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    <title>Attention India Hindi &amp; : टेक्नोलॉजी</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : टेक्नोलॉजी</description>
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        <title>Jio का नया Freedom Plan लॉन्च! कीमत इतनी कम कि देखकर रह जाएंगे हैरान, जानिए क्या हैं बेनिफिट्स</title>
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        <description><![CDATA[ Jio का नया Freedom Plan लॉन्च! कीमत इतनी कम कि देखकर रह जाएंगे हैरान, जानिए क्या हैं बेनिफिट्स ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Piyush Goyal Deepfake Video: CJP प्रोटेस्ट पर अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का AI Deepfake Video वायरल, ऐसे करें पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ Piyush Goyal on Deepfake Video : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को कथित तौर पर विवादित बयान देते हुए दिखाया जा रहा है. हालांकि केंद्रीय मंत्री ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया डीपफेक बताया है. उन्होंने कहा कि उनके असली बयान के साथ छेड़छाड़ कर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है. इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है. वहीं प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने भी इस वीडियो को फर्जी करार दिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे की जा सकती है.&amp;nbsp;
पीयूष गोयल ने वीडियो को बताया AI से बना डीपफेक
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि संसद के बाहर मीडिया से हुई उनकी बातचीत वाले वीडियो को जानबूझकर एडिट किया गया और AI की मदद से डीपफेक वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया. उनका कहना है कि इसका मकसद लोगों के बीच गलत जानकारी फैलाना और उन्हें गुमराह करना है. उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रामक सामग्री लोकतांत्रिक संवाद को भी नुकसान पहुंचाती है.
पीयूष गोयल ने बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस शिकायत दर्ज करा दी है. उनके अनुसार, 25 जुलाई 2026 को सुबह 4:35 बजे नई दिल्ली के चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 123/26 दर्ज की गई. उन्होंने साफ कहा कि इस फर्जी वीडियो को बनाने, सोशल मीडिया पर फैलाने या जानबूझकर उसे बढ़ावा देने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.&amp;nbsp;
PIB ने भी वीडियो को बताया फर्जी
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने भी वायरल वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताया है. PIB के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के AI से तैयार किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से शेयर किए जा रहे हैं. यूनिट का कहना है कि इन वीडियो में ऑडियो और विजुअल दोनों के साथ छेड़छाड़ की गई है. PIB ने यह भी कहा कि इन वीडियो को पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा नेटवर्क से जुड़े हैंडल्स द्वारा सोशल मीडिया पर बढ़ावा दिया जा रहा है. इन वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी के पेपर लीक पर दिए गए बयान और संसद के बाहर पीयूष गोयल की मीडिया से बातचीत को डिजिटल तरीके से बदलकर अलग संदर्भ में पेश किया गया.&amp;nbsp;
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Deepfake क्या होता है और यह क्यों खतरनाक है?
डीपफेक AI की ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज और हाव-भाव की नकल करके नकली वीडियो या ऑडियो तैयार किया जाता है. ऐसे वीडियो देखने में बिल्कुल असली लग सकते हैं, इसलिए कई लोग बिना जांच किए उन पर भरोसा कर लेते हैं. इसका इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, राजनीतिक प्रचार, साइबर फ्रॉड और लोगों को गुमराह करने के लिए भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे करें?
1. चेहरे और हाव-भाव पर ध्यान दें - डीपफेक वीडियो में कई बार आंखों की झपक, होंठों की हरकत और चेहरे की लाइटिंग असामान्य दिखाई देती है. चेहरे के किनारों पर धुंधलापन या एक्सप्रेशन भी असली जैसे नहीं लगते हैं.&amp;nbsp;
2. आवाज और लिप-सिंक जांचें - अगर वीडियो में होंठों की हरकत और आवाज एक-दूसरे से मेल नहीं खा रही हो या आवाज जरूरत से ज्यादा रोबोटिक या अजीब लगे, तो यह डीपफेक होने का संकेत हो सकता है.&amp;nbsp;
3. वीडियो का स्रोस जरूर जांचें - किसी भी वायरल वीडियो पर भरोसा करने या उसे शेयर करने से पहले देखें कि वह किसी आधिकारिक अकाउंट से आया है या नहीं, जरूरत पड़ने पर गूगल या रिवर्स इमेज सर्च से भी पुष्टि करें.&amp;nbsp;
4. AI डिटेक्शन टूल्स की मदद लें - ऑनलाइन उपलब्ध AI डिटेक्शन टूल्स वीडियो और तस्वीरों में एडिटिंग, मेटाडेटा और पिक्सल पैटर्न की जांच करके फर्जी कंटेंट की पहचान करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, इनका रिजल्ट हमेशा 100 प्रतिशत सटीक नहीं होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>5kW का Solar Panel एक दिन में कितनी बिजली बनाता है? जानिए इससे घर के कौन&amp;कौन से डिवाइस चल सकेंगे</title>
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        <description><![CDATA[ 5kW का Solar Panel एक दिन में कितनी बिजली बनाता है? जानिए इससे घर के कौन-कौन से डिवाइस चल सकेंगे ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>हमेशा सफेद रंग का ही क्यों होता है AC? जानिए क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आज कल एयर कंडिशनर लोगों की जरूरत बन चुके हैं. गर्मी से बचने के लिए लोग अब घरों में एसी का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा एसी अब ज्यादातर ऑफिस, मॉल और दूसरे जरूरी जगहों पर भी इस्तेमाल होने लगा है. लेकिन ज्यादातर लोग इस बात पर गौर नहीं करते हैं कि आखिर हमेशा एसी सफेद रंग का ही क्यों होता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.
सफेद रंग का क्या है राज
आपको बता दें कि सफेद रंग की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये सूर्य की रौशनी और गर्मी को काफी हद तक रिफ्लेक्ट कर देता है. इसके विपरीत काले या गहरे रंग ज्यादा गर्मी सोखते हैं. खासकर स्प्लिट AC की आउटडोर यूनिट लगातार धूप में रहती है. अगर उसका रंग गहरा हो तो वो ज्यादा गर्म होगी और कूलिंग पर असर पड़ सकता है. सफेद रंग इस समस्या को काफी हद तक कम करता है.
कम गर्म होने से बेहतर रहती है परफॉर्मेंस
जानकारी के मुताबिक, जब AC की बाहरी बॉडी कम गर्म होती है तो उसके अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और कंप्रेसर पर एक्सट्रा टेंपरेचर का दबाव कम पड़ता है. इससे मशीन की काम करने की ताकत अच्छी बनी रहती है और लंबे समय तक अच्छी कूलिंग मिलती है. यही वजह है कि एसी बनाने वाली कंपनी सफेद रंग पर ज्यादा जोर देती है.
इंटीरियर के साथ हो जाता है मैच
बता दें कि ज्यादातर घरों और ऑफिसों की दीवारें हल्के रंग की होती हैं जिससे सफेद रंग का एसी उससे मैच हो जाता है और डिजाइन भी फिट बैठती है. सफेद रंग का AC लगभग हर तरह के इंटीरियर में आसानी से फिट हो जाता है और देखने में भी ज्यादा आकर्षक लगता है. यही कारण है कि कंपनियां ऐसे रंग को चुनती हैं जो हर यूजर को पसंद भी आती हैं.
बनाने की लागत भी होती है कम
सफेद रंग का प्लास्टिक तैयार करना और उसका बड़े पैमाने पर प्रोडक्टिविटी करना भी आसान और किफायती होता है. एक ही रंग में ज्यादा संख्या में यूनिट तैयार करने से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी कम रहती है. यही वजह है कि एसी बनाने वाली कंपनियां सफेद रंग को ज्यादा तवज्जों देती है. इसके अलावा सफेद रंग का एसी दिखने में भी अच्छा लगता है और लागत भी कम होती है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp का बड़ा धमाका! इन यूजर्स को मिले इतने सारे धांसू फीचर्स, PDF एडिटिंग भी है शामिल</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp: व्हाट्सऐप आज के समय में सबसे चर्चित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है. इस ऐप में यूजर्स को कई सारे एडवांस फीचर्स देखने को मिल जाते हैं जिसकी मदद से चैटिंग का एक्सपीरिएंस बेहतर होता है. इसी कड़ी में अब व्हाट्सऐप ने कई और नए फीचर्स पेश किए हैं. इस नए अपडेट में अब iPad पर बिना फोन के WhatsApp अकाउंट बनाने का फीचर, Android Auto और Apple CarPlay के लिए नया इंटरफेस, PDF फाइल देखने और एडिट करने के टूल्स जैसे फीचर्स शामिल हैं.
किन यूजर्स को मिलेगी सुविधा
आपको बता दें कि व्हाट्सऐप के अनुसार, ये फीचर धीरे-धीरे पूरी दुनियाभर के यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा. इसके अलावा इस अपडेट की सबसे बड़ी खास बात ये है कि अब iPad यूजर्स के लिए नया साइन-अप करना भी काफी आसान हो जाएगा.
इस नए अपडेट के बाद यूजर iPad ऐप में ही नया अकाउंट बना सकेंगे. यानी यूजर्स बिना किसी दूसरे फोन से पेयर किए सीधे iPad से WhatsApp अकाउंट सेटअप कर सकते हैं.
एडिट करें PDF फाइल
इस नए अपडेट में डॉक्यूमेंट से जुड़े फीचर्स भी लगातार जोड़े जा रहे हैं. नए अपडेट के बाद WhatsApp Web और Desktop यूजर्स चैट में आई PDF फाइल को बिना डाउनलोड किए सीधे खोल सकेंगे. इसके अलावा यूजर्स PDF डॉक्यूमेंट में जरूरी हिस्सों को हाईलाइट कर सकेंगे और नोट्स या एनोटेशन भी जोड़ पाएंगे.
कंपनी के अनुसार, ये फीचर Adobe Acrobat टेक्नोलॉजी की मदद से काम करती है. इसीलिए इस नए अपडेट के बाद व्हाट्सऐप चलाने का एक्सपीरिएंस यूजर्स का काफी बेहतर होने वाला है. साथ ही ये आईपैड यूजर्स के लिए एक बड़ा अपडेट माना जा रहा है जिससे अब कई सारे काम आसान हो जाएंगे.
Android Auto का भी बदला एक्सपीरिएंस
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि WhatsApp ने कार में इस्तेमाल किए जाने वाले अपने फीचर को भी बेहतर बनाया है. नए अपडेट के बाद Android Auto और Apple CarPlay पर WhatsApp का इंटरफेस पहले से ज्यादा बेहतर लगेगा.
इसके अलावा अब ड्राइविंग के दौरान यूजर्स बिना हाथ लगाए मैसेज सुन और उनका जवाब दे सकेंगे. इतना ही नहीं, इस नए अपडेट में यूजर्स वॉयस कॉल कर पाएंगे, कॉल हिस्ट्री देख पाएंगे और अपने पसंदीदा कॉन्टैक्ट्स तक कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम से सीधे पहुंच सकेंगे.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>झटका खाने के लिए तैयार रहें आईफोन लवर्स! अगले महीने से इतनी बढ़ सकती है कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Price: ऐप्पल ने कुछ दिन पहले आईपैड और मैकबुक आदि प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाए थे. तब से कयास लगाए जा रहे हैं कि आईफोन की भी बारी आ सकती है. अब रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अगस्त में आईफोन 17 सीरीज के दाम बढ़ सकते हैं. अगर यह दावा सच साबित होता है तो अगले महीने से आपको नया आईफोन लेने के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे. यह भी लगभग तय हो चुका है कि आईफोन 18 सीरीज के मॉडल्स भी बढ़ी हुई कीमतों पर लॉन्च होंगे.
कितने बढ़ सकते हैं आईफोन 17 सीरीज के दाम?
टिपस्टर अभिषेक यादव ने दावा किया है कि ऐप्पल ने iPlanet डीलर्स को जानकारी दी है कि अगस्त के पहले हफ्ते से आईफोन 17 की शुरुआती कीमत बढ़कर 94,990 रुपये हो सकती है. अभी यह मॉडल 82,900 रुपये में बिक रहा है. यानी कीमत में 12,000 रुपये का इजाफा हो सकता है. हालांकि, अभी तक ऐप्पल की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है. इसी तरह आईफोन 17 प्रो और प्रो मैक्स की कीमत में भी लगभग इतनी ही बढ़ोतरी होने की बात कही जा रही है. बता दें कि स्टोरेज और मेमोरी चिप्स के कारण इनकी कीमतें बढ़ गई हैं और कंपनियों के लिए फोन बनाना महंगा हो गया है. कंपनियां अपना खर्च पूरा करने के लिए फोन की कीमतें बढ़ाती जा रही हैं. जापान में आईफोन पहले ही महंगे हो गए हैं और अब भारत में ऐसा होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
धड़ाधड़ बिक्री से स्टॉक की कमी
ऐप्पल ने जब से अपने बाकी प्रोडक्ट्स महंगे किए हैं, तब से आईफोन 17 की बिक्री बढ़ गई है. दाम बढ़ने की संभावना देखते हुए लोग बिना डिस्काउंट के भी इस आईफोन को धड़ाधड़ खरीद रहे हैं. ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन स्टोर्स पर भी इसकी डिमांड बढ़ गई थी. इस वजह से स्टॉक खाली हो गया था. अब ऐप्पल ने बताया है कि अगले वीकेंड तक आईफोन का नया स्टॉक पहुंच जाएगा.&amp;nbsp;
बाकी कंपनियां भी बढ़ा चुकी हैं दाम
इस साल स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. सैमसंग, नथिंग, वनप्लस, रिलयमी, वीवो और ओप्पो समेत लगभग सभी कंपनियां अपने मॉडल के दाम बढ़ा चुकी हैं. जून में आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 2025 में 47 मॉडल्स के दाम बढ़े और 44 के कम हुए थे. इस साल यह ट्रेंड ही बदल गया है. इस साल 79 मॉडल महंगे हुए हैं, जबकि केवल 18 की कीमतें कम हुई हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>क्या Aadhaar से हो रही है जंतर मंतर के प्रोटेस्टर की पहचान? AI सर्विलांस पर खड़े हुए सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ Facial Recognition At Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर मंतर पर जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए दिल्ली पुलिस पर एडवांस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल करने के आरोप लग रहे हैं. सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे वीडियो में दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस एआई-पावर्ड फेशियल रिकग्नेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर रही है. CJP ने भी एक्स पर एक वीडियो शेयर कर कहा है कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को लाइव स्कैन करने के लिए फेशियल रिकग्नेशन वैन खड़ी की है. ये मौके पर बायोमेट्रिक और पर्सनल डेटा निकाल रही है.
क्या आधार से निकाला जा रहा है डेटा?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आधार से डेटा निकालने की बात नहीं आई है, लेकिन कई यूजर्स ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने पूछा है कि क्या ये आधार या किसी दूसरे सरकारी डेटाबेस से कनेक्टेड है. अभी तक पुलिस की तरफ से भी इसे लेकर कोई जवाब नहीं आया है. पुलिस की तरफ से की जा रही मॉनिटरिंग का वीडियो आप नीचे देख सकते हैं.

???? JANTAR MANTAR IS A PROTEST SITE, NOT A DIGITAL OPEN-AIR PRISON! ????Delhi Police has stationed Facial Recognition Vans to live-scan peaceful protesters. They are harvesting biometrics and extracting personal data on the spot&amp;mdash;and we have three direct questions for the&amp;hellip; pic.twitter.com/zCcLg3uxOE
&amp;mdash; Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 23, 2026



प्रोटेस्ट साइट पर खड़ी की गई हैं दो वैन
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनस्थल के नजदीक दो मॉनिटरिंग वैन को तैनात किया है. एक में जंतर मंतर के आसपास लगाए गए सीसीटीवी कैमरा से लाइव फीड आ रहा है, जबकि दूसरी वन में एआई से उन वीडियो को एनलाइज और कैमरा पर कैप्चर हुए लोगों के चेहरे पुलिस के डेटाबेस से कंपेयर किए जा रहे हैं. अधिकारियों ने इसके जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान करने की बात नकारते हुए कहा कि यह इसलिए किया जा रहा है ताकि अगर भीड़ में कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड वाला चेहरा दिखता है तो पुलिस को अलर्ट किया जा सके.&amp;nbsp;
लगातार मॉनिटरिंग से प्रदर्शनकारियों में डर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनस्थल पर हो रही पुलिस की लगातार मॉनिटरिंग से लोगों में डर बैठ गया है. प्रदर्शन में शामिल होने आए लोगों का कहना है कि हर जगह कैमरे देखकर वो असहज हो रहे हैं. कुछ लोगों ने कैमरों में कैप्चर होने से बचने के लिए खुद के फेस कवर करने भी शुरू कर दिए हैं. दूसरी तरफ CJP ने भी सवाल उठाया है कि पुलिस किस कानून के तहत मास-स्कैनिंग कर रही है और इसके लिए डेटाबेस कहां से आ रहा है. CJP ने यह भी पूछा है कि फेशियल स्कैन को स्टोर कौन कर रहा है इस डेटा को कब तक रखा जाएगा?
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        <title>मेटा ग्लासेस से रिकॉर्ड कंटेट डालने वालों की खैर नहीं, इंस्टाग्राम लेगा यह एक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Meta Glasses Content: मेटा ग्लासेस से रिकॉर्ड किए गए कंटेट को लेकर अब इंस्टाग्राम सख्ती बरतने जा रही है. दरअसल, कई क्रिएटर मेटा ग्लासेस का यूज करते हुए लोगों की सहमति के बिना उनके वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. ऐसे कंटेट को लेकर खूब विवाद हुआ था. इसे देखते हुए इंस्टाग्राम ने बड़ा फैसला लिया है. अब अगर कोई लोगों की सहमति के बिना उनका वीडियो रिकॉर्ड कर इस प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करेगा तो उस कंटेट को हटा दिया जाएगा. खुद इंस्टाग्राम के हेड एडम मोस्सेरी ने इसका ऐलान किया है.&amp;nbsp;
इंस्टाग्राम लेगी यह एक्शन
मोस्सेरी ने कहा कि अगर आप लोगों का फायदा उठाते हुए या उन्हें हैरेस करते हुए कंटेट को पोस्ट करेंगे तो उसे हटा दिया जाएगा. हम नहीं चाहते कि लोग चोरी-छिपे दूसरों के वीडियो बनाएं, उन्हें परेशान करें और फिर उन वीडियो को हमारे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करें. इसलिए हम हरसंभव तरीके से ऐसी एक्टिविटीज को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे वीडियो पोस्ट करने वाले दो अकाउंट्स को पहले ही हटाया जा चुका है. इन पर लोगों को परेशान करने वाले कंटेट पोस्ट करने का आरोप था. कंपनी ने भी इन अकाउंट्स को हटाने की पुष्टि की है.
मेटा ग्लासेस से चोरी छिपे कंटेट रिकॉर्ड करना होगा मुश्किल
दूसरी तरफ मेटा भी अपने स्मार्टग्लासेस की मदद से चोरी-छिपे वीडियो रिकॉर्ड करने को मुश्किल बनाने के लिए नए सुरक्षा उपाय लाने पर काम कर रही है. कुछ पुराने मॉडल में रिकॉर्डिंग इंडिकेटर लाइट को मॉडिफाई या कवर किया जा सकता था, जिससे लोगों को यह पता नहीं चलता था कि स्मार्टग्लासेस से उनकी वीडियो रिकॉर्ड हो रही है. अब मेटा सॉफ्टवेयर अपडेट लेकर आई है. इसके बाद अगर सिस्टम को लगता है कि इंडिकेटर लाइट को कवर किया गया है तो कैमरा अपने आप डिसेबल हो जाएगा. हालांकि, इसके बावजूद प्राइवेसी को लेकर चिंता खत्म नहीं हो रही है. पब्लिक प्लेसेस या दिन के समय स्मार्टग्लासेस पर लगी LED लाइट आसानी से नजर नहीं आती, जिससे यह पता नहीं चल पाता कि वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन है या ऑफ.&amp;nbsp;
इंस्टाग्राम पर आया है यह नया फीचर
हाल ही में इंस्टाग्राम ने रिप्लेस ऑडियो नाम से एक नया फीचर रोल आउट किया है. इसकी मदद से आप अपनी पुरानी रील्स में गाने और साउंड चेंज कर पाएंगे. अभी तक ऐसा करने के लिए रील्स को डिलीट करना पड़ता था और फिर इसमें नया गाना एड करने का ऑप्शन मिलता था. अब यह बदल गया है और नए फीचर से पुरानी रील्स में गाने चेंज किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>On&amp;Grid Solar Inverter खरीदने से पहले पता होनी चाहिए ये बातें, वरना पैसे हो जाएंगे बर्बाद</title>
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        <description><![CDATA[ On-Grid Solar Inverter Buying Guide: सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाते समय सोलर पैनल के साथ-साथ इन्वर्टर की क्वालिटी का भी ध्यान रखना जरूरी है. इससे पूरे सिस्टम की एफिशिएंसी पर असर पड़ता है. अगर इन्वर्टर की जरूरत की बात करें तो यह सोलर पैनल से आने वाली DC इलेक्ट्रिसिटी को AC में कन्वर्ट करता है, जिससे यह घर में यूज करने लायक बन जाती है. इसलिए इन्वर्टर का अच्छी क्वालिटी का होना जरूरी है. अगर आप अपने ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम के लिए इन्वर्टर खरीदने जा रहे हैं तो नीचे लिखें बातों का ध्यान जरूर रखें.
On-Grid Solar Inverter में होने चाहिए ये फीचर्स

हाई एफिशिएंसी- इन्वर्टर की एफिशिएंसी बताती है कि कितनी सोलर एनर्जी को इलेक्ट्रिसिटी में बदला गया है. ज्यादातर हाई-एंड इन्वर्टर में 97 प्रतिशत तक की एफिशिएंसी मिलती है.
मैक्सिमम पावर आउटपुट- Maximum Power Point Tracking (MPPT) की मदद से इन्वर्टर को सोलर पैनल से मैक्सिम एनर्जी लेने में मदद मिलती है. दिन में मौसम भले ही कैसा हो, यह फीचर इन्वर्टर को मैक्सिमम एनर्जी लेने में हेल्प करता है.
स्मार्ट मॉनिटरिंग- आप जो इन्वर्टर खरीदने जा रहे हैं, उसका मोबाइल ऐप और वेब इंटरफेस होना जरूरी है. इसकी मदद से आप बैठे-बैठे इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन, सिस्टम की कंडीशन आदि का ध्यान रख पाएंगे.
सेफ्टी फीचर्स- इन्वर्टर में लाइटनिंग प्रोटेक्शन, हाई-वॉल्टेज प्रोटेक्शन, शॉर्ट-सर्किट प्रोटेक्शन जैसे सेफ्टी फीचर्स होने जरूरी है. इनके बिना आपके पूरे सोलर एनर्जी सिस्टम को नुकसान हो सकता है.

इन्वर्टर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

कम कीमत के लालच में आकर खराब क्वालिटी वाला इन्वर्टर न खरीदें.
सोलर पैनल से कम कैपिसिटी वाला इन्वर्टर खरीदने की गलती न करें. सोलर पैनल की मैक्सिमम कैपिसिटी के हिसाब से इन्वर्टर खरीदना चाहिए.
इन्वर्टर खरीदते समय वारंटी और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट पर ध्यान देना जरूरी है. यह पता कर ले कि आपके शहर में उसका सर्विस स्टेशन है या नहीं.&amp;nbsp;
बिना BIS सर्टिफिकेशन और सेफ्टी स्टैंडर्ड वाला इन्वर्टर खरीदने से बचना चाहिए. यह भले ही आपको एक बार सस्ता मिल जाए, लेकिन ये आगे चलकर आपको नुकसान में डाल सकता है.
कभी भी सोलर पैनल, इन्वर्टर और दूसरे डिवाइस अनऑथोराइज्ड सेलर से नहीं खरीदने चाहिए. ऑथोराइज्ड डीलर से डिवाइस खरीदने पर आपको उसकी ऑथेंटिक होने की गारंटी मिलती है और आपको टेक्नीकल असिस्टेंस और इस्टॉलिंग में भी मदद मिलनने के चांस रहते हैं.

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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>PM Modi Instagram Followers: इस एक वीडियो से इंस्टाग्राम पर छाए पीएम मोदी, 12 घंटे में बढ़े 1.1 मिलियन फॉलोअर्स</title>
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        <description><![CDATA[ मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले ने पूरे देश में हड़कंप मचा रखा है. सड़कों पर छात्रों का गुस्सा उबाल पर है, लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर बड़ी हलचल देखने को मिली. दरअसल, यूथ को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने गुरुवार (23 जुलाई) को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसके बाद इंस्टाग्राम पर महज 12 घंटे में उनके 1.1 मिलियन फॉलोअर्स बढ़ गए. इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की लोकप्रियता कितनी ज्यादा है और युवा उनकी बात को कितनी बेहतर तरीके से समझते हैं.&amp;nbsp;
पीएम मोदी ने दिया यह संदेश
गौरतलब है कि नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में युवाओं की नाराजगी और उत्पात को देखते हुए पीएम मोदी ने एक वीडियो पोस्ट किया. इसमें उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है. लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए यह पीड़ादायक है. इस घटना के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं. गुनहगारों को पकड़ा गया है और आज वे जेल में हैं.&amp;nbsp;
उन्होंने कहा कि सरकार ने इतने कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा दोबारा कराने का प्रबंध किया और 19 जून को रिजल्ट भी जारी कर दिया गया. पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से सख्ती से निपटने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है और इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की तैयारी चल रही है. पीएम ने कहा कि सोमवार को जब संसद का सत्र दोबारा शुरू होगा तो इस बिल को उनकी सरकार जल्द से जल्द पास कराने की कोशिश करेगी, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं के दोषियों को जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ी सजा मिल सके.
यूथ ने दिया तगड़ा रेस्पॉन्स
पीएम मोदी का यह वीडियो जारी होने के बाद इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स की संख्या में काफी तेजी से इजाफा हुआ. जब पीएम ने यह वीडियो पोस्ट किया, उस वक्त 101 मिलियन लोग उन्हें फॉलो कर रहे थे. वहीं, महज 12 घंटे बाद उनके फॉलोअर्स की संख्या 102 मिलियन पहुंच गई. इसके अलावा 15.6 मिलियन लोगों ने इस वीडियो को लाइक किया है, जबकि इस वीडियो को 288 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं.&amp;nbsp;
प्रदर्शन में क्या है ताजा अपडेट?
बता दें कि पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन अब भी जारी है, लेकिन मशहूर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है. उधर, मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक को लेकर सख्त सजा वाले बिल को मंजूरी दे दी है. माना जा रहा है कि यह बिल अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>फास्ट चार्जर से भी स्लो चार्ज हो रहा है पावर बैंक? ये हो सकते हैं कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Power Bank Charging Issue: पावर बैंक एक ऐसी एक्सेसरी है, जो आपको मुश्किल में फंसने से बचा सकती है. पावर बैंक से आप उस जगह अपना फोन चार्ज कर सकते हैं, जहां पावर का कोई सोर्स नहीं होता. अगर आपके पास पावर बैंक है तो आप फोन को बंद होने से पहले ही चार्ज कर पाएंगे. हालांकि, कई बार पावर बैंक को चार्ज करने में दिक्कत आने लगती है. फास्ट चार्जर से चार्ज करने पर भी चार्जिंग स्पीड काफी स्लो रहती है. आज हम आपको इसके कारण बताने जा रहे हैं.
क्यों धीरे चार्ज होता है पावर बैंक?
चार्जर का कंपेटिबल न होना- ज्यादातर लोग कम से कम 10,000mAh की कैपेसिटी वाला पावर बैंक तो रखते ही हैं. कई लोग 20,000mAh और इससे भी ज्यादा की कैपेसिटी वाला पावर बैंक कैरी करते हैं. अगर आप इन्हें फास्ट चार्जर से चार्ज करेंगे तो यह कुछ ही पलों में चार्ज हो जाएंगे, लेकिन अगर आप फोन के साथ आने वाले 5-10W चार्जर यूज करेंगे तो इनकी बैटरी पूरी तरह चार्ज होने में काफी समय लेगी.
गलत USB केबल को यूज करना- अगर आप फास्ट चार्जर यूजर कर रहे हैं और फिर भी पावर बैंक स्लो चार्ज हो रहा है तो USB केबल में कुछ गड़बड़ हो सकती है. अगर आप कम वॉट वाली केबल यूज करेंगे तो भी यह चार्जिंग स्पीड को स्लो कर देगी. इसलिए USB-C to USB-C केबल का यूज करना चाहिए जो 100W तक ट्रांसमिट कर सकती है. बाजार में आपको आसानी से ये केबल कम दामों में मिल जाएगी.
चार्जिंग के दौरान यूज करना- अगर आप पावर बैंक को चार्ज करने के साथ-साथ डिस्चार्ज कर रहे हैं, यानी इससे फोन या कोई दूसरा डिवाइस चार्ज कर रहे हैं तो भी स्पीड स्लो हो सकती है. हालांकि, मॉडर्न पावर बैंक में पास-थ्रू टेक्नोलॉजी आती है, जिससे आप चार्जिंग के साथ-साथ इससे दूसरे डिवाइस भी सुरक्षित तरीके से चार्ज कर सकते हैं. इन पावर बैंक में इसके लिए अलग से सर्किट लगे होते हैं, जो चार्जिंग और डिस्चार्जिंग प्रोसेस को अलग-अलग कर देते हैं.
चार्जिंग पोर्ट में खराबी- बाकी सारी चीजें ठीक होने के बाद भी चार्जिंग स्पीड बढ़ नहीं रही है तो पावर बैंक के चार्जिंग पोर्ट में कोई गड़बड़ हो सकती है. कई बार USB साफ न करने पर इनमें कचरा जमा हो जाता है. उमस और पसीने से भी पोर्ट ऑक्सीडाइज हो जाते हैं, जो केबल को पोर्ट से ठीक तरीके से कनेक्ट नहीं होने देते. इसलिए पोर्ट को साफ कर आप चार्जिंग स्पीड को बढ़ा सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>फास्ट, चार्जर, से, भी, स्लो, चार्ज, हो, रहा, है, पावर, बैंक, ये, हो, सकते, हैं, कारण</media:keywords>
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        <title>मधुमक्खी के छत्ते से आया आइडिया लाएगा क्रांति! सोलर पैनल की परफॉर्मेंस हुई जबरदस्त</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Technology: मधुमक्खी के छत्ते से आइडिया लेकर वैज्ञानिक सोलर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति लाने की तैयारी कर रहे हैं. वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों के छत्ते की तरह स्ट्रक्चर वाले नए सोलर पैनल तैयार किए हैं, जो फ्लैट डिजाइन वाले पैनल की तुलना में ज्यादा सनलाइट कैप्चर कर सकते हैं. ज्यादा सनलाइट कैप्चर होने का मतलब है कि पैनल ज्यादा बिजली जनरेट कर पाएंगे. यह नया डिजाइन सोलर पैनल की सबसे बड़ी लिमिटेशन को दूर कर सकता है.
नए डिजाइन का क्या फायदा होगा?
अभी सोलर पैनल का सरफेस एकदम फ्लैट होता है और ये तभी पूरी क्षमता के साथ काम कर पाते हैं, जब सूरज बिल्कुल इनके ऊपर होता है. जैसे ही सूरज का एंगल थोड़ा बदलता है, इन पर पड़ने वाली ज्यादातर सनलाइट एनर्जी में कन्वर्ट होने की बजाय रिफ्लेक्ट हो जाती है. नए डिजाइन वाले पैनल में यह झंझट नहीं रहेगा. ये सूरज के बिल्कुल ऊपर न होने पर भी पूरी क्षमता के साथ काम कर पाएंगे. अगर यह डिजाइन लैब से निकलकर मार्केट में आता है तो सोलर इंस्टॉलेशन की पूरी तस्वीर ही बदल जाएगी. नए स्ट्रक्चर वाले पैनल को कर्व्ड बिल्डिंग्स के साथ-साथ वाहनों पर भी इंस्टॉल किया जा सकेगा.
कैसे काम करेंगे नए पैनल?
वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों से इंस्पिरेशन लेते हुए एक 3D कॉन्केव सोलर पैनल बनाया है, जिसकी स्ट्रक्चर एक हनीकॉम्ब जैसी है. इसका फायदा यह होगा कि पैनल पर आने वाली लाइट सरफेस पर पड़ते ही रिफ्लेक्ट होने की बजाय पैनल की एंगल्ड वॉल्स के बीच ही बाउंस होती रहेगी. जब यह एक वॉल से टकराकर दूसरी पर आएगी तो उसे भी इसे सनलाइट से इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करने का मौका मिलेगा. लैब टेस्ट के दौरान नए डिजाइन वाले पैनल ने फ्लैट पैनल की तुलना में 142.3 प्रतिशत ज्यादा आउटपुट दिया है. इसके अलावा जब सूरज पैनल के बिल्कुल ऊपर आ जाएगा तो इनकी पावर जनरेशन कैपेबिलिटी लगभग 37 प्रतिशत और बढ़ जाएगी.&amp;nbsp;
फ्लेक्सिबल भी होंगे नए पैनल
मौजूदा पैनल काफी रिजिड होते हैं और इन्हें मोड़ा नहीं जा सकता. इस कमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने नए पैनल में पॉलीमर मेटामैटेरियल का इस्तेमाल किया है, जिससे इनमें फ्लेक्सिबिलिटी आई है. इस फ्लेक्सिबिलिटी के कारण इन्हें कर्व्ड बिल्डिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल और एयरोस्पेस इक्विपमेंट समेत उन जगहों पर भी इंस्टॉल किया जा सकेगा, जहां फ्लैट पैनल नहीं लगाए जा सकते. हालांकि, अभी ये पैनल कॉन्सेप्ट के तौर पर ही डेवलप किए जा रहे हैं. मार्केट में पहुंचने से पहले इनकी बड़े लेवल पर टेस्टिंग जरूरी होगी. उसके नतीजों से यह साफ होगा कि ये पैनल कॉन्सेप्ट से निकल रियल वर्ल्ड में यूज हो पाएंगे या नहीं.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब Samsung भी देने लगी Silicon&amp;Carbon बैटरी, जानिए क्यों मची है इस नई टेक्नोलॉजी की धूम</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Silicon-Carbon Battery: सैमसंग ने हाल ही में अपने Galaxy फोल्डेबल फोन लॉन्च किए थे. इनमें कंपनी ने पहली बार सिलिकॉन-कार्बन बैटरी का इस्तेमाल किया है. इसका मतलब है कि Galaxy Z Fold 8 Ultra, Galaxy Z Fold 8 और Galaxy Z Flip 8 में लिथियम-आयन की जगह सिलिकॉन-कार्बन बैटरी दी गई है. बता दें कि कई कंपनियां पहले से ही इस बैटरी टेक्नोलॉजी को यूज कर रही थी और अब सैमसंग ने भी इस लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा दिया है. सिलिकॉन-कार्बन बैटरी कम स्पेस में ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकती है. इसलिए कंपनियां स्मार्टफोन का साइज बड़ा किए बिना उनमें ज्यादा कैपेसिटी वाले बैटरी पैक देने लगी हैं.
क्या होती है सिलिकॉन-कार्बन बैटरी?
सिलिकॉन-कार्बन बैटरी नई तरह की बैटरी सेल है, जो सिलिकॉन एनोड्स के साथ आती है, जबकि लिथियम-आयन बैटरी में ग्रेफाइट एनोड लगे होते हैं. सिलिकॉन बैटरी की एनर्जी डेन्सिटी ज्यादा होती है, जिसका मतलब है कि यह कम स्पेस में ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकती है. लिथियम बैटरी की एनर्जी डेन्सिटी 250-300 Wh/kg ग्राम होती है, जबकि सिलिकॉन-कार्बन बैटरी 400-500 Wh/kg रेंज के साथ आती है.
सैमसंग ने ऐसे उठाया फायदा
सैमसंग ने अपने सबसे प्रीमियम फोन Z Fold 8 Ultra में इस टेक्नोलॉजी का फायदा उठाया है. इसमें 5,000mAh की बैटरी दी गई है, जो इसके पुराने मॉडल Galaxy Z Fold 7 में मिलने वाली 4,400mAh की बैटरी से 600mAh बड़ी है. यानी बैटरी कैपेसिटी में 14 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जबकि कंपनी ने इस मॉडल की थिकनेस 4.2mm से घटाकर 4.1mm कर दी है और दोनों मॉडल में एक समान 215 ग्राम वजन है. यानी सैमसंग ने फोन का वजन और थिकनेस बढ़ाए बिना सिलिकॉन-कार्बन बैटरी की मदद से कैपेसिटी को बढ़ा दिया है. कंपनी ने यह भी कहा है कि उसने बैटरी की परफॉर्मेंस, लॉन्जेविटी और सेफ्टी का पूरा ध्यान रखा है.
बाकी मॉडल्स की बैटरी कैपेसिटी कितनी है?
Fold 8 Ultra में जहां 5,000mAh की बैटरी है, वहीं Fold 8 में 4,800mAh और Flip 8 में 4,300mAh का बैटरी पैक लगा हुआ है. ये अपने पुराने मॉडल से बड़ी बैटरी के साथ आए हैं, लेकिन कैपेसिटी के मामले में ऑनर और मोटोरोला जैसी कंपनियां 6,000mAh का आंकड़ा पार कर चुकी है. माना जा रहा है कि गैलेक्सी फोल्डेबल फोन में सिलिकॉन-बैटरी देना सैमसंग की शुरुआत भर है. आगे चलकर कंपनी इस बैटरी में सिलिकॉन पर्सेंटेज को बढ़ा सकती है और दूसरी कंपनियों की तरह बड़ी बैटरियों वाले मॉडल बाजार में उतारेगी.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>BlackBerry ने क्यों बंद कर दिए थे फोन बनाने और अब क्या कर रही है? सब चल गया पता</title>
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        <description><![CDATA[ Why BlackBerry Stopped Making Phone: एक समय था, जब स्मार्टफोन मार्केट में BlackBerry का दबदबा होता था. उसके बाद एंड्रॉयड और आईफोन की एंट्री होती है और यह कंपनी मार्केट से ही गायब हो जाती है. अब न सिर्फ कंपनी ने फोन बनाने बंद कर दिए हैं बल्कि कंज्यूमर मार्केट से ही बाहर निकल गई है. अब BlackBerry साइबर सिक्योरिटी के फील्ड में काम करती है और अलग-अलग इंडस्ट्रीज के लिए QNX नाम से रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम सप्लाई करती है. आइए जानते हैं कि स्मार्टफोन मार्केट में BlackBerry की एंट्री कैसे हुई, इसने कैसे अपना दबदबा बनाया और क्यों इसे अलविदा कहकर जाना पड़ा.
Pearl 8100 से मिली BlackBerry को पहचान
BlackBerry की शुरुआत एक पेजर कंपनी से हुई थी और Pearl 8100 मॉडल के सहारे उसे फोन मार्केट में अपनी पहचान बनाने का मौका मिला. इसके बाद कंपनी ने Bold और Curve मॉडल लॉन्च किए, जिससे यह ज्यादा लोगों तक पहुंच पाई. BlackBerry Messenger के जरिए फ्री मैसेजिंग सर्विस ने इसे और पॉपुलर बना दिया. आईफोन को टक्कर देने के लिए कंपनी ने 2008 में अपना पहला टचस्क्रीन फोन BlackBerry Storm भी लॉन्च किया था, लेकिन यह कामयाब नहीं हो पाया.
2010 में पीक पर थी BlackBerry&amp;nbsp;
2010 में BlackBerry अपनी पीक पर थी. उस समय अकेले अमेरिका में कंपनी के 2 करोड़ से ज्यादा यूजर्स थे, लेकिन कंपनी अधिक समय तक अपनी जगह बरकरार नहीं रख पाई. 2012 आते-आते अमेरिका में कंपनी के यूजर घटकर एक करोड़ से भी कम हो गए. हालांकि, तब भी दुनियाभर में करीब 8 करोड़ लोग कंपनी के प्रोडक्ट्स यूज कर रहे थे. इंडोनेशिया में कंपनी की पॉपुलैरिटी लगातार बनी हुई थी. 2024 में BlackBerry ने Z3 फोन लाकर अपनी खोई जमीन हासिल करने की कोशिश की. भारत में भी यह फोन लॉन्च किया गया, लेकिन यह आईफोन और एंड्रॉयड को टक्कर नहीं दे पाया. इसके बाद BlackBerry 10, नए ऑपरेटिंग सिस्टम और दूसरे नए डिवाइस भी लॉन्च किए गए, लेकिन कंपनी ने लिए इनमें से किसी ने भी काम नहीं किया.
2011 में ऐप्पल से पिछड़ गई BlackBerry&amp;nbsp;
यूजर्स के मामले में 2011 में BlackBerry पहली बार ऐप्पल से पिछड़ गई थी. यहां से इसके डाउनफॉल की शुरुआत हुई और जो कभी थमा नहीं. 2016 आते-आते अमेरिका के एक प्रतिशत से भी कम यूजर्स BlackBerry यूज कर रहे थे, जबकि iOS का मार्केट शेयर करीब 44 प्रतिशत पहुंच गया था. दूसरी तरफ 2010 में BlackBerry ने QNX सॉफ्टवेयर सिस्टम को खरीदा था. स्मार्टफोन मार्केट में अपना प्रदर्शन देखते हुए कंपनी ने अपना फोकस सॉफ्टवेयर पर शिफ्ट कर लिया. यह आज दुनियाभर में इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल किया जाता है. अब कंपनी रोबोटिक्स की तरफ भी अपने कदम बढ़ा रही है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>अमेरिका को अब AI से आस, वर्षों पुरानी समस्याएं सुलझाने में ली जाएगी मदद</title>
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        <description><![CDATA[ USA AI Investment: लंबे समय से चलती आ रही साइंटिफिक रिसर्च को तेज करने के लिए अमेरिका एआई की तरफ देख रहा है. ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में एआई पर 5 बिलियन डॉलर (लगभग 48,250 करोड़ रुपये) के निवेश का ऐलान किया है. इस पैसे को एआई से बीमारियों का इलाज खोजने, नई दवाएं बनाने में तेजी लाने और बिल्डिंग बनाने के लिए मजबूत मैटेरियल बनाने आदि की रिसर्च में इस्तेमाल किया जाएगा. यानी वर्षों से चली आ रही समस्याओं को सुलझाने के लिए अमेरिका ने एआई पर अपनी उम्मीद टिकाई है. गौरतलब है कि एआई आने के बाद साइंटिफिक रिसर्च तेज हुई है और पूरी दुनिया में नई दवाएं बनाने और बीमारियों के इलाज ढूंढने वाले प्रोजेक्ट चल रहे हैं.
वैज्ञानिकों को मिलेंगे एडवांस कंप्यूटिंग रिसोर्सेस
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के चीफ टेक्नोलॉजी एडवाइजर Michael Kratsios ने बताया कि व्हाइट हाउस अलग-अलग डोमेन में काम कर रही एजेंसियों को एक साथ ला रहा है ताकि वो साइंस के लिए काम कर सकें. अधिकारियों के बताया कि इस प्रोग्राम में काम करने वाले वैज्ञानिकों को अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के एडवांस्ड कंप्यूटिंग रिसोर्सेस की एक्सेस मिलेंगी. इनमें सुपरकंप्यूटर, स्पेशल एआई टूल्स और सरकारी डेटासेट आदि शामिल हैं. बताया जा रहा है कि इस प्रोग्राम में डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन, डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी, डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसपोर्टेशन, डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस और डिपार्टमेंट ऑफ इंटीरियर समेत कुल 15 एजेंसियां शामिल होंगी.
सरकारी डेटा से एआई मॉडल को दी जाएगी ट्रेनिंग
इस प्रोग्राम के लिए एआई मॉडल्स को सरकारी डेटासेट से ट्रेनिंग दी जाएगी. गौरतलब है कि अमेरिकी सरकार के पास हेल्थकेयर, केमिकल और क्रिटिकल मिनरल्स समेत कई एरिया से संबंधित बड़ा डेटा सेट है. इस डेटासेट से एआई मॉडल को ट्रेनिंग देकर उनके पैटर्न पहचाने जा सकते हैं, जिस आधार पर अनुमान और सवालों के जवाब पता लगाने आसान हो जाएंगे. अगर एआई को छोड़कर ट्रेडिशनल तरीकों से रिसर्च की जाए तो इसमें काफी समय खर्च हो सकता है. माइक्रोसॉफ्ट ने भी इस प्रोग्राम में हिस्सेदारी का ऐलान किया है.
जुकरबर्ग भी ढूंढ रहे हैं एआई से बीमारियों का इलाज
मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कुछ ही समय पहले अपनी पत्नी Priscilla Chan के स्टार्टअप Biohub के एक प्रोजेक्ट पर भारी निवेश किया था. इस प्रोजेक्ट में एआई की मदद से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि इंसानी सेल्स कैसे काम करती हैं. अगर इसमें कामयाबी मिलती है तो बीमारियों का इलाज ढूंढना आसान हो जाएगा. मेटा ने इसके लिए 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. इस पैसे से ऐसे एआई सिस्टम बनाए जाएंगे, जो इंसानी सेल्स की तरह काम करेंगे.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Apple iPhone 18 Launch Date : कब लॉन्च होगा आईफोन 18? क्या अभी 17 प्रो खरीदना सही या कर लें थोड़ा और इंतजार</title>
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        <description><![CDATA[ Apple iPhone 18 Launch Date : Apple जल्द ही अपना नया iPhone 18 Pro लॉन्च कर सकता है. वहीं अभी iPhone 17 Pro पर शानदार डिस्काउंट मिल रहा है, जिससे इसे पहले के मुकाबले काफी कम कीमत में खरीदा जा सकता है. भारत में यह फोन 1,34,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ था, लेकिन फिलहाल इस पर 9 हजार रुपये से ज्यादा तक की बचत का मौका है. ऐसे में अगर आप भी नया iPhone खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभी iPhone 17 Pro खरीदा जाए या फिर आने वाले iPhone 18 Pro का इंतजार किया जाए.
एक तरफ मौजूदा iPhone 17 Pro पर हजारों रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ iPhone 18 Pro को लेकर कई लीक्स और रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं, जिनमें इसके प्रोसेसर, कैमरा, AI फीचर्स और डिजाइन से जुड़ी जानकारी दी गई हैं. ऐसे में खरीदने का फैसला लेने से पहले दोनों ऑप्शन के बारे में जानना जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि आईफोन 18 कब लॉन्च होगा और क्या अभी 17 प्रो खरीदना सही है या थोड़ा और इंतजार कर लें.&amp;nbsp;
iPhone 17 Pro पर मिल रहा है डिस्काउंट
iPhone 17 Pro को भारत में 1,34,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, फिलहाल यह Croma की आधिकारिक वेबसाइट पर 1,29,490 रुपये में उपलब्ध है. फोन पर 5,410 रुपये का फ्लैट डिस्काउंट दिया जा रहा है. इसके अलावा SBI, ICICI और Axis Bank के क्रेडिट कार्ड EMI ट्रांजैक्शन पर 4,000 रुपये तक का अतिरिक्त बैंक डिस्काउंट भी मिल सकता है. इस तरह कुल बचत 9,000 रुपये से ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
कब लॉन्च हो सकता है iPhone 18 Pro?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple सितंबर 2026 में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर सकता है. इस बार पहले Pro मॉडल्स पेश किए जाने की संभावना है, जबकि स्टैंडर्ड iPhone 18 को बाद में लॉन्च किया जा सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस साल सितंबर के लॉन्च इवेंट में iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और Apple का पहला फोल्डेबल iPhone मुख्य आकर्षण हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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iPhone 18 Pro में क्या मिल सकता है?
लीक्स और रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro में 6.3 इंच की 120Hz ProMotion OLED डिस्प्ले, नया A20 Pro 2nm प्रोसेसर, Apple Intelligence के बेहतर AI फीचर्स, ट्रिपल 48MP कैमरा सेटअप, बेहतर बैटरी बैकअप, iOS 27, Wi-Fi 7, बेहतर 5G कनेक्टिविटी और टाइटेनियम फ्रेम मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इस बार कैमरा और AI एक्सपीरियंस पर ज्यादा फोकस कर सकती है.&amp;nbsp;
क्या अभी 17 प्रो खरीदना सही या कर लें थोड़ा और इंतजार?
iPhone 17 Pro पर फिलहाल अच्छा डिस्काउंट मिल रहा है, जिससे यह पहले की तुलना में कम कीमत में उपलब्ध है. वहीं रिपोर्ट्स और लीक्स के मुताबिक iPhone 18 Pro में नया A20 Pro प्रोसेसर, बेहतर AI फीचर्स, कैमरा अपग्रेड और लंबी बैटरी लाइफ जैसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ऐसे में अगर आपको तुरंत नया फोन चाहिए तो iPhone 17 Pro एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है, लेकिन अगर जल्दबाजी नहीं है तो आने वाले iPhone 18 Pro का इंतजार करना भी फायदेमंद साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro की कितनी हो सकती है कीमत?
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत करीब 1.40 लाख से 1.50 लाख रुपये के बीच हो सकती है. वहीं iPhone 18 Pro Max की कीमत 1.55 लाख रुपये या उससे ज्यादा रहने की संभावना है. हालांकि असली कीमत का खुलासा लॉन्च इवेंट के दौरान ही होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Apple, iPhone, Launch, Date, कब, लॉन्च, होगा, आईफोन, 18, क्या, अभी, प्रो, खरीदना, सही, या, कर, लें, थोड़ा, और, इंतजार</media:keywords>
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        <title>एक SMS और अकाउंट खाली, भारत में 146 प्रतिशत बढ़े स्कैम, 22,000 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी</title>
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        <description><![CDATA[ SMS Fraud in India: भारत में SMS के जरिए होने वाले फ्रॉड के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. पिछले एक साल में इन मामलों में 146 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. BioCatch की रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिक सुरक्षित माने जाने वाले iOS पर फ्रॉड के मामले 86 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि एंड्रॉयड पर यह बढ़ोतरी 35 प्रतिशत की रही है. अगर साइबर फ्रॉड में होने वाले नुकसान की बात करें तो 2025 में भारत में 22,496 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज की गई हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों को साइबर फ्रॉड में कितना बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है.&amp;nbsp;
SMS फ्रॉड क्यों बढ़ रहे हैं?&amp;nbsp;
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बायोकैच के डायरेक्टर ऑफ ग्लोबल फ्रॉड इंटेलीजेंस टॉम पीकॉक ने कहा कि SMS फ्रॉड इसलिए ज्यादा प्रभावी है क्योंकि वो भरोसेमंद कम्युनिकेशन चैनल का फायदा उठाते हैं. SMS में आए फ्रॉड वाले मैसेज असली लगते हैं और यूजर बिना ज्यादा सोचे-समझे इन पर भरोसा कर लेता है. रिपोर्ट में बताया गया है कि UPI इकोसिस्टम पर भी स्कैमर्स की &amp;nbsp;नजर टिकी हुई है.
कम समय में ज्यादा बड़ा फ्रॉड कर रहे हैं साइबर क्रिमिनल
रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्रॉडस्टर अब कम समय में बड़ा नुकसान कर रहे हैं. मोबाइल फ्रॉड सेशन का औसतन समय 32 प्रतिशत कम हो गया है, लेकिन इस दौरान ट्रांसफर होने वाले पैसों की रकम में 1.7 गुना का उछाल आया है. इसका मतलब यह है कि फ्रॉडस्टर अब बहुत तेजी से लोगों के अकाउंट से अपने अकाउंट में पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं. पीकॉक ने बताया कि थोड़ी देर की कॉल में ज्यादा पैसों का फ्रॉड करना दिखाता है कि फ्रॉड करने वाले अब ज्यादा एफिशिएंट और स्कैम रिफाइन हो रहे हैं. क्रिमिलन अब सोशल इंजीनियरिंग और ऑटोमैटेड टेक्नीक का यूज कर वॉर्निंग नजर आने से पहले ही पैसे को ठिकाने लगा दे रहे हैं.
लोगों को 22,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
साइबर फ्रॉड के मामलों में लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. जैसा हमने आपको ऊपर बताया कि 2025 में 22,496 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि 9,000 करोड़ रुपये की ट्रांसफर को डिक्लाइन कर दिया गया था. जांचकर्ताओं ने पिछले एक साल में अलग-अलग 700 बैंकों की 700 ब्रांच में 8.5 लाख से अधिक ऐसे अकाउंट की पहचान की है, जिनमें फ्रॉड के पैसे को ठिकाने लगाया जा रहा था.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>पासवर्ड भूल गए तो सेल्फी वीडियो से लॉग&amp;इन होगा अकाउंट, गूगल ले आई नया फीचर, ऐसे करें यूज</title>
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        <description><![CDATA[ Selfie video for Google Account: अब आप सेल्फी वीडियो की मदद से भी गूगल अकाउंट में लॉग-इन कर सकेंगे. कंपनी एक नया साइन-इन और रिकवरी ऑप्शन लेकर आई है, जिसमें सेल्फी वीडियो के जरिए आपकी पहचान को वेरिफाई किया जाएगा. अगर बाकी तरीकों से अकाउंट रिकवर नहीं होता है तो यूजर अपने सेल्फी वीडियो से इसकी एक्सेस पा सकेंगे. इसके अलावा इसे गूगल के कई दूसरे फीचर और सर्विसेस को एक्सेस करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, अभी यह फीचर हर जगह और हर डिवाइस के लिए रोलआउट नहीं किया गया है.
अकाउंट रिकवरी के एडिशनल ऑप्शन के तौर पर काम करेगा फीचर
गूगल ने कहा है कि यह फीचर पासकी और रिकवरी कॉन्टैक्ट्स के साथ एक एडिशनल रिकवरी ऑप्शन के तौर पर काम करेगा. इसे सेटअप करने के लिए आपका गूगल अकाउंट में साइन-इन होना जरूरी है. अगर आपने साइन-इन नहीं किया हुआ है तो आप सेल्फी वीडियो एड नहीं कर पाएंगे.
कैसे एड करें सेल्फी वीडियो?&amp;nbsp;

यह फीचर सभी यूजर्स के लिए रोलआउट नहीं किया गया है. इसलिए सबसे पहले आपको एलिजिबिलिटी चेक करनी होगी. आप ब्राउजर में g.co/signin-selfie टाइप कर यह देख सकते हैं कि आपके डिवाइस के लिए यह ऑप्शन रोल आउट हुआ है या नहीं. अगर यह फीचर अवेलेबल होगा तो आपको फेस का शॉर्ट वीडियो लेने का ऑप्शन दिख जाएगा.
इस फीचर में इनरोल करने के लिए सेल्फी वीडियो सेटअप पेज को ओपन करें और गूगल के इंस्ट्रक्शन का पालन करें. पूरी प्रोसेस के दौरान डिवाइस के कैमरे में देखते रहें और इंस्ट्रक्शन का पालन करते हुए हेड मूवमेंट करें. इस दौरान कैमरा आपके फेस को मल्टीपल एंगल से कैप्चर करेगा. इसके बाद आपका सेल्फी वीडियो गूगल अकाउंट में सिक्योर तरीके से सेव हो जाएगा.

कब काम आएगा रिकॉर्ड किया हुआ वीडियो?
अगर आगे चलकर आप अपने डिवाइस से गूगल अकाउंट को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं या पासवर्ड आदि भूल गए हैं तो गूगल अकाउंट की रिकवरी के लिए आफको सेल्फी वेरिफिकेशन का ऑप्शन देगी. तब आपसे फ्रेश वीडियो रिकॉर्ड करने को कहा जाएगा. फिर गूगल उस रिकॉर्डिंग को सेव्ड वीडियो से कंपेयर करेगी और पहचान वेरिफाई होने के बाद आपको अकाउंट की एक्सेस दे देगी.
प्राइवेसी का भी रखा जाएगा ध्यान
गूगल ने बताया है कि इस वीडियो को यूजर की सहमति के बाद ही स्टोर किया जाएगा. स्टोरेज के टाइम यह पूरी तरह एनक्रिप्टेड रहेगा और इसे किसी भी समय डिलीट किया जा सकता है. गूगल ने बताया है कि स्पूफिंग को रोकने के लिए भी उसने कई सिक्योरिटी चेक लगाए हैं.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ एक रुपये में मिल रहा है JioHotstar Premium सब्सक्रिप्शन, ऐसे करें क्लेम</title>
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        <description><![CDATA[ JioHotstar Premium Subscription: सिर्फ एक रुपये देकर आप जियोहॉटस्टार का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन पा सकते हैं. जी हां, आपने सही सुना है. सिर्फ एक रुपये में जियोहॉटस्टार प्रीमियम की मेंबरशिप मिल रही है. इसमें आप एक महीने तक प्रीमियम कंटेट का मजा उठा पाएंगे. हालांकि, यह ऑफर सभी यूजर्स के लिए अवेलेबल नहीं है. अगर आपके फोन में यह ऑफर नहीं दिख रहा है तो इसका मतलब है कि आप इसके लिए एलिजिबल नहीं है. वहीं अगर आपको यह ऑफर दिख रहा है तो आइए जानते हैं कि इसे कैसे क्लेम किया जा सकता है.
किन यूजर्स के लिए आया है ऑफर?
जियोहॉटस्टार की तरफ से यह ऑफर लिमिटेड यूजर्स के लिए रोल आउट किया गया है. इसका फायदा उठाने के लिए आपको जियो नंबर की मदद से साइन-इन करना होगा. ध्यान रहे कि यह नंबर पर पहले कोई जियोहॉटस्टार सब्सक्रिप्शन नहीं होना चाहिए. यह प्लान करीब 30 दिनों तक वैलिड रहेगा और इस केवल एक बार क्लेम किया जा सकता है. अगर आपको इस प्लान का फायदा मिलता है तो आप अपने फोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी समेत किसी भी दो डिवाइस पर एक साथ कंटेट को स्ट्रीम कर सकते हैं.
इस बात का रखें ध्यान
अगर आप इस प्लान के लिए एलिजिबिल हैं और एक रुपये की पेमेंट कर इसे एक्टिवेट करना चाहते हैं तो ऑटो रिन्यूअल का ध्यान रखना जरूरी है. अगर आप इसे इनेबल रखते हैं तो प्रमोशनल प्लान खत्म होते ही आपको रेगुलर प्लान पर स्विच कर दिया जाएगा. यानी एक महीने के बाद आपको बाकी यूजर्स के बराबर पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
कैसे एक्टिवेट करें प्लान?
अगर आप प्लान के लिए एलिजिबल हैं तो जियोहॉस्टार ऐप में अपने जियो नंबर से साइन-इन करें. फिर अपने प्रोफाइल पर जाकर सब्सक्रिप्शन सेक्शन को ओपन करें. अगर यहां एक रुपये वाला प्लान दिखता है तो इसे सेलेक्ट कर पेमेंट कर दें. ट्रांजेक्शन कंप्लीट होने के बाद प्रीमियम मेंबरशिप तुरंत एक्टिव हो जाएगी. अगर आप एक महीने बाद इस मेंबरशिप को एक्टिव नहीं रखना चाहते तो ऑटो-रिन्यूएल ऑप्शन को बंद कर दें.
एयरटेल के इस प्लान में फ्री मिल रहा जियोहॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन
अगर आपके पास एयरटेल का नंबर है तो आप तीन महीनों के लिए जियोहॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन फ्री में पा सकते हैं. एयरटेल के 3,999 रुपये के प्लान में कंपनी तीन महीनों के लिए जियोहॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन फ्री दे रही है. इस प्लान में सालभर की वैलिडिटी, रोजाना 2.5GB डेटा + अनलिमिटेड 5G डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, रोजाना 100 SMS और 12 महीनों के लिए Adobe Express का प्रीमियम प्लान भी फ्री दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>अब चार्जर की नहीं पड़ेगी जरूरत! ऐसे करें कहीं भी अपना फोन चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ अब चार्जर की नहीं पड़ेगी जरूरत! ऐसे करें कहीं भी अपना फोन चार्ज ]]></description>
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        <title>जियो से 5 करोड़ यूजर कम होने के बावजूद एयरटेल की कमाई ज्यादा, क्या हैं कारण?</title>
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        <description><![CDATA[ Jio vs Airtel ARPU: जियो और एयरटेल देश की दो सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियां हैं और दोनों के बीच जबरदस्त मुकाबला चलता रहता है. यूजर्स की संख्या के हिसाब से देखें तो जियो सबसे बड़ी कंपनी है, वहीं अपने हर यूजर से होने वाली कमाई के मामले में एयरटेल पहले नंबर पर है. ताजा फाइनेंशियल नतीजे बताते हैं कि जियो से लगभग 5 करोड़ यूजर्स कम होने के बावजूद एयरटेल का एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) ज्यादा है. आइए जानते हैं कि ARPU क्या होता है, यह क्यों जरूरी है और एयरटेल इस मामले में कैसे आगे है.
क्या होता है ARPU?
टेलीकॉम सेक्टर में ARPU पर सबसे ज्यादा नजर रखी जाती है. इससे पता चलता है कि कोई टेलीकॉम कंपनी अपने हर यूजर से हर महीने कितना रेवेन्यू कमा रही है. ज्यादा ARPU का मतलब है कि उस कंपनी के ग्राहक प्रीमियम प्लान, ज्यादा डेटा यूसेज और दूसरी वैल्यू-एडेड सर्विसेस के लिए ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं. ARPU में अगर मामूली बढ़ोतरी भी होती है तो यह कंपनी की आमदनी को काफी बढ़ा सकता है. अब कंपनियों की बात करें तो जियो का ARPU 215.6 रुपये है. एक साल पहले यह 208.08 रुपये था. इसकी तुलना में एयरटेल का ARPU 257 रुपये है. यानी एयरटेल अपने हर ग्राहक से हर महीने जियो की तुलना में 41.4 रुपये (लगभग 19.2 प्रतिशत) ज्यादा कमा रही है.
किस कंपनी के कितने यूजर?
जियो 53.3 करोड़ यूजर्स के साथ भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है. इनमें से 28.5 करोड़ 5G यूजर्स हैं. दूसरी तरफ एयरटेल के यूजर्स की संख्या 48.3 करोड़ है. यानी करीब 5 करोड़ यूजर्स कम होने के बावजूद इसका ARPU जियो से ज्यादा है. ARPU और यूजर बेस के आधार पर जियो हर महीने 11,498 करोड़ रुपये का रेवेन्यू जनरेट करती है, वहीं एयरटेल इस हिसाब से 12,434 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त कर रही है.
एयरटेल का ARPU ज्यादा क्यों है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरटेल के प्रीमियम यूजर्स की संख्या ज्यादा है और उसके यूजर बेस में पोस्टपेड सब्सक्राइबर की बड़ी हिस्सेदारी है. इसी तरह कंपनी के महंगे प्लान भी उसे ज्यादा रेवेन्यू जनरेट करने में मदद कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि एयरटेल ने सिर्फ यूजर्स के नंबर बढ़ाने पर फोकस करने की बजाय कस्टमर क्वालिटी और हर यूजर पर खर्च बढ़ाने की रणनीति बनाई है. दूसरी तरफ जियो अपने यूजर्स को बढ़ाने के साथ-साथ क्लाउड कंप्यूटिंग और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड जैसी दूसरी डिजिटल सर्विसेस पर भी निवेश कर रही है. कंपनी का कहना है कि फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के लिए चलाई जा रही प्रमोशनल स्कीमों से ARPU पर थोड़ा असर पड़ा है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Waze और Google Maps में क्या होता है अंतर? जानिए किस्मे मिलते हैं एडवांस फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Waze Vs Google Maps: आज के समय में लोग अब रास्ता खोजने के लिए इंसान से नहीं पूछते हैं बल्कि गूगल मैप्स का सहारा लेते हैं. ये नेविगेशन ऐप पूरी दुनिया में काफी फेमश हो चुका है और लोग इसे कई तरीकों से इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन हाल ही में गूगल मैप्स को टक्कर देने के लिए एक नया नेविगेशन ऐप आया है जिसका नाम वेज है. इस ऐप में भी यूजर्स को कई सारे एडवांस फीचर्स दिए जा रहे हैं जो उनके बहुत काम आ सकते हैं. आइए जानते हैं कि दोनों में क्या है अंतर.
Google Maps
Google Maps सिर्फ नेविगेशन तक सीमित नहीं है. ये आसपास के होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, एटीएम, अस्पताल और दूसरे जरूरी जगहों की भी जानकारी देता है. इसके अलावा आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पैदल चलने और साइकिल से ट्रैवल करने के लिए भी सही रूट देख सकते हैं.
बता दें कि इस ऐप में ऑफलाइन मैप डाउनलोड करने का फीचर भी मिलता है जिससे आपको कोई भी रास्त खोजने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसी वजह से Google Maps को रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए यूजर ज्यादा इस्तेमाल करते हैं.
Waze
अब दूसरी तरफ, Waze की बात करें तो ये खासतौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया गया है जो रोजाना कार या बाइक से लंबी दूरी तय करते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें यूजर्स खुद ट्रैफिक, एक्सीडेंट, सड़क बंद होने, पुलिस चेकिंग और स्पीड कैमरा जैसी जानकारी को रियल टाइम में शेयर कर सकते हैं.
इसके अलावा अगर किसी रास्ते पर जाम लग जाता है तो Waze तुरंत आपको दूसरे रूट सजेस्ट कर देता है. इससे समय और फ्यूल दोनों की बचत हो सकती है. लगातार ड्राइव करने वाले लोगों के लिए ये फीचर बहुत ज्यादा काम का साबित हो सकता है.
किसमें हैं ज्यादा एडवांस फीचर्स
अब इन दोनो नेविगेशन ऐप्स के फीचर्स की बात करें तो Google Maps ग्लोबली यूजर्स को बेहतरीन फीचर्स उपलब्ध कराता है. साथ ही ये ज्यादा बैलेंस्ड ऐप भी माना जाता है. ये नेविगेशन के साथ-साथ जगहों की जानकारी, रिव्यू, फोटो, बिजनेस टाइमिंग और ऑफलाइन मैप जैसी कई फीचर्स उपलब्ध कराता है.
वहीं, दूसरी ओर, Waze लाइव ट्रैफिक अपडेट और ड्राइविंग अलर्ट देने में ज्यादा तेज माना जाता है. ये उन लोगों के लिए बेहतर ऑप्शन है जो रोजाना भीड़भाड़ वाले रास्तों पर सफर करते हैं और हर मिनट की बचत करना चाहते हैं.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>आपने जो शराब खरीदी वो कहीं नकली तो नहीं? अब चुटकियों में लगेगा पता, यह ऐप करेगा आपकी पूरी मदद</title>
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        <description><![CDATA[ e-Excise App: नकली शराब का कारोबार लंबे समय से लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है. ऐसी शराब न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है बल्कि कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसी समस्या से निपटने के लिए ई-आबकारी (e-Excise) ऐप को लाया गया है. इस ऐप की मदद से उपभोक्ता कुछ ही सेकंड में ये पता लगा सकते है कि हो उन्होंने शराब खरीदी है वो असली या नकली.
क्या है ई-आबकारी ऐप?
जानकारी के अनुसार, ई-आबकारी ऐप राज्य आबकारी विभाग द्वारा तैयार किया गया एक मोबाइल एप्लिकेशन है जिसका मकसद शराब की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाना और नकली शराब की बिक्री पर रोक लगाना है. इस ऐप के जरिए उपभोक्ता शराब की बोतल पर लगे QR Code या बारकोड को स्कैन करके उसकी पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इससे ये पता चल जाता है कि बोतल अधिकृत है या नहीं.
ऐसे करें शराब की जांच
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ई-आबकारी ऐप का इस्तेमाल करना बेहद आसान है. सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में ऐप इंस्टॉल करें. इसके बाद ऐप खोलकर स्कैन ऑप्शन चुनें और शराब की बोतल पर लगे QR Code या बारकोड को स्कैन करें.
अब अगर बोतल असली होगी तो स्क्रीन पर ब्रांड का नाम, निर्माता, बैच नंबर, पैकिंग की जानकारी और दूसरी जरूरी जानकारी दिखाई देंगे. अगर स्कैन करने पर कोई जानकारी नहीं मिलती या डेटा नहीं मिला तो समझ जाइए कि शराब नकली है. ऐसे में संबंधित आबकारी विभाग को तुरंत शिकायत करें.
उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद
ई-आबकारी ऐप केवल शराब की ओरिजिनलिटी की जांचने तक सीमित नहीं है. कई राज्यों में ये ऐप शिकायत दर्ज कराने, लाइसेंसधारी दुकानों की जानकारी देखने और आबकारी विभाग से जुड़ी दोसी जरूरी सर्विसेज का फायदा लेने की सुविधा भी देता है. इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ता है और अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलती है.
शराब खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
आपको बता दें कि हमेशा शराब खरीदने से पहले कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रखना जरूरी है. हमेशा अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकान से ही शराब खरीदें. बोतल की सील टूटी हुई न हो ये चेक करें. QR Code या बारकोड जरूर को चेक करें. एक्साइज होलोग्राम और लेबल को ध्यान से चेक्स करें. बेहद कम कीमत पर मिलने वाली शराब खरीदने से बचें. किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर तुरंत आबकारी विभाग को सूचना दें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 20 Pro Max से सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी ऐप्पल, पहली बार मिलेगी 7 इंच की बिना बॉर्डर वाली स्क्रीन</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 20 Pro Max: नए आईफोन लॉन्च होने में अब दो महीने से भी कम का समय बचा है. सितंबर में iPhone 18 Pro मॉडल्स और फोल्डेबल आईफोन लॉन्च हो जाएंगे, लेकिन अगर आपको सबसे धांसू आईफोन लेना है तो एक साल का इंतजार और करना पड़ेगा. 2027 में आईफोन के सफर को 20 साल पूरे होंगे. इस मौके को खास बनाने के लिए ऐप्पल सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाली है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऐप्पल करीब 7 इंच की स्क्रीन वाले आईफोन को टेस्ट करने में लगी हुई है. अगर यह आईफोन लॉन्च होता है तो 7 इंच की स्क्रीन के साथ आने वाले वाला पहला फोन बन सकता है.
डिस्प्ले पर नहीं होगी कोई बॉर्डर
चाइनीज टिपस्टर डिजिटल चैट स्टेशन के मुताबिक, ऐप्पल इंटरनली एक बड़े डिस्प्ले पैनल को टेस्ट कर रही है. इसका साइज 6.96 इंच होगा, लेकिन इसे 7 इंच के तौर पर मार्केट किया जाएगा. अभी तक यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि ऐप्पल इस पैनल वाले आईफोन को लॉन्च करेगी भी या यह सिर्फ एक टेस्ट प्रोजेक्ट है. इससे पहले की लीक्स में दावा किया गया है कि ऐप्पल आईफोन की 20वीं एनिवर्सरी पर नए डिजाइन वाले फोन लॉन्च करेगी. कंपनी का प्लान एक ऐसा आईफोन लॉन्च करने का है, जो फ्रंट में ग्लास के एक टुकड़े की तरह नजर आए. यानी इस पर न तो बैजल्स होंगे और न ही कैमरे के लिए कटआउट होगा. यह एक एज-टू-एज डिस्प्ले होगा, जो चारों साइड से कर्व्ड होगा, जिससे ऐसा लुक मिलेगा कि इस स्क्रीन पर कोई बॉर्डर नहीं है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया था कि 20वीं एनिवर्सरी पर आने वाले आईफोन के 2 वर्जन पर ऐप्पल ने काम तेज कर दिया है. इस आईफोन के लिए ऐप्पल खासतौर पर सैमसंग के साथ मिलकर एक नया डिस्प्ले तैयार कर रही है. यह मौजूदा पैनल की तुलना में अधिक ब्राइट और पतला होगा.
ऐप्पल ने आखिरी बार 2024 में बढ़ाया था आईफोन का साइज
अगर ऐप्पल 7 इंच स्क्रीन वाला आईफोन ला रही है तो यह बहुत बड़ी अपग्रेड नहीं होने वाली है. 17 Pro Max में 6.9 इंच का डिस्प्ले मिलता है. ऐसे में 20 Pro Max का साइज बहुत बड़ा नहीं होगा, लेकिन इसमें अंतर साफ नजर आएगा. ऐप्पल ने इससे पहले 2024 में आईफोन 16 सीरीज के समय अपने डिवाइस का साइज बढ़ाया था. तब Pro मॉडल को 6.1 इंच से बढ़ाकर 6.3 इंच की स्क्रीन और प्रो मैक्स मॉडल को 6.7 इंच से बढ़ाकर 6.9 इंच की स्क्रीन दी गई थी.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>iPhone, Pro, Max, से, सारे, रिकॉर्ड, तोड़ेगी, ऐप्पल, पहली, बार, मिलेगी, इंच, की, बिना, बॉर्डर, वाली, स्क्रीन</media:keywords>
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        <title>Google Photos में फिर आ गया ये फीचर! Ask Photos से क्यों है बिल्कुल अलग, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Google Classic Search: गूगल अपने यूजर्स को कई एडवांस फीचर्स उपलब्ध कराती है. ऐसे में अब गूगल फोटोज मे एक नया अपडेट सामने आया है. दरअसल, गूगल फोटो में अब यूजर्स क्लासिक सर्च और आस्क फोटोज के बीच में आसानी से स्विच कर सकेंगे. बता दें कि यूजर्स इस अपडेट की मदद से आसानी से कीवर्ड और एआई फीचर्स अपनी जरूरत के हिसाब से बदल सकेंगे. बता दें कि ये फीचर Android और iPhone दोनों पर धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है.
कैसे काम करता है Ask Photos
Ask Photos की बात करें तो ये Google के Gemini AI पर बेस्ड फीचर है. इसकी मदद से यूजर नॉर्मल बातचीत की तरह लंबा सवाल पूछ सकते हैं और AI उसी के अनुसार फोटो लाइब्रेरी को समझकर जवाब देता है. इतना ही नहीं, ये फोटो में मौजूद डिटेल्स के अनुसार भी यूजर्स को रिजल्ट देता है और कई बार ये फोटो को अच्छे से समझकर आपको रिजल्ट देने का काम करता है.
क्या है ये नया अपडेट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल का क्लासिक सर्च गूगल फोटोज की मदद से सिर्फ कीवर्ड टाइप करके ही फोटो और वीडियो को सर्च कर सकते हैं. बता दे कि ये फीचर ऐसे यूजर्स के लिए काफी बेहतरीन साबित हो सकता है जिन्हें पता है कि उन्हें क्या सर्च करना है. हालांकि, इस फीचर की मदद से आप सिर्फ फोटो और वीडियो ही सर्च कर सकेंगे.
कैसे स्विच करें
अब गूगल फोटोज और आस्क फोटोज में स्विच करना भी काफी आसान है. बस आपको कुछ जरूरी स्टेप्स को फॉलो करना होगा. इसके लिए सबसे पहले Google Photos ऐप खोलें और Search या Ask टैब पर जाएं. कोई भी सर्च करने के बाद स्क्रीन के ऊपर दिखाई देने वाले टॉगल की मदद से Classic Search और Ask Photos के बीच आसानी से स्विच किया जा सकता है.
दोनों ऑप्शन देने का क्या है मकसद
बता दें कि Google का कहना है कि दोनों फीचर अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं. ऐसे में यूजर अब अपनी जरूरत के अनुसार चुन सकेगा कि उसे कैसे रिजल्ट की जरूरत है और वो क्या चाहता है. अगर आपको किसी फोटो को जल्दी ढूंढना है तो आपको Classic Search चुनना ठीक रहेगा. वहीं, जब आपको किसी खास घटना, ट्रैवल या इंसान से जुड़ी फोटो को खोजना है तो आस्क फीचर आपके लिए काफी बेहतरीन साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ थोड़े से पैसे लगाकर घर में लगा TV बन जाएगा होम थिएटर, काम करेंगी ये ट्रिक्स</title>
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        <description><![CDATA[ How to Set-up Home Theatre: बड़ी स्क्रीन पर फिल्में, स्पोर्ट्स और वेब सीरीज आदि देखने का अपना अलग ही मजा होता है. अगर यह सब कुछ होम थिएटर पर देखने को मिल जाए तो मजा दोगुना हो जाता है. अच्छी बात यह है कि आप अपने घर में लगे स्मार्ट टीवी को ही होम थिएटर के तौर पर अपग्रेड कर सकते हैं और इसके लिए ज्यादा पैसा खर्च करने की भी जरूरत नहीं है. आज हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जो आपको टीवी को ही होम थिएटर के तौर पर अपग्रेड करने में मदद करेंगी.
साउंडबार आएगा काम
अपने टीवी सेटअप को अपग्रेड करने के लिए साउंडबार की मदद लें. इसके लिए आपको ज्यादा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. एक अच्छा साउंडबार टीवी की साउंड को कई गुना बेहतर कर देता है. अगर आप साउंडबार के साथ सबवूफर भी खरीदते हैं तो आपको साउंड में दिन-रात का अंतर दिखेगा.
टीवी स्टिक या स्ट्रीमिंग बॉक्स से आसान होगा काम
अगर आपका स्मार्ट टीवी कुछ साल पुराना हो गया है तो इसकी स्पीड स्लो होने जैसे कई इश्यू आ जाते हैं. अगर इसकी इमेज और मोशन परफॉर्मेंस ठीक है तो इसे बदलने की बजाय आप टीवी स्टिक या स्ट्रीमिंग बॉक्स की मदद ले सकते हैं. ये बाजार में आसानी से अवेलेबल हैं और इनके लिए ज्यादा पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा.
बायस लाइट&amp;nbsp;
आप स्मार्ट टीवी के पीछे बायस लाइट लगाकर भी अपना विजुअल एक्सपीरियंस बेहतर कर सकते हैं. बायस लाइट और आपके टीवी की क्वालिटी का सीधा कोई संबंध नहीं होता, लेकिन इसकी मदद से आपके इमेज और विजुअल देखने का तरीका बदल जाता है. अगर आप अंधेरे में टीवी देखते हैं तो ये लाइट आपकी आंखों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर करती है. साथ ही इनकी मदद से आपका दिमाग टीवी पर चल रहे विजुअल को बेहतर कंट्रास्ट और वाइब्रेंसी के साथ परसिव करेगा.
टीवी की हाइट और डिस्टेंस को करें ठीक
टीवी देखने का एक्सपीरियंस इस पर भी डिपेंड करता है कि आप इससे कितनी दूर बैठे हैं और आपके व्यूइंग प्वाइंट से यह कितना ऊपर या नीचे है. टीवी की हाइट के लिए यह ध्यान रखें कि जब आप बैठें हो तो आपकी आंखें सीधी टीवी स्क्रीन के सेंटर पर जानी चाहिए, लेकिन अगर आप लेटकर टीवी देखते हैं तो इसे थोड़ा ऊपर रखा जा सकता है. इसी तरह टीवी और आपके बीच डिस्टेंस भी पर्याप्त होना चाहिए.
वाईफाई की जगह यूज करें ईथरनेट
वाईफाई का यूज बहुत आसान और सुविधाजनक है. आप घर में कहीं भी टीवी रखकर इसे वाईफाई से कनेक्ट कर सकते हैं, लेकिन वाईफाई कनेक्शन बहुत भरोसेमंद नहीं होता. इसकी स्पीड कम-ज्यादा होती रहती है. इसकी बजाय आप ईथरनेट का यूज कर भरोसेमंद कनेक्टिविटी पा सकते हैं.
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        <title>AI नियमों में छोटी सी गलती भी बन सकती है बड़ा खतरा! नई स्टडी ने बताई चौंकाने वाली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: टेक्नोलॉजी काफी तेजी से विस्तार कर रहा है. आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने लोगों के काम करने के तरीकों को काफी आसान बनाया है. लेकिन अब कई देशों में एआई के लिए कई सख्त नियम भी बना दिए हैं. लेकिन अब एक हैरान करने वाली स्टडी सामने आई है जिसके तहत एआई पर ज्यादा सख्ती भी लोगों को बहुत भारी पड़ सकती है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
कंपनियों पर हो रही सख्ती
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये स्टडी अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया है. उनका कहना है कि कई AI नियमों में जिम्मेदारी उन कंपनियों पर ज्यादा डाली जा रही है जो AI का इस्तेमाल करके ऐप्स या दूसरी जरूरी सर्विसेज बनाती हैं. लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए. दरअसल, ज्यादा ध्यान उन कंपनियों पर देने की जरूरत है जो AI मॉडल तैयार कर रही हैं.
इसके अलावा वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर AI बनाने वाली कंपनियों को ये पता चल जाता है कि प्रोडक्ट की सेफ्टी की जिम्मेदारी लास्ट में तय होगा तो वे इसके सेफ्टी पर कम ध्यान देने लगते हैं और इसे बिना ज्यादा टेस्ट के ही छोड़ देते हैं.
क्या है ये नया खतरा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नई स्टडी में फ्री-राइडिंग का भी जिक्र किया गया है. इसका मतलब है कि एक पक्ष ये मानकर चलता है कि दूसरा पक्ष पूरी जिम्मेदारी निभा लेगा. अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में देखा जाए तो ये कहा जा सकता है कि एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियां उसकी सेफ्टी की चिंता डेवलपर्स पर छोड़ सकती हैं.
ऐसे में सेफ्टी को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आ सकती है जो आगे आने वाले समय में एक बड़ा खतरा बन सकती है. ये स्टडी पूरी दुनिया में कंपनियों के लिए एक बड़ी चिंता बनती जा रही है. ऐसे में एआई पर ज्यादा सख्ती भी लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एआई का पूरे देश में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन इसपर लागू होने वाले नियमों पर भी ध्यान देने की जरूरत है जिससे यूजर्स की सेफ्टी का भी ध्यान रखा जा सके. इसके साथ ही बता दें कि डेवलपर्स को सेफ्टी का इतना ध्यान नहीं रहता है जिसका फायदा कंपनियां उठा लेती हैं.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>विदेश जाने से पहले जरूर जान लें ये टेक टिप्स, नहीं होगी इंटरनेट और पेमेंट की टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips For Travelling: दुनिया घूमना बहुत लोगों को सपना होता है, लेकिन कुछ ही लोग इसे पूरा कर पाते हैं. ट्रैवलिंग में मदद के लिए आपको तमात तरह के टूल्स मिल जाएंगे. इसी तरह सफर को आसान बनाने के लिए बहुत तरह की एक्सेसरीज भी मौजूद हैं. इन गैजेट और एक्सेसरीज के साथ-साथ आपको कई दूसरी चीजों का भी ध्यान रखना होता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि विदेशी यात्रा पर जाने से पहले आपको किन-किन जरूरी चीजों को दिमाग में रखना चाहिए.
मोबाइल प्लान कर लें चेक
अगर आप पहली बार देश से बाहर जा रहे हैं तो आपको मोबाइल प्लान का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा. अगर आप लोकल प्लान को ही बाहर जाकर यूज करते हैं तो यह आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ सकता है. डेटा रोमिंग में आपको मोटा खर्चा आएगा. इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले ही इंटरनेशनल डेटा प्लान के बारे में जानकारी जुटा लें. इससे आप बिना ज्यादा पैसे खर्च किए इंटरनेट से कनेक्टेड रह पाएंगे.
नया सिम कार्ड या ई-सिम खरीदें
अगर आपके मौजूदा टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर के पास इंटरनेशनल प्लान नहीं है तो आप नया सिम कार्ड या ई-सिम खरीद सकते हैं. इस तरह आप अपने डेस्टिनेशन के हिसाब से सबसे ज्यादा फायदों वाला कनेक्शन ले सकते हैं. अब ई-सिम भी एक अच्छा ऑप्शन है, जो अलग-अलग देशों में आपको फिजिकल सिम कार्ड खरीदने के झंझट से मुक्ति दिला सकता है.
ऑफलाइन मैप्स कर लें डाउनलोड
भले ही आपके फोन में इंटरनेशनल डेटा प्लान है या नहीं, इस बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि आप जिस जगह जा रहे हैं, वहां मोबाइल नेटवर्क एकदम शानदार होगा. अगर आप किसी रिमोट इलाके में जा रहे हैं तो मोबाइल नेटवर्क का इश्यू हो सकता है. इसलिए अपने फोन में ऑफलाइन मैप्स डाउनलोड कर लें. इसकी मदद से आप बिना कनेक्टिविटी के भी नेविगेशन कर पाएंगे.
Find My जैसी सर्विसेस को रखें ऑन
सफर के दौरान फोन के गुम या चोरी हो जाने का खतरा बना रहता है. अगर किसी नई जगह जाकर फोन चोरी होता है तो मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं. इससे बचने के लिए अपने फोन में फाइंड माई या इस जैसी किसी दूसरी सर्विस को इनेबल रखें. यह चोरी की स्थिति में फोन ट्रैक करने में आपकी मदद कर सकती है.
सफर के लिए रखें अलग फोन
अगर आप लगातार ट्रैवल करते रहते हैं तो सफर के लिए अलग फोन रखें. इसमें आप सिर्फ सफर से संबंधित डॉक्यूमेंट्स और फाइल्स ही स्टोर करें. अगर यह चोरी भी होता है तो आपका पर्सनल डेटा आपके प्राइमरी फोन में सेव रहेगा.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>हर QR Code एक जैसा नहीं होता! जानिए Static और Dynamic में क्या होता है अंतर और कैसे करते हैं काम</title>
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        <description><![CDATA[ Static Vs Dynamic QR Code: डिजिटल दुनिया में अब ज्यादातर काम लोग ऑनलाइन करने लगे हैं. ऐसे में क्यूआर कोड का भी ज्यादातर इस्तेमाल होने लगा है. ऑनलाइन पेमेंट से लेकर किसी प्रोडक्ट की जानकारी के लिए भी अब क्यूआर कोड का इस्तेमाल होने लगता है. इसी कड़ी में बता दें कि क्यूआर कोड भी दो तरह के होते हैं जिसमें डॉयनमिक और स्टेटिक क्यूआर कोड शामिल है. आइए जानते हैं कि दोनों में क्या होता है अंतर.
Dynamic QR Code क्या है
Dynamic QR Code ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी पर बेस्ड होता है. इसमें QR Code को दोबारा बदले बिना उसके अंदर मौजूद जानकारी या लिंक को कभी भी अपडेट किया जा सकता है. मान लीजिए आपने किसी ऐड में QR Code छपवा दिया और बाद में वेबसाइट का लिंक बदल गया. ऐसे में नया QR Code बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. केवल बैकएंड से लिंक अपडेट करने पर वही पुराना QR Code नई वेबसाइट खोलने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा.
Static QR Code क्या होता है
जानकारी के मुताबिक, Static QR Code एक परमानेंट QR Code होता है. इसमें जो जानकारी एक बार जोड़ दी जाती है उसे बाद में बदला नहीं जा सकता है. जैसे अगर किसी वेबसाइट का लिंक या कोई टेक्स्ट इसमें सेव कर दिया गया है तो वह हमेशा वही रहेगा. इस तरह का QR Code उन स्थितियों में बेहतर माना जाता है, जहां जानकारी भविष्य में बदलने की जरूरत नहीं होती है.
क्या होता है बड़ा अंतर
इन दोनों कोड के बीच के बड़े अंतर की बात करें तो Static QR Code में इनफॉर्मेशन हमेशा के लिए फिक्स रहती है जबकि Dynamic QR Code में कंटेंट को जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है. इसके अलावा Dynamic QR Code आपको ये भी बताएगा कि कोड कितनी बार स्कैन हुआ है, कहां स्कैन हुआ है और किस समय पर स्कैन किया गया है.
कौन सा होता है बेहतर
आपको बता दें कि अगर आपको केवल एक नॉर्मल लिंक या जानकारी शेयर करनी है जो आने वाले समय में बदलने वाली नहीं है तो Static QR Code आपके लिए सही ऑप्शन होगा. &amp;nbsp;वहीं, दूसरी ओर, अगर आप बिजनेस, मार्केटिंग कैंपेन, इवेंट, डिजिटल मेन्यू या प्रमोशनल ऑफर चला रहे हैं, जहां समय-समय पर जानकारी अपडेट करनी पड़ती है तो Dynamic QR Code बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Emergency Call Without SIM: फोन में सिम न होने पर भी कैसे लग जाती है 112 पर कॉल, कैसे काम करता है इमरजेंसी सिस्टम?  </title>
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        <description><![CDATA[ Emergency Call Without SIM: ज्यादातर फोन में इमरजेंसी काल का सिस्टम मौजूद रहता है, वही अगर पोन में सिम कार्ड न हो तो, कही भी फोन करना ना मुमकिन होता है, &amp;nbsp;लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना सिम कार्ड के भी फोन से 112 पर कॉल कैसे लग जाती है? यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह पूरी तरह सच है. भारत में 112 एक ऐसा इमरजेंसी नंबर है जो पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस, तीनों सेवाओं को एक साथ जोड़ता है. &amp;nbsp;सबसे खास बात यह है कि यह नंबर बिना सिम कार्ड, बिना नेटवर्क बैलेंस और यहां तक कि फोन लॉक होने पर भी डायल हो जाता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह, कैसे काम करता है यह सिस्टम?&amp;nbsp;
बिना सिम के कॉल क्यों लग जाती है?
दरअसल सिम कार्ड का काम सिर्फ यह बताना होता है कि यह नंबर किस व्यक्ति का है. यानी सेम कार्ड से आपको वह नंबर मिलता है, जिसके जरिए आप आपने परिवार, मित्र से बात करते हैं. लेकिन इमरजेंसी कॉल के लिए फोन को इस पहचान की जरूरत ही नहीं पड़ती. दुनिया भर के मोबाइल फोन एक तय स्टैंडर्ड के हिसाब से बनते हैं. इसमें यह नियम है कि इमरजेंसी नंबर बिना सिम के भी डायल हो सकें. जैसे ही आप 112 डायल करते हैं, फोन अपने आसपास मौजूद किसी भी मोबाइल कंपनी के टावर का सिग्नल पकड़ लेता है, चाहे वह आपकी अपनी कंपनी का न हो, यानी अगर आपके फोन में जियो का सिम है और आसपास सिर्फ एयरटेल का नेटवर्क आ रहा है, तब भी कॉल एयरटेल के टावर से होकर चली जाती है. यही वजह है कि नेटवर्क न होने या सिम न होने पर भी यह नंबर काम करता है.&amp;nbsp;
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लॉक फोन और पैनिक बटन से भी होती है मदद
आजकल के ज्यादातर स्मार्टफोन में यह सुविधा दी जाती है कि अगर आपका फोन लोक है पर फिर भी स्क्रीन पर एक &quot;इमरजेंसी कॉल&quot; का ऑप्शन दिखाई देता है. &amp;nbsp;इस पर टैप करते ही 112 डायल किया जा सकता है, बिना फोन को खोले. इसके अलावा कई स्मार्टफोन में पावर बटन को तीन बार तेजी से दबाने पर अपने आप 112 पर कॉल लग जाती है. इसके साथ ही भारत सरकार ने &quot;112 India&quot; नाम का एक ऐप भी बनाया है, जिससे मुसीबत में फंसा व्यक्ति एक बटन दबाकर अपनी लोकेशन के साथ SOS मैसेज भेज भी &amp;nbsp;सकता है.&amp;nbsp;
अगर बात करें कि कॉल के बाद क्या होता है, तो&amp;nbsp; जैसे ही आप 112 डायल करते हैं, आपकी कॉल सीधे &amp;nbsp;Emergency Responce Center के पास जाती है. वहां बैठा ट्रेंड ऑपरेटर आपसे परेशानी के बारे में पूछता है और जरूरत के हिसाब से पुलिस, फायर या एम्बुलेंस को सूचना देता है. &amp;nbsp;सबसे दिलचस्प बात यह है कि बीना सिम कारेड के बस आप कॉल ही नहीं कर सकता है बल्कि इससे आपकी &amp;nbsp;लोकेशन का भी पता चल जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>BSNL Cheapest Plans: सिम एक्टिव रखना है? ये है BSNL का सबसे सस्ता प्लान, कॉलिंग के साथ मिलेगा डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ BSNL Cheapest Plans: ज्यादातर लोगों के पास एक सिम कार्ड के अलावा एक सेकेंडरी सिम भी होती है, जिसे बस एक्टिव रखने के लिए रिचार्ज करना पड़ता है. ऐसे में उन्हें दोनों सिम को रिचार्ज करना पड़ता है.&amp;nbsp; कई बार वे एक सिम के साथ साथ दूसरे को रिचार्ज नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण उनका BSNL नंबर बंद हो जाता है, औसे में अगर आप भी अपने BSNL नबंर को बंद होने से बचाना चाहते हैं और साथ में कुछ कॉलिंग मिनट और डेटा भी चाहते हैं, तो आपको जान कर खुशी होगी कि BSNL का एक ऐसा प्लान है जिससे आप ये सारे लाभ उठा सकता है. साथ ही यह प्लान मार्केट के सबसे सस्ते प्लान में गिना जाता है और इसमें कॉलिंग के साथ-साथ डेटा भी मिल जाता है. आइए जानते हैं इस प्लान के बारे में पूरी जानकारी.&amp;nbsp;
107 रुपये में क्या-क्या मिलता है?
अगर आप भी अपना BSNL नंबर बंद होने से बचाना चाहते हैं और साथ में कुछ कॉलिंग मिनट और डेटा भी चाहते हैं, तो BSNL का 107 रुपये वाला प्लान आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है.&amp;nbsp;BSNL के इस प्लान में आपको 200 मिनट लोकल, STD और रोमिंग कॉलिंग मिलती है.&amp;nbsp; इसमें MTNL नेटवर्क पर कॉल करना भी शामिल है, यानी अगर आप दिल्ली या मुंबई में हैं तो वहां पर भी यह प्लान काम करेगा.&amp;nbsp; इसके साथ ही इस प्लान में 3GB हाई-स्पीड डेटा भी मिलता है. सबसे खास बात ये है कि जब यह 3GB डेटा खत्म हो जाता है, तो इंटरनेट स्पीड 40 Kbps पर आ जाती है, यानी डेटा पूरी तरह बंद नहीं होता बल्कि धीमी स्पीड पर चलता रहता है. इस प्लान कि वैलिडिटी कि बात करें तो, इसको अब करीब 20 दिन रह गई है, जो पहले 35 दिन हुआ करती थी.&amp;nbsp;
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प्लान कैसे रिचार्ज करें?
इस प्लान को रिचार्ज करना बहुत आसान है. इसको आप MyBSNL ऐप के जरिए, BSNL की ऑफिशियल वेबसाइट से, दुकान से, या फिर पेटीएम, गूगल पे, फोनपे जैसे ऐप्स से यह रिचार्ज कर सकते हैं. एसके लिए बस अपना मोबाइल नंबर डालना होगा, फिर 107 रुपये का प्लान चुनें और पेमेंट कर दें. ध्यान रखें कि अलग-अलग सर्किल यानी राज्यों में इस प्लान के बेनिफिट्स थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए रिचार्ज करने से पहले एक बार अपने सर्किल के हिसाब से प्लान डिटेल्स जरूर चेक कर लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>हर दिन आते हैं WhatsApp पर अनजान कॉल? इस Hidden फीचर को ON करते ही मिल जाएगा छुटकारा</title>
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        <description><![CDATA[ हर दिन आते हैं WhatsApp पर अनजान कॉल? इस Hidden फीचर को ON करते ही मिल जाएगा छुटकारा ]]></description>
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        <title>आपके iPhone में कौन&amp;सा iOS चल रहा है? 30 सेकंड में ऐसे कर सकते हैं पता, जानिए पूरा प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ आपके iPhone में कौन-सा iOS चल रहा है? 30 सेकंड में ऐसे कर सकते हैं पता, जानिए पूरा प्रोसेस ]]></description>
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        <title>मोबाइल यूजर्स सावधान! लगातार स्क्रॉलिंग से बढ़ सकती है ये समस्या, जानिए कैसे करें बचाव?</title>
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>ऑफलाइन स्टोर या ऑनलाइन, कहां से खरीदना चाहिए नया फोन? ये बातें जान लीं तो नहीं रहेगा कंफ्यूजन</title>
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        <description><![CDATA[ Offline vs Online Phone Shopping: नया फोन खरीदना अब मुश्किल नहीं रहा है. आप घर बैठे-बैठे अपनी पसंद का फोन मंगवा सकते हैं. अगर आप दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहते हैं तो कुछ कंपनियां एक घंटे के भीतर आपका फोन डिलीवर कर देती हैं. दूसरी तरफ अगर आप फोन खरीदने से पहले उसका एक्सपीरियंस लेना चाहते हैं तो ऑफलाइन स्टोर में जाकर शॉपिंग करना फायदेमंद रहता है. ऑफलाइन और ऑनलाइन शॉपिंग के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि फोन खरीदने के लिए ऑनलाइन तरीका कब सही रहता है और किस स्थिति में आपको ऑफलाइन स्टोर जाकर फोन खरीदना चाहिए.
ऑनलाइन शॉपिंग है एकदम आसान
दूसरे प्रोडक्ट्स की तरह फोन की ऑनलाइन शॉपिंग एकदम आसान है. आप गूगल, सैमसंग और ऐप्पल आदि कंपनियों की वेबसाइट पर जाकर या फ्लिपकार्ट, विजय सेल्स और अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अपना फोन ऑर्डर कर सकते हैं. अगर आप किसी कंपनी का फोन पहले से यूज कर रहे हैं और उसी कंपनी का अपग्रेडेड मॉडल लेना चाहते हैं तो ऑनलाइन शॉपिंग एक बेहतर च्वॉइस है. आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है और घर बैठे इसे ऑर्डर किया जा सकता है. हालांकि, इसके कुछ नुकसान भी हैं. सबसे बड़ा झंझट शिपिंग को लेकर रहता है. कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां फोन ऑर्डर करने पर लोगों को साबुन जैसे प्रोडक्ट डिलीवर हुए हैं. इसके अलावा टाइम को लेकर भी इश्यू रहता है. कई बार ऑर्डर डिलीवर होने में हफ्तेभर का समय लग जाता है. फिर अगर किसी कारणवश यह पसंद न आए तो पिक-अप और दोबारा डिलीवर होन में हफ्ते का समय और लग सकता है. ऐसे में अगर आपको तुरंत फोन चाहिए तो ऑनलाइन शॉपिंग का तरीका काम नहीं आता.
कब करनी चाहिए ऑफलाइन शॉपिंग?
अगर आपको तुरंत नया फोन चाहिए तो ऑफलाइन स्टोर आपके काम आते हैं. यहां जाकर आप कुछ ही देर में अपनी पंसद का फोन खरीद सकते हैं. इसके अलावा अगर आप किसी ब्रांड का फोन पहली बार ले रहे हैं तो स्टोर पर जाकर उसका एक्सपीरियंस लिया जा सकता है. यहां आपको फोन खरीदने से पहले ही उसके फीचर, स्पेसिफिकेशंस, बिल्ड क्वालिटी और कैमरा आदि को एक्सपीरियंस करने का मौका मिलता है. इसके अलावा स्टोर के कर्मचारी फोन सेटअप करने में भी आपकी मदद कर देंगे. इसके नुकसान की बात करें तो कई बार किसी स्टोर में स्टॉक का इश्यू रहता है. इसके अलावा सेल्समैन आपको बजट से बाहर का फोन खरीदने पर भी तैयार कर लेते हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>ऑफलाइन, स्टोर, या, ऑनलाइन, कहां, से, खरीदना, चाहिए, नया, फोन, ये, बातें, जान, लीं, तो, नहीं, रहेगा, कंफ्यूजन</media:keywords>
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        <title>जैमर से कैसे बंद हो जाता है इंटरनेट? जानिए कैसे करता है काम और क्या है उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ How Jammer Works: सोमवार को जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर मोबाइल सिग्नल नहीं आ रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने कुछ जगहों पर पोर्टेबल मोबाइल जैमर लगाए थे. ऐसा पहली बार नहीं है, जब किसी प्रदर्शन स्थल पर जैमर का इस्तेमाल किया गया है. कई बार पहले भी प्रदर्शन स्थल, परीक्षा केंद्रों और दूसरी संवेदनशील जगहों पर जैमर का इस्तेमाल होता आया है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि जैमर क्यों लगाए जाते हैं और ये काम कैसे करते हैं.&amp;nbsp;
दिल्ली पुलिस ने क्यों लगाए जैमर?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर मोबाइल जैमर लगाए थे. पुलिस इस इलाके के आसपास के मोबाइल कम्युनिकेश को टेंपरेरी तौर पर ब्लॉक करना चाहती थी. अधिकारियों को मानना है कि इससे लोगों में रियल-टाइम कॉर्डिनेशन नहीं हो पाता और सेंसेटिव एक्शन लाइव स्ट्रीमिंग के चांस भी कम हो जाते हैं. बताया जा रहा है कि पुलिस ने इन्हें स्पेसिफिकेशन लोकेशन पर लिमिटेड टाइम के लिए ही इंस्टॉल किया था.
कैसे काम करते हैं जैमर?
मोबाइल जैमर के काम करने का तरीका सिंपल होता है. इसे जिस एरिया में इंस्टॉल किया जाता है, यह उसके आसपास की जगहों पर मोबाइल नेटवर्क को जाम कर देता है. ऑन होने के बाद जैमर उसी फ्रीक्वैंसी पर रेडियो वेव्स छोड़ता है, जिस फ्रीक्वैंसी पर 3G, 4G और 5G नेटवर्क आता है. जैमर से निकली वेव्स स्ट्रॉन्ग होती है और ये मोबाइल टावर से फोन तक आने वाले सिग्नल को रोक देती है. इससे फोन मोबाइल नेटवर्क से कनेक्ट नहीं हो पाता. यही वजह होती है कि जैमर की रेंज में आने वाले डिवाइस पर न तो इंटरनेट काम करता है और न ही कॉलिंग और मैसेज हो पाते हैं. यह ध्यान रहे कि जैमर को टेंपरेरी तौर पर इंस्टॉल किया जाता है और यह केवल अपनी रेंज में आने वाले डिवाइसेस पर असर डालता है. जैमर के बंद होते ही मोबाइल नेटवर्क बहाल हो जाता है.
जैमर ऑन होने की स्थिति में आप क्या करें?
अगर जैमर ऑन है और आप इसकी रेंज के भीतर हैं तो आपका फोन मोबाइल नेटवर्क से कनेक्ट नहीं होगा. इसमें आपके फोन की कोई कमी नहीं है. जैमर ऑन होने तक यह मोबाइल टावर से आपके फोन तक सिग्नल नहीं पहुंचने देगा. इससे बचने के लिए आप अपनी जगह से दूर जा सकते हैं. जैसे ही आप जैमर की रेंज से बाहर होंगे, आपका फोन अपने आप ही नेटवर्क से कनेक्ट हो जाएगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>फ्रिज यूज करते हैं तो तुरंत जान लें ये बात, नहीं तो हर महीने बेवजह खर्च होंगे हजारों रुपये</title>
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        <description><![CDATA[ Fridge Use Tips: फ्रिज घर का एक ऐसा अप्लायंस है, जिसे रोजाना इस्तेमाल किया जाता है. सर्दी में इसकी जरूरत थोड़ी कम हो जाती है, लेकिन यूज पूरी तरह बंद नहीं होता. पूरे दिन चलने के कारण यह बिजली की खपत भी ज्यादा करता है, जिसका सीधा असर बिजली बिल पर पड़ता है. अगर आप फ्रिज यूज करते समय बिजली बचाने चाहते हैं तो एक छोटा-सा काम करना पड़ेगा. कई बार लोग स्पेस बचाने के लिए फ्रिज को एकदम दीवार से सटाकर खड़ा कर देते हैं. अगर आप भी फ्रिज को दीवार से सटाकर रखते हैं तो इसे दीवार से दूर करने की जरूरत है. आइए जानते हैं कि फ्रिज और दीवार के बीच स्पेस होना क्यों जरूरी है.&amp;nbsp;
फ्रिज को दीवार के एकदम पास रखने पर क्या होता है?
आमतौर पर कंडेनसर कॉयल और कंप्रेसर को फ्रिज के पीछे लगाया जाता है. कुछ मॉडल्स में इन्हें साइड में भी दिया जाता है. दोनों ही स्थिति में इसे अच्छे वेंटिलेशन की जरूरत पड़ती है. अगर इसे दीवार से एकदम सटाकर खड़ा कर दिया जाए तो इन दोनों ही पार्ट्स से जनरेट होने वाली हीट को बाहर निकलने की जगह नहीं मिलेगा. इससे इनका टेंपरेचर बढ़ जाएगा और इन्हें फ्रिज में रखे सामान को ठंडा करने के लिए ज्यादा काम करना पड़ेगा. इससे बिजली की भी ज्यादा खपत होगी और इन पार्ट्स पर लोड भी बढ़ेगा. गर्मी के मौसम में तापमान ज्यादा होने के चलते स्थिति और भी खराब हो जाती है. अगर लंबे समय तक इन पार्ट्स पर ज्यादा लोड पड़ेगा तो इनके खराब होने के चांस भी बढ़ जाएंगे.
फ्रिज और दीवार के बीच क्यों होना चाहिए स्पेस?
कंडेनसर कॉयल और कंप्रेसर से जनरेट होने वाली हीट को बाहर निकलने के लिए स्पेस की जरूरत होती है. अगर फ्रिज और दीवार के बीच स्पेस है तो हवा सर्कुलेट होगी और हीट बाहर निकल पाएगी. हीट जमा न होने के कारण पार्ट्स पर लोड कम पड़ेगा. इसके दो फायदे होंगे. पहला बिजली की बचत होगी और दूसरा फायदा यह होगा कि पार्ट्स पर लोड कम पड़ेगा और ये लंबे समय तक बिना खराबी के काम कर पाएंगे.
कितना स्पेस है जरूरी?
दीवार और फ्रिज के बीच उतना स्पेस काफी होता है, जिससे हवा सर्कुलेट हो सके. अगर आपके पास पर्याप्त जगह है तो फ्रिज को दीवार से 1-2 फुट दूर रखा जा सकता है. अगर जगह की कमी है तो इसे दीवार से 4-6 इंच दूर रखें. इससे हवा आसानी से सर्कुलेट हो जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>खुलने वाला है ऐप्पल का पिटारा, फोल्डेबल फोन के अलावा लॉन्च होंगे 10 से ज्यादा नए डिवाइस</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Upcoming Products: फोल्डेबल आईफोन का इंतजार कर रहे ऐप्पल फैन्स के लिए कंपनी का पिटारा खुलने वाला है. आईफोन 18 प्रो मॉडल्स और पहले फोल्डेबल आईफोन के अलावा भी कंपनी जल्द ही कई नए प्रोडक्ट्स लाने वाली है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले कुछ दिनों में ऐप्पल की तरफ से नए आईपैड, मैक और स्मार्ट होम प्रोडक्ट्स देखने को मिलेंगे. आगामी महीनों में ऐप्पल के कुल 14 प्रोडक्ट्स आने हैं, जिनमें से कुछ की लॉन्चिंग 2027 की शुरुआत में हो सकती है. आइए एक नजर डालते हैं कि आईफोन के साथ-साथ कंपनी किन दूसरे प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग की तैयारी में जुटी हुई है.
सितंबर में लॉन्च होंगे नए आईफोन&amp;nbsp;
नए आईफोन का इंतजार सितंबर में समाप्त हो जाएगा. सितंबर के दूसरे सप्ताह में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone Ultra लॉन्च किया जाएगा. Pro मॉडल्स को अब तक की सबसे बड़ी अपग्रेड के साथ लॉन्च किए जाने की पूरी उम्मीद है. ये दोनों ही मॉडल A20 Pro चिपसेट, मेन कैमरा पर वेरिएबल अपर्चर, बड़ी बैटरी और एनर्जी एफिशिएंट डिस्प्ले के साथ लॉन्च होंगे. अगर लुक की बात करें तो डायनामिक आईलैंड को छोटा किया जाएगा. इनमें फेसआईडी कंपोनेंट को डिस्प्ले के अंडर शिफ्ट किया जा रहा है. अगर iPhone Ultra की बात करें तो इस पर ऐप्पल फैन्स के साथ-साथ पूरी टेक इंडस्ट्री की नजर लगी टिकी हुई है. इसमें 7.7 इंच का इनर डिस्प्ले और 5.3 इंच का कवर डिस्प्ले मिलेगा. iOS 27 अपडेट के साथ यह आईफोन कई मल्टीटास्किंग फीचर के साथ लॉन्च होने की उम्मीद है.
आईफोन के अलावा इन प्रोडक्ट्स पर चल रहा काम
ऐप्पल इन दिनों अपने कई मैक मॉडल को रिफ्रेश करने के काम में भी जुटी हुई है. साल के अंत तक एक नया एंट्री लेवल 14 इंच का मैकबुक प्रो आ सकता है, जिसमें M6 चिपस होगी. इसी तरह मैक स्टूडियो, मैक मिनी और आईमैक को भी M5 सीरीज के चिपसेट के साथ अपडेट किया जाएगा. इसके अलावा ऐप्पल MacBook Ultra नाम से नया लैपटॉप भी लाएगी. इसे 2027 के शुरुआती महीनों में उतारा जा सकता है. इसमें OLED डिस्प्ले, टचस्क्रीन सपोर्ट, पतला डिजाइन और आईफोन के डायनामिक आईलैंड जैसा इंटरफेस दिया जाएगा.
अपग्रेडेड आईपैड का इंतजार भी होगा खत्म
ऐप्पल अपनी आईपैड लाइनअप को भी अपग्रेड कर रही है. स्टैंडर्ड iPad 12 को A16 चिप से अपग्रेड कर A18 या A19 प्रोसेसर दिया जाएगा, जो ऐप्पल इंटेलीजेंस सपोर्ट के साथ आएगा. आईपैड मिनी को भी नया और फास्टर चिपसेट, OLED डिस्प्ले और इम्प्रूव्ड स्पीकर के साथ लाया जाएगा. वीयरेबल प्रोडक्ट्स की बात करें तो Apple Watch Series 12 और Apple Watch Ultra 4 का इंतजार भी जल्दी खत्म होगा. इनमें नए एडवांस्ड हेल्थ सेंसर मिलने की उम्मीद है.
इन स्मार्टहोम डिवाइस पर टिकी हैं नजरें
बाकी प्रोडक्ट्स के साथ-साथ ऐप्पल का स्मार्ट होम डिवाइसेस पर भी फोकस है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी एक नया होम हब ला सकती है, जिसमें 7 इंच का डिस्प्ले, A18 और नया सिरी एक्सपीरियंस एड किया जाएगा. इसके अलावा अपडेटेड ऐप्पल टीवी, होमपॉड और होमपॉड मिनी का इंतजार भी जल्द खत्म होने वाला है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>50,000 से भी ज्यादा की छूट! Samsung Galaxy S25 Ultra पर आ गया सबसे बड़ा डिस्काउंट</title>
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        <description><![CDATA[ Galaxy S25 Ultra Price Crash: अगर आप बजट प्राइस में फ्लैगशिप डिवाइस खरीदना चाह रहे हैं तो सैमसंग के Galaxy S25 Ultra फोन पर शानदार डील मिल रही है. अगर आप इसके डिस्काउंट और बैंक ऑफर्स आदि सब को मिला लें तो 50,000 रुपये से ज्यादा की बचत कर सकते हैं. बता दें कि Galaxy S25 Ultra को लॉन्च हुए भले ही 1.5 साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन अपने फीचर्स और लुक के दम पर यह लेटेस्ट मॉडल्स को भी टक्कर देता है. आइए इस फोन के दमदार फीचर्स और इस पर मिल रही छूट के बारे में विस्तार से जान लेते हैं.
Galaxy S25 Ultra में क्या कुछ मिलता है?
सैमसंग ने Galaxy S25 Ultra को 6.9 इंच की QHD+ Dynamic AMOLED 2X स्क्रीन के साथ लॉन्च किया था, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इसमें Snapdragon 8 Elite चिपसेट लगा है, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. फोटो और वीडियो के लिए फोन के रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का अल्ट्रावाइड लेंस, 50MP का टेलीफोटो सेंसर और 10MP का एडिशनल 3x टेलीफोटो लेंस मिलता है. इसके फ्रंट में 12MP का सेंसर लगा हुआ है. फोन में लगा 5,000mAh का बैटरी पैक 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है. डिस्प्ले से लेकर प्रोसेसर और कैमरा से लेकर बैटरी पैक तक के मामले में यह फोन दमदार है.
Galaxy S25 Ultra पर कहां मिल रही छूट?
भारत में इस फोन को 1,29,900 रुपये में लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी फ्लिपकार्ट पर यह धांसू डिस्काउंट के साथ उपलब्ध है. फ्लिपकार्ट पर इस फोन को 89,443 रुपये में लिस्ट किया गया है. 40,000 रुपये से ज्यादा के सीधे डिस्काउंट के अलावा इस पर 4,000 रुपये के बैंक ऑफर और 4,000 रुपये का कैशबैक दिया जा रहा है. इस तरह इसकी कीमत 81,443 रुपये रह जाती है. अब अगर आप इसके बदले में पुराने फोन को एक्सचेंज करते हैं तो उस पर भी हजारों रुपये की बचत की जा सकती है. इन सारी चीजों को मिलाकर आप Galaxy S25 Ultra पर 50,000 रुपये से ज्यादा की छूट प्राप्त कर सकते हैं. इस कीमत में यह फ्लैगशिप मॉडल एक धांसू ऑप्शन बन जाता है.&amp;nbsp;
Google Pixel 10 पर भी उठाएं डिस्काउंट का फायदा
इस समय गूगल पिक्सल पर भी डिस्काउंट का फायदा उठाया जा सकता है. 79,999 रुपये में लॉन्च हुआ यह फोन अमेजन पर 67,200 रुपये में लिस्टेड है. इस पर 2,000 रुपये का कैशबैक भी दिया जा रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>आपके Power Bank में जरूर होने चाहिए ये 4 सेफ्टी फीचर्स! एक छोटी गलती बना सकती है बड़ा खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ Power Bank: स्मार्टफोन के साथ आज कल लोग पावर बैंक का इस्तेमाल भी करने लगे हैं. ये डिवाइस लोगों को ईमरजेंसी स्थिति में काफी काम आता है. बता दें कि आज मार्केट में कई तरह के पावर बैंक मौजूद हैं जो कई घंटों के पावर बैकअप का दावा करते हैं. लेकिन आपको बता दें कि पावर बैंक खरीदते समय उनमें ये 4 सेफ्टी फीचर्स जरुर चेक कर लेने चाहिए नहीं तो बाद में आपको पछताना पड़ सकता है. आइए जानते हैं कौन-कौन से सेफ्टी फीचर्स होते हैं जरूरी.
Temperature Control और Overheat Protection
ज्यादातर पावर बैंक में देखा गया है कि वो चार्जिंग के दौरान हल्के गर्म होने लगते हैं लेकिन डिवाइस का जरूरत से ज्यादा गर्म होना भी खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए ऐसे मॉडल को खरीदना बेहतर होता है जिसमें Temperature Control या Overheat Protection जैसे फीचर मौजूद हों. ये फीचर तापमान बढ़ने पर चार्जिंग स्पीड को कंट्रोल करता है या जरूरत पड़ने पर चार्जिंग बंद कर देता है.
Short Circuit Protection
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अक्सर खराब केबल, धूल या किसी तकनीकी खराबी के कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है. ऐसे में आपके Power Bank में Short Circuit Protection फीचर का होना बहुत जरूरी होता है जो आपको होने वाले खतरे से बचाने में मदद करता है. इससे स्पार्क, आग लगने या डिवाइस को नुकसान पहुंचने जैसी घटनाओं से बचाव होता है.
Overcharge Protection
आपको बता दें कि एक बेहतरीन पावर बैंक में Overcharge Protection जरुर मौजूद होना चाहिए. ये फीचर डिवाइस के पूरी तरह चार्ज होने के बाद अपने आप चार्जिंग को कंट्रोल कर देता है. इससे फोन की बैटरी पर एक्सट्रा दबाव नहीं पड़ता और ओवरहीटिंग या बैटरी खराब होने का खतरा काफी कम हो जाता है. ये फीचर Power Bank की लाइफ भी बढ़ाने में भी मदद करता है.
Overcurrent और Overvoltage Protection
आपको बता दें कि हर स्मार्टफोन को एक निश्चित मात्रा में करंट और वोल्टेज की जरूरत होती है. अब ऐसे में अगर Power Bank जरूरत से ज्यादा करंट या वोल्टेज भेजने लगे तो स्मार्टफोन की बैटरी खराब हो सकती है. इसीलिए पावर बैंक में Overcurrent और Overvoltage Protection फीचर होना चाहिए जो बिजली की सप्लाई को सुरक्षित स्तर पर बनाए रखते हैं जिससे आपका फोन सेफ रहता है और चार्जिंग भी स्थिर रहती है. इसीलिए अगर आप भी पावर बैंक खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो इन फीचर्स को जरूर चेक कर लें.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>कैमरे के सामने रहेंगे फिर भी नहीं होगी पहचान, ये कपड़े पहनकर AI को भी दे देंगे चकमा!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कैमरे-के-सामने-रहेंगे-फिर-भी-नहीं-होगी-पहचान-ये-कपड़े-पहनकर-ai-को-भी-दे-देंगे-चकमा</link>
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        <description><![CDATA[ कैमरे के सामने रहेंगे फिर भी नहीं होगी पहचान, ये कपड़े पहनकर AI को भी दे देंगे चकमा! ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone Vs Samsung! कौन&amp;सा फोन बेचने पर मिलेगा ज्यादा पैसा? सच जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram और Facebook अचानक हुए ठप! Login से लेकर Feed तक, यूजर्स हुए परेशान, मेटा ने क्या बताई वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram and Facebook Down: आज मेटा के दो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक ने अचानक से काम करना बंद कर दिया जिससे दुनियाभर के यूजर्स को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है. इंस्टाग्राम पर कुछ भी पोस्ट करने में परेशानी हो रही थी तो फेसबुक पर वीडियो पोस्ट या अपलोड नहीं हो रहे थे. बता दें कि इस आउटेज का असर भारत, अमेरिका, सिंगापुर समेत कई देशों में देखने को मिला है.
Instagram पर फीड और मैसेजिंग में परेशानी
Downdetector के मुताबिक, आज भारत में दोपहर करीब 2:20 बजे तक Instagram से जुड़ी करीब 1,900 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं थी. यूजर्स ने बताया कि उनका फीड रिफ्रेश नहीं हो रहा था, ऐप के कुछ सेक्शन खुल नहीं रहे थे और डायरेक्ट मैसेज (DM) भेजने में भी समस्या आ रही थी.
हालांकि, सभी यूजर्स को ये परेशानी हो ऐसा सामने नहीं आया है. कुछ लोग ऐप खोल पा रहे थे लेकिन कई फीचर्स काम नहीं कर रहे थे जबकि कुछ के लिए Instagram पूरी तरह से लोड ही नहीं हो रहा था.
Facebook यूजर्स भी रहे परेशान
जानकारी के मुताबिक, ये आउटेज सिर्फ Instagram तक सीमित नहीं था बल्कि Facebook भी इसके लपेटे में था. जी हां, दरअसल, फेसबुक यूजर्स को भी ऐप को इस्तेमाल करने में काफी समस्याएं हुई हैं. भारत में 600 से ज्यादा फेसबुक से संबंधित शिकायतें दर्ज हुईं जिनमें वेबसाइट और ऐप खोलने, न्यूज फीड लोड न होने और अकाउंट फीचर्स तक पहुंचने में दिक्कत शामिल थी.
Meta ने नहीं बताई वजह
आपको बता दें कि फिलहाल अभी तक मेटा ने इस मामले पर कोई जानकारी शेयर नहीं करी है. कंपनी ने ये भी नहीं बताया कि सभी सर्विस पूरी तरह नॉर्मल होने में कितना समय लगेगा. हालांकि, Downdetector पर कुछ समय बाद शिकायतों की संख्या काफी कम हो गई थी जिससे माना जा सकता है कि सर्विस फिर से धीरे-धीरे शुरू हो चुकी हैं.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Demand of Gen Z Electricians: AI कंपनियां Gen Z इलेक्ट्रिशियन को दे रही 2.7 करोड़ रुपये तक की सैलरी? जानिए क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Demand of Gen Z Electricians: आजकल हर जगह AI&amp;nbsp; चर्चा में है, और इसने नौकरियों की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. इस साल अकेले Amazon, Meta, Oracle और TCS जैसी बड़ी कंपनियों से मिलाकर करीब 1 लाख 20 हजार से ज्यादा टेक कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है. लेकिन इसी बीच सिलिकॉन वैली में एक ऐसी नौकरी है जो चुपचाप बहुत मुनाफे वाली बन गई है, और वह है इलेक्ट्रिशियन की नौकरी. डर्टी जॉब्स TV शो के फाउंडर माइक रो का कहना है कि AI कंपनियां अब Gen Z के युवा इलेक्ट्रिशियनों को करोड़ों रुपये की सैलरी देने को तैयार हैं. आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों हो रहा है.&amp;nbsp;
कितनी सैलरी मिल रही है इलेक्ट्रिशियनों को?
माइक रो ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उन्होंने दो महीने पहले टेक्सास के प्लानो शहर में एक डेटा सेंटर में कुछ इलेक्ट्रिशियनों से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा, &quot;मैंने जिन इलेक्ट्रिशियनों से बात की, वे सभी 30 साल से कम उम्र के थे और उन्हें सालाना 2 लाख 40 हजार डॉलर यानी करीब 2.3 करोड़ रुपये से लेकर 2 लाख 80 हजार डॉलर यानी करीब 2.7 करोड़ रुपये तक की सैलरी मिल रही थी.&amp;nbsp;
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आखिर AI कंपनियों को इलेक्ट्रिशियन की इतनी जरूरत क्यों है?
दरअसल, AI मॉडल्स को चलाने के लिए बहुत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है, खासकर ऐसे AI डेटा सेंटर की जिनमें हजारों GPU लगे होते हैं. AI की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियां लगातार नए-नए डेटा सेंटर बना रही हैं और इसी वजह से डेटा सेंटर बनाने वाली जगहों पर इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर और कंस्ट्रक्शन मैनेजर की भारी मांग हो गई है.
Fortune की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को सामान्य कंस्ट्रक्शन काम से करीब 32 प्रतिशत ज्यादा सैलरी मिल रही है, जो सालाना करीब 81,800 डॉलर यानी करीब 78 लाख रुपये अतिरिक्त बैठती है. एक अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेटा सेंटर बनाने का काम अब दुनियाभर में सबसे ज्यादा मजदूरों की कमी झेल रहा कंस्ट्रक्शन सेक्टर बन गया है.&amp;nbsp;सिर्फ AI डेटा सेंटर ही नहीं, बल्कि प्लंबर, मैकेनिक और टेक्नीशियन जैसी बाकी हाथ से काम करने वाली नौकरियों की मांग भी अभी काफी ज्यादा बनी हुई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Apple यूजर्स को बड़ा झटका! Mac&amp;iPad के बाद अब ये सर्विस भी हो गई महंगी, जानिए क्या है नई कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Apple One: एप्पल ने हाल ही में अपने आईपैड और मैकबुक की कीमतों में इजाफा किया था. वहीं, अब कंपनी ने एप्पल वन और एप्पल म्यूजिक के सब्सक्रिप्शन प्लान्स को भी महंगा कर दिया है. बता दें कि रैम और स्टोरेज के महंगे होने के कारण कंपनी ने आईपैड और मैकबुक को महंगा किया था. वहीं, अब इन सब्सक्रिप्शन प्लान्स को भी महंगा करके कंपनी ने अपने यूजर्स को एक और झटका दे दिया है. आइए जानते हैं क्या है नई कीमत.
क्यों हुई कीमतों में बढ़ोतरी
Apple के अनुसार, म्यूजिक लाइसेंसिंग पर आने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसी वजह से कंपनी ने Apple Music और Apple One की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है. हालांकि, बढ़ी हुई कीमत के साथ अब यूजर्स को कुछ एडिशनल फीचर्स भी इस्तेमाल करने को मिल जाएंगे.
Apple One प्लान्स भी हुए महंगे
जानकारी के मुताबिक, Apple ने अपने Apple One बंडल सब्सक्रिप्शन की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है. इस प्लान के जरिए एक ही मेंबरशिप में Apple Music, Apple TV+, Apple Arcade, iCloud+, Apple Fitness+ जैसे फीचर्स मिल जाएंगे.

Individual Plan की नई कीमत 195 रुपये.
Family Plan की नई कीमत 295 रुपये.
Premier Plan की नई कीमत 995 रुपये.

आपको बता दें कि स्ट्रीमिंग सर्विसेज की कीमतों को सिर्फ एप्पल ने ही नहीं बढ़ाया है. बता दें कि इससे पहले Spotify ने भी अमेरिका सहित कई देशों में अपने Individual और Family सब्सक्रिप्शन प्लान्स की कीमतों में बढ़ोतरी की थी.
महंगा हुआ Apple Music
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब Apple Music इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे. बता दें कि कंपनी ने ज्यादातर मेन प्लान्स की कीमतों में इजाफा किया है. जानकारी के अनुसार, कंपनी ने Individual Plan की कीमत को 119 रुपये से बढ़ाकर 139 रुपये प्रति माह कर दी है. वहीं, Family Plan की कीमत को 179 रुपये से बढ़ाकर 229 रुपये प्रति माह और Student Plan की कीमत को 59 रुपये की जगह 69 रुपये प्रति माह कर दिया है.
माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी स्ट्रीमिंग प्लान्स की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. हालांकि, फिलहाल भारत में एप्पल ने इन कीमतों में बढ़ोतरी करके अपने यूजर्स को जरूर निराश किया है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>अब कपड़े पहनाएंगे रोबोट! इस नई टेक्नोलॉजी ने पूरी दुनिया को कर दिया हैरान, जानिए किस देश ने किया ये कारनामा</title>
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        <description><![CDATA[ Robot: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के समय में पूरी दुनिया में काफी तेजी से अपने पैर पसार रहा है. एक तरह ये लोगों की नौकरी पर खतरा बना हुआ है तो वहीं, दूसरी तरफ, एआई की मदद से ऐसे-ऐसे रोबोट्स तैयार हो रहे हैं जो मुश्किल से मुश्किल काम मिनटों में निपता देंगे. इसी कड़ी में बता दें कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने वैज्ञानिकों की टीम ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अब आपको कपड़े पहनाने का काम करेगा.
क्या है ये नई टेक्नोलॉजी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये टेक्नोलॉजी दक्षिण कोरिया के KAIST और अमेरिका की Stanford University के शोधकर्ताओं ने तैयार की है. इसमें कपड़ों के अंदर बेहद मुलायम और फ्लेक्सिबल एयर-प्रेशर बेस्ड ट्यूब (वाइन रोबोट) लगाई गई हैं. इनमें हवा भरते ही ये ट्यूब एक्टिव हो जाती हैं और धीरे-धीरे कपड़ों को आपके शरीर के ऊपर चढ़ाती हैं. इसके अलावा इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खास बात ये है कि कपड़े पहनने के लिए इंसान को एक जगह पर स्थिर खड़े रहने की भी जरूरत नहीं होती है. आप अपना काम करते रहिए और रोबोट आपको धीरे-धीरे कपड़े पहना देगा.
कैसे करता है काम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे चलाने के लिए किसी मुश्किल कंट्रोल एल्गोरिद्म की जरूरत नहीं होती है. ये शरीर की बनावट के अनुसार खुद ही अपना रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ती है और आसानी से कपड़े पहनाने का काम पूरा कर देती है.
महज इतने समय में पहन लेंगे सूट
बता दें कि इस शोधकर्ता किम नाम ग्यून के अनुसार, उन्हें इस टेक्नोलॉजी का आईडिया तब आया जब वे साइकिल चला रहे थे और अचानक बारिश शुरू हो गई. उन्होंने सोचा कि अगर रेनकोट अपने आप शरीर पर चढ़ जाए तो ये कितना बढ़िया होगा.
उन्होंने बताया कि ये रोबोटिक सिस्टम कपड़े को अंदर से बाहर की ओर पलटते हुए शरीर के साइज के अनुसार आगे बढ़ता है. इसकी मदद से आप लगभग 10 सेकंड में एक पूरा सूट पहन लेंगे.
बुजुर्गों से लेकर इमरजेंसी सर्विसेज में होगा फायदा
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये टेक्नोलॉजी बुजुर्गों, दिव्यांगों और ऐसे लोगों के लिए बेहद फायदेमंद होगी जिन्हें खुद कपड़े पहनने में कठिनाई होती है. इसके अलावा सेमीकंडक्टर क्लीनरूम, दमकल कर्मियों, मेडिकल स्टाफ और दूसरी आपातकालीन सर्विसेज में, जहां कुछ ही सेकंड में सुरक्षा किट पहनना जरूरी होता है, वहां भी इसका अच्छे से इस्तेमाल हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Preventing Wi&amp;Fi Hacking:  रसोई की ये सस्ती चीज Hack होने से बच सकता है Wi&amp;Fi, जानिए कैसे </title>
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        <description><![CDATA[ Preventing Wi-Fi Hacking:&amp;nbsp; अगर आपको लगता है कि Wi-Fi को हैक होने से बचाने के लिए महंगे गैजेट या टेक्निकल सेटिंग्स की ही जरूरत होती है, तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी ट्रिक काफी वायरल हो रही है, जिसमें बताया जा रहा है कि रसोई में मिलने वाली एक बेहद सस्ती चीज, यानी एल्यूमिनियम फॉयल, आपके Wi-Fi राउटर को बेहतर बनाने के साथ-साथ उसे हैक होने से भी बचा सकते हैं. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह दावा किया गया कि राउटर के पीछे एल्यूमिनियम फॉयल लगाने से फायदा होता हैआइए जानते हैं इसके बारे में कि आखिर यह ट्रिक कैसे काम करती है.&amp;nbsp;
आखिर एल्यूमिनियम फॉयल कैसे काम करती है?
दरअसल, Wi-Fi राउटर अपने चारों तरफ हर दिशा में इंटरनेट सिग्नल भेजता है. इसमें वो जगहें भी शामिल होती हैं जहां सिग्नल की जरूरत ही नहीं होती, जैसे कि आपके घर के बाहर की जगह. जब इसे राउटर के पीछे सही तरीके से लगाया जाता है, तो यह बाहर की तरफ जाने वाले सिग्नल को वापस घर के अंदर की तरफ मोड़ देती है, इससे फायदा यह होता है कि जिन जगहों पर आपके घर में सिग्नल कमजोर आता है, वहां सिग्नल की ताकत बढ़ जाती है. और चूंकि सिग्नल घर से बाहर कम लीक होता है, इसलिए बाहर मौजूद कोई भी व्यक्ति आपके नेटवर्क को आसानी से डिटेक्ट नहीं कर पाता, जिससे नेटवर्क के गलत हाथों में जाने का खतरा भी कुछ हद तक कम हो जाता है.&amp;nbsp;
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कैसे लगाएं फॉयल&amp;nbsp;
इस ट्रिक को सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए एल्यूमिनियम फॉयल को राउटर के पीछे इस तरह लगाएं कि उसका मुड़ा हुआ हिस्सा उस दिशा की तरफ हो, जहां आपको बेहतर सिग्नल चाहिए. हालांकि यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि फॉयल की रिफ्लेक्टिव क्षमता कभी-कभी सिग्नल के आपस में टकराने जैसी दिक्कत भी पैदा कर सकती है, इसलिए फॉयल को अलग-अलग पोजीशन में लगाकर देखें और इंटरनेट स्पीड चेक करते रहें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>New Gadgets Launched: इस हफ्ते लॉन्च हुए 7 नए गैजेट्स, Samsung से Asus तक कई बड़े ब्रांड शामिल...देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ New Gadgets Launched : अगर आप नया गैजेट खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो बीते कुछ दिनों में टेक मार्केट में कई बड़े लॉन्च देखने को मिले हैं. कुछ ही दिनों में एक के बाद एक कई नए डिवाइस भारतीय बाजार में लॉन्च किए गए. इस दौरान Samsung, Asus, Gigabyte समेत कई बड़ी कंपनियों ने अपने नए प्रोडक्ट्स भारतीय बाजार में उतारे हैं. इनमें Wi-Fi स्पीकर, गेमिंग लैपटॉप, प्रीमियम टैबलेट और वायरलेस ईयरबड्स जैसे कई नए गैजेट्स शामिल हैं. अगर आप इस हफ्ते हुए बड़े लॉन्च मिस कर गए हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि इस हफ्ते लॉन्च हुए 7 नए गैजेट्स कौन से हैं.&amp;nbsp;
Samsung Music Studio 5 और Music Studio 7
Samsung ने भारत में अपने नए Music Studio 5 और Music Studio 7 Wi-Fi स्पीकर लॉन्च किए हैं. इन स्पीकर्स का गोल डॉट डिजाइन इन्हें सामान्य स्पीकर की बजाय होम डेकोर जैसा लुक देता है. Music Studio 7 में 3.1.1 चैनल ऑडियो और टॉप-फायरिंग स्पीकर्स दिए गए हैं, जिससे बेहतर और दमदार साउंड मिलता है. वहीं Music Studio 5 छोटे कमरों के लिए तैयार किया गया है. इन दोनों स्पीकर्स में Wi-Fi Streaming, Bluetooth, SmartThings सपोर्ट, Voice Control और Samsung Q-Symphony फीचर मिलता है. इन्हें अकेले भी इस्तेमाल किया जा सकता है और Samsung TV या Soundbar के साथ भी जोड़ा जा सकता है. इनकी शुरुआती कीमत 27,900 रुपये है. इन्हें Samsung की वेबसाइट, ऑफलाइन स्टोर्स और प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदा जा सकता है.&amp;nbsp;
Gigabyte Gaming A16
Gigabyte ने भारत में अपना पहला Made in India Gaming Laptop लॉन्च किया है. कंपनी ने इसे Dixon Technologies के साथ मिलकर भारत में तैयार किया है. &amp;nbsp;यह लैपटॉप AMD Ryzen Processor के साथ आता है और गेमिंग के अलावा AI आधारित कामों के लिए भी बनाया गया है. कंपनी के मुताबिक यह गेमर्स, स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स सभी के लिए उपयोगी हो सकता है. Gigabyte Gaming A16 भारत में कंपनी के रजिस्टर बिक्री चैनलों पर उपलब्ध है.&amp;nbsp;
Asus Pad T3201
Asus ने भारतीय टैबलेट बाजार में वापसी करते हुए नया Asus Pad T3201 लॉन्च किया है. इस टैबलेट में 12.2 इंच का 2.8K Dual Layer OLED Display दिया गया है, जो 144Hz Refresh Rate और 2000 Nits Peak Brightness के साथ आता है. यह MediaTek Dimensity 8300 Processor, 8GB RAM, 256GB तक स्टोरेज और 9000mAh बैटरी से लैस है, जिसमें 45W Fast Charging का सपोर्ट मिलता है. इसके अलावा इसमें Dolby Atmos वाले Quad Speakers, Android 16, Asus Pen 2.0 और Bluetooth Keyboard का सपोर्ट भी मिलता है. कंपनी बॉक्स में एक Protective Folio Case भी दे रही है. &amp;nbsp;यह टैबलेट 6 अगस्त से Flipkart, Asus eShop, Asus और ROG Stores, Reliance Digital और अन्य रजिस्टर स्टोर्स पर उपलब्ध होगा.&amp;nbsp;
Urbn Atom Link 5-in-1 Magnetic Power Bank
Urbn ने Atom Link 5-in-1 Magnetic Power Bank लॉन्च किया है, जिसे खासतौर पर Apple डिवाइस इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए तैयार किया गया है. &amp;nbsp;इसमें 10,000mAh बैटरी, 20W Wired Fast Charging और 15W Magnetic Wireless Charging का सपोर्ट मिलता है. &amp;nbsp;पावर बैंक में USB Type-C और Lightning Cable पहले से लगी हुई हैं. इसके अलावा इसमें Apple Watch चार्ज करने की सुविधा भी मिलती है. कंपनी इसके साथ MagTag Ring भी देती है, जिससे दूसरे स्मार्टफोन में भी मैग्नेटिक चार्जिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी कीमत 2,799 रुपये रखी गई है. यह Black और Blue रंग में उपलब्ध है.&amp;nbsp;
Realme C100x 4G
Realme ने बजट सेगमेंट में नया Realme C100x 4G लॉन्च किया है. इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8000mAh बैटरी है, जिसे कंपनी कई दिनों तक चलने वाली बैटरी बता रही है. फोन में 45W Fast Charging और 6W Reverse Charging का सपोर्ट मिलता है. इसके अलावा इसमें 120Hz Display, 50MP AI Rear Camera, IP64 Dust और Water Resistance और ArmourShell Protection दी गई है. &amp;nbsp;इसकी शुरुआती लॉन्च कीमत 14,499 रुपये है, जबकि इसकी नियमित कीमत 14,999 रुपये होगी. यह Flipkart, Realme की वेबसाइट और ऑफलाइन स्टोर्स पर उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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Just Corseca JC SkySport Smartwatch और JC Sleepods Earbuds
Just Corseca ने इस हफ्ते दो नए प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं. JC SkySport Smartwatch में 2.01 इंच HD Display, Bluetooth Calling, Heart Rate Monitoring, कई Sports Modes, Built-in Flashlight और Moisture Resistant Design मिलता है. वहीं JC Sleepods Earbuds खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किए गए हैं जो करवट लेकर सोते समय भी ईयरबड्स इस्तेमाल करते हैं. इनमें 10mm Drivers, Smart Touch Control, Noise Isolation और 30 घंटे तक का बैटरी बैकअप मिलता है. &amp;nbsp;स्मार्टवॉच की कीमत 1,499 रुपये और ईयरबड्स की कीमत 1,999 रुपये रखी गई है.&amp;nbsp;
Goboult Tenet Pro
Goboult ने अपने नए Tenet Pro Wireless Earbuds भी लॉन्च किए हैं. इन ईयरबड्स में 32dB Active Noise Cancellation (ANC), 13mm Dynamic Drivers, Quad Mic ENC, Dual Device Connectivity और 75 घंटे तक का कुल बैटरी बैकअप मिलता है. कंपनी का कहना है कि बेहतर फिट के लिए इसमें LiDAR आधारित Ergonomic Design का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लंबे समय तक इस्तेमाल करने में भी आराम मिलता है. इनकी लॉन्च कीमत 1,499 रुपये रखी गई है, जबकि नियमित कीमत 1,699 रुपये होगी. यह Crimson Red, Frost White और Olive Green रंगों में उपलब्ध हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Microphone permission: फोन में कौन&amp;कौन से ऐप्स आपका माइक्रोफोन इस्तेमाल कर रहे हैं? ऐसे करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ Microphone permission: आजकल लगभग हर ऐप माइक्रोफोन की परमिशन मांगता है. चाहे WhatsApp हो, Instagram, Facebook या फिर कोई गेम. कई बार हम बिना सोचे-समझे &#039;Allow&#039; पर टैप कर देते हैं. बाद में यह भी याद नहीं रहता कि किस ऐप को माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की परमिशन दी थी. अगर आपके फोन में भी कई ऐप्स हैं, तो एक बार जरूर चेक कर लें कि कौन-कौन से ऐप्स आपके माइक्रोफोन का इस्तेमाल कर सकते हैं.
अच्छी बात यह है कि Android और iPhone दोनों में यह देखना बहुत आसान है. कुछ सेकंड में आपको पता चल जाएगा कि किन ऐप्स के पास माइक्रोफोन की परमिशन है. अगर कोई ऐसा ऐप दिखे जिसकी जरूरत नहीं है, तो उसकी परमिशन तुरंत बंद कर सकते हैं.
क्यों जरूरी है यह चेक करना?
फोन का माइक्रोफोन आपकी आवाज रिकॉर्ड करने के काम आता है. कॉल करने, वीडियो बनाने, वॉइस मैसेज भेजने और ऑनलाइन मीटिंग के दौरान इसकी जरूरत पड़ती है. लेकिन अगर किसी ऐसे ऐप के पास भी माइक्रोफोन की परमिशन है जिसका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो उसे बंद कर देना ही बेहतर होता है. इससे आपका फोन भी ज्यादा सुरक्षित रहता है और आपकी निजी जानकारी भी सुरक्षित रहती है.
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Android फोन में ऐसे करें चेक:
अगर आप Android फोन इस्तेमाल करते हैं, तो सबसे पहले Settings खोलें. इसके बाद Privacy या Security &amp;amp; Privacy में जाएं. यहां Permission Manager या App Permissions का ऑप्शन मिलेगा. उस पर टैप करें और फिर Microphone चुनें. अब आपके सामने उन सभी ऐप्स की लिस्ट आ जाएगी जिन्हें माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की परमिशन मिली हुई है. अगर आपको कोई ऐसा ऐप दिखता है जिसे इसकी जरूरत नहीं है, तो उस पर टैप करके Don&#039;t Allow या Deny कर दें.
ध्यान रखें कि Samsung, Vivo, Oppo, Xiaomi और दूसरी कंपनियों के फोन में इन सेटिंग्स के नाम थोड़ा अलग हो सकते हैं. लेकिन तरीका लगभग एक जैसा ही रहता है.
iPhone यूजर्स ऐसे करें चेक:
अगर आपके पास iPhone है, तो Settings में जाएं. इसके बाद Privacy &amp;amp; Security पर टैप करें और फिर Microphone खोलें. यहां आपको उन सभी ऐप्स की लिस्ट दिखाई देगी जिन्हें माइक्रोफोन इस्तेमाल करने की परमिशन मिली हुई है. अगर किसी ऐप को इसकी जरूरत नहीं है, तो उसके सामने दिया गया स्विच बंद कर दें. इसके बाद वह ऐप माइक्रोफोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा.
कैसे पता चलेगा कि अभी माइक्रोफोन इस्तेमाल हो रहा है?
अगर आपके फोन में कोई ऐप उस समय माइक्रोफोन इस्तेमाल कर रहा होगा, तो फोन खुद आपको इसका संकेत देता है. Android फोन में स्क्रीन के ऊपर हरे रंग का डॉट या माइक्रोफोन का निशान दिखाई दे सकता है. वहीं iPhone में ऊपर की तरफ नारंगी रंग का छोटा डॉट दिखता है. अगर यह निशान उस समय भी दिखाई दे जब आप कोई कॉल या रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे हैं, तो एक बार जरूर चेक करें कि कौन-सा ऐप खुला हुआ है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सावधान! Dehumidifier इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी, ऐसा करने से हो सकता है बड़ा हादसा</title>
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        <description><![CDATA[ Dehumidifier: बरसात के मौसम में ज्यादातर लोग उमस भरी गर्मी से परेशान रहते हैं. ऐसे में लोग एसी का इस्तेमाल करते हैं जो उनके कमरे से नमी को कुछ हद तक कम करने का काम करती है. लेकिन बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ ही आज मार्केट में Dehumidifier डिवाइस भी आ चुका है जो घर में मौजूद नमी को पूरी तरह से कम करने का काम करता है. लेकिन कई बार लोग इस डिवाइस को गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं जिससे बड़ा हादसा होने की संभावना बढ़ जाती है.
कैसे काम करता है Dehumidifier
जानकारी के मुताबिक, ये एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो कमरे की हवा में मौजूद एक्सट्रा नमी (Humidity) को कम करता है. इसका इस्तेमाल खासतौर पर बरसात के मौसम, बेसमेंट, स्टोर रूम या ऐसे घरों में किया जाता है जहां नमी ज्यादा रहती है. ये फफूंदी, बदबू और नमी से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करता है.
कैसे लग सकती है आग
दरअसल, एक्सपर्ट्स के अनुसार, Dehumidifier लंबे समय तक लगातार चलने, खराब वायरिंग, ओवरहीटिंग या पुराने मॉडल होने की वजह से आग लगने का खतरा पैदा कर सकता है. अगर मशीन के अंदर धूल जमा हो जाए या एयर वेंट बंद हो जाएं तो मोटर जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगता है. ऐसी स्थिति में शॉर्ट सर्किट या आग लगने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है.
कैसे रखें डिवाइस को सेफ
अगर आप भी अपने Dehumidifier को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो कुछ जरूरी चीजों को ध्यान में रखना चाहिए. हमेशा डिवाइस को फ्लैट और मजबूत सतह पर रखें. इसके एयर इनलेट और आउटलेट के आसपास अच्छी खासी खाली जगह छोड़ें ताकि हवा आसानी से निकल सके. समय-समय पर फिल्टर और वेंट की सफाई करते रहें जिससे डिवाइस में धूल न जमा होने पाए और डिवाइस ओवरहीटिंग के खतरे से बचा रहे. अगर मशीन से जलने जैसी गंध, अजीब तरह की आवाज या जरूरत से ज्यादा गर्मी महसूस हो तो तुरंत इसे बंद करके बिजली का प्लग निकाल दें.
इन गलतियों से बचें
जानकारी के लिए बता दें कि Dehumidifier का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रखना चाहिए और छोटी-मोटी गलतियों से भी बचना चाहिए. बता दें कि इसे कभी भी पर्दों, फर्नीचर या दीवार से बिल्कुल सटाकर नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे हवा का फ्लो रुक जाता है. एक्सटेंशन बोर्ड या सस्ते मल्टीप्लग में इसे लगाने से भी बचें. साथ ही, पानी से भरा टैंक समय पर खाली करें और डिवाइस को लंबे समय तक बिना निगरानी के लगातार चालू न छोड़ें.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका OLED TV जरूरत से ज्यादा हो रहा है गर्म? ये हो सकता है कारण, जानिए क्या करें</title>
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        <description><![CDATA[ OLED TV: टेक्नोलॉजी की दुनिया में लोग अपने घरों में स्मार्ट डिवाइसेज का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. इसी कड़ी में बता दें कि अब लोगों के घरों में स्मार्ट टीवी भी खूब देखने को मिलते हैं. मार्केट में कई प्रकार के स्मार्ट टीवी मिलते हैं जिसमें तरह-तरह के डिस्प्ले होते हैं. अक्सर देखा गया है कि OLED TV ज्यादा इस्तेमाल होने पर गर्म होने लगता है. हालांकि, इस डिस्प्ले में यूजर को शानदार पिक्चर क्वालिटी, गहरे ब्लैक कलर और बेहतरीन कंट्रास्ट जैसी सुविधा मिलती है. लेकिन कई बार यूजर्स शिकायत करते हैं कि उनका OLED TV इस्तेमाल के दौरान काफी गर्म हो जाता है. आइए जानते हैं कि क्या होता है इसका कारण और इसे कैसे ठीक कर सकते हैं.
क्यों गर्म होता है OLED TV
जानकारी के मुताबिक, OLED पैनल में हर पिक्सल खुद लाइट पैदा करता है. अब जब स्क्रीन पर ब्राइट कंटेंट, HDR वीडियो या लंबे समय तक गेमिंग चलती है तो पिक्सल ज्यादा बिजली खर्च करते हैं. इससे टीवी के अंदर गर्मी पैदा होती है. हालांकि, इसके अलावा कुछ दूसरे कारण भी हो सकते हैं जिससे टीवी ज्यादा गर्म होने लगती है जैसे ब्राइटनेस और कॉन्ट्रास्ट बहुत ज्यादा होना, खराब वेंटिलेशन, टीवी का दीवार से बहुत पास लगा होना, लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल होना, गर्म मौसम या कमरे का ज्यादा तापमान भी गर्म होने का कारण बन सकती हैं.
कब होता है खतरा
आपको बता दें कि अगर स्मार्ट टीवी हल्का गर्म होती है तो ये नॉर्मल है इससे घबराने की जरूरत नहीं होती है. टीवी के पीछे या किनारों पर गर्माहट महसूस हो सकती है. लेकिन अगर टीवी छूने पर बहुत ज्यादा गर्म लगे, बार-बार ऑटोमैटिक बंद हो जाए, स्क्रीन पर वॉर्निंग मैसेज आए, पिक्चर क्वालिटी खराब होने लगे तो ये तुरंत टीवी को टेक्नीशियन से चेक कराना चाहिए.
क्या है समाधान
बता दें कि OLED TV की ब्राइटनेस अक्सर डिफॉल्ट रूप से काफी ज्यादा सेट होती है. अगर आप पूरे दिन ज्यादा ब्राइटनेस पर टीवी चलाते हैं तो इससे टीवी में ज्यादा गर्मी बढ़ सकती है. इसके अलावा Brightness और OLED Light को थोड़ा कम करें. साथ ही टीवी और दीवार के बीच कुछ जगह छोड़ें. हर कुछ घंटों में छोटा ब्रेक देने से भी गर्माहट कम हो जाती है. इसके अलावा अगर रूम में पंखा या एसी है तो उसे चलाने से भी गर्मी गम हो जाती है. अगर टीवी बार-बार बंद होती है तो Eco Mode या Energy Saving Mode फीचर को ऑन करके रखना चाहिए.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>अगर आपके CPU में भी दिखे ये 5 संकेत तो समझ जाइए हो गया है खराब, समय रहते पहचानें वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अगर-आपके-cpu-में-भी-दिखे-ये-5-संकेत-तो-समझ-जाइए-हो-गया-है-खराब-समय-रहते-पहचानें-वरना-हो-सकता-है-बड़ा-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: CPU (Central Processing Unit) किसी भी सिस्टम का सबसे जरूरी हिस्सा माना जाता है. अगर इसमें हल्की सी भी खराबी आती है तो आपका पूरा सिस्टम इससे प्रभावित होता है. इसके अलावा समय-समय पर सीपीयू को चेक करते रहना चाहिए क्योंकि ये पूरे सिस्टम का कंट्रोल सिस्टम भी होता है जो अगर खराब होता है तो आपको सही कराने में काफी पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे 5 बड़े संकेत के बारे में जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. इसीलिए अगर आपका सीपीयू भी ये संकेत दे तो तुरंत सिस्टम को टेक्नीशियन से चेक कराना चाहिए.&amp;nbsp;
अचानक परफॉर्मेंस कम हो जाए
अगर आपका कंप्यूटर पहले के मुकाबले खराब परफॉर्मेंस देने लगे या फिर अचानक से आपका सिस्टम खराब परफॉर्मेस देने लगे तो समझ जाइए कि आपके सीपीयू में कुछ गड़बड़ी है. हालांकि इसके पीछे दूसरे हार्डवेयर कारण भी हो सकते हैं इसलिए पहले अच्छे से चेक कर लेना बेहतर होता है.
जरूरत से ज्यादा गर्म होना
इसके साथ ही अगर आपका CPU जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है तो समझ जाइए कि सिस्टम में कुछ खराबी है. अगर सिस्टम का फैन लगातार तेज आवाज कर रहा है, लैपटॉप या डेस्कटॉप जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है या तापमान बहुत ज्यादा है तो ये CPU पर एक्सट्रा दबाव या कूलिंग सिस्टम में खराबी हो सकती है. लंबे समय तक ओवरहीटिंग CPU को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.&amp;nbsp;
बूट होने में दिक्कत
आपको बता दें कि अगर कंप्यूटर का पावर बटन दबाने पर सिस्टम सही तरीके से स्टार्ट नहीं होता, बार-बार बूट लूप में फंस जाता है या BIOS तक नहीं पहुंच पाता तो ये CPU या मदरबोर्ड से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में हार्डवेयर टेस्ट करवाना चाहिए जिससे असली कारण सामने आ सकेगा.
कंप्यूटर बार-बार क्रैश या फ्रीज होना
अक्सर देखा गया है कि काम करते समय बार-बार कंप्यूटर फ्रीज हो जाता है या फिर अचानक रीस्टार्ट हो जाता है या ब्लू स्क्रीन जैसी समस्या आने लगती है. अगर आपके साथ ही ऐसा होता है तो ये CPU में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. हालांकि ऐसा RAM या स्टोरेज की समस्या के कारण भी हो सकता है लेकिन लगातार ऐसा होना नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
बार-बार सिस्टम में गड़बड़ी
इतना ही नहीं, अगर कंप्यूटर में अलग-अलग सॉफ्टवेयर बिना कारण बंद हो रहे हैं, फाइलें करप्ट होने लगी हैं या सिस्टम लगातार अजीब एरर दिखा रहा है तो इसका मतलब है कि CPU सही तरीके से काम नहीं कर पा रहा है. ऐसे मामलों में प्रोफेशनल डायग्नोस्टिक टेस्ट कराना ही सही ऑप्शन होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>कहीं Google AI तो नहीं पढ़ रहा आपके निजी ईमेल? इन तरीकों से बनी रहेगी आपकी प्राइवेसी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कहीं-google-ai-तो-नहीं-पढ़-रहा-आपके-निजी-ईमेल-इन-तरीकों-से-बनी-रहेगी-आपकी-प्राइवेसी</link>
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        <description><![CDATA[ कहीं Google AI तो नहीं पढ़ रहा आपके निजी ईमेल? इन तरीकों से बनी रहेगी आपकी प्राइवेसी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Apple यूजर्स की मौज! अब इस नए डिस्प्ले के साथ आएगा नया iPad Mini, जानें पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Apple iPad Mini: एप्पल के कई सारे प्रोडक्ट्स मार्केट में मौजूद हैं जिन्हें यूजर्स काफी पसंद करते हैं. वैसे तो आईफोन को पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है लेकिन एप्पल के बाकी प्रोडक्ट्स भी कई यूजर्स को पसंद आते हैं. इसी कड़ी में बता दें कि एप्पल आईपैड मिनी भी बाजार में एक चर्चित डिवाइस है. कंपनी अब इस डिवाइस को नए डिस्प्ले के साथ बाजार में लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.
पहली बार मिलेगा OLED Panel
दरअसल, Bloomberg के मार्क गुरमन की रिपोर्ट के अनुसार, Apple एक नए iPad Mini पर काम कर रहा है जिसका इंटरनल कोडनेम J510 बताया जा रहा है. जानकारी के लिए बता दें कि ये इस डिवाइस के लिए 2021 के बाद पहला बड़ा अपडेट साबित होने वाला है. बता दें कि नए iPad Mini में OLED डिस्प्ले दिया जा सकता है जो इसे मौजूदा LCD स्क्रीन से काफी बेहतर बनाएगा. बेहतर कलर, ज्यादा कंट्रास्ट और शानदार विजुअल एक्सपीरियंस के कारण ये अपग्रेड कॉम्पैक्ट टैबलेट सेगमेंट में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. इससे पहले प्रो मॉडल्स में OLED टेक्नोलॉजी देखने को मिलती थी.
स्टैंडर्ड iPad में बना रहेगा LCD Display
इतना ही नहीं, जानकारी के मुताबिक, जहां iPad Mini और iPad Air में OLED स्क्रीन आने की चर्चा हो रही है. वहीं नॉर्मल iPad मॉडल में फिलहाल LCD डिस्प्ले ही देखने को मिलेगा. ऐसा इसलिए किया जा रहा है जिससे डिवाइस की कीमत कंट्रोल में रहे. इसके साथ ही माना जा रहा है कि एप्पल पेंसिल को भी कंपनी जल्द ही बाजार में उतारने की तैयारी में है. इस नए डिवाइस में यूजर्स को एक नई टेक्नोलॉजी देखने को मिलेगी.
नया iPad होगा लॉन्च
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Apple सिर्फ iPad Mini तक सीमित नहीं रहने वाला है. कंपनी एक नए एंट्री-लेवल iPad पर भी काम कर रही है जिसके जल्द ही भारतीय मार्केट में लॉन्च होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि इस नए मॉडल में बहुत पावरफुल प्रोसेसर भी देखने को मिल सकता है जिससे इसकी परफॉर्मेंस भी काफी बेहतर हो सकती है. हालांकि, इसके डिजाइन में कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिलेगा.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>X पर कंटेंट चोरी करने वालों की अब खैर नहीं! AI अब पहले से 3 गुना तेजी से पकड़ेगा कॉपी किए गए पोस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ X AI Feature: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X काफी समय से एआई या कॉपी पेस्ट कंटेंट से जूझ रहा था. इसी को देखते हुए अब कंपनी ने एक नया एआई फीचर उतार दिया है जिसकी मदद से अब कंटेंट चोरी करने वालों पर लगाम लगेगी. इसके साथ ही ये फीचर पहले के मुकाबले काफी तेजी से कॉपी किए गए कंटेंट को भी पकड़ने में सक्षम होगा. आइए जानते हैं कैसे काम करेगा ये नया फीचर.
ओरिजिनल कंटेंट को मिलेगा बढ़ावा
जानकारी के लिए बता दें कि X अब प्लेटफॉर्म पर ओरिजिनल कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठा रहा है. ये नया सिस्टम भी इसी प्लान के अनुसार है. हाल ही में कंपनी ने नया वीडियो रिकॉर्डर और एडिटर भी लॉन्च किया है जिससे यूजर्स सीधे X पर ही वीडियो रिकॉर्ड और एडिट कर सकते हैं.
टेक्स्ट पोस्ट भी आएंगे पकड़ में
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नया AI सिस्टम काफी एडवांस है. ये सिस्टम बिना क्रेडिट दिए दोबारा शेयर किए गए वायरल टेक्स्ट पोस्ट की भी पहचान कर सकता है. बता दें कि अगर कोई यूजर किसी भी तरह से दूसरे की पोस्ट को बदलकर पोस्ट करता है तब भी ये फीचर उसे आसानी से पकड़ सकेगा.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कंपनी का कहना है कि अगर कोई कॉपी किया गया कंटेंट मोनेटाइजेशन के दायरे में आता है तो उससे होने वाली कमाई सिर्फ उसे दी जाएगी जो उस कंटेंट का असली क्रिएटर होगा.
नहीं होगी फर्जी एंगेजमेंट
इसके अलावा आपको बता दें कि कंपनी सिर्फ कॉपी-पेस्ट कंटेंट को नहीं पकड़ रही है बल्कि फर्जी एंगेजमेंट बढ़ाने वाले अकाउंट्स पर भी सख्त नजर रख रही है. ऐसे पोस्ट जहां फालतू का एंगेजमेंट बढ़ाने का तरीका इस्तेमाल किया जा रहा है, उन अकाउंट्स पर कंपनी सख्त एक्शन भी ले सकती है. अगर कोई क्रिएटर तीन या उससे ज्यादा बार ऐसे नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे X के क्रिएटर रेवेन्यू शेयरिंग प्रोग्राम से बाहर किया जा सकता है.
X ने AI से संचालित स्पैम और बॉट अकाउंट्स के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है. कंपनी के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में प्लेटफॉर्म हर मिनट लगभग 208 बॉट अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें सस्पेंड कर रहा था और अब ये सिस्टम पहले से ज्यादा प्रभावी होता जा रहा है. कंपनी के इस कदम के बाद से प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा ओरिजिनल कंटेंट देखने को मिल सकता है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पर, कंटेंट, चोरी, करने, वालों, की, अब, खैर, नहीं, अब, पहले, से, गुना, तेजी, से, पकड़ेगा, कॉपी, किए, गए, पोस्ट</media:keywords>
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        <title>क्या होते हैं Anti&amp;Reflective स्क्रीन प्रोटेक्टर? जानिए किस टेक्नोलॉजी पर करते हैं काम और क्या होते हैं इसके नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Anti-Reflective Screen Protector: डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन आज लोगों की जरुरत बन चुके हैं. ऐसे में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक आज स्मार्टफोन पहुंच चुका है. साथ ही जब स्मार्टफोन है तो उसके डिस्प्ले को सेफ रखने के लिए कई लोग स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करते हैं. अब मार्केट में कई तरह के स्क्रीन प्रोटेक्टर के मौजूद हैं जो आपके फोन के डिस्प्ले को सेफ रखते हैं. इसी कड़ी में मार्केट में एंटी-रिफ्लेक्टिव स्क्रीन प्रोटेक्टर काफी ट्रेंडिंग में चल रहा है. आइए जानते हैं किस टेक्नोलॉजी पर ये काम करता है.
क्या होता है Anti-Reflective स्क्रीन प्रोटेक्टर
जानकारी के मुताबिक, Anti-Reflective स्क्रीन प्रोटेक्टर एक खास टाइप का स्क्रीन गार्ड होता है जिस पर एक स्पेशल कोटिंग की जाती है. ये कोटिंग स्क्रीन से टकराने वाली बाहरी रोशनी के रिफ्लेक्शन को कम करती है. इसका फायदा ये होता है कि स्क्रीन पर चमक (Glare) कम दिखाई देती है और कंटेंट पढ़ना या वीडियो देखना ज्यादा आरामदायक हो जाता है.
किस टेक्नोलॉजी पर करता है काम
आपको बता दें कि इस तरह के स्क्रीन प्रोटेक्टर में Anti-Reflective Coating या Optical Coating Technology का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें स्क्रीन के सर्फेस पर बेहद पतली ट्रांसपरेंट परतें लगाई जाती हैं जो आने वाली रोशनी को कंट्रोल करती हैं. कुछ रोशनी को ये रिफ्लेक्ट करती हैं जबकि बाकी को इस तरह फैलाती हैं कि आंखों तक कम चमक पहुंचे. यही वजह है कि तेज धूप में भी स्क्रीन पहले के मुकाबले ज्यादा साफ दिखाई देती है.
क्या हैं इसके फायदे

इस स्क्रीन प्रोटेक्टर के कई सारे फायदे होते हैं.
तेज धूप या आउटडोर में स्क्रीन आसानी से दिखाई देती है.
स्क्रीन पर ग्लेयर कम होने से आंखों पर कम दबाव पड़ता है.
वीडियो देखने, ई-बुक पढ़ने और गेम खेलने का एक्सपीरिएंस बेहतर होता है.
स्क्रीन पर उंगलियों के निशान और हल्के स्मज कुछ हद तक कम दिखाई देते हैं.
लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने पर विजुअल कम्फर्ट बेहतर महसूस हो सकता है.

क्या हैं इसके नुकसान
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस स्क्रीन प्रोटेक्टर के कई सारे नुकसान भी होते हैं. दरअसल, ये नॉर्मल टेम्पर्ड ग्लास के मुकाबले ज्यादा महंगे होते हैं. अगर आप बजट में ऑप्शन तलाश रहे हैं तो ये थोड़ा महंगा सौदा साबित हो सकता है.
इसके अलावा बार-बार सफाई करने, धूल, नमी या रोजाना के इस्तेमाल से इसकी Anti-Reflective कोटिंग धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकती है. इसके बाद पहले जैसा प्रभाव नहीं मिलता है.
बता दें कि ये टेक्नोलॉजी रिफ्लेक्शन को कम जरूर करती है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं करती है. बहुत तेज धूप या सीधी लाइट में स्क्रीन पर हल्की चमक फिर भी दिखाई दे सकती है.
क्या खरीदने में है फायदा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप अक्सर बाहर रहते हैं, धूप में फोन इस्तेमाल करते हैं या लंबे समय तक स्क्रीन देखते हैं तो Anti-Reflective स्क्रीन प्रोटेक्टर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. वहीं, अगर आप अपना स्मार्टफोन ज्यादातर घर या ऑफिस के अंदर ही इस्तेमाल करते हैं तो आप कम कीमत वाला भी स्क्रीन प्रोटेक्टर इस्तेमाल कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Airtel यूजर्स को लगा बड़ा झटका! Unlimited 5G Plan के साथ नहीं कर सकेंगे ये काम, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Airtel Unlimited 5G Plan: देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने अपने यूजर्स को एक झटका दिया है. जानकारी के अनुसार, Airtel अब Unlimited 5G डेटा को मोबाइल हॉटस्पॉट के जरिए शेयर करने की अनुमति नहीं दे रही है. बता दें कि इस बदलाव के बाद यूजर्स ने अपनी नाराजगी जाहिर करना भी शुरू कर दिया है.
यूजर्स ने जताई नाराजगी
आपको बता दें कि इसके बाद से कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की है. कई यूजर्स का कहना है कि वे अपने ऑफिस के काम के लिए हॉटस्पॉट का इस्तेमाल करते हैं और अगर अनलिमिटेड 5G पर ये सुविधा बंद हो जाएगी तो उन्हें काम करने में काफी परेशानी होगी. इसके अलावा कई यूजर्स का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो कई यूजर्स दूसरे टेलीकॉम कंपनी पर भी शिफ्ट हो सकते हैं.
सोशल मीडिया पर वॉयरल पोस्ट
जानकारी के मुताबिक, हाल के दिनों में X पर Airtel की Terms and Conditions का एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हुआ है. इसमें लिखा गया था कि Unlimited 5G डेटा का इस्तेमाल मोबाइल हॉटस्पॉट के जरिए शेयर नहीं किया जा सकेगा.
अगर ये शर्त लागू होती है तो हॉटस्पॉट इस्तेमाल करने पर डेटा Unlimited 5G से नहीं बल्कि यूजर के रोजाना मिलने वाले 4G डेटा कोटे से कट सकता है. हालांकि, अभी तक एयरटेल की ओर से इस पर कोई आधिकारी जानकारी नहीं शेयर की गई है.
कंपनी कैसे करती है पहचान
अब कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर टेलीकॉम कंपनी को कैसे पता चलता है कि डेटा सीधे फोन पर इस्तेमाल हो रहा है या हॉटस्पॉट के जरिए किसी दूसरे डिवाइस पर. दरअसल, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क लेवल पर डेटा ट्रैफिक को चेक कर सकती हैं. इसके लिए TTL (Time To Live), TCP/IP Fingerprinting, HTTP User-Agent और Deep Packet Inspection (DPI) जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस टेक्नोलॉजी की मदद से अलग-अलग डिवाइस के नेटवर्क के नेचर की पहचान की जा सकती है.
300GB इंटरनेट डेटा
जानकारी के लिए बता दें कि Airtel की Unlimited 5G सुविधा पूरी तरह अनलिमिटेड नहीं होती है. बता दें कि कंपनी पहले से ही एक यूजर के लिए हर महीने मैक्सिमम 300GB 5G डेटा की लीमिट फिक्स करती है. इसके बाद डेटा इस्तेमाल पर अलग नियम लागू हो सकते हैं. हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसके बारे में कोई जानकारी शेयर नहीं की है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Gmail यूजर्स ध्यान दें! सिर्फ एक सेटिंग बदलते ही Spam में जाना बंद हो जाएंगे जरूरी Emails</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: जीमेल आज के समय में लोगों के सबसे जरूरी चीजों में से एक हो चुका है. ऑफिस से लेकर बैंक तक के जरूरी मेल आपको जीमेल के जरिए मिलते हैं. लेकिन अक्सर देखा गया है कि कुछ ईमेल अपने आप ही स्पैम में चले जाते हैं. इससे कई बार लोगों को जरूरी मेल समय पर नहीं दिख पाते हैं या फिर मिस हो जाते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी सेटिंग्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बाद आपको सभी मेल इनबॉक्स में दिखने लगेंगे और स्पैम में नहीं जाएंगे.
Spam में क्यों जाते हैं जरूरी ईमेल
जानकारी के अनुसार, Gmail में अब एक एआई फीचर मौजूद है जिसे स्पैम फिल्टर कहा जाता है. ये फीचर संदिग्ध और फर्जी ईमेल की पहचान करने का काम करता हैं. हालांकि कई बार यह सिस्टम गलती से सही ईमेल को भी Spam मान लेता है. ऐसा तब हो सकता है जब ईमेल किसी नए पते से आया हो, उसका कंटेंट प्रमोशनल जैसा लगे या पहले उसी तरह के ईमेल को Spam मार्क किया गया हो.&amp;nbsp;
इस्तेमाल करें Filter
जानकारी के लिए बता दें कि अगर किसी खास व्यक्ति या कंपनी के ईमेल अक्सर आपके पास आते हैं तो उनके लिए Gmail Filter बनाना आपके लिए काफी बेहतर साबित होगा. इसके लिए सबसे पहले कंप्यूटर पर Gmail खोलें और सर्च बार में मौजूद Show search options आइकन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
अब यहां पर From वाले बॉक्स में संबंधित ईमेल एड्रेस दर्ज करें और Create filter पर क्लिक करें. अब Never send it to Spam ऑप्शन को चुनें. आखिरी में फिर से Create filter पर क्लिक कर दें. अब उस ईमेल एड्रेस से आने वाले मैसेज सीधे इनबॉक्स में पहुंचेंगे.
कैसे वापस मिलेगा ईमेल&amp;nbsp;
आपको बता दें कि अगर आपका कोई जरूरी ईमेल Spam में पहुंच गया है तो उसे आसानी से वापस इनबॉक्स में ला सकते हैं. इसके लिए कुछ जरूरी स्टेप्स को फॉलो करना पड़ेगा.
कंप्यूटर पर Gmail खोलें.
इसके बाद बाईं तरफ More पर क्लिक करके Spam फोल्डर खोलें.
अब जिस ईमेल की जरूरत है उसे खोलें.
अब ऊपर दिखाई देने वाले Not spam ऑप्शन पर क्लिक करें.
इसके बाद Gmail आगे उसी ईमेल एड्रेस से आने वाले मैसेज को पहचानने लगेगा और उनके Spam में जाने की संभावना कम हो जाएगी.
मोबाइल ऐप में कैसे करें सेटिंग&amp;nbsp;
आज ज्यादातर लोगों के स्मार्टफोन में भी Gmail खुला रहता है. मोबाइल ऐप में फिल्टर बनाने का ऑप्शन फिलहाल उपलब्ध नहीं है. हालांकि Spam में पहुंचे ईमेल को सही कैटेगरी में वापस भेजा जा सकता है. इसके लिए Gmail ऐप खोलें और Spam फोल्डर में जाएं. अब यहां संबंधित ईमेल खोलें और ऊपर दिए गए तीन डॉट्स पर टैप करें. अब Report not spam या Not spam का ऑप्शन चुनें.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gmail, यूजर्स, ध्यान, दें, सिर्फ, एक, सेटिंग, बदलते, ही, Spam, में, जाना, बंद, हो, जाएंगे, जरूरी, Emails</media:keywords>
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        <title>eSIM वाला फोन बेचने से पहले जरूरी हैं ये काम, सिर्फ फैक्ट्री रिसेट से नहीं बनेगी बात</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/esim-वाला-फोन-बेचने-से-पहले-जरूरी-हैं-ये-काम-सिर्फ-फैक्ट्री-रिसेट-से-नहीं-बनेगी-बात</link>
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        <description><![CDATA[ eSIM Phone Selling Tips: अब फोन से कॉल और मैसेज करने के लिए फिजिकल सिम कार्ड की जरूरत खत्म हो गई है. कई मॉडल अब ई-सिम सपोर्ट के साथ आते हैं. इनमें आपको फिजिकल सिम कार्ड डालने की जरूरत नहीं होती. अमेरिका की बात करें तो ऐप्पल यहां बिकने वाले सारे आईफोन में केवल ई-सिम सपोर्ट देती है. ई-सिम के कई फायदे हैं, लेकिन अगर आप ई-सिम वाले फोन को बेच रहे हैं तो आपको अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी. नॉर्मल फोन की तरह फैक्ट्री रिसेट कर आप काम नहीं चला सकते.&amp;nbsp;
सबसे पहले ई-सिम के बारे में जानें
फिजिकल सिम में एक प्री-प्रोग्राम्ड फिजिकल कार्ड को फोन में बने एक स्पेशल स्लॉट में इन्सर्ट करना पड़ता है. ई-सिम को ऐसे किसी स्लॉट की जरूरत नहीं होती. इसमें एक इम्बेडेड सिम कार्ड (eSIM) में नेटवर्क क्रेडेंशियल डाउनलोड किए जाते हैं. एक बार डाउनलोड होने के बाद ये परमानेंट फोन पर रहते हैं. ई-सिम को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है और यह फोन के IMEI नंबर से लिंक रहती है, जिससे सेफ्टी मजबूत होती है.&amp;nbsp;
फोन को बेचने से पहले कर लें ये काम
अपना पुराना फोन बेचने से पहले कुछ काम करने जरूरी हैं. भले ही आप फिजिकल सिम वाला फोन बेच रहे हैं या ई-सिम वाला, सबसे पहले डेटा बैकअप ले लें. आजकल फोन में पर्सनल और फाइनेंस डिटेल्स समेत सारा जरूरी डेटा स्टोर होता है. इसलिए इसका बैकअप लेना जरूरी है. बैकअप होने पर डेटा डिलीट होने की टेंशन नहीं रहेगी. इसी तरह फोन में स्टोर सोशल मीडिया, बैंकिंग और दूसरी ऐप्स के अकाउंट लॉग-आउट कर दें. इससे जब आप नए फोन में इन ऐप्स में लॉग-इन करेंगे तो दिक्कत नहीं आएगी. इसके अलावा आप बेहतर वैल्यू के लिए फोन की रिपेयरिंग भी करवा सकते हैं.&amp;nbsp;
ई-सिम वाला फोन बेचते समय जरूरी है यह काम
इन सारे कामों के अलावा अगर आप ई-सिम वाला फोन बेच रहे हैं तो आपको एक और काम करना पड़ेगा. यह फोन बेचने से पहले अपने ई-सिम प्रोफाइल को जरूर हटा दें. क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि फैक्ट्री रिसेट करने से यह रिमूव हो जाएगा. इसलिए पहले अपने ई-सिम प्रोफाइल को नए फोन में ट्रांसफर कर लें. इसके बाद इस प्रोफाइल को डिलीट कर फोन को फैक्ट्री रिसेट कर दें. इससे आपका डेटा, सेटिंग्स, फाइल्स और ई-सिम आदि सब किसी दूसरे के हाथों में जान से बच जाएंगे. यही चीजें फिर आपको नया फोन सेटअप करने में मदद करेंगी.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>बरसात में जल्दी क्यों खत्म हो जाती है फोन की बैटरी? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बरसात-में-जल्दी-क्यों-खत्म-हो-जाती-है-फोन-की-बैटरी-वजह-जानकर-आप-भी-रह-जाएंगे-हैरान</link>
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>गिर गया तो टूटने का डर नहीं, फोल्डेबल फोन के लिए सैमसंग ले आई गजब की यह टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Flex Titanium Display: फोल्डेबल फोन काफी नाजुक होते हैं. अगर गिरने पर इनका डिस्प्ले डैमेज हो जाए तो समझ लें कि आपकी जेब पर भारी खर्चा आने वाला है. फोल्डेबल फोन के डिस्प्ले बहुत महंगे होते हैं और इन्हें रिपेयर करवाने के लिए मोटा पैसा खर्च करना पड़ता है. अब सैमसंग ने इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन निकाल लिया है. सैमसंग Flex Titanium नाम से एक नई डिस्प्ले टेक्नोलॉजी लेकर आई है, जो अपकमिंग गैलेक्सी फोल्डेबल फोन को न सिर्फ मजबूत बनाएगी बल्कि इसकी मदद से इन फोन को स्लिम भी बनाया जा सकेगा. यानी नई टेक्नोलॉजी फोन के लुक को बेहतर करने के साथ-साथ ड्यूरैबिलिटी को भी बढ़ाएगी.
क्या है नई Flex Titanium टेक्नोलॉजी?
Flex Titanium सैमसंग की नई फोल्डेबल डिस्प्ले स्ट्रक्चर है, जो कन्वेंशनल सपोर्ट मैटेरियल को टाइटैनियम से बने दो कंपोनेंट से रिप्लेस करेगा. इसमें OLED डिस्प्ले के नीचे एक टाइटैनियम अलॉय फिल्म लगी है. फिर उसके नीचे एक टाइटैनियम सपोर्ट प्लेट दी गई है. यानी पूरा डिस्प्ले मॉड्यूल इस सपोर्ट प्लेट पर तैयार किया गया है. ये सारी लेयर मिलकर डिस्प्ले को भारी बनाए बिना ही उसकी ड्यूरैबिलिटी बढ़ाने में मदद करेंगी. सैमसंग का दावा है कि इसमें लगी टाइटैनियम अलॉय फिल्म ट्रेडिशनल पॉलीमर फिल्म की तुलना में 20 गुना अधिक मजबूत है. साथ ही नई टेक्नोलॉजी में डिस्प्ले कंपोनेंट के बीच एयर गैप भी खत्म कर दिया गया है, जिससे डिस्प्ले पर क्रीज भी कम नजर आएगी और फोन को फोल्ड करना आसान हो जाएगा.
नई टेक्नोलॉजी में टाइटैनियम क्यों यूज किया गया है?
स्पेसक्राफ्ट, सैटेलाइट और यहां तक की मंगल ग्रह पर घूम रहे रोवर के पहिये भी टाइटैनियम से बने हुए हैं. इसके फायदों की बात करें तो पहला यह बहुत मजबूत होता है. दूसरा इस पर जंग नहीं लगता. हालांकि, इसे मोड़ना काफी मुश्किल होता है, लेकिन सैमसंग ने लंबी रिसर्च के बाद मजबूती और फ्लेक्सिबिलिटी के बीच सही बैलेंस बनाने में कामयाबी पा ली है.
नए डिस्प्ले से क्या बदलेगा?
बताया जा रहा है कि Flex Titanium टेक्नोलॉजी वाले डिस्प्ले में क्रिस्प विजुअल, बेहतर कलर और एनर्जी एफिशिएंसी मिलेगी. अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि इस टेक्नोलॉजी को किस फोल्डेबल फोन में यूज किया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाले गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट में यह राज भी खुल जाएगा. दावा किया जा रहा है कि यह डिस्प्ले टेक्नोलॉजी लुक और ड्यूरैबिलिटी के मामले में फोल्डेबल फोन को पूरी तरह बदल देगी.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>क्या एक साथ यूज किए जा सकते हैं अलग&amp;अलग कंपनियों के सोलर पैनल? यहां जानें सारी जरूरी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Guide: सोलर पैनल लगाते समय लगभग सभी लोग एक ही ब्रांड के पैनल यूज करते हैं. लेकिन कई बार सोलर सिस्टम एक्सपैंड करते लोगों को बेहतर ऑप्शन भी मिल जाते हैं. फिर उनके मन में यह सवाल उठता है कि क्या एक ही सिस्टम में अलग-अलग कंपनियों को सोलर पैनल इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसका जवाब हां है, लेकिन आपको कई सारी चीजों का ध्यान रखना पड़ेगा. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि एक ही सोलर सिस्टम में अलग-अलग ब्रांड के पैनल लगाने से क्या होता है.
एक सिस्टम में अलग-अलग पैनल लगाने पर क्या होगा?
आप एक ही सोलर एनर्जी सिस्टम में अलग-अलग कंपनी के पैनल यूज कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करना फायदे का सौदा नहीं होगा. असल में पैनल को यूनिवर्सली प्लग-एंड-प्ले के तौर पर डिजाइन नहीं किया जाता है. इसलिए अलग-अलग पैनल लगने से आउटपुट कम हो सकती है और कंट्रोलर और इन्वर्टर पर भी लोड बढ़ सकता है. इसके अलावा मेंटिनेंस से जुड़े दूसरे इश्यू आने का भी खतरा रहता है. अगर इसका दूसरा पहलू देखें तो अगर पैनल की वॉल्टेज, करंट और पावर आउटपुट एक समान है तो दिक्कत आने की संभावना कम होती है.
कब किए जा सकते हैं अलग-अलग कंपनी के पैनल यूज?

कैंपरवैन, ऑफ-ग्रिड कैंपिंग जैसे पोर्टेबल और मोबाइल सोलर सेटअप में हर पैनल के लिए अलग-अलग चार्ज कंट्रोल का यूज होता है. इसमें आप अलग-अलग ब्रांड के पैनल इस्तेमाल कर सकते हैं.
अगर आप अलग-अलग छत पर सेपरेट चार्ज कंट्रोलर के साथ पैनल लगा रहे हैं तो भी अलग-अलग पैनल इस्तेमाल किए जा सकते हैं.इमरजेंसी या बैकअप के लिए ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम में भी यह तरीका काम आ जाएगा.

कब करनी चाहिए अलग-अलग कंपनी के पैनल से तौबा?

अगर आप छत पर परमानेंट और बड़ा सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं तो इसमें एक ब्रांड के एक जैसे पैनल यूज करने चाहिए. ऐसे सिस्टम में आमतौर पर सिंगल इन्वर्टर यूज किया जाता है. ऐसे यहां अलग-अलग तरह के पैनल यूज करने से काम बिगड़ सकता है.
अगर आप मैक्सिमम एफिशिंसी के लिए सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं तो अलग-अलग तरह के पैनल यूज करने की गलती न करें. ये पैनल आउटपुट को कम कर देंगे, जिससे सिस्टम लगवाने का आपका पूरा उद्देश्य ही बेकार हो जाएगा.
अगर आपको अलग-अलग तरह के पैनल यूज भी करने पड़ें तो कोशिश करें कि उनके वॉटेज सेम हो. अगर इसमें ज्यादा अंतर पाया जाता है तो कम वॉट वाला पैनल ज्यादा कैपेसिटी वाले पैनल को भी ठीक तरीके से काम नहीं करने देगा.

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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>घर के लिए कौन सा Smart Speaker खरीदना चाहिए? जानिए Echo Dot और Google Nest में क्या है अंतर</title>
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        <description><![CDATA[ Amazon Eco Dot Vs Google Nest: आज के समय में स्मार्ट डिवाइसेज काफी तेजी से मार्केट में ट्रेंडिंग में चल रहे हैं. लोग अब स्मार्ट डिवाइसेज का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में अब ज्यादातर घरों में स्मार्ट फ्रिज से लेकर स्मार्ट स्पीकर तक देखने को मिल जाता है. बता दें कि बाजार में अब स्मार्ट स्पीकर में भी ऑप्शन आ गए हैं. फिलहाल मार्केट में अमेजन इको डॉट और गूगल नेस्ट काफी ट्रेडिंग में है. आइए जानते हैं कि दोनों में क्या है अंतर और आपको कौन सा खरीदना चाहिए.
मिलेगा बेहतरीन Voice Assistant&amp;nbsp;
जानकारी के अनुसार, Echo Dot में Amazon का Alexa Voice Assistant देखने को मिल जाता है. वहीं, Google Nest में Google Assistant का सपोर्ट होता है. अगर आप इंटरनेट पर सर्च करने से लेकर रास्ता पूछने या Google की सर्विसेज का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो Google Assistant ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. वहीं, Alexa रोजमर्रा के काम जैसे Smart Home कंट्रोल, रूटीन सेट करने और थर्ड-पार्टी डिवाइस सपोर्ट के मामले में काफी फेमश है.
Google Services या Amazon Services
अब अगर आप Gmail, Google Calendar, Google Maps और YouTube Music जैसी सर्विसेज का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो आपको Google Nest पर विचार करना चाहिए. वहीं अगर आपके पास Amazon Prime Membership है और आप Amazon Music, Audible या Alexa Skills का इस्तेमाल करते हैं तो Echo Dot आपके अनुभव को बेहतर बना सकता है.
किसकी साउंड क्वालिटी बेहतर
इसके अलावा अगर बात ऑडियो क्वालिटी की करें तो दोनों ही डिवाइस नॉर्मल कमरे के लिए अच्छी साउंड देते हैं. Echo Dot का ऑडियो पहले के मुकाबले में काफी बेहतर हुआ है और इसमें दमदार बेस मिलता है.
वहीं, दूसरी ओर, Google Nest की आवाज साफ और बैलेंस्ड होती है जिससे पॉडकास्ट, न्यूज और वोकल म्यूजिक सुनने का बेहतरीन एक्सपीरिएंस मिलता है.&amp;nbsp;
Smart Home कंट्रोल में किसमें ज्यादा दम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपके घर में Smart Bulb, Smart Plug, Smart Camera या दूसरे IoT डिवाइस हैं तो Echo Dot आपके लिए एक बेहतरीन ऑप्शन साबित हो सकता है. Alexa हजारों स्मार्ट डिवाइस और ब्रांड्स के साथ आसानी से काम करता है. Google Nest भी स्मार्ट होम डिवाइस को कंट्रोल करता है लेकिन कई मामलों में Alexa का इकोसिस्टम थोड़ा बड़ा माना जाता है.
किसे खरीदने में है फायदा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपको बेहतर Smart Home कंट्रोल, Alexa Skills और Amazon Services चाहिए हैं तो Echo Dot आपके लिए सही ऑप्शन हो सकता है. लेकिन अगर आप Google Search, Gmail, Calendar और Google Ecosystem का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और ज्यादा नैचुरल Voice Responses चाहते हैं तो Google Nest पर आपको विचार करना चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>LinkedIn पर AI का कब्जा! 10 में 4 लॉन्ग पोस्ट इंसानों ने नहीं लिखे, स्टडी में दावा</title>
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        <description><![CDATA[ LinkedIn AI Post Trend: आज के समय में एआई का इस्तेमाल हर क्षेत्र में बढ़ गया है, क्योंकि यह कम समय में ज्यादा बेहतरीन परिणामों के साथ उत्तर देने में सक्षम में है. ऐसे में कंटेंट राइटिंग में इसका जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है. चाहे सोशल मीडिया पोस्ट के लिए डिस्क्रिप्शन लिखना हो, कैप्शन लिखना हो या पोस्ट के लिए इमेज जनरेट करनी हो, हर काम में एआई इस्तेमाल किया जा रहा है. इसे लेकर एआई डिटेक्शन स्टार्टअप पैनग्राम ने हाल ही में एक रिसर्च की, जिसमें पता चला कि लिंक्डइन पर सबसे अधिक एआई जनरेटेड पोस्ट हैं. इनमें 40% से अधिक पोस्ट को एआई की मदद से बनाया गया. &amp;nbsp;
कैसे किया जाता है एआई का इस्तेमाल?&amp;nbsp;
आज के समय में लिंक्डइन ही नहीं लगभग हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई का इस्तेमाल बढ़ गया है. पैनग्राम की रिपोर्ट के अनुसार, लिंक्डइन पर एआई से तैयार कंटेंट को लिंक्डइन के खुद के एआई टूल &#039;एन्हांस पोस्ट&#039; से नॉर्मल किया गया. बता दें कि यहां एआई का इस्तेमाल दो तरीके से किया गया. एक तो पोस्ट में जो भी कंटेंट और इमेज लगानी है, सब एआई से ही बनाई गई. वहीं, कंटेट और इमेज को एआई की मदद से ज्यादा आकर्षक बनाया गया.&amp;nbsp;
यहां भी पढ़ें: ChatGPT, Gemini, Claude... कहीं आपका डेटा तो नहीं ले रहे? ऐसे करें बंद
लिंक्डइन पर ही सबसे ज्यादा क्यों?
अब सवाल उठता है कि एआई यूज करने के मामले में लिंक्डइन सबसे आगे क्यों है? इसका सबसे बड़ा कारण लिंक्डइन का खुद का एआई राइटिंग असिस्टेंट टूल है. दरअसल, लिंक्डइन पर एआई राइटिंग असिस्टेंट टूल &#039;एन्हांस पोस्ट&#039; है, जिसकी मदद से यूजर्स सिर्फ एक क्लिक में अपने पोस्ट को तैयार करा लेते हैं. यहां यूजर्स इस एआई टूल को अपने आइडिया बताते हैं और यह उस पर लॉन्ग पोस्ट तैयार कर देता है. ऐसा करने में यूजर्स को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है और वे कम समय में अपने विचारों के मुताबिक पोस्ट तैयार कर लेते हैं.&amp;nbsp;
गौरतलब है कि लिंक्डइन एक प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म है, जहां अक्सर लोग करियर टिप्स, लीडरशिप और मोटिवेशनल बातें लिखते हैं. इस तरह की पोस्ट बनाना एआई के लिए बेहद आसान होता है. साथ ही, लिंक्डइन पर अपनी रीच और विजिबिलिटी बनाए रखने के लिए लोगों और कंपनियों पर लगातार कंटेंट पोस्ट करने का बहुत दबाव रहता है. रिसर्च में सामने आया कि रोजाना नए विचार सोचना मुश्किल होता है, इसलिए लोग समय बचाने के लिए AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं.&amp;nbsp;
बता दें कि एआई धीरे-धीरे हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है. ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाते वक्त हमें ख्याल रखना होता है कि जिन पोस्ट को देखकर हम अपने निर्णय ले रहे हैं, कहीं वे एआई जनरेटेड तो नहीं हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>यूजर्स को सब कुछ फ्री देने के बाद कैसे VPN Apps करते हैं कमाई? जानिए क्या है पूरा प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ VPN Apps: डिजिटल प्राइवेसी की जब बात आती है तो ज्यादातर लोग VPN Apps का इस्तेमाल करते हैं. बता दें कि आज के समय में इंटरनेट पर प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर लोग पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं. इसी वजह से VPN (Virtual Private Network) ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. साथ ही स्टोर पर कई सारे फ्री वीपीएन ऐप्स मौजूद हैं जो यूजर्स को फ्री सर्विस देते हैं. इसी कड़ी में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि यूजर्स को सभी चीज फ्री में देने के बाद कैसे ऐप्स कमाई करते हैं. आइए जानते हैं कि क्या है पूरा प्रोसेस.
इस तरह से होती है कमाई
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ज्यादातर फ्री VPN ऐप्स की कमाई का सबसे बड़ा जरिया विज्ञापन होते हैं. बता दें कि जब भी यूजर ऐप खोलता है या सर्वर बदलता है, उसे वीडियो या बैनर ऐड्स दिखाई देते हैं. हर ऐड देखने या उस पर क्लिक करने से कंपनी को ऐड नेटवर्क के जरिए कमाई होती है. इसका मतलब साफ है कि जितने ज्यादा यूजर, उतनी ज्यादा कमाई.
एफिलिएट और पार्टनरशिप भी है जरिया
इसके अलावा कुछ VPN ऐप्स दूसरी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करते हैं. वे अपने ऐप में दूसरे प्रोडक्ट या सर्विस का प्रमोशन करते हैं. ऐसे में अगर कोई यूजर उस लिंक के जरिए कोई खरीदारी करता है या किसी सर्विस का सब्सक्रिप्शन लेता है तो VPN कंपनी को कमीशन मिलता है. इसे एफिलिएट मार्केटिंग भी कहा जाता है.
प्रीमियम प्लान से भी होती है कमाई
आपको बता दें कि कई VPN कंपनियां प्रीमियम प्लान भी ऑफर करती हैं. इसमें यूजर्स को बेसिक सुविधाएं मुफ्त दी जाती हैं लेकिन फास्ट स्पीड, ज्यादा सर्वर, ऐड-फ्री एक्सपीरिएंस और बेहतर सुरक्षा जैसी सर्विसेज के लिए यूजर को प्रीमियम प्लान खरीदना पड़ता है.
यूजर के डेटा से भी कमाई
बता दें कि सभी VPN यूजर्स का डेटा कमाई के लिए इस्तेमाल नहीं करते हैं लेकिन कुछ फ्री VPN ऐप्स यूजर्स की ब्राउजिंग से जुड़ा Anonymous डेटा को इकट्ठा कर उसका विश्लेषण करते हैं. कई मामलों में ये जानकारी ऐड कंपनियों या मार्केट रिसर्च एजेंसियों के लिए काम का साबित हो सकता है.
फ्री VPN इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग और रिव्यू जरूर चेक करें.
Privacy Policy और Permissions को ध्यान से पढ़ें.
जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगने वाले VPN से बचें.
संवेदनशील बैंकिंग सर्विस इस्तेमाल करते समय भरोसेमंद VPN का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
अगर समय-समय पर आप VPN का इस्तेमाल करते हैं तो पेड VPN आपके लिए बेहतर ऑप्शन होगा.

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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका Wireless Charger बढ़ा रहा है बिजली का बिल? जानिए क्या है पूरी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आपका Wireless Charger बढ़ा रहा है बिजली का बिल? जानिए क्या है पूरी सच्चाई ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>किस मौसम में सोलर पैनल लगाए तो होगी जबरदस्त शुरुआत? जानें कब होता है परफेक्ट समय</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Installation Tips: सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने का यह सबसे सही समय है. सरकार इस पर सब्सिडी दे रही है और कंपीटिशन बढ़ने से मार्केट में वैरायटी और ऑप्शन दोनों ही ज्यादा हो गए हैं. इसके अलावा सोलर पैनल का बढ़ता इस्तेमाल इसकी उपयोगिता की भी गारंटी दे रही है. अब अगर सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने के लिए सबसे सही मौसम की बात करें तो आपको गर्मी की शुरुआत को चुनना चाहिए. आज हम आपको बताएंगे क्यों गर्मी की शुरुआत का मौसम पैनल लगाने के लिए सबसे सही है और इस सीजन में पैनल लगाने के फायदे क्या होंगे.
कब लगाना चाहिए सोलर सिस्टम?
आप अपनी जरूरत और सहूलियत के हिसाब से सोलर पैनल कभी भी लगवा सकते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में इसे लगाने के कुछ फायदे होते हैं. अगर मार्च-अप्रैल के महीने में सोलर सिस्टम लगवाया जाता है तो उस समय दिन बड़े हो रहे होते हैं और धूप भी तेज होती है. इसका सीधा फायदा यह होता है कि ज्यादा सनलाइट रहने से सोलर पैनल ज्यादा बिजली बनाएंगे. लंबे दिन और बिना किसी रुकावट के आ रही धूप से सोलर एनर्जी सिस्टम की परफॉर्मेंस अपनी पीक पर रहेगी.
बचत का ज्यादा मौका
गर्मी के मौसम में बिजली का इस्तेमाल ज्यादा होता है. सर्दियों में कूलर, पंखे, फ्रिज और एसी की ज्यादा जरूरत नहीं रहती. इसलिए बिजली की खपत कम होती है. गर्मी आते ही इन सबकी जरूरत पड़ती है और बिजली का बिल आसमान छू जाता है. इसलिए अगर आप गर्मी की शुरुआत में पैनल लगवा लेते हैं तो हजारों रुपये का बिजली बिल बचाया जा सकता है. इसके साथ ही आप नेट मीटरिंग का भी पूरा फायदा उठा पाएंगे. गर्मी में जब सोलर पावर का प्रोडक्शन ज्यादा होगा तो आप ग्रिड में ज्यादा बिजली भेज पाएंगे, जिससे पूरे साल के लिए बेहतर बैलेंस बन जाएगा.
सब्सिडी का फायदा उठाने का सीमित समय ही बाकी
फिलहाल सरकार सोलर पैनल सिस्टम लगाने पर सब्सिडी दे रही है. अगर आप अभी यह सिस्टम लगवाते हैं तो 78,000 रुपये तक की सब्सिडी पा सकते हैं. इसलिए ज्यादा देरी न करते हुए अभी इस सब्सिडी का फायदा उठा लें.
सोलर पैनल लगाने के लिए कितनी जगह की जरूरत पड़ती है?
मोटे अनुमान के तौर पर अगर आप 3kW का सिस्टम लगवा रहे हैं तो लगभग 300 स्क्वेयर फीट एरिया की जरूरत पड़ेगी. यह एरिया ऐसा होना चाहिए, जहां दिन में छांव न रहती हो. अगर आप छोटा सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो 1kW का सिस्टम लगाने के लिए 100 स्क्वेयर फीट जगह चाहिए. इसी तरह अगर आपको ज्यादा बिजली की जरूरत है और आप 5kW का सिस्टम इंस्टॉल करवाते हैं तो लगभग 500 स्क्वेयर फीट की जरूरत होगी.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>किस, मौसम, में, सोलर, पैनल, लगाए, तो, होगी, जबरदस्त, शुरुआत, जानें, कब, होता, है, परफेक्ट, समय</media:keywords>
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        <title>Semicon 2.0 Explained: मोबाइल से मिसाइल तक... आखिर चिप इंडस्ट्री पर क्यों 1.27 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगा भारत?</title>
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        <description><![CDATA[ आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन से लेकर घर का फ्रिज, टीवी, AC, आपकी कार और यहां तक कि देश की मिसाइल तक, सभी में एक चीज कॉमन है और वह है सेमीकंडक्टर चिप. यही छोटी-सी चिप हर इलेक्ट्रॉनिक मशीन का दिमाग होती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि भारत आज भी अपनी जरूरत की ज्यादातर चिप विदेशों से खरीदता है. अब सरकार इसी तस्वीर को बदलना चाहती है. मोदी कैबिनेट ने Semicon 2.0 को मंजूरी दे दी है. अगले छह साल में इस मिशन पर 1.27 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
आखिर Semicon 2.0 है क्या? इसमें इतना पैसा क्यों लगाया जा रहा है? इससे आम आदमी को क्या फायदा होगा और क्या भारत सच में दुनिया का बड़ा चिप निर्माता बन सकता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
छोटी सी चिप इतनी बड़ी चीज क्यों?
चिप देखने में जितनी छोटी होती है, लेकिन यही चिप किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का दिमाग होती है. मोबाइल, लैपटॉप, कार, एयरक्राफ्ट, मेडिकल मशीन, 5G नेटवर्क, सैटेलाइट और मिसाइल हर जगह चिप की जरूरत होती है. हालांकि, चिप बनाना दुनिया के सबसे मुश्किल और सबसे महंगे कामों में गिना जाता है. इसके लिए अरबों डॉलर की फैक्ट्री, धूल रहित क्लीन रूम, हजारों करोड़ की मशीनें और वर्षों का अनुभव चाहिए. यही वजह है कि आज सबसे आधुनिक चिप मुख्य रूप से ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे कुछ ही देशों में बनती है.
कोविड के दौरान जब दुनिया में चिप की कमी हुई थी, तब भारत में कार खरीदने वालों को कई महीने इंतजार करना पड़ा था. कई कंपनियों को उत्पादन तक रोकना पड़ा था. तभी दुनिया को समझ आया कि चिप जैसी अहम चीज के लिए कुछ देशों पर निर्भर रहना कितना खतरनाक है.
Semicon 2.0 आखिर है क्या?
इसे ऐसे समझिए. साल 2021 में सरकार ने Semicon India Programme शुरू किया था. उस समय करीब 76 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. मकसद था भारत में पहली बार चिप बनाने की फैक्ट्री और चिप पैकेजिंग यूनिट लगाना. अब Semicon 2.0 उसी मिशन का अगला और बड़ा चरण है.
इस बार सरकार सिर्फ चिप की फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहती. लक्ष्य है कि पूरी Semiconductor Value Chain भारत में विकसित हो, यानी सिर्फ चिप ही नहीं, बल्कि चिप बनाने वाली मशीनें, सिलिकॉन वेफर, फोटोरेजिस्ट, स्पेशलिटी गैस, केमिकल, रिसर्च, डिजाइन और इंजीनियरों की ट्रेनिंग तक सब कुछ भारत में विकसित किया जाए. योजना छह साल चलेगी और इसकी विस्तृत गाइडलाइन अगले कुछ हफ्तों में जारी होने की उम्मीद है.
1.27 लाख करोड़ रुपये आखिर खर्च कहां होंगे?
सरकार ने पूरी योजना को छह बड़े हिस्सों में बांटा है.&amp;nbsp;

पहला हिस्सा Chip Design के लिए होगा. इसमें स्टार्टअप और भारतीय कंपनियों को आर्थिक मदद मिलेगी, ताकि वे अपनी चिप डिजाइन कर सकें.
दूसरा हिस्सा उन कंपनियों के लिए होगा, जो चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, केमिकल, स्पेशलिटी गैस और दूसरे जरूरी सामान भारत में बनाएंगी.
तीसरा हिस्सा नई Semiconductor Fab यानी चिप बनाने वाली फैक्ट्री लगाने के लिए होगा.
चौथा हिस्सा Packaging, Testing और Assembly Units के विस्तार पर खर्च होगा.
पांचवां हिस्सा नई तकनीक पर रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए होगा.
छठा हिस्सा इंजीनियरों की ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट पर खर्च किया जाएगा.

