरे में फैलाता है. इससे थोड़े समय में आसपास का तापमान बढ़ने लगता है. इसकी कॉम्पैक्ट बनावट और हल्के वजन के कारण इसे एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जाना भी आसान होता है. छोटे बेडरूम, स्टडी रूम और ऑफिस केबिन जैसी जगहों पर यह यूजफुल हो सकता है, हालांकि पंखे की आवाज सुनाई दे सकती है और लंबे समय तक गर्म हवा चलने से कमरे में सूखापन महसूस हो सकता है.&amp;nbsp;
ऑयल हीटर की टेक्नोलॉजी क्या है?
ऑयल हीटर में मेटल के पैनल या फिन के अंदर खास तेल भरा होता हैय हीटिंग एलिमेंट इस तेल को गर्म करता है, जिसके बाद धातु की सतह से गर्मी आसपास की हवा तक पहुंचती है. इस प्रक्रिया में समय लगता है, इसलिए कमरे को गर्म करने में ब्लोअर के मुकाबले ज्यादा देर लग सकती है. इसकी खासियत यह है कि बिजली बंद होने के बाद भी गर्म तेल और मेटल के कारण कुछ समय तक गर्माहट बनी रहती है. इसमें पंखे की जरूरत नहीं होती है, हालांकि इसका वजन ज्यादा होता है और इसकी कीमत भी आमतौर पर ब्लोअर से ज्यादा होती है.&amp;nbsp;
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ब्लोअर या ऑयल हीटर कौन कमरा जल्दी गर्म करेगा
ब्लोअर उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है, जिन्हें कम समय में गर्मी चाहिए और हीटर को अलग-अलग कमरों में यूज करना है. वहीं &amp;nbsp;ऑयल हीटर उन लोगों के लिए यूजफुल है, जिन्हें लंबे समय तक आरामदायक गर्माहट चाहिए. साथ ही बिजली की खपत के मामले में दोनों की क्षमता और यूज का समय देखना जरूरी है. लंबे समय तक हीटर चलाने से बिजली का खर्च बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
हीटर खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
हीटर चुनने से पहले कमरे का साइज , बिजली की खपत, कीमत और सुरक्षा फीचर्स जरूर देखें. छोटे कमरे के लिए 1000 से 1500 वॉट का हीटर सही हो सकता है, जबकि मीडियम साइज के कमरे में 1500 से 2000 वॉट और बड़े कमरे में 2000 वॉट से ज्यादा क्षमता की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा ओवरहीटिंग से बचाव, गिरने पर अपने आप बंद होने की सुविधा और ISI सर्टिफिकेशन पर भी ध्यान दें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>इंटरनेट की स्पीड पर भी पड़ता है केबल का असर? CAT 6 और CAT 6A का अंतर समझें</title>
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        <description><![CDATA[ इंटरनेट की स्पीड पर भी पड़ता है केबल का असर? CAT 6 और CAT 6A का अंतर समझें ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>पानी का TDS मापना क्यों जरूरी? प्यूरीफायर की इस टेक्नोलॉजी को समझें</title>
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        <description><![CDATA[ घर में आने वाला पानी अगर साफ दिखता है और उसका टेस्ट भी अच्छा है, तो जरूरी नहीं कि वह पीने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो. पानी में कई ऐसी चीजें मिली हो सकती हैं, जिन्हें हम देख नहीं सकते हैं. ऐसे में इनकी मात्रा का पता लगाने के लिए TDS की जांच की जाती है. टेक्नोलॉजी की मदद से अब TDS मीटर और वाटर प्यूरीफायर के जरिए पानी में मौजूद घुले हुए तत्वों को मापने और उनकी मात्रा कम करने में मदद मिलती है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि TDS क्या होता है, इसका स्तर पानी की क्वालिटी को कैसे प्रभावित करता है और पानी को साफ करने में RO प्यूरीफायर कैसे मदद करता है. तो आइए जानते हैं कि पानी का TDS मापना क्यों जरूरी है.&amp;nbsp;
क्या होता है पानी का TDS?
TDS का पूरा नाम Total Dissolved Solids है. इससे पता चलता है कि पानी में नमक और दूसरी चीजें कितनी मात्रा में घुली हुई हैं. इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड, सल्फेट और दूसरे घुले हुए तत्व शामिल हो सकते हैं. ये नैचुरल स्रोतों से पानी में आ सकते हैं, जबकि फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी, नालों का पानी, खेती में यूज होने वाले रसायन और शहरों में बहने वाला बारिश का पानी भी पानी में घुले तत्वों की मात्रा बढ़ा सकते हैं. TDS को आमतौर पर PPM यानी Parts Per Million या mg/L में मापा जाता है. इसकी मात्रा बढ़ने से पानी का टेस्ट नमकीन या कड़वा हो सकता है.&amp;nbsp;
पानी का TDS मापना क्यों जरूरी?
पानी का TDS मापने से पता चलता है कि उसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, नमक और दूसरे घुले हुए तत्वों की कुल मात्रा कितनी है. टेक्नोलॉजी के इस दौर में TDS मीटर की मदद से घर पर ही पानी में घुले इन तत्वों का स्तर जांचा जा सकता है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि पानी को साफ करने के लिए RO जैसे वाटर प्यूरीफायर की जरूरत हो सकती है या नहीं, हालांकि सिर्फ TDS की रीडिंग से पानी के पूरी तरह सुरक्षित होने का पता नहीं चलता है. इसमें मौजूद हानिकारक केमिकल और बैक्टीरिया की जांच के लिए दूसरे टेस्ट भी जरूरी हैं.
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RO टेक्नोलॉजी कैसे कम करती है TDS?
वाटर प्यूरीफायर में RO टेक्नोलॉजी पानी में मिले अतिरिक्त नमक और दूसरी खराब चीजों को हटाकर उसे साफ करने में मदद करती है. इस प्रक्रिया में पानी को तेज दबाव से एक खास पतली फिल्टर परत से गुजारा जाता है. यह पतली फिल्टर परत पानी को निकलने देती है, लेकिन उसमें घुले कई नमक और दूसरी खराब चीजों को रोक लेती है. RO प्यूरीफायर खासतौर पर उन स्रोतों के पानी के लिए यूजफुल हो सकते हैं, जिनमें TDS ज्यादा हो. वहीं UV और UF जैसी टेक्नोलॉजी का यूज मुख्य रूप से माइक्रोबियल सुरक्षा के लिए किया जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चार्जर का साइज छोटा, चार्जिंग पावर ज्यादा; जानें GaN का टेक्नोलॉजी फॉर्मूला</title>
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        <description><![CDATA[ चार्जर का साइज छोटा, चार्जिंग पावर ज्यादा; जानें GaN का टेक्नोलॉजी फॉर्मूला ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>स्मार्टफोन बैटरी की अगली पीढ़ी है Silicon&amp;Carbon? जानें Lithium&amp;Ion से कितना अलग</title>
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        <description><![CDATA[ फोन में फीचर्स जितने बढ़ रहे हैं, उतनी ही जरूरत ऐसी बैटरी की महसूस हो रही है, जो कम जगह में ज्यादा पावर स्टोर कर सके और जल्दी चार्ज भी हो जाए. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए स्मार्टफोन कंपनियां Silicon-Carbon बैटरी टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं. इस तकनीक की मदद से अब फोन में 8,000mAh और 10,000mAh तक की बैटरी क्षमता देना संभव हो रहा है, हालांकि Silicon-Carbon बैटरी को Lithium-Ion से पूरी तरह अलग तकनीक समझना सही नहीं है. यह पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी का ही नया रूप है. इसमें बैटरी के अंदर इस्तेमाल होने वाली एक जरूरी चीज को बदल दिया जाता है. तो आइए जानते हैं कि दोनों टेक्नोलॉजी में क्या अंतर है और Silicon-Carbon बैटरी स्मार्टफोन के लिए क्यों चर्चा में है.&amp;nbsp;
स्मार्टफोन बैटरी की अगली पीढ़ी है Silicon-Carbon?
पारंपरिक Lithium-Ion बैटरी में आमतौर पर ग्रेफाइट का इस्तेमाल एनोड के रूप में होता है. वहीं Silicon-Carbon बैटरी में सिलिकॉन और कार्बन को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है. सिलिकॉन ज्यादा लिथियम आयन स्टोर कर सकता है, जबकि कार्बन बैटरी का स्ट्रक्चर और बिजली के प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इससे कम जगह में ज्यादा एनर्जी स्टोर करने की संभावना बढ़ जाती है.
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Lithium-Ion से कितनी अलग है यह टेक्नोलॉजी?
यह दोनों बैटरियां लिथियम-आयन तकनीक पर आधारित हैं. इनमें मेन अंतर एनोड में इस्तेमाल होने वाले सामान का है. पारंपरिक बैटरी में ग्रेफाइट की क्षमता सीमित होती है, जबकि सिलिकॉन ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकता है. इसी वजह से कंपनियां छोटे साइज में बड़ी बैटरी देने की कोशिश कर रही हैं. यह तकनीक खासतौर पर पतले स्मार्टफोन और फोल्डेबल फोन के लिए यूजफुल हो सकती है.&amp;nbsp;
ज्यादा बैटरी और फास्ट चार्जिंग का फायदा
Silicon-Carbon टेक्नोलॉजी से फोन में ज्यादा क्षमता वाली बैटरी फिट करने में मदद मिल सकती है. वहीं इस तकनीक का इस्तेमाल बड़े बैटरी पैक के साथ फास्ट चार्जिंग को बेहतर बनाने के लिए भी किया जा रहा है, हालांकि फोन कितनी देर चलेगा, यह उसके प्रोसेसर, डिस्प्ले, नेटवर्क और इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है. इस टेक्नोलॉजी की एक बड़ी चुनौती सिलिकॉन का फैलना और सिकुड़ना है. चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के दौरान ऐसा होने से समय के साथ बैटरी की क्षमता प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>स्मार्टफोन, बैटरी, की, अगली, पीढ़ी, है, Silicon-Carbon, जानें, Lithium-Ion, से, कितना, अलग</media:keywords>
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        <title>स्मार्ट TV से गेमिंग तक, कितने Wi&amp;Fi बैंड वाला राउटर है आपके काम का?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्ट TV से गेमिंग तक, कितने Wi-Fi बैंड वाला राउटर है आपके काम का? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>कम हो रही आपके इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज? चार्जिंग के वक्त अपनाएं ये 3 आदतें</title>
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        <description><![CDATA[ पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से तंग आकर कई लोगों ने इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीद तो लिया लेकिन कुछ ही महीनों बाद एक शिकायत सामने आने लगती है. शुरुआत में जो स्कूटर फुल चार्ज पर 100 या 120 किलोमीटर तक आराम से दौड़ता था धीरे-धीरे उसकी रेंज 70-80 किलोमीटर पर आकर सिमट जाती है. ऐसे में लोग सोचने लगते हैं कि स्कूटर कंपनी ने बैटरी घटिया क्वालिटी की दी है.&amp;nbsp; लेकिन इनमें से ज्यादातर मामलों में दिक्कत स्कूटर की बैटरी में नहीं बल्कि उसे चार्ज करने के हमारे गलत तरीकों में होती है.
लिथियम-आयन बैटरी बेहद संवेदनशील होती है और हमारी छोटी-छोटी गलतियां उसकी लाइफ और ड्राइविंग रेंज दोनों को तेजी से गिरा देती हैं. अगर आप भी हर दिन रेंज घटने की परेशानी से दो-चार हो रहे हैं तो चार्जिंग के दौरान बस 3 आसान आदतें अपनाकर अपने स्कूटर को पहले जैसा दमदार बना सकते हैं.
राइड खत्म होते ही तुरंत चार्जर लगाने से बचें
अक्सर लोग ऑफिस से घर लौटते ही सबसे पहला काम यह करते हैं कि स्कूटर खड़ा किया और तुरंत चार्जर का प्लग ऑन कर दिया. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अपनी यह आदत आज ही बदल लीजिए. जब आप स्कूटर को 10-15 किलोमीटर या फिर उससे ज्यादा चलाते हैं, तो मोटर के साथ-साथ बैटरी पैक का टेंपरेचर भी काफी बढ़ जाता है. गर्म बैटरी में अचानक हाई वोल्टेज करंट डालने से उसके सेल्स पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है.&amp;nbsp;
इससे बैटरी का केमिकल कंपोजिशन तेजी से डैमेज होने लगता है. जिसे थर्मल स्ट्रेस कहते हैं. इसका सीधा असर स्कूटर की ओवरऑल रेंज पर पड़ता है. हमेशा ध्यान रखें कि लंबी राइड के बाद स्कूटर को कम से कम 20 से 30 मिनट तक किसी छायादार जगह पर खड़ा रहने दें. जब बैटरी का टेंपरेचर नॉर्मल कमरे के टेंपरेचर जितना ठंडा हो जाए तभी चार्जर कनेक्ट करें.

20 से 80 प्रतिशत वाला रूल फॉलो करें
Phone की तरह हम इलेक्ट्रिक स्कूटर को भी तब तक चलाते रहते हैं जब तक डिस्प्ले पर 2-3% बैटरी न दिखने लगे, और फिर रातभर उसे 100% तक चार्ज होने के लिए छोड़ देते हैं. यह तरीका बैटरी की सेहत के लिए खतकनाक साबित होता है. लिथियम-आयन बैटरी को 0% तक ले जाना या लगातार 100% पर फुल चार्ज रखना दोनों ही सिचुएशन्स में भारी इंटरनल रेजिस्टेंस पैदा करता है.&amp;nbsp;
बैटरी को सही रखने के लिए हमेशा 20-80 रूल फाॅलो करें. यानी जैसे ही बैटरी का लेवल 20% के आसपास पहुंचे उसे तुरंत चार्ज पर लगा दें और 80 से 85% चार्ज होते ही प्लग निकाल लें. हफ्ते या महीने में सिर्फ एक या दो बार ही बैटरी को पूरा 100% तक चार्ज करें जिससे उसके सभी सेल्स ठीक से कैलिब्रेट हो सकें. इस ट्रिक से आपकी बैटरी की लाइफ सालों-साल नई जैसी बनी रहेगी.

यह भी पढ़ें: Wi-Fi का सिग्नल फुल, फिर भी इंटरनेट स्लो? जानें क्या है वजह
लोकल चार्जर से चार्ज न करें&amp;nbsp;
जल्दबाजी के चक्कर में कई लोग किसी भी अनब्रांडेड या लोकल फास्ट चार्जर से स्कूटर चार्ज करने की गलती कर बैठते हैं. हमेशा याद रखें कि स्कूटर के साथ मिले ओरिजिनल चार्जर या फिर कंपनी द्वारा ऑथराइज्ड चार्जर का ही इस्तेमाल करें. लोकल चार्जर का वोल्टेज फ्लक्चुएशन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को पूरी तरह बिगाड़ सकता है. जिससे आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसके अलावा बहुत से लोगों की आदत होती है कि रात को सोते समय चार्जर ऑन कर दिया और सुबह आंख खुलने पर बंद किया.&amp;nbsp;
भले ही मॉडर्न स्कूटर्स में ऑटो-कट की सुविधा मिलती है लेकिन पूरी रात चार्जर प्लग-इन रहने से बैकग्राउंड में ट्रिकल चार्जिंग चलती रहती हैजो बैटरी सेल्स को लगातार गर्म रखती है. इसलिए टाइमर का इस्तेमाल करें और जरूरत पूरी होते ही पावर स्विच बंद कर दें जिससे आपकी बैटरी हमेशा लंबी रेंज देती रहे.
यह भी पढ़ें: क्यों आया है फोन? आपके बात करने से पहले ही पूछ लेगा WhatsApp ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Apple के फोल्डेबल iPhone की बैटरी कितनी बड़ी? कैपेसिटी का खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/apple-के-फोल्डेबल-iphone-की-बैटरी-कितनी-बड़ी-कैपेसिटी-का-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ Apple के पहले फोल्डेबल फोन iPhone Duo की बैटरी से जुड़ी जानकारी सामने आई है. यूरोप के एनर्जी लेबलिंग डेटाबेस में दिए गए दस्तावेज के मुताबिक, इस फोन में कितनी क्षमता की बैटरी मिलेगी, इसका खुलासा हो गया है. यह फोन 23 अक्टूबर से Apple के ऑनलाइन स्टोर और कुछ पार्टनर दुकानों पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि Apple के फोल्डेबल iPhone की बैटरी कितनी बड़ी है.&amp;nbsp;
iPhone Duo में कितनी बड़ी बैटरी मिलेगी?
यूरोप के European Product Registry for Energy Labelling (EPREL) डेटाबेस के मुताबिक, Apple के फोल्डेबल iPhone Duo में 4,883mAh की बैटरी दी गई है.डॉक्यूमेंट के मुताबिक, फोन एक बार चार्ज करने पर 51 घंटे 30 मिनट तक की बैटरी एंड्योरेंस रेटिंग भी रखता है. इस फोन में एक बड़ी बैटरी की जगह दो अलग-अलग बैटरी सेल दिए गए हैं. इनमें से एक की कैपेसिटी 2,962mAh और दूसरी की 1,921mAh है. दोनों को मिलाकर कुल कैपेसिटी 4,883mAh होती है. फोल्डेबल डिजाइन में हिंज और दो डिस्प्ले के लिए भी जगह चाहिए, ऐसे में बैटरी को दो हिस्सों में रखना इस डिजाइन का हिस्सा है.
दूसरे iPhone मॉडल्स से कितनी अलग है बैटरी?
बैटरी कैपेसिटी के मामले में iPhone Duo, iPhone 18 Pro से आगे है. iPhone 18 Pro में 4,288mAh की बैटरी बताई गई है. वहीं iPhone 18 Pro Max में 5,567mAh की बैटरी मिलती है, जो फोल्डेबल मॉडल से बड़ी है. iPhone Duo की बैटरी कैपेसिटी iPhone 16 Pro Max की 4,685mAh बैटरी से भी ज्यादा है, हालांकि सिर्फ mAh देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि फोन कितनी देर चलेगा. डिस्प्ले, प्रोसेसर, सॉफ्टवेयर और इस्तेमाल करने का तरीका भी बैटरी लाइफ पर असर डालते हैं.
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किस स्क्रीन पर कितनी चलेगी बैटरी?
Apple के मुताबिक, iPhone Duo की छोटी बाहरी स्क्रीन पर वीडियो प्लेबैक 44 घंटे तक चल सकता है. वहीं अंदर की बड़ी फोल्डेबल स्क्रीन पर यह समय 31 घंटे तक बताया गया है. वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए कंपनी का अनुमान बाहरी स्क्रीन पर 37 घंटे और अंदर की स्क्रीन पर 26 घंटे तक का है. फोन सामान्य इस्तेमाल में 24 घंटे तक चलने का दावा भी करता है.&amp;nbsp;
भारत में कितनी है कीमत?
iPhone Duo की भारत में शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है. इसके बेस वेरिएंट में 256GB स्टोरेज मिलता है. फोन में 7.6 इंच की फोल्डेबल Super Retina XDR स्क्रीन और 5.4 इंच की कवर स्क्रीन दी गई है. इसमें Apple का A20 Pro चिपसेट और डुअल रियर कैमरा यूनिट भी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>क्यों आया है फोन? आपके बात करने से पहले ही पूछ लेगा WhatsApp</title>
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        <description><![CDATA[ क्यों आया है फोन? आपके बात करने से पहले ही पूछ लेगा WhatsApp ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>गैजेट्स के बाद अब गरमा&amp;गरम खाना भी डिलीवर करेगा Flipkart</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में जब भी किसी को जनया स्मार्टफोन, कपड़े या फिर घर का कोई सामान मंगाना होता है. तो वह पहले&amp;nbsp; अपने फोन में Flipkart खोलता है. यही वजह है कि आज यह ई-काॅमर्स मार्केट में भारत की सबसे बड़ी कंपनी है. अब Flipkart अपने यूजर्स को एक और बढ़िया एक्सपीरिएंश देने जा रहा है. अबतक लोग जहां Flipkart से कपड़े, फोन और इलेक्ट्रिक आइटम्स मंगाते थे&amp;nbsp;अब वह अपनी पसंदीदा बिरयानी, पिज्जा और गरमा-गरम छोले-भटूरे भी मंगा सकते हैं.
ई-कॉमर्स में नंबर वन Flipkart अब ऑनलाइन फूड डिलीवरी के मैदान में उतरने की तैयारी कर चुका है. कंपनी अपनी इस नई सर्विस को Eat-in by Minutes नाम से लाने जा रही है. अभी तक इस मार्केट में सिर्फ Zomato और Swiggy का ही बोलबाला रहा है. लेकिन Flipkart की एंट्री से इसमें तगड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा. आपको बता दें कंपनी ने बेंगलुरु में इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया है और माना जा रहा है कि अक्टूबर के आखिर तक इसे आम लोगों के लिए भी शुरू किया जा सकता है.
एक ही ऐप में मिलेगा सब कुछ
कंपनी कोई भी नई सर्विस सीधे ग्राहकों के सामने पेश करने से पहले उसे खुद अच्छे से परखना चाहती है. शुरुआत में Flipkart ने अपने कुछ चुनिंदा कर्मचारियों के साथ ही इस फूड डिलीवरी सर्विस का ट्रायल शुरू किया था. लेकिन ताजा रिपोर्ट्स की मानें तो अब कंपनी के करीब 8000 से ज्यादा कर्मचारी रोज इस सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं और खाना ऑर्डर कर रहे हैं.&amp;nbsp; कंपनी फिलहाल समझ रही है कि ऑर्डर करने से लेकर खाना पहुंचने तक का एक्सपीरियंस कैसा रहता है और अगर कोई तकनीकी दिक्कत आती है.
तो उसे लॉन्च से पहले ही ठीक कर लिया जाए. आम यूजर्स के लिए सबसे अच्छी बात यह होगी कि उन्हें खाना मंगाने के लिए फोन में कोई नया ऐप डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा. आपके मौजूदा Flipkart ऐप के अंदर ही एक अलग टैब जुड़ जाएगा जहां से आप शॉपिंग और ग्रॉसरी के साथ-साथ खाना भी ऑर्डर कर पाएंगे.

ONDC से जुड़े रेस्टोरेंट&amp;nbsp;
फूड डिलीवरी के बिजनेस में सबसे बड़ी चुनौती होती है ज्यादा से ज्यादा रेस्टोरेंट को अपने साथ जोड़ना और समय पर गरमा-गरम खाना ग्राहक के दरवाजे तक पहुंचाना. इसके लिए भी कंपनी ने बड़ा तगड़ा प्लान तैयार किया है. Flipkart इस सर्विस के लिए कई बड़े और लोकल रेस्टोरेंट से सीधे हाथ मिला रहा है. इतना ही नहीं कंपनी सरकार के सपोर्ट वाले नेटवर्क यानी ONDC (Open Network for Digital Commerce पर मौजूद रेस्टोरेंट को भी अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ रही है.&amp;nbsp;जिससे लोगों को खाने के कई सारे ऑप्शन मिल सकें.
Ekart के डिलीवरी नेटवर्क&amp;nbsp;
वहीं खाने की डिलीवरी की जिम्मेदारी संभालने के लिए कंपनी अपनी खुद की लॉजिस्टिक्स यूनिट Ekart के जरिए एक अलग डिलीवरी टीम तैयार कर रही है. चूंकि सामान्य पार्सल डिलीवर करने और गरमा-गरम खाना पहुंचाने में बहुत फर्क होता है इसलिए फूड ऑर्डर्स को फटाफट हैंडल करने के लिए अलग से राइडर्स का नेटवर्क बनाया जा रहा है.
ग्राहकों को होगा फायदा
फिलहाल भारत के ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट पर Zomato और Swiggy का पूरी तरह से कब्जा है. कई बार लोग डिलीवरी चार्ज और प्लेटफॉर्म फीस बढ़ने की शिकायत भी करते हैं. क्योंकि बाजार में कोई तीसरा बड़ा ऑप्शन मौजूद नहीं है. ऐसे में Flipkart जैसे बड़े ब्रांड के आने से इन दोनों कंपनियों की टेंशन जरूर बढ़ सकती है. Flipkart के पास पहले से ही करोड़ों ग्राहकों का डेटाबेस है और उनका डिलीवरी नेटवर्क भी देश के कोने-कोने तक फैला हुआ है.&amp;nbsp;जिसका सीधा फायदा कंपनी को मिलेगा.&amp;nbsp;

यह भी पढ़ें: Google पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करना पड़ सकता है भारी, रिफंड के नाम पर हो रही ठगी
जल्द शुरू हो सकती है सर्विस
रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरु में टेस्टिंग सफल होने के बाद कंपनी इस साल के आखिर तक देश के पांच से छह बड़े शहरों में अपनी फूड डिलीवरी सर्विस शुरू कर सकती है. हालांकि कंपनी ने अभी तक लॉन्च की किसी तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. लेकिन इतना तय है कि इस नई टक्कर से ग्राहकों को सस्ते ऑफर्स और बेहतर सर्विस का एक शानदार ऑप्शन जरूर मिलने वाला है.
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Google पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करना पड़ सकता है भारी, रिफंड के नाम पर हो रही ठगी</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन शॉपिंग करते वक्त अगर गलत सामान आ जाए या फिर UPI पेमेंट करते समय पैसा अटक जाए तो हम सब सबसे पहले क्या करते हैं? तुरंत अपना फोन उठाते हैं और Google पर उस कंपनी या बैंक का कस्टमर केयर नंबर सर्च करने लगते हैं. हमें लगता है जो नंबर दिख रहा है उस पर एक कॉल करते ही हमारी दिक्कत सॉल्व हो जाएगी.&amp;nbsp;
लेकिन यहीं पर अक्सर लोग गलती कर बैठते हैं. आजकल साइबर ठगों ने इसी जल्दबाजी का फायदा उठाने के लिए पूरे इंटरनेट पर अपना जाल बिछा रखा है. आप अपनी अट छोटी सी रकम वापस पाने के चक्कर में अनजाने में सीधा स्कैमर्स को कॉल लगा देते हैं. इसके बाद रिफंड दिलाने के नाम प आपका पूरा बैंक अकाउंट खाली हो जाता है और आपको भनक तक नहीं लगती. जानें कैसे ऐसे स्कैम से बचें.
सर्च रिजल्ट में सबसे ऊपर कैसे दिखते हैं फर्जी नंबर?
अब आपके मन में ये सवाल जरूर आ रहा होगा कि आखिर Google जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर ये फर्जी नंबर सबसे ऊपर कैसे आ जाते हैं? असल में स्कैमर्स आजकल बहुत ज्यादा हाई-टेक हो चुके हैं. वह फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज बनाकर उन पर Google Ads चलाते हैं. जब कोई यूजर हड़बड़ी में कस्टमर केयर या हेल्पलाइन नंबर सर्च करता है, तो ये पेड ऐड्स यानी Sponsored Links सबसे ऊपर दिखाई देते हैं.&amp;nbsp;
आम लोग अक्सर Sponsored टैग पर ध्यान नहीं देते और सबसे ऊपर दिख रहे नंबर को ही कंपनी का ऑफिशियल नंबर मानकर डायल कर देते हैं. इतना ही नहीं ठग कई बार Google Maps और पब्लिक फोरम में जाकर कंपनियों की पुरानी लिस्टिंग को Edit कर देते हैं और वहां अपना नंबर डाल देते हैं. जब आप कॉल करते हैं तो उधर से बात करने वाला शख्स इतने प्रोफेशनल तरीके से बात करता है कि आपको रत्ती भर भी शक नहीं होता.

स्क्रीन शेयरिंग ऐप और रिफंड लिंक का जाल
जब आप इन नकली कस्टमर केयर एजेंट्स को अपनी परेशानी बताते हैं. तो वह तुरंत आपका भरोसा जीतने के लिए कहते हैं कि आपका रिफंड प्रोसेस कर दिया गया है. इसके बाद वो कहते हैं कि तकनीकी खराबी की वजह से पैसा अटक रहा है, जिसे ठीक करने के लिए आपको एक वेरिफिकेशन फॉर्म भरना होगा या फिर AnyDesk और RustDesk जैसा कोई Support App डाउनलोड करना होगा.&amp;nbsp;
असल में ये स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स होते हैं. जैसे ही आप इन्हें अपने फोन में इंस्टॉल करके कोड बताते हैं. आपके पूरे फोन का कंट्रोल ठगों के हाथ में चला जाता है. आप अपने फोन में जो भी टाइप करते हैं या जो भी बैंक का OTP आता है. वह सब ठग अपनी स्क्रीन पर लाइव देख लेते हैं. कई बार तो वो UPI पर Collect Request भेजकर कहते हैं कि रिफंड पाने के लिए अपना पिन डालें, और पिन डालते ही पैसे आने के बजाय कट जाते हैं.
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ठगी से बचने के लिए हमेशा ध्यान रखें ये जरूरी बातें
इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचना बहुत आसान है. बस आपको थोड़ी सी सावधानी बरतने की जरूरत है. सबसे पहला नियम ये बना लें कि कभी भी Google सर्च या सोशल मीडिया के कमेंट बॉक्स से किसी बैंक, शॉपिंग ऐप या कूरियर कंपनी का नंबर न निकालें. अगर आपको वाकई कस्टमर केयर से बात करनी है तो हमेशा उस कंपनी के ऑफिशियल ऐप के अंदर दिए गए Help &amp;amp; Support सेक्शन का ही इस्तेमाल करें या उनकी असली वेबसाइट के Contact Us पेज पर जाएं.&amp;nbsp;
दूसरी सबसे जरूरी बात दुनिया की कोई भी कंपनी और बैंक रिफंड देने के लिए आपसे कोई थर्ड-पार्टी ऐप डाउनलोड करने को नहीं कहता. तो साथ ही याद रखें कि पैसे रिसीव करने के लिए कभी भी UPI पिन डालने की जरूरत नहीं होती पिन सिर्फ पैसे भेजने के लिए डाला जाता है. अगर फिर भी आपके साथ कोई फ्रॉड हो जाए तो बिना देर किए तुरंत 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं.

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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>चार्जिंग के बाद भी नहीं बढ़ रहा बैटरी पर्सेंटेज, जानें कहां है दिक्कत?</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार ऐसा होता है कि फोन पूरी रात चार्जिंग पर लगा रहता है, लेकिन सुबह बैटरी का पर्सेंटेज बढ़ने की जगह वहीं अटका मिलता है. ऐसी स्थिति में अक्सर लोग चार्जर बदलने या नया फोन खरीदने के बारे में सोचने लगते हैं. लेकिन जरूरी नहीं कि हर बार फोन की बैटरी ही खराब हो. चार्जिंग के दौरान आने वाली इस परेशानी के पीछे चार्जिंग केबल, पोर्ट, सॉफ्टवेयर या फोन के अंदर मौजूद हार्डवेयर में खराबी भी हो सकती है. ऐसे में नया फोन लेने से पहले समस्या की वजह पहचानना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि चार्जिंग के बाद भी बैटरी पर्सेंटेज नहीं बढ़ रहा तो दिक्कत कहां है.&amp;nbsp;
चार्जिंग के बाद भी बैटरी पर्सेंटेज नहीं बढ़ रहा तो दिक्कत कहां है
1. खराब बैटरी - फोन की बैटरी लंबे समय तक इस्तेमाल होने के साथ अपनी क्षमता खोने लगती है. ऐसे में वह पहले की तरह चार्ज स्टोर नहीं कर पाती है. अगर फोन चार्जिंग पर लगा होने के बाद भी बैटरी का पर्सेंटेज नहीं बढ़ रहा है, तो बैटरी की स्थिति जांचना जरूरी है. अगर खराबी बैटरी में है तो सिर्फ चार्जर बदलने से भी समस्या ठीक नहीं होगी.
2. चार्जिंग केबल या अडैप्टर में खराबी - पुरानी या डैमेज केबल फोन तक सही बिजली नहीं पहुंचा पाती है. ऐसे में फोन चार्जिंग का निशान दिखा सकता है, लेकिन बैटरी का पर्सेंटेज नहीं बढ़ता है. इसकी जांच के लिए फोन के लिए दूसरी सही और ओरिजिनल केबल या चार्जर इस्तेमाल करके देखें.&amp;nbsp;
3. चार्जिंग पोर्ट में जमा गंदगी - फोन के चार्जिंग पोर्ट में धूल, रेशे या जंग जैसी समस्या होने पर बिजली का संपर्क ठीक से नहीं बन पाता है. इससे चार्जिंग बार-बार रुक सकती है. पोर्ट में गंदगी दिखाई दे तो उसे साफ करने में सावधानी बरतें. सूखे, मुलायम ब्रश से सफाई की जा सकती है. पोर्ट खराब होने या कनेक्शन ढीला होने पर टेक्नीशियन की मदद लें.
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4. सॉफ्टवेयर या ऐप्स की परेशानी - कभी-कभी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी या किसी अपडेट के बाद आई समस्या के कारण बैटरी की स्थिति सही नहीं दिखती है. वहीं कुछ ऐप्स बैकग्राउंड में ज्यादा बिजली खर्च करते हैं, जिससे चार्जिंग धीमी हो सकती है. फोन को रीस्टार्ट करें, उपलब्ध सिस्टम अपडेट जांचें और बैटरी सेटिंग में ज्यादा खपत करने वाले ऐप्स देखें.
5. &amp;nbsp;फोन का तापमान - &amp;nbsp;फोन बहुत गर्म या ज्यादा ठंडा होने पर उसकी सुरक्षा के लिए चार्जिंग धीमी हो सकती है या कुछ समय के लिए रुक सकती है. ऐसे में फोन को सामान्य कमरे के तापमान पर आने दें और फिर चार्जिंग चेक करें. जरूरत पड़ने पर चार्जिंग के दौरान एयरप्लेन मोड चालू करने से बिजली की खपत कम करने में मदद मिल सकती है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - घर की निगरानी करने वाला कैमरा खुद न बन जाए खतरा! ऐसे रखें सुरक्षित ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>घर बैठे ऑनलाइन मिल रहे थे विस्फोटक, सरकार ने 7 वेबसाइट पर की कार्रवाई</title>
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        <description><![CDATA[ कपड़े, मोबाइल और रोजमर्रा के सामान की तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खतरनाक विस्फोटक पदार्थों की लिस्टिंग भी सामने आई है. अमोनियम नाइट्रेट, गन पाउडर, पिक्रिक एसिड और PETN जैसे पदार्थ ऑनलाइन बिक्री के लिए लिस्ट किए गए थे. अब केंद्र सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की है. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA के हस्तक्षेप के बाद सात ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से 3,940 विक्रेताओं की लिस्टिंग हटाई गई हैं.
जिन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हुई है उनमें IndiaMART, TradeIndia, Justdial, Dial4Trade, ExportersIndia, Sigma-Aldrich India और Ibuychemikals शामिल हैं. सरकारी जानकारी के मुताबिक, IndiaMART पर सबसे ज्यादा 3,092 विक्रेताओं की लिस्टिंग थी. ExportersIndia से 421, Justdial से 206, TradeIndia से 166 और Dial4Trade से 11 लिस्टिंग हटाई गईं. बाकी दो प्लेटफॉर्म ने बताया कि वे अपने उत्पाद बेचते हैं और तीसरे पक्ष के विक्रेताओं की लिस्टिंग नहीं करते.
तीन मामलों में 30 लाख रुपये का जुर्माना
CCPA ने अब तक तीन मामलों में अंतिम आदेश जारी किए हैं। Dial4Trade पर अमोनियम नाइट्रेट की बिक्री से जुड़े मामले में 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं ExportersIndia पर दो अलग-अलग मामलों में 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। ये मामले अमोनियम नाइट्रेट, PETN और पिक्रिक एसिड की ऑनलाइन लिस्टिंग से जुड़े हैं। Dial4Trade ने जुर्माने के आदेश को चुनौती दी थी लेकिन राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को उसकी अपील खारिज कर दी। ExportersIndia ने भी आदेशों के खिलाफ अपील दायर की है।
IndiaMART और Justdial की जांच जारी
IndiaMART और Justdial के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। दोनों कंपनियों को जांच रिपोर्ट दी गई है और उन्होंने अपना जवाब दाखिल किया है। IndiaMART ने CCPA के नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, Justdial के मामले में अगली और अंतिम सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को होनी है। TradeIndia, Sigma-Aldrich Chemicals और Ibuychemikals से जुड़े मामलों में भी जांच जारी है।
विस्फोटकों की ऑनलाइन बिक्री पर नियम क्या हैं?
अमोनियम नाइट्रेट, PETN और पिक्रिक एसिड जैसे पदार्थों की खरीद-बिक्री पर कानून के तहत नियंत्रण है। इनके वैध कारोबार के लिए जरूरी लाइसेंस और नियमों का पालन करना होता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को भी विक्रेताओं के लाइसेंस की जानकारी और खरीदारों की पहचान की जांच सुनिश्चित करनी होती है। CCPA ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विस्फोटक पदार्थों की बिक्री से जुड़ी लिस्टिंग दिखाई देती है तो इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर की जा सकती है।
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>OTP और Passkey में क्या अंतर है? अकाउंट की सुरक्षा कैसे होती है बेहतर</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल ऑनलाइन अकाउंट में लॉगिन करने का तरीका बदल रहा है. पहले जहां पासवर्ड याद रखना जरूरी था, वहीं अब मोबाइल पर आने वाला OTP और फिंगरप्रिंट से काम करने वाला Passkey जैसे ऑप्शन इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इनका मकसद अकाउंट तक पहुंच को आसान बनाने के साथ सुरक्षा बढ़ाना भी है, हालांकि दोनों तरीकों में एक बड़ा अंतर है. ऐसे में साइबर ठगी के बदलते तरीकों के बीच यह समझना जरूरी है कि कौन-सा तरीका फिशिंग जैसे हमलों से बेहतर बचाव करता है, तो आइए डान जानते हैं कि OTP और Passkey में क्या अंतर है, साथ ही अकाउंट की सुरक्षा कैसे बेहतर होती है.&amp;nbsp;
OTP कैसे काम करता है?
OTP यानी वन टाइम पासवर्ड एक ऐसा कोड है, जिसका इस्तेमाल एक बार लॉगिन या किसी ट्रांजैक्शन की पुष्टि के लिए किया जाता है. यह आमतौर पर SMS, ईमेल या ऑथेंटिकेटर ऐप के जरिए मिलता है. इसकी मदद से पासवर्ड चोरी होने की स्थिति में भी अकाउंट को सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मिल सकती है, हालांकि OTP की सुरक्षा इस बात पर भी निर्भर करती है कि कोड कैसे बनाया और पहुंचाया जा रहा है. SMS के जरिए आने वाले कोड SIM स्वैपिंग और नेटवर्क से जुड़ी कमजोरियों के कारण जोखिम में पड़ सकते हैं, वहीं फिशिंग वेबसाइट पर OTP दर्ज करने से साइबर अपराधी उसका इस्तेमाल असली वेबसाइट पर लॉगिन करने के लिए कर सकते हैं.&amp;nbsp;
Passkey क्या है?
Passkey पासवर्ड के बिना लॉगिन करने का एक तरीका है. इसमें यूजर फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन या डिवाइस PIN की मदद से अपनी पहचान की पुष्टि कर सकता है. यह तकनीक Apple, Google और Microsoft जैसे टेक प्लेटफॉर्म पर सपोर्ट की जाती है. Passkey बनाते समय डिवाइस दो क्रिप्टोग्राफिक की तैयार करता है. इनमें पब्लिक की वेबसाइट के पास रहती है, जबकि प्राइवेट की डिवाइस पर सुरक्षित रहती है. लॉगिन के दौरान प्राइवेट की की मदद से पुष्टि होती है, लेकिन यह वेबसाइट के साथ शेयर नहीं की जाती है. OTP के मुकाबले यह फिशिंग से बेहतर सुरक्षा देती है.&amp;nbsp;
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OTP और Passkey में क्या है बड़ा अंतर?
OTP में कोड रिसिव करके उसे दर्ज करना पड़ता है, जबकि Passkey से लॉगिन करने के लिए डिवाइस पर अपनी पुष्टि करनी होती है. OTP SMS नेटवर्क पर निर्भर हो सकता है और कोड आने में देरी भी हो सकती है. Passkey में इस तरह कोड का इंतजार नहीं करना पड़ता है, हालांकि Passkey के लिए सही डिवाइस या सिंक की सुविधा उपलब्ध होना जरूरी है. फोन या लैपटॉप खोने पर अकाउंट तक पहुंच बनाए रखने के लिए बैकअप और रिकवरी का ऑप्शन भी तैयार रखना चाहिए.&amp;nbsp;
अकाउंट की सुरक्षा कैसे बेहतर होती है?
जहां Passkey का ऑप्शन उपलब्ध हो, वहां इसका इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है. OTP का यूज करते समय कोड किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर न करें और अकाउंट रिकवरी के लिए सुरक्षित बैकअप रखें. साथ ही अकाउंट की सुरक्षा के लिए सेटिंग्स और रिकवरी प्रक्रिया को भी मजबूत रखना जरूरी है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - रेगुलेटर घुमाते ही कैसे बदलती है पंखे की बिजली खपत? जानें टेक्नोलॉजी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर की निगरानी करने वाला कैमरा खुद न बन जाए खतरा! ऐसे रखें सुरक्षित</title>
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        <description><![CDATA[ घर से बाहर निकलते समय अब कई लोग मोबाइल पर अपने घर का लाइव वीडियो देखकर तसल्ली कर लेते हैं. घर में कौन आया, आसपास क्या हो रहा है और सब कुछ ठीक है या नहीं, इन सवालों का जवाब सिक्योरिटी कैमरे कुछ ही सेकंड में दे देते हैं. लेकिन जिस कैमरे को घर की सुरक्षा के लिए लगाया गया है, वही इंटरनेट से जुड़ने के कारण आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा भी बन सकता है. साइबर अपराधी इन कैमरों तक पहुंच बनाकर लाइव फुटेज, पुरानी रिकॉर्डिंग और निजी जानकारियां देख सकते हैं. ऐसे में सिर्फ कैमरा लगाना काफी नहीं है, बल्कि उसे डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखना भी जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि सिक्योरिटी कैमरे को कैसे सुरक्षित रखें.&amp;nbsp;
घर की निगरानी करने वाले कैमरे को कैसे रखें सुरक्षित
1. अगर आपके सिक्योरिटी अकाउंट पर किसी अनजान लॉगिन या पासवर्ड बदलने का अलर्ट आता है, तो इसे गंभीरता से लें.
2. अगर कैमरा बिना आपके निर्देश के घूमने लगे या उसका एंगल अपने आप बदल जाए, तो यह साइबर अपराधी तक पहुंच का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में एक्सेस लॉग और पुरानी रिकॉर्डिंग की जांच करना सही रहेगा.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;कैमरे, राउटर और सिक्योरिटी अकाउंट के लिए अलग-अलग मजबूत पासवर्ड रखें.&amp;nbsp;
4. आसान पासवर्ड इस्तेमाल करने से बचें और राउटर में WPA2 एन्क्रिप्शन चालू रखें.&amp;nbsp;
5. अगर कैमरा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की सुविधा देता है, तो इसे भी एक्टिव करें. &amp;nbsp;इससे पासवर्ड किसी के हाथ लगने पर भी अकाउंट में प्रवेश के लिए एक अतिरिक्त &amp;nbsp;वेरिफिकेशन जरूरी होगा.&amp;nbsp;
6. हमेशा भरोसेमंद कंपनी का कैमरा चुनें, जिसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और नियमित फर्मवेयर अपडेट की सुविधा हो.
7. दूर से कैमरा देखने के लिए VPN का इस्तेमाल किया जा सकता है. जरूरत न होने पर रिमोट एक्सेस बंद रखें और लॉगिन अलर्ट पर नजर रखें.&amp;nbsp;
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हैकिंग का शक हो तो तुरंत क्या करें?
अगर कैमरा हैक हो गया है, तो सबसे पहले सिस्टम की बिजली सप्लाई डिस्कनेक्ट करें. इसके बाद सिक्योरिटी अकाउंट, राउटर और जुड़े डिवाइस के पासवर्ड बदलें. कैमरा बनाने वाली कंपनी से संपर्क करके गलत एक्टिविटी की जानकारी दें और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम पूछें.&amp;nbsp;
घर का सिक्योरिटी कैमरा इस वजह से हो सकता है हैक
सिक्योरिटी कैमरा लोकल हैकिंग से हैक हो सकता है, जिसमें कोई व्यक्ति आपके घर या नेटवर्क के नजदीक पहुंचकर सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश कर सकता है. इसके लिए नेटवर्क सिग्नल में हस्तक्षेप करना या चुराए गए पासवर्ड का इस्तेमाल करना जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं. इसके अलावा रिमोट हैकिंग के जरिए भी सिक्योरिटी कैमरा हैक हो सकता है. जिसमें दूर बैठकर इंटरनेट के जरिए कैमरे तक पहुंच बनाई जाती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>15 हजार रुपये के बजट में 5G फोन, Itel City 300 में क्या मिलेगा?</title>
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        <description><![CDATA[ Itel ने भारत में अपना नया 5G स्मार्टफोन City 300 5G पेश किया है. इस फोन में 120Hz रिफ्रेश रेट वाली डिस्प्ले दी गई है, जिससे स्क्रीन पर चीजें चलाते समय स्क्रॉलिंग स्मूद रहती है. इसमें 5,000mAh की बैटरी और Android 16 Go Edition भी मिलता है. कंपनी ने इस फोन को उन लोगों के लिए पेश किया है, जो कम बजट में 5G स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर इसकी कीमत क्या है और इस फोन में कौन-कौन से फीचर्स मिलते हैं.&amp;nbsp;
Itel City 300 5G की कीमत क्या है?
Itel City 300 5G के 4GB रैम और 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 14,999 रुपये रखी गई है. फोन तीन कलर Dark Ruby, Mist Beige और Bold Indigo में उपलब्ध है. इसे कंपनी के ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स से खरीदा जा सकता है. स्टोर की जानकारी Itel की आधिकारिक वेबसाइट पर मिल सकती है.
Itel City 300 5G में कौन-कौन से फीचर्स मिलते हैं?
Itel City 300 5G में 6.67 इंच की HD+ LCD स्क्रीन दी गई है. इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है, जिससे स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग और विजुअल्स पहले के मुकाबले ज्यादा स्मूद महसूस हो सकते हैं. डिस्प्ले में पंच-होल डिजाइन और 2.5D कर्व्ड ग्लास भी दिया गया है. Itel City 300 5G में 6nm तकनीक पर बना Unisoc T8200 ऑक्टा-कोर प्रोसेसर दिया गया है. इसके साथ 4GB LPDDR4X रैम और 64GB इंटरनल स्टोरेज मिलती है. माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से स्टोरेज को 1TB तक बढ़ाया जा सकता है. फोन में 10 5G बैंड और NRCA टेक्नोलॉजी का सपोर्ट भी है.
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Android 16 Go Edition के साथ दूसरे फीचर्स
यह स्मार्टफोन Android 16 Go Edition पर चलता है. इसमें साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर और फेस अनलॉक की सुविधा भी मिलती है. इसके अलावा फोन में 3.5mm हेडफोन जैक, USB Type-C पोर्ट, Bluetooth 5.0 और Wi-Fi 5 का सपोर्ट है.&amp;nbsp;
Itel City 300 5G की बैटरी और कैमरा
फोन में 5,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 10W चार्जिंग सपोर्ट करती है. बॉक्स में चार्जर भी मिलता है. फोटोग्राफी के लिए इसमें ऑटोफोकस वाला 13MP रियर कैमरा और 8MP फ्रंट कैमरा दिया गया है. रियर कैमरे से 30fps पर 2K वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हैक न होकर भी कंपनी के लिए खतरा बन सकते हैं AI एजेंट्स: Microsoft ने दी बड़ी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ कंपनियों के अंदर काम कर रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स बिना हैक हुए भी सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकते हैं. टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने कंपनियों को आगाह करते हुए कहा है कि जैसे-जैसे दफ्तरों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इन ऑटोनॉमस AI सिस्टम्स पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है.
&#039;एजेंटिक इनसाइडर&#039; अंदर का नया खतरा
माइक्रोसॉफ्ट सिक्योरिटी की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हयाते गैलॉट (Hayete Gallot) ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि कंपनियां अक्सर बाहरी साइबर हमलों से बचने पर ही ध्यान देती हैं. वे अपने सिस्टम के अंदर काम कर रहे AI एजेंट्स पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेती हैं, जो कि खतरनाक साबित हो सकता है.
गैलॉट के मुताबिक, &quot;AI एजेंट्स का व्यवहार अनिश्चित होता है. माहौल बदलते ही ये अपना तरीका बदल लेते हैं. हैक न होने के बावजूद भी ये अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए दूसरे AI एजेंट्स के साथ मिलकर काम कर सकते हैं और मनमानी कर सकते हैं.&quot;
क्यों बढ़ रहा है जोखिम?
आजकल AI एजेंट्स के पास कंपनियों का सीक्रेट और संवेदनशील डेटा, जरूरी टूल्स और सिस्टम्स का एक्सेस होता है. वे खुद फैसले लेते हैं और बिजनेस के बड़े कामों को संभालते हैं.
माइक्रोसॉफ्ट ने इन एजेंट्स को &#039;एजेंटिक इनसाइडर&#039; यानी अंदरूनी खतरा का नाम दिया है. कंपनी का कहना है कि इन AI सिस्टम्स को अक्सर जरूरत से ज्यादा अधिकार दे दिए जाते हैं, जिससे सिक्योरिटी रिस्क काफी बढ़ जाता है.
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कैसे मिलेगी इस खतरे से राहत?
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि इस खतरे से बचने के लिए AI एजेंट्स के पहचान, अधिकारों, डेटा और नेटवर्क पर 24 घंटे रियल-टाइम नजर रखनी होगी.
इस समस्या को हल करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने अपने &#039;प्रोजेक्ट पर्सेप्शन&#039; (Project Perception) का जिक्र किया. इसके तहत कंपनी &#039;गार्डियन एजेंट्स&#039; (Guardian Agents) का इस्तेमाल करेगी. ये गार्डियन एजेंट्स दूसरे AI एजेंट्स की हर हरकत पर नज़र रखेंगे और खतरा दिखते ही उन्हें रोक देंगे. माइक्रोसॉफ्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि AI मॉडल कोई फैसला क्यों ले रहा है, इसे समझना सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है.
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        <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>इलेक्ट्रिक टूथब्रश दांतों को नुकसान तो नहीं पहुंचाता? जानें कैसे करता है काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इलेक्ट्रिक-टूथब्रश-दांतों-को-नुकसान-तो-नहीं-पहुंचाता-जानें-कैसे-करता-है-काम</link>
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        <description><![CDATA[ आजकल हर छोटी-बड़ी चीज स्मार्ट होती जा रही है. यहां तक कि सुबह-सुबह दांत साफ करने का तरीका भी. अब लोग पुराने तरीकों से दांत साफ नहीं करते हैं बल्कि आजकल इलेक्ट्रिक टूथब्रश का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है. बहुत से लोग अपने पुराने नॉर्मल ब्रश को छोड़कर इस बैटरी वाले ब्रश पर शिफ्ट हो रहे हैं. लेकिन आज भी एक बहुत बड़ा तबका ऐसा है जो इसे खरीदने से हिचकिचाता है.&amp;nbsp;
लोगों के मन में सबसे बड़ा डर यही रहता है कि मोटर से इतनी तेजी से घूमने वाला यह ब्रश कहीं हमारे दांतों की ऊपरी परत को घिस तो नहीं देगा. कुछ लोगों को यह भी लगता है कि इसके वाइब्रेशन से मसूड़े छिल जाएंगे और दांत कमजोर होकर हिलने लगेंगे. अगर आपके मन में भी इलेक्ट्रिक टूथब्रश को लेकर यही सारे सवाल घूम रहे हैं तो जान लें कि क्या वाकई इससे दांतों को कोई खतरा रहता है आखिर कैसे करता है यह काम.
कैसे काम करता है इलेक्ट्रिक टूथब्रश?
इलेक्ट्रिक टूथब्रश के काम करने का तरीका बेहद आसान होता है. इसके हैंडल के अंदर एक छोटी सी रिचार्जेबल बैटरी और मोटर लगी होती है जो ऊपर लगे ब्रिसल्स को तेजी से घुमाती और वाइब्रेट कराती है. बाजार में मुदो तरह के इलेक्ट्रिक ब्रश मिलते हैं. पहले वो जिनका गोल हेड दाएं-बाएं घूमता है और दूसरे सोनिक ब्रश जो हाई-स्पीड वाइब्रेशन के जरिए दांतों की सफाई करते हैं.&amp;nbsp;
जब हम हाथ वाले नार्मल ब्रश से दांत साफ करते हैं. तो एक मिनट में मुश्किल से 200 से 300 बार ही ब्रश को घिस पाते हैं. वहीं एक इलेक्ट्रिक टूथब्रश एक मिनट के अंदर हजारों बार मूवमेंट करता है. इसमें आपको अपने हाथ से ताकत लगाकर रगड़ने की जरूरत नहीं पड़ती. आपको बस ब्रश ऑन करके उसे एक दांत से दूसरे दांत पर हल्के हाथ से ले जाना होता है और यह कोनों में जमे प्लाक को खुद ही साफ कर देता है.

क्या इससे होता है नुकसान?
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि क्या यह दांतों को नुकसान पहुंचाता है. तो इस बारे में डेंटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इलेक्ट्रिक टूथब्रश दांतों को खराब नहीं करता बल्कि कई मामलों में यह नॉर्मल ब्रश से ज्यादा सेफ होता है. असल में हम लोग नार्मल ब्रश करते समय अनजाने में इतनी जोर से दांत रगड़ देते हैं. जिससे दांतों का इनेमल घिस जाता है और मसूड़ों से खून आने लगता है.&amp;nbsp; लेकिन आजकल के अच्छे इलेक्ट्रिक टूथब्रश में प्रेशर सेंसर लगा होता है.
जैसे ही आप दांतों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालते हैं. ब्रश की स्पीड अपने आप कम हो जाती है या वह बीप करने लगता है. इसके अलावा इसमें 2 मिनट का इन-बिल्ट टाइमर भी होता है. जो हर 30 सेकंड में हल्का सा रुककर आपको याद दिलाता है कि अब मुंह के दूसरे हिस्से की सफाई शुरू करें. इससे ओवर-ब्रशिंग का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाता है.

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इस्तेमाल करते वक्त न करें ये गलतियां
इलेक्ट्रिक टूथब्रश से नुकसान तभी होता है जब लोग इसे भी अपने पुराने देसी ब्रश की तरह ही इस्तेमाल करने लगते हैं. अगर आप इसे खरीदकर लाए हैं तो सबसे पहले इसे दांतों पर जोर-जोर से घिसने की आदत छोड़ दें. इसे मसूड़ों की लाइन पर 45 डिग्री के एंगल पर हल्के से टिकाएं और सारा काम इसकी मोटर पर छोड़ दें. हर दांत पर सिर्फ दो से तीन सेकंड रुकना काफी होता है.&amp;nbsp;
दूसरी जरूरी बात यह है कि अगर आपके दांतों में ठंडा-गर्म लगने की शिकायत है या फिर मसूड़े नाजुक हैं. तो इसमें हमेशा सेंसिटिव मोड और सॉफ्ट ब्रिसल्स वाले हेड का इस्तेमाल करें. ठीक नॉर्मल ब्रश की तरह ही इसके ऊपर का ब्रश हेड भी हर 3 महीने में बदल देना चाहिए, क्योंकि मुड़े हुए ब्रिसल्स मसूड़ों को छील सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इलेक्ट्रिक, टूथब्रश, दांतों, को, नुकसान, तो, नहीं, पहुंचाता, जानें, कैसे, करता, है, काम</media:keywords>
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        <title>Amazon के नए AI गैजेट्स सुनेंगे आपकी बातें, कैसे काम करती है टेक्नोलॉजी?</title>
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        <description><![CDATA[ किसी मीटिंग में हुई जरूरी चर्चा हो, फोन पर मिला कोई काम या बातचीत के दौरान तय की गई अगली योजना, कई बार जरूरी बातें याद रखना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अगर कोई डिवाइस आपकी बातचीत से जरूरी जानकारी निकालकर उसकी समरी तैयार कर दे और जरूरी कामों की याद भी दिलाए, तो नोट्स बनाने की जरूरत काफी कम हो सकती है. ऐसे में Amazon ने अपने AI डिवाइस पोर्टफोलियो में दो नए गैजेट्स Bee Frontier और Bee Eclipse &amp;nbsp;पेश किए हैं. ये डिवाइस बातचीत को समझकर उसकी समरी बनाने, जरूरी कामों की पहचान करने और रिमाइंडर तैयार करने में मदद करते हैं. तो आइए जानते हैं कि इनकी टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है.&amp;nbsp;
Amazon के नए AI गैजेट्स की टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है?
Amazon के मुताबिक, दोनों डिवाइस दिनभर की बातचीत से यूजफुल जानकारी निकाल सकते हैं. जैसे किसी मीटिंग के बाद यूजर उनके जरिए चर्चा के जरूरी पॉइंट दोबारा देख सकता है. इसके अलावा बातचीत में तय किए गए कामों की लिस्ट बनाने, फॉलो-अप ईमेल तैयार करने और कैलेंडर इनविटेशन बनाने में भी मदद मिल सकती है. ये डिवाइस Gmail, Google Calendar और Microsoft Outlook जैसी सेवाओं से भी जुड़ सकते हैं. इससे इन्हें संबंधित जानकारी के आधार पर ज्यादा यूजफुल सुझाव देने में मदद मिलती है.&amp;nbsp;
Bee Frontier क्या है?
Bee Frontier एक पहनने योग्य डिवाइस है, जिसे कलाई पर पहना जा सकता है या कपड़ों पर क्लिप किया जा सकता है. इसमें नॉइज फिल्टरिंग वाले दो माइक्रोफोन दिए गए हैं. यह पानी से बचाव की सुविधा के साथ आता है और इसकी बैटरी सात दिनों तक चल सकती है. इसे Onyx, Lavender और Sage रंगों में पेश किया गया है. इसकी कीमत 74.99 डॉलर (लगभग 6,600 रुपये) है.&amp;nbsp;
Bee Eclipse क्या है?
Bee Eclipse क्रेडिट कार्ड के साइज का पतला डिवाइस है, जिसे मैग्नेट की मदद से स्मार्टफोन के पिछले हिस्से पर लगाया जा सकता है. कंपनी का दावा है कि इसकी बैटरी एक बार चार्ज करने पर 21 दिनों से ज्यादा चल सकती है. इसकी शुरुआती कीमत 99.99 डॉलर रखी गई (लगभग 8,800 रुपये) है. यह मैग्नेटिक फोन अटैचमेंट ब्लश पिंक, मिडनाइट और सिल्वर रंगों में मिलेगा.
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प्राइवेसी के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं?
Amazon के अनुसार, इनमें ऑडियो प्रोसेसिंग को चालू या बंद करने के लिए बटन और एक्टिव होने पर जलने वाला LED इंडिकेटर दिया गया है. Bee Frontier को आवाज न मिलने पर तय समय बाद अपने आप बंद होने के लिए भी सेट किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि ऑडियो रिकॉर्डिंग स्टोर नहीं की जाती है. बातचीत को रियल टाइम में प्रोसेस करने के बाद ऑडियो डिलीट कर दिया जाता है, जबकि ट्रांसक्रिप्ट एन्क्रिप्टेड रहते हैं.
Alexa+ और सब्सक्रिप्शन से भी जुड़ेंगे डिवाइस
Amazon Bee को Alexa+ और Amazon.com से भी जोड़ रहा है. यूजर Alexa से बातचीत की समरी पूछ सकते हैं, अपने टास्क देख सकते हैं और पुरानी चर्चा की जानकारी याद कर सकते हैं. बातचीत में किसी सामान की जरूरत का जिक्र होने पर Amazon.com उससे जुड़ा प्रोडक्ट भी सुझा सकता है. Bee Pro सब्सक्रिप्शन की कीमत 11.99 डॉलर प्रति माह है. इसमें थर्ड-पार्टी ऐप इंटीग्रेशन, सुझाए गए टास्क, पर्सनलाइज्ड असिस्टेंस और डेस्कटॉप ऐप जैसी सुविधाएं मिलती हैं. नए यूजर्स को 30 दिनों का फ्री ट्रायल भी दिया जाता है.
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>40 हजार के बजट में चाहिए बढ़िया लैपटॉप, इन 5 ऑप्शन्स को देख लें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/40-हजार-के-बजट-में-चाहिए-बढ़िया-लैपटॉप-इन-5-ऑप्शन्स-को-देख-लें</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में दुनिया के 90 फीसदी कागजी और रिसर्च के काम लैपटॉप के जरिए ही होते हैं. कॉलेज के असाइनमेंट बनाने से लेकर ऑफिस की बड़ी-बड़ी फाइलें तैयार करने, डेटा संभालने और घंटों इंटरनेट पर रिसर्च करने तक हर काम के लिए एक लैपटॉप होना जरूरी है. आज के वक्त में कई तरह के लैपटॉप मार्केट में है जो हजारों से लेकर लाखों तक में जाते हैं.&amp;nbsp;
लेकिन ज्यादातर लोगों का बजट बहुत हाई नहीं होता है. इसलिए वह ज्यादा महंगे ऑप्शन के बजाय मिड रेंज में ही कुछ बढ़िया लैपटॉप की तलाश में होते हैं. इस समय बाती की जाए तो मार्केट में 40 हजार रुपये के आसपास की कीमत में लैपटॉप्स के कई ऑप्शन हैं. अगर आप भी इस बजट में नया लैपटॉप तलाश रहे हैं तो इन 5 ऑप्शन्स पर नजर जरूर डालें.
Lenovo IdeaPad Slim 3 और Acer Aspire Lite&amp;nbsp;
इस बजट में सबसे पहला और तगड़ा ऑप्शन Lenovo IdeaPad Slim 3 है जो बाजार में करीब 30390 रुपये से लेकर 39499 रुपये के बीच अलग-अलग वेरिएंट्स में मिल रहा है. इसमें AMD Ryzen 3 7320U प्रोसेसर के साथ 8GB की फास्ट LPDDR5 रैम और 512GB की एसएसडी स्टोरेज दी गई है. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका बैकलिट कीबोर्ड और प्री-इंस्टॉल्ड एमएस ऑफिस 2024 है. जो देर रात तक पढ़ाई या ऑफिस का काम करने वालों के लिए बहुत काम आता है.&amp;nbsp;
वहीं लिस्ट में दूसरा लैपटॉप है Acer Aspire Lite AL15-53. जिसकी कीमत करीब 31000 रुपये से 36999 रुपये के बीच रहती है. इसमें आपको 13th जनरेशन का Intel Core i3-1305U प्रोसेसर, 8GB रैम और 512GB स्टोरेज मिलती है. 15.6 इंच की फुल एचडी स्क्रीन होने के बावजूद इसका वजन सिर्फ 1.61 किलोग्राम है. जिससे इसे रोज बैग में रखकर कॉलेज या ऑफिस ले जाना बेहद आसान रहता है.

Dell Inspiron 15 और ASUS Vivobook 15
अगर आप लंबे समय तक टिकने वाला मजबूत लैपटॉप चाहते हैं तो&amp;nbsp; Dell Inspiron 15 एक बढ़िया ऑप्शन है. 13th जनरेशन के Intel Core i3-1305U प्रोसेसर या 12th जनरेशन चिपसेट के साथ आने वाला यह नया लैपटॉप ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर 33990 रुपये से 39500 रुपये के बीच में मिल जाता है. इसमें 8GB रैम, 512GB एसएसडी, विंडोज 11 और शानदार साउंड के लिए ट्यून्ड स्पीकर्स दिए गए हैं. जो ऑनलाइन मीटिंग्स और भारी एक्सेल शीट्स पर काम करने के लिए सही हैं.&amp;nbsp;
इसके अलावा आप ASUS Vivobook 15 या Vivobook Go 15 को चुन सकते हैं जो 31500 रुपये से 38990 रुपये की कीमत में मिल रहा है. इसमें Intel Core i3-1215U और Ryzen 3 7320U प्रोसेसर के साथ 8GB रैम और 512GB स्टोरेज मिलती है. इसका स्लीक डिजाइन, 180 डिग्री तक सीधा खुलने वाला हिंज और वेबकैम प्राइवेसी शटर मिल रहा है.&amp;nbsp;

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Acer Aspire 3&amp;nbsp;
Acer Aspire 3 A325-42 और इसका कॉम्पैक्ट वर्जन Acer Aspire One 14 उन लोगों के लिए बेस्ट है. जिन्हें सफर के दौरान लैपटॉप इस्तेमाल करना पड़ता है. यह लैपटॉप मार्केट में 32990 रुपये से 38470 रुपये के बीच आसानी से मिल रहा है. इसमें AMD Ryzen 3 5400U या 7320U प्रोसेसर, 8GB रैम, फास्ट NVMe एसएसडी और आंखों को थकान से बचाने वाली फुल एचडी आईपीएस डिस्प्ले मिलती है. इसके 14 इंच वाले मॉडल का वजन मात्र 1.48 किलोग्राम है.&amp;nbsp;
इन बातों का रखें ध्यान
आखिर में एक जरूरी सलाह यही है कि 40 हजार रुपये खर्च करते समय किसी पुराने और रीफर्बिश्ड मॉडल के झांसे में बिल्कुल न आएं. ऊपर बताए गए इन पांचों ब्रांड न्यू लैपटॉप्स में आपको कंपनी की वारंटी, ओरिजिनल विंडोज 11 और कम से कम 8GB रैम के साथ एसएसडी स्टोरेज मिलती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हजार, के, बजट, में, चाहिए, बढ़िया, लैपटॉप, इन, ऑप्शन्स, को, देख, लें</media:keywords>
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        <title>वॉशिंग मशीन का Eco मोड कैसे बचाता है पानी और बिजली? समझें टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ कपड़े जल्दी धोने के लिए वॉशिंग मशीन में क्विक वॉश का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बिजली और पानी बचाने के लिए Eco मोड एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है. &amp;nbsp;इस मोड में कपड़े धोने में सामान्य प्रोग्राम के मुकाबले ज्यादा समय लग सकता है. ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि जब मशीन ज्यादा देर तक चल रही है, तो बिजली की बचत कैसे हो रही है, हालांकि इसका जवाब मशीन के चलने के समय में नहीं, बल्कि पानी गर्म करने और कपड़ों की सफाई के तरीके में छिपा है. तो आइए जानते हैं कि वॉशिंग मशीन का Eco मोड कैसे पानी और बिजली बचाता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;कम तापमान पर कैसे साफ होते हैं कपड़े?
वॉशिंग मशीन का Eco मोड मुख्य रूप से कम पानी और कम एनर्जी का इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है. कपड़े धोने की प्रक्रिया में तापमान, समय और पानी तीनों की जरूरी भूमिका होती है. सामान्य प्रोग्राम में पानी ज्यादा गर्म हो सकता है, जबकि Eco मोड कम तापमान पर कपड़े धोता है. इसका कारण यह है कि वॉशिंग मशीन की कुल बिजली खपत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पानी गर्म करने में खर्च होता है.
इसके मुकाबले ड्रम को घुमाने में कम बिजली लगती है. ऐसे में पानी का तापमान कम रखने से एनर्जी की खपत घट सकती है, हालांकि कम गर्म पानी में डिटर्जेंट को कपड़ों की गंदगी पर असर करने के लिए ज्यादा समय चाहिए. इसलिए Eco मोड में वॉश साइकल लंबा रखा जाता है, जिससे कपड़े अच्छी तरह साफ हो सकें.&amp;nbsp;&amp;nbsp;वॉशिंग मशीन का Eco मोड कैसे पानी और बिजली बचाता है
कम तापमान पर कपड़े धोने का सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ता है. आंकड़ों के मुताबिक, गर्म पानी से होने वाली धुलाई की तुलना में कम तापमान वाला वॉश 30 से 60 प्रतिशत तक कम एनर्जी इस्तेमाल कर सकता है. इससे बिजली की खपत घटती है और बिल में भी बचत हो सकती है. इसके अलावा Eco मोड में पानी का इस्तेमाल भी कम होता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - मोटर से लेकर पानी तक, कैसे काम करती हैं फ्रंट लोड और टॉप लोड मशीनें?
क्या हर तरह के कपड़ों के लिए सही है Eco मोड?
Eco मोड रोजमर्रा के कपड़ों की धुलाई के लिए यूजफुल हो सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा गंदे कपड़ों और जिद्दी दागों के मामले में कम तापमान सही नहीं हो सकता है. वहीं ज्यादा कपड़े एक साथ डालने पर भी सफाई प्रभावित हो सकती है.ऐसी स्थिति में सामान्य वॉश प्रोग्राम बेहतर ऑप्शन हो सकता है. अगर मुश्किल दागों के कारण Eco मोड में दो बार धुलाई करनी पड़े, तो एक बार गर्म पानी वाले वॉश की तुलना में कुल एनर्जी की खपत बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>सेंसर से मोटर तक, स्मार्ट फैन खुद कैसे एडजस्ट करता है अपनी स्पीड?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्ट फैन का यूज आज ज्यादातर घरों और ऑफिसों में होता है. ये देखने में अट्रैक्टिव होते हैं और इनमें कई फीचर्स मिलते हैं. सामान्य पंखे की स्पीड बदलने के लिए रेगुलेटर घुमाना पड़ता है, जबकि स्मार्ट फैन को रिमोट या मोबाइल ऐप से कंट्रोल किया जा सकता है. कुछ स्मार्ट फैन में ऐसी तकनीक भी होती है, जो कमरे के तापमान और नमी में बदलाव के अनुसार पंखे की स्पीड को अपने आप कम या ज्यादा कर सकती है.
इसमें टाइमर सेट करने, तय समय पर पंखा चलाने और दूसरे स्मार्ट डिवाइस के साथ जोड़कर यूज करने जैसे ऑप्शन भी मिलते हैं, लेकिन अक्सर सवाल उठता है कि स्मार्ट फैन को स्पीड कम या ज्यादा करने का सिग्नल कैसे मिलता है और वह उसी के अनुसार अपनी मोटर की स्पीड कैसे बदलता है. तो आइए जानते हैं कि सेंसर से मोटर तक स्मार्ट फैन खुद अपनी स्पीड कैसे एडजस्ट करता है.&amp;nbsp;
स्मार्ट फैन खुद अपनी स्पीड कैसे एडजस्ट करता है?
कुछ स्मार्ट फैन में ऐसे सेंसर होते हैं, जो कमरे के तापमान या नमी में होने वाले बदलाव को पहचान सकते हैं. इन जानकारियों के आधार पर पंखे की स्पीड को जरूरत के मुताबिक एडजस्ट किया जा सकता है. तापमान बढ़ने पर सिस्टम पंखे की स्पीड बढ़ाने के लिए सेट किया जा सकता है. वहीं कम हवा की जरूरत होने पर इसकी स्पीड घटाई जा सकती है.&amp;nbsp;
इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर कैसे करता है मोटर को कंट्रोल?
BLDC यानी ब्रशलेस डायरेक्ट करंट मोटर वाले पंखों में स्पीड कंट्रोल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर लगा होता है. यह रिमोट, वॉल स्विच या स्मार्ट कंट्रोल पैनल से मिलने वाले निर्देशों को मोटर तक पहुंचाता है. इसके बाद कंट्रोलर इलेक्ट्रिकल पल्स को एडजस्ट करके मोटर की घूमने की स्पीड कंट्रोल करता है. पारंपरिक पंखों में रेगुलेटर वोल्टेज कम करके स्पीड घटाता है, जबकि BLDC फैन में इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर मोटर की स्पीड को सीधे कंट्रोल करता है. इससे स्पीड में बदलाव ज्यादा आसानी से किया जा सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Amazon के नए AI गैजेट्स सुनेंगे आपकी बातें, कैसे काम करती है टेक्नोलॉजी?
स्मार्ट फैन में मिलते हैं कई कंट्रोल ऑप्शन&amp;nbsp;
स्मार्ट फैन को मोबाइल ऐप, रिमोट या वॉयस कमांड से कंट्रोल किया जा सकता है. कुछ मॉडल में टाइमर और शेड्यूलिंग की सुविधा भी मिलती है. इससे पंखे को तय समय पर चालू या बंद करने की सेटिंग की जा सकती है. इसके अलावा ब्रीज मोड में पंखा अलग-अलग समय पर अपनी स्पीड बदलता है. वहीं एक ही ऐप से कई स्मार्ट फैन को ग्रुप में जोड़कर उनकी स्पीड और ऑन-ऑफ सेटिंग्स एक साथ कंट्रोल की जा सकती हैं.
स्मार्ट फैन बिजली की खपत कैसे घटा सकता है?
BLDC फैन का इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम जरूरत के मुताबिक मोटर की स्पीड और बिजली की खपत को कंट्रोल करता है. BLDC फैन समान क्षमता वाले पारंपरिक फैन की तुलना में लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक कम बिजली यूज कर सकता है, हालांकि बचत फैन के मॉडल और यूज पर निर्भर करती है.
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        <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>नए स्मार्टफोन महंगे होने से डिमांड में रिफर्बिश्ड फोन, 13 पर्सेंट तक बढ़ी डिमांड</title>
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        <description><![CDATA[ नए स्मार्टफोन महंगे होने से डिमांड में रिफर्बिश्ड फोन, 13 पर्सेंट तक बढ़ी डिमांड ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>40 घंटे तक म्यूजिक, प्रीमियम डिजाइन! Sony ने पेश किया नया Walkman</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल गाने सुनने के लिए लोग स्मार्टफोन या वायरलेस ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि बेहतर ऑडियो क्वालिटी पसंद करने वालों के बीच म्यूजिक प्लेयर की अपनी अलग जगह है. इसी को ध्यान में रखते हुए Sony ने अपनी नई प्रीमियम Signature Series Walkman रेंज पेश की है. इसमें NW-WM1ZM3, NW-WM1AM3 और NW-ZX900 नाम के तीन मॉडल शामिल हैं. इन वॉकमैन में प्रीमियम मटेरियल से बनी बॉडी, ऑडियो के लिए खास तकनीक और लंबे समय तक चलने वाली बैटरी दी गई है. तो आइए जानते हैं कि Sony ने लॉन्च किए 3 नए प्रीमियम Walkman में कौन-से खास फीचर्स हैं.&amp;nbsp;
Sony ने लॉन्च किए 3 नए प्रीमियम Walkman में कौन-से खास फीचर्स हैं
Sony के सबसे महंगे Walkman NW-WM1ZM3 में 4N ऑक्सीजन-फ्री कॉपर इस्तेमाल किया गया है. इसकी बॉडी के आगे और पीछे के हिस्से को इसी से बनाया गया है और इस पर सोने की परत भी चढ़ाई गई है. कंपनी का दावा है कि यह डिजाइन बास, साउंडस्टेज और हाई-फ्रीक्वेंसी ऑडियो को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसमें Kimber Kable वायरिंग भी मिलती है. वहीं NW-WM1AM3 और NW-ZX900 की मुख्य बॉडी एल्युमिनियम अलॉय से बनी है, हालांकि इन दोनों मॉडल के पिछले हिस्से में भी गोल्ड-प्लेटेड ऑक्सीजन-फ्री कॉपर का इस्तेमाल किया गया है.&amp;nbsp;
40 घंटे तक मिलेगी बैटरी लाइफ
बैटरी के मामले में NW-ZX900 सबसे आगे है. कंपनी के मुताबिक, यह 128kbps MP3 ऑडियो प्लेबैक पर 40 घंटे तक चल सकता है. वहीं म्यूजिक स्ट्रीमिंग के दौरान इसकी बैटरी लाइफ 35 घंटे तक बताई गई है. NW-WM1ZM3 और NW-WM1AM3 दोनों मॉडल 128kbps MP3 प्लेबैक पर 35 घंटे तक और स्ट्रीमिंग के दौरान 31 घंटे तक चल सकते हैं. Sony के तीनों नए Signature Series Walkman फिलहाल कुछ ग्लोबल मार्केट में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध हैं, हालांकि भारत में इन वॉकमैन के लॉन्च और उपलब्धता को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - एक ऐप से जुड़ेगा परिवार का मोबाइल डेटा, Vi ने शुरू की नई सुविधा
ऑडियो टेक्नोलॉजी और डिस्प्ले
तीनों Walkman में Sony की S-Master HX डिजिटल एम्प टेक्नोलॉजी और Native DSD फॉर्मेट का सपोर्ट मिलता है. ये Sony के DSD Remastering Engine के साथ आते हैं. NW-ZX900 में अल्ट्रा-लो-नॉइज LDO रेगुलेटर और क्रिस्टल ऑसिलेटर दिए गए हैं. ये कंपोनेंट्स ऑडियो प्लेयर के डिजाइन का हिस्सा हैं. डिस्प्ले की बात करें तो NW-WM1ZM3 और NW-WM1AM3 में 5.5 इंच की स्क्रीन दी गई है, जबकि NW-ZX900 में 5 इंच का डिस्प्ले मिलता है. यूजर्स होम स्क्रीन के इंटरफेस को अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज भी कर सकते हैं.&amp;nbsp;
Sony Signature Series Walkman की कीमत&amp;nbsp;Sony की नई Signature Series Walkman रेंज में तीन मॉडल शामिल हैं, जिनकी कीमत अलग-अलग रखी गई है. इनमें NW-WM1ZM3 सबसे महंगा है, जिसकी कीमत अमेरिका में 5,899 डॉलर और कनाडा में 8,259.99 कनाडाई डॉलर है. वहीं NW-WM1AM3 की कीमत अमेरिकी बाजार में 2,999.99 डॉलर और कनाडा में 4,199.99 कनाडाई डॉलर है. इसके तीसरे मॉडल NW-ZX900 को अमेरिका में 1,899.99 डॉलर और कनाडा में 2,659.99 कनाडाई डॉलर में पेश किया गया है. भारतीय रुपये के हिसाब से इनकी कीमत 5.60 लाख, 2.85 लाख और 1.80 लाख रुपये है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - एक्सटेंशन बोर्ड पर कितने गैजेट चलाना सुरक्षित? समझें लोड का गणित ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>AI से आवाज चेंज करके हो रही ठगी, तुरंत जान लें सेफ्टी टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ आपके फोन पर किसी अंजान नंबर से कॉल आता है. आप जैसे ही कॉल रिसीव करते हैं दूसरी तरफ से आपके पापा, भाई, बहन या किसी बेस्ट फ्रेंड की घबराई हुई आवाज सुनाई देती है. वह आपसे कहता है कि उसका एक्सीडेंट हो गया है या वह किसी बड़ी प्रॉब्लम में फंस गये है और उन्हें तुरंत कुछ रुपये चाहिए. तो ऐसे में आप क्या करेंगे जाहिर है कि अपनों की ऐसी आवाज सुनकर कोई भी पैनिक कर जाएगा और बिना कुछ सोचे तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देगा.
लेकिन यह भी तो हो सकता है कि फोन पर बात करने वाला इंसान आपका कोई फैमिली मेंबर नहीं बल्कि एक Cyber Criminal हो. आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से लोगों की हूबहू आवाज कॉपी करके ठगी करने का नया ट्रेंड चल पड़ा है. इसे AI वॉइस स्कैम कहा जा रहा है. देश में बढ़ते फ्रॉड को देखते हुए सरकार के टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने लोगों के लिए एक जरूरी सेफ्टी अलर्ट जारी किया है.
इस तरीके से हो रहा है AI वॉइस स्कैम&amp;nbsp;
सरकार के टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करके लोगों को इस नए स्कैम से अलर्ट रहने को कहा है. साइबर फ्रॉड करने वाले अब पुराने तरीकों को छोड़कर हाई-टेक हो गए हैं. यह स्कैमर्स AI टूल्स की मदद से किसी भी इंसान की आवाज को चेंज कर लेते हैं. इसके बाद वे आपके पेरेंट्स, भाई-बहन या किसी क्लोज रिलेटिव की आवाज में आपको कॉल लगाते हैं. AI से बदली गई यह आवाज इतनी असली लगती है कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है.&amp;nbsp;
कॉल पर यह ठग हॉस्पिटल की इमरजेंसी, पुलिस केस या रोड एक्सीडेंट जैसी कोई झूठी कहानी सुनाते हैं. इनका मकसद आपको डराना होता है जिससे आपको सोचने का टाइम ही न मिले. इसी घबराहट का फायदा उठाकर वे तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं. कई बार यह अमाउंट हजारों से लेकर लाखों रुपये तक होता है. जब तक इंसान को सच पता चलता है तब तक बैंक अकाउंट खाली हो चुका होता है.

ऐसे पहचानें सामने वाला ठग है
टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने अपनी एडवाइजरी में कुछ ऐसी जरूरी बातें बताई हैं जिनसे आप तुरंत पकड़ सकते हैं कि कॉल फेक है. ऐसे केस में कॉल हमेशा किसी Unknown नंबर से आएगा. स्कैमर बहाना बनाएगा कि उसके Phone की बैटरी डेड हो गई है या Phone खो गया है इसलिए वह किसी और के नंबर से कॉल कर रहा है. इसके बाद कॉल करने वाला बिना टाइम दिए तुरंत रुपये की डिमांड करेगा और आप पर अभी के अभी पेमेंट करने का प्रेशर बनाएगा.&amp;nbsp;
और आखिरी बात वह हमेशा पैसे किसी अनजान बैंक अकाउंट या फिर किसी अजीब से UPI नंबर पर सेंड करने के लिए कहेगा. अगर आपको किसी भी कॉल पर इन तीनों चीजों से सामना हो तो इमोशनल होने के बजाय तुरंत अलर्ट हो जाएं. समझ जाइए कि कोई आपकी फीलिंग्स का फायदा उठाकर आपको ठगने की कोशिश कर रहा है.

यह भी पढ़ें: नए स्मार्टफोन महंगे होने से डिमांड में रिफर्बिश्ड फोन, 13 पर्सेंट तक बढ़ी डिमांड
स्कैम से बचने के लिए क्या करें?
इस तरह के स्कैम से बचने के लिए हमेशा कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी हैय सरकार का कहना है कि किसी भी Unknown नंबर से आने वाले कॉल पर आंख बंद करके भरोसा न करें फिर चाहे आवाज कितनी ही जानी-पहचानी क्यों न लगे. ऐसा कोई भी कॉल आने पर पैनिक करने के बजाय पहले फोन काटें और अपने उस फैमिली मेंबर या दोस्त के असली नंबर पर खुद कॉल लगाएं. अगर उनका नंबर स्विच ऑफ या बिजी आए तो घर के किसी दूसरे मेंबर से बात करके कन्फर्म करें कि सब ठीक है या नहीं.&amp;nbsp;
बिना पक्का किए एक रुपया भी Send न करें. अगर आपको ऐसा कोई Fradu या डाउटफुल कॉल आता है. तो तुरंत संचार साथी पोर्टल पर जाकर उसे रिपोर्ट करें. और अगर गलती से आपके साथ फ्रॉड हो जाता है तो बिना देरी किए तुरंत नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या फिर cybercrime.gov.in वेबसाइट पर ऑनलाइन कंप्लेंट दर्ज कराएं.
यह भी पढ़ें: जनरेटर कैसे बनाता है बिजली, इससे कितने एसी चला सकते हैं? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>से, आवाज, चेंज, करके, हो, रही, ठगी, तुरंत, जान, लें, सेफ्टी, टिप्स</media:keywords>
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        <title>रेगुलेटर घुमाते ही कैसे बदलती है पंखे की बिजली खपत? जानें टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ गर्मी और उमस के दिनों में पंखे की स्पीड कम-ज्यादा करना हमारी रोज की आदत है. तेज हवा चाहिए तो रेगुलेटर बढ़ा देते हैं और हल्की हवा के लिए स्पीड कम कर देते हैं. ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या धीमी स्पीड पर पंखा चलाने से बिजली का बिल भी कम होता है. इसका जवाब पंखे की स्पीड के साथ-साथ उसमें लगी मोटर और रेगुलेटर की टेक्नोलॉजी पर भी निर्भर करता है.
अलग-अलग तरह के रेगुलेटर बिजली की खपत को अलग तरीके से कंट्रोल करते हैं. ऐसे में सिर्फ पंखे की स्पीड कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि आपका पंखा किस तकनीक पर काम करता है और स्पीड बदलने पर उसकी बिजली की खपत में कितना अंतर आता है. तो आइए जानते हैं कि रेगुलेटर घुमाते ही पंखे की बिजली खपत कैसे बदलती है.&amp;nbsp;
रेगुलेटर घुमाते ही पंखे की बिजली खपत कैसे बदलती है
पंखे की बिजली खपत उसकी मोटर, रेगुलेटर और चलने की स्पीड पर निर्भर करती है. आमतौर पर तेज स्पीड पर मोटर ज्यादा बिजली खर्च करती है, जबकि कम स्पीड पर खपत घट सकती है, हालांकि यह बदलाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि पंखे में किस तरह की मोटर और रेगुलेटर लगा है. पुराने रेगुलेटर में बिजली की अतिरिक्त एनर्जी गर्मी के रूप में बर्बाद हो सकती है. वहीं आज इस्तेमाल होने वाले कैपेसिटिव रेगुलेटर वोल्टेज को कंट्रोल करके बिजली की बर्बादी कम करते हैं.&amp;nbsp;
पुराने और नए रेगुलेटर में क्या है अंतर?
पुराने रेसिस्टिव रेगुलेटर बिजली की अतिरिक्त एनर्जी को गर्मी में बदल देते हैं. ऐसे में पंखे की स्पीड कम करने के बावजूद बिजली की खपत ज्यादा रह सकती है. जैसे 75 वॉट का पंखा इस तरह के रेगुलेटर के साथ कम स्पीड पर भी लगभग पूरी बिजली खींच सकता है. इसके मुकाबले कैपेसिटिव रेगुलेटर बिजली की खपत कम करने में बेहतर होते हैं. ऐसे रेगुलेटर वाले 75 वॉट के पंखे की खपत मध्यम स्पीड पर लगभग 40 वॉट और कम स्पीड पर करीब 20 वॉट हो सकती है.&amp;nbsp;
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BLDC मोटर वाले पंखे कैसे बचाते हैं बिजली?
पंखों में इस्तेमाल होने वाली BLDC मोटर बिजली की खपत को बेहतर तरीके से कंट्रोल करती है. इनमें इलेक्ट्रॉनिक सर्किट स्पीड को सटीक बनाए रखने में मदद करते हैं. इससे वोल्टेज में उतार-चढ़ाव होने पर भी पंखे की तय स्पीड और हवा का प्रवाह ज्यादा स्थिर रहता है.एक सामान्य BLDC पंखा तेज स्पीड पर लगभग 35 वॉट, मध्यम स्पीड पर 15 वॉट और कम स्पीड पर सिर्फ 5 वॉट बिजली खर्च कर सकता है, हालांकि खपत पंखे के मॉडल के अनुसार अलग हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>सेकंडों में बिक गया iPhone Duo का शुरुआती स्टॉक, अब डिलीवरी की चुनौती</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के पहले फोल्डेबल iPhone Duo को खरीदने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. फोन की प्री-बुकिंग शुरू होते ही शुरुआती स्टॉक खत्म हो गया और अब इसे ऑर्डर करने वाले यूर्जस को डिलीवरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. कुछ बाजारों में फोन की डिलीवरी की तारीख जनवरी 2027 तक पहुंच गई है, हालांकि Apple ने अभी तक यह जानकारी नहीं दी है कि प्री-बुकिंग के पहले चरण में बिक्री के लिए कितने फोन उपलब्ध कराए गए थे. ऐसे में यह साफ नहीं है कि स्टॉक जल्दी खत्म होने की वजह यूजर्स की भारी मांग है या कंपनी ने शुरुआत में बिक्री के लिए कम फोन उपलब्ध कराए थे.&amp;nbsp;
प्री-बुकिंग शुरू होते ही खत्म हुआ शुरुआती स्टॉक
iPhone Duo की प्री-बुकिंग 16 अक्टूबर को शुरू हुई थी. अमेरिका समेत कई बाजारों में शुरुआती स्टॉक कुछ ही समय में बिक गया. इसके बाद डिलीवरी की अनुमानित तारीखें लगातार आगे बढ़ने लगीं. अमेरिका में कुछ कॉन्फिगरेशन के लिए डिलीवरी की तारीख नवंबर से बढ़कर जनवरी 2027 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है. चीन में भी Apple की आधिकारिक वेबसाइट पर डिलीवरी के लिए जनवरी 2027 की तारीख दिखाई गई, जबकि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फोन के सभी मॉडल आउट ऑफ स्टॉक हो गए.&amp;nbsp;
क्या ज्यादा मांग की वजह से बढ़ा इंतजार?
iPhone Duo की डिलीवरी में देरी की वजह उसका नया फोल्डेबल डिजाइन हो सकता है, जिसे बनाने में कंपनी को ज्यादा समय लग रहा हो. इसके अलावा शुरुआत में बिक्री के लिए कम फोन उपलब्ध होने की आशंका भी है, हालांकि Apple ने अभी यह नहीं बताया है कि पहले चरण में कितने फोन बिक्री के लिए रखे गए थे. ऐसे में यह साफ नहीं है कि डिलीवरी में देरी की वजह ज्यादा मांग या फोन की कम सप्लाई है.
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कितनी है iPhone Duo की कीमत?
Apple का पहला फोल्डेबल फोन प्रीमियम सेगमेंट में पेश किया गया है. भारत में इसके 256GB स्टोरेज वाले बेस मॉडल की कीमत 2,99,900 रुपये है. वहीं, 2TB स्टोरेज वाले टॉप मॉडल के लिए 4,49,900 रुपये खर्च करने होंगे. फोन Star White और Night Sky कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होने वाली है.&amp;nbsp;
 iPhone Duo में क्या-क्या है खास?
iPhone Duo में बुक-स्टाइल फोल्डिंग डिजाइन दिया गया है. इसमें बाहर की तरफ 5.4 इंच की कवर स्क्रीन और फोन खोलने पर 7.6 इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले मिलता है. स्क्रीन पर नैनो-टेक्सचर फिनिश दी गई है. परफॉर्मेंस के लिए इसमें A20 Pro चिपसेट दिया गया है. फोटोग्राफी के लिए फोन में दो 48 मेगापिक्सल के रियर कैमरे हैं. यह iOS 27 पर काम करता है और इसमें फिजिकल सिम ट्रे की जगह केवल eSIM का सपोर्ट दिया गया है.
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब ऐप डाउनलोड के साथ खरीदें फोन! Google Play Store में आया नया फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ अब तक Google Play Store का नाम सुनते ही मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने या उन्हें अपडेट करने का ख्याल आता था, लेकिन अब यहां से फोन खरीदने का रास्ता भी मिल रहा है. Google ने Play Store में एक नया Shop devices फीचर जोड़ा है, जिसके जरिए यूजर्स कंपनी के हार्डवेयर प्रोडक्ट्स देख सकते हैं और खरीदारी के लिए आगे बढ़ सकते हैं.
यह सुविधा भारत समेत कुछ बाजारों में उपलब्ध है, फिलहाल इसमें Google Pixel और Samsung के कुछ डिवाइस दिखाई दे रहे हैं, हालांकि इस फीचर के जरिए सीधे Play Store पर भुगतान नहीं होता है, बल्कि प्रोडक्ट चुनने के बाद यूजर Google Store पर पहुंच जाता है, जहां खरीदारी की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.&amp;nbsp;
Google Play Store में कहां मिलेगा Shop devices का फीचर?
नया Shop devices फीचर Play Store के अकाउंट स्विचर में दिखाई देता है. यूजर इस फीचर पर टैप करके उपलब्ध डिवाइस की लिस्ट देख सकते हैं. यहां से किसी प्रोडक्ट को चुनने पर Google Store खुल जाता है, जहां उसकी जानकारी देखने, उपलब्ध कॉन्फिगरेशन चुनने और भुगतान करने का ऑप्शन मिलता है, फिलहाल इस सुविधा के तहत प्रोडक्ट सामान्य कीमतों पर लिस्ट किए गए हैं. अभी इसके साथ किसी खास डिस्काउंट की पेशकश नहीं की जा रही है.&amp;nbsp;
क्या Google आगे बढ़ाएगा यह सुविधा?
Google के सपोर्ट पेज पर भी Play Store के जरिए हार्डवेयर खरीदने की सुविधा का जिक्र है. इसके मुताबिक Google Store पर उपलब्ध कुछ योग्य Google और Samsung प्रोडक्ट्स Play Store में दिखाई दे सकते हैं, हालांकि कंपनी ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि Shop devices सेक्शन में आगे और प्रोडक्ट जोड़े जाएंगे या नहीं. इस फीचर के आने से यूजर्स को Play Store पर ऐप्स के साथ Google के डिवाइस देखने का ऑप्शन भी मिल रहा है. खरीदारी के लिए उन्हें Google Store पर जाना होगा.
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भारत में कौन-कौन से डिवाइस हैं लिस्टेड?
भारत में Shop devices सेक्शन के तहत Google के कई प्रोडक्ट्स शामिल किए गए हैं. इनमें Pixel 10a, Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro Fold, Pixel Watch 5 और Pixel Buds Pro 2 शामिल हैं. Pixel 10a को 55,999 रुपये और Pixel 11 को 89,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लिस्ट किया गया है. वहीं, Pixel 11 Pro Fold की शुरुआती कीमत 1,86,999 रुपये है. जानकारी के मुताबिक, कुछ दूसरे बाजारों में इस सेक्शन के अंदर Samsung Galaxy S26 और Galaxy S26 Ultra भी दिखाई दे रहे हैं, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध प्रोडक्ट्स की लिस्ट एक जैसी नहीं है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>कितने का आता है फेसियल रिकॉग्निशन कैमरा, क्या&amp;क्या होते हैं फीचर्स?</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर CCTV कैमरे चर्चा में हैं. सड़कों पर लगे CCTV कैमरे अब सिर्फ आने-जाने वाले लोगों की रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रह गए हैं. नई टेक्नोलॉजी की मदद से कुछ कैमरे चेहरों की पहचान करने और गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ने में भी सक्षम हैं. इसी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए दिल्ली पुलिस सेंट्रल और नई दिल्ली के इलाकों में 338 CCTV कैमरे लगाने की योजना पर काम कर रही है.
करीब 15.7 करोड़ रुपये के इस टेंडर में फिक्स्ड कैमरों के साथ फेस रिकॉग्निशन और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) तकनीक वाले कैमरे भी शामिल हैं. ऐसे में कई लोग सवाल उठ कर है कि आखिर ये कैमरे सामान्य CCTV से कैसे अलग होते हैं, इनमें कौन-से फीचर्स मिलते हैं और इन्हें लगाने में कितना खर्च आता है. तो आइए जानते हैं कि फेसियल रिकॉग्निशन कैमरा कितने का आता है और इसमें क्या-क्या फीचर्स होते हैं.
दिल्ली पुलिस के कैमरों में क्या होगा खास?
दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव में 248 फिक्स्ड कैमरे, 43 PTZ कैमरे और 47 ANPR कैमरे शामिल हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत वीडियो मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, डेटा स्टोरेज और संबंधित सिस्टम भी पांच साल के कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा होंगे. कैमरे रामलीला मैदान के VVIP गेट, तुर्कमान गेट, दिल्ली गेट, राजघाट, इंडिया गेट के C-Hexagon, मंडी हाउस और पटियाला हाउस कोर्ट जैसी जगहों पर लगाए जाने प्रस्तावित हैं.&amp;nbsp;
कितने रुपये का आता है फेस रिकॉग्निशन कैमरा?
फेस रिकॉग्निशन कैमरे की कीमत उसके फीचर्स, पहचानने की क्षमता और सुरक्षा तकनीक पर निर्भर करती है. भारत में सामान्य फेस रिकॉग्निशन डिवाइस की कीमत लगभग 7,000 से 20,000 रुपये तक हो सकती है. वहीं AI और लाइवनेस डिटेक्शन वाले एडवांस डिवाइस करीब 18,000 से 35,000 रुपये या उससे ज्यादा के मिल सकते हैं. फेस, फिंगरप्रिंट और कार्ड जैसे कई ऑप्शनों वाले डिवाइस की कीमत 20,000 से 60,000 रुपये या इससे ज्यादा हो सकती है. साथ ही GST, इंस्टॉलेशन और सॉफ्टवेयर का खर्च अलग हो सकता है.&amp;nbsp;
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कैमरों में कौन-से फीचर्स मिलते हैं?
इन डिवाइस में लाइवनेस डिटेक्शन जैसे फीचर हो सकते हैं, जो असली व्यक्ति के चेहरे और फोटो या मोबाइल स्क्रीन पर दिखाए गए चेहरे के बीच अंतर पहचानने में मदद करते हैं. कम रोशनी में काम करने के लिए इन्फ्रारेड लाइट और WDR तकनीक यूजफुल होती हैं. कुछ कैमरों में एज AI प्रोसेसिंग भी होती है, जिससे डेटा का विश्लेषण डिवाइस पर ही किया जा सकता है. इसके अलावा नंबर प्लेट पहचानने, कैमरे की दिशा बदलने और रिकॉर्डिंग को सॉफ्टवेयर के जरिए मैनेज करने जैसी सुविधाएं भी सिस्टम का हिस्सा हो सकती हैं.&amp;nbsp;
कैसे काम करती है फेस रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी?
सामान्य CCTV कैमरा आसपास की एक्टिवीटीज का वीडियो रिकॉर्ड करता है, जबकि फेस रिकॉग्निशन सिस्टम चेहरे की तस्वीर का उपलब्ध डेटाबेस से मिलान कर संभावित पहचान बताता है, हालांकि कैमरे से मिला नतीजा किसी व्यक्ति की सही पहचान की पक्की पुष्टि नहीं करता है. कई बार तकनीक गलत पहचान भी कर सकती है.
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>ऑनलाइन विज्ञापनों से कैसे जासूसी कर रहा था इजरायल? रिसर्च में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ इंटरनेट चलाते वक्त किसी ऐप पर काम करते हुए जब स्क्रीन पर किसी चीज का विज्ञापन दिखता है. तो हम उसे नार्मल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि यही मामूली दिखने वाले विज्ञापन आपकी जासूसी कर रहे हों? साइबर सेफ्टी पर काम करने वाले रिसर्च ग्रुप Citizen Lab और Confiant की एक नई रिसर्च ने इंटरनेट की दुनिया में हड़कंप मचा दिया है.&amp;nbsp;
इस खुलासे के मुताबिक इजरायल की डिजिटल विज्ञापन एजेंसी Discover Tech ने ऑनलाइन विज्ञापनों की आड़ में दुनिया भर में जासूसी का एक बहुत बड़ा जाल बिछा रखा था. यह कंपनी रोजमर्रा के सामानों के विज्ञापन दिखाकर लोगों को ट्रैक कर रही थी और उनके फोन, कंप्यूटर में चुपके से जासूसी सॉफ्टवेयर यानी स्पाइवेयर डाल रही थी. इस कंपनी के तार इजरायल की कुख्यात और अमेरिका द्वारा ब्लैकलिस्टेड स्पाइवेयर फर्म Candiru से जुड़े मिले हैं. जिसका खतरनाक सॉफ्टवेयर इन विज्ञापनों के जरिए डिवाइस में प्लांट किया जाता था.
रोजाना चलते थे एक करोड़ जासूसी विज्ञापन
रिसर्च में सामने आया है कि Discover Tech अपने विज्ञापन दिखाने के लिए Google, Comcast और रूस के Yandex जैसे दुनिया के सबसे बड़े एड प्लेटफॉर्म्स के नेटवर्क का इस्तेमाल करती थी. Citizen Lab के मुताबिक इस इजरायली कंपनी के विज्ञापन दुनिया भर की 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइट्स और 75 हजार मोबाइल ऐप्स पर चल रहे थे. सबसे खतरनाक बात यह थी कि शिकार बनने के लिए यूजर का विज्ञापन पर क्लिक करना भी जरूरी नहीं था.
जैसे ही कोई इंसान ऐसी किसी वेबसाइट या ऐप को खोलता और स्क्रीन पर विज्ञापन लोड होत&amp;nbsp; Discover Tech उसे ट्रैक कर लेती थी.&amp;nbsp; Confiant के सह-संस्थापक जेरोम डंगू के अनुसार यह कंपनी रोजाना कम से कम एक करोड़ विज्ञापन चलाती और Cookie Matching तकनीक से करोड़ों लोगों का पीछा कर रही थी.

पेंटागन, संयुक्त राष्ट्र और अल-जजीरा से लेकर फलस्तीन तक
इस जासूसी नेटवर्क ने सिर्फ आम इंटरनेट यूजर्स को ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले संगठनों को भी अपनी जद में ले लिया था. शोधकर्ताओं ने मुताबिक कि इन जासूसी विज्ञापनों की पहुंच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन, संयुक्त राष्ट्र यानी यूनाइटेड नेशन्स, नाटो, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और यूरोपीय आयोग के साथ-साथ दिग्गज टेक कंपनी Nvidia के नेटवर्क तक थी.&amp;nbsp;
सिटिजन लैब ने अपनी जांच में पुष्टि की है कि साल 2024 से 2025 के बीच इन्हीं विज्ञापनों के जरिए भेजे गए स्पाइवेयर से कतर के मशहूर मीडिया संस्थान Al Jazeera के 45 विंडोज डिवाइसेस को निशाना बनाकर हैक किया गया था.&amp;nbsp;
वहीं फलस्तीनी इलाकों में तो इन विज्ञापनों की भरमार थी. वहां की लगभग हर वेबसाइट पर Discover Tech के विज्ञापन मौजूद थे जिससे इस इजरायली फर्म को पूरे क्षेत्र की डिजिटल गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने में मदद मिल रही थी और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी.

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खुलासे के बाद हरकत में आईं टेक कंपनियां
इस सनसनीखेज खुलासे के सामने आने के बाद पूरी दुनिया में इंटरनेट सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और बड़ी टेक कंपनियों ने तुरंत एक्शन लिया है. Google ने Citizen Lab और Confiant की जांच में सहयोग करते हुए नीतियों का बार-बार उल्लंघन करने के आरोप में Discover Tech को अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इसी तरह Comcast की एड-टेक कंपनी बीजवैक्स ने भी अपने प्लेटफॉर्म से इस इजरायली फर्म की छुट्टी कर दी है.&amp;nbsp;
उधर यूरोपीय डिजिटल मार्केटिंग संगठन ने भी ऑडिट के बाद Discover tech को अपने स्वीकृत वेंडर्स की लिस्ट से निलंबित कर दिया है. विज्ञापनों के जरिए होने वाली यह जासूसी अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है. इससे पहले पेंटागन ने भी चिंता जताई थी कि युद्ध क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को एड-टेक कंपनियों के लोकेशन डेटा के जरिए निशाना बनाया गया था जिसके बाद कई सैन्य डिवाइसों पर एड ट्रैकिंग बंद कर दी गई है.
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>अब चश्मे में मिलेगा ChatGPT? Nothing बना रहा है AI Smart Glasses!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-चश्मे-में-मिलेगा-chatgpt-nothing-बना-रहा-है-ai-smart-glasses</link>
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        <description><![CDATA[ ब्रिटेन की टेक कंपनी Nothing अब स्मार्ट चश्मों के बाजार में कदम रखने की तैयारी कर सकती है. सामने आई लीक जानकारी के मुताबिक, कंपनी दो तरह के AI स्मार्ट ग्लास बना रही है. इनमें पहला मॉडल चश्मे के जरिए गाने सुनने और फोन कॉल करने की सुविधा दे सकता है. वहीं दूसरे मॉडल में कैमरा भी मिलने की उम्मीद है, जिससे फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए जा सकेंगे.
इसके अलावा इसमें ChatGPT और दूसरी भाषाओं को तुरंत ट्रांसलेशन करने जैसे फीचर्स भी मिल सकते हैं, हालांकि Nothing ने अभी तक इन चश्मों को बनाने या लॉन्च करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;दो तरह के स्मार्ट चश्मे लाने की तैयारी में Nothing
लीक के अनुसार, Nothing अलग-अलग जरूरतों वाले यूजर्स के लिए दो मॉडल तैयार कर रहा है. पहला मॉडल रोजमर्रा के यूज के लिए ऑडियो डिवाइस की तरह काम कर सकता है, जबकि दूसरा अधिक AI फीचर्स के साथ आ सकता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;Meta और दूसरी कंपनियों से मिलेगी टक्कर?
स्मार्ट चश्मों के बाजार में Meta पहले से Ray-Ban Meta जैसे प्रोडक्ट्स के जरिए मौजूद है. Samsung और Google भी आईवियर ब्रांड्स के साथ स्मार्ट चश्मों पर काम कर चुके हैं, जबकि Apple के स्मार्ट चश्मे को लेकर भी चर्चाएं हैं, फिलहाल Nothing ने अपने स्मार्ट चश्मों की कीमत, डिजाइन, बैटरी क्षमता या लॉन्च डेट की जानकारी नहीं दी है. कुछ शुरुआती चर्चाओं में 2027 के आसपास लॉन्च की संभावना जताई गई है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है.&amp;nbsp;Nothing के पहले मॉडल में मिलेंगे ऑडियो फीचर्स
रिपोर्ट के मुताबिक, बेस मॉडल में चश्मे के फ्रेम के अंदर ही ऑडियो की सुविधा दी जा सकती है. इससे यूजर्स म्यूजिक सुनने, ऑडियोबुक चलाने और फोन कॉल करने जैसे काम कर सकेंगे. इसके अलावा, चश्मे को स्मार्टफोन से कनेक्ट करके Google Assistant या Siri जैसे वॉइस असिस्टेंट का यूज भी किया जा सकेगा. इस मॉडल में कैमरा नहीं दिया जाएगा, जिससे इसका फोकस ऑडियो फीचर्स पर रहेगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;Nothing के दूसरे मॉडल में ChatGPT और कैमरा&amp;nbsp;
दूसरा स्मार्ट चश्मा पहले मॉडल के ऑडियो फीचर्स के साथ कैमरा भी दे सकता है. इसकी मदद से यूजर्स अपने नजरिए से फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे. लीक के अनुसार, इस मॉडल में OpenAI के ChatGPT का इंटीग्रेशन और रियल-टाइम भाषा ट्रांसलेशन की सुविधा भी मिल सकती है. इससे दूसरी भाषा में बातचीत समझने और रोजमर्रा के सवालों के जवाब पाने में मदद मिल सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - iPhone Duo की प्री-बुकिंग आज से शुरू! 3 लाख का फोन आखिर कितना खास?&amp;nbsp;धूप में खुद बदल जाएंगे लेंस
दोनों मॉडल में फोटोक्रोमिक लेंस मिलने की बात कही गई है. ये लेंस तेज धूप में अपने आप गहरे हो जाते हैं और घर या किसी बंद जगह पर आने पर फिर से साफ हो जाते हैं. इस तरह बाहर निकलते समय अलग से धूप का चश्मा ले जाने की जरूरत कम हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>भारतीय कंपनी ‘स्काईरूट’ की मदद से रात में ‘धूप’ बेचेगी अमेरिकी कंपनी</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय कंपनी ‘स्काईरूट’ की मदद से रात में ‘धूप’ बेचेगी अमेरिकी कंपनी ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone Duo की प्री&amp;बुकिंग आज से शुरू! 3 लाख का फोन आखिर कितना खास?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन की दुनिया में अब तक लोगों ने फोल्डेबल फोन के कई डिजाइन देखे हैं, लेकिन जब बात Apple की हो तो हर नए डिवाइस पर नजरें टिक जाती हैं. कंपनी ने सितंबर में अपने Surprise and Shine इवेंट में पहली बार फोल्डेबल iPhone Duo पेश किया था. इसके बाद से ही इसकी बिक्री शुरू होने का इंतजार किया जा रहा था. अब यह इंतजार खत्म होने जा रहा है.
Apple आज भारत समेत कई देशों में इसकी प्री-बुकिंग शुरू कर रहा है. करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत वाले इस फोन में फोल्ड होने वाली स्क्रीन, दो डिस्प्ले और नया प्रोसेसर दिया गया है. तो आइए जानते हैं कि iPhone Duo की प्री-बुकिंग कितने बजे शुरू होगी और यह फोन आखिर कितना खास है.&amp;nbsp;
iPhone Duo की प्री-बुकिंग कितने बजे शुरू होगी?
भारत में iPhone Duo की प्री-बुकिंग आज शाम 5:30 बजे से शुरू होगी. यूजर्स Apple की आधिकारिक वेबसाइट और Apple Store ऐप के जरिए फोन बुक कर सकेंगे. इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होगी. उस दिन यह Apple के ऑनलाइन स्टोर और कुछ पार्टनर रिटेलर्स से खरीदा जा सकेगा.
iPhone Duo आखिर कितना खास है?
iPhone Duo में बुक की तरह खुलने वाला फोल्डेबल डिजाइन दिया गया है. इसमें अंदर की तरफ 7.6 इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले और बाहर की तरफ 5.4 इंच की Super Retina XDR स्क्रीन मिलती है. यह दोनों डिस्प्ले ProMotion टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करते हैं. फोन को खोलने पर बड़ी स्क्रीन पर वीडियो देखने, गेम खेलने और एक साथ कई काम करने के लिए ज्यादा जगह मिलती है. Apple के मुताबिक, इसका अंदर का डिस्प्ले iPhone 18 Pro Max की स्क्रीन से 50 प्रतिशत बड़ा है.
A20 Pro चिपसेट और कैमरे में क्या है खास?
iPhone Duo में Apple का A20 Pro चिपसेट दिया गया है, जिसे 2nm प्रोसेस पर बनाया गया है. यह स्मार्टफोन iOS 27.1 पर चलता है और इसमें Siri AI समेत Apple Intelligence के फीचर्स मिलते हैं. फोटोग्राफी के लिए फोन के पीछे 48 मेगापिक्सल का Dual Fusion कैमरा सिस्टम है. इसमें एक मेन कैमरा और एक अल्ट्रा-वाइड एंगल कैमरा शामिल है. वहीं सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 12 मेगापिक्सल का Center Stage फ्रंट कैमरा दिया गया है. फोन को खोलकर वीडियो कॉल करने के लिए इसमें अंडर-डिस्प्ले FaceTime कैमरा भी मौजूद है.&amp;nbsp;
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iPhone Duo की कीमत कितनी है?&amp;nbsp;Apple के पहले फोल्डेबल फोन iPhone Duo की भारत में शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है, जिसमें 256GB स्टोरेज वाला मॉडल मिलेगा. इसके 512GB वेरिएंट की कीमत 3,24,900 रुपये, 1TB मॉडल की 3,74,900 रुपये और सबसे ज्यादा 2TB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 4,49,900 रुपये रखी गई है. स्टोरेज बढ़ने के साथ फोन की कीमत भी बढ़ती है. कलर ऑप्शन की बात करें तो इसे Star White और Night Sky में खरीदा जा सकेगा.&amp;nbsp;फोन खरीदने पर मिलेंगे कौन-से ऑफर?
Apple अपने Trade In प्रोग्राम के तहत योग्य iPhone 13 या उससे नए मॉडल को एक्सचेंज करने पर अधिकतम 81,500 रुपये तक का क्रेडिट दे रहा है. इसके अलावा बैंकों के माध्यम से 12 महीने तक No Cost EMI का ऑप्शन उपलब्ध है. कार्ड से भुगतान करने पर 7,000 रुपये तक का इंस्टेंट कैशबैक भी मिल सकता है. फोन खरीदने वाले यूजर्स को Apple Music, Apple TV+ और Apple Arcade की तीन-तीन महीने की सदस्यता भी मिलेगी.
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब गूगल खुद रोकेगा स्कैम, ठगी होने से पहले काटेगा स्पैम कॉल!</title>
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        <description><![CDATA[ जैसे-जैसे डिजिटल दौर बढ़ता जा रहा है लोगों को कई कामों में सहूलियत होती जा रही है. लेकिन जहां लोगों के इस से फायदा हुआ है तो यही लोगों के लिए डर भी लेकर आया है. अब ठगी के भी नए-नए तरीके ईजाद हो गए है जिनसे साइबर ठग लाखों-करोड़ों की ठगी को मिनटों में अंजाम दे देते हैं. &amp;nbsp;कभी KYC अपडेट के नाम पर, तो कभी पार्सल अटकने या बैंक खाता ब्लॉक होने का डर दिखाकर स्कैमर्स लोगों ठगी का शिकार बना रहे हैं.&amp;nbsp;
इसी परेशानी से हमेशा के लिए निजात दिलाने के लिए Google ने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए नए AI-पावर्ड एंटी-स्कैम फीचर्स का एलान किया है. इस फीचर में आपका फोन सिर्फ Spam का अलर्ट ही नहीं देगा बल्कि ठगी होने से पहले ही फर्जी कॉल्स को खुद काट देगा और नंबर ब्लॉक भी कर देगा.&amp;nbsp;
गूगल ने इसमें यूजर्स की Privacy का भी पूरा ख्याल रखा है. यह स्मार्ट फीचर्स ऑन-डिवाइस Gemini Nano मॉडल पर चलेंगे और जरूरत पड़ने पर Private AI Compute की मदद लेंगे. कंपनी का दावा है कि इस दौरान आपकी जानकारी खुद गूगल भी नहीं देख सकेगा. जानें कैसे काम करेगा यह फीचर.&amp;nbsp;
ठगों को तुरंत रोक लेगा Enhanced Protection मोड
जैसे-जैसे पुराने सेफ्टी फीचर्स मजबूत हो रहे हैं वैसे-वैसे ठग भी नए पैंतरे आजमा रहे हैं. हाल ही में Pixel फोन्स के लिए आए स्टैंडर्ड स्पैम फिल्टर्स को भी अब शातिर स्कैमर्स चकमा देने लगे हैं. इसी का तोड़ निकालते हुए गूगल अपने मैसेज ऐप में Enhanced Protection मोड लेकर आ रहा है.&amp;nbsp;यह एक ऑप्ट-इन फीचर होगा जिसे यूजर अपनी मर्जी से ऑन कर सकेंगे.&amp;nbsp;
इसमें लगा Gemini मॉडल को जैसे ही लगता है कि सामने वाला शख्स आपको बातों में फंसा रहा है. स्क्रीन पर तुरंत चेतावनी आ जाएगी और आपके पास चैट जारी रखने और Report and Block करने का ऑप्शन होगा. इतना ही नहीं अगर कोई ठग किसी एकदम नई फिशिंग वेबसाइट का लिंक भेजता है, तो भी यह रियल-टाइम वेब सिग्नल्स क्लिक करने से पहले ही उसे पकड़कर नए Warning अलर्ट से आपको मालवेयर से बचा लेंगे.

स्क्रीन शेयरिंग और कॉल फॉरवर्डिंग नहीं हो पाएगी
फिलहाल यह स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स Google के मैसेज ऐप के लिए हैं. लेकिन कंपनी इस साल के आखिर तक बाकी इस्तेमाल के लिए ऑन-डिवाइस प्रोटेक्शन लाने पर दूसरी मोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रही है. इसके अलावा Google ने स्क्रीन-शेयरिंग और कॉल-फॉरवर्डिंग को भी रोकने काम काम किया है. अक्सर ठग मदद के बहाने लोगों से फोन की स्क्रीन शेयर करवा लेते हैं. एंड्रॉयड पहले से ही स्क्रीन शेयरिंग के वक्त Apps की प्राइवेट जानकारी छुपा देता है.&amp;nbsp;
लेकिन अब यह सेफ्टी फीचर गूगल क्रोम और एंड्रॉयड वेबव्यू पर भी काम करेगा. वहीं कई बार ठग भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर डायल पैड पर MMI कोड टाइप करवा देते हैं औक किसी ऐप से चुपके से कॉल फॉरवर्डिंग चालू कर देते हैं. अब एंड्रॉयड किसी भी ऐप को गुपचुप तरीके से कॉल फॉरवर्डिंग ऑन नहीं करने देगा और कोड डायल करने पर नई सेटिंग लागू होने से पहले चेतावनी दिखाएगा.

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बैंक के नाम पर आने वाली फर्जी कॉल्स रुकेंगे
Online ठगी सबसे ज्यादा फर्जी बैंक काॅल्स से की जाती है. Cyber ठग Caller ID Spoofing तकनीक का सहारा लेकर अपने Incoming नंबर को किसी बैंक या संस्थान के ऑफिशियल नंबर जैसा बना लेते हैं. आम इंसान स्क्रीन पर बैंक का जाना-पहचाना नंबर देखकर आसानी से भरोसा कर लेता है और ठगी का शिकार हो जाता है. इस जाल को काटने के लिए गूगल अब सीधे बैंकों के साथ हाथ मिला रहा है.
इस नए सिस्टम के तहत जब भी आपके पास बैंक के नाम से कोई कॉल आएगी. तो एंड्रॉयड रियल-टाइम में बैंक के साथ उसे चेक करेगा. इससे तुरंत यह कन्फर्म हो जाएगा कि कॉल वाकई आपका बैंक ही कर रहा है या कोई Scammer नकली नंबर से आपको काॅल कर रहा है. गूगल इस फीचर को ज्यादा देशों में बड़े पैमाने पर रोल-आउट करने के लिए लगातार कई और बैंकों के साथ जुड़ रहा है.
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बार&amp;बार चार्जिंग की टेंशन खत्म! इन 5 लैपटॉप की बैटरी चलती है घंटों</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो घर से बाहर निकलते वक्त लैपटॉप से ज्यादा उसके चार्जर की फिक्र करते हैं. तो यह खबर आपके बड़े काम की है. अक्सर Train में सफर करते समय, किसी Cafe में बैठकर काम करते हुए या ऑनलाइन लंबी क्लासेज के दौरान लैपटॉप की बैटरी एकदम डाउन हो जाती है. ऐसे में जरूरी काम तो अटकता ही है साथ में मूड भी खराब हो जाता है.&amp;nbsp;
कई बार तो जरूरी ऑनलाइन मीटिंग के बीच में ही सिस्टम बंद हो जाता है और फिर दोबारा से उतनी ही मेहनत करनी पड़ जाती है. लेकिन अब नए जमाने के स्मार्ट और कम बिजली खर्च करने वाले प्रोसेसर से लैस लैपटॉप अब सिर्फ तीन-चार घंटे नहीं बल्कि पूरे दिन आराम से चलते हैं. अगर आप भी बार-बार चार्जर लगाने के झंझट से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यह पांच लैपटॉप आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हैं.
Macbook Air और Dell XPS
जब भी लंबी बैटरी लाइफ की बात आती है तो Apple का Macbook Air सबसे पहले दिमाग में आता है. Apple&amp;nbsp; के सिलिकॉन चिप वाले इस लैपटॉप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सुबह एक बार फुल चार्ज करने के बाद आप इस पर लगातार 15 से 18 घंटे तक काम कर सकते हैं. यह लैपटॉप न तो जल्दी गर्म होता है और न ही भारी काम के दौरान बैटरी को तेजी से गिरने देता है.&amp;nbsp;
वहीं अगर आप Windows लैपटॉप चलाना पसंद करते हैं तो नया Dell XPS&amp;nbsp;13 आपके लिए एकदम बढ़िया ऑप्शन है. नए स्नैपड्रैगन एक्स एलीट प्रोसेसर के साथ आने वाला यह मॉडल बैटरी के मामले में Macbook को भी कड़ी टक्कर देता है और नार्मल काम में 20 घंटे के आसपास का बैकअप निकाल लेता है. वजन में बेहद हल्का होने की वजह से इसे बैग में रखकर कहीं भी ले जाना आसान है.&amp;nbsp;

HP Omnibook X 14 और Lenovo Yoga Slim 7x
इन दोनों के अलावा HP Omnibook X 14 भी आज के दौर के लंबे ऑफिस वर्क को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें दी गई दमदार बैटरी एक बार चार्ज होने पर करीब 18 से 20 घंटे तक का साथ निभाती है. अगर आपके काम में दिनभर दर्जनों ब्राउजर टैब्स खोलना, फाइलें तैयार करना और लंबी वीडियो कॉलिंग शामिल है, तब भी यह लैपटॉप शाम तक आसानी से टिकेगा.&amp;nbsp;
वहीं Lenovo Yoga Slim 7x भी बेहतरीन ओलेड डिस्प्ले और तगड़ी बैटरी के लिए लोग खूब खरीद रहे हैं. आमतौर पर चमकदार स्क्रीन वाले लैपटॉप बैटरी जल्दी खर्च करते हैं. लेकिन Lenovo ने इसमें कमाल का पावर मैनेजमेंट दिया है. आप इस पर दफ्तर का काम निपटाने के साथ-साथ घंटों फिल्में भी देख सकते हैं. एक बार चार्ज करने के बाद यह पूरे दिन चलेगा.&amp;nbsp;

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Asus Vivobook S 15&amp;nbsp;
इस लिस्ट में आखिरी दमदार Asus Vivobook S 15 उन लोगों के लिए एक बेहतरीन ऑप्शन है. जिन्हें बड़ी स्क्रीन के साथ लंबी बैटरी लाइफ चाहिए. इसमें 70Whr की बड़ी बैटरी मिलती है जो एक बार फुल चार्ज करने पर 16 से 18 घंटे तक आराम से चल जाती है. स्टूडेंट्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह मॉडल काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. इन पांचों लैपटॉप की एक और सबसे बड़ी खूबी इनका फास्ट चार्जिंग और टाइप-सी चार्जिंग सपोर्ट है.&amp;nbsp;
यानी अब आपको अपने बैग में वो पुराने जमाने का भारी-भरकम और मोटे तार वाला चार्जर ढोने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. अगर कभी सफर के दौरान बैटरी कम हो भी जाए तो सिर्फ 30 से 40 मिनट चार्ज करने पर यह लैपटॉप फिर से कई घंटों तक काम करने लगते हैं. अगर आप नया लैपटॉप लेने की सोच रहे हैं तो इनमें से कोई भी मॉडल आपके लिए बढ़िया डील साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: अभी से बना लें धनतेरस का बजट, इन इलेक्ट्रिक आइटम्स को खरीदना फायदे का सौदा ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>कैसे अपना नाम दिखने से रोक सकते हैं आप? जानें आसान टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार अपनी पहचान छुपाकर बहुत से लोग काॅल पर लोगों के साथ फ्राॅड करते हैं तो कई बार ब्लैकमेल करते हैं. काॅलर की पहचान जानने के लिए अब तक&amp;nbsp;लोग ट्रूकॉलर जैसे ऐप्स का सहारा लेते थे. जहां कोई भी अपना नाम बदलकर कुछ भी लिख लेता था. लेकिन 1 नवंबर से टेलीकॉम की दुनिया में एक बड़ा नियम लागू होने जा रहा है. सरकार और टेलीकॉम कंपनियां अब कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन यानी CNAP सुविधा शुरू कर रही हैं. इसके लागू होते ही जब आप किसी को कॉल करेंगे.&amp;nbsp;
तो सामने वाले की स्क्रीन पर आपका वही असली नाम दिखेगा जो सिम लेते समय KYC फॉर्म में दर्ज किया गया था. स्पैम और फर्जी कॉल्स को रोकने के लिए यह कदम काफी कारगर है. लेकिन इससे कई लोगों और कारोबारियों के मन में प्राइवेसी को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं. कई प्रोफेशनल्स और कंपनियां नहीं चाहतीं कि कॉल करने पर सिम धारक का नाम हर किसी को दिखे. कैसे आप काॅल पर अपना नाम छुपा सकते हैं जान लीजिए क्या रहेगा इसका प्रोसेस.
किन लोगों और कंपनियों को मिलेगी नाम न दिखाने की छूट?
CNAP नियम को लागू करते समय सरकार और TRA ने सभी पहलुओ का ध्यान रखा है. इसलिए इसमें कुछ लोगों और कंपनियों को छूट भी दी गई है. इसमें उन कंपनियों, स्टार्टअप्स और बिजनेस घरानों को दी गई है जो अपने कर्मचारियों के लिए बल्क कनेक्शन लेते हैं. अक्सर कंपनियों में SIM कार्ड किसी एक अधिकारी या मालिक के नाम पर जारी होते हैं. जिन्हें अलग-अलग कर्मचारी इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
ऐसे में हर कॉल पर सिम मालिक का नाम दिखना सही नहीं है. इसलिए कॉरपोरेट और बिजनेस कनेक्शन लेने वाली कंपनियों को KYC वाला नाम न दिखाने की छूट मिलेगी. इसके अलावा आम यूजर्स की कैटेगरी में उन खास लोगों को यह छूट मिलेगी जिनके पास CLIR यानी कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रेस्ट्रिक्शन की सुविधा है. इसमें सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी, खुफिया विभाग के कर्मचारी, जज, VIP और वे लोग शामिल हैं जिन्हें सेफ्टी की वजह से अपनी पहचान छुपा के रखने की सरकारी से परमिशन मिली हुई है.

कंपनियां कैसे सेट कर सकती हैं अपना पसंदीदा नाम?
अगर आप कोई बिजनेस चलाते हैं या आपकी कंपनी ने कर्मचारियों को बात करने के लिए कॉरपोरेट सिम दे रखे हैं. तो आप आसानी से KYC में दर्ज निजी नाम को स्क्रीन पर दिखने से रोक सकते हैं. नियमों के मुताबिक बल्क कनेक्शन इस्तेमाल करने वाली संस्थाओं को Prefered Name यानी अपना पसंदीदा नाम चुनने का ऑप्शन दिया गया है. इसके लिए कंपनी को अपनी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर जैसे जियो, एयरटेल या वीआई के एंटरप्राइज कस्टमर केयर से संपर्क करना होगा.&amp;nbsp;
वहां आपको अपनी कंपनी के रजिस्ट्रेशन से जुड़े जरूरी दस्तावेज, जैसे GST सर्टिफिकेट, कंपनी का PAN कार्ड या ट्रेडमार्क सर्टिफिकेट जमा करने होंगे. टेलीकॉम कंपनी जब आपके डाॅक्यूमेंट्स चेक कर लेगी तो SIM धारक के पर्सनल नाम को सिस्टम से हटाकर उसकी जगह आपकी कंपनी या ब्रांड का नाम अपडेट कर देगी. इसके बाद जब भी उस नंबर से किसी ग्राहक को कॉल किया जाएगा तो पर्सनल नाम की जगह सिर्फ कंपनी का नाम ही फ्लैश होगा.

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CLIR सर्विस पाने के लिए क्या है तरीका?
अगर आप एक इंडिविजुअल यूजर हैं और चाहते हैं कि कॉल करते वक्त सामने वाले की स्क्रीन पर आपका नाम बिल्कुल न दिखे तो इसके लिए आपको अपने ऑपरेटर से CLIR सर्विस एक्टिवेट करवानी होगी. इसके लिए आपको अपनी टेलीकॉम कंपनी के स्टोर जाकर एक आवेदन देना होगा.
आवेदन में आपको यह वजह बतानी होगी कि आपकी सेफ्टी और प्राइवेसी के लिए नाम और पहचान छुपाना क्यों जरूरी है. मंजूरी मिलने के बाद जैसे ही आपके नंबर पर CLIR एक्टिवेट होगा तो नेटवर्क खुद-ब-खुद आपका नाम सामने वाले की स्क्रीन पर भेजना बंद कर देगा. वहीं&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>AI समरी के बीच वेबसाइटों को मिलेगी ज्यादा जगह, Google ने किया सर्च अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ Google पर किसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए अब हर बार अलग-अलग वेबसाइट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती है. AI की मदद से सर्च पेज पर ही सवाल की समरी मिल जाता है. लेकिन इस सुविधा के बढ़ते यूज के बीच न्यूज पब्लिशर्स और दूसरी वेबसाइटों की चिंता भी बढ़ी है. यूजर्स सीधे AI का जवाब पढ़कर आगे बढ़ सकते हैं. इससे वेबसाइटों पर आने वाले विजिटर्स की संख्या प्रभावित हो सकती है.
इसी स्थिति के बीच Google अपने AI सर्च रिजल्ट में बदलाव करने जा रहा है. कंपनी अब जवाबों के साथ वेबसाइटों और आर्टिकल के लिंक को ज्यादा प्रेफरेंस से दिखाएगी, जिससे यूजर्स संबंधित जानकारी के मेन सोर्स तक आसानी से पहुंच सकें, तो आइए जानते हैं कि Google ने नया सर्च अपडेट क्या किया.&amp;nbsp;
Google ने नया सर्च अपडेट क्या किया?
Google के नए अपडेट के तहत AI से तैयार होने वाले जवाबों में संबंधित वेबसाइटों के लिंक पहले के मुकाबले ज्यादा बार और ऊपर दिखाई देंगे. कंपनी लिंक को जवाब के आखिर में ही सीमित रखने की जगह कंटेंट के बीच भी प्रेफरेंस से दिखाएगी.इसके साथ ही Google अपने लिंक कैरोसेल को दुनियाभर में उपलब्ध कराएगा. इसमें AI Overviews के नीचे संबंधित खबरों और आर्टिकल की हेडलाइन फोटो के साथ दिखाई देती हैं. इससे यूजर्स किसी विषय पर अतिरिक्त जानकारी पाने के लिए सीधे संबंधित लेख तक पहुंच सकेंगे.&amp;nbsp;
Google ने सर्च में यह बदलाव क्यों किया?
AI से जवाब मिलने के बाद यूजर्स के वेबसाइट लिंक पर क्लिक करने की संभावना कम होने की बात कई स्टडी में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2025 से जुलाई 2026 के बीच Google से न्यूज वेबसाइटों पर आने वाले ट्रैफिक में काफी ज्यादा कमी आई. इस मुद्दे को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी.ऐसे में Google का नया अपडेट AI से तुरंत जानकारी पाने और उससे जुड़ी वेबसाइटों तक पहुंचने के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश है, हालांकि यह बदलाव न्यूज वेबसाइटों पर आने वाले ट्रैफिक को कितना बढ़ा पाएगा, फिलहाल इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.
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यूजर्स की पसंद के हिसाब से दिखेंगी खबरें
Google का एल्गोरिदम उन वेबसाइटों के आर्टिकल को प्रेफरेंस दे सकेगा, जिन्हें यूजर पहले अपनी पसंदीदा सोर्स के रूप में चुन चुका है. इसके अलावा AI से तैयार जवाबों में संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और ऑनलाइन फॉर्म की सामग्री भी शामिल की जा सकेगी. कंपनी AI समरी के आखिर में दिए जाने वाले लिंक को भी ज्यादा साफ और अट्रैक्टिव बनाने की योजना पर काम कर रही है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;Google ने कब शुरू किए AI सर्च फीचर?
Google ने मई 2024 में AI Overviews लॉन्च किया था. इसमें यूजर्स को सर्च किए गए सवाल की AI से तैयार समरी मिलती है. इससे पहले सर्च रिजल्ट में मुख्य रूप से वेबसाइटों के लिंक दिखाई देते थे. इसके बाद मार्च 2025 में कंपनी ने AI Mode पेश किया, जो अलग विंडो में खुलता है.
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp कॉल के लिए अब अकाउंट जरूरी नहीं? आया गेस्ट कॉलिंग फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन मीटिंग हो, पढ़ाई से जुड़ी चर्चा या दोस्तों के साथ वीडियो कॉल, कई बार सामने वाले व्यक्ति के पास WhatsApp अकाउंट नहीं होने से बातचीत शुरू करना मुश्किल हो जाता है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए WhatsApp ने गेस्ट कॉलिंग फीचर पेश किया है. इसकी मदद से अब उन लोगों को भी कॉल में शामिल होने का इनवाइट भेजा जा सकता है, जिनका इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट नहीं है.
इसके लिए एक कॉल लिंक बनाकर शेयर करना होगा. खास बात यह है कि इन कॉल्स के लिए कोई शुल्क या समय सीमा नहीं है और इनमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन भी मिलता है. तो आइए जानते हैं कि यह फीचर कैसे काम करता है और इसे इस्तेमाल करने के लिए क्या करना होगा.&amp;nbsp;
गेस्ट कॉलिंग फीचर कैसे काम करता है?
गेस्ट कॉलिंग में कॉल शुरू करने और लिंक बनाने का अधिकार सिर्फ WhatsApp अकाउंट वाले यूजर के पास रहेगा. लिंक मिलने के बाद गेस्ट उसे ब्राउजर में खोलकर अपना नाम दर्ज कर सकते हैं, हालांकि वे सीधे कॉल में शामिल नहीं हो सकेंगे. पहले उन्हें वेटिंग रूम में इंतजार करना होगा, जहां से होस्ट परमिशन मिलने पर ही उन्हें कॉल में एंट्री मिलेगी. होस्ट किसी गेस्ट को कॉल से हटा भी सकता है.
प्राइवेसी के लिए रखी गईं ये सीमाएं
WhatsApp के मुताबिक, गेस्ट कॉल भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होंगी. WhatsApp के Guest Calling फीचर के जरिए एक साथ 32 लोगों तक को ग्रुप कॉल में जोड़ा जा सकता है. गेस्ट कॉल में मौजूद दूसरे लोगों के फोन नंबर नहीं देख सकेंगे. इसके अलावा उन्हें मैसेज भेजने या अपनी तरफ से किसी अन्य व्यक्ति को कॉल में जोड़ने की सुविधा नहीं मिलेगी. गेस्ट कंप्यूटर स्क्रीन शेयर कर सकते हैं, थम्स-अप या हार्ट जैसे इमोजी से प्रतिक्रिया दे सकते हैं और बातचीत के दौरान अपनी बात रखने के लिए Raise Hand फीचर का ऑप्शन भी इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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गेस्ट कॉलिंग फीचर यूज करने के लिए क्या करना होगा?
इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए WhatsApp खोलकर Calls टैब में जाएं और ऊपर दिए गए + आइकन पर टैप करें. &amp;nbsp;इसके बाद New Call Link चुनें और वॉयस या वीडियो कॉल का ऑप्शन तय करें. जरूरत के मुताबिक, लोगों को जोड़ने से पहले परमिशन वाला ऑप्शन भी चालू कर सकते हैं फिर लिंक कॉपी करके WhatsApp या किसी दूसरे ऐप के जरिए शेयर कर दें. गेस्ट मोबाइल या कंप्यूटर ब्राउजर से लिंक खोलकर जुड़ सकते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - कपड़ों की धुलाई का तरीका बदलेगी ट्रिपल-ड्रम वॉशिंग मशीन, जानें कीमत ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>सस्ते में मिल रहा सेकेंड हैंड iPhone खरीदना चाहिए या नहीं? जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ जब भी कोई नया iPhone लॉन्च होता है. तो लोगों के मन में यही उम्मीद होती है कि अब पुराने मॉडल्स के दाम कम हो जाएंगे. लेकिन हाल ही में iPhone 18 Pro के आने के बाद मार्केट में बिल्कुल उलटी सिचुएशन देखने को मिली है. मांग बढ़ने की वजह से पुराने iPhone मॉडल सस्ते होने के बजाय और महंगे हो गए हैं. ऐसे में कई लोग अपने&amp;nbsp; पुराने iPhone बेचकर नए वाले मॉडल्स खरीद रहे हैं.&amp;nbsp;
इस बीच सोशल मीडिया पर लोग अपने पुराने iPhone बहुत ही सस्ते दामों में बेचने के ऑफर दे रहे हैं. जिन्हें देखकर कई खरीदारों के मन में लालच आ जाता है कि कम कीमत में iPhone मिल रहा है तो क्यों न खरीद लिया जाए. लेकिन क्या इतने सस्ते दाम में मिलने वाले सेकेंड हैंड iPhone को खरीदना वाकई फायदे का सौदा है या फिर नहीं, जान लीजिए पूरी खबर.
पुराने iPhone सस्ते क्यों मिलते हैं?
जब बाजार में कोई पुराना iPhone बहुत ही कम कीमत में मिल रहा होता है. तो उसके पीछे कोई न कोई वजह जरूर होती है. कई बार लोग मजबूरी में या फिर पैसों की जरूरत के चलते अपना फोन बेचते हैं. लेकिन ज्यादातर मामलों में सस्ते मिलने वाले iPhone में कुछ कमी जरूर होती है. या फोन की बैटरी में खराबी, या उसके इंटरनल पार्ट में कोई गड़बड़ी होती है वहीं कुछ मामलों में फोन वाटर डैमेज यानी पानी में गिरे हुए होते हैं. जिन्हें रिपेयर कराकर मार्केट में बेच दिया जाता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा कुछ डिवाइस चोरी के या EMI पर लिए गए ऐसे फोन होते हैं जिनकी किस्तें न चुकाने पर फाइनेंस कंपनियों द्वारा ब्लॉक कर दिया जाता है. ऐसे फोन्स को खरीदने के बाद कुछ ही दिनों में Apple ID लॉक जैसी दिक्कत सामने आने लगती हैं. इसलिए सिर्फ कम कीमत देखकर खरीद लेना आपको नुकसान भी करा सकता है.&amp;nbsp;

इन चीजों में हो सकती है कमी
सेकेंड हैंड iPhone खरीदते वक्त सबसे बड़ा खतरा उसकी बैटरी और इंटरनल पार्ट्स के साथ होता है. Apple के फोन्स में यह सुरक्षा कवच होता है कि अगर ऑरिजिनल स्क्रीन या बैटरी की जगह कोई लोकल पार्ट लगा दिया जाता है तो फोन की सेटिंग्स में अननोन पार्ट का मैसेज आने लगता है. बहुत से लोग रिफर्बिशड पार्ट्स डालकर फोन को एकदम नया जैसा चमका देते हैं और ग्राहकों को बेवकूफ बनाते हैं.&amp;nbsp;
इसके अलावा iPhone की बैटरी हेल्थ अगर 80 परसेंट से नीचे जा चुकी है. तो फोन बहुत जल्दी डिस्चार्ज होने लगता है और बैटरी बदलवाने में हजारों रुपये का खर्च आ जाता है. ऐसे में जो फोन आपको 10-15 हजार रुपये सस्ता मिल रहा था. उसकी रिपेयरिंग का खर्चा जोड़कर वह नए फोन के बराबर ही महंगा पड़ जाता है. फोन खरीदने से पहले किसी ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर नहीं तो फिर किसी अच्छे टेक्निशनयन से उसे चेक करवा लेना सही रहता है.&amp;nbsp;

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फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी बातें
बिना पक्के बिल और बॉक्स के सेकेंड हैंड iPhone कभी नहीं खरीदना चाहिए. कई बार लोग शौक-शौक में बिना ओरिजिनल इनवॉइस के सस्ता iPhone खरीद लेते हैं. लेकिन बाद में फोन लॉक होने पर दिक्कत में फंस जाते हैं. अगर आप किसी से पुराना iPhone खरीद भी रहे हैं. तो सबसे पहले उसका बॉक्स, ओरिजिनल बिल और IMEI नंबर चेक कर लें.&amp;nbsp;
यह भी देख लें कि बेचने वाले ने अपनी Apple ID और Find My iPhone का फीचर पूरी तरह से लॉग आउट कर दिया हो वरना फोन रीसेट करते समय वह एक्टिवेशन लॉक के चक्कर में हमेशा के लिए बंद हो सकता है. हमेशा भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से या फिर अपने किसी जानकार से ही सेकेंड हैंड फोन लें जिससे किसी भी तकनीकी खराबी के वक्त आपके पास सवाल पूछने का मौका हो.
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>दुनिया में सबसे ज्यादा कहां होता है इंटरनेट शटडाउन, भारत का क्या हाल?</title>
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        <description><![CDATA[ आज मोबाइल पर वीडियो देखने या सोशल मीडिया चलाने से लेकर रोज के जरूरी कामों तक कई चीजों के लिए लोग इंटरनेट पर निर्भर हैं. ऐसे में जब किसी इलाके में इंटरनेट बंद कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोगों का ऑनलाइन दुनिया से संपर्क टूट जाता है. हाल ही में दिल्ली के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने का मामला सामने आया.
अधिकारियों ने इसे सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया. इस घटना ने एक बार फिर भारत में इंटरनेट शटडाउन को लेकर चर्चा तेज कर दी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन कहां होता है और भारत का क्या हाल है.&amp;nbsp;
दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन कहां होता है?
दुनिया में इंटरनेट शटडाउन के मामलों में म्यांमार पहले और भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान तीसरे स्थान पर है. साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक इंटरनेट शटडाउन में भारत की हिस्सेदारी 21 फीसदी रही, हालांकि पिछले सालों के मुकाबले इसमें कमी आई है, लेकिन भारत में इंटरनेट बंद होने की घटनाएं अब भी दर्ज की जा रही हैं. साल 2016 से 2025 के बीच देश में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन जम्मू-कश्मीर में हुए, जबकि विरोध प्रदर्शन 2025 में इंटरनेट बंद किए जाने की सबसे बड़ी वजह रही.&amp;nbsp;
इंटरनेट शटडाउन में भारत का क्या हाल है?
भारत में इंटरनेट शटडाउन के मामलों में पिछले कुछ सालों के दौरान कमी आई है, लेकिन यह समस्या अभी भी बनी हुई है. इंटरनेट शटडाउन का मतलब किसी क्षेत्र में अस्थायी रूप से इंटरनेट सेवाएं बंद करना है. साल 2016 में दुनियाभर में हुए इंटरनेट शटडाउन में भारत की हिस्सेदारी 35 फीसदी से ज्यादा थी, जो 2020 में बढ़कर 60 फीसदी से ज्यादा हो गई. इसके बाद इसमें गिरावट दर्ज की गई और 2022 में यह 41 फीसदी, जबकि 2025 में घटकर 20 फीसदी से ज्यादा रह गई. वैश्विक स्तर पर इंटरनेट बंद होने की घटनाओं में भारत की हिस्सेदारी कम हुई है, लेकिन देश में ऐसे मामले अब भी सामने आ रहे हैं.&amp;nbsp;
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भारत में इंटरनेट शटडाउन की सबसे बड़ी वजह क्या है?
भारत में इंटरनेट शटडाउन की सबसे बड़ी वजह विरोध प्रदर्शन रही है. साल 2025 में इंटरनेट बंद किए जाने के कुल मामलों में 45 फीसदी से ज्यादा घटनाएं विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी थीं, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 10 फीसदी से भी कम था. वहीं सांप्रदायिक हिंसा के कारण इंटरनेट बंद किए जाने की हिस्सेदारी भी 2021 के 6 फीसदी से बढ़कर 2025 में करीब 25 फीसदी हो गई.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>सर्दियों में कितने टेंपरेचर पर चलाना चाहिए फ्रिज? बहुत से लोग नहीं जानते सही नंबर</title>
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        <description><![CDATA[ मौसम में अब हल्की ठंडक घुलने लगी है और धीरे-धीरे सर्दियों की दस्तक शुरू हो चुकी है. घरों में AC और कूलर बंद होने लगे हैं और पंखों की रफ्तार भी कम हो गई है. लेकिन घर में एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंस भी होता है जो गर्मी हो या ठंड उसे हम जरा भी रेस्ट नहीं देते हैं पूरे साल चौबीसों घंटे बिना रुके उसका इस्तेमाल होता रहता है वह है हमारा फ्रिज.&amp;nbsp;&amp;nbsp;अक्सर देखा गया है कि लोग भरी गर्मी के मौसम में फ्रिज की कूलिंग को जिस टेंपरेचर पर सेट करते हैं.
सर्दियां आने के बाद भी उसे बदलना भूल जाते हैं. बहुत से लोगों को तो यह भी ठीक से नहीं पता होता कि फ्रिज के अंदर लगे डायल के किस नंबर का क्या काम होता है. ठंड के मौसम में अगर फ्रिज को सही सेटिंग पर न चलाया जाए तो न सिर्फ उसमें रखी सब्जियां और खाना खराब होता है बल्कि बिजली की खपत भी बेवजह बढ़ती रहती है. इसलिए जान लें सर्दियों में किस नंबर पर फ्रिज चलाना है एकदम सही.
सर्दियों में कितने डिग्री सेट करें फ्रिज?
आजकल बाजार में दो तरह के फ्रिज आते हैं. एक जिनमें टेंपरेचर कंट्रोल करने के लिए 1 से 5 या 7 नंबर तक का गोल डायल होता है और दूसरे मार्डन डिजिटल डिस्प्ले वाले फ्रिज जिनमें डिग्री सेल्सियस में टेंपरेचर दिखता है. अगर आपके घर में नंबर वाले रेगुलेटर का फ्रिज है. तो सबसे पहले यह समझ लें कि नंबर जितना कम होगा कूलिंग उतनी कम होगी और नंबर जितना ज्यादा होगा ठंडक उतनी ही तेज होगी.&amp;nbsp;
सर्दियों में बाहर का तापमान पहले से ही कम रहता है इसलिए फ्रिज के डायल को 1 या 2 नंबर पर रखना सबसे सही माना जाता है. वहीं अगर आपके पास डिजिटल पैनल वाला स्मार्ट फ्रिज है तो ठंड के दिनों में इसका तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच सेट करना चाहिए. इसके अलावा फ्रीजर का तापमान माइनस 15 से माइनस 18 डिग्री सेल्सियस पर रखना काफी होता है.&amp;nbsp;

गलत सेटिंग पर फ्रिज चलाने से होते हैं नुकसान
गर्मियों के दौरान हम फ्रिज को 4 या 5 नंबर पर चलाते हैं जिससे पानी और खाने-पीने की चीजें जल्दी ठंडी हो सकें. लेकिन अगर सर्दियों में भी फ्रिज इसी हाई Setting पर चलता रहे तो इसके कई नुकसान झेलने पड़ते हैं. सबसे बड़ी दिक्कत यह आती है कि जरूरत से ज्यादा Cooling होने की वजह से हरी सब्जियां, फल और पका हुआ खाना जमने लगता है. जिससे उनका प्राकृतिक स्वाद और पोषक तत्व दोनों खत्म हो जाते हैं.&amp;nbsp;
कई बार दूध और दही में भी बर्फ की परत जम जाती है. इसके अलावा Single Door फ्रिज के फ्रीजर में बर्फ का पहाड़ बन जाता है,. जिसे बार-बार डिफ्रॉस्ट करना पड़ता है. हाई कूलिंग सेटिंग पर रखने से फ्रिज का कंप्रेसर बिना जरूरत के लगातार चलता रहता है. इससे न सिर्फ हर महीने बिजली का बिल ज्यादा आता है बल्कि कंप्रेसर जल्दी खराब होने का खतरा भी रहता है.

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ठंड के मौसम में फ्रिज चलाते समय न करें यह गलतियां
सर्दियों में बहुत से लोग बिजली बचाने के चक्कर में एक बड़ी गलती यह करते हैं कि वे रोज कुछ घंटों के लिए या रात में फ्रिज का मेन स्विच ही बंद कर देते हैं. ऐसा करने से फ्रिज के अंदर का तापमान बार-बार बदलता है. जिससे नमी पैदा होती है और खाने में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. तो साथ ही फ्रिज के अंदर से अजीब सी बदबू भी आने लगती है और दोबारा ऑन करने पर कंप्रेसर दोगुनी बिजली खींचता है.&amp;nbsp;
इसलिए फ्रिज को बंद करने के बजाय उसे हमेशा 1 नंबर रखें अगर Winter मोड&amp;nbsp; है तो उसे चालू कर दें. इसके अलावा सर्दियों में लोग अक्सर गरमा-गरम खाना या उबला हुआ दूध सीधे फ्रिज में रख देते हैं. जिससे अंदर की कूलिंग बिगड़ जाती है और मशीन पर लोड बढ़ता है. किसी भी गर्म चीज को पहले नार्मल टेपरेंचर पर ठंडा होने दें और उसके बाद ही ढककर फ्रिज में रखें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>HP का प्रीमियम लैपटॉप लॉन्च, 192GB मेमोरी और AI प्रोसेसिंग पर फोकस</title>
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        <description><![CDATA[ HP ने भारत में अपना नया ZBook Ultra G3a लैपटॉप पेश किया है. कंपनी ने इसे खास तौर पर AI, इंजीनियरिंग, डिजाइन और कंटेंट तैयार करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए तैयार किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत 192GB तक की यूनिफाइड मेमोरी और डिवाइस पर ही बड़े AI मॉडल चलाने की क्षमता है. इसके अलावा इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट वाली OLED स्क्रीन और 96Wh की बैटरी भी मिलती है. तो आइए जानते हैं कि इसकी कीमत और खास फीचर्स क्या है.&amp;nbsp;
HP ZBook Ultra G3a की कीमत कितनी है?
HP के इस नए लैपटॉप की भारत में कीमत 2,89,990 रुपये है. इसे देश में HP के ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल पार्टनर्स के जरिए खरीदा जा सकता है. यह लैपटॉप ग्रे कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. इसमें Windows 11 Pro ऑपरेटिंग सिस्टम दिया गया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;HP ZBook Ultra G3a के खास फीचर्स क्या है?
HP ZBook Ultra G3a में AMD Ryzen AI Max+ Pro सीरीज का प्रोसेसर मिलता है. इसका टॉप वेरिएंट AMD Ryzen AI Max+ Pro 495 चिप के साथ आता है, जिसमें 16-कोर CPU दिया गया है. इसकी क्लॉक स्पीड 5.2GHz तक जाती है. इसमें AMD ग्राफिक्स चिप भी मिलती है. लैपटॉप में 192GB तक की यूनिफाइड मेमोरी दी गई है, जिसमें 160GB तक की डेडिकेटेड VRAM शामिल है. कंपनी ने इसमें नया थर्मल डिजाइन भी दिया है, जिससे यह 81.8 प्रतिशत तक ज्यादा TDP सपोर्ट कर सकता है.&amp;nbsp;
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लैपटॉप पर ही चला सकेंगे बड़े AI मॉडल
इस डिवाइस में 55 TOPS क्षमता वाला NPU दिया गया है. HP का दावा है कि यह लैपटॉप 300 अरब पैरामीटर तक वाले बड़े लैंग्वेज मॉडल (LLM) को लोकल स्तर पर चला सकता है. AI से जुड़े कुछ बड़े कामों के लिए सीधे लैपटॉप की प्रोसेसिंग क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
120Hz OLED डिस्प्ले और बैटरी
HP ZBook Ultra G3a में 16 इंच की OLED स्क्रीन है, जो 2.8K रेजोल्यूशन और 120Hz तक का रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है. इसमें बैकलिट और हॉट-स्वैपेबल कीबोर्ड के साथ अलग Copilot की और फिंगरप्रिंट स्कैनर भी मिलता है.कनेक्टिविटी के लिए Wi-Fi और 5G सपोर्ट दिया गया है. लैपटॉप में 96Wh की बैटरी है. USB Type-C पोर्ट के जरिए 180W तक की वायर्ड फास्ट चार्जिंग भी मिलती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>आपके ईयरबड्स भी हो सकते हैं गंदे, जानें कब और क्यों करें साफ</title>
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>PC गेमर्स का इंतजार जल्द हो सकता है खत्म, GTA 6 पर आई नई रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ गेमिंग की दुनिया में Grand Theft Auto 6 यानी GTA 6 का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है. इस गेम को लेकर अब तक कई तरह की जानकारियां सामने आ चुकी हैं, लेकिन PC पर खेलने वाले गेमर्स के लिए इसकी रिलीज से जुड़ी तस्वीर साफ नहीं हुई है. Rockstar Games ने अभी तक PC वर्जन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी 2027 की शुरुआत में PC यूजर्स के लिए भी इस गेम को पेश कर सकती है. अगर यह जानकारी सही साबित होती है, तो PC गेमर्स को कंसोल लॉन्च के बाद ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. तो आइए जानते हैं कि नई रिपोर्ट में GTA 6 की PC रिलीज को लेकर क्या कहा गया है.
GTA 6 की PC रिलीज को लेकर आई नई रिपोर्ट
GamesBeat रिपोर्ट के मुताबिक, Rockstar Games Grand Theft Auto 6 को 2027 की पहली तिमाही में PC पर लॉन्च करने की योजना बना रही है. रिपोर्ट में गेमिंग इंडस्ट्री से जुड़े चार ऐसे लोगों का हवाला दिया गया है, जिन्हें कंपनी की योजनाओं की जानकारी है. इसके अनुसार, PC वर्जन मार्च 2027 के खत्म होने से पहले जारी किया जा सकता है, हालांकि Rockstar Games ने अभी तक रिलीज की तारीख की पुष्टि नहीं की है. फिलहाल यह जानकारी सिर्फ एक रिपोर्ट में सामने आई है, कंपनी की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
पहले कंसोल पर आएगा GTA 6
Rockstar Games ने GTA 6 की शुरुआती रिलीज के लिए PlayStation 5 और Xbox Series S-X को चुना है. गेम इन कंसोल पर 19 नवंबर को लॉन्च होने वाला है. रिपोर्ट में बताई गई PC रिलीज की समयसीमा के हिसाब से कंप्यूटर पर खेलने वाले यूजर्स को कंसोल लॉन्च के कुछ महीने बाद ही गेम मिल सकता है.यह कंपनी के पुराने रिलीज पैटर्न से अलग होगा. आमतौर पर Rockstar अपने गेम कंसोल पर लॉन्च करने के कम से कम एक साल बाद PC पर लाती रही है.
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GTA 6 की PC रिलीज पुराने गेम्स से कैसे अलग?&amp;nbsp;Rockstar के पिछले गेम्स की रिलीज टाइमलाइन देखें, तो GTA 6 का संभावित PC लॉन्च काफी जल्दी हो सकता है. Grand Theft Auto 5 साल 2013 में PS3 और Xbox 360 पर आया था, जबकि इसका PC वर्जन 2015 में जारी हुआ. कंप्यूटर पर गेम खेलने वालों को करीब दो साल इंतजार करना पड़ा था. वहीं Red Dead Redemption 2 को 2018 में PS4 और Xbox One के लिए लॉन्च किया गया था. इसका PC वर्जन 2019 में आया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर कब बदलना चाहिए, जानें किन संकेतों पर ध्यान दें?</title>
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        <description><![CDATA[ सुबह उठते ही पानी पीने से लेकर चाय बनाने और खाना पकाने तक, घर में कई कामों के लिए वॉटर प्यूरीफायर से निकलने वाले पानी का इस्तेमाल होता है. ऐसे में ज्यादातर लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि उनका प्यूरीफायर ठीक से चल रहा है या नहीं, लेकिन उसके अंदर लगे फिल्टर की हालत पर नजर रखना भूल जाते हैं.&amp;nbsp;
पानी में मौजूद मिट्टी और जंग के बारीक कण को रोकते-रोकते फिल्टर की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसकी वजह से पानी का टेस्ट बदल सकता है, उसकी सप्लाई धीमी हो सकती है और सफाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है. अगर समय रहते फिल्टर नहीं बदला जाए, तो प्यूरीफायर के दूसरे हिस्सों पर भी दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर कब बदलना चाहिए और किन संकेतों पर ध्यान दें.&amp;nbsp;
वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर कब बदलना चाहिए?
फिल्टर की उम्र, उसके टाइप और पानी की क्वालिटी के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. सामान्य तौर पर सेडिमेंट फिल्टर को 3 से 6 महीने, कार्बन फिल्टर को 6 से 12 महीने, RO मेम्ब्रेन को 12 से 24 महीने और UF फिल्टर को लगभग 12 महीने में बदलने की जरूरत पड़ सकती है. कुछ RO मेम्ब्रेन इससे ज्यादा समय तक भी चल सकते हैं. सही समय जानने के लिए अपने प्यूरीफायर के मैनुअल और सर्विस संबंधी निर्देशों को प्राथमिकता दें. फिल्टर बदलने के बाद सिस्टम को निर्माता के निर्देशों के अनुसार फ्लश करना और कनेक्शन में लीकेज की जांच करना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर बदलने के संकेत&amp;nbsp;1. पानी का टेस्ट या स्मेल बदलना - &amp;nbsp;अगर पानी का टेस्ट नमकीन, धातु जैसा या मिट्टी जैसा हो जाए या उसमें अजीब स्मेल आने लगे, तो कार्बन फिल्टर की जांच कराएं. लंबे समय तक इस्तेमाल से इसकी गंदगी सोखने की क्षमता कम हो सकती है.
&amp;nbsp;2. पानी धीरे निकलना - अगर प्यूरीफायर से गिलास भरने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है, तो सेडिमेंट या कार्बन फिल्टर में गंदगी जमा होने से पानी का बहाव कम हो सकता है. ऐसी स्थिति में फिल्टर और मशीन की जांच जरूरी है.&amp;nbsp;
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3. पानी का धुंधला दिखना - पानी में छोटे कण दिखाई देना या उसका रंग धुंधला होना फिल्टर की कार्यक्षमता प्रभावित होने का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में पानी का इस्तेमाल करने से बचें और प्यूरीफायर की जांच कराएं.&amp;nbsp;
4. पानी का TDS बढ़ना - अगर RO से साफ किए गए पानी का TDS पहले से बढ़ रहा है, तो RO मेम्ब्रेन या फिल्ट्रेशन सिस्टम की जांच करानी चाहिए. TDS मीटर पानी में मौजूद सभी तरह की गंदगी का पता नहीं लगा सकता है.&amp;nbsp;
5. फिल्टर बदलने का अलर्ट मिलना - कई मॉर्डन प्यूरीफायर में फिल्टर बदलने के लिए इंडिकेटर लाइट या सर्विस अलर्ट मिलता है. ऐसा संकेत मिलने पर निर्माता के निर्देशों के अनुसार फिल्टर की जांच और जरूरत पड़ने पर उसे बदलवाएं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वॉटर, प्यूरीफायर, का, फिल्टर, कब, बदलना, चाहिए, जानें, किन, संकेतों, पर, ध्यान, दें</media:keywords>
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        <title>सर्दियों में गीजर चलाने से पहले तुरंत कर लें ये काम, टल जाएगा बड़ा हादसा</title>
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        <description><![CDATA[ देश में सर्दियों की आमद होने वाली है. सर्दियों के आते ही&amp;nbsp;घरों में पंखे-कूलर और एसी बंद हो जाते हैं. लेकिन फिर उन उपकरणों का इस्तेमाल होने लगता है जो गर्माहट देते हैं. जिसमें सबसे जरूरी हो जाता है गीजर. सर्दियों के मौसम में&amp;nbsp;ठंडे पानी को हाथ लगाते है करंट सा दौड़ता है. बिना गीजर के नहाना काफी मुश्किल हो जाता है.
लेकिन क्या आपने गौर किया है कि पिछले 6-7 महीनों से बंद पड़ा गीजर अगर बिना चेक किए चालू कर दिया जाए, तो कितना जानलेवा साबित हो सकता है? हर साल ठंड का मौसम शुरू होते ही बाथरूम में करंट फैलने, गीजर का बॉयलर फटने या गैस गीजर के जहरीले धुएं से दम घुटने जैसे हादसे सामने आते हैं.&amp;nbsp;
ज्यादातर लोग गीजर की बिना सर्विसिंग करवाए उसे सालों-साल चलाते रहना है. यही छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार की जान पर भारी पड़ जाती है. अगर आप भी इस सीजन में पहली बार गीजर ऑन करने जा रहे हैं, तो थोड़ा ठहरिए पहले कामों को कर लीजिए.&amp;nbsp;
Earthing और Power Plug चेक करवाएं
गीजर से जुड़ा सबसे आम हादसा होता है बाथरूम की गीली टाइल्स या बहते पानी में करंट का उतर जाना. कई महीनों तक बंद रहने से गीजर के अंदर पानी की नमी से तारें गल सकती हैं. सबसे पहले यह देखें कि गीजर का प्लग किसी नार्मल 6 या 10 एंपियर के बोर्ड में तो नहीं लगाया गया है. गीजर के लिए हमेशा 16 एंपियर का हैवी-ड्यूटी सॉकेट और मजबूत स्विच ही इस्तेमाल होना चाहिए.&amp;nbsp;
इसके बाद अपने घर के मेन इलेक्ट्रिकल पैनल में Earthing की जांच जरूर करवाएं. अगर घर की अर्थिंग कटी हुई या कमजोर है तो हीटिंग एलिमेंट से लीक होने वाला करंट सीधे पानी के नल में आ जाएगा. किसी प्रोफेशनल इलेक्ट्रीशियन से बाथरूम सर्किट में RCCB या ELCB लगवाएं जिससे एक मिलीएंपियर करंट लीक होते ही पावर सप्लाई खुद-ब-खुद कट जाए.&amp;nbsp;

प्रेशर रिलीज वाल्व और Thermostat Test
गीजर में धमाका होने की खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह होती है सेफ्टी वाल्व का जाम हो जाना. हर अच्छे गीजर के नीचे एक छोटा सा प्रेशर रिलीज वाल्व जिसे Safety Valve भी कहते हैं दिया होता है. इसका काम होता है कि जब टैंक के अंदर पानी बहुत ज्यादा गर्म हो जाए और भाप का भारी दबाव बने तो यह वाल्व एक्सट्रा प्रेशर को बूंद-बूंद पानी टपकाकर बाहर निकाल दे. गर्मियों के दौरान महीनों बंद रहने पर पानी के खारेपन और जंग की वजह से यह वाल्व अक्सर पूरी तरह चोक हो जाता है.&amp;nbsp;
अगर वाल्व जाम रहा और गीजर का ऑटो-कट यानी thermostat भी खराब हो गया तो टैंक किसी प्रेशर कुकर की तरह फट सकता है. इसे चेक करने के लिए वाल्व के छोटे लीवर को हल्का सा हिलाकर देखें कि उससे पानी निकल रहा है या नहीं. अगर वह बिल्कुल सख्त या जाम लगे तो नया वाल्व लगवाएं. इसके साथ ही यह भी चेक करें कि पानी गर्म होने पर इंडिकेटर लाइट अपने-आप बंद होती है या नहीं.