सरकार को इससे क्या मिलेगा?
सरकार इसे खर्च नहीं, बल्कि निवेश मान रही है. सरकार का अनुमान है कि इस योजना से करीब 4 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आएगा. साथ ही, करीब 2 लाख करोड़ रुपये की चिप का उत्पादन और लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की चिप का निर्यात हो सकता है, यानी सरकार की कोशिश भारत में पूरी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री खड़ी करने की है.
अब तक क्या हुआ?
ऐसा नहीं है कि सब कुछ अभी शुरू होना है. पहले चरण में सरकार 12 बड़े प्रोजेक्ट मंजूर कर चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आ चुका है. Micron, Kaynes और CG Semi जैसी कंपनियों की Packaging Units पर काम शुरू हो चुका है. गुजरात के सानंद में CG Semi की यूनिट का उद्घाटन भी हो चुका है.
सबसे अहम परियोजना गुजरात के धौलेरा में बन रही Tata Electronics की Silicon Fab है. सरकार का लक्ष्य है कि 2028 तक भारत की पहली Made-in-India Silicon Chip यहीं से निकले. वहीं दिल्ली-NCR के पास जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र में HCL और Foxconn मिलकर Display Driver Chip बनाने की यूनिट लगा रहे हैं.&amp;nbsp;
Strategic Chip और Commercial Chip में क्या फर्क?
सरकार दो तरह की चिप पर फोकस कर रही है. पहली Strategic Chips हैं. इनका इस्तेमाल मिसाइल, रडार, रक्षा उपकरण, सुरक्षित संचार और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में होता है. सरकार चाहती है कि इन चिप्स के लिए भारत किसी दूसरे देश पर निर्भर न रहे. दूसरी Commercial Chips हैं. ये वही चिप हैं, जो मोबाइल, कार, टीवी, फ्रिज, AC, टेलीकॉम नेटवर्क और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होती हैं.
मोबाइल तो भारत में बन रहे, फिर चिप की जरूरत क्यों?
भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है. देश में बिकने वाले ज्यादातर मोबाइल भारत में असेंबल होते हैं, लेकिन इनका सबसे महंगा और सबसे जरूरी हिस्सा यानी Processor Chip अब भी विदेश से आता है. ऐसे में सरकार मोबाइल निर्माण के साथ-साथ अब चिप निर्माण पर भी जोर दे रही है.
किस तरह की चिप बनाएगा भारत?
शुरुआत में भारत की फैब 28nm से 110nm तक की चिप बनाएंगी. दरअसल, Nanometer (nm) जितना छोटा होगा, चिप उतनी ज्यादा तेज, आधुनिक और बिजली बचाने वाली होगी. 28nm से 110nm वाली चिप कार, टीवी, फ्रिज, टेलीकॉम, इंडस्ट्रियल मशीन और रक्षा उपकरणों के लिए पूरी तरह पर्याप्त हैं. वहीं, प्रीमियम स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली 7nm, 5nm, 3nm और 2nm जैसी चिप अभी दुनिया के कुछ ही देशों में बनती हैं. सरकार का लक्ष्य है कि 2035 तक भारत भी ऐसी अत्याधुनिक चिप बनाने की क्षमता विकसित करे.
गाड़ियों और 5G नेटवर्क के लि ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Important Phone Settings: फोन में कर लें ये तीन बदलाव, मोबाइल नहीं आप हो जाएंगे स्मार्ट, यहां जानिए क्या है तरीका?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/important-phone-settings-फोन-में-कर-लें-ये-तीन-बदलाव-मोबाइल-नहीं-आप-हो-जाएंगे-स्मार्ट-यहां-जानिए-क्या-है-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ Important Phone Settings:&amp;nbsp; आज के समय में हर किसी के जिन्दगी में स्मार्ट फोन एक अहम हिस्सा बन गया &amp;nbsp;है. अक्सर ज्यादातर लोग फोन को सिर्फ कॉल करने, मैसेज भेजने या सोशल मीडिया चलाने के लिए ही इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप कुछ सेटिंग्स में अपने फोन में बदलाव कर सकते हैं, जिससे आपका फोन पहले से ज्यादा स्मार्ट हो जाएग और साथ ही उपयोग करने में पहले से ज्यादा असानी हो जाएगी. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी. &amp;nbsp;
सबसे पहले ऐप परमिशन को करें चेक
फोन को तेज और स्मार्ट बनाने के लिए सबसे पहले आपको अपने फोन के सेटिंग से मौजूद ऐप्स कि परमिशन को चेक करना होगा. यानी अक्सर कई लोगों को सही जानकारी नहीं होती है और वे बिना जाने, पड़े उस एप को वे परमिशन दे देते हैं जिसकी उसको जरूरत भी नहीं होती है. उघारण के तौर पर समझे तो कई बार हम बिना सोचे-समझे किसी भी ऐप को कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन या कॉन्टैक्ट्स की परमिशन दे देते हैं. जिससे आपकी निजी जानकारी लीक होने का खतरा बड़ जाता है.
ऐसे में सवाल आता है कि इस परेशानी को ठीक कैसे करें, &amp;nbsp;तो इसके लिए आपको फोन की सेटिंग्स में जाकर &quot;ऐप परमिशन&quot; पर जाना होगा. जहां पर ये सारी जानकारी देख सकते हैं कि आखिर आपने किन-किन फालतू एप्स को परमिशन दे रखी है. वहीं जिन ऐप्स को आप ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते, उनकी परमिशन बंद कर दें. &amp;nbsp;इससे आपका कम खर्च होगा साथ ही आपकी निजी जानकारी भी सुरक्षित रहेगी. &amp;nbsp;
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स्टोरेज को रखें साफ-सुथरा
फोन को इस्तेमाल करते समय अक्सर कई लोग अपने फोन के स्टोरेज को चेक करना भूल जाते हैं, जिसके कारण उनका फोन धिरे-धिरे स्लो, लेक, और हेंग होने लगता है. ऐसे में आपको अपने फोन से पुरानी फोटो, वीडियो और बेकार पड़े ऐप्स को डिलीट कर देना चाहिए, जिससे फोन की स्पीड बनी रहता है. साथ आपको महीने में एक बार अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर &quot;स्टोरेज&quot; पर जा कर चेक करना होगा.&amp;nbsp;
सिस्टम अपडेट को न करें नजरअंदाज
तीसरा और आखिरी बदलाव है फोन के सॉफ्टवेयर अपडेट को समय पर करना. &amp;nbsp;बहुत से लोग सोचते हैं कि अपडेट करने से फोन धीमा हो जाएगा, लेकिन असल में यह सोच गलत है. कंपनियां समय-समय पर अपडेट के जरिए फोन की सुरक्षा को मजबूत करती हैं. अगर आप पुराना सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते रहेंगे, तो हैकर्स आपके फोन को आसानी से निशाना बना सकते हैं. इसलिए आपको &amp;nbsp;हमेशा सेटिंग्स में जाकर &quot;सॉफ्टवेयर अपडेट&quot; वाले ऑप्शन को चेक करते रहना चाहिए ऐर समय पर &amp;nbsp;इंस्टॉल कर लेना चाहिए.&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Important, Phone, Settings:, फोन, में, कर, लें, ये, तीन, बदलाव, मोबाइल, नहीं, आप, हो, जाएंगे, स्मार्ट, यहां, जानिए, क्या, है, तरीका</media:keywords>
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        <title>Smartphone Tips: कोई एप आपकी स्क्रीन तो रिकॉर्ड नहीं कर रहा? फटाफट ऐसे करें चेक</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Tips: स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग से लेकर चैटिंग और ऑनलाइन शॉपिंग तक कई जरूरी काम फोन पर ही होते हैं. ऐसे में अगर कोई ऐप आपकी जानकारी के बिना स्क्रीन रिकॉर्ड कर रही हो, तो आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है. हालांकि, एंड्रॉयड और आईफोन दोनों में स्क्रीन रिकॉर्डिंग के लिए अनुमति की जरूरत होती है अगर आपने किसी ऐप को यह अनुमति दी है, तो समय समय पर इसकी जांच करना जरूरी है. आइए जानते हैं कि कैसे पता करें कि कोई ऐप आपकी स्क्रीन रिकॉर्ड तो नहीं कर रही.
अनजान परमिशन पर रखें सबसे पहले नजर
फोन में इंस्टॉल किसी भी ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन देना खतरा बढ़ सकता है. अगर किसी ऐप ने स्क्रीन रिकॉर्डिंग या स्क्रीन कैप्चर से जुड़ी अनुमति मांगी है, तो पहले यह समझें कि उसे इसकी जरूरत क्यों है? अनजान या जिस ऐप्स पर संदेह हो उसे अनुमति देने से बचें.&amp;nbsp;
Privacy Dashboard से मिल सकता है बड़ा सुराग
अगर आप Android 12 या उससे ऊपर का वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं, तो Privacy Dashboard में जाकर यह देख सकते हैं कि कौन कौन से ऐप्स कैमरा, माइक्रोफोन और दूसरी संवेदनशील परमिशन का इस्तेमाल कर रहे हैं. किसी अनजान ऐप की असामान्य Activity दिखने पर उसकी जांच करें और जरूरत पड़ने पर परमिशन हटा दें.
Accessibility Service की जरूर करें जांच
कुछ ऐप्स Accessibility Service का गलत इस्तेमाल कर स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं. फोन की सेटिंग में जाकर देखें कि यह permission किन ऐप्स को दी गई है. अगर कोई अनजान ऐप्स यहां दिखाई दे, तो उसकी अनुमति तुरंत No allow कर दें.
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स्क्रीन रिकॉर्डिंग का संकेत दिखे तो रहें सतर्क
कई स्मार्टफोन में स्क्रीन रिकॉर्डिंग शुरू होने पर स्टेटस बार में आइकन या नोटिफिकेशन दिखाई देता है. अगर आपने रिकॉर्डिंग शुरू नहीं की है और फिर भी ऐसा संकेत दिखे, तो यह जांचने की जरूरत है कि कौन सा ऐप एक्टिव है. ऐसे में हाल ही में इंस्टॉल किए गए ऐप्स की भी रिव्यू करें.
फोन की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
हमेशा ऐप्स को केवल ऑथराइज्ड ऐप स्टोर से डाउनलोड करें. समय समय पर ऐप परमिशन की जांच करें और जिन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करते, तो अनइंटॉल रें. साथ ही फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट रखना भी जरूरी है, क्योंकि नए अपडेट में कई सुरक्षा सुधार शामिल होते हैं.
आईफोन यूज़र्स तुरंत अपनाएं यह सीक्रेत तरीका
अपने डिवाइस की Setting&gt;Privacy &amp;amp; Security में जाएं. उन सभी ऐप्स क कैमरा और माइकरोफोन एक्सेस तुरंत बंद करें जिनकी आवश्यकता नहीं हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Phone Maintenance Tips: हर 2 साल में नया फोन खरीदना करें बंद! इन 4 टेक सीक्रेट्स से पुराना स्मार्टफोन बनाएं सुपरफास्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Phone Maintenance Tips: हर 2 साल में नया फोन खरीदना करें बंद! इन 4 टेक सीक्रेट्स से पुराना स्मार्टफोन बनाएं सुपरफास्ट ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या फर्जी कॉपीराइट कंप्लेंट मिलने पर भी बंद हो रहा इंस्टाग्राम अकाउंट? जान लें इसकी हकीकत</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Copyright Strike Extortion Network: दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इंस्टाग्राम पर चल रहे एक कथित साइबर एक्सटॉर्शन नेटवर्क की जांच की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि यह नेटवर्क इंस्टाग्राम के कॉपीराइट सिस्टम का मिसयूज कर कंटेट क्रिएटर को टारगेट कर रहा है. इस नेटवर्क की जांच के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के गठन की मांग की गई है. याचिका को कंटेट क्रिएटर नीतिन जोशी ने फाइल किया है और उनका आरोप है कि इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक की जाती है. इससे अकाउंट बंद हो जाता है. फिर स्ट्राइक वापस लेने के लिए पैसों की डिमांड की जाती है. आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता का कहना है कि एक संगठित नेटवर्क इंस्टाग्राम के कॉपीराइट रिपोर्टिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर रहा है. यह नेटवर्क बॉट अकाउंट्स के जरिए किसी इंस्टाग्राम अकाउंट को टारगेट करता है. ये अकाउंट कॉपीराइट के उल्लंघन की शिकायतें दर्ज करवाते हैं. इससे इंस्टाग्राम की ऑटोमैटेड एनफोर्समेंट प्रोसेस शुरू हो जाती है, जिसमें बिना कोई नोटिस या वेरिफिकेशन के अकाउंट को सस्पेंड करने से लेकर डिसेबल तक कर दिया जाता है.
स्ट्राइक वापस लेने के लिए मांगे जाते हैं पैसे
याचिका में कहा गया है कि एक बार इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड या डिसेबल होने के बाद नेटवर्क की तरफ से कंटेट क्रिएटर को कॉन्टैक्ट किया जाता है. फिर यह नेटवर्क कॉपीराइट की शिकायत वापस लेने के लिए मोटी रकम की मांग करते हैं. याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि यह एक नया उभरता हुआ साइबर क्राइम है, जिसमें मेटा प्लेटफॉर्म के कॉपीराइट एनफोर्समेंट मैकेनिज्म को फिरौती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
याचिकाकर्ता ने दिया खुद का उदाहरण
याचिकाकर्ता जोशी ने कहा कि उन्होंने &quot;इंस्टाग्राम का सबसे बड़ा कॉपीराइट स्कैम&quot; टाइटल से एक वीडियो पब्लिश किया था. इसके बाद कई दूसरे क्रिएटर्स ने ऐसी ही फर्जी शिकायतों के सबूत उनके साथ साझा किए हैं. जोशी ने आरोप लगाया कि वीडियो पब्लिश होने के कुछ ही समय बाद कॉपीराइट की शिकायत को लेकर उनके वीडियो को दुनियाभर में ब्लॉक कर दिया गया. इससे पता चलता है कि कैसे मेटा के रिपोर्टिंग मैकेनिज्म को मिसयूज किया जा रहा है. याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच के लिए SIT के गठन की मांग की है. पहले 15 जुलाई को इस पर सुनवाई होनी थी, लेकिन एक जज के सुनवाई से हटने के बाद 28 जुलाई को इस मामले को सुना जाएगा.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, फर्जी, कॉपीराइट, कंप्लेंट, मिलने, पर, भी, बंद, हो, रहा, इंस्टाग्राम, अकाउंट, जान, लें, इसकी, हकीकत</media:keywords>
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        <title>iPhone 16 के दाम धड़ाम! इस सेल में मिल रहा है सबसे सस्ता, मौका चूक न जाना</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 16 Price Cut: 2025 में सबसे ज्यादा बिकने वाले iPhone 16 की लॉन्चिंग को भले ही दो साल होने वाले हैं, लेकिन यह फोन पुराना नहीं हुआ है. अपने धांसू फीचर्स के दम पर यह आज भी कई मामलों में फ्लैगशिप फोन्स को टक्कर दे सकता है. अगर आप यह आईफोन खरीदना चाहते हैं तो इस समय धांसू डील मिल रही है. क्रोमा की इस डील का फायदा उठाकर आप हजारों रुपये बचा सकते हैं. डिस्काउंट के बाद की कीमत पर आईफोन 16 खरीदना और भी फायदे का सौदा हो जाएगा. आइए जानते हैं कि आपको आईफोन 16 में क्या-क्या फीचर्स मिलेंगे और क्रोमा पर क्या डील चल रही है.
iPhone 16 को क्यों पसंद कर रहे हैं लोग?
ऐप्पल ने 2024 में आईफोन 16 सीरीज को लॉन्च किया था. सीरीज के स्टैंडर्ड वेरिएंट iPhone 16 में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले मिलता है, जो 60Hz रिफ्रेश रेट, HDR कंटेट सपोर्ट और 2,000 निट्स की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट के साथ आता है. A18 प्रोसेसर वाला यह आईफोन मल्टीटास्किंग और ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स को आसानी से हैंडल कर लेता है. हाई परफॉर्मेंस के साथ-साथ यह प्रोसेसर एफिशिएंट और अपकमिंग सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए कंपेटिबल भी है. इसके रियर में 48MP+12MP का डुअल कैमरा सेटअप है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसके फ्रंट में 12MP का कैमरा है. बैटरी की बात करें तो फुल चार्जिंग पर यह आईफोन 22 घंटे का वीडियो प्लेबैक सपोर्ट करता है. यह आईफोन अपनी कम कीमत, शानदार फीचर्स और लंबे सॉफ्टवेयर सपोर्ट के कारण लोगों की पसंद बना हुआ है.
क्रोमा पर कितना सस्ता मिल रहा iPhone 16?
iPhone 16 को भारत में 79,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी यह काफी सस्ता मिल रहा है. क्रोमा पर इस आईफोन को 66,490 रुपये में लिस्ट किया गया है. 13,000 रुपये से ज्यादा की छूट के साथ आपको इस पर EMI का भी ऑप्शन मिल रहा है. इस तरह आप अपनी जेब पर एक साथ सारा बोझ डाले बिना भी इस आईफोन को अपना बना सकते हैं.
Google Pixel 10 पर भी डिस्काउंट
अगर आप आईफोन की जगह एंड्रॉयड फोन लेना चाहते हैं तो भी छूट का फायदा उठा सकते हैं. पिछले साल लॉन्च हुआ गूगल पिक्सल 10 इस समय अमेजन पर डिस्काउंट के साथ लिस्टेड है. भारत में यह फोन 79,999 रुपये में लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी अमेजन पर यह 66,900 रुपये में लिस्टेड है. इस पर 2,000 रुपये का कैशबैक भी है, जिसके बाद इसकी कीमत 65,000 रुपये से भी कम हो जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IRCTC Beta Version: IRCTC का बीटा वर्जन लॉन्च.... यह क्या होता है और ओरिजनल वेबसाइट से कितना अलग?</title>
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        <description><![CDATA[ IRCTC Beta Version : भारतीय रेलवे ने IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया है. इसे फिलहाल सभी यूजर्स के लिए स्थायी रूप से लागू नहीं किया गया है, बल्कि लोगों से फीडबैक लेने के लिए टेस्टिंग के तौर पर उपलब्ध कराया गया है. इसका मकसद यह समझना है कि नई वेबसाइट पर टिकट बुक करना कितना आसान है, कौन-कौन सी चीजें बेहतर हुई हैं और किन जगहों पर अभी सुधार की जरूरत है.
रेलवे का कहना है कि यूजर्स के सुझावों और एक्सपीरियंस के आधार पर वेबसाइट में जरूरी बदलाव किए जाएंगे. इसके बाद यही नया पोर्टल सभी लोगों के लिए आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि बीटा वर्जन क्या होता है और ओरिजनल वेबसाइट से यह कितना अलग है.&amp;nbsp;
क्या होता है बीटा वर्जन?
बीटा वर्जन किसी भी वेबसाइट, ऐप या सॉफ्टवेयर का ऐसा शुरुआती वर्जन होता है, जिसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए जारी किया जाता है. इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि असली यूजर्स वेबसाइट का इस्तेमाल करते समय किन दिक्कतों का सामना कर रहे हैं और कौन-कौन से फीचर्स बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं. इस दौरान यूजर्स अपनी राय और सुझाव देते हैं. इन्हीं फीडबैक के आधार पर डेवलपर्स वेबसाइट में जरूरी सुधार करते हैं. सभी बदलाव पूरे होने के बाद ही फाइनल या ओरिजनल वर्जन लॉन्च किया जाता है.&amp;nbsp;
करीब 24 साल बाद बदल रही है IRCTC वेबसाइट
IRCTC की वेबसाइट पहली बार साल 2002 में शुरू की गई थी. तब से लेकर अब तक करोड़ों लोग इसी प्लेटफॉर्म के जरिए रेलवे टिकट बुक करते हैं. रेलवे के मुताबिक, यह वेबसाइट हर दिन औसतन 14.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालती है. इतने बड़े प्लेटफॉर्म पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक और बदलती जरूरतों को देखते हुए अब इसकी डिजाइन और काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया जा रहा है, जिससे टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा आसान और तेज हो सके.&amp;nbsp;
नई बीटा वेबसाइट कैसे यूज करें?
नई बीटा वेबसाइट का यूज https://www.irctc.co.in/eticket/ पर जाकर किया जा सकता है. इसके अलावा मौजूदा IRCTC वेबसाइट के होमपेज पर भी बीटा वर्जन का लिंक दिया जाएगा.&amp;nbsp;
ओरिजनल वेबसाइट से यह कितना अलग है?
रेल मंत्रालय के अनुसार नई वेबसाइट का सबसे बड़ा बदलाव इसका डिजाइन है. नई वेबसाइट पहले की तुलना में ज्यादा साफ और व्यवस्थित दिखाई देगी. स्क्रीन पर बिना जरूरत वाले पॉप-अप, चमकदार एलिमेंट और ध्यान भटकाने वाली चीजों को काफी हद तक कम किया गया है. इससे यूजर्स जरूरी जानकारी पर आसानी से ध्यान दे सकेंगे और टिकट बुकिंग का अनुभव पहले से बेहतर होगा. साथ ही नई वेबसाइट में सीट उपलब्धता देखने का तरीका भी बदला गया है. पहले अलग-अलग क्लास की सीट देखने के लिए बार-बार ऑप्शन बदलना पड़ता था, लेकिन अब यूजर्स एक ही स्क्रीन पर अलग-अलग क्लास में सीटों की उपलब्धता देख सकेंगे. इससे सही ऑप्शन चुनना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>IRCTC, Beta, Version:, IRCTC, का, बीटा, वर्जन, लॉन्च...., यह, क्या, होता, है, और, ओरिजनल, वेबसाइट, से, कितना, अलग</media:keywords>
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        <title>OnePlus के भारत छोड़ने की चर्चा, क्या अब फोन खरीदना रहेगा फायदे का सौदा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/oneplus-के-भारत-छोड़ने-की-चर्चा-क्या-अब-फोन-खरीदना-रहेगा-फायदे-का-सौदा</link>
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        <description><![CDATA[ OnePlus India Exit: हाल ही में खबर आई थी कि चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी वनप्लस जल्द ही अमेरिका और यूरोप से अपना कारोबार समेट सकती है. अब इस लिस्ट में भारत का नाम भी जुड़ गया है. कुछ महीने पहले भी ऐसे कयास लगाए गए थे, जिनका कंपनी ने खंडन किया था. अब एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि वनप्लस अमेरिका और यूरोप से निकलने का ऐलान इसी हफ्ते कर सकती है, जबकि भारत में यह अगले साल अपना कारोबार बंद कर देगी. ऐसे में ग्राहकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या कंपनी के फ्यूचर को लेकर लगाए जा रहे कयासों के बीच अभी वनप्लस का फोन खरीदना चाहिए? आइए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.&amp;nbsp;
क्या पूरी तरह बंद हो जाएगी वनप्लस?
अभी कंपनी के कुछ मार्केट्स से निकलने की खबरें आ रही हैं, जिनमें बताया गया है कि वनप्लस सिर्फ चाइनीज मार्केट पर फोकस करेगी. यानी कंपनी पूरी तरह बंद नहीं हो रही है और उसका अस्तित्व बचा रहेगा. दूसरी बात यह है कि वनप्लस की पैरेंट कंपनी ओप्पो के ऑपरेशन पहले की तरह जारी है. कई जगहों पर वनप्लस की वेबसाइट ग्राहकों को ओप्पो के प्रोडक्ट्स पर रिडायरेक्ट कर रही है. यह बताता है कि वनप्लस के एग्जिट होने के बाद वहां ओप्पो के उपस्थिति रहेगी.&amp;nbsp;
क्या अभी वनप्लस का फोन खरीदना चाहिए?
कुछ लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अभी वनप्लस का फोन खरीदना फायदे का सौदा होने वाला है? इसका जवाब है कि अगर आप फोन खरीदते हैं तो वनप्लस अपने ऑपरेशन जारी रहने तक कंज्यूमर और सिक्योरिटी अपडेट सपोर्ट देती रहेगी. इसके बाद अगर वनप्लस अपना कारोबार समेट भी लेती है तो ओप्पो की तरफ से यह सपोर्ट मिलता रहेगा. कुछ दिन पहले आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि ओप्पो अपना स्मार्टफोन बिजनेस रिस्ट्रक्चर कर रही है. इसके तहत वनप्लस का ऑफ्टर-सेल सर्विस सपोर्ट भी ओप्पो के सर्विस नेटवर्क के तहत आएगा. इसका मतलब है कि अगर आपके वनप्लस फोन में कोई इश्यू आता है तो आप इसे ओप्पो के सर्विस सेंटर पर दिखा सकते हैं.&amp;nbsp;
यूजर्स की शिकायतें भी आ रहीं सामने
अगर आप अभी वनप्लस का फोन खरीदते हैं तो कुछ मौजूदा यूजर्स की शिकायतों का भी ध्यान रखना चाहिए. टेकएडवाइजर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी का कस्टमर सपोर्ट रिपेयर और रिप्लेसमेंट के मामलों में ग्राहकों को संतुष्ट नहीं कर रहा है. कई यूजर्स ने रिप्लेसमेंट के बदले वाउचर मिलने की भी बात कही है. ऐसे में अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि अगर वनप्लस इंडियन मार्केट से एग्जिट लेती है तो आफ्टर-सेल सर्विस की स्थिति क्या रहने वाली है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>OnePlus, के, भारत, छोड़ने, की, चर्चा, क्या, अब, फोन, खरीदना, रहेगा, फायदे, का, सौदा</media:keywords>
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        <title>Airtel यूजर्स के लिए जरूरी सूचना, यह काम नहीं किया तो अकाउंट से कट जाएंगे पैसे</title>
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        <description><![CDATA[ How To Cancel Airtel Perplexity Pro Subscription: अगर आप एयरटेल यूजर हैं तो यह खबर आपके काम की है. जिन यूजर्स ने एयरटेल थैंक्स ऐप से एक साल के लिए Perplexity Pro का सब्सक्रिप्शन एक्टिवेट किया था, उनका फ्री पीरियड पूरा होने वाला है. अगर रिन्यूअल डेट से पहले उसे कैंसिल नहीं किया जाता है तो आपको उस प्लान के पैसे देने पड़ सकते हैं. पिछले साल जब Perplexity ने एयरटेल के साथ अपनी पार्टनरशिप का ऐलान किया था तो उसने 17,000 रुपये की कीमत वाला Pro प्लान फ्री में ऑफर किया था. फ्री होने के बाद भी कई यूजर्स ने इसमें पेमेंट मेथड एड कर दिया था. अब प्रमोशनल पीरियड पूरा हो रहा है और इस सब्सक्रिप्शन को कैंसिल नहीं किया जाएगा तो आपके अकाउंट से प्लान के पैसे कट जाएंगे.
पैसे बचाने हैं तो जल्दी करें
Perplexity का प्रमोशनल पीरियड जल्दी ही पूरा हो जाएगा. यानी सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने के लिए सिर्फ कम समय बचा है. अगर आप प्लान को कंटिन्यू करना चाहते हैं तो आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर आप कैंसिल करना चाहते हैं तो हम इसका तरीका बताने जा रहे हैं.
कैसे कैंसिल करें Airtel Perplexity Pro Subscription?
सबसे पहले Perplexity की वेबसाइट ओपन करें और अपने अकाउंट में साइन-इन कर लें. इसके बाद प्रोफाइल आइकन पर क्लिक या टैप करें. अब मेनू से ऑल सेटिंग को सेलेक्ट कर सब्सक्रिप्शन सेक्शन में जाएं. यहां थैंक्स फॉर सब्सक्राइबिंग परप्लेक्सिटी प्रो लिखा दिखेगा. इस पर टैप करने पर सब्सक्रिप्शन को मैनेज करने का ऑप्शन दिख जाएगा. मैनेज पर टैप कर नेक्स्ट पेज पर जाएं और एक बार फिर मैनेज को सेलेक्ट करें. यहां कैंसिल सब्सक्रिप्शन का ऑप्शन दिखेगा. इस पर टैप करने के बाद आपसे कैंसिल करने के कारण पूछे जाएंगे. आप चाहें तो कारण दे सकते हैं. इसके बाद कंटिन्यू पर टैप कर दें. यह प्रोसेस पूरी होते ही परप्लेक्सिटी की होम स्क्रीन पर आ जाएंगे.
कैंसिलेशन को कैसे करें कन्फर्म
आपका सब्सक्रिप्शन कैंसिल होते ही एक मैसेज के जरिए आपको इसकी जानकारी दे दी जाएगी. इसके अलावा आप चाहें तो फिर से ऑल सेटिंग के पेज पर जाकर सब्सक्रिप्शन सेक्शन ओपन कर लें. यहां पर आपको मैसेज दिख जाएगा, जिसमें लिखा होगा कि आपका प्लान पूरा होने के लिए शेड्यूल है. इसमें आपको तारीख भी दिख जाएगी.
एंड्रॉयड और आईफोन पर यह तरीका आएगा काम
प्लान कैंसिल करने का तरीका प्लेटफॉर्म के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है. अगर आप इसे एंड्रॉयड और आईफोन के जरिए कैंसिल करना चाहते हैं तो आईफोन यूजर्स को अपने ऐप्पल अकाउंट की सेटिंग में जाकर रिकरिंग पेमेंट को मैनेज करना होगा. इसी तरह एंड्रॉयड यूजर्स भी सब्सक्रिप्शन सेक्शन में जाकर इसे कैंसिल कर सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>दिनभर स्क्रीन में घुसे रहने वाले लोगों के लिए काम का है 1&amp;2&amp;10 नियम, जान लिया तो नुकसान से बच जाएंगे</title>
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        <description><![CDATA[ 1-2-10 Rule For Screens: कई लोग दिनभर स्क्रीन में घुसे रहते हैं. लैपटॉप पर काम करते-करते बोर हो जाएंगे और फोन देखना शुरू कर देंगे. फोन देखकर मन भर जाएगा तो टीवी चला लेते हैं. कई लोग तो टीवी देखने के साथ-साथ फोन भी देख रहे होते हैं. लगातार स्क्रीन के आगे रहने से आंखों पर असर पड़ता तय है. लगातार स्क्रीन के आगे रहने से सिरदर्द और नजर के कमजोर होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए आज हम आपको 1-2-10 का नियम बताने जा रहे हैं, जो आपको इन दिक्कतों से बचा सकता है.&amp;nbsp;
क्या है 1-2-10 का नियम?
यह नियम बड़ा आसान है. इसे याद रखने के साथ-साथ फॉलो करना भी मुश्किल वाला काम नहीं है. यह नियम कहता है कि आपके फोन की स्क्रीन आंखों से कम से कम 1 फुट, डेस्कटॉप या लैपटॉप की स्क्रीन 2 फुट और टीवी स्क्रीन 10 फुट दूर होनी चाहिए. इससे स्क्रीन के कारण आंखों पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकता है. अगर आपके घर में छोटे बच्चे हैं और वो टीवी, फोन या लैपटॉप को एकदम पास से देखते हैं तो उन्हें यह नियम समझाया जा सकता है. इसकी मदद से वो जान पाएंगे कि कौन-सा डिवाइस कितनी दूरी से देखना है.
स्क्रीन को एकदम पास से देखने के क्या नुकसान?
अगर आप स्क्रीन को एकदम पास से देखते हैं तो इसके कई नुकसान है. इससे एस्थेनोपिया हो सकता है, जो सिरदर्द और धुंधली नजर का कारण बन सकता है. इसके अलावा अगर आप एकदम पास से स्क्रीन पर नजर गड़ाए रहते हैं तो आखें कम झपकते हैं. इससे आंखों में सूखापन आ सकता है. लंबे समय तक अगर यह स्थिति बन रहती है तो स्क्रीन की तरफ देखना मुश्किल हो जाता है.
स्क्रीन की ब्राइटनेस से भी पड़ता है फर्क
अगर आप दिन के कई घंटे फोन की स्क्रीन पर बीता रहे हैं तो इसकी ब्राइटनेस का आपकी आंखों पर सीधा असर पड़ता है. इसलिए अगर आप फोन को अंधेरे में यूज कर रहे हैं तो स्क्रीन ब्राइटनेस को कम कर लें. हर बार आप इसे कम या ज्यादा करना भूल जाते हैं तो ऑटो-ब्राइटनेस का फीचर आपके काम आएगा. इसी तरह अंधेरे में आप डार्क मोड को भी यूज कर सकते हैं. यह टेक्स्ट को व्हाइट और बैकग्राउंड को ब्लैक कर देता है, जिससे कम ब्राइटनेस के बावजूद स्क्रीन को देखना आसान हो जाता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Tower Fan या Pedestal Fan! छोटी जगह के लिए कौन देगा सबसे ज्यादा ठंडक? जानिए एक घंटे में कितनी बिजली होती है खपत</title>
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        <description><![CDATA[ Tower Fan Vs Pedestal Fan: गर्मियों के मौसम लोग अपने घरों में एसी, कूलर या पंखों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन टेक्नोलॉजी के साथ-साथ अब बाजार में कई सारे ऐसे एडवांस चीजें आ चुकी हैं जो आपको गर्मी से राहत देने में सक्षम है. इसी कड़ी में बता दें कि आज के समय में जो लोग एसी नहीं लगवा सकते हैं उनके लिए मार्केट में पेडेस्टल और टॉवर फैन काफी ट्रेंडिंग में चल रहे हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दोनों में से कौन सा आपके लिए बेस्ट है और कौन ज्यादा बिजली खपत करता है.
कौन देता है ज्यादा ठंडक
अगर सिर्फ तेज हवा की बात करें तो Pedestal Fan नॉर्मली Tower Fan से बेहतर परफॉर्मेंस देता है. इसका बड़ा ब्लेड ज्यादा एयरफ्लो पैदा करता है जिससे गर्मी कम महसूस होती है.
वहीं, दूसरी ओर, Tower Fan की हवा उतनी तेज नहीं होती लेकिन ये लगातार और बैलेंस्ड एयरफ्लो देता है. अगर आप पढ़ाई, ऑफिस का काम या सोने के दौरान कम शोर वाला पंखा चाहते हैं तो Tower Fan आपके लिए ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.
एक घंटे में कितनी होती है बिजली की खपत
अब बिजली की खपत की बात करें तो बता दें कि बिजली की खपत पंखे की मोटर और मॉडल पर निर्भर करती है. Pedestal Fan की पावर नॉर्मली 50 से 70 वॉट होती है. इसका मतलब है कि ये एक घंटे में लगभग 0.05 से 0.07 यूनिट बिजली खर्च करता है.
वहीं, Tower Fan की पावर करीब 35 से 60 वॉट होती है. ऐसे में इसकी खपत लगभग 0.035 से 0.06 यूनिट प्रति घंटे रहती है. अगर बिजली का औसत रेट 8 रुपये प्रति यूनिट माना जाए तो दोनों पंखों को एक घंटे चलाने का खर्च लगभग 30 से 60 पैसे के बीच होता है. इसीलिए बिजली खपत के मामले में दोनों ही डिवाइस किफायती साबित होते हैं.
कौन सा है बेहतर
आपको बता दें कि अगर आपका कमरा 80 से 150 स्कॉवयर फिट के बीच है तो दोनों तरह के पंखे इस्तेमाल किए जा सकते हैं. हालांकि, उनके काम करने का तरीका काफी अलग होता है. बता दें कि Pedestal Fan तेज हवा देने के लिए जाना जाता है.
इसकी ऊंचाई और डायरेक्शन को आसानी से चेंज किया जा सकता है जिससे हवा कमरे के हर कोने तक पहुंचती है. वहीं, दूसरी ओर, Tower Fan पतला और एडवांस डिजाइन के साथ आता है. ये कम जगह घेरता है और हवा को पूरे कमरे में अच्छे से फैलाता है जिससे छोटे कमरों में लोगों को ठंड़क मिलती है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone यूजर्स सावधान! चार्जिंग के समय ये 4 गलतियां पड़ सकती हैं भारी</title>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Smartwatch Privacy: क्या आपकी Smartwatch भी कर रही है जासूसी? ऐसे चोरी हो सकता है पर्सनल डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ Smartwatch Privacy : आज लाखों लोग फिटनेस और हेल्थ ट्रैकिंग के लिए स्मार्टवॉच का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन जितनी तेजी से इन डिवाइस का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. कई रिपोर्ट्स और रिसर्च में यह चिंता जताई गई है कि स्मार्टवॉच से इकट्ठा होने वाला हेल्थ और लोकेशन डेटा कई बार क्लाउड पर स्टोर होता है और कुछ परिस्थितियों में थर्ड-पार्टी तक भी पहुंच सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आपकी स्मार्टवॉच सिर्फ आपकी हेल्थ पर नजर रख रही है या आपकी निजी जानकारी भी कहीं और पहुंच रही है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि क्या आपकी Smartwatch भी जासूसी कर रही है और इससे कैसे आपका पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है.&amp;nbsp;
स्मार्टवॉच कई तरह का डेटा करती है रिकॉर्ड
आज की स्मार्टवॉच पहले की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हो चुकी हैं. इनमें कई तरह के सेंसर लगे होते हैं, जो यूजर की अलग-अलग हेल्थ और एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करते हैं. इन डिवाइस के जरिए हार्ट रेट, ब्लड ऑक्सीजन लेवल, नींद का पैटर्न, स्ट्रेस लेवल, स्किन टेम्परेचर, शरीर की एक्टिविटी, GPS लोकेशन, ब्लूटूथ और वाई-फाई जैसी जानकारियां रिकॉर्ड हो सकती हैं. सभी स्मार्टवॉच में एक जैसे फीचर नहीं होते हैं, लेकिन ज्यादातर डिवाइस कई ज्यादा और बड़े लेवल पर पर्सनल जानकारी इकट्ठा करती हैं.&amp;nbsp;
क्या आपकी Smartwatch भी जासूसी कर रही है?
स्मार्टवॉच आपकी सेहत और फिटनेस पर नजर रखने के लिए कई जानकारियां रिकॉर्ड करती है. यह डेटा कई बार क्लाउड पर स्टोर होता है और कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार कुछ परिस्थितियों में सर्विस प्रोवाइडर्स या कानूनी एजेंसियों के साथ शेयर भी किया जा सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्मार्टवॉच आपकी जासूसी कर रही है, लेकिन अगर यूजर बिना पढ़े सभी परमिशन दे देता है, तो उसकी पर्सनल जानकारी जरूरत से ज्यादा शेयर हो सकती है. ऐसे में प्राइवेसी सेटिंग्स, डेटा शेयरिंग और ऐप परमिशन की नियमित जांच करना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Explained: AI डेटा सेंटर की बढ़ती तलब! एक सवाल पूछने पर जितना पानी उड़ता है, उतने से कितने लोगों की प्यास बुझ सकती है?
हेल्थ डेटा क्यों माना जाता है जरूरी?
स्मार्टवॉच सिर्फ आपकी फिटनेस नहीं बताती, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल की पूरी तस्वीर भी सामने ला सकती है. इसमें आपकी नींद का समय,डेली एक्टिविटी, हार्ट रेट, एक्सरसाइज, लोकेशन हिस्ट्री और कई मामलों में महिलाओं का पिरियड्स जैसी जानकारी भी रिकॉर्ड हो सकती है. यही कारण है कि इस तरह के डेटा को बेहद जरूरी और संवेदनशील माना जाता है.&amp;nbsp;
इससे कैसे आपका पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है?
अगर स्मार्टवॉच की प्राइवेसी सेटिंग्स सही तरीके से मैनेज नहीं की जाएं या जरूरत से ज्यादा परमिशन दे दी जाए, तो आपका हेल्थ डेटा, लोकेशन हिस्ट्री, डेली रूटीन, नींद का पैटर्न और दूसरी पर्सनल जानकारी क्लाउड पर स्टोर होकर अलग-अलग सर्विस प्रोवाइडर्स तक पहुंच सकती है. वहीं अगर डिवाइस या उससे जुड़ा अकाउंट साइबर हमले का शिकार हो जाए, तो हैकर्स ब्लूटूथ, वाई-फाई या कमजोर सुरक्षा का फायदा उठाकर इस डेटा तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसे में मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट और जरूरी ऐप्स को ही परमिशन देना आपकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
1. अगर आप स्मार्टवॉच इस्तेमाल करते हैं, तो &amp;nbsp;समय-समय पर स्मार्टवॉच की Privacy Settings और Data Sharing ऑप्शनों की जांच करें.&amp;nbsp;
2. Location Tracking और बिना जरूरत परमिशन को जरूरत के अनुसार ही चालू रखें.&amp;nbsp;
3. जिन सेंसर की जरूरत न हो, उनका एक्सेस बंद कर दें.&amp;nbsp;
4. पुराने हेल्थ डेटा को समय-समय पर क्लाउड से हटाते रहें.&amp;nbsp;
5. किसी भी अनजान Bluetooth Request को एक्सेप्ट न करें.&amp;nbsp;
6. स्मार्टवॉच का सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें.&amp;nbsp;
7. अगर बैटरी अचानक बहुत तेजी से खत्म होने लगे या डिवाइस असामान्य व्यवहार करे, तो उसे जांचें और जरूरत पड़ने पर रीसेट करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Smartwatch, Privacy:, क्या, आपकी, Smartwatch, भी, कर, रही, है, जासूसी, ऐसे, चोरी, हो, सकता, है, पर्सनल, डेटा</media:keywords>
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        <title>फोन की Storage हो गई फुल? बिना SD Card के भी बढ़ा सकते हैं स्टोरेज, ये है कमाल का तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-की-storage-हो-गई-फुल-बिना-sd-card-के-भी-बढ़ा-सकते-हैं-स्टोरेज-ये-है-कमाल-का-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ फोन की Storage हो गई फुल? बिना SD Card के भी बढ़ा सकते हैं स्टोरेज, ये है कमाल का तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>फोन, की, Storage, हो, गई, फुल, बिना, Card, के, भी, बढ़ा, सकते, हैं, स्टोरेज, ये, है, कमाल, का, तरीका</media:keywords>
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        <title>अब रिमूवेबल बैटरी के साथ क्यों नहीं आते फोन? खुल गया यह बड़ा राज</title>
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        <description><![CDATA[ Why Removable Battery Removed From Phones: अगर आपने कुछ साल पहले तक नोकिया के कीपैड वाले फोन यूज किए हैं तो उनकी बैटरी भी बदली होगी. एक समय था, जब लोग एक फोन के लिए 2-3 बैटरी रखते थे. एक के डिस्चार्ज होते ही उसे निकालकर दूसरी बैटरी डाल लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होता. फोन से रिमूवेबल बैटरी गायब हो गई है. अब बैटरी को आसानी से रिमूव नहीं किया जा सकता. पर ऐसा हुआ क्यों है, क्यों कंपनियों ने अपने फोन में रिमूवेबल बैटरी देना बंद कर दिया? आज हम आपके लिए इन सवालों के जवाब लेकर आए हैं.
...तो इसलिए नहीं आ रहे रिमूवेबल बैटरी वाले फोन
अगर सामान्य वजहों की बात करें तो इसके पीछे कारण हैं. दरअसल, अब कंपनियां हाई-क्वालिटी मैटेरियल से बने और फीचर-लोडेड फोन लॉन्च करने लगी हैं. रिमूवेबल बैटरी के साथ ऐसा करना पॉसिबल नहीं था. रिमूवेबल बैटरी को हटाने के बाद कंपनियों के लिए फोन बनाने में ज्यादा मजबूत मैटेरियल यूज करना, HD कैमरा और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर्स देना आसान हो गया है. अगर पहले की तरह नए फोन में बैक कवर को हटाकर बैटरी निकालने का ऑप्शन रहता तो इन फीचर्स को लंबे टाइम तक वर्किंग कंडीशन में रखना काफी मुश्किल काम हो जाता.
फोन की सेफ्टी से भी जुड़ा है मामला
फीचर्स के अलावा बैटरी की मामला फोन की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है. अगर रिमूवेबल बैटरी वाला फोन चोरी हो जाता है तो इसकी बैटरी हटाते ही सारे सिक्योरिटी फीचर्स बंद हो जाएंगे. नॉन-रिमूवेबल बैटरी को हटाना आसान नहीं है. इसलिए अब फोन चोरी होने के बाद भी इसके ट्रैकिंग और सिक्योरिटी फीचर्स इनेबल रहते हैं, जिससे फोन को ट्रैस कर पाना आसान हो गया है. इसके साथ ही अब बैटरी सील होने के कारण फोन में गैप्स और हिंजेज भी कम हो गए हैं. इससे अब फोन वाटरप्रूफ भी बनने लगे हैं. यही कारण है कि मॉडर्न और अच्छी IP रेटिंग वाले फोन अब काफी समय तक पानी में रह सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या फिर से लौटेगा रिमूवेबल बैटरी का दौर?
भले ही सील्ड बैटरी फायदेमंद है, लेकिन कई लोगों को अब भी रिमूवेबल बैटरी की जरूरत महसूस होती है. कुछ समय पहले यूरोपीय संघ (EU) ने एक कानून बनाया था, जिसके तहत यह अनिवार्य किया गया है कि सभी पोर्टेबल डिवाइसेस में रिमूवेबल बैटरी होनी चाहिए. यह नियम अगले साल से लागू होगा. इसके बाद कंपनियों को EU में बेचने वाले फोन में रिमूवेबल बैटरी देनी पड़ेगी.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>खराब होने के बाद स्मार्टफोन की बैटरी का क्या होता है, E&amp;Waste बनती है या होती है Recycle?</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Battery: स्मार्टफोन ने लोगों के काम को काफी आसान बनाने का काम किया है. कई लोग अपने स्मार्टफोन को काफी लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं. इतने समय से फोन के इस्तेमाल होने पर उसकी बैटरी काफी कमजोर हो जाती है. ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल होता है कि पूरी तरह से स्मार्टफोन की बैटरी खराब होने के बाद उसका क्या होता है. क्या वो ई-वेस्ट बन जाती है या फिर उसे दोबारा रिसाइकिल किया जा सकता है. आइए जानते हैं इसकी पूरी सच्चाई.
क्यों खराब होती है स्मार्टफोन की बैटरी?
आपको बता दें कि ज्यादातर स्मार्टफोन में लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है. हर बार चार्ज और डिस्चार्ज होने पर बैटरी एक चार्जिंग साइकिल पूरी करती है. अब जैस-जैसे साइकिल पूरी होती जाती है वैसे-वैसे बैटरी की ताकत भी कम होने लगती है. एक समय के बाद स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है या फोन गर्म होने लगता है. अब ऐसी स्थिति में आपको फोन की बैटरी रिप्लेस कर देनी चाहिए या फिर नया फोन खरीदने पर विचार करना चाहिए.
पुरानी बैटरी का क्या करना चाहिए?
अगर आपके फोन की बैटरी खराब हो गई है तो उसे कभी भी नॉर्मल डस्टबिन में नहीं फेंकना चाहिए. इससे बेहतर होगा कि आप उसे किसी रजिसटर्ड ई-वेस्ट कलेक्शन सेंटर, मोबाइल निर्माता के सर्विस सेंटर या ई-वेस्ट ड्रॉप बॉक्स में जमा कर दें.
बता दें कि कई स्मार्टफोन कंपनियां पुरानी बैटरियां वापस लेकर उनकी सेफ्टी रिसाइक्लिंग करती हैं जिससे पर्यावरण पर होने वाला नुकसान भी कम होता है. इसीलिए एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि खराब हो चुकीं बैटरी को कभी भी यूहीं नहीं फेंकना चाहिए.
खराब हो चुकी बैटरी का क्या होता है?
अगर स्मार्टफोन की बैटरी पूरी तरह से खराब हो चुकी है और आपने उसे नॉर्मल कचरे में फेंक दिया तो वो ई-वेस्ट बन जाता है जो पर्यावरण के लिए भी काफी नुकसानदायक हो सकता है. इसीलिए हमेशा बैटरी को नॉर्मली कचरे में फेंकने से मना किया जाता है.
जानकारी के लिए बता दें कि आज कई कंपनियां और रजिस्टर्ड ई-वेस्ट रिसाइक्लिंग सेंटर खराब बैटरियों को एक जगह पर इकट्ठा करके उनका सुरक्षित तरीके से रिसाइकिल करते हैं. इस प्रोसेस में बैटरी से लिथियम, कोबाल्ट, कॉपर, निकेल और एल्युमिनियम जैसे चीजों को अलग किया जाता है. इसके बाद इनका इस्तेमाल नई बैटरियां, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य प्रोडक्ट बनाने में किया जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>लॉन्च से पहले लीक हो गई Samsung Galaxy Watch 9 और Ultra 2 की सारी जानकारी, जानिए क्या&amp;कुछ मिलेगा</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Galaxy Watches: सैमसंग के गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट में लगभग एक सप्ताह का समय बाकी है. इसमें कंपनी नए फोल्डेबल फोन के साथ-साथ Galaxy Watch 9 सीरीज और Galaxy Watch Ultra 2 को भी लॉन्च करेगी. लॉन्चिंग से पहले ही वॉचेज की सारी जानकारी लीक हो गई है. लीक के मुताबिक, सैमसंग की नई वॉचेज में नए चिपसेट और बड़ी बैटरी मिलने जा रही है. आइए एक नजर डालते हैं कि Galaxy Watch 9 सीरीज और Galaxy Watch Ultra 2 में क्या-क्या अपग्रेड्स आने वाली हैं.&amp;nbsp;
नई वॉचेज को लेकर सैमसंग ने कही यह बात
सैमसंग का कहना है कि Galaxy Watch 9 सीरीज और Galaxy Watch Ultra 2 एआई पावर्ड हेल्थ कंपैनियन डिवाइस होंगे, जिनमें सारे नए इंटरनल पार्ट्स लगे होंगे. नई चिपसेट और बड़े बैटरी पैक देने के अलावा इन्हें एनर्जी एफिशिएंट भी बनाया गया है.
लॉन्च से पहले ये फीचर हुए लीक
ताजा लीक के मुताबिक, वॉचेज के लिए सैमसंग अब इन-हाउस Exynos चिप को यूज नहीं करेगी. इसे क्वॉलकॉम के Snapdragon Wear Elite प्रोसेसर SW6100 से रिप्लेस किया जा रहा है. यह चिपसेट 3nm प्रोसेस पर बना है और इसमें 5 कंप्यूटिंग कोर्स है. नए प्रोसेसर से परफॉर्मेंस के साथ-साथ पावर एफिशिएंसी में भी सुधार होगा. मॉडल के हिसाब से इस चिपसेट को 2GB रैम और 32GB या 64GB स्टोरेज के साथ पेयर किया जाएगा. कनेक्टिविटी के मामले में सभी मॉडल Bluetooth 6.0, NFC, डुअल बैंड वाईफाई सपोर्ट के साथ आएंगे और सैमसंग के One UI Watch 9.0 पर रन करेंगे. Watch 9 के सभी मॉडल एल्युमिनियम केस के साथ लॉन्च होंगे.&amp;nbsp;
बैटरी में होगा ये इम्प्रूवमेंट
अगर लीक पर भरोसा किया जाए तो Galaxy Watch 9 का साइज 40mm होगा और इसमें मौजूदा मॉडल की तरह ही 325mAh का बैटरी पैक मिलेगा. वहीं इसके 44mm वेरिएंट में बैटरी को अपग्रेड किया जा रहा है. इसमें मौजूदा 435mAh पैक की बजाय 445mAh कैपेसिटी की नई बैटरी मिलेगी. इसकी तुलना में अल्ट्रा मॉडल को शानदार अपग्रेड के साथ लाया जा रहा है. Ultra 2 में मौजूदा मॉडल के 590mAh बैटरी पैक की जगह 800mAh के बैटरी पैक से लैस किया जाएगा. यह वॉच टाइटैनियम के साथ आएगी और पानी के अंदर 100 मीटर तक वाटर रजिस्टेंस ऑफर कर सकती है.&amp;nbsp;
कितनी रह सकती है कीमत?
सैमसंग वॉचेज की ऑफिशियल कीमत लॉन्च के समय पता चलेगी, लेकिन माना जा रहा है कि Watch 9 की शुरुआती कीमत 45,000 रुपये और इसके बड़े वेरिएंट की कीमत लगभग 48,400 रुपये रह सकती है. वहीं Watch Ultra 2 के लिए ग्राहकों को लगभग 82,500 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Refurbished Smartphones खरीदते समय क्या&amp;क्या चीजें चेक करना चाहिए? ज्यादातर लोग करते हैं ये गलती</title>
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        <description><![CDATA[ Refurbished Smartphones: टेक्नोलॉजी की दुनिया में स्मार्टफोन लोगों के जिंदगी की जरुरत बन चुकी है. अब लोग स्मार्टफोन के जरिए अपने कई सारे काम आसान बना रहे हैं. लेकिन कई लोग बजट की कमी की वजह से सेकेंड हैंड या Refurbished स्मार्टफोन को खरीद लेते हैं. बता दें कि Refurbished स्मार्टफोन आजकल काफी ट्रेंडिंग में आ चुके हैं. लोग अब ऑनलाइन भी ऐसे डिवाइस को खरीद रहे हैं. लेकिन अक्सर लोग Refurbished फोन खरीदने से पहले कुछ गलतियां कर देते हैं जिसकी वजह से लोगों को बाद में पछताना पड़ता है. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें Refurbished फोन खरीदने से पहले ध्यान रखना चाहिए.
IMEI नंबर और फोन की असली पहचान
इतना ही नहीं, फोन का IMEI नंबर बॉक्स और डिवाइस में एक जैसा होना चाहिए. इसके अलावा ये भी चेक करें कि फोन चोरी का या ब्लैकलिस्टेड डिवाइस न हो. IMEI को चेक करने से आपको डिवाइस की असली पहचान का पता चल जाता है.
बैटरी हेल्थ चेक करें
Refurbished फोन में सबसे ज्यादा समस्या बैटरी को लेकर होती है. बैटरी जल्दी खत्म होने लगे तो पूरा अनुभव खराब हो सकता है. iPhone में Battery Health आसानी से देखी जा सकती है जबकि Android फोन में बैटरी टेस्टिंग ऐप या सर्विस सेंटर की मदद ली जा सकती है.
फोन को अच्छे से करें चेक
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सबसे पहले फोन के बॉडी, डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल को ध्यान से चेक करना चाहिए. कहीं गहरे स्क्रैच, डेंट या टूटा हुआ हिस्सा तो नहीं है. साथ ही अगर फोन देखने में ही ज्यादा पुराना लग रहा है तो खरीदने से पहले दो बार सोचें.
सभी फीचर्स चेक करें
पुराना स्मार्टफोन खरीदने से पहले फोन के टचस्क्रीन, स्पीकर, माइक्रोफोन, कैमरा, फिंगरप्रिंट सेंसर, फेस अनलॉक, Wi-Fi, Bluetooth और चार्जिंग पोर्ट जैसे सभी चीजों को चेक कर लेना चाहिए. छोटी-सी खराबी भी आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है.
वारंटी और रिटर्न पॉलिसी जरूर पढ़ें
सबसे जरूरी बात पुराना स्मार्टफोन खरीदने से पहले उसकी वारंटी और रिटर्न पॉलिसी को जरूर चेक कर लेना चाहिए. बता दें कि ज्यादातर Refurbished फोन पर 6 महीने से 1 साल तक की वारंटी देते हैं. साथ ही रिटर्न या रिप्लेसमेंट की सुविधा भी उपलब्ध होती है. ऐसे में बिना वारंटी वाला फोन खरीदना आपके लिए खतरा साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Facebook यूजर्स तुरंत बदलें ये Settings, वरना कभी भी Hack हो सकता है आपका अकाउंट!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/facebook-यूजर्स-तुरंत-बदलें-ये-settings-वरना-कभी-भी-hack-हो-सकता-है-आपका-अकाउंट</link>
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        <description><![CDATA[ Facebook यूजर्स तुरंत बदलें ये Settings, वरना कभी भी Hack हो सकता है आपका अकाउंट! ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>सोलर पैनल नहीं बना रहे पूरी बिजली, क्या हो सकते हैं कारण और कैसे करें समाधान? यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Solar System is not Generating Enough Power: सोलर पैनल को कई साल तक चलने के लिए डिजाइन किया जाता है. आमतौर पर सोलर पैनल की उम्र 25 साल मानी जाती है. हालांकि, समय के साथ इनकी एफिशिएंसी कम होती जाती है, लेकिन कई बार समय से पहले ही इनकी एफिशिएंसी पर असर दिखने लगता है. कई लोगों की शिकायत रहती है कि उनके पैनल पर्याप्त बिजली जनरेट नहीं कर रहे हैं. आज हम जानेंगे कि किन कारणों से एनर्जी प्रोडक्शन कम हो सकता है और इस समस्या का समाधान क्या है.
एनर्जी प्रोडक्शन कम होने के क्या कारण?
मौसम- सोलर पैनल को एनर्जी प्रोडक्शन के लिए सनलाइट की जरूरत रहती है. मौसम के हिसाब से दिन छोटे-बड़े होते रहते हैं. इसलिए अगर मानसून या सर्दी में गर्मी के मुकाबले एनर्जी प्रोडक्शन कम हुआ है तो चिंता की कोई बात नहीं है. मानसून में बादल छाने और सर्दियों में दिन छोटे होने के कारण पैनल गर्मी के मुकाबले कम बिजली बनाते हैं.
दूसरे कारण- अगर सोलर पैनल पर छाया पड़ रही है तो भी एनर्जी प्रोडक्शन कम हो सकता है. अगर किसी पेड़ की शाखा के कारण छाया रहने लगी है तो उसे ट्रिम कर दें. इसी तरह पैनल पर जमी धूल-मिट्टी सनलाइट को पैनल तक पहुंचने से रोक सकती है, जिससे पर्याप्त बिजली नहीं बन पाएगी. इसलिए पैनल को नियमित तौर पर साफ करने की सलाह दी जाती है.&amp;nbsp;
पैनल का पुराना हो जाना- जैसा हमने आपको ऊपर बताया कि पुराने होने के साथ-साथ पैनल की एफिशिएंसी कम होती जाती है. 10 साल पुराने पैनल में एफिशिएंसी 5-8 प्रतिशत तक कम हो सकती है.&amp;nbsp;
इन तकनीकी कारणों से भी आ सकती है कमी
सामान्य कारणों के अलावा कनेक्टर या वायरिंग में फॉल्ट आने से भी एनर्जी प्रोडक्शन पर असर पड़ता है. वायरिंग के खराब होने से इलेक्ट्रिक करंट का फ्लो पूरी तरह टूट जाता है. इसी तरह अगर पैनल में हॉटस्पॉट बनने और सेल डैमेज होने से भी कम बिजली जनरेट होती है. इन पर नजर रखना बहुत जरूरी है.
कब है प्रोफेशनल को बुलाने की जरूरत?
सामान्य कारणों जैसे मौसम, पैनल की सफाई या पुराने पैनल के कारण एनर्जी प्रोडक्शन कम होने की वजहों का आप खुद पता लगा सकते हैं, लेकिन अगर पैनल डैमेज हो गए हैं तो आपको प्रोफेशनल को बुलाने की जरूरत पड़ेगी. हॉटस्पॉट बनने, क्रैक्स आने या एनर्जी प्रोडक्शन के एकदम कम हो जाने पर प्रोफेशनल से रिपेयर करवाना जरूरी है. वह पूरे सिस्टम की अच्छे से देखभाल कर आपको बता देगा कि एनर्जी प्रोडक्शन कम होने का सबसे बड़ा कारण क्या है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>बिना किसी Discount के भी क्यों धड़ाधड़ लोग खरीद रहे iPhone 17? जानिए क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ बिना किसी Discount के भी क्यों धड़ाधड़ लोग खरीद रहे iPhone 17? जानिए क्या है वजह ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>Laptop की भी होती है Expiry Date? जानिए कब होती है बदलने की जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ Laptop: डिजिटल दुनिया में लैपटॉप भी आज लोगों की जरुरत बन चुका है. ऑफिस में काम करना हो या फिर वर्क फ्रॉम होम हो या फिर स्टूडेंट्स हों, लैपटॉप ऐसा डिवाइस है जो सभी के लिए काम आता है. लेकिन लैपटॉप भी हमेशा काम नहीं करता है. जी हां, दरअसल, स्मार्टफोन की तरह ही लैपटॉप भी एक समय के बाद काम करना बंद कर सकता है. साथ ही अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या लैपटॉप की भी एक्सपायरी डेट होती है. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कब आपको लैपटॉप बदलने की जरुरत पड़ेगी.
अपडेट्स मिलना हो जाए बंद
जानकारी के लिए बता दें कि पुराने लैपटॉप में अक्सर नए ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर सही तरीके से काम नहीं करते हैं. कई कंपनियां पुराने मॉडल के लिए सिक्योरिटी अपडेट देना भी बंद कर देती हैं. ऐसे में डेटा की सेफ्टी का खतरा भी बढ़ सकता है. अगर आपका लैपटॉप जरूरी अपडेट सपोर्ट नहीं कर रहा है तो आपको लैपटॉप को बदल देना चाहिए.
जल्द खत्म हो जाती है बैटरी
बता दें कि समय के साथ हर लैपटॉप की बैटरी की ताकत कम होती जाती है. अगर आपका लैपटॉप कुछ ही मिनटों में डिस्चार्ज हो जाता है या हमेशा चार्जर से जोड़कर ही इस्तेमाल करना पड़ता है तो पहले बैटरी बदलने का ऑप्शन देखें. लेकिन अगर बैटरी के साथ-साथ दूसरे हार्डवेयर भी पुराने हो चुके हैं तो नया लैपटॉप लेना ज्यादा समझदारी हो सकता है.
कब खरीदना है नया लैपटॉप
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपका लैपटॉप पहले के मुकाबले ज्यादा धीमा हो गया है, बार-बार हैंग होता है या स्टार्ट होने में काफी समय लेता है तो ये संकेत है कि सिस्टम का हार्डवेयर पुराना पड़ चुका है. कई बार RAM या SSD अपग्रेड करने से समस्या दूर हो जाती है लेकिन अगर इसके बाद भी परफॉर्मेंस में कोई सुधार नहीं आता तो नया लैपटॉप खरीदने पर आपको विचार करना चाहिए.
बार-बार रिपेयर की पड़ रही जरूरत
इतना ही नहीं, अगर लैपटॉप में बार-बार कीबोर्ड, स्क्रीन, मदरबोर्ड या दूसरे हार्डवेयर से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं और हर कुछ महीनों में रिपेयर पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं तो आपको बार-बार रिपेयर करना की जगह पर नया लैपटॉप खरीद लेना चाहिए.
कैसे लंबे समय तक चलाएं लैपटॉप
अब अगर आप भी अपने लैपटॉप की लाइफ बढ़ाना चाहते हैं तो कुछ जरूरी चीजों का जरूर ध्यान रखें. इसके लिए आपको समय-समय पर सिस्टम की सफाई करनी चाहिए. बेकार की फाइलें हटाएं, सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें, भरोसेमंद एंटीवायरस का इस्तेमाल करें और लैपटॉप को ज्यादा गर्म होने से बचाएं. इतना ही नहीं, SSD और RAM अपग्रेड करने से भी कई पुराने लैपटॉप की स्पीड में अच्छा सुधार देखा जा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp यूजरनेम से साइबर ठगी का डर, सभी चैटिंग ऐप्स के लिए सरकार ला सकती है नए नियम</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स के लिए सरकार एक जैसे नियम बनाने की तैयारी कर रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है, जिससे देश में काम करने वाले सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक जैसे नियम लागू किए जा सकें. &amp;nbsp;इसकी सबसे बड़ी वजह WhatsApp का आने वाला यूजरनेम फीचर है, जिसे लेकर सरकार ने साइबर फ्रॉड बढ़ने की आशंका जताई है.
क्या है व्हाट्सऐप का नया फीचर?
WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है , जिसमें यूजर्स अपना मोबाइल नंबर बताए बिना सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट कर सकेंगे. कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर होगी, लेकिन सरकार को डर है कि इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल कर ठग फर्जी पहचान बनाकर लोगों को निशाना बना सकते हैं. इससे फिशिंग, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध बढ़ सकते हैं.
सरकार ने व्हाट्सऐप को भेजा नोटिस
इसी वजह से सरकार ने WhatsApp को नोटिस भेजकर कहा था &amp;nbsp;कि जब तक इस मुद्दे पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च न किया जाए. वहीं, MeitY ने Telegram और Signal से भी उनके यूजरनेम फीचर और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मांगी. इस मामले में WhatsApp और Telegram अपना जवाब सरकार को दे चुके हैं.&amp;nbsp;
क्या है सरकार का पक्ष?
सरकार का कहना है कि अगर सिर्फ एक ऐप पर रोक लगाई जाए और दूसरे ऐप्स पर वही फीचर चलता रहे तो यह कानूनी रूप से कमजोर फैसला माना जाएगा. ऐसे में सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक जैसा नियम बनाना जरूरी है. फिलहाल WhatsApp, Telegram और Signal जैसे ऐप आईटी एक्ट 2000 और आईटी नियम 2021 के तहत काम करते हैं, लेकिन इनमें यूजरनेम जैसे फीचर को लेकर कोई अलग नियम नहीं है.&amp;nbsp;
क्या है सरकार की प्लानिंग?
सरकार अब इसी कमी को दूर करने के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार कर रही है. अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और न ही कोई ड्राफ्ट नियम जारी किया गया है. सरकार सभी पक्षों से चर्चा के बाद आगे का निर्णय लेगी. अधिकारियों का कहना है कि मकसद प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है, ताकि नए फीचर साइबर अपराधियों के लिए हथियार न बन जाएं.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Jio&amp;Airtel की बढ़ी टेंशन! BSNL ने लॉन्च किया सस्ता Broadband प्लान, जानिए बेनिफिट्स</title>
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        <description><![CDATA[ BSNL Broadband Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने अपना एक नया ब्रॉडबैंड प्लान लॉन्च कर दिया है. इस प्लान की सबसे खास बात ये है कि इसको कंपनी ने 300 रुपये से भी कम कीमत में लॉन्च किया है. जी हां, इस प्लान की कीमत मे 259 रुपए है. साथ ही इस प्लान को खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उतारा है. इस प्लान का मकसद छोटे शहरों को हाई स्पीड इंटरनेट से कनेक्ट करना है. इससे ग्रामीण क्षेत्र भी शहरों की तरह इंटरनेट से कनेक्ट हो सकेंगे. आइए जानते हैं क्या है इस प्लान के बेनिफिट्स.
फ्री होगी इंस्टालेशन
जानकारी के लिए बता दें कि नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए BSNL ने इस प्लान में फ्री इंस्टॉलेशन और मुफ्त मॉडेम की सुविधा भी शामिल की है. इससे आपको शुरुआत में कोई पैसा नहीं देना होगा. इतना ही नहीं इस ब्रॉडबैंड प्लान के साथ BSNL अपने Waves OTT प्लेटफॉर्म का मुफ्त सब्सक्रिप्शन भी दे रहा है. अब अगर आप भी इस प्लान का लाभ लेना चाहते हैं तो BSNL की ऑफिशियल वेबसाइट, मोबाइल ऐप या कस्टमर केयर के जरिए से आवेदन कर सकते हैं.
मिलेगा अनलिमिटेड इंटरनेट
आपको बता दें कि इस प्लान में यूजर्स को 25Mbps तक की ब्रॉडबैंड स्पीड मिलेगी जो ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, वीडियो कॉल, OTT स्ट्रीमिंग और नॉर्मल इंटरनेट इस्तेमाल के लिए पर्याप्त है. इसके अलावा इस प्लान में 700GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है. ये लिमिट पूरी होने के बाद भी इंटरनेट चलता रहेगा. हालांकि, नेट की स्पीड घटकर 2Mbps रह जाएगी. इसके साथ ही BSNL इस प्लान के साथ देशभर के किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग की सुविधा भी दे रहा है.&amp;nbsp;
Jio का ब्रॉडबैंड प्लान
Reliance Jio की बात करें तो इसका सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड प्लान 399 रुपए में आता है. इस प्लान में यूजर्स को 30MBps की इंटरनेट स्पीड मिल जाती है. इसके साथ ही इसमें यूजर्स को कई सारे एडिशनल बेनिफिट्स भी मिलते हैं. बता दें कि ये प्लान देशभर के यूजर्स के लिए मान्य है. अगर आप फाइबर कनेक्शन लेते हैं तो आपको 3.3TB मंथली डेटा मिल जाता है.&amp;nbsp;
Airtel का सस्ता ब्रॉडबैंड प्लान
एयरटेल के ब्रॉडबैंड प्लान की बात करें तो कंपनी यूजर्स को 499 रुपए में अनलिमिटेड इंटरनेट वाला प्लान उपलब्ध कराती है. इस प्लान में यूजर्स को 40mbps की इंटरनेट स्पीड मिल जाती है. बता दें कि ये कंपनी का सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड प्लान है जो पूरे देशभर के यूजर्स के लिए उपलब्ध है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Google Maps कैसे दिखता है जगहों का नाम? जानिए कहां से मिलती है इसे जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps: गूगल मैप्स का आज ज्यादातर लोग इस्तेमाल करते हैं. जगह खोजने से लेकर पैट्रोल पंप खोजने तक आज गूगल मैप का इस्तेमाल काफी बढ़ चुका है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि गूगल मैप्स पर कैसे जगहों के नाम दिखते हैं. आखिर गूगल मैप को इसकी जानकारी कहां से मिलती है. आइए जानते हैं क्या होता है इसका पूरा प्रोसेस.
कहां से मिलती है जानकारी
आपको बता दें कि Google Maps पर दिखने वाली जानकारी किसी एक जगह से नहीं आती. इसके लिए Google कई अलग-अलग सोर्सेज का इस्तेमाल करता है. इनमें लोकल बिजनेस, सरकारी रिकॉर्ड, मैपिंग पार्टनर्स, वेबसाइट्स और खुद Google के सर्वे शामिल होते हैं. इन सभी जगहों से मिली जानकारी को मिलाकर Maps पर अपडेट किया जाता है.
बिजनेस वाले अपने आप जोड़ सकते हैं नाम
अब आपको बता दें कि अगर किसी व्यक्ति का नया बिजनेस है तो वह Google Business Profile के जरिए अपनी दुकान, ऑफिस या संस्थान की जानकारी खुद दर्ज कर सकता है. इसमें पता, फोन नंबर, वेबसाइट, काम करने का समय और फोटो जैसी जानकारी शामिल की जाती है. वेरिफिकेशन प्रोसेस के बाद ये जानकारी Google Maps पर दिखाई देने लगती है.
यूजर्स भी दे सकते हैं जानकारी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Google Maps की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें आम लोग भी योगदान दे सकते हैं. अगर किसी नई दुकान, सड़क या किसी स्थान का नाम Maps पर नहीं दिख रहा है तो यूजर Add a Place या Suggest an Edit फीचर की मदद से जानकारी भेज सकता है. बता दें कि यूजर से मिली जानकारी के बाद गूगल उसको पहले चेक करता है और सही पाए जाने पर गूगल उससे मैप में जोड़ देता है.
कई स्तर पर होती है जानकारी की जांच
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Google Maps पर कोई भी जानकारी डायरेक्ट नहीं जुड़ जाते हैं. दरअसल, Google अपने एल्गोरिदम, मशीन लर्निंग और ह्यूमन वेरिफिकेशन की मदद से जानकारी को वेरिफाई किया जाता है. अगर कई सोर्सेज एक जैसी जानकारी देते हैं तो उसके सही होने की संभावना ज्यादा होती है. इसके अलावा अगर जानकारी गलत पाई जाती है तो उसे मैप से हटा भी दिया जाता है. इसी तरह से गूगल मैप पर जानकारी को ऐड करना आसान है लेकिन इसकी पीछे भी पूरा लंबा वेरिफिकेशन प्रोसेस होता है जिसे गूगल खुद चेक करता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Use Of Mobile SIM Pin: सिर्फ सिम स्लॉट खोलने के लिए नहीं होती मोबाइल के साथ मिलने वाली पिन, होते हैं कई सारे काम</title>
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        <description><![CDATA[ Use Of Mobile SIM Pin: जब भी आप नया फोन खरीदते हैं, तो उसके चार्जर के साथ-साथ एक छोटी सी पिन भी मिलती है. जिसे ज्यादातर लोग समझते हैं कि यह पिन केवल सिम कार्ड को फोन के अंदर डालने और निकालने के ही काम आती है. कई बार तो लोग इसकी अहमियत जाने बिना ही फेंक देते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि स्मार्टफोन के साथ मिलने वाली इस पिन का इस्तेमाल केवल सिम कार्ड डालने और निकालने तक ही नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल और भी बहुत जगह होता है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
फोन को फोर्स रीस्टार्ट करने में आती है काम
कई यूजर्स की शिकायत होती है कि लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल करने से फोन हैंग होने लगता है या फिर स्क्रीन फ्रीज हो जाती है. ऐसे में आपको बता दें कि वही छोटी सी पिन से आप इस समस्या को खत्म कर सकते हैं. बहुत से फोन्स में एक छोटा सा रीसेट होल होता है, जिसमें इस सिम पिन से दबाकर अपने फोन को रीस्टार्ट कर सकते हैं. हालांकि आजकल के स्मार्टफोन में ऐसा नहीं होता है लेकिन कई पुराने फोन में ऐसा पहले होता आया है.
इसके अलावा कुछ राउटर और मॉडम में भी एक छोटा सा रीसेट बटन होता है, जो अंदर धंसा हुआ होता है ताकि गलती से न दब जाए. वहीं इस पिन के इस्तेमाल से इस बटन को दबाया जाता है, जिससे राउटर की सेटिंग फिर से फैक्ट्री डिफॉल्ट पर आ जाती है. बस फोन में ही नहीं, स्मार्टवॉच और कुछ छोटे गैजेट्स में भी ऐसा ही एक पिनहोल रीसेट सिस्टम दिया जाता है, जिसको उंगली से प्रेस करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में यह पतली सी पिन बहुत काम आती है.
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छोटे छेद साफ करने और मेमोरी कार्ड निकालने में भी उपयोगी
इस पिन का एक और फायदा यह है कि इसकी मदद से फोन के स्पीकर या चार्जिंग पोर्ट के आसपास जमी हल्की धूल-मिट्टी को भी साफ किया जा सकता है. इसके अलावा जिन फोनों में सिम और मेमोरी कार्ड की ट्रे अलग-अलग होती है, वहां भी यही पिन दोनों ट्रे खोलने के काम आती है. कुल मिलाकर देखा जाए तो यह छोटी सी दिखने वाली पिन बस सिम को डालने और निकालने के लिए ही इस्तेमाल नहीं होती है, बल्कि यह और भी कामों के लिए बहुत काम की चीज है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>वेबकैम पर लाल डॉट दिखा? इसका मतलब हमेशा रिकॉर्डिंग नहीं होता, सच जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Webcam: वेबकैम आज के समय में काफी इस्तेमाल किया जाने वाला डिवाइस बन चुका है. बता दें कि वेबकैम पर दिखने वाला लाल या चमकता हुआ इंडिकेटर देखकर अक्सर लोगों को लगता है कि उनका लैपटॉप या कंप्यूटर कैमरा उनकी हर एक्टिविटी को रिकॉर्ड कर रहा है. हालांकि, हर बार ऐसा नहीं होता. कई बार ये लाइट केवल कैमरे के एक्टिव होने का संकेत देती है. हालांकि कुछ स्थिति में रिकॉर्डिंग के दौरान भी ये लाइन दिख सकती है.
नहीं होता हमेशा रिकॉर्डिंग
बता दें कि अगर आप Zoom, Google Meet, Microsoft Teams या किसी वीडियो कॉलिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वेबकैम की लाइट जलना नॉर्मल बात है. इस दौरान कैमरा सिर्फ लाइव वीडियो भेज रहा होता है जरूरी नहीं कि आपकी वीडियो रिकॉर्ड भी हो रही हो.
इसी तरह Windows Hello या अन्य फेस अनलॉक फीचर भी कैमरे को कुछ सेकंड के लिए एक्टिव कर सकते हैं जिससे इंडिकेटर जल सकता है.
क्यों दिखाई देती है वेबकैम पर लाल लाइट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ज्यादातर लैपटॉप और एक्सटर्नल वेबकैम में कैमरे के पास एक छोटी LED लाइट होती है. जब कोई ऐप या सॉफ्टवेयर कैमरे का इस्तेमाल करता है तो ये लाइट जल जाती है. इसका मकसद यूजर को ये बताना होता है कि कैमरा इस समय एक्टिव है.
इतना ही नहीं, ध्यान देने वाली बात ये है कि कैमरे का एक्टिव होना हमेशा वीडियो रिकॉर्डिंग का संकेत नहीं होता. कई बार कैमरा केवल लाइव वीडियो दिखाने या फेस रिकग्निशन के लिए भी ऑन रहता है.
कब हों सावधान
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपने कोई कैमरा इस्तेमाल करने वाला ऐप नहीं खोला है, फिर भी वेबकैम की लाइट बार-बार जल रही है तो ये चिंता की बात हो सकती है. ऐसी स्थिति में ऐसा हो सकता है कि कोई बैकग्राउंड ऐप कैमरे का एक्सेस ले रहा हो या फिर कोई मेलवेयर पहुंच गया हो. ऐसी स्थिति में सबसे पहले ये चेक करें कि कौन-सा ऐप कैमरे का इस्तेमाल कर रहा है. Windows और macOS दोनों में Privacy Settings के जरिए ये देखा जा सकता है कि किन ऐप्स को कैमरे की परमिशन मिली हुई है.
कैसे रहें सेफ
वेबकैम की सुरक्षा के लिए केवल भरोसेमंद ऐप्स को ही कैमरा एक्सेस दें. जिन ऐप्स की जरूरत नहीं है, उनकी परमिशन तुरंत हटा दें. अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और एंटीवायरस को हमेशा अपडेट रखें ताकि किसी भी सुरक्षा खतरे से बचा जा सके.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp पर नहीं रहेगा स्कैम का डर, ये कमाल के फीचर रखेंगे सेफ</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Safety Features: ऑनलाइन स्कैम का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. KYC स्कैम से लेकर डिजिटल अरेस्ट समेत न जाने कितने तरीकों से साइबर अपराधी लोगों की मेहनत की कमाई को लूट लेते हैं. भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp का भी साइबर अपराधी स्कैम के लिए इस्तेमाल करते हैं. इसे देखते हुए व्हाट्सऐप ने अपने प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे फीचर्स जोड़े हैं, जो आपको साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बचा सकते हैं. आज हम आपके लिए ऐसे ही फीचर्स की पूरी लिस्ट लेकर आए हैं.
Silence Unknown Callers
अगर आपके पास अनजान नंबरों से ज्यादा कॉल्स आती हैं तो यह फीचर बड़े काम का है. जैसा नाम से ही जाहिर है यह अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स को साइलेंट कर देता है. इसका यह फायदा है कि ये कॉल्स आपको कॉल टैब और नोटिफिकेशन में तो दिखेंगी, लेकिन ये आपको डिस्टर्ब नहीं कर पाएंगी.
Context Cards
कॉन्टेक्स्ट कार्ड्स में आपको किसी कॉन्टैक्ट के बारे में एक्स्ट्रा इंफोर्मेशन मिल जाती है. यह आपको बता देता है कि कोई नंबर आपके फोन में सेव है या नहीं या आप उस कॉन्टैक्ट के साथ किसी ग्रुप में शामिल हैं. इससे यूजर के पास किसी कॉन्टैक्ट से आए मैसेज का रिप्लाई देने या उसे ब्लॉक करने के लिए काफी इंफोर्मेशन हो जाती है.
Screenshare Warning
व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए स्क्रीन शेयर करने का ऑप्शन देती है. यह बड़े काम का फीचर है, लेकिन कई बार साइबर अपराधी इसकी मदद से सेंसेटिव डेटा चुरा लेते हैं. इसे देखते हुए कंपनी ने अब स्क्रीनशेयर वॉर्निंग दिखाना शुरू कर दिया है. अगर आप किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी स्क्रीन शेयर कर रहे हैं तो संभावित खतरों की वॉर्निंग देते हुए आपके पास अलर्ट आ जाएगा.
Device Linking Alerts
कई बार फ्रॉड करने वाले लोग यूजर्स को बातों में फुसलाकर उसके व्हाट्सऐप अकाउंट को दूसरे डिवाइस से लिंक कर लेते हैं. फिर वो यूजर के अकाउंट को अपनी मर्जी से कैसे भी यूज कर सकते हैं. इससे बचाने के लिए व्हाट्सऐप अब सस्पिशियस रिक्वेस्ट आने वॉर्निंग अलर्ट देती है.&amp;nbsp;
Two-step Verification
ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षा के लिए यह एक जरूरी फीचर्स है. इसमें अकाउंट रिसेट या वेरिफाई करने के लिए एक से ज्यादा वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती है. इसका मतलब है कि केवल पासवर्ड से अकाउंट को रिसेट या वेरिफाई नहीं किया जा सकता. वेरिफिकेशन के लिए आपको एक और एडिशनल तरीके की जरूरत पड़ेगी. इससे अकाउंट को हैक होने से बचाया जा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब YouTube पर नहीं आएगा एक भी Ad! जानिए कैसे मुफ्त में मिलेगी ये सुविधा</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Without Ads: आज के समय में YouTube लोगों के मनोरंजन का बड़ा माध्यम बन चुका है. यह करीब सभी लोग अपने पसंद के हिसाब से वीडियोज देखते हैं. लेकिन अक्सर देखा गया है वीडियो देखते समय बार-बार ऐड्स आने लगते हैं जिससे लोग काफी परेशान होते हैं. लेकिन आज ह्म आपको एक ऐसे ब्राउजर के बारे में बताने जा रहे हैं हो आपको फ्री में यूट्यूब पर वीडियो देखने का मौका देता है और वो भी बिना ऐड्स के. आइए जानते हैं कौन सा है ये ब्राउजर.&amp;nbsp;
DuckDuckGo Browser
जानकारी के मुताबिक, DuckDuckGo एक ऐसा ब्राउजर है जो आपके प्राइवेसी को बनाए रखता है. ये ज्यादातर वो लोग इस्तेमाल करते हैं जिन्हें अपनी प्राइवेसी का ज्यादा खतरा होता है. इसी के साथ हल ही में इस ब्राउजर में एक नया फीचर आया है जो यूट्यूब पर आने वाले ऐड्स को ब्लॉक करने का काम करता है. इसकी एक और खास बात ये है कि इसके लिए आपको किसी भी नए सब्सक्रिप्शन प्लान की जरूरत नहीं होती है.&amp;nbsp;
कैसे करें इस्तेमाल&amp;nbsp;
कंपनी के अनुसार, iPhone, Windows और Mac यूजर्स वालों को ये फीचर डिफॉल्ट रूप से ब्राउजर में ही मिल जाएगा. वहीं, एंड्रॉयड यूजर्स वालों को ब्राउजर में जाकर इस फीचर को ऑन करना पड़ेगा. हालांकि, मन जा रहा है कि कंपनी जल्द ही एंड्रॉयड यूजर्स के लिए भी ये फीचर डिफॉल्ट रूप से पेश कर सकती है.&amp;nbsp;
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस फीचर को इस्तेमाल करने के दौरान आप यूट्यूब पर बिना ऐड्स के वीडियो देख सकते हैं. हालांकि, वीडियो शुरू होने में कुछ समय ले सकता है लेकिन एक बार शुरू होने पर आपको बिना ऐड्स के वीडियो देखने का अनुभव मिलेगा.&amp;nbsp;
मिलेगा बेहतर अनुभव
DuckDuckGo में अब यूजर्स को नया फीचर मिला है जिसकी मदद से आप यूट्यूब पर बार बार एड्स नहीं दिखाई देंगे. इतना ही नहीं, ये ब्राउजर यूट्यूब के साथ ही कई वेबसाइट्स पर भी वीडियो ऐड्स को ब्लॉक करने में सक्षम है. इस फीचर के आने से अब यूजर्स को पहले के मुकाबले ज्यादा बेहतर अनुभव मिलेगा.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>GTA Game Developers: GTA जैसा गेम बनाने में कितने लोग करते हैं काम? जानिए पूरा प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ GTA Game Developers: अक्सर आज के समय में GTA यानी ग्रैंड थेफ्ट ऑटो का नाम किसने नहीं सुना होगा. बता दें कि यह एक बहुत मशहूर वीडियो गेम सीरीज है, जिसे Rockstar Games नाम की कंपनी बनाती है. यह गेम दुनियाभर में करोड़ों लोग खेलते हैं और इसकी कमाई भी बहुत ज्यादा होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शानदार से गेम को बनाने में कितने लोगों की जरूरत होती है? क्या इसको बनाना बाकी गेम्स के मुकाबले काफी ज्यादा मुश्किल होता है? ऐसे में आपको बता दें कि इस गेम को बनाने में कई लोगों की मेहनत जुड़ी होती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इसको बनाने के लिए कई साल लग जाते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
कितने लोग मिलकर बनाते हैं ऐसा गेम?
GTA जैसा बड़ा गेम बनाने के लिए हजारों लोग मिलकर काम करते हैं. जैसे GTA 5 की बात करें तो इसे बनाने में करीब 1,000 से ज्यादा लोगों ने काम किया था. इसके बाद जब Rockstar ने अपने अगले गेम Red Dead Redemption 2 पर काम करना शुरू किया, तो टीम का साइज और भी बड़ा हो गया. इस गेम में करीब 2,000 लोगों ने काम किया, जिनमें से 1,600 लोग सीधे तौर पर गेम बनाने में लगे हुए थे. यानी जैसे-जैसे गेम बनाने की प्रक्रिया बढ़ती गई, इसके डिटेल्स में बढ़ोतरी होती गई, वैसे-वैसे गेम बनाने के काम में और ज्यादा लोग जुड़ते गए. इसकी खासियत इस बात में है कि गेम को बनाने में केवल एक देश का हाथ नहीं है, बल्कि इसे बनाने में अलग-अलग देशों की कंपनियों ने मिलकर काम किया था.
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किस तरह के लोग करते हैं यह काम?
इस जानकारी के बाद हर किसी के दिमाग में यह सवाल आता है कि आखिर इस गेम को बनाने वाले लोग किस तरह के होते हैं. इसके जवाब में आपको बता दें कि इतनी बड़ी टीम में सिर्फ एक तरह के लोग नहीं होते, बल्कि अलग-अलग काम करने वाले लोग होते हैं. कुछ लोग गेम की कहानी लिखते हैं, तो कुछ लोग शहर का डिजाइन तैयार करते हैं, और कुछ लोग कोडिंग करके गेम को असल में चलाने लायक बनाते हैं. इसके अलावा एक टीम सिर्फ गेम की आवाजें और म्यूजिक बनाने का काम करती है. वहीं कुछ लोग पूरी तरह गेम तैयार होने के बाद सिर्फ गेम को टेस्ट करने का काम करते हैं, ताकि ग्राहकों तक पहुंचने से पहले उसमें मौजूद सारी गलतियों को ठीक किया जा सके.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>iOS 27 का पहला पब्लिक बीटा जल्द होगा लॉन्च, जानिए क्या होगा नया और किन आईफोन को मिलेगा सपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ iOS 27 Public Beta: ऐप्पल की नई सॉफ्टवेयर अपडेट iOS 27 का पब्लिक बीटा जल्द ही लॉन्च होने वाला है. डेवलपर्स के लिए iOS 27 के कई वर्जन लॉन्च हो चुके हैं और अब कंपनी पब्लिक के लिए इसके बीटा वर्जन लाने की तैयारी में जुटी हुई है. पब्लिक बीटा को इंस्टॉल कर आईफोन यूजर्स पहले ही यह देख पाएंगे कि नई अपडेट में उन्हें क्या-क्या फीचर्स मिलने वाले हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस अपडेट में क्या कुछ नया होगा और यह किन आईफोन मॉडल्स को सपोर्ट करेगी.
iOS 27 Public Beta में क्या मिलेगा?
इस अपडेट की सबसे बड़ी हाइलाइट सिरी एआई होने जा रहा है. ऐप्पल इसकी झलक पहले ही दिखा चुकी है. नई अपडेट में सिरी चैटबॉट को एआई-पावर्ड बनाया गया है. यह गूगल जेमिनी मॉडल पर ऑपरेट करेगा. हालांकि, सारे आईफोन यूजर्स को इसका फायदा नहीं मिलेगा. यह केवल आईफोन 15 प्रो और उसके बाद के मॉडल पर ही काम करेगा और इसके लिए भी आपको वेटलिस्ट ज्वॉइन करनी पड़ेगी.&amp;nbsp;
सिरी एआई के अलावा पब्लिक बीटा में नए लिक्विड ग्लास डिजाइन एलिमेंट भी देखने को मिलेंगे. इसमें एक खास स्लाइडर भी मिलेगा, जिसकी मदद से आप लिक्विड ग्लास डिजाइन की ट्रांसलुसेंसी को डिसाइड कर पाएंगे. इसके अलावा पुराने आईफोन को फास्ट बनाने के लिए ऐप्पल इसमें CPU शेड्यूलर भी दे सकती है. यह आईफोन 12 और 13 जैसे पुराने मॉडल्स के लिए काफी काम आने वाला फीचर होगा. बाकी फीचर्स की बात करें तो नई सॉफ्टवेयर अपडेट में कस्टम अलार्म वॉल्यूम, बेहतर कनेक्टिविटी, कुछ ऐप्स में अपडेट्स, एयरपॉड्स के लिए कस्टम इक्विलाइजर और कई बग्स के फिक्स को भी रोलआउट किया जाएगा.
इन आईफोन मॉडल्स को सपोर्ट करेगी नई अपडेट
iPhone SE की 2nd और 3rd जनरेशन के बाद लॉन्च हुए सभी मॉडल को नई अपडेट का सपोर्ट मिलेगा. इसका मतलब है कि आईफोन 11 सीरीज, आईफोन 12 सीरीज, आईफोन 13 सीरीज, आईफोन 14 सीरीज, आईफोन 15 सीरीज, आईफोन 16 सीरीज और आईफोन 17 सीरीज के मॉडल्स में नई अपडेट को इंस्टॉल किया जा सकेगा. हालांकि, ध्यान दें कि Siri AI के फीचर्स केवल आईफोन 15 प्रो मॉडल्स के बाद लॉन्च हुए आईफोन को ही सपोर्ट करेंगे.&amp;nbsp;
कब आ सकता है iOS 27 Public Beta?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप्पल 14 जुलाई को iOS 27 Public Beta को रोल आउट कर सकती है. रोल आउट होते ही यह अपडेट इंस्टॉल होने के लिए अवेलेबल हो जाएगी. अगर आप ऐप्पल के पब्लिक बीटा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम में लिस्टेड हैं तो सेटिंग ऐप में जाकर इस अपडेट को इंस्टॉल कर पाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>घंटों तक चलाते हैं Washing Machine! जानिए कितनी बिजली होती है खपत और किन चीजों का रखना चाहिए ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ Washing Machine: आज वाशिंग मशीन ज्यादातर घरों में देखने को मिल जाती है. जल्दी कपड़े धोने से लेकर फटाफट कपड़े सूखने तक का काम आज वाशिंग मशीन के जरिए हो जाता है. इतना ही नहीं, आज टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो चुकी है फुल ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन भी आ चुकी हैं जो आपका काम बहुत आसान बना देती हैं. लेकिन कई बार देखा गया है कि लोग घंटों तक वाशिंग मशीन का इस्तेमाल करते हैं जिससे मशीन पर ज्यादा लोड पड़ता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि घंटों तक वाशिंग मशीन चलाने पर कितनी बिजली की खपत होती है.
कितनी बिजली खर्च करती है वॉशिंग मशीन
आपकी बता दें कि नॉर्मली घर में इस्तेमाल होने वाली वॉशिंग मशीन की पावर 400 वॉट से लेकर 2,000 वॉट तक होती है. वहीं, सेमी-ऑटोमैटिक मशीनें आमतौर पर कम बिजली खर्च करती हैं जबकि फ्रंट लोड और हीटर वाले मॉडल ज्यादा बिजली लेते हैं. ऐसे में अगर किसी मशीन की क्षमता 500 वॉट है और वह एक घंटे तक चलती है तो लगभग 0.5 यूनिट बिजली की खपत होगी. वहीं, अगर मशीन में पानी गर्म करने का फीचर ऑन है तो मशीन ज्यादा बिजली खर्च करती है.&amp;nbsp;
कैसे बढ़ती है बिजली की खपत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वॉशिंग मशीन में गर्म पानी का इस्तेमाल, लंबे वॉश साइकिल, बार-बार छोटे-छोटे लोड में कपड़े धोना और मशीन में ज्यादा पानी भरना भी बिजली की खपत को बढ़ा देते हैं. इसके अलावा, पुरानी या कम एफिशिएंसी वाली मशीनें भी नए मॉडल के मुकाबले ज्यादा बिजली खर्च करती हैं.
कैसे बचाएं बिजली&amp;nbsp;
अब अगर आप भी वाशिंग मशीन इस्तेमाल करने के साथ कम बिजली खर्च करना चाहते हैं तो कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है. हमेशा मशीन में उतना ही पानी भरें जितनी उसकी क्षमता है. इसके अलावा बहुत कम कपड़ों के लिए मशीन चलाने से बचें. साथ ही जहां संभव हो, गर्म पानी की बजाय नॉर्मल पानी का इस्तेमाल करें. साथ की कपड़ों के अनुसार ही मशीन में मोड इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आपकी मशीन में Eco Mode है तो उसका इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है.
इन बातों का रखें खास ध्यान
इसके अलावा कुछ और चीजों का ध्यान रखना भी जरूरी है. वॉशिंग मशीन को हमेशा समतल जगह पर रखें जिससे मशीन में कम वाइब्रेशन हो. इसके साथ ही सही मात्रा में ही डिटर्जेंट डालें क्योंकि ज्यादा झाग बनने से मशीन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है. मशीन के प्लग, वायर और सॉकेट की स्थिति भी समय-समय पर चेक करते रहें. अगर मशीन से अजीब आवाज या कंपन आए तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत टेक्नीशियन से चेक करना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>कैसे करें खराब क्वालिटी वाले सोलर पैनल की पहचान? सस्ते के लालच में हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Buying Guide: कुछ साल पहले तक सोलर पैनल कुछ-कुछ जगहों पर ही नजर आते थे, लेकिन अब शहरों से लेकर गांवों तक हर जगह इनका यूज होने लगा है. डिमांड बढ़ने के कारण अब बाजार में हर तरह के ऑप्शन अवेलेबल हो गए हैं. कई लोग सस्ते का लालच देकर आपको खराब क्वालिटी वाले पैनल भी बेच सकते हैं. ऐसे पैनल पर आपका पैसा भी बर्बाद हो जाएगा और आपको पूरी सोलर एनर्जी भी नहीं मिलेगी. आज हम जानेंगे कि खराब क्वालिटी वाले सोलर पैनल के क्या खतरे हैं और इनकी पहचान कैसे की जा सकती है.
क्यों बिक रहे हैं खराब क्वालिटी वाले पैनल?
इसका सीधा जवाब है कि सोलर पैनल मार्केट में कंपीटिशन बहुत बढ़ गया है और डिमांड भी ज्यादा है. इसलिए कई डीलर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सस्ते दामों में खराब क्वालिटी वाले पैनल बेच रहे हैं. अगर इन पैनल के नुकसान की बात करें तो इनमें घटिया क्वालिटी वाली सेल्स को यूज किया जाता है, जिससे एफिशिएंसी कम हो जाती है. इसी तरह इनके पैनल भी कमजोर होते हैं और इनके तेज आंधी या बारिश में मुड़ने का डर रहता है. इनमें यूज होने वाले ग्लास और बाकी पार्ट्स की क्वालिटी भी काफी खराब होती है.&amp;nbsp;
खराब क्वालिटी वाले पैनल के सबसे बड़े खतरे क्या हैं?

घटिया सेल्स लगे होने के कारण इनकी एफिशिएंसी पहले ही कम होती है. ऊपर से भारत के कई क्षेत्रों में जिस तरह का तापमान रहता है, उससे एफिशिएंसी और कम हो जाती है.
सस्ते सोलर पैनल में माइक्रोक्रैक की भी दिक्कत होती हैं. ये एकदम छोटी क्रैक्स होती हैं, जो गौर से देखने पर नजर भी नहीं आती. कुचछ समय बाद ही क्रैक्स के कारण पैनल की परफॉर्मेंस कम होने लगती है.
क्रैक्स के कारण पैनल में हॉटस्पॉट बन जाते हैं. ये खतरनाक होते हैं और पूरे सिस्टम को डैमेज कर सकते हैं. इसने आग लगने का भी खतरा रहता है.

कैसे करें खराब क्वालिटी वाले पैनल की पहचान?

अगर कोई आपको बहुत कम कीमत में पैनल देने की बात कर रहा है तो सतर्क हो जाएं.
पैनल खरीदते समय आपको सर्टिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए. असली और अच्छी क्वालिटी वाले पैनल पर BIS सर्टिफिकेशन और IEC टेस्टिंग स्टैंडर्ड दिख जाएंगे.
पैनल की बनावट देखकर भी क्वालिटी का अंदाजा लगाया जा सकता है. कमजोर फ्रेम, खराब फिनिशिंग और एक जैसा कलर न होना दिखाता है कि पैनल की क्वालिटी खराब है.
पैनल के साथ मिलने वाले डॉक्यूमेंट से भी पैनल की क्वालिटी और ऑथेंटिसिटी का पता लगाया जा सकता है.

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका स्मार्टफोन भी हमेशा करता है लैग? ये हो सकता है कारण, इस ट्रिक से बन जाएगा सुपरफास्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: वीडियो बनाने से लेकर मूवी देखने तक, आज स्मार्टफोन लोगों की लगभग सभी काम को आसान बनाता है. ये एक ऐसा डिवाइस बन चुका है जो घर में बच्चों से लेकर बुजर्गों तक के काम आता है. लेकिन अक्सर, देखा गया है कि कई बार स्मार्टफोन स्लो हो जाता है या फिर बार-बार लैग करने लगता है जिससे यूजर्स को काफी परेशानी होती है. आज हम आपको ऐसी ट्रिक के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आपका पुराना स्मार्टफोन भी सुपरफास्ट बन जाएगा.
बंद करें बेकार के प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स
आज ज्यादातर स्मार्टफोन्स में कई ऐसे ऐप्स पहले से इंस्टॉल होते हैं जिनका आप ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते हैं. लेकिन ये ऐप्स आपके फोन में स्पेस घेरे रहते हैं जिससे फोन पर ज्यादा लोड रहता है. इसीलिए फोन से बेकार के ऐप्स को तुरंत हटा देना चाहिए. इसके लिए Settings &gt; Apps में जाकर जिन ऐप्स की जरूरत नहीं है उन्हें Disable कर दें. इससे फोन पर अनावश्यक लोड कम होगा.
सेट करें Background Process Limit
इसके अलावा कई ऐप्स बैकग्राउंड में लगातार चलते रहते हैं जो डिवाइस के रैम और बैटरी दोनों का इस्तेमाल करते हैं जिससे आपके फोन पर ज्यादा लोड पड़ता है. इसको सही करने के लिए आपको Developer Options में जाकर Background Process Limit को &quot;At most 2 processes&quot; पर सेट करना होगा. इससे फोन एक समय में लिमिटेड बैकग्राउंड ऐप्स चलाएगा और सिस्टम ज्यादा स्मूद काम करेगा.
हटा दें बेकार के Widgets
बहुत ज्यादा विजेट्स होम स्क्रीन पर लगातार अपडेट होते रहते हैं जिससे रैम और प्रोसेसर का इस्तेमाल बढ़ सकता है. अब आपको जिन विजेट्स की जरूरत नहीं है उन्हें हटा देना ही सही होता है. इससे होम स्क्रीन हल्की होगी और फोन पहले से ज्यादा स्मूद काम करने लगेगा.
Cache को साफ करते रहें
आपको बता दें कि ऐप्स इस्तेमाल करते समय कैश फाइलें जमा होती रहती हैं. अब ज्यादा कैश जमा होने पर फोन पर एक्सट्रा लोड पड़ता है जिससे अक्सर डिवाइस स्लो हो जाता है. इसीलिए एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि समय-समय पर फोन से कैश को साफ करते रहना चाहिए. इसके लिए आपको Settings &gt; Storage में जाकर समय-समय पर कैश साफ करते रहें.
कम करें Animation Scale
आपको बता दें कि स्मार्टफोन की एनिमेशन जितनी लंबी होती है उतना ही आपका डिवाइस स्लो काम करता है. इसीलिए एनिमेशन स्केल को कम करने से ये समस्या दूर हो सकती है. इसके लिए सबसे पहले Settings में जाकर About Phone में जाएं. इसके बाद यहां पर Build Number पर लगातार 7 बार टैप करें. इससे Developer Options चालू हो जाएगा. अब वहां जाकर Window Animation Scale को 0.5x पर सेट कर दें. इससे ऐप्स खुलने और स्क्रीन ट्रांजिशन पहले से ज्यादा तेज काम करने लगेंगे.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Phone Restart Problem : अचानक फोन बार&amp;बार रीस्टार्ट होने लगा? हो सकती है ये गड़बड़</title>
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        <description><![CDATA[ Phone Restart Problem : अचानक फोन बार-बार रीस्टार्ट होने लगा? हो सकती है ये गड़बड़ ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>बुजुर्गों के बहुत काम आते हैं ये 5 Bluetooth Devices! रोजमर्रा की जिंदगी को बना देते हैं आसान</title>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>क्या मोबाइल टावर भी हो सकते हैं हैक? जानिए क्या है इसकी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Tower: स्मार्टफोन आज के समय में लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ऐसे में आपका स्मार्टफोन आपके आस पास के मोबाइल टावर से कनेक्ट होता है जिससे आपको कॉलिंग और इंटरनेट की सुविधा मिलती है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि क्या मोबाइल टावर भी हैक हो सकता है. सोशल मीडिया पर भी समय-समय पर ऐसे दावे सामने आते रहते हैं. आइए जानते हैं क्या है इसकी सच्चाई.
क्या मोबाइल टावर हैक हो सकते हैं
आपको बता दें कि मोबाइल टावर को हैक करना बेहद मुश्किल होता है. मोबाइल टावर कंप्यूटर या स्मार्टफोन की तरह नहीं होते हैं. इनमें कई Security Layers और एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. आपको बता दें कि इन्हें हैक करने के लिए बहुत एडवांस टेक्नोलॉजी का ज्ञान होना जरूरी है. यही वजह है कि आम साइबर अपराधी मोबाइल टावर को निशाना नहीं बनाते हैं.
कैसे हो सकता है साइबर हमला?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइबर अपराधी सीधे मोबाइल टावर को हैक करने के बजाय अक्सर फर्जी बेस स्टेशन या नकली मोबाइल टावर का इस्तेमाल करते हैं. इसे कई बार IMSI Catcher या Stingray जैसे डिवाइसेज के रूप में जाना जाता है. ये डिवाइस आसपास के मोबाइल फोन को असली टावर होने का साइन दे सकते हैं. इसके जरिए कुछ मामलों में कॉल या मैसेज से जुड़ी सीमित जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि आज कल के एडवांस 4G और 5G नेटवर्क में इससे जुड़े कई सेफ्टी टूल्स मौजूद हैं.
मोबाइल कंपनियां कैसे रखती हैं सुरक्षा का ध्यान?
टेलीकॉम कंपनियां अपने नेटवर्क की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी करती हैं. नेटवर्क में किसी भी एब्नार्मल एक्टिविटी का पता लगाने के लिए एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जाते हैं. इसके अलावा समय-समय पर सिक्योरिटी अपडेट, सॉफ्टवेयर पैच और एन्क्रिप्शन तकनीकों को बेहतर बनाया जाता है जिससे किसी भी आने वाले खतरे को रोका जा सके.
यूजर्स को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
हालांकि मोबाइल टावर हैक होने की संभावना बहुत कम होती है लेकिन यूजर्स को अपनी सुरक्षा का ध्यान जरूर रखना चाहिए. हमेशा अपने फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट रखें, अंजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और अनजान ऐप्स इंस्टॉल न करें. अगर अचानक नेटवर्क से जुड़ी कोई समस्या दिखाई दे तो अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करें.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google Privacy Settings:  गूगल के एआई टूल्स नहीं चुरा पाएंगे आपका डेटा, आज ही बदल लें ये 5 सेटिंग्स</title>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Smart Water Tank Monitoring System: अब मोबाइल से चेक करें पानी की टंकी का लेवल, मोटर भी होगी रिमोट से कंट्रोल</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Water Tank Monitoring System: दिल्ली-NCR समेत देश के ज्यादातर घरों की छत पर पानी की टंकी रखी होती है, लेकिन उसमें कितना पानी बचा है, यह पता लगाना अक्सर आसान नहीं होता, क्योंकि टंकी काफी ऊंचाई पर लगी होती है. बार-बार छत पर जाकर टंकी चेक करना न सिर्फ मेहनत का काम है, बल्कि कई बार नामुमकिन भी हो जाता है. लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि अब इस समस्या का हल मिल गया है.
बता दें कि Flosenso नाम की कंपनी की एक डिवाइस अब लोगों को यह सुविधा दे रही है कि वे अपने मोबाइल फोन से ही टंकी में पानी का लेवल देख सकें और साथ ही मोटर को भी दूर बैठे-बैठे ऑन-ऑफ कर सकें. इस डिवाइस का नाम Flosenso Pro है और इसकी कीमत करीब 10 हजार रुपये रखी गई है.
कैसे काम करता है यह स्मार्ट डिवाइस?
Flosenso Pro असल में एक IoT आधारित वॉटर लेवल कंट्रोलर है, यानी यह इंटरनेट की मदद से काम करता है. यह डिवाइस बहुत कम बिजली में चलता है और इसे सीधे पानी की टंकी पर लगाया जाता है. इंस्टॉल होने के बाद यह एक स्मार्ट स्विच के साथ जुड़ जाता है. जब टंकी पूरी तरह भर जाती है, तो यह डिवाइस अपने आप वॉटर पंप को बंद कर देता है, जिससे पानी बर्बाद होने से बच जाता है. इसके साथ ही Flosenso का एक मोबाइल ऐप भी है, जिसे फोन में इंस्टॉल किया जाता है. इस ऐप को खोलते ही यूजर देख सकता है कि छत पर रखी टंकी में कितना पानी भरा हुआ है.&amp;nbsp;
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मोटर को खराब होने से भी बचाती है डिवाइस
Flosenso Pro की एक खास बात यह भी है कि यह मोटर को खराब होने से भी बचाती है. दरअसल कई बार ऐसा होता है कि पानी की सप्लाई मोटर तक नहीं पहुंच पाती, लेकिन मोटर फिर भी चलती रहती है. ऐसे में मोटर के जलने या खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. Flosenso के डिवाइस में यह खासियत दी गई है कि अगर मोटर ऑन हो और पानी की सप्लाई न मिले, तो यह डिवाइस खुद ही मोटर को बंद कर देता है, जिससे उसका नुकसान होने से बच जाता है. कुल मिलाकर, यह गैजेट न सिर्फ पानी की टंकी को मैनेज करने में मदद करता है, बल्कि पानी की बर्बादी और मोटर के खराब होने जैसी दिक्कतों से भी बचाता है, जिससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचता है.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>HDMI 2.1, USB&amp;C और Display Port में क्या अंतर, जानें मॉनिटर के लिए कौन&amp;सा होता है बेहतर?</title>
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        <description><![CDATA[ HDMI 2.1 Vs USB-C Vs Display Port: अक्सर देखा गया है कि लोग नया मॉनिटर खरीदते समय उसकी स्क्रीन साइज या रिफ्रेश रेट को चेक करते हैं. लेकिन मॉनिटर की सही कनेक्टिविटी ही उतनी जरूरी होती है जितना की बाकी फीचर्स. बता दें कि मॉनिटर को खरीदते समय ये जरूर चेक करना चाहिए कि इसमें कौन सी कनेक्टिविटी मिल रही है.
अब बता दें कि आज के समय में मार्केट में HDMI 2.1, USB-C और Display Port काफी ट्रेंडिंग में चल रहे हैं. लेकिन इन तीनों में आपके मॉनिटर के लिए कौन सा बेस्ट रहेगा, इसको लेकर अक्सर लोगों में कंफ्यूजन देखने को मिलता है. आज हम आपको इन तीनों के बारे में बताने जा रहे हैं कि ये कैसे काम करते हैं और इनमें क्या अंतर होता है.
HDMI
अगर आपका मकसद फिल्में देखना, टीवी से कनेक्ट करना या गेमिंग कंसोल जैसे PlayStation और Xbox का इस्तेमाल करना है तो HDMI आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन साबित होगा. आज करीब सभी टीवी, साउंडबार, गेमिंग कंसोल और मीडिया डिवाइस में HDMI पोर्ट मौजूद होता है. ये पोर्ट आसानी से उपलब्ध हो जाता है इसलिए भी इसका इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है.
USB-C
आज कल USB-C भी काफी चर्चित डिवाइस माना जाता है. नए जनरेशन वाले लैपटॉप और मॉनिटर में USB-C तेजी से फेमश हो रहा है. बता दें कि इस पोर्ट की सबसे बड़ी खास बात ये है कि इसे डिस्प्ले पोर्ट के Alternate Mode के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
इसका मतलब है कि एक ही USB-C केबल से वीडियो सिग्नल भेजने के साथ-साथ डेटा ट्रांसफर और कई मामलों में लैपटॉप चार्ज भी किया जा सकता है. हालांकि, सभी USB-C पोर्ट या केबल इस फीचर को सपोर्ट नहीं करते इसलिए खरीदने से पहले डिवाइस की जानकारी जरूर जांच लें.
DisplayPort
अगर आपका कंप्यूटर डेडिकेटेड ग्राफिक्स कार्ड (GPU) के साथ आता है और आप हाई-एंड गेमिंग करते हैं तो DisplayPort आपके लिए एक शानदार ऑप्शन साबित हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी खास बात ये है कि इसमें यूजर्स को कई सारे रिफ्रेश रेट देखने को मिल जाते हैं जो आपके गेमिंग एक्सपीरिएंस को बेहतर बनाने का काम करते हैं. इस पोर्ट की एक और खास बात है कि इसमें यूजर्स को स्क्रीन फटने या फिर लैग करने जैसी समस्या देखने को नहीं मिलती है. इसके अलावा DisplayPort हाई बैंडविड्थ भी देता करता है जिससे हाई रेजोल्यूशन और ज्यादा रिफ्रेश रेट पर बेहतर प्रदर्शन मिलता है.
किसे खरीदने में है फायदा?
अब आपको बताते हैं कि आपके लिए कौन सा पोर्ट सही रहेगा. दरअसल, ये आपकी जरूरत और मॉनिटर पर भी निर्भर करता है. अगर आपके पास PC गेमिंग, हाई रिफ्रेश रेट और मल्टी-मॉनिटर सेटअप है तो DisplayPort सबसे बेहतर विकल्प रहेगा.
वहीं, अगर आप टीवी, होम थिएटर, गेमिंग कंसोल या OTT कंटेंट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो HDMI खरीदने आपके लिए सही रहेगा. वहीं, अगर आपके पास एडवांस लैपटॉप और USB-C सपोर्ट वाला मॉनिटर है तो USB-C ही सबसे सुविधाजनक ऑप्शन आपके लिए साबित हो सकता है क्योंकि ये एक ही केबल से वीडियो, डेटा और कई बार चार्जिंग की सुविधा भी देता है.
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>मिनटों में बदल सकते हैं अपना पुराना Email Address! 99% लोग आज भी नहीं जानते Gmail की ये ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ मिनटों में बदल सकते हैं अपना पुराना Email Address! 99% लोग आज भी नहीं जानते Gmail की ये ट्रिक ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 18 Pro Max खरीदते समय जेब को लगेगा जोर का झटका! इतने बढ़ सकते हैं दाम</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro Max: सितंबर में लॉन्च होने वाले iPhone 18 Pro Max को खरीदने के लिए आपको जेब पर काफी बोझ डालना पड़ेगा. काउंटरप्वाइंट रिसर्च की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ने के कारण इसकी कीमत बढ़ना तय है. दामों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी इसके 1TB में होने की संभावना जताई जा रही है. बता दें कि स्टोरेज और मेमोरी चिप्स समेत कई कंपोनेंट की कीमत बढ़ने और नई टेक्नोलॉजी शामिल किए जाने के कारण यह आईफोन महंगी कीमत पर लॉन्च होगा.&amp;nbsp;
मेमोरी चिप्स के कारण बढ़ेगी iPhone 18 Pro Max की कीमत
काउंटरप्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि मेमोरी चिप की लागत बढ़ना इस आईफोन को महंगा कर रहा है. अब मेमोरी चिप के लिए ही कंपनी को इतना पैसा खर्च करना पड़ रहा है, जितने में वह पहले चिप के साथ कई और कंपोनेंट्स भी खरीद लेती थी. इसके अलावा ऐप्पल iPhone 18 Pro Max में 2nm प्रोसेस से बने चिपसेट का यूज करेगी. एडवांस्ड पैकेजिंग टेक्नोलॉजी के कारण ये चिपसेट काफी महंगे होते हैं.&amp;nbsp;
दाम बढ़ने के पीछे ये भी कारण
ऐप्पल अपने फ्लैगशिप मॉडल में पहली बार मेन कैमरा पर वेरिएबल अपर्चर देने जा रही है. इसकी मदद से फोटो लेते समय सेंसर में जाने वाली लाइट को कंट्रोल किया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अपग्रेड के कारण भी दामों में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. अगर सारी अपग्रेड्स को मिला जाए तो आईफोन के दाम काफी ऊपर जा सकते हैं, लेकिन ऐप्पल इन्हें बैलेंस करने की कोशिश में है. बताया जा रहा है कि दाम कम रखने के लिए कंपनी डिस्प्ले पैनल और दूसरे कई पार्ट्स पर कम पैसा खर्च करेगी, जिससे कीमत में बढ़ोतरी के झटके को कुछ कम किया जा सके.
iPhone 18 Pro Max में क्या मिलेगा?
ऐप्पल का यह फ्लैगशिप मॉडल 6.9 इंच की स्क्रीन मिलेगी. ऐसे कयास हैं कि कंपनी इसमें एनर्जी एफिशिएंट LTPO+ डिस्प्ले पैनल को यूज करेगी. यह आईफोन TSMC की एडवांस्ड 2nm प्रोसेस पर बना A20 Pro चिपसेट के साथ आएगा. ऐप्पल इस मॉडल में 12GB रैम और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए नए C2 modem को यूज करेगी. इसके रियर में 48MP वाला ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया जा सकता है.
कितनी बढ़ सकती है कीमत?
काउंटरप्वाइंट रिसर्च का अनुमान है कि 18 Pro Max की शुरुआती कीमतों में 200 डॉलर तक का इजाफा हो सकता है और इसके 1TB वेरिएंट की कीमत में सबसे बड़ा हाइक होगा. कुछ समय पहले आई एक और रिपोर्ट में बताया गया था कि 18 Pro Max की कीमत 1399 डॉलर (लगभग 1.32 लाख रुपये) हो सकती है. भारत में इंपोर्ट ड्यूटी, टैक्स और दूसरे लोकल प्राइस फैक्टर के कारण कीतम और भी ज्यादा रह सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram पर मचा बवाल, Meta ने चुपचाप हटा दिया AI इमेज फीचर, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram AI Feature: इंस्टाग्राम देश में काफी ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन चुका है. कुछ लोग रील्स देखने के लिए तो कुछ पोस्ट या फॉलोअर्स से कनेक्ट करने के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं. इसी बीच मेटा ने कुछ समय पहले ही इस ऐप में एआई जनरेशन टूल Muse को रोलआउट किया था. लेकिन अब इस टूल का काफी विरोध हो रहा है. लोगों में इस टूल को लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए मेटा ने चुपचाप इस फीचर को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
क्या है फीचर हटाने की वजह
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, Meta ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया कि कंपनी ने इस फीचर को यूजर्स को एक नया क्रिएटिव टूल देने के मकसद से लॉन्च किया था. इसके अलावा इस टूल के जरिए यूजर ये तय कर सकता था कि उसकी पोस्ट एआई के लिए इस्तेमाल की जा सकती है या नहीं. लेकिन यूजर्स का विरोध बताता है कि ये फीचर उनके उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है. इसीलिए फिलहाल इस फीचर को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है. हालांकि, Muse Image का बाकी AI इमेज जनरेशन सिस्टम पहले की तरह उपलब्ध रहेगा.
भारत सरकार ने क्या कहा?
इस मामले पर भारत सरकार ने भी गंभीर रुख अपनाया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानि MeitY ने कहा कि सरकार इस फीचर की जांच करेगी. उन्होंने कहा कि अगर शिकायतें मिली हैं तो पूरे मामले को भारत के कानूनों के तहत देखा जाएगा.
भारत के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार पिछले कुछ समय से डीपफेक और बिना अनुमति AI से बनाई गई तस्वीरों पर सख्ती दिखा रही है. इससे पहले भी AI टूल्स को लेकर सरकार कई कंपनियों से जवाब मांग चुकी है.
दुनिया भर में हुआ विरोध
इस फीचर का विरोध सिर्फ आम लोगों ने ही नहीं किया. अमेरिका की कलाकारों की यूनियन SAG-AFTRA ने अपने सदस्यों को सावधान रहने की सलाह दी. बड़ी टैलेंट एजेंसी CAA ने कहा कि किसी व्यक्ति का चेहरा, नाम, आवाज या तस्वीर उसकी साफ अनुमति के बिना AI मॉडल में इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए. प्राइवेसी से जुड़े कई संगठनों ने भी Meta की आलोचना करते हुए कहा कि AI कंपनियां लोगों की निजी तस्वीरों को सिर्फ डेटा की तरह इस्तेमाल कर रही हैं.
इस फैसला का क्या है मतलब
आपको बता दें कि Meta का ये फैसला दिखाता है कि AI से जुड़े नए फीचर्स लॉन्च करते समय केवल टेक्नोलॉजी ही नहीं बल्कि यूजर्स की प्राइवेसी और परमिशन भी उतना ही जरूरी है. बढ़ते विरोध के बाद कंपनी का ये कदम बताता है कि आने वाले समय में कंपनी को एआई फीचर को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने पर जोर देना चाहिए.
क्यों यूजर्स ने किया इसका विरोध
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर हुआ कि सभी Public Instagram अकाउंट्स को इस फीचर में पहले से ही शामिल (Opt-in) कर दिया गया था. इसका मतलब ये था कि अगर किसी को अपनी पोस्ट को एआई के इस्तेमाल के लिए न देना हो तो उसे सेटिंग में जाकर कुछ बदलाव करने पड़ते थे.
इसके अलावा Meta किसी यूजर को ये भी नहीं बताता था कि उसकी प्रोफाइल का इस्तेमाल करके किसी ने AI इमेज बनाई है. इससे लोगों को डर था कि उनकी तस्वीरों का बिना उनकी परमिशन के गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि कंपनी ने Private अकाउंट्स और 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के अकाउंट्स को इस फीचर से बाहर रखा था.
क्या है Muse Image?
Muse Image Meta का नया AI टूल है जो साधारण भाषा में दिए गए निर्देशों के आधार पर तस्वीरें तैयार करता है. इससे फोटो में बदलाव किए जा सकते हैं किसी चीज़ को हटाया जा सकता है, किसी व्यक्ति को किसी मशहूर जगह के सामने दिखाया जा सकता है, पुरानी तस्वीरें बेहतर बनाई जा सकती हैं और कमरे की फोटो देखकर नया इंटीरियर डिजाइन भी तैयार किया जा सकता है. Meta आने वाले समय में इसे Facebook, Messenger और अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर भी लाने की तैयारी कर रही है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह विवाद सिर्फ Meta तक सीमित नहीं है. बड़ा सवाल यह है कि क्या AI कंपनियां लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना कर सकती हैं? भारत सरकार अब इस मामले की जांच कर रही है. अगर जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो Meta से जवाब भी मांगा जा सकता है. माना जा रहा है कि यह मामला भविष्य में भारत में AI और प्राइवेसी से जुड़े नियम तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Instagram, पर, मचा, बवाल, Meta, ने, चुपचाप, हटा, दिया, इमेज, फीचर, जानिए, क्या, है, पूरा, मामला</media:keywords>
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        <title>स्पैम कॉल्स पर बड़ा बवाल! Truecaller और TRAI आमने&amp;सामने, जानिए यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?</title>
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        <description><![CDATA[ TRAI-Truecaller: देश में स्पैम कॉल्स तेजी से बढ़ रहा था जिसको लेकर ट्राई नए-नए तरीके अपना रहा था. अब इसी बीच स्पैल कॉल्स पर लगाम लगाने को लेकर ट्राई और ट्रूकॉलर आमने-सामने आ चुके हैं. जी हां, दरअसल, ट्रूकॉलर कई सारी कॉल्स को फर्जी बताने लगाने था जिसमें बैंकिंग कॉल्स भी शामिल थीं. इसके अलावा इन दोनों के आमने-सामने का एक और कारण है जो है कि क्या कॉलर आईडी ऐप्स 140 और 1600 सीरीज से आने वाली कॉल्स को स्पैम बताकर यूजर्स को चेतावनी दे सकते हैं या नहीं. आइए जानते हैं कि यूजर्स पर इसका क्या असर होगा.
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, TRAI चाहता है कि Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे कॉलर आईडी ऐप्स 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को स्पैम बताना बंद करें. दरअसल, ट्राई का मानना है कि इन नंबरों से आने वाली कॉल्स केवल रजिस्टर्ड कंपनियां, बैंक और दूसरी संस्थाएं मार्केटिंग या सर्विस के लिए इस्तेमाल करती हैं. इसीलिए इन्हें स्पैम कैटेगरी में नहीं रखा जाना चाहिए.
वहीं, दूसरी ओर, Truecaller का कहना है कि अगर ज्यादातर यूजर्स किसी नंबर को लेकर बार-बार शिकायत कर रहे हैं या फिर उन नंबर को ब्लॉक कर रहे हैं तो ऐसे में उन्हें यूजर्स को जानकारी देने का पूरा हक है.
क्या हैं TRAI के नियम
जानकारी के अनुसार, TRAI ने 2024 में एक नया सिस्टम लागू किया था जिसके तहत अलग-अलग तरह की बिजनेस कॉल्स के लिए स्पेशल नंबर सीरीज तय की गई. 140 सीरीज का इस्तेमाल प्रमोशनल या टेलीमार्केटिंग कॉल्स के लिए किया जाता है. वहीं, 1600 सीरीज बैंकिंग, ओटीपी, ट्रांजैक्शन और दूसरी सर्विस कॉल्स के लिए तय की गई थीं.
अब इसके बाद TRAI ने कंपनियों को नॉर्मल 10 अंकों वाले मोबाइल नंबरों की जगह पर इन्हीं विशेष नंबरों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है जिससे यूजर आसानी से पहचान सकें कि कॉल किसी रजिस्टर्ड संस्था से आई है.
TRAI के प्रस्ताव पर ट्रूकॉलर ने क्या कहा

Wondering why spam calls have increased SIGNIFICANTLY in India recently? Well, it&#039;s actually going to get worse, here&amp;rsquo;s why: In late 2025, TRAI enforced businesses to call consumers using 140 (for telemarketing calls) and 1600 (for BFSI companies to make service/transaction&amp;hellip; pic.twitter.com/Gy5ykiBxrL
&amp;mdash; Rishit Jhunjhunwala (@rishj) July 8, 2026



आपको बता दें कि Truecaller के सीईओ ऋषित झुनझुनवाला ने TRAI के प्रस्ताव की आलोचना की है. उनका कहना है कि कंपनी हर दिन करोड़ों भारतीयों को स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल्स से बचाने में मदद करती है. ऐसे में अगर ऐप्स को यूजर्स को चेतावनी देने से रोका जाएगा तो इसका सीधा असर यूजर्स पर पड़ेगा और इस सिस्टम का ठग भी फायदा उठा सकते हैं जिससे लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं.
यूजर्स पर क्या होगा असर
आपको बता दें कि इस विवाद का सीधा असर करोड़ों भारतीय मोबाइल यूजर्स पर देखने को मिल सकता है. अगर कॉलर आईडी ऐप्स को चेतावनी दिखाने की परमिशन नहीं मिली तो ये पहचानना मुश्किल हो जाएगा कि ये कॉल्स किसी रजिस्टर्ड कंपनी की हैं या फिर किसी ठग की है. हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Phone Screen Freezing Problem: फोन की स्क्रीन बार&amp;बार फ्रीज हो जाती है? सर्विस सेंटर जाने से पहले चेक करें ये चीज</title>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>फोन पर Spam का टैग कौन लगाता है? जानिए कैसे काम करती हैं Caller ID Apps</title>
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        <description><![CDATA[ Caller ID Apps: स्पैल कॉल्स आज कल लोगों की एक बड़ी समस्या बन चुकी है. कई बार लोगों को ड्राइविंग के दौरान या फिर ऑफिस मीटिंग के दौरान स्पैम कॉल्स काफी परेशान करते हैं. आपको बता दें कि स्पैम कॉल्स वो होती हैं जो किसी अनजान नंबर या फिर किसी मार्केटिंग कंपनी द्वारा की जाने वाली कॉल होती है. हालांकि, कई बार ठग भी ऐसे ही नंबरों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके स्मार्टफोन में दिखने वाली स्पैम कॉल कौन डिसाइड करता है. आइए जानते हैं कि आखिर कॉलर आईडी ऐप्स कैसे काम करती हैं.
TRAI का मामला
आपको बता दें कि हाल ही में ट्राई और कॉलर आईडी ऐप्स के बीच एक विवाद चल रहा है जिसमें बताया गया है कि कई बैंकों ने शिकायत की कि उनके ऑफिशियल 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को कुछ कॉलर आईडी प्लेटफॉर्म स्पैम के रूप में दिखा रहे हैं. इससे ग्राहकों तक जरूरी कॉल नहीं पहुंच पा रही हैं.
बता दें कि बैंकों का कहना है कि कई लोगों ने लोन रिकवरी और बैंकिंग अलर्ट से जुड़ी जरूरी कॉल मिस कर दीं क्योंकि उनके फोन पर इन नंबरों को स्पैम बताया गया या कॉल ब्लॉक हो गई. अब TRAI सीधे इन ऐप्स को कंट्रोल करने की मांग नहीं कर रहा है बल्कि एक नए नियम को पेश करना चाहते है.
Google की Caller ID कैसे करती है स्पैम की पहचान
Android फोन में मिलने वाला Google Phone ऐप भी अपने यूजर्स को स्पैम से सेफ्टी देता है. ये सिस्टम पब्लिक बिजनेस डायरेक्टरी, वेरिफाईड बिजनेस जानकारी और यूजर रिपोर्ट का इस्तेमाल करके कॉलर की पहचान करता है. अगर किसी नंबर की शिकायत कई लोग करते हैं तो आने वाली कॉल के दौरान स्पैम चेतावनी दिखाई देने लगती है.
Google ने कुछ Android डिवाइस में AI बेस्ड Scam Detection फीचर का भी इस्तेमाल किया है. ये कॉल के दौरान बातचीत के पैटर्न को समझता है और असामान्य एक्टिविटी पाए जाने पर उस कॉल को स्पैल का टैग दे देता है.
कैसे तय होता है कौन सी कॉल है स्पैम
जानकारी के लिए बता दें कि Truecaller आज देश में काफी चर्चित कॉलर आईडी ऐप है जो कई अलग-अलग सोर्सेज से जानकारी जुटाकर स्पैम कॉल की पहचान करता है. बता दें कि यूजर्स द्वारा की गई स्पैम रिपोर्ट, कॉलिंग पैटर्न की जांच, असामान्य कॉल एक्टिविटी, एक नंबर के खिलाफ लगातार मिलने वाली शिकायतें तय करती हैं कि कॉल स्पैम या नहीं.
कंपनी का कहना है कि केवल यूजर रिपोर्ट के आधार पर किसी नंबर को स्पैम नहीं बताया जाता. सिस्टम लगातार डेटा का विश्लेषण करता है और अगर किसी नंबर की एक्टिविटी नॉर्मल हो जाती है तो उसका स्पैम टैग भी हटाया जा सकता है.
इसके अलावा वेरिफाईड कंपनियां अपने ऑफिशियल नंबर रजिस्टर करा सकती हैं और अगल गलती से स्पैम टैग लग जाए तो उसको वापस लेने के लिए रिक्वेस्ट कर सकती हैं.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp ला रहा है नया Birthday फीचर, अब भूलेंगे नहीं किसी का खास दिन</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Birthday Feature: व्हाट्सऐप आज के समय में एक चर्चित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म बन चुका है. ऑफिस से लेकर पर्सनल यूज तक के लिए आज लोग व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं. इसी के साथ ही देखा गया है कि अक्सर लोग किसी खास के जन्मदिन पर व्हाट्सऐप स्टोरी या स्टेटस भी लगाते हैं. लेकिन अब व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए एक ऐसा फीचर पेश करने जा रही है जिसकी मदद से लोग अपने खास लोगों का बर्थडे याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि ऐप खुद आपको रिमाइंडर भेजेगा. आइए जानते हैं कैसे काम करेगा ये नया फीचर.
कैसे काम करेगा ये नया फीचर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp प्रोफाइल में डेट ऑफ बर्थ ऐड का ऑप्शन देने की तैयारी कर रहा है. इसके बाद अगर कोई यूजर अपनी बर्थडेट शेयर करना चाहता है तो उसके कॉन्टैक्ट्स को जन्मदिन के दिन WhatsApp पर एक खास नोटिफिकेशन दिखाई देगा. इससे यूजर्स बिना किसी अलग कैलेंडर या रिमाइंडर ऐप की मदद के समय पर लोगों को बर्थडे विश भेजे सकेंगे. इसके अलावा यूजर्स को चैट विंडो में भी स्पेशल बर्थडे प्रॉम्प्ट दिखाई दे सकता है जिससे आपको एक क्लिस में मैसेज भेजने की सुविधा मिल जाएगी.
प्लेटफॉर्म बन रहा और भी स्मार्ट
आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से व्हाट्सऐप में कई सारे एआई और एडवांस फीचर्स आ चुके हैं जिससे प्लेटफॉर्म पहले के मुकाबले काफी स्मार्ट हो चुका है. कंपनी का मानना है कि ये प्लेटफॉर्म सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप न बने बल्कि ये सभी कामों के लिए इस्तेमाल हो सके. कंपनी का मकसद इस ऐप को एक मल्टीयूज ऐप बनाना है जहां यूजर्स को सभी तरह की सुविधा मिल सके.
कब रोलआउट होगा फीचर
जानकारी के मुताबिक, अभी ये नया फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है और केवल चुनिंदा एंड्रॉयड बीटा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध है. Meta ने अभी तक इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट का खुलासा नहीं किया है. ऐसे में माना जा रहा है कि अगर ये टेस्टिंग सफल होती है ये जल्द ही ये फीचर सभी यूजर्त तक पहुंच सकता है.
क्या प्राइवेसी रहेगी सेफ
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि WhatsApp इस फीचर में प्राइवेसी का भी खास ध्यान रख रहा है. जानकारी के अनुसार, डेट ऑफ बर्थ सभी लोगों को दिखाना जरूरी नहीं होगा. ये फैसला यूजर्स का रहेगा कि उनकी जन्मतिथि किसी को दिखाई दे और किसको नहीं. इसका मतलब साफ है कि मेटा आपकी प्राइवेसी का भी पूरी तरह से ध्यान रख रहा है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>IRCTC की नई वेबसाइट का इंतजार जल्द होगा खत्म, पहले आ रहा है बीटा वर्जन</title>
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        <description><![CDATA[ IRCTC New Website: भारतीय रेलवे जल्द ही अपनी नई वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले महीने छात्रों से बात करते हुए कहा था कि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन यानी IRCTC की नई वेबसाइट 15 जुलाई तक लाइव हो जाएगी. अब इससे जुड़ी ताजा जानकारी सामने आ रही है. इसके मुताबिक, इस वेबसाइट का बीटा वर्जन जल्द ही लॉन्च होने वाला है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई वेबसाइट से गैर-जरूरी कैप्चा और पॉप-अप्स को हटा दिया जाएगा और इस पर तत्काल टिकट की बुकिंग तेज होगी. इसके साथ रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग में बॉट्स पर भी लगाम लगाने की कोशिश में लगी हुई है.
क्या होगा नई वेबसाइट का फायदा?
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह वेबसाइट 1 लाख टिकट प्रति मिनट की क्षमता के साथ लॉन्च होगी. नई वेबसाइट आने से यात्रियों को इसकी स्लो स्पीड और बार-बार क्रैश होने की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है. इसमें सभी क्लास की सीटों की अवेलिबिलिटी एकसाथ नजर आएगा और एक बार पैसेंजर डिटेल्स सेव करने के बाद बार-बार टिकट बुक करना आसान हो जाएगा. बता दें कि IRCTC की मौजूदा साइट कई बार तत्काल टिकट की बुकिंग शुरू होते ही क्रैश हो जाती है, जिससे यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा यात्रियों की कैप्चा को लेकर भी शिकायत रहती है. कैप्चा सॉल्व करने के लिए लिमिटेड टाइम मिलता है, जब तक यह सॉल्व होता है, टाइम निकल चुका होता है.&amp;nbsp;
नई वेबसाइट से क्या-क्या उम्मीदें?
उम्मीद की जा रही है कि IRCTC की वेबसाइट को नया डिजाइन और यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस दिया जाएगा, जो हाई-ट्रैफिक को भी आसानी से हैंडल कर पाएगा. माना जा रहा है कि नई वेबसाइट में पेमेंट गेटवे इश्यू का भी समाधान कर दिया जाएगा. अब इसका बीटा वर्जन आने के बाद सारे फीचर्स से पर्दा उठ जाएगा. बीटा वर्जन से मिले फीडबैक के आधार पर जरूरी सुधार कर इसे पब्लिक के लिए लॉन्च कर दिया जाएगा.
ऑनलाइन बुक होती हैं 88 प्रतिशत टिकटें
भारतीय रेलवे में डिजिटल रिजर्वेशन की तादाद सबसे ज्यादा है. करीब 88 प्रतिशत टिकट अब ऑनलाइन बुकिंग होती हैं. ऑनलाइन बुकिंग को लेकर भी रेलवे लगातार नियमों में बदलाव करती आई है. बीते साल जुलाई से तत्काल टिकटों को केवल IRCTC वेबसाइट और ऐप से ही बुक किया जा सकता है और इसके लिए भी आधार ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 06:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>140 और 1600 नंबरों को Spam समझकर ब्लॉक किया तो हो सकता है नुकसान! TRAI ने जारी की नई सफाई</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप 140 या 1600 सीरीज से आने वाली कॉल्स को स्पैम समझकर ब्लॉक कर देते हैं तो अब सावधान हो जाइए. टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI ने साफ किया है कि इन नंबरों का इस्तेमाल अलग-अलग कामों के लिए किया जाता है और इन्हें मनमाने तरीके से टैग या ब्लॉक नहीं किया जा सकता.&amp;nbsp;
TRAI ने दी यह जानकारी
TRAI के मुताबिक, 1600 सीरीज का इस्तेमाल बैंकों, बीमा कंपनियों, RBI, SEBI, IRDAI, PFRDA जैसी संस्थाओं और सरकारी विभागों की सर्विस और ट्रांजैक्शन से जुड़ी जरूरी कॉल के लिए होता है. जैसे OTP, बैंक अलर्ट, KYC या सरकारी जानकारी के लिए. ऐसे में इन नंबरों को स्पैम बताकर ब्लॉक करना नियमों के खिलाफ है.&amp;nbsp;
140 सीरीज के नंबर का क्या काम?
इसके अलावा 140 सीरीज के नंबर प्रमोशनल या मार्केटिंग कॉल के लिए तय किए गए हैं. अगर किसी ग्राहक ने DND (Do Not Disturb) में किसी सेक्टर की प्रमोशनल कॉल लेने की अनुमति दी है तो उस सेक्टर की 140 सीरीज वाली कॉल उसे मिल सकती है. ऐसे नंबरों को भी बिना वजह स्पैम टैग या फिल्टर नहीं किया जा सकता. &amp;nbsp;
140 और 1600 सीरीज पर दी सफाई
TRAI ने कहा कि हाल के दिनों में 140 और 1600 सीरीज को लेकर गलतफहमियां फैल रही थीं. इन्हें दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है, ताकि लोग जरूरी कॉल मिस न करें और इन नंबरों को लेकर भ्रम न रहे.
क्या है दिक्कत की वजह?
गौर करने वाली बात यह है कि Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे Call Management Apps अब 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को स्पैम बताने लगे हैं, जिस पर TRAI ने IT Act के तहत Authorized Agency का दर्जा मांगा है. वहीं, इस डिमांड को MeitY ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है, जिससे TRAI को इन ऐप्स को नोटिस भेजने और नियम तोड़ने पर कार्रवाई करने का रास्ता मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.
Truecaller ने दी थी यह जानकारी
इस मामले में Truecaller ने भी अपना पक्ष रखा है. कंपनी का कहना है कि सिर्फ 140 या 1600 नंबर होने से कोई भी कॉल भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती है. कंपनी का दावा है कि इन दोनों सीरीज से रोजाना आने वाली रोजाना करीब 5 करोड़ कॉल्स का लोग जवाब ही नहीं देते हैं. कंपनी ने आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि पिछले 8 महीनों में यूजर्स ने 140 सीरीज की 81 फीसदी और 1600 सीरीज की 79 फीसदी कॉल्स इग्नोर कर दीं, यानी जानकारी छिपने पर लोग हर अनजान कॉल को ही संदिग्ध मानकर काट रहे हैं.
यह भी पढ़ें: सरकारी और बैंक की कॉल को भी Spam बताने लगा था Truecaller, अब TRAI लेगा एक्शन? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सैटेलाइट को भी पावर दे सकते हैं ये सोलर पैनल, बनाते हैं सबसे ज्यादा बिजली</title>
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        <description><![CDATA[ Multi-Junction Solar Cells: अभी घरों पर लगाने के लिए ट्रेडिशनल सिलिकॉन सोलर पैनल और बाईफेशियल सोलर पैनल का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, इसके साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी पर भी काम चल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ सालों में हम घर के सोलर एनर्जी सिस्टम में Multi-Junction Solar Cells यूज करने के करीब पहुंच जाएंगे. ये ऐसे पैनल होते हैं, जिनकी एफिशिएंसी मौजूदा पैनल से लगभग दोगुनी है और इन्हें सैटेलाइट को भी पावर देने के लिए यूज किया जा सकता है. आइए इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्या होते हैं Multi-Junction Solar Cells?
ये एडवांस्ड सोलर पैनल होते हैं, जिन्हें Gallium Indium Phosphide (GaInP), Indium Gallium Arsenide (InGaAs) और Germanium (Ge) जैसे सेमीकंडक्टर मैटेरियल की अलग-अलग लेयर को एक-दूसरे के ऊपर रखकर बनाया जाता है. इनमें से हर लेयर सनलाइट से अलग-अलग वेवलेंग्थ को कैप्चर कर सकती है. इसकी हर सेल में अपना अलग p-n junction होता है, जिस कारण ये पैनल ज्यादा सनलाइट को बिजली में बदल सकते हैं. Concentrated सनलाइट में इन पैनल की एफिशिएंसी 47 प्रतिशत से भी ज्यादा है और स्टैंडर्ड कंडीशन में इनकी एफिशिएंसी 33 प्रतिशत से ज्यादा होती है.
क्या हैं Multi-Junction सोलर पैनल के फायदे
ऊपर हम आपको बता ही चुके हैं कि इनकी एफिशिएंसी 47 प्रतिशत तक है. चूंकि इसमें लगी हर लेयर अलग-अलग रेंज वाली सनलाइट को कैप्चर कर लेती है, इसलिए एनर्जी वेस्टेज बहुत कम होती है. इन पैनल पर ज्यादा टेंपरेचर का भी असर नहीं होता और ये हाई टेंपरेचर भी स्टेबल तरीके से काम कर सकते हैं. ट्रेडिशनल पैनल की बात करें तो ज्यादा टेंपरेचर में इनकी एफिशिएंसी कम हो जाती है. इसके अलावा Multi-Junction पैनल को उन जगहों पर भी काम में लिया जा सकता है, जहां जगह की कमी होती है. इसलिए ये सैटेलाइट, ड्रोन, मार्स रोवर और स्पेस स्टेशन के लिए परफेक्ट माने जाते हैं.
Multi-Junction सोलर पैनल के नुकसान क्या हैं?
मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट- इन पैनल की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट ज्यादा होती है. अगर इनकी ट्रेडिशनल सोलर पैनल से तुलना की जाए तो इन्हें बनाने में 2-2.5 गुना तक ज्यादा लागत आती है. इसके अलावा इनकी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस भी काफी मुश्किल है. इस कारण इनका प्रोडक्शन को मास लेवल पर ले जाना अभी भी कठिन बना हुआ है. वहीं ड्यूरैबिलिटी भी एक चिंता बनी हुई है. इन पैनल को बनाने के लिए नाजुक मैटेरियल का इस्तेमाल होता है. यह ट्रेडिशनल सोलर पैनल की तरह हर प्रकार का मौसम नहीं झेल सकता. डायरेक्ट सनलाइट न होने पर इनकी एफिशिएंसी में भी बड़ी गिरावट आती है.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 06:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WiFi Router Placement Tips: तेज इंटरनेट स्पीड चाहिए? जान लीजिए घर में राउटर रखने की सबसे सटीक जगह</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/wifi-router-placement-tips-तेज-इंटरनेट-स्पीड-चाहिए-जान-लीजिए-घर-में-राउटर-रखने-की-सबसे-सटीक-जगह</link>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 06:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>सस्ते हो सकते हैं स्मार्टफोन&amp;टीवी और लैपटॉप, सरकार ने उठाया यह बड़ा कदम</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone And Laptop Could Become Cheaper: स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और लैपटॉप के महंगे दामों से जूझ रहे ग्राहकों को आने वाले दिनों में बड़ी राहत मिल सकती है. केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड और स्मार्ट टीवी बनाने में यूज होने वाले मैटेरियल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को खत्म कर दिया है. इससे कंपनियों के लिए स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस बनाना सस्ता हो जाएगा और इसका फायदा ग्राहकों को भी मिल सकता है. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे डिवाइसेस के दाम कुछ कम हो सकते हैं.
मार्च, 2029 तक जारी रहेगी छूट
सरकार ने घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए बेसिक ड्यूटी को खत्म कर दिया है. अब डिस्प्ले असेंबली, लिथियम-आयन सेल्स और इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल बनाने में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल सस्ता हो जाएगा. यह छूट 31 मार्च, 2029 तक जारी रहेगी. इसके जरिए सरकार देश में इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का प्रोडक्शन बढ़ाना और कंपनियों की लागत कम करना चाहती है. अभी तक डिस्प्ले असेंबली और लिथियम-आयन सेल्स आदि के लिए भारत काफी हद तक चीन और वियतनाम पर निर्भर है. इस निर्भरता को खत्म करने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है. इससे घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन बढ़ेगा और विदेशों पर निर्भरता कम होगी.
स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और दूसरे डिवाइस हो सकते हैं सस्ते
किसी भी स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी की कुल लागत में डिस्प्ले असेंबली और लिथियम-आयन का काफी बड़ा हिस्सा होता है. पहले इन पर 5-7.5 प्रतिशत तक बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती थी. अब इसके हटने के बाद कंपनियों के लिए इन्हें खरीदना सस्ता हो जाएगा और उनकी मैन्युफैक्चरिंग लागत भी कम हो जाएगी. इसका फायदा ग्राहकों को देने के लिए कंपनियां भारत में बने लैपटॉप, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी जैसे डिवाइस सस्ते कर सकती हैं.
लगातार महंगे हो रहे हैं फोन और लैपटॉप&amp;nbsp;
एआई बूम के कारण स्टोरेज और मेमोरी चिप्स की कमी हो गई है. सप्लाई में कमी और दूसरी तरफ डिमांड ज्यादा होने के कारण इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं. इस कारण स्मार्टफोन और लैपटॉप आदि बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ गई है और इसका असर इनकी कीमतों पर पड़ रहा है. यही वजह है कि ऐप्पल से लेकर सैमसंग और लेनोवो से लेकर डेल जैसी कंपनियां अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी के दाम बढ़ा रही है. अब भारत सरकार के फैसले के बाद कम से कम भारत में बने डिवाइसेस के सस्ते होने की उम्मीद जगी है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Dixon और Vivo मिलकर भारत में बनाएंगे फोन, ज्वाइंट वेंचर को सरकार ने दिखाई हरी झंडी</title>
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        <description><![CDATA[ Dixon-Vivo JV: भारत सरकार ने डिक्सन टेक्नोलॉजी और चाइनीज स्मार्टफोन कंपनी वीवो के ज्वाइंट वेंचर को हरी झंडी दे दी है. इसके तहत डिक्सन और वीवो दोनों मिलकर भारत में स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लगाएंगी. काफी लंबे समय से इस JV को हरी झंडी मिलने का इंतजार किया जा रहा था. बता दें कि दोनों कंपनियों ने दिसंबर, 2024 में बाइंडिंग टर्म शीट पर साइन किए थे, जिसके इस ज्वॉइंट वेंचर में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी डिक्सन और 49 प्रतिशत वीवो इंडिया की होगी. इस प्रोजेक्ट पर इसी साल दिसंबर तक काम शुरू होने की उम्मीद है आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
भारत में वीवो के फोन बनाएगी नई कंपनी
इस ज्वॉइंट वेंचर के तहत बनने वाली कंपनी स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस बनाएगी. यही कंपनी भारत में वीवो के फोन बनाने का ऑर्डर लेगी. इसके साथ-साथ यह दूसरी कंपनियों के लिए भी काम करेगी. इस प्रोजेक्ट को लेकर डिक्सन काफी आशावादी है. निवेशकों के साथ हाल ही में हुई बैठक में डिक्सन के मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल लाल ने कहा था कि इस पार्टनरशिप के कारण डिक्सन के बिजनेस में हर साल 2-2.2 करोड़ नए स्मार्टफोन जुड़ेंगे. यह वीवो के टोटल सालाना प्रोडक्शन का दो तिहाई हिस्सा होगा. भारत में वीवो हर साल लगभग 3.5 करोड़ स्मार्टफोन का प्रोडक्शन करती है. 2027 तक यह कंपनी लगभग 1.1 करोड़ स्मार्टफोन का प्रोडक्शन करेगी, जबकि 2028 तक इसका प्रोडक्शन अपनी पूरी कैपेसिटी पर पहुंच जाएगा.
ज्वाइंट वेंचर से एक साथ कई फायदे
डिक्सन और वीवो के एक साथ आने से भारत को कई फायदे होंगे. पहला फायदा यह है कि इससे देश में स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी. बीते दिन ही सरकार ने घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए फोन में यूज होने वाले कई कंपोनेंट पर बेसिक कस्टम ड्यूटी कम की थी. मोबाइल प्रोडक्शन बढ़ने से सप्लाई चेन और नए प्लांट की जरूरत होगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. दूसरा फायदा यह है कि यह ज्वाइंट वेंचर डिक्सन को वीवो जैसी बड़ी कंपनी के साथ काम करने का मौका देगा. डिक्सन पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स में बड़ा नाम है और अब यह साझेदारी उसे अपने नाम को और आगे ले जाने में मदद करेगी.
यूजर्स को भी होगा फायदा
Dixon-Vivo JV से यूजर्स को भी सीधे तौर पर फायदा होगा. घरेलू प्रोडक्शन बढ़ने का मतलब है कि सप्लाई में सुधार आएगा और ग्राहकों को नए मॉडल्स जल्दी मिल सकेंगे. इसके अलावा सरकार की कुछ नीतियों से फोन बनाने की लागत भी कम हो सकती है, जिससे फोन की कीमत कम होने के भी आसार हैं.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हर पल रिकॉर्ड होगी आपकी हर एक्टिविटी? नए एआई ग्लासेस लॉन्च करने वाली है मेटा</title>
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        <description><![CDATA[ Meta AI Glasses: मेटा अब ऐसे एआई-पावर्ड स्मार्टग्लासेस लाने वाली है, जो आपकी हर एक्टिविटी को रिकॉर्ड करेंगे. आप क्या देख रहे हैं से लेकर आप क्या सुन रहे हैं, यह सब इन स्मार्ट चश्मों में रिकॉर्ड हो जाएगा. ये चश्मे न सिर्फ आपकी एक्टिविटी पर नजर रखेंगे बल्कि आपकी बातचीत को याद रख सकेंगे और उन जगहों को भी पहचान पाएंगे, जहां से आप कभी गुजरे थे. आप इनसे यह भी पूछ सकेंगे कि पूरे दिन में क्या-क्या हुआ था तो ये असिस्टेंट की तरह आपको सारी जानकारी भी दे देंगे. ये सब सुनने में भले ही अच्छा लग रहा है, लेकिन प्राइवेसी के लिहाज से यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है.
कैसे काम करेगा नया फीचर?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा अपने मौजूदा मॉडल से एक फीचर लेकर उस पर नए स्मार्टग्लासेस बना रही है. इंटरनली इसे &#039;सुपर सेंसिंग&#039; के नाम से जाना जा रहा है. अभी के मॉडल में इस फीचर को एक्टिवेट करना पड़ता है, लेकिन नए ग्लासेस में इसे इनेबल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. नए स्मार्ट चश्मे लगातार विजुअल और ऑडियो इंफोर्मेशन को कलेक्ट करते रहेंगे. यह पूरी जानकारी मेटा एआई के पास जाएगी ताकि उसके पास आपके सवालों के जवाब देने के लिए ज्यादा कॉन्टैक्स्ट हो. अगर यह टेक्नोलॉजी आती है तो स्मार्ट चश्मे और भी पावरफुल हो जाएंगे और ये असिस्टेंट या गाइड की तरह आपके हर सवाल का जवाब दे पाएंगे.
हर कुछ सेकंड के बाद फोटो और ऑडियो कैप्चर करेंगे नए चश्मे
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि प्रोटोटाइप चश्मों के इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये हर कुछ सेकंड के बाद फोटो कैप्चर करे और आसपास का ऑडियो भी सुनते रहे. बताया जा रहा है कि मेटा इस रिकॉर्डेड डेटा को परमानेंटली स्टोर नहीं करेगी. वह केवल इसका मेटाडेटा निकालकर अपने सर्वर पर अपलोड करेगी, जिससे मेटा एआई के लिए यूजर के सवालों के जवाब देने आसान हो जाएंगे.
प्राइवेसी को लेकर जताई जा रही है चिंता
भले ही मेटा फोटो और ऑडियो रिकॉर्डिंग को परमानेंटली स्टोर नहीं करना चाहती, फिर भी सर्विलांस और कन्सेंट को लेकर चिंता जताई जा रही है. प्राइवेसी को लेकर पहले से ही मेटा का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है. इसके अलावा फेशियल रिकग्नेशन को लेकर भी मेटा सवालों के घेरे में रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सुपर सेंसिंग फीचर को फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग मोड की जगह एक एआई फंक्शन बताया जा रहा है. इसलिए इस फीचर के यूज के दौरान स्मार्ट चश्मों का LED इंडिकेटर बंद रहेगा. इससे सामने वाले लोगों को चोरी-छिपे या उनकी सहमति के बिना रिकॉर्ड किए जाने का डर बना रहेगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Username फीचर को लेकर WhatsApp ने सौंपा अपना जवाब, अब सरकार कर रही यह काम</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Username Response: Username फीचर को लेकर विवादों में घिरी व्हाट्सऐप ने इस मामले पर सरकार के नोटिस का जवाब सौंप दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपना जवाब सौंप दिया है और अब सरकार इसको रिव्यू कर रही है. बता दें कि केंद्र सरकार ने बीते सप्ताह बुधवार को कंपनी को नोटिस भेजा था. इसमें यूजरनेम फीचर पर चिंता जताते हुए कई सवाल पूछे गए थे. साथ ही कंपनी को इस फीचर की लॉन्चिंग पर रोक लगाने का भी आदेश दिया था.&amp;nbsp;
क्या था यूजरनेम फीचर को लेकर विवाद
WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम फीचर रोलआउट करना चाहती है. इसके लिए उसने अपने यूजर्स को यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन दिया था. यूजरनेम फीचर से व्हाट्सऐप यूजर को अपना मोबाइल नंबर हाइड करने का ऑप्शन मिल जाता. यानी व्हाट्सऐप पर किसी से कॉन्टैक्ट करने के लिए मोबाइल नंबर लेने या देने की जरूरत नहीं पड़ती. इंस्टाग्राम और फेसबुक की तरह सिर्फ यूजरनेम से ही यह काम हो सकता था, लेकिन सरकार के आदेश के बाद फिलहाल इस पर रोक लग गई है.
सरकार को इस फीचर से क्या चिंता?
व्हाट्सऐप के इस फीचर को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शिकायतें की थी. उनका कहना था कि वो अपने नाम को रिजर्व नहीं कर पा रहे हैं और कोई और लोग उनकी पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसी ही चिंताओं को लेकर सरकार ने इस पर रोक लगा दी थी. सरकार का कहना है कि इस फीचर से स्कैम, साइबर फ्रॉड, पहचान छिपाकर धोखाधड़ी आदि के मामले बढ़ सकते हैं. इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे के नाम या सरकारी विभाग और बैंक आदि से मिलता-जुलता यूजरनेम बना लेता है तो लोगों को धोखा देना आसान हो जाएगा. हालांकि, व्हाट्सऐप ने इसका बचाव करते हुए कहा था कि उसने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं और अभी इस फीचर को लॉन्च नहीं किया जा रहा है.
व्हाट्सऐप के बाद टेलीग्राम और सिग्नल को भी भेजे गए नोटिस
टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजरनेम फीचर पहले से ही अवेलेबल था. व्हाट्सऐप का मामला सामने आने के बाद सरकार ने इन दोनों प्लेटफॉर्म्स को भी नोटिस भेजे थे. सरकार ने नोटिस भेजकर इन कंपनियों से पूछा था कि Username बनाने की प्रक्रिया क्या है और फर्जी या मिलते-जुलते Username को रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय हैं? अभी तक इन कंपनियों के जवाब मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है. इसी हफ्ते आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा था कि दोनों प्लेटफॉर्म्स को एडिशनल टाइम दिया गया है और उनके जवाब भी जल्दी आ जाएंगे.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI की भूख! 8 लाख घरों के बराबर बिजली यूज करेगा Meta का नया डेटा सेंटर</title>
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        <description><![CDATA[ Meta Data Centre: एआई बूम के बाद कंपनियों ने डेटा सेंटर पर जोर देना शुरू कर दिया है. एआई को भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जिसके लिए बड़े-बड़े सर्वर रखने के लिए डेटा सेंटर बनाने जरूरी हो गए हैं. अब मेटा कनाडा में एक नया एआई डेटा सेंटर बना रही है, जिसकी लागत 9 अरब डॉलर से भी ज्यादा आएगी. अल्बर्टा में बनने वाला यह डेटा सेंटर 8 लाख घरों के बराबर बिजली की खपत करेगा. यानी यह डेटा सेंटर किसी एक बड़े शहर के बराबर की बिजली अकेला पी जाएगा. &amp;nbsp;
कनाडा में पहला डेटा सेंटर बना रही है मेटा&amp;nbsp;
यह पहली बार है, जब मेटा कनाडा में अपना डेटा सेंटर बना रही है. इसी के साथ कंपनी के कुल डेटा सेंटर की संख्या 33 हो जाएगी. कनाडा में बन रहे डेटा सेंटर की शुरुआती कैपेसिटी 1 गीगावॉट रखी गई है, जिसे बाद में बढ़ाकर 1.8 गीगावॉट किया जा सकता है. डेटा सेंटर के लिए अल्बर्टा को चुनने के पीछे कई वजहें रही हैं. यहां नैचुरल गैस की पर्याप्त सप्लाई है और दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले एनर्जी की लागत भी कम है. यहां तापमान भी कम रहता है, जिससे बड़े डेटा सेंटर की कूलिंग में लगने वाला पैसा बचाया जा सकता है.&amp;nbsp;
बिजली की खपत को लेकर हो रही चर्चा
इस प्रोजेक्ट को लेकर जिस चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है बिजली की खपत. मेटा ने खुद बताया है कि इस डेटा सेंटर को 8 लाख घरों के बराबर बिजली की जरूरत पड़ेगी. इसके लिए कंपनी पावर जनरेशन का खर्चा उठाने और इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड को अपग्रेड करने की बात कह चुकी है. इस प्रोजेक्ट को लेकर मेटा का विरोध भी शुरू हो गया है. पर्यावरण के लिए काम करने वाले लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ रहे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से नैचुरल रिसोर्सेस पर दबाव पड़ रहा है. बता दें कि डेटा सेंटर को बिजली के साथ-साथ भारी मात्रा में पानी की भी जरूरत होती है. हाल ही में अमेजन ने बताया कि पिछले साल उसके डेटा सेंटरों ने 2.5 बिलियन गैलन पानी का इस्तेमाल किया था.&amp;nbsp;
लगातार बढ़ती जाएगी बिजली की जरूरत
एआई डेटा सेंटर के बढ़ने के साथ-साथ इनके लिए पानी और बिजली की भी जरूरत बढ़ती जाएगी. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2030 तक दुनियाभर के डेटा सेंटर को हर साल लगभग 945 terawatt-hours (TWh) बिजली की जरूरत होगी. यह जापान की कुल बिजली की खपत से ज्यादा है. यह खपत आज की तुलना में दोगुनी होगी.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>कौन हैं मार्क जुकरबर्ग के करोड़ों रुपये के पैकेज को ठुकराने वाले ऋषभ अग्रवाल? अब बना रहे हैं अपना स्टार्टअप</title>
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        <description><![CDATA[ AI researcher Rishabh Agarwal: इन दिनों एआई रिसर्चर Rishabh Agarwal की खूब चर्चा हो रही है. ऋषभ ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग का करोड़ों रुपये का पैकेज ठुकराया था और अब अपने नए एआई स्टार्टअप पर काम कर रहे हैं. दरअसल, पिछले कुछ समय से मेटा एआई टैलेंट पर पानी की तरह पैसा बहा रही है. एआई रिसर्चर और इंजीनियर्स को मोटे पैकेज पर कंपनी में शामिल किया जा रहा है. ऋषभ को भी मेटा की तरफ से ऑफर मिला था और करोड़ों की सैलरी ऑफर की गई, लेकिन उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया. खुद ऋषभ ने इस बात को कन्फर्म किया है. आइए जानते हैं कि ऋषभ कौन हैं और उनका सफर कहां से शुरू हुआ था.
एक्स पोस्ट से सामने आई कहानी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया गया था कि ऋषभ ने मेटा से मिले लगभग 8.5 करोड़ रुपये के पैकेज को ठुकरा दिया है. कुछ ही दिन मेटा में काम करने के बाद वो अब अपने एआई स्टार्टअप के लिए काम कर रहे हैं. ऋषभ ने खुद इस वायरल पोस्ट पर रिस्पॉन्ड किया है. इसमें उन्होंने लिखा कि मेटा का ऑफर पोस्ट में दी गई रकम से कहीं ज्यादा बड़ा था.
कौन हैं ऋषभ अग्रवाल?
ऋषभ एक जाने-माने एआई रिसर्चर हैं. JEE में AIR 33 लाने के बाद उन्होंने IIT Bombay में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की. यहां से हायर स्टडीज के लिए वो कनाडा चले गए. कनाडा के मॉन्ट्रियल स्थित एआई रिसर्च इंस्टीट्यूट Mila से उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में PhD पूरी की. इसके बाद उन्होंने एआई के फील्ड में बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ काम किया. इनमें गूगल ब्रेन, गूगल डीपमाइंड, वायमो और मेटा सुपरइंटेलीजेंस लैब्स जैसे कई पॉपुलर नाम शामिल हैं. उन्होंने कुछ समय तक McGill University में पढ़ाया भी है. ऋषभ ने रिइन्फोर्समेंट लर्निंग और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स पर रिसर्च की है. उन्होंने गूगल के Gemma और Gemini एआई मॉडल के लिए भी काम किया है.
पिछले साल मेटा के साथ जुड़े
ऋषभ ने पिछले साल अप्रैल में मेटा की सुपरइंटेलीजेंस लैब के साथ काम करना शुरू किया था, लेकिन 5 महीनों के बाद ही उन्होंने रिजाइन कर दिया. इस फैसले की वजह बताते हुए उन्होंने लिखा कि 7.5 साल तक गूगल ब्रेन, डीपमाइंड और मेटा के साथ काम करने के बाद अब अलग तरह का रिस्क लेना चाहता हूं. इसके बाद ऋषभ बतौर फाउंडिंग मेंबर Periodic Labs के साथ जुड़े हैं. जेफ बेजोस और एनवीडिया इस स्टार्टअप को फंडिंग दे रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या बारिश में इस्तेमाल करना चाहिए एसी? जानिए मानसून में एसी यूज करने का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ How To Use AC in Monsoon: बारिश का सीजन आ गया है और देश के कई शहरों में बादल जमकर बरस रहे हैं. बारिश आने से टेंपरेचर के साथ-साथ गर्मी भी कम हो गई है. ठंडी हवाएं चलने के कारण कई बार एसी चलाने की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन यह मौसम अपने साथ उमस भी लेकर आता है. हवा में नमी बढ़ने के कारण टेंपरेचर कम होने पर शरीर को आराम नहीं मिलता. कमरा ठंडा होने के बाद भी उसमें सोना मुश्किल हो जाता है. क्या ऐसी स्थिति में एसी को यूज करना सही फैसला होता है? आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मानसून में एसी को कैसे और किस मोड पर यूज करना चाहिए.
क्या बारिश में एसी यूज किया जा सकता है?
पहला सवाल यह उठता है कि क्या एसी को बारिश में यूज किया जा सकता है? इसका जवाब है कि बारिश के समय एसी को यूज करना पूरी तरह सेफ है. एसी को हर तरह के मौसम को झेलने के लिए डिजाइन किया जाता है. इसलिए आउटडोर यूनिट पर बारिश या तेज धूप से कोई असर नहीं पड़ता. हालांकि, बारिश के मौसम में वॉल्टेज कम होने, पावर कट और बिजली गिरने आदि का खतरा रहता है, जिसका ध्यान रखना चाहिए.
किस मोड पर यूज करें एसी?
गर्मी में कमरे को ठंडा करने के लिए एसी का कूलिंग मोड काम आता है. यह तुरंत कमरे की गर्म हवा को खींचकर उसे ठंडा कर देता है. मानसून में आपको यह मोड बदलना पड़ेगा. मानसून में उमस के कारण यह मोड एफिशिएंटली काम नहीं करता. इसलिए ड्राई मोड का यूज करना चाहिए. यह कमरे की हवा से नमी को बाहर खींच लेता है, जिससे आपको कंफर्टेबल महसूस होता है. रात को सोने से करीब घंटे भर पहले एसी को ड्राई मोड में चलाकर छोड़ दें. यह कमरे से एक्स्ट्रा नमी बाहर चली जाएगी. बारिश के समय भी ड्राई मोड को यूज किया जा सकता है.
कमरे में खिड़की होने या न होने पर एसी कैसे यूज करें?
अगर आपके कमरे में खिड़की नहीं है तो नमी वाली हवा का बाहर जाना बहुत मुश्किल हो जाता है. इस कारण कमरा चिपचिपा हो जाता है. इसी तरह अगर आपका मकान चारों तरफ से घिरा हुआ है तो हवा का आना मुश्किल हो जाता है. ऐसे घरों और कमरों के लिए एसी का यूज करना जरूरी हो जाता है. वहीं अगर आपके कमरे में खिड़कियां हैं तो एसी यूज करने से पहले उन्हें खोला जा सकता है. वेंटिलेशन के कारण कमरे में ज्यादा नमी नहीं रहती और एसी को भी नमी बाहर खींचने के लिए कम मेहनत करनी पड़ेगी. लेकिन अगर आप एसी यूज कर रहे हैं तो खिड़कियों और दरवाजे को पूरी तरह बंद कर लें. इससे एसी पूरी एफिशिएंसी के साथ काम कर पाएगा.
इन बातों का भी रखें ध्यान

पूरी रात ड्राई मोड में एसी चलाने के बाद आप सुबह के समय फैन मोड यूज कर सकते हैं. ड्राई मोड से पहले फैन मोड को यूज न करें.
तूफान और बिजली चमकने के समय एसी को बंद रखें.
आउटडोर यूनिट के पास पानी जमा न होने दें. अगर यह ठहरे हुए पानी के संपर्क में आ जाता है तो इसे तुरंत बंद कर दें.
अगर बार-बार बिजली आ-जा रही है तो कुछ देर के लिए एसी को बंद रखें.
मानसून के दौरान एसी का टेंपरेचर 24-26 डिग्री पर सेट रखें.
एसी के साथ-साथ सीलिंग फैन को भी यूज करें. इससे पूरे कमरे में एक समान हवा लगेगी.

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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:21 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>क्या, बारिश, में, इस्तेमाल, करना, चाहिए, एसी, जानिए, मानसून, में, एसी, यूज, करने, का, सही, तरीका</media:keywords>
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        <title>BSNL ने लॉन्च किया लाखों की कीमत वाला सैटेलाइट फोन, खरीदने से पहले लेनी पड़ेगी परमिशन</title>
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        <description><![CDATA[ BSNL Satellite Phone: देश की एकमात्र सरकारी कंपनी BSNL ने एक नया सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है. यह उन जगहों पर काम आएगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता. जैसा नाम से ही जाहिर है, यह फोन सैटेलाइट से कनेक्ट होकर काम करेगा. BSNL ने बताया कि इस हैंडसेट को ग्लोबल सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर Inmarsat के साथ पार्टनरशिप में डेवलप किया गया है. बता दें कि भारत में सैटेलाइट फोन रखना गैरकानूनी है. अगर आप इस फोन को खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपको पहले सरकार से परमिशन लेनी पड़ेगी. बिना परमिशन फोन खरीदना या रखना आपको कानूनी मुश्किल में डाल सकता है. आइए जानते हैं कि BSNL के इस सैटेलाइट फोन में क्या फीचर्स हैं और इसे किन लोगों के लिए लॉन्च किया गया है.
BSNL Satellite Phone के फीचर्स
BSNL का कहना है कि इस फोन से सैटेलाइट कनेक्टिविटी के बावजूद एकदम साफ आवाज में वॉइस कॉल की जा सकेगी और यह इमरजेंसी सपोर्ट के साथ लॉन्च हुआ है. फोन को गिरने पर टूटने से बचाने के लिए रग्ड और ड्यूरेबल डिजाइन दिया गया है और इसकी बैटरी लंबी चलती है. BSNL ने अपनी पोस्ट में बताया है कि यह सैटेलाइट फोन डिफेंस, मैरीटाइम, आपदा प्रबंधन, माइनिंग, रिमोट ऑपरेशन और एडवेंचर ट्रैवल आदि के लिए उपयुक्त है. यानी कंपनी भी इसे आम आदमी को बेचने के लिए मार्केट नहीं कर रही है. सरकारी कंपनी के इस सैटेलाइट फोन की कीमत 1,34,166 रुपये रखी गई है. इसे आप अपने नजदीकी BSNL ऑफिस से खरीद सकते हैं. हालांकि, इसे खरीदने से पहले आपको डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन से परमिशन लेनी पड़ेगी. इसके बिना आप सैटेलाइट फोन नहीं खरीद पाएंगे.&amp;nbsp;
कैसे काम करता है सैटेलाइट फोन?
जैसा नाम से ही पता चलता है, सैटेलाइट फोन सैटेलाइट से कनेक्ट रहता है. इसे सिग्नल भेजने या रिसीव करने के लिए मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती. यह डायरेक्ट सैटेलाइट को सिग्नल भेजता और वहीं से रिसीव करता है. इस कारण इसे उन जगहों पर भी यूज किया जा सकता है, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होता. यही वजह है कि समुद्री जहाजों आदि पर इसे इस्तेमाल किया जाता है.&amp;nbsp;
सैटेलाइट फोन पॉपुलर क्यों नहीं हो पाए?
परमिशन के झंझट के अलावा कई और भी कारण हैं, जिनकी वजह से सैटेलाइट फोन पॉपुलर नहीं हो पाए हैं. इसकी सबसे बड़ी कमी कॉल लेग की है. यानी आपके बोलने के बाद रिसीवर तक आवाज पहुंचने में थोड़ा समय लगता है. दूसरी दिक्कत लागत को लेकर है. सैटेलाइट फोन खरीदना और इससे कॉल करना काफी महंगा पड़ता है. इसकी लागत प्रति मिनट 100 रुपये से भी ज्यादा रह सकती है. इसके अलावा सैटेलाइट फोन नॉर्मल फोन की तुलना में काफी बड़े और भारी होते हैं.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>Lithium&amp;ion vs Lead&amp;acid Batteries: सोलर एनर्जी सिस्टम के लिए कौन&amp;सा ऑप्शन रहेगा बेस्ट? यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Best Solar Battery: अगर आप अपने घर की बिजली की जरूरतों के लिए ग्रिड पर डिपेंड नहीं रहना चाहते तो हाइब्रिड या ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम आपके काम आ सकता है. सही बैटरी के साथ यह आपको एनर्जी इंडिपेंडेंट बना देगा. ऐसे में सवाल उठता है कि घर पर लगे सोलर सिस्टम के लिए कौन-सी बैटरी इस्तेमाल करनी चाहिए. अगर मार्केट में मौजूदा ऑप्शन को देखें तो Lithium-ion और Lead-acid बैटरी के बीच ही कंपीटिशन रहता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दोनों तरह की बैटरियां कैसे काम करती हैं और इनमें से किसकी लागत कम है और फायदे ज्यादा हैं.
Lithium-ion बैटरी कैसे काम करती है?
Lithium-ion बैटरी में कैथोड पर लिथियम आयरन फॉस्फेट और निकल मैंग्नीज कॉबाल्ट जैसे लिथियम कंपोनेंट लगे होते हैं, जबकि एनोड पर ग्रेफाइट होता है. यह फास्ट मूविंग लिथियम आयन को यूज कर एनर्जी स्टोर करती है. जब सोलर पैनल से बिजली बनती है तो लिथियम आयन पॉजिटिव प्लेट से नेगेटिव प्लेट की तरफ जाते हैं. जब यह स्टोर एनर्जी को यूज करती है तो आयन वापस नेगेटिव प्लेट से पॉजीटिव प्लेट की तरफ आते हैं.
Lead-acid बैटरी के काम करने का तरीका क्या है?
अगर Lead-acid बैटरी की बात करें तो पॉजीटिव और नेगेटिव दोनों ही लीड प्लेट होती हैं, जिन्हें सल्फरिक एसिड के बीच रखा जाता है, जो इलेक्ट्रोलाइट का काम करता है. जब बैटरी चार्ज होती है तो लीड प्लेट्स और एसिड के बीच रिएक्शन होती है. जब ये बैटरी डिस्चार्ज होती है तो यह रिएक्शन रिवर्स हो जाती है.
दोनों में किसकी लागत कम है?
कीमत के मामले में लिथियम-आयन बैटरी महंगी पड़ती है. अगर kWh के हिसाब से देखें तो लिथियम-आयन बैटरी की कीमत लगभग 15,000-20,000 रुपये प्रति kWh आती है. इसकी तुलना में लीड-एसिड बैटरी लगभग 8,000-12,000 रुपये प्रति kWh के हिसाब से मिल जाएगी. अब सवाल उठता है कि क्या कीमत कम होने के कारण लीड-एसिड बैटरी सही ऑप्शन है? इसका जवाब है कि अगर आप सिर्फ अपफ्रंट कीमत देख रहे हैं तो ये बैटरी आपके लिए सही है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं.
किसके फायदे ज्यादा हैं?
लिथियम-आयन बैटरी की शुरुआती लागत भले ही ज्यादा है, लेकिन इसके फायदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लिथियम-आयन बैटरी लीड बैटरी की तुलना में जल्दी चार्ज होती है और इसकी लाइफ भी ज्यादा होती है. लीड बैटरी जहां 3-5 साल चलती है, वहीं लिथियम-बैटरी 10 साल से ज्यादा चल जाती है. इसी तरह लिथियम बैटरी लीड बैटरी की तुलना में साइज में छोटी और वजन में हल्की होती है. लीड बैटरी को बार-बार देखरेख की जरूरत पड़ती है और लिथियम बैटरी में ऐसा झंझट नहीं होता. लिथियम बैटरी पर ब्लूटूथ से ही नजर रखी जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो सोलर सिस्टम के लिए लिथियम-आयन बैटरी एक बेहतर ऑप्शन है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>सरकारी और बैंक की कॉल को भी Spam बताने लगा था Truecaller, अब TRAI लेगा एक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ अब तक स्पैम कॉल से जुड़े नियम सिर्फ टेलीकॉम कंपनियों पर लागू होते थे, लेकिन अब Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे Call Management Apps भी सरकार के रडार पर आ गए हैं. वजह है इन ऐप्स का 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को Spam बताना या ब्लॉक करना.
क्या है 140 और 1600 सीरीज?
TRAI ने ये दो खास नंबर सीरीज इसलिए बनाई थीं, ताकि आम आदमी को पता चल सके कि सामने से किस तरह की कॉल आ रही है. 140 सीरीज टेलीमार्केटिंग यानी प्रमोशनल कॉल के लिए है, जबकि 1600 सीरीज बैंक, बीमा, अस्पताल, एयरलाइन और कूरियर जैसी सेवाओं की जरूरी कॉल के लिए. सरकार का मानना है कि जब Truecaller जैसे ऐप इन अधिकृत नंबरों को भी Spam दिखाने लगते हैं तो पेमेंट अलर्ट, अकाउंट अपडेट और डिलीवरी जैसी जरूरी कॉल लोगों तक पहुंच ही नहीं पातीं.
TRAI ने मांगा नया अधिकार &amp;nbsp;
दरअसल, Truecaller जैसे ऐप टेलीकॉम कंपनियां नहीं हैं. ये IT Act के तहत Intermediary माने जाते हैं, इसलिए TRAI इन पर सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता. यही वजह है कि TRAI ने IT Act के तहत Authorized Agency का दर्जा मांगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, MeitY ने इस मांग पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है. अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो पहली बार TRAI को इन ऐप्स को नोटिस भेजने और नियम तोड़ने पर कार्रवाई करने का रास्ता मिल जाएगा. प्रस्ताव में यहां तक कहा गया है कि बार-बार नियम तोड़ने पर ऐसे ऐप्स से IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाला कानूनी संरक्षण भी छीना जा सकता है.
Truecaller ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब
Truecaller का कहना है कि सिर्फ 140 या 1600 नंबर होने से कोई कॉल भरोसेमंद नहीं हो जाती. कंपनी TRAI के निर्देश के बाद इन नंबरों पर Spam लेबल दिखाना बंद कर चुकी है, लेकिन उसका दावा है कि इसका नतीजा उल्टा निकला. कंपनी के मुताबिक, इन दोनों सीरीज से रोजाना 5 करोड़ से ज्यादा कॉल्स का लोग जवाब ही नहीं देते. कंपनी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 8 महीनों में यूजर्स ने 140 सीरीज की 81 फीसदी और 1600 सीरीज की 79 फीसदी कॉल्स इग्नोर कर दीं, यानी जानकारी छिपने पर लोग हर अनजान कॉल को ही संदिग्ध मानकर काट रहे हैं.
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इंडस्ट्री भी विरोध में
डिजिटल कंपनियों की संस्था IAMAI ने भी TRAI के प्रस्ताव का विरोध किया है. संस्था का तर्क है कि ऐप्स IT Act और MeitY के दायरे में आते हैं, टेलीकॉम कानून के नहीं. साथ ही ऐप्स से उनका स्पैम डेटा टेलीकॉम कंपनियों के साथ शेयर करवाना, उस जानकारी को छीनने जैसा है, जो कंपनियों ने कई साल की मेहनत से जुटाई है.
अब आगे क्या?&amp;nbsp;
अब लड़ाई जरूरी कॉल पहुंचाने और स्पैम कॉल रोकने के बीच है. सरकार चाहती है कि अधिकृत नंबरों की कॉल गलत तरीके से Spam न बताई जाए, जबकि ऐप्स का कहना है कि इससे लोगों को अनचाही कॉल्स का खतरा और बढ़ जाएगा. MeitY की सैद्धांतिक सहमति के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है कि TRAI को यह नया अधिकार कब और किन शर्तों के साथ मिलता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Best Laptops For Students: पढ़ाई हो या क्रिएटिविटी, हर काम होगा आसान &amp; स्टूडेंट्स के लिए बेस्ट लैपटॉप्स की लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Best Laptops For Students: पढ़ाई हो या क्रिएटिविटी, हर काम होगा आसान - स्टूडेंट्स के लिए बेस्ट लैपटॉप्स की लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:25 +0530</pubDate>
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        <title>मोबाइल, टीवी या चार्जर पर लिखा CE का क्या मतलब होता है? 99% लोग आज तक नहीं जानते इसका जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ CE: अक्सर स्मार्टफोन, लैपटॉप, चार्जर या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर CE लिखा होता है लेकिन ज्यादातर लोग इसका मतलब नहीं जानते हैं. लेकिन बता दें कि इसके लिखे जाने के पीछे कंपनी का बहुत बड़ा कारण होता है. दरअसल, ये प्रोडक्ट के सेफ्टी से जुड़ा होता है जिसे बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं कि क्या है इसके पीछे की असली वजह.
क्या इसका मतलब प्रोडक्ट यूरोप में बना है?
आपको बता दें कि ज्यादातर लोग इस सिंबल को देखते ही मान लेते हैं कि प्रोडक्ट यूरोप में बनाया गया है लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. CE का सिर्फ एक मतलब होता है कि ये प्रोडक्ट यूरोपीय नियमों के अनुसार टेस्ट्स और नियमों का पालन करता है और टेस्टिंग प्रोसेस से होकर गुजरा है.
इसी के साथ ही CE मार्क किसी भी प्रोडक्ट की क्वालिटी के बारे में भी नहीं बताता है. इसीलिए ये निशान आपको ज्यादातर प्रोडक्ट्स में देखने को मिल जाएगा चाहे वो महंगा प्रीमियम प्रोडक्ट हो या फिर सस्ता या छोटा प्रोडक्ट.
क्या होता है CE का मतलब?
जानकारी के मुताबिक, CE एक फ्रेंच भाषा का शब्द है जिसे Conformite Europeenne पढ़ा जाता है. इसका मतलब होता है कि यूरोपीय मानकों के अनुरूप. ये एक आधिकारिक Conformity मार्क है जिसका इस्तेमाल उन प्रोडक्ट्स पर किया जाता है जो यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (European Economic Area - EEA) में बिक्री के लिए तय किए गए नियमों का पालन करते हैं.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब किसी प्रोडक्ट पर CE मार्क होता है तो इसका मतलब ये है कि वह यूरोपीय संघ द्वारा तय किए नियमों का पूरी तरह से पालन करता है.
कैसे मिलता है ये निशान?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि CE मार्क हासिल करने के लिए निर्माता को पहले ये तय करना पड़ता है कि उसका प्रोडक्ट Self Assessment के जरिए प्रमाणित हो सकता है या फिर किसी संस्था से जांच करानी होगी.
कम जोखिम वाले कई प्रोडक्ट्स का मूल्यांकन निर्माता खुद कर सकता है जबकि मेडिकल डिवाइस, औद्योगिक मशीनों और कुछ अन्य संवेदनशील प्रोडक्ट्स की जांच किसी अधिकृत थर्ड-पार्टी संस्था द्वारा की जाती है. अगर ऐसा होता है तो CE मार्क के साथ चार अंकों का एक नंबर भी दिखाई देता है जो उस प्रमाणित संस्था के बारे में बताता है. इसीलिए अगली बार ये निशान देखकर समझ जाइयेगा कि ये प्रोडक्ट यूरोपीय संघ के नियमों का पालन करता है न कि ये वहां बना हुआ है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI यूज करने से बढ़ सकता है आपके घर का बिजली बिल, एक्सपर्ट ने दी वॉर्निंग</title>
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        <description><![CDATA[ AI Cost: एआई टूल्स हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं. नाश्ते की रेसिपी से लेकर ऑफिस की प्रेजेंटेशन तक हर काम में इन टूल्स की मदद ली जा रही है. कई लोग इन टूल्स पर इतने निर्भर हो गए हैं कि इनके बिना उन्हें हर चीज मुश्किल लगती है. भले ही एआई टूल्स ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसकी भी अपनी लागत है. एआई रिक्वेस्ट को प्रोसेस करने के लिए डेटा सेंटर की जरूरत पड़ती है और डेटा सेंटर को भारी मात्रा में बिजली चाहिए. अब एक एक्सपर्ट्स ने चेताया है कि एआई टूल्स का बढ़ता यूज आपके बिजली बिल को भी बढ़ा सकता है.&amp;nbsp;
एआई से कैसे बढ़ सकता है आपकी जेब पर बोझ?
टाइम्सनाऊ के मुताबिक, Penn State&#039;s Institute of Energy and Environment में प्रोफेसर Hannah Wiseman का कहना है कि एआई के कारण पावर ग्रिड को बढ़ाने डिमांड भी बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर वीडियो गेमिंग और एआई के यूज तक हर ऑनलाइन एक्टिविटी के लिए डेटा सेंटर की जरूरत पड़ती है. अब ऐसे डेटा सेंटर बन गए हैं, जो एक मीडियम साइज के शहर के बराबर बिजली की खपत कर रहे हैं. इसलिए जब किसी इलाके में डेटा सेंटर लगता है तो कंपनियों को डिमांड पूरी करने के लिए एक्स्ट्रा ग्रिड का इंतजाम करना पड़ता है. इसकी लागत को पूरा करने के लिए बिजली कंपनियां बाकी यूजर्स के लिए भी बिजली के दाम बढ़ा सकती है.&amp;nbsp;
डेटा सेंटर के लिए कितनी बिजली की जरूरत?
एआई बूम के बाद डेटा सेंटर की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इन्हें ऑपरेट करने के लिए बिजली की जरूरत होती है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2030 तक दुनियाभर के डेटा सेंटर को हर साल लगभग 945 terawatt-hours (TWh) बिजली की जरूरत होगी. यह जापान की कुल बिजली की खपत से ज्यादा है. यानी 4 साल बाद डेटा सेंटर को एक देश से ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ेगी.
गाय के गोबर का लिया जा सकता है सहारा
डेटा सेंटर की बढ़ी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए गाय के गोबर का सहारा लिया जा सकता है. अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के मुताबिक, गाय के गोबर से निकलने वाली मीथेन को कैप्चर कर इससे फ्यूल बनाया जा सकता है. इस गैस को पर्यावरण में मिलने देने की बजाय बिजली बनाने में यूज किया जा सकता है जो घरों, फैक्ट्रियों और डेटा सेंटर तक को पावर दे सकती है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>एआई मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए यह कंपनी दे रही 1.7 करोड़ रुपये की सैलरी, अब इस नौकरी पर आएगा खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ OpenAI Investment Banking Model: AI ने कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट और रिसर्च आदि कामों के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है और अब इसकी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग पर है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैटजीपीटी चैटबॉट बनाने वाली कंपनी ओपनएआई एक नया एआई मॉडल बना रही है, जो इन्वेस्टमेंट बैंकर्स के काम आएगा. इस मॉडल को ट्रेनिंग देने के लिए कंपनी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग एक्सपर्ट की तलाश कर रही है. एआई मॉडल को ट्रेनिंग देने के काम के बदले उसे लगभग 1.7 करोड़ रुपये की बेस सैलरी दी जाएगी.
1.7 करोड़ रुपये की सैलरी के बदले करना होगा यह काम
इस काम के लिए ओपनएआई को सिर्फ दो साल के इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के एक्सपीरियंस वाले कैंडिडेट की तलाश है, जिसने कंपनी एंड इंडस्ट्री रिसर्च, फाइनेंशियल एनालिसिस, वैल्यूएशन, डील एग्जीक्यूशन और क्लाइंट प्रेजेंटेशन तैयार करने जैसे काम किए हो. इस कैंडिडेट को ओपनएआई में बैंकिंग से जुड़ा कोई काम नहीं करना होगा बल्कि एक नए एआई मॉडल को ट्रेनिंग देने और उसे चेक करने का काम करना होगा. एक्सपर्ट को एआई मॉडल को यह बताने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी कि इन्वेस्टमेंट बैंकर काम कैसे करते हैं. अब यह देखा जाना बाकी है कि जब यह मॉडल तैयार होकर पब्लिक के लिए रोलआउट हो जाएगा, तब यह इन्वेस्टमेंट बैंकर्स की नौकरी पर कितना असर डालता है. शुरुआत में कंपनियां एआई को मदद के तौर पर अपनी वर्कफोर्स में शामिल करती हैं और आगे चलकर यही टेक्नोलॉजी कर्मचारियों की नौकरी खा जाती है. दूसरे सेक्टरों में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं.
अब फाइनेंशियल सर्विसेस पर ध्यान दे रही हैं एआई कंपनियां
ओपनएआई समेत दूसरी एआई कंपनियां अब फाइनेंशियल सर्विसेस पर ज्यादा फोकस कर रही हैं. ओपनएआई जहां इन्वेस्टमेंट बैंकर्स के लिए नया मॉडल तैयार कर रही है, वहीं इसकी राइवल कंपनी एंथ्रोपिक ने हाल ही में कई एआई एजेंट लॉन्च किए थे. ये फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में होने वाले रिपीटेटिव टास्क को ऑटोमैट कर सकते हैं. एंथ्रोपिक का कहना है कि टेक्नोलॉजी के बाद अब फाइनेंशियल सर्विसेस उसका दूसरा सबसे बड़ा एंटरप्राइज बिजनेस बन गया है.
बड़े-बड़े बैंक भी एआई पर कर रहे मोटा निवेश
एक तरफ जहां एआई कंपनियां फाइनेंशियल सर्विसेस लाने पर काम कर रही हैं, दूसरी तरफ बड़े-बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक भी टेक्नोलॉजी पर मोटा पैसा निवेश कर रहे हैं. JPMorgan हर साल टेक्नोलॉजी पर 18 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है, जिसमें से ज्यादातर पैसा एआई के जा रहा है. इसी तरह Goldman Sachs भी टेक्नोलॉजी पर सालाना 6 बिलियन का निवेश कर रहा है.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एआई, मॉडल, को, ट्रेनिंग, देने, के, लिए, यह, कंपनी, दे, रही, 1.7, करोड़, रुपये, की, सैलरी, अब, इस, नौकरी, पर, आएगा, खतरा</media:keywords>
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        <title>नॉर्मल स्क्रीन गॉर्ड से कैसे अलग होता है Privacy Screen Guard? जानिए क्यों सिर्फ आपको दिखती है स्क्रीन, बगल वाला नहीं देख पाता</title>
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        <description><![CDATA[ नॉर्मल स्क्रीन गॉर्ड से कैसे अलग होता है Privacy Screen Guard? जानिए क्यों सिर्फ आपको दिखती है स्क्रीन, बगल वाला नहीं देख पाता ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>दवाओं के बाद अब आपकी रोजमर्रा की चीजों पर भी AI का कब्जा! जानिए कैसे बना रही है नए प्रोडक्ट्स</title>
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        <description><![CDATA[ AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के समय में काफी ज्यादा एडवांस हो चुकी है. अब इंसानों की जगहों पर रोबोट्स तक आ चुके हैं जो इंसानों की तुलना में काफी बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं, बड़ी फैक्टरी में भी अब धीरे-धीरे एआई का इस्तेमाल शुरू हो चुका है. बता दें कि पहले एआई आपके लिए दवाओं के बनाने का काम करता था. लेकिन अब ये आपकी डेली की चीजों तक भी पहुंच चुका है. घर में इस्तेमाल होने वाली डेली चीजें को भी अब एआई की मदद से तैयार किया जा रहा है.
खाने-पीने के सामान में भी हो रहा एआई का इस्तेमाल
एआई सिर्फ शैंपू बनाने तक ही सीमित नहीं रह गया है. ये अब आपके खाने-पीने वाले सामानों को भी तैयार करने में मदद कर रहा है. आज Nestle और Haleon जैसी कंपनियां भी AI का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं.
इन कंपनियों के अनुसार, AI की मदद से नए इंग्रीडिएंट्स की टेस्टिंग की जाती है जो पहले के मुकाबले काफी बेहतर तरीके से हो पा रहा है. इतना ही नहीं, एआई अब नए प्रोडक्ट्स को लेकर नए आईडिया भी पेश कर रहा है जो कंपनियों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रहा है.
इस कंपनी ने शुरू की रिसर्च
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ब्यूटी और स्किनकेयर की बड़ी कंपनी L&#039;Or&amp;eacute;al ने अपने रिसर्च और डेवलपमेंट में अब AI का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. कंपनी अब एआई के इस्तेमाल से तेजी से प्रोडक्ट को बनाने पर काम कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अब पहले की तुलना में लगभग चार गुना तेजी से नए प्रोडक्ट को तैयार कर रही है.
जानकारी के मुताबिक, एआई कंपनी के प्रोडक्ट में ऐसे Molecules की पहचान करती है जो बालों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल हो सके. इसी के बाद कंपनी ने एक नया शैंपू भी तैयार किया है जो दावा करता है कि ये बालों का ज्यादा घना बना देगा. इतना ही नहीं, कंपनी अपने लैब में पिछले करीब 4 सालों से एआई का इस्तेमाल कर रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले सालों में एआई बाकी चीजों को तैयार करने में भी मदद कर सकेगा. हालांकि, इसको लेकर कई एक्सपर्ट्स के मन में क्वालिटी को लेकर चिंताएं भी मौजूद हैं जिनपर आज भी विचार करने की जरूरत है.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp लेकर आई नया Meta Business Agent, चुटकियों में हो जाएंगे कई मुश्किल काम</title>
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        <description><![CDATA[ Meta Business Agent: मेटा के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप ने भारत में Meta Business Agent का ऐलान किया है. यह एक एआई पावर्ड टूल है, जो ग्राहकों के साथ बातचीत और ऑपरेशन मैनेज करने में बिजनेसेस की मदद कर सकता है. मेटा बिजनेस एजेंट को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि बिजनेसेस अपने ग्राहकों को फास्टर और पर्सनल एक्सपीरियंस प्रदान कर सके. कंपनी का कहना है कि मेटा बिजनेस एजेंट पहली ही बातचीत से अधिक प्रासंगिक और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकता है.&amp;nbsp;
क्या है मेटा बिजनेस एजेंट की खासियत?
मेटा बिजनेस एजेंट ग्राहकों के साथ होने वाली पूरी बातचीत को हैंडल करेगा. यह बिजनेस से जुड़े सवालों के जवाब, कैटलॉग रिकमंडेशन, अपॉइंटमेंट बुक करना और सेल को पूरा करने में मदद करने समेत कई काम आसानी से कर सकता है. इसके अलावा यह बिजनेस ऑनर के लिए एक पार्टनर के तौर पर भी काम कर सकता है. यह बिजनेस ऑनर को बातचीत की इनसाइट और समरी देने के साथ-साथ कस्टमर इंगेजमेंट को मॉनिटर और डेली ऑपरेशन को मैनेज करने में भी मदद करता है. इसके बारे में बताते हुए मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्&amp;zwj;टर और कंट्री हेड अरुण श्रीनिवास ने कहा कि पूरी दुनिया में बातचीत के जरिए व्यापार करने के मामले में भारत सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाज़ार बन गया है. आज लोग और कंपनियां आपस में जुड़ने के लिए मैसेजिंग को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं. अब जबकि एआई कंपनियों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है, तो मेटा बिजनेस एजेंट इस बदलाव में एक अगला बड़ा कदम है.
बड़े बिजनेस के लिए मेटा बिजनेस एजेंट प्लेटफॉर्म की शुरुआत
मेटा ने एक नया मेटा बिजनेस एजेंट प्लेटफॉर्म भी पेश किया है. यह ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो बड़े बिजनेसेस को एआई एजेंट डिप्लॉय करने के लिए जरूरी होता है. यह बिजनेसेस को मौजूदा बिजनेस सिस्टम जैसे शॉपिफाई, जेनडेस्&amp;zwj;क और शॉपी से जुड़ने के साथ-साथ एआई-पावर्ड एजेंट बनाने और उन्हें कस्टमाइज़ करने की सुविधा देता है.&amp;nbsp;
व्हाट्सऐप पर बिजनेस डिस्कवरी होगी आसान
व्हाट्सऐप लोगों के लिए मेटा बिजनेस एजेंट द्वारा चलाए जा रहे बिजनेस को खोजना भी आसान बना रहा है. जल्द ही लोग सीधे व्हाट्सऐप सर्च में ही नाम डालकर किसी भी बिजनेस को सर्च करे सकेंगे. साथ ही उन्हें अपने दोस्तों और परिवार के साथ बिजनेस कॉन्टैक्ट्स शेयर करने का भी ऑप्शन मिलेगा, जिससे भरोसेमंद बिजनेसेस से जुड़ना आसान हो जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब YouTube Live से होगी ताबड़तोड़ कमाई! भारत में लॉन्च हो गया ये नया फीचर, जानिए कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Gifts Feature: यूट्यूब आज एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है जहां पर क्रिएटर्स हर महीने मोटी कमाई कर रहे हैं. यूट्यूब पर शॉर्ट्स से लेकर लंबे वीडियोज तक आज इस प्लेटफॉर्म का पूरे देश में काफी इस्तेमाल किया जाता है. इसी कड़ी में यूट्यूब ने आज देश में अपना एक नया फीचर लॉन्च कर दिया है जिसकी मदद से अब क्रिएटर्स यूट्यूब लाइव से और तगड़ी कमाई कर सकेंगे. जी हां, दरअसल, यूट्यूब ने Gifts नाम का नया फीचर लॉन्च किया है. ये फीचर खास तौर पर Vertical Live Streams के लिए पेश किया गया है.
क्या है YouTube Gifts फीचर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नए फीचर की मदद से ऑडिएंस लाइव स्ट्रीम के दौरान एनिमेटेड वर्चुअल गिफ्ट भेजकर अपने पसंदीदा क्रिएटर्स को अपना सपोर्ट जाहिर कर सकेंगे. इसके साथ ही इस फीचर से अब क्रिएटर्स और पैसे भी कमा सकेंगे.
इसके अलावा इस फीचर को खास बनाने के लिए यूट्यूब ने इसमें कई सारे देसी थीम वाले गिफ्ट्स को भी जोड़ा है. इतना ही नहीं, कंपनी ने आने वाले समय में त्योहारों और खास मौकों के लिए नए सीजनल गिफ्ट लाने की भी घोषणा की है.
क्रिएटर्स कैसे करें इस्तेमाल
अब आपको बता दें कि अगर कोई क्रिएटर इस फीचर का इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे YouTube Studio में जाकर Earn सेक्शन खोलना होगा. इसके बाद वहां Virtual Items Module को एक्सेप्ट करने के बाद Gifts फीचर एक्टिव हो जाएगा. बता दें कि एक बार फीचर चालू होने पर सभी एलिजिबल Vertical Live Streams में Gifts अपने आप उपलब्ध हो जाएंगे. हालांकि, जिन लाइव स्ट्रीम में Gifts एक्टिव होंगे, वहां Super Stickers का ऑप्शन उपलब्ध नहीं रहेगा.
क्या हैं Jewels
YouTube ने Gifts के साथ Jewels नाम की नई डिजिटल करेंसी भी शुरू की है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऑडिएंस पहले Jewels खरीदेंगे, इसके बाद इन्हीं Jewels का इस्तेमाल करके लाइव स्ट्रीम के दौरान Gifts भेज सकेंगे. बता दें कि जब कोई ऑडिएंस Gift भेजता है तो क्रिएटर को Rubies मिलते हैं. इन्हीं Rubies से बाद में क्रिएटर की कमाई होती है. इस तरह से ऑडिएंस का सपोर्ट क्रिएटर्स के लिए एक नया कमाई का जरिया बन जाएगा.
कैसे होगा फायदा
अब एक सवाल मन में आया होगा कि इस नए फीचर से यूजर्स को कैसे फायदा मिलेगा. दरअसल, YouTube का नया Gifts फीचर ऑडिएंस और क्रिएटर्स दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. जहां एक ओर ऑडिएंस को लाइव स्ट्रीम में अपना रिएक्शन देने का नया मौका मिलेगा तो वहीं, दूसरी ओर क्रिएटर्स को कमाई का एक नया जरिया मिल जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone और iPad का चार्जिंग पोर्ट आखिर कितनी Fast Charging सपोर्ट करता है? जानिए पूरा सच</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone or iPad Fast Charging: स्मार्टफोन या लैपटॉप या अन्य डिवाइस भी आज फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं. एप्पल डिवाइस भी आज के समय में फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं. लेकिन अक्सर डिवाइस कितनी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करते हैं इस बात पर कोई ध्यान नहीं देता है. बता दें कि आपका डिवाइस कितनी तेजी से चार्ज हो रहा है ये बात डिवाइस कितनी फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करता है इसपर निर्भर करता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आईफोन और आईपैड कितनी फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं.
iPhone की चार्जिंग स्पीड
आपको बता दें कि आज टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो चुकी है. ऐसे में अब Apple के नए iPhone मॉडल पहले के मुकाबले काफी बेहतर चार्जिंग स्पीड सपोर्ट करते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, iPhone 17, iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max आज मैक्सिमम 40W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं.
हालांकि Apple अब नए iPhone के साथ चार्जर नहीं देता. ऐसे में अगर आप पुराने 5W या 18W वाले Apple चार्जर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपका नया iPhone काफी स्लो स्पीड से चार्ज होगा.
कैसे चेक होती है चार्जिंग स्पीड
जानकारी के मुताबिक, कोई भी डिवाइस या स्मार्टफोन की बैटरी की ताकत उसके mAh (मिलीएम्पियर-आवर) से चेक की जाती है. इसका मतलब ये होता है कि जितनी ज्यादा बैटरी की mAh उतनी ज्यादा वो एनर्जी स्टोर कर सकता है. आज के सयम में ज्यादातर एडवांस स्मार्टफोन में 5,000mAh की बैटरी देखने को मिल जाती है. वहीं, टैबलेट्स में ये क्षमता 8,000mAh या उससे भी ज्यादा देखने को मिलती है.
वहीं, अब चार्जिंग स्पीड की बात करें तो ये Watts (W) में मापी जाती है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जितना ज्यादा वॉट का चार्जर होगा उतनी तेजी से वो डिवाइस को चार्ज करेगा.
कितनी है iPad की चार्जिंग स्पीड
अब अगर iPad की बात करें तो 2025 में लॉन्च हुए बेस iPad में लगभग 45W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. वहीं, 13-इंच वाले M5 iPad Pro इससे भी आगे जाकर 60W तक की चार्जिंग सपोर्ट करता है.
दिलचस्प बात ये है कि Apple आज भी iPad के साथ चार्जर देता है लेकिन बॉक्स में मिलने वाला चार्जर केवल 20W का होता है. इसका मतलब है कि आपका iPad जितनी तेज चार्जिंग कर सकता है, उतनी स्पीड आपको बॉक्स में मिले चार्जर से नहीं मिलती.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>क्या ज्यादा गर्मी में ज्यादा बिजली बनाते हैं सोलर पैनल? सच जानकर रह जाएंगे दंग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-ज्यादा-गर्मी-में-ज्यादा-बिजली-बनाते-हैं-सोलर-पैनल-सच-जानकर-रह-जाएंगे-दंग</link>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Energy Generation: सोलर पैनल पूरी तरह सनलाइट पर डिपेंड होते हैं. ये सनलाइट को ही कैप्चर कर उसे बिजली में बदलते हैं. अगर सनलाइट नहीं होती है तो सोलर पैनल भी काम नहीं करते हैं. इस कारण कई लोगों को लगता है कि गर्मी के मौसम में जब तेज धूप होती है तो सोलर पैनल भी ज्यादा बिजली पैदा करते होंगे. असल में ऐसा नहीं है. सोलर पैनल पर टेंपरेचर का भी असर पड़ता है. अगर टेंपरेचर ज्यादा हो जाता है तो सोलर पैनल की एफिशिएंसी थोड़ी कम हो जाती है. इसलिए भीषण गर्मी में सोलर पैनल का एनर्जी प्रोडक्शन ज्यादा होने की जगह कम हो जाता है.
ज्यादा गर्मी में कम बिजली क्यों बनाते हैं पैनल?
इसका जवाब साइंस में छिपा हुआ है. दरअसल, धूप में सूरज से निकले फोटोन सोलर पैनल तक पहुंचते हैं. सोलर पैनल के पास पहुंचकर ये इलेक्ट्रिक फील्ड क्रिएट कर लेते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन्स मूव होना शुरू हो जाते हैं और करंट पैदा होता है, जिससे बिजली बनती है. लेकिन जब टेंपरेचर ज्यादा होता है तो सोलर पैनल ज्यादा गर्म हो जाते हैं. इससे इलेक्ट्रॉन्स समेत सारे मॉलिक्यूल की हलचल बढ़ जाती है. यानी इलेक्ट्रॉन जरूरत से ज्यादा हिलने लगते हैं और ये उस जगह पर मूव नहीं हो पाते, जहां इन्हें होना चाहिए. इससे वॉल्टेज कम हो जाती है और एनर्जी प्रोडक्शन कम हो जाता है.
कितने टेंपरेचर तक फुल एफिशिएंसी के साथ काम करते हैं सोलर पैनल?
25 डिग्री सेल्सियस तक सोलर पैनल अपनी पूरी एफिशिएंसी के साथ काम करते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे टेंपरेचर बढ़ता जाएगा, हर डिग्री के साथ-साथ एफिशिएंसी में 0.5 प्रतिशत की कमी आती जाती है. यानी अगर टेंपरेचर 45 डिग्री तक पहुंच जाए तो सोलर पैनल की एफिशिएंसी 10 प्रतिशत तक कम हो सकती है.
कैसे बढ़ाएं एफिशिएंसी?
सोलर पैनल की मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए पैनल की पॉजीशन सही होना जरूरी है. सोलर पैनल हमेशा साउथ फेसिंग होने चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा सनलाइट को कैप्चर किया जा सके. इसी तरह पैनल का साफ होना भी आवश्यक है. पैनल गंदे होने पर एनर्जी प्रोडक्शन में 15 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है. मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए हाई क्वालिटी वाले पैनल चुनें. इनकी लागत भले ही ज्यादा हो, लेकिन इनका लाइफ स्पैन ज्यादा होता है और ये ज्यादा बिजली जनरेट कर पाएंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या आपकी Smartwatch बीमारी आने से पहले दे सकती है चेतावनी? जानिए कितनी भरोसेमंद है ये टेक्नोलॉजी</title>
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        <description><![CDATA[ Smartwatch: आज कल टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो चुकी है. अब स्मार्टफोन से लेकर स्मार्टवॉच तक ऐसे डिवाइस मार्केट में मौजूद हैं जो आपके कई सारे कामों को आसान बना देते हैं. अब तो एआई की मदद से इन डिवाइसेज में कई सारे फीचर्स मिलने लगे हैं जिनकी मदद से लोग अपनी हेल्थ की भी मॉनिटरिंग कर सकते हैं. ऐसे में अब एक नई टेक्नोलॉजी सामने आई है जिसमें माना जा रहा है कि स्मार्टवॉच बीमारी आने से पहले ही आपको चेतावनी दे देगी. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
इन चीजों पर नजर रखती है स्मार्टवॉच
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टवॉच का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये आपके शरीर के नॉर्मल पैटर्न को समझकर उसमें होने वाले बदलावों को पहचान सकती है. अगर आपकी नॉर्मल हार्ट रेट, शरीर का तापमान या नींद का पैटर्न अचानक बदलने लगे तो ये किसी संभावित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है.
हालांकि, ये बदलाव किस बीमारी के कारण हो रहा है, इसका सटीक जवाब स्मार्टवॉच नहीं दे सकती. ऐसे मामलों में डॉक्टर की जांच और मेडिकल टेस्ट ही आखिरी सहारा होते हैं.
हर हेल्थ डेटा पर आंख बंद करके भरोसा न करें
स्मार्टवॉच कई तरह के हेल्थ स्कोर और आंकड़े दिखाती हैं लेकिन सभी पर आंख बंद करके भरोसा करना सही नहीं माना जाता है. ये मशीन कभी-कभी किसी दूसरे कारणों से भी आपको गलत रीडिंग दे सकती है. ऐसे में अगर बार-बार आपको गलत रीडिंग मिलती है तो डॉक्टर पर भरोसा करना ज्यादा सही रहता है.
इन फीचर्स पर कर सकते हैं भरोसा
आपको बता दें कि अब तक हुए कई रिसर्च बताते हैं कि स्मार्टवॉच कुछ मामलों में काफी काम की डिवाइस साबित हुई हैं. खासतौर पर Atrial Fibrillation (AFib) यानी दिल की अनियमित धड़कन की पहचान करने में इनकी सटीकता अच्छी मानी गई है. ये ऐसी स्थिति है जो स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती है और समय रहते इसका पता चलना बेहद जरूरी होता है.
इसके अलावा, रोजाना चलने वाले कदमों की संख्या और नींद का कुल समय जैसी जानकारी भी काफी हद तक भरोसेमंद मानी जाती है. हालांकि, नींद के अलग-अलग स्टेजों की डिटेल ट्रैकिंग अभी पूरी तरह सटीक नहीं मानी जाती.
क्या डॉक्टर की जगह लेगी स्मार्टवॉच
AI और स्मार्टवॉच लगातार बेहतर हो रही हैं लेकिन इन्हें डॉक्टर की जगह इस्तेमाल करना बिलकुल भी उचित नहीं माना जा सकता है. अगर कोई डिवाइस स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी देती है तो उसे केवल एक शुरुआती संकेत समझना चाहिए न कि अंतिम मेडिकल रिपोर्ट.
सिर्फ ऐप या AI की सलाह के आधार पर दवा लेना या इलाज शुरू करना आपके लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है. इसीलिए हमेशा सबसे पहले अपने डॉक्टर से ही सलाह लेनी चाहिए.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Vapour Chamber Cooling और AMOLED डिस्प्ले के साथ हो गया Nothing Phone 4b! इतने सारे फीचर्स से है लैस, जानें कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ Nothing Phone 4b: स्मार्टफोन निर्माता कंपनी नथिंग ने आज भारत में अपना एक नया स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है. इस स्मार्टफोन में कंपनी ने कई सारे धांसू फीचर्स उपलब्ध कराएं हैं जो यूजर्स के रोजमर्रा की जिंदगी में बड़े काम आ सकते हैं. इसके अलावा डिवाइस में एमोलेड डिस्प्ले दिया हुआ है जो आपको स्मूथ परफॉर्मेंस देता है. बता दें कि इस स्मार्टफोन के लॉन्च के बाद कई बड़े ब्रांड्स की भी टेंशन जरूर बढ़ सकती है. आइए जानते हैं कि इस नए फोन में क्या-क्या फीचर्स दिए गए हैं.
मिला AMOLED डिस्प्ले

You&amp;rsquo;re hot. So is Phone (4b).In a new unibody, it&amp;rsquo;s got the focus-saving Glyph Bar and all our Essential AI tools. They keep you in the moment, so you can take in the attention.Eye candyPhone (4b) pic.twitter.com/bJ9aSMbu7L
&amp;mdash; Nothing (@nothing) July 7, 2026