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अंदर जमी गंदगी की सर्विसिंग&amp;nbsp;
सर्दियों की शुरुआत में गीजर को चालू करने से पहले उसकी बेसिक सर्विसिंग और डीप क्लीनिंग करवाना बेहद जरूरी है. भारत के ज्यादातर इलाकों में सप्लाई का पानी खारा होता है. जिससे टैंक के अंदर और हीटिंग रॉड पर सफेद चूने की मोटी परत जम जाती है. यह परत न सिर्फ बिजली का बिल कई गुना बढ़ा देती है बल्कि हीटिंग कॉइल को अंदर से फाड़कर करंट पानी में उतार देती है.&amp;nbsp;
इसलिए मैकेनिक को बुलाकर टैंक साफ करवाएं और जरूरत पड़ने पर मैग्नीशियम एनोड रॉड बदलवा लें. वहीं आपके बाथरूम में LPG से चलने वाला गैस गीजर लगा है. तो खतरा दोगुना हो जाता है. गैस गीजर को कभी भी छोटे, तंग या बिना खिड़की वाले बाथरूम में नहीं लगाना चाहिए. यह जलते वक्त तेजी से ऑक्सीजन सोखता है और जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस छोड़ता है. जिससे इंसान को बिना भनक लगे दम घुट जाता है. गैस गीजर का इस्तेमाल करते वक्त एग्जॉस्ट फैन ऑन रखें.
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सर्दियों, में, गीजर, चलाने, से, पहले, तुरंत, कर, लें, ये, काम, टल, जाएगा, बड़ा, हादसा</media:keywords>
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        <title>क्या सच में सेफ हैं फ्री VPN ऐप्स, कहीं डेटा चोरी तो नहीं कर रहे?</title>
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        <description><![CDATA[ इंटरनेट पर कोई Block की गई Website खोलनी हो किसी Online Game का Ping सुधारना हो या फिर पब्लिक Wi-Fi पर खुद को सेफ रखना हो हम तुरंत Play Store और App Store पर जाकर Free VPN सर्च करते हैं. App Install करके तुरंत Connect कर लेते हैं VPN चालू कर लेते हैं. हमें लगता है कि अब हमारी पहचान पूरी तरह छुप चुकी है और हम डिजिटल दुनिया में एकदम हैं.&amp;nbsp;
लेकिन कहावत है कि अगर कोई सर्विस आपको बिल्कुल फ्री में मिल रही है तो प्रोडक्ट वह सर्विस नहीं बल्कि आप खुद हैं. हाई-स्पीड सर्वर मेंटेन करना, भारी-भरकम इंटरनेट बैंडविड्थ खरीदना और इंजीनियरों की बड़ी टीम संभालना कोई बच्चों का खेल नहीं है इसमें हर महीने लाखों रुपये का खर्च आता है. तो फिर सोचने वाली बात यह है कि यह फ्री VPN कंपनियां अपनी जेब से पैसा लगाकर आपको फ्री में प्राइवेसी क्यों दे रही हैं? कहीं चुपके से यह आपका डेटा तो नहीं चुरा रहीं.
बेचा जा सकता है आपका डेटा
Play Store पर मौजूद लगभग हर फ्री VPN ऐप के बैनर पर बड़े-बड़े अक्षरों में स्ट्रिक्ट नो-लॉग्स पॉलिसी लिखा होता है. इसका मतलब यह होता है कि वे आपका कोई भी डेटा रिकॉर्ड नहीं करते. लेकिन जब Cyber Security एक्सपर्ट्स इन Apps की Privacu Policy चेक करते हैं. तो हकीकत सामने आती है, ज्यादातर फ्री Apps आपकी हर डिजिटल हरकत पर पैनी नजर रखती हैं. आप कौन सी Websites देख रहे हैं, फोन में कौन सी A[pps कितने समय तक इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
आपकी Location और Device का यूनिक आईडी क्या है सब कुछ बैकएंड में लॉग होता रहता है. इस पूरे डेटा को बंडल बनाकर थर्ड-पार्टी डेटा ब्रोकर्स, विज्ञापन कंपनियों और मार्केटिंग एजेंसियों को ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है. यानी Privacy बचाने के जिस मकसद से आपने VPN ऑन किया था उसी VPN ने आपकी प्राइवेसी से खिलवाड़ कर दिया. कई बार तो कमजोर सर्वर होने के चलते यह प्राइवेट जानकारियां Dark Web पर भी लीक हो जाती हैं.

Malware का हमला और नेटवर्क Hijack होने का खतरा
फ्री VPN से होने वाला नुकसान सिर्फ Data चोरी तक ही नहीं रहता. बल्कि यह आपके Phone की सेहत के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है. दुनिया भर के Cyber रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि फ्री VPN ऐप्स में से करीब 35 से 40 परसेंट ऐप्स में Hidden Trackers, Adware और Spyware कोड छिपे होते हैं. App इंस्टॉल होते ही आपके फोन की स्क्रीन पर बेवजह के पॉप-अप ऐड्स आने लगते हैं.&amp;nbsp;
बैकग्राउंड में इंटरनेट की खपत बढ़ जाती है और बैटरी आग की तरह गर्म होकर तेजी से उतरने लगती है.&amp;nbsp;इससे भी बड़ा खतरा होता है Network Hijacking का. कई फ्री प्रोवाइडर्स आपके फोन और इंटरनेट कनेक्शन को चुपके से अपना रेजिडेंशियल प्रॉक्सी बना देते हैं. इसका मतलब यह है कि दुनिया के किसी कोने में बैठा कोई अनजान शख्स आपके इंटरनेट और IP एड्रेस का इस्तेमाल करके Cyber Crime कर सकता है.&amp;nbsp;

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कैसे रह सकते हैं सेफ?
फ्री VPN अगर अनसेफ है तो क्या इसका मतलब यह है कि Internet पर VPN का इस्तेमाल करना ही छोड़ देना चाहिए? बिल्कुल नहीं बस थोड़ी सी सतर्कता बरतने की जरूरत है. सबसे पहला नियम कि किसी भी अनजान डेवलपर ले फ्री VPN ऐप को फोन में कभी जगह न दें. कोई भी ऐप इंस्टॉल करते वक्त उसकी परमिशन जरूर चेक करें. एक VPN टूल को आपके कॉन्टैक्ट्स, गैलरी, कैमरा या स्टोरेज की एक्सेस क्यों चाहिए?&amp;nbsp;
अगर ऐसी गैर-जरूरी Permissions मांगी जा रही हों तो फौरन App को अनइंस्टॉल कर दें. अगर आपको कभी-कभार किसी जरूरी काम के लिए VPN चाहिए ही तो हमेशा उन भरोसेमंद कंपनियों के मॉडल चुनें जो ओपन-सोर्स हैं और जिनका इंडिपेंडेंट सिक्योरिटी ऑडिट हो चुका है जैसे कि प्रोटॉन वीपीएन. यह कंपनियां अपने पेड सब्सक्राइबर्स से कमाई करती हैं इसलिए फ्री यूजर्स के डेटा का सौदा नहीं करतीं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>सोलर की जगह विंड टरबाइन लगाना कितना सही, कितनी बनेगी बिजली?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोलर-की-जगह-विंड-टरबाइन-लगाना-कितना-सही-कितनी-बनेगी-बिजली</link>
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        <description><![CDATA[ आज के दौर में लोगों के घरों में बिजली की जरूरतें काफी बढ़ती जा रही हैं. लेकिन जहां बिजली की खपत बढ़ रही है तो वहीं बिजली का बिल भी बढ़ता जा रहा है. ऐसे में लोग बिजली बिल बचाने के तरीके खोज रहे हैं. इसमें सबसे पहले नंबर पर आता है&amp;nbsp;सोलर पैनल लगाना. बड़े शहरों में कई लोगों के घरों की छतों पर सोलर पैनल लगे हुए नजर आते हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से Internet पर छोटे Rooftop Wind Turbine यानी घरेलू पवन चक्कियों के वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं.&amp;nbsp;
लोग दावा कर रहे हैं कि Solar सिर्फ दिन में धूप होने पर काम करता है. जबकि Wind Turbine तो रात के अंधेरे और आंधी-बारिश में भी 24 घंटे लगातार बिजली बना सकता है. ऐसे में कई लोग यह सोचने लगे हैं कि क्या छत से सोलर हटाकर Wind Turbine लगा लेना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होगा? क्या सच में घरेलू Turbine&amp;nbsp; से घर के पंखे, फ्रिज और एसी चलाने लायक बिजली बन पाती है? जान लेें पूरी खबर.
छत पर कितनी बिजली पैदा करता है Wind Turbine?&amp;nbsp;
अगर पुराने Records के आधार पर देखें तो 1 किलोवाट का Wind Turbine भी 1 किलोवाट के सोलर सिस्टम जितनी बिजली बना सकता है. लेकिन दोनों के काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है. Solar Panel को सिर्फ सीधी धूप चाहिए जो भारत के ज्यादातर हिस्सों में साल के 300 दिन भरपूर मिलती है और यह रोज 4 से 5 यूनिट बिजली आसानी से Generate कर देता है. लेकिन वहीं एक छोटे Wind Turbine को घूमने और बिजली बनाने के लिए कम से कम 12 से 15 किमी प्रति घंटे की लगातार हवा की रफ्तार चाहिए होती है.&amp;nbsp;
शहरों में घनी आबादी और आसपास ऊंची-ऊंची इमारतें होने की वजह से छतों पर हवा की स्पीड थम जाती है और हवा में भारी भंवर यानी Turbulence बनने लगता है. जिससे Turbine के पंखे रुक-रुक कर झटके खाते हैं और 1 किलोवाट का सिस्टम भी दिनभर में मुश्किल से 1 या 2 यूनिट ही निकाल पाता है. यानी जब तक आप किसी समंदर के किनारे या खुले मैदान में नहीं हैं तो Wind Turbine ज्यादा कारगर नहीं है.

Solar के मुकाबले क्यों भारी पड़ता है Turbine?
Solar और Wind Turbine की तुलना में सबसे बड़ा अंतर इनके Structure और Maintenance का है. Solar Panel एक जगह Fix रहते हैं, उनमें कोई हिलने-डुलने वाला पुर्जा नहीं होता. महीने में दो बार बस पानी से धूल धो दी और काम खत्म यह 25 साल तक बिना झंझट चलते हैं. दूसरी तरफ Wind Turbine में तेजी से घूमने वाले Blades, Gearbox, Bearing और Generator लगे होते हैं. जब यह तेज हवा में घूमता है. तो भारी Vibration और सनसनाती आवाज पैदा करता है,&amp;nbsp;
जिससे छत की दीवारों में दरारें आने का खतरा रहता है. इसके अलावा Moving Parts होने के चलते हर साल Greasing, Bearing बदलने और पार्ट्स की टूट-फूट का भारी खर्च झेलना पड़ता है. जहां सोलर पर सरकार से 78 हजार रुपये तक की भारी Subsidy मिल रही है वहीं घरेलू Wind Turbine पर कोई खास सरकारी मदद नहीं मिलती. वहीं इसकी शुरुआती कीमत और Installation Cost भी Solar से करीब डेढ़ गुना ज्यादा बैठती है.

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आपके लिए क्या सही फैसला?
अगर आप Solar हटाकर सिर्फ Wind Turbine लगाने की सोच रहे हैं. तो आम रिहायशी इलाकों के लिए यह फैसला बिल्कुल सही नहीं है. फिर सवाल आता है Wind Turbine किनके लिए सही है? तो इसका सबसे बेहतरीन इस्तेमाल उन जगहों पर होता है जो पूरी तरह खुली हैं, जैसे तटीय इलाके, पहाड़ों की चोटियां, बड़े खेत और हाईवे के किनारे बने फार्महाउस. वहां भी एक्सपर्ट्स Solar हटाने की सलाह कभी नहीं देते. बल्कि Solar-Wind Hybrid Setup लगाने को कहते हैं.&amp;nbsp;
Hybrid मॉडल का फायदा यह है कि दिन के तेज उजाले में Solar Panel घर का पूरा लोड उठा लेते हैं और रात को या मानसून के बादलों में जब धूप गायब हो जाती है. तब तेज हवाओं से Turbine बिजली बनाकर Battery को चार्ज रखता है. इसलिए अगर आपके पास बजट और सही लोकेशन इजाजत है. तो दोनों लगवा लीजिए Solar को हटाकर सिर्फ Turbine लगाना फायदे वाली बात नहीं है.
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>खाना खाते हुए Phone चलाने की आदत है? आज ही छोड़ दें..वरना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/खाना-खाते-हुए-phone-चलाने-की-आदत-है-आज-ही-छोड़-देंवरना</link>
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        <description><![CDATA[ बच्चों की हर परेशानी की वजह Phone ही है, घरों में अक्सर मां यही कहती हैं. हर दिक्कत का तो नहीं कह सकते हैं लेकिन कुछ मामलों में मां का कहना एक दम सही साबित होता है. आजकल डाइनिंग टेबल हो, ऑफिस की कैंटीन हो या घर का सोफा, लोग कहीं भी जब कुछ खाते हैं तो एक हाथ में खाने की प्लेट और दूसरे हाथ में होता है Phone. क्या आप जानते हैं कि यह Multitasking आपके शरीर के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ कर रही है?&amp;nbsp;
हम में से ज्यादातर लोग इस आदत के पूरी बुरी तरह आदी हो चुके हैं. लेकिन खाने की टेबल पर Phone का यह इस्तेमाल एक बहुत बुरी लत बन चुका है. हेल्थ और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यह आपकी सेहत के लिए काफी खतरनाक हो सकता है. अगर आप भी बिना Phone चलाए खाना नहीं खा पाते तो जानें इसके क्या नुकसान हो सकते हैं.&amp;nbsp;
बढ़ जाता है मोटापा
जब आपका पूरा ध्यान Mobile की Screen पर चल रहे Video या फिर चैटिंग पर होता है. तो आपका दिमाग दो अलग-अलग दुनिया में बंट जाता है. Medical Science के मुताबिक हमारे पेट और दिमाग के बीच एक डायरेक्ट न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन होता है. जब हम खाना खाते हैं तो पेट करीब 20 मिनट बाद दिमाग को पेट भर जाने का सिग्नल भेजता है. लेकिन जब दिमाग स्क्रीन में खोया रहता है. तो वह इस सिग्नल को पूरी तरह मिस कर देता है.&amp;nbsp;
इसे माइंडलेस ईटिंग यानी बिना सोचे-समझे खाना कहते हैं. नतीजा यह होता है कि आपको पता ही नहीं चलता कि आप कब अपनी भूख से 30 से 40 परसेंट ज्यादा खाना खा गए. इसके साथ ही फोन पर ध्यान होने की वजह से लोग खाने को ठीक से चबाने के बजाय सीधे निगलने लगते हैं. इससे न सिर्फ कैलोरी इनटेक तेजी से बढ़ता है. बल्कि पेट की चर्बी और वजन भी बढ़ने लगता है. अगर आपका वजन तमाम कोशिशों के बाद भी कम नहीं हो रहा तो जिम जाने से पहले खाने की प्लेट से फोन को दूर करके देखिए.

डाइजेस्टिव सिस्टम हो जाता है स्लो
डाइजेशन की शुरुआत पेट में नहीं बल्कि मुंह में होती है. जब हम खाने को देखते हैं और उसकी खुशबू महसूस करते हैं. तो मुंह में लार और पेट में पाचक एंजाइम बनने शुरू होते हैं. लेकिन जब आंखें फोन पर टिकी होती हैं तो शरीर Rest and Digest मोड में जाने की बजाय एक मानसिक तनाव वाली स्थिति में रहता है. स्क्रीन पर आने वाले Notifications, News और Social Media ड्रामा दिमाग में Cortisol यानी स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ा देते हैं.&amp;nbsp;
तनाव की हालत में पाचन तंत्र में खून का बहाव कम हो जाता है. जिससे पाचक रस पूरी मात्रा में नहीं निकल पाते. अधचबा खाना जब सीधे पेट में पहुंचता है. तो आंतों को उसे पचाने के लिए बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है. इसका सीधा असर यह होता है कि खाना पचने के बजाय पेट में सड़ने लगता है. जिससे गैस, ब्लोटिंग, सीने में जलन और एसिडिटी की दिक्कत होने लगती है और लंबे समय में यह आदत पेट के अल्सर और क्रोनिक कब्ज बन सकती है.

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टॉयलेट सीट से भी गंदा फोन
कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि एक Phone की स्क्रीन पर टॉयलेट सीट से भी 10 गुना ज्यादा खतरनाक बैक्टीरिया और कीटाणु चिपके होते हैं. हम दिनभर Metro, Office, Lift, Public Toilet और सड़कों पर फोन का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद हाथ धोकर जब हम खाना खाने बैठते हैं. लेकिन खाने के बीच-बीच में उसी गंदे फोन की Screen को उंगलियों से छूते हैं और फिर उसी हाथ से रोटी का निवाला तोड़कर मुंह में डालते हैं.&amp;nbsp;
ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया सीधे खाने के रास्ते आपके पेट में चले जाते हैं जो फूड पॉइजनिंग, डायरिया और आंतों के गंभीर इंफेक्शन की वजह बनते हैं. इसके अलावा स्क्रीन से चिपक कर खाने से परिवार के साथ बातचीत और इमोशनल बॉन्डिंग भी खत्म हो जाती है. इसलिए सेहत और सुकून चाहते हैं तो खाने के 20 मिनट फोन को डाइनिंग टेबल से दूर दूसरे कमरे में रख दीजिए.
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>खाना, खाते, हुए, Phone, चलाने, की, आदत, है, आज, ही, छोड़, दें..वरना</media:keywords>
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        <title>Apple Home Collection क्या है? स्मार्ट लॉक से थर्मोस्टेट तक होंगे कनेक्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Apple अपने स्मार्ट होम इकोसिस्टम को आगे बढ़ाते हुए ऐसी एक्सेसरीज लेकर आया है, जिन्हें iPhone के जरिए एक ही जगह से मैनेज किया जा सकेगा. कंपनी ने 13 अक्टूबर 2026 को अपने Welcome Home इवेंट में Apple Home Collection पेश किया है. इस नई रेंज में स्मार्ट लॉक, वीडियो डोरबेल, इनडोर और आउटडोर कैमरे के साथ स्मार्ट थर्मोस्टेट शामिल हैं.
इन प्रोडक्ट्स को LG Electronics और Schneider Electric के साथ मिलकर तैयार किया गया है. कंपनी का फोकस घर के अलग-अलग डिवाइस को आपस में जोड़ने के साथ उनकी सुरक्षा और इस्तेमाल को आसान बनाने पर है. तो आइए जानते हैं कि Apple Home Collection क्या है. साथ ही यह स्मार्ट लॉक, कैमरे और थर्मोस्टेट को कैसे कनेक्ट करेगा.&amp;nbsp;
क्या है Apple Home Collection?
Apple Home Collection स्मार्ट होम एक्सेसरीज की एक नई रेंज है. इसके जरिए यूजर्स घर के अंदर और बाहर की एक्टिवीटीज पर नजर रखने, दरवाजे का एक्सेस मैनेज करने और तापमान कंट्रोल करने जैसे काम कर सकेंगे. खास बात यह है कि इन डिवाइस को Apple Home ऐप से चलाया जा सकेगा. इन्हें सेटअप करने के लिए iPhone को डिवाइस के पास लाकर एक टैप से प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. इसके लिए अलग ऐप डाउनलोड करने या नया अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं होगी.&amp;nbsp;
स्मार्ट लॉक और कैमरे कैसे करेंगे काम?
इस कलेक्शन में LG का Smart Deadbolt Lock और Video Doorbell शामिल हैं. स्मार्ट लॉक में Ultra Wideband तकनीक दी गई है, जो यूजर के दरवाजे के पास आने का पता लगा सकती है. कम्पैटिबल iPhone या Apple Watch में होम की होने पर दरवाजा अपने आप अनलॉक हो सकता है. इसके अलावा, PIN पैड या फोन और वॉच टैप करके भी लॉक खोला जा सकेगा.&amp;nbsp;वहीं वीडियो डोरबेल की मदद से दरवाजे पर आए व्यक्ति को देखा और उससे बात की जा सकेगी. यूजर घर से दूर रहते हुए भी अपने Apple डिवाइस पर नोटिफिकेशन देख सकते हैं.&amp;nbsp;
स्मार्ट लॉक, कैमरे और थर्मोस्टेट को कैसे कनेक्ट करेगा?
Apple Home Collection के स्मार्ट लॉक, कैमरे और थर्मोस्टेट को iPhone के जरिए Apple Home ऐप से कनेक्ट किया जा सकेगा. इसके लिए iPhone को डिवाइस के पास लाकर एक टैप से सेटअप शुरू करना होगा. कंपनी के मुताबिक इन एक्सेसरीज में Thread सपोर्ट दिया गया है, जिससे Wi-Fi कनेक्शन में परेशानी आने पर भी डिवाइस की कनेक्टिविटी बनाए रखने में मदद मिल सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Apple के Welcome Home इवेंट में क्या-क्या हुआ लॉन्च? यहां देखें पूरी लिस्ट
Apple Home Collection की बिक्री कब?
Apple के मुताबिक, इन डिवाइस से जुड़ा डेटा और कैमरा फुटेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेगा. कंपनी और उसके पार्टनर भी इस डेटा को पढ़ नहीं सकेंगे, कैमरों की वीडियो हिस्ट्री सपोर्टेड iCloud+ प्लान में 10 दिनों तक रखी जा सकती है. Apple Home Collection की बिक्री दिसंबर 2026 से शुरू होगी, जबकि कुछ एक्सेसरीज 2027 की शुरुआत में उपलब्ध होंगी. कंपनी ने फिलहाल सभी प्रोडक्ट्स की उपलब्धता हर देश में होने की पुष्टि नहीं की है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>पंखे वाला हीटर vs बिना पंखे वाला, गर्मी देने की तकनीक में क्या अंतर?</title>
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        <description><![CDATA[ सर्दियों में कमरे को गर्म रखने के लिए हीटर का यूज आम है, लेकिन हर हीटर गर्मी देने के लिए एक जैसा तरीका नहीं अपनाता है. कुछ हीटर चालू करते ही सामने बैठे व्यक्ति को गर्माहट देने लगते हैं, जबकि कुछ कमरे की हवा को गर्म करके तापमान बढ़ाते हैं. यही अंतर पंखे वाले हीटर, पैनल हीटर और इंफ्रारेड हीटर के काम करने के तरीके को अलग बनाता है.
हीटर खरीदते समय सिर्फ उसकी पावर या डिजाइन देखना काफी नहीं है. यह समझना भी जरूरी है कि वह गर्मी कहां पहुंचाता है, कितनी जल्दी गर्माहट महसूस होती है और यूज के दौरान आराम कैसा रहता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पंखे वाले और बिना पंखे वाले हीटर गर्मी कैसे देते हैं और दोनों की तकनीक में क्या अंतर है.&amp;nbsp;
पंखे वाला हीटर कैसे करता है काम?
पंखे वाले हीटर में एक हीटिंग एलिमेंट और पंखा होता है. हीटिंग एलिमेंट हवा को गर्म करता है और पंखा उस गर्म हवा को कमरे में फैलाता है. इस वजह से कम समय में गर्माहट महसूस होने लगती है. छोटे कमरे या थोड़ी देर के लिए गर्मी पाने में यह तरीका यूजफुल हो सकता है, हालांकि पंखे से हवा लगातार चलने के कारण आवाज हो सकती है. साथ ही हवा के साथ धूल और एलर्जी पैदा करने वाले कण भी इधर-उधर फैल सकते हैं.&amp;nbsp;
बिना पंखे वाला हीटर कैसे देता है गर्मी?
बिना पंखे वाले हीटर में गर्मी देने की तकनीक उसके प्रकार पर निर्भर करती है. इंफ्रारेड हीटर हवा को पहले गर्म करने की जगह सामने मौजूद व्यक्ति तक सीधे गर्मी पहुंचाता है. इसकी गर्माहट धूप में मिलने वाली गर्मी जैसी महसूस हो सकती है और इसे चालू करने के बाद जल्दी महसूस किया जा सकता है. वहीं दूसरी ओर पैनल हीटर हवा को गर्म करके कमरे का तापमान धीरे-धीरे बढ़ाता है. इससे पूरे कमरे में समान गर्माहट फैल सकती है, लेकिन इसमें समय लगता है.
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बिजली की खपत में कितना अंतर होता है?
हीटर की बिजली खपत उसकी पावर और यूज की अवधि पर निर्भर करती है. आमतौर पर पंखे वाले हीटर 1,500 से 2,000 वॉट और इंफ्रारेड हीटर 300 से 700 वॉट की रेंज में आते हैं. वही &amp;nbsp;पैनल हीटर की पावर आम तौर पर 750 से 2,000 वॉट तक हो सकती है. कम वॉट वाला हीटर हर स्थिति में ज्यादा किफायती हो, यह जरूरी नहीं है. कमरे का साइज, इंसुलेशन और कितनी जगह गर्म करनी है, इन बातों से भी फर्क पड़ता है.&amp;nbsp;
कौन-सा हीटर किस जरूरत के लिए बेहतर है?
अगर आपको छोटे कमरे में जल्दी गर्म हवा चाहिए, तो पंखे वाला हीटर यूजफुल हो सकता है. किसी खास जगह पर तुरंत गर्माहट पाने के लिए इंफ्रारेड हीटर एक ऑप्शन है. वहीं बेडरूम या लिविंग रूम में धीरे-धीरे और लगातार गर्माहट के लिए पैनल हीटर पर सही रहता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung के ये 3 स्मार्टफोन फिर हुए महंगे, जानें क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन खरीदने का बजट बनाते समय फोन के फीचर्स के साथ उसकी कीमत पर भी नजर रखनी पड़ती है. लेकिन अगर पसंद का फोन खरीदने के लिए कुछ समय इंतजार किया जाए और बाद में उसकी कीमत बढ़ जाए, तो बजट बिगड़ सकता है. Samsung के तीन स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे यूजर्स के साथ भी ऐसा हो सकता है.
कंपनी ने Galaxy A27 5G, Galaxy M47 5G और Galaxy F70 Pro 5G की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों फोन के अलग-अलग रैम और स्टोरेज वेरिएंट अब 2,000 रुपये तक महंगे हो गए हैं. इससे पहले भी इन स्मार्टफोन की कीमतों में बदलाव किया जा चुका है. ऐसे में आइए जानते हैं कि अब इनकी नई कीमतें कितनी हो गई हैं और इसकी वजह क्या है.&amp;nbsp;
Samsung के तीनों फोन की कीमतों में कितना इजाफा हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार, Samsung ने Galaxy A27 5G, Galaxy M47 5G और Galaxy F70 Pro 5G के सभी रैम और स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 2,000 रुपये बढ़ा दी है. इस बदलाव के बाद इन फोन को खरीदने के लिए यूजर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.
Samsung Galaxy A27 5G की नई कीमत
Samsung Galaxy A27 5G के 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले बेस वेरिएंट की कीमत पहले 33,999 रुपये थी, जो अब बढ़कर 35,999 रुपये बताई जा रही है. वहीं, 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वाला मॉडल 40,999 रुपये की जगह 42,999 रुपये में मिल रहा है. इसके 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत भी 45,999 रुपये से बढ़कर 47,999 रुपये हो गई है.
Galaxy M47 5G और Galaxy F70 Pro 5G के दाम भी बढ़े
Galaxy M47 5G और Galaxy F70 Pro 5G के बेस मॉडल में भी 2,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. दोनों फोन के 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत अब 35,999 रुपये से बढ़कर 37,999 रुपये बताई जा रही है. वहीं 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 39,999 रुपये से बढ़कर 41,999 रुपये हो गई है. साथ ही 8GB रैम और 256GB स्टोरेज मॉडल अब 46,999 रुपये में उपलब्ध होने की बात कही गई है, जबकि पहले इसकी कीमत 44,999 रुपये थी.
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कीमत बढ़ने की वजह क्या है?
इन स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ने की एक बड़ी वजह रैम और स्टोरेज की कमी बताई जा रही है. स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को इन जरूरी कंपोनेंट्स की सप्लाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इसका असर पूरे स्मार्टफोन बाजार पर पड़ रहा है और कई कंपनियां अपने फोन की कीमतें बढ़ा रही हैं. Samsung के अलावा Oppo, Vivo, iQOO, OnePlus और Apple भी अपने स्मार्टफोन महंगे कर चुके हैं. हालांकि, Samsung ने इन तीनों फोन की कीमतें बढ़ाने की अलग से कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है.
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 21:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ तेज आवाज नहीं, क्लियर साउंड! दिवाली पार्टी के लिए देखें ये डिवाइस</title>
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        <description><![CDATA[ सिर्फ तेज आवाज नहीं, क्लियर साउंड! दिवाली पार्टी के लिए देखें ये डिवाइस ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>18 घंटे तक म्यूजिक और 35W साउंड! CMF के नए स्पीकर्स लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ म्यूजिक सुनने का मजा तब बढ़ जाता है, जब स्पीकर का साउंड अच्छा हो और बार-बार चार्जिंग की चिंता भी न करनी पड़े. इसी सेगमेंट में Nothing के सब-ब्रांड CMF ने अपने दो नए Bluetooth स्पीकर्स, CMF Speaker S और CMF Speaker M, पेश किए हैं. इन &amp;nbsp;दोनों डिवाइस को कुछ ग्लोबल मार्केट में लॉन्च किया गया है. कंपनी इन्हें जल्द ही अपनी वेबसाइट के जरिए दूसरे ग्लोबल मार्केट में भी उपलब्ध कराएगी.
इन दोनों स्पीकर्स में 18 घंटे तक की बैटरी लाइफ, धूल और पानी से बचाव के लिए IP68 रेटिंग और वायरलेस कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स मिलते हैं, हालांकि दोनों मॉडल के साइज, साउंड आउटपुट और बैटरी क्षमता में अंतर है. वहीं CMF Speaker M को कंपनी की भारतीय वेबसाइट पर भी लिस्ट किया गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि &amp;nbsp;CMF के नए स्पीकर्स में क्या खास है और इसकी कीमत कितनी है.&amp;nbsp;
CMF के नए स्पीकर्स में क्या खास है?
CMF के नए Speaker M में 4,900mAh और Speaker S में 2,600mAh की बैटरी दी गई है. कंपनी दोनों से 18 घंटे तक के प्लेबैक का दावा करती है. इन्हें फुल चार्ज होने में करीब 3 घंटे और 2.5 घंटे लगते हैं. साथ ही दोनों में Bluetooth 6.0, 10 मीटर तक की कनेक्टिविटी रेंज और AAC, SBC व LC3 कोडेक का सपोर्ट है. LC3 का सपोर्ट सिर्फ Auracast Audio के लिए है.&amp;nbsp;
साउंड आउटपुट में कितना अंतर?
CMF Speaker S में 45mm का सिंगल फुल-रेंज ड्राइवर दिया गया है, जिसका आउटपुट 10W RMS है. वहीं दूसरी ओर CMF Speaker M में 70mm का वूफर और 16mm का ट्वीटर मिलता है. इसका कुल आउटपुट 35W RMS है, जिसमें वूफर 25W और ट्वीटर 10W का आउटपुट देता है. फ्रीक्वेंसी रेंज की बात करें तो Speaker S में यह 70Hz से 20,000Hz तक, जबकि Speaker M में 60Hz से 20,000Hz तक है.&amp;nbsp;
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CMF के नए स्पीकर्स में मिलेंगे कई ऑडियो मोड
इन दोनों स्पीकर्स में Wide Soundstage, Ultra Bass, Custom EQ और Night Mode दिए गए हैं. साथ ही इनमें Stereo Mode, Party Mode, डुअल कनेक्शन, Google Fast Pair और Microsoft Swift Pair का सपोर्ट भी मिलता है. डिवाइस पर पावर, ब्लूटूथ पेयरिंग, मल्टीफंक्शन नॉब और Auracast के लिए अलग-अलग फिजिकल कंट्रोल दिए गए हैं. IP68 रेटिंग इन्हें धूल और पानी से सुरक्षा देती है.&amp;nbsp;
CMF Speaker S और Speaker M की कीमत
CMF Speaker S की कीमत यूके में 49 पाउंड (करीब 6,000 रुपये) है. वहीं बड़े मॉडल CMF Speaker M की कीमत 99 पाउंड (करीब 12,000 रुपये) है. यह दोनों स्पीकर्स डार्क ग्रे, ऑरेंज, टरक्वॉइज और व्हाइट कलर में उपलब्ध होंगे. यूके में इन्हें Nothing के ऑनलाइन स्टोर से खरीदा जा सकेगा. भारत में Speaker M की लिस्टिंग सामने आई है, लेकिन कंपनी ने अभी इसकी कीमत और लॉन्च डेट का खुलासा नहीं किया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - क्लाउड स्टोरेज चुनते समय न करें ये गलती, खतरे में पड़ सकता है आपका डेटा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>7 इंच की स्क्रीन, स्मार्ट होम का कंट्रोल! Apple HomeView लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने भारत में अपना नया स्मार्ट डिस्प्ले HomeView लॉन्च किया है. इसकी मदद से यूजर्स घर की स्मार्ट लाइट, दरवाजे के लॉक और दूसरे कनेक्टेड डिवाइसों को कंट्रोल कर सकेंगे. इसमें म्यूजिक सुनने, वीडियो कॉल करने और दूसरी सुविधाओं का इस्तेमाल करने का ऑप्शन भी मिलता है.&amp;nbsp;
HomeView में Siri AI असिस्टेंट दिया गया है, जो यूजर की जरूरत के मुताबिक जवाब और जानकारी देने में मदद करेगा. इसकी एक खास बात यह भी है कि यह परिवार के अलग-अलग सदस्यों को पहचान सकता है और हर किसी के लिए उनकी पसंद के अनुसार स्क्रीन दिखा सकता है. तो आइए जानते हैं कि इसकी कीमत और खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
7 इंच की स्क्रीन और Siri AI का सपोर्ट
HomeView में 7 इंच की Liquid Retina टचस्क्रीन दी गई है, जो True Tone सपोर्ट और 500 निट्स तक की ब्राइटनेस के साथ आती है. इसमें A18 चिप लगी है. स्क्रीन को टेबल पर रखते समय उसके एंगल को एडजस्ट किया जा सकता है. डिवाइस की स्क्रीन यूजर की दूरी के हिसाब से जानकारी दिखा सकती है. दूर से देखने पर जरूरी जानकारी दिखाई देगी, जबकि पास आने पर ज्यादा डिटेल सामने आ सकती है.&amp;nbsp;
परिवार के छह सदस्यों को पहचान सकता है
इस डिवाइस में फेस रिकग्निशन फीचर दिया गया है, जो परिवार के छह सदस्यों तक की पहचान कर सकता है. इसके आधार पर हर व्यक्ति को अपनी पसंद के ऐप और विजेट वाला होम स्क्रीन मिल सकता है. Messages और Calendar जैसे ऐप्स की निजी जानकारी संबंधित यूजर तक सीमित रहती है, जबकि शेयर फोटो एल्बम और म्यूजिक पूरे परिवार के लिए उपलब्ध हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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म्यूजिक, वीडियो कॉल और स्मार्ट डिवाइस कंट्रोल
HomeView में बिल्ट-इन स्पीकर सिस्टम है, जो स्पैशियल ऑडियो और मल्टीरूम प्लेबैक को सपोर्ट करता है. यूजर इससे FaceTime कॉल कर सकते हैं, आवाज से मैसेज का जवाब दे सकते हैं और रेसिपी को स्टेप-बाय-स्टेप देख सकते हैं. इसके अलावा Siri AI या टचस्क्रीन की मदद से स्मार्ट लाइट, लॉक, थर्मोस्टेट और ब्लाइंड्स जैसे संगत डिवाइस कंट्रोल किए जा सकते हैं. इसका Home Camera इंटरफेस एक साथ नौ कैमरों की फीड भी दिखा सकता है.&amp;nbsp;
Apple HomeView की कीमत क्या है?
Apple HomeView की भारत में कीमत 39,900 रुपये है. &amp;nbsp;इसकी प्री-बुकिंग 13 अक्टूबर से Apple के ऑनलाइन स्टोर और Apple Store ऐप पर शुरू हो गई है. इसकी बिक्री 13 नवंबर से शुरू होगी. यह सिल्वर, स्टारलाइट, रोज पिंक और स्पेस ग्रे रंगों में उपलब्ध होगा. कंपनी ने इसका वॉल-माउंटेड वर्जन भी पेश किया है, जिसे घर के एंट्री गेट, गलियारे या दूसरी जगहों पर दीवार पर लगाया जा सकता है. इसके माउंटिंग एक्सेसरीज अलग से खरीदने पड़ सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Apple के Welcome Home इवेंट में क्या&amp;क्या हुआ लॉन्च? यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ घर में मौजूद स्मार्ट गैजेट्स को संभालना अब पहले से आसान हो सकता है. Apple ने अपने Welcome Home Event 2026 में स्मार्ट होम से जुड़े कई नए प्रोडक्ट पेश किए हैं. इन डिवाइस की मदद से यूजर्स घर के स्मार्ट डिवाइसों को कंट्रोल करने, टीवी पर अपने पसंदीदा शो देखने और वॉयस कमांड का इस्तेमाल करने जैसे काम आसानी से कर सकेंगे.&amp;nbsp;
इस इवेंट में सबसे ज्यादा चर्चा Apple के नए HomeView स्मार्ट डिस्प्ले की रही. इन नए प्रोडक्ट्स के जरिए Apple घर के अलग-अलग स्मार्ट डिवाइस को एक साथ जोड़ने और Siri को AI फीचर्स के साथ बेहतर बनाने पर जोर दे रहा है. तो आइए जानते हैं कि Apple के Welcome Home इवेंट में क्या-क्या लॉन्च हुआ.&amp;nbsp;
Apple HomeView हुआ लॉन्च&amp;nbsp;
Apple HomeView कंपनी का नया स्मार्ट होम हब है. इसमें 7 इंच की Liquid Retina टचस्क्रीन दी गई है, जिसे टेबल पर रखने या दीवार पर लगाने का विकल्प मिलता है. इसके टेबलटॉप मॉडल में स्क्रीन को जरूरत के हिसाब से घुमाया जा सकता है. इसकी स्क्रीन 500 निट्स तक की ब्राइटनेस देती है. यह डिवाइस A18 चिप और Siri AI के साथ आती है. इसमें फेस रिकग्निशन की मदद से घर के छह सदस्यों तक की पहचान की जा सकती है. इसकी बिक्री 13 नवंबर से शुरू होगी.&amp;nbsp;
Apple TV 4K किया गया पेश&amp;nbsp;
Apple ने अपने Apple TV 4K को भी अपडेट किया है. इसमें A19 चिप दी गई है, जो पिछले मॉडल के मुकाबले बेहतर परफॉर्मेंस देने का दावा करती है. इसमें Siri AI की मदद से आवाज के जरिए शो खोजने और स्मार्ट होम डिवाइस कंट्रोल करने की सुविधा मिलेगी. नए मॉडल में बिल्ट-इन माइक्रोफोन दिए गए हैं. इसे चार HomePod स्पीकर्स तक से जोड़कर सराउंड साउंड का अनुभव लिया जा सकता है. इसके Siri Remote में भी नया फीचर है, जिससे आवाज के जरिए रिमोट ढूंढने के लिए अलर्ट बजाया जा सकता है. इसकी शिपिंग 13 नवंबर से शुरू होगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - 18 घंटे तक म्यूजिक और 35W साउंड! CMF के नए स्पीकर्स लॉन्च
HomePod mini 2 की भी एंट्री आज&amp;nbsp;
Apple ने HomePod mini का नया वर्जन भी पेश किया है. इसमें पहले के मुकाबले तेज चिपसेट दिया गया है. इसका Sound Glow फीचर म्यूजिक के हिसाब से स्पीकर के ऊपर लगी लाइट के रंग बदलता है. यह ग्रीन, पिंक, व्हाइट, मिडनाइट और ब्लू रंगों में उपलब्ध होगा. इसमें Siri AI का सपोर्ट भी मिलेगा, लेकिन यह सुविधा भविष्य के सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए आएगी. इसकी बिक्री 30 अक्टूबर से शुरू होगी.&amp;nbsp;
Apple Home Collection लॉन्च&amp;nbsp;
स्मार्ट होम इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए Apple ने LG और Schneider Electric के साथ मिलकर Home Collection पेश किया है. इसमें स्मार्ट लॉक, वीडियो डोरबेल, इनडोर और आउटडोर कैमरे के साथ स्मार्ट थर्मोस्टेट शामिल हैं. इन डिवाइस को Apple Home ऐप के जरिए जोड़कर कंट्रोल किया जा सकेगा. कंपनी के मुताबिक, इन्हें सेटअप करने के लिए iPhone को डिवाइस के पास लाकर जरूरी निर्देशों का पालन करना होगा. इन प्रोडक्ट की उपलब्धता दिसंबर से शुरू होने की योजना है, हालांकि सभी डिवाइस हर देश में उपलब्ध नहीं होंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>सर्दियों में गीजर चलाते समय न करें ये गलतियां, बिजली बिल पर पड़ सकता है असर</title>
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        <description><![CDATA[ सर्दियों में सुबह-सुबह गर्म पानी मिल जाए, तो दिन की शुरुआत थोड़ी आसान हो जाती है. नहाने से लेकर डेली के दूसरे कामों तक गीजर का इस्तेमाल बढ़ जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे चलाने का तरीका आपके बिजली बिल पर भी असर डाल सकता है. ऐसे में कुछ आदतों पर ध्यान देकर बिजली की खपत को कंट्रोल रखने और गीजर की उम्र बढ़ाने में मदद मिल सकती है. तो आइए जानते हैं कि सर्दियों में गीजर इस्तेमाल करते समय किन गलतियों से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
सर्दियों में गीजर चलाते समय न करें ये गलतियां
1. गीजर का तापमान बहुत ज्यादा रखना - कई लोग पानी जल्दी और ज्यादा गर्म करने के लिए गीजर का तापमान अधिकतम पर सेट कर देते हैं. इससे बिजली की खपत बढ़ सकती है और हीटिंग एलिमेंट पर भी दबाव पड़ता है. कुछ विशेषज्ञ सुझावों के मुताबिक, 50 से 60 डिग्री सेल्सियस की सेटिंग पर विचार किया जा सकता है, हालांकि सही तापमान गीजर के मॉडल और सुरक्षा निर्देशों पर निर्भर करता है.&amp;nbsp;
2. जरूरत न होने पर भी चालू छोड़ना - अगर आप गीजर को पूरे दिन चालू रखते हैं, तो टैंक में रखे पानी का तापमान बनाए रखने के लिए यह बीच-बीच में बिजली इस्तेमाल कर सकता है. बेहतर है कि गर्म पानी की जरूरत के हिसाब से हीटिंग का समय तय करें. ऑटोमैटिक कंट्रोल या टाइमर की सुविधा भी इसमें मदद कर सकती है.&amp;nbsp;
3. टैंक की सफाई को नजरअंदाज करना - पानी में मौजूद मिनरल्स और गंदगी धीरे-धीरे गीजर की टंकी में जमा होने लगती है. इससे पानी गर्म होने में ज्यादा समय लग सकता है और गीजर से असामान्य आवाज भी आ सकती है. समय-समय पर टैंक की सफाई और जरूरी हिस्सों की जांच कराना यूजफुल है.&amp;nbsp;
4. जरूरत से बड़ा या छोटा गीजर खरीदना - घर में कितने लोग हैं और गर्म पानी की कितनी जरूरत पड़ती है, इसके आधार पर गीजर की क्षमता चुननी चाहिए. कम जरूरत के लिए बहुत बड़ा गीजर लेना या ज्यादा इस्तेमाल के लिए छोटा मॉडल चुनना एनर्जी की बर्बादी बढ़ा सकता है. इंस्टेंट और स्टोरेज गीजर के बीच चुनाव भी इस्तेमाल के तरीके के हिसाब से करें.&amp;nbsp;
5. इन्सुलेशन और सुरक्षा पर ध्यान न देना - टैंक की कमजोर इन्सुलेशन से गर्मी जल्दी बाहर निकल सकती है, जिससे पानी दोबारा गर्म करने की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा ऊंची इमारतों में गीजर खरीदते समय पानी के दबाव के अनुकूल मॉडल चुनना जरूरी है. प्रेशर रिलीज वाल्व और ओवरहीटिंग से बचाने वाली सुविधाएं भी जांचें. इंस्टॉलेशन और मरम्मत प्रशिक्षित तकनीशियन से ही कराएं.&amp;nbsp;
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बिजली बचाने के लिए क्या करें?
बिजली की खपत कम करने के लिए गीजर खरीदते समय उसकी एनर्जी रेटिंग जरूर देखें. इससे बिजली की बचत का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है. इसके अलावा, घर में कितने लोगों को गर्म पानी की जरूरत होती है, उसके हिसाब से गीजर की क्षमता चुनें. अच्छी इन्सुलेशन वाला गीजर पानी को ज्यादा देर तक गर्म रखने में मदद करता है, जिससे उसे बार-बार गर्म करने की जरूरत कम हो सकती है. साथ ही खरीदने से पहले उसकी वारंटी की जानकारी भी जरूर लें, जिससे खराबी आने पर मरम्मत से जुड़ी शर्तों को समझ सकें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>बार&amp;बार बफरिंग से छुटकारा चाहिए? Wi&amp;Fi राउटर में बदलें ये 5 सेटिंग्स</title>
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        <description><![CDATA[ बार-बार बफरिंग से छुटकारा चाहिए? Wi-Fi राउटर में बदलें ये 5 सेटिंग्स ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>हेडफोन खरीदने का प्लान है? देखें 10000 के बजट में ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल हेडफोन को इस्तेमाल सिर्फ गाने सुनने तक सिमित नहीं रह गया है, बल्कि ऑनलाइन मीटिंग, गेमिंग, फिल्में देखने और ट्रैवलिंग के दौरान म्यूजिक सुनने के लिए भी किया जाता है. ऐसे में अगर आप 10,000 रुपये तक के बजट में नया हेडफोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो बाजार में आपके ले कई बेहतरीन ऑप्शन्स मौजूद हैं.
इस रेंज में वायरलेस ब्लूटूथ हेडफोन, एक्टिव नॉइज कैंसलेशन (ANC) वाले मॉडल और बेहतर बैटरी बैकअप देने वाले हेडफोन आसानी से मिल सकते हैं. ऐसे में आइ जानते हैं आपके लिए सही विकल्प कौनसा होगा. क्योंकि हेडफोन चुनने के लिए यह समझना जरूरी है कि आपके इस्तेमाल के हिसाब से कौन-से फीचर्स सबसे ज्यादा काम आएंगे.
Sony WH-CH720N है बेस्ट ऑप्शन
अगर प लंबे समय तक हेडफोन पहनना पसंद करते हैं और आसपास के शोर से दूर रहना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक शानदार ऑप्शन हो सकता है. यह सोनी का सबसे हल्का वायरलेस ANC हेडफोन है. इसमें इंटीग्रेटेड प्रोसेसर V1 मिलता है, जो बाहर के शोर को काफी हद तक कम करने में मदद करता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ANC ऑन रहने पर भी आपको 35 घंटे तक का बैकअप मिलता है. यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आपको करीब 6,989 से 7,890 रुपये &amp;nbsp;के बीच मिल जाता है.
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JBL Live 770NC / Tune 780NC में मिलेंगे फिचर्स
अगर आपको हैवी बेस पसंद है और आप पार्टी म्यूजिक फिल करना चाहते हैं, तो JBL के ये नए मॉडल आपके लिए बेस्ट है. इसमें आपको ट्रू एडाप्टिव नॉइज़ कैंसिलेशन और स्पैटियल ऑडियो मिलता है. जिससे बाहर का शोर सुनाई नहीं देता. इसमें वियर डिटेक्शन फीचर भी है, जिससे हेडफोन उतारते ही गाना रुक जाता है. इसमें 50 से 76 घंटे तक का बैटरी लाइफ बैकअप मिलता है और यह आपको आसानी से 7,599 तक की कीमत में मिल जाता है.
Marshall Major V / IV बेहतरीन डिजाइन
अगर आपको बेहतर साउंड क्वालिटी के साथ नई स्टाइल, क्लासिक रेट्रो लुक और प्रिमियम हेडफोन की तलाश कर रहे हैं, तो यह आपके लिए एक परफेक्ट ऑप्शन हो सकता है. इसमें आपको फिचर्स के साथ-साथ बेहतरीन डिजाइन भी मिलेंगी. यह ऑन-ईयर डिजाइन में आता है. इसमें ANC न होने के बावजूद भी इसकी साउंड क्वालिटी बेहतर होती है. इसकी खासियत है कि इसकी बैटरी 80 घंटे से भी ज्यादा चलती है. यह आपको 9,999 तक की कीमत में मिल जाएगा.
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Facebook अकाउंट में ईमेल जोड़ने और हटाने का आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी अपडेट रखना जरूरी है. Facebook का इस्तेमाल करने वाले कई यूजर्स की ईमेल आईडी समय के साथ बदल जाती है. कुछ लोग पुरानी ईमेल आईडी का इस्तेमाल बंद कर देते हैं, तो कुछ अपने अकाउंट में एक नया ईमेल जोड़ना चाहते हैं. ऐसी स्थिति में Facebook अकाउंट से जुड़ी ईमेल आईडी को अपडेट करना सही होता है.
ईमेल एड्रेस केवल अकाउंट की जानकारी तक सीमित नहीं होता, बल्कि लॉगिन, जरूरी नोटिफिकेशन और अकाउंट रिकवरी के दौरान भी काम आता है. इसलिए अगर आपकी Facebook प्रोफाइल में पुरानी या ऐसी ईमेल आईडी जुड़ी है, जिसका आप अब इस्तेमाल नहीं करते, तो उसे बदलने ज्यादा बेहतर होगा. इसके लिए नया Facebook अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है. Meta के Accounts Centre के जरिए यूजर्स अपनी जानकारी मैनेज कर सकते हैं.
Facebook अकाउंट में नई ईमेल आईडी कैसे जोड़ें?
अगर आप अपने मौजूदा Facebook अकाउंट में नई ईमेल आईडी जोड़ना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे पहले Facebook ऐप खोलें और अपने अकाउंट को लॉगिन करें. इसके बाद मेन्यू या प्रोफाइल पिक्चर पर टैप करें. अब Settings &amp;amp; privacy के विकल्प पर जाएं और Settings खोलें. यहां आपको अकाउंट से जुड़ी अलग-अलग सेटिंग्स दिखाई देंगी. इसके बाद Accounts Centre में जाएं. यहां Personal details के विकल्प पर टैप करें और फिर Contact info खोलें. अब Add new contact का विकल्प चुनें. इसके बाद Add email address पर टैप करें और वह नई ईमेल आईडी दर्ज करें, जिसे आप अपने Facebook अकाउंट से जोड़ना चाहते हैं. अगर स्क्रीन पर अकाउंट चुनने का विकल्प दिखाई देता है, तो सही अकाउंट को सिलेक्ट करें. ईमेल आईडी डालने के बाद Next पर टैप करें. वेरिफिकेशन के लिए Facebook आपके नए ईमेल एड्रेस पर एक कन्फर्मेशन कोड भेजता है. अपने ईमेल इनबॉक्स में जाकर यह कोड देखें और Facebook पर डालकर करके प्रोसेस को पूरा करें.
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Facebook से पुरानी ईमेल आईडी कैसे हटाएं?
अगर आपकी प्रोफाइल में कोई ऐसी ईमेल आईडी जुड़ी है, जिसका अब इस्तेमाल नहीं होता, तो आप उसे हटा भी सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले Facebook की Settings खोलें और Accounts Centre में जाएं. इसके बाद Personal details के अंदर Contact info पर टैप करें. यहां आपके अकाउंट से जुड़ी संपर्क जानकारी दिखाई देगी. अब उस ईमेल एड्रेस को चुनें, जिसे आप हटाना चाहते हैं. इसके बाद Delete email के विकल्प पर टैप करें और दोबारा Delete चुनकर अपनी कंन्फर्म करें. सुरक्षा के लिए Facebook आपसे अकाउंट का पासवर्ड दोबारा डालने के लिए कह सकता है.
इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप पुरानी ईमेल आईडी की जगह नई आईडी इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो जल्दबाजी में पुरानी आईडी न हटाएं. पहले नई ईमेल आईडी जोड़ें और उसे वेरिफाई करें. इसके बाद चेक कर लें कि नई आईडी सही तरीके से अकाउंट में जुड़ गई है. वहीं ईमेल एड्रेस की स्पेलिंग ध्यान से चेक करें और वेरिफिकेशन कोड किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर न करें. यदि Facebook पर प्राइमरी ईमेल बदलने का ऑप्शन है, तो अपनी जरूरत के अनुसार उसे भी मैनेज कर सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर चमकाने में घंटों की मेहनत क्यों? दिवाली पर काम आएंगे ये गैजेट्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/घर-चमकाने-में-घंटों-की-मेहनत-क्यों-दिवाली-पर-काम-आएंगे-ये-गैजेट्स</link>
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        <description><![CDATA[ घर चमकाने में घंटों की मेहनत क्यों? दिवाली पर काम आएंगे ये गैजेट्स ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बैंक खाते में पैसे डालकर ठगी! क्या है Jumped Deposit Scam?</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने Jumped Deposit Scam को लेकर यूजर्स को सतर्क किया है. इस तरह की ठगी में जालसाज पहले खाते में थोड़े पैसे भेजते हैं और फिर गलती से ट्रांसफर होने का बहाना बनाकर रकम लौटाने के लिए कहते हैं. असली ठगी तब सामने आती है, जब पैसे वापस करने के नाम पर यूजर से बड़ी रकम के UPI पेमेंट को मंजूरी दिलाने की कोशिश की जाती है. SBI ने नेशनल साइबर सिक्योरिटी स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत इस धोखाधड़ी को लेकर चेतावनी जारी की है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Jumped Deposit Scam क्या है, यह स्कैम कैसे काम करता है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
क्या है Jumped Deposit Scam?
इस स्कैम में ठग किसी व्यक्ति के बैंक खाते में छोटी रकम जमा करते हैं. इसके बाद ठग फोन करके दावा करते हैं कि पैसे गलती से ट्रांसफर हो गए हैं और उन्हें वापस भेज दिया जाए. इस बहाने ठग यूजर का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं. जब व्यक्ति पैसे लौटाने के लिए तैयार हो जाता है, तो जालसाज UPI के जरिए पेमेंट रिक्वेस्ट भेजते हैं. यह रिक्वेस्ट पहले जमा की गई रकम से काफी ज्यादा हो सकती है. अगर व्यक्ति बिना जांच किए इसे मंजूरी दे देता है, तो उसके खाते से बड़ी रकम निकल सकती है.
यह स्कैम कैसे काम करता है?
SBI के मुताबिक, ठग जल्दबाजी, इमोशनल दबाव या किसी आपात स्थिति का हवाला देकर लोगों को तुरंत फैसला लेने के लिए मजबूर कर सकते हैं. शुरुआत में छोटी रकम मिलने से उनकी बात सच लग सकती है, लेकिन पैसे लौटाने के तरीके में ही धोखाधड़ी छिपी होती है. बैंक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी यूजर्स को अलर्ट किया है कि खाते में अनजान रकम आने पर बिना पुष्टि कोई कदम न उठाएं.
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खाते में अनजान पैसे आएं तो क्या करें?
अगर आपके खाते में ऐसी रकम आती है, जिसके बारे में आपको जानकारी नहीं है, तो उसे वापस भेजने के लिए खुद कोई ट्रांजैक्शन न करें. सबसे पहले बैंक के आधिकारिक नंबर या शाखा से संपर्क करें और रकम की जांच साथ ही वापसी की प्रक्रिया बैंक के जरिए पूरी कराएं. साथ ही ऐसी किसी भी पेमेंट रिक्वेस्ट को मंजूरी न दें, जिसे आपने खुद शुरू नहीं किया है.
Jumped Deposit Scam से बचने के लिए SBI की सलाह
1. संदिग्ध नंबर को ब्लॉक करें - &amp;nbsp;ठगी का शक होने पर नंबर ब्लॉक करें और तुरंत बैंक को इसकी सूचना दें.
2. जल्दबाजी में पेमेंट मंजूर न करें - किसी के दबाव या इमरजेंसी बताने पर UPI रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें.
3. कॉल की पुष्टि करें - बैंक से जुड़ी कॉल की पहचान जांचें. SBI ने 1600 से शुरू होने वाले नंबरों से आने वाली कॉल को &amp;nbsp;सुरक्षित बताया है.
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>हीटिंग से सेफ्टी तक, सर्दियों में रूम हीटर खरीदने से पहले जानें ये बातें</title>
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        <description><![CDATA[ सर्दियों की सुबह बिस्तर से निकलना मुश्किल हो और कमरे में ठंड के कारण हाथ-पैर सुन्न महसूस हों, तो रूम हीटर की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, लेकिन बाजार में मिलने वाले हर हीटर की टेक्नोलॉजी एक जैसी नहीं होती है. कोई कुछ ही मिनटों में गर्म हवा देने लगता है, तो कोई धीरे-धीरे पूरे कमरे को गर्म करता है. ऐसे में सिर्फ कीमत देखकर हीटर खरीदना सही फैसला नहीं है. हीटिंग टेक्नोलॉजी, बिजली की खपत, कमरे का आकार और सेफ्टी फीचर्स जैसी बातें भी ध्यान में रखना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि सर्दियों में Room Heater खरीदने से पहले कौन-सी बातें जान लें.&amp;nbsp;
खरीदने से पहले हीटिंग टेक्नोलॉजी जान लें
1. ऑयल-फिल्ड रेडिएटर इसमें मौजूद तेल गर्म होकर कमरे में धीरे-धीरे गर्मी फैलाता है. यह कम आवाज करता है और बंद होने के बाद भी कुछ समय तक गर्मी देता रहता है. हालांकि कमरे को गर्म करने में करीब 15 से 20 मिनट लग सकते हैं.&amp;nbsp;
2. क्वार्ट्ज और हैलोजन हीटर - इनकी हीटिंग टेक्नोलॉजी जल्दी गर्मी देती है. ये सामने बैठे व्यक्ति को गर्म रखने के लिए यूजफुल हैं, लेकिन पूरे कमरे को समान रूप से गर्म नहीं करते है.&amp;nbsp;
3. सिरेमिक और फैन हीटर - सिरेमिक हीटर गर्म हवा फैलाने के लिए फैन का इस्तेमाल करते हैं. वहीं फैन हीटर मेटल कॉइल से हवा गर्म करते हैं. ये तेजी से गर्मी देते हैं, लेकिन फैन वाले मॉडल शोर कर सकते हैं और हवा में रूखापन महसूस हो सकता है.&amp;nbsp;
कमरे के हिसाब से चुनें हीटर की पावर
हीटर खरीदते समय कमरे का साइज सबसे जरूरी है. छोटे कमरे के लिए कम पावर वाला मॉडल सही हो सकता है, जबकि बड़े कमरे में ज्यादा हीटिंग क्षमता की जरूरत पड़ती है. आमतौर पर प्रति वर्ग फुट करीब 10 वॉट हीटिंग पावर का अनुमान लगाया जाता है. इस हिसाब से 150 वर्ग फुट के कमरे के लिए लगभग 1500 वॉट का हीटर अच्छा हो सकता है, हालांकि छत की ऊंचाई, खिड़कियों और कमरे के इंसुलेशन से जरूरत बदल सकती है.&amp;nbsp;
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बिजली का बिल बढ़ने से कैसे बचें?
रूम हीटर की बिजली खपत उसकी वॉट क्षमता और इस्तेमाल के समय पर निर्भर करती है. जैसे 1500 वॉट का हीटर रोज 5 घंटे, लगातार 90 दिन चलाने पर और 8 रुपये प्रति यूनिट की दर से करीब 5,400 रुपये का खर्च आ सकता है. थर्मोस्टेट, टाइमर और ECO मोड जैसे फीचर्स तापमान को कंट्रोल करने और जरूरत न होने पर बिजली की खपत कम करने में मदद कर सकते हैं.&amp;nbsp;
सेफ्टी फीचर्स को न करें नजरअंदाज
हीटर में ओवरहीट प्रोटेक्शन और टिप-ओवर प्रोटेक्शन जैसे फीचर्स जरूर चेक करें. ये ज्यादा गर्म होने या हीटर गिरने की स्थिति में सुरक्षा देने में मदद करते हैं. मजबूत बेस, सेफ्टी ग्रिल और ISI मार्क भी खरीदते समय देखना चाहिए. हीटर को पर्दों, बिस्तर, फर्नीचर और ज्वलनशील चीजों से कम से कम 2 फीट दूर रखें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर के लिए गीजर खरीदने जा रहे हैं, जानें मार्केट में क्या&amp;क्या ऑप्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ सर्दियों का मौसम आते ही घरों में गर्म पानी की जरूरत बढ़ जाती है. ऐसे में अगर आप भी नया गीजर खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो बाजार में इसके लिए आपको कई ऑप्शन्स मिल जाएंगे. आजकल मार्केट में छोटे बाथरूम से लेकर बड़े परिवारों की जरूरत के हिसाब से कई तरह के गीजर मिलते हैं. इनमें इंस्टेंट गीजर, स्टोरेज गीजर, गैस गीजर और एनर्जी एफिशिएंट मॉडल शामिल हैं.
हालांकि, सही गीजर चुनने के लिए सिर्फ कीमत देखना काफी नहीं होता है. गीजर चुनने से पहले आपको उसकी क्षमता, बिजली की खपत, सुरक्षा फीचर्स और इस्तेमाल की जरूरत को भी अच्छी तरह देखना चाहिए. आइए जानते हैं आपके लिए कौनसा गीजर सबसे बेहतर होगा.
स्टोरेज गीजर हो सकता है बेस्ट
स्टोरेज गीजर भारतीय घरों में काफी लोकप्रिय हैं. इनमें पानी गर्म करने के लिए एक टैंक होता है, जिसमें गर्म पानी कुछ समय तक जमा रहता है. ये आमतौर पर 10, 15, 25 लीटर या उससे अधिक क्षमता में मिलते हैं. अगर आपके घर में कई लोग हैं और सभी को नहाने के लिए गर्म पानी चाहिए तो 15 से 25 लीटर का गीजर आपके लिए सही हो सकता है. अगर आपका छोटे परिवार है तो आपके लिए 10 से 15 लीटर का मॉडल बेहतर हो सकता है. स्टोरेज गीजर की खासियत यह है कि एक बार पानी गर्म होने के बाद जरूरत के समय उसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
इंस्टेंट गीजर भी फायदेमंद
अगर आपके घर में जगह कम है या गर्म पानी की जरूरत केवल हाथ-मुंह धोने, बर्तन साफ करने या थोड़े समय के लिए होती है, तो इंस्टेंट गीजर आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें पानी को स्टोर करने के बजाय जरूरत के अनुसार गर्म किया जाता है. ये आमतौर पर 1 से 3 लीटर की क्षमता वाले छोटे मॉडल में मिलते हैं. कुछ मॉडल अधिक क्षमता और ज्यादा पावर के साथ भी आते हैं. इनका आकार छोटा होता है और पानी गर्म करने में कम समय लगता है.
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गैस गीजर हो सकता है बेहतरीन विकल्प
गैस गीजर LPG या पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से पानी गर्म करते हैं. इसमें पानी जल्दी गर्म हो जाता है और बिजली से पानी गर्म करने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर आपके घर में गैस की सुविधा उपलब्ध है, तो आपके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. लेकिन इसकी इंस्टॉलेशन में सुरक्षा सबसे जरूरी है. गैस गीजर को बंद और बिना वेंटिलेशन वाले बाथरूम में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस का खतरा होता है.
सोलर गीजर में बिजली की बचत
अगर आपके घर की छत पर पर्याप्त जगह और अच्छी धूप आती है तो आपके लिए सोलर वॉटर हीटर भी अच्छा विकल्प हो सकता है. यह सूर्य की एनर्जी से पानी गर्म करता है, जिससे बिजली की खपत कम होती है. हालांकि इसकी शुरुआती लागत अधिक होती है और बादल वाले दिनों में बैकअप हीटिंग की जरूरत पड़ सकती है.
गीजर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
गीजर का चुनाव हमेशा परिवार के सदस्यों और नहाने के तरीके के हिसाब चुनना बेहतर होता है. वहीं गीजर खरीदते हुए केवल कीमत नहीं बल्कि सुरक्षा फिचर्स पर ध्यान देना भी जरूरी होता है. गीजर खरीदने से पहले ISI मार्क, थर्मल कट-ऑफ और प्रेशर रिलीज वाल्व जैसे फीचर्स देखें. खरीदते वक्त गीजर की कीमत के साथ इंस्टॉलेशन खर्च, बिजली की खपत और सर्विस सुविधा भी जांचें.
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>12 से 18 अक्टूबर के बीच स्मार्टफोन कंपनियों के बड़े लॉन्च, देखें लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ 12 से 18 अक्टूबर के बीच यानी अक्टूबर के इस हफ्ते स्मार्टफोन बाजार में कई नए फोन आने वाले हैं. कंपनियां अपने नए मॉडल में बेहतर डिस्प्ले, बड़ी बैटरी, तेज प्रोसेसर और गेमिंग के लिए खास फीचर्स देने पर ध्यान दे रही हैं. OnePlus और RedMagic चीन में अपने नए फ्लैगशिप फोन लॉन्च करने जा रहे हैं. वहीं, OPPO, Motorola और Infinix के कुछ फोन भी भारत में आ सकते हैं, हालांकि इनमें से ज्यादातर फोन की भारतीय लॉन्च डेट को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
OnePlus 16 में मिलेगी 9000mAh की बैटरी
OnePlus 16 को चीन में 12 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया जाना है. कंपनी के मुताबिक, फोन में 165Hz रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन मिलेगी, जो चुनिंदा गेम में 185Hz तक जा सकेगी. इसमें Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 प्रोसेसर, 9000mAh की बैटरी, 100W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट मिलने की जानकारी दी गई है. कैमरे के लिए 200MP का मेन सेंसर और 50MP के अल्ट्रा-वाइड व पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरे दिए जा सकते हैं. भारत में इसकी लॉन्चिंग को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं है.&amp;nbsp;
RedMagic 12 Pro+ गेमिंग पर करेगा फोकस
RedMagic 12 Pro+को चीन में 15 अक्टूबर को पेश किया जाएगा. इसमें Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 चिपसेट और अंडर-डिस्प्ले सेल्फी कैमरा टेक्नोलॉजी मिलने की पुष्टि हुई है. कंपनी ने इसके स्क्रीन बेजल को घटाकर 0.96mm कर दिया है. फोन के ट्रांसपेरेंट डिजाइन में तीन कलर ऑप्शन मिलेंगे. इसकी बैटरी 8,400mAh की हो सकती है, जिसमें 120W वायर्ड और 80W वायरलेस चार्जिंग मिलने की उम्मीद है. बाकी स्पेसिफिकेशन लॉन्च के दौरान सामने आएंगे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - दिवाली पर लॉन्च होंगे ये स्मार्ट गैजेट्स! बाजार में मचाएंगे धूम
OPPO, Motorola और Infinix के फोन भी लिस्ट में शामिल
OPPO Find X10 सीरीज के भारत में अक्टूबर के इस हफ्ते या आखिर तक आने की चर्चा है. इसके Pro Max मॉडल में 6.78 इंच की 144Hz स्क्रीन, Dimensity 9600 Pro प्रोसेसर, तीन 200MP कैमरे और 8000mAh की बैटरी मिलने की जानकारी सामने आई है, हालांकि भारत में इसकी लॉन्च डेट आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुई है.
Motorola Edge 70 Neo को भी भारत में पेश किए जाने की उम्मीद है, जबकि Infinix GT 50 Pro को कंपनी भारतीय बाजार के लिए टीज कर चुकी है. Infinix के इस फोन में 144Hz AMOLED डिस्प्ले, Dimensity 8400 Ultimate प्रोसेसर और 6,500mAh की बैटरी मिलती है. इसकी भारतीय कीमत और लॉन्च डेट अभी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
iQOO और Xiaomi के नए फोन पर भी नजर
iQOO 16 को चीन में लॉन्च किया जा चुका है और भारत में इसकी एंट्री अक्टूबर के आखिर में हो सकती है. इसमें 8,400mAh बैटरी, 165Hz डिस्प्ले और Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 प्रोसेसर मिलता है. वहीं Xiaomi 18 Pro की भारत में लॉन्चिंग को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं. कुछ रिपोर्ट अक्टूबर, जबकि कुछ दिसंबर में लॉन्च की संभावना जता रही हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>से, अक्टूबर, के, बीच, स्मार्टफोन, कंपनियों, के, बड़े, लॉन्च, देखें, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>क्लाउड स्टोरेज चुनते समय न करें ये गलती, खतरे में पड़ सकता है आपका डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ फोन की स्टोरेज भरने लगे या जरूरी फाइलों को कहीं सुरक्षित रखना हो तो क्लाउड स्टोरेज एक आसान ऑप्शन बन जाता है. कुछ ही मिनटों में फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट्स ऑनलाइन सेव किए जा सकते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सर्विस पर आप अपना डेटा अपलोड कर रहे हैं, वह आपकी जरूरतों और प्राइवेसी के हिसाब से सही भी है या नहीं
जल्दबाजी में चुना गया क्लाउड स्टोरेज आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकता है. साथ ही बाद में दूसरी सर्विस पर जाने के लिए फाइलें डाउनलोड करनी पड़ सकती हैं और उन्हें दोबारा अपलोड करना पड़ सकता है. ऐसे में शुरुआत में कुछ बातों को चेक कर लेना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि क्लाउड स्टोरेज चुनते समय कौन-सी गलती न करें
क्लाउड स्टोरेज चुनते समय न करें ये गलती
क्लाउड स्टोरेज चुनने से पहले अपने फोन और दूसरे डिवाइस में मौजूद फाइलों पर नजर डालें. देखें कि फोटो, वीडियो, जरूरी डॉक्यूमेंट और फोन बैकअप कितनी जगह ले रहे हैं. इससे आपको अंदाजा मिल जाएगा कि कितनी स्टोरेज की जरूरत है. अगर आपकी फोटो ही 18GB जगह ले रही है तो 5GB वाला फ्री प्लान सही नहीं होगा. वहीं अगर आपका पूरा डेटा 20GB से कम है, तो सीधे 2TB का प्लान लेना जरूरत से ज्यादा खर्च हो सकता है.&amp;nbsp;
फ्री स्टोरेज और कीमत देखें
हर सर्विस की सुविधाएं और फ्री स्टोरेज अलग-अलग होती है. Google One 15GB फ्री स्टोरेज देता है और Gmail, Google Docs साथ ही Android के साथ आसानी से काम करता है. Apple का iCloud 5GB फ्री स्टोरेज देता है और Apple डिवाइस के साथ आसानी से काम करता है. OneDrive, Microsoft 365 सब्सक्रिप्शन के साथ मिलता है, जबकि Dropbox का फ्री प्लान सीमित है. Proton Drive जैसी सर्विस प्राइवेसी पर ज्यादा ध्यान देती है. प्लान चुनते समय यह भी चेक करें कि डिलीट हुई फाइलें वापस मिल सकती हैं या नहीं और फाइल शेयर करने के लिए सामने वाले व्यक्ति का उसी प्लेटफॉर्म पर अकाउंट होना जरूरी है या नहीं.&amp;nbsp;
अपने डिवाइस के हिसाब से चुनें सर्विस
अगर आप Windows लैपटॉप और Android फोन दोनों इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसी सर्विस चुनें जो दोनों पर ठीक से काम करे. Apple डिवाइस इस्तेमाल करने वालों के लिए iCloud सुविधाजनक हो सकता है. वहीं अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर लोगों के साथ फाइल शेयर करनी हो, तो Google Drive या Dropbox जैसे ऑप्शन काम आ सकते हैं.&amp;nbsp;
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निजी डेटा की सुरक्षा पर ध्यान दें
वित्तीय रिकॉर्ड, निजी बातचीत या संवेदनशील डॉक्यूमेंट अपलोड करने से पहले प्राइवेसी पॉलिसी समझें. Google Drive, Dropbox और OneDrive जैसी सेवाओं को तकनीकी रूप से फाइलों तक पहुंच मिल सकती है और उनकी नीतियों के तहत ऑटोमेटेड स्कैनिंग भी हो सकती है. ज्यादा निजी सुरक्षा के लिए Proton Drive जैसी जीरो-नॉलेज सर्विस ऑप्शन हो सकती है, जिसमें एन्क्रिप्शन इस तरह किया जाता है कि सर्विस देने वाली कंपनी भी फाइल का कंटेंट नहीं पढ़ सकती &amp;nbsp;है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बिना इंटरनेट भी मिलेंगे जरूरी डॉक्यूमेंट, Google Drive में ऑन करें ये फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार जरूरत के समय जरूरी डॉक्यूमेंट न मिलें, तो परेशानी हो सकती है. सफर के दौरान, डॉक्टर के पास जाते समय या किसी जरूरी काम में इंटरनेट न चलने से भी दिक्कत आ सकती है, लेकिन थोड़ी तैयारी करके आप इस समस्या से बच सकते हैं. Google Drive में एक ऐसा फीचर मौजूद है, जिसकी मदद से आप जरूरी फाइलों को बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी खोल सकते हैं.
इसके लिए आपको संबंधित फाइल को पहले से ऑफलाइन इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना होगा. इससे टिकट, पहचान पत्र, एडमिट कार्ड, प्रिस्क्रिप्शन, फॉर्म, होटल वाउचर और PDF जैसी जरूरी फाइलें नेटवर्क न होने पर भी आपके काम आ सकती हैं. तो आइए जानते हैं कि यह फीचर Google Drive में ऑन कैसे करें.
Google Drive का ऑफलाइन फीचर क्यों है जरूरी?
कई बार यात्रा के दौरान एयरपोर्ट का Wi-Fi ठीक से काम नहीं करता या मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता है. परीक्षा और जरूरी अपॉइंटमेंट के समय भी इंटरनेट की समस्या सामने आ सकती है. ऐसे में अगर जरूरी डॉक्यूमेंट ऑनलाइन ही सेव हैं, तो उन्हें खोलना मुश्किल हो सकता है.Google Drive का ऑफलाइन फीचर आपको ऐसी स्थिति के लिए पहले से तैयार रहने में मदद करता है. आप जिन फाइलों को इंटरनेट के बिना इस्तेमाल करना चाहते हैं, उन्हें पहले ही ऑफलाइन उपलब्ध करा सकते है.&amp;nbsp;
Google Drive में कैसे ऑन करें यह फीचर?
1. इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए आप सबसे पहले अपने फोन में Google Drive ऐप खोलें.&amp;nbsp;
2. अब उस फाइल को ढूंढें, जिसकी जरूरत आपको इंटरनेट के बिना पड़ सकती है. यह डॉक्यूमेंट, PDF, फोटो या कोई दूसरी फाइल हो सकती है.&amp;nbsp;
3. इसके बाद फाइल के साइड में दिए गए तीन डॉट वाले मेन्यू पर टैप करें.&amp;nbsp;
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4. यहां Make available offline का ऑप्शन चुनें.&amp;nbsp;
5. घर या ऑफिस से निकलने से पहले ऐप के ऑफलाइन सेक्शन में जाकर चेक करें कि जरूरी फाइल उपलब्ध है या नहीं.&amp;nbsp;
इंटरनेट बंद होने से पहले कर लें तैयारी
इस फीचर का फायदा तभी मिलेगा, जब आप इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध रहते हुए फाइल को ऑफलाइन इस्तेमाल करने के लिए तैयार कर लेंगे. ऐसे में सफर पर निकलने, परीक्षा देने या किसी जरूरी अपॉइंटमेंट पर जाने से पहले अपने जरूरी डॉक्यूमेंट को ऑफलाइन उपलब्ध कराना न भूलें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिवाली पर लॉन्च होंगे ये स्मार्ट गैजेट्स! बाजार में मचाएंगे धूम</title>
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        <description><![CDATA[ दिवाली पर घर की सजावट से लेकर रोजमर्रा के काम आसान बनाने तक, स्मार्ट गैजेट्स की मांग बढ़ रही है. इस बार AI से नोट्स बनाने वाले डिवाइस, हेल्थ ट्रैक करने वाली स्मार्ट रिंग, स्मार्ट वॉच और घर को स्मार्ट बनाने वाले उपकरण लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. कुछ गैजेट्स बाजार में उपलब्ध हैं, जबकि कुछ नई तकनीक के चलते चर्चा में हैं. अगर आप इस दिवाली अपने लिए या किसी को गिफ्ट देने के लिए कोई टेक प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं, तो इन विकल्पों पर नजर डालें&amp;nbsp;
दिवाली से पहले लॉन्च होंगे नए स्मार्टफोन
स्मार्ट गैजेट्स के साथ इस दिवाली नए स्मार्टफोन भी चर्चा में रह सकते हैं. अक्टूबर के आखिर में OPPO Find X10 सीरीज और Infinix GT 50 Pro जैसे फोन पर नजर रहेगी. वहीं, Motorola Edge 70 Neo को भी भारत में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है. इन फोन्स में बेहतर कैमरा, तेज प्रोसेसर और बड़ी बैटरी जैसे फीचर्स मिलने की संभावना है.&amp;nbsp;
AI से नोट्स बनाने वाले वियरेबल गैजेट्स
AI पर आधारित छोटे रिकॉर्डिंग डिवाइस उन लोगों के लिए उपयोगी &amp;nbsp;हैं, जिन्हें मीटिंग, इंटरव्यू या बातचीत के दौरान जरूरी बातें नोट करनी होती हैं. Plaud NotePin S ऐसा ही एक वियरेबल डिवाइस है. यह बातचीत रिकॉर्ड कर उसे टेक्स्ट, सारांश और नोट्स में बदलने में मदद करता है. कंपनी ने इसे 2026 में पेश किया &amp;nbsp;
स्मार्टवॉच और स्मार्ट रिंग से रखें सेहत पर नजर
स्मार्टवॉच अब केवल समय देखने का साधन नहीं रह गई हैं. इनमें हार्ट रेट, नींद, कदमों और वर्कआउट जैसी गतिविधियों को ट्रैक करने वाले फीचर्स मिलते हैं. Noise ColorFit Pro 6 और Pro 6 Max जैसे मॉडल उन लोगों के लिए विकल्प हैं, जो रोजाना अपनी फिटनेस पर नजर रखना चाहते हैं. स्मार्ट रिंग भी वियरेबल टेक्नोलॉजी की एक दिलचस्प कैटेगरी है. इन्हें उंगली में पहना जाता है और कुछ मॉडल नींद, गतिविधि और स्वास्थ्य से जुड़े संकेतों को ट्रैक करते हैं.&amp;nbsp;
स्मार्ट लाइटिंग से सजाएं अपना घर
दिवाली पर घर को सजाने के लिए स्मार्ट लाइटिंग एक अलग विकल्प बनती है. RGB लाइट्स में रंग और रोशनी अपनी पसंद के अनुसार बदली जाती है. मोशन सेंसर वाली लाइटें किसी के पास आने पर अपने आप जलती हैं और जरूरत न होने पर बंद होती हैं. इससे सीढ़ियों, गलियारों और कमरे के कुछ हिस्सों में रोशनी का इस्तेमाल आसान होता है. D-Voom Times Gate जैसे डिस्प्ले डिवाइस भी डेस्क या कमरे की सजावट के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं
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स्मार्ट पंखे और एयर प्यूरीफायर
घर को स्मार्ट बनाने के लिए Wi-Fi से चलने वाले BLDC पंखे भी एक विकल्प हैं. कुछ मॉडल मोबाइल ऐप या स्मार्ट होम सिस्टम से कंट्रोल किए जाते हैं.&amp;nbsp;प्रदूषण वाले इलाकों में HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर भी बेहद काम आता है. कुछ मॉडल हवा की गुणवत्ता दिखाने के लिए डिस्प्ले देते हैं. &amp;nbsp;केवल स्क्रीन पर AQI दिखने से डिवाइस की सफाई क्षमता साबित नहीं होती. कमरे के आकार, फिल्टर और CADR जैसी जानकारी देखकर ही खरीदारी करें.
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        <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Motorola के पुराने डिजाइन से अलग है Signature 27? जानिए क्या है खास</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन मार्केट में फोन की पहचान उसके फीचर्स के साथ डिजाइन से भी होती है. कई बार अलग-अलग कीमत वाले फोन देखने में काफी हद तक एक जैसे लगते हैं. खासकर फोन के पीछे दिया गया कैमरा सेटअप और बैक पैनल अक्सर एक जैसे दिखते हैं. इसी बीच Motorola के नए फोन Signature 27 में कंपनी ने इस पुराने तरीके से कुछ अलग करने की कोशिश की है. इस फोन को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में दिखाया गया है. कंपनी इसे पिछले महीने ही ग्लोबल मार्केट में पेश कर चुकी है और अब यह भारत में भी आने वाला है. फोन में नए डिजाइन के साथ कैमरा और साउंड टेक्नोलॉजी पर भी खास ध्यान दिया गया है.&amp;nbsp;
Motorola Signature 27 का डिजाइन कितना अलग है?
Motorola Signature 27 के पीछे लगे कैमरों का डिजाइन बाकी फोन से इसे अलग बनाता है. फोन के ऊपरी हिस्से में चौड़ा कैमरा मॉड्यूल दिया गया है. इसमें तीन कैमरा लेंस एक लाइन में हैं, जबकि इनके नीचे दो गोल हिस्से भी दिखाई देते हैं. Motorola ने इस बार अपने पुराने डिजाइन से हटकर नया लुक देने की कोशिश की है.फोन हल्के ऑलिव ग्रीन रंग में नजर आया है. इसके पीछे की सतह पर खास तरह की बनावट दी गई है, जो रोशनी पड़ने पर चमकती है. कैमरे के आसपास का हिस्सा भी फोन के कलर जैसे ही है, जबकि इसके किनारे मेटल जैसे दिखाई देते हैं. इसके अलावा, कैमरा मॉड्यूल पर Bang &amp;amp; Olufsen का नाम भी दिया गया है.&amp;nbsp;
Bang &amp;amp; Olufsen के साथ नई पार्टनरशिप
Motorola Signature 27 की एक खास बात इसका ऑडियो सिस्टम है. कंपनी के मुताबिक, यह दुनिया का पहला स्मार्टफोन है जिसमें Bang &amp;amp; Olufsen की ऑडियो टेक्नोलॉजी दी गई है. इससे फोन में ऑडियो एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने पर कंपनी का फोकस दिखाई देता है.&amp;nbsp;
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प्रोसेसर और कैमरे में क्या मिलेगा?
Motorola ने पुष्टि की है कि इस फोन में Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 चिपसेट मिलेगा. इसके साथ ग्लोबल मॉडल में ArcticMesh कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जिसमें नया वेपर चैंबर और दूसरे थर्मल मटेरियल इस्तेमाल किए गए हैं. इसके पीछे 50 मेगापिक्सल का Sony LYTIA 910 प्राइमरी कैमरा और 200 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया गया है. फोन में Video Enhancement Engine भी मिलेगा, जो AI की मदद से वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान सीन को समझकर रंगों को एडजस्ट करता है.&amp;nbsp;
भारत में कब और कितनी होगी कीमत?
भारतीय वेरिएंट के डिस्प्ले, बैटरी और बाकी हार्डवेयर की पूरी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है. कंपनी ने भारत में इसकी कीमत और बिक्री की तारीख भी घोषित नहीं की है. फोन का डिजाइन और शुरुआती फीचर्स जरूर सामने आ गए हैं, लेकिन इसकी असली परफॉर्मेंस समझने के लिए टेस्ट का इंतजार करना होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Starlink कैसे काम करता है, जानें सैटेलाइट इंटरनेट की टेक्नोलॉजी?</title>
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        <description><![CDATA[ इंटरनेट के बिना आज के दौर में बहुत से कम कर पाना लगभग नामुमकिन है. हमारी जिंदगी से जुड़े रोजमर्रा के बहुत से जरूरी कामों के लिए इसकी जरूरत पड़ती है. लेकिन आज भी देश में गई ऐसे इलाके हैं बल्कि बात की जाए तो दुनिया में भी ऐसे कई इलाके हैं जहां इंटरनेट सही तरीके से नहीं पहुंच पाया है. क्योंकि वहां इंटरनेट के लिए जरूरी फाइबर केबल और नेटवर्क नहीं है.&amp;nbsp;
ऐसे इलाकों में इंटरनेट पहुंचने में समय लग सकता है मगर Elon Musk का Starlink इन जगहों पर भी आसानी से इंटरनेट सुविधा दे सकता है. क्योंकि इस इंटरनेट के लिए जमीन पर बिछी हुई केबल है और टावर की जरूरत नहीं होती यह सीधा सेटेलाइट के नेटवर्क का इस्तेमाल करता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;SpaceX की Starlink&amp;nbsp; सैटेलाइट तकनीक पर काम करती है. चलिए आपको बताते हैं किस तरीके से लोगों के घरों तक Starlink पहुंचाता है Internet.&amp;nbsp;
कैसे काम करती है Starlink की टेक्नोलॉजी?
Starlink SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस है. इसमें Low Earth Orbit में मौजूद सैटेलाइट का Network इस्तेमाल होता है. नार्मल ब्रॉडबैंड में Internet घर तक पहुंचाने के लिए Optical Fiber Cable इस्तेमाल होती है. वहीं Mobile Internet के लिए फोन आसपास के Tower से जुड़ता है. Starlink का तरीका अलग है. इसमें यूजर के घर पर एक डिश एंटीना लगाया जाता है.&amp;nbsp;
यह डिश सैटेलाइट के साथ Contact बनाती है और Internet Signal भेजने और रिसीव करने का काम करती है. इसके साथ Wi-Fi Router भी होता है जिससे घर के Phone, Laptop और दूसरे Device Internet से जुड़ सकते हैं. इसका फायदा यह है कि जहां Cable बिछाना और Tower लगाना मुश्किल हो वहां भी Connectivity पहुंच जाती है.&amp;nbsp;

डिश से सैटेलाइट और फिर Internet तक कैसे पहुंचता है सिग्नल?
जब यूजर Phone और Laptop पर कोई वेबसाइट खोलता है तो डिवाइस का Data Wi-Fi Router तक जाता है. Router उसे डिश एंटीना तक पहुंचाता है. इसके बाद डिश आसमान में मौजूद Starlink सैटेलाइट को Signal भेजती है. सैटेलाइट से मिला Signal आगे Network और जमीन पर मौजूद Infrastructure के जरिए Internet तक पहुंचता है.&amp;nbsp;
Website या App से जवाब लौटने पर Signal इसी Network के रास्ते वापस सैटेलाइट और फिर यूजर की डिश तक आता है. डिश उसे Router तक पहुंचाती है जहां से Phone और Laptop पर Content दिखता है. यानी इस व्यवस्था में यूजर का Device सीधे सैटेलाइट से नहीं जुड़ता बल्कि डिश और Router के जरिए Connection बनता है. इसकी Performance इन बातों पर निर्भर करती है जैसे डिश को Signal मिलना Service के लिए जरूरी Network Infrastructure.&amp;nbsp;

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भारत में Starlink की सेवा शुरू होने में देरी क्यों?
भारत में Starlink की Commercial Service शुरू होने में सेफ्टी से जुड़ी शर्तें और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रोसेस बड़ी वजह हैं. सैटेलाइट Internet कंपनियों को देश के तय नियमों के हिसाब से काम करना होता है. इनमें कानून के तहत निगरानी और जरूरत पड़ने पर Interception की व्यवस्था शामिल है. भारत में जो यूजर्स हैं उनके Social Traffic की निगरानी और देश के अंदर तय किए गए Gateway और Network व्यवस्था को मानना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
इसके अलावा अगर बात करें तो Spectrum एलोकेशन की प्रोसेस पूरी होनी बाकी है. भारत में यह सभी बातें इंटरनेट सेवाओं को भारत के नियमों और सुरक्षा जरूरतों के तहत चलाने के लिए हैं. इसलिए कह सकते हैं कि Starlink की Service शुरू होने का रास्ता प्रोसेस के पूरा होने पर टिका हुआ है. Elon Musk की कंपनी को इसे भारत में लॉन्च करने से पहले सभी जरूरी मंजूरियां और व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी तभी बात बन पाएगी.
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Jio&amp;Airtel के मुकाबले Starlink महंगा या सस्ता, देखें हिसाब&amp;किताब?</title>
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        <description><![CDATA[ Internet के बिना आज के टाइम में आप कुछ भी नहीं कर सकते. भारत में इस वक्त जनसंख्या के लिहाज दुनिया में Internet इस्तेमाल करने के मामले में दूसरे नंबर पर है. जिसमें ज्यादातर लोग Wi-Fi के जरिए Internet इस्तेमाल करते हैं. भारत में इस वक्त बात की जाए तो Airtel और Jio दो प्रमुख Internet Service प्रोवाइडर्स हैं. पिछले काफी समय से दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी Elon Musk की सैटेलाइट Internet कंपनी Starlink भी भारत में अपनी Service शुरू करने की तैयारी में है.&amp;nbsp;
जिसमें उसे अबतक कामयाबी हासिल नहीं हुई है. अभी कुछ दिनों पहले ही Elon Musk ने Starlink को लेकर भारत के सबसे अमीर बिजनेसमैन Mukesh Ambani पर ट्वीट्स भी किए थे. इसी बीच लोगों के मन में यह सवाल भी आ रहा है आखिर Starlink उनके लिए कितना फायदेमंद हो सकता है? क्या यह Jio और Airtel के मुकाबले लोगों को सस्ते में Internet दे सकता है. चलिए आपको बताते हैं इन&amp;nbsp; Jio और Airtel के मुकाबले Starlink सस्ता है महंगा.
Starlink का कुल खर्च कितना?
Starlink की Service के लिए सबसे पहले आपको यह जानना जरूरी है कि इसमें शुरुआती खर्च और मंथली खर्च कितना आएगा जो कि थोड़ा सा अलग है. Starlink का Basis Monthly Plan करीब 8600 रुपये का माना जा रहा है. जिसमें आपको 220 Mbps से ज्यादा की Download Speed मिल सकती है. लेकिन इसके Hardware Set-up चार्ज काफी महंगा पड़ जाएगा.
इसकी सर्विस को चालू करने के लिए यूजर को एक डिश एंटीना, Wi-Fi राउटर और Cable का किट खरीदना पड़ेगा. जिसकी कीमत लगभग 34000 रुपये के आसपास बैठती है. यानी अगर आप पहले महीने ही स्टारलिंक लगाना चाहते हैं. तो शुरुआत में ही आपको 42000 रुपये से ज्यादा का बजट रखना पड़ेगा.&amp;nbsp;

Jio और Airtel Fiber के बजट-फ्रेंडली Plans&amp;nbsp;
अब बात करते हैं भारतीय टेलीकॉम मार्केट के दो सबसे बड़े सूरमाओं यानी Jio और Airtel की. इन दोनों कंपनियों ने देश में Fiber Broadband को घर-घर पहुंचा दिया है. अब इनके खर्च की बात की जाए तो Jio Fiber की शुरुआत सिर्फ 699 रुपये प्रति महीने से होती है. जिसमें आपको बिना किसी रुकावट के 100 Mbps की स्मूथ स्पीड मिलती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;अगर आपको ज्यादा स्पीड चाहिए तो 1499 रुपये में 300 Mbps और 3999 रुपये में सीधे 1 Gbps तक की स्पीड मिल जाती है.&amp;nbsp;
वहीं Airtel Xstreame Fiber भी लगभग बराबर है, Airtel का 100 Mbps वाला प्लान 799 रुपये से शुरू होता है. जबकि 300 Mbps के लिए 1599 रुपये और 1 Gbps की अल्ट्रा-फास्ट स्पीड के लिए 3999 रुपये चुकाने पड़ते हैं. Jio और Airtel में जो फायदा है वह यह कि इसमें कोई हार्डवेयर चार्ज नहीं देना पड़ता. इसके साथ ही शहरों में इनकी लाइन जमीन से आने की वजह से Speed भी काफी सही रहती है.

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आपके लिए फायदे का सौदा कौनसा?
सिर्फ Technology देखें तो&amp;nbsp;अगर आप किसी शहर, कस्बे या ऐसे इलाके में रहते हैं जहां Jio या Airtel की Fiber लाइन मौजूद है. तो आपके लिए Starlink बिल्कुल भी फायदे का सौदा नहीं है. Fiber Broadband न सिर्फ Starlink से दस गुना सस्ता पड़ता है. बल्कि इसमें बादलों, भारी बारिश या खराब मौसम का असर भी नहीं होता.&amp;nbsp;
वहीं दूसरी तरफ Starlink उन दूर-दराज के इलाकों में भी काम कर सकता है जहां आज तक कोई टेलीकॉम कंपनी केबल नहीं बिछा पाई है. जैसे लद्दाख की वादियां, पूर्वोत्तर के घने जंगल, दूर-दराज के बॉर्डर एरिया या फिर बीच समंदर में जहाज.&amp;nbsp;
यानी जिन जगहों पर जहां Fiber की पहुंच नामुमकिन है वहां Starlink आपको Internet मुहैया करवा सकता है.&amp;nbsp; लेकिन आम शहरी यूजर जो घर से काम करता है उसके लिए 8600 रुपये का बिल भरना समझदारी नहीं होगी. इसलिए नार्मल जरूरतों के लिए Jio-Airtel और No-Network Zone के लिए Starlink ज्यादा फायदेमंद है. हालांकि Starlink सर्विस भारत में अभी शुरू नहीं हुई है इसलिए लोगों के पास इसका ऑप्शन नहीं है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Vivo Y600s Pro लॉन्च, 10,200mAh बैटरी से फोन की पावर गेम में बदलाव?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन में बड़ी बैटरी और तेज चार्जिंग की मांग के बीच Vivo ने चीन में अपना नया फोन Y600s Pro पेश कर दिया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत 10,200mAh की बैटरी है. कंपनी ने इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट वाली AMOLED स्क्रीन और 90W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया है. खास बात यह है कि नए फोन के कई फीचर्स इसी साल आए Vivo Y600 Pro से मिलते हैं. इसमें प्रोसेसर, डिस्प्ले, बैटरी क्षमता और कैमरा सेटअप भी लगभग सेम हैं.&amp;nbsp;
Vivo Y600s Pro की कीमत कितनी है?
Vivo Y600s Pro को चीन में दो स्टोरेज ऑप्शन में उतारा गया है. इसके 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत CNY 2,699 यानी करीब 39,000 रुपये है. वहीं, 8GB RAM और 512GB स्टोरेज मॉडल CNY 2,999 यानी लगभग 43,300 रुपये में आता है. फोन चार कलर ऑप्शन- मूनलाइट ब्लैक, फ्लोटिंग गोल्ड, स्टाररी पर्पल और वास्ट ब्लू में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
Vivo Y600s Pro की बैटरी और 90W चार्जिंग
Vivo Y600s Pro में 10,200mAh की बैटरी दी गई है, जबकि इसकी रेटेड क्षमता 10,000mAh बताई गई है. फोन 90W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करता है, फिलहाल फोन को चीन में पेश किया गया है और भारत में इसकी उपलब्धता को लेकर जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
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120Hz AMOLED डिस्प्ले और प्रोसेसर
इस फोन में 6.83 इंच की 1.5K AMOLED स्क्रीन दी गई है, जिसका रेजोल्यूशन 2800 बाय 1260 पिक्सल है. डिस्प्ले 120Hz तक के रिफ्रेश रेट के साथ आता है. इसमें HDR और P3 वाइड कलर गैमट का सपोर्ट भी मिलता है. फोन में 6nm तकनीक पर बना MediaTek Dimensity 7300e प्रोसेसर दिया गया है. यह Android 16 पर आधारित OriginOS 6 पर चलता है. इसके साथ 8GB LPDDR5 RAM और 512GB तक UFS 3.1 स्टोरेज मिलती है. Memory Fusion फीचर के जरिए 8GB तक अतिरिक्त वर्चुअल RAM का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
Vivo Y600s Pro का कैमरा और कनेक्टिविटी में क्या है खास?
फोटोग्राफी के लिए फोन के पीछे 50MP का कैमरा और सामने 32MP का सेल्फी कैमरा दिया गया है. दोनों कैमरों में EIS सपोर्ट मिलता है और इनसे 1080p तक वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है. कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, Wi-Fi 6, Bluetooth 5.4, NFC और USB Type-C पोर्ट दिया गया है. फोन में स्टीरियो स्पीकर, इंफ्रारेड रिमोट और इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर जैसे फीचर्स भी हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>AI डिवाइस अब भारत के हिसाब से होंगे तैयार, IMC 2026 में नई टेक्नोलॉजी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-डिवाइस-अब-भारत-के-हिसाब-से-होंगे-तैयार-imc-2026-में-नई-टेक्नोलॉजी</link>
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        <description><![CDATA[ इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में भारतीय कंपनियों ने ऐसी टेक्नोलॉजी दिखाई है, जिसे देश की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है. Reliance Jio जहां AI वाले वियरेबल डिवाइस लाने की तैयारी में है, वहीं Torchit ने दृष्टिबाधित लोगों की मदद के लिए स्मार्ट चश्मे बनाए हैं. Qualcomm जैसी कंपनियां भी पेमेंट, पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों में इन डिवाइस के इस्तेमाल की संभावनाएं ढूंढ रही हैं.&amp;nbsp;
Jio के AI डिवाइस में मिलेंगी कई सुविधाएं
Reliance Intelligence की वियरेबल टीम ऐसे डिवाइस तैयार कर रही है, जिनमें यूजर्स आवाज के जरिए AI फीचर्स का इस्तेमाल कर सकेंगे. कंपनी इन्हें नवंबर या दिसंबर 2026 तक भारत में लॉन्च करने की योजना बना रही है. इनमें लाइव ट्रांसलेशन, मीटिंग या बातचीत के नोट्स बनाना, स्कैन करके पेमेंट करना, म्यूजिक सुनना और लाइव क्रिकेट कमेंट्री जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं.
यूजर्स Hello, Jio बोलकर असिस्टेंट को एक्टिव कर सकेंगे. इन डिवाइस में फिलहाल हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, बंगाली, तेलुगु, तमिल और मलयालम समेत आठ भाषाओं का सपोर्ट है. कंपनी चार और भाषाएं जोड़ने की योजना बना रही है, हालांकि इनकी कीमत अभी नहीं बताई गई है.&amp;nbsp;
दृष्टिबाधित लोगों के लिए Torchit के स्मार्ट चश्मे
अहमदाबाद की कंपनी Torchit ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए Jyoti स्मार्ट ग्लास तैयार किए हैं. इनमें Explore, Read, Medicine, Colour, Currency और Food and Grocery जैसे छह मोड मिलते हैं. कैमरे की मदद से ये चश्मे सामने मौजूद चीजों की जानकारी दे सकते हैं और लिखे हुए टेक्स्ट, दवाओं, रंगों तथा पैसों को पहचानने में मदद करते हैं. कंपनी के मुताबिक, जुलाई 2026 में पेश किया गया नया मॉडल वायरलेस है. Torchit के प्रोडक्ट भारत में 40 हजार से ज्यादा लोगों तक पहुंच चुके हैं. इनकी कीमत करीब 20,000 से 25,000 रुपये है.
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पेमेंट और पढ़ाई में भी काम आएंगे स्मार्ट चश्मे
Qualcomm ने Lenskart और NPCI के साथ मिलकर चश्मे से पेमेंट करने की टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया. इसमें आवाज या फिंगरप्रिंट से भुगतान की पुष्टि की जा सकती है. कंपनी को शिक्षा, कामकाज और नेविगेशन में भी ऐसे डिवाइस के इस्तेमाल की संभावना दिखती है.&amp;nbsp;
AI के लिए मजबूत डिजिटल नेटवर्क भी जरूरी
IMC 2026 में जापान ने भारत के साथ डेटा सेंटर, फाइबर नेटवर्क और समुद्र के नीचे बिछने वाली इंटरनेट केबल जैसी सुविधाओं पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई. AI सेवाओं को चलाने के लिए सिर्फ चिप्स ही नहीं, बल्कि तेज और भरोसेमंद नेटवर्क, बिजली और डेटा सेंटर भी जरूरी हैं. ऐसे में AI टेक्नोलॉजी के विकास के साथ उसके लिए मजबूत डिजिटल स्ट्रक्चर तैयार करना भी जरूरी होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>दुनिया के साथ 6G की रेस में भारत, Jio ने जताई शुरुआती रोलआउट की उम्मीद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/दुनिया-के-साथ-6g-की-रेस-में-भारत-jio-ने-जताई-शुरुआती-रोलआउट-की-उम्मीद</link>
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        <description><![CDATA[ मोबाइल नेटवर्क की दुनिया में अब 5G के बाद अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी यानी 6G की तैयारी तेज हो रही है. आने वाले समय में इसका इस्तेमाल सिर्फ तेज इंटरनेट चलाने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि AI, ऑनलाइन हेल्थकेयर, पढ़ाई और रियल-टाइम डिजिटल सेवाओं में भी इसकी जरूरी भूमिका हो सकती है.
इसी दिशा में Reliance Jio ने भारत में 6G को लेकर अपनी योजनाएं सामने रखी हैं. इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 में कंपनी ने कहा कि वैश्विक मानक तय होने के बाद भारत उन शुरुआती देशों में शामिल हो सकता है, जहां कमर्शियल 6G सेवाएं शुरू होंगी. कंपनी ने अपने नए नेटवर्क से जुड़ी तकनीक का प्रदर्शन भी किया है.&amp;nbsp;
6G में 5G से कितनी ज्यादा क्षमता मिलेगी?
Jio के मुताबिक, 6G नेटवर्क मौजूदा 5G नेटवर्क के मुकाबले पांच गुना तक ज्यादा क्षमता दे सकते हैं. कंपनी का यह भी दावा है कि इसमें नेटवर्क लेटेंसी करीब 10 गुना तक कम हो सकती है. कम लेटेंसी का मतलब है कि किसी कमांड या रिक्वेस्ट पर नेटवर्क तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेगा.&amp;nbsp;
इस तरह की कनेक्टिविटी से AI सेवाओं को रियल टाइम में काम करने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, होलोग्राफिक वीडियो, हेल्थकेयर, शिक्षा और दूसरी डिजिटल सेवाओं के लिए भी ज्यादा बैंडविड्थ उपलब्ध हो सकती है, हालांकि 6G की कमर्शियल शुरुआत के लिए वैश्विक मानकों का अंतिम रूप से तय होना जरूरी है, जिसे 2030 के आसपास का लक्ष्य बताया गया है.&amp;nbsp;
Jio ने दिखाई Giga MIMO Radio तकनीक
IMC 2026 में Jio ने अपना Giga MIMO Radio पेश किया. कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला Giga MIMO Radio है. इसके साथ एक ऐसी कॉमन बेसबैंड यूनिट भी दिखाई गई, जो 5G और 6G दोनों नेटवर्क को सपोर्ट कर सकती है. &amp;nbsp;Jio ने बताया कि उसने 8,000 से ज्यादा पेटेंट फाइल किए हैं, जिनमें सैकड़ों 6G से जुड़े हैं. कंपनी के मुताबिक, वैश्विक नेटवर्क मानकों को विकसित करने की प्रक्रिया में भी उसने 934 से ज्यादा योगदान दिए हैं.&amp;nbsp;
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किसानों, डॉक्टरों और छात्रों को कैसे मिलेगी मदद?
Jio का मानना है कि तेज कनेक्टिविटी और कम लेटेंसी से AI आधारित सेवाएं ज्यादा तेजी से जवाब दे सकेंगी. कंपनी ने किसानों, डॉक्टरों और छात्रों के लिए ऐसे संभावित इस्तेमाल भी दिखाए. इसके साथ वह AI-native और quantum-safe नेटवर्क पर काम कर रही है, जिनका उद्देश्य नेटवर्क की क्षमता और सुरक्षा को बेहतर बनाना है.&amp;nbsp;
सैटेलाइट कनेक्टिविटी की भी तैयारी
Jio ने IMC 2026 में Sovereign Satellite Connectivity योजना भी पेश की. इसके तहत कंपनी करीब 1,600 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट और देशभर में 23 ग्राउंड स्टेशन वाले नेटवर्क की योजना बना रही है. यह पहल कंपनी की अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी से जुड़ी तैयारियों का हिस्सा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>SIM स्वैप फ्रॉड से अलग है SIM लॉक, जानें यह फीचर क्यों है जरूरी</title>
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        <description><![CDATA[ SIM स्वैप फ्रॉड से अलग है SIM लॉक, जानें यह फीचर क्यों है जरूरी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>केबल लगाने से कहीं ज्यादा काम करता है Type&amp;C पोर्ट, जानें कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन में चार्जिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला छोटा-सा Type-C पोर्ट आपके कई काम आसान बना सकता है. आमतौर पर लोग इसमें केबल लगाकर फोन चार्ज करते हैं और काम पूरा होने पर उसे निकाल देते हैं, लेकिन इस पोर्ट का इस्तेमाल सिर्फ बैटरी चार्ज करने तक सीमित नहीं है. इसकी मदद से दूसरे डिवाइस को पावर देने, फाइल ट्रांसफर करने, कीबोर्ड-माउस चलाने और फोन की स्क्रीन को टीवी पर देखने जैसे काम भी किए जा सकते हैं. इनमें से कई सुविधाएं कुछ स्मार्टफोन में पहले से मौजूद होती हैं, लेकिन ज्यादातर यूजर्स इनके बारे में नहीं जानते हैं.&amp;nbsp;
फोन से दूसरे डिवाइस भी कर सकते हैं चार्ज
कुछ स्मार्टफोन में रिवर्स चार्जिंग का फीचर मिलता है. इसकी मदद से फोन दूसरे डिवाइस को भी पावर दे सकता है. Type-C से Type-C केबल लगाकर वायरलेस ईयरबड्स, फिटनेस बैंड या जरूरत पड़ने पर दूसरे फोन को चार्ज किया जा सकता है. यह फीचर इमरजेंसी में काम आ सकता है, खासकर जब आसपास चार्जिंग सॉकेट उपलब्ध न हो.&amp;nbsp;
बड़ी फाइलें ट्रांसफर करना होगा आसान
Quick Share जैसे वायरलेस ऑप्शनों से फाइल भेजना सुविधाजनक है, लेकिन बड़ी वीडियो फाइलें या फोल्डर ट्रांसफर करने में समय लग सकता है. ऐसे में अगर दोनों फोन डायरेक्ट केबल से डेटा ट्रांसफर करने का सपोर्ट करते हैं, तो Type-C केबल से फाइलें भेजी जा सकती हैं. इससे वायरलेस नेटवर्क पर निर्भर रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती है.&amp;nbsp;
फोन से चलाएं कीबोर्ड और माउस
Type-C पोर्ट की मदद से कुछ फोन में कीबोर्ड और माउस जैसे बाहरी डिवाइस जोड़े जा सकते हैं. इसके लिए जरूरत के हिसाब से USB अडैप्टर या वायरलेस डोंगल इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे लंबे ईमेल लिखना, डॉक्यूमेंट एडिट करना और मैसेज टाइप करना आसान हो सकता है, हालांकि इसकी सुविधा फोन के मॉडल पर निर्भर करती है.&amp;nbsp;
टीवी की बड़ी स्क्रीन पर देखें वीडियो
कुछ स्मार्टफोन Type-C पोर्ट के जरिए वीडियो आउटपुट सपोर्ट करते हैं. ऐसे फोन को सही HDMI-to-Type-C केबल से टीवी या मॉनिटर से जोड़ा जा सकता है. इससे फोन की स्क्रीन बड़ी डिस्प्ले पर दिखाई दे सकती है और डाउनलोड की गई फिल्में या वीडियो भी देखे जा सकते हैं. यह सुविधा हर फोन में उपलब्ध नहीं होती है.&amp;nbsp;
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वायर वाले ईयरफोन भी कर सकते हैं इस्तेमाल
फोन में 3.5mm हेडफोन जैक न होने पर भी वायर वाले ईयरफोन इस्तेमाल किए जा सकते हैं. &amp;nbsp;इसके लिए Type-C कनेक्टर वाले ईयरफोन या Type-C से 3.5mm का अडैप्टर काम आ सकता है. गेम खेलने वालों के लिए भी वायर वाले ईयरफोन यूजफुल हो सकते हैं. इनमें वायरलेस कनेक्शन से जुड़ी देरी या रुकावट की समस्या नहीं होती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बिना किसी सॉफ्टवेयर के लैपटॉप की ओवरहीटिंग कैसे घटाएं? जानें आसान तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ बिना किसी सॉफ्टवेयर के लैपटॉप की ओवरहीटिंग कैसे घटाएं? जानें आसान तरीके ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>किस तरह के ऐप्स ज्यादा डाउनलोड कर रहे लोग? चौंका देंगी ये डिटेल्स</title>
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        <description><![CDATA[ आज के दौर में स्मार्टफोन केवल एक साधारण फोन नहीं रह गया है, जिसका इस्तेमाल केवल कॉल या मैसेज तक ही सिमित हो. अब लोग मोबाइल ऐप्लिकेशन्स के जरिए रोज नई चीजे सीखते हैं. लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब मोबाइल ऐप डाउनलोड करने की लोगों की पसंद में नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं. अब लोगों का इंटरेस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), शॉर्ट वीडियो और ज्योतिष ऐप्स की ओर बढ़ रहा है.
सेंसर टावर की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2025 के दौरान जनरेटिव AI ऐप्स के डाउनलोड में सालाना आधार पर 205 परसेंट की बढ़ोतरी हुई. वहीं, पढ़ाई और नौकरी से जुड़े ऐप्स के डाउनलोड में 39 परसेंट की ग्रोथ हुई. ये आंकड़े बताते हैं कि लोग अब मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ समय बिताने के लिए नहीं, बल्कि अपने काम आसान बनाने के लिए भी कर रहे हैं.
AI ऐप्स की बढ़ती लोकप्रियता
AI ऐप्स आज लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं. इनकी मदद से लोग सवालों के जवाब जान सकते हैं, लेख लिख सकते हैं, पढ़ाई में मदद ले सकते हैं और कई तरह के काम कम समय में कर सकते हैं. चैटजीपीटी जैसे ऐप्स ने इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है. भारत में 2025 के दौरान जनरेटिव AI ऐप्स के डाउनलोड में 205 परसेंट की बढ़ोतरी दर्ज होना इस बात का सबसे बड़ा संकेत है.
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एंटरटेंमेंट ऐप्स भी आगे
वीडियो देखने और एंटरटेंमेंट करने वाले ऐप्स की लोकप्रियता भी कम नहीं हुई है. खासकर छोटे एपिसोड वाली कहानियों और शॉर्ट ड्रामा ऐप्स ने लोगों का ध्यान खींचा है. इन ऐप्स में छोटे एपिसोड के जरिए कहानी बताई जाती है, कम समय होने की वजह से लोगों को यह काफी पसंद आ रहे हैं. सेंसर टावर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2025 के दौरान मीडिया और एंटरटेंमेंट ऐप्स के डाउनलोड में 20 परसेंट की बढ़ोचरी हुई है.
सोशल मीडिया ऐप्स में गिरावट
इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया ऐप्स आज भी लोगों की डिजिटल जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. इनके जरिए लोग दोस्तों और परिवार से जुड़े रहते हैं और फोटो और वीडियो शेयर करते हैं. हालांकि 2025 के दौरान सोशल मीडिया ऐप्स के कुल डाउनलोड में 17 परसेंट की गिरावट देखने को मिली है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro के बाद Apple के ये प्रोडक्ट्स होंगे लाॅन्च, जानें तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro के बाद Apple के ये प्रोडक्ट्स होंगे लाॅन्च, जानें तारीख ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>OpenAI का गणित में तहलका, 700 सवाल सॉल्व करने के बाद भड़के मैथमैटीशियन</title>
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        <description><![CDATA[ Artifical Intelligence ने इस वक्त दुनिया भर में लोगों के कामों को बहुत आसान कर दिया है. लेकिन एक और जहां इससे लोगों के काम आसान हुए हैं. वहीं लोगों के लिए कुछ ऐसे खतरे भी पैदा हो गए है जो कि आगे चलकर बहुत मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. OpenAI ने हाल ही में एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिससे दुनियाभर के Mathematicians की नींद उड़ गई है.
OpenAI कंपनी के एक एडवांस्ड AI मॉडल ने अकेले दम पर Maths के 700 से ज्यादा मुश्किल सवाल और 377 क्रिटिकल समस्याओं को हल कर दिया है. जैसे ही यह खबर सामने आई दुनिया भर के Mathematicians में खलबली मच गई. इस खबर के बाद द एसोसिएशन फॉर ह्यूमन मैथमैटिक्स ने खुलकर OpenAI के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और वैज्ञानिकों और रिसर्चरों से इस कंपनी का बायकॉट करने की अपील तक कर डाली है. जान लीजिए पूरी खबर.
Mathematicians ने क्यों किया बायकॉट का ऐलान?
OpenAI के AI मॉडल के Maths के 700 से ज्यादा सवाल हल करने वाली खबर जब सोशल मीडिया पर आई तो Maths के हल्कों में इस खबर को बहुत अच्छे से नहीं लिया गया.&amp;nbsp;इस खुलासे के बाद Mathematicians में भारी गुस्सा देखा जा रहा है. इस मामले पर द एसोसिएशन फॉर ह्यूमन मैथमैटिक्स का कहना है कि किसी ने भी OpenAI से इस तरह के खतरनाक और बड़े पैमाने पर Research करने के लिए नहीं कहा था.&amp;nbsp;
आरोप लगाया जा रहा है कि कंपनी ने बिना किसी की अनुमति और मांग के चुपचाप Maths के ऐसे मुश्किल सवालों पर काम किया. जानकारों का मानना है कि AI मॉडल जब इस तरह के बड़े और अनसुलझे Maths रहस्यों को खुद ही सुलझाने लगेंगे तो इंसानी रिसर्च और स्कॉलरशिप की क्या अहमियत रह जाएगी. इसे रिसर्च की ट्रांसपेरेंसी के खिलाफ एक बड़ा खतरा माना जा रहा है.

ताकत का प्रदर्शन या वैज्ञानिक रिसर्च?
इस मामले में विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि OpenAI ने अचानक से 700 से ज्यादा फाइलें और डेटा रिपॉजिटरी एक साथ इंटरनेट पर जारी कर दी हैं. Mathematicians का कहना है कि यह किसी जेन्युइन एकेडमिक रिसर्च या स्कॉलरशिप का नमूना नहीं है. बल्कि टेक सेक्टर में अपनी धाक और पावर दिखाने का एक तरीका भर है.
पिछले महीने ही OpenAI ने दावा किया था कि उसके एक मॉडल ने Navier-Stokes Millennium Prize Problem जैसी दुनिया की सबसे कठिन और अनसुलझी Maths पहेली को सुलझा लिया है. जानकारों का मानना है कि कंपनियां वैज्ञानिक नियमों और नैतिकता को ताक पर रखकर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही हैं.
यह भी पढ़ें: चश्मे से ही हो जाएगी UPI पेमेंट, Jio लाया AI स्मार्टग्लास
क्या AI बना देगा रिसर्चरों को बेरोजगार?
आपको बता दें इस पूरे विवाद के पीछे एक और बड़ा डर सामने है. Maths के जानकारों का कहना है कि अगर AI सिस्टम खुद ही ऐसे कठिन तर्क और प्रूफ तैयार करने लगे जिन्हें इंसान समझ ही न पाए तो पूरी रिसर्च कम्युनिटी पर इसका बुरा असर पड़ेगा. इसके अलावा सबसे बड़ा खतरा यह है कि इस तरह के सुपर-पावरफुल AI मॉडल्स पर सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों का अधिकार रहेगा.
जिससे आम वैज्ञानिकों और रिसर्चरों के बीच एक असमानता पैदा हो जाएगी. फिलहाल OpenAI का दावा है कि उसने इस काम में सलाहकारों की मदद ली है. लेकिन Mathematicians का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है.

यह भी पढ़ें: CJP प्रोटेस्ट के बीच सोशल मीडिया पर सख्ती, सरकार ने जारी की एडवाइजरी ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>घर में गीजर चलाने के लिए कितने सोलर पैनल की जरूरत, जानें हिसाब&amp;किताब?</title>
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        <description><![CDATA[ सर्दियों में सुबह गर्म पानी मिल जाए तो दिन की शुरुआत आसान हो जाती है. लेकिन ठंड बढ़ने के साथ गीजर का इस्तेमाल भी बढ़ता है और इसका असर बिजली के बिल पर पड़ता है. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि अगर घर की छत पर सोलर पैनल लगवा लिए जाएं तो क्या गीजर भी आसानी से चल सकता है?
सोलर पैनल सिर्फ बिजली का बिल कम करने में ही नहीं, बल्कि घर के रोजमर्रा के बिजली खर्च को संभालने में भी मदद करते हैं. ऐसे में अगर आप केवल गीजर की वजह से सोलर पैनल लगवाने के बारे में सोच रहे हैं, तो भी यह आपके बिजली के बिल को कम करने में आपकी मदद करेगा.
&amp;nbsp;कितने सोलर पैनल से चलेगा गीजर?
आमतौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिक गीजर 1000 से 3000 वॉट या उससे अधिक क्षमता के होते हैं. अगर आपके घर में 2000 वॉट का गीजर है, तो उसे चलाने के लिए पर्याप्त क्षमता वाला सोलर सिस्टम चाहिए. आजकल बाजार में 550 वॉट के सोलर पैनल भी उपलब्ध हैं. ऐसे चार पैनल मिलकर करीब 2.2 किलोवॉट की कुल क्षमता देते हैं.
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एक सोलर पैनल की कीमत कितनी है?
भारत में 550 वॉट के सोलर पैनल की कीमत ब्रांड, तकनीक और मॉडल के अनुसार बदलती है. कुछ ऑनलाइन प्लेटफार्म पर यह 10,000 से 15,000 रुपये के आसपास उपलब्ध हैं. वहीं प्रीमियम मॉडल इससे महंगे हो सकते हैं. अगर गीजर के लिए चार पैनल लगाने की योजना है, तो केवल पैनलों पर ही मोटे तौर पर 40,000 से 60,000 रुपये तक का खर्च मानकर चल सकते हैं.
सोलर पैनल का वजन कितना होता है?
छत पर सोलर पैनल लगवाते समय लोग अक्सर उसकी कीमत और बिजली बनाने की क्षमता पर ध्यान देते हैं, लेकिन वजन को नजरअंदाज कर देते हैं. चार पैनलों का कुल वजन ही लगभग 100 से 112 किलोग्राम हो सकता है. इसके अलावा पैनल को सहारा देने वाला लोहे या एल्युमिनियम का स्ट्रक्चर भी वजन बढ़ाता है. इसलिए छत पर पैनल लगवाने से पहले उसकी मजबूती और स्ट्रक्चर की सुरक्षा की जांच करवाना बेहतर है.
दिन में चलेगा गीजर?
सही क्षमता और डिजाइन वाले सोलर सिस्टम से दिन में गीजर चलाया जा सकता है. लेकिन यह समझना भी बेहद जरूरी है कि सोलर पैनल की बिजली लगातार एक जैसी नहीं रहती. घने बादल और धूप कम होने पर बिजली का उत्पादन घट सकता है. वहीं रात में गीजर चलाने के लिए बैटरी या ग्रिड बिजली की जरूरत पड़ सकती है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>घर में सबसे ज्यादा बिजली कौन खर्च करता है? इन Appliances पर दें ध्यान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/घर-में-सबसे-ज्यादा-बिजली-कौन-खर्च-करता-है-इन-appliances-पर-दें-ध्यान</link>
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        <description><![CDATA[ गर्मी में AC चलाना हो, सर्दियों में गीजर से पानी गर्म करना हो या पूरे दिन फ्रिज में खाने-पीने का सामान सुरक्षित रखना हो, घर के कई काम बिजली पर निर्भर हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर का कौन-सा डिवाइस बिजली के बिल को सबसे ज्यादा बढ़ाता है.
कई बार कम समय चलने वाली मशीन भी ज्यादा बिजली खींचती है, जबकि कुछ डिवाइस लगातार चालू रहने के कारण महीने भर में काफी यूनिट खर्च कर देते हैं. ऐसे में इनकी बिजली खपत और यूज के तरीके को समझना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि घर में सबसे ज्यादा बिजली कौन-सा डिवाइस खर्च करता है.&amp;nbsp;
घर में सबसे ज्यादा बिजली कौन-सा डिवाइस खर्च करता है
गर्मियों में AC घर के सबसे ज्यादा बिजली खर्च करने वाले डिवाइस में शामिल है. एक सामान्य 1.5 टन, 3-स्टार AC करीब 1,500 से 2,000 वॉट बिजली ले सकता है. रोजाना 8 घंटे चलने पर महीने में लगभग 360 से 480 यूनिट तक खपत हो सकती है. 5-स्टार इन्वर्टर AC से बिजली की खपत 30 से 40 फीसदी तक कम हो सकती है. वहीं सर्दियों में पानी गर्म करने वाला गीजर सबसे ज्यादा बिजली की खपत बढ़ाता है. 2,000 से 3,000 वॉट का गीजर रोजाना करीब 2 घंटे चलने पर महीने में लगभग 120 से 180 यूनिट खर्च कर सकता है.&amp;nbsp;
फ्रिज और वॉशिंग मशीन की खपत पर भी दें ध्यान
1. रेफ्रिजरेटर - फ्रिज दिन-रात चलता रहता है. 250 लीटर का सामान्य 3-स्टार फ्रॉस्ट-फ्री फ्रिज प्रतिदिन करीब 1.5 से 2 यूनिट बिजली खर्च कर सकता है. महीने की खपत लगभग 45 से 90 यूनिट तक हो सकती है. वहीं 5-स्टार इन्वर्टर कंप्रेसर मॉडल बिजली बचाने में मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
2. वॉशिंग मशीन - मशीन की खपत उसके मॉडल और वॉश प्रोग्राम पर निर्भर करती है. इसकी क्षमता करीब 500 से 2,000 वॉट हो सकती है और महीने में लगभग 15 से 60 यूनिट खर्च हो सकती हैं. ठंडे पानी में कपड़े धोने और मशीन को पूरी क्षमता के साथ चलाने से बिजली बचाई जा सकती है.&amp;nbsp;
पंखे, कूलर और टीवी भी बढ़ाते हैं बिल
कूलर करीब 150 से 300 वॉट बिजली लेता है. रोजाना 10 घंटे चलने पर महीने में लगभग 45 से 90 यूनिट खपत हो सकती है. सामान्य पंखे 75 से 90 वॉट बिजली लेते हैं, जबकि BLDC पंखे करीब 28 से 35 वॉट पर चल सकते हैं. रोजाना 16 घंटे यूज करने पर एक पंखे की मासिक खपत लगभग 13 से 43 यूनिट हो सकती है. वहीं 43 इंच का LED टीवी करीब 80 से 120 वॉट बिजली खर्च कर सकता है. रोजाना 6 घंटे चलने पर महीने में लगभग 14 से 22 यूनिट खपत हो सकती है. बड़े टीवी ज्यादा बिजली ले सकते हैं.&amp;nbsp;
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किचन के डिवाइस की खपत कितनी है?
1. माइक्रोवेव - 800 से 1,200 वॉट का माइक्रोवेव रोजाना आधा घंटा चलाने पर महीने में करीब 12 से 18 यूनिट खर्च कर सकता है.&amp;nbsp;
2. डिशवॉशर - यह एक वॉश साइकल में लगभग 1,200 से 2,400 वॉट की बिजली क्षमता यूज कर सकता है. रोजाना एक साइकल चलाने पर मासिक खपत करीब 36 से 72 यूनिट हो सकती है.
3. इंडक्शन चूल्हा - 1,000 से 2,000 वॉट का इंडक्शन रोजाना 2 घंटे चलाने पर महीने में लगभग 60 से 120 यूनिट बिजली खर्च कर सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>घर, में, सबसे, ज्यादा, बिजली, कौन, खर्च, करता, है, इन, Appliances, पर, दें, ध्यान</media:keywords>
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        <title>फोन में हैं ये ऐप तो बिना इंटरनेट भी हो जाएगी चैटिंग, जानें यहां</title>
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        <description><![CDATA[ आज के वक्त में अगर हमारे फोन का Internet अचानक बंद हो जाए या Wi-Fi का नेटवर्क गायब हो जाए तो ऐसा लगता है जैसे दुनिया ही थम गई है. हम तुरंत परेशान हो जाते हैं कि अब किसी से बात कैसे होगी, मैसेज कैसे भेजा जाएगा या जरूरी काम कैसे निपटाए जाएंगे. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना किसी सिम कार्ड, मोबाइल नेटवर्क या फिर इंटरनेट के भी आपस में बातचीत करना मुमकिन हो सकता है? Technology की दुनिया में एक ऐसा बदलाव आ चुका है जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.&amp;nbsp;
Twitter यानी X के को-फाउंडर जैक डोर्सी ने पिछले साल एक ऐसा मैसेजिंग ऐप लॉन्च किया है. जो पूरी तरह से बिना Internet और बिना किसी सेंट्रलाइज्ड सर्वर के काम करता है. इस ऐप का नाम Bitchat है. इस App में Wi-Fi के बिना भी Phone पर Chatting की जा सकती है. यह तकनीक उन इलाकों के लिए काफी सही है जहां अक्सर Network की समस्या रहती है या फिर किसी इमरजेंसी के दौरान Internet सेवाएं ठप कर दी जाती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह App बिना इंटरनेट के कैसे चलता है.&amp;nbsp;
Bluetooth से चलता है यह Mesh Network
जब हम नॉर्मल Chatting Apps जैसे WhatsApp या Telegram की बात करते हैं. तो हमारे दिमाग में सबसे पहले Internet, Wi-Fi और तगड़े Servers का ख्याल आता है. लेकिन जैक डोर्सी का यह नया ऐप इन सभी नियमों को पूरी तरह से पलट देता है. यह App Bluetooth Low Energy यानी BLE Network पर काम करता है. जिसे Bluetooth Mesh Networking भी कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि अगर आपके आस-पास कोई दूसरा User भी इस App का इस्तेमाल कर रहा है.&amp;nbsp;
तो आपके फोन का Bluetooth सीधे उसके Phone से Connect हो जाता है. यह एक Local Cluster बना लेता है जिससे एक Device से दूसरे Device तक मैसेज आसानी से हॉप करते हुए आगे बढ़ जाते हैं. मान लीजिए कि आप किसी ऐसी जगह पर हैं जहां मोबाइल का नेटवर्क पूरी तरह से गायब है. लेकिन आपके आस-पास कुछ ही दूरी पर दूसरे लोग भी मौजूद हैं. तो आप ब्लूटूथ के जरिए बिना किसी रुकावट के एक-दूसरे से चैट कर सकते हैं.&amp;nbsp;

बिना ई-मेल फोन नंबर के Registration&amp;nbsp;
आज के समय में जब भी हम कोई नया App अपने Phone में Download करते हैं. तो सबसे पहले हमसे हमारा Phone Number, E-mail मांगा जाता है. कई बार तो Personal Data लीक होने का डर भी हमेशा हमारे मन में बना रहता है. लेकिन इस नए Messaging Platform की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अकाउंट बनाने का कोई लंबा-चौड़ा चक्कर ही नहीं है. आपको बिना किसी Registration के सीधा App ओपन करना होता है.&amp;nbsp;
एक Display Name सेट करना होता है और बस आप Chatting के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. न तो इसमें किसी SIM Card की जरूरत होती है और न ही किसी सेंट्रल सर्वर की जहां आपका Personal Data या Chat History Store की जाती है. आपके भेजे गए सारे मैसेज पूरी तरह से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं वह सिर्फ Sender और Receiver के डिवाइस में ही सेव रहते हैं.&amp;nbsp;
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Internet बंद होने पर आता है काम
कई बार ऐसे हालात बन जाते हैं जब सरकार या प्रशासन की तरफ से सुरक्षा कारणों से Internet सेवाएं बंद कर देनी पड़ती हैं. ऐसे वक्त में अपनों से संपर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसी ही परिस्थितियों और आपातकालीन समय के लिए यह Bluetooth Based Messaging App एक बेहतरीन ऑप्शन के रूप में सामने आया है.&amp;nbsp;
दुनिया भर में कई जगहों पर Protest या Internet Shutdown के दौरान लोगों ने इस तरह की Offline Technology का खुलकर इस्तेमाल करते हैं जिससे उनका आपस में Contact बना रहे. हालांकि भारत जैसे देशों में सुरक्षा और नियमों के चलते इस तरह के Apps को लेकर सरकार और Tech कंपनियों के बीच कई बार कड़े कदम भी उठाए गए हैं और इसे App Store से हटाया भी गया है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>CJP प्रोटेस्ट के बीच सोशल मीडिया पर सख्ती, सरकार ने जारी की एडवाइजरी</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में CJP से जुड़े प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बीच केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि प्रदर्शन से जुड़ी गैरकानूनी पोस्ट पर सरकारी एजेंसियों की शिकायत मिलने पर प्राथमिकता से कार्रवाई करें.
सरकार को चिंता है कि सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़ी झूठी, भ्रामक या बदली हुई तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं. कुछ पोस्ट को उनके असली संदर्भ से हटाकर भी दिखाया जा सकता है. ऐसी सामग्री से लोगों में भ्रम फैलने, शांति बिगड़ने और हिंसा भड़कने का खतरा हो सकता है. सरकार ने प्लेटफॉर्म से कहा है कि वे ऐसी पोस्ट पहचानें और शिकायत मिलने पर समय पर कदम उठाएं. जानिए, एडवाइजरी में और क्या कहा गया है.
सरकारी एजेंसियों की शिकायतों को दें प्राथमिकता
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों से कहा है कि वे अधिकृत सरकारी एजेंसियों से मिली शिकायतों को प्राथमिकता दें. इनमें कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियां भी शामिल हैं.&amp;nbsp;प्लेटफॉर्म को दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों से जुड़ी ऐसी सामग्री पर नजर रखनी होगी जो गैरकानूनी हो सकती है.
सरकारी एजेंसियों की शिकायत मिलने पर उन्हें पोस्ट की जांच करके जरूरी कार्रवाई करनी होगी. सरकार का कहना है कि गलत जानकारी तेजी से फैल सकती है और इससे लोगों में भ्रम पैदा हो सकता है. इसलिए कंपनियों को ऐसी शिकायतों पर देर किए बिना ध्यान देना चाहिए.

AI से बनी पोस्ट पर लगाना होगा लेबल
सरकार की ओर से जारी की गई एडवाइजरी में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाई गई तस्वीरों और वीडियो के बारे में भी बताया गया है. सोशल मीडिया कंपनियों से कहा गया है कि वे ऐसी सामग्री पर AI लेबल जरूर लगाएं खास तौर पर जब उसमें दिल्ली में मौजूदा प्रदर्शन या घटना की असली तस्वीर और वीडियो बताकर शेयर किया जा रहा हो.
आज के वक्त में AI टूल की मदद से तस्वीरें और वीडियो बनाना और पहले की बनी हुई वीडियोज में बदलाव करना काफी आसान काम है. इसलिए बिना AI लेबल के ऐसी पोस्ट देखने वालों को असली लग सकती हैं. इससे लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि वह जो देख रहे हैं वह घटना का असी वीडियो है या AI से तैयार की गई वीडियो है. लेबल देखकर यूजर को इसकी जानकारी मिल सकेगी. सरकार ने प्लेटफॉर्म से ऐसी पोस्ट की पहचान और लेबलिंग पर ध्यान देने को कहा है.

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एजेंसियों को समय पर देनी होगी जानकारी
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों से कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और दूसरी अधिकृत सरकारी निकायों के साथ समय पर सहयोग करने को कहा है. इसमें जरूरी जानकारी देना और कानून के तहत मांगी गई मदद उपलब्ध कराना शामिल है.&amp;nbsp;कंपनियों को यह काम लागू कानून और तय समय-सीमा के भीतर करना होगा. एडवाइजरी में सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत तय टाइम-लिमिट का भी जिक्र है.
यानी सीधे कहें तो Social Media कंपनियों को सरकारी एजेंसियों की ओर से मिली शिकायतों और अनुरोधों को तुरंत देखना होगा और जवाब देने में देरी नहीं करनी होगी. क्योंकि दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन से जुड़ी भ्रामक पोस्ट से शांति और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है. इसलिए सभी प्लेटफॉर्म्स से कहा गया है कि वह बताई गई सभी शिकायतों को चेक करें और जरूरत पड़ने पर समय पर कदम उठाएं.
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: एलन मस्क क्यों बोले&amp; क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? जियो&amp;एयरटेल का रोड़ा बना स्टालिंक!</title>
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        <description><![CDATA[ एलन मस्क ने 7 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि भारत में &#039;कुछ ओलिगार्क&#039; स्टारलिंक को रोक रहे हैं ताकि उनका &#039;मोनोपोलिस्टिक चोकहोल्ड&#039; बना रहे. अगले ही दिन उन्होंने सीधे मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए पूछा, &#039;क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?&#039;. सरकार ने इन आरोपों को &#039;बेबुनियाद&#039; बताया और कहा कि तीनों सैटकॉम कंपनियों यानी स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और वन वेब की सिक्योरिटी क्लीयरेंस गृह मंत्रालय के पास लंबित है, किसी एक कंपनी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा. इस बीच स्टारलिंक की VP लॉरेन ड्रायर ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में कहा, &#039;हम भारत की सेवा के लिए तैयार हैं, जैसे ही भारत तैयार होगा&#039;. तो फिर जंग किस बात की छिड़ी है...

तीनों को GMPCS लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन कोई भी अभी तक कमर्शियल सेवा शुरू नहीं कर पाया है.
जियो और एयरटेल अभी मोबाइल टावर और फाइबर से देश के 90% से ज्यादा हिस्से में 4G, 5G और ब्रॉडबैंड पहुंचा चुके हैं. स्टारलिंक का पूरा मॉडल अलग है. वह सैटेलाइट के जरिए उन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाएगा जहां फाइबर या मोबाइल टावर पहुंचाना मुश्किल या महंगा है.
दोनों तरफ दोस्ती भी है और जंग भी
जियो और एयरटेल दोनों ने स्टारलिंक के साथ MoU साइन किए हैं ताकि उसके इंटरनेट उपकरण अपने रिटेल स्टोर्स से बेच सकें. साथ ही, दोनों कंपनियां खुद भी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं. जियो ने 1,600 सैटेलाइट का अपना LEO कॉन्स्टेलेशन बनाने की घोषणा की है. यानी एक ही वक्त में साझेदारी और मुकाबला, दोनों चल रहे हैं.
स्टारलिंक कहां तक पहुंचा है?
स्टारलिंक ने भारत में 20 गेटवे साइट्स और सैकड़ों एंटेना लगा दिए हैं. कंपनी का दावा है कि उसने भारतीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पूरा ऑपरेशन डिजाइन किया है और भारतीय यूजर्स का डेटा भारत के अंदर ही रखेगी.
स्टारलिंक ने 2022 में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और जून 2025 में उसे DoT से लाइसेंस मिल गया. लेकिन अभी भी दो बड़ी अड़चनें बाकी हैं गृह मंत्रालय की सिक्योरिटी क्लीयरेंस और विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी.
भारत में स्टारलिंक की कीमत कितनी होगी?
स्टारलिंक ने अपनी वेबसाइट पर जो कीमत दिखाई थी, उसके मुताबिक महीने का प्लान 8,600 रुपए और हार्डवेयर किट 34,000 रुपए है. यह सामान्य मोबाइल इंटरनेट से 2 से 5 गुना महंगा है और हार्डवेयर लगभग 15 गुना महंगा. हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में 2,500 रुपए से 3,500 रुपए महीने की संभावित कीमत भी बताई जा रही है. सैटेलाइट इंटरनेट के लिए घर पर एक डिश/टर्मिनल लगाना जरूरी होगा.
सरकार का रुख क्या है?
संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा, &#039;DoT ने सभी सैटकॉम कंपनियों को लाइसेंस और प्रोविजनल स्पेक्ट्रम दे दिया है. अब मामला MHA के पास सिक्योरिटी क्लीयरेंस के लिए लंबित है. जैसे ही मंजूरी मिलेगी, सबको मिल जाएगी. इसका किसी एक कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है.&#039; सरकार का मुख्य डर यह है कि विदेशी सैटेलाइट ऑपरेटरों के जरिए भारतीय डेटा देश से बाहर न चला जाए.
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग सिर्फ कंपनियों के बीच नहीं, बल्कि सुरक्षा, संप्रभुता और बाजार नियंत्रण के बीच है. स्टारलिंक के पास तकनीक और ग्लोबल अनुभव है, जियो और एयरटेल के पास भारतीय बाजार की गहरी समझ और मौजूदा नेटवर्क है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>प्रदर्शन में कैसे काम करेंगे दिल्ली पुलिस के बॉडी वार्न कैमरे? जानें टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ उनके व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच राजधानी में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों की वर्दी पर लगा एक छोटा-सा डिवाइस चर्चा में आ गया है. पहली नजर में यह वॉकी-टॉकी जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसका काम बातचीत करने की जगह घटनाओं को रिकॉर्ड करना है.
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थलों और भारतीय निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर जाने वाली सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे जवानों को ये डिवाइस दिए हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर यह तकनीक कैसे काम करती है और भीड़ को कंट्रोल करने के दौरान इसकी क्या काम होगा. तो आइए जानते हैं कि प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस के बॉडी वार्न कैमरे कैसे काम करेंगे.&amp;nbsp;
क्या होते हैं बॉडी वॉर्न कैमरे?
वर्दी पर लगाए जाने वाले इन छोटे कैमरों को बॉडी वॉर्न कैमरा (Body-Worn Camera) कहा जाता है. इन्हें आमतौर पर पुलिसकर्मियों की छाती, कंधे या कॉलर के पास लगाया जाता है. साइज में छोटे होने के बाद भी ये कैमरे वीडियो के साथ ऑडियो भी रिकॉर्ड कर सकते हैं. इनके जरिए ड्यूटी के दौरान होने वाली घटनाओं, बातचीत और पुलिस की कार्रवाई का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है. इन कैमरों का इस्तेमाल खासतौर पर उन परिस्थितियों में किया जाता है, जहां पुलिस को बड़ी भीड़ संभालनी पड़ती है या किसी घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते हैं.&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस के बॉडी वार्न कैमरे कैसे काम करेंगे?
बॉडी वॉर्न कैमरों को पुलिसकर्मी जरूरत के मुताबिक मैन्युअल तरीके से चालू या बंद कर सकते हैं. कुछ मॉडल में ऐसी तकनीक भी होती है, जो खास एक्टिविटी के दौरान कैमरे को अपने आप चालू कर सकती है. इनमें हथियार निकालने, दौड़ने या अचानक झटका लगने जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं, हालांकि यह सुविधा कैमरे के मॉडल पर निर्भर करती है. इन डिवाइस में लगी बैटरी कई घंटों तक काम कर सकती है. वहीं रिकॉर्डिंग में मौजूद जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए डेटा एन्क्रिप्शन का यूज किया जाता है. इससे वीडियो रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - CJP प्रोटेस्ट के बीच सोशल मीडिया पर सख्ती, सरकार ने जारी की एडवाइजरी
बॉडी कैमरे जरूरी करने की मांग क्यों उठी?
प्रदर्शनों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी. इसमें मांग की गई कि भीड़ कंट्रोल, प्रदर्शन प्रबंधन और भीड़ को खत्म करने के लिए तैनात दिल्ली पुलिस साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के लिए बॉडी वॉर्न कैमरे जरूरी किए जाएं. याचिका में यह भी कहा गया कि कैमरों को ड्यूटी शुरू होने से लेकर खत्म होने तक लगातार चालू रखने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाई जाए, हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने कैमरों को जरूरी बनाने का निर्देश देने से इनकार कर दिया और इस फैसले को सरकार पर छोड़ दिया.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Snapdragon चिप और 8,400mAh बैटरी, iQOO 16 की भारत में एंट्री करीब?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन मार्केट में फ्लैगशिप फोन को लेकर मुकाबला लगातार बढ़ रहा है. कंपनियां अब बेहतर प्रोसेसर, हाई रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन और बड़ी बैटरी के साथ अपने नए डिवाइस पेश कर रही हैं. इसी बीच iQOO के अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन iQOO 16 को लेकर भारत में हलचल तेज हो गई है. फोन को चीन में पेश किया जा चुका है.
अब भारतीय बाजार में इसकी एंट्री के संकेत मिल रहे हैं, हालांकि कंपनी ने अभी तक भारत में लॉन्च की तारीख का खुलासा नहीं किया है. हाल ही में iQOO India के CEO निपुन मार्या की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस फोन की लॉन्चिंग को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी हैं. तो आइए जानते हैं कि क्या iQOO 16 की भारत में एंट्री करीब है.&amp;nbsp;
क्या iQOO 16 की भारत में एंट्री करीब है?
iQOO India के CEO निपुन मार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक टीजर शेयर किया है. इसमें कंपनी ने अपने अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन के लिए यूजर्स को इंतजार करने को कहा है. पोस्ट में फोन का नाम या उसके फीचर्स नहीं बताए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह iQOO 16 हो सकता है. कंपनी की ओर से आने वाले समय में इसकी लॉन्चिंग से जुड़ी और जानकारी सामने आ सकती है.&amp;nbsp;
iQOO 16 चीन में लॉन्च
iQOO 16 को पिछले महीने चीन में लॉन्च किया गया था. वहां इसके शुरुआती मॉडल की कीमत 5,999 चीनी युआन रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 86,000 रुपये होती है, हालांकि भारत में इसकी कीमत क्या होगी, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है. यह फोन पिछले साल आए iQOO 15 का अगला मॉडल है.&amp;nbsp;
iQOO 16 में मिलेगी 165Hz वाली 2K स्क्रीन
फोन में 6.85 इंच की 2K AMOLED डिस्प्ले दी गई है, जो 165Hz तक का रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है. इसमें Samsung की M16 ल्यूमिनसेंट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. चीन में पेश किए गए मॉडल में Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 5 चिपसेट दिया गया है. इसके साथ 16GB तक LPDDR5x Ultra RAM और 1TB तक UFS 4.1 स्टोरेज का ऑप्शन मिलता है. गेमिंग के लिए इसमें Q4 गेमिंग चिप दी गई है.&amp;nbsp;
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8400mAh बैटरी और तीन 50MP कैमरे
चीन वाले मॉडल में 8,400mAh की बैटरी दी गई है, जो 100W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 40W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करती है. फोटोग्राफी के लिए फोन के पिछले हिस्से में तीन कैमरे हैं. इनमें 50MP का मुख्य कैमरा, 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा और 50MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 32MP का फ्रंट कैमरा मिलता है, फिलहाल भारत में iQOO 16 की लॉन्च डेट, कीमत और यहां मिलने वाले वेरिएंट की जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>फ्रिज का यह छोटा&amp;सा फिल्टर क्यों है खास? जानें कब और कैसे करें साफ</title>
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        <description><![CDATA[ फ्रिज में रखी सब्जियां, फल और दूसरी खाने-पीने की चीजें कई बार अजीब बदबू देने लगती हैं. इसकी वजह सिर्फ खाने की चीजें नहीं, बल्कि फ्रिज के अंदर लगा एयर फिल्टर भी हो सकता है. फ्रिज में इस्तेमाल होने वाला यह छोटा-सा फिल्टर अंदर की बदबू को कम करने में मदद करता है, लेकिन लगातार इस्तेमाल के कारण इसकी क्षमता धीरे-धीरे घट सकती है.
ऐसे में फ्रिज के अंदर अलग-अलग चीजों की गंध आपस में मिल सकती है, जिससे खाने का टेस्ट और खुशबू प्रभावित हो सकती है. अच्छी बात यह है कि कुछ फ्रिज में इस फिल्टर को साफ किया जा सकता है, जबकि कुछ में इसे बदलना पड़ता है. तो आइए जानते हैं कि फ्रिज का यह छोटा-सा फिल्टर क्यों खास है. साथ ही इसे कब और कैसे साफ करें.&amp;nbsp;
फ्रिज का यह छोटा-सा फिल्टर क्यों खास है?
फ्रिज में लगा एयर फिल्टर अंदर की बदबू को कम करने में मदद करता है, लेकिन हर फ्रिज में निकालकर साफ किया जा सकने वाला एयर फिल्टर नहीं होता है. इसके लिए कंपनी की वेबसाइट &amp;nbsp;या फ्रिज के साथ मिले मैनुअल की मदद ली जा सकती है. फिल्टर की जगह भी ब्रांड और मॉडल के हिसाब से अलग होती है. LG के कई फ्रिज में यह अंदर की ऊपरी या बीच वाली जगह पर मिलता है. Whirlpool के मुताबिक, इसके फ्रिज में फिल्टर आमतौर पर ऊपर की तरफ होता है. Samsung के कुछ मॉडल में यह पीछे, जबकि कुछ में बीच में लगा होता है. वहीं Frigidaire के कई मॉडल में इसे खाने की चीजें रखने वाले हिस्से के पीछे लगाया जाता है.&amp;nbsp;
एयर फिल्टर को कब साफ करें?
Samsung के मुताबिक, उसके फिल्टर को हर 6 महीने से 1 साल के बीच साफ किया जा सकता है, जबकि कई दूसरे ब्रांड आमतौर पर हर 6 महीने में फिल्टर बदलने की सलाह देते हैं. अगर फ्रिज में तेज गंध वाली चीजें ज्यादा रखी जाती हैं या अंदर की बदबू कम नहीं हो रही है, तो फिल्टर की जांच करना जरूरी है. सही समय और तरीका जानने के लिए अपने फ्रिज के मैनुअल में दिए गए निर्देश जरूर देखें.&amp;nbsp;
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एयर फिल्टर को साफ करने का सही तरीका क्या है?
1. फिल्टर साफ करने से पहले कंपनी के निर्देश जरूर देखें. हर मॉडल का तरीका एक जैसा नहीं होता है.LG अपने कुछ एयर फिल्टर को पानी से साफ करने की सलाह नहीं देता है. वहीं Samsung अपने कुछ फिल्टर को चार घंटे तक हल्के गर्म पानी में भिगोने, फिर धोकर पूरी तरह सुखाने की सलाह देता है.&amp;nbsp;
2. LG के फिल्टर को सुखाने के लिए हेयर ड्रायर या धूप का इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी के निर्देशों के अनुसार, इसे करीब आठ घंटे तक धूप में रखा जा सकता है. Samsung तेज केमिकल वाले क्लीनर इस्तेमाल करने से भी मना करता है, इससे फिल्टर खराब हो सकता है.
3. साफ करने के बाद फिल्टर को सही तरीके से वापस लगाना जरूरी है. ठीक से फिट नहीं होने पर हवा बाहर निकल सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक Prompt और तैयार होगा Video Game, Google ने दिखाई नई टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ Google गेमिंग की दुनिया में AI को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है. अब गेम बनाने के लिए कोडिंग या लंबे समय तक डेवलपमेंट करने की जरूरत कम हो सकती है. कंपनी ने Unity के साथ मिलकर Playground नाम का नया प्लेटफॉर्म पेश किया है, जहां यूजर्स सिर्फ टेक्स्ट प्रॉम्प्ट देकर वीडियो गेम तैयार कर सकेंगे.
इस टेक्नोलॉजी का मकसद गेम क्रिएशन को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है, हालांकि फिलहाल इसका इस्तेमाल 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोग कर सकेंगे. तो आइए जानते हैं कि सिर्फ Prompt लिखकर कैसे गेम बना सकेंगे&amp;nbsp;
सिर्फ Prompt लिखकर कैसे गेम बना सकेंगे
Google का Playground यूजर्स को नेचुरल लैंग्वेज में दिए गए टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के जरिए गेम बनाने और उसमें बदलाव करने की सुविधा देगा. इसके लिए यूजर को कोडिंग की जानकारी होना जरूरी नहीं है. गेम का आइडिया बताने के लिए प्रॉम्प्ट लिखा जाएगा और प्लेटफॉर्म उसी आधार पर गेम तैयार करने में मदद करेगा. Playground में Google के AI मॉडल्स के साथ दूसरी एडवांस AI टेक्नोलॉजी और कंपनी की मौजूदा तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. तैयार किए गए गेम को Google Playground पर पब्लिश भी किया जा सकेगा, जहां दूसरे यूजर्स उन्हें डाउनलोड करके खेल पाएंगे.&amp;nbsp;
Unity Spark से गेमिंग का अगला लेवल
Playground में आगे Unity Spark को भी जोड़ा जाएगा. इसे 2026 के आखिर में प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है. Unity के मुताबिक, यह ज्यादा एडवांस गेम मैकेनिक्स और हाई-क्वालिटी 3D एक्सपीरियंस तैयार करने में मदद करेगा. Unity Spark में AI से कुछ एसेट्स तैयार किए जाएंगे, जबकि ज्यादातर इमेजरी और इफेक्ट्स Unity की मौजूदा लाइब्रेरी से लिए जाएंगे. कंपनी ने बताया है कि इन एसेट्स को बनाने वाले ह्यूमन आर्टिस्ट्स को क्रेडिट और भुगतान दिया जाएगा. Playground और Spark दोनों में इस्तेमाल के आधार पर फ्री और पेड टियर होंगे.&amp;nbsp;
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Google World Models पर आधारित Playground
Playground Google की World Models टेक्नोलॉजी पर कंपनी के बढ़ते फोकस का हिस्सा है. यह AI टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर वर्चुअल दुनिया तैयार कर सकता है और सिर्फ भाषा को समझने तक सीमित नहीं रहता है. Google ने पिछले साल अपना World Model Genie 3 लॉन्च किया था. जनवरी में कंपनी ने Genie की मदद से वर्चुअल वर्ल्ड और कैरेक्टर बनाने वाला एक प्रोटोटाइप भी पेश किया था.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung Week Sale में Galaxy Devices पर 60 पर्सेंट तक छूट, जानें ऑफर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Week Sale 2026 शुरू हो गई है और कंपनी ने अपने अलग-अलग प्रोडक्ट्स पर कई तरह के ऑफर्स पेश किए हैं. इस सेल में स्मार्टफोन से लेकर टैबलेट, लैपटॉप, टीवी, मॉनिटर और वियरेबल्स तक शामिल हैं. कुछ प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट 60 प्रतिशत तक पहुंच रहा है.
एक ही सेल में Samsung के अलग-अलग प्रोडक्ट खरीदने वालों के लिए ऑफर्स को कैटेगरी के हिसाब से रखा गया है. तो आइए जानते है कि Samsung Week Sale में Galaxy डिवाइसेज पर खास ऑफर्स कौन-से हैं.&amp;nbsp;
स्मार्टफोन पर मिल रहा है कितना फायदा?
Samsung Week 2026 में स्मार्टफोन पर अधिकतम 34 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है. कुछ फोन पर 10,000 रुपये तक का बैंक डिस्काउंट और मल्टी-बाय पर 9,500 रुपये तक का अतिरिक्त फायदा मिल सकता है. कंपनी 55 प्रतिशत तक का Assured Buyback और Samsung Care+ का ऑप्शन भी दे रही है. पहली खरीद पर 4,000 रुपये तक का फायदा मिल सकता है. इस ऑफर में Galaxy Z Fold 8 Ultra, Z Fold 8, Z Flip 8, S26 Ultra, S26, A57 5G, A37 5G, A56 5G, A36 5G, A27 5G, M17 5G और M17e 5G जैसे मॉडल शामिल हैं.&amp;nbsp;
Samsung Week Sale में खास ऑफर्स कौन-से हैं
टैबलेट, वियरेबल्स और एक्सेसरीज पर सेल का डिस्काउंट 60 प्रतिशत तक है. यहां कुछ प्रोडक्ट्स पर 6,500 रुपये तक का बैंक डिस्काउंट और पहली खरीद पर 2,000 रुपये तक का फायदा मिल सकता है. Galaxy Tab S12 Ultra, Tab S12+, Tab S11 सीरीज, Tab A11 सीरीज, Tab S10 Lite, Buds 4, Buds 4 Pro, Watch 8, Watch Ultra 2, Watch 9 सीरीज और Buds Core इस ऑफर का हिस्सा हैं.&amp;nbsp;
Laptop और TV पर भी बड़े ऑफर्स
लैपटॉप कैटेगरी में 31 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है. साथ ही 5,000 रुपये तक का बैंक डिस्काउंट और पहली खरीद पर 2,000 रुपये तक का फायदा मिल सकता है. Galaxy Book 6 Ultra, Book 6 Pro, Book 6, Book 5 360 और Book 5 इसमें शामिल हैं. टीवी पर 51 प्रतिशत तक की छूट है. कुछ मॉडल के साथ फ्री टीवी या साउंडबार मिल सकता है.&amp;nbsp;
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कहां से खरीद सकते हैं Samsung के प्रोडक्ट?
Samsung Week 2026 के ऑफर्स कंपनी की वेबसाइट, Samsung Shop App और Samsung Exclusive Stores पर उपलब्ध हैं, हालांकि किस प्रोडक्ट पर कौन-सा बैंक ऑफर, कैशबैक या अन्य फायदा मिलेगा, यह संबंधित कैटेगरी और प्रोडक्ट पर निर्भर करेगा.
बैंक कैशबैक और वारंटी का फायदा
Samsung Week में HDFC, ICICI, SBI समेत दूसरे बैंक कार्ड से 22.5 प्रतिशत तक का बैंक कैशबैक मिल सकता है. वहीं अलग-अलग कैटेगरी में इसकी अधिकतम सीमा अलग है. कुछ पैनल पर 25,000 रुपये, वीडियो डिस्प्ले प्रोडक्ट्स पर 20,000 रुपये, डिजिटल अप्लायंसेज पर 21,000 रुपये, रेफ्रिजरेटर पर 21,500 रुपये, वॉशिंग मशीन पर 9,000 रुपये, माइक्रोवेव पर 6,000 रुपये और एयर कंडीशनर पर 14,000 रुपये तक कैशबैक दिया जा रहा है. इसके अलावा यूजर्स को 2 प्रतिशत तक एक्सचेंज ऑफर, पहली खरीद के फायदे, डिस्काउंट और प्रोडक्ट्स पर EMI का ऑप्शन भी मिलेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone बार&amp;बार हो रहा है Hang? Apps से Storage तक समझें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार iPhone बिल्कुल ठीक चल रहा होता है और अचानक स्क्रीन पर आपकी उंगलियों का असर ही नहीं होता है. कोई ऐप खुला रह जाता है, फोन बंद नहीं होता या फिर कुछ समय के लिए पूरा सिस्टम जैसे रुक जाता है. इसकी वजह हमेशा कोई बड़ी खराबी हो, ऐसा जरूरी नहीं है.
कई बार फोन के बैकग्राउंड में चल रहे काम, पुराना ऐप, कम बैटरी या स्टोरेज का लगभग भर जाना भी इसकी वजह बन सकता है.ये समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं और कई दिनों तक फोन सामान्य चलने के बाद अचानक सामने आ सकती हैं. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि Apps से Storage तक iPhone के बार-बार Hang होने की वजह क्या है.&amp;nbsp;
iPhone Hang होने के पीछे क्या वजह हो सकती है?
जब iPhone के बैकग्राउंड में एक साथ बहुत सारे काम चल रहे हों, तो फोन पर दबाव बढ़ सकता है. कई ऐप एक साथ चलना या कोई सिस्टम टास्क बीच में अटक जाना भी फोन के जवाब देना बंद करने की वजह बन सकता है. कम बैटरी होने पर भी फोन की स्पीड प्रभावित हो सकती है और वह अटका हुआ महसूस हो सकता है.&amp;nbsp;
जब iPhone की स्टोरेज लगभग पूरी भर जाती है, तो सिस्टम के पास जरूरी काम करने, अपडेट इंस्टॉल करने और अस्थायी फाइलें सेव करने के लिए कम जगह बचती है. ऐसे में फोन के अचानक रुकने की समस्या दिखाई दे सकती है.&amp;nbsp;
इस वजह भी कर सकती है iPhone को Freeze
अगर आपका iPhone किसी खास ऐप को इस्तेमाल करते समय बार-बार Hang होता है, तो उस ऐप पर ध्यान देना चाहिए. किसी ऐप का मौजूदा iOS वर्जन के साथ पूरी तरह Compatible न होना या उसमें मौजूद Bug भी फोन के Freeze होने की वजह बन सकता है.
Games, Editing Apps और Social Media Apps ज्यादा मेमोरी की जरूरत पड़ने के कारण ऐसी स्थिति में खास तौर पर परेशानी पैदा कर सकते हैं. ऐसे ऐप को Update करना या जरूरत न होने पर Remove करना सही हो सकता है. यूज में नहीं आने वाले Apps को बंद रखना भी फोन के दोबारा Lock होने की संभावना कम कर सकता है.&amp;nbsp;
iPhone Freeze हो जाए तो ऐसे करें Force Restart
1. अगर स्क्रीन Touch का जवाब नहीं दे रही है और फोन सामान्य तरीके से बंद भी नहीं हो रहा, तो Force Restart किया जा सकता है. इससे आपका Data Delete नहीं होता है.
2. इसके लिए पहले Volume Up बटन दबाकर तुरंत छोड़ें.&amp;nbsp;
3. इसके बाद Volume Down बटन दबाकर तुरंत छोड़ें.&amp;nbsp;
4. अब Side Button को दबाकर रखें.&amp;nbsp;
5. स्क्रीन पर Apple Logo दिखाई देने पर Side Button छोड़ दें. इसके बाद iPhone को दोबारा शुरू होने में कुछ सेकंड लग सकते हैं. कई बार इसके बाद फोन सामान्य तरीके से काम करने लगता है.&amp;nbsp;
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iOS Update करना भी हो सकता है जरूरी
पुराना iOS भी फोन में Freeze और Crash जैसी दिक्कतों की वजह बन सकता है. Apple के Software Updates में नए फीचर्स के साथ ऐसे Bugs के फिक्स भी शामिल होते हैं जो फोन के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं, साथ ही अपडेट Apps की कंपेटिबिलिटी और बैटरी मैनेजमेंट में भी सुधार करते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>कंप्यूटर और दीवार के बीच का Gap क्यों है जरूरी? जानें सही दूरी</title>
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        <description><![CDATA[ कंप्यूटर और दीवार के बीच का Gap क्यों है जरूरी? जानें सही दूरी ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Lenovo ThinkBook 14x भारत में लॉन्च, Intel Ultra से बदला परफॉर्मेंस गेम</title>
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        <description><![CDATA[ Lenovo ने भारत में अपना नया ThinkBook 14x लॉन्च किया है. यह Copilot+ PC Intel Core Ultra Series 2 प्रोसेसर के साथ आता है. इसमें 14 इंच का 2.8K OLED डिस्प्ले दिया गया है. कंपनी ने इसमें 16GB RAM और 1TB तक स्टोरेज का ऑप्शन दिया है. लैपटॉप में 65Wh तक की बैटरी, बैकलिट कीबोर्ड और ग्लास टचपैड जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. तो आइए जानते हैं कि Lenovo ThinkBook 14x की कीमत क्या है.&amp;nbsp;
Lenovo ThinkBook 14x की कीमत क्या है?
भारत में Lenovo ThinkBook 14x की शुरुआती कीमत 1,08,990 रुपये है. इसे Lenovo India की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है. कंपनी यूजर्स को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टम कॉन्फिगरेशन चुनने का ऑप्शन भी दे रही है.&amp;nbsp;
2.8K OLED डिस्प्ले में 120Hz रिफ्रेश रेट
ThinkBook 14x में 14 इंच का 2.8K OLED डिस्प्ले मिलता है. इसका रिफ्रेश रेट 120Hz तक है और यह 100 प्रतिशत DCI-P3 कलर गैमट कवर करता है. स्क्रीन का आस्पेक्ट रेशियो 16:10 है. &amp;nbsp;इसमें Eyesafe Certification 2.0 भी दिया गया है, जो ब्लू लाइट से सुरक्षा के लिए है. डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 500 निट्स तक बताई गई है.&amp;nbsp;
Intel Core Ultra Series 2 से लैस
परफॉर्मेंस के लिए लैपटॉप में Intel Core Ultra Series 2 प्रोसेसर दिए गए हैं. इसमें Intel Core Ultra 5 226V, Intel Core Ultra 7 256V और Intel Core Ultra 7 256V के कॉन्फिगरेशन मिलते हैं. लैपटॉप Windows 11 Pro पर चलता है और इसमें 16GB RAM के साथ 1TB तक ऑनबोर्ड स्टोरेज दिया गया है.&amp;nbsp;
Wi-Fi 7 और कई कनेक्टिविटी ऑप्शन
Lenovo ThinkBook 14x में Wi-Fi 7 कनेक्टिविटी मिलती है. पोर्ट्स की बात करें तो इसमें दो USB Type-C, दो USB Type-A और एक फुल-साइज HDMI पोर्ट दिया गया है. इसमें अतिरिक्त स्टोरेज के लिए Dual SSD Slots भी मौजूद हैं. कीबोर्ड बैकलिट है और इसकी लाइट के लेवल को एडजस्ट किया जा सकता है. साथ ही ग्लास टचपैड दिया गया है.
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iPhone और Android से कनेक्ट होगा लैपटॉप
लैपटॉप में Lenovo Smart Connect फीचर दिया गया है. इसकी मदद से PC को Android डिवाइस और iPhone के साथ पेयर किया जा सकता है. ThinkBook 14x में MIL-STD-810H durability भी दी गई है.&amp;nbsp;
65Wh तक बैटरी और हल्का डिजाइन
ThinkBook 14x के Core Ultra 7 256V वाले टॉप मॉडल में 65Wh की बैटरी मिलती है, जबकि बाकी दोनों मॉडल 54.7Wh बैटरी के साथ आते हैं. लैपटॉप में एल्युमिनियम चेसिस दिया गया है.
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        <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>10 हजार तक के इन फोन में मिलेगी 5000mAh बैटरी! खरीदने से पहले देख लें लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपका बजट बहुत ज्यादा नहीं है और आप&amp;nbsp;कम बजट में फोन खरीद रहे हैं. लेकिन ऐसा फोन चाहते हैं जिसे बार-बार चार्ज न करना पड़े तो आजकल मार्केच में 10 हजार रुपये तक में ऐसे कई फोन मिल जाते हैं जिनमें 5000mAh या इससे बड़ी बैटरी दी गई है. बड़ी बैटरी का मतलब है कि फोन को बार-बार चार्ज करने की जरूरत कम होती है.&amp;nbsp;
इस लिस्ट में बात की जाए तो POCO, Lava, Infinix, realme और Samsung के फोन शामिल हैं. इनमें कुछ फोन बड़ी स्क्रीन देते हैं. तो कुछ में ज्यादा स्टोरेज मिलती है. कुछ मॉडल पुराने हैं इसलिए खरीदने से पहले उनका Android वर्जन और वारंटी जरूर चेक करें. चलिए आपको बताते हैं 10 हजार तक के वह फोन जिनमें मिलेगी 5000mAh बैटरी.&amp;nbsp;
POCO C71 और Lava Virat V1&amp;nbsp;
POCO C71 में 5200mAh की बैटरी दी गई है. इसके 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत करीब 9999 रुपये है. इसमें बड़ी स्क्रीन मिलती है जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz है. आसान भाषा में कहें तो स्क्रीन पर स्क्रॉल करते समय चीजें थोड़ी ज्यादा स्मूद दिख सकती हैं. फोन 15W चार्जिंग सपोर्ट करता है. यानी यह बहुत तेज चार्ज होने वाला फोन नहीं है और बैटरी भरने में कुछ समय लग सकता है. POCO C71 4G फोन है इसलिए 5G चाहिए तो फिर आपको दूसरा ऑप्शन देखना पड़ सकता है.
Lava Virat V1 भी 10 हजार रुपये के बजट में आता है. इसके 4GB रैम और 64GB स्टोरेज वाले वेरिएंट में 5000mAh बैटरी और 90Hz स्क्रीन मिलती है. POCO के मुकाबले इसमें स्टोरेज कम है. अगर फोन में कई ऐप, फोटो और वीडियो रखने हैं तो यह बात ध्यान में रखें. खरीदने से पहले देख लें अगर ज्यादा स्टोरेज और बड़ी बैटरी चाहिए तो POCO C71 सही है. वहीं कम कीमत में नार्मल यूज का फोन चाहिए तो Lava Virat V1 भी देख सकते हैं.&amp;nbsp;

Infinix Hot 30i और realme C61 भी देख सकते हैं
Infinix Hot 30i में 5,000mAh बैटरी, 6.6 इंच की स्क्रीन और 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा मिलता है. इसके 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत अलग-अलग ऑनलाइन लिस्टिंग में करीब 7000 से 9500 रुपये के बीच दिखी है. इस फोन में ज्यादा रैम और स्टोरेज मिलती है. लेकिन यह पुराना मॉडल है. इसलिए खरीदने से पहले देखें कि फोन में कौनसा Android वर्जन है और उसके लिए अपडेट मिल रहे हैं या नहीं.&amp;nbsp;
realme C61 में 5,000mAh बैटरी और 90Hz स्क्रीन दी गई है. इसकी कीमत करीब 7000 से 8200 रुपये के बीच दिखाई गई है. फोन में 32 मेगापिक्सल का रियर कैमरा मिलता है. इसकी कीमत रैम और स्टोरेज वाले वेरिएंट के हिसाब से बदल सकती है. इसलिए ऑर्डर करने से पहले यह देख लें कि चुने गए मॉडल में कितनी रैम और स्टोरेज मिल रही है.

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Samsung Galaxy M04 भी बढ़िया ऑप्शन
Samsung Galaxy M04 में 5,000mAh बैटरी दी गई है. इसके दाम करीब 7500 रुपये है. अगर आप Samsung का फोन चाहते हैं और आपका इस्तेमाल कॉल, मैसेज, वीडियो और इंटरनेट तक रहता है. तो इसे लिस्ट में रख सकते हैं. लेकिन यह पुराना मॉडल है. कभी-कभी पुराने फोन की कीमत कम दिखती है लेकिन नए मॉडल पर चल रहा ऑफर उससे बेहतर पड़ सकता है.
फोन की बैटरी कितनी देर चलेगी यह सिर्फ mAh पर निर्भर नहीं करता. स्क्रीन की ब्राइटनेस ज्यादा रखने लगातार वीडियो देखने या गेम खेलने पर बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है. नार्मल यूज में 5,000mAh बैटरी पूरे दिन चल सकती है. फोन लेते समय यह भी देख लें कि बॉक्स में चार्जर मिल रहा है या नहीं. अगर आपको फोन जल्दी चार्ज करना जरूरी है तो चार्जिंग सपोर्ट जरूर चेक करें. आपको बता दें POCO C71 में इस लिस्ट की सबसे बड़ी बैटरी और ज्यादा स्टोरेज मिलती है.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>होम थिएटर के लिए ये 5 ऑप्शंस बेस्ट, घर में ही आएगी सिनेमाहॉल वाली फीलिंग</title>
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        <description><![CDATA[ टीवी की स्क्रीन बड़ी हो लेकिन आवाज धीमी लगे तो मूवी देखने का मजा कम हो जाता है. ऐसे में होम थिएटर या साउंडबार आपके टीवी की आवाज को ज्यादा साफ और दमदार बना सकता है.&amp;nbsp;आजकल मार्केट में ऐसे शानदार होम थिएटर सिस्टम आ चुके हैं जो घर बैठे आपको थिएटर वाला फील दे देते हैं.&amp;nbsp;पहले के जमाने में होम थिएटर का मतलब बड़े-बड़े और भारी-भरकम स्पीकर्स हुआ करते थे. जिन्हें सेट करना काफी मुश्किल काम होता था.
लेकिन अब जमाना पूरी तरह बदल चुका है और कॉम्पैक्ट डिजाइन में ही ऐसा दमदार साउंड आउटपुट मिलने लगा है कि पूरा कमरा गूंज उठे. चाहे आप कोई एक्शन मूवी देख रहे हों या फिर घर पर पार्टी का प्लान हो यह स्पीकर्स एकदम बढ़िया ऑप्शन हैं. अगर आप भी अपने घर के माहौल को पूरी तरह बदलना चाहते हैं और सिनेमाहॉल जैसा एक्सपीरिएंश पाना चाहते हैं. तो नीचे बताए गए इन 5 बेहतरीन ऑप्शंस को एक बार जरूर चेक आउट करें.
Blaupunkt SBW Chicago&amp;nbsp;
Blaupunkt SBW Chicago HT5.1 कम कीमत में 5.1 चैनल सिस्टम देखने वालों के लिए एक ऑप्शन है. इसकी कीमत करीब 7999 रुपये है. इसमें साउंडबार, सबवूफर और पीछे रखने के लिए दो सैटेलाइट स्पीकर मिलते हैं. इसका कुल आउटपुट 350W है. पीछे वाले स्पीकर को बैठने की जगह के पीछे रखने पर फिल्म का साउंड ज्यादा चारों तरफ से महसूस हो सकता है. लेकिन इन्हें जोड़ने के लिए कमरे में तार रखने की जगह भी देखनी होगी. इसमें Bluetooth और कई तरह के वायर्ड कनेक्शन दिए गए हैं.&amp;nbsp;
boAt Aavante Bar 1700D
इसके अलावा boAt Aavante Bar 1700D की कीमत करीब 9999 रुपये है. यह 2.1 चैनल साउंडबार है. यानी इसमें एक साउंडबार और एक सबवूफर मिलता है. यह फोन से Bluetooth के जरिए भी जुड़ सकता है, इसलिए टीवी बंद होने पर गाने चलाने के काम भी आएगा. ध्यान रखें कि 2.1 सिस्टम में पीछे रखने वाले अलग स्पीकर नहीं होते. अगर आपको कम तारों वाला आसान सेटअप चाहिए तो यह ऑप्शन देखा जा सकता है. लेकिन अगर आपका फिल्म में पीछे से आती आवाज अच्छी लगती है तो 5.1 सिस्टम ज्यादा सही रहेगा.&amp;nbsp;

boAt Aavante Prime 5.1 5000D
boAt Aavante Prime 5.1 5000D करीब 11999 रुपये का है. इसमें 5.1 चैनल सेटअप, सबवूफर और दो पीछे के स्पीकर मिलते हैं. इसका आउटपुट 500W RMS है. इसमें HDMI eARC कनेक्शन भी है. अगर आपके टीवी में eARC पोर्ट है तो एक HDMI केबल से टीवी और साउंडबार जोड़ सकते हैं. फिल्म के अलावा Bluetooth से फोन पर गाने सुनने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
Zebronics Juke BAR 9510WS PRO&amp;nbsp;
Zebronics Juke BAR 9510WS PRO की कीमत करीब 12499 रुपये है. इसमें 5.1 चैनल साउंड और पीछे के वायरलेस स्पीकर दिए गए हैं. ऐसे स्पीकर लगाने में कमरे के आर-पार तार ले जाने की जरूरत कम हो सकती है. इसकी आउटपुट पावर 600W है लेकिन यह boAt के RMS आउटपुट से कंपेयर नहीं कर सकते.
क्योंकि दोनों सिस्टम में स्पीकर रखने की सुविधा अलग है boAt में eARC का फायदा है जबकि Zebronics में पीछे के स्पीकर वायरलेस हैं. अगर टीवी दीवार पर लगा है या कमरा किराये का है तो वायरलेस स्पीकर लगाना ज्यादा आसान पड़ सकता है.

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Sony HT-S20R 5.1
Sony HT-S20R इस लिस्ट का महंगा ऑप्शन है. इसकी कीमत करीब 17990 रुपये बताई गई है. इसमें 5.1 चैनल सेटअप, सबवूफर और दो पीछे के स्पीकर मिलते हैं. इसका कुल आउटपुट 400W है और यह Dolby Digital सपोर्ट करता है. टीवी से जोड़ने के लिए इसमें HDMI ARC दिया गया है. ध्यान रखें कि इसके पीछे के स्पीकर वायर्ड हैं. खरीदने से पहले यह तय कर लें कि उनके तार कमरे में कैसे पहुंचेंगे.&amp;nbsp;
सिस्टम चुनते समय पहले देखें कि आपके टीवी में HDMI ARC या eARC पोर्ट है या नहीं. अगर टीवी में यह पोर्ट नहीं है, तो Optical कनेक्शन की जरूरत पड़ सकती है. अपने कमरे में स्पीकर रखने की जगह भी नाप लें. छोटे कमरे में बहुत हाई और बड़े सिस्टम लेना जरूरी नहीं. जबकि बड़े कमरे में कमजोर साउंडबार की आवाज कम लग सकती है. इसलिए पहले पूरी तरह Rates और घर की जगह कंपेयर कर लें तब ही किसी ऑप्शन को चुनें.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Aadhaar के गलत इस्तेमाल की टेंशन खत्म, ऐप से ऐसे करें लॉक</title>
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        <description><![CDATA[ Aadhaar Card भारत में इस्तेमाल होने वाला सबसे Common दस्तावेज है. देश में हर छोट-बड़े सरकारी और प्राइवेट काम के लिए Aadhaar कितना जरूरी हो चुका है, यह बात किसी से छिपी नहीं है. Bank Account&amp;nbsp; खुलवाना हो, नया SIM लेना हो या किसी योजना का फायदा उठाना हो हर जगह इसकी जरूरत होती है. लेकिन जैसे-जैसे इसका दायरा बढ़ रहा है वैसे-वैसे लोगों के मन में Data चोरी और फर्जीवाड़े का डर भी सताने लगा है. हर किसी को इस बात की फिक्र होती है कि कहीं उसके नाम पर कोई गलत काम न हो जाए.
इसी टेंशन को पूरी तरह खत्म करने के लिए UIDAI ने एक नया Security Feature पेश किया है. इस नए Update की मदद से आप अपने Aadhaar Number को पूरी तरह लॉक कर सकते हैं. एक बार नंबर लॉक होने के बाद कोई भी इसका गलत फायदा नहीं उठा पाएगा. तो चलिए आपको बताते हैं कि यह नया Feature कैसे काम करता है और इसे कैसे किया जा सकता है इस्तेमाल.
क्या है यह नया Aadhaar Lock Feature?
आप में से कई लोग यह सोच रहे होंगे कि पहले से ही Biometric Lock का ऑप्शन मौजूद था. तो फिर इस नए Feature में ऐसा क्या खास है? आपको बता दें कि पहले वाले Feature से सिर्फ Fingerprint, Iris या OTP जैसी चीजें ही Control होती थीं, लेकिन आधार नंबर खुला रहता था.
अब इस नए अपडेट के आने से पूरा का पूरा Aadhaar Number ही Lock हो जाता है. अगर कोई इस Lock किए गए Number का इस्तेमाल करके कहीं Verification करने की कोशिश करेगा तो सिस्टम तुरंत Error दिखा देगा. खासकर उन लोगों के लिए जो इसका इस्तेमाल रोज नहीं करते और बुजुर्गों के लिए यह Feature एक Digital सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. इससे किसी भी तरह के Fraud या फर्जीवाड़े की गुंजाइश लगभग जीरो हो जाती है.

VID का कर सकेंगे इस्तेमाल
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि अगर हमने अपना Aadhaar Number पूरी तरह Lock कर दिया तो हमें कभी जरूरत पड़ने पर काम कैसे चलेगा? यहीं पर 16 Digits की Virtual ID यानी VID का असली काम आएगी.&amp;nbsp; जब आपका Aadhaar Number Lock होता है. तब आप इसी Virtual ID का इस्तेमाल करके अपने सारे जरूरी काम बिना किसी रुकावट के पूरे कर सकते हैं.
यह Virtual ID पूरी तरह से सेफ होती है और इसे कोई Track नहीं कर सकता. Aadhaar Lock करने से पहले आपके पास यह ID होना बहुत जरूरी है. अगर आपके पास यह नहीं है तो आप इसे आधिकारिक App या Portal के जरिए Generate कर सकते हैं. इस तरह आप अपने Main नंबर को महफूज रखकर बेफिक्र होकर अपने Digital काम निपटा सकते हैं.
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App से ऐसे Activate करें यह Feature
इस कमाल के Feature को चालू करना बहुत आसान है और इसके लिए आपको किसी आधार केंद्र के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में आधिकारिक mAadhaar ऐप ओपन करें और अपना पिन डालकर login कर लें. इसके बाद ऐप के होम पेज पर नीचे की तरफ दिए गए Security के ऑप्शन पर क्लिक करें.
वहाx आपको Virtual ID and Aadhaar Lock का ऑप्शन दिखाई देगा उस पर टैप करें. अब Aadhaar Lock को चुनें, जरूरी शर्तों वाले बॉक्स पर टिक करें और अपनी VID दर्ज करें. इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा और साथ ही Face Authentication यानी चेहरा स्कैन करके Verification पूरा करना होगा. इतना करते ही आपका Number पूरी तरह सुरक्षित तरीके से लॉक हो जाएगा.

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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>PM Modi के साथ IMC&amp;2026 का आगाज, दूसरे दिन 6G लॉन्च पर बड़ा फोकस</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम की अगली बड़ी तस्वीर इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में देखने को मिल रही है. नई दिल्ली के यशोभूमि में चल रहे IMC के 10वें संस्करण का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया. 7 से 10 अक्टूबर तक चल रहे इस आयोजन में 6G, AI, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, साइबर सिक्योरिटी और नई पीढ़ी के नेटवर्क से जुड़ी तकनीकों पर खास चर्चा हो रही है. इस बार आयोजन का फोकस सिर्फ नई टेक्नोलॉजी दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें बड़े स्तर पर इस्तेमाल में लाने पर भी जोर दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
6G पर रहेगी खास नजर
IMC 2026 के दूसरे दिन 6G सबसे बड़े चर्चा के विषयों में शामिल रहेगा. कार्यक्रम में 3rd International 6G Symposium भी आयोजित किया जा रहा है. इसमें 6G के लिए जरूरी इंटेलिजेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेक्ट्रम, नई पीढ़ी के नेटवर्क और ग्लोबल टेलीकॉम स्टैंडर्ड में भारत की भूमिका पर बातचीत होगी. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत 4G के दौर में पीछे था, 5G में दुनिया के साथ चल रहा है और 6G में आगे रहने का लक्ष्य रखता है. सरकार 6G इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग के लिए जरूरी इकोसिस्टम तैयार करने पर भी जोर दे रही है. इसमें AI और मशीन लर्निंग की भूमिका पर भी चर्चा होगी.&amp;nbsp;
मोबाइल अब सिर्फ चैट का जरिया नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन अब सिर्फ बातचीत करने का माध्यम नहीं रहा. डिजिटल कनेक्टिविटी ने सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान की है और लोगों के यात्रा साथ ही इंतजार का समय कम किया है. उन्होंने मोबाइल को सुशासन का टूल बताते हुए कहा कि Digital India ने मोबाइल को डिजिटल गवर्नेंस के केंद्र में रखा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का निर्माण करने तक सीमित नहीं रहना चाहता है, बल्कि देश में टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स की डिजाइनिंग पर भी आगे बढ़ रहा है. उन्होंने अगले दशक के लिए अभी से टेक्नोलॉजी रोडमैप तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया.&amp;nbsp;
AI के साथ Deepfake और Cyber Fraud पर भी फोकस
PM मोदी ने Deepfake और Cyber Fraud को बड़ी चुनौती बताते हुए डिजिटल सुरक्षा के लिए वैश्विक फ्रेमवर्क की जरूरत बताई. उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी तभी बड़े स्तर पर काम कर सकती है जब लोगों को अपने डेटा और पैसे की सुरक्षा पर भरोसा हो.&amp;nbsp;
मोबाइल बना Gaming Console और Content Studio
PM मोदी के मुताबिक सस्ता डेटा, तेज कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल ने भारत में Content Creation को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि देश में 50 करोड़ से ज्यादा लोग Gaming Ecosystem का हिस्सा हैं और Tier-II साथ ही Tier-III शहरों के युवा इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.&amp;nbsp;
भारत में 5G यूजर्स की संख्या 550 मिलियन
IMC 2026 में भारत के टेलीकॉम विस्तार से जुड़े कई आंकड़े भी सामने आए हैं. सिंधिया के मुताबिक भारत में 5G यूजर्स की संख्या 550 मिलियन तक पहुंच चुकी है और 2030 तक इसे 1 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य है. भारत का ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर बेस भी करीब 60 मिलियन से बढ़कर 1 बिलियन हो गया है. उन्होंने बताया कि देश में 1GB मोबाइल डेटा की कीमत करीब 8 रुपये है.&amp;nbsp;
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AI, सैटेलाइट और साइबर सिक्योरिटी एजेंडे&amp;nbsp;
IMC 2026 में AI-native टेलीकॉम नेटवर्क, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और साइबर सिक्योरिटी पर भी खास फोकस है. सैटेलाइट ट्रैक में Direct-to-Device कनेक्टिविटी, सैटेलाइट और टेरेस्ट्रियल नेटवर्क के एकीकरण और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल पर चर्चा हो रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने IMC से पहले GSMA बोर्ड मेंबर्स के साथ बैठक में साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए लगातार अलर्ट मैसेज भेजने और डीपफेक या AI कंटेंट के असली सोर्स की पहचान करने वाले सिस्टम पर जोर दिया था.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर के पुराने फोन को बना सकते हैं कार का डैशकैम, जानें तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/घर-के-पुराने-फोन-को-बना-सकते-हैं-कार-का-डैशकैम-जानें-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ घर के पुराने फोन को बना सकते हैं कार का डैशकैम, जानें तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>5G से जल्दी खत्म होती है बैटरी? बंद करने पर कितना फर्क पड़ेगा</title>
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        <description><![CDATA[ जब से देश में 5G नेटवर्क आया है तब से इंटरनेट चलाने का तरीका ही बदल गया है. अब बस कुछ ही मिनटों में बड़ी-बड़ी फाइलें डाउनलोड हो जाती हैं और वीडियो बिना किसी रुकावट के चलते हैं. लेकिन इस सुपरफास्ट स्पीड के साथ स्मार्टफोन यूजर्स के सामने एक बहुत बड़ी सिरदर्द भी आ गई है और वह है फोन की बैटरी का बहुत तेजी से खत्म होना. कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या हर समय फोन में 5G ऑन रखने से बैटरी ज्यादा ड्रेन होती है या फिर यह सिर्फ अफवाह है?&amp;nbsp;
टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे कुछ टेक्नीकल वजहें हैं. अगर आपके एरिया में नेटवर्क सही नहीं रहता है, तो फोन का प्रोसेसर और मॉडेम नेटवर्क तलाशने में बहुत ज्यादा ताकत लगाता है. जिससे बैटरी धड़ाम होने लगती है. चलिए आपको बताते हैं&amp;nbsp; कि 5G का बैटरी पर असल में कितना असर पड़ता है और इसे बंद करने से आपको बैटरी बैकअप में कितना फायदा मिल सकता है.
कम सिग्नल और नेटवर्क स्विचिंग से जाती है बैटरी
बहुत से लोगों को लगता है कि 5G टेक्नोलॉजी ही ऐसी है जो अपने आप बैटरी खा जाती है. लेकिन ऐसा नहीं है दरअसल जब आप ऐसी जगह पर होते हैं जहां 5G के सिग्नल अनस्टेबल होते हैं. ऐसे इलाकों में आपका स्मार्टफोन लगातार मजबूत नेटवर्क की तलाश में लगा रहता है और बार-बार 5G से 4G या इसके उलट स्विच होता रहता है. इस लगातार चलने प्रोसेस में फोन का इंटरनल मॉडेम और प्रोसेसर बहुत ज्यादा पावर खींचने लगता है.
&amp;nbsp;नतीजा यह होता है कि बिना फोन इस्तेमाल किए भी जेब में रखे-रखे ही बैटरी तेजी से घटने लगती है. हालांकि जिन जगहों पर 5G का कवरेज एकदम स्टेबल होता है, वहां बैटरी की खपत 4G के मुकाबले बहुत ज्यादा नहीं बढ़ती है. क्योंकि अब मार्डन प्रोसेसर काफी हद तक पावर को मैनेज करने लगे हैं.

5G बंद करने पर बैटरी बचत होती है?
अगर आपके मन में यह सवाल है कि क्या 5G बंद करके सीधे 4G पर आ जाने से बैटरी की कोई खास बचत होती है, तो जान लीजिए कि इसका सीधा फायदा आम तौर पर 5 से 15 प्रतिशत तक देखने को मिल सकता है. अगर आप लगातार वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग या हॉटस्पॉट का इस्तेमाल करते हैं. तो बैटरी थोड़ी ज्यादा देर चल सकती है.
आज के दौर में आने वाले आधुनिक स्मार्टफोन्स में भले ही पावर-एफिशिएंट चिपसेट दिए जाने लगे हैं, फिर भी खराब नेटवर्क वाले इलाकों में 5G ऑफ करना ही सही रहता है. अगर आप चाहें तो अपने फोन की नेटवर्क सेटिंग्स में जाकर ऑटोमैटिक या स्मार्ट 5G मोड ऑन कर सकते हैं. जिससे जब जरूरत हो तभी फोन 5G का इस्तेमाल करे और बाकी समय बैटरी बचाए.

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फोन की सेटिंग्स बदलकर बचा सकते हैं बैटरी?
अगर आप 5G की सुपरफास्ट स्पीड से समझौता नहीं करना चाहते और चाहते हैं कि बैटरी भी पूरा दिन आराम से चल जाए तो आपको कुछ छोटी लेकिन जरूरी सेटिंग्स बदल लेनी चाहिए. सबसे पहले अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर उन ऐप्स का बैकग्राउंड डेटा बंद कर दें जो चुपचाप पीछे इंटरनेट और बैटरी दोनों चूसते रहते हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया ऐप्स के लिए Battery Optimization और Restricted Mode सेलेक्ट करना भी बहुत फायदेमंद साबित होता है.&amp;nbsp;
अगर आपके घर या ऑफिस में Wi-Fi है तो मोबाइल डेटा की बजाय Wi-Fi का इस्तेमाल करना फोन के Processor पर लोड काफी हद तक कम कर देता है. इन आसान तरीकों को अपनाकर आप बिना किसी परेशानी के अपने फोन की बैटरी लाइफ को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Google आपकी पुरानी Activity खुद हटाएगा, Account में ऑन करें ये फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ Google पर हम क्या सर्च करते हैं, कौन-से ऐप्स इस्तेमाल करते हैं, YouTube पर क्या देखते हैं और लोकेशन से जुड़ी कौन-सी एक्टिविटी होती है, इन सबका रिकॉर्ड अकाउंट में सेव हो सकता है. समय के साथ यह हिस्ट्री काफी लंबी हो जाती है. ऐसे में हर बार पुरानी एक्टिविटी को खुद जाकर डिलीट करना थोड़ा मुश्किल काम हो सकता है. Google इसी के लिए Auto-delete का ऑप्शन देता है, जिसकी मदद से पुरानी एक्टिविटी को तय समय के बाद अपने आप हटाया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि Google आपकी पुरानी Activity खुद कैसे हटाएगा और Account में कौन-सा फीचर ऑन करें.&amp;nbsp;
Google आपकी पुरानी Activity खुद कैसे हटाएगा?
Google Account में Auto-delete एक ऐसा ऑप्शन है, जिससे यूजर अपनी पुरानी एक्टिविटी को अपने आप हटाने की सेटिंग कर सकता है. इसमें यह तय किया जा सकता है कि Google आपकी एक्टिविटी को कितने समय तक सेव रखे. उपलब्ध ऑप्शनों में 3 महीने, 18 महीने और 36 महीने की अवधि शामिल है. एक बार यह सेटिंग चुनने के बाद तय समय से पुरानी एक्टिविटी अपने आप डिलीट होती रहती है.&amp;nbsp;
Account में कौन-सा फीचर ऑन करें?
1. Google Account की सेटिंग में जाएं - इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपने Google Account में लॉग इन करें. इसके बाद अकाउंट की Settings में जाएं. यहीं से आपकी Google Activity से जुड़ी सेटिंग्स को मैनेज किया जा सकता है.&amp;nbsp;
2. Data &amp;amp; Privacy सेक्शन खोलें - Settings में जाने के बाद Data &amp;amp; Privacy सेक्शन चुनें. इस हिस्से में Google Account से जुड़ी हिस्ट्री और दूसरी डेटा सेटिंग्स को मैनेज करने के ऑप्शन मिलते हैं.&amp;nbsp;
3. अपनी Activity History चुनें - इसके बाद History Settings में जाएं. यहां आप उस एक्टिविटी को चुन सकते हैं, जिसे मैनेज करना चाहते हैं. इसमें Web &amp;amp; App Activity और YouTube History जैसी हिस्ट्री शामिल हैं.&amp;nbsp;
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4. Auto-delete का ऑप्शन चुनें - अब चुनी गई Activity History में Auto-delete का ऑप्शन मिलेगा. इसे ऑन करने के बाद आपको यह तय करना होगा कि पुरानी एक्टिविटी कितने समय बाद अपने आप डिलीट होनी चाहिए. यहां 3, 18 या 36 महीने की अवधि में से ऑप्शन चुना जा सकता है.&amp;nbsp;
Auto-delete ऑन करने से पहले रखें ध्यान
पुरानी एक्टिविटी हटाने से Google की हिस्ट्री पर आधारित कुछ पर्सनलाइज्ड सुझाव कम हो सकते हैं. अगर आप पर्सनलाइज्ड Recommendations चाहते हैं, तो Auto-delete के लिए ज्यादा समय वाला ऑप्शन चुन सकते हैं. इससे आपकी पुरानी Activity लंबे समय तक सेव रहेगी और तय अवधि पूरी होने के बाद ही अपने आप हटेगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Amazon Sale कल से शुरू, जानें किन प्रीमियम फोन्स पर मिलेगा बड़ा ऑफर?</title>
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        <description><![CDATA[ Amazon Great Indian Festival Sale &amp;nbsp;8 अक्टूबर यानी कल से शुरू होने वाली है और इस बार स्मार्टफोन सेगमेंट में कई बड़े ऑफर्स देखने को मिलेंगे. Samsung, Apple, Xiaomi, OnePlus और iQOO जैसे ब्रांड्स के फोन पर कीमत में कटौती के साथ बैंक ऑफर, कूपन, एक्सचेंज बेनिफिट और नो-कॉस्ट EMI का फायदा भी दिया जा रहा है. खास बात यह है कि कुछ प्रीमियम फोन अपनी लॉन्च कीमत के मुकाबले काफी कम दाम में मिल रहे हैं. ऐसे में अगर इस फेस्टिव सीजन में नया फोन लेने का प्लान है, तो इन डील्स पर नजर रखना फायदेमंद हो सकता है. तो आइए जानते हैं कि Amazon Sale में किन प्रीमियम फोन्स पर बड़ा ऑफर मिलेगा.&amp;nbsp;
Samsung Galaxy S25 Ultra पर बड़ा ऑफर
Samsung Galaxy S25 Ultra इस सेल के सबसे बड़े प्रीमियम ऑफर्स में शामिल है. फोन की प्रभावी कीमत 84,999 रुपये है, जिसमें कूपन ऑफर शामिल है. इसके अलावा 9 महीने तक नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन भी मिल रहा है. इसकी शुरुआती लॉन्च कीमत 1,29,999 रुपये थी. सेल में यह फोन अपनी लॉन्च कीमत से काफी कम दाम पर मिल रहा है.&amp;nbsp;
iPhone 16 भी हुआ सस्ता
Apple का iPhone 16 भी सेल में कम कीमत पर उपलब्ध है. Amazon पर इसकी कीमत 71,999 रुपये दिखाई जा रही है, जबकि इसकी लिस्टेड कीमत 89,900 रुपये है. इस कीमत में कूपन, बैंक डिस्काउंट या दूसरे उपलब्ध ऑफर्स का फायदा पहले से जोड़ा गया है.&amp;nbsp;
Xiaomi 17 पर भी बड़ी कटौती
Xiaomi 17 को Amazon Sale में 59,999 रुपये में लिस्ट किया गया है. इसकी लिस्टेड कीमत 1,19,999 रुपये है. डील में क्रेडिट कार्ड EMI बेनिफिट और 6 महीने तक नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन शामिल है.&amp;nbsp;
लिस्ट में OnePlus और iQOO के फोन भी शामिल
OnePlus Nord 6 की कीमत 42,999 रुपये है, जबकि पहले यह 52,999 रुपये में लिस्ट था. वहीं iQOO 15R की प्रभावी कीमत 46,499 रुपये है, जबकि इसकी लिस्टेड कीमत 69,999 रुपये थी. iQOO 15R पर कूपन और 3 महीने तक नो-कॉस्ट EMI का फायदा मिल सकता है.&amp;nbsp;
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कम बजट में भी कई ऑप्शन
iQOO Z11xa को 24,999 रुपये में लिस्ट किया गया है, जबकि इसकी कीमत 40,999 रुपये है. Redmi 15C 5G Prime भी 15,999 रुपये में उपलब्ध है, जिसकी लिस्टेड कीमत 29,999 रुपये है.&amp;nbsp;
एक्सचेंज और बैंक ऑफर से बचत
स्मार्टफोन पर एक्सचेंज के जरिए 70,000 रुपये तक की बचत का ऑप्शन दिया जा रहा है. इसके अलावा 7,500 रुपये तक के कूपन और 2,944 रुपये प्रति महीने से शुरू होने वाली नो-कॉस्ट EMI भी उपलब्ध है. SBI डेबिट या क्रेडिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड EMI से भुगतान करने पर 10 प्रतिशत इंस्टेंट डिस्काउंट का भी फायदा मिल सकता है, हालांकि फोन की लास्ट कीमत मॉडल, पेमेंट मेथड, एक्सचेंज किए जाने वाले डिवाइस और लागू ऑफर्स के आधार पर अलग हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब Chrome पर सिर्फ सर्च नहीं, Gemini खुद करेगा वेब पर काम ; जानें कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome में Gemini अब सिर्फ वेबपेज समझने या सवालों के जवाब देने का काम नहीं करेगा. Google ने भारत में Android यूजर्स के लिए Gemini in Chrome उपलब्ध कर दिया है और इसके साथ Auto Browse फीचर भी पेश किया है. यह फीचर AI को एक वेबसाइट से दूसरी वेबसाइट पर जाकर कई स्टेप वाले काम करने में सक्षम बनाता है. यूजर को हर काम खुद करने की जगह Gemini कुछ ऑनलाइन टास्क अपनी तरफ से पूरा कर सकता है. तो आइए जानते हैं कि Auto Browse कैसे खुद काम करेगा.&amp;nbsp;
Android पर भी आया Gemini in Chrome
Gemini in Chrome को भारत में पहले डेस्कटॉप यूजर्स के लिए पेश किया गया था, लेकिन अब Android पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी मदद से यूजर्स किसी वेबपेज के बारे में सवाल पूछ सकते हैं, लंबे आर्टिकल का सार जान सकते हैं और ब्राउजर छोड़े बिना Google Keep और Calendar जैसे ऐप्स के साथ Gemini को कनेक्ट कर सकते हैं. इसके अलावा फोन पर ब्राउजिंग के दौरान Gemini की इमेज जनरेशन क्षमता का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इसमें Nano Banana के जरिए इमेज बनाने या उनमें बदलाव करने का ऑप्शन शामिल है.&amp;nbsp;
Auto Browse कैसे खुद काम करेगा?
भारत में Auto Browse फीचर डेस्कटॉप और Android दोनों पर उपलब्ध है, हालांकि इसका इस्तेमाल फिलहाल Google AI Pro और AI Ultra सब्सक्राइबर्स कर सकते हैं. यह सामान्य Autofill से अलग है. Autofill जहां मुख्य रूप से फॉर्म में जानकारी भरने तक सीमित रहता है. वहीं Auto Browse कई स्टेप वाले ऑनलाइन काम संभाल सकता है.
Gemini अलग-अलग वेबसाइटों से जानकारी जुटा सकता है, फॉर्म भर सकता है और कुछ बार-बार किए जाने वाले ऑनलाइन काम पूरे कर सकता है. यह किसी इवेंट के लिए पार्किंग बुक करने, ग्रॉसरी ऑर्डर करने या अलग-अलग तारीखों पर होटल और फ्लाइट की कीमतें चेक करने जैसे काम कर सकता है.&amp;nbsp;
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शॉपिंग में भी कर सकता है कई काम
Auto Browse को कुछ ज्यादा मुश्किल कामों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. जैसे यूजर किसी तस्वीर के आधार पर प्रोडक्ट ढूंढने के लिए Gemini को कह सकता है. इसके बाद AI अलग-अलग कीमतों की तुलना करके सही सामान को कार्ट में जोड़ने और उपलब्ध डिस्काउंट लगाने में मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
यूजर की मंजूरी के बाद होंगे जरूरी काम
Auto Browse वेबसाइटों पर सीधे काम कर सकता है, इसलिए Google ने इसमें कुछ सुरक्षा फीचर्स भी जोड़े हैं. अगर किसी वेबपेज पर ऐसा गलत निर्देश मौजूद है, जो AI को अपने हिसाब से काम करने के लिए कंफ्यूज करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे पहचान सकता है. इसके अलावा पैसे खर्च करने, प्राइवेसी से जुड़े या किसी दूसरे जरूरी काम को पूरा करने से पहले Gemini यूजर से परमिशन मांग सकता है. इससे ऐसे कामों के दौरान यूजर का कंट्रोल बना रहता है.
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>PlayStation Portal में बड़ा अपग्रेड! नए मॉडल में मिल सकती है OLED स्क्रीन</title>
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        <description><![CDATA[ गेमिंग की दुनिया में Sony अपने PlayStation Portal को एक बड़े अपग्रेड के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी कर सकता है. कंपनी के इस गेम स्ट्रीमिंग डिवाइस के नए मॉडल से जुड़ी जानकारी सामने आई है, जिसमें OLED स्क्रीन मिलने की संभावना जताई जा रही है. खास बात यह है कि Sony कथित तौर पर एक नहीं, बल्कि दो नए PlayStation हार्डवेयर मॉडल पर काम कर रहा है. अगर OLED डिस्प्ले वाला Portal आता है, तो यह मौजूदा मॉडल के मुकाबले स्क्रीन एक्सपीरियंस में बड़ा बदलाव ला सकता है.&amp;nbsp;
दो नए मॉडल की जानकारी आई सामने
नए PlayStation हार्डवेयर से जुड़ी यह जानकारी X पर सामने आई है और यह Wi-Fi Alliance की फाइलिंग से मिली है. फाइलिंग में CFI-Y2000 और CFI-Y2105 मॉडल नंबर वाले दो डिवाइस दिखाई दिए हैं. मौजूदा PlayStation Portal के मॉडल नंबर CFI-Y100 सीरीज में आते हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि ये सिर्फ छोटे बदलाव वाले मॉडल नहीं, बल्कि नई जनरेशन के डिवाइस हो सकते हैं, हालांकि फाइलिंग में इन डिवाइसेज के पूरे स्पेसिफिकेशन नहीं दिए गए हैं और यह भी साफ तौर पर नहीं बताया गया है कि ये नए PlayStation Portal मॉडल ही हैं.&amp;nbsp;
Android 15 और Wi-Fi 5 का सपोर्ट
फाइलिंग के मुताबिक इन डिवाइसेज को Gaming Console कैटेगरी में Computer Entertainment System के तौर पर लिस्ट किया गया है. इनमें Android 15 ऑपरेटिंग सिस्टम और कनेक्टिविटी के लिए Dual-band Wi-Fi 5 दिया जा सकता है. डिवाइस में 3.5mm हेडफोन जैक और USB के जरिए चार्जिंग की सुविधा भी बताई गई है.&amp;nbsp;
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OLED स्क्रीन बन सकती है सबसे बड़ा बदलाव
नए Portal में OLED डिस्प्ले मिलने की चर्चा सबसे ज्यादा है. इससे स्क्रीन पर ब्लैक कलर ज्यादा गहरा और कॉन्ट्रास्ट बेहतर दिखाई दे सकता है. खासकर डार्क गेमिंग सीन में इसका फायदा देखने को मिल सकता है. एक रिपोर्ट में पहले दावा किया गया था कि Sony OLED स्क्रीन वाले PlayStation Portal पर काम कर रहा है और इसे 2026 के खत्म होने से पहले पेश किया जा सकता है. नई फाइलिंग इस टाइमलाइन से मिली हुई नजर आती है.&amp;nbsp;
क्या Vita की वापसी जैसा होगा नया Portal?
Sony ने 2011 में PSP के बाद PlayStation Vita लॉन्च किया था. इसमें पीछे की तरफ टच पैनल जैसे फीचर्स थे, लेकिन इसे उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली. इसके बाद कंपनी ने हैंडहेल्ड कंसोल मार्केट से दूरी बना ली. PlayStation Portal इससे अलग है. यह न तो पोर्टेबल PS5 है और न ही Vita का सीधा नया मॉडल है. इसमें PS5 से गेम स्ट्रीम किए जा सकते हैं और PlayStation Plus सब्सक्रिप्शन के जरिए क्लाउड गेमिंग भी की जा सकती है. अब OLED स्क्रीन वाला नया Portal Sony के पोर्टेबल गेमिंग डिवाइस को नया लुक और बेहतर स्क्रीन एक्सपीरियंस दे सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>भारतीय कंपनियों के लिए Cyber Risk अलर्ट, 96 पर्सेंट फर्म्स पर असर</title>
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        <description><![CDATA[ AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अटैक का खतरा भी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. Cisco की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले 12 महीनों के दौरान 96 फीसदी संगठनों को ऐसे साइबर इंसिडेंट का सामना करना पड़ा, जिसका उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ा. इनमें एक-तिहाई से ज्यादा मामलों में AI की मदद से किए गए अटैक शामिल थे. कंपनियों के लिए साइबर सिक्योरिटी अब सिर्फ टेक्नोलॉजी से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर बिजनेस ऑपरेशन पर भी पड़ रहा है.&amp;nbsp;
साइबर डिफेंस में टेक्नोलॉजी से ज्यादा बड़ी दिक्कत क्या?
Cisco की Relentless Defense Report में बताया गया है कि कंपनियों की साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने में सिर्फ टेक्नोलॉजी की कमी ही समस्या नहीं है. अप्रूवल में देरी, अलग-अलग जगह बंटा डेटा और आपस में ठीक से कनेक्ट न रहने वाली टीमें भी सिक्योरिटी मजबूत करने की राह में बड़ी रुकावट बन रही हैं. यह रिपोर्ट 30 बाजारों में 8,000 सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स के डबल-ब्लाइंड सर्वे पर आधारित है. इसमें भारत के 1,000 लोगों को भी शामिल किया गया था.&amp;nbsp;
भारत का सिक्योरिटी स्कोर 66 रहा
रिपोर्ट में कंपनियों को उनके सिक्योरिटी सिस्टम की कवरेज, साइबर खतरे पहचानने की स्पीड और उन्हें ठीक करने की क्षमता के आधार पर आंका गया. भारत का औसत स्कोर 100 में 66 रहा, जबकि ग्लोबल औसत 64 था, हालांकि भारत में सिर्फ 8 फीसदी संगठन ही सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कैटेगरी में पहुंचे. ग्लोबल स्तर पर भी यह आंकड़ा 8 फीसदी ही रहा. रिपोर्ट के मुताबिक, इन टॉप संगठनों में सिक्योरिटी कवरेज बेहतर होने के साथ खतरे पहचानने और उन पर तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता भी ज्यादा थी.&amp;nbsp;
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Security, IT और Networking टीमों के बीच गैप
भारत में सिर्फ 40 फीसदी लोगों ने कहा कि उनकी सिक्योरिटी, नेटवर्किंग और IT टीमें एक साथ काम करती हैं और उनके पास साझा टूल्स व विजिबिलिटी है. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में संगठनों में सिक्योरिटी से जुड़े काम अलग-अलग टीमों में बंटे हुए हैं. डेटा भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया. 44 फीसदी भारतीय संगठनों ने बताया कि वह असली साइबर खतरों से निपटने की जगह अलग-अलग सिस्टम से डेटा इकट्ठा करने और उसे जोड़ने में ज्यादा समय लगा रहे हैं. वहीं 43 फीसदी ने माना कि डेटा सिलोज तक पहुंच न होने के कारण जरूरी जानकारी सामने नहीं आ पाती है.&amp;nbsp;
क्या AI साइबर सिक्योरिटी को बना रहा है ज्यादा मजबूत?
भारत में 90 पर्सेंट से ज्यादा सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक AI से साइबर खतरे पहचानने और उन पर कार्रवाई की क्षमता कम से कम 25 पर्सेंट बेहतर हुई है. करीब 40 पर्सेंट कंपनियां AI एजेंट्स का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन डेटा लीक और सिस्टम सिक्योरिटी को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Netflix अकाउंट अचानक Hold पर, जानें किस वजह से रुक सकती है Streaming?</title>
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        <description><![CDATA[ Netflix अकाउंट अचानक Hold पर, जानें किस वजह से रुक सकती है Streaming? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>पुराने Phones पर WhatsApp लॉगिन हो सकता है बंद, यूजर्स जान लें क्या करें?</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है. जिसके बिना एक दिन भी बिताना किसी के लिए मुमकिन नहीं लगता है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक दोस्तों से चैट करना, वीडियो कॉल करना और जरूरी ऑफिस के डॉक्युमेंट्स भेजना सब कुछ इसी ऐप पर टिका रहता है. लेकिन अगर आप भी अभी तक कोई बहुत पुराना स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं. तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है.
कंपनी समय-समय पर अपने ऐप को और ज्यादा सेफ और फास्ट बनाने के लिए नए सॉफ्टवेयर अपडेट लाती रहती है. जिसकी वजह से पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले डिवाइस पीछे छूट जाते हैं. Meta ने कहा हैं कि आने वाले दिनों में कई पुराने Android और iPhone मॉडल पर WhatsApp का सपोर्ट हमेशा के लिए बंद किया जा रहा है. अगर आपके पास भी पुराना फोन है तो बिना देर किए जान लें कि आपको वक्त रहते क्या कदम उठाने चाहिए.
किन Phones में बंद हो सकता है WhatsApp?
WhatsApp हर साल की तरह इस बार भी उन पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम वाले फोन्स की लिस्ट तैयार कर रहा है जो अब लेटेस्ट सिक्योरिटी पैच को सपोर्ट नहीं कर पाते हैं. जब कोई फोन बहुत पुराना हो जाता है. तो उसमें नए एन्क्रिप्शन, प्राइवेसी फीचर्स और AI टूल्स को चलाना तकनीकी रूप से नामुमकिन हो जाता है. कंपनी का मकसद करोड़ों यूजर्स के पर्सनल डेटा और चैट को हैकर्स से बचाना होता है.&amp;nbsp;
जिसके लिए मजबूत सॉफ्टवेयर का होना बहुत जरूरी है. अगर आपका एंड्रॉइड फोन किसी पुराने वर्जन पर चल रहा है या फिर आपके पास एप्पल का कोई ऐसा iPhone है जो अब नए iOS अपडेट पाने के लायक नहीं बचा है. तो उस पर खतरा मंडरा रहा है. इन पुराने डिवाइस में एप का चलना बंद हो जाएगा और लॉगिन करने पर Error आने लगेगा. जिससे आप चाहकर भी अपने अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.

कैसे देखें फोन का Operating System Version?
यह पता लगाने के लिए कि आपका स्मार्टफोन इस नए बदलाव की चपेट में आने वाला है या नहीं, आपको सबसे पहले अपने फोन की सेटिंग्स में जाना होगा. Android यूजर्स अपनी सेटिंग्स में जाकर About Phone वाले ऑप्शन को खोलें और वहां Android Version चेक करें कि वह कंपनी के तय किए गए मिनिमम क्राइटेरिया से ऊपर है या नहीं. ठीक इसी तरह iPhone इस्तेमाल करने वाले लोग Settings के General सेक्शन में जाकर About और फिर Software पर क्लिक करके अपना iOS वर्जन आसानी से देख सकते हैं.&amp;nbsp;
अगर आपके फोन का सॉफ्टवेयर बहुत पुराना है और उस पर कोई नया अपडेट दिखाने का ऑप्शन नहीं आ रहा है तो समझ लीजिए कि आपका डिवाइस अब रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुका है. समय रहते अपनी Settings चेक कर लेने से आप अचानक आने वाली परेशानी से बच जाएंगे.&amp;nbsp;
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बचाव के लिए तुरंत क्या करें?
अगर Phone का Software Version चेक करने के बाद यह साफ हो जाता है कि आपका Phone भी पुराने वर्जन की लिस्ट में शामिल है. तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसे में सबसे पहले अपने मौजूदा WhatsApp चैट का Google या iCloud पर जाकर पूरा बैकअप ले लें जिससे आपके जरूरी फोटे, वीडियो और मैसेज डिलीट न हों. इसके बाद अगर आपके फोन में Software अपडेट करने का कोई ऑप्शन बचा है. तो उसे तुरंत डाउनलोड करके फोन को अपग्रेड कर लें.&amp;nbsp;
और अगर आपका डिवाइस इतना पुराना हो चुका है कि उस पर कोई नया अपडेट नहीं आ सकता है. तो आपके पास नया स्मार्टफोन खरीदने के अलावा कोई दूसरा ऑप्शन नहीं बचेगा. नया फोन लेते ही अपना पुराना नंबर उसमें डालें, WhatsApp इंस्टॉल करें और अपना Backup Restore कर लें. जिससे आपकी चैटिंग बिना किसी रुकावट के दोबारा से शुरू हो जाएगी.

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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अमेरिकी कंपनियां ला रहीं नए सोलर पैनल, बिजली भी ज्यादा और उम्र भी लंबी</title>
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        <description><![CDATA[ दुनिया भर में सभी लोगों के घरों में कई ऐसा उपकरण मौजूद होते हैं जो सिर्फ बिजली से चलते हैं. जिन घरों में बहुत ज्यादा बिजली इस्तेमाल की जाती है उन घरों का बिजली बिल काफी आता है. इसी परेशानी से बचने के लिए अब बहुत से घरों में सोलर पैनल इंस्टॉल करवाए जा रहे हैं. भारत में इसके लिए पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भी चलाई जा रही है. जिसमें सोलर पैनल इंस्टॉल करवाने पर सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है.&amp;nbsp;सोलर पैनल तकनीक में भी अब बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
पारंपरिक सिलिकॉन सोलर पैनल की जगह अब बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अमेरिकी टेक और एनर्जी कंपनियां मिलकर ऐसे एडवांस सोलर पैनल बाजार में उतार रही हैं. जो पारंपरिक पैनलों के मुकाबले काफी ज्यादा बिजली बनाते हैं और उनकी उम्र भी बहुत लंबी होती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;चलिए आपको बताते हैं कि इन नए सोलर पैनलों में ऐसा क्या खास है और यह कैसे पुराने मॉडल्स से बिल्कुल अलग साबित हो रहे हैं.
कैसे काम करेगी नई टैंडम सोलर टेक्नोलाॅजी?
इन नए और एडवांस्ड सोलर पैनलों के पीछे जो सबसे बड़ी तकनीक काम कर रही है. उसे पेरोव्हस्काइट-सिलिकॉन टैंडम तकनीक कहा जाता है. पारंपरिक सोलर पैनल में सिर्फ एक ही परत होती है. लेकिन इन नए टैंडम पैनलों में दो अलग-अलग लाइट-एब्जॉर्बिंग लेयर्स को आपस में जोड़ा जाता है. ऊपर वाली परत पेरोव्हस्काइट क्रिस्टल की होती है.
जो धूप के हाई-एनर्जी स्पेक्ट्रम को खींचती है जबकि नीचे पारंपरिक सिलिकॉन लेयर होती है जो बची हुई रोशनी को कैप्चर करती है. इस डबल परत की वजह से यह पैनल सूरज की किरणों का बहुत बड़ा हिस्सा बिजली में बदल देते हैं. जिससे इनकी एफिशिएंसी पुरानी तकनीक के मुकाबले 25 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ जाती है.

40 प्रतिशत तक ज्यादा बिजली पैदा करेंगे
इन नए अमेरिकी सोलर पैनलों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम जगह में भी बहुत ज्यादा पावर जनरेट करने की क्षमता रखते हैं. पारंपरिक पैनलों के मुकाबले यह उतनी ही जगह में लगभग 25 से 40 प्रतिशत तक ज्यादा बिजली पैदा कर देते हैं. जिससे कम पैनल्स में ही आपकी सारी जरूरतें पूरी हो जाती हैं. इसके अलावा पहले पेरोव्हस्काइट मटेरियल को लेकर यह चिंता जताई जाती थी कि नमी और गर्मी पाकर वह जल्दी खराब हो जाता है.
लेकिन अमेरिकी कंपनियों ने नई इंजीनियरिंग और प्रोटेक्शन कोटिंग के जरिए इस कमजोरी को पूरी तरह दूर कर लिया है. अब लेबोरेटरी और फील्ड टेस्ट में यह साबित हो चुका है कि यह नए टैंडम पैनल लंबी धूप, बारिश और खराब मौसम में भी बिना किसी दिक्कत के टिके रहते हैं और इनका सालाना डिग्रेडेशन एक प्रतिशत से भी कम होता है.

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कितने फायदेमंद यह नए सोल पैनल?
अगर बात लागत की जाए तो&amp;nbsp;शुरुआती दौर में इन मार्डन टैंडम सोलर पैनलों को बनाने की लागत पारंपरिक सिलिकॉन पैनलों के मुकाबले थोड़ी ज्यादा जरूर होती है. लेकिन इनका बड़ा फायदा यह है कि यह प्रोजेक्ट की कुल लागत को काफी हद तक कम कर देते हैं. बड़ी इमारतों पर जब कम पैनल लगाकर ही ज्यादा बिजली मिलने लगती है तो इंस्टॉलेशन, वायरिंग और जमीन का खर्च अपने आप बहुत घट जाता है.&amp;nbsp;
अमेरिका की कई बड़ी कंपनियां अब इसे कमर्शियल और यूटिलिटी स्केल पर बड़े पैमाने पर उतारने की तैयारी कर रही हैं, जिससे आने वाले कुछ सालों में यह तकनीक हर घर तक आसानी से पहुंच सकेगी. कुल मिलाकर देखा जाए तो यह नई जनरेशन के सोलर पैनल भविष्य में बिजली के बिल से पूरी तरह आजादी दिला सकता है और रिन्यूएबल एनर्जी को एक नए मुकाम पर ले जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram पर बढ़ रहे Fake Followers? ऐसे करें Account की सफाई</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram पर बढ़ रहे Fake Followers? ऐसे करें Account की सफाई ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Jio Fiber या Airtel Fiber कौनसा है एकदम वैल्यू फॉर मनी? ऐसे करें पता</title>
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        <description><![CDATA[ Jio Fiber या Airtel Fiber कौनसा है एकदम वैल्यू फॉर मनी? ऐसे करें पता ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>फोन के Speaker में जमी धूल ऐसे होगी साफ, Sound Quality भी रहेगी बेहतर</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन का धूल-मिट्टी और छोटे कणों के संपर्क में आना आम बात है. समय के साथ यही बारीक गंदगी फोन के Speaker के छोटे-छोटे कटआउट में जमा होने लगती है. शुरुआत में इसका ज्यादा पता नहीं चलता, लेकिन जब धूल काफी इकट्ठी हो जाती है तो आवाज धीमी, दबे हुए जैसी या साफ न सुनाई देने वाली हो सकती है.&amp;nbsp;
अगर आपके फोन के Speaker से भी पहले जैसी आवाज नहीं आ रही है, तो तुरंत Repair Centre जाने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान तरीकों की मदद से Speaker के आसपास जमा सूखी गंदगी और छोटे कणों को सावधानी से हटाया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि फोन के Speaker में जमी धूल कैसे साफ करें.&amp;nbsp;
Speaker साफ करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
फोन के Speaker की सफाई करते समय सबसे जरूरी है कि ज्यादा दबाव न डाला जाए. सफाई के लिए सॉफ्ट Cotton Swab, सामान्य Toothbrush या Bulb Blower जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर हल्के Solvent की जरूरत हो तो उसकी मात्रा बहुत कम रखनी चाहिए.&amp;nbsp;
Speaker के अंदर नमी या पानी जाने से बचाना भी जरूरी है. अगर गलती से नमी Speaker के हिस्से तक पहुंच जाए, तो उसे सोखने वाली चीज की मदद से बाहर निकालने की कोशिश की जा सकती है. इसके अलावा कुछ Apps ऐसी भी हैं जो खास Audio Frequencies चलाती हैं. इन ध्वनि तरंगों के कंपन से Speaker में मौजूद धूल या नमी की बूंदों को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है.&amp;nbsp;
फोन के Speaker में जमी धूल कैसे साफ करें?
1. सबसे पहले फोन के निचले हिस्से में Speaker की जगह पहचानें. इसके बाद किसी सूखे कपड़े या Cotton Swab से आसपास की सतह को हल्के हाथ से साफ करें. अब Swab को Speaker के छोटे Cutouts के ऊपर बहुत हल्के दबाव के साथ गोल-गोल घुमाएं. इससे जमी हुई गंदगी बाहर आने में मदद मिल सकती है.&amp;nbsp;
2. अगर Speaker के छेद थोड़े बड़े हैं, तो Cotton Swab की नोक को बहुत थोड़ा अंदर ले जाया जा सकता है, लेकिन इसे जबरदस्ती अंदर डालने या ज्यादा दबाने से बचें, इससे Speaker को नुकसान पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
3. बेहतर सफाई के लिए Swab की नोक पर बहुत थोड़ी मात्रा में Rubbing Alcohol लगाई जा सकती है. सफाई पूरी होने के बाद किसी Brush से Mesh पर बची गंदगी को धीरे से हटाएं और कपड़े से आसपास का हिस्सा साफ कर दें.&amp;nbsp;
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Bulb Blower से भी निकल सकती है जमा धूल
Speaker की Grill में जमा ढीले धूल-कणों को हटाने के लिए Bulb Blower भी इस्तेमाल किया जा सकता है. अब Bulb Blower से Speaker Grill पर हल्की हवा छोड़ें. इससे अंदर मौजूद ढीली धूल बाहर निकलने में मदद मिलेगी. इसके बाद Speaker Mesh को Brush से हल्के हाथ से साफ करें और कपड़े से बची हुई गंदगी हटा दें. यह तरीका खास तौर पर उन छोटे कणों को बाहर निकालने में मदद कर सकता है, जो पहले की सफाई के दौरान ढीले हुए हों.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Adobe Photoshop हुआ छात्रों के लिए फ्री, 1 साल तक मिलेगी प्रो एडिटिंग</title>
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        <description><![CDATA[ फेस्टिव सीजन में जहां ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग प्रोडक्ट्स पर ऑफर्स मिल रहे हैं, वहीं Adobe ने छात्रों के लिए Photoshop से जुड़ा एक खास ऑफर पेश किया है. इसके तहत योग्य छात्र भारत में Photoshop का एक साल का सब्सक्रिप्शन बिना किसी कीमत के ले सकते हैं, हालांकि यह ऑफर सभी यूजर्स के लिए नहीं है और इसके लिए कॉलेज से जुड़ी जानकारी देनी होगी. तो आइए जानते हैं कि एक साल का फ्री Photoshop कैसे मिलेगा.&amp;nbsp;
छात्रों को एक साल तक फ्री मिलेगा Photoshop
Adobe के इस ऑफर के तहत योग्य छात्रों को Photoshop का सालाना प्लान पहले साल बिना किसी फ्री के मिलेगा. आम तौर पर इस प्लान की कीमत 1,999 रुपये प्रति साल है, लेकिन ऑफर के तहत चेकआउट के समय छात्रों को 0 रुपये का भुगतान करना होगा. &amp;nbsp;योग्य छात्र एक साल तक Photoshop का इस्तेमाल बिना सब्सक्रिप्शन फीस दिए कर सकेंगे.&amp;nbsp;
फ्री प्लान के बाद देना होगा 1,999 रुपये
इस ऑफर में एक जरूरी शर्त भी है. 12 महीने पूरे होने के बाद Photoshop का प्लान अपने आप 1,999 रुपये सालाना की कीमत पर रिन्यू हो जाएगा, अगर इसे पहले रद्द नहीं किया गया, जो छात्र अगले साल पैसे देकर इसे जारी नहीं रखना चाहते, उन्हें फ्री अवधि खत्म होने से पहले रिन्यूअल बंद करना होगा. Adobe ने यह भी बताया है कि यह ऑफर बिना किसी सूचना के खत्म किया जा सकता है, इसलिए 0 रुपये वाला ऑप्शन दिखने पर छात्र इसे उपलब्ध रहने तक ले सकते हैं.&amp;nbsp;
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एक साल का फ्री Photoshop कैसे मिलेगा
एक साल का फ्री Photoshop पाने के लिए सबसे पहले Adobe की Photoshop छात्र ऑफर वाली वेबसाइट पर जाकर चेकआउट शुरू करना होगा. इसके बाद अपने Adobe अकाउंट से लॉगिन करें. अगर अकाउंट नहीं है, तो ईमेल आईडी की मदद से नया अकाउंट बनाया जा सकता है. चेकआउट के समय UPI को भुगतान के ऑप्शन के तौर पर चुनना होगा और मांगी गई कॉलेज की जानकारी दर्ज करनी होगी.&amp;nbsp;
UPI से पूरा करना होगा ऑटो पे
इसके बाद अपने UPI ऐप में जाकर AutoPay की अनुमति पूरी करनी होगी. चेकआउट में दी गई जानकारी के अनुसार, यह मैंडेट सेट करने के लिए करीब 2 रुपये का छोटा टोकन अमाउंट लिया जा सकता है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद Photoshop का सब्सक्रिप्शन अगले 12 महीनों के लिए एक्टिव हो जाएगा. इसके बाद डेस्कटॉप पर Adobe Creative Cloud ऐप के जरिए Photoshop डाउनलोड करके इस्तेमाल किया जा सकेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Google Pixel 10a हुआ महंगा, अब खरीदने के लिए देने होंगे 6,000 ज्यादा</title>
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        <description><![CDATA[ Google Pixel 10a खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो अब इसके लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. Google ने अपने इस किफायती Pixel फोन की कीमत भारत के साथ-साथ अमेरिका और कुछ दूसरे बाजारों में भी बढ़ा दी है. भारत में Pixel 10a की कीमत सीधे 6,000 रुपये बढ़ाई गई है. यह फोन इस साल की शुरुआत में Pixel 10 सीरीज में एंट्री लेवल मॉडल के तौर पर पेश किया गया था. अब कीमत बढ़ने के बाद यह फोन पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है. तो आइए जानते हैं कि भारत में Pixel 10a की नई कीमत क्या है.&amp;nbsp;
भारत में Pixel 10a की नई कीमत
Google Pixel 10a को भारत में फरवरी में 49,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. यह कीमत 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले एकमात्र वेरिएंट के लिए थी. अब कंपनी ने इसकी कीमत में 6,000 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है. इसके बाद Google India Store पर Pixel 10a की नई कीमत 55,999 रुपये हो गई है.
कीमत बढ़ने के बाद भी फोन खरीदने वालों के लिए कुछ बैंक ऑफर उपलब्ध हैं. योग्य क्रेडिट कार्ड से EMI पर भुगतान करने पर 3,000 रुपये तक का इंस्टेंट कैशबैक लिया जा सकता है. इसके अलावा नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन भी दिया गया है. फोन Berry, Fog, Lavender और Obsidian चार कलर ऑप्शन में आता है.&amp;nbsp;
अमेरिका में भी बढ़ी कीमत
Pixel 10a की कीमत में बढ़ोतरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका में भी इसके दाम बढ़ाए गए हैं. 128GB मॉडल की शुरुआती कीमत पहले 499 डॉलर थी, जो अब बढ़कर 599 डॉलर हो गई है. वहीं 256GB मॉडल की कीमत अब 699 डॉलर रखी गई है. नई कीमतें अमेरिका के रिटेलर्स पर भी दिखाई दे रही हैं.&amp;nbsp;
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Pixel 10a में मिलते हैं ये फीचर्स
Google Pixel 10a Android 16 पर चलता है और इसमें 6.3 इंच का Actua pOLED डिस्प्ले दिया गया है. स्क्रीन का रेजॉल्यूशन 1,080x2,424 पिक्सल है और यह 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है. डिस्प्ले पर Corning Gorilla Glass 7i की सुरक्षा मिलती है और इसकी पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक है. फोन में Tensor G4 चिपसेट के साथ Titan M2 सिक्योरिटी को-प्रोसेसर दिया गया है. इसमें 8GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलती है. फोन को IP68 रेटिंग भी मिली है, जिससे धूल और पानी से सुरक्षा मिलती है.&amp;nbsp;
कैमरा और बैटरी भी खास
फोटोग्राफी के लिए Pixel 10a में डुअल रियर कैमरा सेटअप है. इसमें 48MP का मेन कैमरा और 13MP का अल्ट्रावाइड कैमरा मिलता है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 13MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. फोन में 5,100mAh की बैटरी है, जो 30W वायर्ड और 10W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Facebook खोलते ही दिखेंगे फुल&amp;स्क्रीन वीडियो, Meta बदल रहा App का अंदाज</title>
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        <description><![CDATA[ Facebook खोलते ही सबसे पहले Feed देखने की आदत अब बदल सकती है. Meta अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक नए वीडियो-फर्स्ट एक्सपीरियंस की टेस्टिंग करने जा रहा है, जिसमें कुछ यूजर्स को ऐप खुलते ही सीधे फुल-स्क्रीन वीडियो दिखाई देंगे. कंपनी के मुताबिक, यह टेस्ट इस साल के आखिर में शुरू किया जाएगा, हालांकि यह बदलाव सभी यूजर्स के लिए नहीं होगा.
शुरुआत में सिर्फ कुछ यूजर्स को इस नए एक्सपीरियंस का हिस्सा बनाया जाएगा. कंपनी का कहना है कि लोग ज्यादा इमर्सिव और विजुअल कंटेंट देखना चाहते हैं. Facebook पर वीडियो अब सिर्फ देखने तक सीमित नहीं है. लोग इसके जरिए बातचीत हो रही है, कम्युनिटीज बन रही हैं और खरीदारी भी शुरू हो रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Facebook पर वीडियो एक्सपीरियंस कैसे बदलेगा.&amp;nbsp;
Facebook पर ऐसे बदलेगा वीडियो एक्सपीरियंस
Meta के Facebook प्रमुख Tom Allison ने बताया कि कंपनी ऐसे यूजर्स के लिए नया एक्सपीरियंस तैयार कर रही है, जो Facebook पर ज्यादा वीडियो देखना चाहते हैं. नए टेस्ट के तहत ऐप खोलते ही कुछ लोगों के सामने फुल-स्क्रीन वीडियो शुरू होगा, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पुराना Facebook Feed हटा दिया जाएगा. कंपनी का Classic Feed एक अलग सेकेंड टैब के तौर पर उपलब्ध रहेगा. टेस्ट में शामिल यूजर्स जरूरत के मुताबिक वीडियो एक्सपीरियंस और पुराने Feed के बीच जा सकेंगे.&amp;nbsp;
Marketplace के 10 साल पूरे होने पर बड़ा बदलाव
Facebook का यह वीडियो टेस्ट ऐसे समय में सामने आया है, जब Marketplace को शुरू हुए 10 साल पूरे हो रहे हैं. Tom Allison के मुताबिक, Marketplace की शुरुआत उस समय हुई थी, जब Facebook ने देखा कि लोग पहले से ही Groups के जरिए सामान खरीदने और बेचने का काम कर रहे थे. इसी के साथ कंपनी ने लगातार सामान बेचने वाले यूजर्स के लिए Seller नाम का एक नया ऐप भी टेस्ट करना शुरू किया है.&amp;nbsp;
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Sellers के लिए आया नया Seller ऐप
Seller ऐप को खास तौर पर उन लोगों के लिए तैयार किया जा रहा है, जो Marketplace पर अक्सर सामान बेचते हैं. इसमें बिक्री से जुड़े कई जरूरी टूल्स एक ही जगह मिलेंगे. इस ऐप में AI की मदद से लिस्टिंग तैयार करने की सुविधा, एक यूनिफाइड इनबॉक्स, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और परफॉर्मेंस से जुड़ी जानकारी शामिल है. Seller ऐप Facebook से जुड़ा रहेगा, इसलिए विक्रेता उसी नेटवर्क के जरिए खरीदारों और अपनी कम्युनिटीज तक पहुंच बनाए रख सकेंगे.कंपनी का कहना है कि इसका मकसद बड़ी संख्या में प्रोडक्ट लिस्ट करने वाले सेलर्स के लिए बिक्री की प्रक्रिया को आसान बनाना है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>AI खतरे पर अलर्ट, OpenAI से सॉफ्टबैंक तक उठी न्यूक्लियर लेवल सुरक्षा की मांग</title>
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        <description><![CDATA[ AI की दुनिया में हर नए मॉडल के साथ उसकी ताकत बढ़ रही है, लेकिन अब इसी बढ़ती क्षमता के साथ उसके संभावित खतरों को लेकर चिंता भी तेज हो रही है. OpenAI के AI Safety से जुड़े पूर्व कर्मचारी डेविड रॉबिन्सन ने कंपनी छोड़ने के बाद AI कंपनियों के सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए हैं.
वहीं SoftBank के CEO मासायोशी सोन ने भी बहुत पावरफुल AI मॉडल्स से पैदा होने वाले जोखिमों को लेकर देशों से मिलकर काम करने और इस तकनीक को कंट्रोल करने की जरूरत बताई है. तो आइए जानते हैं कि OpenAI से सॉफ्टबैंक तक एआई के क्या खतरे बताए हैं.&amp;nbsp;
OpenAI के पूर्व कर्मचारी ने क्यों जताई चिंता?
OpenAI की Safety Team में ट्रांसपेरेंसी से जुड़ा काम कर चुके डेविड रॉबिन्सन ने कंपनी के काम करने के तरीके पर अपनी चिंता जाहिर की. उनके मुताबिक OpenAI ने काफी हद तक Trial and Error के जरिए आगे बढ़ते हुए AI को विकसित किया है, लेकिन जैसे-जैसे AI मॉडल ज्यादा सक्षम हो रहे हैं, किसी गलती के परिणाम भी ज्यादा गंभीर हो सकते हैं.&amp;nbsp;
रॉबिन्सन ने यह भी बताया कि टेस्टिंग के दौरान AI के अपने तय व्यवहार से हटकर काम करने के मामले सामने आए हैं. उनका कहना है कि तेज लॉन्च के बीच कंपनियों को ऐसी सुरक्षा चाहिए, जिसमें पहली बार में ही ज्यादा सावधानी बरती जाए.&amp;nbsp;
AI से क्या-क्या खतरे बताए जा रहे हैं?
AI कंपनियों के कुछ कर्मचारियों ने हाल के समय में इसके बहुत गंभीर जोखिमों को लेकर चेतावनी दी है. चिंता छोट सिस्टम फेलियर की नहीं, बल्कि बहुत पावरफुल AI के गलत तरीके से इस्तेमाल या कंट्रोल से बाहर होने की स्थिति को लेकर भी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि फ्यूचर में यह तकनीक इंसानों के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकती है. इसी वजह से रॉबिन्सन ने AI कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था की तुलना न्यूक्लियर पावर प्लांट से करने की बात कही है. उनका कहना है कि AI सिस्टम में कई स्तर की सुरक्षा, अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था और पर्याप्त समय लेकर की जाने वाली टेस्टिंग होनी चाहिए, जिससे इंसानी गलती किसी बड़े हादसे का कारण न बने.&amp;nbsp;
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SoftBank CEO ने भी AI को लेकर दी चेतावनी
SoftBank के CEO मासायोशी सोन ने भी AI की तेजी से बढ़ती क्षमताओं को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है. क्योटो में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि AI की क्षमता तेजी से बढ़ रही है और देशों को इस तकनीक को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए आपस में भरोसा बनाकर काम करना होगा. सोन के मुताबिक, पावरफुल AI मॉडल अगर गलत हाथों में चले जाएं तो यह बहुत खतरनाक साबित हो सकते हैं. उन्होंने देशों के बीच सहयोग की जरूरत पर जोर दिया, जिससे AI से जुड़े बड़े जोखिमों को कंट्रोल किया जा सके.
वेबसाइट और कोड से रोबोट तक पहुंच रहा AI
सोन ने बताया कि आज AI सेवाएं वेबसाइट ब्राउज करने और कोड लिखने जैसे काम कर रही हैं. आने वाले चरण में यही तकनीक रोबोट और दूसरी मशीनों को असल दुनिया में काम करने में मदद कर सकती है. यही बढ़ती क्षमता AI की सुरक्षा को लेकर चिंता को और जरूरी बनाती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Earbuds खरीदने का सही समय! 5&amp;7 हजार के अंदर ये मॉडल हैं खास</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप नए TWS ईयरबड्स खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो Amazon और Flipkart की आने वाली सेल आपके लिए खास हो सकती है. इन दोनों ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग ब्रांड्स के ईयरबड्स पर ऑफर देखने को मिलेंगे. Amazon Great Indian Festival 2026 की शुरुआत 8 अक्टूबर से होगी, जबकि Flipkart Big Billion Days Sale 2026 सभी ग्राहकों के लिए 9 अक्टूबर से शुरू होगी. Flipkart पर ग्राहकों को एक दिन पहले से अर्ली एक्सेस भी मिलेगा.&amp;nbsp;
सेल से पहले ही 5 से 7 हजार रुपये से कम कीमत वाले कई मॉडल लिस्ट किए जा चुके हैं. इनमें OnePlus, Samsung, JBL, Nothing, Huawei और Sony जैसे ब्रांड्स के ईयरबड्स शामिल हैं. इनमें ANC, लंबी बैटरी, मल्टी-डिवाइस कनेक्टिविटी और लो-लेटेंसी गेमिंग जैसे फीचर्स मिलते हैं. तो आइए जानते हैं कि सेल में 5-7 हजार के अंदर कौन-से मॉडल खास हैं.&amp;nbsp;
सेल में 5-7 हजार के अंदर कौन-से मॉडल खास हैं
1. Samsung Galaxy Buds Core - Samsung Galaxy Buds Core में Dynamic Drivers के साथ ANC और कॉल नॉइज रिडक्शन मिलता है. इसमें हर ईयरबड पर तीन माइक्रोफोन और Galaxy AI Interpreter दिया गया है. केस के साथ ANC बंद होने पर कुल 35 घंटे तक प्लेबैक मिल सकता है. इसकी प्रभावी सेल कीमत 3,399 रुपये है,&amp;nbsp;
2. Huawei FreeBuds SE 4 - Huawei FreeBuds SE 4 में 10mm ड्राइवर्स, Multi-Mode ANC और कॉल नॉइज कैंसिलेशन दिया गया है. कंपनी के मुताबिक ANC बंद होने पर कुल बैटरी बैकअप 50 घंटे तक है. सेल में यह 5,499 रुपये में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
3. Nothing Ear A - Nothing Ear A में 11mm ड्राइवर्स और 45dB तक ANC मिलता है. यह Multipoint Connectivity और LDAC सपोर्ट करता है और केस के साथ कुल 42.5 घंटे तक प्लेबैक देता है. इसकी सेल कीमत 5,999 रुपये है.
4. OnePlus Buds 4 - OnePlus Buds 4 में 11mm वूफर और 6mm ट्वीटर के साथ डुअल DAC दिए गए हैं. इसमें 55dB तक Adaptive ANC, Transparency Mode और हर ईयरबड में तीन माइक्रोफोन मिलते हैं. Gaming Mode में लेटेंसी 47ms तक है और AI Translation का सपोर्ट भी मौजूद है. Bluetooth 5.4 और LHDC 5.0 के साथ इसकी कुल बैटरी लाइफ 45 घंटे तक बताई गई है. सेल में इसकी प्रभावी कीमत 5,999 रुपये है.&amp;nbsp;
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5. &amp;nbsp;Sony WF-C510 - Sony WF-C510 में 6mm ड्राइवर्स, Ambient Sound Mode और Voice Focus दिया गया है. Bluetooth 5.3 और Multipoint Connection के जरिए इसे दो डिवाइस से जोड़ा जा सकता है. केस के साथ कुल 22 घंटे तक प्लेबैक और 5 मिनट की चार्जिंग में 1 घंटे तक का प्लेबैक मिलने का दावा है. इसकी सेल कीमत 5,990 रुपये है.&amp;nbsp;
6. JBL Tune Beam 2 - JBL Tune Beam 2 में 10mm ड्राइवर्स, Adaptive ANC और TalkThru फीचर मिलता है. कॉल के लिए छह माइक्रोफोन दिए गए हैं. Bluetooth 5.3, Google Fast Pair और Multipoint कनेक्टिविटी भी मौजूद है. केस के साथ बैटरी 48 घंटे तक चल सकती है. सेल कीमत 4,999 रुपये है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Earbuds, खरीदने, का, सही, समय, 5-7, हजार, के, अंदर, ये, मॉडल, हैं, खास</media:keywords>
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        <title>Redmi 17C से OnePlus N6x तक, किस फोन में मिलती है बेहतर टेक्नोलॉजी?</title>
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        <description><![CDATA[ कम बजट वाले स्मार्टफोन खरीदते समय में अब लोग कीमत के साथ बड़ी स्क्रीन, 120Hz रिफ्रेश रेट, 5G सपोर्ट, बड़ी बैटरी और Android 16 जैसे फीचर्स पर भी ध्यान दे रहे हैं. इसी सेगमेंट में Redmi 17C, Poco M8x 5G और OnePlus N6x एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते हैं. इन तीनों फोन में 120Hz डिस्प्ले और IP64 रेटिंग मिलती है, लेकिन प्रोसेसर, कैमरा, बैटरी और चार्जिंग के मामले में इनके बीच काफी अंतर है. &amp;nbsp;
ऐसे में इन स्मार्टफोन्स को लेकर सवाल उठता है कि करीब एक ही बजट में कौन-सा फोन किस मामले में आगे निकलता है. तो आइए जानते हैं कि Redmi 17C से OnePlus N6x तक सबसे बेहतर टेक्नोलॉजी किस फोन में मिलती है.&amp;nbsp;
कीमत में कितना है अंतर?
Redmi 17C की शुरुआती कीमत 4GB RAM और 128GB स्टोरेज के लिए 20,999 रुपये है, जबकि 6GB+128GB मॉडल 22,999 रुपये में आता है. Poco M8x 5G की कीमत भी 4GB+128GB के लिए 20,999 रुपये और 6GB+128GB के लिए 22,999 रुपये है. वहीं OnePlus N6x सबसे कम कीमत में आता है. इसका 4GB+64GB वेरिएंट 18,999 रुपये और 4GB+128GB मॉडल 20,999 रुपये का है.&amp;nbsp;
तीनों में 120Hz डिस्प्ले
Redmi 17C और Poco M8x 5G में 6.9 इंच की HD+ LCD स्क्रीन दी गई है, जबकि OnePlus N6x में 6.8 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले मिलता है. इन तीनों फोन में 120Hz रिफ्रेश रेट है. Poco M8x 5G में Gorilla Glass 7i का प्रोटेक्शन भी मिलता है. सॉफ्टवेयर की बात करें तो Redmi और Poco में Android 16 पर आधारित HyperOS 3 है, जबकि OnePlus N6x OxygenOS 16 के साथ आता है.&amp;nbsp;
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सबसे बेहतर टेक्नोलॉजी किस फोन में मिलती है?
Redmi 17C में MediaTek Dimensity 6300 5G चिपसेट है. इसमें 6,000mAh बैटरी और 33W चार्जिंग मिलती है. Poco M8x 5G Snapdragon 4 Gen 5 प्रोसेसर के साथ आता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत 7,900mAh बैटरी है.यह 45W चार्जिंग सपोर्ट करता है. OnePlus N6x में MediaTek Dimensity 6360 Apex चिपसेट और 7,000mAh बैटरी दी गई है, लेकिन इसकी चार्जिंग स्पीड 15W तक सीमित है.&amp;nbsp;
कौन-से फोन का कैमरा है बेस्ट?
Redmi 17C में 50MP का रियर कैमरा और 8MP फ्रंट कैमरा है. Poco M8x 5G में भी 50MP का मेन कैमरा है, जिसके साथ 2MP सेंसर दिया गया है. OnePlus N6x में 13MP रियर और 5MP फ्रंट कैमरा मिलता है. ऐसे में कम कीमत के साथ OnePlus N6x अच्छा ऑप्शन है. वहीं Redmi 17C बैटरी, डिस्प्ले और कैमरे का बैलेंस देता है, जबकि Poco M8x 5G सबसे बड़ी बैटरी और 45W फास्ट चार्जिंग के साथ अलग ऑप्शन पेश करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिवाली पर फोन खरीदें कम दाम में, मिल सकती है 50% तक छूट</title>
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        <description><![CDATA[ दिवाली से पहले नया फोन लेने की सोच रहे हैं. तो कुछ दिन रुकना फायदेमंद हो सकता है. हर साल दिवाली के आसपास&amp;nbsp; सभी बड़े ब्रांड्स अपने ग्राहकों के लिए ऐसे-ऐसे धमाकेदार ऑफर्स लेकर आते हैं जिन्हें देखकर किसी का भी दिल ललचा जाए. इस बार स्मार्टफोन बनाने वाली दिग्गज कंपनी शाओमी (Xiaomi) ने अपनी बंपर दिवाली सेल का ऐलान कर दिया है. अगर आप भी इस फेस्टिव सीजन अपने पुराने फोन को बदलकर कोई नया बजट स्मार्टफोन घर लाने का मन बना रहे हैं.
तो यह बिल्कुल सही मौका है.&amp;nbsp;कंपनी इस बार चुनिंदा स्मार्टफोन्स और गैजेट्स पर आधे यानी पूरे 50 प्रतिशत तक की भारी-भरकम छूट दे रही है.&amp;nbsp; इतना ही नहीं इसके साथ ही कुछ खास मॉडल्स के साथ कमाल के फ्री गिफ्ट्स भी मिल रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं&amp;nbsp; कि इस दिवाली सेल में आपके लिए कौन-कौन सी शानदार डील्स इंतजार कर रही हैं और आप कैसे इसका पूरा फायदा उठा सकते हैं.&amp;nbsp;
इस फोन पर 50% तक छूट
Diwali with Xiaomi Sale 8 अक्टूबर से शुरू होगी. डील में शाओमी के किफायती स्मार्टफोन Redmi A7 Pro 5G पर इस समय गजब की डील मिल रही है. वैसे तो इस फोन की ओरिजिनल कीमत 14999 रुपये है. लेकिन फेस्टिव ऑफर्स और डील्स के चलते यह बजट में बहुत ही कम दाम में मिल रहा है. इस पर तकरीबन 50% की छूट मिल सकती है.
स्पेसिफिकेशंस की बात करें तो इसमें 6.9 इंच की बड़ी 120Hz डिस्प्ले, स्मूथ परफॉर्मेंस के लिए यूनिसोक T8300 प्रोसेसर और पावरफुल बैकअप के लिए 6300mAh की दमदार बैटरी दी गई है. इसके अलावा फोटोग्राफी के लिए 32MP का रियर कैमरा और आधुनिक फीचर्स मिलते हैं. जो इस कीमत में इसे पैसा वसूल बनाते हैं.

इन पर भी तगड़ी छूट
कंपनी के कई और स्मार्टफोन पर सीधे 15000 रुपये तक की बचत का मौका मिल सकता है. खरीदारी के लिए एक्सचेंज डील और नो-कॉस्ट EMI के ऑप्शन भी मिलेंगे.&amp;nbsp;सेल की बड़ी डील Xiaomi 17 Ultra पर है. इसे बैंक ऑफर और 10000 रुपये की एक्सट्रा बचत के बाद 129999 रुपये में खरीदा जा सकेगा. इस फोन के साथ 19999 रुपये की Photography Kit Pro भी फ्री मिलेगी. यह किट उन लोगों के काम आ सकती है जो फोन से फोटो और वीडियो ज्यादा लेते हैं. फ्लैगशिप फोन खरीदने का प्लान है तो सेल मिस न होने दें.
Redmi सीरीज के फोन भी होंगे सस्ते
Redmi Note 15 SE का 6GB रैम और 128GB स्टोरेज वाला बेस मॉडल ऑफर के बाद 22999 रुपये में मिलेगा. इसकी मौजूदा लिस्टेड कीमत 25999 रुपये बताई गई है. इसके 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत 24999 रुपये होगी. ज्यादा स्टोरेज चाहिए तो 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाला मॉडल 26999 रुपये में मिलेगा.&amp;nbsp;
Redmi Turbo 5 5G की कीमत बैंक छूट के बाद 37999 रुपये रह जाएगी. इसकी लिस्टेड कीमत 41999 रुपये है. Redmi Note 17 सीरीज में बेस Redmi Note 17 को 26000 रुपये से कम कीमत पर खरीदा जा सकेगा. Note 17 Pro की शुरुआती इफेक्टिव कीमत 33999 रुपये और Note 17 Pro Max की 44999 रुपये बताई गई है.&amp;nbsp;

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ऑफर का फायदा लेने से पहले यह बातें देखें
प्रीमियम फोन की तलाश कर रहे हैं. तो Xiaomi 17T भी सेल में 64999 रुपये में मिलेगा. वहीं Xiaomi 17 Ultra 129999 रुपये की ऑफर कीमत पर आएगा. दोनों की कीमत और फीचर अलग हैं. इसलिए सिर्फ छूट देखकर फोन न चुनें. पहले यह तय करें कि आपको कैमरा, स्टोरेज, परफॉर्मेंस या बैटरी में किस चीज की ज्यादा जरूरत है. फिर उसी हिसाब से मॉडल और वेरिएंट की तुलना करें.
बैंक डिस्काउंट पाने के लिए चुनिंदा कार्ड से पेमेंट करना पड़ सकता है. वहीं अगर आप पुराना फोन एक्सचेंज कर रहे हैं तो उस फोन की कीमत उसकी कंडीशन और मॉडल के हिसाब से तय होगी. सेल 8 अक्टूबर से शुरू होगी जैसे ही सेल लाइव हो बिना किसी देरी के अपने पसंदीदा स्मार्टफोन को कार्ट में ऐड कर लें और पेमेंट के लिए अपने बैंक ऑफर्स तैयार रखें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर के लिए खरीदने जा रहे हैं इलेक्ट्रिक चिमनी, इन बातों को रखें ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय किचन में खाना बनाते समय मसालों की खुशबू तो अच्छी लगती है, लेकिन तेल में फ्राई या ग्रिलिंग के दौरान निकलने वाला धुआं, भाप और चिकनाई परेशानी बढ़ा सकती है. खासकर ऐसे किचन में जहां वेंटिलेशन कम हो या खिड़की न हो, वहां धुआं और खाने की गंध लंबे समय तक बनी रह सकती है. ऐसे में इलेक्ट्रिक किचन चिमनी धुएं, गर्म हवा और गंध को बाहर निकालने में मदद करती है.
बाजार में अलग-अलग साइज, डिजाइन और फीचर्स वाली चिमनियां मौजूद हैं. इसलिए सिर्फ दिखने में अच्छी चिमनी खरीदना काफी नहीं है. सही मॉडल चुनने के लिए कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए. तो आइए जानते हैं कि घर के लिए इलेक्ट्रिक चिमनी खरीदने जा रहे हैं तो किन बातों को ध्यान रखें.&amp;nbsp;
इलेक्ट्रिक चिमनी खरीदने के लिए किन बातों को ध्यान रखें
1. चिमनी का साइज - चिमनी की चौड़ाई आपके स्टोव या हॉब से कम नहीं होनी चाहिए. आमतौर पर 60 से 90 सेंटीमीटर तक के साइज मिलते हैं. दो बर्नर वाले स्टोव के लिए 60 सेंटीमीटर की चिमनी सही हो सकती है.&amp;nbsp;
2. सक्शन पावर - चिमनी कितनी तेजी से धुआं और दूसरी चीजें बाहर खींच पाएगी, यह उसकी सक्शन पावर पर निर्भर करता है. आमतौर पर 450 से 950&amp;nbsp; प्रति घंटा की सक्शन क्षमता वाले मॉडल मिलते हैं. अगर खाना बनाते समय ज्यादा फ्राइंग या ग्रिलिंग होती है, तो अच्छी सक्शन पावर जरूरी हो जाती है.&amp;nbsp;
3. फिल्टर भी जरूरी - चिमनी में Mesh, Baffle और Charcoal या Carbon जैसे अलग-अलग फिल्टर मिलते हैं. Mesh फिल्टर तेल और कणों को रोकता है, जबकि Baffle फिल्टर धुएं और ग्रीस को पकड़ने के लिए इस्तेमाल होता है. Charcoal या Carbon फिल्टर खासतौर पर ductless चिमनी में गंध और धुएं को कम करने में मदद करता है.&amp;nbsp;
4. ऑटो क्लीन और आसान कंट्रोल - आज की चिमनियों में ऑटो क्लीन जैसे फीचर्स मिलते हैं, जिससे अंदर जमा तेल और गंदगी साफ करने में आसानी होती है. Touch, Push या Remote Control जैसे ऑप्शन भी उपलब्ध हैं. कुछ मॉडल मोबाइल ऐप के साथ-साथ Amazon Alexa और Google Home से भी कंट्रोल किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
5. शोर और डिजाइन - चिमनी खरीदते समय उसका Noise Level भी देखना चाहिए, ज्यादा आवाज किचन में परेशानी पैदा कर सकती है. इसके अलावा Stainless Steel, Glass और दूसरे डिजाइन उपलब्ध होते हैं, इसलिए ऐसा मॉडल चुना जा सकता है जो किचन के इंटीरियर के साथ अच्छा लगे.&amp;nbsp;
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Ducted या Ductless कौन-सी चिमनी चुनें?
Ducted और Ductless, इलेक्ट्रिक चिमनी के दो अलग-अलग सेटअप हैं. वहीं Convertible चिमनी में दोनों तरह के सेटअप का ऑप्शन मिल सकता है. Ducted चिमनी धुएं और गर्म हवा को पाइप के जरिए किचन से बाहर निकालती है, जबकि Ductless मॉडल हवा को फिल्टर करके वापस किचन में भेजता है. Convertible मॉडल दोनों तरीकों से काम कर सकते हैं. वहीं Filterless चिमनी कम मेंटेनेंस वाले ऑप्शन के तौर पर उपलब्ध हैं.
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Apple की भारत में बड़ी कार्रवाई, App Store से हटाया गया BitChat</title>
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        <description><![CDATA[ इंटरनेट के बिना भी लोगों को आपस में मैसेज भेजने की सुविधा देने वाला Jack Dorsey का मैसेजिंग ऐप BitChat एक बार फिर चर्चा में है. Apple ने इस ऐप को भारत के App Store से हटा दिया है. यह कदम भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के निर्देश के बाद उठाया गया है. BitChat को Twitter के को-फाउंडर Jack Dorsey ने पेश किया है और इसकी सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए आसपास मौजूद डिवाइस Bluetooth नेटवर्क की मदद से आपस में जुड़ सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि Apple ने BitChat को भारत के App Store से क्यों हटा दिया है.&amp;nbsp;
Apple ने BitChat को भारत के App Store से क्यों हटाया&amp;nbsp;
Jack Dorsey ने 3 अक्टूबर को X पर Apple की ओर से भेजे गए एक संदेश का स्क्रीनशॉट शेयर किया. इसमें Apple की App Review टीम ने बताया कि MeitY की मांग के बाद BitChat को भारत के App Store से हटाया जा रहा है. Apple के मुताबिक, सरकार ने ऐप में भारत में गैरकानूनी माने जाने वाले कंटेंट का हवाला देते हुए इसे देश में उपलब्ध न रखने का निर्देश दिया था. Apple ने यह भी साफ किया कि BitChat दूसरे देशों में उपलब्ध रहेगा. भारत में इसका TestFlight वर्जन भी अब इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. TestFlight का इस्तेमाल ऐप के बीटा वर्जन को टेस्ट करने के लिए किया जाता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;कैसे काम करता है BitChat?
BitChat बाकी सामान्य मैसेजिंग ऐप्स से काफी अलग तरीके से काम करता है. इसके लिए हर बार इंटरनेट कनेक्शन या किसी केंद्रीय सर्वर पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. ऐप Bluetooth आधारित mesh networking का इस्तेमाल करता है. इसके जरिए आसपास के डिवाइस सीधे एक-दूसरे से जुड़कर मैसेज आगे पहुंचा सकते हैं.&amp;nbsp;
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अक्टूबर में फिर सामने आया मामला
जुलाई में Jantar Mantar के पास इंटरनेट बंद होने के दौरान CJP के प्रदर्शनकारियों ने BitChat की मदद से आपस में संपर्क बनाए रखा था. इसी वजह से ऐप पहले भी सरकारी कार्रवाई के दायरे में आया था, लेकिन बाद में फिर उपलब्ध हो गया. अब 2 अक्टूबर को Jantar Mantar के आसपास 1.5 किलोमीटर के इलाके में 12 घंटे इंटरनेट बंद रहने और दिल्ली-मुंबई में CJP के प्रदर्शनों के बाद Apple ने BitChat को भारत के App Store से हटा दिया.&amp;nbsp;
BitChat को लेकर सरकार ने क्या चिंता जताई?
Apple के मुताबिक, MeitY ने IT Act की Section 69A के तहत BitChat को भारत के App Store से हटाने का निर्देश दिया था. सरकार को आशंका है कि ऐप की कुछ सुविधाओं का इस्तेमाल गुप्त तरीके से लोगों को जोड़ने, गैरकानूनी भीड़ जुटाने या आपराधिक गतिविधियों में हो सकता है. वहीं, Internet Freedom Foundation ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि BitChat का अपना कोई सर्वर नहीं है और यह खुद कंटेंट होस्ट नहीं करता है. संगठन ने सरकार से इस आदेश को सार्वजनिक करने और इसे वापस लेने की मांग की है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - दिवाली पर फोन खरीदें कम दाम में, मिल सकती है 50% तक छूट ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Apple, की, भारत, में, बड़ी, कार्रवाई, App, Store, से, हटाया, गया, BitChat</media:keywords>
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        <title>चार्जिंग का नया ऑल इन वन गैजेट? Xiaomi का 165W पावर बैंक कितना है खास</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल एक फोन की बैटरी खत्म होना ही अकेली परेशानी नहीं है. बैग में फोन के साथ टैबलेट, ईयरबड्स, गेमिंग हैंडहेल्ड या लैपटॉप भी हो, तो हर डिवाइस के लिए अलग चार्जर और केबल संभालना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में Xiaomi का Power Bank 20000 165W इसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें 20,000mAh बैटरी के साथ 165W तक का मैक्सिमम आउटपुट, 120W वाला बिल्ट-इन USB-C केबल और 45W का दूसरा USB-C पोर्ट दिया गया है. जानिए Xiaomi का 165W Power Bank कितना खास है.&amp;nbsp;
Xiaomi का 165W Power Bank कितना खास है?
इस Power Bank की सबसे खास चीज इसका Integrated USB-C केबल है. यह अकेले 120W तक आउटपुट दे सकता है. इसके अलावा दूसरे USB-C पोर्ट से 45W तक की चार्जिंग मिलती है. इन दोनों को साथ इस्तेमाल करने पर कंपनी ने 165W तक का मैक्सिमम आउटपुट दिया है. वहीं USB-A पोर्ट 22.5W तक आउटपुट दे सकता है, जिससे पुराने डिवाइस और छोटे गैजेट भी चार्ज किए जा सकते हैं. सफर के दौरान इससे लैपटॉप और फोन को एक साथ चार्ज किया जा सकता है, हालांकि 120W का पोर्ट होने का मतलब यह नहीं है कि हर डिवाइस 120W की स्पीड से चार्ज होगा. चार्जिंग की असली स्पीड डिवाइस की क्षमता और उसके सपोर्टेड चार्जिंग सिस्टम पर निर्भर करती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;भारी बॉडी के साथ मिलती है स्मार्ट डिजाइन
20,000mAh बैटरी और 165W तक की पावर होने की वजह से इसका साइज सामान्य Power Bank से थोड़ा बड़ा है. बॉडी लंबी और पतली है, इसलिए इसे पकड़ना ज्यादा मुश्किल नहीं लगता है. इसमें ब्रेडेड USB-C केबल दी गई है, जिसे Carrying Loop की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके फ्रंट पर दिया गया Color Digital Display भी खास है. यह बैटरी लेवल के साथ चार्जिंग और डिस्चार्जिंग की जानकारी, अनुमानित समय, Low Current और Malfunction Indicator दिखाता है.&amp;nbsp;
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90W तक खुद भी हो सकता है चार्ज
Xiaomi Power Bank 20000 165W सिर्फ दूसरे डिवाइस को चार्ज करने के लिए ही तेज नहीं है, बल्कि इसे खुद भी 90W तक की स्पीड से चार्ज किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि सही चार्जर के साथ यह करीब 15 मिनट में 27 प्रतिशत तक चार्ज हो जाता है.&amp;nbsp;
किस यूजर के लिए यह पावर बैंक बेहतर है?
भारत में Xiaomi Power Bank 20000 165W की कीमत 5,499 रुपये है. यह उन लोगों के लिए ज्यादा यूजफुल है जो एक साथ कई डिवाइस लेकर चलते हैं. लैपटॉप, फोन और दूसरे गैजेट्स को एक ही Power Bank से संभालने की सुविधा इसका बड़ा फायदा है.&amp;nbsp;
वहीं अगर जरूरत सिर्फ कभी-कभार फोन की बैटरी बढ़ाने की है, तो 486 ग्राम वजन वाला यह Power Bank जरूरत से ज्यादा बड़ा ऑप्शन लग सकता है, लेकिन कई डिवाइस साथ यूज करने वालों के लिए 120W बिल्ट-इन केबल, 45W USB-C, 22.5W USB-A और 90W रीचार्जिंग सपोर्ट इसे एक ज्यादा वर्सेटाइल चार्जिंग ऑप्शन बनाते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>OPPO F35 Series लॉन्च, 8,000mAh बैटरी से 144Hz AMOLED तक क्या है खास?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन मार्केट में बड़ी बैटरी और कैमरा फीचर्स को लेकर कंपनियों के बीच मुकाबला लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच OPPO ने भारत में अपनी F Series की नई जेनरेशन पेश कर दी है. कंपनी ने आज OPPO F35 Pro 5G और OPPO F35 5G को भारतीय बाजार में लॉन्च किया है. खास बात यह है कि यह लॉन्च भारत में OPPO F Series के 10 साल पूरे होने के मौके पर हुआ है. नई सीरीज में 8,000mAh की बड़ी बैटरी, 50MP कैमरा और हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले जैसे फीचर्स दिए गए हैं. तो आइए जानते हैं कि OPPO F35 Series में 8,000mAh बैटरी से 144Hz AMOLED तक क्या खास है.&amp;nbsp;
OPPO F35 Series में क्या खास है?
OPPO F35 Series की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8,000mAh बैटरी है. कंपनी के मुताबिक यह बैटरी लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए तैयार की गई है और OPPO की लैब टेस्टिंग में लंबे इस्तेमाल के बाद भी इसकी बैटरी हेल्थ 80 प्रतिशत से ज्यादा बनाए रखने का दावा किया गया है. फोन में 80W SUPERVOOC फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलता है. कंपनी के अनुसार यह फोन 2.95 दिन तक इस्तेमाल, 705.4 घंटे तक स्टैंडबाय और करीब 15 घंटे तक Instagram ब्राउजिंग दे सकता है, हालांकि असली बैटरी बैकअप इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा.&amp;nbsp;
144Hz AMOLED डिस्प्ले और 50MP सेल्फी कैमरा
OPPO F35 Series में 17.22cm का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. इसमें अधिकतम 144Hz रिफ्रेश रेट, 450ppi पिक्सल डेंसिटी और 1.07 बिलियन कलर का सपोर्ट मिलता है. इसकी पीक ब्राइटनेस 3600 निट्स तक बताई गई है .सेल्फी के लिए फोन में 50MP का फ्रंट कैमरा है, जिसका फील्ड ऑफ व्यू 100 डिग्री है.
50MP मेन कैमरा और 8MP अल्ट्रा-वाइड लेंस
रियर कैमरा सेटअप में 50MP का मेन कैमरा दिया गया है, जिसमें OIS सपोर्ट मिलता है. इसके साथ 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा भी मौजूद है. फोन से फ्रंट और रियर दोनों कैमरों के जरिए 4K वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है. कैमरा सॉफ्टवेयर में AI Eraser 2.0, AI Unblur, AI Reflection Remover, AI Clarity Enhancer और AI Portrait Glow जैसे फीचर्स दिए गए हैं.&amp;nbsp;
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Dimensity 7360 MAX से दमदार परफॉर्मेंस
परफॉर्मेंस के लिए OPPO F35 Pro 5G में 4nm MediaTek Dimensity 7360 MAX चिपसेट मिलता है. फोन में 5,000mm का VC कूलिंग सिस्टम भी दिया गया है. &amp;nbsp;कंपनी ने 6-Year Smoothness Protection का दावा किया है, जो 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट और उससे ऊपर लागू होता है. फोन में ColorOS 16.5 मिलता है.&amp;nbsp;
OPPO F35 Series की कीमत&amp;nbsp;
OPPO F35 Pro 5G की शुरुआती कीमत 45,999 रुपये है. इसका 8GB+128GB मॉडल 49,999 रुपये और 8GB+256GB वेरिएंट 54,999 रुपये में आता है. फोन Sunrise Orange, Wave Blue और Twilight Brown रंगों में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
वहीं OPPO F35 5G की कीमत 38,999 रुपये से शुरू होती है. इसका 6GB+128GB मॉडल 38,999 रुपये और 8GB+128GB वेरिएंट 42,999 रुपये का है. इसे Wave Blue, Mist Pink और Titanium Grey रंगों में खरीदा जा सकेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Amazon Great Indian Festival में बंपर डिस्काउंट, iPhone 16 और Samsung Galaxy S25 पर मिल रही डील</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों के सीजन लगभग आ चुका है और इस समय लोग नई-नई चीजें खूब खरीदते हैं. खास तौर पर फोन की बिक्री खूब होती है. अगर आपका भी नया फोन खरीदने का प्लान है. तो Amazon Great Indian Festival की डील्स आपके काम आ सकती हैं. इन सेल में iPhone 16 और Samsung Galaxy S25 जैसे फोन कम कीमत पर मिल रहे हैं.&amp;nbsp;
आपको बता दें Amazon Great Indian Festival पर इस की यह सबसे बड़ी सेल होगी इसमें इन दोनों धांसू फोन्स पर लोगों को तगड़ा डिस्काउंट मिल सकता है. अलग-अलग बैंक के क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और एक्सचेंज ऑफर्स के साथ अलग-अलग वेरिएंट के हिसाब से बढ़िया ऑफर्स मिल सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कितने में मिल रही है आपको यह डील.&amp;nbsp;
Amazon सेल में iPhone 16 और S25 Ultra की डील
Amazon Great Indian Festival में iPhone 16 को ऑफर के साथ 71999 रुपये में खरीदा जा सकता है. फोन लेने से पहले यह देख लें कि बताई गई कीमत बैंक कार्ड या दूसरे पेमेंट ऑफर के बाद तो नहीं है. कई बार सेल में दिखने वाली कम कीमत के लिए चुनिंदा बैंक का कार्ड इस्तेमाल करना पड़ता है. आपके पास उस बैंक का कार्ड नहीं है तो फोन की कीमत अलग हो सकती है.
Samsung का बड़ा फोन पसंद है तो Samsung Galaxy S25 Ultra 5G पर भी डील मिल रही है. इसकी कीमत 84999 रुपये बताई गई है. यह उन लोगों के लिए एक ऑप्शन हो सकता है जो बड़ा डिस्प्ले और प्रीमियम मॉडल चाहते हैं. लेकिन खरीदने से पहले Amazon पर ऑफर की पूरी जानकारी देख लें. बैंक छूट, एक्सचेंज बोनस और फोन के वेरिएंट के हिसाब से कीमत थोड़ी बदल भी सकती है.

खरीदने से पहले इन बातों पर दें ध्यान
सेल की कीमत देखकर तुरंत ऑर्डर करने से पहले फोन की फाइनल कीमत चेक करें. कई ऑफर बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर मिलते हैं. जबकि एक्सचेंज की छूट पुराने फोन की हालत और मॉडल पर निर्भर करती है. ऐसे में जो कीमत सेल में दिखाई जा रही है उसी पर आपको वह फोन मिल जाए ऐसा जरूरी नहीं है.&amp;nbsp;
फोन ऑर्डर करने से पहले तय करें कि आपको कौन सा फोन चाहिए और कितना खर्च करना है. अगर आपका बजट कम है तो S25 की 57999 रुपये वाली डील देख सकते हैं. iPhone लेने का मन है तो Amazon पर iPhone 16 की ऑफर कीमत चेक करें. बड़े और प्रीमियम Samsung फोन की तलाश है तो S25 Ultra की डील देख सकते हैं.

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दोनों Phone के स्पेसिफिकेशंस जान लें
इन दोनों प्रीमियम स्मार्टफोन्स के स्पेसिफिकेशंस की बात करें तो दोनों ही टेक्नोलॉजी के मामले में अपने-अपने सेगमेंट के टाॅप Phones में शुमार हैं. अगर बात करें iPhone 16 की,तो इसमें लेटेस्ट ए-सीरीज का बेहद पावरफुल चिपसेट दिया गया है. जो भारी-भरकम ऐप्स और हाई-एंड गेमिंग को बिना किसी लैग के एकदम स्मूदली हैंडल करता है. इसके कैमरा डिपार्टमेंट की बात करें तो इसमें वर्टिकल-अलाइन ड्यूल रियर कैमरा सेटअप और एडवांस्ड फोटोग्राफिक स्टाइल्स मिलते हैं. जो कम रोशनी में भी बेहद क्रिस्प, डिटेल और प्रोफेशनल लेवल की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करते हैं.
दूसरी तरफ Samsung Galaxy S25 भी परफॉर्मेंस के मामले में किसी से पीछे नहीं है. इसमें लेटेस्ट स्नैपड्रैगन या एक्सीनॉस प्रोसेसर का तगड़ा कॉम्बिनेशन मिलता है जो मल्टीटास्किंग, गैलेक्सी एआई फीचर्स और सुपर फास्ट स्पीड के लिए जाना जाता है. इसके कैमरा सेटअप में धांसू ज़ूम क्षमता, हाई-मेगापिक्सल सेंसर और शानदार वीडियो स्टेबलाइजेशन मिलते हैं, जो हर एंगल से बेहतरीन क्लैरिटी देते हैं. इन दोनों ही स्मार्टफोन्स का प्रोसेसर और कैमरा मिलकर यूजर्स को एक अल्टीमेट और प्रीमियम एक्सपीरियंस देते हैं. तो जो भी आपका बजट इजाजत दें वह डील डन कर दीजिए.
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Macbook Neo या फिर Macbook Air कौनसा आपके लिए बेस्ट, ऐसे करें पता</title>
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        <description><![CDATA[ देश में बहुत सी कंपनियों के लैपटाॅप मिलते हैं. जिनमें बात करें तो Apple, Dell, Lenovo,HP इन कंपनियों के लैपटाॅप खूब बिकते हैं. वहीं बात की जाए तो इन कंपनियों में Apple का एक अलग ही रुतबा है. Apple का नाम सुनते ही दिमाग में एक प्रीमियम लैपटॉप की तस्वीर जाती है. जो अपनी धांसू परफॉर्मेंस और लंबी बैटरी लाइफ के लिए जाने जाते हैं.&amp;nbsp;
Apple अपने लैपटॉप दो वेरिएंट में बेच रहा था जिनमें Macbook Air और Macbook Pro थे. अब इसमें एक नए सेगमेंट यानी Macbook Neo को भी ऐड कर दिया गया है. Apple का Macbook Neo का अब तक का सबसे सस्ता लैपटॉप है. जिसे आप बहुत कम दाम खर्च करके हासिल कर सकते हैं. इसकी सीधी टक्कर Macbook Air से है.
अब लोगों के पास Macbook Air का नया ऑप्शन यानी&amp;nbsp; Macbook Neo आ गया है. अगर आपको अपने लिए Macbook खरीदना हो तो Macbook Air या फिर&amp;nbsp; Macbook Neo कौनसा आपके लिए बढ़िया रहेगा चलिए जान लीजिए इस खबर में पूरी जानकारी.
डिजाइन और पोर्टेबिलिटी में फर्क
जब भी हम कोई नया लैपटॉप खरीदते हैं तो सबसे पहले उसकी लुक और उसका वजन यानी वह उठाने में कितना हल्का है इस बात को पहले देखते हैं. Macbook Air अपने आइकॉनिक स्लिम डिजाइन और बेहद हल्के वजन के लिए पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है. जिसे आप बिना किसी दिक्कत के अपने बैग में डालकर कहीं भी आसानी से ट्रैवल कर सकते हैं. वहीं दूसरी ओर अगर बात Macbook Neo की करें तो यह अपनी अलग यूनीक पहचान और यूथफुल वाइब के साथ मार्केट में उतारा गया है.&amp;nbsp;
जो दिखने में बेहद स्टाइलिश और ट्रेंडी लगता है. दोनों ही लैपटॉप्स की बिल्ड क्वालिटी इतनी शानदार है कि हाथ में लेते ही एक प्रीमियम फील आती है. अगर आपको दिनभर ऑफिस या कॉलेज के चक्कर काटने पड़ते हैं और वजन कम से कम रखना है. तो डिजाइन के मामले में दोनों ही आपको बिल्कुल निराश नहीं करेंगे. 
काम और परफॉर्मेंस में कौन आगे है?
MacBook Neo में A18 Pro चिप है. यह वेब ब्राउजिंग, ईमेल, ऑनलाइन क्लास, डॉक्यूमेंट बनाने, वीडियो देखने और हल्की फोटो एडिटिंग जैसे कामों के लिए बनाया गया है. अगर आपका ज्यादातर काम ब्राउजर और सामान्य ऐप्स में होता है, तो Neo आपकी जरूरत पूरी कर सकता है. लेकिन इसमें 8GB मेमोरी और शुरुआती मॉडल में 256GB स्टोरेज है. बहुत सारे ऐप्स एक साथ चलाने या बड़ी फाइलें रखने पर यह सीमा महसूस हो सकती है.
MacBook Air में M5 चिप के साथ 16GB मेमोरी और 512GB स्टोरेज मिलता है. इसे ज्यादा भारी काम कई ऐप्स के साथ काम करने और लंबे समय तक इस्तेमाल करने के लिए बेहतर ऑप्शन माना जा सकता है. Air में दो Thunderbolt 4 USB-C पोर्ट और MagSafe चार्जिंग पोर्ट हैं. Neo में दो USB-C पोर्ट हैं, लेकिन उनमें से एक USB 2 स्पीड वाला है. बैटरी के मामले में Apple Neo के लिए वीडियो देखने पर 16 घंटे तक और Air के लिए 18 घंटे तक बैकअप है.
&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: Wi-Fi की स्पीड हो रही है कम? इन ऐप्स से चेक करें कौन चला रहा इंटरनेट
कीमत में कितना फर्क?
MacBook Air के 13 इंच M5 मॉडल की शुरुआती कीमत 119900 रुपये है. इसमें 13.6 इंच की स्क्रीन, 16GB मेमोरी और 512GB स्टोरेज मिलता है. अगर बड़ी स्क्रीन चाहिए तो 15 इंच वाला Air 144900 रुपये से शुरू होता है. Air की स्क्रीन P3 कलर और True Tone को सपोर्ट करती है. वहीं MacBook Neo की शुरुआती कीमत 69900 रुपये है. यानी दोनों की शुरुआती कीमत में 50000 रुपये का अंतर है.
आपके लिए कौन सा सही रहेगा?
अगर आप पहली बार MacBook ले रहे हैं और बजट करीब 70000 रुपये है. तो Neo को देख सकते हैं. कॉलेज के नोट्स, ऑनलाइन मीटिंग, इंटरनेट चलाने, डॉक्यूमेंट बनाने और मनोरंजन के लिए यह अच्छा शुरुआती ऑप्शन है. घर या ऑफिस में पहले से मॉनिटर और दूसरे सामान हैं. तब भी खरीदने से पहले इसके पोर्ट देख लें. 256GB स्टोरेज आपके काम के लिए कम पड़ सकता है. तो 512GB मॉडल की ओर रुख कर सकते हैं.
अगर लैपटॉप से पढ़ाई के साथ काम भी करना है एक साथ कई ऐप्स चलाने हैं. ज्यादा फाइलें रखनी हैं या बड़ी स्क्रीन चाहिए तो MacBook Air खरीदना सही रहेगा. वीडियो एडिटिंग या दूसरे भारी काम करने वालों के लिए भी इसकी ज्यादा मेमोरी और तेज पोर्ट काम आएंगे. लेकिन अगर आपका इस्तेमाल कम है. तो सिर्फ Air के लिए एक्सट्रा 50000 रुपये खर्च करना जरूरी नहीं.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Macbook, Neo, या, फिर, Macbook, Air, कौनसा, आपके, लिए, बेस्ट, ऐसे, करें, पता</media:keywords>
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        <title>Wi&amp;Fi की स्पीड हो रही है कम? इन ऐप्स से चेक करें कौन चला रहा इंटरनेट</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi की स्पीड हो रही है कम? इन ऐप्स से चेक करें कौन चला रहा इंटरनेट ]]></description>
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        <title>10000 रुपये के बजट में खरीदें ये स्मार्ट वॉच, यहां देखें ऑप्शंस</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्ट वॉच खरीदने के लिए अब ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी नहीं है. 10,000 के बजट में ही कई ऐसी वॉचेज बाजार में उपलब्ध हैं, जिनमें एमोलेड डिस्प्ले, जीपीएस, ब्लूटूथ कॉलिंग, स्पोर्ट्स मोड्स और हेल्थ ट्रैकिंग जैसे फीचर्स मिलते हैं. वॉच खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपको फिटनेस, कॉलिंग, जीपीएस या बैटरी में से किस फीचर की ज्यादा जरूरत है.
रीयलमी वॉच एस5, प्राइस करीब ₹7,499
₹10,000 के बजट में रीयलमी वॉच एस5 एक ऑप्शन है. इसकी प्राइस करीब ₹7,499 है. इसमें एमोलेड डिस्प्ले मिलता है और इसका राउंड डायल डिजाइन इसे सामान्य वॉच जैसा लुक देता है. अगर आप ऐसी स्मार्ट वॉच चाहते हैं जो ऑफिस, कॉलेज और डेली यूज में आसानी से पहनी जा सके तो यह एक ऑप्शन हो सकती है. इस वॉच में हेल्थ और फिटनेस से जुड़े कई फीचर्स दिए जाते हैं. बैटरी को लेकर भी यह मॉडल उन लोगों के लिए उपयोगी है जो बार-बार चार्जिंग नहीं करना चाहते.&amp;nbsp;
नॉइज़फिट एंडेवर प्रो, प्राइस ₹9,999
अगर आपका बजट करीब ₹10,000 है और आप ज्यादा फीचर्स वाली वॉच देख रहे हैं तो नॉइज़फिट एंडेवर प्रो पर नजर डाल सकते हैं. इसकी मौजूदा प्राइस ₹9,999 है. इसमें एमोलेड डिस्प्ले और जीपीएस जैसे फीचर्स मिलते हैं. यह वॉच फिटनेस ट्रैकिंग के साथ आउटडोर एक्टिविटीज पर ध्यान देने वाले यूजर्स के लिए भी बनाई गई है.इसमें जीपीएस की मदद से आउटडोर एक्टिविटी को ट्रैक किया जा सकता है. साथ ही स्मार्ट नोटिफिकेशंस और हेल्थ ट्रैकिंग जैसे फीचर्स भी मिलते हैं.&amp;nbsp;
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अमेजफिट बिप 6 और टाइटन सेलेस्टर भी ऑप्शंस
अमेजफिट बिप 6 भी इस बजट में मिलने वाली वॉचेज में शामिल है.&amp;nbsp; इसमें एमोलेड डिस्प्ले और बिल्ट-इन जीपीएस जैसे फीचर्स मिलते हैं. इसके अलावा स्पोर्ट्स और फिटनेस ट्रैकिंग के लिए भी इसमें कई मोड्स दिए गए हैं.वहीं टाइटन सेलेस्टर की प्राइस करीब ₹7,500 बताई गई है. इसमें एमोलेड डिस्प्ले और बिल्ट-इन जीपीएस मिलता है. इसका डिजाइन भी थोड़ा प्रीमियम रखा गया है. अगर आप इंडियन ब्रांड की स्मार्ट वॉच लेना चाहते हैं तो इसे भी ऑप्शंस में शामिल किया जा सकता है.
₹6,000 के आसपास भी मिलेंगे ऑप्शंस
अगर आपका बजट ₹10,000 तक है लेकिन आप पूरा बजट खर्च नहीं करना चाहते तो कई सस्ते ऑप्शंस भी मौजूद हैं. नॉइज़फिट प्रो 6आर की प्राइस करीब ₹6,999, बोट वेलर वॉच 1 जीपीएस की प्राइस करीब ₹5,999 और नॉइज़फिट हेलो 3 की प्राइस करीब ₹5,499 बताई गई है.स्मार्ट वॉच लेते समय सिर्फ लुक और प्राइस देखकर फैसला न करें. अगर आप रनिंग या वॉकिंग करते हैं तो बिल्ट-इन जीपीएस जरूरी होता है. ऑफिस या कॉलेज के लिए खरीद रहे हैं तो एमोलेड डिस्प्ले, कॉलिंग और नोटिफिकेशंस ज्यादा काम आते हैं. वहीं ज्यादा समय तक चार्जिंग से बचना चाहते हैं तो बैटरी बैकअप पर ध्यान दें. प्राइसेज और ऑफर्स समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए खरीदारी से पहले मौजूदा प्राइस जरूर चेक करें.
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>10000, रुपये, के, बजट, में, खरीदें, ये, स्मार्ट, वॉच, यहां, देखें, ऑप्शंस</media:keywords>
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        <title>इस साल देश में ये Phone सबसे ज्यादा बिका, जानें लोग क्यों हुए इसके दीवाने?</title>
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        <description><![CDATA[ जब भी हम नया फोन खरीदने की सोचते हैं. तो सबसे पहले यही कन्फ्यूजन रहता है कि आखिर मार्केट में कौन सा मॉडल सबसे बेस्ट चल रहा है. देश में बहुत सारी स्मार्टफोन कंपनियां अपने नए फोन आए दिन लॉन्च करती रहती हैं. जिनमें Apple,Vivo,Oppo,Onelpus,Realme, Google Pixel समेत कई और कंपनियां शामिल हैं. लोग अपनी-अपनी ज़रूरतें और अपने-अपने शौक के हिसाब से फोन खरीदने हैं.&amp;nbsp;
लेकिन इन सब में जो आगे निकल जाता है वह है बजट. कई बार लोग शौक और जरूरत को किनारे रखते हुए बजट को प्रेफर करते हैं. तो कई बार शौक के चलते बजट को बढ़ा भी देते हैं. ऐसा ही कुछ इस साल देखने को मिला है इस साल जो फोन सबसे ज्यादा बिका है वह नार्मल बजट में नहीं है फिर भी लोगों ने उसे खूब खरीदा है. चलिए आपको बताते हैं कौनसा है वहा फोन और क्यों लोग हुए हैं उसके दीवाने.
iPhone 17 बिक्री की लिस्ट में सबसे आगे
इस साल भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले स्मार्टफोन की लिस्ट में Apple का iPhone 17 सबसे आगे रहा. इसकी कीमत 82900 रुपये से शुरू होती है. फिर भी इसकी बिक्री मजबूत रही. फोन की बाजार में हिस्सेदारी 4% से ज्यादा दर्ज की गई. खास बात यह है कि इसके साथ लिस्ट में शामिल कई दूसरे फोन बजट कैटेगरी के थे. Oppo A6x 5G और Vivo के मॉडल भी टॉप पर रहे लेकिन iPhone 17 उनसे आगे निकल गया.
iPhone 16 की मांग भी बनी हुई है. पुराना मॉडल होने के बाद भी वह बिक्री की लिस्ट में शामिल रहा. इससे पता चलता है कि कुछ लोग नया मॉडल चुनते हैं. तो कुछ कम कीमत में पिछला iPhone लेना पसंद करते हैं.&amp;nbsp;इस बात से साफ जाहिर होता है कि देश में Apple का क्रेज Phones के मामले में सर चढ़कर बोलता है.

क्या हैं इसके फीचर्स?
iPhone 17 में 6.3 इंच की Super Retina XDR स्क्रीन है. यह 120Hz तक के ProMotion रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इसका फायदा स्क्रॉलिंग, वीडियो देखने और गेम खेलने में दिखता है. फोन में A19 चिप दी गई है जो ऐप्स और रोज के कामों को तेज चलाने में मदद करती है. Apple ने स्क्रीन पर बेहतर स्क्रैच सेफ्टी भी दी है. जिससे रोज फोन इस्तेमाल करते समय हल्की खरोंचों का खतरा कम हो सकता है.
फोन के पीछे 48MP का मेन कैमरा और 48MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलता है. सामने 18MP Center Stage कैमरा है, जो सेल्फी और वीडियो कॉल में फ्रेम को बेहतर तरीके से सेट करता है. फोन सीधा पकड़कर भी ग्रुप सेल्फी लेना आसान हो सकता है. इसमें 256GB से स्टोरेज शुरू होता है यानी बेस मॉडल में फोटो, वीडियो और ऐप्स रखने के लिए ज्यादा जगह मिलती है. यह फीचर उन लोगों के काम आ सकते हैं जो फोन से फोटो और वीडियो ज्यादा बनाते हैं.&amp;nbsp;
क्यों बना नंबर वन?
82900 रुपये की शुरूआती कीमत होने से साफ बता चलता है कि यह फोन हर किसी के बजट में तो नहीं आने वाला. लेकिन बावजूद इसके इसने बिक्री में सबको पीछे छोड़ दिया. ऐसा किस वजह से हुआ तो आपको बता दें इसके पीछे सबसे पहली वजह यह 17 सीरीज का सबसे सस्ता फोन है और लेटेस्ट है.
इस सीरीज में Pro और Pro Max की कीमत काफी ज्यादा है. जो लोग EMI पर भी लेंगे तब भी उन्हें बहुत महंगा पड़ेगा. iPhone 17 की शुरुआती कीमत 82900 रुपये है. इस EMI और एक्सचेंज ऑफर से खरीदना थोड़ा आसान हो जाता है. बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर कुछ ग्राहकों को एक्सट्रा छूट भी मिल सकती है.&amp;nbsp;

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इस वजह से भी खरीद ज्यादा&amp;nbsp;
अगर किसी के पास Mac, Apple Watch या AirPods हैं. तो iPhone उनके साथ आसानी से कनेक्ट हो&amp;nbsp;जाता है. इससे फोटो शेयर करना, कॉल लेना और फाइलों को दूसरे Apple डिवाइस पर देखना ज्यादा सही रहता है. कैमरा और सॉफ्टवेयर अपडेट भी इसे पसंद करने की वजह हैं. जो लोग नया कैमरा, स्मूद स्क्रीन और Apple के डिवाइस साथ इस्तेमाल करना चाहते हैं. उनके लिए iPhone 17 अभी भी बढ़िया ऑप्शन है.
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        <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन का कैमरा धुंधली फोटो लेता है? तो इन सेंटिंग्स को बदल दें</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में हर कोई चाहता है कि उसका स्मार्टफोन एक बेहतरीन कैमरे की तरह काम करे और हर पल को एकदम शानदार तरीके से कैद कर ले. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हम महंगे से महंगा फोन ले आते हैं और जब फोटो खींचने की बारी आती है तो तस्वीरें एकदम धुंधली या बेजान आती हैं. इस चक्कर में हमें लगने लगता है कि हमारे फोन का कैमरा खराब हो गया है या कंपनी ने हमारे साथ धोखा किया ह.&amp;nbsp;
हालांकि सच तो यह है कि इसके पीछे कोई बहुत बड़ा हार्डवेयर फॉल्ट नहीं होता. बल्कि हमारे फोन की कुछ सेटिंग्स गड़बड़ होती हैं जो इसका कारण बनती है. अगर आपका भी फोन ऐसी ही घटिया और ब्लर तस्वीरें खींचकर आपका मूड खराब कर रहा है. तो घबराने की जरूरत नहीं है. बस कुछ छोटी-छोटी सेटिंग्स को बदलकर आप अपने फोन के कैमरे को एकदम बढ़िया बना सकते हैं.
सेंटिंग चेंज करने से पहले कर लें यह काम
सबसे पहले बिना किसी सेटिंग को चेंज किए अपने फोन के पिछले कैमरे के कांच को ध्यान से देखें. अक्सर हमारी जेब और हाथों से लगने वाले दाग, तेल या धूल के पार्टिकल्स लेंस पर जम जाते हैं. जिससे लाइट ठीक से अंदर नहीं जा पाती और फोटो ब्लर आने लगती है. इसके अलावा अगर आपने अपने फोन पर कोई घटिया क्वालिटी का टेम्पर्ड ग्लास या फिर कैमरा प्रोटेक्टर लगवा रखा है.&amp;nbsp;
तो वह भी फोकस खराब करने का बड़ा कारण बनता है. लेंस को हमेशा किसी साफ माइक्रोफाइबर कपड़े से साफ और अगर प्रोटेक्टर पर स्क्रैच आ गए हैं. तो उसे तुरंत हटवा दें. यह छोटा सा काम आपके आधे से ज्यादा फोटो ब्लर होने की दिक्कत को मिनटों में हल कर देगी और आपको साफ-सुथरी तस्वीरें मिलने लगेंगी.
कैमरा ऐप की इन सेटिंग्स को तुरंत करें ठीक
लेंस साफ होने के बाद भी अगर बात नहीं बन रही है. तो अपने फोन के कैमरा ऐप की सेटिंग्स को चेक करना बहुत जरूरी है सबसे पहले कैमरे के रिजॉल्यूशन और फ्रेम रेट की सेटिंग में जाएं और देखें कि कहीं वीडियो या फोटो लो-क्वालिटी मोड पर तो सेट नहीं है.&amp;nbsp;
इसके अलावा एचडीआर (HDR) मोड को हमेशा ऑटो पर सेट रखें जिससे फोन खुद-बखुद रोशनी के हिसाब से बैलेंस बना सके. कई बार लोग गलती से मैक्रो मोड या मैनुअल फोकस ऑन कर देते हैं. जिससे नॉर्मल फोटो खींचते वक्त कैमरा सही जगह फोकस नहीं कर पाता. इन छोटी-मोटी सेटिंग्स को रीसेट करके डिफॉल्ट मोड पर लाने से आपके फोन की फोटो क्वालिटी में एकदम से जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिल जाएगा.

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फोकस लॉक और शेकप्रूफ फीचर्स यूज करें
अक्सर लोग फोटो खींचते वक्त फोन को कसकर पकड़ते नहीं हैं. जिससे हाथ हिलने की वजह से तस्वीरें धुंधली हो जाती हैं. इसके लिए अपने कैमरे की सेटिंग्स में जाकर ग्रिड लाइंस को ऑन कर लें जिससे आपको फ्रेम का सही अंदाजा मिल सके इसके साथ ही जब आप किसी सब्जेक्ट की फोटो लें. तो स्क्रीन पर उस पर टैप करके फोकस को लॉक जरूर कर दें.&amp;nbsp;
इससे कैमरा समझ जाता है कि आपको असल में किस हिस्से को साफ दिखाना है. इसके अलावा, लो-लाइट या रात के समय नाइट मोड का इस्तेमाल करें और इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS/EIS) के ऑप्शन को हमेशा चालू रखें. इन ट्रिक्स को अपनाने से आपके हाथ का कांपना या हल्का सा मूवमेंट भी फोटो को खराब नहीं कर पाएगा और हर शॉट एकदम प्रोफेशनल आएगा.

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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सेकंड हैंड iPhone लेने से पहले, ये चीज जरूर चेक कर लें</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल मार्केट में सेकंड हैंड और रिफर्बिशड आईफोन लोग खूब खरीद रहे हैं. क्योंकि नए आईफोन मंहगे हो गए हैं इसलिए लोग कम बजट में ऐपल का मजा लेना चाहते हैं. लेकिन नया हो या पुराना आईफोन खरीदना एक बड़ा इन्वेस्टमेंट तो माना ही जाता है. ऐसे में जब आप किसी से पुराना फोन ले रहे होते हैं,. तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि डिवाइस अंदर से कितना फिट है और उसकी वारंटी बची है या नही.&amp;nbsp;
कई बार लोग बिना वारंटी स्टेटस चेक किए जल्दबाजी में फोन खरीद लेते हैं और बाद में कोई बड़ा हार्डवेयर खराबी निकलने पर उनकी जेब पर भारी-भरकम खर्च आ जाता है. इसलिए समझदारी इसी में है कि पूरे पैसे देने से पहले आप उस आईफोन की वारंटी और ऐपल केयर स्टेटस को अच्छी तरह चेक कर लें. जिससे आपको बाद में किसी भी तरह का पछतावा न हो. चलिए आपको बताते हैं कैसे आप चेक कर सकते हैं वारंटी.
सेटिंग्स के जरिए सीधे फोन में ऐसे देखें वारंटी स्टेटस
अगर आपके हाथ में वह आईफोन मौजूद है जिसे आप खरीदना चाहते हैं. तो वारंटी चेक करने का सबसे आसान तरीका खुद फोन की सेटिंग्स में जाकर चेक करना है. इसके लिए आपको सबसे पहले उस आईफोन की सेटिंग्स ऐप को ओपन करना होगा. इसके बाद थोड़ा नीचे स्क्रॉल करके जनरल के ऑप्शन पर टैप करें. यहां आपको एपलकेयर एंड वारंटी का ऑप्शन मिल जाएगा.&amp;nbsp;
जिस पर क्लिक करते ही आपके सामने उस डिवाइस की पूरी डिटेल आ जाएगी. अगर आपने या पिछले मालिक ने उस फोन में अपने ऐपल अकाउंट से साइन इन किया हुआ है. तो स्क्रीन पर साफ दिखने लगेगा कि फोन की ऑफिशियल वारंटी या एक्सटेंडेड प्लान कब तक वैलिड है. यह तरीका एकदम सही है और सेकंड-हैंड डील करते वक्त मालिक के सामने ही सच जानने का सबसे अच्छा तरीका है.

सीरियल नंबर से कर सकते हैं चेक
कई बार ऐसा होता है कि आपके पास फोन की सेटिंग्स खोलने का मौका नहीं होता और बेचने वाला आपको दूर से ही डिवाइस बेच रहा होता है. ऐसे में आप सीरियल नंबर के जरिए वारंटी चेक कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपने किसी भी ब्राउज़र में एप्पल की ऑफिशियल चेक कवरेज वेबसाइट पर जाना होगा. वहां दिए गए बॉक्स में आपको उस आईफोन का यूनिक सीरियल नंबर दर्ज करना होता है.&amp;nbsp;
जो आपको फोन के अबाउट सेक्शन में मिल जाएगा. सीरियल नंबर डालने और स्क्रीन पर दिखने वाला कैप्चा कोड भरकर सबमिट करने के बाद एप्पल का पोर्टल तुरंत बता देगा कि डिवाइस वारंटी में है या नहीं. यह ऑनलाइन तरीका उन लोगों के लिए वरदान साबित होता है जो ऑनलाइन मार्केटप्लेस से पुराना सामान मंगवाते हैं और पेमेंट करने से पहले उसकी वैधता परखना चाहते हैं.
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वारंटी न हो ता क्या करें?
अगर चेक करने पर पता चलता है कि उस सेकंड-हैंड आईफोन की वारंटी खत्म हो चुकी है. तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसे बिल्कुल न खरीदें वारंटी न होने पर फोन के कैमरे, बैटरी हेल्थ, फेस आईडी और डिस्प्ले जैसी जरूरी चीजों की फिजिकली और तकनीकी रूप से अच्छी तरह जांच कर लें.&amp;nbsp;
अगर फोन पहले कभी किसी लोकल मार्केट से रिपेयर हुआ होगा और उसमें थर्ड-पार्टी पार्ट्स डले होंगे. तो उसकी लाइफ पर खतरा हो सकता है. बिना वारंटी वाले फोन का सौदा हमेशा कम कीमत पर ही तय करना समझदारी है. इन छोटी-छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखकर आप किसी भी फ्रॉड से बच सकते हैं और अपने लिए एक बेहतरीन सेकंड-हैंड आईफोन घर ला सकते हैं.

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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Huawei Mate 90 लॉन्च, नई Chip Architecture बनी सबसे बड़ी खासियत</title>
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        <description><![CDATA[ Huawei ने Mate 90 सीरीज के साथ नया फोन लॉन्च करने के साथ अपनी चिप टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर सिस्टम में भी बड़े बदलाव किए हैं. इस बार सीरीज की सबसे खास बात इसका नया LogicFolding चिप आर्किटेक्चर है. Huawei ने इस टेक्नोलॉजी को फोन की प्रोसेसिंग स्पीड और परफॉर्मेंस बेहतर करने के लिए तैयार किया है. Mate 90 सीरीज में कंपनी ने अपने Kirin चिपसेट के साथ Android के बिना चलने वाला HarmonyOS 7 दिया है. सीरीज में Mate 90, Mate 90 Pro, Mate 90 Pro Max और Mate 90 RS ULTIMATE DESIGN शामिल हैं.&amp;nbsp;
नई LogicFolding चिप आर्किटेक्चर बनी खासियत
Huawei Mate 90 सीरीज के प्रीमियम मॉडल में Kirin 9050 Pro चिप दी गई है. कंपनी के मुताबिक यह LogicFolding तकनीक पर आधारित है.इसमें चिप के अंदर की वायरिंग को सामान्य 2D डिजाइन की जगह 3D तरीके से तैयार किया गया है.&amp;nbsp;Mate 90 Pro Max और RS ULTIMATE DESIGN में Kirin 9050 Pro दिया गया है, जो पिछली फ्लैगशिप जनरेशन के मुकाबले 31 पर्सेंट ज्यादा परफॉर्मेंस देने का दावा करता है. वहीं Mate 90 Pro में Kirin 9035 और स्टैंडर्ड Mate 90 में Kirin 9030 चिप मिलती है. कंपनी ने इनके प्रदर्शन में 20 पर्सेंट और 27 पर्सेंट सुधार का दावा किया है.
Huawei Mate 90 की कीमत
अभी Huawei Mate 90 सीरीज चीन में लॉन्च हुई है. कंपनी ने इसे 1 अक्टूबर 2026 को पेश किया और उसी दिन चीन में इसकी बिक्री भी शुरू कर दी, फिलहाल Huawei ने भारत या अन्य ग्लोबल मार्केट के लिए लॉन्च डेट की जानकारी नहीं दी है.&amp;nbsp;चीन में Huawei Mate 90 की शुरुआती कीमत 5,999 युआन है, जो भारतीय रुपये में लगभग 86,145 रुपये है.&amp;nbsp;
12,000 निट्स तक पहुंचेगी डिस्प्ले ब्राइटनेस
Mate 90 Pro में दूसरी पीढ़ी की Linglong Display दी गई है. Huawei के अनुसार इसकी पीक ब्राइटनेस 12,000 निट्स तक जाती है. इसमें बेहतर Tandem OLED आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पैनल की लाइफ 138 पर्सेंट तक बढ़ने का दावा है. Pro Max और RS मॉडल में Full-color Linglong Display मिलती है. कंपनी ने आंखों की सुविधा के लिए 1 निट तक की लो-ब्राइटनेस मोड और आसपास की रोशनी पहचानने वाली तकनीक भी दी है.&amp;nbsp;
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200MP कैमरा और XMAGE तकनीक
Mate 90 सीरीज में Huawei ने कैमरा पर भी काफी फोकस किया है. Pro Max में 200MP RYYB टेलीफोटो कैमरा, 18 EV अल्ट्रा-HDR मेन कैमरा और 20x से ज्यादा जूम पर स्टेबल फोटो के लिए CIPA 7.5 रेटेड हार्डवेयर इमेज स्टेबलाइजेशन दिया गया है. इसके अलावा XMAGE True-to-Color Camera 3.0 के जरिए रंगों की सटीकता में 37 पर्सेंट और स्किन टोन की सटीकता में 62 पर्सेंट सुधार का दावा किया गया है. XMAGE Z10 Modular Camera में 1-इंच सेंसर और 24-240mm लगातार ऑप्टिकल जूम दिया गया है.&amp;nbsp;
HarmonyOS 7 के साथ आया फोन&amp;nbsp;
Huawei Mate 90 सीरीज Android के बजाय कंपनी के अपने HarmonyOS 7 पर चलती है. Huawei के अनुसार इसका इकोसिस्टम 4.5 लाख से ज्यादा ऐप्स और सेवाओं को सपोर्ट करता है. Pro Max और उससे ऊपर के मॉडल में 30B MoE ऑन-डिवाइस AI मॉडल दिया गया है, जो फोटो एडिटिंग, कॉल समरी, रियल-टाइम ट्रांसलेशन और कंटेंट मैनेजमेंट जैसे कामों में मदद करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro Max में आई बड़ी खराबी, Apple ने भी मानी बात</title>
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        <description><![CDATA[ Apple का लेटेस्ट और प्रीमियम स्मार्टफोन iPhone 18 Pro Max इन दिनों काफी चर्चा में है. इसकी कीमत की ज्यादा होने के बाद भी इसे खरीदने के लिए देश के कई बड़े शहरों में लोगों की लंबी लाइन नजर आई. एक ओर जहां नया iPhone लेने के लोग काफी एक्साइटेड नजर आ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर iPhone 18 Pro Max को लेकर ऐसी खबर आई है जो नए खरीदने वालों का मन खराब कर सकती है. iPhone 18 Pro Max के कुछ ग्राहकों को जरूरी सुविधाओं में परेशानी आ रही है.&amp;nbsp;
अमेरिका में AT&amp;amp;T नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों के फोन का मोबाइल नेटवर्क बंद हो गया. इससे वे कॉल नहीं कर पा रहे, मोबाइल डेटा नहीं चला पा रहे और SMS भी न भेज पा रहे हैं, न रिसीव कर पा रहे हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;Apple ने माना है कि यह परेशानी कुछ iPhone 18 Pro Max यूजर्स को हुई है. कंपनी ने इसके लिए सॉफ्टवेयर और नेटवर्क सेटिंग्स का अपडेट जारी किया है.&amp;nbsp;
लेकिन जिन फोन में नेटवर्क की यह दिक्कत पहले ही आ चुकी है, उनमें सिर्फ अपडेट से काम नहीं चल सकता. ऐसे लोगों को फोन बदलना पड़ सकता है. हालांकि Apple ने अभी यह नहीं बताया कि कुल कितने ग्राहकों को परेशानी हुई है. चलिए आपको बताते हैं कि फोन में क्या दिक्कत आ रही है अपडेट कैसे चेक करें और किन लोगों को नया फोन लेना पड़ सकता है.
AT&amp;amp;T नेटवर्क पर क्या दिक्कत आ रही है?
Apple के AT&amp;amp;T नेटवर्क इस्तेमाल करने वाले कुछ iPhone 18 Pro Max का मोबाइल नेटवर्क अचानक बंद हो सकता है. ऐसी सिचुएशन में यूजर नार्मल फोन कॉल नहीं कर पाता, मोबाइल डेटा से इंटरनेट नहीं चला पाता और SMS भेजने और रिसीव करने में भी दिक्कत होती है. फोन वाई-फाई से जुड़ा हो तो इंटरनेट के कुछ काम किए जा सकते हैं. लेकिन वाई-फाई डिसकनेक्ट होने पर फोन से कॉल और इंटरनेट इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है.
यह परेशानी हर iPhone 18 Pro Max में नहीं आई है. Apple ने कहा है कि कुछ ही यूजर्स इससे प्रभावित हुए हैं. अभी यह भी साफ नहीं है कि कुल कितने लोगों के फोन में यह दिक्कत आई. खबरों के मुताबिक अब तक सामने आए मामले AT&amp;amp;T नेटवर्क और iPhone 18 Pro Max से जुड़े हैं. इसलिए दूसरे नेटवर्क या iPhone मॉडल इस्तेमाल करने वालों को घबराने की जरूरत नहीं है. अगर AT&amp;amp;T नेटवर्क पर आपके फोन का सिग्नल अचानक चला जाए, तो पहले देखें कि फोन में नया अपडेट आया है या नहीं. अपडेट के बाद भी नेटवर्क न लौटे तो Apple या AT&amp;amp;T की मदद लें.