कंपनी ने इस फोन में 6.77 इंच का Super AMOLED डिस्प्ले उपलब्ध कराया है जो 120Hz की Adaptive Refresh Rate को सपोर्ट करता है. इस डिस्प्ले के साथ यूजर्स को इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर भी देखने को मिल जाता है.
पावर के लिए इस फोन में कंपनी ने 6000mAh की बैटरी उपलब्ध कराई है जो आपको बेहतरीन बैकअप देने में सक्षम है. बता दें कि अभी तक किसी भी नथिंग फोन में इतनी बड़ी बैटरी नहीं दी गई है. कंपनी का दावा है कि ये फोन एक बार फुल चार्ज पर करीब 18 घंटों का बैकअप देता है.
मिलते हैं इतने सारे फीचर्स
Nothing Phone 4b के फीचर्स की बात करें तो सबसे पहले इसका डिजाइन काफी यूनिक दिया हुआ है. साथ ही फोन में पॉलीकार्बोनेट यूनिबॉडी डिजाइन और नया ट्रांसपेरेंट कैमरा मॉड्यूल भी मौजूद है. इतना ही नहीं, कंपनी ने इस बार इस स्मार्टफोन में एक नया Glyph Bar उपलब्ध कराया है. इसमें 45 मिनी LED लाइट्स का इस्तेमाल किया गया है. इस फीचर का इस्तेमाल चार्जिंग स्टेटस, नोटिफिकेशन, टाइमर जैसे चीजों के लिए किया जाता है.
इसके अलावा इस फोन में कंपनी ने Qualcomm Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर उपलब्ध कराया है जिससे डिवाइस आपको बेहतरीन परफॉर्मेंस देने में सक्षम होगा. इस फोन में कंपनी ने एक और खास फीचर दिया हुआ है जिसका नाम Vapour Chamber Cooling System है. इसकी मदद से गेमिंग के दौरान भी आपका फोन ज्यादा गर्म नहीं होगा.
कैमरा सेटअप
फोन के कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें 50MP Samsung प्राइमरी कैमरा दिया गया है जिसमें OIS और EIS दोनों का सपोर्ट मिलता है. इसके साथ 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा भी मौजूद है. ये स्मार्टफोन Android 16 पर बेस्ड Nothing OS 4.1 के साथ आता है. इस फोन में कई सारे एआई फीचर्स भी देखने को मिल जाएंगे.
कितनी है इस फोन की कीमत
कंपनी ने देश में Nothing Phone 4b को 34,999 रुपये की शुरूआती कीमत में लॉन्च किया है. बता दें कि इस फोन में कई वेरिएंट्स मौजूद हैं जिनकी कीमत भी अलग-अलग है. फोन के 8+128GB वेरिएंट की कीमत 34,999 रुपये है. वहीं, इसके 8+256GB मॉडल की कीमत 38,999 रुपये रखी गई है. बता दें कि अगर आप बैंक ऑफर का लाभ उठाते हैं तो ये कीमत कुछ कम भी हो सकती है. इसके अलावा कंपनी ने इस स्मार्टफोन का एक नया एडिशन भी लॉन्च किया है जिसका नाम RCB Edition रखा है. हालांकि, ये एडिशन सिर्फ बेंगलुरू के कंपनी के फ्लैगशिप स्टोर के जरिए ही खरीदा जा सकेगा.
Motorola Edge 60 Pro को मिलेगी टक्कर
नथिंग का ये नया फोन मोटोरोला एज 60 प्रो को सीधी टक्कर देने में सक्षम है. बता दें कि मोटोरोला के इस फोन में भी यूजर्स को कई सारे धांसू फीचर्स देखने को मिल जाते हैं. कंपनी ने इस फोन में तीन वेरिएंट्स उपलब्ध कराएं हैं जिसमें 8+256GB, 12+256GB और 16+512GB शामिल है.
इसके अलावा इस स्मार्टफोन में तीन कैमरा सेटअप मिलता है. साथ ही 50 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है. पावर के लिए डिवाइस में 6000एमएएच की बैटरी भी मौजूद है जो आपको धांसू बैकअप देने में सक्षम है. इस फोन की कीमत की बात करें तो आज के समय में ये फोन 30 हजार से 35 हजार रुपये की रेंज में बाजार में उपलब्ध है.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या Airtel सच में ग्राहकों को भेज रहा है ऐसा इनविटेशन? जानिए क्या है वायरल मैसेज की सच्चाई और इसका मकसद</title>
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        <description><![CDATA[ Airtel Viral Message: टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने अपने यूजर्स को एक मैसेज भेजा है जिसमें 22 जुलाई 2026 को होने वाले एक इवेंट के बारे में जानकारी दी गई है. जी हां, अगर आपके भी किसी परिचित को Airtel की ओर से ऐसा मैसेज मिला है जिसमें 22 जुलाई 2026 को Consumer Education Workshop में शामिल होने का इनविटेशन दिया गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है. आइए जानते हैं क्या है इस वायरल मैसेज की सच्चाई.
क्या है सच्चाई
दरअसल, मैसेज में लिखा गया है कि Airtel यूजर्स को Consumer Education Workshop में शामिल होने के लिए इनविटेशन भेज रहा है. इसमें इवेंट डेट, टाइम और कार्यक्रम का स्थान भी दिया गया है. इसके अलावा मैसेज में इवेंट के मकसद के बारे में भी बताया गया है.
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये मैसेज TRAI द्वारा किया जाने वाला प्रोग्राम से संबंधित है जिसे एयरटेल ऑर्गेनाइज कर रहा है. इस इवेंट का मकसद यूजर्स को कंपनी के प्रोडक्ट्स के बारे में जानकारी देना और Complaint Redressal Process के बारे में समझाना है. इसीलिए ये कोई फर्जी मैसेज नहीं है बल्कि ट्राई द्वारा किए जा रहे इवेंट के लिए बुलाने के लिए किए जाने वाला इनविटेशन है.
क्या है इस इवेंट का मकसद
बता दें कि ऐसी वर्कशॉप का मकसद यूजर्स और कंपनी के बीच बेहतर क्म्यूनिकेशन डेवलप करना होता है. इसमें आमतौर पर ये बताया जाता है कि किसी सेवा से जुड़ी समस्या होने पर शिकायत कहां और कैसे दर्ज करें, शिकायत का समाधान कितने समय में किया जाता है और अगर समाधान नहीं मिलता है तो आगे किस स्तर पर संपर्क किया जा सकता है.
हालांकि, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपको किसी भी तरह का संहेद है तो आपको Airtel Customer Care से संपर्क करना चाहिए या फिर Airtel के आधिकारिक ऐप और वेबसाइट पर इससे संबंधित जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए.
क्यों हो रहा ये इवेंट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में टेलीकॉम कंपनियां समय-समय पर Consumer Education Program या Consumer Awareness Workshop आयोजित करती हैं. इनका मकसद यूजर्स को उनके अधिकार, सर्विसेज, शिकायत दर्ज कराने के प्रोसेस और डिजिटल सेफ्टी जैसी जरूरी जानकारियां देना होता है.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Best Glass for Mobile : के लिए सबसे मजबूत ग्लास कौन सा होता है, जानें किसमें सबसे ज्यादा होती है सेफ्टी</title>
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        <description><![CDATA[ Best Glass for Mobile Screen Protection : स्मार्टफोन का यूज आज हमारी डेली लाइफ की छोटी बड़ी सभी चीजों में शामिल है. ऐसे में अगर फोन हाथ से गिर जाए और उसकी स्क्रीन टूट जाए, तो इसे सही कराने पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. यही वजह है कि ज्यादातर लोग स्क्रीन की सुरक्षा के लिए टेम्पर्ड ग्लास या दूसरे स्क्रीन प्रोटेक्टर का यूज करते हैं, लेकिन बाजार में इतने सारे ऑप्शन मौजूद हैं कि अक्सर लोगों को समझ नहीं आता कि आखिर कौन-सा ग्लास सबसे मजबूत है और किसे खरीदना सही रहेगा. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि मोबाइल के लिए सबसे मजबूत ग्लास कौन सा होता है और किसमें सबसे ज्यादा सेफ्टी होती है.&amp;nbsp;
मोबाइल के लिए सबसे मजबूत ग्लास कौन सा होता है?
मोबाइल के लिए सबसे मजबूत ग्लास Sapphire Glass को सबसे ज्यादा मजबूत माना जाता है. यह एल्यूमीनियम ऑक्साइड से बनाया जाता है और इसकी मजबूती हीरे के बाद सबसे ज्यादा मानी जाती है. हालांकि इसकी कीमत काफी ज्यादा होती है, इसलिए इसका यूज आमतौर पर महंगे स्मार्टफोन और प्रीमियम डिवाइस में किया जाता है.
इन ग्लास को भी माना जाता है मोबाइल के लिए मजबूत
ज्यादातर स्मार्टफोन में Gorilla Glass का यूज होता है. यह खरोंच और गिरने से स्क्रीन को अच्छी सुरक्षा देता है. अगर आपने नया स्मार्टफोन खरीदा है, तो आपने Gorilla Glass का नाम जरूर सुना होगा. कई मोबाइल कंपनियां अपनी स्क्रीन की मजबूती बताने के लिए इसका यूज करती हैं. यह ग्लास खास प्रोसेस से तैयार किया जाता है, जिससे यह गिरने पर भी बेहतर सुरक्षा देता है. इसकी मजबूती की वजह से इसे कई स्मार्टफोन्स में यूज किया जाता है. इसके अलावा DragonTrail Glass भी मजबूती और टिकाऊपन के मामले में Gorilla Glass जैसा ही माना जाता है, लेकिन इसे अलग केमिकल प्रोसेस से तैयार किया जाता है. इसके अलावा Aluminosilicate Glass भी कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और स्मार्टफोन में यूज किया जाता है, इसकी खासियत यह है कि यह ज्यादा तापमान को बेहतर तरीके से सहन कर सकता है.
टेम्पर्ड ग्लास खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप अपने फोन के लिए टेम्पर्ड ग्लास खरीद रहे हैं, तो सिर्फ कीमत देखकर फैसला न करें. 9H हार्डनेस रेटिंग वाला ग्लास ज्यादा मजबूत माना जाता है और यह खरोंच से बेहतर सुरक्षा देता है. इसके अलावा ग्लास में अच्छी Oleophobic Coating होनी चाहिए, जिससे स्क्रीन पर उंगलियों के निशान और तेल के दाग कम दिखाई दें. वहीं 2.5D या 3D Edge Design वाला ग्लास बेहतर कवरेज देता है. साथ ही कम से कम 99 प्रतिशत ट्रांसपेरेंसी और अच्छी टच सेंसिटिविटी वाला ग्लास चुनना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
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2D, 2.5D, 5D और 11D में कौन बेहतर?
मार्केट में 2D, 2.5D, 3D, 5D और 11D टेम्पर्ड ग्लास आसानी से मिल जाते हैं. 2D ग्लास सिर्फ स्क्रीन को कवर करता है, जबकि 2.5D ग्लास किनारों तक सुरक्षा देता है. अगर आपके फोन में Curved Display है या आप Edge-to-Edge सुरक्षा चाहते हैं, तो 5D या 11D टेम्पर्ड ग्लास बेहतर ऑप्शन हो सकता है.&amp;nbsp;
कौन-सा स्क्रीन प्रोटेक्टर होता है सबसे मजबूत?
मार्केट में Tempered Glass, TPU, PET और Nano Liquid जैसे कई स्क्रीन प्रोटेक्टर मौजूद हैं. इनमें टेम्पर्ड ग्लास सबसे ज्यादा मजबूत माना जाता है और यह गिरने या खरोंच लगने पर स्क्रीन की बेहतर सुरक्षा करता है. वहीं TPU हल्की खरोंच से बचाव करता है, PET हल्का और सस्ता ऑप्शन है लेकिन सुरक्षा कम देता है. Nano Liquid स्क्रीन पर कोटिंग बनाता है, लेकिन यह ज्यादा मजबूत सुरक्षा नहीं देता है.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Play Store की ये 4 Hidden Settings हर Android यूजर को पता होनी चाहिए! बढ़ जाएगी सेफ्टी</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आज ज्यादातर लोग गूगल प्ले स्टोर को सिर्फ ऐप डाउनलोड करने का जरिया समझते हैं. लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. दरअसल, गूगल प्ले स्टोर में ऐप डाउनलोड करने के साथ-साथ ऐसे कई फीचर्स मौजूद हैं जो आपके स्मार्टफोन की सुरक्षा को बढ़ा देते हैं. इसके अलावा इन फीचर्स को ऑन करके आप अपने पैसे भी बचा सकते हैं. आइए जानते हैं प्ले स्टोर के ऐसे फीचर्स जो हर एंड्रॉयड यूजर्स को पता होना जरूरी है.
Activity Tracking को करें बंद
अगर आपको ऐसा लगता है कि Google आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी के आधार पर आपको ऐड्स दिखा रहा है तो आप इस चीज को बंद भी कर सकते हैं. इससे आपकी प्राइवेसी बनी रहेगी और कम पर्सनलाइज्ड ऐड्स दिखाई देंगे. इसके लिए Google Account की Data &amp;amp; Privacy सेटिंग में जाना है. इसके बाद Ad Personalization को बंद करें. जरूरत हो तो Web &amp;amp; App Activity को भी Disable कर सकते हैं.
खतरनाक ऐप्स से बचाएगा Play Protect
आपको बता दें कि Play Protect Google का इनबिल्ट सिक्योरिटी फीचर है जो आपके फोन में मौजूद ऐप्स को समय-समय पर स्कैम करता है. इस फीचर की मदद से आपको ऐप्स में मौजूद वायरस या मैलवेयर का अलर्ट मिल जाता है. साथ ही ये फीचर आपको ज्यादा खतरनाक ऐप से बचाता है और उन्हें डिलीट करने की सलाह भी देता है. इस फीचर को ऑन करने के लिए Google Play Store खोलें. इसके बाद अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें. यहां Play Protect में जाएं. Scan apps with Play Protect को Enable कर दें. इससे आपका फोन पहले से ज्यादा सुरक्षित रहेगा.
इन ऐप्स का बचा हुआ डेटा हटाएं
अक्सर देखा गया है कि जब भी आप कोई ऐप को अनइंस्टॉल करते हैं तो उसके बाद उस ऐप का कुछ डेटा फोन में ही स्टोर रहता है. इससे फोन में कचरा जमा हो जाता है. इसीलिए कोई भी ऐप अनइंस्टॉल करने के बाद उसका बचा हुआ डेटा भी डिलीट कर देना चाहिए. ऐसा करने के लिए आपको Play Store और Google अकाउंट की सेटिंग्स में जाकर पुराने और इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स का डेटा हटाकर स्टोरेज को मैनेज करना होगा. इससे आपका अकाउंट भी साफ-सुथरा रहेगा और बेकार डेटा जमा नहीं होगा.
कैंसिल करें बेकार Subscriptions
कई बार हम किसी ऐप का फ्री ट्रायल लेते हैं या सब्सक्रिप्शन खरीद लेते हैं और बाद में उसे भूल जाते हैं. ऐसे में हर महीने या साल आपके अकाउंट से पैसे कटते रहते हैं. इसे चेक करने के लिए Play Store खोलें. प्रोफाइल आइकन पर टैप करें. Payments &amp;amp; Subscriptions में जाएं. Subscriptions खोलें. अब यहां पर आप जिन सर्विस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं उन्हें तुरंत Cancel कर दें. इससे अनचाहे ऑटो-पेमेंट से बचा जा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फ्रांस में गर्मी के साथ&amp;साथ एसी की कीमत भी निकाल रही पसीना, जानिए भारत के मुकाबले कितना महंगा</title>
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        <description><![CDATA[ AC Price in France: फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और बेल्जियम जैसे कई यूरोपीय देशों में गर्मी ने कहर ढहाया हुआ है. आमतौर पर ठंडे माने जाने वाले इन देशों में तापमान 40 डिग्री से पार पहुंच गया है. भयंकर गर्मी के कारण कई लोगों की मौत हो गई है. राहत पाने के लिए लोग एसी धड़ाधड़ एसी खरीद रहे हैं. इससे न सिर्फ एसी की डिमांड बढ़ी है बल्कि इनके दाम भी आसमान छूने लगे हैं. अगर भारत से कंपेयर किया जाए तो फ्रांस में एसी की ठंडी हवा पाना काफी महंगा है. आइए जानते हैं कि भारत के मुकाबले फ्रांस में एसी खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च करना पड़ता है.
भारत में एसी की कितनी कीमत?
भारत में विंडो और स्प्लिट एसी समेत कई ऑप्शंस अवेलेबल हैं और इनके ब्रांड, एनर्जी रेटिंग, कैपेसिटी के हिसाब से कीमत अलग-अलग हो सकती है. अगर एवरेज के तौर पर देखा जाए तो 1.5 टन की इन्वर्टर एसी की कीमत 30,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक जाती है. इसमें यूनिट के साथ-साथ इंस्टॉलेशन का भी खर्च आ जाता है. अगर ज्यादा कैपेसिटी और ज्यादा एनर्जी रेटिंग वाला मॉडल खरीदा जाए तो उसकी कीमत उसी हिसाब से बढ़ती जाती है.&amp;nbsp;
फ्रांस में एसी लगाना कितना महंगा?
भारत की तरह फ्रांस में भी लोग पोर्टेबल, विंडो और स्प्लिट एसी आदि खरीद रहे हैं. अगर कीमत की बात करें तो फ्रांस में एसी खरीदना पसीने निकाल सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां पोर्टेबल एसी की कीमत लगभग 200-750 यूरो (लगभग 22,000-82,000 रुपये) तक है. इसमें इंस्टॉलेशन की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए यह खर्चा बच जाता है. अगर स्प्लिट एसी की बात करें तो इसकी एक यूनिट के लिए फ्रांस में 1-2 लाख रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. इसके अलावा इंस्टॉलेशन का खर्चा भी लगभग 20,000 रुपये तक रह सकता है. यानी भारत में जो एसी अधिकतम 50,000 रुपये का मिलता है, उसके लिए फ्रांस में लगभग 4 गुना अधिक तक पैसा देना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
तेजी से बढ़ रही एसी की डिमांड
WHO का कहना है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बना हुआ है और यहां वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से तापमान बढ़ रहा है. यहां दशकों में एक बार आने वाली हीटवेव अब हर साल आ रही हैं और करोड़ों लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं. लगातार बढ़ती गर्मी से यहां एसी की डिमांड भी बढ़ रही है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का अनुमान है कि 2050 तक यूरोप में एयर कंडीशनरिंग की डिमांड दोगुनी हो जाएगी.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फ्रांस, में, गर्मी, के, साथ-साथ, एसी, की, कीमत, भी, निकाल, रही, पसीना, जानिए, भारत, के, मुकाबले, कितना, महंगा</media:keywords>
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        <title>Jio, Airtel, Vi यूजर्स को बड़ा झटका! 15% तक बढ़ सकते हैं प्रीपेड प्लान के दाम, जानें क्या है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Prepaid Recharge Plan Price Hike: देश की मुख्य टेलीकॉम कंपनियों ने अपने यूजर्स को एक जोरदार झटका देने का फैसला किया है. जहां एक तरफ स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं तो वहीं, दूसरी तरफ महंगे मोबाइल रिचार्ज प्लान लोगों को काफी परेशान करते हैं. अब देश की तीन बड़ी टेलीकॉम कंपनियों ने फिर से एक बार आने वाले कुछ महीनों में मोबाइल रिचार्ज मंहगे करने का फैसला किया है. आइए जानते हैं क्यों होने वाली है ये बढ़ोतरी.
कितने महंगे होंगे रिचार्ज प्लान
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों टेलीकॉम कंपनियां अपने प्रीपेड रिचार्ज प्लान में करीब 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं. बता दें कि फिलहाल बीते दो सालों से कंपनियों ने प्लान की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी. जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है. लेकिन इसके बावजूद कंपनियों की प्रति ग्राहक औसत कमाई (ARPU) उनके मुताबिक नहीं हुई थी. इसी वजह से अब टेलीकॉम कंपनियों ने अपनी कमाई को बढ़ाने के लिए रिचार्ज प्लान की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है जिसका सीधा असर आम इंसान पर देखने को मिलेगा.
किन प्लान्स पर होगा असर
जानकारी के मुताबिक, इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर फिलहाल प्रीपेड रिचार्ज प्लान्स पर देखने को मिल सकता है. बता दें कि डेली इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा पैक्स और अनलिमिटेड कॉलिंग वाले प्लान महंगे हो सकते हैं. हालांकि, माना जा रहा है कि आने वाले कुछ समय में टेलीकॉम कंपनियां अपने प्रीपेड प्लान्स को भी महंगा कर सकती हैं.
आखिरी बार कब हुई थी बढ़ोतरी
जानकारी के लिए बता दें कि टेलीकॉम कंपनियों ने आखिरी बार अपने रिचार्ज प्लान्स में बड़ी बढ़ोतरी 2024 में की थी. इसके बाद से कंपनियों ने कोई भी कीमत नहीं बढ़ाई थी. लेकिन इस बीच मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करने में काफी इजाफा देखने को मिला था. लेकिन कंपनियों की प्रति ग्राहक कमाई में कोई खास बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली थी. इसी वजह से अब कंपनियों ने ये फैसला लिया है जिससे वह अपनी कमाई को बढ़ा सकें.
क्या सभी प्लान्स हो जाएंगे महंगे
दरअसल, एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियां सभी प्रीपेड प्लान्स को महंगा करने की जगह पर नई प्राइसिंग मॉडल पेश कर सकती हैं. इसमें उन्ही प्लान्स की कीमतों को बढ़ाया जाएगा जिसमें ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल होता है. इसके बाद जो लोग ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला प्लान चुनते हैं उन्हें अब ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
अगर ऐसा होता है तो कम डेटा इस्तेमाल करने वालों पर इस बढ़ोतरी का कोई असर देखने को नहीं मिलेगा. बढ़ोतरी के बाद से जो ज्यादा डेटा का इस्तेमाल करेगा उनको अब प्लान्स के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे.
क्या करें यूजर्स
आपको बता दें कि अगर आने वाले कुछ महीनों में रिचार्ज प्लान की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो ऐसे में पुराने रिचार्ज प्लान्स पहले के मुकाबले महंगे हो जाएंगे. ऐसे में जिन यूजर्स की लंबी वैलिडिटी वाला प्लान खत्म होने वाला है वो प्लान महंगे होने से पहले अपना रिचार्ज प्लान करा लेंगे तो उनको ज्यादा फायदा होगा. हालांकि, टेलीकॉम कंपनियों ने अभी तक किस डेट से प्लान्स महंगे होंगे इसके बारे में कोई आधिकारीक जानकारी शेयर नहीं की है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Jio, Airtel, यूजर्स, को, बड़ा, झटका, 15, तक, बढ़, सकते, हैं, प्रीपेड, प्लान, के, दाम, जानें, क्या, है, वजह</media:keywords>
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        <title>गाय के गोबर से मिलेगी एआई डेटा सेंटर को पावर, अमेरिका में चल रही तैयारी</title>
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        <description><![CDATA[ Data Centre Power Problem: एआई बूम के बाद डेटा सेंटर की डिमांड बढ़ गई है और कंपनियां इस पर भारी निवेश कर रही हैं. पानी के साथ-साथ डेटा सेंटर को बड़ी मात्रा में बिजली की भी जरूरत पड़ती है. इसके कारण ग्रिड पर लोड लगातार बढ़ रहा है और इससे बचने के लिए कंपनियां अब दूसरे पावर सोर्सेस की तरफ नजर डाल रही हैं. यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन कंपनियों को गाय के गोबर में बिजली की लगातार बढ़ती जरूरत का समाधान नजर आ रहा है. आइए जानते हैं कि कैसे गाय के गोबर से डेटा सेंटर की एनर्जी नीड्स पूरी हो सकती हैं.
डेटा सेंटर को कितनी बिजली की जरूरत?
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2030 तक डेटा सेंटर को हर साल लगभग 945 terawatt-hours (TWh) बिजली की जरूरत होगी. यह जापान की कुल बिजली की खपत से ज्यादा है. यह खपत आज की तुलना में दोगुनी होगी और इसके पीछे सबसे बड़ी जिम्मेदार एआई होगी.
कैसे गाय के गोबर से बनी बिजली से डेटा सेंटर को मिलेगी पावर?
इसका जवाब renewable natural gas (RNG) में छिपा हुआ है. TOI की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के मुताबिक, गाय के गोबर से निकलने वाली मीथेन को कैप्चर कर इससे फ्यूल बनाया जा सकता है. इस गैस को पर्यावरण में मिलने देने की बजाय बिजली बनाई जा सकती है, जो घरों, फैक्ट्रियों और डेटा सेंटर तक को पावर दे सकती है. कहा जा रहा है कि इससे मीथेन एमिशन में भी कमी आएगी और एआई के दौर में डेटा सेंटर की बढ़जी ऊर्जा जरूरतें भी पूरी हो पाएंगी.
गाय का गोबर कैसे पूरी करेगा यह जरूरत?
जब गाय का गोबर डिकम्पोज होता है तो इससे मीथेन गैस रिलीज होती है. इसे ग्रीनहाउस गैस माना जाता है और यह कार्बन डाइऑक्साइड से भी खतरनाक होती है. इंटरगवर्नमेंट पैनल ऑफ क्लाइमेट चेंज (IPCC) का कहना है कि 100 साल के पीरियड में मीथेन कॉर्बन डाइऑक्साइड की तुलना में ग्लोबल वॉर्मिंग को 28 गुना तक बढ़ा सकती है. अब इस मीथेन को हवा में घुलने देने की बजाय इससे बिजली बनाने पर विचार हो रहा है. गाय के गोबर से पैदा हुई मीथेन को साफ करने के बाद यह एक तरीके से renewable natural gas बन जाती है. इसे पाइपलाइन के जरिए पावर स्टेशन तक पहुंचाया जा सकता है. इसके लिए किसी नए इंफ्रास्ट्रक्चर की भी जरूरत नहीं पड़ेगी. पावर स्टेशन से बिजली डेटा सेंटर तक पहुंच जाएगी. सोलर और विंड एनर्जी सिस्टम मौसम पर निर्भर होते हैं, लेकिन यह तरीका बिना रुके लगातार बिजली सप्लाई कर पाएगा.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>अगर आपके पास भी है ये Smartphones तो इस साल हो जाएंगे बेकर! कंपनी नहीं देगी ये सपोर्ट, चेक करें लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphones: मार्केट में आज कई सारे एडवांस स्मार्टफोन मौजूद हैं जिन्हें लोग अपनी जरूरत के हिसाब से खरीदते हैं. लेकिन अक्सर लोग स्मार्टफोन खरीदते समय उसकी बैटरी, कैमरा और अन्य फीचर्स चेक करते हैं. लेकिन सबसे जरूरी होता है सॉफ्टवेयर अपडेट. माना जाता है कि जबतक स्मार्टफोन में सॉफ्टवेयर अपडेट मिलता रहता है तब तक आपका स्मार्टफोन सही से काम करता है. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे स्मार्टफोन्स के बारे में जिन्हें जल्द ही कंपनी से सॉफ्टवेयर अपडेट मिलना बंद हो जाएगा.
सॉफ्टवेयर अपडेट में क्या-क्या मिलता है
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज के एडवांस&amp;nbsp; स्मार्टफोन में सॉफ्टवेयर अपडेट के साथ कई सारे सिक्योरिटी फीचर्स भी मिलते हैं. इन सिक्योरिटी अपडेट्स के साथ आपके स्मार्टफोन का डेटा सुरक्षित रहता है और फोन अच्छे से काम करता रहता है. हालांकि अपडेट इंस्टॉल करने के नोटिफिकेशन कई लोगों को परेशान करते हैं लेकिन जब ये नोटिफिकेशन आना बंद हो जाते हैं तो असली चिंता शुरू होती है. क्योंकि इसका मतलब है कि कंपनी अब आपके फोन में मिलने वाली नई सुरक्षा कमियों को ठीक नहीं करेगी.
सपोर्ट खत्म होने पर क्या होता है
आपको बता दें कि जब किसी स्मार्टफोन का सपोर्ट पीरियड खत्म हो जाता है तो वह तुरंत बेकार नहीं होता. फोन पहले की तरह काम करता रहता है लेकिन उसे नए एंड्रॉयड या iOS अपडेट नहीं मिलते. सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि सिक्योरिटी पैच भी बंद हो जाते हैं.
ऐसे में अगर कुछ समय बाद ऑपरेटिंग सिस्टम में कोई नई कमी पाई जाती है तो उसका समाधान अपडेट के जरिए आपके फोन तक नहीं पहुंच पाएगा. इससे साइबर अपराध और डेटा चोरी जैसे समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.
Google Pixel यूजर्स रहें सावधान
जानकारी के मुताबिक, Google ने हाल के वर्षों में अपने Pixel स्मार्टफोन्स के लिए अपडेट समय बढ़ा दी है. Pixel 8 और इसके बाद आने वाले मॉडल को 7 साल तक अपडेट मिलेगा. लेकिन पुराने Pixel फोन्स को केवल 5 साल तक ही सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी सपोर्ट मिलता है.
अब 2027 तक जिन स्मार्टफोन में अपडेट मिलना बंद हो जाएगा उसमें Pixel 7, Pixel 7 Pro, Pixel 6a, Pixel 6 और Pixel 6 Pro शामिल हैं.
क्या है Apple का तरीका
Apple एंड्रॉयड कंपनियों की तरह किसी iPhone की एंड-ऑफ-लाइफ तारीख पब्लिक नहीं करता है. हालांकि आमतौर पर iPhone को लॉन्च के बाद 5 से 7 साल तक iOS अपडेट मिलते हैं.
आने वाले iOS 27 अपडेट के साथ माना जा रहा है कि iPhone SE (2020), iPhone 11, iPhone 11 Pro और iPhone 11 Pro Max को लास्ट बार अपडेट मिल सकता है. हालांकि Apple पुराने iPhone के लिए बड़े iOS अपडेट बंद होने के बाद भी कई बार जरूरी सिक्योरिटी पैच जारी करता रहता है.
इन स्मार्टफोन्स का सपोर्ट होगा खत्म
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Samsung अलग-अलग कैटेगरी के फोन के हिसाब से अलग समय तक अपडेट देता है. फ्लैगशिप Galaxy S और Fold सीरीज को मैक्सिमम 7 साल तक सपोर्ट मिलता है जबकि मिड-रेंज और बजट फोन को चार से छह साल तक अपडेट दिए जाते हैं.
ऐसे में Samsung Galaxy A14, Galaxy A54 5G, Galaxy S23, Galaxy S23+, Galaxy S23 Ultra, Galaxy Z Fold4, Galaxy Z Flip4, Galaxy A53 5G, Galaxy S22, Galaxy S22+, Galaxy S22 Ultra, Galaxy S21 FE 5G, Galaxy Z Fold3 और Galaxy Z Flip3 जैसे मॉडल्स का सॉफ्टवेयर सपोर्ट 2027 के अंत तक खत्म हो जाएगा.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>लॉन्च होने के बाद भी नहीं खरीद पाएंगे फोल्डेबल आईफोन, ऐप्पल को फिर आ रही वर्षों पुरानी दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ Foldable iPhone: अपना पहला फोल्डेबल आईफोन iPhone Ultra लॉन्च करने की तैयारी में जुटी ऐप्पल को एक बार फिर सालों पुरानी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. ताजा रिपोर्ट्स में बताया गया है कि यह फोन सितंबर में अपने तय समय पर लॉन्च तो हो जाएगा, लेकिन इसे खरीदने के लिए ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ेगा. दरअसल, इस आईफोन को लेकर ऐप्पल को कई चुनौतियां आ रही हैं, जिसके कारण शुरुआत में इसका प्रोडक्शन कम होगा. यही वजह है कि सितंबर में लॉन्च करने के बाद ऐप्पल इसके प्री-ऑर्डर की तारीख को अक्टूबर तक आगे खिसका सकती है.
पहले भी ऐसी दिक्कत का सामना कर चुकी है ऐप्पल
यह पहली बार नहीं है, जब ऐप्पल इस तरह की समस्या से दो-चार हो रही है. 12 सितंबर, 2017 को ऐप्पल ने iPhone 8, iPhone 8 Plus और iPhone X को लॉन्च किया था. पहले दो मॉडल के लिए प्री-ऑर्डर सिर्फ तीन दिन बाद ही शुरू हो गए थे, लेकिन iPhone X के प्री-ऑर्डर शुरू होने में छह हफ्तों का समय लग गया था. 12 सितंबर को लॉन्च हुए इस आईफोन के प्री-ऑर्डर 27 अक्टूबर से शुरू हुए थे. फोल्डेबल आईफोन को लेकर भी इसी तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि iPhone Ultra के प्री ऑर्डर 2026 की चौथी तिमाही में शुरू होंगे. यानी अक्टूबर से पहले प्री-ऑर्डर शुरू होने की संभावना नहीं है.
इन फीचर्स के साथ लॉन्च हो सकता है iPhone Ultra
iPhone Ultra के फीचर्स की बात करें तो इसमें 7.8 इंच का मेन OLED डिस्प्ले और 5.5 इंच की कवर स्क्रीन मिल सकती है. इसे A20 Pro चिपसेट और पावर बटन में इंटीग्रेटेड टचआईडी सेंसर से लैस किया जाएगा. फोल्डेबल आईफोन के फ्रंट में दोनों स्क्रीन पर एक-एक कैमरा और रियर में 48MP वाला डुअल कैमरा सेटअप दिया जाएगा. बैटरी को लेकर ऐसी उम्मीद है कि ऐप्पल इसमें अपना अब तक का सबसे बड़ा बैटरी पैक दे सकती है. यह आईफोन iOS 27 अपडेट के साथ लॉन्च होगा.
कितनी रह सकती है कीमत?
ऐप्पल को फोल्डेबल आईफोन से खूब उम्मीदें हैं. ऐसे भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि प्री-ऑर्डर शुरू होते ही यह फोन सोल्ड आउट हो सकता है. इसे देखते हुए ऐप्पल ने इस आईफोन का प्रोडक्शन बढ़ा दिया है. कंपनी ने अपने सप्लायर को इस आईफोन की करीब एक करोड़ यूनिट्स तैयार करने को कहा है, जबकि पहले 70-80 लाख यूनिट बनाने की प्लानिंग थी. कीमत की बात करें तो iPhone Ultra के टॉप वेरिएंट के प्राइस तीन लाख रुपये के आसपास रह सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:21 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>लॉन्च, होने, के, बाद, भी, नहीं, खरीद, पाएंगे, फोल्डेबल, आईफोन, ऐप्पल, को, फिर, आ, रही, वर्षों, पुरानी, दिक्कत</media:keywords>
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        <title>कैसे काम करता है iPhone Reverse Charging फीचर? जानें क्या कोई भी डिवाइस इससे हो सकता है चार्ज</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Reverse Charging Feature: स्मार्टफोन में आज लोगों को कई सारे एडवांस फीचर्स देखने को मिल जाते हैं जो लोगों के रोजमर्रा के काम को आसान बना देते हैं. इसके साथ ही अब स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां इससे आगे बढ़कर रिवर्स चार्जिंग फीचर को भी डिवाइस के साथ पेश कर चुकी हैं. पहले ये चीज बहुत ही कम देखने को मिलता था. लेकिन आज करीब सभी प्रीमियम और फ्लैगशिप स्मार्टफोन में रिवर्स चार्जिंग फीचर देखने को मिल जाता है. लेकिन क्या इस फीचर से और भी डिवाइस चार्ज हो सकते हैं या नहीं ये सवाल कई लोगों के मन में उठता है.
Reverse Charging फीचर क्या होता है
जानकारी के अनुसार, Reverse Charging एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसमें आपका स्मार्टफोन पावर रिसीवर की बजाय पावर सोर्स बन जाता है. इसका मतलब है कि फोन में मौजूद बैटरी दूसरे डिवाइस को भी चार्ज करने लगती है. बता दें कि फोन की बैटरी से वायरलेस ईयरबड्स, स्मार्टवॉच या और छोटे-मोटे डिवाइस को चार्ज किया जा सकता है. बता दें कि ये फीचर उस समय बहुत ज्यादा काम आता है जब आपका कोई डिवाइस डिस्चार्ज हो जाए और आपके पास उसका चार्जर मौजूद न हो. ऐसी स्थिति में आप इस फीचर के इस्तेमाल से अपना डिवाइस चार्ज कर सकते हैं.
किसी भी डिवाइस को चार्ज कर सकते हैं?
अगर आप इस फीचर से किसी भी डिवाइस को चार्ज करने की सोच रहे हैं तो ऐसा संभव नहीं है. दरअसल, iPhone की Reverse Charging फीचर की ताकत इतनी नहीं होती है कि वो किसी भी डिवाइस को चार्ज कर सके. इससे सिर्फ कुछ छोटे डिवाइसेज को ही आपातकाल स्थिति में चार्ज किया जा सकता है.
iPhone में कैसे होता है इस फीचर का इस्तेमाल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Apple ने iPhone में हार्डवेयर लेवल पर Reverse Charging फीचर उपलब्ध कराया है लेकिन इसे सभी यूजर्स के लिए पूरी तरह से उपलब्ध नहीं कराया गया है. बता दें कि कुछ नए iPhone मॉडल USB-C पोर्ट के जरिए लिमिटेड पावर आउटपुट दे सकते हैं. इसका मतलब है कि अगर आप USB-C केबल से कुछ एक्सेसरीज जैसे AirPods या दूसरे छोटे गैजेट्स को कनेक्ट करते हैं तो वे इस फीचर से चार्ज हो सकते हैं.
हालांकि, एंड्रॉयड फोन की तरह iPhone में अभी तक ऐसा ऑप्शन नहीं है जिससे आप किसी भी स्मार्टफोन को आसानी से वायरलेस या केबल के जरिए चार्ज कर सकें.
इन बातों का जरुर रखें ध्यान
इस फीचर को इस्तेमाल करने के साथ आपको कुछ चीजों का जरुर ध्यान रखना चाहिए. दरअसल, अगर आप iPhone से किसी दूसरे डिवाइस को चार्ज करने की कोशिश करते हैं तो सबसे पहले सही और ओरिजिनल केबल का ही इस्तेमाल करें. साथ ही ये भी ध्यान रखें कि इससे iPhone की बैटरी तेजी से कम हो सकती है. इसलिए जब आपके फोन की बैटरी पहले से कम हो तब इस फीचर का इस्तेमाल बिलकुल भी न करें क्योंकि इससे आपके फोन की बैटरी पर असर पड़ने लगता है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>तबाही से बचा लेगी यह टेक्नोलॉजी, जापान ने बनाया भूकंप आते ही हवा में उठ जाने वाला घर</title>
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        <description><![CDATA[ Japan&amp;rsquo;s Floating House: भूकंप के कारण हर साल जानमाल का भारी नुकसान होता है. पहले तुर्किये और अब वेनेजुएला में आए भूकंप में हजारों लोगों की मौत हुई है और बड़ी-बड़ी इमारतें जमींदोज हो गई. भूकंप में बिल्डिंग्स गिरने से ही ज्यादा नुकसान होता है. जापान जैसे देश में जहां भूकंप आना सामान्य बात है, वहां ऐसी तबाही से बचने के लिए नए तरीके के घर बनाए जा रहे हैं. जापान की एक कंपनी ऐसे घर बना रही है, जो भूकंप आते ही हवा में उठ जाएंगे. इससे भूकंप के झटकों के दौरान मकान के ढहने का खतरा कम हो जाता है. आइए जानते हैं कि यह टेक्नोलॉजी क्या है और कैसे काम करती है.&amp;nbsp;
इस कंपनी ने बनाए हवा में उठने वाले घर&amp;nbsp;
Air Danshin Systems Inc नाम की एक कंपनी ने एक नई टेक्नोलॉजी बनाई है, जो भूकंप के दौरान घर को हवा में उठा देती है. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत में हो रहा है. इस टेक्नोलॉजी में घर को एक स्पेशल एयर चैंबर सिस्टम के ऊपर बनाया जाता है. जैसे ही इसके अंदर लगे सेस्मिक सेंसर मूवमेंट को डिटेक्ट करते हैं, कंप्रैस्ड हवा चैंबर में भर जाती है और घर करीब 3 सेंटीमीटर तक ऊपर उठ जाता है, जिससे भूकंप के झटकों का असर नहीं होता. जैसे ही भूकंप के झटके शांत होते हैं, यह सिस्टम वापस घर को अपनी जगह पर ले आता है.
यूज होने लगी है टेक्नोलॉजी
Air Danshin का यह सिस्टम केवल कागजों तक ही सीमित नहीं है. जापान में करीब 90 घरों और बिल्डिंग्स में इसका इस्तेमाल हो रहा है. भूकंप की तरंगे महसूस होने के एक सेकंड से भी कम समय में यह एक्टिवेट हो जाता है. इसमें इमरजेंसी बैटरी पैक लगे होते हैं, जिसकी मदद से यह पावर आउटेज के समय भी काम कर सकता है. इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है. कंपनी ने घरों के साथ-साथ बड़ी लैबोरेट्रीज और फैक्ट्रियों के लिए भी इसका वर्जन तैयार किया है.
सिस्टम को बेहतर बनाने पर चल रहा है काम
Air Danshin अभी इस सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम कर रही है. इसके डिजाइन में सुधार किया जा रहा है और साथ ही इसे ग्लोबल लेवल पर ले जाने की भी तैयारी हो रही है. ट्रायल के दौरान अच्छे नतीजे देने के बावजूद इस सिस्टम की कुछ लिमिटेशन भी सामने आई है. यह भूकंप के हल्के झटके झेल सकता है, लेकिन बड़े और अलग-अलग दिशाओं से उठने वाली भूकंप की तरंगों के खिलाफ यह उतना प्रभावी नहीं है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>अगर आपके फोन में भी हैं ये Apps तो तुरंत कर दें डिलीट नहीं हो आ सकती है बड़ी मुसीबत</title>
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        <description><![CDATA[ Apps: स्मार्टफोन में अक्सर लोग कई सारे ऐप्स अपनी जरुरत के हिसाब से डाउनलोड कर लेते हैं. लेकिन कई बार ऐसे ऐप्स भी आपके फोन में आ जाते हैं जिनसे आपकी मुसीबत बढ़ सकती है. जी हां, दरअसल, देश में आज रियल कैश वाले ऑनलाइन गेम्स पर पूरी तरह से पाबंदी लग चुकी है. ऐसे में अगर आपके फोन में भी तीन पत्ती और Rummy जैसे ऐप्स मौजूद हैं तो तुरंत डिलीट कर दीजिए नहीं तो आपके लिए भी मुसीबत खड़ी हो सकती है.
हो सकता है बड़ा नुकसान
आपको बता दें कि तीन पत्ती और Rummy जैसे कई ऐप्स शुरुआत में छोटे-छोटे बोनस और कैशबैक का ऑफर देते हैं जिससे लोग ज्यादा पैसे लगाने लगते हैं. कई बार यूजर्स अपनी जमा पूंजी तक गंवा देते हैं. एक बार नुकसान होने के बाद लोग पैसे वापस जीतने की उम्मीद में लगातार खेलते रहते हैं जिससे नुकसान और बढ़ सकता है.
निजी जानकारी पर भी होता है खतरा
इतना ही नहीं, कई गेमिंग ऐप्स इंस्टॉल करते समय कॉन्टैक्ट्स, स्टोरेज, लोकेशन और अन्य जरूरी परमिशन मांगते हैं. अगर ऐप भरोसेमंद नहीं है तो आपकी निजी जानकारी गलत हाथों में पहुंच सकती है. कुछ फर्जी ऐप्स बैंकिंग फ्रॉड, फिशिंग और साइबर ठगी का जरिया भी बन सकते हैं.
लग सकती है गेम की लत
ऑनलाइन कार्ड गेम्स इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि खिलाड़ी बार-बार वापस आए. अब धीरे-धीरे ये आदत लत में बदल सकती है. ऐसे में बच्चों और युवाओं पर इसका बुरा असर पड़ सकता है और इससे लोगों की पर्सनल जिंदगी भी प्रभावित हो सकती है.
तुरंत डिलीट कर दें ऐप्स
अगर आपके फोन में ऐसे गेम्स इंस्टॉल हैं और आप उनका इस्तेमाल नहीं करते हैं तो इन्हें तुरंत ही डिलीट कर देना ही आपकी सेफ्टी के लिए सही माना जाता है. साथ ही किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके रिव्यू, डेवलपर की जानकारी और मांगी जाने वाली परमिशन को ध्यान से चेक कर लेना चाहिए. हमेशा प्ले स्टोर या आधिकारी वेबसाइट से ही ऐप को डाउनलोड करना चाहिए जिससे आपकी प्राइवेसी सुरक्षित रहती है.
बता दें कि ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स पर सरकार का रुख काफी सख्त है. इसीलिए ऐसे गेम्स को सरकार ने बैन भी कर दिया है. लेकिन जिनके फोन में पहले से ये ऐप्स मौजूद हैं उन्हें भी जल्द से जल्द ऐप्स को डिलीट कर देना चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया गया तो आपका डेटा और प्राइवेसी दोनों ही गलत हाथों तक पहुंच सकती है और कई मामलों में लोगों को ठगी का भी शिकार बनना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अगर, आपके, फोन, में, भी, हैं, ये, Apps, तो, तुरंत, कर, दें, डिलीट, नहीं, हो, आ, सकती, है, बड़ी, मुसीबत</media:keywords>
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        <title>OLED और QLED को टक्कर देगा Micro RGB TV! जानिए क्या है ये नई टेक्नोलॉजी और कैसे भविष्य में बढ़ेगा इसका इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ Micro RGB TV: आज टेक्नोलॉजी की दुनिया में लोग स्मार्ट डिवाइसेज का इस्तेमाल करते हैं. स्मार्ट टीवी काफी समय से लोगों के घरों में राज कर रही है. इन स्मार्ट टीवी में भी काफी एडवांस्मेंट देखने को मिला है. कोई ओएलईडी डिस्प्ले के साथ आती हैं तो कई क्यूएलईडी डिस्प्ले के साथ. लेकिन अब एक नई टेक्नोलॉजी काफी समय से चर्चा का विषय बनी हुई है जिसको माइक्रो आरजीबी टीवी कहा जा रहा है. माना जा रहा है कि ये भविष्य में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाली टेक्नोलॉजी साबित हो सकती है. आइए जानते हैं कि क्या है ये नई टेक्नोलॉजी.
क्या है Micro RGB TV
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Micro RGB TV एक नेक्स्ट जनरेशन की टीवी टेक्नोलॉजी मानी जा रही है. इस टेक्नोलॉजी में लाल, हरा और नीला (आरजीबी) रंग पैदा करने के लिए बेहद छोटे RGB LED का इस्तेमाल किया जाता है. इससे स्क्रीन पर हर पिक्सेल ज्यादा सटीक रंग और बेहतर ब्राइटनेस दिखा सकता है.
लंबे समय तक कर सकेंगे इस्तेमाल
इतना ही नहीं, आप Micro RGB TV को काफी लंबे समय तक भी इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही ये गेमिंग के लिए भी एक बेहतर ऑप्शन के रूप में देखा जा रहा है. इस टेक्नोलॉजी में यूजर को फास्ट रिस्पॉन्स टाइम, स्मूथ मोशन और कम इनपुट लैग के कारण शानदार गेमिंग एक्सपीरिएंस देखने को मिल जाएगा.
मिलेगी जबरदस्त पिक्चर क्वालिटी
Micro RGB TV की सबसे बड़ी खास बात ये है कि इस टेक्नोलॉजी से अब पहले से कहीं ज्यादा बेहतर पिक्चर क्वालिटी देखने को मिल सकेगी. अब आप चाहे आप 4K फिल्में देखें, गेम खेलें या लाइव स्पोर्ट्स का आनंद लें, हर चीज आपको पहले से ज्यादा असली और शानदार दिखेगी.
OLED और QLED से कितनी अलग है ये तकनीक
आपको बता दें कि OLED टीवी में हर पिक्सेल खुद रोशनी पैदा करता है जिससे शानदार ब्लैक लेवल और बेहतरीन कॉन्ट्रास्ट मिलता है. वहीं, QLED टीवी बेहतर ब्राइटनेस और रंगों के लिए क्वांटम डॉट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करती है. वहीं, इन सबसे अलग, Micro RGB TV इन दोनों तकनीकों को एक साथ लाने का प्रयास कर रही है.
इसमें अलग-अलग RGB LED डॉयरेक्ट लाइट पैदा करत सकते हैं जिसकी मदद से बैकलाइट की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है. इससे होता ये है कि लाइट पहले के मुकाबले ज्यादा नैचुरल लगती है और ब्राइटनेस भी बढ़ जाती है.
भविष्य में होगा इस्तेमाल
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले सालों में Micro RGB TV प्रीमियम टीवी मार्केट में एक बड़ा बदलाव पेश कर सकती है. हालांकि, अभी ये टेक्नोलॉजी अपने शुरूआती चरण में है और इसकी कीमत भी कुछ हद तक ज्यादा होने वाली है. लेकिन माना जा रहा है कि ज्यादा प्रोडक्टिविटी के साथ-साथ इसकी लागत कम भी हो सकती है. ऐसे में अगर टीवी निर्माता कंपनियां इस टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर अपनाने में सफल रहती हैं तो आने वाले समय में Micro RGB TV OLED और QLED के लिए एक मजबूत चुनौती बन सकता है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram पर कैसे शेयर करते हैं लाइव लोकेशन? 99% लोगों आज भी नहीं पता ये आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Tips: इंस्टाग्राम आज के समय में काफी ट्रेंडिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन चुका है. इंस्टाग्राम रील्स से लेकर स्टोरी और पोस्ट्स तक लोग इंस्टाग्राम पर अपना काफी ज्यादा समय बिताते हैं. लेकिन आपको बता दें कि अगर जब अपनी लाइव लोकेशन शेयर करने की बात आती है तो लोग व्हाट्सऐप या दूसरे ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. जी हां, दरअसल, आज भी ज्यादातर लोगों को नहीं पता है कि इंस्टाग्राम से भी आप अपनी लाइव लोकेशन शेयर कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि कैसे इंस्टाग्राम पर शेयर करें लाइव लोकेशन.
इंस्टाग्राम पर कैसे शेयर होगी लाइव लोकेशन?
जानकारी के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर लाइव लोकेशन शेयर करने के लिए सबसे पहले ऐप को खोलें और उस व्यक्ति की चैट में जाएं जिसके साथ आप अपनी लोकेशन शेयर करना चाहते हैं. अब चैट स्क्रीन में मौजूद &#039;+&#039; या अटैचमेंट ऑप्शन पर टैप करें. यहां आपको Location का ऑप्शन दिखाई देगा. इसे चुनने के बाद Share Live Location पर टैप करें. इसके बाद इंस्टाग्राम आपसे लोकेशन की परमिशन मांगेगा. परमिशन देने के बाद आपकी लाइव लोकेशन शेयर होना शुरू हो जाएगी.
कितने समय तक दिखती है लोकेशन?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंस्टाग्राम का ये फीचर कुछ समय के लिए ही काम करता है. जैसे व्हाट्सऐप पर आपको कुछ मिनट्स से लेकर कुछ घंटों तक का समय मिलता है, वैसे ही इंस्टाग्राम भी ये फीचर आपको कुछ समय के लिए ही देता है. इसका मतलब है कि एक तय समय के बाद आपकी लोकेशन शेयर होना अपने आप बंद हो जाती है. हालांकि आप जब चाहें तब Stop Sharing पर टैप करके लाइव लोकेशन शेयरिंग रोक सकते हैं.
इन चीजों का जरुर रखें ध्यान
अब इंस्टाग्राम पर अपनी लाइव लोकेशन शेयर करते समय कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रखना चाहिए. बता दें कि केवल उसी व्यक्ति के साथ अपनी लाइव लोकेशन शेयर करें जिस पर आपको पूरा भरोसा हो. किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध अकाउंट के साथ अपनी रियल-टाइम लोकेशन शेयर करने से बचें. इसके अलावा, अगर आपके फोन में लोकेशन सर्विस बंद है तो पहले उसे ऑन करना होगा तभी ये फीचर सही तरीके से काम करेगा. इतना ही नहीं, बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आपको इंस्टाग्राम का लेटेस्ट वर्जन का ही इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आपने काफी समय से इंस्टाग्राम अपडेट नहीं किया है तो पहले आपको ऐप को अपडेट कर लेना चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Gorilla Glass में ऐसा क्या, जो फोन की स्क्रीन को टूटने नहीं देता? मजबूती जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Gorilla Glass: आजकल स्मार्टफोन की कीमतें लाखों में पहुंच गई हैं. अगर आप सैमसंग और ऐप्पल जैसी कंपनियों के टॉप-एंड मॉडल लेना चाहते हैं तो लगभग दो लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं. इतने महंगे फोन अगर हाथ से छूट जाए तो कलेजा बाहर को आने को हो जाता है. इस टेंशन से बचाने के लिए कई कंपनियां फोन पर Gorilla Glass प्रोटेक्शन देती हैं. अगर फोन जोर से भी गिर जाए तो यह ग्लास स्क्रीन को टूटने से बचा लेता है. इस ग्लास में ऐसा क्या होता है जो यह गिरने पर टूटता नहीं? आज हम इस सवाल का जवाब जानेंगे.
कैसे बनता है Gorilla Glass?
गोरिल्ला ग्लास को बनाने की शुरुआत सिलिकॉन डाइऑक्साइड, जिसे साधारण रेत भी कहा जाता है, से होती है. सिलिकॉन डाइऑक्साइड और ऐसे ही कुछ दूसरे मिनरल्स को बहुत ज्यादा टेंपरेचर पर पिघलाया जाता है, जिससे एक ग्लास बनता है. फिर इस रेत को कई दूसरे केमिकल के साथ मिलाकर फिर से पिघलाया जाता है, जिससे Aluminosilicate ग्लास बनता है. Aluminosilicate को एक खांचे में तब तक उड़ेला जाता है, जब तक यह ओवरफ्लो होना शुरू न हो जाए. इसके बाद एक मशीन इस ग्लास की शीट बना लेती है. यह प्रोसेस पूरी होने के बाद इस ग्लास गर्म किए हुए नमक में डाला जाता है. इससे ग्लास में सोडियम आयन को हटाकर बड़े पोटैशियम आयन उनकी जगह ले लेते हैं. फिर जब ग्लास ठंडा होता है तो उसके सरफेस पर एक कंप्रैसिव लेयर बन जाती है.
एक पतला कांच इतनी प्रोटेक्शन कैसे दे पाता है?
इस प्रोसेस से बना कांच बहुत पतला होता है. इसकी मोटाई 0.3-0.5mm होती है, लेकिन इसके दोनों साइड किनारों पर एक कुशन जैसी लेयर बन जाती है, जो नजर नहीं आती. यह लेयर इस गोरिल्ला ग्लास को फ्लेक्सिबिलिटी देती है. इससे अगर फोन जोर से गिरे तो यह लेयर एकदम टूटने की बजाय उस झटको को एब्जॉर्ब कर लेती है. इसलिए इस ग्लास के टूटने की संभावना कम रहती है. यह ग्लास स्क्रीन को न सिर्फ टूटने से बचाता है बल्कि स्क्रैचेज से भी पूरी प्रोटेक्शन देता है.
Ceramic Shield से मिल रही है Gorilla Glass को टक्कर
Gorilla Glass को कॉर्निंग नाम की कंपनी तैयार करती है. इसी कंपनी का दूसरा प्रोडक्ट Ceramic Shield इस ग्लास को कड़ी टक्कर दे रहा है. सैमसंग और ऐप्पल जैसी कंपनियां इन दोनों ही प्रोडक्ट्स को यूज करती हैं. Ceramic Shield को लेकर ऐप्पल और कॉर्निंग दोनों का ही दावा है कि यह दूसरे प्रोटेक्टिव ग्लास की तुलना में ज्यादा मजबूत है. इसे ग्लास में सेरेमिक नैनोक्रिस्टल एम्बेड कर तैयार किया जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>नहीं पड़ेगी नए फोन की जरूरत! इन 5 एंड्रॉयड Phones में सबसे लंबे समय तक मिलता है सॉफ्टवेयर अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ Android Smartphones: टेक्नोलॉजी की इस दुनिया में अब लोगों को एडवांस स्मार्टफोन्स बेहद पसंद आते हैं. लोग अब ऐसा फोन खरीदना पसंद करते हैं जिसमें उन्हें एडवांस फीचर्स के साथ-साथ बेहतरीन सेफ्टी फीचर्स भी मिले. लेकिन अक्सर ऐसा देखा गया है कि कई स्मार्टफोन में कुछ समय के बाद सॉफ्टवेयर अपडेट मिलना बंद हो जाता है जिससे उस डिवाइस में सिक्योरिटी अपडेट भी नहीं मिलता है.
सॉफ्टवेयर अपडेट बंद होने के बाद लोगों को अक्सर मजबूरन ही नया स्मार्टफोन खरीदना पड़ता है. ऐसे में आज हम आपको ऐसे 5 एंड्रॉयड स्मार्टफोन के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमें सबसे लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिल जाता है.
Honor Magic V6
Honor ने भी अपने फ्लैगशिप Magic सीरीज के लिए 7 साल तक Android और सिक्योरिटी अपडेट देने की घोषणा की है. इस लिस्ट में शामिल Honor Magic V6 कंपनी का एक प्रीमियम फोल्डेबल स्मार्टफोन है जिसे यूजर्स खूब पसंद करते हैं. जानकारी के मुताबिक, इस फोन में कंपनी ने 7.95-इंच इनर और 6.52-इंच की कवर स्क्रीन उपलब्ध कराई है. साथ ही इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर दिया हुआ है.
Google Pixel 10a
गूगल का फोन भी अपने यूजर्स को लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट उपलब्ध कराता है. अब अगर कम बजट फोन की बात करें तो Google Pixel 10a ऐसा फोन है जिसमें कंपनी 7 साल तक Android OS और सिक्योरिटी अपडेट उपलब्ध कराती है. इस फोन की सबसे बड़ी बात ये है कि इस फोन में सबसे पहले एंड्रॉयड अपडेट मिलता है.
Motorola Signature
Motorola का स्मार्टफोन भी इस लिस्ट में शुमार है. बता दें कि मोटोरोला Signature स्मार्टफोन कंपनी का एक प्रीमियम फ्लैगशिप मॉडल माना जात है. इस डिवाइस में यूजर्स को 7 साल तक Android अपडेट और 7 साल तक सिक्योरिटी अपडेट मिल जाता है. प्रोसेसर की बात करें तो कंपनी ने इसमें Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर उपलब्ध कराया है जो मल्टीटास्किंग करने में सक्षम है.
Fairphone Gen 6
सॉफ्टवेयर अपडेट के मामले में ये फोन सबसे आगे आता है. कंपनी इस फोन में करीब 7 सालों तक सॉफ्टवेयर अपेडट देता है और 8 सालों तक सिक्योरिटी अपडेट उपलब्ध कराती है. इसके अलावा इस फोन की सबसे बड़ी खास बात इसका मॉड्यूलर डिजाइन है जो लोगों को बेहद पसंद आता है. इस फोन में 6.31-इंच की OLED डिस्प्ले मिलती है जो 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है.
Samsung Galaxy S26 Ultra
दुनिया की बड़ी और चर्चित स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Samsung भी इस लिस्ट में शामिल है. दरअसल, कंपनी के प्रीमियम Galaxy स्मार्टफोन्स में कंपनी 7 साल तक Android और सिक्योरिटी अपडेट उपलब्ध कराती है. इनमें Galaxy S26 Ultra सबसे ताकतवर मॉडल माना जाता है. इसमें Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर के साथ 12GB और 16GB RAM मिल जाता है. इस फोन में यूजर्स को कई सारे प्रीमियम फीचर्स भी देखने को मिल जाते हैं.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>आपकी बातें चोरी&amp;छिपे सुन रहे हैं सोशल मीडिया ऐप्स, फोन में इस सेटिंग को तुरंत करें बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: सोशल मीडिया ऐप्स का इस्तेमाल आज लगभग सभी लोग किसी न किसी काम के लिए करते हैं. कोई मनोरंजन के लिए तो कोई ऑफिस वर्क के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अक्सर देखा गया है कि सोशल मीडिया ऐप्स जाने अनजाने में आपकी बातें सुनते हैं. जी हां, दरअसल, कई सोशल मीडिया ऐप्स आज प्राइवेसी का खतरा बन चुके हैं. लेकिन आप अपने स्मार्टफोन में एक सेटिंग बदलकर इस चीज को पूरी तरह से रोक सकते हैं.
माइक्रोफोन की परमिशन पर रखें नजर
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई सोशल मीडिया ऐप्स वॉयस मैसेज, वीडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीमिंग जैसी फीचर्स के लिए आपसे माइक्रोफोन का एक्सेस मांगते हैं. अगर आप इन फीचर्स का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो ऐप को हमेशा के लिए माइक्रोफोन की अनुमति नहीं देना चाहिए. जरूरत न होने पर इस परमिशन को बंद रखना चाहिए जिससे आपकी प्राइवेसी बनी रहे.
ऐसे बंद करें एक्सेस
अब अगर आप भी अपने स्मार्टफोन में माइक्रोफोन को दी गई परमिशन को बंद करना चाहते हैं तो बस कुछ आसान स्टेप्स को फॉलो करके ये काम आसानी से कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आपको स्मार्टफोन की Settings में जाना होगा. इसके बाद Privacy या Security &amp;amp; Privacy सेक्शन खोलें. यहां Permission Manager या App Permissions का ऑप्शन मिलेगा. अब Microphone पर टैप करें और देखें कि किन-किन ऐप्स को माइक्रोफोन की अनुमति मिली हुई है. जिन ऐप्स को इसकी जरूरत नहीं है उनके लिए परमिशन को Don&#039;t Allow या Allow Only While Using the App पर सेट कर दें.
iPhone यूजर्स ऐसे बंद करें सेटिंग
वहीं, अगर आपके पास iPhone है तो Settings खोलें और Privacy &amp;amp; Security में जाएं. इसके बाद Microphone ऑप्शन पर टैप करें. यहां उन सभी ऐप्स की लिस्ट दिखाई देगी जिन्हें माइक्रोफोन एक्सेस मिला हुआ है. यहां से आप उन ऐप्स की परमिशन को बंद कर सकते हैं जिनका आप बहुत कम इस्तेमाल करते हैं.
ऐसे ऐप्स को ही दें परमिशन
आपको बता दें कि हर ऐप को माइक्रोफोन का एक्सेस देना सही नहीं होता है. हमेशा सिर्फ भरोसेमंद ऐप्स को ही परमिशन देना सही होता है. बता दें कि कई ऐसे ऐप्स हैं जिन्हें माइक्रोफोन का कोई काम नहीं होता है फिर भी वे माइक्रोफोन की परमिशन मांगते हैं तो ऐसे में आपको ऐसे ऐप्स को बिलकुल भी परमिशन नहीं देनी चाहिए. इससे आपकी प्राइवेसी बनी रहती है और कोई भी ऐप आपकी बातें भी नहीं सुन सकेगा.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:20 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>आपकी, बातें, चोरी-छिपे, सुन, रहे, हैं, सोशल, मीडिया, ऐप्स, फोन, में, इस, सेटिंग, को, तुरंत, करें, बंद</media:keywords>
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        <title>नए बच्चों को कैसे भोंट बुद्धि बना रहा एआई, क्यों Gen&amp;Z में कम देखने को मिल रहा IQ?</title>
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        <description><![CDATA[ AI Impact on Gen-Z IQ: Gen-Z ऐसी पहली जनरेशन है, जिसका IQ अपने पैरेंट्स की तुलना में कम है. दुनिया के टॉप न्यूरोसाइंटिस्ट में से एक Dr. Jared Cooney Horvath का कहना है कि 1997-2010 के बीच पैदा हुई जनरेशन ऐसी पहली जनरेशन बन गई है, जिसने एकेडमिक्स में अपने पैरेंट्स से खराब प्रदर्शन किया है. उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी पर ज्यादा निर्भरता के कारण यह हाल हुआ है. इससे भी चिंताजनक यह है कि कई इस जनरेशन के लोगों को लगता है कि वो बहुत स्मार्ट हैं. सोशल मीडिया और एआई जैसी टेक्नोलॉजी को इसके पीछे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.&amp;nbsp;
इन मामलों में पिछड़े Gen-Z
पिछले कई दशकों से कॉग्नेटिव डेवलपमेंट पर नजर रखी जा रही है. इसमें पहली बार Gen Z को लेकर ऐसा हुआ है, जब उन्होंने बेसिक अटेंशन, मेमोरी, लिट्रेसी, मैथ्स स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी और जनरल IQ के मामले में अपने से पहली जनरेशन के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया है. यह तब है, जब बच्चे 20वीं सदी के बच्चों के मुकाबले ज्यादा समय स्कूल में रह रहे हैं. Horvath का कहना है कि ऐसा एजुकेशन टेक्नोलॉजी के कारण हो रहा है. अब टैबलेट और कंप्यूटर आम हो गए हैं और रियल लर्निंग के लिए जगह नहीं बची है. स्टूडेंट्स घंटों तक टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं. अब वो किताबें पढ़ने की जगह शॉर्ट वीडियोज में ही उनकी समरी देख रहे हैं.
एआई ने कैसे डाला असर?
Gen-Z ऐसी पहली जनरेशन है, जो मानव इतिहास की सबसे पावरफुल मानी जा रही है एआई टेक्नोलॉजी के दौर में जी रही है. एक प्रॉम्प्ट पर एआई एक्सप्लेन, कैलकुलैट, समराइज, डिजाइन और कोडिंग कर सकती है. रीजनिंग के मामले में भी यह सुपरफास्ट है. ये सारी चीजें आज से 10 साल पहले तक कल्पना लगती थी. अब जब हर सवाल का जवाब एक प्रॉम्प्ट दूर है तो याद रखने और सोचने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. हालांकि, इसके पीछे Gen-Z को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता. यह जनरेशन एक ऐसी दुनिया में जी रही है, जहां सब कुछ आसान हो गया है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. हर टेक्नोलॉजिकल एडवांस्मेंट के साथ ऐसा होता है. प्रिंटिंग प्रेस आने के बाद याद रखने की जरूरत खत्म हो गई. कैलकुलैटर ने मेंटल अर्थमैटिक को बदल दिया, जबकि इंटरनेट ने इंफोर्मेशन का पूरा गेम ही चेंज कर दिया. इसी तरह अब एआई नॉलेज को एक्सेस करने और जरनेट करने का पूरा मामला बदल रही है.
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        <title>पहली बार इतना सस्ता मिल रहा iPhone 16! Prime Day Sale में 60 हजार से भी कम कीमत में खरीदने का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ पहली बार इतना सस्ता मिल रहा iPhone 16! Prime Day Sale में 60 हजार से भी कम कीमत में खरीदने का मौका ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पहली, बार, इतना, सस्ता, मिल, रहा, iPhone, 16, Prime, Day, Sale, में, हजार, से, भी, कम, कीमत, में, खरीदने, का, मौका</media:keywords>
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        <title>पुराने iPhone के मिलेंगे अच्छे पैसे! Apple देगा जबरदस्त एक्सचेंज वैल्यू, जानिए कैसे उठाएं फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Apple iPhone Exchange: आईफोन को पूरी दुनिया में काफी पसंद किया जाता है. आईफोन को लोग इसके बेहतरीन सिक्योरिटी और सेफ्टी फीचर्स के लिए पसंद करते हैं. लेकिन कई बार लोग आईफोन को एक्सचेंज करना चाहते हैं या फिर अपग्रेड करना चाहते हैं तो लोगों को उनके मनमुताबिक पैसे नहीं मिल पाते हैं. इसी को देखते हुए अब एप्पल ने लोगों को नया ऑफर पेश किया है जिसकी मदद से लोग अपने पुराने फोन को कंपनी से ही एक्सचेंज करके नया आईफोन खरीद सकते हैं. आसान भाषा में कहें तो एप्पल ही आपसे आपका पुराना आईफोन लेकर आपको नया आईफोन दे देगा. आइए जानते हैं कि कैसे आप भी इसका फायदा उठा सकते हैं.
क्या है Apple Trade-In प्रोग्राम
जानकारी के अनुसार, Apple का Trade-In प्रोग्राम लंबे समय से उन यूजर्स की पहली पसंद रहा है जो समय-समय पर अपने डिवाइस अपग्रेड करते रहते हैं. इस सुविधा के जरिए ग्राहक अपने पुराने Apple डिवाइस को एक्सचेंज करके नए प्रोडक्ट की कीमत कम कर सकते हैं. इस प्रोग्राम से लोगों को काफी फायदा होता है और उन्हें अपना आईफोन एक्सचेंज या बेचने के लिए किसी थर्ड पार्टी या फिर मार्केट में भटकना नहीं पड़ता है. इस प्रोग्राम की एक और खास बात ये है कि इसके तहत आप अपने पुराने से पुराना आईफोन भी एक्सचेंज कर सकते हैं.
कैसे होगा यूजर्स को फायदा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस Apple ने Trade-In वैल्यू में कोई खास बदलाव नहीं किया है. हालांकि, इस बार कई डिवाइसों पर अच्छी बढ़ोतरी जरूर देखने को मिली है. iPhone मॉडल्स पर 10 से 25 डॉलर तक, iPad पर 15 से 20 डॉलर तक, MacBook सीरीज पर 5 से 35 डॉलर तक और Apple Watch पर 10 डॉलर तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है.
किन ग्राहकों को मिलेगी मैक्सिमम वैल्यू
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Apple जो Trade-In वैल्यू दिखाता है, वह मैक्सिमम प्राइस होती है. अब आपको ये मैक्सिमम प्राइस तब ही मिलता है जब आपका पुराना मॉडल लेटेस्ट हो या फिर जल्दी में खरीदा है और मॉडल की स्टोरेज ज्यादा हो. आपके पुराने मॉडल की कंडिशन ही आपको सबसे ज्यादा एक्सचेंज वैल्यू दिला सकती है.
कैसे मिलेगा ज्यादा वैल्यू
अगर आप भी एप्पल के इस प्रोग्राम के जरिए सबसे ज्यादा एक्सचेंज वैल्यू लेना चाहते हैं तो आपका पुराना आईफोन या अन्य एप्पल प्रोडक्ट ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए. साथ ही उसकी कंडिशन भी नई जैसी होनी चाहिए और स्टोरेज भी ज्यादा होनी चाहिए. ऐसे मिलने पर एप्पल आपको मैक्सिमम एक्सचेंज वैल्यू ऑफर कर सकता है.
इन डिवाइसेज की बढ़ गई वैल्यू
नई अपडेट के बाद iPhone 16 की मैक्सिमम Trade-In वैल्यू 460 डॉलर, iPhone 16 Plus की 465 डॉलर, iPhone 16 Pro की 560 डॉलर और iPhone 16 Pro Max की 695 डॉलर हो गई है.
वहीं, iPad की बात करें तो स्टैंडर्ड iPad के लिए अब 235 डॉलर, iPad Air के लिए 460 डॉलर, iPad Mini के लिए 265 डॉलर और iPad Pro के लिए 690 डॉलर तक की एक्सचेंज वैल्यू मिल सकती है.
Mac लाइनअप में Mac Mini की कीमत बढ़कर 375 डॉलर और MacBook Air की 520 डॉलर तक पहुंच गई है. वहीं MacBook Pro के लिए 690 डॉलर तक और iMac के लिए 355 डॉलर तक की मैक्सिमम वैल्यू तय की गई है.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पुराने, iPhone, के, मिलेंगे, अच्छे, पैसे, Apple, देगा, जबरदस्त, एक्सचेंज, वैल्यू, जानिए, कैसे, उठाएं, फायदा</media:keywords>
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        <title>एक छोटी सी गलती से बढ़ सकता है शॉर्ट सर्किट का खतरा! जानें कैसे Smart Plug बढ़ा देता है लोगों की मुसीबत</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Plug: आज कल ज्यादातर घरों में स्मार्ट डिवाइस पहुंच चुके हैं. अब लोग अपने घर को ज्यादा एडवांस दिखाने के चक्कर में अपने घरों में ज्यादातर इंटरनेट कनेक्टेड या फिर स्मार्ट डिवाइसेज का इस्तेमाल करने लगे हैं. लेकिन कई बार ये डिवाइस ही लोगों के लिए एक मुसीबत बन जाते हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही डिवाइस स्मार्ट प्लग के बारे में बताने जा रहे हैं जो आज कल मार्केट में काफी ट्रेंडिंग में है.
डिवाइस की पावर रेटिंग जानना जरुरी
बता दें कि अब किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर आमतौर पर उसकी Voltage (V), Watt (W) और कई बार Ampere (A) की जानकारी उपलब्ध होती है. इन जानकारी में सबसे जयादा जरुरी Ampere की वैल्यू होती है क्योंकि ये बताता है कि आपका डिवाइस मैक्सिमम कितना करंट झेल सकता है.
Smart Plug के साथ ये काम करना पड़ेगा महंगा
आपकी जानकारी के लिए बताएं कि दरअसल, Smart Plug एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसकी मदद से लोग इससे कई सारे डिवाइस कनेक्ट कर सकते हैं. वहीं, अब अगर इस स्मार्ट प्लग में Power Strip लगा देते हैं तो डिवाइस पर बहुत ज्यादा लोड पड़ने लगता है. बता दें कि Power Strip में कई डिवाइस एक साथ जुड़े हों तो वे मिलकर Smart Plug की ताकत से ज्यादा करंट खींचने लगते हैं.
अब जब Smart Plug अपनी ताकत से ज्यादा लोड उठाएगा तो वो ज्यादा गर्म होने लगेगा. इतना ही नहीं, ऐसी स्थिति में डिवाइस जल्दी खराब हो सकता है और कई बार शॉर्ट सर्किट या आग लगने का भी खतरा बढ़ जाता है.
Smart Power Strip है सुरक्षित?
अगर आप Smart Power Strip खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको डिवाइस खरीदने से पहले सावधान रहना चाहिए. ज्यादातर Smart Power Strip लगभग 15A या उससे कम लोड के लिए ही डिजाइन किए जाते हैं. इसलिए इनमें भी बहुत ज्यादा बिजली खींचने वाले डिवाइस नहीं कनेक्ट कर सकते हैं और ये सेफ भी नहीं माना जाता है.
क्या है सेफ तरीका
अगर आप कई डिवाइस एक साथ इस्तेमाल करते हैं तो सबसे सुरक्षित तरीका है कि Power Strip को सीधे दीवार के सॉकेट में लगाएं, न कि Smart Plug के जरिए. अगर अलग-अलग डिवाइस को स्मार्ट कंट्रोल देना चाहते हैं तो उनके लिए अलग-अलग Smart Plug इस्तेमाल करना ही बेहतर ऑप्शन रहता है. इससे ओवरलोडिंग का खतरा कम होगा और आपके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी सेफ रहेंगे.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>एक, छोटी, सी, गलती, से, बढ़, सकता, है, शॉर्ट, सर्किट, का, खतरा, जानें, कैसे, Smart, Plug, बढ़ा, देता, है, लोगों, की, मुसीबत</media:keywords>
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        <title>Coding Apps For Kids: यूट्यूब पर फालतू कार्टून छुड़वाने वाले 5 सीक्रेट ऐप, जो खेल&amp;खेल में सिखा देंगे कोडिंग और साइंस</title>
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        <description><![CDATA[ Coding Apps For Kids: आज के समय में बच्चे मोबाइल, टैबलेट, स्मार्ट टीवी और वीडियो गेम्स के बीच बड़े हो रहे हैं. ज्यादातर पेरेंट्स की यही चिंता रहती है कि बच्चे घंटों तक यूट्यूब पर कार्टून वाले वीडियो देखते रहते हैं, जिससे उनका स्क्रीन टाइम तो बढ़ता है, लेकिन सीखने को बहुत कम मिलता है. ऐसे में कई ऐसे एप्स भी मौजूद हैं जो बच्चों को खेल-खेल में कोडिंग, लॉजिकल थिंकिंग और टेक्नोलॉजी की बुनियादी समझ दे सकते हैं. खास बात यह है कि इनमें पढ़ाई किसी क्लास रूम की तरह नहीं, बल्कि गेम, पहेलियां और इंटरएक्टिव एक्टिविटी के जरिए कराई जाती है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि यूट्यूब पर बच्चों के फालतू कार्टून छुड़वाने वाले पांच सीक्रेट ऐप कौन से हैं, जो खेल-खेल में बच्चों को कोडिंग और साइंस सिखा देंगे.&amp;nbsp;
Kodable
कोडिंग सीखने की शुरुआत करने वाले बच्चों के लिए Kodable को सबसे पॉपुलर ऐप्स में गिना जाता है. यह एक पहेलियां, भूल भुलैया और गेम्स के जरिए बच्चों को प्रोग्रामिंग के शुरुआती कांसेप्ट को समझाता है. विजुअल तरीके से सीखने की वजह से छोटे बच्चों के लिए इसे समझना आसान होता है और इसमें कोड की कठिन लाइनों की बजाय ग्राफिकल ऑब्जेक्ट का इस्तेमाल किया जाता है.&amp;nbsp;
CodeSpark
8 से 9 साल की उम्र के बच्चों के लिए CodeSpark एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है. इसमें The loops नाम के किरदारों के जरिए बच्चों को अलग-अलग टास्क पूरे करने होते हैं. इन एक्टिविटी के दौरान बच्चे लॉजिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स विकसित करते हैं खास बात यह है कि पढ़ना न जानने वाले बच्चे भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि इसका डिजाइन बहुत हद तक शब्दों पर निर्भर नहीं करता है.&amp;nbsp;
ScratchJr&amp;nbsp;
अगर बच्चा सिर्फ गेम खेलने के बजाय खुद गेम सीखना चाहता है, तो स्क्रैच जेआर उसके लिए उपयोगी हो सकता है. 5 से 7 साल के बच्चों के लिए तैयार यह ऐप &amp;nbsp;एनीमेशन, इंटरैक्टिव स्टोरी और छोटे गेम बनाने का मौका देता है. इससे बच्चों की क्रिएटिविटी बढ़ती है और वह क्रमबद्ध तरीके से सोचने की आदत विकसित करते हैं.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-क्या Solar Power Bank सिर्फ दिखावा है? खरीदने से पहले जान लें ये चौंकाने वाला सच
Tynker
Tynker बच्चों को विजुअल कोड ब्लॉक्स के जरिए प्रोग्रामिंग सीखाता है. जैसे-जैसे उनकी समझ बढ़ती है वह जावा स्क्रिप्ट, स्विफ्ट और पाइथन जैसी भाषाओं की ओर आगे बढ़ सकते हैं. इसमें गेम और पजल्स के साथ-साथ ऐसे कोर्स भी उपलब्ध हैं जो बच्चों को अपने ऐप और गेम बनाने की दिशा में प्रेरित करते हैं.&amp;nbsp;
LightBot
LightBot शुरुआती बच्चों के लिए एक आसान और मजेदार कोडिंग ऐप है. इसमें बच्चे इजी कमांड्स की मदद से एक रोबोट को अलग-अलग काम करवाते हैं. खेल-खेल में बच्चे loops, conditionals और sequencing जैसी प्रोग्रामिंग की महत्वपूर्ण अवधारणाओं से को भी समझ पाते हैं.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ऑनलाइन पेमेंट किया, लेकिन सामान कभी डिलीवर ही नहीं हुआ! तेजी से बढ़ रहे हैं साइबर फ्रॉड के तरीके, जानें कैसे रहें सुरक्षित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ऑनलाइन-पेमेंट-किया-लेकिन-सामान-कभी-डिलीवर-ही-नहीं-हुआ-तेजी-से-बढ़-रहे-हैं-साइबर-फ्रॉड-के-तरीके-जानें-कैसे-रहें-सुरक्षित</link>
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        <description><![CDATA[ Online Scam: देश में साइबर अपराध के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. जैस-जैसे टेक्नोलॉजी विकसित हो रही है वैसे ही ठग भी लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए नए तरीकों का इजात कर रहे हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको एक नए ऑनलाइन स्कैम के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से साइबर ठग लोगों को अपना शिकार बनाते हैं.
दरअसल, आज के समय में लोग ऑनलाइन शॉपिंग में ज्यादा इंट्रेस्ट रखते हैं. कुछ भी मंगवाना हो तो लोग आज अपने स्मार्टफोन की मदद से ऑनलाइन ऑर्डर कर देते हैं. अब इसी का फायदा उठाकर ठग आपको अपना शिकार बनाते हैं.
सोशल मीडिया के जरिए लोगों से ठगी
इतना ही नहीं, सोशल मीडिया वीडियोज भी लोगों को ठगने का जरिया बन चुका है. कई बार वीडियो में दावा किया जाता है प्रोडक्ट बहुत सस्ता है और उसे देखकर लोग प्रोडक्ट ऑर्डर कर देते हैं जो उनके घर तक कभी पहुंचता ही नहीं है.
डिलीवरी के नाम पर लाखों की ठगी
सिर्फ सामान न भेजना ही नहीं बल्कि अब ठग डिलीवरी प्रोसेस का भी गलत फायदा उठा रहे हैं. दरअसल, इस स्कैम में यूजर इंस्टाग्राम या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाए गए विज्ञापन के जरिए कुछ ऑर्डर करता है और उसके बाद व्हाट्सऐप मैसेज आता है कि उनका पार्सल भेजने से पहले एड्रेस वेरिफिकेशन के लिए 1,299 रुपये जमा करने होंगे जो बाद में वापस कर दिए जाएंगे. इसके बाद लोग पेमेंट करत देते हैं और ऐसे करके लोगों से कई हजार या कई बार लाखों की ठगी भी कर दी जाती है.
सस्ते ऑफर बन रहे चारा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अक्सर लोग सस्ते ऑफर के चक्कर में सामान ऑर्डर तो कर देते हैं लेकिन इससे उन्हें साइबर फ्रॉड का सामना करना पड़ जाता है. जी हां, दरअसल, आज के युवाओं में इंस्टाग्राम रील्स को लेकर काफी उत्साह देखा जाता है. ऐसे में रील्स के दौरान लोगों के ऐसे बेहतरीन ऑफर दिखाए जाते हैं जिनसे लोग उस लिंक पर क्लिक कर देते हैं और बाद में साइबर ठगी का शिकार बनते हैं.
बता दें कि ऐसे लिंक पर भूलकर भी क्लिक नहीं करना चाहिए. हमेशा ऑनलाइन शॉपिंग आधिकारी वेबसाइट या फिर वेरिफाईड ऐप के जरिए ही करना उचित माना जाता है.
ठग हुए पहले से स्मार्ट
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि पहले साइबर अपराध आज केवल नकली वेबसाइट या फर्जी पेमेंट तक सीमित थी. लेकिन अब फ्रॉड करने वाले ई-कॉमर्स सिस्टम की कमियों का फायदा उठा रहे हैं. आज कई मामलों में डिलीवरी एजेंट OTP का गलता इस्तेमाल करते हैं तो कहीं लोगों के अकाउंट में जानकारी बदल दी जाती है. इसी से समझ आता है कि आज साइबर अपराधी भी पहले से कहीं स्मार्ट तरीकों से लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं.
ऑनलाइन ठगी से कैसे बचें
ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए आपको कुछ जरुरी चीजों का ध्यान रखना चाहिए.

हमेशा भरोसेमंद ई-कॉमर्स वेबसाइट या ब्रांड की आधिकारिक साइट से खरीदारी करें.
सोशल मीडिया पर बहुत सस्ते ऑफर देखकर तुरंत भरोसा न करें.
सेलर की रेटिंग, रिव्यू, रिटर्न पॉलिसी और कॉन्टेक्ट डिटेल्स जरूर जांचें.
ज्यादातर कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन चुनना उचित रहता है.
खरीदारी का पूरा रिकॉर्ड तब तक सुरक्षित रखें जब तक सामान सही तरीके से मिल न जाए.

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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ऑनलाइन, पेमेंट, किया, लेकिन, सामान, कभी, डिलीवर, ही, नहीं, हुआ, तेजी, से, बढ़, रहे, हैं, साइबर, फ्रॉड, के, तरीके, जानें, कैसे, रहें, सुरक्षित</media:keywords>
    </item>
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        <title>Airtel ने बढ़ा दी Jio की टेंशन! Unlimited 5G के साथ इस नए प्लान में मिल रहे कई धांसू बेनिफिट्स</title>
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        <description><![CDATA[ Airtel New Recharge Plan: जहां एक तरफ स्मार्टफोन लोगों की जीवन का हिस्सा बन चुका है, वहीं, दूसरी तरफ, इंटरनेट ने भी लोगों की जिंदगी में अपनी एक खास जगह बना ली है. अब लोग इंटरनेट और स्मार्टफोन के बिना एक पल भी रहना पसंद नहीं करते हैं. अब देश में कई टेलीकॉम कंपनियां मौजूद हैं जो अपने यूजर्स को तरह-तरह के रिचार्ज प्लान ऑफर करती हैं.
इसी कड़ी में Airtel ने भी हाल ही में अपना एक नया रिचार्ज प्लान पेश किया है जिसमें यूजर्स को कई सारे धांसू बेनिफिट्स भी देखने को मिल जाएंगे. इस प्लान की सबसे बड़ी खास बात ये है कि इसकी कीमत भी 200 रुपये है. आइए जानते हैं कि इस प्लान में यूजर्स को क्या-क्या बेनिफिट्स मिल रहे हैं.
Airtel का 200 रुपये वाला रिचार्ज प्लान
आपको बता दें कि एयरटेल के इस रिचार्ज प्लान की कीमत महज 200 रुपये रखी है. इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिन है. बता दें कि ये प्लान आपके मौजूदा प्लान के साथ काम करेगा. इस प्लान में यूजर्स को कुल 30GB इंटरनेट डेटा भी मिल जाता है जिससे लोग आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे. साथ ही इस प्लान में यूजर्स को Unlimited 5G डेटा की भी सुविधा मिल रही है. हालांकि, इसके लिए यूजर्स के पास 5जी स्मार्टफोन होना जरुरी है और यूजर 5G एरिया में रह रहे हों.
इतना ही नहीं, इस नए रिचार्ज प्लान में यूजर्स को 28 दिनों तक JioHotstar Mobile का सब्सक्रिप्शन भी मिल जाएगा. इसके अलावा प्लान में यूजर्स को Airtel Xstream Play Premium का एक्सेस भी 28 दिनों तक मिलेगा. साथ ही प्लान में यूजर्स को और भी 18 ओटीटी ऐप्स के सब्सक्रिप्शन मिल जाएंगे.
Vi का 199 रुपये वाला प्लान
वोडाफोन-आईडिया के पास भी 199 रुपये वाला रिचार्ज प्लान मौजूद है. हालांकि, ये सिर्फ डेटा प्लान नहीं है बल्कि इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ ही 2जीबी इंटरनेट डेटा और 300 फ्री SMS जैसे बेनिफिट्स मिल जाते हैं. बता दें कि इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है.
Jio की बढ़ गई टेंशन
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एयरटेल के इस प्लान ने जियो की टेंशन बढ़ा दी है. बता दें कि Jio भी अपने यूजर्स को 28 दिनों तक 30GB डेटा वाला प्लान ऑफर करता है. इसके अलावा जियो यूजर्स को इस प्लान में JioHotstar के साथ-साथ 16 और OTT ऐप्स का सब्सक्रिप्शन मिल जाता है. बता दें कि जियो के इस प्लान की कीमत भी 200 रुपये है और ये भी आपके मौजूद प्लान के साथ ही काम करता है.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Airtel, ने, बढ़ा, दी, Jio, की, टेंशन, Unlimited, के, साथ, इस, नए, प्लान, में, मिल, रहे, कई, धांसू, बेनिफिट्स</media:keywords>
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    <item>
        <title>धीरे&amp;धीरे कम हो रही Instagram की Reach? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी गलतियां</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/धीरे-धीरे-कम-हो-रही-instagram-की-reach-कहीं-आप-भी-तो-नहीं-कर-रहे-ये-बड़ी-गलतियां</link>
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        <description><![CDATA[ Instagram Tips: इंस्टाग्राम आज युवाओं के बीच काफी फेमश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन चुका है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए आज कई लोग अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं. रील्स देखने से लेकर रील्स से पैसा कमाने तक, यूजर्स इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अक्सर, देखा गया है कि कई यूजर्स के अकाउंट्स पर धीरे-धीरे रीच कम होने लगती है. अगर आपके साथ ही ऐसा ही हो रहा है तो ये खबर आपके लिए ही है. दरअसल, आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन गलतियों की वजह से इंस्टाग्राम पर रीच कम होने लगती हैं.
ऑडियंस से कनेक्ट न होना
Instagram उन अकाउंट्स को प्राथमिकता देता है जिन पर अच्छी Engagement होती है. अगर आप कमेंट्स का जवाब नहीं देते, DMs को नजरअंदाज करते हैं या अपने फॉलोअर्स से बातचीत नहीं करते हैं तो भी आपकी Reach कम हो सकती है. इसीलिए समय-समय पर अपने फॉलोअर्स से जुड़ने की कोशिश करें.
पोस्ट करने का सही समय
आपको बता दें कि अगर आपका कंटेंट बढ़िया है लेकिन वो सही समय पर पोस्ट नहीं हुआ तो भी धीरे&amp;mdash;धीरे रीच कम हो जाती है. इसीलिए कोशिश करें कि आपकी ऑडियंस जब सबसे ज्यादा एक्टिव रहती हो, उसी समय पोस्ट करें. Instagram Insights की मदद से आप अपने फॉलोअर्स की एक्टिविटी का समय आसानी से देख सकते हैं.
गलत और फालतू के Hashtags का इस्तेमाल
अक्सर देखा गया है कि लोग बिना सोचे समझे कई सारे टैग्स का इस्तेमाल कर देते हैं जिससे उन्हें लगता है कि रीच बढ़ जाएगी. लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है. दरअसल, बार-बार एक जैसे Hashtags इस्तेमाल करने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है. हमेशा अपने कंटेंट से जुड़े और लिमिटेड Hashtags का ही इस्तेमा करें.
लगातार एक जैसा ही कंटेंट पोस्ट करना
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंस्टाग्राम अब नए कंटेंट खोजता है. प्लेटफॉर्म पर बार-बार एक जैसा ही कंटेंट डालने से रीच कम हो सकती है. Instagram भी ऐसे अकाउंट्स की Reach सीमित कर देता है जिनका कंटेंट नया या दिलचस्प नहीं होता. इसलिए समय-समय पर नए फॉर्मेट जैसे Reels, Carousel पोस्ट और Stories का इस्तेमाल करना बेहतर ऑप्शन रहता है.
खराब क्वालिटी वाली पोस्ट
इंस्टाग्राम पर कोई भी पोस्ट करने से पहले अक्सर लोग फोटो की क्वालिटी नहीं चेक करते हैं. धुंधली फोटो, लो क्वालिटी वाले वीडियो या कई दिनों तक कोई पोस्ट न करना भी आपके अकाउंट की रीच को कम कर सकता है. इसीलिए अच्छी क्वालिटी के फोटो और वीडियो का इस्तेमाल करना चाहिए. साथ ही एक तय शेड्यूल बनाकर पोस्ट करना चाहिए.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>15,000 के बजट में 5 सबसे बेस्ट कैमरा फोन्स, जो देते हैं DSLR जैसी पिक्चर क्वालिटी</title>
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        <description><![CDATA[ 15,000 के बजट में 5 सबसे बेस्ट कैमरा फोन्स, जो देते हैं DSLR जैसी पिक्चर क्वालिटी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>फोन में चार कैमरे होने का क्या फायदा? फोटो लेते समय कौन&amp;सा कैमरा होता है एक्टिव, जानिए पूरी कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: फोटोग्राफी भी आज समय के साथ काफी बदल चुकी है. अब लोग अपने स्मार्टफोन की मदद से ही कई बेहतरीन फोटो ले लेते हैं. बता दें कि स्मार्टफोन ने लोगों के जीवन में अपनी एक अलग जगह बना ली है. अब यूजर्स करीब सभी कामों के लिए अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं. वहीं, अब एडवांस स्मार्टफोन्स में तीन से चार कैमरा देखने को मिलते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फोटो लेते समय कौन सा वाला कैमरा एक्टिव होता है. आइए जानते हैं कि फोन में मौजूद तीन या चार कैमरों की क्या होती है जरुरत.
हर कैमरे का अलग-अलग काम
आज कल के एडवांस स्मार्टफोन में ज्यादातर कई सारे कैमरा मौजूद होते हैं. इसको डिजाइन के लिए नहीं दिया जाता है बल्कि इन कैमरों के अलग-अलग काम भी होते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि प्राइमरी कैमरे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है क्योंकि इसे डेली के काम के लिए काम करना होता है.
वहीं, अल्ट्रा-वाइड कैमरा बड़े ग्रुप, बिल्डिंग या नेचर को ज्यादा एरिया के साथ कैप्चर करने का काम करता है. इसके अलावा टेलीफोटो कैमरा दूर मौजूद चीजों को बिना ज्यादा क्वालिटी खोए जूम करके कैप्चर करता है. मैक्रो कैमरा का काम बहुत छोटी चीजों की क्लोज-अप फोटो लेना होता है.
सभी कैमरे एक साथ फोटो लेते हैं?
ज्यादातर केस में ऐसा बिलकुल भी नहीं होता है. बता दें कि जब आप नॉर्मल फोटो क्लिक करते हैं तो फोन प्राइमरी कैमरा का इस्तेमाल करता है. अगर आप अल्ट्रा-वाइड मोड चुनते हैं तो अल्ट्रा-वाइड कैमरा एक्टिव हो जाता है. इसी तरह ज्यादा जूम करने पर टेलीफोटो कैमरा काम करता है.
हालांकि, कुछ स्मार्टफोन बेहतर इमेज क्वालिटी यूजर को देने के लिए सभी कैमरों से मिली डिटेल्स को प्रोसेस जरूर करते हैं. लेकिन एक फोटो के लिए सभी कैमरा यूज होते हैं, ऐसा नहीं है.
चार कैमरों का असली फायदा क्या है
आपको बता दें कि फोन में ज्यादा कैमरा होने का ये मतलब बिलकुल नहीं होता है कि एक फोटो बहुत ज्यादा बेहतर आएगी. इसका असली फायदा ये है कि एक ही फोन से अलग-अलग परिस्थितियों में बेहतर तस्वीरें ली जा सकती हैं. चौड़े लैंडस्केप से लेकर दूर की बिल्डिंग हो या फिर किसी चीज की बहुत पास से फोटो लेनी हो. सभी स्थिति में एक ही फोन से आप फोटो ले सकते हैं. इसके अलावा कई स्मार्टफोन में अब AI और इमेज प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल होता है जो फोटो को और भी ज्यादा बेहतर बनाने का काम करती है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्या प्ले स्टोर पर कोई भी अपलोड कर सकता है कैसा भी ऐप, जानें क्या हैं नियम?</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में करोड़ों लोग अपने स्मार्टफोन में ऐप डाउनलोड करने के लिए प्ले स्टोर का इस्तेमाल करते हैं. ऐप डेवलपर्स के लिए भी प्ले स्टोर सबसे बड़ा प्लेटफार्म माना जाता है. वहीं प्ले स्टोर के नियमों को लेकर भी अक्सर सवाल उठते आए हैं कि क्या कोई भी व्यक्ति प्ले स्टोर पर अपनी मर्जी का कोई भी ऐप अपलोड कर सकता है, तो ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या प्ले स्टोर पर कोई भी, कैसा भी ऐप अपलोड कर सकता है और इसे लेकर गूगल के नियम क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या प्ले स्टोर पर कोई भी अपलोड कर सकता है ऐप?&amp;nbsp;
गूगल प्ले स्टोर पर कोई भी व्यक्ति कैसा भी ऐप अपलोड नहीं कर सकता है. दरअसल गूगल प्ले स्टोर पर ऐप पब्लिश करने के लिए कई नियमों और शर्तों का पालन करना जरूरी होता है. अगर कोई ऐप इन नियमों पर खरा नहीं उतरता है, तो गूगल उसे पब्लिश करने से इनकार भी कर सकता है. गूगल प्ले स्टोर पर ऐप अपलोड करने के लिए सबसे पहले गूगल प्ले डेवलपर अकाउंट बनाना पड़ता है. इसके लिए एक बार रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है. अकाउंट बनने के बाद डेवलपर प्ले कंसोल के जरिए अपना नया ऐप बन सकता है, उसकी जानकारी भर सकता है और ऐप को समीक्षा के लिए भेज सकता है.&amp;nbsp;
प्ले स्टोर पर ऐप अपलोड करने से पहले करनी होती है तैयारी&amp;nbsp;
ऐप को प्ले स्टोर पर भेजने से पहले डेवलपर को उसे पूरी तरह तैयार करना होता है. ऐप को रिलीज की से साइन करना जरूरी होता है. इसके अलावा अलग-अलग डिवाइस और स्क्रीन साइज पर सेटिंग टेस्टिंग, ऐप के साइज को ऑप्टिमाइज करना और गूगल की सभी नीतियों का पालन करना भी जरूरी होता है. ऐप डेवलपर को ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी तैयार करनी होती है और उसे ऑनलाइन अपलोड करना पड़ता है. साथ ही ऐप आईकॉन, स्क्रीनशॉट और फीचर्स ग्राफिक जैसी जरूरी फाइलें भी अपलोड करनी होती है.&amp;nbsp;
प्ले स्टोर लिस्टिंग में देनी होती है पूरी जानकारी&amp;nbsp;
गूगल ऐप पब्लिश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी मांगता है, जिसमें ऐप का नाम, शॉर्ट डिस्क्रिप्शन डिटेल, ऐप की कैटेगरी, सपोर्ट ईमेल वेबसाइट और प्राइवेसी पॉलिसी का लिंक भी शामिल होता है. इसके अलावा डेवलपर फीचर ग्राफिक और अलग-अलग डिवाइस के स्क्रीनशॉट भी अपलोड करने होते हैं, ताकि यूजर्स ऐप डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सके.&amp;nbsp;
कंटेंट रेटिंग और डेटा सेफ्टी होती है जरूरी&amp;nbsp;
गूगल प्ले स्टोर पर ऐप अपलोड करने से पहले हर ऐप के लिए कंटेंट रेटिंग भरना अनिवार्य है. इसके जरिए तय किया जाता है कि ऐप सभी उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त है या नहीं. अगर डेवलपर गलत जानकारी देता है या यह सेक्शन खाली छोड़ देता है, तो ऐप को हटाया जा सकता है. इस तरह से डेटा सेफ्टी सेक्शन में भी यह बताना होता है कि यह ऐप कौन-कौन सा डेटा इकट्ठा करता है, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है और क्या वह किसी तीसरे पक्ष के साथ शेयर किया जाता है.&amp;nbsp;
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कौन से ऐप एक्सेप्ट करता है गूगल प्ले स्टोर?
गूगल प्ले स्टोर पर वहीं ऐप एक्सेप्ट किए जाते हैं, जो उसकी नीतियों का पालन करते हो. ऐप में किस तरह का मालवेयर, धोखाधड़ी, फर्जी पिक्चर या यूजर्स को गुमराह करने वाली जानकारी नहीं होनी चाहिए. अगर ऐप कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन या कांटेक्ट जैसी परमिशन मांगता है, तो इसके पीछे कारण होना चाहिए. साथ ही डेवलपर को यह भी बताना होता है कि उस डेटा का उपयोग कैसे किया जाएगा. वहीं अगर कोई डेवलपर गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे ऐप अपलोड करने की कोशिश करता है, जो प्राइवेसी पॉलिसी के लिए डेटा सेफ्टी के लिए खतरा हो तो वह उसे रिजेक्ट कर सकता है. इसके अलावा गूगल प्ले स्टोर कॉपीराइट वाले कंटेंट के ऐप को भी रिजेक्ट कर देता है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>क्या Solar Power Bank सिर्फ दिखावा है? खरीदने से पहले जान लें ये चौंकाने वाला सच</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Power Bank: लो बैटरी की समस्या आज लगभग सभी डिवाइसों के साथ देखने को मिल जाती है. स्मार्टफोन से लेकर लैपटॉप या टैबलेट तक, लोग डिवाइसेज को ज्यादा इस्तेमाल करते हैं जिससे अक्सर लो बैटरी की समस्या देखने को मिलती है. ऐसे में मार्केट में पावरबैंक लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्शन माना जाता था. लेकिन अब सोलर पावर बैंक मार्केट में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. लेकिन क्या सच में सोलर पावर बैंक काम करता है या फिर ये एक दिखावा है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच.
क्या है Solar Power Bank
जानकारी के मुताबिक, Solar Power Bank एक नॉर्मल पावर बैंक की तरह ही होता है. इस डिवाइस में बस एक छोटा सा फर्क होता है. दरअसल, सोलर पावर बैंक के ऊपर छोटा सा सोलर पैनल लगा होता है. कंपनी दावा करती हैं कि ये डिवाइस सूरज की रौशनी से चार्ज हो जाता है. डिवाइस के ऊपर लगे पैनल से ये डिवाइस को चार्ज कर लेता है. हालांकि, इसकी चार्जिंग क्षमता पूरी तरह सोलर पैनल पर निर्भर नहीं होती.
क्या धूप से चार्ज हो जाता है डिवाइस
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ज्यादातर Solar Power Bank में लगे सोलर पैनल बहुत छोटे साइज के होते हैं. इसी वजह से ये बहुत धीमी गति से बैटरी को चार्ज करते हैं. कई मामलों में देखा गया है कि पूरी बैटरी को चार्ज करने में करीब 60 घंटे या उससे भी ज्यादा का समय लग जाता है. इसलिए अगर आप भी सोचते हैं कि धूप में फोन को रखकर अपना फोन चार्ज कर लेंगे तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है.
सोलर पैनल का क्या फायदा
दरअसल, सोलर पावर बैंक के ऊपर लगे पैनल का सबसे बड़ा फायदा आपातकाल स्थिति में आता है. ये इसलिए दिया जाता है कि अगर बिजली सोर्स नहीं है तो इसे धूप में रख दें जिससे कुछ तो बैटरी धीरे-धीरे चार्ज हो सकेगी. इससे जरूरत पड़ने पर फोन में थोड़ी चार्जिंग मिल सकती है. इसीलिए ये चार्जिंग के लिए नहीं बल्कि एक बैकअप के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप भी सोलर पावर बैंक खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपको भी इन चीजों का ध्यान रखना चाहिए.
कम से कम 10,000mAh या उससे ज्यादा पावर वाले मॉडल को चुनें.
USB-C फास्ट चार्जिंग और सेफ्टी फीचर्स जरूर देखें.
अगर सोलर चार्जिंग आपके लिए जरूरी है तो बड़े और बेहतर सोलर पैनल वाले मॉडल पर विचार करें.

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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>अब सिर्फ एक टेक्स्ट लिखकर बना सकेंगे मजेदार गेम्स! Meta ले आया ये नया ऐप, जानें कैसे करें इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ Meta AI Pocket App: मेटा अपने यूजर्स के लिए समय-समय पर नए अपडेट्स पेश करती रहती है. लेकिन अब मेटा ने अपना एक नया एआई ऐप पेश किया है जिसकी मदद से लोग बिना टेक्स्ट लिखे ही कई सारे मजेदार गेम्स को तैयार कर सकते हैं. जी हां, दरअसल, मेटा ने अपना नया AI ऐप Pocket लॉन्च किया है जिसकी सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये ऐप बिना कोडिंग सीखे ही कई छोटे-मोटे गेम्स को आपके लिए तैयार कर सकता है.
क्या है Pocket ऐप
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये एक नया एआई ऐप है जिसमें यूजर्स को नए गेम्स तैयार करने का मौका मिलता है. इस ऐप के जरिए लोग अपनी सोच के अनुसार ही अपना एक नया गेम तैयार कर सकते हैं. जानकारी के अनुसार, इस Pocket ऐप में एक स्क्रॉल करने वाला फीड दिया गया है जहां दूसरे यूजर्स द्वारा बनाए गए गेम्स और क्रिएशंस को देखा, खेला और शेयर भी किया जा सकता है. बता दें कि Meta ने इन AI से तैयार होने वाले प्रोजेक्ट्स को Gizmos नाम दिया है. कंपनी के अनुसार ये एक ऐसा क्रिएटिव प्लेटफॉर्म है जहां लोग अपनी AI क्रिएशंस को बना सकते हैं और साथ ही दूसरों के साथ शेयर भी कर सकते हैं.
इस प्लेटफॉर्म से है रिश्ता
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Pocket कोई एक नया प्लेटफॉर्म या प्रोजेक्ट नहीं है. दरअसल, ये प्लेटफॉर्म पूरी तरह से Gizmo नाम के AI गेमिंग प्लेटफॉर्म की टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है. बता दें कि Gizmo को मेटा ने कुछ समय पहले हासिल कर लिया था. ये प्लेटफॉर्म भी बिलकुल पॉकेट ऐप की तरह ही काम करता था जहां यूजर अपने दिमाग से जो प्रॉम्प्ट लिखते थे उसे प्लेटफॉर्म गेम के रूप में तैयार कर देता था.
अभी तक नहीं हुआ आधिकारिक ऐलान
बता दें कि दिलचस्प बात ये है कि Meta ने अभी तक Pocket ऐप की औपचारिक घोषणा नहीं की है. कंपनी ने इस बारे में किसी भी सवाल का आधिकारिक जवाब भी नहीं दिया है. जिस तरह ये ऐप बिना किसी प्रमोशन के लॉन्च किया गया है उससे ये अनुमाना लगाया जा रहा है कि ये ऐप फिलहाल टेस्टिंग फेज में है और इसमें कई सारे और अपडेट्स देखने को मिल सकते हैं. ऐसे में पॉकेट ऐप को लोगों से अच्छा रिस्पांस तो मिल रहा है लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि इस ऐप में मेटा अपने यूजर्स को और क्या नया दे सकती है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Telegram की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने पाइरेटेड फिल्में हटाने के लिए दिया 15 दिन का अल्टीमेटम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/telegram-की-बढ़ी-मुश्किलें-सरकार-ने-पाइरेटेड-फिल्में-हटाने-के-लिए-दिया-15-दिन-का-अल्टीमेटम</link>
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        <description><![CDATA[ Notice to Telegram: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप पर हाल ही में एक नया फीचर यूजरनेम आया था जिसके बाद से ये मुद्दा काफी तेजी से चर्चा में आया है. दरअसल, यूजरनेम पर कई सारे सवाल उठ रहे थे जिसके बाद से सरकार ने इस फीचर पर रोक लगा दिया है. अब व्हाट्सऐप के बाद सरकार ने टेलीग्राम को भी नोटिस जारी कर दिया है.
दरअसल, भारत में ऑनलाइन पाइरेसी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information &amp;amp; Broadcasting) ने Telegram को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपनी एंटी-पाइरेसी व्यवस्था को मजबूत करने और इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में पाइरेटेड फिल्में, OTT कंटेंट और कई कॉपीराइट कंटेंट शेयर किए जा रहे हैं जिससे फिल्म इंडस्ट्री और क्रिएटर इकोनॉमी को भारी नुकसान हो रहा है.
Telegram से सरकार ने क्या कहा
जानकारी के अनुसार, मंत्रालय ने Telegram को साफ निर्देश दिए हैं कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद पाइरेटेड फिल्मों और कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले ऑडियो-वीडियो कंटेंट की पहचान करने, उनकी रिपोर्टिंग करने, उन तक पहुंच रोकने और उन्हें हटाने के लिए कोई मजबूत तरीका तैयार करें.
इसके अलावा सरकार का मानना है कि केवल शिकायत मिलने के बाद कंटेंट हटाना ही पर्याप्त नहीं है. प्लेटफॉर्म को खुद भी ऐसे कंटेंट की पहचान करने और समय रहते उसे हटाने के लिए जरुरी कदम उठाने होंगे.
Grievance Redressal की मांग
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने Telegram से उसके Grievance Redressal सिस्टम की पूरी जानकारी भी मांगी है. सरकार जानना चाहती है कि फिल्म निर्माता, OTT प्लेटफॉर्म, ब्रॉडकास्टर और कानून लागू करने वाली एजेंसियां पाइरेटेड कंटेंट की शिकायत कैसे दर्ज करा सकती हैं और उन शिकायतों पर कितनी तेजी से कार्रवाई की जाती है.
बार-बार उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई
सरकार ने Telegram से उन यूजर्स और नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने को कहा है जो बार-बार पाइरेटेड कंटेंट साझा करते हैं. इसमें केवल पर्सनल अकाउंट ही नहीं बल्कि चैनल, ग्रुप, बॉट, एडमिन और उनसे जुड़े कई नेटवर्क भी शामिल हैं. सराकर के इस कदम का मसकद ऐसे पूरे नेटवर्क को खत्म करना है जो लगातार फिल्मों और वेब सीरीज की पाइरेटेड कॉपी लोगों तक पहुंचाते हैं.
15 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट
सरकार ने Telegram को 15 दिनों के भीतर एक डिटेल Action Taken Report (ATR) जमा करने का निर्देश दिया है. इस रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म को बताना होगा कि उसने पाइरेटेड कंटेंट की पहचान, उन्हें रोकने और हटाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए हैं. अगर तय समय के अंदर रिपोर्ट नहीं दी गई तो सरकार मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है.
IT कानून और कॉपीराइट कानून के तहत जिम्मेदारी
सरकार ने Telegram को बताया है कि भारत में एक इंटरमीडियरी के तौर पर उसे आईटी एक्ट, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत जरूरी सावधानी बरतनी होगी.
सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य भारत की तेजी से बढ़ती क्रिएटर इकोनॉमी, फिल्म इंडस्ट्री, OTT प्लेटफॉर्म, ब्रॉडकास्टर्स, फिल्म निर्माताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स के हितों की रक्षा करना है. अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पाइरेटेड कंटेंट आसानी से मिल जाएगा तो इससे न केवल कंटेंट बनाने वालों को आर्थिक नुकसान होगा बल्कि इस इंडस्ट्री पर भी सीधा असर देखने को मिलेगा. इसी वजह से सरकार अब प्लेटफॉर्म लेवल पर जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्त कदम उठा रही है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Telegram, की, बढ़ी, मुश्किलें, सरकार, ने, पाइरेटेड, फिल्में, हटाने, के, लिए, दिया, दिन, का, अल्टीमेटम</media:keywords>
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        <title>एक घंटे में कितनी बिजली पैदा करता है Solar Panel? जानें क्या होता है पूरा प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel: महंगी बिजली के चलते आज लगभग सभी जगहों पर सोलर एनर्जी काफी तेजी से विकसित हो रही है. अब लोग अपने घरों में बिजली सप्लाई के लिए सोलर पैनलों का इस्तेमाल करने लगे हैं. बता दें कि सोलर एनर्जी पर्यावरण के भी अनूकूल है इसीलिए सरकार भी सोलर पैनल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है. आज मार्केट में कई तरह के सोलर पैनल मौजूद हैं. लोग अपनी जरुरत के हिसाब से सोलर पैनल का चयन करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक घंटे में सोलर पैनल कितनी बिजली पैदा करता है. आइए जानते हैं विस्तार से.
कैसे सूरज की रौशनी से तैयार होती है बिजली
जानकारी के अनुसार, सोलर पैनल के अंदर सिलिकॉन से बनी फोटोवोल्टिक (Photovoltaic) सेल्स लगी होती हैं. अब जब सूरज की किरणें इन सेल्स पर पड़ती हैं तो उनमें मौजूद इलेक्ट्रॉन्स एक्टिव हो जाते हैं और उनका फ्लो शुरू हो जाता है. यही फ्लो डायरेक्ट करंट (DC) बिजली के रूप में निकलता है.
इसके बाद ये DC बिजली इनवर्टर में जाती है जहां इसे अल्टरनेटिंग करंट (AC) में बदला जाता है. यही AC बिजली घर के पंखे, टीवी, फ्रिज, एसी और अन्य डिवाइस को चलाने के काम आती है.
एक घंटे में कितनी बिजली होती है पैदा
दरअसल, सोलर पैनल द्वारा बनने वाली बिजली उसके Watt, सूरज की रौशनी और मौसम पर निर्भर करती है. उदाहरण के लिए बता दें कि अगर आपके पास 400 वॉट का सोलर पैनल है और उसे एक घंटे तक अच्छी और सीधी धूप मिलती है तो वह लगभग 0.4 यूनिट (0.4 kWh) बिजली पैदा कर सकता है.
इसी तरह 100W पैनल लगभग 0.1 यूनिट प्रति घंटा, 250W पैनल लगभग 0.25 यूनिट प्रति घंटा और 500W पैनल लगभग 0.5 यूनिट प्रति घंटा बिजली पैदा करने में सक्षम है. हालांकि, अगर सोलर पैनल सही तरीके से इंस्टॉल नहीं है, मौसल ठीक नहीं है या फिर किसी दूसरी वजह से भी बिजली पैदा करने की ताकत में बदलाव हो सकता है.
एक दिन में कितनी मिलती है बिजली
आपको बता दें कि देश में नॉर्मली रोजाना 4 से 6 घंटे की अच्छी धूप मिल जाती है. ऐसे में अगग आपके घर में 400W का एक पैनल लगा हुआ है तो वो पूरे दिन में लगभग 1.6 से 2.4 यूनिट तक बिजली बना सकता है. वहीं, अगर आपके घर में 3 किलोवॉट (3kW) का सोलर सिस्टम लगा है तो वह मौसम और धूप के अनुसार प्रतिदिन करीब 12 से 18 यूनिट तक बिजली पैदा कर सकता है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब फोन में ही सेव होगा आपका Digital Signature! Google ला रहा नया ऐप, जानें यूजर्स को क्या होगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Google Signature App: गूगल लगातार यूजर्स की प्राइवेसी के लिए नए-नए फीचर्स पेश कर रही है. इसी कड़ी में गूगल अब एक नए ऐप को जल्द ही यूजर्स के लिए पेश करने वाली है जिसकी मदद से अब लोग अपना डिजिटल सिग्नेचर फोन में ही सेव कर सकेंगे. जी हां, दरअसल, गूगल एक नया Signatures ऐप रोलआउट कर रही है जिसकी मदद से यूजर्स अपने स्मार्टफोन में डिजिटल सिग्नेचर को सेफ रख सकेंगे.
क्या है Google का नया ऐप
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल के नए Signatures ऐप का यूजर्स की सुविधा के लिए तैयार किया जा रहा है. इस ऐप का मेन उद्देश्य यूजर्स की सेफ्टी है. दरअसल, इस ऐप आपके डिजिटल सिग्नेचर को आपके फोन में सेव करके रखेगा. साथ ही यूजर को इसमें कई तरीकों से अपने सिग्नेचर को तैयार करने का ऑप्शन मिलेगा. इस ऐप की मदद से यूजर स्क्रीन पर हाथ से सिग्नेचर बना सकते हैं, पहले से मौजूद सिग्नेचर की फोटो अपलोड कर सकते हैं या फिर अपना नाम टाइप करके अलग-अलग फॉन्ट स्टाइल में डिजिटल सिग्नेचर तैयार कर सकते हैं.
इसके अलावा ऐप में आपको अलग-अलग सिग्नेचर सेव करने का भी ऑप्शन मिलेगा. इसकी मदद से आप अपनी जरुरत और अलग-अलग जगहों पर उन सिग्नेचरों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कैसे इस्तेमाल करें ऐप
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपके फोन में जून 2026 का Google Play System Update इंस्टॉल है तो आप भी इस नए ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले Settings में जाकर Google Play System Update चेक करें और नया अपडेट इंस्टॉल करें. इसके बाद ऐप ड्रॉअर में Signatures ऐप दिखाई नहीं देगा.
इसे इस्तेमाल करने के लिए आपको Activity Launcher जैसे ऐप की मदद लेनी होगी. वहां Signature सर्च करने पर इससे जुड़े अलग-अलग ऑप्शन दिखाई देंगे जिनकी मदद से आप नया सिग्नेचर बना सकते हैं और पहले से सेव सिग्नेचर्स को मैनेज कर सकते हैं.
कब मिलेगा पूरी तरह तैयार ऐप
जानकारी के अनुसार, फिलहाल ये ऐप पूरी तरह तैयार नहीं माना जा रहा है. मौजूदा समय में यूजर केवल सिग्नेचर बनाकर सेव कर सकते हैं, उन्हें एडिट या डिलीट कर सकते हैं और Manage Signatures सेक्शन में जाकर उनको मैनेज कर सकते हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, ये ऐप कुछ Google Pixel, Samsung और OnePlus स्मार्टफोन्स में दिखाई देना शुरू हो गया है. खास बात यह है कि यह किसी Android वर्जन अपडेट के बजाय Google Play System Update के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>मोबाइल से बीच सड़क हैक हो रहे ई&amp;रिक्शा? पढ़ें BAT&amp;BMS विवाद और EV साइबर सुरक्षा की पूरी कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ कुछ दिन पहले तक शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक मोबाइल ऐप ई-रिक्शा को लेकर पूरे देश में इतनी बड़ी बहस छेड़ देगा, लेकिन पिछले एक हफ्ते में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने ठीक यही किया. इन वीडियो में कुछ लोग मोबाइल फोन की मदद से चलते ई-रिक्शा के पास जाते हैं और कुछ ही सेकंड में वाहन बंद हो जाता है. देखते ही देखते ये वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच गए. ई-रिक्शा चालकों में डर फैल गया. बैटरी बनाने वाली कंपनियों पर सवाल उठने लगे और आखिरकार सरकार को भी इस पूरे मामले में कार्रवाई करनी पड़ी.
शुरुआत में यह पूरा विवाद चीनी बैटरी मैनेजमेंट ऐप BAT-BMS के इर्द-गिर्द घूम रहा था, लेकिन जैसे-जैसे बात आगे बढ़ी, यह साफ होता गया कि मामला किसी एक ऐप का नहीं है. असली सवाल भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV इकोसिस्टम की साइबर सुरक्षा का है. असली सवाल यह है कि जिस रफ्तार से देश में EV अपनाए जा रहे हैं, उतनी ही मजबूत उनकी डिजिटल सुरक्षा है भी या नहीं? चलिए इस पूरी कहानी को शुरू से समझते हैं.
सरकार ने अब तक क्या किया?
सबसे ताजा अपडेट यह है कि केंद्र सरकार ने इस मामले से जुड़े दो ऐप हटवा दिए हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY के सचिव एस कृष्णन ने 3 जुलाई को बताया कि जो दो ऐप उनके संज्ञान में आए थे, उन्हें Google Play Store और Apple App Store से हटा दिया गया है. ये दो ऐप BAT-BMS और Epoch Li-ion हैं.&amp;nbsp;
एस कृष्णन ने यह भी कहा कि ऐप स्टोर्स को खुद भी सावधानी बरतनी होगी और सरकार Google तथा Apple के साथ बातचीत करेगी, ताकि भविष्य में नुकसान पहुंचाने वाले ऐसे ऐप दोबारा उपलब्ध न हों. इसके साथ ही सरकार अब इस पूरी घटना के पीछे छिपी बड़ी तस्वीर यानी बैटरी सिस्टम की साइबर कमजोरियों की भी जांच कर रही है.
सबसे पहले समझिए BMS क्या होता है?
इस पूरी कहानी को समझने के लिए सबसे पहले BMS को समझना जरूरी है. हर लिथियम-आयन बैटरी के अंदर छोटा इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम होता है, जिसे बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी BMS कहते हैं.&amp;nbsp;
अगर बैटरी को इंसान का शरीर मान लें तो BMS उसका दिमाग है. यही तय करता है कि बैटरी कितनी चार्ज होगी, कितनी डिस्चार्ज होगी और किस सेल का तापमान कितना है. ऐप यह भी देखता है कि कहीं बैटरी ओवरहीट तो नहीं हो रही और कहीं शॉर्ट सर्किट का खतरा तो नहीं है. कुल मिलाकर BMS का काम यह पक्का करना है कि बैटरी सुरक्षित तरीके से चलती रहे.
आजकल कई आधुनिक BMS में ब्लूटूथ मॉड्यूल भी लगा होता है. इसकी मदद से मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी की पूरी जानकारी देखी जा सकती है. सर्विस इंजीनियर और अधिकृत डीलर इसी ऐप से बैटरी की सेहत जांचते हैं. कुछ BMS में सुरक्षा कारणों से बैटरी को ऑन या ऑफ करने का विकल्प भी दिया जाता है. असल विवाद यहीं से शुरू हुआ है, जो फीचर सर्विसिंग को आसान बनाने के लिए बनाया गया था, अब उसके गलत इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है.
वायरल वीडियो में आखिर क्या दिखा?
सोशल मीडिया पर घूम रहे वीडियो में दावा किया गया कि कुछ लोग सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा के पास जाते हैं, मोबाइल ऐप खोलते हैं, बैटरी से कनेक्ट होते हैं और कुछ सेकंड बाद ई-रिक्शा बंद हो जाता है.&amp;nbsp;
कई वीडियो में ड्राइवर परेशान दिखे. किसी को बीच सड़क रिक्शा धक्का देकर ले जाना पड़ा तो किसी की दिनभर की कमाई रुक गई. कुछ लोगों ने इसे एक तरह का प्रैंक बना लिया और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में इसे टिर्री कंट्रोल जैसा नाम भी दिया जाने लगा. कई वीडियो में तो रिकॉर्डिंग के बाद बैटरी दोबारा चालू भी कर दी गई, सिर्फ ड्राइवर का रिएक्शन कैमरे में कैद करने के लिए.
इन वीडियो ने आम लोगों के मन में एक धारणा बना दी कि कोई भी व्यक्ति मोबाइल से किसी भी ई-रिक्शा को कभी भी बंद कर सकता है. क्या सचमुच ऐसा है? यहीं पर ठहरकर सोचने की जरूरत है.
क्या सच में हर ई-रिक्शा बंद किया जा सकता है
इसका सीधा जवाब है नहीं. जानकारों के मुताबिक, सभी ई-रिक्शा इस समस्या की चपेट में नहीं हैं. जो ई-रिक्शा लेड-एसिड बैटरी पर चलते हैं, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं, क्योंकि उनमें ब्लूटूथ वाला BMS होता ही नहीं. इसी तरह कई बड़ी कंपनियों की बैटरियां अपने अलग और बंद यानी प्रोप्राइटरी ऐप पर चलती हैं और किसी थर्ड पार्टी ऐप से जुड़ती ही नहीं.
खतरा सिर्फ उन कुछ ब्लूटूथ वाली लिथियम बैटरियों पर है, जिनसे इस तरह के आम ऐप कनेक्ट हो सकते हैं. उनमें भी जोखिम तभी है, जब BMS में मजबूत पासवर्ड या ऑथेंटिकेशन न हो. यानी वायरल वीडियो जो तस्वीर पेश कर रहे हैं, वह हर वाहन पर लागू नहीं होती. यह बात इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे बेवजह की दहशत को रोका जा सकता है.
BAT-BMS विवाद कैसे शुरू हुआ और यह ऐप है क्या?
वायरल वीडियो के बाद सबसे पहले BAT-BMS नाम का ऐप चर्चा में आया. यह चीन की कंपनी शेनझेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी का बनाया हुआ ऐप है और मूल रूप से इसे ब्लूटूथ वाली लिथियम-आयन बैटरियों की निगरानी और सर्विसिंग के लिए तैयार किया गया था.
इस ऐप में बैटरी का वोल्टेज करंट तापमान चार्जिंग स्टेटस और बैटरी हेल्थ जैसी जानकारी देखी जा सकती है. साथ ही, कुछ कंपैटिबल बैटरियों में इसमें कंट्रोल फीचर भी मौजूद है, यानी बैटरी को ऑन या ऑफ करने की सुविधा. आरोप यही है कि कुछ लोग इसी कंट्रोल फीचर का गलत फायदा उठा रहे थे. जानकारों के मुताबिक, यह ऐप करीब दस से पंद्रह मीटर की ब्लूटूथ रेंज में मौजूद कंपैटिबल बैटरी से जुड़ सकता है और अगर उस बैटरी में सुरक्षा कमजोर हो तो उसे बंद तक किया जा सकता है.
फिर कहानी में नया मोड़ कैसे आया?
शुरू में माना जा रहा था कि दिक्कत सिर्फ BAT-BMS में है और इसे हटाते ही मामला खत्म हो जाएगा. कुछ परीक्षणों में यह भी देखा गया कि बैटरी बंद करने से पहले यह ऐप पासवर्ड मांग रहा था. असली मोड़ तब आया, जब एक दूसरे बैटरी मैनेजमेंट ऐप को आजमाया गया. वह ऐप भी उसी कंपैटिबल बैटरी से जुड़ गया और उसे बंद भी करने लगा.&amp;nbsp;
सरकार ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोबाइल, से, बीच, सड़क, हैक, हो, रहे, ई-रिक्शा, पढ़ें, BAT-BMS, विवाद, और, साइबर, सुरक्षा, की, पूरी, कहानी</media:keywords>
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        <title>VPN पर सरकार का बड़ा एक्शन! आने वाला है नया नियम, रिपोर्ट में हो गया खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ New Rule on VPN: आज के डिजिटल समय में वीपीएन यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क काफी तेजी से चर्चा में आया है. बता दें कि अक्सर, सरकार किसी ऐप या वेबसाइट पर बैन लगाती है तो अक्सर लोग उसे वीपीएन की मदद से एक्सेस करने लगते हैं. इसी को लेकर अब सरकार वीपीएन को लेकर सख्त नियम बनाने की ओर कदम बढ़ा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, जल्द ही सरकार वीपीएन पर नए नियम लागू कर सकती है जिससे कंपनियों को देश में अपनी मौजूदगी सुनिश्चित करनी पड़ेगी. आइए जानते हैं कि नए नियम से कैसे लोगों पर पड़ेगा असर.
क्यों बन रहे नए नियम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मानना है कि वर्ष 2022 में भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) द्वारा जारी किए गए नियम वैसे रिजल्ट्स नहीं दे पाए जैसा उनसे उम्मीद की गई थी. पिछले नियमों के मुताबिक, VPN कंपनियों को अपने ग्राहकों से जुड़ी कई जानकारियां सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इससे VPN सेवाओं के इस्तेमाल पर कंट्रोल नहीं हो पाया था.
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, आज ज्यादातर लोग VPN की मदद से उन वेबसाइटों, ऐप्स और ऑनलाइन सर्विसों तक पहुंच रहे हैं जिन्हें सरकार बैन करती है.
कैसे काम करता है VPN
आपको बता दें कि VPN के काम करने का तरीका काफी अलग है. दरअसल, ये यूजर्स के असली IP Address को छिपाकर इंटरनेट ट्रैफिक को दूसरे देशों में मौजूद सर्वर के जरिए से भेजता है. इससे यूजर की ऑनलाइन पहचान पूरी तरह से सुरक्षित रहती है. इसके बाद यूजर ऐसे कंटेंट या वेबसाइट पर आसानी से पहुंच सकता है जिसे किसी देश या क्षेत्र में बैन किया गया है.
नए नियम क्या कहते हैं
रिपोर्ट के अनुसार, नए नियम लागू होने पर VPN कंपनियों को भारत में अपना कार्यालय स्थापित करना पड़ सकता है. इसके अलावा कंपनियों को देश में अपना स्थानीय अधिकारी भी नियुक्त करना पड़ेगा जो सरकार की ओर से भेजे गए निर्देशों, शिकायतों और कानूनी अनुरोधों का समय पर जवाब दे सके. इस नियम को कंपनियों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए लाया जा रहा है.
नियम तोड़ने पर क्या होगा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार केवल नए नियम ही नहीं बना रही है बल्कि नियमों को तोड़ने के लिए भी नियम तैयार किए जा रहे हैं. नियम ना मानने वालों पर सरकार सख्त एक्शन भी ले सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई VPN कंपनी सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उसके भारत में नियुक्त अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इसमें जुर्माने के साथ जेल की सजा जैसे प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>ई&amp; रिक्शा चालक अब नहीं होंगे परेशान, सरकार ने दिया BAT&amp;BMS समेत 7 ऐप्स हटाने का नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप ई-रिक्शा चलाते हैं या इलेक्ट्रिक वाहन से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. केंद्र सरकार ने ऐसे 7 मोबाइल ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है, जिनका कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर ई-रिक्शा की बैटरी को दूर से कंट्रोल या बंद किया जा रहा था. इसी वजह से सरकार ने Google और Apple से इन ऐप्स को अपने-अपने ऐप स्टोर से हटाने के लिए कहा है. माना जा रहा है कि इस फैसले से हजारों ई-रिक्शा चालकों को राहत मिल सकती है.
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कई वीडियो और शिकायतें सामने आ रही थीं. इनमें दावा किया गया कि कुछ लोग बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से जुड़े मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल कर चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी को अचानक बंद कर देते थे. इससे चालक बीच रास्ते में फंस जाते थे और उन्हें यात्रियों के सामने परेशानी का सामना करना पड़ता था. कई चालकों ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं की वजह से उनकी रोज़ाना की कमाई पर असर पड़ रहा है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Google Android और Apple iOS को नोटिस जारी किया है. मंत्रालय ने दोनों कंपनियों से BAT-BMS समेत कुल 7 ऐप्स को अपने ऐप स्टोर से हटाने के लिए कहा है.सरकार का कहना है कि अगर किसी ऐप का इस्तेमाल लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है, तो ऐसे ऐप्स पर कार्रवाई करना जरूरी है. यही वजह है कि इन ऐप्स को हटाने का फैसला लिया गया.
BAT-BMS ऐप क्या है?
BAT-BMS यानी बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़े ऐप्स का इस्तेमाल आमतौर पर बैटरी की स्थिति, चार्जिंग, तापमान और अन्य तकनीकी जानकारी देखने के लिए किया जाता है.ये ऐप्स बैटरी की निगरानी में मदद करते हैं, लेकिन अगर इनका गलत इस्तेमाल हो जाए तो बैटरी के काम करने पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से सरकार ने ऐसे ऐप्स की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है.यह भी पढ़ें -&amp;nbsp; मोबाइल से बीच सड़क हैक हो रहे ई-रिक्शा? पढ़ें BAT-BMS विवाद और EV साइबर सुरक्षा की पूरी कहानी
ई-रिक्शा चालकों को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार की इस कार्रवाई के बाद ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. अगर ऐसे ऐप्स का गलत इस्तेमाल रुकता है, तो चलते-चलते ई-रिक्शा बंद होने जैसी घटनाएं कम हो सकती हैं. इससे चालकों का समय बचेगा, उनकी रोज़गार पर असर कम पड़ेगा और यात्रियों का सफर भी पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा.
क्या सभी ई-रिक्शा होंगे प्रभावित?विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या हर ई-रिक्शा में नहीं है.केवल कुछ ऐसी बैटरियों में यह जोखिम देखा गया है, जिनमें मोबाइल ऐप के जरिए एक्सेस मिलने की सुविधा मौजूद है. इसलिए जिन वाहनों में इस तरह का सिस्टम नहीं है, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है.हालांकि, बैटरी खरीदते समय यह जरूर देखना चाहिए कि उसमें पर्याप्त सुरक्षा फीचर्स मौजूद हों और उसका सॉफ्टवेयर सुरक्षित हो.यह भी पढ़ें - VPN पर सरकार का बड़ा एक्शन! आने वाला है नया नियम, रिपोर्ट में हो गया खुलासा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp के बाद अब Telegram और Signal पर भी सरकार की नजर, भेजा गया नोटिस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/whatsapp-के-बाद-अब-telegram-और-signal-पर-भी-सरकार-की-नजर-भेजा-गया-नोटिस</link>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Username Feature: व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर पर रोक लगाने के बाद अब सरकार टेलीग्राम और सिग्नल पर भी एक्शन ले सकती है. इन दोनों ही प्लेटफॉर्म पर पहले से ही यूजरनेम फीचर अवेलेबल है. अब आईटी मंत्रालय इनको नोटिस भेजकर इस फीचर को लेकर जवाब मांगा है. सरकार यह जानना चाह रही है कि इस फीचर में यूजर की असली पहचान कैसे सुनिश्चित की जाती है. साथ ही यह भी कि कोई व्यक्ति फर्जी नाम या किसी दूसरे की पहचान से अकाउंट बनाकर लोगों को गुमराह या ठगी तो नहीं कर सकता. अधिकारियों ने बताया कि नियम सबके लिए बराबर है. टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा गया है.
इन सवालों के मांगे गए जवाब

Username बनाने की प्रक्रिया क्या है?
फर्जी या मिलते-जुलते Username को रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय हैं?
किसी सरकारी संस्था, सेलिब्रिटी या आम व्यक्ति की पहचान की नकल (Impersonation) कैसे रोकी जाती है?
शिकायत मिलने पर फर्जी Username हटाने या ब्लॉक करने की प्रक्रिया क्या है?
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जरूरत पड़ने पर कैसे सहयोग किया जाता है?

WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर लग चुकी है रोक
यूजर प्राइवेसी के लिए व्हाट्सऐप यूजरनेम फीचर को ला रही थी, लेकिन उसके रोलआउट से पहले ही उस पर रोक लग गई है. सरकार ने मेटा से इस फीचर को रोलआउट न करने का कहते हुए नोटिस भेजकर तीन दिनों में जवाब मांगा है. सरकार ने फ्रॉड और पहचान छिपाकर धोखाधड़ी के मामलों के डर से इसके खिलाफ सख्ती बरती है. इसके जवाब में व्हाट्सऐप ने कहा कि अभी यह फीचर रोलआउट नहीं किया जा रहा है और उसने इसमें कई सुरक्षा उपाय किए हैं. व्हाट्सऐप ने अभी इस फीचर के लिए यूजरनेम रिजर्व करना शुरू किया था.
यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार को क्या चिंता?
व्हाट्सऐप को भेजे नोटिस में सरकार ने कहा है कि इस फीचर के कारण ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और पहचान छिपाकर धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं. साथ ही सरकार को यह भी चिंता है कि इस फीचर का दुरुपयोग कर लोग किसी व्यक्ति, सरकारी संस्था, वित्तीय संस्थान और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते नाम रिजर्व कर सकते हैं. इससे यूजर्स के लिए असली और नकली में पहचान करना मुश्किल हो जाएगा. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि साइबर अपराधी पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम को अंजाम दे रहे हैं. यह फीचर उनकी और मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>फोटो लेते समय आईफोन से आएगी आवाज, यहां बंद नहीं हो सकती कैमरे की शटर साउंड</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Shutter Sound: जब भी आईफोन कैमरा या दूसरे फोन के कैमरा से फोटो लेते है तो शटर साउंड आती है. यह आवाज बिल्कुल ट्रेडिशनल कैमरा जैसी होती है. कई देशों में आप आईफोन या दूसरे मोबाइल में यह आवाज बंद कर सकते हैं. कई जगहें ऐसी भी हैं, जहां इस आवाज पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन जापान में मामला पूरी तरह अलग है. यहां बिकने वाले आईफोन और दूसरे फोन में इस आवाज को डिसेबल नहीं किया जा सकता. भले ही आपका फोन साइलेंट है, यहां फोटो लेने पर शटर साउंड जरूरी आएगी. आइए जानते हैं कि यह फोन कैमरा के लिए यह आवाज आना क्यों जरूरी है और कब से इस नियम की शुरुआत हुई.
प्राइवेसी से जुड़ा है कारण
शटर साउंड से पता चलता है कि फोटो क्लिक हो गई है. अगर कोई अनजान व्यक्ति आपकी फोटो ले रहा है तो यह साउंड आपको अलर्ट कर सकती है. यही वजह है कि जापान में शटर साउंड को अनिवार्य किया गया है. यहां बिकने वाले फोन में कैमरा शटर साउंड बाई डिफॉल्ट इनेबल रहती है और इसे बंद भी नहीं किया जा सकता. यहां इसे लेकर एक कानून भी बना हुआ है.
क्यों पड़ी कानून बनाने की जरूरत?
2000 के दशक के शुरुआती सालों में जापान में बिल्ट-इन कैमरा वाला पहला पोर्टेबल फोन Kyocera VP-210 लॉन्च हुआ था. इसमें कोई शटर साउंड नहीं थी. इस वजह से लोगों की चोरी-छिपे फोटो लेने की घटनाएं एक बड़ी समस्या बन गई थी. Masashi Tashiro नाम के एक सेलिब्रिटी पर भी फोन कैमरा से एक महिला की आपत्तिजनक फोटो लेने का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया. इस तरह की घटनाओं को देखते हुए जापान में मोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने अपने-अपने डिवाइस में शटर साउंड का फीचर जोड़ना शुरू कर दिया. इस फीचर को ऐसा बनाया कि इसे डिसेबल न किया जा सके.
2015 में बन गया कानून
2015 से पहले कंपनियां अपने तौर पर शटर साउंड दे रही थी, लेकिन 2015 में सरकार ने इस नियम को कानून का रूप दे दिया. इस कानून के तहत स्मार्टफोन पर शटर साउंड को म्यूट करने पर पाबंदी लगी हुई है और जापान में फोन बेचने वाली हर कंपनी को इसका पालन करना होता है. हालांकि, अब कुछ लोगों ने थर्ड-पार्टी ऐप्स और दूसरे तरीकों से इस आवाज को बंद करने का जुगाड़ निकाल लिया है. कुछ लोग सिम सेटिंग चेंज कर भी इस आवाज को म्यूट कर रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Smartwatches को चार्ज करना आज भी झंझट भरा काम, USB&amp;C Ports का क्यों नहीं होता यूज?</title>
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        <description><![CDATA[ Smartwatch Charging: ऐप्पल ने आईफोन में चार्जिंग के लिए लाइटनिंग कनेक्टर की जगह मे दे दिया है. कई एंड्रॉयड फोन में पहले से ही यह पोर्ट अवेलेबल है. यानी आईफोन और एंड्रॉयड फोन को एक जैसे चार्जर से ही चार्ज किया जा सकता है, लेकिन स्मार्टवॉच के मामले में ऐसा नहीं है. हर कंपनी की स्मार्टवॉच के लिए चार्जर अलग होता है और एक चार्जर से दूसरे ब्रांड की स्मार्टवॉच चार्ज नहीं की जा सकती. अगर एक कंपनी लगभग अपने हर मॉडल के लिए अलग-अलग चार्जर देती है. इस कारण स्मार्टवॉच को चार्ज करना आज भी झंझट भरा काम बना हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि चार्जिंग को आसान बनाने के लिए स्मार्टवॉच में फोन की तरह USB-C Port का यूज क्यों नहीं होता? आइए इसका जवाब जानते हैं.
स्मार्टवॉच में क्यों नहीं आता USB-C Port?
कंपनियों के लिए हर स्मार्टवॉच में अलग-अलग चार्जर की जगह USB-C Port देना क्यों मुश्किल है? इसके पीछे कई कारण हैं. अगर फोन की तरह स्मार्टवॉच में USB-C Port दिया जाए तो इसकी वाटरप्रूफिंग पर असर पड़ सकता है. इसी तरह पोर्ट को काफी स्पेस की जरूरत पड़ेगी. स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड में इतनी जगह नहीं होती कि इस पोर्ट को फिट किया जा सके.
स्लिम मॉडल में तो स्पेस की यह कमी और ज्यादा बढ़ जाती है. इसके अलावा फोन की तरह स्मार्टवॉच एक जैसी नहीं होती. फोन भले ही अलग-अलग कंपनियां बना रही हैं, लेकिन इनकी शेप लगभग एक जैसी होती है. स्मार्टवॉच में ऐसा नहीं होता. हर कंपनी अलग-अलग शेप और साइज के मॉडल बना रही है, जिसके चलते हर मॉडल में एक जैसे चार्जर देना मुश्किल भरा काम हो सकता है.
क्या वायरलेस चार्जिंग भी नहीं आ सकती काम?
अब कई लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि जब एक जैसा चार्जर नहीं दिया जा सकता तो वायरलेस चार्जिंग इसका समाधान नहीं है? वायरलेस चार्जर इस समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन इसकी अपनी दिक्कतें हैं. वायरलेस चार्जिंग स्लो होती है. इसके अलावा चार्जिंग के लिए डिवाइस को एकदम सटीक जगह पर रखना पड़ता है. अब Qi2 स्टैंडर्ड जैसे एडवांस्मेंट हुए हैं, लेकिन इसके लिए स्मार्टवॉच में वायरलेस चार्जिंग की कैपेबिलिटी होनी चाहिए. डिजाइन और यूटिलिटी को देखते हुए अधिकतर कंपनियां यह फीचर देने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में ग्राहकों के पास हर स्मार्टवॉच के साथ नया चार्जर लेना जरूरी बन जाता है. भले ही इससे इलेक्ट्रॉनिक कचरे में इजाफा हो रहा हो.
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>क्या नॉर्मल फोन के दिन जाने वाले हैं? Elon Musk की कंपनी बना रही है यह धांसू डिवाइस</title>
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        <description><![CDATA[ SpaceX AI Device: क्या नॉर्मल फोन के दिन अब जाने वाले हैं? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि अब कंपनियां एआई डिवाइसेस पर फोकस कर रही है. ओपनएआई ने कुछ दिन पहले एआई एजेंट से चलने वाला फोन लाने की जानकारी दी थी तो अब एलन मस्क की कंपनी SpaceX भी इस रेस में कूद पड़ी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पेसएक्स एक एआई डिवाइस तैयार कर रही है, जो आईफोन से पतला होगा. कंपनी ने एक हैंडसेट की तरह नजर आने वाले इस डिवाइस का प्रोटोटाइप अपने निवेशकों को दिखाया है.&amp;nbsp;
SpaceX AI Device के बारे में क्या-क्या जानकारी सामने आई?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रेडिशनल फोन से अलग तरह का यह डिवाइस एक नए ऑपरेटिंग सिस्टम पर रन करेगा और इसमें क्वालकॉम की स्नैपड्रेगन चिप को यूज किया जाएगा. इस डिवाइस में xAI की एआई टेक्नोलॉजी को भी इंटीग्रेट करने की बात सामने आ रही है. हालांकि, अभी तक यह प्रोजेक्ट बहुत शुरुआती चरण में है और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कंपनी इसे असली प्रोडक्ट बदलेगी या नहीं. अगर यह प्रोजेक्ट प्रोटोटाइप से प्रोडक्ट तक पहुंचता है तो इस डिवाइस में एनक्रिप्टेड कम्युनिकेशन, एक्स सर्विसेस और स्टारलिंक कनेक्टिविटी जैसे फीचर भी मिल सकते हैं. मस्क का नाम जुड़ने पर ग्राहकों को भी इसमें शानदार हार्डवेयर, जबरदस्त कैमरा, भरोसेमंद सॉफ्टवेयर, अच्छी बैटरी लाइफ और मैच्योर ऐप इकोसिस्टम मिलने की उम्मीद है.
पहले भी सामने आ चुकी है स्पेसएक्स के फोन बनाने की जानकारी
यह पहली बार नहीं है, जब स्पेसएक्स को फोन जैसे किसी हार्डवेयर पर काम करने की जानकारी सामने आ रही है. इसी साल एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कंपनी एक स्टारलिंक कनेक्टेड फोन बनाएगी, जिसका बाद में मस्क ने खंडन कर दिया था. हालांकि, मस्क खुद भी फोन बनाने की बात कह चुके हैं. ऐप डिस्ट्रीब्यूशन पर ऐप्पल और गूगल के कंट्रोल को देखते हुए उन्होंने फोन बनाने की बात कही थी. तब मस्क ने कहा था कि अगर एक्स को ऐप स्टोर और प्ले स्टोर से हटाया जाता है तो वो एक ऑल्टरनेटिव फोन बना सकते हैं.
ओपनएआई भी बना रही है एआई एजेंट से चलने वाला फोन
कुछ समय पहले जानकारी मिली थी कि चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई एक नई तरह के फोन पर काम कर रही है. &amp;nbsp;ऐप्पल के पूर्व डिजाइन चीफ Jony Ive भी इस प्रोजेक्ट में शामिल हैं. इस अनोखे फोन में मोबाइल ऐप्स की जरूरत नहीं होगी और यह एआई एजेंट्स से चलेगा. ये एआई एजेंट रियल-टाइम में कॉन्टेक्स्ट, यूजर बिहेवियर और जरूरत को समझकर काम करेंगे.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp Username Feature... सुनने में अच्छा लेकिन इसमें छिपा है बड़ा खतरा! प्राइवेसी बढ़ेगी या फर्जी अकाउंट?</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Username Feature:&amp;nbsp;मोबाइल नंबर... आज WhatsApp पर आपकी सबसे बड़ी पहचान है. कोई नया व्यक्ति आपसे बात करना चाहता है तो उसे आपका नंबर चाहिए. लेकिन अब यह पूरी व्यवस्था बदलने वाली है. जल्द ही WhatsApp पर सिर्फ Username के जरिए भी लोगों से जुड़ा जा सकेगा. यानी मोबाइल नंबर सामने वाले को बताए बिना बातचीत शुरू हो सकेगी.
सुनने में यह फीचर काफी अच्छा लगता है. आखिर कौन नहीं चाहता कि उसका निजी मोबाइल नंबर हर किसी के पास न पहुंचे,&amp;nbsp;लेकिन इसी फीचर ने भारत सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है. सरकार को डर है कि कहीं यह सुविधा साइबर ठगों के लिए नया हथियार न बन जाए. यही वजह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने Meta को नोटिस भेजा है और तीन दिन में जवाब मांगा है और फिलहाल भारत में इस फीचर को लॉन्च न करने के लिए कहा है. अब सवाल यही है कि क्या WhatsApp लोगों की प्राइवेसी बढ़ाने जा रहा है या फिर अनजाने में फर्जी पहचान और ऑनलाइन ठगी का नया रास्ता खोल रहा है?
पहले समझिए... आखिर Username फीचर है क्या?
अभी तक WhatsApp की पूरी व्यवस्था मोबाइल नंबर पर टिकी हुई है. किसी को मैसेज भेजना है तो उसका नंबर होना जरूरी है. लेकिन नए फीचर में यूजर अपने लिए एक यूनिक Username चुन सकेगा. इसके बाद सामने वाला आपका नंबर देखे बिना सिर्फ Username के जरिए आपसे बातचीत शुरू कर सकेगा. Meta का कहना है कि इसका मकसद लोगों की Privacy बढ़ाना है. खासकर उन लोगों के लिए जो बिजनेस करते हैं, ऑनलाइन सामान खरीदते-बेचते हैं, किसी कम्युनिटी का हिस्सा हैं या ऐसे लोगों से बात करते हैं जिन्हें वे अपना निजी मोबाइल नंबर नहीं देना चाहते. हालांकि, एक बात यहां साफ कर देना जरूरी है कि अभी सिर्फ Username रिजर्व करने की घोषणा हुई है. Username से चैट करने की सुविधा अभी लाइव नहीं हुई है. Meta के मुताबिक इसे इस साल चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा.
सरकार को किस बात को लेकर चिंता है?
यहीं से पूरी कहानी शुरू होती है. सरकार की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ एक शब्द है... &#039;Impersonation&#039; यानी किसी दूसरे व्यक्ति, बैंक, सरकारी संस्था या कंपनी की तरह खुद को पेश करना. MeitY को डर है कि अगर लोग मोबाइल नंबर की बजाय सिर्फ Username देखकर भरोसा करने लगेंगे तो साइबर ठगों के लिए लोगों को धोखा देना पहले से आसान हो सकता है. सरकार के नोटिस में साफ लिखा गया है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, पहचान छिपाकर ठगी और नकली अकाउंट के मामलों को बढ़ा सकता है. इसे एक आसान उदाहरण से समझिए...
मान लीजिए किसी बैंक का असली Username है...@SBIHelp. अब कोई ठग इससे मिलता-जुलता Username बना सकता है...@SBI_Help या फिर @SBIHelp_. पहली नजर में आम आदमी शायद फर्क ही न समझ पाए. अगर ऐसे अकाउंट से मैसेज आए कि...&quot;आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है...&quot;, &quot;KYC अपडेट कीजिए...&quot; या फिर &quot;आपका UPI ब्लॉक हो जाएगा...&quot; ऐसे में&amp;nbsp;कई लोग उसे असली समझकर भरोसा कर सकते हैं. यही सबसे बड़ा खतरा है.
भारत में यह डर और बड़ा क्यों है?
भारत पहले से ही साइबर ठगी की बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है. इसमें फर्जी कस्टमर केयर,&amp;nbsp;डिजिटल अरेस्ट, निवेश के नाम पर ठगी, KYC अपडेट, बिजली बिल,&amp;nbsp;कूरियर के नाम पर ठगी के कई मामले हैं. इन सभी मामलों में ठग सबसे पहले भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं. अगर उन्हें किसी बैंक, सरकारी विभाग या अधिकारी जैसा दिखने वाला Username मिल गया तो लोगों को भ्रमित करना और आसान हो सकता है.
सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर फ्रॉड की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं और हजारों करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई है. ऐसे में सरकार इस फीचर को सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा के नजरिए से भी देख रही है.
सरकार ने नोटिस में क्या कहा?
MeitY ने Meta को भेजे नोटिस में कई अहम सवाल उठाए हैं. सरकार ने पूछा है कि अगर मोबाइल नंबर छिप जाएगा तो फर्जी पहचान कैसे रोकी जाएगी? अगर कोई व्यक्ति सरकारी विभाग, बैंक या किसी मशहूर व्यक्ति जैसा Username रख ले तो उसे कैसे रोका जाएगा? जरूरत पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियां असली व्यक्ति तक कैसे पहुंचेंगी?
क्या यह फीचर IT Act 2000 और IT Rules 2021 का पालन करता है?
नोटिस में Meta को तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर संतुष्ट नहीं होती तब तक भारत में इस फीचर को रोलआउट न किया जाए. लेकिन क्या सरकार ने इस फीचर पर पूरी तरह रोक लगा दी है? नहीं. यह समझना बहुत जरूरी है. सरकार ने WhatsApp के Username फीचर पर स्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया है. फिलहाल सरकार सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा करना चाहती है. यानी मामला अभी बातचीत और जांच के चरण में है.
WhatsApp क्या कह रहा है?
Meta ने ABP News को बताया है कि Username फीचर अभी लाइव नहीं हुआ है. फिलहाल लोगों को सिर्फ अपना पसंदीदा Username रिजर्व करने का विकल्प दिया गया है. चैटिंग की सुविधा बाद में चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी. Meta का दावा है कि उसने शुरुआत से ही Impersonation को ध्यान में रखकर कई सुरक्षा इंतजाम किए हैं. कंपनी के मुताबिक, सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, मशहूर हस्तियों और Meta के वेरिफाइड अकाउंट्स के नाम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं.&amp;nbsp;उनसे मिलते-जुलते कई Lookalike Username भी रिजर्व किए जाएंगे ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके.
WhatsApp ने यह भी साफ किया है कि मोबाइल नंबर पूरी तरह खत्म नहीं हो रहा. WhatsApp इस्तेमाल करने के लिए नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि हर नए व्यक्ति को आपका नंबर दिखाई नहीं देगा. कंपनी का कहना है कि किसी को आपको मैसेज भेजने के लिए आपका Exact Username पता होना चाहिए.
बार-बार Username का अनुमान लगाने की कोशिशों को सिस्टम ब्लॉक करेगा. नए अकाउंट कितने लोगों से संपर्क कर सकते है ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Nothing Phone 4b की लॉन्चिंग का चल गया पता, RCB एडिशन भी होगा लॉन्च, जानें किससे होगा मुकाबला</title>
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        <description><![CDATA[ Nothing Phone 4b: नथिंग 7 जुलाई को अपनी लाइन-अप में एक नया बजट-फ्रेंडली फोन शामिल करने जा रही है. अगर आप क्रिकेट और खासकर आरसीबी के फैन हैं तो यह फोन आपके लिए और भी स्पेशल हो सकता है. दरअसल, 7 जुलाई को Nothing Phone 4b लॉन्च हो रहा है. कंपनी आरसीबी के साथ पार्टनरशिप में इसका स्पेशल एडिशन भी लाने वाली है. इसी के साथ नथिंग की &#039;b&#039; सीरीज की भी शुरुआत हो जाएगी. इस फोन के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं.
Nothing Phone 4b में क्या कुछ मिलेगा?
यह फोन 6.7 इंच के AMOLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च हो सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें 8GB रैम मिलने की उम्मीद है, जिसे 128GB या 256GB स्टोरेज के साथ पेयर किया जाएगा. नथिंग कंफर्म कर चुकी है कि इसमें Qualcomm Snapdragon चिपसेट होगा, लेकिन इस प्रोसेसर का नाम नहीं बताया गया है. माना जा रहा है कि यह Snapdragon 6 Gen 4 हो सकता है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 50MP प्राइमरी सेंसर के साथ डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 16MP कैमरा मिलेगा. ऐसे कयास हैं कि इसमे 6,000mAh का बैटरी पैक दिया जा सकता है, जो 33W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा.
आरसीबी एडिशन में क्या खास होगा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, आरसीबी एडिशन को रेड फिनिश के साथ लॉन्च किया जा सकता है. इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, आरसीबी प्लेयर्स को इसके दो डिजाइन ऑप्शन दिखाकर किसी एक को चुनने को कहा गया था. उनकी फाइनल च्वॉइस अभी तक रिवील नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि प्लेयर्स ने रेड वेरिएंट को पसंद किया था. रेड के साथ यह फोनन ब्लैक, व्हाइट और ब्लू कलर ऑप्शन में लॉन्च होगा. स्पेशल एडिशन में एक्सक्लूसिव वॉलपेपर, थीम्ड एक्सेसरीज और कस्टम पैकेजिंग भी दी जा सकती है.
कितनी रहेगी कीमत और किससे होगा मुकाबला?
जानकारी के मुताबिक, 7 जुलाई को दोपहर 3.30 बजे इस फोन को लॉन्च किया जाएगा. इसकी कीमत 30,000 रुपये के आसपास रह सकती है. इस कीमत पर यह फोन OnePlus Nord CE 6 सीरीज, Motorola Edge लाइनअप और Redmi Note 15 Pro से मुकाबला करेगा. Redmi Note 15 Pro की बात करें तो इसमें 6.7 इंच का AMOLED डिस्प्ले, MediaTek Dimensity 7400-Ultra प्रोसेसर, 200MP का प्राइमरी कैमरा और 6500 mAh Si/C बैटरी लगी हुई है. इसके 8GB+128GB वर्जन की कीमत 31,999 रुपये रखी गई है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp के बाद अब Telegram और Signal पर भी सरकार की नजर, हो सकता है एक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Username Feature: व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर पर रोक लगाने के बाद अब सरकार टेलीग्राम और सिग्नल पर भी एक्शन ले सकती है. इन दोनों ही प्लेटफॉर्म पर पहले से ही यूजरनेम फीचर अवेलेबल है. अब आईटी मंत्रालय इनको नोटिस भेजकर इस फीचर को लेकर जवाब मांग सकता है. सरकार यह जानना चाह रही है कि इस फीचर में यूजर की असली पहचान कैसे सुनिश्चित की जाती है. साथ ही यह भी कि कोई व्यक्ति फर्जी नाम या किसी दूसरे की पहचान से अकाउंट बनाकर लोगों को गुमराह या ठगी तो नहीं कर सकता. बता दें कि सरकार ने कुछ दिन पहले ही नीट पेपर लीक की घटना में नाम सामने आने के बाद टेलीग्राम पर टेंपरेरी बैन लगाया था.&amp;nbsp;
इन सवालों के मांगे जाएंगे जवाब

Username बनाने की प्रक्रिया क्या है?
फर्जी या मिलते-जुलते Username को रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय हैं?
किसी सरकारी संस्था, सेलिब्रिटी या आम व्यक्ति की पहचान की नकल (Impersonation) कैसे रोकी जाती है?
शिकायत मिलने पर फर्जी Username हटाने या ब्लॉक करने की प्रक्रिया क्या है?
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ जरूरत पड़ने पर कैसे सहयोग किया जाता है?

WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर लग चुकी है रोक
यूजर प्राइवेसी के लिए व्हाट्सऐप यूजरनेम फीचर को ला रही थी, लेकिन उसके रोलआउट से पहले ही उस पर रोक लग गई है. सरकार ने मेटा से इस फीचर को रोलआउट न करने का कहते हुए नोटिस भेजकर तीन दिनों में जवाब मांगा है. सरकार ने फ्रॉड और पहचान छिपाकर धोखाधड़ी के मामलों के डर से इसके खिलाफ सख्ती बरती है. इसके जवाब में व्हाट्सऐप ने कहा कि अभी यह फीचर रोलआउट नहीं किया जा रहा है और उसने इसमें कई सुरक्षा उपाय किए हैं. व्हाट्सऐप ने अभी इस फीचर के लिए यूजरनेम रिजर्व करना शुरू किया था.
यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार को क्या चिंता?
व्हाट्सऐप को भेजे नोटिस में सरकार ने कहा है कि इस फीचर के कारण ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और पहचान छिपाकर धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं. साथ ही सरकार को यह भी चिंता है कि इस फीचर का दुरुपयोग कर लोग किसी व्यक्ति, सरकारी संस्था, वित्तीय संस्थान और सरकारी एजेंसियों से मिलते-जुलते नाम रिजर्व कर सकते हैं. इससे यूजर्स के लिए असली और नकली में पहचान करना मुश्किल हो जाएगा. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि साइबर अपराधी पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम को अंजाम दे रहे हैं. यह फीचर उनकी और मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>WhatsApp, के, बाद, अब, Telegram, और, Signal, पर, भी, सरकार, की, नजर, हो, सकता, है, एक्शन</media:keywords>
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        <title>3 Star vs 5 Star AC Power Consumption: 3 Star और 5 Star AC में कितनी होती है बिजली की बचत, जानें 1 घंटे का हिसाब&amp;किताब?</title>
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        <description><![CDATA[ 3 Star vs 5 Star AC Power Consumption: रोजाना गर्मी बढ़ने के साथ अब AC सिर्फ लग्जरी नहीं, बल्कि कई घरों की जरूरत बन चुका है. ऐसे में ज्यादातर लोग एयर कंडीशनर (AC) खरीदते समय सबसे पहले उसकी कीमत देखते हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी उसकी स्टार रेटिंग होती है. यही रेटिंग तय करती है कि आपका AC कितनी बिजली खर्च करेगा और हर महीने बिजली का बिल कितना आएगा.
भारत में बिजली की बढ़ती कीमतों के बीच सही स्टार रेटिंग वाला AC चुनना लंबे समय में अच्छी बचत करा सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि 3 Star AC खरीदना बेहतर रहेगा या 5 Star AC. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि 1 घंटे में 3 Star और 5 Star AC में बिजली की बचत कितनी होती है.&amp;nbsp;
3 Star और 5 Star AC की स्टार रेटिंग का क्या मतलब होता है?
एयर कंडीशनर की स्टार रेटिंग ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) तय करता है. यह रेटिंग बताती है कि कोई AC कम बिजली खर्च करके कितनी अच्छी कूलिंग देता है. 5 Star AC कम बिजली में बेहतर कूलिंग देता है. यह 3 Star AC की तुलना में लगभग 10 से 28 प्रतिशत तक कम बिजली खर्च करता है. 3 Star AC खरीदने में सस्ता होता है, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर इसकी बिजली की लागत ज्यादा हो सकती है. स्टार रेटिंग ISEER (Indian Seasonal Energy Efficiency Ratio) के आधार पर तय की जाती है. ISEER जितना ज्यादा होगा, AC उतनी ही कम बिजली खर्च करेगा.&amp;nbsp;
1 घंटे में 3 Star और 5 Star AC में बिजली की बचत कितनी होती है?
अगर आप 1.5 टन AC यूज करते हैं तो 3 Star AC एक घंटे में लगभग 1100 से 1200 वॉट बिजली खर्च करता है. वहीं 5 Star AC एक घंटे में लगभग 800 से 900 वॉट बिजली खर्च करता है. ऐसे में 5 Star AC, 3 Star AC के मुकाबले करीब 15 से 25 प्रतिशत कम बिजली खर्च करता है, जिससे लंबे समय में बिजली के बिल में अच्छी बचत हो सकती है.&amp;nbsp;
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3 Star और 5 Star AC में कौन सा है बेस्ट ऑप्शन?
आमतौर पर 5 Star AC की कीमत 3 Star AC से करीब 5,000 से 10,000 ज्यादा होती है. अगर आप AC का इस्तेमाल रोजाना सिर्फ 2 से 4 घंटे करते हैं और आपका बजट कम है, तो 3 Star AC आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है. वहीं अगर आप रोज 6 से 10 घंटे AC चलाते हैं, बिजली का बिल कम रखना चाहते हैं और AC को कई साल तक इस्तेमाल करने की योजना है, तो 5 Star AC ज्यादा फायदेमंद रहेगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Air Cooler Humidity Tips: बदलते मौसम में आपका कूलर भी फेंकने लगा है चिपचिपी हवा, तुरंत अपनाएं ये ट्रिक्स ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Google ने पेश किया नया AI मॉडल! अब मात्र 4 सेकेंड में तैयार होगी फोटो, जानें कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ Google Nano Banana 2 Lite: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में गूगल ने एक और धमाका किया है. दरअसल, गूगल ने अपना नया एआई मॉडल नैनो बनाना 2 लाइट को पेश किया है. इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये महज 4 सेकेंड के अंदर आपको एआई फोटो तैयार करके दे देगा. कंपनी का दावा है कि ये अभी तक का सबसे फास्ट और किफायती मॉडल है जो यूजर्स को एक बेहतरीन अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है.
करेगा कई सारे क्रिएटिव काम
कंपनी का कहना है कि ये मॉडल ऐसे कामों के लिए तैयार किया गया है जहां पर स्पीड की वैल्यू होती है. जहां रिजनिंग से ज्यादा यूजर को तेजी से काम चाहिए होता है, वैसी स्थिति में ये एक बेस्ट ऑप्शन साबित होगा. इसे कंपनी ने खासतौर पर तेजी से विजुअल आइडिया देना, फटाफट प्रोटोटाइप तैयार करना, बड़ी संख्या में AI इमेज बनाना और हाई-वॉल्यूम में कंटेंट जनरेशन करना जैसे कामों के लिए बनाया है.
महज 4 सेकंड में फोटो तैयार
कंपनी के अनुसार, Nano Banana 2 Lite अपनी फास्ट स्पीड के लिए जाना जा रहा है. कंपनी का कहना है कि ये मॉडल लगभग 4 सेकंड में टेक्स्ट को इमेज में बदल सकता है. ऐसे में ये उन लोगों के लिए एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म बन सकता है जिन्हें ज्यादा मात्रा में फोटो जनरेट करनी होती हैं.
क्वालिटी पर भी है फोकस
Google का दावा है कि Nano Banana 2 Lite सिर्फ तेजी से काम करने के लिए ही नहीं बल्कि क्वालिटी कंटेंट देने में भी सक्षम है. ये मॉडल यूजर को फोटो के अंदर सभी टेक्स्ट को अच्छे से मैनेज करने में भी सक्षम है.
इसके अलावा कंपनी ने इस मॉडल को अलग-अलग जरुरतों के हिसाब से पेश किया है. Nano Banana 2 Lite उन यूजर्स के लिए बेहतर माना जा रहा है जिन्हें बड़ी संख्या में AI इमेज चाहिए और ये काम कम लागत में होना चाहिए. वहीं, दूसरी ओर, Nano Banana 2 ऐसे यूजर्स के लिए है जिन्हें हाई क्वालिटी, अच्छी स्पीड और किफायती कीमत के साथ नॉर्मल यूज करना है. इसीलिए ये नया मॉडल किफायती होने के साथ-साथ काफी तेज भी है जो यूजर्स को बहुत पसंद आ सकता है. एआई की रेस में गूगल अपने ऐसे कई मॉडल्स को अपडेट करने के ऊपर भी काम कर रहा है.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Samsung Galaxy Ring 2 को लेकर बड़ा संकेत! पहली बार मिलेगा ऐसा फीचर जो आज तक किसी Galaxy Wearable में नहीं आया</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Galaxy Ring 2: स्मार्टफोन निर्माता कंपनी सैमसंग जल्द ही अपनी नई वियरेबल गैलेक्सी रिंग 2 को बाजार में लॉन्च करने की तैयारी में है. बता दें कि कंपनी ने करीब दो साल पहले स्मार्ट रिंग मार्केट में कदम रखा था. उसके बाद कंपनी ने अपना पहला स्मार्ट रिंग पेश किया था जिसे बाजार में काफी अच्छा रिस्पांस मिला था. वहीं, अब मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी जल्द ही गैलेक्सी रिंग 2 को भी बाजार में उतारने की तैयारी में है. लेकिन लॉन्च से पहले ही ऐसी जानकारी सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है. जी हां, दरअसल, लीक्स के अनुसार, इस रिंग में एक ऐसा फीचर मिलने वाला है जो आज तक किसी गैलेक्सी वियरेबल में नहीं दिया गया था.
कंपनी ने की पुष्टि
Forbes से बातचीत के दौरान Samsung के डिजिटल हेल्थ डिविजन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड Hon Pak ने बताया कि Galaxy Ring 2 फिलहाल अभी डेवलपमेंट स्टेज में है. हालांकि उन्होंने इसकी लॉन्च डेट या नए फीचर्स के बारे में कोई आधिकारीक जानकारी नहीं दी है. लेकिन उनकी बातों से ये माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई सारे ऐसे फीचर्स देखने को मिल सकते हैं जो स्मार्ट रिंग को बाकी वियररेबल से अलग बनाएंगी.
पूरे इकोसिस्ट पर काम कर रही कंपनी
कंपनी का मानना है कि वो ऐसा डिवाइस बिलकुल नहीं चाहती है जो लोगों के काम कर सके. दरअसल, कंपनी का मानना है कि डिवाइस ऐसा होना चाहिए जो लोगों की जरुरत के हिसाब से उन्हें डिवाइस को चुनने का मौका दे और सभी डिवाइस एक साथ कनेक्ट होकर यूजर्स के लिए काम कर सकें. इसी से समझ आ रहा है कि कंपनी पूरे एक नए इकोसिस्टम पर काम कर रही है.
iPhone के साथ भी चलेगी Galaxy Ring 2?
कई लोगों के मन में ये सवाल काफी समय से है कि क्या सैमसंग गैलेक्सी रिंग 2 क्या iPhone के साथ भी काम करेगी. हालांकि, कंपनी ने इसे लेकर कोई आधिकारीक जानकारी नहीं दी है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि सैमसंग जल्द ही बड़ा बदलाव जरूर कर सकती है. इससे ये अनुमान लगाना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में आईफोन में भी इस डिवाइस का सपोर्ट मिलेगा.
पहली बार ये फीचर
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Galaxy Ring का सबसे बेहतर अनुभव Samsung Galaxy स्मार्टफोन्स के साथ ही मिलता है. हालांकि, ये डिवाइस कई अलग-अलग एंड्रॉयड फोन्स के साथ भी काम करते हैं लेकिन असली अनुभव सैमसंग फोन के साथ ही मिलता है. अब बता दें कि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है कि सैमसंग का डिवाइस एप्पल डिवाइस में भी सपोर्ट मिले. लेकिन कंपनी के अधिकारियों की बातों से ऐसा संकेत मिल रहा है कि पहली बार कंपनी एप्पल डिवाइस में भी स्मार्ट रिंग का सपोर्ट दे सकती है. अगर ऐसा होता है तो ये Galaxy वियरेबल सीरीज के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा.
स्लीप एपनिया मॉनिटरिंग वाला दुनिया का पहला स्मार्ट रिंग
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, RingConn Gen 2 को दुनिया का पहला ऐसा अल्ट्रा-थिन स्मार्ट रिंग बताया जा रहा है जो खासतौर पर स्लीप एपनिया की मॉनिटरिंग के लिए तैयार किया गया है. कंपनी का दावा है कि ये इस समस्या का पता लगाने में 90% तक सफल है. इतना ही नहीं, ये स्मार्ट रिंग आपके हेल्थ से जुड़े कई पैरामीटर्स पर नजर रखता है. इसमें हार्ट रेट, ब्लड ऑक्सीजन (SpO2), स्ट्रेस स्कोर, डेली एक्टिविटी, वर्कआउट ट्रैकिंग शामिल है. इससे यूजर्स कहीं भी रहते हुए अपनी फिटनेस और हेल्थ पर बेहतर तरीके से नजर रख सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Samsung, Galaxy, Ring, को, लेकर, बड़ा, संकेत, पहली, बार, मिलेगा, ऐसा, फीचर, जो, आज, तक, किसी, Galaxy, Wearable, में, नहीं, आया</media:keywords>
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        <title>अब फोन से ही कंट्रोल करें अपना AI एजेंट! OpenClaw ने पेश किया अपना नया मोबाइल ऐप, जानें कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ OpenClaw Mobile App: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी तेजी से ग्रोथ कर रहा है. वहीं, अब एआई ही नहीं बल्कि एआई ऐजेंट्स भी आ चुके हैं जो लोगों के ऑर्डर पर काम करते हैं. इसी कड़ी में ओपन-सोर्स AI असिस्टेंट OpenClaw ने अपने यूजर्स के लिए एक बड़ा अपडेट जारी कर दिया है. इस अपडेट के बाद आप एआई ऐजेंट को अपने मोबाइल से ही कंट्रोल कर सकेंगे. जी हां, दरअसल कंपनी ने एंड्रॉयड और आईओएस के लिए एक नया ऐप जारी किया है.
आपके लिए काम करेगा AI
बता दें कि OpenClaw की सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये सिर्फ बातचीत तक लिमिटेड नहीं है. बल्कि ये आपके लिए काम भी करेगा. उदाहरण के तौर पर बताएं तो अगर आप इसे कैमरा, फोटो, अपने कॉनटेक्ट्स या लोकेशन एक्सेस करने की अनुमति देते हैं तो ये आपके लिए वो सब करेगा जो आप इससे करवाना चाहते हैं.
मीटिंग याद दिलाने से लेकर डिवाइस में फोटो मैनेज करने से लेकर ये सभी रोजमर्रा के काम आपके लिए आसानी से कर सकता है. इसी वजह से ये बाकी एआई ऐजेंट्स के मुकाबले काफी अलग है. इतना ही नहीं, ये एआई ऐजेंट आपको लोकेशन बताने से लेकर आपके लिए नया रास्ता खोजने तक के काम को भी कर सकता है. एआई ऐजेंट ने आज की दुनिया में लोगों के काम को काफी हद तक आसान बना दिया है. अब ऐसे ऐप लोगों के बहुत काम आने वाले हैं.
OpenClaw के काम करने का तरीका
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OpenClaw नॉर्मल AI चैटबॉट्स से थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. जहां एक तरफ नॉर्मल एआई डॉयरेक्ट कंपनी के सर्वर से कनेक्ट होती हैं. वहीं, दूसरी तरफ OpenClaw एक Gateway के जरिए काम करता है. इसे AI असिस्टेंट का कंट्रोल सेंटर भी कहा जा सकता है.
बता दें कि ये Gateway यूजर के कंप्यूटर, किसी क्लाउड सर्वर या निजी सिस्टम पर आसानी से चलने में सक्षम है. कंपनी ने अब जो नया मोबाइल ऐप पेश किया है वो एक रिमोट कंट्रोल की तरह काम करेगा जिसकी मदद से आप एआई ऐजेंट से ऑर्डर देकर कुछ ही काम करवा सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>कैसा होगा iPhone 18 Pro का लाइनअप? सामने आ गई एक&amp;एक डिटेल</title>
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        <description><![CDATA[ सितंबर 2026 में लॉन्च होने वाली आईफोन प्रो सीरीज को लेकर लग रहीं अटकलों को अब नई हवा मिलनी शुरू हो चुकी है. सोशल मीडिया पर iPhone 18 Pro सीरीज का पूरा लाइनअप वायरल हो रहा है, जिससे आईफोन का फोल्डेबल फोन आने की चर्चा भी सही साबित होती नजर आ रही है. दरअसल, iPhone 18 Pro की सीरीज का लाइनअप लीक होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें &amp;nbsp;3 नए आईफोन की डिटेल्स दी गई है. आइए जानते हैं कि लीक हुई जानकारी के हिसाब से कैसा हो सकता है आईफोन 18 प्रो का लाइनअप और किस फोन में क्या-क्या स्पेसिफिकेशन होने का अनुमान है?
कैसे हैं तीनों स्मार्टफोन?
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर के अनुसार, iPhone 18 Pro Lineup (आईफोन 18 प्रो सीरीज) सितंबर 2026 में बाजार में दस्तक देने वाली है. कंपनी इस बार तीन नए और बेहद दमदार मॉडल पेश करने की तैयारी में है. इन तीनों शानदार मॉडल्स के नाम iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और इस बार का सबसे खास मॉडल iPhone Ultra हैं.&amp;nbsp;
तीनों स्मार्टफोन्स में कैसे होंगे स्पेसिफिकेशंस?

रैम (RAM): तीनों ही फोन्स में 12GB की दमदार रैम मिलने का दावा किया जा रहा है. 12GB रैम का मतलब है कि आपका फोन कभी धीमा नहीं पड़ेगा. हैंग नहीं होगा और आप एक साथ कई हैवी ऐप्स या गेम्स का इस्तेमाल बिना किसी रुकावट के कर सकेंगे.
प्रोसेसर: इन सभी मॉडल्स में बिल्कुल नया Apple A20 Pro चिप प्रोसेसर दिया गया है, जो फोन को सुपरफास्ट बना देगा.
अन्य चिप: बेहतर इंटरनेट, शानदार नेटवर्क और कॉलिंग के लिए तीनों ही स्मार्टफोन्स में Apple C2 modem चिप होने का दावा किया जा रहा है. वहीं, कुछ खास और मॉडर्न टेक्निकल वर्क को संभालने के लिए तीनों में Apple N2 chip भी दी गई है.