Apple ने कौन सा अपडेट दिया है?
Apple ने इस परेशानी को रोकने के लिए iOS 27.0.1 और नेटवर्क सेटिंग्स का अपडेट जारी किया है. कंपनी के मुताबिक AT&amp;amp;T ग्राहकों के फोन पर नेटवर्क सेटिंग्स का अपडेट अगले 14 दिनों में अपने आप पहुंच जाएगा. यूजर्स अपने फोन में नया सॉफ्टवेयर अपडेट भी चेक कर सकते हैं. इसके लिए Settings खोलें, फिर General और About पर जाएं. यहां अपडेट का मैसेज दिखे तो स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों के मुताबिक उसे इंस्टॉल करें.
फोन अपडेट रखने से नई परेशानी से निजात मिल सकती है. लेकिन जिन फोन में नेटवर्क पहले ही बंद हो चुका है, उनके लिए अपडेट काफी नहीं हो सकता. Apple के मुताबिक ऐसे iPhone 18 Pro Max को बदलना पड़ सकता है. अगर अपडेट करने के बाद भी कॉल, मोबाइल डेटा या SMS काम नहीं कर रहे हैं. तो Apple या AT&amp;amp;T से संपर्क करें. वे फोन की सिचुएशन देखकर बताएंगे.&amp;nbsp;

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कुछ ग्राहकों को फोन क्यों बदलना पड़ सकता है?
इस मामले में iPhone के अंदर लगे नेटवर्क पार्ट का फर्क भी चर्चा में है. आफको बता दें अमेरिका में बिकने वाले iPhone 18 Pro Max में Qualcomm का मॉडेम है. वहीं छोटे iPhone 18 Pro में Apple का C2 मॉडेम दिया गया है. यह फर्क इसलिए सामने आया है क्योंकि अब तक बताई गई नेटवर्क की परेशानी iPhone 18 Pro Max और AT&amp;amp;T यूजर्स से जुड़ी है. हालांकि खबर में यह नहीं कहा गया कि मॉडेम का फर्क ही इस दिक्कत की वजह है.
Apple का कहना है कि जिन फोन में नेटवर्क की परेशानी पहले ही आ चुकी है, उन्हें Apple या AT&amp;amp;T के जरिए बदलना पड़ सकता है. अपडेट से आगे की परेशानी रोकने में मदद मिल सकती है. लेकिन खराबी आ चुके फोन के लिए यह तरीका काम नहीं आएगा. iPhone 18 Pro Max में कैमरा, बैटरी और परफॉर्मेंस को बेहतर किया गया है. ऐसे महंगे फोन में कॉल और इंटरनेट बंद होना ग्राहकों के लिए बड़ी परेशानी है. AT&amp;amp;T इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अपडेट चेक करें. नेटवर्क फिर भी काम न करे तो सपोर्ट टीम से बात करके पूछें कि आपका फोन बदला जा सकता है या नहीं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Wireless कीबोर्ड या Wire वाला, कौनसा होता है ज्यादा सही, जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ Wireless कीबोर्ड या Wire वाला, कौनसा होता है ज्यादा सही, जान लें ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>1Hz से 120Hz तक का खेल, LTPO Display आखिर कैसे करती है काम?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन की स्क्रीन अब सिर्फ बड़ी और चमकदार होने तक सीमित नहीं रही है. आज फोन खरीदते समय AMOLED, OLED और pOLED जैसे डिस्प्ले नाम आम हो चुके हैं. इसी के साथ प्रीमियम स्मार्टफोन में LTPO का नाम भी तेजी से सुनने को मिलता है. खासकर जब किसी फोन में 120Hz रिफ्रेश रेट या Always-On Display की बात होती है, तब LTPO को भी खास फीचर के तौर पर बताया जाता है, लेकिन LTPO खुद कोई अलग तरह का स्क्रीन पैनल नहीं है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो डिस्प्ले को जरूरत के हिसाब से उसका रिफ्रेश रेट बदलने में मदद करती है. तो आइए जानते हैं कि LTPO Display काम कैसे करती है.&amp;nbsp;
LTPO Display क्या है?
LTPO का पूरा नाम Low-Temperature Polycrystalline Oxide है. यह एक डिस्प्ले बैकप्लेन टेक्नोलॉजी है, जिसमें दो तरह के Thin-Film Transistors यानी TFTs का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें Low-Temperature Polycrystalline Silicon यानी LTPS और Oxide TFTs शामिल हैं, जो आमतौर पर IGZO यानी Indium Gallium Zinc Oxide पर आधारित होते हैं.&amp;nbsp;
LTPO Display काम कैसे करती है
LTPO में स्विचिंग सर्किट के लिए LTPS का इस्तेमाल होता है, जबकि डिस्प्ले को चलाने के लिए Oxide TFTs काम करते हैं. इन दोनों को मिलाकर बनाई गई यह व्यवस्था डिस्प्ले को तेज काम करने के साथ कम पावर इस्तेमाल करने में मदद करती है. &amp;nbsp;LTPO, OLED या AMOLED का ऑप्शन नहीं है. बल्कि यह इन स्क्रीन के नीचे काम करने वाली टेक्नोलॉजी है, जो पिक्सल को कंट्रोल करती है. इसी वजह से किसी फोन के स्पेसिफिकेशन में LTPO AMOLED Display लिखा दिखाई दे सकता है.&amp;nbsp;
LTPO को पहली बार कब इस्तेमाल किया गया?
LTPO टेक्नोलॉजी को Apple ने 2018 में Apple Watch Series 4 के लिए LTPO बैकप्लेन के तौर पर विकसित किया था. इसके बाद यह टेक्नोलॉजी धीरे-धीरे प्रीमियम स्मार्टफोन और स्मार्ट वॉच में ज्यादा इस्तेमाल होने लगी.
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LTPO Display में क्या खास है?
LTPO का सबसे बड़ा फायदा पावर की बचत है. ज्यादा रिफ्रेश रेट पर चलने वाली स्क्रीन ज्यादा पावर खर्च करती है, जबकि हर तरह के कंटेंट के लिए हाई रिफ्रेश रेट की जरूरत नहीं होती है. LTPO इसी जरूरत के हिसाब से रिफ्रेश रेट को कम या ज्यादा कर सकता है. जैसे अगर आप ई-बुक पढ़ रहे हैं या स्क्रीन पर कोई स्थिर तस्वीर देख रहे हैं, तो डिस्प्ले बहुत कम रिफ्रेश रेट पर चल सकता है. वहीं स्क्रॉलिंग शुरू करने पर यह रिफ्रेश रेट बढ़ा देता है, जिससे स्क्रीन पर मूवमेंट ज्यादा स्मूद दिखाई देता है. इस तरह यूजर को हाई रिफ्रेश रेट और बेहतर पावर एफिशिएंसी में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं पड़ती है.&amp;nbsp;
LTPO Display में क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
LTPO की मैन्युफैक्चरिंग सामान्य OLED डिस्प्ले की तुलना में ज्यादा मुश्किल होती है. यही वजह है कि यह टेक्नोलॉजी आमतौर पर हाई-एंड स्मार्टफोन और स्मार्ट वॉच में देखने को मिलती है. इसके अलावा कुछ मामलों में डिस्प्ले डेंसिटी को लेकर भी समझौता करना पड़ सकता है, हालांकि ऐसा कम ही देखने को मिलता है. LTPO में बड़े IGZO TFTs के इस्तेमाल से कुछ स्थितियों में डिस्प्ले डेंसिटी प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Amazon&amp;Flipkart सेल में Poco X8 से Nord CE 6 Lite तक, 30 हजार में बेस्ट फोन</title>
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        <description><![CDATA[ Amazon और Flipkart की सेल में अगर आप 30,000 रुपये से कम में स्मार्टफोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो Poco, Redmi, OnePlus और Motorola के कुछ मॉडल देख सकते हैं. इन फोन्स में 9,000mAh तक की बड़ी बैटरी, 144Hz तक का रिफ्रेश रेट और 50 मेगापिक्सल कैमरा जैसे फीचर्स मिलते हैं. &amp;nbsp;तो आइए जानते हैं कि Amazon-Flipkart सेल में 30,000 रुपये के अंदर स्मार्टफोन ऑप्शन कौन-से हैं.&amp;nbsp;
OnePlus Nord N6
कम बजट में बड़ी बैटरी चाहने वालों के लिए OnePlus Nord N6 एक बेस्ट ऑप्शन है. इसकी शुरुआती कीमत 24,999 रुपये है. फोन में 6.75 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. इसमें 8,000mAh की बैटरी और 45W चार्जिंग दी गई है. फोन MediaTek Dimensity 6360 Apex प्रोसेसर पर चलता है और 6GB तक RAM साथ ही 128GB स्टोरेज मिलता है, हालांकि इसका सॉफ्टवेयर सपोर्ट 2 साल के OS अपडेट और 3 साल के सिक्योरिटी अपडेट तक सीमित है.&amp;nbsp;
Poco X8
इस लिस्ट में Poco X8 को 29,999 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीदा जा सकता है. फोन में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. इसे IP69K रेटिंग के साथ पेश किया गया है. &amp;nbsp;फोन में 50 मेगापिक्सल का मेन रियर कैमरा और डेप्थ मैपिंग के लिए एक अतिरिक्त कैमरा दिया गया है, हालांकि वीडियो रिकॉर्डिंग 1080p पर 30fps तक सीमित है. &amp;nbsp;इसकी सबसे बड़ी खासियत 9,000mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है, जो 67W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसमें Snapdragon 6s Gen 4 प्रोसेसर, 8GB तक RAM और 256GB तक स्टोरेज मिलता है.&amp;nbsp;
Motorola G77 Power
Motorola G77 Power इस लिस्ट में 22,999 रुपये की शुरुआती कीमत के साथ सबसे कम कीमत वाले ऑप्शनों में शामिल है .फोन में 6.74 इंच का FHD+ LCD डिस्प्ले और 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है. इसे IP64 रेटिंग दी गई है. &amp;nbsp;इस फोन की खासियत इसका 7,000mAh बैटरी पैक है, जिसे कंपनी सामान्य इस्तेमाल में 2 दिन तक चलने वाला बताती है. फोन MediaTek Dimensity 6400 प्रोसेसर पर चलता है और 30W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करता है.&amp;nbsp;
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Redmi Note 17
Redmi Note 17 की शुरुआती कीमत 27,999 रुपये है. फोन में 6.9 इंच का FHD+ AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और Gorilla Glass 7i प्रोटेक्शन के साथ आता है. &amp;nbsp;बॉडी को IP65 रेटिंग मिली है. फोन में 8,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसमें Snapdragon 4 Gen 4 प्रोसेसर, 8GB तक RAM, 128GB स्टोरेज और 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा मिलता है.
OnePlus Nord CE 6 Lite
Nord CE 6 Lite की शुरुआती कीमत 28,999 रुपये है. इसमें 6.72 इंच का FHD+ AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. फोन में MediaTek Dimensity 7400 Apex प्रोसेसर दिया गया है. &amp;nbsp;इसमें 7,000mAh की बैटरी और 45W चार्जिंग मिलती है. फोन में 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है.
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>एक App से दूसरे App तक WhatsApp का कनेक्शन, जानें कैसे करें Link</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में एक ऐप से दूसरे ऐप पर कोई जानकारी भेजना डेली के काम का हिस्सा बन चुका है. खासकर WhatsApp पर किसी दूसरे ऐप से फोटो, वीडियो, PDF, ऑडियो या कोई लिंक शेयर करने की जरूरत अक्सर पड़ती है. iPhone में WhatsApp को किसी दूसरे ऐप से जोड़ने या उसमें कंटेंट भेजने के लिए अलग-अलग तरीके मौजूद हैं. इनमें Universal Links, Custom URL Scheme और Share Extension जैसे ऑप्शन शामिल हैं. इनका इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि एक App से दूसरे App तक WhatsApp का कनेक्शन कैसे करें.&amp;nbsp;
Universal Link से WhatsApp कैसे करें Link?
WhatsApp अकाउंट से लिंक करने के लिए Universal Link सबसे आम तरीकों में से एक है. इसमें wa.me के साथ WhatsApp नंबर को इंटरनेशनल फॉर्मेट में लिखना होता है. वहीं नंबर लिखते समय +, शुरुआत में अतिरिक्त 0, ब्रैकेट या डैश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसके अलावा Universal Link में पहले से लिखा हुआ मैसेज भी जोड़ा जा सकता है. इससे WhatsApp चैट खुलने पर वह मैसेज टेक्स्ट बॉक्स में पहले से दिखाई देता है. इसके लिए नंबर के साथ ?text= के जरिए URL-encoded मैसेज जोड़ा जाता है. इससे तरह बिना किसी खास नंबर के भी पहले से तैयार मैसेज वाला WhatsApp लिंक बनाया जा सकता है.&amp;nbsp;
Custom URL Scheme का क्या है काम?
iPhone पर WhatsApp को सीधे खोलने के लिए Custom URL Scheme का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए whatsapp:// के साथ जरूरी पैरामीटर दिया जाता है. इससे ऐप खुलने के साथ तय किया गया काम भी किया जा सकता है, जैसे कोई टेक्स्ट भेजने के लिए तैयार करना. &amp;nbsp;अगर किसी ऐप को यह जांचना हो कि iPhone में WhatsApp इंस्टॉल है या नहीं, तो UIApplication canOpenURL: का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए WhatsApp URL को ऐप की Info.plist फाइल में LSApplicationQueriesSchemes के अंदर शामिल करना जरूरी होता है.&amp;nbsp;
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Share Extension से WhatsApp पर क्या भेज सकते हैं?
WhatsApp पर दूसरे ऐप से &amp;nbsp;कंटेंट शेयर करने के लिए Share Extension सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले तरीकों में से एक है. iOS 8.0 से उपलब्ध इस फीचर की मदद से एक ऐप का कंटेंट दूसरे इंस्टॉल किए गए ऐप में भेजा जा सकता है. WhatsApp के जरिए टेक्स्ट, फोटो, वीडियो, ऑडियो नोट्स और म्यूजिक फाइल, PDF, कॉन्टैक्ट कार्ड और वेब URL शेयर किए जा सकते हैं.
Share Extension में अलग-अलग तरह के करीब 30 मीडिया फाइल टाइप सपोर्ट किए जाते हैं, हालांकि दूसरे ऐप से शेयर करते समय फाइल को एडिट नहीं किया जा सकता है. अगर किसी फोटो, वीडियो या दूसरी फाइल में बदलाव करना है, तो शेयर करने से पहले उसे उसी ऐप में एडिट करना होगा.&amp;nbsp;
WhatsApp पर फाइल शेयर करने की लिमिट क्या है?
एक बार में अधिकतम 30 फाइल अपलोड की जा सकती हैं. सभी फाइलों के लिए अधिकतम साइज 2GB है. वहीं वीडियो फाइल की सीमा 200MB और फोटो की सीमा 16MB है.
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Jio, Airtel और Vi यूजर्स के लिए बदलेगा रिचार्ज का तरीका, TRAI ने दिया 30 दिन का समय</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप मोबाइल रिचार्ज करते समय सिर्फ कॉल और SMS वाला कोई सस्ता प्लान तलाशते हैं, लेकिन ऐप में कई विकल्पों के बीच वह आसानी से नहीं मिलता? या फिर ऐसा रिचार्ज ढूंढने में परेशानी होती है जिसमें डेटा की जरूरत ही न हो? ऐसे मोबाइल यूजर्स के लिए Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI का नया कदम काफी अच्छा साबित हो सकता है.
TRAI ने Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea (Vi) समेत टेलीकॉम कंपनियों को अपने जरूरी रिचार्ज प्लान और Special Tariff Vouchers यानी STVs को ग्राहकों के सामने ज्यादा स्पष्ट तरीके से दिखाने का निर्देश दिया है. इसके लिए कंपनियों को 1 अक्टूबर को जारी निर्देश के 30 दिनों के भीतर अनुपालन करना होगा.
ऐप खोलते ही दिखेगा &amp;lsquo;TRAI-Mandated Packs&amp;rsquo;
अब सबसे बड़ा बदलाव यह है कि टेलीकॉम कंपनियों को अपने वेबसाइट और मोबाइल ऐप के प्रीपेड रिचार्ज सेक्शन में &amp;ldquo;TRAI-Mandated Packs&amp;rdquo; नाम से अलग और साफ दिखाई देने वाला सेक्शन देना होगा. TRAI के निर्देश के मुताबिक यह सेक्शन प्रीपेड रिचार्ज वाले हिस्से में पहले टैब के रूप में दिखाई देना चाहिए. इसके अलावा कंपनियों के अपने एक्सक्लूसिव रिटेल आउटलेट्स पर भी इन प्लान को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा.
TRAI को क्यों देना पड़ा यह निर्देश?
TRAI के मुताबिक उसे ग्राहकों से शिकायतें मिली थीं कि उसके द्वारा अनिवार्य किए गए कुछ वाउचर टेलीकॉम कंपनियों की वेबसाइट और ऐप पर आसानी से दिखाई नहीं देते. इन प्लेटफॉर्म की जांच भी की और पाया कि कुछ मामलों में ऐसे वाउचर अलग-अलग कैटेगरी में रखे गए थे या उन्हें खोजने के लिए ग्राहकों को कई पेज और स्क्रीन से गुजरना पड़ता था. इससे यूजर्स के लिए अपनी जरूरत के मुताबिक सही रिचार्ज चुनना मुश्किल हो रहा था.
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सिर्फ डेटा वाला रिचार्ज लेना जरूरी नहीं
इस पूरे बदलाव का एक अहम हिस्सा Voice और SMS-only STV है. TRAI के नए नियमों के तहत टेलीकॉम कंपनियों को ऐसे Special Tariff Vouchers उपलब्ध कराने होंगे जिनमें सिर्फ वॉयस कॉल और SMS की सुविधा हो और डेटा अनिवार्य रूप से शामिल न हो. यह उन ग्राहकों के लिए खासतौर पर उपयोगी हो सकता है जिन्हें मोबाइल डेटा की जरूरत कम पड़ती है या जो इंटरनेट के लिए Wi-Fi का इस्तेमाल करते हैं या जिनका फोन इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉल और SMS तक सीमित है.
30 दिन या उससे कम की वैलिडिटी वाले विकल्प
नए नियम में सिर्फ लंबी अवधि के Voice-SMS-only STV की बात नहीं है. कंपनियों को ऐसे STV देने होंगे जिनकी वैलिडिटी उन Voice-SMS-Data वाले STV की 30 दिन या उससे कम वाली वैलिडिटी के अनुसार हो. इसके अलावा हर महीने उसी तारीख को दोबारा रिन्यू किए जा सकने वाला कम से कम एक विकल्प देना होगा. अगर किसी महीने वह तारीख मौजूद नहीं है, तो उस महीने की आखिरी तारीख को रिन्यूअल की तारीख माना जाएगा. कंपनियों को लंबी वैलिडिटी वाला कम से कम एक Voice-SMS-only STV भी उपलब्ध कराना होगा, जो उनके संबंधित लंबी अवधि वाले बंडल प्लान के अनुसार हो.
नियम कब से लागू होंगे?
Voice-SMS-only STVs से जुड़े नए नियम 22 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे. वहीं रिचार्ज प्लान को सही तरीके से दिखाने वाले निर्देश के तहत कंपनियों को 1 अक्टूबर 2026 से 30 दिनों के अंदर पालन करना होगा.
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        <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Xiaomi 17T खरीदना हुआ महंगा, कीमत में सीधे 5,000 रुपये का उछाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xiaomi-17t-खरीदना-हुआ-महंगा-कीमत-में-सीधे-5000-रुपये-का-उछाल</link>
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        <description><![CDATA[ फेस्टिव सीजन शुरू होने से पहले अगर आप Xiaomi 17T खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको बता दें कि इस फोन की कीमत पर एक नया अपडेट सामने आया है. कंपनी के इस स्मार्टफोन की भारत में कीमत एक बार फिर बढ़ा दी गई है. इस बार फोन के दोनों स्टोरेज मॉडल पर सीधे 5,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. 12GB रैम के साथ 256GB और 512GB स्टोरेज वाले दोनों वेरिएंट अब पहले के मुकाबले महंगे हो गए हैं. नई कीमतें 1 अक्टूबर से लागू हैं और Xiaomi की ऑनलाइन स्टोर के साथ Amazon India पर भी दिखाई दे रही हैं.&amp;nbsp;
Xiaomi 17T की कीमत फिर कितनी बढ़ी है?
नई कीमत के बाद Xiaomi 17T के 12GB रैम और 256GB स्टोरेज मॉडल की कीमत 69,999 रुपये हो गई है. इससे पहले यह वेरिएंट 64,999 रुपये में मिल रहा था. वहीं 12GB रैम और 512GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत अब 74,999 रुपये हो गई है. पहले इसकी कीमत 69,999 रुपये थी. इन दोनों ही वेरिएंट पर 5,000 रुपये का सीधा इजाफा किया गया है.&amp;nbsp;
लॉन्च के मुकाबले अब कितना महंगा?
Xiaomi 17T को भारत में जून में लॉन्च किया गया था.उस समय 256GB मॉडल की शुरुआती कीमत 59,999 रुपये, जबकि 512GB वेरिएंट की कीमत 64,999 रुपये रखी गई थी. अब नई कीमतों के साथ दोनों मॉडल अपनी शुरुआती कीमत से 10,000 रुपये महंगे हो चुके हैं. इससे पहले जुलाई में भी कंपनी ने दोनों वेरिएंट की कीमत में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की थी. फोन को भारत में ब्लैक, ब्लू और वायलेट रंगों में पेश किया गया है.&amp;nbsp;
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Xiaomi 17T में क्या मिलता है?
फोन में 6.59 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 1.5K रेजोल्यूशन और 120Hz अडेप्टिव रिफ्रेश रेट के साथ आता है. डिस्प्ले की सुरक्षा के लिए Corning Gorilla Glass 7i दिया गया है. परफॉर्मेंस के लिए इसमें MediaTek Dimensity 8500-Ultra चिपसेट मिलता है. फोन में 12GB LPDDR5x रैम और 512GB तक UFS 4.1 स्टोरेज का ऑप्शन है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;Leica कैमरा और बड़ी बैटरी
Xiaomi 17T में 6,500mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी दी गई है. फोन 67W फास्ट चार्जिंग और 22.5W रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करता है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 32 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलता है. पीछे Leica-ब्रांडेड कैमरा सेटअप दिया गया है. इसमें 50 मेगापिक्सल का Light Fusion 800 मुख्य कैमरा, 50 मेगापिक्सल का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा और 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा शामिल है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Xiaomi, 17T, खरीदना, हुआ, महंगा, कीमत, में, सीधे, 5, 000, रुपये, का, उछाल</media:keywords>
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        <title>बिजली का बिल 20% तक तुरंत घटेगा! फ्रिज&amp;इन्वर्टर में बस करें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ गर्मियां हों या सर्दियां कोई भी सीजन हो बिजली की जरूरत तो पड़ती ही है. लेकिन घर में कुछ खास उपकरण ऐसे होते हैं जिनसे बिजली की खपत ज्यादा होती है. और बिजली का बिल भी बढ़कर आता है.&amp;nbsp;गर्मियों के दिनों में जब एसी, फ्रिज और इन्वर्टर दिन-रात चलते हैं. तो मीटर काफी तेजी से भागता है. लोग सोचते हैं कि बिजली की खपत कम करने के लिए शायद महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बदलने पड़ेंगे या फिर अपने आराम से समझौता करना होगा.&amp;nbsp;
तो आपको बता दें ऐसा करने की जरूरत नहीं है. घर के कुछ जरूरी उपकरणों की सही सेटिंग बदलकर आप अपने बिजली के बिल को सीधे 20 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं. जान लीजिए कुछ ऐसे आसान और बेहद असरदार तरीके जिन्हें अगर आप अपने घर के फ्रिज और इन्वर्टर पर आजमा लें तो महीने के बिजली बिल से आपको काफी हद तक राहत मिल जाएगी.&amp;nbsp;
फ्रिज का तापमान और कूलिंग कंट्रोल है जरूरी
घर में रखा फ्रिज चौबीस घंटे चालू रहने वाला इकलौता ऐसा उपकरण है जो सबसे ज्यादा बिजली की खपत करता है. ज्यादातर लोग या तो फ्रिज की कूलिंग को हमेशा मैक्सिमम पर सेट रखते हैं या फिर मौसम बदलने के बाद भी उसका तापमान बदलना भूल जाते हैं. गर्मियों के हिसाब से फ्रिज का तापमान मीडियम यानी दो से चार डिग्री सेल्सियस के बीच रखना बिल्कुल सही रहता है. जबकि सर्दियों में इसे थोड़ा कम किया जा सकता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा बहुत से लोग फ्रिज को दीवार से बिल्कुल सटाकर रख देते हैं. जिससे उसके पीछे लगे कॉइल को हवा नहीं मिल पाती और कंप्रेसर पर ज्यादा दबाव पड़ने के चलते बिजली का बिल तेजी से बढ़ने लगता है. फ्रिज के दरवाजे को बार-बार खोलना और अंदर गर्म खाना रख देना भी कंप्रेसर को ज्यादा मेहनत करने पर मजबूर करता है. इसलिए फ्रिज को हमेशा दीवार से थोड़ा दूर हवादार जगह पर रखें, जरूरत पड़ने पर ही उसका दरवाजा खोलें और उसके थर्मोस्टेट की सही सेटिंग का खास ख्याल रखें.

इन्वर्टर की बैटरी और लोड मैनेजमेंट से बचाएं बिजली
घर का इन्वर्टर और उसकी बैटरी भी बिजली के बिल में बढ़ाने में रोल अदा करते हैं. जब घर की इन्वर्टर बैटरी पुरानी हो जाती है और उसमें इलेक्ट्रोलाइट का लेवल कम हो जाता है. तो वह चार्ज होने में बहुत ज्यादा वक्त लेने लगती है. ज्यादा देर तक चार्जिंग होने का मतलब है कि मीटर लगातार बिजली खींच रहा है और बिजली की भारी बर्बादी हो रही है. इसके अलावा कई लोग घर की मेन वायरिंग और इन्वर्टर इंस्टॉलेशन के वक्त लोड का सही से हिसाब नहीं लगाते.&amp;nbsp;
जिससे पावर लीकेज और बैटरी ओवरचार्जिंग की समस्या बनी रहती है. आपको समय-समय पर अपनी बैटरी के पानी की जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चार्जिंग पूरी होने के बाद इन्वर्टर ऑटो-कट मोड पर आ जाए. इन्वर्टर के साथ जुड़े उन उपकरणों को बंद रखें जिनकी उस वक्त कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि छोटा सा लोड भी पूरे महीने में बिल में यूनिट बढ़ाता है.

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इन बातों का भी रखें ध्यान
फ्रिज और इन्वर्टर की सही सेटिंग के अलावा रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें भी बिजली का बिल घटाने में बहुत बड़ा योगदान देती हैं. अक्सर घर से निकलते वक्त कमरे के पंखे, कूलर या टीवी का स्विच खुला छोड़ देते हैं या फिर फोन और लैपटॉप चार्ज होने के बाद भी चार्जर को बोर्ड में ही प्लग इन रहने देते हैं जिसे फैंटम लोड कहा जाता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा घर के पुराने और पारंपरिक बल्बों की जगह एलईडी लाइट्स का इस्तेमाल करना शुरू करें क्योंकि वे बहुत कम बिजली में ज्यादा रोशनी देती हैं. इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद काम की बातों को अगर आप अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लेंगे तो आप खुद देखेंगे कि अगले महीने आपका बिजली का बिल 20 प्रतिशत तक कम होकर आएगा.
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        <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>बार&amp;बार Spam में क्यों जा रहा जरूरी Email? Gmail में ऐसे रोकें</title>
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        <description><![CDATA[ बार-बार Spam में क्यों जा रहा जरूरी Email? Gmail में ऐसे रोकें ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>स्मार्ट ग्लास के बीच Apple नहीं भूला Vision Pro, नए हेडसेट पर काम जारी!</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्ट ग्लास और नए गैजेट्स के दौर में दुनिया भर की टेक कंपनियां लगातार कुछ नया करने में जुटी हैं और ऐसे में भला एप्पल पीछे कैसे रह सकता है. भले ही आजकल बाजार में स्मार्ट ग्लासेस और एआई पिंस की बहुत चर्चा चल रही हो. लेकिन एप्पल ने अपने पॉपुलर और महंगे मिक्स्ड-रियलिटी हेडसेट विजन प्रो को बिल्कुल भी नहीं भुलाया है. कंपनी के भीतर इस डिवाइस के नए और हल्के मॉडल पर चुपचाप काम चल रहा है.&amp;nbsp;
टेक लवर्स के बीच इस बात को लेकर काफी उत्सुकता है कि एप्पल अपने इस फ्यूचरिस्टिक गैजेट को किस नए रूप में मार्केट में उतारने की तैयारी कर रहा है. हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या आने वाला मॉडल कितना महंगा होगा. इस मामले में कंपनी की तरफ से फिलहाल क्या अपडेट है चलिए इस बारे में जानते हैं.
हल्के और सस्ते विजन प्रो मॉडल की तैयारी
एप्पल के शुरुआती विजन प्रो के साथ सबसे बड़ी प्राॅब्लम उसका भारी वजन और बहुत ज्यादा कीमत थी. जो हर कोई आसानी से अफोर्ड नहीं कर सकता था. अब रिपोर्ट्स के मुताबिक एप्पल इस प्राॅब्लम से निपटने के लिए एक नए हार्डवेयर कॉन्सेप्ट पर काम कर रहा है. जिसे N224 कोडनेम दिया गया है. कंपनी के इंजीनियर्स का फोकस इसके वजन को कम करना और कीमत को थोड़ा पॉकेट-फ्रेंडली बनाना है. जिससे लोग इसे लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के पहन सकें.&amp;nbsp;
इस नए प्रोजेक्ट के तहत अंदरूनी पार्ट्स को बिल्कुल नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है जिससे यूजर को ज्यादा बेहतर, हल्का और आरामदायक एक्सपीरिएंस मिल सके. एप्पल यह अच्छी तरह समझता है कि अगर किसी डिवाइस को आम जनता तक पहुंचाना है. तो उसे भारी-भरकम डिजाइन से बाहर निकालना ही होगा. आने वाले महीनों में इस मॉडल से जुड़े कुछ और दिलचस्प खुलासे होने की उम्मीद है. जिस पर पूरी टेक इंडस्ट्री की पैनी नजर बनी हुई है.

स्मार्ट ग्लास और कॉम्पैक्ट डिजाइन पर खास नजर
विजन प्रो के अपडेट के अलावा एप्पल&amp;nbsp; बिना डिस्प्ले वाले स्मार्ट ग्लास की तकनीक पर भी अंदरखाने तेजी से काम कर रही है. हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी अपने शुरुआती रिसर्च फेज में है. लेकिन कंपनी के कई सीनियर इंजीनियर्स इस पर अपना पूरा फोकस बनाए हुए हैं. इसके अलावा मेटा और दूसरे ब्रांड्स के वियरएबल प्रोडक्ट्स के हार्डवेयर अप्रोच की भी स्टडी की जा रही है जिससे कैमरों, सेंसर्स और प्रोसेसर को एक बहुत ही कॉम्पैक्ट डिजाइन में फिट किया जा सके.&amp;nbsp;
एप्पल फ्यूचर में आने वाले अपने गैजेट्स बेहद हल्के और आम आदमी के इस्तेमाल करने में आसान बनाने के लिए डिजाइन रिसर्च पर काफी जोरों से काम कर रही है. कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूजर को एक ऐसा नेचुरल लुक मिले जिसे पहनकर बाहर निकलने में किसी को भी झिझक महसूस न हो.
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कब हो सकता है लाॅन्च?
आने वाले इन नए मॉडल्स में एप्पल अपनी दमदार और कस्टमाइज्ड चिप तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है. जिससे इनकी परफॉरमेंस और बैटरी की एनर्जी एफिशिएंसी दोनों में सुधार देखने को मिलेगा. हालांकि अगर आप सोच रहे हैं कि यह नया हल्का हेडसेट और स्मार्ट ग्लास कल आपको जल्द ही बाजार में दिख जाएगा. तो ऐसा नहीं है इसके लिए आपको थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नए डिवाइस के साल 2028 के अंत या 2029 से पहले मार्केट में आने की कोई खास उम्मीद नहीं है. एप्पल हर प्रोजेक्ट पर बहुत बारीकी से काम करता है और जब तक चीजें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों लेवल पर पूरी तरह परफेक्ट नहीं हो जातीं वे किसी भी आधिकारिक तारीख की घोषणा करने से बचते हैं. तब तक टेक लवर्स के पास सिर्फ कयास लगाने और इस शानदार भविष्य की तकनीक का इंतजार करने का ही ऑप्शन बचता है.

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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>6 साल के अपडेट्स से 6000mAh बैटरी तक, Galaxy A08 भारत में लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung ने भारत में अपना नया Galaxy A08 लॉन्च किया है. कंपनी ने इस फोन में बड़ी बैटरी और 50 मेगापिक्सल कैमरा के साथ लंबे Software Support पर भी खास जोर दिया है. Galaxy A08 को एंड्रॉयड 16 पर आधारित One UI 9 के साथ पेश किया गया है और इसमें छह पीढ़ियों तक OS Upgrade साथ ही छह साल के Security Updates मिलने की बात कही गई है. तो आइए जानते हैं कि Samsung Galaxy A08 की कीमत और खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
Samsung Galaxy A08 की कीमत कितनी है?
Galaxy A08 को भारत में 4GB RAM और 64GB Storage वाले एक ही वेरिएंट में उतारा गया है. इसकी कीमत 18,499 रुपये है. फोन Dark Blue, Green और Silver रंगों में उपलब्ध है. इसे Samsung Exclusive Stores, Partner Retailers, Samsung.com और दूसरे Online Platforms से खरीदा जा सकता है. कंपनी एलिजिबल बैंक कार्ड्स पर छह महीने तक Zero-Interest EMI और NBFC Partners के जरिए नौ महीने तक की EMI सुविधा भी दे रही है.&amp;nbsp;
6.7 इंच की स्क्रीन और Helio G99+ चिपसेट
Galaxy A08 में 6.7 इंच का HD+ PLS LCD Display दिया गया है. स्क्रीन 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. फोन में MediaTek Helio G99+ Chipset लगाया गया है, जिसे 4GB RAM के साथ जोड़ा गया है. 64GB की इंटरनल स्टोरेज को MicroSD Card की मदद से 2TB तक बढ़ाया जा सकता है. फोन की सिक्योरिटी के लिए Samsung Knox Protection मौजूद है, जो पासवर्ड और बायोमेट्रिक जानकारी जैसे सेंसिटिव डेटा की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होती है.&amp;nbsp;
Gemini और Perplexity का भी मिलेगा सपोर्ट
Galaxy A08 में One UI 9 के साथ कई AI फीचर्स दिए गए हैं. फोन Circle to Search 3.0, Gemini और Perplexity को सपोर्ट करता है. यूजर्स Gemini और Perplexity को वॉइस के जरिए या पावर बटन को लंबे समय तक दबाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा Samsung Ecosystem के क्विक शेयर और मोड्स-रूटीन जैसे फीचर्स भी इसमें मिलते हैं.&amp;nbsp;
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50MP कैमरा और 6000mAh बैटरी
फोटोग्राफी के लिए Galaxy A08 के पीछे Dual Camera Setup है. इसमें f/1.8 Aperture वाला 50MP प्राइमरी सेंसर और f/2.4 Aperture वाला 2MP डेप्थ सेंसर दिया गया है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 8MP फ्रंट कैमरा मिलता है, जिसका Aperture f/2.0 है. &amp;nbsp;फोन में 6,000mAh की Battery दी गई है, जो 25W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है. इसका बॉडी थिकनेस 8mm है. साथ ही सामने Corning Gorilla Glass 5 Protection मिलता है. इसके अलावा फोन को IP64 Dust और Splash Rating भी मिली है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बार&amp;बार गर्म हो रहा फोन, तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग</title>
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        <description><![CDATA[ बार-बार गर्म हो रहा फोन, तुरंत बदलें ये 5 सेटिंग ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>फास्ट चार्जिंग के लिए कैसी केबल चुनें? Type&amp;A और Type&amp;C का अंतर समझें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फास्ट-चार्जिंग-के-लिए-कैसी-केबल-चुनें-type-a-और-type-c-का-अंतर-समझें</link>
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        <description><![CDATA[ अक्सर देखा गया है कि कुछ चार्जर फोन को स्लो चार्ज करते हैं तो वहीं कुछ तेजी से, इसमें चार्जर एडाप्टर की कैपेसिटी का फर्क काम कर रहा होता है. कम वाॅट वाला चार्जर फोन स्लो चार्ज करता है तो वहीं ज्यादा वाॅट वाला तेज. लेकिन सिर्फ चार्जिंग एडाप्टर ही इसमें रोल अदा नहीं करता. बल्कि आप किस तरह की चार्जिंग केबल इस्तेमाल कर रहे हैं इस बात से भी फर्क पड़ता है.&amp;nbsp;
कई लोग सोचते हैं टाइप-सी केबल फोन जल्दी चार्ज करती है और टाइप-ए स्लो. लेकिन क्या वाकई ऐसा है. आज जब लगभग सारे&amp;nbsp;स्मार्टफोन फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आते हैं. तो ऐसे में कौनसी केबल यूज करना सही है. अगर आपको भी इसे लेकर कंफ्यूजन है तो कोई बात नहीं हम आपकी इस कंफ्यूजन को दूर कर देते हैं.&amp;nbsp;
USB Type-A और Type-C कौनसी फास्ट?
USB केबल के बारे में&amp;nbsp;सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि दोनों केबल्स की बनावट यानी आर्किटेक्चर में क्या फर्क होता है. पुरानी और आम दिखने वाली यूएसबी टाइप-ए केबल में आमतौर पर चार से नौ पिन होती हैं. जिन्हें पुराने चार्जिंग स्टैंडर्ड के हिसाब से डिजाइन किया गया था.&amp;nbsp;
वहीं अगर हम नई टाइप-सी कनेक्टर की बात करें तो इसके अंदर पूरे चौबीस पिन होते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह एक्स्ट्रा पिन सिर्फ सहूलियत के लिए दोनों तरफ से लगाने की सुविधा ही नहीं देते. बल्कि एक साथ भारी मात्रा में करंट, वोल्टेज और डेटा को बहुत तेजी से फोन तक पहुंचाने का काम करते हैं.&amp;nbsp;
यही वजह है कि टाइप-सी केबल आज के समय में हर बड़े गैजेट की पहली पसंद बन चुकी है.&amp;nbsp;टाइप-ए केबल सिर्फ बारह से अठारह वाट तक की पावर आसानी से दे पाती है. लेकिन जब बात सौ या दो सौ वाट से ऊपर की पावर डिलीवरी की आती है तो वहां पुरानी टाइप-ए केबल पीछे छूट जाती है और टाइप-सी ही काम आती है.&amp;nbsp;

कुछ खास ब्रांड्स की Type-A केबल तेज क्यों होती हैं?
अब आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि अगर टाइप-सी इतनी पावरफुल है. तो फिर ओप्पो, वीवो या वनप्लस जैसी कंपनियां अपने महंगे और दमदार स्मार्टफोन्स के साथ आज भी टाइप-ए केबल क्यों देती हैं और वे इतनी तेजी से फोन कैसे चार्ज कर लेते हैं. तो आपको बता दें इसका सीधा सा जवाब यह है कि यह कंपनियां आम और सस्ती टाइप-ए केबल का इस्तेमाल नहीं करतीं. उनकी केबल दिखने में भले ही टाइप-ए जैसी लगे. लेकिन उनके अंदर पांच पिन होती हैं और उनका पूरा चार्जिंग सिस्टम एक खास प्रोप्राइटरी प्रोटोकॉल पर काम करता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा इन ब्रांड्स की केबल थोड़ी मोटी और मजबूत होती हैं जिससे बिना गर्म हुए भारी करंट को आसानी से संभाला जा सके. इसका मतलब यह है कि अगर आप ओप्पो या वनप्लस का फोन इस्तेमाल कर रहे हैं. तो उसके साथ मिलने वाली खास केबल और चार्जर ही आपको सुपरफास्ट चार्जिंग दे सकता है. लेकिन किसी लोकल केबल से आप वैसी स्पीड कभी हासिल नहीं कर पाएंगे चाहे आपका चार्जर कितना भी बड़ा क्यों न हो.

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इन बातों का रखें खास ख्याल
अपने फोन के लिए सही केबल चुनने का सबसे आसान और सेफ रूल यह है कि हमेशा वही केबल इस्तेमाल करें जो आपके फोन के डिब्बे के साथ कंपनी ने दी थी. वह केबल आपके डिवाइस के हार्डवेयर और बैटरी के हिसाब से पूरी तरह से मेल खाती है. अगर किसी वजह से आपकी ओरिजनल केबल टूट जाती है या खो जाती है. तो हमेशा उसी ब्रांड की ओरिजनल केबल खरीदें. अगर आपका फोन पावर डिलीवरी यानी पीडी प्रोटोकॉल और टाइप-सी सपोर्ट के साथ आता है.&amp;nbsp;
तो हमेशा अच्छी क्वालिटी की टाइप-सी टू टाइप-सी केबल का लें. लोकल और बहुत सस्ती केबल्स खरीदने से बचें क्योंकि वे न केवल आपके फोन को बहुत धीरे चार्ज करती हैं. बल्कि कई बार ज्यादा गर्म होने की वजह से बैटरी और फोन के मदरबोर्ड को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. हमेशा समझदारी से सही एम्पियर और वॉट क्षमता वाली केबल चुनें जिससे आपका फोन लंबे समय तक सेफ रहे और आपको बार-बार चार्जिंग की सुस्ती से परेशान न होना पड़े.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>किस वजह से फट जाते हैं पावर बैंक? कहीं आप भी तो नहीं करते ये गलतियां</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/किस-वजह-से-फट-जाते-हैं-पावर-बैंक-कहीं-आप-भी-तो-नहीं-करते-ये-गलतियां</link>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में पावर बैंक लोग काफी इस्तेमाल करते हैं. जब भी हम घर से बाहर लंबे सफर पर निकलते हैं या फिर ऑफिस के काम में बिजी रहते हैं. तो फोन की बैटरी का कुछ भरोसा नहीं होता इसलिए पावर बैंक का सहारा लेना ही पड़ता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस छोटी सी चीज को आप अपनी जेब या बैग में बेफिक्र होकर रखते हैं. वह कभी आपको नुकसान भी पहुंचा सकती है.&amp;nbsp;
आए दिन सोशल मीडियापर पावर बैंक फटने या उसमें आग लगने की घटनाएं देखने को मिल जाती हैं. लोगों को लगता है कि यह अचानक से खराब हो जाते हैं. जबकि ऐसा नहीं है बल्कि लगातार की जाने वाली गलतियों के चलते ऐसा हो जाता है. इसलिए अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखने हैं और इन गलतियों से बचते हैं तो आप और आपका पाॅवर बैंक दोनों सेफ रहेंगे.
लोकल और सस्ते पावर बैंक खरीदने की गलती
अक्सर लोग पैसे बचाने के चक्कर में बाजार से बिना सोचे-समझे सस्ते और लोकल ब्रांड के पावर बैंक खरीद लेते हैं. जब मार्केट में कोई अच्छा ब्रांडेड पावर बैंक महंगा मिलता है. तो बहुत से लोग बचत करने के चक्कर में ऑनलाइन भी सस्ते चीनी पावर बैंक मंगा लेते हैं. इन सस्ते गैजेट्स में अंदर इस्तेमाल होने वाली बैटरी की क्वालिटी बेहद घटिया होती है और उनमें कोई प्रॉपर सर्किट प्रोटेक्शन भी नहीं दिया होता है.&amp;nbsp;
ऐसे पावर बैंक में जरा सा भी शॉर्ट सर्किट होने और थोड़ा सा ओवरलोड बढ़ने पर बैटरी का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है. जो आगे चलकर ब्लास्ट की वजह बन जाता है. इसलिए हमेशा किसी भरोसेमंद और अच्छी कंपनी का ही पावर बैंक खरीदना चाहिए. भले ही उसके लिए थोड़े ज्यादा पैसे क्यों न खर्च करने पड़ें. क्योंकि जान है तो जहान है.

धूप में रखना और चार्जिंग के दौरान इस्तेमाल करना
बहुत से लोग जाने-अनजाने में पावर बैंक को गलत जगह पर रख देते हैं और चार्जिंग के वक्त उसका इस्तेमाल करते हैं. कई बार लोग जल्दबाजी में पावर बैंक को कार के डैशबोर्ड पर या फिर ऐसी जगह छोड़ देते हैं. जहां सीधे तेज धूप पड़ती रहती है. गर्मियों के दिनों में जब गाड़ी का तापमान बढ़ता है. तो धूप में रखा पावर बैंक अंदर से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है और लिथियम-आयन बैटरी का तापमान सहने की क्षमता खत्म होने पर वह फट सकता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा कुछ लोगों की आदत होती है कि वे पावर बैंक को खुद चार्जिंग पर लगाकर उसी से अपना फोन भी चार्ज करने लगते हैं और फिर पावर बैंक से फोन चार्ज करते हुए उसपर हेवी गेमिंग या वीडियो स्ट्रीमिंग करने लगते हैं. इस डबल प्रेशर की वजह से बैटरी और उसके अंदर का सर्किट बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है और इंटरनल कंपोनेंट्स पिघलने लगते हैं. जिससे बड़ा हादसा होने का खतरा बढ़ जाता है.

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खराब चार्जर और लंबे समय तक प्लग में लगाए रखना
सबसे खतरनाक आदत यह है कि लोग पावर बैंक को चार्ज करने के लिए किसी भी लोकल एडाप्टर का इस्तेमाल करते हैं या फिर उसे फुल चार्ज होने के बाद भी घंटों तक बिजली के बोर्ड में ही प्लग इन छोड़ देते हैं. हर पावर बैंक के साथ एक तय एम्पीयर और वोल्टेज का स्पेसिफिकेशंस होता है. लेकिन लोग फोन वाले किसी भी तेज चार्जर से उसे रातभर के लिए चार्जिंग पर लगा देते हैं. जब पावर बैंक पूरा 100 परसेंट चार्ज हो जाता है और उसके बाद भी उसमें लगातार करंट जाता रहता है.&amp;nbsp;
तो ओवरचार्जिंग की वजह से अंदर की बैटरी फूलने लगती है. बैटरी फूलने का मतलब होता है कि उसके अंदर गैस बनने लगी है और वह किसी भी वक्त फट सकती है. इसके अलावा फटी हुई और डैमेज हो चुकी केबल का इस्तेमाल करना भी आग लगने की बड़ी वजह बनता है. हमेशा सही चार्जर का इस्तेमाल करें, बैटरी फुल होते ही उसे निकाल दें. अगर इन गलतियों से बचेंगे तो सेफ रहेंगे.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>लैपटॉप बैटरी जल्दी खत्म? बैकअप बढ़ाने के असरदार तरीके आजमाएं</title>
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        <description><![CDATA[ कोई भी जब नया लैपटॉप खरीद के इस्तेमाल करता है. तो उसकी बैटरी एकदम बढ़िया चलती है कई घंटों तक उसे चार्जिंग पर लगाने की जरूरत नहीं होती. लेकिन जैसे-जैसे टाइम बीतता जाता है. लैपटॉप की बैटरी बहुत जल्दी ड्रेन होने लगती है. पहले जहां कई घंटे तक बिना चार्जिंग के लैपटॉप आराम से चला था. वहीं कुछ टाइम बाद उसे दिन में दो-तीन बार चार्ज करना पड़ जाता है. बाहर ले जाते वक्त भी डर रहता है कि कहीं चलते-चलते शट डाउन ना हो जाए.&amp;nbsp;
अगर आप भी इस परेशानी से दो-चार हो रहे हैं. तो फिर क्या अब फिर से लैपटॉप बदलने का समय आ गया है? या फिर उसकी बैटरी चेंज करनी चाहिए. तो आपको बता दें ऐसा करने की जरूरत नहीं है. बस आप कुछ तरीकों को आजम करके ही अपनी इस परेशानी को काफी हद तक काम कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कैसे हैं आप बढ़ा सकते हैं अपने लैपटॉप का बैटरी बैकअप.&amp;nbsp;
स्क्रीन ब्राइटनेस और कीबोर्ड बैकलाइट कम रखें
बहुत से लोग अपने लैपटॉप को फुल ब्राइटनेस के मोड पर रखकर इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं तो फिर आपको बता दें यह आदत सही नहीं है. क्योंकि लैपटॉप की बैटरी खाने में सबसे ज्यादा हाथ स्क्रीन की ब्राइटनेस का होता है. कई लोग गैर जरूरी वक्त में भी स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम नहीं करते. जिस वजह से लैपटॉप को जितना चलना चाहिए उतना चल नहीं पता क्योंकि पूरी बैटरी स्क्रीन पी जाती है.&amp;nbsp; आप अगर आप रोजाना ब्राइटनेस कम ज्यादा नहीं करना चाहते तो आप ऑटो ब्राइटनेस का फीचर इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
इसके अलावा कीबोर्ड की बैकलाइट भी बैटरी ड्रेन करने में बड़ा अहम रोल अदा करती है. कीबोर्ड की बैक लाइट अक्सर बहुत स्लो हाई करके रखते हैं लेकिन जब आप नेचुरल लाइट में बैठे हों तो आपको उसे बहुत हाई करने की जरूरत नहीं होती. और जब अंधेरा होता है तो फिर काम लाइट भी कीबोर्ड को अच्छे से विजिबल बनाती है. इसके अलावा आप लैपटॉप में स्लीप मॉड भी एक्टिवेट कर सकते हैं बहुत देर तक एक्टिविटी ना होने पर उसकी स्क्रीन अपने आप बंद हो जाएगी.&amp;nbsp;

बैकग्राउंड ऐप्स और कम यूज होने वाले प्रोग्राम्स हटाएं
कई बार लैपटॉप की स्क्रीन पर तो सिर्फ एक ही ऐप खुला होता है. लेकिन बैकग्राउंड में कई ऐसे सॉफ्टवेयर दौड़ रहे होते हैं जिनका हमें कोई अंदाज़ा भी नहीं होता. एंटीवायरस स्कैन, क्लाउड सिंक, चैट ऐप्स और ऑटो-अपडेट्स बैकग्राउंड में बैटरी ड्रेन करते रहते हैं. जब एक साथ कई प्रोसेस चालू रहते हैं. तो प्रोसेसर पर लोड पड़ता है और बैटरी धड़ाम से नीचे आ जाती है. टास्क मैनेजर खोलकर चेक करें कि कौन सा ऐप बेवजह आपकी बैटरी जला रहा है.
जरूरत न होने पर ब्लूटूथ, वाई-फाई और एक्सटर्नल डिवाइस जैसे पेन ड्राइव या माउस को निकालकर रखें. ब्लूटूथ हमेशा ऑन रहने से लगातार डिवाइस सर्च करता रहता है. जिससे फालतू एनर्जी खर्च होती है. स्टार्टअप ऐप्स की सेटिंग में जाकर उन सभी फालतू प्रोग्राम्स को डिसेबल कर दें जो लैपटॉप ऑन होते ही अपने आप चालू हो जाते हैं. जब सिस्टम पर बोझ कम होगा तो बैटरी अपने आप ज्यादा चलेगी.&amp;nbsp;

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पावर सेविंग मोड्स का सही इस्तेमाल&amp;nbsp;
विंडोज और मैकबुक में मिलने वाले पावर सेवर और बैटरी सेवर मोड्स बड़े काम की चीज हैं. जब भी आप लैपटॉप पर कोई हेवी गेम या वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर नहीं चला रहे हों तो बैटरी सेवर मोड को हमेशा ऑन रखें. यह मोड बैकग्राउंड की एक्टिविटीज को रोक देता है और प्रोसेसर की स्पीड को थोड़ा बैलेंस कर देता है. जिससे बैटरी बेकार बर्बाद नहीं होती है.
इसके साथ ही चार्जिंग की अपनी कुछ आदतें सुधारनी बहुत जरूरी है. लैपटॉप को रातभर चार्जिंग पर लगाकर छोड़ना या बैटरी को बिल्कुल जीरो तक डिस्चार्ज होने देना बैटरी की लाइफ को कम कम करता है. कोशिश करें कि बैटरी हमेशा बीस से अस्सी प्रतिशत के दायरे में रहे. अगर आप इन छोटी-सी बातों का ध्यान रखेंगे तो आपके लैपटॉप की बैटरी लंबा चलेगी.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टाइपिंग छोड़िए, अब बोलकर लिखेगा AI! Fireflies.ai का नया Voice Tool लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ अब काम करते समय हर छोटी बात टाइप करने की जरूरत नहीं होगी. Fireflies.ai ने नया वॉइस टूल Talk लॉन्च किया है, जो आपकी आवाज को सीधे टेक्स्ट में बदलकर उसी जगह लिख देता है, जहां आप सामान्य तौर पर टाइप करते हैं. अब ईमेल लिखना हो, Slack पर जवाब देना हो, किसी डॉक्यूमेंट में कुछ जोड़ना हो या AI टूल में प्रॉम्प्ट डालना हो, आप बोलकर अपना काम कर सकते हैं.
खास बात यह है कि Talk सिर्फ मीटिंग के लिए नहीं है, बल्कि डेली के काम में अलग-अलग ऐप्स के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि Fireflies.ai का नया Voice Tool कैसे काम करता है.&amp;nbsp;
कैसे काम करता है Fireflies.ai Talk?
Fireflies.ai का नया वॉइस टूल Mac और Windows पर कंपनी के डेस्कटॉप ऐप के जरिए काम करता है. यूजर कीबोर्ड शॉर्टकट से Talk शुरू कर सकता है और जिस ऐप में काम चल रहा है, वहीं बोलकर टेक्स्ट दर्ज कर सकता है. आवाज से तैयार हुआ टेक्स्ट सीधे कर्सर की जगह पर दिखाई देता है. कंपनी ने इस फीचर को अपने सभी प्लान में उपलब्ध कराया है, जिसमें फ्री प्लान भी शामिल है. अभी यह Mac और Windows के डेस्कटॉप ऐप पर उपलब्ध है. iOS सपोर्ट जल्द आने की बात कही गई है, जिसके बाद Android वर्जन भी पेश किया जाएगा.&amp;nbsp;
100 से ज्यादा भाषाओं का सपोर्ट
Talk की खास बात इसका भाषा सपोर्ट भी है. यह 100 से ज्यादा भाषाओं में आवाज को टेक्स्ट में बदल सकता है. इनमें हिंदी, तमिल, मलयालम, तेलुगु, गुजराती, कन्नड़, ओडिया, बंगाली, मराठी, पंजाबी और सिंधी जैसी भारतीय भाषाएं भी शामिल हैं, &amp;nbsp;सिर्फ आवाज को शब्दों में बदलना ही इसका काम नहीं है. Talk अपने आप टेक्स्ट में जरूरी विराम चिह्न जोड़ता है और लिखे गए वाक्यों को साफ-सुथरा भी करता है. ऐसे में यूजर को बोलते समय कोमा या फुल स्टॉप अलग से बोलने की जरूरत नहीं पड़ती है.&amp;nbsp;
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कहां-कहां यूज कर सकते हैं Fireflies.ai Talk?
Talk का इस्तेमाल ईमेल लिखने, Slack मैसेज का जवाब देने, डॉक्यूमेंट में टेक्स्ट जोड़ने और AI टूल्स में प्रॉम्प्ट लिखने के लिए किया जा सकता है. Slack में किसी टीममेट या ग्रुप का नाम बोलने पर उसे संबंधित @mention में बदला जा सकता है.&amp;nbsp;
प्राइवेसी को लेकर कंपनी ने क्या कहा?
Fireflies.ai का कहना है कि डिक्टेशन डिवाइस पर रहता है. ऑडियो ट्रांसक्रिप्शन के लिए भेजा जाता है, लेकिन तैयार टेक्स्ट को स्टोर नहीं किया जाता और न ही कंपनी के AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. Talk को SOC 2 Type II, GDPR और HIPAA मानकों के अनुरूप होने का भी दावा किया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>किसी और के डॉक्यूमेंट पर सिम लेने पर होगी इतनी सजा, जान लें नियम</title>
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        <description><![CDATA[ आज के इस डिजिटल दौर में मोबाइल फोन सभी के पास होते हैं. और उसमें सबसे जरूरी चीज होती है सिम कार्ड जो कि बैंक खाते से लेकर सोशल मीडिया अकाउंट तक, हर जगह मोबाइल नंबर की जरूरत पड़ती है. देश में आज भी कई बच्चे अपने माता-पिता के नाम पर सिम चला रहे हैं. क्योंकि सिम खरीदने की लीगल उम्र 18 साल है. लेकिन बहुत से एडल्ट्स भी दूसरों के नाम पर सिम चला रहे हैं. मगर ऐसा करना कानूनन सही नहीं है.
सरकार और टेलीकॉम डिपार्टमेंट&amp;nbsp; अब फर्जी सिम कार्ड और साइबर फ्रॉड को लेकर बेहद सख्त हो गए हैं. हाल ही में दूरसंचार विभाग ने चेतावनी जारी की है कि इस तरह सिम लेना भारी पड़ सकता है. अगर आप भी बिना सोचे-समझे किसी और के कागजों पर सिम चालू करवा लेते हैं या अपनी आईडी किसी अनजान को दे देते हैं तो जान लीजिए ऐसा करने पर कितनी सजा हो सकती है.
दूसरे के नाम पर सिम पर भिजवा सकती है जेल
नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 के तहत फर्जी तरीके से सिम कार्ड हासिल करना या किसी दूसरे की पहचान चुराकर मोबाइल कनेक्शन लेना एक गंभीर और दंडनीय अपराध मान लिया गया है. अगर कोई व्यक्ति धोखाधड़ी, छलकपट या किसी अन्य की झूठी पहचान का सहारा लेकर सिम कार्ड खरीदता है. तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
इस तरह के मामलों में पकड़े जाने पर आरोपी को तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है. इतना ही नहीं इसमें सजा के साथ भारी-भरकम आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है. कानून के मुताबिक दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का तगड़ा जुर्माना ठोका जा सकता है. जेल और जुर्माने का यह कड़ा प्रावधान इसलिए लाया गया है जिससे लोग पहचान छिपाकर गलत गतिविधियों को अंजाम देने की न सोचें.

मदद करना या बेचना भी जुर्म
इस कानून का दायरा सिर्फ सिम खरीदने वालों के लिए ही नहीं है. बल्कि इसमें कई और पहलू भी शामिल हैं. अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे की आईडी पर सिम लेने में मदद करता है यानी उसका एबेटमेंट करता है या फिर इस तरह की किसी साजिश में शामिल पाया जाता है. तो उसे भी मुख्य आरोपी की तरह ही बराबर सजा भुगतनी होगी. इसके अलावा अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड को किसी और को इस्तेमाल करने के लिए दे देना या किराए पर चलाना भी बहुत खतरनाक है.
अगर आपके नाम पर कोई सिम है और उसका इस्तेमाल करके कोई शख्स साइबर अपराध, ठगी या राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देता है. तो कानूनी तौर पर आप फंस जाएंगे. पुलिस की जांच में असली सब्सक्राइबर यानी जिसके नाम पर सिम रजिस्टर्ड है. उसी को जिम्मेदार माना जाएगा. इसलिए कभी भी भूलकर अपना सिम कार्ड किसी दोस्त, रिश्तेदार या अनजान शख्स को इस्तेमाल के लिए न दें.&amp;nbsp;

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ऐसे करें खुद का बचाव
साइबर ठगी और फर्जीवाड़े के इस दौर में यह जानना बेहद जरूरी है कि आपके नाम पर कुल कितने सिम कार्ड एक्टिव हैं. कई बार लोगों को पता भी नहीं होता और उनकी आईडी पर कोई दूसरा शख्स फर्जी तरीके से मोबाइल नंबर चला रहा होता है. इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने संचार साथी) पोर्टल और ऐप लॉन्च किया है. आप इस आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आसानी से चेक कर सकते हैं कि आपकी पहचान पर कितने और कौन-कौन से नंबर चल रहे हैं.
अगर लिस्ट में कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे आप नहीं जानते और जिसका इस्तेमाल अब बंद हो चुका है. तो आप तुरंत पोर्टल के जरिए उसकी शिकायत कर सकते हैं और उसे ब्लॉक करवा सकते हैं. सरकार की यह पहल नागरिकों की सुरक्षा के लिए है. इसलिए सतर्क रहें किसी को भी अपने डॉक्यूमेंट्स का गलत इस्तेमाल न करने दें और अपनी डिजिटल पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखें.
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>TV को मिलेगा नया Slim डिजाइन! Amazon ने लॉन्च किया Fire TV Stick 4K</title>
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        <description><![CDATA[ टीवी पर कंटेंट देखने का तरीका लगातार बदल रहा है और अब स्ट्रीमिंग डिवाइस भी सिर्फ वीडियो चलाने तक सीमित नहीं रह गए हैं. इसी बीच Amazon ने नया Fire TV Stick 4K लॉन्च किया है. कंपनी ने इसके साथ नया Fire TV Remote भी पेश किया है, जबकि इसका ज्यादा प्रीमियम वर्जन Fire TV Remote Plus भी 2027 में लाने की तैयारी है.
नए Fire TV Stick 4K में पहले वाले स्लिम स्टिक डिजाइन को बरकरार रखा गया है, लेकिन अब इसमें 4K पिक्चर क्वालिटी मिलती है. खास बात यह है कि इसे टीवी के USB पोर्ट से सीधे पावर भी दिया जा सकता है.&amp;nbsp;
Fire TV Stick 4K में क्या बदला?
Amazon का नया Fire TV Stick 4K पिछले साल आए Fire TV Stick 4K Select से ज्यादा तेज है. इसका डिजाइन पतला और स्टिक जैसा है, जिसे सीधे टीवी के HDMI पोर्ट से कनेक्ट किया जा सकता है. वहीं, टीवी के USB पोर्ट से पावर देने की सुविधा भी इसमें मौजूद है. Prime Thanksgiving Sale के दौरान इसकी कीमत Prime मेंबर्स के लिए कम रखी जाएगी. यह सेल 13 अक्टूबर से शुरू होगी, जिसमें Early Access Sale भी शामिल है.&amp;nbsp;
नए Fire TV Remote का डिजाइन कैसा है?
Amazon ने नए Fire TV Remote के डिजाइन में भी बदलाव किया है. इसमें फ्लैट फ्रंट, हल्का घुमावदार बैक और गोल किए गए किनारे दिए गए हैं. कंपनी के अनुसार इसका निचला सेंटर ऑफ ग्रेविटी इसे हाथ में पकड़ने पर ज्यादा स्वाभाविक फिट बनाता है. Remote के होम बटन में अब रिसाइकल्ड एल्युमिनियम का इस्तेमाल किया गया है.
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Remote में मिलेगा Custom Button
नए Fire TV Remote में Custom Button भी जोड़ा गया है, जो पहले प्रीमियम Alexa Voice Remote Pro में दिया जाता था.यह Remote नए Fire TV Stick 4K के साथ भी मिलेगा. Fire TV Remote की प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है. इसकी शिपिंग 22 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
Fire TV Remote Plus में क्या खास होगा?
Amazon का Fire TV Remote Plus 2027 में आएगा. इसमें Fire TV के सामान्य फीचर्स के अलावा बैकलिट बटन और प्रीमियम एल्युमिनियम बॉडी मिलेगी. इसमें Find My Remote फीचर भी होगा. Alexa वाले डिवाइस से Alexa, find my remote कहने पर रिमोट आवाज करेगा, जिससे उसे ढूंढना आसान होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अब AI बताएगा Video में क्या कमी है! Instagram Creators के लिए आया नया फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर वीडियो बनाना अब सिर्फ शूटिंग और एडिटिंग करने तक का काम नहीं रह गया है. किसी वीडियो को कितने लोग देख रहे हैं, कितने समय तक देख रहे हैं, कितने लोगों ने उसे शेयर या लाइक किया और किस तरह का कंटेंट ऑडियंस को पसंद आ रहा है, ये आंकड़े भी क्रिएटर्स के लिए काफी मायने रखते हैं. अब Instagram इसी डेटा को समझने में क्रिएटर्स की मदद करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है.
Meta ने अपने Edits ऐप में नया AI Creative Assistant पेश किया है, जो क्रिएटर्स के Instagram अकाउंट के डेटा और परफॉर्मेंस को देखकर उन्हें पर्सनलाइज्ड सुझाव देगा. तो आइए जानते हैं कि Instagram Creators के लिए आया नया फीचर कैसे काम करता है.&amp;nbsp;
Instagram का AI Assistant कैसे करेगा काम?
नया AI Assistant सिर्फ सामान्य सलाह देने के साथ क्रिएटर के अपने Instagram डेटा को देखकर जवाब देगा. यह अकाउंट के फॉलो, व्यूज, वीडियो रिटेंशन, लाइक्स और शेयर जैसे मेट्रिक्स को देख सकता है. इसके साथ ही यह Instagram पर चल रहे ट्रेंड्स और उस क्रिएटर की ऑडियंस की पसंद को भी ध्यान में रखेगा. इस डेटा के आधार पर AI समय के साथ कंटेंट की परफॉर्मेंस में दिखने वाले पैटर्न पहचान सकता है. इससे क्रिएटर को उन चीजों के बारे में जानकारी मिल सकती है, जिन्हें सिर्फ आंकड़ों को देखकर समझना मुश्किल होता है.&amp;nbsp;
क्रिएटर AI से क्या पूछ सकेंगे?
Edits के इस फीचर में क्रिएटर्स कई तरह के सवाल पूछ सकते हैं. जैसे Instagram पर अभी क्या ट्रेंड कर रहा है, कोई वीडियो अच्छा क्यों चला या दूसरा वीडियो उम्मीद के मुताबिक क्यों नहीं चला, &amp;nbsp;इसके अलावा क्रिएटर यह भी जान सकते हैं कि उनके ऑडियंस को कौन-सा कंटेंट सबसे ज्यादा पसंद आया. AI से कंटेंट आइडिया, वीडियो की शुरुआत में बेहतर हुक, कैप्शन, ट्रेंडिंग ऑडियो और वीडियो की स्क्रिप्ट को लेकर भी सुझाव मांगे जा सकते हैं.&amp;nbsp;
यह टूल कैसे तैयार किया गया?
Meta ने इस AI टूल को बनाने के लिए कई क्रिएटर्स के साथ मिलकर काम किया. बातचीत के दौरान क्रिएटर्स ने बताया कि वह ऐसा AI नहीं चाहते, जो उनके लिए पूरा कंटेंट तैयार कर दे. उनकी जरूरत एक ऐसे टूल की थी, जो उनके कंटेंट के आंकड़ों को समझे और उनका सही तरीके से एनालिटिक्स करे. इसी वजह से यह AI क्रिएटर के वीडियो और पोस्ट की परफॉर्मेंस से जुड़ी जानकारी को देखकर यूजफुल सुझाव देता है, हालांकि कंटेंट में क्या बदलाव करना है या वीडियो को किस तरह आगे ले जाना है, इसका आखिरी फैसला क्रिएटर खुद करता है.&amp;nbsp;
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AI फीचर इस्तेमाल करने की भी है लिमिट
Instagram Edits का नया AI फीचर शुरुआत में क्रिएटर्स के लिए फ्री उपलब्ध होगा, लेकिन इसके इस्तेमाल की एक सीमा रहेगी. ज्यादा इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए Meta One सब्सक्रिप्शन के जरिए अतिरिक्त यूज की सुविधा उपलब्ध होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 05:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Freestanding या Integrated, किचन के लिए कौन&amp;सा Appliance ज्यादा सही?</title>
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        <description><![CDATA[ किचन को डिजाइन करते समय सिर्फ कैबिनेट, रंग और लाइटिंग पर ध्यान देना काफी नहीं होता है. यहां इस्तेमाल होने वाले Appliances भी पूरे स्पेस के लुक और काम करने के तरीके को बदल सकते हैं. खासकर जब बात Refrigerator, Dishwasher या दूसरे किचन Appliances की हो, तो एक सवाल अक्सर सामने आता है कि उन्हें कैबिनेट के अंदर छिपाकर रखा जाए या अलग यूनिट के तौर पर इस्तेमाल किया जाए. ऐसे में Integrated और Freestanding Appliances के बीच कंफ्यूजन शुरू होता है, इन दोनों ऑप्शनों के अपने फायदे हैं और सही चुनाव आपकी जरूरत और किचन के डिजाइन पर निर्भर करता है. तो आइए जानते हैं कि Freestanding या Integrate, किचन के लिए कौन सा Appliance ज्यादा सही है.
Integrated Appliances क्या होते हैं?
Integrated Appliances को किचन की कैबिनेटरी के साथ फिट किया जाता है. कई बार इनके ऊपर ऐसा पैनल लगाया जाता है, जो आसपास की कैबिनेट जैसा ही दिखाई देता है. इससे Appliances अलग से नजर नहीं आते और पूरा किचन ज्यादा एक जैसा और व्यवस्थित दिख सकता है. इनका एक और फायदा शोर से जुड़ा है..कैबिनेट के अंदर फिट होने के कारण कुछ Appliances की आवाज बाहर कम सुनाई दे सकती है. इससे किचन का माहौल ज्यादा शांत महसूस हो सकता है.
Freestanding Appliances में क्या खास है?
Freestanding Appliances अलग से तैयार यूनिट होते हैं और इन्हें कैबिनेट में स्थायी रूप से फिट करने की जरूरत नहीं होती है. इसका सबसे बड़ा फायदा इनकी आसानी से जगह बदल पाने की क्षमता है. अगर फ्यूचर में घर बदलने या किचन का बड़ा बदलाव करने का विचार है, तो इन्हें दूसरी जगह ले जाना आसान हो सकता है. इसके अलावा, किसी Appliance में सर्विस या मरम्मत की जरूरत पड़ने पर उसके अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच बनाना भी आसान रहता है.
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किचन के लिए कौन सा Appliance ज्यादा सही है?
Integrated Appliance किचन की कैबिनेट के साथ आसानी से फिट हो जाता है और पूरे किचन को एक जैसा लुक देता है. वहीं Freestanding Appliance अलग यूनिट की तरह नजर आता है और कई बार किचन के डिजाइन में अलग पहचान बना सकता है. इसलिए सिर्फ लुक के आधार पर किसी एक ऑप्शन को चुनना जरूरी नहीं है. Appliance में मिलने वाले फीचर्स, किचन की जगह और आने वाले समय में बदलाव की जरूरत को भी ध्यान में रखना चाहिए. साथ ही किचन में दोनों तरह के Appliances का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
खरीदने से पहले करें थोड़ी रिसर्च
नया Kitchen Appliance लेने से पहले अलग-अलग ब्रांड और उनके इस्तेमाल से जुड़े कंजयूर्म एक्सपीरियंस को देखना भी जरूरी है. खासकर Refrigerator और Dishwasher जैसे Appliances खरीदते समय Brand Rankings और Reliability Reviews की जानकारी काम आ सकती है. इससे आपको अपनी जरूरत और किचन के हिसाब से सही ऑप्शन चुनने में आसानी होगी.
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone बन जाएगा Gaming Controller! जानें क्या है ये स्मार्ट तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके पास iPhone है और आप मोबाइल गेमिंग को थोड़ा अलग अंदाज में एन्जॉय करना चाहते हैं तो ये ट्रिक आपके काफी काम आ सकती है. अब iPhone को सिर्फ गेम खेलने वाला फोन ही नहीं बल्कि Bluetooth Gaming Controller की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए किसी महंगे गेमपैड को खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. कुछ आसान स्टेप्स के जरिए आप अपने iPhone को दूसरे डिवाइस के साथ कंट्रोलर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि क्या है इसका तरीका.
iPhone को Controller कैसे बनाएं
दरअसल, नॉर्मली गेमिंग के लिए Xbox, PlayStation या दूसरे Bluetooth कंट्रोलर का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन कुछ ऐप्स और गेमिंग सेटअप की मदद से iPhone को भी वर्चुअल कंट्रोलर के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसका फायदा खासतौर पर तब मिलता है जब आप PC, Mac या दूसरे compatible device पर गेम खेल रहे हों और आपके पास अलग से गेमपैड मौजूद न हो.
Bluetooth से कैसे करें कनेक्ट?
सबसे पहले iPhone और जिस डिवाइस पर गेम चलाना है, उन दोनों में Bluetooth कनेक्शन की सुविधा होनी चाहिए. इसके बाद iPhone में ऐसा compatible controller app इस्तेमाल करना होगा जो दूसरे डिवाइस से कनेक्ट होकर गेमिंग इनपुट भेज सके.

iPhone में Bluetooth ऑन करें.
Compatible controller ऐप इंस्टॉल और ओपन करें.
ऐप में दिए गए pairing ऑप्शन को चुनें.
दोनों डिवाइस को आपस में pair करें.
कनेक्शन बनने के बाद गेम में controller input को select करें.

ध्यान रखें कि सभी ऐप्स और गेम Bluetooth controller के रूप में iPhone को सपोर्ट नहीं करते हैं. इसलिए इस्तेमाल किए जा रहे ऐप और गेम की compatibility को पहले चेक कर लेना चाहिए.
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कैसे होगा गेमिंग का एक्सपीरिएंस
iPhone को कंट्रोलर की तरह इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आपके पास फिजिकल बटन के बजाय स्क्रीन पर virtual controls होंगे. यानी स्क्रीन पर joystick, directional buttons और दूसरे gaming controls दिखाई दे सकते हैं.
इससे casual gaming काफी आसान हो सकती है. हालांकि, लंबे समय तक गेम खेलने वाले यूजर्स को traditional physical controller ज्यादा सुविधाजनक लग सकता है क्योंकि उसमें buttons का tactile feedback मिलता है.
क्या हर iPhone में चलेगा?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये सुविधा केवल iPhone मॉडल पर निर्भर नहीं करती है. असल में ये काफी हद तक controller app, operating system और गेम/डिवाइस compatibility पर निर्भर करती है. इसलिए पुराने या नए iPhone में इस्तेमाल करने से पहले उस ऐप की requirements जरूर देख लें.
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>फोन कैसे पकड़ लेता है आसपास छिपा Tracker? जानें ये टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ फोन कैसे पकड़ लेता है आसपास छिपा Tracker? जानें ये टेक्नोलॉजी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>कान में लगे Earbuds कैसे बदल देते हैं भाषा? सेकेंडों में ऐसे होता है Translation</title>
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Google Search में दिख रही निजी जानकारी? ऐसे करें Remove</title>
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        <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>5G के दौर में भी 4G की धूम, शिपमेंट में 3 पर्सेंट ग्रोथ ; जानें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में स्मार्टफोन खरीदने का ट्रेंड एक बार फिर थोड़ा बदलता नजर आ रहा है. जिस समय 5G फोन को नई टेक्नोलॉजी और बेहतर कनेक्टिविटी के तौर पर देखा जा रहा है, उसी समय 4G स्मार्टफोन की मांग में दोबारा तेजी आने लगी है. Counterpoint Research के मुताबिक, भारत में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट 2026 में सालाना आधार पर 3 फीसदी बढ़ सकती है. खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हो रही है, जब 2025 में 4G स्मार्टफोन शिपमेंट में 48 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. तो आइए जानते हैं कि 5G के दौर में भी 4G की मांग क्यों बढ़ रही है.&amp;nbsp;
4G स्मार्टफोन की हिस्सेदारी बढ़ेगी
Counterpoint Research के अनुसार, भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 4G की हिस्सेदारी 2025 में 11 फीसदी थी, जो 2026 में बढ़कर 13 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. इसके बाद 2027 में 4G की हिस्सेदारी 15 फीसदी तक जाने की उम्मीद है. 4G अब सिर्फ बेहद सस्ते फोन तक सीमित नहीं रह रहा है, बल्कि इसका इस्तेमाल और मांग बजट सेगमेंट में भी बढ़ रही है.&amp;nbsp;
5G के दौर में भी 4G की मांग क्यों बढ़ रही है?
4G की मांग बढ़ने की एक बड़ी वजह 4G और 5G स्मार्टफोन के बीच बढ़ता कीमत का अंतर है. महंगे कंपोनेंट्स की वजह से 5G फोन की कीमतें ऊपर जा रही हैं. ऐसे में ग्राहक कम कीमत में बेहतर स्पेसिफिकेशन और फीचर्स वाले फोन तलाश रहे हैं. इसका असर खासतौर पर दो सेगमेंट में दिखाई दे रहा है. 10,000 रुपये से कम कीमत वाले एंट्री सेगमेंट और 10,000 से 20,000 रुपये वाले बजट सेगमेंट में ग्राहक 5G के बजाय 4G फोन को ऑप्शन के तौर पर देख रहे हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - क्यों बदला गया AI का नाम? ट्रंप को क्या थी इससे दिक्कत, जानें पूरा मामला&amp;nbsp;10 से 20 हजार रुपये वाले सेगमेंट में बढ़ी 4G की मौजूदगी
बढ़ती मांग को देखते हुए स्मार्टफोन कंपनियां भी अपनी रणनीति बदल रही हैं. अब 4G मॉडल सिर्फ एंट्री-लेवल कैटेगरी तक सीमित नहीं हैं. कंपनियां 10,000 से 20,000 रुपये के बजट में भी 4G स्मार्टफोन पेश कर रही हैं. Counterpoint के मुताबिक, 2025 में इस प्राइस बैंड में 4G मॉडल पेश करने वाली कंपनियों की संख्या सिर्फ 2 थी, जो 2026 में अब तक बढ़कर 12 हो चुकी है.&amp;nbsp;
4G को मिल रहा नया प्राइस-वैल्यू रोल
4G की रिकवरी अब केवल एंट्री-लेवल बाजार तक सीमित नहीं है. 10,000 से 20,000 रुपये वाला सेगमेंट भी इसके लिए जरूरी बन रहा है, जहां ग्राहक 5G की ज्यादा कीमत &amp;nbsp;बेहतर की जगह स्पेसिफिकेशन और एक्सपीरियंस को प्रेफरेंस दे रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपोनेंट की कीमतें जल्द सामान्य होने की संभावना कम है. ऐसे में 4G की भूमिका आगे भी बढ़ सकती है और 2027 तक इसकी हिस्सेदारी 15 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Apps को Activity Track करने दिया तो क्या होगा? जानें सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: स्मार्टफोन ने लोगों की जिंदगी में अपनी एक अलग जगह बना ली है. लोगों के काम करने से लेकर मनोरंजन तक, अब स्मार्टफोन के जरिए सब कुछ संभव हो चुका है. लेकिन बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ ही स्मार्टफोन के साथ लोगों को प्राइवेसी का खतरा भी मंडराने लगा है. दरअसल, स्मार्टफोन में कई सारे ऐप्स मौजूद होते हैं. ऐसे में हम फोन पर क्या सर्च करते हैं, कौन-सी वेबसाइट खोलते हैं, किस जगह जाते हैं और किन चीजों में दिलचस्पी रखते हैं, इसकी जानकारी इन ऐप्स तक पहुंच सकती है.
कई बार ऐप इंस्टॉल करते समय हम बिना ज्यादा सोचे-समझे Activity Tracking की परमिशन दे देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐप्स को एक्टिविटी ट्रैकिंग परमिशन देने के बाद क्या होता है. आइए जानते हैं कि इसकी पूरी सच्चाई.
क्या होता है Activity Tracking?
जानकारी के अनुसार, Activity Tracking का मतलब है कि कोई ऐप या सर्विस आपकी डिजिटल एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड कर रही है. इस रिकॉर्ड में आप कौन सा ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं, कौन सी वेबसाइट विजिट कर रहे हैं, क्या सर्च कर रहे हैं जैसी सारी जानकारियां मौजूद रहती हैं.
हालांकि, हर ऐप को आपकी पूरी एक्टिविटी की जानकारी मिले, ऐसा जरूरी नहीं है. ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन-सी परमिशन दी है और ऐप किस तरह का डेटा कलेक्ट करता है.
आपकी पसंद का लगाया जाता है अंदाजा
दरअसल, इस एक्टिविटी ट्रैकिंग की मदद से आपकी पसंद और नापसंद का भी अंदाजा लगाया जाता है. जैसे आपने ऑनलाइन किसी मोबाइल, जूते या होटल के बारे में कई बार सर्च किया. अगर अलग-अलग सर्विसेज के बीच आपकी एक्टिविटी से जुड़ा डेटा इस्तेमाल किया जा रहा है तो कंपनियां आपके पसंद का भी अंदाजा लगाती हैं.
इसी आधार पर आपको भविष्य में उसी तरह के प्रोडक्ट या सर्विस के ऐड भी ज्यादा दिखाई देने लगते हैं. यानी आपने जिस चीज के बारे में सिर्फ जानकारी खोजी थी, वह आपकी डिजिटल प्रोफाइल का हिस्सा बन जाती है.
ज्यादा पर्सनलाइज्ड हो सकते हैं विज्ञापन
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Tracking का सबसे ज्यादा इस्तेमाल विज्ञापन को ज्यादा बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी से ये समझा जाता है कि आपको क्या पसंद है और क्या नहीं. इसके बाद आपको आपकी डिजिटल फीड पर आपने जो हाल फिलहाल में सर्च किया हुआ होता है उसी से संबंधित विज्ञापन दिखाए जाते हैं.
कई लोगों को यही वजह परेशान करती है कि वे किसी प्रोडक्ट की चर्चा या सर्च करने के बाद उससे जुड़े विज्ञापन अलग-अलग ऐप्स और वेबसाइटों पर देखने लगते हैं.
Privacy पर पड़ता है असर
इस फीचर से सबसे बड़ी चिंता यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर बनी रहती है. आपकी एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी अगर कई सर्विसेज के जरिए प्रोसेस हो रही है तो आपकी ऑनलाइन आदतों की एक डिटेल्ड जानकारी तैयार हो जाती है.
इसलिए किसी भी ऐप को Tracking की परमिशन देने से पहले ये समझना जरूरी है कि वह किस तरह का डेटा मांग रहा है और उसका इस्तेमाल किस मकसद से किया जा रहा है.
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Pixel 11 Pro नहीं लेना? ये 10 Android फोन भी हैं शानदार ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Google का नया Pixel 11 Pro बाजार में आते ही चर्चा में है. कैमरा, साफ Android एक्सपीरियंस और Gemini AI के नए फीचर्स इसे खास बनाते हैं, लेकिन हर यूजर के लिए यह फोन सही ऑप्शन हो, ऐसा जरूरी नहीं है. इसकी शुरुआती कीमत में बढ़ोतरी, रैम और बैटरी में कटौती जैसी बातें कुछ खरीदारों को सोचने पर मजबूर कर सकती हैं. ऐसे में Android की दुनिया में कई दूसरे फोन मौजूद हैं, जो अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से बेहतर फीचर्स देते हैं. अगर आप Pixel 11 Pro लेने का मन बदल रहे हैं, तो इन ऑप्शनों पर भी नजर डाल सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि Pixel 11 Pro के अलावा कौन-से 10 Android फोन शानदार ऑप्शन देखें.&amp;nbsp;
1. Samsung Galaxy S26 Ultra
Samsung Galaxy S26 Ultra उन लोगों के लिए ऑप्शन है जिन्हें दमदार परफॉर्मेंस चाहिए. इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट, 12GB रैम, S Pen और बेहतर कैमरा सिस्टम मिलता है. Privacy Display फीचर स्क्रीन को आसपास बैठे लोगों की नजर से बचाने में मदद करता है.&amp;nbsp;
2. Samsung Galaxy S26
अगर आप छोटा, हल्का और फ्लैगशिप कैटेगरी का फोन चाहते हैं, तो Samsung Galaxy S26 एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसमें भी Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया गया है, इसलिए परफॉर्मेंस के मामले में यह पीछे नहीं रहता है. फोन में 6.3 इंच का डिस्प्ले मिलता है, जो उन यूजर्स के लिए सुविधाजनक हो सकता है जिन्हें बड़े और भारी फोन पसंद नहीं हैं.
3. Poco F8 Ultra
Poco F8 Ultra कम कीमत में फ्लैगशिप हार्डवेयर देने पर फोकस करता है. इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5, 12GB रैम, 6.9 इंच 120Hz AMOLED डिस्प्ले और 6,500mAh बैटरी है. फोन में 100W चार्जिंग और 50MP कैमरे भी मिलते हैं.&amp;nbsp;
4. Nothing Phone (3)
अगर आपको बाकी फोन से अलग डिजाइन पसंद है, तो Nothing Phone (3) एक अलग ऑप्शन है. इसमें Snapdragon 8s Gen 4 चिपसेट, ब्राइट डिस्प्ले और अच्छी बैटरी लाइफ मिलती है. Essential Space स्क्रीनशॉट और नोट्स को व्यवस्थित करता है, जबकि Glyph Matrix फोन के रियर डिजाइन को खास बनाता है.&amp;nbsp;
5. RedMagic 11S Pro
गेमिंग प्रेफरेंस है तो RedMagic 11S Pro खास तौर पर इसी जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5, 12GB रैम, 7,400mAh बैटरी और 80W चार्जिंग है. फोन में गेमिंग के लिए शोल्डर ट्रिगर और एक्टिव-पैसिव कूलिंग सिस्टम भी दिया गया है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Liquid Glass को ऐसे करें अपने हिसाब से कस्टमाइज, iPhone लगेगा अलग
6. Google Pixel 10a
Pixel 11 Pro की तुलना में Pixel 10a काफी सस्ता ऑप्शन है. इसमें 8GB रैम और कम कैमरा हार्डवेयर मिलता है, लेकिन Gemini Live, Circle to Search और AI फोटो एडिटिंग जैसे कई फीचर्स मौजूद हैं. इसकी 5,100mAh बैटरी Pixel 11 Pro की बैटरी से भी बड़ी है.&amp;nbsp;
7. Samsung Galaxy Z Flip 8
अगर आप सामान्य स्लैब फोन से हटकर फोल्डेबल लेना चाहते हैं, तो Galaxy Z Flip 8 ऑप्शन बन सकता है. Galaxy Z Flip 8 में 6.9 इंच की फोल्डेबल स्क्रीन दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 2,600 निट्स तक की ब्राइटनेस सपोर्ट करती है. बाहर 4.1 इंच की कवर स्क्रीन भी 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ मिलती है. फोन की खासियत इसका नया AI FlexWindow है.&amp;nbsp;
8. Motorola razr 60 Ultra &amp;nbsp;
Motorola Razr 60 Ultra भी एक बेस्ट ऑप्शन है. इसमें 7 इंच की OLED फोल्डेबल स्क्रीन है, जो 4,500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस देती है. बाहर 4 इंच की pOLED कवर स्क्रीन मिलती है. परफॉर्मेंस के लिए इसमें Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर, 16GB रैम और 512GB स्टोरेज मिलता है. फोन Android 15 आधारित कस्टम OS और Moto AI फीचर्स के साथ आता है.&amp;nbsp;
9. &amp;nbsp;Google Pixel 10 Pro
अगर Pixel का एक्सपीरियंस ही चाहिए तो Pixel 10 Pro देखा जा सकता है. इसमें 16GB रैम और 4,870mAh बैटरी है. Pixel 11 Pro में ज्यादा ब्राइट डिस्प्ले, एंटी-ग्लेयर कोटिंग और तेज Night Sight जैसे फायदे हैं.&amp;nbsp;
10. Oppo Find X9s
Oppo Find X9s में 6.59 इंच का AMOLED पैनल है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,256 बाय 2,760 पिक्सल रेजोल्यूशन देता है. इसमें 3nm MediaTek Dimensity 9500s चिपसेट, 12GB RAM और 512GB तक UFS 4.1 स्टोरेज दिया गया है. इसकी पीक ब्राइटनेस 3,600 निट्स तक है और Dolby Vision सपोर्ट भी मिलता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Pixel, Pro, नहीं, लेना, ये, Android, फोन, भी, हैं, शानदार, ऑप्शन</media:keywords>
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        <title>व्हाट्सऐप पर चार्ज तो महंगे होंगे अप्लायंसेज, जानें 1 अक्टूबर से क्या&amp;क्या बदल रहा?</title>
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        <description><![CDATA[ अक्टूबर की शुरुआत टेक और डिजिटल दुनिया में कुछ ऐसे बदलाव लेकर आ रही है, जिनका असर सीधे यूजर्स की जेब, मोबाइल रिचार्ज, बिजनेस मैसेजिंग और डिजिटल सिस्टम पर दिखाई दे सकता है. कहीं कंपनियों के लिए मैसेज भेजना महंगा होगा, तो कहीं बिना डेटा वाला मोबाइल रिचार्ज ऑप्शन बढ़ेगा. होम इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने वालों के लिए भी अक्टूबर की शुरुआत जरूरी हो सकती है. कुछ कंपनियां लागत बढ़ने के बीच कीमतों में बदलाव की तैयारी कर रही हैं. तो आइए जानते हैं कि 1 अक्टूबर से क्या-क्या बदल रहा है.&amp;nbsp;
WhatsApp Business पर बढ़ेगा मैसेजिंग खर्च
1 अक्टूबर से WhatsApp Business Platform पर कंपनियों के मैसेजिंग चार्ज में बदलाव होगा. भारत में Utility Message की दर 0.115 रुपये यानी 11.5 पैसे प्रति डिलीवर मैसेज है. 18 प्रतिशत GST जोड़ने पर यह करीब 14 पैसे हो जाती है. इसका असर आम WhatsApp यूजर पर नहीं पड़ेगा. ग्राहकों को दोस्तों, परिवार या बिजनेस अकाउंट से चैट करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा. यह बदलाव मुख्य रूप से कंपनियों की ओर से भेजे जाने वाले Business Messages की लागत से जुड़ा है.&amp;nbsp;
Jio, Airtel और Vi के रिचार्ज में बढ़ेंगे ऑप्शन
TRAI के नए नियमों के तहत टेलीकॉम कंपनियों को Voice और SMS Only Plans उपलब्ध कराने होंगे. ऐसे प्लान में मोबाइल डेटा शामिल नहीं होगा. &amp;nbsp;जिन वैधता अवधि के लिए कंपनियां कॉल, SMS और डेटा वाले प्लान देती हैं, वहां 30 दिन या उससे कम की अवधि के लिए डेटा-फ्री ऑप्शन भी देना होगा. इन प्लान की कीमत संबंधित डेटा वाले प्लान से कम रखनी होगी. साथ ही कम से कम एक ऐसा प्लान देना होगा जिसे हर महीने उसी तारीख को रिन्यू किया जा सके.&amp;nbsp;
AC, TV और दूसरे अप्लायंसेज हो सकते हैं महंगे
फेस्टिव सीजन शुरू होने से पहले होम इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने वालों के लिए कीमतों में बदलाव जरूरी हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ कंपनियां बढ़ती लागत के कारण AC की कीमतों में करीब 5 से 8 फीसदी तक बढ़ोतरी कर सकती हैं. कुछ कंपनियों की ओर से LED TV और वॉशिंग मशीन की कीमतों में 2 से 3 फीसदी तक वृद्धि की बात सामने आई है, जबकि कुछ टीवी कंपनियां करीब 7 फीसदी तक बढ़ोतरी की योजना में हैं. फ्रिज और दूसरे होम अप्लायंसेज की कीमतों में भी करीब 3 से 4 फीसदी तक बढ़ोतरी की संभावना बताई गई है.
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बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़ा नया कानून होगा लागू
1 अक्टूबर से Bankers Books Evidence Act, 2026 लागू होगा और 1891 के पुराने कानून की जगह लेगा. नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड में रखे बैंकिंग रिकॉर्ड को भी मान्यता दी गई है. रिकॉर्ड को मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर से प्रमाणित किया जा सकेगा.&amp;nbsp;
Google अंतरिक्ष में करेगा AI कंप्यूटिंग का टेस्ट
Google का Project Suncatcher भी 1 अक्टूबर से चर्चा में रहेगा. कंपनी अपने पहले टेस्ट सैटेलाइट के जरिए अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग की संभावना जांचेगी. इस प्रोटोटाइप में चार Google Tensor Processing Units यानी TPU होंगे. इसका मकसद अभी अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाना नहीं, बल्कि यह देखना है कि AI चिप्स अंतरिक्ष की परिस्थितियों में कैसे काम करते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब 24 घंटे काम करेगा AI, OpenAI ने लॉन्च किए ऑलवेज&amp;ऑन Dots एजेंट</title>
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        <description><![CDATA[ OpenAI ने DevDay 2026 में ऐसे AI एजेंट पेश किए हैं, जो यूजर के किसी गोल पर लगातार काम कर सकते हैं. कंपनी ने इन एजेंट्स को Dots नाम दिया है. ये अपने क्लाउड कंप्यूटर पर चलते हैं और जरूरत के मुताबिक बैकग्राउंड में काम जारी रख सकते हैं. इसके साथ ही OpenAI ने GPT-6.1 Sol मॉडल भी पेश किया है, जिसे कंपनी ने कम कीमत में करीब फ्लैगशिप स्तर की क्षमता देने वाला मॉडल बताया है.&amp;nbsp;
क्या हैं OpenAI के Dots AI एजेंट?
Dots ऐसे AI एजेंट हैं जो GPT-6 Astra पर आधारित हैं. OpenAI के मुताबिक, ये यूजर के तय किए गए गोल की दिशा में चौबीसों घंटे काम कर सकते हैं. खास बात यह है कि इन्हें 4,000 से ज्यादा ऐप्स से जोड़ा जा सकता है. ये जुड़े हुए ऐप्स से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर यूजर की पसंद को समझ सकते हैं और बैकग्राउंड में रिसर्च भी कर सकते है, फिलहाल रिसर्च के दौरान जुड़े ऐप्स में Dots को सिर्फ पढ़ने की अनुमति दी जा सकती है. यूजर अपने Dots को ChatGPT के अलावा Slack और Microsoft Teams के जरिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
यूजर तय करेगा AI का काम&amp;nbsp;
OpenAI ने Dots में यूजर कंट्रोल का ऑप्शन भी रखा है. यूजर अपने हिसाब से नियम तय कर सकता है कि एजेंट किन कामों को खुद कर सकता है. वहीं कुछ सेंसिटिव काम हमेशा यूजर के कंट्रोल में रहेंगे. जैसे पासवर्ड बदलने का काम Dots अपने आप नहीं करेंगे. कंपनी एंटरप्राइज के लिए विशेषज्ञ Dots की भी टेस्टिंग कर रही है. इनमें खरीदारी और इनवॉइस प्रोसेसिंग जैसे तय कामों के लिए अलग एजेंट शामिल हैं. OpenAI, Microsoft के साथ मिलकर इन एजेंट्स को Agent 365 के जरिए एंटरप्राइज सुरक्षा और प्रबंधन सिस्टम से जोड़ने पर भी काम कर रहा है.&amp;nbsp;
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GPT-6.1 Sol भी हुआ लॉन्च
Dots के साथ OpenAI ने GPT-6.1 Sol भी पेश किया है. कंपनी के अनुसार, यह GPT-6 Sol का अपग्रेड है और एजेंटिक कोडिंग, कंप्यूटर इस्तेमाल और प्रोफेशनल कामों में GPT-6 Astra के करीब पर्फोमेन्स दे सकता है. इसकी कीमत GPT-6 Astra के मुकाबले पांचवें हिस्से तक है. GPT-6.1 Sol के लिए इनपुट की कीमत 2 डॉलर प्रति 10 लाख टोकन और आउटपुट की कीमत 10 डॉलर प्रति 10 लाख टोकन रखी गई है. वहीं GPT-6 Astra के लिए यही कीमतें 10 डॉलर और 50 डॉलर हैं.&amp;nbsp;
ChatGPT में और क्या बदला?
OpenAI ने टीमों के लिए ChatGPT Space लॉन्च किया है, जहां ChatGPT और Dots शेयर फाइलों साथ ही जानकारी पर साथ काम कर सकते हैं. डेवलपर्स अब ChatGPT में प्लगइन एक्सटेंशन, इंटरैक्टिव पैनल और फाइल व्यूअर बना सकेंगे. इसके अलावा Agents API में कंप्यूटर इस्तेमाल के साथ OpenAI ने Slack और Teams में @ChatGPT इंटीग्रेशन, 16 पार्टनर टूल्स में Sign in with ChatGPT और 32 पार्टनर्स वाले OpenAI Marketplace की भी घोषणा की है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gemini से Flipkart Shopping का नया तरीका, सीधे दिखेगा Buy Button</title>
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        <description><![CDATA[ अब ऑनलाइन शॉपिंग के लिए हर बार अलग-अलग ई-कॉमर्स ऐप या वेबसाइट खोलने की जरूरत कम हो सकती है. Google अपने AI प्लेटफॉर्म Gemini और AI Mode के जरिए भारत में शॉपिंग का एक नया तरीका टेस्ट कर रहा है. इस टेस्ट में कुछ यूजर्स को Flipkart के कुछ प्रोडक्ट्स के साथ सीधे Buy Button दिखाई दे रहा है.&amp;nbsp;अभी यह सुविधा सीमित यूजर्स और कुछ प्रोडक्ट्स के लिए उपलब्ध बताई गई है. इनमें स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल एक्सेसरीज शामिल हैं. Google इस फीचर को अक्टूबर में ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है. यह फीचर ऐसे समय में टेस्ट किया जा रहा है, जब भारत में फेस्टिव शॉपिंग का दौर शुरू होने वाला है.&amp;nbsp;Gemini में कैसे दिखेगा Buy Button?
रिपोर्ट के मुताबिक, Gemini और AI Mode में दिखाई देने वाले कुछ Flipkart प्रोडक्ट्स पर Buy का ऑप्शन मिल रहा है. इस बटन पर टैप करने के बाद यूजर Flipkart के ब्रांडेड चेकआउट फ्लो में पहुंचता है, जहां खरीदारी पूरी की जा सकती है.
हालांकि अभी हर यूजर को यह ऑप्शन नहीं मिल रहा है. कुछ लोगों को सिर्फ Flipkart के प्रोडक्ट्स दिखाई दे सकते हैं, लेकिन उनके साथ सीधे खरीदने का बटन उपलब्ध नहीं होगा. Google के AI रिजल्ट्स में Amazon के प्रोडक्ट्स भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन टेस्ट के दौरान उनके साथ Buy Button नहीं देखा गया.&amp;nbsp;
AI Shopping के लिए Google का नया तरीका
Google पहले से AI के जरिए शॉपिंग को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है. कंपनी ने Universal Commerce Protocol यानी UCP पेश किया था. यह एक ओपन स्टैंडर्ड है, जिसे AI एजेंट्स को प्रोडक्ट खोजने से लेकर खरीदारी के अलग-अलग चरणों में रिटेलर्स के साथ काम करने के लिए तैयार किया गया है, हालांकि Flipkart के साथ चल रहा टेस्ट Google के अपने होस्टेड चेकआउट से अलग नजर आता है. इसमें चेकआउट Flipkart की ब्रांडिंग के साथ दिखाई देता है और इसके पीछे इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी के बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
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Flipkart के साथ Google का पहले से कनेक्शन
Google ने पहले Flipkart को भारत में अपने agentic shopping एक्सपीरियंस पर काम करने वाले मर्चेंट्स में शामिल किया था. इसके अलावा 2024 में Google ने Walmart की अगुवाई वाली फंडिंग राउंड के तहत Flipkart में करीब 350 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 3,360 करोड़ रुपये का निवेश किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, Google इस Buy Button टेस्ट को अक्टूबर में और यूजर्स तक बढ़ा सकता है. यह Flipkart की Big Billion Days Sale 2026 से पहले होगा, जिसकी शुरुआत सभी ग्राहकों के लिए 9 अक्टूबर से बताई गई है.&amp;nbsp;
AI Shopping से Affiliate Marketing पर असर?
AI से सीधे खरीदारी का तरीका affiliate marketing पर भी असर डाल सकता है. अगर यूजर Gemini में ही प्रोडक्ट खोजकर Buy Button से खरीद लेता है, तो वह रिव्यू या डील्स वेबसाइट तक पहुंचे बिना खरीदारी कर सकता है. हालांकि, Google और Flipkart ने अभी affiliate links या referral tracking को लेकर स्थिति साफ नहीं की है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - फोन बनेगा छोटा PC! अभी ऑन करें Android का ये सीक्रेट Desktop Mode ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 09:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Motorola Razr Flex के स्पेक्स लीक, Wide Foldable में क्या होगा खास?</title>
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        <description><![CDATA[ Motorola के आने वाले Wide Foldable को लेकर नई जानकारी सामने आई है. कंपनी इस डिवाइस को फिलहाल Razr Flex नाम से तैयार कर रही है, हालांकि लॉन्च के समय इसका नाम यही होगा या नहीं, यह अभी साफ नहीं है. फोन का इंटरनल कोडनेम Parker बताया जा रहा है. लीक हुई जानकारी में फोन की स्क्रीन, प्रोसेसर, कैमरा, बैटरी और डिजाइन से जुड़ी कई डिटेल सामने आई हैं. फोन की सबसे खास बात इसकी 6.92 इंच की 165Hz फोल्डिंग स्क्रीन हो सकती है, जबकि बाहर की तरफ 4.97 इंच की कवर स्क्रीन मिलने की उम्मीद है. तो आइए जानते हैं कि Motorola के Wide Foldable में क्या खास होगा.&amp;nbsp;
Motorola के Wide Foldable में क्या खास होगा?
लीक के मुताबिक, Motorola Razr Flex में 6.92 इंच की OLED फोल्डिंग स्क्रीन मिल सकती है. इसका रेजोल्यूशन 2364 बाय 1728 पिक्सल और रिफ्रेश रेट 165Hz तक होगा. यह स्क्रीन HDR10, HDR10+ और Dolby Vision सपोर्ट के साथ आ सकती है. फोन के बाहर 4.97 इंच की OLED कवर स्क्रीन दी जा सकती है, जिसका रेजोल्यूशन 1736 बाय 1140 पिक्सल बताया गया है. यह स्क्रीन फोन को खोले बिना भी कई काम करने के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी.&amp;nbsp;
Snapdragon चिप और 12GB RAM
परफॉर्मेंस के लिए इसमें Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिए जाने की बात सामने आई है. इसके साथ 12GB RAM और 256GB स्टोरेज मिल सकती है. लीक में फिलहाल सिर्फ यही स्टोरेज वेरिएंट सामने आया है और स्टोरेज बढ़ाने का ऑप्शन नहीं होगा.&amp;nbsp;
Motorola Razr Flex कब हो सकता है लॉन्च?
लीक के अनुसार Motorola Razr Flex को दिसंबर 2026 के मध्य लॉन्च किया जा सकता है. यह PANTONE Coriander और PANTONE Dark Botanical Garden रंगों में आ सकता है, हालांकि Motorola ने अभी फोन के अंतिम नाम, पूरी स्पेसिफिकेशन, कीमत और लॉन्च तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.&amp;nbsp;
कैसा होगा इसका कैमरा?
फोटोग्राफी के लिए फोन के पीछे 50MP मुख्य कैमरा और 50MP अल्ट्रा वाइड कैमरा मिल सकते हैं. जिसमें मेन कैमरे से 30x डिजिटल जूम मिलने की बात भी कही गई है. वहीं दोनों स्क्रीन पर अलग-अलग 32MP कैमरा दिए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
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5,000mAh बैटरी और 25W वायरलेस चार्जिंग
Razr Flex में 5,000mAh डुअल-सेल बैटरी होने की जानकारी सामने आई है. फोन 25W Qi वायरलेस चार्जिंग और USB-PD वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट कर सकता है. साथ ही फोन खुलने पर 110x149x5.8mm और फोल्ड होने पर 110x76x12.6mm का हो सकता है.&amp;nbsp;
Android 17 और IP48-IP49 सुरक्षा
फोन में Android 17 पहले से इंस्टॉल मिल सकता है. पावर बटन में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया जा सकता है. इसके अलावा एक अलग AI फिजिकल बटन भी मिलने की बात कही गई है. फोन को IP48 और IP49 रेटिंग के साथ लाए जाने की जानकारी है. कनेक्टिविटी के लिए Wi-Fi 7 और Bluetooth 6.0 भी मिल सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 09:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Galaxy A36&amp;A56 के बाद Samsung के इन फोन की बढ़ सकती है कीमत, जानें कब?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/galaxy-a36-a56-के-बाद-samsung-के-इन-फोन-की-बढ़-सकती-है-कीमत-जानें-कब</link>
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        <description><![CDATA[ Samsung के स्मार्टफोन खरीदने की तैयारी कर रहे यूजर्स के लिए आने वाला समय थोड़ा जरूरी हो सकता है. कंपनी के कुछ प्रीमियम फोन की कीमतों में जल्द बदलाव देखने को मिल सकता है. एक लीक के मुताबिक, Samsung अपने Galaxy S25, Galaxy S25 Ultra और Galaxy Z Fold 8 की कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही है. अगर यह जानकारी सही साबित होती है, तो तीनों मॉडल पहले की तुलना में महंगे हो सकते हैं फिलहाल Samsung की ओर से कीमत बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों फोन की कीमत में 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है. यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है, जब Samsung पहले ही अपने Galaxy A36 और Galaxy A56 की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी कर चुकी है.&amp;nbsp;
कब बढ़ सकती है Galaxy S25 की कीमत?
X पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक,एक इंडस्ट्री सोर्स के हवाले से दावा किया है कि Samsung Galaxy S25 और Galaxy S25 Ultra की कीमत में अक्टूबर के पहले सप्ताह में बढ़ोतरी की जा सकती है. वहीं, Galaxy Z Fold 8 की कीमत 10 अक्टूबर को बढ़ाए जाने की बात कही गई है. अभी Amazon पर Galaxy S25 का 12GB RAM और 128GB स्टोरेज वाला मॉडल 61,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लिस्टेड है. वहीं Galaxy S25 Ultra के 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 99,999 रुपये से शुरू होती है.

EXCLUSIVE: Samsung price hike incoming in India ???????? ????Just got info from my source, Samsung is hiking prices of the Galaxy S25 series and Galaxy Z Fold8 series in IndiaGalaxy S25 and Galaxy S25 Ultra prices going up by ₹10,000 in the first week of OctoberGalaxy Z Fold8&amp;hellip;
&amp;mdash; Abhishek Yadav (@yabhishekhd) September 28, 2026