कैसा होगा iPhone 18 Pro?
सोशल मीडिया पर लीक हुई iPhone 18 Pro के लाइनअप का पहला मॉडल iPhone 18 Pro &amp;nbsp;है. यह उन लोगों को बहुत पसंद आएगा, जो हाथ में एकदम फिट बैठने वाला फोन चाहते हैं. इसमें आपको 6.3 इंच की शानदार डिस्प्ले मिलेगी, जिसके ऊपरी हिस्से में स्मॉल डायनामिक आइलैंड दिया गया है. फोन का बाहरी ढांचा एल्युमिनियम से बना है, जो इसे मजबूती देता है. इसकी मोटाई 8.8 मिलीमीटर से थोड़ी ज्यादा बताई जा रही है.&amp;nbsp;
फोन को सुरक्षित रखने के लिए इसमें फेस आईडी का फीचर दिया गया है. वहीं, फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए तीनों रियर कैमरे 48 मेगापिक्सल के कैमरे दिए गए हैं. इनमें पहला 48MP का फ्यूजन कैमरा, दूसरा 48MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा और तीसरा 48 MP का टेलीफोटो कैमरा है. शानदार सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 24MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है. इस फोन में 4288 mAh की बैटरी होने का दावा किया गया है. माना जा रहा है कि इस फोन की कीमत 1399 डॉलर हो सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: iPhone 18 Pro का बदल जाएगा लुक? कैमरा सेटअप को धांसू बनाने के लिए ऐप्पल करेगी यह काम
कैसा होगा iPhone 18 Pro Max?
अगर आप बड़ी स्क्रीन वाले फोन पर वीडियो देखना या गेम खेलना पसंद करते हैं तो यह मॉडल खास आपके लिए है. इस फोन में 6.9 इंच का डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें प्रो मॉडल की तरह स्मॉल डायनामिक आइलैंड और मजबूत एल्युमिनियम बॉडी दी गई है. इसकी मोटाई भी 8.8 मिलीमीटर से ज्यादा है. कैमरे के मामले में यह फोन बिल्कुल प्रो मॉडल जैसा ही है. इसमें भी 48MP के तीन रियल कैमरे (फ्यूजन, अल्ट्रा वाइड और टेलीफोटो) और 24MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. इस स्मार्टफोन की बड़ी स्क्रीन को लंबे समय तक चलाए रखने के लिए इसमें 5200 mAh की पावरफुल बैटरी होने का दावा किया जा रहा है. इस फोन की कीमत 1499 डॉलर होने का अनुमान है.&amp;nbsp;
कैसा होगा iPhone Ultra?&amp;nbsp;
इस पूरी सीरीज का सबसे महंगा और चौंकाने वाला मॉडल आईफोन अल्ट्रा है, जो Apple का पहला फोल्डेबल फोन होगा. इस फोन में आपको डबल स्क्रीन का मजा मिलेगा. जब आप फोन को किताब की तरह खोलेंगे तो अंदर 7.7 इंच की मेन डिस्प्ले मिलेगी, जो इसे मिनी टैबलेट जैसा बना देगी. वहीं, इसे बंद करने पर बाहर की तरफ 5.3 इंच की कवर डिस्प्ले दी गई है. इसमें डायनामिक आइलैंड की जगह कैमरे के लिए छोटा-सा पंच होल दिया गया है. यह फोन बेहद पतला है और खुलने के बाद इसकी मोटाई सिर्फ 4.5 मिलीमीटर रह जाती है. प्रीमियम लुक देने के लिए फोन को टाइटेनियम और एल्युमिनियम से बनाया गया है.
इस मॉडल में फेस आईडी की जगह टच आईडी होने का दावा है. रियर में 48MP के दो कैमरे (फ्यूजन और अल्ट्रा वाइड) दिए गए हैं. &amp;nbsp;इसमें टेलीफोटो कैमरा नहीं है. &amp;nbsp;सेल्फी के लिए इसमें 24MP के दो कैमरे मौजूद हैं, जिनमें एक अंदर वाली बड़ी स्क्रीन पर और दूसरा बाहर वाली कवर स्क्रीन पर रहेगा. डबल स्क्रीन को पावर देने के लिए इसमें सबसे दमदार 5800 mAh की भारी-भरकम बैटरी लगाई गई है. इस स्मार्टफोन की कीमत 2399 डॉलर होने का अनुमान है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>कैसा, होगा, iPhone, Pro, का, लाइनअप, सामने, आ, गई, एक-एक, डिटेल</media:keywords>
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        <title>भारत में WhatsApp का Username फीचर फिलहाल नहीं होगा लॉन्च, केंद्र सरकार ने Meta को भेजा नोटिस</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp जल्द ही अपने यूजर्स के लिए &#039;Username&#039; फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन भारत सरकार ने इसके लॉन्च से पहले ही Meta को नोटिस भेज दिया है.सरकार का कहना है कि इस फीचर का गलत इस्तेमाल कर साइबर ठग लोगों को अपना शिकार बना सकते हैं. इसी वजह से सरकार ने Meta से जवाब मांगा है और कहा है कि जब तक सभी सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिलते, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए.
सरकार ने क्यों उठाया कदम
व्हाट्सएप अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसा फीचर लाने की तैयारी कर रहा था जिसमें यूजर्स मोबाइल नंबर की जगह यूज़रनेम के जरिए जुड़ सकें. माना जा रहा है कि इससे प्राइवेसी बेहतर हो सकती है, लेकिन सरकार ने इसके कुछ संभावित जोखिमों पर सवाल उठाए हैं.
Meta से मांगा गया जवाब
सूत्रों के अनुसार सरकार ने Meta को निर्देश दिया है कि वह तीन दिनों के अंदर इस फीचर से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराए. इसमें यह भी क्लियर करने को कहा गया है कि यूजरनेम सिस्टम कैसे काम करेगा और इससे सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें - कैसा होगा iPhone 18 Pro का लाइनअप? सामने आ गई एक-एक डिटेल
सरकार ने जताई चिंता
इस मामले में सरकार का कहना है कि इस फीचर से ऑनलाइन फ्रॉड और फिशिंग के मामले बढ़ सकते हैं. इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर ठगी के मामलों में इजाफा हो सकता है.सरकार का &amp;nbsp;यह भी मानना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे के नाम या सरकारी विभाग, बैंक जैसी संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो लोगों को धोखा देना आसान हो जाएगा.
व्हाट्सएप फीचर में क्या खास है
यूजरनेम फीचर का उद्देश्य यूजर्स को मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए बिना दूसरों से जुड़ने का विकल्प देना बताया जा रहा है. इससे कई लोग अपनी निजी जानकारी को सीमित रखने में सक्षम हो सकते हैं. हालांकि अभी सबकी नजर Meta के जवाब और सरकार की अगली समीक्षा पर रहेगी. अगर बातचीत और जांच के बाद फीचर सुरक्षित माना जाता है तो भविष्य में भारत में इसकी लॉन्चिंग पर फैसला लिया जा सकता है. फिलहाल इस फीचर की शुरुआत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.यह भी पढ़ें-&amp;nbsp; अब फोन से ही कंट्रोल करें अपना AI एजेंट! OpenClaw ने पेश किया अपना नया मोबाइल ऐप, जानें कैसे करेगा काम ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>इंसानों की जगह काम करेगा रोबोट? इस कंपनी ने पेश किया सबसे एडवांस Humanoid Robot, जानें क्या&amp;क्या कर सकता है</title>
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        <description><![CDATA[ Humanoid Robot: एक तरफ जहां लोग अपनी नौकरियां बचाने के लिए परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी भी जोरो-शोरों से विकसित हो रही है. पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसे रोबोट्स तैयार किए जा रहे हैं जो इंसानों की तरह काम करेंगे. इतना ही नहीं, अब तो ऐसे रोबोट भी आने शुरू हो गए हैं जो इंसानों से कहीं बेहतर तरीके से काम करने में सक्षम हैं. इसी कड़ी में बता दें कि गूगल के समर्थन वाली कंपनी Apptronik ने अपना नया ह्यूमनॉइड रोबोट Apollo 2 को लॉन्च कर दिया है.
इसके साथ ही कंपनी ने एक रोबोट ट्रेनिंग सेंटर Robot Park भी शुरू किया है जहां पर इन रोबोट्स को हर स्थिति में काम करने की ट्रेनिंग दी जाएगी. कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी शेयर की है.
क्यों खास है ये Robot Park
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने Google DeepMind की मदद से करीब 90,000 वर्गफुट का Robot Park तैयार किया है. इस रोबोट पार्क की सबसे बड़ी खास बात ये है कि यहां सिर्फ रोबोट्स को ट्रेनिंग ही नहीं दी जाएगी बल्कि यहां पर उन्हें ऐसी रियल परिस्थितियों से अवगत कराया जाएगा जहां वो इंसानों से बेहतर तरीके से काम कर सकें. इससे वो दुनिया को रियल टाइम में समझ सकेंगे और निर्णय लेकर काम कर सकेंगे.
इस नए रोबोट मे क्या है नया
Apollo 2 रोबोट की बात करें तो कंपनी ने इस रोबोट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये इंसानों के बीच आसानी से काम कर सके. ये रोबोट सामान उठाएगा, सामान को एक जगह से दूसरे जगह ले जाएगा और इतना ही नहीं ये लोगों से नॉर्मल तरीके से बातचीत भी कर सकता है. बता दें कि कंपनी ने इसे दो अलग-अलग वर्जन में पेश किया है जिसमें पहला दो पैरों वाला ह्यूमनॉइड मॉडल है और दूसरा पहियों वाला मोबाइल मॉडल शामिल है.
बड़े स्तर पर होगी तैनाती
कंपनी के CEO के अनुसार फिलहाल Apollo 2 का अभी पायलट स्टेज जारी रहेगा. अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो 2027 और उसके बाद इस रोबोट को बड़े पैमाने पर तैयार करना शुरू किया जाएगा. साथ ही इसकी बड़े स्तर पर तैनाती भी हो सकेगी जहां ये लोगों के साथ मिलकर उनके काम को आसान बनाने का काम करेगा.
डेटा हो रहा इकट्ठा
Apptronik के CEO जेफ कार्डेनास के अनुसार, वो सिर्फ रोबोट ही नहीं तैयार कर रहे हैं बल्कि डेटा भी इकट्ठा कर रहे हैं जिसे वो रोबोट की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमा कर सकेंगे. इस डेटा को ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा जिससे रोबोट कहीं ज्यादा स्मार्ट और आम जिंदगी में लोगों की जरुरतों को आसानी से समझ सके.
क्या रोबोट खा जाएंगे इंसानों की नौकरी
जिस तरह से पूरी दुनिया में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बढ़ रहे हैं उससे सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोबोट्स आने वाले समय में लोगों की नौकरियां खत्म कर देंगे. बता दें कि चीन की ई-कॉमर्स कंपनी JD.com के संस्थापक रिचर्ड लियू के अनुसार, आने वाले समय में डिलीवरी ऐजेंट्स का काम रोबोट ही करेंगे. ऐसे में आज जो भी इंसानी डिलीवरी ऐजेंट्स मौजूद हैं उनकी नौकरी पर बड़ा संकट आ सकता है.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>QR Code स्कैन करने का झंझट मिटेगा, अब लैपटॉप पर आसान तरीके से चला पाएंगे WhatsApp</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp New Feature: व्हाट्सऐप पर एक के बाद एक लगातार दमदार फीचर्स आ रहे हैं. हाल ही में कंपनी ने यूजरनेम फीचर रोलआउट किया है. अब कंपनी एक और फीचर पर काम कर रही है, जिससे लिंक्ड डिवाइस पर व्हाट्सऐप यूज करने के लिए QR कोड को स्कैन करने का झंझट नहीं रहेगा. इसके लिए व्हाट्सऐप पर पासकी-बेस्ड लिंकिंग फीचर आएगा, जो इस पूरी प्रोसेस को फास्ट और सिक्योर बना देगा. जानकारी के मुताबिक, पहले यह फीचर एंड्रॉयड के लिए आएगा. आईफोन के लिए इसकी अवेलेबिलिटी को लेकर अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है.&amp;nbsp;
अभी लिंक्ड डिवाइस के लिए क्या प्रोसेस?
अभी अगर आप अपने मोबाइल के अलावा लैपटॉप या डेस्कटॉप पर व्हाट्सऐप यूज करना चाहते हैं तो QR कोड को स्कैन करना पड़ता है. स्कैन होने के बाद ही आपका अकाउंट दूसरे डिवाइस पर लॉग-इन होगा. अब इस प्रोसेस को बदलने पर विचार किया जा रहा है. नया फीचर आने के बाद यूजर को QR कोड स्कैन करने की जरूरत नहीं रहेगी. इसकी जगह पासकी (Passkey) को यूज कर दूसरे डिवाइस पर व्हाट्सऐप को यूज किया जा सकेगा. हालांकि, यह फीचर QR कोड को रिप्लेस नहीं करेगा बल्कि यूजर को एक और सुविधाजनक ऑप्शन दे देगा.
पासकी का क्या फायदा होगा?
सबसे पहले पासकी के बारे में जानते हैं. पासकी फोन के बिल्ट-इन सिक्योरिटी फीचर को यूज कर आपकी पहचान को वेरिफाई करती है. यानी फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक और स्क्रीन लॉक आदि के जरिए यह आपकी आईडेंटिटी को वेरिफाई करेगी. पासकी को डिवाइस और पासवर्ड मैनेजर में स्टोर किया जा सकता है. इसके फायदे की बात करें तो पासकी को बाईपास करना अटैकर्स के लिए काफी मुश्किल होता है. यानी यह हैकिंग के खिलाफ ज्यादा सुरक्षा देती है.
कैसे काम करेगा नया फीचर?
यह फीचर अवेलेबल होने के बाद जब आप पासकी के जरिए किसी डिवाइस को लिंक करने की कोशिश करेंगे तो आपके पास व्हाट्सऐप पर एक कंफर्मेशन रिक्वेस्ट आएगी. इस पर कंटिन्यू करते ही आपका डिवाइस लिंक हो जाएगा. हालांकि, कुछ मामलों में एडिशनल वेरिफिकेशन के लिए यूजर्स को QR कोड स्कैन करने के लिए भी कहा जा सकता है. यह दिखाता है कि कंपनी QR कोड को पूरी तरह हटा नहीं रही है. इस फीचर को यूज करने के लिए यूजर को व्हाट्सऐप अकाउंट के लिए एक पासकी जनरेट करनी पड़ेगी. इसके लिए ऐप की सेटिंग में जाकर अकाउंट ओपन करें. यहां आपको पासकी का ऑप्शन दिख जाएगी. पासकी क्रिएट होने के बाद आप इसे डिवाइस लिंक करने के लिए यूज कर पाएंगे.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>ऐप्पल का पहला फोल्डबेल आईफोन कब होगा लॉन्च? सामने आ गई तारीख</title>
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        <description><![CDATA[ Foldable iPhone Launch Date: ऐप्पल के नए आईफोन का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए खुशखबरी है. यह जानकारी पहले ही मिल गई थी कि ऐप्पल सितंबर में अपने पहले फोल्डेबल आईफोन के साथ iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च करेगी. अब एक रिपोर्ट में उस तारीख से भी पर्दा उठ गया है, जिस दिन नए आईफोन को लॉन्च किया जाएगा. ऐप्पल को कवर करने वाले ब्लूमबर्ग के पत्रकार मार्क गुरमैन ने अपनी रिपोर्ट में इस तारीख के बारे में जानकारी दी है. आइए जानते हैं कि नए आईफोन किस तारीख को लॉन्च होंगे.
कब लॉन्च होंगे नए आईफोन?
गुरमैन ने दावा किया है कि ऐप्पल 8 सितंबर को नए आईफोन लॉन्च करेगी और 9 सितंबर को इसके ऑल्टरनेट के तौर पर रखा गया है.गुरमैन का कहना है कि इन दो दिनों को छोड़कर बाकी किसी दिन लॉन्चिंग बहुत मुश्किल लग रही है. यानी अगर 8 सितंबर को लॉन्च इवेंट नहीं होता है तो 9 सितंबर को आखिरकार नए आईफोन की एंट्री हो जाएगी. बता दें कि पिछले कुछ सालों से ऐप्पल सितंबर में ही अपना लॉन्च इवेंट करती आई है.
क्या रहता है ऐप्पल का लॉन्च कैलेंडर?
ऐप्पल आमतौर पर सितंबर में लेबर डे के अगले मंगलवार या बुधवार को लॉन्च इवेंट आर्गेनाइज करती है. इस बार 7 सितंबर को लेबर डे है और 8 सितंबर को मंगलवार होने के कारण पूरी उम्मीद है कि उस दिन ऐप्पल फोल्डेबल आईफोन समेत बाकी आईफोन को लॉन्च कर देगी. लॉन्चिंग के एक-दो हफ्ते बाद नए आईफोन की बिक्री शुरू हो जाएगी. इस बार सितंबर में ऐप्पल नई लाइनअप के सारे मॉडल लॉन्च नहीं करेगी. सितंबर में जहां Foldable iPhone, iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को लॉन्च किया जाएगा, वहीं iPhone 18, iPhone 18e और iPhone Air 2 को अगले साल फरवरी-मार्च में लाया जाएगा.
सितंबर में ही नए आईफोन क्यों लॉन्च करती है ऐप्पल?
सितंबर में नए आईफोन लॉन्च करने के पीछे होलीडेज सेल एक बड़ा कारण है. साल की चौथी तिमाही में थैंक्सगिविंग, ब्लैक फ्राइडे, क्रिसमस और भारत में दिवाली समेत कई बड़े त्योहार आते हैं. इससे फेस्टिव सीजन में कंपनी की धमाकेदार सेल करने मदद मिलती है. इसके अलावा ऐप्पल का फिस्कल ईयर सितंबर में पूरा होता है. इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन के लिए भी सितंबर सही समय रहता है. हर साल जून-अगस्त के बीच में आईफोन का मास प्रोडक्शन शुरू होता है, जो सितंबर आते-आते अपने चरम पर पहुंच जाता है. इसलिए लॉन्चिंग के समय तक कंपनी की इन्वेंट्री भर जाती है और सप्लाई की ज्यादा दिक्कत नहीं रहती.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>चौंकाने वाला खुलासा! सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा के लिए बने आधे से ज्यादा सेफ्टी फीचर्स नहीं कर रहे काम</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Safety Features: आज के आधुनिक समय में सोशल मीडिया लोगों के जीवन का हिस्ता बनता जा रहा है. बच्चों से लेकर बड़ों तक, आज ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं. लेकिन कुछ समय पहले ही बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कई देशों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्स पर सख्त एक्शन लिया था. इसमें प्लेटफॉर्म को निर्देश दिए गए थे कि वो बच्चों की सुरक्षा के लिए नए फीचर्स को ऐड करें.
लेकिन अब एक रिपोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है जिसमें बताया गया है कि सोशल मीडिया पर बच्चों के लिए मौजूद आधे से ज्यादा फीचर्स काम ही नहीं कर रहे हैं.
कैसे हुआ टेस्ट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस टेस्ट को तीन स्टेजों में किया गया है. इसमें रिसर्च टीम ने अलग-अलग उम्र के बच्चों और बड़ें के डमी अकाउंट्स बनाए और उसके बाद तीन तरह की स्थितियों में इसे टेस्ट किया गया. पहले ये चेक किया गया है कि बच्चा नॉर्मली कैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है. इसके बाद दूसरे स्टेज में ये चेक किया गया है कि कैसे बच्चे सेफ्टी फीचर्स को आसानी से दरकिनार कर सकते हैं. वहीं, तीसरी स्टेज में ये चेक किया गया है कि कैसे कोई बड़ा व्यक्ति युवाओं के अकाउंट्स तक आसानी से पहुंच सकता है. अब ऐसे में अगर कोई भी सेफ्टी फीचर प्लेटफॉर्म पर सही तरीके से काम नहीं कर रहा था तो उसे फेल माना गया है.
इन संस्थानों ने की जांच
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये स्टडी New York University और Northeastern University के शोधकर्ताओं ने की है. इसे Heat Initiative और Cybersafety Research Center ने प्रकाशित किया है. जानकारी के अनुसार, रिसर्च के दौरान चार बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद कुल 86 चाइल्ड सेफ्टी फीचर्स की जांच की गई.
रिसर्चर्स का कहना है कि जिन सेफ्टी फीचर्स का प्रमोशन बच्चों को गलत कंटेंट से दूर रखने या अजनबियों के संपर्क से बचाने के लिए किया जाता है उनमें से कम से कम 50 प्रतिशत सही रिजल्ट देने में असफल रहे हैं.
कंपनियों ने जताई आपत्ति
अब इस रिपोर्ट के आने के बाद कंपनियों में तहलका मच गया है. Snap, Meta और YouTube ने इस स्टडी के रिजल्ट्स को सही नहीं माना है और अपनी असहमति जताई है. Meta का कहना है कि Instagram के Teen Accounts फीचर की वजह से युवाओं को पहले के मुकाबले कम गलत कंटेंट दिखाए जा रहे हैं. इसके अलावा कंपनी ने ये भी दावा किया है कि रिपोर्ट में फीचर्स को गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है और इसके कोई ज्यादा सबूत भी नहीं दिए गए हैं.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या आपके व्हाट्सऐप पर नहीं दिख यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन? यह तरीका आएगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Username: मेटा के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर Username फीचर आ गया है. इसका फायदा यह होगा कि किसी से कनेक्ट होने के लिए अब आपको फोन नंबर नहीं देने पड़ेंगे और यूजरनेम से काम चल जाएगा. बता दें कि अभी यह फीचर पूरी तरह से रोल आउट नहीं हुआ है. अभी केवल यूजरनेम को रिजर्व करने की प्रोसेस शुरू हुई है. कई लोगों ने अपना यूजरनेम रिजर्व कर लिया है, जबकि कईयों के अकाउंट पर यह ऑप्शन नहीं आया है. आइए जानते हैं कि ऐसे लोगों के लिए क्या तरीका है और अपनी पसंद का यूजरनेम कैसे रिजर्व किया जा सकता है.&amp;nbsp;
यूजरनेम रिजर्व करने का ऑप्शन न दिखें तो करें यह काम
यूजरनेम रिजर्वेशन की प्रोसेस पूरी हफ्ते रोलआउट होती रहेगी. यही कारण है कि कुछ यूजर्स के अकाउंट में यह ऑप्शन आ गया है, जबकि कुछ को इंतजार करना पड़ रहा है. अगर आपके अकाउंट में यह ऑप्शन नहीं आया है तो व्हाट्सऐप को अपडेट कर लें. व्हाट्सऐप का कहना है कि अगर किसी यूजर को यह ऑप्शन नहीं दिख रहा है तो वह ऐप चेक करते रहें. चरणबद्ध तरीके से इसे सभी यूजर के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा.&amp;nbsp;
कैसे रिजर्व करें यूजरनेम?
व्हाट्सऐप पर यूजरनेम रिजर्व करने का तरीका बड़ा आसान है. इसके लिए ऐप ओपन कर सेटिंग में जाएं और यहां दिख रहे अकाउंट सेक्शन पर टैप करें. यहां आपको यूजरनेम का ऑप्शन दिख जाएगा. इसमें आप यूजरनेम रिजर्व कर सकते हैं. ध्यान रखें कि इसमें एक जैसे दो यूजरनेम सेट नहीं हो सकते.
कैसे लें मनपसंद यूजरनेम?
व्हाट्सऐप पर कई यूजर्स को यूजरनेम सेट करते हुए दिक्कत आ रही है. कॉमन नेम वाले यूजर्स को खासकर इस समस्या से ज्यादा जूझना पड़ रहा है. दरअसल, व्हाट्सऐप ने सिक्योरिटी रीजन के चलते एक यूनिक नाम को एक ही यूजर के लिए सेट करने का ऑप्शन दिया है. इस कारण कई लोग अपनी पसंद का यूजरनेम सेट नहीं कर पा रहे हैं. अगर आप भी इस दिक्कत से जूझ रहे हैं तो कुछ ट्रिक्स आपके काम सकती हैं. आप अपने नाम में नंबर, डॉट, अंडरस्कोर आदि जोड़कर यूजरनेम सेट कर सकते हैं. इसके अलावा आप प्रीफिक्स के तौर पर नाम के आगे प्रोफेशन या Official, Iam, OG, Real जैसे अक्षर जोड़कर भी अपना यूजरनेम बना सकते हैं. अगर यह तरीका काम नहीं आ रहा तो आप अपने इंस्टाग्राम या फेसबुक के यूजरनेम को भी WhatsApp के यूजरनेम के तौर पर सेट कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>AI टेस्टिंग के नाम पर Meta ने ये क्या किया? बच्चों के फेक प्रोफाइल बनाने का लगा आरोप</title>
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        <description><![CDATA[ Meta AI Testing: Mark Zuckerberg की कंपनी मेटा एक बार फिर विवादों में घिर चुकी है. कंपनी पर बच्चों की फेक प्रोफाइल बनाने का गंभीर आरोप लगा है. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि मेटा ने एक सीक्रेट प्रोजेक्ट चलाया था. इसमें कंपनी ने अपने कॉन्ट्रैक्टर्स से बच्चों के फर्जी प्रोफाइल बनाकर Gemini और ChatGPT जैसे चैटबॉट को टेस्ट करने को कहा था. टेस्टिंग के दौरान इन प्रोफाइल के जरिए एआई चैटबॉट्स से सेक्स, ड्रग्स और दूसरे कई हाई-रिस्क मुद्दों पर बातचीत की गई थी. आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और मेटा का इस पर क्या कहना है.
क्यों बनाए गए बच्चों के फर्जी अकाउंट?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा के इस प्रोजेक्ट को &amp;lsquo;Cannes&amp;rsquo; नाम दिया गया था और कंपनी के Covalen नाम के कॉन्ट्रैक्टर ने मैनेज किया था. यह प्रोजेक्ट 21 अप्रैल तक एक्टिव था. मेटा ने इस प्रोजेक्ट को अपने राइवल एआई चैटबॉट्स को टेस्ट करने के लिए शुरू किया था. यानी मेटा इन प्रोफाइल के जरिए यह देख रही थी कि गूगल और ओपनएआई जैसी कंपनियों के एआई चैटबॉट टीनएजर्स को हाई-रिस्क टॉपिक पर कैसा जवाब देते हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए ऐसे फर्जी अकाउंट तैयार किए गए थे, जो 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लगे. फिर इन अकाउंट्स के जरिए अलग-अलग चैटबॉट्स की टेक्स्ट और इमेज प्रॉम्प्ट के सहारे टेस्टिंग की गई.
सेंसेटिव टॉपिक्स पर की गई बातचीत
रिपोर्ट में बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान कई प्रॉम्प्ट में दवाएं, चाकू, फंदे और मेडिकल से जुड़ी कुछ तस्वीरें यूज की गई. इसी तरह कई प्रॉम्प्टस को ऐसे लिखा गया, जैसे उन्हें बुलिंग, खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विचारों और ड्रग्स से जुड़े सवालों से जूझ रहे बच्चों और टीनएजर ने लिखा है. इनमें ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़े सवालों का भी जिक्र किया गया था, वहीं कुछ पूरी तरह काल्पनिक स्थितियों के बारे में बात की गई थी. इस प्रोजेक्ट के पहले हिस्से में अलग-अलग एआई चैटबॉट्स को 45,000 से ज्यादा ऐसे प्रॉम्प्ट्स दिए गए थे.&amp;nbsp;
मेटा ने अपने बचाव में क्या कहा?
मेटा ने अपने इस प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि सेफ्टी और एज-एप्रोप्रिएट बिहेवियर के लिए ऐसा आमतौर पर किया जाता है. कंपनी ने कहा कि कंपीटिटर कंपनियों के चैटबॉट की बेंचमार्किंग सेफ्टी परफॉर्मेंस के विश्लेषण में मदद करती है. साथ ही मेटा ने प्रोजेक्ट के दौरान कलेक्ट किए गए रिस्पॉन्सेस को अपने मॉडल की ट्रेनिंग के लिए यूज करने से भी इनकार किया है. लेकिन मेटा पर फिर भी सवाल उठ रहे हैं. भले ही बेंचमार्किंग एक कॉमन प्रैक्टिस है, लेकिन बच्चों के फेक अकाउंट्स क्रिएट कर की गई ऐसी टेस्टिंग नियमों और ट्रांसपेरेंसी को लेकर कई सवाल खड़े करती है.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>टेस्टिंग, के, नाम, पर, Meta, ने, ये, क्या, किया, बच्चों, के, फेक, प्रोफाइल, बनाने, का, लगा, आरोप</media:keywords>
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        <title>स्मार्टवॉच और दूसरे वीयरेबल डिवाइस का नहीं रहेगा झंझट, नई AI स्किन बनेगी आपकी पर्सनल डॉक्टर</title>
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        <description><![CDATA[ AI Skin Patch: आपके हेल्थ डेटा पर नजर रखने के लिए स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड और स्मार्ट रिंग जैसे डिवाइसेस की जरूरत जल्द ही खत्म हो सकती है. यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के रिसर्चर ने स्किन जैसा दिखने वाला एक कप्यूंटिंग पैच बनाया है, जो एआई की मदद से बॉडी पर ही पूरी डेटा प्रोसेस कर देगा. यानी यह स्मार्टवॉच और दूसरे डिवाइसेस की तरह आपका डेटा सर्वर पर नहीं भेजेगा. आपकी स्किन पर लगा यह पैच डेटा मिलते ही उसी वक्त उसी जगह पर इसे प्रोसेस कर देगा.&amp;nbsp;
AI Skin Patch का क्या फायदा होगा?
अगर स्मार्टवॉट की बात करें तो यह हार्ट रेट और मूवमेंट आदि के डेटा को मॉनिटर कर सकती है, लेकिन डेटा एनालिसिस का पूरा काम सर्वर पर होता है. कई बार जब एक-एक पल महत्वपूर्ण हो जाए, उस स्थिति में यह देरी बहुत बड़ी मुश्किल बन सकती है. ऐसी स्थिति में यह पैच जान बचा सकता है. इसे डेटा प्रोसेस करने के लिए किसी एक्सटर्नल सर्वर की जरूरत नहीं होगी. इस पैच पर कई सालों से काम चल रहा है. रिसर्चर इसे एक ऐसे इंटेलीजेंस डिवाइस के तौर पर डेवलप करना चाहते हैं, जो सीधे बायोलॉजिकल टिश्यू से अटैच हो सके. शुरुआती रिसर्च में यह पता चला कि ऐसा डिवाइस थोड़े ट्रांजिस्टर के साथ काम कर सकता है, लेकिन इसे प्रैक्टिकल यूज के लिए तैयार करना चुनौती बना हुआ था. अब रिसर्चर ने इस चुनौती से पार पा लिया है.
कैसे काम करेगा यह पैच?
रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्चर ने इस नए पैच में ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोकेमिकल ट्रांजिस्टर को यूज किया है. यह कंप्यूटर चिप्स में यूज होने वाले ट्रांजिस्टर से अलग तरीके से काम करात है. यह डिवाइस इलेक्ट्रिक करंट और इलेक्ट्रोलाइट-लेयर में आयन के मूवमेंट्स से इंफोर्मेशन को प्रोसेस कर सकता है. चूंकि इंलेक्ट्रोलाइट इंफोर्मेशन को स्टोर रख सकता है, इसलिए हर ट्रांजिस्ट अपनी मेमोरी के साथ काम करता है. हालांकि, ऐसा डिवाइस तैयार करना काफी मुश्किल भरा काम था, लेकिन रिसर्चर ने अलग-अलग तरीके इस्तेमाल कर इसे एक डिवाइस का रूप दे दिया है.&amp;nbsp;
कहां-कहां हो सकता है यूज?
इस डिवाइस को दिल की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह अचानक से दिल में पैदा होने वाले इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को रोकने में मददगार साबित हो सकता है. अगर इन्हें तुरंत न रोका जाए तो ये एक्टिविटी जानलेवा भी हो सकती हैं. इसी तरह यह ब्लड शुगर, हार्ट रेट और ECG मेजरमेंट के जरिए हार्ट अटैक को रोकने में मददगार साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>स्मार्टवॉच, और, दूसरे, वीयरेबल, डिवाइस, का, नहीं, रहेगा, झंझट, नई, स्किन, बनेगी, आपकी, पर्सनल, डॉक्टर</media:keywords>
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        <title>AI टूल्स पर सरकार का बड़ा अलर्ट! अगर ऑफिस में कर रहें इस्तेमाल तो हो जाएं सावधान, जानें क्या है नियम</title>
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        <description><![CDATA[ Warning for AI Tools: आज की बढ़ती टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी तेजी से ग्रो कर रहा है. आज ज्यादातर लोग एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उनके काम को आसान बनाने का काम करता है. लेकिन एआई के विस्तार के साथ-साथ साइबर फ्रॉड भी काफी तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में अब लोगों की प्राइवेसी पर भी ज्यादा खतरा बना रहा है. इसी को देखते हुए अब सरकार ने कई एआई टूल्स को लेकर चेतावनी जारी की है. आइए जानते हैं सरकार ने क्यों लिया ये फैसला.
CERT-In ने क्यों जारी की चेतावनी?
जानकारी के अनुसार, CERT-In ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि नई जनरेशन वाले एडवांस AI मॉडल साइबर हमलों को पहले से कहीं ज्यादा तेज और प्रभावी बना सकते हैं. इन एडवांस एआई सिस्टम की मदद से साइबर हमलावर पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से सिस्टम में सेंध लगा सकते हैं.
इसीलिए एजेंसी ने सरकारी संस्थानों को सलाह दी है कि वे अपने सिस्टम में मौजूद गंभीर सुरक्षा खामियों को 12 से 24 घंटे के भीतर ठीक कर लें जिससे होने वाले साइबर हमलों से बचा जा सके.
सरकारी दफ्तरों के लिए चेतावनी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज सरकारी कामकाजों में भी एआई टूल्स का जोरों से इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन इसके साथ ही प्राइवेसी और साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ गया है. इसीलिए भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) की साइबर सुरक्षा ने कई सरकारी विभागों को चेतावनी दी है. दरअसल, इस चेतावनी में कहा गया है कि कोई भी कर्मचारी ऐसे एआई टूल्स काम में इस्तेमाल न करें जिसे मंजूरी नहीं मिली है. ऐसा इसलिए क्योंकि बिना मंजूरी वाले एआई टूल्स इस्तेमाल करने से प्राइवेसी पर खतरा बढ़ सकता है.
हालांकि, इन निर्देशों में जनरेटिव AI टूल्स पर पूरी तरह बैन लगाने को लेकर कोई बात नहीं की है. सरकार का मेन मकसद ये है कि इन टूल्स के इस्तेमाल से कहीं सरकारी डेटा खतरे में न पड़ जाए.
सरकारी विभागों को दिए गए ये निर्देश
सरकारी विभागों के लिए एजेंसी ने AI प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर कंट्रोल के साथ-साथ कई सारे निर्देश भी जारी किए हैं. विभागों को बताया गया है कि जरूरी सिस्टम में मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) को अनिवार्य रूप से मजबूत करना है. इसके अलावा सभी जरूरी सिक्योरिटी अपडेट और पैच समय पर इंस्टॉल करना भी जरूरी है. साथ ही नियमित रूप से वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और सिक्योरिटी ऑडिट कराना भी जरूरी है. इतना ही नहीं, इंटरनेट से जुड़े सर्वर और नेटवर्क पर लगातार पैनी नजर रखनी है.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कमाल की टेक्नोलॉजी! इस देश में लोगों की जान बचा रहा ये Smart Bracelet, हीटवेव से पहले ही देता है खतरे का संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Bracelet: आज की इस आधुनिक दुनिया में कई एसी टेक्नोलॉजी आ चुकी हैं जो लोगों के जान बचाने का काम कर ही हैं. ऐसा ही एक मामला रोम से सामने आया है. दरअसल, यहां पर एक ऐसा स्मार्ट ब्रेसलेट को इस्तेमाल में लाया गया है जो लोगों की जान बचाने का काम कर रहा है. ये स्मार्ट डिवाइस लोगों को हीटवेव से होने वाले खतरों से पहले ही संकेत दे देता है जिससे लोग समय रहते ही उपाय ढूंढ सकें. आइए जानते हैं कि कैसे काम करती है ये स्मार्ट ब्रेसलेट.
हीटवेव से बचाने के लिए डिवाइस का सहारा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रोम में इन दिनों तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच रहा है जिससे बुजुर्गों को काफी समस्या हो रही है. इसी खतरे को कम करने के लिए वहां के प्रशासन ने एक स्पेशल स्मार्ट ब्रेसलेट का सहारा लेना शुरू कर दिया है. ये डिवाइस जो इसे पहनता है उसकी हेल्थ और एक्टिविटी पर पैनी नजर रखता है. इससे होता ये है कि डिवाइस को किसी भी असामान्य एक्टिविटी का पता लगते ही ये अलर्ट दे देता है. बता दें कि इस योजना के लिए यूरोपीय संघ के कोविड रिकवरी फंड के तहत करीब 400 मिलियन यूरो का बजट तय किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का लाभ करीब वहां के 700 बुजुर्गों तक पहुंच चुका है.
कैसे काम करता है ये डिवाइस
आपको बता दें कि ये डिवाइस काले रंग का है. साथ ही ये कई सारे सेंसरों से लैस है. रिपोर्ट के अनुसार, इसमें मोशन सेंसर लगे हुए हैं जो ये पहचान सकता है कि पहनने वाला व्यक्ति अचानक गिर गया है या नहीं. इसके अलावा ये पूरे दिन व्यक्ति की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता रहता है.
इसके साथ ही इस डिवाइस में एक्सेलेरोमीटर और जाइरोस्कोप जैसे सेंसर भी मौजूद हैं जो शरीर में होने वाले छोटे-मोटे एक्टिविटी पर नजर रखता है. इसमें मौजूद ऑप्टिकल हार्ट रेट सेंसर लगातार दिल की धड़कन पर नजर रखता है.
बता दें कि इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये केवल एक पहनने वाला डिवाइस ही नहीं है बल्कि ये डिवाइस आस-पास मौजूद फार्मेसी में उपलब्ध कंट्रोल सेंटर तक व्यक्ति का डेटा भी पहुंचाता है. इसी डेटा के जरिए कंट्रोल सेंटर में मौजूद कर्मचारी हर व्यक्ति की एक्टिविटी पर नजर रखता है और किसी भी आपातकाल स्थिति में तुरंत मेडिकल सर्विस उपलब्ध कराई जाती है.
फोन करके ली जाती है खबर
इतना ही नहीं, इस डिवाइस के साथ-साथ वहां की प्रशासन डेली बुजुर्गों को फोन करके उनकी सेहत की खबर लेते रहते हैं. बता दें कि बातचीत के दौरान उन्होंने समय पर दवाई ली या नहीं, गर्मी से बचाव कर रहे हैं या नहीं जैसी चीजें बुजुर्गों से पूछी जाती हैं.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>जापान की नई AI पुलिस चीफ Aieko से ठगों की बढ़ी मुश्किलें! ऐसे कर रही लोगों की सुरक्षा</title>
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        <description><![CDATA[ Japan AI Police Chief: पूरी दुनिया टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जोरों से काम कर रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज लोगों के जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है. कई एआई टूल्स लोगों के काम को आसान बना रहे हैं. वहीं, एआई की मदद से अब रोबोट्स भी तैयार हो रहे हैं जो अनेकों काम करने में सक्षम हैं. इसी कड़ी में जापान ने अब अपने देश में एक नई एआई पुलिस चीफ तैयार की है जो लोगों को ठगों से बचाने का काम कर रही है. आइए जानते हैं कि कैसे काम करती है ये नई एआई पुलिस चीफ.
जापान की नई पहल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस एआई पुलिस चीफ का नाम आइको रखा गया है. इसके साथ ही इस डिजिटल अवतार को कागावा यूनिवर्सिटी के साइबर सिक्योरिटी सेंटर के विजिटिंग प्रोफेसर तोशिनोरी हिरानो ने तैयार किया है. बता दें कि हिरानो पहले से ही ओसाका पुलिस को साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में सलाह देते रहे हैं.
उनका मानना है कि एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए लोगों तक सुरक्षा संबंधी जानकारी ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाई जा सकती है.
ठगी में हो रहा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले लोग फिजिकली लोगों को ठगा करते थे. लेकिन जैसे ही टेक्नोलॉजी एडवांस हुई है ठगों ने भी अब नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है. अब साइबर ठग टेक्नोलॉजी की मदद से लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाते हैं. अक्सर, वे ऑनलाइन वीडियो प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके लोगों को डिजिटल अरेस्ट करते हैं तो कई बार एआई जनरेटेड वीडियो के जरिए लोगों को डरा कर उनसे ठगी की जाती है.
ऐसे लोगों को कर रही जागरुक
जानकारी के मुताबिक, आइको ने लोगों को जागरुक करने काम ओसाका पुलिस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल से की है. इस चैनल पर &quot;चीफ आइको की क्राइम प्रिवेंशन क्लास&quot; नाम के एक वीडियो डाला गया है जिसमें वो बता रही है कि ऑनलाइन फ्रॉड से कैसे बचा जाए. इस वीडियो में एआई पुलिस चीफ ने बताया है कि कैसे ठग लोगों को अपना शिकार बनाते हैं.
इतना ही नहीं, इस वीडियो में आइको ने लोगों को जागरुक किया है कोई भी असली पुलिस अफसर कभी भी ऑनलाइन वीडियो पर अपनी पहचान नहीं बताता है और न ही आपको अरेस्ट वारेंट दिखाता है. इसके अलावा पुलिस कभी भी ऐसे प्लेटफॉर्म पर लोगों से पेमेंट ट्रांसफर करने को भी नहीं कहती है. ये सब साइबर ठगों की चाल होती है जिससे लोगों को अपने चंगुल में फंसाया जाए.
नए स्कैम से करेगी लोगों को आगाह
ओसाका पुलिस का कहना है कि आइको की ये वीडियो सीरीज आगे आने वाले समय में भी अपडेट होती रहेगी. जैसे-जैसे साइबर अपराधी नए तरीके अपनाएंगे, वैसे-वैसे आइको भी लोगों को उन खतरों के बारे में समय-समय पर जागरूक करती रहेगी. पुलिस को उम्मीद है कि AI टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से ऑनलाइन ठगी के मामलों में कमी लाने और लोगों को समय रहते सतर्क करने में मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब WhatsApp पर नंबर बताए बिना भी कर सकेंगे चैट! आया नया Username फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ मेटा की मैसेजिंग ऐप WhatsApp अब अपने यूजर्स को यूजरनेम रखने की सुविधा दे रही है. इसका मतलब है कि अब आपको किसी नए शख्स से बात करने के लिए अपना फोन नंबर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कंपनी ने 29 जून को इसका ऐलान किया. फिलहाल, यूजरनेम रिजर्व यानी पहले से बुक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह फीचर इस साल के आखिर तक सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा.
क्या है यह नया फीचर?
WhatsApp पर अभी तक किसी को मैसेज करने या किसी से मैसेज पाने के लिए फोन नंबर का होना जरूरी था. नए फीचर के बाद आप अपने यूजरनेम से भी पहचाने जा सकेंगे. कंपनी का कहना है कि जब आप किसी व्यक्ति या किसी बिजनेस को पहली बार मैसेज करेंगे तो उसे आपका फोन नंबर नहीं दिखेगा, बशर्ते आपने अपना यूजरनेम चालू किया हो. WhatsApp ने इसे एक प्राइवेसी फीचर बताया है. कंपनी का कहना है कि किसी नए इंसान से मिलने पर सीधे फोन नंबर देना कई बार बड़ा कदम लगता है, क्योंकि फोन नंबर निजी होता है और हमारी जिंदगी के कई कामों से जुड़ा होता है. ऐसे में यूजरनेम एक आसान रास्ता देता है.
अभी क्यों करना है यूजरनेम रिजर्व?
WhatsApp के दुनियाभर में तीन अरब से ज्यादा यूजर हैं. इतने बड़े यूजरबेस की वजह से एक जैसे नाम आपस में टकराने की आशंका रहती है, यानी जो नाम आप चाहते हैं, वह किसी और का हो सकता है. इसी वजह से कंपनी ने रिजर्वेशन पहले से खोल दिया है, ताकि हर कोई अपनी पसंद का नाम वक्त रहते बुक कर ले. यूजरनेम तीन से 35 अक्षर तक का हो सकता है. कंपनी ने मशहूर हस्तियों के नाम भी अलग से रिजर्व रखे हैं, ताकि कोई उनके नाम का गलत इस्तेमाल न कर सके.
कैसे रिजर्व करें यूजरनेम?
इसके लिए सबसे पहले अपने फोन में WhatsApp को लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट कर लें. इसके बाद Settings में जाएं, फिर Account और फिर Username पर टैप करें. यहां आप अपना मनचाहा नाम चुन सकते हैं. ऐप खुद बता देगा कि वह नाम उपलब्ध है या किसी और ने ले लिया है. कंपनी का कहना है कि यह सुविधा धीरे-धीरे अलग-अलग देशों में आएगी. आपके देश में जब यह सुविधा उपलब्ध होगी तो WhatsApp आपको ऐप के अंदर ही इसकी जानकारी दे देगा.
प्राइवेसी के लिए खास इंतजाम
WhatsApp ने साफ किया है कि यूजरनेम को ढूंढने के लिए कोई डायरेक्टरी या सर्च लिस्ट नहीं होगी, जैसा इंस्टाग्राम पर होता है. यानी किसी से पहली बार बात करने के लिए उसका पूरा और सही यूजरनेम पता होना जरूरी है. इसके अलावा कंपनी एक ऑप्शनल यूजरनेम की भी दे रही है, जिसे की कहा जा रहा है. अगर आप चाहें तो यह तय कर सकते हैं कि सिर्फ वही लोग आपको मैसेज कर सकें, जिनके पास आपकी यह की हो. आप अपना यूजरनेम कभी भी बदल सकते हैं या यह फीचर बंद भी कर सकते हैं.
बिजनेस और क्रिएटर्स के लिए सुविधा
जो लोग ऑनलाइन एक तय पहचान बनाए रखना चाहते हैं, जैसे क्रिएटर, छोटे कारोबारी या संस्थाएं, उनके लिए कंपनी ने खास ऑप्शन रखा है. ऐसे लोग अपना इंस्टाग्राम या फेसबुक वाला यूजरनेम WhatsApp पर भी क्लेम कर सकते हैं, ताकि हर जगह उनकी पहचान एक जैसी रहे. बता दें कि यूजरनेम की सुविधा टेलीग्राम, सिग्नल और वायर जैसे मैसेजिंग ऐप पहले से देते रहे हैं. WhatsApp ने अब जाकर यह कदम उठाया है.
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 10:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, WhatsApp, पर, नंबर, बताए, बिना, भी, कर, सकेंगे, चैट, आया, नया, Username, फीचर</media:keywords>
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        <title>WiFi राउटर के ऊपर कभी नहीं रखनी चाहिए ये चीजें, स्लो हो जाता है इंटरनेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/wifi-राउटर-के-ऊपर-कभी-नहीं-रखनी-चाहिए-ये-चीजें-स्लो-हो-जाता-है-इंटरनेट</link>
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        <description><![CDATA[ WiFi राउटर के ऊपर कभी नहीं रखनी चाहिए ये चीजें, स्लो हो जाता है इंटरनेट ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 10:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone में दिखने वाला Blue Arrow क्या है? 90% यूजर्स नहीं जानते इसका असली मतलब</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Blue Arrow: आज पूरी दुनिया में iPhone का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ा है. कई लोग इसे अपने स्टेटस के तौर पर खरीदते हैं तो कई इसे अपनी इच्छा पूरी करने के लिए खरीदते हैं. लेकिन iPhone आज पूरी दुनिया खूब इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन अक्सर देखा गया है कि iPhone यूजर्स को डिवाइस के सभी फीचर्स और सिंबल के बारे में पता ही नहीं होता है. आज हम आपको एक ऐसे ही चीज के बारे में बताने जा रहे हैं. दरअसल, ज्यादातर यूजर्स को आईफोन में मौजूद ब्लू ऐरो का असली मतलब पता ही नहीं होता है.
क्या है iPhone का Blue Arrow?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि iPhone में दिखाई देने वाला Blue Arrow दरअसल Location Services का इंडिकेटर होता है. इसका मतलब है कि कोई ऐप या सिस्टम सर्विस आपके फोन की लोकेशन का इस्तेमाल कर रही है या हाल ही में कर चुकी है. इस फीचर को कंपनी ने आपके प्राइवेसी के तौर पर दिया है जिससे आपको हमेशा पता लगता रहे कि कौन सा ऐप आपकी लोकेशन एक्सेस कर रहा है.
कई तरह के होते हैं Arrow
बता दें कि iPhone में केवल एक तरह का नहीं बल्कि कई अलग-अलग तरह के लोकेशन आइकन मौजूद होते हैं. Solid Blue Arrow तब दिखता है जब ऐप इस समय आपकी लोकेशन का इस्तेमाल कर रहा है. Hollow Blue Arrow साइन तब दिखाई देगा जब किसी ऐप ने आपकी लोकेशन के आसपास एक Geofence सेट किया है और जरूरत पड़ने पर लोकेशन एक्सेस करेगा. वहीं, Gray Arrow तब दिखाई देता है जब पिछले 24 घंटों के दौरान किसी ऐप ने आपकी लोकेशन का इस्तेमाल किया हो.
कब दिखता है Blue Arrow
दरअसल, ये साइन आपको अलग-अलग परिस्थितियों में दिखाई दे सकता है. जैसे जब आप Maps ऐप से नेविगेशन कर रहे हों तब भी ये सिंबल दिखाई देता है. इसके अलावा Weather ऐप मौसम की जानकारी के लिए आपकी लोकेशन एक्सेस करता है तब भी आपको ये सिंबल दिखाई देगा. वहीं, अगर आप कोई भी Ride Booking या Food Delivery ऐप का इस्तेमाल करते हैं तो वे आपकी लाइव लोकेशन एक्सेस करते हैं तो आपको ये साइन दिखाई देने लगता है.
कैसे बंद करें Blue Arrow
अगर आप नहीं चाहते कि बार-बार Blue Arrow दिखाई दे तो ऐप की लोकेशन परमिशन को बंद कर सकते हैं और उसके बाद आपको ये ऐरो दिखाई देना बंद हो जाएगा. जिन ऐप्स को जरूरत नहीं है, उनकी लोकेशन Never या While Using the App पर सेट कर दें.
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>ट्रेंड को फॉलो कर Wired Earbuds ले रहे हैं? खरीदने से पहले जान लें इनके झंझट</title>
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        <description><![CDATA[ Wired Earphone Disadvantages: वायर्ड ईयरफोन फिर से ट्रेंड में आ गए हैं. बीच में ब्लूटूथ ईयरबड्स का चलन बढ़ा था, लेकिन अब फिर से सेलिब्रिटी से लेकर आम लोग वायर्ड ईयरफोन यूज करने लगे हैं. वायर्ड ईयरफोन के कई फायदे हैं. ऑडियो क्वालिटी से लेकर बैटरी का झंझट न होने समेत इनके कई फायदे हैं और यही वजह है कि लोग फिर से इनका इस्तेमाल करने लगे हैं. हालांकि, इनके कई नुकसान भी हैं, जिनकी जानकारी होना जरूरी है. अगर वायर्ड ईयरफोन खरीद रहे हैं तो इन्हें दिमाग में रखना जरूरी है.
वायर का उलझना
वायर्ड ईयरफोन का सबसे बड़ा झंझट वायर का उलझना है. हालांकि, कई लोग यूज करने के बाद ईयरफोन को संभालकर रखते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें सीधा ही रख देते हैं. इसलिए जब इन्हें दूसरी बार बैग या पॉकेट से निकला जाता है तो वायर उलझ जाते हैं और इन्हें अनटैंगल करना झंझट वाला काम हो जाता है. ब्लूटूथ ईयरबड्स के मामले में ऐसी दिक्कत नहीं रहती.&amp;nbsp;
मोबिलिटी की दिक्कत
वायर्ड ईयरफोन के साथ यह बड़ी दिक्कत मोबिलिटी को लेकर है. ब्लूटूथ ईयरबड्स लगाकर आप घर में कहीं भी घूम सकते हैं और मोबाइल को साथ रखने की जरूरत नहीं होती. आप एक कमरे में फोन रखकर दूसरे कमरे में बैठे-बैठे म्यूजिक और पॉडकास्ट आदि सुन सकते हैं, लेकिन वायर्ड ईयरफोन के साथ यह फ्लैक्सिबिलिटी नहीं है. वायर्ड ईयरफोन यूज करते समय आपको फोन पॉकेट में रखना जरूरी है. इसमें मोबिलिटी की फ्लैक्सिबिलिटी नहीं होती.&amp;nbsp;
ड्यूरैबिलिटी
वायर्ड ईयरफोन की ड्यूरैबिलिटी का भी झंझट रहता है. वायर मुड़ने और कई बार खींचने के कारण यह डैमेज हो सकता है. जहां से वायर मुड़ती है, वहां से यह जल्दी टूटने लगती है. इस कारण म्यूजिक सुनने का एक्सपीरियंस खराब हो जाता है. इससे बचने के लिए हैंडलिंग का बहुत ध्यान रखना पड़ता है. ऐसा न करने पर वायर्ड ईयरफोन खराब हो सकते हैं.
कंपैटिबिलिटी
कंपैटिबिलिटी को लेकर भी दिक्कत रहती है. अलग-अलग फोन में अलग-अलग हेडफोन जैक होते हैं. उदाहरण के तौर पर एंड्रॉयड &amp;nbsp;फोन में 3.5mm जैक मिल जाता है, लेकिन ऐप्पल आईफोन में यह काम नहीं करता. इसलिए अगर कोई एंड्रॉयड और आईफोन यूज करता है तो उसे अलग-अलग ईयरफोन यूज करने पड़ते हैं. इस तरह कंपैटिबिलिटी को लेकर भी झंझट रहता है. वायर्ड ईयरबड्स के मामले में यह दिक्कत नही होती. ब्लूटूथ वाले ईयरफोन में यह दिक्कत नहीं होती और इसे एंड्रॉयड और आईफोन के साथ यूज किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;फोल्डेबल फोन वालों के पास होनी ही चाहिए ये एक्सेसरीज, वरना एक झटके में हो जाएगा लाखों का नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>क्या Apple प्रोडक्ट्स महंगे होने से रिफर्बिश्ड मार्केट में आएगा बूम, जानें क्यों बढ़ सकती है डिमांड?</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Price Hike: ऐप्पल ने आईपैड और मैकबुक समेत अपने कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा दिए हैं. आने वाले दिनों में आईफोन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इस कारण ग्राहकों को नया प्रोडक्ट खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे. इस कारण माना जा रहा है कि रिफर्बिश्ड मार्केट में बूम आ सकता है. दरअसल, जब नए आईफोन और लैपटॉप आदि महंगे होंगे तो लोग कम कीमत पर प्रीमियम प्रोडक्ट्स पाने के लिए रिफर्बिश्ड मार्केट की तरफ नजर दौड़ाते हैं. यहां प्रीमियम फीचर वाले प्रोडक्ट्स सस्ते में मिल जाते हैं.&amp;nbsp;
क्यों महंगे हुए ऐप्पल प्रोडक्ट्स?
स्टोरेज और मेमोरी चिप्स बढ़ती लागत के कारण ऐप्पल के लिए प्रोडक्ट्स बनाना महंगा हो गया है. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हमने पहले कभी इतनी तेजी से किसी कंपोनेंट की कीमतों में इतना इजाफा नहीं देखा था. हम अभी तक इस कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों को बचाते आए थे, लेकिन अब हम ऐसे प्वाइंट पर पहुंच गए हैं, जहां हमें कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने शुरू करने पड़ेंगे.
क्यों आ सकता है रिफर्बिश्ड मार्केट में बूम?
महंगी कीमत-&amp;nbsp;अब ऐप्पल के नए प्रोडक्ट्स के लिए ग्राहकों को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा. कंपनी के कई प्रोडक्ट्स की कीमत 70,000 रुपये तक बढ़ गई है. ऐसे में बजट को लेकर सेंसेटिव ग्राहकों के पास रिफर्बिश्ड मार्केट के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं बचा है. यही वजह है कि ऐप्पल प्रोडक्ट्स की बढ़ी कीमतें अब ग्राहकों को रिफर्बिश्ड मार्केट की तरफ पुश करेंगी.
बढ़िया क्वालिटी- रिफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स अब सिर्फ पुराने प्रोडक्ट्स को बेचना नहीं रहा है. मार्केट में कई ऑथोराइज्ड सेलर्स हैं, जो पूरी जांच के बाद प्रोडक्ट्स को बेचते हैं और ग्राहकों को क्वालिटी को लेकर सर्टिफिकेट भी दिया जाता है. इस कारण ग्राहकों को रिफर्बिश्ड प्रोडक्ट्स को लेकर भरोसा पैदा होने लगा है.
सस्ते में प्रीमियम एक्सपीरियंस- पिछले कुछ सालों में भारत में प्रीमियम फोन की डिमांड बढ़ी है. लोग अब प्रीमियम एक्सपीरियंस के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार है. यही वजह है कि रिफर्बिश्ड मार्केट में आईफोन की मांग में तेजी आई है. अब कीमत बढ़ने के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि लोग रिफर्बिश्ड मार्केट का रूख करेंगे.
रिफर्बिश्ड प्रोडक्ट लेते समय ध्यान रखें ये बातें
अगर आप रिफर्बिश्ड प्रोडक्ट ले रहे हैं तो उसकी फिजिकल कंडीशन जरूर देखें. केवल फोटो-वीडियो देखकर पेमेंट न करें. फोटो-वीडियो से डिवाइस की असली कंडीशन पता नहीं चलती. इसी तरह फोन खरीदने से पहले उसकी बैटरी हेल्थ को भी जरूर चेक करें.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>अब पार्सल ढूंढने की झंझट खत्म! Google Wallet में मिलेगा Delivery Tracking का नया फीचर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-पार्सल-ढूंढने-की-झंझट-खत्म-google-wallet-में-मिलेगा-delivery-tracking-का-नया-फीचर</link>
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        <description><![CDATA[ Google Wallet: गूगल वॉलेट को कंपनी ने एक डिजिल पेमेंट ऐप के तौर पर मार्केट में उतारा था. लेकिन अब ये ऐप सिर्फ एक डिजिटल पेमेंट ऐप तक सीमित नहीं रहेगा. दरअसल, गूगल ने इसमें एक नया फीचर ऐड कर दिया है. इस नए फीचर की मदद से अब यूजर ऐप के अंदर ही अपने ऑनलाइन ऑर्डर को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे. जी हां, गूगल वॉटेल में यूजर्स को जल्द ही ऐसा फीचर मिलेगी जिसकी मदद से यूजर अपने ऑनलाइन किए गए ऑर्डर को सीधे ऐप के जरिए ट्रैक कर सकेंगे. बता दें कि गूगल आपकी मेल पर मौजूद ऑर्डर की रसीद की मदद से ये काम कर सकेगा.
होम स्क्रीन पर मिलेगी जानकारी
जानकारी के मुताबिक, अगर आपका कोई भी पार्सल जल्द ही आने वाला है तो उसकी सारी जानकारी आपको गूगल वॉलेट के होम पेज पर ही मिल जाएगी. वहां से आप पार्सल की सटीक लोकेशन से लेकर अन्य डिलीवरी स्टेटस को बस एक टैप की मदद से प्राप्त कर सकेंगे. हालांकि, जब डिलीवरी पूरी जाएगी तो ये जानकारी होमपेज से अपने आप ही हट जाएगी.
Gmail पर नहीं पड़ेगा कोई असर
गूगल ने ये साफ कर दिया है कि Wallet में पैकेज ट्रैकिंग चालू करने से Gmail में मौजूद आपके ईमेल में कोई भी असर नहीं पड़ने वाला है. ये फीचर सिर्फ पार्सल से जुड़ी रसीद से जानकारी प्राप्त करके आपको अपडेट देने तक ही सीमित है. इसके अलावा आपका बाकी अन्य मेल पर इस फीचर का कोई असर नहीं पड़ेगा.
नहीं पड़ेगी डिलीवरी ऐप की जरुरत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल के इस नए फीचर की मदद से अब यूजर्स को किसी और वेबसाइट या फिर अपने पार्सल को ट्रैक करने के लिए किसी डिलीवरी ऐप की जरुरत नहीं पड़ेगी. अब यूजर सीधे गूगल वॉलेट में ही ये काम कर सकेंगे. बता दें कि गूगल अपने आप ही जीमेल पर मौजूद रसीद से पार्सल ट्रैक करेगा और फिर वॉलेट ऐप पर शो करने लगेगा.
भारतीय यूजर्स को करना पडेगा इंतजार
जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल इस फीचर को टेस्टिंग के तौर पर अभी तक अमेरिका में ही शुरू किया गया है. भारतीय यूजर्स को इस नए फीचर के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. Google के मुताबिक, ये फीचर ज्यादातर बड़े रिटेलर्स के ईमेल फॉर्मेट को सपोर्ट करता है लेकिन छोटे ऑनलाइन स्टोर्स के साथ इसको तालमेल मिलाने में अभी थोड़ा समय लग सकता है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>अब Space से आएगी बिजली! धरती तक Solar Power पहुंचाने की टेक्नोलॉजी कर देगी हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Power from Space: आज के समय में सोलर एनर्जी लोगों की पहली पसंद बन चुकी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्पेस में मौजूद सोलर पैनलों की मदद से बिजली सीधे धरती पर आ जाती तो कैसा रहता. जी हां, दरअसल, ये अब सपना नहीं रह गया, विज्ञान आज काफी तरक्की कर चुका है. आज दुनिया भर के वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को असल में बदलने का काम कर रही है. अब माना जा रहा है कि अगर ये टेक्नोलॉजी सफल होती है तो आगे आने वाले समय में पृथ्वी को लगातार बिजली मिल सकेगी. लेकिन अब सवाल ये है कि स्पेस में तैयार हुई बिजली को धरती तक लाया कैसे जाएगा. आइए जानते हैं इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से.
स्पेस से धरती तक बिजली पहुंचाना है चैलेंज
अब सोलर एनर्जी के साथ एक चैलेंज भी है. दरअसल, स्पेस में सोलर पैनल से बिजली पैदा करना तो काफी आसान है लेकिन उसे धरती पर लाना ही सबसे बड़ी चुनौती है. कई सारे वैज्ञानिक कई सालों से ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं जिसकी मदद से सोलर एनर्जी को स्पेस से धरती पर लाया जा सके. इसी को लेकर अभी दो तरीके काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं.
क्यों पड़ी सोलर एनर्जी को धरती पर लाने की जरुरत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज कल घरों में लगे सोलर पैनलों के साथ कई सारी समस्याएं हैं. घरों में या फिर धरती पर मौजूद सभी सोलर पैनलों को मौसम के ऊपर निर्भर रहना पड़ता है. खराब मौसम, धूल या फिर किसी भी गंदगी के चलते कई बार सोलर पैनल सही तरीके से बिजली पैदा नहीं कर पाती है. लेकिन स्पेस में ऐसा बिलकुल भी नहीं है. दरअसल, स्पेस में मौजूद सोलर पैनल लगातार सूरज की रौशनी से बिजली पैदा करते रहते हैं. इसी वजह से ये टेक्नोलॉजी आगे आने वाले समय में धरती पर भी काफी सही साबित हो सकता है.
क्या है लेजर टेक्नोलॉजी
जिस टेक्नोलॉजी की चर्चा हो रही है उसे लेजर टेक्नोलॉजी कहा जाता है. इस तकनीक में इंफ्रारेड लेजर बीम का इस्तेमाल किया जाता है. जानकारी के अनुसार, इस टेक्नोलॉजी में सोलर एनर्जी को लेजर रेज के रूप में पृथ्वी की ओर भेजा जाता है. इतना ही नहीं इस ओर कुछ कंपनियां कई सफल टेस्ट भी कर चुकी हैं.
इस लेजर सिस्टम का एक बड़ा फायदा ये है कि इसे जरूरत के अनुसार ज्यादा सटीक तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है. इसके अलावा इसके मेंटेनेंस का खर्च भी काफी कम होता है.
क्या है माइक्रोवेव तकनीक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये टेक्नोलॉजी माइक्रोवेव पर आधारित है. इस टेक्नोलॉजी की मदद से सैटेलाइट सोलर एनर्जी को इकट्ठा करता है और उसे माइक्रोवेव सिग्नल में बदल देता है. इसके बाद धरती पर मौजूद रिसीवर तक उस सिग्नल को भेजा जाता है. इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खास बात ये है कि कई माइक्रोवेव सिग्नल एक दिशा में केंद्रित किए जाते हैं जिससे एनर्जी खराब नहीं होती है और ट्रांसमिशन ज्यादा अच्छे तरीके से हो पाता है. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: घंटों गेम खेलने पर भी फोन नहीं होगा गर्म! 99% लोगों को आज भी नहीं पता ये तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/tech-tips-घंटों-गेम-खेलने-पर-भी-फोन-नहीं-होगा-गर्म-99-लोगों-को-आज-भी-नहीं-पता-ये-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: स्मार्टफोन आज एक ऐसा डिवाइस बन चुका है जहां लोगों के सारे काम हो सकते हैं. आज के एडवांस स्मार्टफोन में इतने सारे फीचर्स मिलते हैं जिनकी मदद से लोग अपने करीब सभी कामों को आसानी से अपने फोन से ही कर लेते हैं. वहीं, युवाओं और बच्चों में भी स्मार्टफोन का एक अलग ही क्रेज रहता है. खासतौर पर बच्चे और युवा अपने मनपसंद के ऑनलाइन गेम को स्मार्टफोन पर घंटों तक खेलते रहते हैं जिससे कई बार फोन बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है. इसीलिए आज हम आपको ऐसे तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से घंटों गेम खेलने पर भी आपका डिवाइस गर्म नहीं होगा.
फोन से हटा दें कवर
इसके अलावा स्मार्टफोन पर लोग कवर का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगर आपके फोन का स्मार्टफोन मोटे सिलिकॉन या रबर से बना हुआ है तो गेमिंग के दौरान उसे कुछ समय के लिए हटा देना बेहतर होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार फोन पर कवर लगा रहने से डिवाइस की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती है और फोन तेजी से गर्म होने लगता है.
बैलेंस्ड सेटिंग का करें इस्तेमाल
अक्सर देखा गया है कि लोग गेम खेलने के दौरान हाई ग्राफिक्स और फ्रेम रेट का इस्तेमाल करते हैं. ऐसा करने से फोन पर ज्यादा लोड पड़ता है. अब अगर आप फ्लैगशिप फोन हीं इस्तेमाल कर रहे हैं तो Ultra Graphics या 120 FPS पर गेम खेलने के बजाय Balanced या Medium सेटिंग पर खेलना ज्यादा सही होता है. इससे प्रोसेसर पर कम दबाव पड़ेगा और फोन ज्यादा देर तक ठंडा रहेगा.
बंद कर दें बेकार के ऐप्स
आपको बता दें कि जब भी आप अपने स्मार्टफोन में गेम खेले तो उससे पहले बैकग्राउंड में खुले सभी ऐप्स को बंद कर दें. ऐसा करने से बैकग्राउंड में ऐप्स आपके फोन की बैटरी को कंज्यूम नहीं कर सकेंगे और फोन जल्दी गर्म भी नहीं होगा.
चार्जिंग के दौरान गेम खेलना गलत
कई बार देखा गया है कि बैटरी डिस्चार्ज होने पर फोन को चार्जिंग पर लगाकर गेम खेलना शुरू कर देते हैं. ऐसा करना बहुत गलत होता है. क्योंकि ऐसा करने से फोन की बैटरी पर बहुत ज्यादा लोड पड़ता है और वो तेजी से गर्म होने लगता है. इतना ही नहीं, इससे फोन की बैटरी की लाइफ भी कम हो जाती है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका बच्चा भी दिनभर देखता है Reels? हो सकता है ये बड़ा खतरा, रिपोर्ट में हो गया खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-आपका-बच्चा-भी-दिनभर-देखता-है-reels-हो-सकता-है-ये-बड़ा-खतरा-रिपोर्ट-में-हो-गया-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ Instagram Reels: इंस्टाग्राम एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन चुका है जहां लोग कई घंटों तक एक्टिव रहते हैं. कोई रील्स देखने में तो कोई स्टोरी पोस्ट करने और बातें करने में इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करता है. लेकिन इंस्टाग्राम रील्स आज सबसे ज्यादा ट्रेंडिंग में है जहां बच्चों से लेकर बूढ़े तक एक्टिव रहते हैं. आज कल के बच्चों में स्मार्टफोन का इतना ज्यादा क्रेज है कि वे कई घंटों तक इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल करते रहते हैं. अब एक रिपोर्ट सामने आई है जहां बताया है कि ऐसा करना बच्चों के दिमाग पर काफी गहरा असर डाल रहा है.
ज्यादा रील्स देखने से बढ़ रहा तनाव
जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ बायरॉथ के शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक नई स्टडी में सामने आया है कि लगातार शॉर्ट वीडियो देखने की आदत बच्चों और युवाओं में तनाव बढ़ाने का काम कर रहा है. इतना ही नहीं, ऐसा करने से उनका फोकस भी कम हो रहा है. यह रिसर्च जून में European Child &amp;amp; Adolescent Psychiatry जर्नल में प्रकाशित हुई है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया भर में आज युवा अपना ज्यादा से ज्यादा समय शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर बिता रहे हैं. ऐसा करने से उनके दिमाग और व्यवहार पर गलत असर पड़ रहा है जिस पर अब ध्यान देने की जरुरत है.
ये हैं तीन कारण
इस रिसर्च में तीन बड़े कारण सामने आए हैं जिससे बच्चे और युवा रील्स देखने से अपने आप को रोक नहीं पाते हैं. पहला है फटाफट नया कंटेंट आने से यूजर उसी में बंधा रहता है और प्लेटफॉर्म छोड़ नहीं पाता है. दूसरा है Infinite Scrolling जो कभी खत्म नहीं होती है. इसीलिए लोग लगातार स्क्रॉल करते रहते हैं और अपने कई घंटे इसी में बर्बाद कर देते हैं. वहीं, तीसरा है यूजर की पसंद के अनुसार कंटेंट दिखाने वाला पर्सनलाइज्ड एल्गोरिदम. ये लोगों को वही कंटेंट दिखाता है जो वो देखना चाहते हैं या फिर उन्हें पसंद है. ये सबसे बड़ा कारण हैं जिससे लोग अपने आप को इस प्लेटफॉर्स से दूर नहीं कर पाते हैं.
इतने लोगों पर हुआ रिसर्च
इस रिसर्च में 42 अलग-अलग रिसर्च ग्रुप का एनॉलिसिस किया गया. इस रिसर्च में करीब 47 हजार लोगों को शामिल किया गया था जिनकी औसत उम्र करीब 16 है. बता दें कि इस रिसर्च में घर, स्कूल और अन्य पब्लिक प्लेस पर डिजिटल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर स्टडी की गई जिसके बाद ये पता चला कि शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म को इस तरह तैयार किया गया है कि लोग उससे दूर जा ही नहीं सकते हैं. हर सेकेंड नए वीडियो आने से लोग प्लेटफॉर्म से चिपके रहते हैं और जल्दी दूर नहीं हो पाते हैं.
कैसे बच्चों को करें इससे दूर
शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर पैरेंट्स और फैमली बच्चों के लिए स्वस्थ डिजिटल माहौल तैयार करें और मोबाइल के इस्तेमाल करने का एक तय समय निर्धारित करें इन खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है. इसके अलावा बच्चों को ज्यादातर स्मार्टफोन के बजाय बाहरी दुनिया में ले जाना और ग्राउंड में फिजिकल एक्टिविटी या खेल-कूद में भाग लेने से वह ज्यादा तेजी से रिकवर करते हैं. इतना ही नहीं, बच्चों के साथ पैरेंट्स और फैमली को ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहिए जिससे उसकी सोशल मीडिया और स्मार्टफोन पर निर्भरता कम हो सके.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>क्या, आपका, बच्चा, भी, दिनभर, देखता, है, Reels, हो, सकता, है, ये, बड़ा, खतरा, रिपोर्ट, में, हो, गया, खुलासा</media:keywords>
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        <title>भारत को नहीं मिलेगा Mythos का एक्सेस, ट्रंप सरकार के नए आदेश में भी राहत नहीं</title>
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        <description><![CDATA[ Claude Mythos 5 Access: ट्रंप सरकार ने एंथ्रोपिक के शक्तिशाली एआई मॉडल Mythos 5 पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दी है. अमेरिकी सरकार का कहना है कि एंथ्रोपिक कुछ भरोसेमंद अमेरिकी कंपनियों को इसकी एक्सेस दे सकती है. इसका मतलब है कि कंपनी अभी इसे पब्लिक के लिए रोलआउट नहीं कर पाएगी और पहले की तरह भारत समेत अधिकतर दुनिया के लिए इसके एक्सेस पर ताला लटका रहेगा. आइए यह पूरा मामला विस्तार से जानते हैं.
ट्रंप प्रशासन ने लगाई थी एक्सेस पर रोक
कुछ हफ्ते पहले ट्रंप सरकार ने एंथ्रोपिक को आदेश देकर अपने एडवांस्ड एआई मॉडल Mythos 5 और Fable 5 का एक्सेस बंद करने को कहा था. इस आदेश के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को हवाला दिया गया था, लेकिन माना जा रहा है कि इस आदेश के जरिए ट्रंप प्रशासन उन एआई मॉडल्स पर अपना कंट्रोल कड़ा करना चाहता है, जिन्हें दूसरे देशों की सरकारों या साइबर अपराधियों द्वारा मिसयूज किया जा सकता है.
अब किसे मिलेगा एक्सेस?
एंथ्रोपिक ने बताया कि उसे क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रोटेक्ट और ऑपरेट करने वाली कंपनियों के लिए Mythos 5 का एक्सेस रिस्टोर करने की मंजूरी मिल गई है. अब इन कंपनियों के लिए रोलआउट तेज किया जा रहा है. साथ ही कंपनी Mythos 5 और Fable 5 को जनरल यूज के लिए अवेलेबल करवाने पर भी सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सरकार के आदेश के बाद 100 से अधिक कंपनियों को एंथ्रोपिक के इस सबसे शक्तिशाली साइबर सिक्योरिटी मॉडल का एक्सेस मिल जाएगा. इनमें वो कंपनियां भी शामिल हैं, जो एंथ्रोपिक के प्रोजेक्ट ग्लासविंग प्रोग्राम में शामिल थीं.
क्यों लगाया गया था बैन?
अमेरिकी अधिकारियों ने चिंता जताई थी कि पावरफुल एआई मॉडल को चीन और रूस जैसे देशों की मिलिट्री और इंटेलीजेंस एजेंसियां यूज कर सकती हैं. इसके अलावा कई साइबर एक्सपर्ट्स ने भी चेतावनी दी थी कि अगर ये मॉडल गलत हाथों में पड़ जाते हैं तो इनसे साइबर हमले किए जा सकते हैं. हालांकि, अमेरिकी सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठे थे. जानकारों का कहना है कि कोई नहीं जानता है कि अमेरिकी सरकार ने कंपनियों को किस आधार पर इसकी एक्सेस दी और बाकियों को किस आधार पर छोड़ा गया. यह सरकार के हाथ में बहुत ज्यादा पावर देने जैसा है. OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी इसकी आलोचना करते हुए कहा था कि सेफ्टी टेस्टिंग बुरी चीज नहीं है, लेकिन सरकार का कस्टमर चुनना ठीक नहीं है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>प्लास्टिक से हमेशा बेहतर क्यों होते हैं Tempered Glass? सामने आ गई बड़ी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Tempered Glass Screen Protector: स्मार्टफोन आज कल लोगों की जरुरत बन चुके हैं. आज मार्केट में मंहगे से मंहगे और सस्ते से सस्ते स्मार्टफो मौजूद हैं. लेकिन सभी स्मार्टफोन में लोगों के एक समस्या जरुर होती है जो है डिवाइस की स्क्रीन. दरअसल, फोन चाहे महंगा हो या सस्ता लोगों को स्क्रीन प्रोटेक्टर की जरुरत हमेशा होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि प्लास्टिक वाला स्क्रीन प्रोटेक्टर इस्तेमाल करना चाहिए या फिर टेम्पर्ड ग्लास. आइए जानते हैं कि हमेशा ही टेम्पर्ड ग्लास ही क्यों स्मार्टफोन के लिए बेहतर माना जाता है.
स्क्रीन एक्सपीरिएंस में नहीं होता कोई बदलाव
बता दें कि टेम्पर्ड ग्लास का सरफेस बिल्कुल चिकना होता है इसलिए फोन इस्तेमाल करते समय टच रिस्पॉन्स लगभग वैसा ही महसूस होता है जैसा बिना किसी प्रोटेक्टर के होता है. वहीं, दूसरी ओर, प्लास्टिक वाले प्रोटेक्टर कुछ समय बाद खुरदरे हो जाते हैं जिससे लोगों को स्क्रीन पर अजीब सा महसूस होने लगता है.
लंबे समय तक मिलती है स्क्रैच से सुरक्षा
अक्सर देखा गया है कि लोग अपने स्मार्टफोन को पॉकेट में रखते हैं जहां पर पहले से ही मौजूद चाबियां, सिक्के या फिर कोई भी हार्ड चीज स्क्रीन को नुकसान पहुंचा सकते हैं. लेकिन टेम्पर्ड ग्लास इतना हार्ड होता है कि वो स्मार्टफोन की स्क्रीन पर कोई नुकसान नहीं आने देता है. वहीं प्लास्टिक प्रोटेक्टर जल्दी घिस जाते हैं और उन पर निशान साफ दिखाई देने लगते हैं.
गिरने से मिलती है सेफ्टी
आपको बता दें कि टेम्पर्ड ग्लास को स्पेशल हीट ट्रीटमेंट प्रोसेस के जरिए तैयार किया जाता है जिसकी मदद से ये नॉर्मल ग्लास के मुकाबले ज्यादा मजबूत होता है. ऐसे में अगर आपका स्मार्टफोन किसी कारण से गिर भी जाता है तो टेम्पर्ड ग्लास अपने ऊपर पर झटका सह लेता है और फोन की असली स्क्रीन को कोई नुकसान नहीं होता है. वहीं प्लास्टिक प्रोटेक्टर केवल हल्की खरोंचों से ही सुरक्षा दे पाते हैं.
साफ डिस्प्ले से मिलती है बेहतर क्वालिटी
ज्यादातर बेहतरीन क्वालिटी वाले टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन की ब्राइटनेस और रंगों पर बहुत कम असर डालता है. साथ ही इसमें अक्सर ओलियोफोबिक कोटिंग होती है जिसकी मदद से स्क्रीन पर उंगलियों के निशान और धब्बों नहीं आते हैं.
आसनी से बदल भी सकते हैं
टेम्पर्ड ग्लास की एक सबसे बड़ी खास बात ये है कि खराब या टूट जाने पर इसे आसानी से बदला भी जा सकता है. साथ ही इसे लगाना भी आसान है और लगाते समय एयर बबल होने की संभावना भी काफी कम होती है. वहीं, दूसरी तरफ, प्लास्टिक प्रोटेक्टर लगाते समय अक्सर बुलबुले बन जाते हैं जिन्हें हटाना कई बार मुश्किल हो जाता है.
क्या प्लास्टिक प्रोटेक्टर हो चुके बेकार
ऐसा नहीं है कि प्लास्टिक प्रोटेक्टर अब पूरी तरह बेकार हो चुके हैं. दरअसल, ये हल्के, सस्ते और Curved डिस्प्ले पर ज्यादा बेहतर तरीके से फिट हो सकते हैं. लेकिन अगर आप अपने स्मार्टफोन की डिस्प्ले को गिरने, झटकों और टूटने से बचाना चाहते हैं तो प्लास्टिक की जगह पर टेम्पर्ड ग्लास ही ज्यादा बेहतर ऑप्शन साबित होता है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Apple iPhone के ये 5 पुराने फीचर्स आज भी हैं लोगों की पहली पसंद, दूसरा वाला तो है बेहद कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Features: एप्पल आईफोन लोगों को खूब पसंद आते हैं. आज कल ये फोन एक स्टेटस सिंबल बन चुका है. आईफोन हर साल अपना नया मॉडल मार्केट में लॉन्च करती है. ऐसे में कंपनी कई सारे नए फीचर्स भी पेश करती है और पुराने फीचर्स को बंद कर देती है. लेकिन आज भी कई लोगों को आईफोन के पुराने फीचर्स पसंद आते हैं जिन्हें कंपनी बहुत पहले ही बंद कर चुकी है. आइए जानते हैं ऐसे 5 पुराने फीचर्स जिन्हें आज भी लोग पसंद करते हैं और वापस पाना चाहते हैं.
Control Center से Bluetooth बंद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुराने iOS वर्जन में Control Center से सिर्फ एक टैप में ही Bluetooth और Wi-Fi पूरी तरह बंद हो जाता था. लेकिन iOS 11 के बाद ये पूरी तरह से बदल गया है. अब इन्हें दबाने पर केवल मौजूदा कनेक्शन डिस्कनेक्ट होता है जबकि Bluetooth और Wi-Fi पूरी तरह बंद नहीं होते हैं. इन्हें पूरी तरह बंद करने के लिए यूजर को Settings में जाना पड़ता है.
हेडफोन जैक
बता दें कि iPhone 7 के साथ Apple ने 3.5mm हेडफोन जैक को हटाकर वायरलेस ऑडियो को पेश किय था. इतना ही नहीं, कंपनी ने इसके साथ AirPods भी पेश किए थे. हालांकि वायरलेस ईयरबड्स काफी फेमश हैं लोगों को पसंद भी आते हैं. लेकिन कुछ लोग आज भी वायर्ड हेडफोन जैक ही पसंद करते हैं और उसे बेहतर मानते हैं.
3D Touch
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2015 में iPhone 6s के साथ 3D Touch फीचर आया था. उस समय इसे एक अनोखे फीचर के रूप में देखा गया था. इस फीचर की मदद से लोग स्क्रीन पर थोड़ा ज्यादा तेज से दबा कर कई सारे काम कर सकते थे. अगर किसी लिंक पर ज्यादा तेजी से दबाया जाता था तो उसका प्रीव्यू पेज खुल जाता था. बता दें कि बाद में Apple ने इसे हटाकर Haptic Touch पेश किया जो लंबे समय तक स्क्रीन दबाने पर काम करता है.
iTunes से ऐप्स मैनेज करने का फीचर
बता दें कि पहले iPhone यूजर्स को कंप्यूटर से कनेक्ट करने iTunes के जरिए Home Screen पर ऐप्स को आसानी से मैनेज करने की सुविधा मिलती थी. पहले इस फीचर की मदद से ऐप्स को ड्रैग-एंड-ड्रॉप करके अलग-अलग पेज पर ले जाना आसान होता था. लेकिन 2017 में Apple ने iTunes से इस फीचर को हटा दिया और बाद में macOS से भी iTunes को पूरी तरह से बंद कर दिया था. अब यूजर्स को सीधे iPhone पर ही ऐप्स को मैनेज करना पड़ता है.
Touch ID
इसके अलावा Home Button वाले iPhone में मिलने वाला Touch ID लंबे समय तक लोगों के बीच एक खास सेफ्टी फीचर के तौर पर पसंद किया जाता था. इस फीचर की मदद से लोग सिर्फ अपनी उंगली रखते ही फोन को अनलॉक कर सकते थे. इतना ही नहीं, इस फीचर की मदद से कई सारे ऐप्स में लॉगइन भी हो जाती थी.
लेकिन iPhone X के बाद Apple ने इस फीचर की जगह पर Face ID को पेश कर दिया जो चेहरे की 3D स्कैनिंग के जरिए यूजर को पहचानता है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>AI का कमाल! मंगल पर इंसानों से पहले पहुंचेगा ये अनोखा रोबोट? जानिए क्यों हो रही इसकी चर्चा</title>
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        <description><![CDATA[ Robot on Mars: आज की टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो चुकी है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में अब सब कुछ संभव होता जा रहा है. एक तरफ जहां रोबोट्स के इस्तेमाल को इंसानों के लिए खतरा माना जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ, एआई रोबोट को दूसरे ग्रह पर भेजने की तैयारी हो रही है. जी हां, दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अब इंसानों से पहले ही मंगल ग्रह पर पर पहुंच सकता है.
इस जीव से प्रेरित होकर तैयार हुआ रोबोट
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने इंचवर्म (Inchworm) यानी एक छोटे कीड़े से प्रेरित होकर एक बेहद छोटा और पूरी तरह सॉफ्ट रोबोट तैयार किया है. आगे आने वाले समय में ये रोबोट क्षतिग्रस्त सीवर पाइपों की जांच करने, खतरनाक इलाकों में खोजबीन करने और यहां तक कि मंगल ग्रह पर जाकर काम खोजबीन करने में भी काम आ सकता है.
&amp;nbsp;इंचवर्म की तरह रेंगकर बढ़ता है आगे
आर्टिफिशियल मांसपेशी को इस आकार में तैयार किया गया है जिससे ये बार-बार लंबी और छोटी हो सके. इसके दोनों ओर के बीच एक लचीला प्लास्टिक आर्च लगाया गया जिसने रोबोट को स्पेशल खांचे वाली जगहों पर इंचवर्म की तरह रेंगने में सक्षम बनाया.
टेस्ट के दौरान हर बार बिजली मिलने पर रोबोट लगभग 10 प्रतिशत तक फैलता था और फिर वापस सिकुड़ जाता था. इसी प्रोसेस को बार-बार किया गया और रोबोट धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा.
किन चीजों से बना रोबोट
जानकारी के मुताबिक, आज कल के नॉर्मल रोबोट्स में मेटल, मोटर जैसे चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन ये रोबोट इनसे बिलकुल अलग है. दरअसल, इसे पूरी तरह लचीले मटेरियल से तैयार किया गया है और इसमें कोई हार्ड हिस्सा मौजूद नहीं है. इसी वजह से ये रोबोट बहुत ही सॉफ्ट, हल्का और फ्लेक्सिबल है. इस रोबोट की सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये संकरी जगहों से गुजरने और ऊबड़-खाबड़ जगहों पर चलने के लिए तैयार किया गया है.
मंगल ग्रह पर हो सकता है इस्तेमाल
वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इस रोबोट में छोटा कैमरा और अन्य सेंसर भी लगाए जा सकते हैं. इससे यह किसी दूसरे ग्रह जाकर वहां की जानकारी लाने का काम आसानी से कर सकेगा. इसीलिए माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस रोबोट को मंगल ग्रह पर भेजा जा सकता है.
इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसका सरल डिजाइन है. जहां एक तरफ नॉर्मल रोबोट कई मोटरों और मुश्किल टेक्निकल चीजों पर निर्भर रहता हैं, वहीं ये केवल एक आर्टिफिशियल मांसपेशी के जरिए चलता है. टेस्टिंग के दौरान यह रोबोट लगातार चार महीने से अधिक समय तक रोजाना करीब चार घंटे तक बिना किसी दिक्कत के काम करता रहा.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Smartphone Battery Issue: अचानक 25% से 5% पर आ गई मोबाइल की बैटरी? जानें इसके पीछे की वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Battery Issue: अचानक 25% से 5% पर आ गई मोबाइल की बैटरी? जानें इसके पीछे की वजह ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>क्या होता है NFC? ज्यादातर लोगों को नहीं पता इसका सही इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ What is NFC: जैसे-जैसे नई टेक्नोलॉजी आ रही है वैसे-वैसे स्मार्टफोन भी काफी एडवांस होते जा रहे हैं. आजकल के एडवांस स्मार्टफोन्स में यूजर्स को ऐसे फीचर्स मिलते हैं जिनके बारे में ज्यादातर यूजर्स को पता तक नहीं होता है. आज हम आपको स्मार्टफोन में मौजूद एक ऐसे ही फीचर के बारे में बताने जा रहे हैं. दरअसल, अब लगभग हर नए स्मार्टफोन में NFC (Near Field Communication) का फीचर मिलता है. आइए जानते हैं कि ये फीचर कैसे काम करता है.
क्या है NFC?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि NFC यानी Near Field Communication एक ऐसी वायरलेस टेक्नोलॉजी होती है जिसकी मदद से कोई भी दो डिवाइस में डेटा एक्सचेंज होता है. हालांकि, इसके लिए दोनों डिवाइसेज के बीच की दूरी बहुत कम होनी चाहिए (लगभग 4 सेंटीमीटर तक). इस फीचर की मदद से किसी भी दो डिवाइस में आसानी से डेटा एक्सचेंज हो सकता है और वह आपस में बात भी कर सकते हैं.
किस टेक्नोलॉजी पर काम करता है ये फीचर
जानकारी के अनुसार, ये फीचर रेडियो फ्रीक्वेंसी टेक्नोलॉजी पर काम करती है. साथ ही इस फीचर को इस्तेमाल करना भी काफी आसान है. इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपके दोनों डिवाइसों में NFC ऑन होना चाहिए और उन्हें एक-दूसरे के करीब लाना होता है.
कहां होता है सबसे ज्यादा इस्तेमाल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस फीचर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कॉन्टैक्टलेस पेमेंट के लिए किया जाता है. अगर आपका फोन और बैंक कार्ड NFC सपोर्ट करते हैं तो आप मोबाइल को POS मशीन के पास ले जाकर आसानी से पेमेंट कर सकते हैं. इस फीचर की मदद से आपको अपना कार्ड निकालने या फिर PIN डालने की जरूरत भी नहीं पड़ती है.
इन कामों में भी होता है यूज
इस फीचर का इस्तेमाल सिर्फ पेमेंट के लिए ही नहीं बल्कि कई और जगहों पर भी होता है. ज्यादातर लोग आज भी यही मानते हैं कि एनएफसी का इस्तेमाल सिर्फ पेमेंट के लिए किया जाता है. लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. दरअसल, इसके जरिए यूजर एक स्मार्टफोन से दूसरे स्मार्टफोन में छोटी फाइलें या कॉन्टैक्ट भी शेयर कर सकता है. इसके अलावा NFC टैग स्कैन करके Wi-Fi, Bluetooth या और भी दूसरी सेटिंग्स को तुरंत ऑन या ऑफ किया जा सकता है. इसके अलावा NFC सपोर्ट वाले वायरलेस स्पीकर, हेडफोन या और भी दूसरे डिवाइस को बहुत तेजी से पेयर किया जा सकता है.
कैसे चेक करें कि आपके फोन में NFC है या नहीं?
अब आपको बताते हैं कि अपने स्मार्टफोन में कैसे चेक करें कि आपके फोन में ये फीचर है या नहीं. इसके लिए सबसे पहले आपको अपने स्मार्टफोन की Settings में जाकर NFC सर्च करना है. अब अगर आपको ये ऑप्शन दिखाई दे रहा है तो इसका मतलब है आपका फोन ये फीचर सपोर्ट करता है. कई एंड्रॉयड फोन में यह Quick Settings पैनल में भी मिलता है जहां से इसे आसानी से ऑन या ऑफ किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:30:17 +0530</pubDate>
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        <description><![CDATA[ Monsoon AC Tips: देश के कई हिस्सों में मानसून दस्तक दे चुका है और बाकी जगहों पर इसका इंतजार किया जा रहा है. इस सीजन में होने वाली बारिश सुकून देती है, लेकिन उमस जीना मुश्किल कर देती है. हवा में नमी बढ़ जाने के कारण पंखे और कूलर चलाने का भी फायदा नहीं होता. इस कारण लोग एसी चलाकर इस उमस से बचते हैं, लेकिन अगर आप मानसून में गर्मियों की तरह ही एसी यूज कर रहे हैं तो आपका बिजली का बिल आसमान छू जाएगा. इसलिए मानसून में एसी की कुछ सेटिंग्स बदलने की जरूरत है. इससे बिल भी बचेगा और कूलिंग भी ज्यादा होगी.
मानसून में एसी चलाते समय इन गलतियों से बचें
हर समय कूल मोड यूज करना- एसी का कूल मोड आग बरसाती गर्मी से राहत दे सकता है, लेकिन मानसून में यह मोड काम नहीं आएगा. यह भले ही टेंपरेचर को कम कर देगा, लेकिन हवा से नमी को नहीं हटा पाएगा. इस कारण एसी चलने के बावजूद भी आप कंफर्टेबल महसूस नहीं कर पाएंगे. इसलिए जब उमस ज्यादा हो तो एसी में कूल की बजाय ड्राई मोड यूज करें. इससे हवा से नमी भी गायब हो जाएगी और बिजली की खपत भी कम होगी.
टेंपरेचर को 16 या 18 डिग्री पर सेट करना- अगर आप बिजली बिल की बचत करना चाहते हैं तो एसी का टेंपरेचर 16 या 18 डिग्री पर सेट न करें. कई लोगों को लगता है कि कम टेंपरेचर सेट करने से कमरा जल्दी ठंडा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आप टेंपरेचर 16 डिग्री सेट करते हैं तो एसी को ज्यादा काम करना पड़ेगा और यह ज्यादा बिजली की खपत करेगा. इसलिए टेंपरेचर को 24-26 डिग्री पर रखें.
खिड़की-दरवाजे खुले छोड़ना- एसी यूज करते समय कमरे के खिड़की और दरवाजे खुले न छोड़ें. यह गलती भारी पड़ सकती है. दरअसल, जब बाहर से गर्म हवा आएगी तो यह कमरे के टेंपरेचर को बढ़ा देगी.इस कारण कमरे को ठंडा करने के लिए एसी को फिर से ज्यादा काम करना पड़ेगा. इससे बिजली की खपत बढ़ती है और इसका सीधा असर आपके बिजली बिल पर दिखेगा.&amp;nbsp;
फिल्टर को साफ न करना- एसी की एफिशिएंसी काफी हद तक इस पर निर्भर करती है कि उसके फिल्टर कैसे हैं. अगर फिल्टर गंदे हो गए हैं और इन पर धूल-मिट्टी जम गई है तो यह कूलिंग को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है. इसलिए एसी के फिल्टर को नियमित तौर पर साफ करते रहें. इसी तरह आउटडोर यूनिट को भी साफ रखें.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>काम का तनाव होगा आधा! प्रोफेशनल्स के लिए बेस्ट हैं ये Gadgets, फटाफट चेक करें लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/काम-का-तनाव-होगा-आधा-प्रोफेशनल्स-के-लिए-बेस्ट-हैं-ये-gadgets-फटाफट-चेक-करें-लिस्ट</link>
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube और TikTok पर सबसे बड़ी कार्रवाई! इस देश ने 47 लाख अकाउंट्स को किया ब्लॉक, जानें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Accounts: पूरी दुनिया में सोशल मीडिया काफी तेजी से विस्तार कर चुका है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी आज सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. लेकिन सोशल मीडिया की लत आगे आने वाली जनरेशन के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर इंडोनेशिया ने एक बड़ा कदम उठाया है.
दरअसल, देश में सोशल मीडिया को लेकर नए नियम लागू किए गए थे. इसके बाद YouTube और TikTok ने 16 साल से कम उम्र के लाखों यूजर्स के अकाउंट्स को बंद कर दिया है. इस कार्रवाई के तहत कुल 47 लाख से ज्यादा अकाउंट हटाए गए.
16 साल से कम उम्र वालों के अकाउंट्स बंद
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही देश में नए नियम लागू हुए TikTok ने करीब 41 लाख अकाउंट्स को बंद कर दिया है. वहीं, YouTube ने लगभग 6 लाख अकाउंट्स को बंद किया है. सरकार का कहना है कि ये कदम बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उठाए गए हैं. लेकिन ये कंपनियों के लिए एक मौका है कि वे अपनी नीतियों में जल्द से जल्द बदलाव करें.
प्लेटफॉर्म की भी होगी जिम्मेदारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नए नियम की एक सबसे बड़ी खास बात ये है कि इसके तहत बच्चों की उम्र की जांच के लिए केवल स्कूल और पैरेंट्स की नहीं होगी बल्कि अब इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी जिम्मेदारी लेनी होगी. नियम में साफ बताया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को खुद ही ऐसे अकाउंट्स को पहचानना होगा जो कम उम्र वाले हैं.
ये हैं हाई रिस्क प्लेटफॉर्म
जानकारी के लिए बता दें कि इस नए नियम को मार्च 2026 में लागू किया गया था. इसीलिए इस नियम के तहत वे सभी प्लेटफॉर्म इस नियम के अंडर आते हैं जिन्हें सरकार ने हाई रिस्क कैटेगरी में रखा था. बता दें कि इन प्लेटफॉर्म में YouTube, TikTok, Instagram, X और Roblox जैसे ऐप्स शामिल हैं.
दूसरे देशों के लिए उदाहरण
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोशल मीडिया से बच्चों की सुरक्षा के लिए इंडोनेशिया के द्वारा लिया गया ये फैसला दूसरे देशों के लिए एक नया उदाहरण सेट कर सकता है. ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में कई अन्य देश जो बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले खतरों से बचाना चाहते हैं, भी ऐसे ही नियम को लागू कर सकते हैं. ये मॉडल बाकी देशों में भी जल्द ही लागू किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>किस जेनरेशन पर Apple ने कितनी महंगी कीं डिवाइस? पढ़ें पूरी 18 पीढ़ियों का लेखा&amp;जोखा</title>
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        <description><![CDATA[ Each Generation iPhone Price: आईफोन की कीमत हमेशा से प्रीमियम रही है. यानी इन्हें खरीदने के लिए ग्राहकों को अपनी जेब खाली करनी पड़ी है. iPhone 17 Series को ऐप्पल ने बढ़ी हुई कीमत पर लॉन्च किया था, लेकिन स्टोरेज ज्यादा होने के कारण यह झटका जोर से नहीं लगा था. इस बार iPhone 18 Pro मॉडल्स की कीमत बड़ा झटका देने वाली है. आइए एक नजर डालते हैं कि हर जनरेशन के साथ ऐप्पल के आईफोन की कीमतें कैसे बढ़ती गईं.
कितनी थी फर्स्ट जनरेशन आईफोन की कीमत?
2007 में फर्स्ट जनरेशन आईफोन के साथ ऐप्पल के इस सबसे ज्यादा बिकने वाले डिवाइस के सफर की शुरुआत हुई थी. फर्स्ट जनरेशन आईफोन को 2007 में 499 डॉलर की कीमत पर लॉन्च किया गया था. भारत में यह आईफोन कभी लॉन्च नहीं हुआ.&amp;nbsp;
iPhone 3G- ऐप्पल ने 2008 में iPhone 3G को लॉन्च किया था. अमेरिका में इसकी कीमत 199 डॉलर थी और भारत में इसे 31,000 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. ऐप्पल ने एयरटेल और वोडाफोन के साथ कॉलेब्रेशन में यह फोन लॉन्च किया था.
iPhone 4- ऐप्पल ने मई, 2011 में इस आईफोन को 34,500 रुपये की कीमत पर उतारा था. करीब छह महीने बाद कंपनी ने iPhone 4s लॉन्च किया और इसकी कीमत 44,500 रुपये रखी.
iPhone 5- अक्टूबर, 2012 में कंपनी 16GB वाला iPhone 5 लाई और इसकी कीमत 45,500 रुपये रखी. इसके बाद नवंबर, 2013 में iPhone 5c और iPhone 5s को लॉन्च किया गया था. इनकी कीमतें क्रमश: 41,900 और 53,500 रुपये थीं.
iPhone 6/6 Plus- 2014 में नेक्स्ट जनरेशन आईफोन लॉन्च करते हुए ऐप्पल ने iPhone 6/6 Plus को भारत में लॉन्च किया. 6 की कीमत में इजाफा नहीं किया गया और यह 5s की तरह 53,500 रुपये की कीमत पर लॉन्च हुआ था. वहीं प्लस मॉडल के दाम 62,500 रुपये रखे गए.
iPhone 6s और 6s Plus- 2015 में ऐप्पल ने 6 सीरीज को ही कंटिन्यू किया और दो नए मॉडल उतारे. iPhone 6s को 62,000 रुपये और 6s Plus को 72,000 रुपये में लॉन्च किया गया.&amp;nbsp;
iPhone SE 1st Gen, iPhone 7 और iPhone 7 Plus- 2016 में ऐप्पल ने कुल तीन मॉडल लॉन्च किए. SE 1st Gen की कीमत 39,000 रुपये, iPhone 7 की कीमत 60,000 रुपये और Plus की 72,000 रुपये रखी गई.&amp;nbsp;
iPhone 8, 8 Plus और iPhone X- 2017 में आईफोन के सफर को 10 साल पूरे हो गए थे. इस मौके पर कंपनी ने पहले सितंबर में iPhone 8 और 8 Plus लॉन्च किया. इनके दाम क्रमश: 64,000 और 73,000 रुपये थे. दो महीने बाद ही आईफोन 9 सीरीज को स्किप कर ऐप्पल ने iPhone X लॉन्च किया और इसकी कीमत 89,000 रुपये रखी.
iPhone Xs, iPhone Xs Max, iPhone Xr- सितंबर-अक्टूबर 2018 में ये तीन आईफोन लॉन्च हुए और इनकी कीमतें क्रमश: 99,900, 1,09,900 और 76,900 रुपये रखी गईं.
iPhone SE 2nd Gen और iPhone 11 सीरीज- 2019 में ऐप्पल किफायती आईफोन का सेकंड जनरेशन वेरिएंट लेकर आई, जिसे 42,500 रुपये में लॉन्च किया गया था. इसी साल सितंबर में आईफोन 11 सीरीज आई, जिसकी शुरुआती कीमत 64,900 रुपये से शुरू होकर 1,09,900 तक गई थी.
iPhone 12 सीरीज- 2020 में Apple की iPhone 20 सीरीज लॉन्च हुई. इसमें iPhone 12 mini, iPhone 12, iPhone 12 Pro और iPhone 12 Pro Max मॉडल शामिल थे. इसकी शुरुआती कीमत 69,900 रुपये से लेकर 1,29,000 रुपये तक थी.
iPhone 13 सीरीज- 2021 में आईफोन 13 सीरीज लॉन्च हुई. इसमें भी 12 सीरीज की तरह 4 आईफोन शामिल थे. इस सीरीज की कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी और ये आईफोन भी 12 सीरीज के दामों पर ही लॉन्च हुए.
iPhone 14 सीरीज- 2022 में लॉन्च हुई इस सीरीज में 4 आईफोन थे, लेकिन मिनी को प्लस मॉडल से रिप्लेस कर दिया गया. iPhone 14 की शुरुआती कीमत 79,900 थी, जबकि Pro Max मॉडल की शुरुआती कीमत बढ़कर 139,900 रुपये हो गई थी.
iPhone 15 सीरीज- 2023 में आई इस सीरीज में भी प्रीवियस जनरेशन की तरह 4 मॉडल उतारे गए थे. इस सीरीज की शुरुआती कीमत भी 79,900 रुपये थी और प्रो मैक्स मॉडल के बेस वेरिएंट के लिए ग्राहकों को लगभग 1.60 लाख रुपये चुकाने पड़े थे.
iPhone 16 सीरीज- 2024 में ऐप्पल आईफोन 16 सीरीज लेकर आई. इसकी कीमत की बात करें तो बेस वेरिएंट की शुरुआती कीमत 79,900 रुपये थी, जबकि प्रो मैक्स का बेस वेरिएंट थोड़ा सस्ता होकर 1,44,900 रुपये में लॉन्च हुआ था.
iPhone 17 सीरीज- पिछले साल ऐप्पल ने iPhone 17 सीरीज लॉन्च की थी. इसमें प्लस मॉडल को अल्ट्रा-स्लिम आईफोन एयर से रिप्लेस किया गया. इस सीरीज की शुरुआती कीमत 82,900 रुपये थी, जबकि 17 Pro Max की कीमत 1,49,900 रुपये रखी गई.
iPhone 18 Series- ऐप्पल इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro मॉडल्स और फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. इनकी कीमतें सामने नहीं आई हैं, लेकिन माना जा रहा है कि ये तीनों ही ऐप्पल के अब तक के सबसे महंगे आईफोन हो सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>हर कोई कर रहा है Transparent Solar Panel की बात, लेकिन क्या Black Panel अब भी है बेस्ट? जानें दोनों में अंतर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हर-कोई-कर-रहा-है-transparent-solar-panel-की-बात-लेकिन-क्या-black-panel-अब-भी-है-बेस्ट-जानें-दोनों-में-अंतर</link>
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        <description><![CDATA[ Transparent Vs Black Solar Panel: सोलर पैनल आज कल काफी तेजी से लोगों के बीच चर्चित हो चुका है. लोग अब अपने घरों में सोलर पैनल लगवा रहे हैं. इतना ही नहीं, भारत सरकार भी सोलर पैनल को बढ़ावा दे रही है. ऐसे में अब इस टेक्नोलॉजी की दुनिया में सोलर पैनल में भी कई तरह की नई टेक्नोलॉजी आ चुकी हैं. दरहसल, आज कल मार्केट में ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. लेकिन क्या ये ब्लैक फिल्म वाले सोलर पैनल से ज्यादा बेहतर हैं? आज ह्म आपको इसके बारे में ही बताने जा रहे हैं.
क्या Black Solar Panel आज भी हैं बेस्ट?
जानकारी के अनुसार, Black Solar Panel खासतौर पर Monocrystalline Technology पर आधारित होते हैं. काले रंग के होने कारण ये सूरज की रौशनी को ज्यादा बेहतर तरीके से एब्जॉर्ब करके बिजली बनाने का काम करते हैं. ये काफी तेजी से बिजली पैदा करने के लिए जाने जाते हैं. इतना ही नहीं, ये कम जगह पर आसानी से फिट भी हो जाते हैं. इसलिए घरों, फैक्ट्रियों और बड़े सोलर प्लांट्स में इनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. साथ ही इनकी उम्र भी लगभग 25 से 30 साल तक हो सकती है.
क्या होता है Transparent Solar Panel
दरहसल, Transparent Solar Panel ऐसा सोलर पैनल होता है जो पूरी तरह या कुछ हिस्सा ट्रांसपेरेंट होता है. इसका मतल है कि इसके आर पार आसानी से देखा जा सकता है. ये नॉर्मल शीशे की तरह होता है और आसानी से सूरज की रौशनी से बिजली बनाने का काम करता है. इस सोलर पैनल की सबसे खास बात ये है कि इसे आप बड़ी बिल्डिंग, गाड़ी के ऊपर या ग्रीनहाउस जैसी जगहों पर आसानी से लगा सकते हैं.
दोनों के बीच क्या है सबसे बड़ा अंतर?
Transparent Solar Panel का सबसे बड़ा दया इसका डिजाइन है और कई जगहों पर इस्तेमाल किए जाने की क्वालिटी है. ये इमारत की सुंदरता बनाए रखते हुए बिजली भी पैदा कर सकता है.
वहीं, दूसरी ओर, Black Solar Panel की सबसे बड़ी ताकत इसकी हाई Efficiency है. बता दें कि ब्लैक वाले पैनल ट्रांसपेरेंट के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से बिजली बनाने में सक्षम हैं. ऐसे में अगर आप अपने घर का बिजली बिल बचाना चाहते है तो ब्लैक सोलर पैनल आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है.
किसे खरीदने में है फायदा
अगर आप किसी बड़े ऑफिस, मॉल या ग्लास बिल्डिंग के लिए सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं तो आपको ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल की ओर रुख करना चाहिए. वहीं अगर आप कम जगह में सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं और कम बिजली बिल भी चाहते हैं तो आपके लिए ब्लैक सोलर पैनल एक बेस्ट ऑप्शन साबित होगा.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 00:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हुआ Google Chrome! 2026 के ये 5 फीचर्स नहीं देखे तो बहुत कुछ मिस कर देंगे</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome: वेब ब्राउजिंग को और बेहतर बनाने के लिए गूगल क्रोम ने इस साल कई फीचर्स पेश किए हैं जिससे यूजर्स को और बेहतर एक्सपीरिएंस मिल सके. इन फीचर्स के आने के बाद गूगल क्रोम को इस्तेमाल करना पहले से ज्यादा तेज, स्मार्ट और बेहतर हो चुका है. इतना ही नहीं, क्रोम में इस बार एआई फीचर भी आया है जो यूजर्स के काम को और भी आसान बनाने का काम कर रहा है. आइए जानते हैं गूगल क्रोम के वो 5 ऐसे फीचर्स जिन्हें मिस करना आपको बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा.
AI Mode का नया अनुभव
गूगल क्रोम ने अपने एआई मोड को पहले से और भी बेहतर कर दिया है. कंपनी ने इसमें Side-by-Side Browsing फीचर को भी ऐड किया है. बता दें कि पहले AI के जवाब में दिए गए लिंक नई टैब में खुलते थे जिससे बार-बार टैब बदलनी पड़ती थी. अब लिंक खुलने पर स्क्रीन का एक हिस्सा वेबपेज दिखाएगा जबकि दूसरा हिस्सा AI Mode के लिए रिजर्व रहेगा.
अब मिलेगा Full-Screen Reading Mode
इसके साथ ही इस बार गूगल क्रोम ने यूजर को फुल स्क्रीन रीडिंग मोड उपलब्ध कराया है जिसकी मदद से अब यूजर लंबे-लंबे आर्टिकल को पढ़ना काफी आसान हो जाएगा. आपको बता दें कि पहले ये रीडिंग मोड सिर्फ एक छोटे से कोने में खुलता था लेकिन ये नया फीचर पूरे वेबपेज को ही रीडिंग मोड में बदल देता है.
सीधे Google Drive में सेव होगी फाइन
जानकारी के अनुसार, गूगल क्रोम ने इस बार एक नया फीचर यूजर को उपलब्ध कराया है जिसकी मदद से अब यूजर पीडीएफ फाइल को सीधे गूगल ड्राइव में सेव कर सकेंगे. इस फीचर की मदद से अब पीडीएफ फाइल को सेव करना पहले से आसान हो गया है. अब आपको बस पीडीएफ फाइल को ओपन करना है और ऊपर जाकर सेव टू ड्राइव पर क्लिक कर देना है जिसके बाद आपकी फाइल सीधे गूगल ड्राइव पर सेव हो जाएगी.
Gemini Skills से बार-बार Prompt लिखने की झंझट खत्म
इसके अलावा Chrome में मौजूद Gemini AI भी यूजर के बहुत काम आने वाला है. अब इसके Skills फीचर की मदद से यूजर को और ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस मिलेगा. बता दें कि इस फीचर की मदद से यूजर को किसी भी चीज को सर्च करने या फिर प्रोड्क्ट कंपैरिजन करने के लिए बार-बार एक ही प्रॉम्प्ट डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. एक बार प्रॉम्प्ट डालने के बाद आप उसे सेव कर सकते हैं जो बाद में भी आपके काम आ जाएगा.
Vertical Tabs
अब आपको बता दें कि गूगल क्रोम ने इस बार यूजर के लिए एक नया फीचर पेश किया है जिसका नाम है वर्टिकल टैब्स. जी हां, दरअसल, अगर आपके Chrome में हमेशा कई टैब खुले रहते हैं तो नया Vertical Tabs फीचर आपके बड़े काम आ सकता है. इस फीचर की मदद से अब यूजर को टैब्स स्क्रीन के ऊपर की जगह पर बाईं ओर वर्टिकल लिस्ट में दिखाई देंगे. इससे हर टैब का नाम साफ दिखाई देता है और सही टैब ढूंढना आसान हो जाता है.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 00:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>GTA 6 खरीदने वालों को लग सकता है बड़ा झटका! इस बार नहीं मिलेगी Disc, जानें क्यों लिया ये फैसला</title>
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        <description><![CDATA[ GTA VI: गेमिंग लवर्स लंबे समय से जीटीए 6 का इंतजार कर रहे हैं. अब जब इस गेम की लॉन्चिंग काफी नजदीक आ चुकी है. ऐसे में गेमर्स के लिए एक बुरी खबर सामने आई है. दरअसल, Rockstar Games ने घोषणा की है कि जो खिलाड़ी गेम का फिजिकल एडिशन खरीदेंगे, उन्हें बॉक्स के अंदर गेम डिस्क नहीं मिलेगा. जी हां, फिजिकल एडिशन खरीदने वालों के लिए कंपनी ने ये फैसला लिया है. हालांकि, उन्हें बॉक्स के अंदर एक डिजिटल डाउनलोड कोड जरुर दिया जाएगा.
गेमर्स में है नाराजगी
कई खिलाड़ियों का मानना है कि डिस्क खरीदने से उन्हें कई फायदे होते थे. उनका मानना है कि डिस्क को वो अपने दोस्तों को उधार भी दे सकते थे और साथ ही बाद में किसी को बेच भी सकते थे. लेकिन अब कंपनी ने डिस्क की जगह पर एक डिजिटल कोड देने का फैसला किया है जो सिर्फ एक ही डिवाइस पर चलता है. इसी सबसे बड़ी वजह है कि गेमर्स में काफी नाराजगी देखी जा रही है.
बॉक्स मिलेगा, लेकिन अंदर नहीं होगी गेम डिस्क
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले जब कोई नया गेम लॉन्च होता था तो खिलाड़ी स्टोर से उसकी डिस्क खरीदकर सीधे अपने कंसोल में चला सकते थे. लेकिन GTA 6 के फिजिकल एडिशन में केवल एक बार इस्तेमाल होने वाला डाउनलोड कोड दिया जाएगा जिससे गेम इंटरनेट के जरिए डाउनलोड करना होगा. इसका साफ मतलब है कि गेमर्स को बॉक्स तो मिलेगा लेकिन उसमें खेलने के लिए कोई डिस्क नहीं दी जाएगी बल्कि उसकी जगह पर गेमर्स को सिर्फ एक डिजिटल कोड होगा जिसे उन्हें इंटरनेट की मदद से डाउनलोड करना होगा.
गेम की ओनरशिप है असली चिंता
आपको बता दें कि गेमिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये मामला सिर्फ एक डिस्क का नहीं है बल्कि ये मामला गेम के ओनरशिप को लेकर है. दरअसल, एक्सपर्ट्स का मानना है कि उन्हें सिर्फ एक कोड दिया जा रहा है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या जो गेम खरीद रहा है वह उसका मालिक होगा या फिर उसे सिर्फ गेम खेलने के लिए एक लाइसेंस दिया जा रहा है. इसके अलावा भविष्य में गेम के सर्वर बंद हो जाएं या कंपनी किसी वजह से एक्सेस हटा दे तो खिलाड़ी के पास खरीदा हुआ गेम भी बेकार हो सकता है.
कंपनी ने क्यों लिया ये फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Rockstar ने अभी तक इसकी कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. माना जा रहा है कि कंपनी ने ऐसा इसलिए किया है ताकी गेम की फाइलें लॉन्च से पहले ये लीक न हो जाए. साथ ही लॉन्च के समय खिलाड़ियों को हमेशा सबसे नया अपडेटेड वर्जन उपलब्ध कराना भी इसका एक कारण माना जा रहा है.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Smartphone Tips : आपका नया फोन सच में नया है या नहीं? ऐसे करें तुरंत चेक</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Tips : आपका नया फोन सच में नया है या नहीं? ऐसे करें तुरंत चेक ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>अब नहीं होगी आपकी हर ऑनलाइन एक्टिविटी की निगरानी? AI ने निकाला नया रास्ता, जानें पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: आज के समय में ज्यादातर काम अब ऑनलाइन हो चुके हैं. ऐसे में Online ads में भी काफी तेजी आई है. लोगों को अब ज्यादातर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तरह-तरह के ऐड्स दिखाए जाते हैं. बता दें कि पहले ऐसा होता था कि जो आप देखते हैं उसी के अनुसार आपको ऐड्स भी दिखाए जाते थे. इससे ज्यादातर कंपनियां लोगों की एक्टिविटी पर नजर रखती थीं. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसका एक समाधान निकाल लिया गया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
बिना प्रोफाइल बनाए होगा काम
रिसर्च के अनुसार, अब किसी भी यूजर के बारे में जानने के लिए उसकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी. अब इस काम को AI के जरिए किया जा सकेगा. दरअसल, एआई अब किसी भी यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक नहीं करेगा बल्कि एआई इस जगह पर यूजर उस समय जो भी वेब पेज पर काम कर रहा है उसी को समझकर यूजर को ऐड्स दिखाने का काम करेगा.
बता दें कि आप जिस भी वेब पेज पर हैं एआई उसे अच्छे से समझेगा कि उस समय आपके लिए कौन सा ऐड सबसे बेस्ट रहेगा. इस तरीके से लोगों की पर्सनल डिटेल्स सुरक्षित रहेंगी.
क्या बदल जाएगा ऑनलाइन ऐड्स का तरीका
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कंसास के शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में पाया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बिना किसी यूजर की पर्सनल जानकारी को इकट्ठा किए भी उसके मन के अनुसार उसे ऐड्स दिखाए जा सकते हैं. इसका मतलब ये है कि आने वाले समय में अब ऑनलाइन विज्ञापन दिखाने के लिए अब लोगों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी.
इतने लोगों पर हुआ टेस्ट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस तरीके को परखने के लिए वैज्ञानिकों ने करीब 1000 लोगों का इसका टेस्ट किया है. इस टेस्ट को चार अलग-अलग स्टेजों पर किया गया. सभी प्रतिभागियों को ऐसी वेबसाइटें दिखाई गईं जिन पर AI द्वारा तैयार किए गए Contextual विज्ञापन मौजूद थे. इसके बाद उनसे उनके अनुभवों के बारे में सवाल पूछे गए.
पहले टेस्ट में लोगों को चलने-फिरने वाले यानी एनिमेटेड ऐड नॉर्मल ऐड्स के मुकाबले ज्यादा पसंद आए.
दूसरे टेस्ट में पता चला कि जो ऐड्स कंटेंट के बीच में दिखाए गए वो साइड में आने वाले ऐड्स के मुकाबले ज्यादा प्रभावी रहे.
वहीं, तीसरे और आखिरी टेस्ट में ये पता चला कि यूजर उस समय जो भी कंटेंट देख रहा है उसी से मिलता-जुलता ऐड दिया जाए तो लोग उसे ज्यादा गौर से देखते हैं.
क्या भविष्य में बदलेगा ऑनलाइन ऐड्स का मॉडल
इस टेस्ट के बाद से ही माना जा रहा है कि अगर ये टेक्नोलॉजी बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो डिजिटल ऐड्स का पूरा तरीका बदला जा सकता है. इसके बाद से कंपनियों को किसी भी यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को लंबे समय तक ट्रैक करने की जरुरत नहीं होगी बल्कि उसी समय देखे जा रहे कंटेंट के आधार पर तुरंत ऐड्स दिखाए जा सकेंगे.
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        <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>क्या होता है Quantum Computer? जानिए नॉर्मल कंप्यूटर से कैसे है अलग</title>
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        <description><![CDATA[ What is Quantum Computer: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ कई और भी नई टेक्नोलॉजी भी काफी तेजी से विकसित हो रही हैं. इसी बीच Quantum Computer भी काफी तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है. क्वांटम कंप्यूटर आने वाले समय की सबसे तेज और ताकतवर टेक्नोलॉजी में से एक माना जा रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर ये नॉर्मल कंप्यूटर से कितना अलग है.
क्या है Quantum Computer?
दरअसल, Quantum Computer एक ऐसा सिस्टम है जो Quantum Physics के सिद्धांतों पर काम करता है. ये कंप्यूटर नॉर्मल कंप्यूटर की तुलना में काफी तेज और एडवांस होता है. साथ ही ये कंप्यूटर डेटा प्रोसेस करने के लिए Qubit (क्वांटम बिट) का इस्तेमाल करते हैं. वहीं नॉर्मल कंप्यूटर केवल 0 और 1 का इस्तेमाल करते हैं. बता दें कि Qubit की सबसे खास बात ये है कि ये एक ही समय में 0 और 1 दोनों ही तरीकों में मौजूद रहता है. यही सबसे बड़ी वजह कि क्वांटर कंप्यूटर ज्यादा एडवांस है और कई कामों को एक साथ करने में सक्षम है.
नॉर्मल कंप्यूटर से कैसे है अलग?
अब इसके और नॉर्मल कंप्यूटर में अंतर की बात करें तो नॉर्मल कंप्यूटर डेटा को Binary Bits (0 और 1) में प्रोसेस करता है. वहीं, दूसरी ओर, क्वांटम कंप्यूटर डेटा को Qubit में प्रोसेस करता है जो एक साथ कई सारे कामों को करने में सक्षम होता है. इसी वजह से Quantum Computer बेहद मुश्लिक कामों को बहुत कम समय में पूरा कर सकता है.
क्या हैं इसके फायदे
Quantum Computer के फायदों की बात करें तो इसका सबसे बड़ा फायदा इसकी तेज प्रोसेसिंग स्पीड है. क्वांटम कंप्यूटर का इस्तेमाल आने वाले समय में दवाइयों की खोज, मौसम की सटीक भविष्यवाणी, साइबर सिक्योरिटी, फाइनेंशियल मॉडलिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये टेक्नोलॉजी आने वाले समय में कई सारे मुश्किल समस्याओं के रिजल्ट्स खोजने में मदद करेगी.
भविष्य की तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में Quantum Computing कई उद्योगों में बड़ा बदलाव ला सकती है. हालांकि, ये टेक्नोलॉजी अभी शुरुआती दौर में है लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में ये कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है. इसीलिए क्वांटम कंप्यूटर आने वाले समय में सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी के रूप में सामने आ सकता है और लोगों के कई सारे काम भी पहले की तुलना में आसान हो सकेंगे.
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टीवी रिमोट ब्लूटूथ से क्यों नहीं चलते? वर्षों पुरानी वजह जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ TV Remote Bluetooth: जब स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और यहां तक की स्मार्ट टीवी में ब्लूटूथ है तो टीवी के रिमोट में ब्लूटूथ क्यों नहीं है? क्या आपके मन में यह सवाल आया है कि अब जब सारे मॉडर्न गैजेट ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के साथ आ रहे हैं तो टीवी रिमोट अभी भी इंफ्रारेड के साथ क्यों चिपके हुए हैं? इसका जवाब और वजह बड़ी आसान-सी है. यह जानने से पहले जानते हैं कि टीवी रिमोट काम कैसे करते हैं और क्यों इनमें अभी भी दशकों पुरानी टेक्नोलॉजी यूज हो रही है.
कैसे काम करते हैं इंफ्रारेड वाले रिमोट?
1970 और 80 के दशक में इंफ्रारेड रिमोट का चलन शुरू हुआ था. अल्ट्रासॉनिक क्लिकर की जगह लेने वाले ये रिमोट जल्दी ही पॉपुलर हो गए और टीवी, प्रोजेक्टर से लेकर एयर कंडीशनर तक में इनका यूज होने लगा. इनके काम करने का तरीका बड़ा आसान है. रिमोट में लगा एक माइक्रोप्रोसेसर बाइनरी कोड क्रिएट करता है. इस कोड को रिमोट में लगा एमिटर लाइट की पल्सेस के तौर पर एनकोड करता है, जिसे डिवाइस की तरफ फ्लैश किया जाता है. उस लाइट को सामने वाला डिवाइस डिकोड कर कमांड में बदल देता है. यही तरीका है कि जब आप रिमोट पर बटन दबाते हैं तो टीवी में चैनल चेंज हो जाता है.
आज भी क्यों यूज हो रही है दशकों पुरानी टेक्नोलॉजी
पिछले कुछ सालों में टीवी समेत लगभग सारे गैजेट का स्वरूप बदल गया है तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि रिमोट में अब भी दशकों पुरानी टेक्नोलॉजी क्यों यूज हो रही है. इसके जवाब में कम लागत, रिलायबिलिटी, पावर एफिशिएंसी और सिंपलिसिटी जैसी कई चीजें गिनाईं जा सकती हैं. यानी टीवी रिमोट मे कई वर्षों से चले आ रहे इंफ्रारेड को यूज करना सस्ता पड़ता है, यह ज्यादा भरोसेमंद है और वायरलेस टेक्नोलॉजी के मुकाबले यह कम पावर कंज्यूम करता है. इसे यूज करने के लिए कंपनियों को किसी तरह की यूटिलिटी फीस भी नहीं देनी पड़ती. इन्हीं कारणों के चलते कंपनियां आज भी टीवी रिमोट में ब्लूटूथ की बजाय इंफ्रारेड का यूज कर रही है.
ब्लूटूथ के भी हैं कई फायदे
ब्लूटूथ कई भी कई फायदे हैं और अगर टीवी रिमोट में इसे यूज किया जाता है तो टीवी देखना आसान हो जाएगा. ब्लूटूथ की रेंज इंफ्रारेड से ज्यादा होती है. इसका फायदा यह होगा कि दूसरे कमरे से भी टीवी को कंट्रोल किया जा सकेगा. इसी तरह एक रिमोट कई डिवाइस को कंट्रोल करने के काम आ सकता है.
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        <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सोलर पैनल लगवाने से पहले ये बातें जरूर जान लें, नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Disadvantages: जब सोलर एनर्जी की बात आती है तो लोग इसके फायदों को लेकर खूब चर्चा करते हैं. सोलर एनर्जी न सिर्फ बिजली का बिल बचाती है बल्कि यह एनर्जी नीड्स को लेकर इंडिपेंडेंट भी बना सकती है. सोलर पैनल सनलाइट से बिजली जनरेट करते हैं और यह कभी न खत्म होने वाला सिलसिला है. हालांकि, सोलर पैनल के लिए कई नुकसान भी हैं. अगर आप सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने पर विचार कर रहे हैं तो इनके बारे में जानना जरूरी है. इन पर विचार किए बिना आपका बड़ा नुकसान हो सकता है.
हर टाइम काम नहीं करते सोलर पैनल- सोलर पैनल हर समय काम नहीं करते. ये केवल सनलाइट होने पर बिजली जनरेट करते हैं. रात के समय इनकी आउटपुट बिल्कुल जीरो हो जाती है. वहीं बारिश या सर्दियों के महीनों में धूप न निकलने के कारण इनकी आउटपुट कम हो जाती है. अगर आप देश के किसी ऐसे हिस्से में रहते हैं, जहां धूप कम आती है तो आपको सोलर पैनल लगाने पर विचार जरूर करना चाहिए.
सेटअप की लागत है महंगी- सोलर एनर्जी सिस्टम को इंस्टॉल करवाना महंगा सौदा है. साथ ही इस पर किया गया निवेश पूरा होने में कई साल लग सकते हैं. अगर आप ऑफ-ग्रिड सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाना चाहते हैं तो बैटरी के कारण इसकी लागत और भी बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
सोलर बैटरी से पर्यावरण को भी नुकसान- सोलर पावर जहां एनर्जी का क्लीन सोर्स है, वहीं एनर्जी स्टोर करने के लिए यूज होने वाली बैटरी पर्यावरण के लिए खतरनाक है. अगर इन्हें ठीक तरीके से डिस्पॉज न किया जाए तो ये पानी और मिट्टी को प्रदूषित कर सकती है, जो इंसानों और पशुओं के लिए काफी हानिकारक हो सकता है.
मेंटिनेंस का रहेगा झंझट- सोलर पैनल इंस्टॉल करने के बाद आप उन्हें लेकर हमेशा के लिए बेफिक्र नहीं हो सकते. इस पूरे एनर्जी सिस्टम को मेंटिनेंस की जरूरत पड़ती है. तेज आंधी-तूफान या बारिश आने के बाद इनका फिजिकल इंस्पेक्शन जरूरी होता है. इसके लिए एफिशिएंसी मैंटेन करने के लिए पैनल को रेगुलर क्लीन करना पड़ता है. कई बार इमरजेंसी में प्रोफेशनल रिपेयरिंग भी करवानी पड़ सकती है.
स्पेस की पड़ेगी जरूरत- सोलर पैनल लगाने के लिए आपको काफी स्पेस की जरूरत पड़ती है. अगर आप छत पर पैनल इंस्टॉल करवाना चाहते हैं तो छत की कंडीशन भी मायने रखती है. इसके अलावा यह भी एनस्योर करना पड़ेगा कि पैनल पर दिन में छांव न आए. छांव आने पर ये काम करना बंद कर देते हैं.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cloud Storage और External Hard Drive में कौन सा है आपके लिए बेहतर? जानिए क्या है दोनों के काम करने का तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/cloud-storage-और-external-hard-drive-में-कौन-सा-है-आपके-लिए-बेहतर-जानिए-क्या-है-दोनों-के-काम-करने-का-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ Cloud Storage Vs External Hard Drive: आज के समय में लोग स्मार्टफोन या लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन अब लोगों को अपने डेटा की भी चिंता ज्यादा रहती है. लोग आज के समय में फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट जैसी चीजें का बैकअप रखते हैं. बैकअप के लिए अब लोग क्लाउड स्टोरेज या फिर External Hard Drive का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दोनों कैसे काम करते हैं और दोनों में से आपके लिए कौन सा वाला ज्यादा बेहतर है. आइए जानते हैं विस्तार से.
Cloud Storage कैसे काम करता है?
Cloud Storage के नाम से ही पता चलता है कि आपका डेटा क्लाउड में स्टोर होता है. जी हां, दरअसल क्लाउड स्टोरेज में आपकी फाइलें आपके कंप्यूटर या स्मार्टफोन में नहीं बल्कि इंटरनेट से चलने वाले किसी कंपनी के सर्वर या फिर क्लाउड सर्वर में सेव होते हैं. यहां पर आपको एक बार अपनी फाइल अपलोड करनी होती है. इसके बाद आप उस फाइल को कहीं से भी एक्सेस कर सकते हैं. साथ ही यहां पर आपकी फाइलें ज्यादा सुरक्षित रहती है. अगर आपका लैपटॉप या सिस्टम खराब भी हो जाता है तो भी आपके डेटा को कोई फर्क नहीं पड़ता है और वह पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं और आप उसे किसी भी डिवाइस से एक्सेस कर सकते हैं.
External Hard Drive कैसे काम करती है?
वहीं, अब External Hard Drive की बात करें तो ये एक फिजिकल स्टोरेज डिवाइस होती है जिसे USB के जरिए कंप्यूटर या लैपटॉप से कनेक्ट किया जाता है. इसमें यूजर का डेटा सीधे ड्राइव में सेव होता है और फाइल देखने या कॉपी करने के लिए इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ती है. इसीलिए इस डिवाइस को लोग बड़ी फाइलों का बैकअप लेने और ऑफलाइन इस्तेमाल के लिए ज्यादा बेहतर ऑप्शन समझते हैं.
दोनों में क्या है सबसे बड़ा अंतर?
Cloud Storage का सबसे बड़ा फायदा ये है कि आप अपनी फाइलों को कहीं से भी एक्सेस कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे लोगों के साथ आसानी से शेयर भी कर सकते हैं. वहीं, दूसरी ओर, External Hard Drive पूरी तरह आपके पास रहती है और इंटरनेट पर निर्भर नहीं होती. लेकिन हां, हार्ड ड्राइव अगर आपके जाने-अनजाने में खो जाती है तो आपका डेटा भी वापस नहीं लाया जा सकता है. क्योंकि इसे ऑफलाइन इस्तेमाल के लिए ज्यादा अच्छा माना जाता है.
किसे चुनना रहेगा बेहतर?
अगर आप अक्सर सफर करते हैं, कई डिवाइस इस्तेमाल करते हैं और चाहते हैं कि आपका डेटा हर समय उपलब्ध रहे तो Cloud Storage आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. वहीं, अगर आपको ज्यादा डेटा ऑफलाइन ही स्टोर करना है वो भी बिना इंटरनेट के इस्तेमाल के तो आपके लिए हार्ड ड्राइव ही सबसे बेस्ट ऑप्शन रहेगा. हालांकि, आखिरी फैसला आपका ही होता है कि आपकी जरूरत क्या है और कौन सा ऑप्शन चुनना पसंद करते हैं.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>बिना OPT के भी अकाउंट खाली कर देते हैं हैकर्स, कैसे होता है यह स्कैम? </title>
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        <description><![CDATA[ बिना OPT के भी अकाउंट खाली कर देते हैं हैकर्स, कैसे होता है यह स्कैम?  ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Satellite Internet: कैसे काम करता है सैटेलाइट इंटरनेट, आसमान से आपके घर तक कैसे पहुंचता है नेटवर्क?</title>
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        <description><![CDATA[ Satellite Internet: आज के समय में इंटरनेट सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है. चाहे ऑफिस का काम हो, कॉलेज का असाइनमेंट करना हो या दूसरे काम हो इंटरनेट आज के समय में इंसान की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है. जिस तरह से पारंपरिक केबल इंटरनेट सेवाएं प्रदान करती है, उसी प्रकार सैटेलाइट इंटरनेट भी यही काम करता है. बस इन दोनों में फर्क इतना है कि सैटेलाइट इंटरनेट आकाश में स्थित एक उपग्रह के माध्यम से मिलता है.
सैटेलाइट इंटरनेट का नाम आते ही लोगों के मन में अक्सर सवाल उठते हैं कि यह आखिर यह होता क्या है और आसमान से घर तक नेटवर्क कैसे पहुंचता है? ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सैटेलाइट इंटरनेट क्या है, यह कैसे काम करता है और आसमान से आपके घर तक नेटवर्क कैसे पहुंचता है.&amp;nbsp;
क्या होता है सैटेलाइट इंटरनेट?
जिस तरह से सामान्य ब्रॉडबैंड या फाइबर इंटरनेट के जरिए केबल के माध्यम से इंटरनेट आपके घर तक पहुंचता है. उसी तरह सैटेलाइट इंटरनेट भी इंटरनेट सेवा ही है. फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें इंटरनेट सिग्नल जमीन पर बिछी केबलों के बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के जरिए भेजे जाते हैं. यह तकनीक खासतौर पर उन इलाकों के लिए उपयोगी मानी जाती है, जहां फाइबर या फिर ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचना मुश्किल होता है. पहाड़ी क्षेत्र, दूर-दराज के गांव और ऐसे स्थान जहां केबल बिछाना आसान नहीं है, वहां सैटेलाइट इंटरनेट अच्छा ऑप्शन माना जाता है.&amp;nbsp;
आसमान से आपके घर तक कैसे पहुंचता है नेटवर्क?
सैटेलाइट इंटरनेट की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनी अपने ग्राउंड स्टेशन से सिग्नल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट तक भेजती है. इसके बाद वहीं सैटेलाइट इंटरनेट सिग्नल आपके घर की छत या दीवार पर लगाए गए डिश एंटीना या सैटेलाइट एंटीना तक पहुंचता है. यह डिश एक मॉडम से जुड़ी होती है, जो सिग्नल को इंटरनेट डेटा में बदल देता है. इसके बाद मॉडेम से राउटर के जरिए घर के मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और दूसरे इंटरनेट डिवाइस इंटरनेट से कनेक्ट हो जाते हैं.&amp;nbsp;
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए किन डिवाइस की होती है जरूरत?&amp;nbsp;
सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन लेने पर कंपनी कुछ जरूरी डिवाइस उपलब्ध कराती है. इनमें मुख्य रूप से सैटेलाइट डिश या एंटीना, मॉडेम राउटर और कनेक्टिंग केबल शामिल है. डिश को घर में ऐसी जगह लगाया जाता है, जहां आसमान साफ दिखाई देता हो उसके सामने कोई पेड़, इमारत या रुकावट न हो. साफ लाइन और साइट मिलने पर नेटवर्क बेहतर तरीके से मिलते हैं.&amp;nbsp;
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भारत में सैटेलाइट इंटरनेट&amp;nbsp;
भारत में पहले से कुछ कंपनियां सैटलाइट इंटरनेट उपलब्ध करा रही है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में बड़ी कंपनियों के इस क्षेत्र में आने से कंपटीशन बढ़ सकता है. खासकर उन इलाकों में जहां आज भी हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचना बहुत बड़ी समस्या है, वहां सैटलाइट इंटरनेट एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है. आपको बता दें कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भी पिछले काफी समय से भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ बोलने से ही लॉक हो जाएगा आपका स्मार्टफोन! जानें कैसे यूज करें ये फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: स्मार्टफोन में ऐसे कई सारे फीचर्स मौजूद रहते हैं तो अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. आज कल के एडवांस स्मार्टफोन में यूजर्स को कई सारे बेहतरीन फीचर्स मिलते हैं जो डिवाइस के इस्तेमाल करने के तरीके को काफी आसान बना देते हैं. इसी में आज हम आपको एक ऐसे फीचर के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे सिर्फ बोलने से ही आपका स्मार्टफोन लॉक हो जाएगा. आइए जानते हैं कि कैसे आप भी इस फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
Android यूजर्स ऐसे करें एक्टिव

Android फोन में भी यह सुविधा Voice Access के जरिए मिलती है.
Settings खोलें.
सर्च बॉक्स में Voice Access लिखकर खोजें.
Voice Access फीचर को ऑन करें.
इसके बाद Voice Access Shortcuts को भी एक्टिव कर दें.

इस फीचर के ऑन होने के बाद अब आप वॉइस कमांड की मदद से बिना अपने फोन की स्क्रीन को छुए ही डिवाइस को लॉक कर सकते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि अलग-अलग कंपनियों के Android फोन में सेटिंग्स का नाम थोड़ा अलग हो सकता है.
iPhone में ऐसे करें सेटअप
अगर आप iPhone यूजर हैं तो इस फीचर को आसानी से अपने फोन में सेटअप कर सकते हैं. इसके लिए आपको बस ये स्टेप्स फॉलो करने होंगे.

Settings में जाएं.
Accessibility पर टैप करें.
Vocal Shortcuts ऑप्शन को चुनें.
Set Up Vocal Shortcuts चुनें.
अब Lock Screen ऑप्शन पर टैप करें.
Lock Screen शब्द को लगातार 3 बार बोलें ताकि iPhone आपकी आवाज को अच्छे से पहचान सके.
सेटअप पूरा होते ही फीचर एक्टिव हो जाएगा.

क्या है इस फीचर का फायदा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मान लीजिए आपके हाथ गंदे हैं, खाना बना रहे हैं या किसी जरूरी काम में व्यस्त हैं. ऐसे समय में फोन को हाथ लगाए बिना केवल Lock बोलकर स्क्रीन लॉक करना काफी आसान तरीका साबित हो सकता है. ये फीचर यूजर की सेफ्टी के साथ ही समय भी बचाता है.
किन बातों का रखना चाहिए ध्यान
इस फीचर के साथ ही आपको कुछ चीजों का ध्यान रखना भी जरूरी है. दरअसल, फोन की भाषा और आपकी वॉइस कमांड एक जैसी होनी चाहिए. इसके अलावा ये फीचर कम शोर-शराबे या फिर शांत माहौल में काफी अच्छे से काम करता है. इसीलिए शोर वाले इलाकों में इसका इस्तेमाल कम करना चाहिए. इसके साथ ही फीचर को सेटअप करते समय साफ और तेज आवाज में बोलकर सेटअप करना चाहिए. साथ ही सेफ्टी के लिए स्क्रीन लॉक में PIN, पासवर्ड या बायोमेट्रिक लॉक जरूर रखें.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब गुमनाम रहकर यूज नहीं कर पाएंगे एआई, बदल गई पॉलिसी, देना पड़ सकता है बायोमेट्रिक डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ Anthropic Privacy Policy: एआई को यूज करने के लिए आपको अपना पासपोर्ट दिखाने तक की जरूरत पड़ सकती है. ऐसा हम नहीं कर रहे बल्कि अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अपनी नई पॉलिसी में लिखा है. कंपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लेकर आई है, जिसमें यूजर की पहचान वेरिफाई करने के लिए कड़े कदमों का प्रावधान किया गया है. नई पॉलिसी कंज्यूमर अकाउंट यानी Claude Free, Pro और Max प्लान यूज करने वाले यूजर के लिए ही लागू होगी. कमर्शियल यूजर को अभी तक इस पॉलिसी के तहत नहीं लाया गया है.
वेरिफिकेशन के लिए देना पड़ सकता है बायोमेट्रिक डेटा
एंथ्रोपिक की नई एआई पॉलिसी के हिसाब के कुछ सिचुएशन में यूजर को उनकी उम्र और पहचान साबित करने के लिए कहा जा सकता है. इसके लिए यूजर को सेल्फी या वीडियो, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसा सरकारी डॉक्यूमेंट देना पड़ेगा. इसके अलावा पॉलिसी में फेशियल जियोमेट्री टेंपलेट के क्रिएशन की बात भी कही गई है. यह पॉलिसी 8 जुलाई से लागू हो जाएगी.&amp;nbsp;
कब पड़ेगी वेरिफिकेशन की जरूरत?
एंथ्रोपिक का कहना है कि जब कोई यूजर अपने अकाउंट पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देगा तो वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा इस जानकारी को प्लेटफॉर्म के नियम लागू करने, फ्रॉड की जांच, सिक्योरिटी चिंताओं से जुड़े मसले और एआई सर्विसेस के मिसयूज को रोकने के लिए भी यूज किया जा सकता है. बता दें कि एंथ्रोपिक के Claude मॉडल को एक्सेस करने के लिए यूजर का पहले से ही 18 साल का होना जरूरी है. इसी साल कंपनी ने कानूनी बाध्यता के कारण कई जगहों पर एज-वेरिफिकेशन सिस्टम शुरू किया था. एंथ्रोपिक ने बताया कि वेरिफिकेशन की प्रोसेस Persona नाम की एक आईडी वेरिफिकेशन कंपनी हैंडल करती है. जब यूजर किसी खास फीचर की एक्सेस करना चाहेंगे, तब उन्हें वेरिफिकेशन प्रोसेस से गुजरना पड़ सकता है.
प्राइवेसी को लेकर उठ रहे हैं सवाल
एंथ्रोपिक की अपडेटेड प्राइवेसी पॉलिसी आने के बाद से ही इस पर सवाल उठ रहे हैं. खासकर यूजर प्राइवेसी और बायोमेट्रिक डेटा कलेक्शन पर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है. प्राइवेसी एक्सपर्ट्स लगातार यह चिंता जताते आए हैं कि आइडेंटिटी डेटाबेस साइबर क्रिमिनल का टारगेट बन सकता है और इससे यूजर की सेफ्टी को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं. दूसरी तरफ एंथ्रोपिक ने अपने बचाव में कहा है कि इस पॉलिसी को सभी यूजर के आइडेंटिटी चेंकिंग प्रोग्राम के तौर पर नहीं लाया गया है. यह संदिग्ध गतिविधियों में शामिल अकाउंट को रिव्यू करने की प्रोसेस के एक हिस्से के तौर पर लाया गया है.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 08:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अब, गुमनाम, रहकर, यूज, नहीं, कर, पाएंगे, एआई, बदल, गई, पॉलिसी, देना, पड़, सकता, है, बायोमेट्रिक, डेटा</media:keywords>
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        <title>Elon Musk करेंगे नया कमाल, Starmind में बनाएंगे 10 लाख एआई सैटेलाइट का नेटवर्क</title>
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        <description><![CDATA[ Elon Musk&#039;s Starmind: जमीन पर एआई डेटा सेंटर की रेस से ऊपर उठते हुए दुनिया के सबसे अमीर इंसान Elon Musk अब स्पेस का यूज करना चाहते हैं. उनकी कंपनी SpaceX एक स्पेस में 10 लाख एआई सैटेलाइट भेजना चाहती है. इन सैटेलाइट में पावरफुल चिप लगी होगी और ये एआई कंप्यूटिंग करेंगे. अब इस प्रोजेक्ट को नाम भी मिल गया है. एलन मस्क ने कन्फर्म किया है कि इसे प्रोजेक्ट को Starmind कहा जाएगा. यह भले ही सुनने में कंपनी के स्टारलिंक की तरह लगता है, लेकिन दोनों के काम में काफी अंतर होगा. आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी क्या-क्या जानकारी सामने आई है.&amp;nbsp;
Starmind पर काम हो गया है शुरू
भले ही इस प्रोजेक्ट का नाम अभी कन्फर्म हुआ है, लेकिन इस पर काम कई महीनों से जारी है. इसी साल जनवरी में SpaceX ने यूएस फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (USFCC) से 10 लाख एआई सैटेलाइट का नेटवर्क बनाने की परमिशन मांगी थी. इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी आउटर स्पेस में एक बहुत बड़ा कंप्यूटिंग नेटवर्क बनाना चाहती है. इस नेटवर्क में लगे सैटेलाइट सिर्फ इंफोर्मेशन को ट्रांसमिट नहीं करेंगे बल्कि इनमें एआई से रिलेटिड कंप्यूटिंग टास्क भी पूरे किए जाएंगे. इन सैटेलाइट में पावरफुल प्रोसेसर लगे होंगे, जो सोलर पावर से एनर्जी लेकर काम करते रहेंगे. हर सैटेलाइट करीब 79 मीटर चौड़ा होगा और 120-150 kW की कंप्यूटिंग पावर दे सकेगा.
अगले साल लॉन्चिंग की तैयारी
इस प्रोजेक्ट की टेस्टिंग के लिए अगले साल की शुरुआत में दो टेस्ट यूनिट को लॉन्च किया जा सकता है. अगर सब कुछ उम्मीद के मुताबिक रहता है तो हो सकता है कि आपकी एआई रिक्वेस्ट को स्पेस में प्रोसेस किया जाएगा और इस पूरे काम में जमीन पर बने डेटा सेंटर की जरूरत नहीं रहेगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने में SpaceX अपने स्टारशिप रॉकेट की मदद भी ले सकती है. हर लॉन्च में यह रॉकेट 30-50 एआई सैटेलाइट ले जा सकता है.
स्पेस में सैटेलाइट नेटवर्क क्यों बनाना चाह रहे हैं मस्क?
एआई आने के बाद डेटा सेंटर की डिमांड बढ़ गई है, लेकिन कंपनियों को नए डेटा सेंटर बनाने के लिए कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. डेटा सेंटर के लिए सबसे पहले जगह चाहिए. इसके बाद इन्हें बड़ी मात्रा में पानी और एनर्जी की जरूरत होती है, जिसके चलते अकसर कंपनियों को विरोध का सामना करना पड़ता है. इसे देखते हुए अब डेटा सेंटर के लिए स्पेस की तरफ देखा जा रहा है.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 08:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सरकार ने लगाया बैन, लेकिन बच्चे फिर भी सोशल मीडिया पर, क्या फेल हो गया ऑस्ट्रेलिया का कानून?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सरकार-ने-लगाया-बैन-लेकिन-बच्चे-फिर-भी-सोशल-मीडिया-पर-क्या-फेल-हो-गया-ऑस्ट्रेलिया-का-कानून</link>
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        <description><![CDATA[ Social Media Ban For Kids: ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया में सबसे पहले 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर ताला लगाया था. इसके बाद यूके और यूएई ने भी ऐसे कानून पास कर 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया यूज करने पर पाबंदी लगा दी है. अब एक सर्वे ने ऑस्ट्रेलिया के कानून की पोल खोलकर रख दी है. इसमें सामने आया है कि सोशल मीडिया बैन करने का खास असर नजर नहीं आ रहा है और बच्चे अब भी पहले की तरह सोशल मीडिया यूज कर रहे हैं.&amp;nbsp;
पिछले साल आया था कानून
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल दिसंबर में सोशल मीडिया पर ताला लगाने वाला कानून पास किया था. इसके बाद बच्चों के लिए टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और स्नैपचैट आदि प्लेटफॉर्म पर अकाउंट क्रिएट करने पर रोक लग गई. बच्चों की मेंटल हेल्थ पर सोशल मीडिया के बुरे प्रभाव को रोकने के लिए यह कानून लाया गया था.
सर्वे में सामने आई हकीकत
The BMJ नाम के एक मेडिकल जर्नल में छपी स्टडी ने इस कानून के असर की सच्चाई सामने रख दी है. इस कानून का असर जानने के लिए दो सर्वे किए गए. 12-17 साल के 400 से अधिक टीनएजर्स पर पहला सर्वे कानून लागू होने से पहले, जबकि दूसरा सर्वे कानून लागू होने के तीन महीने बाद किया गया था. इनमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल, रोजाना सोशल मीडिया पर व्यतीत होने वाले समय, अकाउंट को एक्सेस करने के तरीके और एज-वेरिफिकेशन से जुड़े सवाल किए गए थे. दूसरे सर्वे में उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने बैन से बचने के कोई दूसरे तरीके भी इस्तेमाल किए हैं.
ज्यादातर बच्चे यूज कर रहे हैं सोशल मीडिया
सर्वे में जो नतीजे सामने आए हैं, वो बता रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया का यह एक्सपेरिमेंट सफल साबित नहीं हुआ है. 16 साल से कम उम्र के लगभग 85 प्रतिशत बच्चे अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूज कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वो किसी दूसरे की बजाय अपने अकाउंट से इन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस कर रहे हैं. हालांकि, दो तिहाई टीनएजर्स ने कहा कि उन्हें एज वेरिफाई करनी पड़ी है. इसके लिए उनसे डेट ऑफ बर्थ या सेल्फी अपलोड करने को कहा जाता है. इसके बावजूद टीनएजर्स ने ऐसे जुगाड़ निकाल लिए हैं, जिससे बैन का असर नहीं हो रहा. सर्वे में शामिल कई टीनएजर्स ने कहा कि उन्होंने फेक अकाउंट क्रिएट कर लिए हैं और कई प्राइवेट ब्राउजिंग के जरिए बैन से बच रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 08:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>एप्पल ने बढ़ाई MacBook और iPad की कीमतें, खरीदने से पहले देखे क्या है नया प्राइस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एप्पल-ने-बढ़ाई-macbook-और-ipad-की-कीमतें-खरीदने-से-पहले-देखे-क्या-है-नया-प्राइस</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप एप्पल के प्रोडक्ट खरीदने की की सोच रहें तो ये खबर आपके लिए बहुत काम की हो सकती है. कंपनी ने अपने कई MacBook और iPad मॉडल्स के दाम में बढ़ोतरी कर दी है. कंपनी के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण मेमोरी और स्टोरेज की लागत काफी बढ़ गई. जिसकी वजह से एप्पल की ओर से फैसला लिया गया है.
कंपनी का कहना है कि अभी टेक इंडस्ट्री में चीज पहले जैसी नहीं है.AI का इस्तेमाल तेजी से किया जा रहा है.जिसके लिए ज्यादा मेमोरी और स्टोरेज की जरूरत होती है.इसी वजह से इन पार्ट्स की कीमत है काफी बढ़ गई है. इसलिए कुछ MacBook और iPad मॉडल्स के दाम बढ़ाने पड़े.
Apple ने कई लोकप्रिय मॉडल्स की नई कीमतें जारी की हैं. अपडेट के बाद अब कीमतें इस प्रकार हैं.नई कीमतें लागू होने के बाद एप्पल के कुछ प्रोडक्ट्स पहले की तुलना में ज्यादा महंगे हो गये हैं.

MacBook Neo (एंट्री मॉडल):&amp;nbsp; 599 डॉलर- 699 डॉलर
MacBook Air 512GB: 1099 डॉलर- 1299 डॉलर
MacBook Pro 1TB:&amp;nbsp; 1699 डॉलर- 1999 डॉलर
iPad Air 128GB:&amp;nbsp; 599 डॉलर- 749 डॉलर
iPad Pro Wi-Fi 256GB:&amp;nbsp; 999 डॉलर- 1199 डॉलर

कीमतों में बदलाव के दौरान Apple का ऑनलाइन स्टोर कुछ समय के लिए बंद किया गया था. बाद में स्टोर को दोबारा चालू कर दिया गया है. साथही &amp;nbsp;प्राइस लिस्ट भी अपडेट कर दी गयीं है.
&amp;nbsp;स्टोरेज कंपनियों को मिल रहा फायदा
रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ समय में मेमोरी और स्टोरेज से जुड़े कंपोनेंट्स की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है. इसका फायदा उन कंपनियों को मिला है जो इन पार्ट्स को बनाती हैं. बढ़ती मांग के चलते इन कंपनियों के कारोबार में भी तेजी देखने को मिली है.
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इससे पहले भी अप कंपनी अपने प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ाने के लिए मॉडर्न लाइनअप में बदलाव करती रही है. जिसमें कंपनी कई बार कम स्टोरेज वाले मॉडल को हटाकर ज्यादा स्टोरेज वाले मॉडल को शुरुआती विकल्प बना देती है. जिससे प्रोडक्ट कीमत अपने आप बढ़ जाती है.क्या iPhone भी महंगे होंगे?
अगर कंपोनेंट्स की लागत इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में iPhone की कीमतों पर भी असर दिखाई दे सकता है. खासकर ज्यादा स्टोरेज और AI फीचर्स वाले मॉडल पहले से महंगे हो सकते हैं. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन्स और डिवाइसेज़ में AI फीचर्स को बेहतर तरीके से चलाने के लिए ज्यादा RAM और स्टोरेज की जरूरत होगी. इसी वजह से कंपनियां अब अपने नए डिवाइसेज़ में हार्डवेयर अपग्रेड पर ज्यादा फोकस कर रही हैं.
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        <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone 17 Pro वाली कीमत में ही ज्यादा वैल्यू फॉर मनी देते हैं ये एंड्रॉयड फोन, देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Pro Alternatives: ऐप्पल का iPhone 17 Pro एक पावरफुल डिवाइस है. इसमें एक से बढ़कर एक फीचर दिए गए हैं. कैमरा की बात करें तो यह प्रोफेशनल कैमरा को टक्कर देता है. वहीं इसमें लगा A19 Pro चिपसेट दमदार परफॉर्मेंस देने के साथ-साथ हैवी टास्क को भी आसानी से हैंडल कर लेता है. हालांकि, इसके लिए आपको 1,34,900 रुपये खर्च करने पड़ेंगे. आज हम आपके लिए इसके कुछ ऐसे ऑल्टरनेटिव लेकर आए हैं, जो लगभग इतनी ही कीमत में ज्यादा वैल्यू फॉर मनी ऑफर करते हैं.
Samsung Galaxy S26 Ultra
सैमसंग का यह फोन iPhone 17 Pro और 17 Pro Max का सबसे बड़ा कंपीटिटर है. 17 Pro के लगभग समान कीमत वाले इस डिवाइस की मोटाई केवल 7.9mm है. इसका सबसे खास फीचर प्राइवेसी डिस्प्ले है, जो आजतक आईफोन समेत किसी भी दूसरे फोन में नहीं मिलता. इस फोन में 200MP का प्राइमरी कैमरा मिलता है, जो आईफोन को टक्कर देने वाला है. कंपनी इसे सात साल तक OS अपडेट देगी, जो इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट बनाता है.
Oppo Find X9 Ultra
Oppo ने Find X9 Ultra को कैमरा-फर्स्ट डिवाइस के तौर पर उतारा है. 17 Pro के मामले इसकी कीमत थोड़ी ज्यादा है, लेकिन फीचर्स के मामले में भी यह काफी दमदार है. इसमें 7,050mAh की सिलिकॉन-कार्बन बैटरी लगी है, जो 100W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है. यह 17 Pro की 40W लिमिट से कई गुना ज्यादा है. इसमें कुल 6 लेंसेस लगे हुए हैं, जिनमें 10x ऑप्टिकल टेलीफोटो और 200MP का मेन सेंसर शामिल है. इसके साथ प्रोफेशनल इमेजिंग एक्सेसरीज किट भी यूज की जा सकती है.
Xiaomi 17 Ultra
इसकी कीमत 17 Pro के लगभग बराबर है. इसके फीचर की बात करें तो इसमें जबरदस्त कैमरा सिस्टम लगा हुआ है. यह फोन Leica 200MP ऑप्टिकल जूम टेलीफोटो लेंस के साथ लॉन्च हुआ था. शाओमी ने इस फोन में 1/1.4 इंच के सेंसर यूज किए हैं, जिनकी मदद से यह बिना डिजिटल क्रॉपिंग के 200MP इमेज को कैप्चर कर लेता है. इस पर भी फोटोग्राफी किट को अटैच किया जा सकता है.
Vivo X300 Ultra
Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट और 6,600mAh की बैटरी वाला यह फोन iPhone 17 Pro को कड़ी टक्कर देता है. यह 4K 120fps वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे टास्क आसानी से हैंडल कर सकता है. दमदार सेंसर के साथ इसके कैमरा सेटअप में कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं, जो कम रोशनी और लॉन्ग डिस्टेंस से भी शानदार फोटो लेने में मदद करते हैं. Xiaomi 17 Ultra और Oppo Find X9 Ultra की तरह इसमें भी फोटोग्राफी किट लगाई जा सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Pro, वाली, कीमत, में, ही, ज्यादा, वैल्यू, फॉर, मनी, देते, हैं, ये, एंड्रॉयड, फोन, देखें, पूरी, लिस्ट</media:keywords>
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        <title>iPhone 16 पर डिस्काउंट की बारिश, यहां मिल रहा है 20,000 रुपये बचाने का मौका</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 16 Price Drop: ऐप्पल के सबसे पॉपुलर आईफोन में से एक iPhone 16 पर इस समय छूट बरस रही है. इसका फायदा उठाकर आप 20,000 रुपये की बचत कर सकते हैं. बता दें कि पिछले साल दुनियाभर में सबसे ज्यादा बिकने वाले इस आईफोन में कई शानदार फीचर मिलते हैं. आईफोन 17 लॉन्च होने के बाद भी इसकी बिक्री में कमी नहीं आई है और लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं. अगर आप भी शानदार लुक, दमदार फीचर और ऐप्पल एक्सपीरियंस के लिए आईफोन लेना चाहते हैं तो यह iPhone 16 एक बेहतरीन च्वॉइस बन सकती है. आइए एक नजर डालते हैं कि इस आईफोन में क्या-क्या फीचर्स हैं और इसे कितनी कीमत पर घर लाया जा सकता है.
iPhone 16 के स्पेसिफिकेशंस
2024 में लॉन्च हुए iPhone 16 में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले है, जो 60Hz रिफ्रेश रेट, HDR कंटेट सपोर्ट और 2,000 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. A18 प्रोसेसर वाला यह आईफोन मल्टीटास्किंग और ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स को आसानी से हैंडल कर लेता है. हाई परफॉर्मेंस के साथ-साथ यह प्रोसेसर एफिशिएंट और अपकमिंग सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए कंपेटिबल भी है. इसके रियर में 48MP+12MP का डुअल कैमरा सेटअप है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसके फ्रंट में 12MP का कैमरा है. बैटरी की बात करें तो फुल चार्जिंग पर यह आईफोन 22 घंटे का वीडियो प्लेबैक सपोर्ट करता है. यह आईफोन अपनी कम कीमत, शानदार फीचर्स और सॉफ्टवेयर सपोर्ट के कारण लोगों को पसंद आ रहा है.&amp;nbsp;
iPhone 16 पर कहां मिल रही है छूट?
भारत में इस आईफोन की शुरुआती कीमत 79,900 थी, लेकिन अब यह काफी सस्ता हो गया है. फ्लिपकार्ट पर यह फोन 16,000 रुपये की सीधी छूट के बाद 63,900 रुपये में लिस्टेड है. अगर आप यह आईफोन लेते हैं तो इतनी कीमत भी नहीं चुकानी पड़ेगी. 16,000 के फ्लैट डिस्काउंट के अलावा इस पर 4,000 रुपये के बैंक ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है. कुल 20,000 रुपये की छूट के बाद आप सिर्फ 59,900 रुपये देकर इस आईफोन को घर ला सकते हैं. इस कीमत पर यह एक जबरदस्त फोन बन जाता है.
Google Pixel 10 को भी सस्ते में खरीदने का मौका
अगर आप एंड्रॉयड फोन पर डिस्काउंट को इंतजार कर रहे हैं तो अमेजन पर एक शानदार ऑफर लाइव है. अमेजन से पिछले साल लॉन्च हुए गूगल पिक्सल 10 को भारी छूट के साथ खरीदा जा सकता है. भारत में यह फोन 79,999 रुपये में लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी अमेजन से सारे ऑफर मिलाने के बाद इसे 59,000 रुपये से भी कम में खरीद सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Amazon Prime Day 2026: 30,000 रुपये तक सस्ते मिलेंगे Galaxy S25 Ultra और iPhone 17 समेत ये फोन, आ रही है सबसे बड़ी सेल</title>
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        <description><![CDATA[ Amazon Prime Day 2026 Sale: अमेजन ने भारत में अपनी प्राइम डे सेल के 10वें एडिशन का ऐलान कर दिया है. केवल प्राइम मेंबर के लिए आने वाली यह सेल 4-6 जुलाई तक चलेगी. कंपनी ने बताया कि इस सेल में 100 से अधिक कंपनियों के 500 से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट मिलेगा और टेक्नोलॉजी पर खास फोकस रहेगा. अगर आप भी नया स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट आदि खरीदना चाहते हैं तो यह सेल आपके हजारों रुपये बचा सकती है. सेल के कुछ ऑफर लाइव हो चुके हैं और कुछ की झलक दिखाई गई है. इसकी टक्कर में फ्लिपकार्ट भी GOAT Sale लेकर आ रही है. इसमें भी सामान भारी छूट के साथ मिलेंगे.
Amazon Prime Day 2026 Sale में सस्ते मिलेंगे ये मोबाइल
Samsung Galaxy S25 Ultra- लगभग 1.30 लाख रुपये की शुरुआती कीमत वाले Samsung Galaxy S25 Ultra पर अमेजन प्राइम डे सेल में 30,000 रुपये से ज्यादा की बचत का मौका मिलेगा. अभी तक इसकी डिस्काउंटेड कीमत का ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन कंपनी ने कन्फर्म कर दिया है कि यह एक लाख रुपये से कम में लिस्टेड होगा.&amp;nbsp;
iPhone 17- अमेजन ने कन्फर्म किया है कि सेल में आईफोन 17 पर शानदार डिस्काउंट आएगा. अभी इसकी कीमत 82,900 रुपये है, लेकिन अमेजन सेल में इस पर भारी छूट मिल सकती है.
Redmi Turbo 5 पर 20,000 की छूट- अगर आप धांसू एंड्रॉयड फोन खरीदना चाहते हैं तो अमेजन प्राइम डे सेल में Redmi Turbo 5 पर 20,000 रुपये की छूट मिलेगी. अमेजन के सेल पेज पर डिस्काउंटेड प्राइस लाइव हो गया है. यह फोन कई धाकड़ फीचर्स से लैस है.
इन प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर भी मिलेगी छूट- अमेजन के मुताबिक, अपकमिंग सेल में OnePlus 13, OnePlus 15R, iPhone 17 Pro Max, iQOO 15 और Samsung Z Fold 7 जैसे प्रीमियम मोबाइल पर भी छूट मिलेगी. इसी तरह मिडरेंज और बजट सेगमेंट वाले फोन की कीमतें भी सस्ती होगी. यानी इस सेल मे सस्ते से लेकर महंगे से महंगे फोन के दाम धड़ाम होने वाले हैं. सेल शुरू होते ही इनके डिस्काउंटेड प्राइस लाइव हो जाएंगे.&amp;nbsp;
सेल शुरू होने से पहले ही मिल रहा बचत का मौका
अगर आपके पास प्राइम मेंबरशिप नहीं है तो अमेजन इसे सस्ते में ऑफर कर रही है. प्राइम मेंबरशिप प्लान की कीमत 1,499 रुपये है, लेकिन अभी डिस्काउंट के बाद यह 999 रुपये में मिल रही है. इसी तरह प्राइम लाइट प्लान की कीमत 799 से कम होकर 599 रुपये और प्राइम शॉपिंग एडिशन का प्लान 399 से कम होकर 299 रुपये में मिल रहा है.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Flipkart GOAT Sale 2026: वॉशिंग मशीन और पंखे&amp;कूलर समेत हर आइटम पर छूट ही छूट, इस सेल में मचेगा तहलका</title>
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        <description><![CDATA[ Flipkart GOAT Sale 2026: अगर आप कूलर-पंखे से लेकर वॉशिंग मशीन और स्मार्टफोन से लेकर घर का कोई भी दूसरा सामान खरीदना चाहते हैं तो कुछ दिन का इंतजार आपके हजारों रुपये बचा सकता है. दरअसल, फ्लिपकार्ट पर 4 जुलाई से GOAT Sale 2026 शुरू हो रही है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स अप्लायंसेस से लेकर स्मार्टफोन और घर के बाकी सामान भी भारी बचत के साथ खरीदने का मौका मिलेगा. यह सेल Plus और Black सब्सक्राइबर्स के लिए 24 घंटे पहले लाइव हो जाएगी. फ्लिपकार्ट की इस सेल के बराबर ही अमेजन की प्राइम डे सेल चलेगी. आइए जानते हैं कि फ्लिपकार्ट सेल में किन आइटम्स पर डिस्काउंट मिलेगा.
हर कैटेगरी के सामान पर छूट
फ्लिपकार्ट की GOAT सेल में हर कैटेगरी के सामान पर डिस्काउंट मिलेगा. फ्लिपकार्ट ने इस सेल को लेकर एक माइक्रोसाइट लाइव की है, जिससे पता चलता है कि सेल में आईफोन 17 समेत कई धाकड़ स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप, वॉशिंग मशीन, कूलर, ब्लूटूथ स्पीकर, बेड के गद्दे, फैशन, ब्यूटी प्रोडक्ट्स और फर्नीचर समेत कई आइटम्स पर भारी छूट मिलेगी. इतना ही नहीं, सेल के दौरान आप फ्लिपकार्ट से आप टू-व्हीलर की खरीद पर भी पैसे बचा सकते हैं. यानी फ्लिपकार्ट की यह सेल आपको सस्ते से लेकर महंगे तक हर प्रकार के सामान पर छूट पाने का मौका देगी.
कितना डिस्काउंट देगी फ्लिपकार्ट?
इस सेल के लिए फ्लिपकार्ट ने ICIC बैंक, BOBCARD और HSBC से साझेदारी की है. इसका मतलब है कि इन बैंकों के अकाउंट और कार्ड होल्डर को 10 प्रतिशत का इंस्टैंट डिस्काउंट मिलेगा. बाकी बैंक ऑफर्स और कैशबैक की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. सेल नजदीक आने पर इस बारे में और जानकारी सामने आ जाएगी. फ्लिपकार्ट ने अभी सस्ते मिलने वाले प्रोडक्ट्स की झलक दिखाई है, लेकिन ये नहीं बताया है कि इन पर कितना डिस्काउंट मिलेगा. सेल लाइव होने से पहले कुछ डील्स को रिवील किया जा सकता है और सेल लाइव होते ही सारे डिस्काउंट सामने आ जाएंगे.
अमेजन भी ला रही है प्राइम डे सेल
अमेजन पर भी प्राइम मेंबर्स के लिए 4 जुलाई से सेल शुरू हो रही है. 6 जुलाई तक चलने वाली इस सेल में सैमसंग गैलेक्सी एस25 अल्ट्रा और आईफोन 17 प्रो मैक्स जैसे प्रीमियम फोन पर 30,000 रुपये तक का डिस्काउंट मिलेगा. सेल लाइव होने से पहले कंपनी ने प्राइम मेंबरशिप भी सस्ती कर दी है और अब 1499 की जगह 999 रुपये में सब्सक्रिप्शन लिया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Flipkart, GOAT, Sale, 2026:, वॉशिंग, मशीन, और, पंखे-कूलर, समेत, हर, आइटम, पर, छूट, ही, छूट, इस, सेल, में, मचेगा, तहलका</media:keywords>
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        <title>आपका पैसा और डेटा बचा सकती है WhatsApp की यह वॉर्निंग, आ रहा है नया सेफ्टी फीचर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आपका-पैसा-और-डेटा-बचा-सकती-है-whatsapp-की-यह-वॉर्निंग-आ-रहा-है-नया-सेफ्टी-फीचर</link>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Safety Feature: व्हाट्सऐप के जरिए स्कैम के मामले बढ़ रहे हैं. स्कैमर अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाने को कोशिश करते हैं. इसे देखते हुए व्हाट्ऐस एक नया फीचर ला रही है, जो यूजर को अनजान लोगों से चैटिंग करने से पहले एक वॉर्निंग दिखाएगा. इससे उन्हें यह सोचने का समय मिल सकेगा कि वो जिस अनजान व्यक्ति से बात कर रहे हैं, वह कहीं स्कैमर तो नहीं है. आइए जानते हैं कि इस फीचर को लाने की जरूरत क्यों पड़ी और यह कैसे काम करेगा.&amp;nbsp;
क्यों पड़ी नए फीचर की जरूरत?
व्हाट्सऐप पर पहले से भी कई सेफ्टी फीचर्स मौजूद हैं, लेकिन वे सभी बातचीत शुरू होने के बाद काम में आने वाले हैं. इसलिए यह नया वॉर्निंग फीचर लाया जा रहा है, जो बातचीत शुरू होने से पहले ही यूजर को अलर्ट कर देगा. इससे यूजर किसी अनजान व्यक्ति से आए मैसेज का रिप्लाई करने से पहले अलर्ट हो जाएगा और स्कैम से फंसने से बच सकता है. यह बात भी ध्यान रखने वाली है कि यह फीचर पूरी तरह फुलप्रूफ नहीं है. इस वॉर्निंग को इग्नोर कर आगे बढ़ा जा सकता है और यह केवल अनजान नंबरों पर ही काम करेगा. इसका एक नुकसान यह भी है कि यह हर अनजान नंबर से बातचीत करते समय वॉर्निंग दिखाएगा और हर अनजान नंबर स्कैमर का होना जरूरी नहीं है. ऐसे में यह झंझट भी साबित हो सकता है.
कैसे काम करेगा नया फीचर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सऐप इस फीचर को एंड्रॉयड के साथ-साथ आईफोन यूजर्स के लिए रोल आउट कर रही है. फीचर अवेलेबल होने के बाद यूजर जैसे ही किसी अनजान नंबर के साथ चैटिंग शुरू करेगा, उसी वक्त उसकी स्क्रीन पर एक वॉर्निंग आ जाएगी. इसमें लिखा होगा कि आप जिस नंबर से चैटिंग करने जा रहे हैं, वह कहां रजिस्टर्ड है, क्या इस नंबर को कॉन्टैक्ट के तौर पर सेव किया गया है या क्या सामने वाला व्यक्ति आपके साथ किसी ग्रुप का मेंबर है. इसमें यूजर को कैंसिल और कंटिन्यू करने का ऑप्शन मिलेगा. यूजर अपनी मर्जी से इसे कंटिन्यू कर सकता है और वह चाहे तो चैटिंग कैंसिल भी कर सकता है. कैंसिल करने पर सामने वाले यूजर के पास इसकी कोई नोटिफिकेशन नहीं जाएगी.
व्हाट्सऐप पर पहले से मौजूद हैं ये सेफ्टी फीचर
व्हाट्सऐप पर यूजर्स के लिए पहले से कई सेफ्टी फीचर्स मौजूद हैं. इनमें साइलेंस अननोन कॉल्स, डिवाइस लिंकिंग अलर्ट, स्क्रीन शेयर वॉर्निंग, टू-स्टेप वेरिफिकेशन और कॉन्टैक्स्ट कार्ड आदि शामिल हैं.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>फोन और ऐप्स में दिखने वाला Military&amp;Grade Encryption क्या होता है? जानकर उड़ जाएंगे होश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-और-ऐप्स-में-दिखने-वाला-military-grade-encryption-क्या-होता-है-जानकर-उड़-जाएंगे-होश</link>
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        <description><![CDATA[ Military-Grade Encryption: डेटा प्राइवेसी आज के समय में लोगों की जरूरत बन चुकी है. लोग अपने डेटा को ज्यादा महत्व देने लगे हैं क्योंकि आज के समय में जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार होता है. साइबर फ्रॉड भी काफी तेजी से बढ़ रहा है जिससे लोगों को अपनी जानकारी को सुरक्षित रखना काफी मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में अक्सर देखा गया है कि क्लाउड स्टोरेज, मैसेजिंग ऐप्स और कई ऑनलाइन सर्विसेज Military-Grade Encryption की बात करती हैं. आइए जानते हैं कि आखिर ये है क्या और कैसे काम करता है.
क्या है Military-Grade Encryption?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षित सिस्टम को कहा जाता है. इसका इस्तेमाल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है. हालांकि, अब इस टर्म को मार्केट में काफी इस्तेमाल किया जाता है. कई बार कई लोगों को लगता है कि Military-Grade Encryption है तो इसका मतलब है कि इसका इस्तेमाल आर्मी में किया जाता है. लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. बस इसे कई लोग मार्केटिंग स्ट्रेटजी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.
हालांकि, ये बाकी एनक्रिप्शन सिस्टम से थोड़ा एडवांस जरूर होता है जो आपके डेटा को एक्सट्रा कवरेज उपलब्ध कराता है और डेटा लीक जैसी समस्याओं से सुरक्षित रखता है.
कैसे काम करता है ये सिस्टम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये एनक्रिप्शन सिस्टम किसी भी जानकारी को ऐसे कोड में बदल देता है जिसे बिना डिक्रिप्ट किए हुए नहीं पढ़ा जा सकता है. ये डेटा को कई छोटे-छोटे हिस्सों में करकर ऐसे कोड में बदल देता है जिसे कोई भी हैकर हैक न कर सके और आपकी जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित रहे. वहीं, अगर कोई आपके डेटा को हासिल भी कर लेता है तो भी वह उसका कहीं भी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा क्योंकि उसे डिकोड करना काफी ज्यादा मुश्किल होता है.
क्या इस सिस्टम को हैक किया जा सकता है
जानकारी के मुताबिक, अभी तक इस सिस्टम को कोई भी हैक नहीं कर पाया है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे बेहद मजबूत एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी मानते हैं. ये सिस्टम इनता मजबूत और एडवांस है इस बात का अंदाजा आप इससे भी लगा सकते हैं कि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सिस्टम को भविष्य में आने वाले क्वांटम कंप्यूटर भी नहीं तोड़ सकेंगे.
हालांकि, किसी सिस्टम की सुरक्षा केवल एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म पर निर्भर नहीं करती. अगर पासवर्ड कमजोर हो, सर्वर में कोई कमी हो या फिर किसी अन्य स्तर पर सुरक्षा कमजोर हो तो आपका डेटा खतरे में पड़ सकता है.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फोन, और, ऐप्स, में, दिखने, वाला, Military-Grade, Encryption, क्या, होता, है, जानकर, उड़, जाएंगे, होश</media:keywords>
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        <title>सोलर पैनल छत पर लगाएं या जमीन पर? जानिए कौन&amp;सा विकल्प देगा ज्यादा बिजली और बचत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोलर-पैनल-छत-पर-लगाएं-या-जमीन-पर-जानिए-कौन-सा-विकल्प-देगा-ज्यादा-बिजली-और-बचत</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/सोलर-पैनल-छत-पर-लगाएं-या-जमीन-पर-जानिए-कौन-सा-विकल्प-देगा-ज्यादा-बिजली-और-बचत</guid>
        <description><![CDATA[ Rooftop Vs Ground-Mounted Solar: सोलर पैनल लगाते समय कई लोग आसानी से यह डिसाइड नहीं कर पाते कि इन्हें छत पर लगाना चाहिए या जमीन पर. दोनों ही जगह लगे पैनल का काम और काम करने का तरीका एक जैसा होगा, लेकिन परफॉर्मेंस से लेकर लागत तक कई चीजों में अंतर देखने को मिलता है. आज हम आपके लिए एक आसान कंपेरिजन लेकर आए हैं, जिससे आपको यह यह फैसला लेने में आसानी होगी कि छत पर सोलर पैनल लगाने चाहिए या जमीन पर.&amp;nbsp;
Rooftop और Ground-Mounted Solar का क्या मतलब?
Rooftop solar system घरों, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल बिल्डिंगों की छत पर लगाए जाते हैं. ये उन जगहों के लिए सही रहते हैं जहां पर खुली जगह कम होती है, लेकिन छतों पर पर्याप्त स्पेस होता है. इसलिए शहरी घरों और ऑफिसेस आदि के ऊपर आमतौर पर सोलर पैनल देखने को मिल जाते हैं. अगर Ground-Mounted Solar की बात करें तो जैसा नाम से जाहिर है, इन्हें जमीन पर माउंट किया जाता है. ये खेतों, इंडस्ट्रियल जोन और बड़े मैदानों वाले इंस्टीट्यूट आदि के लिए सही च्वॉइस होते हैं.
क्या है दोनों में अंतर?
फ्लेक्सिबिलिटी- ग्राउंड-माउंटेड पैनल ज्यादा फ्लेक्सिबल होते हैं. इन्हें मैक्सिमम सनलाइट के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है. वहीं छत पर लगने वाले पैनल की कुछ लिमिटेशन होती हैं. लिमिटेड स्पेस के कारण डायरेक्शन और साइज के मामले में फ्लेक्सिबिलिटी नहीं ली जा सकती.
मेंटिनेंस- छत पर लगे सोलर पैनल को ऊंचाई के कारण साफ करना मुश्किल होता है. जमीन पर लगे पैनल में ऐसी दिक्कत नहीं आती और इन्हें ज्यादा मशक्कत के बिना भी साफ किया जा सकता है.
स्केबिलिटी- अगर स्केलिबिलिटी की बात करें तो छत पर लगे सोलर एनर्जी सिस्टम को एक्सपैंड करना मुश्किल होता है. जगह की कमी के कारण इसमें नए पैनल नहीं जोड़े जा सकते. जमीन पर ऐसी कोई दिक्कत नहीं आती और जरूरत पड़ने पर कभी भी नए पैनल लगाए जा सकते हैं.
कौन-सा सेटअप देगा ज्यादा बिजली और किसकी लागत कम?
एनर्जी प्रोडक्शन की बात करें तो जमीन पर लगे पैनल ज्यादा एफिशिएंट होते हैं. स्पेस अवेलेबल होने के कारण इन्हें सनलाइट के हिसाब से ऑप्टिमाइज किया जा सकता है. वहीं छत पर लगे पैनल के साथ यह ऑप्शन नहीं है. इन्हें छत के ऑरिएंटेशन के हिसाब से सेट किया जाता है. इसलिए एनर्जी प्रोडक्शन में जमीन पर लगे पैनल बाजी मार जाते हैं. वहीं लागत के मामले में छत पर लगे पैनल सस्ते पड़ते हैं. छत पर पैनल इंस्टॉल करने की लागत कम है. जमीन पर पैनल लगाने के लिए पहले उस जगह को तैयार करना पड़ता है, जिसमें काफी खर्च आता है.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोलर, पैनल, छत, पर, लगाएं, या, जमीन, पर, जानिए, कौन-सा, विकल्प, देगा, ज्यादा, बिजली, और, बचत</media:keywords>
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        <title>आप भी चलाते हैं Instagram! जानिए Reels या Posts में से कहां मिलती है सबसे ज्यादा Reach, सामने आया डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Reels Vs Posts: इंस्टाग्राम ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है जहां युवा सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं. रील्स स्क्रॉल करने से लेकर स्टोरी पोस्ट करने तक, लोग इस प्लेटफॉर्म पर काफी एक्टिव रहते हैं. इतना ही नहीं, कई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स इस प्लेटफॉर्म से हर महीने मोटी कमाई भी कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंस्टाग्राम पर पोस्ट या रील्स में से कहां मिलती है सबसे ज्यादा रीच. हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है जहां ये पता लग रहा है कि पोस्ट या रील्स में से कहां पर लोगों को सबसे ज्यादा रीच मिल रही है.
क्या Photo Posts हो गए पुराने?
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. इंस्टाग्राम Reels जरूर काफी फेमश हो चुके हैं. लेकिन फोटो आज भी प्लेटफॉर्ट के एलगोरिथम का एक अहम हिस्सा है. खासतौर पर Carousel Posts आज कल काफी ज्यादा अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि आज कल लोग ऐसे फोटो पर ज्यादा समय बिता रहे हैं. इससे प्लेटफॉर्म पर ऐसी फोटोज के शेयर और सेव होने की संभावना ज्यादा हो जाती है.
ओरिजनल कंटेंट की ज्यादा डिमांड
अब कॉपी पेस्ट या फिर एआई से बने कंटेंट को कंपनी ने बढ़ाना बंद कर दिया है. अब फ्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा ओरिजनल कंटेंट को प्रमोट करना चाहती है. इसीलिए कई बार ऐसा देखा गया है कि कॉपी-पेस्ट या फिर रिपोस्ट की कई पोस्ट से कई गुना ज्यादा रीच ओरिजनल कंटेंट की होती है. इसीलिए कंपनी अब चरणबद्ध तरीके से ओरिजनल कंटेंट को बढ़ावा दे रही है.
Reels का है दबदबा
इंस्टाग्राम रील्स आज शॉर्ट वीडियो फॉर्मेट में सबसे आगे है. लोग रील्स बनाने से लेकर रील्स स्क्रॉल करने तक में सबसे ज्यादा इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते हैं. अब ऐसे में अगर आप नए फॉलोअर्स तक अपनी रीच बढ़ाना चाहते हैं तो इंस्टाग्राम रील एक बेहतरीन ऑप्शन है. ऐसा इसलिए है क्योंकि Instagram का एल्गोरिदम Reels को सबसे ज्यादा उन लोगों तक पहुंचाते हैं तो पहले से ही आपको फॉलोअर्स नहीं हैं.
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, कम फॉलोअर्स वाले अकाउंट्स पर Reels की Reach नॉर्मली फोटो पोस्ट के मुकाबले में दो से तीन गुना तक ज्यादा देखी गई है. इसी वजह से नए इंस्टाग्राम अकाउंट होल्डर्स तेजी से अपनी रीच बढ़ाने के लिए इंस्टाग्राम रील्स का ही इस्तेमाल करते हैं.
Engagement के मामले में कौन आगे?
आपको बता दें कि अगर Engagement की बात करें तो इंस्टाग्राम पर Carousels काफी ज्यादा तेजी से वायरल हो रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ अगर आप रीच की बात करेंगे तो आज भी इंस्टाग्राम रील्स ही इस रेस में सबसे आगे है. प्लेटफॉर्स पर जब भी यूजर्स किसी पोस्ट को सेव करते हैं, कमेंट करते हैं या फिर कई स्लाइड्स को स्वाइप करके देखते हैं तो Instagram ऐसे कंटेंट को ज्यादा महत्व देता है. इसी वजह से कई अकाउंट्स पर Carousel Posts का Engagement Rate Reels से कई गुना ज्यादा देखने को मिल जाता है.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 15&amp;16 यूजर्स की लगी लॉटरी! Apple लौटाएगी पैसे, कहीं आपका नाम भी तो नहीं?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी iPhone इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए है. दरहसल, कई ऐसे मामले सामने आये हैं जहां Apple यूजर्स को पैसे वापस कर रही है. यह मामला Siri वॉयस असिस्टेंट और यूजर्स की प्राइवेसी से जुड़ी शिकायतों से संबंधित बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार अगर आपके पास भी iPhone 15 या iPhone 16 मॉडल है तो कंपनी आपको भी पैसे वापस करेगी. आइए जानते हैं कि आपको भी पैसे मिलेंगे या नहीं.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple पर आरोप लगाया गया था कि Siri कभी-कभी गलती से एक्टिव हो जाती थी और यूजर्स की बातचीत रिकॉर्ड करने लगती है जिससे लोगों की प्राइवेसी पर सवाल उठ रहे थे. इसी मुद्दे को लेकर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई है. मामला बढ़ता देख Apple ने सेटलमेंट का रुख अपनाया है और लोगों को रिफंड देने पर सहमति जताई है. हालांकि Apple ने यह बिल्कुल भी नहीं मना है उसने कोई गलत काम किया है लेकिन बस मामला ज्यादा लंबा न चले इसीलिए उसने सेटलमेंट का रास्ता अपनाया है.&amp;nbsp;
किन यूजर्स को मिल सकता है पैसा?
जानकारी के अनुसार, रिफंड का फायदा केवल उन लोगों को मिल सकता है जो सेटलमेंट की शर्तों को पूरा करते हों. इसमें सिर्फ वे यूजर्स शामिल होते हैं जिन्होंने Apple डिवाइस का इस्तेमाल किया हो या फिर उसे समय के दौरान Siri से होने वाली समस्या का सामना किया हो. यह जरूरी नहीं है कि हर iPhone 15 या iPhone 16 यूजर को अपने आप पैसा मिल जाए. पैसा सिर्फ उन लोगों को दिया जाएगा जो शर्तों को मानते होंगे या फिर रिफंड के पात्र होंगे.
कितना मिलेगा रिफंड
बताते चलें की रिफंड इस बात पर निर्भर करेगा कि कुल कितने लोग दावा करते हैं और सेटलमेंट फंड कितना बड़ा है. कुछ मामलों में प्रति डिवाइस निश्चित रकम दी जाती है जबकि आखिरी पेमेंट जो पात्र होंगे उनकी संख्या के हिसाब से होता है. यानी सभी लोगों को एक समान रकम मिले, यह जरूरी नहीं है.
कैसे क्लेम करें रिफंड
अगर कोई यूजर सेटलमेंट की सभी शर्तों को पूरा करता है तो उसे सभी प्रोसेस के तहत क्लेम फॉर्म भरना पड़ सकता है. इसके लिए आमतौर पर ईमेल, रजिस्टर्ड नोटिस या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से जानकारी दी जाती है. बता दें कि क्लेम करते समय डिवाइस की जानकारी या अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं इसलिए यूजर्स को अपने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने पड़ेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>New WhatsApp Subscription Plan: व्हाट्सएप पर भी आ गया है सब्सक्रिप्शन का ऑप्शन, जानिए क्या&amp;क्या मिल रहे हैं फीचर्स?</title>
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        <description><![CDATA[ New WhatsApp Subscription Plan: अब तक व्हाट्सएप की पहचान ऐसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के रूप में हो रही है, जिसे इस्तेमाल करने के लिए किसी तरह की फीस नहीं देनी पड़ती है. कॉलिंग, चैटिंग, स्टेटस और फाइल शेयरिंग जैसे सभी फीचर्स फ्री में मिलते हैं. हालांकि, अब मेटा ने उन यूजर्स के लिए नया ऑप्शन पेश किया है, जो व्हाट्सएप को ज्यादा पर्सनल और अलग अंदाज में इस्तेमाल करना चाहते हैं. कंपनी ने भारत में एंड्रॉयड और आईओएस यूजर्स के लिए व्हाट्सएप प्लस का नया सब्सक्रिप्शन प्लान रोल आउट करना शुरू कर दिया है. यह व्हाट्सएप का पहला ऑफिशियल पेड प्लान है, जिसमें यूजर्स को कई एक्सक्लूसिव कस्टमाइजेशन फीचर्स दिए जा रहे हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि व्हाट्सएप पर भी सब्सक्रिप्शन का ऑप्शन आ गया है तो अब इसमें क्या-क्या फीचर्स मिल रहे हैं.&amp;nbsp;
कितने का है व्हाट्सएप प्लस का सब्सक्रिप्शन?
भारत में व्हाट्सएप प्लस का सब्सक्रिप्शन 79 रुपये प्रतिमाह रखी गई है, हालांकि नए यूजर्स को शुरुआत में एक महीने का फ्री ट्रायल भी दिया जा रहा है. यानी यूजर्स पहले इस सर्विस को इस्तेमाल करके देख सकते हैं और उसके बाद सब्सक्रिप्शन जारी रखने का फैसला कर सकते हैं. यह प्लान पूरी तरह ऑप्शनल है, जो लोग इसे नहीं लेना चाहते, वे पहले की तरह व्हाट्सएप के सभी बेसिक फीचर फ्री में इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या है व्हाट्सएप प्लस?
व्हाट्सएप प्लस को एक तरह का कस्टमाइजेशन पैक कहा जा सकता है. यह प्लान ऐप के मूल फीचर्स में कोई बदलाव नहीं करता, बल्कि व्हाट्सएप को ज्यादा पर्सनल बनाने के लिए एक्स्ट्रा ऑप्शन देता है. इसमें यूजर्स को ऐप का लुक बदलने, नए आइकन इस्तेमाल करने, एक्स्ट्रा चैट पिन करने और एक्सक्लूसिव रिंगटोन स्टिकर का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है.&amp;nbsp;
मिलेंगे नए कलर थीम्स और ऐप आइकन&amp;nbsp;
व्हाट्सएप प्लस के तहत यूजर्स को 18 नए कलर थीम्स दिए गए हैं. इनमें वाइब्रेट ब्लू, रॉयल पर्पल, फॉरेस्ट ग्रीन, फ्यूशिया पिंक, डीप नेवी, टील, बरगंडी और गोल्डन येलो जैसे कई रंग शामिल है. इसके अलावा व्हाट्सएप के डिफॉल्ट आइकन को बदलने का ऑप्शन भी मिलेगा. यूजर्स 14 अलग-अलग डिजाइन वाले ऐप आइकन में से अपनी पसंद का आइकन चुन सकते हैं. इनमें कुछ डिजाइन मिनिमल स्टाइल के है, तो कुछ ज्यादा क्रिएटिव और आर्टिस्टिक लुक वाले हैं.&amp;nbsp;
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अब 20 चैट्स तक कर सकेंगे पिन&amp;nbsp;
व्हाट्सएप प्लस का एक बड़ा फीचर चैट पिनिंग लिमिट को बढ़ाना भी है. सामान्य व्हाट्सएप में सीमित चैट्स को ही ऊपर पिन किया जा सकता है, लेकिन प्लस सब्सक्रिप्शन लेने वाले यूजर्स 20 तक जरूरी चैट्स को अपनी चैट लिस्ट में सबसे ऊपर रख सकते हैं. यह फीचर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो काम या पर्सनल कारण से कई जरूरी चैट्स को हमेशा आसानी से एक्सेस करना चाहते हैं. इसके अलावा सब्सक्राइबर्स को 10 स्पेशल रिंगटोंस भी मिलती है. इनमें फ्लटर, रिप्पल, मीडो, कार्निवल, टेंपो, बबल और क्वेस्ट जैसे ऑप्शन शामिल है. इसके अलावा कुछ प्रीमियम स्टिकर पैक्स भी दिए गए हैं, जो सामान्य यूजर्स को उपलब्ध नहीं होंगे. इन स्टिकर के जरिए यूजर अपने चैटिंग एक्सपीरियंस को ज्यादा एक्साइटेड बना सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>GTA 6 का इंतजार पड़ सकता है भारी! बस एक क्लिक में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, जानें बचने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ GTA VI Cyber Fraud: गेमिंग लवर्स काफी समय से जीटीए 6 का इंतजार कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक, जल्द ही ये गेम लॉन्च होने वाला है. लेकिन इसी बीच साइबर ठग भी एक्टिव हो चुके हैं. बता दें कि देश में साइबर ठगी के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. अब ठगों ने गेमर्स को भी निशाना बना लिया है.
दरअसल, सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ठग अब GTA VI के फर्जी बीटा इनवाइट और नकली वेबसाइटों के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. आइए जानते हैं कैसे क्या है पूरा मामला.
कैसे हो रहा ये स्कैम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ठग अब नए-नए तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं. यह भी उन्हीं में से एक तरीका है. दरअसल, ठग गेमर्स को ईमेल या मैसेज करते हैं जिसमें लिखा होता है कि उन्हें GTA VI का अर्ली एक्सेस दिया जा रहा है. यानी कि वह गेम के लॉन्च होने से पहले ही गेम को खेल या ट्राई कर सकते हैं.
इतना ही नहीं, ठग गेमर्स को मैसेज के साथ एक लिंक भी भेजते हैं तो गेमर्स को किसी वेबसाइट पर ले जाता है. अब यहीं पर सतर्क रहना है. दरअसल, लिंक से जिस वेबसाइट पर लोगों को ले जाया जाता है वह बिलकुल असली जैसी लगती है इसीलिए कई बार लोग बिना सोचे समझें आगे बढ़ते जाते हैं और ठगी का शिकार बन जाते हैं.
बता दें कि जब यूजर वेबसाइट पर पहुंचता है तो उससे कई तरह की निजी जानकारियां मांगी जा सकती हैं जैसे नाम, पता, जन्मतिथि, गेमिंग अकाउंट और कई बार बैंकिंग डिटेल्स. अब जैसे ही कोई भी यूजर ये सब जानकारी वेबसाइट पर शेयर करता है वैसे ही उसकी सारी जानकारी ठगों तक पहुंच जाती है और आगे ठगी की संभावना और बढ़ जाती है.
सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?
साइबर ठगी से बचने के लिए आपको कई सारी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है. सबसे जरूरी बात ये है कि Rockstar Games ने अब तक किसी सार्वजनिक GTA VI बीटा प्रोग्राम की घोषणा नहीं की है. इसलिए अगर कोई वेबसाइट या ईमेल ऐसा दावा करते हैं तो समझ जाइए कि वह फेक है.

हमेशा जानकारी को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही चेक करें.
अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी वेबसाइट पर अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें.
अगर आपने गलती से किसी अनजान साइट पर अपना गेमिंग पासवर्ड फिल किया हुआ है तो तुरंत जाकर उसे बदल दें.
इसके अलावा अगर आपने कहीं भी अपनी बैंकिंग डिटेल्स शेयर की हैं तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और अपने अकाउंट पर नजर रखें.

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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Data Transfer One Phone to Another: पुराने मोबाइल से नए फोन में कैसे ट्रांसफर करें डेटा? यहां जानें स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस</title>
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        <description><![CDATA[ Data Transfer One Phone to Another: एक फोन की स्टोरेज फुल हो जाने से हर कामकाजी आदमी को परेशानी होने लगती है. ऐसे में नया फोन खरीदने में नहीं, बल्कि परेशानी इस बात की होती है कि उनके पुराने फोन में जो जरूरी फोटोग्राफ्स हैं, कॉन्टैक्ट्स हैं, मैसेज हैं और जरूरी डेटा है, उसे वे नए फोन में कैसे ट्रांसफर करें. इसकी जानकारी हर किसी को नहीं होती, इसलिए बहुत से लोग दोनों फोन लेकर चलते हैं.
ऐसे में आपको बता दें कि आज के स्मार्टफोन्स नए-नए फीचर्स के साथ आते रहते हैं. उसी तरह आज के स्मार्टफोन्स में डेटा को एक फोन से दूसरे फोन में ट्रांसफर करना बहुत आसान बना दिया गया है. इसके लिए जरूरी है तो बस आपके दोनों फोन का 50% से ऊपर तक चार्ज होना, क्योंकि ट्रांसफर करने में समय भी लगता है और वाई-फाई भी चलता है, जिसके कारण फोन की बैटरी खत्म हो जाती है. वहीं ट्रांसफर के दौरान अगर बीच में रुकावट आती है तो शायद ट्रांसफर करने में दिक्कत हो सकती है.&amp;nbsp;
Android से Android फोन में डेटा कैसे भेजें?
अगर आप एक Android को दूसरे Android फोन से बदल रहे हैं तो इसमें डेटा ट्रांसफर करना बेहद आसान होता है. नया फोन ऑन करते ही सेटअप के दौरान आपसे पूछा जाएगा कि क्या आप पुराने डिवाइस से डेटा कॉपी करना चाहते हैं. ऐसे में आपको यहां Yes का ऑप्शन चुनना है और अपने Google अकाउंट से साइन इन करना है.&amp;nbsp; इसके बाद दोनों फोन पर एक QR कोड दिखेगा, जिसे स्कैन करते ही दोनों डिवाइस आपस में जुड़ जाएंगे. फिर आपको चुनना होगा कि कॉन्टैक्ट्स, फोटो, मैसेज, ऐप्स में से क्या-क्या ट्रांसफर करना है. यह प्रोसेस पूरा होने में कम से कम 30 मिनट से लेकर घंटों तक समय लग सकता है, इसलिए जरूरी है कि दोनों फोन को अच्छी तरह चार्ज रखें और पास-पास रखें, वरना आपके डेटा ट्रांसफर में रुकावटें आ सकती हैं.&amp;nbsp;
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Android से iPhone या iPhone से Android में ट्रांसफर करना
अगर आप अपने फोन की वैरायटी ही बदल रहे हैं, मतलब आप Android से iPhone या iPhone से Android जा रहे हैं, तो इसमें भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. इस दौरान भी डेटा ट्रांसफर बहुत आसानी से हो जाता है. Android से iPhone में जाने के लिए Apple का खास ऐप Move to iOS काम करता है. इसे पुराने Android फोन में डाउनलोड करें, फिर नए iPhone पर दिखने वाला कोड एंटर करें इसके बाद डिवाइस एक टेम्परेरी वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ जाएंगे. इसके बाद कॉन्टैक्ट्स, मैसेज, फोटो जैसी चीजें अपने आप ट्रांसफर हो जाएंगी. वहीं iPhone से Android में जाने के लिए नए Android फोन के सेटअप में Copy from iPhone ऑप्शन चुनें और दोनों फोन को केबल या वाई-फाई से कनेक्ट कर लें.&amp;nbsp;
ट्रांसफर करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अक्सर लोगों को एक गलतफहमी रहती है कि फोन में डेटा ट्रांसफर करने का मतलब होता है कि आपके WhatsApp के मैसेज और डॉक्यूमेंट भी ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और है.&amp;nbsp; WhatsApp चैट्स और डॉक्यूमेंट्स को ट्रांसफर करने के लिए अक्सर अलग से QR कोड को स्कैन करना पड़ता है. साथ ही म्यूजिक, PDF और कुछ खास नोट्स भी कई बार अपने आप ट्रांसफर नहीं होते, इन्हें Google Drive या Dropbox जैसी क्लाउड सर्विस से मैन्युअली डाउनलोड करना होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>चलते&amp;चलते हैंग क्यों हो जाता है फोन, क्या हो सकते हैं कारण और कैसे करें समाधान?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Phone Hangs: फोन हैंग होने की समस्या से ज्यादातर यूजर दो-चार होते हैं. अगर फोन पुराना है तो यह समस्या ज्यादा आती है. हैंग होने पर फोन पूरी तरह काम करना बंद कर देता है. इस दौरान न तो कॉल की जा सकती है और न ही कोई ऐप यूज की जा सकती है. अगर किसी इमरजेसी स्थिति में फोन हैंग हो जाए तो मुश्किल और बढ़ जाती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि फोन हैंग होने के पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं और कैसे इस इन दिक्कतों को फिक्स किया जा सकता है.
ये हैं फोन हैंग होने के कॉमन कारण
स्टोरेज फुल होना- अगर स्टोरेज फुल हो गई है तो फोन के लिए नए डेटा को हैंडल और ऐप्स को रन करना काफी मुश्किल हो जाता है. पर्याप्त स्टोरेज न होने के कारण फोन का सिस्टम बेसिक टास्क भी नहीं कर पाता. ऐसी स्थिति में पहले फोन की स्पीड स्लो होती है और कई टास्क के दौरान यह हैंग भी हो सकता है. इस दिक्कत से बचने के लिए फोन की स्टोरेज को खाली रखना जरूरी है. इसके लिए डुप्लीकेट फाइल्स, गैर-जरूरी फोटो-वीडियो और अनयूज्ड ऐप्स को डिलीट कर दें. इससे स्पेस खाली होगा और यह फोन की स्पीड भी बढ़ा देगा.
बैकग्राउंड एक्टिविटी का ओवरलोड- कई ऐप्स यूज के बाद बंद करने पर भी पूरी तरह बंद नहीं होतीं. ये लगातार बैकग्राउंड में एक्टिव रहती हैं और बैटरी के साथ फोन की रैम को भी यूज करती है. अगर बैकग्राउंड में एक साथ कई ऐप्स की एक्टिविटीज चल रही हैं तो प्रोसेसर पर लोड बढ़ जाता है. इस दौरान अगर आप फोन में मल्टी-टास्किंग या किसी बड़ी ऐप को ओपन करते हैं तो सिस्टम उसे प्रोसेस करने में स्ट्रगल करने लगता है. कई बार फोन के हैंग होने के पीछे यह कारण भी हो सकता है. इससे बचाव के लिए सेटिंग में जाकर ऐप्स की बैकग्राउंड एक्टिविटीज को लिमिट कर दें.
हार्डवेयर प्रॉब्लम- पुराने फोन में बैटरी, स्क्रीन और दूसरे कंपोनेंट खराब होने लगते हैं, जिससे फोन के ऑपरेशन पर असर पड़ता है. अगर बैटरी कमजोर हो गई है तो यह स्टेबल पावर सप्लाई नहीं कर पाएगी. इसी तरह गिरने या नमी आदि जाने के कारण इंटरनल वायरिंग और कनेक्शन भी डिस्टर्ब हो सकते हैं, जो फोन के फंक्शन को स्लो कर देते हैं. कुछ मामलों में रिपेयर कर इन दिक्कतों को फिक्स किया जा सकता है, लेकिन अगर फोन कई साल पुराना है तो उसे रिप्लेस कर लेना बेहतर ऑप्शन रहेगा.
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन की बैटरी का दुश्मन कहीं आपका चार्जर तो नहीं? ऐसे 1 मिनट में लगा सकते हैं पता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/फोन-की-बैटरी-का-दुश्मन-कहीं-आपका-चार्जर-तो-नहीं-ऐसे-1-मिनट-में-लगा-सकते-हैं-पता</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: स्मार्टफोन इस आधुनिक दुनिया में लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. खासतौर पर युवाओं में स्मार्टफोन का क्रेज काफी देखा जाता है. उन्हें इस डिवाइस को अपने सभी कामों में इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद आता है. लेकिन कई बार स्मार्टफोन की बैटरी लोगों को अक्सर परेशान करती है. ज्यादातर फोन डिस्चार्ज होने पर लोग तुरंत अपने चार्जर से फोन को चार्ज करने लगते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके फोन का चार्जर ही बैटरी को खराब कर रहा है. आइए जानते हैं क्या है पूरी सच्चाई.
चार्जर से कैसे खराब हो जाती है फोन की बैटरी
दरअसल, फोन की बैटरी जब चार्ज होती है तो उसमें एक केमिकल रिएक्शन होता है. वहीं, बैटरी को सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए एक समान वोल्टेज और बिजली की जरूरत होती है. अब अगर आपके फोन का चार्जर ज्यादा या कम बिजली खींच रहा है तो इससे सीधे आपके फोन की बैटरी पर असर पड़ता है. लंबे समय तक ऐसा होने पर स्मार्टफोन की बैटरी बुरी तरह से खराब हो सकती है.
कई बार लोगों के फोन का असली चार्जर खो जाता है तो उसकी जगह पर लोग लोकल चार्जर खरीद लेते हैं तो डिवाइस की बैटरी को जाने-अनजाने में ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोकर चार्जर सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखते हैं.
कैसे लगाएं पता
अब अगर आपको शक है कि आपका चार्जर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो आप भी कुछ आसान तरीकों से इसका पता लगा सकते हैं.
चार्जिंग के दौरान फोन ज्यादा गर्म होना
अगर आपका फोन चार्जिंग के दौरान जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है तो ये संकेत है कि चार्जर खराब हो रहा है.
बैटरी बहुत धीरे या बहुत तेजी से चार्ज होना
अगर पहले के मुकाबले फोन की बैटरी जरूरत से तेज या फिर जरुरत से धीरे चार्ज हो रही है तो आपको अपने चार्जर की तुरंत जांच करवानी चाहिए.
चार्जिंग का बार-बार रुकना
स्मार्टफोन के चार्जिंग के दौरान अगर बार-बार कनेक्शन टूट रहा है या फिर फोन बार-बार चार्जिंग ऑन या ऑफ कर रहा है तो समझ जाइए कि चार्जर खराब हो चुका है.
चार्जर का जरूरत से ज्यादा गर्म होना
अगर फोन चार्जिग के दौरान चार्जर जरुरत से ज्यादा गर्म हो रहा है तो बिलकुल भी इसे नजरअंदाज न करें. क्योंकि ऐसी स्थिति में कई बार चार्जर ब्लास्ट हो जाते हैं.
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Internet Problem in Train: ट्रेन में क्यों नहीं आते हैं मोबाइल नेटवर्क, किस वजह से आती है ये दिक्कत?</title>
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        <description><![CDATA[ Internet Problem in Train: ट्रेन में सफर करना भले ही कितना भी मजेदार हो, लेकिन एक चीज है जो हर यात्री को परेशान करती है, वह है मोबाइल नेटवर्क का गायब हो जाना. चाहे आप किसी से जरूरी बात कर रहे हों या वीडियो देख रहे हों. ट्रेन में सिग्नल अचानक चला जाता है या इंटरनेट की स्पीड बहुत धीमी हो जाती है.&amp;nbsp; बहुत से लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ उनके फोन या सिम कार्ड की कमी है, लेकिन असल में इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक और तकनीकी वजह हैं.&amp;nbsp; आइए जानते हैं कि ट्रेन में नेटवर्क की यह दिक्कत आखिर क्यों आती है?&amp;nbsp;
ट्रेन का मेटल बॉडी बनता है दिक्कत की पहली वजह
ट्रेन में नेटवर्क की समस्या का सबसे बड़ा कारण है ट्रेन के डिब्बे की बनावट. जी हां, आजकल ट्रेन के डिब्बे मेटल यानी धातु से बने होते हैं, और यह पूरा डिब्बा एक तरह का धातु का डिब्बा बन जाता है, जिसे विज्ञान की भाषा में फैराडे केज कहा जाता है.&amp;nbsp; यह असल में एक मेटल बॉक्स की तरह काम करता है, जो मोबाइल सिग्नल जैसी माइक्रोवेव वेवस को बाहर ही रोक देता है.&amp;nbsp; मजेदार बात यह है कि सिर्फ डिब्बे की दीवारें ही नहीं, बल्कि खिड़कियों के शीशों पर भी एक बहुत पतली धातु की परत लगाई जाती है, जो गर्मी और ठंड से बचाने में मदद करती है, लेकिन इसी वजह से मोबाइल सिग्नल भी अंदर आने से रुक जाता है.&amp;nbsp; यही कारण है कि जब आप ट्रेन के अंदर बैठे होते हैं तो सिग्नल कमजोर दिखता है, लेकिन जैसे ही आप खिड़की के पास जाते हैं या डिब्बे से बाहर निकलते हैं, सिग्नल थोड़ा बेहतर हो जाता है.&amp;nbsp;
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तेज रफ्तार की वजह से बार-बार बदलता है टावर
दूसरी बड़ी वजह है ट्रेन की तेज रफ्तार. जब आप एक जगह बैठे होते हैं, तो आपका फोन एक ही मोबाइल टावर से लगातार जुड़ा रहता है, लेकिन ट्रेन में सफर करते समय आप हर कुछ सेकंड में एक टावर के दायरे से निकल कर दूसरे टावर के दायरे में पहुंच जाते हैं.&amp;nbsp; जैसे ही आपका फोन किसी टावर के सिग्नल के दायरे में आता है, उतनी ही तेजी से वह उस टावर के दायरे से बाहर भी निकल जाता है और उसे दोबारा किसी नए टावर से जुड़ने की कोशिश करनी पड़ती है. ट्रेन जितनी तेज चलती है, सिग्नल की ताकत उतनी ही तेजी से बदलती रहती है, जिससे कॉल कटने और नेटवर्क टूटने की संभावना और बढ़ जाती है.
इसके अलावा एक और वजह है, जो रास्ते की भौगोलिक स्थिति से जुड़ा हुआ है. जब ट्रेन की पटरियां अक्सर ऐसे इलाकों से गुजरती हैं जहां आबादी कम होती है, जैसे जंगल, पहाड़ी इलाके, या फिर खेत-खलिहान. इन इलाकों में मोबाइल कंपनियां ज्यादा टावर नहीं लगाती हैं, क्योंकि वहां उपयोगकर्ताओं की संख्या कम होती है और टावर लगाना कंपनी के लिए फायदेमंद नहीं माना जाता. इसके अलावा, सुरंगों, पहाड़ी घाटियों और घुमावदार पटरियों पर भी सिग्नल कमजोर हो जाता है, क्योंकि वहां टावर का सीधा रास्ता ही फोन तक नहीं पहुंच पाता.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या इंटरनेट पर आपकी हर क्लिक बदल रही है आपकी सोच? नई रिसर्च ने उठाए सवाल</title>
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        <description><![CDATA[ Internet: इंटरनेट का इस्तेमाल भारत ही नहीं बल्की पूरी दुनिया में काफी तेजी से बढ़ चुका है. लोग आज किसी भी चीज को सर्च करने से लेकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल या फिर ऑनलाइन पेमेंट तक के लिए इंटरनेट पर निर्भर हो चुके हैं. लोग आज इंटरनेट से इस कदर कनेक्ट हो चुके हैं कि अगर थोड़ी देर के लिए इंटरनेट न चलें तो लोग बौखलाने लगते हैं.
इसी को देखते हुए एक नए शोध से ये जानकारी सामने आई है कि इंटरनेट का इस्तेमाल लोगों के सोचने के तरीके को बदल रहा है. साथ ही इसका असर लोगों के व्यक्तित्व पर भी पड़ सकता है.
एल्गोरिदम तय करते हैं आपको क्या दिखाई देगा
आपको ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाली चीजें पूरी तरह प्लान्ड होती हैं. आपको कौन-सा वीडियो दिखाना है, कौन सी खबर आपकी फीड पर आनी चाहिए, ये सभी चीजें अपने आप नहीं होती हैं बल्कि इसके पीछे पूरी एक एल्गोरिदम काम करती है जो आपकी एक्टिविटी के अनुसार आपको चीजें पेश करती है.
आपकी आदतों का नक्शा तैयार हो रहा है
एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के मीडिया शोधकर्ता ब्योर्न बेइन्योन के मुताबिक, आज बड़ी से बड़ी टेक कंपनियां केवल यूजर्स का डेटा इकट्ठा नहीं करतीं हैं बल्कि उस डेटा का विश्लेषण करके उनके आने वाले कल के व्यवहार का भी पता लगाने की कोशिश करती है.
बता दें कि जब आप कोई भी चीज गूगल या इंटरनेट पर सर्च करते हैं या फिर किसी पोस्ट पर क्लिक करते हैं, वीडियो देखते हैं, ऑनलाइन खरीदारी करते हैं या सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हैं तो आपकी हर एक एक्टिविटी एक डिजिटल रिकॉर्ड में बदल जाती है. इसी रिकॉर्ड का इस्तेमाल कंपनियां आपके व्यवहार को समझने के लिए करती हैं.
डेटा सब्जेक्ट बनते जा रहे हैं इंटरनेट यूजर्स
शोध में एडवां इंटरनेट यूजर्स को &amp;ldquo;डेटा सब्जेक्ट&amp;rdquo; कहा गया है. इसका मतलब है कि आजकल लोग जाने या अनजाने में अपनी पर्सनल लाइफ की चीजों को एक डेटा में बदलते जा रहे हैं जिसका बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही हैं.
इतना ही नहीं हैरान करने वाली बात ये है कि ज्यादातर लोगों को अभी भी यह लगता है कि ऑनलाइन जो भी फैसले वह ले रहे हैं वह पूरी तरह से उनका फैसला है.
छोटे-छोटे सुझाव बदल सकते हैं बड़े फैसले
इसीलिए अब इंटरनेट लोगों पर इस कदर हावी हो चुका है कि ऑनलाइन दिखाई गई एक छोटी सी चीज लोगों के सोचने के तरीके को भी पूरी तरह से बदल दे रही है. फोन पर आने वाला नोटिफिकेशन, रिकमंड किया गया वीडियो या फिर ऑनलाइन शॉपिंग की रिकमेंडेशन देखने में मामूली लग सकती है. लेकिन यही छोटी-छोटी चीजें समय के साथ हमारी आदतों और फैसले लेने के तरीकों को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती हैं.
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Location Tracking in Airoplan Mode: क्या एयरप्लेन मोड ऑन करने के बाद भी ट्रैक हो सकता है मोबाइल फोन? जान लीजिए जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ Location Tracking in Airoplan Mode: फोन चोरी के मामले रोजाना सुनने को मिलते हैं. चोरी के बाद चोर फोन को सबसे पहले एयरप्लेन मोड पर डाल देता है, जिससे उस फोन पर कोई कॉल या मैसेज नहीं आ सके. एयरप्लेन मोड पर डालते ही फोन का इंटरनेट कनेक्शन, वाई-फाई कनेक्शन, ब्लूटूथ हर चीज से कनेक्शन कट जाता है. &amp;nbsp;ऐसे में कई लोगों को लगता है कि अगर चोर ने उनके फोन को एयरप्लेन मोड पर डाल दिया होगा तो उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन इसकी सच्चाई कुछ और है.
एयरप्लेन मोड में भी बंद नहीं होती फोन की ट्रैकिंग
स्टडी के मुताबिक, एयरप्लेन मोड पर आपके फोन में नेटवर्क नहीं आएगा, कॉल और मैसेज नहीं आएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि आपके फोन की ट्रैकिंग नहीं हो सकती. इसका कारण है फोन के अंदर मौजूद GPS सिस्टम. यह फंक्शन एयरप्लेन मोड पर भी काम करता है.
अगर आपने एयरप्लेन मोड ऑन करने के बाद भी वाई-फाई या ब्लूटूथ मैन्युअली ऑन कर दिया तो आपका फोन फिर से कनेक्ट हो सकता है और लोकेशन शेयर होने लगती है.&amp;nbsp; अगर इससे भी काम नहीं बनता है तो पुलिस या एजेंसियां जरूरत पड़ने पर स्टिंग्रे जैसी एडवांस डिवाइस का इस्तेमाल करती हैं, जो फोन को कनेक्ट कर सकती हैं.&amp;nbsp;
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बिना इंटरनेट और नेटवर्क कैसे काम करता है GPS?
अब आपके दिमाग में यह सवाल आता होगा कि जब फोन का इंटरनेट कनेक्शन टूट गया, तब GPS एयरप्लेन मोड पर कैसे काम करता है? असल में GPS को काम करने के लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती है. इसका काम सीधे सैटेलाइट से होता है. वह वहां से सिग्नल पकड़ता है और आपकी लोकेशन का पता लगा लेता है. यहां राहत की बात भी है. जब तक आपका फोन किसी नेटवर्क से कनेक्ट नहीं होता, तब तक वह यह लोकेशन डेटा किसी और को भेज नहीं सकता.&amp;nbsp;
कुल मिलाकर बात यह है कि एयरप्लेन मोड आपको पूरी तरह इनविजिबल नहीं बनाता, बस आपकी रियल टाइम ट्रैकिंग को रोक देता है. &amp;nbsp;दरअसल, इसकी ट्रैकिंग तो हो सकती है, लेकिन बिना नेटवर्क उस लोकेशन डेटा को किसी और तक भेजा नहीं जा सकता.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ सोच से चलेगा वीडियो गेम, नया कमाल करने की तैयारी में हैं साइंटिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिर्फ-सोच-से-चलेगा-वीडियो-गेम-नया-कमाल-करने-की-तैयारी-में-हैं-साइंटिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Thoughts Will Control Video Games: अब वह दिन दूर नहीं, जब इंसान अपने विचारों से ही वीडियो गेम्स खेल सकेगा. गेम को कंट्रोल करने के लिए कंट्रोलर की जरूरत नहीं होगी और इंसान अपनी सोच से ही स्क्रीन पर चल रहे गेम को कंट्रोल कर पाएगा. इसके लिए रिसर्चर ने ब्रेन-कंट्रोल्ड गेमिंग सिस्टम तैयार किया है, जो दिमाग की नैचुरल वायरिंग से काम करने का तरीका सीखता है. इससे मेंटल हेल्थ, मेडिसिन और ह्यूमन-कंप्यूटर इंटरेक्शन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है. आइए एक नजर डालते हैं कि यह सिस्टम कैसे काम करेगा.
दिमाग में चल रहे विचारों से कंट्रोल हो जाएगा गेम
येल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने एक नया ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) बनाया है, जिसकी मदद से लोग अपनी ब्रेन एक्टिविटी के सहारे वीडियो गेम खेल सकते हैं. रियल-टाइम फंक्शनल MRI (fMRI) का यूज करते हुए रिसर्चर की टीम ने एक डेमो दिखाया, जिसमें यूजर अपने विचारों से कंप्यूटर को कंट्रोल कर सकता है. रिसर्चर का कहना है कि ब्रेन एक्टिविटी इस्टैबलिश्ड न्यूरल पाथवेज को फॉलो करती है. जब इन पाथवेज के हिसाब से सिस्टम को डिजाइन किया जाता है तो BCI को यूज करना सीखना आसान बन जाता है. जब एक बार BCI ब्रेन की न्यूरल स्ट्रक्चर के हिसाब से अलाइन हो जाता है तो यूजर को जल्दी इसका कंट्रोल मिल जाता है. टेस्ट में पता चला कि कुछ पार्टिसिपेंट्स ने एक घंटे से भी कम में BCI का कंट्रोल ले लिया था और कई मामलों में यह और भी जल्दी हो गया. वहीं अगर यह न्यूरल स्ट्रक्चर के हिसाब से अलाइन नहीं होता तो यूजर के लिए कंट्रोल सीखना मुश्किल हो जाता है.
कहां काम आ सकता है नया सिस्टम?
रिसर्च टीम में शामिल Erica Busch ने कहा कि इस सिस्टम को बातचीत और चलने-फिरने में परेशानियों का सामना कर रहे लोगों से लेकर डिप्रेशन और एंग्जायटी का इलाज ढूंढने तक में यूज किया जा सकता है. यह कंज्यूमर गेम्स और नई जनरेशन की टेक्नोलॉजी को डेवलप करने के भी काम आ सकता है.&amp;nbsp;
मेंटल हेल्थ के फील्ड में ला सकता है क्रांतिकारी बदलाव
इस सिस्टम को डिप्रेशन और एंग्जायटी आदि का इलाज ढूंढने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. आगे चलकर इस सिस्टम को हेल्दी लोगों पर यूज कर बेहतर तरीके से ट्रेनिंग दी जा सकती है, जो इसकी ओवरऑल परफॉर्मेंस को इम्प्रूव करने में मदद करेगा. बता दें कि एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक भी इसी तरह का BCI चिप तैयार कर रही है.
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक घंटे चलने पर कितनी बिजली खाता है Laptop? इस्तेमाल करने से पहले जान लें पूरा हिसाब&amp;किताब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-घंटे-चलने-पर-कितनी-बिजली-खाता-है-laptop-इस्तेमाल-करने-से-पहले-जान-लें-पूरा-हिसाब-किताब</link>
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        <description><![CDATA[ Laptop Electricity Consumption: आज की डिजिटल दुनिया में लैपटॉप एक ऐसा डिवाइस हो चुका है जो लोगों के बहुत काम आता है. बच्चों की पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम तक में आज लैपटॉप का इस्तेमाल होता है. इतना ही नहीं, वर्क फ्रॉम होम में भी लैपटॉप की अहम भूमिका होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक घंटे चलने पर आपका लैपटॉप कितनी बिजली खपत करता है. आइए जानते हैं पूरा जोड़-गणित.
कैसे पता चलता है लैपटॉप ने कितनी खर्च की बिजली?
जानकारी के मुताबिक, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की बिजली खपत को वॉट (Watt) में मापा जाता है. अब लैपटॉप कितनी बिजली खपत कर रहा है यह उसके प्रोसेसर, स्क्रीन साइज, ग्राफिक्स कार्ड और इस्तेमाल करने के तरीके पर भी निर्भर करता है.
आमतौर पर एक नॉर्मल लैपटॉप 30 से 60 वॉट का होता है. वहीं, बिजनेस या प्रोफेशनल लैपटॉप 50 से 90 वॉट और गेमिंग लैपटॉप अक्सर 100 से 250 वॉट तक के हो सकते हैं. इसीलिए हर लैपटॉप की बिजली खपत उसके वॉट पर निर्भर करती है कि वह कितने वॉट का लैपटॉप है.
एक घंटे में कितनी यूनिट बिजली होती है खर्च?
बिजली का बिल यूनिट (kWh) के आधार पर तय किया जाता है. अब अगर 1000 वॉट वाला डिवाइस 1 घंटे तक चलता है तो वह 1 यूनिट बिजली खर्च करेगा. इसी हिसाब से अब अगगर आपका लैपटॉप 50 वॉट का है तो वह करीब 0.05 यूनिट बिजली हर घंटे खर्च करेगा. इसका मतलब है कि 1 घंटे लैपटॉप चलाने पर केवल 0.05 यूनिट बिजली खर्च होगी.
अब महीने का हिसाब लगाएं तो अगर आप अपना लैपटॉप रोज 8 घंटे इस्तेमाल करते हैं तो डेली 3.2 रुपये की बिजली खर्च होती है. इस हिसाब से महीने का करीब 96 रुपये बिजली एक लैपटॉप खर्च कर सकता है. हालांकि गेमिंग या ज्यादा वॉट वाले लैपटॉप ज्यादा बिजली खर्च करेंगे.
कैसे बचाएं बिजली
अगर आप लैपटॉप के इस्तेमाल के साथ-साथ ही बिजली की बचत भी करना चाहते हैं तो आपको कुछ जरूरी चीजें ध्यान में रखनी होंगी.

जरूरत के हिसाब से ही स्क्रीन की ब्राइटनेस को सेट करें.
बेमतलब के ऐप्स और बैकग्राउंड प्रोग्राम को बंद करें.
हो सके तो पावर सेविंग मोड का इस्तेमाल करें.
इस्तेमाल ने करने की स्थिति में लैपटॉप को स्लीप या शटडाउन कर दें.
लैपटॉप की बैटरी फुल चार्ज होने पर चार्जर को प्लग से निकाल दें.

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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>बैन खत्म, लेकिन Telegram अब भी बंद! जानिए क्यों नहीं खुल रहा ऐप और कैसे करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ Telegram: देश में कुछ दिन पहले टेलीग्राम काफी चर्चा का विषय बना हुआ था. वजह थी NEET पेपर लीक. दरअसल, नीट के पेपर लीक के बाद से मैसेजिंग साइट टेलीग्राम पर सरकार का रुख सख्त था. इसके बाद से सरकार ने इस ऐप पर 22 जून 2026 तक बैन लगा दिया था क्योंकि 22 जून को ही NEET (UG) 2026 का रिएग्जाम होना था. अब टेलीग्राम पर लगा हुआ बैन तो हट चुका है लेकिन फिर भी ये ऐप कई लोगों के फोन में अभी तक नहीं चल रहा है. आइए जानते हैं क्यों हो रही ये दिक्कत.
Telegram ने क्या कहा?
इस पूरे मामले को लेकर Telegram ने सोशल मीडिया पर एक यूजर का जवाब देते हुए कहा है कि, ऐप का न चलना आपके सरकार के हाथ में है. कंपनी की ओर से ऐसा बयान साफ दर्शाता है कि उसका इस पूरे मामले में कोई कंट्रोल नहीं है.
कई लोगों को हो रही दिक्कत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई लोग अभी भी ऐप से मैसेज सेंड नहीं कर पा रहे हैं. कुछ लोगों के स्टोर पर भी यह ऐप नहीं दिखाई दे रहा है तो कुछ का ऐप ओपन ही नहीं हो रहा है. फिलहाल Telegram पर प्रतिबंध बढ़ाए जाने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन इसके बावजूद यह ऐप पूरी तरह से काम नहीं कर रहा है.
कई रिपोर्ट्स का मानना है कि ऐप को एक साथ चालू करने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में शुरू किया जा रहा है. इसीलिए कुछ यूजर्स को ऐप को इस्तेमाल करने में मुश्किल हो रही है. हालांकि, इसकी अभी तक कोई आधिकारीक जानकारी सामने नहीं आई है.
ऐप नहीं चल रहा तो क्या करें
अगर आपके फोन में भी Telegram सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो कुछ उपाय आपके काम आ सकते हैं.
अनइंस्टॉल करके फिर से ऐप को इंस्टॉल करने से भी कई बार समस्या दूर हो सकती है. इसके अलावा सबसे पहले अपने फोन में नया अपडेट चेक करें. अगर आपके फोन में कोई नया अपडेट आया हुआ है तो पहले वो इंस्टॉल करें. आप ऐप को पूरी तरह बंद करके दोबारा ओपन करें या फिर फोन को रीस्टार्ट भी कर सकते हैं. अगर प्ले स्टोर पर ऐप नहीं दिख रहा है तो कुछ समय बाद फिर से चेक करें. इसके अलावा आप एयरप्लेन मोड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. कई बार ये तरीका काम आ जाता है.
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आप भी रातभर फोन को चार्जिंग पर लगाते हैं? जानें बैटरी को लंबे समय तक चलाने के लिए क्या है सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Overnight Charging Vs Morning Charging: आजकल लगभग सभी के हाथों में स्मार्टफोन पहुंच चुका है. फोन के जरिए लोग आज करीब सभी काम आसानी से कर सकते हैं. लेकिन कई बार स्मार्टफोन की बैटरी लोगों को काफी परेशान कर देती है. दरअसल, स्मार्टफोन की बैटरी की लाइफ एक समय के बाद कम होने लगती है.
हालांकि, कई बार हमारी कुछ गलत आदतें भी बैटरी को खराब कर देती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या रातभर फोन चार्जिंग पर लगाकर छोड़ना भी बैटरी को नुकसान पहुंचाता है और क्या इसकी जगह सुबह जल्दी फास्ट चार्ज करना बेहतर ऑप्शन है? आइए समझते हैं डिटेल में.
फास्ट चार्जिंग है बेहतर ऑप्शन
फास्ट चार्जिंग आज के समय में लोगों की जरूरत बन चुकी है क्योंकि ये कुछ भी समय में आपके डिवाइस को चलने लायक बना देती है. फास्ट चार्जिंग से फोन बस कुछ ही समय में घंटों तक चलने के लिए तैयार हो जाता है. हालांकि, एक तरीके से देखा जाए तो बार-बार फास्ट चार्जिंग इस्तेमाल करने से बैटरी पर ज्यादा लोड पड़ने लगता है. शोध से पता चलता है कि नॉर्मल और फास्ट चार्जिंग के बीच बैटरी की ताकत में ज्यादा अंतर नहीं होता है. इसलिए कभी-कभार फास्ट चार्जर इस्तेमाल करना कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है.
क्या रातभर चार्जिंग करने से बैटरी खराब होती है?
अक्सर देखा गया है लोग कहते हैं कि रात भर फोन को चार्जिंग पर लगाकर नहीं रखना चाहिए. ऐसा करने से फोन की बैटरी जल्दी खराब होने लगती है. लेकिन आज की इस आधुनिक दुनिया में नए और एडवांस स्मार्टफोन मौजूद हैं जो फोन को ओवर चार्जिंग होने से बचा लेते हैं. आज काल आने वाले नए Android और iPhone मॉडल में स्मार्ट चार्जिंग फीचर की सुविधा मिलती है.
यह तकनीक बैटरी के लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद चार्जिंग की स्पीड को अपने आप ही कम कर देती है. इसके बाद फोन धीरे धीरे चार्ज होता है. ऐसा इसीलिए होता है जिससे बैटरी पर ज्यादा लोड न पड़े और आपका डिवाइस लंबे समय तक आसानी से काम कर सके.
तो कब चार्ज करना चाहिए फोन?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लिथियम-आयन बैटरियों को सबसे ज्यादा नुकसान गर्मी से पहुंचाता है. ऐसे में जब आपका फोन तेजी से चार्ज होता है तो फोन तेजी से गर्म भी होने लगता है. ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि फोन की बैटरी पर ज्यादा लोड पड़ता है. क्योंकि जितना तेज बैटरी चार्ज होगी उतनी तेज ही फोन भी गर्म होगा.
इसीलिए बार-बार फास्ट चार्जिंग के इस्तेमाल से फोन की बैटरी जल्दी खराब हो जाती है. इसीलिए एक्टर्स सलाह देते हैं कि अगर आप रात भर फोन को चार्जिंग पर लगाना चाहते हैं तो नॉर्मल चार्जर का इस्तेमाल करें. फास्ट चार्जर का इस्तेमाल कभी-कभी या फिर ज्यादा जल्दी हो तब ही करना चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Sleep Mode in Laptop: क्या हर बार आप भी Sleep Mode में डाल देते हैं लैपटॉप, जानें इससे परफार्मेंस पर क्या पड़ता है असर?</title>
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        <description><![CDATA[ Sleep Mode in Laptop: क्या हर बार आप भी Sleep Mode में डाल देते हैं लैपटॉप, जानें इससे परफार्मेंस पर क्या पड़ता है असर? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>ChatGPT से है आपको खतरा? Signal President ने AI चैटबॉट्स को लेकर दी बड़ी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ Signal President on ChatGPT: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी तेजी से अपने पैर पसार रहा है. एआई चैटबॉट्स तो अब लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं. पढ़ाई से लेकर ऑफिस के काम और Personal advice तक के लिए लोग ChatGPT, Gemini, Claude जैसे AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. जानकारी के लिए बता दें कि इन चैटबॉट्स के बात करने का तरीका इतना आसान होता है कि कई लोग इन्हें अपना डिजिटल साथी समझने लगते हैं जो एक समय बाद बड़ा खतरा बन सकता है. इसी को लेकर Signal की प्रेसिडेंट मेरिडिथ व्हिटेकर का मानना है कि ऐसा सोचना खतरनाक हो सकता है.
AI का सही इस्तेमाल जरूरी
मेरिडिथ व्हिटेकर खुद AI टूल्स का इस्तेमाल केवल जरूरत पड़ने पर करती हैं. वह डॉक्यूमेंट्स को व्यवस्थित करने या फॉर्मेटिंग जैसे कामों में AI की मदद लेती हैं. हालांकि, वह अपने विचारों, किसी भी चीज पर लिखना या मुश्किल मुद्दों पर सोचने के लिए AI पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं. उनके अनुसार किसी विचार को समझने और उसे डेवलप करने का प्रोसेस इंसानी सोच का जरूरी हिस्सा है जिसे पूरी तरह मशीनों के हवाले नहीं किया जाना चाहिए.
AI इंसान नहीं सिर्फ एक तकनीकी सिस्टम है
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Signal की अध्यक्ष मेरिडिथ व्हिटेकर ने Bloomberg से बातचीत में लोगों को चेतावनी दी है कि वे AI चैटबॉट्स को अपना दोस्त या भरोसेमंद साथी समझने की गलती न करें. उनका कहना है कि AI सिस्टम चाहे कितनी भी इंसानों जैसी भाषा में जवाब दें लेकिन उनमें न तो चेतना होती है और न ही भावनाओं को समझने की असली ताकत. वे सिर्फ अपने ट्रेनिंग के दौरान सीखे गए डेटा के आधार पर रिएक्शन देते हैं. आसान भाषा में समझाएं तो AI आपकी भावनाओं को महसूस नहीं करता बल्कि केवल यह अनुमान लगाता है कि किसी सवाल का सबसे सही जवाब क्या हो सकता है.
कंट्रोल हमेशा कंपनी के हाथ में रहता है
व्हिटेकर का मानना है कि किसी भी AI चैटबॉट पर पूरी तरह भरोसा करना सही नहीं है क्योंकि उसके काम करने का तरीका और ताकतों पर कंट्रोल उस कंपनी का होता है जिसने उसे बनाया है. भले ही AI आपको निष्पक्ष लगता हो लेकिन उसकी भी कुछ लिमिटेशन होती हैं. इसके अलावा इनके नियम और काम करने का तरीका भी कंपनी द्वारा तय किया जाता है. ऐसे में यूजर्स के पास इन चैटबॉट्स का कोई भी कंट्रोल नहीं रहता है.
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 08:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp को मिला नया मुखिया! अब भारत के कुणाल शाह संभालेंगे कमान</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Kunal Shah: मेटा की मशहूर मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. करीब सात साल तक वॉट्सऐप चलाने वाले विल कैथकार्ट अब यह जिम्मेदारी छोड़ रहे हैं. उनकी जगह अब एक भारतीय कुणाल शाह लेंगे जो CRED कंपनी के फाउंडर हैं.
व्हाट्सएप के मुखिया विल कैथकार्ट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके यह जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि वॉट्सऐप आज जितनी मजबूत स्थिति में है उतनी पहले कभी नहीं थी और इसी वजह से उन्हें लगा कि अब पीछे हटने का सही समय है. उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग को तीन अरब से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया और दुनियाभर में लोगों की निजी बातचीत की रक्षा की.
कुणाल शाह कौन हैं

Some personal news. After nearly 7 years leading WhatsApp, I&#039;m excited to share who will take over the responsibility of delivering simple, reliable, and private messaging for the world. WhatsApp is in the strongest position it&#039;s ever been &amp;mdash; and that felt like the right moment to&amp;hellip;
&amp;mdash; Will Cathcart (@wcathcart) June 22, 2026



कुणाल शाह मुंबई के रहने वाले हैं पढ़ाई में उन्होंने फिलॉसफी में बीए किया फिर एमबीए बीच में ही छोड़ दिया. साल 2010 में उन्होंने फ्रीचार्ज नाम की कंपनी शुरू की थी जिसे बाद में स्नैपडील ने खरीद लिया था.
इसके बाद 2018 में उन्होंने CRED शुरू की जो क्रेडिट कार्ड बिल भरने पर लोगों को रिवॉर्ड देती है. आज CRED भारत की सबसे जानी मानी फिनटेक कंपनियों में शामिल है. कुणाल शाह दो सौ से ज्यादा स्टार्टअप्स में निवेश भी कर चुके हैं.
कैथकार्ट ने कुणाल शाह की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने CRED को भारत की सबसे अहम टेक कंपनियों में से एक बनाया है और उन्हें यूजर्स की सच में परवाह है.
यह लीडरशिप बदलाव सिर्फ इत्तेफाक नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेटा भारतीय फिनटेक स्टार्टअप CRED में करीब 900 मिलियन डॉलर का निवेश करने जा रही है. इस डील के बाद मेटा को CRED में करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी और कंपनी की वैल्यू करीब 4.5 अरब डॉलर हो जाएगी.
इंडिया के लिए क्यों अहम है यह डील
यह डील भारत के लिए कई मायनों में बड़ी है.
पहला यह दिखाता है कि मेटा जैसी ग्लोबल कंपनी अब भारत के डिजिटल पेमेंट मार्केट में सीधे एंट्री करना चाहती है. अभी इस मार्केट में फोनपे और गूगल पे का दबदबा है जो मिलकर करीब अस्सी प्रतिशत यूपीआई ट्रांजैक्शन हैंडल करते हैं जबकि वॉट्सऐप पे अभी काफी पीछे है. ऐसे में फेसबुक और इंस्टाग्राम से डिस्कवरी, वॉट्सऐप से कॉमर्स और CRED से पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर जोड़कर मेटा एक बड़ा डिजिटल इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रही है.
दूसरा यह पहली बार है जब किसी भारतीय फाउंडर को दुनिया की किसी सबसे बड़ी टेक कंपनी के इतने बड़े प्रोडक्ट की सीधी कमान मिली है जिसके तीन अरब से ज्यादा यूजर्स हैं.
अभी यह साफ नहीं है कि विल कैथकार्ट आगे मेटा में किसी और भूमिका में नजर आएंगे या नहीं. कुणाल शाह का वॉट्सऐप में औपचारिक कार्यभार कब से शुरू होगा इस पर भी अभी कंपनी की तरफ से विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी गई है.
ऑपरेटिंग रोल से हटने का फैसला

It&amp;rsquo;s been a minute. 2015&amp;ndash;2018- Exited FreeCharge. Spent time learning and investing.- Pondered about: Why can&#039;t trust be rewarded? Started with $1M of personal capital.- Launched CRED to reward people for paying credit card bills on time.2019&amp;ndash;2025- Built a system run by a&amp;hellip;
&amp;mdash; Kunal Shah (@kunalb11) June 22, 2026



व्हाट्सएप के फाउंडर बनने के बाद क्रेड के फाउंडर कुणाल शाह ने ऑपरेटिंग रोल से हटने का फैसला किया है. जानकारी के अनुसार, उनकी जगह अब मितेन संपत इंटरिम सीईओ की जिम्मेदारी संभालेंगे. कुणाल शाह अब क्रेड में शेयरहोल्डर के तौर पर बने रहेंगे. कुणाल शाह ने बताया कि वो अब मेटा जॉइन कर रहे हैं और वहां वॉट्सऐप की ग्लोबल लीडरशिप संभालेंगे. मेटा ने क्रेड में माइनॉरिटी इन्वेस्टर के तौर पर भी निवेश किया है. हालांकि मेटा को क्रेड के मेंबर डेटा का कोई एक्सेस नहीं मिलेगा.
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        <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>फोन या कोई भी दूसरा गैजेट लेना है तो याद रखे यह 30&amp;Day Rule, कभी नहीं होगा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Gadget Buying Tips: अगर आपको नया गैजेट खरीदना है, लेकिन बजट कम है तो एक नियम आपके काम आ सकता है. यह नियम आपके पैसे बर्बाद होने से बचा लेगा. दरअसल, जब हम फोन या कोई दूसरा गैजेट खरीदने के लिए मार्केट में जाते हैं तो कई बार बजट से बाहर जाकर ऐसी चीज खरीद लेते हैं, जिसका बाद में दुख होता है. ऐसा खुद की पसंद, मार्केटिंग या उस गैजेट की किसी खूबी के कारण होता है. इसका असर यह होता है कि हम उस गैजेट पर अपना पैस खर्च कर बैठते हैं, जिसकी हमें जरूरत नहीं होती है. आज हम आपको ऐसा नियम बताने जा रहे हैं, जो आपको इस मुश्किल से बचा लेगा.
गैजेट खरीदते समय ध्यान रखें 30 दिनों का नियम
यह ऐसा नियम है जो आपको बजट के अंदर और अपनी पसंद का गैजेट खरीदने में मदद करता है. यह नियम कहता है कि जब भी आप कोई नया फोन, लैपटॉप, हेडफोन आदि खरीदने का विचार करते हैं तो आपको 30 दिन तक रुकना चाहिए. कई बार ऐसा होता है कि हम सोशल मीडिया पर कोई वीडियो देखकर तुरंत किसी गैजेट के लिए मन बना लेते हैं. कई बार यह भी होता है कि हम कोई और गैजेट खरीदने जाते हैं, लेकिन बातों में आकर कोई और गैजेट खरीद लेते हैं. 30 दिन तक रुकने का फायदा यह होगा कि आपको सोचने का पूरा समय मिल जाएगा. इस दौरान आप उस गैजेट से जुड़ी रिसर्च कर सकते हैं. इससे उस प्रोडक्ट की सारी खूबियां-खामियां पता चल जाएंगी.
क्या हैं इस नियम के फायदे?
30 दिन बार सारी रिसर्च और खामियां-खूबियां जानने के बाद अगर आपको लगता है कि गैजेट खरीदना चाहिए तो आप इसे खरीद सकते हैं. इतने में आपको उस गैजेट की जरूरत समेत सारी बातें पता चल जाएंगी. इस नियम के दो बड़े फायदे हैं. पहला यह होगा कि आपको बजट के अंदर डिसीजन लेने में मदद मिलेगी. दूसरा यह होगा कि आप तुरंत जोश में आकर कोई फैसला लेकर पैसे खर्च करने से बच जाएंगे. इस तरह न तो आपको बजट बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी और आप कोई गैर-जरूरी गैजेट खरीदने से भी बच &amp;nbsp;जाएंगे.
बाकी जगह भी काम आएगा यह नियम
30 दिनों का यह नियम गैजेट की शॉपिंग के अलावा बाकी जगहों पर भी काम आएगा. अगर आप इंप्लसिव परचेज के कारण ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं तो इस नियम को दूसरे फाइनेंशियल डिसीजन में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फोन, या, कोई, भी, दूसरा, गैजेट, लेना, है, तो, याद, रखे, यह, 30-Day, Rule, कभी, नहीं, होगा, नुकसान</media:keywords>
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        <title>इस दुकान में नहीं है एक भी इंसान! अकेला ह्यूमनॉइड रोबोट संभाल रहा पूरा स्टोर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-दुकान-में-नहीं-है-एक-भी-इंसान-अकेला-ह्यूमनॉइड-रोबोट-संभाल-रहा-पूरा-स्टोर</link>
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        <description><![CDATA[ Humanoid Robot: तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब वह दिन दूर नहीं जब दुकानों में इंसानों की जगह रोबोट काम करते दिखाई दें. हांगकांग में एक ऐसा ही अनोखा एक्सपेरिमेंट शुरू होने जा रहा है जहां एक कन्वीनियंस स्टोर को पूरी तरह एक ह्यूमनॉइड रोबोट चलाएगा. इस स्टोर में ग्राहकों की मदद से लेकर सामान को सही तरीके से रखने तक का काम रोबोट ही संभालेगा.
कौन है शियाओ गाई?
शियाओ गाई को चीन की बीजिंग स्थित AI और रोबोटिक्स कंपनी Galbot ने तैयार किया है. यह रोबोट लगभग 5 फीट 6 इंच लंबा है और इसके हाथ काफी लंबी हैं जिससे यह स्टोर के अंदर कई तरह के कामों को आसानी से कर सकता है.