Galaxy Z Fold 8 की कीमत भी बढ़ने के संकेत
Samsung Galaxy Z Fold 8 को भारत में 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था. इसके 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले बेस मॉडल की शुरुआती कीमत 1,79,999 रुपये रखी गई थी. इसका टॉप मॉडल 16GB RAM और 1TB स्टोरेज के साथ 2,39,999 रुपये में आया था. अगर लीक का दावा सही रहता है, तो इस फोल्डेबल फोन की कीमत में भी अगले महीने बदलाव देखने को मिल सकता है, हालांकि Samsung ने अभी तक इस संभावित बढ़ोतरी की पुष्टि नहीं की है.&amp;nbsp;
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A36 और A56 की कीमत पहले ही बढ़ी
इससे पहले Samsung Galaxy A56 और Galaxy A36 की कीमतों में पिछले 10 महीनों के दौरान तीसरी बार बढ़ोतरी की रिपोर्ट सामने आई थी. Galaxy A56 का 8GB + 128GB मॉडल अब 44,999 रुपये है, जो पहले 42,999 रुपये था. वहीं Galaxy A36 के 8GB + 128GB वेरिएंट की कीमत 36,999 रुपये हो गई है, जिसमें 3,000 रुपये की बढ़ोतरी बताई गई है.&amp;nbsp;
दूसरे ब्रांड्स के फोन भी हुए महंगे
स्मार्टफोन की कीमतों में यह बदलाव सिर्फ Samsung तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक Oppo, Vivo, iQOO, OnePlus और Apple जैसे दूसरे ब्रांड्स ने भी हाल में अपने फोन की कीमतों में बढ़ोतरी की है. इसके पीछे OEMs के सामने RAM और स्टोरेज की बढ़ती लागत से जुड़ी चुनौती को एक वजह बताया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वॉशिंग मशीन के लिए 20000 का बजट, ये रहे बेहतरीन मॉडल्स</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में हर किसी के घर में वॉशिंग मशीन है. ऑफिस का काम हो या घर के काम इन सब के बाद हाथ से कपड़े धोना एक बहुत भारी-भरकम काम लगता है. ऐसे में घर में वॉशिंग मशीन होने से काम आसानी और जल्दी हो जाता है. जब तक वॉशिंग मशीन में कपड़े धुलते हैं, आप उस समय को अपने अन्य कामों में लगाकर काम समय पर खत्म कर सकते हैं.
अगर आप वॉशिंग मशीन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो जानिए 20000 में कुछ ऐसे ही बेहतरीन ऑप्शन्स के बारे में. वॉशिंग मशीन के ये शानदार ऑप्शन्स आपका काम आसान करने के साथ ही बजट में भी फिट बैठते हैं. इनके फिचर्स आधुनिक होने के साथ ही बेहतरीन डिजाइन में भी मिलते हैं.
Samsung 7 kg 5 Star Inverter Fully Automatic Top Load Washing Machine
अगर आपका परिवार छोटा है, तो यह 7 किलोग्राम क्षमता वाली मशीन आपके लिए बेहतर हो सकती है. इसमें आप 3-4 लोगों के कपड़े आसानी से धो सकते हैं. इसकी कीमत लगभग 19,000 तक पड़ सकती है. इस वॉशिंग मशीन की खासियत इसकी मजबूत मैग्नेट का उपयोग करने वाली मोटर है जो काम करते वक्त बिलकुल भी आवाज नहीं करती. वहीं यह कम बिजली खर्च करती है, और लंबे समय तक बिना खराब हुए चलती है.
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LG 8.0 kg 5 Star Semi-Automatic Top Loading Washing Machine With Roller Jet Pulsator
यह वॉशिंग मशीन 2 साल की वारंटी और वॉश मोटर पर 5 साल की वारंटी के साथ मिलती है. साथ ही मशीन के बेस, ड्रेन होज और बैक कवर में चूहे भगाने वाले खास मटेरियल का इस्तेमाल किया गया है जो नुकसान से बचाता है. इसकी कीमत करीब 14,489 है. वहीं यह बिजली की खपत में भी मदद करती है. इसमें कफ और कॉलर की जिद्दी मैंद को साफ करने के लिए इनबिल्ट कॉलर स्क्रबर दिया गया है.
Voltas Beko WTT85UHA/OK5I0I0W01 2024 Model 8.5 kg 5 Star
यह एक एक सेमी-ऑटोमैटिक ट्विन टब वॉशिंग मशीन है. स्पिन टब के जरिए हवा का सर्कुलेशन होता है, जो कपड़ों से अतिरिक्त नमी को तेजी से खत्म करके उन्हें जल्दी सुखाने में मदद करता है. इसकी क्षमता 8.5 किलोग्राम है और यह 5-स्टार एनर्जी रेटिंग के साथ आती है, जिससे बिजली और पानी की बचत होती है. वहीं इसकी कीमत लगभग 16,690 है. वहीं इसमें वॉश सिलेक्टर, वॉश टाइमर, ड्रेन सिलेक्टर और स्पिन टाइमर के लिए आसान नॉब और डायल दिए गए हैं.
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वॉशिंग, मशीन, के, लिए, 20000, का, बजट, ये, रहे, बेहतरीन, मॉडल्स</media:keywords>
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        <title>Bose के नए Earbuds ने बदला ट्रेंड, Wired कनेक्शन के साथ मिला ANC</title>
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        <description><![CDATA[ Wireless Earbuds ने पिछले कुछ सालों में ऑडियो सुनने का तरीका काफी बदल दिया है. बिना वायर्ड के फोन से जुड़ने वाले Earbuds अब आम हो चुके हैं, लेकिन इसी बीच Bose ने एक ऐसा प्रोडक्ट पेश किया है, जो लोगों का ध्यान वापस Wired Earbuds की तरफ खींच रहा है. कंपनी ने एक दशक से ज्यादा समय बाद अपने नए Wired Earbuds लॉन्च किए हैं, जिनमें Active Noise Cancellation यानी ANC दिया गया है. इनमें ब्लूटूथ कनेक्शन या ऑडियो चलाने के लिए अलग बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती है. ये Earbuds USB-C के जरिए डिवाइस से जुड़ते हैं और Noise Cancellation के साथ वायर्ड लिसनिंग का ऑप्शन देते हैं. तो आइए जानते हैं कि Bose Noise Cancelling Wired Earbuds की कीमत और खास फीचर्स क्या हैं.&amp;nbsp;
Bose Noise Cancelling Wired Earbuds की कीमत
Bose के नए Earbuds की कीमत 99 डॉलर है. भारतीय रुपये में इसकी कीमत करीब 9,500 रुपये है. फिलहाल इन्हें अमेरिका में Bose के ऑनलाइन स्टोर से Pre-Order किया जा सकता है. कंपनी की जानकारी के अनुसार इनकी शिपिंग अक्टूबर 2026 में शुरू होने की उम्मीद है. इन्हें Black, White Smoke और Limited Edition Dewdrop Mint Green कलर में खरीदा जा सकेगा.
Bose Noise Cancelling Wired Earbuds के खास फीचर्स&amp;nbsp;
आमतौर पर Wired Earphones में 3.5mm Jack देखने को मिलता है, लेकिन Bose ने यहां USB-C का इस्तेमाल किया है. कंपनी के मुताबिक, ये Earbuds लगभग किसी भी USB-C Device के साथ काम करने के लिए तैयार किए गए हैं. इसके लिए इनमें कंपनी का Proprietary Digital Signal Processor यानी DSP दिया गया है, जो अलग-अलग USB-C Ports के साथ कंपेटिबिलिटी संभालता है. &amp;nbsp;Earbuds Audio को 24-bit Signal के जरिए प्रोसेस करते हैं. इसी के जरिए Bose ने ऑडियो प्रोसेसिंग और Noise Cancellation टेक्नोलॉजी को सीधे USB-C Connection के साथ जोड़ा है.&amp;nbsp;
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ANC के साथ मिलेंगे तीन Listening Modes
Noise Cancellation के लिए दोनों Earbuds में दो-दो Microphones दिए गए हैं. यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से Quiet Mode चुन सकते हैं, जो आसपास की आवाजों को कम करता है. वहीं Aware Mode आसपास की आवाजों को सुनने देता है और जरूरत न होने पर ANC को पूरी तरह बंद भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
बैटरी खत्म होने की नहीं होगी टेंशन
इन Earbuds को चलाने के लिए अलग बैटरी की जरूरत नहीं है. ये USB-C केबल के जरिए सीधे डिवाइस से कनेक्ट होते हैं. इसका फायदा यह है कि लंबे समय तक गाने सुनते समय Earbuds की बैटरी खत्म होने की टेंशन नहीं करनी पड़ेगी, हालांकि USB-C होने की वजह से इन्हें पुराने 3.5mm Headphone Jack में सीधे नहीं लगाया जा सकता है. साथ ही इन्हें पुराने तरीके वाले DAC या Amp के साथ भी कनेक्ट नहीं किया जा सकेगा. Bose का यह प्रोडक्ट कंपनी के Wireless QuietComfort Earbuds से अलग एक Wired ऑप्शन है, जिसमें केबल से कनेक्ट होने के साथ ANC का फीचर भी मिलता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में मोबाइल यूजर्स की संख्या 1.29 अरब के पार! अगस्त में जुड़े 55 लाख नए ग्राहक</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में मोबाइल कनेक्शन की संख्या लगातार बढ़ रही है. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में एक महीने के दौरान करीब 55.1 लाख नए वायरलेस मोबाइल ग्राहक जुड़े. इसके साथ ही भारत का कुल मोबाइल सब्सक्राइबर बेस बढ़कर करीब 129.34 करोड़ हो गया है. TRAI ने अगस्त का टेलीकॉम सब्सक्रिप्शन डेटा 28 सितंबर को जारी किया.
TRAI के अनुसार, अगस्त के अंत तक भारत में वायरलेस मोबाइल सब्सक्राइबर्स की संख्या 1,293.43 मिलियन रही. जुलाई के मुकाबले में इसमें 5.51 मिलियन यानी करीब 55.1 लाख की बढ़ोतरी हुई. महीने-दर-महीने आधार पर मोबाइल सब्सक्राइबर बेस में 0.43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. हालांकि, इस बढ़ोतरी में शहरी इलाकों की हिस्सेदारी ज्यादा रही. अगस्त में शहरी वायरलेस कनेक्शन 0.70 प्रतिशत बढ़कर 74.88 करोड़ हो गए. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में वायरलेस सब्सक्राइबर बेस सिर्फ 0.06 प्रतिशत बढ़कर 54.46 करोड़ रहा.
Jio ने जोड़े सबसे ज्यादा ग्राहक
टेलीकॉम कंपनियों के बीच अगस्त में नए मोबाइल ग्राहकों को जोड़ने के मामले में Reliance Jio सबसे आगे रहा. कंपनी ने करीब 24 लाख नए मोबाइल ग्राहक जोड़े. इसके बाद Bharti Airtel ने करीब 21.1 लाख ग्राहक जोड़े. वहीं Vodafone Idea (Vi) के मोबाइल ग्राहकों की संख्या में लगभग 5.06 लाख की बढ़ोतरी हुई. सरकारी कंपनी BSNL ने भी करीब 4.93 लाख नए ग्राहक जोड़े.
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जियो और एयरटेल को मिलाकर ही अगस्त में 45 लाख से ज्यादा नए मोबाइल ग्राहक जुड़े. इससे दोनों कंपनियों की कुल ग्राहक संख्या में बढ़ोतरी हुई. अगस्त के अंत में जियो का मोबाइल सब्सक्राइबर बेस करीब 50.84 करोड़ जबकि एयरटेल का करीब 49.16 करोड़ रहा.
कुल टेलीफोन कनेक्शन भी बढ़े
सिर्फ मोबाइल ही नहीं, भारत में कुल टेलीफोन सब्सक्राइबर बेस भी अगस्त में बढ़ा. वायरलेस और वायरलाइन कनेक्शन को मिलाकर देश में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 1.36 अरब हो गई जो जुलाई में करीब 1.35 अरब थी. इस दौरान कुल टेली-डेंसिटी भी बढ़कर 95.07 प्रतिशत पहुंच गई है.
ब्रॉडबैंड यूजर्स का आंकड़ा भी बढ़ा
TRAI के आंकड़ों में ब्रॉडबैंड सेक्टर की भी तस्वीर सामने आई. अगस्त में देश का कुल ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर बेस 1.10 अरब तक पहुंच गया, जो जुलाई में करीब 1.09 अरब था. इसमें महीने-दर-महीने लगभग 0.61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में मोबाइल और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार जारी है. हालांकि अगस्त में मोबाइल ग्राहकों की वृद्धि का बड़ा हिस्सा शहरी क्षेत्रों से आया जबकि ग्रामीण इलाकों में बढ़ोतरी काफी धीमी रही है.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>चीन ने बनाई पानी से चलने वाली बैटरी! 300 साल तक होगी लाइफ, जानें टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ चीन के वैज्ञानिकों ने बैटरी टेक्नोलॉजी में एक ऐसा एक्सपेरिमेंट किया है जो आने वाले समय में एनर्जी स्टोरेज की तस्वीर बदल सकता है. शोधकर्ताओं ने एक नई वॉटर-बेस्ड बैटरी तैयार की है जो लैब टेस्ट में करीब 1,20,000 चार्जिंग साइकल तक स्टेबल रही. वैज्ञानिकों के हिसाब से अगर इसे ग्रिड स्टोरेज में इस्तेमाल किया जाए तो यह सैद्धांतिक रूप से करीब 300 साल तक काम कर सकती है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई ऐसी बैटरी नहीं है जिसे सिर्फ पानी भरकर चला दिया जाए. इसे aqueous battery कहा जा रहा है जिसमें पानी बेस्ड इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल होता है. इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने मैग्नीशियम और कैल्शियम के न्यूट्रल साल्ट वाला इलेक्ट्रोलाइट तैयार किया जिसका pH करीब 7 रखा गया. इससे बैटरी के अंदर होने वाली corrosive reactions को कम करने में मदद मिलती है.
1.2 लाख चार्जिंग साइकल का दावा
इस डिजाइन में एक खास covalent organic polymer (COP) को नेगेटिव इलेक्ट्रोड के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. वैज्ञानिकों ने कई अलग-अलग पॉलिमर स्ट्रक्चर की जांच के बाद Hex TADD COP को चुना. पॉजिटिव इलेक्ट्रोड के लिए Prussian blue analog का इस्तेमाल किया गया है.
इस बैटरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी साइकल लाइफ है. टेस्टिंग के दौरान यह लगभग 120,000 charge-discharge cycles तक स्टेबल रही है. तुलना के लिए, आम रिचार्जेबल बैटरियों में समय के साथ क्षमता कम होने लगती है.
रिसर्च में दिए गए हिसाब के मुताबिक, अगर बैटरी को ग्रिड स्टोरेज में औसतन करीब 1.1 साइकल प्रतिदिन चलाया जाए तो 120,000 साइकल लगभग 300 साल के बराबर हो सकते हैं. हालांकि, यह 300 साल का आंकड़ा असली दुनिया में किसी बैटरी के 300 साल तक इस्तेमाल होने की गारंटी नहीं है बल्कि साइकल टेस्ट और इस्तेमाल दर पर बेस्ड सैद्धांतिक अंदाजा है.
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पर्यावरण के लिए भी अहम क्यों?
इस टेक्नोलॉजी का एक और फायदा इसकी सुरक्षा से जुड़ा है. शोधकर्ताओं ने जिस न्यूट्रल इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल किया है, वह जहरीला नहीं बताया गया है और इसे टोफू बनाने में इस्तेमाल होने वाले ब्राइन जैसे खनिजों से जोड़ा गया है. इससे बैटरी के डिस्पोजल से जुड़ी पर्यावरणीय चिंताएं कम हो सकती हैं.
वहीं, पानी बेस्ड बैटरियों में आग लगने का खतरा भी लिथियम-आयन बैटरियों के मुकाबले में कम रहता है. इसी वजह से इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर एनर्जी स्टोरेज में फायदेमंद साबित हो सकता है.
क्या यह स्मार्टफोन की बैटरी को बदल देगी?
अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. इस तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती energy density है. पानी बेस्ड बैटरियां लंबे समय से सुरक्षा और कम लागत के लिए आकर्षक रही हैं लेकिन पोर्टेबल डिवाइस में जरूरी ज्यादा एनर्जी को कम वजन और कम जगह में स्टोर करना अभी भी चुनौती है.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>फोन बनेगा छोटा PC! अभी ऑन करें Android का ये सीक्रेट Desktop Mode</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके पास नया Google Pixel फोन है तो उसे सिर्फ स्मार्टफोन की तरह इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. Android का Desktop Mode फीचर फोन को बाहरी मॉनिटर से जोड़कर PC जैसे इंटरफेस में बदल सकता है. इसमें एक साथ कई ऐप्स को अलग-अलग विंडो में चलाया जा सकता है और कीबोर्ड-माउस की मदद से काम भी किया जा सकता है.
Android Desktop Mode फिलहाल Android 16 के March Pixel Drop के बाद Pixel 8 और उसके बाद के Pixel फोन में उपलब्ध है. हालांकि, Google ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि यह फीचर दूसरे Android स्मार्टफोन ब्रांड्स के लिए कब उपलब्ध होगा. Samsung पहले से अपने Galaxy स्मार्टफोन्स में DeX के जरिए PC जैसा अनुभव देता है जबकि Motorola के फोन में Smart Connect जैसे फीचर मौजूद हैं. Android का नया Desktop Mode इसी तरह फोन को बड़ी स्क्रीन पर ज्यादा कंप्यूटर जैसा बनाने की दिशा में Google का कदम है.
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ऐसे करें Android फोन को Desktop Mode में इस्तेमाल
इसके लिए सबसे पहले अपने Pixel 8 या उससे नए Pixel फोन को किसी बाहरी मॉनिटर से जोड़ना होगा. इसके लिए हाई-स्पीड USB-C केबल का इस्तेमाल करें. फोन कनेक्ट होने के बाद स्क्रीन पर ऑप्शन दिखाई देगा जिसमें फोन की स्क्रीन को मिरर करने या Desktop Mode इस्तेमाल करने का ऑप्शन मिलेगा.
यहां Desktop ऑप्शन चुनें. इसके बाद आप Bluetooth के जरिए कीबोर्ड और माउस कनेक्ट कर सकते हैं. USB हब के जरिए भी इन डिवाइस को फोन से कनेक्ट किया जा सकता है. इसके बाद मॉनिटर पर आपको डेस्कटॉप जैसा इंटरफेस दिखाई देने लगेगा.
कंप्यूटर जैसा मिलेगा इंटरफेस
Desktop Mode में ऐप्स अलग-अलग विंडो में खुलते हैं. इन विंडोज का आकार अपनी जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है. एक तरह का Start Menu भी मिलता है, जिसके जरिए App Drawer से ऐप्स खोले जा सकते हैं. ऊपर से नीचे की ओर स्वाइप करने पर नोटिफिकेशन देखे जा सकते हैं. खास बात यह है कि फोन को डिस्कनेक्ट करके दोबारा कनेक्ट करने पर एक्टिव विंडोज का लेआउट बरकरार रह सकता है. यानी काम को उसी जगह से दोबारा शुरू करना आसान हो जाता है.
अभी हैं कुछ बड़ी सीमाएं
Desktop Mode काफी फायदेमंद है लेकिन फिलहाल इसे पूरी तरह PC का ऑप्शन नहीं माना जा सकता. रिपोर्ट के मुताबिक फोटो एडिटिंग जैसे ज्यादा demanding कामों में लिमिटेशन सामने आ सकती हैं. वीडियो प्लेबैक ठीक चलता है लेकिन फिलहाल सिस्टम 60Hz फ्रेम रेट तक सीमित है. बड़े मॉनिटर के साथ 4K सपोर्ट की कमी भी कुछ यूजर्स के लिए परेशानी बन सकती है.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Googlebook ने ली Chromebook की जगह, नए Laptop में क्या खास?</title>
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        <description><![CDATA[ Google ने लैपटॉप की दुनिया में Chromebook से आगे बढ़ते हुए Googlebook नाम से लैपटॉप की नई सीरीज पेश की है. इसे खास तौर पर Android डिवाइस और Gemini AI के साथ बेहतर तरीके से काम करने के लिए बनाया गया है. Googlebook में सिर्फ सामान्य लैपटॉप वाले काम ही नहीं, बल्कि फोन और लैपटॉप को आपस में जोड़कर इस्तेमाल करने पर भी खास ध्यान दिया गया है. यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब लैपटॉप में AI फीचर्स का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Googlebook में क्या खास है.&amp;nbsp;
Googlebook में क्या है?
Googlebook Google का नया लैपटॉप प्लेटफॉर्म है, जिसमें Googlebook OS दिया गया है. यह सिस्टम ChromeOS की कुछ खूबियों को Android तकनीक के साथ जोड़ता है. नए लैपटॉप Acer, ASUS, Dell, HP और Lenovo जैसे ब्रांड लेकर आ रहे हैं. शुरुआती Googlebook मॉडल की कीमत 899 डॉलर से शुरू होती है. कंपनी के मुताबिक, Googlebook को Android डिवाइस के साथ इस तरह तैयार किया गया है कि दोनों के बीच काम करना आसान हो. फोन से जुड़े कई काम लैपटॉप पर ही किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
Googlebook में क्या खास है?
Googlebook की एक खासियत Cast My Apps है. इसके जरिए फोन के ऐप्स को लैपटॉप की स्क्रीन पर इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, फोन और लैपटॉप के बीच जानकारी को लेकर बार-बार अलग-अलग डिवाइस पर जाने की जरूरत कम होती है. Googlebook में Gemini AI को भी सिस्टम का जरूरी हिस्सा बनाया गया है. Magic Pointer इसका एक प्रमुख फीचर है. यह सामान्य माउस कर्सर से आगे बढ़कर स्क्रीन पर दिखाई दे रही चीजों के आधार पर Gemini की मदद लेने का तरीका देता है. जैसे ईमेल में मौजूद किसी तारीख को देखकर मीटिंग शेड्यूल करने में मदद ली जा सकती है.&amp;nbsp;
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Gemini AI से जुड़े कई फीचर्स
Googlebook में Gemini की मदद से कस्टम विजेट बनाने की सुविधा भी दी गई है. यूजर Gmail और Google Calendar जैसी सेवाओं की जानकारी जोड़कर अपनी जरूरत के हिसाब से डैशबोर्ड तैयार कर सकता है. Rambler नाम का फीचर बोली गई बातों को व्यवस्थित टेक्स्ट में बदलने में मदद करता है. Qualcomm Snapdragon X Elite वाले Googlebook मॉडल में Android ऐप्स और गेम्स को नेटिव तरीके से चलाने का सपोर्ट भी मिलता है.&amp;nbsp;
क्या Chromebook खत्म हो जाएगा?
Google ने अभी Chromebook को बंद नहीं किया है. मौजूदा Chromebook यूजर्स को उनकी तय सपोर्ट अवधि के अनुसार सॉफ्टवेयर अपडेट मिलते रहेंगे. कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ Chromebook मॉडल को फ्यूचर में Googlebook OS में अपग्रेड किया जा सकेगा, हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि किन मॉडलों को यह सुविधा मिलेगी और अपडेट कब शुरू होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>10 माइक ANC, ट्रिपल ड्राइवर्स और 68 घंटे की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ नया हेडफोन! जानें कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Nothing ने अपने प्रीमियम ऑडियो पोर्टफोलियो में नया Headphone (1) Pro लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इसमें ऑडियो क्वालिटी से लेकर नॉइज कैंसिलेशन और बैटरी तक कई बड़े अपग्रेड किए हैं. इसकी सबसे खास बात ट्रिपल-ड्राइवर सेटअप, 10 माइक्रोफोन वाला ANC सिस्टम और 68 घंटे तक की बैटरी लाइफ है.
Nothing Headphone (1) Pro में हर ईयरकप के अंदर तीन अलग ड्राइवर दिए गए हैं. इनमें 40mm डायनेमिक ड्राइवर बास के लिए, 13x8mm प्रिसिजन डायनेमिक ड्राइवर मिड-रेंज और वोकल्स के लिए जबकि xMEMS ड्राइवर हाई-फ्रीक्वेंसी यानी ट्रेबल के लिए काम करता है. कंपनी के मुताबिक यह सेटअप बास, वोकल्स और इंस्ट्रूमेंट्स को अलग-अलग तरीके से हैंडल करता है.
हेडफोन को Metropolis Studios के साथ ट्यून किया गया है. इसमें Flat EQ, Personal Sound और Dynamic Spatial Audio जैसे फीचर्स मिलते हैं. Spatial Audio में हेड ट्रैकिंग के साथ Standard, Live House, Club और Concert Hall जैसे मोड दिए गए हैं.
10 माइक और 46dB तक ANC
नए हेडफोन में कुल 10 माइक्रोफोन दिए गए हैं. इसका Adaptive Active Noise Cancellation सिस्टम कंपनी के अनुसार 46dB तक शोर कम कर सकता है. इसमें Transparency Mode भी मौजूद है जिससे जरूरत पड़ने पर आसपास की आवाजें सुनी जा सकती हैं.
इसके अलावा कॉलिंग के लिए चार-माइक्रोफोन एल्गोरिदम और Environmental Noise Cancellation भी दिया गया है. Headphone (1) Pro में 8mm सिलिकॉन साउंड सील और डुअल-लेयर कुशन भी मिलते हैं.
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68 घंटे तक चलेगी बैटरी
हेडफोन में 1,060mAh की बैटरी दी गई है. AAC पर ANC बंद रखने पर यह 68 घंटे तक चल सकती है जबकि ANC ऑन होने पर कंपनी 30 घंटे तक का प्लेबैक बताती है. LDAC इस्तेमाल करने पर यह आंकड़ा ANC ऑफ में 53 घंटे और ANC ऑन में 28 घंटे तक है. सिर्फ 5 मिनट की चार्जिंग से ANC बंद होने पर करीब 4 घंटे का प्लेबैक मिल सकता है.
Nothing Headphone 1 Pro Vs Apple AirPods Max 2
ब्रांड के हिसाब से मुकाबले करें तो Apple AirPods Max 2 में एक Apple-designed dynamic driver और कुल 9 माइक्रोफोन दिए गए हैं. Apple के अनुसार इसमें ANC ऑन रहने पर 20 घंटे तक की बैटरी मिलती है और भारत में इसकी कीमत ₹74,900 है.
वहीं Nothing Headphone (1) Pro में तीन ड्राइवर, 10 माइक्रोफोन और ANC ऑफ होने पर 68 घंटे तक की बैटरी दी गई है. हालांकि भारत में Nothing ने अभी इसकी कीमत और बिक्री की तारीख आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं की है. अमेरिका में इसकी कीमत $399 यानी करीब ₹38,300 है.
डिजाइन और कनेक्टिविटी भी प्रीमियम
Headphone (1) Pro का वजन 327 ग्राम है और इसमें एल्युमिनियम, टाइटेनियम तथा स्क्रैच-रेजिस्टेंट ग्लास का इस्तेमाल किया गया है. इसे IP52 रेटिंग मिली है. कनेक्टिविटी के लिए Bluetooth 6.1, LDAC, USB-C, 3.5mm ऑडियो और डुअल-डिवाइस कनेक्शन मिलता है. हेडफोन Android और iOS दोनों के साथ काम करता है.
फिलहाल भारतीय कीमत का इंतजार है. कंपनी की भारतीय वेबसाइट पर प्रोडक्ट लिस्ट हो चुका है लेकिन भारत में इसकी बिक्री कब शुरू होगी, इसकी ऑफिशियल जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>सबकुछ ठीक फिर भी SIM दिखा रहा नो सर्विस, चेक करें ये सेटिंग</title>
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        <description><![CDATA[ फोन में अचानक नो सर्विस दिखने लगे और कॉल, मैसेज या मोबाइल डेटा चलना बंद हो जाए, तो तुरंत लगता है कि SIM या नेटवर्क में कोई दिक्कत है, लेकिन हर बार समस्या की वजह यही हो, यह जरूरी नहीं है. कई बार फोन में SIM लगी होती है, कोई बड़ी खराबी भी नजर नहीं आती और फिर भी नेटवर्क कनेक्शन गायब हो जाता है.
ऐसे में बार-बार SIM निकालना या तुरंत नई SIM लेने की जरूरत नहीं होती है. इस तरह की परेशानी को ठीक करने के लिए शुरुआत में कुछ आसान सेटिंग्स और सामान्य जांच काफी हो सकती हैं तो आइए जानते हैं कि सबकुछ ठीक फिर भी SIM नो सर्विस दिखा रहा तो कौन-सी सेटिंग चेक करें.&amp;nbsp;
सबसे पहले Airplane Mode चेक करें
कई बार फोन में Airplane Mode गलती से चालू रह जाता है, जिससे मोबाइल कनेक्शन बंद हो जाता है. जिसमें सबसे पहले इसे ऑफ करके नेटवर्क देखें. अगर पहले से ऑफ है, तो करीब 10 से 15 सेकंड के लिए इसे ऑन करें और फिर बंद कर दें. इससे फोन दोबारा मोबाइल नेटवर्क से जुड़ने की कोशिश करता है.&amp;nbsp;
SIM नो सर्विस दिखा रहा तो कौन-सी सेटिंग चेक करें
अगर फोन अपने आप सही मोबाइल नेटवर्क से कनेक्ट नहीं हो रहा है, तो Automatic Network Selection की सेटिंग जरूर चेक करें. इसके लिए फोन की Settings में जाएं और Network &amp;amp; Internet या Mobile Network का ऑप्शन खोलें. यहां देखें कि नेटवर्क अपने आप चुनने वाली सेटिंग चालू है या नहीं. साथ ही Network Mode की सेटिंग भी देखें और उसे सामान्य ऑप्शन पर रखें. गलत नेटवर्क मोड होने पर भी कनेक्शन प्रभावित हो सकता है.&amp;nbsp;
5G की जगह 4G करके देखें
कमजोर या अस्थिर 5G कवरेज वाले इलाके में फोन बार-बार 5G और 4G के बीच नेटवर्क बदल सकता है. ऐसे में कुछ समय के लिए Preferred Network Type को 4G/LTE पर बदलकर देखें. अगर सिग्नल स्थिर हो जाता है, तो समस्या नेटवर्क स्विचिंग से जुड़ी हो सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - बिल्डिंग में मोबाइल सिग्नल कैसा? 1 क्लिक में पता चल जाएगी नेटवर्क और इंटरनेट स्पीड
SIM को दोबारा लगाकर देखें
फोन बंद करके SIM निकालें और देखें कि उस पर धूल, खरोंच या किसी तरह का नुकसान तो नहीं है. SIM को सही तरीके से ट्रे में लगाकर फोन दोबारा शुरू करें. अगर eSIM इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सेटिंग्स में SIM लाइन को बंद करके फिर चालू करके भी जांच सकते हैं. अगर बाकी सभी तरीके काम न करें, तो Network Settings Reset किया जा सकता है. इससे सेव किए गए Wi-Fi नेटवर्क, Bluetooth कनेक्शन और मोबाइल नेटवर्क से जुड़ी सेटिंग्स हट जाएंगी, लेकिन फोन के ऐप्स, फोटो या निजी डेटा डिलीट नहीं होंगे.
फोन Restart करके देखें
कभी-कभी अस्थायी सॉफ्टवेयर समस्या की वजह से भी नेटवर्क कनेक्शन रुक सकता है. ऐसे में फोन को एक बार Restart करना आसान तरीका है. दोबारा चालू होने के बाद फोन को नेटवर्क से जुड़ने में थोड़ा समय दें. इसलिए No Service दिखते ही तुरंत SIM बदलने का फैसला लेने के बजाय पहले इन बेसिक सेटिंग्स को जांचना बेहतर है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 01:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 18 Pro Max में छिपी है बड़ी कमी! हाथ में उठाते ही समझ आएगी ये दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro Max में छिपी है बड़ी कमी! हाथ में उठाते ही समझ आएगी ये दिक्कत ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 01:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram Reel को बना सकते हैं अपने फोन की रिंगटोन! ये है सबसे आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल Instagram Reels और दूसरे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर ऐसे कई गाने, डायलॉग और ऑडियो वायरल होते हैं जिन्हें सुनकर मन करता है कि काश यही आवाज फोन की रिंगटोन बन जाए. अच्छी बात यह है कि आप किसी पसंदीदा Reel के ऑडियो को अपने फोन की रिंगटोन के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए Android और iPhone में तरीका थोड़ा अलग है. आइए आसान स्टेप्स में जानते हैं.
जिस Reel की आवाज आपको पसंद है, उसे पहले फोन में सेव करना होगा. अगर Reel में डाउनलोड का ऑप्शन उपलब्ध है तो वीडियो को डाउनलोड कर सकते हैं. इसके अलावा अपने फोन के स्क्रीन रिकॉर्डिंग फीचर से भी उस Reel का छोटा हिस्सा रिकॉर्ड किया जा सकता है. ध्यान रखें कि रिंगटोन के लिए पूरे वीडियो की जरूरत नहीं होती. जिस हिस्से को रिंगटोन बनाना चाहते हैं, उसे करीब 20-30 सेकंड का रखना बेहतर रहेगा. इसके बाद वीडियो से ऑडियो निकालने के लिए किसी भरोसेमंद ऑडियो एडिटर या फोन में मौजूद एडिटिंग टूल का इस्तेमाल किया जा सकता है.
Android फोन में ऐसे लगाएं Reel की आवाज
Android फोन में अपनी पसंद की ऑडियो फाइल को रिंगटोन बनाना काफी आसान है. सबसे पहले Reel से तैयार की गई MP3 या दूसरी ऑडियो फाइल को फोन में सेव करें. अब Settings में जाएं और Sound &amp;amp; vibration या इसी तरह के विकल्प को खोलें. इसके बाद Phone ringtone पर टैप करें. यहां आपको फोन में मौजूद रिंगटोन की लिस्ट दिखाई देगी.
कई Android फोन में Add ringtone, My Sounds, + या Choose from files जैसा विकल्प मिलता है. इस पर टैप करके Reel से तैयार की गई ऑडियो फाइल चुनें. फाइल सिलेक्ट करते ही वह रिंगटोन की लिस्ट में जुड़ जाएगी. अब उसे चुनकर सेव कर दें.
कुछ Android फोन में फाइल मैनेजर से ऑडियो को Ringtones फोल्डर में कॉपी करने के बाद भी वह रिंगटोन की सूची में दिखाई देने लगती है.
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iPhone में थोड़ा अलग है तरीका
iPhone में किसी MP3 फाइल को सीधे रिंगटोन के तौर पर चुनने का ऑप्शन Android की तरह नहीं मिलता. इसके लिए GarageBand ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है.
सबसे पहले Reel की ऑडियो फाइल को iPhone के Files ऐप में सेव करें. इसके बाद GarageBand खोलें और नया ऑडियो प्रोजेक्ट शुरू करें. यहां ऑडियो रिकॉर्डर या किसी इंस्ट्रूमेंट को चुनकर एडिटिंग स्क्रीन पर जाएं.
अब Files से अपनी ऑडियो फाइल को GarageBand में इंपोर्ट करें. जरूरत के मुताबिक ऑडियो को ट्रिम करके करीब 30 सेकंड या उससे कम का हिस्सा रखें. इसके बाद प्रोजेक्ट को रिंगटोन के रूप में एक्सपोर्ट करें. GarageBand आपको इसे सीधे Ringtone के तौर पर एक्सपोर्ट करने का ऑप्शन देगा. एक्सपोर्ट होने के बाद iPhone की Settings &gt; Sounds &amp;amp; Haptics &gt; Ringtone में जाकर नई रिंगटोन चुन सकते हैं.
कॉपीराइट का रखें ध्यान
किसी Reel के ऑडियो को निजी इस्तेमाल के लिए रिंगटोन बनाना और उसे सार्वजनिक रूप से शेयर या कमर्शियल इस्तेमाल करना अलग बातें हैं. इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के कॉपीराइट वाले गाने या ऑडियो को बिना परमिशन के सार्वजनिक इस्तेमाल करने से बचें.
इस तरह थोड़ी सी एडिटिंग के बाद आपकी पसंदीदा Reel का वायरल डायलॉग, म्यूजिक या आवाज फोन की कॉल आने पर सुनाई दे सकती है.
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 01:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>एक छोटी गलती और WhatsApp Account Ban! इन 4 कामों से बचें</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp आज हर किसी के लिए काफी जरूरी है. ऐसे में अगर अचानक WhatsApp Account Ban हो जाए तो परेशानी बढ़ सकती है. लेकिन अकाउंट पर कार्रवाई सिर्फ किसी बड़ी गलती की वजह से ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कुछ ऐसे काम भी हैं जो सामान्य लग सकते हैं, लेकिन WhatsApp की नीतियों के खिलाफ हो सकते हैं.
WhatsApp के मुताबिक, वह तकनीक और यूजर्स से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर ऐसे अकाउंट की पहचान करता है जो उसकी तय नीतियों का उल्लंघन करते हैं. इसलिए इस पर कई एक्टिविटी से बचना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि किन 4 कामों की मदद से WhatsApp Account Ban होने से बचाएं.&amp;nbsp;
बार-बार अनचाहे मैसेज भेजना पड़ सकता है भारी
अगर कोई व्यक्ति आपसे कहता है कि वह आपके मैसेज नहीं चाहता, तो इसके बाद उसे दोबारा मैसेज नहीं करना चाहिए. WhatsApp की सलाह है कि ऐसे कॉन्टैक्ट को अपनी एड्रेस बुक से हटा दें और आगे संपर्क न करें. लगातार अनचाहे मैसेज भेजना शिकायत की वजह बन सकता है.&amp;nbsp;
बल्क या ऑटोमैटिक मैसेज से रहें दूर
WhatsApp पर एक साथ बड़ी संख्या में मैसेज भेजना, ऑटोमैटिक मैसेज या ऑटो-डायलिंग जैसी गतिविधियां नियमों के खिलाफ हो सकती हैं. WhatsApp ऐसे व्यवहार को पहचानने के लिए मशीन लर्निंग तकनीक और यूजर रिपोर्ट का यूज करता है. अनऑथराइज्ड या ऑटोमेटिक अकाउंट और ग्रुप बनाना या WhatsApp की तरह काम करने वाले ऐप्स का यूज करना भी जोखिम पैदा कर सकता है.
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बिना अनुमति किसी का नंबर या डेटा यूज न करें
किसी दूसरे व्यक्ति का फोन नंबर उसकी अनुमति के बिना शेयर करना या अनऑथराइज्ड सोर्स से मिले कॉन्टैक्ट डेटा का यूज करके लोगों को मैसेज या ग्रुप में जोड़ना WhatsApp की नीतियों का उल्लंघन हो सकता है. इसलिए किसी और की कॉन्टैक्ट लिस्ट या निजी जानकारी का यूज करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
Broadcast List का जरूरत से ज्यादा यूज
Broadcast List से भेजा गया मैसेज तभी यूजर तक पहुंचता है, जब उसने आपका फोन नंबर अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव किया हो. अगर कोई व्यक्ति बार-बार ऐसे मैसेज भेजता है और यूजर्स उसकी रिपोर्ट करते हैं, तो WhatsApp उस अकाउंट पर कार्रवाई कर सकता है.&amp;nbsp;
इसके अलावा WhatsApp की Terms of Service में झूठी या गलत जानकारी प्रकाशित करना, गैरकानूनी तरीके अपनाना, धमकी या डराने-धमकाने वाली एक्टिविटी, Hate Speech और आपत्तिजनक व्यवहार भी प्रतिबंधित है. WhatsApp यूज करते समय इन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 01:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>4 साल बाद Google का बड़ा Android इवेंट, इस बार क्या होगा खास?</title>
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        <description><![CDATA[ Google एक बार फिर Android डेवलपर्स के लिए अपना खास इवेंट लेकर आ रहा है. चार साल के लंबे इंतजार के बाद Android Dev Summit 2026 एक बार फिर होने जा रहा है. &amp;nbsp;इस बार यह इवेंट काफी खास माना जा रहा है. इसमें कंपनी अपने मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के अगले बड़े बदलावों पर जानकारी दे सकती है.
खासतौर पर Android 18 का जिक्र इस इवेंट को और जरूरी बनाता है. दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में Android से जुड़े नए फीचर्स, डेवलपमेंट टूल्स और टेक्निकल अपडेट्स पेश किए जाने की उम्मीद है. तो आइए जानते हैं कि इस बार Android Dev Summit 2026 में क्या खास होगा.&amp;nbsp;
चार साल बाद कब लौट रहा है Android Dev Summit?
Google का Android Dev Summit 2026 28 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा और 29 अक्टूबर तक चलेगा. इसमें मेन कार्यक्रम अमेरिका के Mountain View, California स्थित Google Event Centre at Bay View में आयोजित किया जाएगा. यह कुछ प्रोफेशनल Android डेवलपर्स के लिए इन-पर्सन इवेंट होगा और इसमें शामिल होने के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन जरूरी है.&amp;nbsp;
इस बार Android Dev Summit 2026 में क्या खास होगा?
इस बार की सबसे बड़ी चर्चा Android 18 को लेकर है. Summit में Google अपने अगले ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ी ज्यादा जानकारी शेयर कर सकता है. इसके अलावा Jetpack Compose में नए ग्राफिक्स फीचर्स से जुड़े अपडेट भी सामने आने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
AI से लेकर Android XR तक पर रहेगा फोकस
Android Dev Summit 2026 में सिर्फ नए OS की बात नहीं होगी. यहां Android ऐप्स और यूजर एक्सपीरियंस में Artificial Intelligence को शामिल करने से जुड़े सेशन भी होने की उम्मीद है. इसके साथ Android XR, डेवलपमेंट टूल्स और ऐप बनाने से जुड़े तकनीकी विषय भी कार्यक्रम का हिस्सा हो सकते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Big Billion Days Sale पर बंपर डिस्काउंट, मोबाइल से लेकर लैपटॉप तक कितनी छूट?
लंदन में भी होगा Android Dev Summit &amp;nbsp;एक्सटेंडेड
Google ने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के डेवलपर्स के लिए 28 अक्टूबर को London में Android Dev Summit का एक्सटेंडेड एडिशन रखा है. यह कार्यक्रम Google के UK ऑफिस, 6 Pancras Square में होगा. यहां डेवलपर्स को Android टीम के सदस्यों और दूसरे डेवलपर्स से बातचीत करने का मौका मिलेगा.&amp;nbsp;
चार साल बाद क्यों खास है यह इवेंट?
Android Dev Summit का पिछला dedicated edition 2022 में हुआ था. अब 2026 में इसकी वापसी हो रही है. Mountain View में दो दिन के मुख्य कार्यक्रम के साथ London में एक्सटेंडेड एडिशन भी रखा गया है. इवेंट में प्रोडक्ट डेमो, Android एक्सपर्ट्स से बातचीत और नए तकनीकी अपडेट्स शामिल होंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर के अंदर ही छिपी हो सकती है इंटरनेट स्लो होने की बड़ी वजह, ऐसे जानें</title>
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        <description><![CDATA[ जब इंटरनेट धीमा चलता है तो ज्यादातर लोग तुरंत अपने ब्रॉडबैंड प्लान या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को जिम्मेदार मानते हैं. आम धारणा है कि ज्यादा स्पीड वाला प्लान लेने से इंटरनेट की हर समस्या खत्म हो जाएगी. लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि इंटरनेट की परफॉर्मेंस केवल डाउनलोड स्पीड पर निर्भर नहीं करती. कई बार असली परेशानी आपके घर के अंदर ही मौजूद होती है.
इंटरनेट कनेक्शन को समझने के लिए बैंडविथ और लेटेंसी दो अलग चीजें हैं. बैंडविथ बताती है कि एक समय में कितनी मात्रा में डेटा ट्रांसफर हो सकता है जबकि लेटेंसी यह बताती है कि डेटा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कितना समय लग रहा है. बड़ी फाइल या फिल्म डाउनलोड करने में बैंडविथ ज्यादा जरूरी होती हैं. लेकिन वीडियो कॉल, ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल रियलिटी जैसी इंटरैक्टिव सर्विसेज में कम लेटेंसी बेहद जरूरी होती है. ज्यादा लेटेंसी होने पर वीडियो कॉल में आवाज अटक सकती है और गेम में रिएक्शन देर से मिलता है.
घर का Wi-Fi बन सकता है सबसे बड़ा कारण
रिसर्च में सामने आया कि इंटरनेट में सबसे ज्यादा देरी हमेशा दूर मौजूद सर्वर या इंटरनेट के मुख्य नेटवर्क में नहीं होती है. कई मामलों में समस्या यूजर तक पहुंचने वाले आखिरी हिस्से यानी लास्ट माइल में होती है.
घर में यह आखिरी कनेक्शन अक्सर Wi-Fi के जरिए डिवाइस तक पहुंचता है. कमजोर Wi-Fi सिग्नल, एक साथ जुड़े कई डिवाइस और नेटवर्क पर ज्यादा ट्रैफिक लेटेंसी बढ़ा सकते हैं. यानी आपके पास तेज इंटरनेट प्लान होने के बावजूद फोन, टीवी या लैपटॉप पर इंटरनेट एक्सपीरिएंस खराब हो सकता है.
एक सेकंड की देरी भी कर सकती है परेशान
रिसर्च में कुछ एक्सेस नेटवर्क में लेटेंसी एक सेकंड या उससे ज्यादा तक पहुंचने की बात सामने आई. आम यूजर को एक सेकंड बहुत कम समय लग सकता है लेकिन रियल-टाइम सेवाओं के लिए यह काफी बड़ा अंतर है. जैसे वीडियो मीटिंग में आवाज के बीच अंतर बढ़ सकता है, बातचीत में लोग एक-दूसरे की बात काट सकते हैं और ऑनलाइन गेमिंग के दौरान अचानक फ्रीज या लैग महसूस हो सकता है.
यह भी पढ़ें: क्या 100MBPS वाले WiFi प्लान में सच में मिलती है इतनी तेज इंटरनेट स्पीड या बस दिखावा है?
समस्या सिर्फ Wi-Fi तक सीमित नहीं
रिसर्च में इंटरनेट के दूसरे हिस्सों में छिपी देरी को भी देखा गया. वेब सर्वर के सॉफ्टवेयर में डेटा भेजे जाने से पहले भी एक्सट्रा देरी हो सकती है. इसके अलावा Starlink जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज में नेटवर्क के अलग-अलग हिस्से रिस्पॉन्स टाइम को प्रभावित कर सकते हैं.
कैसे खोजी जा सकती है असली समस्या?
रिसर्च में ऐसे टूल विकसित किए गए हैं जो इंटरनेट ट्रैफिक को प्रभावित किए बिना रियल टाइम में लेटेंसी की निगरानी कर सकते हैं. इनमें eBPF जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है जिससे कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के अंदर नेटवर्क एक्टिविटी का विश्लेषण किया जाता है. ऐसे टूल इंटरनेट प्रोवाइडर्स और कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क को यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि देरी आखिर किस हिस्से में हो रही है.
इसका मतलब साफ है कि तेज इंटरनेट के लिए केवल महंगा या ज्यादा Mbps वाला प्लान लेना ही काफी नहीं है. घर में Wi-Fi की कंडिशन, राउटर से दूरी, एक साथ जुड़े डिवाइस और नेटवर्क पर पड़ने वाला लोड भी इंटरनेट एक्सपीरिएंस को काफी प्रभावित कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;Google Maps और Earth में क्या है फर्क? जानें क्या है दोनों की टेक्नोलॉजी ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Flipkart की Big Billion Days Sale इस दिन होगी शुरू, इन्हें मिलेगा अर्ली एक्सेस</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart ने अपनी साल की सबसे बड़ी और लोकप्रिय सेल Flipkart Big Billion Days Sale 2026 की तारीखों का आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है.&amp;nbsp;हर साल की तरह इस बार भी इस महासेल में ग्राहकों को स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स, फैशन और होम अप्लायंसेज जैसे लाखों प्रोडक्ट्स पर भारी डिस्काउंट और बंपर डील्स मिलने वाली हैं. त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले आने वाली यह सेल ग्राहकों के लिए बचत करने का सबसे अच्छा मौका होती है.
इस दिन से शुरू होगी मुख्य सेल
Flipkart द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सभी आम ग्राहकों के लिए बिग बिलियन डेज 2026 की मुख्य सेल अगले महीने 9 अक्टूबर 2026 से लाइव हो जाएगी. यह सेल भारतीय बाजार में आते ही ई-कॉमर्स स्पेस में तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है. हालांकि, कंपनी ने अभी सभी व्यक्तिगत डील्स और डिस्काउंट्स की पूरी लिस्ट को सीक्रेट रखा है, लेकिन मुख्य बैनर और टीजर लाइव कर दिए गए हैं, जिसमें टॉप डील्स रिवीलिंग सून का मैसेज दिया गया है.
इन ग्राहकों को मिलेगा 24 घंटे पहले अर्ली एक्सेस
हर बार की तरह Flipkart अपने कुछ खास और वफादार ग्राहकों को आम जनता से पहले शॉपिंग करने की खास सुविधा दे रहा है, जिसे अर्ली एक्सेस कहा जाता है. इस बार 8 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे से ही अर्ली एक्सेस की शुरुआत हो जाएगी.
इस अर्ली एक्सेस का लाभ उठाने वालों में मुख्य रूप से Flipkart Plus, Flipkart Black और फ्लिपकार्ट के को-ब्रांडेड Credit Card धारक शामिल हैं. इन ग्राहकों को आम जनता से पूरे 24 घंटे पहले सेल का एक्सेस मिल जाएगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि सीमित स्टॉक या बंपर डिस्काउंट वाले प्रोडक्ट्स को ये मेंबर्स स्टॉक खत्म होने से पहले ही आसानी से खरीद सकते हैं.
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;AI बना रहा धड़ाधड़ सॉफ्टवेयर, फिर भी इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहीं कंपनियां? ये है वजह
शुरू हो चुकी हैं अर्ली बर्ड डील्स
मुख्य सेल 9 अक्टूबर से शुरू होगी, लेकिन फ्लिपकार्ट ने ग्राहकों की एक्साइटमेंट बढ़ाने के लिए 24 सितंबर 2026 से ही अपने प्लेटफॉर्म पर Early Bird Deals Store को लाइव कर दिया है. इसके तहत कंपनी कई गैजेट्स और स्मार्टफोन्स पर मिलने वाले शुरुआती ऑफर्स का खुलासा कर रही है.&amp;nbsp;
फिलहाल सामने आई शुरुआती अर्ली बर्ड डील्स में Realme P4s 5G, Oppo K14 Lite और Infinix Note Edge जैसे कई स्मार्टफोन शामिल हैं, जिनकी प्रभावी कीमत सभी बैंक ऑफर्स को मिलाकर 8,999 से शुरू हो रही है. इसके अलावा प्रीमियम स्मार्टफोन्स जैसे iPhone 17 और अन्य फ्लैगशिप डिवाइसेज पर मिलने वाले बड़े डिस्काउंट के प्राइज रेंज को भी टीज किया जाने लगा है.
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बच्चों के लिए बेस्ट हैं ये टॉय लैपटॉप, आज ही खरीदकर रख लें</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में बच्चों को मोबाइल और टैबलेट जैसे गैजेट्स यूज करना बेहद पसंद होता है. वहीं माता-पिता अक्सर इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि बच्चे स्क्रीन पर ज्यादा समय न बिताएं. ऐसे में टॉय लैपटॉप आपके लिए एक ऐसा विकल्प हो सकता है, जो बच्चों को गैजेट जैसा अनुभव देने के साथ-साथ उन्हें खेल-खेल में कुछ नया सीखने का मौका भी देता है.
टॉय लैपटॉप असली कंप्यूटर की तरह काम नहीं करते, लेकिन इनमें बच्चों की उम्र और सीखने के स्तर को ध्यान में रखकर कई एक्टिविटीज दी जाती हैं. इनमें अक्षर पहचानने, नंबर सीखने, स्पेलिंग, म्यूजिक, क्विज और लॉजिकल गेम्स जैसे फिचर्स मिलते हैं. कुछ मॉडल में नकली कीबोर्ड और माउस भी दिए जाते हैं, जिससे बच्चों को कंप्यूटर चलाने की शुरुआती समझ मिलती है.
LeapFrog My Own Leaptop
छोटे बच्चों के लिए LeapFrog My Own Leaptop खास तौर पर बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यह 2 से 4 साल की उम्र के बच्चों के लिए है. इसमें ABCs, मैसेज, गेम्स और म्यूजिक जैसे चार लर्निंग मोड मिलते हैं. बच्चे इसमें अक्षर सीखने के साथ अपना नाम स्पेल करना भी सीख सकते हैं. इसमें 16 गाने और धुनें हैं और स्क्रीन पर अलग-अलग एनिमेशन भी दिखाई देते हैं.
LeapFrog 2-in-1 LeapTop Touch
अगर आप ऐसा टॉय लैपटॉप चाहते हैं जिसे बच्चा लैपटॉप और टैबलेट दोनों की तरह इस्तेमाल कर सके, तो LeapFrog 2-in-1 LeapTop Touch एक बेहतरीन विकल्प है. इसका डिजाइन बच्चों को कीबोर्ड के साथ-साथ टच इंटरफेस का अनुभव देता है. उपलब्ध लिस्टिंग्स में इसे छोटे बच्चों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग टॉय के तौर पर पेश किया गया है. इस तरह का डिजाइन उन बच्चों के लिए उपयोगी हो सकता है जो एक ही तरह की एक्टिविटी से जल्दी बोर हो जाते हैं.
VTech Brilliant Baby Laptop
बहुत छोटे बच्चों के लिए VTech Brilliant Baby Laptop भी एक विकल्प है. इसमें अलग-अलग बटन, लाइट और इंटरैक्टिव एक्टिविटीज के जरिए बच्चों को रंग, आकार, जानवर और संगीत जैसी चीजों से परिचित कराया जाता है. इसमें मूवेबल माउस और कैरी करने के लिए हैंडल जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. इसका फोकस शुरुआती उम्र के बच्चों को कंप्यूटर जैसे खिलौने के जरिए बेसिक कॉन्सेप्ट समझाने पर है.
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VTech Play Smart Preschool Laptop
थोड़े बड़े प्री-स्कूल बच्चों के लिए VTech Play Smart Preschool Laptop देखा जा सकता है. इसमें शुरुआती शिक्षा से जुड़ी एक्टिविटीज के साथ बच्चों को कीबोर्ड और माउस के जरिए कंप्यूटर जैसा अनुभव देने की कोशिश की जाती है. इस तरह के मॉडल में बच्चे अक्षर, नंबर, लॉजिक और दूसरी शुरुआती स्किल्स से जुड़ी एक्टिविटीज कर सकते हैं.
VTech Advance Laptop
VTech Advance Laptop उन बच्चों के लिए एक और विकल्प है जो सिर्फ म्यूजिक या बेसिक बटन वाले खिलौने से आगे की एक्टिविटीज करना चाहते हैं. इस तरह के एजुकेशनल लैपटॉप बच्चों को कीबोर्ड, स्क्रीन और अलग-अलग लर्निंग एक्टीवीटिज के जरिए कंप्यूटर की शुरुआती समझ देने के लिए बनाए जाते हैं. अगर बच्चा पहले से अक्षर और नंबर पहचानता है, तो खरीदने से पहले इसमें मौजूद एक्टिविटीज और लेवल्स जरूर चेक करें, ताकि खिलौना बच्चे के लिए बहुत आसान या बहुत मुश्किल न हो.
खरीदते समय सिर्फ डिजाइन न देखें
टॉय लैपटॉप खरीदते समय केवल रंग, कार्टून कैरेक्टर या कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं है. सबसे पहले बच्चे की उम्र देखें. 2 से 4 साल के बच्चे के लिए अल्फाबेट, म्यूजिक और सिंपल गेम्स वाले मॉडल उपयोगी हो सकते हैं, जबकि प्री-स्कूल उम्र के बड़े बच्चों के लिए स्पेलिंग, नंबर्स, लॉजिक और प्रोबल्म सोल्विंग जैसी एक्टिविटीज ज्यादा असरदार हो सकती हैं.
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>रोज&amp;रोज Reels देखने की आदत दिमाग पर डाल रही है असर? स्टडी में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ आज Instagram Reels, YouTube Shorts और दूसरे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. कुछ मिनट के लिए शुरू किया गया स्क्रॉलिंग सेशन कब आधे घंटे या उससे ज्यादा का हो जाता है, पता ही नहीं चलता. लेकिन लगातार शॉर्ट वीडियो देखने की यह आदत सिर्फ समय ही नहीं ले रही बल्कि ध्यान और सेल्फ-कंट्रोल से जुड़ी मानसिक प्रोसेस को भी प्रभावित कर सकती है. हालिया रिसर्च में शॉर्ट वीडियो इस्तेमाल और cognitive control के बीच संबंध देखा गया है.
शॉर्ट वीडियो को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि यूजर को एक के बाद एक नया कंटेंट मिलता रहे. हर कुछ सेकंड में बदलता वीडियो, तेज विजुअल और अलग-अलग तरह की जानकारी दिमाग का ध्यान लगातार खींचती है. 2026 में पब्लिश एक स्टडी में ज्यादा शॉर्ट-फॉर्म वीडियो इस्तेमाल करने वाले लोगों में self-control से जुड़े परफॉर्मेंस और attentional control के बीच नेगेटिव संबंध पाया गया. शोधकर्ताओं ने Go/No-Go जैसे टास्क के जरिए inhibitory control और ध्यान को जांचा.
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फोकस और सेल्फ-कंट्रोल पर पड़ सकता है असर
2024 में पब्लिश EEG स्टडी में 48 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था. शोधकर्ताओं ने पाया कि शॉर्ट वीडियो की लत बढ़ने के साथ self-control और दिमाग के executive control से जुड़े संकेतों में कमी का संबंध दिखाई दिया. Executive control वही क्षमता है जो हमें ध्यान बनाए रखने और बेमतलह रिएक्शन को रोकने में मदद करती है.
इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार Reels देखने से दिमाग को स्थायी नुकसान हो जाता है. उपलब्ध शोध मुख्य रूप से संबंध (association) दिखाता है और कई स्टडी में सीमित सैंपल या cross-sectional डिजाइन जैसी सीमाएं भी हैं.
पसंदीदा वीडियो ज्यादा खींच सकते हैं ध्यान
एक दूसरे रिसर्च में 56 युवा एडल्ट के दिमाग की एक्टिविटी को शॉर्ट वीडियो देखते समय चेक किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक पसंदीदा वीडियो देखने के दौरान self-control और cognitive control से जुड़े दिमागी क्षेत्रों की एक्टिविटी में बदलाव देखा गया. शोधकर्ताओं ने इसे ध्यान और self-regulation से जुड़े प्रोसेस से जोड़ा. यानी समस्या केवल वीडियो की संख्या नहीं बल्कि लगातार और बिना किसी उद्देश्य के स्क्रॉल करने की आदत भी हो सकती है.
क्या करना चाहिए?
अगर आपको लगता है कि Reels देखते-देखते समय का पता नहीं चलता तो छोटे बदलाव मददगार हो सकते हैं. ऐप में daily time limit लगाना, नोटिफिकेशन कम करना और खाली समय में बिना मकसद स्क्रॉल करने से बचना एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है.
सबसे जरूरी बात यह है कि शॉर्ट वीडियो को पूरी तरह नुकसानदेह मानने के बजाय इस्तेमाल के तरीके और मात्रा पर ध्यान दिया जाए. मौजूदा शोध से यह संकेत जरूर मिलता है कि ज्यादा या problematic short-video use का ध्यान और self-control से संबंध हो सकता है लेकिन इसके लंबे समय के प्रभावों को समझने के लिए और बेहतर longitudinal research की जरूरत है.
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>रात में फोन पर Do Not Disturb नहीं! ये सेटिंग ऑन करने पर मिलेगी बेहतर नींद</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. रात को सोते समय भी फोन अक्सर बेड के पास रहता है और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन नींद में खलल डाल सकते हैं. ऐसे में ज्यादातर लोग फोन को Do Not Disturb (DND) मोड पर डाल देते हैं. लेकिन अगर रात में फोन से दूरी बनानी है तो DND की जगह Airplane Mode ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.
आपको बता दें कि Do Not Disturb का काम मुख्य रूप से फोन के नोटिफिकेशन और कॉल को साइलेंट करना है. इसमें यूजर यह तय कर सकता है कि किन लोगों या ऐप्स के अलर्ट आने दिए जाएं. अलग-अलग फोन में Sleep, Work या Driving जैसे कस्टम मोड भी बनाए जा सकते हैं. हालांकि DND पूरी तरह फोन को कनेक्टिविटी से अलग नहीं करता है. कुछ नोटिफिकेशन इस मोड में भी पहुंच सकते हैं. इसी तरह कुछ कंडिशन में बार-बार कॉल करने वाला व्यक्ति या इमरजेंसी ऑप्शन का इस्तेमाल करके आप तक पहुंच सकता है.
Airplane Mode में नेटवर्क से हो जाता है डिस्कनेक्ट
Airplane Mode इससे एक कदम आगे जाता है. इसे ऑन करने पर फोन का सेल्युलर नेटवर्क बंद हो जाता है. यानी फोन लगातार मोबाइल नेटवर्क खोजने या सिग्नल बनाए रखने की कोशिश नहीं करता है.
हालांकि Airplane Mode में Wi-Fi और Bluetooth कुछ डिवाइस में दोबारा ऑन किए जा सकते हैं. अगर रात में पूरी तरह डिजिटल ब्रेक लेना है तो इन्हें भी बंद किया जा सकता है. इससे फोन पर इंटरनेट और सोशल मीडिया की पहुंच काफी हद तक खत्म हो जाती है.
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बैटरी के लिए भी फायदेमंद
Airplane Mode का एक और फायदा फोन की बैटरी से जुड़ा है. कमजोर मोबाइल नेटवर्क वाले इलाकों में स्मार्टफोन लगातार बेहतर सिग्नल खोजता रहता है जिससे बैटरी की खपत बढ़ सकती है. रातभर Airplane Mode में रखने पर फोन को नेटवर्क खोजने में बिजली खर्च नहीं करनी पड़ती है.
अलार्म फिर भी करेगा काम
कई लोगों को लगता है कि Airplane Mode ऑन करने पर फोन का अलार्म भी बंद हो जाएगा. ऐसा जरूरी नहीं है. नॉर्मली फोन का सेट किया हुआ अलार्म Airplane Mode में भी काम करता है. इसलिए सुबह उठने के लिए फोन को नेटवर्क से कनेक्ट रखना जरूरी नहीं होता है.
रात में डिजिटल डिटॉक्स के लिए फायदेमंद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Airplane Mode का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह फोन इस्तेमाल करने की आदत पर भी लगाम लगाने में मदद कर सकता है. रात में सोशल मीडिया स्क्रॉल करने या बार-बार नोटिफिकेशन चेक करने की आदत है तो सोने से पहले Airplane Mode ऑन करना एक आसान तरीका होता है.
हालांकि अगर आपको रात में जरूरी कॉल या किसी इमरजेंसी कॉनटेक्ट के लिए उपलब्ध रहना है तो Airplane Mode की बजाय DND का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर होता है. यानी दोनों मोड का इस्तेमाल आपकी जरूरत के हिसाब से किया जाना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Meta स्मार्ट ग्लासेज यूजर्स तुरंत बदलें ये सेटिंग! वरना AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल होंगी आपकी फोटोज</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल AI स्मार्ट ग्लास सिर्फ फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं हैं. इन ग्लासेज के जरिए यूजर्स Meta AI से सामने दिखाई देने वाली चीजों के बारे में सवाल पूछ सकते हैं, किसी मेन्यू का अनुवाद करा सकते हैं या किसी ऑब्जेक्ट की जानकारी हासिल कर सकते हैं. लेकिन इसी सुविधा के साथ प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. Meta ने अब यूजर्स को अपने विजुअल डेटा को AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होने से रोकने का ऑप्शन दिया है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Meta के AI स्मार्ट ग्लास कैमरे से ली गई फोटो या वीडियो को तब प्रोसेस कर सकते हैं, जब यूजर Meta AI से उसके बारे में कोई सवाल करता है. जैसे अगर आपने ग्लास से किसी रेस्टोरेंट के मेन्यू को देखकर उसका ट्रांसलेशन करने के लिए AI से पूछा तो उस विजुअल डेटा को AI सर्विस तक भेजना पड़ सकता है. पहले ऐसे विजुअल इंटरैक्शन का इस्तेमाल Meta अपने AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए कर सकता था. रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने अब यूजर्स को इससे बाहर निकलने का ऑप्शन देना शुरू किया है.
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ऑप्ट-आउट करने पर क्या बदलेगा?
अगर यूजर विजुअल डेटा के AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल से ऑप्ट आउट करता है तो कैमरे से संबंधित AI इंटरैक्शन का डेटा मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. Meta के अनुसार, ऐसे डेटा को प्रोडक्ट सुधार के लिए थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा रिव्यू भी नहीं किया जाएगा.
इसका मतलब यह नहीं है कि ग्लास का कैमरा काम करना बंद कर देगा. आप पहले की तरह AI से किसी फोटो या सामने दिख रही चीज के बारे में सवाल पूछ सकेंगे. फर्क सिर्फ इतना होगा कि उस विजुअल डेटा को AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं होगी.
सेटिंग कैसे बदलें?
अगर आपके पास Meta AI वाले स्मार्ट ग्लास हैं तो सबसे पहले उनसे जुड़े Meta View ऐप में जाएं. इसके बाद प्राइवेसी या AI से संबंधित सेटिंग्स में विजुअल डेटा के इस्तेमाल से जुड़ा ऑप्शन खोजें. यहां आपको अपने विजुअल डेटा को AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल करने की परमिशन को बंद करने का ऑप्शन मिल जाएगा.
ध्यान रखें कि ऐप के वर्जन और क्षेत्र के अनुसार सेटिंग का नाम या उसका स्थान अलग हो सकता है. इसलिए ऐप को लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखना बेहतर है.
क्या इससे पूरा डेटा प्राइवेट हो जाएगा?
यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा. यह ऑप्ट-आउट मुख्य रूप से AI के लिए इस्तेमाल होने वाले विजुअल डेटा से संबंधित है. इसका मतलब यह नहीं है कि स्मार्ट ग्लास से जुड़ी हर तरह की डेटा प्रोसेसिंग पूरी तरह बंद हो जाएगी. Meta के मुताबिक कुछ AI फीचर्स के लिए डेटा को क्लाउड में प्रोसेस करना जरूरी हो सकता है.
Meta ने AI ग्लास के लिए Private Processing नाम की तकनीक भी पेश की है जिसका उद्देश्य क्लाउड में AI प्रोसेसिंग के दौरान यूजर डेटा को Meta सहित अन्य सिस्टम से सुरक्षित रखना है.
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Instagram&amp;Facebook Reels शेयर करना होगा आसान! नहीं पड़ेगी डाउनलोड करने की जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया यूजर्स के लिए Meta एक ऐसा फीचर टेस्ट कर रहा है जिससे Instagram और Facebook पर मौजूद फोटो, वीडियो और Reels को WhatsApp पर शेयर करने के लिए पहले उन्हें डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह सुविधा WhatsApp के अंदर ही कंटेंट चुनने का ऑप्शन देगी.
अभी अगर कोई यूजर Instagram या Facebook की अपनी Reel या फोटो WhatsApp पर शेयर करना चाहता है तो उसे संबंधित ऐप खोलकर कंटेंट ढूंढना पड़ता है. कई मामलों में वीडियो को डाउनलोड करके WhatsApp में दोबारा अपलोड करना भी पड़ता है. नए फीचर के आने के बाद यह प्रोसेस आसान हो सकता है. WhatsApp के मीडिया पिकर में Instagram और Facebook नए मीडिया सोर्स के तौर पर दिखाई देंगे. वहां से यूजर अपने अकाउंट पर शेयर किए गए पोस्ट, Reels और Stories को सीधे चुनकर WhatsApp चैट या Status में शेयर कर सकेगा.
ऐसे काम करेगा नया फीचर
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp के मीडिया पिकर में एक ड्रॉपडाउन ऑप्शन मिलेगा. इसमें Instagram और Facebook अकाउंट को चुनकर वहां उपलब्ध मीडिया को ब्राउज किया जा सकेगा. कंटेंट को उसी तरह ग्रिड में देखा जा सकेगा, जैसे WhatsApp के नॉर्मल मीडिया पिकर में फोन की फोटो और वीडियो दिखाई देते हैं. यूजर किसी Reel, पोस्ट या Story को चुनकर सीधे चैट में भेज सकता है या WhatsApp Status में इस्तेमाल कर सकता है.
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Accounts Center से जोड़ना होगा अकाउंट
इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए WhatsApp अकाउंट को Meta के Accounts Center से Instagram और Facebook अकाउंट के साथ लिंक करना जरूरी होगा. Meta पहले से ही Accounts Center के जरिए अपने अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच कुछ क्रॉस-प्लेटफॉर्म फीचर्स उपलब्ध करा रहा है.
अभी सभी यूजर्स को नहीं मिलेगा फीचर
फिलहाल यह सुविधा WhatsApp के लेटेस्ट Beta वर्जन पर चुनिंदा Android और iOS यूजर्स के लिए टेस्ट की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार इसे धीरे-धीरे ज्यादा Beta टेस्टर्स तक पहुंचाया जा रहा है. हालांकि, Meta ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इसका Stable Version सभी यूजर्स के लिए कब जारी होगा.
प्राइवेसी को लेकर क्या है जानकारी?
यह फीचर मुख्य रूप से Linked Instagram और Facebook अकाउंट से WhatsApp में मीडिया लाने के लिए है. रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp को Accounts Center से जोड़ने पर पर्सनल चैट और कॉल की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन खत्म नहीं होती है. साथ ही, यह इंटीग्रेशन दूसरे Meta प्लेटफॉर्म को WhatsApp में मौजूद मीडिया का नॉर्मल एक्सेस नहीं देता है.
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Google Maps को चकमा देकर शख्स ने अपने नाम पर रखवा दिया सड़क का नाम! जानें कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps दुनिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले मैपिंग प्लेटफॉर्म में से एक है. लोग इसका इस्तेमाल रास्ता खोजने, किसी जगह की लोकेशन देखने और आसपास की दुकानों या सड़कों की जानकारी हासिल करने के लिए करते हैं. लेकिन इसकी जानकारी हमेशा सरकारी रिकॉर्ड जैसी स्थायी या आफिशियल नहीं होती. यूजर्स और दूसरे सोर्सज से मिलने वाले डेटा के कारण कभी-कभी इसमें अजीबोगरीब बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं.
ऐसी ही एक दिलचस्प घटना में एक शख्स ने Google Maps की इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर एक सड़क का नाम अपने नाम से जोड़ दिया. यह मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि देखने वालों को मैप पर सड़क का नाम बाकायदा असली जानकारी जैसा नजर आ रहा था.
ऐसे किया Google Maps को गुमराह
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स ने Google Maps के यूजर-एडिटिंग सिस्टम का फायदा उठाया. Google Maps में यूजर्स किसी जगह या लोकेशन से जुड़ी गलत जानकारी की रिपोर्ट कर सकते हैं और कुछ मामलों में नई जगह या जानकारी जोड़ने का सुझाव भी दे सकते हैं.
इसी प्रोसेस का इस्तेमाल करते हुए सड़क के नाम में बदलाव कराया गया. खास बात यह थी कि मैप पर दिखाई देने वाली जानकारी देखने में इतनी नॉर्मल लग रही थी कि पहली नजर में किसी को शक नहीं हुआ कि इसके पीछे किसी व्यक्ति की शरारत हो सकती है.
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इस तरह शख्स ने टेक्निकल सिस्टम की एक खामी या वेरिफिकेशन प्रोसेस का फायदा उठाकर सड़क को अपने नाम से जोड़ने में कामयाबी हासिल की.
Google Maps की जानकारी कौन बदल सकता है?
आपको बता दें कि Google Maps को सिर्फ Google की टीम ही अपडेट नहीं करती है. प्लेटफॉर्म पर यूजर्स भी किसी जगह से संबंधित गलत जानकारी की शिकायत कर सकते हैं या बदलाव का सुझाव दे सकते हैं. ऐसे सुझावों को Google अपने सिस्टम और उपलब्ध जानकारी के आधार पर चेक करता है.
यही क्राउडसोर्सिंग सिस्टम Google Maps को दुनिया भर में तेजी से अपडेट रखने में मदद करता है. हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि गलत या मजाकिया जानकारी भी कभी-कभी सिस्टम तक पहुंच सकती है.
इस मामले से यह समझ आता है कि किसी मैप पर दिखाई देने वाली जानकारी को हमेशा सरकारी रिकॉर्ड या ऑफिशियल डॉक्यूमेंट्स नहीं माना जाना चाहिए.
मैप पर दिखी जानकारी हमेशा सच नहीं होती
Google Maps में किसी सड़क, दुकान या जगह का नाम दिखाई देने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वह नाम स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज हो. खासकर यूजर द्वारा सुझाई गई जानकारी के मामले में ऐसा संभव है कि उसे बाद में संशोधित या हटा दिया जाए.
इस तरह की घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि डिजिटल मैपिंग सर्विसेज में ऑटोमेशन और यूजर इनपुट के साथ वेरिफिकेशन कितना जरूरी है. एक छोटी सी गलत जानकारी भी हजारों या लाखों यूजर्स तक पहुंच सकती है.
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>चीनी Smartphone Brands में कौन है सबसे दमदार? जानें किसके फोन हैं सबसे बेस्ट!</title>
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        <description><![CDATA[ चीनी Smartphone Brands में कौन है सबसे दमदार? जानें किसके फोन हैं सबसे बेस्ट! ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>पहली बार Laptop चार्ज करने का सही तरीका क्या है? एक गलती घटा सकती है बैटरी लाइफ</title>
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        <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Coal vs Nuclear: कौन&amp;सा पावर प्लांट बनाता है ज्यादा बिजली?</title>
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        <description><![CDATA[ बिजली की बढ़ती जरूरत के बीच पावर प्लांट की क्षमता और उसकी एफिशिएंसी दोनों पर चर्चा तेज रहती है. कोयला और न्यूक्लियर पावर, दोनों लंबे समय से बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है.
कोयले से बिजली बनाने में ईंधन को जलाकर गर्मी पैदा की जाती है, जबकि न्यूक्लियर प्लांट में परमाणु ईंधन से निकलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि Coal और Nuclear में आखिर कौन ज्यादा बिजली पैदा करता है.&amp;nbsp;
कोयले से बिजली बनाने में कितनी ऊर्जा मिलती है?
कोयला आधारित पावर प्लांट में कोयले को जलाकर गर्मी पैदा की जाती है. इस गर्मी से पानी भाप में बदलता है और भाप टरबाइन को घुमाती है. इसके बाद टर्बाइन से जुड़ा अल्टरनेटर बिजली पैदा करता है. इस पूरी प्रक्रिया में ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा गर्मी के रूप में निकल जाता है. आंकड़ों के मुताबिक, सामान्य कोयला पावर प्लांट की एफिशिएंसी करीब 32 से 33 प्रतिशत होती है. कोयले में मौजूद ऊर्जा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ही बिजली में बदला जा पाता है, जबकि बाकी ऊर्जा conversion process में खो जाती है.&amp;nbsp;
न्यूक्लियर प्लांट कैसे बनाता है ज्यादा बिजली?
न्यूक्लियर पावर प्लांट में enriched uranium-235 जैसे परमाणु ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है. यहां परमाणु प्रक्रिया से निकलने वाली गर्मी का यूज भाप बनाने में होता है और यही भाप टरबाइन को चलाकर बिजली पैदा करती है. कई रिपोर्ट्स में न्यूक्लियर पावर को कोयले की तुलना में काफी अधिक एफिशियंट बताया गया है. इसमें fissile material से बिजली बनाने का कैपिसिटी फैक्टर 92 प्रतिशत तक बताया गया है. इसी वजह से समान मात्रा के ईंधन से न्यूक्लियर पावर ज्यादा ऊर्जा हासिल कर सकता है.&amp;nbsp;
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कौन-सा पावर प्लांट ज्यादा बिजली बनाता है?
बिजली बनाने की क्षमता और एफिशिएंसी के मुताबिक, न्यूक्लियर पावर प्लांट ज्यादा बिजली पैदा कर सकता है. आंकड़ों के अनुसार, एक सामान्य न्यूक्लियर प्लांट करीब 1 गीगावॉट बिजली पैदा करता है, जबकि एक औसत कोयला पावर प्लांट की क्षमता लगभग 380 मेगावॉट होती है.&amp;nbsp;
न्यूक्लियर प्लांट में कब बदलता है ईंधन?
कोयला और न्यूक्लियर पावर प्लांट में ईंधन की जरूरत के मामले में काफी अंतर है. आंकड़ों के मुताबिक, कोयले से चलने वाले पावर प्लांट हर साल करीब 1.1 अरब टन कोयला इस्तेमाल करते हैं. हालांकि यह केवल अमेरिका के संदर्भ में है. वहीं न्यूक्लियर प्लांट को बार-बार ईंधन डालने की जरूरत नहीं पड़ती है. न्यूक्लियर पावर प्लांट में आमतौर पर करीब 1.5 से 2 साल के अंतर पर ईंधन बदला या दोबारा भरा जाता है. जिससे दोनों तरह के पावर प्लांट में ईंधन की खपत और उसे इस्तेमाल करने का तरीका काफी अलग होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Flipkart Big Billion Days Sale में iPhone 17 और Galaxy S25 पर बंपर डील!</title>
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        <description><![CDATA[ Flipkart की Big Billion Days Sale का इंतजार करने वाले ग्राहकों के लिए बड़ी खबर है. इस साल की सेल में स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक कई प्रोडक्ट्स पर आकर्षक डिस्काउंट और बैंक ऑफर्स देखने को मिल सकते हैं. खास तौर पर iPhone 17 और Samsung Galaxy S25 जैसे प्रीमियम स्मार्टफोन सेल के प्रमुख डील्स में शामिल हैं.
iPhone खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों की नजर Big Billion Days Sale पर रहने वाली है. Apple के नए iPhone 17 को सेल में आकर्षक ऑफर के साथ पेश किया जा रहा है. फोन की कीमत पर सीधे डिस्काउंट के अलावा बैंक कार्ड ऑफर और एक्सचेंज बेनिफिट का फायदा भी मिल सकता है. ऐसे में जिन लोगों की नजर नए iPhone पर है, उनके लिए सेल के दौरान मिलने वाली प्रभावी कीमत नॉर्मल रिटेल प्राइस के मुकाबले में कम हो सकती है. हालांकि, असली कीमत बैंक ऑफर, एक्सचेंज वैल्यू और चुने गए स्टोरेज वेरिएंट के आधार पर अलग हो सकती है.
Galaxy S25 भी ऑफर लिस्ट में शामिल
Samsung Galaxy S25 भी Big Billion Days Sale के प्रमुख स्मार्टफोन डील्स में शामिल है. Galaxy S25 प्रीमियम डिजाइन, हाई-एंड प्रोसेसर और कैमरा फीचर्स के साथ कंपनी की फ्लैगशिप S सीरीज का हिस्सा है.
सेल के दौरान इस फोन पर डिस्काउंट के साथ एक्सचेंज ऑफर मिलने की उम्मीद है. पुराने स्मार्टफोन को एक्सचेंज करने वाले ग्राहकों के लिए इसकी प्रभावी कीमत और कम हो सकती है. बैंक ऑफर का इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त बचत का ऑप्शन भी मिल सकता है.
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सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, दूसरे गैजेट्स पर भी ऑफर
Big Billion Days Sale में स्मार्टफोन के अलावा लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्ट टीवी, ईयरबड्स और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर भी डील्स देखने को मिलती हैं. सेल के दौरान अलग-अलग बैंक कार्ड, EMI और एक्सचेंज ऑफर कीमत को और कम कर सकते हैं.
इसलिए किसी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले सिर्फ दिखाई जा रही सेल कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. बैंक डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, कूपन और EMI से मिलने वाले लाभ को जोड़कर फाइनल कीमत देखना ज्यादा जरूरी है.
सेल में खरीदारी करते समय रखें इन बातों का ध्यान
किसी महंगे स्मार्टफोन पर मिलने वाला बड़ा डिस्काउंट देखकर तुरंत खरीदारी करने के बजाय इसके पुराने दाम भी चेक कर लेना चाहिए. साथ ही मॉडल का सही स्टोरेज वेरिएंट, वारंटी, एक्सचेंज शर्तें और बैंक ऑफर की पात्रता जरूर देखें.
iPhone 17 और Galaxy S25 जैसे महंगे फोन खरीदने वालों के लिए एक्सचेंज वैल्यू खास तौर पर जरूरी होते हैं. पुराने फोन की कंडिशन और मॉडल के आधार पर मिलने वाली कीमत में काफी अंतर हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Apple फिर करेगा बड़ा लॉन्च इवेंट? Home Devices को लेकर बढ़ी चर्चा</title>
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        <description><![CDATA[ सितंबर में iPhone 18 सीरीज और iPhone Duo लॉन्च करने के बाद Apple का इस साल का टेक शो अभी खत्म नहीं हुआ है. कंपनी को लेकर अब अक्टूबर में एक और लॉन्च इवेंट की चर्चा हो रही है, जिसमें कुछ नए डिवाइसेज पेश किए जा सकते हैं. रिपोर्ट्स में HomePod Mini, स्क्रीन वाले Home Hub और Apple TV 4K के नए मॉडल का जिक्र है. इसके अलावा MacBook Pro, iPad Mini और iMac के अपडेटेड वर्जन भी इस साल की लाइनअप का हिस्सा हो सकते हैं.&amp;nbsp;
अक्टूबर में फिर इवेंट कर सकता है Apple
MacRumors के अनुमान के मुताबिक, Apple अक्टूबर में एक अलग लॉन्च इवेंट आयोजित कर सकता है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस इवेंट में कौन-कौन से प्रोडक्ट पेश किए जाएंगे. कुछ डिवाइसेज को कंपनी इवेंट के बजाय प्रेस रिलीज के जरिए भी लॉन्च कर सकती है.
iPad Mini में OLED डिस्प्ले की चर्चा
Apple इस साल नए iPad Mini को भी पेश कर सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें A20 Pro या A19 Pro चिपसेट में से कोई एक मिल सकता है. इसके साथ OLED डिस्प्ले, नया स्पीकर सिस्टम और वॉटर-रेसिस्टेंट डिजाइन मिलने की बात कही जा रही है.
iMac और MacBook Pro में भी अपडेट
नए iMac मॉडल में M6 चिपसेट मिलने की उम्मीद है. इसमें 24-इंच डिस्प्ले और नए कलर ऑप्शन भी दिए जा सकते हैं. वहीं, MacBook Pro के 14-इंच मॉडल को M6 चिप के साथ अपडेट किया जा सकता है.
MacBook Pro के OLED वर्जन को लेकर भी चर्चा है. इसमें 14 और 16 इंच के डिस्प्ले ऑप्शन मिल सकते हैं, लेकिन OLED वाला बड़ा अपग्रेड साल 2026 के आखिर में आने की उम्मीद है.
HomePod Mini में Siri AI का सपोर्ट
Apple अपने Smart Home सेक्शन में भी नए डिवाइस ला सकता है. नए HomePod Mini में नया चिपसेट, बेहतर साउंड क्वालिटी, N1 चिप और Wi-Fi 7 सपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है. इसमें दूसरी जनरेशन का Ultra Wideband चिप भी दिया जा सकता है. डिवाइस में Siri AI सपोर्ट और नया रेड कलर ऑप्शन भी मिल सकता है.
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Home Hub बन सकता है नया डिवाइस
Apple के स्क्रीन वाले स्मार्ट होम डिवाइस को फिलहाल Home Hub या HomePad के नाम से चर्चा में बताया जा रहा है. इसमें 7-इंच की स्क्वायर स्क्रीन, A18 चिपसेट, Siri AI और FaceTime सपोर्ट मिल सकता है. इसे टेबलटॉप और वॉल-माउंटेड मॉडल में पेश किए जाने की बात है.
Apple TV 4K में भी नया प्रोसेसर
Apple TV 4K का नया वर्जन भी इस लाइनअप में शामिल हो सकता है. इसमें A17 Pro चिप, 8GB RAM और N1 नेटवर्किंग चिप के साथ Wi-Fi 7 सपोर्ट मिलने की चर्चा है. साथ ही नया Siri Remote भी पेश किया जा सकता है.
फिलहाल इनमें से किसी भी डिवाइस की लॉन्च डेट और फाइनल स्पेसिफिकेशन Apple ने आधिकारिक तौर पर कन्फर्म नहीं किए हैं. इसलिए अक्टूबर इवेंट को लेकर सामने आई जानकारी को अभी रिपोर्ट्स और लीक्स के तौर पर ही देखा जा रहा है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - क्या AI आपके पुराने Chat से आपकी Personality पहचान सकता है? ऐसे करें आसान Experiment ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>अब ChatGPT रहेगा 24x7 आपके साथ! OpenAI ने दिया नया Voice फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ OpenAI ने ChatGPT के Voice फीचर को पहले से ज्यादा उपयोगी बना दिया है. अब यूजर्स सिर्फ AI से बातचीत या सवाल-जवाब ही नहीं कर सकेंगे बल्कि बोलकर उसे कई तरह के काम करने के लिए भी कह सकेंगे. कंपनी ने ChatGPT Voice में agentic capabilities जोड़ी हैं जिससे AI यूजर की तरफ से काम शुरू कर सकता है. यह सुविधा वेब और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध कराई जा रही है.
इस अपडेट की सबसे खास बात यह है कि यूजर को हर काम के लिए टाइप करने की जरूरत नहीं होगी. उदाहरण के लिए आप चलते-फिरते ChatGPT से किसी डॉक्यूमेंट को तैयार करने, जानकारी जुटाने या किसी दूसरे काम को शुरू करने के लिए कह सकते हैं. Voice बातचीत खत्म होने के बाद भी काम को टेक्स्ट मोड में आगे बढ़ाया जा सकता है. यानी मोबाइल पर शुरू किया गया काम बाद में दूसरे डिवाइस पर भी जारी किया जा सकता है. OpenAI के मुताबिक Voice अब केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है. उपलब्ध टूल्स और कनेक्टेड ऐप्स के आधार पर ChatGPT डॉक्यूमेंट बनाने, वेब ब्राउज करने, ऐप्स के साथ काम करने और दूसरे एजेंटिक टास्क को पूरा करने में मदद कर सकता है.
Voice से डॉक्यूमेंट और दूसरे काम भी
ChatGPT Work के साथ Voice को इस्तेमाल करने पर यूजर बोलकर डॉक्यूमेंट, प्रेजेंटेशन और स्प्रेडशीट जैसे काम शुरू कर सकता है. कनेक्टेड ऐप्स और ब्राउजर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. अगर Voice कॉल खत्म होने के समय कोई काम अधूरा है तो वह टेक्स्ट में जारी रह सकता है.
इसका मतलब यह है कि ChatGPT को अब केवल एक conversational chatbot की तरह इस्तेमाल करने के बजाय एक ऐसे AI assistant के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे काम सौंपा जा सके.
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Free यूजर्स को भी मिलेगा फायदा
OpenAI ने Voice में plugins और connected apps का सपोर्ट भी जोड़ा है. कंपनी के अनुसार Free और Go यूजर्स अपने प्लान में उपलब्ध plugins के साथ Voice का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि अलग-अलग प्लान में उपलब्ध सुविधाएं और usage limits अलग हो सकती हैं.
Voice में किसी ऐसे काम के लिए यूजर की अनुमति जरूरी होने पर स्क्रीन पर approval मांगा जाता है. OpenAI के मुताबिक ऐसे मामलों में सिर्फ बोलकर approval देना काफी नहीं है यूजर को स्क्रीन पर दिए गए ऑप्शन से कार्रवाई को approve या decline करना होता है.
ChatGPT Voice का बदलता रूप
OpenAI पिछले कुछ समय से ChatGPT Voice को बातचीत से आगे ले जाने पर काम कर रहा है. अब Voice में वेब सर्च, connected apps और plugins जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी के नए अपडेट से साफ है कि भविष्य में AI assistant सिर्फ सवालों का जवाब देने के बजाय यूजर के लिए वास्तविक डिजिटल काम करने पर ज्यादा केंद्रित होगा.
हालांकि, AI को कोई काम सौंपते समय यूजर्स को permissions, connected apps और privacy settings पर ध्यान देना जरूरी होगा. खासकर ऐसे कार्यों में जिनमें व्यक्तिगत जानकारी या किसी बाहरी सेवा पर कार्रवाई शामिल हो.
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>OnePlus 16 में 200MP कैमरा अपग्रेड, अब Rear Lights भी होंगी खास</title>
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        <description><![CDATA[ OnePlus 16 को लेकर कंपनी लगातार नई जानकारियां सामने ला रही है और अब फोन के कैमरा सेटअप से पर्दा भी उठ गया है. OnePlus 16 में पहले डिजाइन, डिस्प्ले और स्टोरेज वेरिएंट से जुड़ी जानकारी सामने आई थी, जबकि अब OnePlus ने इसके कैमरों की पूरी डिटेल शेयर की है. नई जानकारी के मुताबिक, फोन में 200MP का मेन कैमरा दिया जाएगा, जिसके साथ दो 50MP रियर कैमरे मौजूद होंगे. कंपनी ने कैमरा फीचर्स के साथ Oppo के Lumo इमेजिंग इंजन से जुड़ी जानकारी भी दी है.&amp;nbsp;
OnePlus 16 में मिलेगा 200MP का मेन कैमरा
OnePlus 16 का सबसे बड़ा कैमरा अपग्रेड इसका 200MP प्राइमरी सेंसर है. इसमें 1/1.4-इंच सेंसर और f/1.6 अपर्चर दिया गया है. फोन के मेन कैमरे को लेकर कंपनी ने इस बार बड़ा बदलाव किया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;50MP के दो रियर कैमरे भी मौजूद
फोन का अल्ट्रावाइड कैमरा 50MP का होगा और इसमें 116 डिग्री का फील्ड ऑफ व्यू मिलेगा. वहीं, टेलीफोटो कैमरे में भी 50MP सेंसर का इस्तेमाल किया गया है. यह Sony IMX882 सेंसर के साथ आता है और 3X ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा,हालांकि टेलीफोटो जूम के मामले में OnePlus 16 पिछले मॉडल से थोड़ा पीछे रहेगा. OnePlus 15 में 3.5X ऑप्टिकल जूम दिया गया था, जबकि नए मॉडल में 3X जूम मिलेगा.
सेल्फी कैमरा भी हुआ अपग्रेड
OnePlus 16 में फ्रंट कैमरे को भी अपग्रेड किया गया है. जहां पिछले मॉडल में 32MP का सेल्फी कैमरा था, वहीं नए फोन में 50MP का फ्रंट कैमरा मिलेगा. इसके अलावा, कंपनी फोन के कैमरा सिस्टम में Oppo का Lumo कलर मैनेजमेंट सिस्टम भी शामिल करेगी. इसमें Open Gate सपोर्ट भी दिया जाएगा.&amp;nbsp;
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चार स्टोरेज वेरिएंट में आएगा फोन
OnePlus 16 तीन कलर ऑप्शन में लॉन्च होगा, जिनके नाम Tomorrow Star, Martian Masterpiece और Dark Forest हैं. फोन को चार RAM और स्टोरेज कॉम्बिनेशन में पेश किया जाएग. जिसमें 12GB+256GB, 12GB+512GB, 16GB+512GB और 16GB+1TB शामिल है.&amp;nbsp;
Snapdragon 8 Elite Gen 6 से लैस होगा
कंपनी पहले ही बता चुकी है कि OnePlus 16 में Qualcomm का नया Snapdragon 8 Elite Gen 6 चिपसेट मिलेगा. यह 2nm प्रोसेस पर आधारित है. रिपोर्ट के मुताबिक, फोन में BOE की 165Hz डिस्प्ले होगी, जो गेमिंग मोड में 185Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट कर सकती है. OnePlus 16 को चीन में अक्टूबर में लॉन्च किया जाएगा. कंपनी ने 28 सितंबर को OnePlus Game Conference 2026 भी आयोजित करने की जानकारी दी है, जहां फोन की परफॉर्मेंस से जुड़ी और डिटेल सामने आने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Snapdragon 8 Elite Gen 6 से लैस होंगे ये स्मार्टफोन, देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ प्रीमियम स्मार्टफोन की दुनिया में अब अगली पीढ़ी के प्रोसेसर की एंट्री हो चुकी है. Qualcomm ने Snapdragon Summit में Snapdragon 8 Elite Gen 6 और Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 को पेश किया है. इन दोनों चिपसेट 2nm प्रोसेस पर तैयार किए गए हैं और इनमें Qualcomm का कस्टम Oryon CPU आर्किटेक्चर दिया गया है. कंपनी के मुताबिक नए प्लेटफॉर्म से फोन में ऑन-डिवाइस AI, गेमिंग, कैमरा और कनेक्टिविटी से जुड़ी परफॉर्मेंस बेहतर होगी.
इन नए चिपसेट के साथ कई बड़े Android ब्रांड अपने फ्लैगशिप फोन लाने की तैयारी में हैं. Xiaomi, Honor, OnePlus, iQOO, Motorola और RedMagic के कुछ मॉडल इस नई चिप सीरीज के साथ सामने आने वाले हैं. तो आइए जानते हैं कि कौन-से प्रीमियम स्मार्टफोन Snapdragon 8 Elite Gen 6 से लैस होंगे
Xiaomi 18 सीरीज
Xiaomi ने नए Snapdragon चिपसेट के साथ अपने फ्लैगशिप फोन पेश कर दिए हैं. Xiaomi 18 Pro में Snapdragon 8 Elite Gen 6 और Xiaomi 18 Pro Max में Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 दिया गया है. इन दोनों फोन Android 17 पर आधारित HyperOS 4 पर चलते हैं. Xiaomi 18 Pro में 6.4 इंच और Pro Max में 6.9 इंच का डिस्प्ले है. साथ ही दोनों में Privacy Display फीचर और पीछे अलग डिस्प्ले दिया गया है. Pro Max में 8,500mAh और Pro में 7,000mAh बैटरी है. इन दोनों फोन 100W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करते हैं.&amp;nbsp;
Honor Magic 9 सीरीज
Honor Magic 9 सीरीज 28 सितंबर को चीन में लॉन्च होगी. कंपनी ने पुष्टि की है कि Magic 9 और Magic 9 Pro Max में Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 सीरीज चिपसेट मिलेगा. फोन में Honor का खुद विकसित Light H1 इमेजिंग चिप भी दिया जाएगा. साथ ही दोनों मॉडल में 16GB तक RAM और 1TB तक स्टोरेज मिलने की बात सामने आई है.&amp;nbsp;
OnePlus 16
OnePlus 16 में भी Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 चिपसेट मिलेगा, जिसकी पीक क्लॉक स्पीड 5.0GHz है. फोन में Wind Chaser Gaming Kernel दिया जाएगा. कंपनी के अनुसार यह फोन 185fps तक गेमिंग सपोर्ट कर सकता है. इसमें 9,000mAh बैटरी और 100W चार्जिंग मिलेगी. चीन में इसका लॉन्च अगले महीने होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
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iQOO 16
iQOO 16 Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 के साथ आने वाला है. इसमें कंपनी का Q4 गेमिंग चिप भी मिलेगा, जो 2K रिजॉल्यूशन पर 165fps तक सपोर्ट करता है. फोन का लॉन्च 29 सितंबर को iQOO Pad Ultra और iQOO Gaming Headset के साथ होगा.&amp;nbsp;
Motorola और RedMagic के फोन
Motorola Signature 27 में भी नया Snapdragon चिपसेट मिलेगा. फोन में 50MP Sony LYTIA 910 मेन कैमरा और 200MP पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया गया है. कंपनी ने इस फोन के लिए 7 साल के OS अपडेट देने का वादा किया है.
वहीं RedMagic 12 Pro+ में Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 मिलने की उम्मीद है और इसे अक्टूबर में लाने की पुष्टि की गई है. Qualcomm ने Vivo और Redmi को भी इस नए चिपसेट इकोसिस्टम का हिस्सा बताया है, लेकिन इनके फोन के नाम और लॉन्च टाइमलाइन अभी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Snapdragon, Elite, Gen, से, लैस, होंगे, ये, स्मार्टफोन, देखें, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>ChatGPT से भूलकर भी न कराएं ये 5 काम! वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ आज पढ़ाई, रिसर्च, कोडिंग, कंटेंट लिखने और रोजमर्रा के कई कामों में लोगों की मदद कर रहा है. लेकिन AI चैटबॉट से हर तरह की जानकारी शेयर करना सुरक्षित नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ऐसे काम हैं जिनमें ChatGPT पर पूरी तरह निर्भर रहने से कानूनी, स्वास्थ्य और प्राइवेसी से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
ChatGPT से अपनी परेशानियों पर बात करना आसान लगता है लेकिन इसे प्रोफेशनल थेरेपिस्ट या काउंसलर का ऑप्शन नहीं माना जाना चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ शोधों में पाया गया है कि चैटबॉट यूजर की मौजूदा सोच को चुनौती देने के बजाय कभी-कभी उसे और मजबूत कर सकते हैं.
खासकर आत्महत्या, गंभीर मानसिक संकट या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में AI के बजाय अच्छे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या स्थानीय आपातकालीन सर्विस से संपर्क करना चाहिए.
कानूनी सलाह लेने के लिए न करें इस्तेमाल
कानूनी मामले में ChatGPT को वकील का ऑप्शन नहीं माना जाना चाहिए. AI कभी-कभी ऐसे कोर्ट केस, दलीलें भी तैयार कर सकता है जो असली नहीं होतीं हैं. जानकारी के मुताबिक, दुनियाभर में 2,000 से ज्यादा ऐसे अदालती मामलों का रिकॉर्ड है, जहां AI से जुड़े गलत तर्क सामने आए हैं.
इसलिए कानून की नॉर्मल जानकारी समझने के लिए AI फायदेमंद हो सकता है लेकिन अपने चल रहे केस, कानूनी विवाद या संवेदनशील डॉक्यूमेंट्स की जानकारी शेयर करने से बचना चाहिए.
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बीमारी का इलाज तय करने के लिए AI पर भरोसा न करें
लक्षणों के आधार पर बीमारी, दवा या डाइट का फैसला ChatGPT से लेना खतरनाक हो सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने नमक में मौजूद क्लोराइड कम करने के लिए AI से सलाह ली और गलत जानकारी के आधार पर सोडियम ब्रोमाइड का सेवन करने लगा जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. AI से किसी मेडिकल टर्म या रिपोर्ट को समझा जा सकता है लेकिन बीमारी का निदान और इलाज डॉक्टर से ही कराना चाहिए.
ऑफिस की गोपनीय जानकारी अपलोड न करें
कंपनी की कॉन्फिडेंशियल फाइल, सोर्स कोड, ग्राहक का डेटा, पासवर्ड या NDA के तहत आने वाली जानकारी ChatGPT में डालना जोखिम भरा हो सकता है. रिपोर्ट में Samsung का उदाहरण दिया गया है, जहां कर्मचारियों द्वारा इंटरनल सोर्स कोड AI टूल में डालने के बाद कंपनी ने अपने डिवाइस पर जनरेटिव AI टूल्स के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी. इसलिए ऑफिस के संवेदनशील डॉक्यूमेंट्स के लिए हमेशा कंपनी की AI सर्विस और डेटा पॉलिसी का पालन करें.
पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स कभी न डालें
सबसे जरूरी बात यह है कि ChatGPT में पासवर्ड, OTP, बैंक अकाउंट नंबर, कार्ड की पूरी जानकारी, पासपोर्ट नंबर या ID डॉक्यूमेंट की फोटो जैसी संवेदनशील जानकारी नहीं डालनी चाहिए. रिपोर्ट में पहले शेयर ChatGPT बातचीत के Google सर्च में दिखाई देने की घटना का भी उल्लेख किया गया है.
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वीडियो शूटिंग में चाहिए ज्यादा दम? 1 लाख के अंदर ये फोन हैं खास</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में अच्छे कैमरे वाले फोन से सोशल मीडिया के लिए वीडियो शूट करने से लेकर उसे एडिट और अपलोड करने तक का काम आसानी से किया जा सकता है. खासतौर पर प्रीमियम और फ्लैगशिप फोन में 4K साथ ही 60fps वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे फीचर्स मिल रहे हैं, जबकि कुछ मॉडल 8K वीडियो तक रिकॉर्ड कर सकते हैं.
भारत में 1 लाख रुपये से कम कीमत में Apple, Samsung, Vivo, Oppo और Google जैसे ब्रांड के कई स्मार्टफोन मौजूद हैं, जो वीडियो रिकॉर्डिंग के मामले में दमदार स्पेसिफिकेशन देते हैं. तो आइए आज हम आपको ऐसे ही कुछ फोन के बारे में बताते हैं, जिन्हें वीडियो शूटिंग के लिए इस बजट में खरीदा जा सकता है.&amp;nbsp;
Samsung Galaxy S26
Samsung Galaxy S26 में 50MP मेन, 10MP 3x टेलीफोटो और 12MP अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है. फोन 8K वीडियो को 30fps और 4K वीडियो को 60fps तक रिकॉर्ड कर सकता है. इसमें Exynos 2600 चिपसेट और 4,300mAh बैटरी मिलती है. डिस्प्ले 6.3 इंच का Dynamic AMOLED 2X है और 120Hz तक रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. इसकी कीमत 99,999 से 1,02,999 रुपये के बीच है, जो अलग-अलग वेरिएंट और रिटेलर के हिसाब से अलग हो सकती है.&amp;nbsp;
iPhone 17
Apple का iPhone 17 इस बजट में एक मजबूत ऑप्शन है. इसमें A19 चिपसेट के साथ 48MP मेन और 48MP अल्ट्रा वाइड कैमरा मिलता है. फोन 4K वीडियो को 60fps तक रिकॉर्ड कर सकता है. फ्रंट में 18MP कैमरा और Center Stage फीचर दिया गया है. इसमें 6.3 इंच का Super Retina XDR OLED डिस्प्ले है, जो 120Hz तक रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. इसके 256GB मॉडल की शुरुआती कीमत 99,900 रुपये है.&amp;nbsp;
Google Pixel 11
Google Pixel 11 इस लिस्ट का एक और ऑप्शन है. इसमें Tensor G6 चिपसेट और 48MP मेन, 13MP अल्ट्रा वाइड और 10.8MP टेलीफोटो कैमरा मिलता है. फोन 4K वीडियो को 60fps तक रिकॉर्ड कर सकता है. इसमें 6.3 इंच AMOLED डिस्प्ले और 4,985mAh बैटरी है. 256GB मॉडल की कीमत 89,999 रुपये से शुरू होती है.&amp;nbsp;
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Oppo Find X9
Oppo Find X9 में 50MP के तीन रियर कैमरे दिए गए हैं, जिनमें मेन, अल्ट्रा वाइड और टेलीफोटो सेंसर शामिल हैं. यह फोन 4K वीडियो को 120fps तक रिकॉर्ड कर सकता है. इसमें Dimensity 9500 चिपसेट और 7,025mAh बैटरी है. फोन 80W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करता है. भारत में OPPO Find X9 के बेस वेरिएंट की शुरुआती कीमत 74,999 रुपये है.&amp;nbsp;
Vivo X300 FE
Vivo X300 FE में Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट के साथ ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलता है. इसमें 50MP मेन, 50MP टेलीफोटो और 8MP अल्ट्रा वाइड कैमरा है. यह फोन 8K वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है. इसमें 6.31 इंच AMOLED डिस्प्ले, 6,500mAh बैटरी और 90W वायर्ड चार्जिंग मिलती है. भारत में vivo X300 FE की शुरुआती कीमत 84,999 रुपये है. वहीं, RAM और स्टोरेज के हिसाब से इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 99,999 रुपये है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gemini का नया कमाल! अब Google से बनाएं हाई&amp;क्वालिटी वीडियो, ऐसे करें इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ टेक्स्ट और फोटोज बनाने तक सीमित नहीं है. Google ने वीडियो क्रिएशन को भी आसान बनाने के लिए Gemini और Google Vids में नए AI फीचर्स पेश किए हैं. कंपनी के नए Gemini Omni मॉडल की मदद से यूजर्स बिना प्रोफेशनल वीडियो एडिटिंग की जानकारी के हाई-क्वालिटी वीडियो तैयार कर सकते हैं. Google के मुताबिक, Google Vids में Gemini Omni के जरिए 1080p वीडियो फ्री में बनाए जा सकते हैं.
जानकारी के अनुसार, इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि वीडियो बनाने के लिए आपको खुद शूटिंग या एडिटिंग करने की जरूरत नहीं है. आप सिर्फ यह बता सकते हैं कि वीडियो में क्या दिखाना चाहते हैं. Gemini Omni आपके टेक्स्ट प्रॉम्प्ट को समझकर उसके आधार पर वीडियो तैयार कर सकता है.
इसके अलावा, यूजर्स अपने आइडिया को और बेहतर तरीके से समझाने के लिए इमेज रेफरेंस या किसी रफ स्केच का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे AI को वीडियो के विजुअल और स्टाइल को समझने में मदद मिलती है.
वीडियो में बाद में भी कर सकेंगे बदलाव
Google Vids का नया सिस्टम सिर्फ वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है. वीडियो तैयार होने के बाद भी यूजर्स नॉर्मल लैंग्वेज में बदलाव के लिए निर्देश दे सकते हैं. जैसे बैकग्राउंड बदलना, लाइटिंग ठीक करना या कोई इफेक्ट जोड़ना जैसे काम टेक्स्ट कमांड के जरिए किए जा सकते हैं.
इसका फायदा खासतौर पर उन लोगों को मिलेगा जिन्हें वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की जटिल सेटिंग्स समझने में परेशानी होती है. Gemini Omni स्टेप-बाय-स्टेप एडिटिंग को सपोर्ट करता है, इसलिए छोटे बदलाव के लिए पूरी वीडियो को दोबारा बनाने की जरूरत नहीं पड़ती.
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1080p वीडियो बनाने की सुविधा
Google ने 23 सितंबर 2026 को बताया कि Google Vids में Gemini Omni के जरिए यूजर्स 1080p हाई-क्वालिटी वीडियो मुफ्त में बना सकते हैं. इसमें सीन का समय और ट्रांजिशन पर भी कंट्रोल दिया गया है. इसके अलावा, तैयार टेम्पलेट्स की मदद से सोशल मीडिया, बिजनेस या कम्युनिटी प्रोजेक्ट के लिए वीडियो जल्दी तैयार किए जा सकते हैं.
Google के अनुसार, AI से बनाए गए हर वीडियो क्लिप में डिजिटल वॉटरमार्क शामिल होगा. इसका मकसद दर्शकों को यह बताना है कि कंटेंट AI की मदद से तैयार किया गया है.
ऐसे करें Gemini AI वीडियो फीचर का इस्तेमाल
Google Vids में वीडियो बनाने के लिए डेस्कटॉप पर vids.new खोलना होगा. इसके बाद अपने वीडियो का आइडिया टेक्स्ट में बताकर प्रॉम्प्ट दिया जा सकता है. जरूरत के मुताबिक इमेज रेफरेंस जोड़कर वीडियो को ज्यादा सटीक बनाया जा सकता है.
वहीं Gemini Apps में वीडियो जनरेशन के लिए फिलहाल व्यक्तिगत अकाउंट पर Google AI प्लान की जरूरत होती है. यह सुविधा 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है.
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>क्या AI आपके पुराने Chat से आपकी Personality पहचान सकता है? ऐसे करें आसान Experiment</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में लोग AI चैटबॉट्स से सिर्फ सवालों के जवाब नहीं लेते, बल्कि उनसे अपनी पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों, पसंद-नापसंद और रोजमर्रा की परेशानियों पर भी बात करते हैं. ऐसे में एक दिलचस्प सवाल उठता है क्या आपके पुराने चैट देखकर AI आपकी Personality के बारे में अंदाजा लगा सकता है? इसका जवाब जानने के लिए आप खुद एक आसान एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं.
हम AI से बातचीत करते समय कई ऐसी बातें लिख देते हैं जिनसे हमारी सोच और व्यवहार का अंदाजा लगाया जा सकता है. उदाहरण के लिए आप किस तरह के सवाल पूछते हैं, किसी समस्या का समाधान किस तरीके से चाहते हैं, कितनी जानकारी पसंद करते हैं और किसी फैसले को लेकर आपकी प्राथमिकता क्या होती है. एक-दो चैट से Personality का सही अंदाजा लगाना मुश्किल है लेकिन लंबे समय की बातचीत में ऐसे पैटर्न ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं. यही पैटर्न AI को आपके व्यवहार के बारे में अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं.
खुद करें यह आसान Experiment
इस एक्सपेरिमेंट के लिए किसी AI चैटबॉट में अपनी पुरानी बातचीत का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करें. अगर आपके पास पुराने चैट का टेक्स्ट है तो उसे कॉपी करके एक नए चैट में डाल सकते हैं. इसके बाद AI से सीधे अपनी Personality बताने के बजाय ऐसा सवाल पूछें: &amp;ldquo;इन बातचीत के पैटर्न के आधार पर मेरे बारे में क्या अनुमान लगाया जा सकता है? मेरी सोचने की शैली, फैसले लेने का तरीका, पसंद और बातचीत के पैटर्न का एनालिसिस करें. केवल चैट में मौजूद सबूतों के आधार पर जवाब दें और जहां निश्चित न हों, वहां अनुमान बताएं.&amp;rdquo;
अब AI के जवाब को ध्यान से पढ़ें. खास तौर पर देखें कि क्या वह आपकी बातचीत से ऐसे पैटर्न पहचानता है जिन्हें आपने खुद कभी नोटिस नहीं किया था.
फिर AI की Prediction को Test करें
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Experiment को और बेहतर बनाने के लिए अपनी पुरानी चैट को दो हिस्सों में बांट सकते हैं. पहले हिस्से की बातचीत AI को देकर Personality का अनुमान लगाने को कहें. इसके बाद दूसरे हिस्से की बातचीत से देखें कि उसका अनुमान कितना मेल खाता है.
मसलन, अगर पहले हिस्से की चैट देखकर AI कहता है कि आप किसी निर्णय से पहले कई ऑप्शनों का मुकाबला करते हैं तो दूसरे हिस्से की बातचीत में देखें कि क्या असल में ऐसा पैटर्न दिखाई देता है.
लेकिन AI की हर बात को सच न मानें
यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है. AI किसी व्यक्ति की Personality का मनोवैज्ञानिक टेस्ट नहीं कर रहा होता. वह मुख्य रूप से आपके लिखे हुए शब्दों, सवालों और बातचीत के पैटर्न से संभावित निष्कर्ष निकालता है.
अगर आप किसी खास विषय पर लगातार सवाल पूछते हैं तो AI यह मान सकता है कि उस विषय में आपकी स्पेशल रुचि है. लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि आपकी पूरी Personality उसी आधार पर तय हो जाए.
Privacy का भी रखें ध्यान
पुराने Chats को किसी AI मॉडल में डालने से पहले यह जरूर देखें कि उनमें कोई निजी जानकारी तो नहीं है. फोन नंबर, ईमेल, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी, पर्सनल डॉक्यूमेंट या किसी दूसरे व्यक्ति की संवेदनशील जानकारी को हटाना बेहतर है.
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>क्या, आपके, पुराने, Chat, से, आपकी, Personality, पहचान, सकता, है, ऐसे, करें, आसान, Experiment</media:keywords>
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        <title>घर में एक ही Wi&amp;Fi पर TV, Phone और Laptop चलाने से Speed कैसे बंटती है?</title>
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        <description><![CDATA[ घर में एक ही Wi-Fi पर TV, Phone और Laptop चलाने से Speed कैसे बंटती है? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung के इन स्मार्टफोन्स पर 3000 रुपये तक का Price Hike, जानें नई कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung के स्मार्टफोन खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो अब बजट पहले से थोड़ा ज्यादा रखना होगा. कंपनी ने भारत में अपने दो लोकप्रिय 5G स्मार्टफोन Galaxy A36 5G और Galaxy A56 5G की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. इन दोनों मॉडल के सभी वेरिएंट्स अब पहले के मुकाबले महंगे मिलेंगे. इनमें Galaxy A36 5G की कीमत में सबसे ज्यादा 3,000 रुपये का इजाफा हुआ है, जबकि Galaxy A56 5G के लिए ग्राहकों को 2,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे. नई कीमतें 24 सितंबर से लागू हो गई हैं और Samsung India के साथ Amazon पर भी कीमतों को अपडेट किया गया है.&amp;nbsp;
Galaxy A36 5G कितने रुपये महंगा हुआ?
Galaxy A36 5G के सभी वेरिएंट्स पर 3,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इसका 8GB+128GB मॉडल अब 36,999 रुपये का है, जबकि पहले इसकी कीमत 33,999 रुपये थी. 8GB+256GB वेरिएंट की कीमत 37,999 रुपये से बढ़कर 40,999 रुपये हो गई है. वहीं, 12GB+256GB मॉडल अब 46,499 रुपये में मिलेगा, जो पहले 43,499 रुपये का था.&amp;nbsp;
Galaxy A56 5G की नई कीमत
Galaxy A56 5G के 8GB रैम और 128GB स्टोरेज मॉडल की कीमत अब 44,999 रुपये हो गई है. इसकी पुरानी कीमत 42,999 रुपये थी. वहीं, 8GB+256GB वेरिएंट अब 48,999 रुपये में मिलेगा, जिसकी कीमत पहले 46,999 रुपये थी. फोन के 12GB+256GB मॉडल की कीमत 52,999 रुपये से बढ़कर 54,499 रुपये हो गई है.&amp;nbsp;
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इन दोनों फोन में मिलते हैं ये फीचर्स
Galaxy A56 5G और Galaxy A36 5G दोनों में 6.7 इंच का Full-HD+ Super AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट और Corning Gorilla Victus+ प्रोटेक्शन के साथ आती है. इन दोनों स्मार्टफोन Auto Trim, Best Face, AI Select और Read Aloud जैसे AI फीचर्स को सपोर्ट करते हैं.&amp;nbsp;
परफॉर्मेंस के लिए Galaxy A56 5G में Exynos 1580 चिपसेट दिया गया है, जबकि Galaxy A36 5G Snapdragon 6 Gen 3 प्रोसेसर के साथ आता है. इन दोनों फोन में 12GB तक RAM और 256GB तक स्टोरेज मिलती है. ये Android 15 पर आधारित One UI 7 पर काम करते हैं और इन्हें छह OS अपग्रेड और छह साल के सिक्योरिटी अपडेट मिलेंगे.&amp;nbsp;
कैमरा और बैटरी में क्या है खास?
Galaxy A56 5G में 50MP OIS मेन कैमरा, 12MP अल्ट्रा वाइड और 5MP मैक्रो कैमरा मिलता है. Galaxy A36 5G में भी 50MP OIS प्राइमरी और 5MP मैक्रो कैमरा है, लेकिन इसका अल्ट्रा वाइड कैमरा 8MP का है. इन दोनों फोन में 12MP फ्रंट कैमरा दिया गया है. वहीं दोनों मॉडल 5,000mAh बैटरी और 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करते हैं. इनमें IP67 रेटिंग, 5G, 4G LTE, Wi-Fi, Bluetooth 5.3, GPS, NFC और USB Type-C पोर्ट मिलता है. साथ ही दोनों फोन 7.4mm मोटे हैं और इनमें स्टीरियो स्पीकर भी दिए गए हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>एयर फ्रायर साफ कर रहे हैं तो न करें ये गलती, खराब हो जाएगा हीटिंग सिस्टम</title>
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        <description><![CDATA[ एयर फ्रायर ने किचन में खाना बनाने का तरीका काफी आसान कर दिया है, लेकिन इसकी सफाई में की गई छोटी-सी गलती मशीन की परफॉर्मेंस पर असर डाल सकती है. रोज इस्तेमाल होने वाले इस डिवाइस में खाना पकाने के दौरान तेल, चिकनाई और खाने के छोटे टुकड़े जमा होते रहते हैं. अगर इन्हें सही तरीके से साफ न किया जाए तो न सिर्फ सफाई मुश्किल हो सकती है, बल्कि हीटिंग सिस्टम, वेंट्स और नॉन-स्टिक कोटिंग को भी नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए एयर फ्रायर की सफाई करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि एयर फ्रायर साफ कर रहे हैं तो कौन-सी गलती न करें.
मेन यूनिट को पानी में न डालें
एयर फ्रायर की मेन बॉडी को पानी में डुबोना नहीं चाहिए, इसमें इलेक्ट्रॉनिक हिस्से मौजूद होते हैं. बाहरी और अंदरूनी हिस्से को हल्के गीले कपड़े या स्पंज से साफ करें. कंट्रोल पैनल पर भी ज्यादा नमी जाने से बचना चाहिए और सफाई से पहले प्लग जरूर निकालना चाहिए.&amp;nbsp;
हर इस्तेमाल के बाद करें सफाई
एयर फ्रायर को कई बार बिना साफ किए दोबारा इस्तेमाल करने से पुरानी चिकनाई और खाने के अवशेष जमा हो सकते हैं. इससे बदबू आने के साथ खाना पकने के दौरान पुराना तेल या बचा हुआ खाना जल सकता है. इसलिए हर इस्तेमाल के बाद बास्केट और ट्रे को साफ करना जरूरी है.&amp;nbsp;
स्टील या मेटल वाले स्क्रबर से न करें सफाई
बास्केट या ट्रे को साफ करने के लिए स्टील वूल, मेटल स्क्रबर या बहुत खुरदुरे स्पंज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इससे नॉन-स्टिक कोटिंग खराब हो सकती है. सफाई के लिए सॉफ्ट स्पंज, हल्का डिश सोप और गुनगुने पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है. ज्यादा जमी चिकनाई होने पर हटाने वाले हिस्सों को कुछ समय भिगोकर साफ करना आसान रहेगा.
हीटिंग एलिमेंट को न भूलें
एयर फ्रायर के हीटिंग एलिमेंट पर भी खाने के कण और चिकनाई जमा हो सकती है. इसे पूरी तरह ठंडा करने और प्लग निकालने के बाद सॉफ्ट ब्रश या टूथब्रश से साफ किया जा सकता है. इसे नजरअंदाज करने पर एयर फ्रायर की क्षमता प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
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तेज केमिकल से भी बचें
ब्लीच, ओवन क्लीनर या दूसरे तेज केमिकल नॉन-स्टिक कोटिंग को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अवशेष छोड़ सकते हैं. इसकी जगह हल्का डिश सोप और गर्म पानी इस्तेमाल करना बेहतर है. जरूरत पड़ने पर पानी और सिरके का घोल भी चिकनाई हटाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
साफ करने के बाद पूरी तरह सुखाएं
सफाई के बाद एयर फ्रायर के हिस्सों को तुरंत जोड़ने की गलती न करें. सभी पार्ट्स को पूरी तरह सूखने दें, फिर दोबारा असेंबल करें. नमी बची रहने पर इस्तेमाल के दौरान भाप या इलेक्ट्रिकल दिक्कत की स्थिति बन सकती है. साथ ही पीछे के वेंट्स की सफाई भी नियमित रूप से करनी चाहिए, वहां जमा ग्रीस और खाने के कण एयरफ्लो को प्रभावित कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>No&amp;Cost EMI की सच्चाई! जानिए क्या सच में नहीं देना होता कोई ब्लाज</title>
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        <description><![CDATA[ No-Cost EMI की सच्चाई! जानिए क्या सच में नहीं देना होता कोई ब्लाज ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>स्क्रीन बंद, इंटरनेट चालू? Smart TV के पीछे चल रहा ये सिस्टम</title>
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        <description><![CDATA[ टीवी देखने के बाद रिमोट से पावर बटन दबाते ही स्क्रीन काली हो जाती है और लगता है कि डिवाइस पूरी तरह बंद हो गया है, लेकिन स्मार्ट टीवी के मामले में ऐसा हमेशा नहीं होता है. कई मॉडल स्टैंडबाय मोड में जाने के बाद भी नेटवर्क से जुड़े रहते हैं और पर्दे के पीछे कई सिस्टम काम करते रहते हैं. इसी वजह से स्मार्ट टीवी की सुविधा के साथ कंज्यूमर प्राइवेसी भी चर्चा में आती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि स्क्रीन बंद होने के बाद भी Smart TV में कौन-से सिस्टम काम करते रहते हैं.
स्क्रीन बंद होने के बाद क्या चलता रहता है?
स्क्रीन बंद होने के बाद Smart TV पूरी तरह बंद नहीं होता है, बल्कि कई मॉडल स्टैंडबाय मोड में चले जाते हैं. इस दौरान टीवी का मेन बोर्ड, वाई-फाई या नेटवर्क चिप और बैकग्राउंड ऑपरेटिंग सिस्टम सक्रिय रह सकते हैं. इनकी मदद से टीवी ऐप्स और सॉफ्टवेयर अपडेट चेक कर सकता है, डेटा सिंक कर सकता है और फोन से कास्टिंग या वॉयस कमांड जैसी सुविधाओं को सपोर्ट कर सकता है. कुछ टीवी में ACR जैसी तकनीक भी बैकग्राउंड में कंटेंट से जुड़ी जानकारी पहचानने का काम कर सकती है.&amp;nbsp;
ACR कैसे करता है काम?
स्मार्ट टीवी में Automatic Content Recognition यानी ACR एक ऐसा सिस्टम है, जो टीवी पर चल रहे कंटेंट को पहचानने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. रिसर्च के मुताबिक यह तकनीक स्क्रीन पर दिखने वाले कंटेंट को समय-समय पर पहचानकर उसे उपलब्ध कंटेंट लाइब्रेरी से मैच कर सकती है.&amp;nbsp;
Samsung और LG स्मार्ट टीवी पर हुई रिसर्च में ACR से जुड़े नेटवर्क डेटा की जांच की गई. रिसर्च में सामने आया कि टीवी पर कंटेंट देखने का तरीका बदलने पर ACR का काम करने का तरीका भी अलग हो सकता है. यहां तक कि टीवी को सिर्फ बाहरी डिस्प्ले की तरह इस्तेमाल करने पर भी ACR एक्टिव रह सकता है. हालांकि अगर ACR से जुड़ी प्राइवेसी सेटिंग बंद कर दी जाए, तो उसके सर्वर पर जाने वाला नेटवर्क डेटा ट्रैफिक रुक गया.&amp;nbsp;
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Smart TV की प्राइवेसी कैसे रखें?
टीवी के Privacy या System Settings में जाकर ACR, Viewing Information, Personalized Advertising और Voice Recognition जैसी सुविधाओं की समीक्षा की जा सकती है. जिन फीचर्स की जरूरत नहीं है, उन्हें बंद करना एक ऑप्शन है. साथ ही टीवी का फर्मवेयर और सिक्योरिटी अपडेट समय पर इंस्टॉल करना जरूरी है. घर के राउटर और उससे जुड़े दूसरे डिवाइस को भी अपडेट रखना चाहिए. पुराने या इस्तेमाल न होने वाले डिवाइस को नेटवर्क से हटाना भी सुरक्षा के लिए यूजफुल है.
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        <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अब फोन बनेगा एडिटिंग स्टूडियो, एंड्रॉयड पर आया Adobe Premiere</title>
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        <description><![CDATA[ वीडियो एडिटिंग के लिए अब हर बार लैपटॉप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. Adobe ने अपने Premiere मोबाइल ऐप को एंड्रॉयड यूजर्स के लिए भी उपलब्ध करा दिया है. इससे पहले यह ऐप आईफोन पर लॉन्च किया गया था और अब एंड्रॉयड डिवाइसेज तक पहुंचने के बाद ज्यादा यूजर्स मोबाइल पर वीडियो एडिट कर सकेंगे. ऐप को फ्री में इस्तेमाल किया जा सकता है और इसमें वीडियो, ऑडियो, इफेक्ट्स समेत कई एडिटिंग टूल्स दिए गए हैं.&amp;nbsp;
4K तक वीडियो एडिटिंग का सपोर्ट
Adobe Premiere मोबाइल में मल्टी-ट्रैक टाइमलाइन दी गई है, जिसकी मदद से वीडियो के साथ म्यूजिक, टेक्स्ट और इफेक्ट्स को अलग-अलग लेयर पर रखा जा सकता है. इसमें फ्रेम-लेवल पर एडिटिंग का ऑप्शन भी मिलता है. यूजर्स वीडियो को 4K तक की क्वालिटी में एडिट और एक्सपोर्ट कर सकते हैं.
ऐप में Enhance Audio फीचर भी मौजूद है, जो रिकॉर्डिंग से बैकग्राउंड नॉइस कम करके आवाज को ज्यादा साफ करने में मदद करता है. यह इंटरव्यू, वॉयस ओवर और दूसरी रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
Templates और Creative Tools भी मिलेंगे
यूजर्स चाहें तो क्रिएटर्स के बनाए टेम्पलेट से प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं या अपना टेम्पलेट तैयार कर सकते हैं. ऐप में Adobe Stock के जरिए इफेक्ट्स, ट्रांजीशन, म्यूजिक और दूसरे क्रिएटिव एसेट्स का ऑप्शन भी दिया गया है. फोन में मौजूद फाइलों को सीधे इस्तेमाल करने के साथ वीडियो से ऑडियो निकालने की सुविधा भी मिलती है.
Adobe Firefly से AI फीचर्स
मोबाइल ऐप में Adobe Firefly पर आधारित कुछ जनरेटिव AI फीचर्स भी शामिल हैं. इनमें Generative Fill, Image-to-Video और Generate Sound Effects जैसे टूल्स मिलते हैं. Adobe के अनुसार, एडिटिंग के दौरान जबरन लॉगिन की जरूरत नहीं है और ऐप में बार-बार अपग्रेड का प्रमोशन भी नहीं दिखाया जाता है. इसके अलावा मोबाइल एक्सपीरियंस एड फ्री है और एडिट किए गए वीडियो पर वॉटरमार्क नहीं लगाया जाता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - AI की ताकत अब कम कीमत में, GPT-6 के साथ OpenAI का बड़ा बदलाव
किन Android फोन पर चलेगा ऐप?
Adobe Premiere मोबाइल को चलाने के लिए Android 13 या उसके बाद का वर्जन जरूरी है. डिवाइस में कम से कम 5GB RAM भी होनी चाहिए. ऐप Google Play Store के जरिए उपलब्ध है.&amp;nbsp;
आगे और कौन से फीचर्स आएंगे?
Adobe ने बताया है कि आने वाले समय में मोबाइल ऐप में Adobe Fonts, बेहतर captions, keyframes, cropping और beat detection जैसे फीचर्स जोड़े जाएंगे. साथ ही Premiere मोबाइल और डेस्कटॉप Premiere के बीच एक ही प्रोजेक्ट पर आगे एडिटिंग जारी रखने की सुविधा भी लाई जाएगी. फ्री वर्जन में बेसिक एडिटिंग टूल्स मिलेंगे, जबकि अतिरिक्त जनरेटिव क्रेडिट्स और स्टोरेज के लिए अपग्रेड का ऑप्शन रहेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>स्मार्ट Siri का इंतजार पड़ा महंगा, iPhone यूजर्स को मिलेगा Compensation Claim</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Intelligence से जुड़ी स्मार्ट Siri का इंतजार करने वाले कुछ iPhone यूजर्स के लिए अब कंपनसेशन का रास्ता खुल गया है. Apple ने Siri के अपग्रेड में हुई देरी को लेकर 25 करोड़ डॉलर (करीब 2,200 करोड़ रुपये) के सेटलमेंट की क्लेम विंडो शुरू कर दी है. अमेरिका में तय शर्तों के तहत योग्य iPhone मालिक एक डिवाइस के लिए शुरुआती तौर पर 25 डॉलर का भुगतान मांग सकते हैं.&amp;nbsp;
यह मामला उस क्लास एक्शन केस से जुड़ा है जिसमें Apple पर आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने iPhone 16 को Apple Intelligence के लिए तैयार फोन के तौर पर पेश किया, जबकि WWDC 2024 में दिखाई गई ज्यादा स्मार्ट Siri उस समय उपलब्ध नहीं थी. यह अपग्रेड इसी महीने iOS 27 के साथ यूजर्स तक पहुंचा है.&amp;nbsp;
किन iPhone मॉडल्स पर मिलेगा Claim?
यह सेटलमेंट सिर्फ अमेरिका में हुई योग्य खरीद पर लागू है. इसमें iPhone 15 Pro और iPhone 15 Pro Max के साथ पूरी iPhone 16 सीरीज शामिल है. इसमें iPhone 16, 16 Plus, 16 Pro, 16 Pro Max और iPhone 16e आते हैं. खरीदारी 10 जून 2024 से 29 मार्च 2025 के बीच की गई होनी चाहिए.&amp;nbsp;
क्लेम वही व्यक्ति कर सकता है जिसने फोन मूल रूप से खरीदा हो. डिवाइस निजी या काम के इस्तेमाल के लिए लिया गया होना चाहिए और उसे दोबारा बेचने के लिए नहीं खरीदा गया होना चाहिए. भारत में खरीदे गए इन्हीं मॉडल्स पर यह सेटलमेंट लागू नहीं होगा, यह मामला अमेरिका में दायर और सेटल हुआ है.&amp;nbsp;
Claim करने के लिए क्या चाहिए?
क्लेम SmartphoneAISettlement.com के जरिए किया जा सकता है. फॉर्म में नाम, पता, फोन नंबर और iPhone का सीरियल नंबर मांगा जाएगा. यह जानकारी सेटिंग्स में General के बाद About सेक्शन में मिल जाएगी. सीरियल नंबर उपलब्ध नहीं होने पर Apple Account ईमेल और डिवाइस से जुड़े फोन नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है. हर डिवाइस के लिए अलग क्लेम करना होगा और एक फोन पर केवल एक भुगतान मिलेगा. योग्य यूजर्स को आने वाले दिनों में क्लेम ID और PIN वाला ईमेल भी मिल सकता है, हालांकि इनके बिना भी आवेदन किया जा सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - सिर्फ कैमरा नहीं, आवाज पर भी फोकस; Meta AI Glasses में नए फीचर्स
कब तक करना होगा Claim?
क्लेम जमा करने की आखिरी तारीख 21 दिसंबर 2026 है. मामले की अंतिम मंजूरी के लिए सैन जोस की फेडरल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 24 फरवरी 2027 को सुनवाई होगी. इसके बाद ही भुगतान शुरू होंगे और किसी अपील की स्थिति में इसमें और देरी हो सकती है. भुगतान PayPal, Venmo, डायरेक्ट डिपॉजिट या पेपर चेक के जरिए किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>टीवी&amp;मॉनिटर ठीक फिर भी डिस्प्ले खराब? जानें HDMI Cable के 5 संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ टीवी-मॉनिटर ठीक फिर भी डिस्प्ले खराब? जानें HDMI Cable के 5 संकेत ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>नया फोन भी कुछ महीनों में क्यों पड़ जाता है धीमा? जानें टेक्निकल वजह</title>
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        <title>Meta ने लॉन्च किए नए स्मार्ट ग्लासेस! सिनेमा से गेमिंग तक सबकुछ होगा खास</title>
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        <description><![CDATA[ Meta ने अपने नए वर्चुअल रियलिटी डिवाइस Meta VR Glasses को पेश कर दिया है. कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग ने Meta Connect 2026 इवेंट में इस डिवाइस को दिखाया. खास बात यह है कि यह पुराने VR हेडसेट की तरह भारी और बड़ा नहीं है. इसका वजन करीब 100 ग्राम है और कंपनी इसे सिनेमा, गेमिंग, स्पोर्ट्स और ऑफिस वर्क के लिए इस्तेमाल करने का दावा कर रही है. इसकी बिक्री 2027 के वसंत में शुरू होगी और कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 1,299.99 डॉलर रखी है.
इन VR Glasses में 5K Infinite Display दिया गया है जो माइक्रो-OLED पैनल पर बेस्ड हैं. इसमें 37 पिक्सल प्रति डिग्री की डेंसिटी है. Meta ने इसमें Dolby Vision और Dolby Atmos भी जोड़ा है जिससे वीडियो और ऑडियो एक्सपीरिएंस को ज्यादा इमर्सिव बनाने की कोशिश की गई है. आंखों और हाथों की ट्रैकिंग के कारण कई कामों के लिए अलग कंट्रोलर की जरूरत नहीं होगी.
घर बैठे मिलेगा IMAX जैसा सिनेमा
Meta VR Glasses को पहला IMAX Enhanced certified VR डिवाइस बताया गया है. यूजर्स चुनिंदा 3D फिल्में और IMAX के एक्सपैंडेड आस्पेक्ट रेशियो वाला कंटेंट देख सकेंगे. Disney+ पर चुनिंदा Marvel फिल्मों के 3D कंटेंट की स्ट्रीमिंग भी शुरू की जाएगी. इसके अलावा Meta ने Prime Video, YouTube, ESPN, Crunchyroll, Plex और कई अन्य प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है.
घर बैठे स्टेडियम की फ्रंट-रो सीट
स्पोर्ट्स देखने वालों के लिए भी Meta ने खास एक्सपीरिएंस तैयार किया है. कंपनी ESPN, MLB, NBC Sports, TNT Sports और UFC समेत अन्य पार्टनर्स के साथ काम कर रही है. Meta के मुताबिक लॉन्च के बाद हर साल 100 से ज्यादा इमर्सिव लाइव स्पोर्ट्स इवेंट्स उपलब्ध कराने की योजना है, जिनमें दर्शक 180-डिग्री व्यू और वर्चुअल फ्रंट-रो सीट जैसा अनुभव पा सकेंगे.
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100 ग्राम का VR
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,Meta VR Glasses का डिजाइन नॉर्मल चश्मे जैसा रखा गया है. कंपनी ने भारी स्ट्रैप और चेहरे पर लगने वाले बड़े हार्डवेयर को हटाने की कोशिश की है. हालांकि इसका पूरा कंप्यूटिंग सिस्टम चश्मे के अंदर नहीं है. एक अलग पॉकेट डिवाइस यानी पक को ऑप्टिकल केबल के जरिए ग्लासेस से जोड़ा जाता है. इसमें बैटरी, स्टोरेज और कंप्यूटिंग का काम होता है. Meta के अनुसार यह सिस्टम Quest 3 के मुकाबले में करीब पांच गुना हल्का है.
गेमिंग और AI का भी मिलेगा साथ
गेमिंग के लिए लॉन्च के समय 75 से ज्यादा ऐसे गेम उपलब्ध होने की बात कही गई है जिन्हें हाथों के इशारों से खेला जा सकेगा. इसके अलावा Xbox Cloud Gaming के जरिए सैकड़ों गेम स्ट्रीम किए जा सकेंगे. Meta ने अपने Muse AI एजेंट को भी AI ग्लासेस के साथ जोड़ने की घोषणा की है जिससे यूजर सामने दिखाई दे रही चीजों के बारे में सवाल पूछने और कुछ काम करवाने के लिए AI का इस्तेमाल कर सकेगा.
कितनी है कीमत
Meta VR Glasses की शुरुआती कीमत 1,299.99 डॉलर है और इसे Spring 2027 में लॉन्च किया जाएगा. हालांकि, भारत में इसकी कीमत और उपलब्धता को लेकर अभी तक कंपनी की ओर से कोई जानकारी सामने नहीं आई है.
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 13:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ये हैं सबसे सस्ते रिमोट कंट्रोल सीलिंग फैंस, यहां से करें शॉपिंग</title>
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        <description><![CDATA[ सीलिंग फैन घर की सबसे जरूरी चीजों में शामिल रहता है, लेकिन हर बार पंखे की स्पीड बदलने के लिए उठकर रेगुलेटर तक जाना जरूरी नहीं है. अब रिमोट कंट्रोल वाले सीलिंग फैन इस काम को आसान बना रहे हैं. खास बात यह है कि रिमोट वाला फैन खरीदने के लिए हमेशा ज्यादा बजट की जरूरत भी नहीं पड़ती है. मार्केट में 2,000 रुपये से कम कीमत में भी कुछ मॉडल उपलब्ध हैं, जबकि थोड़े ज्यादा बजट में BLDC और 5-स्टार रेटिंग वाले ऑप्शन मिल जाते हैं.&amp;nbsp;
अगर आप ऐसा फैन ढूंढ रहे हैं जिसमें रिमोट कंट्रोल के साथ बिजली की खपत भी कम हो, तो BLDC मॉडल पर नजर डाल सकते हैं. कुछ ऐसे सीलिंग फैन भी है जिनकी कीमत, फीचर्स और रिमोट कंट्रोल सुविधा के आधार पर तुलना की जा सकती है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि सबसे सस्ते रिमोट कंट्रोल सीलिंग फैंस कौन-से हैं.&amp;nbsp;
सबसे सस्ते रिमोट कंट्रोल सीलिंग फैंस कौन-से हैं
सबसे सस्ते रिमोट कंट्रोल सीलिंग फैंस LONGWAY Creta P1 50W Golden Remote Controlled Ceiling Fan एक बेस्ट ऑप्शन है. 1200mm स्वीप वाले इस मॉडल की लिस्टेड कीमत करीब 1,749 रुपये है. वहीं LONGWAY Creta का 1200mm 3-ब्लेड वेरिएंट पैक ऑफ 2 में करीब 3,299 रुपये में लिस्टेड है. वहीं एक अन्य ऑप्शन LONGWAY Aero 1200mm BLDC Ceiling Fan है. इसकी कीमत 1,999 है. इसमें BLDC मोटर, रिमोट कंट्रोल और BEE 5-स्टार रेटिंग दी गई है.
3 हजार रुपये के आसपास कौन से ऑप्शन हैं?
Crompton Energion Hyperjet 1200mm BLDC की कीमत 2,794 रुपये है. इसमें BLDC मोटर, BEE 5-स्टार रेटिंग और पॉइंट एनवेयर रिमोट कंट्रोल मिलता है. इसमें एंटी-रस्ट प्रोटेक्शन भी दिया गया है और 2 साल की मैन्युफैक्चरर वारंटी है.
Polycab Wizzy Vibe 1200mm BLDC की कीमत 2,799 रुपये है. इसमें रिमोट कंट्रोल, 5-स्टार रेटिंग और हाई एयर डिलीवरी का दावा किया गया है. प्रोडक्ट लिस्टिंग में 4 साल की वारंटी भी दी गई है.&amp;nbsp;
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बिजली बचाने वालों के लिए कौन सा फैन?
Orient Electric Zeno 1200mm BLDC की कीमत 3,299 रुपये है. इसमें BEE 5-स्टार रेटिंग, BLDC मोटर और रिमोट कंट्रोल मिलता है. कंपनी की ओर से बिजली की खपत में 50 प्रतिशत तक बचत का दावा किया गया है. इस मॉडल के साथ 3 साल की वारंटी है.&amp;nbsp;
वहीं atomberg Ikano Stylique 1200mm BLDC की कीमत 3,499 रुपये है. &amp;nbsp;इसमें Advance Air Technology, रिमोट ऑपरेशन, BEE 5-स्टार रेटिंग और लो-नॉइस ऑपरेशन दिया गया है. इसके साथ 3 साल की वारंटी भी मिलती है.
सीलिंग फैंस की शॉपिंग कहां से करें?
सबसे सस्ते रिमोट कंट्रोल सीलिंग फैंस की शॉपिंग के लिए Moglix और Amazon जैसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर अलग-अलग मॉडल देखे जा सकते हैं. यहां आपको अलग-अलग ब्रांड के रिमोट वाले सीलिंग फैन की कीमत, डिस्काउंट और फीचर्स की जानकारी मिलती है और आप अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से सही फैन चुनकर खरीद सकते हैं. रिमोट कंट्रोल के अलावा फैन की BLDC मोटर, BEE रेटिंग, स्वीप साइज, एयर डिलीवरी और वारंटी भी देखना जरूरी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI की ताकत अब कम कीमत में, GPT&amp;6 के साथ OpenAI का बड़ा बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ AI का यूज अब प्रोफेशनल, कोडिंग, कंप्यूटर पर अलग-अलग काम करने और लंबे समय तक मदद लेने के लिए तेजी से किया जा रहा है. इसी दिशा में OpenAI ने GPT-6 सीरीज के दो नए मॉडल GPT-6 Sol और GPT-6 Luna पेश किए हैं. कंपनी के मुताबिक, इन दोनों मॉडल्स में GPT-6 Astra से जुड़ी कुछ क्षमताओं को कम कीमत वाले टियर तक पहुंचाया गया है. OpenAI ने इनके API की कीमत भी GPT-5.6 के प्रमोशनल प्राइस की तुलना में 50 फीसदी कम की है.&amp;nbsp;
OpenAI का कहना है कि GPT-6 Sol और GPT-6 Luna को GPT-6 Astra जैसी ट्रेनिंग तकनीकों के आधार पर तैयार किया गया है. कंपनी ने प्रोफेशनल वर्क, कोडिंग, कंप्यूटर यूज और अलाइनमेंट जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन का दावा किया है. हालांकि, GPT-6 Astra अभी भी OpenAI का सबसे ज्यादा क्षमता वाला मॉडल बना हुआ है.&amp;nbsp;
किन यूजर्स को मिलेगा एक्सेस?
GPT-6 Sol और GPT-6 Luna को ChatGPT Work और Codex में Plus, Pro, Business, Enterprise और Edu यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है. Free और Go यूजर्स डेस्कटॉप ऐप के जरिए GPT-6 Luna इस्तेमाल कर सकते हैं. फिलहाल ये मॉडल स्टैंडर्ड ChatGPT में उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन OpenAI इन्हें धीरे-धीरे रोलआउट करने की योजना बना रहा है. API में इन्हें gpt-6-sol और gpt-6-luna नाम से इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
अलग-अलग टेस्ट में प्रदर्शन
AutomationBench में GPT-6 Sol ने xhigh effort पर 33.2 प्रतिशत स्कोर किया, जबकि Claude Opus 5 का स्कोर 26.9प्रतिशत रहा. DeepSWE टेस्ट में Sol ने 68.8प्रतिशत स्कोर हासिल किया, जबकि Claude Fable 5 का स्कोर 69.9प्रतिशत रहा. हालांकि, Sol की एक टास्क की लागत करीब 0.27 डॉलर थी और DeepSWE में इसकी लागत Claude Fable 5 से करीब 80 प्रतिशत कम रही. OSWorld 2.0 में भी Sol ने 60.5प्रतिशत स्कोर किया, जबकि Claude Opus 5 का स्कोर 60.3प्रतिशत रहा.
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API कीमत में बड़ी कटौती
GPT-6 Sol की कीमत 1 मिलियन इनपुट टोकन के लिए 2 डॉलर और 1 मिलियन आउटपुट टोकन के लिए 10 डॉलर है. वहीं GPT-6 Luna के लिए यही कीमत 0.10 डॉलर और 0.50 डॉलर है. OpenAI के अनुसार, दोनों मॉडल GPT-5.6 Sol और GPT-5.6 Luna की प्रमोशनल कीमतों से 50 फीसदी सस्ते हैं.&amp;nbsp;
कम लागत में कैसे मिला बेहतर परफॉर्मेंस
GPT-6 Luna ने GPT-5.6 Luna की तुलना में high effort पर 5.4 प्रतिशत अंक बेहतर प्रदर्शन किया और एक टास्क की लागत 58 प्रतिशत कम हुई. OpenAI के इंटरनल टेस्ट के अनुसार, GPT-6 Sol ने GPT-5.6 Sol के मुकाबले करीब आधी गलतियां कीं. कंपनी का कहना है कि GPT-6 Luna, ज्यादा effort पर GPT-5.6 Sol जैसा प्रदर्शन करीब 1 प्रतिशत लागत में कर सकता है. नए मॉडल जवाबों में कम मुश्किल शब्दों और गैर-जरूरी जानकारी को भी कम करते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ कैमरा नहीं, आवाज पर भी फोकस; Meta AI Glasses में नए फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Meta ने अपने नए AI Glasses में सिर्फ कैमरा और स्मार्ट फीचर्स तक सीमित रहने की जगह अब आवाज, AI असिस्टेंस, ऑडियो और एक्सेसिबिलिटी पर भी बड़ा फोकस किया है. 23 सितंबर को कैलिफोर्निया के Menlo Park स्थित कंपनी के मुख्यालय में हुए Meta Connect 2026 इवेंट में Meta ने अपने नए वियरेबल्स की लंबी रेंज पेश की.
कंपनी ने बताया कि साल के अंत तक Ray-Ban, Oakley और Meta Glasses को मिलाकर 100 से ज्यादा स्टाइल उपलब्ध होंगे. नए मॉडल में बेहतर AI, लंबी बैटरी, नए डिजाइन और कई ऐसे फीचर्स शामिल किए गए हैं, जिन्हें बिना फोन निकाले इस्तेमाल किया जा सकेगा. तो आइए जानते हैं कि Meta ने AI Glasses में कौन-से नए फीचर्स जोड़े हैं.
Glasses में आया Muse AI
Meta ने अपने AI Glasses के लिए Muse AI को पेश किया है, जो सिर्फ सवालों के जवाब देने के साथ यूजर की ओर से कई काम भी कर सकता है. यह वेबसाइट और कनेक्टेड सर्विसेज के साथ काम करने के लिए Muse Secure VM का इस्तेमाल करता है और Meta के Muse Spark AI मॉडल से संचालित है. यूजर इससे ईमेल भेजने, ट्रैवल बुक करने, फॉर्म भरने या खरीदारी जैसे काम करवा सकता है. हालांकि फिलहाल Muse AI की सुविधा अमेरिका तक सीमित है.&amp;nbsp;
कैमरे के साथ आवाज पर भी खास ध्यान
नए Glasses में Dolby Atmos Capture, Dynamic Photo और Landscape Crop Mode जैसे फीचर्स दिए गए हैं. Dynamic Photo एक फोटो के साथ कई फ्रेम कैप्चर करता है, जिसके बाद Meta AI बेहतर फ्रेम चुनने में मदद कर सकता है. वहीं Landscape Crop Mode से फोटो, वीडियो, स्लो-मो और हाइपरलैप्स को हॉरिजॉन्टल फॉर्मेट में रिकॉर्ड किया जा सकता है. Private Processing के जरिए Meta का दावा है कि AI फीचर्स इस्तेमाल करते समय यूजर का डेटा कंपनी समेत किसी और को दिखाई नहीं देगा.&amp;nbsp;
Meta ने AI Glasses में कौन-से नए फीचर्स जोड़े हैं
Meta Glasses में Hearing Enhancement फीचर भी जोड़ा जा रहा है. यह हल्की से मध्यम सुनने की परेशानी वाले लोगों के लिए FDA-cleared सॉफ्टवेयर है. कंपनी के मुताबिक इसे घर पर कुछ मिनटों में सेट किया जा सकता है और इसके लिए क्लिनिक या प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं है. यह फीचर अमेरिका में इस साल के लास्ट में कुछ स्टाइल पर उपलब्ध होगा. इसे Meta One सब्सक्रिप्शन के साथ लिया जा सकेगा.&amp;nbsp;
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Ray-Ban Meta Audio की भी एंट्री
Meta ने पहली बार Ray-Ban Meta Audio पेश किया है. ये कैमरा-फ्री AI Glasses हैं, जिनमें म्यूजिक, पॉडकास्ट, कॉल और AI असिस्टेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. इनका वजन 43 ग्राम है और एक चार्ज पर 12 घंटे तक इस्तेमाल का दावा किया गया है. चार्जिंग केस के साथ यह समय 48 घंटे तक बताया गया है. अमेरिका में इसकी शुरुआती हुई है, जबकि भारत में लॉन्च की जानकारी अभी नहीं दी गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सिर्फ, कैमरा, नहीं, आवाज, पर, भी, फोकस, Meta, Glasses, में, नए, फीचर्स</media:keywords>
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        <title>Gemini को मिला Apps का कंट्रोल, AI अब करेगा ज्यादा काम</title>
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        <description><![CDATA[ Google Gemini को अब ऐसा AI टूल बनाया जा रहा है, जहां यूजर्स एक ही जगह पर कई तरह के काम कर सकेंगे. Google ने Gemini के Connect Apps फीचर में कई नए थर्ड-पार्टी एप्स जोड़े हैं. कंपनी के अनुसार, इससे यूजर्स को हर छोटे-बड़े काम के लिए बार-बार अलग एप या टैब खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
Google ने Gemini में Airtable, Linear, monday.com, PandaDoc, Wispr AI और Zoho को जोड़ा है. इन कनेक्शन्स का इस्तेमाल प्रोजेक्ट संभालने, डेटाबेस व्यवस्थित करने और बोलकर नोट्स तैयार करने जैसे कामों के लिए किया जा सकता है. प्रोडक्टिविटी से जुड़े कई टास्क अब Gemini के जरिए किए जा सकेंगे.&amp;nbsp;
क्रिएटिव कामों के लिए भी नए Apps
क्रिएटिव यूजर्स के लिए Google ने Adobe, Picsart, Squarespace और Webflow के साथ कनेक्शन शुरू किया है. इनका मकसद Gemini के अंदर ही आइडिया को विजुअल रूप देना, ग्राफिक या दूसरे विजुअल एसेट तैयार करना और वेबसाइट बनाने में मदद करना है. इससे क्रिएटिव काम के दौरान बार-बार अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की जरूरत कम हो सकती है.&amp;nbsp;
Gemini में Apps कैसे इस्तेमाल होंगे?
इन नए कनेक्शन्स को Gemini की सेटिंग्स में जाकर जोड़ा जा सकता है. इसके अलावा बातचीत के दौरान किसी ऐप को @ मेंशन करके भी बुलाया जा सकता है या Gemini से सीधे उस ऐप के इस्तेमाल के लिए कहा जा सकता है. Google के अनुसार, नए इंटीग्रेशन का रोलआउट शुरू हो चुका है.
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पहले भी बढ़ाई जा चुकी है Gemini की पहुंच
Google ने अगस्त में भी Connected Apps का विस्तार किया था, जिसमें Granola, Otter.ai, Wix, Ticketmaster, iHeartRadio, Pandora और Zocdoc जैसे नाम शामिल थे. कंपनी अपने खुद के ऐप्स के बीच भी Gemini की क्षमता बढ़ा रही है. इस महीने की शुरुआत में वर्कस्पेस में एजेंटिक फीचर्स पेश किए गए, जिनकी मदद से Gemini Gmail, Drive, Docs, Slides और Chat के बीच कामों को कोऑर्डिनेट कर सकता है और उसी ऐप में रहते हुए डॉक्यूमेंट, स्प्रेडशीट और प्रेजेंटेशन तैयार करने में मदद करता है.&amp;nbsp;
Lifestyle से जुड़े काम भी होंगे आसान
Gemini के नए Connected Apps सिर्फ ऑफिस या क्रिएटिव कामों तक सीमित नहीं हैं. Apartments.com से अपार्टमेंट खोजे जा सकते हैं, Experian से क्रेडिट मॉनिटर किया जा सकता है, Peloton से वर्कआउट प्लान किए जा सकते हैं और SeatGeek के जरिए इवेंट टिकट खोजे जा सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>AI से बनेगा कंटेंट और बढ़ेगी शॉपिंग, YouTube का बड़ा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ वीडियो बनाने वालों के लिए YouTube अब सिर्फ वीडियो अपलोड करने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है. कंपनी ने क्रिएटर्स के काम को आसान बनाने के लिए AI, एडिटिंग, रिसर्च, कमेंट मैनेजमेंट और शॉपिंग से जुड़े कई नए फीचर्स पेश किए हैं. Made on YouTube इवेंट में YouTube ने बताया कि नए टूल्स वीडियो बनाने की शुरुआत से लेकर उसे बेहतर करने और दर्शकों तक पहुंचाने तक अलग-अलग चरणों में मदद करेंगे. इसका असर YouTube Studio, Shorts और YouTube Create जैसे प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिलेगा.&amp;nbsp;
वीडियो बनाने से पहले भी मिलेगी AI की मदद
YouTube Studio में नए Insights और Research सेक्शन क्रिएटर्स को पुराने वीडियो के प्रदर्शन को समझने और ऐसे वीडियो खोजने में मदद करेंगे, जो बाकी कंटेंट से अलग प्रदर्शन कर चुके हैं. ड्राफ्ट वीडियो के लिए भी AI के जरिए pacing, structure और storytelling जैसी चीजों पर सुझाव मिल सकेंगे.&amp;nbsp;थंबनेल बनाने की प्रक्रिया को भी अपडेट किया गया है. क्रिएटर्स अपने चैनल की शैली के अनुसार थंबनेल तैयार कर सकेंगे. इसके अलावा dynamic thumbnails अलग-अलग दर्शक समूहों के लिए अलग ऑप्शन सुझा सकेंगे.&amp;nbsp;
Shorts में Gemini से होगी एडिटिंग
YouTube Shorts और YouTube Create में Gemini-powered editing assistant भी लाया जा रहा है. क्रिएटर्स अपनी जरूरत के हिसाब से निर्देश देकर फ्रेम का क्रम बदलने, क्लिप काटने और म्यूजिक सिंक करने जैसे काम कर सकेंगे. इसके बाद वे जरूरत के अनुसार manual timeline editing पर वापस जा सकते हैं.
YouTube opt-in AI comment moderation की भी टेस्टिंग कर रहा है, जो क्रिएटर की पसंद के अनुसार कमेंट मॉडरेशन सीख सकेगा. पहचान की सुरक्षा के लिए लाइकनेस डिटेक्शन में स्पीकिंग वॉइस डिटेक्शन क फेशियल डिटेक्शन के साथ जोड़े जाने की योजना है.&amp;nbsp;
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Ask YouTube बनेगा शॉपिंग असिस्टेंट
YouTube के Ask YouTube फीचर को अब शॉपिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. वीडियो देखते समय यूजर्स किसी प्रोडक्ट के बारे में सवाल पूछ पाएंगे, उसकी स्पेसिफिकेशन जान सकेंगे और जवाब मिलने के बाद आगे के सवाल भी कर सकेंगे. जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट की तुलना के लिए कंपेरिजन टेबल भी दिखाई जाएगी. YouTube TV पर इसे वॉयस कमांड से इस्तेमाल करने का ऑप्शन भी दिया जाएगा.
भारत में बढ़ेगा YouTube Shopping
भारत में YouTube अपने Shopping affiliate programme का विस्तार कर रहा है. इसमें Amazon के साथ AJIO, Meesho, Snapdeal और Tata CLiQ भी जुड़ेंगे. YouTube के अनुसार, भारत में 45 करोड़ से ज्यादा लॉग-इन यूजर्स शॉपिंग से जुड़ा कंटेंट सर्च करते हैं और इस तरह के कंटेंट का वॉच टाइम एक साल में 55 प्रतिशत बढ़ा है. 50 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय क्रिएटर्स अब इस प्रोग्राम का हिस्सा हैं और क्रिएटर्स 1.9 करोड़ से ज्यादा वीडियो में प्रोडक्ट टैग कर चुके हैं. Q1 2025 से Q1 2026 के बीच औसत क्रिएटर पेआउट 160 &amp;nbsp;प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है. इसके अलावा, प्रोडक्ट टैग अब अलग-अलग देशों में स्थानीय ऑफर और वहां की करेंसी के हिसाब से दिखाए जा सकेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>फोन में पानी गया तो ये हैक अपनाते हैं 29 पर्सेंट लोग, Report में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ फोन हाथ से गिर जाए या अचानक पानी की चपेट में आ जाए, तो कुछ सेकंड में ही टेंशन शुरू हो जाती है. ऐसे समय में हर कोई तुरंत सर्विस सेंटर जाने की जगह पहले अपने लेवल पर फोन को ठीक करने की कोशिश करता है. भारत में स्मार्टफोन को लेकर लोगों की ऐसी ही आदतों और एक्सीडेंट से होने वाले नुकसान को लेकर एक नई Consumer Study सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, 29 प्रतिशत भारतीयों ने पानी से खराब हुए स्मार्टफोन को ठीक करने के लिए चावल का इस्तेमाल किया है.&amp;nbsp;
यह Study Hansa Research ने वन एसिस्ट के लिए की है. The Great Indian Smartphone Protection Crisis नाम की इस रिपोर्ट में भारत में Smartphone Usage, Accidental Damage और Protection Plan को लेकर लोगों की आदतों को समझने की कोशिश की गई है.&amp;nbsp;
82 प्रतिशत लोगों का फोन कभी न कभी गिरा
रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत लोगों ने कम से कम एक बार अपना Smartphone गिराया है. वहीं, 72 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी तरह का Accidental Damage झेला है. फोन का जेब या बैग से फिसलना भी नुकसान की बड़ी वजहों में शामिल रहा और ऐसे मामलों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत बताई गई है.&amp;nbsp;
फोन गिरने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग रही. 35 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वे फोन गिरते ही घबरा गए थे, जबकि 24 प्रतिशत ने इस वजह से किसी से बहस या झगड़ा होने की बात कही. 15 प्रतिशत लोगों ने तो Smartphone Damage होने के कारण अपने प्लान्स तक केंसिल कर दिए.&amp;nbsp;
पानी से खराब फोन के लिए ये हैक अपनाते हैं 29 पर्सेंट लोग
फोन को नुकसान पहुंचने के बाद कुछ लोग Temporary Fix का सहारा भी लेते हैं. Study में सामने आया कि 29 प्रतिशत भारतीयों ने Water-Damaged Smartphone के लिए चावल का इस्तेमाल किया. इसके अलावा 20 से 32 प्रतिशत लोगों ने Tape या दूसरे अस्थायी तरीकों से टूटे या खराब फोन को संभालने की कोशिश की.&amp;nbsp;
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Smartphone Protection Plan अब भी कम
इतने ज्यादा Accidental Damage के बाद भी Protection Plan का इस्तेमाल सीमित है. रिपोर्ट के मुताबिक, 36 प्रतिशत लोगों ने अपने Smartphone में कभी न कभी Protection Plan लिया है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 6 से 8 प्रतिशत Consumers के पास Active Protection Plan है. रिपोर्ट में इसके पीछे महंगा होना, Protection Plan के फायदे की कम जानकारी और क्लैम प्रोसेस को लेकर चिंता जैसे कारण बताए गए हैं.&amp;nbsp;
पुराने फोन के लिए भी Protection की मांग
Study के मुताबिक, 70 प्रतिशत Consumers मानते हैं कि नए फोन के मुकाबले Pre-owned Smartphone में Protection Plan ज्यादा जरूरी है. करीब 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि Warranty या Protection Plan मिलने पर वे पुराना फोन खरीदने पर विचार कर सकते हैं. Non-Metro इलाकों में 54 प्रतिशत लोगों ने Pre-owned Smartphone खरीदा, जबकि Metro में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत रहा. रिपोर्ट के अनुसार, लोग फोन लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं और बढ़ती कीमतों के कारण Damage या Repair का खर्च भी ज्यादा असर डाल रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Google Account को रखें सुरक्षित, ऐसे एक्टिव करें 2&amp;Step Verification</title>
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        <description><![CDATA[ Google Account को रखें सुरक्षित, ऐसे एक्टिव करें 2-Step Verification ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>पुराने Solar Panels कम बिजली क्यों बनाते हैं? समझें पूरी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ सोलर पैनल लगवाने के बाद कई साल तक अच्छी मात्रा में बिजली मिलती रहती है, लेकिन समय बीतने के साथ इसका आउटपुट धीरे-धीरे कम हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि पैनल अचानक खराब हो गया है. दरअसल लंबे समय तक धूप, गर्मी, नमी और मौसम का सामना करने के कारण Solar Panels की बिजली बनाने की क्षमता में धीरे-धीरे कमी आती है. इस प्रक्रिया को Solar Panel Degradation कहा जाता है.
आमतौर पर सोलर पैनल की परफॉर्मेंस में हर साल करीब 0.3 परसेंट से 1 परसेंट तक की गिरावट हो सकती है, जबकि इंडस्ट्री में औसत गिरावट लगभग 0.5 परसेंट सालाना बताई गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पुराने Solar Panels कम बिजली क्यों बनाते हैं.&amp;nbsp;
पुराने Solar Panels कम बिजली क्यों बनाते हैं?
Solar Panels लगातार धूप और UV किरणों के संपर्क में रहते हैं. इसके अलावा गर्मी और बदलते मौसम का असर भी सेल और उसके अंदर मौजूद कनेक्शन पर पड़ता है. दिन में पैनल गर्म और रात में ठंडा होने से बार-बार फैलने और सिकुड़ने की प्रक्रिया होती है. इससे समय के साथ Micro-cracks बन सकते हैं और अंदर के कनेक्शन कमजोर हो सकते हैं. ऐसे में लेक्ट्रॉन्स के लिए रास्ते कम होते हैं और बिजली का उत्पादन प्रभावित होता है.&amp;nbsp;
इस वजह से भी कम हो सकती है शुरुआती Power
पुराने P-Type Solar Panels में Light-Induced Degradation यानी LID देखने को मिल सकती है. पहली बार तेज धूप पड़ने के बाद सिलिकॉन सेल के अंदर होने वाली प्रक्रिया के कारण शुरुआती एफिशिएंसी में करीब 1 परसेंट से 3 परसेंट तक की कमी आ सकती है. यह शुरुआती गिरावट होती है और बाद में प्रदर्शन स्थिर हो जाता है. मॉर्डन N-Type Panels में यह समस्या काफी कम हो गई है.&amp;nbsp;
PID और मौसम का भी पड़ता है असर
Potential-Induced Degradation यानी PID हाई वोल्टेज, गर्मी और नमी जैसे कारणों से हो सकती है. इससे Solar Cell की बिजली बनाने की क्षमता प्रभावित होती है. इसके अलावा लंबे समय तक नमी, बारिश, UV किरणों और गर्म मौसम के संपर्क में रहने से पैनल के अंदर के हिस्सों पर असर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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गंदगी भी घटाती है बिजली
पैनल की सतह पर धूल, पक्षियों की गंदगी, प्रदूषण और पत्तियां जमा होने से सूरज की रोशनी सेल तक कम पहुंचती है. धूल वाले इलाकों में नियमित सफाई न होने पर बिजली उत्पादन में 10 पर्सेंट से 20 पर्सेंट तक की कमी हो सकती है.&amp;nbsp;
कब तक काम करते हैं Solar Panels
Solar Panels की यूज लाइफ आमतौर पर 25 से 30 साल मानी जाती है. 25 साल बाद पैनल बंद होना जरूरी नहीं है, बल्कि उसकी Power आउटपुट कम हो सकती है. कई पैनल इस अवधि के बाद भी बिजली बनाते रहते हैं.अच्छी क्वालिटी के पैनल, सही इंस्टॉलेशन, नियमित सफाई और समय-समय पर जांच से एफिशिएंसी में गिरावट को कम रखने में मदद मिल सकती है.
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>हर बार Low Battery पर Galaxy Watch चार्ज करना सही है? जानें पूरी बात</title>
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        <description><![CDATA[ हर बार Low Battery पर Galaxy Watch चार्ज करना सही है? जानें पूरी बात ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>कैसे पैसा कमाता है गूगल, कहां से होती है इतनी मोटी कमाई?</title>
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        <description><![CDATA[ आज अगर हमें कोई भी चीज सर्च करनी होती है, तो हम सबसे पहले गूगल का इस्तेमाल ही करते हैं. जानकारी मिलने के बाद हम उसे बंद कर देते हैं. यानी कि गूगल का उपयोग लगभग हम सभी फ्री में ही करते हैं. यूट्यूब पर भी हम वीडियो फ्री में ही देखते हैं. हालांकि गूगल और यूट्यूब पर कुछ प्रिमियम कंटेंट देखने के लिए हमें पैसे देने होते हैं. फिर भी बहुत सा कंटेंट हम लोग फ्री में ही देख लेते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनी आखिर अपनी कमाई करती कहां से है? आइए जानते हैं गूगल की कमाई, एडवर्डस और एडसेंस सर्विस के बारे में.
गूगल की शुरुआत
गूगल की शुरुआत 1998 में की गई थी और आज इसे दुनिया में करोड़ों लोग इस्तेमाल करते हैं. गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक है, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में गूगल की सालाना कमाई 402.83 अरब अमेरिकी डॉलर थी. वहीं गूगल की एक दिन की कमाई लगबग 6,700 करोड़ बताई जाती है. गूगल की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा एडवर्टाइजमेंट से आता है. जिसमें गूगल एड्स और एडसेन्स शामिल है. वहीं गूगल की बाकी कमाई गूगल प्ले स्टोर, यूट्यूब एड्स और सब्सक्रिपश्न, गूगल क्लाउड और गूगल हार्डवेयर से आता है.
एडवर्टाइजमेंट से पैसे कमाता है गूगल
गूगल की कमाई का लगभग 80 परसेंट हिस्सा एडवर्टाइजमेंट से आता है. कंपनी सर्च इंजन में सबसे ऊपर दिखाने वाले स्पोन्सर्ड एडवर्टाइजमेंट के जरिए पैसा कमाती है. वहीं यूट्यूब पर वीडियो के बीच में आने वाले एड्स से भी पैसे कमाती है. कंपनी गूगल एडसेंस की मदद से अन्य मोबाइल एप्स और वेबसाइट पर एड्स दिखाने के लिए जगह उपलब्ध करवाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी एल्गोरिथ्म बेस्ड एडवर्टाइजमेंट दिखाने के लिए एडवर्टाइजर्स के बीच बोली भी लगवाती है.
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गूगल वर्कप्लेस और क्लाउड भी देते हैं हिस्सा
गूगल की कमाई में गूगल वर्कप्लेस और क्लाउड का भी एक अहम हिस्सा है. गूगल वर्कप्लेस का उपयोग कई बड़ी कंपनियां अपने डेटा को सेफ रखने के लिए यह करती है. इसके अलावा गूगल अन्य सर्विसेज जैसे गूगल शिट्स, गूगल मीट, गूगल चैट और गूगल स्लाइड्स भी अपने कस्मर्स को देती हैं. वहीं गूगल क्लाउड की सर्विसेज दे कर कंपनी पैसे कमाती है.
गूगल हार्डवेयर से होती है कमाई
पिछले कुछ सालों में गूगल ने हार्डवेयर सेक्टर में भी अपनी पहुंच बनाई है. इसमें गूगल की स्मार्टवॉच, पिक्सल फोन, ईयरबड्स और अन्य हार्डवेयर प्रोडक्ट्स शामिल है. गूगल इन प्रोडक्ट्स को बेचकर भी पैसे कमाता है. अगर आप एक एंड्रोइड यूजर हैं, तो आप गूगल प्लेस्टोर के बारे में तो जानते ही होंगे. गूगल अपने प्लेस्टोर की मदद से भी पैसे कमाता है. वह प्लेस्टोर पर बिकने वाले एप्स से पैसे कमाता है.
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        <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Android फोन में बार&amp;बार आने वाले Nearby Device Alerts का मतलब क्या है?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके Android फोन में बार-बार Nearby Device, Nearby device detected या किसी आसपास के डिवाइस से जुड़ा अलर्ट दिखाई देता है तो इसे देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. यह आमतौर पर फोन के आसपास मौजूद Bluetooth या दूसरे वायरलेस डिवाइस को पहचानने की कोशिश से जुड़ा होता है. हालांकि, लगातार आने वाले ऐसे अलर्ट कभी-कभी परेशान जरूर कर सकते हैं.
क्या होता है Nearby Device Alert?
Android फोन आसपास मौजूद कुछ डिवाइस और एक्सेसरीज को पहचान सकता है. इसके लिए फोन में Bluetooth, Wi-Fi और कुछ मामलों में Nearby device scanning जैसी सुविधाएं काम करती हैं. जब फोन को कोई ऐसा डिवाइस मिलता है जिससे कनेक्ट किया जा सकता है तो वह आपको नोटिफिकेशन के जरिए इसकी जानकारी देता है. जैसे मान लिजिए आपके आसपास Bluetooth ईयरफोन, स्मार्टवॉच, स्पीकर, कार सिस्टम या दूसरे संगत डिवाइस मौजूद हों तो फोन उन्हें पहचान सकता है.
बार-बार क्यों आता है ये नोटिफिकेशन?
इसके कई कारण हो सकते हैं. सबसे आम वजह यह है कि आपके आसपास कोई Bluetooth डिवाइस बार-बार pairing या connection mode में आ रहा हो. ऐसे में फोन उसे नए डिवाइस के तौर पर पहचानने की कोशिश करता है.
इसके अलावा, अगर आपने पहले किसी डिवाइस को फोन से कनेक्ट किया था और वह अब आसपास मौजूद है तो Android उसे दोबारा पहचान सकता है. कुछ फोन में Google की Fast Pair सुविधा भी आसपास मौजूद सपोर्टेड एक्सेसरीज को पहचानकर कनेक्शन का ऑप्शन दिखाती है. कभी-कभी किसी दूसरे व्यक्ति का Bluetooth डिवाइस भी आपके फोन के आसपास होने पर इस तरह का अलर्ट ट्रिगर कर सकता है.
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क्या इसका मतलब फोन हैक हो रहा है?
सिर्फ Nearby Device का अलर्ट आने का मतलब फोन हैक होना नहीं है. यह नॉर्मली Android फीचर भी हो सकता है. किसी अनजान डिवाइस का नाम दिखाई देने पर तुरंत यह मान लेना सही नहीं होगा कि कोई आपके फोन में घुसने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, अगर नोटिफिकेशन के साथ कोई ऐसा डिवाइस दिख रहा है जिसे आप पहचानते नहीं हैं और फोन आपसे पेयरिंग या कनेक्शन की परमिशन मांग रहा है तो बिना उसे चेक करें एक्सेप्ट नहीं करना चाहिए.
कैसे बंद करें ऐसे Alerts?
अगर आपको ये नोटिफिकेशन बार-बार परेशान कर रहे हैं तो फोन की Settings खोलें. इसके बाद Google में जाकर Devices &amp;amp; sharing में जाएं और वहां Devices जैसे ऑप्शनों में Nearby या device-scanning से जुड़ी सेटिंग को सर्च करें. अलग-अलग Android फोन और उनके सॉफ्टवेयर वर्जन में इसका नाम और जगह अलग हो सकता है.
अलर्ट आए तो क्या करें?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सबसे पहले नोटिफिकेशन में दिख रहे डिवाइस का नाम देखें. अगर वह आपका अपना ईयरफोन, वॉच या स्पीकर है तो चिंता की बात नहीं है. अगर डिवाइस अनजान है तो Connect या Pair पर तुरंत टैप न करें.
खास तौर पर पब्लिक जगहों पर ऐसे अलर्ट आने पर बिना पहचान के किसी डिवाइस को कनेक्ट करने से बचना बेहतर है. यानी Nearby Device Alert अपने आप में खतरे का संकेत नहीं है लेकिन अनजान डिवाइस के साथ कनेक्शन एक्सेप्ट करते समय सावधानी जरूर रखनी चाहिए.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Android, फोन, में, बार-बार, आने, वाले, Nearby, Device, Alerts, का, मतलब, क्या, है</media:keywords>
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    <item>
        <title>Xiaomi 18 Pro की स्क्रीन में नया Privacy फीचर, जानें कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ Xiaomi की नई फ्लैगशिप सीरीज में इस बार सिर्फ कैमरा या बड़ी बैटरी ही चर्चा में नहीं है. कंपनी स्क्रीन को लेकर भी ऐसा फीचर ला रही है, जो फोन इस्तेमाल करते समय आसपास मौजूद लोगों की नजर से जानकारी को बचाने में मदद कर सकता है. Xiaomi 18 Pro सीरीज में Hardware-Level Privacy Display दिया जाएगा. खास बात यह है कि इसके लिए अलग से Privacy Screen Protector लगाने की जरूरत नहीं होगी, यह तकनीक फोन के डिस्प्ले हार्डवेयर का ही हिस्सा होगी. Xiaomi 18 Pro और Xiaomi 18 Pro Max को चीन में आज यानी 23 सितंबर को लॉन्च किया जा रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Xiaomi 18 Pro की स्क्रीन का नया प्राइवेसी फीचर कैसे काम करेगा.&amp;nbsp;
Xiaomi 18 Pro की स्क्रीन प्राइवेसी फीचर कैसे काम करेगा?
Xiaomi के मुताबिक, नई Privacy Display तकनीक सीधे डिस्प्ले में बनाई गई है. इसका काम स्क्रीन के देखने के एंगल को सीमित करना है. जब Privacy Mode चालू किया जाएगा, तो फोन को सामने से देखने वाले व्यक्ति को स्क्रीन सामान्य तरीके से दिखाई देगी, लेकिन साइड से देखने पर डिस्प्ले काफी ज्यादा डार्क नजर आएगा.
कंपनी के अनुसार, 60 डिग्री से ज्यादा के Viewing Angle पर साइड से दिखाई देने वाली ब्राइटनेस करीब 1 प्रतिशत तक रह सकती है. इसके लिए डिस्प्ले में अलग-अलग तरह के पिक्सल का इस्तेमाल किया गया है, जो बड़े एंगल से निकलने वाली रोशनी को कम करते हैं. यह तकनीक Samsung Galaxy S26 Ultra में मिलने वाली Privacy Display तकनीक जैसी है.
Xiaomi 18 Pro में 4,000 निट्स की ब्राइट स्क्रीन
Xiaomi 18 Pro सीरीज में नया M11 Luminescent Panel दिया जाएगा. Xiaomi का दावा है कि यह पिछली पीढ़ी के पैनल की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा Efficient है. डिस्प्ले की Peak Brightness 4,000 Nits तक होगी.
कंपनी का कहना है कि यह पैनल सामान्य 2K Resolution वाले डिस्प्ले की तुलना में कम बिजली खपत करते हुए बेहतर Display परफॉर्मेंस दे सकता है. फोन में सिर्फ 0.99mm के Bezels मिलेंगे, जिससे Screen-to-Body Ratio भी ज्यादा रहेगा. Xiaomi 18 Pro में 6.36 इंच का डिस्प्ले होने की उम्मीद है और इसमें LTPO AMOLED, 144Hz Refresh Rate और 2K-Class Resolution मिलने की बात कही गई है. हालांकि इसकी पूरी जानकारी लॉन्च के समय सामने आएगी.
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7,000mAh से 8,500mAh तक बैटरी
बैटरी के मामले में भी Xiaomi ने बड़ा अपग्रेड किया है. Xiaomi 18 Pro में 7,000mAh Battery दी जाएगी, जबकि 18 Pro Max में 8,500mAh की Battery मिलेगी. Fast Charging को लेकर रिपोर्ट्स सामने आई हैं, लेकिन कंपनी ने अभी इसकी पूरी Charging Specifications नहीं बताई हैं.
Xiaomi 18 Pro का कैमरा कैसा होगा?
कैमरा सेटअप भी इस सीरीज का बड़ा हिस्सा होगा. दोनों फोन में Leica के साथ मिलकर तैयार किया गया Triple Rear Camera System मिलेगा. इसमें 200MP Primary Camera और 200MP Periscope Telephoto Camera शामिल होने की बात सामने आई है. 50MP Ultra-Wide Camera भी मिलने की उम्मीद है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Wi&amp;Fi का पासवर्ड बदलने के बाद भी पुराना डिवाइस कैसे जुड़ा रहता है? चेक करें ये Setting</title>
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        <description><![CDATA[ घर के Wi-Fi का पासवर्ड बदलने के बाद आमतौर पर माना जाता है कि पुराने सभी डिवाइस नेटवर्क से डिस्कनेक्ट हो जाएंगे. लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता है. स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी या दूसरे डिवाइस में नेटवर्क की पुरानी जानकारी सेव होने के कारण कंडिशन थोड़ी अलग होती है. वहीं कुछ राउटर सेटिंग्स ऐसी भी होती हैं जिनकी वजह से पुराने डिवाइस को दोबारा कनेक्ट होने में आसानी होती है.
पासवर्ड बदलने के बाद क्या होता है?
आपको बता दें कि जब आप राउटर का Wi-Fi पासवर्ड बदलते हैं तो नॉर्मली पुराने पासवर्ड से कनेक्टेड डिवाइस का कनेक्शन टूट जाना चाहिए. इसके बाद उस डिवाइस को नए पासवर्ड की जरूरत होती है. अगर किसी फोन या लैपटॉप में नेटवर्क की पुरानी जानकारी सेव है तो वह नए पासवर्ड के बिना इंटरनेट से दोबारा कनेक्ट नहीं कर पाएगा. हालांकि, कुछ डिवाइस में नेटवर्क प्रोफाइल सेव रहती है. ऐसे में डिवाइस Wi-Fi नेटवर्क को पहचानता रहता है और नया पासवर्ड डालने का ऑप्शन दिखा सकता है.
कहीं WPS तो ऑन नहीं?
बताते चलें कि राउटर की WPS (Wi-Fi Protected Setup) सेटिंग को भी जरूर चेक करें. WPS की मदद से कई डिवाइस को बिना Wi-Fi पासवर्ड टाइप किए नेटवर्क से कनेक्ट किया जा सकता है. अगर आपके राउटर में WPS एक्टिव है और कोई पुराना डिवाइस पहले से इसकी मदद से पेयर किया गया है तो यह आपके लिए सुरक्षा का एक्सट्रा पहलू बन सकता है. इसलिए राउटर के एडमिन पैनल में जाकर WPS ऑप्शन को चेक करें. जरूरत नहीं है तो इसे बंद रखना ही बेहतर माना जाता है.
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Remembered Network भी हो सकता है कारण
फोन या कंप्यूटर Wi-Fi नेटवर्क की जानकारी सेव करके रखता है. इसे Saved Network या Remembered Network कहा जाता है. पासवर्ड बदलने के बाद भी नेटवर्क का नाम डिवाइस में दिखाई देता रहता है. अगर आप चाहते हैं कि कोई पुराना डिवाइस भविष्य में अपने आप कनेक्ट न हो तो उस डिवाइस में जाकर Wi-Fi नेटवर्क को Forget कर दें. इसके बाद उसे दोबारा कनेक्ट करने के लिए नया पासवर्ड डालना होगा.
राउटर में Connected Devices जरूर देखें
अगर आपको शक है कि कोई पुराना या अनजान डिवाइस अभी भी Wi-Fi इस्तेमाल कर रहा है तो राउटर के एडमिन पैनल में Connected Devices, Client List या Device List जैसे ऑप्शन देखें. यहां नेटवर्क से जुड़े डिवाइस की जानकारी मिल सकती है.
अगर कोई अनजान डिवाइस नजर आए तो पहले उसका कनेक्शन ब्लॉक करें और Wi-Fi पासवर्ड बदलें. इसके साथ ही राउटर का एडमिन पासवर्ड भी बदलना समझदारी है.
Wi-Fi की Security Setting भी चेक करें
सिर्फ पासवर्ड बदलना ही काफी नहीं होता है. राउटर में WPA2 या WPA3 जैसी एडवांस सेफ्टी सिस्टम इस्तेमाल करें. अगर राउटर में पुराना और कमजोर सिक्योरिटी मोड एक्टिव है तो उसे बदलना बेहतर है. साथ ही Wi-Fi का नाम और पासवर्ड मजबूत रखें. पासवर्ड में केवल मोबाइल नंबर, नाम या आसान शब्द इस्तेमाल करने से बचें.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सिनेमा जैसा 3D साउंड और नॉइज कैंसिलेशन, ये हैं जबरदस्त वायरलेस हेडफोन्स</title>
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        <description><![CDATA[ रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए नया हेडफोन चुनते समय बात सिर्फ आवाज तक सीमित नहीं रहती. बैटरी कितने दिन चलेगी, शोर कितना कटता है, कनेक्टिविटी के क्या विकल्प हैं और कीमत जेब पर कितनी भारी पड़ रही है, ये सभी बातें अहम होती हैं.
boAt की लाइनअप में इस समय दो हेडफोन काफी चर्चा में हैं, Nirvana Eutopia 2 ANC और Rockerz 650 Pro. दोनों की बैटरी 80 घंटे तक का दावा करती है, लेकिन फीचर्स, टेक्नोलॉजी और बजट के मामले में दोनों एक-दूसरे से काफी अलग हैं. आइए आसान शब्दों में समझें कि दोनों में क्या अंतर है और आपके लिए कौन सा बेहतर रहेगा.
दोनों हेडफोन्स की सीधी तुलना



फीचर
boAt Nirvana Eutopia 2 ANC
boAt Rockerz 650 Pro


कीमत
5999 रुपए
3099 रुपए


नॉइज़ कैंसलेशन (ANC)
45dB अडेप्टिव हाइब्रिड ANC (ऐप सपोर्ट)
उपलब्ध नहीं


ऑडियो तकनीक
3D स्पेशियल ऑडियो + ड्यूल ड्राइवर्स
डॉल्बी ऑडियो (Dolby Audio) + 40mm ड्राइवर्स


बैटरी बैकअप
80 घंटे तक (10 मिनट चार्ज = 12 घंटे)
80 घंटे तक


कनेक्टिविटी
ब्लूटूथ 5.4
ब्लूटूथ 5.3 + AUX (वायर्ड केबल)


कंट्रोल्स
बटन / boAt Hearables ऐप
टच एंड स्वाइप कंट्रोल्स


कॉलिंग तकनीक
AI-ENx टेक (बैकग्राउंड नॉइज़ फिल्टर)
सामान्य इन-बिल्ट माइक



boAt Nirvana Eutopia 2 ANC: प्रीमियम फीचर्स और खामोशी

कीमत- 5999 रुपए
यह आपको boAt की वेबसाइट, अमेजन और फ्लिपकार्ट पर मिल जाएगा.

यह हेडफोन उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जो बेहतर ऑडियो क्वालिटी के साथ बाहरी शोर से पूरी तरह आजादी चाहते हैं.
45dB अडेप्टिव हाइब्रिड ANC
इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका एक्टिव नॉइज़ कैंसलेशन है. यह बाहरी आवाजों को 45dB तक दबा सकता है. &#039;अडेप्टिव&#039; होने के कारण आप इसे boAt Hearables ऐप के जरिए अपनी जरूरत के हिसाब से सेट कर सकते हैं. अगर आप मेट्रो, फ्लाइट या शोर-शराबे वाले ऑफिस में हैं, तो यह फीचर आपके बहुत काम आएगा.
3D स्पेशियल ऑडियो और ड्यूल ड्राइवर्स
इसमें ड्यूल ड्राइवर सेटअप मिलता है, जो हाई नोट्स (ट्रेबल), वोकल्स और बेस को अलग-अलग साफ सुनाता है. साथ ही 3D स्पेशियल ऑडियो की मदद से ऐसा महसूस होता है जैसे आवाज चारों तरफ से आ रही हो.
बैटरी और फास्ट चार्जिंग
एक बार फुल चार्ज करने पर यह 80 घंटे तक चल सकता है. यदि कभी जल्दी में हों, तो केवल 10 मिनट की चार्जिंग में 12 घंटे का बैकअप मिल जाता है.
लेटेस्ट ब्लूटूथ 5.4 और AI कॉलिंग
इसमें नया ब्लूटूथ 5.4 वर्जन है, जो स्टेबल कनेक्शन देता है. कॉलिंग के लिए AI-ENx तकनीक दी गई है, जिससे कॉल पर बात करते समय सामने वाले को आपकी आवाज साफ सुनाई देती है.
boAt Rockerz 650 Pro: बजट में भारी बेस और वायर्ड का भरोसा

कीमत: 3099 रुपए
यह आपको boAt की वेबसाइट, अमेजन और फ्लिपकार्ट पर मिल जाएगा.

लगभग आधी कीमत में आने वाला Rockerz 650 Pro उन यूजर्स के लिए है, जिन्हें ज्यादा उलझन भरे सेटिंग्स के बिना दमदार बेस और आसान कंट्रोल्स चाहिए.
डॉल्बी ऑडियो और 40mm ड्राइवर्स
इसमें 40mm के बड़े ड्राइवर्स लगे हैं, जो पंचदार बेस देने के लिए जाने जाते हैं. इसके साथ डॉल्बी ऑडियो ट्यूनिंग मिलती है, जिससे गाने और ओटीटी कंटेंट सुनने का अनुभव काफी साफ और गहरा हो जाता है.
टच एंड स्वाइप कंट्रोल्स
हेडफोन के ईयरकप पर उंगली फेरकर (स्वाइप करके) आप गाना बदल सकते हैं, वॉल्यूम कम-ज्यादा कर सकते हैं या फोन कॉल उठा सकते हैं. इसके लिए बार-बार फोन जेब से निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.
ब्लूटूथ के साथ AUX सपोर्ट
इसमें ब्लूटूथ 5.3 के अलावा 3.5mm AUX पोर्ट दिया गया है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर बैटरी खत्म भी हो जाए या गेमिंग के दौरान बिना किसी लैग के आवाज चाहिए, तो आप केबल लगाकर इसे वायर्ड हेडफोन की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. बजट मॉडल होने के बावजूद बैटरी के मामले में कोई कटौती नहीं की गई है. यह भी 80 घंटे तक का प्लेबैक देता है.
फिल्में देखने और गेमिंग के लिए कौन सा आगे?
अगर आप सिनेमैटिक और रियलिस्टिक अनुभव चाहते हैं, तो Nirvana Eutopia 2 ANC का 3D स्पेशियल ऑडियो ज्यादा बेहतर माहौल तैयार करता है. अगर आपको तेज आवाज और गहरा बेस पसंद है तो Rockerz 650 Pro का डॉल्बी ऑडियो और 40mm ड्राइवर सेटअप ज्यादा असरदार साबित होगा. इसके अलावा इसमें AUX केबल का विकल्प है, जिससे गेमिंग के समय ऑडियो लैग बिल्कुल खत्म हो जाता है.
आपके लिए कौन सा मॉडल सही रहेगा?
Nirvana Eutopia 2 ANC

आपका बजट 6,000 रुपए के करीब है.
आप अक्सर सफर करते हैं, वर्क-फ्रॉम-होम करते हैं या लाइब्रेरी/ऑफिस में शोर से बचना चाहते हैं (ANC अनिवार्य है).
आप अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट्स की डिटेल आवाज और 3D ऑडियो पसंद करते हैं.

Rockerz 650 Pro

आपका बजट 3,000 रुपए से 3,500 रुपए के बीच है.
आपको एक्टिव नॉइज़ कैंसलेशन की खास जरूरत नहीं है, लेकिन तगड़ा बेस और लाउड साउंड चाहिए.
आप फोन के बिना केवल टच-स्वाइप से गाने बदलना चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर वायर्ड (Aux) कनेक्शन का इस्तेमाल करना चाहते हैं.