China just opened a store run by one robot. But the robot isn&amp;rsquo;t the story.Galbot launched a fully autonomous humanoid-operated store in Beijing &amp;mdash; 9 square meters, one robot, thousands of customers a day. Greeting people, serving drinks, snacks, even pharmaceuticals. No human&amp;hellip; pic.twitter.com/1pYuldynS3
&amp;mdash; fernando a (@fernandoybus) June 21, 2026



इंसान जैसी बनावट और एडवांस AI पावर्स के कारण यह ग्राहकों के साथ बातचीत करने और अलग-अलग कामों को संभालने में सक्षम बताया जा रहा है.
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24 घंटे खुला रहेगा रोबोट वाला ये स्टोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हांगकांग के हंग होम वाटरफ्रंट इलाके में एक नया 24x7 कन्वीनियंस स्टोर शुरू किया जा रहा है. खास बात यह है कि यहां किसी भी इंसानी कर्मचारी की तैनाती नहीं होगी. पूरे स्टोर का संचालन शियाओ गाई (Xiao Gai) नाम का ह्यूमनॉइड रोबोट करेगा.
यह स्टोर एक पोर्टेबल कैप्सूल रिटेल आउटलेट के रूप में तैयार किया गया है और इसे शहर का अपनी तरह का पहला स्टोर माना जा रहा है.
स्टोर में क्या-क्या काम करेगा रोबोट?
शियाओ गाई सिर्फ ग्राहकों का स्वागत ही नहीं करेगा बल्कि स्टोर के रोजमर्रा के कई महत्वपूर्ण कार्य भी संभालेगा.
इस रोबोट के कई सारे काम हैं.

शेल्फ पर सामान रखना और व्यवस्थित करना
ग्राहकों द्वारा चुने गए प्रोडक्ट उपलब्ध कराना
बिलिंग और चेकआउट प्रोसेस में सहायता करना
ग्राहकों के सवालों का जवाब देना
कई भाषाओं में बातचीत करना

यानी एक तरह से यह रोबोट स्टोर मैनेजर, सेल्स असिस्टेंट और कैशियर की भूमिका एक साथ निभाएगा.
ग्राहकों को क्या मिलेगा?
इस स्टोर में ग्राहकों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध रहेगा. यहां पेय पदार्थ, स्नैक्स और कुछ ओवर-द-काउंटर दवाइयां भी खरीदी जा सकेंगी. कंपनी का दावा है कि रोबोट द्वारा चलाया जा रहा यह अनोखा एक्सपीरिएंस बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर सकता है. अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे इलाके में आने वाले विजिटर्स की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है.
क्या रोबोट पूरी तरह भरोसेमंद साबित होंगे?
हालांकि इस नई पहल को लेकर काफी उत्साह है लेकिन अतीत के कुछ उदाहरण यह भी दिखाते हैं कि वास्तविक परिस्थितियों में AI और रोबोट हमेशा आपके हिसाब से परफॉर्मेंस नहीं कर पाते. इसी साल कॉफी चेन Starbucks ने उत्तरी अमेरिका में शुरू किए गए एक AI-आधारित इन्वेंट्री सिस्टम को कुछ ही महीनों में बंद कर दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सिस्टम कई प्रोडक्ट्स की सही पहचान करने में असफल रहा और गलत लेबलिंग जैसी समस्याएं सामने आईं. इसी के चलते कंपनी को पुराने तरीके से संचालन पर लौटना पड़ा.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>एक समय धूम मचाने वाले Curved Display Phone क्यों हो गए गायब? यह है सबसे बड़ा कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Curved Display Phone: एक समय था, जब कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन की अलग ही धाक होती थी. सैमसंग समेत कई कंपनियों ने अपने प्रीमियम फोन में कर्व्ड डिस्प्ले यूज किया था, लेकिन यह ट्रेंड लंबा नहीं चल पाया. कुछ ही साल बाद कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन धीरे-धीरे गायब होने लगे और आज ज्यादातर प्रीमियम फोन फ्लैट डिस्प्ले के साथ ही आ रहे हैं. आखिर ऐसा क्या हुआ है कि एक समय का हिट डिजाइन अब नजर भी नहीं आ रहा है और कंपनियां भी इससे दूरी बनाती जा रही है. आज हम इसके पीछे के कारणों पर नजर डालेंगे.
यह रहा कर्व्ड डिस्प्ले बंद होने का सबसे बड़ा कारण
कर्व्ड डिस्प्ले का नाजुक होना इनके बंद होने का सबसे बड़ा कारण बना. फ्लैट स्क्रीन के मुकाबले कर्व्ड डिस्प्ले के डैमेज होने की आशंका ज्यादा रहती है. यह डिस्प्ले साइड से थोड़ा मुड़ा हुआ होता है. ऐसे में अगर यह किसी हार्ड सरफेस से टकरा जाए तो इसके टूटने का डर बना रहता है. इससे बचाने के लिए अगर आप स्क्रीन प्रोटेक्टर यूज करना चाहे तो वह पूरी सेफ्टी नहीं दे सकता. स्क्रीन प्रोटेक्टर कर्व्ड डिस्प्ले पर परफेक्टली फिट नहीं आता. इसका मतलब है कि कोशिश करने के बाद भी इस तरह के डिस्प्ले को डैमेज होने से बचाया नहीं जा सकता था. यही सबसे बड़ा कारण है कि स्मार्टफोन कंपनियों ने इस तरह के डिस्प्ले को अलविदा कह दिया.
यह भी है एक कारण
डैमेज का खतरा कर्व्ड डिस्प्ले के बंद होने का सबसे बड़ा कारण था, लेकिन यही एकमात्र वजह नहीं थी. ऐसे डिस्प्ले पर एक्सीडेंटल टच का भी झंझट रहता था. यानी न चाहते हुए भी हाथ डिस्प्ले पर टच हो जाता था, जिससे कोई नया फंक्शन खुल जाता. डिवाइस को पकड़ते समय यह झंझट ज्यादा रहता था, जो यूजर की सिरदर्दी को बढ़ाने वाला साबित होता था. इसके अलावा ग्लेयर को लेकर भी खूब समस्या आती थी. दिन के समय यूज के दौरान इसके किनारों से लाइट रिफ्लेक्ट होती थी, जो फोन देखने के एक्सपीरियंस को खराब करने के लिए काफी थी.
पुराने जमाने की चीज नहीं हुई है कर्व्ड डिस्पले
कर्व्ड डिस्प्ले से भले ही ज्यादातर कंपनियों ने दूरी बना ली है, लेकिन यह टेक्नोलॉजी मार्केट से पूरी तरह गायब नहीं हुई है. मोटोरोला अपनी एज सीरीज के फोन में यह कर्व्ड डिस्प्ले दे रही है. ऐसे भी कयास हैं कि ऐप्पल भी अगले साल अपनी आईफोन 20 सीरीज में कर्व्ड डिस्प्ले के साथ लॉन्च कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो बाकी कंपनियों को भी फिर से इस ट्रेंड को अपनाना होगा.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ चार्जिंग नहीं! Android फोन के USB&amp;C पोर्ट के ये 5 कमाल के इस्तेमाल आपको कर देंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Android USB-C: आज के समय में USB-C पोर्ट लगभग हर एडवांस स्मार्टफोन का हिस्सा बन चुका है. कुछ साल पहले तक मोबाइल फोन में माइक्रो-USB या दूसरे प्रकार के चार्जिंग पोर्ट इस्तेमाल किए जाते थे लेकिन USB-C ने माइक्रो-यूएसबी को तेजी से रिप्लेस किया है. इसका कारण है USB-C की तेज डेटा ट्रांसफर स्पीड, फास्ट चार्जिंग और आसान कनेक्टिविटी. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी भी डॉयरेक्शन से लगाया जा सकता है जिससे बार-बार पोर्ट घुमाने की परेशानी नहीं होती.
हालांकि ज्यादातर लोग USB-C पोर्ट का इस्तेमाल केवल फोन चार्ज करने के लिए करते हैं लेकिन ये इससे कई ज्यादा और भी काम कर सकता है. यह पोर्ट आपके स्मार्टफोन को एक गेमिंग कंसोल, मिनी कंप्यूटर और यहां तक कि प्रोफेशनल रिकॉर्डिंग डिवाइस में भी बदल सकता है. आइए जानते हैं वो 5 काम जो ये पोर्ट आपके लिए कर सकता है.
फोन की स्क्रीन को बड़े डिस्प्ले पर दिखाएं
अगर आप अपने फोन की स्क्रीन को टीवी या मॉनिटर पर दिखाना चाहते हैं तो USB-C पोर्ट इसमें भी मदद कर सकता है. USB-C से HDMI एडॉप्टर या केबल की मदद से फोन को सीधे टीवी या मॉनिटर से जोड़ा जा सकता है. इसके बाद आप वीडियो, फोटो, प्रेजेंटेशन या और भी कंटेंट बड़ी स्क्रीन पर देख सकते हैं.
कीबोर्ड और माउस लगाकर फोन को बनाएं मिनी कंप्यूटर
आज स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग और मैसेजिंग तक सीमित नहीं हैं. लोग इनका इस्तेमाल ऑफिस के काम, ईमेल, डॉक्यूमेंट एडिटिंग और ऑनलाइन रिसर्च के लिए भी करते हैं.
USB-C पोर्ट के जरिए आप अपने फोन से कीबोर्ड और माउस कनेक्ट कर सकते हैं. इससे टाइपिंग तेज हो जाती है और वेब ब्राउजिंग भी ज्यादा आसान लगती है. अगर आपके पास USB-C डिवाइस नहीं है तो एडॉप्टर की मदद से नॉर्मल USB कीबोर्ड और माउस भी जोड़े जा सकते हैं.
गेमिंग कंट्रोलर जोड़कर लें कंसोल जैसा अनुभव
मोबाइल गेमिंग अब पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो चुकी है. कई Android स्मार्टफोन ऐसे गेम चला सकते हैं जो कभी केवल गेमिंग कंसोल या पीसी पर उपलब्ध थे. लेकिन टचस्क्रीन पर गेम खेलना हर बार सुविधाजनक नहीं होता.
USB-C पोर्ट की मदद से आप अपने फोन में गेमिंग कंट्रोलर जोड़ सकते हैं. Xbox या PlayStation कंट्रोलर को केबल के जरिए कनेक्ट कर सकते हैं जबकि कुछ मामलों में OTG एडॉप्टर की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा बाजार में ऐसे कंट्रोलर भी उपलब्ध हैं जो सीधे फोन से जुड़ जाते हैं और गेमिंग को और भी ज्यादा मजेदार बना देते हैं.
Ethernet के जरिए पाएं तेज और स्थिर इंटरनेट
कई बार Wi-Fi या मोबाइल डेटा की स्पीड उम्मीद के मुताबिक नहीं होती. वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन मीटिंग या हाई-क्वालिटी स्ट्रीमिंग के दौरान नेटवर्क की समस्या परेशान कर सकती है.
ऐसी स्थिति में USB-C पोर्ट आपके काम आ सकता है. USB-C से Ethernet एडॉप्टर की मदद से आप अपने फोन को सीधे राउटर से कनेक्ट कर सकते हैं. इससे इंटरनेट कनेक्शन और भी ज्यादा स्टेबल और तेज हो जाता है.
अगर आपके फोन में Android 6.0 या उससे नया वर्जन है तो ज्यादातर मामलों में यह कनेक्शन बिना किसी एक्सट्रा सेटअप के काम करने लगता है.
USB-C माइक्रोफोन से करें प्रोफेशनल ऑडियो रिकॉर्डिंग
स्मार्टफोन के माइक्रोफोन पहले की तुलना में काफी बेहतर हो चुके हैं लेकिन प्रोफेशनल ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए बाहरी माइक्रोफोन अभी भी ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं.
अगर आप कंटेंट क्रिएटर हैं, पॉडकास्ट रिकॉर्ड करते हैं या वीडियो बनाते हैं तो USB-C माइक्रोफोन आपके लिए काफी काम की चीज साबित हो सकती है. इसे सीधे फोन से कनेक्ट किया जा सकता है और यह बेहतर ऑडियो क्वालिटी उपलब्ध कराता है.
वायर्ड माइक्रोफोन का एक फायदा यह भी है कि इनमें वायरलेस माइक्रोफोन की तरह बैटरी खत्म होने या सिग्नल में रूकावट जैसी समस्या नहीं होती. इसलिए रिकॉर्डिंग ज्यादा साफ और भरोसेमंद रहती है.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>बिना ऑफिस चलता है Telegram का पूरा कारोबार, जानिए कैसे होती है कमाई</title>
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        <description><![CDATA[ Telegram Business: दुनियाभर में मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या एक अरब. भारत में कुल यूजर्स 15 करोड़ से ऊपर. इन सब को हैंडल करने के लिए Telegram के कर्मचारी किसी एक जगह ऑफिस में बैठकर काम नहीं करते हैं. अरबों यूजर्स वाले इस प्लेटफॉर्म के बारे में ज्यादातर लोगों को लगता होगा कि हजारों कर्मचारी किसी बड़े ऑफिस में बैठकर काम करते होंगे, लेकिन टेलीग्राम के मामले में ऐसा कुछ नहीं है. इस पूरी कंपनी में सिर्फ 30 कर्मचारी काम करते हैं. इसका ऑपरेशनल हेडक्वार्टर दुबई में है, लेकिन कर्मचारियों के लिए न तो कोई सेंट्रल ऑफिस है और न ही कोई HR. सभी इंजीनियर टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव को रिपोर्ट करते हैं.&amp;nbsp;
कैसे चलता है टेलीग्राम का बिजनेस?
भारत सरकार ने कुछ दिन पहले टेलीग्राम पर टेंपरेरी बैन लगा दिया था. इसके बाद यह प्लेटफॉर्म खूब चर्चा में रहा है और लोग इसके बारे में सबकुछ जानना चाहते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कंपनी में कुल 30 कर्मचारी काम करते हैं. इन 30 पर ही करोड़ों यूजर्स को हैंडल करने की जिम्मेदारी है. खास बात यह भी है कि ये कर्मचारी किसी एक जगह ऑफिस में बैठकर काम नहीं करते. टेलीग्राम में रिमोट वर्क कल्चर है, जिस कारण टेलीग्राम में नौकरी करने वाले इंजीनियर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से काम कर रहे हैं.
30 लोग करोड़ों यूजर्स को कैसे हैंडल करते हैं?
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि 30 लोग दुनियाभर के अरबों यूजर्स को कैसे हैंडल करते हैं. इसका जवाब है कि ये 30 इंजीनियर ऑटोमेशन, बॉट्स और एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से इस प्लेटफॉर्म को संभाल रहे हैं. टेलीग्राम में मॉडरेशन, सपोर्ट और सर्वर मैंटेनेस के लिए बॉट्स और ऑटोमेशन आदि का यूज किया जाता है. इसका पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर क्लाउड बेस्ड है, जिस कारण कुछ ही इंजीनियर के लिए बड़ी संख्या में यूजर को हैंडल करना आसान हो जाता है. छोटी टीम होने के कम लागत जैसे कई फायदे भी हैं, लेकिन यह नुकसान से भी अछूती नहीं है. छोटी टीम के कारण टेलीग्राम की कंटेट मॉडरेशन प्रैक्टिस अकसर विवादों के घेरे में रहती है.
कैसे कमाई करता है टेलीग्राम?
टेलीग्राम की कमाई का तरीका भी थोड़ा अलग है. यह प्राइवेट चैट, ग्रुप्स या मैसेज को मॉनेटाइज न कर पब्लिक ब्रॉडकास्ट चैनल को मॉनेटाइज करता है. इसके अलावा कंपनी प्रीमियम प्लान से भी रेवेन्यू जनरेट करती है. अगर एड प्रोडक्ट की बात करें तो स्पॉन्सर्ड मैसेज के जरिए कंपनी 1,000 सब्सक्राइबर वाले पब्लिक चैनल में एड दिखाने का मौका देती है. यह एड भी सिर्फ फ्री यूजर्स को नजर आएगी. इसके साथ कंपनी ने बिल्ट-इन बॉट्स, मिनी गेम्स और थर्ड-पार्टी ऐप्स के साथ एक डिजिटल इकोसिस्टम क्रिएट किया है. इसमें यूजर टेलीग्राम स्टार खरीदकर उनसे टेलीग्राम पर मौजूद कंटेट, सर्विसेस और गुड्स को खरीद सकता है. टेलीग्राम को इससे कमीशन मिलता है. इसके अलावा कंपनी एंटरप्राइजेज से API एक्सेस आदि देकर पैसा कमाती है.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>OTG, Air Fryer या Microwave? 24 घंटे चलने पर कौन खाता है सबसे ज्यादा बिजली और किसे खरीदने में है आपका फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ OTG Vs Air Fryer Vs Microwave: आजकल मॉडर्न किचन में OTG, Air Fryer और Microwave जैसे डिवाइस तेजी से फेमश हो रहे हैं. ये न सिर्फ खाना बनाने को आसान बनाते हैं बल्कि समय भी बचाते हैं. लेकिन जब बात बिजली की खपत और सही इनवेस्टमेंट की आती है तो कई लोग उलझन में पड़ जाते हैं कि आखिर कौन-सा डिवाइस सबसे कम बिजली खर्च करता है और किसे खरीदना ज्यादा फायदेमंद रहेगा. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.
कितना होता है तीनों का पावर कंजम्प्शन?
हर डिवाइस की बिजली खपत उसकी वॉट क्षमता पर निर्भर करती है. OTG (Oven Toaster Grill) आमतौर पर 1200W से 2000W तक बिजली का इस्तेमाल करता है. Air Fryer की पावर रेंज 1200W से 1800W के बीच होती है. वहीं, Microwave Oven आमतौर पर 800W से 1500W तक बिजली खपत करता है.
अगर इन तीनों को लगातार 24 घंटे तक चलाया जाए तो OTG सबसे ज्यादा बिजली खर्च कर सकता है क्योंकि इसकी हीटिंग एलिमेंट लंबे समय तक लगातार काम करते हैं.
24 घंटे चलाने पर किसका बिजली बिल बढ़ेगा ज्यादा?
मान लीजिए किसी OTG की क्षमता 2000W है. ऐसे में 24 घंटे लगातार चलने पर यह करीब 48 यूनिट बिजली खर्च कर सकता है. वहीं 1500W का Air Fryer लगभग 36 यूनिट और 1200W का Microwave करीब 28 से 30 यूनिट बिजली खर्च करेगा.
हालांकि असली इस्तेमाल में लोग इन डिवाइसों को कुछ मिनटों या घंटों के लिए ही इस्तेमाल करते हैं. इसलिए रोजमर्रा की जिंदगी में अंतर उतना बड़ा नहीं दिखता लेकिन लंबे समय में बिजली की बचत मायने रखती है.
खाना बनाने में कौन है सबसे तेज?
स्पीड की बात करें तो Microwave सबसे आगे माना जाता है. यह कुछ ही मिनटों में खाना गर्म या तैयार कर सकता है.
Air Fryer भी तेज है और कम तेल में कुरकुरा खाना बनाने के लिए मशहूर हो चुका है. दूसरी तरफ OTG को प्रीहीटिंग और कुकिंग में ज्यादा समय लगता है.
खरीदने में किसका फायदा ज्यादा?
अगर आपका मुख्य उद्देश्य खाना गर्म करना, डिफ्रॉस्ट करना और जल्दी कुकिंग करना है तो Microwave आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन साबित हो सकता है. वहीं, अगर आप हेल्दी लाइफस्टाइल पसंद करते हैं और कम तेल में स्नैक्स, फ्रेंच फ्राइज या रोस्टेड फूड बनाना चाहते हैं तो Air Fryer आपके लिए सही रहेगा. वहीं केक, कुकीज, पिज्जा और बेकिंग का शौक रखने वालों के लिए OTG सबसे बेहतरीन डिवाइस साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 00:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Google Maps पर दिखने वाला Leaf Icon क्या बताता है? जानिए कैसे बचा सकता है आपका पेट्रोल और पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps Leaf Icon: आज के समय में रास्ता खोजने और ट्रैफिक की जानकारी पाने के लिए Google Maps सबसे फेमश नेविगेशन ऐप्स में से एक है. हालांकि ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल केवल लोकेशन सर्च करने या दिशा-निर्देश पाने के लिए करते हैं लेकिन इसमें कई ऐसे फीचर्स भी मौजूद हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. इन्हीं में से एक खास फीचर है Eco-Friendly Route जिसे पहचानने के लिए Google Maps पर एक हरे पत्ते (Leaf Symbol) का निशान दिखाई देता है.
अगर आपने कभी रास्ता चुनते समय समय और दूरी के साथ यह हरा पत्ता देखा है तो इसका मतलब है कि Google Maps आपको ऐसा मार्ग दिखा रहा है जो पर्यावरण के लिए बेहतर होने के साथ-साथ ईंधन की खपत भी कम कर सकता है.
Green Icon का क्या मतलब है?
Google Maps पर दिखाई देने वाला ये ग्रीन icon इस बात का संकेत है कि आप एक ऐसे रूट पर यात्रा कर रहे हैं जिहां आपकी गाड़ी कम ईंधन खर्च करेगी. यह रूट केवल दूरी के आधार पर तय नहीं किया जाता बल्कि कई और भी जरूरी चीजों को ध्यान में रखकर किया जाता है जैसे:

सड़क पर ट्रैफिक की स्थिति
चढ़ाई और ढलान वाले रास्तों की संख्या
वाहन की लगातार एक जैसी गति बनाए रखने की संभावना
बार-बार रुकने और चलने की स्थित

इन सभी चीजों को ध्यान में रखकर Google Maps ऐसा रास्ता चुनने की कोशिश करता है जिसमें आपकी गाड़ी कम ईंधन खर्च करे.
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क्या Eco-Friendly Route हमेशा सबसे तेज होता है?
जरूरी नहीं कि यह मार्ग हर बार सबसे तेज हो. हालांकि Google Maps इस फीचर को तभी प्राथमिकता देता है जब पर्यावरण-अनुकूल रूट और सबसे तेज रूट के बीच समय का अंतर बहुत कम हो. इसका मतलब है कि अगर किसी दूसरे मार्ग से केवल कुछ मिनटों का ही फर्क पड़ता है और उसमें ईंधन की बचत ज्यादा हो सकती है तो Google Maps उसी रूट को हरे पत्ते के साथ दिखा सकता है. इस तरह यूजर्स को यात्रा में ज्यादा समय गंवाए बिना ईंधन बचाने का मौका मिलता है.
Eco-Friendly Route को कैसे ऑन करें?
Google Maps में यह सुविधा आमतौर पर डिफॉल्ट रूप से एक्टिव रहती है. फिर भी अगर आप इसे अपनी जरूरत के अनुसार ऑन या ऑफ करना चाहते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं.
Android और iPhone में सेटिंग बदलने का तरीका

Google Maps ऐप खोलें.
अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें.
Settings में जाएं.
Navigation Settings चुनें.
Route Options पर टैप करें.
यहां आपको Prefer Fuel-Efficient Routes या Eco-Friendly Routes का ऑप्शन मिलेगा.
अपनी जरूरत के अनुसार इसे ऑन या ऑफ कर दें.

नेविगेशन के दौरान भी बदल सकते हैं सेटिंग
अगर आप पहले से किसी रूट पर यात्रा कर रहे हैं तब भी इस फीचर को कंट्रोल किया जा सकता है. स्क्रीन के ऊपर दाईं ओर मौजूद तीन डॉट्स पर टैप करें. Prefer Fuel-Efficient Routes ऑप्शन चुनें. इसे ऑन या ऑफ करें. इससे आपको सफर के दौरान ही अलग-अलग रूट ऑप्शन देखने का मौका मिलेगा.
कैसे लोगों के लिए फायदेमंद है ये फीचर
Eco-Friendly Route सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि आपकी जेब के लिए भी फायदेमंद है. कम ईंधन खर्च होने से सफर की लागत घट सकती है और साथ ही कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है. अगर आप रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं तो Google Maps का यह छोटा-सा ग्रीन आईकन समय के साथ अच्छी-खासी ईंधन बचत में मदद कर सकता है.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Google, Maps, पर, दिखने, वाला, Leaf, Icon, क्या, बताता, है, जानिए, कैसे, बचा, सकता, है, आपका, पेट्रोल, और, पैसा</media:keywords>
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        <title>Android यूजर्स ध्यान दें! यह सीक्रेट प्राइवेसी सेटिंग अभी तक नहीं की ऑन तो खतरे में है डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ Android Privacy Feature: आज के समय में स्मार्टफोन हमारी निजी जानकारी का सबसे बड़ा खजाना बन चुके हैं. बैंकिंग ऐप्स, प्राइवेट फोटो, डॉक्यूमेंट्स, चैट और सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसी संवेदनशील जानकारियां फोन में ही मौजूद रहती हैं. ऐसे में सुरक्षा और प्राइवेसी पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई हैं.
दिलचस्प बात यह है कि Android 15 या उससे नए वर्जन वाले कई स्मार्टफोन्स में एक बेहद काम का प्राइवेसी फीचर मौजूद है लेकिन यह डिफॉल्ट रूप से ऑन नहीं होता. यही फीचर आपके फोन के अंदर एक अलग और सुरक्षित डिजिटल स्पेस तैयार करता है.
क्या है Private Space और Secure Folder?
Google Pixel और कुछ अन्य Android डिवाइसों में इस फीचर को Private Space कहा जाता है जबकि Samsung के स्मार्टफोन में इसे Secure Folder के नाम से जाना जाता है.
इसे आसान भाषा में समझें तो यह आपके फोन के अंदर एक दूसरा सुरक्षित सेक्शन होता है जो मेन प्रोफाइल से पूरी तरह अलग काम करता है. यहां आप ऐप्स इंस्टॉल कर सकते हैं, फाइलें स्टोर कर सकते हैं और इन्हें एक अलग पासवर्ड, PIN या पैटर्न से सुरक्षित रख सकते हैं. यह एक डिजिटल लॉकर की तरह काम करता है जहां रखा गया डेटा नॉर्मल फोन प्रोफाइल से अलग रहता है.
यह फीचर इतना खास क्यों है?
Private Space या Secure Folder का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां इंस्टॉल किए गए ऐप्स आपके मेन प्रोफाइल के डेटा तक आसानी से पहुंच नहीं पाते. उदाहरण के लिए, आप बैंकिंग ऐप्स को अलग सुरक्षित स्पेस में रख सकते हैं. प्राइवेट चैटिंग ऐप्स को छिपाकर इस्तेमाल कर सकते हैं.
अलग Google अकाउंट या प्रोफाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं. जरूरी डॉक्यूमेंट्स और फाइलें सुरक्षित स्टोर कर सकते हैं. इससे आपकी संवेदनशील जानकारी नॉर्मल ऐप्स और डेटा ट्रैकिंग से काफी हद तक सुरक्षित रहती है.
Android में Private Space कैसे ऑन करें?
अगर आपका फोन Android 15 या उससे नया वर्जन चला रहा है और यह फीचर सपोर्ट करता है तो इसे एक्टिवेट करने के लिए Settings &gt; Security &amp;amp; Privacy &gt; Private Space पर जाएं.
इसके बाद आपको Google अकाउंट से लॉगिन करना होगा और एक अलग लॉक सेट करना होगा. सेफ्टी के लिए यह लॉक आपके मेन फोन लॉक से अलग होना चाहिए.
Samsung फोन में Secure Folder कैसे सेटअप करें?
Samsung Galaxy सीरीज के स्मार्टफोन्स में:
Settings &gt; Security &amp;amp; Privacy &gt; More Security Settings &gt; Secure Folder
पर जाएं.
Secure Folder शुरू करने के लिए Samsung अकाउंट की जरूरत होती है. यहां आप अलग Google प्रोफाइल नहीं बना सकते लेकिन सुरक्षित स्टोरेज और ऐप आइसोलेशन की सुविधा मिलती है.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Wired या Wireless Security Camera? कौन है ज्यादा सुरक्षित और किसे खरीदने में है आपका फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Wired Vs Wireless Security Camera: घर और ऑफिस की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी कैमरे अब एक जरूरत बन चुके हैं. कुछ साल पहले तक कैमरा खरीदना काफी आसान था क्योंकि ज्यादातर सिस्टम वायर्ड (Wired) होते थे और इन्हें प्रोफेशनल्स द्वारा इंस्टॉल किया जाता था. लेकिन अब बाजार में वायरलेस (Wireless) कैमरों की बढ़ती लोकप्रियता ने ग्राहकों के सामने कई विकल्प खड़े कर दिए हैं.
वायरलेस कैमरों को आसानी से इंस्टॉल किया जा सकता है. इसके अलावा इनमें यूजर्स को स्मार्ट फीचर्स भी मिल जाते हैं साथ ही इन्हें इस्तेमाल करना भी काफी आसान होता है. जबकि वायर्ड कैमरे भरोसेमंद निगरानी और लगातार रिकॉर्डिंग के लिए पसंद किए जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दोनों में से बेहतर कौन है? आइए जानते हैं आपके लिए कौन सा रहेगा बेस्ट.
वायर्ड सिक्योरिटी कैमरा क्यों चुनें?
अगर आप लंबे समय तक अपने ऑफिस, घर या कहीं भी निगरानी चाहते हैं तो आपके लिए वायर्ड कैमरा एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है. बता दें कि इन कैमरों को सीधे बिजली और रिकॉर्डिंग सिस्टम से जोड़ा जाता है जिससे इन्हें बैटरी चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती. एक बार इंस्टॉल होने के बाद ये लंबे समय तक बिना किसी मेंटेनेंस के काम करते रहते हैं.
हालांकि इसके साथ एक बड़ी चुनौती भी रहती है. दरअसल, इनका इंस्टॉलेशन प्रोसेस काफी मुश्किल होता है. केबल बिछाने के लिए दीवारों, छतों या बाहरी हिस्सों में काम करना पड़ सकता है. कई बार इसके लिए विशेषज्ञ की मदद लेनी पड़ती है जिससे लागत बढ़ जाती है. इसके अलावा कैमरे की लोकेशन बदलना भी थोड़ा मुश्किल होता है.
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वायरलेस सिक्योरिटी कैमरा क्यों हो रहे फेमश?
वायरलेस कैमरों की सबसे बड़ी ताकत उनकी सुविधा है. इन्हें इंस्टॉल करने के लिए ज्यादा तकनीकी वायरिंग की जरूरत नहीं होती. ज्यादातर मॉडल सीधे घर के Wi-Fi नेटवर्क से कनेक्ट हो जाते हैं और मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही मिनटों में काम शुरू कर देते हैं.
वायरलेस कैमरों के कई सारे फायदे होते हैं जैसे,

आसान और तेज इंस्टॉलेशन
ड्रिलिंग या वायरिंग की आवश्यकता नहीं
जरूरत पड़ने पर आसानी से दूसरी जगह लगाया जा सकता है
स्मार्टफोन नोटिफिकेशन और रिमोट मॉनिटरिंग
क्लाउड स्टोरेज और टू-वे ऑडियो जैसे स्मार्ट फीचर्स

होती हैं ये कमियां
बैटरी आधारित मॉडल को समय-समय पर चार्ज करना पड़ता है. वहीं, इनकी काम करने की ताकत काफी हद तक Wi-Fi सिग्नल पर निर्भर करती है. अगर कैमरा ऐसे स्थान पर लगा है जहां नेटवर्क कमजोर है तो रिकॉर्डिंग में देरी, कनेक्टिविटी की समस्या या कुछ फुटेज मिस होने की संभावना रहती है.
किन लोगों के लिए बेहतर हैं?

किराए के मकान में रहने वाले लोग
अपार्टमेंट में रहने वाले लोग
स्मार्ट होम डिवाइस इस्तेमाल करने वाले
DIY (खुद इंस्टॉल करने वाले) यूजर्स

किसमें है ज्यादा स्टोरेज?
यह एक ऐसा पहलू है जिसे कई खरीदार नजरअंदाज कर देते हैं. वायर्ड कैमरा सिस्टम आमतौर पर DVR या NVR के जरिए लोकल स्टोरेज पर रिकॉर्डिंग सेव करते हैं. इसलिए एक बार सिस्टम लगाने के बाद अक्सर किसी मासिक शुल्क की जरूरत नहीं पड़ती.
वहीं, दूसरी ओर, कई वायरलेस कैमरे क्लाउड स्टोरेज सेवाएं उपलब्ध कराते हैं. हालांकि कुछ मॉडल लोकल स्टोरेज भी सपोर्ट करते हैं लेकिन एडवांस फीचर्स के लिए मासिक सब्सक्रिप्शन लेना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bluetooth Battery Usage: हर टाइम फोन में Bluetooth ऑन रखने से कितनी बैटरी खत्म होती है, जान लीजिए जवाब?</title>
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        <description><![CDATA[ 








Bluetooth Battery Usage:&amp;nbsp;बहुत से लोग सोचते हैं कि Bluetooth हमेशा ऑन रखने से फोन की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है, इसलिए वो हर बार इस्तेमाल के बाद उसे बंद कर देते हैं. लेकिन इसकी सच्चाई थोड़ी अलग है. काफी सारी टेस्टिंग करने के बाद सामने आया कि पूरे दिन Bluetooth ऑन रखने के बाद बैटरी पर कुछ खास असर नहीं पड़ा. उस टेस्ट में सामने आया कि पूरे दिन Bluetooth ऑन रखने के बाद भी फोन की बैटरी केवल करीब 1 से 2% तक ही कम हुई. यानी इससे यह बात साबित होती है कि बैटरी पर Bluetooth ऑन होने का असर बहुत कम पड़ता है.&amp;nbsp;
Bluetooth Low Energy कैसे बचाती है बैटरी?
इसकी वजह है आज की Bluetooth टेक्नोलॉजी, जिसे Bluetooth Low Energy यानी BLE कहा जाता है. यह टेक्नोलॉजी डेटा को छोटे-छोटे पैकेट में और बहुत कम बिजली खर्च करते हुए भेजती है, ताकि फोन और कनेक्ट किए गए डिवाइस दोनों की बैटरी बची रहे. इसका मतलब है जब Bluetooth सिर्फ ऑन रहता है पर किसी डिवाइस से जुड़ा नहीं होता, तो वह लगभग ना के बराबर बैटरी इस्तेमाल करता है. यानी जब आप Bluetooth का इस्तेमाल किसी डिवाइस से कनेक्ट करके चला रहे हैं तभी उसकी बैटरी जाती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः ChatGPT का बड़ा अपडेट! अब समय पर मिलेगा हर चीज का अलर्ट, जानिए कैसे काम करता है ये नया फीचर
बैटरी आखिर खर्च किस वजह से होती है?
ऐसे में हर किसी के दिमाग में आता है कि फोन इस्तेमाल न करने पर भी बैटरी जा किस लिए रही है. इसका कारण Bluetooth का ऑन होना नहीं है बल्कि इसका कारण है लगातार स्क्रीन और लोकेशन सर्विस का ऑन रहना.&amp;nbsp; एक टेस्ट के मुताबिक लगातार स्क्रीन के ऑन रहने से करीब 40% से 50% बैटरी इस्तेमाल होती है. जबकि GPS से हर घंटे लगभग 10 से 20% बैटरी जाती है. इसलिए अगर आपका फोन जल्दी डिस्चार्ज हो रहा है, तो सबसे पहले स्क्रीन ब्राइटनेस और लोकेशन सेटिंग्स पर ध्यान दें.&amp;nbsp;
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आप कभी भी Bluetooth बंद ही न करें. अगर आप किसी भी डिवाइस से कनेक्ट नहीं हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करने वाले, तो उससे बैटरी पर ना के बराबर असर पड़ता है.&amp;nbsp;




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 ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Bluetooth, Battery, Usage:, हर, टाइम, फोन, में, Bluetooth, ऑन, रखने, से, कितनी, बैटरी, खत्म, होती, है, जान, लीजिए, जवाब</media:keywords>
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        <title>GTA 6 फैंस हो जाएं तैयार! Gameplay Trailer को लेकर सामने आई बड़ी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ GTA 6 Gameplay: GTA 6 को लेकर खिलाड़ियों में उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल ही में Rockstar Games द्वारा प्री-ऑर्डर से जुड़ी जानकारी और संभावित कीमतों को लेकर कुछ संकेत सामने आए थे जिसके बाद से ही फैंस की नजरें गेम के अगले बड़े खुलासे पर टिकी हुई हैं. खास तौर पर GTA 6 के तीसरे ट्रेलर या गेमप्ले वीडियो को लेकर इंटरनेट पर कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं के अनुसार, 25 जून 2026 को Rockstar Games कोई बड़ा ऐलान कर सकती है. माना जा रहा है कि इसी दिन प्री-ऑर्डर की डिटेल्ड जानकारी के साथ GTA 6 का नया वीडियो भी जारी किया जा सकता है.
क्या सीधे Gameplay Video आएगा?
GTA कम्यूनिटी में इस समय एक दिलचस्प चर्चा चल रही है. फेमश यूट्यूबर DarkViperAU ने अपने एक वीडियो में दावा किया है कि Rockstar Games संभवतः GTA 6 का तीसरा ट्रेलर जारी करने के बजाय सीधे गेमप्ले रिवील पेश कर सकती है.
हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब गेम की रिलीज नजदीक आने के कारण Rockstar खिलाड़ियों को असली गेमप्ले दिखाने पर ज्यादा ध्यान दे सकती है. ऐसे में अगर Trailer 3 आता भी है तो उसके बाद गेमप्ले वीडियो का आना लगभग तय माना जा रहा है.
Gameplay Reveal में क्या देखने को मिल सकता है?
GTA 6 के गेमप्ले रिवील से फैंस को काफी उम्मीदें हैं. पिछले कुछ वर्षों में सामने आए लीक्स के आधार पर माना जा रहा है कि गेम की कई नई खूबियों को पहली बार विस्तार से दिखाया जा सकता है.
नए Vehicle Mechanics
Rockstar इस बार गाड़ी चलाने के अनुभव को पहले से ज्यादा असली बनाने की कोशिश कर सकती है. गेमप्ले रिवील में कारों, बाइक्स और अन्य गाड़ियों के नए कंट्रोल और फिजिक्स सिस्टम की झलक देखने को मिल सकती है. इससे यह भी पता चल सकेगा कि GTA 5 की तुलना में क्या बदलाव किए गए हैं.
इमारतों के अंदर जाने की सुविधा
सबसे ज्यादा चर्चा जिस फीचर की हुई है वह है बड़ी संख्या में इमारतों के अंदर एंट्री करने की ताकत. गेमप्ले वीडियो में मेन किरदारों को दुकानों में खरीदारी करते हुए या अलग-अलग स्थानों के अंदर घूमते हुए दिखाया जा सकता है.
फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
अभी तक Rockstar Games ने GTA 6 के अगले वीडियो या गेमप्ले रिवील की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है. इसलिए सामने आ रही सभी जानकारियों को फिलहाल अटकलों और अफवाहों के रूप में ही देखा जाना चाहिए. हालांकि इतना जरूर है कि आने वाले दिनों में GTA 6 से जुड़ा बड़ा खुलासा देखने को मिल सकता है जिसका इंतजार दुनियाभर के करोड़ों खिलाड़ी कर रहे हैं.
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>GTA, फैंस, हो, जाएं, तैयार, Gameplay, Trailer, को, लेकर, सामने, आई, बड़ी, जानकारी</media:keywords>
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    <item>
        <title>Father’s Day 2026: ये स्मार्ट गैजेट्स बन सकते हैं पापा के सबसे पसंदीदा साथी, दूसरा वाला है बेहद शानदार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fathers-day-2026-ये-स्मार्ट-गैजेट्स-बन-सकते-हैं-पापा-के-सबसे-पसंदीदा-साथी-दूसरा-वाला-है-बेहद-शानदार</link>
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        <description><![CDATA[ Father&amp;rsquo;s Day 2026: Father&amp;rsquo;s Day पर हर कोई अपने पिता को कुछ ऐसा गिफ्ट देना चाहता है जो सिर्फ खास ही नहीं बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को भी आसान बना दे. अगर आप भी इस बार पुराने गिफ्ट्स से हटकर कुछ बेहतरीन देने की सोच रहे हैं तो स्मार्ट गैजेट्स आपके लिए एक शानदार ऑप्शन साबित हो सकते हैं. ये डिवाइस न सिर्फ तकनीक का अनुभव कराते हैं बल्कि स्वास्थ्य, सुरक्षा और मनोरंजन में भी मदद करते हैं.
Smartwatch
आजकल स्मार्टवॉच सिर्फ समय देखने के लिए नहीं रह गए हैं. एडवांस स्मार्टवॉच लोगों की एक्टिविटी को भी ट्रैक करती है. यह हार्ट रेट मॉनिटरिंग, ब्लड ऑक्सीजन लेवल, स्लीप ट्रैकिंग और डेली एक्टिविटी रिकॉर्ड जैसे फीचर्स भी उपलब्ध कराती हैं. यदि आपके पापा फिटनेस को लेकर सजग हैं या अपनी सेहत पर नजर रखना चाहते हैं तो स्मार्टवॉच उनके लिए एक शानदार डिवाइस साबित हो सकता है.
Smart Speaker
स्मार्ट स्पीकर आजकल लोगों को खूब पसंद आते हैं. स्मार्ट स्पीकर ने लोगों के कई कामों को आसान बनाया है जैसे आवाज देकर गाने चलाना, मौसम की जानकारी लेना, अलार्म सेट करना या स्मार्ट होम डिवाइस कंट्रोल करना. तकनीक में रुचि रखने वाले पिताओं के लिए यह एक दिलचस्प और धांसू गिफ्ट हो सकता है.
Wireless Earbuds
लंबे सफर के दौरान ईयरबड्स लोगों के काफी काम आते हैं. ऐसे में अगर जो पिता अक्सर यात्रा करते हैं या फोन कॉल्स पर व्यस्त रहते हैं उनके लिए वायरलेस ईयरबड्स भी बेहतरीन डिवाइस साबित हो सकता है. इनकी मदद से बिना तारों के कॉलिंग, गाने सुनने और ऑनलाइन मीटिंग्स का आनंद लिया जा सकता है. लंबी बैटरी लाइफ और नॉइज कैंसिलेशन जैसे फीचर्स एक्सपीरिएंस को और बेहतर बनाते हैं.
Fitness Band
अगर आपके पापा नियमित रूप से वॉक या एक्सरसाइज करते हैं तो फिटनेस बैंड भी एक अच्छा गिफ्ट हो सकता है. यह कदमों की गिनती, कैलोरी ट्रैकिंग और डेली एक्टिविटी का रिकॉर्ड रखता है. इसकी मदद से वे अपनी फिटनेस प्रोग्रेस को आसानी से मॉनिटर कर सकते हैं.
Portable Powerbank
आज के समय में स्मार्टफोन हर व्यक्ति की जरूरत बन चुका है. ऐसे में यात्रा के दौरान बैटरी खत्म होना परेशानी पैदा कर सकता है. एक अच्छी क्षमता वाला पावर बैंक पिताजी को कहीं भी और कभी भी अपने फोन को चार्ज रखने की सुविधा देगा.
Smart Reading Light
यदि आपके पापा किताबें पढ़ने के शौकीन हैं तो स्मार्ट रीडिंग लाइट भी एक बेहतरीन गिफ्ट हो सकती है. इसकी एडजस्टेबल ब्राइटनेस लंबे समय तक पढ़ने में काफी अच्छा महसूस कराती है.
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        <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Father’s, Day, 2026:, ये, स्मार्ट, गैजेट्स, बन, सकते, हैं, पापा, के, सबसे, पसंदीदा, साथी, दूसरा, वाला, है, बेहद, शानदार</media:keywords>
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        <title>Data Security: बिना सोचे समझे फोन में कभी नहीं देनी चाहिए ये परमीशन, पड़ जाएंगे मुसीबत में </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/data-security-बिना-सोचे-समझे-फोन-में-कभी-नहीं-देनी-चाहिए-ये-परमीशन-पड़-जाएंगे-मुसीबत-में</link>
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        <description><![CDATA[ Data Security: बिना सोचे समझे फोन में कभी नहीं देनी चाहिए ये परमीशन, पड़ जाएंगे मुसीबत में  ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>पुराना फोन बेचना चाहते हैं भारतीय! लेकिन 70% लोग इस एक डर की वजह से रुक जाते हैं, जानें पूरी जानकारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पुराना-फोन-बेचना-चाहते-हैं-भारतीय-लेकिन-70-लोग-इस-एक-डर-की-वजह-से-रुक-जाते-हैं-जानें-पूरी-जानकारी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/पुराना-फोन-बेचना-चाहते-हैं-भारतीय-लेकिन-70-लोग-इस-एक-डर-की-वजह-से-रुक-जाते-हैं-जानें-पूरी-जानकारी</guid>
        <description><![CDATA[ Old Smartphone: आज के समय में लगभग हर व्यक्ति के घर में कोई न कोई पुराना स्मार्टफोन जरूर पड़ा होता है. कई लोग नया फोन खरीदने के बाद पुराने डिवाइस को घर में यूहीं फेंक देते हैं. हालांकि कुछ लोग पुराने फोन को बेचकर उससे कुछ पैसे बना लेते हैं. लेकिन आज भी ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो अभी भी अपना पुराना स्मार्टफोन बेचना नहीं चाहते हैं. इसके पीछे का कारण कम पैसा नहीं बल्कि फोन में मौजूद डेटा है. कई लोगों को लगता है कि पुराने फोन से उनका डेटा चोरी हो सकता है.
डेटा प्राइवेसी है बड़ी वजह
कैशिफाई द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत भारतीय अपने पुराने स्मार्टफोन को बेचने से इसलिए हिचकते हैं क्योंकि उन्हें अपने निजी डेटा के गलत इस्तेमा का डर होता है. 8,000 लोगों पर किए गए इस सर्वे में लगभग 75 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि पुराने फोन का डेटा किसी भी गलत हाथों में जा सकता है या फिर उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. बता दें कि आज कल लोग अपने स्मार्टफोन में बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड, फोटो, वीडियो, चैट से लेकर कई संवेदनशील जानकारियां भी स्टोर करते रखते हैं. ऐसे में लोगों की यह चिंता स्वाभाविक मानी जा रही है.
कीमत से ज्यादा जरूरी हो गई डेटा सुरक्षा
सर्वे में यह भी सामने आया कि जब लोग किसी प्लेटफॉर्म पर अपना पुराना फोन बेचने का फैसला करते हैं तो उनकी प्राथमिकता बदल चुकी है. लगभग 45 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे सबसे पहले डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को महत्व देते हैं जबकि केवल 29.5 प्रतिशत लोगों के लिए सबसे ज्यादा कीमत मिलना है जरूरी होता है. इससे यह साफ पता चलता है कि अब लोगों को अपनी प्राइवेसी और डेटा की चिंता ज्यादा है.
भरोसेमंद डेटा डिलीशन सिस्टम
सर्वे से पता चला कि ग्राहक सिर्फ चिंता नहीं जता रहे बल्कि समाधान भी चाहते हैं. करीब 69 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अगर किसी रीसेल प्लेटफॉर्म पर वेरिफाइड डेटा डिलीशन की सुविधा मिलती है तो लोगों का भरोसा ज्यादा बढ़ेगा. वहीं, दूसरी ओर, 83 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का मानना है कि फोन बेचते समय डेटा डिलीशन सर्टिफिकेट मिलना बेहद जरूरी है. यह प्रमाण पत्र इस बात की पुष्टि करेगा कि फोन का डेटा पूरी तरह सुरक्षित और स्थायी रूप से मिटा दिया गया है. दिलचस्प बात यह है कि इसमें से आधे से ज्यादा लोग ऐसी सुविधा के लिए अतिरिक्त शुल्क देने को भी तैयार हैं.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>पुराना, फोन, बेचना, चाहते, हैं, भारतीय, लेकिन, 70, लोग, इस, एक, डर, की, वजह, से, रुक, जाते, हैं, जानें, पूरी, जानकारी</media:keywords>
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        <title>सिर्फ WhatsApp नहीं! फोन की लगभग हर ऐप ट्रैक कर रही है आपकी एक्टिविटी, जानें कैसे करें बंद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिर्फ-whatsapp-नहीं-फोन-की-लगभग-हर-ऐप-ट्रैक-कर-रही-है-आपकी-एक्टिविटी-जानें-कैसे-करें-बंद</link>
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        <description><![CDATA[ App Tracking: स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. हम बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया, शॉपिंग और मनोरंजन तक लगभग हर काम मोबाइल ऐप के जरिए करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिन ऐप पर आप भरोसा करते हैं, वे आपके बारे में कितनी जानकारी जुटा रहे हैं? हैरानी की बात यह है कि आपके फोन में मौजूद कई ऐप लगातार आपकी एक्टिविटी पर नजर रख रहे हैं और आपकी निजी जानकारी को इकट्ठा कर रहे हैं.
आपके बारे में दोस्तों से ज्यादा जानते हैं ऐप
आज के दौर में मोबाइल ऐप केवल आपकी जरूरतें पूरी नहीं करते बल्कि आपकी आदतों, पसंद-नापसंद और लोकेशन तक की जानकारी भी रिकॉर्ड करते हैं. कई ऐप आपके फोन की लोकेशन, कॉन्टैक्ट्स, माइक्रोफोन और इंटरनेट ब्राउजिंग से जुड़ा डेटा इकट्ठा करते हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐप यूजर्स का डेटा विज्ञापन नेटवर्क और अन्य कंपनियों के साथ साझा करते हैं. यही वजह है कि आपको इंटरनेट पर अक्सर वही Ads दिखाई देते हैं जिनसे जुड़ी चीजें आपने हाल ही में सर्च की होती हैं.
कैसे तैयार होती है आपकी डिजिटल प्रोफाइल?
जब आप किसी ऐप को इंस्टॉल करते हैं तो वह कई तरह की परमिशन मांगता है. इनमें लोकेशन, कैमरा, माइक्रोफोन और कॉन्टैक्ट्स जैसे परमिशन शामिल हो सकती हैं.
कई बार नॉर्मल दिखने वाले ऐप्स जैसे मौसम बताने वाले ऐप, टॉर्च, फिटनेस ट्रैकर, शॉपिंग ऐप या मोबाइल गेम्स भी जरूरत से ज्यादा एक्सेस मांग लेते हैं. इन जानकारियों के आधार पर कंपनियां आपके नेचर के अनुसार आपकी प्रोफाइल तैयार कर सकती हैं जिसमें आपकी पसंद, यात्रा की जगहें, खरीदारी की आदतें और ऑनलाइन एक्टिविटी शामिल हो सकती हैं.
iPhone में ऐसे बंद करें ट्रैकिंग
अगर आप iPhone इस्तेमाल करते हैं तो कुछ आसान सेटिंग्स बदलकर अपनी प्राइवेसी को बेहतर बना सकते हैं.

Settings खोलें.
Privacy &amp;amp; Security पर जाएं.
Location Services ऑप्शन चुनें.
हर ऐप की लोकेशन परमिशन को चेक करें.
जरूरत न होने पर Never या While Using the App चुनें.
जिन ऐप्स को सटीक GPS की जरूरत नहीं है उनके लिए Precise Location बंद कर दें.

Android यूजर्स ऐसे करें अपनी सुरक्षा
Android स्मार्टफोन में भी लोकेशन ट्रैकिंग को बंद करना बेहद आसान है.

Settings में जाएं.
Location ऑप्शन खोलें.
App Permissions पर टैप करें.
सभी ऐप्स की परमिशन को चेक करें.
अनावश्यक ऐप्स के लिए Don&#039;t Allow या Only While Using the App चुनें.

सिर्फ लोकेशन ही नही इन परमिशन पर भी रखें नजर
ज्यादातर लोग केवल लोकेशन परमिशन पर ध्यान देते हैं जबकि कैमरा, माइक्रोफोन और कॉन्टैक्ट्स एक्सेस भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. यदि कोई कैलकुलेटर ऐप माइक्रोफोन की परमिशन मांग रहा है या कोई गेम आपके कॉन्टैक्ट्स तक पहुंचना चाहता है तो अलर्ट हो जाइए. ऐसे मामलों में तुरंत परमिशन हटाना बेहतर रहता है.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mobile Hacking Signs: कैसे पता करें कि आपका फोन हो गया हैक? ये टिप्स दूर कर देंगे आपकी दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Hacking Signs: क्या होगा अगर आपको पता चलें की आप जो स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं वो हैक हो चुका है. आजकल हैकिंग के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं, और सबसे डरावनी बात यह है कि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका फोन हैक हो चुका है. हैकर्स इतनी चालाकी से काम करते हैं कि फोन पहले जैसा ही दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर आपकी निजी जानकारी चोरी हो रही होती है.
ऐसे में सबसे जरूरी है कि आप कुछ आम संकेतों को पहचानना सीखें, ताकि समय रहते अपने फोन को सुरक्षित कर सकें. आइए जानते हैं कि कैसे पता लगाया जाए कि आपका फोन हैक हो गया है.&amp;nbsp;
बैटरी जल्दी खत्म होना हो सकता है खतरे का संकेत
सबसे पहला और सबसे आम संकेत है बैटरी का जल्दी खत्म होना. अगर आपका फोन पहले पूरा दिन चलता था, लेकिन अब अचानक से बैटरी बहुत तेजी से खत्म होने लगी है, तो ये किसी खतरनाक ऐप या वायरस की निशानी हो सकती है. इसके अलावा अगर फोन हल्का इस्तेमाल करने पर भी गर्म होने लगे या बिना किसी वजह के डेटा बहुत तेजी से खत्म हो रहा हो तो समझ जाइए कि बैकग्राउंड में कोई ऐप चुपके से काम कर रहा है. साथ ही अगर फोन की स्पीड अचानक धीमी हो गई है, ऐप्स बार-बार हैंग हो रहे हैं या खुद से बंद हो जाते हैं, तो ये भी एक बड़ा संकेत है कि कुछ गड़बड़ है.&amp;nbsp;
अचानक दिखने लगीं अनचाही पोस्ट?
दूसरा बड़ा संकेत है अजीब एक्टिविटी. अगर आपके फोन से बिना आपकी जानकारी के मैसेज या ईमेल भेजे जा रहे हैं, या आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐसी पोस्ट दिख रही हैं जो आपने डाली ही नहीं, तो ये साफ इशारा है कि कोई और आपके फोन को कंट्रोल कर रहा है. इसके अलावा अगर फोन की स्क्रीन पर बार-बार अजीब पॉप-अप या विज्ञापन आने लगें, या आपको ऐसे ऐप्स दिखें जो आपने कभी डाउनलोड ही नहीं किए, तो भी सतर्क हो जाना चाहिए.
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हैकिंग से बचने के लिए करें ये काम
फोन हैकिंग का पता चलने पर घबराने की बजाय तुरंत कुछ कदम उठाने चाहिए. सबसे पहले फोन की सेटिंग में जाकर देखिए कि कौन से ऐप्स इंस्टॉल हैं, और जो ऐप पहचान में न आएं उन्हें तुरंत डिलीट कर दीजिए. इसके बाद एक अच्छा एंटीवायरस ऐप डालकर पूरे फोन की स्कैनिंग कीजिए. साथ ही अपने सभी जरूरी अकाउंट्स, जैसे बैंकिंग, ईमेल और सोशल मीडिया का पासवर्ड तुरंत बदल दीजिए, और जहां भी मुमकिन हो वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन कर दीजिए.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब डेटा सिर्फ दिखेगा नहीं, महसूस भी होगा! वैज्ञानिकों ने बनाया गजब का Smart Glove, जानें कैसे करता है काम</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Glove: आज की डिजिटल दुनिया में हम ज्यादातर जानकारी को स्क्रीन पर चार्ट, ग्राफ और आंकड़ों के रूप में देखते हैं. लेकिन सोचिए, अगर किसी दिन आप अपने डेटा को केवल देख ही नहीं बल्कि उसे महसूस भी कर सकें तो कैसा अनुभव होगा?
इसी सोच को हकीकत में बदलने की दिशा में ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अनोखा पहनने वाला ग्लव तैयार किया है. यह स्पेशल ग्लव डेटा को गर्माहट और टच के रूप में महसूस कराने में सक्षम है जिससे जानकारी को समझने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है.
क्या है ThermoPhy ग्लव?
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड के शोधकर्ताओं ने ThermoPhy नाम का एक एक्सपेरिमेंटल स्मार्ट ग्लव तैयार किया है. इसका मकसद डिजिटल जानकारी को केवल विजुअल फॉर्म में दिखाने के बजाय उसे महसूस कराने में बदलना है.
यह ग्लव टच, तापमान और छोटे ढांचों की मदद से डेटा को इस तरीके से पेश करता है कि यूजर्स उसे महसूस कर सकें. इससे जानकारी ज्यादा व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई लगती है.
उंगलियों में छिपी है गर्माहट की तकनीक
ग्लव के अंदर बेहद छोटे हीटिंग एलिमेंट लगाए गए हैं जो उंगलियों के आसपास कंट्रोल्ड टेंपरेचर पैदा करते हैं. यह गर्माहट केवल ग्लव पहनने वाले व्यक्ति को महसूस होती है. इस तकनीक की खास बात यह है कि यह एक साथ दो स्तरों पर जानकारी साझा कर सकती है. बाहरी हिस्से का डिजाइन सभी लोगों को दिखाई देता है जबकि तापमान के जरिए मिलने वाली जानकारी निजी रहती है.
कैसे काम करता है ये ग्लव?
जानकारी के मुताबिक, ThermoPhy ग्लव के बाहरी हिस्से पर छोटे 3D-प्रिंटेड मॉड्यूल लगाए जा सकते हैं. ये मॉड्यूल अलग-अलग प्रकार के चार्ट और ग्राफ का भौतिक रूप तैयार करते हैं जैसे बार चार्ट, लाइन ग्राफ या हीट मैप.
यूजर्स इन डिजाइनों को न केवल देख सकता है बल्कि छूकर भी समझ सकता है. इससे डेटा को समझने का अनुभव पहले के मुकाबले ज्यादा वास्तविक बन जाता है.
कम लागत में तैयार किया गया प्रोटोटाइप
शोधकर्ताओं ने इस ग्लव को काफी कम लागत में तैयार किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों की कीमत लगभग 28 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रखी गई है जिससे भविष्य में इसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाना आसान हो सकता है.
हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इसे ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा जा सकता है.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>AI Bear Tracking: अब भालू का बिहैवियर ट्रैक करेगा AI, DNA कलेक्शन में भी करेगा मदद</title>
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        <description><![CDATA[ AI Bear Tracking: भालुओं की एक्टिविटी पर नजर रखने और डीएनए सैंपल जुटाने का तरीका पहले से ज्यादा आसान हो सकता है. रिसर्चर्स ने एक ऐसा एआई आधारित सिस्टम विकसित किया है, जो जंगलों में रहने वाले ब्राउन भालुओं के व्यवहार को ट्रैक करने के साथ-साथ यह भी पहचान सकेगा कि किसी जगह से डीएनए सैंपल मिलने की संभावना है या नहीं. माना जा रहा है कि यह तकनीक वन्य जीव संरक्षण और रिसर्च के क्षेत्र में बड़ी मदद साबित हो सकती है.
यह रिसर्च जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन की ओर से पब्लिश किया गया है. इसमें बताया गया है कि एआई की मदद से कैमरा ट्रैप में कैद तस्वीरों का विश्लेषण कर भालुओं की खास एक्टिविटी को पहचाना जा सकता है. खासतौर पर सिस्टम इस बात पर नजर रखता है कि भालू कब दौ पैरों खड़ा होता है, क्योंकि ऐसा व्यवहार अक्सर पेड़ों से शरीर रगड़ने के दौरान देखा जाता है.&amp;nbsp;
कैसे जुटाए जाते हैं भालू के डीएनए सैंपल?&amp;nbsp;
वन्य जीव एक्सपर्ट्स लंबे समय से भालुओं के फर के जरिए डीएनए सैंपल इकट्ठा करते रहे हैं. इसके लिए पेड़ों पर कांटेदार तार लगाए जाते हैं, जिन्हें हेयर स्नेर कहा जाता है. जब भालू पेड़ से शरीर रगड़ता है तो उसके कुछ बाल तारों में फंस जाते हैं, जिन्हें बाद में डीएनए जांच के लिए इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि इस प्रक्रिया में रिसर्चर्स को बार-बार इन जगहों पर जाकर सैंपल इकट्ठा करने पड़ते हैं, जिससे समय और संसाधनों बहुत खर्च होते है. वहीं कई बार निरीक्षण के बावजूद उपयोगी सैंपल नहीं मिलते हैं.&amp;nbsp;
एआई ने कैसे पहचाना भालुओं का व्यवहार?
रिसर्चर्स ने 2020 से 2023 के बीच कैमरा ट्रैप से जुटाए गई 2,373 तस्वीरों का इस्तेमाल किया. चूंकि भालुओं की एक्टिविटी से जुड़ा कोई डेटासेट उपलब्ध नहीं था, इसलिए वैज्ञानिकों ने तस्वीरों में भालुओं के शरीर के 15 प्रमुख हिस्सों को मैन्युअल चिन्हित किया. इसके बाद YOLOv11 आधारित पोज एस्टिमेशन मॉडल को ट्रेन किया गया. यह मॉडल भालू के शरीर की स्थिति को पहचानने में 93.2 प्रतिशत तक सटीक साबित हुआ. वहीं एक अलग मशीन लर्निंग मॉडल ने भालुओं के दो पैरों पर खड़े होने और चार पैरों पर चलने जैसी मुद्राओं को 96.1 प्रतिशत सटीकता के साथ वर्गीकृत किया.&amp;nbsp;
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दूर दराज के इलाकों में भी करेगा काम&amp;nbsp;
रिसर्चर्स के अनुसार, यह सिस्टम उन क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी है, जहां मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट कनेक्टिविटी बहुत सीमित होती है. आमतौर पर कैमरा टाइप की तस्वीरें भेजने के लिए काफी डेटा की जरूरत होती है, लेकिन एआई सिस्टम पूरी तस्वीर भेजने के बजाय केवल जरूरी पोज डेटा और सरल विजुअल जानकारी सैटेलाइट लिंक के जरिए ट्रांसफर कर सकता है. इससे डेटा ट्रांसफर का आकार कई मेगाबाइट से घटकर लगभग 100 बाइट तक रह जाता है, जिससे दूर के इलाकों में भी निगरानी आसान हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Reliance AGM: भारत की भाषा में AI से लेकर सैटेलाइट इंटरनेट तक, ये रहीं बड़ी अनाउंसमेंट</title>
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        <description><![CDATA[ Reliance AGM Tech Announcement: रिलायंस की 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग में कंपनी ने कई बड़े ऐलान किए. इनमें टेक से जुड़ी कुछ बड़ी घोषणाएं भी शामिल हैं. हर इवेंट की तरह इसमें भी एआई पर खास फोकस रहा. रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत को बाहर बने एआई का केवल उपभोक्ता नहीं बने रहना चाहिए. भारत को एआई निर्माता और ग्लोबल लीडर बनना चाहिए. अगर इस इवेंट की बड़ी घोषणाओं पर नजर डालें तो रिलायंस की मीडिया और एंटरटेनमेंट डिवीजन JioStar ने एक नए जेनएआई स्टूडियो का ऐलान किया है. इसके अलावा एआई पावर्ड कॉल एजेंट, सैटेलाइट इंटरनेट और भारत के लोगों के लिए भारत की भाषा में एआई पर काम करने की अनाउंसमेंट भी की है. आइए इस मीटिंग में हुए बड़ी टेक अनाउंस्मेंट पर एक नजर डालते हैं.
जामनगर में बन रहा भारत का एआई बैकबोन- जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने बताया कि रिलायंस इंटेलीजेंस जामनगर में भारत का सॉवरेन एआई बैकबोन बना रहा है. यह इंफ्रास्ट्रक्चर रिलायंस की अपनी सोलर एनर्जी से ऑपरेट होगा और इसकी पहली 120 मेगावाट क्षमता इस साल के अंत तक शुरू करने की योजना है. पूरी तरह चालू होने पर यह क्षमता दो लाख से अधिक H100-इक्विवेलेंट जीपीयू तक बढ़ सकती है.
कंटेट प्रोडक्शन के लिए एआई स्टूडियो- रिलायंस AGM में कंपनी ने जियोस्टार जेनएआई मीडिया स्टूडियो (JAMS) को रिवील किया है. यह एक एआई पावर्ड प्लेटफॉर्म है, जो कंटेट प्रोडक्शन में आइडिएशन से लेकर इमेज, वीडियो और फाइनल प्रोडक्शन तक पूरा काम कर सकेगा. इसे अनाउंस करते हुए जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कहा कि यह नई जनेरशन के कंटेट टेक्नोलॉजिस्ट को नर्चर करने के लिए लाया गया है, जो स्टोरीटेलिंग को एआई के साथ मिलाकर प्रीमियम कंटेट प्रोड्यूस करना चाहते हैं.
एआई एजेंट के लिए नया प्लेटफॉर्म- &amp;nbsp;रिलायंस ने नए Jio Teleframe को भी पेश किया है. यह वॉइस-फर्स्ट एजेंटिक एआई सिस्टम है, जो घर में एंटरटेनमेंट, शॉपिंग और कनेक्टेड होम डिवाइसेस के लिए यूज होने वाले एजेंट को कंट्रोल करने के लिए एक हब के तौर पर काम करेगा. इसे हर भारतीय भाषा में एक्सेस किया जा सकता है.&amp;nbsp;
एआई पावर्ड कॉल एजेंट- आकाश अंबानी ने एआई पावर्ड कॉल एजेंट का भी ऐलान किया है. यह एक नेटिव वॉइस असिस्टेंट है, जिसे जियो नेटवर्क में इंटीग्रेट किया जाएगा. इसके लिए किसी ऐप या अलग से फोन नंबर की जरूरत नहीं पडे़गी और यह भी सभी भारतीय भाषाओं में काम करेगा. यूजर की परमिशन मिलने पर यह कॉल ज्वॉइन कर रियल टाइम में उसे ट्रांसक्राइब कर पाएगा. कॉन्फ्रेंस कॉल में यह 10 स्पीकर को पहचान सकेगा और कॉल में भाग लेने वाले बाकी लोगों के साथ भी मीटिंग के नोट्स शेयर कर सकेगा. बाकी खूबियों की बात करें तो यह कॉल अटेंड करते करते हुए कैब बुकिंग, फूड ऑर्डर, टेबल रिजर्वेशन और मीटिंग शेड्यूल करने जैसे काम भी कर पाएगा. यह फीचर इस साल के आखिर तक रोल आउट किया जा सकता है.
एआई को एक्सेसिबल बनाने की कोशिश- आकाश अंबानी ने यह भी कहा कि जियो भारतीय भाषाओं में एआई को तैयार कर रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे यूज कर पाएं. उन्होंने कहा कि रिलायंस भारत के लिए एआई बना रही है, जो एक दिन पूरी दुनिया की सेवा करेगी. साथ ही इस दशक के अंत तक एआई को किफायती बनाने पर भी काम चल रहा है.
छात्रों से लेकर किसानों तक, हर किसी के लिए एआई- रिलायंस इंटेलिजेंस 22 भारतीय भाषाओं में भरोसेमंद, किफायती और अलग-अलग भाषाओं में एआई सेवाएं देने की तैयारी कर रही है, इनमें जियोभारतआईक्यू, एआई व्यापार, जियोहेल्थआईक्यू, जियोलर्नआईक्यू और जियोकृषिआईक्यू जैसी सेवाएं शामिल होंगी. इन्हें किसानों, छात्रों, दुकानदारों, परिवारों और छोटे कारोबारियों के लिए एआई को उपयोगी बनाने के लिए लाया जा रहा है.
सैटेलाइट इंटरनेट पर भी है नजर
सैटेलाइट इंटरनेट पर भी जियो की नजर है और कंपनी इसे ग्रोथ के अगले पड़ाव के तौर पर देख रही है. मुकेश अंबानी ने अपने संबोधन में कहा कि जियो सैटेलाइट कनेक्टिविटी की संभावनाएं तलाश रही हैं. जियो ने भारत को ग्राउंड पर कनेक्ट किया है. अब यह तैयारी चल रही है कि भारत को आसमान से कैसे कनेक्ट किया जा सकता है.
जियोहॉटस्टार पर आएगा मल्टी-फ्रेम व्यूइंग का फीचर
AGM में जियोहॉटस्टार पर मल्टी-फ्रेम व्यूइंग के फीचर का भी ऐलान किया गया है. इसकी मदद से यूजर एक साथ चार अलग-अलग शोज या स्ट्रीम्स देख पाएंगे. यानी क्रिकेट मैच का मजा लेते-लेते यूजर गाने भी सुन पाएंगे और न्यूज चैनल पर अपडेट भी ले सकेंगे. एक साथ अलग-अलग फ्रेम में देखते हुए आप अपनी मर्जी से किसी भी फ्रेम का ऑडियो चुन पाएंगे. अगर जियोहॉस्टार के मंथली एक्टिव यूजर्स की बात करें तो इनकी संख्या 45 करोड़ से पार हो गई है, जबकि शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म तड़का भी दो महीने के भीतर 10 करोड़ से ज्यादा दर्शक जुटा चुका है.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
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        <description><![CDATA[ Mobile Data vs Wi-Fi Battery Consumption: आजकल फोन सिर्फ कॉलिंग और मैसेजिंग के लिए यूज नहीं हो रहे हैं. इन पर दिनभर सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग चलती रहती है और ऑनलाइन पेमेंट, गेमिंग, वीडियो कॉल और ऑनलाइन मीटिंग जैसे कई कामों में इन्हें इस्तेमाल किया जा रहा है. इन चीजों के लिए फोन का इंटरनेट से कनेक्ट रहना जरूरी है. जब इंटरनेट की बात आती है तो लोग बिना कुछ सोचे सुविधा के हिसाब से मोबाइल डेटा या वाईफाई को ऑन कर लेते हैं. आप मोबाइल डेटा या वाईफाई में से क्या चुनते हैं, इसका फोन की बैटरी पर सीधा असर पड़ता है. आज हम जानेंगे कि इन दोनों में से कौन-सा ज्यादा बैटरी की खपत करता है.
मोबाइल डेटा है बैटरी का असली दुश्मन
अगर मोबाइल डेटा और वाईफाई की बात की जाए तो मोबाइल डेटा फोन की बैटरी का बड़ा दुश्मन है. स्ट्रॉन्ग वाईफाई नेटवर्क की तुलना में 4G या 5G नेटवर्क को यूज करना बैटरी पर 50-120 प्रतिशत तक ज्यादा असर डालता है. यानी मोबाइल डेटा को यूज करना बैटरी के लिए ज्यादा भारी काम है. यही कारण है कि वाईफाई से कनेक्टेड रहते हुए फोन की बैटरी ज्यादा चलती है.&amp;nbsp;
मोबाइल डेटा ज्यादा बैटरी क्यों खाता है?
इसके पीछे दो कारण हैं. पहला है सिग्नल डिस्टेंस. जब आप मोबाइल डेटा का यूज कर रहे होते हैं तो फोन को टावर से कनेक्ट होने के लिए ज्यादा पावर की जरूरत पड़ती है. यह टावर 100 मीटर दूर भी हो सकता है और इसकी दूरी 2-3 किलोमीटर भी हो सकती है. टावर से फोन जितनी दूर होगा, उसे नेटवर्क लेने के लिए उतना ही ज्यादा काम करना पड़ेगा. इसमें ज्यादा बैटरी कंज्यूम होती है. दूसरा कारण है कमजोर नेटवर्क. मोबाइल डेटा ऑन रहते हुए फोन लगातार स्ट्रॉन्ग नेटवर्क की तलाश में रहता है. जब तक इसे स्ट्रॉन्ग और स्टेबल नेटवर्क नहीं मिलता, इसकी स्कैनिंग चलती रहती है. इस कारण बैटरी पर ज्यादा लोड पड़ता है. दूसरी वाईफाई के मामले में ऐसा नहीं होता. वाईफाई राउटर फोन से कुछ ही कदमों की दूरी पर होता है, जिस कारण बैटरी पर ज्यादा लोड नहीं आता.
बैटरी बचाने के काम आएंगी ये टिप्स

मोबाइल डेटा की जगह अवेलेबल होने पर वाईफाई यूज करें.&amp;nbsp;
कमजोर नेटवर्क है तो मोबाइल डेटा को बंद कर दें.
सफर के दौरान जरूरत न होने पर मोबाइल डेटा को बंद रखें.
फोन के सॉफ्टवेयर और ऐप्स को हमेशा अपडेटेड रखें.

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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Phonepe ला रहा नया नियम, अब Wallet यूज नहीं करने पर कटेंगे 100 रुपये!</title>
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        <description><![CDATA[ PhonePe New Rule: आजकल पेमेंट करने के लिए लोग अक्सर डिजिटल पेमेंट का उपयोग करते हैं, जिनमें फोन पे और पेटीएम जैसे ऐप शामिल है. PhonePe&amp;nbsp; पर कई लोग वॉलेट (Phonepe Wallet) का भी उपयोग करते हैं, जबकि कई लोग इसका उपयोग नहीं करते हैं. अब इसे लेकर बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल डिजिटल पेमेंट प्लेटफार्म फोन पे ने अपने वॉलेट को लेकर नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किए गए वॉलेट पर अब मेंटेनेंस फीस वसूली जाएगी.
कंपनी के अनुसार, अगर किसी यूजर ने 365 दिनों तक फोन पे वॉलेट से कोई पेमेंट नहीं किया तो उसका वॉलेट इनएक्टिव माना जाएगा और उस पर हर तिमाही 100 रुपये की फीस लग सकती है. फोन पे का कहना है कि यह फीस वॉलेट के रखरखाव, प्लेटफॉर्म अपडेट, सिक्योरिटी और तकनीकी सेवाओं को जारी रखने के लिए लिया गया है. फोन पे का यह फैसला आने के बाद लोगों ने नाराजगी भी जाहिर की. कई लोगों का कहना है कि वह पेमेंट के लिए सीधे यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं और वॉलेट का उपयोग नहीं करते ऐसे में उन पर फीस लगाना उचित नहीं है.
कब माना जाएगा वॉलेट इन एक्टिव?
कंपनी के अनुसार, केवल फोन पे वॉलेट से किए गए वित्तीय ट्रांजैक्शन ही वॉलेट एक्टिविटी माने जाएंगे. अगर 365 दिनों में वॉलेट के जरिए कोई लेनदेन नहीं हुआ तो वॉलेट इनएक्टिव कैटेगरी में आ जाएगा. सिर्फ फोन पे ऐप खोलना यूपीआई से पेमेंट करना, मोबाइल रिचार्ज, बिल पेमेंट करना, लोन इंश्योरेंस या दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल करने से वॉलेट एक्टिव नहीं माना जाएगा. केवाईसी अपडेट करने से भी वॉलेट एक्टिव नहीं माना जाएगा.
कैसे कटेगी 100 रुपये की फीस?
फोन पे पहले यूजर को 15 दिनों तक कई बार नोटिफिकेशन भेजकर चेतावनी देगा. इस दौरान अगर यूजर वॉलेट से कोई ट्रांजैक्शन करता है तो वॉलेट दोबारा एक्टिव हो जाएगा और कोई फीस नहीं ली जाएगी. लेकिन अगर निर्धारित समय के अंदर कोई एक्टिविटी नहीं होती है, तो कंपनी वॉलेट बैलेंस से 100 रुपये की तिमाही मेंटेनेंस फीस काट लेगी. अगर वॉलेट में 100 रुपये से कम बैलेंस है, तो उपलब्ध पूरी राशि काट ली जाएगी और बैलेंस जीरो हो जाएगा. कंपनी ने साफ किया है कि वॉलेट बैलेंस कभी नेगेटिव नहीं होगा.
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यूजर्स क्यों जाता रहे नाराजगी?
नए नियम की जानकारी सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए. कुछ लोगों का कहना है कि ज्यादातर लोग फोन पे वॉलेट के बजाय सीधे बैंक अकाउंट से यूपीआई पेमेंट करते हैं. ऐसे में वॉलेट इन एक्टिव रहने पर फीस लगाना सही नहीं है. वहीं कुछ यूजर्स ने इसे ऐसी सुविधा के लिए चार्ज बताया, जिसका वह इस्तेमाल ही नहीं करते. वहीं आपको बता दें कि डिजिटल वॉलेट इंडस्ट्री में इस तरह की फीस कोई नहीं बात नहीं है. इससे पहले मोबिक्विक भी इनएक्टिव वॉलेट पर मेंटेनेंस चार्ज लगाने की घोषणा कर चुका है. एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने भी पहले इनएक्टिव वॉलेट के लिए मेंटेनेंस फीस लागू की थी, जिसे बाद में वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज मॉडल में बदल दिया गया.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Android फोन में वायरस घुसने पर नजर आते हैं ये वॉर्निंग साइन, बड़ा नुकसान होने से ऐसे करें बचाव</title>
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        <description><![CDATA[ Android Phone Virus Sign: आजकल एंड्रॉयड फोन में साइबर अटैक से बचाने के लिए कई तरह की प्रोटेक्शन मिलती है, लेकिन नए खतरे भी लगातार सामने आते रहते हैं. इंटरनेट से कनेक्टेड रहने के कारण स्मार्टफोन में वायरस आने का खतरा बना रहता है. साइबर अटैकर्स डेटा से लेकर फाइनेंशियल डिटेल्स तक चुराने के लिए फोन में वायरस इंस्टॉल कर सकते हैं. अब इतने एडवांस वायरस आ गए हैं कि उन्हें कब इंस्टॉल कर दिया जाता है, पता भी नहीं चलता. इसका पता तभी चलता है, जब आपका फोन कुछ वॉर्निंग साइन देने लगता है. आज हम जानेंगे कि फोन में वायरस इंस्टॉल होने पर यह क्या संकेत देता है और इस खतरे से कैसे बचा जा सकता है.
वायरस घुसने पर ये संकेत देगा एंड्रॉयड फोन
वायरस घुसने पर फोन कई वॉर्निंग साइन देने लगता है. आपके किए बिना भी अगर किसी के पास आपके नंबर से कॉल और मैसेज जा रहे हैं तो यह बड़ा रेड फ्लैग है. कॉल लॉग और सेंट मैसेज सेक्शन में जाकर आप यह देख सकते हैं. इसी तरह अगर आपके फोन में कोई अनजान ऐप नजर आ रही है तो यह भी खतरे की घंटी है. कई बार वायरस अपने टास्क पूरे करने के लिए यूजर की परमिशन के बिना ही ऐप डाउनलोड कर लेते हैं. इसलिए इस बात पर भी ध्यान रखे. इसके अलावा अगर आपके फोन में गैर-जरूरी पॉप-अप्स आने लगे हैं तो यह एडवेयर का काम हो सकता है. इन पॉप-अप पर क्लिक न करें और पॉप-अप दिखाने वाली ऐप को डिलीट कर दें. बाकी वॉर्निंग साइन की बात करें तो वायरस घुसने पर फोन लगातार काम करने के कारण ओवरहीट होने लगता है और बैटरी लाइफ भी कम हो जाती है. अगर आपको अपने फोन में ऐसे वॉर्निंग साइन नजर आ रहे हैं तो अलर्ट रहने की जरूरत है.
ऑनलाइन खतरों से कैसे बचें?
अगर आपको लगता है कि फोन में वायरस घुस आया है तो सबसे पहले इसे फ्लाइट मोड में डाल दें. इस तरह आप वायरस को हैकर से डिस्क्नेक्ट कर पाएंगे. इसके बाद फोन को सेफ मोड में बूट करे. इससे थर्ड-पार्टी ऐप्स डिसेबल हो जाएंगी. एहतियात की बात करें तो ऑनलाइन खतरों से बचने के लिए अनजान सोर्स और लिंक से ऐप्स डाउनलोड न करें. अपने फोन में गूगल प्ले प्रोटेक्ट को इनेबल रखें. चइसके अलावा अपने फोन के सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखें. यह साइबर हमलों से बचाव में आपकी मदद कर सकता है.
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        <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>कूलिंग पाने के लिए लगेगा सिर्फ एक बाल्टी पानी, चिलचिलाती गर्मी में भी बर्फ जैसी ठंडक देगा एसी</title>
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        <description><![CDATA[ AC Cooling Tips: उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में गर्मी के मौसम में तापमान 50 डिग्री के पास पहुंच जाता है. इतने टेंपरेचर पर एसी के भी पसीने छूट सकते हैं. इतनी गर्मी में एसी को कूलिंग के लिए बहुत ताकत लगानी पड़ती है और इसके बावजूद कमरा पूरी तरह ठंडा नहीं हो पाता. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो एक बाल्टी पानी से इसका समाधान हो सकता है. एक बाल्टी पानी से आप चिलचिलाती गर्मी में भी बर्फ जैसी ठंडक पा सकेंगे. आइए जानते हैं कि यह तरीका कैसे काम करेगा.
गर्मी में कूलिंग क्यों नहीं दे पाता एसी?
एसी कमरे के अंदर की हवा को खींचकर इसे कंडेनसर कॉइल में से गुजारता है, जिससे हवा ठंडी हो जाती है. जब बाहर टेंपरेचर ज्यादा होता है तो कॉइल हवा को पूरी तरह ठंडा नहीं कर पातीं. इस कारण घंटों तक एसी यूज करने के बावजूद कमरा ठंडा नहीं होता. दूसरी तरफ एसी लगातार रूम में ठंडक देने के लिए फुल लोड पर काम करता है, जिससे बिजली का बिल बढ़ना तय है.
एक बाल्टी पानी करेगा कमाल
गर्मी में कॉइल गर्म हो जाती हैं. जब आप इस पर ठंडा पानी डालेंगे, यह कंडेनसर कॉइल से टच होकर भाप बन जाएगा. इस दौरान यह कॉइल की गर्मी को भी साथ खींच लाएगा. जब कॉइस ठंडी होगी तो इसके अंदर का रेफ्रिजेरेंट हवा को ज्यादा ठंडा कर पाएगा. इससे कूलिंग भी ज्यादा होगी और कंप्रेसर को पूरे लोड के साथ काम नहीं करना पड़ेगा. यह तरीका सूखे और गर्म मौसम में प्रभावी तरीके से काम करता है.&amp;nbsp;
पानी डालने से पहले एसी को कर लें बंद
एसी की आउटडोर यूनिट पर पानी डालने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा. सबसे पहले एसी को बंद कर दें. इसके बाद बाल्टी या पाइप की मदद से मेटल फिन्स पर पानी डालें. ध्यान रहे कि पानी का प्रेशर तेज न हो और पानी इलेक्ट्रिक पैनल, वायरिंग और कंट्रोल बॉक्स में न चला जाए. पानी डालने के बाद एसी को 15-20 मिनट के लिए पूरी तरह सूखने दें और फिर यूज करें. इसके अलावा एसी फिल्टर और आउटडोर यूनिट की साफ-सफाई रखने से भी कूलिंग एफिशिएंसी बढ़ती है.
ज्यादा कूलिंग के लिए अपनाएं ये टिप्स

रूम के दरवाजे और खिड़की पूरी तरह बंद रखें.
एसी का टेंपरेचर 24 डिग्री पर सेट करें और इसे बार-बार न बदलें.
एसी के साथ सीलिंग फैन चलाने से भी कूलिंग बढ़ती है और कमरा जल्दी ठंडा होगा.

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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 23:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>AI Agents के इस कारनामे ने बढ़ा दी चिंता! इन लोगों की जा सकती है नौकरी, जानिए पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चैटबॉट या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रह गया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में इसकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है. अब AI कंपनी Anthropic की एक नई रिपोर्ट ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कोडिंग से जुड़े नौकरियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, AI एजेंट्स कई रियल प्रोजेक्ट्स में इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के बराबर परफॉर्मेंस करते दिखाई दे रहे हैं.
कोडिंग टास्क में इंजीनियरों की बराबरी कर रहा AI
Anthropic ने अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच Claude Code के लगभग 4 लाख सेशन का विश्लेषण किया. इस स्टडी में यह समझने की कोशिश की गई कि लोग AI के साथ किस तरह काम कर रहे हैं, कौन-कौन से काम किए जा रहे हैं और उनमें सफलता की दर कितनी है.
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला परिणाम यह रहा कि AI एजेंट्स कई कोडिंग कामों में पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के जैसे ही सफलता हासिल कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि तकनीकी बैकग्राउंड न रखने वाले लोग भी AI की मदद से ऐसे प्रोग्रामिंग काम पूरे कर पा रहे हैं जिन्हें पहले केवल अनुभवी डेवलपर्स ही आसानी से कर सकते थे.
AI कर रहा पूरा काम
रिपोर्ट के अनुसार, इंसानों और AI के बीच काम का एक नया बंटवारा उभरकर सामने आया है. ज्यादातर मामलों में लोग यह तय करते हैं कि उन्हें क्या बनाना है जबकि AI यह तय करता है कि उसे कैसे बनाना है.
यानी प्रोजेक्ट की प्लानिंग, टारगेट और दिशा तय करने का काम इंसान कर रहे हैं जबकि कोड लिखना, कमांड चलाना, बग ठीक करना और तकनीकी कामों जैसी जिम्मेदारियां AI संभाल रहा है. इससे डेवलपमेंट प्रोसेस पहले की तुलना में काफी तेज हो रही है.
डिबगिंग में लगा समय हुआ आधा
स्टडी में यह भी सामने आया कि AI टूल्स के इस्तेमाल से सॉफ्टवेयर में आने वाली कमियों को ठीक करने में लगने वाला समय काफी कम हो गया है. Anthropic के आंकड़ों के अनुसार, डिबगिंग से जुड़े सेशनों की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक घट गई.
आसान भाषा में कहें तो AI अब केवल कोड लिखने में ही नहीं बल्कि गलतियों को पहचानने और उन्हें सुधारने में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है. इससे डेवलपर्स का समय बच रहा है और प्रोजेक्ट जल्दी पूरे हो रहे हैं.
क्या कोडिंग नौकरियों पर मंडरा रहा है खतरा?
रिपोर्ट यह नहीं कहती कि AI पूरी तरह इंसानी प्रोग्रामर्स की जगह लेने वाला है. हालांकि यह जरूर संकेत देती है कि रोजमर्रा के और दोहराए जाने वाले कोडिंग कामों में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है.
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>क्यों लगती है सोशल मीडिया की लत और कैसे मदद कर सकते हैं ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे कानून? यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Addiction: हाल में ब्रिटेन ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर ताला लगा दिया है. यानी ऑस्ट्रेलिया की तरह यहां भी 16 साल से छोटे बच्चे फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्सेस नहीं कर पाएंगे. इसके पीछे के कारणों में सोशल मीडिया से बच्चों को होने वाले नुकसान के अलावा इन प्लेटफॉर्म्स की एडिक्टिव नैचर को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है. आज हम जानेंगे कि ऐसी क्या चीजे हैं जो सोशल मीडिया की लत लगाती हैं और कैसे ऑस्ट्रेलिया-यूके जैसे कानून इससे बचाने में मदद कर सकते हैं.
क्यों लग जाती है सोशल मीडिया की लत?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डिजाइन ही ऐसे किया जाता है ताकि घंटों तक यूजर इन पर चिपका रहे. इसके लिए कंपनियां पावरफुल एल्गोरिदम का यूज करती है, जो अपने आप पता लगा लेता है कि यूजर को क्या देखना पसंद है और वह उसी तरह का कंटेट पुश करता है. इसके अलावा ये प्लेटफॉर्म ऐसा आभास करवाते हैं कि अगर किसी कंटेट को अभी नहीं देखा तो वह गायब हो जाएगा. ये चीजें यूजर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से चिपकाएं रखती हैं.
अटेंशन ग्रैब करने के लिए एआई का यूज
अगर आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बंद करके बैठ जाते हैं तो भी नोटिफिकेशन लगातार आपको याद दिलाती रहेंगी कि कुछ ऐसा है, जो आप देखने से चूक गए. कंपनियों ने एआई पावर्ड नोटिफिकेशन सिस्टम डेवलप कर लिए हैं, जो यह अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह की नोटिफिकेशन से यूजर का ध्यान खींचा जा सकता है. इन प्लेटफॉर्म्स पर इन्फिनिटी स्क्रॉल और ऑटोप्ले जैसे फीचर्स भी मिलते हैं, जो यूजर को सोचने का समय ही नहीं देते और एक बार हाथ में फोन लेने के बाद लोग घंटों-घंटों इन प्लेटफॉर्म्स पर गुजार देते हैं. बच्चों के लिए यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है क्योंकि उनमें सेल्फ-कंट्रोल की क्षमता कम होती है. यही वजह है कि बच्चों को लेकर खास तौर पर चिंता जताई जा रही है.
क्या नियमों से असर पड़ता है?
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल मीडिया पर बैन लगाना प्रभावी तरीका नहीं है. बैन लगाने के बाद बच्चे VPN और दूसरे तरीकों से इन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करेंगे. हालांकि, यह कहना भी सही नहीं है कि बैन लगाने का तरीका पूरी तरह असफल है. एक सर्वे के मुताबिक, बैन लगने के बाद करीब 30 प्रतिशत बच्चे सोशल मीडिया से दूर हो गए हैं. जानकारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे कानून उन फीचर्स में बदलाव करवा सकते हैं, जिनसे सोशल मीडिया एडिक्टिव बनता है.&amp;nbsp;
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        <title>कहां से आता है AC में पानी? जानें क्या है इसके पीछे की टेक्नोलॉजी और कैसे करता है काम</title>
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        <description><![CDATA[ AC Tips: गर्मी के दिनों में जब एयर कंडीशनर (AC) लगातार चलता है तो अक्सर लोगों की नजर उससे निकलने वाले पानी पर पड़ती है. कई लोगों को लगता है कि AC के अंदर कोई पानी की टंकी होती है या उसमें बाहर से पानी डाला जाता है. लेकिन सच यह है कि AC में आने वाला पानी कहीं से भरकर नहीं आता बल्कि यह एक खास वैज्ञानिक प्रोसेस का नतीजा होता है. आइए समझते हैं कि AC में पानी कहां से आता है और इसके पीछे कौन-सी तकनीक काम करती है.
हवा में छिपा होता है पानी
हमारे आसपास मौजूद हवा में हमेशा कुछ मात्रा में नमी मौजूद रहती है. चाहे मौसम गर्म हो या ठंडा, हवा में पानी के बेहद छोटे-छोटे कण होते हैं जिन्हें हम अपनी आंखों से नहीं देख सकते. जब AC कमरे की गर्म और नम हवा को अपने अंदर खींचता है तब यही नमी आगे चलकर पानी में बदल जाती है.
AC कैसे बनाता है पानी?
एयर कंडीशनर के अंदर एक हिस्सा होता है जिसे इवेपोरेटर कॉइल (Evaporator Coil) कहा जाता है. यह कॉइल बहुत ठंडी होती है. जब कमरे की गर्म हवा इस ठंडी कॉइल से टकराती है तो हवा में मौजूद नमी Condense होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है.
यह प्रोसेस बिल्कुल वैसी ही होती है जैसे ठंडे पानी की बोतल को बाहर रखने पर उसकी सतह पर पानी की बूंदें जम जाती हैं. वास्तव में यह पानी बोतल के अंदर से नहीं आता बल्कि आसपास की हवा में मौजूद नमी से बनता है.
पानी बाहर कैसे निकलता है?
Condensation के प्रोसेस के बाद बनने वाला पानी AC के अंदर मौजूद ड्रेन पैन में इकट्ठा होता है. इसके बाद यह एक ड्रेन पाइप के जरिए बाहर निकाल दिया जाता है. यही कारण है कि स्प्लिट AC की बाहरी यूनिट के पास अक्सर पानी टपकता हुआ दिखाई देता है.
अगर यह पाइप बंद हो जाए तो पानी बाहर निकलने के बजाय AC के अंदर जमा हो सकता है जिससे लीकेज की समस्या भी हो सकती है.
ज्यादा नमी वाले मौसम में बढ़ जाता है पानी
बरसात या उमस वाले दिनों में AC से ज्यादा पानी निकलता है. इसकी वजह यह है कि उस समय हवा में नमी का स्तर ज्यादा होता है. AC को हवा में मौजूद ज्यादा नमी को पानी में बदलना पड़ता है इसलिए ड्रेन पाइप से ज्यादा पानी बाहर आता है.
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>हर iPhone यूजर की बड़ी उलझन! Apple Maps बेहतर या Google Maps? जानें किसे इस्तेमाल करना आसान</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Maps Vs Google Maps: iPhone खरीदने के बाद कई यूजर्स के मन में एक सवाल जरूर आता है नेविगेशन के लिए Apple Maps इस्तेमाल करें या फिर Google Maps? दोनों ही ऐप आपको रास्ता दिखाने, ट्रैफिक की जानकारी देने और लोकेशन सर्च में मदद करते हैं लेकिन इनके फीचर्स और इस्तेमाल करने का तरीका काफी अलग है. अगर आप भी इस दुविधा में हैं तो आइए जानते हैं कि आपके लिए कौन-सा मैप ऐप बेहतर साबित हो सकता है.
Apple Maps
Apple Maps को खास तौर पर iPhone, iPad और Mac डिवाइस के लिए तैयार किया गया है. यही वजह है कि यह Apple के इकोसिस्टम के साथ बेहद स्मूद तरीके से काम करता है. Siri की मदद से आप बिना फोन छुए नेविगेशन शुरू कर सकते हैं और Apple Watch पर भी दिशा-निर्देश आसानी से देख सकते हैं.
Apple Maps का इंटरफेस काफी बेहतरीन है जिससे नए यूजर्स को इसे इस्तेमाल करने में परेशानी नहीं होती. इसके अलावा यह बैटरी की खपत भी काफी कम करता है जो लंबे सफर के दौरान फायदेमंद साबित होता है.
Google Maps क्यों है दुनिया का सबसे फेमश ऑप्शन?
Google Maps की सबसे बड़ी ताकत इसका विशाल डेटा नेटवर्क है. दुनिया भर के करोड़ों लोग रोजाना इसका इस्तेमाल करते हैं जिससे ट्रैफिक, सड़क बंद होने, रूट बदलाव और स्थानीय जगहों की जानकारी लगातार अपडेट होती रहती हैं.
अगर आप किसी नए शहर में घूम रहे हैं और आपको नजदीकी होटल, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप या एटीएम ढूंढना है तो Google Maps आमतौर पर ज्यादा सटीक जानकारी उपलब्ध कराता है. यूजर रिव्यू, फोटो, बिजनेस टाइमिंग और भीड़ की जानकारी जैसे फीचर्स इसे और भी बेहतरीन बना देते हैं.
ट्रैफिक और रूटिंग में कौन आगे?
रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए ट्रैफिक अपडेट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. इस मामले में Google Maps अक्सर ज्यादा सटीक माना जाता है क्योंकि इसके पास रियल-टाइम डेटा का बड़ा नेटवर्क मौजूद है. यह वैकल्पिक रास्ते भी जल्दी सुझा देता है.
हालांकि Apple Maps ने पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार किया है और अब यह भी ट्रैफिक तथा रूट सुझाव देने में पहले से कहीं बेहतर हो गया है. फिर भी कई क्षेत्रों में Google Maps की जानकारी ज्यादा बेहतर रहती है.
प्राइवेसी के मामले में Apple आगे
यदि आपकी प्राथमिकता डेटा सेफ्टी और प्राइवेसी है तो Apple Maps आपके लिए बेहतर ऑप्शन हो सकता है. Apple लंबे समय से यूजर प्राइवेसी को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है. कंपनी कम से कम व्यक्तिगत डेटा स्टोर करने का दावा करती है.
दूसरी तरफ Google Maps बेहतर सेवाएं देने के लिए ज्यादा डेटा का इस्तेमाल करता है जिससे उसे ट्रैफिक और स्थान संबंधी जानकारी को और सटीक बनाने में मदद मिलती है.
आखिर किसे चुनें?
अगर आप Apple इकोसिस्टम का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं, आसान इंटरफेस पसंद करते हैं और प्राइवेसी आपके लिए बहुत जरूरी है तो Apple Maps एक अच्छा विकल्प है. वहीं यदि आपको सबसे सटीक ट्रैफिक अपडेट, ज्यादा लोकेशन डेटा, शानदार रिव्यू और बेहतर सर्च रिजल्ट चाहिए तो Google Maps अभी भी ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>अब हवा से निकलेगा पीने का पानी! वैज्ञानिकों ने बनाई ऐसी जैकेट जो कर देगी कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Jacket Technology: कल्पना कीजिए कि आप ऐसी जैकेट पहनें जो आसपास की हवा से नमी खींचकर उसे पीने योग्य पानी में बदल दे. यह सुनने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लग सकता है लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे हकीकत के करीब पहुंचा दिया है. अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने एक ऐसा खास जैकेट विकसित किया है जो वातावरण में मौजूद नमी को इकट्ठा करके स्वच्छ पानी में बदल सकता है.
कैसे काम करती है यह स्मार्ट जैकेट?
इस नई तकनीक वाली जैकेट में विशेष प्रकार का कपड़ा लगाया गया है जो हवा से नमी को सोख लेता है. इसके बाद यह नमी जैकेट में लगे अलग किए जा सकने वाले सिस्टम तक पहुंचाई जाती है.
जब इन मॉड्यूल्स को एक फोल्ड होने वाले कलेक्टर में रखकर गर्म किया जाता है तो उनमें जमा पानी बाहर निकल आता है. इसके बाद इस पानी को इकट्ठा करके पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
एक दिन में कितना पानी बना सकती है?
परीक्षणों के दौरान इस जैकेट ने वातावरण की नमी के अनुसार प्रतिदिन लगभग 400 से 900 मिलीलीटर तक पानी तैयार किया. यह मात्रा करीब डेढ़ से चार कप पानी के बराबर है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह परफॉर्मेंस मौजूदा कई तकनीकों की तुलना में काफी बेहतर है. बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जाने पर इसकी क्षमता पुराने सिस्टम से तीन से दस गुना तक अधिक पाई गई.
सफलता का असली राज क्या है?
शोधकर्ताओं के मुताबिक सबसे बड़ी उपलब्धि केवल ऐसा पदार्थ बनाना नहीं थी जो पानी सोख सके. उन्होंने ऐसे फाइबर तैयार किए हैं जो हवा से नमी को तेजी और प्रभावी तरीके से कपड़े तक पहुंचाते हैं इसके बाद फिर उसे स्टोरेज सिस्टम में भेजते हैं.
यही वजह है कि यह तकनीक सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में भी उपयोगी साबित हो सकती है.
सिर्फ जैकेट ही नहीं कई जगह होगा इस्तेमाल
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल केवल कपड़ों तक सीमित नहीं रहेगा. इसे बैकपैक, टेंट, आपातकालीन स्थिति और अन्य आउटडोर मशीनों में भी शामिल किया जा सकता है.
इसका मतलब है कि आने वाले समय में यात्रा या कैंपिंग के दौरान लोग अपने सामान की मदद से ही पानी जुटा सकेंगे.
एक और डिवाइस ने बनाया नया रिकॉर्ड
इसी शोध टीम ने एक अलग वायुमंडलीय पानी स्टोरेज सिस्टम डिवाइस भी विकसित किया है जिसने सूखे और नम दोनों तरह के मौसम में शानदार प्रदर्शन किया है. न्यू मैक्सिको के रेगिस्तानी क्षेत्र और टेक्सास के नम वातावरण में किए गए परीक्षणों में इस डिवाइस ने प्रतिदिन लगभग 1.3 लीटर स्वच्छ पानी इक्कठा किया. शोधकर्ताओं के अनुसार यह अब तक की सबसे प्रभावशाली वॉटर स्टोरेज क्षमता में से एक है.
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 07:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>AC Outdoor Unit Cleaning Tips: एसी की आउटडोर यूनिट को पानी से धोना चाहिए या नहीं? जान लीजिए सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ AC Outdoor Unit Cleaning Tips : आजकल चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी से राहत दिलाने में एसी सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि पहले की तरह एसी ठंडी हवा नहीं देता और कमरे को ठंडा करने में ज्यादा समय लेने लगता है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि शायद गैस खत्म हो गई है या एसी में कोई खराबी आ गई है. &amp;nbsp;हालांकि हर बार ऐसा नहीं होता है. कई मामलों में एसी की कूलिंग कम होने की वजह सिर्फ इसकी आउटडोर यूनिट पर जमी धूल और गंदगी होती है. अक्सर आपने लोगों को गर्मियों में स्प्लिट एसी की आउटडोर यूनिट पर पानी डालकर उसे साफ करते देखा होगा. सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़े कई वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि आउटडोर यूनिट धोने से एसी की कूलिंग बढ़ जाती है. ऐसे में आइए &amp;nbsp;आज हम आपको बताते हैं कि एसी की आउटडोर यूनिट को पानी से धोना चाहिए या नहीं?&amp;nbsp;
क्यों कम हो जाती है एसी की कूलिंग?
स्प्लिट एसी की आउटडोर यूनिट घर के बाहर खुली जगह पर लगी होती है. यह धूप, धूल, मिट्टी, बारिश और प्रदूषण के सीधे संपर्क में रहती है. समय के साथ इसकी कंडेनसर कॉइल्स पर धूल की मोटी परत जम जाती है. जब कॉइल्स गंदी हो जाती हैं तो वे कमरे की गर्मी को ठीक तरीके से बाहर नहीं फेंक पातीं, इसका सीधा असर एसी की कूलिंग पर पड़ता है और कमरा ठंडा होने में ज्यादा समय लगने लगता है.&amp;nbsp;
एसी की आउटडोर यूनिट को पानी से धोना चाहिए या नहीं?
अगर सही तरीके से किया जाए तो आउटडोर यूनिट को पानी से साफ करना सुरक्षित माना जाता है. इससे कॉइल्स पर जमी धूल हट जाती है और गर्मी बाहर निकलने की प्रक्रिया बेहतर हो जाती है. हालांकि यह काम सावधानी के साथ करना बेहद जरूरी है. गलत तरीके से पानी डालने पर नुकसान भी हो सकता है.&amp;nbsp;
पानी से एसी की आउटडोर यूनिट धोने के क्या फायदे होते हैं?
1. कूलिंग बेहतर हो जाती है: साफ कॉइल्स गर्मी को तेजी से बाहर निकालती हैं, जिससे एसी पहले के मुकाबले बेहतर कूलिंग देने लगता है और कमरा जल्दी ठंडा होता है.&amp;nbsp;
2. बिजली की खपत कम हो सकती है: जब कॉइल्स साफ होती हैं तो कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, ऐसे में एसी को कम मेहनत करनी पड़ती है और बिजली की खपत भी कम हो सकती है.&amp;nbsp;
3. कंप्रेसर की उम्र बढ़ती है: लगातार ज्यादा दबाव में काम करने से कंप्रेसर जल्दी खराब हो सकता है, लेकिन समय-समय पर सफाई करने से यह लंबे समय तक सही तरीके से काम करता है.&amp;nbsp;
4. ओवरहीटिंग का खतरा घटता है: गर्मी के मौसम में ओवरहीटिंग की समस्या बढ़ जाती है. साफ आउटडोर यूनिट गर्मी को बेहतर तरीके से बाहर निकालती है, जिससे मशीन पर दबाव कम होता है.&amp;nbsp;
क्या पानी डालने से शॉर्ट सर्किट हो सकता है?
यह डर लगभग हर किसी के मन में होता है कि आउटडोर यूनिट में बिजली के तार और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स लगे होते हैं, इसलिए पानी डालने से करंट लग सकता है या शॉर्ट सर्किट हो सकता है, लेकिन &amp;nbsp;एसी बनाने वाली कंपनियां इस बात को ध्यान में रखती हैं कि आउटडोर यूनिट खुले वातावरण में लगाई जाएगी, जहां उसे बारिश, धूल और तेज हवाओं का सामना करना पड़ेगा. इसी वजह से इसके इलेक्ट्रिकल पार्ट्स और वायरिंग को सील बंद और सुरक्षित बॉक्स में रखा जाता है. इसलिए हल्के पानी से सफाई करना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.
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आउटडोर यूनिट को साफ करने का सही तरीका

अगर आप खुद आउटडोर यूनिट की सफाई करना चाहते हैं, तो सफाई शुरू करने से पहले एसी की मेन पावर सप्लाई बंद कर दें. इससे किसी भी तरह की दुर्घटना का खतरा नहीं रहेगा.&amp;nbsp;
नॉर्मल पानी की धार से यूनिट को साफ करें जिससे कॉइल्स पर जमी धूल निकल जाए.&amp;nbsp;
कई लोग तेज प्रेशर वाले पाइप से सफाई करने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है. इससे कॉपर की पतली फिन्स मुड़ सकती हैं और एयर फ्लो प्रभावित हो सकता है. हालांकि यह सुरक्षित होता है, फिर भी अतिरिक्त सावधानी करते हुए इलेक्ट्रिकल हिस्से पर सीधे पानी डालने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
अगर यूनिट बहुत ज्यादा गंदी है या आपको सफाई का तरीका समझ नहीं आ रहा है, तो किसी तकनीशियन से सर्विस करवाना बेहतर रहेगा.&amp;nbsp;

कितने समय में करनी चाहिए सफाई?
अगर आपका एसी धूल वाली जगह पर लगा है, तो गर्मियों के दौरान हर 2 से 3 महीने में आउटडोर यूनिट की जांच और सफाई कर लेनी चाहिए. वहीं सामान्य परिस्थितियों में साल में कम से कम एक या दो बार सर्विस जरूर करवानी चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 07:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Facebook पर आया नया AI Mode! अब पोस्ट, ग्रुप और Reels से मिलेगा सीधे सवालों का जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ Facebook AI Mode: सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए Meta ने Facebook पर कई नए AI फीचर्स पेश किए हैं. कंपनी का दावा है कि ये सुविधाएं यूजर्स के लिए जानकारी खोजने, कंटेंट बनाने और प्लेटफॉर्म पर इंटरैक्ट करने के तरीके को पहले से कहीं ज्यादा आसान और स्मार्ट बनाएंगी.
Facebook Search का बदलेगा अंदाज
Meta ने Facebook में एक नया AI Mode जोड़ा है जो पुराने सर्च सिस्टम से अलग तरीके से काम करेगा. अब यूजर्स केवल कीवर्ड टाइप करने के बजाय नॉर्मल भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और Meta AI उन्हें सीधे जवाब देने की कोशिश करेगा.
यह AI Facebook पर मौजूद सार्वजनिक पोस्ट, ग्रुप्स और Reels जैसे कांटेंट का विश्लेषण करके उत्तर तैयार करेगा. इसका मतलब है कि यूजर को लंबी-लंबी सर्च लिस्ट देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि उसे एक संक्षिप्त और उपयोगी जवाब मिल सकेगा.
कम्युनिटी कंटेंट से तैयार होंगे जवाब
Meta का नया AI सिस्टम Facebook कम्युनिटी में चल रही चर्चाओं और साझा की गई सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल करेगा. इससे यूजर्स को किसी विषय पर लोगों की राय, अनुभव और ट्रेंडिंग जानकारी एक ही जगह पर देखने का मौका मिलेगा. कंपनी का मानना है कि यह फीचर लोगों को बेहतर और तेज तरीके से जानकारी प्राप्त करने में मदद करेगा.
कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए क्रिएटिव टूल्स
AI Mode के अलावा Facebook ने कंटेंट बनाने वाले यूजर्स के लिए भी कई नए टूल्स लॉन्च किए हैं. इनमें वीडियो एडिटिंग के लिए नए इफेक्ट्स, ट्रांजिशन और कोलाज कटआउट जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
इन टूल्स की मदद से क्रिएटर्स अपने वीडियो और पोस्ट को अधिक आकर्षक और प्रोफेशनल बना सकेंगे जिससे दर्शकों की रुचि बढ़ने की संभावना है.
AI की मदद से बदल सकेंगे अपना लुक
Facebook ने AI-आधारित प्रीसेट्स भी पेश किए हैं जिनकी मदद से यूजर्स अपने डिजिटल अवतार या तस्वीरों में अलग-अलग स्टाइल आजमा सकेंगे.
इन फीचर्स के जरिए कपड़ों, हेयरस्टाइल और एक्सेसरीज में बदलाव करके विभिन्न लुक्स को आसानी से देखा जा सकेगा. यह सुविधा खासतौर पर उन यूजर्स के लिए उपयोगी होगी जो नए स्टाइल्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.
क्रिएटर्स को मिलेगा AI असिस्टेंट
Meta ने कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक नया AI असिस्टेंट भी लॉन्च किया है. यह टूल पोस्ट करने का सही समय सुझाने, ऑडियंस की भागीदारी का विश्लेषण करने और कंटेंट की परफॉर्मेंस से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा. इसका उद्देश्य क्रिएटर्स को बेहतर रणनीति बनाने और उनकी पहुंच बढ़ाने में सहायता देना है.
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 07:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Facebook, पर, आया, नया, Mode, अब, पोस्ट, ग्रुप, और, Reels, से, मिलेगा, सीधे, सवालों, का, जवाब</media:keywords>
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        <title>Inverter Battery Water Tips: बारिश का पानी इन्वर्टर की बैटरी में डालना चाहिए या नहीं, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/inverter-battery-water-tips-बारिश-का-पानी-इन्वर्टर-की-बैटरी-में-डालना-चाहिए-या-नहीं-क्या-कहते-हैं-एक्सपर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Inverter Battery Water Tips : इन्वर्टर आज लगभग हर घर की जरूरत बन चुका है. चाहे भीषण गर्मी में बिजली चली जाए या बारिश के मौसम में लंबे पावर कट हों, इन्वर्टर ही घर की लाइट, पंखे और जरूरी डिवाइस को चलाए रखने में मदद करता है, लेकिन कई लोगों की शिकायत रहती है कि उनकी इन्वर्टर बैटरी ज्यादा समय तक नहीं चलती, जल्दी डिस्चार्ज हो जाती है या कुछ ही सालों में खराब होने लगती है. कई बार बैटरी के जल्दी खराब होने की वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं होती, बल्कि हमारी छोटी-छोटी गलतियां होती हैं. इनमें सबसे बड़ी गलती बैटरी में गलत तरह का पानी डालना है.
बारिश के मौसम में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या बारिश का पानी इन्वर्टर की बैटरी में डाला जा सकता है. कई लोगों का मानना है कि बारिश का पानी बिल्कुल साफ और नेचुरल होता है, इसलिए यह बैटरी के लिए भी सुरक्षित होगा. सोशल मीडिया पर भी इस तरह के कई दावे देखने को मिलते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि बारिश का पानी इन्वर्टर की बैटरी में डालना चाहिए या नहीं और इसे लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्यों जल्दी खराब हो जाती है इन्वर्टर की बैटरी?
कई लोग इन्वर्टर खरीदने के बाद उसकी देखभाल पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं.खासतौर पर बैटरी के पानी को लेकर लापरवाही की जाती है. कुछ लोग बारिश का पानी स्टोर करके रख लेते हैं, तो कुछ नल का पानी या आरओ का पानी भी बैटरी में डाल देते हैं, लेकिन गलत पानी का इस्तेमाल बैटरी की काम करने की ताकत को धीरे-धीरे कम करने लगता है. इससे बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है और उसकी उम्र भी घट जाती है.&amp;nbsp;
क्या बारिश का पानी बैटरी में डालना चाहिए?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन्वर्टर की बैटरी में बारिश का पानी बिल्कुल नहीं डालना चाहिए. बारिश का पानी देखने में साफ जरूर लगता है, लेकिन उसमें हवा में मौजूद धूल, मिट्टी, प्रदूषण, गैसें और कई तरह छोटे-छोटे कण मिल सकते हैं. खासकर शहरों में बारिश के पानी में केमिकल तत्वों की मात्रा भी हो सकती है. यह बैटरी के अंदर होने वाली केमिकल प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे बैटरी की क्षमता और उम्र दोनों पर बुरा असर पड़ता है.&amp;nbsp;
बैटरी में कौन-सा पानी डालना चाहिए?
इन्वर्टर की बैटरी में हमेशा डिस्टिल्ड वॉटर (Distilled Water) या डिमिनरलाइज्ड वॉटर (Demineralised Water) का ही इस्तेमाल करना चाहिए. यह खास प्रकार का साफ पानी होता है, जिसमें मिनरल्स, नमक और दूसरी गंदगी नहीं होती हैं. इसी वजह से यह बैटरी के लिए सुरक्षित माना जाता है. ध्यान रखें कि आरओ का पानी भी बैटरी के लिए सही ऑप्शन नहीं माना जाता, क्योंकि उसमें भी कुछ मात्रा में घुले हुए तत्व मौजूद हो सकते हैं.&amp;nbsp;
बारिश का पानी डालने से क्या नुकसान हो सकता है?
1. &amp;nbsp;बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है - गंदगी बैटरी की चार्ज स्टोर करने की क्षमता को कम कर सकती हैं.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;बैटरी की उम्र घट सकती है - गलत पानी के लगातार इस्तेमाल से बैटरी जल्दी खराब हो सकती है.&amp;nbsp;
3. प्लेटों को नुकसान पहुंच सकता है - गंदगी बैटरी की प्लेटों पर जमकर उनकी कार्यक्षमता कम कर सकती हैं.&amp;nbsp;
4. जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है - केमिकल प्रतिक्रियाओं में गड़बड़ी होने से बैटरी के अंदर जंग लगने की संभावना बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
5. &amp;nbsp;परफॉर्मेंस कमजोर हो जाती है - बैटरी पहले जितना बैकअप नहीं दे पाती और उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है.&amp;nbsp;
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कितने दिन में बैटरी का पानी चेक करना चाहिए?
बैटरी की अच्छी परफॉर्मेंस के लिए समय-समय पर पानी का स्तर जांचना बेहद जरूरी है. हर 45 से 60 दिन में एक बार पानी जरूर चेक करें. गर्मियों में महीने में एक बार लेवल देखना बेहतर रहता है. अगर इन्वर्टर का इस्तेमाल ज्यादा होता है, तो पानी की जांच जल्दी-जल्दी करनी चाहिए. वहीं कम इस्तेमाल होने पर भी दो महीने से ज्यादा बिना जांच के नहीं छोड़ना चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 07:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>AI Robot Pets की एंट्री! लेकिन इनसे जुड़ा ऐसा खतरा, जिसे जानकर हो जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ AI Robot Pets: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच या ड्रोन तक सीमित नहीं रहा है. यह तकनीक धीरे-धीरे हमारे रोजमर्रा के जीवन के हर हिस्से में अपनी जगह बना रही है. इसी कड़ी में अब AI से लैस रोबोटिक पालतू जानवर भी सामने आने लगे हैं. कुछ समय पहले तक जो चीजें साइंस फिक्शन फिल्मों में दिखाई देती थीं वे अब हकीकत बन रही हैं.
इसका एक ताजा उदाहरण द फैमिलियर (The Familiar) नाम का रोबोट है जिसे iRobot के सह-संस्थापक कॉलिन एंगल ने विकसित किया है. यह एक फर वाले पालतू जानवर जैसा रोबोट है जिसे घर के सदस्यों के साथ घुलने-मिलने, उन्हें समझने और समय के साथ उनसे रिश्ता बनाने के लिए तैयार किया गया है.
सिर्फ मशीन नहीं, साथी बनने की कोशिश
घरेलू रोबोट आमतौर पर सफाई या अन्य कामों के लिए बनाए जाते हैं लेकिन द फैमिलियर का उद्देश्य अलग है. इसका मकसद लोगों को साथ और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास कराना है.
लगभग एक कुत्ते के आकार का यह रोबोट घर के अंदर घूम सकता है और लोगों के पीछे-पीछे एक कमरे से दूसरे कमरे तक जा सकता है. इसके निर्माता दावा करते हैं कि यह केवल काम करने वाली मशीन नहीं बल्कि घर में अपनी मौजूदगी महसूस कराने वाला एक डिजिटल साथी है.
इस रोबोट को बनाने वाली कंपनी Familiar Machines &amp;amp; Magic का कहना है कि यह ज्यादातर डेटा को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस करता है और सामान्य परिस्थितियों में जानकारी को क्लाउड पर नहीं भेजता. कंपनी का यह भी दावा है कि इंटरनेट से जुड़ने के लिए यूजर्स की अनुमति आवश्यक होगी.
साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ रही चिंता
हालांकि कंपनियां सुरक्षा के बड़े दावे कर रही हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट से जुड़े ऐसे रोबोट पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के कानून और सूचना विज्ञान विशेषज्ञ रयान कालो के अनुसार, पहले किए गए कई शोध यह दिखा चुके हैं कि नेटवर्क से जुड़े घरेलू रोबोट दूर से हैक किए जा सकते हैं. अब जब इन मशीनों में एडवांस AI तकनीक जोड़ी जा रही है तो संभावित कमजोरियां और भी बढ़ सकती हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई साधारण रोबोट वैक्यूम हैक हो जाए तो नुकसान सीमित हो सकता है लेकिन अधिक बुद्धिमान और स्वतंत्र रूप से घूमने वाले रोबोट घर के भीतर नई तरह की सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर सकते हैं.
भावनात्मक जुड़ाव भी बन सकता है समस्या
AI रोबोट से जुड़ी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक इंसानों का उनके साथ भावनात्मक रिश्ता बना लेना है. शोधकर्ताओं का कहना है कि लोग मशीनों के साथ उम्मीद से कहीं अधिक जल्दी भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं.
नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के कानून और कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर वुडरो हार्टजॉग का मानना है कि हद से ज्यादा सामाजिक और दोस्ताना व्यवहार करने वाले रोबोट लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं. यदि इंसान किसी मशीन पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाए तो उसके निर्णय और व्यवहार पर भी असर पड़ सकता है.
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        <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 07:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>NEET री&amp;टेस्ट तक Telegram पर लगा बैन! जानिए कैसे एक झटके में पूरा ऐप हो जाता है बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Telegram Ban in India: हाल ही में NEET परीक्षा से जुड़े कथित चीटिंग रैकेट और पेपर लीक की चर्चाओं के बीच Telegram का नाम भी सुर्खियों में आ गया. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स का इस्तेमाल परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए किया जा रहा था. इसके बाद Telegram पर आज भारत सरकार ने बैन लगा दिया है.
हालांकि किसी भी देश में किसी ऐप को पूरी तरह बंद करना आसान नहीं होता लेकिन सरकारें जरूरत पड़ने पर कानूनी और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करके बड़े प्लेटफॉर्म्स तक की पहुंच रोक सकती हैं.
आखिर किसी ऐप को कैसे किया जाता है बैन?
जब किसी ऐप पर अवैध एक्टिविटी, राष्ट्रीय सुरक्षा, फर्जीवाड़े या बड़े स्तर पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते हैं तब संबंधित सरकारी एजेंसियां जांच शुरू करती हैं. यदि आरोप गंभीर पाए जाते हैं तो इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) और मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को उस ऐप की सेवाएं ब्लॉक करने का आदेश दिया जा सकता है.
इसके बाद यूजर्स के लिए ऐप के सर्वर तक पहुंचना मुश्किल या असंभव हो जाता है. कई मामलों में ऐप स्टोर और प्ले स्टोर से भी उस ऐप को हटाया जा सकता है ताकि नए यूजर उसे डाउनलोड न कर सकें.
एक झटके में लाखों यूजर्स क्यों हो जाते हैं प्रभावित?
आज Telegram जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करोड़ों लोग पढ़ाई, बिजनेस, न्यूज और निजी बातचीत के लिए करते हैं. ऐसे में यदि किसी देश में ऐप पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो लाखों यूजर्स अचानक अपनी चैट, ग्रुप्स और चैनलों तक पहुंच खो सकते हैं.
सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है जो अपने कामकाज या पढ़ाई के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहते हैं. कई बार महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान भी बाधित हो जाता है.
क्या VPN से बैन को बायपास किया जा सकता है?
कई यूजर्स ऐप बैन होने के बाद VPN का सहारा लेते हैं जिससे वे दूसरे देशों के सर्वर के जरिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकें. हालांकि कई देशों में VPN के इस्तेमाल पर भी नियम लागू हो सकते हैं. इसके अलावा VPN का इस्तेमाल हमेशा सुरक्षित या कानूनी हो यह जरूरी नहीं है.
यूजर्स को क्या करना चाहिए?
यदि किसी ऐप पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो घबराने के बजाय आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए. फर्जी खबरों और अफवाहों से बचना जरूरी है. साथ ही अपने महत्वपूर्ण डेटा का बैकअप रखना और वैकल्पिक प्लेटफॉर्म की जानकारी रखना भी समझदारी भरा कदम है.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Apple यूजर्स को लगेगा झटका! Siri के लिए हर महीने देना पड़ सकता है पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ Siri AI Subscription: सिरी के नए एआई वर्जन का बेसब्री से इंतजार हो रहा है. ऐप्पल ने WWDC 2026 में इसकी झलक भी दिखा दी है. iOS 27 अपडेट रोल आउट होने के साथ ही नया सिरी आईफोन यूजर्स के पास पहुंचने लगेगा. अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो ऐप्पल यूजर्स का दिल तोड़ने वाली है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सिरी के सबसे एडवांस्ड एआई फीचर्स हमेशा फ्री नहीं रहेंगे और इन्हें यूज करने के लिए सब्सक्रिप्शन फीस देनी पड़ेगी. यानी यूजर सिरी के सारे फीचर्स फ्री में यूज नहीं कर पाएंगे.&amp;nbsp;
नई रणनीति अपना सकती है ऐप्पल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप्पल सिरी के कुछ एआई फीचर्स के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान पेश कर सकती है. दरअसल, एआई फीचर्स प्रोवाइड करना कंपनियों की जेब पर काफी बोझ डालता है. लार्ज लैंग्वेज मॉडल रन करने और जनरेटिव एआई सर्विसेस के लिए कंप्यूटिंग पावर और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ती है, जिसे तैयार करना बहुत महंगा काम होता है. इसे देखते हुए सिरी की जो रिक्वेस्ट्स ऑन-डिवाइस प्रोसेस हो पाएंगी, उनके लिए यूजर को पैसा नहीं देना पड़ेगा, लेकिन एडवांस्ड एआई फीचर्स के लिए चैटजीपीटी और जेमिनी की तरह सब्सक्रिप्शन प्लान लाया जा सकता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि अभी तक सिरी में मिलने वाले फीचर्स और कुछ ऑन-डिवाइस पर्सनल कॉन्टेक्स्ट फीचर फ्री रहेंगे, जबकि कुछ जरनेटिव एआई फीचर्स के लिए पैसे देने पड़ेंगे.
एआई की रेस में पिछड़ रही है ऐप्पल
दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी ऐप्पल एआई की रेस में पिछड़ रही है. लंबे इंतजार के बाद कंपनी ने इसी महीने WWDC में सिरी के एआई वर्जन से पर्दा उठाया है. फिलहाल इसके सब्सक्रिप्शन प्लान का ऐलान नहीं किया गया है. बताया जा रहा है कि अभी कंपनी अपने एआई प्रोडक्ट्स यूजर तक पहुंचाने की कोशिश में लगी हुई है. वह चाहती है कि पहले यूजर उसके एआई फीचर्स यूज करें. फिर आगे चलकर एडवांस्ड फीचर के लिए सब्सक्रिप्शन प्लान पेश किए जा सकते हैं.
Siri AI में क्या मिलेगा?
सिरी के एआई वर्जन को गूगल के जेमिनी मॉडल पर तैयार किया गया है. कंपनी इसके लिए डेडिकेटेड ऐप भी लेकर आई है, जो अलग-अलग ऐप्स के साथ काम कर सकती है. नए सिरी को अधिक कन्वर्सेशनल और पर्सनल कॉन्टेक्स्ट समझने वाला बताया जा रहा है. Siri AI की विजुअल इंटेलीजेंस भी बेहतर हुई है. यानी अब यह समझ सकेगा कि यूजर के डिवाइस की स्क्रीन पर क्या दिख रहा है. यह उस कॉन्टेक्स्ट को समझकर अपना रिस्पॉन्स देगा.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ गाने सुनने के लिए नहीं होता Earbuds? 99% लोग नहीं जानते इसके ये छुपे हुए फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Earbuds: आज के समय में ईयरबड्स लगभग हर स्मार्टफोन यूजर की जरूरत बन चुके हैं. ज्यादातर लोग इन्हें सिर्फ गाने सुनने, कॉल करने या वीडियो देखने के लिए इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके ईयरबड्स में ऐसे कई स्मार्ट फीचर्स मौजूद हैं जिनके बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी ही नहीं होती? अगर आप भी अपने ईयरबड्स का इस्तेमाल सिर्फ म्यूजिक सुनने तक सीमित रखते हैं तो यह लेख आपके लिए है.
फोन को बिना छुए कंट्रोल करने की सुविधा
आधुनिक ईयरबड्स में टच कंट्रोल फीचर दिया जाता है. इसकी मदद से आप गाने बदल सकते हैं, म्यूजिक रोक या चला सकते हैं और कॉल रिसीव या कट कर सकते हैं. कई मॉडल्स में वॉयस असिस्टेंट को भी सिर्फ एक टैप से एक्टिव किया जा सकता है. इससे बार-बार फोन निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.
आसपास की आवाज सुनने वाला ट्रांसपेरेंसी मोड
कई प्रीमियम और मिड-रेंज ईयरबड्स में ट्रांसपेरेंसी या एम्बिएंट मोड मिलता है. यह फीचर बाहरी आवाजों को आपके कानों तक पहुंचाता है. सड़क पर चलते समय, ऑफिस में काम करते समय या किसी से बात करते समय यह फीचर काफी उपयोगी साबित होता है क्योंकि आपको ईयरबड्स निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.
खोए हुए ईयरबड्स को ढूंढने की सुविधा
अक्सर लोग अपने छोटे आकार की वजह से ईयरबड्स कहीं रखकर भूल जाते हैं. अच्छी बात यह है कि कई कंपनियां फाइंड माय ईयरबड्स फीचर देती हैं. मोबाइल ऐप के जरिए ईयरबड्स में आवाज बजाकर उनकी लोकेशन आसानी से पता लगाई जा सकती है.
गेमिंग के लिए लो-लेटेंसी मोड
अगर आप मोबाइल गेम खेलते हैं तो यह फीचर आपके काफी काम आ सकता है. लो-लेटेंसी मोड ऑडियो और वीडियो के बीच होने वाली देरी को कम करता है. इससे गेम खेलते समय दुश्मन के कदमों की आवाज या अन्य साउंड इफेक्ट्स सही समय पर सुनाई देते हैं.
लाइव ट्रांसलेशन और स्मार्ट AI फीचर्स
नई पीढ़ी के कई ईयरबड्स में AI आधारित फीचर्स शामिल किए जा रहे हैं. कुछ मॉडल्स रियल-टाइम ट्रांसलेशन की सुविधा देते हैं जिससे अलग भाषा बोलने वाले लोगों से बातचीत करना आसान हो जाता है. इसके अलावा नोट्स रिकॉर्डिंग, वॉयस कमांड और स्मार्ट असिस्टेंट सपोर्ट जैसे फीचर्स भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.
ईयरबड्स का पूरा फायदा उठाएं
अगर आपके पास वायरलेस ईयरबड्स हैं तो उनके मोबाइल ऐप की सेटिंग्स जरूर चेक करें. हो सकता है कि उनमें कई ऐसे फीचर्स मौजूद हों जिनका आपने कभी इस्तेमाल ही न किया हो. सही जानकारी के साथ आप अपने ईयरबड्स को सिर्फ म्यूजिक डिवाइस नहीं बल्कि एक स्मार्ट गैजेट की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>आपके बैग में रखा गैजेट कहीं जेल न पहुंचा दे! साथ रखना पड़ सकता है भारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आपके-बैग-में-रखा-गैजेट-कहीं-जेल-न-पहुंचा-दे-साथ-रखना-पड़-सकता-है-भारी</link>
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        <description><![CDATA[ आज टेक्नोलॉजी का दौर है और हर कोई गैजेट यूज कर रहा है. गैजेट हमारे जीवन को आसान बनाते हैं और कई बार मुश्किल स्थिति में पड़ने से भी बचा लेते हैं. इसके बावजूद हर जगह हर गैजेट को यूज नहीं किया जा सकता. सैटेलाइट फोन जैसे कॉमन माने जाने वाले कई गैजेट कई देशों में बैन हैं. अगर बैन के बावजूद कोई इन्हें यूज करते हुए पाया जाता है तो उसे जेल भी भेजा जा सकता है. आज हम आपके लिए ऐसे ही गैजेट्स की जानकारी लेकर आए हैं, जो कुछ देशों में कॉमन हैं, लेकिन कुछ देशों में गैर-कानूनी भी हैं.
सैटेलाइट फोन- ट्रैवलिंग करने वाले लोग सैटेलाइट फोन का खूब यूज करते हैं. यह बिना मोबाइल नेटवर्क वाले इलाकों में भी सैटेलाइट की मदद से कनेक्टिविटी और दूसरे फीचर ऑफर करता है. अमेरिका आदि देशों में सैटेलाइट फोन कॉमन है, लेकिन भारत समेत कई देशों में इस पर पाबंदी लगी हुई है.
ड्रोन्स- पिछले कुछ सालों में ड्रोन्स का यूज बढ़ा है. भारत की बात करें तो शादियों से लेकर टूरिस्ट डेस्टिनेशन तक की वीडियो बनाने के लिए ड्रोन्स को धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हर देश में ऐसा नहीं है. इजिप्ट में कोई विदेशी टूरिस्ट ड्रोन लेकर नहीं घुस सकता है, वहीं मोरक्को में इसे यूज करने से पहले परमिशन लेनी पड़ती है.
डैशकैम- भारत समेत कई देशों में डैशकैम कॉमन होते जा रहे हैं. ये आसानी से अवेलेबल हैं और आप अपनी मर्जी से कोई भी मॉडल खरीदकर अपने व्हीकल में यूज कर सकते हैं. पर कई देशों में डैशकैम आपको मुश्किल में फंसा सकता है. पुर्तगाल, लग्जमबर्ग और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में डैशकैम यूज करने पर जुर्माना लगता है. यहां डैशकैम को प्राइवेसी का उल्लंघन करने वाले डिवाइस के तौर पर ट्रीट किया जाता है.
वॉकी-टॉकी- वॉकी-टॉकी को यूज करना कई लोगों को आकर्षित कर सकता है. भारत में भी सिक्योरिटी पर्पज के लिए वॉकी-टॉकी यूज करना आम है. लेकिन कई देशों में इसे यूज करना इतना आसान नहीं है. यूएई की बात करें तो यहां वॉकी-टॉकी यूज करने से पहले परमिट लेना होता है. इसी तरह थाईलैंड में एक खास फ्रीक्वैंसी पर ही इन्हें ऑपरेट किया जा सकता है. अगर कोई दूसरी फ्रीक्वैंसी यूज करता हो तो उसका डिवाइस जब्त किया जा सकता है.
VPN- इंटरनेट यूज करते समय प्राइवेसी को प्रोटेक्ट करने के लिए वीपीएन का यूज किया जाता है. यह यूजर डिवाइस और सर्वर के बीच एक एनक्रिप्टेड टनल क्रिएट कर देता है, जिससे सर्विस प्रोवाइडर यह नहीं देख सकता कि आप किस वेबसाइट पर विजिट कर रहे हैं. पाकिस्तान, रूस और तुर्किये समेत कई देशों में इस पर बैन लगा हुआ है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp नहीं, Telegram ही क्यों हुई डिजिटल स्ट्राइक? कैसे काम करता है इसका सिस्टम</title>
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        <description><![CDATA[ Telegram Ban in India: भारत समेत कई देशों में मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. दोस्तों और परिवार से बातचीत से लेकर पढ़ाई, बिजनेस और बड़ी-बड़ी कम्युनिटीज तक, सब कुछ अब मोबाइल ऐप्स पर निर्भर हो गया है.
लेकिन आज भारत सरकार ने नीट की परिक्षा को लेकर Telegram पर बड़ी कार्रवाई की है. सरकार ने इस ऐप पर बैन लगा दिया है. अब ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठा कि आखिर WhatsApp की बजाय Telegram ही निशाने पर क्यों आया? इसके पीछे Telegram के काम करने के तरीके और उसके खास फीचर्स की बड़ी भूमिका है.
Telegram को लेकर क्यों उठे सवाल?
Telegram को उसकी तेज स्पीड, बड़े ग्रुप्स और फाइल शेयरिंग की क्षमता के लिए जाना जाता है. जहां WhatsApp में ग्रुप और चैनल की कुछ सीमाएं होती हैं, वहीं Telegram पर लाखों लोगों तक एक साथ जानकारी पहुंचाई जा सकती है.
यही वजह है कि कई बार कुछ लोग इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गलत गतिविधियों के लिए भी करने लगते हैं. बड़े सार्वजनिक चैनल, अनलिमिटेड फाइल शेयरिंग जैसे फीचर्स के कारण अवैध सामग्री या संवेदनशील जानकारी तेजी से फैल सकती है. ऐसे मामलों में प्रशासन की नजर सबसे पहले Telegram पर जाती है.
Telegram का सिस्टम कैसे काम करता है?
Telegram एक क्लाउड-बेस्ड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है. इसका मतलब है कि आपके मैसेज और मीडिया फाइलें सिर्फ फोन में ही नहीं बल्कि Telegram के सर्वरों पर भी सुरक्षित रहती हैं. यही कारण है कि आप किसी भी नए डिवाइस में लॉगिन करके पुराने चैट्स तक पहुंच सकते हैं.
WhatsApp मुख्य रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर आधारित है जबकि Telegram में नॉर्मल चैट्स क्लाउड पर स्टोर होती हैं. हालांकि Telegram Secret Chat नाम का एक स्पेशल फीचर भी देता है जिसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन उपलब्ध होता है और मैसेजेस को ज्यादा सुरक्षा मिलती है.
WhatsApp और Telegram में सबसे बड़ा अंतर
WhatsApp का फोकस निजी बातचीत पर ज्यादा है जबकि Telegram बड़े समुदायों और सार्वजनिक चैनलों के लिए जाना जाता है. Telegram पर एक चैनल के जरिए लाखों लोगों तक मैसेज पहुंचाया जा सकता है. इसके अलावा, बड़ी फाइलें शेयर करना और ऑटोमेटेड बॉट्स का इस्तेमाल भी Telegram की खासियत है.
यही सुविधाएं इसे पढ़ाई, बिजनेस और कंटेंट शेयरिंग के लिए खास बनाती हैं लेकिन कुछ मामलों में यही फीचर्स गलत इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ा देते हैं.
क्या Telegram पूरी तरह असुरक्षित है?
ऐसा बिल्कुल नहीं है. Telegram कई सेफ्टी फीचर्स प्रदान करता है जिनमें टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, पासकोड लॉक और सीक्रेट चैट जैसी सुविधाएं शामिल हैं. सुरक्षा काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करती है कि यूजर्स ऐप का इस्तेमाल कैसे कर रहा है और किस तरह के चैनलों या ग्रुप्स से जुड़ा हुआ है.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Panel लगवाने के बाद भी नहीं मिल रहा फायदा? ये हो सकते हैं कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Common Solar Panel Problems: लोग बिजली बिल की बचत और पावर कट की टेंशन से मुक्ति के लिए सोलर पैनल लगवाते हैं. कई बार मौसम से लेकर मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट और इंस्टॉलेशन में गड़बड़ जैसे कारणों से सोलर एनर्जी सिस्टम ठीक तरीके से काम नहीं कर पाता. अगर समय पर इन दिक्कतों को दूर न किया जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है. आज हम आपको उन कॉमन प्रॉब्लम के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सोलर एनर्जी सिस्टम को प्रभावति कर सकती हैं. साथ ही इनके समाधान के बारे में भी जानेंगे.
पैनल पर धूल-मिट्टी जमा होना
सोलर पैनल पर धूल-मिट्टी जमा होना सबसे कॉमन प्रॉब्लम है. कई जगहों पर प्रदूषण और कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी के कारण भी धूल ज्यादा उड़ती है जो पैनल पर जमा हो जाती है. अगर इसे समय रहते साफ न किया जा तो एनर्जी जनरेशन कम हो जाता है. धूल-मिट्टी सनलाइट को ब्लॉक कर देती है और पैनल की एफिशिएंसी कम होने लगती है. इससे बचने के लिए पैनल को महीने में कम से कम एक बार साफ कर लें.
सोलर पैनल में हॉटस्पॉट
कई बार पैनल का एक छोटा-सा हिस्सा बाकी सरफेस से ज्यादा गर्म हो जाता है. आमतौर पर क्रैक या इंटरनल डैमेज के कारण ऐसा होता है. जब उस जगह से इलेक्ट्रिसिटी पास नहीं हो पाती है तो वहां एक स्पॉट बन जाता है, जिसे हॉटस्पॉट कहा जाता है. ये आसानी से नजर नहीं आते, लेकिन कई बार पूरे पैनल की परफॉर्मेंस को कम कर देते हैं. समाधान की बात करें तो प्रोफेशनल टेक्निशियन को बुलाकर इसे दिखाना चाहिए.
क्रैक या फिजिकल डैमेज
ट्रांसपोर्टेशन से लेकर इंस्टॉलेशन तक पैनल में क्रैक या फिजिकल डैमेज आने का खतरा रहता है. क्रैक ग्लास सरफेस पर भी हो सकती है और इंटरनल सोलर सेल में भी. अगर कहीं भी एक छोटी-सी भी क्रैक है तो यह पूरे पैनल में इलेक्ट्रिसिटी के फ्लो पर डिस्टर्ब कर सकती है, जिससे सोलर एनर्जी सिस्टम की परफॉर्मेंस कम हो जाती है. इसी तरह कई बार मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में गड़बड़ के कारण भी डिलेमिनेशन और सॉल्डरिंग डिफेक्ट जैसी दिक्कतें रह जाती हैं, जो परफॉर्मेंस और एफिशिएंसी पर असर डालती हैं.
वायरिंग डिफेक्ट
कई बार ऐसा भी हो सकता है कि सोलर पैनल में कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन फिर भी यह सिस्टम पूरी ताकत के साथ काम नहीं कर पाता. ऐसा तब होता है, जब वायरिंग में कोई प्रॉब्लम रह गई हो. कनेक्शन लूज रह जाना, खराब क्वालिटी का वायर यूज करना या वायर को ठीक से मैनेज न किए जाने पर भी परफॉर्मेंस में कमी आ सकती है.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 02:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>AI बन सकता है आपका सबसे बड़ा डिजिटल खतरा! हर इंटरनेट यूजर को जाननी चाहिए ये सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Internet Users: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में पिछले कुछ दिन बेहद हलचल भरे रहे हैं. कहीं बड़ी टेक कंपनियां कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं तो कहीं अत्याधुनिक AI मॉडल्स को लेकर विवाद खड़े हो रहे हैं. इस बीच एक बात साफ है कि AI तकनीक के विकास की रफ्तार पहले से कहीं ज्यादा तेज हो चुकी है. Google, Microsoft, Meta और Anthropic जैसी दिग्गज कंपनियां लगातार नए और अधिक शक्तिशाली AI सिस्टम तैयार करने में जुटी हैं. लेकिन इस तेज दौड़ के पीछे एक ऐसी चिंता छिपी है जो दुनिया के हर इंटरनेट यूजर को प्रभावित कर सकती है और वह है डेटा की बढ़ती भूख.
AI को आखिर इतना डेटा क्यों चाहिए?
AI मॉडल्स इंसानों की तरह सोचने और जवाब देने की क्षमता खुद से विकसित नहीं करते. उन्हें सीखने के लिए भारी मात्रा में डेटा की जरूरत होती है. यह डेटा टेक्स्ट, तस्वीरें, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग और यहां तक कि लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों से भी जुटाया जाता है.
जितनी ज्यादा जानकारी AI को मिलती है वह उतना ही बेहतर तरीके से पैटर्न समझ पाता है और अपने जवाबों को अधिक सटीक बना सकता है. यही वजह है कि AI कंपनियां लगातार नए डेटा स्रोतों की तलाश में रहती हैं ताकि उनके मॉडल पहले से ज्यादा सक्षम बन सकें.
इंटरनेट का डेटा अब पर्याप्त नहीं रहा
AI के शुरुआती दौर में कंपनियां मुख्य रूप से इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल करती थीं. वेबसाइटों, ब्लॉग्स, लेखों और अन्य खुले स्रोतों से प्राप्त जानकारी AI प्रशिक्षण का प्रमुख आधार थी.
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. AI मॉडल्स पहले से कहीं बड़े और अधिक जटिल हो गए हैं. ऐसे में सार्वजनिक डेटा की उपलब्धता सीमित पड़ने लगी है. इसी कारण टेक कंपनियां अब उच्च गुणवत्ता वाले कंटेंट तक पहुंच पाने के लिए प्रकाशकों, मीडिया संस्थानों और कंटेंट क्रिएटर्स के साथ लाइसेंसिंग समझौते कर रही हैं.
निजता और सहमति पर बढ़ते सवाल
डेटा हासिल करने की इस होड़ में सबसे बड़ा सवाल यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर उठ रहा है. कई बार लोगों को यह तक स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाता कि उनकी जानकारी किस तरह इस्तेमाल की जा रही है. कुछ मामलों में डेटा संग्रह से बाहर रहने का विकल्प भी ढूंढना आसान नहीं होता.
विशेषज्ञों का मानना है कि AI को बेहतर बनाने के लिए डेटा जरूरी है लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और उपयोगकर्ता की सहमति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. यदि लोगों को यह पता ही न हो कि उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है तो यह गंभीर चिंता का विषय बन सकता है.
बेहतर AI की कीमत क्या बहुत ज्यादा है?
यह सच है कि अधिक डेटा मिलने से AI टूल्स अधिक स्मार्ट और उपयोगी बनते हैं. इससे यूजर्स को बेहतर सर्च, अधिक सटीक सुझाव और एडवांस डिजिटल सेवाएं मिल सकती हैं.
लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. इंटरनेट पर मौजूद आपकी तस्वीरें, पोस्ट, टिप्पणियां, पसंद-नापसंद और अन्य डिजिटल जानकारी AI प्रशिक्षण का हिस्सा बन सकती हैं. यानी बेहतर तकनीक पाने की कीमत कहीं न कहीं व्यक्तिगत डेटा के रूप में चुकाई जा रही है.
सरकारों की भूमिका क्यों जरूरी हो गई है?
AI उद्योग की डेटा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं और फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि यह मांग भविष्य में कम होगी. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारों और नियामक संस्थाओं को ज्यादा एक्टिव भूमिका निभानी चाहिए.
जरूरी है कि डेटा संग्रह के प्रोसेस पारदर्शी हो यूजर्स को स्पष्ट ऑप्शन दिए जाएं और कंपनियों पर उचित निगरानी रखी जाए. यदि समय रहते प्रभावी नियम नहीं बनाए गए तो आने वाले वर्षों में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा एक और बड़ी चुनौती बन सकती है.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 02:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Google का Logo बार&amp;बार क्यों बदल जाता है? Doodle के पीछे छिपी है बेहद दिलचस्प कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ Google का Logo बार-बार क्यों बदल जाता है? Doodle के पीछे छिपी है बेहद दिलचस्प कहानी ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 02:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ टाइपिंग के लिए ही नहीं होता फोन का Keyboard! ज्यादातर लोगों को नहीं पता है इसके सीक्रेट फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: स्मार्टफोन का कीबोर्ड सिर्फ मैसेज टाइप करने का साधन नहीं है. आज के समय में Android और iPhone के कीबोर्ड कई ऐसे स्मार्ट फीचर्स के साथ आते हैं जिनके बारे में ज्यादातर यूजर्स को जानकारी ही नहीं होती. ये फीचर्स न केवल आपकी टाइपिंग को तेज बनाते हैं बल्कि समय बचाने और गलतियों को कम करने में भी मदद करते हैं. अगर आप भी रोजाना फोन पर चैटिंग, ईमेल या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं तो ये 5 छिपे हुए कीबोर्ड फीचर्स आपके लिए बेहद काम के साबित हो सकते हैं.
Swipe Typing से करें सुपरफास्ट टाइपिंग
अगर आप हर अक्षर पर अलग-अलग टैप करते हैं तो अब यह तरीका बदलने का समय आ गया है. अधिकांश स्मार्टफोन कीबोर्ड में Swipe Typing का फीचर मिलता है. इसमें आपको उंगली को एक अक्षर से दूसरे अक्षर तक स्लाइड करना होता है और कीबोर्ड खुद शब्द पहचान लेता है. यह फीचर खासतौर पर एक हाथ से फोन चलाने वालों के लिए काफी उपयोगी है. इससे टाइपिंग की स्पीड कई गुना बढ़ सकती है.
Clipboard फीचर से बचाएं समय
कई बार हमें एक ही टेक्स्ट को बार-बार पेस्ट करना पड़ता है. ऐसे में कीबोर्ड का Clipboard फीचर बहुत काम आता है. यह आपके द्वारा कॉपी किए गए टेक्स्ट, लिंक या नंबर को कुछ समय तक सुरक्षित रखता है. इसकी मदद से आपको बार-बार कॉपी करने की जरूरत नहीं पड़ती और जरूरी जानकारी आसानी से दोबारा इस्तेमाल की जा सकती है.
Voice Typing से बिना टाइप किए लिखें मैसेज
जब हाथ व्यस्त हों या लंबा मैसेज टाइप करने का मन न हो, तब Voice Typing शानदार विकल्प है. आपको सिर्फ माइक्रोफोन आइकन पर टैप करना होता है और जो बोलेंगे वह टेक्स्ट में बदल जाएगा.
आजकल AI आधारित वॉयस टाइपिंग पहले से काफी बेहतर हो चुकी है और हिंदी समेत कई भाषाओं को अच्छी तरह समझ लेती है.
Text Shortcut से बार-बार लिखने की झंझट खत्म
क्या आप अपना ईमेल, पता या कोई खास मैसेज बार-बार टाइप करते हैं? कीबोर्ड का Text Shortcut फीचर इस परेशानी को खत्म कर सकता है. उदाहरण के लिए आप em टाइप करते ही अपना पूरा ईमेल एड्रेस ऑटोमैटिक दिखा सकते हैं. इससे समय की बचत होती है और टाइपिंग आसान बन जाती है.
One-Handed Mode से बड़े फोन पर आसान टाइपिंग
आजकल स्मार्टफोन की स्क्रीन काफी बड़ी हो गई हैं जिससे एक हाथ से टाइप करना मुश्किल हो सकता है. One-Handed Mode की मदद से कीबोर्ड स्क्रीन के एक कोने में सिमट जाता है. इससे अंगूठे से सभी बटन तक पहुंचना आसान हो जाता है और बड़े फोन पर भी आराम से टाइपिंग की जा सकती है.
क्यों जानना जरूरी हैं ये फीचर्स?
अधिकांश लोग अपने फोन के कीबोर्ड का केवल 20-30% हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं. जबकि इन स्मार्ट फीचर्स की मदद से टाइपिंग तेज, आसान और अधिक सुविधाजनक बन सकती है. अगर आपने अभी तक इन विकल्पों को नहीं आजमाया है तो एक बार जरूर इस्तेमाल करें. हो सकता है कि इसके बाद आपका फोन इस्तेमाल करने का तरीका ही पूरी तरह बदल जाए.
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 02:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Refrigerator Power Consumption: सिंगल डोर या डबल डोर... 1 घंटे में कौन सा फ्रिज खाता है ज्यादा बिजली, जानें यूनिट का हिसाब&amp;किताब?</title>
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        <description><![CDATA[ Refrigerator Power Consumption: गर्मियों में अक्सर फ्रिज घर की सबसे जरूरी चीज बन जाता है. दूध रखना हो या फिर सब्जियों को ताजा रखना हो, फ्रिज सारी जरूरतों को पूरा करता है. लेकिन पूरे दिन फ्रिज का चलते रहना जितना जरूरी होता है, उसके अलावा यह भी जानना जरूरी है कि आपका फ्रिज कितना बिजली खाता है. &amp;nbsp;ऐसे वक्त एक ही ख्याल मन में आता है कि कौन सा फ्रिज बिजली बचाता है, सिंगल डोर या फिर डबल डोर फ्रिज. तो आइए आपको बताते हैं इसका पूरा हिसाब-किताब क्या है.&amp;nbsp;
सिंगल डोर फ्रिज कितनी बिजली खाता है?
सबसे पहले सिंगल डोर रेफ्रिजरेटर के बारे में बात करें तो इनकी सबसे खास बात ये होती है कि ये डबल डोर रेफ्रिजरेटर की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत कम बिजली की खपत करते हैं. &amp;nbsp;साथ ही इनकी साइज भी छोटी होती है. ऐसे में इन्हें आसानी से कहीं भी रखते भी बन जाता है. &amp;nbsp;अगर आपकी छोटी फैमिली है तो ये आपके लिए बेहतर है. सिंगल डोर फ्रिज आमतौर पर 180 से 200 लीटर क्षमता का होता है. &amp;nbsp;इसमें कंप्रेसर और पंखा मिलकर काम नहीं करते, बल्कि ठंडक खुद ऊपर से नीचे आती है. &amp;nbsp;सिंगल डोर फ्रिज की बिजली खपत आमतौर पर 70 से 150 वॉट के बीच होती है और यह पूरे दिन में करीब 0.8 से 2.5 यूनिट बिजली खर्च करता है. &amp;nbsp;अगर एक घंटे की बात करें तो यह लगभग 0.07 से 0.10 यूनिट प्रति घंटा खर्च करता है.&amp;nbsp;
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डबल डोर फ्रिज कितनी बिजली खाता है?
डबल डोर फ्रिज बड़े होते हैं और इनमें Frost Free तकनीक होती है, यानी इनमें खुद-ब-खुद बर्फ नहीं जमती. लेकिन इसके लिए कंप्रेसर और पंखा दोनों एक साथ काम करते हैं, जिससे बिजली की खपत ज्यादा होती है. &amp;nbsp;डबल-डोर फ्रिज बड़ी कैपेसिटी के साथ आते हैं. ऐसे में आप इसमें काफी दिनों के लिए सब्जियां या बाकी चीजें स्टोर कर सकते हैं. &amp;nbsp;साथ ही इसमें फ्रीजर के लिए अलग से डोर होता है. &amp;nbsp;ऐसे में आपको फ्रीजर को एक्सेस करने के लिए रेफ्रिजरेटर का गेट ओपन नहीं करना होता है और इससे इसका तापमान नहीं बढ़ता है. इसमें फ्रीजर की साइज भी बड़ी होती है. &amp;nbsp;एक घंटे में यह लगभग 0.10 से 0.17 यूनिट बिजली खर्च करता है. हालांकि नए Inverter डबल डोर फ्रिज इससे कम बिजली खर्च करते हैं क्योंकि उनका कंप्रेसर जरूरत के हिसाब से अपनी रफ्तार घटाता-बढ़ाता है.&amp;nbsp;
डबल-डोर फ्रिज की कीमत ज्यादा होने के साथ-साथ इसकी कैपेसिटी भी ज्यादा होती है जिसके कारण ये बिजली की खपत भी ज्यादा करते हैं. डबल-डोर रेफ्रिजरेटर आमतौर पर फ्रॉस्ट-फ्री टेक्नोलॉजी के साथ आते हैं, जिन्हें ऑपरेट होने के लिए 30-40 प्रतिशत ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. अगर आपके घर में जगह कम हो तो ये और भी परेशानी खड़ी कर सकते हैं.&amp;nbsp;
तो कौन सा फ्रिज खरीदें?
आपको कौन सा फ्रिज खरीदना चाहिए, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे आपकी जरूरत कितनी है, आपके घर में कितने फैमिली मेंबर्स हैं, आपको फ्रिज की कितनी जरूरत पड़ती है और आपके घर में फ्रिज रखने की कितनी जरूरत है. &amp;nbsp;वहीं अगर आपका बजट ज्यादा है और आपकी फैमिली में 6 से 7 लोग हैं, तो आपके लिए डबल डोर फ्रिज खरीदना एक बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं अगर आपकी छोटी फैमिली है तब आपको सिंगल डोर का फ्रिज खरीदना चाहिए. &amp;nbsp;इससे आपको आपके बजट अनुसार फ्रिज भी मिल जाता है, इसलिए सिंगल डोर खरीदना बेहतर विकल्प है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आधा अरब लोगों ने किया सब्सक्राइब! MrBeast ने रचा YouTube पर इतिहास, जानिए कैसे बढ़ाएं फॉलोअर्स</title>
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Chrome की यह सेटिंग ON करते ही रॉकेट हो जाएगी इंटरनेट स्पीड! ज्यादातर लोग नहीं जानते ये ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome: आज के समय में करोड़ों लोग अपने स्मार्टफोन और कंप्यूटर पर रोजाना Google Chrome का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन बहुत कम यूजर्स जानते हैं कि Chrome में एक ऐसा छिपा हुआ फीचर मौजूद है जो वेबसाइट्स को पहले से तेज लोड करने में मदद कर सकता है. इस फीचर का नाम Preload Pages है. इसे एक्टिव करने के बाद ब्राउजर उन वेब पेजों को पहले से तैयार रखना शुरू कर देता है जिन पर आपके क्लिक करने की संभावना अधिक होती है.
अगर आप अक्सर ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं सोशल मीडिया चलाते हैं या काम के दौरान कई वेबसाइट्स खोलते हैं तो यह सेटिंग आपके ब्राउजिंग अनुभव को काफी बेहतर बना सकती है.
क्या है Chrome का Preload Pages फीचर?
Preload Pages Chrome का एक बिल्ट-इन फीचर है जिसका उद्देश्य वेबसाइट्स को तेजी से खोलना है. यह फीचर आपके ब्राउज़िंग पैटर्न का अनुमान लगाकर उन पेजों को बैकग्राउंड में पहले से लोड करना शुरू कर देता है जिन्हें आप अगली बार खोल सकते हैं.
जब आप वास्तव में उस लिंक पर क्लिक करते हैं तो पेज पहले से तैयार होने के कारण बहुत जल्दी खुल जाता है. इससे वेबसाइट लोड होने में लगने वाला इंतजार कम हो जाता है और ब्राउजिंग अधिक स्मूथ महसूस होती है.
किन डिवाइसों पर उपलब्ध है यह फीचर?
Chrome का Preload Pages फीचर लगभग सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है जिनमें शामिल हैं.

Android स्मार्टफोन
iPhone
Windows PC
Mac कंप्यूटर

यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार Standard Preloading या Extended Preloading मोड चुन सकते हैं. Extended मोड अधिक वेब पेजों को पहले से लोड करता है जिससे स्पीड और बेहतर हो सकती है.
कंप्यूटर पर कैसे चालू करें यह सेटिंग?
यदि आप Windows या Mac पर Chrome इस्तेमाल करते हैं, तो नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें.

Google Chrome खोलें.
ऊपर दाईं ओर मौजूद तीन डॉट्स पर क्लिक करें.
Settings में जाएं.
Performance सेक्शन खोलें.
Preload Pages विकल्प को ऑन करें.
बेहतर स्पीड के लिए Extended Preloading चुनें.

मोबाइल पर कैसे एक्टिव करें Preload Pages?
Android और iPhone यूजर्स इन आसान स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं.

Chrome ऐप खोलें.
तीन डॉट्स वाले मेन्यू पर टैप करें.
Settings में जाएं.
Privacy and Security विकल्प चुनें.
Preload Pages पर टैप करें.
Standard या Extended Preloading में से अपनी पसंद का विकल्प चुनें.

क्या इस फीचर का कोई नुकसान भी है?
हालांकि यह फीचर ब्राउजिंग स्पीड बढ़ाने में मदद करता है लेकिन इसके साथ एक छोटा सा समझौता भी जुड़ा है. क्योंकि Chrome कुछ वेब पेजों को पहले से लोड करता है इसलिए.

मोबाइल डेटा की खपत थोड़ी बढ़ सकती है.
डिवाइस की मेमोरी का थोड़ा अधिक इस्तेमाल हो सकता है.

बेहतर अनुमान लगाने के लिए ब्राउजर कुकीज का इस्तेमाल कर सकता है. यदि आपके पास सीमित डेटा प्लान है तो Extended की बजाय Standard मोड चुनना बेहतर हो सकता है.
आम यूजर्स के लिए क्यों है उपयोगी?
जो लोग धीमी वेबसाइट्स से परेशान रहते हैं उनके लिए यह सेटिंग एक आसान समाधान साबित हो सकती है. इसके लिए किसी अतिरिक्त ऐप को डाउनलोड करने या नया डिवाइस खरीदने की जरूरत नहीं है. हालांकि यह कमजोर इंटरनेट कनेक्शन को तेज नहीं बनाएगी लेकिन वेबसाइट्स को पहले से तैयार रखकर ब्राउज़िंग अनुभव को अधिक तेज और स्मूथ जरूर बना सकती है.
खासतौर पर वे लोग जो दिनभर कई लिंक खोलते हैं ऑनलाइन खरीदारी करते हैं, खबरें पढ़ते हैं या सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं उन्हें इस फीचर का फायदा साफ तौर पर महसूस हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए सिंगापुर का 19वीं सदी वाला कूलिंग सिस्टम तकनीक फिर चर्चा में, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Singapore Cooling Technology: सिंगापुर के उत्तर-पूर्वी इलाके पंगगोल के नीचे एक बेहद खास भूमिगत सिस्टम काम कर रहा है जो करीब 5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए ठंडा पानी इमारतों तक पहुंचाता है. 2025 में प्रति व्यक्ति GDP के हिसाब से दुनिया के दूसरे सबसे अमीर देश माने जाने वाले सिंगापुर में यह आधुनिक नहीं बल्कि पुरानी तकनीक पर आधारित व्यवस्था तेजी से फैल रही है.
क्या है District Cooling सिस्टम?
इस तकनीक को डिस्ट्रिक्ट कूलिंग कहा जाता है. इसमें एक केंद्रीय प्लांट में पानी को ठंडा किया जाता है और फिर उसे भूमिगत पाइपों के जरिए आसपास की इमारतों तक भेजा जाता है. यह पानी इमारतों के अंदर हवा को ठंडा करने में मदद करता है और फिर वापस प्लांट में लौटकर दोबारा ठंडा किया जाता है.
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पारंपरिक एयर कंडीशनिंग की तुलना में कम बिजली खर्च करता है जो सिंगापुर जैसे देश के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि वह अपनी ज्यादातर ऊर्जा आयात करता है.
तेजी से फैलता नेटवर्क और बड़े प्रोजेक्ट
सिंगापुर में इस तरह के सिस्टम कम से कम आठ अलग-अलग जिलों में लगाए जा चुके हैं. मरीना बे का डिस्ट्रिक्ट कूलिंग प्लांट जो 2006 में शुरू हुआ था दुनिया का सबसे बड़ा भूमिगत कूलिंग नेटवर्क माना जाता है. अब कई नई इमारतों को भी इस सिस्टम से जोड़ा जा रहा है और नए प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.
ENGIE जैसी बड़ी कंपनियां भी इस क्षेत्र में एक्टिव हैं. पंगगोल में इनके दो सिस्टम लगभग 8,000 सरकारी आवासों को ठंडक पहुंचा रहे हैं.
बढ़ती गर्मी और बिजली खपत बड़ी चुनौती
सिंगापुर में तापमान वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है जिससे एयर कंडीशनिंग की मांग लगातार बढ़ रही है. हालांकि AC लोगों को राहत देता है लेकिन इससे बिजली की खपत और कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ता है जिससे एक तरह का &amp;ldquo;ऊर्जा चक्र&amp;rdquo; बन जाता है.
इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने सरकारी इमारतों और घरों में तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस रखने की सलाह दी है.
बड़ा निवेश और जलवायु रणनीति
सिंगापुर सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए करीब 100 अरब सिंगापुर डॉलर (लगभग 77 अरब अमेरिकी डॉलर) का लंबी अवधि का निवेश किया है. डिस्ट्रिक्ट कूलिंग को इसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है.
19वीं सदी से जुड़ी है यह तकनीक
दिलचस्प बात यह है कि इस तकनीक की जड़ें 19वीं सदी तक जाती हैं. सबसे शुरुआती डिस्ट्रीक्ट कूलिंग सिस्टम 1889 में अमेरिका के डेनवर शहर में अमोनिया या ब्राइन सॉल्यूशन के जरिए बनाया गया था.
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक बिजली की खपत को 30% से 50% तक कम कर सकती है हालांकि इसे विकसित करने में भारी लागत लगती है.
चुनौतियां भी कम नहीं
इस सिस्टम की अपनी सीमाएं भी हैं. इसे चलाने के लिए काफी मात्रा में पानी की जरूरत होती है जो आगे चलकर जल संकट और डेटा सेंटर जैसे बड़े उपभोक्ताओं के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 21:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone 17 Pro वाली गलती से बचना चाहती है ऐप्पल, 18 Pro में करेगी यह काम</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro: ऐप्पल की iPhone 17 सीरीज सुपरहिट साबित हुई थी, लेकिन इसके फ्लैगशिप Pro मॉडल्स में ऐसी दिक्कतें भी आईं, जिसके चलते कंपनी की काफी फजीहत का सामना करना पड़ा था. खासकर ड्यूरैबिलिटी और कॉस्मिक ऑरेंज मॉडल में कलर चेंज होने की समस्याएं खूब चर्चा में रही थीं. अब 18 Pro मॉडल्स पर काम कर रही कंपनी ने इस गलती को सुधारने पर जोर दिया है. 17 Pro मॉडल वाली गलतियों को दोहराना नहीं चाहती. इसलिए नए मॉडल की मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को बदला गया है.
iPhone 18 Pro को रंग बदलने से रोकने के लिए क्या हो रहा है?
रिपोर्ट्स की मानें तो ऐप्पल iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को ज्यादा ड्यूरेबल बनाने के लिए एक नई मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस यूज कर रही है. इसमें इंप्रूव्ड एल्युमिनियम रिफाइनिंग प्रोसेस की मदद ली जा रही है, जिसमें कम टेंपरेचर और कम इलेक्ट्रोकेमिकल रिफाइनमेंट स्टेप्स की जरूरत पड़ती है. इस प्रोसेस से नए मॉडल को ज्यादा कॉरोजन रजिस्टेंस और एलॉय स्ट्रेंग्थ मिलेगी, जिससे कलर चेंज होने की दिक्कत दूर होने की उम्मीद है. इस प्रोसेस से कंपनी की लागत भी कम होगी.
एल्युमिनियम फिनिशिंग को ही कंटिन्यू करेगी ऐप्पल
इससे पहले आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ऐप्पल नए मॉडल के लिए iPhone 17 Pro वाली एल्युमिनियम फिनिशिंग को ही नई सीरीज के लिए कंटिन्यू करेगी. टाइटैनियम के मुकाबले इसमें हीट को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है. ऐप्पल इस बार मैटेरियल को चेंज न करते हुए प्रोसेस में बदलाव कर रही है. यह बदलाव करना इसलिए भी जरूरी है कि कंपनी लगातार दो साल तक एक ही जैसी कमी के कारण शर्मिंदगी का सामना नहीं करना चाहती. दूसरा कारण यह है कि ऐप्पल आईफोन कलर को लेकर नए एक्सपेरिमेंट कर रही है. इस बार Pro मॉडल को डार्क चेरी कलर ऑप्शन के साथ भी उतारा जाएगा. अगर इसमें भी कलर चेंज होने की शिकायतें सामने आती हैं तो ऐप्पल के लिए डिफेंड करना मुश्किल हो जाएगा.
iPhone 17 Pro में लॉन्च होते ही आने लगी थी दिक्कत
ऐप्पल ने पिछले साल सितंबर में iPhone 17 Pro मॉडल्स को लॉन्च किया था. बिक्री शुरू होने के लगभग दो हफ्तों के भीतर ही इस मॉडल के कलर चेंज होने की दिक्कतें आने लगी थीं. कॉस्मिक ऑरेंज कलर में यह दिक्कत ज्यादा आई और कई यूजर ने प्रो मॉडल के पिंक होने की शिकायतें की थीं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 21:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Dark Mode Vs Light Mode: गर्मियों में कौन बचाता है ज्यादा बैटरी? सच जानकर बदल देंगे अपनी सेटिंग</title>
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        <description><![CDATA[ Dark Mode Vs Light Mode: गर्मियों के मौसम में स्मार्टफोन यूजर्स अक्सर एक सवाल पूछते हैं क्या Dark Mode इस्तेमाल करने से बैटरी ज्यादा बचती है और क्या यह फोन को कम गर्म रखता है? बढ़ते तापमान और तेजी से खत्म होती बैटरी के बीच यह बहस पहले से ज्यादा चर्चा में है. हालांकि इसका जवाब केवल डार्क या लाइट थीम चुनने पर निर्भर नहीं करता बल्कि आपके फोन की स्क्रीन तकनीक और इस्तेमाल के तरीके पर भी आधारित है.
क्या Dark Mode सच में बैटरी बचाता है?
अगर आपके स्मार्टफोन में OLED या AMOLED डिस्प्ले है तो Dark Mode कुछ हद तक बैटरी बचाने में मदद कर सकता है. ऐसी स्क्रीन में काले रंग के पिक्सल बहुत कम या बिल्कुल भी बिजली खर्च नहीं करते. यही वजह है कि डार्क इंटरफेस इस्तेमाल करने पर स्क्रीन की ऊर्जा खपत कम हो सकती है.
हालांकि कई लोग मानते हैं कि Dark Mode से बैटरी लाइफ में बहुत बड़ा फर्क पड़ता है लेकिन वास्तविकता में यह अंतर अक्सर सीमित होता है. यदि स्क्रीन ब्राइटनेस कम या मीडियम लेवल पर रखी जाए तो रोजमर्रा के इस्तेमाल में बैटरी बचत उतनी ज्यादा स्पष्ट महसूस नहीं होती.
LCD स्क्रीन वाले फोन में कितना फायदा?
सभी स्मार्टफोन OLED स्क्रीन के साथ नहीं आते. जिन फोन में LCD डिस्प्ले होती है उनमें Dark Mode का बैटरी पर लगभग कोई खास असर नहीं पड़ता. इसका कारण यह है कि LCD स्क्रीन की बैकलाइट हर समय चालू रहती है चाहे स्क्रीन पर काला रंग दिख रहा हो या सफेद.
इसलिए यदि आपका फोन LCD पैनल वाला है तो केवल बैटरी बचाने के लिए Dark Mode अपनाने से ज्यादा लाभ मिलने की संभावना नहीं है.
गर्मी का मौसम बैटरी को कैसे प्रभावित करता है?
हाई तापमान बैटरी की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है. गर्मियों में गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, GPS नेविगेशन और लंबे समय तक बाहर फोन इस्तेमाल करने से डिवाइस जल्दी गर्म हो जाता है.
ऐसी स्थिति में OLED स्क्रीन वाले फोन पर Dark Mode थोड़ी कम ऊर्जा खर्च कर सकता है जिससे गर्मी पैदा होने में मामूली कमी आ सकती है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि फोन की ब्राइटनेस का प्रभाव इससे कहीं ज्यादा होता है.
गर्मियों में कौन-सा मोड ज्यादा बेहतर है?
यह पूरी तरह आपके उपयोग पर निर्भर करता है. तेज धूप में बाहर इस्तेमाल करते समय Light Mode अधिक स्पष्ट दिखाई देता है और टेक्स्ट पढ़ना आसान होता है. रात के समय या घर के अंदर Dark Mode आंखों को अपेक्षाकृत आरामदायक महसूस हो सकता है.
OLED स्क्रीन वाले फोन में Dark Mode बैटरी की थोड़ी बचत भी कर सकता है. इसलिए किसी एक मोड को हर स्थिति में सर्वश्रेष्ठ नहीं कहा जा सकता.
बैटरी बचाने के लिए क्या करें?
यदि आपका लक्ष्य बैटरी लाइफ बढ़ाना है तो केवल डार्क या लाइट मोड पर निर्भर रहने के बजाय इन बातों पर ध्यान दें.

स्क्रीन ब्राइटनेस को जरूरत के अनुसार रखें.
बैकग्राउंड में चल रहे अनावश्यक ऐप्स बंद करें.
जरूरत पड़ने पर Battery Saver मोड का इस्तेमाल करें.
फोन को लंबे समय तक सीधी धूप में न रखें.
मोबाइल डेटा की बजाय संभव हो तो Wi-Fi का इस्तेमाल करें.
ओवरहीटिंग से बचाने के लिए भारी ऐप्स का लगातार इस्तेमाल न करें.

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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 21:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>Reels देखना नहीं रहा खतरे से खाली! इस तरीके से आपको टारगेट कर सकते हैं हैकर</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Reels Risks: आप इंस्टाग्राम रील्स देख रहे हैं. अचानक से फीड पर किसी सर्विस के प्रीमियम सब्सक्रिप्शन को फ्री में पाने का तरीका बताने वाला वीडियो आता है. आप वीडियो में बताए स्टेप्स को फॉलो करते हैं और कुछ दिन बाद पता चलता है कि आपकी फाइनेंशियल इंफोर्मेशन, पासवर्ड और दूसरे क्रेडेंशियल गलत हाथों में पहुंच गए हैं. फिर आप सोचते रह जाते हैं कि आखिर पासवर्ड और दूसरी जानकारी लीक कैसे हुई और आखिर ये हो कैसे रहा है? रिसर्चर ने पता लगाया है कि इसके पीछे स्कैमर का पूरी तरह प्लान किया हुआ कैंपेन चल रहा है.
रील्स के जरिए किया जा टारगेट
रिवर्सिंग लैब्स के रिसर्चर के मुताबिक, इन दोनों दो अलग-अलग साइबर क्राइम कैंपेन चल रहे हैं. ये टिकटॉक वीडियो और रील्स के जरिए लोगों को टारगेट कर रहे हैं. पहले यूजर्स को ट्यूटोरियल वाला शॉर्ट वीडियो दिखाया जाता है और फिर मलेशियस वेबसाइट के जरिए उनके डिवाइस में मालवेयर इंस्टॉल किया जाता है. यह मालवेयर यूजर की सारी जानकारी हैकर तक पहुंचाता रहता है. चूंकि इंस्टाग्राम आदि पर ट्यूटोरियल वीडियो बहुत आम है तो यूजर्स को हैकर्स की चाल समझ भी नहीं आती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स इसके लिए VidarStealer नाम के इंफोस्टीलर का यूज कर रहे हैं. इसका यूज कर लोगों को टारगेट करना आसान और फास्टर हो गया है.&amp;nbsp;
सोशल मीडिया पर कैसे आया यह खतरा?
हैकर्स वीडियो में पॉपुलर सॉफ्टवेयर और ऐप्स के पेड सब्सक्रिप्शन को फ्री में देने का दावा करते हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह के लाखों वीडियो मौजूद हैं. वीडियो में किसी प्रकार की गड़बड़ दिखाई नहीं देती और यह दूसरी रील्स जैसा ही दिखता है. चूंकि सोशल मीडिया पर करोड़ों लोग रोजाना घंटों बीताते हैं, इसलिए स्कैमर के पास भी टारगेट करने के लिए ज्यादा बड़ा यूजर ग्रुप हो जाता है. स्कैमर को इस तरीके से न तो बल्क ईमेल करने होते हैं और न ही उन्हें हर यूजर के पास कॉल करने की जरूरत होती है.
क्या है ऐसे स्कैम से बचाव का तरीका?
सोशल मीडिया पर ऐसे स्कैम आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं. एआई टूल्स के आने के बाद अब सॉफिस्टिकेटेड ऑपरेशन के लिए हैकर्स को टेक्नीकल नॉलेज होने की जानकारी भी जरूरी नहीं है. इसलिए स्कैम से बचाव में कुछ सावधानियां काम आ सकती हैं-

इस बात का ध्यान रखें कि रील्स आदि तरीकों से सोशल मीडिया पर स्कैम हो सकता है.
फ्री सॉफ्टवेयर, ऐप्स या उनके क्रैक्ड वर्जन का दावा करने वाले वीडियो से सतर्क रहें.
संदिग्ध वीडियो और अकाउंट को रिपोर्ट कर रहें.
किसी भी अनजान लिंक और सोर्स से फाइल्स डाउनलोड न करें.

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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 21:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>आपका Wi&amp;Fi हैकर्स के निशाने पर! तुरंत बदल दें ये 3 सेटिंग्स, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ आपका Wi-Fi हैकर्स के निशाने पर! तुरंत बदल दें ये 3 सेटिंग्स, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 21:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>सोशल मीडिया की लत से अपने आप को कैसे बचाएं, जानिए क्या हैं उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media: आज के दौर में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. चाहे दोस्तों और परिवार से जुड़े रहना हो, नई जानकारी हासिल करनी हो या मनोरंजन करना हो ज्यादातर लोग दिन का बड़ा हिस्सा फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बिताते हैं. हालांकि, कई बार यही प्लेटफॉर्म हमारी एकाग्रता, मानसिक शांति और आत्मविश्वास को भी प्रभावित करने लगते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी नहीं है. असली जरूरत इसे समझदारी और संतुलन के साथ इस्तेमाल करने की है. यहां कुछ आसान तरीके बताए गए हैं जो सोशल मीडिया के साथ स्वस्थ रिश्ता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.
स्क्रीन टाइम पर रखें नजर
अक्सर लोगों को अंदाजा ही नहीं होता कि वे रोजाना कितने घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं. अपने फोन के स्क्रीन टाइम फीचर का इस्तेमाल करें और रोजाना के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करें. इससे बेवजह स्क्रॉलिंग की आदत कम होगी.
अपनी फीड को बेहतर बनाएं
आप जिन अकाउंट्स को फॉलो करते हैं वही आपकी सोच और भावनाओं को प्रभावित करते हैं. ऐसे पेज और लोगों को फॉलो करें जो आपको कुछ नया सिखाते हों, प्रेरित करते हों या सकारात्मक ऊर्जा देते हों. नकारात्मकता फैलाने वाले अकाउंट्स से दूरी बनाएं.
दिन की शुरुआत और अंत सोशल मीडिया से न करें
सुबह उठते ही और रात को सोने से पहले सोशल मीडिया देखने की आदत मानसिक तनाव बढ़ा सकती है. दिन की शुरुआत किसी सकारात्मक एक्टिविटी से करें और सोने से पहले कुछ समय स्क्रीन से दूर रहें.
गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद करें
हर कुछ मिनट में आने वाले नोटिफिकेशन ध्यान भंग करते हैं और बार-बार फोन देखने की आदत पैदा करते हैं. केवल जरूरी अलर्ट चालू रखें और बाकी नोटिफिकेशन बंद कर दें.
नियमित डिजिटल ब्रेक लें
दिन में कुछ समय ऐसा तय करें जब आप सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहें. इस दौरान किताब पढ़ें, टहलें, व्यायाम करें या किसी शौक को समय दें. इससे मानसिक ताजगी बनी रहती है.
असली रिश्तों को प्राथमिकता दें
तकनीक का उद्देश्य लोगों को जोड़ना है उनकी जगह लेना नहीं. दोस्तों और परिवार के साथ आमने-सामने बातचीत को महत्व दें और केवल ऑनलाइन संपर्क पर निर्भर न रहें.
पोस्ट करने से पहले सोचें
कुछ भी साझा करने से पहले खुद से पूछें कि क्या यह जानकारी उपयोगी है, किसी को प्रेरित कर सकती है या बातचीत में सकारात्मक योगदान देती है. सोच-समझकर की गई पोस्ट ज्यादा प्रभावशाली होती है.
लाइक्स और फॉलोअर्स को अपनी पहचान न बनाएं
किसी पोस्ट पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट्स या फॉलोअर्स की संख्या आपकी योग्यता, प्रतिभा या सफलता को तय नहीं करती. अपनी वास्तविक उपलब्धियों और व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दें.
वर्तमान पल का आनंद लें
खाना खाते समय, परिवार के साथ बैठते समय या किसी खास मौके पर बार-बार फोन चेक करने से बचें. यादगार अनुभवों को जीना, उन्हें रिकॉर्ड करने से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है.
उद्देश्य के साथ सोशल मीडिया इस्तेमाल करें
हर बार ऐप खोलने से पहले तय करें कि आप वहां क्यों जा रहे हैं. अगर कोई स्पष्ट कारण नहीं है तो केवल आदत के कारण अंतहीन स्क्रॉलिंग करने से बचें.
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ship Navigation: समंदर में कैसे काम करता है जीपीएस, बिना इंटरनेट रास्ता कैसे ढूंढते हैं पानी के जहाज?</title>
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        <description><![CDATA[ Ship Navigation: किसी भी देश में आयात और निर्यात के लिए समुद्री रास्तों का सहारा लिया जाता है. इस दौरान ऐसा होता है कि जहाज हजारों किलोमीटर पानी से घिरे होते हैं और दूर-दूर तक कोई जमीन दिखाई नहीं देती है. ऐसे में कई लोगों के सवाल अक्सर उठते हैं कि उस जहाज को कैसे पता चलता है कि वह कहां है, उसे कहां जाना है और समुद्र के अंदर जीपीएस कैसे काम करता है. इसके अलावा बिना इंटरनेट के जहाज कैसे आसानी से अपना रास्ता ढूंढ़ लेते हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि समुद्र में जीपीएस कैसे काम करता है और बिना इंटरनेट के पानी के जहाज कैसे रास्ता ढूंढते हैं.
क्या जहाजों को पड़ती है इंटरनेट की जरूरत?&amp;nbsp;
बहुत से लोगों को लगता है कि समुद्र के बीच में जहाज इंटरनेट के सहारे रास्ता ढूंढते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है जहाजों की नेविगेशन प्रणाली इंटरनेट पर नहीं बल्कि जीपीएस और दूसरे सेटेलाइट सिस्टम पर निर्भर करती है. जीपीएस उपग्रह लगातार पृथ्वी की परिक्रमा करते रहते हैं और जहाज पर लगे रिसीवर को अपनी लोकेशन की जानकारी भेजते हैं, इसलिए इंटरनेट न होने पर भी जहाज अपनी सटीक स्थिति का स्थिति जान सकते हैं.&amp;nbsp;
जीपीएस कैसे बताता है जहाज की लोकेशन?&amp;nbsp;
जीपीएस यानी ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम पृथ्वी के चारों ओर घूम रहे दर्जनों उपग्रह के नेटवर्क पर काम करता है. जहाज पर लगा रिसीवर एक साथ कई सेटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है. इन सिगनल्स के आधार पर सिस्टम जहाज का लैटीट्यूड, लोंगिट्यूड, गति और दिशा की गणना करता है. इसी वजह से हजारों किलोमीटर दूर समुद्र में भी जहाज को अपनी लोकेशन सही लोकेशन पता रहती है.&amp;nbsp;
सिर्फ जीपीएस ही नहीं यह तकनीक भी करती है मदद&amp;nbsp;
आधुनिक जहाज केवल जीपीएस पर निर्भर नहीं रहते, इनमें जीएनएसएस, एएसआई, रडार और इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इनफॉरमेशन सिस्टम जैसे सिस्टम भी लगे होते हैं. जीएनएसएस कई सैटेलाइट नेटवर्क से डेटा लेकर ज्यादा सटीक लोकेशन देता है. वहीं एआईएस आसपास मौजूद दूसरे जहाज की जानकारी देता है. इसके अलावा रडार कोहरे, बारिश और अंधेरे में भी दिक्कतों का पता लगता है और ईसीडीआईएस डिजिटल समुद्री नक्शे पर जहाज की रियल टाइम लोकेशन दिखता है.
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पानी के नीचे क्यों नहीं चलता जीपीएस?&amp;nbsp;
जीपीएस सिग्नल रेडियो तरंगों के जरिए काम करते हैं, यह तरंगे पानी के अंदर ज्यादा गहराई तक नहीं पहुंच पाती. यही कारण है कि पनडुब्बियां समुद्र के अंदर जीपीएस का इस्तेमाल नहीं कर पाती. इसके बजाय वह सोनार और इनर्शियल नेवीगेशन सिस्टम जैसी तकनीकों का उपयोग करती है. वहीं जीपीएस सिग्नल लेने के लिए उन्हें समय-समय पर सतह के करीब आना पड़ता है.&amp;nbsp;
अगर जीपीएस फेल हो जाए तो क्या होगा?&amp;nbsp;
अगर समुद्र में जहाजों का जीपीएस फेल हो जाए तो बड़े जहाज में बैकअप नेविगेशन सिस्टम भी मौजूद होते हैं. रडार इलेक्ट्रॉनिक मैप कंपास, एआईएस और पारंपरिक नेविगेशन तकनीकी किसी भी इमरजेंसी की कंडीशन में जहाज को सुरक्षित दिशा देने में मदद करती है. इसी वजह से आधुनिक जहाज के समुद्र में रास्ता भटकने की संभावना बहुत कम होती है.
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI नहीं छीन रहा रोजगार, बल्कि खोल रहा है लाखों नए अवसर! जेफ बेजोस का बड़ा खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Jeff Bezos on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने दुनियाभर में एक बड़ी बहस को जन्म दिया है. कई लोगों का मानना है कि AI आने वाले वर्षों में लाखों लोगों की नौकरियां खत्म कर देगा और रोजगार का संकट पैदा होगा. खासकर OpenAI, Anthropic जैसी कंपनियों के उन्नत AI चैटबॉट्स आने के बाद यह चिंता और बढ़ गई है. हालांकि, Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस इस सोच से सहमत नहीं हैं. उनका मानना है कि AI नौकरी खत्म करने के बजाय नए अवसरों और रोजगार के रास्ते खोलेगा.
AI को लेकर डर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है
हाल ही में फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में बेजोस ने अपनी नई AI कंपनी Prometheus के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत है कि AI के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म हो जाएंगी. उनके अनुसार, AI इंसानों की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा, नए उद्योगों को जन्म देगा और ऐसे काम पैदा करेगा जिनकी आज कल्पना भी नहीं की जा सकती.
बेजोस का कहना है कि जो लोग यह सोच रहे हैं कि AI के कारण सभी नौकरियां गायब हो जाएंगी, वे वास्तविकता को सही तरीके से नहीं देख रहे हैं. उनके अनुसार, तकनीकी बदलाव हमेशा नए अवसर लेकर आते हैं.
आने वाला दशक हो सकता है तकनीकी चमत्कारों का दौर
जेफ बेजोस का मानना है कि AI केवल एक तकनीक नहीं बल्कि भविष्य की कई बड़ी क्रांतियों का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष अनुसंधान, बायोटेक्नोलॉजी और AI जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त प्रगति देखने को मिलेगी.
उनके मुताबिक, अगले दस वर्षों में दुनिया कई ऐसे तकनीकी चमत्कार देख सकती है जो आज असंभव लगते हैं. AI इस परिवर्तन की सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक होगा.
क्या है Prometheus?
Prometheus एक AI स्टार्टअप है जिसकी शुरुआत नवंबर 2025 में जेफ बेजोस और पूर्व Google अधिकारी विक्रम बजाज ने मिलकर की थी. Amazon के CEO पद से हटने के बाद यह पहली कंपनी है जिसका नेतृत्व बेजोस खुद कर रहे हैं.
इस कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा AI सिस्टम विकसित करना है जिसे बेजोस Artificial General Engineer कहते हैं. यह सिस्टम वास्तविक इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग डेटा पर प्रशिक्षित होगा और जटिल उत्पादों को डिजाइन करने में मदद करेगा.
चैटबॉट नहीं इंजीनियरिंग की दुनिया बदलना है लक्ष्य
जहां अधिकांश AI कंपनियां चैटबॉट और डिजिटल सेवाओं पर काम कर रही हैं, वहीं Prometheus का फोकस मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग सेक्टर पर है.
कंपनी का उद्देश्य ऐसे AI टूल विकसित करना है जो जेट इंजन, मेडिकल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जटिल उत्पादों के डिजाइन और निर्माण की प्रक्रिया को तेज और सस्ता बना सकें. इससे कंपनियों को महंगे फिजिकल प्रोटोटाइप बनाने की जरूरत कम पड़ेगी और नए उत्पाद जल्दी बाजार में पहुंच सकेंगे.
AI से तेज होगी खोज और नवाचार
बेजोस का मानना है कि AI नए आविष्कारों की रफ्तार को कई गुना बढ़ा देगा. जिन प्रोजेक्ट्स को पहले समय और लागत के कारण शुरू नहीं किया जा सकता था, उन्हें AI की मदद से आसानी से पूरा किया जा सकेगा.
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ मौजूदा नौकरियों में ऑटोमेशन बढ़ सकता है लेकिन कुल मिलाकर AI का प्रभाव रोजगार के लिए सकारात्मक रहेगा. उनका कहना है कि जब नई तकनीकें आती हैं तो वे पुराने कामों को बदलती जरूर हैं लेकिन साथ ही नए प्रकार के रोजगार भी पैदा करती हैं.
हल की खोज से बढ़ती है सभ्यता की समृद्धि
बेजोस ने AI की तुलना इतिहास की बड़ी तकनीकी खोजों से की. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हजारों साल पहले जब हल (Plough) का आविष्कार हुआ था तब कृषि उत्पादन बढ़ा और समाज अधिक समृद्ध हुआ.
उनके अनुसार, मानव सभ्यता की आर्थिक प्रगति हमेशा नए आविष्कारों पर आधारित रही है. AI भी उसी तरह की एक तकनीक है जो भविष्य में आर्थिक विकास और नए रोजगारों को बढ़ावा दे सकती है.
सभी विशेषज्ञ बेजोस से सहमत नहीं
हालांकि AI को लेकर हर विशेषज्ञ की राय एक जैसी नहीं है. कई कारोबारी नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि जनरेटिव AI बड़ी संख्या में व्हाइट-कॉलर नौकरियों को प्रभावित कर सकता है.
Anthropic के CEO डारियो अमोदेई कई बार यह कह चुके हैं कि AI भविष्य में कार्यबल के बड़े हिस्से की जगह ले सकता है. उन्होंने हाल ही में यह भी सुझाव दिया था कि अगर AI के कारण व्यापक स्तर पर नौकरियां खत्म होती हैं तो यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसी योजनाओं के लिए पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) बढ़ाया जा सकता है.
भविष्य में बेरोजगारी नहीं, कर्मचारियों की कमी हो सकती है
जेफ बेजोस का दृष्टिकोण इससे बिल्कुल अलग है. उनका मानना है कि AI उत्पादकता को इतना बढ़ा देगा कि कंपनियों को ज्यादा काम के लिए अधिक लोगों की जरूरत पड़ेगी. उनके अनुसार, कम लागत और तेज नवाचार नए उद्योगों को जन्म देंगे, जिससे रोजगार की मांग भी बढ़ेगी.
निवेशकों का बड़ा भरोसा
रिपोर्ट्स के मुताबिक Prometheus अब तक लगभग 12 अरब डॉलर का निवेश जुटा चुका है. इस कंपनी में JPMorgan Chase, Goldman Sachs, BlackRock और खुद जेफ बेजोस ने निवेश किया है.
कंपनी तेजी से विस्तार कर रही है और OpenAI, xAI तथा Meta जैसी बड़ी AI कंपनियों से इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की भर्ती कर रही है. यह संकेत देता है कि Prometheus आने वाले वर्षों में AI और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>AI पर अमेरिकी कब्जा! Fable 5 और Mythos 5 पर लगा ताला, दुनिया और भारत के लिए क्या बदलने वाला है?</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: अमेरिकी सरकार द्वारा Anthropic के दो एडवांस AI मॉडल्स Fable 5 और Mythos 5 को वैश्विक स्तर पर बंद करने का फैसला सिर्फ एक तकनीकी घटना नहीं है बल्कि यह AI इंडस्ट्री के भविष्य को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है. इस प्रतिबंध का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भारत समेत उन सभी देशों पर पड़ेगा जहां डेवलपर्स, स्टार्टअप्स, कंपनियां और रिसर्चर्स इन मॉडल्स का उपयोग कर रहे थे.
आखिर क्यों महत्वपूर्ण थे Fable 5 और Mythos 5?
Fable 5 और Mythos 5 को Anthropic के सबसे सक्षम AI मॉडल्स में गिना जाता था. ये मॉडल जटिल डेटा विश्लेषण, कंटेंट निर्माण, कोडिंग, रिसर्च और एंटरप्राइज ऑटोमेशन जैसे कार्यों में इस्तेमाल किए जाते थे. कई कंपनियों ने अपने AI उत्पाद और सेवाएं इन्हीं मॉडल्स के आधार पर विकसित की थीं.
ऐसे में इनका अचानक बंद होना केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि पूरे AI इकोसिस्टम के लिए झटका माना जा रहा है.
दुनिया भर में क्या असर देखने को मिल सकता है?
सबसे बड़ा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जिनके AI टूल्स सीधे इन मॉडल्स पर निर्भर थे. उन्हें अब अपने सिस्टम को किसी दूसरे मॉडल पर माइग्रेट करना होगा जिससे समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं.
इसके अलावा AI बाजार में प्रतिस्पर्धा का संतुलन भी बदल सकता है. अब अन्य कंपनियों के मॉडल्स को ज्यादा अवसर मिलेंगे. इससे AI उद्योग में नई प्रतिस्पर्धा शुरू होने की संभावना है जहां कंपनियां वैकल्पिक समाधान खोजने में जुट जाएंगी.
रिसर्च सेक्टर पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि कई शोध परियोजनाएं इन मॉडल्स की क्षमताओं का उपयोग कर रही थीं.
भारतीय यूजर्स और स्टार्टअप्स पर क्या होगा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े AI बाजारों में से एक बनता जा रहा है। हजारों डेवलपर्स, टेक स्टार्टअप्स और SaaS कंपनियां विदेशी AI मॉडल्स का इस्तेमाल करती हैं. यदि किसी भारतीय कंपनी की सेवाएं Fable 5 या Mythos 5 पर आधारित थीं तो उसे अपने उत्पादों में बदलाव करना पड़ सकता है.
छोटे स्टार्टअप्स के लिए यह चुनौती और बड़ी हो सकती है क्योंकि उनके पास बड़े स्तर पर तकनीकी माइग्रेशन के लिए सीमित संसाधन होते हैं. इससे कुछ सेवाओं की लागत बढ़ सकती है या नए फीचर्स की लॉन्चिंग में देरी हो सकती है.
क्या यह भारत के लिए अवसर भी बन सकता है?
हर संकट अपने साथ अवसर भी लेकर आता है. विदेशी AI मॉडल्स पर निर्भरता कम होने से भारतीय कंपनियां और शोध संस्थान अपने खुद के बड़े भाषा मॉडल (LLMs) विकसित करने पर अधिक ध्यान दे सकते हैं.
सरकार और निजी क्षेत्र पहले ही स्वदेशी AI तकनीकों पर निवेश बढ़ा रहे हैं. ऐसे में यह घटना भारत को AI आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का मौका दे सकती है.
AI का भविष्य किस ओर जाएगा?
यह फैसला एक बार फिर दिखाता है कि AI अब केवल तकनीक का विषय नहीं रह गया है बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा नियंत्रण और वैश्विक नीति से भी जुड़ चुका है. आने वाले वर्षों में सरकारें AI मॉडल्स पर और अधिक निगरानी तथा नियंत्रण लागू कर सकती हैं.
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>भारत का अपना Video AI आया! सिर्फ 48 पैसे प्रति सेकंड में बना देगा प्रोफेशनल वीडियो</title>
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        <description><![CDATA[ AI Video: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ दुनिया भर में तेज होती जा रही है और अब भारत भी इस क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है. इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Avataar AI ने Varya नाम का नया वीडियो जनरेशन मॉडल लॉन्च किया है. यह मॉडल न केवल वीडियो बनाने की प्रक्रिया को तेज और सस्ता बनाता है बल्कि भारतीय संस्कृति और संदर्भों को भी बेहतर तरीके से समझने के लिए तैयार किया गया है.
वैश्विक तकनीक पर आधारित
Varya का आधार Alibaba द्वारा विकसित ओपन-सोर्स वीडियो जनरेशन मॉडल Wan 2.2 है. हालांकि Avataar AI ने इसे सीधे इस्तेमाल करने के बजाय इसकी क्षमताओं को एक अधिक हल्के और तेज एडिशन में बदल दिया है. इस प्रक्रिया को मॉडल डिस्टिलेशन कहा जाता है जिसमें बड़े AI मॉडल की खूबियों को बनाए रखते हुए उसे कम संसाधनों में काम करने योग्य बनाया जाता है.
कंपनी का दावा है कि इस तकनीक की मदद से Varya पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से वीडियो तैयार कर सकता है. जहां Wan 2.2 को वीडियो बनाने के लिए 50 स्टेप्स की आवश्यकता होती है, वहीं Varya केवल 4 स्टेप्स में यह काम पूरा कर लेता है. इससे वीडियो जनरेशन की स्पीड लगभग 10 गुना तक बढ़ जाती है और लागत भी काफी कम हो जाती है.
कुछ ही सेकंड में तैयार होगा वीडियो
Avataar AI के अनुसार, NVIDIA H200 GPU का उपयोग करने पर Varya लगभग 45 सेकंड में 720p रिजॉल्यूशन का 5 सेकंड लंबा वीडियो तैयार कर सकता है. तुलना करें तो इसी काम के लिए Wan 2.2 को करीब 1,230 सेकंड लगते हैं.
कंपनी के आंतरिक परीक्षणों के मुताबिक, Varya की वीडियो जनरेशन लागत लगभग 48 पैसे प्रति सेकंड है. यह इसे कई अंतरराष्ट्रीय वीडियो AI मॉडलों की तुलना में कहीं अधिक किफायती बनाता है.
भारतीय संस्कृति को बेहतर समझने के लिए विशेष ट्रेनिंग
Varya की सबसे बड़ी खासियत इसकी सांस्कृतिक समझ मानी जा रही है. Avataar AI ने इसे विशेष रूप से चुने गए डेटा सेट्स पर प्रशिक्षित किया है ताकि यह भारतीय जीवनशैली और सांस्कृतिक तत्वों को बेहतर तरीके से पहचान सके.
इसमें त्योहारों की झलक, पारंपरिक और क्षेत्रीय परिधान, भारतीय व्यंजन तथा देश की विविध वास्तुकला जैसी चीजों को समझने की क्षमता शामिल है. इससे AI द्वारा बनाए गए वीडियो अधिक वास्तविक और स्थानीय संदर्भों के अनुरूप दिखाई देंगे.
Varya का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है?
इस AI मॉडल को इस्तेमाल में आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है. यूजर केवल टेक्स्ट के जरिए अपनी कल्पना लिख सकते हैं या कोई तस्वीर अपलोड कर सकते हैं. इसके बाद Varya उस इनपुट के आधार पर वीडियो क्लिप तैयार कर देता है.
अगर यूजर वीडियो को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो वे अतिरिक्त क्लिप जनरेट करके उसी कहानी या दृश्य को लंबा भी कर सकते हैं.
तकनीकी जानकारी भी होगी सार्वजनिक
Avataar AI ने बताया है कि वह जल्द ही Varya की तकनीकी संरचना, मॉडल डिस्टिलेशन प्रक्रिया और प्रदर्शन से जुड़े बेंचमार्क्स पर एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट जारी करेगी. इससे डेवलपर्स और शोधकर्ताओं को मॉडल का सिस्टम समझने में मदद मिलेगी.
भारत के AI इकोसिस्टम को मिलेगा नया बल
Varya को केवल एक AI प्रोडक्ट के रूप में नहीं देखा जा रहा बल्कि इसे एक ओपन इकोसिस्टम प्रोजेक्ट के रूप में भी विकसित किया जा रहा है. कंपनी की योजना इसे AI Kosh प्लेटफॉर्म के माध्यम से ओपन-वेट मॉडल के रूप में उपलब्ध कराने की है.
इसका मतलब है कि डेवलपर्स इस मॉडल को अपने सर्वर पर होस्ट कर सकेंगे जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव कर पाएंगे और इसके आधार पर नए AI एप्लिकेशन भी विकसित कर सकेंगे. यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते AI इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 05:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>फोन से अचानक गायब हो गए मोबाइल नेटवर्क! कहीं आपका सिम भी तो नहीं हो गया हैक, तुरंत करें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ SIM Swap Attack: अक्सर ऐसा होता है कि फोन में अचानक नेटवर्क चला जाता है और लोग इसे टेलीकॉम कंपनी की तकनीकी समस्या या कमजोर कवरेज समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हर बार नेटवर्क का गायब होना सामान्य बात नहीं होती. कई मामलों में यह साइबर ठगों द्वारा किए जाने वाले खतरनाक SIM Swap Attack का संकेत भी हो सकता है. यही वजह है कि सरकारी एजेंसियां लोगों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं.
क्या होता है SIM Swap Attack?
SIM Swap Attack एक ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें अपराधी आपकी मोबाइल कंपनी को धोखे में रखकर आपके मोबाइल नंबर को अपने पास मौजूद SIM कार्ड पर ट्रांसफर करवा लेते हैं. जैसे ही नंबर दूसरे SIM पर एक्टिव होता है आपके फोन में नेटवर्क बंद हो जाता है और कॉल, मैसेज तथा OTP सीधे ठग के पास पहुंचने लगते हैं.
आजकल बैंकिंग, सोशल मीडिया और कई ऑनलाइन सेवाएं मोबाइल नंबर के जरिए पहचान वेरिफाई करती हैं. ऐसे में यदि किसी और के पास आपका नंबर पहुंच जाए तो वह आपके महत्वपूर्ण अकाउंट्स तक पहुंच बना सकता है और उनका गलत इस्तेमाल कर सकता है.
सरकार ने जारी की चेतावनी
हाल ही में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों को इस खतरे के प्रति आगाह किया है. मंत्रालय ने कहा कि यदि आपके फोन में अचानक लंबे समय तक नेटवर्क नहीं आ रहा है, कॉल और मैसेज मिलना बंद हो गए हैं और समस्या का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिख रहा है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
हालांकि कभी-कभी नेटवर्क आउटेज भी हो सकता है लेकिन बिना किसी वजह के लंबे समय तक सेवा बाधित रहना SIM से छेड़छाड़ का संकेत हो सकता है.
SIM Swap Attack का शक होने पर क्या करें?
यदि आपको लगता है कि आपके साथ ऐसा कुछ हो रहा है तो सबसे पहले किसी दूसरे फोन से अपनी टेलीकॉम कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क करें. उनसे पूछें कि क्या हाल ही में आपके SIM या मोबाइल नंबर से जुड़ा कोई बदलाव किया गया है.
अगर आपको किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि का पता चलता है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं. जितनी जल्दी कार्रवाई होगी उतनी ही जल्दी आपके बैंक खाते, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित किया जा सकेगा.
SIM Swap फ्रॉड से खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
साइबर अपराधियों से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए. अपने मोबाइल नंबर पर अतिरिक्त सुरक्षा के लिए टेलीकॉम कंपनी द्वारा उपलब्ध Carrier PIN या IVR Lock जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करें. किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड या अन्य निजी डिटेल्स साझा न करें चाहे वह खुद को बैंक या टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी ही क्यों न बताए.
इसके अलावा यदि आपके मोबाइल नंबर पर कोई असामान्य एक्टिविटी दिखाई दे जैसे अचानक नेटवर्क गायब होना, कॉल या मैसेज बंद हो जाना तो तुरंत अपने सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करें और मामले की जांच करवाएं.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Fable 5 से साइबर हमले का खतरा...अमेरिका ने सबसे ताकतवर AI मॉडल पर लगाई रोक, भारतीय यूजर्स का भी एक्सेस बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Anthropic ने 9 जून 2026 को Fable 5 और Mythos 5 लॉन्च किए थे. हालांकि, लॉन्च के महज तीन दिन बाद 12 जून की रात अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि इन मॉडल्स तक किसी भी विदेशी नागरिक की पहुंच तुरंत बंद की जाए.&amp;nbsp;आदेश में यह भी कहा गया कि यह प्रतिबंध अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों पर भी लागू होगा यहां तक कि Anthropic के अपने विदेशी कर्मचारियों पर भी.
Anthropic ने कहा कि चूंकि वह यह पहचान नहीं कर सकती कि कौन यूजर विदेशी नागरिक है और कौन नहीं, इसलिए उसने दोनों मॉडल सभी के लिए बंद कर दिए. कंपनी के बाकी Claude मॉडल अभी भी काम कर रहे हैं.
जेलब्रेक का डर - Anthropic ने बताया गलतफहमी
अमेरिकी सरकार का कहना है कि एक कंपनी ने दावा किया था कि उसने Fable 5 को जेलब्रेक कर लिया है. जेलब्रेक का मतलब होता है कि AI से वो जानकारी निकलवा लेना जो वो सामान्य तौर पर देने से मना कर देता है. जैसे अगर आप किसी AI से बम बनाने का तरीका पूछें तो वो मना कर देगा, लेकिन जेलब्रेक के जरिए उसे इस तरह से उलझाया जाता है कि वो वो जानकारी भी दे दे जो उसे नहीं देनी चाहिए.
साइबर और रासायनिक हथियारों के लिए हो सकता है Fable 5 का इस्तेमाल
अमेरिकी सरकार को डर था कि Fable 5 का इस्तेमाल साइबर हमलों, जैविक या रासायनिक हथियारों की जानकारी हासिल करने के लिए हो सकता है. हालांकि Anthropic ने इस दावे को गलत बताया. कंपनी का कहना है कि उसने सरकार का डेमो देखा और पाया कि यह जेलब्रेक बहुत सीमित है और व्यापक खतरा पैदा करने वाला नहीं है. Anthropic ने अपने बयान में कहा कि हमें लगता है यह एक गलतफहमी है और हम जल्द से जल्द एक्सेस बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं. यह पहली बार है जब अमेरिकी सरकार ने किसी AI कंपनी के लाइव मॉडल को एक्सपोर्ट कंट्रोल के दायरे में लाकर बंद करवाया हो. अब तक ऐसे नियम चिप्स और हार्डवेयर पर लगते थे लेकिन अब AI सॉफ्टवेयर भी इसके दायरे में आ गया है. इसे AI नियमन के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है.
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भारत पर असर और बड़ा सवाल
भारत के लिए यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय स्टार्टअप, IT कंपनियां और डेवलपर्स Anthropic के API पर निर्भर हैं. जो भी Fable 5 पर आधारित प्रोडक्ट बना रहे थे उनका काम रातोंरात रुक गया. यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि भारत जैसे देश अमेरिकी AI टेक्नोलॉजी पर कितने निर्भर हैं और अपना खुद का AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना कितना जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>कैसे डाउन हो जाती हैं सोशल मीडिया साइट्स? जानिए क्या होता है इसके पीछे का कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Websites: आज के समय में Facebook, Instagram, WhatsApp, X (Twitter) और YouTube जैसी सोशल मीडिया सेवाएं हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि अचानक ये प्लेटफॉर्म काम करना बंद कर देते हैं. मैसेज नहीं भेजे जाते, पोस्ट लोड नहीं होतीं और लाखों-करोड़ों यूजर्स एक साथ परेशान हो जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी सोशल मीडिया साइट्स डाउन कैसे हो जाती हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे की प्रमुख वजहें.
सर्वर पर बढ़ जाता है दबाव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म दुनिया भर में फैले विशाल डेटा सेंटर और सर्वरों के जरिए काम करते हैं. जब किसी कारण से अचानक बहुत ज्यादा लोग एक साथ किसी सेवा का इस्तेमाल करने लगते हैं तो सर्वर पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है. यदि सिस्टम उस ट्रैफिक को संभाल नहीं पाता तो वेबसाइट या ऐप धीमी पड़ सकती है या पूरी तरह बंद हो सकती है.
तकनीकी अपडेट भी बन सकते हैं वजह
कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर नए फीचर और सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करती हैं. कई बार अपडेट के दौरान कोई तकनीकी गड़बड़ी हो जाती है जिससे पूरे नेटवर्क पर असर पड़ सकता है. एक छोटी सी कोडिंग गलती भी लाखों यूजर्स को प्रभावित कर सकती है.
डेटा सेंटर में खराबी
सोशल मीडिया कंपनियों के डेटा सेंटर उनके पूरे नेटवर्क का आधार होते हैं. यदि किसी डेटा सेंटर में बिजली की समस्या, हार्डवेयर फेलियर या नेटवर्क उपकरणों में खराबी आ जा तो सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं. कई बार बैकअप सिस्टम होने के बावजूद समस्या को ठीक करने में समय लग जाता है.
DNS और नेटवर्किंग समस्याएं
जब आप किसी वेबसाइट का नाम टाइप करते हैं तो DNS (Domain Name System) उसे सही सर्वर से जोड़ता है. यदि DNS सिस्टम में कोई दिक्कत आ जाए तो यूजर्स वेबसाइट तक पहुंच ही नहीं पाते. इसके अलावा इंटरनेट रूटिंग या नेटवर्क कनेक्टिविटी में गड़बड़ी भी बड़े आउटेज का कारण बन सकती है.
साइबर अटैक का खतरा
कुछ मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म साइबर हमलों का शिकार भी हो सकते हैं. DDoS (Distributed Denial of Service) जैसे हमलों में हैकर्स बड़ी मात्रा में फर्जी ट्रैफिक भेजकर सर्वर को ओवरलोड करने की कोशिश करते हैं. इससे प्लेटफॉर्म की सेवाएं बाधित हो सकती हैं.
मानवीय गलती भी जिम्मेदार
कई बार समस्या किसी तकनीकी खराबी से नहीं बल्कि इंसानी भूल से पैदा होती है. नेटवर्क सेटिंग्स में गलत बदलाव, सर्वर कॉन्फिगरेशन में त्रुटि या मेंटेनेंस के दौरान हुई गलती पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है.
क्या आपका इंटरनेट हमेशा जिम्मेदार होता है?
जरूरी नहीं कि हर बार समस्या सोशल मीडिया कंपनी की ही हो. कई बार यूजर के इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल नेटवर्क या स्थानीय ISP में खराबी होने के कारण भी ऐप्स काम नहीं करतीं. इसलिए आउटेज की पुष्टि करने से पहले अपने इंटरनेट कनेक्शन की जांच करना भी जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>किस टेक्नोलॉजी पर काम करता है Smart Meter? जानिए क्या इसे हैक किया जा सकता है?</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Meter: आज के समय में बिजली वितरण कंपनियां तेजी से स्मार्ट मीटर लगा रही हैं. इन मीटरों का उद्देश्य बिजली की खपत को रियल-टाइम में मॉनिटर करना, बिलिंग को अधिक सटीक बनाना और बिजली चोरी पर रोक लगाना है. लेकिन जैसे-जैसे ये डिवाइस इंटरनेट और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ रहे हैं, लोगों के मन में एक सवाल भी उठ रहा है क्या स्मार्ट मीटर को हैक किया जा सकता है? आइए समझते हैं कि स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है और इसकी सुरक्षा कितनी मजबूत होती है.
क्या होता है स्मार्ट मीटर?
स्मार्ट मीटर एक डिजिटल बिजली मीटर है जो उपभोक्ता की बिजली खपत को लगातार रिकॉर्ड करता है और यह डेटा सीधे बिजली कंपनी तक पहुंचाता है. पारंपरिक मीटर की तरह इसमें किसी कर्मचारी को घर-घर जाकर रीडिंग लेने की जरूरत नहीं पड़ती.
यह मीटर उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की जानकारी लगभग रियल-टाइम में उपलब्ध कराता है जिससे बिजली बचाने में भी मदद मिलती है.
स्मार्ट मीटर किस टेक्नोलॉजी पर काम करता है?
स्मार्ट मीटर कई आधुनिक तकनीकों के संयोजन से काम करता है. इसमें एक माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी और कम्युनिकेशन मॉड्यूल लगा होता है. डेटा ट्रांसमिशन के लिए इसमें GSM, 4G, RF (Radio Frequency), NB-IoT या Power Line Communication (PLC) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये तकनीकें मीटर को बिजली कंपनी के सर्वर से जोड़ती हैं और खपत संबंधी जानकारी अपने आप भेजती रहती हैं.
इसके अलावा स्मार्ट मीटर में रिमोट कनेक्ट और डिस्कनेक्ट जैसी सुविधाएं भी होती हैं जिससे बिजली कंपनी जरूरत पड़ने पर दूर बैठे ही कुछ कार्य कर सकती है.
क्या स्मार्ट मीटर को हैक किया जा सकता है?
तकनीकी रूप से देखा जाए तो इंटरनेट या नेटवर्क से जुड़ा कोई भी डिवाइस पूरी तरह हैकिंग से अछूता नहीं होता. इसलिए स्मार्ट मीटर को हैक करना सैद्धांतिक रूप से संभव है.
हालांकि, आधुनिक स्मार्ट मीटरों में एन्क्रिप्शन, सिक्योर ऑथेंटिकेशन और सुरक्षित फर्मवेयर जैसी कई सुरक्षा परतें मौजूद होती हैं. डेटा को एन्क्रिप्ट करके भेजा जाता है ताकि बीच में कोई व्यक्ति उसे पढ़ या बदल न सके.
यदि किसी सिस्टम में सुरक्षा खामी हो पुराना सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा हो या साइबर सुरक्षा नियमों का पालन न किया जाए, तब साइबर हमले का खतरा बढ़ सकता है.
सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं?
बिजली कंपनियां और मीटर निर्माता नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट, सिक्योरिटी पैच और नेटवर्क मॉनिटरिंग का उपयोग करते हैं. कई स्मार्ट मीटरों में छेड़छाड़ का पता लगाने वाले सेंसर भी लगे होते हैं जो किसी असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत भेज सकते हैं.
इसके अलावा महत्वपूर्ण डेटा को सुरक्षित सर्वरों में संग्रहित किया जाता है और केवल अधिकृत सिस्टम को ही उसकी पहुंच दी जाती है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>चौंकाने वाला खुलासा! आपका फोन और PC हर कुछ सेकंड में ले रहे हैं Screenshot, तुरंत करें ये सेटिंग OFF</title>
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        <description><![CDATA[ PC Screenshot: आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे डिजिटल अनुभव को पहले से ज्यादा स्मार्ट बना रहा है. लेकिन सुविधा के साथ-साथ गोपनीयता को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के एक फीचर ने दुनिया भर में प्राइवेसी को लेकर नई बहस छेड़ दी है. यह फीचर है Microsoft Recall जो आपके कंप्यूटर की गतिविधियों को याद रखने के लिए समय-समय पर स्क्रीनशॉट लेता है.
क्या है Microsoft Recall फीचर?
माइक्रोसॉफ्ट ने Windows 11 Copilot+ PC के लिए Recall फीचर पेश किया था. इसका उद्देश्य यूजर्स को उन चीजों को आसानी से ढूंढ़ने में मदद करना है जिन्हें उन्होंने पहले अपने कंप्यूटर पर देखा था.
यह फीचर लगभग हर कुछ सेकंड में स्क्रीन की तस्वीरें यानी स्क्रीनशॉट कैप्चर करता है और उन्हें डिवाइस में सुरक्षित रखता है. इसके बाद AI इन तस्वीरों का विश्लेषण करके एक खोज योग्य रिकॉर्ड तैयार करता है. यानी यदि आपने कोई वेबसाइट, दस्तावेज़ या ऐप पहले खोला था तो बाद में उसे आसानी से खोज सकते हैं.
कैसे काम करता है यह फीचर?
Recall आपके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकांश ऐप्स, वेब पेज और डॉक्यूमेंट्स की स्क्रीन इमेज सेव करता है. AI इन सभी स्क्रीनशॉट्स में मौजूद जानकारी को समझता है और उसे व्यवस्थित तरीके से स्टोर करता है.
जब यूजर किसी पुरानी गतिविधि को खोजता है तो सिस्टम संबंधित स्क्रीनशॉट दिखाकर सीधे उसी स्थान पर पहुंचने में मदद करता है. यह सुविधा उपयोगी लग सकती है लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं.
स्टोरेज पर भी पड़ता है असर
लगातार स्क्रीनशॉट सेव करने की वजह से यह फीचर काफी स्टोरेज भी इस्तेमाल करता है. उदाहरण के लिए, 1TB SSD वाले सिस्टम में बड़ी मात्रा में स्टोरेज केवल इन स्क्रीनशॉट्स को रखने के लिए आरक्षित की जा सकती है. इसलिए यह फीचर केवल प्राइवेसी ही नहीं बल्कि स्टोरेज इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा में है.
प्राइवेसी एक्सपर्ट क्यों हैं चिंतित?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और गोपनीयता समर्थकों का मानना है कि लगातार स्क्रीन रिकॉर्ड जैसी गतिविधि यूजर की निजी जानकारी के लिए खतरा बन सकती है. स्क्रीन पर अक्सर पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी, निजी चैट, ईमेल और अन्य संवेदनशील डेटा दिखाई देता है. यदि ये सभी स्क्रीनशॉट्स किसी कारण से गलत हाथों में पहुंच जाएं तो इसका दुरुपयोग हो सकता है. यही वजह है कि कई सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस फीचर को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है.
क्या स्मार्टफोन भी पूरी तरह सुरक्षित हैं?
यह चिंता केवल Windows PC तक सीमित नहीं है. Android और iPhone में मौजूद कुछ एक्सेसिबिलिटी फीचर्स स्क्रीन कैप्चर से जुड़े विशेष अधिकार प्रदान करते हैं.
इसके अलावा कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स एक्सेसिबिलिटी परमिशन का गलत इस्तेमाल करके स्क्रीन कंटेंट तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं. खासकर वे ऐप्स जो हर जगह स्क्रीनशॉट लेने का दावा करते हैं, सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरे हो सकते हैं.
हालांकि Apple फिलहाल ऐसा कोई फीचर नहीं देता जो पूरे फोन की स्क्रीन का अपने आप स्क्रीनशॉट लेता रहे. स्क्रीन रिकॉर्डिंग या कैप्चर के लिए आमतौर पर स्पष्ट अनुमति की जरूरत होती है.
Recall फीचर को कैसे बंद करें?
यदि आप Windows 11 इस्तेमाल कर रहे हैं और इस फीचर को निष्क्रिय करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए स्टेप्स अपनाएं.
Settings &amp;rarr; Privacy &amp;amp; Security &amp;rarr; Recall &amp;amp; Snapshots
इसके बाद Recall फीचर को Off कर दें.
Android यूजर्स को समय-समय पर यह जांचना चाहिए कि किन ऐप्स को Accessibility Permissions मिली हुई हैं. वहीं iPhone उपयोगकर्ता Privacy &amp;amp; Security सेटिंग्स में जाकर Screen Recording से जुड़ी अनुमतियों की समीक्षा कर सकते हैं.
ऑनलाइन सुरक्षा के लिए सतर्क रहना जरूरी
आपकी स्क्रीन पर आपकी डिजिटल जिंदगी का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है. बैंक डिटेल्स, निजी संदेश, ऑफिस डॉक्यूमेंट और कई महत्वपूर्ण जानकारियां स्क्रीन पर दिखाई देती हैं. इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कौन-सा फीचर या ऐप आपकी स्क्रीन तक पहुंच बना सकता है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ शॉपिंग और बुकिंग ही नहीं, अब UPI से पेमेंट भी कर पाएंगे AI Agents, इस कंपनी ने निकाल लिया तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ AI Agents UPI Payment: एआई सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रही है. एआई चैटबॉट के बाद अब एआई एजेंट्स का दौर आ गया है, जो टास्क पूरे कर सकते हैं. एआई एजेंट आपकी ट्रिप की शॉपिंग, प्लानिंग और बुकिंग तक सब कर सकते हैं. आपको बस एक कमांड के जरिए इन्हें बताना है कि आप क्या सोच रहे हैं. इसके बाद के सारे काम ये खुद से कर सकते हैं. अभी तक एआई एजेंट्स ऑनलाइन पेमेंट नहीं कर पाते थे. अब यह दिक्कत भी दूर हो गए हैं. शॉपिंग और बुकिंग के साथ-साथ अब एजेंट्स UPI पेमेंट भी कर पाएंगे.
क्या होते हैं एआई एजेंट्स?
एआई एजेंट्स ऐसे सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं, जो यूजर की कमांड पर टास्क को पूरा करते हैं. इनमें रीजनिंग, प्लानिंग और मेमोरी की कैपेबिलिटीज होती हैं. यानी ये खुद से सीखकर अपने डिसीजन खुद ले सकते हैं. कंप्यूटर में यूज होने वाले कुछ एआई एजेंट्स टिकट बुकिंग और ग्रॉसरी ऑर्डर करने के काम आ सकते हैं और कुछ रियल लाइफ में भी देखे जा सकते हैं. रोबोट, ऑटोमेटेड ड्रोन्स और सेल्फ ड्राइविंग कार रियल लाइफ एआई एजेंट्स के उदाहरण माने जा सकते हैं.&amp;nbsp;
UPI पेमेंट का मिल गया तरीका
अभी तक एआई एजेंट्स को पेमेंट करने से पहले ह्यूमन ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब यह झंझट खत्म हो गया है. पाइन लैब्स का कहना है कि उसने इसका तरीका निकाल लिया है. इस कंपनी ने पाइन लैब्स पेमेंट प्रोटोकॉल (P3P) नाम से सिस्टम तैयार किया है, जो एआई एजेंट को बिना इंसानी ऑथेंटिकेश के पेमेंट करने की सुविधा देगा. इस सिस्टम में UPI के ही पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर UPI One Time Mandates (OTM) और Reserve Pay को यूज किया गया है. OTM की बात करें तो इसकी मदद से यूजर फ्यूचर पेमेंट को एडवांस में ही अप्रूव कर सकता है. यह सिंगल फ्यूचर ट्रांजेक्शन के लिए बैंक अकाउंट में फिक्स अमाउंट ब्लॉक कर लेता है. दूसरा रिजर्व पे सिस्टम NPCI ने रिकरिंग और ऑटोमैटिक पेमेंट के लिए डेवलप किया था. इसे सब्सक्रिप्शन बेस्ड सर्विसेस के लिए यूज किया जाता है.
एआई एजेंट अकाउंट तो खाली नहीं कर देंगे?
एआई को पैसा लगाने की परमिशन देने के बाद यह सवाल उठता है कि कहीं यह सिस्टम अकाउंट तो खाली नहीं कर देगा? इसके बारे में कंपनी का कहना है कि Grantex ऐसा होने से रोक लेगी. यह एआई एजेंट के लिए एक डिजिटल आइडेंटिटी और परमिशन लेयर होती है, जो परमिशन मिलने पर एक लिमिट तक ही पैसा खर्च पाती है और यह हर लेनदेन का रिकॉर्ड भी रखती है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 01:30:19 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सिर्फ, शॉपिंग, और, बुकिंग, ही, नहीं, अब, UPI, से, पेमेंट, भी, कर, पाएंगे, Agents, इस, कंपनी, ने, निकाल, लिया, तरीका</media:keywords>
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        <title>Strong Password Tips:  हर बार भूल जाते हैं अपना पासवर्ड, ये आसान तरीका जान लेंगे तो हमेशा रहेगा याद</title>
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        <description><![CDATA[ Strong Password Tips: बैंक के काम से लेकर सोशल मीडिया और ऑफिस के काम तक हर जगह पासवर्ड की जरूरत पड़ती है. लेकिन कई अकाउंट्स होने की वजह से लोगों के लिए अलग-अलग पासवर्ड रखना मुश्किल होता है और इसके चलते लोग अक्सर अपना पासवर्ड आसान सा रख लेते हैं या फिर एक ही पासवर्ड हर जगह पर यूज कर लेते हैं. ऐसा करने में लोगों के लिए तो आसानी होती है, लेकिन यही साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान निशाना बन जाता है.
पासवर्ड मजबूत नहीं होने से साइबर अपराधी आसानी से लोगों के सोशल मीडिया से लेकर बैंक अकाउंट तक की डिटेल निकाल लेते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि हर बार अगर आप भी अपना पासवर्ड भूल जाते हैं तो कौन सा तरीका जान लेंगे, जिससे आपको हमेशा आपका पासवर्ड याद रहेगा.&amp;nbsp;
क्यों भूल जाते हैं लोग पासवर्ड?&amp;nbsp;
अक्सर लोग पासवर्ड में बर्थ डेट, मोबाइल नंबर, नाम या 123456 जैसे आसान कॉन्बिनेशन का इस्तेमाल करते हैं. कई बार सुरक्षा बढ़ाने के लिए बहुत कठिन पासवर्ड बना लेते हैं जिसे वे बाद में खुद ही भूल जाते हैं. ऐसे में हर बार फॉरगेट पासवर्ड का ऑप्शन चूज करना पड़ता है. जिससे कई तरह की परेशानियां भी झेलनी पड़ती है.
आसान लेकिन मजबूत पासवर्ड बनाने का तरीका&amp;nbsp;
किसी यादगार वाक्य का इस्तेमाल करें&amp;nbsp;
अगर आप आपके लिए आसान लेकिन साइबर अपराधियों के अनुसार मजबूत पासवर्ड बनाना चाहते हैं, तो आप अपने पसंदीदा वाक्य या किसी खास याद को पासवर्ड का आधार बना सकते हैं. जैसे किसी को रोजाना सुबह 6 बजे चाय पीना पसंद है जैसे वाक्य के शब्दों के पहले अक्षर लेकर उसमें नंबर और सिंबल जोड़ सकते हैं. इससे पासवर्ड याद रखना आसान हो जाता है. रोजाना सुबह 6 बजे चाय पीना पसंद है में रोजाना का R, सुबह का S, 6 बजे का 6, चाय का C, पीना का P और पसंद है का P रख सकते हैं.&amp;nbsp;
चार अलग-अलग शब्दों को जोड़ें&amp;nbsp;
सुरक्षा एक्सपर्ट्स चार या उससे ज्यादा असंबंधित शब्दों को मिलाकर पासवर्ड बनाने की सलाह देते हैं. जैसे CoffeeRiverBananaTrain जैसी पासफ्रेज लंबी होने के कारण ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं.&amp;nbsp;
अक्षरों की जगह नंबर और सिंबल जोड़े&amp;nbsp;
नॉर्मल शब्दों में कुछ अक्षरों की जगह नंबर या कोई स्पेशल साइन जोड़ने से पासवर्ड और मजबूत हो जाता है. इसके उदाहरण के तौर पर आप Vacation time को V@c4t10nT!m3 भी बना सकते हैं.
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सुरक्षा में पासवर्ड मैनेजर बन सकता है मददगार&amp;nbsp;
अगर आपको कोई पासवर्ड याद रखने में दिक्कत होती है, तो Google Password Manager, iCloud Keychain या Bitwarden जैसे पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह आपके सभी पासवर्ड सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं और जरूरत पड़ने पर ऑटोफिल की सुविधा भी देते हैं. इसके अलावा अब कई कंपनियां पास की तकनीक को भी बढ़ावा दे रही है. इसमें पासवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं पड़ती. फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या फोन स्क्रीन लॉक की मदद से लॉगिन किया जा सकता है. इससे पासवर्ड चोरी या फिशिंग का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 01:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;quot;पैसे की वैल्यू ही खत्म हो जाएगी...&amp;quot;, दुनिया के पहले ट्रिलेनियर Elon Musk ने क्यों कही यह बात?</title>
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        <description><![CDATA[ Trillionaire Elon Musk: अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क दुनिया का पहले ट्रिलेनियर यानी खरबपति बन गए हैं. उनकी कंपनी स्पेसएक्स के IPO (SpaceX IPO) के बाद उनकी कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर हो गई है. IPO से पहले फोर्ब्स ने उनकी संपत्ति करीब 780 अरब डॉलर आंकी थी और अब यह कई देशों की कुल संपत्ति से भी ज्यादा हो गई है. भले ही दुनिया उनकी दौलत का हिसाब लगा रही है, लेकिन मस्क का मानना है कि भविष्य में पैसों की कोई वैल्यू नहीं होगी. हाल ही में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में पैसों का महत्व खत्म हो जाएगा.
पैसों के भविष्य को लेकर क्या सोचते हैं मस्क?
2026 Abundance Summit में बोलते हुए मस्क ने कहा था कि आने वाला समय एआई और रोबोट का है. भविष्य में मशीनें इतनी प्रोडक्टिव हो जाएंगी कि काम, आय और पैसे को लेकर ट्रेडिशनल आइडियाज पूरी तरह बदल जाएंगे. हमारे पास यूनिवर्सल हाई इनकम होगी. एआई और रोबोट इतना काम करेंगे और सर्विसेस देंगे कि इंसानों के लिए पर्याप्त होगा. इस कारण भविष्य में ऐसा समय आएगा, जब पैसा अपना महत्व खो देगा.&amp;nbsp;
क्या हैं मस्क के बयान के मायने?
दरअसल, मस्क का मानना है कि मशीनों के कारण इतनी गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस होंगी कि चीजें एकदम सस्ती हो जाएंगी और उन्हें एक्सेस करना मुश्किल नहीं रहेगा. हेल्थकेयर, हाउंसिंग जैसी महंगी चीजें भी सस्ती हो जाएंगी. मस्क से पूछा गया कि जब पैसा जरूरी नहीं होगा तो किस चीज की वैल्यू रहेगी? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि एआई सिस्टम को डॉलर जैसी इंसानी करेंसी की जरूरत नहीं है. यह पावर, वॉटेज और टन आदि के बारे में सोचेंगे.
काम करना भी हो जाएगा ऑप्शनल- मस्क
इससे पहले मस्क यह भी कह चुके हैं कि भविष्य में इंसानों को काम करने की जरूरत नहीं रहेगी. रोबोट के कारण सारे काम हो सकेंगे और इंसान केवल शौक के तौर पर सब्जियां उगा सकेगा. बता दें कि रोबोट को लेकर मस्क काफी आशावादी हैं. उनकी कंपनी टेस्ला इन दिनों ऑप्टिमस नाम के ह्यूमनॉयड रोबोट पर काम कर रही है. कंपनी ने 2030 तक 10 लाख रोबोट डिप्लॉय करने का टारगेट रखा है.&amp;nbsp;
इतिहास में कोई पहली बार कोई व्यक्ति बना ट्रिलेनियर
एलन मस्क ट्रिलेनियर बनने वाले पहले इंसान है. आजतक इतिहास में किसी व्यक्ति के पास इतनी संपत्ति नहीं रही. उनकी संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा की स्पेसएक्स में उनकी हिस्सेदारी से आता है. इसमें उनकी हिस्सेदारी करीब 866 अरब डॉलर की है. इसके अलावा टेस्ला, एक्स (पूर्व में ट्विटर), न्यूरालिंक और द बोरिंग कंपनी में भी उनकी बड़ी हिस्सेदारी है.
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 01:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>पैसे, की, वैल्यू, ही, खत्म, हो, जाएगी..., दुनिया, के, पहले, ट्रिलेनियर, Elon, Musk, ने, क्यों, कही, यह, बात</media:keywords>
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        <title>WhatsApp पर आया है RBI का मैसेज? भूलकर भी न करें ओपन, एक झटके में उड़ जाएगी सारी कमाई</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Message from RBI Scam: अगर आपके पास व्हाट्सऐप पर RBI की तरफ कोई मैसेज आया हो तो उसे ओपन न करें. यह RBI के नाम पर स्कैम की कोशिश हो सकती है. दरअसल, व्हाट्सऐप पर स्कैम के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. स्कैमर अब RBI जैसी भरोसेमंद संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. इसे देखते हुए सरकार की तरफ से भी ऐसे मैसेज को लेकर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है.
APK फाइल के साथ भेजा जा रहा है मैसेज
WhatsApp पर स्कैमर APK फाइल के साथ एक मैसेज भेज रहे हैं. सेंडर ने अपनी प्रोफाइल फोटो में RBI का लोगो लगाया हुआ है. मैसेज में लोगों को डराने के लिए लिखा हुआ है कि आपका बैंक अकाउंट संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा हुआ पाया गया है. इसमें आगे अकाउंट ब्लॉक होने से रोकने के लिए फाइनेंशियल डिटेल्स देने और तीन दिनों के भीतर ऐसा न करने पर अकाउंट ब्लॉक होने की बात कही गई है. अब सरकार ने इस मैसेज को फर्जी बताते हुए लोगों को अलर्ट किया है.
सरकार ने लोगों को किया अलर्ट
पीआईबी फैक्ट चेक की तरफ से इस मैसेज की सच्चाई बताई गई है. पीआईबी ने लिखा कि यह मैसेज फर्जी है. फ्रॉडस्टर इस तरह के मैसेज भेजकर आपकी बैंकिंग और पर्सनल इंफोर्मेशन चुराना चाहते हैं. बचाव के तरीके बताते हुए पोस्ट में लिखा गया है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर अनजान APK फाइल डाउनलोड न करें. RBI व्हाट्सऐप पर ब्लू टिक वाले केवल दो नंबरों- 99309 91935, 99990 41935 के जरिए ही कम्युनिकेट करता है. पोस्ट में ऑथेंटिक जानकारी के लिए RBI की वेबसाइट पर जाने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;

RBI PHISHING SCAM ‼️Did you also receive a #WhatsApp message in the name of RBI, along with an APK file , alleging that your bank account is linked to suspicious transactions and asking for financial details to avoid account blockage ❓#PIBFactCheck:❌ This message is&amp;hellip; pic.twitter.com/XoA4lBaVo8
&amp;mdash; PIB Fact Check (@PIBFactCheck) June 11, 2026



ऐसे स्कैम से कैसे बचें?
व्हाट्सऐप पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे स्कैम मैसेजेज की बाढ़ आई हुई है. स्कैमर कभी RBI तो कभी किसी दूसरे सरकारी विभाग के नाम पर ऐसे मैसेज भेजकर स्कैम करने की कोशिश करते हैं. ऐसे स्कैम से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-&amp;nbsp;

किसी भी अनजान नंबर से आए लिंक से APK फाइल डाउनलोड न करें.
अगर व्हाट्सऐप मैसेज, ईमेल या SMS में आया लिंक संदिग्ध लग रहा है तो इस पर टैप न करें.
किसी भी अनजान व्यक्ति को किसी भी तरीके से अपनी पर्सनल, बैंकिंग और फाइनेंशियल डिटेल्स न दें.
फोन के सॉफ्टवेयर और बैंकिंग समेत दूसरी ऐप्स को हमेशा अपडेटेड रखें.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>WhatsApp, पर, आया, है, RBI, का, मैसेज, भूलकर, भी, न, करें, ओपन, एक, झटके, में, उड़, जाएगी, सारी, कमाई</media:keywords>
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        <title>फेसबुक डाउन होने से यूजर्स परेशान लॉगिन और फीड में आई दिक्कत,अचानक ठप हुई सेवाएं</title>
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        <description><![CDATA[ आज दुनिया के कई हिस्सों में फेसबुक यूजर्स को अचानक परेशानी का सामना करना पड़ा. बड़ी संख्या में लोगों ने बताया कि प्लेटफॉर्म सामान्य तरीके से काम नहीं कर रहा था.कुछ यूजर्स का अकाउंट खुल नहीं रहा था, कुछ लोगों की फीड अपडेट नहीं हो रही थी और कई लोग ऐप के अलग-अलग फीचर्स इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे. थोड़ी ही देर में सोशल मीडिया और आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी और साफ हो गया कि यह समस्या सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है.
फेसबुक पर अचानक बढ़ीं शिकायतें
फेसबुक में आई इस तकनीकी दिक्कत की जानकारी सबसे पहले यूजर्स की शिकायतों से सामने आई. लोगों ने बताया कि ऐप खुलने के बाद भी कंटेंट सही से दिखाई नहीं दे रहा था. कई यूजर्स ने कहा कि पोस्ट लोड नहीं हो रही थीं और प्लेटफॉर्म सामान्य स्पीड से काम नहीं कर रहा था.कुछ लोगों को बार-बार एरर दिखाई दे रही थी, जबकि कुछ यूजर्स अपने अकाउंट तक पहुंच ही नहीं बना पा रहे थे.
किन समस्याओं का सामना करना पड़ा
इस आउटेज के दौरान अलग-अलग यूजर्स को अलग तरह की परेशानी देखने को मिली.कुछ लोग लॉगिन नहीं कर पा रहे थे, कुछ का फीड रिफ्रेश नहीं हो रहा था और कुछ यूजर्स को अकाउंट एक्सेस में दिक्कत आई.कई लोगों ने शुरुआत में यह भी सोचा कि शायद उनके इंटरनेट या फोन में समस्या है. हालांकि बाद में बड़ी संख्या में शिकायतें आने के बाद पता चला कि मामला प्लेटफॉर्म स्तर की तकनीकी दिक्कत से जुड़ा हो सकता है.
कई देशों में दिखा असर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फेसबुक की यह समस्या कई देशों में एक साथ देखने को मिली. अलग-अलग क्षेत्रों के यूजर्स ने ऑनलाइन जानकारी साझा की कि उन्हें प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही है. भारत के कई यूजर्स ने भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कीं. इससे माना गया कि यह किसी एक नेटवर्क या डिवाइस से जुड़ा मामला नहीं था.
यह भी पढ़ें - WhatsApp पर आया है RBI का मैसेज? भूलकर भी न करें ओपन, एक झटके में उड़ जाएगी सारी कमाई
यूजर्स दूसरे प्लेटफॉर्म पर पहुंचे
फेसबुक पर दिक्कत आने के बाद कई यूजर्स दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पहुंचे और यह जानने की कोशिश की कि क्या बाकी लोग भी इसी समस्या का सामना कर रहे हैं. लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि उन्हें किस तरह की परेशानी हो रही है. इससे आउटेज की जानकारी तेजी से फैल गई.
कंपनी की तरफ से क्या जानकारी सामने आई
समस्या सामने आने के बाद यूजर्स कंपनी की तरफ से आधिकारिक अपडेट का इंतजार करते रहे. शुरुआती रिपोर्ट आने तक यह साफ नहीं हो सका कि तकनीकी दिक्कत की वजह क्या थी और सेवाएं पूरी तरह कब तक सामान्य होंगी. ऐसे मामलों में आमतौर पर तकनीकी टीम समस्या की जांच करने के बाद सुधार का काम करती है.
यूजर्स को क्या करना चाहिएअगर आपके फोन में फेसबुक काम नहीं कर रहा है तो तुरंत पासवर्ड बदलने या अकाउंट सेटिंग्स बदलने की जरूरत नहीं है. ऐप को बार-बार हटाकर इंस्टॉल करने से भी बचना चाहिए. कुछ समय इंतजार करके दोबारा ऐप चेक करना बेहतर हो सकता है. अगर समस्या सर्वर से जुड़ी होगी तो सेवाएं सामान्य होने के साथ अपने आप काम करने लगेंगी.यह भी पढ़ें - आईफोन पर WhatsApp यूज करने के लिए जरूरी हो गया यह काम, नवंबर तक का है टाइम ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Network Signal : नेटवर्क गायब होते ही जोर&amp;जोर से चिल्लाने से क्या फोन पकड़ लेता है सिग्नल? जानिए सच</title>
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        <description><![CDATA[ Network Signal : मोबाइल फोन आज हमारी लाइफ की एक जरूरी जरूरत बन गया है. इसके बिना एक दिन भी बिताना लोगों के लिए मुश्किल लगता है. जरूरी कॉल करना हो, किसी को मैसेज भेजना हो, ऑनलाइन पेमेंट करनी हो या सोशल मीडिया चलाना हो, हर काम के लिए मजबूत नेटवर्क सिग्नल की जरूरत पड़ती है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि फोन पर बात करते-करते अचानक आवाज टूटने लगती है, कॉल कट जाती है या स्क्रीन पर No Service दिखाई देने लगता है.&amp;nbsp;
ऐसी स्थिति में अक्सर लोग कई बार सिग्नल पकड़ने के लिए अजीब और अलग तरीके अपनाते हैं. कुछ लोग फोन को ऊपर उठाकर इधर-उधर घुमाने लगते हैं, तो कुछ जोर-जोर से बोलना शुरू कर देते हैं. कई लोग बात करने के लिए खिड़की के पास चले जाते हैं या छत पर पहुंच जाते हैं. ऐसे में कई बार यह सवाल सामने आता है कि सच में तेज आवाज में बोलने से नेटवर्क वापस आ जाता है, &amp;nbsp;क्या मोबाइल को ऊंचा उठाने से सिग्नल बढ़ जाते हैं. तो आइए जानते हैं नेटवर्क गायब होते ही जोर-जोर से चिल्लाने से क्या फोन सिग्नल पकड़ लेता है.&amp;nbsp;
क्या जोर-जोर से बोलने से सिग्नल वापस आ जाते हैं?
जब नेटवर्क कमजोर होता है, तो तेज आवाज में बोलने से मोबाइल का सिग्नल मजबूत नहीं होता है.मोबाइल नेटवर्क आपकी आवाज की तेजी से नहीं चलता है. यह आपके फोन और मोबाइल टावर के बीच भेजे और पाए जाने वाले रेडियो सिग्नल के जरिए काम करता है. हालांकि जब सामने वाले की आवाज टूटने लगती है, तो कई लोग तेज बोलने लगते हैं. उन्हें लगता है कि सामने वाला उनकी बात ठीक से सुन पाएगा, जबकि इसका नेटवर्क से कोई संबंध नहीं होता है.&amp;nbsp;
मोबाइल नेटवर्क आखिर काम कैसे करता है?
जब आप किसी को कॉल करते हैं या इंटरनेट चलाते हैं, तो आपका फोन आसपास मौजूद मोबाइल टावर से रेडियो सिग्नल के जरिए जुड़ता है. यह डेटा कई चरणों से गुजरता है. जिसमें फोन सबसे नजदीकी टावर से कनेक्ट होता है. इसके बाद टावर उस जानकारी को नेटवर्क सिस्टम तक पहुंचाता है. वहां से यह डेटा दूसरे व्यक्ति या इंटरनेट सर्वर तक भेजा जाता है. जवाब वापस उसी रास्ते से आपके फोन तक पहुंचता है. हर कॉल और मैसेज के पीछे पूरा नेटवर्क सिस्टम लगातार काम करता रहता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए खतरे की घंटी! AI Agents से काम करवाएगी यह भारतीय कंपनी
चलते-चलते नेटवर्क क्यों गायब हो जाता है?
नेटवर्क कमजोर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे ऊंची इमारतें, मोटी दीवारें, बेसमेंट या लिफ्ट जैसी जगहों पर नेटवर्क सिग्नल कमजोर पड़ सकते हैं. इसके अलावा खराब मौसम, मोबाइल टावर से ज्यादा दूरी, एक साथ बहुत ज्यादा लोगों के नेटवर्क का यूज करना या फोन के सॉफ्टवेयर में आई कोई गड़बड़ी भी सिग्नल गायब होने का कारण बन सकती है. इसलिए नेटवर्क की समस्या हमेशा टेलीकॉम कंपनी की वजह से नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कई तकनीकी कारण भी हो सकते हैं.&amp;nbsp;
नेटवर्क मजबूत रखने के आसान उपाय क्या हैं?
अगर आपके फोन में बार-बार नेटवर्क की समस्या आती है, तो कुछ आसान उपाय अपनाकर इसे काफी हद तक बेहतर किया जा सकता है. समय-समय पर फोन को रीस्टार्ट करने से नेटवर्क कनेक्शन रीफ्रेश हो जाते हैं और छोटी-मोटी तकनीकी गड़बड़ियां दूर हो जाती हैं. फोन के सॉफ्टवेयर को अपडेट रखना भी जरूरी है, क्योंकि नए अपडेट नेटवर्क की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाते हैं. साथ ही सिम कार्ड को साफ रखें और अगर वह पुराना या खराब हो गया हो तो नया सिम ले लें.
जिन इलाकों में 5G सिग्नल कमजोर हो, वहां 4G का इस्तेमाल करना बेहतर ऑप्शन हो सकता है. वहीं अगर घर या ऑफिस में मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहता है, तो वाई-फाई कॉलिंग फीचर को ऑन करके कॉलिंग का बेहतर एक्सपीरियंस लिया जा सकता है. इसके अलावा मोटे या धातु वाले फोन कवर सिग्नल में रुकावट पैदा कर सकते हैं, इसलिए उन्हें हटाकर भी चेक करना चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैटरी, आंखें और फोन, फुल ब्राइटनेस से तीनों को हो सकता है नुकसान, आज ही बदलें ये आदत</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बैटरी-आंखें-और-फोन-फुल-ब्राइटनेस-से-तीनों-को-हो-सकता-है-नुकसान-आज-ही-बदलें-ये-आदत</guid>
        <description><![CDATA[ Display Brightness Effect: स्मार्टफोन के बिना अब दिन तो छोड़िए कुछ घंटे गुजरने भी मुश्किल हो गए हैं. सुबह उठते ही फोन संभालने से लेकर रात को सोने तक हर समय फोन हाथ में और दिन में कई-कई घंटे हमारी आंखों के सामने रहता है. इससे हमारी आंखों पर असर तो पड़ता ही है, लेकिन अगर आप डिस्प्ले ब्राइटनेस फुल रखते हैं तो यह आंखों के अलावा फोन और बैटरी को भी नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए ब्राइटनेस को हमेशा फुल रखने से बचने की सलाह दी जाती है. आज हम जानेंगे कि फुल ब्राइटनेस से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं.
डिस्प्ले ब्राइटनेस फुल रखने के नुकसान
आंखों पर होता है यह असर- फोन की ब्राइटनेस फुल रहने से आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. लंबे समय तक फुल ब्राइटनेस में फोन देखने के आंखें ड्राई होने लगती हैं. कुछ ही दिनों में आपकी नजर धुंधली होने लगेगी और सिरदर्द की समस्या भी हो जाएगी. अगर इसके बाद भी ब्राइटनेस का स्तर यही बना रहता है तो कुछ ही महीनों में चश्मा लगने तक की नौबत आ सकती है. इसके अलावा फोन से निकलने वाली ब्लू लाइट आपकी नींद में भी खलल डाल सकती है. ब्लू लाइट के कारण मेलटॉनिन हॉर्मोन रिलीज नहीं होता, जो दिमाग को सोने का संकेत देता है. इसलिए डिस्प्ले ब्राइटनेस को कम रखना चाहिए.
बैटरी की दुश्मन है फुल ब्राइटनेस- फुल डिस्प्ले ब्राइटनेस का मतलब है बैटरी पर एक्स्ट्रा लोड. अगर आपको फुल ब्राइटनेस पर फोन यूज करने की आदत है तो हो सकता है कि आपको दिन में दो बार फोन चार्ज करना पड़े. बैटरी को दिन में दो-दो बार चार्ज करने से इसकी लाइफ पर असर पड़ता है. चार्जिंग के दौरान फोन हीट भी होता है और गर्मी के मौसम में यह हीट बैटरी के फूलने का भी कारण बन सकती है. इस वजह से आपको जल्द ही बैटरी रिप्लेसमेंट के बारे में सोचना पड़ जाएगा. यही कारण है कि बैटरी बचाने के लिए ब्राइटनेस को फुल न रखने की सलाह दी जाती है.
डिस्प्ले को भी खतरा- अगर आप OLED या AMOLED डिस्प्ले वाला फोन यूज कर रहे हैं तो उसे भी फुल ब्राइटनेस से खतरा है. फुल ब्राइटनेस से इन डिस्प्ले पर स्क्रीन-बर्न का डर रहता है. इसका मतलब है कि लगातार यूज करने पर फोन की स्क्रीन पर परमानेंट निशान बन जाएगा. इससे बचाव के लिए फोन की ब्राइटनेस को कम रखें. अगर आप ब्राइटनेस एडजस्ट करना भूल जाते हैं तो ऑटो-ब्राइटनेस या डार्क मोड को इनेबल कर लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>सीलिंग फैन की स्पीड हो गई कम? नया खरीदने से पहले कर लें ये काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सीलिंग-फैन-की-स्पीड-हो-गई-कम-नया-खरीदने-से-पहले-कर-लें-ये-काम</link>
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        <description><![CDATA[ Ceiling Fan Speed Issue: गर्मी के मौसम में अगर सीलिंग फैन काम करना बंद कर दे तो आफत आ जाती है. भले ही आप एसी और कूलर यूज करते हैं, लेकिन इन्हें पूरे दिन यूज करना काफी महंगा पड़ता है. अगर पावर कट है तो इन्वर्टर बैटरी से सीलिंग फैन ही चल सकता है. लगातार यूज के बाद कई बार ऐसा होता है कि पंखे की स्पीड कम हो जाती है. भले ही आपने रेगुलेटर पर हाईएस्ट स्पीड सेट कर दी है, लेकिन पंखा उतनी तेज स्पीड से चलता नहीं है. अगर आपका पंखा धीमा हो गया है तो उसे बदलने से पहले ये कुछ काम कर देख लेने चाहिए.
Capacitor को बदलें- अगर पंखे की स्पीड कम हो गई है और यह हवा नहीं दे रहा है तो कैपेसिटर में दिक्कत हो सकती है. यह छोटा-सा पार्ट पंखे को फुल स्पीड पर चलने में मदद करता है. पुराना होने पर जब इसमें खराबी आने लगती है तो पंखे की स्पीड कम हो जाती है. इसलिए कैपेसिटर को बदलकर देख लें. इसकी कीमत ज्यादा नहीं होती और यह किसी भी इलेक्ट्रिकल शॉप पर मिल जाता है.
रेगुलेटर पर डालें नजर- ऐसा कम ही होता है पर कई बार रेगुलेटर में खराबी में पंखे की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकती है. रेगुलेटर खराब होने पर पंखे को पूरी वॉल्टेज नहीं मिल पाती और यह बहुत धीमी गति से घूमने लगता है. इसलिए रेगुलेटर बदलकर देखें. अगर पंखा फिर से पूरी स्पीड में घूमने लगे तो समझ लें की रेगुलेटर में खराबी के कारण यह दिक्कत आ रही थी.
ब्लेड अलाइनमेंट- अगर पंखे की ब्लेड मुड़ गई है या इनका अलाइनमेंट गड़बड़ हो गया है तो भी पंखा हवा देना बंद कर सकता है. ऐसा होने पर पंखे को घूमने के लिए ज्यादा पावर लगानी पड़ेगी, जो दूसरे पार्ट्स के लिए भी नुकसानदायक है. इसलिए ब्लेड की अलाइनमेंट को चेक करें. अगर ब्लेड मुड़ी हुई नजर आ रही है तो हाथ से ही इसे सीधा किया जा सकता है. साथ ही मैक्सिमम एयरफ्लो के लिए ब्लेड को साफ रखें. ब्लेड पर गंदगी जमने से ये भारी हो जाती है और इन्हें घूमाने के लिए मोटर पर ज्यादा लोड पड़ता है.
बीयरिंग की देखरेख भी है जरूरी- ज्यादातर सीलिंग फैन में दो बॉल बीयरिंग लगे होते हैं और इन्हें देखरेख की जरूरत पड़ती है. बीयरिंग सूखने पर पंखा आवाज करने लगता है और कई बार इसकी स्पीड भी कम हो जाती है. ऐसी स्थिति में बीयरिंग पर थोड़ा तेल या लूब्रिकेंट डालकर काम चलाया जा सकता है. अगर बीयरिंग बिल्कुल घिस चुके हैं तो किसी इलेक्ट्रिशियन को बुलाकर इन्हें रिप्लेस करवा लें.
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        <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Wi&amp;Fi Router Right Way Uses: वाई&amp; फाई राउटर को 24 घंटे ऑन रखना चाहिए या रात में कर देना चाहिए बंद, क्या है सही तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi Router Right Way Uses : इंटरनेट अब हमारी डेली लाइफ का जरूरी हिस्सा बन चुका है. सुबह उठते ही मोबाइल पर मैसेज चेक करने से लेकर ऑनलाइन पढ़ाई, ऑफिस का काम, मनोरंजन और स्मार्ट डिवाइस चलाने तक हर चीज इंटरनेट पर निर्भर हो गई है. ऐसे में घरों में वाई- फाई राउटर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. इसके इस्तेमाल के साथ एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या रात को सोने से पहले वाई- फाई राउटर बंद कर देना चाहिए या फिर इसे 24 घंटे चालू रखना ज्यादा सही होता है.
कई लोग मानते हैं कि रात में राउटर बंद करने से बिजली की अच्छी- खासी बचत होती है और डिवाइस की उम्र बढ़ जाती है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि राउटर को हमेशा चालू रखना चाहिए क्योंकि इसे लगातार काम करने के लिए ही डिजाइन किया गया है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि वाई- फाई राउटर को 24 घंटे ऑन रखना चाहिए या रात में बंद कर देना चाहिए और इसका सही तरीका क्या है.&amp;nbsp;
क्या राउटर को 24 घंटे चलाने के लिए बनाया जाता है?
ज्यादातर वाई- फाई राउटर इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे दिन- रात लगातार काम कर सकें. कंपनियां इन्हें 24 घंटे इस्तेमाल को ध्यान में रखकर तैयार करती हैं. इसलिए अगर आपका राउटर लगातार चालू रहता है तो यह कोई समस्या की बात नहीं है. दरअसल बार- बार राउटर को ऑन और ऑफ करने से उसके इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. लगातार पावर कट और रीस्टार्ट की वजह से लंबे समय में हार्डवेयर पर असर पड़ने की संभावना रहती है.&amp;nbsp;
 24 घंटे में कितनी बिजली खाता है वाई- फाई राउटर?&amp;nbsp;
अक्सर लोग बिजली बचाने के लिए रात में राउटर का स्विच बंद कर देते हैं, लेकिन सच यह है कि राउटर बहुत कम बिजली की खपत करता है. एक सामान्य वाई- फाई राउटर लगभग 5 से 20 वाट तक बिजली खर्च करता है. अगर इसे पूरे महीने 24 घंटे चालू रखा जाए, तब भी बिजली के बिल में बहुत बड़ा अंतर देखने को नहीं मिलता है. रात में इसे बंद करने से थोड़ी बहुत बचत जरूर हो सकती है, लेकिन इतनी इससे आपके बिल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता है.&amp;nbsp;अगर आप कई दिनों के लिए घर से बाहर जा रहे हैं, छुट्टियों पर हैं या लंबे समय तक इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं होने वाला है, तो राउटर बंद करना बेहतर ऑप्शन हो सकता है. इससे बिना जरूरत बिजली की खपत रुकती है और अचानक होने वाले वोल्टेज उतार- चढ़ाव से डिवाइस को भी सुरक्षा मिलती है.&amp;nbsp;
क्या हर रात राउटर बंद करना नुकसानदायक है?
हर रात राउटर बंद करना कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाता है, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बार- बार पावर ऑन- ऑफ करने से राउटर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है. अगर आपका इंटरनेट सामान्य रूप से काम कर रहा है और कोई विशेष कारण नहीं है, तो उसे लगातार चालू रखना ज्यादा सही माना जाता है.&amp;nbsp;
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रात में अपडेट भी मिलते हैं
इंटरनेट सेवा प्रदाता यानी आईएसपी (ISP) कई बार राउटर के लिए जरूरी फर्मवेयर अपडेट जारी करते हैं. ये अपडेट सुरक्षा बढ़ाने, बग ठीक करने और नेटवर्क प्रदर्शन बेहतर बनाने का काम करते हैं. अक्सर ऐसे अपडेट रात के समय भेजे जाते हैं. अगर राउटर बंद रहेगा, तो अपडेट समय पर इंस्टॉल नहीं हो पाएंगे और आपको बाद में नेटवर्क संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Wi-Fi, Router, Right, Way, Uses:, वाई-, फाई, राउटर, को, घंटे, ऑन, रखना, चाहिए, या, रात, में, कर, देना, चाहिए, बंद, क्या, है, सही, तरीका</media:keywords>
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        <title>नया फोन खरीदने वालों को झटका! इस साल हर महीने बढ़ रहे हैं स्मार्टफोन के दाम</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Prices in India: नया फोन खरीदने वाले ग्राहकों को जोर का झटका लग रहा है. पिछले साल जहां मोबाइल फोन की कीमतें लगभग स्थिर रहीं, वहीं इस साल के पहले पांच महीनों में दामों में लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा चुकी है. मई तक हर महीने फोन की कीमतें बढ़ती आई हैं और फिलहाल राहत के संकेत भी नजर नहीं आ रहे. एंट्री-लेवल और बेस-लेवल के स्मार्टफोन के दामों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. मेमोरी चिप्स की कमी के कारण बढ़ती लागत इस प्राइस हाइक का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है.
इस साल बदल गई स्मार्टफोन मार्केट की तस्वीर
TechArc की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल मोबाइल के दाम स्थिर रहे. आमतौर पर पहली तिमाही में लॉन्च हुए फोन की कीमतें सितंबर तक करीब 5 प्रतिशत तक कम हो जाती थीं. 2025 में 47 मॉडल्स के दाम बढ़े और 44 के कम हुए थे. इस साल यह ट्रेंड ही बदल गया है. इस साल फोन महंगे ज्यादा हो रहे हैं, जबकि सस्ते होने वालों की संख्या कम है. 2026 में 79 मॉडल महंगे हुए हैं, जबकि केवल 18 की कीमतें कम हुई हैं. इसके अलावा इस साल जनवरी से लेकर मई तक हर महीने फोन के दाम बढ़े हैं और 5 महीनों में ही कीमतों में 7.9 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ है.&amp;nbsp;
फोन महंगे होने का कारण क्या है?&amp;nbsp;एआई आने के बाद डेटा सेंटर की जरूरतें बढ़ी हैं और अब एआई कंपनियां इन पर अरबों का निवेश कर रही हैं. डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में चिप की जरूरत पड़ती है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए चिप निर्माता कंपनियों ने कंज्यूमर मार्केट यानी लैपटॉप और स्मार्टफोन आदि में यूज होने वाली चिप्स का प्रोडक्शन कम कर दिया. अब उनका पूरा फोकस एआई डेटा सेंटर के लिए चिप बनाने पर है. इस कारण स्मार्टफोन आदि डिवाइसेस के लिए चिप की कमी हो गई और इनकी कीमतें आसमान छूने लगीं. इससे मोबाइल कंपनियों की लागत बढ़ी और उसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है.
लगभग सभी कंपनियों पर पड़ा असर
मेमोरी चिप्स की कमी का असर लगभग सभी कंपनियों पर पड़ा है. Ai+ ने अपने फोन की कीमतें 31.6 प्रतिशत, रेडमी ने लगभग 27 प्रतिशत, CMF ने 24.3 प्रतिशत, Infinix ने लगभग 20 प्रतिशत और पोको ने लगभग 16.4 प्रतिशत बढ़ाई हैं. इसी तरह सैमसंग जैसी कंपनियों ने भी अपने कई मॉडल्स महंगे किए हैं. इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर सस्ते मॉडल्स पर पड़ रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ChatGPT Lionel Messi AI Makeover : ChatGPT से बदला लियोनेल मेसी का लुक, आप भी ऐसे कर सकते हैं अपना AI मेकओवर</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT Lionel Messi AI Makeover : फुटबॉल की दुनिया के सुपरस्टार लियोनेल मेसी का एक फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनके बाल अर्जेंटीना के झंडे के नीले और सफेद रंग में नजर आ रहे हैं. खास बात यह है कि यह कोई असली हेयर कलर नहीं, बल्कि ChatGPT की मदद से तैयार किया गया AI मेकओवर है. OpenAI और लियोनेल मेसी ने मिलकर एक खास ग्लोबल पार्टनरशिप शुरू की है.
इसका मकसद दुनिया भर के फुटबॉल फैंस को यह बताना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से लोग अपनी क्रिएटिविटी दिखा सकते हैं और AI मनोरंजन का भी नया जरिया बन सकता है. अब फैंस भी अपने पसंदीदा कलर और स्टाइल के साथ खुद का AI लुक तैयार कर सकते हैं. &amp;nbsp;ऐसे में आइए जानते हैं कि ChatGPT से लियोनेल मेसी का लुक कैसे बदला और आप भी अपना AI मेकओवर कैसे कर सकते हैं.&amp;nbsp;
ChatGPT से लियोनेल मेसी का लुक कैसे बदला?
मेसी की जो फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, उसमें उनके बाल अर्जेंटीना के झंडे के नीले और सफेद रंग में नजर आ रहे हैं. यह बदलाव इतना असली और नेचुरल लगता है कि पहली बार देखने पर ऐसा लगता है जैसे मेसी ने सच में अपने बालों को कलर कर लिया हो, लेकिन यह पूरा लुक ChatGPT Images की मदद से बनाया गया है. इसी फोटो के जरिए OpenAI ने अपनी नई वैश्विक पहल की शुरुआत की है, जिसे कंपनी AI के दौर का पहला वैश्विक फुटबॉल सीजन बता रही है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;मेसी ने क्या दिया था प्रॉम्प्ट?
इस खास AI इमेज को बनाने के लिए मेसी ने ChatGPT को एक बेहद आसान प्रॉम्प्ट दिया था. उन्होंने लिखा था, मेरे बालों को अर्जेंटीना के झंडे के रंगों में बदल दो, लेकिन उन्हें नेचुरल और रियल दिखना चाहिए. इसी एक लाइन की मदद से ChatGPT ने मेसी का नया AI लुक तैयार कर दिया. अब इस प्रॉम्प्ट को ChatGPT Images के प्रीसेट स्टाइल्स कलेक्शन में भी शामिल किया गया है, जिससे दुनिया भर के फुटबॉल लवर्स अपने देश के झंडे के रंगों के साथ इसी तरह का मेकओवर तैयार कर सकें.&amp;nbsp;
मेसी ने क्या कहा?&amp;nbsp;लियोनेल मेसी का कहना है कि उन्हें हमेशा यह देखना अच्छा लगता है कि अलग-अलग देशों के लोग फुटबॉल को किस तरह जीते और महसूस करते हैं. मेसी ने कहा, मैंने ChatGPT का इस्तेमाल करके खुद को एक नए अंदाज में अपने देश का सपोर्ट करते हुए देखने की कोशिश की और जाहिर है, मैंने शुरुआत अर्जेंटीना के रंगों से की, मुझे लगता है कि इस सीजन में बहुत से फैंस AI की मदद से मैचों को नए तरीके से समझेंगे, उनका मजा लेंगे और अपनी टीम के लिए सपोर्ट जताएंगे.&amp;nbsp;
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फुटबॉल फैंस के लिए और भी खास है यह ग्लोबल पार्टनरशिप
OpenAI और मेसी की यह ग्लोबल पार्टनरशिप केवल AI फोटो बनाने तक सीमित नहीं है. इसका उद्देश्य फुटबॉल लवर्स के एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाना भी है. AI की मदद से फैंस मैच से जुड़ी जरूरी जानकारी आसानी से समझ सकेंगे. मैदान पर क्या हो रहा है, इसका विश्लेषण कर पाएंगे. टूर्नामेंट की कहानियों और घटनाओं को बेहतर तरीके से फॉलो कर सकेंगे. अपनी पसंदीदा टीम के लिए क्रिएटिव तरीके से सपोर्ट दिखा सकेंगे, साथ ही AI टूल्स का इस्तेमाल करके अनोखा कंटेंट तैयार कर सकेंगे.&amp;nbsp;
आप भी अपना AI मेकओवर कैसे कर सकते हैं?
1. अगर आप भी मेसी की तरह अपना AI मेकओवर करना चाहते हैं, तो सबसे पहले ChatGPT में Images फीचर खोलें.&amp;nbsp;
2. अपनी फोटो अपलोड करें या नई इमेज बनाने का ऑप्शन चुनें.&amp;nbsp;
3. अपनी पसंद का प्रॉम्प्ट लिखें. जैसे मेरे बालों को भारत के तिरंगे के रंगों में बदल दें, लेकिन उन्हें नेचुरल और रियल दिखाएं.&amp;nbsp;
4. कुछ ही सेकंड में ChatGPT आपकी पसंद के अनुसार नई AI इमेज तैयार कर देगा. वहीं आप अपने पसंदीदा फुटबॉल क्लब, देश या किसी खास थीम के रंगों का इस्तेमाल करके भी नया लुक बना सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ChatGPT, Lionel, Messi, Makeover, ChatGPT, से, बदला, लियोनेल, मेसी, का, लुक, आप, भी, ऐसे, कर, सकते, हैं, अपना, मेकओवर</media:keywords>
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        <title>Hybrid Solar System क्या होता है और क्या हैं इसके फायदे&amp;नुकसान? यहां जान लें सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Hybrid Solar System: अगर आप बिजली बिल की टेंशन के साथ-साथ पावर कट के झंझट से भी मुक्ति चाहते हैं तो हाइब्रिड सोलर सिस्टम आपके लिए सही ऑप्शन है. इसमें ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड दोनों ही सिस्टम वाली खूबियां मिल जाती हैं, जो इसे एक परफेक्ट एनर्जी सॉल्यूशन बनाती है. इसलिए अगर आप सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने जा रहे हैं तो इस ऑप्शन के बारे में जरूर जान लें. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि Hybrid Solar System क्या होता है और इसके फायदे-नुकसान क्या हैं.
क्या होता है Hybrid Solar System?
यह एक ऐसा सोलर एनर्जी सिस्टम होता है, जो लिथियम बैटरी बैंक और पावर ग्रिड दोनों से कनेक्ट होता है. दिन में यह सनलाइट की मदद से बिजली जनरेट कर एनर्जी जरूरतों को पूरा करता है और साथ में बैटरियों को भी चार्ज करता है, जो रात में यूज हो सकती हैं. अगर इसके बाद एक्सेस एनर्जी बचती है तो इसे ग्रिड में सप्लाई किया जा सकता है. इसके लिए सोलर पैनल के साथ-साथ हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर, बैटरी बैंक, ग्रिड कनेक्शन और नेट मीटर की जरूरत है. बाकी सिस्टम की तरह यह भी आसानी से 25-30 साल तक चल सकता है.&amp;nbsp;
Hybrid Solar System के फायदे क्या हैं?
पावर बैकअप- पावर कट होने की स्थिति में यह सिस्टम बैकअप की तरह काम करता है. इसमें लगी बैटरियों से जरूरतें पूरी की जा सकती हैं. यह एक तरह से 24 घंटे काम करता है और आपको रात-दिन किसी भी समय बिजली को लेकर टेंशन नहीं रहती.बिल की बचत- यह सिस्टम बिजली बनाकर ग्रिड में एक्सपोर्ट कर सकता है, जिसके बदले आपको बिजली यूज करने को मिल जाती है और आपको हजारों रुपये बिल नहीं चुकाना पड़ता.&amp;nbsp;क्लीन एनर्जी सोर्स- दूसरे सोलर सिस्टम की तरह इसमें बिजली जनरेट करने के लिए फॉसिल फ्यूल यूज नहीं करना पड़ता. यह सनलाइट से बिजली जनरेट करता है, जिसे पर्यावरण पर बुरा असर नहीं पड़ता.
Hybrid Solar System के नुकसान क्या-क्या हैं?
ज्यादा लागत- हाइब्रिड सोलर सिस्टम को लगाने की कॉस्ट बाकी सिस्टम से ज्यादा है. इसकी तुलना में ऑन-ग्रिड सोलर पावर सिस्टम काफी सस्ता पड़ता है. ज्यादा लागत होने के कारण पेबैक टाइम भी बढ़ जाता है. यानी बिजली बिल की बचत के जरिए इसकी लागत पूरी करने में ज्यादा टाइम लगेगा.बैटरी रिप्लेसमेंट का झंझट- सोलर पैनल आराम से 20-25 साल तक चल जाते हैं, लेकिन बैटरी लंबे टाइम तक नहीं चलती. इस कारण हर 5-7 साल बाद बैटरी रिप्लेसमेंट का झंझट रहता है, जो लागत को और बढ़ा देता है.मुश्किल इंस्टॉलेशन और मैंटेनेंस- ऑन-ग्रिड सिस्टम की तुलना में इसकी इंस्टॉलेशन मुश्किल होती है. इसमें ज्यादा वायरिंग और सेटिंग की जरूरत पड़ती है, जिस कारण मैंटेनेंस का झंझट भी बढ़ जाता है.
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hybrid, Solar, System, क्या, होता, है, और, क्या, हैं, इसके, फायदे-नुकसान, यहां, जान, लें, सारी, बातें</media:keywords>
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        <title>क्या बैटरी की वजह से स्लो हो रहा है आपका लैपटॉप? इन गलतियों से है बचने की जरूरत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-बैटरी-की-वजह-से-स्लो-हो-रहा-है-आपका-लैपटॉप-इन-गलतियों-से-है-बचने-की-जरूरत</link>
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        <description><![CDATA[ Slow Laptop Fix: लैपटॉप की स्पीड स्लो होने पर ज्यादातर लोगों का ध्यान स्टोरेज ड्राइव, सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर की किसी गड़बड़ी की तरफ ही जाता है. कई बार इनकी वजह से लैपटॉप की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है, लेकिन हर बार इन्हें ही दोष देना ठीक नहीं होता. बैटरी भी लैपटॉप की स्पीड स्लो कर सकती है और इस तरफ कम ही लोगों का ध्यान जाता है. आज हम बताने जा रहे हैं कि बैटरी से जुड़ी कौन-सी गलतियों के कारण आपका लैपटॉप आसान काम करने में भी लंबा समय लगा सकता है.
बैटरी से कैसे पड़ता है परफॉर्मेंस पर असर?
मॉडर्न लैपटॉप को परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ में बैलेंस बनाए रखने के लिए डिजाइन किया जाता है. कई बार नए लैपटॉप की डिफॉल्ट सेटिंग पावर सेविंग के हिसाब से सेट की हुई होती है. इसलिए आपको परफॉर्मेंस में थोड़ी कमी नजर आ सकती है. अच्छी बात यह है कि आप इन सेटिंग्स को अपने हिसाब से सेट कर सकते हैं.
परफॉर्मेंस के लिए सेटिंग ऑप्टिमाइज न करना
अगर आपको तेज स्पीड और शानदार परफॉर्मेंस चाहिए तो सेटिंग को परफॉर्मेंस के लिए ऑप्टिमाइज कर लें. विंडोज में बाई डिफॉल्ट बैंलेंस्ड पावर मोड एक्टिव होता है. इसका मतलब है कि जब आप हैवी टास्क करते हैं तो यह CPU की क्लॉक स्पीड बढ़ा देता है और जब कोई लाइट काम होता है तो यह पावर सेविंग को मैक्सिमाइज कर देता है. लेकिन क्लॉक स्पीड सेट करने में अगर थोड़ा-सा भी टाइम लग जाए तो यह लैपटॉप की स्पीड को धीमा कर कर सकता है. इससे बचने के लिए आप विंडोज सेटिंग में बदलाव कर सकते हैं.
हाई-एंड टास्क के दौरान लैपटॉप को चार्जिंग पर न रखना
अगर आप लैपटॉप पर वीडियो एडिटिंग या गेमिंग जैसा हाई-एंड टास्क कर रहे हैं तो इसे प्लग-इन रखना चाहिए. इससे बेस्ट परफॉर्मेंस मिलती है और लैपटॉप एकदम स्मूद तरीके से काम करता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चार्जिंग पर होने के कारण लैपटॉप का कंपोनेंट पूरी पावर के साथ काम करता है. चार्जिंग से हटने के बाद बैटरी बचाने के लिए सिस्टम कई चीजों को स्लो कर देता है.
खराब चार्जर यूज करना
अगर आप लैपटॉप से एकदम फास्ट और स्मूद परफॉर्मेंस लेना चाहते हैं तो सही चार्जर यूज करना बहुत जरूरी है. नकली या खराब क्वालिटी वाला चार्जर पर्याप्त पावर सप्लाई नहीं कर पाएगा, जिससे सिस्टम पूरी एनर्जी से काम नहीं कर सकेगा और आपको स्पीड में फर्क नजर आएगा. इसके अलावा खराब चार्जर से चचार्जिंग स्लो हो जाती है, जो बैटरी को भी खराब सकती है.
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका पुराना Android फोन बन चुका है हैकर्स का आसान निशाना? जानिए कब लेना चाहिए नया डिवाइस</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-आपका-पुराना-android-फोन-बन-चुका-है-हैकर्स-का-आसान-निशाना-जानिए-कब-लेना-चाहिए-नया-डिवाइस</link>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: पुराना Android स्मार्टफोन अब सिर्फ धीमा नहीं, आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है. साल 2026 में भी लाखों लोग ऐसे Android फोन इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्हें लंबे समय से कोई सॉफ्टवेयर या सिक्योरिटी अपडेट नहीं मिला है.
पहली नजर में ये डिवाइस सामान्य रूप से काम करते दिखाई देते हैं लेकिन इनके भीतर कई ऐसे सुरक्षा छेद मौजूद हो सकते हैं जिनका फायदा साइबर अपराधी आसानी से उठा सकते हैं. ऐसे में पैसे बचाने के लिए पुराने फोन का इस्तेमाल करना कभी-कभी आपकी निजी जानकारी और ऑनलाइन सुरक्षा पर भारी पड़ सकता है.
क्यों बढ़ जाता है पुराने Android फोन का खतरा?
हर Android स्मार्टफोन को हमेशा के लिए अपडेट नहीं मिलते. आमतौर पर ज्यादातर कंपनियां अपने फोन को तीन से पांच साल तक ही सिक्योरिटी पैच और नए Android अपडेट देती हैं. इसके बाद डिवाइस का आधिकारिक सपोर्ट खत्म हो जाता है.
जब किसी फोन को सुरक्षा अपडेट मिलना बंद हो जाता है तब उसमें सामने आने वाली नई कमजोरियों को ठीक नहीं किया जाता. ऐसे में हैकर्स और साइबर अपराधियों के लिए उन डिवाइसों को निशाना बनाना आसान हो जाता है. वे फर्जी ऐप्स, संक्रमित वेबसाइटों या धोखाधड़ी वाले लिंक के जरिए फोन में सेंध लगाने की कोशिश कर सकते हैं.
आज के समय में स्मार्टफोन में बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड, ओटीपी, निजी तस्वीरें और कई संवेदनशील जानकारियां मौजूद रहती हैं. इसलिए बिना सुरक्षा अपडेट वाला फोन आपकी व्यक्तिगत जानकारी के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है.
कब समझें कि फोन बदलने का समय आ गया है?
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ा संकेत यह है कि आपका फोन अब Android वर्जन अपडेट या सिक्योरिटी पैच प्राप्त नहीं कर रहा है. यदि कंपनी ने आपके मॉडल का सपोर्ट बंद कर दिया है तो उस डिवाइस पर बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग या महत्वपूर्ण अकाउंट्स का इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता.
इसके अलावा यदि कई जरूरी ऐप्स आपके फोन में काम करना बंद कर दें या नए अपडेट इंस्टॉल न हों तो यह भी संकेत है कि डिवाइस पुराना हो चुका है. बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ऐप्स अक्सर सुरक्षा कारणों से पुराने Android वर्जन का समर्थन बंद कर देते हैं.
हार्डवेयर से जुड़े संकेतों पर भी ध्यान देना जरूरी है. फोन का बार-बार हैंग होना, जरूरत से ज्यादा गर्म होना, बैटरी का फूलना या अचानक क्रैश होना दर्शाता है कि डिवाइस अपनी उम्र पूरी कर रहा है. आमतौर पर चार से छह साल पुराने स्मार्टफोन में ऐसे जोखिम बढ़ने लगते हैं हालांकि कुछ प्रीमियम मॉडल लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं.
नया फोन नहीं खरीद सकते तो क्या करें?
हर किसी के लिए हर कुछ साल में नया स्मार्टफोन खरीदना आसान नहीं होता. ऐसे में कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
अगर आपका फोन अब अपडेट नहीं पा रहा है तो उसमें बैंकिंग ऐप्स, यूपीआई वॉलेट या अन्य वित्तीय जानकारी रखने से बचें. जिन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करते उन्हें हटा दें और किसी भी अनजान वेबसाइट या थर्ड-पार्टी स्रोत से APK फाइल डाउनलोड न करें.
साथ ही मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें. यदि कभी कोई अपडेट उपलब्ध हो तो उसे तुरंत इंस्टॉल करना भी जरूरी है.
पुराने फोन का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
यदि आपका स्मार्टफोन अभी भी काम कर रहा है लेकिन सुरक्षा सपोर्ट खत्म हो चुका है तो उसे मुख्य डिवाइस की बजाय सेकेंडरी डिवाइस के रूप में इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा. आप इसे म्यूजिक सुनने, वीडियो देखने, बच्चों के मनोरंजन या सिर्फ Wi-Fi आधारित कामों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
सिर्फ चालू होना ही काफी नहीं
कई बार पुराना स्मार्टफोन देखने में पूरी तरह ठीक लगता है और सामान्य काम भी कर लेता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह सुरक्षित भी है. जैसे ही किसी डिवाइस को सुरक्षा अपडेट मिलना बंद हो जाता है उसकी डिजिटल सुरक्षा धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. इसलिए पैसे बचाना जरूरी है लेकिन अपनी निजी जानकारी और ऑनलाइन सुरक्षा को नजरअंदाज करना कहीं ज्यादा महंगा साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 05:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>आपका अकाउंट हैक है या नहीं, कैसे करें पता? ये 2 टिप्स आएंगे आपके बेहद काम</title>
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        <description><![CDATA[ Account Hacking Warning Sign: ऑनलाइन दुनिया में हैकिंग का खतरा लगातार बना रहता है. अब एआई आने के बाद यह खतरा और बढ़ गया है. हैकिंग की ज्यादातर घटनाओं के बारे में विक्टिम को पता भी नहीं चलता. एडवांस टूल्स से सिस्टम में मालवेयर और स्पाईवेयर इंस्टॉल कर दिए जाते हैं, जो सारी जानकारी हैकर तक पहुंचाते रहते हैं. सिस्टम की तरह अकाउंट हैक होने के भी अपने खतरे हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि अकाउंट और सिस्टम के हैक होने पर क्या वॉर्निंग साइन नजर आते हैं और आपको क्या करना चाहिए.
इन वॉर्निंग साइन पर रखें नजर
पासवर्ड काम करना कर देंगे बंद- अगर आपके अकाउंट के पासवर्ड काम करना बंद कर चुके हैं और आप रिसेट प्रोसेस पर नहीं जा पा रहे हैं तो हो सकता है कि किसी ने आपको लॉग-आउट करने के लिए आपके क्रेडेंशियल चेंज कर दिए हैं. यह बताता है कि आपका अकाउंट हैक हो चुका है.
अकाउंट में चेंजेज नजर आना- अगर आपको अकाउंट में कोई ऐसे बदलाव नजर आ रहे हैं, जो आपने नहीं किए तो भी हैकिंग की पूरी आशंका है. रिकवरी ईमेल, फोन नंबर, सिक्योरिटी क्वेश्चन आदि को देखकर यह पता किया जा सकता है.
अनजान सॉफ्टवेयर या ऐप्स नजर आना- अगर आपके डिवाइस पर अनजान प्रोग्राम, ऐप्स या सॉफ्टवेयर नजर आ रहा है, जो आपने इंस्टॉल नहीं किया तो यह भी हैकिंग का संकेत है. हैकर रैंसमवेयर, स्पाईवेयर या रिमोट एक्सेस ट्रोजन आदि से आपके डिवाइस या अकाउंट को टारगेट कर सकते हैं.
कॉन्टैक्ट्स के पास बिना भेजे मेल और मैसेज जाना- अगर आपके कॉन्टैक्ट्स को आपके बिना भेजे भी आपके ईमेल एड्रेस या किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मैसेज मिल रहे हैं तो यह हैकर का काम हो सकता है. अकाउंट हैक करने के बाद हैकर्स फिशिंग अटैक के लिए ऐसी चीजें करते हैं.
ऐसे लगाएं हैकिंग का पता
फ्री वेबसाइट- आप haveibeenpwned.com वेबसाइट पर जाकर भी यह देख सकते हैं कि कहीं आपका अकाउंट हैक तो नहीं हो गया है. यह फ्री सर्विस है. आपको सिर्फ वेबसाइट पर जाकर ईमेल एड्रेस डालना है. अगर डेटाबेस में आपका ईमेल नजर आए तो तुरंत अपने सारे अकाउंट्स के पासवर्ड बदल दें.
क्रोम भी करेगा मदद- क्रोम ब्राउजर ओपन कर सेटिंग में जाएं और प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी सेक्शन पर क्लिक करें. इसके बाद पासवर्ड मैनेजर ओपन कर चेक पासवर्ड को ओपन करें. अगर किसी डेटा लीक में आपके क्रेडेंशियल लीक हुए हैं तो क्रोम यहां पर उसकी जानकारी दे देगा.
हैक होने पर क्या करें?

अफेक्टेड डिवाइस को ऑफलाइन कर दें.
किसी दूसरे डिवाइस से अपने अकाउंट्स के पासवर्ड बदल दें
सभी अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को इनेबल करें.

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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 05:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>अब बच्चों के लिए बंद होगा सोशल मीडिया! इस देश ने लागू किया सख्त नियम</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Ban: ब्रिटेन की सरकार बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए कुछ हानिकारक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना को आगे बढ़ा सकते हैं. हालांकि, सुरक्षित माने जाने वाले कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक बच्चों की पहुंच जारी रह सकती है.
बच्चों की सुरक्षा बनी सरकार की प्राथमिकता
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस मुद्दे पर कई विशेषज्ञों और प्रभावित परिवारों से बातचीत की है. इसके अलावा उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के अनुभवों का भी अध्ययन किया है जहां दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त नियम लागू किए गए थे.
सरकार का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों को हानिकारक कंटेंट और ऑनलाइन खतरों से बचाना बेहद जरूरी हो गया है.
टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार युवाओं की सुरक्षा के मामले में बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी. सरकार का फोकस ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रहेगा जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं. हालांकि, फिलहाल इस सप्ताह किसी औपचारिक प्रतिबंध की घोषणा की संभावना कम बताई जा रही है.
ऑनलाइन यौन शोषण रोकने पर भी जोर
सरकार जल्द ही उन उपायों की जानकारी दे सकती है जिनका उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन यौन प्रकृति की तस्वीरें या सामग्री बनाने से रोकना है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सामग्री का इस्तेमाल बाद में ब्लैकमेलिंग और सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों में किया जा सकता है. ऑनलाइन अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह विषय सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है.
सोशल मीडिया के प्रभाव पर बढ़ रही चिंता
ब्रिटेन में इस साल बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को लेकर व्यापक चर्चा और परामर्श प्रक्रिया शुरू की गई थी. इसमें कई संभावित उपायों पर विचार किया गया जिनमें स्क्रीन टाइम लिमिट, रात के समय इस्तेमाल पर रोक, और बच्चों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाले डिजाइन फीचर्स पर नियंत्रण शामिल हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर असर डाल सकता है.
अन्य देश भी बना रहे हैं सख्त नियम
ब्रिटेन अकेला देश नहीं है जो इस दिशा में कदम उठा रहा है. फ्रांस, डेनमार्क और पोलैंड भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया नियमों को और सख्त बनाने पर विचार कर रहे हैं. वहीं, ग्रीस ने घोषणा की है कि जनवरी 2027 से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर प्रतिबंध लागू किया जाएगा.
मौजूदा कानून पहले से लागू
ब्रिटेन में पहले से ही ऑनलाइन सुरक्षा कानून लागू है जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों को अवैध और हानिकारक कंटेंट से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पड़ते हैं. अब सरकार इस सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने पर विचार कर रही है.
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 05:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>Project Ganga : Fiber या Satellite से... Project Ganga के जरिए गांवों तक इंटरनेट कैसे पहुंचाएगी योगी सरकार?</title>
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        <description><![CDATA[ Project Ganga : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब गांवों तक तेज इंटरनेट पहुंचाने की बड़ी तैयारी कर चुकी है. आज के दौर में इंटरनेट लोगों की जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है. पढ़ाई से लेकर इलाज, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और रोजगार तक, लगभग हर काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंच चुका है. इसी जरूरत को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रोजेक्ट गंगा की शुरुआत की है. इस योजना का उद्देश्य गांवों और छोटे कस्बों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी डिजिटल सुविधाओं का पूरा फायदा उठा सकें.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि अगर गांवों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाया जाए तो वहां रहने वाले युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा और कारोबार के नए रास्ते खुल सकते हैं. यही वजह है कि प्रोजेक्ट गंगा को प्रदेश की सबसे बड़ी डिजिटल कनेक्टिविटी योजनाओं में से एक माना जा रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि योगी सरकार Fiber या Satellite से Project Ganga के जरिए गांवों तक इंटरनेट कैसे पहुंचाएगी.&amp;nbsp;
क्या है प्रोजेक्ट गंगा?
प्रोजेक्ट गंगा का पूरा नाम गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट है. यह एक ऐसी योजना है जिसके जरिए राज्य के लाखों परिवारों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जाएगा. इस परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (DSP) का नेटवर्क तैयार किया जाएगा. ये स्थानीय युवा अपने-अपने क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं पहुंचाने का काम करेंगे. सरकार का लक्ष्य अगले कुछ सालों में करीब 20 लाख परिवारों तक ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना है.&amp;nbsp;
गांव तक इंटरनेट कैसे पहुंचाएगी सरकार?
योगी सरकार इसके लिए मुख्य रूप से फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क का इस्तेमाल करेगी. ऑप्टिकल फाइबर केबल्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट गांवों तक पहुंचाया जाएगा. इन केबल्स को स्थानीय स्तर पर डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स संचालित करेंगे. जहां फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल होगा या चुनौतियां होंगी, वहां आधुनिक वायरलेस तकनीकों और सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं का भी यूज किया जा सकता है. हालांकि परियोजना का मुख्य आधार फाइबर नेटवर्क ही रहेगा क्योंकि यह ज्यादा स्थिर और तेज इंटरनेट स्पीड उपलब्ध कराता है.&amp;nbsp;
हर गांव में बनेंगे डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर
प्रोजेक्ट गंगा की सबसे खास बात यह है कि इसमें बाहरी कंपनियों के जगह स्थानीय युवाओं को शामिल किया जाएगा. सरकार न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में तैयार करेगी. इन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, नेटवर्क स्थापित करने की सुविधा और कारोबार शुरू करने में मदद दी जाएगी.इससे गांवों में ही इंटरनेट सेवाओं का संचालन होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. सरकार इस परियोजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है. योजना के तहत लगभग 50 प्रतिशत डिजिटल उद्यमी महिलाएं होंगी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और महिलाएं भी डिजिटल बिजनेस से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगी.&amp;nbsp;
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इंटरनेट के साथ मिलेंगी कई डिजिटल सेवाएं
यह योजना सिर्फ इंटरनेट देने तक सीमित नहीं है. प्रोजेक्ट गंगा के तहत लोगों को कई आधुनिक डिजिटल सेवाओं का फायदा मिलेगा, जिनमें हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्शन, सार्वजनिक वाई-फाई सुविधा, आईपीटीवी सेवाएं, ओटीटी प्लेटफॉर्म तक पहुंच, सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था, साइबर सिक्योरिटी सेवाएं, सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन सुविधा भी शामिल हैं. इससे गांवों में रहने वाले लोगों को शहरों जैसी डिजिटल सुविधाएं मिलने लगेंगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 05:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>USB पोर्ट अलग&amp;अलग रंग के क्यों होते हैं? जानिए कौन&amp;सा कलर देता है तेज स्पीड</title>
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        <description><![CDATA[ USB पोर्ट अलग-अलग रंग के क्यों होते हैं? जानिए कौन-सा कलर देता है तेज स्पीड ]]></description>
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        <title>गजब! Humanoid Robot ने फतह किया 20,341 फीट ऊंचा ज्वालामुखी, अब इस चोटी पर है नजर</title>
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        <description><![CDATA[ Humanoid Robot: ह्यूमनॉइड रोबोट ने दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में से एक माने जाने वाले इक्वाडोर के चिम्बोराजो ज्वालामुखी की चोटी तक पहुंचकर नया इतिहास रच दिया है. इस उपलब्धि को रोबोटिक्स की दुनिया में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है क्योंकि इसका उद्देश्य रोबोट्स को प्रयोगशालाओं और नियंत्रित वातावरण से बाहर निकालकर वास्तविक और कठिन परिस्थितियों में परखना है.
20,341 फीट (करीब 6,200 मीटर) ऊंचे इस ज्वालामुखी पर चढ़ने वाला रोबोट यूनिट्री G1 का संशोधित एडिशन है जिसे पेम्बा नाम दिया गया है. यह अभियान एक बड़े रोबोटिक्स मिशन की पहली सीढ़ी माना जा रहा है जिसका अंतिम लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट तक पहुंचना है.
सिर्फ करतब दिखाने के लिए नहीं बना यह रोबोट

Introducing Pemba.The first humanoid to climb to 20,000ft.Everest next. More below. pic.twitter.com/k1BHkRLYjm
&amp;mdash; pabs (@pabloberlangab) June 7, 2026



आजकल सोशल मीडिया पर अक्सर रोबोट्स के नाचने, दौड़ने या जिमनास्टिक करते हुए वीडियो वायरल होते रहते हैं. लेकिन पेम्बा का उद्देश्य इससे कहीं अलग है. इस परियोजना का मुख्य सवाल यह है कि क्या ह्यूमनॉइड रोबोट उन खतरनाक और दूरस्थ क्षेत्रों में काम कर सकते हैं जहां इंसानों के लिए जाना जोखिम भरा होता है और पुरानी मशीनें प्रभावी साबित नहीं हो पातीं.
जंगलों और दुर्गम इलाकों के लिए तैयार किया गया सिस्टम
Interesting Engineering की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना का नेतृत्व इंजीनियर और Geologic Dome के संस्थापक पाब्लो बेरलांगा बोएमारे कर रहे हैं. इससे पहले वे वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय परियोजनाओं पर काम कर चुके हैं.
उनके अनुसार, दुनिया के कई संरक्षित जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों की निगरानी के लिए हजारों स्थिर कैमरे और सेंसर लगाए जाते हैं. इनकी मदद से वन्यजीवों की एक्टिविटी, अवैध कटाई, शिकार और पर्यावरणीय बदलावों पर नजर रखी जाती है.
टीम का मानना है कि भविष्य में कैमरों और सेंसरों से लैस मोबाइल रोबोट इन कामों को ज्यादा प्रभावी तरीके से कर सकते हैं. ऐसे रोबोट बड़े क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से घूमकर डेटा एकत्र कर सकेंगे और सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए जानकारी भेज सकेंगे. भविष्य में इन्हें सौर ऊर्जा से संचालित करने की भी योजना है.
अब नजरें माउंट एवरेस्ट पर
इस परियोजना का अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य हिमालय की चोटियों तक पहुंचना है. Geologic Dome और नेपाल की Fourteen Peaks Expedition नामक संस्था मिलकर माउंट एवरेस्ट पर रोबोट भेजने की योजना पर काम कर रही हैं.
प्रस्तावित मिशन के तहत रोबोट को एवरेस्ट बेस कैंप से लेकर कैंप-IV तक भेजा जा सकता है जो लगभग 8,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
इस दौरान वैज्ञानिक बैटरी परफॉर्मेंस, रोबोट की चाल, जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव और कठिन मौसम में उसकी कार्यक्षमता से जुड़ा डेटा एकत्र करेंगे.
एवरेस्ट मिशन में कानूनी अड़चन
हालांकि एवरेस्ट अभियान की तैयारी चल रही है लेकिन इसके सामने एक बड़ी रूकावट भी आ गई है. नेपाल में फिलहाल ऐसे किसी कानून या नियम का अभाव है जो रोबोट्स के एवरेस्ट अभियान को कंट्रोल करता हो. इसी वजह से स्थानीय अधिकारियों ने पहले आवश्यक नियम बनाने की बात कही है. जब तक नए दिशा-निर्देश तैयार नहीं हो जाते तब तक एवरेस्ट मिशन को आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा.
क्या एवरेस्ट तक पहुंचेगा पेम्बा?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पेम्बा माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंच पाएगा या नहीं. लेकिन चिम्बोराजो ज्वालामुखी पर उसकी सफल चढ़ाई ने यह साबित कर दिया है कि ह्यूमनॉइड रोबोट अब प्रयोगशाला की सीमाओं से बाहर निकलकर पृथ्वी के सबसे कठिन इलाकों में भी अपनी क्षमता दिखाने लगे हैं.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>गजब, Humanoid, Robot, ने, फतह, किया, 20, 341, फीट, ऊंचा, ज्वालामुखी, अब, इस, चोटी, पर, है, नजर</media:keywords>
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        <title>ईरान के बाद अब रूस को डर, हैकिंग से बचने के लिए पुतिन का सर्विलांस सिस्टम किया बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Putin Surveillance System: बीती 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ज्वाइंट स्ट्राइक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को ढेर कर दिया था. इजरायल ने खामनेई समेत ईरान के बड़े नेताओं और अधिकारियों की लोकेशन जानने के लिए तेहरान के CCTV नेटवर्क को हैक कर लिया था. फिर इसी सूचना के आधार पर खामनेई को टारगेट किया. यह जानकारी सामने आने के बाद रूस की भी चिंताएं बढ़ गई हैं. अब एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस की सिक्योरिटी एजेंसियों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर की सुरक्षा के लिए यूज किए जाने वाले स्पेशल सर्विलांस सिस्टम को बंद कर दिया है. यह सिस्टम रूस की राजधानी मॉस्को में लगे लगभग 3 लाख सर्विलांस कैमरा से अलग है.
रूस को सता रही है हैकिंग की चिंता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने नागरिकों पर नजर रखने के लिए लगाए गए सर्विलांस सिस्टम को हैकिंग के खतरे से बचने के लिए जांचा-परखा है. इंटरनेट से पूरी तरह कट करने के बाद ही इस सिस्टम को फिर से ऑन किया गया है. दरअसल, अब खुफिया एजेंसियां एआई की मदद से हजारों घंटों के फुटेज देखकर किसी बड़े नेता की मूवमेंट का पैटर्न पहचान सकती हैं. इजरायल ने भी एआई की मदद से सीसीटीवी कैमरा की फुटेज को एनालाइज कर खामनेई की मूवमेंट का पता लगाया था. एआई आने के बाद सिस्टम इतने एडवांस हो गए हैं कि सड़क पर चलती गाड़ी की नंबर प्लेट तक को देखा जा सकता है. अगर एक बार सिस्टम किसी सब्जेक्ट को पहचान ले तो मूवमेंट समेत उसका पूरा प्रोफाइल तैयार कर सकता है.
यूक्रेन से हैकिंग का खतरा
रूसी अधिकारियों को पुतिन की सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है. हाल ही में यूक्रेन की इंटेलीजेंस सर्विसेस ने रूस के ट्रैफिक कैमरा सिस्टम को हैक कर लिया था. इसके अलावा रूसी सेना के बड़े अधिकारियों को टारगेट करने के लिए मोबाइल फोन की लोकेशन से जुड़े डेटा को भी यूज किया गया था. यूक्रेन के एक हैकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि मॉस्को के कैमराज काम कर रहे हैं और इन्हें रेगुलरली हैक किया जाता है. अपने बयान में उसने क्रेमलिन के आसपास लगे कैमरों का भी जिक्र किया था. हालांकि, उसने यह नहीं बताया कि क्या यूक्रेन इतनी बड़ी संख्या में फुटेज को एनलाइज कर सकता है या नहीं. यह बात भी ध्यान रखने वाली है कि अमेरिका और ब्रिटेन के पास लोकेशन का सटीक पता लगने वाले टूल्स मौजूद हैं. दोनों देशों ने यूक्रेन को सर्विलांस ड्रोन की मदद से हाई-रेजॉल्यूशन इमेज प्रोवाइड करवाई थी, जिससे किसी टारगेट की लोकेशन का पता लग सके.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google Chrome यूजर्स सावधान! सरकार ने जारी किया हाई अलर्ट, तुरंत करें ये काम वरना होगा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome: भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी ने Google Chrome इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है. एजेंसी के अनुसार, Chrome ब्राउजर में कई ऐसे सुरक्षा दोष पाए गए हैं जिनका फायदा उठाकर साइबर अपराधी यूजर्स के सिस्टम को निशाना बना सकते हैं.
CERT-In ने जारी की सुरक्षा चेतावनी

A sudden and unexplained loss of mobile network service isn&#039;t always a technical issue. In some cases, it can be an early warning sign of a SIM swap attack, where fraudsters transfer your number to a SIM card they control.#CyberSecurity #StaySafeOnline #DigitalIndia pic.twitter.com/mtwjU4Btcd
&amp;mdash; Ministry of Electronics &amp;amp; IT (@GoI_MeitY) June 8, 2026



सरकार समर्थित साइबर सुरक्षा संस्था Indian Computer Emergency Response Team (CERT-In) ने अपनी ताजा एडवाइजरी में बताया है कि Google Chrome के कुछ पुराने वर्जन सुरक्षा जोखिमों से प्रभावित हैं. यह खतरा Windows, macOS और Linux प्लेटफॉर्म पर चल रहे Chrome ब्राउजर से जुड़ा हुआ है.
एजेंसी ने कहा है कि जिन यूजर्स के सिस्टम में Chrome का पुराना वर्जन इंस्टॉल है उन्हें जल्द से जल्द अपडेट करना चाहिए.
क्या है खतरा?
CERT-In के अनुसार, इन कमियों का फायदा उठाकर कोई भी हमलावर दूर बैठकर सिस्टम पर दुर्भावनापूर्ण कोड चला सकता है. इसके अलावा संवेदनशील जानकारी चोरी करना, सिस्टम को क्रैश करना या ब्राउजर की सेफ्टी लेयर्स को बायपास करना भी संभव हो सकता है.
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सुरक्षा दोष हैकर्स को यूजर के डिवाइस पर अनधिकृत गतिविधियां करने का मौका दे सकते हैं जिससे व्यक्तिगत और संगठनात्मक डेटा दोनों खतरे में पड़ सकते हैं.
Chrome में कहां मिलीं खामियां?
जांच में पता चला है कि Chrome के कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स में तकनीकी कमजोरियां मौजूद हैं. इनमें GPU, V8 इंजन, Blink, WebGL, WebRTC, PDF Viewer, Media, Network, Extensions और अन्य ब्राउजर सब-सिस्टम शामिल हैं.
इन कमजोरियों में मेमोरी मैनेजमेंट से जुड़ी समस्याएं, बफर ओवरफ्लो, टाइप कन्फ्यूजन, इंटीजर ओवरफ्लो और अनइनिशियलाइज्ड मेमोरी जैसी खामियां शामिल हैं. ऐसे दोष साइबर अपराधियों को सिस्टम की सुरक्षा को प्रभावित करने का अवसर दे सकते हैं.
कैसे हो सकता है हमला?
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी यूजर को नुकसान पहुंचाने के लिए हैकर एक विशेष रूप से तैयार किए गए वेबपेज या लिंक का इस्तेमाल कर सकता है. यदि यूजर उस लिंक को खोल देता है तो हमलावर इन कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है. सरल शब्दों में कहें तो केवल किसी संदिग्ध वेबसाइट या लिंक पर क्लिक करना भी जोखिम पैदा कर सकता है.
किन यूजर्स पर है असर?
यह चेतावनी सभी डेस्कटॉप Chrome यूजर्स के लिए जारी की गई है. चाहे आप व्यक्तिगत उपयोगकर्ता हों या किसी कंपनी/संस्था में काम करते हों यदि आपके कंप्यूटर में Chrome का पुराना वर्जन चल रहा है तो आपको सावधान रहने की जरूरत है.
Chrome को तुरंत कैसे अपडेट करें?
अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Chrome को तुरंत नए वर्जन में अपडेट करें.

अपडेट करने के लिए ये स्टेप्स फॉलो करें.
Google Chrome खोलें.
ऊपर दाईं ओर मौजूद तीन डॉट (⋮) मेन्यू पर क्लिक करें.
Help ऑप्शन चुनें.
About Google Chrome पर क्लिक करें.
Chrome अपने आप नए अपडेट की जांच करेगा और उसे इंस्टॉल कर देगा.
अपडेट पूरा होने के बाद ब्राउजर को रीस्टार्ट करें.

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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Cluade Mythos का पब्लिक वर्जन Fable 5 हुआ लॉन्च, जानिए कैसे है सबसे पावरफुल सिस्टम से अलग</title>
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        <description><![CDATA[ Claude Fable 5: अमेरिकी एआई एजेंसी एंथ्रोपिक ने अपने पावरफुल साइबर सिक्योरिटी मॉडल Claude Mythos का पब्लिक वर्जन Claude Fable 5 लॉन्च कर दिया है. कंपनी का कहना है कि यह पब्लिक यूज के लिए सेफ है और इसमें कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं. बता दें कि पिछले काफी समय से एआई कंपनियां एक के बाद एक पावरफुल मॉडल लॉन्च कर रही हैं. एंथ्रोपिक ने कुछ दिन पहले ही ऐलान किया था कि वह पब्लिक यूज के लिए Mythos जैसा मॉडल लाएगी और अब इसे लॉन्च कर दिया गया है. आइए जानते हैं कि यह Claude Mythos से कितना अलग है.
Claude Fable 5 में Mythos जैसी कैपेबिलिटीज- एंथ्रोपिक
एंथ्रोपिक का कहना है कि Claude Fable 5 में Mythos जैसी कैबेलिटीज हैं, लेकिन इसमें कई सेफ्टी कंट्रोल दिए गए हैं. इस कारण साइबर सिक्योरिटी, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कुछ मॉडल ट्रेनिंग एक्टिविटीज को डेडिकेटेड सेफ्टी सिस्टम के जरिए स्क्रीन किया जा रहा है. जब इस सिस्टम के पास कोई सेंसेटिव क्वेरी आएगी तो यह उस रिक्वेस्ट को एक कम कैपेबल Claude Opus 4.8 मॉडल के पास भेज देगा. इससे यूजर को उसके प्रॉम्प्ट का रिस्पॉन्स मिल जाएगा और मिसयूज का भी खतरा नहीं रहेगा. नए मॉडल के बारे में बताते हुए एंथ्रोपिक ने कहा कि इस तरह के मॉडल को रिलीज करने के खतरे भी हैं. बिना सुरक्षा उपायों के Fable 5 की कैपेबिलिटीज का मिसयूज कर बड़ा नुकसान किया जा सकता है.
Claude Fable 5 की खास बातें क्या हैं?
एंथ्रोपिक का कहना है कि Fable 5 उसके अब तक के सारे पब्लिक एआई मॉडल्स से बेहतर है. यह मुश्किल सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स को हैंडल, विजुअल और बड़े डेटा को समझ और एनालाइज कर सकता है. इसके अलावा यह लाखों टोकन वाले लंबे टास्क के दौरान भी अपना फोकस मैंटेन रखता है. नया मॉडल एंथ्रोपिक की सर्विसेस और API के जरिए अवेलेबल है.&amp;nbsp;
पब्लिक के लिए अवेलेबल नहीं है Claude Mythos
एंथ्रोपिक का साइबर सिक्योरिटी मॉडल Claude Mythos दुनियाभर में तहलका मचा रहा है. यह मॉडल इतना पावरफुल है कि किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर को चुटकियों में हैक कर सकता है. एंथ्रोपिक का कहना है कि अभी तक उसके समेत दुनिया की किसी भी कंपनी के पास Mythos के मिसयूज को रोकने का तरीका नहीं है. इसके चलते इसे पब्लिक के लिए अवेलेबल नहीं करवाया गया है. अभी भारत समेत दुनिया के कुछ ही देशों की चुनिंदा कंपनियों के पास इसकी एक्सेस है, जो इसकी मदद से अपने सिस्टम और सॉफ्टवेयर की खामियों का पता लगाकर उन्हें दूर कर रही हैं.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>iPhone यूजर्स की हुई मौज! अब एक ही WhatsApp ऐप में चला सकेंगे दो अकाउंट, जानिए कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp for iPhone Users: iPhone इस्तेमाल करने वाले WhatsApp यूजर्स के लिए लंबे समय से इंतजार की जा रही सुविधा आखिरकार आ गई है. अब iPhone पर एक ही WhatsApp ऐप के अंदर दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल किए जा सकेंगे. इसके लिए न तो WhatsApp Business ऐप डाउनलोड करने की जरूरत होगी और न ही किसी दूसरे फोन का सहारा लेना पड़ेगा.
एक फोन में पर्सनल और प्रोफेशनल नंबर का आसान इस्तेमाल
आज के समय में कई लोग निजी और ऑफिस के काम के लिए अलग-अलग मोबाइल नंबर रखते हैं. पहले iPhone यूजर्स को दोनों नंबरों पर WhatsApp चलाने के लिए WhatsApp Business ऐप का इस्तेमाल करना पड़ता था या फिर दूसरा डिवाइस रखना पड़ता था. नए अपडेट के बाद दोनों अकाउंट एक ही ऐप में मैनेज किए जा सकेंगे.
इस फीचर की मदद से यूजर्स बिना बार-बार लॉगिन किए आसानी से एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट पर स्विच कर सकेंगे. इससे काम और निजी बातचीत को अलग रखना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.
iPhone में दूसरा WhatsApp अकाउंट कैसे जोड़ें?
दूसरा WhatsApp अकाउंट जोड़ने के लिए सबसे पहले ऐप की Settings में जाएं. वहां प्रोफाइल नाम के पास दिखाई देने वाले एरो आइकन पर टैप करें. इसके बाद Add Account ऑप्शन चुनें और स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करें.
प्रोसेस पूरी होने के बाद दूसरा नंबर भी उसी WhatsApp ऐप में एक्टिव हो जाएगा और आप जरूरत के अनुसार दोनों अकाउंट के बीच आसानी से स्विच कर पाएंगे.
दोनों अकाउंट की सेटिंग्स रहेंगी अलग
WhatsApp ने इस फीचर को इस तरह डिजाइन किया है कि दोनों अकाउंट पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करेंगे. यानी हर अकाउंट की चैट हिस्ट्री, नोटिफिकेशन, प्राइवेसी सेटिंग्स और अन्य विकल्प अलग-अलग रहेंगे.
यूजर्स चाहें तो दोनों अकाउंट के लिए अलग नोटिफिकेशन सेट कर सकते हैं जिससे यह पहचानना आसान होगा कि कौन-सा मैसेज पर्सनल नंबर पर आया है और कौन-सा वर्क अकाउंट पर.
दूसरे नंबर की होगी जरूरत
इस फीचर का लाभ उठाने के लिए आपके पास दूसरा मोबाइल नंबर होना जरूरी है. यह नंबर फिजिकल SIM कार्ड या iPhone में सपोर्टेड eSIM के रूप में हो सकता है. नंबर वेरिफाई होने के बाद दोनों अकाउंट एक ही ऐप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
Android जैसा अनुभव अब iPhone पर भी
Android यूजर्स को यह सुविधा काफी समय पहले मिल चुकी थी. अब WhatsApp ने iPhone में भी यह फीचर उपलब्ध कराकर दोनों प्लेटफॉर्म के बीच फीचर गैप को काफी हद तक कम कर दिया है.
धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंचेगा अपडेट
WhatsApp ने इस फीचर को दुनिया भर के iPhone यूजर्स के लिए जारी करना शुरू कर दिया है. यदि आपके फोन में अभी यह विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है तो सबसे पहले WhatsApp को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Instagram ने बदला प्रोफाइल का तरीका, अब यूजर खुद बदल सकेंगे लुक</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Profile Grid Reordering: इंस्टाग्राम पर अब यूजर्स अपनी मर्जी से प्रोफाइल को सजा सकेंगे. दरअसल, कंपनी ने एक नए प्रोफाइल कस्टमाइजेशन फीचर का ऐलान किया है, जो यूजर्स को प्रोफाइल ग्रिड पर पोस्ट को रिअरेंज करने का ऑप्शन देगा. इसकी मदद से यूजर पोस्ट को हाइड या डिलीट किए बिना अपने प्रोफाइल पेज पर कंटेट को रिअरेंज कर सकेंगे. उन्हें पिन किए बिना भी अपनी मर्जी को पोस्ट को सबसे ऊपर दिखाने का ऑप्शन मिल जाएगा. यूजर्स काफी लंबे समय से इस फीचर की मांग कर रहे थे और अब खुद इंस्टाग्राम के सीईओ एडम मोस्सेरी ने इसे रिवील किया है.
नए फीचर से क्या बदलेगा?
नया फीचर आने के बाद यूजर अपने प्रोफाइल ग्रिड पर पोस्ट की पोजिशन को मैनुअली चेंज कर पाएगा. अभी तक इंस्टाग्राम इसके लिए क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर फॉलो करती थी, जिसमें सबसे रिसेंट पोस्ट प्रोफाइल ग्रिड में सबसे ऊपर दिखती थी. हालांकि, यूजर को तीन पोस्ट पिन करने का ऑप्शन मिलता है, लेकिन इसके बाद की पोस्ट की पोजिशन पर उसका कोई कंट्रोल नहीं रहता था. अब रिऑर्डरिंग ऑप्शन आने के बाद यूजर पोस्ट को अलग-अलग पोजिशन पर ड्रैग एंड ड्रॉप कर पाएंगे. इससे उन्हें अपनी फेवरेट, मोस्ट लाइक्ड, मोस्ट व्यूड और मोस्ट शेयर्ड पोस्ट को सबसे ऊपर रखने का मौका मिलेगा. साथ ही इससे वो प्रोफाइल की ओवरऑल अपीयरेंस भी बदल पाएंगे. इंस्टाग्राम ने भी कहा है कि यूजर अब अपने बेस्ट वर्क को सबसे ऊपर, सेंटर और कहीं भी रखकर अपनी मर्जी से अपनी स्टोरी बता पाएंगे.
लंबे समय से की जा रही थी इस फीचर की मांग
इंस्टाग्राम यूजर और क्रिएटर लंबे समय से इस फीचर की डिमांड कर रहे थे. कंपनी ने कहा कि यह फीचर यूजर को अपने प्रोफाइल का स्ट्रॉन्ग फर्स्ट इंप्रेशन क्रिएट करने में मदद करेगा. इससे क्रिएटर्स, बिजनेसेस और ब्रांड्स को अपने प्रोडक्ट्स, कैंपेन और दूसरा इंपोर्टेंट कंटेट भी हाइलाइट करने का मौका मिलेगा. कंपनी ने बताया कि यूजर अपनी मर्जी से कभी भी ग्रिड के लेआउट को बदल सकेंगे और इससे कंटेट पोस्टिंग की डेट पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
इंस्टाग्राम का पेड सब्सक्रिप्शन भी हुआ रोलआउट
ग्रिड को ऑर्डर करने का फीचर लाने से पहले कंपनी अपना पेड सब्सक्रिप्शन प्लान Instagram Plus भी रोल आउट कर चुकी है. रत में इसकी कीमत 299 रुपये प्रति माह रखी गई है. इसमें यूजर को 48 घंटे तक स्टोरी लाइव रखने, बिना व्यूअर लिस्ट में आए किसी की स्टोरी देखने समेत कई फीचर्स मिलेंगे.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 01:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कैसे काम करता है STP, गंदे पानी को किस तकनीक से करता है साफ?</title>
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        <description><![CDATA[ How STP Technology Works: शहरों और कस्बों में बढ़ती आबादी के साथ गंदे पानी यानी सीवेज की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है. यदि इस पानी को बिना साफ किए नदियों, तालाबों या जमीन में छोड़ दिया जाए तो यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. यही वजह है कि एसटीपी (Sewage Treatment Plant) की भूमिका आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो चुकी है. एसटीपी ऐसी व्यवस्था है जो घरों, कार्यालयों और उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाने का काम करती है.
क्या होता है STP?
एसटीपी यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एक ऐसी तकनीकी सिस्टम है जहां गंदे पानी से ठोस कचरा, हानिकारक बैक्टीरिया, रसायन और अन्य प्रदूषक तत्वों को अलग किया जाता है. इस प्रोसेस के बाद प्राप्त पानी का उपयोग बागवानी, निर्माण कार्य, फ्लशिंग और कई औद्योगिक कार्यों में किया जा सकता है.
सबसे पहले होती है स्क्रीनिंग
जब सीवेज प्लांट में गंदा पानी पहुंचता है तो सबसे पहले स्क्रीनिंग की प्रक्रिया होती है. इसमें बड़े आकार का कचरा जैसे प्लास्टिक, कपड़े के टुकड़े, लकड़ी और अन्य ठोस पदार्थों को विशेष जालियों की मदद से अलग कर लिया जाता है. इससे आगे की मशीनों को नुकसान नहीं पहुंचता.
सेडिमेंटेशन टैंक में बैठती है गंदगी
स्क्रीनिंग के बाद पानी को बड़े टैंकों में भेजा जाता है, जहां भारी कण नीचे बैठ जाते हैं. इस प्रोसेस को सेडिमेंटेशन कहा जाता है. यहां कीचड़ और ठोस पदार्थ पानी से अलग हो जाते हैं जबकि अपेक्षाकृत साफ पानी अगले चरण में पहुंचता है.
बैक्टीरिया की मदद से होती है सफाई
एसटीपी का सबसे जरूरी स्टेज जैविक उपचार होता है. इसमें विशेष प्रकार के सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया गंदे पानी में मौजूद जैविक कचरे को तोड़ते हैं. इस प्रोसेस के लिए ऑक्सीजन भी दी जाती है ताकि बैक्टीरिया तेजी से काम कर सकें. इसे एक्टिवेटेड स्लज प्रोसेस जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जाता है.
आखिरी चरण में मरते हैं कीड़े
बॉयोलॉजिकल ट्रीटमेंट के बाद पानी को क्लोरीन, ओजोन या अल्ट्रावायलेट (यूवी) तकनीक से कीटाणुरहित किया जाता है. इससे हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस नष्ट हो जाते हैं. इसके बाद पानी काफी हद तक साफ और सुरक्षित हो जाता है.
साफ पानी का होता है दोबारा इस्तेमाल
ट्रीटमेंट के बाद बचे हुए पानी को सिंचाई, पार्कों की देखभाल, कूलिंग सिस्टम और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे ताजे पानी की बचत होती है और जल संसाधनों पर दबाव कम पड़ता है.
पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका
एसटीपी न केवल गंदे पानी को साफ करता है बल्कि नदियों और भूजल को प्रदूषित होने से भी बचाता है. तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में यह तकनीक स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान बनकर उभरी है.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्यों लगवाना चाहिए ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम और क्या हैं इसके फायदे? यहां जानें हर सवाल का जवाब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्यों-लगवाना-चाहिए-ऑफ-ग्रिड-सोलर-सिस्टम-और-क्या-हैं-इसके-फायदे-यहां-जानें-हर-सवाल-का-जवाब</link>
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        <description><![CDATA[ Off-Grid Solar System: लगातार बढ़ते बिजली बिल से बचने के लिए लोग सोलर एनर्जी सिस्टम की तरफ जा रहे हैं. यह न सिर्फ बिजली बिल से बचाता है बल्कि पर्यावरण पर भी इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ता. कई प्रकार के सोलर पावर सिस्टम में से Off-Grid Solar System सबसे कॉमन सिस्टम में से एक है. इसके कई फायदे होते हैं और यह एनर्जी जरूरत के मामले में आपको एकदम इंडिपेंडेंट बना सकता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि Off-Grid Solar System क्यों लगवाना चाहिए और इसके फायदे क्या-क्या हैं.
क्या होता है Off-Grid Solar System?
जैसा नाम से पता चल रहा है, इस सिस्टम की ग्रिड की जरूरत नहीं होती और यह पूरी तरह इंडिपेंडेंटली काम करता है. यह पहले सोलर पैनल की मदद से बिजली जनरेट करता है, फिर उससे सोलर बैटरी चार्ज होती है. फिर इस इलेक्ट्रिसिटी को इन्वर्टर की मदद से कन्वर्ट कर होम अप्लायंसेस चलाने के लायक बनाया जाता है. इस सिस्टम में बैटरी बैंक, सोलर चार्जर कंट्रोलर, ऑफ-ग्रिड सोलर इन्वर्टर, डीसी डिस्कनेक्ट स्विच आदि का यूज होता है.
Off-Grid Solar System के क्या फायदे हैं?
एनर्जी इंडिपेंडेंट- अगर आप लगातार पावर कट से परेशान हैं तो यह सिस्टम आपके खूब काम आ सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका ग्रिड से कोई कनेक्शन नहीं होता इसलिए आपको पावर कट की चिंता नहीं रहेगी. यह सोलर एनर्जी की मदद से बैटरी चार्ज करेगा और आपको आंधी-तूफान और बारिश में बिजली कट होने की टेंशन से मुक्त कर देगा.
इंस्टॉलेशन एकदम आसान- इसका ग्रिड से कोई कनेक्शन नहीं होता, इसलिए इसे कहीं भी इंस्टॉल किया जा सकता है. इसे उन जगहों पर भी इंस्टॉल किया जा सकता है, जहां बिजली का कनेक्शन नहीं है. दूसरा इसे ग्रिड से कनेक्ट नहीं करना पड़ता, इसलिए इंस्टॉल करने के लिए प्रोफेशनल्स की भी जरूरत नहीं पड़ती. बेसिक नॉलेज के साथ इस सिस्टम को कोई भी इंस्टॉल कर सकता है.
ग्रामीण और रिमोट इलाकों के लिए फायदेमंद- ग्रामीण और रिमोट इलाकों में पावर कट जैसी समस्याएं ज्यादा आती हैं. कई जगहों पर ग्रिड नहीं पहुंची है, जिसके चलते लोग बिजली का कनेक्शन नहीं ले पा रहे हैं. ऐसी जगहों के लिए ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम खूब फायदेमंद है. यह सोलर एनर्जी से चलते हुए पावर नीड्स को आसानी से पूरा कर सकता है. इसके अलावा सारे सोलर पावर सिस्टम की एक खूबी यह भी होती है कि ये एन्वायरनमेंट फ्रेंडली होते हैं.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्यों, लगवाना, चाहिए, ऑफ, ग्रिड, सोलर, सिस्टम, और, क्या, हैं, इसके, फायदे, यहां, जानें, हर, सवाल, का, जवाब</media:keywords>
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        <title>सावधान! एक ईमेल और कंपनी का करोड़ों का नुकसान, तेजी से फैल रहा नया एक्सटॉर्शन स्कैम</title>
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        <description><![CDATA[ Extortion Scam: साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर कंपनियों को निशाना बना रहे हैं. हाल ही में Google की साइबर सुरक्षा टीमों ने एक ऐसे खतरनाक डेटा चोरी और उगाही (Extortion) अभियान का खुलासा किया है जो अमेरिका की कई कंपनियों को निशाना बना रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान एक साइबर अपराधी समूह द्वारा चलाया जा रहा है जिसे Luna Moth, Silent Ransom Group और Chatty Spider जैसे नामों से जाना जाता है.
कैसे काम करता है यह नया स्कैम?
रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर शुरुआत में सामान्य दिखने वाले ईमेल भेजते हैं. ये ईमेल किसी इनवॉइस (बिल) या भुगतान से जुड़ी बातचीत का हिस्सा लगते हैं. खास बात यह है कि इनमें न तो कोई संदिग्ध लिंक होता है और न ही कोई खतरनाक अटैचमेंट.
ईमेल में अक्सर सिर्फ इतना लिखा होता है कि हैलो, यह वह इनवॉइस है जिसके बारे में हमने कल बात की थी.
ऐसे संदेश कर्मचारियों को भ्रमित करते हैं और आगे की बातचीत शुरू करवाने की कोशिश करते हैं. इसके बाद साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग और वॉयस फिशिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके कंपनी के सिस्टम तक पहुंच बनाने का प्रयास करते हैं.
सिस्टम में घुसने के बाद क्या करते हैं हमलावर?
एक बार नेटवर्क तक पहुंच मिलने के बाद अपराधी संवेदनशील और गोपनीय डेटा की तलाश शुरू कर देते हैं. वे ग्राहक जानकारी, व्यावसायिक दस्तावेज, आंतरिक रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण फाइलों को चुरा सकते हैं.
कई मामलों में वे कर्मचारियों को धोखे से ऐसे कदम उठाने के लिए भी मजबूर करते हैं जिससे उन्हें और अधिक जानकारी या सिस्टम एक्सेस मिल सके.
डर पैदा कर पैसे मांगते हैं अपराधी
डेटा चोरी करने के बाद हमलावर कंपनी को एक धमकी भरा ईमेल भेजते हैं. इस ईमेल में दावा किया जाता है कि उन्होंने कंपनी के डेटाबेस और गोपनीय फाइलों की बड़ी मात्रा में चोरी कर ली है.
विश्वास दिलाने के लिए वे कथित तौर पर कुछ स्क्रीनशॉट भी साझा करते हैं और कहते हैं कि उनके पास चोरी किए गए डेटा का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है. इसके बाद वे कंपनी से संपर्क करने और आर्थिक समझौता करने की मांग करते हैं.
अगर पैसे नहीं दिए तो क्या धमकी देते हैं?
धमकी भरे संदेशों में अपराधी दावा करते हैं कि यदि कंपनी उनकी मांग नहीं मानेगी तो वे चोरी किया गया डेटा सार्वजनिक कर देंगे. वे कर्मचारियों, ग्राहकों और व्यावसायिक साझेदारों को डेटा लीक की जानकारी भेजने की धमकी भी देते हैं.
इसके अलावा वे कंपनी की प्रतिष्ठा खराब होने, कानूनी कार्रवाई होने, ग्राहकों का भरोसा टूटने और कारोबार पर गंभीर असर पड़ने जैसी बातें लिखकर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं.
कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी बताते हैं बेअसर
ईमेल में साइबर अपराधी यह भी दावा करते हैं कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां उनकी पहुंच से बाहर हैं और वे कंपनी की मदद नहीं कर पाएंगी. इसका उद्देश्य पीड़ित संगठन को डराना और उसे जल्दी भुगतान करने के लिए मजबूर करना होता है.
कंपनियां कैसे रहें सुरक्षित?

किसी भी अनजान या संदिग्ध ईमेल पर तुरंत भरोसा न करें.
बिना पुष्टि किए किसी कॉल, ईमेल या संदेश के आधार पर सिस्टम एक्सेस न दें.
कर्मचारियों को नियमित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दें.
मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) का इस्तेमाल करें.
महत्वपूर्ण डेटा का नियमित बैकअप रखें.
संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत साइबर सुरक्षा टीम को सूचित करें.

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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>चुपके से क्या देख रहे हैं बच्चे? Apple का नया अपडेट देगा Parents को पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Apple Update: तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा आज हर माता-पिता की बड़ी चिंता बन गई है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए Apple ने अपने Worldwide Developers Conference (WWDC) 2026 में कई नए पैरेंटल कंट्रोल और चाइल्ड सेफ्टी फीचर्स पेश किए हैं. ये सुविधाएं आने वाले iPhone, iPad और Mac डिवाइसों में macOS 27, iPadOS 27 और iOS 27 के साथ उपलब्ध होंगी. कंपनी का कहना है कि इन टूल्स की मदद से माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी, ऐप इस्तेमाल और डिजिटल व्यवहार पर बेहतर कंट्रोल रख सकेंगे.
बच्चों के लिए अलग Child Account की सुविधा
Apple अब बच्चों के लिए डिवाइस सेटअप करते समय विशेष Child Account बनाने का विकल्प देगा. यह अकाउंट बच्चों की उम्र के अनुसार सुरक्षा उपायों को अपने आप लागू करेगा. इसके तहत वयस्क वेबसाइटों तक पहुंच सीमित रहेगी, बच्चों के लिए उपयुक्त कंटेंट की सिफारिशें मिलेंगी और App Store पर भी उम्र के अनुसार कंट्रोल लागू होगा.
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे केवल वही सामग्री देखें जो उनकी आयु के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हो.
कौन-से ऐप इस्तेमाल कर सकेंगे बच्चे फैसला करेंगे माता-पिता
नए अपडेट के बाद माता-पिता यह तय कर सकेंगे कि बच्चे डिवाइस शुरू करने के बाद किन ऐप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. Apple कुछ जरूरी और सुरक्षित ऐप्स की सूची उपलब्ध कराएगा जिनमें से चयन किया जा सकेगा.
इसके अलावा, माता-पिता किसी भी नए ऐप को अपने स्तर पर मंजूरी देकर जोड़ सकते हैं. जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाएंगे, उनके लिए अतिरिक्त ऐप्स की अनुमति भी दी जा सकेगी.
Ask to Browse फीचर क्या है?
Apple अपने पहले से मौजूद Ask to Buy सिस्टम का विस्तार कर रहा है. अभी यह सुविधा ऐप डाउनलोड और इन-ऐप खरीदारी के लिए माता-पिता की अनुमति मांगती है.
अब कंपनी Ask to Browse नाम का नया फीचर ला रही है. इसके तहत यदि कोई बच्चा Safari ब्राउजर में किसी नई वेबसाइट पर जाना चाहता है तो पहले माता-पिता की मंजूरी जरूरी होगी. इससे बच्चों को अनजान या जोखिमभरी वेबसाइटों तक पहुंचने से रोका जा सकेगा.
नए संपर्क जोड़ने से पहले भी मिलेगी अनुमति
Apple ने बच्चों की ऑनलाइन बातचीत को सुरक्षित बनाने के लिए संपर्क प्रबंधन में भी बदलाव किए हैं. अब बच्चे किसी नए व्यक्ति से Phone, FaceTime या Messages के जरिए संपर्क करने से पहले माता-पिता की स्वीकृति प्राप्त करेंगे.
इस सुविधा से अभिभावकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि उनके बच्चे किन लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं.
आपत्तिजनक और हिंसक कंटेंट पर सख्त निगरानी
कंपनी ने अपने Communication Safety फीचर को और मजबूत बनाया है. इसके तहत साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में नग्नता से जुड़े कंटेंट अपने आप धुंधली (Blur) कर दी जाएगी.
इसके अलावा, 18 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए अत्यधिक हिंसक, खून-खराबे वाले या परेशान करने वाले दृश्य भी सिस्टम द्वारा पहचानकर ब्लॉक किए जाएंगे. इससे बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित करने वाले कंटेंट से बचाने में मदद मिलेगी.
ऐप्स के लिए समय सीमा तय कर सकेंगे अभिभावक
Apple ने Time Allowances नाम का नया विकल्प भी पेश किया है. इसकी मदद से माता-पिता गेमिंग, सोशल मीडिया और मनोरंजन जैसी अलग-अलग ऐप श्रेणियों के लिए इस्तेमाल की समय सीमा निर्धारित कर सकेंगे.
वे दिन के अलग-अलग समय के अनुसार शेड्यूल भी बना सकेंगे. उदाहरण के लिए, पढ़ाई के दौरान या स्कूल के समय कुछ ऐप्स को पूरी तरह बंद रखा जा सकता है जबकि अन्य समय पर उन्हें इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है.
Screen Time डैशबोर्ड हुआ और ज्यादा स्मार्ट
Apple ने अपने Screen Time फीचर को भी नया रूप दिया है. अब माता-पिता को बच्चों के डिवाइस इस्तेमाल का अधिक स्पष्ट और विस्तृत विवरण मिलेगा. इसी डैशबोर्ड से वे ऐप्स, वेबसाइटों और अन्य डिजिटल एक्टिविटी से जुड़े नियमों में बदलाव कर सकेंगे. इससे सभी कंट्रोल एक ही जगह से आसानी से प्रबंधित किए जा सकेंगे.
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर Apple का बड़ा फोकस
Apple ने पैरेंटल कंट्रोल और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए एक अलग वेबसाइट भी शुरू की है जहां अभिभावकों को उपयोगी संसाधन और मार्गदर्शन मिलेगा. कंपनी का मानना है कि तेजी से बढ़ती डिजिटल दुनिया में बच्चों को प्राइवेसी संबंधी खतरों और अनुचित सामग्री से बचाना बेहद जरूरी है.
नए फीचर्स यह दिखाते हैं कि टेक कंपनियां अब केवल डिवाइस बनाने तक सीमित नहीं हैं बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं.
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        <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>मोबाइल से DSLR जैसी फोटो चाहिए? ये 5 ट्रिक्स आपकी कैमरा स्किल्स बदल देंगी</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Camera: आज के समय में स्मार्टफोन कैमरे पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो चुके हैं. अच्छी फोटो खींचने के लिए महंगा फोन होना जरूरी नहीं है. सही तकनीक और कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप साधारण स्मार्टफोन से भी बेहतरीन तस्वीरें कैप्चर कर सकते हैं. चाहे आप यात्रा की यादें सहेज रहे हों परिवार के खास पलों को रिकॉर्ड कर रहे हों या सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बना रहे हों, ये आसान टिप्स आपकी फोटोग्राफी को बेहतर बना सकती हैं.
फोटो लेने से पहले कैमरा लेंस जरूर साफ करें
अक्सर लोग फोटो खींचने से पहले कैमरा लेंस की सफाई पर ध्यान नहीं देते जबकि यह सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है. फोन दिनभर जेब, बैग और हाथों में रहता है जिससे लेंस पर धूल, गंदगी और उंगलियों के निशान जमा हो जाते हैं.
गंदा लेंस तस्वीरों को धुंधला बना सकता है और फोटो की क्वालिटी खराब कर सकता है. इसलिए हर बार फोटो लेने से पहले माइक्रोफाइबर या मुलायम कपड़े से लेंस को हल्के से साफ कर लें. इससे तस्वीरें अधिक साफ और शार्प दिखाई देंगी.
बेहतर फ्रेमिंग के लिए ग्रिड लाइन्स का इस्तेमाल करें
अधिकांश स्मार्टफोन कैमरों में ग्रिड लाइन का विकल्प मौजूद होता है. कैमरा सेटिंग्स में जाकर 3x3 ग्रिड को ऑन करें. यह आपको रूल ऑफ थर्ड्स के अनुसार फोटो कंपोज करने में मदद करता है.
अगर आप अपने फोटो के मुख्य विषय को ग्रिड की लाइनों या उनके मिलने वाले बिंदुओं पर रखते हैं तो तस्वीर ज्यादा आकर्षक और संतुलित दिखाई देती है. यह तकनीक लैंडस्केप, पोर्ट्रेट और फूड फोटोग्राफी जैसी लगभग हर तरह की फोटो में काम आती है.
फोकस और एक्सपोजर को खुद कंट्रोल करें
सिर्फ कैमरा खोलकर फोटो क्लिक करने के बजाय स्क्रीन पर उस हिस्से को टैप करें जिस पर आप फोकस करना चाहते हैं. ऐसा करने से कैमरा उसी विषय के अनुसार फोकस और रोशनी को एडजस्ट कर देता है.
कई स्मार्टफोन में एक्सपोजर को मैन्युअली बढ़ाने या घटाने का विकल्प भी मिलता है. यदि फोटो में आसमान बहुत ज्यादा चमकीला दिखाई दे रहा है या डिटेल्स गायब हो रही हैं तो एक्सपोजर थोड़ा कम करें. इससे रंग ज्यादा नैचुरल दिखेंगे और तस्वीर में बेहतर डिटेल्स मिलेंगी.
फोटो एडिटिंग का सही इस्तेमाल करें
एक अच्छी फोटो को और बेहतर बनाने के लिए हल्की एडिटिंग काफी मददगार साबित होती है. इसके लिए Snapseed, Adobe Lightroom Mobile, PicsArt, InShot या Google Photos जैसे फ्री टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.
ब्राइटनेस, कॉन्ट्रास्ट, शार्पनेस और कलर बैलेंस में छोटे बदलाव आपकी तस्वीर को अधिक आकर्षक बना सकते हैं. हालांकि एडिटिंग करते समय यह ध्यान रखें कि फोटो जरूरत से ज्यादा फिल्टर या इफेक्ट्स से भरी हुई न लगे. नैचुरल लुक हमेशा बेहतर परिणाम देता है.
जरूरत पड़ने पर Night Mode और HDR का लाभ उठाएं
कम रोशनी में फोटो खींचते समय Night Mode काफी उपयोगी फीचर साबित होता है. यह कई तस्वीरों को जोड़कर अधिक रोशनी और डिटेल्स वाली फोटो तैयार करता है.
वहीं HDR (High Dynamic Range) ऐसे दृश्यों में मदद करता है जहां रोशनी का अंतर ज्यादा हो, जैसे चमकता हुआ आसमान या बैकलाइट वाली स्थिति. HDR का इस्तेमाल करने से फोटो के उजले और अंधेरे हिस्सों में संतुलन बना रहता है और तस्वीर अधिक प्रभावशाली दिखती है.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>iPhone का क्रेज खत्म? इन कारणों से एंड्रॉयड फोन की तरफ जा रहे हैं लोग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iphone-का-क्रेज-खत्म-इन-कारणों-से-एंड्रॉयड-फोन-की-तरफ-जा-रहे-हैं-लोग</link>
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        <description><![CDATA[ Android Over iPhone: 2007 में आईफोन का सफर शुरू हुआ था. उस साल ऐप्पल ने पहला आईफोन लॉन्च किया और इसने देखते ही देखते पूरी मोबाइल फोन इंडस्ट्री को बदल दिया. यही कारण है कि सालों-साल आईफोन की बिक्री सबसे ज्यादा रही. पर इसका मतलब यह नहीं है कि आईफोन खरीदने वाला हर यूजर इससे खुश ही है. कई फीचर्स की कमी से लेकर कीमत तक, कई ऐसे कारण हैं, जिन्हें लेकर लोग एंड्रॉयड की तरफ देख रहे हैं. आज हम जानेंगे कि लोग आईफोन छोड़कर एंड्रॉयड फोन की तरफ क्यों जा रहे हैं.
कस्टमाइजेशन का ऑप्शन
कस्टमाइजेशन के मामले में एंड्रॉयड का कोई मुकाबला नहीं है और यही कारण है कि कई लोग आईफोन को छोड़ रहे है. हालांकि, अब आईफोन में कस्टमाइजेशन पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है, लेकिन यह अभी भी एंड्रॉयड के मुकाबले पर नहीं पहुंचा है.
कीमत भी एक बड़ा कारण
कीमत भी लोगों को नया आईफोन लेने से रोक रही है. अगर मौजूदा मॉडल की बात करें तो सबसे सस्ते iPhone 17e के लिए लगभग 65,000 रुपये चुकाने पड़ते हैं, जबकि फीचर के मामले में यह बाकी आईफोन की तुलना में सबसे नीचे है. दूसरी तरफ एंड्रॉयड फोन काफी सस्ते हैं. 30,000-40,000 रुपये की रेंज में शानदार फीचर्स वाला एंड्रॉयड फोन खरीदा जा सकता है.
पोर्ट्स और जैक
आईफोन में कमाल के फीचर्स हैं, लेकिन कई ऐसी चीजें मिसिंग हैं, जो लोगों के लिए बहुत जरूरी है. ऐप्पल ने आजतक किसी भी आईफोन में microSD कार्ड के लिए स्लॉट नहीं दिया है, जिस कारण बिल्ट-इन स्लॉट के जरिए स्टोरेज बढ़ाना नामुमकिन है. इसी तरह आईफोन में कई सालों से 3.5mm हेडफोन जैक भी गायब है. ये चीजें भी लोगों को एंड्रॉयड की तरफ पुश कर रही हैं. अमेरिका में अब केवल ई-सिम वाले आईफोन बेचे जा रहे हैं. ऐसे में फिजिकल सिम के दीवानों के लिए नया आईफोन खरीदना मुश्किल काम हो गया है.
ऐप्स की साइडलोडिंग
आईफोन में ऐप स्टोर के अलावा कहीं और से ऐप्स डाउनलोड करना टेढी खीर है. ऐप्पल के क्लोज्ड इकोसिस्टम के चलते केवल ऐप स्टोर से ही ऐप्स डाउनलोड करनी पड़ती है. अगर कोई ऐप इस स्टोर पर अवेलेबल नहीं है तो आईफोन यूजर्स उसे यूज नहीं कर सकता. इस कारण बहुत-से लोग आईफोन नहीं खरीदना चाहते. दूसरी तरफ एंड्रॉयड में इस तरह की बंदिश नहीं है. हालांकि, आपको थर्ड-पार्टी ऐप्स डाउनलोड करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन एंड्रॉयड आपको ऐप्स डाउनलोड करने से रोकता नहीं है.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Oh No! रिचार्ज नहीं हुआ लेकिन पैसा कट गया? जानिए RBI का नियम जिससे जल्दी मिलेगा रिफंड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/oh-no-रिचार्ज-नहीं-हुआ-लेकिन-पैसा-कट-गया-जानिए-rbi-का-नियम-जिससे-जल्दी-मिलेगा-रिफंड</link>
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        <description><![CDATA[ RBI Refund Rule: आज के डिजिटल दौर में ज्यादातर लोग मोबाइल रिचार्ज के लिए UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि कई बार ऐसा होता है कि रिचार्ज सफल नहीं होता, लेकिन बैंक खाते से पैसे कट जाते हैं. ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपके पैसे वापस मिलने की पूरी संभावना होती है. बस आपको सही प्रोसेस और समय सीमा की जानकारी होनी चाहिए.
पैसे कटने के बाद भी रिचार्ज फेल क्यों हो जाता है?
भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन किए जाते हैं. इतने बड़े नेटवर्क में कभी-कभी सर्वर पर दबाव बढ़ने, इंटरनेट कनेक्टिविटी में रुकावट या तकनीकी खराबी के कारण ट्रांजैक्शन अधूरा रह सकता है.
जब भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती और राशि संबंधित सेवा तक नहीं पहुंचती तो उसे फेल ट्रांजैक्शन माना जाता है. ऐसे मामलों में गलती आमतौर पर ग्राहक की नहीं होती बल्कि तकनीकी कारण जिम्मेदार होते हैं.
रिचार्ज फेल होने पर सबसे पहले क्या करें?
यदि आपका रिचार्ज नहीं हुआ है तो तुरंत दोबारा भुगतान करने की गलती न करें. सबसे पहले अपने बैंक और UPI ऐप में ट्रांजैक्शन की स्थिति जांचें. यह सुनिश्चित करें कि पैसे वास्तव में खाते से कटे हैं या नहीं.
इसके अलावा ट्रांजैक्शन आईडी, तारीख, समय और भुगतान की राशि को नोट करके सुरक्षित रखें. यह जानकारी आगे शिकायत दर्ज कराने में बेहद काम आती है.
आजकल अधिकांश UPI ऐप्स में Check Status का विकल्प भी मिलता है. इसके जरिए बैंक सर्वर से सीधे ट्रांजैक्शन की स्थिति पता चल जाती है और कई मामलों में रिफंड अपने आप प्रोसेस हो जाता है.
RBI के नियम क्या कहते हैं?
बहुत कम लोगों को पता है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल भुगतान से जुड़े रिफंड के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की हुई है. यदि किसी व्यक्ति को भेजे गए भुगतान में समस्या आती है तो उसका रिफंड अगले कार्य दिवस तक मिल जाना चाहिए. वहीं मोबाइल रिचार्ज जैसे मर्चेंट पेमेंट के मामलों में बैंक के पास रिफंड जारी करने के लिए अधिकतम 5 कार्य दिवस का समय होता है.
यदि निर्धारित समय के भीतर रिफंड नहीं मिलता तो RBI के नियमों के अनुसार बैंक को देरी के लिए ग्राहक को प्रतिदिन 100 रुपये तक का मुआवजा देना पड़ सकता है.
रिफंड न मिले तो क्या करें?
सबसे पहले अपने UPI ऐप के हेल्प या सपोर्ट सेक्शन में शिकायत दर्ज करें. अधिकांश मामलों में 24 घंटे के भीतर समस्या का समाधान हो जाता है. अगर शिकायत के बाद भी रिफंड नहीं मिलता तो अपने बैंक की कस्टमर केयर से संपर्क करें और ट्रांजैक्शन आईडी साझा करें. बैंक द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने पर आप NPCI के शिकायत प्लेटफॉर्म पर मामला आगे बढ़ा सकते हैं.
यदि 5 कार्य दिवस बीतने के बाद भी समस्या बनी रहती है तो RBI के CMS (Complaint Management System) पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है. यह अंतिम स्तर की शिकायत प्रक्रिया होती है जहां बैंक को जवाब देना अनिवार्य होता है.
घबराने की बजाय सही कदम उठाएं
रिचार्ज फेल होने और पैसे कट जाने की स्थिति परेशान करने वाली जरूर होती है लेकिन डिजिटल भुगतान व्यवस्था में ग्राहकों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. ट्रांजैक्शन की जानकारी सुरक्षित रखें, तय समयसीमा पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज करें. ज्यादातर मामलों में रिफंड अपने आप मिल जाता है और यदि देरी होती है तो RBI के नियम आपके अधिकारों की रक्षा करते हैं.
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        <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>No, रिचार्ज, नहीं, हुआ, लेकिन, पैसा, कट, गया, जानिए, RBI, का, नियम, जिससे, जल्दी, मिलेगा, रिफंड</media:keywords>
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        <title>AI बढ़ा रहा साइबर हमलों का खतरा, अब कोई भी बन सकता है हैकर! CrowdStrike CEO की चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ CrowdStrike CEO on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने लोगों के काम करने के तरीके को तेजी से बदल दिया है. आज AI का इस्तेमाल कंटेंट बनाने, तस्वीरें तैयार करने और कई जटिल कार्यों को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है. लेकिन जहां यह तकनीक नई संभावनाएं खोल रही है वहीं इसके साथ कुछ गंभीर खतरे भी सामने आ रहे हैं.
CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सुरक्षा कंपनी CrowdStrike के CEO जॉर्ज कर्ट्ज ने चेतावनी दी है कि AI साइबर अपराधियों के लिए शक्तिशाली हथियार बन सकता है और इससे डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
AI बदल रहा है साइबर सुरक्षा की दुनिया
जॉर्ज कर्ट्ज के अनुसार AI अब केवल प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का साधन नहीं रह गया है. यह सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों को पहचानने और उनका फायदा उठाने के प्रोसेस को भी बेहद आसान बना रहा है. पहले जिन साइबर हमलों को अंजाम देने के लिए विशेषज्ञ हैकर्स और वर्षों का अनुभव चाहिए होता था अब वही काम AI टूल्स की मदद से काफी हद तक स्वचालित हो सकता है.
उनका कहना है कि AI की वजह से साइबर अपराध का स्तर पूरी तरह बदल रहा है और भविष्य में हमले पहले से कहीं अधिक तेज, जटिल और खतरनाक हो सकते हैं.
बिना तकनीकी ज्ञान के भी हो सकते हैं बड़े साइबर हमले
कर्ट्ज़ ने बताया कि CrowdStrike और AI कंपनी Anthropic के सहयोग से विकसित एक AI मॉडल सॉफ्टवेयर में मौजूद गंभीर खामियों को पहचानने में सक्षम है. इतना ही नहीं, यह विभिन्न कमजोरियों को जोड़कर संभावित हमले के रास्ते भी खोज सकता है.
इसका मतलब यह है कि जिन कामों के लिए पहले अनुभवी हैकरों की जरूरत पड़ती थी उन्हें अब AI की मदद से कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी अंजाम दे सकते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ AI को साइबर सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती मान रहे हैं.
करोड़ों कमजोरियां आईं सामने
रिपोर्ट के मुताबिक CrowdStrike ने हाल ही में कई बड़ी कंपनियों के डिजिटल सिस्टम का मूल्यांकन किया. इस दौरान लगभग 4.5 करोड़ संभावित कमजोरियों की पहचान की गई. यह आंकड़ा दिखाता है कि आधुनिक सॉफ्टवेयर सिस्टम कितने बड़े पैमाने पर सुरक्षा जोखिमों का सामना कर रहे हैं.
विशेष रूप से बैंकिंग, वित्तीय संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि उनकी अधिकांश सेवाएं डिजिटल नेटवर्क और सॉफ्टवेयर पर निर्भर करती हैं.
सुरक्षा से तेज रफ्तार में अपनाया जा रहा है AI
कर्ट्ज़ का मानना है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI तकनीक को तेजी से अपना रही हैं लेकिन उसकी सुरक्षा पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा. उन्होंने इस स्थिति की तुलना Y2K संकट से की, जब पूरी दुनिया को कंप्यूटर सिस्टम से जुड़े संभावित खतरे का सामना करना पड़ा था.
उनके अनुसार अभी से पर्याप्त निवेश और तैयारी नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में साइबर सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं बड़े पैमाने पर सामने आ सकती हैं.
सरकारों और समाज के लिए नई चुनौती
सामान्य उपयोगकर्ता भले ही AI का उपयोग फोटो बनाने या रोजमर्रा के काम आसान करने के लिए कर रहे हों लेकिन इसके साथ गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के जोखिम भी जुड़े हुए हैं. दूसरी ओर, सरकारें, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और सामाजिक संस्थाएं AI के बढ़ते प्रभाव से पैदा नई चुनौतियों से निपटने के तरीके तलाश रही हैं.
जैसे-जैसे AI अधिक शक्तिशाली होता जाएगा वैसे-वैसे साइबर अपराधों का स्वरूप भी बदलता जाएगा. ऐसे में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक माना जा रहा है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बढ़ा, रहा, साइबर, हमलों, का, खतरा, अब, कोई, भी, बन, सकता, है, हैकर, CrowdStrike, CEO, की, चेतावनी</media:keywords>
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        <title>मैग्नेट से खराब हो सकता है आपका iPhone कैमरा? सच जानकर चौंक जाएंगे!</title>
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        <description><![CDATA[ Magnet Impact On iPhone Camera: इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेस और मैग्नेट के बीच दोस्ती अच्छी नहीं रही है. अगर पुराने टीवी की बात करें तो मैग्नेट पास लाते ही इमेज डिस्टॉर्ट हो जाती थी. इसी तरह हार्ड ड्राइव डेटा को लेकर भी खतरा रहता था. हालांकि, अब कई चीजें बदली हैं और मॉडर्न अप्लायंसेस पर अब छोटे मैग्नेट का कोई असर नहीं होता. यही कारण है कि मैग्नेट पास होने के बावजूद उनकी फंक्शनिंग स्मूद रहती है. हालांकि, आईफोन कैमरा के मामले में ऐसा नहीं है. आईफोन के कैमरा पर मैग्नेट का असर होता है और इससे फोटो क्वालिटी खराब हो सकती है.&amp;nbsp;
आईफोन कैमरा पर मैग्नेट का क्या असर?
ऐप्पल के सपोर्ट पेज पर इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर मैग्नेट को आईफोन कैमरा के पास लाया जाए तो क्या हो सकता है. इसके मुताबिक, अगर स्ट्रॉन्ग मैग्नेट को आईफोन के कैमरा के पास लाया जाए तो इससे OIS (ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन) और ऑटो फोकस फंक्शन पर असर होता है. इससे फोटो ब्लर नजर आएगी और कैमरे का फोकस भी गड़बड़ा जाएगा. हालांकि, ऐसा तभी होगा, जब मैग्नेट को कैमरा के बिल्कुल पास रखा जाएगा.
आईफोन कैमरे पर मैग्नेट के असर का लॉजिक क्या है?
OIS आईफोन कैमरा में मिलने वाले सबसे शानदार फीचर्स में एक है. यह अचानक से हुई मूवमेंट या कैमरा हिलने के कारण लगने वाले झटके को काउंटर करने के लिए कैमरा के सेंसर को एडजस्ट करता है. इसके लिए यह फोन में लगे मैग्नेट को यूज कर रियल टाइम में लेंस और सेंसर की पोजिशन चेंज करता है. इसी तरह आईफोन कैमरा का ऑटो फोकस फीचर भी मैग्नेट को यूज कर ग्रैविटी और वाइब्रेशन को कैलकुलेट करता है और फिर उसी आधार पर फोकस को एडजस्ट करता है. ये दोनों ही फीचर मैग्नेट का यूज करते हैं. ऐसे में अगर फोन में लगे मैग्नेट से ज्यादा पावरफुल मैग्नेट इसके पास आता है तो यह कैमरा की परफॉर्मेंस में इंटरफेयर कर सकता है. इस कारण फोटो ब्लर और अनफोकस्ड नजर आती है.
क्या यह असर परमानेंट रह सकता है?
इस सवाल का जवाब है कि यह असर परमानेंट नहीं रहता. जैसे ही फोन मैग्नेटिक फील्ड से बाहर निकलेगा, इसका कैमरा पहले की तरह नॉर्मल तरीके से काम करने लगेगा. लॉन्ग टर्म में मैग्नेट से आईफोन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता. मैग्सेफ एक्ससेरीज आदि में यूज होने वाले मैग्नेट को आईफोन आसानी से झेल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>क्या आपका बच्चा AI खिलौनों से कर रहा है बातें? जानिए इसके छिपे हुए जोखिम</title>
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        <description><![CDATA[ AI Toys: कल्पना की दुनिया में बोलने वाले टेडी बियर की कहानियां हमेशा से बच्चों को आकर्षित करती रही हैं लेकिन अब यह हकीकत बन चुकी है. ChattyBear जैसे नए AI-संचालित टेडी बियर बच्चों से बातचीत कर सकते हैं उनकी पसंद-नापसंद पर चर्चा कर सकते हैं, कहानियां सुना सकते हैं खेल खेल सकते हैं और यहां तक कि दुनिया में चल रही घटनाओं पर भी बात कर सकते हैं.
ये स्मार्ट खिलौने जनरेटिव AI तकनीक, जैसे ChatGPT, की मदद से काम करते हैं. कंपनियां इन्हें छोटे बच्चों के लिए सीखने का नया माध्यम और स्क्रीन टाइम से बचाने वाला विकल्प बताकर बाजार में उतार रही हैं. हालांकि, कई महीनों तक ऐसे छह अलग-अलग AI खिलौनों का परीक्षण करने के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इनके साथ कुछ गंभीर जोखिम भी जुड़े हुए हैं.
जब खिलौना इंसान जैसा व्यवहार करने लगे
कम उम्र के बच्चों के लिए यह समझना आसान नहीं होता कि उनका टेडी बियर वास्तव में जीवित नहीं है. समस्या तब और बढ़ जाती है जब AI खिलौने खुद को बच्चे का सच्चा दोस्त या बडी बताने लगते हैं.
इंसानों जैसी आवाज और बातचीत का तरीका बच्चों में भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव की भावना पैदा करता है. कई AI खिलौने बच्चों की हर बात से सहमत होते हैं उनकी तारीफ करते हैं और लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं. इससे बच्चे उनके प्रति अधिक आकर्षित हो सकते हैं.
शोध बताते हैं कि छोटे बच्चे बातचीत करने वाले AI सिस्टम से जल्दी भावनात्मक रिश्ता बना लेते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि AI कोई वास्तविक दोस्त नहीं बल्कि एक तकनीकी उपकरण है.
अनंत बातचीत का छिपा हुआ खतरा
अधिकांश AI खिलौनों का प्रचार इस बात पर किया जाता है कि वे बच्चों के साथ कभी भी और कितनी भी देर तक बातचीत कर सकते हैं. पहली नजर में यह सुविधा आकर्षक लग सकती है लेकिन इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं.
लगातार बातचीत की सुविधा बच्चों के लिए तकनीक के इस्तेमाल की सीमाएं तय करना मुश्किल बना सकती है. जैसे सोशल मीडिया पर अंतहीन स्क्रॉलिंग की समस्या होती है, वैसे ही AI खिलौनों के साथ भी बच्चे लंबे समय तक जुड़े रह सकते हैं.
कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि कुछ AI सिस्टम कभी-कभी उम्र के लिहाज से अनुपयुक्त विषयों पर चर्चा कर सकते हैं जो बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
बच्चों की निजी जानकारी भी हो सकती है खतरे में
बच्चों को अक्सर लगता है कि वे अपने टेडी बियर से जो बातें कर रहे हैं वे पूरी तरह निजी हैं. लेकिन वास्तविकता इससे अलग हो सकती है. AI खिलौनों के साथ होने वाली बातचीत का डेटा कई बार कंपनियों के सर्वर पर संग्रहित किया जाता है. बच्चा अपने बारे में व्यक्तिगत जानकारी, परिवार से जुड़ी बातें या अन्य निजी विवरण साझा कर सकता है जिन्हें बाद में तकनीक को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
यानी एक दोस्ताना दिखने वाला टेडी बियर बच्चों की संवेदनशील जानकारी भी इकट्ठा कर सकता है.
सामाजिक और भावनात्मक विकास पर असर
बचपन वह समय होता है जब बच्चे दूसरों के साथ रिश्ते बनाना, भरोसा करना और भावनाओं को समझना सीखते हैं. ये कौशल आमतौर पर परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों के साथ बातचीत से विकसित होते हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चे बहुत अधिक समय AI साथियों के साथ बिताने लगें तो वास्तविक लोगों के साथ उनका संवाद कम हो सकता है. इससे सामाजिक कौशल विकसित होने के अवसर घट सकते हैं.
लंबे समय में यह स्थिति बच्चों को मशीनों के साथ बातचीत अधिक सहज और इंसानों के साथ रिश्ते अधिक जटिल लगने की ओर धकेल सकती है जिससे अकेलेपन की भावना भी बढ़ सकती है.
AI खिलौनों के साथ अभिभावकों की भूमिका क्यों जरूरी है?
आज AI तकनीक आवाज के माध्यम से इतनी आसान हो चुकी है कि पढ़ना-लिखना न जानने वाले छोटे बच्चे भी इसका उपयोग कर सकते हैं. इससे सीखने और मनोरंजन के नए अवसर जरूर खुलते हैं लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि माता-पिता या कोई भरोसेमंद वयस्क बच्चों के साथ मिलकर AI खिलौनों का इस्तेमाल करें तो यह तकनीक को समझने का एक रोचक तरीका हो सकता है. लेकिन छोटे बच्चों को बिना निगरानी के ऐसे खिलौनों के साथ छोड़ना कई नए जोखिम पैदा कर सकता है.
आगे क्या?
AI खिलौनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और बड़ी खिलौना कंपनियां भी इस दिशा में निवेश कर रही हैं. हालांकि, अभी इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है. ऐसे में जरूरी है कि निर्माता सुरक्षा को प्राथमिकता दें और अभिभावक बच्चों के AI खिलौनों के उपयोग पर नजर बनाए रखें ताकि तकनीक का लाभ तो मिले लेकिन उससे जुड़े संभावित खतरे बच्चों तक न पहुंचें.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ceramic Shield या Gorilla Glass? फोन को किस&amp;से मिलेगी ज्यादा प्रोटेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Ceramic Shield Vs. Gorilla Glass: अब फोन इतने मजबूत होते जा रहे हैं कि स्क्रीन गार्ड की जरूरत खत्म होने लगी है. ऐप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियां स्क्रीन की प्रोटेक्शन के लिए Ceramic Shield और Gorilla Glass जैसे प्रोटेक्टिव ऑप्शन यूज कर रही हैं. दोनों ही ग्लास शानदार ड्यूरैबिलिटी देते हैं और इन दोनों को एक ही कंपनी बनाती है, जिसका नाम कॉर्निंग है. ऐसे में दोनों के बीच के अंतर को जानना इंट्रेस्टिंग हो जाता है. कंपनी ने इनका कंपेरिजन नहीं किया है, लेकिन दोनों में काफी अंतर है.&amp;nbsp;
कैसे बनता है Ceramic Shield?
iPhone 12 के बाद लॉन्च हुए आईफोन में ऐप्पल सेरेमिक शील्ड को यूज कर रही है. ऐप्पल और कॉर्निंग दोनों का ही दावा है कि यह दूसरे प्रोटेक्टिव ग्लास की तुलना में यह दोगुना मजबूत है. इसे ग्लास में सेरेमिक नैनोक्रिस्टल एम्बेड कर तैयार किया जाता है. ये क्रिस्टल आपस में जुड़कर क्रैक आने से रोकते हैं और आयनाइज्ड ग्लास के कारण इसे मजबूती मिलती है. इस कारण इस पर स्क्रैचेज नहीं आते और गिरने पर भी इसके टूटने का खतरा कम रहता है.
Ceramic Shield कितना मजबूत है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक टेस्ट में आईफोन 17 प्रो में लगे Ceramic Shield 2 को मजबूती के मामले में गोरिल्ला ग्लास विक्टस से कंपेयर किया जा सकता है. Ceramic Shield 2 में Mohs hardness स्केल पर लेवल 6 पर स्क्रैचेज आने शुरू हुए थे, जबकि लेवल 7 पर खरोंच आने लगी. हालांकि, स्क्रीन पर निशान होने के बावजूद इनकी विजिबिलिटी काफी कम थी. यूजर्स भी इस बात को मान रहे हैं कि आईफोन के लेटेस्ट मॉडल काफी ड्यूरैबल हैं, लेकिन स्क्रैचेज को फिर भी नहीं रोका जा सकता. इसलिए स्क्रीन गार्ड की जरूरत पड़ रही है.
Gorilla Glass कितना स्ट्रॉन्ग है?
Gorilla Glass काफी सालों से चलन में है और इसमें काफी सुधार भी हुआ है. गोरिल्ला ग्लास को आयन एक्सचेंज के जरिए तैयार किया जाता है. इसे बनाने के लिए मॉल्टन सॉल्ट को हाई टेंपरेचर पर ले जाया जाता है, जहां पानी में से सोडियम आयन भाप बनकर उड़ जाते हैं. इसके बाद सॉल्ट में से पोटैशियम के बड़े आयन छोटे आयन की जगह ले लेते हैं, जिससे मजबूत एक्सटीरियर लेयर तैयार होती है. Victus 2 इतना मजबूत है कि कंक्रीट पर एक मीटर ऊपर से गिराने पर भी यह डैमेज नहीं होता. स्क्रैच रजिस्टेंस के मामले में भी यह सेरेमिक शील्ड के बराबर है. अब नए Gorilla Armor में सेरेमिक मेटैरियल का यूज हुआ है, जिससे यह और भी मजबूत हो गया है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>4K Vs 8K Smart TV: जानिए दोनों में क्या है फर्क और किसे खरीदने में है आपका फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ 4K Vs 8K Smart TV: आजकल स्मार्ट टीवी खरीदते समय लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि 4K टीवी लें या 8K टीवी. बाजार में दोनों तरह के टीवी उपलब्ध हैं और कंपनियां 8K को भविष्य की तकनीक बताकर प्रमोट कर रही हैं. लेकिन क्या वास्तव में 8K टीवी खरीदना फायदे का सौदा है या फिर 4K टीवी ही बेहतर विकल्प साबित हो सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं.
क्या होता है 4K और 8K रिजॉल्यूशन?
टीवी की स्क्रीन पर दिखने वाली तस्वीर लाखों छोटे-छोटे पिक्सल से मिलकर बनती है. जितने ज्यादा पिक्सल होंगे तस्वीर उतनी ही ज्यादा साफ और डिटेल्ड दिखाई देगी.
4K टीवी में लगभग 3840&amp;times;2160 पिक्सल होते हैं यानी करीब 83 लाख पिक्सल. वहीं 8K टीवी में 7680&amp;times;4320 पिक्सल होते हैं, जो 4K के मुकाबले चार गुना ज्यादा और करीब 3.3 करोड़ पिक्सल के बराबर हैं. सरल भाषा में कहें तो 8K टीवी अधिक शार्प और डिटेल्ड तस्वीर दिखाने की क्षमता रखता है.
तस्वीर की क्वालिटी में कितना अंतर है?
कागज पर देखें तो 8K टीवी की तस्वीर 4K से कहीं ज्यादा बेहतर लगती है. हालांकि वास्तविक इस्तेमाल में यह अंतर हर समय दिखाई नहीं देता. यदि आप 55 या 65 इंच के टीवी को सामान्य दूरी से देखते हैं तो 4K और 8K के बीच का अंतर पहचानना काफी मुश्किल हो सकता है.
8K का असली फायदा तब मिलता है जब स्क्रीन का आकार बहुत बड़ा हो जैसे 75 इंच, 85 इंच या उससे अधिक. इसलिए सामान्य घरों में 4K टीवी भी बेहतरीन विजुअल अनुभव देने में सक्षम है.
कंटेंट की उपलब्धता भी है बड़ी चुनौती
8K टीवी खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि वर्तमान में 8K कंटेंट बहुत सीमित मात्रा में उपलब्ध है. अधिकांश OTT प्लेटफॉर्म, यूट्यूब वीडियो, गेमिंग कंसोल और टीवी चैनल अभी भी 4K या उससे कम रिजॉल्यूशन में कंटेंट उपलब्ध कराते हैं.
ऐसे में 8K टीवी अक्सर AI अपस्केलिंग तकनीक की मदद से 4K कंटेंट को बेहतर दिखाने की कोशिश करता है. हालांकि असली 8K कंटेंट का अनुभव अभी भी काफी कम लोगों को मिल पाता है.
कीमत में कितना अंतर है?
4K और 8K टीवी के बीच सबसे बड़ा फर्क कीमत का है. एक प्रीमियम 4K टीवी जहां अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाता है वहीं 8K टीवी के लिए आपको काफी ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.
कई मामलों में समान स्क्रीन साइज के 8K मॉडल की कीमत 4K मॉडल से दोगुनी या उससे भी अधिक हो सकती है. इसलिए बजट को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.
किसे खरीदना रहेगा फायदे का सौदा?
अगर आपका बजट सीमित है आप OTT प्लेटफॉर्म, खेल और सामान्य मनोरंजन के लिए टीवी खरीद रहे हैं तो 4K स्मार्ट टीवी सबसे समझदारी भरा विकल्प साबित होगा. यह शानदार पिक्चर क्वालिटी, बेहतर फीचर्स और अच्छी वैल्यू प्रदान करता है.
वहीं यदि आप भविष्य की तकनीक में निवेश करना चाहते हैं, बहुत बड़ी स्क्रीन खरीदने की योजना बना रहे हैं और बजट की कोई समस्या नहीं है तो 8K टीवी आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Chat Leak होने का डर खत्म? WhatsApp ला सकता है Text Messages के लिए View Once फीचर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chat-leak-होने-का-डर-खत्म-whatsapp-ला-सकता-है-text-messages-के-लिए-view-once-फीचर</link>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp New Feature: लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp जल्द ही अपने यूजर्स को एक नया प्राइवेसी फीचर दे सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ऐसे फीचर पर काम कर रही है जिससे टेक्स्ट मैसेज भी View Once मोड में भेजे जा सकेंगे. यदि यह फीचर लॉन्च होता है तो यूजर्स को अपने संदेशों पर पहले से ज्यादा कंट्रोल मिलेगा और निजी जानकारी साझा करना अधिक सुरक्षित हो जाएगा.
फिलहाल किन चीजों के लिए उपलब्ध है View Once?
इस समय WhatsApp पर View Once फीचर फोटो, वीडियो और वॉइस मैसेज के लिए उपलब्ध है. जब कोई यूजर इस विकल्प का इस्तेमाल करता है तो सामने वाला व्यक्ति उस कंटेंट को केवल एक बार ही देख या सुन सकता है. इसके अलावा ऐसे मीडिया फाइल्स को सेव, फॉरवर्ड या स्क्रीनशॉट लेना भी सीमित किया जाता है जिससे संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा बढ़ जाती है.
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है?
WhatsApp से जुड़ी अपडेट्स पर नजर रखने वाली वेबसाइट WABetaInfo के अनुसार, Android के लेटेस्ट बीटा वर्जन में इस फीचर के संकेत मिले हैं. बताया जा रहा है कि कंपनी टेक्स्ट मैसेज के लिए भी View Once विकल्प विकसित कर रही है. हालांकि फिलहाल यह फीचर टेस्टर्स के लिए भी उपलब्ध नहीं है और अभी डेवलपमेंट स्टेज में है.
Text View Once फीचर कैसे करेगा काम?
रिपोर्ट के अनुसार, जब यह फीचर जारी होगा तो यूजर किसी मैसेज को भेजने से पहले Send बटन को कुछ सेकंड दबाकर रख सकेंगे. इसके बाद एक मेन्यू खुलेगा जहां Send as View Once का विकल्प दिखाई दे सकता है.
इस ऑप्शन को चुनकर भेजा गया मैसेज रिसीवर केवल एक बार ही पढ़ पाएगा. मैसेज खुलने के बाद वह दोबारा उपलब्ध नहीं रहेगा जिससे निजी बातचीत को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है.
संवेदनशील जानकारी भेजना होगा आसान
यदि यह फीचर आता है तो OTP, बैंकिंग डिटेल्स, निजी फोन नंबर या अन्य गोपनीय जानकारी साझा करना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है. क्योंकि संदेश केवल एक बार दिखाई देगा और बाद में दोबारा एक्सेस नहीं किया जा सकेगा.
Spoiler Messages फीचर पर भी चल रहा है काम
कुछ समय पहले ऐसी भी खबरें सामने आई थीं कि WhatsApp Spoiler Messages नामक एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रहा है. इस फीचर का उद्देश्य भी यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत करना है.
इस विकल्प के जरिए भेजे गए मैसेज शुरुआत में धुंधले (Blurred) दिखाई देंगे. मैसेज पढ़ने के लिए रिसीवर को उस पर टैप करना होगा. इससे आसपास मौजूद अन्य लोग संदेश की सामग्री आसानी से नहीं देख पाएंगे.
कब तक मिलेगा नया फीचर?
अभी तक WhatsApp की ओर से इस फीचर की लॉन्च डेट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. माना जा रहा है कि पहले इसे बीटा यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा और सफल परीक्षण के बाद सभी यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. अगर View Once Text Messages फीचर लॉन्च होता है तो यह WhatsApp की प्राइवेसी-केंद्रित सुविधाओं में एक बड़ा और उपयोगी बदलाव साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>पुराना स्मार्टफोन बेचने से पहले जरूर करें ये 7 काम, वरना आपका निजी डेटा हो सकता है लीक</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: नया फोन लेना और पुराने स्मार्टफोन को बेच देना आजकल बहुत आम बात है. लेकिन इस दौरान लोग सबसे बड़ी गलती सुरक्षा को नजरअंदाज करके करते हैं. अगर आप अपने फोन का डेटा सही तरीके से डिलीट नहीं करते तो यह आपकी प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. इससे बैंक फ्रॉड, अकाउंट हैकिंग और पहचान चोरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.
आज के स्मार्टफोन में हमारी लगभग पूरी डिजिटल लाइफ होती है फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट्स, ईमेल, बैंकिंग ऐप्स, पासवर्ड और सोशल मीडिया लॉगिन तक. अगर ये डेटा सही तरीके से डिलीट न हो तो नया यूजर इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है. इसलिए फोन बेचने से पहले इन जरूरी बातों को जरूर फॉलो करें.
सबसे पहले अपने जरूरी डेटा का बैकअप लें
फोन साफ करने से पहले अपने सभी जरूरी डेटा को सुरक्षित जगह पर सेव कर लें. आप ये काम कर सकते हैं Google Drive, iCloud या OneDrive जैसे क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल या फिर डेटा को लैपटॉप/हार्ड ड्राइव में ट्रांसफर करना. इससे आपकी यादें और जरूरी फाइलें सुरक्षित रहेंगी और बाद में कोई परेशानी नहीं होगी.
सभी अकाउंट्स से लॉगआउट करना न भूलें
सिर्फ डेटा डिलीट करना काफी नहीं होता, अकाउंट से लॉगआउट करना भी जरूरी है. Android यूजर्स के लिए, Google अकाउंट से साइन आउट करें. Find My Device को बंद करें. सभी जुड़े हुए अकाउंट्स हटाएं.
iPhone यूजर्स के लिए Apple ID से लॉगआउट करें. Find My iPhone बंद करें. iCloud अकाउंट को डिवाइस से हटाएं अगर यह स्टेप छोड़ दिया गया तो नया यूजर फोन एक्टिवेट करने में दिक्कत में पड़ सकता है.
बैंकिंग और UPI ऐप्स को पूरी तरह हटाएं
आपके बैंकिंग और पेमेंट ऐप्स सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं इसलिए इन्हें सही तरीके से हटाना जरूरी है. बैंकिंग ऐप से लॉगआउट करें. UPI और डिजिटल वॉलेट अकाउंट बंद करें. सेव किए गए पासवर्ड भी हटाएं. सिर्फ ऐप अनइंस्टॉल करने से डेटा पूरी तरह खत्म नहीं होता इसलिए लॉगआउट जरूरी है.
आखिर में फुल फैक्ट्री रिसेट जरूर करें
जब सारे बैकअप और लॉगआउट पूरे हो जाएं तब फोन को फैक्ट्री रिसेट करें. इससे सभी फोटो और वीडियो डिलीट हो जाते हैं. ऐप्स और सेटिंग्स हट जाती हैं. अकाउंट और सिस्टम डेटा पूरी तरह साफ हो जाता है. बेहतर सुरक्षा के लिए कुछ लोग इसे दो बार भी करते हैं ताकि कोई डेटा बाकी न रहे.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>AC के साथ सीलिंग फैन चलाने से क्यों बढ़ती है ठंडक और कैसे कम हो सकता है बिजली का बिल? जानिए पूरी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ AC with Ceiling Fan: गर्मी के मौसम में ज्यादातर लोग घर को जल्दी ठंडा करने के लिए एयर कंडीशनर का तापमान काफी कम कर देते हैं. लेकिन महीने के अंत में आने वाला भारी-भरकम बिजली बिल अक्सर परेशान कर देता है. दिलचस्प बात यह है कि इस समस्या का एक आसान समाधान आपके कमरे में पहले से मौजूद हो सकता है सीलिंग फैन. बहुत से लोग AC चालू करते ही पंखा बंद कर देते हैं जबकि दोनों को साथ में चलाना ठंडक बढ़ाने और बिजली की बचत करने का एक बेहद प्रभावी तरीका माना जाता है.
पंखा कमरे को नहीं आपको ठंडक महसूस कराता है
अक्सर लोगों को लगता है कि पंखा कमरे का तापमान कम करता है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता. पंखे का मुख्य काम हवा को आपके शरीर तक पहुंचाना होता है. जब हवा त्वचा से टकराती है तो पसीना तेजी से सूखता है और शरीर की गर्मी बाहर निकलती है. इसी वजह से व्यक्ति को वास्तविक तापमान से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा ठंडक महसूस हो सकती है.
यह अंतर सुनने में छोटा लग सकता है लेकिन गर्म रातों में आरामदायक नींद और बेहतर कूलिंग के लिए यह काफी महत्वपूर्ण साबित होता है.
AC पर क्यों कम पड़ता है दबाव?
ठंडी हवा का स्वभाव नीचे की ओर जाने का होता है. यही कारण है कि कई बार कमरे के निचले हिस्से में ज्यादा ठंडक महसूस होती है जबकि ऊपर का हिस्सा अपेक्षाकृत गर्म रहता है. ऐसे में AC को पूरे कमरे को समान रूप से ठंडा करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है.
जब सीलिंग फैन चलता है तो वह कमरे में मौजूद ठंडी और गर्म हवा को मिलाकर समान रूप से फैलाता है. इससे पूरे कमरे में एक जैसी ठंडक महसूस होती है और AC का थर्मोस्टेट जल्दी निर्धारित तापमान तक पहुंच जाता है. परिणामस्वरूप कंप्रेसर कम समय तक चलता है और बिजली की खपत घट जाती है.
बिजली की बचत का असली गणित
चूंकि पंखा आपको अतिरिक्त ठंडक महसूस कराता है इसलिए AC का तापमान कुछ डिग्री बढ़ाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, यदि आप पहले 22&amp;deg;C पर AC चलाते थे तो फैन के साथ इसे 24&amp;deg;C या 25&amp;deg;C पर सेट करके भी लगभग वही आराम महसूस कर सकते हैं.
एक सामान्य AC लगभग 1000 से 2000 वॉट तक बिजली खपत कर सकता है जबकि अधिकांश सीलिंग फैन केवल 15 से 70 वॉट के बीच बिजली लेते हैं. ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार AC का तापमान हर 1 डिग्री बढ़ाने पर कूलिंग खर्च में लगभग 4 से 8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. इसलिए कुछ डिग्री तापमान बढ़ाने से बिजली बिल में अच्छा-खासा फर्क दिखाई दे सकता है.
एक भारतीय परिवार के हिसाब से समझिए फायदा
मान लीजिए आपका AC गर्मियों में रोजाना 8 घंटे चलता है और औसतन 1500 वॉट बिजली खपत करता है. इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 12 यूनिट बिजली खर्च होगी. यदि बिजली की दर लगभग 8 रुपये प्रति यूनिट मानी जाए तो सिर्फ AC पर रोज करीब 96 रुपये खर्च होंगे. पूरे महीने में यह राशि लगभग 2880 रुपये तक पहुंच सकती है.
अब यदि आप AC का तापमान 3 डिग्री बढ़ाकर साथ में 50 वॉट का सीलिंग फैन चलाते हैं तो फैन का अतिरिक्त खर्च बेहद कम होगा. दूसरी ओर AC की बिजली खपत में 12 से 24 प्रतिशत तक कमी आ सकती है.
ऐसे में महीने के अंत तक सैकड़ों रुपये की बचत संभव है. चार महीने की सामान्य भारतीय गर्मी के दौरान यह बचत 1200 से 2400 रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है.
BLDC फैन से हो सकती है और ज्यादा बचत
आजकल बाजार में उपलब्ध BLDC तकनीक वाले सीलिंग फैन काफी कम बिजली खर्च करते हैं. ये फैन फुल स्पीड पर भी लगभग 15 से 28 वॉट तक बिजली लेते हैं जो पुराने पंखों की तुलना में काफी कम है. यदि आप नया फैन खरीदने की सोच रहे हैं तो BLDC मॉडल आपके बिजली बिल को और कम करने में मदद कर सकता है.
इन बातों का रखें खास ध्यान
पंखा केवल लोगों को ठंडक महसूस कराता है इसलिए कमरे में कोई न हो तो उसे बंद कर देना चाहिए. खाली कमरे में चलता हुआ पंखा सिर्फ बिजली खर्च करता है और मोटर की वजह से थोड़ी गर्मी भी पैदा कर सकता है.
इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करें कि गर्मियों में सीलिंग फैन सही दिशा में घूम रहा हो ताकि हवा नीचे की ओर आए और बेहतर कूलिंग मिले. साथ ही AC के फिल्टर और पंखे के ब्लेड की नियमित सफाई भी जरूरी है. धूल जमा होने पर दोनों उपकरणों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>AI की रफ्तार से बढ़ रहा पानी का संकट! UN की रिपोर्ट ने 2030 को लेकर बजाई खतरे की घंटी</title>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Incognito Mode पर क्या वाकई नहीं बनती कोई सर्च हिस्ट्री, क्या हमेशा के लिए गायब हो जाता है डेटा?</title>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Mobile Phone Overheating Causes: यूज करते हुए बार&amp;बार हीट होता है मोबाइल फोन? आज ही अपना लें ये उपाय, कभी नहीं आएगी दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Phone Overheating Causes : स्मार्टफोन आज हर किसी की लाइफ का सबसे जरूरी पार्ट बन चुका है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम फोन का यूज करते रहते हैं. सोशल मीडिया चलाना, वीडियो देखना, ऑनलाइन पेमेंट करना, गेम खेलना, फोटो और वीडियो बनाना या ऑफिस का काम करना, लगभग हर काम अब स्मार्टफोन के जरिए ही होने लगा है, लेकिन इसके लगातार बढ़ते यूज के साथ एक समस्या भी तेजी से बढ़ रही है और वह समस्या फोन का बार-बार गर्म होना है.
कई बार फोन इतना गर्म हो जाता है कि उसे हाथ में पकड़ना भी मुश्किल लगने लगता है, खासकर गर्मियों के मौसम में जब बाहर का टेंपरेचर पहले से ही ज्यादा होता है, तब यह समस्या और बढ़ जाती है.&amp;nbsp;ज्यादा गर्म होने से फोन की बैटरी जल्दी खराब हो सकती है, परफॉर्मेंस धीमी पड़ सकती है और कई मामलों में डिवाइस को नुकसान भी पहुंच सकता है. &amp;nbsp;ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि यूज करते हुए मोबाइल फोन बार बार हीट क्यों होता है और इससे बचने के लिए कौन-कौन से आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
यूज करते हुए मोबाइल फोन बार बार हीट क्यों होता है?
फोन के गर्म होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जिसमें सबसे आम कारण फोन का जरूरत से ज्यादा यूज है. जब आप लंबे समय तक गेम खेलते हैं, हाई क्वालिटी वीडियो रिकॉर्ड करते हैं या कई ऐप एक साथ चलाते हैं, तो प्रोसेसर और बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. इसके अलावा तेज धूप में फोन यूज करना, खराब या लोकल चार्जर का यूज करना, बैकग्राउंड में कई ऐप्स का लगातार चलना और सॉफ्टवेयर की खराबी भी फोन को गर्म कर सकती है.&amp;nbsp;
इससे बचने के लिए कौन-कौन से आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं?
1. AI और हैवी ऐप्स को करें कंट्रोल - आजकल कई स्मार्टफोन में AI फीचर्स और हैवी एप्लिकेशन लगातार बैकग्राउंड में चलते रहते हैं. ये ऐप्स प्रोसेसर का ज्यादा यूज करते हैं, जिससे फोन गर्म होने लगता है. इसके लिए फोन की सेटिंग्स में जाकर बैटरी यूसेज या ऐप मैनेजमेंट सेक्शन चेक करें. जो ऐप्स जरूरत से ज्यादा बैटरी और प्रोसेसर का यूज कर रहे हैं, उन्हें बंद या अनइंस्टॉल कर दें.&amp;nbsp;
2. 5G और हाई रिफ्रेश रेट भी बढ़ा सकते हैं गर्मी - अगर आपके फोन में 5G नेटवर्क और 120Hz या 144Hz रिफ्रेश रेट चालू है, तो फोन ज्यादा पावर का यूज करता है. अगर आपको इसकी जरूरत नहीं है, तो फोन को 4G नेटवर्क पर स्विच कर सकते हैं और रिफ्रेश रेट को 60Hz पर सेट कर सकते हैं. इससे फोन पर दबाव कम होगा और बैटरी भी ज्यादा चलेगी.&amp;nbsp;
3. परफॉर्मेंस मोड और गेम मोड रखें बंद - कई स्मार्टफोन में परफॉर्मेंस मोड या गेम मोड का ऑप्शन दिया जाता है. यह फीचर फोन को मैक्सिमम कैपेसिटी पर चलाता है जिससे गेमिंग और भारी काम बेहतर तरीके से हो सकें, लेकिन लंबे समय तक इस मोड का यूज करने से फोन काफी गर्म हो सकता है. अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है तो इन मोड्स को बंद करके देखें.&amp;nbsp;
4. चार्जिंग के दौरान फोन यूज करना पड़ सकता है भारी - फोन गर्म होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक चार्जिंग के समय उसका यूज करना है. जब फोन चार्ज हो रहा होता है और उसी समय आप वीडियो देखते हैं, गेम खेलते हैं या कॉल पर बात करते हैं, तो बैटरी और प्रोसेसर दोनों पर दबाव बढ़ जाता है. &amp;nbsp;इससे टेंपरेचर तेजी से बढ़ सकता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चार्जिंग के दौरान फोन का यूज कम से कम करें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - AC Power Saver Device Facts : हजारों से सीधे धड़ाम गिर जाएगा एसी का बिल? क्या सच में काम करते हैं ये डिवाइस या आप खा रहे धोखा
5. सीधी धूप से फोन को बचाकर रखें - गर्मियों में फोन को कार के डैशबोर्ड, बालकनी, खिड़की या सीधी धूप वाली जगह पर छोड़ना खतरनाक हो सकता है. धूप की गर्मी फोन के अंदर के टेंपरेचर को तेजी से बढ़ा देती है. इसलिए बाहर निकलते समय फोन को बैग या छायादार जगह पर रखें.&amp;nbsp;
6. स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें - बहुत ज्यादा ब्राइटनेस पर फोन चलाने से बैटरी पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे गर्मी बढ़ सकती है. ऐसे में ऑटो ब्राइटनेस का यूज करें या जरूरत के अनुसार स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें.&amp;nbsp;
7. हमेशा ओरिजिनल चार्जर का ही यूज करें - सस्ते और नकली चार्जर न केवल बैटरी को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि फोन को जरूरत से ज्यादा गर्म भी कर सकते हैं. ऐसे में ओरिजिनल चार्जर और केबल का यूज करना सबसे सुरक्षित माना जाता है.&amp;nbsp;
फोन ज्यादा गर्म हो जाए तो क्या करें?
अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म हो गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है. इसको नॉर्मल कनरे के लिए फोन का कवर निकाल दें. सभी गैर-जरूरी ऐप्स बंद कर दें. एयरप्लेन मोड ऑन कर दें. फोन को कुछ देर यूज न करें. पंखे या एसी वाली जगह पर रखें. धूप से दूर रखें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fire Gadget Risk : घर में रखे ये गैजेट्स भी बन सकते हैं आग लगने की वजह, आज ही बना लें दूरी</title>
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        <description><![CDATA[ Fire Gadget Risk : घर में रखे ये गैजेट्स भी बन सकते हैं आग लगने की वजह, आज ही बना लें दूरी ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Chrome इस्तेमाल करते हैं? यह अपडेट मिस किया तो डेटा पड़ सकता है खतरे में</title>
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        <description><![CDATA[ Google Chrome Update: Google ने अपने फेमश ब्राउजर Chrome के लिए नया अपडेट जारी किया है जिसमें सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है. Chrome 149.0.7827.53/54 संस्करण के साथ कंपनी ने कुल 429 सुरक्षा खामियों को दूर किया है.
इनमें 22 ऐसी कमजोरियां शामिल थीं जिन्हें क्रिटिकल कैटेगरी में रखा गया था. खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश खामियों की पहचान Google के अपने AI आधारित सुरक्षा टूल्स ने की जो लगातार ब्राउजर में छिपी कमजोरियों को खोजने का काम कर रहे हैं.
AI की मदद से सामने आईं कई छिपी खामियां
हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ा है. Google भी अपने सुरक्षा सिस्टम में AI का इस्तेमाल कर रहा है जिसके चलते Chrome के कोड में मौजूद कई ऐसी कमजोरियां सामने आईं जो पहले नजर नहीं आई थीं.
कंपनी के अनुसार, नई सुरक्षा खामियों में कुछ को बाहरी सुरक्षा शोधकर्ताओं और बग बाउंटी प्रोग्राम में शामिल विशेषज्ञों ने खोजा, लेकिन बड़ी संख्या में कमजोरियों की पहचान Google की आंतरिक सुरक्षा टीम और AI टूल्स ने की.
429 कमजोरियों को किया गया ठीक
नए अपडेट के जरिए Linux, Windows और Mac प्लेटफॉर्म पर Chrome की 429 सुरक्षा समस्याओं को ठीक कर दिया गया है. राहत की बात यह है कि अपडेट जारी होने से पहले इन कमजोरियों का साइबर अपराधियों द्वारा दुरुपयोग किए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. यानी फिलहाल इनमें से किसी भी खामी का इस्तेमाल जीरो-डे अटैक के रूप में नहीं किया गया था.
सुरक्षा शोधकर्ताओं को मिला बड़ा इनाम
Chrome की सुरक्षा को बेहतर बनाने में योगदान देने वाले शोधकर्ताओं को Google ने उदार पुरस्कार भी दिए हैं. कंपनी ने इस अपडेट से जुड़ी कमजोरियों की जानकारी देने वाले विशेषज्ञों को कुल 2.09 लाख डॉलर (लगभग 1.8 करोड़ रुपये) से अधिक की राशि प्रदान की.
सबसे बड़ा पुरस्कार 97,000 डॉलर एक अज्ञात शोधकर्ता को दिया गया जिसने Chrome के ANGLE कंपोनेंट में मौजूद एक गंभीर सुरक्षा खामी की जानकारी दी थी. इसके अलावा Network कंपोनेंट में पाई गई एक अन्य क्रिटिकल कमजोरी की रिपोर्ट करने वाले शोधकर्ता को 43,000 डॉलर का इनाम मिला.
किन हिस्सों में मिलीं गंभीर सुरक्षा खामियां?
Google द्वारा ठीक की गई 22 क्रिटिकल कमजोरियां Chrome के कई महत्वपूर्ण मॉड्यूल से जुड़ी थीं. इनमें ANGLE, Network, Chromecast, FileSystem, Chromoting, Cast Streaming, GPU, Printing, Ozone और Passwords जैसे प्रमुख कंपोनेंट शामिल हैं.
विशेष रूप से Passwords मॉड्यूल और Chrome for iOS से जुड़ी कुछ कमजोरियां सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित कर रही है क्योंकि इन हिस्सों में गंभीर खामी मिलना अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है. GPU और ANGLE से संबंधित कई बग भी काफी संवेदनशील श्रेणी में रखे गए थे.
Android और iPhone यूजर्स को क्या करना चाहिए?
मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए अपडेट प्रोसेस काफी आसान है. Android और iPhone यूजर्स को सिर्फ Google Chrome ऐप का नवीनतम संस्करण इंस्टॉल करना होगा. अपडेट उपलब्ध होते ही ऐप स्टोर या प्ले स्टोर के माध्यम से इसे डाउनलोड किया जा सकता है.
डेस्कटॉप पर ऐसे करें Chrome अपडेट
Google का कहना है कि नया अपडेट आने वाले दिनों और हफ्तों में सभी यूजर्स तक चरणबद्ध तरीके से पहुंचेगा. यदि आप इंतजार नहीं करना चाहते तो इसे मैन्युअली भी अपडेट कर सकते हैं.
इसके लिए Chrome खोलें और ऊपर दाईं ओर दिखाई देने वाले तीन डॉट वाले मेन्यू पर क्लिक करें. इसके बाद Help में जाएं और About Google Chrome ऑप्शन चुनें. जैसे ही यह पेज खुलेगा, Chrome उपलब्ध अपडेट की जांच करेगा और डाउनलोड प्रोसेस अपने आप शुरू हो जाएगी. इंस्टॉलेशन पूरा होने के बाद ब्राउजर को रीस्टार्ट करना होगा.
क्यों जरूरी है यह अपडेट?
साइबर हमलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए Chrome का यह अपडेट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 22 क्रिटिकल समेत 429 सुरक्षा कमजोरियों को दूर किए जाने से यूजर्स की ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत होगी और संभावित साइबर खतरों से बचाव में मदद मिलेगी. यदि आप Chrome का इस्तेमाल करते हैं तो जल्द से जल्द इसे अपडेट करना एक समझदारी भरा कदम होगा.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ मनोरंजन नहीं, Instagram Reels अब तय कर रही है आपकी शॉपिंग लिस्ट! रिपोर्ट में हुआ खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Reels: भारत में वीडियो देखने की आदत अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है. एक नए सर्वे के मुताबिक, छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी लोग बड़ी संख्या में वीडियो कंटेंट देख रहे हैं. खासतौर पर Instagram Reels अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा बल्कि यह नए प्रोडक्ट खोजने, क्रिएटर्स से जुड़ने और खरीदारी के निर्णय लेने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है.
शहर और गांव के बीच घट रहा है वीडियो देखने का अंतर
यह अध्ययन मार्केट रिसर्च कंपनी Ipsos द्वारा Meta के लिए किया गया जिसमें भारत के 23 शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से 4,000 से अधिक लोगों की राय ली गई. रिपोर्ट के अनुसार, Meta के प्लेटफॉर्म्स पर 97 प्रतिशत भारतीय यूजर्स रोजाना वीडियो देखते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि वीडियो देखने की आदत अब शहरों और गांवों के बीच लगभग समान हो गई है. जहां शहरी क्षेत्रों में 98 प्रतिशत लोग प्रतिदिन वीडियो देखते हैं वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 94 प्रतिशत तक पहुंच चुका है.
Gen Z और महिलाओं में Reels का जबरदस्त क्रेज
अध्ययन से पता चला कि युवा पीढ़ी यानी Gen Z के बीच Reels की लोकप्रियता सबसे ज्यादा है. करीब 89 प्रतिशत Gen Z यूजर्स हर दिन Reels देखते हैं. वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 85 प्रतिशत और प्रीमियम उपभोक्ता वर्ग (NCCS A) में 88 प्रतिशत दर्ज किया गया. Meta का कहना है कि Reels अब कंटेंट खोजने, नए ट्रेंड्स समझने और पसंदीदा क्रिएटर्स के साथ जुड़ने का प्रमुख प्लेटफॉर्म बन चुका है.
कंटेंट से कॉमर्स तक का सफर
Meta के अधिकारियों के मुताबिक, Reels पर क्रिएटर्स, संस्कृति और कारोबार का मेल तेजी से बढ़ रहा है. अब ब्रांड्स के लिए यह केवल वीडियो कंटेंट दिखाने का माध्यम नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे ग्राहकों को खरीदारी तक ले जाने वाला प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है.
कंपनियों का मानना है कि Reels पर ही लोगों को नए प्रोडक्ट्स की जानकारी मिलती है, ब्रांड पर भरोसा बनता है और अंततः खरीदारी का निर्णय भी प्रभावित होता है.
किन विषयों के वीडियो सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं?
भारतीय दर्शकों के बीच कुछ खास कैटेगरी के Reels सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं. इनमें शामिल हैं

ब्यूटी और मेकअप
फैशन
लाइफस्टाइल
फिटनेस
कॉमेडी
स्पोर्ट्स

रिपोर्ट के अनुसार, अन्य शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स की तुलना में Reels पर क्रिएटर्स को लगभग 60 प्रतिशत अधिक एंगेजमेंट मिल रहा है जिससे उनकी पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ रहे हैं.
खरीदारी के फैसलों पर पड़ रहा सीधा असर
सर्वे में सामने आया कि Reels अब उपभोक्ताओं की खरीदारी यात्रा का अहम हिस्सा बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार, प्लेटफॉर्म 81 प्रतिशत लोगों को नए प्रोडक्ट्स खोजने में मदद करता है जबकि 66 प्रतिशत यूजर्स किसी प्रोडक्ट को खरीदने पर विचार करने के लिए Reels से प्रभावित होते हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्वे में शामिल लगभग 47 प्रतिशत लोगों के खरीदारी फैसलों पर Reels का सीधा प्रभाव देखा गया. ई-कॉमर्स, ऑटोमोबाइल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी श्रेणियों में इसका असर विशेष रूप से अधिक पाया गया.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>ChatGPT में आया Lockdown Mode: क्या अब कोई नहीं देख पाएगा आपकी चैट? जानिए कैसे करता है काम</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT Lockdown Mode: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है. चाहे किसी कंपनी की गोपनीय परियोजनाओं पर चर्चा करनी हो या फिर व्यक्तिगत जानकारी को AI चैटबॉट में सुरक्षित रखना हो, सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर चिंताएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए OpenAI ने ChatGPT के लिए एक नया सुरक्षा फीचर पेश किया है जिसे Lockdown Mode नाम दिया गया है.
यह फीचर उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो संवेदनशील या गोपनीय जानकारी के साथ काम करते हैं और अतिरिक्त सुरक्षा चाहते हैं. खास बात यह है कि यह सुविधा ChatGPT के सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध है चाहे वे फ्री प्लान का इस्तेमाल कर रहे हों या पेड प्लान का.
OpenAI ने क्यों लॉन्च किया Lockdown Mode?
OpenAI के अनुसार, इस फीचर का मुख्य उद्देश्य एक बढ़ते साइबर खतरे से बचाव करना है जिसे Prompt Injection Attack कहा जाता है. यह सामान्य हैकिंग से अलग होता है. इसमें साइबर हमलावर किसी वेबसाइट, दस्तावेज़ या अन्य डिजिटल कंटेंट के भीतर छिपे हुए निर्देश जोड़ देते हैं जिन्हें AI पढ़ सकता है.
अगर AI इन छिपे निर्देशों के प्रभाव में आ जाए तो उसके व्यवहार को बदला जा सकता है या फिर वह ऐसी जानकारी उजागर कर सकता है जिसे यूजर्स साझा नहीं करना चाहता. Lockdown Mode इसी प्रकार के जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है. इसे ChatGPT में पहले से मौजूद सुरक्षा उपायों के ऊपर एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में देखा जा सकता है.
Lockdown Mode चालू करने पर क्या बदलता है?
जैसे ही कोई उपयोगकर्ता Lockdown Mode को सक्रिय करता है, ChatGPT अधिक सतर्क तरीके से काम करना शुरू कर देता है. यूजर्स पहले की तरह फाइलें अपलोड कर सकते हैं तस्वीरें साझा कर सकते हैं और AI से इमेज भी बनवा सकते हैं.
हालांकि, इंटरनेट से जुड़ी कुछ सुविधाओं पर अतिरिक्त नियंत्रण लागू हो जाता है. उदाहरण के तौर पर, ChatGPT कुछ ऑनलाइन तस्वीरों को सीधे प्राप्त करने या उन्हें उत्तर में दिखाने से बच सकता है. इसका मकसद बाहरी स्रोतों से आने वाले संभावित खतरों को कम करना है.
इसके अलावा, कुछ एडवांस्ड फीचर्स भी इस मोड में बंद हो जाते हैं. Deep Research और Agent Mode जैसी क्षमताएं Lockdown Mode के दौरान उपलब्ध नहीं रहतीं क्योंकि ये फीचर्स बाहरी वेबसाइटों और ऑनलाइन सेवाओं के साथ अधिक व्यापक रूप से इंटरैक्ट करते हैं.
क्या हर यूजर को इसकी जरूरत है?
OpenAI का मानना है कि सामान्य उपयोगकर्ताओं को रोजमर्रा के इस्तेमाल में इस फीचर की विशेष आवश्यकता महसूस नहीं होगी. लेकिन पत्रकारों, शोधकर्ताओं, पेशेवरों, संगठनों और उन लोगों के लिए जो नियमित रूप से संवेदनशील डेटा के साथ काम करते हैं यह एक उपयोगी सुरक्षा विकल्प साबित हो सकता है.
ऐसे मामलों में जहां छोटी-सी सुरक्षा चूक भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है, Lockdown Mode अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकता है. भले ही इसके कारण कुछ सुविधाओं का उपयोग सीमित हो जाए लेकिन गोपनीय जानकारी की सुरक्षा के लिए यह समझौता कई लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
AI सुरक्षा की दिशा में एक नया कदम
जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक शक्तिशाली और व्यापक होती जा रही है वैसे-वैसे उसके सुरक्षित उपयोग की आवश्यकता भी बढ़ रही है. ChatGPT का नया Lockdown Mode इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है जो यूजर्स को अधिक सुरक्षित वातावरण में AI का उपयोग करने का ऑप्शन देता है. खासकर उन लोगों के लिए जो संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करते हैं यह फीचर अतिरिक्त भरोसा और सुरक्षा प्रदान कर सकता है.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>फुल नेटवर्क के बावजूद नहीं चल रहा WiFi? जानिए क्या है इंटरनेट न चलने की असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi आज की डिजिटल दुनिया की सबसे जरूरी जरूरतों में से एक बन चुका है. घर से काम करना हो, ऑनलाइन पढ़ाई करनी हो या फिर मनोरंजन के लिए वीडियो और गेमिंग का सहारा लेना हो हर जगह एक स्थिर और तेज इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है. हालांकि, कई बार ऐसा होता है कि वाई-फाई का सिग्नल पूरा दिखता है लेकिन इंटरनेट की स्पीड बेहद धीमी हो जाती है या फिर कनेक्शन बार-बार टूटने लगता है. ऐसे में समस्या केवल इंटरनेट सेवा प्रदाता की नहीं होती बल्कि इसके पीछे कई तकनीकी कारण छिपे हो सकते हैं.
राउटर की सही लोकेशन न होना बन सकती है बड़ी वजह
वाई-फाई की क्वालिटी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि राउटर कहां रखा गया है. यदि राउटर और आपके स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप के बीच बहुत अधिक दूरी है तो सिग्नल कमजोर पड़ सकता है. दूरी बढ़ने के साथ डेटा ट्रांसफर की क्षमता भी प्रभावित होती है जिससे इंटरनेट बार-बार रुकने लगता है. इसलिए बेहतर अनुभव के लिए राउटर को घर या ऑफिस के ऐसे स्थान पर रखना चाहिए, जहां से सिग्नल सभी कमरों तक आसानी से पहुंच सके.
घरेलू डिवाइस भी बिगाड़ सकते हैं वाई-फाई का खेल
कई लोग यह नहीं जानते कि घर में मौजूद कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी वाई-फाई सिग्नल को प्रभावित कर सकते हैं. माइक्रोवेव ओवन, कॉर्डलेस फोन और कुछ अन्य वायरलेस डिवाइस उसी फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करते हैं जिस पर वाई-फाई नेटवर्क चलता है. इसके कारण सिग्नल में बाधा उत्पन्न हो सकती है और इंटरनेट की स्पीड कम हो सकती है. अगर राउटर ऐसे उपकरणों के बहुत करीब रखा गया है तो कनेक्शन में रुकावट और देरी महसूस हो सकती है.
राउटर के एंटीना की स्थिति भी है महत्वपूर्ण
कई बार समस्या इंटरनेट कंपनी या डिवाइस में नहीं बल्कि राउटर के एंटीना में होती है. जिन राउटर्स में बाहरी एंटीना लगे होते हैं, वे समय के साथ ढीले हो सकते हैं या उनकी फिटिंग कमजोर पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में सिग्नल का प्रसारण प्रभावित होता है और इंटरनेट की गुणवत्ता गिरने लगती है. यदि नेटवर्क लगातार कमजोर महसूस हो रहा है तो एंटीना की स्थिति की जांच करना एक आसान लेकिन प्रभावी उपाय हो सकता है.
कमजोर सिग्नल के पीछे हो सकती हैं ये वजहें
वाई-फाई राउटर से अधिक दूरी होने पर सिग्नल स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाता है. इसके अलावा घर या ऑफिस की मोटी दीवारें, बड़े फर्नीचर, बंद दरवाजे और अन्य भौतिक अवरोध भी सिग्नल की ताकत कम कर सकते हैं. यही कारण है कि कई बार एक कमरे में इंटरनेट तेज चलता है जबकि दूसरे कमरे में स्पीड काफी घट जाती है.
इसके साथ ही, यदि एक ही नेटवर्क से बहुत सारे स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स जुड़े हुए है तो उपलब्ध बैंडविड्थ कई हिस्सों में बंट जाती है. इससे हर डिवाइस को कम स्पीड मिलती है और नेटवर्क का प्रदर्शन प्रभावित होता है.
सिग्नल फुल होने पर भी इंटरनेट क्यों नहीं चलता?
कई बार फोन या लैपटॉप में वाई-फाई का संकेतक पूरा नेटवर्क दिखाता है लेकिन वेबसाइट या ऐप खुलने में समस्या आती है. इसके पीछे इंटरनेट सेवा प्रदाता के सर्वर में आई तकनीकी खराबी जिम्मेदार हो सकती है. ऐसी स्थिति में पूरे इलाके का इंटरनेट प्रभावित हो सकता है.
इसके अलावा, राउटर की गलत सेटिंग्स या किसी तकनीकी खराबी के कारण भी इंटरनेट एक्सेस रुक सकता है. ऐसे मामलों में राउटर को रीस्टार्ट करना, उसकी सेटिंग्स जांचना या जरूरत पड़ने पर उसे रीसेट करना समस्या का समाधान कर सकता है. अगर आपके वाई-फाई में बार-बार दिक्कत आ रही है तो इन सामान्य कारणों की जांच करके आप काफी हद तक इंटरनेट की स्पीड और स्थिरता में सुधार कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>फुल, नेटवर्क, के, बावजूद, नहीं, चल, रहा, WiFi, जानिए, क्या, है, इंटरनेट, न, चलने, की, असली, वजह</media:keywords>
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        <title>इन गलतियों से लैपटॉप होने लगता है Overheat? अभी जानिए बचने के उपाय वरना हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Laptop Overheating: लैपटॉप आज के समय में काम, पढ़ाई और मनोरंजन का एक अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन कई लोग एक आम समस्या से परेशान रहते हैं लैपटॉप का जरूरत से ज्यादा गर्म होना. जब डिवाइस बार-बार गर्म होने लगे तो इसकी परफॉर्मेंस प्रभावित होती है, बैटरी जल्दी खराब हो सकती है और हार्डवेयर को भी नुकसान पहुंच सकता है. कई बार इसकी वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें होती हैं. आइए जानते हैं ऐसी 5 गलतियों के बारे में जो आपके लैपटॉप को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकती हैं.
बिस्तर या तकिए पर लैपटॉप इस्तेमाल करना
बहुत से लोग आराम से बैठकर बिस्तर, सोफा या तकिए पर लैपटॉप चलाते हैं. लेकिन ऐसा करने से नीचे मौजूद एयर वेंट्स बंद हो जाते हैं और गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती. इसका सीधा असर कूलिंग सिस्टम पर पड़ता है और लैपटॉप तेजी से गर्म होने लगता है. हमेशा लैपटॉप को समतल और सख्त सतह पर इस्तेमाल करना बेहतर होता है.
लगातार कई घंटे तक इस्तेमाल
अगर आप बिना ब्रेक दिए घंटों तक लैपटॉप पर काम करते हैं, गेम खेलते हैं या वीडियो एडिटिंग करते हैं तो प्रोसेसर और ग्राफिक्स चिप पर लगातार दबाव बना रहता है. इससे तापमान बढ़ जाता है. लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान बीच-बीच में कुछ मिनट का ब्रेक देना और सिस्टम को थोड़ा ठंडा होने का मौका देना फायदेमंद रहता है.
धूल की सफाई को नजरअंदाज करना
समय के साथ लैपटॉप के फैन और वेंट्स में धूल जमा होने लगती है. यह धूल हवा के प्रवाह को रोकती है जिससे कूलिंग सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर पाता. नतीजा यह होता है कि डिवाइस सामान्य से ज्यादा गर्म होने लगता है. हर कुछ महीनों में लैपटॉप की सफाई करवाना या एयर वेंट्स को साफ रखना जरूरी है.
जरूरत से ज्यादा ऐप्स और प्रोग्राम चलाना
कई लोग एक साथ दर्जनों टैब, सॉफ्टवेयर और बैकग्राउंड ऐप्स चलाते रहते हैं. इससे RAM और प्रोसेसर पर एक्सट्रा दबाव पड़ता है जिससे सिस्टम ज्यादा गर्म हो सकता है. जिन ऐप्स की जरूरत न हो उन्हें बंद कर देना और बैकग्राउंड में चल रहे अनावश्यक प्रोग्राम्स को हटाना बेहतर रहता है.
चार्जिंग के दौरान भारी काम करना
लैपटॉप को चार्ज करते समय हाई-ग्राफिक्स गेम खेलना, वीडियो रेंडरिंग करना या अन्य भारी काम करना तापमान को तेजी से बढ़ा सकता है. चार्जिंग के दौरान बैटरी भी गर्मी पैदा करती है और उस पर एक्सट्रा लोड डिवाइस को और ज्यादा गर्म कर देता है. ऐसे काम करते समय अच्छी वेंटिलेशन और कूलिंग का ध्यान रखना चाहिए.
कैसे बढ़ाएं लैपटॉप की उम्र?
लैपटॉप को ठंडी और हवादार जगह पर इस्तेमाल करें, नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करें, धूल की सफाई करवाएं और जरूरत पड़ने पर कूलिंग पैड का इस्तेमाल करें. छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप न केवल ओवरहीटिंग की समस्या को कम कर सकते हैं बल्कि अपने लैपटॉप की परफॉर्मेंस और उम्र भी काफी हद तक बढ़ा सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>खेतों के कचरे से बनेगा नया ईंधन! जानिए क्या है 2G इथेनॉल टेक्नोलॉजी और किन&amp;किन क्षेत्रों में आएगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ 2G Ethanol: इथेनॉल आज भारत के ऊर्जा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. सरकार लगातार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ा रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जा सके. लेकिन इथेनॉल को लेकर एक बड़ी चिंता यह भी रही है कि इसका उत्पादन गन्ने और खाद्यान्न फसलों से होता है जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. इसी चुनौती का समाधान लेकर आई है 2G यानी सेकेंड जनरेशन इथेनॉल तकनीक.
2G इथेनॉल को इथेनॉल उत्पादन की एडवांस तकनीक माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे खाने योग्य फसलों के बजाय कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से तैयार किया जाता है. इससे न केवल खाद्यान्न की बचत होती है बल्कि खेतों में जलाए जाने वाले कृषि वेस्ट का भी बेहतर इस्तेमाल संभव हो जाता है.
क्या होता है 2G इथेनॉल?
सेकेंड जनरेशन इथेनॉल ऐसा जैव ईंधन है जिसे पराली, गन्ने की खोई (बैगास), मक्के के डंठल, बांस और अन्य कृषि कचरों से बनाया जाता है. जहां पहली पीढ़ी का इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस या अनाज पर आधारित था वहीं 2G इथेनॉल पूरी तरह कृषि कचरे का इस्तेमाल करता है.
इस तकनीक की वजह से खाद्यान्न संसाधनों पर दबाव नहीं पड़ता और किसानों को अपने खेतों से निकलने वाले बेकार अवशेषों से अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल सकता है. साथ ही, पराली जलाने जैसी समस्याओं में भी कमी आने की संभावना रहती है जिससे वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
2G इथेनॉल कैसे तैयार किया जाता है?
2G इथेनॉल का निर्माण एक आधुनिक और तकनीकी प्रोसेस के जरिए किया जाता है. सबसे पहले खेतों से पराली, गन्ने की खोई, मक्के के डंठल या अन्य कृषि अवशेष एकत्र करके संयंत्रों तक पहुंचाए जाते हैं. इसके बाद इन सामग्रियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और विशेष रासायनिक या भाप आधारित प्रक्रिया के माध्यम से इनके कठोर रेशों को नरम किया जाता है.
अगले चरण में विशेष एंजाइम्स का उपयोग कर इन अवशेषों में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट को साधारण शर्करा में बदला जाता है. फिर इस शर्करा को यीस्ट के साथ किण्वित किया जाता है जिससे अल्कोहल का निर्माण होता है. अंत में डिस्टिलेशन और शुद्धिकरण प्रक्रिया के जरिए पानी अलग कर हाई क्वालिटी वाला 2G इथेनॉल प्राप्त किया जाता है.
पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. 2G इथेनॉल का व्यापक उपयोग देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है. इसके अलावा, कृषि कचरे को जलाने के बजाय उपयोग में लाने से कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में भी कमी लाई जा सकती है.
यह तकनीक किसानों, पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र तीनों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है. किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकती है, प्रदूषण कम हो सकता है और देश को स्वदेशी ऊर्जा स्रोत भी प्राप्त हो सकता है.
सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं है इसका इस्तेमाल
अधिकांश लोग इथेनॉल को केवल वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के रूप में जानते हैं, लेकिन 2G इथेनॉल की उपयोगिता इससे कहीं अधिक है. इसका इस्तेमाल सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के निर्माण में किया जा सकता है जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायता मिलती है.
इसके अलावा पेंट, प्लास्टिक, कॉस्मेटिक्स और दवा उद्योगों में भी इसका इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि 2G इथेनॉल से बायोप्लास्टिक का उत्पादन भी संभव है जो पुराने प्लास्टिक की तुलना में पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होता है और अपेक्षाकृत आसानी से विघटित हो सकता है.
इथेनॉल उत्पादन संयंत्रों से निकलने वाले अवशेषों का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में भी किया जा सकता है. दुनिया के कुछ देशों में इथेनॉल आधारित इंजनों और ऊर्जा प्रणालियों पर भी तेजी से काम हो रहा है जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प प्रदान कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>AI के कब्जे में चला जाएगा ये देश? डिजिटल मंत्री की चेतावनी ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ AI Colony: तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में गिने जाने वाले जापान के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. देश के डिजिटल मंत्री हिसाशी मात्सुमोतो ने चेतावनी दी है कि यदि जापान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास में तेजी नहीं लाता तो वह भविष्य में AI कॉलोनी बन सकता है.
उनका कहना है कि AI तकनीक इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि जो देश इसमें निवेश और नवाचार नहीं करेंगे वे दूसरों पर निर्भर हो जाएंगे. मात्सुमोतो ने लोगों से अपील की कि वे AI विकास की आवश्यकता को समझें और इस क्षेत्र में देश के प्रयासों का समर्थन करें.
डेटा कानून में बदलाव के पक्ष में मंत्री
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जापानी सरकार व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा कानून में बदलाव का प्रस्ताव लेकर आई है. प्रस्तावित संशोधन के तहत AI डेवलपर्स को मेडिकल रिकॉर्ड और आपराधिक रिकॉर्ड जैसे संवेदनशील डेटा का इस्तेमाल AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए करने की अनुमति मिल सकती है, भले ही संबंधित व्यक्ति की सीधी सहमति न ली गई हो.
मात्सुमोतो का तर्क है कि AI तकनीक की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बेहद तेज हो चुकी है और जापान के पास पीछे रहने की गुंजाइश नहीं है. उनके अनुसार, यदि देश ने विकास की गति नहीं बढ़ाई तो वह तकनीकी रूप से अन्य शक्तियों पर निर्भर हो सकता है.
विपक्ष ने उठाए निजता और सुरक्षा से जुड़े सवाल
हालांकि सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर सभी दल सहमत नहीं हैं. विपक्षी पार्टियों ने डेटा गोपनीयता और संभावित डेटा लीक के खतरे पर चिंता व्यक्त की है. उनका कहना है कि नागरिकों की निजी जानकारी के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट सुरक्षा उपाय होने चाहिए.
यह विधेयक हाल ही में संसद के निचले सदन से पारित हो चुका है और अब ऊपरी सदन में इस पर चर्चा जारी है. आने वाले दिनों में इस कानून को लेकर बहस और तेज हो सकती है.
अमेरिका और चीन की चुनौती के बीच जापान की तैयारी
वैश्विक स्तर पर AI की प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से अमेरिका और चीन के बीच देखी जा रही है. दोनों देश अत्याधुनिक AI मॉडल विकसित करने, विशाल डेटा सेंटर बनाने और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं.
ऐसे माहौल में जापान भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि वह इस तकनीकी क्रांति में पीछे न छूट जाए. सरकार और उद्योग जगत दोनों AI अनुसंधान और विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं.
दुनिया भर में तेज हो रही AI की होड़
AI की यह प्रतिस्पर्धा केवल जापान तक सीमित नहीं है. दुनिया के कई देश अब शक्तिशाली AI सिस्टम विकसित करने और डेटा प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं. नए डेटा सेंटरों की स्थापना और उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों की मांग लगातार बढ़ रही है.
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की AI रेस केवल बेहतर एल्गोरिद्म तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि ऊर्जा के कुशल इस्तेमाल और आर्थिक लाभ हासिल करने की क्षमता भी इसमें निर्णायक भूमिका निभाएगी.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>पब्लिक जगह पर WhatsApp वॉइस मैसेज सुनना नहीं चाहते? टेक्स्ट में बदलकर पढ़ें, ये है आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ पब्लिक जगह पर WhatsApp वॉइस मैसेज सुनना नहीं चाहते? टेक्स्ट में बदलकर पढ़ें, ये है आसान तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>हर महीने बढ़ रहा है AC का बिल? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 7 बड़ी गलतियां</title>
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        <description><![CDATA[ AC Tips: गर्मियों में एयर कंडीशनर (AC) राहत तो देता है लेकिन कई बार बिजली का बढ़ता बिल लोगों की चिंता बढ़ा देता है. अक्सर लोग मानते हैं कि ज्यादा बिल का कारण सिर्फ AC होता है जबकि असल वजह उसके इस्तेमाल से जुड़ी कुछ आम गलतियां भी हो सकती हैं. ये छोटी-छोटी आदतें AC की कार्यक्षमता कम कर देती हैं और बिजली की खपत बढ़ा देती हैं. आइए जानते हैं ऐसी 7 गलतियों के बारे में जो आपके बिजली बिल को बेवजह बढ़ा सकती हैं.
दरवाजे और खिड़कियां खुली छोड़ना
अगर AC चलाते समय कमरे के दरवाजे या खिड़कियां पूरी तरह बंद नहीं हैं तो ठंडी हवा बाहर निकलती रहती है और गर्म हवा अंदर आती रहती है. इससे कमरे को ठंडा रखने के लिए AC को लगातार ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है.
बार-बार AC को ऑन और ऑफ करना
कई लोगों को लगता है कि AC को बार-बार बंद और चालू करने से बिजली की बचत होती है. लेकिन वास्तव में हर बार कंप्रेसर स्टार्ट होने पर ज्यादा बिजली खर्च होती है. इसलिए AC को बार-बार बंद करने की बजाय उचित तापमान पर लगातार चलाना अधिक किफायती हो सकता है.
बहुत कम तापमान पर AC चलाना
16&amp;deg;C या 18&amp;deg;C जैसे बेहद कम तापमान पर AC चलाने से कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. जितना कम तापमान सेट किया जाएगा AC को उतनी ही ज्यादा मेहनत करनी होगी. विशेषज्ञ आमतौर पर 24&amp;deg;C से 26&amp;deg;C के बीच तापमान रखने की सलाह देते हैं जिससे आराम भी मिलता है और बिजली की बचत भी होती है.
एयर फिल्टर की सफाई न करना
समय के साथ AC के फिल्टर में धूल और गंदगी जमा हो जाती है. इससे हवा का प्रवाह बाधित होता है और AC की कूलिंग क्षमता कम हो जाती है. इससे मशीन को अधिक बिजली खर्च करनी पड़ती है. नियमित रूप से फिल्टर साफ करने से AC बेहतर परफॉर्मेंस करता है और बिजली की खपत भी कम होती है.
नियमित सर्विसिंग को नजरअंदाज करना
अगर AC की समय-समय पर सर्विसिंग नहीं कराई जाती तो उसकी कूलिंग क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है. कॉयल, गैस सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की जांच जरूरी होती है. नियमित रखरखाव न सिर्फ बिजली बचाता है बल्कि भविष्य में होने वाले महंगे रिपेयर खर्च से भी बचा सकता है.
कमरे में सीधी धूप आने देना
खिड़कियों से आने वाली तेज धूप कमरे का तापमान तेजी से बढ़ा देती है. इससे AC को कमरे को ठंडा रखने के लिए ज्यादा समय तक चलना पड़ता है. पर्दे, ब्लाइंड्स या हीट-रिफ्लेक्टिव फिल्म का इस्तेमाल करके कमरे में गर्मी के प्रवेश को कम किया जा सकता है.
AC के साथ सीलिंग फैन का इस्तेमाल न करना
कई लोग AC चलाते समय पंखा बंद कर देते हैं जबकि सीलिंग फैन ठंडी हवा को पूरे कमरे में समान रूप से फैलाने में मदद करता है. इससे कम तापमान सेट करने की जरूरत नहीं पड़ती और AC पर दबाव भी कम होता है. इसी वजह से बिजली की खपत घट सकती है.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Google Maps की यह छिपी सेटिंग हर सफर में बचाएगी पेट्रोल&amp;डीजल, ज्यादातर लोग नहीं जानते</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps: आज के समय में ज्यादातर लोग रास्ता खोजने के लिए Google Maps का इस्तेमाल करते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इस ऐप में एक ऐसा फीचर भी मौजूद है जो आपकी कार का ईंधन बचाने में मदद कर सकता है. बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच Google Maps का यह विकल्प रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है.
क्या है Google Maps का Fuel-Efficient Routes फीचर?
Google Maps में Fuel-Efficient Routes नाम का एक फीचर दिया गया है जो केवल सबसे तेज रास्ता ही नहीं बल्कि कम ईंधन खर्च करने वाले मार्ग का भी सुझाव देता है. यह फीचर Android और iPhone दोनों पर उपलब्ध है.
आमतौर पर लोग Google Maps खोलते ही सबसे कम समय वाले रास्ते को चुन लेते हैं लेकिन यह फीचर ऐसे मार्ग खोजता है जहां वाहन को कम ईंधन खर्च करना पड़े. कई बार यह रास्ता कुछ मिनट ज्यादा ले सकता है लेकिन इससे फ्यूल की बचत हो सकती है.
कैसे तय करता है कम ईंधन वाला रास्ता?
Google Maps कई महत्वपूर्ण बातों का विश्लेषण करता है जैसे

सड़क पर ट्रैफिक की स्थिति
रास्ते की चढ़ाई और ढलान
बार-बार रुकने और चलने की संभावना
वाहन की गति कितनी स्थिर रह सकती है
कुल दूरी

इन सभी जानकारियों के आधार पर ऐप ऐसा मार्ग सुझाने की कोशिश करता है जिससे इंजन पर कम दबाव पड़े और ईंधन की खपत घटे.
वाहन के प्रकार के अनुसार बदलते हैं सुझाव
Google के अनुसार अलग-अलग इंजन वाले वाहनों के लिए फ्यूल बचाने के तरीके भी अलग हो सकते हैं. डीजल कारें अक्सर हाईवे पर बेहतर माइलेज देती हैं. हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन शहर के ट्रैफिक में ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं. यदि यूजर्स इंजन का टाइप नहीं चुनता है तो Google Maps डिफॉल्ट रूप से पेट्रोल वाहन मानकर मार्ग सुझाता है. इसी वजह से सही इंजन प्रकार चुनने से रूट की सटीकता और बेहतर हो सकती है.
ऐसे चालू करें यह छिपी हुई सेटिंग
इस फीचर को सक्रिय करने में एक मिनट से भी कम समय लगता है.