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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भीड़ में आपका नाम सुनते ही iPhone देगा अलर्ट! कमाल का है ये फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप अक्सर भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहते हैं या कानों में AirPods/हेडफोन लगाए रखते हैं तो iPhone का एक फीचर आपके लिए काफी काम का साबित हो सकता है. Apple के iPhone में मौजूद Name Recognition फीचर आसपास बोले जा रहे खास नाम या आवाज को पहचानकर यूजर को अलर्ट कर सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए आपको लगातार फोन की स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ती.
क्या है Name Recognition फीचर?
जानकारी के मुताबिक, iPhone में Accessibility के तहत Sound Recognition नाम का फीचर मिलता है. इसके जरिए फोन आसपास की कुछ खास आवाजों को पहचान सकता है. इसमें डोरबेल, सायरन, अलार्म जैसी आवाजों के अलावा कुछ कंडिशनों में लोगों के नाम की पहचान से जुड़ा ऑप्शन भी काफी कारगर साबित हो सकता है.
यह फीचर खासतौर पर तब मददगार हो सकता है जब आप किसी शोर वाली जगह पर हों या आपके कानों में हेडफोन लगे हों. जैसे मान लिजिए अगर कोई आपको पुकार रहा है और आसपास काफी शोर है तो iPhone उस आवाज को पहचानकर आपको सूचना दे सकता है.
भीड़ में कैसे मिलेगा अलर्ट?
मान लीजिए आप रेलवे स्टेशन, बाजार, एयरपोर्ट या किसी ऑफिस में हैं और आसपास बहुत ज्यादा शोर है. ऐसे में किसी की आवाज सीधे सुनाई नहीं देने पर भी iPhone का साउंड-रिकॉग्निशन सिस्टम मदद कर सकता है.
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हालांकि, इसे किसी व्यक्ति की आवाज पहचानने वाले नॉर्मल Face ID या Contact Name Recognition फीचर की तरह नहीं समझना चाहिए. Sound Recognition का काम खास तरह की आवाजों और साउंड को पहचानना है. इसके काम करने की क्षमता वातावरण, आवाज की क्लियरिटी और आपके iPhone के मॉडल/सॉफ्टवेयर पर निर्भर कर सकती है.
iPhone में ऐसे करें फीचर ऑन
इसे इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले अपने iPhone में Settings खोलें. इसके बाद Accessibility सेक्शन में जाएं. यहां आपको Audio &amp;amp; Visual या Sound Recognition से जुड़ा विकल्प दिखाई दे सकता है. उपलब्ध iOS वर्जन के अनुसार इसका स्थान या नाम थोड़ा अलग हो सकता है.
इसके बाद Sound Recognition को ऑन करें और उपलब्ध साउंड कैटेगरी में अपनी जरूरत के अनुसार ऑप्शन चुनें. अगर आपके iPhone में किसी खास आवाज या व्यक्ति से जुड़े नए Recognition विकल्प उपलब्ध हैं तो उन्हें भी यहीं से सेट किया जा सकता है.
हेडफोन यूजर्स के लिए क्यों है उपयोगी?
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हो सकता है जो अक्सर हेडफोन या ईयरबड्स लगाए रखते हैं. म्यूजिक सुनते समय आसपास की आवाजें कम सुनाई दे सकती हैं. ऐसे में iPhone का अलर्ट सिस्टम जरूरी आवाज या घटना पर आपका ध्यान खींच सकता है. ध्यान रखें कि यह फीचर 100 प्रतिशत सटीकता की गारंटी नहीं देता है. तेज शोर, कई लोगों के एक साथ बोलने या आवाज बहुत दूर होने पर पहचान प्रभावित हो सकती है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ Calling&amp;SMS चाहिए? अब मिलेगा No&amp;Data Recharge, जानें कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ मोबाइल रिचार्ज कराते समय अगर आपका काम सिर्फ कॉल करने, कॉल रिसीव करने और SMS पाने तक सीमित है, तो अब आपको ऐसे डेटा के लिए पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी जिसका इस्तेमाल ही नहीं करना है. अब ऐसे यूजर्स के लिए रिचार्ज का ऑप्शन बदलने वाला है. Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए Voice और SMS-only प्लान उपलब्ध कराना जरूरी किया है. इसका मतलब है कि जिन यूजर्स को इंटरनेट डेटा की जरूरत नहीं है, वे अपनी जरूरत के हिसाब से बिना डेटा वाला रिचार्ज चुन सकेंगे. तो आइए जानते हैं कि इसका फायदा कैसे मिलेगा.&amp;nbsp;
इसका फायदा कैसे मिलेगा?
TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए सिर्फ Voice और SMS वाले रिचार्ज प्लान उपलब्ध कराना जरूरी किया है. जिन यूजर्स को मोबाइल डेटा नहीं चाहिए, वो सिर्फ कॉलिंग और SMS की जरूरत के हिसाब से रिचार्ज चुन सकेंगे. इससे उन्हें ऐसे पैक लेने की जरूरत नहीं होगी जिनमें डेटा भी शामिल होता है. नए नियमों के तहत कंपनियों को 30 दिन या उससे कम अवधि वाले Voice और SMS-only प्लान देने होंगे. अगर किसी कंपनी के पास 28 या 30 दिन की वैलिडिटी वाला कॉलिंग, SMS और डेटा पैक है, तो उसी अवधि वाला बिना डेटा का ऑप्शन भी उपलब्ध कराना होगा.&amp;nbsp;
कैलेंडर महीने के हिसाब से भी मिलेगा ऑप्शन
TRAI ने रिचार्ज की वैलिडिटी को लेकर एक और व्यवस्था की है. कंपनियों को कैलेंडर महीने के आधार पर चलने वाला प्लान भी देना होगा. जैसे अगर किसी ग्राहक ने महीने की 5 तारीख को रिचार्ज किया है, तो अगली रिन्यूअल तारीख भी 5 ही होगी. जिस महीने 5 तारीख नहीं होगी, उस स्थिति में महीने का आखिरी दिन रिन्यूअल डेट माना जाएगा.
लंबे समय के लिए भी No-Data Plan
सिर्फ छोटे रिचार्ज ही नहीं, कंपनियों को कम से कम एक लंबी वैलिडिटी वाला Voice और SMS-only प्लान भी रखना होगा. अभी कई कंपनियों के ऐसे प्लान 84 दिन या 365 दिन की अवधि वाले रहे हैं, जिनमें एक साथ ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ती थी. TRAI के मुताबिक, इसी वजह से कम अवधि वाले बिना डेटा ऑप्शन की जरूरत महसूस हुई. इस मामले में अप्रैल 2026 में लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे गए थे, जिसमें 1,132 से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं. जून 2026 में ओपन हाउस चर्चा के बाद अब नए नियम जारी किए गए हैं.&amp;nbsp;
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किन यूजर्स को हो सकता है फायदा?
इस बदलाव का फायदा खासकर बुजुर्गों, फीचर फोन चलाने वालों और उन लोगों को मिल सकता है जिन्हें इंटरनेट डेटा की जरूरत नहीं होती है. इसका असर ऐसे दूसरे SIM इस्तेमाल करने वालों पर भी पड़ सकता है, जिन्हें मुख्य रूप से कॉलिंग, बैंक से आने वाले SMS या OTP के लिए नंबर चालू रखना होता है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>झाडृ&amp;पोछा करने वाला रोबोट कितने का आता है, कैसे करता है काम?</title>
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        <description><![CDATA[ आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के भी पास समय नहीं होता. व्यक्ति का पूरा दिन ऑफिस और घर के काम में ही निकल जाता है. ऐसे में घर पर तो झाडृ-पोछा लगाने तक का समय भी नहीं रहता. वहीं काम वाली बाई भी पैसे तो ले लेती है लेकिन वो सफाई नहीं करती जैसी आपको चाहिए होती है. इसी समस्या का हल है रोबोट वैक्यूम क्लीनर, यह साधारण वैक्यूम क्लीनर जैसे नहीं होते. इन्हें चलाने के लिए व्यक्ति की मदद नहीं लगती. यह खुद ही घर में झाडृ-पोछा कर देते हैं. जानिए रोबोट वैक्यूम क्लीनर और उसकी खासियत के बारे में.
क्या होता है रोबोट वैक्यूम क्लीनर?
असल में रोबोट वैक्यूम क्लीनर एक ऐसी सफाई करने वाली मशीन है, जिसमें नेविगेशन सिस्टम और मैप होता है. यह आपके पूरे घर का मैप तैयार करता है और उसके बाद पूरे घर में बिना टरकाए घूमता रहता है. इसके नीचे लगे साइड ब्रश और रॉलर फर्श की धूल, गंदगी और बालों को मशीन में लगे डस्टबिन में इक्ठ्ठा कर लेता है. इसके अंदर पानी का टैंक और एक मॉप कपड़ा भी होता है, जो फर्श पर पानी का छिटकाव करते हुए पोछा भी लगाता रहता है.
अन्य फिचर्स भी है खास
यह सफाई पूरी करने के बाद बैटरी कम होने या खत्म होने पर खुद ही ऑटो-चार्जिंग मोड पर चला जाता है. आप इसे इसके मोबाइल एप या वाई-फाई की मदद से भी कंट्रोल कर सकते हैं और सफाई की जगह को तय कर सकते हैं. अगर आप अपना घर हमेशा चमकदार रखना चाहते हैं, तो यह आपके लिए एक शानदार विकल्प है. इसे बार-बार सेट करना नहीं पड़ता और इससे आपका समय बचता है जिसका उपयोग आप दूसरे कामों में कर सकते हैं. इनका पतना डिजाइन आसानी से फर्निचर और सोफे के नीचे चला जाता है. जिससे वहां की सफाई आसान हो जाती है.
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ऑनलाइन प्लेटफार्म से कर सकते हैं खरीद
यह रोबोट वैक्यूम क्लीनर आपके किसी भी ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आसानी से मिल जाएंगे. कई लोगों को लगता है कि यह रोबोट वैक्यूम क्लीनर बेहद मंहगे और बजट से बाहर होते है. जबकि ऐसा नहीं है भारत में इसकी शुरुआत 4,000 से लेकर 15,000 रुपये तक हैं. वहीं अगर आपका बजट ज्यादा है और आप ज्यादा स्मार्ट फिचर्स वाला रोबोट वैक्यूम क्लीनर चाहते हैं, तो आपके लिए 20,000 से 40,000 तक वाले मॉडल बेहतरीन हो सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>घर के लिए Smart Solar Tech, ये Gadgets बदल सकते हैं रोज का काम</title>
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        <description><![CDATA[ घर के लिए Smart Solar Tech, ये Gadgets बदल सकते हैं रोज का काम ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>बजट से परफॉर्मेंस तक, Students के लिए 2026 के टॉप Laptop Options</title>
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        <description><![CDATA[ अब पढ़ाई के लिए किताबों और नोट्स के साथ ऑनलाइन क्लास, रिसर्च, असाइनमेंट, प्रेजेंटेशन, कोडिंग और AI टूल्स जैसे कामों के लिए लैपटॉप लगभग हर छात्र की जरूरत बन चुका है, लेकिन हर स्टूडेंट को एक जैसा लैपटॉप नहीं चाहिए. किसी को कम बजट में रोजमर्रा के काम के लिए मशीन चाहिए, तो किसी को Coding, Creative Work या Gaming के लिए ज्यादा परफॉर्मेंस चाहिए. इसी वजह से 2026 में लैपटॉप चुनते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि बैटरी, वजन, स्क्रीन और प्रोसेसर को भी देखना जरूरी है. तो आइए आज हम आपको Students के लिए 2026 के टॉप लैपटॉप ऑप्शन बताते हैं.
ASUS और Acer के बजट ऑप्शन
कम बजट में ASUS Chromebook Plus CX34 एक ऑप्शन है. इसकी भारतीय ASUS कीमत 36,990 रुपये है और इसमें 14-इंच FHD डिस्प्ले, 8GB RAM और ChromeOS मिलता है. यह वेब ब्राउजिंग और सामान्य पढ़ाई जैसे कामों के लिए बनाया गया है.&amp;nbsp;
Acer Aspire 3 उन छात्रों के लिए Windows ऑप्शन है जिन्हें ChromeOS की जगह Windows 11 चाहिए. इसमें AMD Ryzen 3 7320U, 128GB NVMe स्टोरेज और 1080p डिस्प्ले दिया गया है. वहीं ज्यादा परफॉर्मेंस चाहिए तो Acer Aspire 16 में Intel Core Ultra 5 115U, 16GB RAM, 512GB SSD और 16-इंच 1920 बाय 1200 डिस्प्ले मिलता है.&amp;nbsp;
Apple का सस्ता MacBook ऑप्शन
Apple का MacBook Neo इस सेगमेंट में खास ऑप्शन है. Apple MacBook Neo की शुरुआती कीमत 69,900 रुपये है, जिसमें 256GB स्टोरेज मिलता है. वहीं 512GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत 79,900 रुपये तक जाती है. इसमें A18 Pro चिप, 13-इंच Liquid Retina डिस्प्ले और कंपनी के अनुसार 16 घंटे तक की बैटरी लाइफ मिलती है.
Lenovo और ASUS के प्रीमियम ऑप्शन
हैंडराइटिंग नोट्स और टैबलेट जैसा इस्तेमाल करने वालों के लिए Lenovo Yoga 7i 2-in-1 दिया गया है. इसमें 14-इंच 2K OLED टच डिस्प्ले, 16GB RAM और 512GB SSD वाला कॉन्फिगरेशन मिलता है.&amp;nbsp;
हल्के लैपटॉप की ढूंढ में ASUS Zenbook A14 भी ऑप्शन है. ASUS India पर इसकी शुरुआती कीमत 86,990 रुपये है. कंपनी के अनुसार इसका वजन 1 किलोग्राम से कम है और Snapdragon प्रोसेसर के साथ 16GB RAM व 512GB SSD कॉन्फिगरेशन उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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Apple MacBook Air और HP OmniBook Ultra
ज्यादा परफॉर्मेंस चाहने वाले छात्रों के लिए MacBook Air M5 एक ऑप्शन है. Apple India के अनुसार 13-इंच मॉडल 1,19,900 रुपये से शुरू होता है. इसमें M5 चिप और 15 घंटे तक की बैटरी लाइफ मिलती है.
Windows में HP OmniBook Ultra का 14-इंच मॉडल Intel Core Ultra 7 356H, 16GB RAM, 1TB SSD और 3K 120Hz टच डिस्प्ले के साथ मिलता है. HP India पर इसकी मौजूदा कीमत 2,24,499 रुपये है.
गेमिंग और ज्यादा परफॉर्मेंस &amp;nbsp;के लिए ऑप्शन
Engineering, 3D Modeling या Gaming जैसे भारी कामों के लिए Lenovo Legion 5i Gen 10 और ASUS ROG Zephyrus G16 जैसे ऑप्शन हैं. Legion 5i में Core Ultra प्रोसेसर और RTX 50-series GPU कॉन्फिगरेशन मिलता है, जबकि ASUS ROG Zephyrus G16 के 2026 मॉडल की ASUS India पर शुरुआती कीमत 4,29,990 रुपये है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Amazon पर AI की Shopping बंद, Meta Muse की एंट्री ब्लॉक; जानें क्यों?</title>
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        <description><![CDATA[ AI अब सिर्फ सवालों के जवाब देने या जानकारी खोजने तक सीमित नहीं रह गया है. नए AI एजेंट यूजर्स की तरफ से वेबसाइट खोलने, प्रोडक्ट खोजने, फॉर्म भरने और खरीदारी जैसे कई काम खुद करने लगे हैं. इसी तरह का एक AI एजेंट Meta ने Muse के नाम से लॉन्च किया है, लेकिन Amazon पर Muse की यह सुविधा ज्यादा समय तक नहीं चल पाई. Amazon ने Meta के इस AI एजेंट को अपनी वेबसाइट पर यूजर्स की ओर से शॉपिंग करने से रोक दिया है. Amazon का कहना है कि Muse को Amazon पर इस तरह काम करने की अनुमति नहीं दी गई थी और इससे यूजर अकाउंट, डेटा और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठते हैं. तो आइए जानते हैं कि Amazon ने Meta Muse को क्यों ब्लॉक किया.&amp;nbsp;
Amazon ने Meta Muse को क्यों किया ब्लॉक?
Amazon का कहना है कि Meta ने Muse को Amazon.com पर खरीदारी करने की अनुमति लेने के लिए उससे सहमति नहीं ली थी. कंपनी के मुताबिक उसने Meta से Amazon को Muse की Shopping सुविधा से हटाने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद Amazon ने Muse की पहुंच रोक दी.&amp;nbsp;
अब Amazon पर Muse के जरिए Shopping करने की कोशिश करने वाले यूजर्स को एक संदेश दिखाई दे रहा है. इसमें बताया जाता है कि बिना अनुमति वाला AI एजेंट Amazon की Conditions of Use का उल्लंघन करता है. Amazon ने यह भी चिंता जताई है कि Muse यूजर के अकाउंट पेज और ऑर्डर हिस्ट्री तक पहुंच सकता है. कंपनी के अनुसार, यह एजेंट अपनी पहचान बताए बिना यूजर के अकाउंट और ट्रांजेक्शन से जुड़े काम कर रहा था.&amp;nbsp;
Meta ने सुरक्षा को लेकर क्या कहा?
Meta ने Muse की सुरक्षा को लेकर अलग जानकारी दी है. कंपनी का कहना है कि Muse यूजर्स के पासवर्ड या पेमेंट जानकारी को नहीं देख सकता है. यूजर की ओर से दी गई क्रेडेंशियल जानकारी सुरक्षित स्टोरेज में रखी जाती है, जिससे Muse उनका इस्तेमाल कर सके लेकिन उन्हें देख न सके. Muse को संवेदनशील कामों के दौरान यूजर की मंजूरी लेने के लिए डिजाइन किया गया है. Meta के अनुसार, एजेंट की गतिविधियों का रिकॉर्ड भी देखा जा सकता है.&amp;nbsp;
Meta Muse कैसे करता है काम?
Meta ने Muse को 8 सितंबर 2026 को एक Personal AI Agent के तौर पर लॉन्च किया था. Muse एक Secure Virtual Machine में अपना Browser इस्तेमाल करता है. इसके जरिए यह वेबसाइट खोल सकता है, जानकारी खोज सकता है, फॉर्म भर सकता है और Shopping से जुड़े काम कर सकता है.
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Amazon और AI Agents के बीच बढ़ता विवाद
Meta Muse पर Amazon की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब AI Agents को लेकर टेक कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बीच बहस बढ़ रही है. Amazon पहले भी Perplexity के AI Shopping Assistant को लेकर कानूनी विवाद में रहा है.&amp;nbsp;
Amazon खुद भी AI आधारित Shopping सुविधाओं पर काम कर रहा है. कंपनी ने Alexa for Shopping और Buy for Me जैसे फीचर्स पेश किए हैं. Buy for Me के जरिए बाहरी वेबसाइटों से प्रोडक्ट खरीदने की सुविधा दी जाती है और Amazon के मुताबिक यह सिस्टम खुद की पहचान भी बताता है, साथ ही ब्रांड्स को इससे बाहर रहने का ऑप्शन देता है.
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        <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Windows PC हो गया Hang? ये Secret Trick आएगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार Windows PC या लैपटॉप पर काम करते समय अचानक कोई ऐप फ्रीज हो जाता है. माउस क्लिक करने पर कोई रिस्पॉन्स नहीं मिलता, स्क्रीन पर ऐप अटका रहता है और उसे नॉर्मल तरीके से बंद करना मुश्किल हो जाता है. ऐसी कंडिशन में ज्यादातर लोग पूरा कंप्यूटर Restart करने लगते हैं. लेकिन हर बार PC को Restart करने की जरूरत नहीं होती है. Windows में मौजूद कुछ आसान तरीकों की मदद से आप सिर्फ उसी अटके हुए ऐप को Force Quit यानी जबरदस्ती बंद कर सकते हैं.
सबसे आसान तरीका है Task Manager
आपको बता दें कि अगर कोई ऐप जवाब नहीं दे रहा है तो उसे बंद करने के लिए Windows का Task Manager सबसे भरोसेमंद ऑप्शन साबित हो सकता है. इसके लिए सबसे पहले कीबोर्ड पर Ctrl + Shift + Esc एक साथ दबाएं. इससे सीधे Task Manager खुल जाएगा.
अब आपको स्क्रीन पर आपके कंप्यूटर में चल रहे ऐप्स और बैकग्राउंड प्रोसेस की लिस्ट दिखाई देगी. यहां उस ऐप को खोजें जो Hang हो गया है. ऐप के नाम पर क्लिक करें और फिर End Task के ऑप्शन को चुनें.
ऐसा करते ही Windows उस ऐप के प्रोसेस को बंद कर देगा. इसके बाद आप उस ऐप को दोबारा खोल सकते हैं. ध्यान रखें कि अगर उस ऐप में आपका काम सेव नहीं हुआ था तो Force Quit करने पर वह डेटा खो सकता है.
एक और Shortcut आएगा बेहद काम
अगर Task Manager तक पहुंचने में परेशानी हो रही है तो आप Alt + F4 भी आजमा सकते हैं. ये Shortcut मौजूदा विंडो को बंद करने के लिए इस्तेमाल होता है. हालांकि, अगर ऐप पूरी तरह से फ्रीज हो चुका है तो ये Shortcut हमेशा काम करे, ये जरूरी नहीं है. ऐसी कंडिशन में फिर से Ctrl + Shift + Esc दबाकर Task Manager खोलना बेहतर रहेगा.
Windows में छिपा है एक और तरीका
कुछ मामलों में आप Start Menu से भी अटके हुए ऐप को बंद कर सकते हैं. Start बटन पर क्लिक करके ऐप को खोजें और उपलब्ध ऑप्शनों में अगर End Task दिखाई दे तो उसे चुनें. इससे भी ऐप के प्रोसेस बंद की जा सकती है.
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हालांकि, ये ऑप्शन हर Windows PC पर या हर ऐप के लिए दिखाई दे, ये जरूरी नहीं है. इसलिए Task Manager वाला तरीका सबसे ज्यादा कारगर माना जा सकता है.
PC को Restart करने की जरूरत कब?
अगर सिर्फ एक ऐप फ्रीज हुआ है और बाकी Windows नॉर्मल तरीके से काम कर रहा है तो पूरा PC Restart करने के बजाय केवल उसी ऐप को बंद करना बेहतर है. इससे बाकी खुले हुए ऐप्स और आपका काम प्रभावित होने से बच सकता है.
लेकिन अगर पूरा Windows सिस्टम ही जवाब नहीं दे रहा, माउस और कीबोर्ड दोनों काम नहीं कर रहे या Task Manager भी नहीं खुल रहा, तब सिस्टम को Restart करने की जरूरत पड़ सकती है.
अगली बार PC Hang हो तो याद रखें ये Trick
अगली बार Windows PC पर कोई ऐप अचानक अटक जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले Ctrl + Shift + Esc दबाकर Task Manager खोलें, अटके हुए ऐप को चुनें और End Task पर क्लिक कर दें. ये छोटा-सा Shortcut आपका काफी समय बचा सकता है और हर छोटी समस्या के लिए पूरे कंप्यूटर को Restart करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Jio vs Airtel Vs Vi... 1 साल का रिचार्ज किसका सबसे सस्ता? देखें यहां</title>
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        <description><![CDATA[ हर महीने रिचार्ज कराने की झंझट से बचने के लिए कुछ लोग अब सालभर की वैलिडिटी वाले प्लान को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इससे न सिर्फ बार-बार रिचार्ज भूलने का टेंशन खत्म होता है, बल्कि साल में होने वाली टैरिफ बढ़ोतरी से भी कुछ हद तक बचाव हो जाता है. लेकिन Jio, Airtel और VI के annual प्लान की कीमतों और फायदों में काफी फर्क है, इसलिए सही प्लान चुनने से पहले तीनों कंपनियों के ऑफर की तुलना करना जरूरी हो जाता है. आइए जानते हैं कि 1 साल के रिचार्ज के मामले में कौन सी कंपनी सबसे सस्ती और फायदेमंद साबित हो रही है.&amp;nbsp;
सिर्फ कॉलिंग वाले प्लान में कौन सस्ता?
अगर आपके घर में वाई-फाई लगा है या आप सिर्फ अपनी सिम एक्टिव रखने और अनलिमिटेड कॉलिंग के लिए सालभर का रिचार्ज ढूंढ रहे हैं, तो आपके लिए बेहद बजट-फ्रेंडली ऑप्शन मौजूद हैं.
Airtel का 1,849 वाला प्लान- यह एयरटेल का सबसे सस्ता सालाना प्लान है। इसमें आपको पूरे 365 दिनों की वैलिडिटी के साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और कुल 3,600 SMS मिलते हैं. हालांकि, इसमें रोज का इंटरनेट डेटा नहीं मिलता है, इसलिए यह केवल कॉलिंग पसंद करने वालों के लिए बेस्ट है.Vi का 1,849 वाला प्लान- वोडाफोन-आइडिया का प्लान भी ठीक एयरटेल की तरह ही है. इसमें भी 1,849 में 365 दिन के लिए देश भर में किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉलिंग और कुल 3600 एसएमएस की सुविधा दी जाती है.Jio का 3,599 वाला प्लान- ध्यान देने वाली बात यह है कि जियो के पास फिलहाल सिर्फ कॉलिंग के लिए अलग से कोई सस्ता 365 दिन का प्लान नहीं है. जियो का शुरुआती सालाना प्लान 3,599 से ही शुरू होता है, जो डेली डेटा के साथ आता है.
Data plan की तुलना
यदि आप काम या एंटरटेनमेंट के लिए हर दिन मोबाइल डेटा का खूब इस्तेमाल करते हैं, तो तीनों कंपनियों के पास 2GB से 2.5GB डेली डेटा वाले तगड़े प्लान्स की लिस्ट है.
Jio का 3,599 वाला प्लान- Jio के इस प्लान में यूजर्स को पूरे 365 दिनों तक रोजाना 2.5GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है. इसके साथ ही अनलिमिटेड कॉलिंग, रोजाना 100 SMS और JioTV व JioAICloud जैसी ऐप्स का फ्री एक्सेस मिलता है. सबसे बड़ी बात, अगर आपके एरिया में जियो का 5G नेटवर्क है, तो आप इसमें अनलिमिटेड 5G डेटा का मजा उठा सकते हैं.Airtel का 3,599 वाला प्लान- एयरटेल भी इसी कीमत में अपना प्लान पेश करता है. 3,599 में आपको 365 दिनों के लिए रोजाना 2GB डेटा, अनलिमिटेड लोकल और एसटीडी कॉलिंग के साथ हर दिन 100 SMS मिलते हैं. यूजर्स के लिए इसमें भी अनलिमिटेड 5G डेटा का सपोर्ट मिलता है.Vi का 3,499 और 3,599 वाला प्लान- वोडाफोन आइडिया का 3,499 वाला प्लान आपको रोज 1.5GB डेटा देता है. वहीं, इसके 3,599 वाले प्लान में रोजाना 2GB डेटा मिलता है. VI के प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसके हीरो अनलिमिटेड फीचर्स हैं, जिसमें रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक पूरी तरह फ्री और अनलिमिटेड नाइट डेटा मिलता है, जो आपके डेली कोटे से नहीं कटता.
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कौनसा प्लान चुनें?
अगर आप सीधे तौर पर कीमतों की तुलना करें, तो बिना डेली डेटा वाले कॉलिंग प्लान में Airtel और Vi का ₹1,849 वाला प्लान सबसे सस्ता है. वहीं, अगर आप हर दिन भारी डेटा इस्तेमाल करते हैं और 5G की तलाश में हैं, तो Jio का 3,599 वाला प्लान ज्यादा वैल्यू देता है क्योंकि इसमें एयरटेल के मुकाबले हर दिन 0.5GB डेटा ज्यादा यानी कुल 2.5GB रोज मिलता है. रात में मूवीज डाउनलोड या स्ट्रीमिंग करने वालों के लिए Vi का अनलिमिटेड नाइट डेटा वाला प्लान सबसे शानदार साबित हो सकता है
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>OTP नहीं आया, फिर भी Bank Transaction हो गया? SIM Swap से अलग ये तरीका समझिए</title>
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        <description><![CDATA[ बैंक अकाउंट से जुड़ी सुरक्षा के लिए OTP को सबसे जरूरी सुरक्षा कवच माना जाता है. लेकिन क्या हो अगर आपके फोन पर कोई OTP आए ही नहीं और फिर भी बैंक अकाउंट से ट्रांजैक्शन हो जाए? ऐसी कंडिशन में केवल SIM Swap को जिम्मेदार मानना सही नहीं है. साइबर अपराधी कई दूसरे तरीकों से भी बैंकिंग फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं.
OTP के बिना ट्रांजैक्शन कैसे हो सकता है?
आपको बता दें कि हर ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजैक्शन के लिए SMS OTP जरूरी नहीं होता है. कई बैंक और पेमेंट सर्विस जोखिम के हिसाब से अलग-अलग ऑथेंटिकेशन सिस्टम इस्तेमाल करते हैं. मसलन, पहले से सेव किए गए बेनिफिशियरी, भरोसेमंद डिवाइस, ऐप बेस्ड अप्रूवल या UPI PIN के जरिए पेमेंट पूरा हो सकता है.
यानी अगर किसी हमलावर के पास आपके बैंकिंग ऐप का एक्सेस या UPI से जुड़ी जरूरी जानकारी पहुंच गई है तो उसे हर बार SMS OTP की जरूरत नहीं पड़ेगी.
SIM Swap से अलग क्या है तरीका?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि SIM Swap में आमतौर पर अपराधी मोबाइल ऑपरेटर के जरिए आपके नंबर का नया SIM हासिल करने की कोशिश करता है. इसके बाद आपके नंबर पर आने वाले SMS और कॉल उसके पास पहुंच सकते हैं.
लेकिन एक दूसरा खतरा मोबाइल या बैंकिंग ऐप के अकाउंट का अनधिकृत एक्सेस है. अगर फोन में कोई खतरनाक ऐप इंस्टॉल हो गया, बैंकिंग क्रेडेंशियल चोरी हो गए या किसी ने आपके डिवाइस का एक्सेस हासिल कर लिया तो अपराधी OTP को इंटरसेप्ट किए बिना भी कुछ प्रकार के ट्रांजैक्शन कर सकता है.
UPI फ्रॉड में OTP की जरूरत नहीं
UPI पेमेंट इसका सबसे आसान उदाहरण है. सामान्य UPI ट्रांजैक्शन में SMS OTP नहीं, बल्कि UPI PIN का इस्तेमाल होता है. अगर किसी तरीके से आपका UPI PIN पता चल जाए और UPI ऐप या डिवाइस तक पहुंच मिल जाए तो अपराधी आपके खाते से पैसे भेजने की कोशिश कर सकता है.
इसी वजह से केवल SMS OTP को सुरक्षित मान लेना पर्याप्त नहीं है. UPI PIN, फोन का स्क्रीन लॉक और बैंकिंग ऐप की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
मैलवेयर भी बन सकता है बड़ा खतरा
फोन में मौजूद कोई संदिग्ध या खतरनाक ऐप बैंकिंग फ्रॉड का रास्ता खोल सकता है. कुछ मैलवेयर यूजर से एक्सेसिबिलिटी परमिशन लेकर स्क्रीन पर दिखने वाली जानकारी पढ़ने या दूसरे ऐप्स के साथ इंटरैक्ट करने की कोशिश कर सकते हैं.
अगर आपने हाल में किसी अनजान वेबसाइट से APK डाउनलोड किया है या किसी संदिग्ध ऐप को Accessibility, SMS, Notification या Screen Overlay जैसी परमिशन दी है तो सावधान हो जाएं.
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बैंकिंग अलर्ट को नजरअंदाज न करें
अगर बैंक से ट्रांजैक्शन का अलर्ट आता है लेकिन आपको OTP नहीं मिला तो इसे तुरंत गंभीरता से लें. सबसे पहले बैंक के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से अकाउंट चेक करें और जरूरत पड़ने पर कार्ड, UPI या नेट बैंकिंग को अस्थायी रूप से ब्लॉक करें. किसी SMS, WhatsApp मैसेज या कॉल में दिए गए लिंक या नंबर पर भरोसा करने के बजाय बैंक के ऑफिशियल कस्टमर केयर नंबर का इस्तेमाल करें.
फोन में ये सावधानियां रखें
अपने फोन में केवल भरोसेमंद ऐप इंस्टॉल करें और अनजान APK से बचें. बैंकिंग ऐप, UPI ऐप और ईमेल अकाउंट पर मजबूत पासकोड रखें. किसी व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN, कार्ड PIN या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड शेयर न करें.
सबसे जरूरी बात यह है कि OTP न आना इस बात का सबूत नहीं है कि आपका बैंक अकाउंट सुरक्षित है. अगर कोई अनजान ट्रांजैक्शन दिखाई देता है तो तुरंत बैंक को सूचित करना सबसे जरूरी कदम है.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Wired या Wireless! फोन की बैटरी के लिए कौन ज्यादा सुरक्षित?</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल स्मार्टफोन चार्ज करने के लिए यूजर्स के पास दो बड़े ऑप्शन हैं वायर्ड चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग. वायरलेस चार्जिंग देखने में काफी सुविधाजनक लगती है जबकि वायर्ड चार्जिंग को लंबे समय से भरोसेमंद ऑप्शन माना जाता है. लेकिन सवाल यह है कि फोन की बैटरी की सेहत के लिए दोनों में से कौन बेहतर है? इसका जवाब सिर्फ चार्जिंग की स्पीड पर निर्भर नहीं करता है बल्कि फोन कितना गर्म होता है और बैटरी कितनी देर तक हाई चार्ज लेवल पर रहती है यह भी मायने रखता है.
वायर्ड चार्जिंग में क्या है खास?
आपको बता दें कि वायर्ड चार्जिंग में चार्जर और फोन के बीच सीधे केबल के जरिए बिजली पहुंचती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें एनर्जी का नुकसान काफी कम होता है और अच्छी क्वालिटी के चार्जर के साथ फोन तेजी से चार्ज किया जा सकता है. आजकल कई स्मार्टफोन 67W, 80W, 100W या इससे भी ज्यादा फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करते हैं. हालांकि, ज्यादा पावर का मतलब हमेशा बैटरी के लिए बेहतर नहीं होता है. बहुत तेज चार्जिंग के दौरान फोन गर्म हो जाता है और लगातार ज्यादा टेंपरेचर बैटरी की पावर को खराब कर देती है.
वायरलेस चार्जिंग में कहां है समस्या?
वायरलेस चार्जिंग में फोन और चार्जिंग पैड के बीच इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के जरिए बिजली ट्रांसफर होती है. इसमें केबल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है इसलिए यह काफी सुविधाजनक है. लेकिन इसकी एक कमी गर्मी है. चार्जिंग के दौरान एनर्जी का कुछ हिस्सा हीट में बदल सकता है.
अगर फोन और चार्जिंग पैड सही तरीके से अलाइन न हों तो गर्मी और बढ़ सकती है. यही वजह है कि वायरलेस चार्जिंग के दौरान फोन का टेंपरेचर वायर्ड चार्जिंग के मुकाबले में कुछ कंडिशन में ज्यादा बढ़ जाता है.
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बैटरी हेल्थ पर गर्मी का कितना असर?
स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी के लिए बहुत ज्यादा टेंपरेचर सही नहीं माना जाता है. लंबे समय तक ज्यादा गर्मी में रहने से बैटरी की क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है. इसलिए चार्जिंग टेक्नोलॉजी चुनते समय सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि फोन कितनी तेजी से चार्ज होता है.
अगर वायरलेस चार्जिंग के दौरान फोन बार-बार गर्म होता है तो रोजाना लंबे समय तक इसका इस्तेमाल बैटरी की लाइफ पर असर डाल सकता है. वहीं, अच्छी क्वालिटी वाली वायर्ड चार्जिंग में गर्मी को कंट्रोल रखना काफी हद तक आसान हो जाता है.
कौन-सी चार्जिंग है बेहतर?
बैटरी हेल्थ को प्राथमिकता देने पर वायर्ड चार्जिंग आम तौर पर ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. खासकर तब जब फोन को चार्ज करते समय टेंपरेचर कंट्रोल रहे. वहीं, वायरलेस चार्जिंग सुविधा के मामले में काफी आगे है और कभी-कभार या डेस्क पर फोन रखने के लिए यह बेहद कारगर साबित होता है.
हालांकि, असली फर्क चार्जिंग टेक्नोलॉजी से ज्यादा इस्तेमाल के तरीके से पड़ता है. फोन को ज्यादा गर्म होने से बचाना, खराब या नकली चार्जर से दूरी रखना और लंबे समय तक 100 प्रतिशत चार्ज पर रखने से बचना बैटरी के लिए ज्यादा जरूरी होता है.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>200MP कैमरा के साथ आज लॉन्च होगा Motorola का नया फोन! जानें कैसे होंगे फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Motorola आज भारत में अपना एक नया प्रीमियम फोन लॉन्च करने वाली है. इस फोन का नाम Motorola Signature 27 है. बता दें कि इस फोन को कंपनी Snapdragon Summit 2026 में पेश करने वाली है. लॉन्च से पहले कंपनी ने फोन के डिजाइन, कैमरा और ऑडियो को लेकर कई संकेत दिए हैं. खास बात यह है कि इस बार Motorola ने कैमरा और साउंड एक्सपीरियंस पर खास फोकस किया है.
कैसा होगा डिजाइन
दरअसल, इस फोन के टीजर के अनुसार, Motorola Signature 27 में एक नया कैमरा मॉड्यूल देखने को मिल रहा है. इसके अलावा इस फोन में इस बार कैमरा को भबी नए तरीके से प्लेस किया गया है. फोन को Pantone Capulet Olive और Pantone Coal Smoke कलर में पेश किए जाने की जानकारी सामने आई है.
कैमरा मॉड्यूल का डिजाइन पिछले Motorola Signature से काफी अलग नजर आता है. इसमें चार मेन कैमरा रिंग और एक फ्लैश दिखाई देता है. इससे संकेत मिलता है कि कंपनी इस बार फोटोग्राफी को फोन की बड़ी खासियत बनाने वाली है.
200 मेगापिक्सल का मिलेगा कैमरा
जानकारी के अनुसार, Motorola ने अभी Signature 27 के सभी कैमरा सेंसर की जानकारी नहीं दी है लेकिन टीजर में 200MP कैमरा, LYTIA और Dolby Vision का जिक्र दिखाई देता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फोन में 200MP का मेन कैमरा देखने को मिलेगा जिसमें 100x Super Zoom जैसी ताकत पर भी फोकस किया गया है.
Bang &amp;amp; Olufsen के साथ ऑडियो पार्टनरशिप
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Signature 27 की दूसरी बड़ी खासियत इसका ऑडियो सिस्टम हो सकता है. Motorola ने डेनमार्क की प्रीमियम ऑडियो कंपनी Bang &amp;amp; Olufsen के साथ ग्लोबल पार्टनरशिप की घोषणा की है. फोन पर Audio by Bang &amp;amp; Olufsen ब्रांडिंग भी दिखाई गई है.
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इस पार्टनरशिप से स्पीकर ट्यूनिंग, म्यूजिक प्लेबैक और कॉल ऑडियो में सुधार की उम्मीद है. हालांकि, कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि Signature 27 में किस तरह का स्पीकर हार्डवेयर या खास ऑडियो फीचर मिलेगा.
कितनी होगी कीमत
आपको बता दे कि कंपनी ने अपना पिछले Motorola Signature को भारत में 59,999 रुपये की शुरूआती कीमत में लॉन्च किया था. इस हिसाब से माना जा रहा है कि कंपनी इस फोन को पुराने सिग्नेचर मॉडल से ज्यादा कीमत पर बाजार में उतार सकती है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी कीमत के बारे में कोई आधिकारीक जानकारी शेयर नहीं की है.
Samsung Galaxy S26 Ultra से होगी टक्कर
Motorola का ये नया प्रीमियम फोन मार्केट में Samsung Galaxy S26 Ultra को कड़ी टक्कर दे सकता है. सैमसंग के इस फोन में यूजर्स को 12GB रैम के साथ स्नैपड्रैगन 8 इलाइट जनरेशन 5 प्रोसेसर देखने को मिल जाता है. इसके अलावा इसमें 6.7 इंच की बड़ी एमोलेड डिस्प्ले दी गई है जो 120 हर्ट्ज के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इस फोन में यूजर्स को 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा मिलता है. वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 12 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मौजूद है. इसमें कंपनी ने 5000mAh की बैटरी भी उपलब्ध कराई है. भारत में अभी इस फोन की कीमत करीब 1.30 लाख रुपये है.
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        <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>एक मोबाइल नंबर, दो iPhone! जानिए कैसे काम करता है Apple का ये फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके पास दो iPhone हैं और दोनों में एक ही मोबाइल नंबर इस्तेमाल करना चाहते हैं तो Apple ने आपके लिए एक बेहद काम का फीचर पेश किया है. iOS 27 में आया iPhone Handoff आपको एक ही मोबाइल नंबर को दो iPhone पर इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. यानी बार-बार SIM या eSIM बदलने और दोनों फोन के लिए अलग-अलग मोबाइल कनेक्शन लेने की जरूरत कम हो सकती है.
क्या है iPhone Handoff?
iPhone Handoff एक ऐसा फीचर है जिसके जरिए दो iPhone को एक ही मोबाइल नंबर से कनेक्ट जा सकता है. इसके बाद दोनों डिवाइस से उसी नंबर पर कॉल और मैसेज किए जा सकते हैं. Apple ने इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया है जो समय-समय से दो iPhone के बीच स्विच करते हैं. फीचर सेट होने के बाद जिस iPhone को इस्तेमाल करना है, उसे अनलॉक करना ही काफी है. फोन खुद Handoff के जरिए सक्रिय हो जाता है और यूजर उसी नंबर से कॉल या मैसेज कर सकता है.
कैसे काम करता है यह फीचर?
iPhone Handoff इस्तेमाल करने के लिए दोनों iPhone में iOS 27 या उससे नया वर्जन होना जरूरी है. दोनों फोन एक ही Wi-Fi नेटवर्क से जुड़े होने चाहिए और iCloud, FaceTime तथा iMessage के लिए एक ही Apple Account से साइन इन होना चाहिए.
सेटअप के दौरान एक iPhone को Primary और दूसरे को Secondary डिवाइस बनाया जाता है. Primary iPhone में मुख्य eSIM और कैरियर सेटिंग्स रहती हैं. हालांकि, सपोर्ट करने वाले कैरियर की कंडिशन में दोनों फोन की अपनी eSIM का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
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कैसे करें iPhone Handoff सेटअप?
दोनों iPhone को पास रखकर किसी एक को अनलॉक करें. इसके बाद Settings &gt; Cellular में जाएं और Set Up Cellular/Add eSIM या iPhone Handoff ऑप्शन चुनें. अब Use Number on This iPhone and Another पर टैप करके स्क्रीन पर दिए निर्देशों का पालन करना होगा.
इसके बाद एक फोन को मुख्य यानी Primary iPhone के रूप में असाइन किया जा सकता है. फीचर एक्टिव होने पर Dynamic Island के पास एक छोटा नोटिफिकेशन भी दिखाई देता है.
अभी किन कंपनियों पर चलेगा?
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि iPhone Handoff सिर्फ फोन में मौजूद फीचर नहीं है. इसके लिए मोबाइल कैरियर का सपोर्ट भी जरूरी है. मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल अमेरिका में T-Mobile और जर्मनी में Telekom ने इसके लिए सपोर्ट की पुष्टि की है. अमेरिका में T-Mobile इसके लिए अतिरिक्त 5 डॉलर प्रति माह चार्ज कर रहा है. भारत में इस फीचर के लिए कैरियर सपोर्ट की उपलब्धता अलग से चेक करनी होगी.
किन लोगों के लिए कारगर है ये फीचर?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दो iPhone रखने वाले यूजर्स के लिए यह फीचर काफी सुविधाजनक हो सकता है. जैसे कोई व्यक्ति नया iPhone खरीदने के बाद पुराने फोन को ट्रैवल के दौरान इस्तेमाल कर सकता है. इसी तरह ऑफिस और पर्सनल इस्तेमाल के लिए अलग-अलग iPhone रखने वाले यूजर्स भी एक ही नंबर दोनों डिवाइस पर इस्तेमाल कर सकते हैं.
हालांकि, इसकी कुछ सीमाएं भी हैं. मसलन, इससे Apple Watch अपने आप दूसरे iPhone पर स्विच नहीं होती और कुछ Wallet आइटम जैसे ID और पास भी दोनों डिवाइस पर उपलब्ध नहीं हो सकते.
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>क्या 100MBPS वाले WiFi प्लान में सच में मिलती है इतनी तेज इंटरनेट स्पीड या बस दिखावा है?</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर 100Mbps, 200Mbps और यहां तक कि 1Gbps तक के WiFi प्लान ऑफर करते हैं. विज्ञापन में 100Mbps की स्पीड देखकर यूजर्स को लगता है कि डाउनलोडिंग और स्ट्रीमिंग बेहद तेज होगी. लेकिन सवाल यह है कि क्या 100Mbps वाला प्लान असल में 100Mbps की इंटरनेट स्पीड देता है? इसका जवाब है हां, लेकिन कुछ इसमें भी कई चीजों को समझना जरूरी है. आइए जानते हैं विस्तार से.
100Mbps का मतलब क्या होता है?
दरअसल, सबसे पहले Mbps को समझना जरूरी है. Mbps यानी Megabits per second. अगर आपके ब्रॉडबैंड प्लान की स्पीड 100Mbps है तो इसका मतलब है कि नॉर्मल कंडिशन में आपका इंटरनेट कनेक्शन हर सेकेंड 100 मेगाबिट डेटा ट्रांसफर कर सकता है.
लेकिन डाउनलोडिंग ऐप या ब्राउजर में अक्सर स्पीड MB/s यानी Megabytes per second में दिखाई जाती है. एक Byte में 8 Bits होते हैं. इसलिए 100Mbps को 8 से भाग देने पर लगभग 12.5MB/s की मैक्सिमम डाउनलोड स्पीड बनती है. यानी अगर किसी बड़ी फाइल को डाउनलोड करते समय 10-12MB/s के आसपास स्पीड दिख रही है तो जरूरी नहीं कि आपका इंटरनेट स्लो है.
क्या हर समय 100Mbps स्पीड मिलेगी?
ऐसा नहीं है. दरअसल, 100Mbps आपके कनेक्शन की मैक्सिमम लाइन स्पीड होती है. असली स्पीड कई चीजों पर निर्भर करती है. जैसे WiFi राउटर से दूरी, दीवारें, डिवाइस की WiFi पावर और नेटवर्क पर एक साथ जुड़े डिवाइस स्पीड को स्लो कर सकते हैं.
इसके अलावा जिस सर्वर से आप कोई फाइल या वीडियो डाउनलोड कर रहे हैं उसकी पावर भी काफी जरूरी होती है. अगर सर्वर की तरफ से स्पीड कम है तो आपके पास 100Mbps का कनेक्शन होने के बावजूद डाउनलोड स्पीड कम रहती है.
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WiFi पर स्पीड क्यों कम हो जाती है?
100Mbps का ब्रॉडबैंड कनेक्शन होने का मतलब यह नहीं कि हर डिवाइस पर हमेशा 100Mbps मिलेगा. WiFi में कुछ स्पीड ओवरहेड और वायरलेस इंटरफेरेंस के कारण कम हो सकती है. अगर राउटर से काफी दूरी पर जाकर स्पीड टेस्ट किया जाता है तो रिजल्ट कम आ सकता है. 2.4GHz WiFi की तुलना में 5GHz बैंड आमतौर पर कम दूरी में ज्यादा तेज स्पीड देता है, हालांकि इसकी रेंज कम होती है.
स्पीड सही तरीके से कैसे चेक करें?
अपने 100Mbps कनेक्शन की असली पावर को चेक करने के लिए सबसे पहले राउटर के पास जाकर स्पीड टेस्ट करें. संभव हो तो Ethernet/LAN केबल से कंप्यूटर को सीधे राउटर से जोड़कर टेस्ट करें. इससे WiFi से जुड़ी समस्याओं को अलग किया जा सकता है.
एक साथ कई डिवाइस पर डाउनलोड, वीडियो स्ट्रीमिंग या गेमिंग चल रही हो तो स्पीड सभी के बीच बंट जाती है. इसलिए टेस्ट के दौरान दूसरे डिवाइस पर भारी इंटरनेट एक्टिविटी को बंद कर देना चाहिए.
तो क्या 100Mbps प्लान सिर्फ दिखावा है?
ऐसा नहीं कहा जा सकता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 100Mbps कोई सिर्फ मार्केटिंग नंबर नहीं है. सही फाइबर कनेक्शन, अच्छे राउटर, सक्षम डिवाइस और बेहतर नेटवर्क कंडिशन में 100 Mbps के आसपास की स्पीड हासिल की जा सकती है.
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>बड़े काम का है Google का ये एक फीचर! ज्यादातर लोग कर देते हैं नजरअंदाज</title>
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        <description><![CDATA[ Google के कई ऐसे फीचर्स हैं जो रोजमर्रा के काम को आसान बना सकते हैं लेकिन जानकारी के अभाव में यूजर्स इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं. ऐसा ही एक काम का फीचर Google Lens है. फोन के कैमरे के जरिए यह फीचर सिर्फ फोटो खींचने तक सीमित नहीं है बल्कि किसी चीज की पहचान करने, टेक्स्ट पढ़ने और उसके बारे में जानकारी हासिल करने में भी मदद करता है.
कैमरे से करें किसी भी चीज की पहचान
मान लीजिए आपको रास्ते में कोई पौधा, जानवर, प्रोडक्ट या कोई ऐसी चीज दिखाई देती है जिसके बारे में आप नहीं जानते हैं. ऐसे में Google Lens की मदद ली जा सकती है. कैमरा खोलकर उस चीज पर Lens का इस्तेमाल करने पर Google उससे जुड़ी जानकारी और मिलती-जुलती फोटो दिखा देता है. इसका मतलब है कि जिस चीज का नाम आपको पता नहीं है, उसके बारे में भी फोन के कैमरे से जानकारी हासिल की जा सकती है.
फोटो में लिखे टेक्स्ट को करें कॉपी
Google Lens का एक बेहद काम का फीचर फोटो में मौजूद टेक्स्ट को पहचानना है. अगर किसी किताब, पोस्टर, डॉक्यूमेंट या बोर्ड पर कुछ लिखा है तो उसे दोबारा टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती है. Lens उस टेक्स्ट को स्कैन करके उसे कॉपी करने का ऑप्शन भी देता है. इसका इस्तेमाल मोबाइल नंबर, एड्रेस, नोट्स या किसी डॉक्यूमेंट से जरूरी जानकारी निकालने में भी किया जा सकता है.
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दूसरी भाषा के टेक्स्ट का करें ट्रांसलेशन
अगर आपको किसी दूसरी भाषा में लिखा हुआ टेक्स्ट समझ नहीं आ रहा है तो Google Lens यहां भी मदद कर सकता है. कैमरे से टेक्स्ट स्कैन करके उसका ट्रांसलेशन देखा जा सकता है. ट्रैवल के दौरान साइन बोर्ड, मेन्यू या किसी दूसरी भाषा में लिखी जानकारी समझने में यह फीचर खास तौर पर काफी काम आता है.
किसी प्रोडक्ट को खोजने में भी मदद
ऑनलाइन शॉपिंग करते समय भी Google Lens काम आ सकता है. किसी प्रोडक्ट की तस्वीर लेकर उससे मिलते-जुलते सामान को सर्च किया जा सकता है. इससे किसी चीज का नाम जाने बिना भी उसके बारे में ऑनलाइन जानकारी ढूंढना आसान हो जाता है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई Android फोन में Google Lens सीधे Google ऐप या कैमरा ऐप के जरिए उपलब्ध होता है. Google ऐप खोलने पर सर्च बार के पास Lens का आइकन दिखाई देता है. कुछ डिवाइस में कैमरा ऐप के अंदर भी Lens का ऑप्शन मिल जाता है. हालांकि, फीचर की उपलब्धता और इंटरफेस फोन के मॉडल तथा सॉफ्टवेयर के हिसाब से अलग हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>स्मार्ट TV पर फ्री में देखें हजारों फिल्में और TV चैनल! ये हैं कमाल के तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में Netflix, Prime Video और Disney+ जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते सब्सक्रिप्शन खर्च के बीच अगर आप बिना ज्यादा पैसे खर्च किए फिल्में और TV शो देखना चाहते हैं तो आपके Smart TV में ही कई ऑप्शन मौजूद हो सकते हैं. खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर सर्विसेज विज्ञापनों के बदले फ्री कंटेंट देती हैं.
TV में पहले से मौजूद Free Channels चेक करें
आपको बता दें कि सबसे पहले अपने Smart TV में मौजूद फ्री चैनल्स को चेक करें. Samsung TV Plus, LG Channels, Roku Channel और Google TV जैसे प्लेटफॉर्म कई फ्री चैनल उपलब्ध कराते हैं. इनमें न्यूज, फिल्में, रियलिटी शो, स्पोर्ट्स और मनोरंजन से जुड़े चैनल मिल सकते हैं. भारत में Samsung TV Plus भी चुनिंदा Samsung Smart TV मॉडल्स पर बिना सब्सक्रिप्शन के ऐड बेस्ड कंटेंट उपलब्ध कराता है.
Prime Video का Free कंटेंट देखें
Amazon ने पुराने Freevee प्लेटफॉर्म के फ्री कंटेंट को Prime Video में शामिल कर दिया है. इसलिए अगर आपके Smart TV में Prime Video ऐप है तो उसमें Free सेक्शन जरूर चेक करें. ध्यान रखें कि Prime Video पर पेड और फ्री कंटेंट साथ-साथ दिख सकता है, इसलिए कंटेंट की कीमत जरूर चेक करें.
Pluto TV भी है शानदार ऑप्शन
अगर आपको पुराने जमाने की तरह चैनल बदलकर TV देखने का एक्सपीरिएंस पसंद है तो Pluto TV काम आ सकता है. इसमें कई 24x7 लाइव चैनल के साथ ऑन-डिमांड फिल्में और शो भी मिलते हैं. अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से चैनल खोजे जा सकते हैं.
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Tubi से फ्री फिल्में देखें
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Tubi एक फेमश फ्री स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है, जहां फिल्मों और TV शो की बड़ी लाइब्रेरी मिलती है. इसमें ऑन-डिमांड कंटेंट के साथ Live TV भी उपलब्ध है. इसके लिए अलग से पेड सब्सक्रिप्शन लेने की जरूरत नहीं होती. हालांकि, फ्री कंटेंट के बदले बीच-बीच में विज्ञापन दिखाए जाते हैं.
YouTube को नजरअंदाज न करें
YouTube सिर्फ छोटे वीडियो देखने के लिए नहीं है. इसके Free Movies सेक्शन में विज्ञापनों के साथ कई फिल्में और TV शो मुफ्त में उपलब्ध होते हैं. इसके अलावा कुछ ऑफिशियल स्टूडियो चैनलों और पब्लिक-डोमेन कंटेंट पर भी पुरानी फिल्में और शो मिल सकते हैं.
Library Card से Hoopla और Kanopy
अगर आपके पास ऐसी लाइब्रेरी का कार्ड है जो Hoopla या Kanopy को सपोर्ट करती है तो आप इनके जरिए मुफ्त में फिल्में और शो देख सकते हैं. खास बात यह है कि इन सर्विसेज में आमतौर पर विज्ञापन नहीं होते हैं क्योंकि कंटेंट का खर्च संबंधित लाइब्रेरी वहन करती है.
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung का One UI 9 अपडेट, अब galaxy phones में मिलेंगे ये धांसू फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung smartphone का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है. Samsung ने आधिकारिक तौर पर अपने सबसे नए और एडवांस सॉफ्टवेयर अपडेट One UI 9 का ग्लोबल रोलआउट शुरू कर दिया है. यह नया सॉफ्टवेयर गूगल के सबसे नए ऑपरेटिंग सिस्टम Android 17 पर आधारित है. कंपनी ने इस अपडेट में सुरक्षा, कैमरा और AI को लेकर कई बड़े और क्रांतिकारी बदलाव किए हैं.
सबसे पहले इन स्मार्टफोन यूजर्स को मिलेगा फायदा
Samsung ने अपने इस बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट की शुरुआत अपनी प्रीमियम फ्लैगशिप सीरीज Samsung Galaxy S26, Galaxy S26 plus और Galaxy S26 Ultra से की है. इन स्मार्टफोन के यूजर्स अब अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर इस नए अपडेट को डाउनलोड कर सकते हैं.
इससे पहले कंपनी ने इसे अपने नए फोल्डेबल डिवाइसेज जैसे Galaxy Z Fold 8 और Z Flip 8 सीरीज के लिए भी पेश किया था. टेक रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों और महीनों में इसे पुराने फ्लैगशिप फोन जैसे Galaxy S25 और S24 सीरीज के साथ-साथ बजट और मिड-रेंज Galaxy A, Galaxy M और Galaxy F सीरीज के स्मार्टफोन के लिए भी धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा.&amp;nbsp;
One UI 9 के सबसे धांसू और नए फीचर्स
My FanCam फिचर
इस अपडेट का सबसे मजेदार और चर्चा में रहने वाला फीचर My FanCam है. अगर आप वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं और फ्रेम में बहुत सारे लोग हैं, तो यह एआई फीचर आपके द्वारा चुने गए किसी एक खास व्यक्ति को खुद-ब-खुद ट्रैक करता रहेगा. चाहे कोई बच्चा डांस कर रहा हो या कोई खेल का मैच हो, कैमरा फोकस सिर्फ उसी व्यक्ति पर रहेगा.&amp;nbsp;
पहले से ज्यादा एडवांस हुआ Galaxy AI
Samsung ने अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस अपडेट में और भी ज्यादा पर्सनल और मददगार बना दिया है. इसमें Now Brief नाम का एक नया टूल जोड़ा गया है, जो आपको आपके स्वास्थ्य, मौसम और जरूरी खबरों की डेली समरी एआई कार्ड्स के रूप में देगा. आप इन कार्ड्स को अपनी पसंद के हिसाब से एडिट और कस्टमाइज भी कर सकते हैं.
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प्राइवेसी और सुरक्षा का रखा खास ध्यान
डेटा चोरी को ध्यान में रखते हुए सैमसंग ने One UI 9 में Scam Detection और Privacy Alerts जैसे सुरक्षा फीचर्स शामिल किए हैं. यह फीचर्स किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऐप के बैकग्राउंड में डेटा एक्सेस करने पर यूजर को तुरंत सावधान कर देंगे. इसके अलावा फोन चोरी होने की स्थिति में आपके पर्सनल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए Theft Protection टूल को भी अपग्रेड किया गया है.
नया लुक और स्मूद एनिमेशन
दिखने के मामले में भी यह सॉफ्टवेयर काफी बदल गया है. सैमसंग ने अपने क्विक पैनल को पूरी तरह से नया डिजाइन दिया है. अब यूजर्स अपनी सुविधा के अनुसार इसके बटन्स और टाइल्स का साइज छोटा-बड़ा कर सकते हैं और उन्हें कहीं भी सेट कर सकते हैं. इसके साथ ही, फोन चलाने का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा स्मूद हो गया है क्योंकि इसके सिस्टम एनिमेशन को एंड्रॉइड 17 के साथ बेहद फास्ट बनाया गया है.
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>JioHome यूजर्स के लिए 12 महीने Prime Lite Free, ऐसे करें Claim</title>
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        <description><![CDATA[ JioHome यूजर्स के लिए OTT से जुड़ी एक नई सुविधा शुरू की गई है. अब कुछ JioHome प्लान इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को अलग से Amazon Prime Lite का सब्सक्रिप्शन लेने की जरूरत नहीं होगी. कंपनी 30 Mbps और 100 Mbps वाले 3-in-1 JioHome प्लान पर एक साल की Amazon Prime Lite Membership बिना किसी एकस्ट्रा फीस के दे रही है. इस ऑफर में नए ग्राहकों के साथ मौजूदा यूजर्स भी शामिल हैं. यह सुविधा Jio की 10वीं सालगिरह के मौके पर शुरू किए गए बेनिफिट्स का हिस्सा है. तो आइए जानते हैं कि किन JioHome यूजर्स को Free Prime Lite मिलेगा और इसे कैसे क्लेम करें.&amp;nbsp;
किन JioHome यूजर्स को मिलेगा Free Prime Lite?
यह ऑफर JioHome के 30 Mbps और 100 Mbps 3-in-1 प्लान पर लागू है. इन प्लान में एक ही कनेक्शन के जरिए TV, OTT और Wi-Fi की सुविधा मिलती है. Eligible यूजर्स को 12 महीने की Amazon Prime Lite Membership मिलेगी और इसके लिए मौजूदा JioHome प्लान की कीमत के ऊपर कोई अलग चार्ज नहीं लिया जाएगा.&amp;nbsp;
Prime Lite में क्या मिलेगा?
Free Membership के दौरान यूजर्स Amazon Prime Lite के तहत Prime Video पर फिल्में और शो देख सकेंगे. इसके अलावा Amazon पर Eligible Orders के लिए Free और Fast Delivery का फायदा भी मिलेगा. इस ऑफर में OTT Entertainment के साथ Amazon की डिलीवरी सुविधा भी शामिल है.&amp;nbsp;
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MyJio से ऐसे करें Offer Claim
Prime Lite Benefit लेने का तरीका भी काफी आसान है. इसके लिए अपने JioHome Account के साथ MyJio App खोलें. Home Page पर अगर Amazon Prime Lite का Claim Banner दिखाई देता है, तो उस पर टैप करें, इसके बाद दिए गए Steps को पूरा करके Free Membership एक्टिवेट की जा सकती है. वहीं 12 महीने की अवधि Offer की घोषणा या Rollout Date से नहीं, बल्कि Membership एक्टिवेट करने वाले दिन से शुरू होगी.&amp;nbsp;
19 सितंबर से शुरू हुआ Rollout
Jio ने इस Offer का Rollout 19 सितंबर से शुरू किया है. कंपनी के अनुसार, सभी Eligible JioHome यूजर्स को यह फायदा अगले दो हफ्तों में धीरे-धीरे मिल जाएगा. इसलिए सभी यूजर्स को एक ही समय पर MyJio में यह Banner दिखाई देना जरूरी नहीं है.&amp;nbsp;
888 रुपये और 1,199 रुपये वाले Plans में क्या बदला?
888 रुपये और 1,199 रुपये वाले JioHome Plans के साथ-साथ 150 Mbps या उससे ज्यादा स्पीड वाले यूजर्स के मौजूदा फायदे में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इन यूजर्स को पहले की तरह 24 महीने की Amazon Prime Lite Membership मिलती रहेगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 09:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>ऑफिस आने&amp;जाने के लिए कौन सी स्कूटी सबसे बेस्ट, देखें टॉप&amp;5 लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ रोज ऑफिस आने-जाने के लिए दोपहिया वाहन खरीदते समय सिर्फ उसका लुक देखना काफी नहीं होता. रोज के इस्तेमाल में अच्छा माइलेज, आरामदायक सीट, आसान हैंडलिंग, पर्याप्त स्टोरेज और अच्छा सर्विस नेटवर्क भी जरूरी होता है. भारतीय बाजार में Honda Activa, TVS Jupiter, Suzuki Access और Yamaha RayZR जैसे स्कूटर लंबे समय से लोगों के बीच लोकप्रिय हैं. इसके अलावा Electric Scooter भी शहर में रोजाना आने-जाने वालों के लिए एक विकल्प बन चुके हैं.
Honda Activa
ऑफिस आने-जाने के लिए Honda Activa एक जाना-पहचाना विकल्प है. इसका डिजाइन सिंपल है और शहर के ट्रैफिक में इसे चलाना आसान रहता है. 110cc Activa की कीमत और माइलेज इसे रोज के इस्तेमाल के लिए पसंद किया जाने वाला स्कूटर बनाते हैं. 2026 के उपलब्ध बाजार डेटा के मुताबिक Activa की शुरुआती कीमत करीब 77 हजार रुपये और दावा किया गया माइलेज करीब 59 kmpl है. अलग-अलग वेरिएंट और शहर के हिसाब से इसकी कीमत बदल सकती है.
&amp;nbsp;TVS Jupiter
TVS Jupiter उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जिन्हें रोज की राइड में आराम के साथ ज्यादा स्टोरेज चाहिए. Jupiter 125 में 33 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मिलता है, जिसमें रोजमर्रा का सामान आसानी से रखा जा सकता है. Autocar India के मुताबिक इसका सेटअप शहर में आरामदायक राइड के लिए तैयार किया गया है. इसका सस्पेंशन खराब सड़कों पर भी राइड को आसान बनाने में मदद करता है.
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Suzuki Access 125
Suzuki Access 125 उन लोगों के लिए एक विकल्प है, जो ऑफिस आने-जाने के साथ कभी-कभी शहर में लंबी राइड भी करते हैं. इसमें 124cc का इंजन मिलता है और इसका प्रदर्शन रोजाना की जरूरतों के लिए पर्याप्त रहता है. 2026 के बाजार डेटा में इसकी शुरुआती कीमत करीब 83 से 86 हजार रुपये के आसपास बताई गई है. हालांकि, वेरिएंट और शहर के हिसाब से कीमत अलग हो सकती है.
Yamaha RayZR 125 और Electric Scooter
अगर आपको हल्की और स्पोर्टी स्कूटी पसंद है तो Yamaha RayZR 125 Fi Hybrid ले&amp;nbsp; सकते हैं. इसमें 125cc का इंजन और हल्का सेटअप मिलता है, जो शहर के ट्रैफिक में आसान हैंडलिंग में मदद करता है. 2026 के उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक इसकी शुरुआती कीमत करीब 82 हजार रुपये बताई गई है. वहीं, अगर आपके ऑफिस और घर दोनों जगह चार्जिंग की सुविधा है तो Electric Scooter भी रोज के कम्यूट के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. छोटे या मध्यम दूरी के रोजाना सफर में इससे पेट्रोल का खर्च कम करने में मदद मिलती है. Electric Scooter खरीदते समय रोज की दूरी और चार्जिंग की सुविधा जरूर ध्यान में रखें.
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>वर्क डेस्क की लाइटिंग हुई हाईटेक, BenQ ने पेश किए नए Bar Lights</title>
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        <description><![CDATA[ वर्क डेस्क पर काम करते समय सही रोशनी होना काफी जरूरी है, खासकर जब स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठना हो. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए BenQ ने मुंबई में आयोजित InfoComm 2026 में अपने नए वर्कस्पेस लाइटिंग सिस्टम और Mac यूजर्स के लिए तैयार की गई एक्सेसरीज को दिखाया है. कंपनी ने यहां कुल तीन नए प्रोडक्ट्स प्रदर्शित किए, जिनमें से कुछ को इससे पहले IFA 2026 में भी पेश किया जा चुका है. हालांकि, अभी इन प्रोडक्ट्स की भारत में आधिकारिक लॉन्च डेट, कीमत और बिक्री की जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
छोटे मॉनिटर के लिए आया iScreenBar
BenQ का iScreenBar छोटे मॉनिटर के लिए तैयार किया गया कॉम्पैक्ट डेस्क लाइटिंग सिस्टम है. इसे खास तौर पर Apple iMac के लिए डिजाइन किया गया है. यह स्क्रीन के पीछे चुंबकीय तरीके से लगाया जा सकता है और इसमें माइक्रोफोन के लिए अलग जगह भी दी गई है. कंपनी के अनुसार इसमें iMac डिस्प्ले के हिसाब से अलग-अलग लाइटिंग मोड मिलते हैं. वीडियो कॉल के दौरान इसमें ऐसा मोड भी दिया गया है, जो लाइट बार के एक हिस्से की रोशनी बंद कर देता है. पुराने मॉडल्स के मुकाबले इसके कंट्रोल भी अब लाइट बार में ही दिए गए हैं.&amp;nbsp;
Dual Monitor Setup के लिए ScreenBar Max
BenQ ने ScreenBar Max को भी प्रदर्शित किया, जिसे बड़े वर्कस्पेस और डुअल-मॉनिटर सेटअप के लिए बनाया गया है. यह कंपनी के दूसरे मौजूदा लाइटिंग प्रोडक्ट्स की तुलना में काफी बड़ा है. इसमें लाइटिंग के साथ कंट्रोल भी सीधे सिस्टम में शामिल किए गए हैं. यह लाइटिंग सिस्टम अपने अलग माउंटिंग सिस्टम के साथ आता है और इसे सीधे मॉनिटर पर माउंट नहीं किया जा सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Samsung Galaxy S27 Ultra की डिटेल्स हो गईं लीक, जानें कैसे होंगे फीचर्स&amp;nbsp;Studio Arm से डेस्क पर मिलेगा क्लीन लुक
BenQ के INFTYLAB ब्रांड ने Studio Arm पेश किया है, जिसे Apple Studio Display, Studio Display XDR और iMac के लिए तैयार किया गया है. यह स्क्रीन को अलग-अलग दिशा और एंगल पर घुमाने की सुविधा देता है. इसका डिजाइन डेस्क पर केबल्स को कम दिखाने वाले साफ-सुथरे लुक के लिए किया गया है. यह VESA और स्टैंड दोनों ऑप्शनों में आता है. इसके बेस में C-Clamp और Grommet भी दिए गए हैं.&amp;nbsp;
M Mouse में मिलेंगे कस्टमाइज कंट्रोल
INFTYLAB का M Mouse हल्के डिजाइन वाला माउस है, जिसमें दो स्क्रॉल व्हील और तीन कस्टमाइज किए जा सकने वाले बटन दिए गए हैं. यह Bluetooth के जरिए कनेक्ट होता है और एक साथ तीन डिवाइस के बीच स्विच किया जा सकता है. यूजर इसके बटन और दूसरे कंट्रोल को INFTYLAB Glide डेस्कटॉप ऐप की मदद से अपनी जरूरत के अनुसार बदल सकते हैं. इसके साथ INFTYLAB लाइनअप में Flow Desk Mat भी शामिल है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - आवाज पर भी AI का कब्जा! असली और नकली Voice में ऐसे करें फर्क ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Apple AirPods की Sound हो रही है फीकी? ऐसे साफ करें Ear Cups</title>
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>TV को बनाना है ज्यादा स्मार्ट? ये Streaming Devices आएंगे काम</title>
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        <description><![CDATA[ TV को बनाना है ज्यादा स्मार्ट? ये Streaming Devices आएंगे काम ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ बोलकर कंट्रोल कर सकते हैं अपना iPhone! नहीं पड़ेगी Siri की जरुरत, जानें कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ जब भी iPhone को आवाज से कंट्रोल करने की बात आती है तो सबसे पहले Siri का नाम आता है. लेकिन iPhone में एक ऐसा फीचर भी मौजूद है जिसके जरिए आप सिर्फ बोलकर फोन की स्क्रीन पर मौजूद चीजों को कंट्रोल कर सकते हैं. इसका नाम Voice Control है. यह फीचर खासतौर पर Accessibility के लिए बनाया गया है लेकिन नॉर्मल यूजर्स के लिए भी कई कंडिशन में ये काफी कारगर साबित हो सकता है.
बिना टच किए कर सकेंगे कई काम
दरअसल, Voice Control की खासियत यह है कि यह सिर्फ सवालों का जवाब देने या नॉर्मल कमांड चलाने तक ही सीमित नहीं रहता है. इसके जरिए आप स्क्रीन पर टैप, स्वाइप, ड्रैग और लॉन्ग-प्रेस जैसे कई काम आवाज के जरिए कर सकते हैं. जैसे आप Open Control Center, Tap Instagram या Turn up the volume जैसे कमांड बोल सकते हैं.
इतना ही नहीं, स्क्रीन पर मौजूद अलग-अलग आइटम्स के ऊपर नंबर दिखाकर भी उन्हें चुना जा सकता है. Show Numbers बोलने पर स्क्रीन के अलग-अलग हिस्सों पर नंबर दिखाई देने लगते हैं. इसके बाद उससे जुड़ा नंबर बोलकर उस जगह को टैप किया जा सकता है.
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ऐसे ऑन करें Voice Control
इस फीचर को एक्टिवेट करने के लिए iPhone में Settings में जाकर Accessibility सेक्शन में जाएं और वहां Voice Control पर जाएं और Voice Control को ऑन कर दें. पहली बार इस्तेमाल करते समय जरूरी भाषा डाउनलोड की जा सकती है. फीचर एक्टिव होने पर स्टेटस बार में एक नीले रंग का आइकन दिखाई देता है.
Apple Voice Control में कस्टम कमांड बनाने की सुविधा भी देता है. यानी यूजर अपनी पसंद का कोई शब्द या वाक्य तय करके उसके साथ कोई खास एक्शन जोड़ सकता है. इसमें Custom Gesture, Shortcut, Text Insert और Recorded Commands जैसे ऑप्शन भी देखने को मिल जाते हैं.
स्क्रीन पर नंबर और ग्रिड का मिलेगा ऑप्शन
Voice Control में Overlay फीचर भी काफी काम का है. इसके जरिए स्क्रीन पर नंबर, नाम या ग्रिड दिखाया जा सकता है. इससे उन जगहों पर भी पहुंचना आसान हो जाता है जहां सीधे कमांड बोलकर सही आइटम चुनना मुश्किल हो.
इसके अलावा Face ID वाले iPhone में Attention Aware ऑप्शन इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे ऑन करने पर iPhone आपके देखने पर Voice Control को एक्टिव रखता है और नजर हटाने पर इसे स्लीप कर देता है.
इंटरनेट के बिना भी कर सकते हैं इस्तेमाल
Voice Control की एक खास बात यह भी है कि यह ऑफलाइन काम करता है. इसलिए हर कमांड के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी नहीं होता है. हाथ में चोट लगी हो, खाना बनाते समय फोन चलाना हो या किसी दूसरी वजह से स्क्रीन को छूना संभव न हो, तब यह फीचर काफी कारगर साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Power Cut में Generator से कनेक्ट करने से पहले जानें, किन डिवाइस को खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ Power Cut में Generator से कनेक्ट करने से पहले जानें, किन डिवाइस को खतरा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Chrome या Edge? जानिए कौन सा ब्राउजर इस्तेमाल करना है ज्यादा सुरक्षित</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में इंटरनेट ब्राउजर सिर्फ वेबसाइट खोलने का जरिया नहीं रह गया है. ब्राउजर में हमारे पासवर्ड, बैंकिंग से जुड़ी जानकारी, सोशल मीडिया अकाउंट और पर्सनल डेटा तक मौजूद रहता है. ऐसे में Google Chrome और Microsoft Edge में से कौन ज्यादा सुरक्षित है, यह सवाल काफी अहम हो जाता है. दोनों ब्राउजर सुरक्षा के लिए कई एडवांस फीचर्स देते हैं लेकिन इनके काम करने का तरीका और एक्सट्रा सुरक्षा ऑप्शन अलग-अलग हैं.
Chrome में मिलते हैं ये सिक्योरिटी फीचर्स
आपको बता दें कि Google Chrome में यूजर्स को Safe Browsing जैसे फीचर मिलते हैं जो खतरनाक वेबसाइट, डाउनलोड और फिशिंग लिंक से बचाने में मदद करते हैं. Chrome किसी संदिग्ध वेबसाइट पर जाने से पहले चेतावनी दिखाता है जिससे यूजर गलती से किसी फ्रॉड पेज पर अपनी जानकारी दर्ज करने से बच सकता है.
इसके अलावा Chrome में पासवर्ड मैनेजर, साइट परमिशन कंट्रोल और सिक्योरिटी चेकअप जैसे ऑप्शन भी मौजूद रहते हैं. Chrome का सिक्योरिटी सिस्टम लगातार अपडेट होता रहता है जिससे नए साइबर खतरों के खिलाफ सुरक्षा बेहतर करने की कोशिश की जाती है.
Edge भी सुरक्षा में पीछे नहीं
Microsoft Edge में भी कई मजबूत सुरक्षा फीचर्स दिए गए हैं. इसमें Microsoft Defender SmartScreen खतरनाक वेबसाइट और डाउनलोड के खिलाफ चेतावनी देने में मदद करता है. यह फीचर खास तौर पर फिशिंग और खतरनाक फाइलों से बचाव के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है.
Edge में Tracking Prevention का ऑप्शन भी मिल जाता है. इसके जरिए यूजर यह कंट्रोल कर सकता है कि वेबसाइट्स उसकी ऑनलाइन एक्टिविटी को किस हद तक ट्रैक कर पाएं. Microsoft Edge में अलग-अलग लेवल की Tracking Prevention सेटिंग्स मौजूद हैं जिन्हें जरूरत के हिसाब से बदला भी जा सकता है.
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असली फर्क कहां दिखाई देता है?
Chrome और Edge दोनों ही एडवांस सुरक्षा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि एक ब्राउजर हर कंडिशन में सुरक्षित है और दूसरा असुरक्षित. सुरक्षा काफी हद तक ब्राउजर को अपडेट रखने, संदिग्ध वेबसाइटों से बचने और सही प्राइवेसी सेटिंग्स इस्तेमाल करने पर भी निर्भर करती है.
दोनों ब्राउजर में फिशिंग और मालवेयर से सुरक्षा के लिए चेतावनी सिस्टम मौजूद हैं. हालांकि, Edge का Microsoft के सुरक्षा इकोसिस्टम के साथ इंटीग्रेशन और Chrome का Google के Safe Browsing सिस्टम के साथ जुड़ाव इनके सेफ्टी एक्सपीरिएंस में अंतर जरूर पैदा करता है.
कौन सा ब्राउजर चुनना चाहिए?
अगर आपकी प्राथमिकता सुरक्षा है तो केवल Chrome या Edge के नाम के आधार पर फैसला करने के बजाय उनके सिक्योरिटी और प्राइवेसी फीचर्स को देखें. दोनों में मजबूत सेफ्टी फीचर्स उपलब्ध हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि ब्राउजर को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर रखें और अनजान एक्सटेंशन, संदिग्ध डाउनलोड और फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें.
साथ ही, ब्राउजर में सेव पासवर्ड और वेबसाइट परमिशन की समय-समय पर समीक्षा करना भी जरूरी है. याद रखें, सबसे सुरक्षित ब्राउजर भी तब खतरे में पड़ सकता है जब यूजर किसी फर्जी लिंक पर क्लिक करके अपनी संवेदनशील जानकारी खुद शेयर कर दे.
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>आवाज पर भी AI का कब्जा! असली और नकली Voice में ऐसे करें फर्क</title>
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        <description><![CDATA[ फोन पर किसी अपने की आवाज सुनकर हमें तुरंत भरोसा हो जाता है कि कॉल उसी व्यक्ति की है, लेकिन AI Voice Scam में इसी भरोसे का फायदा उठाया जाता है. AI की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज जैसी नकली आवाज तैयार की जा सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ मामलों में सिर्फ करीब तीन सेकंड की आवाज से भी उसका क्लोन बनाया जा सकता है, जो लगभग 85 प्रतिशत तक असली आवाज जैसी सुनाई दे सकती है. इसके बाद स्कैमर किसी रिश्तेदार या दोस्त की आवाज में कॉल करके बड़ा स्केम कर सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि असली और नकली AI Voice में कैसे फर्क करें.&amp;nbsp;
AI Voice Scam कैसे काम करता है?
इस तरह की ठगी में स्कैमर पहले किसी व्यक्ति की आवाज का छोटा सा रिकॉर्डिंग सैंपल हासिल करते हैं. इसके बाद AI Voice Cloning टूल की मदद से उस आवाज की कॉपी तैयार की जाती है. AI आवाज के बोलने के अंदाज, फ्लकचुएशन और बोलने के ढंग को समझ कर उसी तरह की नई आवाज तैयार कर सकता है. इसके बाद इस नकली आवाज का इस्तेमाल किसी करीबी की पहचान बनाकर किया जा सकता है.&amp;nbsp;
असली और AI Voice में फर्क कैसे करें?
1. बोलने की स्पीड &amp;nbsp;- AI आवाज कई बार बहुत ज्यादा एक जैसी स्पीड और लय में बोलती है. बातचीत में जहां इंसान नॉर्मल तरीके से रुकता है, वहां AI आवाज में अजीब तरह का पॉज सुनाई दे सकता है.&amp;nbsp;
2. आवाज का फ्लकचुएशन &amp;ndash; असली इंसान बोलते समय कभी तेज, कभी धीमी आवाज में बोल सकता है और लंबी बात के दौरान सांस लेने के कारण आवाज में बदलाव आ सकता है. AI आवाज में वॉल्यूम और टोन जरूरत से ज्यादा एक जैसे रह सकते हैं.&amp;nbsp;
3. बोलने का ढंग - AI कभी-कभी किसी खास नाम, शॉर्ट फॉर्म या मुश्किल शब्द को बोलने में गलती कर सकता है. कुछ शब्दों को जरूरत से ज्यादा साफ और एक ही तरीके से बोलना भी AI Voice हो सकता है.&amp;nbsp;
4. तकनीकी गड़बड़ी - अगर आवाज में रोबोट जैसी फीलिंग, हल्की धातु जैसी आवाज, अचानक पिच बदलना या शब्दों के बीच अजीब कट महसूस हो, तो ऑडियो AI से बना हो सकता है.&amp;nbsp;
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5. AI डिटेक्टर &amp;nbsp;- कुछ ऑनलाइन टूल ऑडियो को जांच कर यह अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं कि आवाज सिंथेटिक हो सकती है या नहीं. हालांकि, किसी जरूरी मामले में सिर्फ AI डिटेक्टर पर भरोसा न करें.&amp;nbsp;
6. कोडवर्ड तर करें - परिवार में पहले से एक कोडवर्ड तय करना भी असली और AI Voice में फर्क करने का तरीका हो सकता है.&amp;nbsp;
आपकी आवाज स्कैमर तक कैसे पहुंच सकती है?
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए आपके वीडियो, रील या वॉइस नोट से भी आपकी आवाज का सैंपल लिया जा सकता है. कुछ स्कैमर स्पैम कॉल या रोबोकॉल के जरिए भी आपकी आवाज रिकॉर्ड करने की कोशिश कर सकते हैं. कई बार वे फोन पर छोटे-छोटे सवाल पूछते हैं, जिससे सामने वाला सिर्फ हां या Yes बोल दे और उस आवाज का इस्तेमाल आगे किया जा सके.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung Galaxy S27 Ultra की डिटेल्स हो गईं लीक, जानें कैसे होंगे फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Galaxy S27 Ultra को लेकर अभी से कई बड़े लीक्स सामने आने लगे हैं. हालांकि, कंपनी ने इस फोन को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी शेयर नहीं करी है लेकिन रिपोर्ट्स और टिप्स के मुताबिक यह फ्लैगशिप स्मार्टफोन 2027 की शुरुआत में मार्केट में लॉन्च हो सकता है. ऑनलाइन लीक्स के अनुसार फोन के डिजाइन, कैमरा, डिस्प्ले, प्रोसेसर और कीमत को लेकर कई दावे किए गए हैं.
कैसे होंगे फीचर्स
इस फोन के फीचर्स की बात करें तो Galaxy S27 Ultra में एक बड़ा कैमरा सेटअप देखने को मिल जाएगा जिसमें एक 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा मौजूद होगा. इसके अलावा इसमें एक 50MP का अल्ट्रावाइड कैमरा और एक 50MP का टेलीफोटो कैमरा भी देखने को मिल सकता है. सेल्फी के लिए डिवाइस में 16 मेगापिक्सल के फ्रंट कैमरा मिलने की उम्मीद है.
लीक्स के अनुसार Galaxy S27 Ultra में 6.9 इंच Dynamic LTPO AMOLED 2X डिस्प्ले मिल सकता है. इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और करीब 3,000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस होने का दावा किया गया है. प्रोसेसर की बात करें तो फोन में Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro दिया जा सकता है.
बड़ी बैटरी और फास्ट चार्जिंग
बैटरी को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आई हैं. कुछ शुरुआती लीक्स में 5,700mAh बैटरी का दावा किया गया है जबकि नई रिपोर्ट्स में करीब 5,200&amp;ndash;5,500mAh क्षमता की संभावना बताई गई है. चार्जिंग के लिए 45W या 65W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिल सकता है.
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कितनी होगी इसकी कीमत
सैमसंग के नए फ्लैगशिप फोन के कीमत की बात करें तो कुछ लीक्स में Galaxy S27 Ultra की शुरुआती कीमत करीब 1,49,990 रुपये बताई गई है. वहीं, एक हालिया रिपोर्ट में भारत में इसकी कीमत 1,41,999 रुपये से 1,46,999 रुपये के बीच होने का अंदाजा लगाया गया है. इसलिए फिलहाल कीमत को लेकर अलग-अलग दावे हैं और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा.
कब लॉन्च होगा Samsung Galaxy S27 Ultra?
लीक्स के मुताबिक Samsung Galaxy S27 Ultra को जनवरी या फरवरी 2027 में पेश किया जा सकता है. कुछ रिपोर्ट्स फरवरी 2027 को ज्यादा संभावित लॉन्च विंडो बता रही हैं. कंपनी आमतौर पर Galaxy S सीरीज को Galaxy Unpacked इवेंट में लॉन्च करती है. ऐसे में S27 Ultra के साथ Galaxy S27 सीरीज के दूसरे मॉडल भी पेश किए जा सकते हैं.
iPhone 18 Pro Max से होगी टक्कर
Samsung का आने वाला फ्लैगशिप फोन की टक्कर हाल ही में लॉन्च हुआ iPhone 18 Pro Max से होने वाली है. बता दें कि iPhone 18 Pro Max में कंपनी ने 6.9 इंच की डिस्प्ले दी है जो 120 हर्ट्ज के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इसके अलावा इसमें 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा भी देखने को मिल जाता है जो बेहतरीन फोटो लेने में सक्षम है. भारत में इस फोन की शुरूआती कीमत 1,79,900 रुपये है.
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>जापान ने बनाया नया रोबोट! मौके पर ही मशीनों की करेगा मरम्मत, इंसानों का काम होगा आसान</title>
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        <description><![CDATA[ जापान में रोबोटिक्स की दुनिया से एक ऐसा मामला सामने आया है जो आने वाले समय की झलक देता है. यहां इंसानों के लिए नहीं बल्कि ह्यूमनॉइड रोबोट्स की मरम्मत के लिए खास एंबुलेंस तैयार की गई है. ये वाहन किसी रोबोट के खराब होने पर उसके पास पहुंचेगा और जरूरत पड़ने पर वहीं मरम्मत करने के साथ-साथ खराब रोबोट की जगह दूसरा रोबोट भी उपलब्ध कराएगा.
कैसी है ये रोबोट एंबुलेंस?
इस खास वाहन को जापानी कंपनी GMO AI &amp;amp; Robotics Trading (GMO AIR) ने तैयार किया है. कंपनी के मुताबिक ये जापान में ह्यूमनॉइड रोबोट्स की देखभाल के लिए डिजाइन किया गया पहला समर्पित वाहन है. इसे सितंबर 2026 से टोक्यो में इस्तेमाल किया जा रहा है.
बाहर से देखने पर ये किसी एंबुलेंस जैसी नजर आती है. इसमें रूफ लाइट्स और Humanoid Ambulance की मार्किंग दी गई है. हालांकि, इसका काम इंसानों का इलाज करना नहीं बल्कि खराब पड़े रोबोट को दोबारा काम करने लायक बनाना है.
खराब रोबोट की जगह तुरंत मिलेगा दूसरा रोबोट
GMO AIR की एंबुलेंस में जरूरत पड़ने पर एक एक्सट्रा ह्यूमनॉइड रोबोट भी ले जाया जा सकता है. अगर मौके पर खराब रोबोट को ठीक करना संभव नहीं है तो उसे वाहन में वापस ले जाया जाएगा और उसकी जगह दूसरा रोबोट काम संभाल सकता है.
इस तरह किसी कंपनी या संस्थान का काम लंबे समय तक बंद रहने से बचाया जा सकता है. खराब मशीन को इसके बाद GMO के शिबुया कंडिशन ह्यूमनॉइड लैब जैसे रिपेयर बेस पर ले जाया जा सकता है.
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अंदर क्या-क्या मिलेगा?
ये वाहन एक तरह की मोबाइल रोबोट रिपेयर वर्कशॉप है. इसमें रोबोट की जांच के लिए डायग्नोस्टिक उपकरण, जरूरी स्पेयर पार्ट्स और रिपेयर टूल्स रखे जाते हैं. साथ ही एक इंजीनियर भी मौके पर पहुंचता है, जो खराब रोबोट की जांच और मरम्मत कर सकता है. अगर खराबी इतनी बड़ी हो कि रोबोट की मौके पर मरम्मत संभव न हो तो यहां सबसे दिलचस्प सुविधा काम आती है.
अभी सिर्फ एक एंबुलेंस से हुई शुरुआत
फिलहाल GMO AIR के पास टोक्यो में ऐसी एक ही एंबुलेंस है. ये सर्विस हर कंपनी के रोबोट के लिए उपलब्ध नहीं है. फिलहाल इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से GMO AIR द्वारा तैनात किए गए ह्यूमनॉइड रोबोट्स की देखभाल के लिए किया जाएगा और हर मामले में वाहन भेजने का फैसला कंडिशन के आधार पर किया जाएगा.
कंपनी का कहना है कि जैसे-जैसे ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल बढ़ेगा, वैसे-वैसे इस तरह की मोबाइल मेंटेनेंस सर्विस की जरूरत भी बढ़ सकती है. इसी को ध्यान में रखते हुए जापान में रोबोट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की कोशिश शुरू हो गई है.
रोबोट के दौर में जरूरी होगी ऐसी सर्विस
ह्यूमनॉइड रोबोट अगर एयरपोर्ट, फैक्ट्री, होटल या दूसरे कामकाजी क्षेत्रों में लगातार इस्तेमाल किए जाएंगे तो उनके खराब होने पर तुरंत सर्विस उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी होगा. GMO AIR का ये एक्सपेरिमेंट इसी समस्या का शुरुआती समाधान माना जा सकता है. कंपनी का लक्ष्य फिलहाल सिर्फ रोबोट बेचना नहीं बल्कि उन्हें लगातार काम करते रखने के लिए पूरा सपोर्ट सिस्टम तैयार करना है.
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>क्या है Focus Mode? जानें कैसे ये फीचर आईफोन यूजर्स की करता है मदद</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने iOS 27 में Focus Mode को पहले के मुकाबले ज्यादा स्मार्ट और बेहतर बनाने की कोशिश की है. अब ये फीचर सिर्फ तय किए गए समय या मैन्युअल सेटिंग्स के बेस पर नोटिफिकेशन को साइलेंट नहीं करेगा बल्कि यूजर की जरूरत और कंडिशन के हिसाब से Focus को मैनेज करने में ज्यादा मदद करेगा. इसका मकसद फोन से आने वाली बेकार की चीजों को कम करना है जिससे यूजर काम, पढ़ाई या आराम के दौरान ज्यादा ध्यान फोकस्ड रह सके.
क्या है Focus Mode?
आपको बता दें कि iPhone में Focus Mode ऐसा फीचर है जो आपको ये तय करने देता है कि किसी खास कंडिशन में कौन-से नोटिफिकेशन और कॉल आप देखना चाहते हैं. जैसे Work Focus में सिर्फ ऑफिस से जुड़े लोगों या ऐप्स के नोटिफिकेशन की परमिशन दी जा सकती है जबकि Sleep Focus रात में ज्यादातर अलर्ट को रोक देता है.
iOS 27 में Apple ने इसी सिस्टम को ज्यादा फ्लेक्सिबल बनाने पर ध्यान दिया है. यानी Focus Mode को सिर्फ एक साधारण Do Not Disturb सेटिंग के तौर पर इस्तेमाल करने के बजाय इसे रोजमर्रा की कंडिशन के हिसाब से ज्यादा आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है.
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अब Focus Mode को करना होगा कम मैनेज
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले Focus Mode का फायदा लेने के लिए यूजर को अलग-अलग Focus सेट करने, समय तय करने और ऐप्स या कॉन्टैक्ट्स चुनने पड़ते थे. iOS 27 में Apple ने Focus के एक्सपीरिएंस को ज्यादा ऑटोमेटेड बनाया है.
इसका मतलब ये है कि जब आप किसी खास काम में व्यस्त हों, आराम कर रहे हों या किसी ऐसी कंडिशन में हों जहां लगातार नोटिफिकेशन परेशानी पैदा कर सकते हैं तो Focus Mode को मैनेज करना पहले से आसान हो जाता है. हालांकि, इसका ये मतलब नहीं है कि iPhone बिना किसी सीमा के आपकी तरफ से सभी फैसले लेगा. यूजर के पास ये कंट्रोल रहेगा कि कौन-से लोग और ऐप्स जरूरी हैं और किन नोटिफिकेशन को पहले दिखाना चाहिए.
iOS 27 में क्यों खास है ये बदलाव?
आज स्मार्टफोन पर लगातार आने वाले नोटिफिकेशन ध्यान भटकाने की बड़ी वजह बन रहे हैं. Apple का नया Focus एक्सपीरिएंस इसी समस्या को कम करने की दिशा में एक कदम है. खास बात ये है कि यूजर को हर बार फोन उठाकर सेटिंग बदलने की जरूरत नहीं पड़ती है. इसका मतलब साफ है कि iOS 27 में Focus Mode का फोकस सिर्फ Do Not Disturb करने पर नहीं बल्कि सही समय पर सही तरह की जानकारी दिखाने पर है. इससे iPhone को इस्तेमाल करने का एक्सपीरिएंस ज्यादा पर्सनल हो जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>महंगा फोन सिर्फ ब्रांड के नाम पर बिकता है? जानिए बजट और फ्लैगशिप के बीच का असली फर्क</title>
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        <description><![CDATA[ महंगा फोन सिर्फ ब्रांड के नाम पर बिकता है? जानिए बजट और फ्लैगशिप के बीच का असली फर्क ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>सोलर से 24 घंटे चलाना है फ्रिज, कितनी क्षमता का लगवाएं पैनल?</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल घर की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग तेजी से सोलर सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन फ्रिज को 24 घंटे चलाने के लिए सिर्फ सोलर पैनल लगाना ही काफी नहीं है. इसके लिए यह देखना भी जरूरी है कि फ्रिज कितना बड़ा है, वह कितनी बिजली खर्च करता है और उसे चलाने के लिए कितनी पावर की जरूरत पड़ती है. फ्रिज का कंप्रेसर स्टार्ट होते समय भी सामान्य से ज्यादा बिजली लेता है. इसलिए सोलर सिस्टम लगवाने से पहले इन सभी बातों का ध्यान रखना जरूरी है. अगर आप भी सोलर की मदद से फ्रिज को दिन-रात चलाना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि इसके लिए कितनी क्षमता का पैनल लगवाएं.&amp;nbsp;
सोलर से 24 घंटे फ्रिज चलाने के लिए कितने पैनल लगाएं?
अगर आप सोलर की मदद से फ्रिज को 24 घंटे चलाना चाहते हैं तो पैनल की क्षमता फ्रिज के साइज और उसकी बिजली खपत के हिसाब से तय होगी. अगर आपके पास छोटा या मिनी फ्रिज है, तो इसकी बिजली जरूरत बड़े घरेलू फ्रिज की तुलना में कम होती है. ऐसे फ्रिज को शुरू करते समय करीब 0.3 से 0.4 kW तक बिजली की जरूरत हो सकती है, जबकि सामान्यतौर पर इसे चलाने के लिए लगभग 0.1 से 0.2 kW की जरूरत रहती है. ऐसे में छोटे फ्रिज के लिए करीब 0.3 kW क्षमता का एक सोलर पैनल इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
बड़े फ्रिज के लिए कितनी लगेगी सोलर क्षमता?
अगर आपके पास बड़ा फ्रिज है, खासकर 500 लीटर या इससे ज्यादा क्षमता वाला French-door मॉडल है, तो इसकी बिजली जरूरत भी बढ़ जाती है. ऐसे फ्रिज को स्टार्ट होने के समय करीब 1.2 से 1.3 kW तक बिजली की जरूरत हो सकती है. इसके बाद कम्प्रेसर के साइकल के दौरान लगभग 0.5 से 0.7 kW बिजली की जरूरत रहती है. ऐसे बड़े फ्रिज के लिए करीब 0.3 kW के 3 से 4 सोलर पैनल की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, फ्रिज को शुरू करते समय ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती है, इसलिए सोलर सिस्टम की क्षमता उसी हिसाब से रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
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रात में फ्रिज चलाने के लिए बैटरी भी जरूरी
अगर आप फ्रिज को 24 घंटे सोलर की मदद से चलाना चाहते हैं, तो सिर्फ सोलर पैनल लगाना काफी नहीं होगा. पैनल से बिजली मुख्य रूप से दिन में धूप के दौरान मिलती है, जबकि रात में फ्रिज को चलाने के लिए बैटरी में स्टोर की गई बिजली की जरूरत पड़ेगी. इसके लिए सोलर बैटरी या पोर्टेबल पावर स्टेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में 24 घंटे वाले सोलर सेटअप में पैनल की क्षमता के साथ बैटरी की क्षमता भी सही रखना जरूरी है, जिससे दिन में स्टोर की गई बिजली से रात में फ्रिज चलता रहे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>वोल्टेज कम ज्यादा हो रहा, जानें कौन से गैजेट्स सबसे पहले खराब होते हैं?</title>
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        <description><![CDATA[ वोल्टेज कम-ज्यादा होना घर की सामान्य परेशानी लग सकती है, लेकिन इसका असर सीधे महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स पर पड़ता है. खासकर गर्मी और बारिश के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने, सप्लाई सिस्टम पर लोड बढ़ने या मौसम से जुड़ी समस्याओं के कारण वोल्टेज में फ्लक्चुएशन देखा जा सकता है. कभी लाइट अचानक धीमी पड़ती है तो कभी तेज हो जाती है, कई बार टीवी, फ्रिज या दूसरे डिवाइस अचानक बंद भी हो जाते हैं. बार-बार होने वाला यह फ्लक्चुएशन सिर्फ काम में रुकावट नहीं डालता, बल्कि अंदर के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर भी दबाव बढ़ा सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि वोल्टेज कम ज्यादा होने से कौन-से गैजेट्स सबसे पहले खराब होते हैं.&amp;nbsp;
वोल्टेज फ्लक्चुएशन से क्या होता है?
जब बिजली की सप्लाई तय लेवल से ऊपर या नीचे होती रहती है, तो इसे वोल्टेज फ्लक्चुएशन कहा जाता है. ज्यादा वोल्टेज से डिवाइसों के अंदर के सर्किट और दूसरे पार्ट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. वहीं कम वोल्टेज में मोटर वाले डिवाइस सही तरीके से काम करने के लिए ज्यादा करंट खींच सकते हैं, जिससे वे गर्म होने लगते हैं. लगातार ऐसा होने पर डिवाइसों की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और उनके पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं.&amp;nbsp;
कौन-से गैजेट्स सबसे पहले खराब होते हैं?
1. एयर कंडीशनर और फ्रिज में कंप्रेसर लगा होता है, इसलिए वोल्टेज की समस्या इनके लिए परेशानी पैदा कर सकती है. लो वोल्टेज में कंप्रेसर को काम करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है, जिससे वह गर्म हो सकता है और उसके इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल पार्ट्स पर भी दबाव बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
2. स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर और दूसरे डिजिटल डिवाइस के अंदर संवेदनशील सर्किट, कैपेसिटर, रेगुलेटर और माइक्रोचिप जैसे पार्ट्स होते हैं. अचानक हाई वोल्टेज या पावर सर्ज आने पर इनमें खराबी हो सकती है. इसका असर स्क्रीन फ्लिकर होने, डिवाइस अचानक बंद होने या उसके काम करने की स्पीड और स्थिरता पर भी पड़ सकता है.
3. वॉशिंग मशीन और पानी की मोटर जैसे डिवाइसों में मोटर लगातार बिजली पर निर्भर रहती है. लो वोल्टेज में मोटर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और वह ज्यादा गर्म हो सकती है. लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर मोटर की वाइंडिंग और दूसरे पार्ट्स खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
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छोटे गैजेट्स को भी न करें नजरअंदाज
Wi-Fi राउटर, कंप्यूटर, टीवी, चार्जर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी अचानक आने वाले पावर स्पाइक से प्रभावित हो सकते हैं. बार-बार छोटे-छोटे सर्ज आने से अंदर के पार्ट्स धीरे-धीरे कमजोर हो सकते हैं. बिजली कटने के बाद सप्लाई लौटते समय आने वाला पावर बैक-सर्ज भी इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए परेशानी पैदा कर सकता है.&amp;nbsp;
वोल्टेज फ्लक्चुएशन से कैसे बचाएं डिवाइस?&amp;nbsp;ऐसे में बड़े डिवाइसों के लिए सही क्षमता वाला वोल्टेज स्टेबलाइजर इस्तेमाल किया जा सकता है. टीवी, कंप्यूटर और राउटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सर्ज प्रोटेक्टर यूजफुल हो सकता है. ज्यादा समस्या वाले इलाकों में वोल्टेज मॉनिटरिंग रिले या ऑटोमैटिक कट-ऑफ डिवाइस भी इस्तेमाल किए जाते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>GPMI vs HDMI: कौन&amp;सी Cable Technology खास, किसकी पिक्चर क्वालिटी बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ TV, Monitor, Laptop या Gaming Console को दूसरे डिवाइस से जोड़ने के लिए HDMI Cable का इस्तेमाल काफी समय से होता आ रहा है. हाई क्वालिटी ऑडियो और वीडियो के लिए यह एक जाना-पहचाना कनेक्शन बन चुका है, लेकिन अब Cable Technology में एक नया नाम चर्चा में है, जिसे GPMI यानी General Purpose Media Interface कहा जाता है.
इसे 50 से ज्यादा Chinese Tech Companies ने मिलकर तैयार किया है और GPMI का काम सिर्फ वीडियो और ऑडियो भेजना नहीं है. इसकी मदद से एक ही Cable के जरिए Video, Audio, Data, Network, Control Signals और Power भी ट्रांसफर किए जा सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि GPMI और HDMI में कौन-सी Cable Technology खास है और किसकी पिक्चर क्वालिटी बेस्ट है.&amp;nbsp;
GPMI में मिलते हैं दो तरह के ऑप्शन
GPMI को Type-C और Type-B दो formats में पेश किया गया है. Type-C, USB-C जैसे कनेक्टर का इस्तेमाल करता है और इसमें 96Gbps Bandwidth के साथ 240W Power Delivery मिलती है. वहीं Type-B के लिए कनेक्टर अलग &amp;nbsp;दिया गया है, जो 192Gbps Bandwidth और 480W Power तक सपोर्ट करता है. यह फोर्मेट्स दोनों में 8K Video का सपोर्ट मौजूद है.&amp;nbsp;
GPMI और HDMI में कौन-सी Cable Technology खास है?
GPMI की सबसे बड़ी खासियत इसका All-in-One Design है. जहां अलग-अलग काम के लिए कई Cables की जरूरत पड़ सकती है, वहीं GPMI एक ही Connection से कई तरह के सिग्नल संभालने के लिए तैयार किया गया है. इससे Cable Clutter कम करने और बड़े AV Setups को आसान बनाने में मदद मिल सकती है. इसे खास तौर पर 8K Displays, Video Walls, Digital Signage, Conference Rooms, Gaming और दूसरे High-Bandwidth Applications के लिए यूजफुल माना गया है.&amp;nbsp;
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GPMI और HDMI किसकी पिक्चर क्वालिटी बेस्ट है?
GPMI का फोकस ज्यादा Bandwidth और 8K Video Support पर है. इसके Type-B में 192Gbps तक Bandwidth मिलती है, जबकि HDMI 2.2 की अधिकतम Bandwidth 96Gbps है. हालांकि GPMI 8K तक Video Support करता है, वहीं HDMI 2.1 और DisplayPort 2.1 10K और 16K Resolution तक आउटपुट दे सकते हैं. &amp;nbsp;ज्यादा Bandwidth होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि हर स्थिति में GPMI की पिक्चर क्वालिटी अपने आप बेहतर हो जाएगी.&amp;nbsp;
क्या HDMI की जगह ले पाएगा GPMI?
GPMI के Specs मजबूत हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती Adoption है. HDMI पहले से TVs, Monitors, Gaming Consoles और दूसरे डिवाइस में बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है. GPMI के लिए नए Hardware और Compatible Devices की जरूरत होगी, जबकि पुराने HDMI या DisplayPort Devices के साथ इसकी सीधी बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी नहीं है. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 13:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mini Split AC चलाना है Solar से, पहले जानें कितने Panel लगेंगे?</title>
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        <description><![CDATA[ AC का इस्तेमाल बढ़ते ही बिजली का बिल भी बढ़ने लगता है. ऐसे में Solar Panel की मदद से Mini Split AC चलाना एक किफायती ऑप्शन हो सकता है. हालांकि इसके लिए कितने Solar Panel चाहिए, यह तय करना आसान नहीं है. Mini Split AC की बिजली खपत Window AC और Central AC से अलग होती है. इसमें Ductless और Inverter Technology का इस्तेमाल किया जाता है, जो कमरे की जरूरत के हिसाब से Compressor की स्पीड को अपने आप घटाती-बढ़ाती रहती है. इसी तकनीक के कारण Mini Split AC आमतौर पर Central AC के मुकाबले कम बिजली में काम कर सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Mini Split AC &amp;nbsp;के लिए कितने Solar Panel लगेंगे?
दोनों AC में बिजली खपत का कितना अंतर?
एक 3-Ton Central AC तेज गर्मी में करीब 3,000 से 4,000 Watt तक बिजली खींच सकता है. ऐसे में इतनी Power के लिए लगभग 10 से 14 Solar Panel की जरूरत पड़ सकती है. वहीं 12,000 BTU यानी 1-Ton Single-Zone Mini Split आमतौर पर 4 से 12 Amp के बीच चलता है और इसकी Average Power Consumption करीब 700 से 1,200 Watt रहती है. Inverter Compressor की वजह से इसका लगातार बिजली इस्तेमाल कम रह सकता है, हालांकि बीच-बीच में Power Spike हो सकता है.&amp;nbsp;
AC एक दिन में कितनी बिजली खर्च करेगा?
AC की बिजली खपत जानने के लिए उसकी Watt और रोजाना इस्तेमाल होने वाले घंटों का पता होना चाहिए. AC की Watt और रोज चलने के समय को मिलाकर हिसाब निकालें, फिर इस आंकड़े को 1,000 से Divide कर दें. इससे आपको रोज की बिजली खपत kWh में मिल जाएगी. जैसे अगर आप 12,000 BTU का Mini Split AC अगर औसतन 900 Watt बिजली लेता है और रोज 8 घंटे चलता है, तो उसकी Daily Consumption 7.2 kWh होगी.&amp;nbsp;
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Mini Split AC के लिए कितने Solar Panel लगेंगे?
अगर Mini Split AC को चलाने के लिए रोज करीब 8 kWh बिजली चाहिए और एक 400W Solar Panel दिन में लगभग 1.6 kWh बिजली पैदा करता है, तो इस हिसाब से करीब 5 Panel की जरूरत होगी. वहीं अतिरिक्त क्षमता के लिए 5 से 6 Panel का ऑप्शन रखा जा सकता है.
वहीं 550W का Solar Panel रोज करीब 2.2 kWh बिजली बना सकता है ऐसे में 12,000 BTU Mini Split AC के लिए लगभग 4 से 5 Panel की जरूरत पड़ सकती है. अगर मौसम बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा रहता है, AC रोज 10 घंटे से ज्यादा चलता है या आसमान में बादल ज्यादा रहते हैं तो जरूरत के हिसाब से Solar Panel की संख्या बढ़ानी पड़ सकती है.
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Threads पर बच्चों की एक्टिविटी पर अब पैरेंट्स की रहेगी नजर, Meta ने दिया नया कंट्रोल</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Threads पर युवाओं की ऑनलाइन एक्टिविटी को लेकर Meta ने बड़ा अपडेट किया है. कंपनी ने भारत समेत एशिया-पैसिफिक एरिया में पैरेंटल सुपरविजन फीचर को रोल आउट करना शुरू किया है. इसके जरिए माता-पिता अपने बच्चों के Threads इस्तेमाल का समय देख सकेंगे और कई अहम सेटिंग्स को मैनेज कर पाएंगे. ये सुविधा Meta के Family Centre के जरिए उपलब्ध होगी.
पिछले 7 दिन का स्क्रीन टाइम देख सकेंगे पैरेंट्स
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नए पैरेंटल कंट्रोल की मदद से माता-पिता ये देख पाएंगे कि उनके बच्चे ने पिछले सात दिनों में हर दिन Threads पर कितना समय बिताया है. इसके साथ ही पूरे सप्ताह का औसत डेली स्क्रीन टाइम भी देखा जा सकेगा. इससे पैरेंट्स को ये समझने में मदद मिलेगी कि बच्चा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कितना वक्त बिता रहा है. Meta के मुताबिक, ये निगरानी Threads पर सुपरविजन सेटअप होने के बाद उपलब्ध होगी.
रात में Threads को कर सकेंगे ब्लॉक
नए फीचर में Sleep Mode का कंट्रोल भी शामिल है. माता-पिता रात के समय Threads के इस्तेमाल को सीमित या पूरी तरह ब्लॉक कर सकते हैं. Meta के डिफॉल्ट Sleep Mode में रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक नोटिफिकेशन म्यूट रहते हैं और ऑटो-रिप्लाई ऑन रहता है. पैरेंट्स अपनी जरूरत के अनुसार इन सेटिंग्स को एडजस्ट कर सकते हैं.
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रोजाना की टाइम लिमिट भी कर सकेंगे तय
Meta ने पैरेंट्स को Threads के लिए डेली टाइम लिमिट सेट करने का ऑप्शन भी दिया है. यानी माता-पिता तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा एक दिन में कितनी देर तक Threads इस्तेमाल कर सकता है.
इसके अलावा कुछ खास दिनों या घंटों में Threads का एक्सेस पूरी तरह ब्लॉक भी किया जा सकेगा. खास बात ये है कि अगर किशोर Threads को एक से ज्यादा डिवाइस पर इस्तेमाल करता है तो टाइम लिमिट सभी डिवाइस पर कुल इस्तेमाल के समय पर लागू होगी.
टैगिंग और प्राइवेसी पर भी कंट्रोल
सिर्फ स्क्रीन टाइम ही नहीं, माता-पिता अब कुछ प्राइवेसी और कंटेंट सेटिंग्स भी मैनेज कर सकेंगे. वे ये कंट्रोल कर पाएंगे कि Threads पोस्ट में उनके बच्चे को कौन टैग कर सकता है. इसके अलावा कुछ प्राइवेसी सेटिंग्स और संवेदनशील कंटेंट से जुड़ी प्राथमिकताओं को मैनेज या अप्रूव करने का ऑप्शन भी मिलेगा.
Family Centre से मिलेगा पूरा कंट्रोल
इन सभी फीचर्स को Meta के Family Centre के जरिए मैनेज किया जा सकेगा. कंपनी का कहना है कि वह आगे भी पैरेंटल सुपरविजन टूल्स का विस्तार करेगी जिससे माता-पिता Meta के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी से जुड़ी जरूरी जानकारी और कंट्रोल एक ही जगह से हासिल कर सकें.
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>आपके Gadgets चुपचाप हो रहे हैं खराब, ये आदतें डालती हैं असर</title>
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        <description><![CDATA[ आपके Gadgets चुपचाप हो रहे हैं खराब, ये आदतें डालती हैं असर ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>जेब से लेकर Backpack तक, काम आएंगे ये Mini Tech Gadgets</title>
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        <description><![CDATA[ जेब से लेकर Backpack तक, काम आएंगे ये Mini Tech Gadgets ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>मुंबई में किसने खरीदा पहला iPhone 18 Pro Max, कहां का रहने वाला है युवक?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की आधिकारिक बिक्री पूरे भारत में शुरू हो गई है. हर साल की तरह इस बार भी नए आईफोन को लेकर लोगों में जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. मुंबई के Apple BKC स्टोर पर सुबह से ही ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. इसी भीड़ में सूरत से आया यह युवक भी शामिल था, जिसने स्टोर खुलते ही iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro दोनों मॉडल खरीद लिए.
सूरत से मुंबई तक का सफर&amp;nbsp;
सूरत से आए इस आईफोन लवर ने बताया कि नए आईफोन को पहले ही दिन अपने हाथ में लेने के लिए उसने एक लंबा सफर तय किया. वह 5 से 6 घंटे का सफर तय करके सूरत से मुंबई पहुंचा था. मुंबई आने के बाद भी उसका इंतजार खत्म नहीं हुआ. वह रात करीब 10 बजे से ही स्टोर के बाहर कतार में लग गया था. उसने लगभग 6 घंटे स्टोर के बाहर इंतजार किया और फिर ढाई घंटे लंबी कतार में खड़े रहने के बाद आखिरकार सुबह उसे नया फोन मिल सका.

VIDEO | Mumbai: Sale of newly-launched iPhone 18 series begins. Visuals from Apple Store at Bandra Kurla Complex.A customer says, &quot;I&amp;rsquo;ve got the first phone. I&amp;rsquo;m really excited. My goal was to get the first one; I&amp;rsquo;d been waiting here for about 10 to 12 hours for this. Finally,&amp;hellip; pic.twitter.com/TUmjp8GBc8
&amp;mdash; Press Trust of India (@PTI_News) September 18, 2026



क्यों है आईफोन को लेकर इतनी बड़ी दिवानगी?
युवक ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह लंबे समय से आईफोन इस्तेमाल कर रहा है. उसका मानना है कि जितने भी आईफोन यूजर्स हैं, वे इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि फोन में कोई नया फीचर आए या न आए, लेकिन लॉन्चिंग के पहले ही दिन नया मॉडल हासिल करना उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है.&amp;nbsp; एपल के आसान इंटरफेस की तारीफ करते हुए उसने कहा कि एक बार जब किसी को आईफोन इस्तेमाल करने की आदत हो जाती है, तो वह गूगल या सैमसंग जैसे किसी अन्य डिवाइस पर शिफ्ट नहीं होना चाहता. आईफोन हाथ में आने के बाद किसी दूसरी चीज की जरूरत ही महसूस नहीं होती.&amp;nbsp;
एक साथ खरीदे दो-दो प्रीमियम आईफोन
इस आईफोन फैन ने एपल स्टोर से केवल एक नहीं, बल्कि दो स्मार्टफोन खरीदे हैं, जिसमें iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max दोनों शामिल हैं. दोनों फोन खरीदने के बाद युवक बेहद खुश नजर आया और उसने कहा कि वह अपनी इस खरीदारी से अब पूरी तरह से खुश है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: iPhone 18 Pro Max की सेल आज से, खरीदने से पहले जान लें EMI का गणित
मुंबई एपल स्टोर पर पहुंच रहे फैंस
मुंबई के बीकेसी एपल स्टोर पर केवल सूरत ही नहीं, बल्कि गुजरात और महाराष्ट्र के कई अलग-अलग शहरों से लोग पहुंच रहे हैं. कुछ फैंस तो ऐसे भी थे जो पहले सुबह-सुबह लालबागचा राजा के दर्शन करने गए और वहां से सीधे सुबह 6 बजे ही एपल स्टोर के बाहर लाइन में आकर खड़े हो गए ताकि वे नई सीरीज के प्रो मॉडल्स को घर ले जा सकें. इतनी भारी भीड़ और लोगों का यह उत्साह साफ दिखाता है कि भारत में प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में एपल का क्रेज किस कदर बढ़ चुका है.
यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;iPhone 18 Proकी बिक्री शुरू, मुंबई से यूपी तक Apple स्टोर के बाहर लगी लाइनें ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro Max खरीदने के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए, जानें हिसाब&amp;किताब</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की भारत में बिक्री शुरू हो चुकी है. दोनों फोन की प्री-बुकिंग के बाद अब आप इन्हें Apple India Store से खरीद सकते हैं. iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपये है और इसे EMI के जरिए भी खरीदा जा सकता है. हालांकि, iPhone खरीदने से पहले इसकी कीमत को अपनी मासिक कमाई और बजट के हिसाब से देखना जरूरी है.
Apple 6 महीने की No Cost EMI और Instant Cashback की सुविधा भी दे रहा है. ऐसे में फोन खरीदने का फैसला लेने से पहले यह देखना बेहतर रहेगा कि आपकी सैलरी के हिसाब से हर महीने की EMI कितनी आसानी से मैनेज हो सकती है या आप पूरी रकम पर iPhone 18 Pro Max &amp;nbsp;खरीद सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि iPhone 18 Pro Max खरीदने के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro Max की कीमत कितनी है?
Apple ने iPhone 18 Pro Max को 256GB, 512GB, 1TB और 2TB स्टोरेज ऑप्शनों में लॉन्च किया है. इसका 256GB मॉडल 1,79,900 रुपये से शुरू होता है. वहीं iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये है. इन दोनों मॉडल की बिक्री 18 सितंबर से शुरू हुई है.&amp;nbsp;
EMI पर iPhone 18 Pro Max &amp;nbsp;खरीदने के लिए कितनी सैलरी?
Apple India Store पर iPhone 18 Pro Max 256GB के लिए Instant Cashback के साथ EMI 28,817 रुपये प्रति महीने से शुरू होती है. ऐसे में अगर EMI को मासिक सैलरी के करीब 12 प्रतिशत तक रखना है, तो 28,817 की EMI के लिए करीब 2.40 लाख रुपये प्रति महीने की सैलरी चाहिए. अगर 15 प्रतिशत तक EMI में रखना चाहते हैं, तो करीब 1.92 लाख रुपये महीने की सैलरी चाहिए. वहीं EMI को सिर्फ 10 प्रतिशत सैलरी तक रखना चाहते हैं, तो करीब 2.88 लाख रुपये मासिक कमाई होनी चाहिए. 28,817 रुपये की EMI के हिसाब से सैलरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी कमाई का कितना हिस्सा हर महीने EMI में रखना चाहते हैं.&amp;nbsp;
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iPhone 18 Pro Max खरीदने के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए?
अगर आप iPhone 18 Pro Max को EMI की जगह पूरी रकम देकर खरीदना चाहते हैं, तो 256GB मॉडल की कीमत 1,79,900 रुपये है. ऐसे में एक आसान बजट के तौर पर 1.80 लाख रुपये या उससे ज्यादा की मासिक सैलरी होने पर फोन की कीमत आपकी एक महीने की कमाई के करीब बैठती है.&amp;nbsp;
Trade In से iPhone 18 Pro Max पर बच सकते हैं पैसे
पुराने फोन को Apple Trade In में देने से नए iPhone की कीमत और EMI दोनों कम हो सकती हैं. पुराने फोन का मॉडल और उसकी कंडीशन देखकर Apple एक्सचेंज क्रेडिट तय करता है. Apple की मौजूदा India Store जानकारी के मुताबिक, पुराने स्मार्टफोन पर करीब 4,500 रुपये से लेकर 81,500 रुपये तक का एक्सचेंज फायदा मिल सकता है. इससे नए iPhone के लिए चुकाई जाने वाली कुल रकम कम हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>नए Chip और दमदार Battery के साथ, इस हफ्ते लॉन्च हुए ये Smartphones</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नए-chip-और-दमदार-battery-के-साथ-इस-हफ्ते-लॉन्च-हुए-ये-smartphones</link>
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        <description><![CDATA[ सितंबर के इस हफ्ते में स्मार्टफोन बाजार का फोकस एक बार फिर बजट और मिड-रेंज फोन पर आ गया है. पिछले हफ्ते जहां Apple के नए iPhone Duo और iPhone 18 Pro जैसे प्रीमियम फोन चर्चा में रहे, वहीं अब बड़ी बैटरी, नए चिपसेट और ज्यादा फीचर्स वाले किफायती स्मार्टफोन ने बाजार में दस्तक दे दी है. इस हफ्ते लॉन्च होने वाले फोन में 10,000mAh तक की बैटरी, 5G कनेक्टिविटी से लेकर हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले तक देखने को मिली. तो आइए जानते हैं कि इस हफ्ते लॉन्च कौन-से स्मार्टफोन लॉन्च हुए.&amp;nbsp;
इस हफ्ते लॉन्च हुए ये Smartphones
1. Redmi Note 17 Pro&amp;nbsp;
Redmi Note 17 Pro को कंपनी ने 9000mAh की बड़ी बैटरी के साथ 15 सितंबर को भारत में लॉन्च किया है. इस फोन में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED पैनल मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. प्रोसेसिंग के लिए इसमें 4nm बेस्ड Snapdragon 6s Gen 4 चिपसेट दिया गया है.&amp;nbsp;
इसमें 8MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा मिलता है, जबकि वीडियो कॉल और सेल्फी के लिए 16MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. भारत में इसके 8GB RAM और 128GB स्टोरेज मॉडल की कीमत 36,999 रुपये है, जबकि 8GB+256GB वेरिएंट 39,999 रुपये में आता है.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;Redmi Note 17 Pro Max&amp;nbsp;Redmi Note 17 Pro Max इस सीरीज का ज्यादा बैटरी-फोक्सड मॉडल है और इसमें 10,000mAh की क्षमता वाली बैटरी दी गई है. फोन में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले है, जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz है. परफॉर्मेंस के लिए यह मॉडल 4nm ऑक्टा-कोर Snapdragon 6 Gen 5 प्रोसेसर पर चलता है.
फोटोग्राफी के लिए पीछे 50MP का मुख्य कैमरा और 8MP का अल्ट्रा वाइड सेंसर मिलता है. वहीं, सेल्फी के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. भारत में फोन का 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वेरिएंट 49,999 रुपये का है, जबकि 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाला टॉप मॉडल 55,999 रुपये में पेश किया गया है.&amp;nbsp;
3. OPPO K14 Lite
OPPO ने इस हफ्ते K Series में नया K14 Lite भारत में पेश किया है. फोन की शुरुआती कीमत 16,999 रुपये है, जिसमें 4GB RAM के साथ 64GB स्टोरेज मिलता है. इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत 7,000mAh की बैटरी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - iPhone 18 Pro Max की सेल आज से, खरीदने से पहले जान लें EMI का गणित
परफॉर्मेंस के लिए K14 Lite में Unisoc T7250 चिपसेट लगाया गया है. स्क्रीन 120Hz रिफ्रेश रेट और 900 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती है. कैमरा सेटअप में पीछे 13MP का ऑटोफोकस वाला मेन कैमरा मिलता है. फ्रंट में 5MP सेंसर दिया गया है.&amp;nbsp;
4. Lava Bold N4 Pro
Lava Bold N4 Pro 5G को कंपनी ने भारत में अपनी Bold सीरीज के नए स्मार्टफोन के तौर पर लॉन्च किया है. इसमें 6.75 इंच का HD+ डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. परफॉर्मेंस के लिए फोन में Unisoc T8200 5G चिपसेट लगाया गया है. फोटोग्राफी के लिए रियर पैनल पर 50MP का AI सपोर्ट वाला डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है. पावर बैकअप के लिए इसमें 6,000mAh की बैटरी मौजूद है. भारत में इसके 6GB RAM और 128GB स्टोरेज वाले की स्पेशल लॉन्च कीमत सभी ऑफर्स समेत 13,999 रुपये है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>स्पैम कॉल से परेशान? TRAI का नया नियम, AI पकड़ेगा संदिग्ध नंबर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/स्पैम-कॉल-से-परेशान-trai-का-नया-नियम-ai-पकड़ेगा-संदिग्ध-नंबर</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके फोन पर बार-बार लोन, क्रेडिट कार्ड, इंश्योरेंस या दूसरे ऑफर के लिए अनचाही कॉल आती हैं तो आपके लिए काम की खबर है.&amp;nbsp;टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने स्पैम कॉल और मैसेज पर लगाम लगाने के नियम और सख्त कर दिए हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;TRAI ने Telecom Commercial Communications Customer Preference Regulations में तीसरा संशोधन किया है.&amp;nbsp;इसका मकसद स्पैम करने वाले नंबरों की पहचान जल्दी करना और टेलिकॉम कंपनियों को उन पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए मजबूर करना है.&amp;nbsp;
अब सिर्फ शिकायत नहीं, AI &amp;nbsp;पकड़ेगा स्पैम
नए सिस्टम में AI की मदद से संदिग्ध नंबरों की पहचान की जाएगी. टेलिकॉम कंपनियों के AI सिस्टम से मिली जानकारी आपस में शेयर की जाएगी ताकि एक नेटवर्क पर पकड़े गए संदिग्ध नंबर के खिलाफ दूसरे नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जा सके.
सबसे बड़ा बदलाव शिकायतों की संख्या को लेकर है. अगर किसी Sender के खिलाफ 10 दिन में 3 या उससे ज्यादा अलग-अलग लोगों की शिकायत आती है और उसके किसी नंबर को AI सिस्टम ने भी संदिग्ध बताया है तो कार्रवाई की जा सकती है यानी अब AI की पहचान और लोगों की शिकायत मिलकर स्पैम करने वाले नंबर पर जल्दी कार्रवाई करा सकती है.
5 शिकायत पर भी कार्रवाई का प्रावधान
अगर किसी Sender के खिलाफ 10 दिन में अलग-अलग लोगों की शिकायत आती है तो उसके टेलिकॉम संसाधनों पर कार्रवाई का प्रावधान है. इसका मतलब यह है कि स्पैम करने वाले सिर्फ एक नंबर को बदलकर बच निकलना मुश्किल होगा.
ऐप से होने वाली कॉल पर भी नजर
कंपनियां अगर अपने ग्राहकों को ऐप या ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए कॉल करती हैं तो उन्हें पहले से यह जानकारी टेलिकॉम कंपनी को देनी होगी कि किन नंबरों से ऐसी कॉल की जाएंगी.बिना तय प्रक्रिया के की गई ऐसी कॉल को स्पैम के तौर पर देखा जा सकता है.&amp;nbsp;आपने खुद जानकारी मांगी है तो कंपनी जवाब दे सकती है.
अगर आपने किसी कंपनी से खुद किसी प्रोडक्ट, सर्विस या जानकारी के बारे में पूछा है तो उस कंपनी को जवाब देने के लिए कम्युनिकेशन की अनुमति मिल सकती है लेकिन ग्राहक की ओर से की गई रिक्वेस्ट का डिजिटल या लिखित रिकॉर्ड होना जरूरी होगा यानी किसी कंपनी के लिए सिर्फ यह कहना काफी नहीं होगा कि ग्राहक ने खुद कॉल या मैसेज की अनुमति दी थी.
गलत नंबर इस्तेमाल हुआ तो जल्दी बंद करना होगा
अगर किसी कंपनी के नंबर या मैसेज टेम्पलेट का गलत इस्तेमाल पाया जाता हैतो टेलिकॉम कंपनी को उस संसाधन को बंद करने की कार्रवाई करनी होगी.&amp;nbsp;अगर इसके पीछे कोई टेलीमार्केटर पाया जाता है तो उसके दूसरे नंबरों पर भी कार्रवाई हो सकती है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है.
1600 और 1601 नंबर दिखें तो उन्हें तुरंत स्पैम न समझें
TRAI ने सर्विस और ट्रांजैक्शन से जुड़ी कॉल के लिए 1600 सीरीज और 1601 सीरीज को लेकर भी व्यवस्था की है. TRAI ने अगस्त 2026 में 1601 नंबर सीरीज के इस्तेमाल के लिए अलग दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
इसलिए बैंक , सरकारी सेवा या दूसरी जरूरी सेवाओं से आने वाली वैध कॉल को सिर्फ नंबर देखकर स्पैम समझना सही नहीं होगा. हालांकि अगर कोई नंबर आपको परेशान कर रहा है तो उसे अपने फोन में ब्लॉक किया जा सकता है.
स्पैम कॉल आए तो आप क्या करें?

अगर आपके पास अनचाही स्पैम कॉल या मैसेज आता है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय शिकायत कर सकते हैं.
इसके लिए 1909 पर कॉल या SMS किया जा सकता है. TRAI के DND ऐप और टेलिकॉम कंपनी के ऐप या वेबसाइट के जरिए भी शिकायत की जा सकती है.&amp;nbsp;
TRAI के अनुसार कुछ मामलों में शिकायत के लिए पहले DND में रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है.

ध्यान रखें स्पैम कॉल की शिकायत समय पर करना जरूरी है. TRAI की मौजूदा जानकारी के मुताबिक UCC यानी अनचाही व्यावसायिक कॉल या मैसेज की शिकायत 7 दिन के भीतर की जा सकती है.
आम यूजर के लिए इसका मतलब क्या है?
सीधी बात यह है कि अब स्पैम करने वाले नंबरों को पकड़ने में सिर्फ लोगों की शिकायत पर निर्भर नहीं रहना होगा. लोगों की शिकायत + AI से मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई तेज करने की कोशिश की जा रही है.&amp;nbsp;इसका फायदा यह होगा कि अगर कोई नंबर लगातार लोगों को परेशान कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू होने की संभावना पहले से जल्दी हो सकती है.
यह भी पढ़ें: कॉल ड्रॉप से हो गए परेशान? TRAI ने दी यह काम करने की सलाह ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्पैम, कॉल, से, परेशान, TRAI, का, नया, नियम, पकड़ेगा, संदिग्ध, नंबर</media:keywords>
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        <title>5 साल में Chip Industry की शुरुआत, Semicon 2.0 का अगला बड़ा प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ टेक्नोलॉजी जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, चिप्स की जरूरत भी उतनी ही बढ़ रही है. भारत ने पिछले पांच साल में सेमीकंडक्टर सेक्टर में अपनी मौजूदगी बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं. जहां 2021 में देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा कमर्शियल बेस नहीं था, वहीं अब चिप मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग और डिजाइन से जुड़े कई प्रोजेक्ट आगे बढ़ चुके हैं. अब सरकार इस पूरे इकोसिस्टम को अगले स्तर पर ले जाने के लिए Semicon 2.0 पर फोकस कर रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में Semicon India 2026 का उद्घाटन किया. 17 से 19 सितंबर तक चल रहे इस तीन दिवसीय कार्यक्रम की थीम Silicon to Systems: Building the Ecosystem है. इसमें 52 देशों की 600 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. कार्यक्रम में ग्लोबल और भारतीय कंपनियों के साथ निवेशक, रिसर्चर, स्टार्टअप और नीति-निर्माता शामिल हुए हैं.
2021 में शुरू हुआ था भारत का पहला चिप मिशन
दिसंबर 2021 में भारत सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ Semicon 1.0 को मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग का इकोसिस्टम तैयार करना था. इसके तहत अब तक 12 सेमीकंडक्टर यूनिट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव हैं. इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-LED डिस्प्ले फैब और नौ ATMP-OSAT यूनिट्स शामिल हैं. &amp;nbsp;इनमें से पांच यूनिट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है. साथ ही, चिप डिजाइन से जुड़ी 24 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और देशभर के 500 संगठनों के एक लाख से ज्यादा इंजीनियरों को एडवांस्ड चिप-डिजाइन टूल्स तक पहुंच दी गई है.&amp;nbsp;
Semicon 2.0 में डिजाइन से लेकर टेक चेन पर फोकस
15 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ Semicon 2.0 को मंजूरी दी. इस बार फोकस सिर्फ चिप बनाने वाली फैक्ट्रियां लगाने पर नहीं है. योजना में चिप डिजाइन, मशीनरी और मैटेरियल, नए फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट डेवलपमेंट को शामिल किया गया है. इसका एक बड़ा फोकस फैबलेस कंपनियों पर भी है. ऐसी कंपनियां चिप का डिजाइन तैयार करती हैं, लेकिन चिप की फिजिकल मैन्युफैक्चरिंग किसी दूसरी कंपनी से कराती हैं. इसके जरिए भारत में अपनी चिप डिजाइन तैयार करने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - iPhone 18 Proकी बिक्री शुरू, मुंबई से यूपी तक Apple स्टोर के बाहर लगी लाइनें
सेमीकंडक्टर क्यों जरूरी हैं?
सेमीकंडक्टर आज स्मार्टफोन और कंप्यूटर से लेकर AI, 5G-6G, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डेटा सेंटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक तक में इस्तेमाल होते हैं. भारत में सेमीकंडक्टर की मांग वित्त वर्ष 2030 तक 110 अरब डॉलर और 2035 तक 200 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है. भारत ने वित्त वर्ष 2017 से 2025 के बीच सेमीकंडक्टर उत्पादों के आयात पर करीब 150 अरब डॉलर खर्च किए हैं. ऐसे में घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना जरूरी माना जा रहा है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Semicon India 2026 में Chip से AI तक नई Technology, जानें क्या-क्या खास? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 18 Pro की सेल कल से शुरू, जानें सबसे सस्ती डील कहां मिलेगी?</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अब सेल का वक्त आ गया है. Apple के नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की सेल कल यानी 18 सितंबर से शुरू होग. iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये है. ऐसे में नए iPhone को खरीदते समय बैंक ऑफर, एक्सचेंज और No Cost EMI जैसे ऑप्शनों से बचत की जा सकती है. अगर आप नया iPhone खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले कीमत और मिलने वाले ऑफर्स की जानकारी जानना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि iPhone 18 Pro की सबसे सस्ती डील कहां मिलेगी.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro की कीमत कितनी है?
iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये है. इसमें 256GB स्टोरेज वाला मॉडल मिलता है. 512GB वेरिएंट की कीमत 1,89,900 रुपये, 1TB मॉडल की 2,39,900 रुपये और 2TB वेरिएंट की कीमत 3,14,900 रुपये है.&amp;nbsp;
वहीं, iPhone 18 Pro Max की कीमत 1,79,900 रुपये से शुरू होती है. इसके 256GB मॉडल की कीमत इतनी है, जबकि 512GB वेरिएंट 2,04,900 रुपये, 1TB मॉडल 2,54,900 रुपये और 2TB वेरिएंट 3,29,900 रुपये का है.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro की सबसे सस्ती डील कहां मिलेगी?
iPhone 18 Pro सीरीज को खरीदने पर कुछ बैंक कार्ड से 7,000 रुपये तक का इंस्टेंट कैशबैक मिल सकता है. Apple की वेबसाइट पर American Express, Axis Bank और ICICI Bank के योग्य कार्ड पर यह ऑफर दिया जा रहा है. Flipkart, Amazon, Reliance Digital, Vijay Sales और Croma जैसे प्लेटफॉर्म पर कार्ड ऑफर अलग हो सकते हैं.&amp;nbsp;
पुराने फोन पर खास एक्सचेंज ऑफर
अगर आपके पास पुराना स्मार्टफोन है तो Apple Trade In के जरिए नए iPhone की कीमत कम की जा सकती है. पुराने फोन का मॉडल और उसकी कंडीशन देखकर एक्सचेंज क्रेडिट तय होगा. रिपोर्ट्स और लीक्स के मुताबिक, एक्सचेंज पर 4,500 रुपये से लेकर 81,500 रुपये तक का फायदा मिल सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Google Pixel में आया नया Scam Detection, जानें फीचर्स
6 महीने की No Cost EMI का ऑप्शन
अगर आप पूरी रकम एक साथ खर्च नहीं करना चाहते हैं तो iPhone 18 Pro को 6 महीने की No Cost EMI पर भी खरीदा जा सकता है. iPhone 18 Pro 256GB के लिए EMI करीब 26,316 रुपये प्रति महीने से शुरू होती है. iPhone 18 Pro Max के लिए यह करीब 28,817 रुपये प्रति महीने है.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro में क्या खास?
iPhone 18 Pro में 6.3 इंच और Pro Max में 6.9 इंच का LTPO OLED Super Retina XDR डिस्प्ले मिलता है. दोनों में 120Hz ProMotion और 3,000 निट्स पीक ब्राइटनेस है. फोन में 2nm बेस्ड A20 Pro चिपसेट और iOS 27 मिलता है. साथ ही दोनों मॉडल में 48MP मेन, 48MP टेलीफोटो और 48MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है. इसके साथ LiDAR स्कैनर और 18MP Center Stage फ्रंट कैमरा भी मिलता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Semicon India 2026 में Chip से AI तक नई Technology, जानें क्या-क्या खास? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Pro, की, सेल, कल, से, शुरू, जानें, सबसे, सस्ती, डील, कहां, मिलेगी</media:keywords>
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        <title>POCO X8 Review: 9000mAh बैटरी वाला फोन कितना दमदार, जानें किसके लिए यह फोन बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ 9000mAh की बड़ी Silicon-Carbon बैटरी POCO X8 का एक्स फैक्टर जरूर है, लेकिन कंपनी का दांव सिर्फ बैटरी पर नहीं है. 6.83 इंच की 1.5K AMOLED स्क्रीन, 120Hz रिफ्रेश रेट, Snapdragon 6s Gen 4 प्रोसेसर, 67W फास्ट चार्जिंग और IP66/IP68/IP69/IP69K जैसी कई सिक्योरिटी रेटिंग इस स्मार्टफोन को दमदार बनाती हैं. क्या 29,999 रुपये में आने वाली यह डिवाइस आपके लिए परफेक्ट है, जानते हैं इस रिव्यू में...
डिजाइन मजबूत, लेकिन हैंडी नहीं&amp;nbsp;
POCO X8 का डिजाइन उन लोगों के लिए है, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल में मजबूत स्मार्टफोन चाहते हैं. फोन में Corning Gorilla Glass Victus 2 प्रोटेक्शन दिया गया है और कई लेवल की IP रेटिंग भी हैं. इसका मतलब है कि धूल और पानी से बचाव के मामले में फोन काफी मजबूत है.&amp;nbsp;
फोन की मोटाई करीब 8.6mm और वजन करीब 223-226 ग्राम है. इससे साफ पता चलता है कि यह हल्का या छोटा फोन नहीं है. बड़ी स्क्रीन और बड़ी बैटरी की वजह से इसका आकार नॉर्मल मिड-रेंज फोन से बड़ा महसूस होता है. अगर आपको छोटा और हल्का फोन पसंद है तो POCO X8 आपको भारी लग सकता है. अगर आपकी प्राथमिकता मजबूत बॉडी और बड़ी बैटरी है तो इसका बड़ा आकार परेशान नहीं करेगा.
IP69K रेटिंग कितनी खास?
POCO X8 को IP66, IP68, IP69 और IP69K रेटिंग मिली हैं. आसान भाषा में कहें तो फोन को धूल और पानी से बचाव के लिए काफी मजबूत बनाया गया है. खास तौर पर IP69K जैसी रेटिंग इसे उन लोगों के लिए खास बनाती है, जो फोन का इस्तेमाल ऐसे माहौल में करते हैं, जहां पानी और धूल का सामना ज्यादा होता है. हालांकि, किसी भी फोन की IP रेटिंग का मतलब यह नहीं है कि उसे जानबूझकर पानी में डुबोकर या प्रेशर वॉटर जेट के नीचे रखकर इस्तेमाल किया जाए.

POCO X8 के डिस्प्ले में क्या खास?
इस फोन में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz है. इसका फायदा स्क्रॉलिंग, वीडियो देखने और नॉर्मल इस्तेमाल में नजर आता है. स्क्रीन पर मूवमेंट काफी स्मूथ है. तेज और आउटडोर में स्क्रीन की ब्राइटनेस काफी अच्छी है. वहीं, AMOLED स्क्रीन की वजह से रंग अच्छे और गहरे दिखाई देते हैं. 1.5K रिजॉल्यूशन बड़ी स्क्रीन पर वीडियो और फोटो देखने का अनुभव भी बेहतर करता है. HDR10+, Dolby Vision, 100% DCI-P3 और 3200Hz तक इंस्टेंट टच सैंपलिंग जैसे फीचर्स इसे खास बनाते हैं. इसके अलावा Wet Touch 2.0 की मदद से गीली उंगली या बारिश जैसी कंडीशन में टच रिस्पॉन्स बेहतर रहता है.&amp;nbsp;
कैसी है इसकी परफॉर्मेंस?
POCO X8 में Snapdragon 6s Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है. यह 4nm प्रोसेस पर बना ऑक्टा-कोर चिपसेट है और इसकी क्लॉक स्पीड 2.4GHz तक जाती है. हमने इस डिवाइस के 8GB+256GB वैरिएंट को करीब 15 दिन इस्तेमाल किया. यह फोन WhatsApp, Instagram, YouTube, Chrome, Maps, ऑनलाइन शॉपिंग, वीडियो कॉल और दूसरे रोजमर्रा के कामों के लिए फोन पर्याप्त पावर देता है. नॉर्मल यूज के लिए इस फोन की परफॉर्मेंस काफी अच्छी है, लेकिन हार्डकोर गेमिंग के लिए यह परफेक्ट नहीं है. इस फोन हल्के और नॉर्मल गेम आराम से चलते हैं, लेकिन हैवी गेम्स लगातार खेलने पर लैग और हीटिंग जैसे इश्यू नजर आते हैं.&amp;nbsp;

RAM और स्टोरेज कितनी?
भारत में POCO X8 के तीन वैरिएंट 6GB+128GB, 8GB+128GB और 8GB+256GB लॉन्च किए गए हैं. इनकी कीमत ₹29,999, ₹32,999 और ₹35,999 तय की गई है. खास बात यह है कि 256GB वाले वैरिएंट में तेज UFS 3.1 स्टोरेज दी गई है, जबकि 128GB मॉडल में UFS 2.2 स्टोरेज है.&amp;nbsp;
कितना दमदार है 50MP का कैमरा?&amp;nbsp;
POCO X8 में 50MP का रियर कैमरा OIS के साथ दिया गया है. इसके साथ 2MP का डेप्थ सेंसर है, जबकि सेल्फी के लिए 16MP का कैमरा मिलता है. कैमरा ऐप में पोर्ट्रेट, नाइट मोड, HDR जैसे कई नॉर्मल मोड हैं, लेकिन दिन की रोशनी में रियर कैमरा सेटअप से ठीक-ठाक तस्वीरें खींची जा सकती हैं, लेकिन अल्ट्रावाइड कैमरे की कमी खलती है. रात की रोशनी में तस्वीरों की क्वालिटी काफी खराब रहती है. इसके अलावा 16MP फ्रंट कैमरा वीडियो कॉल और नॉर्मल सेल्फी के लिए ठीक-ठाक है. अगर आपकी प्रायॉरिटी फोटोग्राफी है तो POCO X8 का कैमरा सेटअप इस फोन की सबसे बड़ी ताकत नहीं है.
बैटरी कितनी पावरफुल?
अब उस फीचर पर आते हैं, जिसकी वजह से POCO X8 सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है. फोन में 9,000mAh की Silicon-Carbon बैटरी दी गई है. यह नॉर्मल मिड-रेंज फोन की तुलना में काफी बड़ी बैटरी है. रिव्यू के दौरान फोन पूरे दिन बेहद आराम से चला. अगर नॉर्मल तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो डेढ़ से दो दिन का बैकअप भी आसानी से मिल सकता है. इसके अलावा POCO X8 में 67W फास्ट चार्जिंग दी गई है, जिससे इसे चार्ज करने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. साथ ही, यह फोन 22.5W wired reverse charging सपोर्ट करता है. जरूरत पड़ने पर आप इससे दूसरे डिवाइस भी चार्ज कर सकते हैं.&amp;nbsp;

सॉफ्टवेयर कितना दमदार?
POCO X8 में Android 16 बेस्ड HyperOS 3 ऑपरेटिंग सिस्टम मिलता है. इंटरफेस में ऐप्स को अलग-अलग कैटेगरी में रखने और App Finder जैसे फीचर्स मिलते हैं. हालांकि, POCO की ब्लोटवेयर वाली पुरानी समस्या इस फोन में भी नजर आई. फोन में कुछ ऐसे ऐप्स और प्रमोशनल नोटिफिकेशन मिलते हैं, जिनकी जरूरत हर यूजर को नहीं होती. खास बात यह है कि POCO ने X8 के लिए 4 बड़े Android अपडेट और 6 साल के सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है.&amp;nbsp;
स्पीकर और कनेक्टिविटी
फोन में डुअल स्टीरियो स्पीकर और Dolby Atmos सपोर्ट दिया गया है, जिससे वीडियो और म्यूजिक देखने-सुनने का एक्सपीरियंस बेहतर हो सकता है. इसके अलावा ऑडियो को 300 पर्सेंट बूस्ट करने का ऑप्शन भी है, जिससे शोर-शराबे में भी आवाज सुनने में दिक्कत नहीं होती है.&amp;nbsp;
POCO X8 खरीदना चाहिए या नहीं?
यह फोन उन लोगों के लिए बेहद खास है, जो दिनभर फोन इस्तेमाल करते हैं. काफी ज्यादा वीडियो देखते हैं. ट्रैवल करते हैं और बार ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>POCO, Review:, 9000mAh, बैटरी, वाला, फोन, कितना, दमदार, जानें, किसके, लिए, यह, फोन, बेस्ट</media:keywords>
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        <title>Refurbished Phone खरीद रहे हैं? हार्डवेयर से बैटरी तक ये चीजें करें चेक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/refurbished-phone-खरीद-रहे-हैं-हार्डवेयर-से-बैटरी-तक-ये-चीजें-करें-चेक</link>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन खरीदते समय हर कोई चाहता है कि कम कीमत में ज्यादा फीचर्स वाला फोन मिल जाए, लेकिन जब नए स्मार्टफोन्स की कीमत बढ़ने लगे, तो एक और ऑप्शन तेजी से लोगों का ध्यान खींचता है और वह रिफर्बिश्ड फोन है. Apple और Samsung के पुराने मॉडल सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. आमतौर पर इन फोन को दोबारा बेचने से पहले अच्छी तरह चेक और टेस्ट किया जाता है और जरूरत पड़ने पर खराब हिस्सों की रिपेयरिंग भी की जाती है.
रिफर्बिश्ड फोन खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम कीमत में अच्छा और हाल का मॉडल मिल सकता है. इससे पैसे बचाने के साथ बेहतर हार्डवेयर वाले फोन पर कम खर्च में अपग्रेड करने का मौका भी मिलता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि Refurbished Phone खरीद रहे हैं तो Hardware और Battery से लेकर कौन-सी चीजें चेक करें.&amp;nbsp;
हार्डवेयर से बैटरी तक ये चीजें करें चेक
फोन का IMEI Number बॉक्स या Invoice पर दिए IMEI से मिलाएं. भारत में CEIR की Sanchar Saathi Service से IMEI Status भी चेक किया जा सकता है. iPhone में Apple Account और Android Phone में पुराना Google Account हटाया गया हो, यह जरूर देखें. iPhone में Battery Health चेक करें. Android Phones में Battery Capacity की जानकारी सेटिंग्स में मिल सकती है.
सही Seller चुनना जरूरी
रिफर्बिश्ड फोन खरीदते समय मॉडल चुनने से पहले Seller की क्रेडिबिलिटी चेक करें. Manufacturer-Certified Refurbished Phone को आमतौर पर एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है. Samsung का Certified Re-Newed Program Galaxy S25 Ultra और Galaxy S25 जैसे मॉडल उपलब्ध कराता है. ब्रांड से सीधे मिलने वाले Refurbished Phones को Inspection, Functional Testing और Software Validation से गुजरना पड़ता है. कई मामलों में पुराने डेटा को पूरी तरह हटाया जाता है और खराब पार्ट्स को Original Spare Parts से बदला जाता है. ऐसे में खरीदने से पहले कंपनी की Official Refurbished Program वेबसाइट पर वोरेंटी जरूर चेक करें.
यह भी पढ़ें - POCO X8 Review: 9000mAh बैटरी वाला फोन कितना दमदार, जानें किसके लिए यह फोन बेस्ट?&amp;nbsp;
Retailer से खरीद रहे हैं तो ये चीजें देखें
Refurbished Phone Retailer से खरीदते समय Device Condition, Grading, Warranty और Return या Replacement Policy ध्यान से देखें. खरीदारी का पक्का Invoice भी संभालकर रखें. साथ ही Physical Refurbisher Store पर जाकर फोन को खुद चेक करें. Display, Camera, Handset की ऑवर ऑल कंडीशन और रिप्लेसमेंट पार्ट्स की जानकारी जरूर लें. ऐसे Seller से सावधान रहें, जो IMEI Number या पक्का Bill देने से मना करे.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें &amp;nbsp;- iPhone 18 Pro की सेल कल से शुरू, जानें सबसे सस्ती डील कहां मिलेगी? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मीटर रीडर का इंतजार खत्म...खुद बनवाएं Accurate बिजली बिल, अपनाएं ये हैक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मीटर-रीडर-का-इंतजार-खत्मखुद-बनवाएं-accurate-बिजली-बिल-अपनाएं-ये-हैक</link>
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        <description><![CDATA[ कई बार बिजली की खपत सामान्य होने के बाद भी बिल बढ़ा हुआ दिखाई देता है. इसकी एक वजह मीटर की सही रीडिंग दर्ज न होना भी हो सकती है. अगर मीटर रीडर तय समय पर घर नहीं पहुंचता या बिजली कंपनी अनुमान के आधार पर बिल तैयार करती है, तो सही यूज से ज्यादा रकम का बिल आ सकता है. ऐसे में यूजर को परेशानी के साथ-साथ एक्सट्रा भुगतान का भी सामना करना पड़ सकता है. &amp;nbsp;
ऐसे में आपको मीटर रीडर का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. आप खुद मीटर की रीडिंग जमा करके सही खपत के आधार पर बिल बनवाने में मदद कर सकते हैं. इससे बिलिंग की गलतियों से बचने के साथ अपनी बिजली खपत और खर्च पर भी नजर रख सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि खुद Accurate बिजली बिल कैसे बनवाएं.&amp;nbsp;
मीटर रीडिंग देने से क्या होता है?&amp;nbsp;अगर बिजली का बिल अनुमानित रीडिंग या मीटर रीडर के घर नहीं पहुंचने की वजह से ज्यादा बन गया है, तो खुद मीटर रीडिंग जमा करना यूजफुल हो सकता है. इससे बिजली कंपनी के पास आपके मीटर की सही खपत का आंकड़ा पहुंचता है और बिल को सही इस्तेमाल के आधार पर तैयार करने में मदद मिल सकती है. इससे बिना जरूरूत बढ़े हुए बिल, भुगतान को लेकर विवाद और बिलिंग से जुड़ी परेशानियों को कम किया जा सकता है.&amp;nbsp;
खुद कैसे जमा करें मीटर रीडिंग?
इसके लिए आपको अपने स्थानीय DISCOM यानी बिजली वितरण कंपनी के ऐप या पोर्टल पर जाना होगा. वहां लॉगिन करने के बाद Self Meter Reading का ऑप्शन चुनकर मीटर की रीडिंग जमा की जा सकती है.
यह भी पढ़ें - ChatGPT हिस्ट्री डिलीट करने पर डेटा कहां जाता है? समझें AI चैट का पूरा सिस्टम
खुद Accurate बिजली बिल कैसे बनवाएं?
1. खुद Accurate बिजली बिल बनवाने के लिए सबसे पहले अपने स्थानीय DISCOM का ऐप या पोर्टल खोलें.&amp;nbsp;
2. इसके बाद Consumer ID या अकाउंट नंबर की मदद से लॉगिन करें.&amp;nbsp;
3. अब Self Meter Reading का ऑप्शन चुनें.
4. इसके साथ ही बिजली मीटर की ऐसी साफ फोटो खींचें, जिसमें kWh रीडिंग साफ दिखाई दे.
5. आखिर में मीटर पर दिखाई दे रही रीडिंग दर्ज करें &amp;nbsp;और बिलिंग साइकिल खत्म होने से पहले रीडिंग और फोटो सबमिट कर दें.&amp;nbsp;
इस बात का रखें ध्यान
Self Meter Reading जमा करने की सुविधा के लिए हर DISCOM की अपनी मासिक समय-सीमा हो सकती है. इसलिए रीडिंग उसी बिलिंग विंडो के दौरान जमा करें, जो आपके स्थानीय DISCOM ने तय की है. समय-सीमा के बाद जमा की गई रीडिंग स्वीकार होगी या नहीं, यह संबंधित बिजली वितरण कंपनी के नियमों पर निर्भर करेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Smartphone से AI Chip तक, जानें आज के बड़े Tech Launch</title>
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        <description><![CDATA[ टेक वर्ल्ड के लिए आज यानी 17 सितंबर 2026 काफी हलचल भरा दिन है. एक तरफ नए Smartphones की बिक्री शुरू हो रही है तो दूसरी तरफ AI Chips, Smart Home Appliances, Google TV और बड़े Semiconductor Event से जुड़ी खबरें भी सामने आई हैं. Redmi ने अपनी नई Note 17 Pro Series को भारत में पेश किया है, तो वहीं Samsung से लेकर ViewSonic ने अपने नए प्रोडक्ट्स पेश किए हैं. Smartphone से लेकर AI और Home Tech तक, आज टेक सेक्टर में कई बड़े अपडेट देखने को मिल रहे हैं. तो आइए जानते हैं कि आज के बड़े Tech Launch कौन-से हैं.&amp;nbsp;
Redmi Note 17 Pro Series
Redmi Note 17 Pro Series में Pro और Pro Max मॉडल शामिल हैं. Redmi Note 17 Pro की बिक्री भारत में 17 सितंबर से शुरू हो रही है, जबकि Pro Max की बिक्री 23 सितंबर से शुरू होगी. Pro Max की शुरुआती कीमत 49,999 रुपये है और इसमें 10,000mAh Silicon-Carbon Battery, 100W HyperCharge, Snapdragon 6 Gen 5, LPDDR5X RAM और UFS 4.1 Storage मिलता है. फोन में 6.83-inch 1.5K OLED 120Hz Display और 50MP Sony OIS Camera भी दिया गया है.&amp;nbsp;
SEMICON India 2026 भी आज&amp;nbsp;
17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के Yashobhoomi में SEMICON India 2026 आयोजित हो रहा है. इसमें 600 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं और Semiconductor साथ ही Chip Industry से जुड़ी Technology को प्रदर्शित किया जा रहा है.&amp;nbsp;
Samsung का 2026 Bespoke AI Appliance Lineup
Samsung India ने अपनी नई Bespoke AI Appliance Range पेश की है. इसमें Family Hub Refrigerator with AI Vision, Bespoke AI WindFree Pro Air Conditioner और Infinite 1-Way Cassette AC with WindFree शामिल हैं. इनमें Google Gemini के साथ AI Vision, Bixby, Knox Security और SmartThings जैसे फीचर्स दिए गए हैं.&amp;nbsp;
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ViewSonic की नई Google TV Series
ViewSonic ने भारत में नई Google TV Series पेश की है. यह 32, 43, 50, 55 और 65-inch स्क्रीन साइज में आएगी. इसमें Google TV Ref+ 5.0, Android 14, Chromecast, HDR, Dolby Audio और Google Assistant का सपोर्ट दिया गया है. कंपनी ने इसके साथ Pro AV Displays और Projector Solutions भी पेश किए हैं.&amp;nbsp;
Huawei की दो नई AI Chips का ऐलान
Huawei ने 2027 के लिए दो नई AI Chips की योजना बताई है. 960DT को 2027 की पहली तिमाही में और Ascend 960PR को तीसरी तिमाही में लॉन्च करने की योजना है. कंपनी UnifiedBus Technology के जरिए कई AI Chips को एक साथ जोड़ने पर भी काम कर रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Semicon India 2026 में Chip से AI तक नई Technology, जानें क्या&amp;क्या खास?</title>
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        <description><![CDATA[ Semicon India 2026 के साथ भारत में सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को लेकर बड़ा आयोजन शुरू हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के यशोभूमि में इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया. 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस इवेंट में दुनिया की कई बड़ी कंपनियां, निवेशक, रिसर्चर, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स हिस्सा ले रहे हैं. इस बार इसकी थीम सिलिकॉन से सिस्टम तक: इकोसिस्टम का निर्माण रखी गई है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Semicon India 2026 से टेक्नोलॉजी के नए दौर में क्या खास है.&amp;nbsp;
600 से ज्यादा कंपनियां होंगी शामिल
Semicon India 2026 में 600 से ज्यादा कंपनियां और 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. कार्यक्रम में 52 देशों के प्रतिनिधि, 400 से ज्यादा एग्जीक्यूटिव और 150 से ज्यादा स्पीकर्स शामिल हैं. करीब 50 हजार विजिटर्स के पहुंचने की उम्मीद है. यहां कंपनियों के साथ निवेशक, रिसर्चर, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान और छात्र भी हिस्सा ले रहे हैं. इसका मुख्य फोकस भारत में सहयोग, निवेश, इनोवेशन और विकास को बढ़ावा देना है.
सेमीकंडक्टर की पूरी जर्नी दिखाई जाएगी
इस इवेंट में सिर्फ चिप बनाने की टेक्नोलॉजी ही नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन को दिखाया जा रहा है. इसमें सेमीकंडक्टर मटेरियल और चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक का सफर शामिल है.
इस बार Sand to Silicon to Systems Value Chain Experience के जरिए विजिटर्स को इस पूरे इकोसिस्टम की झलक मिलेगी. सेमीकंडक्टर मटेरियल से शुरू होकर सिलिकॉन, चिप और फिर पूरे सिस्टम तक पहुंचने की प्रक्रिया को एक साथ समझने का मौका मिलेगा.&amp;nbsp;
सेमीकंडक्टर सेक्टर पर PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Semicon India 2026 के उद्घाटन के दौरान भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बात करते हुए कहा कि अब भारत में बने चिप्स देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं. उन्होंने बताया कि मोहाली और सूरत में दो सेमीकंडक्टर प्लांट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत में फैबलैस कंपनियों की ग्रोथ और नई इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के निर्माण पर फोकस किया जा रहा है. कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सिलिकॉन फोटोनिक्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी भारत को आगे बढ़ना होगा.&amp;nbsp;
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छह देशों के पवेलियन भी मौजूद
इवेंट में जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह कंट्री पवेलियन हैं. इसके अलावा 12 स्टेट पवेलियन, स्टार्टअप पवेलियन, इनोवेशन शोकेस, स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी मौजूद हैं. यहां ASML, Applied Materials, IBM Research, Micron, Tata Electronics, NXP, Lam Research, Tokyo Electron और कई अन्य कंपनियां भी हिस्सा ले रही हैं.&amp;nbsp;
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन पर भी फोकस
Semicon India 2026 ऐसे समय हो रहा है जब भारत अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है. Semicon India Programme के तहत सरकार ने 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इनमें से तीन प्रोजेक्ट्स ने कमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया है. इसके साथ ही Semicon 2.0 के अगले चरण को भी मंजूरी दी गई है, जिसका फोकस सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूत करना है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google Pixel में आया नया Scam Detection, जानें फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Google ने सितंबर 2026 के Pixel Drop का रोलआउट शुरू कर दिया है. इस अपडेट के साथ Pixel यूजर्स को कई नए फीचर्स मिलने जा रहे हैं, जिनमें Scam Detection, Digital Wellbeing से जुड़े टूल्स और कुछ नए Customisation Options शामिल हैं. अपडेट धीरे-धीरे अलग-अलग डिवाइस और कैरियर तक पहुंचाया जा रहा है. Google के मुताबिक, जिन डिवाइस पर यह अपडेट उपलब्ध होगा, उन्हें सिस्टम की तरफ से अपडेट का अलर्ट मिलेगा.
इसके लिए फोन को नए Android Version पर अपडेट करने के साथ Apps को भी रिफ्रेश करना होगा. इस Pixel Drop में सबसे ज्यादा ध्यान Scam Detection फीचर पर है, जो संदिग्ध मैसेज और चैट को यूजर के जवाब देने से पहले पहचानने में मदद करता है. तो आइए जानते हैं कि Google Pixel में आए नए Scam Detection के फीचर क्या हैं.&amp;nbsp;
Google Pixel में आए नए Scam Detection के फीचर क्या हैं?
Google का नया Scam Detection फीचर शुरुआत में अमेरिका में Pixel 6 और उससे नए मॉडल पर उपलब्ध किया गया है. यह Gboard में सीधे काम करता है और Third-Party Chat Platforms पर भी संदिग्ध बातचीत को पहचान सकता है. जैसे ही यूजर किसी संदिग्ध चैट का जवाब लिखना शुरू करता है, Keyboard के ऊपर Likely scam का Alert दिखाई देता है. इस फीचर में Data Analysis फोन पर ही Real-Time में किया जाता है.&amp;nbsp;
अब नोटिफिकेशन में भी मिलेगी Scam Warning
Google ने Scam Detection को नोटिफिकेशन तक भी बढ़ाया है. अब संदिग्ध Incoming Message का प्रीव्यू खोलने से पहले ही उस पर Likely scam लिखा दिखाई दे सकता है. पहले यह सुविधा सिर्फ अमेरिका में Pixel 6 और नए फोन तक सीमित थी. अब इसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, मैक्सिको, सिंगापुर और यूके में भी लॉन्च किया जा रहा है. इसके अलावा Notification Scam Protection में अरबी, फ्रेंच, जर्मन, जापानी, पुर्तगाली और स्पेनिश जैसी नई भाषाओं का सपोर्ट भी दिया गया है.&amp;nbsp;
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Pixel VIPs में भी हुआ बदलाव
Pixel VIPs फीचर को नए Home Screen Widgets के साथ अपडेट किया गया है. अब Priority Contacts को सीधे होम स्क्रीन से One-Tap Call या Message किया जा सकता है. अनरीड और जरूरी नोटिफिकेशन के लिए खास इंडिकेटर भी मिलेंगे.&amp;nbsp;
पुराने Pixel में आया Pause Point
Digital Wellbeing फीचर Pause Point, जो पहले Pixel 11 पर आया था, अब Pixel 6 और इसके बाद के पुराने मॉडल तक पहुंच रहा है. यह चुने गए Distracting Apps को खोलते समय एक छोटा सा Pause देता है, जिससे यूजर तुरंत ऐप खोलने की जगह एक पल रुक कर आगे बढ़ने का फैसला कर सके.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>20 हजार रुपये में Waterproof Phone चाहिए? जानें टॉप ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन खरीदते समय कैमरा, बैटरी और प्रोसेसर के साथ अब पानी और डस्ट प्रोटेक्शन भी काफी मायने रखता है. खासकर बारिश के मौसम में फोन के पानी के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में नया फोन खरीदते समय फोन की IP रेटिंग भी जरूर देखनी चाहिए, IP रेटिंग से पता चलता है कि डिवाइस धूल और पानी से कितनी सुरक्षा देता है. बारिश में फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए यह फीचर काफी काम का हो सकता है. अच्छी बात यह है कि अब मिड-रेंज सेगमेंट में भी IP68 और IP69 रेटिंग वाले स्मार्टफोन मिल रहे हैं. तो आइए जानते हैं कि 20 हजार रुपये में Waterproof Phone के टॉप ऑप्शन कौन-से हैं.&amp;nbsp;
1. Moto G96 5G
भारत में Moto G96 5G की कीमत स्टोरेज वेरिएंट और रिटेलर के हिसाब से 18,999 रुपये से 21,099 रुपये के बीच है. Moto G96 5G इस लिस्ट का बेस्ट ऑप्शन है. इसमें 6.67 इंच का कर्व्ड P-OLED डिस्प्ले, 144Hz रिफ्रेश रेट और 1600 निट्स तक पीक ब्राइटनेस मिलती है. फोन में Snapdragon 7s Gen 2 प्रोसेसर, 8GB रैम और 128GB/256GB स्टोरेज है. इसमें 50MP मेन और 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा, 32MP फ्रंट कैमरा, 5,500mAh बैटरी और 33W फास्ट चार्जिंग मिलती है. फोन को IP68 रेटिंग मिली है.&amp;nbsp;
2. Samsung Galaxy A33 5G और Galaxy A34 5G
Samsung Galaxy A33 5G और Galaxy A34 5G उन यूजर्स के लिए अच्छे ऑप्शन हैं, जो IP67 रेटिंग के साथ फोन चाहते हैं. Galaxy A33 5G की भारत में मौजूदा कीमत रिटेलर, RAM-स्टोरेज वेरिएंट और स्टॉक के हिसाब से करीब 19,980 से 33,990 रुपये के बीच है. वहीं, Samsung Galaxy A34 5G की कीमत करीब 20,790 रुपये से शुरू होती है. Galaxy A34 5G में IP67 रेटिंग के साथ अच्छा कैमरा और लंबा सॉफ्टवेयर सपोर्ट मिलता है, जिससे यह इस प्राइस रेंज में एक यूजफुल ऑप्शन बनता है.
3. &amp;nbsp;POCO C85 5G
POCO C85 5G में IP रेटिंग के साथ डस्ट और वाटर रेजिस्टेंस मिलता है. इसके 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की मौजूदा कीमत करीब 16, 999 रुपये से शुरू होती है, जबकि 8GB+128GB मॉडल करीब 17,999 रुपये तक है. फोन में 6.9 इंच का 120Hz HD+ डिस्प्ले और 50MP रियर कैमरा मिलता है.&amp;nbsp;
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4. &amp;nbsp;OPPO A6c
OPPO A6c में IP64 रेटिंग दी गई है. कंपनी के मुताबिक यह सामान्य इस्तेमाल में पानी और धूल से सुरक्षा देता है. इसके 4GB+64GB वेरिएंट की मौजूदा कीमत करीब 16,999 रुपये है. फोन में 6.75 इंच का 120Hz डिस्प्ले, Snapdragon 685 प्रोसेसर और 6,500mAh बैटरी मिलती है.
5. &amp;nbsp;Samsung Galaxy A06 5G
Samsung Galaxy A06 5G में IP54 रेटिंग मिलती है. यह पानी और धूल से बेसिक सुरक्षा देता है, लेकिन इसे पानी में डुबोने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है. इसकी कीमत 17,499 रुपये है. फोन में 5G कनेक्टिविटी मिलती है.&amp;nbsp;
6. Redmi A7 Pro 5G
Redmi A7 Pro 5G में IP52 रेटिंग दी गई है, जो धूल और पानी के छींटों से बेसिक सुरक्षा देती है. इसके बेस मॉडल की कीमत 14,499 रुपये से शुरू है. फोन में 6.9 इंच का 120Hz डिस्प्ले दिया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>हजार, रुपये, में, Waterproof, Phone, चाहिए, जानें, टॉप, ऑप्शन</media:keywords>
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        <title>AI कॉल का बढ़ता खतरा! जानें कैसे होती है स्पैम की पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ अब फोन पर आने वाली हर अनजान कॉल के पीछे इंसान ही हो, ऐसा बिलकुल जरूरी नहीं है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे वॉयस एजेंट तैयार किए जा रहे हैं जो इंसानों की तरह बातचीत कर सकते हैं, सवालों के जवाब दे सकते हैं और सामने वाले से जानकारी हासिल कर सकते हैं. यही तकनीक बैंक, इंश्योरेंस और डिलीवरी कंपनियां भी इस्तेमाल कर रही हैं. ऐसे में असली और फर्जी कॉल के बीच अंतर करना मुश्किल होता जा रहा है.
हर AI कॉल स्पैम नहीं होती
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, AI से की गई कॉल को सीधे स्पैम या स्कैम मानना सही नहीं है. मसलन, बैंक किसी ग्राहक को EMI की याद दिलाने, इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी रिन्यू कराने और डिलीवरी कंपनी पता कन्फर्म करने के लिए ऑटोमेटेड वॉयस एजेंट का इस्तेमाल कर सकती है.
यही वजह है कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ऑटोमेटेड बिजनेस कॉल्स को अलग तरीके से पहचानने के लिए नए नियम तैयार कर रही है. इस नई व्यवस्था में कंपनियों को अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को ये बताना होगा कि वे ऑटोमेटेड यानी A2P (Application-to-Person) कॉल कर रही हैं.
AI कैसे पकड़ता है संदिग्ध कॉल?
जानकारी के लिए बता दें कि टेलीकॉम कंपनियां सिर्फ आवाज नहीं सुनतीं हैं बल्कि कॉलिंग पैटर्न और दूसरे चीजों को भी एनलाइज करती हैं. कोई नंबर बड़ी संख्या में कॉल कर रहा है लगातार ऐसे लोगों को फोन कर रहा है जिनसे उसका कोई स्पष्ट संबंध नहीं है या उसके खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें मिल रही हैं तो उसे संदिग्ध माना जा सकता है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में AI आधारित सिस्टम ने करीब 22.99 अरब इनकमिंग कॉल्स को संभावित स्पैम के तौर पर चिह्नित किया गया है.
नंबर देखकर न करें भरोसा
आपको बता दें कि किसी कॉल के स्क्रीन पर दिखने वाला नंबर असली होने की गारंटी नहीं है. ठग Caller ID को भी स्पूफ कर सकते हैं और कॉल को किसी भरोसेमंद संस्था के नंबर जैसा दिखा सकते हैं. इसलिए अगर कोई कॉल बैंक, पुलिस, सरकारी विभाग या किसी कंपनी के नाम पर आए और आपसे संवेदनशील जानकारी मांगे तो सिर्फ नंबर देखकर उस पर भरोसा न करें.
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भारत में अलग-अलग तरह की बिजनेस कॉल के लिए 140 और 1600 सीरीज जैसे नंबरिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, इनसे भरोसा बढ़ सकता है लेकिन इन्हें भी सावधानी बरतने का ऑप्शन नहीं माना जाना चाहिए.
AI आवाज और AI स्कैम में फर्क समझें
ये जरूरी नहीं कि AI आवाज का मतलब स्कैम हो. कुछ स्मार्टफोन और Caller ID सर्विसेज ये पहचानने की कोशिश कर रही हैं कि सामने वाला इंसान है या AI-generated voice इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन AI आवाज की पहचान और धोखाधड़ी की पहचान दो अलग चीजें हैं.
फोन उठाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अनजान कॉल पर OTP, UPI PIN, कार्ड नंबर, CVV, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा न करें. अगर कॉल करने वाला जल्दबाजी करने, डराने या तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाए तो कॉल काटकर संबंधित बैंक या कंपनी के ऑफिशियल नंबर पर खुद संपर्क करें. याद रखें, AI से बनी आवाज सुनकर ही किसी कॉल को असली या फर्जी तय नहीं किया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कॉल, का, बढ़ता, खतरा, जानें, कैसे, होती, है, स्पैम, की, पहचान</media:keywords>
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        <title>Meta One Subscription लॉन्च, WhatsApp से Instagram तक एक ही प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp, Instagram और Facebook इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए Meta ने अब एक ही जगह पर कई सुविधाएं जोड़ दी हैं. Meta ने भारत समेत दूसरे ग्लोबल मार्केट्स में Meta One नाम का नया Subscription लॉन्च किया है. यह एक ऐसा प्लान है, जिसमें हाल ही में लॉन्च किए गए WhatsApp Plus, Instagram Plus और Facebook Plus के फायदे एक साथ मिलते हैं. कंपनी ने अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से यूजर्स और AI का ज्यादा इस्तेमाल करने वालों के लिए Meta One Core और Premium प्लान पेश किए हैं. वहीं बिजनेस और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए Essential, Advanced, Expert और Max जैसे अलग-अलग Bundle दिए गए हैं.&amp;nbsp;
Meta One की भारत में कितनी है कीमत?
भारत में Meta One Core प्लान की कीमत 549 रुपये प्रति महीना रखी गई है. वहीं Meta One Premium की कीमत 1,960 रुपये प्रति महीना है. बिजनेस और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए Essential Bundle की कीमत 639 रुपये प्रति महीने से शुरू होती है, जबकि Advanced Bundle के लिए 2,099 रुपये प्रति महीना देना होगा. &amp;nbsp;इसके अलावा Expert Bundle 6,399 रुपये और सबसे ऊपर Max Bundle 20,990 रुपये प्रति महीने का है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;तीनों Plus Plans की कीमत से कितना अलग है Meta One?
भारत में WhatsApp Plus का सब्सक्रिप्शन 79 रुपये प्रति महीने है, जबकि Instagram Plus और Facebook Plus के लिए हर महीने 99-99 रुपये देने होते हैं वहीं Meta One के प्लान में इन तीनों Plus सब्सक्रिप्शन के फीचर्स को एक साथ जोड़ा गया है.
Meta One Core और Premium में क्या मिलेगा?
Meta One Core के साथ Instagram Stories को नए स्टाइल में बदलने, वॉइस इफेक्ट्स और दूसरे क्रिएटिव टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा Instagram, Facebook और WhatsApp पर Meta AI से इमेज और वीडियो बनाने के लिए ज्यादा यूजेस लिमिट्स मिलेंगी. &amp;nbsp;वहीं Meta One Premium में Meta AI के टूल्स और फीचर्स के लिए इससे भी ज्यादा यूजेस लिमिट्स दी गई हैं.&amp;nbsp;
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बिजनेस और Creators के लिए क्या है?
1. Essential Bundle - Essential Bundle में WhatsApp पर Meta Business Agent के लिए ज्यादा एक्सेस और मैनेजमेंट टूल्स मिलते हैं. यह Agent पूरे दिन ग्राहकों के सवालों का जवाब दे सकता है. सफल वेरिफिकेशन के बाद यूजर्स को Verified Badge, WhatsApp Business ऐप में वेरीफाई चैनल और इंपर्सनेशन प्रोटेक्शन भी मिलता है.&amp;nbsp;
2. Advanced Bundle - Advanced Bundle में प्रोफेशनल ग्रेड टूल्स के साथ Stories को 30 दिन पहले तक शेड्यूल करने, ऑर्गेनिक पोस्ट और रिल्स में लिंक जोड़ने, एक्सपोर्टेबल एनालिटिक्स और ज्यादा गहराई से ऑडियंस इनसाइट देखने जैसे फीचर्स मिलते हैं.&amp;nbsp;
3. &amp;nbsp;Expert और Max &amp;nbsp;- Expert और Max Bundle में Meta Business Agent की सबसे एडवांसड कैपेबिलिटी दी जाती हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Fitbit vs Google Pixel Watch: किसकी Battery Life ज्यादा? जानें फर्क</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल Smartwatch और Fitness Tracker दोनों ही हेल्थ और एक्टिविटी ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन दोनों की Battery Life में काफी फर्क देखने को मिल सकता है. बड़ी स्क्रीन और ज्यादा स्मार्ट फिचर्स वाली Watch को अक्सर जल्दी चार्ज करना पड़ता है, जबकि Screenless Fitness Tracker कई दिनों तक चल सकते है. Fitbit Air और Google Pixel Watch भी इसी तरह के डिवाइस हैं. ऐसे में कई लोग इन दोनों के फीचर्स के साथ बैटरी लाइफ को लेकर भी काफी कंफ्यूज रहते हैं तो आइए जानते हैं कि Fitbit और Google Pixel Watch में किसकी Battery Life ज्यादा है और दोनों में कितना फर्क है.&amp;nbsp;
Fitbit Air कितने दिन चल सकता है?
Fitbit Air को एक बार फुल चार्ज करने पर 7 दिन तक चलने का दावा किया गया है. यह मुख्य रूप से Health Metrics को ट्रैक करता है, जबकि इनका डेटा देखने के लिए फोन की मदद लेनी पड़ती है. असली इस्तेमाल में भी इसका बैटरी बैकअप कंपनी के दावे के करीब ही रहा. एक Reviewer ने इसे लगातार 7 दिन इस्तेमाल किया और आखिर में 15 प्रतिशत बैटरी बाकी थी. वहीं PhoneArena के टेस्ट में 4 दिन बाद इसकी बैटरी 70 प्रतिशत से घटकर 29 प्रतिशत रह गई.&amp;nbsp;
Pixel Watch 4 की Battery कितनी है?
Pixel Watch 4 के 41mm मॉडल की बैटरी Always-On Display ऑन रहने पर 30 घंटे तक चलने का दावा किया गया है. वहीं 45mm मॉडल में बैटरी बैकअप 40 घंटे तक बताया गया है. नई Pixel Watch 5 के लिए भी 40 घंटे की बैटरी लाइफ बताई गई है. हालांकि असली इस्तेमाल में Pixel Watch 4 का बैकअप कंपनी के दावे से ज्यादा पाया गया. Android Central के टेस्ट के मुताबिक 45mm मॉडल करीब 48 घंटे तक चला और इसमें 10 से 15 प्रतिशत बैटरी बाकी थी. वहीं Battery Saver मोड ऑन करने पर Google 45mm मॉडल के लिए 72 घंटे यानी करीब 3 दिन तक का बैकअप बताता है.
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Fitbit और Google Pixel Watch में कितना फर्क है?
Pixel Watch 4 में 3,000-nit AMOLED Display, Speaker, Dual-Frequency GPS और Cellular Models में LTE Radio मिलता है. वहीं Fitbit Air में Display, Built-in GPS और Speaker जैसी चीजें नहीं हैं. यह Location Data जैसी जानकारी के लिए फोन पर निर्भर करता है. यह दोनों डिवाइस अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. Google का सुझाव है कि Pixel Watch को दिन में इस्तेमाल किया जाए, जबकि रात में Sleep Tracking के लिए Fitbit Air पहना जा सकता है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Wi-Fi नेटवर्क में छिपे हैं अनजान यूजर्स? ऐसे करें पहचान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>2nm टेक्नोलॉजी के साथ MediaTek की नई Chip हुई लॉन्च, जानें क्या खास?</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन में AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और इसी के साथ मोबाइल चिप्स भी पहले से ज्यादा पावरफुल और स्मार्ट बन रही हैं. इसी दिशा में MediaTek ने अपनी नई फ्लैगशिप मोबाइल चिप Dimensity 9600 Pro लॉन्च की है. यह कंपनी की पहली स्मार्टफोन चिप है, जिसे TSMC की 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया गया है. इसका फोकस बेहतर परफॉर्मेंस, पावर एफिशिएंसी और फोन पर सीधे ज्यादा AI काम करने पर है. कंपनी ने इसके साथ Dimensity 9600M भी पेश की है, जो TSMC की 3nm प्रोसेस पर बनी है. MediaTek के मुताबिक इन दोनों चिप्स वाले पहले स्मार्टफोन जल्द लॉन्च होंगे.&amp;nbsp;
2nm पर बनी Dimensity 9600 Pro
Dimensity 9600 Pro में कुल 8 CPU कोर दिए गए हैं. इन्हें 2 प्राइम, 3 परफॉर्मेंस और 3 एफिशिएंसी कोर में बांटा गया है. इसमें दो प्राइम कोर 4.55GHz, तीन परफॉर्मेंस कोर 4.35GHz और तीन एफिशिएंसी कोर 3.10GHz तक की स्पीड पर चलते हैं. चिप में नई कैश आर्किटेक्चर के साथ LPDDR6 RAM और UFS 5.0 स्टोरेज का सपोर्ट भी मिलता है. MediaTek के मुताबिक पिछली पीढ़ी के मुकाबले सिंगल-कोर परफॉर्मेंस में 17 प्रतिशत और मल्टी-कोर परफॉर्मेंस में 15 प्रतिशत तक सुधार हुआ है, जबकि मल्टी-कोर पावर खपत 61 प्रतिशत तक कम हुई है.&amp;nbsp;
AI के लिए क्या खास है?
नई चिप में डेडिकेटेड NPU दिया गया है, जो फोन पर ज्यादा मुश्किल Generative AI काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. कंपनी का कहना है कि नए NPU की Prompt Processing क्षमता पिछली पीढ़ी के मुकाबले 51 प्रतिशत बेहतर है. चिप में Agentic AI Engine भी दिया गया है, जिसे 30 अरब पैरामीटर तक के On-Device AI Models को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन किया गया है.
Gaming और Graphics में भी बड़ा Upgrade
ग्राफिक्स के लिए इसमें G2 Ultra NX GPU दिया गया है.MediaTek के मुताबिक यह पिछले मॉडल की तुलना में 27 प्रतिशत तक ज्यादा पीक प्रफोर्मेंस, 24 प्रतिशत कम पावर खपत और 18 प्रतिशत तेज Ray Tracing देता है. इसमें तीसरी पीढ़ी का Ray Tracing Engine भी शामिल है और 185fps तक Mobile Gaming का सपोर्ट बताया गया है.&amp;nbsp;
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Camera और Video में भी खास
Dimensity 9600 Pro में Imagiq 1290 ISP और AI Imaging Fusion Architecture दिया गया है. यह 60fps Motion Capture और 4K-240fps Native Ultra Slow Motion Video को सपोर्ट करता है. कंपनी ने इसके साथ 10MB System Cache वाले GPU और नए Imaging Engines की जानकारी भी दी है.&amp;nbsp;
Dimensity 9600M भी हुई लॉन्च
MediaTek ने Dimensity 9600M को भी पेश किया है, जो 3nm प्रोसेस पर बनी है. इसमें Agentic AI Engine, HyperEngine Gaming Optimization और Dedicated ISP Support दिया गया है. इसका मकसद फ्लैगशिप फोन वाले फीचर्स और क्षमताओं को ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स तक पहुंचाना है.
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Smart बातचीत से Agentic AI तक, Amazon Alexa+ भारत में Free लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ Alexa को भारत में आए करीब आठ साल हो चुके हैं, लेकिन अब Amazon ने अपने Voice Assistant को एक नए AI अवतार में पेश किया है. कंपनी ने Alexa+ को भारत में लॉन्च कर दिया है, जो पुरानी Alexa के मुकाबले ज्यादा स्मार्ट साथ ही नेचुरल बातचीत और कॉम्प्लेक्स रिक्वेस्ट को समझने के लिए डिजाइन किया गया है.
भारत में Alexa+ की शुरुआत Free में की गई है और लॉन्च के समय यह Hindi और Hinglish को भी समझ और बोल सकता है. Amazon के मुताबिक, आने वाले समय में इसमें दूसरी भाषाओं का सपोर्ट भी जोड़ा जाएगा. भारत पहला देश है, जहां Alexa+ को Amazon के Quick-Commerce प्लेटफॉर्म Amazon Now के साथ जोड़ा गया है.&amp;nbsp;
Alexa+ भारत में Free हुआ लॉन्च
Amazon के अनुसार, भारत में Alexa+ आज से सभी यूजर्स के लिए Free उपलब्ध है. Early Access के दौरान इसके लिए किसी Subscription की जरूरत नहीं होगी. Early Access खत्म होने के बाद भी Prime Members के लिए Alexa+ बिना किसी एक्स्ट्रा फीस के उपलब्ध रहेगा.&amp;nbsp;
Hindi और Hinglish में होगी बातचीत
Alexa+ का एक बड़ा इंडिया-स्पेसिफिक फीचर इसका लैंग्वेज सपोर्ट है. कंपनी के मुताबिक, यह लॉन्च के समय Hindi और Hinglish में यूजर्स की बात समझ कर जवाब दे सकता है. इसके अलावा Amazon ने आने वाले समय में और भाषाओं का सपोर्ट जोड़ने की भी पुष्टि की है.&amp;nbsp;
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Alexa+ और Amazon Now का खास Integration
भारत में Alexa+ को Amazon Now के साथ Integrate किया गया है. इसके जरिए यूजर बातचीत के दौरान जरूरत का सामान बताता जाए, तो Alexa+ उसे Amazon Now के Cart में जोड़ सकती है. हालांकि, सामान अपने आप Order नहीं होगा. Order पूरा करने के लिए यूजर को Voice Confirmation देनी होगी.&amp;nbsp;
बातचीत का Context समझेगी Alexa+
नई Alexa+ को ज्यादा Natural Conversation के लिए तैयार किया गया है. अगर यूजर एक ही बातचीत में कई Requests करता है, तो Assistant पिछली बातों का Context समझ सकती है और हर बार वही जानकारी दोहराने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह यूजर की बताई कुछ प्रिफरेंस और जरूरी डिटेल्स को याद रखकर आगे की बातचीत को पर्सनलाइज भी कर सकती है.
Alexa+ सवालों के जवाब देने के अलावा Compatible Smart Home Devices को कंट्रोल करने और स्पॉटेड सर्विसीज पर अलग-अलग टास्क पूरे करने में भी मदद कर सकती है. Amazon के नए Fire और Echo डिवाइस समेत उसके लेटेस्ट Consumer Hardware में Alexa+ पहले से ही उपलब्ध होगी.
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        <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Jio vs Airtel vs Vi, 365 दिन की वैलिडिटी में कौन सा प्लान बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ हर महीने या तीन महीने में रिचार्ज कराने की झंझट से बचने के लिए कई लोग एक साल वाला रिचार्ज प्लान कराते हैं. लेकिन जब Jio, Airtel और Vi जैसे ऑपरेटर अलग-अलग डेटा, कॉलिंग, SMS और दूसरे फायदे वाले प्लान पेश करते हैं, तो सही प्लान चुनना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. किसी प्लान में ज्यादा डेली डेटा मिलता है, तो किसी में ओटीटी सब्सक्रिप्शन या अतिरिक्त डेटा का फायदा दिया जाता है. ऐसे में सिर्फ कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं है. तो आइए जानते हैं 365 दिन की वैलिडिटी वाले Jio, Airtel और Vi के प्लान में क्या-क्या फायदे मिलते हैं और &amp;nbsp;कौन सा प्लान बेस्ट है.
Jio के 365 दिन वाले रिचार्ज प्लान
Jio के पास 365 दिन की वैलिडिटी वाले दो प्लान हैं. जिसमें 3,999 रुपये वाले प्लान में रोज 2.5GB हाई-स्पीड डेटा, अनलिमिटेड वॉयस कॉल और रोज 100 SMS मिलते हैं. पात्र यूजर्स को अनलिमिटेड 5G डेटा भी मिलता है. इसके साथ FanCode, JioTV, 50GB JioAICloud स्टोरेज और JioHotstar का Mobile+ Hollywood सब्सक्रिप्शन मिलता है. इसमें Google Gemini का 18 महीने का Pro Plan भी शामिल है.&amp;nbsp;
वहीं दूसरे 3,599 रुपये वाले प्लान में भी रोज 2.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉल और 100 SMS मिलते हैं. साथ में 120GB अतिरिक्त डेटा, JioTV Pro Pack वाउचर, 50GB JioAICloud स्टोरेज, JioHotstar और 18 महीने का Google Gemini Pro सब्सक्रिप्शन मिलता है.&amp;nbsp;
Airtel के सालाना प्लान में कितने फायदे मिलते हैं?
Airtel के 3,599 रुपये और 3,999 रुपये वाले प्लान की वैलिडिटी एक साल है. 3,599 रुपये वाले प्लान में रोज 2GB डेटा, अनलिमिटेड कॉल और 100 SMS मिलते हैं. 3,999 रुपये वाले प्लान में रोज 2.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉल और 100 SMS दिए जाते हैं. इसमें 12 महीने का Disney+ Hotstar Mobile सब्सक्रिप्शन भी मिलता है. पात्र यूजर्स को दोनों प्लान में अनलिमिटेड 5G डेटा मिलता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - IAF का Dronathon 2026 शुरू, Pokhran में परखे जाएंगे एडवांस्ड ड्रोन सिस्टम
Vi के 365 दिन वाले प्लान&amp;nbsp;
1. Vi के पास सालाना वैलिडिटी वाले कई प्लान हैं. इसके 1,189 रुपये वाले प्लान में 50GB डेटा मिलता है, जबकि 1,849 रुपये वाले प्लान में अनलिमिटेड कॉल और 3,600 SMS मिलते हैं. 2,249 रुपये वाले प्लान में 30GB डेटा, अनलिमिटेड कॉल और 3,600 SMS मिलते हैं.&amp;nbsp;
2. 3,599 रुपये से शुरू होने वाले प्लान में रोज 2GB डेटा के साथ अनलिमिटेड कॉल और 100 SMS मिलते है. &amp;nbsp;इसमें Hero Unlimited के तहत Binge All Night और Weekend Data Rollover जैसे फायदे मिलते हैं.
3. 3,699 रुपये वाले प्लान में Disney+ Hotstar, 3,799 रुपये वाले में Amazon Prime Lite और 3,999 रुपये वाले प्लान में दोनों सब्सक्रिप्शन मिलते हैं. 4,999 रुपये वाले प्लान में 18 से ज्यादा ओटीटी सब्सक्रिप्शन, रोज 2GB डेटा और 200 SMS मिलते हैं.&amp;nbsp;
365 दिन की वैलिडिटी में कौन सा प्लान बेस्ट?
कॉलिंग के लिए और बेसिक सालाना रिचार्ज करने वाले यूजर्स के लिए Vi के कम कीमत वाले प्लान ऑप्शन बेस्ट हो सकते हैं. वहीं ज्यादा मोबाइल डेटा और मेन ओटीटी प्लेटफॉर्म का एक्सेस चाहने वाले यूजर्स के लिए Airtel और Jio के सालाना प्लान ज्यादा सही हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हीरे&amp;सोने से जड़े हैं ये Smartphones, कीमत 1 करोड़ तक; जानें पूरी डिटेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हीरे-सोने-से-जड़े-हैं-ये-smartphones-कीमत-1-करोड़-तक-जानें-पूरी-डिटेल</link>
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        <description><![CDATA[ Apple के iPhone Duo की करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत ने महंगे और प्रीमियम स्मार्टफोन्स को लेकर चर्चा बढ़ा दी है, लेकिन लग्जरी फोन की दुनिया में 3 लाख रुपये भी सबसे ज्यादा कीमत नहीं है. कुछ खास स्मार्टफोन्स की कीमत कई लाख रुपये से लेकर करीब 1 करोड़ रुपये तक पहुंचती है. इन फोन्स को खास बनाने के लिए इनमें सोना, हीरे, रेयर लेदर और हाथ से की गई खास डिजाइनिंग का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ डिवाइसेज में बेहतर सिक्योरिटी, AI फीचर्स और 24 बाय 7 पर्सनल कॉन्सिएर्ज जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. तो आइए जानते हैं कि हीरे-सोने से जड़े इन Smartphones की कीमत और पूरी डिटेल क्या है.
हीरे-सोने से जड़े Smartphones की कीमत और डिटेल&amp;nbsp;
1. VERTU AlphaFold Gold IV और Green Diamond
करीब 95 लाख रुपये वाला VERTU AlphaFold अपने लग्जरी फोल्डेबल डिजाइन के लिए खास है. इसके Gold IV और Green Diamond एडिशन में 8.05-इंच की इनर फोल्डेबल स्क्रीन और 6.53-इंच का आउटर डिस्प्ले है. इसमें एयरोस्पेस-ग्रेड मटेरियल, रेयर एलिगेटर लेदर, सॉलिड गोल्ड डिटेलिंग और रेयर ग्रीन डायमंड्स का इस्तेमाल किया गया है. &amp;nbsp;फोन में Hermes Agent AI, A5 सिक्योरिटी चिप, मल्टी-लेयर्ड प्राइवेसी आर्किटेक्चर और 65W फास्ट चार्जिंग के साथ 6,500mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी दी गई है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;2. Caviar iPhone 17 Pro Max Palmette 18K
करीब 94 लाख रुपये से शुरू होने वाला Caviar iPhone 17 Pro Max Palmette 18K अपने खास ज्वेलरी डिजाइन के लिए जाना जाता है. इसमें सामान्य फोन बॉडी की जगह 18-कैरेट सॉलिड गोल्ड का इस्तेमाल किया गया है. इसके डिजाइन में मिडिल ईस्टर्न आर्ट और UAE के खजूर के पत्तों से प्रेरित बारीक डिजाइनिंग की गई है.
इसके iPhone 17 Pro Max वर्जन में 46 असली हीरे हाथ से लगाए गए हैं, जबकि पीछे Apple लोगो को 58 हीरों से सजाया गया है. यह एडिशन दुनिया भर में कुछ ही यूनिट्स तक सीमित है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - IAF का Dronathon 2026 शुरू, Pokhran में परखे जाएंगे एडवांस्ड ड्रोन सिस्टम&amp;nbsp;
3. VERTU Agent Q Bespoke Himalaya Alligator Skin
करीब 21 लाख रुपये की कीमत वाला VERTU Agent Q लग्जरी डिजाइन के साथ सिक्योरिटी और AI पर भी फोकस करता है. फोन में रेयर हिमालय एलिगेटर लेदर का इस्तेमाल किया गया है. इसमें A5 सिक्योरिटी चिप, ट्रिपल-सिस्टम हार्डवेयर आइसोलेशन और 10TB का एन्क्रिप्टेड पर्सनल डेटा वॉल्ट दिया गया है. &amp;nbsp;इसमें Ruby Key के जरिए VERTU के AI इकोसिस्टम का एक्सेस मिलता है, जिसमें 200 से ज्यादा स्पेशलाइज्ड AI एजेंट्स शामिल हैं. साथ ही 24 बाय 7 रियल-टाइम ह्यूमन कॉन्सिएर्ज सर्विस भी मिलती है.
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>10,000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Redmi का नया फोन! जानें फीचर्स और कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Redmi ने भारतीय मार्केट में अपना नया फोन Redmi Note 17 Pro और Redmi Note 17 Pro Max को उतार दिया है. बता दें कि कंपनी ने इससे पहले Redmi Note 17 को पेश किया गया था. इस नई सीरीज की सबसे बड़ी खास बात ये है कि इस बार फोन में 10,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जो यूजर्स को बहुत लंबा बैकअप देने में सक्षम होगी. आइए जानते हैं फोन के फीचर्स से लेकर कीमत तक सारी डिटेल्स.
कैसे हैं दोनों फोन के फीचर्स
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि Redmi Note 17 Pro Max में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले उपलब्ध कराया है जो 120 हर्ट्ज के रिफ्रेश रेट को भी सपोर्ट करता है. इसके अलावा इसमें Wet Touch 2.0 फीचर भी मौजूद है. परफॉर्मेंस के लिए इसमें 4nm ऑक्टा-कोर Snapdragon 6 Gen 5 प्रोसेसर दिया गया है. ये फोन IP66, IP68 और IP69K रेटिंग के साथ आया है.
कंपनी इस फोन में 6 साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स देने का वादा करती है. इस फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया हुआ है. इसके अलावा इसमें एक 8MP का अल्ट्रावाइड कैमरा भी मौजूद है. सेल्फी के लिए डिवाइस में 32 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है. इसमें 10,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जो 100W के वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 27W के रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है.
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वहीं, दूसरी तरफ Redmi Note 17 Pro में 6.83 इंच 1.5K AMOLED डिस्प्ले और IP66/IP68/IP69K प्रोटेक्शन मिलता है. हालांकि इसमें Snapdragon 6s Gen 4 प्रोसेसर दिया गया है. इसमें भी प्रो मैक्स जैसा ही कैमरा सेटअप दिया हुआ है. लेकिन इसमें सेल्फी के लिए 16 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मौजूद है. इसमें कंपनी ने 9,000mAh की बैटरी दी है जो 67W के फास्ट चार्जिंग और 22.5W के रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है.
कितनी है कीमत
अब इन फोन के कीमत पर नजर डालें तो भारत में Redmi Note 17 Pro की शुरुआती कीमत 36,999 रुपये रखी गई है. ये कीमत 8GB RAM और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की है. वहीं, इसके 8+256GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 39,999 रुपये रखी गई है.
दूसरी ओर, Redmi Note 17 Pro Max की शुरुआती कीमत 49,999 रुपये है. इस कीमत पर 8GB RAM के साथ 256GB स्टोरेज मिलता है. इसका टॉप वेरिएंट 12GB RAM और 256GB स्टोरेज के साथ 55,999 रुपये में आएगा. आपको बता दें कि Redmi Note 17 Pro की बिक्री भारत में 17 सितंबर से शुरू होगी. वहीं Pro Max मॉडल की पहली सेल 23 सितंबर से शुरू होगी. दोनों स्मार्टफोन Amazon के जरिए खरीदे जा सकेंगे.
POCO X8 Pro Max को मिलेगी टक्कर
Redmi का ये फोन POCO X8 Pro Max को कड़ी टक्कर देगा. पोको के इस फोन में 9000mAh की बैटरी देखने को मिल जाती है. इसके अलावा इसमें 6.83 इंच का एमोलेड डिस्प्ले दिया हुआ है. इसके साथ ही ये फोन मीडियाटेक प्रोसेसर पर काम करता है. इसके अलावा इसमें और भी कई सारे बेहतरीन फीचर्स मौजूद हैं. भारत में इस फोन की कीमत करीब 52 हजार रुपये है.
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>10, 000mAh, की, बैटरी, के, साथ, लॉन्च, हुआ, Redmi, का, नया, फोन, जानें, फीचर्स, और, कीमत</media:keywords>
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        <title>म्यूजिक, कॉल और रोजाना इस्तेमाल के लिए 4 TWS ईयरबड्स, जानें इनमें क्या खास?</title>
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        <description><![CDATA[ TWS ईयरबड्स आजकल रोजमर्रा के इस्तेमाल में काफी आम हो गए हैं. लोग इनका इस्तेमाल म्यूजिक सुनने, वीडियो देखने, कॉल करने और अलग-अलग डिवाइस के साथ कनेक्ट करने के लिए करते हैं. ऐसे में सिर्फ अच्छी आवाज ही नहीं, बल्कि ANC, बैटरी, कनेक्टिविटी और दूसरे फीचर्स भी जरूरी हो गए हैं.
boAt के Nirvana Zenith Pro, Airdopes Prime 800D, Airdopes Prime 701 ANC और Airdopes Plus 222 अलग-अलग फीचर्स के साथ आते हैं. आइए जानते हैं इनमें क्या खास है?
boAt Nirvana Zenith Pro
Nirvana Zenith Pro में 50dB तक का हाइब्रिड अडैप्टिव एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन (ANC) मिलता है. सामान्य ANC एक तय स्तर पर शोर कम करता है, जबकि अडैप्टिव ANC आसपास के माहौल के हिसाब से नॉइस कैंसिलेशन को बदल सकता है.
इसमें LDAC के जरिए Hi-Res Audio का सपोर्ट मिलता है. साथ ही, बेहतर और ज्यादा इमर्सिव साउंड के लिए boAt Spatial Audio भी दिया गया है.
ईयरबड्स ASAP Charge के साथ 80 घंटे तक का प्लेबैक दे सकते हैं. कंपनी के स्पेसिफिकेशन के मुताबिक, 10 मिनट की चार्जिंग से 250 मिनट तक प्लेबैक मिल सकता है.
कॉल के लिए इसमें AI-ENx टेक्नोलॉजी के साथ 6 माइक्रोफोन दिए गए हैं. इसमें 12mm ड्राइवर्स और boAt Signature Sound भी मिलता है.
इसके अलावा Mimi का Adaptive EQ फीचर यूजर्स को अपनी सुनने की जरूरत के हिसाब से पर्सनलाइज्ड हियरिंग प्रोफाइल बनाने की सुविधा देता है.
boAt Airdopes Prime 800D
Airdopes Prime 800D में Dolby Audio और 11mm डायनेमिक ड्राइवर्स दिए गए हैं. इसमें boAt Signature Sound मिलता है.
चार्जिंग केस के साथ ईयरबड्स कुल 45 घंटे तक का प्लेबैक देते हैं. कॉलिंग के लिए इसमें AI-ENx टेक्नोलॉजी के साथ 4 माइक्रोफोन दिए गए हैं.
इसमें Multipoint Connectivity भी है. इसकी मदद से ईयरबड्स को एक साथ दो डिवाइस से कनेक्ट किया जा सकता है.
अगर आप अक्सर फोन और लैपटॉप के बीच स्विच करते हैं तो यह फीचर काम आ सकता है. जरूरत के मुताबिक, ईयरबड्स कनेक्टेड डिवाइस के बीच ऑडियो स्विच कर सकते हैं.
boAt Airdopes Prime 701 ANC
Airdopes Prime 701 ANC में 46dB हाइब्रिड एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन और 50 घंटे तक का प्लेबैक मिलता है. हाइब्रिड ANC में ईयरबड्स के अंदर और बाहर मौजूद माइक्रोफोन आसपास की आवाज को पहचानते हैं. इससे बाहर के शोर को कम करने में मदद मिलती है. कंपनी के मुताबिक, Hybrid ANC सामान्य ANC की तुलना में 40% तक बेहतर नॉइस कैंसिलेशन दे सकता है.
इसमें ASAP Charge है. 10 मिनट की चार्जिंग के बाद 180 मिनट तक प्लेबैक मिल सकता है. इस ईयरबड्स में 24-bit boAt Spatial Audio और Multipoint Connectivity भी दी गई है.
कॉल के लिए 4 माइक्रोफोन और AI-ENx टेक्नोलॉजी दी गई है, जिसे बैकग्राउंड नॉइज वाले माहौल में ज्यादा बेहतरीन कॉल के लिए डिजाइन किया गया है.
Prime 701 ANC में Google Gemini के साथ CREST AI भी दिया गया है. इसमें 25 भाषाओं तक आमने-सामने ट्रांसलेशन, AI आधारित लर्निंग और चैट फीचर्स और आवाज के जरिए डिवाइस कंट्रोल जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
boAt Airdopes Plus 222
Airdopes Plus 222 में 60 घंटे तक की बैटरी लाइफ मिलती है. इसमें 13mm ड्राइवर्स दिए गए हैं, जिन्हें दमदार और साफ ऑडियो के लिए डिजाइन किया गया है. म्यूजिक और वीडियो के लिए इसमें Immersive Spatial Audio भी मिलता है.
यूजर्स boAt Hearables App के जरिए ईयरबड्स को कस्टमाइज कर सकते हैं. इसमें टच कंट्रोल और फर्मवेयर अपडेट जैसे विकल्प मिलते हैं. ऐप में Ring My Buds फीचर भी दिया गया है.
इसमें Dual-Pairing Multipoint Connectivity और गेमिंग के लिए BEAST Mode दिया गया है, जिसमें 55ms की लो लेटेंसी मिलती है. इसमें Siri और Google Assistant के लिए Voice Assistant सपोर्ट भी है.
कीमत और उपलब्धता



मॉडल
कीमत
उपलब्धता


boAt Nirvana Zenith Pro
₹3,199
boAt Website, Amazon, Flipkart


boAt Airdopes Prime 800D
₹1,999
boAt Website, Amazon, Flipkart


boAt Airdopes Prime 701 ANC
₹2,599
boAt Website, Amazon, Flipkart


boAt Airdopes Plus 222
₹1,099
boAt Website, Amazon



कौन-सा TWS ईयरबड आपके लिए है?
इन चारों मॉडल को अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर पेश किया गया है. म्यूजिक सुनने वाले यूजर्स ऑडियो फीचर्स को प्राथमिकता दे सकते हैं. ज्यादा कॉल करने वालों के लिए माइक्रोफोन टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण हो सकती है. वहीं, कई डिवाइस इस्तेमाल करने वालों के लिए Multipoint Connectivity काम की हो सकती है. गेमिंग करने वाले यूजर्स लो-लेटेंसी मोड वाले मॉडल पसंद कर सकते हैं.