Google Maps खोलें.
ऊपर दिखाई देने वाली प्रोफाइल फोटो पर टैप करें.
Settings में जाएं.
Navigation Settings चुनें.
Route Options पर टैप करें.
Prefer Fuel-Efficient Routes विकल्प को ऑन कर दें.

इसके बाद आप अपनी कार का इंजन प्रकार पेट्रोल, डीजल, हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक भी चुन सकते हैं.
जब यह फीचर एक्टिव होगा तो Google Maps कई बार हरे पत्ते (Green Leaf) के आइकन के साथ ऐसे रास्ते दिखाएगा जो कम ईंधन खर्च कर सकते हैं.
क्या वास्तव में होगी पैसे की बचत?
इस सवाल का जवाब आपकी ड्राइविंग शैली और यात्रा के मार्ग पर निर्भर करता है. Google का कहना है कि यह फीचर भारी ट्रैफिक, बार-बार ब्रेक लगाने की स्थिति और कठिन रास्तों से बचाकर ईंधन की खपत कम करने की कोशिश करता है. अगर आप रोजाना ऑफिस आते-जाते हैं या नियमित रूप से लंबी दूरी तय करते हैं तो थोड़ी-थोड़ी बचत समय के साथ एक अच्छी रकम में बदल सकती है.
हालांकि, हर जगह परिणाम एक जैसे नहीं मिलते. कुछ लोगों का कहना है कि सुझाया गया रास्ता कभी-कभी थोड़ा लंबा या कम सुविधाजनक हो सकता है जबकि कई यूजर्स ने लगातार एक ही रूट पर यात्रा करते समय ईंधन बचत महसूस की है.
बढ़ते फ्यूल खर्च के बीच आजमाने लायक है यह ट्रिक
यदि आप पेट्रोल या डीजल के बढ़ते खर्च से परेशान हैं तो Google Maps की यह सेटिंग जरूर आजमानी चाहिए. इसे चालू करने में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता और यह बैकग्राउंड में काम करते हुए आपकी हर यात्रा में ईंधन बचाने में मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सिर्फ नया Siri ही नहीं, iOS 27 में मिलेंगे एक से बढ़कर एक फीचर्स, यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिर्फ-नया-siri-ही-नहीं-ios-27-में-मिलेंगे-एक-से-बढ़कर-एक-फीचर्स-यहां-देखें-पूरी-लिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ iOS 27 All Features: ऐप्पल की iOS 27 अपडेट से अगले हफ्ते पर्दा उठ जाएगा. आईफोन यूजर्स इस सॉफ्टवेयर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. सबकी नजरें इस अपडेट के साथ आने वाले सिरी के एआई वर्जन पर टिकी हुई हैं, जो अब केवल असिस्टेंट न रहकर चैटबॉट की तरह काम करेगा. इसके साथ-साथ ऐप्पल कैमरा और फोटोज समेत कई ऐप्स के शानदार अपडेट लाने वाली है, जिनके बारे में कम चर्चा हो रही है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि iOS 27 अपडेट में अपग्रेडेड सिरी के अलावा और क्या-क्या फीचर्स आ रहे हैं.
कैमरा ऐप
नई अपडेट में ऐप्पल विजुअल इंटेलीजेंस को कैमरा कंट्रोल बटन से कैमरा ऐप में मूव कर रही है. इसमें यूजर को पहले से मौजूद फोटो, वीडियो, पोर्ट्रेट मोड के साथ नया सिरी मोड भी मिलेगा. अपडेट के बाद यूजर विजुअल इंटेलीजेंस से ऑब्जेक्ट्स, प्लांट्स, एनिमल्स, बुक्स और दूसरी चीजों की पहचान कर सकेंगे. इसमें नया कैलोरी स्कैनिंग फीचर भी मिलने वाला है.
फोटोज ऐप
फोटोज ऐप में ऐप्पल इंटेलीजेंस टूल्स सेक्शन होगा, जिसमें यूजर को फोटो को एक्सटैंड और रिफ्रेम करने का ऑप्शन मिलेगा. ऐसे भी कयास हैं कि यूजर नैचुरल लैंग्वेज में प्रॉम्प्ट देकर भी फोटो एडिट कर पाएंगे. iOS 27 के अगले वर्जन में वॉइस-बेस्ड फोटो एडिटिंग फीचर भी आने वाला है.
फोल्डेबल आईफोन इंटरफेस
ऐप्पल सितंबर में फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. इसमें iOS 27 अपडेट के साथ ही लॉन्च किया जाएगा. इसे देखते हुए भी नई अपडेट में फोल्डेबल इंटरफेस जोड़ा जा रहा है.
वॉलेट ऐप
नई अपडेट में वॉलेट ऐप को भी नया Create a Pass ऑप्शन मिल रहा है. इसकी मदद से यूजर किसी भी मूवी टिकट, कॉन्सर्ट पास, मेंबरशिप कार्ड्स को स्कैन कर उसका डिजिटल पास जनरेट कर पाएंगे. साथ ही कंपनी इसमें एआई बिल स्प्लिटिंग फीचर भी ऐड कर रही है, जो ऐप्पल कैश के साथ काम करेगा.&amp;nbsp;
शॉर्टकट
iOS 27 अपडेट से शॉर्टकट क्रिएट करने का तरीका भी बदलने वाला है. नई अपडेट आने के बाद यूजर नैचुरल लैंग्वेज में सिरी को बता सकेंगे कि उन्हें शॉर्टकट में क्या करना चाहते हैं और सिरी अपने आप इसे जनरेट कर देगी.
ये होंगे बाकी फीचर्स
बाकी फीचर्स की बात करें तो यूजर को कस्टम वॉलपेपर जनरेट करने का ऑप्शन मिलेगा. सफारी में चार टैब के साथ अपडेटेड होम पेज आ रहा है. कैलेंडर ऐप में नए एआई फीचर्स मिलेंगे और सिरी दूसरी ऐप्स से भी इवेंट आदि की जानकारी निकाल सकेगा. इसी तरह वेदर ऐप में भी नए मोड जोड़े जा रहे हैं.
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>&amp;apos;AI को रोकना होगा!&amp;apos; बिना इंसानों के काम कर सकता है Claude, एंथ्रोपिक ने कहा&amp; अब थमने की जरूरत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ai-को-रोकना-होगा-बिना-इंसानों-के-काम-कर-सकता-है-claude-एंथ्रोपिक-ने-कहा-अब-थमने-की-जरूरत</link>
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        <description><![CDATA[ AI Safety Alert: एआई में एडवांसमेंट की रफ्तार को लेकर पिछले काफी समय से चिंता जताई जा रही है. Elon Musk समेत कई लोग इस बारे में अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं. अब एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने भी एआई एडवांसमेंट की रफ्तार धीमी करने की मांग उठाई है. दरअसल, कंपनी का कहना है कि उसका एआई मॉडल Claude AI तेजी से नए एआई सिस्टम क्रिएट कर सकता है. इससे हम जल्द ही एक ऐसी स्थिति में पहुंच सकते हैं, जहां एआई सिस्टम खुद ही अपने से अगले सिस्टम को डिजाइन, बिल्ड और ट्रेन कर सकेंगे और इस पूरी प्रोसेस में इंसानों की जरूरत भी नहीं होगी.
एंथ्रोपिक ने कहा- तैयारी शुरू कर देनी चाहिए
एंथ्रोपिक ने कहा कि अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है, जहां एआई सिस्टम खुद अपने सक्सेसर को तैयार कर सके, लेकिन इसे टाला नहीं जा सकता. सरकारों, रेगुलेटर और समाज को इसके लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. कंपनी के मुताबिक, पब्लिक बेंचमार्क और उसके खुद के डेटा के अनुसार एआई काम को तेज कर रही है. इससे हेल्थकेयर, साइंस और प्रोडक्टिविटी जैसे एरिया में फायदा हो सकता है, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि जब एआई सिस्टम खुद काबिल हो जाएंगे तो इंसान उस पर काबू कैसे रखेंगे.
ऐसे तेज होती जा रही है एआई एडवांसमेंट की स्पीड
बीते 2-3 सालों में ही एआई में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ती गई है. शुरुआत में इंजीनियर कोड खुद लिखते थे. इसके बाद चैटबॉट इस काम में उनकी हेल्प करने लगे. फिर ऐसे एजेंट आ गए जो कोडिंग का पूरा काम कर सकते हैं. आज के एआई एजेंट कोड रन करने के साथ टास्क भी पूरे कर सकते हैं और दूसरे एजेंट को टास्क सौंप भी सकते हैं. एंथ्रोपिक का कहना है कि अब इसकी अगली स्टेज ऐसी होगी, जहां एआई सिस्टम फ्यूचर के एआई मॉडल को भी तैयार कर सकेंगे.
एंथ्रोपिक ने बताए तीन सिनेरियो
एंथ्रोपिक ने कहा कि मौजूदा स्थिति के आधार पर तीन फ्यूचर सिनेरियो बनते हैं. पहली संभावना यह है कि एआई का विकास धीमा हो जाए. दूसरी संभावना है कि एआई प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करेगी, लेकिन कंट्रोल इंसानों के पास रहेगा और तीसरे सिनेरियो में एआई सिस्टम खुद ही अपने सक्सेसर मॉडल तैयार कर लेंगे. कंपनी दूसरी संभावना को लेकर ज्यादा आशान्वित है. कंपनी ने सरकारों समेत सभी स्टेकहॉल्डर्स से एआई के विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग करते हुए कहा कि इसमें पूरी दुनिया को साथ आना पड़ेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Green SM Limo टैक्सी सर्विस भारत में लॉन्च, सेफ्टी के साथ&amp;साथ कंफर्ट पर भी जोर</title>
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        <description><![CDATA[ Green SM Limo: अगर आप Delhi-NCR में रहते हैं तो आपके लिए इलेक्ट्रिक कैब का एक और ऑप्शन आ गया है. वियतनाम की मोबिलिटी कंपनी Green SM ने भारत में एंट्री करते हुए अपनी इलेक्ट्रिक टैक्सी सर्विस Green SM Limo को Delhi-NCR में लॉन्च कर दिया है. इससे पहले कंपनी वियतनाम, लाओस, इंडोनेशिया और फिलिपींस में अपनी सेवाएं दे रही हैं. कंपनी ने बताया कि वह Delhi-NCR के मुख्य इलाकों से अपनी सर्विस शुरू करेगी और डिमांड के हिसाब से कवरेज बढ़ाती रहेगी. भारत में कंपनी 10,000 इलेक्ट्रिक व्हीकल का फ्लीट डिप्लॉय करने की प्लानिंग के साथ आई है.
कंपनी खुद ही कारों की मालिक
उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों में ड्राइवर अपनी गाड़ियां और बाइक लगा सकते हैं, लेकिन Green SM खुद ही अपने फ्लीट में चलने वाली कारों की मालिक हैं. जानकारी के मुताबिक, इस सर्विस में VinFast Limo Green को यूज किया जाएगा, जो एक 7-सीटर SUV है. इसे खासतौर से पैसेंजर ट्रांसपोर्टेशन के लिए तैयार किया गया है. पैसेंजर मोबाइल ऐप के अलावा हॉटलाइन के जरिए भी अपनी राइड बुक कर सकेंगे. Green SM ने बताया कि इस फ्लीट के सभी ड्राइवरों को इलेक्ट्रिक व्हीकल ऑपरेशन, रोड सेफ्टी और कस्टमर सर्विस की ट्रेनिंग दी गई है.
यात्रियों के आराम का रखा गया है पूरा ख्याल
Green SM Limo के हर व्हीकल में कंपनी का सिक्योर-टू-सेफ सिस्टम फिट गया है, जिसमें इंटीरियर और एक्सटीरियर कैमरा, एआई-सपोर्टेड टेक्नोलॉजी और ड्राइवर और पैसेंजर के लिए इमरजेंसी असिस्टेंट बटन लगा हुआ है. इसमें पैसेंजर की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा गया है. स्पेसियस केबिन वाली कंपनी की हर गाड़ी में पानी का पानी, वेट टिश्यू और दूसरी जरूरी चीजें अवेलेबल होंगी. यानी यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके कंफर्ट को भी ध्यान में रखा गया है. यह सर्विस लॉन्च होने से ओला-उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए मुकाबला कड़ा हो जाएगा.
बुकिंग पर चल रहा प्रमोशनल ऑफर
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपनी लॉन्चिंग के मौके पर कंपनी एक खास प्रमोशनल डिस्काउंट ऑफर भी चला रही है. 5 जून से लेकर 11 जून तक कैब बुक करने वाले पैसेंजर किराये पर 250 रुपये तक की बचत कर सकते हैं. भारत में एंट्री के बाद Green SM अब मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, टोयोटा और हुंडई समेत उन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं, जिनकी कारों को फ्लीट सेक्टर में यूज किया जा रहा है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Instagram पर लाखों Views चाहिए? पहले समझिए 125 Characters का Viral Formula</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram 125 Characters Formula: Instagram पर पोस्ट डालते समय फोटो या वीडियो जितना महत्वपूर्ण होता है उतना ही जरूरी उसका कैप्शन भी होता है. कई क्रिएटर्स और बिजनेस पेज मैनेजर अक्सर इस सवाल से जूझते हैं कि ज्यादा पहुंच (Reach) पाने के लिए छोटा कैप्शन लिखें या लंबा. साल 2026 में इस सवाल का जवाब पहले से थोड़ा बदल चुका है. अब कोई एक तय लंबाई सभी पोस्ट पर लागू नहीं होती बल्कि कैप्शन की लंबाई आपके कंटेंट और उद्देश्य पर निर्भर करती है.
125 कैरेक्टर का नियम क्यों है खास?
Instagram हर पोस्ट के लिए 2,200 कैरेक्टर तक लिखने की अनुमति देता है. हालांकि, यूजर्स को पोस्ट के नीचे शुरुआत में केवल लगभग 125 कैरेक्टर ही दिखाई देते हैं. इसके बाद पूरा टेक्स्ट पढ़ने के लिए More पर टैप करना पड़ता है. यही वजह है कि शुरुआती 125 कैरेक्टर सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. यदि पहली लाइन आकर्षक नहीं हुई तो अधिकांश लोग आगे का कैप्शन पढ़े बिना ही आगे बढ़ सकते हैं.
कितनी लंबाई वाला कैप्शन सबसे बेहतर माना जा रहा है?
सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर किए गए हालिया अध्ययनों के अनुसार, 138 से 150 कैरेक्टर के बीच के कैप्शन अक्सर अच्छा प्रदर्शन करते हैं. यह लंबाई इतनी होती है कि जरूरी जानकारी दी जा सके और साथ ही टेक्स्ट बहुत बड़ा भी न लगे.
वहीं Reels के लिए छोटे और सीधे कैप्शन अधिक प्रभावी माने जा रहे हैं. छोटे कैप्शन दर्शकों का समय बचाते हैं और वीडियो देखने का अनुभव बाधित नहीं करते.
लंबे कैप्शन कब देते हैं बेहतर परिणाम?
हालांकि छोटे कैप्शन लाइक्स बढ़ाने में मदद कर सकते हैं लेकिन लंबे कैप्शन कई मामलों में ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं. लगभग 400 से 600 कैरेक्टर वाले कैप्शन अक्सर ज्यादा कमेंट्स और सेव्स प्राप्त करते हैं. आज के Instagram एल्गोरिदम में सेव और कमेंट्स को काफी अहम माना जाता है क्योंकि ये दर्शाते हैं कि यूजर कंटेंट के साथ वास्तव में जुड़ रहा है.
शेयर्स बन गए हैं सबसे बड़ी ताकत
Instagram के अनुसार, किसी पोस्ट को शेयर किया जाना अब सबसे मजबूत एंगेजमेंट संकेतों में से एक है. जब कोई व्यक्ति आपकी पोस्ट किसी दोस्त या ग्रुप में भेजता है तो प्लेटफॉर्म इसे मूल्यवान कंटेंट का संकेत मानता है और उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की संभावना बढ़ जाती है.
इसी कारण कहानी आधारित (Storytelling) लंबे कैप्शन, खासकर कैरोसेल पोस्ट के साथ, अक्सर बेहतर प्रदर्शन करते हैं क्योंकि वे लोगों को शेयर करने के लिए प्रेरित करते हैं.
एजुकेशनल और ट्यूटोरियल पोस्ट में लंबा कैप्शन क्यों जरूरी है?
यदि आप किसी विषय को समझा रहे हैं, कोई गाइड दे रहे हैं, उत्पाद की जानकारी साझा कर रहे हैं या किसी संवेदनशील मुद्दे पर बात कर रहे हैं तो लंबा कैप्शन उपयोगी हो सकता है. ऐसे कैप्शन लोगों को अधिक संदर्भ देते हैं, चर्चा शुरू करते हैं और कमेंट सेक्शन में बातचीत बढ़ाने में मदद करते हैं.
2026 में Hashtags से ज्यादा जरूरी हो गए हैं Keywords
Instagram पर खोज (Discovery) का तरीका भी बदल रहा है. अब केवल हैशटैग्स पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. प्लेटफॉर्म की AI आधारित सर्च सिस्टम सीधे कैप्शन में लिखे गए शब्दों को समझती है और उसी के आधार पर कंटेंट को सही दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश करती है.
इसलिए कैप्शन में स्वाभाविक रूप से सही कीवर्ड्स शामिल करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. हालांकि, केवल कीवर्ड्स भर देने से फायदा नहीं होगा. जरूरत से ज्यादा कीवर्ड ठूंसने वाले कैप्शन एल्गोरिदम को नकारात्मक संकेत भी दे सकते हैं.
बेहतर Reach के लिए क्या रणनीति अपनाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अच्छा तरीका दोनों प्रकार के कैप्शन का संतुलित इस्तेमाल करना है. Reels, मीम्स और त्वरित प्रमोशनल पोस्ट के लिए 150 कैरेक्टर से कम के छोटे कैप्शन इस्तेमाल करें. एजुकेशनल कंटेंट, कैरोसेल पोस्ट और एक्सपर्ट राय वाले कंटेंट के लिए लंबे कैप्शन लिखें. शुरुआती 125 कैरेक्टर को हमेशा आकर्षक और ध्यान खींचने वाला बनाएं. हैशटैग्स के साथ-साथ संबंधित कीवर्ड्स का भी इस्तेमाल करें.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>अब जानवर भी करेंगे इंसानों से बात? AI की नई खोज ने दुनिया को चौंकाया</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Intelligence: क्या आने वाले समय में इंसान व्हेल से सवाल पूछ सकेगा, डॉल्फिन की चेतावनियों को समझ पाएगा या पक्षियों के संदेशों का मतलब जान सकेगा? जो बातें अब तक केवल फिल्मों और विज्ञान-कल्पना की कहानियों में दिखाई देती थीं वे अब हकीकत के करीब पहुंचती नजर आ रही हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज प्रगति ने वैज्ञानिकों को जानवरों के बात करने के सिस्टम को समझने के नए अवसर दिए हैं.
जानवरों की आवाज़ों में छिपे संकेत खोज रहा है AI
दुनिया भर के शोधकर्ता अब AI आधारित न्यूरल नेटवर्क्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उसी तकनीक पर आधारित हैं जिस पर ChatGPT जैसे मॉडल काम करते हैं. इन सिस्टम्स की मदद से जानवरों की लाखों आवाज़ों और उनके व्यवहार से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है.
AI उन पैटर्न्स और संकेतों को पहचानने में सक्षम है जिन्हें इंसानी दिमाग या पारंपरिक शोध विधियां आसानी से नहीं पकड़ सकतीं. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल रही है कि अलग-अलग जानवर किस तरह अपने समूह के अन्य सदस्यों तक जानकारी पहुंचाते हैं.
कई प्रजातियों पर हो रहा है शोध
हाल के वर्षों में चूहों, डॉल्फिन, व्हेल, पक्षियों, बड़े बंदरों और यहां तक कि समुद्री जीवों पर भी AI आधारित अध्ययन किए गए हैं. इन अध्ययनों में अलग-अलग प्रकार की आवाज़ों, उनकी पहचान और उनके संभावित अर्थों को समझने की कोशिश की जा रही है.
उदाहरण के तौर पर, अफ्रीकी धारीदार चूहों पर किए गए एक शोध में वैज्ञानिकों ने 1.22 लाख से अधिक ध्वनियों का विश्लेषण किया. AI ने इनमें कई अलग-अलग प्रकार की कॉल्स की पहचान की जो संभवतः विभिन्न संदेशों को व्यक्त करती हैं.
व्हेल की भाषा को समझने की बड़ी कोशिश
सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक स्पर्म व्हेल के बात करने के सिस्टम को समझने का प्रयास है. वैज्ञानिक मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल करके व्हेल द्वारा निकाली जाने वाली लाखों कोडा क्लिक ध्वनियों का अध्ययन कर रहे हैं.
शोधकर्ताओं का मानना है कि इन ध्वनियों में शब्दों, नामों, स्थानीय बोलियों और यहां तक कि किसी प्रकार के व्याकरण जैसी संरचनाएं भी मौजूद हो सकती हैं. शुरुआती परिणाम बताते हैं कि व्हेल का संवाद पहले की सोच से कहीं अधिक जटिल हो सकता है.
क्या इंसान और जानवरों के बीच सीधी बातचीत संभव होगी?
वैज्ञानिक अब केवल जानवरों की भाषा को समझने तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि वे यह भी जांच रहे हैं कि क्या भविष्य में इंसान और जानवरों के बीच दो-तरफा संवाद संभव हो सकता है. इस दिशा में काम कर रहे संगठनों में Earth Species Project और Project CETI शामिल हैं. ये संस्थाएं बड़े AI मॉडलों की मदद से जानवरों की आवाज़ों में छिपे अर्थों को खोजने और संभावित संवाद सिस्टम विकसित करने पर काम कर रही हैं.
अभी भी मौजूद हैं कई चुनौतियां
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों की संचार सिस्टम को समझना और मानव भाषा की तरह उसका अनुवाद करना दो अलग-अलग बातें हैं. भले ही AI किसी आवाज का अर्थ पहचान ले लेकिन जानवर दुनिया को इंसानों से बिल्कुल अलग तरीके से महसूस करते हैं.
यही कारण है कि वास्तविक अंतर-प्रजातीय संवाद (Interspecies Communication) अभी भी एक बड़ी वैज्ञानिक चुनौती बना हुआ है. फिर भी AI के विकास ने इस दिशा में अभूतपूर्व प्रगति की है और उम्मीद जगाई है कि भविष्य में इंसान अन्य जीवों की बातों को बेहतर तरीके से समझ सकेगा.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अब, जानवर, भी, करेंगे, इंसानों, से, बात, की, नई, खोज, ने, दुनिया, को, चौंकाया</media:keywords>
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        <title>फ्लाइट पकड़ने से पहले पढ़ लें ये खबर! पावर बैंक को लेकर क्या कहते हैं एयरलाइन नियम?</title>
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        <description><![CDATA[ Power Bank in Flights: गर्मी की छुट्टियों में हवाई यात्रा की तैयारी कर रहे हैं और साथ में पावर बैंक ले जाने का सोच रहे हैं? तो उड़ान भरने से पहले एयरलाइंस और एविएशन अधिकारियों द्वारा बनाए गए नियमों को जान लेना बेहद जरूरी है. हाल के वर्षों में पावर बैंक से जुड़े आग और धुएं के कई मामलों के बाद दुनिया भर की एयरलाइंस ने सुरक्षा नियमों को और सख्त कर दिया है.
पावर बैंक को चेक-इन बैग में रखना मना
सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि लिथियम-आयन बैटरी वाले पावर बैंक को चेक-इन लगेज में नहीं रखा जा सकता. यात्रियों को इन्हें अपने कैरी-ऑन बैग या हैंड बैगेज में ही रखना होगा. इस नियम के पीछे मुख्य कारण सुरक्षा है.
यदि कार्गो होल्ड में रखी बैटरी में कोई खराबी आ जाए और आग लग जाए तो विमान चालक दल तुरंत कार्रवाई नहीं कर सकता. वहीं, केबिन में मौजूद बैटरी पर नजर रखना और किसी आपात स्थिति से निपटना आसान होता है.
कितनी क्षमता वाला पावर बैंक ले जा सकते हैं?
सामान्य तौर पर यात्री 100 वॉट-आवर (Wh) तक की क्षमता वाले दो पावर बैंक बिना किसी विशेष अनुमति के विमान में ले जा सकते हैं. इतनी क्षमता वाला पावर बैंक स्मार्टफोन को कई बार चार्ज करने के लिए पर्याप्त होता है.
अगर बैटरी की क्षमता 100Wh से अधिक और 160Wh तक है तो उसे विमान में ले जाने के लिए एयरलाइन की मंजूरी आवश्यक हो सकती है. इस तरह की बैटरियां आमतौर पर पेशेवर वीडियो उपकरणों या मेडिकल डिवाइस में उपयोग की जाती हैं.
mAh से Wh कैसे पता करें?
कई पावर बैंक पर क्षमता mAh (मिलीएम्पियर-आवर) में लिखी होती है. ऐसे में वॉट-आवर निकालने के लिए एक आसान गणना की जा सकती है.
उदाहरण के लिए:
10,000mAh = 10Ah
10Ah &amp;times; 3.7V = 37Wh
यानी 10,000mAh का पावर बैंक लगभग 37Wh के बराबर होता है जो विमान यात्रा के लिए तय सीमा के अंदर है.
एयरलाइंस क्यों हो गई हैं सख्त?
हाल के वर्षों में लिथियम बैटरियों से जुड़े कई हादसे सामने आए हैं. जनवरी 2025 में दक्षिण कोरिया के एक एयरपोर्ट पर टेकऑफ से पहले एक विमान में आग लग गई थी जिसके बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. ऐसी घटनाओं ने एयरलाइंस और एविएशन एजेंसियों को बैटरी सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क बना दिया है. कई उड़ानों को केवल एहतियात के तौर पर डायवर्ट भी करना पड़ा है क्योंकि बैटरी से जुड़े संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
लिथियम बैटरियां खतरनाक क्यों हो सकती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार लिथियम-आयन बैटरियां छोटे आकार में काफी अधिक ऊर्जा स्टोर करती हैं. यदि बैटरी दब जाए, ज्यादा गर्म हो जाए या जरूरत से ज्यादा चार्ज हो जाए तो थर्मल रनअवे प्रोसेस शुरू हो सकता है.
इस स्थिति में बैटरी तेजी से गर्म होने लगती है और जहरीली गैसें तथा आग पैदा कर सकती है. हालांकि ऐसे मामलों की संभावना बहुत कम होती है लेकिन जब ऐसा होता है तो नुकसान गंभीर हो सकता है.
यात्रा से पहले पावर बैंक की जांच जरूर करें
फ्लाइट पर जाने से पहले अपने पावर बैंक की स्थिति जांच लें. यदि उसमें इनमें से कोई संकेत दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल न करें:

बैटरी का फूल जाना
चार्जिंग के दौरान जरूरत से ज्यादा गर्म होना
बाहरी पार्ट में दरार या नुकसान
असामान्य गंध आना

विशेषज्ञ सस्ते और अनजान ब्रांड के पावर बैंक खरीदने से भी बचने की सलाह देते हैं क्योंकि उनमें सुरक्षा मानकों की कमी हो सकती है.
विमान के अंदर पावर बैंक कहां रखें?
फ्लाइट के दौरान पावर बैंक को ओवरहेड बिन में रखने की अनुमति कई एयरलाइंस नहीं देती हैं. इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके जैसे सीट के सामने मौजूद पॉकेट, सीट के नीचे रखा बैग. इससे किसी समस्या की स्थिति में केबिन क्रू तुरंत कार्रवाई कर सकता है.
उड़ान के दौरान चार्जिंग से बचें
कई एयरलाइंस यात्रियों को पावर बैंक से अन्य डिवाइस चार्ज करने या विमान के पावर सॉकेट से पावर बैंक चार्ज करने की अनुमति नहीं देतीं. इसलिए यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन के नियम जरूर पढ़ लें.
सीट के नीचे गिर जाए बैटरी तो क्या करें?
यदि आपका पावर बैंक या कोई बैटरी वाला उपकरण सीट और दीवार के बीच फंस जाए तो उसे निकालने के लिए सीट को हिलाने या पीछे-आगे करने की कोशिश न करें.
सीट का दबाव बैटरी को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे वह गर्म होकर आग पकड़ सकती है. ऐसी स्थिति में तुरंत केबिन क्रू को सूचित करें क्योंकि उन्हें ऐसे डिवाइस सुरक्षित तरीके से निकालने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
यात्रा से पहले एयरलाइन के नियम जरूर जांचें
हर एयरलाइन के नियम थोड़े अलग हो सकते हैं. कुछ कंपनियां बैटरियों की संख्या या क्षमता को लेकर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लागू करती हैं. इसलिए फ्लाइट से पहले अपनी एयरलाइन की आधिकारिक गाइडलाइन पढ़ना सबसे सुरक्षित विकल्प है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>फ्लाइट, पकड़ने, से, पहले, पढ़, लें, ये, खबर, पावर, बैंक, को, लेकर, क्या, कहते, हैं, एयरलाइन, नियम</media:keywords>
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        <title>सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करते समय भूलकर भी न दिखाएं ये चीज, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सोशल-मीडिया-पर-फोटो-पोस्ट-करते-समय-भूलकर-भी-न-दिखाएं-ये-चीज-एक्सपर्ट्स-ने-दी-चेतावनी</link>
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        <description><![CDATA[ Fingerprint Scam: आजकल स्मार्टफोन में बहुत पावरफुल कैमरा सेटअप मिलने लगा है. ये छोटी-से छोटी डिटेल्स को भी कैप्चर कर सकता है. इसलिए यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि सोशल मीडिया पर जो फोटोज पोस्ट की जा रही हैं, उनमें क्या दिख रहा है. सिक्योरिटी एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर सोशल मीडिया पर पोस्ट फोटो में फिंगरप्रिंट नजर आ रहे हैं तो यह बहुत बड़ी मुसीबत का कारण बन सकते हैं. फोटो की मदद से फिंगरप्रिंट को रिकंस्ट्रक्ट किया जा सकता है और इसके बाद के नुकसान का आप अंदाजा लगा सकते हैं.
ऐसी तस्वीरें पोस्ट करने से बचें
फिंगरप्रिंट आज के टाइम में बहुत जरूरी बायोमेट्रिक आईडेंटिफायर बन गए हैं. इनकी मदद से कंप्यूटर और स्मार्टफोन जैसे डिवाइस अनलॉक किए जा सकते हैं. अगर फिंगरप्रिंट वाली तस्वीरें गलत हाथों में पड़ जाए तो इससे बड़ा नुकसान हो सकता है. इसी खतरे को देखते हुए जर्मनी के पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर Bayerischer Rundfunk ने लोगों से ऐसी फोटो पोस्ट न करने की अपील की है, जिसमें फिंगरप्रिंट साफ नजर आ रहे होते हैं. थम्स-अप, पीस साइन, विक्ट्री साइन या कैमरे की तरफ हाथ हिलाने वाली फोटो से फिंगरप्रिंट रिवील हो सकते हैं.&amp;nbsp;
एआई की मदद से तैयार किए जा सकते हैं असली जैसे फिंगरप्रिंट
साइबर अपराधी एआई की मदद से सोशल मीडिया पर अपलोडेड फोटोज को प्रोसेस कर एकदम सटीक फिंगरप्रिंट रिकंस्ट्रक्ट कर रहे हैं. अगर लाइटिंग और परस्पेक्टिव ठीक होता है और हाई-रेजॉल्यूशन वाले कैमरे से फोटो ली गई है तो साइबर अपराधियों के लिए काम और आसान हो जाता है. सॉफ्टवेयर और एआई टूल्स की मदद से वो आपके फिंगरप्रिंट की सबसे छोटी लाइन को भी रिकंस्ट्रक्ट कर प्रिंट कर सकते हैं. सोशल मीडिया पर आपकी बाकी डिटेल्स और फोटो की मदद से दूसरी जानकारियां भी कलेक्ट करना आसान है. चाइनीज सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि करीब 1.5 मीटर दूरी से ली गई फोटो में अगर उंगलियां कैमरे के सामने है तो फिंगरप्रिंट को एक्सट्रेक्ट किया जा सकता है. अगर यह दूरी 3 मीटर हो जाए तो आधे फिंगरप्रिंट का फिर भी आसानी से पता लग जाएगा.
क्या हैं बचाव के तरीके?

फोटो में कभी भी अपने फिंगरप्रिंट न दिखाएं. अगर किसी फोटो में फिंगरप्रिंट नजर आ रहे हैं तो पोस्ट करने से पहले उन्हें ब्लैक आउट कर दें.
हाई-रेजॉल्यूशन वाली फोटोज में हथेली न दिखाएं. इसी तरह हाथों के क्लोज-अप वाली फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से बचें.

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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सोशल, मीडिया, पर, फोटो, पोस्ट, करते, समय, भूलकर, भी, न, दिखाएं, ये, चीज, एक्सपर्ट्स, ने, दी, चेतावनी</media:keywords>
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        <title>Waterproof Smartphone: पानी में खराब न होने वाला सबसे सस्ता मोबाइल कौन सा है, जान लीजिए कीमत? </title>
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        <description><![CDATA[ Waterproof Smartphone:&amp;nbsp;आज के डिजिटल दौर में फोन हर आदमी की जरूरत बन गया है. मनोरंजन से लेकर दिन भर के लाखों काम इसी डिवाइस पर निर्भर हो चुके हैं. चाहे वो डॉक्यूमेंट्स को स्टोर करके रखना हो या फिर कहीं पर पेमेंट करना हो, हर चीज के लिए आदमी फोन पर डिपेंड हो गया है. ऐसे में हर आदमी जब फोन खरीदने जाता है तब वो फोन के स्टोरेज, कैमरा, बैटरी के अलावा ये भी सोचता है कि उनको ऐसा फोन मिल जाए जो लंबे समय तक चले और जो बारिश की बूंदों, पानी के छींटों या गलती से पानी में गिर जाने पर भी आसानी से खराब न हो, क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि फोन में पानी चला जाए तो कभी-कभी यह बच भी जाता है, लेकिन ज्यादा पानी पहुंचने पर डिवाइस पूरी तरह खराब हो जाती है. ऐसे में आदमी अक्सर कन्फ्यूज हो जाता है कि कौन सा फोन लेना बेहतर होगा.&amp;nbsp;
अच्छी बात यह है कि अब वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन खरीदने के लिए बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत भी नहीं है. बाजार में कई ऐसे स्मार्टफोन मौजूद हैं जो पानी और धूल से सुरक्षा देने वाली IP68 या IP69 रेटिंग के साथ आते हैं और इनकी कीमत भी काफी किफायती है. ऐसे में आइए आपको बताते हैं कुछ बेहतरीन वॉटरप्रूफ फोन्स के बारे में जो आपको 13,000 रुपये से शुरू होने वाली कीमत में मिल सकते हैं.&amp;nbsp;
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सबसे सस्ता वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन कौन सा है?
अगर कीमत के हिसाब से देखा जाए तो Realme P3x 5G इस समय सबसे सस्ते वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन्स में से एक माना जाता है. ये IP68 और IP69 दोनों रेटिंग्स के साथ आता है. साथ ही इसमें 6GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ 6.72 इंच की बड़ी डिस्प्ले और MediaTek Dimensity 6400 प्रोसेसर और 6000mAh की दमदार बैटरी भी दी गई है. इसकी शुरुआती कीमत करीब 12,999 रुपये बताई गई है, जो इसे बजट सेगमेंट में एक शानदार विकल्प बनाती है. इसके अलावा Redmi Note 14 Pro 5G भी एक बेहतर विकल्प है, जिसमें IP68 रेटिंग दी गई है जिससे यह पानी से सुरक्षित रहता है. इसमें 8GB रैम और 128GB स्टोरेज मिलता है. &amp;nbsp;Flipkart पर यह फोन करीब 21,489 रुपये में लिस्ट है, जबकि ऑफर के तहत इसे लगभग 20,239 रुपये में भी लिया जा सकता है.&amp;nbsp;
साथ ही Motorola Edge 60 Fusion 5G फोन भी है, जिसमें 8GB रैम और 256GB स्टोरेज दी गई है. जो IP68 रेटिंग के साथ यह पानी और धूल से सुरक्षा प्रदान करता है. &amp;nbsp;इसमें 6.67 इंच की डिस्प्ले, 50MP कैमरा और 5500mAh की बैटरी मिलती है, जो 68W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. इस फोन की कीमत Flipkart पर लगभग 22,999 रुपये है. इसके अलावा &amp;nbsp;Oppo Reno 13 5G भी एक प्रीमियम स्मार्टफोन है जिसमें 8GB रैम और 128GB स्टोरेज दी गई है. वहीं IP66, IP68 और IP69 तीनों ही रेटिंग्स के साथ यह फोन पानी से पूरी तरह सुरक्षित है, जिसकी किमत लगभग 29,999 रुपये तक है. साथ ही &amp;nbsp;प्रीमियम सेगमेंट में Samsung Galaxy S25 5G भी IP68 रेटिंग के साथ आता है और पानी से सुरक्षा प्रदान करता है, जिसकी किमत करीब 56,899 रुपये तक है.&amp;nbsp;
वॉटरप्रूफ फोन खरीदते समय क्या रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का कहना है कि वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन खरीदते समय केवल कीमत नहीं बल्कि उसकी IP रेटिंग भी जरूर देखनी चाहिए. IP68 और IP69 रेटिंग वाले फोन आमतौर पर पानी और धूल से बेहतर सुरक्षा देते हैं. बारिश के मौसम में ऐसे स्मार्टफोन काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं और अचानक पानी लगने पर फोन खराब होने का खतरा भी कम हो जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Waterproof, Smartphone:, पानी, में, खराब, न, होने, वाला, सबसे, सस्ता, मोबाइल, कौन, सा, है, जान, लीजिए, कीमत </media:keywords>
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        <title>कब और कैसे साफ करने चाहिए सोलर पैनल? ये बातें जान लीं तो नहीं होगी दिक्कत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कब-और-कैसे-साफ-करने-चाहिए-सोलर-पैनल-ये-बातें-जान-लीं-तो-नहीं-होगी-दिक्कत</link>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Cleaning Tips: सोलर पैनल में मूविंग पार्ट्स नहीं होते, इसलिए इन्हें ज्यादा मैंटेनेंस की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन सफाई का ध्यान रखना चाहिए. अगर सोलर पैनल पर धूल-मिट्टी जमा हो गई है तो इनकी एफिशिएंसी कम हो जाती है. यही कारण है कि मैन्युफैक्चरर भी अकसर पैनल को साफ रखने की सलाह देते हैं. बारिश होने पर पैनल से धूल-मिट्टी, गंदगी और सूखे पते आदि सब साफ हो जाते हैं, लेकिन हर बार सफाई के लिए बारिश का इंतजार सही नहीं होता. आज हम बताने जा रहे हैं कि सोलर पैनल को कब और कैसे साफ करना चाहिए.
कब करनी चाहिए सोलर पैनल की सफाई?
इस सवाल का कोई सटीक जवाब नहीं है कि सोलर पैनल की सफाई कब करनी चाहिए. यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है. अगर सफाई को कुछ महीने हो गए हैं और पैनल पर धूल-मिट्टी और गंदगी आदि जमी दिख रही है तो इन्हें साफ किया जा सकता है. इसके अलावा अगर आपको लगता है कि पैनल पूरी एफिशिएंसी के साथ काम नहीं कर रहे तो भी सफाई की जा सकती है. हालांकि, एफिशिएंसी के कम होने के पीछे टेक्नीकल कारण भी हो सकते हैं, लेकिन सफाई वाला तरीका भी आजमाया जा सकता है.
इस बात का रखें ध्यान
सोलर पैनल की सफाई के लिए सुबह या किसी ठंडे दिन को चुनना चाहिए. हीट अब्जॉर्प्शन प्रोपर्टीज के कारण धूप निकलने के बाद पैनल बहुत गर्म हो जाते हैं और इन्हें साफ करना खतरे से खाली नहीं होता. अगर सोलर पैनल ज्यादा ऊंचाई पर लगे हुए हैं तो सफाई के लिए प्रोफेशनल की मदद लेना सेफ रहता है.
कैसे करें पैनल की सफाई?

पैनल की सफाई से पहले सोलर एनर्जी सिस्टम को बंद कर दें. इससे नुकसान होने की खतरा कम हो जाता है. &amp;nbsp;
सफाई करते समय पैनल पर भार न डालें. इससे सेल्स में छोटी दरारें आ जाती हैं, जिससे यह परमानेंट डैमेज हो सकता है.
पैनल पर ज्यादा प्रेशर से पानी न मारें और न ही सफाई के लिए हार्ड केमिकल को यूज करें.
सफाई के लिए मुलायम कपड़े या ब्रश का इस्तेमाल करें ताकि सरफेस खुरदुरा न हो जाए.अगर पैनल पर कोई धब्बा या गंदगी जम गई है तो इसे कुछ देर के लिए गीले कपड़े से कवर कर दें. इसके बाद इसे उतारना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Array Link Technology: चला गया छत पर लगी गोल छतरी का जमाना, अब डिश एंटीना की जगह लेगा Array Link; जानें टेक्नोलॉजी?</title>
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        <description><![CDATA[ Array Link Technology: अक्सर सभी ने देखा होगा कि घर हो या ऑफिस या टीवी स्टेशन की छत पर एक बड़ी सी गोल छतरी जैसा एंटीना डिश होता है, जिसे Parabolic Antenna या Satellite Dish कहा जाता है. जहां आज इंटरनेट का इस्तेमाल करना हो या ट्रैकिंग करनी हो, टेक्नोलॉजी इतनी बढ़ गई है कि अंतरिक्ष से डायरेक्ट हमारे फोन तक कनेक्शन बनाने के लिए हजारों सैटेलाइट दुनिया भर में उपलब्ध हैं. लेकिन आज तक सैटेलाइट को धरती से जोड़ने के लिए आज भी 1970 के दशक में जो Parabolic Antenna का आविष्कार हुआ था, वही पुरानी तकनीक आज तक चलती आ रही है. जिसकी सबसे बड़ी खराबी है कि एक समय पर एक ही सैटेलाइट को ट्रैक कर सकते हैं, साथ ही महंगे भी बहुत होते हैं.&amp;nbsp;
लेकिन अब वो समय आ गया है जिससे शायद इस समस्या से राहत मिल सकती है. हाल ही में University of California, San Diego (UCSD) के वैज्ञानिकों ने एक अद्भुत टेक्नोलॉजी बनाई है, जिसे ArrayLink के नाम से जाना जाएगा. माना जा रहा है कि यह टेक्नोलॉजी गोल डिश एंटीना का एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प बन सकती है. वहीं वैज्ञानिकों की बताई गई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस टेक्नोलॉजी की वजह से इंटरनेट की स्पीड और भी कई गुना ज्यादा बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
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क्या है Array Link Technology
अगर बात करें सैटेलाइट की स्पीड की तो पृथ्वी के LEO यानी Low Earth Orbit में मौजूद सैटेलाइट की स्पीड इतनी तेज होती है कि उनको ट्रैक करना पुराने एंटीना के बस की बात नहीं रह गई है. साथ ही जब एक डिश एक सैटेलाइट को छोड़कर दूसरे से जुड़ने की कोशिश करता है तो बीच में कुछ सेकंड या मिनट्स के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी भी टूट जाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार LEO में मौजूद सैटेलाइट की स्पीड 28,000 km/h होती है. &amp;nbsp;
वैज्ञानिकों के अनुसार इसी समस्या को दूर करती है ArrayLink Technology, जो पुरानी टेक्नोलॉजी को पूरी तरह बदल देती है. बताया जा रहा है कि इसके लिए किसी डिश का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है बल्कि एक लैपटॉप जैसे छोटे और फ्लैट डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है, जिसे Phased Array कहते हैं. इनकी खासियत है कि यह बिना हिले-डुले Radio Waves को सिग्नलों की दिशा बदलकर सैटेलाइट को ट्रैक करती है. इससे फायदा होगा कि डेटा ट्रांसफर बिना किसी रुकावट के लगातार होता रहेगा. आसान भाषा में समझें तो जहां पुराना डिश एंटीना आसमान में दौड़ते सैटेलाइट के पीछे खुद घूमता था, वहीं यह नया फ्लैट डिवाइस बिना अपनी जगह से हिले, अपनी Waves को मोड़कर सैटेलाइट से जुड़ देगा. जिससे बिना रुकावट वाला सुपरफास्ट इंटरनेट मिलेगा और कनेक्शन नहीं टूटेगा.&amp;nbsp;
कैसे देता है ज्यादा स्पीड?
विशेषज्ञों ने बताया कि इसमें बड़ा डिश एंटीना बनाने की बजाय उन्होंने छोटे-छोटे 16 एंटीना पैनल्स को एक किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग घरों की छतों या टावरों पर फैला दिया और उन्हें सॉफ्टवेयर के जरिए आपस में जोड़ दिया गया. उन्होंने बताया कि ये अलग-अलग एंटीना एक टीम की तरह काम करते हैं, जब ये एक साथ मिलते हैं तो इनकी ताकत एक बहुत बड़े डिश एंटीना के बराबर हो जाती है.
जब इस नई टेक्नोलॉजी का टेस्ट किया गया तो पता चला कि छोटे एंटीना पैनल्स का यह नया नेटवर्क पुराने एंटीना के मुकाबले 3 गुना ज्यादा तेजी से डेटा ट्रांसफर कर सकता है. यानी अब बिना अटके भारी-भरकम डॉक्यूमेंट्स डाउनलोड हो सकेंगे और वीडियो कॉलिंग से लेकर स्ट्रीमिंग तक सब कुछ सुपरफास्ट हो जाएगा.&amp;nbsp;
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
इस तकनीक की सबसे खास बात है कि इन्हें सेटअप करने के लिए किसी तरह के महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं है. इसे किसी भी इमारत की छत, मोबाइल टावर या ऑफिस बिल्डिंग पर लगाया जा सकता है. इससे मोबाइल टावर आसानी से सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन में बदल जाएंगे. साथ ही इससे सैटेलाइट कंपनियों की लागत कम होगी, उन्हें अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं कराना होगा. &amp;nbsp;वहीं आने वाले समय में लोगों को इससे लिमिटेड प्राइस में हाई स्पीड इंटरनेट और Direct-to-Phone Connectivity मिल सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Array, Link, Technology:, चला, गया, छत, पर, लगी, गोल, छतरी, का, जमाना, अब, डिश, एंटीना, की, जगह, लेगा, Array, Link, जानें, टेक्नोलॉजी</media:keywords>
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        <title>Call Forwarding Deactivation Code: आपके मोबाइल में भी तो नहीं लगी है कॉल फारवर्डिंग, इस सीक्रेट कोड से तुरंत करें बंद   </title>
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        <description><![CDATA[ Call Forwarding Deactivation Code:&amp;nbsp;आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग से लेकर ऑनलाइन पेमेंट, ऑफिस के काम और परिवार से बातचीत तक लगभग हर जरूरी काम फोन के जरिए ही होता है. ऐसे में अगर आपकी कॉल किसी और नंबर पर फॉरवर्ड हो जाए और आपको इसकी जानकारी भी न हो, तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है. &amp;nbsp;कई बार लोग खुद कॉल फॉरवर्डिंग चालू कर देते हैं और बाद में उसे बंद करना भूल जाते हैं. वहीं कुछ मामलों में फोन की सेटिंग्स बदल जाने से भी यह फीचर एक्टिव हो सकता है. &amp;nbsp;ऐसे में जरूरी है कि आप समय-समय पर जांचते रहें कि आपके नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग चालू है या नहीं.&amp;nbsp;
आखिर क्या होती है Call Forwarding?
कॉल फॉरवर्डिंग एक ऐसी सुविधा है जिसमें आपके मोबाइल नंबर पर आने वाली कॉल किसी दूसरे नंबर पर अपने आप ट्रांसफर हो जाती है. उदाहरण के लिए, अगर आपने अपना नंबर किसी दूसरे नंबर पर फॉरवर्ड कर रखा है, तो आपके पास आने वाली कॉल सीधे उस नंबर पर पहुंच जाएगी. यह फीचर उन लोगों के लिए काफी उपयोगी होता है जो एक से ज्यादा नंबर इस्तेमाल करते हैं या किसी खास समय में अपनी कॉल किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते हैं. हालांकि अगर यह फीचर गलती से चालू रह जाए तो आपकी जरूरी कॉल्स आपके पास आने के बजाय किसी और नंबर पर जा सकती हैं.&amp;nbsp;
जिओ, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल में कॉल फॉरवर्डिंग को एक्टिवेट यानी चालू करने के लिए यूजर्स अपने फोन में Settings &gt; Call &gt; Advanced Settings &gt; Call Forwarding में जाकर इसे ऑन कर सकते हैं. इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियां कुछ खास कोड भी उपलब्ध कराती हैं, जिनकी मदद से कॉल फॉरवर्डिंग को आसानी से एक्टिव किया जा सकता है. यूजर अपनी जरूरत के अनुसार सभी कॉल्स, बिजी कॉल्स, अनआंसर्ड कॉल्स या नेटवर्क से बाहर होने की स्थिति में कॉल फॉरवर्डिंग सेट कर सकते हैं. यही वजह है कि यह फीचर कई लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होता है, लेकिन इसकी जानकारी होना भी उतना ही जरूरी है.&amp;nbsp;
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इस सीक्रेट कोड से तुरंत करें चेक
अगर आपको शक है कि आपके फोन में कॉल फॉरवर्डिंग चालू है, तो इसे चेक करना बेहद आसान है. इसके लिए अपने फोन के डायलर में *#21# डायल करें और कॉल बटन दबाएं. इसके बाद स्क्रीन पर जानकारी दिखाई देगी कि आपके नंबर पर कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव है या नहीं. अगर किसी नंबर पर कॉल फॉरवर्ड की जा रही होगी तो उसकी जानकारी भी आपको दिखाई देगी. यह तरीका लगभग सभी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों जैसे Jio, Airtel, Vi और BSNL पर काम करता है. इससे आप कुछ ही सेकंड में अपने नंबर की स्थिति जान सकते हैं.&amp;nbsp;
कॉल फॉरवर्डिंग बंद करने का आसान तरीका
यदि आपके फोन में कॉल फॉरवर्डिंग चालू है और आप इसे बंद करना चाहते हैं, तो इसके लिए एक आसान कोड मौजूद है. अगर आप अपने फोन में जिओ, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल का सिम उपयोग करते हैं, तो फिर निम्न कोड जरिए कॉल फॉरवर्डिंग को हटा.ा जा सकता है
Jio कॉल फॉरवर्डिंग डीएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *413
unconditional कॉल फॉरवर्डिंग के लिए डीएक्टिवट कोडः *402
&amp;nbsp;बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *406
&amp;nbsp;non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *404
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः *410

Airtel कॉल फॉरवर्डिंग डिएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##21#
बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##67#
non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##61#
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##62#

Vodafone idea कॉल फॉरवर्डिंग डीएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##002#
बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##67#
non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##61#
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##62#

BSNL कॉल फॉरवर्डिंग के लिए डीएक्टिवेशन कोड

सभी इनकमिंग कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##21#
बिजी कॉल्स के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##67#
non-answerable कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##61#
अनरीचेबल कॉल के लिए डीएक्टिवेट कॉल फॉरवर्डिंग कोडः ##62#&amp;nbsp;

यह भी पढ़ेंः आपका फोन 24 घंटे रख रहा है आप पर नजर! इस सेटिंग को तुरंत करें बंद वरना बाद में पड़ेगा पछताना ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Call, Forwarding, Deactivation, Code:, आपके, मोबाइल, में, भी, तो, नहीं, लगी, है, कॉल, फारवर्डिंग, इस, सीक्रेट, कोड, से, तुरंत, करें, बंद,   </media:keywords>
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        <title>iPhone 18 Pro की बैटरी को लेकर सामने आई नई लीक, फैन्स को लगा बड़ा झटका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/iphone-18-pro-की-बैटरी-को-लेकर-सामने-आई-नई-लीक-फैन्स-को-लगा-बड़ा-झटका</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/iphone-18-pro-की-बैटरी-को-लेकर-सामने-आई-नई-लीक-फैन्स-को-लगा-बड़ा-झटका</guid>
        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro: ऐप्पल के अपकमिंग iPhone 18 Pro को लेकर एक नई लीक सामने आई है, जिसने फैन्स को निराश कर दिया है. यह लीक बताती है कि इस मॉडल में बैटरी कैपेसिटी को उतना अपग्रेड नहीं किया जाएगा, जितनी उम्मीद की जा रही थी. हालांकि, iPhone 17 Pro के मुकाबले यह मॉडल बड़ी बैटरी के साथ आएगा, लेकिन इसकी कैपेसिटी 5,000mAh से कम ही रहने की बात कही जा रही है. बता दें कि इस मॉडल को सितंबर में लॉन्च किया जाएगा. आइए जानते हैं कि बैटरी से जुड़ी क्या-क्या नई जानकारी सामने आई है.
iPhone 18 Pro के लिए दो बैटरी पैक टेस्ट कर रही है ऐप्पल
चाइनीज टिपस्टर डिजिटल चैट स्टेशन की मानें तो ऐप्पल इस मॉडल के दो बैटरी पैक टेस्ट कर रही है. अमेरिका में बिकने वाले वेरिएंट के लिए 4,288mAh की बैटरी टेस्ट की जा रही है, जबकि चीन और बाकी मार्केट वाले मॉडल के लिए 4,056mAh की बैटरी की टेस्टिंग चल रही है. दोनों में अंतर इस वजह से है क्योंकि अमेरिका में कंपनी eSIM वाले आईफोन बेचती है, जिससे सिम स्लॉट का स्पेस बच जाता है और यह बड़ा बैटरी पैक देने के काम आता है.
iPhone 17 Pro के मुकाबले कितनी बड़ी अपग्रेड?
अगर यह लीक सच साबित होती है तो अपकमिंग प्रो मॉडल में 17 Pro के मुकाबले छोटी अपग्रेड देखने को ही मिलेगी. 17 Pro मॉडल की बात करें तो इसके अमेरिकी वेरिएंट में 4,252mAh का बैटरी पैक है, जबकि फिजिकल सिम स्लॉट के साथ आने वाले आईफोन में 4,056mAh का बैटरी पैक लगा हुआ है. इस तरह देखा जाए तो दोनों जनरेशन के मॉडल की बैटरी कैपेसिटी में मामूली अंतर होगा. ऐप्पल नए मॉडल को पावर एफिशिएंट बनाकर इस अंतर को बढ़ाने पर विचार कर रही है.
ज्यादा एफिशिएंसी से बन सकती है बात
18 Pro की बैटरी में भले ही बड़ी अपग्रेड देखने को न मिले, लेकिन ऐप्पल इसे एफिशिएंट बनाने पर पूरा जोर दे रही है. कंपनी इस मॉडल में 2nm प्रोसेस पर बने A20 Pro चिपसेट को यूज करेगी, जहां एनर्जी एफिशिएंसी के मामले में काफी आगे है. यह कम पावर की खपत कर बेहतर परफॉर्मेंस देगा, जिससे फोन की बैटरी ज्यादा समय तक चलेगी. इसके अलावा ऐप्पल नए डिस्प्ले पैनल भी यूज कर सकती है, जो पावर एफिशिएंट होगा. इस तरह कंपनी हार्डवेयर को एफिशिएंट बनाकर कम कैपेसिटी वाली बैटरी से ज्यादा काम लेने की प्लानिंग के साथ आगे बढ़ रही है.
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Android फोन्स पर प्राइवेसी के लिए मिलते हैं ये धाकड़ फीचर्स, आईफोन वालों को आज भी इनका इंतजार ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Pro, की, बैटरी, को, लेकर, सामने, आई, नई, लीक, फैन्स, को, लगा, बड़ा, झटका</media:keywords>
    </item>
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        <title>आपकी इन गलतियों से जल्दी खत्म हो जाती है फोन की बैटरी! जानिए किन चीजों का रखना चाहिए ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया, ऑनलाइन पढ़ाई और मनोरंजन तक, लगभग हर काम के लिए हम फोन पर निर्भर हैं. लेकिन कई बार लोग शिकायत करते हैं कि उनका फोन बार-बार चार्ज करना पड़ता है या बैटरी पहले की तुलना में बहुत जल्दी खत्म होने लगी है. इसकी वजह हमेशा बैटरी की खराबी नहीं होती, बल्कि हमारी कुछ गलत आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं. आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में जो आपके स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ को तेजी से कम कर सकती हैं.
स्क्रीन की ब्राइटनेस हमेशा ज्यादा रखना
फोन की स्क्रीन सबसे ज्यादा बैटरी खर्च करने वाले हिस्सों में से एक है. अगर आप हर समय ब्राइटनेस को 100 प्रतिशत पर रखते हैं तो बैटरी तेजी से खत्म होगी. बेहतर होगा कि ऑटो-ब्राइटनेस फीचर का इस्तेमाल करें या जरूरत के हिसाब से स्क्रीन की रोशनी कम रखें.
बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स
कई ऐप्स ऐसे होते हैं जो फोन इस्तेमाल न करने पर भी बैकग्राउंड में एक्टिव रहते हैं. ये लगातार इंटरनेट, लोकेशन और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं जिससे बैटरी की खपत बढ़ जाती है. समय-समय पर अनावश्यक ऐप्स को बंद करना और उनकी बैकग्राउंड गतिविधियों को सीमित करना जरूरी है.
हर समय लोकेशन और ब्लूटूथ ऑन रखना
GPS, ब्लूटूथ और Wi-Fi जैसे फीचर्स लगातार चालू रहने पर बैटरी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं. यदि इनकी जरूरत नहीं है तो इन्हें बंद रखना बेहतर होता है. इससे बैटरी की बचत के साथ-साथ फोन की परफॉर्मेंस भी बेहतर बनी रहती है.
बार-बार नोटिफिकेशन आने देना
सोशल मीडिया, शॉपिंग और गेमिंग ऐप्स से आने वाली लगातार नोटिफिकेशन भी बैटरी खर्च करती हैं. हर नोटिफिकेशन के साथ स्क्रीन एक्टिव होती है और प्रोसेसर काम करता है. जिन ऐप्स की नोटिफिकेशन जरूरी नहीं हैं, उन्हें बंद कर देना चाहिए.
गलत तरीके से चार्जिंग करना
फोन को बार-बार 0 प्रतिशत तक डिस्चार्ज होने देना या पूरी रात चार्जिंग पर छोड़ देना बैटरी की सेहत को प्रभावित कर सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी को सामान्यतः 20 से 80 प्रतिशत के बीच रखना बेहतर माना जाता है. साथ ही हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले चार्जर और केबल का इस्तेमाल करना चाहिए.
पुराने सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
कई लोग फोन में आने वाले सॉफ्टवेयर अपडेट को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि कंपनियां अपडेट के जरिए बैटरी ऑप्टिमाइजेशन और परफॉर्मेंस सुधार से जुड़े फीचर्स भी जारी करती हैं. इसलिए फोन को समय-समय पर अपडेट रखना जरूरी है.
बैटरी बचाने के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि आपके फोन की बैटरी लंबे समय तक चले तो स्क्रीन ब्राइटनेस नियंत्रित रखें, अनावश्यक ऐप्स हटाएं, जरूरत न होने पर लोकेशन और ब्लूटूथ बंद रखें तथा नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल करें. छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल बैटरी बैकअप बढ़ाया जा सकता है बल्कि बैटरी की उम्र भी लंबे समय तक बरकरार रखी जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Samsung Galaxy S25 Edge पर धमाका छूट, यहां मिल रहा 40,000 रुपये से भी ज्यादा का डिस्काउंट</title>
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        <description><![CDATA[ Galaxy S25 Edge Price Drops: अगर आप कम कीमत पर प्रीमियम फोन लेना चाहते हैं तो शानदार मौका आ गया है. इस समय सैमसंग के Galaxy S25 Edge स्मार्टफोन पर 40,000 हजार रुपये से अधिक की बचत की जा सकती है. प्रीमियम लुक, दमदार फीचर्स और स्लिम प्रोफाइल वाले फोन पर इस तरह की डील पहले नहीं आई थी और ऐसा मौका दोबारा आना भी मुश्किल है. इस फोन में आपको एकदम लेटेस्ट फीचर्स मिल जाएंगे और बचत का अवसर भी मिल रहा है. आइए इसके फीचर्स और डील के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Galaxy S25 Edge के स्पेसिफिकेशंस
Galaxy S25 Edge में 6.6 इंच का डायनामिक AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है. इसमें क्वालकॉम का Snapdragon 8 Elite for Galaxy प्रोसेसर लगा है, जिसे 12GB रैम के साथ पेयर किया गया है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर और 12MP का सेंकेडरी सेंसर मिलता है. फ्रंट में वीडियो और सेल्फी के लिए 12MP का कैमरा लगा हुआ है. 3,900mAh की बैटरी वाले इस फोन में गैलेक्सी एआई फीचर्स भी हैं. सैमसंग ने इस फोन के साथ अल्ट्रा-स्लिम फोन सेगमेंट की शुरुआत की थी और इसके बाद ऐप्पल और टेक्नो समेत कई कंपनियां पतले फोन लॉन्च कर चुकी हैं.
फ्लिपकार्ट पर मिल रही धमाकेदार छूट
S25 Edge को भारत में 1,09,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. अब एक ही झटके में इसकी कीमत में बड़ी कटौती देखने को मिली है. फ्लिपकार्ट पर Galaxy S25 Edge अभी 69,999 रुपये में लिस्टेड है. 40,000 रुपये के इस फ्लैट डिस्काउंट के अलावा सेलेक्टेड क्रेडिट कार्ड्स पर 3,500 रुपये का कैशबैक भी ऑफर किया जा रहा है. फ्लिपकार्ट इस फोन पर एक्सचेंज ऑफर भी दे रही है. एक्सचेंज के बाद इस फोन को 53,000 रुपये से भी कम में खरीदा जा सकता है.&amp;nbsp;
iPhone 16 पर भी बचत का मौका
सैमसंग के S25 Edge की तरह पिछले साल सबसे ज्यादा बिकने वाले ऐप्पल के पॉपुलर मॉडल iPhone 16 पर भी डिस्काउंट मिल रहा है. iPhone 16 की इस समय कीमत 69,900 रुपये है, लेकिन क्रोमा स्टोर से आप इसे बेहद कम दाम पर खरीद सकते हैं. क्रोमा स्टोर पर बैंक कैशबैक, कूपन, एक्सचेंज वैल्यू और बोनस सब को मिलाकर यह आईफोन 43,490 रुपये में अवेलेबल है. क्रोमा पर यह ऑफर 14 जून तक अवेलेबल रहेगा. इससे पहले आईफोन खरीदकर आप इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>iOS 27 का इंतजार जल्द होगा खत्म, लेकिन इन iPhone मॉडल्स को नहीं मिलेगा अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ iOS 27 Update: ऐप्पल की iOS 27 अपडेट की पहली झलक का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. 8 जून से शुरू होने वाली ऐप्पल की वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस (WWDC) 2026 में इस अपडेट को रिवील कर दिया जाएगा. इसके साथ ऐप्पल iPadOS 27, macOS 27, watchOS 27 समेत दूसरी सॉफ्टवेयर अपडेट का भी ऐलान कर सकती है. iOS 27 के साथ सिरी के एआई वर्जन को भी रोलआउट किया जाएगा. इस अपडेट के कई फीचर्स पहले पता चल गए थे और अब सपोर्टेड डिवाइस की लिस्ट भी सामने आ गई है. आइए एक नजर डालते हैं कि इस अपडेट में क्या-क्या फीचर्स होंगे और यह किन आईफोन मॉडल को सपोर्ट करेगी.
iOS 27 Update में क्या-क्या मिलेगा?
सिरी का नया वर्जन- iOS 27 का सबसे खास फीचर सिरी का नया एआई वर्जन होगा. सिरी अब एक असिस्टेंट न रहकर चैटजीपीटी और जेमिनी की तरह एक एआई चैटबॉट के समान काम करेगा. इसमें विजुअल इंटेलीजेंस मिलने की भी पूरी-पूरी उम्मीद है, जिससे यह समझ सकेगा कि आईफोन की स्क्रीन पर क्या चल रहा है और कैमरा के जरिए भी इसे इनपुट दी जा सकेगी. सिरी के लिए अलग से ऐप भी लॉन्च की जा सकती है.
एआई एडिटिंग टूल्स और कैमरा ऐप अपग्रेड- iOS 27 से आईफोन में फोटो एडिटिंग का तरीका बदलने वाला है. नई अपडेट अपने साथ फोटो एडिटिंग के लिए एक्सटेंड, इनहैंस और रिफ्रेम के ऑप्शन्स लेकर आएगी. इनकी मदद से फोटो में एडिशनल कंटेट जनरेट और फोटोज का परस्पेक्टिव भी बदला जा सकेगा. ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि आईफोन में फोटो एडिटिंग के लिए नैनो बनाना मॉडल का सपोर्ट मिल सकता है. इसके अलावा कैमरा ऐप को भी हालिया समय की सबसे बड़ी अपग्रेड मिलने वाली है. इसमें सिरी पावर्ड कैमरा मोड और नए कस्टमाइज ऑप्शन आ रहे हैं.
सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स- iOS 27 अपडेट 5G कनेक्टिविटी को सपोर्ट करेगी. मोबाइल नेटवर्क से बाहर होने पर भी यूजर सैटेलाइट की मदद से मैसेज भेज और रिसीव कर पाएंगे. ऐप्पल मैप्स में भी नए सैटेलाइट फीचर मिलने की उम्मीद है. ये फीचर्स सारे आईफोन को न मिलकर केवल आईफोन 17 सीरीज तक ही सीमित रह सकते हैं.
इन आईफोन को नहीं मिलेगी अपडेट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, iOS 27 अपडेट आईफोन 12 के बाद लॉन्च हुए मॉडल को सपोर्ट करेगी. यानी आईफोन 12 सीरीज, आईफोन 13 सीरीज, आईफोन 14 सीरीज, आईफोन 15 सीरीज, आईफोन 16 सीरीज और आईफोन 17 सीरीज को iOS 27 से अपडेट किया जा सकता है. आईफोन 12 से पहले के आईफोन इस अपडेट के लिए कंपैटिबल नहीं होंगे.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>भारत में इस कंपनी के लाखों यूजर्स पर साइबर अटैक का खतरा, सरकार ने जारी की वॉर्निंग</title>
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        <description><![CDATA[ Microsoft Office Security Flaw Warning: अगर आप माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस यूज करते हैं तो आपके लिए जरूरी जानकारी है. सरकारी साइबर सिक्योरिटी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने वॉर्निंग जारी करते हुए कहा है कि माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में ऐसी सुरक्षा खामियां मिली हैं, जिससे सिस्टम हैक हो सकता है. इन खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स टारगेटेड सिस्टम पर हार्मफुल कोड रन कर इसका पूरा कंट्रोल अपने हाथों में ले सकते हैं. एजेंसी ने उन खामियों का भी जिक्र किया है, जिनके कारण यह खतरा पैदा हुआ है.
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में क्या खामियां मिली हैं?
सरकारी एजेंसी ने अपनी वॉर्निंग में कहा कि अनट्रस्टेड डेटा के डिसीरियलाइजेशन के कारण माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस में खामियां मिली है और अटैकर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. एजेंसी के मुताबिक, हैकर्स नेटवर्क के जरिए प्रभावित सिस्टम पर स्पेशली क्राफ्टेड डेटा भेजकर इस सिक्योरिटी कमजोरी का फायदा उठा सकता है. अगर यह अटैक सफल रहता है तो हैकर्स टारगेटेड सिस्टम में स्टोर सेंसेटिव इंफोर्मेशन एक्सेस कर, डेटा चुरा, सिस्टम में अनऑथोराइज्ड चेंज कर और टारगेटेड सिस्टम का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले सकते हैं.
दुनियाभर में माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के करोड़ों यूजर्स
माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस दुनियाभर में सबसे ज्यादा यूज होने वाला सॉफ्टवेयर सुइट है. इसे इंडिविजुअल यूजर्स के साथ-साथ बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी खूब यूज किया जाता है. डॉक्यूमेंट, प्रेजेंटेशन और स्प्रेडशीट आदि तैयार करने के लिए यह ज्यादा इस्तेमाल होता है. एजेंसी ने बताया कि उसकी वॉर्निंग इंडिविजुअल यूजर के साथ-साथ ऑर्गेनाइजेशन्स के लिए भी है. इन खामियों का खतरा ज्यादा है और इसे यूज करने वालों को टारगेट किया जा सकता है.
यूजर्स के पास बचाव के लिए क्या तरीका?
CERT-In ने इस खतरे से बचाव का तरीका भी सुझाया है. एजेंसी ने सुझाव दिया है कि माइक्रोसॉफ्ट यूजर्स को कंपनी की तरफ से जारी लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट को इंस्टॉल कर लेना चाहिए. इस अपडेट की मदद से ये खामियां दूर हो जाएंगी और साइबर अटैक का खतरा नहीं रहेगा. CERT-In ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसे खतरों से बचाव के लिए ऐप्स और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखना चाहिए.
ये हैं सॉफ्टवेयर अपडेट रखने के फायदे
चाहे आपके मोबाइल की ऐप्स हों या सिस्टम के सॉफ्टवेयर, इन्हें हमेशा अपेडेटेड रखना चाहिए. इससे न सिर्फ आपको समय-समय पर नए फीचर्स मिलते रहते हैं बल्कि साइबर खतरों से भी सुरक्षा मिलती है. सॉफ्टवेयर अपडेट रखने से साइबर अटैक की चिंता नहीं रहती और आपके डिवाइस भी बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>ChatGPT ने रचा इतिहास, यूजर्स के मामले में तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT Reaches 1 Billion Monthly Users: OpenAI की एआई ऐप ChatGPT ने नया इतिहास रच दिया है. यह एक बिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स तक पहुंचने वाली पहली एआई ऐप बन गई है. गूगल मैप्स, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब आदि को पछाड़कर सबसे कम समय में यह उपलब्धि हासिल करने वाली भी पहली ऐप है. ChatGPT को 2023 में लॉन्च किया गया था और तीन सालों में ही इस ऐप के मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या एक बिलियन को पार कर गई है. टिकटॉक को यहां तक पहुंचने में पांच और इंस्टाग्राम को आठ साल लगे थे. यह दिखाता है कि किस तेजी से एआई अब लोगों के जीवन में अपनी जगह बनाती जा रही है.
एआई सेगमेंट में मुश्किल हो रहा है मुकाबला
एआई सेगमेंट में कंपीटिशन बढ़ने के कारण मुकाबला कड़ा होता जा रहा है. एक्टिव यूजर्स के मामले में चैटजीपीटी सबसे आगे बनी हुई है, लेकिन उसकी राइवल ऐप्स भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं. एंथ्रोपिक की Claude के मंथली एक्टिव यूजर्स 56 मिलियन हो गए हैं. Claude ने सालाना आधार पर 640 प्रतिशत की ग्रोथ की है, वहीं चैटजीपीटी केवल 62 प्रतिशत इजाफा ही कर पाई है. यह दिखाता है कि चैटजीपीटी के लिए आगे का सफर आसान नहीं रहने वाला है. डेटा से यह भी पता चला है कि अमेरिका में जिन यूजर्स ने Claude ऐप इंस्टॉल की है, एक महीने बाद चैटजीपीटी पर उनका टाइम स्पेंट 5 प्रतिशत कम हो जाता है.
IPO की तैयारियों में जुटीं दोनों कंपनियां
एआई की रेस में एक-दूसरे का मुकाबले कर रहीं OpenAI और एंथ्रोपिक दोनों ही पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही हैं. एंथ्रोपिक ने अमेरिका में IPO लाने की प्रोसेस शुरू कर दी है वहीं OpenAI भी अगले कुछ दिनों में अपने IPO का ऐलान कर सकती है. अब ChatGPT के यह माइलस्टोन हासिल करने के बाद OpenAI की स्थिति और मजबूत हुई है.
इस देश में फ्री में मिल रहा है ChatGPT Plus का सब्सक्रिप्शन
पिछले महीने ही खबर आई थी कि OpenAI ने माल्टा की सरकार के साथ मिलकर एक नया अभियान शुरू किया है. इसके तहत फ्री एआई लिटरेसी कोर्स पूरा करने वाले माल्टा के हर नागरिक को एक साल तक ChatGPT Plus का फ्री सब्सक्रिप्शन दिया जाएगा. विदेशों में रहने वाले माल्टा के नागरिकों के लिए भी यह ऑफर लागू होगा. माल्टा के बाद UAE में भी ऐसा अभियान चलाया जा सकता है. कंपनी भारत में लोगों को ChatGPT Go का सब्सक्रिप्शन फ्री ऑफर कर रही है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>इस देश में सबसे तेज चलता है इंटरनेट! जानिए स्पीड के मामले में भारत की क्या है रैंक</title>
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        <description><![CDATA[ इस देश में सबसे तेज चलता है इंटरनेट! जानिए स्पीड के मामले में भारत की क्या है रैंक ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>AI बताएगा कौन&amp;सी कॉल है फर्जी, Google का यह फीचर बचा देगा आपकी मेहनत की कमाई</title>
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        <description><![CDATA[ Google Fake Call Detection Feature: एंड्रॉयड फोन पर अब फर्जी कॉल का झंझट कम होने जा रहा है. गूगल ने एंड्रॉयड के लिए एक नए फेक कॉल डिटेक्शन फीचर को इंट्रोड्यूस किया है. इसे यूजर को एआई की मदद से कॉल के जरिए होने वाले स्कैम से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है. दरअसल, पिछले कुछ समय से स्कैमर एआई की मदद से आवाज की नकल कर लोगों को टारगेट कर रहे हैं. एआई एजेंट्स और वॉइस क्लोनिंग टूल्स अवेलेबल होने के बाद यह खतरा और बढ़ गया है. इसे देखते हुए गूगल यह फीचर लेकर आई है. यह अपनी तरह का पहला प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो संदिग्ध कॉल को डिटेक्ट कर यूजर को अलर्ट कर देगा.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा यह फीचर?
एआई से चलने वाला यह फीचर बाई डिफॉल्ट ऑन रहेगा और बैकग्राउंड में अपना काम करेगा. इसके काम करने का तरीका बड़ा आसान है. जब कोई कॉन्टैक्ट गूगल की फोन ऐप को यूज करते हुए आपको कॉल करेगा तो उसके डिवाइस से आपके डिवाइस पर एक साइलेंट कंफर्मेशन सिग्नल भेजा जाएगा. इसकी मदद से आपका डिवाइस यह वेरिफाई कर पाएगा कि यह कॉल असली कॉन्टैक्ट से आई है और कोई स्कैमर आपके कॉन्टैक्ट की आवाज की नकल कर आपसे संपर्क नहीं कर रहा है. अगर कोई स्कैमर आपका कोई जानकार बनकर आपको कॉल करेगा तो उसके डिवाइस से यह सिग्नल नहीं आएगा. इसके बाद आपका फोन उस कॉन्टैक्ट से वेरिफाई करेगा. अगर उसे वहां से वापस सिग्नल नहीं मिलेगा तो आपकी फोन स्क्रीन पर वॉर्निंग नजर आएगी, जिसमें आपको कॉल कट करने की सलाह दी जाएगी. अगर आप यह फीचर यूज नहीं करना चाहते तो फोन ऐप की सेटिंग में जाकर इसे बंद किया जा सकता है.
किन फोन में मिलेगा यह फीचर?
गूगल की तरफ से जानकारी दी गई है कि फेक कॉल डिटेक्शन फीचर को दुनियाभर में रोल आउट करना शुरू कर दिया है. सबसे पहले पिक्सल डिवाइस पर यह फीचर आएगा और उसके बाद एंड्रॉयड 12 के बाद के वर्जन यूज करने वाले स्मार्टफोन के लिए भी इसे अवेलेबल करवा दिया जाएगा. बता दें कि गूगल की फोन ऐप कई एंड्रॉयड डिवाइसेस में डिफॉल्ट होती है. अगर आप अपने एंड्रॉयड डिवाइस में कोई और फोन ऐप यूज कर रहे हैं तो प्ले स्टोर से Phone by Google कर सकते हैं. इस फीचर का फायदा उठाने के लिए इस ऐप को डिफॉल्ट सेट करने की जरूरत पड़ेगी.
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        <title>चांद पर बसेंगे इंसान? NASA की नई तकनीक ने बढ़ाई Moon Colony की उम्मीदें, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ NASA Regenerative Fuel Cell: इंसानों को चांद पर बसाने का सपना अब पहले से ज्यादा वास्तविक नजर आने लगा है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA एक ऐसी नई ऊर्जा तकनीक पर काम कर रही है जो भविष्य में चांद और मंगल ग्रह पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी को संभव बना सकती है. यह तकनीक है रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल जिसे NASA अपने मिशनों के लिए एक गेम-चेंजर मान रहा है.
आखिर क्या है NASA की नई रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल?
रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल को एक विशेष प्रकार की रिचार्जेबल एनर्जी सिस्टम कहा जा सकता है. यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली, गर्मी और पानी पैदा करती है. जब इसे दोबारा चार्ज करना होता है तो यही पानी फिर से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित कर दिया जाता है जिससे ऊर्जा चक्र लगातार चलता रहता है.
NASA का मानना है कि यह तकनीक चंद्रमा पर ऊर्जा आपूर्ति की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान कर सकती है. खासकर उन क्षेत्रों में जहां लंबे समय तक सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती और सोलर पैनल प्रभावी नहीं रह जाते.
चांद पर ऊर्जा की समस्या क्यों है इतनी बड़ी?
चंद्रमा पर दिन और रात का चक्र पृथ्वी की तुलना में काफी अलग है. वहां एक दिन और एक रात लगभग 14-14 पृथ्वी दिनों के बराबर होते हैं. इसका मतलब है कि कई क्षेत्रों में लगातार दो सप्ताह तक अंधेरा छाया रह सकता है.
इतने लंबे अंधेरे में सौर ऊर्जा पर निर्भर रहना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा तापमान भी बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है जो डिवाइसेज और इंसान दोनों के लिए चुनौती बनता है. यही वजह है कि NASA ऐसे ऊर्जा स्रोतों की तलाश में है जो लगातार बिजली उपलब्ध करा सकें.
Artemis मिशन के लिए होगी अहम
NASA का Artemis कार्यक्रम इंसानों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहा है. हाल ही में Artemis II मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के आसपास भेजने का महत्वपूर्ण चरण पूरा किया गया. आने वाले वर्षों में NASA चंद्रमा पर नियमित मिशन, वैज्ञानिक अनुसंधान और परमानेंट घर बनाने की योजना बना रहा है. ऐसे में नई फ्यूल सेल तकनीक रोवर्स, वैज्ञानिक डिवाइस और रहने योग्य मॉड्यूल्स को ऊर्जा प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
आकार में बड़ी लेकिन क्षमता में और भी विशाल
NASA द्वारा विकसित किया जा रहा यह सिस्टम आकार में एक छोटी कार जितना बड़ा है. इसमें करीब 1,000 से अधिक पुर्जे और सैकड़ों सेंसर लगे हुए हैं. इसके बावजूद वैज्ञानिकों का कहना है कि समान क्षमता वाली पुरानी बैटरी सिस्टम की तुलना में इसका वजन अपेक्षाकृत कम है. फिलहाल वैज्ञानिक इसकी कार्यक्षमता बढ़ाने पर काम कर रहे हैं.
चंद्रमा पर बसावट के लिए क्यों जरूरी है यह तकनीक?
पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियां लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष मिशनों के लिए पर्याप्त नहीं मानी जातीं. उनकी ऊर्जा स्टोर करने की क्षमता सीमित होती है और उन्हें बार-बार चार्ज करने की आवश्यकता पड़ती है. इसके मुकाबले रीजेनेरेटिव फ्यूल सेल समान वजन वाली बैटरियों की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा स्टोर कर सकती है. यही कारण है कि NASA इसे भविष्य की चंद्र बस्तियों और लंबी अवधि के मिशनों के लिए एक मजबूत विकल्प मान रहा है.
2030 तक बन सकती है पहली स्थायी मून कॉलोनी
NASA की दीर्घकालिक योजना चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की है. एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में कई मिशनों, दर्जनों लॉन्च और अरबों डॉलर के निवेश के बाद चंद्रमा पर पहली स्थायी कॉलोनी स्थापित की जा सकेगी.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Single Vs Dual Inverter AC: कौन&amp;सी तकनीक देगी बेहतर कूलिंग और बिजली बिल में राहत, जानिए किसे खरीदने में है फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Single Vs Dual Inverter AC: भीषण गर्मी के दौर में एयर कंडीशनर अब सिर्फ लग्जरी नहीं बल्कि घरों की एक अहम जरूरत बन चुका है. बढ़ती मांग के साथ कंपनियां भी नई-नई तकनीकों वाले AC बाजार में उतार रही हैं. इन्हीं में सबसे ज्यादा चर्चा सिंगल इन्वर्टर और ड्यूल इन्वर्टर AC की होती है. कई लोग ड्यूल इन्वर्टर को सबसे बेहतर बताते हैं जबकि कुछ के अनुसार सिंगल इन्वर्टर भी पर्याप्त है. ऐसे में नया AC खरीदने से पहले इन दोनों तकनीकों के बीच का अंतर समझना जरूरी हो जाता है.
सिंगल इन्वर्टर AC कैसे काम करता है
सिंगल इन्वर्टर AC में एक कंप्रेसर मोटर होती है जो कमरे के तापमान के अनुसार अपनी स्पीड को कंट्रोल करती रहती है. जब कमरे का तापमान तय स्तर तक पहुंच जाता है तो कंप्रेसर की स्पीड कम हो जाती है और जरूरत पड़ने पर फिर बढ़ जाती है. इस तकनीक की वजह से AC बार-बार बंद और चालू नहीं होता जिससे बिजली की खपत कम होती है और कमरे का तापमान भी संतुलित बना रहता है. यही कारण है कि यह पारंपरिक नॉन-इन्वर्टर AC की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल माना जाता है.
ड्यूल इन्वर्टर AC क्यों माना जाता है एडवांस?
ड्यूल इन्वर्टर AC में दो रोटरी सिस्टम या दोहरे मैकेनिज्म वाला कंप्रेसर इस्तेमाल किया जाता है. इससे कंप्रेसर पर पड़ने वाला दबाव संतुलित रहता है और मशीन अधिक स्मूद तरीके से काम करती है. यह तकनीक कमरे को कम समय में ठंडा करने में सक्षम होती है और तापमान को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखती है. खासतौर पर रात के समय इसका फायदा महसूस होता है क्योंकि तापमान में बार-बार बदलाव नहीं होता और लगातार आरामदायक माहौल बना रहता है.
बिजली बचाने में कौन आगे है?
ऊर्जा दक्षता के मामले में ड्यूल इन्वर्टर AC को थोड़ा बेहतर माना जाता है. इसका कंप्रेसर बेहद कम स्पीड पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है जिससे बिजली की खपत कम होती है. यदि घर में AC का इस्तेमाल रोजाना कई घंटों तक या पूरी रात किया जाता है तो ड्यूल इन्वर्टर मॉडल लंबे समय में बिजली बिल कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि, जिन लोगों का इस्तेमाल सीमित है और AC केवल कुछ घंटों के लिए चलता है उनके लिए सिंगल इन्वर्टर AC भी पर्याप्त और किफायती विकल्प साबित हो सकता है.
कूलिंग और शोर के मामले में अंतर
ड्यूल इन्वर्टर AC की सबसे बड़ी खासियत इसकी शांत कार्यप्रणाली है. इसका कंप्रेसर और आउटडोर यूनिट कम कंपन पैदा करते हैं जिससे शोर भी कम सुनाई देता है. साथ ही यह तेजी से कूलिंग देने में सक्षम होता है. दूसरी ओर, सिंगल इन्वर्टर AC भी अच्छी कूलिंग देता है लेकिन ड्यूल इन्वर्टर जैसी स्मूद और साइलेंट परफॉर्मेंस नहीं दे पाता.
कौन-सा AC खरीदना रहेगा सही?
अगर आपका बजट थोड़ा ज्यादा है और आप AC का इस्तेमाल नियमित रूप से लंबे समय तक करते हैं तो ड्यूल इन्वर्टर AC बेहतर निवेश साबित हो सकता है. वहीं, यदि आपका बजट सीमित है और इस्तेमाल भी कम है तो सिंगल इन्वर्टर AC आपकी जरूरतों को अच्छी तरह पूरा कर सकता है.
खरीदने से पहले इन बातों पर जरूर दें ध्यान
सिर्फ इन्वर्टर तकनीक देखकर AC चुनना सही फैसला नहीं होगा. खरीदारी से पहले BEE स्टार रेटिंग और ISEER स्कोर जरूर जांचें. कई बार बेहतर स्टार रेटिंग वाला सिंगल इन्वर्टर AC, कम रेटिंग वाले ड्यूल इन्वर्टर मॉडल से भी अधिक बिजली बचा सकता है. इसलिए सही चुनाव वही होगा जो आपके इस्तेमाल, बजट और बिजली बचत की जरूरतों के अनुरूप हो.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>WiFi Speed Boost Tips: घर पर लगा Wi&amp;FI बहुत स्लो है? अपने राउटर में तुरंत बदलिए ये 4 सेटिंग्स</title>
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        <description><![CDATA[ WiFi Speed Boost Tips: घर पर लगा Wi-FI बहुत स्लो है? अपने राउटर में तुरंत बदलिए ये 4 सेटिंग्स ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>iOS 27 कब होगा रिलीज? जानिए आपके iPhone में Apple की नई AI Siri कब तक पहुंचेगी</title>
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        <description><![CDATA[ iOS 27: Apple एक बार फिर अपने सालाना डेवलपर इवेंट WWDC में बड़े ऐलान करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी इस बार iOS 27, macOS 27 और अन्य नए सॉफ्टवेयर अपडेट पेश करेगी. हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा Siri के नए AI अवतार को लेकर है जिसे Apple पहले से कहीं अधिक स्मार्ट और उपयोगी बनाने की दिशा में काम कर रहा है. माना जा रहा है कि iOS 27 के साथ Siri सिर्फ एक वॉयस असिस्टेंट नहीं बल्कि एक पूर्ण AI एजेंट के रूप में सामने आ सकती है.
iOS 27 कब तक होगा उपलब्ध?
अगर Apple अपने पुराने लॉन्च पैटर्न पर कायम रहता है तो WWDC 2026 की शुरुआत के तुरंत बाद 8 जून को iOS 27 का पहला डेवलपर बीटा जारी किया जा सकता है. इसके बाद जुलाई में पब्लिक बीटा वर्जन आने की संभावना है. फाइनल एडिशन सितंबर 2026 में लॉन्च होने वाले नए iPhone 18 सीरीज के साथ पेश किया जा सकता है. इसके कुछ दिनों बाद पुराने सपोर्टेड iPhone मॉडल्स को भी यह अपडेट मिलना शुरू हो जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple Siri के नए AI फीचर्स को सितंबर तक यूजर्स के लिए उपलब्ध कराने की कोशिश में है.
Siri में होगा अब तक का सबसे बड़ा बदलाव
Apple ने पहली बार WWDC 2024 में Siri के एडवांस्ड AI वर्जन की झलक दिखाई थी. हालांकि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कंपनी को कई तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. अब माना जा रहा है कि Apple ने AI क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए बाहरी तकनीकों का भी सहारा लिया है.
नई Siri यूजर की व्यक्तिगत जानकारी और पसंद को बेहतर ढंग से समझ सकेगी. यह स्क्रीन पर मौजूद कंटेंट का विश्लेषण करेगी और कई काम अपने आप पूरा करने में सक्षम होगी. यानी Siri पहले की तुलना में कहीं ज्यादा स्मार्ट और उपयोगी बनने जा रही है.
ChatGPT जैसी नई Siri App मिलने की संभावना
iOS 27 के साथ Apple एक नई Siri ऐप भी पेश कर सकता है. यह पारंपरिक वॉयस असिस्टेंट से अलग होकर आधुनिक AI चैटबॉट की तरह काम करेगी. रिपोर्ट्स के अनुसार इस ऐप में वॉयस मोड को ऑन या ऑफ करने का विकल्प मिलेगा. यह पुरानी बातचीत को याद रखने में सक्षम होगी और चैट हिस्ट्री को ऑटोमैटिक डिलीट करने का फीचर भी दे सकती है. इसके अलावा यूजर्स फोटो और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करके Siri से उनकी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे.
Dynamic Island में नजर आएगी नई Siri
Apple Siri के इंटरफेस को भी पूरी तरह बदल सकता है. बताया जा रहा है कि नई Siri को सीधे Dynamic Island के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा. यूजर जब स्क्रीन के ऊपरी हिस्से से नीचे की ओर स्वाइप करेगा तब Search or Ask नाम का नया इंटरफेस खुलेगा. यहां से वेब सर्च करने, ऐप्स खोलने, मैसेज भेजने, कैलेंडर इवेंट बनाने और नोट्स खोजने जैसे कई काम सीधे Siri के जरिए किए जा सकेंगे.
सर्च या कमांड के परिणाम Dynamic Island से निकलने वाले इंटरैक्टिव कार्ड के रूप में दिखाई देंगे. वहीं आगे स्वाइप करने पर चैटबॉट स्टाइल बातचीत शुरू हो सकेगी.
कैमरा ऐप में भी मिलेगा AI का दम
iOS 27 का एक और बड़ा आकर्षण कैमरा ऐप में AI इंटीग्रेशन हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूजर कैमरे को किसी वस्तु, उत्पाद या प्रसिद्ध स्थान की ओर पॉइंट करेगा और Siri तुरंत उसकी पहचान कर जानकारी उपलब्ध करा सकेगी.
इसके लिए Apple बाहरी AI सेवाओं जैसे उन्नत जनरेटिव AI मॉडल्स का इस्तेमाल कर सकता है. इससे कैमरा सिर्फ फोटो खींचने का माध्यम नहीं रहेगा बल्कि एक विजुअल सर्च टूल भी बन जाएगा.
कैमरा इंटरफेस होगा ज्यादा कस्टमाइजेबल
Apple कैमरा ऐप के डिजाइन में भी बड़े बदलाव कर सकता है. वर्तमान में मिलने वाले कुछ फिक्स्ड शॉर्टकट्स की जगह यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार कैमरा कंट्रोल्स को कस्टमाइज कर सकेंगे. नई Add Widgets सुविधा के जरिए Night Mode, Timer, Depth Control और अन्य प्रोफेशनल कैमरा सेटिंग्स को अपनी पसंद के अनुसार व्यवस्थित किया जा सकेगा. इससे फोटोग्राफी का अनुभव और बेहतर होने की उम्मीद है.
Photos ऐप में आएंगे नए AI एडिटिंग टूल्स
Apple अपने Photos ऐप को भी AI फीचर्स से लैस करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी Reframe और Extend जैसे नए एडिटिंग टूल्स पर काम कर रही है. इनकी मदद से तस्वीरों को बेहतर फ्रेम में एडजस्ट करना और फोटो के आसपास अतिरिक्त कंटेंट जोड़ना आसान हो सकता है. इसके अलावा Apple ऐसी तकनीक पर भी काम कर रहा है जिसमें यूजर सिर्फ बोलकर या टेक्स्ट लिखकर फोटो एडिट कर सकेगा.
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति फोटो से किसी अनचाहे ऑब्जेक्ट को हटाना चाहता है या रंग बदलना चाहता है तो उसे केवल निर्देश देना होगा और AI बाकी काम खुद कर देगा. हालांकि यह फीचर शुरुआती iOS 27 रिलीज का हिस्सा होगा या नहीं इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है.
क्या iOS 27 Apple के लिए गेम-चेंजर साबित होगा?
iOS 27 को Apple के सबसे बड़े AI अपडेट्स में से एक माना जा रहा है. नई Siri, स्मार्ट कैमरा फीचर्स, Dynamic Island इंटीग्रेशन और AI आधारित फोटो एडिटिंग टूल्स इसे अब तक के सबसे महत्वपूर्ण iPhone अपडेट्स में शामिल कर सकते हैं. यदि ये सभी फीचर्स तय समय पर लॉन्च होते हैं तो iPhone यूजर्स का अनुभव पहले से काफी अलग और अधिक स्मार्ट हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>भारत में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा, 4 साल में लगभग दोगुना हुआ आंकड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ Internet Use In Indian Women: पिछले कुछ सालों में भारत में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई है. छठे नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2023-24) में सामने आया है कि देश में करीब 64 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने जीवन में कभी न कभी इंटरनेट यूज किया है. 2019-21 के दौरान हुए NFHS-5 में यह संख्या 33. प्रतिशत थी. यानी 4-5 साल में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या में तेज उछाल आया है. शहरी महिलाएं इस मामले में ग्रामीण महिलाओं से आगे हैं. आइए जानते हैं कि इंटरनेट और मोबाइल यूज को लेकर सर्वे में और क्या-क्या सामने आया है.
शहरों में डिजिटल पहुंच ज्यादा
NHFS-6 में इंटरनेट यूज करने वाली महिलाओं की संख्या में इजाफा देखा गया है. इसके साथ ही शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच डिजिटल पहुंच को लेकर बड़ा अंतर देखने को मिला है. करीब 77.3 प्रतिशत शहरी महिलाओं ने जीवन में कम से कम एक बार इंटरनेट यूज करने की बात कही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 58.6 प्रतिशत ही है. यानी ग्रामीण इलाकों की महिलाओं की इंटरनेट तक पहुंच शहरी महिलाओं से काफी कम है. यह दिखाता है कि देश में महिलाओं और लड़कियों के लिए इंटरनेट की एक्सेस आसान हुई है, लेकिन अभी भी शहरी और ग्रामीण इलाकों में अंतर जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं. इंटरनेट के साथ मोबाइल यूज को लेकर भी यही पैटर्न नजर आता है.&amp;nbsp;
मोबाइल यूज के मामले में भी शहरी महिलाएं आगे
इंटरनेट यूज की तरह मोबाइल यूज के मामले में भी शहरी महिलाएं आगे हैं. सर्वे के मुताबिक, देश की 63.6 प्रतिशत महिलाओं ने अपना मोबाइल फोन होने की बात कही. शहरी इलाकों की 77.6 प्रतिशत महिलाओं के पास अपना फोन है, जबकि ग्रामीण इलाकों में केवल 57.4 प्रतिशत महिलाओं के पास ही फोन है.&amp;nbsp;
भारत में कुल कितने इंटरनेट यूजर्स?
भारत में इंटरनेट यूजर्स की कुल संख्या एक अरब के पास पहुंच गई है. इस साल जनवरी में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक्टिव इंटरनेट यूजर्स की संख्या लगभग 96 करोड़ थी. इनमें से करीब 55 करोड़ यूजर्स ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. वहीं अगर पूरी दुनिया की बात करें तो चीन सबसे ज्यादा इंटरनेट यूजर्स के साथ टॉप पर बना हुआ है. पिछले साल के अंत तक चीन में इंटरनेट यूज करने वाले लोगों की संख्या 1.3 अरब हो गई थी. यहां 80 प्रतिशत से अधिक लोगों तक इंटरनेट पहुंच चुका है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>किचन से बेडरूम तक बदल देंगे घर का माहौल! ये 5 स्मार्ट गैजेट्स बचाएंगे हजारों रुपये</title>
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        <description><![CDATA[ Smart Gadgets: आज के समय में बढ़ते बिजली बिल, खाने की बर्बादी और प्लास्टिक कचरे जैसी समस्याएं लगभग हर घर की चिंता बन चुकी हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है जिससे मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. हालांकि, नई स्मार्ट टेक्नोलॉजी की मदद से इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
अगर आप अपने घर को आधुनिक और सुविधाजनक बनाना चाहते हैं तो कुछ स्मार्ट उपकरण आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. ये गैजेट्स न केवल समय और ऊर्जा बचाते हैं बल्कि पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी निभाने में भी मदद करते हैं.
Smart Water Purifier
आज भी कई लोग रोजाना पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर खरीदते हैं जिससे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा पैदा होता है. इसका असर जेब और पर्यावरण दोनों पर पड़ता है. स्मार्ट वॉटर प्यूरीफायर इस समस्या का बेहतर समाधान हो सकते हैं. एडवांस प्यूरीफायर मोबाइल ऐप से कनेक्ट होकर पानी की क्वालिटी, फिल्टर की स्थिति और दैनिक इस्तेमाल की जानकारी उपलब्ध कराते हैं. इससे आपको साफ पानी तो मिलता ही है, साथ ही बार-बार बोतलबंद पानी खरीदने की जरूरत भी कम हो जाती है.
Air Purifier
घर के अंदर की हवा भी कई बार बाहर की तुलना में अधिक प्रदूषित हो सकती है. धूल, पराग कण और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्व स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं. स्मार्ट एयर प्यूरीफायर वातावरण की गुणवत्ता को लगातार मॉनिटर करते हैं और जरूरत के अनुसार अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाते या घटाते हैं. इससे हवा साफ रहती है और बिजली की खपत भी नियंत्रित रहती है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों वाले घरों में यह उपकरण काफी उपयोगी साबित हो सकता है.
Robotic Vaccum Cleaner
घर की नियमित सफाई में काफी समय और ऊर्जा खर्च होती है. पारंपरिक वैक्यूम क्लीनर जहां अधिक बिजली लेते हैं वहीं नई पीढ़ी के रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर कम ऊर्जा में बेहतर सफाई प्रदान करते हैं. ये डिवाइस सेंसर और मैपिंग तकनीक की मदद से पूरे घर का नक्शा तैयार कर सफाई करते हैं. इससे बार-बार सफाई उत्पादों और केमिकल क्लीनर्स के इस्तेमाल की जरूरत भी कम हो जाती है.
Smart Inverter AC
भीषण गर्मी में एयर कंडीशनर लगभग हर घर की जरूरत बन चुका है. लेकिन इसके साथ आने वाला भारी बिजली बिल लोगों की चिंता बढ़ा देता है. स्मार्ट इन्वर्टर एसी कमरे के तापमान को लगातार मॉनिटर करता है और उसी हिसाब से कंप्रेसर की गति को एडजस्ट करता है. इससे बिजली की अनावश्यक खपत कम होती है. कई मॉडलों में वाई-फाई कंट्रोल, वॉइस कमांड और स्लीप मोड जैसे फीचर्स भी मिलते हैं जो इस्तेमाल को और आसान बना देते हैं.
AI Smart Fridge
अक्सर लोग फ्रिज में रखे खाद्य पदार्थों को भूल जाते हैं जिसके कारण वे खराब हो जाते हैं और फूड वेस्टेज बढ़ जाता है. नई पीढ़ी के स्मार्ट रेफ्रिजरेटर कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस होते हैं. ये आपको मोबाइल के जरिए फ्रिज के अंदर रखी चीजों की जानकारी दिखा सकते हैं. कुछ मॉडल एक्सपायरी डेट पर नजर रखते हैं और उपलब्ध सामग्री के आधार पर रेसिपी सुझाव भी देते हैं. इससे खाने की बर्बादी कम होती है और खरीदारी की बेहतर योजना बनाना आसान हो जाता है.
स्मार्ट गैजेट्स क्यों हैं फायदेमंद?
स्मार्ट होम डिवाइस केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं बनाए गए हैं बल्कि ये बिजली, पानी और अन्य संसाधनों की बचत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सही गैजेट्स का चुनाव करके आप अपने घर को आधुनिक बना सकते हैं मासिक खर्च कम कर सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं. गर्मियों के इस मौसम में ये स्मार्ट उपकरण आपके घर को ज्यादा आरामदायक और ऊर्जा-कुशल बनाने में मदद कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>8GB, 12GB या 16GB, नए फोन में कितनी रैम होनी चाहिए और क्या है इसकी जरूरत? यहां जानें सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ How Much RAM is Required In Phone: कुछ साल पहले तक फोन में 4GB रैम को काफी समझा जाता था. 6GB और 8GB का मतलब था कि फोन में कुछ भी किया जा सकता है, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं और खासकर ऑन-डिवाइस एआई फीचर्स आने के बाद रैम की जरूरत भी बढ़ गई है. यही कारण है कि अब कंपनियां 12 और 16GB तक की रैम वाले मॉडल लॉन्च करने लगी हैं. आज हम जानेंगे कि फोन में रैम की जरूरत क्यों होती है और अगर आप अब नया फोन ले रहे हैं तो उसमें कम से कम कितनी रैम होनी चाहिए.
फोन में क्यों पड़ती है रैम की जरूरत?
RAM यानी रैंडम मेमोरी एक्सेस. यह फोन का टेंपरेरी वर्कस्पेस होता है. फोन में खुलीं ऐप्स, टैब्स और सारी प्रोसेस रैम पर ही रन करती हैं. ज्यादा रैम होने का मतलब है कि आप फोन में एक साथ ज्यादा ऐप्स और प्रोसेस ओपन कर सकते हैं. यानी ज्यादा रैम होने पर मल्टीटास्किंग आसान हो जाती है. रैम टेंपरेरी तौर पर उतना ही डेटा होल्ड करती है, जितना ऑपरेटिंग सिस्टम और फोन में ओपन ऐप को जरूरत है. फोन ऑफ होने पर रैम का डेटा इरेज हो जाता है.
फोन में कितनी रैम होनी चाहिए?
अगर आप नया फोन ले रहे हैं और इसे बेसिक टास्क के लिए यूज करना चाहते हैं तो कम से कम 8GB वाले ऑप्शन को चुनें. इससे ऐप्स रन करने, फोटो लेने और मल्टीटास्किंग में फोन अटकेगा नहीं. अब फुल एंड्रॉयड सर्विस के लिए भी रैम की रिक्वायरमेंट कम से कम 6GB हो गई है. इसलिए थोड़ा ज्यादा स्पेस ही ठीक रहता है, लेकिन अगर आप एआई फीचर्स यूज करना चाहते हैं तो आपको ज्यादा रैम की जरूरत पड़ेगी. अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज कर रहे हैं तो हो सकता है कि 12GB रैम भी आपके लिए कम पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि गूगल के जेमिनी इंटेलीजेंस के लिए कम से कम 12GB रैम और लेटेस्ट प्रोसेसर होना जरूरी है. जेमिनी इंटेलीजेंस के फीचर ऑन-डिवाइस प्रोसेस कंप्लीट करते हैं, इसलिए ज्यादा रैम की जरूरत है.&amp;nbsp;
आईफोन का क्या हाल है?
ऐप्पल भी पिछले कुछ सालों से धीरे-धीरे रैम में इजाफा कर रही है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि iPhone 18 Pro Max को 12GB रैम के साथ लॉन्च किया जा सकता है. अगर ऐप्पल इंटेलीजेंस की बात करें तो इसे 8GB रैम की जरूरत पड़ती है.
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>क्या AI भी बन जाएगा अगला डॉट&amp;कॉम क्रैश? फूट गया बुलबुला तो हिल सकती है दुनिया की अर्थव्यवस्था, जानिए क्या है मामला</title>
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        <description><![CDATA[ AI Bubble: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आधुनिक दौर की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांतियों में गिना जा रहा है. जिस तरह इंटरनेट ने दुनिया को बदल दिया था उसी तरह एआई को भी भविष्य की दिशा तय करने वाली तकनीक माना जा रहा है. आज लगभग हर बड़ी और छोटी टेक कंपनी किसी न किसी रूप में एआई से जुड़ना चाहती है. निवेशकों का उत्साह भी चरम पर है और अरबों डॉलर इस क्षेत्र में लगाए जा रहे हैं.
लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे कुछ चिंताजनक संकेत भी दिखाई दे रहे हैं. कई बड़ी कंपनियां स्वीकार कर चुकी हैं कि एआई पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है जबकि उससे मिलने वाली कमाई अभी उस गति से नहीं बढ़ रही. यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञों को 1990 के दशक के डॉट-कॉम बबल की याद आने लगी है.
आखिर क्या होता है बबल?
आर्थिक दुनिया में बबल उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी कंपनी, सेक्टर या संपत्ति की कीमत उसकी वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक बढ़ जाती है. निवेशकों की उम्मीदें इतनी ऊंची हो जाती हैं कि कीमतें वास्तविकता से कट जाती हैं. जब लोगों को एहसास होता है कि मूल्यांकन वास्तविक नहीं है तो अचानक गिरावट शुरू हो जाती है और बबल फूट जाता है.
डॉट-कॉम बबल क्या था?
1990 के दशक के मध्य में इंटरनेट आम लोगों तक पहुंचना शुरू हुआ. उस समय निवेशकों को विश्वास था कि इंटरनेट भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है. इसी उम्मीद में इंटरनेट आधारित कंपनियों में भारी निवेश होने लगा. कई ऐसी कंपनियां भी अरबों डॉलर की वैल्यू हासिल करने लगीं जिनके पास न तो मजबूत बिजनेस मॉडल था और न ही कमाई का कोई स्पष्ट रास्ता. केवल इंटरनेट से जुड़ा होना ही निवेश आकर्षित करने के लिए काफी था. इस दौरान टेक शेयरों में इतनी तेजी आई कि अमेरिकी शेयर बाजार का नैस्डैक इंडेक्स कुछ ही वर्षों में कई गुना बढ़ गया.
डॉट-कॉम बबल कैसे बना?
उस समय इंटरनेट एक नई और रोमांचक तकनीक थी. निवेशकों को लगा कि ऑनलाइन दुनिया में उतरने वाली हर कंपनी सफल होगी. कम ब्याज दरों और बाजार में उपलब्ध पूंजी ने इस उत्साह को और बढ़ावा दिया. स्टार्टअप्स को बिना ज्यादा सवाल किए फंडिंग मिल रही थी. कंपनियां मुनाफे की बजाय केवल ग्राहकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान दे रही थीं. विज्ञापन और विस्तार पर भारी खर्च किया जा रहा था, जबकि वास्तविक आय बेहद कम थी. घाटे में चल रही कंपनियां भी शेयर बाजार में उतरकर बड़ी रकम जुटाने में सफल हो रही थीं.
जब फूटा इंटरनेट का बुलबुला
साल 2000 के आसपास निवेशकों को महसूस होने लगा कि कई इंटरनेट कंपनियों की कीमतें वास्तविकता से बहुत दूर हैं. इसके बाद बाजार में भारी गिरावट शुरू हुई. कुछ ही वर्षों में नैस्डैक इंडेक्स अपने उच्च स्तर से लगभग 80 प्रतिशत तक टूट गया. निवेशकों के खरबों डॉलर डूब गए और कई चर्चित इंटरनेट कंपनियां पूरी तरह बंद हो गईं. हालांकि जिन कंपनियों के पास मजबूत बिजनेस मॉडल था वे समय के साथ इस संकट से बाहर निकलने में सफल रहीं.
भारत पर कितना पड़ा था असर?
डॉट-कॉम संकट का प्रभाव भारत में अमेरिका जितना गंभीर नहीं था. उस समय भारतीय बाजार में इंटरनेट कंपनियों का प्रभाव सीमित था. फिर भी वैश्विक निवेशकों की घबराहट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया और कई निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि इससे देश में कोई बड़ी आर्थिक मंदी नहीं आई.
एआई और डॉट-कॉम बबल की तुलना क्यों की जा रही है?
आज एआई को लेकर जो उत्साह दिखाई दे रहा है वह कई मामलों में डॉट-कॉम युग से मिलता-जुलता नजर आता है. विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ संकेत ऐसे हैं जो संभावित जोखिम की ओर इशारा कर रहे हैं.
कमाई से ज्यादा उम्मीदों पर आधारित वैल्यूएशन
कई एआई स्टार्टअप्स की बाजार कीमत उनकी वास्तविक आय की तुलना में बेहद अधिक है. निवेशक इस डर से पैसा लगा रहे हैं कि कहीं वे अगली बड़ी तकनीकी लहर से पीछे न रह जाएं. यही मानसिकता डॉट-कॉम दौर में भी देखने को मिली थी.
हर जगह AI का इस्तेमाल
जिस तरह 1990 के दशक में कंपनियां अपने नाम के साथ .com जोड़कर निवेशकों को आकर्षित करती थीं, आज कई कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं को एआई आधारित बताकर बाजार का ध्यान खींच रही हैं. कई मामलों में एआई की वास्तविक भूमिका सीमित होने के बावजूद उसका प्रचार बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च
एआई को चलाने के लिए अत्याधुनिक चिप्स, विशाल डेटा सेंटर और भारी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है. दुनिया भर की कंपनियां इन संसाधनों पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या भविष्य में होने वाली कमाई इस निवेश को सही साबित कर पाएगी? यही चिंता विश्लेषकों को परेशान कर रही है.
अगर एआई बबल फूट गया तो क्या होगा?
यदि एआई क्षेत्र में निवेश और मूल्यांकन वास्तविकता से बहुत आगे निकल जाते हैं और बाजार का भरोसा टूटता है तो सबसे पहले टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. निवेशकों को बड़ा नुकसान हो सकता है और स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो जाएगा.
इसके अलावा, तकनीकी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका भी बढ़ सकती है. जिन कंपनियों ने केवल उम्मीदों के आधार पर विस्तार किया है वे आर्थिक दबाव में आ सकती हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं होगा कि एआई तकनीक खत्म हो जाएगी.
क्या एआई का भविष्य खतरे में है?
इतिहास बताता है कि बबल फूटने के बाद भी मजबूत तकनीकें जीवित रहती हैं. डॉट-कॉम संकट के बाद हजारों कंपनियां गायब हो गईं लेकिन इंटरनेट पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बनकर उभरा. इसी तरह अगर एआई क्षेत्र में कोई बड़ा सुधार या गिरावट आती है तो कमजोर कंपनियां बाहर हो सकती हैं, लेकिन वास्तविक उपयोगिता वाली तकनीकें और मजबूत बिजनेस मॉडल लंबे समय तक टिके रहेंगे.
संभव है कि आने वाले वर्षों में एआई उद्योग एक बड़े परीक्षण से गुजरे लेकिन यह भी उतना ही संभव है कि इस प्रक्रिया के बाद केवल वही कंपनियां बचें जो वास्तव में लोगों और उद्योगों के लिए मूल्य पै ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Scam से बचाएगा WhatsApp का नया फीचर, यूजर्स को मिलेगा वॉर्निंग अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ WhatsApp Scam Alert Feature: लोगों को स्कैम करने के लिए साइबर अपराधी किसी भी प्लेटफॉर्म को यूज करने से पीछे नहीं रहते. व्हाट्सऐप चूंकि सबसे ज्यादा यूज होने वाले प्लेटफॉर्म्स में से एक है, इसलिए इस पर स्कैमर की नजरें ज्यादा रहती हैं. डिजिटल अरेस्ट, फर्जी जॉब ऑफर और इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर फिशिंग लिंक भेजना, फर्जी सरकारी योजनाओं के लाभ आदि के लालच समेत स्कैमर अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाना चाहते हैं. लगातार बढ़ती ऐसी घटनाओं को देखते हुए कंपनी WhatsApp Scam Alert नाम से एक नए फीचर पर काम कर रही है. इसकी मदद से यूजर को संदिग्ध मैसेज का पता लग जाएगा और वह स्कैम से बच सकेगा.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा स्कैम अलर्ट फीचर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाट्सऐप के एंड्रॉयड वर्जन के लिए इस फीचर को तैयार किया जा रहा है. यह अनजान कॉन्टैक्ट से आने वाले फ्रॉड मैसेज को डिटेक्ट कर यूजर को वॉर्निंग अलर्ट दिखाएगा. इसके साथ यूजर को मैसेज भेजने वाले को ब्लॉक और रिपोर्ट करने का भी ऑप्शन होगा. अगर यूजर को लगता है कि यह मैसेज सेफ है तो वह बिना कुछ किए चैट कंटिन्यू कर सकता है. वॉइस ट्रांसक्रिप्ट की तरह यह फीचर पूरी तरह यूजर के डिवाइस पर ही काम करेगा. इसका मतलब है कि मैसेज को एनालाइज करने के लिए मेटा के सर्वर पर नहीं भेजा जाएगा. मैसेज को डिटेक्ट करने और अलर्ट देने की पूरी प्रोसेसर ऑन-डिवाइस होगी. इससे एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा.&amp;nbsp;
ऑप्शनल होगा स्कैम अलर्ट फीचर
बताया जा रहा है कि यह फीचर पूरी तरह ऑप्शनल होगा. यह बाई डिफॉल्ट ऑफ रहेगा. अगर कोई इसे यूज करना चाहता है तो ऐप सेटिंग में जाकर इसे इनेबल करना पड़ेगा. अभी इस फीचर पर काम चल रहा है और अगले कुछ दिनों में इसे बीटा यूजर्स के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा. टेस्टिंग पूरी होने के बाद व्हाट्सऐप इसे चरणबद्ध तरीके से सभी यूजर्स के लिए लॉन्च करेगी.
पेड सब्सक्रिप्शन भी हो रहा है रोलआउट&amp;nbsp;
WhatsApp लगातार नए फीचर्स लाती रहती है और इसी कड़ी में कंपनी WhatsApp Plus को भी रोलआउट कर रही है. यह पेड सब्सक्रिप्शन प्लान है, जिसमें पैसे देने पर यूजर्स को कुछ एडिशनल फीचर्स और कस्टमाइजेशन का ऑप्शन मिलता है. यूरोप में इसकी कीमत लगभग 280 रुपये रखी गई है. भारत में अभी इसे लॉन्च नहीं किया है. जल्द ही इसे भारतीय यूजर्स के लिए भी अवेलेबल करवा दिया जाएगा.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Jio Vs Airtel: ₹3999 का रिचार्ज कराने से पहले जानिए कौन दे रहा सबसे ज्यादा फायदा</title>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Energy System पर लगाने से पहले डिसाइड कर लें चीजें, नहीं तो बर्बाद हो सकते हैं पैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Energy System Tips: बिजली बिल को कम करने के लिए लोग तेजी से सोलर एनर्जी की तरफ बढ़ रहे हैं. इसी का नतीजा है कि आजकल शहरों से लेकर गांवों तक हर जगह सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. सोलर पैनल क्लीन एनर्जी देने के साथ-साथ बिजली की बढ़ती लागत से भी बचाते हैं, लेकिन कई बार सोलर एनर्जी सिस्टम को लेकर कंफ्यूजन रहती है. इसलिए कुछ चीजों को पहले ही डिसाइड कर लेना बेहतर रहता है.&amp;nbsp;
सबसे पहले देखें अपनी जरूरत
सोलर पैनल लगाने से पहले घर की एनर्जी नीड्स को देखना जरूरी है. बिजली के बिल में देखकर पता लगाया जा सकता है कि घर में हर महीने कितनी बिजली की खपत हो रही है. अगर हर महीने घर में 3 किलोवॉट बिजली कंज्यूम हो रही है तो इतनी ही पावर जनरेट करने वाले सिस्टम की जरूरत पड़ेगी. कम कैपेसिटी वाला सिस्टम लगाने पर बिजली बिल के झंझट से छुटकारा नहीं मिल पाएगा. इसलिए सिस्टम की कैपेसिटी को डिसाइड कर ही आगे बढ़ें
छत की कंडीशन और सनलाइट का हिसाब
सोलर पैनल लगाने की छत की कंडीशन को भी देखना पड़ता है. सोलर पैनल की लाइफ 25-30 साल होती है. इसलिए इंस्टॉलेशन से पहले यह जरूर देख लें कि घर की छत इतने सालों तक इस सिस्टम को झेल पाएगी या नहीं. इसके अलावा एनर्जी जनरेशन के लिए सनलाइट बहुत जरूरी है. छत पर ऐसी जगह पैनल इंस्टॉल करने चाहिए जहां किसी बिल्डिंग या पेड़ की छाया न पड़ती हो.
सोलर एनर्जी सिस्टम का चुनाव
ऑफ-ग्रिड, ऑन-ग्रिड और हाइब्रिड समेत तीन तरह के सोलर एनर्जी सिस्टम ज्यादा ट्रेंड में हैं. ऑफ-ग्रिड सिस्टम में एनर्जी स्टोरेज के लिए बैटरी की जरूरत पड़ती है और यह पावर कट के दौरान भी काम करता है. ऑन-ग्रिड की बात करें तो यह ग्रिड के साथ कनेक्टेड होता है. यह बिजली बिल को कम करता है और इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती. वहीं हाइब्रिड दोनों का मिला-जुला सिस्टम है. यह ऑन-ग्रिड की तरह बिल भी बचाता है और ऑफ-ग्रिड की तरह बैकअप भी देता है. अपनी जरूरत के हिसाब से इनमें से किसी भी टाइप को सेलेक्ट किया जा सकता है.
सोलर पैनल की क्वालिटी
कई लोग पैसा बचाने या कम खर्च में सोलर सिस्टम लगाने के लिए खराब क्वालिटी वाले पैनल खरीद लेते हैं. ये भले ही एक बार पैसे बचा देते हैं, लेकिन इनमें इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन भी कम होता है और इनकी परफॉर्मेंस जल्दी खराब हो जाती है. खराब क्वालिटी होने के कारण इन्हें बार-बार मैंटेनेंस की जरूरत पड़ती है और इनकी लाइफ भी कम होती है. दूसरी तरफ हाई-क्वालिटी वाले पैनल में ऐसी दिक्कत नहीं आती. एक बार इंस्टॉल करने के बाद सालों तक टेंशन फ्री रहा जा सकता है. इसलिए यह डिसाइड कर लें कि आप एक बार पैसा बचाकर झंझट लेना चाहते हैं या एक बार पैसा लगाकर टेंशन फ्री रहना चाहते हैं.
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        <title>Google पर बड़ा झटका! दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से बदल जाएगा Search Ads का पूरा खेल, जानिए क्या है पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ Google Keyword Bidding: दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद डिजिटल विज्ञापन जगत में कीवर्ड बिडिंग एक चर्चित विषय बन गया है. अदालत ने Google और Hindware से जुड़े मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कंपनी अपने प्रतिस्पर्धी के ट्रेडमार्क वाले नाम पर विज्ञापन दिखाने के लिए बोली लगाती है तो यह ट्रेडमार्क उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर कीवर्ड बिडिंग क्या है और इस फैसले का ऑनलाइन ऐड इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ सकता है.
क्या होती है कीवर्ड बिडिंग?
कीवर्ड बिडिंग डिजिटल मार्केटिंग का एक ऐसा तरीका है जिसमें कंपनियां Google जैसे सर्च इंजन पर कुछ खास शब्दों या वाक्यांशों के लिए पेमेंट करती हैं ताकि उनका विज्ञापन सर्च रिजल्ट्स में ऊपर दिखाई दे. इस प्रोसेस में एडवटाइजर्स पहले उन शब्दों का चयन करते हैं जिनसे वे अपने प्रोडक्ट या सर्विस को जोड़ना चाहते हैं.
इसके बाद वे प्रति क्लिक (Cost Per Click या CPC) की अधिकतम राशि तय करते हैं. जब कोई यूजर उस कीवर्ड को सर्च करता है तो Google एक नीलामी प्रक्रिया चलाता है और सबसे प्रतिस्पर्धी बोली लगाने वाले विज्ञापनदाताओं के विज्ञापन प्रमुख स्थानों पर दिखाए जाते हैं.
विवाद की जड़ क्या है?
सामान्य तौर पर कीवर्ड बिडिंग एक वैध विज्ञापन तकनीक मानी जाती है. लेकिन विवाद तब शुरू होता है जब कोई कंपनी अपने प्रतिद्वंद्वी के ट्रेडमार्क वाले नाम पर बोली लगाती है. मान लीजिए कोई व्यक्ति किसी खास ब्रांड को खोज रहा है, लेकिन उसी समय किसी दूसरी कंपनी का विज्ञापन उसके सामने आ जाए क्योंकि उसने उस ब्रांड के नाम पर बोली लगाई थी. ऐसे मामलों में मूल ब्रांड यह दावा कर सकता है कि उसकी पहचान और प्रतिष्ठा का फायदा उठाया जा रहा है. दूसरी ओर, विज्ञापन देने वाली कंपनी इसे सिर्फ एक मार्केटिंग रणनीति बता सकती है. यही कानूनी टकराव वर्षों से डिजिटल विज्ञापन उद्योग में चर्चा का विषय रहा है.
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का क्या होगा असर?
अदालत के इस फैसले के बाद भारत में ऑनलाइन विज्ञापनों की निगरानी और सख्त हो सकती है. विशेष रूप से उन मामलों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा जहां ट्रेडमार्क वाले शब्दों का इस्तेमाल विज्ञापन दिखाने के लिए किया जाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंपनियां अपने ब्रांड नामों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सक्रिय हो सकती हैं और प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाने में भी हिचकिचाएंगी नहीं. साथ ही Google को भी भारत में अपनी विज्ञापन नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>सोलर पैनल की उम्र दोगुनी कर सकते हैं ये आसान उपाय! ज्यादातर लोग नहीं जानते</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Care Tips: सोलर एनर्जी इस समय पावर का सबसे क्लीन और किफायती सोर्स बनी हुई है. घरों की बात करें या इंडस्ट्री की, हर जगह सोलर पैनल लग रहे हैं. इंस्टॉलेशन के बाद बस सूरज निकलने की देरी है. सनलाइट आते ही ये अपना काम शुरू कर देते हैं. सोलर पैनल की खास बात यह भी है कि ये 20-25 साल आराम से चल जाते हैं. अगर इनकी मैंटेनेंस ठीक तरीके से की जाए तो लाइफ और बढ़ जाती है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन कारणों से पैनल खराब हो सकते हैं और उन्हें लंबे चलाने के लिए क्या उपाय करने की जरूरत है.
कितने साल चल सकते हैं सोलर पैनल?
आमतौर पर सोलर पैनल की लाइफ 25-30 साल तक मानी जाती है. यह पैनल की क्वालिटी, यूसेज और मैंटेनेंस पर भी डिपेंड करती है. अच्छी क्वालिटी वाले कई पैनल वारंटी पूरी होने के बाद भी उसी तरह काम करते रहते हैं. अगर सही तरीके से पैनल को मैंटेन किया जाए तो 30 साल से ज्यादा समय तक बिजली जनरेट कर सकते हैं.
किन कारणों से खराब होते हैं पैनल?
पैनल खराब होने के कई कारण हैं. इनमें सबसे कॉमन कारण पैनल पर धूल-मिट्टी का जमना है. इस कारण सोलर पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है. शहरों की बात करें तो पॉल्यूशन और नमी मिलकर पैनल सरफेस पर एक पतली लेयर बना लेते हैं. इससे पैनल को पावर जनरेट करने के लिए एक्स्ट्रा काम करना पड़ता है. अगर लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहे तो पैनल की एफिशिएंसी और लाइफ स्पैन पर असर पड़ता है. मौसम भी एक बड़ा फैक्टर है. ज्यादा टेंपरेचर से पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है और ज्यादा उमस और बारिश से मेटल पार्ट्स पर जंग लगने लगता है. तेज आंधी-बारिश से बी पैनल पर छोटी-छोटी दरारें आ सकती हैं. इसी तरह इंस्टॉलेशन और वायरिंग में गड़बड़ी भी काम बिगाड़ सकती है.
कैसे रखें सोलर पैनल का ध्यान?

सोलर पैनल को साल में 2-4 बार जरूर सफ करें. खासकर आंधी-तूफान वाले मौसम के बाद सफाई और इंस्पेक्शन दोनों जरूरी है.
अगर पैनल पर किसी पेड़ की छांव पड़ रही है तो उसे ट्रिम कर दें.
पैनल को छत से चिपकाकर इंस्टॉल न करें. वेंटिलेशन बनाए रखने के लिए छत और पैनल के बीच 1-2 फीट की दूरी जरूर रखें.
साल में कम से कम दो बार प्रोफेशनल टेक्नीशियन को बुलाकर सोलर एनर्जी सिस्टम की जांच करवा लें.

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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>जब AI उड़ाएगा विमान, तब क्या होगा? जानिए कैसे बदल सकती है हवाई यात्रा की दुनिया</title>
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        <description><![CDATA[ AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ मोबाइल, चैटबॉट या रोबोट तक सीमित नहीं रहा. जिस चीज़ को लोग अब तक साइंस फिक्शन फिल्मों में देखते आए थे वह अब असल दुनिया में टेस्ट की जा रही है. अब सवाल उठ रहा है कि अगर विमान उड़ाने का काम AI करने लगे तो क्या होगा? हाल ही में एक बड़ी टेस्ट फ्लाइट ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है.
AI ने संभाली विमान उड़ाने की जिम्मेदारी
CNN की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी स्टार्टअप कंपनी Merlin Labs ने एक खास AI सिस्टम Merlin Pilot का परीक्षण किया. इस दौरान एक Cessna Caravan विमान की उड़ान के कई अहम हिस्सों को AI सिस्टम ने कंट्रोल किया. टेस्ट के समय सुरक्षा के लिए एक पायलट कॉकपिट में मौजूद था लेकिन विमान को नेविगेट करने, दिशा बदलने, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश समझने और रेडियो कम्युनिकेशन जैसे कई काम AI ने खुद संभाले. इतना ही नहीं, लैंडिंग प्रक्रिया में भी AI सिस्टम ने मदद की. हालांकि यह तकनीक अभी शुरुआती टेस्टिंग फेज में है और इसे फिलहाल कमर्शियल पैसेंजर फ्लाइट्स में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.
क्या AI के भरोसे विमान उड़ाना सुरक्षित होगा?
AI आधारित एविएशन टेक्नोलॉजी के समर्थकों का मानना है कि इससे इंसानी गलतियों को कम किया जा सकता है. आज भी कई विमान हादसों की बड़ी वजह मानवीय भूल मानी जाती है. ऐसे में AI सिस्टम पायलट्स को मुश्किल और तनावपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर सहायता दे सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक विमानों में पहले से ही ऑटोमेशन मौजूद है लेकिन नए AI सिस्टम पुराने सिस्टम्स की तुलना में अचानक आने वाली परिस्थितियों को ज्यादा समझदारी से संभालने की क्षमता रखते हैं.
फिर भी, किसी भी AI टेक्नोलॉजी को पूरी तरह लागू करने से पहले लंबी सुरक्षा जांच और कई स्तरों पर परीक्षण बेहद जरूरी होंगे. इसके साथ ही यात्रियों का भरोसा जीतना भी सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है.
पायलट्स की संस्था क्यों जता रही चिंता?
उत्तरी अमेरिका की पायलट्स संस्था Air Line Pilots Association का मानना है कि AI को पूरी तरह इंसानी पायलट की जगह नहीं लेनी चाहिए. संस्था के अनुसार, AI को एक सहायक पायलट की तरह इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित रहेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि आपातकालीन हालात में इंसानी अनुभव और निर्णय क्षमता अब भी मशीनों से कहीं आगे है. इसलिए पूरी तरह AI पर निर्भरता फिलहाल जोखिम भरी मानी जा रही है.
आने वाले समय में बदल सकती है हवाई यात्रा
आज भी कई लोग यह सोचकर घबरा जाते हैं कि भविष्य में विमान मशीनें उड़ाएंगी. लेकिन टेक्नोलॉजी जिस तेजी से आगे बढ़ रही है उसे देखते हुए AI आधारित उड़ान सिस्टम आने वाले वर्षों में एविएशन इंडस्ट्री का अहम हिस्सा बन सकते हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मशीनों को कितना कंट्रोल दिया जाए और इंसानों की भूमिका कितनी बनी रहे. आने वाले समय में यही बहस हवाई यात्रा के भविष्य को तय कर सकती है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ ChatGPT नहीं! आपके फोन में मौजूद हैं 12 दमदार AI फीचर्स, ज्यादातर लोग आज भी हैं अंजान</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone AI Features: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ चैटबॉट्स या तस्वीरें बनाने वाले टूल्स तक सीमित नहीं रह गया है. पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन कंपनियों ने ऐसे कई AI फीचर्स पेश किए हैं जो यूजर्स की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना रहे हैं. चाहे फोटो एडिटिंग हो भाषाओं का अनुवाद करना हो या फिर लंबी बातचीत का सार समझना हो, AI अब आपके फोन के अंदर कई रूपों में मौजूद है. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई फीचर्स पहले से ही आपके स्मार्टफोन में उपलब्ध हैं लेकिन ज्यादातर लोग उनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. आइए जानते हैं ऐसे 12 AI फीचर्स के बारे में जो आपके स्मार्टफोन अनुभव को और बेहतर बना सकते हैं.
Circle to Search
कुछ चुनिंदा एंड्रॉयड स्मार्टफोन में मिलने वाला Circle to Search फीचर किसी भी ऐप से बाहर निकले बिना जानकारी खोजने की सुविधा देता है. स्क्रीन पर दिखाई देने वाली किसी तस्वीर, टेक्स्ट या ऑब्जेक्ट को सिर्फ सर्कल या टैप करके उससे जुड़ी जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है.
AI Object Remover
आज के स्मार्टफोन AI की मदद से तस्वीरों में मौजूद अनचाहे लोगों, तारों, रिफ्लेक्शन या अन्य डिस्टर्ब करने वाले तत्वों को पहचानकर हटा सकते हैं. इसके बाद AI खुद ही बैकग्राउंड को भर देता है जिससे फोटो ज्यादा साफ और प्रोफेशनल दिखती है.
Live Translation
विदेश यात्रा के दौरान या अलग भाषा बोलने वाले लोगों से बातचीत करते समय Live Translation फीचर बेहद काम आता है. यह आपकी बात को रियल टाइम में दूसरी भाषा में बदल देता है जिससे संवाद करना काफी आसान हो जाता है.
AI Call Transcripts
कुछ प्रीमियम स्मार्टफोन्स अब फोन कॉल्स को टेक्स्ट में बदलने की सुविधा देते हैं. इससे आपको नोट्स बनाने की जरूरत नहीं पड़ती और बाद में बातचीत के जरूरी हिस्सों को आसानी से खोजा और पढ़ा जा सकता है.
AI Writing Assistant
अगर आप मैसेज, ईमेल या कोई अन्य टेक्स्ट लिखते हैं तो AI Writing Assistant आपकी मदद कर सकता है. यह वाक्यों को बेहतर बना सकता है, व्याकरण संबंधी गलतियां सुधार सकता है लेखन का टोन बदल सकता है और लंबे टेक्स्ट का संक्षिप्त समरी भी तैयार कर सकता है.
Voice Recording Summary
मीटिंग, इंटरव्यू या लेक्चर रिकॉर्ड करने के बाद पूरी ऑडियो सुनना समय लेने वाला काम हो सकता है. AI अब लंबी रिकॉर्डिंग को समझकर उसका छोटा और महत्वपूर्ण सार तैयार कर देता है जिससे जरूरी जानकारी जल्दी मिल जाती है.
Smart Photo Search
AI आधारित फोटो सर्च की मदद से पुरानी तस्वीरें ढूंढना पहले से कहीं आसान हो गया है. अब आपको फोटो टैग करने की जरूरत नहीं पड़ती. कुत्ता, समुद्र तट, जन्मदिन या लाल कार जैसे शब्द लिखकर संबंधित तस्वीरें खोजी जा सकती हैं.
AI Wallpaper Generator
कुछ स्मार्टफोन अब AI की मदद से कस्टम वॉलपेपर तैयार करने की सुविधा देते हैं. आप किसी थीम या टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर कुछ ही सेकंड में बिल्कुल नया और अनोखा वॉलपेपर बना सकते हैं.
Web Page Summary
कई AI ब्राउजर और डिजिटल असिस्टेंट अब लंबे आर्टिकल या वेबपेज का सार तैयार कर सकते हैं. इससे आपको हजारों शब्द पढ़ने की आवश्यकता नहीं होती और मुख्य जानकारी कम समय में मिल जाती है.
AI Noise Cancellation
कॉल के दौरान आसपास के शोर को कम करने के लिए आधुनिक स्मार्टफोन AI का उपयोग करते हैं. यह फीचर इंसानी आवाज और बैकग्राउंड नॉइज में अंतर पहचानकर अनचाहे शोर को दबा देता है जिससे बातचीत ज्यादा स्पष्ट सुनाई देती है.
Smart Replies और Predictive Text
AI आधारित प्रेडिक्टिव टेक्स्ट और स्मार्ट रिप्लाई फीचर्स अब पहले से ज्यादा समझदार हो चुके हैं. ये बातचीत के संदर्भ को समझकर पूरे वाक्य या संभावित जवाब सुझा सकते हैं जिससे टाइपिंग का समय बचता है.
AI Photo Enhancement
AI फोटो की ब्राइटनेस, रंग, शार्पनेस और डिटेल्स को अपने आप बेहतर बना सकता है. कई स्मार्टफोन पुराने फोटो को रीस्टोर करने और कम क्वालिटी वाली तस्वीरों को ज्यादा स्पष्ट बनाने में भी सक्षम हैं.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>What Is UPI Circle: UPI Circle क्या है? अब परिवार के लोग भी कर सकेंगे पेमेंट, लेकिन कंट्रोल रहेगा आपके हाथ में</title>
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        <description><![CDATA[ What Is UPI Circle: आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो UPI का इस्तेमाल न करता हो. चाहें सब्जी खरीदनी हो, बिजली का बिल भरना हो या किसी दोस्त को पैसे भेजने हों, अब हर ज्यादातर काम मोबाइल से ही हो जाते हैं. &amp;nbsp;डिजिटल पेमेंट ने जिंदगी को काफी आसान बना दिया है. &amp;nbsp;लेकिन इसके साथ एक समस्या भी सामने आती है. वहीं कई बार घर के बुजुर्गों को ऑनलाइन भुगतान करने में परेशानी होती है, बच्चों को छोटी-मोटी खरीदारी के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है या फिर छात्रों को खर्च के लिए सीमित रकम चाहिए होती है. &amp;nbsp;ऐसे में लोग या तो अपना फोन और UPI एक्सेस दे देते हैं या फिर हर बार खुद भुगतान करते हैं. &amp;nbsp;दोनों ही तरीकों में परेशानी और जोखिम रहता है. &amp;nbsp;इसी समस्या को आसान बनाने के लिए UPI Circle फीचर लाया गया है.&amp;nbsp;
क्या है UPI Circle और कैसे करता है काम?
UPI Circle एक ऐसा फीचर है जो आपको अपने परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को UPI भुगतान करने की अनुमति देने की सुविधा देता है. साथ ही सबसे खास बात यह है कि इसके लिए आपको अपना UPI PIN, पासवर्ड या बैंक अकाउंट की जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी पड़ती है. आप तय कर सकते हैं कि सामने वाला व्यक्ति हर महीने कितनी रकम तक खर्च कर सकता है. साथ ही आप यह भी चुन सकते हैं कि हर भुगतान आपकी मंजूरी के बाद हो या तय सीमा के अंदर अपने आप पूरा हो जाए. यानी सुविधा भी मिलेगी और आपके पैसे पर पूरा नियंत्रण भी बना रहेगा. आसान शब्दों में कहें तो यह किसी प्रीपेड कार्ड की तरह काम करता है, लेकिन सीधे आपके UPI अकाउंट से जुड़ा होता है.&amp;nbsp;
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परिवार के लिए क्यों फायदेमंद है यह सुविधा?
मान लीजिए घर में माता-पिता डिजिटल पेमेंट सीख रहे हैं या आपका बच्चा हॉस्टल में पढ़ाई कर रहा है और उसे रोजमर्रा के खर्च के लिए पैसे चाहिए. ऐसे मामलों में UPI Circle काफी मददगार साबित हो सकता है. क्योंकि इससे बार-बार पैसे ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं पड़ती और खर्च की सीमा पहले से तय होने के कारण पैसों के गलत इस्तेमाल का खतरा भी कम हो जाता है. यही वजह है कि इस फीचर को परिवारों के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प माना जा रहा है. इससे बच्चों, बुजुर्गों और दूसरे परिवार के सदस्यों को डिजिटल भुगतान करने की आजादी मिलती है, जबकि मुख्य अकाउंट धारक हर गतिविधि पर नजर रख सकता है.&amp;nbsp;
UPI Circle का इस्तेमाल कैसे करें?
UPI Circle का उपयोग करना भी काफी आसान है. सबसे पहले आपको ऐसा UPI ऐप इस्तेमाल करना होगा जो इस फीचर को सपोर्ट करता हो. इसके बाद ऐप में UPI Circle या Delegated Payments का विकल्प चुनना होगा. फिर आप अपने किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य को जोड़ सकते हैं. इसके बाद मासिक खर्च की सीमा और भुगतान की अनुमति का तरीका तय कर सकते हैं. साथ ही समय-समय पर भुगतान की जांच करना और जरूरत खत्म होने पर एक्सेस हटाना भी जरूरी है. कुल मिलाकर UPI Circle उन लोगों के लिए एक शानदार सुविधा है जो अपने परिवार को डिजिटल भुगतान की सुविधा देना चाहते हैं, लेकिन साथ ही अपने पैसों की सुरक्षा और नियंत्रण भी बनाए रखना चाहते हैं. आने वाले समय में यह फीचर परिवारों के बीच डिजिटल लेनदेन को और आसान बना सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mobile Signal Transmission: टॉवर से हमारे मोबाइल तक कैसे पहुंचता है सिग्नल, जान लीजिए टेलीकॉम सेक्टर की टेक्नोलाॅजी</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Signal Transmission: स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज के समय में जब आप घर बैठे दुनिया के किसी भी कोने में वीडियो कॉल करते हैं,तो बिना किसी तार के कॉल और इंटरनेट कैसे काम करते हैं? आइए जानते हैं मोबाइल टावर और टेलीकॉम नेटवर्क की इस अद्भुत तकनीक के पीछे की पूरी कार्यप्रणाली.&amp;nbsp;
टेलीकॉम तकनीक की दुनिया अदृश्य तरंगों के खेल पर टिकी है. ये माइक्रोवेव और रेडियो तरंगें ही होती हैं जो बिना किसी रुकावट के अदृश्य रूप से हमारे और हमारे प्रियजनों के बीच का फासला मिटा देती हैं. यह पूरी प्रक्रिया एक जटिल लेकिन बेहद सटीक नेटवर्क के जरिए काम करती है, जो कुछ ही मिलीसेकंड में हमारे संदेशों और आवाजों को हजारों किलोमीटर दूर पहुंचा देती है.टेलीकॉम सेक्टर की यह अद्भुत इंजीनियरिंग सच में किसी चमत्कार से कम नहीं है.साथ ही यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है. आइए अब जान लेते हैं वे चरण कौन से हैं.
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मुख्य चरण
&amp;nbsp;1.वॉयस या डेटा का तरंगों में बदलना- जब आप अपने फोन से किसी को कॉल करते हैं या इंटरनेट पर कुछ सर्च करते हैं, तो आपका स्मार्टफोन सबसे पहले आपकी आवाज या डेटा को डिजिटल सिग्नल्स में बदल देता है. इसके बाद, फोन का ट्रांसमीटर इन सिग्नल्स को रेडियो तरंगों में परिवर्तित कर देता है.&amp;nbsp;
2. फोन से टावर तक का सफर- फोन में लगा एंटीना इन रेडियो तरंगों को हवा में एमिट करता है. आस-पास लगे मोबाइल टावर इन तरंगों को अपने रिसीवर के जरिए पकड़ लेते हैं. यह प्रक्रिया प्रकाश की गति से होती है, इसलिए इसमें बिल्कुल भी समय नहीं लगता.&amp;nbsp;
3. मोबाइल स्विचिंग सेंटर- टावर तक पहुंचने के बाद, सिग्नल तारों (फाइबर ऑप्टिक केबल) के माध्यम से मोबाइल स्विचिंग सेंटर तक भेजे जाते हैं. इसे टेलीकॉम नेटवर्क का दिमाग कहा जाता है. मोबाइल स्विचिंग सेंटर का काम यह तय करना होता है कि कॉल या डेटा को आगे किस दिशा में भेजना है यानी, दूसरे व्यक्ति के फोन या दूसरे नेटवर्क तक.&amp;nbsp;
4. रिसीवर तक पहुंचना- अगर आप किसी दूसरे शहर या देश में कॉल कर रहे हैं, तो मोबाइल स्विचिंग सेंटर फाइबर ऑप्टिक्स या सैटेलाइट के जरिए उस क्षेत्र के टावर तक सिग्नल भेजता है. इसके बाद, रिसीवर का टावर रेडियो तरंगों को उस व्यक्ति के फोन तक प्रसारित कर देता है. उसका फोन इन तरंगों को वापस आवाज या डेटा में बदल देता है.&amp;nbsp;
5. स्पेक्ट्रम और फ्रिक्वेंसी का रोल- यह सारा ट्रैफिक स्पेक्ट्रम पर निर्भर करता है. सरकारें टेलीकॉम कंपनियों को रेडियो फ्रीक्वेंसी के बैंड (जैसे 700 मेगा हर्ट्ज &amp;nbsp;1800 मेगा हर्ट्ज, 3.5 गीगा हर्ट्ज) आवंटित करती हैं, जिन पर डेटा हवा में तैरता है.
6. 4जी और 5जी का अंतर- पुरानी पीढ़ियों की तुलना में आज की तकनीक काफी एडवांस हो चुकी है. 4जी तकनीक में पैकेट स्विचिंग के जरिए डेटा तेजी से भेजा जाता है, वहीं 5जी टेक्नोलॉजी में मिलीमीटर वेव्स का उपयोग होता है. साथ ही 5जी में मल्टिपल एंटीना तकनीक (मासिव मीमो) का यूज होता है, जिससे इंटरनेट की स्पीड कई गुना बढ़ जाती है और लेटेंसी (सिग्नल में लगने वाला समय) न के बराबर हो जाता है.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <title>अब वीडियो एडिटिंग के लिए नहीं पड़ेगी एडिटर की जरूरत, Gemini करेगा पूरा काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-वीडियो-एडिटिंग-के-लिए-नहीं-पड़ेगी-एडिटर-की-जरूरत-gemini-करेगा-पूरा-काम</link>
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        <description><![CDATA[ Gemini Omni AI Model: अब वीडियो एडिटिंग के लिए आपको एडिटर की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह काम आप गूगल जेमिनी पर कर पाएंगे. गूगल ने अनाउंस किया है कि अब यूजर जेमिनी पर वीडियो अपलोड कर उसे Gemini Omni मॉडल से एडिट कर पाएंगे. खास बात यह है कि इसके लिए यूजर को एडिटिंग की जानकारी होना जरूरी नहीं है. वीडियो अपलोड करने के बाद उसे नैचुरल लैंग्वेज में प्रॉम्प्ट देना है. बाकी का सारा काम जेमिनी अपने आप संभाल लेगा. यह मॉडल सीन मॉडिफाई करने, विजुअल स्टाइल चेंज करने, नए एलिमेंट एड करने और वीडियो क्लिप को रिफाइन करने जैसे काम कर पाएगा.
जेमिनी से कैसे करें वीडियो एडिट?
जेमिनी से वीडियो एडिट करवाना एकदम आसान है. इसके लिए सबसे पहले जेमिनी ऐप को ओपन करें और अपनी मर्जी का कोई भी वीडियो इस पर अलोड कर दे. वीडियो अपलोड होने के बाद टेक्स्ट बॉक्स में प्रॉम्प्ट लिखें. प्रॉम्प्ट में आपको यह बताना है कि आप वीडियो में क्या चेंज करना चाहते हैं या वीडियो कैसे एडिट करना है. इसके बाद कुछ ही देर में जेमिनी वीडियो को एडिट कर आपको रिजल्ट दिखा देगा. अगर एडिट किया हुआ वीडियो पसंद नहीं आया है तो आप प्रॉम्प्ट देकर अपने मनपसंद बदलाव करवा सकते हैं. आखिर में रिजल्ट को रिव्यू कर सेवल कर लें. जेमिनी ऐप के साथ-साथ इसके वेब वर्जन पर भी वीडियो एडिट किया जा सकता है.&amp;nbsp;
गूगल का नया मल्टीमॉडल एआई मॉडल है Gemini Omni
गूगल ने बीते महीने ही Gemini Omni मॉडल का ऐलान किया था. कंपनी इसे सिनेमैटिक वीडियो जनरेशन और एडिटिंग मॉडल बता रही है, जो टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो और वीडियो इनपुट को समझ सकता है. यूजर इसमें वीडियो, फोटो, ड्रॉइंग या कोई दूसरा रेफरेंस मैटेरियल अपलोड कर बोलचाल की भाषा वाले प्रॉम्प्ट से नया वीडियो क्रिएट या एडिट कर सकता है. ट्रेडिशनल एडिटिंग टूल्स की तरह इसमें वीडियो को सीन-बाई-सीन एडिट करने की जरूरत नहीं पड़ती. यूजर को वीडियो अपलोड कर सिर्फ प्रॉम्प्ट देना है. एडिटर वाले सारे काम यह मॉडल खुद से कर देगा. यह मॉडल पुराने इंस्ट्रक्शन याद रखता है, जिससे सीन, कैरेक्टर और विजुअल एलिमेंट में कंसिस्टेंसी बनी रहती है.
खुद का डिजिटल वर्जन बना सकते हैं यूजर्स
गूगल का कहना है कि इस मॉडल की मदद से यूजर अपना डिजिटल वर्जन भी बना सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपनी वॉइस और अपीयरेंस का यूज करना होगा. यानी इस मॉडल पर यूजर अपनी वॉइस और शक्ल अपलोड कर अपना वर्जन बना पाएंगे. बाद में इस वर्जन को वीडियो में भी यूज किया जा सकेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Upcoming Smartphones in June: Motorola Edge 70 Pro+ समेत ये मॉडल होंगे लॉन्च, यहां देखें सारी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Upcoming Smartphones in June 2026: नया फोन लेने की प्लानिंग कर रहे यूजर्स के लिए जून महीना बहुत खास रहने वाला है. इस महीने भारत में कई नए फोन लॉन्च होने वाले हैं. मोटोरोला, शाओमी और वनप्लस जैसी कंपनियां मिड-रेंज, प्रीमियम मिड-रेंज और गेमिंग फोक्स्ड फोन लॉन्च करने वाली हैं. ऐसे में अगर आप नया फोन लेना चाह रहे हैं तो इस महीने आपके लिए कई नए ऑप्शन भी अवेलेबल हो जाएंगे. आइए एक नजर डालते हैं कि इस महीने कौन-कौन से फोन लॉन्च होंगे और उनमें क्या-क्या फीचर्स मिलने की उम्मीद है.
Motorola Edge 70 Pro+
इस महीने फोन लॉन्चिंग की शुरुआत 4 जून से हो जाएगी. मोटोरोला ने बताया है कि वह 4 जून को अपना Motorola Edge 70 Pro+ स्मार्टफोन लॉन्च करेगी. 6.8 इंच के AMOLED डिस्प्ले वाले इस फोन में 50MP का पेरिस्कोप टेलीफोटो कैमरा मिलेगा, जो 3.5x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें एआई जूम फीचर्स, इमेज स्टेबलाइजेशन टूल्स आदि मिलेंगे. इसमें MediaTek Dimensity 8500 Extreme प्रोसेसर मिलेगा. भारत में इसे करीब 50,000 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया जाएगा और यह फ्लिपकार्ट पर अवेलेबल होगा.&amp;nbsp;
Xiaomi 17T
Xiaomi 17T को कई मार्केट्स में पहले ही लॉन्च किया जाए चुका है और अब यह 4 जून को भारत में लॉन्च होने के लिए तैयार है. इस फोन में 6.59 इंच की AMOLED स्क्रीन मिलेगी, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3500 निट्स पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करेगी. इसमें मीडियाटेक का Dimensity 8500 Ultra प्रोसेसर मिलेगा, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. इसके रियर में 50MP+50MP+12MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप होगा. 6500mAh की बैटरी पैक वाले इस फोन की कीमत लगभग 75,000 रुपये हो सकती है.
Redmi Turbo 5
यह फोन 18 जून को लॉन्च होगा और इसमें 6.59 इंच की AMOLED स्क्रीन मिलने की उम्मीद है. यह फोन भी MediaTek Dimensity 8500 Ultra चिपसेट के साथ लॉन्च हो सकता है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 50MP का प्राइमरी सेंसर और 8MP का अल्ट्रावाइड लेंस मिलेगा. फ्रंट में इसे 20MP सेंसर दिया जाएगा. 7560mAh के धाकड़ बैटरी पैक वाले इस फोन की कीमत लगभग 30 हजार रुपये रह सकती है.&amp;nbsp;
OnePlus 15s
OnePlus 15s को भी जून में ही लॉन्च किया जा सकता है. यह 6.32 इंच के AMOLED डिस्प्ले के साथ आएगा, जो 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा. इसमें क्वालकॉम के Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है. इसके रियर में 50MP+50MP और फ्रंट में 12MP कैमरा मिलेगा. 7500mAh की बैटरी वाले इस फोन की शुरुआती कीमत 60,000 रुपये रह सकती है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>सबसे सस्ते में iPhone 17 खरीदने का मौका! 45 हजार से भी कम कीमत में कर सकते हैं अपने नाम, जानिए कैसे उठाएं मौके का फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 17 Discount Offer: अगर आप नया iPhone खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर Croma ने अपनी Everything Apple सेल के तहत iPhone 17 पर आकर्षक ऑफर पेश किया है. कंपनी का दावा है कि ग्राहक iPhone 17 के 256GB वेरिएंट को प्रभावी रूप से सिर्फ ₹44,768 में खरीद सकते हैं जबकि इसकी वास्तविक कीमत ₹82,900 है. हालांकि, इस कीमत तक पहुंचने के लिए कई अलग-अलग ऑफर्स और बेनिफिट्स का फायदा उठाना होगा. यह ऑफर 29 मई से 14 जून तक उपलब्ध है.
₹82,900 वाला iPhone ₹44,768 में कैसे मिलेगा?
Croma द्वारा बताई गई प्रभावी कीमत कई छूट और रिवॉर्ड्स को जोड़कर निकाली गई है. इनमें शामिल हैं:

₹1,000 तक का बैंक कैशबैक
₹1,658 का डिस्काउंट कूपन
एक्सचेंज बोनस के रूप में ₹8,000 तक की अतिरिक्त छूट
पुराने स्मार्टफोन पर ₹23,500 तक का एक्सचेंज वैल्यू
Tata Neu Coins के रूप में ₹4,974 तक का रिवॉर्ड

इन सभी फायदों को जोड़ने पर कुल बचत लगभग ₹38,132 तक पहुंच सकती है. इसके बाद iPhone 17 की प्रभावी कीमत ₹44,768 रह जाती है.
सबसे बड़ा फायदा एक्सचेंज ऑफर से
इस डील का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा एक्सचेंज प्रोग्राम है. कुल बचत का बड़ा हिस्सा पुराने फोन को बदलने पर मिलने वाले एक्सचेंज वैल्यू और बोनस से आता है. यदि आपके पास ऐसा स्मार्टफोन नहीं है जो एक्सचेंज के लिए पात्र हो तो आपको विज्ञापित कीमत का लाभ नहीं मिल पाएगा. एक्सचेंज कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि आपका पुराना फोन कौन-सा मॉडल है उसकी उम्र कितनी है और उसकी स्थिति कैसी है.
Tata Neu Coins भी कम नहीं हैं अहम
ऑफर में मिलने वाले Tata Neu Coins भी कुल बचत का हिस्सा हैं. हालांकि यह सीधे नकद छूट नहीं है. इन कॉइन्स को Tata Neu प्लेटफॉर्म के भीतर भविष्य की खरीदारी में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसलिए कुछ ग्राहक इन्हें तत्काल डिस्काउंट की तुलना में अलग नजरिए से देख सकते हैं.
खरीदारी के साथ मिलेगा फ्री Apple Adapter
इस प्रमोशनल ऑफर के दौरान iPhone 17 खरीदने वाले ग्राहकों को Apple का ओरिजिनल चार्जिंग एडॉप्टर भी मुफ्त दिया जा रहा है. इस एक्सेसरी की कीमत ₹2,190 बताई गई है. Croma के अनुसार यह फ्री गिफ्ट ऑफर भी 29 मई से 14 जून तक वैध रहेगा.
खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
₹44,768 की कीमत सुनने में बेहद आकर्षक लग सकती है लेकिन यह तभी संभव है जब ग्राहक उपलब्ध हर ऑफर का पूरा लाभ उठाए. खासकर एक्सचेंज वैल्यू, एक्सचेंज बोनस और Tata Neu रिवॉर्ड्स इस कीमत को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं. बता दें कि फोन खरीदने से पहले ऑफर जरूर चेक कर लें. वेबसाइट पर मौजूद ऑफर्स में बदलाव भी हो सकते हैं.
Samsung Galaxy S25 Plus 5G पर भारी छूट
ई-कॉमर्स साइट Flipkart पर Samsung Galaxy S25 Plus 5G पर भारी डिस्काउंट दिया जा रहा है. इस फोन की असल कीमत 99,999 रुपये है लेकिन छूट के बाद ये फोन यहां पर महज 79,999 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा आप इस फोन को 8884 रुपये की आसान किस्तों पर भी खरीद सकते है. यहां पर आपको कई बैंक ऑफर भी देखने को मिल जाएंगे जिससे फोन की कीमत और भी सस्ती हो सकती है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सबसे, सस्ते, में, iPhone, खरीदने, का, मौका, हजार, से, भी, कम, कीमत, में, कर, सकते, हैं, अपने, नाम, जानिए, कैसे, उठाएं, मौके, का, फायदा</media:keywords>
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        <title>न कैमरा, न चेहरा, न माइक! फिर भी YouTube से हर महीने छाप सकते हैं लाखों रुपये, जानिए कैसे</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Income: आज के दौर में YouTube केवल उन लोगों तक सीमित नहीं रह गया है जो कैमरे के सामने आकर वीडियो बनाते हैं. तकनीक के विकास और AI टूल्स की बढ़ती पहुंच ने कंटेंट क्रिएशन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. अब कोई भी व्यक्ति बिना चेहरा दिखाए बिना महंगे कैमरे और माइक्रोफोन के भी अपना YouTube चैनल शुरू कर सकता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग फेसलेस चैनलों के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं.
क्यों बढ़ रही है फेसलेस YouTube चैनलों की लोकप्रियता?
कई लोग ऐसे होते हैं जो कैमरे के सामने आने में सहज महसूस नहीं करते या अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते. ऐसे लोगों के लिए AI आधारित टूल्स एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरे हैं. आज फैक्ट वीडियो, मोटिवेशनल कंटेंट, टेक एक्सप्लेनर, फाइनेंस टिप्स, हेल्थ जानकारी, टॉप-10 लिस्ट और स्टोरीटेलिंग जैसे कई प्रकार के वीडियो बिना कैमरे के तैयार किए जा सकते हैं. दर्शकों का फोकस कंटेंट की क्वालिटी पर होता है न कि वीडियो बनाने वाले के चेहरे पर.
AI की मदद से मिनटों में तैयार हो सकते हैं वीडियो
वीडियो बनाने की शुरुआत एक अच्छे विषय और स्क्रिप्ट से होती है. ChatGPT, Gemini जैसे AI प्लेटफॉर्म किसी भी विषय पर कुछ ही सेकंड में स्क्रिप्ट तैयार करने में मदद कर सकते हैं. इसके बाद AI वॉइस टूल्स की सहायता से उस स्क्रिप्ट को नैचुरल आवाज में बदला जा सकता है. हिंदी, अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में वॉइसओवर तैयार करने की सुविधा अब आसानी से उपलब्ध है.
इसके बाद AI वीडियो जनरेशन प्लेटफॉर्म स्क्रिप्ट के अनुसार तस्वीरें, वीडियो क्लिप, एनिमेशन और बैकग्राउंड म्यूजिक जोड़कर वीडियो तैयार कर देते हैं. क्रिएटर को केवल अंतिम समीक्षा करके वीडियो अपलोड करना होता है.
कम समय में ज्यादा कंटेंट बनाना संभव
शुरुआत में वीडियो तैयार करने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ पूरा प्रोसेस काफी तेज हो जाता है. कई क्रिएटर्स एक वीडियो को 10 से 15 मिनट के भीतर तैयार कर लेते हैं. YouTube Shorts जैसे फॉर्मेट ने इस प्रोसेस को और आसान बना दिया है क्योंकि छोटे वीडियो तेजी से बनाए और पब्लिश किए जा सकते हैं.
YouTube से कमाई के कई रास्ते
जब चैनल YouTube की मोनेटाइजेशन शर्तों को पूरा कर लेता है तब विज्ञापनों के जरिए कमाई शुरू हो जाती है. इसके अलावा एफिलिएट मार्केटिंग, ब्रांड स्पॉन्सरशिप, डिजिटल प्रोडक्ट्स की बिक्री और अन्य प्रमोशनल अवसर भी आय के महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं. यदि कंटेंट लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है तो कमाई का दायरा धीरे-धीरे बढ़ता जाता है.
शुरुआत करने से पहले क्या करें?
सफलता के लिए सबसे पहले एक ऐसा विषय चुनना जरूरी है जिसमें आपकी रुचि हो और दर्शकों की मांग भी मौजूद हो. मोटिवेशन, रोचक तथ्य, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और एजुकेशनल कंटेंट जैसे क्षेत्र फेसलेस चैनलों के लिए काफी फेमश माने जाते हैं. चैनल बनाने के बाद नियमित रूप से वीडियो अपलोड करना और आकर्षक थंबनेल तैयार करना ग्रोथ में मदद करता है.
केवल AI पर निर्भर न रहें
हालांकि AI वीडियो निर्माण को आसान बनाता है लेकिन पूरी तरह कॉपी-पेस्ट कंटेंट पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं है. अपने विचार, रिसर्च और रचनात्मकता को शामिल करने से वीडियो अधिक भरोसेमंद और यूनिक बनते हैं. साथ ही YouTube की नीतियों का पालन करना और धैर्य बनाए रखना भी जरूरी है क्योंकि अधिकांश चैनलों को अच्छी ग्रोथ हासिल करने में कुछ महीने लग सकते हैं.
आज कंटेंट क्रिएशन का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. AI टूल्स की मदद से अब कोई भी व्यक्ति कम संसाधनों में अपना YouTube चैनल शुरू कर सकता है और सही रणनीति के साथ इसे एक सफल ऑनलाइन बिजनेस में बदल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>न, कैमरा, न, चेहरा, न, माइक, फिर, भी, YouTube, से, हर, महीने, छाप, सकते, हैं, लाखों, रुपये, जानिए, कैसे</media:keywords>
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        <title>iOS 28 को देखकर खुश हो जाएंगे ऐप्पल यूजर्स, कंपनी ने अभी से शुरू कर दी तैयारी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ios-28-को-देखकर-खुश-हो-जाएंगे-ऐप्पल-यूजर्स-कंपनी-ने-अभी-से-शुरू-कर-दी-तैयारी</link>
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        <description><![CDATA[ iOS 28 Update: ऐप्पल ने पिछले साल बड़े बदलावों के साथ iOS 26 को लॉन्च किया था और अब यूजर्स को iOS 27 सॉफ्टवेयर अपडेट का इंतजार है. इसे भी कई शानदार अपग्रेड्स मिलने वाली है, लेकिन एक ताजा रिपोर्ट ने ऐप्पल यूजर्स को एक्साइटमेंट बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि ऐप्पल ने iOS 28 अपडेट पर काम कर दिया है और यह iOS 27 की तुलना में कई गुना शानदार होने वाली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, iOS 27 के मुकाबले iOS 28 कहीं ज्यादा बड़ी और महत्वपूर्ण अपडेट होने जा रही है. हालांकि, अभी इसके स्पेसिफिकेशंस सामने नहीं आए हैं.
कब रोल आउट की जाएगी iOS 28 Update?
ऐप्पल को कवर करने वाले ब्लूमबर्ग के जर्नलिस्ट मार्क गुरमैन का कहना है कि अगले साल आने वाली iOS 28 कहीं अधिक महत्वपूर्ण होगी. उन्होंने इसमें मिलने वाले फीचर्स की जानकारी नहीं दी है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि इसमें iOS 27 की तुलना में कई शानदार अपग्रेड्स मिल सकती है. यह इसलिए भी खास होने वाली है क्योंकि 2027 में आईफोन के सफर को 20 साल पूरे हो जाएंगे. इस मौके पर ऐप्पल अब तक के सबसे अलग और फ्यूचरिस्टिक दिखने वाले आईफोन लॉन्च करेगी. इन आईफोन को iOS 28 के साथ ही लॉन्च किया जाएगा. इसलिए ऐप्पल आईफोन की 20वीं एनिवर्सरी को हार्डवेयर के साथ-साथ सॉफ्टवेयर के तौर पर भी स्पेशल बनाना चाहती है.
फिलहाल iOS 27 की तैयारियों में जुटी है ऐप्पल
फिलहाल ऐप्पल iOS 27 की तैयारियों में जुटी हुई है. अगले हफ्ते होने वाले ऐप्पल के WWDC 2026 में इसकी पहली झलक दिखाई जा सकती है और सितंबर में आईफोन 18 प्रो मॉडल्स के साथ इसे लॉन्च कर दिया जाएगा. इस अपडेट का मेन फोकस सिरी के नए वर्जन और एडिशनल ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स पर रहेगा. इस अपडेट के साथ यूजर्स को सिरी का चैटबॉट स्टाइल वर्जन मिलेगा. यह ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस के साथ आएगा और यूजर के पर्सनल कॉन्टेक्स्ट को भी समझ सकेगा.&amp;nbsp;
iOS 27 में क्या-क्या मिलने वाला है?
अपडेटेड सिरी के साथ अपकमिंग अपडेट में सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स भी मिलेंगे. हालांकि, ये केवल आईफोन 17 सीरीज तक ही सीमित रह सकते हैं. ऐप्पल मैप्स में नए सैटेलाइट फीचर्स जोड़े जाएंगे और यूजर मोबाइल कनेक्टिविटी न होने पर भी सैटेलाइट की मदद से मैसेज सेंड और रिसीव कर पाएंगे. नई अपडेट में फोटो एडिटिंग के लिए नए एआई टूल्स भी मिलेंगे. कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि फोटो एडिटिंग के लिए गूगल के नैनो बनाना मॉडल का सपोर्ट भी मिल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>iOS, को, देखकर, खुश, हो, जाएंगे, ऐप्पल, यूजर्स, कंपनी, ने, अभी, से, शुरू, कर, दी, तैयारी</media:keywords>
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        <title>3kW vs 5kW Solar System: आपके घर के लिए कौन&amp;सा सिस्टम रहेगा बेहतर? यहां देखें पूरी गाइड</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel For Home: बिजली के लगातार बढ़ते बिल से बचने के लिए लोग अब सोलर पावर यूज करने लगे हैं. हालांकि, कई लोगों के लिए अपनी जरूरत के हिसाब से सही सोलर एनर्जी सिस्टम चुनना कंफ्यूजिंग हो सकता है. ज्यादातर लोग 3kW और 5kW के सिस्टम में कंफ्यूज होते हैं. दोनों की लागत में अंतर है और कैपेसिटी में भी. इसलिए बिना ज्यादा पैसा खर्च किए सही सिस्टम चुनना जरूरी हो जाता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर की जरूरत के हिसाब से आपको 3kW और 5kW में से कौन-सा सिस्टम चुनना चाहिए.
सबसे पहले देखें बिजली की खपत
सोलर पैनल का साइज चुनने के लिए बिजली की खपत को सबसे बड़ा आधार बनाया जा सकता है. आप अपने बिजली बिल पर देख सकते हैं कि महीने में आप कितनी बिजली की खपत कर रहे हैं. अगर मोटा अनुमान लिया जाए तो 2BHK में 6-10 यूनिट रोजाना खर्च होती है. बड़े घर में ज्यादा अप्लायंस होने के कारण खपत और बढ़ जाती है और यह 15-25 यूनिट तक जा सकती है. वहीं अगर सोलर पैनल की कैपेसिटी देखें तो 3kW का सिस्टम रोजाना लगभग 15-18 और 5kW का सिस्टम 25-30 यूनिट तक जरनेट कर सकता है.
पैनल लगाने के लिए कितनी जगह चाहिए?
आजकल 550W के पैनल ज्यादा चलन में है. अगर आप 5kW का सिस्टम लगाते हैं तो 9-10 पैनल की जरूरत पड़ती है. पैनल को हमेशा टिल्ट कर और साउथ-फेसिंग लगाया जाता है. अगर kW &amp;nbsp;का सिस्टम लगाने के लिए 100-120 स्क्वेयर फीट की जरूरत पड़ती है. इस तरह आप 3kW और 5kW के लिए स्पेस का हिसाब लगा सकते हैं. पैनल लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें, जहां छांव न रहे.
सोलर एनर्जी सिस्टम से कितनी बचत हो जाएगी?
सोलर पैनल एनर्जी जनरेशन के लिए सनलाइट पर डिपेंड रहते हैं. सनलाइट जितने ज्यादा घंटे रहेगी, पावर जनरेशन उतना ही ज्यादा होगा. मोटे तौर पर हिसाब लगाया जाए तो 3kW वाला सिस्टम एक एसी और घर के दूसरे अप्लायंसेस की खपत के बराबर एनर्जी जनरेट कर सकता है. इस तरह आप हर महीने 3,000-5,000 रुपये बचा सकते हैं. वहीं अगर आप 2 एसी और घर के बाकी अप्लायंसेस यूज करते हैं तो इसके लिए 5kW का सिस्टम लगवाना चाहिए. यह आपके हर महीने बिजली बिल के 5,000-10,000 रुपये बचा सकता है. इस तरह कुछ ही सालों में सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने की लागत पूरी हो जाती है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Podcast सुनने वालों की लग गई लॉटरी! YouTube Premium में आया गेम&amp;चेंजर फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube New Feature: YouTube Premium यूजर्स के लिए पॉडकास्ट सुनने का अनुभव अब पहले से ज्यादा स्मार्ट और आसान होने जा रहा है. कंपनी ने कई नए फीचर्स पेश किए हैं जिनमें बेहतर प्लेबैक कंट्रोल, AI आधारित पॉडकास्ट सुझाव और उन्नत बैकग्राउंड लिसनिंग शामिल हैं. इन अपडेट्स का मकसद उन यूजर्स को बेहतर सुविधा देना है जो लंबे पॉडकास्ट सुनना पसंद करते हैं और चलते-फिरते भी अपने पसंदीदा शो से जुड़े रहना चाहते हैं.
On-the-Go Mode से पॉडकास्ट सुनना होगा आसान
YouTube का नया On-the-Go Mode खास तौर पर उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो पॉडकास्ट को देखने की बजाय सुनना ज्यादा पसंद करते हैं. इस मोड में प्लेबैक कंट्रोल्स तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो जाती है जिससे यूजर्स बिना किसी परेशानी के अपने पॉडकास्ट को नियंत्रित कर सकते हैं.
अगर आप यात्रा कर रहे हैं जिम में वर्कआउट कर रहे हैं, टहल रहे हैं या किसी अन्य काम में व्यस्त हैं तब भी यह फीचर आपके लिए उपयोगी साबित होगा. इसकी मदद से आप कुछ ही टैप में पॉडकास्ट को आगे या पीछे कर सकते हैं और अन्य ऐप्स इस्तेमाल करते समय भी सुनना जारी रख सकते हैं. फिलहाल यह सुविधा Android पर YouTube Premium सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध कराई गई है जबकि iPhone यूजर्स को यह फीचर जल्द मिलने की उम्मीद है.
On-the-Go Mode के प्रमुख फायदे
इस फीचर के जरिए यूजर्स आसानी से पॉडकास्ट को फास्ट-फॉरवर्ड या रिवाइंड कर सकते हैं. प्लेबैक कंट्रोल्स तक पहुंच सरल हो जाती है और दूसरे ऐप्स इस्तेमाल करते समय भी ऑडियो बिना रुकावट चलता रहता है. साथ ही बैकग्राउंड में सुनने का अनुभव पहले से ज्यादा बेहतर हो जाता है.
Autospeed फीचर खुद एडजस्ट करेगा प्लेबैक स्पीड
YouTube ने Autospeed नाम का एक नया फीचर भी जोड़ा है. आमतौर पर यूजर्स को पॉडकास्ट की स्पीड खुद तय करनी पड़ती है लेकिन अब यह काम सिस्टम अपने आप करेगा. यह फीचर पॉडकास्ट की बातचीत और कंटेंट की गति को समझकर प्लेबैक स्पीड को एडजस्ट करता है. यदि बातचीत धीमी चल रही हो तो यह स्पीड बढ़ा सकता है जबकि किसी महत्वपूर्ण या जटिल जानकारी वाले हिस्से में स्पीड कम कर सकता है ताकि श्रोता कोई जरूरी बात मिस न करें.
इससे यूजर्स कम समय में ज्यादा कंटेंट सुन सकेंगे और महत्वपूर्ण जानकारी भी आसानी से समझ पाएंगे. फिलहाल Android पर YouTube Premium यूजर्स को यह सुविधा मिल रही है जबकि iOS सपोर्ट जल्द आने वाला है.
Ask Music अब AI की मदद से सुझाएगा पॉडकास्ट
YouTube ने अपने Ask Music फीचर को भी अपग्रेड किया है. पहले यह केवल म्यूजिक रिकमेंडेशन देता था लेकिन अब AI की मदद से पॉडकास्ट भी सुझाएगा. यूजर्स अपनी पसंदीदा श्रेणी, मूड, पसंदीदा पॉडकास्ट या सुनने की आदतों के आधार पर नए पॉडकास्ट खोज सकते हैं.
आपको सिर्फ यह बताना होगा कि आप किस तरह का कंटेंट सुनना चाहते हैं इसके बाद YouTube का AI आपके लिए उपयुक्त शो की सिफारिश करेगा. यह सुविधा फिलहाल कुछ चुनिंदा देशों में YouTube Premium और YouTube Music Premium यूजर्स के लिए उपलब्ध है.
चरणबद्ध तरीके से जारी हो रहे हैं अपडेट्स
YouTube इन सभी नए फीचर्स को धीरे-धीरे रोलआउट कर रहा है. On-the-Go Mode और Autospeed फिलहाल Android यूजर्स के लिए उपलब्ध हैं, जबकि iPhone सपोर्ट आने वाले समय में जोड़ा जाएगा. वहीं AI आधारित पॉडकास्ट सुझावों वाला Ask Music फीचर अभी केवल कुछ देशों तक सीमित है.
इन नए अपडेट्स के जरिए YouTube पॉडकास्ट की दुनिया में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है. कंपनी का फोकस यूजर्स को अधिक व्यक्तिगत, स्मार्ट और सुविधाजनक अनुभव देने पर है ताकि वे अपने पसंदीदा पॉडकास्ट का आनंद पहले से बेहतर तरीके से ले सकें.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>ATM Technology: ATM में कैश खत्म होने से पहले बैंक को कैसे पता चल जाता है, कैसे काम करती है टेक्नोलॉजी? </title>
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        <description><![CDATA[ ATM Technology:&amp;nbsp; रोजाना लाखों लोग ATM से पैसे निकालते हैं. किसी को सैलरी निकालनी होती है, किसी को खरीदारी के लिए कैश चाहिए होता है, तो कोई अचानक जरूरत पड़ने पर ATM पहुंच जाता है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बैंक को कैसे पता चल जाता है कि किसी ATM में पैसे खत्म होने वाले हैं? क्या बैंक तब जागता है जब ATM खाली हो जाता है? असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है.
आज के समय का ATM सिर्फ पैसे निकालने वाली मशीन नहीं, बल्कि बैंक से लगातार जुड़ा हुआ एक स्मार्ट सिस्टम है. यह मशीन हर सेकंड अपनी जानकारी बैंक के सर्वर तक पहुंचाती रहती है और कैश की स्थिति पर नजर बनाए रखती है.&amp;nbsp;
ATM के अंदर कैसे होती है पैसों की निगरानी?
ATM के अंदर अलग-अलग कैश बॉक्स यानी कैश कैसट लगे होते हैं, जिनमें 100 रुपये, 200 रुपये और 500 रुपये या दूसरे नोट रखे जाते हैं. जब भी कोई ग्राहक पैसे निकालता है, मशीन तुरंत रिकॉर्ड अपडेट कर देती है कि कितने नोट निकले और कितने बचे हैं. इसके लिए ATM में खास सेंसर और सॉफ्टवेयर लगे होते हैं. ये सिस्टम लगातार कैश की गिनती करता रहता है. इतना ही नहीं, ATM यह भी बता सकता है कि कौन-से नोट ज्यादा बचे हैं और कौन-से लगभग खत्म होने वाले हैं. &amp;nbsp;यही वजह है कि बैंक को हर समय ATM की सही स्थिति पता रहती है.&amp;nbsp;
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कैश कम होते ही बैंक को मिल जाता है अलर्ट
जैसे ही ATM में कैश तय की गई सीमा से नीचे पहुंचता है, मशीन अपने आप बैंक के कंट्रोल रूम या मॉनिटरिंग सिस्टम को डिजिटल अलर्ट भेज देती है. इसके बाद बैंक की टीम तुरंत कार्रवाई शुरू कर देती है. इसी जानकारी के आधार पर कैश वैन भेजी जाती है और ATM में दोबारा पैसे भरे जाते हैं. साथ ही कई बैंक अब ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं जो यह अनुमान भी लगा लेते हैं कि किसी इलाके में किस दिन और किस समय ज्यादा कैश निकलेगा. त्योहारों, सैलरी डेट और छुट्टियों के दौरान ATM में अतिरिक्त कैश रखा जाता है ताकि लोगों को परेशानी न हो.&amp;nbsp;
स्मार्ट डेटा और टेक्नोलॉजी से चलता है पूरा खेल
आज ATM मैनेजमेंट पूरी तरह डेटा और टेक्नोलॉजी पर आधारित हो चुका है. बैंक सिर्फ यह नहीं देखते कि ATM में कितने पैसे बचे हैं, बल्कि यह भी देखते हैं कि किस इलाके में कैश की मांग कितनी है. इसी वजह से व्यस्त बाजारों, रेलवे स्टेशन और भीड़भाड़ वाले इलाकों के ATM ज्यादा बार भरे जाते हैं. वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी बैंकों को ATM में कैश उपलब्ध रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं. साल 2021 में RBI ने कहा था कि अगर ATM लंबे समय तक खाली रहता है तो संबंधित बैंक पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसलिए बैंक लगातार अपने ATM नेटवर्क की निगरानी करते हैं. साफ शब्दों में कहें तो ATM कोई साधारण मशीन नहीं, बल्कि बैंक से हर पल बातचीत करने वाला एक स्मार्ट डिजिटल सिस्टम है, जो पैसे खत्म होने से पहले ही बैंक को खबर दे देता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>फोन नंबर और एड्रेस Google पर हो गए पब्लिक? जानिए उन्हें हटाने का सबसे आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Google: आज के डिजिटल युग में हमारी निजी जानकारी पहले से कहीं अधिक ऑनलाइन मौजूद है. फोन नंबर, ईमेल आईडी, घर का पता और अन्य व्यक्तिगत विवरण कई बार अनजाने में इंटरनेट पर सार्वजनिक हो जाते हैं. सबसे बड़ी चिंता तब होती है जब ये जानकारी सीधे Google Search में दिखाई देने लगती है. ऐसी स्थिति में साइबर अपराधियों के लिए स्पैम कॉल, फिशिंग अटैक, पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे अपराध करना आसान हो सकता है. अच्छी बात यह है कि Google ने यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐसे टूल उपलब्ध कराए हैं जिनकी मदद से आप अपनी निजी जानकारी को सर्च रिजल्ट्स से हटाने की मांग कर सकते हैं.
Google पर अपनी जानकारी कैसे खोजें?
यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी कौन-कौन सी निजी जानकारी Google Search में दिखाई दे रही है तो Google का Results About You टूल आपकी मदद कर सकता है. इस टूल का इस्तेमाल करने के लिए अपने Google अकाउंट में साइन इन करें और वहां अपना मोबाइल नंबर, ईमेल पता या घर का पता दर्ज करें जिसे आप ट्रैक करना चाहते हैं.
इसके बाद आप तय कर सकते हैं कि Google आपको ईमेल के जरिए सूचना भेजे या Google ऐप नोटिफिकेशन के माध्यम से. एक बार सेटअप पूरा होने पर Google इंटरनेट पर मौजूद जानकारी को स्कैन करता है और आपको रिपोर्ट देता है कि आपकी व्यक्तिगत जानकारी किन-किन वेबसाइटों या सर्च रिजल्ट्स में दिखाई दे रही है.
सर्च रिजल्ट्स से जानकारी हटाने का तरीका
अगर आपको कोई ऐसा Google Search रिजल्ट मिल जाता है जिसमें आपकी निजी जानकारी दिखाई दे रही है तो आप सीधे उसे हटाने के लिए अनुरोध भेज सकते हैं. इसके लिए उस सर्च रिजल्ट को खोलें और उसके साथ दिखाई देने वाले तीन डॉट्स (Three Dots) पर क्लिक करें. यहां आपको Remove Result का विकल्प मिलेगा.
इसके बाद Google आपसे कारण पूछेगा कि आप उस लिंक को क्यों हटाना चाहते हैं. उदाहरण के लिए, यदि उसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी मौजूद है या फिर वह जानकारी पुरानी हो चुकी है तो आप संबंधित विकल्प चुनकर अनुरोध भेज सकते हैं. Google आपकी रिक्वेस्ट की समीक्षा करने के बाद आवश्यक कार्रवाई करता है.
संवेदनशील जानकारी लीक होने पर क्या करें?
यदि इंटरनेट पर आपकी अत्यधिक संवेदनशील जानकारी जैसे सरकारी पहचान पत्र, बैंक खाते का विवरण, क्रेडिट कार्ड नंबर, पासवर्ड या मेडिकल रिकॉर्ड्स दिखाई दे रहे हैं तो केवल सामान्य रिमूवल रिक्वेस्ट पर्याप्त नहीं हो सकती. ऐसी स्थिति में Google के Personal Content Removal सपोर्ट पेज का उपयोग करना बेहतर होता है.
यहां आपको अपनी समस्या के अनुसार सही श्रेणी चुननी होती है और उस वेबपेज का URL तथा अन्य जरूरी जानकारी भरकर फॉर्म जमा करना होता है. इसके बाद Google मामले की जांच करता है और उचित निर्णय लेता है.
पुरानी तस्वीरें और जानकारी हटाने का उपाय
कई बार ऐसा होता है कि आपने किसी वेबसाइट से अपनी फोटो या जानकारी हटवा दी होती है लेकिन वह Google Search में काफी समय तक दिखाई देती रहती है. ऐसा Google के कैश्ड डेटा की वजह से होता है. इस समस्या के समाधान के लिए Google का Remove Outdated Content टूल इस्तेमाल किया जा सकता है. आपको सिर्फ उस पेज का URL जमा करना होता है और Google पुरानी जानकारी को अपने सर्च इंडेक्स से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देता है. इसी तरह, यदि कोई पुरानी तस्वीर Google Images में दिखाई दे रही है तो उसके URL के माध्यम से भी रिमूवल रिक्वेस्ट भेजी जा सकती है.
यह बात जरूर समझें
Google Search से किसी लिंक या जानकारी को हटाने का मतलब यह नहीं है कि वह डेटा इंटरनेट से पूरी तरह मिट गया है. यदि वह जानकारी मूल वेबसाइट पर मौजूद है, तो उसे पूरी तरह हटाने के लिए आपको उस वेबसाइट के एडमिनिस्ट्रेटर या मालिक से संपर्क करना होगा और कंटेंट हटाने का अनुरोध करना होगा.
जब आप Google को कोई रिमूवल रिक्वेस्ट भेजते हैं तो कंपनी आपको एक कन्फर्मेशन ईमेल भेजती है. इसके बाद Google की टीम मामले की समीक्षा करती है और प्राइवेसी तथा सार्वजनिक हित दोनों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेती है. इसलिए हर अनुरोध स्वीकार हो जाए, यह जरूरी नहीं है. हालांकि, आपकी रिक्वेस्ट का क्या हुआ, इसकी जानकारी आपको नोटिफिकेशन या ईमेल के माध्यम से दे दी जाती है.
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        <title>हर साल क्यों महंगे होते जा रहे हैं स्मार्टफोन? सामने आ गई बड़ी वजह, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Price Hike: अगर आपने पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन बाजार पर नजर रखी है तो आपने जरूर महसूस किया होगा कि फोन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. जो स्मार्टफोन कभी 10 हजार रुपये के आसपास मिल जाता था आज उसकी कीमत 15 से 20 हजार रुपये तक पहुंच रही है. यह बदलाव केवल प्रीमियम ब्रांड्स तक सीमित नहीं है, बल्कि बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में भी साफ दिखाई देता है. महंगाई इसका एक कारण जरूर है लेकिन इसके पीछे कई तकनीकी और कारोबारी वजहें भी काम कर रही हैं.
AI और पावरफुल प्रोसेसर ने बढ़ाई कीमत
आज के स्मार्टफोन पहले की तुलना में कहीं ज्यादा स्मार्ट और ताकतवर हो गए हैं. कंपनियां अब ऐसे प्रोसेसर इस्तेमाल कर रही हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाई-एंड गेमिंग और मल्टीटास्किंग जैसे काम आसानी से संभाल सकें.
क्वालकॉम, मीडियाटेक और अन्य चिप निर्माता लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इन एडवांस चिप्स को विकसित करने और बनाने में अधिक लागत आती है. यही वजह है कि आधुनिक स्मार्टफोन के हार्डवेयर पर पहले से ज्यादा खर्च हो रहा है जिसका असर सीधे फोन की कीमत पर पड़ता है.
5G तकनीक ने बढ़ाया खर्च
भारत में 5G नेटवर्क तेजी से फैल चुका है और अब लगभग हर नए स्मार्टफोन में 5G सपोर्ट देखने को मिलता है. हालांकि, 5G को फोन में शामिल करना कंपनियों के लिए सस्ता नहीं है. 5G स्मार्टफोन में उन्नत मॉडेम, बेहतर एंटीना सिस्टम, अधिक प्रभावी कूलिंग तकनीक और बड़ी बैटरी की जरूरत होती है. इन सभी अतिरिक्त हार्डवेयर की वजह से उत्पादन लागत बढ़ जाती है. यही कारण है कि अब एंट्री-लेवल फोन भी पहले की तुलना में महंगे हो गए हैं.
कैमरा और डिस्प्ले पर बढ़ता फोकस
आज के उपभोक्ता सिर्फ एक साधारण स्मार्टफोन नहीं चाहते. वे शानदार कैमरा, बेहतरीन डिस्प्ले और प्रीमियम अनुभव की उम्मीद करते हैं. हाई मेगापिक्सल कैमरे, AMOLED स्क्रीन, हाई रिफ्रेश रेट, ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) और एडवांस जूम जैसी सुविधाएं अब मिड-रेंज फोन में भी मिलने लगी हैं. इन फीचर्स के लिए महंगे कंपोनेंट्स की जरूरत पड़ती है जिससे फोन की कुल लागत बढ़ जाती है.
मैन्युफैक्चरिंग और आयात लागत का असर
स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण पार्ट्स विदेशों से आयात किए जाते हैं. हाल के वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है.
इसके अलावा शिपिंग लागत, कच्चे माल की कीमत और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी कंपनियों के खर्च को बढ़ाते हैं. भारत में असेंबली बढ़ने के बावजूद कई प्रीमियम पार्ट्स अभी भी चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से मंगाए जाते हैं.
लंबे सॉफ्टवेयर अपडेट भी हैं एक वजह
पहले स्मार्टफोन कंपनियां सीमित समय तक ही सॉफ्टवेयर अपडेट देती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. कई ब्रांड 3 से 7 साल तक एंड्रॉयड अपडेट और सुरक्षा पैच देने का वादा कर रहे हैं.
लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट बनाए रखने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त इंजीनियरिंग टीम और संसाधनों की जरूरत होती है. यह निवेश भी आखिरकार उत्पाद की कीमत में शामिल हो जाता है.
AI फीचर्स बन रहे हैं सबसे बड़ा आकर्षण
स्मार्टफोन इंडस्ट्री में AI अब सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है. कंपनियां अपने नए डिवाइस में AI आधारित सुविधाओं को प्रमुखता से पेश कर रही हैं. फोटो एडिटिंग, लाइव ट्रांसलेशन, स्मार्ट वर्चुअल असिस्टेंट, AI सर्च समरी और कई अन्य इंटेलिजेंट फीचर्स अब स्मार्टफोन का हिस्सा बन रहे हैं. इन सुविधाओं को बेहतर तरीके से चलाने के लिए शक्तिशाली हार्डवेयर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है जिससे विकास लागत बढ़ती है.
ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाएं
भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद भी तेजी से बदल रही है. अब लोग बेहतर डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ, तेज चार्जिंग, शानदार कैमरा और गेमिंग परफॉर्मेंस चाहते हैं. जब ग्राहक अधिक फीचर्स और बेहतर अनुभव की मांग करते हैं तो कंपनियां भी उसी अनुसार नए और महंगे मॉडल बाजार में उतारती हैं. इससे स्मार्टफोन की औसत कीमत लगातार बढ़ रही है.
अब बजट फोन भी पहले जैसे नहीं रहे
कुछ साल पहले बजट स्मार्टफोन का मतलब केवल कॉलिंग, मैसेजिंग और बेसिक ऐप्स तक सीमित था. लेकिन आज कम कीमत वाले फोन में भी हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले, बड़ी बैटरी, फास्ट चार्जिंग, मल्टीपल कैमरे और 5G सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलने लगे हैं. यानी अब बजट स्मार्टफोन की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है. कम कीमत वाले फोन भी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हो गए हैं.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या 24 घंटे ऑन रहने पर AC की तरह फट सकता है आपका Wi&amp;Fi Router? यहां जानिए पूरी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi Router: आज के समय में Wi-Fi Router लगभग हर घर और ऑफिस की जरूरत बन चुका है. कई लोग इसे 24 घंटे चालू रखते हैं ताकि इंटरनेट सेवा लगातार मिलती रहे. हाल के वर्षों में एयर कंडीशनर (AC) में आग लगने या ब्लास्ट जैसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं जिसके बाद लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या Wi-Fi Router भी उसी तरह फट सकता है? इसका जवाब है हां, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम होती है. फिर भी कुछ परिस्थितियों में Router में ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट या आग लगने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
क्यों हो सकता है Router खतरनाक?
Wi-Fi Router के अंदर कई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और एक पावर एडॉप्टर होता है. लगातार बिजली मिलने और लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण ये हिस्से गर्म हो सकते हैं. यदि डिवाइस की क्वालिटी खराब हो, बिजली की सप्लाई अस्थिर हो या वेंटिलेशन सही न मिले तो खतरा बढ़ सकता है.
हालांकि Router में AC जैसी बड़ी कंप्रेसर यूनिट या हाई-पावर सिस्टम नहीं होता इसलिए बड़े ब्लास्ट की संभावना बेहद कम रहती है. लेकिन अत्यधिक गर्मी से धुआं निकलना, पिघलना या आग लगना संभव है.
ओवरहीटिंग सबसे बड़ा कारण
Router को अक्सर लोग टीवी के पीछे, बंद अलमारी में या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के ऊपर रख देते हैं. इससे गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती और डिवाइस का तापमान बढ़ने लगता है. अगर Router छूने पर बहुत ज्यादा गर्म महसूस हो, बार-बार इंटरनेट डिस्कनेक्ट हो या उसमें से जलने जैसी गंध आए तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है.
सस्ते एडॉप्टर और नकली एक्सेसरीज से बढ़ता है जोखिम
कई बार असली पावर एडॉप्टर खराब होने पर लोग सस्ते या लोकल चार्जर इस्तेमाल करने लगते हैं. गलत वोल्टेज या खराब गुणवत्ता वाला एडॉप्टर शॉर्ट सर्किट का कारण बन सकता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा कंपनी द्वारा दिए गए ओरिजिनल एडॉप्टर का ही इस्तेमाल करें और खराब केबल को तुरंत बदल दें.
सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये उपाय

Router को खुली और हवादार जगह पर रखें.
उसके ऊपर कोई भारी वस्तु न रखें.
बिजली के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सर्ज प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करें.
समय-समय पर धूल साफ करते रहें.
बहुत पुराने Router या क्षतिग्रस्त एडॉप्टर को बदल दें.
यदि लंबे समय तक घर से बाहर जा रहे हैं तो Router को बंद कर सकते हैं.