Nirvana Zenith Pro में ANC, LDAC, पर्सनलाइज्ड ऑडियो, Spatial Audio और 80 घंटे तक का प्लेबैक मिलता है.
Prime 800D में Dolby Audio, कॉलिंग फीचर्स और Multipoint Connectivity दी गई है.
Prime 701 ANC में नॉइस कैंसिलेशन और CREST AI फीचर्स मिलते हैं.
Airdopes Plus 222 में ज्यादा बैटरी लाइफ, Spatial Audio, ऐप के जरिए कस्टमाइजेशन और गेमिंग से जुड़े फीचर्स दिए गए हैं.

डिस्क्लेमर: यह एक Sponsored Article है. ABP Network Pvt. Ltd. और/या ABP Live इस आर्टिकल में दी गई सामग्री या इसमें व्यक्त विचारों का किसी भी तरह समर्थन नहीं करता है. पाठकों को अपने विवेक से जानकारी का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Apple Watch की Hidden Settings आएंगी काम, यूजर्स जरूर जानें ये Tricks</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Watch की Hidden Settings आएंगी काम, यूजर्स जरूर जानें ये Tricks ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 18 Pro की डिलीवरी में देरी, अक्टूबर तक करना होगा इंतजार</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अब एक नया अपडेट सामने आया है. Apple ने पिछले हफ्ते अपने Surprise and Shine इवेंट में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च किया था. इसके बाद 12 सितंबर से दोनों फोन के लिए प्री-ऑर्डर शुरू हो गए. कंपनी ने 18 सितंबर से स्टोर्स में इनकी बिक्री शुरू होने की बात कही थी. लेकिन शुरुआती प्री-ऑर्डर के बाद अब ऑनलाइन स्टोर पर डिलीवरी की तारीख आगे बढ़ती दिखाई दे रही है. भारत समेत कई देशों में नए ऑर्डर की डिलीवरी सितंबर के आखिर से लेकर अक्टूबर तक पहुंच गई है.
iPhone 18 Pro की डिलीवरी कब?
iPhone 18 Pro के लिए फिलहाल 29 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच की अनुमानित डिलीवरी डेट बताई जा रही है. यह डिलीवरी डेट उपलब्ध अलग-अलग कलर और स्टोरेज वेरिएंट पर लागू है. जो ग्राहक अब iPhone 18 Pro ऑर्डर करते हैं, उन्हें 18 सितंबर की लॉन्च डेट पर फोन मिलने की उम्मीद कम है. हालांकि, जिन ग्राहकों ने शुरुआती समय में प्री-ऑर्डर किया है, उन्हें 18 सितंबर से फोन मिलने की उम्मीद है. इसी दिन Apple Stores पर भी नए iPhone का शुरुआती स्टॉक उपलब्ध होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
iPhone 18&amp;nbsp; Pro Max के लिए कितना इंतजार?
iPhone 18 Pro Max की डिलीवरी के लिए ग्राहकों को भारत में और ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है. इसकी अनुमानित डिलीवरी 6 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच बताई जा रही है. अभी Pro Max ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को 18 सितंबर की बिक्री शुरू होने के बाद भी कई हफ्तों तक इंतजार करना पड़ सकता है. अमेरिका में भी डिलीवरी का अनुमान आगे बढ़ चुका है. वहां iPhone 18 Pro की डिलीवरी 29 सितंबर से 6 अक्टूबर और iPhone 18 Pro Max की 6 अक्टूबर से 13 अक्टूबर के बीच बताई जा रही है. हालांकि, नए ऑर्डर और स्टॉक के हिसाब से ये अनुमान बदल सकते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - iPhone Duo के बाद आएगा और भी बड़ा Duo Max? रिपोर्ट में हुआ खुलासा
iPhone 18 सीरीज कीमत और कलर ऑप्शन
iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को 256GB, 512GB, 1TB और 2TB स्टोरेज ऑप्शनों में पेश किया गया है. भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए है, जबकि iPhone 18 Pro Max 1,79,900 रुपए से शुरू होता है. साथ ही फोन Burgundy, Glacier, Silver और Black &amp;nbsp;में ऑप्शनों उपलब्ध हैं. अलग-अलग स्टोरेज और कलर के हिसाब से डिलीवरी का समय बदल सकता है.&amp;nbsp;
अभी ऑर्डर करने से पहले क्या देखें?
अगर आपको iPhone 18 Pro या Pro Max तुरंत चाहिए, तो ऑर्डर करने से पहले Apple Store पर दिखाई जा रही डिलीवरी डेट जरूर देखना जरूरी है. फिलहाल Pro मॉडल की अनुमानित डिलीवरी Pro Max के मुकाबले पहले है, जबकि Pro Max के लिए अक्टूबर तक की तारीख बताई जा रही है. वहीं, शुरुआती प्री-ऑर्डर करने वाले ग्राहकों के लिए 18 सितंबर की डिलीवरी अभी भी जरूरी तारीख बनी हुई है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - 2500 के बजट में कौन से Earbuds खरीदें? देखें यहां ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन साफ करते समय आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-साफ-करते-समय-आप-भी-तो-नहीं-कर-रहे-ये-गलती-हो-जाएगा-बड़ा-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ फोन साफ करते समय आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? हो जाएगा बड़ा नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>क्या होता है Bluetooth LE? जानें नॉर्मल वाले से कैसे है अलग</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड, वायरलेस सेंसर और कई दूसरे डिवाइस को आपस में कनेक्ट करने के लिए Bluetooth का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन Bluetooth की दुनिया में एक नाम अक्सर सुनने को मिलता है Bluetooth LE यानी Bluetooth Low Energy. जैसा कि नाम से साफ है, इसे खास तौर पर कम पावर में वायरलेस कनेक्शन देने के लिए डिजाइन किया गया है. आइए जानते हैं कि Bluetooth LE क्या है और ये नॉर्मल Bluetooth से कैसे अलग है.
Bluetooth LE क्या होता है?
जानकारी के मुताबिक, Bluetooth LE का पूरा नाम Bluetooth Low Energy है. इसे ऐसे डिवाइस के लिए बनाया गया है जिन्हें लंबे समय तक बैटरी पर चलना होता है और जिन्हें लगातार ज्यादा डेटा ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं होती है. जैसे स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर, वायरलेस सेंसर, स्मार्ट होम डिवाइस और कुछ हेल्थ मॉनिटरिंग गैजेट्स Bluetooth LE का फायदा उठाते हैं. ये डिवाइस छोटी-छोटी जानकारियां समय-समय पर फोन या दूसरे डिवाइस तक भेजते हैं, इसलिए इनके लिए ज्यादा पावर खपत वाला कनेक्शन जरूरी नहीं होता है.
नॉर्मल Bluetooth और Bluetooth LE में अंतर
नॉर्मल Bluetooth को नॉर्मली लगातार ऑडियो या ज्यादा डेटा ट्रांसफर जैसे कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. वायरलेस हेडफोन और स्पीकर इसका सबसे उदाहरण हैं. वहीं Bluetooth LE को कम डेटा वाले कामों के लिए ज्यादा बेहतर माना जाता है.
Bluetooth LE का सबसे बड़ा फायदा कम बिजली की खपत है. इसका मतलब है कि बैटरी से चलने वाले छोटे डिवाइस लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. दूसरी तरफ, नॉर्मल Bluetooth में लगातार डेटा ट्रांसफर के कारण पावर की खपत ज्यादा होती है.
क्या Bluetooth LE की रेंज कम होती है?
ऐसा जरूरी नहीं है. दरअसल, Bluetooth LE की रेंज केवल इसके नाम या Low Energy होने से तय नहीं होती है. इस्तेमाल किए गए Bluetooth वर्जन, हार्डवेयर, एंटीना और आसपास के वातावरण के आधार पर रेंज अलग-अलग हो सकती है.
यह भी पढ़ें: कितने टाइप के होते हैं Bluetooth? जानें कौन-सा वाला किस काम आता है
Bluetooth LE का मकसद ज्यादा पावर खर्च करके लगातार कनेक्शन बनाए रखना नहीं है बल्कि जरूरत के मुताबिक कम एनर्जी में डिवाइस को कम्युनिकेशन की सुविधा देना है.
क्या Bluetooth LE से ऑडियो चल सकता है?
आपको बता दें कि पहले Bluetooth LE का इस्तेमाल मेनली सेंसर और कम डेटा वाले कनेक्शन के लिए किया जाता था. लेकिन अब Bluetooth LE Audio ने इसकी पावर को काफी बढ़ा दिया है. इसके जरिए वायरलेस ऑडियो के लिए कम पावर वाले नए तरीके उपलब्ध हुए हैं.
LE Audio में LC3 codec जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है जो कम डेटा रेट पर भी बेहतर ऑडियो एक्सपीरिएंस देने के लिए डिजाइन की गई है. इससे भविष्य के वायरलेस ईयरबड्स और हेडफोन में बैटरी बचाने के साथ कई नए फीचर्स संभव हैं.
Bluetooth LE क्यों है खास?
Bluetooth LE की सबसे बड़ी खासियत है कम पावर में कनेक्टिविटी. यही वजह है कि छोटी बैटरी वाले गैजेट्स में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड, स्मार्ट सेंसर और IoT डिवाइस जैसे प्रोडक्ट्स के लिए ये काफी कारगर टेक्नोलॉजी साबित होती है.
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>iOS 18 अपडेट को लेकर Apple पर बढ़ी मुश्किलें, iPhone रिपेयर के खर्च पर CCPA की जांच</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के लिए भारत में iOS 18 से जुड़ा मामला अब गंभीर होता जा रहा है. iOS 18 अपडेट के बाद कुछ iPhone यूजर्स ने स्क्रीन, माइक्रोफोन और दूसरी दिक्कतों की शिकायत की थी. इन शिकायतों के बाद भारत की सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने Apple की सॉफ्टवेयर वारंटी और रिपेयर पॉलिसी की जांच तेज कर दी है.
75 शिकायतों के बाद जांच हुई तेज
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, CCPA के पास Apple के खिलाफ करीब 75 शिकायतें पहुंची थीं. शिकायतों में आरोप लगाया गया कि iOS 18 अपडेट के बाद कुछ iPhone में स्क्रीन और माइक्रोफोन जैसी समस्याएं सामने आईं. इसके बाद यूजर्स को डिवाइस ठीक कराने के लिए अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ी. अब मामले को CCPA की जांच शाखा को डिटेल्ड जांच के लिए भेज दिया गया है.
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CCPA इस बात की भी जांच कर रहा है कि अगर किसी सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद फोन में समस्या आती है तो ऐसी कंडिशन में रिपेयर का खर्च कंज्यूमर से लेना उचित है या नहीं.
Apple की सॉफ्टवेयर वारंटी बनी बड़ा मुद्दा
इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा Apple की सॉफ्टवेयर वारंटी है. Apple के सॉफ्टवेयर लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, सॉफ्टवेयर किसी तरह की वारंटी के बिना उपलब्ध कराया जाता है. कंपनी की सीमित वारंटी मुख्य रूप से हार्डवेयर को कवर करती है. यही प्रावधान अब CCPA की जांच के दायरे में है.
iPhone 15 की स्क्रीन के लिए ₹27,900 का खर्च
मामले में सामने आए मामले में iPhone 15 की स्क्रीन रिपेयर का लगभग खर्च करीब ₹27,900 बताया गया है. ये रकम फोन की शुरुआती कीमत के एक बड़े हिस्से के बराबर है. ऐसे में अगर कोई यूजर सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद आई कथित समस्या के कारण स्क्रीन रिपेयर कराने को मजबूर होता है तो उसके लिए ये काफी बड़ा फाइनेंशियल बोझ हो सकता है.
यही वजह है कि CCPA यह देखना चाहता है कि ऐसी कंडिशन में कंपनी की जिम्मेदारी कितनी बनती है और कंज्यूमर को किस तरह की सुरक्षा मिलनी चाहिए.
Apple ने क्या कहा?
Apple ने इन आरोपों के बीच अपनी कंडिशन साफ कर दी है. कंपनी का कहना है कि iOS 18 को रिलीज करने से पहले इसकी अच्छे से टेस्टिंग की गई थी. Apple ने ये भी कहा है कि सॉफ्टवेयर वारंटी को लेकर उसकी शर्तें इंस्टॉलेशन से पहले यूजर्स के सामने रखी जाती हैं और इस तरह की व्यवस्था इंडस्ट्री में नॉर्मल है. कंपनी के अनुसार, जून 2026 तक केवल करीब 11 प्रतिशत डिवाइस iOS 18 पर चल रहे थे.
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iOS, अपडेट, को, लेकर, Apple, पर, बढ़ी, मुश्किलें, iPhone, रिपेयर, के, खर्च, पर, CCPA, की, जांच</media:keywords>
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        <title>Solar से चलानी है Washing Machine? जानें कितने पैनल होंगे जरूरी</title>
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        <description><![CDATA[ बिजली की बढ़ती जरूरत और महंगे बिल के बीच सोलर पावर अब घरों में भी तेजी से इस्तेमाल की जा रही है. लोग रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक्स अप्लायंस को सोलर से चलाने के ऑप्शन ढूंढ रहे हैं. वॉशिंग मशीन भी इन्हीं अप्लायंस में शामिल है, जिसे चलाने के लिए कितनी सोलर पावर चाहिए, यह जानना आपके लिए भी काम का हो सकता है. ऐसे में अगर आप वॉशिंग मशीन को भी सोलर से चलाने का सोच रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसके लिए कितने सोलर पैनल चाहिए होंगे. वॉशिंग मशीन की बिजली खपत और सोलर पैनल की क्षमता के आधार पर पैनल की जरूरत अलग हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि Solar से वॉशिंग मशीन चलाने के लिए कितने पैनल जरूरी होंगे.&amp;nbsp;
एक वॉशिंग मशीन को कितनी बिजली चाहिए?
किसी अप्लायंस की बिजली खपत जानने के लिए उसकी पावर रेटिंग देखी जा सकती है. अगर रेटिंग एम्पियर में दी गई है और सर्किट का वोल्टेज पता है, तो एम्पियर को वोल्ट से मिलाकर वाट निकाला जा सकता है. इसके बाद रोजाना इस्तेमाल के घंटों के हिसाब से बिजली की खपत को kWh में बदला जा सकता है. जैसे105 kWh सालाना बिजली इस्तेमाल करने वाली वॉशिंग मशीन करीब 0.29 kWh बिजली रोजाना इस्तेमाल करती है.&amp;nbsp;
Solar से वॉशिंग मशीन चलाने के लिए कितने पैनल जरूरी होंगे?
अगर कोई वॉशिंग मशीन पूरे साल में करीब 105 kWh बिजली खर्च करती है, तो उसकी रोजाना बिजली खपत लगभग 0.29 kWh होगी. ऐसे में 400W का एक सोलर पैनल सालभर में करीब 572 kWh बिजली बना सकता है. इस हिसाब से एक ही सोलर पैनल वॉशिंग मशीन की पूरे साल की बिजली जरूरत पूरी करने के लिए काफी है, लेकिन सोलर पैनल से मिलने वाली बिजली धूप, मौसम, पैनल की दिशा, तापमान और छाया के हिसाब से कम-ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
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सोलर सिस्टम लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
सोलर सिस्टम लगाते समय सबसे पहले वॉशिंग मशीन की सालाना बिजली खपत को देखना चाहिए. साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि पैनल पर लिखी क्षमता और उससे मिलने वाली असली बिजली अलग हो सकती है. धूप, मौसम, पैनल की दिशा और उस पर पड़ने वाली छाया का भी बिजली उत्पादन पर असर पड़ता है. अगर सोलर सिस्टम ग्रिड से नहीं जुड़ा है और वॉशिंग मशीन को रात या कम धूप में चलाना है, तो बैटरी और इन्वर्टर की जरूरत पड़ सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - फोन साफ करते समय आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? हो जाएगा बड़ा नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>फोन में अचानक दिखने लगा No Service, चेक करें ये चीज</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार फोन इस्तेमाल करते समय अचानक नेटवर्क गायब हो जाता है और स्क्रीन पर No Service लिखा दिखाई देने लगता है. इसके बाद न तो कॉल आती है और न ही कॉल लगती है. इंटरनेट भी काम करना बंद कर देता है. ऐसी स्थिति में सबसे पहले लोग अपना फोन खराब समझ लेते हैं, लेकिन हर बार समस्या फोन में ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है.
कई बार SIM, नेटवर्क कवरेज या फोन की कुछ सेटिंग के कारण भी यह परेशानी आ सकती है. अगर आपके फोन में भी अचानक No Service दिख रहा है तो बिना घबराए कुछ चीजें चेक कर लें. कई बार छोटी सी सेटिंग बदलने या फोन को दोबारा शुरू करने से ही नेटवर्क वापस आ जाता है.
सबसे पहले Airplane Mode चेक करें
अगर फोन में अचानक नेटवर्क चला गया है तो सबसे पहले Airplane Mode चेक करें. कई बार यह गलती से ऑन हो जाता है और फोन का मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाता है. स्क्रीन पर जाकर देखें कि Airplane Mode चालू तो नहीं है. अगर यह ऑन है तो उसे बंद कर इसके बाद फोन दोबारा नेटवर्क पकड़ लेता है. अगर Airplane Mode पहले से बंद है तो उसे करीब 10 सेकंड के लिए ऑन करके फिर बंद भी कई बार इस ट्रिक से भी नेटवर्क आने लगता है.
SIM कार्ड को भी जरूर देखें
No Service दिखने की एक वजह SIM कार्ड भी हो सकता है. अगर SIM ठीक से फोन में नहीं लगी है या SIM में कोई दिक्कत है तो नेटवर्क नहीं आएगा. ऐसी स्थिति में फोन बंद करके SIM निकालें और दोबारा लगाएं. अगर आपके पास दूसरा फोन है तो SIM को उसमें लगाकर भी देख सकते हैं. अगर दूसरे फोन में भी नेटवर्क नहीं आता है तो समस्या SIM या नेटवर्क की होती है. वहीं अगर दूसरे फोन में नेटवर्क आ रहा है और आपके फोन में भी दिक्कत हो सकती है.
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नेटवर्क सेटिंग को एक बार चेक करें
फोन की नेटवर्क सेटिंग में भी गड़बड़ी होने पर No Service दिखाई दे सकता है. सेटिंग्स में जाकर मोबाइल नेटवर्क या SIM सेटिंग्स खोलें और देखें कि आपकी SIM एक्टिव है या नहीं. नेटवर्क ओपरेटर को आटोमेटिक पर रखने से फोन नेटवर्क को पकड़ लेता है. अगर आपने हाल ही में कोई नेटवर्क सेटिंग बदली है तो उसे दोबारा एक बार देख लें. अगर इसके बाद भी नेटवर्क नहीं आता तो फोन को एक बार रिस्टार्ट.
कहीं नेटवर्क कवरेज की समस्या तो नहीं
कई बार फोन में No Service इसलिए आता है क्योंकि आप ऐसी जगह पर हैं जहां मोबाइल नेटवर्क अच्छा नही आ रहा हो. बेसमेंट, लिफ्ट, पहाड़ी इलाके या किसी बंद जगह में ऐसा हो सकता है. ऐसी स्थिति में खुली जगह पर जाकर कुछ देर इंतजार करें. अगर आसपास दूसरे लोगों के उसी नेटवर्क के फोन में भी सिग्नल नहीं आ रहे हैं तो नेटवर्क या कंपनी की तरफ से समस्या हो सकती है.
फिर भी नेटवर्क न आए तो क्या करें
अगर SIM सही है, सेटिंग भी ठीक है और दूसरी जगह जाने पर भी No Service बना हुआ है तो नेटवर्क कंपनी से बात करना सबसे अच्छा ऑप्शन है. अगर समस्या सिर्फ आपके फोन में है तो सर्विस सेंटर पर फोन की जांच कराएं खासकर अगर फोन गिरने, पानी लगने या किसी दूसरी परेशानी के बाद नेटवर्क गायब हुआ है तो हार्डवेयर की जांच करना जरूरी है.
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>ChatGPT हिस्ट्री डिलीट करने पर डेटा कहां जाता है? समझें AI चैट का पूरा सिस्टम</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT पर रोजाना कई तरह की बातचीत होती है. इनमें कुछ चैट ऐसी होती हैं जिन्हें यूजर बाद में दोबारा देखना चाहता है, जबकि कुछ बातचीत ऐसी होती हैं जिन्हें वह हिस्ट्री से हटाना पसंद करता है. ChatGPT में इसके लिए डिलीट और आर्काइव जैसे अलग-अलग ऑप्शन मिलते हैं, लेकिन कई लोग इसे लेकर कंफ्यूज होते हैं कि किसी चैट को डिलीट करने के बाद उसका क्या होता है और क्या उसे दोबारा वापस लाया जा सकता है.
OpenAI के मुताबिक, डिलीट की गई बातचीत को ChatGPT के इंटरफेस, API या सपोर्ट के जरिए वापस नहीं पाया जा सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ChatGPT हिस्ट्री डिलीट करने पर डेटा कहां जाता है.&amp;nbsp;
ChatGPT में चैट कैसे डिलीट करते हैं?
ChatGPT की चैट हिस्ट्री में जिस बातचीत को हटाना चाहते हैं, उसे सबसे पहले साइडबार में खोजें. इसके बाद उस चैट के नाम के पास दिखाई दे रहे तीन डॉट पर क्लिक या टैप करें. अब दिखाई दे रहे ऑप्शनों में Delete पर क्लिक करें और चैट को हटाने का ऑप्शन चुनें. इसके बाद यह बातचीत आपकी चैट हिस्ट्री से हट जाएगी और दोबारा हिस्ट्री में दिखाई नहीं देगी.&amp;nbsp;
ChatGPT हिस्ट्री डिलीट करने पर डेटा कहां जाता है?
ChatGPT में किसी चैट को डिलीट करने पर वह आपकी चैट हिस्ट्री से तुरंत हट जाती है और OpenAI के अनुसार उसे 30 दिनों के अंदर सिस्टम से स्थायी रूप से डिलीट करने के लिए शेड्यूल किया जाता है. डिलीट की गई चैट को ChatGPT इंटरफेस, API या सपोर्ट के जरिए दोबारा रिकवर नहीं किया जा सकता है. हालांकि अगर कोई चैट हिस्ट्री में दिखाई नहीं दे रही है, तो हो सकता है कि वह डिलीट होने की जगह आर्काइव की गई हो.
आर्काइव चैट कैसे देखें?
आर्काइव की गई चैट अकाउंट में सेव रहती है. इसे देखने के लिए सबसे पहले ChatGPT की Settings खोलें. इसके बाद Data controls सेक्शन में जाएं और Archived chats के सामने दिए गए Manage ऑप्शन पर टैप करें. यहां आपको पहले से आर्काइव की गई सभी चैट दिखाई देंगी, जिन्हें आप जरूरत के हिसाब से देख या दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं. यहां चैट मिलने पर Unarchive ऑप्शन से उसे वापस हिस्ट्री में लाया जा सकता है.&amp;nbsp;
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जरूरी चैट को सुरक्षित रखने का तरीका क्या है?
यूजर ChatGPT की Settings खोलें. इसके बाद Data controls सेक्शन में जाएं और Export data के जरिए अपना ChatGPT डेटा एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं. हालांकि चैट एक बार डिलीट हो जाने के बाद उसे दोबारा रिकवर नहीं किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>अमेरिका से कितना अलग है भारत में बिकने वाला iPhone 18 Pro Max? जानें अंतर</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने iPhone 18 Pro Max को लेकर एक दिलचस्प बदलाव किया है. फोन भारत में भी बनाया जा रहा है लेकिन अमेरिका में बिकने वाले मॉडल में एक अहम हार्डवेयर अंतर है. ये अंतर फोन के नेटवर्क कनेक्टिविटी सिस्टम से जुड़ा है और विदेश से iPhone खरीदने वालों के लिए जानना जरूरी है.
भारत में बन रहा iPhone 18 Pro Max
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Apple अब भारत को iPhone की मैन्युफैक्चरिंग के लिए लगातार अहम बना रहा है. iPhone 18 Pro Max की ग्लोबल बिक्री के साथ भारत में भी इसका प्रोडक्शन किया जा रहा है.
हालांकि, एक ही मॉडल नाम होने के बावजूद अलग-अलग मार्केटों के लिए फोन के अंदर इस्तेमाल होने वाला हार्डवेयर पूरी तरह एक जैसा नहीं है. भारत में मिलने वाले iPhone 18 Pro Max में Apple का नया C2 मॉडेम दिया गया है. ये Apple का लेटेस्ट सेलुलर मॉडेम है जिसे कंपनी ने बेहतर नेटवर्क परफॉर्मेंस और पावर एफिशिएंसी के लिए तैयार किया है.
अमेरिकी मॉडल में Qualcomm मॉडेम
आपको बता दें कि सबसे बड़ा अंतर अमेरिकी iPhone 18 Pro Max में देखने को मिलता है. Apple की टेक्निकल जानकारी के अनुसार, iPhone 18 Pro Max में C2 मॉडेम दुनिया के ज्यादातर बाजारों में इस्तेमाल किया गया है लेकिन अमेरिका में बिकने वाले Pro Max मॉडल में C2 की जगह Qualcomm का मॉडेम लगाया गया है.
अभी Apple ने ये साफ नहीं किया है कि अमेरिकी मॉडल में Qualcomm के किस खास मॉडेम का इस्तेमाल हुआ है. हालांकि, रिपोर्ट्स में Qualcomm Snapdragon X85 को संभावित विकल्प बताया जा रहा है. इसका मतलब है कि अमेरिका और भारत में बिकने वाले iPhone 18 Pro Max के अंदर नेटवर्क से जुड़ा हार्डवेयर अलग हो सकता है.
आखिर अमेरिका में क्यों बदला मॉडेम?
इस बदलाव की ऑफिशियल वजह Apple ने नहीं बताई है. एक संभावित कारण Qualcomm के साथ पुराने सप्लाई समझौते को माना जा रहा है. Qualcomm ने पहले Apple को 2026 तक स्मार्टफोन मॉडेम उपलब्ध कराने की जानकारी दी थी.
यह भी पढ़ें: एक iPhone 18 Pro को बनाने में कितनी लागत लगती है? जानें पूरा हिसाब-किताब
दिलचस्प बात ये है कि Apple अब धीरे-धीरे अपने खुद के C-Series मॉडेम पर निर्भरता बढ़ा रहा है. iPhone 18 Pro में C2 मॉडेम दुनियाभर में दिया गया है जबकि Pro Max के अमेरिकी वेरिएंट में Qualcomm वाला ऑप्शन रखा गया है.
SIM को लेकर भी बड़ा अंतर
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मॉडेम के अलावा अमेरिका और भारत के मॉडल में SIM को लेकर भी मार्केट बेस्ड अंतर है. भारत में iPhone 18 Pro Max nano-SIM और eSIM दोनों को सपोर्ट करता है.
वहीं अमेरिकी मॉडल पूरी तरह eSIM-only है और इसमें फिजिकल SIM कार्ड नहीं लगाया जा सकता. Apple ने अमेरिका समेत कुछ देशों में इसी व्यवस्था को अपनाया है.
यानी अगर आप विदेश से iPhone 18 Pro Max खरीदने की सोच रहे हैं तो केवल कीमत देखकर फैसला न करें. मॉडल नंबर, SIM सपोर्ट और मॉडेम वेरिएंट जरूर चेक करें.
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: 1980s AI रेट्रो सेल्फी की कीमत कितनी? ChatGPT पर आपकी फोटो से होते ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980s का रेट्रो लुक वाला AI फोटो ट्रेंड जोरों पर है. लोग अपनी सेल्फी AI टूल्स में डालकर उन्हें बड़े बाल, विंटेज कपड़े, पुराने स्टूडियो बैकड्रॉप और फिल्म जैसे टेक्सचर वाले पोर्ट्रेट में बदल रहे हैं. प्रोसेस दिखने में बेहद आसान लगता है यानी फोटो अपलोड करो, प्रॉम्प्ट टाइप करो और कुछ सेकंड में इमेज तैयार. इसके पीछे काम करने वाला फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बिजली खाता है, गर्मी पैदा करता है और ठंडा होने के लिए पानी पीता है...
एक AI इमेज में कितनी बिजली लगती है?
इसका कोई एक फिक्स नंबर नहीं है. AiEnsured के CTO डॉ. श्रीनिवास पद्मनाभुनी का अनुमान है कि एक AI इमेज बनाने में करीब 1.2 वॉट-घंटे बिजली खर्च हो सकती है. मास्कटेक ग्रुप के CTO रित्विक बताब्याल कहते हैं कि यह नंबर मॉडल और डिप्लॉयमेंट के हिसाब से वॉट-घंटे के फ्रैक्शन से लेकर कई वॉट-घंटे तक हो सकता है.
AI&amp;amp;Beyond के को-फाउंडर जसप्रीत बिंद्रा का अनुमान 0.1 से 4 वाट-घंटे प्रति इमेज का है. यह अंतर इसलिए है क्योंकि मॉडल का साइज, हार्डवेयर और वर्कलोड का असर एनर्जी फुटप्रिंट पर पड़ता है.
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, इमेज जनरेशन सिंपल टेक्स्ट-बेस्ड टास्क्स से कहीं ज्यादा एनर्जी-इंटेंसिव है. 2026 की UN यूनिवर्सिटी की एक एसेसमेंट में अनुमान लगाया गया कि एक टिपिकल AI-जनरेटेड इमेज को बेसिक टेक्स्ट-क्लासिफिकेशन टास्क से करीब 1,450 गुना ज्यादा एनर्जी लगती है.
असली समस्या एक इमेज नहीं बल्कि स्केल
एक आम इंसान के लिए कुछ वाट-घंटे बहुत छोटी मात्रा है, लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब यह मास एक्टिविटी बन जाती है. लोग आमतौर पर एक ही इमेज नहीं बनाते. पहला वर्जन चेहरा सही न दिखने पर रिजेक्ट हो जाता है, दूसरे प्रॉम्प्ट में कपड़े बदले जाते हैं और तीसरे में लाइटिंग. कई वर्जन बनाने के बाद फाइनल इमेज शेयर होती है.
एक वायरल ट्रेंड इसलिए लाखों इन्फरेंस टास्क्स में बदल जाता है. यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी (UNU) का अनुमान है कि 2022 और 2023 में टेक्स्ट-टू-इमेज सिस्टम्स से 15 बिलियन से ज्यादा इमेज जनरेट हुईं. 2023 में रोजाना करीब 34 मिलियन AI इमेज बन रही थीं. मौजूदा 1980s ट्रेंड में कितनी इमेज बनीं, इसका कोई भरोसेमंद सार्वजनिक आंकड़ा नहीं है, इसलिए इसका कुल एनर्जी या वाटर फुटप्रिंट बताना अटकलबाजी होगी.
पानी की लागत: दो चम्मच से लेकर बड़े संकट तक
बिजली सिर्फ आधी कहानी है. डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए पानी की जरूरत होती है और बिजली बनाने में भी पानी लगता है. UNU की 2026 एसेसमेंट के मुताबिक, 2030 तक AI चलाने वाले डेटा सेंटर्स को सालाना 945 टेरावाट-घंटे बिजली की जरूरत हो सकती है.
इससे जुड़ा वॉटर फुटप्रिंट 9.3 ट्रिलियन लीटर तक पहुंच सकता है, जो सब-सहारन अफ्रीका के 1.3 बिलियन लोगों की सालाना घरेलू पानी की जरूरत के बराबर है. लैंड फुटप्रिंट 14,500 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो सकता है.
एक सिंगल AI इमेज का वाटर फुटप्रिंट कितना है?
UNU का अनुमान है कि एक AI इमेज का बिजली-जुड़ा वाटर फुटप्रिंट करीब 29 मिलीलीटर है, यानी लगभग दो चम्मच. यह नंबर डेटा सेंटर की लोकेशन, कूलिंग टेक्नोलॉजी, लोकल क्लाइमेट, बिजली का मिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की एफिशिएंसी पर निर्भर करता है.
IEA के मुताबिक, एक AI इमेज बनाने में करीब 23 मिलीलीटर पानी लगता है. यह एक इमेज के लिए छोटा लगता है, लेकिन जब रोजाना करोड़ों इमेज बनती हैं, तो सालाना खर्च 200 ओलंपिक-साइज स्विमिंग पूल भरने के बराबर हो सकता है.
एनर्जी और पानी के अलावा सेल्फी का डेटा कहां जाता है?
इस ट्रेंड का एक और पहलू है जिस पर कम बात होती है- आपकी फोटो का क्या होता है. रेट्रो लुक पाने के लिए आपको एक साफ, अच्छी रोशनी वाली सेल्फी AI टूल को देनी पड़ती है, कई बार कई फोटो.
सिक्योरिटी रिसर्चर्स महीनों से चेतावनी दे रहे हैं कि हाई-रिजॉल्यूशन सेल्फी में चेहरे की ज्योमेट्री, स्किन टेक्सचर और क्लोज-अप शॉट्स में उंगलियों के निशान भी निकाले जा सकते हैं. पासवर्ड की तरह चेहरा रीसेट नहीं हो सकता.
सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई प्लेटफॉर्म अपलोड की गई इमेज को रख लेते हैं. बहुत कम यूजर्स टर्म्स एंड कंडीशन्स पढ़ते हैं कि उनकी फोटो अगले मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल हो सकती है या नहीं.
इस पर रेगुलेशन बहुत कमजोर है यानी कुछ खास कानूनों को छोड़कर कोई सख्त सामान्य नियम नहीं है जो कंपनी को आपकी फन के लिए अपलोड की गई सेल्फी दोबारा इस्तेमाल करने से रोके.
AI बूम सिर्फ सॉफ्टवेयर की कहानी नहीं
AI के बढ़ने के साथ डेटा सेंटर कैपेसिटी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. IEA के अप्रैल 2026 के मुताबिक, 2025 में ग्लोबल डेटा सेंटर बिजली की खपत तेजी से बढ़ी और AI के विस्तार के साथ यह और तेजी से बढ़ने वाली है. पांच बड़ी टेक कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2025 में 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा था और 2026 में इसमें 75% और बढ़ोतरी की उम्मीद है.
IEA की रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर्स से बिजली की खपत 2025 में 485 TWh से बढ़कर 2030 तक 950 TWh हो सकती है, जो ग्लोबल बिजली मांग का करीब 3% होगा. AI-फोकस्ड डेटा सेंटर्स की बिजली खपत 2025 में 50% बढ़ी.
UNU का अनुमान है कि 80 से 90 प्रतिशत AI एनर्जी इस्तेमाल इन्फरेंस में होता है यानी जब डिप्लॉयड मॉडल असल में इस्तेमाल किए जा रहे होते हैं, न कि ट्रेनिंग के दौरान. रोजाना करीब 2.5 बिलियन ChatGPT प्रॉम्प्ट्स चलते हैं, जो दिखाता है कि रोजमर्रा का AI इस्तेमाल कैसे एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर लोड में बदल जाता है.
तो क्या AI इमेज बनाना बंद कर देना चाहिए?
एक AI-जनरेटेड इमेज का एनवायर्नमेंटल फुटप्रिंट रोजमर्रा के कई एमिशन और रिसोर्स इस्तेमाल की तुलना में काफी छोटा है. असली सवाल यह है कि जब AI इमेज जनरेशन इतना आसान हो जाता है कि लोग अरबों इमेज बनाते हैं, तो क्या होता है. यहीं एफिशिएंसी गेन मायने रखती है.
AI मॉडल्स को ज्यादा एफिशिएंट बनाया जा सकता है, हार्डवेयर बेहतर हो  ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>स्मार्टफोन से पहले का टेक दौर, RadioShack के 12 यादगार गैजेट</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन से पहले का टेक दौर, RadioShack के 12 यादगार गैजेट ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>लैपटॉप के Webcam के पास क्यों बने होते हैं ये छोटे&amp;छोटे छेद? ये है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ लैपटॉप की स्क्रीन के ऊपर लगे Webcam को तो आपने जरूर देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी उसके आसपास बने छोटे-छोटे छेदों पर गौर किया है? कई लोग इन्हें कैमरे का हिस्सा समझते हैं जबकि इनमें से कुछ छेद का कैमरे से कोई मतलब नहीं होता है. इन छोटे छेदों का लैपटॉप की आवाज, वीडियो कॉल और प्राइवेसी से खास कनेक्शन हो सकता है.
Webcam के पास छेद आखिर किस काम आते हैं?
लैपटॉप के Webcam के आसपास बने छोटे छेदों में सबसे नॉर्मली पर माइक्रोफोन छिपा होता है. आज के ज्यादातर लैपटॉप में इन-बिल्ट माइक्रोफोन दिए जाते हैं ताकि यूजर को वीडियो कॉल या ऑनलाइन मीटिंग के दौरान अलग से माइक्रोफोन लगाने की जरूरत न पड़े. माइक्रोफोन के लिए बनाया गया छेद बाहर से बेहद छोटा दिखाई देता है. इसके पीछे सेंसर या माइक्रोफोन कंपोनेंट लगा होता है जो आपकी आवाज को पकड़कर लैपटॉप तक पहुंचाता है.
एक नहीं, दो माइक्रोफोन भी हो सकते हैं
कई एडवांस लैपटॉप में Webcam के आसपास एक से ज्यादा छोटे छेद दिखाई देते हैं. इसकी वजह ये है कि उनमें डुअल या मल्टीपल माइक्रोफोन दिए जाते हैं. इनका काम सिर्फ आपकी आवाज रिकॉर्ड करना नहीं बल्कि आसपास के शोर को कम करने में भी मदद करना होता है.
जैसे मान लिजिए अगर आप वीडियो कॉल के दौरान पंखे, AC या आसपास लोगों की आवाज के बीच बात कर रहे हैं तो लैपटॉप का माइक्रोफोन सिस्टम आपकी आवाज को अलग से पहचानने की कोशिश करता है. इसी टेक्नोलॉजी की मदद से कॉल के दौरान आवाज साफ सुनाई देती है.
Noise Cancellation में भी होती है मदद
कुछ लैपटॉप में माइक्रोफोन की ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें एक माइक्रोफोन आपकी आवाज पकड़ता है जबकि दूसरा आसपास की आवाजों को पहचानने में मदद करता है. इसके बाद सॉफ्टवेयर इन दोनों सिग्नल का एनालिसिस करके अनचाहे बैकग्राउंड नॉइज को कम कर सकता है.
यही कारण है कि Webcam के पास दिखने वाले हर छोटे छेद को कैमरे का हिस्सा समझना सही नहीं है. कुछ छेद लैपटॉप के ऑडियो सिस्टम का जरूरी हिस्सा होते हैं.
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हर छेद माइक्रोफोन का नहीं होता
यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. हर लैपटॉप में Webcam के पास बने सभी छोटे छेद माइक्रोफोन के लिए हों, ये जरूरी नहीं है. अलग-अलग कंपनियां और मॉडल अपने डिजाइन के हिसाब से इनकी जगह बदल सकती हैं.
कुछ डिजाइन में Webcam के पास LED इंडिकेटर, सेंसर या दूसरे हार्डवेयर कंपोनेंट्स के लिए भी छोटी ओपनिंग हो सकती है. इसलिए सिर्फ देखकर किसी छेद का काम तय नहीं किया जा सकता है.
इन्हें गलती से बंद न करें
अगर आपके लैपटॉप में Webcam के पास माइक्रोफोन का छेद है तो उसे स्टिकर, टेप या किसी दूसरी चीज से ढकने से बचना चाहिए. ऐसा करने पर माइक्रोफोन की आवाज कम हो सकती है और वीडियो कॉल के दौरान सामने वाले व्यक्ति को आपकी आवाज ठीक से सुनाई नहीं देगी.
इसलिए अगली बार लैपटॉप के Webcam के पास ये छोटे-छोटे छेद दिखाई दें तो उन्हें सिर्फ डिजाइन का हिस्सा न समझें. इनमें छिपा छोटा-सा माइक्रोफोन आपके वीडियो कॉल और ऑनलाइन मीटिंग की आवाज को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>लैपटॉप, के, Webcam, के, पास, क्यों, बने, होते, हैं, ये, छोटे-छोटे, छेद, ये, है, वजह</media:keywords>
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        <title>AI से लेकर रोबोटिक्स तक, BRICS में दिखे 37 डीप&amp;टेक इनोवेशन</title>
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        <description><![CDATA[ भारत अब टेक्नोलॉजी के साथ नई और खास तकनीकों को विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसकी झलक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन में देखने को मिली. यहां AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, समुद्री रोबोटिक्स, फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसी अलग-अलग तकनीकों पर काम कर रहे 37 भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप और उद्यमों ने अपने इनोवेशन पेश किए.
यह प्रदर्शनी 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के साथ 11 और 12 सितंबर 2026 को आयोजित की गई. इसका मकसद भारतीय रिसर्च लैब, स्टार्टअप और रिसर्च पार्क से निकलने वाले इनोवेशन को दुनिया के सामने लाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों से जोड़ना है.&amp;nbsp;
BRICS में दिखे 37 डीप-टेक इनोवेशन
नई दिल्ली में आयोजित BRICS प्रदर्शनी में भारत के 37 डीप-टेक इनोवेशन को प्रदर्शित किया गया. शिक्षा मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से इस प्रदर्शनी का आयोजन किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य BRICS नेताओं ने भारतीय डीप-टेक तकनीकों से जुड़े स्टॉलों का दौरा किया और देश की उभरती टेक्नोलॉजी क्षमताओं की जानकारी ली. प्रदर्शनी में शामिल स्टार्टअप्स ने हेल्थकेयर, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और टेलीकम्युनिकेशन जैसे क्षेत्रों में अपने समाधान पेश किए.
AI से होगी कैंसर स्क्रीनिंग और हार्ट की जांच
Periwinkle Technologies ने AI आधारित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग और ट्रायेज प्लेटफॉर्म पेश किया. यह तकनीक 60 सेकंड से भी कम समय में कैंसर के जोखिम का आकलन करने में सक्षम है. वहीं, Tricog Health ने AI-पावर्ड कार्डियक इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किया. यह सिस्टम रियल टाइम ECG डायग्नोसिस और मरीजों की प्राथमिकता तय करने में मदद करता है. कंपनी के अनुसार, इसका यूज 12,000 से ज्यादा स्वास्थ्य सुविधाओं में हो रहा है और यह 3.5 करोड़ से ज्यादा मरीजों को कवर कर चुका है.
क्वांटम कंप्यूटर से लेकर समुद्री रोबोट तक
QpiAI ने सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट पर आधारित क्वांटम कंप्यूटरों की अपनी रेंज दिखाई. इसमें रिसर्च और शिक्षा के लिए 8-क्यूबिट वाला Qvidya, एडवांस्ड रिसर्च और हाइब्रिड कंप्यूटिंग के लिए 25-क्यूबिट वाला Indus और स्केलेबिलिटी के लिए डिजाइन किया गया 64-क्यूबिट प्रोसेसर Kaveri शामिल हैं.
EyeRov ने जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच के लिए स्वदेशी मरीन रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म पेश किया. इसमें रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल, ऑटोनॉमस सरफेस व्हीकल और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल के साथ AI एनालिटिक्स भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
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सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भी इनोवेशन
Quantsolar Technologies ने मुश्किल जल निकायों पर यूज किए जा सकने वाले फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्लेटफॉर्म को प्रदर्शित किया. यह तकनीक अलग-अलग तरह के जल क्षेत्रों में सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने के लिए तैयार की गई है. Chara Technologies ने रेयर-अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक पावरट्रेन तकनीक पेश की. कंपनी का उद्देश्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को ज्यादा स्किल, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में काम करना है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Google Account की ये 5 सेटिंग्स अभी बदलें! वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में Google Account सिर्फ Gmail चलाने तक सीमित नहीं है. इसी एक अकाउंट से Google Photos, Drive, YouTube, Contacts और कई दूसरी सेवाएं जुड़ी होती हैं. ऐसे में अगर Google Account की सिक्योरिटी सेटिंग्स कमजोर हैं तो आपकी पर्सनल जानकारी से लेकर जरूरी फाइलों तक पर खतरा मंडरा सकता है. अच्छी बात ये है कि कुछ जरूरी सेटिंग्स बदलकर अकाउंट की सुरक्षा काफी मजबूत की जा सकती है.
2-Step Verification जरूर ऑन करें
Google Account को सुरक्षित रखने के लिए सबसे जरूरी सेटिंग 2-Step Verification है. इसे एक्टिव करने के बाद सिर्फ पासवर्ड से अकाउंट में लॉगिन नहीं किया जा सकता. लॉगिन के दौरान एक्सट्रा वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती है. इससे अगर किसी को आपका पासवर्ड पता भी चल जाए तो उसके लिए अकाउंट में डॉयरेक्ट एंट्री करना मुश्किल हो जाता है.
Security Checkup जरूर करें
Google Account में Security Checkup का ऑप्शन दिया जाता है, जहां आप अकाउंट की सुरक्षा से जुड़ी कई चीजों की जांच कर सकते हैं. यहां ये देखा जा सकता है कि किन डिवाइस पर आपका अकाउंट लॉगिन है, कौन-से ऐप्स या सर्विस आपके Google Account से जुड़ी हैं और कहीं कोई संदिग्ध एक्टिविटी तो नहीं हुई. अगर कोई अनजान डिवाइस दिखाई दे तो तुरंत उसे अकाउंट से साइन आउट कर देना बेहतर है.
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पुराने और कमजोर पासवर्ड से बचें
अगर आपका Google Account पासवर्ड काफी पुराना है या आपने उसे दूसरी वेबसाइटों पर भी इस्तेमाल किया है तो उसे बदलने का समय आ गया है. एक ही पासवर्ड को कई जगह इस्तेमाल करने पर किसी दूसरी वेबसाइट का डेटा लीक होने की कंडिशन में आपका Google Account भी खतरे में पड़ सकता है. पासवर्ड ऐसा रखें जिसे आसानी से अनुमान न लगाया जा सके और अलग-अलग सर्विसेज के लिए अलग पासवर्ड का इस्तेमाल करें.
थर्ड-पार्टी ऐप्स की Access चेक करें
कई बार हम किसी ऐप या वेबसाइट को Google Account से साइन-इन करने के लिए परमिशन दे देते हैं और बाद में उसे भूल जाते हैं. समय-समय पर Google Account में जाकर देखें कि किन थर्ड-पार्टी ऐप्स को आपके अकाउंट की परमिशन मिली हुई है. जिस ऐप या वेबसाइट का अब इस्तेमाल नहीं करते, उसकी एक्सेस हटा दें. इससे अनावश्यक डेटा एक्सेस का जोखिम कम किया जा सकता है.
Recovery Phone और Email अपडेट रखें
Google Account का Recovery Phone Number और Recovery Email बेहद जरूरी होते हैं. पासवर्ड भूलने या अकाउंट में किसी तरह की समस्या आने पर इन्हीं की मदद से अकाउंट वापस हासिल करने का मौका मिलता है. इसलिए ये जरूर जांच लें कि रिकवरी नंबर आपका चालू नंबर है और Recovery Email भी ऐसा है जिसे आप नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं.
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Duo में नहीं मिलेंगे iPhone 18 Pro के ये खास फीचर्स, खरीदने से पहले जान लें बड़ा अंतर</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Duo में नहीं मिलेंगे iPhone 18 Pro के ये खास फीचर्स, खरीदने से पहले जान लें बड़ा अंतर ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>बारिश में भीग गया फोन? भूलकर भी तुरंत न लगाएं चार्जर, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ बारिश में भीग गया फोन? भूलकर भी तुरंत न लगाएं चार्जर, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Bluetooth Mouse और Wireless Mouse में क्या है अंतर! जानें कौन सा होता है बेहतर?</title>
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        <description><![CDATA[ Bluetooth Mouse और Wireless Mouse में क्या है अंतर! जानें कौन सा होता है बेहतर? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Duo के लिए बजट की टेंशन खत्म, 40 हजार रुपए से शुरू ये फोल्डेबल फोन</title>
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        <description><![CDATA[ फोल्डेबल फोन अब सिर्फ महंगे प्रीमियम डिवाइस तक सीमित नहीं रह गए हैं. Apple ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone Duo करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ पेश किया है. यह कीमत कई यूजर्स के बजट से काफी बाहर हो सकती है. हालांकि अगर आपको भी फोल्ड होने वाला फोन पसंद है और आप इसके लिए इतना बड़ा बजट नहीं रखना चाहते, तो भारत में कुछ सस्ते ऑप्शन मौजूद हैं. Tecno, Ai+, Motorola और Samsung के कई फोल्डेबल फोन कम कीमत में क्लैमशेल डिजाइन, AMOLED डिस्प्ले और कवर स्क्रीन जैसे फीचर्स देते हैं. इनमें कुछ मॉडल करीब 40 हजार रुपये से शुरू होते हैं. तो आइए जानते हैं कि 40 हजार रुपए से शुरू फोल्डेबल फोन कौन-से हैं.&amp;nbsp;
Tecno Phantom V Flip
करीब 40 हजार रुपये के बजट में Tecno Phantom V Flip एक ऑप्शन हो सकता है. इसमें 6.9 इंच का FHD+ Foldable AMOLED डिस्प्ले है, जो LTPO टेक्नोलॉजी के साथ 10Hz से 120Hz तक अडैप्टिव रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. बाहर 1.32 इंच की AMOLED कवर स्क्रीन दी गई है. फोन का वजन 194 ग्राम है और इसमें MediaTek Dimensity 8050 चिपसेट, 8GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलती है. &amp;nbsp;कैमरे में 64MP मेन और 13MP अल्ट्रावाइड कैमरा है. सेल्फी के लिए 32MP फ्रंट कैमरा दिया गया है. मेन कैमरे से 4K वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है. फोन में 4,000mAh बैटरी और 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलता है.
Ai+ NovaFlip 5
Ai+ NovaFlip 5G की ऑफिशियल लिस्टिंग में 8GB RAM और 256GB स्टोरेज मॉडल की कीमत 49,999 रुपये है. इसमें 6.9 इंच का FHD+ AMOLED मेन डिस्प्ले और 3 इंच की AMOLED कवर स्क्रीन मिलती है. फोन में 2.5GHz तक की प्राइमरी क्लॉक-स्पीड वाला MediaTek ऑक्टा-कोर प्रोसेसर और Android 15 दिया गया है. इसमें 50MP + 2MP का डुअल रियर कैमरा सेटअप, 32MP फ्रंट कैमरा और 4,325mAh बैटरी मिलती है. फोन 5G, NFC और Bluetooth 5.4 सपोर्ट करता है.
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Motorola Razr 50
Motorola Razr 50 में 6.9 इंच की pOLED मुख्य स्क्रीन और बाहर एक बड़ी कवर स्क्रीन दी गई है. इससे फोन खोले बिना कई छोटे काम किए जा सकते हैं. इसमें MediaTek Dimensity 7300X चिपसेट, 8GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलता है. फोन में 4,200mAh बैटरी है, जो 30W वायर्ड और 15W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करती है. Motorola की भारतीय वेबसाइट पर इसका 8GB+256GB मॉडल 44,999 रुपये है.&amp;nbsp;
Samsung Galaxy Z Flip 5
Samsung Galaxy Z Flip 5 में 6.7 इंच की Dynamic AMOLED 2X स्क्रीन है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करती है. बाहर 3.4 इंच की कवर स्क्रीन मिलती है. फोन Snapdragon 8 Gen 2 चिपसेट, 8GB RAM और 256GB या 512GB स्टोरेज ऑप्शन के साथ आता है. इसमें 12MP + 12MP का रियर कैमरा सेटअप, 10MP सेल्फी कैमरा और 3,700mAh बैटरी दी गई है. फोन 25W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Duo, के, लिए, बजट, की, टेंशन, खत्म, हजार, रुपए, से, शुरू, ये, फोल्डेबल, फोन</media:keywords>
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        <title>Laptop नहीं है? 3 सस्ती एक्सेसरीज से फोन को बनाएं मिनी कंप्यूटर</title>
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        <description><![CDATA[ Laptop नहीं है? 3 सस्ती एक्सेसरीज से फोन को बनाएं मिनी कंप्यूटर ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp की स्टोरेज हो रही फुल? बिना चैट डिलीट किए ऐसे बनाएं जगह</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp पर आने वाली फोटो, वीडियो और फाइलें धीरे-धीरे फोन की स्टोरेज भर देती हैं. इससे Storage is Full का मैसेज दिख सकता है और चैट बैकअप भी फेल हो सकता है. हालांकि, स्टोरेज खाली करने के लिए पूरी चैट डिलीट करने की जरूरत नहीं है. WhatsApp में मौजूद एक यूजफुल टूल की मदद से गैर-जरूरी फोटो, वीडियो और फाइलों को चुनकर हटाया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि बिना चैट डिलीट किए WhatsApp में कैसे जगह बनाएं.&amp;nbsp;
WhatsApp का कौन-सा टूल करेगा मदद?
WhatsApp में Manage Storage नाम का एक टूल मिलता है. इसे यूज करने के लिए WhatsApp Settings में जाएं और Storage and Data सेक्शन खोलें. यहां आपको Manage Storage का ऑप्शन दिखाई देगा. यह टूल बताता है कि WhatsApp और उसमें सेव मीडिया फाइलें कितनी स्टोरेज यूज कर रही हैं. साथ ही, फोन में कितनी जगह खाली है, इसकी जानकारी भी मिलती है.
इसमें आप 5MB से बड़ी फाइलों को अलग से देख सकते हैं. इसके अलावा, बार-बार फॉरवर्ड की गई फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और ऑडियो फाइलें भी दिखाई देती हैं. कई बार अलग-अलग ग्रुप में एक ही तरह की फाइलें बार-बार आने से फोन में डुप्लीकेट फाइलें जमा हो जाती हैं. Storage Manager की मदद से इन्हें पहचान कर हटाया जा सकता है.&amp;nbsp;
बिना चैट डिलीट किए WhatsApp में कैसे जगह बनाएं?
1. सबसे पहले WhatsApp खोलें. iPhone में नीचे दिए गए You मेन्यू पर टैप करें. Android में ऊपर दाईं ओर मौजूद तीन डॉट वाले मेन्यू को खोलें.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;अब Settings में Manage Storage पर जाएं, यहां आपको WhatsApp में स्टोरेज यूज होने की जानकारी मिलेगी.&amp;nbsp;
3. Larger than 5MB सेक्शन खोलें. इसमें 5MB से बड़ी फाइलों की लिस्ट दिखाई देगी. किसी फाइल को हटाने के लिए उस पर टैप करके होल्ड करें. सभी फाइलें चुनने के लिए Select All का ऑप्शन यूज कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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4. इसके बाद वापस Manage Storage पेज पर जाएं और Forwarded many times सेक्शन खोलें. यहां मौजूद गैर-जरूरी फॉरवर्डेड फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और ऑडियो फाइलों को चुनकर डिलीट करें.&amp;nbsp;
5. अगर फिर भी स्टोरेज खाली नहीं होती है, तो अलग-अलग पर्सनल चैट या ग्रुप चैट खोलें. वहां मौजूद बड़ी या गैर-जरूरी मीडिया फाइलों को चुनकर हटाया जा सकता है.&amp;nbsp;
6. WhatsApp से गैर-जरूरी मीडिया हटाने पर क्लाउड बैकअप का साइज कम हो सकता है. इससे दूसरे फोन पर स्विच करते समय बैकअप से जुड़ी परेशानियां भी कम हो सकती हैं.&amp;nbsp;
इन सेटिंग्स से भी बचा सकते हैं स्टोरेज
WhatsApp में Media Auto-Download को बंद करना भी यूजफुल हो सकता है. इससे हर फोटो या वीडियो अपने आप डाउनलोड नहीं होगा और आपको जरूरत के हिसाब से फाइल डाउनलोड करनी पड़ेगी. जिन ग्रुप्स को आप अक्सर चेक नहीं करते, उनमें Disappearing Messages का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टैबलेट खरीदने का प्लान है? Lenovo और Samsung के इन मॉडल्स पर डालें नजर</title>
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        <description><![CDATA[ टैबलेट खरीदते समय बड़ी स्क्रीन या ज्यादा स्टोरेज देखना काफी नहीं होता है. लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करने के लिए अलग-अलग फीचर्स काम आते हैं. ऐसे में बाजार में मौजूद कई मॉडल्स में से अपने लिए सही टैबलेट चुनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. अगर आप भी नया टैबलेट लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो Lenovo और Samsung के कुछ मॉडल्स पर नजर डाल सकते हैं. इन टैबलेट्स में अलग-अलग स्क्रीन, प्रोसेसर, बैटरी और स्टोरेज ऑप्शन दिए गए हैं, जिससे जरूरत के हिसाब से चुनाव किया जा सकता है.&amp;nbsp;
Samsung के इन मॉडल्स पर डालें नजर
1. Samsung Galaxy Tab S11 Ultra 5G - इसकी कीमत 1,29,999 रुपए है. इसमें 14.6 इंच का 120Hz Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले मिलता है.टैबलेट में 12GB RAM, 512GB स्टोरेज और 11,600mAh की बड़ी बैटरी दी गई है. &amp;nbsp;
2. Samsung Galaxy Tab S11 - इसकी कीमत 67,498 रुपए &amp;nbsp;है. इसमें 11 इंच का 120Hz Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 12GB RAM के साथ 128GB, 256GB और 512GB स्टोरेज का ऑप्शन मिलता है.&amp;nbsp;
3. Samsung Galaxy Tab S10 Plus - इसकी कीमत 79,999 रुपए है. इसमें 12.4 इंच का 120Hz Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले मिलता है. टैबलेट में 12GB RAM और 256GB स्टोरेज दी गई है.&amp;nbsp;
4. Samsung Galaxy Tab S10 Lite 5G - इसकी कीमत 38,999 रुपए &amp;nbsp;है. इसमें 10.9 इंच का 90Hz TFT LCD डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 6GB या 8GB RAM और 128GB या 256GB स्टोरेज का ऑप्शन है.&amp;nbsp;
Lenovo के बेस्ट टैबलेट
1. Lenovo Yoga Tab Plus 512GB - इसकी कीमत 63,999 रुपए है. इसमें 12.7 इंच का 144Hz डिस्प्ले मिलता है. टैबलेट में 16GB RAM और 512GB तक स्टोरेज दी गई है.&amp;nbsp;
2. Lenovo Idea Tab Pro 256GB - इसकी कीमत 41,999 रुपए है. इसमें 12.7 इंच का 144Hz LCD डिस्प्ले दिया गया है. इसमें 8GB या 12GB RAM और 256GB तक स्टोरेज का ऑप्शन मिलता है.&amp;nbsp;
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3. Lenovo Idea Tab Plus - इसकी कीमत 36,999 रुपए है. इसमें 12.1 इंच का 90Hz LCD डिस्प्ले मिलता है. टैबलेट में 12GB RAM और 256GB स्टोरेज दी गई है, जिसे 1TB तक बढ़ाया जा सकता है.&amp;nbsp;
4. Lenovo Tab Plus 256GB - इसकी कीमत 23,999 रुपए है. इसमें 11.5 इंच का 90Hz LCD डिस्प्ले दिया गया है. टैबलेट में 8GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलती है.&amp;nbsp;
कम कीमत में ये मॉडल भी देख सकते हैं
कम बजट में Samsung का Galaxy Tab A11 LTE आपको 14,999 रुपए कीमत और Galaxy Tab A11 &amp;nbsp;वाला टेब 15,999 रुपए कीमत से मिल रहा है. Lenovo की तरफ से Tab M11 WiFi + Cellular भी 13,999 रुपए कीमत, Tab M10 (3rd Gen) 13,399 रुपए कीमत और Tab M9 LTE 9,799 रुपए कीमत में कम बजट वाले ऑप्शन शामिल हैं. इनमें स्क्रीन और बैटरी का साइज अलग-अलग है, इसलिए बजट के साथ अपनी जरूरत के हिसाब से मॉडल चुना जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>टैबलेट, खरीदने, का, प्लान, है, Lenovo, और, Samsung, के, इन, मॉडल्स, पर, डालें, नजर</media:keywords>
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        <title>स्मार्टवॉच की हरी लाइट का राज खुला! जानें हर वक्त जलती क्यों रहती है?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके पास स्मार्टवॉच या फिटनेस बैंड है तो आपने इसके पीछे लगी हरी रोशनी जरूर देखी होगी. कई बार ये लाइट लगातार जलती रहती है और देखकर लगता है कि आखिर इसका काम क्या है. क्या ये सिर्फ डिजाइन का हिस्सा है या फिर इसके पीछे कोई खास टेक्नोलॉजी काम करती है? आइए जानते हैं कि आखिर क्यों जलती रहती है ये लाइट.
हरी लाइट क्यों जलती है?
जानकारी के अनुसार, स्मार्टवॉच के पीछे लगी हरी LED मेन रूप से हार्ट रेट यानी दिल की धड़कन मापने के लिए इस्तेमाल होती है. इसके लिए घड़ी में एक टेक्नोलॉजी होती है जिसे फोटोपीथिस्मोग्राफी (PPG) कहा जाता है.
ये टेक्नोलॉजी आपकी स्किन पर रोशनी डालकर शरीर में बह रहे खून की मात्रा में होने वाले बदलावों को पहचानती है. जब दिल धड़कता है तो उस समय ब्लड का फ्लो थोड़ा बढ़ जाता है. इसी बदलाव को सेंसर लगातार रिकॉर्ड करता है और उसके आधार पर आपकी हार्ट रेट का अंदाजा लगाया जाता है.
हरी रोशनी ही क्यों होती है?
अब सवाल आता है कि स्मार्टवॉच में हरी LED ही क्यों लगाई जाती है? इसकी वजह हरी रोशनी का खून में मौजूद हीमोग्लोबिन के साथ खास तरह से इंटरैक्ट करना है. हरी रोशनी स्किन में प्रवेश करने के बाद ब्लड के फ्लो में होने वाले बदलाव को पहचानने में सेंसर की मदद करती है.
घड़ी की LED स्किन पर रोशनी डालती है और साथ मौजूद फोटोडायोड ये देखता है कि कितनी रोशनी वापस आ रही है. इस डेटा को सॉफ्टवेयर प्रोसेस करता है और उससे दिल की धड़कन की गणना की जाती है.
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हर वक्त क्यों जलती रहती है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपको ये हरी लाइट हर समय जलती हुई इसलिए दिखाई देती है क्योंकि स्मार्टवॉच लगातार आपकी हार्ट रेट मॉनिटर कर रही होती है. खासकर जब आप वर्कआउट कर रहे हों, तब सेंसर ज्यादा एक्टिव हो जाता है.
कुछ स्मार्टवॉच आराम की कंडिशन में भी समय-समय पर हार्ट रेट चेक करती हैं. इस वजह से LED थोड़ी देर के लिए जलती और फिर बंद होती दिखाई दे सकती है. लगातार जलती हुई दिखने का मतलब ये जरूरी नहीं कि सेंसर में कोई खराबी है.
क्या इससे आंखों या स्किन को नुकसान होता है?
नॉर्मली स्मार्टवॉच में इस्तेमाल होने वाली ये LED कम पावर वाली होती है और नॉर्मल इस्तेमाल के लिए डिजाइन की जाती है. इसे सीधे आंखों में चमकाने के लिए नहीं बनाया गया है. हालांकि, अगर घड़ी पहनने पर स्किन में लगातार जलन, लालिमा या असहजता महसूस हो तो उसे कुछ समय के लिए उतार देना बेहतर है.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>यमन के आतंकियों ने AI से बनाई मिसाइल, Anthropic का चौंकाने वाला खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ तकनीक की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और डराने वाला मामला सामने आया है. अब तक हम सभी जानते थे कि एआई इंसानों के काम को आसान बना रहा है, लेकिन अब इसका इस्तेमाल खतरनाक हथियारों को बनाने में भी होने लगा है.
हाल ही में Anthropic ने अपनी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि यमन के एक थ्रेट एक्टर यानी आतंकी गुट ने इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जगह उनके एआई टूल Claude AI का इस्तेमाल करके मिसाइल प्रोग्राम के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया. इस खबर के सामने आने के बाद पूरी दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञों और टेक जगत में खलबली मच गई है.
तीन बड़े मिसाइल प्रोजेक्ट्स पर चल रहा था काम
Anthropic की सुरक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी यमन के एक सक्रिय सेल ने क्लोड एआई का इस्तेमाल तीन अलग-अलग हथियारों के प्रोग्राम को एक साथ चलाने के लिए किया. यह गुट एक गाइडेड रॉकेट, 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल और आर-2000 नाम की मिसाइल सीरीज पर काम कर रहा था, जिसमें एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी शामिल है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गुट ने किसी इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मदद नहीं ली, बल्कि Claude AI के कई अकाउंट्स को एक साथ मिलाकर एक पूरी टीम की तरह काम पर लगा दिया.
एआई अकाउंट्स को बांट दी गई थी जिम्मेदारी
इस आतंकी सेल ने एआई का इस्तेमाल करने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया. उन्होंने Claude AI के अलग-अलग अकाउंट को एक सीनियर इंजीनियर की तरह काम सौंप दिया. इनमें से एक एआई अकाउंट मिसाइल का कोड लिख रहा था, दूसरा अकाउंट जरूरी रिसर्च कर रहा था और तीसरा अकाउंट पहले अकाउंट द्वारा लिखे गए कोड की कमियों को चेक कर रहा था. इस तरह बिना किसी इंसानी दिमाग के ही एआई ने मिलकर मिसाइल की दिशा तय करने वाला बेहद जटिल सॉफ्टवेयर तैयार कर दिया.
चालाकी से बायपास किए गए सुरक्षा फीचर्स
हैरानी की बात यह है कि इस काम के लिए उन्होंने किसी बहुत महंगे कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि आम लोगों के काम आने वाले छोटे डिवाइस पर ही ओपन-सोर्स ऑटोपायलट सिस्टम को इंटीग्रेट करने के लिए क्लोड एआई की मदद ली. एआई ने न सिर्फ इस सिस्टम के लिए कोड लिखा, बल्कि उसकी सेटिंग्स तय कीं और कंप्यूटर के अंदर ही इसकी उड़ानों का डिजिटल ट्रायल यानी फ्लाइट सिमुलेशन भी करके देख लिया.&amp;nbsp;
कंपनी के सुरक्षा फिल्टर ने कई संदिग्ध रिक्वेस्ट को ब्लॉक भी किया, लेकिन इस गुट ने अपने असली मकसद को छुपाए रखा और काम को छोटे टुकड़ों में बांट दिया, जिससे एआई को कभी पता ही नहीं चल पाया कि उससे मिसाइल का सॉफ्टवेयर बनवाया जा रहा है..
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टेस्ट फेल होने पर पकड़ी गई आतंकियों की चालाकी
हालांकि, कंपनी का कहना है कि उनके पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यह आतंकी गुट पूरी तरह से काम करने वाला हथियार जमीन पर तैयार कर पाया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गुट ने एक गाइडेड रॉकेट का फील्ड टेस्ट किया था जो पूरी तरह फेल हो गया.&amp;nbsp;इस टेस्ट के फेल होने के कुछ ही घंटों के भीतर यह गुट दोबारा क्लोड एआई के पास पहुंच गया और रॉकेट के फेल होने के बाद मिले डेटा को एआई के सामने रखकर खराबी का पता लगाने की कोशिश करने लगा. इसी हरकत की वजह से एंथ्रोपिक कंपनी को इस पूरे खेल की भनक लगी.
अकाउंट बैन होने पर भी कम नहीं हुआ खतरा
जैसे ही कंपनी को इस घटना का पता चला, उसने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस सेल से जुड़े सभी क्लोड अकाउंट्स को हमेशा के लिए बैन कर दिया और इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को बताई गई. लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बैन लगने से पहले ही इस गुट ने अपना काम काफी हद तक पूरा कर लिया था.&amp;nbsp;
उन्होंने मिसाइल सिस्टम का एक ऐसा डिजिटल मॉडल तैयार कर लिया है, जो अब बिना क्लोड एआई और बिना इंटरनेट के भी सीधे कंप्यूटर पर काम कर सकता है. इसका मतलब है कि एआई का एक्सेस छिन जाने के बाद भी वे इस मिसाइल प्रोग्राम पर आगे का काम जारी रख सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 17 Pro पर बड़ा ऑफर, 69,990 में खरीदने का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने नई iPhone 18 Pro सीरीज हाल ही में लॉन्च कर दी है. इसके साथ ही पिछले साल के Pro मॉडल को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है. आमतौर पर नया iPhone आने के बाद पुराने मॉडल की कीमत कम होने की उम्मीद रहती है, लेकिन इस बार थोड़ा अलग है. iPhone 17 Pro पर रिटेलर Croma ने ऐसा ऑफर दिया है , जिसमें अलग-अलग फायदे जोड़ने के बाद इसकी कीमत ₹69,990 तक पहुंच रही है. यानी अगर आपके पास एक्सचेंज करने के लिए अच्छा पुराना फोन है तो यह डील आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है.
पुराने मॉडल पर क्यों आया इतना बड़ा फायदा?
नई iPhone सीरीज आने के बाद ग्राहक अक्सर पिछले मॉडल की कीमत कम होने का इंतजार करते हैं. iPhone 17 Pro के मामले में भी अब यही मौका देखने को मिल रहा है. Croma पर इसके 256GB मॉडल को अलग-अलग ऑफर्स के साथ कम कीमत में खरीदा जा सकता है. यानी जिन लोगों को Apple का Pro मॉडल चाहिए, लेकिन नया iPhone 18 Pro खरीदने के लिए करीब ₹1.65 लाख खर्च नहीं करना चाहते, उनके लिए पिछली सीरीज का फोन एक ऑप्शन बन सकता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;69,990 की कीमत पर मिल रहा iPhone 17 Pro
Croma की डील में iPhone 17 Pro 256GB की कीमत ₹69,990 बताई गई है. इसके फोन को एक्सचेंज करना जरूरी है. उदाहरण के तौर पर कुछ पुराने iPhone मॉडल पर ₹44,500 तक की एक्सचेंज वैल्यू मिल सकती है. इसके ऊपर ₹12,000 तक का एक्सचेंज बोनस और कुछ कार्ड पर ₹4,000 तक का बैंक कैशबैक मिल सकता है. इन सभी फायदों को जोड़ने पर कीमत काफी नीचे आ जाती है. लेकिन आपके पुराने फोन की हालत, मॉडल और एक्सचेंज वैल्यू के हिसाब से अंतिम कीमत अलग हो सकती है.
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पुराना iPhone है तो डील और भी काम की
इस ऑफर का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हो सकता है जिनके पास पहले से कोई अच्छा पुराना iPhone है. मान लीजिए आपके पास ऐसा फोन है जिसकी एक्सचेंज वैल्यू अच्छी मिल रही है, तो नए iPhone के लिए अपनी जेब से देने वाले पैसे कम हो जाते है.&amp;nbsp; &amp;nbsp;फोन की कंडीशन, मॉडल और लागू ऑफर के हिसाब से मिलने वाली रकम बदल सकती है. इसलिए हर खरीदार के लिए ₹69,990 की कीमत एक जैसी नहीं होगी.
&amp;nbsp;iPhone 17 Pro अभी भी क्यों खरीदा जा सकता है?
अगर आपको सिर्फ नया मॉडल दिखाने के लिए फोन नहीं खरीदना है, तो iPhone 17 Pro अभी भी एक दमदार विकल्प है. इसमें Pro सीरीज वाला प्रीमियम हार्डवेयर और कैमरा सेटअप मिलता है. इसलिए कम कीमत पर मिलने की वजह से यह उन लोगों के लिए दिलचस्प हो सकता है जो Apple का Pro फोन चाहते हैं लेकिन नए मॉडल पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना चाहते. वहीं अगर आपके लिए लेटेस्ट चिप, नए कैमरा सुधार और नए फीचर्स ज्यादा जरूरी हैं, तो iPhone 18 Pro पर जाना ज्यादा सही रहेगा. Apple के मुताबिक iPhone 18 Pro में A20 Pro चिप और नया vapor chamber भी दिया गया है.
&amp;nbsp;खरीदने से पहले बस ये हिसाब जरूर लगा लें
इस डील को लेने से पहले सबसे पहले अपने पुराने फोन की एक्सचेंज वैल्यू चेक करें. इसके बाद देखें कि आपके कार्ड पर बैंक कैशबैक लागू है या नहीं और एक्सचेंज बोनस की शर्तें क्या हैं. अगर इन सभी फायदों के बाद कीमत आपके बजट में आ रही है, तभी डील लेना फायदेमंद रहेगा. दूसरी तरफ अगर आपके पास एक्सचेंज करने के लिए फोन नहीं है, तो ₹69,990 वाली कीमत आपके लिए लागू नहीं होगी. ऐसे में iPhone 17 Pro और नए iPhone 18 Pro की कीमत और फीचर्स की तुलना करके फैसला लेना बेहतर रहेगा.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Pro, पर, बड़ा, ऑफर, 69, 990, में, खरीदने, का, मौका</media:keywords>
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        <title>iPhone Duo सबसे सस्ता कहां? जानें US और Dubai में भारत से कितना फर्क</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने आखिरकार अपना पहला फोल्डेबल iPhone लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इसे iPhone Duo नाम दिया है और इसके साथ Apple ने फोल्डेबल स्मार्टफोन की दुनिया में कदम रखा है. फोन की शुरुआती कीमत ने भारत में काफी चर्चा पैदा कर दी है. ऐसे में सवाल उठता है कि iPhone Duo को भारत, अमेरिका, दुबई और हांगकांग में से कहां खरीदना सबसे सस्ता पड़ेगा? आइए जानते हैं पूरा जोड-गणित.
अमेरिका में सबसे कम कीमत
आपको बता दें कि अमेरिका में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 1,999 डॉलर है जो भारतीय रूपये में करीब 1.90 लाख रुपये होती है. हालांकि अमेरिका में Apple की बताई कीमत में लोकल सेल्स टैक्स शामिल नहीं होता है इसलिए खरीदारी के समय फाइनल पेमेंट राज्य के हिसाब से कुछ बढ़ सकती है. फिर भी भारतीय शुरुआती कीमत के मुकाबले में अमेरिका में यही मॉडल काफी सस्ता दिखाई देता है.
दुबई में भी मिल सकता है बड़ा फायदा
वहीं, दुबई यानी UAE की बात करें तो iPhone Duo के 256GB मॉडल की कीमत 8,499 UAE दिरहम बताई गई है. भारतीय रुपये में ये करीब 2.2 लाख रुपये होती है. यानी यहां भी फोन भारत की कीमत से काफी कम पड़ता है.
दुबई से iPhone खरीदने का एक फायदा ये भी है कि भारत के मुकाबले कई Apple डिवाइस वहां कम कीमत पर मिलते हैं. हालांकि विदेश से फोन लाने पर टैक्स और कस्टम नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है.
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हांगकांग में कैसी है कीमत?
हांगकांग में 256GB iPhone Duo की कीमत 17,499 हांगकांग डॉलर बताई गई है जो भारतीय रुपये में करीब 2.12 लाख रुपये होती है. इस लिहाज से हांगकांग भी भारत के मुकाबले में ये फोन काफी सस्ते में बेच रहा है.
भारत में कितनी है iPhone Duo की कीमत
जानकारी के मुताबिक, भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये रखी गई है. ये कीमत 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की है. वहीं, इसके 512GB वेरिएंट की कीमत 3,24,900, 1TB वेरिएंट की कीमत 3,74,900 और टॉप वेरिएंट 2TB की कीमत 4,49,900 रुपये रखी है. इसका मतलब साफ है कि भारतीय यूजर्स के लिए Apple का पहला फोल्डेबल फोन प्रीमियम स्मार्टफोन से कहीं आगे निकलकर लग्जरी सेगमेंट में पहुंच गया है.
तो सबसे सस्ता iPhone Duo कहां?
इस हिसाब से देखा जाए तो अमेरिका में iPhone Duo को सबसे कम कीमत में खरीदा जा सकता है. इसके बाद हांगकांग और दुबई जैसे बाजार आते हैं जबकि भारत में इसकी कीमत सबसे ज्यादा है. भारत और अमेरिका के बीच शुरुआती कीमत का अंतर करीब 1 लाख रुपये तक पहुंच जाता है.
हालांकि, आपको बता दें कि विदेश से फोन खरीदते समय केवल कीमत देखना काफी नहीं होता है. लोकल टैक्स, कस्टम ड्यूटी, वारंटी, नेटवर्क बैंड और SIM सपोर्ट जैसी चीजों को भी ध्यान में रखना चाहिए.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 18 Pro: हर टाइम जोन में कब शुरू होगा प्री&amp;ऑर्डर? यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iphone-18-pro-हर-टाइम-जोन-में-कब-शुरू-होगा-प्री-ऑर्डर-यहां-देखें-पूरी-लिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन मार्केट में इस समय नए डिजाइन, कैमरा और नई टेक्नोलॉजी वाले फोन को लेकर काफी चर्चा है. Apple भी अपने नए iPhone मॉडल लगातार लांच कर रहा है. कंपनी ने अब iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है, जिसके बाद लोगों की नजर इसकी बिक्री और प्री-ऑर्डर पर है. खास बात यह है कि अलग-अलग देशों में iPhone की बुकिंग एक ही समय पर शुरू होती है, लेकिन टाइम जोन अलग होने की वजह से वहां घड़ी में समय अलग दिखाई देता है. ऐसे में जानिए कि भारत में कितने बजे, अमेरिका में कितने बजे और दूसरे देशों में कब प्री-ऑर्डर शुरू होगा.
भारत में कब शुरू होगा प्री-ऑर्डर?
भारत में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के प्री-ऑर्डर 12 सितंबर 2026 को शाम 5:30 बजे से शुरू हो गए हैं. भारतीय ग्राहक Apple की वेबसाइट और Apple Store ऐप के जरिए फोन की बुकिंग कर सकेंगे. अगर आप नया iPhone खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो प्री-ऑर्डर शुरू होने से पहले ही अपना Apple अकाउंट, पेमेंट और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी तैयार रखना बेहतर रहेगा. इससे बुकिंग के समय ज्यादा परेशानी नहीं होगी और पसंद का मॉडल चुनना भी आसान रहेगा.
अमेरिका में सुबह अलग-अलग समय पर खुलेगी बुकिंग
अमेरिका में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max प्री-ऑर्डर 12 सितंबर को सुबह 5 बजे Pacific Time से शुरू होगा। इसके बाद Mountain Time में सुबह 6 बजे, Central Time में सुबह 7 बजे और Eastern Time में सुबह 8 बजे बुकिंग खुलेगी. यानी अमेरिका के चार प्रमुख टाइम जोन में समय अलग रहेगा, लेकिन तारीख 12 सितंबर ही होगी.
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&amp;nbsp;UK, France और यूरोप में दोपहर में शुरू होगी बुकिंग
UK में iPhone 18 Pro का प्री-ऑर्डर दोपहर 1 बजे BST से शुरू होगा. France और Central European Time वाले देशों में करीब 2 बजे बुकिंग खुलेगी. वहीं Eastern European Time वाले कुछ देशों में यह समय करीब 3 बजे रहेगा. इसलिए यूरोप के हर देश में स्थानीय घड़ी का समय उसके टाइम जोन के हिसाब से अलग हो सकता है.
&amp;nbsp;China और Japan में शाम-रात को खुलेगा प्री-ऑर्डर
China और Hong Kong में प्री-ऑर्डर स्थानीय समय के हिसाब से करीब रात 8 बजे शुरू होगा, जबकि Japan में रात 9 बजे बुकिंग खुलेगी. यानी भारत में शाम 5:30 बजे शुरू होने वाली बुकिंग एशिया के दूसरे हिस्सों में शाम से रात के समय दिखाई देगी. इससे पता चलता है कि अलग-अलग देशों में एक ही ग्लोबल लॉन्च का समय स्थानीय टाइम जोन के कारण बदल जाता है.
&amp;nbsp;Australia में रात को बुकिंग, 18 सितंबर से बिक्री
Australia के कुछ प्रमुख शहरों में प्री-ऑर्डर स्थानीय समय के हिसाब से रात करीब 10 बजे या उसके आसपास शुरू हो सकता है. इसके बाद iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की बिक्री 18 सितंबर 2026 से शुरू होगी. भारत में ग्राहक इसे सुबह 8 बजे से खरीद सकेंगे. यानी 12 सितंबर को अलग-अलग टाइम जोन में प्री-ऑर्डर खुलने के बाद 18 सितंबर से फोन की बिक्री शुरू होगी.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Meta के नए हेडसेट का लुक आया सामने, जानें खासियत</title>
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        <description><![CDATA[ Meta के अपकमिंग मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट को लेकर एक बड़ा लीक सामने आया है. कंपनी के इस डिवाइस को फिलहाल Project Phoenix के कोडनेम से जाना जा रहा है. सामने आई तस्वीरों से यह साफ पता चलता है कि Meta इस बार अपने Quest सीरीज वाले भारी डिजाइन से अलग हटकर ज्यादा पतले और चश्मे जैसे डिजाइन पर काम कर रही है. हालांकि, Meta ने अभी तक इस डिवाइस को ऑफिशियली लॉन्च नहीं किया है. ऐसे में आइए जानते है क्या है Meta के नए हेडसेट की खासियत.
चश्मे जैसा डिजाइन देखने को मिला
लीक हुई तस्वीरों में Project Phoenix का डिजाइन सामान्य VR हेडसेट की तुलना में काफी अलग दिखाई दे रहा है. इसमें मोटे फेस कवर की जगह ग्लासेज जैसी फ्रेम नजर आ रही हैं. डिवाइस में अलग-अलग नोज पैड दिए गए हैं, जिससे यह चेहरे पर सामान्य चश्मे की तरह टिक सकता है. बताया जा रहा है कि इस डिजाइन की वजह से हेडसेट को हल्का और लंबे समय तक पहनने के लिए ज्यादा आरामदायक बनाना है.
हैंड और आई ट्रैकिंग पर जोर
लीक से यह भी संकेत मिलता है कि Meta इस डिवाइस में हैंड और आई ट्रैकिंग जैसी तकनीकों को अहम भूमिका दे रही है. इसका मतलब यह है कि यूजर को कई कामों के लिए पूराने कंट्रोलर की जरूरत कम पड़ सकती है. डिवाइस के किनारों और नीचे की तरफ सेंसर या कैमरा भी दिखाई दे रहा है. इनका इस्तेमाल ट्रैकिंग और मिक्स्ड रियलिटी अनुभव को बेहतर बनाने के लिए हो सकता है. हालांकि, इन सेंसर का सही काम Meta की ऑफिशियल घोषणा के बाद ही साफ होगा.
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प्रिस्क्रिप्शन लेंस का भी सपोर्ट
Project Phoenix से जुड़ी तस्वीरें Meta के HorizonOS के एक प्रिस्क्रिप्शन लेंस पैकेज में सामने आईं. इनमें अलग-अलग प्रिस्क्रिप्शन लेंस इंसर्ट्स को हेडसेट के ऑप्टिक्स के सामने फिट करते हुए दिखाया गया है. बताया जा रहा है कि मेटा के Horizon OS के प्रिस्क्रिप्शन लेंस पैकेज और सेटअप फाइल अपडेट के दौरान यह विजुअल्स लीक हो गए.
कब लॉन्च होगा हेडसेट?
अभी तक Meta ने Project Phoenix का ऑफिशियल नाम, कीमत और लॉन्च डेट की घोषणा नहीं की है. हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में इसे 2027 में आने वाला प्रीमियम और अल्ट्रालाइट मिक्स्ड रियलिटी डिवाइस बताया जा रहा है. वहीं, Meta Connect 2026 इवेंट 23 सितंबर से शुरू होने वाला है, इसलिए आने वाले दिनों में कंपनी इस प्रोजेक्ट से जुड़ी अधिक जानकारी सामने ला सकती है.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>अब iPhone और AirPods बताएंगे जिम में आपकी हर एक्टिविटी का राज! जानें कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Apple में यूजर्स को GymKit नाम का एक फीचर देखने को मिल जाता है. बता दें कि कंपनी ने इसे पहली बार 2017 में पेश किया था. इसका मकसद Apple Watch और जिम में मौजूद एक्सरसाइज मशीन के बीच डेटा शेयर करना था. यूजर अपनी Apple Watch को मशीन के NFC सेंसर पर टैप करके कनेक्ट कर सकता था. इसके बाद मशीन और वॉच दोनों एक-दूसरे के साथ वर्कआउट से जुड़ी जानकारी शेयर करते थे.
हालांकि, GymKit को बड़े लेवल पर अपनाया नहीं जा सका. इसकी एक बड़ी वजह ये रही कि हर जिम मशीन इस टेक्नोलॉजी को सपोर्ट नहीं करती है. अब iOS 27 के साथ Apple ने इस सिस्टम को iPhone तक पहुंचा दिया है.
iPhone बनेगा वर्कआउट का कंट्रोल सेंटर
आपको बता दें कि iOS 27 में iPhone को GymKit से जोड़ने का तरीका काफी आसान है. अगर आपके जिम की मशीन GymKit सपोर्ट करती है तो iPhone को उसके NFC या GymKit कनेक्शन पॉइंट पर टैप करना होगा. इसके बाद वर्कआउट का टाइप चुनकर एक्सरसाइज शुरू की जा सकती है.
इस दौरान iPhone वर्कआउट से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करेगा और उसे Apple के Fitness ऐप में सेव किया जा सकेगा. यानी अब GymKit का इस्तेमाल करने के लिए हर बार Apple Watch पहनना जरूरी नहीं रहेगा.
ट्रेडमिल, एलिप्टिकल, इंडोर बाइक और सीढ़ियां चढ़ने वाली मशीन जैसे कार्डियो डिवाइस इसका हिस्सा होते हैं. हालांकि, इसका असली फायदा तभी मिलेगा जब उससे जुड़ी मशीन में Apple का GymKit सपोर्ट मौजूद हो.
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AirPods Pro 3 कैसे करेंगे मदद?
iOS 27 के इस सेटअप में AirPods Pro 3 भी अहम भूमिका निभाते हैं. अगर यूजर इन्हें पहनकर एक्सरसाइज करता है तो ईयरबड्स हार्ट रेट जैसी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं. ये डेटा iPhone तक पहुंचता है और फिर वर्कआउट मशीन के डेटा के साथ मिलकर Fitness ऐप में दर्ज होता है.
इस तरह पूरे प्रोसेस में तीन डिवाइस मिलकर काम करते हैं वर्कआउट मशीन अपने आंकड़े देती है, AirPods Pro 3 हार्ट रेट जैसी जानकारी उपलब्ध कराते हैं और iPhone इन सभी डेटा को संभालता है.
Apple के अनुसार, वर्कआउट खत्म होने के बाद कनेक्टेड मशीन से सेशन का डेटा हटा दिया जाता है. हालांकि, अगर यूजर ने उस मशीन में अलग से साइन-इन किया है तो कंडिशन अलग हो सकती है.
क्या Apple Watch की जरूरत खत्म हो गई?
जी नहीं, ऐसा बिलकुल भी नहीं है. iOS 27 का नया GymKit फीचर उन लोगों के लिए काम का साबित हो सकता है जो Apple Watch नहीं रखते या कभी-कभी वॉच घर पर भूल जाते हैं. अगर वॉच की बैटरी खत्म हो गई है, तब भी जिम मशीन, iPhone और AirPods Pro 3 की मदद से वर्कआउट रिकॉर्ड किया जा सकता है.
लेकिन Apple Watch अभी भी ज्यादा बेहतर हेल्थ और फिटनेस डिवाइस माना जाता है. ये सिर्फ वर्कआउट के दौरान ही नहीं बल्कि पूरे दिन और रात में भी कई तरह का डेटा रिकॉर्ड करती है. इसलिए iPhone और AirPods का नया सेटअप Apple Watch का पूरा ऑप्शन नहीं है.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro Max या Galaxy S26 Ultra! जानें दोनों में से किसे खरीदने में है फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने अपने नए फ्लैगशिप iPhone 18 Pro Max को प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में उतारा है. फोन का डिजाइन देखने में पिछले मॉडल से बहुत अलग नहीं लगता है लेकिन इसके अंदर कई बड़े अपग्रेड देखने को मिलते हैं. दूसरी तरफ Samsung का Galaxy S26 Ultra पहले से ही हाई-एंड Android स्मार्टफोन के तौर पर अपनी जगह बना चुका है. ऐसे में दोनों फोन की तुलना होना लाजिमी है.
दोनों ही कंपनियों के ये सबसे पावरफुल नॉन-फोल्डेबल स्मार्टफोन हैं. इसलिए इनमें से किसी एक को चुनना सिर्फ स्पेसिफिकेशन पर निर्भर नहीं करता है बल्कि यूजर की जरूरत, ऑपरेटिंग सिस्टम और पसंद भी काफी मायने रखती है.
डिजाइन में किसका पलड़ा भारी?
आपको बता दें कि iPhone 18 Pro Max और Galaxy S26 Ultra दोनों ही बड़े स्क्रीन वाले ट्रेडिशनल स्मार्टफोन हैं. दोनों में 6.9 इंच का डिस्प्ले मिलता है. हालांकि, iPhone के किनारे और कॉर्नर थोड़े ज्यादा कर्व्ड हैं जबकि Samsung ने अपने इसस डिवाइस को सीधा और ज्यादा बॉक्सी डिजाइन दिया है.
बिल्ड क्वालिटी के मामले में भी दोनों प्रीमियम फील देते हैं. iPhone में एल्यूमिनियम और ग्लास का इस्तेमाल किया गया है जबकि Galaxy S26 Ultra में ग्लास बैक मिलता है.
वजन की बात करें तो Samsung यहां आगे निकलता है. Galaxy S26 Ultra का वजन करीब 214 ग्राम है जबकि iPhone 18 Pro Max करीब 249 ग्राम का है. लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने पर ये अंतर महसूस किया जा सकता है. Samsung का फोन 7.9mm पतला है, वहीं iPhone की मोटाई 8.75mm है.
दोनों के डिस्प्ले में कितना अंतर?
Apple ने iPhone 18 Pro Max में OLED पैनल दिया है जिसका रिजॉल्यूशन 2868x1320 पिक्सल है. इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है और स्क्रीन की पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक पहुंचती है. यानी तेज धूप में भी डिस्प्ले को देखने में काफी मदद मिल सकती है.
Galaxy S26 Ultra में 3120x1440 पिक्सल रिजॉल्यूशन वाला AMOLED डिस्प्ले दिया गया है. कागज पर Samsung की स्क्रीन ज्यादा रिजॉल्यूशन वाली है लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में दोनों के बीच अंतर आसानी से नजर नहीं आएगा. इसमें भी 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है जबकि पीक ब्राइटनेस 2,600 निट्स तक है.
Samsung का एक बड़ा फायदा S Pen है. इससे नोट्स लिखने, स्क्रीन पर ड्रॉ करने और कुछ खास काम करने में सुविधा मिलती है. Apple की तरफ से Pencil सपोर्ट चाहिए तो इसके लिए अलग और महंगे iPhone Duo की जरूरत पड़ती है.
कैमरा में सबसे बड़ा मुकाबला
कैमरा दोनों फ्लैगशिप फोन की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है. iPhone 18 Pro Max में ट्रिपल रियर कैमरा सिस्टम दिया गया है. इसमें वाइड, अल्ट्रा-वाइड और टेलीफोटो कैमरा शामिल हैं और तीनों में 48MP सेंसर दिए गए हैं.
इस बार iPhone के मेन कैमरे में वेरिएबल अपर्चर इस डिवाइस को ज्यादा खास बनाता है. ज्यादातर स्मार्टफोन कैमरों में अपर्चर फिक्स रहता है लेकिन यहां यूजर जरूरत के हिसाब से इसे बदल सकता है. इससे अलग-अलग रोशनी की कंडिशन में फोटोग्राफी पर ज्यादा कंट्रोल मिलने के साथ-साथ क्रिएटिव शॉट्स लेने के ऑप्शन बढ़ जाते हैं.
Samsung Galaxy S26 Ultra कैमरा हार्डवेयर के मामले में अलग प्लानिंग अपनाता है. इसमें 200MP का मेन कैमरा है. हाई-रिजॉल्यूशन सेंसर की वजह से फोटो को क्रॉप करने पर भी ज्यादा डिटेल बच सकती हैं. फोन में 50MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा भी मिलता है.
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बैटरी और चार्जिंग में मुकाबला बराबर
बैटरी क्षमता के मामले में दोनों फोन करीब 5,000mAh के आसपास हैं. नॉर्मल इस्तेमाल में दोनों से पूरे दिन की बैटरी लाइफ मिलने की उम्मीद की जा सकती है. चार्जिंग में भी इस बार दोनों फ्लैगशिप लगभग बराबरी पर हैं. 60W चार्जर की मदद से दोनों फोन करीब 15 मिनट में 0 से 50 प्रतिशत तक चार्ज हो सकते हैं. यानी जल्दी में फोन को चार्ज करने वाले यूजर्स के लिए दोनों ही ऑप्शन अच्छे हैं.
परफॉर्मेंस में Apple की नई छलांग
Galaxy S26 Ultra में 3nm प्रोसेस पर बना Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया गया है. ये बेहद शक्तिशाली प्रोसेसर है और कुछ टेस्ट में Apple के A19 Pro को भी पीछे छोड़ चुका है.
हालांकि, iPhone 18 Pro Max में Apple का नया A20 Pro चिपसेट मिलता है जिसे कंपनी ने 2nm प्रोसेस पर तैयार किया है. छोटे प्रोसेस नोड का फायदा बेहतर परफॉर्मेंस और पावर एफिशिएंसी के तौर पर मिल सकता है. हालांकि, असली इस्तेमाल में दोनों की क्षमता का सही अंदाजा लंबे समय के टेस्ट के बाद ही लगाया जा सकेगा.
RAM की बात करें तो Galaxy S26 Ultra में स्टोरेज वेरिएंट के हिसाब से 12GB और 16GB RAM मिलती है. iPhone 18 Pro Max में सभी कॉन्फिगरेशन में 12GB RAM दी गई है.
कीमत और किसके लिए कौन सा फोन?
अमेरिका में दोनों फोन की शुरुआती कीमत 256GB मॉडल के लिए करीब 1,299 डॉलर है. इसलिए कीमत के आधार पर इनके बीच बड़ा अंतर नहीं है. अगर आप Apple के दूसरे डिवाइस जैसे AirPods और Apple Watch इस्तेमाल करते हैं तो iPhone 18 Pro Max आपके लिए ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. वहीं Android की आजादी, S Pen और ज्यादा जूम क्षमता पसंद करने वालों के लिए Galaxy S26 Ultra आकर्षक ऑप्शन हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>चार्जर पर बना Qi का निशान का क्या मतलब होता? जानिए वजह</title>
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        <description><![CDATA[ चार्जर पर बना Qi का निशान का क्या मतलब होता? जानिए वजह ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Chrome में सेव पासवर्ड देखने का आसान तरीका, ऐसे करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में ज्यादातर लोग अलग-अलग वेबसाइट और ऐप्स के लिए अलग पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं. इतने सारे पासवर्ड याद रखना किसी के लिए भी आसान नहीं होता. इसी वजह से Google Chrome का Password Manager काफी उपयोगी फीचर माना जाता है. Chrome में यूजर अपनी अनुमति से वेबसाइटों के पासवर्ड सेव कर सकता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा देख भी सकता है. ऐसे में अगर आप किसी वेबसाइट का पासवर्ड भूल गए हैं तो पहले से Chrome में सेव होने पर पासवर्ड को आसानी से चेक किया जा सकता है.
मोबाइल में ऐसे देखें सेव पासवर्ड
Android फोन में Chrome के जरिए सेव पासवर्ड देखने के लिए सबसे पहले Google Chrome खोलें. इसके बाद ऊपर दाईं तरफ दिखाई देने वाले तीन डॉट्स पर टैप करें. अब Settings में जाएं और Google Password Manager का विकल्प चुनें. यहां आपको उन वेबसाइट और ऐप्स की लिस्ट दिखाई देगी, जिनके लॉगिन डिटेल्स आपने Chrome में सेव किए हैं. आप जिस वेबसाइट का पासवर्ड देखना चाहते है, उसके ऊपर पर टैप करें. इसके बाद Chrome आपकी फोन की सुरक्षा जांच के लिए PIN, पैटर्न, पासवर्ड या फिंगरप्रिंट मांगेगा. वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद पासवर्ड के सामने मौजूद आंख के आइकन पर टैप करके आप पासवर्ड देख सकते हैं.
कंप्यूटर पर ऐसे चेक करें पासवर्ड
कंप्यूटर या लैपटॉप पर भी Chrome में सेव पासवर्ड देखना आसान है. इसके लिए Chrome ब्राउजर को ऑपन करें और ऊपर मौजूद तीन डॉट्स पर क्लिक करें. इसके बाद Settings में जा कर, Passwords and Autofill सेक्शन में जाएं और Google Password Manager को ऑपन करें. अब सेव किए गए अकाउंट्स की लिस्ट में उस वेबसाइट को चुनें, जिसका पासवर्ड आप देखना चाहते है. पासवर्ड देखने के लिए कंप्यूटर का PIN, पासवर्ड या अन्य स्क्रीन-लॉक वेरिफिकेशन मांगा जाता है. वेरिफिकेशन के बाद आंख के आइकन पर क्लिक करके आप पासवर्ड देख सकते हैं.
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Google Password Manager के फायदें
Google Password Manager का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह यूजर को हर वेबसाइट का पासवर्ड अलग से याद रखने की परेशानी से बचाता है. फिर भी पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. फोन और कंप्यूटर में मजबूत स्क्रीन लॉक रखें और Google Account पर 2-Step Verification हमेशा चालू रखें. वहीं अपने पासवर्ड या OTP को कभी भी किसी के साथ शेयर न करें.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>कैसे बनाएं अपने घर का डिजिपिन? ये टिप्स आएंगे आपके काम</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में किसी को अपनी लोकेशन बताना हर बार आसान नहीं होता है. कई जगहों पर घर का नंबर, सड़क या गली का नाम साफ तौर पर पता नहीं होता है. गांवों और दूर-दराज के इलाकों में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है, जहां सही पता बताना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में भारतीय डाक ने डिजिटल एड्रेसिंग को आसान बनाने के लिए DIGIPIN सिस्टम शुरू किया है, जो हर लोकेशन को 10 अक्षरों और अंकों का एक खास डिजिटल कोड देता है.
अब डाक विभाग ने अपना DIGIPIN जानें और अपना PIN Code जानें जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं, जिससे लोग अपनी लोकेशन और मौजूदा पिन कोड की जानकारी आसानी से हासिल कर सकते हैं. साथ ही DIGIPIN को लेकर जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा. तो आइए जानते हैं कि अपने घर का डिजिपिन कैसे बनाएं.&amp;nbsp;
क्या है DIGIPIN?
DIGIPIN यानी Digital Postal Index Number भारतीय डाक विभाग की डिजिटल एड्रेसिंग व्यवस्था है. इसे डाक विभाग ने IIT हैदराबाद और इसरो के National Remote Sensing Centre (NRSC) के साथ मिलकर तैयार किया है. यह एक ओपन-सोर्स, जियो-कोडेड और ग्रिड आधारित सिस्टम है, जिसमें भारत के करीब 4 मीटर बाय 4 मीटर के हिस्से को एक यूनिक 10-अक्षर वाला अल्फान्यूमेरिक कोड दिया जाता है.
यह कोड किसी जगह के अक्षांश और देशांतर यानी latitude और longitude के आधार पर तैयार होता है. खास बात यह है कि DIGIPIN आपके मौजूदा पते या PIN Code को खत्म नहीं करता, बल्कि उसके साथ एक अतिरिक्त डिजिटल लेयर की तरह काम करता है.&amp;nbsp;
अपने घर का डिजिपिन कैसे बनाएं?
अपना DIGIPIN पता करना काफी आसान है. इसके लिए भारतीय डाक विभाग की अपना डिजिपिन जानें सुविधा पर जाना होगा. पोर्टल पर पहुंचने के बाद अपनी लोकेशन एक्सेस की अनुमति देनी होगी. इसके बाद स्क्रीन पर आपकी मौजूदा जगह का 10-अक्षर वाला DIGIPIN दिखाई देगा. अगर आप लोकेशन एक्सेस नहीं देना चाहते हैं, तो अक्षांश और देशांतर यानी latitude-longitude को मैन्युअली भी दर्ज कर सकते हैं. कोड मिलने के बाद इसे सेव या नोट करके रखा जा सकता है.&amp;nbsp;
DIGIPIN को ऐसे कर सकते हैं शेयर
DIGIPIN मिलने के बाद इसे किसी दोस्त या उस व्यक्ति के साथ शेयर किया जा सकता है, जिसे आपकी सही लोकेशन पर पहुंचना है. इसके साथ QR Code का ऑप्शन भी मिलता है. इसे Google Maps या Mappls Maps के जरिए खोला जा सकता है, जिससे लोकेशन तक पहुंचना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;
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डिलीवरी और इमरजेंसी में आएगा काम
DIGIPIN का इस्तेमाल डाक और पार्सल डिलीवरी से लेकर ई-कॉमर्स और नेविगेशन तक में किया जा सकता है. खासकर ऐसे इलाकों में जहां घर का नंबर या सड़क की जानकारी साफ नहीं है, यह सही लोकेशन पहचानने में मदद कर सकता है. &amp;nbsp;एंबुलेंस, पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत टीमों के लिए भी यह यूजफुल हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 07:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>ये फोन यूज करते हैं तो सबसे सस्ता होगा रिचार्ज, देख लें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में मोबाइल नंबर को एक्टिव रखना भी एक खर्च बन गया है. पहले जहां छोटे से रिचार्ज से काम चल जाता था, वहीं अब ज्यादातर यूजर्स को नंबर की वैलिडिटी बनाए रखने के लिए एक तय रकम खर्च करनी पड़ती है. खासकर उन लोगों के लिए यह परेशानी ज्यादा है जो दूसरा SIM सिर्फ बैंक OTP, Aadhaar verification या कभी-कभार कॉल के लिए रखते हैं.
ऐसे में सबसे सस्ता रिचार्ज कौन सा है और किस नेटवर्क पर नंबर को कम खर्च में एक्टिव रखा जा सकता है, यह जानना जरूरी हो जाता है. तो आइए जानते हैं कि कौन-से फोन यूज पर सबसे सस्ता रिचार्ज होगा.&amp;nbsp;
2015 से 2026 तक कितना बदला रिचार्ज?
2015 में 10 रुपए का टॉप-अप भी काफी था. इससे पूरा टॉक टाइम मिलता था और इनकमिंग की वैलिडिटी बनी रहती थी. अब स्थिति काफी बदल चुकी है. 2026 में प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों के स्मार्टफोन यूजर्स के लिए कम कीमत वाले टॉकटाइम प्लान काफी सीमित हो गए हैं. अब Jio का न्यूनतम प्लान 189 रुपए , जबकि Airtel और Vi का शुरुआती प्लान 199 रुपए है.
कौन-से फोन यूज पर सबसे सस्ता रिचार्ज होगा?
सबसे सस्ता रिचार्ज फोन के ब्रांड से ज्यादा आपके नेटवर्क और प्लान पर निर्भर करता है. हालांकि 4G फीचर फोन-कीपैड फोन यूज करने वालों के लिए कुछ खास रिचार्ज प्लान सस्ते पड़ सकते हैं. खासकर Jio Phone, Jio Bharat, Lava, itel और Nokia के 4G फीचर फोन पर Jio के 123 रुपए, 234 रूपए, &amp;nbsp;369 रूपए और 1,234 रूपए वाले प्लान इस्तेमाल किए जा सकते हैं. वहीं सामान्य स्मार्टफोन यूजर्स के लिए Jio का 189 रुपए और BSNL का 107 रूपए वाला प्लान कम कीमत वाले ऑप्शन मे शामिल हैं.&amp;nbsp;
Jio का 189 रुपए वाला प्लान
Jio यूजर्स के लिए 189 रुपए का प्लान 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है. इसमें अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग, कुल 2GB डेटा और 300 SMS मिलते हैं. यह प्राइवेट नेटवर्क पर 4G और 5G स्मार्टफोन यूजर्स के लिए कम कीमत वाला एंट्री-लेवल ऑप्शन है. हालांकि, 4G फीचर फोन यूजर्स के लिए Jio के कुछ अलग प्लान भी उपलब्ध हैं. 123 रूपए वाले प्लान में 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ अनलिमिटेड कॉलिंग, रोज 0.5GB डेटा और कुल 300 SMS मिलते हैं.&amp;nbsp;
234 और 369 रुपए वाले फीचर फोन प्लान
Jio का 234 रुपए &amp;nbsp;वाला प्लान 56 दिनों की वैलिडिटी देता है. इसमें रोज 0.5GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग मिलती है, जबकि 300 SMS का इस्तेमाल शुरुआती 28 दिनों तक किया जा सकता है. 369 रूपए &amp;nbsp;वाले प्लान की वैलिडिटी 84 दिन है. इसमें रोज 0.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और 28 दिनों के लिए 300 SMS मिलते हैं.&amp;nbsp;
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1,234 रुपए वाला लंबी वैलिडिटी प्लान
Jio का 1,234 रुपए वाला प्लान 336 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है. इसमें पूरी वैलिडिटी के दौरान अनलिमिटेड कॉलिंग और रोज 0.5GB डेटा मिलता है. इस हिसाब से कुल 168GB 4G डेटा मिलता है. इन प्लान्स के साथ JioSaavn और JioTV का फ्री सब्सक्रिप्शन भी दिया जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone Duo के कवर की कीमत ने चौंकाया,  इतने में आता है Android फोन</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च कर दिया है. इसे कंपनी ने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ पेश किया है. लंबे समय से जिस फोल्डेबल iPhone का इंतजार किया जा रहा था, उसके सामने आने के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत की हो रही है. भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है, लेकिन बात सिर्फ फोन की कीमत तक सीमित नहीं है. Apple ने के पहले फोल्डेबल iPhone के साथ एक खास Folio कवर भी लॉन्च किया है, जिसकी कीमत इतनी है कि उस बजट में एक अच्छा Android फोन खरीदा जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि इस कवर की कीमत कितनी है.&amp;nbsp;
iPhone Duo Folio कवर की कीमत कितनी है?
Apple ने इस कवर को iPhone Duo Folio नाम दिया है. इसकी कीमत 14,900 रुपए रखी गई है. कवर में बिल्ट-इन किकस्टैंड दिया गया है, जिससे फोन को अलग-अलग एंगल पर खड़ा किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल वीडियो देखने, पढ़ने या FaceTime कॉल के दौरान किया जा सकता है. यह कवर दो कलर ऑप्शन Taupe और Navy Blue में मिलेगा. Apple के मुताबिक iPhone Duo Folio की बिक्री 16 अक्टूबर से शुरू होगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - AI से लेकर न्यू टेक तक, BRICS में बनेगी Tech Strategy
कैसा है iPhone Duo?
iPhone Duo Apple का पहला फोल्डेबल iPhone है, जिसे कंपनी ने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ लॉन्च किया है. फोन को बंद करने पर 5.4 इंच की आउटर डिस्प्ले मिलती है, जबकि खोलने पर 7.6 इंच की इनर डिस्प्ले सामने आती है. इसमें Apple का नया A20 Pro चिपसेट दिया गया है.
फोन की दोनों डिस्प्ले ProMotion, Always-On और 3,000 निट्स तक पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती हैं. इसमें 48MP Fusion प्राइमरी और 48MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है. सेल्फी के लिए 12MP सेंसर मिलता है. इसके अलावा फोल्डेबल डिजाइन के साथ Duo Preview और Split View जैसे मल्टीटास्किंग फीचर्स भी मिलते हैं.&amp;nbsp;
3 लाख से शुरू है iPhone Duo
भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपए है. 256GB मॉडल की कीमत 2,99,900 रुपए , 512GB की₹3,24,900 रुपए , 1TB की 3,74,900 रुपए &amp;nbsp;और 2TB मॉडल की कीमत 4,49,900 रुपए है. फोन Star White और Night Sky कलर में आता है. अगर बेस मॉडल के साथ 14,900 का Folio कवर जोड़ दिया जाए, तो कुल कीमत 3,14,800 रुपए हो जाती है. अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 1,999 डॉलर यानी करीब 1.90 लाख रुपए है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - चांद की बर्फ और क्रेटर मैप करेगा IBM-NASA का AI, जानें कैसे? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI बना बड़ी मुसीबत! जानें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्यों दी चेतावनी?</title>
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        <description><![CDATA[ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक टेक्नोलॉजी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक दोधारी तलवार की तरह है.&amp;nbsp;
उन्होंने आगाह किया कि जहां एक तरफ इस तकनीक की मदद से डिजिटल धोखाधड़ी और फ्रॉड को पकड़ा जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ अपराधी इसका इस्तेमाल बड़े घोटालों को अंजाम देने के लिए भी कर रहे हैं. वित्त मंत्री ने टेक कंपनियों और फिनटेक सेक्टर को सलाह दी कि वे नई तकनीकों को इस तरह विकसित करें जिससे सिस्टम की कार्यकुशलता तो बढ़े, लेकिन उससे सुरक्षा को लेकर कोई नया खतरा पैदा न हो.
समाज और चुनावों को प्रभावित कर सकती है टेक्नोलॉजी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने AI, लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स LLMs और साइबर स्पेस से जुड़े खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक तकनीक इतनी ताकतवर हो चुकी है कि यह न सिर्फ आम समाज को प्रभावित कर सकती है, बल्कि लोकतांत्रिक देशों में होने वाले चुनावों के नतीजों तक को बदल सकती है.
उन्होंने बताया कि आज के नए डिजिटल मॉडल्स जमीनी स्तर पर लोगों की राय और जनमत को इस तरह प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, जिसके बारे में आम जनता को अंदाजा तक नहीं हो पाता. यही वजह है कि तकनीक के इन बढ़ते जोखिमों को समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी हो गया है.
रेगुलेशन और नई खोजों के बीच संतुलन जरूरी
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के मंच से वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारों और केंद्रीय बैंक को एआई से जुड़े इन खतरों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि नियम ऐसे होने चाहिए जो बाजार में नई खोजों को बढ़ावा दें, न कि उन्हें दबाएं.
वित्त मंत्री ने बताया कि उन्होंने RBI के साथ इस विषय पर चर्चा की है. उन्होंने आरबीआई से सॉफ्ट-टच रेगुलेशन अपनाने की बात की है ताकि फिनटेक सेक्टर बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके. उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि हाल ही में आरबीआई ने फिनटेक सेक्टर के लिए यूनिफाइड फिनटेक फोरम को एक सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन के रूप में मान्यता दे दी है, जो इस बदलते दौर की बड़ी जरूरत थी.
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भारत की युवा आबादी और डिजिटल इकोनॉमी की तारीफ
अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने भारत के युवाओं की क्षमता और देश के युवा आबादी के फायदे पर भी खुलकर बात की. उन्होंने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो भारत की युवा आबादी की ताकत पर संदेह करते हैं. उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी आज निराशा से आगे निकल चुकी है और देश के भविष्य का निर्माण कर रही है.
उन्होंने गर्व से कहा कि हमारे युवा आज कल के लिए कोडिंग लिख रहे हैं, बड़े और टिकाऊ बिजनेस खड़े कर रहे हैं. आज भारत की UPI जैसी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था पूरी दुनिया में सबसे ताकतवर बनकर उभरी है, जिसके जरिए हर महीने अरबों रुपयों का डिजिटल लेनदेन हो रहा है. इसके साथ ही भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में नए मुकाम हासिल कर रहा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>स्विच दबाते ही दिखती है चिंगारी, कब सिर्फ ढीला कनेक्शन और कब खतरे का संकेत?</title>
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        <description><![CDATA[ घर में लाइट ऑन करने के लिए स्विच दबाना हमारी रोजमर्रा की आदत है, लेकिन अगर हर बार स्विच दबाते ही चिंगारी दिखाई दे, चटकने की आवाज आए या जलने जैसी गंध महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. स्विच के अंदर बहुत छोटी इलेक्ट्रिक स्पार्किंग कई बार सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है, लेकिन बाहर दिखाई देने वाली तेज चिंगारी या बार-बार होने वाली स्पार्किंग बिजली की समस्या का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कौन-सी चिंगारी सामान्य है और कब सावधान होने की जरूरत है. तो आइए जानते हैं कि स्विच दबाते ही चिंगारी दिखती है तो कब सिर्फ ढीला कनेक्शन और कब खतरे का संकेत है.&amp;nbsp;
स्विच दबाते ही चिंगारी दिखती है तो कब सिर्फ ढीला कनेक्शन?
लाइट स्विच के कॉन्टैक्ट जब सर्किट को खोलते या बंद करते हैं, तो अंदर बहुत छोटे इलेक्ट्रिकल आर्क बन सकते हैं. आमतौर पर ये इतने छोटे होते हैं कि दिखाई भी नहीं देते है. कई लाइट बल्ब, पुराने इनकैंडेसेंट बल्ब, ज्यादा वाट वाले फिक्स्चर या लंबे लाइट सर्किट को कंट्रोल करने वाले स्विच में यह ज्यादा हो सकता है. हल्की क्लिक की आवाज भी सामान्य हो सकती है.&amp;nbsp;
कब चिंगारी खतरे का संकेत है?
अगर स्विच से साफ दिखाई देने वाली चमक निकल रही है, तेज चटकने या फूटने की आवाज आ रही है, जलने की गंध या धुआं दिखाई दे रहा है, या स्विच छूने पर गर्म लग रहा है, तो यह सामान्य नहीं है. ऐसे संकेत ढीली वायरिंग, खराब स्विच कॉन्टैक्ट, ओवरलोडेड सर्किट, खतरनाक वायरिंग या इलेक्ट्रिकल आर्क की ओर इशारा कर सकते हैं.&amp;nbsp;
स्पार्किंग के पीछे क्या वजह हो सकती है?
स्विच के पीछे ढीले तार या टर्मिनल कनेक्शन होने पर बिजली का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और स्पार्किंग हो सकती है. समय के साथ स्विच के अंदर मौजूद मेटल कॉन्टैक्ट भी घिस सकते हैं, जिससे आर्क बढ़ सकता है. इसके अलावा ज्यादा बिजली का लोड, खराब वायरिंग और डिमर या स्मार्ट स्विच की गलत इंस्टॉलेशन भी समस्या पैदा कर सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - एपल का Foldable Phone लेने के लिए कितनी डाउन पेमेंट जरूरी? जानें डिटेल्स&amp;nbsp;
चिंगारी दिखे तो क्या करें?
अगर स्विच से चिंगारी, धुआं या जलने की गंध आ रही है, तो सबसे पहले संबंधित सर्किट का ब्रेकर बंद करें और स्विच का इस्तेमाल न करें. बार-बार स्विच चलाकर जांच करने की कोशिश न करें. किसी स्विच को खोलने या तार छूने से पहले बिजली पूरी तरह बंद होना सुनिश्चित करना जरूरी है.&amp;nbsp;
इलेक्ट्रीशियन को कब बुलाएं?&amp;nbsp;अगर जले हुए तार दिखाई दें, ब्रेकर बार-बार ट्रिप हो, जलने की गंध आए या स्विच बदलने के बाद भी चिंगारी जारी रहे, तो लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रीशियन की मदद लेना बेहतर है. खासकर दिखाई देने वाली चिंगारी, तेज आवाज और गर्म स्विच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 07:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Telegram के ये Bots बदल देंगे काम करने का तरीका, 2026 में जरूर आजमाएं</title>
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        <description><![CDATA[ Telegram के ये Bots बदल देंगे काम करने का तरीका, 2026 में जरूर आजमाएं ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कहां बेचें अपना पुराना आईफोन? इन वेबसाइट्स पर मिलेगा अच्छा दाम</title>
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        <description><![CDATA[ नया iPhone खरीदने का मन है लेकिन पुराना फोन घर में पड़ा है तो उसे आप उसे बेचकर नए फोन का खर्च कम कर सकते हैं. खासकर अभी Apple ने iPhone 18 Pro, Pro Max और पहला फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च किया है, ऐसे में कई लोग अपना पुराना iPhone बेचकर नया मॉडल लेने की तैयारी कर सकते हैं. पुराना iPhone बेचने के लिए आज कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मौजूद हैं, जहां फोन की जानकारी और हालत के आधार पर पुराने फोन की कीमत बताई जाती है. Cashify जैसे प्लेटफॉर्म पर फोन की डिटेल भरकर पुराने फोन की &amp;nbsp;कीमत का पता लगाया जा सकता है और कई वेबसाइट पर घर से फोन पिकउप की सुविधाएं भी मिलती है.
&amp;nbsp;Cashify पर बेच सकते हैं पुराना iPhone
पुराना iPhone बेचने के लिए Cashify &amp;nbsp;एक अच्छा ऑप्शन सकता है और यह काफी पुराना भी है. यहां आपको सबसे पहले अपने फोन का मॉडल, उसकी हालत कैसी है और फोन किस साल में खरीदा है उसकी जानकारी देनी होगी .इसके बाद Cashify &amp;nbsp;प्लेटफॉर्म उनके अनुमान के हिसाब से आपके फोन की कीमत बताता है. Cashify, फोन की जांच के बाद पिकअप की सुविधा और आपके डूरस्टेप पर पेमेंट का आप्शन भी मिलता है. अपना पुराना फोन बेचने से पहले अलग-अलग जगहों पर कीमत जरूर चेक कर लें.
&amp;nbsp;Flipkart पर भी मिल सकता है बेचने का विकल्प
Flipkart भी पुराने स्मार्टफोन के लिए buyback और sell करने से जुड़े ऑप्शन देता है. यहां अपने फोन की जानकारी देकर उसकी कीमत का अंदाजा आप लगा सकते हैं. कई बार पुराने फोन को नए फोन की खरीद के साथ एक्सचेंज करने पर अलग-अलग &amp;nbsp;ऑफर भी मिलते है. इसलिए अगर आप नया iPhone खरीदने वाले हैं तो एक्सचेंज और सीधे बेचने, दोनों ऑप्शन चेक करे.
यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;iPhone के साथ Apple ने और क्या फोड़ा बम? पूरी लॉन्च लिस्ट देखें
&amp;nbsp;Apple का Trade-In भी देख सकते हैं
अगर आप सीधे नया iPhone खरीदना है तो Apple के Trade In के आप्शन को भी देख सकते हैं. इसमें पुराने फोन की अनुमानित कीमत नए Apple डिवाइस की खरीददारी में एडजस्ट किया जा सकता है.हालांकि हर पुराने iPhone की कीमत एक जैसी नहीं होती. मॉडल, स्टोरेज, फोन की हालत और दूसरी चीजों के आधार पर कीमत बदल सकती है. इसलिए पहले उसकी अनुमानित वैल्यू देखना जरूरी है.
Ovantica पर भी बेच सकते हैं पुराना iPhone
पुराना iPhone बेचने के लिए Ovantica भी एक अच्छा ऑप्शन है. यहां आप अपने फोन की जानकारी देकर उसकी कीमत का पता लगा सकते हैं. फोन का मॉडल, स्टोरेज और उसकी हालत जैसी चीजों के आधार पर कीमत तय होती है. अगर आपका iPhone अच्छी कंडीशन में है और उसमें कोई बड़ी खराबी नहीं है, तो आपको अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है. नया iPhone लेने से पहले Ovantica पर मिलने वाली कीमत की तुलना दूसरे प्लेटफॉर्म से जरूर कर लें, ताकि आपको बेहतर डील मिल सके.
&amp;nbsp;फोन की हालत से तय होती है कीमत
पुराना iPhone बेचते समय उसकी कीमत सिर्फ मॉडल से तय नहीं होती. फोन की स्क्रीन पर खरोंच है या नहीं, बॉडी की हालत कैसी है, कैमरा और स्पीकर ठीक काम कर रहे हैं या नहीं और बैटरी की स्थिति कैसी है, इन चीजों का भी असर पड़ सकता है. अगर फोन साफ-सुथरा है और उसमें कोई बड़ी खराबी नहीं है तो आपको बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद रहती है.
यह भी पढ़ें :&amp;nbsp;Siri की आवाज से हो गए हैं बोर? सेकेंडों में ऐसे बदलें Voice! ये है तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चांद की बर्फ और क्रेटर मैप करेगा IBM&amp;NASA का AI, जानें कैसे?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/चांद-की-बर्फ-और-क्रेटर-मैप-करेगा-ibm-nasa-का-ai-जानें-कैसे</link>
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        <description><![CDATA[ चांद को समझने की कोशिश अब सिर्फ फोटो और पुराने मेप्स तक सीमित नहीं रहेगी. वैज्ञानिकों के पास चांद से जुड़ा दशकों का डेटा मौजूद है, लेकिन अलग-अलग मिशनों और डिवाइसों से मिले इस डेटा को समझना और उसका इस्तेमाल करना आसान नहीं है. इसी चुनौती को आसान बनाने के लिए IBM और NASA ने एक नया AI मॉडल पेश किया है.
इसे NASA-IBM Lunar Foundation Model नाम दिया गया है. यह एक ओपन-सोर्स AI मॉडल है, जिसे वैज्ञानिक चांद की सतह से जुड़े डेटा का विश्लेषण करने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे. तो आइए जानते हैंं कि NASA-IBM Lunar Foundation Model कैसे कम करेगा.&amp;nbsp;
NASA-IBM Lunar Foundation Model कैसे कम करेगा
रिपोर्ट के अनुसार, IBM और NASA ने 10 सितंबर 2026 को इस AI मॉडल को सार्वजनिक किया है. इसे चांद के अध्ययन के लिए तैयार किया गया है और इसकी ट्रेनिंग में NASA के चार मिशनों के नौ डिवाइसों से जुटाए गए डेटा की 30 से ज्यादा लेयर्स का इस्तेमाल हुआ है. इसमें Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) से मिला डेटा भी शामिल है. यह मॉडल IBM और NASA के ओपन फाउंडेशन मॉडल परिवार का हिस्सा है, जिसमें भू-स्थानिक और मौसम से जुड़े मॉडल भी शामिल हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;चांद की बर्फ खोजने में मिलेगी मदद
NASA और IBM का यह मॉडल चांद के उन हिस्सों को समझने में मदद कर सकता है, जहां स्थायी रूप से छाया रहती है. वैज्ञानिक इन क्षेत्रों में संभावित बर्फ के भंडार की तलाश कर रहे हैं. चंद्रमा पर मौजूद बर्फ जरूरी मानी जाती है क्योंकि इससे पानी और ऑक्सीजन जैसे संसाधनों तक पहुंच मिल सकती है. फ्यूचर में इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल चांद पर मानव उपस्थिति और मंगल मिशनों के लिए रॉकेट ईंधन तैयार करने में किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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क्रेटर की मैपिंग और लैंडिंग साइट की पहचान
AI मॉडल चांद की सतह पर मौजूद क्रेटर्स की पहचान और मैपिंग में भी मदद कर सकता है. इससे संभावित सुरक्षित लैंडिंग साइट चुनने में वैज्ञानिकों को मदद मिल सकती है. इसके अलावा, मॉडल चांद की ज्वालामुखीय विशेषताओं का अध्ययन करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. NASA और IBM के मुताबिक, बेंचमार्क टेस्ट में इस मॉडल ने चांद की सतह की जरूरी विशेषताओं को आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मॉडल की तुलना में 23 प्रतिशत ज्यादा सटीकता से पहचाना है.&amp;nbsp;
2028 के Artemis मिशन के लिए जरूरी&amp;nbsp;
NASA का Artemis कार्यक्रम 2028 में अंतरिक्ष यात्रियों को फिर से चांद पर भेजने की योजना पर काम कर रहा है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य चांद पर लंबे समय तक मानव मौजूदगी के लिए तकनीकों का परीक्षण करना और फ्यूचर के मंगल मिशनों की तैयारी करना है. ऐसे में NASA-IBM Lunar Foundation Model वैज्ञानिकों को चांद की सतह, संभावित बर्फ और क्रेटर्स से जुड़े बड़े डेटा को तेजी से समझने में मदद कर सकता है.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI से लेकर न्यू टेक तक, BRICS में बनेगी Tech Strategy</title>
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        <description><![CDATA[ दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है और इसी के साथ टेक्नोलॉजी भी ग्लोबल सहयोग का बड़ा हिस्सा बनती जा रही है. नई दिल्ली में हो रहे BRICS Summit 2026 में ट्रेड और निवेश के साथ AI, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सर्विसेज और स्टार्टअप जैसे टेक सेक्टर्स पर भी खास फोकस देखने को मिल रहा है. भारत की BRICS अध्यक्षता में इन क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. ऐसे में यह समिट सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ने की दिशा भी तय कर रहा है. &amp;nbsp;
AI और डिजिटल सर्विसेज पर बढ़ेगा सहयोग
जितिन प्रसाद ने AI और डिजिटल सर्विसेज को BRICS देशों के लिए नए अवसरों वाला सेक्टर बताया. उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ना चाहिए और ट्रेड साथ ही सर्विसेज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत है. डिजिटल सर्विसेज में नए मौके पैदा हो रहे हैं और AI के क्षेत्र में मिलकर काम करने से इसका फायदा उठाया जा सकता है. उन्होंने AI को ग्लोबल साउथ के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी बताया.&amp;nbsp;
BRICS में Tech Strategy&amp;nbsp;
BRICS में Tech Strategy बनाने के लिए सदस्य देश AI, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सर्विसेज, डेटा सेंटर और स्टार्टअप जैसे टेक क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर काम करेंगे. इसमें टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को शेयर करने, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच नई टेक पहल को जोड़ने पर जोर रहेगा. भारत अपनी BRICS अध्यक्षता में AI और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों को खास प्राथमिकता दे रहा है, जिससे सदस्य देश मिलकर टेक्नोलॉजी और डिजिटल इकोनॉमी में आगे बढ़ सकें.
BRICS में सेमीकंडक्टर भी एजेंडा
BRICS Summit में सेमीकंडक्टर सेक्टर को भी जरूरी माना गया है. भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और Semiconductor Mission 2.0 की शुरुआत कर चुका है. भारत ने BRICS सदस्य देशों को इस सेक्टर में साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित किया है. भारत अपनी सेमीकंडक्टर पहल को BRICS के सभी सदस्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है.&amp;nbsp;
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स्टार्टअप और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
टेक्नोलॉजी के साथ स्टार्टअप और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी चर्चा के केंद्र में हैं. भारत ने Digital Public Infrastructure को बढ़ावा देने के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं. वहीं भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान BRICS Incubator Network और BRICS Startup Innovation Fund जैसे प्रस्ताव भी संभावित नतीजों में शामिल हैं. इनका उद्देश्य स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए सहयोग का रास्ता मजबूत करना है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Duo महंगा क्यों? Software में छिपा है असली खेल</title>
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        <description><![CDATA[ फोल्डेबल फोन की दुनिया में Apple की एंट्री भले देर से हुई हो, लेकिन iPhone Duo के साथ कंपनी ने एक ऐसा फोन पेश करने की कोशिश की है, जिसमें सिर्फ फोल्ड होने वाली स्क्रीन पर ध्यान नहीं दिया गया है. इसका डिजाइन और कई हार्डवेयर फीचर्स Android फोल्डेबल फोन में पहले से देखने को मिल चुके हैं. ऐसे में असली फर्क उस सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस का है, जिसे Apple ने खासतौर पर फोल्डेबल स्क्रीन के हिसाब से तैयार किया है.
भारत में iPhone Duo शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस फोन की इतनी ज्यादा कीमत की वजह क्या है. तो आइए जानते हैं कि iPhone Duo इतना महंगा क्यों है.&amp;nbsp;
iPhone Duo के हार्डवेयर में क्या है खास?
iPhone Duo का डिजाइन चौड़ा और पासपोर्ट जैसा है, हालांकि Samsung, Huawei और Xiaomi जैसे ब्रांड इसी तरह के फोल्डेबल फोन पहले ही बाजार में ला चुके हैं. Apple ने डिस्प्ले की क्रीज को कम दिखाई देने वाली बनाने पर भी काफी काम किया है. इसमें 100 से ज्यादा कंपोनेंट वाला हिंज, खास एडहेसिव और मैट फिनिश का इस्तेमाल किया गया है. Duo में 5.4 इंच का बाहरी और 7.6 इंच का अंदरूनी Super Retina XDR डिस्प्ले मिलता है. वहीं दोनों स्क्रीन 120Hz ProMotion, Always-On Display और 3,000 निट्स तक की आउटडोर ब्राइटनेस सपोर्ट करती हैं. फोन में Grade 5 Titanium फ्रेम, Ceramic Shield 2 और IP68 रेटिंग भी है.&amp;nbsp;
iPhone Duo इतना महंगा क्यों है?
iPhone Duo की सबसे खास बात इसका सॉफ्टवेयर है. Apple ने iOS 27 को फोल्डेबल स्क्रीन के लिए अलग तरह से डिजाइन किया है. इंटरफेस में कंट्रोल और नेविगेशन को किनारे की तरफ ले जाया गया है, जिससे बड़ी स्क्रीन पर कंटेंट के लिए ज्यादा जगह मिलती है. फोन को खोलने पर बाहर और अंदर स्क्रीन के बीच बदलाव भी काफी सहज रखा गया है. Dynamic Island को भी दोनों डिस्प्ले के हिसाब से दोबारा डिजाइन किया गया है. स्क्रीन खुलते समय इंटरफेस में डायनेमिक ब्लर इफेक्ट दिखाई देता है, जिससे पूरा एक्सपीरियंस ज्यादा फ्लूइड लगता है.
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डेवलपर्स के लिए भी बड़ा बदलाव
Apple सिर्फ अपने सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहना चाहता है. कंपनी चाहती है कि डेवलपर्स भी Duo की फोल्डेबल स्क्रीन का पूरा फायदा उठाएं. Netflix, Slack और Zoom जैसे ऐप्स में Duo के लिए कस्टम सपोर्ट दिखाया गया है, जो फोन के हिंज के एंगल के हिसाब से भी बदल सकता है.&amp;nbsp;
कैमरा और बैटरी भी खास
Duo में 48MP का Dual Fusion कैमरा सिस्टम है. इसमें 48MP Fusion Main और 48MP Fusion Ultra Wide कैमरा मिलता है. बाहरी स्क्रीन रियर कैमरे से फोटो लेते समय लाइव प्रीव्यू की तरह काम कर सकती है. &amp;nbsp;फोन में Dual Battery Architecture दिया गया है. Apple के मुताबिक अंदरूनी स्क्रीन पर 31 घंटे और बाहरी स्क्रीन पर 44 घंटे तक वीडियो प्लेबैक मिल सकता है. A20 Pro चिप और C2 मॉडेम भी इसकी पावर एफिशिएंसी में मदद करते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro में आया गजब का फीचर! अब Apple खुद बताएगा फोटो असली है या नकली</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro में आया गजब का फीचर! अब Apple खुद बताएगा फोटो असली है या नकली ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>3 लाख वाला iPhone Duo खरीदना कितना सही, क्या यह दुनिया का सबसे महंगा फोन?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने iPhone Duo को iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ पेश किया है. फोल्डेबल iPhone को लेकर लंबे समय से चर्चा थी, लेकिन लॉन्च के बाद अब सबसे ज्यादा बात इसके फीचर्स से ज्यादा इसकी कीमत को लेकर हो रही है. भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है. iPhone Duo खरीदने के लिए आपको एक महंगी कार या किसी बड़े निवेश जितनी रकम खर्च करनी पड़ सकती है.
कई लोगों के लिए यह रकम पूरे साल की कमाई या सालभर के पैकेज के बराबर हो सकती है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर एक स्मार्टफोन पर इतने पैसे खर्च करना कितना सही है. खासकर जब iPhone Duo के टॉप वेरिएंट की कीमत 4,49,900 रुपये तक पहुंच जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 3 लाख वाला iPhone Duo खरीदना कितना सही है और क्या यह दुनिया का सबसे महंगा फोन है.&amp;nbsp;
iPhone Duo की कीमत कितनी है?
भारत में iPhone Duo चार स्टोरेज वेरिएंट में लॉन्च हुआ है. इसके 256GB मॉडल की कीमत 2,99,900 रुपये है. 512GB के लिए 3,24,900 रुपये, 1TB मॉडल के लिए 3,74,900 रुपये और 2TB वेरिएंट के लिए 4,49,900 रुपये देने होंगे. फोन स्टार व्हाइट और नाइट स्काई दो कलर ऑप्शन में उपलब्ध है. अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 1,999 डॉलर यानी करीब 1.90 लाख रुपये बताई गई है. इस हिसाब से भारत में बेस मॉडल के लिए अमेरिकी कीमत की तुलना में करीब 1.09 लाख रुपये ज्यादा चुकाने पड़ते हैं.&amp;nbsp;
3 लाख वाला iPhone Duo खरीदना कितना सही है?
3 लाख रुपये वाला iPhone Duo खरीदना उन लोगों के लिए ही सही कहा जा सकता है जिन्हें फोल्डेबल डिजाइन, बड़ी इनर डिस्प्ले और Apple के नए फीचर्स की खास जरूरत है. अगर आपकी प्रिफरेंस सामान्य फोन, कैमरा, सोशल मीडिया और रोजमर्रा के काम तक सीमित है, तो इतनी रकम खर्च करने जरूरी नहीं है, लेकिन अगर आप Apple के पहले फोल्डेबल एक्सपीरियंस के लिए प्रीमियम कीमत देने को तैयार हैं, तो iPhone Duo अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
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क्या है iPhone Duo में खास?
iPhone Duo Apple का पहला फोल्डेबल iPhone है. फोल्ड होने पर इसमें 5.4 इंच की Super Retina XDR आउटर डिस्प्ले मिलती है, जबकि अनफोल्ड करने पर 7.6 इंच की बड़ी स्क्रीन मिलती है. इन दोनों डिस्प्ले ProMotion, Always-On और 3,000 निट्स तक पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करती हैं. फोन में 48MP Fusion प्राइमरी और 48MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है. सेल्फी के लिए 12MP सेंसर मिलता है. फोल्डेबल डिजाइन के साथ Duo Preview और Split View मल्टीटास्किंग जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं.&amp;nbsp;
क्या यह दुनिया का सबसे महंगा फोन?
iPhone Duo दुनिया का सबसे महंगा फोन नहीं है. यह Apple का अब तक का सबसे महंगा iPhone जरूर है, जिसकी भारत में शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपए और 2TB मॉडल की कीमत 4,49,900 रुपए तक है. हालांकि, दुनिया में कुछ ऐसे प्रीमियम और लग्जरी फोन भी मौजूद हैं जिनकी कीमत iPhone Duo से कहीं ज्यादा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cloud के बिना चलेगा AI? Nvidia के नए सिस्टम ने चौंकाया</title>
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        <description><![CDATA[ AI के लिए हर बार Cloud का सहारा लेना जरूरी नहीं होगा. आपके घर में मौजूद अलग-अलग कंप्यूटर भी मिलकर AI के काम को संभाल सकते हैं. NVIDIA ने IFA 2026 में अपने नए Personal AI Router यानी PAIR का ऐलान किया है. खास बात यह है कि PAIR कोई Hardware Router नहीं, बल्कि एक Free और Open-Source Software है, जो घर के PCs को आपस में जोड़कर लोकल AI इंटरफेरेंस टास्क को पूरा करने में मदद करता है. यह Ollama और LM Studio जैसे टूल्स के साथ काम करता है. तो आइए जानते हैं कि NVIDIA PAIR कैसे काम करेगा.&amp;nbsp;
NVIDIA PAIR कैसे करेगा काम?
PAIR Local Network पर मौजूद कम्पेटेबल कंप्यूटर को अपने आप ढूंढता है और उन्हें AI वर्कलोड के लिए कनेक्ट करता है. इसकी खासियत यह है कि यह उन कंप्यूटर की प्रोसेसिंग पावर का इस्तेमाल करता है, जब किसी PC पर गेमिंग या दूसरा काम चल रहा है, तो PAIR दूसरे अवेलेबल सिस्टम पर AI का काम भेज सकता है.
Agentic AI में बड़े कामों को कई छोटे टास्क में बांटा जा सकता है. PAIR इन अलग-अलग टास्क को नेटवर्क पर मौजूद कंप्यूटर में डिस्ट्रिब्यूट कर सकता है, जिससे एक ही GPU पर सारा प्रोसेसिंग लोड नहीं पड़ता. NVIDIA के मुताबिक, डिवाइस नेटवर्क में जुड़ते या हटते रहें, PAIR उसके हिसाब से भी अडेप्ट कर सकता है.
किन कंप्यूटर पर चलेगा PAIR?
PAIR मुख्य रूप से NVIDIA GeForce RTX GPUs वाले सिस्टम के साथ काम करता है. इसमें RTX 20 Series और उसके बाद के GPUs, RTX Pro GPUs और DGX Spark Systems शामिल हैं. इसके अलावा Apple M4 या उससे नए चिप वाले सिस्टम भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. NVIDIA के मुताबिक, PAIR Beta Windows, Linux और macOS के लिए उपलब्ध है. इसे ग्राफिकल और टर्मिनल दोनों इंटरफेस के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या PAIR सुरक्षित है?
NVIDIA ने PAIR में Devices को कनेक्ट करने के लिए &amp;nbsp;6 डिजिट पैरिंग कोड का इस्तेमाल किया है. इसके बाद कंप्यूटर के बीच कम्युनिकेशन को mTLS यानी Mutual Transport Layer Security के जरिए सिक्योर किया जाता है. इससे दोनों सिस्टम के बीच Encrypted Communication Channel तैयार होता है.
यह भी पढ़ें - YouTube Videos कैसे डाउनलोड करें? जानें कौन-सा तरीका है पूरी तरह Legal&amp;nbsp;Local AI को मिलेगा नया Boost
NVIDIA के मुताबिक, PAIR घर के Idle PCs की अनयूज्ड कंप्यूटर पावर को एक साथ जोड़कर लोकल AI टास्क को तेज करने में मदद करेगा. इसके साथ llama.cpp और vLLM के नए ऑप्टिमाइजेशन भी पेश किए गए हैं, जिससे लोकल AI इंफेरेंस की परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है. वहीं Hermes Agent, OpenClaw और Perplexity Portable Computer के लिए लोकल सेटअप को आसान बनाया गया है.
अक्टूबर में आएंगे RTX Spark PCs
NVIDIA के नए RTX Spark Windows PCs अक्टूबर 2026 में लॉन्च होंगे. कंपनी इन्हें AI Agents और Local AI Workloads के लिए तैयार कर रही है, जिससे यूजर्स को AI को अपने ही System पर चलाने के लिए नए ऑप्शन मिलेंगे.
यह भी पढ़ें - Meta Muse करेगा Email से Payment तक का काम, कैसे चलेगा AI Agent? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Apple Wallet और Apple Pay में क्या है फर्क? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे बड़ी गलती</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Wallet और Apple Pay में क्या है फर्क? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे बड़ी गलती ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Apple का Siri AI अब 3 लाख ऐप्स से जुड़ेगा, फोन का इस्तेमाल कैसे बदलेगा?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने Siri को वॉयस असिस्टेंट से आगे ले जाने की तैयारी कर ली है. कंपनी का नया Siri AI अब यूजर्स की बात समझकर अलग-अलग ऐप्स के अंदर मौजूद जानकारी और फीचर्स के साथ काम कर सकेगा. Apple के मुताबिक, ये सिस्टम 3 लाख से ज्यादा ऐप्स के साथ काम करने की क्षमता रखता है. इससे iPhone इस्तेमाल करने का तरीका काफी बदल सकता है.
सिर्फ कमांड नहीं, काम भी करेगा Siri
आपको बता दें कि पुराने Siri में नॉर्मली अलार्म लगाने, मौसम पूछने या कॉल करने जैसे लिमिटेड काम किए जाते थे. नया Siri AI ज्यादा नैचुरल लैंग्वेज समझने के लिए डिजाइन किया गया है. यानी यूजर को किसी खास कमांड को याद रखने की जरूरत नहीं होगी.
Apple के मुताबिक Siri AI स्क्रीन पर मौजूद जानकारी को समझ सकता है, पर्सनल कॉन्टेक्स्ट के आधार पर जवाब दे सकता है और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग ऐप्स में बदलाव भी कर सकता है.
ऐप खोलने की जरूरत होगी कम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बदलाव का सबसे बड़ा असर डेली के ऐप इस्तेमाल पर पड़ सकता है. जैसे यूजर Siri से कह सकता है कि किसी मैसेज के आधार पर रिमाइंडर बना दो या किसी फोटो को एडिट करके शेयर कर दो. Siri जरूरत के मुताबिक उस ऐप के फीचर तक खुद पहुंच सकती है.
Apple ने बताया है कि Siri AI Messages, Music, Reminders जैसे ऐप्स में एक्शन या बदलाव भी कर सकती है. बता दें कि कंपनी का गोल है कि यूजर को हर छोटे काम के लिए ऐप खोलकर अलग-अलग स्क्रीन पर जाने की जरूरत न पड़े.
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3 लाख ऐप्स से जुड़ने का मतलब क्या है?
दरअसल, यहां 3 लाख ऐप्स का मतलब ये नहीं है कि Siri हर ऐप का हर काम अपने आप कर पाएगी. ऐप डेवलपर्स को अपने ऐप के कंटेंट और फीचर्स को Apple Intelligence के लिए उपलब्ध कराने के लिए App Intents और संबंधित स्कीमा का इस्तेमाल करना होगा. Apple के डेवलपर डॉक्यूमेंट के मुताबिक, इससे ऐप के डेटा और एक्शन Siri और Apple Intelligence के लिए खोजने योग्य बनते हैं. यानी धीरे-धीरे ज्यादा ऐप्स Siri के साथ गहराई से जुड़ेंगे और यूजर नैचुरल लैंग्वेज में उनसे जुड़े काम कर सकेगा.
एक ऐप से दूसरे ऐप तक पहुंचेगा AI
बताते चलें कि Siri AI का एक और बड़ा बदलाव है क्रॉस-ऐप काम करना. Apple Intelligence ऐप्स के डेटा और एक्शन को समझकर जरूरत के मुताबिक उन्हें एक साथ इस्तेमाल कर सकता है. जैसे Siri किसी जानकारी को एक ऐप से लेकर दूसरे ऐप में इस्तेमाल करने में मदद कर सकती है.
इससे iPhone केवल ऐप्स का कलेक्शन नहीं बल्कि एक ऐसा सिस्टम बन सकता है जहां यूजर काम बताएगा और Siri उसके लिए जरूरी ऐप्स को पीछे से इस्तेमाल करेगी.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone के साथ Apple ने और क्या फोड़ा बम? पूरी लॉन्च लिस्ट देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के Surprise and Shine इवेंट में इस बार सिर्फ नए iPhone की एंट्री नहीं हुई, बल्कि कंपनी ने अपनी iPhone लाइनअप में एक बड़ा बदलाव भी किया है. 9 सितंबर को हुए Apple Event में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ कंपनी ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone Duo भी पेश किया है. इसके अलावा नई जनरेशन के Apple Watch और AirPods भी लॉन्च किए गए हैं.
वहीं Apple ने नए AirPods 5 और Apple Watch Series 12 के साथ Watch Ultra 4 को भी लॉन्च किया है. &amp;nbsp;Apple का यह इवेंट एक साथ कई प्रोडक्ट कैटेगरी के लिए बड़ा अपडेट लेकर आया है. नए CEO John Ternus ने भी इवेंट में Apple के नए iPhone Duo और दूसरी डिवाइस को कंपनी के Intelligent Personal Hub के तौर पर पेश किया.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro और 18 Pro Max हुए लॉन्च
इवेंट की सबसे बड़ी लॉन्चिंग iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max रही. इन दोनों मॉडल में A20 Pro चिप दी गई है, जिसे Apple ने iPhone की अब तक की सबसे तेज चिप बताया है. कंपनी ने Intelligence, Performance, Battery और Camera में बड़े बदलाव किए हैं. iPhone 18 Pro चार कलर ऑप्शन Deep Black, Silver, Glacier और Burgundy में आया है.
A20 Pro चिप को मिला बड़ा अपग्रेड
iPhone 18 Pro में नई A20 Pro चिप दी गई है, जो 2nm Architecture पर आधारित है. इसमें 6-Core CPU, 7-Core GPU और 32-Core Neural Engine दिया गया है. Apple के मुताबिक नए Super Cores 20 प्रतिशत तक तेज हैं और GPU Performance में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है. Neural Engine की Compute Power भी 2 गुना हुई है.&amp;nbsp;
AirPods 5 भी हुए लॉन्च
Apple ने AirPods 5 भी पेश किए हैं. इनमें Redesigned Open-Ear Design, नया Multi-Port Acoustic Architecture और Next-Generation Adaptive EQ दिया गया है. कंपनी के मुताबिक नए AirPods में Active Noise Cancellation के साथ पिछली पीढ़ी की तुलना में 50 प्रतिशत ज्यादा Noise Reduction मिलता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Apple iPhone 18 Launch : कितनी फास्ट है Apple की नई A20 प्रो चिप, फोन को कितना करेगी तेज?
Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च 
Apple ने आखिरकार अपना पहला फोल्डेबल iPhone, iPhone Duo लॉन्च कर दिया है. यह डिवाइस दो स्क्रीन के साथ पेश किया गया है और खुलने पर 7.6 इंच का बड़ा इनर डिस्प्ले देता है. इसका डिजाइन पासपोर्ट जैसा है, जबकि फोल्ड होने पर इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. Apple ने इसमें ऐसा फोल्डेबल डिजाइन दिया है, जिसमें डिस्प्ले को फ्लैट रखने और क्रीज को कम दिखाने पर खास फोकस किया गया है. iPhone Duo में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है और यह Apple के नए चिपसेट के साथ आता है.&amp;nbsp;
Apple Watch Series 12 और Ultra 4 की एंट्री
इवेंट में Apple Watch Series 12 और Apple Watch Ultra 4 भी लॉन्च किए गए. इनमें नया Health Sensing System दिया गया है. Apple के मुताबिक अब Background Heart Rate Readings हर पांच सेकंड में ली जाएंगी. इसके साथ Heart Rate Variability यानी HRV को भी ज्यादा बार Sample किया जाएगा.
यह भी पढ़ें - iPhone 18 सीरीज से Foldable तक आज क्या होगा लॉन्च, कितनी होगी कीमत? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च! कीमत से फीचर्स तक जानें सबकुछ</title>
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        <description><![CDATA[ Apple का बहुप्रतिक्षित फोल्डेबल फोन आखिरकार लॉन्च हो गया है. हालांकि, इस फोन को लेकर कई सारी चर्चाएं चल रही थीं. लेकिन कंपनी ने अपने पहले फोल्डेबल फोन को iPhone Duo नाम से लॉन्च किया है. बता दें कि कंपनी ने इस फोन को इस तरह से डिजाइन किया है कि यूजर्स को बंद होने पर कॉम्पैक्ट iPhone का एक्सपीरिएंस मिले जबकि खोलने पर बड़ी स्क्रीन का फायदा मिल सके. कंपनी का कहना है कि ये फोन मल्टीटास्किंग, गेमिंग और वीडियो देखने के लिए यूजर्स को बेस्ट एक्सपीरिएंस देगा.
शानदार कैमरा सेटअप
इस फोन के कैमरा सेटअप पर नजर डालें तो इसमें कंपनी ने ट्रिपल कैमरा की जगह पर डुआल कैमरा सेटअप दिया है. इसमें 48 मेगापिक्सल का Fusion Main कैमरा है और 48MP का Fusion Ultra Wide कैमरा दिया गया है.
इसके अलावा फोन में Apple Intelligence और Siri AI का सपोर्ट भी मिलता है. इन फीचर्स के जरिए Apple यूजर्स को ज्यादा पर्सनलाइज्ड और स्मार्ट एक्सपीरिएंस देने की कोशिश कर रहा है.
मिले जबरदस्त फीचर्स

This is the iPhone Duo, starting at $1,999 #AppleEvent pic.twitter.com/5VithPkI5v
&amp;mdash; Apple Hub (@theapplehub) September 9, 2026



आपको बता दें कि iPhone Duo की सबसे बड़ी खासियत इसका फोल्डेबल डिस्प्ले है. इस फोन में कंपनी ने 7.6 इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले उपलब्ध कराया है जो अब तक किसी भी आईफोन में नहीं दिया गया था. इसके अलावा इस फोन के बाहर में 5.4 इंच की डिस्प्ले दी गई है. दोनों डिस्प्ले में ProMotion, Always-On Display और आउटडोर में 3,000 निट्स तक की ब्राइटनेस का सपोर्ट मिल जाता है. इसके अलावा फोन में IP68 रेटिंग मिलती है जिसका मतलबब है कि ये फोल्डेबल फोन पानी और धूल से सुरक्षित रहेगा.
दमदार प्रोसेर
iPhone Duo में Apple का नया A20 Pro चिपसेट प्रोसेसर दिया गया है. इसके अलावा फोन में कस्टम वेपर चैंबर भी दिया गया है जो फोन को हीट होने से बचाने में मदद करता है. साथ ही फोन में डुअल-बैटरी सिस्टम मौजूद है. कंपनी का दावा है कि ये फोन यूजर्स को करीब 24 घंटों का जबरदस्त बैकअप देने में सक्षम होगा.
यह भी पढ़ें: Apple का AI अब सिर्फ iPhone में नहीं? Siri से लेकर Smart Home तक बड़ा प्लान
कितनी है iPhone Duo की कीमत
कंपनी ने भारत में Apple iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये रखी गई है. ये फोन 256GB से लेकर 2TB तक के स्टोरेज ऑप्शनों में उपलब्ध होगा. कंपनी ने इस फोन को Star White और Night Sky शेड में पेश किया है. इसके अलावा इस फोन के प्री-ऑर्डर 16 अक्टूबर से शुरू होंगे और इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होगी.
Apple का फोल्डेबल सेगमेंट में बड़ा कदम
बता दें कि iPhone Duo के साथ Apple ने फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में अपनी पहली मौजूदगी दर्ज कराई है. बड़ी स्क्रीन, प्रीमियम डिजाइन, A20 Pro चिप और iOS 27 के नए फीचर्स इसे कंपनी के मौजूदा iPhone मॉडल्स से अलग बनाते हैं. अब देखना होगा कि करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत वाला ये फोल्डेबल iPhone ग्राहकों के बीच कितना फेमश होता है.
यह भी पढ़ें:
1199 डॉलर की कीमत के साथ लॉन्च हुआ iPhone 18 Pro और Pro Max! जानें फीचर्स ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>$1299 वाला iPhone 18 Pro Max भारत में कितने का मिलेगा? 4 साल के डेटा से समझें</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने iPhone 18 Pro Max को अमेरिका में 1,299 डॉलर की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च किया है. ये कीमत पिछले साल के iPhone 17 Pro Max के मुकाबले 100 डॉलर ज्यादा है. ऐसे में भारतीय ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर ये फोन भारत में कितने रुपये का पड़ेगा? पिछले चार साल में iPhone Pro Max की अमेरिका और भारत की लॉन्च कीमतों को देखें तो इसका एक दिलचस्प पैटर्न सामने आता है.
चार साल में अमेरिका और भारत की कीमत का अंतर
अगर 2022 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो iPhone Pro Max की अमेरिकी शुरुआती कीमत और भारत में इसकी कीमत के बीच अच्छा-खासा अंतर रहा है. 2022 में iPhone 14 Pro Max की अमेरिकी कीमत 1,099 डॉलर थी जबकि भारत में इसका शुरुआती दाम 1,39,900 रुपये था.
2023 में Apple ने iPhone 15 Pro Max की अमेरिकी कीमत 1,199 डॉलर रखी. भारत में इसका 256GB मॉडल 1,59,900 रुपये में लॉन्च हुआ.
2024 में iPhone 16 Pro Max की अमेरिकी कीमत 1,199 डॉलर पर ही रही लेकिन भारत में शुरुआती कीमत घटकर 1,44,900 रुपये हो गई. ये 256GB मॉडल के लिए थी.
2025 में iPhone 17 Pro Max की अमेरिकी कीमत फिर 1,199 डॉलर रही जबकि भारत में इसका शुरुआती दाम 1,49,900 रुपये था.
यानी पिछले चार साल में भारत में Pro Max की शुरुआती कीमत 1,39,900 रुपये से बढ़कर 1,49,900 रुपये तक पहुंची है. बीच में 2024 में कीमत में कमी भी देखने को मिली.
अब 1,299 डॉलर की कीमत से कितना बढ़ेगा दाम?
iPhone 18 Pro Max के लिए कंडीशन थोड़ी अलग है. इस बार अमेरिका में ही Apple ने कीमत 100 डॉलर बढ़ाकर 1,299 डॉलर कर दी है. यानी सिर्फ डॉलर की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है बल्कि भारत में भी इसका असर देखने को मिलेगा.
अगर पिछले वर्षों में अमेरिका और भारत के बीच बने कीमत के अंतर को आधार मानें तो 1,299 डॉलर वाले iPhone 18 Pro Max की भारतीय शुरुआती कीमत करीब 1,64,900 रुपये से 1,69,900 रुपये के बीच हो सकती है.
यह भी पढ़ें: 1199 डॉलर की कीमत के साथ लॉन्च हुआ iPhone 18 Pro और Pro Max! जानें फीचर्स
इसके अलावा अगर iPhone 17 Pro Max भारत में 1,49,900 रुपये से शुरू हुआ था. अगर Apple अमेरिकी कीमत में 100 डॉलर की बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय कीमत में भी जोड़ता है तो करीब 10,000 से 15,000 रुपये की बढ़ोतरी संभव दिखाई देती है. इस हिसाब से कीमत लगभग 1,59,900 से 1,64,900 रुपये तक पहुंच सकती है.
1.7 लाख रुपये तक जा सकती है शुरुआती कीमत
हालांकि टैक्स, करेंसी एक्सचेंज रेट, भारत में Apple की प्राइसिंग प्लानिंग और इंपोर्ट/लोकल मैन्युफैक्चरिंग जैसे कारण डिवाइस की फाइनल कीमत पर असर डाल सकते हैं. दिलचस्प बात ये है कि लॉन्च से पहले कुछ रिपोर्ट्स में iPhone 18 Pro Max की भारत में कीमत करीब 1,59,900 रुपये बताई गई थी, जबकि कुछ अनुमानों में ये 1,69,900 रुपये तक जाने की बात कही गई.
भारत में कितनी बढ़ सकती है कीमत?
अगर पिछले चार साल के ट्रेंड और इस साल अमेरिका में हुई 100 डॉलर की बढ़ोतरी को मिलाकर देखें तो iPhone 18 Pro Max की भारत में शुरुआती कीमत लगभग 1.60 लाख से 1.70 लाख रुपये के बीच बैठ सकती है. यानी iPhone 17 Pro Max के 1,49,900 रुपये के मुकाबले करीब 10,000 से 20,000 रुपये तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
इसका मतलब है कि भारतीय ग्राहकों को इस बार Pro Max खरीदने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा बजट रखना पड़ सकता है. वहीं, 512GB और 1TB जैसे ज्यादा स्टोरेज वेरिएंट की कीमत इससे काफी ऊपर जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Siri की आवाज से हो गए हैं बोर? सेकेंडों में ऐसे बदलें Voice! ये है तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप लंबे समय से iPhone इस्तेमाल कर रहे हैं और Siri की एक ही आवाज सुन-सुनकर बोर हो चुके हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. Apple iPhone में Siri की आवाज बदलने का ऑप्शन देता है. इतना ही नहीं, आप उपलब्ध ऑप्शनों के अनुसार Siri की Voice और Language भी बदल सकते हैं. इसके लिए किसी थर्ड-पार्टी ऐप की जरूरत नहीं पड़ती है. आइए जानते हैं क्या है तरीका.
Siri की आवाज बदलना है बेहद आसान
Siri की आवाज बदलने का प्रोसेस काफी आसान है. इसके लिए सबसे पहले अपने iPhone में Settings ऐप खोलें. इसके बाद नीचे स्क्रॉल करके Siri या Apple Intelligence &amp;amp; Siri वाले ऑप्शन पर जाएं. iOS के वर्जन के हिसाब से इस सेटिंग का नाम थोड़ा अलग हो सकता है. अब यहां आपको Siri से जुड़ी कई सेटिंग्स दिखाई देंगी. इनमें Voice या Siri Voice का ऑप्शन सर्च करें और उस पर टैप करें.
कुछ सेकेंड में चुनें नई Voice
आपको बता दें कि Siri Voice के अंदर जाने के बाद आपको उपलब्ध अलग-अलग Voice ऑप्शन दिखाई दे सकते हैं. यहां किसी Voice पर टैप करके उसे चुना जा सकता है. कुछ ऑप्शनों में अलग-अलग Variety/Accent भी उपलब्ध होते हैं.
किसी Voice को चुनने के बाद iPhone उसे डाउनलोड कर सकता है. इसके लिए इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत पड़ती है. डाउनलोड पूरा होने के बाद Siri आपकी चुनी हुई आवाज में जवाब देने लगेगी.
Language भी बदल सकते हैं
अगर आप Siri को किसी दूसरी लैंग्वेज में इस्तेमाल करना चाहते हैं तो ये ऑप्शन भी इसी सेटिंग सेक्शन में मिल जाएगा. Settings &gt; Siri/Apple Intelligence &amp;amp; Siri &gt; Language पर जाकर उपलब्ध भाषा में से अपनी पसंद की लैंग्वेज चुन सकते हैं.
यह भी पढ़ें: Foldable iPhone में नहीं मिलेंगे ये फीचर्स! Face ID भी हो सकता है गायब
Siri की आवाज बदलने से क्या बदलेगा?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Voice बदलने से आपके iPhone की बाकी आवाजों पर कोई असर नहीं पड़ता है. बदलाव मुख्य रूप से Siri के बोलने के तरीके और आवाज तक सीमित रहता है. यानी म्यूजिक, रिंगटोन, नोटिफिकेशन या दूसरे ऑडियो की आवाज पहले जैसी ही रहती है.
ये फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो रोजाना Siri का इस्तेमाल करते हैं और अपने iPhone के एक्सपीरिएंस में थोड़ा बदलाव चाहते हैं.
अगर Voice का ऑप्शन दिखाई न दे तो?
अगर आपके iPhone में Siri Voice का ऑप्शन नहीं दिख रहा है तो सबसे पहले iOS अपडेट चेक करें. साथ ही ये भी ध्यान रखें कि Siri की कुछ Voice और Language सभी देशों या क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं होतीं हैं.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro में ये 10 बड़े बदलाव, पुराने मॉडल से कितना एडवांस्ड?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple ने आखिरकार अपने नए Pro iPhone से पर्दा उठा दिया है. कंपनी के Surprise and Shine इवेंट में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च किया गया. इस बार Apple ने सिर्फ डिजाइन या कैमरा पर ही फोकस नहीं किया, बल्कि नए A20 Pro चिप, ज्यादा पावरफुल AI, बेहतर कूलिंग और कैमरा कंट्रोल जैसे कई बड़े बदलाव किए हैं. खास बात यह है कि पहली बार iPhone 18 Pro को Apple के नए CEO John Ternus ने पेश किया. &amp;nbsp;वहीं, इस बार कंपनी ने रेगुलर iPhone 18 को लॉन्च नहीं किया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि iPhone 18 Pro में कौन-से 10 बड़े बदलाव हुए और पुराने मॉडल से कितना एडवांस्ड है.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro में ये 10 बड़े बदलाव
1. नया 2nm A20 Pro चिप - iPhone 18 Pro सीरीज का सबसे बड़ा अपग्रेड इसका A20 Pro चिप है. यह 2nm टेक्नोलॉजी पर तैयार किया गया है. इसमें 6-कोर CPU है, जिसमें दो नए Super Cores और चार Efficiency Cores हैं. Apple के मुताबिक Super Cores 20 प्रतिशत तक तेज हैं.&amp;nbsp;
2. 7-कोर GPU और बेहतर AI - A20 Pro में 7-कोर GPU दिया गया है, जिससे ग्राफिक्स परफॉर्मेंस 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. चिप में Neural Engine को भी बड़ा अपग्रेड मिला है. अब इसमें दूसरा Neural Engine भी है और कुल 32 कोर दिए गए हैं. इससे ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग को ज्यादा ताकत मिलती है.&amp;nbsp;
3. नया कूलिंग सिस्टम - पावरफुल चिप के साथ Apple ने फोन की थर्मल मैनेजमेंट पर भी काम किया है. iPhone 18 Pro में नया Vapour Chamber कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जो पिछले मॉडल की तुलना में काफी बड़ा है. इसका मकसद गेमिंग और AI जैसे भारी काम के दौरान फोन को ज्यादा ठंडा रखना है.&amp;nbsp;
4. Dynamic Island - Dynamic Island अब पहले से छोटा है. Apple ने इसे ज्यादा यूजफुल बनाया है और यह एक साथ तीन Live Activities दिखा सकता है यानी फ्लाइट स्टेटस, Maps नेविगेशन और टाइमर जैसी अलग-अलग जानकारी एक साथ देखी जा सकती है.&amp;nbsp;
5. 48MP कैमरा - कैमरा सिस्टम में इस बार बड़ा बदलाव Variable Aperture का है. 48MP Fusion Main Camera में मैकेनिकल Variable Aperture दिया गया है. इससे लेंस में आने वाली रोशनी और Depth of Field पर ज्यादा कंट्रोल मिलता है.&amp;nbsp;
6. तीन 48MP रियर कैमरे - दोनों Pro मॉडल में Triple Rear Camera Setup मिलता है. इसमें 48MP Main, 48MP Telephoto और 48MP Ultra Wide कैमरा शामिल हैं. Apple का कहना है कि यह उसका सालों में सबसे बड़ा कैमरा अपग्रेड है.
7. AI वाला नया Siri - iPhone 18 Pro में iOS 27 के साथ नया Siri AI मिलता है. यह यूजर के Personal Context को समझकर ज्यादा Personal और Conversational तरीके से काम कर सकता है. Apple के अनुसार Siri AI 300,000 से ज्यादा ऐप्स के साथ काम कर सकता है.&amp;nbsp;
8. बैटरी - iPhone 18 Pro में 36 घंटे तक और iPhone 18 Pro Max में 45 घंटे तक वीडियो प्लेबैक का दावा किया गया है. Pro Max को Apple ने अब तक की सबसे बेहतर iPhone Battery Life वाला मॉडल बताया है.&amp;nbsp;
9. नया डिजाइन और रंग - फोन में Color-Matched Aluminum और Back Glass दिया गया है. नए Burgundy और Glacier रंग के साथ Black और Silver ऑप्शन भी मिलते हैं. साथ ही Dynamic Island को भी छोटा किया गया है.&amp;nbsp;
10. AI फोटो की पहचान - Apple ने AI से बनी या बदली गई तस्वीरों को लेकर भी नया फीचर पेश किया है. iPhone 18 Pro से क्लिक की गई तस्वीरों के लिए Apple Reference Image नाम का नया स्टैंडर्ड दिया गया है, जिससे फोटो की ऑथेंटिसिटी को पहचानने में मदद मिलेगी.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - iPhone के साथ Apple ने और क्या फोड़ा बम? पूरी लॉन्च लिस्ट देखें
iPhone 18 Pro और &amp;nbsp;Pro Max की कीमत
भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपए और iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1,79,900 रुपए है. इन दोनों मॉडल 256GB, 512GB, 1TB और 2TB स्टोरेज ऑप्शन में आते हैं. इनके प्री-ऑर्डर 12 सितंबर से शुरू होंगे और बिक्री 18 सितंबर से शुरू होगी.&amp;nbsp;
पुराने मॉडल से कितना एडवांस्ड है?
पुराने मॉडल के मुकाबले iPhone 18 Pro में A20 Pro चिप, बेहतर AI, Variable Aperture कैमरा, छोटा Dynamic Island और ज्यादा बैटरी लाइफ जैसे बड़े अपग्रेड मिले हैं. इसके साथ बेहतर कूलिंग भी दी गई है, जिससे यह परफॉर्मेंस और कैमरा के मामले में ज्यादा एडवांस्ड बनता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo लॉन्च! कीमत से फीचर्स तक जानें सबकुछ ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>YouTube Videos कैसे डाउनलोड करें? जानें कौन&amp;सा तरीका है पूरी तरह Legal</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Videos कैसे डाउनलोड करें? जानें कौन-सा तरीका है पूरी तरह Legal ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>घर के Wi&amp;Fi की स्पीड कितनी होनी चाहिए? ऐसे फटाफट करें टेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ घर के लिए नया इंटरनेट कनेक्शन लेते समय सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर कितनी Mbps स्पीड काफी होगी. बहुत कम स्पीड वाला प्लान लेने पर डेली के कामों में परेशानी हो सकती है, वहीं जरूरत से ज्यादा स्पीड के लिए पैसे खर्च करने का भी कोई खास फायदा नहीं होता है. इसलिए प्लान चुनने से पहले ये समझना जरूरी है कि आपकी जरूरत के हिसाब से कितनी इंटरनेट स्पीड सही रहेगी.
इंटरनेट स्पीड में Download और Upload क्या है?
आपको बता दें कि इंटरनेट की स्पीड नॉर्मली दो चीजों से तय होती है एक Download Speed और दूसरी Upload Speed. Download का मतलब इंटरनेट से आपके फोन, लैपटॉप या दूसरे डिवाइस तक डेटा आने की रफ्तार है. वहीं Upload Speed बताती है कि आपके डिवाइस से इंटरनेट पर डेटा कितनी तेजी से भेजा जा सकता है.
इसे Mbps या Gbps में मापा जाता है. यहां ध्यान रखें कि Mbps में छोटा b का मतलब bits होता है जबकि फाइल का साइज MB यानी Megabytes में बताया जाता है.
Ping या Latency भी है बेहद जरूरी
बताते चलें कि सिर्फ Download और Upload Speed देखकर इंटरनेट कनेक्शन को अच्छा नहीं कहा जा सकता है. Ping या Latency भी जरूरी होते हैं. ये बताता है कि आपके डिवाइस से सर्वर तक डेटा पहुंचने और वापस आने में कितना समय लग रहा है.
इसे मिलीसेकंड यानी ms में मापा जाता है और नॉर्मली कम Ping बेहतर माना जाता है. खासकर ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल और दूसरी रियल-टाइम एक्टिविटी में कम Latency का काफी अहम रोल होता है.
कितनी इंटरनेट स्पीड आपके लिए काफी है?
आपकी जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि घर में कितने लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं और उनका इस्तेमाल किस तरह का है. जैसे Netflix जैसी स्ट्रीमिंग सर्विसेज पर Full HD वीडियो के लिए करीब 5 Mbps और 4K वीडियो के लिए लगभग 15 Mbps की स्पीड काफी होती है. वीडियो कॉल के लिए भी बहुत ज्यादा स्पीड की जरूरत नहीं होती है.
लेकिन घर में एक साथ कई डिवाइस इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हों तो जरूरत तेजी से बढ़ जाती है. मसलन, एक व्यक्ति 4K वीडियो देख रहा है, दूसरा वीडियो कॉल पर है और तीसरा गेम डाउनलोड कर रहा है तो 50 Mbps कनेक्शन पर नेटवर्क स्लो महसूस होता है.
Fiber और Cable में क्या अंतर है?
जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेट की टेक्नोलॉजी भी स्पीड पर असर डालती है. Cable इंटरनेट में अक्सर Download Speed, Upload Speed से काफी ज्यादा होती है. वहीं Fiber इंटरनेट में दोनों डॉयरेक्शन में लगभग एक जैसी स्पीड मिलना आम बात है.
ग्रामीण या दूरदराज के क्षेत्रों में Fiber या Cable उपलब्ध नहीं होने पर 5G Home Internet या Satellite Internet ऑप्शन बेहतर साबित हो सकते हैं. इनकी स्पीड और Latency जगह और नेटवर्क की कंडिशन के अनुसार बदल सकती है. नया प्लान लेते समय ISP की स्पीड, Upload पावर और दूसरे डिटेल्स को ध्यान से देखना जरूरी है.
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इंटरनेट स्पीड कैसे टेस्ट करें?
अगर आपको अपनी मौजूदा इंटरनेट स्पीड का पता नहीं है तो सबसे पहले अपने Internet Service Provider के अकाउंट या प्लान की जानकारी देखें. इसके बाद ऑनलाइन Speed Test की मदद से असली स्पीड को चेक किया जा सकता है.
Speedtest.net जैसी सर्विसेज Download, Upload और Ping की जानकारी देती हैं. वहीं, Cloudflare का Speed Test कनेक्शन की स्थिरता, Jitter और Packet Loss जैसी एक्सट्रा जानकारी भी दिखा सकता है.
अगर आपका फोकस Gaming या दूसरे रियल-टाइम कामों पर है तो अलग-अलग सर्वर पर Ping चेक करना भी फायदेमंद रहेगा.
एक बार नहीं, कई बार करें स्पीड टेस्ट
इंटरनेट स्पीड हर समय एक जैसी नहीं रहती. दिन के व्यस्त समय में आपके इलाके में ज्यादा लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हों तो स्पीड कम हो सकती है. इसलिए बेहतर रिजल्ट्स के लिए सुबह, दोपहर और शाम जैसे अलग-अलग समय पर कई बार टेस्ट करें और उनका औसत देखें. साथ ही टेस्ट के दौरान घर में कोई बड़ी फाइल डाउनलोड या अपलोड न कर रहा हो, इसका भी ध्यान रखें.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>घर, के, Wi-Fi, की, स्पीड, कितनी, होनी, चाहिए, ऐसे, फटाफट, करें, टेस्ट</media:keywords>
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        <title>महंगा Mic खरीदने से पहले जानें, iPhone का ये Audio Feature</title>
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        <description><![CDATA[ वीडियो बनाते समय अक्सर लोग कैमरा क्वालिटी, लाइटिंग और फ्रेमिंग पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन अच्छी वीडियो को बेहतर बनाने में ऑडियो का भी बड़ा रोल होता है. रील्स, व्लॉग, इंटरव्यू या किसी इवेंट की रिकॉर्डिंग के दौरान अगर आसपास ट्रैफिक, हवा या लोगों की बातचीत का शोर ज्यादा हो, तो आपकी आवाज साफ सुनाई नहीं देती है.
ऐसे में कई लोगों को लगता है कि बेहतर साउंड के लिए अलग से महंगा माइक्रोफोन खरीदना जरूरी है, हालांकि अगर आप iPhone से वीडियो रिकॉर्ड करते हैं, तो फोन में मौजूद कुछ ऑडियो फीचर्स आपकी आवाज को ज्यादा साफ रिकॉर्ड करने में मदद कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं कौन-सी सेटिंग आपके काम आ सकती है.&amp;nbsp;
iPhone का ये Audio Feature सुधारेगा आवाज&amp;nbsp;
अगर आपका iPhone iOS 26 या उसके बाद के वर्जन पर चल रहा है, तो वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान Voice Isolation का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह फीचर आपकी आवाज पर ज्यादा फोकस करता है और आसपास के शोर को कम करने की कोशिश करता है. इसे इस्तेमाल करने के लिए Camera ऐप खोलकर Video मोड चुनें और रिकॉर्डिंग शुरू करें. इसके बाद स्क्रीन के ऊपर से Control Center खोलें. यहां Audio Controls या Mic Mode पर टैप करें और Voice Isolation चुन लें. इसके बाद रिकॉर्डिंग के दौरान iPhone आपकी आवाज को प्रेफरेंस देगा.&amp;nbsp;
कौन-सा Mic Mode चुनें?
iPhone में रिकॉर्डिंग के लिए अलग-अलग माइक्रोफोन मोड मिलते हैं. Automatic मोड में iPhone खुद तय करता है कि कौन-सा मोड बेहतर रहेगा. Standard सामान्य ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए है, जबकि Voice Isolation बोलने वाली वीडियो में आवाज को साफ रखने और बैकग्राउंड नॉइस कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, Wide Spectrum आसपास की आवाजों को भी रिकॉर्ड करने के लिए यूजफुल है. इसका इस्तेमाल कॉन्सर्ट, लाइव इवेंट या नेचर साउंड रिकॉर्ड करते समय किया जा सकता है.&amp;nbsp;
रिकॉर्डिंग के बाद भी कैसे Audio सुधार सकते हैं?
अगर वीडियो पहले ही रिकॉर्ड हो चुकी है, तो Photos ऐप के ऑडिया मिक्स फीचर से ऑडियो को बेहतर करने की कोशिश की जा सकती है. इसके लिए Photos ऐप में वीडियो खोलें, एडिट पर जाएं और ऑडियो मिक्स में इन-फ्रेम, स्टूडियो या उपलब्ध दूसरे प्रोफाइल्स को आजमाएं.
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External Mic है तो ये सैटिंग्स देखें
अगर आप USB-C या किसी दूसरे External Mic का इस्तेमाल करते हैं, तो नए iOS वर्जन में इनपुट गेन को भी एडजस्ट किया जा सकता है. इससे माइक्रोफोन की सेंसिटिविटी बढ़ाई या घटाई जा सकती है. अगर एक से ज्यादा ऑडियो डिवाइस जुड़े हैं, तो कंट्रोल सेंटर से ऑडियो इनपुट बदलकर रिकॉर्डिंग के लिए माइक्रोफोन चुना जा सकता है.&amp;nbsp;
Stereo Audio को लेकर क्या करें?
Mono Audio को बैकग्राउंड नॉइस कम करने वाली सेटिंग नहीं समझना चाहिए. यह Accessibility फीचर है, जो लेफ्ट और राइट ऑडियो चैनल को एक साथ मिला देता है. वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए Stereo Sound ऑन रखना बेहतर होता है, क्योंकि इससे ऑडियो ज्यादा नेचुरल रिकॉर्ड होती है. रिकॉर्डिंग के दौरान Mic को हाथ से न ढकें, तेज हवा में रिकॉर्डिंग से बचें या Wind Muff इस्तेमाल करें और कैमरे को अपनी आवाज के करीब रखें. प्रोफेशनल रिकॉर्डिंग के लिए External Mic का इस्तेमाल किया जा सकता है. रिकॉर्डिंग शुरू करने से पहले Mic Mode चेक करना भी न भूलें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>AI से इंसानों के अस्तित्व पर खतरा? Anthropic रिसर्चर ने जताई बड़ी चिंता</title>
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        <description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पूरी दुनिया में काफी तेजी से अपने पैर पसार रहा है. टेक कंपनियों से लेकर आम यूजर्स तक एआई का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है. लेकिन अब एआई की सुरक्षा को लेकर भी कई सारे सवाल उठ रहे हैं. Anthropic के एक प्रमुख AI सेफ्टी रिसर्चर ने ऐसा दावा किया है जिसने टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है. उनका मानना है कि आने वाले दशक में AI के इतना शक्तिशाली हो जाने का खतरा है कि ये पूरी ह्यूमन प्रजाति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.
इंसानों को खत्म कर देगा AI?
दरअसल, Anthropic के AI Alignment रिसर्चर Evan Hubinger ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता जाहिर की है. उनके मुताबिक, फिलहाल जो मौजूदा AI मॉडल्स हैं उनसे इंसानों को ज्यादा खतरा नहीं है लेकिन आने वाले समय में अगर एआई अपने आप को बेहतर बना लेता है तो ये इंसानों के लिए खतरा साबित हो सकता है. Hubinger का अंदाजा है कि अगले 10 सालों में एआई के इंसानी सभ्यता को खत्म करने का प्रतिशत 10 फीसदी से भी ज्यादा हो सकता है. उनका मानना है कि अगर एआई अपनी ताकत को बढ़ा लेता है और अपने आप में सुधार लाता है तो ये इंसानों के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है.
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AI एजेंट्स के साइबर अटैक ने बढ़ाई चिंता
जानकारी के अनुसार, AI सेफ्टी को लेकर चिंता ऐसे समय बढ़ी है जब कई कंपनियों के AI सिस्टम से जुड़े साइबर सुरक्षा मामले सामने आए हैं. AI एजेंट्स ऐसे सिस्टम हैं जो इंसान के कमांड्स के बिना कई काम खुद करने में सक्षम होते हैं.
हाल के महीनों में OpenAI, Anthropic और Meta ने अपने AI टूल्स से जुड़े हैकिंग या साइबर एक्टिविटी के मामलों का खुलासा किया है.
क्या Superintelligence के लिए तैयार है हम?
आपको बता दें कि Hubinger ने ये भी कहा कि AI को इंसानों के इच्छाओं के अनुरूप बनाए रखने के लिए अभी जितने समाधान की जरूरत है उतने मौजूद नहीं हैं. इसे AI Alignment कहा जाता है जिसका मकसद ये सुनिश्चित करना है कि ज्यादा पावरफुल AI सिस्टम इंसानों के हितों के लिए काम करे न की उनके खिलाफ.
उनके अनुसार, AI कंपनियां सुरक्षा पर काम कर रही हैं लेकिन सुपरइंटेलिजेंस के सामने आने वाले खतरों को पूरी तरह कंट्रोल करने की क्लियर प्लानिंग फिलहाल तैयार नहीं है. इसीलिए हम अभी सुपरइंटेलिजेंस के लिए अच्छी तरह से तैयार नहीं हैं.
Anthropic की रिपोर्ट में भी चेतावनी
दरअसल, Anthropic ने अगस्त में जारी अपनी एक सेफ्टी रिपोर्ट जारी की थी जिसमें एआई को लेकर आगे आने वाले समय में खतरों के बारे में बताया गया था. इस रिपोर्ट में साफ बताया गया था कि अगर एआई अपने आप को ज्यादा पावरफुल बना लेता है तो ये इंसानों के लिए भविष्य में खतरा बन सकता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Shopping के बाद Tracking आसान, Google Wallet दिखाएगा पूरा ऑर्डर स्टेटस</title>
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        <description><![CDATA[ ऑनलाइन Shopping करने के बाद सबसे ज्यादा झंझट ऑर्डर को Track करने में होती है. कभी Retailer की Website खोलनी पड़ती है, तो कभी कोरियर की App या फिर Gmail में आए Confirmation Email को ढूंढना पड़ता है. अलग-अलग जगहों पर ऑर्डर की जानकारी चेक करने की यह प्रक्रिया अब थोड़ी आसान हो सकती है.
Google Wallet में एक ऐसा फीचर आया है, जो Eligible Online ऑर्डर की रिसिप्ट , ट्रैकिंग नंबर और शिपिंग अपडेट्स को एक ही जगह दिखा सकता है. Google Wallet यह जानकारी Gmail से लेता है और App की होम स्क्रीन पर आने वाली Deliveries को दिखाता है. हालांकि फिलहाल यह सुविधा सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध है और इसका इस्तेमाल करने के लिए Gmail की कुछ सेटिंग को On रखना जरूरी है.
Google Wallet में ऑर्डर Tracking कैसे शुरू करें?
1. इस फिचर को इस्तेमाल करने से पहले Gmail में कुछ जरूरी सैटिंग्स Enable करनी होंगी. इसके लिए Gmail App खोलें और सैटिंग्स में जाकर अपना Google Account Select करें.
2. यहां Package Tracking को On करें. इसके बाद स्मार्ट फीचर्स और पर्सनलाइजेशन को भी Enable करना होगा.
3. कुछ Google Products में इसे सिर्फ स्मार्ट फीचर्स के नाम से भी दिखाया जा सकता है.
4. इन सैटिंग्स को On करने के बाद Google Wallet में अलग से कोई सेटअप करने की जरूरत नहीं है. Wallet Gmail से Eligible ऑर्डर की जानकारी लेकर उसे अपने आप दिखा सकता है.
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Google Wallet में Online ऑर्डर कैसे देखें?
जब कोई Eligible Online Purchase किया जाता है और उसका Confirmation Email Gmail पर आता है, तो Google Wallet Delivery की जानकारी अपने आप Add कर सकता है. इसके लिए Wallet App खोलें. होम स्क्रीन पर अपकमिंग डिलीवरी दिखाई दे सकती हैं.
किसी ऑर्डर पर Tap करने के बाद उसकी रिसिप्ट , शिपिंग डिटेल्स और मौजूदा डिलीवरी स्टेटस देखा जा सकता है. अगर पुराने ऑर्डर देखने हैं, तो View More पर जाकर Eligible Online Purchases की लंबी हिस्ट्री देख सकते हैं. वहीं Track Package पर Tap करने से कोरियर की ऑफिशियल ट्रैकिंग पैज खुल जाएगी, जहां शिपमेंट से जुड़े ज्यादा डिटेल्स मिल सकते हैं.
किन बातों का रखना होगा ध्यान?
यह फीचर Gmail में आने वाले Eligible ऑर्डर Confirmation Emails को स्कैन करके उनमें मौजूद ट्रैकिंग की जानकारी निकालता है. अगर स्मार्ट फीचर्स और पर्सनलाइजेशन या पैकेज ट्रैकिंग इनेबल नहीं है, तो Google Wallet में डिलीवरी की जानकारी दिखाई नहीं देगी.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>फोन में मौजूद ये फाइलें बन सकती हैं Hackers का आसान निशाना! जानें कैसे बचें</title>
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        <description><![CDATA[ आज स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और मैसेज करने का जरिया बनकर नहीं रह गया है. इसमें हमारी पर्सनल फोटोज, वीडियो, बैंकिंग से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, पासवर्ड, पहचान पत्र और कई जरूरी फाइलें सेव रहती हैं. यही वजह है कि अगर फोन की सुरक्षा में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो साइबर अपराधियों के लिए पर्सनल डेटा तक पहुंचने का रास्ता आसान हो सकता है.
कौन-सी फाइलें ज्यादा संवेदनशील हैं?
जानकारी के अनुसार, फोन में मौजूद हर फाइल से एक जैसा खतरा नहीं रहता है. खासतौर पर PDF, डॉक्यूमेंट, ZIP फाइल, APK और डाउनलोड पर सावधानी बरतनी चाहिए. बैंक स्टेटमेंट, आधार या पैन कार्ड की कॉपी, पासपोर्ट, ऑफिस के डॉक्यूमेंट्स और पर्सनल फोटोज जैसी फाइलों में संवेदनशील जानकारी होती है.
इसके अलावा, अनजान सोर्स से मिली कोई APK फाइल भी खतरनाक साबित हो सकती है. इसे इंस्टॉल करने पर किसी संदिग्ध ऐप को फोन की जरूरी परमिशन मिल सकती है.
WhatsApp और ईमेल से आई फाइलों पर रहें सावधान
आपको बता दें कि Hackers अक्सर भरोसेमंद दिखने वाले मैसेज के जरिए फाइल भेजते हैं. जैसे कोई व्यक्ति बैंक, कुरियर, नौकरी, बिजली बिल या इनाम से जुड़ा PDF या लिंक भेज सकता है. फाइल खोलने या उसमें दिए लिंक पर क्लिक करने के बाद यूजर को फर्जी वेबसाइट पर ले जाया जाता है.
इसलिए अनजान नंबर या ईमेल से आई फाइल को बिना चेक किए नहीं खोलना चाहिए. सिर्फ इसलिए किसी फाइल पर भरोसा न करें क्योंकि उसे किसी परिचित के नाम या प्रोफाइल से भेजा गया है.
डाउनलोड फोल्डर भी करें चेक
कई बार हम इंटरनेट से कोई फाइल डाउनलोड करके भूल जाते हैं. फोन के Downloads फोल्डर में पुरानी और गैरजरूरी फाइलें लंबे समय तक पड़ी रहती हैं. इनमें कोई संदिग्ध फाइल मौजूद हो तो वह भविष्य में परेशानी का कारण बन सकती है. इसीलिए समय-समय पर Downloads, Documents और दूसरे फोल्डर को चेक करते रहना चाहिए और गैरजरूरी फाइलों को डिलीट कर दें.
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फाइलों को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
सबसे पहले फोन में स्क्रीन लॉक जरूर लगाएं और मजबूत PIN या पासकोड का इस्तेमाल करें. ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स को भी समय पर अपडेट करते रहें क्योंकि अपडेट में सुरक्षा से जुड़े सुधार शामिल होते हैं.
अनजान वेबसाइट से APK या दूसरे ऐप डाउनलोड न करें. किसी फाइल को खोलने के लिए अगर वह अचानक पासवर्ड, परमिशन या किसी ऐप को इंस्टॉल करने के लिए कहे तो सावधान हो जाएं.
जरूरी डॉक्यूमेंट्स का बैकअप किसी भरोसेमंद और सुरक्षित क्लाउड स्टोरेज या दूसरे सुरक्षित माध्यम में रखें. साथ ही, संवेदनशील फाइलों को बिना जरूरत किसी के साथ शेयर न करें.
फोन में इन बातों का भी रखें ध्यान
किसी भी फाइल को खोलने से पहले उसके नाम, एक्सटेंशन और भेजने वाले व्यक्ति की जांच करें.
अगर फाइल का नाम अजीब है या उसमें ऐसा एक्सटेंशन है जिसकी आपको जानकारी नहीं है तो उसे खोलने से बचना चाहिए. साथ ही, फोन में मौजूद किसी भी ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन न दें. खासकर फाइल, फोटो, माइक्रोफोन, कैमरा और कॉन्टैक्ट्स जैसी संवेदनशील परमिशन देने से पहले सोचें.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>न OTP, न PIN, न CVC… फिर भी FD से निकल गए 5.99 लाख, जानें कैसे?</title>
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        <description><![CDATA[ साइबर ठगी के मामले अब सिर्फ बैंक अकाउंट या UPI तक सीमित नहीं रह गए हैं. ठग लोगों की जमा पूंजी तक पहुंचने के नए तरीके अपना रहे हैं. भोपाल में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां 61 वर्षीय बुजुर्ग की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से करीब 6 लाख रुपये निकाल लिए गए. रकम ट्रांसफर होने के दौरान व्यक्ति के मोबाइल पर कोई OTP नहीं आया. उन्होंने अपना पासवर्ड, PIN, CVC या बैंकिंग से जुड़ी कोई जानकारी भी किसी के साथ शेयर नहीं की थी. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर FD से इतनी बड़ी रकम कैसे निकल गई.&amp;nbsp;&amp;nbsp;तीन ट्रांजेक्शन में निकले 5.99 लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक, भोपाल की अफकार कॉलोनी निवासी 61 वर्षीय शरीफ अहमद कुरैशी का ICICI बैंक की अशोका गार्डन शाखा में सेविंग अकाउंट और FD है. 4 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 12:30 बजे के बीच उनकी FD से नेट बैंकिंग के जरिए तीन ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किए गए. इन ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 5,99,009.62 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए गए.
रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद शरीफ अहमद ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की. इसके बाद साइबर सेल से मिली ई-जीरो FIR के आधार पर ऐशबाग पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.&amp;nbsp;एफडी खाते में नेटबैंकिंग नहीं होती तो ठगी कैसे हुई?&amp;nbsp;FD की अलग नेट बैंकिंग नहीं होती है, लेकिन वह बैंक के सेविंग अकाउंट से जुड़ी होती है. अगर FD मोबाइल बैंकिंग ऐप के जरिए बनाई गई है, तो उसे उसी ऐप से तोड़ा भी जा सकता है. ठग इसी प्रक्रिया का फायदा उठा सकते हैं. साइबर और बैंकिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जालसाज रिफंड या पैसे वापस दिलाने जैसे बहाने बनाकर ग्राहक को अपने जाल में फंसाते हैं. इसके बाद मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते हैं और बैंकिंग ऐप खोलने के लिए कहते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Apple का AI अब सिर्फ iPhone में नहीं? Siri से लेकर Smart Home तक बड़ा प्लान&amp;nbsp;ठगों को कैसे मिल रहा आपके मोबाइल ऐप का एक्सेस?&amp;nbsp;ठग आमतौर पर सीधे बैंकिंग ऐप का एक्सेस नहीं लेते, बल्कि ग्राहक को रिफंड, पैसे वापस दिलाने या किसी दूसरी वजह का झांसा देकर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते हैं. इसके बाद ग्राहक से बैंकिंग ऐप खोलने और बताए गए स्टेप्स करने के लिए कहते हैं. स्क्रीन शेयर होने पर ठग मोबाइल पर दिखाई देने वाली बैंकिंग जानकारी देख सकते हैं, जिसमें खाते में मौजूद रकम और FD की जानकारी भी शामिल हो सकती है. इसके बाद इसी जानकारी का फायदा उठाकर FD तोड़ने और रकम को दूसरे खाते में ट्रांसफर करने की कोशिश करते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;साइबर ठगी से बचने के तरीके क्या हैं?
1. किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई भी स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें.
2. रिफंड के लिए इंटरनेट पर मिले किसी अनजान नंबर से संपर्क करने की जगह बैंक या कंपनी की ऑथोराइज्ड ऐप या वेबसाइट का इस्तेमाल करें.
3. किसी के कहने पर बैंकिंग ऐप खोलकर PIN भी न डालें.
4. अगर ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और बैंक से संपर्क करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro के रंग लीक, लॉन्च से पहले खुला बड़ा राज!</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के नए iPhone को लेकर लॉन्च से पहले चर्चाएं तेज हैं. इस बार कंपनी के Pro मॉडल के रंगों ने लोगों का ध्यान खींच लिया है. iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के लॉन्च से कुछ घंटे पहले एक छोटा वीडियो ऑनलाइन सामने आया है. इसमें कथित तौर पर दोनों फोन के रिटेल डेमो यूनिट दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में iPhone 18 Pro Max बरगंडी शेड में नजर आ रहा है, जबकि iPhone 18 Pro को हल्के नीले रंग में देखा गया है. इसके सामने आने के बाद Apple के नए Pro मॉडल के कलर को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro Max में दिखा Dark Cherry कलर
करीब 14 सेकंड का यह वीडियो दक्षिण कोरियाई ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Naver पर सामने आया है. इसे टिप्स्टर yeux1122 ने शेयर किया है. वीडियो में कथित iPhone 18 Pro Max बरगंडी रंग में दिखाई देता है. इस शेड को पहले सामने आई रिपोर्ट्स में Dark Cherry बताया गया है. &amp;nbsp;वीडियो में खास बात यह है कि कथित iPhone 18 Pro Max के साथ iPhone 17 Pro Max का डार्क ब्लू मॉडल भी दिखाई देता है.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro में दिखा Sky Blue शेड
वीडियो में iPhone 18 Pro हल्के नीले रंग में नजर आ रहा है. इस कलर को लेकर पहले भी कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं. माना जा रहा है कि यह रंग काफी हल्का हो सकता है और कुछ लाइटिंग कंडीशन में सिल्वर जैसा भी दिखाई दे सकता है.&amp;nbsp;

hands on video of iPhone 18 Pro and Pro Max demo units in Dark Cherry and Blue repectively#Apple #iPhone18 #iPhone18ProMax pic.twitter.com/nr008cEsFo
&amp;mdash; Piyush Bhasarkar (@TechKard) September 7, 2026



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Pro मॉडल में मिल सकते हैं तीन कलर
iPhone 18 Pro सीरीज के कलर को लेकर पहले सामने आए लीक्स में Dark Cherry और Sky Blue के अलावा तीसरे कलर का भी जिक्र किया गया है. एक लीक में कथित iPhone 18 Pro के सिम ट्रे दिखाई दिए थे, जिनसे Silver, Dark Cherry Red और Sky Blue कलर की ओर इशारा मिला था, हालांकि बाद की जानकारी में Silver की जगह Black कलर मिलने की बात कही गई है. Apple ने अभी तक इन कलर ऑप्शन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.&amp;nbsp;
क्या सच में हैं ये रिटेल डेमो यूनिट?
इस वीडियो को पूरी तरह आधिकारिक नहीं माना जा सकता है. वीडियो में यह जानकारी नहीं दी गई है कि ये डिवाइस कहां से आए हैं, हालांकि Apple के 9 सितंबर के इवेंट से पहले रिटेलर्स को डेमो यूनिट मिलने की उम्मीद को देखते हुए इनके असली होने की अटकलें लगाई जा रही हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Pro, के, रंग, लीक, लॉन्च, से, पहले, खुला, बड़ा, राज</media:keywords>
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        <title>Galaxy Tab S10+ पर Samsung का फेस्टिव धमाका, मिल रहा ये खास ऑफर</title>
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        <description><![CDATA[ फेस्टिव सीजन शुरू होने से पहले Samsung ने अपने प्रीमियम टैबलेट Galaxy Tab S10+ पर खास ऑफर पेश किया है. कंपनी इस टैबलेट को काम, क्रिएटिविटी और स्मार्ट लाइफस्टाइल के लिए एक ऑल-राउंड डिवाइस के रूप में पेश कर रही है. बड़े Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले, AI फीचर्स और बॉक्स में मिलने वाले S Pen के साथ Galaxy Tab S10+ प्रोफेशनल्स, क्रिएटिव यूजर्स और टेक पसंद करने वाले लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. तो आइए जानते हैं कि &amp;nbsp;Samsung के फेस्टिव ऑफर पर क्या खास मिल रहा है.&amp;nbsp;
Galaxy Tab S10+ में क्या खास है?
Galaxy Tab S10+ में 31.47 सेंटीमीटर का Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है. इसमें एंटी-रिफ्लेक्टिव टेक्नोलॉजी भी मौजूद है, जिससे स्क्रीन पर पड़ने वाली चमक कम होती है और विजुअल ज्यादा साफ दिखाई देते हैं. टैबलेट में क्वाड-स्पीकर सेटअप मिलता है, जिसे AI Dialogue Boost का सपोर्ट दिया गया है. इससे आवाज को ज्यादा साफ बनाने में मदद मिलती है. डिवाइस को IP68 रेटिंग मिली है, जबकि Armor Aluminium construction इसे मजबूती देने का काम करता है.&amp;nbsp;
फेस्टिव ऑफर में इतनी हुई कीमत
1. Samsung ने Galaxy Tab S10+ के दोनों वेरिएंट पर फेस्टिव कीमत पेश की है.12GB रैम और 256GB स्टोरेज वाला Wi-Fi मॉडल अब 1,05,999 रुपए की जगह 88,999 रुपए में मिल रहा है,
2. 5G वेरिएंट की कीमत 1,20,999 रुपए से घटाकर 1,03,999 रूपए कर दी गई है. इसके साथ कंपनी ने No-Cost EMI की सुविधा भी दी है.
3. Wi-Fi मॉडल को बैंक के जरिए 14,833 रूपए &amp;nbsp;प्रति महीने, NBFC के जरिए 7,417 रुपए &amp;nbsp;प्रति महीने और Samsung Finance+ के जरिए 6,877 रुपए प्रति महीने की EMI पर लिया जा सकता है.
4. Samsung Finance+ में 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट देना होगा. वहीं, 5G मॉडल के लिए बैंक से 17,333, रूपए NBFC से 8,667 रुपए &amp;nbsp;और Samsung Finance+ के जरिए 8,036 रूपए &amp;nbsp;प्रति महीने की EMI उपलब्ध है. इस ऑप्शन में भी 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट लागू है.&amp;nbsp;
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S Pen के साथ मिलेंगे AI वाले फीचर्स
Galaxy Tab S10+ के साथ S Pen भी मिलता है. इसकी मदद से यूजर्स को कई प्रोडक्टिवीटी फीचर्स मिलते हैं. इनमें नोटिड असिस्ट शामिल है, जो नोट्स को ट्रांसक्राइब करने और उनका सार तैयार करने में मदद करता है. इसके अलावा PDF Overlay Translation की मदद से अलग-अलग भाषाओं वाले डॉक्यूमेंट को समझना आसान होता है. Handwriting Help फीचर लिखे हुए नोट्स को व्यवस्थित करने में मदद करता है. टैबलेट में Circle to Search और Air Command जैसे AI-powered features भी दिए गए है. ये फीचर्स Samsung के Bixby और Google के Gemini के साथ काम करते हैं.
Galaxy Tab S10+ में &amp;nbsp;10090mAh बैटरी
परफॉर्मेंस के लिए टैबलेट में MediaTek Dimensity 9300+ प्रोसेसर दिया गया है. इसमें 12GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलता है, जिसे बढ़ाया जा सकता है. पावर के लिए 10090mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Apple Watch Series 12 में क्या नया मिलेगा, क्या अल्ट्रा&amp;4 का डिजाइन बदलेगा?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple के नए iPhone के साथ अब अगली जनरेशन की Apple Watch पर भी सबकी नजर है. Apple 9 सितंबर को होने वाले अपने Surprise and Shine इवेंट में Apple Watch Series 12 और Apple Watch Ultra 4 पेश कर सकता है, हालांकि कंपनी ने अभी तक नई Apple Watch को इस इवेंट में लॉन्च करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन नई Apple Watch को लेकर सामने आई लीक और रिपोर्ट्स &amp;nbsp;से संकेत मिलता है कि इस साल Apple का फोकस बड़े डिजाइन बदलाव की जगह परफॉर्मेंस, हेल्थ ट्रैकिंग और वेलनेस एक्सपीरियंस को बेहतर करने पर हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Apple Watch Series 12 में क्या नया मिलेगा और क्या अल्ट्रा-4 का डिजाइन बदलेगा.&amp;nbsp;
Apple Watch Series 12 में क्या नया मिलेगा?
1. नया और तेज चिप - Series 12 में S11 या उससे नई चिप मिलने की उम्मीद है, जिससे परफॉर्मेंस और पावर एफिशिएंसी बेहतर हो सकती है.&amp;nbsp;
2. हार्ट रेट ट्रैकिंग - Apple लगातार हार्ट रेट मॉनिटरिंग फीचर की टेस्टिंग कर रही है. इससे दिनभर हार्ट रेट का ज्यादा लगातार डेटा मिल सकता है.&amp;nbsp;
3. Ceramic केस की वापसी - Series 12 में सफेद और डार्क ग्रे कलर में Ceramic केस का ऑप्शन मिल सकता है.
4. हेल्थ और फिटनेस ऐप में बदलाव - वेलनेस से जुड़े ज्यादा मैट्रिक्स को बेहतर तरीके से दिखाने के लिए हेल्थ और फिटनेस ऐप्स में बदलाव की उम्मीद है.&amp;nbsp;
5. बैटरी और एफिशिएंसी में सुधार - नए चिप की बेहतर पावर एफिशिएंसी से बैटरी बैकअप में सुधार मिल सकता है, हालांकि बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है.&amp;nbsp;
6. नए बैंड और फिनिश - Apple Series 12 के साथ नए बैंड कलर और अलग-अलग कॉन्फिगरेशन पेश कर सकती है, जिससे यूजर्स को ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे.&amp;nbsp;
क्या अल्ट्रा-4 का डिजाइन बदलेगा?
Apple Watch Ultra 4 के डिजाइन में इस बार कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसका लुक और मौजूदा Ultra मॉडल की मजबूत डिजाइन काफी हद तक बरकरार रह सकती है. Apple का फोकस इस साल बाहरी डिजाइन बदलने की जगह परफॉर्मेंस, हेल्थ और फिटनेस ट्रैकिंग जैसे इंटरनल अपग्रेड पर रहने की संभावना है. हालांकि छोटे-मोटे बदलाव या नए फिनिश देखने को मिल सकते हैं, लेकिन पूरी तरह नया डिजाइन या बड़ा रीडिजाइन फिलहाल उम्मीद में नहीं है.&amp;nbsp;
नया चिप बेहतर परफॉर्मेंस
Apple Watch Series 12 और Ultra 4 में नई पीढ़ी का चिप मिलने की उम्मीद है. इसका नाम S11 या इससे नया चिप हो सकता है. Series 11 और Ultra 3 में S10 चिप दिया गया है, जो इससे पहले Series 10 और Ultra 2 में भी इस्तेमाल हुआ था.&amp;nbsp;
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हेल्थ ट्रैकिंग पर रहेगा ज्यादा फोकस
नई Apple Watch में हेल्थ मॉनिटरिंग को पहले से ज्यादा यूजफुल बनाने की कोशिश की जा सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple लगातार हार्ट रेट मॉनिटरिंग की क्षमता का टेस्ट कर रहा है. इससे वॉच पूरे दिन हार्ट रेट से जुड़ा ज्यादा लगातार डेटा जुटा सकती है.&amp;nbsp;
Touch ID और SE 4 की उम्मीद कम
नई Apple Watch में Touch ID मिलने की संभावना फिलहाल कम बताई जा रही है. Apple Watch SE 4 के इस साल लॉन्च होने की उम्मीद भी नहीं है. Apple ब्लड-शुगर डिटेक्शन फीचर पर भी काम कर रहा है, जिसे 2030 तक पेश करने का लक्ष्य बताया गया है. वहीं Apple Watch का बड़ा डिजाइन बदलाव अभी डेवलपमेंट में है और इसे आने में एक या दो साल लग सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Apple का AI अब सिर्फ iPhone में नहीं? Siri से लेकर Smart Home तक बड़ा प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ Apple का AI प्लान अब सिर्फ iPhone तक सीमित नहीं रहना वाला है. कंपनी अपने स्मार्ट होम प्रोडक्ट्स में भी AI को बड़ी भूमिका देने की तैयारी में है. खासकर Siri AI के आने के बाद Apple के पुराने HomePod और Apple TV जैसे डिवाइसेज को नए तरीके से इस्तेमाल करने की उम्मीद बढ़ गई है. ऐसे में Apple के 9 सितंबर को होने वाले लॉन्च इवेंट Surprise and Shine &amp;nbsp;में नए स्मार्ट होम डिवाइसेज की एंट्री की चर्चा है, जबकि आगे चलकर Apple एक ऐसे स्मार्ट होम हब पर भी काम कर सकता है जो घर के अलग-अलग डिवाइसेज को एक ही जगह से कंट्रोल करने का काम करेगा.&amp;nbsp;
Siri से लेकर Smart Home तक बड़ा प्लान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple इसी सीजन में नए HomePod Mini और Apple TV 4K को लॉन्च कर सकता है. मौजूदा HomePod Mini और Apple TV कई साल पुराने हो चुके हैं और अब Siri AI के तैयार होने के बाद इनके नए वर्जन आने की उम्मीद है. नए HomePod Mini में S5 चिप की जगह S9 चिप मिल सकती है.
इसके साथ नए कलर ऑप्शन, नया वायरलेस चिप और बेहतर ऑडियो क्वालिटी मिलने की बात कही जा रही है. हालांकि सबसे बड़ा बदलाव Siri AI का सपोर्ट हो सकता है, जिससे HomePod Mini पहले के मुकाबले ज्यादा स्मार्ट तरीके से काम कर सकेगा. वहीं, नए Apple TV 4K में A15 Bionic की जगह A17 Pro चिप मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा इसके रिमोट को भी नए डिजाइन और Siri AI से जुड़े फीचर्स के साथ अपडेट किया जा सकता है.
7 इंच स्क्रीन वाला स्मार्ट होम हब
Apple का स्मार्ट होम प्लान यहीं खत्म नहीं होता है. कंपनी एक नए स्मार्ट होम हब पर भी काम कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके दो वर्जन हो सकते हैं. एक मॉडल स्क्रीन के साथ आएगा, जिसे मैग्नेटिक सिस्टम की मदद से दीवार पर लगाया जा सकेगा, जबकि दूसरे मॉडल में स्पीकर बेस दिया जा सकता है. इस डिवाइस में 7 इंच का स्क्वायर डिस्प्ले और homeOS नाम का नया ऑपरेटिंग सिस्टम मिलने की उम्मीद है. इसमें Siri AI से बातचीत, फेसटाइम कॉल और स्मार्ट होम डिवाइसेज को मैनेज करने जैसे काम किए जा सकते हैं. इसे HomePod नाम से भी पेश किए जाने की चर्चा है और इसमें A18 चिप मिलने की उम्मीद है.
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Siri AI बनेगा पूरे Home Ecosystem का हिस्सा
इस स्मार्ट होम हब का सबसे अहम हिस्सा इसका AI एक्सपीरियंस हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, डिवाइस में पर्सनल प्रोफाइल, फेशियल रिकग्निशन और प्रेजेंस डिटेक्शन जैसे फीचर्स भी मिल सकते हैं. इससे अलग-अलग यूजर्स को उनकी जरूरत के हिसाब से कैलेंडर, रिमाइंडर्स, फोटो और दूसरे विजेट्स दिखाए जा सकते हैं. इसके अलावा Widget Gallery और Smart Stack जैसे फीचर्स भी इसका हिस्सा हो सकते हैं.&amp;nbsp;
कैमरा और स्मार्ट डोरबेल भी आ सकते हैं
Apple के स्मार्ट होम प्लान में आगे सिक्योरिटी कैमरा और स्मार्ट डोरबेल जैसे प्रोडक्ट्स भी शामिल हो सकते हैं. इसके साथ स्मार्ट डिस्प्ले का एक एडवांस वर्जन भी आने की चर्चा है, जिसमें बड़ी 9 इंच स्क्रीन और रोबोटिक आर्म दिया जा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पुराना फोन फेंकने की गलती न करें! Google Store पर मिलेगी तगड़ी कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके पास पुराना स्मार्टफोन पड़ा है और आपको लगता है कि अब इसकी कोई खास कीमत नहीं बची तो उसे फेंकने या कबाड़ में देने से पहले एक बार जरूर सोच लें. पुराने फोन से छुटकारा पाने के साथ-साथ आप उसकी अच्छी-खासी कीमत भी हासिल कर सकते हैं. Google अपने Google Store पर ट्रेड-इन सुविधा देता है जिसके जरिए पुराने डिवाइस को अच्छी कीमत पर एक्सचेंज किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि कैसे आप इसका फायदा उठा सकते हैं.
पुराने फोन के बदले मिल सकता है अच्छा ऑफर
दरअसल, Google Store का ट्रेड-इन प्रोग्राम उन यूजर्स के लिए फायदेमंद होता है जो नया स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं. इसमें पुराने फोन की कंडिशन, मॉडल और दूसरी डिटेल्स के आधार पर उसकी कीमत तय की जाती है. खास बात ये है कि कुछ पुराने फोन उम्मीद से बेहतर वैल्यू हासिल कर सकते हैं. यानी ऐसा जरूरी नहीं कि कई साल पुराना स्मार्टफोन पूरी तरह बेकार हो चुका हो. अगर डिवाइस अच्छी कंडीशन में है तो उसकी कीमत आपके अनुमान से ज्यादा निकल सकती है.
कैसे काम करता है Google Store Trade-In?
जानकारी के अनुसार, ट्रेड-इन का प्रोसेस नॉर्मली काफी आसान होता है. नया डिवाइस खरीदते समय यूजर को अपने पुराने फोन की जानकारी देनी होती है. इसमें फोन का मॉडल, स्टोरेज और उसकी कंडिशन जैसी जानकारी शामिल है.
इसके बाद पुराने फोन की ट्रेड-इन वैल्यू दिखाई जाती है. अगर यूजर ऑफर एक्सेप्ट करता है तो पुराने डिवाइस को तय प्रोसेस के अनुसार जमा या शिप किया जाता है. फाइनल वैल्यू फोन की असली कंडिशन को चेक करने के बाद ही तय की जाती है.
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फोन की कंडिशन से तय होती है कीमत
आपको बता दें कि पुराने फोन की कीमत केवल उसके मॉडल से तय नहीं होती है. उसकी फिजिकल कंडीशन भी बहुत जरूरी होती है. स्क्रीन पर ज्यादा क्रैक, बॉडी पर डैमेज, खराब बटन या चार्जिंग से जुड़ी समस्या होने पर ट्रेड-इन वैल्यू कम हो जाती है. लेकिन अगर फोन साफ-सुथरी कंडिशन में मौजूद है और सही तरीके से काम करने वाला फोन है तो उसकी बेहतर कीमत मिल सकती है. इसलिए ट्रेड-इन से पहले फोन की कंडिशन को अच्छी तरह से चेक कर लेना चाहिए.
नया फोन खरीदने पर मिलेगा फायदा
ट्रेड-इन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि पुराने फोन की वैल्यू को नए डिवाइस की खरीद के साथ जोड़ा जाता है. इससे नए फोन की कीमत कम हो जाती है. जैसे अगर आपके पुराने फोन की ट्रेड-इन वैल्यू अच्छी निकलती है तो आपको नए स्मार्टफोन के लिए अपनी जेब से कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे. यही वजह है कि पुराना फोन सीधे बेचने या फेंकने से पहले ट्रेड-इन ऑप्शन को चेक करना फायदेमंद रहता है.
फोन देने से पहले ये काम जरूर करें
पुराना फोन ट्रेड-इन करने से पहले उसमें मौजूद पर्सनल जानकारी को सुरक्षित करना बेहद जरूरी होता है. फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट और जरूरी फाइलों का बैकअप लें. इसके बाद अपने Google या दूसरे अकाउंट से साइन आउट करें और फोन को फैक्ट्री रीसेट करें.
साथ ही, ट्रेड-इन की शर्तों और फाइनल वैल्यू को ध्यान से पढ़ें. क्योंकि ऑनलाइन दिखाई गई कीमत और डिवाइस को चेक करने के बाद की कीमत अलग हो सकती है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 17 Pro पर आया जबरदस्त Price Drop! यहां मिल रहा बेहद सस्ता</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Pro पर आया जबरदस्त Price Drop! यहां मिल रहा बेहद सस्ता ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>बिना WhatsApp अकाउंट के भी कर सकेंगे कॉल! जल्द आ रहा है ये नया फीचर</title>
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>वंदे भारत कवच ब्रेकिंग सिस्टम से लैस, 160 की स्पीड में खुद कैसे रुकेगी ट्रेन?</title>
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        <description><![CDATA[ वंदे भारत ट्रेनें अब 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ने लगी हैं और इसी के साथ भारतीय रेलवे ने अपना स्वदेशी सुरक्षा कवच सिस्टम भी और मजबूत कर दिया है. यह सिस्टम अब इतना तेज और भरोसेमंद बना दिया गया है कि तेज रफ्तार में भी अगर कोई खतरा दिखे तो ट्रेन खुद ही ब्रेक लगा लेगी, चाहे ड्राइवर समय पर प्रतिक्रिया दे या नहीं.
हाल ही में रेलवे ने इसका एक बड़ा और सफल ट्रायल पूरा किया है, जिसमें ट्रेन ने एक नया रिकॉर्ड बनाया. आइए जानते हैं कि यह तकनीक क्या है, यह कैसे काम करती है और इसके आने से रेल यात्रियों का सफर कितना सुरक्षित होने वाला है.
कवच सिस्टम आखिर है क्या?
कवच भारतीय रेलवे का बनाया हुआ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन यानी ATP सिस्टम है. इसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर तैयार किया है. इसका मकसद ट्रेन हादसों को कम से कम करना है. खासकर सिग्नल पार करने की गलती और तय सीमा से ज्यादा स्पीड की वजह से होने वाले हादसों को कम रोकना. अब इसका नया वर्जन कवच 4.0 तैयार किया गया है, जो खासतौर पर हाई स्पीड ट्रेनों के लिए बनाया गया है.&amp;nbsp;
160 की स्पीड में कैसे लगेगा ब्रेक?
कवच सिस्टम ट्रेन, पटरी और सिग्नल के बीच लगातार डिजिटल तरीके से जानकारी का आदान-प्रदान करता है. अगर कोई ट्रेन तय स्पीड से ज्यादा तेज चल रही हो, या खतरे वाले सिग्नल के पास पहुंच रही हो और ड्राइवर ने समय पर ब्रेक नहीं लगाया, तो यह सिस्टम खुद-ब-खुद ट्रेन की ब्रेक प्रणाली को सक्रिय कर देता है. यानी 160 किलोमीटर प्रति घंटे जैसी तेज रफ्तार में भी अगर इंसानी चूक हो जाए तो मशीन खुद संभाल लेती है और ट्रेन को सुरक्षित रूप से रोक देती है.&amp;nbsp;
टक्कर रोकने की तकनीक कैसे काम करती है?
इस सिस्टम को काम करने के लिए पटरियों पर हजारों की संख्या में RFID टैग लगाए जाते हैं. साथ ही टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल और खास कवच हट भी बनाई जाती हैं. ट्रेन में लगा उपकरण अल्ट्रा हाई फ्रिक्वेंसी रेडियो के जरिए पटरी और सिग्नल सिस्टम से लगातार जुड़ा रहता है. इससे यह पता चलता रहता है कि आगे या पीछे कोई दूसरी ट्रेन तो नहीं आ रही. इसी वजह से यह सिस्टम आमने-सामने की टक्कर और पीछे से होने वाली टक्कर, दोनों तरह के हादसों को रोकने में सक्षम है.&amp;nbsp;
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कितना भरोसेमंद है यह सिस्टम
कवच को सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 यानी SIL-4 मानक पर बनाया गया है. इसका मतलब है कि इस सिस्टम में गलती होने की संभावना 10,000 साल में सिर्फ एक बार जितनी कम है. यह दुनिया के सबसे ऊंचे सुरक्षा मानकों में गिना जाता है. इसके अलावा यह सिस्टम रेलवे कंट्रोल रूम को हर ट्रेन की लाइव लोकेशन और स्पीड की जानकारी भी लगातार भेजता रहता है, जिससे पूरे नेटवर्क की निगरानी करना आसान हो जाता है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>4 साल में बदल गया टीवी देखने का तरीका, इस फॉर्मेट में बढ़े 3 गुना व्यूअर्स</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में Connected TV (CTV) और Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) का दायरा लगातार बढ़ रहा है. देश में डिजिटल वीडियो और टीवी काफी तेजी से मजबूत हो रहा है. लेकिन अब इनको संचालित करने के लिए एक संस्था की जरूरत हो रही है. WPP Media और The Trade Desk की Ormax Media के साथ की गई रिसर्च के मुताबिक, भारत में CTV की पहुंच करीब 207 मिलियन दर्शकों तक हो चुकी है. ये संख्या लगभग 6.2 करोड़ से 6.5 करोड़ घरों से जुड़ी है.
रिपोर्ट के अनुसार 2022 के मुकाबले CTV ऑडियंस करीब तीन गुना बढ़े हैं. भारत में लोग औसतन रोजाना 2.9 घंटे CTV पर वीडियो कंटेंट देखते हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बड़ी स्क्रीन पर इंटरनेट बेस्ड कंटेंट देखने का चलन कितनी तेजी से बढ़ रहा है.
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा क्रेज
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कनेक्टेड टीवी के यूजर्स करीब तीन गुना बढ़ चुके हैं, वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में सीटीवी के यूजर्स दोगुना हो चुके हैं. ये बढ़ोतरी मैट्रो शहरों के मुकाबले ग्रामीण एरिया में ज्यादा देखने को मिल रही है. इसके अलावा एडवर्टाइजर्स के लिए भी ये एक अहम बढ़ोतरी है. इसका ये मतलब नहीं है कि लोग लीनियर टीवी को छोड़ते जा रहे हैं बल्कि अब लोग कनेक्टेड टीवी को भी अपनाने लगे हैं.
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रोज करीब 3 घंटे बड़ी स्क्रीन पर कंटेंट
रिपोर्ट के अनुसार CTV दर्शक औसतन 2.9 घंटे प्रतिदिन बड़ी स्क्रीन पर कंटेंट देखते हैं. वेब सीरीज सबसे फेमश कंटेंट फॉर्मेट है जिसे 69 फीसदी दर्शक पसंद करते हैं. इसके बाद क्रिकेट 64 फीसदी और थिएट्रिकल फिल्में 63 फीसदी दर्शकों की पसंद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक CTV पर क्रिकेट देखने वाले 84 फीसदी मामलों में को-व्यूइंग यानी एक से ज्यादा लोग साथ बैठकर मैच देखते हैं.
युवाओं में भी बढ़ रहा क्रेज
अक्सर लोग कहते हैं कि युवा पीढ़ी बड़ी स्क्रीन से दूर हो चुकी है लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक Gen Z यूजर्स औसतन 3.1 घंटे रोज CTV पर बिताते हैं. इनमें 46 फीसदी ने पिछले एक साल में अपना CTV इस्तेमाल बढ़ाया है. वहीं 77 फीसदी Gen Z यूजर्स परिवार या दोस्तों के साथ CTV देखते हैं. ऐसे में अब एडवर्टाइजर्स के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया के साथ Smart TV को भी युवाओं तक पहुंचने का एक जरूरी जरिया बन चुका है.
FAST प्लेटफॉर्म क्या है
आपको बता दें कि CTV इकोसिस्टम में FAST यानी Free Ad-Supported Streaming TV भी तेजी से जरूरी हो रहा है. करीब एक-तिहाई CTV दर्शक FAST के बारे में जानते हैं जबकि हर पांच में से एक दर्शक इसका इस्तेमाल करता है. FAST यूजर्स औसतन 3.4 घंटे रोज CTV पर बिताते हैं जो पूरे CTV दर्शकों के 2.9 घंटे के औसत से ज्यादा है.
ऐसे में 20.7 करोड़ दर्शकों तक पहुंच चुका CTV भारत के TV और advertising ecosystem को नई दिशा दे रहा है. खासकर ये ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है, परिवार के साथ देखने की आदत और OTT कंटेंट भी फेमश हो रहे हैं जो ये संकेत दे रहा है कि आगे आने वाले समय में टीवी की परिभाषा सिर्फ पुराने चैनलों तक सीमित नहीं रहने वाली है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Web Cookies कितने समय तक रहती हैं? जानें लॉगआउट के बाद भी क्यों बना रहता है खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए हम लगभग हर वेबसाइट पर लॉगिन करते हैं. बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया और शॉपिंग वेबसाइट तक, कई सर्विसेज हमें पहचानने के लिए Web Cookies का इस्तेमाल करती हैं. नॉर्मली लगता है कि किसी वेबसाइट से लॉगआउट करते ही अकाउंट पूरी तरह सुरक्षित हो गया है लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है. कुछ Cookies लंबे समय तक आपके ब्राउजर में मौजूद रहते हैं और यही बात प्राइवेसी व सिक्योरिटी के लिए चिंता बढ़ाती है.
क्या होती हैं Web Cookies?
जानकारी के अनुसार, Web Cookies छोटी-छोटी डेटा फाइलें होती हैं जिन्हें वेबसाइट आपके ब्राउजर में सेव करती हैं. इनका इस्तेमाल वेबसाइट को आपकी पहचान याद रखने, आपकी पसंद सेव करने, शॉपिंग कार्ट बनाए रखने और लॉगिन सेशन को मैनेज करने के लिए किया जाता है.
हर Cookie एक जैसी नहीं होती. कुछ Cookies ब्राउजर बंद करते ही हट जाती हैं जबकि कुछ को एक समय तक स्टोर किया जाता है. इन्हें आमतौर पर Persistent Cookies कहा जाता है.
सालों तक कैसे रह सकती हैं Cookies?
आपको बता दें कि किसी Cookie की लाइफ इस बात पर निर्भर करती है कि वेबसाइट ने उसे कितने समय के लिए सेट किया है. अगर उसकी Expiration Date काफी आगे की रखी गई है तो वह लंबे समय तक ब्राउजर में मौजूद रहती है.
लेकिन कई वेबसाइटें सुरक्षा के लिए पुराने Session या Authentication Cookies को समय-समय पर खत्म कर देती हैं. फिर भी लंबे समय तक रहने वाली पहचान या ट्रैकिंग Cookies आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी और प्राइवेसी से जुड़ी जानकारी के लिए जरूरी होती हैं.
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सिर्फ Logout करना हमेशा काफी क्यों नहीं?
जब आप किसी वेबसाइट से लॉगआउट करते हैं तो नॉर्मली वेबसाइट आपके मौजूदा लॉगिन सेशन को खत्म कर देती है. लेकिन इसका मतलब ये जरूरी नहीं कि ब्राउजर में मौजूद हर Cookie तुरंत डिलीट हो जाए. कुछ Cookies केवल वेबसाइट को आपकी पसंद या पहचान याद रखने के लिए होती हैं. वहीं अगर किसी हमलावर के हाथ कोई वैध Authentication Token लग जाए और वह अभी भी एक्टिव हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है. हालांकि सुरक्षित वेबसाइटें ऐसे जोखिम को कम करने के लिए Logout के समय Session Token को सर्वर पर खत्म कर देती हैं.
असली खतरा कब बढ़ता है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब आपके डिवाइस या ब्राउजर तक किसी दूसरे व्यक्ति की पहुंच हो या कोई सॉफ्टवेयर आपके ब्राउजर डेटा तक पहुंच जाए. खास तौर पर पब्लिक या शेयर्ड कंप्यूटर पर लॉगिन करना खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे डिवाइस पर ब्राउजर में सेव Cookies और दूसरे डेटा आपकी प्राइवेसी को प्रभावित कर सकते हैं.
खुद को कैसे रखें सुरक्षित?
सुरक्षा के लिए समय-समय पर ब्राउजर की Cookies और Site Data साफ करें. संवेदनशील वेबसाइटों पर काम करने के बाद Logout जरूर करें और पब्लिक कंप्यूटर पर अपने पासवर्ड सेव न करें. ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखना भी जरूरी है. इसके अलावा Two-Factor Authentication (2FA) या Passkeys जैसे सेफ्टी फीचर्स का इस्तेमाल करें. अगर किसी अकाउंट में Log out of all devices या Sign out everywhere ऑप्शन उपलब्ध है तो कुछ कंडिशन में उसका इस्तेमाल करना चाहिए.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Smartwatch के हेल्थ नंबर कितने सही हैं? क्या हर आंकड़ा होता है सही, जानें सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ आज स्मार्टवॉच सिर्फ समय देखने वाली डिवाइस नहीं रह गई है. एडवांस स्मार्टवॉच में कई सारे फीचर्स देखने को मिल जाते हैं जो यूजर्स के लिए काफी फायदेमंद साबित होते हैं. हार्ट रेट, कदमों की संख्या, नींद, एक्सरसाइज, कैलोरी और यहां तक कि रिकवरी जैसी कई जानकारियां भी ये आपकी कलाई पर दिखाती है. लेकिन स्क्रीन पर दिखाई देने वाला हर नंबर शरीर से सीधे मापा गया आंकड़ा हो ये जरूरी नहीं होता है.
कई आंकड़े होते हैं सिर्फ अनुमान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के शोधकर्ताओं के मुताबिक, स्मार्टवॉच से मिलने वाले कई हेल्थ डेटा असली में सेंसर से मिले संकेतों और कंप्यूटर एल्गोरिदम की मदद से तैयार किया गया अंदाजा होता है.
वैज्ञानिकों ने बताया कि लोगों को ये समझना जरूरी है कि घड़ी कौन-सी चीज सीधे माप रही है और किन रिजल्ट्स को अलग-अलग डेटा के आधार पर कैलकुलेट किया जा रहा है. इस स्टडी का कंल्यूजन Sensors जर्नल में पब्लिश हुए हैं.
सेंसर कैसे जुटाते हैं जानकारी?
आपको बता दें कि स्मार्टवॉच में मौजूद अलग-अलग सेंसर शरीर और आसपास के वातावरण से संकेत लेते हैं. जैसे ऑप्टिकल सेंसर स्किन पर रोशनी डालकर कलाई में ब्लड फ्लो से जुड़े बदलावों को पहचानते हैं. इसी डेटा के आधार पर हार्ट रेट का अनुमान लगाया जाता है.
इसी तरह मोशन सेंसर शरीर की एक्टिविटी को पहचानते हैं जबकि GPS बाहर चलते या दौड़ते समय दूरी, स्थान और स्पीड जैसी जानकारी देता है. इसके बाद घड़ी का सॉफ्टवेयर इन संकेतों को प्रोसेस करके स्क्रीन पर अलग-अलग आंकड़े दिखाता है.
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कौन-से आंकड़ों पर ज्यादा भरोसा?
हर स्मार्टवॉच फीचर की सटीकता एक जैसी नहीं होती है. नॉर्मली यूजर के आराम करने की कंडिशन में हार्ट रेट, लगातार एक्सरसाइज के दौरान हार्ट रेट, स्टेप काउंट और बाहर की एक्टिविटी की स्पीड जैसे सरल आंकड़े ज्यादा भरोसेमंद हो सकते हैं.
इसके मुकाबले कैलोरी बर्न, नींद के अलग-अलग लेवल, शरीर में पानी की मात्रा, रिकवरी और बॉडी कंपोजिशन जैसे मुश्किल रिजल्ट्स कई तरह के डेटा और अनुमान पर निर्भर करते हैं. इसलिए इन्हें बिल्कुल सटीक मान लेना सही नहीं होता है.
एक ही व्यक्ति को अलग-अलग नंबर क्यों मिलते हैं?
दरअसल, स्मार्टवॉच की रीडिंग पर कई बाहरी चीजों का असर पड़ सकता है. घड़ी का ढीला होना, ज्यादा हाथ हिलाना, पसीना, टेंपरेचर, टैटू, स्किन का रंग और शरीर की बनावट जैसी परिस्थितियां सेंसर के रिजल्ट्स को प्रभावित कर सकती हैं.
इसके अलावा अलग-अलग कंपनियां अलग सेंसर, टेक्नोलॉजी और अपने पर्सनल एल्गोरिदम इस्तेमाल करती हैं. इसी वजह से दो ब्रांड की घड़ियां एक ही व्यक्ति के लिए अलग-अलग आंकड़े दिखा सकती हैं.
ट्रेंड पर रखनी चाहिए नजर
वैज्ञानिकों के अनुसार, स्मार्टवॉच का सबसे अच्छा इस्तेमाल लंबे समय के बदलावों को समझने के लिए किया जाता है. जैसे एक दिन हार्ट रेट नॉर्मल से थोड़ा अलग दिखने के बजाय कई दिनों या हफ्तों में लगातार हो रहा बदलाव ज्यादा जरूरी होता है. इसी तरह नींद, रोजाना की एक्टिविटी या आराम की कंडिशन में हार्ट रेट के पैटर्न को लंबे समय तक देखना ज्यादा कारगर साबित होता है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI Search और Google Search में क्या अंतर, किस सवाल के लिए कौन बेहतर?</title>
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        <description><![CDATA[ पिछले 25 साल से इंटरनेट पर कुछ भी खोजने का मतलब था- गूगल खोलना, कीवर्ड टाइप करना और नीचे लिंक्स की लिस्ट में से जवाब ढूंढना. अब यह तरीका बदल रहा है. लोग सवाल पूछकर सीधे जवाब पाना चाहते हैं और यही काम AI सर्च टूल्स जैसे ChatGPT, Perplexity और Google के अपने AI Overviews कर रहे हैं. दोनों तरीके आज साथ-साथ इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन इनका काम करने का ढंग बिल्कुल अलग है.
गूगल सर्च कैसे काम करता है?
गूगल सर्च एक कीवर्ड-बेस्ड सिस्टम है. जब कोई सवाल टाइप किया जाता है तो गूगल उससे मिलते-जुलते शब्दों वाले लाखों वेब पेज खोजता है और उन्हें रैंकिंग के हिसाब से लिस्ट में दिखाता है. यूजर को खुद अलग-अलग लिंक खोलकर, पढ़कर और तुलना करके अपना जवाब निकालना पड़ता है. यानी गूगल जवाब नहीं, बल्कि जवाब तक पहुंचने के रास्ते दिखाता है.
AI सर्च कैसे अलग तरीके से काम करता है?
AI सर्च टूल्स बड़े लैंग्वेज मॉडल यानी LLM पर चलते हैं. ये सवाल के पीछे की मंशा समझने की कोशिश करते हैं, इंटरनेट से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करते हैं और फिर उसे एक सीधे, आसान जवाब में बदलकर पेश कर देते हैं. यूजर को अलग-अलग वेबसाइट खोलने की जरूरत नहीं पड़ती. कई बार जवाब के साथ सोर्स लिंक भी दिए जाते हैं, ताकि यूजर चाहे तो असली जानकारी वहां जाकर जांच सके.
लिंक की लिस्ट बनाम सीधा जवाब
यही दोनों में सबसे बड़ा फर्क है. गूगल सर्च संभावित जवाब वाले पेज दिखाता है, जबकि AI सर्च सीधे तैयार जवाब देता है. सीधी और आसान जानकारी के लिए, जैसे किसी शहर का मौसम या किसी शब्द का मतलब, दोनों तरीके तेजी से काम करते हैं. लेकिन जब सवाल जटिल हो और कई पहलुओं को जोड़कर समझना हो, तो AI सर्च का जवाब ज्यादा व्यवस्थित और पढ़ने में आसान होता है.
सावधानी है जरूरी
AI सर्च का एक बड़ा जोखिम भी है. कई बार AI मॉडल गलत या भ्रामक जानकारी को भी उतने ही भरोसेमंद अंदाज में पेश कर देते हैं, जितना सही जानकारी को. इसे तकनीकी भाषा में हैलुसिनेशन कहा जाता है. वहीं गूगल सर्च में यूजर खुद अलग-अलग स्रोतों को देखकर तय कर सकता है कि कौन सी जानकारी भरोसेमंद है. इसलिए जरूरी और संवेदनशील मामलों में, जैसे सेहत, पैसा या कानून से जुड़े सवाल, जवाब को एक से ज्यादा जगह जांचना समझदारी है.
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कौन सा है बेहतर?
रोजमर्रा के छोटे-मोटे सवालों, जैसे किसी जगह का पता, किसी दुकान का समय या किसी वेबसाइट का लिंक ढूंढने के लिए गूगल सर्च तेज और भरोसेमंद है. वहीं रिसर्च, तुलना करने वाले सवाल, या ऐसे मुद्दे जिनमें कई जानकारियों को जोड़कर समझना हो, जैसे किसी नौकरी को चुनना चाहिए या नहीं या दो प्रोडक्ट्स में क्या फर्क है, वहां AI सर्च ज्यादा उपयोगी साबित होता है. ताजा खबरों और ठीक इसी वक्त की जानकारी के लिए अब भी पारंपरिक सर्च इंजन और सीधे न्यूज वेबसाइट ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>अब फोन से निकालकर चलाएं Action Camera, RugOne का अनोखा स्मार्टफोन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-फोन-से-निकालकर-चलाएं-action-camera-rugone-का-अनोखा-स्मार्टफोन</link>
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        <description><![CDATA[ RugOne ने बर्लिन में आयोजित IFA 2026 में अपना नया Xsnap 7 Pro पेश किया है. यह एक अनोखा स्मार्टफोन है, जिसमें फोन के साथ अलग से इस्तेमाल किया जा सकने वाला Modular Action Camera दिया गया है. RugOne का Xsnap 7 कैमरा मॉड्यूल सिर्फ 39 ग्राम का है और यह मैग्नेट की मदद से सीधे फोन से जुड़ जाता है. जरूरत पड़ने पर इसे फोन से अलग करके भी कैमरे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि यह मोबाइल फोटोग्राफी के एक्सपीरियंस को एक नया अंदाज देने वाला है.&amp;nbsp;
फोन से कैसे अलग हो जाएगा Action Camera?
RugOne Xsnap 7 Pro का सबसे खास फीचर इसका Magnetic Camera Module है. करीब 39 ग्राम वजन वाला यह छोटा मॉड्यूल फोन से आसानी से अलग किया जा सकता है. इसे हेलमेट, बाइक या दूसरे गियर पर भी लगाया जा सकता है. कंपनी ने इसे all-weather, all-terrain imaging system के तौर पर पेश किया है. कैमरा बिना किसी एक्स्ट्रा केसिंग के 5 मीटर तक पानी के अंदर भी काम कर सकता है.&amp;nbsp;
यह कैमरा 30fps पर 2.7K तक वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकता है. इसमें 133 डिग्री का फील्ड ऑफ व्यू मिलता है. साथ ही SteadyX Stabilization, Horizon Lock, Timelapse और HDR Photo जैसे फीचर्स दिए गए हैं. हालांकि इसमें RAW फाइल सपोर्ट नहीं मिलता और वीडियो MP4 फॉर्मेट में रिकॉर्ड होता है.
40 मिनट तक अलग से चलेगा कैमरा
Xsnap 7 Camera Module में 64GB की Built-in Storage दी गई है. यह फोन से अलग होकर करीब 40 मिनट तक काम कर सकता है और जरूरत पड़ने पर फोन से ही रिचार्ज हो जाता है. इसके अलावा Xsnap Go App की मदद से कैमरे को 50 मीटर तक की दूरी से रिमोट तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है.
Rugged Smartphone में भी दमदार फीचर्स
Xsnap 7 Pro में 6.67 इंच की 1.5K AMOLED डिस्पले दी गई है. फोन MediaTek Dimensity 8400 5G चिपसेट पर चलता है और इसमें 512GB स्टोरेज मिलती है. यह फोन 2 मीटर गहरे पानी में 30 मिनट तक रह सकता है और 1.5 मीटर की ऊंचाई से गिरने के बाद भी टिकने के लिए बनाया गया है. डिस्पले पर Corning Gorilla Glass Victus की प्रोटेक्शन दी गई है.
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50MP और 64MP कैमरा सेटअप
फोन में 50MP का मेन कैमरा दिया गया है, जिसमें Samsung GN9 Sensor मिलता है. इसके साथ 64MP का इंफेयर्ड नाइट विजन कैमरा भी है, जो OV64B1B सेंसर के साथ आता है. फोन Android 16 पर चलता है और इसमें Google Gemini AI के साथ RugOne के अपने AI Tools भी शामिल हैं.
Rugged Smartphone की कीमत
Xsnap 7 Pro को 7 सितंबर से Kickstarter पर Early-Bird Price में करीब 76,000 रुपए में खरीदा जा सकेगा. इसका Global Launch अक्टूबर में होगा. यूरोप में फोन की रिटेल कीमत करीब रुपए 1 लाख और अमेरिका में इसकी कीमत करीब 84,000 रुपए रखी गई है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 13:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>UPI Payment करते हैं? ये 6 Security Tips जरूर जानें</title>
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        <description><![CDATA[ UPI Payment करते हैं? ये 6 Security Tips जरूर जानें ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्या है Hugging Face Hack जिसने बढ़ा दी चिंता? आपका डेटा भी है खतरे में</title>
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        <description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है. Chatbot से लेकर कोडिंग, रिसर्च और कंटेंट क्रिएशन तक, आज लाखों लोग AI टूल्स पर निर्भर हैं. ऐसे में AI से जुड़ी किसी बड़ी कंपनी या प्लेटफॉर्म पर साइबर हमला सिर्फ एक वेबसाइट की समस्या नहीं रह जाता बल्कि इसका असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ता है. हाल ही में Hugging Face से जुड़ी हैकिंग की घटना ने इसी चिंता को फिर से सामने ला दिया है. आइए जानते हैं आखिर ये है क्या.
क्या है Hugging Face?
जानकारी के अनुसार, Hugging Face को AI और मशीन लर्निंग की दुनिया के सबसे जरूरी प्लेटफॉर्म्स में गिना जाता है. यहां डेवलपर्स और रिसर्चर्स हजारों AI मॉडल, डेटासेट और दूसरी मशीन लर्निंग संसाधनों को शेयर और इस्तेमाल करते हैं.
खास बात ये है कि ओपन-सोर्स AI इकोसिस्टम में Hugging Face की बड़ी भूमिका है. यानी यहां मौजूद किसी मॉडल या सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ होने पर उसका असर सिर्फ प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहता है बल्कि उन प्रोजेक्ट्स तक भी पहुंच सकता है जो इन संसाधनों पर निर्भर हैं.
हैक के बाद क्यों बढ़ी चिंता?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता ये है कि AI इकोसिस्टम एक-दूसरे से काफी जुड़ा हुआ है. डेवलपर किसी मॉडल को डाउनलोड करके अपने सर्वर या ऐप में इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे में अगर किसी भरोसेमंद सोर्स से मिलने वाली फाइल या मॉडल में बदलाव कर दिया जाए तो यूजर अनजाने में जोखिम वाला कोड अपने सिस्टम में पहुंचा सकता है. यही वजह है कि Hugging Face जैसी सर्विस होने वाली सुरक्षा घटना को नॉर्मल डेटा चोरी की घटना से अलग नजर से देखा जा रहा है.
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AI मॉडल भी बन सकते हैं साइबर हमले का रास्ता
आपको बता दें कि नॉर्मली साइबर हमले में वेबसाइट, पासवर्ड या सर्वर को निशाना बनाया जाता है. लेकिन AI की दुनिया में खतरा थोड़ा अलग है. यहां मॉडल और डेटा खुद सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन का हिस्सा बन चुके हैं.
अगर हमलावर किसी फेमश AI मॉडल, पैकेज या डेटासेट के साथ छेड़छाड़ करने में सफल हो जाए तो वह उन डेवलपर्स तक पहुंचने की कोशिश करता है जो उस संसाधन को अपने प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करते हैं. इसे AI सप्लाई-चेन सुरक्षा की बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
क्या आपका AI डेटा भी खतरे में है?
इसका मतलब ये नहीं है कि Hugging Face इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति तुरंत खतरे में है. किसी सुरक्षा घटना में असली जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा सिस्टम प्रभावित हुआ, किस तरह की जानकारी तक पहुंच बनी और सुरक्षा तरीके कितने मजबूत थे.
ऐसे में AI टूल्स पर आंख बंद करके भरोसा करना सही नहीं माना जाता है. खासकर कंपनियों और डेवलपर्स को थर्ड-पार्टी मॉडल, पैकेज और डेटासेट इस्तेमाल करते समय उनकी सुरक्षा को जरूर चेक करना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Fold नहीं, अब Roll होगी लैपटॉप स्क्रीन! Lenovo ने दिखाया नया टेक कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ लैपटॉप की स्क्रीन को अब तक आपने खुलते और बंद होते ही देखा होगा, लेकिन Lenovo ने इसके डिजाइन को एक कदम आगे ले जाने की कोशिश की है. कंपनी ने IFA 2026 में Project Swan नाम का एक नया प्रोटोटाइप लैपटॉप दिखाया है, जिसकी स्क्रीन मुड़ने की जगह रोल होकर बड़ी हो जाती है. ऐसे में जरूरत के हिसाब से एक ही लैपटॉप की स्क्रीन का साइज बढ़ाया जा सकता है. इस कॉन्सेप्ट की मदद से आने वाले समय में लैपटॉप का डिजाइन सिर्फ पतला और हल्का होने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्क्रीन का साइज भी जरूरत के हिसाब से बदला जा सकेगा. तो आइए जानते हैं कि इसमें क्या खास होगा.&amp;nbsp;
14 इंच की स्क्रीन बन जाएगी 17 इंच
Lenovo का Project Swan फिलहाल एक प्रोटोटाइप है. इसमें 14 इंच की स्क्रीन को रोल करके 17 इंच तक बढ़ाया जा सकता है. इसमें 16:9 आस्पेक्ट रेशियो दिया गया है, जिससे स्क्रीन पारंपरिक वाइडस्क्रीन लैपटॉप जैसी दिखाई देती है. Lenovo के मुताबिक, स्क्रीन 2,258 बाय 1,672 पिक्सल से बढ़कर 2,850 बाय 1,672 पिक्सल तक पहुंचती है. कंपनी ने इसे लगभग 4K डिस्प्ले बताया है. यह कॉन्सेप्ट Lenovo के पिछले ThinkBook Plus Rollable से अलग है. पिछले मॉडल में स्क्रीन ऊपर की तरफ बढ़कर 14 इंच से 16.7 इंच हो जाती थी. वहीं Project Swan में स्क्रीन की चौड़ाई बढ़ाई जाती है.
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कैसा है इसका डिजाइन?
Lenovo इससे पहले CES 2026 में Legion Pro Rollable भी दिखा चुकी है. उस मॉडल में स्क्रीन 16 इंच से 21.5 इंच और फिर 23.8 इंच तक बढ़ती थी. &amp;nbsp;Project Swan का डिजाइन आसान इस्तेमाल और बेहतर काम के लिए बनाया गया है. इसके फंक्शन भी कीबोर्ड के ऊपर दिए गए फंक्शन बटन से कंट्रोल किए जाते हैं. Lenovo के अनुसार, वाइडस्क्रीन डिजाइन लैपटॉप को ज्यादा बैलेंस और कंर्फटेबल बनाता है और पारंपरिक लैपटॉप के साइज को भी बनाए रखता है.&amp;nbsp;
कीमत और लॉन्च कितनी हो सकती है?
Project Swan अभी सिर्फ एक प्रोटोटाइप कॉन्सेप्ट है. कंपनी ने इसकी कीमत, कॉन्फिगरेशन और बाजार में उपलब्ध होने की तारीख की जानकारी नहीं दी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>IFA 2026 के Top Gadgets, Laptop से Robot तक सब खास</title>
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        <description><![CDATA[ IFA 2026 में इस बार टेक्नोलॉजी का काफी अलग और नया अंदाज देखने को मिल रहा है. बर्लिन में चल रहे इस बड़े टेक शो में रोबोट, लैपटॉप, स्मार्ट लाइट, सिक्योरिटी कैमरा, प्रोजेक्टर और कई तरह के नए गैजेट्स लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. शो में अगली पीढ़ी के ऑटोनॉमस फ्लोर क्लीनर से लेकर ह्यूमनॉइड रोबोट और नए कंप्यूटिंग हार्डवेयर तक कई दिलचस्प टेक्नोलॉजी पेश की जा रही हैं. कुछ गैजेट्स अपने अनोखे डिजाइन की वजह से चर्चा में हैं, तो कुछ नई टेक्नोलॉजी और खास फीचर्स के कारण सुर्खियां बटोर रहे हैं. IFA 2026 में नजर आ रहे इन खास गैजेट्स में से कुछ ऐसे हैं, जो आने वाले समय की टेक्नोलॉजी की झलक दिखाते हैं. तो आइए जानते हैं कि IFA 2026 के Top Gadgets क्या है.&amp;nbsp;
iRobot Roomba Max 875
iRobot Roomba Max 875 एक ऐसा रोबोट क्लीनर है, जो ऑटोमैटिक सफाई के साथ गहरी क्लीनिंग पर फोकस करता है. इसमें SealForce टेक्नोलॉजी है, जो कारपेट पर सफाई करते समय नीचे से एक सील बनाकर सक्शन को सीधे फाइबर तक पहुंचाती है. इसमें सेल्फ-क्लीनिंग रोलर मॉप, दाग ढीले करने वाला स्टीम नोजल और ऐसा बेस भी है जो डस्टबिन खाली करने के साथ मॉप को धोकर सुखाता है.. इसकी कीमत 1,199 डॉलर है.&amp;nbsp;
Philips Hue Liane 360
स्मार्ट लाइटिंग में Philips Hue Liane 360 ने अलग डिजाइन पेश किया. यह रोप लाइट OmniGlow टेक्नोलॉजी के जरिए चारों तरफ एक जैसी रोशनी देती है. इसे मोड़ा, लटकाया या अलग-अलग जगहों पर लगाया जा सकता है. यह 1.6 करोड़ रंग दिखा सकती है और Hue ऐप से इसकी ब्राइटनेस और कलर कंट्रोल किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
PrimeBOT Prime Q1
PrimeBOT Prime Q1 एक छोटा ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसकी लंबाई करीब 3 फीट है. यह चल सकता है, घूम सकता है, डांस कर सकता है और 10 से ज्यादा मार्शल आर्ट मूवमेंट कर सकता है. इसमें 22 डिग्री ऑफ फ्रीडम दिए गए हैं और इसके लुक को 3D प्रिंटिंग व मॉड्यूलर हेड से बदला जा सकता है.&amp;nbsp;
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Lenovo Project AeroBlade
लैपटॉप की दुनिया में Lenovo Project AeroBlade खास रहा. यह सिर्फ 10mm मोटा और करीब 1.85 पाउंड वजन वाला फैन लेस लैपटॉप प्रोटोटाइप है. इसमें Frore Systems की AirJet टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है, जो फैन की जगह अल्ट्रासोनिक वाइब्रेशन से हवा को मूव करती है.&amp;nbsp;
Lenovo Project Swan
Lenovo Project Swan में 14 इंच की स्क्रीन है, जो बटन दबाने पर साइड की तरफ खुलकर 17 इंच की हो जाती है. इसमें 16:9 आस्पेक्ट रेशियो दिया गया है. इसका मकसद लैपटॉप को कॉम्पैक्ट रखते हुए ज्यादा स्क्रीन स्पेस देना है.&amp;nbsp;
दूसरे खास गैजेट्स
IFA 2026 में Reolink OMVI 2i Ultra सिक्योरिटी कैमरा भी खास रह. इसमें 8MP वाइड कैमरा और 5MP पैन-टिल्ट कैमरा है, जो किसी ऑब्जेक्ट को पहचानने पर उस पर ऑटोमेटिक जूम कर सकता है. वहीं DJI Osmo 360 II 8K वीडियो के साथ आया है. Acer Predator Atlas 7 में 7 इंच का फॉर्म फैक्टर और Intel Arc G3 Extreme प्रोसेसर दिया गया है. इसके अलावा Lexar Muse Ultra-Slim Portable SSD सिर्फ 3.8mm तक पतला है, जबकि Oukitel RG14-P लैपटॉप के ढक्कन पर लगे सोलर पैनल से 10W तक चार्जिंग कर सकता है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Laptop में Screenshot लेने के 8 प्रो तरीके, नहीं जानते होंगे</title>
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        <description><![CDATA[ Laptop में Screenshot लेने के 8 प्रो तरीके, नहीं जानते होंगे ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्या Router के पास सबसे तेज इंटरनेट चलता है? जानिए क्या है सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ अक्सर आपने सुना होगा कि Wi-Fi Router के जितना पास बैठेंगे, इंटरनेट उतना ही तेज चलेगा. यही वजह है कि जब घर में इंटरनेट धीमा होता है तो लोग Router के पास जाकर बैठ जाते हैं. लेकिन क्या वाकई Router के बिल्कुल पास इंटरनेट की स्पीड सबसे ज्यादा होती है? इसका जवाब थोड़ा दिलचस्प है. दरअसल, दूरी का असर जरूर पड़ता है लेकिन सिर्फ Router के पास होना ही तेज इंटरनेट की गारंटी नहीं है.
Router से दूरी का क्या है कनेक्शन?
Wi-Fi Router रेडियो सिग्नल के जरिए आपके फोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और दूसरे डिवाइस को इंटरनेट से जोड़ता है. जैसे-जैसे आप Router से दूर जाते हैं, Wi-Fi सिग्नल की ताकत आमतौर पर कम होती जाती है. दीवारें, दरवाजे, फर्नीचर और दूसरी इलेक्ट्रॉनिक चीजें भी सिग्नल को प्रभावित कर सकती हैं.
इसलिए अगर आपका फोन Router से काफी दूर है तो कमजोर सिग्नल के कारण स्पीड कम और कनेक्शन अनस्टेबल हो सकता है. खासकर बड़े घरों या कई कमरों वाले फ्लैट में ये समस्या ज्यादा दिखाई देती है.
क्या बिल्कुल Router के पास बैठने से सबसे ज्यादा स्पीड मिलेगी?
ऐसा जरूरी नहीं है. दरअसल, Router के ठीक बगल में बैठने से सिग्नल बहुत मजबूत मिल सकता है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इंटरनेट की असली स्पीड हमेशा वहीं सबसे ज्यादा होगी. आपकी इंटरनेट स्पीड आपके ब्रॉडबैंड प्लान, Router की क्षमता, Wi-Fi बैंड, नेटवर्क ट्रैफिक और सर्वर जैसे कई फैक्टर पर निर्भर करती है. जैसे अगर आपका प्लान 100 Mbps का है तो Router के पास बैठने से वह अचानक 500 Mbps नहीं हो जाएगा. इसके अलावा कुछ Router के बिल्कुल नजदीक होने पर भी परफॉर्मेंस में खास फायदा नहीं मिलता है.
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2.4GHz और 5GHz में भी है फर्क
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Wi-Fi Router में इस्तेमाल होने वाला बैंड भी काफी जरूरी है. नॉर्मली 2.4GHz Wi-Fi ज्यादा दूरी तक पहुंच सकता है और दीवारों को बेहतर तरीके से पार करता है लेकिन इसमें भीड़ और interference ज्यादा हो सकती है. वहीं 5GHz Wi-Fi ज्यादा स्पीड दे सकता है लेकिन इसकी रेंज कम होती है और दीवारों से गुजरते समय सिग्नल ज्यादा कमजोर हो जाता है. यानी Router से कुछ दूरी पर 5GHz की स्पीड घट सकती है जबकि 2.4GHz उसी जगह ज्यादा स्टेबल कनेक्शन दे सकता है.
Router कहां रखना सबसे बेहतर है?
Router को घर के किसी एक कोने में रखने के बजाय घर के बीच के हिस्से में, थोड़ी ऊंचाई पर और खुले स्थान में रखना बेहतर होता है. उसे अलमारी के अंदर, टीवी के पीछे या जमीन पर रखने से Wi-Fi सिग्नल प्रभावित हो सकता है. अगर घर बड़ा है और कुछ कमरों में Wi-Fi कमजोर रहता ह तो Wi-Fi Mesh System या Range Extender जैसे ऑप्शन भी मदद कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>2,666 रुपए की EMI में 12GB RAM वाला फोन, फीचर्स जानकर चौंक जाएंगे!</title>
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        <description><![CDATA[ Tecno ने पिछले महीने भारतीय बाजार में Tecno Spark Go 3 Pro लॉन्च किया था. अब 4 सितंबर से यह फोन बिक्री के लिए उपलब्ध हो गया है. कंपनी ने इसे 15,999 रुपए की शुरुआती कीमत में पेश किया है. इसे सिर्फ 2,666 रुपए प्रति महीने की किस्त देकर फोन खरीदा जा सकता है. फोन में 4GB RAM के साथ 8GB Extended RAM का सपोर्ट मिलता है, जिससे कुल 12GB RAM की ताकत मिलती है. इसके अलावा इसमें 5200mAh की Battery और 120Hz Display जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं.&amp;nbsp;
Tecno Spark Go 3 Pro की कीमत
Tecno Spark Go 3 Pro के 4GB RAM + 64GB Storage वेरिएंट की कीमत 15,999 रुपए है. वहीं 4GB RAM + 128GB Storage मॉडल को 16,999 रुपए के लॉन्च प्राइस में लाया गया है. फोन खरीदने वालों के लिए कंपनी 6 महीने की No Cost EMI भी दे रही है. इसके तहत सिर्फ 2,666 रुपए प्रति महीने की किस्त देकर फोन खरीदा जा सकता है.
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह सेल
यह 4G स्मार्टफोन Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर भी उपलब्ध होगा. फोन को बरगंडी रेड, एक्लिप्स ब्लैक, बेसाल्ट टाइटेनियम और सनराइज ऑरेंज कलर में खरीदा जा सकता है. इसके साथ 1 साल की मेन्यू फैक्चर वारंटी भी मिलेगी.
Tecno Spark Go 3 Pro फीचर्स&amp;nbsp;
फोन में 1526 बाय 720 पिक्सल रेजोल्यूशन वाली 6.78 इंच की HD+ IPS LCD डिस्पले दी गई है. इसमें वॉटर ड्रॉप नोच स्टाइल के साथ 120Hz रिफ्रेश रेट, 240Hz &amp;nbsp;टच सैम्पलिंग रेट और 580 निट्स की हाई ब्राइटनेस मिलती है. फोन को IP68 + IP69 रेटिंग भी मिली है, जो इसे डस्ट और वॉटर प्रोटेक्शन देती है.&amp;nbsp;
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इसका प्रोसेसर भी है खास&amp;nbsp;
परफॉर्मेंस के लिए फोन में MediaTek Helio G81 चिपसेट दिया गया है. यह 12nm तकनीक से तैयार ऑक्टा-कोर प्रोसेसर है, जिसकी क्लोक स्पीड 1.8GHz से 2.0GHz तक है. 91Mobiles की टेस्टिंग में फोन ने 3,71,151 का स्कोर हासिल किया है. ग्राफिक्स के लिए ARM Mali-G52 MC2 GPU दिया गया है.
5200mAh बैटरी और 13MP कैमरा
पावर बैकअप के लिए फोन में 5200mAh बैटरी दी गई है, जिसे 10W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. इसमें OTG, Wi-Fi, Bluetooth और Infrared Sensor भी दिया गया है, जिससे फोन को TV रिमोट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
कैमरे में पीछे LED फ्लैश के साथ 13MP का f1.8 मेन कैमरा मिलता है, जो ऑटोफोकस सपोर्ट करता है. वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 8MP का f2.0 फ्रंट कैमरा दिया गया है. सिक्योरिटी के लिए फोन में Side-Mounted Fingerprint Sensor भी मौजूद है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>कौन सा App खत्म कर रहा iPhone की Battery? चुटकियों में ऐसे करें पता</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपके iPhone की बैटरी पहले के मुकाबले तेजी से खत्म हो रही है तो हर बार इसकी वजह खराब बैटरी नहीं होती. कई बार कुछ ऐप्स बैकग्राउंड में लगातार एक्टिव रहते हैं और चुपचाप काफी बैटरी खर्च करते रहते हैं. अच्छी बात ये है कि iPhone में ऐसा फीचर मौजूद है जिससे आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि कौन-सा ऐप सबसे ज्यादा बैटरी खा रहा है.
Battery खाने वाले ऐप की ऐसे करें पहचान
सबसे पहले अपने iPhone में Settings ऐप खोलें. इसके बाद नीचे स्क्रॉल करके Battery ऑप्शन पर टैप करें. यहां आपको पिछले 24 घंटे या पिछले कई दिनों में बैटरी इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.
इस स्क्रीन पर ऐप्स की एक लिस्ट भी मिलती है. हर ऐप के सामने ये जानकारी होती है कि उसने कुल बैटरी खपत में कितने प्रतिशत का इस्तेमाल किया. जिस ऐप का प्रतिशत ज्यादा है, वह आपकी बैटरी पर ज्यादा असर डाल रहा हो सकता है.
सिर्फ Percentage देखकर फैसला न करें
आपको बता दें कि ये जरूरी नहीं कि सबसे ज्यादा Battery इस्तेमाल करने वाला ऐप हमेशा खराब या बेकार ही हो. जैसे अगर आपने लंबे समय तक YouTube पर वीडियो देखे हैं तो उसका बैटरी इस्तेमाल ज्यादा होना नॉर्मल है. इसी तरह गेमिंग ऐप्स, कैमरा और वीडियो एडिटिंग ऐप्स भी ज्यादा पावर ले सकते हैं क्योंकि वे प्रोसेसर, डिस्प्ले और दूसरे हार्डवेयर का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. इसलिए Battery सेक्शन में दिखाई देने वाले आंकड़ों को आपके इस्तेमाल के हिसाब से समझना जरूरी है.
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Screen और Background Activity पर दें ध्यान
iPhone की Battery सेटिंग्स में आपको ये भी देखने को मिल सकता है कि कोई ऐप स्क्रीन पर इस्तेमाल होने के दौरान कितनी बैटरी ले रहा है और बैकग्राउंड में कितना एक्टिव था.
अगर कोई ऐप आपने बहुत कम इस्तेमाल किया लेकिन फिर भी उसका बैकग्राउंड बैटरी इस्तेमाल काफी ज्यादा दिखाई दे रहा है तो उस पर ध्यान देना चाहिए. हो सकता है वह बैकग्राउंड में लोकेशन, सिंकिंग या दूसरी एक्टिविटी कर रहा हो.
ज्यादा Battery खाने वाले ऐप के साथ क्या करें?
अगर कोई ऐप जरूरत से ज्यादा बैटरी इस्तेमाल कर रहा है तो सबसे पहले उसे अपडेट करें. कई बार ऐप के नए वर्जन में बैटरी से जुड़ी समस्याओं को ठीक किया जाता है. जरूरत न होने पर आप उस ऐप की Background App Refresh सेटिंग को भी लिमिटेड कर सकते हैं.
इसके अलावा जिन ऐप्स को लगातार आपकी लोकेशन की जरूरत नहीं है, उनके Location Access को भी सीमित करना मददगार साबित हो सकता है. अगर कोई ऐप बेहद ज्यादा बैटरी खर्च कर रहा है और आपको उसकी जरूरत भी नहीं है तो उसे हटाना एक आसान ऑप्शन हो सकता है.
Battery Health भी जरूर चेक करें
अगर सभी ऐप्स का इस्तेमाल नॉर्मल है फिर भी iPhone की बैटरी बहुत तेजी से खत्म हो रही है तो Settings में जाकर Battery ऑप्शन में जाएं और यहां पर Battery Health में जाकर बैटरी की कंडिशन को चेक करें. पुरानी या कमजोर बैटरी होने पर फोन का बैकअप कम हो जाता है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कौन, सा, App, खत्म, कर, रहा, iPhone, की, Battery, चुटकियों, में, ऐसे, करें, पता</media:keywords>
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        <title>GPT&amp;6 vs Claude vs Gemini : Context Window से Price तक, जानें कौन&amp;सा AI बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ AI अब हमारी डेली लाइफ का हिस्सा बन चुका है. जैसे-जैसे इसका यूज बढ़ रहा है, वैसे-वैसे AI कंपनियां भी अपने मॉडल्स को ज्यादा बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं. इसी कड़ी में OpenAI ने अपना नया AI मॉडल GPT-6 लॉन्च किया है. कंपनी के मुताबिक, यह दुनिया का सबसे इंटेलिजेंट और अलाइंड मॉडल है. GPT-6 के आने के बाद AI की दुनिया में इसकी तुलना Claude Fable 5.1 और Gemini 3.8 Flash जैसे मॉडल्स से की जा रही है. यह तीनों मॉडल अपने-अपने खास फीचर्स के साथ आते हैं, लेकिन Context Window, Output Capacity, Benchmark Performance और Pricing के मामले में इनमें अंतर है. ऐसे में आइए जानते हैं GPT-6, Claude Fable 5.1 और Gemini 3.8 Flash में क्या फर्क है.
Context Window में कौन आगे?
AI का Context Window उसकी Short-Term Memory की तरह काम करता है. यह बताता है कि AI एक समय में कितना टेक्सट पढ़, याद और समझ सकता है. GPT-6 में 1,050,000 टोकन का Context Window दिया गया है. वहीं Gemini 3.8 Flash में 1,048,576 &amp;nbsp;टोकन और Claude Fable 5.1 में 1,000,000 &amp;nbsp;टोकन का Context Window मिलता है. इस मामले में GPT-6 सबसे आगे है.
Output और Knowledge Cutoff
एक रिस्पॉन्स में कितना Output जनरेट किया जा सकता है, इस मामले में GPT-6 और Claude Fable 5.1 बराबरी पर हैं. दोनों मॉडल 128,000 टोकन तक Output जनरेट कर सकते हैं. वहीं Gemini 3.8 Flash 65,536 टोक्नस यानी करीब 66K &amp;nbsp;टोकन तक Output दे सकता है. GPT-6 और Claude Fable 5.1, Gemini 3.8 Flash की तुलना में करीब दोगुना Output एक रिस्पॉन्स में जनरेट कर सकते हैं.
वहीं Knowledge Cutoff की बात करें तो GPT-6 का Cutoff 30 अप्रैल 2026 तक है. Claude Fable 5.1 का Knowledge Cutoff जून 2026 और Gemini 3.8 Flash का मार्च 2026 तक है. हालांकि Google का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में जानकारी जनवरी 2025 तक ही हो सकती है.
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Benchmark Scores में कौन-सा AI बेस्ट?
1. OpenAI के मुताबिक GPT-6 ने ARC-AGI-2 में 95.0 प्रतिशत , ARC-AGI-3 में 99.9 प्रतिशत और अपने साइबर सिक्योरिटी टेस्ट एक्सप्लॉइट बेंच में 100 प्रतिशत स्कोर किया है. एजेंट्स लास्ट एग्जाम में इसका स्कोर 59.3 प्रतिशत बताया गया है, जबकि पुराने GPT-5.6 Sol का स्कोर 53.6 प्रतिशत था.
2. Anthropic के अनुसार Claude Fable 5.1 ने Terminal-Bench 4.0 में 55.8 प्रतिशत और CursorBench 3.2.0 में 73.4 प्रतिशत स्कोर किया है. Humanity लास्ट एग्जाम &amp;nbsp;में इसका स्कोर बिना Tools के 60.9 प्रतिशत और Tools के साथ 65 प्रतिशत बताया गया है.
3. Google के मुताबिक Gemini 3.8 Flash ने Terminal-Bench 2.1 में 90.8 प्रतिशत स्कोर हासिल किया है, जबकि पिछले फ्लैश मॉडल का स्कोर 81.6 प्रतिशत था. HLE-Verified में इसका स्कोर 54.9 प्रतिशत रहा.
AI मॉडल की कीमत
इन तीनों मॉडल अपने-अपने सब्सक्रिप्शन प्लान के जरिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. भारत में GPT-6 को ChatGPT Plus Plan के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसकी कीमत 1,999 रुपए प्रति महीने से शुरू होती है. Claude Fable 5.1 के लिए Claude Pro Plan की कीमत 2,399 रुपए प्रति महीना है. वहीं Gemini 3.8 Flash Google AI Pro Plan के साथ उपलब्ध है, जिसकी कीमत भारत में 1,950 रुपए प्रति महीना है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Windows PC की Storage हो रही है फुल? जानें कौन सी Files खा रहीं सारी जगह</title>
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        <description><![CDATA[ Windows PC की Storage हो रही है फुल? जानें कौन सी Files खा रहीं सारी जगह ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp पर अपनी प्रोफाइल फोटो किससे छिपाएं, ये प्राइवेसी सेटिंग काम आएगी</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp का इस्तेमाल आज लगभग हर कोई करता है. यहां लोग दोस्तों और परिवार के साथ चैट करने के अलावा अपनी फोटो भी प्रोफाइल पर लगाते हैं. लेकिन जरूरी नहीं कि आप अपनी प्रोफाइल फोटो हर WhatsApp कांटेक्ट को दिखाना चाहें. अगर आप चाहते हैं कि आपके द्वारा चुने हुए खास लोग ही आपकी फोटो देख पाएं, तो WhatsApp में इसके लिए एक आसान प्राइवेसी सेटिंग दी गई है. इसकी मदद से आप अपनी प्रोफाइल फोटो को अपनी पसंद के लोगों से छिपा सकते हैं और कुछ पसंद लोगों को दिखा सकते हैं.
WhatsApp में प्रोफाइल फोटो छिपाने की सेटिंग&amp;nbsp;
WhatsApp में प्रोफाइल फोटो की प्राइवेसी बदलने का विकल्प मिलता है. इसमें आप खुद तय कर सकते हैं कि आपकी प्रोफाइल फोटो कौन देख सकता है और कौन नहीं . अगर आप फोटो को कुछ खास लोगों से छिपाना चाहते हैं, तो इसके लिए My Contacts Except का विकल्प काम आता है. इस सेटिंग को चुनने के बाद आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद जिन लोगों को आप चुनेंगे, उन्हें आपकी प्रोफाइल फोटो दिखाई नहीं देगी.
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ऐसे छिपाएं प्रोफाइल फोटो
इसके लिए सबसे पहले WhatsApp खोलें और सेटिंग्स में जाएं और इसके बाद WhatsApp में सबसे ऊपर कोने में एक तीन डॉट वाला विकल्प दिखेगा. उसमें&amp;nbsp; Privacy वाले विकल्प पर टैप करें. यहां आपको Profile Photo का ऑप्शन दिखाई देगा. अब Profile Photo पर टैप करने के बाद My Contacts Except... चुनें. इसके बाद उन लोगों को सिलेक्ट कर दें, जिनसे आप अपनी प्रोफाइल फोटो छिपाना चाहते हैं. लोगों को चुनने के बाद सेटिंग सेव कर दें.अब जिन लोगों को आपने चुना है, वे आपकी WhatsApp प्रोफाइल फोटो नहीं देख पाएंगे.
फोटो सभी से छिपानी हो तो क्या करें?
अगर आप अपनी प्रोफाइल फोटो किसी को भी नहीं दिखाना चाहते तो Nobody विकल्प चुन सकते हैं. इसके बाद आपकी प्रोफाइल फोटो किसी भी WhatsApp यूजर को दिखाई नहीं देगी. वहीं, अगर आप चाहते हैं कि सिर्फ आपके सेव किए हुए कॉन्टैक्ट्स ही फोटो देखें तो My Contacts विकल्प चुन सकते हैं. इस तरह WhatsApp आपको प्रोफाइल फोटो की प्राइवेसी अपनी जरूरत के हिसाब से बदलने की सुविधा देता है.
प्राइवेसी के लिए काम की है ये सेटिंग
कई बार हम ऐसे लोगों का नंबर सेव कर लेते हैं जिनसे ज्यादा बात नहीं होती, लेकिन हम नहीं चाहते कि वे हमारी फोटो देखें. ऐसे में सभी कॉन्टैक्ट्स से फोटो छिपाने की जरूरत नहीं है. My Contacts Except... विकल्प से आप सिर्फ कुछ लोगों को चुनकर अपनी फोटो उनसे छिपा सकते हैं. इसलिए अगर आप WhatsApp पर अपनी प्रोफाइल फोटो को लेकर ज्यादा प्राइवेसी रखना चाहते हैं, तो यह छोटी सी सेटिंग आपके काफी काम आ सकती है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>गाड़ी कहां पार्क है? भूल जाते हैं तो ऑन कर लें Google Map की ये सेटिंग</title>
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        <description><![CDATA[ बड़े मॉल, एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन या किसी बड़े इवेंट की पार्किंग में अक्सर लोग अपनी गाड़ी पार्क करके भूल जाते हैं कि वे किस फ्लोर या किस लाइन में खड़ी की थी. बाद में गाड़ी ढूंढने में काफी समय बर्बाद हो जाता है. इस दिक्कत को दूर करने के लिए गूगल मैप्स में एक बेहद काम का फीचर दिया गया है, जिसकी मदद से पार्किंग की सही लोकेशन सेव की जा सकती है और बाद में आसानी से गाड़ी तक पहुंचा जा सकता है.
मैन्युअली पार्किंग लोकेशन कैसे सेव करें
इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले फोन में लोकेशन सर्विस ऑन करनी होती है. इसके बाद गूगल मैप्स ऐप खोलें, जहां मैप पर आपकी मौजूदा लोकेशन एक नीली बिंदी के रूप में दिखाई देती है. इस नीली बिंदी पर टैप करते ही कुछ ऑप्शन खुलते हैं, जिनमें से पार्किंग सेव करें या सेट एज पार्किंग लोकेशन पर टैप करना होता है. ऐसा करते ही उस जगह पर एक छोटा सा &#039;P&#039; आइकन दिखने लगता है, जो बताता है कि गाड़ी वहां खड़ी है.
अपने आप सेव हो जाएगी पार्किंग लोकेशन
अगर बार-बार मैन्युअली सेव करना झंझट लगता है, तो एंड्रॉयड फोन में एक ऑटोमैटिक सेटिंग भी मौजूद है. इसके लिए मैप्स ऐप में प्रोफाइल फोटो पर टैप करके सेटिंग्स में जाएं, वहां नेविगेशन ऑप्शन चुनें और ऑटोमैटिकली सेव पार्किंग को ऑन कर दें. इसके बाद गूगल मैप्स फोन के मोशन सेंसर या गाड़ी के ब्लूटूथ कनेक्शन की मदद से खुद समझ जाता है कि आप कब गाड़ी चलाना बंद करके पार्क कर चुके हैं, और अपने आप उस जगह को आपने यहां पार्क किया के तौर पर मार्क कर देता है.
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फोटो, नोट और टाइमर जोड़ने की सुविधा
पार्किंग लोकेशन सेव करने के बाद गूगल मैप्स कुछ और भी सुविधाएं देता है। सेव की गई जगह पर टैप करके more info में जाकर पार्किंग स्पॉट की एक फोटो खींची जा सकती है, ताकि आसपास की पहचान याद रहे. इसके अलावा फ्लोर नंबर, गाड़ी की जगह या किसी खास पहचान का नोट भी लिखा जा सकता है. अगर पेड पार्किंग में गाड़ी खड़ी की है, तो वहां टाइमर भी सेट किया जा सकता है, जिससे तय समय खत्म होने से पहले फोन पर याद दिलाने वाला नोटिफिकेशन आ जाता है.
गाड़ी तक वापस कैसे पहुंचें
गाड़ी की तरफ लौटते समय बस मैप्स के सर्च बार में जाकर सेव की गई पार्किंग लोकेशन पर टैप करना होता है. इसके बाद हाउ टू गेट देयर ऑप्शन पर टैप करने से पैदल चलने का पूरा रास्ता और अनुमानित समय दिखने लगता है, जिससे बड़ी और भीड़भाड़ वाली पार्किंग में भी आसानी से गाड़ी तक पहुंचा जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>कैमरा लवर्स के लिए बेस्ट! 200MP वाले 6 नए स्मार्टफोन, जानें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन कैमरे काफी आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन 200MP सेंसर की डिमांड अब भी बनी हुई है. कंपनियां इसे हाई-एंड कैमरा एक्सपीरिएंस के तौर पर पेश कर रही हैं 2026 में कई कंपनियां 200MP सेंसर वाले स्मार्टफोन लेकर आई हैं. खास बात यह है कि इस सेगमेंट में सिर्फ प्रीमियम फ्लैगशिप ही नहीं, बल्कि मिड-रेंज और किफायती फोन भी शामिल हैं. अगर आप नया कैमरा फोन खरीदने का सोच रहे हैं, तो 200MP कैमरे वाले इन स्मार्टफोन्स पर नजर डाल सकते हैं.&amp;nbsp;
Xiaomi 17 Ultra
Xiaomi 17 Ultra में 200MP टेलीफोटो कैमरा मिलता है. इसके साथ 50MP मेन और 50MP अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है. फोन में 50MP फ्रंट कैमरा, Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट, 6.9 इंच OLED डिस्प्ले, 6,000mAh बैटरी और 90W Hyper Charging सपोर्ट है.
Oppo Reno 15 Pro
Oppo Reno 15 Pro में 200MP मेन कैमरे के साथ 50MP पेरिस्कोप और 50MP टेलीफोटो कैमरा दिया गया है. फ्रंट में 50MP कैमरा मिलता है.इसमें MediaTek Dimensity 8450 प्रोसेसर, 6.78 इंच LTPO AMOLED डिस्प्ले, 6,500mAh बैटरी और 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट है.
Samsung Galaxy Z Fold 8 Ultra
फोल्डेबल फोन में 200MP कैमरा चाहने वालों के लिए Samsung Galaxy Z Fold 8 Ultra एक ऑप्शन है. इसमें 200MP मेन कैमरा के साथ 50MP और 10MP के दो अन्य रियर कैमरे मिलते हैं. फोन में 8 इंच Dynamic AMOLED 2X मेन डिस्प्ले, Snapdragon 8 Elite Gen 5 for Galaxy चिपसेट, 5,000mAh बैटरी और 45W चार्जिंग है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - iPhone 18 Pro का कैमरा कितना दमदार होगा? जान लें एक-एक डिटेल
Vivo X300 Ultra
Vivo X300 Ultra में 200MP मेन और 200MP टेलीफोटो कैमरा दिया गया है. इसके अलावा 50MP का तीसरा सेंसर और 50MP फ्रंट कैमरा मिलता है. फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर, 6.82 इंच AMOLED डिस्प्ले, 6,600mAh बैटरी और 100W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट है.&amp;nbsp;
Samsung Galaxy S26 Ultra
Samsung Galaxy S26 Ultra 2026 के प्रीमियम 200MP कैमरा फोन में शामिल है. इसमें 200MP मेन कैमरे के साथ 50MP अल्ट्रा वाइड, 50MP टेलीफोटो और 10MP टेलीफोटो कैमरा मिलता है. फोन में 6.9 इंच का Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले, Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट, 5,000mAh बैटरी और 60W फास्ट चार्जिंग दी गई है.
Oppo Find X9 Ultra
Oppo Find X9 Ultra की सबसे खास बात इसका डुअल 200MP कैमरा सेटअप है. इसमें 200MP मेन और 200MP टेलीफोटो कैमरा के साथ 50MP अल्ट्रा वाइड और 50MP टेलीफोटो सेंसर मिलता है. फोन में 6.82 इंच LTPO AMOLED डिस्प्ले, Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट और 7,050mAh बैटरी है, जो 100W SuperVOOC चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसके अलावा Oppo Reno 15 Pro Mini, Realme 16 Pro+, Realme 16 Pro, Redmi Note 15 Pro और Vivo V70 FE भी 200MP कैमरा वाले 2026 के मॉडल्स में शामिल हैं. इनमें अलग-अलग कीमत और फीचर्स के साथ 200MP मेन कैमरा दिया गया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>फोन नहीं हो रहा ऑन? इन 6 तरीकों से करें Fix</title>
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        <description><![CDATA[ फोन नहीं हो रहा ऑन? इन 6 तरीकों से करें Fix ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro का कैमरा कितना दमदार होगा? जान लें एक&amp;एक डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ Apple 9 सितंबर 2026 को अपना बड़ा इवेंट आयोजित करने जा रहा है. जहां iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max पेश किए जाने की उम्मीद है, वहीं&amp;nbsp; iPhone 18 Pro को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके कैमरा अपग्रेड्स की हो रही है. Apple के नए Pro मॉडल्स में इस बार कैमरा सिर्फ ज्यादा मेगापिक्सल तक सीमित नहीं रहने वाला है. इस बार फोटोग्राफी को ज्यादा कंट्रोल देने वाली तकनीक भी देखने को मिल सकती है.
खासतौर पर Variable Aperture को लेकर कई रिपोर्ट्स सामने आई हैं. इसके अलावा Telephoto Camera में सुधार, बेहतर लो-लाइट फोटोग्राफी, पोर्ट्रेट फोटोग्राफी और Pro यूजर्स के लिए नए सॉफ्टवेयर फीचर्स मिलने की उम्मीद है. हालांकि इन कैमरा फीचर्स को लेकर अभी तक Apple की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. तो आइए जानते हैं कि iPhone 18 Pro का कैमरा कितना दमदार होगा.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro का कैमरा कितना दमदार होगा.
1. Variable Aperture कैमरा - iPhone 18 Pro सीरीज के कैमरे में Variable Aperture सबसे बड़ा अपग्रेड हो सकता है. 48MP Main Camera के साथ इस तकनीक के मिलने की चर्चा है. Variable Aperture लेंस में जाने वाली रोशनी को जरूरत के हिसाब से कम या ज्यादा करने में मदद करता है. इससे अलग-अलग शूटिंग कंडीशन में कैमरे को ज्यादा कंट्रोल मिल सकता है.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;पोर्ट्रेट फोटोग्राफी बेहतर - Variable Aperture का फायदा पोर्ट्रेट फोटो में भी देखने को मिल सकता है. यूजर फोकस और Depth of Field को अपनी जरूरत के अनुसार एडजस्ट कर सकेगा. इससे सब्जेक्ट और बैकग्राउंड के बीच बेहतर सेप्रेशन मिल सकता है और बैकग्राउंड ब्लर ज्यादा नेचुरल दिखाई देने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
3. लो-लाइट फोटोग्राफी - कम रोशनी में फोटोग्राफी के दौरान Variable Aperture कैमरे में आने वाली रोशनी को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. इससे लो-लाइट फोटो में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है. खासतौर पर ऐसे सीन में यह फीचर यूजफुल हो सकता है, जहां सही रोशनी उपलब्ध नहीं होती है.&amp;nbsp;
Telephoto Camera में भी हो सकता है बड़ा सुधार
iPhone 18 Pro में Telephoto Camera को भी अपग्रेड किए जाने की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें ज्यादा Wide Aperture दिया जा सकता है. इससे कैमरा सेंसर तक ज्यादा रोशनी पहुंच सकती है और कम रोशनी में जूम करते समय बेहतर फोटो लेने में मदद मिल सकती है. Pro मॉडल्स में 48MP Telephoto Camera की चर्चा है, जबकि Optical Zoom को 5x से 6x तक बढ़ाए जाने की संभावना बताई जा रही है. Pro Max में 6x Optical Zoom मिलने की चर्चा है.&amp;nbsp;
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Pro यूजर्स को मिल सकते हैं नए कैमरा कंट्रोल
Apple iPhone 18 Pro में नए Pro-focused Software Features भी दे सकता है. कैमरा ऐप के अंदर ज्यादा एडवांस कंट्रोल मिलने की उम्मीद है, जिससे यूजर्स को शूटिंग के दौरान कैमरे पर ज्यादा कंट्रोल मिल सकेगा. iOS 27 में Camera Interface को भी आसान बनाने की बात सामने आई है.
बड़ा हो सकता है Camera Module
इन सभी संभावित कैमरा अपग्रेड्स का असर फोन के Camera Module पर भी दिखाई दे सकता है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Pro मॉडल का Camera Bump करीब 2mm तक बड़ा हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Ultra को टक्कर देने आ रहा Xiaomi 18 Fold! इस दिन होगा लॉन्च, जानें फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ स्मार्टफोन मार्केट में बहुत ही जल्द एक नया डिवाइस लॉन्च होने वाला है. दरअसल, 9 सितंबर को एप्पल अपना डिवाइस लॉन्च करने की तैयारी में है लेकिन उससे पहले ही 7 सितंबर को शाओमी अपना एक फोल्डेबल स्मार्टफोन मार्केट में उतारने वाली है. माना जा रहा है कि कंपनी का ये नया फोन आईफोन अल्ट्रा को सीधी टक्कर देने में भी सक्षम होगा. हालांकि, इस फोन को 7 सितंबर को चीन में लॉन्च किया जाएगा. आइए जानते हैं कि इसमें कौन से फीचर्स मिलेंगे.
कैसे होगा डिजाइन
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Xiaomi 18 Fold का डिजाइन इसे दूसरे बड़े फोल्डेबल फोन से अलग बनाता है. कंपनी के मुताबिक, फोल्ड होने के बाद इसका साइज लगभग एक पासपोर्ट जितना हो जाएगा. इसका फायदा ये है कि फोन को जेब या बैग में रखना आसान रहेगा और रोजमर्रा के कामों के लिए एक हाथ से भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.
इसके अलावा इस फोन में बाहर की तरफ 5.38 इंच का कवर डिस्प्ले दिए जाने की संभावना है वहीं, इसके अंदर 7.58 इंच की बड़ी इनर स्क्रीन देखने को मिल सकती है. इस बड़े डिस्प्ले का इस्तेमाल मल्टीटास्किंग, वीडियो देखने, गेमिंग और दूसरे कामों के लिए किया जा सकता है.
मिलेगी दमदार बैटरी
लीक्स के मुताबिक, Xiaomi 18 Fold में 6,000mAh की बैटरी देखने को मिल सकती है जो 67W के वायर्ड और 50W के वायरलेस चार्जिंग को भी सपोर्ट करेगी. अगर ये आंकड़े सही होते हैं तो बड़ी स्क्रीन वाले फोल्डेबल फोन के लिए ये एक मजबूत बैटरी पैकेज हो सकता है.
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कैमरा सेटअप
Xiaomi 18 Fold में मिलने वाले कैमरा सेटअप की बात करें तो इस डिवाइस में ट्रिपल कैमरा सेटअप देखने को मिल जाएगा जिसमें एक LED फ्लैश मिलेगा. माना जा रहा है कि इस फोन में 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा देखने को मिलेगा. इसके अलावा कैमरा सेटअप के लिए Xiaomi ने Leica के साथ साझेदारी की है.
इतना ही नहीं, माना जा रहा है कि Xiaomi 18 Fold के अंदर कंपनी का नया Xring O3 फ्लैगशिप प्रोसेसर दिया जाएगा. ये Xiaomi के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि उसके पुराने Mix Fold मॉडल्स में Qualcomm Snapdragon चिपसेट का इस्तेमाल किया गया था.
कितनी होगी कीमत
आपको बता दें कि फिलहाल कंपनी की ओर से इसकी कीमत को लेकर कोई आधिकारीक जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन टिप्स्टर Digital Chat Station के मुताबिक, फोन को कंपनी 10,000 चीनी युआन से ज्यादा कीमत में उतार सकती है. ये कीमत भारतीय रुपये में करीब 1.40 लाख रुपये होता है.
iPhone Ultra को मिलेगी टक्कर
1 सितंबर 2026 से John Ternus ने Apple के नए CEO के रूप में कमान संभाली है. इसी कड़ी में बता दें कि एप्पल का पहला फोल्डेबल फोन आईफोन अल्ट्रा को लेकर काफी समय से लीक्स सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि कंपनी इसे भी अपने नए फोन के साथ लॉन्च कर सकती है. लेकिन कुछ रिपोर्ट्स का मानना है कि इस फोन को कंपनी अगले साल पेश कर सकती है. हालांकि, लीक्स में इस फोन को लेकर कई सारी जानकारी सामने आई हैं जैसे माना जा रहा है कि इसकी अमेरिका में कीमत 2000 डॉलर से 2500 डॉलर के बीच हो सकती है. इसके अलावा इसमें दमदार बैटरी और पावरफुल प्रोसेसर भी देखने को मिल सकता है. ऐसे में शाओमी का ये नया फोन iPhone Ultra के लिए एक चुनौती जरूर बन सकता है.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>OpenAI ने शुरू किया GPT&amp;6 Astra का रोलआउट! जानें कितना ताकतवर है ये नया मॉडल</title>
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        <description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI ने अपने नए और अब तक के सबसे ताकतवर AI मॉडल GPT-6 का रोलआउट शुरू करने का ऐलान किया है. इस नए मॉडल को GPT-6 Astra के नाम से जाना जा रहा है. कंपनी के मुताबिक, शुरुआती स्टेड में इसे चुनिंदा यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.
OpenAI का कहना है कि GPT-6 को पहले के मुकाबले ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. हालांकि, कंपनी ने इसके साथ सेफ्टी का भी ध्यान रखा है जिससे बढ़ती AI क्षमताओं के साथ संभावित जोखिमों को कम किया जा सके.
चुनिंदा यूजर्स को मिलेगा पहले एक्सेस
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI ने GPT-6 Astra को फिलहाल सभी यूजर्स के लिए एक साथ उपलब्ध कराने के बजाय लिमिटेड यूजर्स के साथ रोलआउट शुरू करने का फैसला किया है. इस तरह कंपनी नए मॉडल की क्षमताओं और उसके इस्तेमाल से जुड़े खतरों को करीब से समझ सकेगी.
बता दें कि धीरे-धीरे तरीके से रोलआउट करने से मॉडल में किसी टेक्निकल समस्या या सुरक्षा से जुड़े खतरे की कंडिशन को तेजी से खत्म किया जा सकता है. इसके बाद मॉडल को ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है.
सुरक्षा को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता
GPT-6 के ऐलान के दौरान OpenAI के प्रेसिडेंट Greg Brockman ने AI सुरक्षा को लेकर कंपनी की सोच साफ कर दी है. उन्होंने कहा कि इस लेवल की क्षमता वाले AI सिस्टम के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए.
कंपनी ने GPT-6 में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल करने की बात कही है जिनका मकसद AI की ताकतवर क्षमताओं से जुड़े खतरों को कम करना है. जैसे-जैसे AI मॉडल ज्यादा मुश्किल काम करने में सक्षम हो रहे हैं, वैसे-वैसे उनके गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंताएं भी बढ़ी हैं.
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पहले के मॉडल से कितना अलग होगा GPT-6?
GPT-6 Astra को OpenAI के पिछले AI मॉडल्स के मुकाबले में ज्यादा पावरफुल सिस्टम के तौर पर पेश किया जा रहा है. ऐसे मॉडल से उम्मीद की जाती है कि वह मुश्किल सवालों को बेहतर तरीके से समझ सके, लंबे और मुश्किल कमांड्स पर काम कर सके और अलग-अलग तरह के कामों में ज्यादा बेहतर रिजल्ट्स दे सके.
हालांकि, किसी नए मॉडल की असली क्षमता का अंदाजा केवल कंपनी के दावों से नहीं लगाया जा सकता है. इसके लिए बेहतर टेस्टिंग, बेंचमार्क और आम यूजर्स के एक्सपीरिएंस भी जरूरी होते हैं.
आम यूजर्स को कब मिलेगा GPT-6?
फिलहाल OpenAI ने GPT-6 Astra के शुरुआती रोलआउट को चुनिंदा यूजर्स तक सीमित रखने की जानकारी दी है. हालांकि, सभी यूजर्स के लिए ये कब रोलआउट होगा इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इसे आम यूजर्स के लिए भी उपलब्ध कराया जा सकता है.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Airtel के 449 और Jio के 450 रुपये वाले पैक में क्या है अंतर, जानें किसमें ज्यादा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ टेलीकॉम कंपनियों के बीच सस्ते और ज्यादा फायदे वाले रिचार्ज प्लान को लेकर मुकाबला लगातार बढ़ रहा है. अगर आप भी हर महीने मोबाइल रिचार्ज पर ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते लेकिन भरपूर डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और दूसरे बेनिफिट्स चाहते हैं तो Airtel और Jio के करीब-करीब समान कीमत वाले प्लान आपके लिए दिलचस्प हो सकते हैं. खास बात ये है कि दोनों प्लान की कीमत में सिर्फ 1 रुपये का अंतर है लेकिन इनके डेटा बेनिफिट में बड़ा फर्क देखने को मिलता है. आइए जानते हैं कि किसमें यूजर्स को ज्यादा बेनिफिट्स मिलते हैं.
Airtel का 449 रुपये वाला प्लान
Airtel का 449 रुपये वाला प्रीपेड प्लान उन यूजर्स को ध्यान में रखकर पेश किया गया है जिन्हें रोजाना ज्यादा इंटरनेट डेटा की जरूरत पड़ती है. इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ रोजाना 4GB डेटा दिया जाता है.
इसके अलावा यूजर्स को हर दिन 100 SMS भी मिलते हैं. इसके साथ ही इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड 5जी की भी सुविधा मिल जाती है. बता दें कि इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है.
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Jio का 450 रुपये वाला प्लान
दूसरी तरफ Jio के 450 रुपये वाले रिचार्ज प्लान की बात करें तो इसमें यूजर्स को अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ ही डेली 2जीबी डेटा मिलता है. इसका मतलब साफ है कि एयरटेल महज 1 रुपये के अंतर में आपको डबल इंटरनेट डेटा उपलब्ध करा रहा है. जियो के इस प्लान में भी यूजर्स को अनलिमिटेड 5जी डेटा की सुविधा मिलती है. लेकिन वैलिडिटी के मामले में जियो एयरटेल से आगे निकल गया है. जहां एयरटेल 449 रुपये में यूजर्स को 28 दिन की वैलिडिटी दे रहा है. वहीं, जियो यूजर्स से 1 रुपये ज्यादा लेकर उन्हें 36 दिन की वैलिडिटी दे रहा है.
किसके लिए कौन सा प्लान बेहतर?
आपको बता दें कि ये पूरी तरह से आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. अगर आपको ज्यादा इंटरनेट डेटा चाहिए है और आप रोजाना कई GB डेटा इस्तेमाल करते हैं तो Airtel का ₹449 प्लान आपके लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा. लेकिन वहीं अगर आप पहले से Jio नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं और आपके इलाके में Jio की कनेक्टिविटी बेहतर है तो आपके लिए 450 रुपये वाला पैक एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है. इसके अलावा जियो के प्लान में यूजर्स को ज्यादा वैलिडिटी भी मिल जाती है. इसके अलावा यूजर्स को इस प्लान में एक्सट्रा बेनिफिट्स भी मिलते हैं.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या बदल सकते हैं Google Maps में बोलने वाली आवाज? जानिए पूरी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps आज सिर्फ रास्ता दिखाने वाला ऐप नहीं है बल्कि ड्राइविंग के दौरान टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, ट्रैफिक अपडेट और रास्ते की जानकारी देने वाला एक जरूरी टूल बन चुका है. नेविगेशन के दौरान लगातार एक आवाज आपको बताती रहती है कि कब मुड़ना है, किस रास्ते पर जाना है और कितनी दूरी बाकी है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या Google Maps की बोलने वाली आवाज को बदला जा सकता है? अगर आप भी Google Maps की आवाज को अपनी पसंद के हिसाब से बदलना चाहते हैं तो पहले इसकी पूरी सच्चाई जान लीजिए.
क्या Google Maps में Voice बदलने का ऑप्शन है?
दरअसल, Google Maps में सीधे तौर पर अपनी पसंद की कोई भी आवाज चुनने का ऑप्शन उपलब्ध नहीं है. यानी आप ऐप की सेटिंग में जाकर किसी सेलिब्रिटी, दोस्त या अपनी रिकॉर्ड की हुई आवाज को नेविगेशन वॉयस के रूप में सेट नहीं कर सकते हैं. हालांकि, Google Maps में लैंग्वेज और कुछ मामलों में Voice/Voice selection से जुड़े ऑप्शन उपलब्ध हो सकते हैं. ये ऑप्शन आपके फोन, ऑपरेटिंग सिस्टम, एरिया और Google Maps के मौजूदा वर्जन पर निर्भर कर सकते हैं.
Android फोन में कैसे बदलें भाषा?
अगर आप Google Maps की नेविगेशन आवाज को दूसरी लैंग्वेज में सुनना चाहते हैं तो सबसे पहले Google Maps खोलें. इसके बाद ऊपर दाईं ओर अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें और Settings में जाएं.
अब Navigation settings या इससे जुड़े ऑप्शन को खोलें. यहां आपको Voice selection जैसा ऑप्शन मिल सकता है. उपलब्ध ऑप्शनों में से अपनी पसंद की लैंग्वेज या वॉयस चुन सकते हैं. ध्यान रखें कि हर लैंग्वेज में एक जैसी आवाज या सभी फीचर्स उपलब्ध हों ये जरूरी नहीं है.
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क्या अपनी आवाज रिकॉर्ड करके लगा सकते हैं?
आपको बता दें कि अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या कोई अपनी आवाज में Google Maps में ऑफिशियल तौर पर ऐसा कोई नॉर्मल फीचर नहीं है जिससे आप अपनी आवाज रिकॉर्ड करके उसे नेविगेशन के दौरान इस्तेमाल कर सकें.
इंटरनेट पर कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स या अनऑफिशियल तरीके Google Maps की आवाज बदलने का दावा कर सकते हैं लेकिन ऐसे ऐप्स इस्तेमाल करते समय सावधान रहना चाहिए. अनजान ऐप को माइक्रोफोन, स्टोरेज या दूसरी संवेदनशील परमिशन देना आपकी प्राइवेसी के लिए खतरा पैदा कर सकता है.
आवाज नहीं आ रही तो क्या करें?
कई बार यूजर आवाज बदलने की कोशिश करते हैं लेकिन असली समस्या वॉयस सेटिंग नहीं बल्कि म्यूट या कम वॉल्यूम होती है. नेविगेशन शुरू करने के बाद स्क्रीन पर स्पीकर आइकन जरूर जांचें. अगर आवाज बंद है तो उसे अनम्यूट करें.
फोन का मीडिया वॉल्यूम बढ़ाना भी जरूरी है क्योंकि नेविगेशन की आवाज नॉर्मली मीडिया ऑडियो के जरिए सुनाई देती है. अगर Bluetooth से कार का सिस्टम जुड़ा है तो कार के ऑडियो सिस्टम का वॉल्यूम और सही आउटपुट भी जांचें.
तो क्या है पूरी सच्चाई?
इस हिसाब से देखा जाए तो Google Maps की आवाज को पूरी तरह अपनी पसंद की कस्टम आवाज में बदलना नॉर्मली संभव नहीं है. आप उपलब्ध लैंग्वेज ऑप्शनों में से चुनाव कर सकते हैं लेकिन अपनी रिकॉर्ड की हुई आवाज या किसी मनपसंद व्यक्ति की आवाज को ऑफिशियल तरीके से नेविगेशन वॉयस बनाना अलग बात है और Google Maps इसका ऑप्शन नहीं देता है.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब WhatsApp से भरें बिजली&amp;पानी का Bill, नया फीचर लॉन्च</title>
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        <description><![CDATA[ हर महीने बिजली, पानी, गैस और दूसरे जरूरी बिल भरने के लिए अलग-अलग ऐप खोलना पड़ता है. अब WhatsApp इस काम को भी आसान बनाने जा रहा है. कंपनी ने भारत में Bill Payments फीचर लॉन्च किया है, जिसकी मदद से यूजर्स WhatsApp के अंदर ही कई तरह के बिल देख, मैनेज और उनका पेमेंट कर सकेंगे. बिल भरने के लिए बार-बार दूसरे ऐप पर जाने की जरूरत नहीं होगी. यह फीचर भारत में धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है और आने वाले हफ्तों में Android और iOS यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि अब WhatsApp से बिजली-पानी का Bill कैसे भरें.&amp;nbsp;
WhatsApp का नया Bill Payments फीचर क्या है?
WhatsApp का नया Bill Payments फीचर Bharat Connect (BBPS) नेटवर्क पर काम करता है. इसके जरिए यूजर्स को 30 अलग-अलग कैटेगरी में 22,722 बिलर्स का एक्सेस मिलेगा. इनमें बिजली, पानी, गैस, FASTag, इंश्योरेंस, क्रेडिट कार्ड और लोन रिपेमेंट जैसे बिल शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, यह फीचर WhatsApp की मौजूदा पेमेंट सर्विस का दायरा भी बढ़ाता है. इससे पहले ऐप पर मोबाइल रिचार्ज और दूसरी ट्रांजेक्शन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध थीं.&amp;nbsp;
WhatsApp से ऐसे भरें बिल
बिल पेमेंट करने के लिए सबसे पहले WhatsApp खोलना होगा. इसके बाद होम स्क्रीन के ऊपर दिए गए रूपए वाले आइकन पर टैप करना होगा. यहां अपनी जरूरत के हिसाब से बिल कैटेगरी और बिलर चुनना होगा. इसके बाद कस्टमर या अकाउंट से जुड़ी जरूरी जानकारी दर्ज करके उसे कन्फर्म करना होगा. डिटेल दर्ज करने के बाद WhatsApp बिल की रकम अपने आप दिखाएगा. रकम और बिल की जानकारी चेक करने के बाद यूजर UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर सकेगा.&amp;nbsp;
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एक जगह मैनेज होंगे कई बिल
नए फीचर में Household Bills Summary भी दी गई है. इसमें पहले से भुगतान किए गए बिलर्स दिखाई दे सकते हैं, जिससे अगली बार उन्हें एक टैप में एक्सेस किया जा सकेगा. एक ही बिलर के तहत कई अकाउंट भी मैनेज किए जा सकेंगे. इसके अलावा Payments Home स्क्रीन पर लोकप्रिय बिल कैटेगरी भी दिखाई जाएंगी, जबकि See All ऑप्शन से 20 से ज्यादा कैटेगरी देखी जा सकेंगी.&amp;nbsp;
कैसे यूजर्स तक पहुंचेगा फीचर?
WhatsApp का Bill Payments फीचर अभी सभी यूजर्स को एक साथ नहीं मिला है. कंपनी इसे भारत में धीरे-धीरे रोलआउट कर रही है. आने वाले हफ्तों में यह Android और iOS पर ज्यादा यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>ब्लर फोटो को ऐसे करें क्लियर, Google Photos का ये फीचर आएगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ कभी-कभी फोटो क्लिक करने का सही मौका तो मिल जाता है, लेकिन फोटो सेव होने के बाद पता चलता है कि वह ब्लर हो गई है. कभी हाथ हिलने की वजह से फोटो धुंधली हो जाती है, तो कभी किसी के मूवमेंट या सही फोकस न होने के कारण फोटो की डिटेल साफ नहीं दिखती है. पुरानी फोटो में भी लो-क्वालिटी कैमरे की वजह से ऐसी परेशानी देखने को मिल सकती है.
ऐसी ब्लर फोटो को दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाने के लिए Google Photos में एक AI फीचर दिया गया है, जो फोटो की क्लेरिटी और डिटेल को बेहतर करने में मदद करता है. इस फीचर का नाम Photo Unblur है. तो आइए जानते हैं कि &amp;nbsp;Google Photos का ये फीचर क्या है और इससे ब्लर फोटो को कैसे क्लियर करें.
क्या है Google Photos का Photo Unblur फीचर?
Photo Unblur, Google Photos में मौजूद AI editing tools का हिस्सा है. यह Magic Eraser और Portrait Light जैसे फीचर्स के साथ काम करता है. Photo Unblur मशीन लर्निंग की मदद से फोटो में मौजूद ब्लर को पहचानता है. यह खास तौर पर मोशन या फोकस से जुड़ी समस्या की पहचान करके फोटो की शार्पनेस, लाइटिंग और डिटेल को बेहतर करता है. इसका मकसद फोटो को ज्यादा साफ बनाना है, जिससे पहले धुंधली दिख रही फोटो को बेहतर तरीके से इस्तेमाल और शेयर किया जा सके. यह फीचर फोटो में मौजूद नेचुरल टोन और टेक्सचर को बनाए रखते हुए क्लेरिटी सुधारने की कोशिश करता है.
Photo Unblur से ब्लर फोटो कैसे करें क्लियर?
1. Google Photos में Photo Unblur इस्तेमाल करना काफी आसान है. इसके लिए सबसे पहले अपने Android, iOS या Chromebook डिवाइस पर Google Photos खोलें.
2. अब जिस फोटो को ठीक करना है, उसे चुनें. इसके बाद स्क्रीन के नीचे दिए गए एडिट आइकन पर टैप करें.
3. अब एडिटिंग टूल्स में जाकर Photo Unblur ऑप्शन चुनें.
4. Google Photos इसके बाद AI की मदद से फोटो पर शार्पनिंग लागू करेगा. अगर इफेक्ट ज्यादा या कम रखना चाहते हैं, तो स्ट्रेंथ स्लाइडर की मदद से इसकी इंटेसिटी को एडजस्ट किया जा सकता है.
5. चेज पसंद आने के बाद सेव कॉपी पर टैप करें. इससे एडिटिड फोटो की अलग कॉपी सेव होगी और ओरिजिनल फोटो पहले की तरह सुरक्षित रहेगी.
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किन डिवाइस पर चलेगा Photo Unblur?
Photo Unblur Android, iOS और Chromebook Plus डिवाइस पर उपलब्ध है. Android के लिए कम से कम 3GB RAM और Android 8.0 या उससे ऊपर का वर्जन चाहिए. iPhone या iPad पर iOS 15 या उससे ऊपर जरूरी है. Chromebook Plus पर ChromeOS version 118 या बाद का वर्जन होना चाहिए.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ब्लर, फोटो, को, ऐसे, करें, क्लियर, Google, Photos, का, ये, फीचर, आएगा, काम</media:keywords>
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        <title>लॉन्च होंने जा रहे ये नए टेक गैजेट्स, देखें पूरी डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ सितंबर की शुरुआत टेक्नोलॉजी और गैजेट्स की दुनिया के लिए काफी खास नजर आ रही है. आज यानी 4 सितंबर को कई नए टेक प्रोडक्ट्स लॉन्च होने जा रहे हैं. इनमें स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट बैंड, AI लैपटॉप, रोबोट और स्मार्ट ग्लासेस तक शामिल हैं. वहीं, Berlin में आज से IFA 2026 की शुरुआत भी हो रही है, जहां कंपनियां अपनी नई टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स को दुनिया के सामने पेश कर रही हैं. ऐसे में आज का दिन टेक्नोलॉजी पसंद करने वालों के लिए काफी खास है. तो आइए जानते हैं कि आज कौन-से नए टेक गैजेट्स लॉन्च होंगे.&amp;nbsp;
आज लॉन्च होगा 9,000mAh बैटरी वाला POCO X8 5G
POCO आज भारत में अपनी X8 सीरीज का बेस मॉडल POCO X8 5G लॉन्च करने जा रही है. इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9,000mAh की बैटरी होगी. कंपनी के मुताबिक, यह सिंगल चार्ज में 3 दिन से ज्यादा का बैकअप दे सकती है. फोन में Snapdragon 6s Gen 4 प्रोसेसर और 8GB तक रैम मिलने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
POCO X8 Power में 10,000mAh की बैटरी
POCO X8 Power 5G आज लॉन्च होने वाला कंपनी का ज्यादा बैटरी वाला मॉडल है. इसमें 10,000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जिसे 100W फास्ट चार्जिंग से चार्ज किया जा सकेगा. फोन में Snapdragon 6 Gen 5 प्रोसेसर और 1.5K AMOLED डिस्प्ले के साथ 120Hz रिफ्रेश रेट मिल सकता है.&amp;nbsp;
Infinix Hot 70 Pro 5G+ भी होगा लॉन्च
Infinix Hot 70 Pro 5G+ भी आज भारत में लॉन्च होगा. इसमें 6.76 इंच का Full HD+ डिस्प्ले दिया जाएगा, जो 144Hz एडेप्टिव रिफ्रेश रेट सपोर्ट करेगा. फोन में MediaTek Dimensity 7100 5G चिपसेट और 50 मेगापिक्सल Sony IMX882 मेन कैमरा मिलेगा. पावर के लिए 6,000mAh बैटरी और 45W फास्ट चार्जिंग दी जाएगी.&amp;nbsp;
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IFA 2026 में दिखेंगे नए AI गैजेट्स
Berlin में आज से IFA 2026 की शुरुआत हो रही है. यहां AI, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी से जुड़े कई प्रोडक्ट्स पेश किए जा रहे हैं. ASUS ने ProArt P16 और P14 AI लैपटॉप पेश किए हैं, जो NVIDIA RTX Spark से लैस हैं. इनमें 120B पैरामीटर तक के LLM, 90GB से ज्यादा 3D सीन रेंडरिंग और 4K AI वीडियो जनरेशन जैसे काम किए जा सकते हैं.
इसके अलावा ECOVACS ने नए DEEBOT और WINBOT रोबोट पेश किए हैं. UGREEN ने MagFlow चार्जिंग लाइनअप लॉन्च किया है, जिसमें 10,000mAh का 25W मैग्नेटिक पावर बैंक शामिल है. वहीं, ACEMATE S10 Pro AI Tennis Robot भी IFA 2026 में पेश किया गया है, जो AI की मदद से टेनिस ट्रेनिंग के लिए बनाया गया है. IFA 2026 में RayNeo iO और GT Max स्मार्ट ग्लासेस भी चर्चा में हैं.&amp;nbsp;
Xiaomi Smart Band 11 की चर्चा&amp;nbsp;
Xiaomi ने Smart Band 11 Active को ग्लोबल मार्केट में लॉन्च करना शुरू कर दिया है. Xiaomi Smart Band 11 चीन में आज लॉन्च हुआ है. इसमें 2,000 निट्स ब्राइट AMOLED डिस्प्ले और Sleep HRV Tracking जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसकी बैटरी 21 दिन तक चलने का दावा है. इसमें NFC वर्जन के साथ Ceramic और Metal Edition भी मिलेंगे. इसकी शुरुआती कीमत करीब 289 युआन है. हालांकि इसके भारत लॉन्च की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं मिली है.
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक क्लिक में खुलेंगे Chrome के सारे Tabs, ऐसे करें इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ कई बार कंप्यूटर पर काम करते-करते Chrome में इतने सारे Tabs खुल जाते हैं कि उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है. रिसर्च हो, ऑफिस का कोई काम हो या फिर किसी पर्सनल प्लानिंग से जुड़ा काम, हम अक्सर जरूरी जानकारी के लिए कई Tabs एक साथ खोलकर रखते हैं. हालांकि, अगर काम के बीच गलती से पूरी Browser Window बंद हो जाए तो एक-एक करके उन सभी Tabs को दोबारा खोलना काफी परेशान करने वाला काम हो सकता है.
इसमें समय भी जाता है और काम का फ्लो भी टूट जाता है. ऐसी स्थिति में Google Chrome का एक फीचर काम आ सकता है. इसकी मदद से हर Tab को अलग-अलग खोलने की जरूरत नहीं पड़ती. तो आइए जानते हैं कि ये कौन-सा फीचर है और इसे कैसे इस्तेमाल करें.&amp;nbsp;
इस फीचर से एक क्लिक में खुलेंगे Chrome के सारे Tab
अगर Chrome की कोई window बंद हो जाती है, तो जरूरी Tabs को एक-एक करके ढूंढने और दोबारा खोलने में समय लग सकता है. ऐसी स्थिति में Google Chrome का Tab Grouping फीचर काम आ सकता है. इसकी मदद से एक जैसे या एक ही काम से जुड़े Tabs को एक Group में रखा जा सकता है. इसके बाद पूरे Tab Group को सेव करके बाद में दोबारा खोला जा सकता है. यह तरीका खास तौर पर तब यूजफुल है, जब किसी प्रोजेक्ट या रिसर्च के लिए कई Tabs एक साथ खुले हों. इससे ब्राउजर में Tabs को आसानी से मैनेज किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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ऐसे बनाएं और इस्तेमाल करें Tab Group
Chrome में Tab Group बनाने के लिए सबसे पहले किसी खुले हुए Tab पर Right-click करें. इसके बाद Add tab to group ऑप्शन चुनें. अब उस Tab Group को पहचानने के लिए एक नाम दिया जा सकता है. इसके बाद उसी काम या विषय से जुड़े दूसरे Tabs को भी इस Group में जोड़ें. जब सभी जरूरी Tabs एक ही Group में आ जाएं, तो इस Tab Group को बाद में दोबारा खोला जा सकता है. इस तरह एक-एक Tab को अलग से खोलने के बजाय पूरा सेट एक साथ वापस पाया जा सकता है. Chrome में Tab Group से जुड़े ऑप्शन आपके इस्तेमाल किए जा रहे Chrome version और device के हिसाब से अलग हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Canva को टक्कर देने आया Google Pics, ऐसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ अब डिजाइन तैयार करने के लिए घंटों बैठकर बड़े-बड़े सॉफ्टवेयर सीखने की जरूरत कम होने वाली है. Google ने क्रिएटिव डिजाइनिंग की दुनिया में अपना नया AI टूल Google Pics लॉन्च किया है. इसकी मदद से यूजर्स सिर्फ अपनी जरूरत को एक Prompt में लिखकर फोटो, पोस्टर, सोशल मीडिया पोस्ट और दूसरे विजुअल तैयार कर सकेंगे. Google का यह नया टूल Canva और Adobe Express जैसे फेमस डिजाइन प्लेटफॉर्म्स को टक्कर देने की कोशिश कर रहा है. खास बात यह है कि यहां यूजर को शुरुआत से डिजाइन तैयार करने के बजाय AI को बताना होगा कि उसे किस तरह का विजुअल चाहिए. ऐसे में आइए जानते हैं कि Google Pics कैसे काम करेगा.
Google Pics कैसे काम करेगा?
Google Pics का काम करने का तरीका काफी आसान है. यूजर को अपनी जरूरत के हिसाब से Prompt देना होगा और AI उसे समझकर फोटो, पोस्टर, इलस्ट्रेशन या दूसरे विजुअल तैयार करेगा. इसके लिए Google के Nano Banana इमेज-जेनरेशन मॉडल का इस्तेमाल किया गया है. Canva या Adobe Express की तरह शुरुआत से डिजाइन तैयार करने की जगह Google Pics में यूजर अपनी जरूरत को शब्दों में बता सकता है. इसके बाद AI उसी के आधार पर डिजाइन तैयार करेगा.&amp;nbsp;Google Pics में AI से करें फोटो एडिट
Google Pics में नई फोटो बनाने के साथ उसे एडिट करने के ऑप्शन भी दिए गए हैं. यूजर किसी इमेज में मौजूद टेक्स्ट को बदल या दूसरी भाषा में ट्रांसलेट कर सकेंगे. इसके अलावा फोटो में मौजूद किसी ऑब्जेक्ट को अलग करने, उसमें बदलाव करने या उसे बदलने का ऑप्शन भी मिलेगा. टूल एक ही Prompt से कई अलग-अलग इमेज भी तैयार कर सकता है. इससे यूजर अपनी पसंद के हिसाब से सबसे बेहतर ऑप्शन चुन सकेंगे.
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टीम के साथ मिलकर कर सकेंगे काम
Google Pics में Collaborative Editing का फीचर भी दिया गया है. इसकी मदद से एक विजुअल प्रोजेक्ट पर टीम के कई सदस्य साथ मिलकर काम कर सकेंगे. यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए यूजफुल हो सकती है, जो टीम के साथ डिजाइन या प्रेजेंटेशन पर काम करते हैं.
Google Workspace में मिलेगा Google Pics
Google Pics को Google Workspace का हिस्सा बनाया जा रहा है. शुरुआत में इसे Google Docs और Google Slides के साथ उपलब्ध कराया गया है. कंपनी के मुताबिक इसे आने वाले कुछ हफ्तों में ज्यादातर Workspace यूजर्स के साथ-साथ Google AI Pro और Ultra का सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स के लिए रोल आउट किया जाएगा. इसके बाद इसे Google Drive में भी लाया जाएगा.
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