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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ऑफिस में इंसानों से ज्यादा काम कर रहे AI टूल्स! 2026 में Copilot से लेकर ChatGPT तक का हो रहा इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ AI Tools: साल 2026 में ऑफिस में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब AI सिर्फ एक अलग चैटबॉट या सहायक नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे उन टूल्स के अंदर शामिल हो चुका है जिन्हें लोग रोज इस्तेमाल करते हैं. चाहे डॉक्यूमेंट बनाना हो, डेटा एनालिसिस करना हो, मीटिंग का सार निकालना हो या फिर रोजमर्रा के काम ऑटोमेट करना हो, AI अब हर जगह अहम भूमिका निभा रहा है.
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कर्मचारियों को अलग-अलग ऐप्स में जाने की जरूरत कम पड़ रही है. AI सीधे Word, Excel, Gmail, Slack और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म के भीतर काम कर रहा है. आइए जानते हैं उन AI टूल्स के बारे में जो 2026 में ऑफिस प्रोडक्टिविटी की तस्वीर बदल रहे हैं.
Microsoft 365 Copilot
Microsoft Copilot आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले एंटरप्राइज AI सिस्टम्स में शामिल हो चुका है. यह Word, Excel, PowerPoint, Outlook और Teams जैसे टूल्स के अंदर ही काम करता है. यूजर्स साधारण भाषा में कमांड देकर डॉक्यूमेंट तैयार कर सकते हैं, स्प्रेडशीट का विश्लेषण कर सकते हैं, मीटिंग का सार निकाल सकते हैं और टास्क मैनेज कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लोगों को अलग प्लेटफॉर्म पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती जिससे काम की गति काफी बढ़ जाती है.
Google Workspace with Gemini
Google ने अपने Workspace प्लेटफॉर्म को Gemini AI के जरिए और ज्यादा स्मार्ट बना दिया है. अब Docs, Sheets, Slides और Drive में AI आधारित फीचर्स शामिल हैं जो कंटेंट तैयार करने, डेटा का सार निकालने और ऑटोमेशन में मदद करते हैं. Gemini ईमेल, डॉक्यूमेंट और अन्य फाइलों के डेटा को समझकर कॉन्टेक्स्ट के अनुसार सुझाव देता है. खासतौर पर वे कंपनियां जो पहले से Google Ecosystem का इस्तेमाल करती हैं उनके लिए यह काफी उपयोगी साबित हो रहा है.
Notion AI
Notion AI ने डॉक्यूमेंटेशन, डेटाबेस और टास्क मैनेजमेंट को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाकर काम को आसान बना दिया है. यह लंबे डॉक्यूमेंट्स का सार तैयार कर सकता है, जरूरी टास्क पहचान सकता है और कंपनी के इंटरनल डेटा से सवालों के जवाब भी दे सकता है. यही वजह है कि इसे अब ऑल-इन-वन वर्कस्पेस के तौर पर देखा जा रहा है.
ChatGPT
ChatGPT अब भी सबसे लोकप्रिय AI टूल्स में से एक बना हुआ है. लोग इसका इस्तेमाल लेखन, रिसर्च, कोडिंग, आइडिया जनरेशन और समस्या समाधान जैसे कामों में कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लचीलापन है. यह किसी एक काम तक सीमित नहीं है बल्कि अलग-अलग इंडस्ट्री में एक सामान्य AI सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. कई कंपनियों के वर्कफ्लो में यह थिंकिंग लेयर की तरह काम कर रहा है.
Zapier AI
Zapier AI हजारों ऐप्स को आपस में जोड़कर ऑटोमेटेड वर्कफ्लो बनाने में मदद करता है. यूजर्स सिर्फ साधारण भाषा में निर्देश देकर ईमेल, मैसेजिंग ऐप्स, डेटाबेस और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टूल्स को एक साथ जोड़ सकते हैं. इससे दोहराए जाने वाले काम अपने आप होने लगते हैं और कर्मचारियों का समय बचता है.
Grammarly
पहले Grammarly सिर्फ ग्रामर सुधारने वाला टूल माना जाता था लेकिन अब यह एक एडवांस कम्युनिकेशन असिस्टेंट बन चुका है. यह ईमेल लिखने, टोन सुधारने और कंटेंट को ज्यादा स्पष्ट और प्रोफेशनल बनाने में मदद करता है. ऑफिस कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है.
Otter.ai
Otter.ai खासतौर पर ऑनलाइन मीटिंग्स के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है. यह रियल टाइम में मीटिंग ट्रांसक्राइब करता है, जरूरी पॉइंट्स का सार बनाता है और एक्शन आइटम्स पहचानता है. रिमोट और हाइब्रिड वर्क कल्चर में यह प्रशासनिक काम का बोझ काफी कम कर रहा है.
ClickUp AI
ClickUp AI प्रोजेक्ट मैनेजमेंट को और ज्यादा स्मार्ट बना रहा है. यह टास्क प्लान तैयार कर सकता है, प्रोजेक्ट्स का सार बना सकता है और वर्कफ्लो ऑटोमेट कर सकता है. बड़ी टीमों और मल्टी-लेयर प्रोजेक्ट्स को मैनेज करने में यह काफी मददगार साबित हो रहा है.
2026 का AI ट्रेंड क्या संकेत देता है?
2026 के ट्रेंड को देखें तो साफ पता चलता है कि AI अब अलग टूल नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे ऑफिस सॉफ्टवेयर के भीतर शामिल हो चुका है. एक तरफ Microsoft 365 और Google Workspace जैसे प्लेटफॉर्म AI-फर्स्ट सिस्टम बन रहे हैं, वहीं ChatGPT जैसे टूल्स अब भी फ्लेक्सिबल सोच और क्रिएटिव कामों के लिए बेहद लोकप्रिय हैं. दूसरी ओर Zapier जैसे ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म अलग-अलग ऐप्स को जोड़कर पूरे वर्कफ्लो को स्मार्ट बना रहे हैं. आने वाले समय में AI सिर्फ काम को तेज नहीं करेगा बल्कि ऑफिस में काम करने के पूरे तरीके को बदल देगा.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>ऑफिस, में, इंसानों, से, ज्यादा, काम, कर, रहे, टूल्स, 2026, में, Copilot, से, लेकर, ChatGPT, तक, का, हो, रहा, इस्तेमाल</media:keywords>
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        <title>Cyber Attacks in India: साइबर सिक्योरिटी के मामले में भारत की रैंकिंग कितनी, इस मामले में अमेरिका&amp;यूरोप हमसे कितने आगे?</title>
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        <description><![CDATA[ Cyber Attacks in India:&amp;nbsp;इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) के ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी इंडेक्स (जीसीआई) 2024 में भारत को शीर्ष टियर 1 यानी रोल-मॉडलिंग देशों की श्रेणी में रखा गया था, जहां भारत ने 100 में से 98.49 का अच्छा स्कोर हासिल किया था. कानूनी, तकनीकी और संगठनात्मक मोर्चों पर कड़े कदम उठाने के कारण कागजी तौर पर भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शुमार है.
वहीं, इसके उलट वर्ल्ड साइबर क्राइम इंडेक्स और अन्य वैश्विक रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत साइबर क्रिमिनल्स के निशाने पर रहने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश भी है. जमीनी स्तर पर हर हफ्ते भारतीय संगठनों को औसतन 3000 से अधिक साइबर हमलों का सामना करना पड़ता है.&amp;nbsp;
सीबीएसई के पोर्टल में सेंध
भारत की डिजिटल सुरक्षा की इस जमीनी हकीकत और बुनियादी कमियों की पोल तब खुल गई जब हाल ही में सीबीएसई के री-इवैल्युएशन पोर्टल पर मैलिसियस अटैक हुआ. इस साइबर हमले के कारण पोर्टल के पेमेंट गेटवे में सेंध लगी और लगभग 50 छात्रों को सिस्टम का अनऑथराइजड एक्सेस मिल गया. जिसके कारण पोर्टल पर फीस की राशि में भारी गड़बड़ी देखने को मिली, जहां प्रति विषय फीस 1 रुपये से लेकर 68000 रुपये तक दिखाई देने लगी.
वहीं, इससे पहले एक 19 वर्षीय एथिकल हैकर ने भी सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पोर्टल में हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड और कमजोर लॉगिन सिस्टम जैसी बेहद गंभीर खामियों का खुलासा किया था. हालांकि बोर्ड ने लाइव डेटा लीक से इनकार किया है, लेकिन इस घटना के बाद केंद्र सरकार को तुरंत आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट्स को सिस्टम के टेक्निकल ऑडिट और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैनात करना पड़ा. इस घटना से पता चलता है कि हमारे महत्वपूर्ण सरकारी और शैक्षणिक डेटाबेस कितने सेंसिटिव हैं.
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अमेरिका और यूरोपीय देश कितने एडवांस?
साइबर सुरक्षा के कड़े नियम और नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के मामले में अमेरिका और &amp;nbsp;यूरोपीय देश भारत से काफी आगे हैं.
बजट और एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर: अमेरिका जो जीसीआई में पहला स्थान रखता है और ब्रिटेन जैसे देश अपने कुल आईटी बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा केवल साइबर सुरक्षा और एआई से चलने वाले डिफेंस सिस्टम पर खर्च करते हैं.&amp;nbsp;
कड़े डेटा कानून: यूरोप का जीडीपीआर (जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन) दुनिया का सबसे सख्त डेटा प्राइवेसी कानून है. वहां डेटा लीक होने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगता है, जिससे वे सुरक्षा से समझौता नहीं करती हैं.&amp;nbsp;
जमीनी जागरूकता: पश्चिमी देशों में सरकारी विभागों से लेकर छोटे व्यवसायों तक जीरो-ट्रस्ट सुरक्षा आर्किटेक्चर और सिक्योर कोडिंग को अनिवार्य माना जाता है. इसके उलट, भारत ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट(डीपीडीपीए) जैसे कानून तो बनाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू होना अभी बाकी है.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp का नया धमाका! अब सिर्फ सेकेंडों में करें Log Out, चैट्स भी नहीं होंगी गायब</title>
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        <description><![CDATA[ Whatsapp New Feature: अगर आप भी कभी WhatsApp से कुछ समय का ब्रेक लेना चाहते हैं लेकिन चैट्स और सेटिंग्स खोने के डर से ऐसा नहीं कर पाते, तो जल्द ही आपकी यह परेशानी खत्म हो सकती है. Meta के स्वामित्व वाला इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अब एक नए Logout फीचर पर काम कर रहा है जिसकी मदद से यूजर्स ऐप से साइन आउट कर सकेंगे, वो भी बिना चैट्स या डेटा हटाए.
बीटा वर्जन में दिखा नया फीचर
इस फीचर की जानकारी WABetaInfo की एक रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह फीचर WhatsApp Beta for Android वर्जन 2.26.21.9 में देखा गया है. फिलहाल इसे कुछ बीटा टेस्टर्स के लिए जारी किया गया है और आने वाले महीनों में इसे सभी यूजर्स तक पहुंचाया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp अब ऐसा विकल्प देने जा रहा है जिसमें यूजर ऐप को हटाए बिना सीधे लॉगआउट कर सकेंगे और उनका पूरा डेटा फोन में सुरक्षित रहेगा.
अब तक क्या थी परेशानी?
अभी तक WhatsApp में कोई आधिकारिक Logout ऑप्शन मौजूद नहीं है. यदि कोई यूजर कुछ समय के लिए ऐप से दूरी बनाना चाहता था तो उसे मजबूरी में ऐप अनइंस्टॉल करना पड़ता था. इसके बाद दोबारा WhatsApp इस्तेमाल करने के लिए ऐप डाउनलोड करना, नंबर वेरिफाई करना और चैट बैकअप रीस्टोर करना पड़ता था. लगातार नोटिफिकेशन और मैसेज से परेशान यूजर्स के लिए यह प्रक्रिया काफी झंझट भरी साबित होती थी.
कैसे काम करेगा नया Logout फीचर?
नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp सेटिंग्स के Account सेक्शन में Logout का विकल्प दिया जाएगा. जब यूजर इस ऑप्शन पर टैप करेगा तो पहले एक कन्फर्मेशन स्क्रीन दिखाई देगी. इसके बाद अकाउंट डिवाइस से अस्थायी रूप से डिस्कनेक्ट हो जाएगा. सबसे खास बात यह है कि इस दौरान चैट्स, मीडिया फाइल्स और अकाउंट सेटिंग्स फोन में सुरक्षित रहेंगी. यानी जब भी यूजर वापस आना चाहेगा, वह आसानी से लॉगिन करके वहीं से बातचीत शुरू कर सकेगा जहां छोड़ी थी.
डिजिटल डिटॉक्स चाहने वालों के लिए राहत
आजकल कई लोग सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स से थोड़ी दूरी बनाकर मानसिक शांति चाहते हैं. ऐसे में WhatsApp का यह फीचर काफी उपयोगी साबित हो सकता है. यूजर्स बिना डेटा खोए कुछ समय के लिए ऐप से दूर रह सकेंगे और बाद में आसानी से वापसी कर पाएंगे.
WhatsApp में पहले से मौजूद हैं ये खास फीचर्स
WhatsApp पहले ही एक फोन में दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल करने की सुविधा देता है. इससे पर्सनल और ऑफिस अकाउंट को आसानी से अलग रखा जा सकता है. इसके अलावा, प्राइवेसी बढ़ाने के लिए App Lock फीचर भी मौजूद है, जिसमें फिंगरप्रिंट, फेस अनलॉक या पासकोड के जरिए चैट्स को सुरक्षित रखा जा सकता है.
छोटा बदलाव लेकिन बड़ा असर
देखने में यह फीचर छोटा लग सकता है लेकिन करोड़ों WhatsApp यूजर्स के लिए यह काफी काम का साबित हो सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जो बार-बार नोटिफिकेशन से परेशान रहते हैं या कुछ समय के लिए डिजिटल दुनिया से दूरी बनाना चाहते हैं. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो आने वाले समय में WhatsApp छोड़ना और दोबारा वापसी करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या आपके घर या ऑफिस में लगा है ये WiFi CCTV Camera? एक गलती से लीक हो सकता है आपका पूरा पर्सनल डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ WiFi CCTV Camera: अगर आपने अपने घर, दुकान या ऑफिस में CP Plus का WiFi CCTV कैमरा लगाया हुआ है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. भारत की सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसी ने इन कैमरों में एक गंभीर सुरक्षा खामी को लेकर चेतावनी जारी की है. इस कमजोरी की वजह से यूजर्स का संवेदनशील डेटा खतरे में पड़ सकता है.
साइबर एजेंसी ने जारी की चेतावनी
भारत की साइबर सुरक्षा संस्था CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) के अनुसार, कुछ CP Plus WiFi कैमरों में ऐसा सिक्योरिटी बग मिला है जिससे हैकर्स डिवाइस के अंदर मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं. इसमें WiFi पासवर्ड, एन्क्रिप्शन डेटा और नेटवर्क से जुड़ी दूसरी जरूरी जानकारी शामिल हो सकती है.
एजेंसी का कहना है कि इस कमजोरी का फायदा उठाकर कोई भी व्यक्ति कैमरे और उससे जुड़े वायरलेस नेटवर्क की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है.
कैसे हो सकता है डेटा चोरी?
रिपोर्ट के मुताबिक, कैमरे की मेमोरी में सेव संवेदनशील डेटा को सही तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया है. अगर किसी को कैमरे तक फिजिकल एक्सेस मिल जाता है तो वह डिवाइस से WiFi क्रेडेंशियल्स, सिक्योरिटी कीज़ और कॉन्फिगरेशन डिटेल्स निकाल सकता है. इसका मतलब है कि हमलावर यह समझ सकता है कि कैमरा नेटवर्क से कैसे कनेक्ट होता है और फिर उस जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकता है.
यूजर्स के लिए क्यों खतरनाक है यह खामी?
CERT-In ने चेतावनी दी है कि इस सिक्योरिटी समस्या की वजह से कई बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं जैसे

WiFi यूजरनेम और पासवर्ड लीक होना
कैमरा और नेटवर्क के बीच होने वाले एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन तक पहुंच
नेटवर्क की निजी जानकारी चोरी होना
हैकर्स द्वारा नेटवर्क का गलत इस्तेमाल

किन CP Plus कैमरों पर है खतरा?
यह चेतावनी उन CP Plus WiFi कैमरा मॉडल्स के लिए जारी की गई है जो v02.21.031 या उससे पुराने फर्मवेयर पर चल रहे हैं.
प्रभावित मॉडल्स की लिस्ट-
CP-E38Q
CP-E48Q
CP-E25Q
CP-E35Q
CP-E45Q
CP-E28Q
CP-E21Q
CP-E31Q
CP-E41Q
CP-E24Q
CP-Z43Q
CP-E34Q
CP-E44Q
CP-T31Q
CP-V48Q
CP-V41Q
CP-Z45Q
तुरंत करें यह काम
सभी CP Plus यूजर्स को सलाह दी गई है कि वे अपने कैमरे को तुरंत अपडेट करें. कंपनी ने इस समस्या को ठीक करने के लिए नया फर्मवेयर v02.21.041 जारी किया है. यूजर्स Ezykam+ मोबाइल ऐप के जरिए OTA (Over-The-Air) अपडेट ऑप्शन का इस्तेमाल करके कैमरे को आसानी से अपडेट कर सकते हैं.

सुरक्षित रहने के लिए अपनाएं ये टिप्स
कैमरे का फर्मवेयर हमेशा अपडेट रखें
मजबूत और अलग WiFi पासवर्ड इस्तेमाल करें
अनजान लोगों को कैमरे तक फिजिकल एक्सेस न दें
समय-समय पर कैमरे की सिक्योरिटी सेटिंग्स चेक करें
डिफॉल्ट पासवर्ड तुरंत बदल दें.

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सिर्फ फोटो-वीडियो नहीं, Pen Drive का ऐसा इस्तेमाल देख आपके भी उड़ जाएंगे होश, जानिए क्या-क्या कर सकते हैं ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>क्या, आपके, घर, या, ऑफिस, में, लगा, है, ये, WiFi, CCTV, Camera, एक, गलती, से, लीक, हो, सकता, है, आपका, पूरा, पर्सनल, डेटा</media:keywords>
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        <title>Government Data Leak: सरकारी संस्था से डेटा लीक होने पर क्या कानूनी अधिकार, जानें डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियम</title>
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        <description><![CDATA[ Government Data Leak: सीबीएसई के लाखों छात्रों के लिए शुरू किया गया री-इवैल्यूएशन पोर्टल अचानक चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल] सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर सामने आई साइबर सुरक्षा चूक ने लाखों छात्रों और पेरेंट्स के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार,&amp;nbsp; पोर्टल के पेमेंट सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी और कथित साइबर हमले के बाद कुछ छात्रों को सिस्टम पर अनधिकृत पहुंच मिल गई थी. इसके चलते कई मामलों में री-इवैल्यूएशन फीस की राशि सामान्य रकम की जगह एक रुपये से लेकर 67 से 68 हजार तक दिखाई देने लगी. मामले के सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री, तकनीकी एक्सपर्ट्स और सरकारी संस्थाओं ने जांच शुरू कर दी है.
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर किसी सरकारी संस्था, बोर्ड, यूनिवर्सिटी या सरकारी पोर्टल से नागरिकों का डेटा लीक हो जाए या डाटा सुरक्षा में चूक हो जाए तो आम लोगों के पास क्या कानूनी अधिकार हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सरकारी संस्था से डेटा लीक होने पर क्या कानूनी अधिकार है और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियम क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम 2023 भारत का पहला व्यापक डेटा संरक्षण कानून है. इसे अगस्त 2023 में संसद से मंजूरी मिली थी, जबकि इसके नियमों को बाद में अधिसूचित किया गया. इस कानून का उद्देश्य नागरिकों के डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्था या कंपनी लोगों की पर्सनल जानकारी का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना न कर सके. मोबाइल नंबर, आधार नंबर, बैंकिंग जानकारी, ईमेल आईडी, ऑनलाइन रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल व्यक्तिगत जानकारियां इस कानून के दायरे में आती है.&amp;nbsp;
डेटा लीक होने पर नागरिकों को क्या मिलते हैं अधिकार?&amp;nbsp;
कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को अपने डेटा पर नियंत्रण का अधिकार दिया गया है. यदि किसी सरकारी संस्था, कंपनी या डिजिटल प्लेटफार्म से उसका डेटा लीक होता है तो संबंधित व्यक्ति कई तरह के अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है. नागरिक यह जान सकते हैं कि उनका डेटा किस उद्देश्य से एकत्रित किया गया और उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है. इसके अलावा वे अपने डेटा में सुधार, अपडेट या उसे हटाने की मांग भी कर सकते हैं. किसी डेटा उल्लंघन की स्थिति में प्रभावित लोगों को उसकी जानकारी देना भी संबंधित संस्था की जिम्मेदारी होगी. नियमों के अनुसार, डेटा उल्लंघन होने पर संबंधित संस्था को बिना अनावश्यक देरी के प्रभावित व्यक्तियों को सूचना देनी होगी. सूचना में यह बताना जरूरी होगा कि डेटा लीक कैसे हुआ, उससे क्या संभावित असर पड़ सकता है और &amp;nbsp;समस्या को दूर करने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं.&amp;nbsp;
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किन संस्थाओं पर लागू होता है कानून?&amp;nbsp;
यह कानून सभी संस्थाओं पर लागू होता है जो भारतीय नागरिकों का डिजिटल डाटा एकत्र करती है या उसका उपयोग करती है. &amp;nbsp;इसमें सरकारी विभाग, बैंक, हॉस्पिटल, एजुकेशन इंस्टीट्यूट, ई-कॉमर्स प्लेटफार्म, मोबाइल ऐप और प्राइवेट कंपनियां शामिल है. कानून भारत के बाहर मौजूद संगठनों पर भी लागू हो सकता है, जो भारतीय नागरिकों को सेवा प्रदान करते हैं और उनका डेटा प्रोसेस करते हैं.&amp;nbsp;
डेटा लीक पर कितना लग सकता है जुर्माना?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटक्शन एक्ट में डेटा सुरक्षा को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं. अगर कोई संस्था डेटा सुरक्षा उपाय लागू करने में विफल रहती है और इसके कारण डेटा उल्लंघन होता है तो उस पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं डेटा उल्लंघन की जानकारी समय पर न देने या बच्चों से संबंधित डेटा सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने पर 200 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सजा का प्रावधान है. अन्य प्रकार के उल्लंघनों के लिए भी भारी जुर्माना का प्रावधान रखा गया है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Tech Tips: रातभर AC चलाने पर भी नहीं बढ़ेगा Bill! जानिए 7 स्मार्ट Cooling Hacks</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: इस समय बाहर निकलना ऐसा लग रहा है जैसे सीधे गर्म हवा के ब्लोअर के सामने खड़े हों. कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है और ऐसे में AC अब लग्जरी नहीं बल्कि जरूरत बन गया है. लेकिन दिनभर AC चलाने का सीधा असर बिजली बिल पर पड़ता है. अच्छी बात यह है कि हर समय AC को 16 डिग्री पर चलाना जरूरी नहीं होता. कुछ आसान आदतें अपनाकर आप कमरे को ठंडा भी रख सकते हैं और बिजली की खपत भी कम कर सकते हैं.
कमरे को पूरी तरह बंद रखें
कई लोग AC चलाते समय दरवाजे या खिड़कियां ठीक से बंद नहीं करते. छोटे-छोटे गैप से भी ठंडी हवा बाहर निकलती रहती है जिससे AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. अगर कमरा अच्छी तरह सील रहेगा तो कूलिंग ज्यादा देर तक बनी रहेगी और बिजली की बचत भी होगी.
समय पर AC सर्विस जरूर कराएं
अगर AC की लंबे समय से सर्विस नहीं हुई है तो उसकी कूलिंग क्षमता कम हो जाती है और बिजली की खपत बढ़ जाती है. गंदे कॉइल, जाम पाइप या कम गैस जैसी समस्याएं मशीन पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं. गर्मी शुरू होने से पहले सर्विस कराना बेहतर माना जाता है. कोशिश करें कि काम अधिकृत टेक्नीशियन से ही करवाएं.
सही तापमान पर AC चलाएं
बहुत से लोगों को लगता है कि AC को 16 या 18 डिग्री पर सेट करने से कमरा जल्दी ठंडा हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं होता. विशेषज्ञों के अनुसार 24 डिग्री का तापमान ज्यादातर घरों के लिए सबसे बेहतर और बिजली बचाने वाला माना जाता है. इससे कमरा आरामदायक रहता है और कंप्रेसर पर भी कम दबाव पड़ता है.
AC के फिल्टर नियमित साफ करें
धूल, मिट्टी और प्रदूषण की वजह से AC के फिल्टर जल्दी गंदे हो जाते हैं. जब फिल्टर जाम होने लगते हैं तो एयरफ्लो कम हो जाता है और AC को ज्यादा बिजली खर्च करनी पड़ती है. हर कुछ हफ्तों में फिल्टर साफ करने से कूलिंग बेहतर होती है और बिजली बिल भी कम आता है.
AC के साथ पंखा भी चलाएं
कई लोग इसे नजरअंदाज करते हैं लेकिन ceiling fan AC की ठंडी हवा को पूरे कमरे में तेजी से फैलाने में मदद करता है. इससे कमरा जल्दी ठंडा होता है और AC को लगातार तेज मोड पर चलाने की जरूरत नहीं पड़ती. हल्की फैन स्पीड भी काफी असर दिखा सकती है.
रात में Sleep Timer का इस्तेमाल करें
आजकल ज्यादातर AC में sleep timer का फीचर मिलता है लेकिन बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल करते हैं. सोने के बाद 1 या 2 घंटे का timer सेट करने से रातभर बेवजह बिजली खर्च नहीं होती और सुबह तक कमरा भी आरामदायक बना रहता है.
जरूरत न हो तो AC पूरी तरह बंद करें
अगर AC इस्तेमाल नहीं हो रहा है तो उसे सिर्फ रिमोट से बंद छोड़ने की बजाय मेन स्विच से भी ऑफ कर दें. Standby mode में भी थोड़ी-बहुत बिजली खर्च होती रहती है जो लंबे समय में बिल बढ़ा सकती है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>UPI यूज करते हैं? अभी ऑन करें ये सेटिंग, वरना एक क्लिक में खाली हो सकता है अकाउंट</title>
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        <description><![CDATA[ UPI Tips: आज भारत में करोड़ों लोग रोजाना UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं. बिजली बिल भरने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और पैसे ट्रांसफर करने तक, हर काम कुछ सेकंड में हो जाता है. लेकिन तेज और आसान पेमेंट के साथ साइबर फ्रॉड का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है. खासकर Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे ऐप्स पर फर्जी पेमेंट रिक्वेस्ट और स्कैम के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. ऐसे में UPI ऐप के अंदर मौजूद एक छोटी लेकिन बेहद जरूरी सेटिंग आपकी पेमेंट सुरक्षा को काफी मजबूत बना सकती है. हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोग इस फीचर के बारे में जानते ही नहीं हैं.
कैसे होता है UPI फ्रॉड?
UPI स्कैम में अक्सर हैकर्स सीधे बैंक अकाउंट नहीं तोड़ते. इसके बजाय वे लोगों को झांसे में लेकर खुद ही पैसे ट्रांसफर करवाते हैं. कई बार यूजर्स Collect Request को पैसे मिलने वाला मैसेज समझ लेते हैं जबकि असल में उसे मंजूर करने पर पैसे उनके खाते से कट जाते हैं. इसी गलती की वजह से हजारों लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं.
UPI ऐप में छिपी है ये जरूरी सुरक्षा सेटिंग
अधिकतर UPI ऐप्स में कुछ ऐसे सिक्योरिटी फीचर्स होते हैं जिन्हें यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से कंट्रोल कर सकता है. हालांकि हर ऐप में इनका नाम अलग हो सकता है लेकिन काम लगभग एक जैसा होता है. इन सेटिंग्स को ऑन करने से फर्जी रिक्वेस्ट, गलत ट्रांसफर और ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा काफी कम हो सकता है.
तुरंत ऑन करें ये 4 जरूरी फीचर्स
बायोमेट्रिक लॉक या ऐप लॉक चालू करें
फिंगरप्रिंट या फेस लॉक लगाने से कोई दूसरा व्यक्ति आपकी अनुमति के बिना पेमेंट नहीं कर पाएगा.
Payment Request नोटिफिकेशन बंद न करें
अगर कोई आपके पास फर्जी पेमेंट रिक्वेस्ट भेजता है तो नोटिफिकेशन के जरिए तुरंत पता चल जाएगा.
पैसे भेजने से पहले नाम जरूर जांचें
किसी भी रिक्वेस्ट को मंजूर करने से पहले सामने वाले का नाम और UPI ID ध्यान से पढ़ें.
Daily Transaction Limit कम रखें
अगर ऐप में यह विकल्प मौजूद है तो रोजाना ट्रांजैक्शन लिमिट कम सेट करें. इससे फ्रॉड होने पर बड़ा नुकसान होने से बच सकता है.
QR Code और Reward Scam से रहें सावधान
आजकल स्कैमर्स नकली रिफंड, कैशबैक और रिवॉर्ड के नाम पर QR Code या लिंक भेजते हैं. कई लोग जल्दबाजी में उन्हें स्कैन कर लेते हैं और उनके खाते से पैसे कट जाते हैं. NPCI भी बार-बार चेतावनी दे चुका है कि किसी अनजान व्यक्ति की Payment Request कभी मंजूर न करें और अपना UPI PIN किसी के साथ साझा न करें चाहे सामने वाला खुद को बैंक कर्मचारी ही क्यों न बताए.
एक छोटी सावधानी बचा सकती है बड़ा नुकसान
UPI ने डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है लेकिन छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान में बदल सकती है. इसलिए अगली बार पेमेंट करने से पहले अपने UPI ऐप की सुरक्षा सेटिंग्स जरूर जांच लें. सिर्फ एक मिनट की सावधानी आपके बैंक खाते को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Bluetooth का नाम आखिर किस राजा पर रखा गया? 99% लोग देते हैं गलत जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ Bluetooth: आज Bluetooth हमारे स्मार्टफोन, लैपटॉप, ईयरबड्स, स्मार्टवॉच और कारों का अहम हिस्सा बन चुका है. हर दिन करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि Bluetooth नाम किसी तकनीकी शब्द से नहीं बल्कि एक वास्तविक राजा के नाम से जुड़ा हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर लोग इसका सही जवाब नहीं दे पाते.
आखिर किस राजा के नाम पर रखा गया Bluetooth?
Bluetooth का नाम 10वीं शताब्दी के Scandinavian (डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे) राजा के नाम पर रखा गया था. जानकारी के अनुसार, राजा Harald Bluetooth Gormsson के नाम ही ब्लूटूथ का नाम रखा गया था. इन्होंने 958 से 985 तक डेनमार्क और नॉर्वे पर राज किया था. बता दें कि यह राजा डेनमार्क और नॉर्वे के कुछ हिस्सों को एकजुट करने के लिए प्रसिद्ध था. इतिहासकारों के अनुसार, राजा हेराल्ड ने अलग-अलग जनजातियों और क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने का काम किया था. इसी वजह से जब एक नई वायरलेस तकनीक विकसित की जा रही थी तो उसके इंजीनियरों को लगा कि यह तकनीक भी विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को आपस में जोड़ने का काम करेगी. इसलिए इसका नाम Bluetooth रखा गया.
Bluetooth नाम का मतलब क्या है?
राजा Harald को Bluetooth उपनाम मिला हुआ था. माना जाता है कि उनके एक दांत का रंग गहरा नीला या काला दिखाई देता था जिसकी वजह से उन्हें Bluetooth कहा जाने लगा. हालांकि इतिहास में इसके पीछे अलग-अलग कहानियां मिलती हैं लेकिन यही उपनाम बाद में दुनिया की सबसे लोकप्रिय वायरलेस तकनीकों में से एक का नाम बन गया.
तकनीक और इतिहास का अनोखा मेल
1990 के दशक में जब कई कंपनियां मिलकर एक शॉर्ट-रेंज वायरलेस कम्युनिकेशन स्टैंडर्ड पर काम कर रही थीं, तब Intel के एक इंजीनियर ने इस नाम का सुझाव दिया था. उस समय यह केवल एक अस्थायी कोडनेम माना जा रहा था. बाद में जब अंतिम नाम चुनने की बारी आई तो Bluetooth इतना लोकप्रिय हो चुका था कि इसे ही स्थायी नाम बना दिया गया.
Bluetooth का लोगो भी छिपाता है राज
क्या आपने कभी Bluetooth के लोगो को ध्यान से देखा है? इसका प्रतीक कोई साधारण डिजाइन नहीं है. यह नॉर्डिक रूनिक अक्षरों का संयोजन है, जो राजा Harald Bluetooth के नाम के शुरुआती अक्षरों H और B को दर्शाता है. यानी Bluetooth का नाम ही नहीं, बल्कि उसका लोगो भी सीधे उस ऐतिहासिक राजा से जुड़ा हुआ है.
क्यों है यह जानकारी खास?
अधिकांश लोग मानते हैं कि Bluetooth का संबंध किसी तकनीकी शब्द, रंग या वैज्ञानिक अवधारणा से होगा. लेकिन सच्चाई यह है कि इसका नाम एक ऐसे राजा के सम्मान में रखा गया था जिसने लोगों और क्षेत्रों को जोड़ा था. ठीक उसी तरह Bluetooth आज दुनिया भर में अरबों डिवाइसों को आपस में जोड़ने का काम करता है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Ac Blast Reason: दिल्ली में फिर AC Blast, गर्मी में किस वजह से फटता है एसी, ऐसे करें देखभाल?</title>
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        <description><![CDATA[ Ac Blast Reason: दिल्ली में फिर AC Blast, गर्मी में किस वजह से फटता है एसी, ऐसे करें देखभाल? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Online Gaming करते हैं तो आपके फोन में जरूर होनी चाहिए यह चीज, बड़े खतरों से बचा देगी</title>
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        <description><![CDATA[ VPN For Online Gaming: स्कूल-कॉलेज या ऑफिस से लौटने के बाद घर पर ऑनलाइन गेमिंग का अपना मजा है. आप चाहें तो अकेले इसके मजे ले सकते हैं या फिर अपने दोस्तों को भी इन्वाइट कर सकते हैं. हालांकि, ऑनलाइन गेमिंग करते समय कुछ सावधानी बरतना भी जरूरी है. दरअसल, पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन गेमिंग पूरी तरह बदल गई है. अब बाकी चीजों के साथ-साथ ऑनलाइन सेफ्टी का भी ध्यान रखना पड़ता है. इसलिए ऑनलाइन गेमिंग के शौकीनों के फोन में VPN होना जरूरी हो गया है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि ऑनलाइन गेमिंग के लिए VPN के कितने फायदे हैं.
क्या होता है VPN?
VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क इंटरनेट कनेक्शन को सेफ बनाता है. इससे आपकी ऑनलाइन इंफोर्मेशन एक कोडेड फॉर्म में बदल जाती है, जिसे हैक करना बहुत मुश्किल होता है. इसके अलावा VPN से आपका असली IP Address छिप जाता है और उसकी जगह VPN सर्वर का IP दिखने लगता है.
Online Gaming में VPN के फायदे
इंटरनेट कनेक्शन नहीं होता स्लो- VPN का एक बड़ा फायदा है कि यह IP एड्रेस को मास्क कर देता है और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) आपकी गेमिंग एक्टिविटी का पता नहीं लगा पाते. कई बार पीक ऑवर्स के दौरान अगर सर्विस प्रोवाइडर को गेमिंग एक्टिविटी का पता चलता है कि वो इंटरनेट ट्रैफिक को थोड़ा स्लो कर सकते हैं. VPN आपको इससे बचा लेता है.
सिक्योरिटी की चिंता करता है दूर- सिक्योरिटी रीजन के लिए VPN यूज करना बहुत जरूरी है. खासकर अगर आप इंटरनेट कैफे या पब्लिक वाईफाई से अपना डिवाइस कनेक्ट कर गेमिंग करते हैं तो आपके डिवाइस में VPN होना ही चाहिए. दरअसल, गेमिंग अकाउंट से आपकी ईमेल आईडी, पासवर्ड और पेमेंट इंफोर्मेशन भी जुड़ी होती है और स्कैमर इस पर नजर रखते हैं. VPN यूज कर आप अपने कनेक्शन को एनक्रिप्ट कर सकते हैं, जिससे डेटा और इंफोर्मेशन चुराना मुश्किल हो जाता है.
ब्लॉक सर्विस का भी उठाया जा सकता है फायदा- VPN आपके IP एड्रेस को चेंज कर देता है, जिससे ऐसा लगता है कि आप किसी दूसरी जगह से इंटरनेट एक्सेस कर रहे हैं. इस कारण किसी इलाके में ब्लॉक गेम या सर्विसेस को एक्सेस किया जा सकता है.
यह बात ध्यान रखना है जरूरी
VPN भले ही आपके IP एड्रेस को बदल और ट्रैफिक को एनक्रिप्ट कर देता है, लेकिन यह फुलप्रूफ नहीं होता. इसकी मदद से आप इंटरनेट पर इनविजिबल नहीं हो सकते. VPN यूज करने के बाद भी वेबसाइट कूकीज के जरिए आपको ट्रैक कर सकती है और जिस अकाउंट से आप लॉग-इन है, उसकी एक्टिविटी भी हाइड नहीं होती. इसलिए यह मानकर न चलें कि VPN आपको अदृश्य बना देगा.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>फोन GPS बंद होने पर भी चल सकता है आपकी लोकेशन का पता, ये तरीके आते हैं काम</title>
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        <description><![CDATA[ Location Tracking: कई स्मार्टफोन यूजर्स को लगता है कि GPS बंद करने से लोकेशन ट्रैकिंग भी बंद हो सकती है. भले ही आप अपने डिवाइस का GPS बंद कर दें, लेकिन आप लोकेशन ट्रैकिंग को पूरी तरह बंद नहीं कर सकते. GPS के अलावा भी बहुत ऐसे तरीके हैं, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि आप किस शहर की किस जगह पर खड़े हैं. अगर आप इंटरनेट यूज नहीं करते हैं तब भी लोकेशन का पता लगाने के कई तरीके मौजूद हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही तरीके बताने जा रहे हैं, जिससे लोकेशन ट्रैक की जा सकती है.&amp;nbsp;
लोकेशन बंद होने के बाद कैसे ट्रैकिंग होती है?
अगर आप फोन की लोकेशन को बंद करके यह सोच रहे हैं कि आपकी जगह का पता नहीं चलेगा तो आप गलत हैं. जियोलोकेशन के तरीके से आपकी जगह को एकदम पिनप्वाइंट किया जा सकता है. जियोलोकेशन के कई सिस्टम हैं, जिनके बारे में आप नीचे पढ़ेंगे.
मोबाइल टावर- आपके मोबाइल में नेटवर्क पहुंचाने वाले टावर आपकी लोकेशन का पता लगा सकते हैं. आप जिस कंपनी की सिम यूज करते हैं, वह सेल टावर की मदद से पता कर सकती है कि आप कहां खड़े हैं. इसके लिए आपके सबसे नजदीकी तीन मोबाइल टावर का यूज किया जाता है. इमरजेंसी और कानूनी मामलों में अकसर इस तरीके का इस्तेमाल होता है.&amp;nbsp;
वाईफाई नेटवर्क- सभी स्मार्टफोन में वाईफाई चिप लगी होती है. जगह-जगह लगे वाईफाई राउटर और ओपन कनेक्शन इससे कनेक्ट होने के लिए लगातार सिग्नल भेजते रहते हैं. जब आपका फोन इन कनेक्शन में से किसी के साथ कनेक्ट होता है तो उससे भी आपकी लोकेशन का पता चल सकता है.
IP एड्रेस- अगर आप VPN के बिना इंटरनेट यूज करते हैं तो IP एड्रेस से आपकी लोकेशन पता चल सकती है. हालांकि, यह सटीक लोकेशन डिस्क्लोज नहीं करता है, लेकिन शहर के नाम और सर्विस प्रोवाइडर आदि की इंफोर्मेशन पता की जा सकती है.
स्टॉकरवेयर- बाकी तरीकों के अलावा स्टॉकरवेयर से भी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है. ये एक तरह के स्पाईवेयर या मालवेयर होते हैं, जिन्हें यूजर की एक्टिविटी को इंटरसेप्ट करने के लिए डिजाइन किया जाता है. एक बार यूजर के फोन में इंस्टॉल होने के बाद ये मैसेज, ऐप्स और डेटा के साथ-साथ लोकेशन की भी एक्सेस हासिल कर सकते हैं. 2023 में हजारों यूजर्स को इस तरह के स्टॉकरवेयर से टारगेट किया गया था.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>YouTube पर दिखेंगे सिर्फ आपकी पसंद के वीडियो, ऐसे बनाएं अपनी मर्जी का फीड</title>
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        <description><![CDATA[ How To Customize YouTube Feed: कई बार यूट्यूब ओपन करने के बाद अनगिनत वीडियो अवेलेबल होने के बाद भी लगता है कि इस पर देखने लायक कुछ नहीं है. ऐसा तब ज्यादा होता है, जब यूट्यूब का एल्गोरिदम आपकी पसंद के वीडियो सजेस्ट नहीं करता. इस कारण फीड पर आने वाले किसी भी वीडियो पर टैप करने का मन नहीं होता. हालांकि, अब जल्द ही इस झंझट से मुक्ति मिलने की उम्मीद है. गूगल ने यूट्यूब के लिए एक नए फीचर का ऐलान किया है, जो यूजर को अपना यूट्यूब फीड कस्टमाइज करने का ऑप्शन देगा. आइए जानते हैं कि यह फीचर कैसे काम करेगा.
कैसे काम करेगा नया फीचर?
इस फीचर को &#039;योर कस्टम फीड&#039; नाम दिया गया है. इसमें प्रॉम्प्ट देने पर यूट्यूब यूजर की रिक्वेस्ट के आधार पर एक वीडियो फीड जनरेट कर देगी. यह फीड यूजर को यूट्यूब के होम पेज पर नजर आएगा. फिलहाल इस फीचर को रोल आउट किया जा रहा है और अमेरिका से इसकी शुरुआत हुई है. अगर अभी यह आपकी फीड पर नहीं आया है तो थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. माना जा रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में इसे सारे यूजर्स के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा.
YouTube पर कैसे देखें केवल अपनी पसंद के वीडियो?
यह नया फीचर एआई की मदद से काम करेगा. इसमें यूजर को स्पेसिफिक या मोटे-तौर पर आइडिया वाला प्रॉम्प्ट एंटर करना होगा. गूगल भी इसमें यूजर की मदद करेगी. इस फीचर को इनेबल करने के लिए यूट्यूब होम पेज के टॉप पर नजर आने वाली कस्टम योर फीड को सेलेक्ट करना होगा. इसके बाद आपको सजेस्टेड प्रॉम्प्ट दिखेंगे. आप चाहें तो इसमें अपनी मर्जी का प्रॉम्प्ट भी यूज कर सकते हैं. इसके बाद उस प्रॉम्प्ट के आधार पर यूट्यूब आपकी फीड में वीडियो दिखाना शुरू कर देगा. वीडियो पसंद न आने पर आप दोबारा भी प्रॉम्प्ट देकर कस्टम फीड जनरेट करवा पाएंगे.
एआई जनरेटेड कंटेट की पहचान होगी आसान
इस फीचर के साथ-साथ यूट्यूब अपने पहले से मौजूद एक फीचर को एक्सपैंड कर रही है. प्लेटफॉर्म पर एआई कंटेट की बाढ़ को देखते हुए यूट्यूब ने कहा है कि वह एआई जनरेटेड कंटेट वाले वीडियो पर लेबल लगाएगी. कुछ खास कंटेट के लिए यह लेबल परमानेंट होगा और हटाया नहीं जा सकेगा. पहले क्रिएटर के पास एआई कंटेट पर लेबल लगाने का ऑप्शन था. अब अगर क्रिएटर लेबल नहीं लगाता है तो यू्ट्यूब का इंटरनल सिस्टम यह काम कर देगा.
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        <title>Microwave vs OTG: गर्मियों में खाना बनाने के लिए माइक्रोवेव अच्छा या ओटीजी, जानें किससे कम होगी किचन की गर्मी?</title>
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        <description><![CDATA[ Microwave vs OTG: गर्मियों के मौसम में किचन में कुछ देर खाना बनाना भी मुश्किल लगने लगता है. गैस ऑन होते ही रसोई का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और लंबे समय तक किचन में खड़ा होना ना परेशानी बढ़ा देता है. ऐसे में अब लोग सिर्फ गैस स्टोव ही नहीं बल्कि माइक्रोवेव और ओटीजी जैसे अप्लायंसेज को भी इस नजर से देखने लगे हैं कि आखिर कौन सा ऑप्शन कम गर्मी पैदा करता है और बिजली का बिल भी कम बढ़ता है. खासतौर पर नौतपा और भीषण गर्मी के दौरान यह सवाल और जरूरी हो गया है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि गर्मियों में खाना बनाने के लिए माइक्रोवेव या ओटीजी कौन बेहतर है और इन दोनों में किससे बिजली कम खर्च होती है और किचन में गर्मी भी कम होती है.&amp;nbsp;
माइक्रोवेव कैसे करता है काम?
माइक्रोवेव इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स की मदद से खाना गर्म करता है. यह खाने के अंदर मौजूद पानी और फैट के मॉलिक्यूल्स को तेजी से वाइब्रेट करती है, जिससे खाना अंदर से गर्म होता है. इसी वजह से माइक्रोवेव के इस्तेमाल के दौरान आस पास की हवा ज्यादा गर्मी नहीं होती है. यही कारण है कि माइक्रोवेव में खाना गर्म करने या जल्दी कुछ पकाने के दौरान किचन का तापमान ज्यादा नहीं बढ़ता. बाहरी बाॅडी कम गर्म होती है और छोटे-छोटे काम कुछ ही मिनटों में पूरे हो जाते हैं.&amp;nbsp;
ओटीजी बढ़ा देता है किचन की गर्मी&amp;nbsp;
ओटीजी ओवन टोस्टर ग्रिलर पारंपरिक ओवन की तरह काम करता है. इसमें इलेक्ट्रिक हीटिंग रॉड्स होती है जो काफी ज्यादा गर्म होकर पूरे चैम्बर में ड्राई हीट फैलाती है. &amp;nbsp;बेकिंग या ग्रिलिंग के दौरान ओटीजी लंबे समय तक 150 से 250 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान बनाए रखता है. इसी वजह से ओटीजी का ग्लास डोर, मेटल बॉडी और आसपास की हवा भी धीरे-धीरे गर्म होने लगती है. अगर लंबे समय तक केक, कुकीज या ग्रिल्ड फूड बनाया जाए तो किचन कुछ ही देर में काफी गर्म महसूस होने लगता है.&amp;nbsp;
गर्मियों में सबसे बड़ा फर्क बनता है कुकिंग टाइम&amp;nbsp;
माइक्रोवेव और ओटीजी के बीच सबसे बड़ा अंतर सिर्फ हीटिंग टेक्नोलॉजी का नहीं, बल्कि खाना पकाने लगने वाले समय का भी है. ओटीजी इस्तेमाल करने से पहले आमतौर पर 10 से 15 मिनट तक प्री हीटिंग करनी पड़ती है. इसके बाद खाना में 20 से 45 मिनट तक लग सकते हैं. यानी लंबे समय तक लगातार हीट पैदा होती रहती है. वहीं माइक्रोवेव में प्रीहीटिंग की जरूरत नहीं पड़ती. खाना गर्म करना, सब्जियां स्टीम करना या इंस्टेंट मील तैयार करने जैसे 2 से 10 मिनट में हो जाते हैं . वहीं इसके कम इस्तेमाल होने की वजह से किचन में गर्मी भी कम फैलती है.&amp;nbsp;
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किससे ज्यादा आता है बिजली बिल?
कई लोग सिर्फ वोल्टेज देखकर फैसला करते हैं, लेकिन असल में बिजली की खपत इस बात पर निर्भर करती है कि अप्लायंस कितनी देर तक चलता है. माइक्रोवेव आराम आमतौर पर 1200 वाट से 1400 वाट तक बिजली खपत करता है, लेकिन कुछ मिनट के लिए ही चलता है. दूसरी तरफ ओटीजी का वोल्टेज कई बार कम होता है, लेकिन यह 30 से 60 मिनट तक लगातार चलता रहता है. ऐसे में रोजाना के कामों के लिए माइक्रोवेव ज्यादा एनर्जी एफिशिएंट माना जाता है. वहीं ओटीजी लंबे बेकिंग और ग्रिलिंग सेशन के दौरान ज्यादा बिजली खर्च कर सकता है. इसके अलावा ओटीजी से निकलने वाली एक्स्ट्रा गर्मी की वजह से एसी या कूलर पर भी ज्यादा लोड पड़ता है, जिससे बिजली बिल बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
फिर भी ओटीजी क्यों है जरूरी?&amp;nbsp;
गर्मी में माइक्रोवेव ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन ओटीजी की सबसे बड़ी खासियत उसकी फूड टेक्सचर है. माइक्रोवेव खाने को जल्दी गर्म तो कर देता है, लेकिन कई बार नरम या थोड़ा रबर जैसा महसूस होने लगता है. वहीं ओटीजी ड्राई हीट की मदद से खाने को क्रिस्पी और ब्राउन टेक्सचर देता है. इसी वजह से बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग के लिए ओटीजी आज भी बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>साइबर स्पेस में मचेगी खलबली, Anthropic पब्लिक के लिए लॉन्च करेगी Mythos&amp;class मॉडल</title>
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        <description><![CDATA[ Claude Mythos: साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में तहलका मचा चुका एंथ्रोपिक का Claude Mythos मॉडल काफी समय से चर्चा में है. यह किसी भी सॉफ्टवेयर को हैक कर सकता है. इसकी कैपेबिलिटीज को देखते हुए इसे पब्लिक के लिए लॉन्च नहीं किया गया है, लेकिन जल्द ही यह इंतजार खत्म हो सकता है. कंपनी ने संकेत दिए हैं कि Claude Mythos जैसे मॉडल को जल्द ही पब्लिक के लिए रोलआउट कर दिया जाएगा. अभी कंपनी इसकी तैयारी में जुटी हुई है और अगले कुछ हफ्तों में यह सभी यूजर्स के लिए अवेलेबल हो जाएगा.&amp;nbsp;
कंपनी ने खुद दिए संकेत
गुरुवार को एंथ्रोपिक ने अपग्रेडेड Claude Opus 4.8 मॉडल को लॉन्च किया था. इसकी अनाउंसमेंट में कंपनी ने बताया कि वह Mythos-class मॉडल को लॉन्च करने की तैयारी में है. हालांकि, यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि कंपनी Mythos मॉडल को सबके लिए अवेलेबल कराएगी या Mythos जैसा कोई मॉडल लॉन्च किया जाएगा.
Mythos मॉडल में क्या खास?
एंथ्रोपिक के Mythos मॉडल में एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी कैपेबिलिटीज हैं और यह किसी भी सॉफ्टवेयर में खामियों का पता लगा सकता है. इस कारण साइबर सिक्योरिटी को लेकर चिंताएं भी खड़ी हो गई हैं. एंथ्रोपिक अभी इस मॉडल को सेलेक्टेड कंपनियों के साथ ही टेस्ट कर रही है और इसे पब्लिक के लिए अवेलेबल नहीं करवाया गया है. हाल ही में एंथ्रोपिक ने कहा था कि अभी उस समेत किसी भी कंपनी के पास इस मॉडल को मिसयूज को रोकने का तरीका उपलब्ध नहीं है. इस मॉडल को लेकर दुनियाभर की सरकारें भी चिंतित हैं और भारत समेत कई देशों ने इसकी फेयर एक्सेस की मांग की है. &amp;nbsp;
जरूरी सॉफ्टवेयर में हजारों कमियां निकाल चुका है Claude Mythos
थ्रोपिक का कहना है कि Claude Mythos ने एक महीने में दुनिया के सबसे जरूरी सॉफ्टवेयर में साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी 10,000 से ज्यादा कमियों का पता लगा लिया है. इस मॉडल की एक्सेस वाली कई कंपनियों ने कहा है कि Claude Mythos से कमियों का पता लगाने की रफ्तार 10 गुना बढ़ गई है. इंटरनेट होस्टिंग प्लेटफॉर्म क्लाउडफ्लेयर ने इस मॉडल से अपने क्रिटिकल-पाथ सिस्टम में 2,000 बग्स ढूंढे हैं और इनमें से 400 हाई और क्रिटिकल सेवेयरिटी वाले थे. इसी तरह Mozilla ने फायरफॉक्स में 271 इश्यूज को ढूंढकर फिक्स किया है.&amp;nbsp;
OpenAI और Google भी ले आई ऐसे मॉडल
साइबर सिक्योरिटी स्पेस में Mythos को टक्कर देने के लिए बाकी कंपनियों ने भी एंट्री मार दी है. OpenAI ने इसकी टक्कर में Daybreak मॉडल लॉन्च किया है तो गूगल ने AI Threat Defense मॉडल को इंट्रोड्यूस किया है.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>WWDC से पहले ही AI Siri की सारी जानकारी हो गई लीक, जानिये इसमें क्या&amp;कुछ नया मिलेगा</title>
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        <description><![CDATA[ AI Siri: ऐप्पल पिछले काफी समय से सिरी अस्सिटेंट के नए वर्जन पर काम कर रही है. इसे 8 जून से शुरू होने वाले WWDC 2026 इवेंट में रिवील किया जा सकता है. अब ताजा लीक में इससे जुड़ी सारी जानकारी सामने आ गई है. लीक के अनुसार, ऐप्पल ने सिरी के पूरे एक्सपीरियंस को ही रिडिजाइन किया है. अब यह एक एआई चैटबॉट की तरह काम करेगा. गूगल और ऐप्पल के बीच हुई पार्टनरशिप के तहत ऐप्पल के इस असिस्टेंट को गूगल के जेमिनी मॉडल पर तैयार किया जा रहा है. आइए जानते हैं कि नए सिरी में क्या होगा और यह कैसे काम करेगा.
डायनामिक आईलैंड में मूव होगा सिरी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिरी का नया वर्जन डायनामिक आईलैंड में मूव किया जा सकता है. यूजर &#039;सिरी&#039; बोलकर या पावर बटन को प्रेस कर इसे समन कर पाएंगे. साथ ही ऐप्पल इसके लिए एक नया तरीका भी इंट्रोड्यूस कर सकती है, जिससे स्क्रीन के टॉप सेंटर से स्वाइप-डाउन करने से सिरी का सर्च और आस्क का इंटरफेस ओपन हो जाएगा. इस इंटरफेस के सर्च ऑप्शन को एआई पावर्ड बनाया जा रहा है. साथ ही इसमें मौजूदा सिरी सजेशन के साथ नए एआई फोकस्ड फीचर भी मिलेंगे. सर्च और आस्क इंटरफेस से ही यूजर वेब सर्च, ऐप लॉन्च, मैसेज, नोट्स, कैलेंडर अपॉइंटमेंट और ऐप शॉर्टकट आदि को यूज कर सकेंगे.
कैसे काम करेगा नया सिरी?
डायनामिक आईलैंड से सिरी टेक्स्ट कार्ड्स में रिस्पॉन्स देगा. इसे स्वाइप डाउन कर कन्वर्सेशन को डेडिकेटेड सिरी ऐप में ओपन किया जा सकेगा, जहां एक एआई चैटबॉट जैसा इंटरफेस मिलेगा. बताया जा रहा है कि ऐप्पल इसमें चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनी जैसी थर्ड-पार्टी सर्विसेस का सपोर्ट भी ऐड करेगी. टेक्स्ट के साथ-साथ यूजर बोलकर, फोटो और डॉक्यूमेंट्स आदि को अपलोड कर इंटरेक्ट कर पाएंगे. नया सिरी ज्यादा कॉन्टेक्स्ट अवेयर भी होगा. यानी यह किसी टास्क को कंप्लीट करने के लिए वेब पर सर्च के साथ-साथ यह भी रीड कर पाएगा कि स्क्रीन पर क्या इंफोर्मेशन है.
ऐप्पल के लिए करो या मरो की स्थिति
एआई के मामले में ऐप्पल बाकी कंपनियों से बहुत पीछे है. दूसरी कंपनियां जहां एक के बाद एक नए एआई फीचर्स ला रही है, वहीं ऐप्पल अभी तक 2024 में अनाउंस किए गए फीचर्स को रोल आउट नहीं कर पाई है. ऐसे में नए सिरी को लेकर ऐप्पल के लिए करो या मरो की स्थिति बनी हुई है. सफल होने पर ऐप्पल टक्कर में जाएगी, वहीं अगर यह एक्सपेरिमेंट कामयाब नहीं रहता है तो कंपनी को यूजर्स की नाराजगी झेलनी पड़ेगी.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Instagram Plus: इंस्टाग्राम पर भी आ रहा है पेड सब्सक्रिप्शन, पैसे देने पर मिलेंगे ये फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Instagram Plus: मेटा अब रेवेन्यू के लिए सिर्फ एड पर डिपेंड नहीं रहता चाहती. कंपनी को लगता है कि एक्स्ट्रा फीचर्स और टूल्स के लिए कुछ लोग पैसे देने को तैयार हैं. इसे देखते हुए कंपनी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स Instagram, Facebook और WhatsApp के पेड सब्सक्रिप्शन रोल आउट करने शुरू कर दिए हैं. पिछले कुछ दिनों से इनकी टेस्टिंग चल रही थी और अब कंपनी ने इन्हें रोल आउट करना शुरू कर दिया है. आज हम जानेंगे कि इंस्टाग्राम के सब्सक्रिप्शन प्लान Instagram Plus में क्या-क्या फीचर्स मिलते हैं और इसके लिए कितनी रकम चुकानी पडे़गी.
Instagram Plus में क्या-क्या मिलेगा?
Instagram Plus खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा काम का है, जो लगातार स्टोरी पोस्ट करते हैं और उन पर ज्यादा कंट्रोल चाहते हैं. यह प्लान लेने पर यूजर देख पाएंगे कि उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी को कितने लोगों ने रीवॉच किया है. उन्हें क्लोज फ्रेंड्स के अलावा भी ऑडियंस लिस्ट क्रिएट करने और स्टोरी को 24 घंटे से ज्यादा समय तक लाइव रखने का भी ऑप्शन मिलेगा. साथ ही उन्हें हफ्ते में एक स्टोरी को स्पॉटलाइट करने का मौका मिलेगा, ताकि इसकी विजिबिलिटी बढ़ सके. बाकी फीचर्स की बात करें तो स्टोरी देखने वालों की लिस्ट में सर्च करने, किसी की व्यूअर लिस्ट में आए बिना स्टोरी देखने और फॉलोवर्स की फीड में पोस्ट किए बिना अपने प्रोफाइल पर पोस्ट करने का भी ऑप्शन मिलेगा.
कस्टमाइजेशन का भी मिलेगा ऑप्शन
Instagram Plus में ऊपर दिए गए फीचर्स के अलावा कस्टमाइजेशन के लिए भी कुछ टूल मिलेगा. पेड सब्सक्राइबर ऐप आइकन को कस्टम कर सकेंगे. उन्हें एनिमेटेड सुपर हार्ट रिएक्शन और ज्यादा प्रोफाइल पिन्स का भी ऑप्शन मिलेगा. इस तरह देखा जाए को कस्टमाइजेश और स्टोरी से रिलेटिड ऑप्शंस के अलावा इस प्लान में यूजर्स के लिए कुछ एक्स्ट्रा नहीं है. हालांकि, कंपनी ने कहा है कि आगे चलकर इसमें कुछ और मजेदार फीचर जोड़े जा सकते हैं. दूसरी तरफ अगर फेसबुक प्लस की बात करें तो इसमें भी इंस्टाग्राम प्लस वाले फीचर्स मिलने की बात कही जा रही है.
Instagram Plus के लिए कितना पैसा देना होगा?
मेटा ने इंस्टाग्राम प्लस और फेसबुक प्लस के लिए एक समान कीमत रखी है. दोनों प्लान की कीमत 3.99 डॉलर (लगभग 380 रुपये) प्रति महीने रखी गई है. हालांकि, भारत को लेकर प्राइसिंग का अभी तक ऐलान नहीं किया गया है. बता दें कि पेड सब्सक्रिप्शन आने के बाद भी इन ऐप्स के कोर फंक्शन जैसे पोस्टिंग, मैसेजिंग, स्क्रॉलिंग आदि पहले की तरह फ्री रहेंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>क्या सर्दियों में भी काम करते हैं सोलर पैनल? बहुत कम लोगों को पता है यह बात</title>
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        <description><![CDATA[ Do Solar Panels Work In Winters: सोलर पैनल की पॉपुलैरिटी और यूज लगातार बढ़ता जा रहा है. यही कारण से है कि अब बड़े शहरों से लेकर छोटे गांवों तक सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. अब बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों से लेकर छोटे घरों तक सबकी एनर्जी जरूरतें सोलर पैनल पूरी कर रहे हैं. सोलर पैनल सनलाइट को इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या सर्दियों में भी जब सूरज कभी-कभार निकलता है, तब सोलर पैनल बिजली बनाते हैं. आज हम इसी सवाल का जवाब लेकर आए हैं.
क्या सर्दियों में काम करते हैं सोलर पैनल?
इस सवाल का जवाब यह है कि जब तक पैनल लाइट को कैप्चर कर सकेंगे, ये बिजली बनाते रहेंगे. सोलर पैनल को बिजली जनरेट करने के लिए सनलाइट की जरूरत होती है. इन्हें गर्मी से कोई मतलब नहीं है. कई बार तापमान कम होने पर सोलर पैनल की एफिशिएंसी बढ़ जाती है. सर्दियों की बात करें तो इस मौसम में दिन छोटे होते हैं और सूरज भी कभी-कभार नजर आता है, इसलिए उनकी आउटपुट कम हो जाती है. इसी तरह बर्फबारी में भी सोलर पैनल काम करते हैं. कम ही लोगों को इस बात की जानकारी है कि बर्फ के कारण सोलर पैनल ज्यादा बिजली जनरेट करते हैं. जब बर्फ से रिफ्लेक्ट होकर सनलाइट पैनल तक पहुंचती है तो इनकी एफिशिएंसी बढ़ जाती है.
सर्दियों में इन बातों से पड़ता है इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन पर असर
सोलर पैनल को सिर्फ सनलाइट की जरूरत होती है. अगर सर्दियों में सनलाइट आ रही है तो ये बिजली बनाएंगे, भले ही आउटपुट थोड़ी कम हो जाए. सर्दियों में सूरज कम देर के लिए निकलता है, इसलिए एनर्जी जनरेशन कम हो जाती है. कम तापमान से सोलर पैनल की कंडक्टिविटी बेहतर होती है. इससे वो सनलाइट से ज्यादा बिजली जनरेट कर पाते हैं. ज्यादा गर्मी में पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है.
क्या बारिश में काम करते हैं सोलर पैनल?
अभी भारत में मानसून दस्तक देने वाला है. ऐसे में कई लोग सोच रहे होंगे कि क्या बारिश में सोलर पैनल बिजली बनाते हैं. इसका जवाब है कि सोलर पैनल बारिश में भी काम करते हैं. बारिश से पैनल पर इतना फर्क नहीं पड़ता, जितने बादलों के कारण पड़ता है. बादल सनलाइट को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं, जिसके कारण पैनल काम नहीं कर पाते.
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        <title>Portable Air Conditioner For Summer: गर्मियों में तेजी से बढ़ रहा पोर्टेबल एसी का ट्रेंड, बहुत थोड़ी सी डाउन पेमेंट पर आ जाएगा घर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/portable-air-conditioner-for-summer-गर्मियों-में-तेजी-से-बढ़-रहा-पोर्टेबल-एसी-का-ट्रेंड-बहुत-थोड़ी-सी-डाउन-पेमेंट-पर-आ-जाएगा-घर</link>
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        <description><![CDATA[ Portable Air Conditioner For Summer: देशभर में गर्मी में लगातार बढ़ती जा रही है और इसके साथ ही एयर कंडीशनर की मांग भी तेजी से देखने को मिल रही है. हालांकि, आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो किराए के घर में रहने, इंस्टॉलेशन की परेशानियां, ज्यादा बजट की वजह से फ्लैट और विंडो एसी खरीदने से बचते हैं.
ऐसे में अब पोर्टेबल एसी तेजी से लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. खास बात यह है कि इस एसी को बिना किसी तोड़फोड़ के और भारी इंस्टॉलेशन के आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि गर्मियों में पोर्टेबल एसी का ट्रेंड तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन बहुत थोड़ी सी डाउन पेमेंट पर आप इसे कैसे खरीद सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रहा है पोर्टेबल एसी का ट्रेंड?
पोर्टेबल एसी की सबसे बड़ी खासियत इसकी मोबिलिटी मानी जाती है. इसमें पहिए लगे होते हैं, जिसकी मदद से इसे एक कमरे से दूसरे कमरे में आसानी से ले जाया जा सकता है. स्प्लिट या विंडो एसी की तरह इसे दीवार पर फिक्स करने की जरूरत नहीं होती है. यही कारण है कि किराएदार और छोटे घरों में रहने वाले लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं. इसके अलावा पोर्टेबल एसी को इंस्टॉल करने के लिए किसी बड़ी तकनीक की जरूरत नहीं होती, इसमें एक पाइप लगा होता है जो कमरे की गर्म हवा को बाहर निकालने का काम करता है. इसके पाइप को खिड़की के जरिए बाहर लगाया जा सकता है.&amp;nbsp;
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कम कीमत में मिल रहे कई ऑप्शन?&amp;nbsp;
मार्केट में छोटे मिनी एयर कंडीशनर से लेकर 1 टन तक के पोर्टेबल एसी उपलब्ध हैं. कई मिनी कूलर और मिनी एसी की शुरुआत कीमत 1000 रुपये के आसपास से शुरू हो जाती है. वहीं बड़े पोर्टेबल एसी लगभग 30,000 रुपये की शुरुआत कीमत से खरीदी जा सकते हैं. ब्लू स्टार, लॉयड और क्रूज जैसी कंपनी के पोर्टेबल एसी इन दिनों काफी चर्चा में है. ब्लू स्टार का 1 टन पोर्टेबल एसी कई ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर उपलब्ध है. कंपनी के अनुसार, यह करीब 90 स्क्वायर फीट तक के कमरे को ठंडा कर सकता है. इसमें हाई एफिशिएंसी रोटरी कंप्रेशर, ऑटो मोड और एंटीबैक्टीरियल सिल्वर कोटिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं.&amp;nbsp;
आसान ईएमआई और कम डाउन पेमेंट का फायदा&amp;nbsp;
पोर्टेबल एसी की बिक्री बढ़ने की एक बड़ी वजह आसान फाइनेंसिंग ऑप्शन भी है. कई ई-कॉमर्स प्लेटफाॅर्म और फाइनेंस कंपनियां एसी पर आसान ईएमआई ऑफर कर रही है. कुछ मॉडल पर जीरो डाउन पेमेंट और कम महीने की किस्त का ऑप्शन भी मिल रहा है. बजाज फिनसर्व ईएमआई नेटवर्क और दूसरी फाइनेंसिंग कंपनियों के जरिए ग्राहक कम डाउन पेमेंट पर पोर्टेबल एसी खरीद सकते हैं. कई प्लेटफॉर्म्स पर हजार से 1500 रुपये तक की शुरुआती मासिक ईएमआई पर भी एसी उपलब्ध है. इसके अलावा कुछ बैंकों के कार्ड पर कैशबैक और एक्सचेंज ऑफर भी दिए जा रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Portable, Air, Conditioner, For, Summer:, गर्मियों, में, तेजी, से, बढ़, रहा, पोर्टेबल, एसी, का, ट्रेंड, बहुत, थोड़ी, सी, डाउन, पेमेंट, पर, आ, जाएगा, घर</media:keywords>
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        <title>Best Earbuds Under 2000 Rupees: बेहतर कॉलिंग और लाजवाब म्यूजिक के लिए बेस्ट हैं 2000 रुपये के ये ईयर बड्स, कान में डालो और भूल जाओ</title>
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        <description><![CDATA[ Best Earbuds Under 2000 Rupees: आज के समय में वायरलेस इयरबड्स सिर्फ गाने सुनने तक सीमित नहीं रह गए. ऑफिस कॉल्स, ऑनलाइन मीटिंग, गेमिंग और एंटरटेनमेंट के लिए अब लोग बड़ी तेजी से टीडब्ल्यूएस ईयर बड्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं. अच्छी बात यह है कि कम बजट में भी ऐसे ईयर बड्स बाजार में मौजूद है, जिनमें एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन, लंबी बैटरी लाइफ और दमदार साउंड क्वालिटी जैसे फीचर्स मिल रहे हैं. अगर आपका बजट 2000 तक है और आप बेहतर कॉलिंग के साथ शानदार म्यूजिक एक्सपीरियंस चाहते हैं तो यह ईयर बड्स आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं.&amp;nbsp;
वनप्लस नॉर्ड बड्स 3&amp;nbsp;
वनप्लस के ये ईयर बड्स बजट में सेगमेंट में काफी पसंद किया जा रहे हैं. इन्हें 12.4 एमएम टिटेनाइज्ड और ड्राइवर्स और बस वेव 2.0 टेक्नोलॉजी दी गई है ,जो दमदार बास और क्लियर साउंड देती है. इसमें 32 डीबी एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन और एआई कॉल नॉइस रिडक्शन फीचर मिलता है, जिससे कॉलिंग के दौरान आवाज साफ सुनाई देती है.&amp;nbsp;
रियलमी बड्स टी-310&amp;nbsp;
रियलमी के इस मॉडल में 46 डीबी हाइब्रिड एएनसी दिया गया है जो इस बजट में काफी खास माना जाता है. इसमें 12.4 एमएम डायनामिक बास ड्राइवर्स और 360 डीग्री Spatial Audio फीचर मिलता है. गेमिंग के लिए इसमें 45 एमएस अल्ट्रा लो लेटेंसी मोड भी मौजूद है. कॉलिंग के दौरान एआई डीप कॉल नॉइस कैंसिलेशन आसपास के शोर को कम करने में मदद करता है. इसकी बैटरी लाइफ करीब 40 घंटे बताई गई है.&amp;nbsp;
बोट एयरडॉप्स 141 एलिट एएनसी&amp;nbsp;
कम कीमत में एएनसी फीचर जाने वाली यूजर्स के बीच बोट एयरडॉप्स 141 एलिट एएनसी काफी लोकप्रिय है. इसमें 35 डीबी नॉइस कैंसिलेशन और 10 एमएम ड्राइवर्स दिए गए हैं. कंपनी का दावा है कि यह ईयरबड्स करीब 42 घंटे तक टोटल प्लेबैक देते हैं. म्यूजिक और कॉलिंग दोनों के लिए इन्हें अच्छा ऑप्शन माना जाता है.&amp;nbsp;
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सीएमएफ बाय नथिंग बड्स 2ए&amp;nbsp;
सीएमएफ बाय नथिंग बड्स 2ए में 12.4 एमएम बायो-फाइबर डायनामिक ड्राइवर्स दिए गए है. इसमें 42 डीबी तक का एएनसी और ट्रांसपेरेंसी मोड भी मिलता है. कॉलिंग के लिए इसमें चार एचडी माइक्रोफोन और क्लियर वॉइस टेक्नोलॉजी दी गई है. ब्लूटूथ 5.4 और ड्यूल डिवाइस कनेक्शन जैसे फीचर्स इसे और बेहतर बनाते हैं. कंपनी के अनुसार यह कुल 35.5 घंटे तक की बैटरी लाइफ ऑफर करता है.
बोट निर्वाणा आयन
अगर आपकी पहली प्राथमिकता लंबी बैटरी लाइफ है, तो boAt Nirvana Ion एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसमें 32 डीबी एएनसी के साथ क्वाड माइक सेटअप और ईएनएक्स टेक्नोलॉजी दी गई है. कंपनी दावा करती है कि यह ईयरबड्स 120 घंटे तक बैटरी बैकअप दे सकते हैं, जो इस बजट में काफी ज्यादा माना जाता है.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:24 +0530</pubDate>
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        <title>Ethanol Stove vs LPG Cylinder: एलपीजी सिलेंडर से कितना सस्ता है एथेनॉल चूल्हा, जानें कैसे काम करती है यह नई तकनीक?</title>
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        <description><![CDATA[ Ethanol Stove vs LPG Cylinder: रसोई में खाना बनाने के लिए ज्यादातर लोग एलपीजी गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब एक नई तकनीक चर्चा में है, जिसे एथेनॉल चूल्हा कहा जा रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इस तकनीक के बारे में जानकारी दी है. दावा किया जा रहा है कि यह चूल्हा एलपीजी सिलेंडर से सस्ता पड़ सकता है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर है. यही वजह है कि लोग अब इस नई तकनीक को लेकर काफी उत्सुक हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चूल्हा गन्ने, मक्का और मीठे ज्वार जैसी फसलों से बनने वाले एथेनॉल ईंधन पर चलता है.
क्या है एथेनॉल चूल्हा और कैसे करता है काम?
एथेनॉल चूल्हा एक आधुनिक कुकिंग स्टोव है, जो लिक्विड या जेल फॉर्म वाले एथेनॉल ईंधन से चलता है. यह &amp;ldquo;सस्टेनेबल कंबशन टेक्नोलॉजी&amp;rdquo; पर काम करता है. इसमें एक छोटा ईंधन टैंक होता है, जिसमें एथेनॉल डाला जाता है. जब इसे जलाया जाता है तो यह बिना धुएं, गंध और कालिख के तेज आंच देता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे निकलने वाली आंच एलपीजी गैस जैसी ही मानी जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, एथेनॉल जलने पर करीब 700 से 800 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पैदा कर सकता है, जिससे खाना जल्दी पकता है. इसकी बनावट काफी हद तक पुराने मिट्टी के तेल वाले स्टोव जैसी होती है, लेकिन इसमें लगे बर्नर ईंधन का ज्यादा अच्छे तरीके से इस्तेमाल करते है.
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एलपीजी सिलेंडर से कितना सस्ता पड़ सकता है?
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एथेनॉल चूल्हे से खाना पकाने का खर्च एलपीजी गैस से कम हो सकता है. यूएन क्लाइमेट टेक्नोलॉजी सेंटर एंड नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक एक लीटर एथेनॉल से करीब 15 घंटे तक लगातार आंच मिल सकती है. यही वजह है कि इसे एलपीजी के मुकाबले ज्यादा किफायती बताया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा है कि पानी में 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर एलपीजी जैसी आंच पैदा की जा सकती है. हालांकि अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है और बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है. वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सही कीमत और सप्लाई होने पर यह आम लोगों के लिए सस्ता विकल्प बन सकता है.
पर्यावरण और सुरक्षा के लिए भी बेहतर माना जा रहा
एथेनॉल को बायो-फ्यूल माना जाता है, क्योंकि यह पौधों से तैयार होता है. एलपीजी की तरह यह जीवाश्म ईंधन नहीं होता है. यही कारण है कि इसे पर्यावरण के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है. एथेनॉल जलने पर धुआं और कालिख बहुत कम निकलती है, जिससे रसोई की हवा साफ रहती है. इसके अलावा एथेनॉल जेल के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है, इसलिए गैस लीक जैसी बड़ी दुर्घटना का खतरा कम बताया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो इससे लोगों का खर्च कम हो सकता है और प्रदूषण भी घट सकता है. हालांकि अभी इस तकनीक पर और परीक्षण किए जा रहे हैं ताकि इसे पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Oakter Studio AC 5000 Launch: एक घंटे में सिर्फ 4 रुपये की बिजली फूंकता है यह एसी, जानें किस तकनीक से कम कर रहा खपत?</title>
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        <description><![CDATA[ Oakter Studio AC 5000 2026 Launch : गर्मी का मौसम आते ही लोगों की सबसे बड़ी चिंता बढ़ते बिजली बिल को लेकर होने लगती है. एयर कंडीशनर भले ही तेज गर्मी से राहत दिलाते हों, लेकिन कई बार उनका भारी बिजली बिल लोगों का बजट बिगाड़ देता है. खासतौर पर छोटे घरों, स्टूडियो अपार्टमेंट या किराए के कमरों में रहने वाले लोग ऐसा AC चाहते हैं जो कम जगह घेरे, कम बिजली खाए और जेब पर ज्यादा बोझ भी न डाले. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ओकटर कंपनी ने अपना नया स्टूडियो एसी 5000 (2026) मॉडल लॉन्च किया है.
कंपनी का दावा है कि यह छोटा और हल्का विंडो AC सिर्फ करीब 4 रुपये प्रति घंटे की बिजली खर्च करता है. यही वजह है कि यह नया मॉडल लॉन्च होते ही चर्चा में आ गया है. कंपनी के मुताबिक यह AC खास तौर पर छोटे कमरों, स्टडी रूम, ऑफिस केबिन और स्टूडियो अपार्टमेंट जैसी जगहों के लिए बनाया गया है. इसमें नई इन्वर्टर तकनीक दी गई है, जो पुराने मॉडल की तुलना में कम बिजली खर्च करते हुए बेहतर कूलिंग देने में मदद करती है.&amp;nbsp;
एक घंटे में सिर्फ 4 रुपये की बिजली फूंकता है यह एसी
ओकटर का नया स्टूडियो एसी 5000 (2026) मॉडल 0.5 टन क्षमता के साथ आता है. कंपनी का कहना है कि यह AC करीब 75 वर्ग फुट तक के कमरे को आसानी से ठंडा कर सकता है. इसका वजन लगभग 22 किलो रखा गया है, जिससे इसे इंस्टॉल करना और जरूरत पड़ने पर एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान हो जाता है. यह AC खासतौर पर उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो छोटे फ्लैट, पीजी, स्टूडियो रूम या ऑफिस के छोटे केबिन में रहते हैं.&amp;nbsp;
कैसे कम करता है बिजली की खपत?
इस AC की सबसे बड़ी खासियत इसकी इन्वर्टर-आधारित कूलिंग तकनीक है. आमतौर पर पुराने AC में फिक्स्ड स्पीड कंप्रेसर होता है, जो जरूरत पड़ने पर बार-बार ऑन और ऑफ होता रहता है. इससे बिजली की खपत ज्यादा होती है, लेकिन इस नए मॉडल में इन्वर्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक कमरे के तापमान के हिसाब से कंप्रेसर की स्पीड को कंट्रोल करती है यानी जरूरत के अनुसार ही कूलिंग होती है और बिजली की बचत होती है. कंपनी का दावा है कि यह AC करीब 500 वॉट बिजली की खपत करता है. यह लगभग दो घंटे चलाने पर यह एक यूनिट बिजली खर्च करता है. इसी वजह से इसका अनुमानित खर्च करीब 4 रुपये प्रति घंटा बताया जा रहा है.&amp;nbsp;
3-स्टार रेटिंग के साथ मिलेगा स्टूडियो एसी&amp;nbsp;
ओकटर स्टूडियो एसी 5000 (2026) को 3-स्टार एनर्जी रेटिंग दी गई है. इसका मतलब है कि यह बिजली बचाने के साथ संतुलित कूलिंग देने में सक्षम है. इसके अलावा इसमें एंटी-डस्ट फिल्टर भी दिया गया है, जो हवा में मौजूद धूल और छोटे कणों को रोकने में मदद करता है. कंपनी का कहना है कि इसका लो-नॉइज ऑपरेशन फीचर कम आवाज के साथ काम करता है, जिससे पढ़ाई या काम करते समय ज्यादा परेशानी नहीं होती है.&amp;nbsp;
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पानी टपकने की समस्या भी होगी कम
इस मॉडल में CWRC कूलिंग सिस्टम दिया गया है. कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम AC के बाहर पानी टपकने की समस्या को कम करने में मदद करता है. इसके साथ ही यह AC भारत के अलग-अलग मौसम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जिससे उमस और ज्यादा गर्मी वाले इलाकों में भी बेहतर कूलिंग मिल सके. इस AC की एक और खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी खास वायरिंग या भारी पावर सेटअप की जरूरत नहीं पड़ती है. कंपनी का दावा है कि यह मॉडल सामान्य 6A घरेलू पावर सॉकेट पर आसानी से चल सकता है. यह 1200VA प्योर साइन वेव इन्वर्टर पर भी काम कर सकता है.&amp;nbsp;
कितनी है इस एसी की कीमत&amp;nbsp;
ओकटर स्टूडियो एसी 5000 (2026) मॉडल की लॉन्च कीमत 14,499 रुपये प्लस GST रखी गई है. ग्राहक इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ऑनलाइन मार्केटप्लेस और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीद सकते हैं. कंपनी इस AC के साथ रिमोट कंट्रोल, माउंटिंग फ्रेम, यूनिट पर 1 साल की वारंटी और कंप्रेसर पर 5 साल की वारंटी भी दे रही है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Keystroke Dynamics: Typing Speed से भी हो सकती है आपकी डिजिटल पहचान, Keyboard ही खोल देता है कई राज</title>
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        <description><![CDATA[ Keystroke Dynamics: Typing Speed से भी हो सकती है आपकी डिजिटल पहचान, Keyboard ही खोल देता है कई राज ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>अब वीडियो एडिटिंग सिर्फ बोलकर होगी! Google का नया AI बदल देगा कंटेंट बनाने का तरीक, देखकर दंग रह जाएंगे क्रिएटर्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-वीडियो-एडिटिंग-सिर्फ-बोलकर-होगी-google-का-नया-ai-बदल-देगा-कंटेंट-बनाने-का-तरीक-देखकर-दंग-रह-जाएंगे-क्रिएटर्स</link>
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        <description><![CDATA[ Google Gemini Omni: Google ने आधिकारिक तौर पर अपना नया मल्टीमॉडल AI मॉडल Gemini Omni पेश कर दिया है. यह नया सिस्टम खासतौर पर वीडियो जनरेशन और एडिटिंग के लिए तैयार किया गया है. कंपनी ने पिछले साल Nano Banana के जरिए Gemini आधारित इमेज जनरेशन और एडिटिंग टूल्स लॉन्च किए थे लेकिन अब Gemini Omni उसी तकनीक को अगले स्तर पर ले जाकर वीडियो कंटेंट तक पहुंचा रहा है.
जहां Nano Banana सिर्फ तस्वीरों तक सीमित था, वहीं Gemini Omni टेक्स्ट, वीडियो, इमेज और वॉइस जैसी कई इनपुट्स को समझकर पूरे वीडियो सीन्स तैयार कर सकता है.
Gemini Omni Flash से होगी शुरुआत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सीरीज का पहला मॉडल Gemini Omni Flash होगा जिसे धीरे-धीरे Gemini App, Google Flow और YouTube Shorts में उपलब्ध कराया जा रहा है. इस नए AI मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसका conversational video editing सिस्टम है. यानी अब यूजर्स को भारी-भरकम एडिटिंग सॉफ्टवेयर सीखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे सिर्फ सामान्य भाषा में कमांड देकर वीडियो बदल सकेंगे.
उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर कहे कि आईने को पानी जैसा बना दो तो AI उसी हिसाब से वीडियो में बदलाव कर देगा. Google ने एक डेमो में दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति के आईने को छूते ही वह लिक्विड की तरह लहराने लगता है और उसका हाथ धीरे-धीरे मिरर मटेरियल में बदल जाता है.
AI अब समझेगा असली दुनिया के नियम
Google का कहना है कि Gemini Omni सिर्फ विजुअल जनरेशन तक सीमित नहीं है. इस मॉडल को फिजिक्स और रियल-वर्ल्ड इंटरैक्शन समझने के लिए भी ट्रेन किया गया है. यानी यह गुरुत्वाकर्षण, मूवमेंट, पानी की स्पीड और ऑब्जेक्ट्स के व्यवहार जैसी चीजों को बेहतर तरीके से समझ सकता है. इसी वजह से AI द्वारा बनाए गए वीडियो पहले की तुलना में ज्यादा रियलिस्टिक दिखाई देंगे. कंपनी Gemini के बड़े नॉलेज मॉडल को भी इसमें जोड़ रही है ताकि यह सिर्फ खूबसूरत वीडियो ही नहीं बल्कि context-aware explainers और जानकारी देने वाले विजुअल्स भी तैयार कर सके.
टेक्स्ट, फोटो और आवाज से बनेगा पूरा वीडियो
Gemini Omni कई तरह के इनपुट्स को सपोर्ट करता है. यूजर्स टेक्स्ट, फोटो, वीडियो क्लिप और वॉइस रेफरेंस का इस्तेमाल करके AI को गाइड कर सकते हैं. इसके अलावा अलग-अलग रेफरेंस को मिलाकर वीडियो का स्टाइल, मूवमेंट और पूरा स्ट्रक्चर भी कंट्रोल किया जा सकता है. फिलहाल ऑडियो सपोर्ट सीमित है और केवल वॉइस रेफरेंस तक उपलब्ध है लेकिन आने वाले समय में और एडवांस ऑडियो फीचर्स जोड़े जा सकते हैं.
अब AI बनाएगा आपका डिजिटल अवतार
Google एक नया AI Avatar फीचर भी ला रहा है. इसकी मदद से यूजर्स अपनी डिजिटल पहचान बना सकेंगे, जो उनकी आवाज में वीडियो तैयार कर सकेगी. यह फीचर खासतौर पर कंटेंट क्रिएटर्स, एजुकेटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है.
किन यूजर्स को मिलेगा पहले एक्सेस?
रिपोर्ट्स के अनुसार Gemini Omni Flash सबसे पहले Google AI Plus, Pro और Ultra सब्सक्राइबर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है. इसे Gemini App और Google Flow के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा.
साथ ही Google इस तकनीक को YouTube Shorts और YouTube Create ऐप में भी बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराने जा रहा है. इससे आने वाले समय में शॉर्ट वीडियो बनाने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है.
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अब बिना फोन के भी हो सकती है आपकी ट्रैकिंग! WiFi राउटर से होगी आपकी पहचान, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या इंटरनेट चलाते समय एक्सेप्ट करनी चाहिए Cookies? ये बात जान ली तो हमेशा आएगी काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-इंटरनेट-चलाते-समय-एक्सेप्ट-करनी-चाहिए-cookies-ये-बात-जान-ली-तो-हमेशा-आएगी-काम</link>
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        <description><![CDATA[ Website Cookies: जब भी आप कोई वेबसाइट ओपन करते हैं, एक Cookie पॉप-अप आता है. इस पर मोस्टली एक्सेप्ट या रिजेक्ट का ऑप्शन होता है. ज्यादातर लोग बिना देखे ही Website Cookies एक्सेप्ट कर लेते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो बता दें कि ऐसा करने से आपकी प्राइवेसी पर असर पड़ता है. Cookies को एक्सेप्ट करने से वेबसाइट को डेटा कलेक्ट करने की परमिशन मिल जाती है. इसके बाद वेबसाइट आपका डेटा स्टोर कर सकती है. इसलिए अगर आप प्राइवेसी और डेटा सेफ्टी को लेकर चिंतित हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.&amp;nbsp;
क्या होती हैं Cookies?
Cookies ऐसी छोटी डेटा फाइल्स होती हैं, जिनकी मदद से वेबसाइट लॉग-इन, सेटिंग और प्रीफरेंसेस को याद रखती हैं. इनमें से कुछ एसेंशियल Cookies होती हैं, जो वेबसाइट के ठीक तरीके से फंक्शन करने के लिए जरूरी होती है. यूजर की लैंग्वेज और रीजन प्रेफरेंस को स्टोर करने के लिए फंक्शनल Cookies होती हैं. यूजर साइट से कैसे इंटरेक्ट करता है, इससे जुड़ा डेटा स्टोर करने का काम एनालिटिकल Cookies का होता है और टारगेटेड एड दिखाने के लिए एडवरटाइजिंग Cookies को यूज किया जाता है.
क्या Cookies एक्सेप्ट करनी चाहिए?
इस सवाल का कोई एक सही जवाब नहीं है. अगर आप एक्सेप्ट कर लेते हैं तो हर बार आपको वेबसाइट पर अपनी प्रेफरेंस और सेटिंग सेट नहीं करनी पड़ेगी. वहीं अगर आप इन्हें रिजेक्ट कर देते हैं तो ट्रैकिंग और प्राइवेसी से जुड़ी चिंता से पीछा छूट जाएगा. इसके बीच का एक आसान तरीका केवल एसेंशियल Cookies को एक्सेप्ट करना हो सकता है. कुछ वेबसाइट पर Cookies सेटिंग मैनेज करने का ऑप्शन भी मिलता है, जिससे आप अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज कर सकते हैं.
Accept all cookies करने पर क्या होता है?
अगर आप हर वेबसाइट पर Accept all cookies सेलेक्ट कर रहे हैं तो आपको एकदम स्मूद ब्राउजिंग एक्सपीरियंस मिलता है, लेकिन इसके कुछ खतरे भी हैं. इससे आपके ब्राउजिंग बिहेवियर पर नजर रखी जा सकती है. इसके सहारे आपका प्रोफाइल क्रिएट कर टारगेटेड एडवरटाइजमेंट भी दिखाई जा सकती है. यह बात याद रखने वाली है कि Cookies कोई वायरस या मालवेयर नहीं है और ये डायरेक्ट आपके डिवाइस को डैमेज नहीं कर सकती. इनके साथ सिक्योरिटी की नहीं बल्कि प्राइवेसी की चिंता जुड़ी हुई है. अगर Cookies का स्टोर डेटा गलत हाथों में पड़ जाए तो खतरनाक हो सकता है.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Nitin Gadkari Water Based Stove Launch: पानी से जलेगा ये चूल्हा, नितिन गडकरी ने लॉन्च की गजब की तकनीक,  जानें कब तक खरीद पाएंगे आप?</title>
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        <description><![CDATA[ Nitin Gadkari Water Based Stove Launch : देश में लगातार बढ़ती LPG सिलेंडर की कीमतों और कई जगहों पर गैस सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच अब एक नई तकनीक चर्चा में है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतिन गडकरी ने नागपुर में एक खास कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल से चलने वाले नए स्टोव की तकनीक पेश की है. दावा किया जा रहा है कि यह चूल्हा पारंपरिक LPG गैस सिलेंडर से सस्ता भी होगा और पर्यावरण के लिए बेहतर भी होगा. वहीं सबसे खास बात यह है कि यह स्टोव सिर्फ इथेनॉल से नहीं, बल्कि पानी और इथेनॉल के मिश्रण से चलेगा. सरकार और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक रसोई गैस का बड़ा ऑप्शन बन सकती है. तो आइए जानते हैं कि ये चूल्हा आप कब तक खरीद पाएंगे.
क्या है इथेनॉल बेस्ड स्टोव तकनीक?
इथेनॉल बेस्ड स्टोव एक नई तरह का कुकिंग सिस्टम है जो इथेनॉल फ्यूल की मदद से खाना पकाता है. इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल बेस्ड फ्यूल होता है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है. यह पूरी तरह भारतीय तकनीक बताई जा रही है यानी इसे भारत में ही विकसित किया गया है.&amp;nbsp;
पानी और इथेनॉल मिलाकर कैसे जलेगा चूल्हा?
इस तकनीक की सबसे खास बात यही है कि इसमें इथेनॉल के साथ लगभग 7 प्रतिशत पानी मिलाया जाता है. इसके बाद यह मिश्रण स्टोव में डाला जाता है. जब स्टोव को जलाया जाता है तो इससे एक साफ और लगातार जलने वाली फ्लेम निकलती है, जो गैस चूल्हे जैसी दिखाई देती है. दावा किया गया है कि इससे धुआं बहुत कम निकलता है. प्रदूषण नहीं के बराबर होता है. खाना जल्दी पकता है और फ्यूल की लागत कम आती है.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा यह स्टोव?
इस स्टोव का काम करने का तरीका काफी आसान बताया गया है. इसमें एक छोटा फ्यूल टैंक या कंटेनर होगा, जिसमें इथेनॉल और पानी का मिश्रण डाला जाएगा. जैसे ही स्टोव ऑन किया जाएगा, मिश्रण से फ्लेम पैदा होगी और खाना पकाया जा सकेगा. इस तकनीक में पारंपरिक LPG सिलेंडर की जरूरत काफी कम हो सकती है. नीतिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि यह स्टोव कमर्शियल गैस सिलेंडर की तुलना में काफी सस्ता पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह भारतीय तकनीक है और इससे देश को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. उनके मुताबिक इससे खाना पकाने का खर्च कम होगा. विदेशों से आने वाली गैस पर निर्भरता घटेगी. किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण को कम नुकसान होगा.&amp;nbsp;
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ये चूल्हा आप कब तक खरीद पाएंगे?
अभी बड़े स्तर पर इसकी बिक्री शुरू नहीं हुई है. माना जा रहा है कि सुरक्षा परीक्षण और सरकारी मंजूरी के बाद आने वाले समय में यह आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है. हालांकि अभी तक इसकी लॉन्च डेट या कीमत को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
इथेनॉल स्टोव के फायदे
1. LPG से सस्ता पड़ सकता है: सरकार का दावा है कि इथेनॉल आधारित स्टोव का इस्तेमाल करने पर घरेलू और होटल दोनों का खर्च कम हो सकता है.&amp;nbsp;
2. प्रदूषण होगा कम: लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल की तुलना में यह काफी साफ तरीके से जलता है. इससे धुआं कम निकलता है और घर के अंदर की हवा ज्यादा खराब नहीं होती है.
4. किसानों को होगा फायदा: इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्के से तैयार किया जाता है. इसकी मांग बढ़ने से किसानों की फसल की खपत बढ़ सकती है और उनकी कमाई में इजाफा हो सकता है.
5. विदेशी गैस पर निर्भरता घटेगी: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल और गैस खरीदकर पूरा करता है. अगर इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ता है तो देश का काफी पैसा बच सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Google Maps Fuel Saving Setting : गूगल मैप की इस सेटिंग को करें ऑन, आज ही से होने लगेगी फ्यूल की बंपर बचत</title>
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        <description><![CDATA[ Google Maps Fuel Saving Setting : आज के समय में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है. खासकर दिल्ली-NCR समेत बड़े शहरों में रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए गाड़ी चलाना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है. ऐसे में हर कोई यही सोचता है कि आखिर फ्यूल की बचत कैसे की जाए. बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारे स्मार्टफोन में मौजूद एक नॉर्मल सी ऐप गूगल मैप्स हर महीने सैकड़ों रुपये तक बचाने में मदद कर सकती है. ज्यादातर लोग इसे सिर्फ रास्ता देखने के लिए यूज करते हैं, लेकिन इसके अंदर एक ऐसा फीचर भी मौजूद है जो कम फ्यूल खर्च करने वाले रास्ते दिखाता है.
अगर इस सेटिंग को ऑन कर दिया जाए तो गूगल मैप्स ऐसे रूट्स सजेस्ट करता है जहां ट्रैफिक कम हो, दूरी छोटी हो और गाड़ी का फ्यूल कम खर्च हो. इससे 10 से 20 प्रतिशत तक पेट्रोल, डीजल या सीएनजी बचाने में मदद मिल सकती है. तो आइए जानते हैं कि गूगल मैप की किस सेटिंग को ऑन करें, जिससे आज ही फ्यूल की बंपर बचत होने लगेगी.&amp;nbsp;
गूगल मैप की किस सेटिंग को ऑन करें?
गूगल मैप्स में एक खास फीचर दिया गया है जिसे Fuel Efficient Routes कहा जाता है. इसका मतलब है कि ऐप आपको ऐसे रास्ते दिखाएगा जहां गाड़ी कम फ्यूल खर्च करेगी. आमतौर पर लोग सबसे तेज या सबसे छोटा रास्ता चुनते हैं, लेकिन कई बार वहां ज्यादा ट्रैफिक होता है. ट्रैफिक में बार-बार ब्रेक और एक्सीलेटर लगाने से फ्यूल ज्यादा खर्च होता है. ऐसे में यह फीचर ऐसे रास्ते ढूंढता है जहां ट्रैफिक कम हो और गाड़ी स्मूद तरीके से चल सके.&amp;nbsp;
कैसे काम करता है यह फीचर?
यह फीचर आपकी गाड़ी के इंजन और फ्यूल टाइप के हिसाब से रूट तय करता है. जैसे पेट्रोल, डीजल और सीएनजी गाड़ियों का फ्यूल खर्च अलग-अलग होता है. जब आप गूगल मैप्स में अपनी कार की जानकारी डालते हैं, तब ऐप उसी हिसाब से बेहतर और फ्यूल बचाने वाला रास्ता दिखाता है.&amp;nbsp;
Google Maps में Fuel Saving Setting कैसे ऑन करें?
1. अगर आप भी फ्यूल बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने फोन में गूगल मैप्स ऐप खोलें.&amp;nbsp;
2. इसके बाद ऊपर दाईं तरफ दिखाई देने वाली अपनी प्रोफाइल फोटो या जीमेल आइकन पर टैप करें.&amp;nbsp;
3. अब Settings वाले ऑप्शन को चुनें.&amp;nbsp;
4. वहीं नीचे स्क्रॉल करें और Navigation ऑप्शन पर क्लिक करें.&amp;nbsp;
5. अब आपको Prefer Fuel-Efficient Routes या Fuel Efficient Routes का ऑप्शन दिखाई देगा. इसे ऑन कर दें.&amp;nbsp;
कार की जानकारी देना क्यों जरूरी है?
इस फीचर को सही तरीके से काम करने के लिए गूगल मैप्स आपकी गाड़ी से जुड़ी कुछ जानकारी मांगता है. इसमें आपको बताना होता है कि आपकी कार पेट्रोल से चलती है या डीजल से, गाड़ी CNG है या Hybrid, इंजन किस प्रकार का है. इन जानकारियों की मदद से ऐप बेहतर रूट तैयार करता है.&amp;nbsp;
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हरे रंग का पत्ता क्या बताता है?
जब आप किसी लोकेशन के लिए रूट सर्च करेंगे, तब कुछ रास्तों के पास हरे रंग का छोटा पत्ता दिखाई देगा. यह Green Leaf इस बात का संकेत होता है कि उस रास्ते पर जाने से फ्यूल की बचत होगी. &amp;nbsp;अगर आप उस रूट को चुनते हैं तो आपकी गाड़ी कम पेट्रोल या डीजल खर्च करेगी.&amp;nbsp;
कितना फ्यूल बच सकता है?
गूगल के अनुसार, यह फीचर ड्राइविंग और ट्रैफिक के आधार पर लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक फ्यूल बचाने में मदद कर सकता है. अगर कोई व्यक्ति रोजाना लंबी दूरी तय करता है तो महीने भर में अच्छी बचत हो सकती है. आज के समय में गूगल मैप्स की मदद से आप ट्रैफिक की जानकारी देख सकते हैं. टोल रोड का पता लगा सकते हैं. पेट्रोल पंप ढूंढ सकते हैं. इसके अलावा रेस्टोरेंट और होटल ढूंढ सकते हैं. दूरी और टाइम का अंदाजा लगा सकते हैं. साथ ही ट्रैफिक फ्री रास्ता चुन सकते हैं. इसी वजह से शहरों में लाखों लोग रोज इसका इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AC यूज करते समय काम आएंगे ये हैक, बिजली बचेगी और कमरा भी हो जाएगा पहाड़ों जैसा ठंडा</title>
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        <description><![CDATA[ AC Use Hacks: देश के कई हिस्सों में गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. 45 डिग्री से पार जा चुके पारे में कूलर और पंखें भी हाथ खड़े कर चुके हैं. अब गर्मी से राहत पाने का एकमात्र तरीका एसी ही बचा है. ज्यादातर लोगों को एसी चलाते समय बिजली के बिल की टेंशन रहती है. डेली कुछ घंटों तक एसी यूज करने से बिजली बिल काफी बढ़ जाता है. इसलिए लोग बहुत संभलकर एसी यूज करते हैं. आज हम आपके लिए कुछ ऐसे हैक्स लेकर आए हैं, जो बिजली भी बचाएंगे और आपके कमरे को मनाली जैसा ठंडा भी कर देंगे.
बड़े काम आएंगे ये AC Use Hacks
खिड़की-दरवाजे पूरी तरह बंद रखें- एसी यूज करते समय वेंटिलेशन की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए कमरे के खिड़की और दरवाजों की पूरी तरह बंद रखें. अगर खिड़की या दरवाजा थोड़ा-सा भी खुला है तो बाहर की गर्म हवा अंदर का टेंपरेचर बढ़ा सकती है और एसी को कूलिंग के लिए ज्यादा काम करना पड़ेगा. इससे बिजली की खपत ज्यादा होती है. कमरे को पूरी तरह बंद कर आप कूलिंग बढ़ा सकते हैं और बिजली की खपत भी कम होगी.
एसी की देखरेख भी है जरूरी- हर बार गर्मियां शुरू होने से पहले एसी की सर्विसिंग करवा लेना जरूरी है. सर्विस न होने पर एसी ज्यादा बिजली कंज्यूम करता है और कूलिंग एफिशिएंसी भी कम हो जाती है. सर्विसिंग के लिए हमेशा प्रोफेशनल टेक्नीशियन की मदद लें.
सही टेंपरेचर का है सारा खेल- कई लोगों को लगता है कि एसी का टेंपरेचर कम सेट करने पर यह जल्दी कूलिंग करता है. इसलिए लोग 16 या 18 डिग्री पर एसी चलाते हैं. ऐसा करने से आपका कमरा जल्दी ठंडा नहीं होगा, लेकिन बिजली का बिल जरूर आसमान छूने लगेगा. कम टेंपरेचर मैंटेन करने के लिए एसी को ज्यादा काम करना पड़ता है. बिजली की बचत और सही कूलिंग के लिए एसी का तापमान 24 डिग्री पर सेट रखना चाहिए.
एसी के साथ सीलिंग फैन भी करें यूज- यह तरीका भी खूब काम का है. सीलिंग फैन ऑन रखने से एसी की ठंडी हवा जल्दी ही पूरे रूम में सर्कुलेट हो जाती है और कमरा जल्दी ठंडा होता है. इससे एसी को कमरा ठंडा रखने के लिए कम काम करना पड़ेगा और इससे बिजली की खपत भी कम हो जाएगी. आप चाहें तो पंखे को धीमी स्पीड पर भी चला सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>यूज, करते, समय, काम, आएंगे, ये, हैक, बिजली, बचेगी, और, कमरा, भी, हो, जाएगा, पहाड़ों, जैसा, ठंडा</media:keywords>
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        <title>आईफोन के लिए आ रहा है अल्टीमेट सिक्योरिटी फीचर, हाथ से छिनते ही हो जाएगा लॉक</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone Security Feature: आईफोन यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर है. आईफोन के लिए जल्द ही अब तक का सबसे तगड़ा सिक्योरिटी फीचर आने वाला है. आईफोन वैसे भी अपने सिक्योरिटी फीचर के लिए पॉपुलर है, लेकिन नया फीचर सिक्योरिटी एक कदम और आगे ले जाएगा. इसके बाद अगर अनलॉक होने के बाद भी आपका आईफोन चोरी होता है तो भी चोर इसका कुछ नहीं कर पाएगा. आईफोन अपने आप डिटेक्ट कर लेगा कि कब इसे छीना गया है और यह लॉक हो जाएगा. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
अभी आईफोन में मिलते हैं ये सिक्योरिटी फीचर
अभी आईफोन में Find My + Activation Lock और Stolen Device Protection जैसे फीचर मिलते हैं. जैसे ही आप Find My iPhone एक्टिवेट करते हैं, इसके साथ एक्टिवेशन लॉक भी ऑन हो जाता है. इसके बाद अगर कोई आईफोन को रिस्टोर या इसका डेटा डिलीट करना चाहेगा तो उसे यूजर ऐप्पल अकाउंट के ईमेल एड्रेस और पासवर्ड की जरूरत पड़ती है. स्टोलन डिवाइस प्रोटेक्शन की बात करें तो यह कई सेटिंग बदल देता है. जब आईफोन किसी ट्रस्टेड लोकेशन से बाहर होता है तो इस अनलॉक करने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती है. अगर वेरिफिकेशन फेल हो जाए तो दोबारा ट्राई का मौका एक घंटे बाद मिलता है. इससे चोरी हुए फोन को यूज करना लगभग असंभव हो जाता है.
नया फीचर क्या काम करेगा?
ऊपर बताए गए सारे फीचर तभी काम करेंगे, जब आईफोन लॉक हो और चोरी हो जाए. अगर आईफोन अनलॉक है और चोरी हो जाए तो ये काम नहीं करते. अब ऐप्पल इसी कमी को दूर करना चाह रही है. नया फीचर आईफोन के एक्सेरोमीटर और दूसरे टूल्स की मदद से यह पता कर लेगा कि आईफोन छिन गया है. यह डिटेक्ट होते ही आईफोन लॉक हो जाएगा. अगर किसी यूजर ने अपने आईफोन को ऐप्पल वॉच से पेयर किया है तो यह डिस्टेंस को भी मॉनिटर करेगा. एक बार चोरी हुआ आईफोन लॉक होने के बाद इस पर स्टोलन डिवाइस वाले सारे सिक्योरिटी तामझाम लागू हो जाएंगे.&amp;nbsp;
कब तक आ सकता है नया फीचर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप्पल फिलहाल इस फीचर पर काम कर रही है. अभी इसकी लॉन्चिंग को लेकर टाइमलाइन सामने नहीं आई है. उम्मीद की जा रही है कि सिक्योरिटी के लिहाज से जरूरी इस फीचर को जल्द से जल्द रोलआउट कर दिया जाएगा. बता दें कि एंड्रॉयड फोन में पहले से ही Theft Detection Lock नाम से ऐसा फीचर अवेलेबल है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आईफोन, के, लिए, आ, रहा, है, अल्टीमेट, सिक्योरिटी, फीचर, हाथ, से, छिनते, ही, हो, जाएगा, लॉक</media:keywords>
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        <title>भारत में Free WiFi का बड़ा अपडेट! अब QR Code स्कैन करते ही मिलेगा इंटरनेट, PM&amp;WANI में हुए बड़े बदलाव</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भारत-में-free-wifi-का-बड़ा-अपडेट-अब-qr-code-स्कैन-करते-ही-मिलेगा-इंटरनेट-pm-wani-में-हुए-बड़े-बदलाव</link>
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        <description><![CDATA[ PM-WANI Wi-Fi: देशभर में लोगों तक सस्ता और आसान इंटरनेट पहुंचाने के लिए सरकार ने PM-WANI (प्रधानमंत्री वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस) योजना में कई अहम बदलाव किए हैं. दूरसंचार विभाग (DoT) का उद्देश्य पब्लिक वाई-फाई को ज्यादा सुरक्षित, तेज और यूजर फ्रेंडली बनाना है, ताकि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक जगहों पर लोग आसानी से इंटरनेट इस्तेमाल कर सकें.
QR Code स्कैन करते ही कनेक्ट होगा Wi-Fi
अब PM-WANI वाई-फाई इस्तेमाल करने के लिए लंबी लॉगिन प्रोसेस से नहीं गुजरना पड़ेगा. नई व्यवस्था के तहत यूजर्स QR कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में इंटरनेट से जुड़ सकेंगे. इस फीचर की मदद से लैपटॉप, टैबलेट और दूसरे डिवाइस को भी आसानी से कनेक्ट किया जा सकेगा. यूजर को सिर्फ लॉगिन पेज पर दिख रहे QR कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होग जिसके बाद इंटरनेट एक्सेस तुरंत मिल जाएगा. इससे लॉगिन प्रोसेस पहले के मुकाबले तेज और ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी.
15, 30 और 60 मिनट वाले सस्ते प्लान
सरकार ने लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए PM-WANI के तहत छोटे समय वाले नए प्लान भी पेश किए हैं. ये सैशे स्टाइल प्लान होंगे जिनकी वैलिडिटी 15 मिनट, 30 मिनट और 60 मिनट तक रहेगी. इन प्लान्स का फायदा उन लोगों को मिलेगा जिन्हें थोड़े समय के लिए इंटरनेट की जरूरत होती है जैसे यात्रा के दौरान रेलवे स्टेशन या बस अड्डे पर. इससे यूजर्स कम कीमत में अपनी जरूरत के हिसाब से डेटा इस्तेमाल कर पाएंगे.
फर्जी Wi-Fi नेटवर्क से मिलेगी सुरक्षा
पब्लिक वाई-फाई के नाम पर होने वाले साइबर फ्रॉड और फेक हॉटस्पॉट से बचाने के लिए भी सरकार ने नया कदम उठाया है. अब आधिकारिक नेटवर्क के नाम में PMWANI ब्रांडिंग अनिवार्य होगी. इस बदलाव के बाद लोग असली और नकली वाई-फाई नेटवर्क में आसानी से फर्क कर सकेंगे. इससे डेटा चोरी और ऑनलाइन स्कैम जैसी घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी.
देशभर में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि इन नए बदलावों से PM-WANI योजना ज्यादा प्रभावी बनेगी और ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक इंटरनेट पहुंच को मजबूत किया जा सकेगा. आसान लॉगिन, छोटे प्लान और बेहतर सुरक्षा जैसे फीचर्स लोगों के डिजिटल अनुभव को पहले से बेहतर बनाने में मदद करेंगे.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या आपके फोन में भी ON है ये सेटिंग? तुरंत करें OFF वरना हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉलिंग या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गया है. बैंकिंग, चैटिंग, फोटो, लोकेशन और निजी जानकारी सब कुछ हमारे फोन में मौजूद रहता है. लेकिन कई बार अनजाने में हम ऐसी सेटिंग्स ON छोड़ देते हैं जिनकी वजह से कुछ ऐप्स हमारी प्राइवेसी में सेंध लगा सकते हैं. यही कारण है कि फोन की Privacy Settings को समय-समय पर जांचना बेहद जरूरी हो गया है.
बिना सोचे-समझे Permissions देना पड़ सकता है भारी
अक्सर लोग नया ऐप इंस्टॉल करते ही बिना पढ़े सभी Permissions Allow कर देते हैं. इसके बाद वही ऐप्स कैमरा, माइक्रोफोन और लोकेशन जैसी संवेदनशील चीजों तक पहुंच बना लेते हैं. कई ऐप्स बैकग्राउंड में भी इन फीचर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है. Android स्मार्टफोन्स में Privacy Dashboard और Permission Manager जैसे फीचर्स दिए जाते हैं ताकि यूजर्स आसानी से पता लगा सकें कि कौन-सा ऐप क्या Access कर रहा है.
कैमरा और माइक्रोफोन Access सबसे बड़ा जोखिम
अगर किसी ऐप को Camera और Microphone की अनुमति मिली हुई है तो वह जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल कर सकता है. कई बार यूजर्स को इसकी जानकारी भी नहीं होती. नए Android वर्जन में अब स्क्रीन पर Green Indicator दिखाई देता है जिससे पता चलता है कि कैमरा या माइक्रोफोन एक्टिव है. अगर आपको किसी ऐप पर भरोसा नहीं है तो उसकी Permissions तुरंत बंद कर देना बेहतर रहेगा.
हमेशा ON रहने वाली Location Tracking भी खतरनाक
कुछ ऐप्स लगातार आपकी Live Location ट्रैक करते रहते हैं. इससे आपकी गतिविधियों और लोकेशन हिस्ट्री का डेटा जमा किया जा सकता है. साइबर एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि Allow all the time विकल्प चुनने से बचें. इसके बजाय Only while using the app ऑप्शन ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इससे ऐप सिर्फ इस्तेमाल के दौरान ही आपकी लोकेशन Access कर पाता है.
पुराने Apps भी बन सकते हैं खतरा
कई ऐसे ऐप्स होते हैं जिन्हें लोग महीनों या सालों तक इस्तेमाल नहीं करते लेकिन उनकी Permissions फोन में बनी रहती हैं. ऐसे ऐप्स भी आपकी जानकारी तक पहुंच बनाए रख सकते हैं. हालांकि Android में अब Auto Reset Permissions फीचर मिलता है जो लंबे समय तक इस्तेमाल न होने वाले ऐप्स की Permissions खुद हटा देता है.
ऐसे करें अपने फोन की Privacy Settings चेक
अगर आप Android फोन इस्तेमाल करते हैं तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:
सबसे पहले Settings खोलें. इसके बाद Privacy या Security &amp;amp; Privacy सेक्शन में जाएं. अब Permission Manager खोलें. यहां Camera, Microphone और Location Permissions को ध्यान से चेक करें. जरूरत पड़ने पर आप Camera और Mic Access को पूरी तरह Disable भी कर सकते हैं.
एक्सपर्ट क्यों दे रहे हैं चेतावनी?
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों का कहना है कि हर महीने कम से कम एक बार App Permissions जरूर जांचनी चाहिए. इंटरनेट फोरम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी कई यूजर्स ने बताया है कि अनजान ऐप्स को ज्यादा Permissions देना प्राइवेसी रिस्क बढ़ा सकता है.
अभी करें ये जरूरी काम
अगर आपने लंबे समय से अपने फोन की Privacy Settings चेक नहीं की है तो अभी यह काम कर लें. हो सकता है कोई ऐप आपकी उम्मीद से ज्यादा जानकारी Access कर रहा हो. छोटी-सी लापरवाही आपकी निजी जानकारी को खतरे में डाल सकती है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>इंटरनेट पर ये चीजें देखना है मना, घर से उठाकर ले जा सकती है पुलिस</title>
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        <description><![CDATA[ What Is Illegal to Watch on Internet: इंटरनेट बहुत बड़ा है और आप इसे अपनी मर्जी से यूज कर सकते हैं. पढ़ाई-लिखाई से लेकर ऑफिस के काम और एंटरटेनमेंट समेत कई कामों के लिए इंटरनेट इस्तेमाल होता है. सफर पर जाते समय रास्ता भूल गए तो इंटरनेट आपको रास्ता बता देता है. कुछ नया खाने का मन किया तो इंटरनेट पर रेसिपी देखी जा सकती है. मोटे तौर पर बेसिक और लीगल कामों के लिए इंटरनेट पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन कई चीजें गैरकानूनी भी है. आज हम आपको बताएंगे कि इंटरनेट पर क्या देखना मना है. अगर आप मनाही के बावजूद ये काम करते हैं तो पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है.
इंटरनेट पर क्या देखना मना है?
बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेट- इंटरनेट पर बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेट पर कठोर पाबंदी लगाई गई है. कानून के तहत इस तरह का कंटेट क्रिएट करना, देखना, डाउनलोड करना, स्टोर करना, ब्राउज करना और डिस्ट्रीब्यूट करना गंभीर अपराध है. इसमें लंबी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है. इसलिए ऐसे किसी भी कंटेट से बचना जरूरी है. अश्लील वीडियो को लेकर भी कई मामलों में कानून का डंडा चल सकता है.
पायरेटेड कंटेट- अगर आप इंटरनेट पर पायरेटेड कंटेट देख या यूज कर रहे हैं तो कानूनी मुसीबत में फंस सकते हैं. कॉपीराइट कानून के तहत बिना परमिशन के पायरेटेड कंटेट देखना, स्टोर, डाउनलोड और डिस्ट्रीब्यूट करना गैरकानूनी है. ऐसे अपराधों में जुर्माने से लेकर सजा तक हो सकती है.
भड़काऊ और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे से जुड़ा कंटेट- देश की संप्रभुता, एकता और सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कंटेट पूरी तरह बैन है. ऐसे कंटेट के खिलाफ कई कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है. अगर कोई इंटरनेट पर टेरेरिस्ट प्रोपेगेंडा, हेट स्पीच, राष्ट्र-विरोधी कंटेट देखते या फैलाते हुए पकड़ा जाता है तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इस तरह के कंटेट को शेयर या महज लाइक करना भी कानूनी पचड़े में फंसा सकता है और जांच एजेंसियां आपके घर तक आ सकती हैं.
ऑनलाइन गैंबलिंग और बैन हुई सर्विस- ऑनलाइन गैंबलिंग पर प्रतिबंध होने के कारण इस तरह की एक्टिविटी करना गैर-कानूनी है. इसी तरह जिन सर्विसेस और ऐप्स को सरकार ने बैन किया हुआ है, उन्हें एक्सेस करना भी मुश्किलें बढ़ा सकता है. ऐसी ऐप्स को VPN के जरिए यूज करना भी खतरे से खाली नहीं है और इसे सरकार के नियमों के उल्लंघन के तौर पर देखा जा सकता है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>हवा की नमी से बनेगी बिजली! वैज्ञानिकों ने तैयार किया ऐसा डिवाइस जो बदल सकता है पूरी दुनिया</title>
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        <description><![CDATA[ Electricity from Air Humidity: दुनियाभर में बढ़ते ई-वेस्ट और प्रदूषण के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है जो हवा में मौजूद नमी से बिजली बना सकती है. खास बात यह है कि यह डिवाइस पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल है और इसे बनाने में ऐसे सामान्य पदार्थों का इस्तेमाल किया गया है जो खाने-पीने में भी उपयोग होते हैं.
यह रिसर्च Queen Mary University of London, University of Warwick, Imperial College London और Universitas Mercatorum के वैज्ञानिकों ने मिलकर की है. इस शोध को Nano Energy जर्नल में प्रकाशित किया गया है.
क्या है यह नई तकनीक?
इस तकनीक को Moisture-Electric Generator यानी MEG कहा जाता है. जहां आम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नमी से खराब हो जाते हैं, वहीं यह नया सिस्टम नमी को ही अपनी ताकत बनाता है. डिवाइस को जिलेटिन, साधारण नमक और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे सस्ते और सुरक्षित पदार्थों से तैयार किया गया है. इसे बनाने की प्रोसेस भी बेहद आसान और पानी आधारित है जिससे उत्पादन लागत काफी कम हो सकती है.
कैसे बनती है बिजली?
यह डिवाइस हवा या त्वचा में मौजूद नमी को सोखता है. जब जिलेटिन और नमक का मिश्रण सूखता है तो इसके अंदर तीन परतों वाली खास संरचना बन जाती है. इसके बाद जैसे ही यह दोबारा नमी के संपर्क में आता है, अंदर मौजूद आयन सक्रिय होकर मूवमेंट शुरू कर देते हैं. इसी प्रोसेस से लगातार बिजली पैदा होती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसका एक छोटा यूनिट करीब 1 वोल्ट बिजली लगातार 30 दिनों से ज्यादा समय तक बना सकता है.
छोटे उपकरण भी चला सकता है
शोधकर्ताओं ने कई यूनिट्स को जोड़कर इसका बड़ा सिस्टम तैयार किया. इस सेटअप ने करीब 90 वोल्ट तक बिजली पैदा की जो छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और LED लाइट स्ट्रिंग्स को चलाने के लिए पर्याप्त थी. इससे साफ है कि भविष्य में यह तकनीक छोटे गैजेट्स और सेंसर डिवाइस के लिए बैटरी का विकल्प बन सकती है.
सांस और शरीर की नमी भी पहचान सकता है
यह तकनीक केवल बिजली बनाने तक सीमित नहीं है. वैज्ञानिकों ने पाया कि यह डिवाइस सेंसर की तरह भी काम कर सकता है. क्योंकि इसकी बिजली उत्पादन क्षमता नमी के स्तर के अनुसार बदलती है इसलिए यह इंसानी शरीर से निकलने वाली बेहद हल्की नमी को भी पहचान सकता है. रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने इसे सांसों की निगरानी और बोलते समय निकलने वाली नमी को मापने में इस्तेमाल किया. भविष्य में इसका उपयोग हेल्थ मॉनिटरिंग डिवाइस, वियरेबल टेक्नोलॉजी और टचलेस सेंसर सिस्टम में किया जा सकता है.
पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित
इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण अनुकूल होना है. सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में प्लास्टिक, जहरीले केमिकल और भारी धातुएं होती हैं लेकिन MEG को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इस्तेमाल के बाद यह आसानी से मिट्टी में घुल सके. यह कुछ ही हफ्तों में प्राकृतिक रूप से खत्म हो सकता है या पानी में घोलकर इसके पदार्थों को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे सर्कुलर इलेक्ट्रॉनिक्स की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं.
भविष्य की इलेक्ट्रॉनिक्स बदल सकती है यह खोज
शोधकर्ताओं का मानना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने के लिए दुर्लभ और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों पर निर्भरता कम हो सकती है. यह नई खोज दिखाती है कि साधारण, सस्ते और टिकाऊ पदार्थों से भी हाई-परफॉर्मेंस तकनीक तैयार की जा सकती है जो प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर काम करे.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>क्या कानों में लगे Earbuds कर सकते हैं आपकी जासूसी? जानिए क्या है इसकी सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Earbuds: आज के समय में वायरलेस ईयरबड्स सिर्फ गाने सुनने या कॉल करने का साधन नहीं रह गए हैं. ऑफिस मीटिंग, ऑनलाइन क्लास, गेमिंग और रोजमर्रा की बातचीत तक लोग घंटों इन्हें कानों में लगाए रखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही छोटे-से Earbuds आपकी निजी बातचीत पर नजर रखने का जरिया भी बन सकते हैं? साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि स्मार्ट डिवाइस जितने सुविधाजनक होते जा रहे हैं, उतना ही डेटा चोरी और प्राइवेसी रिस्क भी बढ़ रहा है.
कैसे बन सकते हैं Earbuds जासूसी का हथियार?
ज्यादातर आधुनिक Earbuds में माइक्रोफोन, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, वॉयस असिस्टेंट सपोर्ट और AI फीचर्स दिए जाते हैं. यही फीचर्स कई बार साइबर अपराधियों के लिए रास्ता खोल देते हैं. अगर किसी डिवाइस में सिक्योरिटी खामी हो या वह किसी मैलवेयर से संक्रमित हो जाए तो हैकर माइक्रोफोन तक पहुंच बना सकते हैं.
इसका मतलब यह है कि यूजर को बिना पता चले आसपास की बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है. कई बार फर्जी ऐप्स या संदिग्ध ब्लूटूथ कनेक्शन भी डेटा चोरी का कारण बन जाते हैं.
ब्लूटूथ हैकिंग का बढ़ता खतरा
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक सार्वजनिक जगहों पर ब्लूटूथ ऑन रखना खतरनाक साबित हो सकता है. एयरपोर्ट, मॉल, रेलवे स्टेशन या कैफे जैसी जगहों पर हैकर्स नकली ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए यूजर्स को टारगेट करते हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति गलती से ऐसे डिवाइस से कनेक्ट होता है उसकी जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है.
कुछ मामलों में हैकर्स ऑडियो डेटा, कॉन्टैक्ट लिस्ट और फोन की दूसरी जानकारी तक एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं. यही वजह है कि टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ हमेशा भरोसेमंद डिवाइस और आधिकारिक ऐप्स इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.
कौन-से यूजर्स सबसे ज्यादा जोखिम में?
जो लोग लगातार ऑफिस कॉल, बिजनेस मीटिंग या निजी बातचीत के लिए Earbuds का इस्तेमाल करते हैं, वे ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं. खासकर वे यूजर्स जो सस्ते या अनजान ब्रांड के Earbuds खरीदते हैं उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है. कई लोकल डिवाइस में सिक्योरिटी अपडेट्स की कमी होती है जिससे डेटा लीक का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, यदि किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा माइक्रोफोन परमिशन दी गई है तो वह बैकग्राउंड में आपकी आवाज रिकॉर्ड कर सकता है.
खुद को कैसे रखें सुरक्षित?
Earbuds इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. हमेशा भरोसेमंद ब्रांड के डिवाइस खरीदें और उन्हें समय-समय पर अपडेट करते रहें. अनजान ब्लूटूथ रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और जब जरूरत न हो तब ब्लूटूथ बंद रखें. फोन में इंस्टॉल ऐप्स की परमिशन भी नियमित रूप से चेक करनी चाहिए. जिन ऐप्स को माइक्रोफोन एक्सेस की जरूरत नहीं है, उनकी परमिशन तुरंत हटा दें. साथ ही, किसी भी संदिग्ध लिंक या फर्जी ऐप डाउनलोड से बचना चाहिए. तकनीक जितनी स्मार्ट हो रही है उतना ही जरूरी है कि यूजर्स भी सतर्क रहें.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Mobile Security:  फोन का Mic कब&amp;कब सुन रहा होता है आपकी बातें, जानें कैसे होती है डेटा ट्रैकिंग?</title>
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        <description><![CDATA[ Mobile Security:&amp;nbsp;आज के समय में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल करने का जरिया नहीं रह गया है. लोग इससे पढ़ाई करते हैं, ऑनलाइन काम करते हैं, फोटो और वीडियो बनाते हैं, शॉपिंग करते हैं और घंटों सोशल मीडिया चलाते हैं. यानी हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा अब फोन के अंदर ही सिमट गया है. लेकिन कई बार लोगों को ऐसा लगता है कि फोन उनकी बातें भी सुन रहा है. उदाहरण के लिए अगर कोई दोस्त से किसी जूते या मोबाइल की बात करे और थोड़ी देर बाद उसी चीज का विज्ञापन फोन में दिखने लगे, तो शक होना लाजमी है. यही वजह है कि अब लोग जानना चाहते हैं कि आखिर फोन का Mic कब एक्टिव होता है और डेटा ट्रैकिंग कैसे होती है.
Mic हमेशा ऑन नहीं होता, लेकिन Apps ले सकती हैं Access
असल में स्मार्टफोन का माइक्रोफोन हर समय आपकी बातें रिकॉर्ड नहीं करता, लेकिन कई ऐप्स Mic की Permission मांगती हैं. जब हम बिना सोचे-समझे किसी ऐप को Permission दे देते हैं, तब वह जरूरत पड़ने पर माइक्रोफोन इस्तेमाल कर सकती है. जैसे Voice Search, Voice Typing या Video Recording के समय Mic एक्टिव होता है. कुछ ऐप्स बैकग्राउंड में भी काम करती रहती हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि फोन लगातार सुन रहा है. हालांकि बड़ी टेक कंपनियां दावा करती हैं कि वे बिना इजाजत निजी बातें रिकॉर्ड नहीं करतीं, लेकिन यूजर्स की एक्टिविटी और पसंद को समझने के लिए डेटा जरूर इकट्ठा किया जाता है.
फिर कैसे दिखने लगते हैं वही Ads जिनकी हम बात करते हैं?
कई लोग सोचते हैं कि फोन उनकी बातें सुनकर Ads दिखाता है, लेकिन इसकी असली वजह अक्सर हमारी ऑनलाइन एक्टिविटी होती है. आप क्या सर्च करते हैं, कौन-सी वीडियो देखते हैं, किस पोस्ट पर ज्यादा रुकते हैं और किस चीज में दिलचस्पी दिखाते हैं, ये सब डेटा कंपनियों तक पहुंचता है. इसके बाद AI और एल्गोरिदम आपकी पसंद को समझकर उसी तरह के विज्ञापन दिखाने लगते हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि हम किसी चीज के बारे में पहले से सोच रहे होते हैं और इंटरनेट पर उससे जुड़ी जानकारी देख चुके होते हैं, इसलिए हमें लगता है कि फोन हमारी बातें सुन रहा है. यानी हर बार Mic ही वजह नहीं होता, बल्कि डेटा ट्रैकिंग और ऑनलाइन बिहेवियर भी बड़ा कारण होता है.
यह भी पढ़ेंः सिर्फ बिजली बिल की ही बचत नहीं करते Solar Panels, एक साथ हैं इतने फायदे, जानकर रह जाएंगे हैरान
अपनी प्राइवेसी बचाने के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि आपका डेटा ज्यादा सुरक्षित रहे, तो फोन की Settings समय-समय पर जरूर चेक करें. जिन ऐप्स को Mic, Camera या Location की जरूरत नहीं है, उनकी Permission बंद कर दें. फोन में कौन-सी ऐप बैकग्राउंड में चल रही है, इस पर भी ध्यान दें. इसके अलावा मजबूत Password रखें और किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने से बचें. सच यह है कि आज के दौर में स्मार्टफोन के बिना जिंदगी आसान नहीं है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सावधानी भी बहुत जरूरी है. जितना हम अपने डेटा को समझेंगे, उतना ही खुद को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रख पाएंगे.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ बिजली बिल की ही बचत नहीं करते Solar Panels, एक साथ हैं इतने फायदे, जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Benefits: पिछले कुछ सालों से सोलर एनर्जी का यूज बढ़ा है. घरों से लेकर कमर्शियल इमारतों तक सोलर पैनल लगने लगे हैं. इन्हें इंस्टॉल करना आसान है और एक बार लगाने के बाद सालों-साल इसका यूज किया जा सकता है. इंस्टॉलेशन के बाद बेसिक मैंटनेंस के अलावा इस पर कोई खर्च नहीं आता और बिजली बिल की टेंशन भी नहीं रहती. यही कारण हैं कि लोग अब तेजी से सोलर एनर्जी को अपना रहे हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिजली बिल की टेंशन से फ्री करने के अलावा सोलर पैनल्स के क्या-क्या फायदे हैं.
एनर्जी को लेकर ग्रिड पर निर्भरता खत्म
हर साल बिजली की लागत बढ़ती जाती है और बिल के तौर पर हर महीने हजारों रुपये चुकाने पड़ते हैं. सोलर पैनल लगाकर इस खर्चे से बचा जा सकता है. सोलर पैनल अपनी लागत को कुछ ही महीनों में पूरा कर देते हैं. इसके अलावा अगर आप ऑफ-ग्रिड सिस्टम लगाते हैं तो ग्रिड पर एनर्जी को लेकर आपकी निर्भरता खत्म हो जाती है. सोलर बैटरी की मदद से आप एनर्जी को स्टोर कर रात के समय यूज कर सकते हैं.&amp;nbsp;
मरम्मत पर कोई खर्च नहीं
सोलर पैनल को इंस्टॉल करने की लागत थोड़ी ज्यादा है, जो सब्सिडी के कारण कम हो जाती है. एक बार इंस्टॉल करने के बाद मैंटेनेंस पर कोई खर्च नहीं करना पड़ता. घर की छत पर लगे पैनल को साल में एक-दो बार संभालने की जरूरत पड़ती है. इसके अलावा मैंटेनेंस का कोई झंझट नहीं रहता. सोलर पैनल आसानी से 20-25 साल तक चल जाते हैं.
कार्बन फुटप्रिंट घटाने में मिलेगी मदद
सोलर एनर्जी जनरेशन में किसी प्रकार का पॉल्यूशन नहीं होता. इससे न तो कोई पॉल्यूटिंग गैस रिलीज होती है और न ही किसी तरह का गंध जमीन में फेंका जाता है. इस तरह सोलर एनर्जी कार्बन एमिशन कम करने में मदद कर सकती है. ऐसे समय में जब पर्यावरण पर हर तरह से हमला हो रहा है, तब सोलर एनर्जी एक क्लीन एनर्जी के तौर पर हमारे बीच मौजूद है.
सरकारी सब्सिडी
सोलर पैनल और सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने के लिए सरकार सब्सिडी दे रही है. इससे सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने की लागत काफी कम हो जाती है. कई राज्यों की सरकारें कम ब्याज पर लोन की भी सुविधा दे रही है ताकि लोगों को सोलर पावर लगाने में दिक्कत का सामना न करना पड़े.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सिर्फ, बिजली, बिल, की, ही, बचत, नहीं, करते, Solar, Panels, एक, साथ, हैं, इतने, फायदे, जानकर, रह, जाएंगे, हैरान</media:keywords>
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        <title>अब WiFi नहीं, रोशनी से चलेगा इंटरनेट! चीन का 6G धमाका, 1.2KM दूर पलक झपकते पहुंचाया डेटा</title>
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        <description><![CDATA[ अब WiFi नहीं, रोशनी से चलेगा इंटरनेट! चीन का 6G धमाका, 1.2KM दूर पलक झपकते पहुंचाया डेटा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Cooler खरीदने से पहले जान लें ये 5 सीक्रेट बातें, वरना गर्मियों में हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Cooler Buying Tips: गर्मियों का मौसम आते ही ज्यादातर लोग राहत पाने के लिए नया कूलर खरीदने की सोचते हैं. बाजार में छोटे, बड़े, डेजर्ट, पर्सनल और टावर कूलर की इतनी वैरायटी मौजूद है कि सही चुनाव करना आसान नहीं होता. कई लोग सिर्फ डिजाइन या कम कीमत देखकर कूलर खरीद लेते हैं लेकिन बाद में तेज आवाज, ज्यादा बिजली बिल या कम कूलिंग जैसी समस्याओं से परेशान हो जाते हैं. अगर आप भी नया कूलर लेने का प्लान बना रहे हैं तो पहले ये 5 जरूरी बातें जरूर जान लें.
कमरे के हिसाब से चुनें सही कूलर
सबसे बड़ी गलती लोग यही करते हैं कि कमरे के साइज को नजरअंदाज कर देते हैं. छोटे कमरे के लिए बड़ा डेजर्ट कूलर लेना बेकार हो सकता है, वहीं बड़े हॉल में छोटा पर्सनल कूलर ठीक से ठंडक नहीं देगा. अगर आपका कमरा छोटा है तो पर्सनल कूलर बेहतर रहेगा जबकि बड़े कमरे या हॉल के लिए डेजर्ट कूलर ज्यादा असरदार होता है.
Cooling Pads की क्वालिटी जरूर देखें
कूलर की असली ताकत उसके Cooling Pads में होती है. कई सस्ते कूलर में खराब क्वालिटी के पैड लगाए जाते हैं जो जल्दी खराब हो जाते हैं और हवा भी सही से ठंडी नहीं करते. Honeycomb Pads वाले कूलर ज्यादा बेहतर माने जाते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक चलते हैं और अच्छी कूलिंग देते हैं.
पानी की टंकी जितनी बड़ी उतनी ज्यादा राहत
अगर आप बार-बार पानी भरने से बचना चाहते हैं तो बड़े Water Tank वाला कूलर चुनें. छोटे टैंक वाले कूलर में बार-बार पानी डालना पड़ता है, खासकर तेज गर्मी में. परिवार के इस्तेमाल के लिए कम से कम 40 से 60 लीटर की टंकी वाला कूलर ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है.
बिजली की खपत पर भी दें ध्यान
कई लोग सिर्फ कूलिंग देखकर कूलर खरीद लेते हैं लेकिन बाद में बिजली का बिल चौंका देता है. खरीदने से पहले उसकी Power Consumption जरूर चेक करें. आजकल बाजार में ऐसे कूलर भी मौजूद हैं जो कम बिजली में बेहतर कूलिंग देते हैं. इन्वर्टर सपोर्ट वाले मॉडल बिजली कटौती में भी काम आते हैं.
Air Throw और आवाज को नजरअंदाज न करें
कूलर की हवा कितनी दूर तक जाती है इसे Air Throw कहा जाता है. अगर कमरे में हवा सही तरीके से नहीं पहुंचेगी तो कूलिंग का मजा खराब हो जाएगा. इसके अलावा कुछ कूलर बहुत ज्यादा आवाज करते हैं जिससे रात में नींद खराब हो सकती है. इसलिए खरीदने से पहले उसकी Noise Level और Fan Speed जरूर जांच लें.
सिर्फ कीमत देखकर फैसला न करें
सस्ता कूलर शुरुआत में अच्छा लग सकता है लेकिन खराब मोटर, कमजोर बॉडी और कम कूलिंग बाद में परेशानी बढ़ा सकती है. हमेशा अच्छी ब्रांड, मजबूत बॉडी और जरूरी फीचर्स वाला कूलर चुनें. सही जानकारी के साथ खरीदा गया कूलर गर्मियों में लंबे समय तक राहत देता है और बेकार खर्च से भी बचाता है.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Password Security Tips : हैकर्स के लिए सबसे आसान होता है इन Password को तोड़ना, ऐसे बनाएं अपने डिवाइस और डेटा को स्ट्रॉग</title>
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        <description><![CDATA[ Password Security Tips : आज के डिजिटल दौर में हमारा लगभग हर काम ऑनलाइन हो गया है. बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया, ईमेल, शॉपिंग और ऑफिस का काम तक अब इंटरनेट के जरिए होता है. ऐसे में पासवर्ड ही हमारा सबसे बड़ा स्फटी फीचर बन गया है, लेकिन कई लोग आज भी आसान पासवर्ड जैसे 123456, password, abc123 या अपनी जन्मतिथि का इस्तेमाल करते हैं. यही छोटी गलती हैकर्स के लिए सबसे बड़ा मौका बन जाती है.
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि कमजोर पासवर्ड कुछ सेकेंड में ही क्रैक किए जा सकते हैं. अगर एक बार हैकर आपके किसी एक अकाउंट तक पहुंच गया, तो वह आपके बैंक अकाउंट, ईमेल, सोशल मीडिया और पर्सनल डेटा तक भी पहुंच सकता है. कई बार लोग एक ही पासवर्ड को कई अकाउंट्स में इस्तेमाल करते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है. ऐसे में जरूरी है कि आप मजबूत पासवर्ड बनाएं और अपनी डिजिटल सुरक्षा को गंभीरता से लें. तो आइए जानते हैं कि हैकर्स के लिए किन पासवर्ड को तोड़ना सबसे आसान होता है और अपने डिवाइस और डेटा को स्ट्रॉग कैसे बनाएं.&amp;nbsp;
हैकर्स के लिए किन पासवर्ड को तोड़ना सबसे आसान होता है?
1. हैकर्स सबसे पहले उन्हीं पासवर्ड्स को ट्राई करते हैं जो लोग सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. जैसे 123456, password, abc123, qwerty, 000000. ऐसे पासवर्ड कुछ सेकेंड में क्रैक हो जाते हैं. कई लोग अपने नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि या बच्चे के नाम को भी पासवर्ड बना लेते हैं. सोशल मीडिया पर मौजूद जानकारी से हैकर इन्हें आसानी से गेस कर लेते हैं.&amp;nbsp;
2. बहुत से लोग Gmail, Facebook, Instagram और बैंकिंग ऐप में एक ही पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं. यह आदत बेहद खतरनाक साबित हो सकती है. अगर किसी एक वेबसाइट का डेटा लीक हो जाए और आपका पासवर्ड हैकर के हाथ लग जाए, तो वह उसी पासवर्ड से आपके बाकी अकाउंट भी खोलने की कोशिश करेगा, इसे Credential Stuffing कहा जाता है. इसलिए हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
3. कम अक्षरों वाले पासवर्ड को हैक करना आसान होता है. साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार पासवर्ड कम से कम 12 से 16 अक्षरों का होना चाहिए.सिर्फ छोटे शब्द रखने की जगह इनमें अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल करें, जैसे बड़े अक्षर (A,B,C), छोटे अक्षर (a,b,c), नंबर (1,2,3), स्पेशल कैरेक्टर (@,#,$,&amp;amp;).
4.कई लोग सीधे शब्द जैसे finance, welcome या india पासवर्ड बना लेते हैं. हैकर्स के पास ऐसे लाखों शब्दों की लिस्ट होती है, जिन्हें ऑटोमैटिक टूल्स से ट्राई करते हैं. इसे Dictionary Attack कहा जाता है. इसलिए आसान शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
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अपने डिवाइस और डेटा को स्ट्रॉग कैसे बनाएं?
1. अब सिर्फ पासवर्ड पर रखना सुरक्षित नहीं माना जाता है. इसलिए जहां भी पॉसिबल हो, Two-Factor Authentication (2FA) ऑन करें.इसमें पासवर्ड डालने के बाद आपके मोबाइल पर OTP या कोड आता है. अगर किसी हैकर को आपका पासवर्ड मिल भी जाए, तब भी बिना OTP के वह अकाउंट में लॉगिन नहीं कर पाएगा. आज Gmail, Facebook, Instagram, WhatsApp और बैंकिंग ऐप्स में यह सुविधा मौजूद है.&amp;nbsp;
2. अलग-अलग अकाउंट्स के लिए अलग पासवर्ड याद रखना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में Password Manager काफी मददगार साबित होता है. यह आपके सभी पासवर्ड सुरक्षित तरीके से स्टोर करता है और मजबूत पासवर्ड भी खुद बना देता है.
3.अगर आपको लगता है कि आपका अकाउंट कभी हैक हुआ है या किसी वेबसाइट का डेटा लीक हुआ है, तो तुरंत पासवर्ड बदल दें. साथ ही पुराने और कमजोर पासवर्ड को समय-समय पर अपडेट करते रहना बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
4. पासवर्ड कम से कम 12-16 अक्षरों का रखें और हर अकाउंट के लिए अलग Password बनाएं.&amp;nbsp;
5. इसके अलावा नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर इस्तेमाल न करें.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>इस नंबर से आ रही इंटरनेशनल कॉल से रहें सावधान! सरकार ने जारी की बड़ी चेतावनी, एक गलती से खाली हो सकता है बैंक</title>
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        <description><![CDATA[ Cyber Fraud: भारत सरकार के दूरसंचार विभाग यानी Department of Telecommunications (DoT) ने स्मार्टफोन यूजर्स को एक नए तरह के साइबर फ्रॉड को लेकर अलर्ट किया है. विभाग ने कहा है कि अगर किसी कॉल पर इंटरनेशनल कॉल का दावा किया जाए लेकिन नंबर की शुरुआत +91 से हो रही हो तो ऐसे कॉल को तुरंत संदिग्ध मान लेना चाहिए. दरअसल, +91 भारत का कंट्री कोड है और असली इंटरनेशनल कॉल हमेशा उसी देश के कोड से आती है जहां से कॉल की जा रही होती है. ऐसे में +91 दिखाकर खुद को विदेशी कॉल बताना धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है.
फर्जी कॉल से लोगों को बनाया जा रहा निशाना
DoT के मुताबिक साइबर अपराधी अब Caller ID Spoofing जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस तकनीक की मदद से स्कैमर्स किसी भी नंबर को असली या भरोसेमंद दिखाने की कोशिश करते हैं ताकि लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाएं. ऐसे कॉल में ठग खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिसकर्मी, बैंक कर्मचारी या डिलीवरी एजेंट बताकर लोगों पर दबाव बनाते हैं. कई बार यूजर्स को डराया जाता है कि उनका सिम बंद होने वाला है, बैंक अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा या उनके नाम पर कोई गैरकानूनी पार्सल पकड़ा गया है.
बैंक डिटेल और OTP चुराने का खतरा
सरकारी एजेंसियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने पहले भी इस तरह की स्पूफ कॉल्स को बड़ा खतरा बताया है. इन कॉल्स का मकसद लोगों से बैंकिंग डिटेल, OTP, पासवर्ड और दूसरी निजी जानकारी हासिल करना होता है. कुछ मामलों में यूजर्स को फर्जी लिंक भेजे जाते हैं या नकली कस्टमर सपोर्ट सेवाओं तक पहुंचाया जाता है जिससे मोबाइल और बैंक अकाउंट दोनों खतरे में पड़ सकते हैं.
DoT ने दी ये अहम सलाह
दूरसंचार विभाग ने साफ कहा है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी या वित्तीय जानकारी शेयर न करें. अगर कोई कॉल संदिग्ध लगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं और उसकी शिकायत करें. विभाग ने लोगों से कहा है कि ऐसे फर्जी नंबरों और टेलीकॉम फ्रॉड की रिपोर्ट सरकार के Sanchar Saathi प्लेटफॉर्म पर करें. यह सरकारी सेवा यूजर्स को साइबर और टेलीकॉम सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराती है.
सोशल मीडिया पर भी जारी किया गया अलर्ट
DoT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि अगर +91 नंबर से कोई कॉल खुद को इंटरनेशनल बता रही है तो यह पहला रेड फ्लैग है. सरकार लगातार Scam Alert, Cyber Safety और International Fraud जैसे अभियानों के जरिए लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में जुटी हुई है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>अब तक के सबसे बड़े डिस्प्ले के साथ आएंगे iPhone 18 Pro और18 Pro Max, टूट सकता है यह रिकॉर्ड!</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 18 Pro and 18 Pro Max: ऐप्पल के अपकमिंग फ्लैगशिप मॉडल iPhone 18 Pro और 18 Pro Max का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है. इन दोनों ही मॉडल्स में बड़े बदलाव के संकेत पहले से ही मिल रहे थे. अब एक नई लीक ने लोगों की एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि अपकमिंग मॉडल्स का डिस्प्ले साइज मौजूदा iPhone 17 Pro और iPhone 17 Pro Max की तुलना में बड़ा होने वाला है. ये महज कयास हैं और ऐप्पल की तरफ से अभी तक ऑफिशियली कुछ नहीं कहा गया है.&amp;nbsp;
iPhone 18 Pro और 18 Pro Max का डिस्प्ले साइज बढ़ेगा
Tipster Majin ने अपकमिंग मॉडल के साइज को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने iPhone 18 Pro और 18 Pro Max की प्रोटेक्टिव फिल्म की फोटो शेयर की है, जिसके बाद साइज को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं. माना जा रहा है कि iPhone 18 Pro में मौजूदा मॉडल की 6.3 इंच की स्क्रीन की जगह 6.4 इंच और मैक्स मॉडल में 6.9 इंच की जगह लगभग 7 इंच की स्क्रीन मिल सकती है. अगर ऐसा होता है तो पहली बार कोई फोन लगभग 7 इंच के डिस्प्ले के साथ लॉन्च होगा. अभी तक कंपनियां 6.9 इंच तक ही अटकी हैं. इसके अलावा यह ऐप्पल के हिसाब से भी डिजाइन लैंग्वेज में बड़ा बदलाव होगा. कंपनी पिछले कई सालों से फ्रंट डिजाइन को सेम ही रखे हुए है.
डायनामिक आईलैंड होगा छोटा
अपकमिंग मॉडल में एक और बड़ा बदलाव डायनामिक आईलैंड में देखने को मिलेगा. इस बार कंपनी इसका साइज छोटा करने जा रही है. 18 प्रो मॉडल्स में यह 17 प्रो मॉडल्स की तुलना में 35 प्रतिशत छोटा होगा. इसके साथ कंपनी डिस्प्ले के लिए नया LTPO+ डिस्प्ले पैनल यूज कर सकती है, जो ज्यादा पावर एफिशिएंट होगा.
बैटरी कैपेसिटी भी बढ़ेगी- ऐसे कयास हैं कि दोनों प्रो मॉडल्स में 5,100mAh-5,200mAh की कैपेसिटी वाला बैटरी पैक दिया जा सकता है. प्रो मैक्स में ज्यादा कैपेसिटी वाला बैटरी पैक लगा होगा, जिस कारण इसकी थिकनेस भी 0.5mm ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
एक्सपेक्टेड प्राइस और लॉन्चिंग
ऐप्पल हर साल सितंबर में नए आईफोन लॉन्च करती है. इसलिए माना जा रहा है कि सितंबर के दूसरे हफ्ते में iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया जाएगा और एक-दो हफ्ते बाद इनकी बिक्री शुरू हो जाएगी. एक्सपेक्टेड प्राइस की बात करें तो ऐसी उम्मीद है कि प्रो मॉडल्स की कीमतों में इजाफा नहीं होगा और इसे 17 प्रो मॉडल्स के दामों पर ही लॉन्च किया जा सकता है. इसका मतलब है कि iPhone 18 Pro मॉडल्स की शुरुआती कीमत 1,34,900 रुपये रह सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:19 +0530</pubDate>
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        <title>Meta का बड़ा दांव! Facebook में आया Reddit जैसा नया फीचर, अब हर टॉपिक पर होगी खुलकर चर्चा</title>
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        <description><![CDATA[ Meta New Feature: सोशल मीडिया दिग्गज Meta लगातार नए ऐप्स और फीचर्स पर काम कर रहा है. हाल ही में Snapchat जैसे फीचर वाला Instants पेश करने के बाद अब कंपनी ने अमेरिका में एक नया ऐप लॉन्च किया है जिसका नाम Forum रखा गया है. यह ऐप काफी हद तक Reddit की तरह काम करता है और खासतौर पर Facebook Groups और कम्युनिटी डिस्कशन को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
Forum का मकसद लोगों को केवल फोटो-वीडियो स्क्रॉल कराने के बजाय किसी खास विषय पर बातचीत, सलाह और सवाल-जवाब का प्लेटफॉर्म देना है. इसमें AI आधारित जवाब देने की सुविधा भी शामिल की गई है जिससे यूजर्स को बेहतर अनुभव मिल सके.
Facebook अकाउंट से होगा लॉगिन
Meta के इस नए ऐप में यूजर्स अपने Facebook अकाउंट के जरिए लॉगिन कर सकते हैं. लॉगिन करने के बाद उन्हें Facebook Groups की पोस्ट Reddit जैसी फीड में दिखाई देती हैं. यहां लोग अलग-अलग टॉपिक पर चल रही चर्चाओं को पढ़ सकते हैं, नए ग्रुप्स खोज सकते हैं और सीधे कम्युनिटी में पोस्ट भी कर सकते हैं.
कंपनी का कहना है कि Forum को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि यूजर्स का ध्यान वायरल कंटेंट से हटकर असली बातचीत और उपयोगी जानकारी पर जाए.
Nickname से पोस्ट करने की सुविधा
Forum की एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें यूजर्स Nickname यानी अलग नाम से पोस्ट कर सकते हैं. हालांकि उनकी गतिविधियां Facebook अकाउंट और संबंधित Groups से जुड़ी रहेंगी. ऐप में किया गया कोई भी पोस्ट उसी Facebook Group में भी दिखाई देगा जिससे कम्युनिटी कनेक्शन बना रहेगा. इसके अलावा इसमें एक हल्का प्रोफाइल सेक्शन भी दिया गया है जहां यूजर्स की Group एक्टिविटी और पोस्ट्स दिखाई देंगी.
पहले भी कर चुका है ऐसा प्रयोग
यह पहली बार नहीं है जब Meta ने Groups के लिए अलग ऐप लॉन्च किया हो. साल 2014 में Facebook ने एक स्टैंडअलोन Groups ऐप लॉन्च किया था लेकिन बाद में 2017 में उसे बंद कर दिया गया. अब कंपनी नए अंदाज और AI फीचर्स के साथ फिर से इस कॉन्सेप्ट को वापस ला रही है.
AI देगा सवालों के जवाब
Forum में सबसे बड़ा आकर्षण इसका AI-powered Ask फीचर माना जा रहा है. यूजर कोई भी सवाल टाइप करेगा और ऐप अलग-अलग Facebook Groups में मौजूद चर्चाओं के आधार पर जवाब तैयार करेगा.
AI द्वारा दिए गए जवाबों के साथ उन पोस्ट्स और चर्चाओं के लिंक भी दिखाई देंगे जिनसे जानकारी ली गई होगी. इससे यूजर चाहें तो पूरी बातचीत भी पढ़ सकते हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, Meta Group एडमिन्स की मदद के लिए भी AI का इस्तेमाल कर रहा है ताकि मॉडरेशन और कम्युनिटी मैनेजमेंट आसान बनाया जा सके.
AI दौर में Meta की नई रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक Mark Zuckerberg का मानना है कि AI की मदद से कंपनी पहले की तुलना में तेजी से नए ऐप्स तैयार कर सकती है. यही वजह है कि Meta लगातार नए एक्सपेरिमेंट कर रहा है. कुछ समय पहले कंपनी ने Threads लॉन्च किया था, जिसे कई लोग X का विकल्प मानते हैं. वहीं &amp;lsquo;Instants&amp;rsquo; फीचर में Snapchat और BeReal जैसी झलक देखने को मिली थी. अब Forum के जरिए कंपनी Reddit जैसी कम्युनिटी-आधारित बातचीत की दुनिया में भी कदम रख रही है.
फिलहाल सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध
अभी Forum केवल अमेरिका में iPhone यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है. Meta ने फिलहाल इसके ग्लोबल लॉन्च को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. हालांकि कंपनी की रणनीति को देखकर साफ है कि आने वाले समय में AI और अलग-अलग स्टैंडअलोन ऐप्स पर उसका फोकस और बढ़ सकता है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Meta, का, बड़ा, दांव, Facebook, में, आया, Reddit, जैसा, नया, फीचर, अब, हर, टॉपिक, पर, होगी, खुलकर, चर्चा</media:keywords>
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        <title>AI से दोस्ती कर सकती है अकेला, दिमाग पर भी पड़ता है यह बुरा असर</title>
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        <description><![CDATA[ AI Tools Risk: एआई टूल्स धीरे-धीरे हमारे जीवन में अहम जगह बनाते जा रहे हैं. पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल तक हर मामले पर लोग अब एआई टूल्स की मदद ले रहे हैं. लगातार बढ़ते यूज के कारण कई लोग इन टूल्स से इमोशनली अटैच हो जाते हैं. एक मामले में तो एक महिला ने एआई से बने वर्चुअल पार्टनर से शादी भी रचा ली थी. अब एक रिसर्च में सामने आया है कि एआई टूल्स के कई छिपे हुए साइकोलॉजिकल और सोशल रिस्क हैं. इन टूल्स पर ज्यादा निर्भरता से अकेले होने तक का खतरा है. इसलिए इन्हें संभलकर यूज करना जरूरी है.
असल रिश्तों पर असर डाल सकती है एआई से दोस्ती
IIM लखनऊ की एक स्टडी में सामने आया है कि एआई कंपेनियन से हद से ज्यादा इमोशनली अटैच होना असल दुनिया के रिश्तों और मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है. रिसर्चर का कहना है कि एआई टूल्स आने के बाद लोगों के संवाद और इमोशनल सपोर्ट मांगने का तरीका बदल गया है. इन टूल्स को कंफर्ट, कंपैनियनशिप और इमोशनल इंगेजमेंट के टूल के तौर मार्केट किया जाता है, लेकिन यूजर के बिहेवियर और साइकोलॉजी पर इसका काफी असर पड़ सकता है. रिसर्चर ने बताया कि कई लोग इमोशनल कंफर्ट के लिए लोग अब इंसानों की जगह एआई सिस्टम यूज कर रहे हैं. इससे असल लाइफ में लोगों से बातचीत छूट जाती है. रिसर्चर ने बताया कि कई यूजर इमोशनल रेगुलेशन और मेंटल हेल्थ सपोर्ट के लिए एआई टूल्स पर डिपेंड होते जा रहे हैं. अगर ऐसा ज्यादा समय तक होता है तो यह खतरनाक हो सकता है.
एआई टूल्स को 10 मिनट यूज करना भी खतरनाक
कुछ महीने पहले Carnegie Mellon University, MIT, University of Oxford और UCLA की एक और रिसर्च में सामने आया था कि कुछ देर तक ही एआई चैटबॉट्स को यूज करना लोगों को मानसिक रूप से आलसी बना सकता है. रिसर्चर ने बताया कि एआई की थोड़ी-सी मदद भी इंसान के सोचने की क्षमता को कम कर देती है. इस कारण वो प्रॉब्लम को खुद से नहीं सुलझा पाते. अगर चीजें जरा भी मुश्किल हो जाए तो वो हाथ खड़े कर देते हैं. एक बार लोगों को एआई से जवाब मिलने की आदत लग जाए तो वो खुद से किसी मुश्किल का हल निकालने का संघर्ष करने के लिए तैयार नहीं है. एआई की मदद के बदले में दिमाग बड़ी कीमत चुका रहा है. जो लोग एआई का यूज कर रहे है, वो इस टेक्नोलॉजी को कभी यूज न कर पाने वाले लोगों की तुलना में जल्दी गिव अप कर रहे हैं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>YouTube पर बर्बाद न करें टाइम, लंबे वीडियो देखकर जेमिनी बता देगा सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Ask YouTube: अगर आपके पास यूट्यूब पर घंटों लंबे वीडियो देखने का समय नहीं है, लेकिन आप कुछ जरूरी भी मिस नहीं करना चाहते तो चिंता करने की जरूरत नहीं है. आप अपना काम करते रह सकते हैं और गूगल का एआई असिस्टेंट Gemini आपके लिए वीडियो देखकर सब बता देगा. यह फीचर न सिर्फ आपका टाइम बचाएगा बल्कि दूसरे कई कामों में आपकी मदद भी कर सकता है. आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं कि जेमिनी आपके लिए वीडियो कैसे देखेगा और इस फीचर के और क्या-क्या फायदे हैं.
जेमिनी आपके लिए वीडियो कैसे देखेगा?
दो तरीकों से जेमिनी को वीडियो देखने का काम सौंपा जा सकता है. पहला तरीका है कि यूट्यूब वीडियो के लिंक को जेमिनी को भेजकर उससे जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं. दूसरा तरीके में जेमिनी को यूट्यूब पर ही यूज किया जा सकता है. यूट्यूब ओपन करने पर अब लाइक और शेयर के ऑप्शन के साथ Ask का भी ऑप्शन मिलता है. इस पर क्लिक करते ही यूट्यूब में इंटीग्रेट किया गया जेमिनी ओपन हो जाता है, जिस पर आप प्रॉम्प्ट देकर कुछ भी पूछ सकते हैं. इसके लिए आपको गूगल अकाउंट में साइन-इन करना होगा. बिना साइन-इन किए आस्क का ऑप्शन नहीं दिखेगा.&amp;nbsp;
क्या-क्या काम कर सकता है यह फीचर?
लंबे वीडियो की बना देगा समरी- अगर आप जेमिनी से किसी लंबे वीडियो की समरी बनाने की कहेंगे तो यह पलक झपकते ही टास्क पूरा कर देगा. इस समरी में पूरे वीडियो की टाइमस्टैंप भी मिलेगी. यानी यह बता देगा कि वीडियो में कितने मिनट पर किस टॉपिक पर बात चल रही है. आप वीडियो को आधा देखने के बाद बाकी के कंटेट की भी समरी बना सकते हैं.
सारे सवालों के देगा जवाब- आप किसी वीडियो की समरी नहीं बनाना चाहते तो जेमिनी आपके सवालों के जवाब भी दे सकता है. आप किसी भी वीडियो के बारे में जेमिनी से अपने सवाल पूछ सकता है और यह टाइम स्टैंप के साथ उसका जवाब देगा. इस तरह भी आप लंबा वीडियो देखने से बच जाएंगे.
जरूरी हिस्से के लिए नहीं देखना पड़ेगा पूरा वीडियो- कई वीडियो ऐसे होते हैं, जिसके कुछ ही हिस्से में यूजर की दिलचस्पी होती है. लेकिन इस हिस्से पर पहुंचने के लिए कई बार पूरा वीडियो देखना पड़ जाता है. जेमिनी यह झंझट भी दूर कर देता है. आप जेमिनी से यह पूछ सकते हैं कि आपकी पसंद के टॉपिक पर किस टाइम बात हो रही है. जेमिनी आपको सीधा वहीं ले जाएगा.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:21 +0530</pubDate>
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        <title>Vivo T5x 5G या OnePlus Nord CE 6 Lite! 25 हजार की रेंज में कौन देता है बेहतरीन परफॉर्मेंस, खरीदने से पहले समझें कंपैरिजन</title>
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        <description><![CDATA[ Vivo T5X 5G Vs OnePlus Nord CE6 Lite: भारत के बजट 5G स्मार्टफोन बाजार में इस समय दो फोन सबसे ज्यादा चर्चा में हैं Vivo T5x 5G और OnePlus Nord CE 6 Lite. दोनों ही डिवाइस उन यूजर्स को ध्यान में रखकर लॉन्च किए गए हैं जो कम कीमत में दमदार बैटरी, अच्छा कैमरा और स्मूद परफॉर्मेंस चाहते हैं. OnePlus का यह फोन 6GB + 128GB वेरिएंट में लगभग 23,499 रुपये में आता है जबकि Vivo T5x 5G की कीमत करीब 22,999 रुपये रखी गई है. ऐसे में सवाल यही है कि 2026 में किस फोन पर पैसा लगाना ज्यादा समझदारी होगी.
डिस्प्ले और डिजाइन में कौन आगे?
दोनों स्मार्टफोन बड़े FHD+ LCD डिस्प्ले के साथ आते हैं. OnePlus Nord CE 6 Lite में 6.72 इंच की स्क्रीन दी गई है जिसमें 144Hz रिफ्रेश रेट और 1,000 निट्स ब्राइटनेस मिलती है. वहीं Vivo T5x 5G में 6.76 इंच का थोड़ा बड़ा डिस्प्ले मौजूद है जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,300 निट्स की पीक ब्राइटनेस दी गई है.
अगर आप ज्यादा स्मूद स्क्रॉलिंग और गेमिंग पसंद करते हैं तो OnePlus का 144Hz रिफ्रेश रेट आकर्षित कर सकता है. लेकिन तेज धूप में बेहतर विजिबिलिटी के मामले में Vivo का फोन ज्यादा मजबूत दिखाई देता है. डिजाइन की बात करें तो दोनों फोन फ्लैट एज और मॉडर्न लुक के साथ आते हैं इसलिए यहां पसंद काफी हद तक कलर और ब्रांड पर निर्भर करेगी.
कैमरा सेटअप कितना दमदार?
फोटोग्राफी के मामले में दोनों फोन लगभग बराबरी पर दिखाई देते हैं. दोनों में 50MP का प्राइमरी रियर कैमरा और 32MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है. सोशल मीडिया फोटो, वीडियो कॉलिंग, रील्स और डेली फोटोग्राफी के लिए दोनों स्मार्टफोन अच्छा अनुभव देने का दावा करते हैं.
हालांकि असली फर्क मेगापिक्सल से ज्यादा इमेज प्रोसेसिंग और कलर ट्यूनिंग में देखने को मिल सकता है. कुछ यूजर्स को Vivo के कैमरा कलर्स पसंद आ सकते हैं जबकि कुछ लोग OnePlus की नैचुरल प्रोसेसिंग को बेहतर मान सकते हैं.
परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस
OnePlus Nord CE 6 Lite में MediaTek Dimensity 7400 Apex प्रोसेसर मिलता है जबकि Vivo T5x 5G में Dimensity 7400 Turbo चिप दी गई है. दोनों प्रोसेसर एक ही प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं इसलिए रोजमर्रा के इस्तेमाल, वीडियो स्ट्रीमिंग और कैजुअल गेमिंग में बहुत बड़ा अंतर महसूस नहीं होगा.
सॉफ्टवेयर की बात करें तो दोनों फोन Android 16 पर चलते हैं. OnePlus में OxygenOS 16 मिलता है जबकि Vivo में OriginOS 6 दिया गया है. जो यूजर क्लीन और हल्का इंटरफेस पसंद करते हैं उन्हें OxygenOS ज्यादा पसंद आ सकता है. वहीं OriginOS कई कस्टम फीचर्स के साथ आता है.
बैटरी में किसका दबदबा?
बैटरी के मामले में Vivo थोड़ा आगे निकलता नजर आता है. Vivo T5x 5G में 7,200mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जबकि OnePlus Nord CE 6 Lite में 7,000mAh बैटरी मिलती है. Vivo फोन 44W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है और सामान्य इस्तेमाल में लगभग दो दिन तक आराम से चल सकता है. अगर आप ज्यादा ट्रैवल करते हैं या बार-बार चार्जिंग से बचना चाहते हैं तो Vivo T5x 5G ज्यादा बेहतर विकल्प बन सकता है.
मजबूती और वजन में फर्क
Vivo T5x 5G का वजन 220 ग्राम है और इसमें IP68 रेटिंग दी गई है जिससे यह पानी और धूल से बेहतर सुरक्षा देता है. दूसरी तरफ OnePlus Nord CE 6 Lite हल्का है और इसका वजन 208 ग्राम रखा गया है लेकिन इसमें IP64 रेटिंग मिलती है.
यानि जो लोग ज्यादा मजबूत और टिकाऊ फोन चाहते हैं उनके लिए Vivo बेहतर हो सकता है. वहीं हल्का और हाथ में आरामदायक फोन पसंद करने वाले यूजर्स OnePlus की तरफ जा सकते हैं.
आखिर किसे खरीदना रहेगा सही?
अगर आपकी प्राथमिकता बड़ी बैटरी, ज्यादा मजबूत बॉडी और बेहतर आउटडोर ब्राइटनेस है तो Vivo T5x 5G ज्यादा वैल्यू देता है. लेकिन अगर आप हल्का फोन, ज्यादा स्मूद डिस्प्ले और क्लीन सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस चाहते हैं तो OnePlus Nord CE 6 Lite भी शानदार विकल्प साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google Search में AI से हो गए परेशान? कंपनी नहीं दे रही बंद करने का ऑप्शन, लेकिन ये सीक्रेट ट्रिक्स अभी भी करेंगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ Google AI Search: पिछले कुछ सालों में google.com ने अपने सर्च इंजन में तेजी से AI फीचर्स जोड़ने शुरू कर दिए हैं. पहले AI Overviews आए, फिर AI Mode और अब कंपनी एक नया कस्टमाइज्ड सर्च बॉक्स भी लेकर आई है जिसे वह पिछले दो दशकों में Search का सबसे बड़ा बदलाव बता रही है. लेकिन हर यूजर को यह AI अनुभव पसंद आए ऐसा जरूरी नहीं है. कई लोग आज भी पुराने और सिंपल सर्च रिजल्ट्स पसंद करते हैं जहां सीधे वेबसाइट लिंक दिखाई दें और बीच में AI के जवाब न आएं.
समस्या यह है कि Google फिलहाल Search में AI फीचर्स को पूरी तरह बंद करने का कोई आधिकारिक विकल्प नहीं देता. कंपनी AI Overviews को Search का मुख्य हिस्सा मानती है. हालांकि कुछ ऐसे तरीके जरूर मौजूद हैं जिनकी मदद से AI रिजल्ट्स को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
सर्च के आखिर में जोड़ें -AI
अगर आप Google Search में AI Overview कम देखना चाहते हैं तो सबसे आसान तरीका है अपनी सर्च क्वेरी के आखिर में -AI जोड़ना. मान लीजिए आप सर्च करते हैं best gaming laptop 2026 -AI या how to bake pizza -AI तो कई बार Google AI आधारित जवाब दिखाने के बजाय नॉर्मल वेब रिजल्ट्स ज्यादा दिखाता है.
असल में Google लंबे समय से Search Operators सपोर्ट करता है जिनकी मदद से यूजर्स ज्यादा सटीक तरीके से सर्च कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर site: किसी खास वेबसाइट के रिजल्ट दिखाता है जबकि filetype: किसी विशेष फाइल फॉर्मेट जैसे PDF या Excel खोजने में मदद करता है.
इसी तरह -AI भी Google को संकेत देता है कि AI से जुड़े रिजल्ट्स को कम प्राथमिकता दी जाए. हालांकि यह तरीका हर बार पूरी तरह काम नहीं करता लेकिन AI Overviews की संख्या काफी कम हो सकती है.
Web Filter ऑन करके पाएं पुराना Search अनुभव
Google में एक और फीचर मौजूद है जिसे Web Filter कहा जाता है. इसे ऑन करने के बाद AI Overviews, Shopping Widgets, Knowledge Panels और कई AI आधारित एलिमेंट्स हट जाते हैं और आपको पुराने स्टाइल वाला क्लासिक सर्च पेज दिखाई देता है.
इसे इस्तेमाल करना भी बेहद आसान है. सबसे पहले सामान्य तरीके से Google Search करें. इसके बाद Search Bar के नीचे जहां Images, Videos और News जैसे विकल्प दिखाई देते हैं, वहां More पर क्लिक करें और फिर Web चुन लें. इसके बाद आपको केवल वेबसाइट लिंक वाले सिंपल सर्च रिजल्ट्स दिखने लगेंगे जिससे Search अनुभव काफी साफ और तेज महसूस होता है.
दूसरे Search Engine का इस्तेमाल भी बन सकता है समाधान
अगर आप Google के AI फीचर्स से पूरी तरह दूरी बनाना चाहते हैं तो किसी दूसरे Search Engine पर स्विच करना भी अच्छा विकल्प हो सकता है. प्राइवेसी फोकस्ड सर्च इंजन duckduckgo.com⁠� यूजर्स को AI फीचर्स बंद करने का विकल्प देता है. इसमें Search Assist नाम का फीचर मौजूद है लेकिन इसे एक सिंपल टॉगल से ऑफ किया जा सकता है.
वहीं search.brave.com⁠ भी Google जैसा अनुभव देने की कोशिश करता है और इसका अपना अलग वेब इंडेक्स है. Brave में Answer with AI फीचर दिया गया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे Search Settings में जाकर आसानी से बंद किया जा सकता है.
क्या भविष्य में AI से बचना मुश्किल होगा?
टेक कंपनियां तेजी से AI आधारित Search की ओर बढ़ रही हैं और आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है. ऐसे में पूरी तरह AI-फ्री Search मिलना मुश्किल जरूर हो सकता है, लेकिन फिलहाल ऊपर बताए गए तरीके इस्तेमाल करके आप काफी हद तक पुराने और क्लीन Search अनुभव का मजा ले सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google Maps Hidden Features: बहुत कम लोग जानते हैं Google Maps के ये Hidden Features, मोबाइल में ऐसे करें सेटिंग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/google-maps-hidden-features-बहुत-कम-लोग-जानते-हैं-google-maps-के-ये-hidden-features-मोबाइल-में-ऐसे-करें-सेटिंग</link>
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        <description><![CDATA[ Google Maps Hidden Features: आज के समय में गूगल मैप्स सिर्फ रास्ता बताने वाला ऐप नहीं रह गया है. ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल एक जगह से दूसरी जगह पर जाने के लिए करते हैं, लेकिन इसमें कई ऐसे फीचर्स भी मौजूद हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है. यह फीचर्स न सिर्फ सफर को आसान बनाते हैं, बल्कि रोजमर्रा के कई कामों में भी मदद करते हैं.
गूगल मैप्स में ऐसे कई स्मार्ट टूल्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यूजर्स दूरी माप सकते हैं, पार्किंग लोकेशन सेव कर सकते हैं, बिना इंटरनेट के रास्ता देख सकते हैं और यहां तक की आसपास के होटल, रेस्टोरेंट और चार्जिंग स्टेशन तक भी तक की जानकारी भी पा सकते हैं. इसके अलावा लाइव ट्रैफिक अपडेट और वॉइस नेविगेशन जैसे फीचर्स ड्राइविंग को ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाते हैं.
मेजरिंग डिस्टेंस
गूगल मैप्स की मदद से किसी भी दो स्थानों के बीच की दूरी आसानी से मापी जा सकती है. इसके लिए मैप पर उस जगह को सेलेक्ट करना है, जहां से दूरी मापनी है. इसके बाद मेजरिंग डिस्टेंस ऑप्शन पर क्लिक करके दूसरा बिंदु सेट किया जा सकता है. दोनों बिंदु सेट होते ही मैप किलोमीटर में दूरी दिखा देता है. इस फिचर का इस्तेमाल कई लोग ट्रैकिंग यात्रा प्लानिंग और जमीन की दूरी समझने के लिए करते हैं.&amp;nbsp;
पार्किंग लोकेशन&amp;nbsp;
भीड़भाड़ वाले इलाकों या बड़े मॉल में गाड़ी पार्क करने के बाद अक्सर लोग उसकी लोकेशन भूल जाते हैं. गूगल मैप्स में सेव पार्किंग फीचर इस समस्या को आसान बना देता है. गाड़ी पार्क करने के बाद मैप में दिख रहे ब्लू डॉट पर टाइप करके सेव पार्किंग ऑप्शन चुनना जा सकता है. इसके बाद लौटते समय वहीं लोकेशन मैप पर दिखाई देती है और आसानी से वहां तक पहुंचा जा सकता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;पार्किंग स्पॉट चेक करना&amp;nbsp;
कई बार लोग किसी जगह पहुंचने के बाद पार्किंग की समस्या में फंस जाते हैं. गूगल मैप्स में पार्किंग की जानकारी देखने का फीचर भी मिलता है. इसके लिए पहले लोकेशन सर्च करनी होती है. इसके बाद मैप पार्किंग उपलब्धता से जुड़ी जानकारी दिखा देता है. इससे पहले ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां गाड़ी पार्क करने की सुविधा मौजूद है या नहीं.&amp;nbsp;
नेवीगेशन फिचर
गूगल मैप्स का ऑफलाइन नेविगेशन फीचर भी काफी काम का माना जाता है. इसकी मदद से यूजर्स बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी रास्ता देख सकते हैं. इसके लिए पहले से किसी इलाके का मैप डाउनलोड करना होता है. एक बार मैप डाउनलोड हो जाने के बाद बिना नेटवर्क वाले इलाके में भी रास्ता आसानी से देखा जा सकता है.&amp;nbsp;
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होटल, रेस्टोरेंट और मेन्यू की जानकारी&amp;nbsp;
अगर आप किसी नए इलाके में है और होटल, रेस्टोरेंट, मेडिकल स्टोर या एटीएम ढूंढना चाहते हैं तो गूगल मैप्स इसमें भी आपकी मदद कर सकता है. यूजर्स किसी रेस्टोरेंट की रेटिंग, फोटो, रिव्यू और कई जगह पर मेन्यू कार्ड तक देख सकते हैं. कई लोग खाना ऑर्डर करने से पहले रेट लिस्ट और डिलीवरी टाइम चेक करने के लिए भी गूगल मैप्स का इस्तेमाल करते हैं.&amp;nbsp;
ईवी चार्जिंग स्टेशन सर्च करना&amp;nbsp;
इलेक्ट्रिक व्हीकल इस्तेमाल करने के लिए गूगल मैप्स में चार्जिंग स्टेशन सर्च करने की सुविधा दी गई है. मैप पर ईवी चार्जिंग स्टेशन नियर मी या चार्जर टाइप सर्च करने पर आसपास मौजूद चार्जिंग पॉइंट की जानकारी दिखाई देती है. इससे सफर के दौरान चार्जिंग स्टेशन ढूंढना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;
स्ट्रीट व्यू टाइम ट्रैवल&amp;nbsp;
गूगल के एक फीचर में स्ट्रीट व्यू टाइम ट्रैवल भी शामिल है. इसमें आप पुराने समय को लेकर यह देख सकते हैं कि पुराने टाइम में कोई लोकेशन कैसी दिखती थी, हालांकि यह कुछ ही जगह के लिए मिलता है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WiFi Slow होने की असली वजह आई सामने! कहीं पड़ोसी तो चोरी&amp;छिपे नहीं चला रहे आपका इंटरनेट? तुरंत बदलें राउटर की ये सीक्रेट सेटिंग्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/wifi-slow-होने-की-असली-वजह-आई-सामने-कहीं-पड़ोसी-तो-चोरी-छिपे-नहीं-चला-रहे-आपका-इंटरनेट-तुरंत-बदलें-राउटर-की-ये-सीक्रेट-सेटिंग्स</link>
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        <description><![CDATA[ Wi-Fi Internet Speed: आज के समय में घर का WiFi सिर्फ इंटरनेट नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है. ऑनलाइन क्लास, ऑफिस मीटिंग, OTT स्ट्रीमिंग और गेमिंग जैसी चीजें पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि महंगा प्लान लेने के बावजूद WiFi अचानक स्लो चलने लगता है. वीडियो बफर होने लगती है, कॉल कटने लगती है और मोबाइल में इंटरनेट रेंगने लगता है. ऐसे में ज्यादातर लोग नेटवर्क कंपनी को दोष देते हैं जबकि असली वजह कुछ और भी हो सकती है.
कहीं कोई चोरी-छिपे तो नहीं इस्तेमाल कर रहा आपका WiFi?
कई बार पड़ोसी या आसपास मौजूद लोग बिना बताए आपके WiFi से कनेक्ट हो जाते हैं. अगर पासवर्ड कमजोर हो या पहले कभी किसी को शेयर किया गया हो तो दूसरे लोग आसानी से इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे आपके WiFi की स्पीड कम हो जाती है और डेटा भी तेजी से खत्म होने लगता है.
अगर आपको शक है कि कोई दूसरा व्यक्ति आपका इंटरनेट इस्तेमाल कर रहा है तो सबसे पहले राउटर की सेटिंग में जाकर Connected Devices की लिस्ट चेक करें. यहां उन सभी डिवाइस के नाम दिखाई देते हैं जो आपके WiFi से जुड़े हुए हैं. अगर कोई अनजान डिवाइस दिखे तो समझ जाइए कि आपका नेटवर्क सुरक्षित नहीं है.
तुरंत बदलें WiFi का पासवर्ड
WiFi सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका मजबूत पासवर्ड रखना है. बहुत से लोग आज भी अपना मोबाइल नंबर, नाम या 12345678 जैसे आसान पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं जिन्हें हैक करना बेहद आसान होता है.
पासवर्ड बनाते समय बड़े अक्षर, छोटे अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर का इस्तेमाल करें. इससे कोई भी व्यक्ति आसानी से आपके नेटवर्क में घुस नहीं पाएगा. पासवर्ड बदलने के बाद सभी पुराने डिवाइस अपने आप डिस्कनेक्ट हो जाते हैं.
राउटर की ये सेटिंग जरूर करें ऑन
अधिकतर लोग राउटर लगवाने के बाद उसकी सेटिंग्स कभी नहीं बदलते. यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है. राउटर में WPA2 या WPA3 सिक्योरिटी मोड जरूर ऑन रखें. यह आपके नेटवर्क को अनऑथराइज्ड एक्सेस से बचाने में मदद करता है. इसके अलावा WPS फीचर को बंद कर देना चाहिए. यह फीचर जल्दी कनेक्शन के लिए होता है लेकिन साइबर एक्सपर्ट्स इसे सिक्योरिटी के लिहाज से सुरक्षित नहीं मानते.
WiFi स्लो होने की दूसरी वजहें भी जान लें
सिर्फ चोरी ही नहीं, कई दूसरी वजहों से भी WiFi धीमा हो सकता है. अगर राउटर घर के किसी कोने में रखा है या उसके आसपास दीवारें ज्यादा हैं तो सिग्नल कमजोर पड़ सकते हैं. माइक्रोवेव, ब्लूटूथ डिवाइस और पुराने राउटर भी इंटरनेट स्पीड पर असर डालते हैं.
बेहतर स्पीड के लिए राउटर को घर के बीचों-बीच और खुली जगह पर रखें. साथ ही समय-समय पर राउटर को रीस्टार्ट और अपडेट करते रहें. इससे नेटवर्क की परफॉर्मेंस बेहतर बनी रहती है.
छोटी सी सावधानी बचा सकती है बड़ा नुकसान
आज के डिजिटल दौर में WiFi सिक्योरिटी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. अगर कोई अनजान व्यक्ति आपके नेटवर्क का इस्तेमाल करता है तो सिर्फ स्पीड ही नहीं, आपकी प्राइवेसी भी खतरे में पड़ सकती है. इसलिए समय रहते राउटर की सेटिंग्स चेक करें और अपने इंटरनेट को पूरी तरह सुरक्षित बनाएं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>WiFi, Slow, होने, की, असली, वजह, आई, सामने, कहीं, पड़ोसी, तो, चोरी-छिपे, नहीं, चला, रहे, आपका, इंटरनेट, तुरंत, बदलें, राउटर, की, ये, सीक्रेट, सेटिंग्स</media:keywords>
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        <title>सावधान! AI की एंट्री से भारत की लाखों नौकरियां खतरे में, सबसे ज्यादा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर</title>
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        <description><![CDATA[ सावधान! AI की एंट्री से भारत की लाखों नौकरियां खतरे में, सबसे ज्यादा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Dark Vs Light Mode: आंखों के लिए कौन&amp;सा सही? यह बात जान ली तो सब पता चल जाएगा</title>
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        <description><![CDATA[ Dark Vs Light Mode: घर हो या ऑफिस, आजकल लोग ज्यादातर समय स्क्रीन के आगे ही रहते हैं. स्क्रीन देखने का वैसे कोई नुकसान नहीं है, लेकिन अगर घंटों तक इसके सामने बैठे रहने से आंखों में थकान और जलन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. इससे बचने के लिए कई लोग अपने डिवाइस पर डार्क मोड को यूज करते हैं. लाइट मोड में जहां लाइट बैकग्राउंड पर डार्क टेक्स्ट दिखते हैं, वहीं डार्क मोड में बैकग्राउंड डार्क और टेक्स्ट लाइट हो जाते हैं. लेकिन क्या लाइट या डार्क मोड सेलेक्ट कर लेने से आंखों पर पड़ने वाला असर कम हो जाता है? आइए जानते हैं कि आंखों की सेहत के लिए डिवाइस का कौन-सा मोड ठीक रहता है.&amp;nbsp;
Dark Vs Light Mode: कौन-सा बेहतर है?
इस सवाल का जवाब है कि कोई भी मोड एक-दूसरे से बेहतर नहीं है. इनके फायदे और नुकसान आसपास की लाइटिंग और यूजर के विजन पर डिपेंड करते हैं. मसलन अगर किसी व्यक्ति की दूर की नजर कमजोर है तो उसके लिए डार्क मोड मुश्किल खड़ी कर सकता है.&amp;nbsp;
कब अच्छा और कब खराब है Dark Mode?
कम रोशनी वाली कंडीशन में आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लाइट आ सके. इसलिए अगर अंधेरे में लाइट मोड वाली वाली स्क्रीन को लगातार लंबे समय तक देखा जाए तो आंखों में दर्द होना शुरू हो सकता है. ऐसी स्थिति में डार्क मोड काम आता है, जो स्क्रीन और रूम की लाइट के बीच कंट्रास्ट को कम कर देता है तो आंखों के लिए देखना सहज हो जाता है. वहीं अगर किसी कमरे में पूरी रोशन है तो पुतलियां सिकुड़ जाती है. इस कारण डेप्थ ऑफ फील्ड कम हो जाता है. इस कारण आंखों के लिए टेक्स्ट पर फोकस कर पाना मुश्किल हो जाता है. इससे कई बार टेक्स्ट ब्लर नजर आने लगते हैं.
Light Mode को ऐसे यूज करने पर नहीं आएगी दिक्कत
लाइटिंग के हिसाब से डार्क मोड आंखों के लिए मुश्किल हो सकता है. वहीं अगर आप कुछ टिप्स के साथ लाइट मोड यूज करते हैं तो आंखों पर ज्यादा असर नहीं डालेगा. लाइट मोड की ब्राइटनेस कम करने से ग्लेयर कम हो जाता है, जो आंखों के लिए अच्छा है. आजकल मॉडर्न फोन में ऑटो-ब्राइटनेस का ऑप्शन मिलता है, जो एम्बिएंट लाइट के हिसाब से ब्राइटनेस को एडजस्ट कर देता है. इसके अलावा आप नाइट मोड भी यूज कर सकते हैं, जो स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट को कम कर देता है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;Solar Panel यूज कर रहे हैं तो ये हैक्स आएंगे बड़े काम, पावर जनरेशन के साथ एफिशिएंसी भी बढ़ेगी ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>अगले दो सालों में पूरी तरह बदल जाएंगे Apple और Samsung के महंगे फोन, ये ट्रेंड कर रहे हैं इशारा</title>
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        <description><![CDATA[ Apple And Samsung Future Phone Plan: स्मार्टफोन मार्केट में आज एक से बढ़कर एक शानदार डिजाइन वाले फोन मौजूद है. कम बजट में कीपैड वाले फोन मिल जाएंगे तो प्रीमियम सेगमेंट में धाकड़ रिफ्रेश रेट के साथ बड़े डिस्प्ले वाले फोन भी अवेलेबल हैं. अब अगले एक-दो साल में बाजार में और भी नए लुक और डिजाइन वाले फोन एंट्री मारने के लिए तैयार हैं. हर बार की तरह इस बार भी ऐप्पल और सैमसंग यह लीड लेने वाली है. दोनों कंपनियों के अपकमिंग फोन में अब तक सबसे धांसू अपग्रेड्स आने जा रहे हैं. एक बार जब इन कंपनियों के फोन लॉन्च हो जाएंगे तो बाकी कंपनियां भी इन्हें फॉलो करने लगेंगी. आइए एक नजर डालते हैं कि सैमसंग और ऐप्पल फोन को लेकर किस तरह के एक्सपेरिमेंट कर रही हैं.
फोल्डेबल फोन&amp;nbsp;
पिछले कुछ सालों से फोल्डेबल स्मार्टफोन एक ही तरह के डिजाइन पर अटके हुए थे. एक्सटर्नल डिस्प्ले एक रेगुलर फोन की तरह दिखता है और अनफोल्ड करने पर बड़ा डिस्प्ले एक टैबलेट की तरह नजर आता है. इस मामले में चाइनीज कंपनी Huawei ने पहल करते हुए अपने फोल्डेबल फोन का डिजाइन चेंज कर लिया. पिछले महीने कंपनी ने Huawei Pura X Max फोन को लॉन्च किया था, जो वाइड फोल्डिंग डिजाइन के साथ आया है. यानी इसकी चौड़ाई लंबाई से ज्यादा है. अब कयास हैं कि सैमसंग भी Galaxy Z Fold 8 के साथ Galaxy Z Fold 8 Wide को लॉन्च करेगी, जो हॉरिजॉन्टली फोल्डिंग स्मार्टफोन होगा. सितंबर में ऐप्पल भी इसी फॉर्म फैक्टर में अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी.&amp;nbsp;
फुल डिस्प्ले वाले फोन
2027 में आईफोन के सफर को 20 साल पूरे हो जाएंगे और इस मौके के लिए ऐप्पल ने धाकड़ तैयारी की है. अगर रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी अगले साल फुल डिस्प्ले वाला आईफोन लॉन्च कर सकती है. यानी इसके डिस्प्ले पर न कोई कटआउट होगा, न डायनामिक आईलैंड होगा और न ही बेजल्स देखने को मिलेंगे. लीक्स के मुताबिक, दूसरी कंपनियों ने भी इस तरह के डिस्प्ले के लिए रिसर्च शुरू कर दी है और जल्द ही मार्केट में फुल डिस्प्ले वाले फोन के कई ऑप्शंस लॉन्च हो सकते हैं.
नया डिस्प्ले साइज?
पिछले कुछ सालों से स्मार्टफोन के डिस्प्ले 6.9 इंच की अपर लिमिट पर अटके हुए हैं. यह ट्रेंड भी जल्द बदल सकता है और अगले कुछ सालों में 7 इंच से बड़ी स्क्रीन वाले फोन मार्केट में दस्तक दे सकते हैं. इसी तरह साइज में छोटे लेकिन वाइड डिस्प्ले वाले फोन भी लॉन्च होने की कतार में हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Google का बड़ा सरप्राइज! अब AI Pro यूजर्स को मिलेगा YouTube Premium Lite फ्री, बिना Ads के देखें वीडियो का</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube Premium Lite: Google ने अपने AI Pro सब्सक्रिप्शन को और आकर्षक बनाने के लिए एक नया फायदा जोड़ दिया है. अब Google AI Pro लेने वाले यूजर्स को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के YouTube Premium Lite की सदस्यता भी मिलेगी. इस नए ऑफर के जरिए यूजर्स YouTube पर ज्यादातर वीडियो बिना विज्ञापन के देख पाएंगे. हालांकि, भारत के कई यूजर्स के लिए इसमें एक बड़ी शर्त भी रखी गई है.
Jio वाले फ्री AI Pro यूजर्स को नहीं मिलेगा फायदा
कंपनी ने साफ कर दिया है कि यह YouTube Premium Lite ऑफर सिर्फ उन लोगों के लिए है जो सीधे Google AI Pro का भुगतान कर रहे हैं. यानी जिन यूजर्स को Reliance Jio पार्टनरशिप के तहत 18 महीने का मुफ्त AI Pro प्लान मिला है, उन्हें ट्रायल अवधि के दौरान यह सुविधा नहीं दी जाएगी.
इस जानकारी को विकास कंसल ने X पर साझा किया. उन्होंने बताया कि Jio ऑफर वाले यूजर्स को YouTube Premium Lite तभी मिलेगा जब उनका मुफ्त ट्रायल खत्म होने के बाद वे पेड AI Pro प्लान पर स्विच करेंगे.
क्या है YouTube Premium Lite प्लान?
YouTube Premium Lite, कंपनी के रेगुलर YouTube Premium का हल्का वर्जन है. भारत में इसकी कीमत 89 रुपये प्रति माह रखी गई है. इस प्लान के तहत ज्यादातर सामान्य वीडियो बिना विज्ञापन के देखे जा सकते हैं लेकिन Shorts, म्यूजिक कंटेंट और सर्च पेज पर विज्ञापन अभी भी दिखाई देंगे.
इसके अलावा इस प्लान में कई प्रीमियम फीचर्स शामिल नहीं हैं. यूजर्स को YouTube Music Premium, एडवांस प्लेबैक कंट्रोल, वीडियो क्यू सिस्टम और हाई-क्वालिटी ऑडियो जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी.
Gemini AI इस्तेमाल करने का तरीका भी बदला
Google ने यह बदलाव ऐसे समय पर किया है जब कंपनी Gemini AI के इस्तेमाल का तरीका भी बदल रही है. पहले जहां यूजर्स को रोजाना प्रॉम्प्ट लिमिट मिलती थी, अब उन्हें compute-based सिस्टम पर शिफ्ट किया जा रहा है.
इस नए मॉडल में AI उपयोग की गणना कई चीजों के आधार पर होगी, जैसे प्रॉम्प्ट कितना जटिल है, बातचीत कितनी लंबी है और कौन-कौन से AI टूल इस्तेमाल किए जा रहे हैं. कंपनी ने ईमेल के जरिए बताया कि Gemini की लिमिट अब हर पांच घंटे में रिफ्रेश होगी लेकिन इसके साथ साप्ताहिक सीमा भी लागू रहेगी.
Reddit पर यूजर्स ने जताई नाराजगी
Google के इस नए सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया और Reddit पर काफी आलोचना देखने को मिल रही है. कई यूजर्स का कहना है कि अब Gemini AI का इस्तेमाल पहले से ज्यादा उलझनभरा हो गया है.
एक Reddit यूजर ने दावा किया कि Gemini के साथ कुछ लंबी बातचीत करने पर ही उसकी लगभग आधी साप्ताहिक लिमिट खत्म हो गई. वहीं दूसरे यूजर्स का कहना है कि Google को यह बदलाव लागू करने से पहले ज्यादा स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी.
AI Pro सब्सक्रिप्शन में बढ़ रही सुविधाएं
हालांकि Google लगातार अपने AI Pro प्लान को ज्यादा उपयोगी बनाने की कोशिश कर रहा है. Gemini AI फीचर्स के साथ अब YouTube Premium Lite जोड़कर कंपनी उन यूजर्स को आकर्षित करना चाहती है जो AI और मनोरंजन दोनों सेवाओं का फायदा एक साथ लेना चाहते हैं.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>पोस्टपेड SIM में सच में मिलता है VIP नेटवर्क? खरीदने से पहले जान लें कंपनियों का पूरा खेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/पोस्टपेड-sim-में-सच-में-मिलता-है-vip-नेटवर्क-खरीदने-से-पहले-जान-लें-कंपनियों-का-पूरा-खेल</link>
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        <description><![CDATA[ पोस्टपेड SIM में सच में मिलता है VIP नेटवर्क? खरीदने से पहले जान लें कंपनियों का पूरा खेल ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Panel यूज कर रहे हैं तो ये हैक्स आएंगे बड़े काम, पावर जनरेशन के साथ एफिशिएंसी भी बढ़ेगी</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Panel Hacks: इको-फ्रेंडली और रीन्यूएबल एनर्जी जनरेट करने के मामले में सोलर पैनल धीरे-धीरे लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. एक बार सोलर पैनल लगाने के बाद चिंता करने की जरूरत नहीं रहती. सूरज निकलते ही ये बिजली बनाना शुरू कर देते हैं. अगर आप पहले से सोलर पैनल यूज कर रहे हैं या नया सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने जा रहे हैं तो हम आपके लिए कुछ हैक्स लेकर आए हैं. ये एनर्जी जनरेशन से लेकर एफिशिएंसी तक बढ़ाने में आपके काम आ सकते हैं.&amp;nbsp;
प्लेसमेंट को ऐसे करें ऑप्टिमाइज
सोलर पैनल की आउटपुट इस बात पर डिपेंड करेगी कि सोलर पैनल की प्लेसमेंट कैसी है. दरअसल, पैनल को इस तरह प्लेस किया जाना चाहिए ताकि इन्हें ज्यादा से ज्यादा सनलाइट मिल सके. इसलिए पैनल का मुंह सूरज की तरफ रखा जाता है. अगर सोलर पैनल को पूरी तरह सन फेसिंग नहीं लगाया जा सकता तो भी चिंता की बात नहीं है. सूरज की तरफ थोड़ा-सा टिल्ट कर देने पर भी काफी फर्क पड़ता है. इस बात का भी ध्यान रखें कि सोलर पैनल पर किसी पेड़ या बिल्डिंग की परछाई न आए. इससे एफिशिएंसी कम हो सकती है.
सुबह या शाम के समय करें सफाई
मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए सोलर पैनल की रेगुलर साफ-सफाई जरूरी है. धूल-मिट्टी जमा होने के कारण पैनल सनलाइट को एब्जॉर्ब नहीं कर पाते, जिससे पावर जनरेशन कम हो जाता है. इसलिए सॉफ्ट ब्रश या सॉफ्ट कपड़े से पैनल को साफ कर दें. यह ध्यान रखें कि दिन के समय जब टेंपरेचर ज्यादा होता है, तब पैनल की सफाई न की जाए. दिन में पानी जल्दी इवेपोरेट होकर पैनल पर धब्बे छोड़ देता है. इसलिए सुबह या शाम जब धूप और टेंपरेचर कम हो, पैनल की सफाई तब करनी चाहिए.&amp;nbsp;
स्टोरेज के लिए बैटरी आएगी काम
सोलर पावर के साथ अवेलेबिलिटी को लेकर दिक्कत रहती है. यानी सनलाइट होने पर यह पावर जनरेट करता है, लेकिन रात के समय या बादल हो जाने पर पावर जनरेशन बंद हो जाता है. इस चुनौती से निपटने के लिए सोलर बैटरी का सहारा लिया जा सकता है. दिन के समय जब सोलर एनर्जी सिस्टम पावर जनरेट करेगा, तब ये चार्ज हो जाएंगी और रात के समय पावर सप्लाई कर पाएंगी.&amp;nbsp;
धीरे-धीरे कैपेसिटी बढ़ाएं
अगर आप सोलर पैनल लगवाने जा रहे हैं तो एकदम पूरा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. अगर आपका बजट कम है तो आप कम कैपेसिटी से इसकी शुरुआत कर सकते हैं. मान लिजिए आपको 5 किलोवॉट का सिस्टम लगवाना है तो आप इसकी शुरुआत 3 किलोवाट के साथ कर सकते हैं. इससे आप इस टेक्नोलॉजी को भी परख पाएंगे और जरूरत पड़ने पर इसकी कैपेसिटी भी बढ़ा सकेंगे.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Jio का धमाका! एक ही रिचार्ज में मिल रहे 15 OTT ऐप्स, Netflix&amp;Amazon वालों की बढ़ी टेंशन</title>
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        <description><![CDATA[ Jio Recharge Plan: अब मोबाइल रिचार्ज सिर्फ कॉलिंग और इंटरनेट तक सीमित नहीं रह गया है. ज्यादातर लोग ऐसे प्लान तलाशते हैं जिनमें डेटा के साथ मनोरंजन का भी पूरा पैकेज मिले. इसी जरूरत को देखते हुए जियो का करीब 200 रुपये वाला डेटा ऐड-ऑन प्लान तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है. कम कीमत में मिलने वाला यह पैक यूजर्स को अतिरिक्त इंटरनेट के साथ कई लोकप्रिय OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस भी देता है. यही कारण है कि फिल्में, वेब सीरीज और लाइव स्पोर्ट्स देखने वाले यूजर्स के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
कम कीमत में डेटा और OTT का डबल फायदा
जियो का यह प्लान एक डेटा ऐड-ऑन पैक के तौर पर पेश किया गया है. इसमें यूजर्स को 5GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है जो उन लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है जिन्हें अपने मौजूदा प्लान के अलावा अतिरिक्त इंटरनेट की जरूरत पड़ती है. इस पैक की वैलिडिटी 28 दिनों की रखी गई है और इसी अवधि तक इसके OTT बेनिफिट्स भी एक्टिव रहते हैं.
Amazon Prime और YouTube Premium का भी मिलता है एक्सेस
इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ डेटा नहीं बल्कि इसके साथ मिलने वाले प्रीमियम एंटरटेनमेंट बेनिफिट्स हैं. यूजर्स को Amazon Prime का एक्सेस दिया जाता है जिससे नई फिल्में, वेब सीरीज और कई एक्सक्लूसिव शो देखे जा सकते हैं. इसके अलावा YouTube Premium की सुविधा भी मिलती है, जिससे बिना विज्ञापन वीडियो देखने का अनुभव मिलता है. साथ ही बैकग्राउंड प्ले और ऑफलाइन डाउनलोड जैसे फीचर्स भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
15 से ज्यादा OTT ऐप्स का पूरा पैकेज
यह प्लान सिर्फ कुछ चुनिंदा ऐप्स तक सीमित नहीं है. कंपनी के मुताबिक इसमें 15 से ज्यादा OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस शामिल किया गया है. यूजर्स को JioHotstar का सब्सक्रिप्शन कूपन भी MyJio ऐप के जरिए दिया जाता है. ऐसे में क्रिकेट मैच, लेटेस्ट फिल्में और ट्रेंडिंग वेब सीरीज देखने वालों के लिए यह प्लान काफी फायदे का सौदा माना जा रहा है.
रिचार्ज करने से पहले ये बात जरूर जान लें
चूंकि यह एक डेटा ऐड-ऑन पैक है, इसलिए इसे इस्तेमाल करने के लिए नंबर पर पहले से एक्टिव बेस प्लान होना जरूरी है. अगर आपका मुख्य रिचार्ज खत्म हो जाता है, तो यह ऐड-ऑन भी काम करना बंद कर देगा. रिचार्ज के बाद सभी OTT फायदे MyJio ऐप के जरिए एक्टिव किए जा सकते हैं.
क्यों बढ़ रही है OTT वाले रिचार्ज प्लान्स की डिमांड?
भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. लोग अब अलग-अलग ऐप्स के लिए अलग सब्सक्रिप्शन लेने की बजाय ऐसे प्लान पसंद कर रहे हैं, जिनमें इंटरनेट और एंटरटेनमेंट दोनों एक साथ मिल जाएं. यही वजह है कि टेलीकॉम कंपनियां अब OTT बंडल प्लान्स पर ज्यादा फोकस कर रही हैं और जियो का यह ऑफर भी उसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है.
Airtel का ओटीटी वाला रिचार्ज प्लान
अगर आप ऐसा पोस्टपेड प्लान तलाश रहे हैं जिसमें पूरे परिवार के लिए कॉलिंग, इंटरनेट और ओटीटी का फायदा एक साथ मिल जाए तो Airtel का ₹699 वाला प्लान आपके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है. कंपनी ने इस प्लान को खास तौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया है जो एक ही रिचार्ज में दो सिम कार्ड चलाना चाहते हैं. यानी अब अलग-अलग रिचार्ज कराने की झंझट काफी हद तक खत्म हो सकती है.
इस पोस्टपेड प्लान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दो लोग एक ही प्लान का फायदा उठा सकते हैं. दोनों सिम पर अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा दी जाती है जिससे किसी भी नेटवर्क पर बिना रुकावट बात की जा सकती है. इसके साथ इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के लिए भी अच्छी खबर है, क्योंकि प्लान में अनलिमिटेड डेटा एक्सेस शामिल किया गया है. ऐसे में बार-बार डेटा खत्म होने की टेंशन नहीं रहती.
Airtel इस प्लान में रोजाना 100 SMS की सुविधा भी दे रहा है. वहीं एंटरटेनमेंट पसंद करने वाले यूजर्स को Amazon Prime का एक साल का सब्सक्रिप्शन मिलता है जिससे फिल्में, वेब सीरीज और शॉपिंग बेनिफिट्स का फायदा लिया जा सकता है. इसके अलावा Jio Hotstar Mobile का भी एक साल का एक्सेस दिया जा रहा है, जिससे क्रिकेट, लाइव स्पोर्ट्स और लेटेस्ट शो देखने का मजा मिल सकता है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>रोड ट्रिप का मजा होगा डबल! सफर पर निकलने से पहले बैग में जरूर रखें ये 5 धांसू गैजेट्स</title>
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        <description><![CDATA[ Gadgets For Travel: रोड ट्रिप का असली मजा तभी आता है जब सफर बिना टेंशन के पूरा हो. दोस्तों या परिवार के साथ लंबी ड्राइव, नए शहरों की खोज और रास्ते की खूबसूरती हर किसी को पसंद होती है. लेकिन अगर सफर के दौरान टायर पंचर हो जाए, फोन की बैटरी खत्म हो जाए या कार गंदी हो जाए तो पूरा मूड खराब हो सकता है. ऐसे में कुछ स्मार्ट गैजेट्स आपकी यात्रा को काफी आसान और सुरक्षित बना सकते हैं. अगर आप भी अगली रोड ट्रिप की तैयारी कर रहे हैं तो ये ट्रैवल-फ्रेंडली गैजेट्स जरूर साथ रखें.
पोर्टेबल टायर इन्फ्लेटर
लंबे सफर में टायर की परेशानी सबसे बड़ी दिक्कत बन सकती है. खासकर हाईवे या दूर-दराज के इलाकों में तुरंत मदद मिलना आसान नहीं होता. ऐसे में पोर्टेबल टायर इन्फ्लेटर बेहद काम आता है. यह कुछ ही मिनटों में टायर में हवा भर देता है और कई मॉडल्स में डिजिटल प्रेशर डिस्प्ले, ऑटो कट-ऑफ और इमरजेंसी फ्लैशलाइट जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. रात के समय या बारिश में यह गैजेट काफी राहत देता है. इसकी कीमत लगभग 1,800 रुपये से 4,000 रुपये तक होती है.
डैश कैमरा
भारत में अब डैश कैमरा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. यह सिर्फ वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी गैजेट बन चुका है. सड़क पर होने वाले हादसे, अचानक सामने आए विवाद या पार्किंग के दौरान हुई घटना सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड हो जाता है. कई डैशकैम्स में नाइट विजन, पार्किंग मॉनिटरिंग और मोबाइल ऐप सपोर्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं जिससे वीडियो तुरंत फोन में देखे जा सकते हैं. इसकी कीमत लगभग 3,000 रुपये से 10,000 रुपये तक होती है.
फास्ट चार्जिंग पावर बैंक
रोड ट्रिप के दौरान नेविगेशन, म्यूजिक और फोटो क्लिक करने से फोन की बैटरी तेजी से खत्म होती है. ऐसे में एक दमदार फास्ट चार्जिंग पावर बैंक बेहद जरूरी हो जाता है. कम से कम 20,000mAh क्षमता वाला पावर बैंक लंबे सफर में काफी मदद करता है. USB-C और मल्टीपल पोर्ट्स वाले मॉडल्स एक साथ कई डिवाइस चार्ज कर सकते हैं. जहां चार्जिंग पॉइंट्स आसानी से नहीं मिलते, वहां यह गैजेट किसी लाइफसेवर से कम नहीं. इसकी कीमत लगभग 1,500 रुपये से 5,000 रुपये तक जा सकती है.
कार वैक्यूम क्लीनर
रोड ट्रिप के दौरान कार में धूल, मिट्टी और खाने-पीने का कचरा जमा होना आम बात है. बच्चों के साथ सफर कर रहे हों तो गाड़ी जल्दी गंदी हो जाती है. ऐसे में पोर्टेबल कार वैक्यूम क्लीनर काफी काम आता है. यह छोटा, हल्का और आसानी से इस्तेमाल होने वाला गैजेट है जिसे कार में कहीं भी रखा जा सकता है. USB चार्जिंग वाले मॉडल्स सफर के दौरान भी आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इसकी कीमत लगभग 1,200 रुपये से 4,500 रुपये तक हो सकती है.
वायरलेस चार्जिंग वाला स्मार्ट फोन होल्डर
अगर आप सफर में मैप्स का इस्तेमाल करते हैं तो स्मार्ट फोन होल्डर आपके लिए जरूरी एक्सेसरी है. यह फोन को मजबूती से पकड़कर रखता है ताकि ड्राइविंग के दौरान बार-बार फोन हाथ में न लेना पड़े. नए मॉडल्स में ऑटोमैटिक ग्रिप और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. इससे फोन चार्ज भी होता रहता है और डैशबोर्ड पर तारों का झंझट भी कम हो जाता है. इसकी कीमत लगभग 1,000 रुपये से 3,500 रुपये तक हो सकती है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ चैट नहीं, WhatsApp Backup भी हो सकता है हैक! तुरंत ऑन करें ये सीक्रेट Setting</title>
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>अब PPT बनाना हुआ बच्चों का खेल! OpenAI ने ChatGPT में दिया ऐसा फीचर, मिनटों में तैयार होगी प्रोफेशनल PowerPoint Presentation</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT New Feature: अब PowerPoint प्रेजेंटेशन बनाने के लिए घंटों मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. OpenAI ने ChatGPT के लिए एक नया फीचर लॉन्च किया है जिसकी मदद से यूजर्स सीधे Microsoft PowerPoint के अंदर ही स्लाइड्स बना और एडिट कर सकेंगे. खास बात यह है कि इसके लिए किसी डिजाइनिंग या प्रेजेंटेशन एक्सपर्ट बनने की जरूरत नहीं होगी. सिर्फ सामान्य भाषा में निर्देश देकर पूरा स्लाइडशो तैयार किया जा सकता है.
PowerPoint में मिलेगा ChatGPT का नया साइडबार
नए बीटा फीचर के तहत PowerPoint में ChatGPT का एक खास साइडबार दिखाई देगा. इसे इंस्टॉल करने के बाद यूजर सीधे ऐप के अंदर चैटबॉट से बात कर पाएंगे. इसकी मदद से नई स्लाइड्स तैयार करना, पुराने प्रेजेंटेशन को अपडेट करना, नोट्स को प्रोफेशनल डेक में बदलना या किसी स्लाइड का कंटेंट दोबारा लिखना बेहद आसान हो जाएगा. अब यूजर्स को हर स्लाइड अलग-अलग बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ChatGPT खुद कंटेंट को व्यवस्थित करके एक बेहतर प्रेजेंटेशन तैयार करेगा.
नोट्स और डेटा से खुद बनेगा पूरा प्रेजेंटेशन
OpenAI के मुताबिक यह फीचर यूजर्स के आइडिया को कुछ ही मिनटों में प्रोफेशनल प्रेजेंटेशन में बदल सकता है. यूजर अपने नोट्स, डॉक्यूमेंट्स, एक्सेल शीट, इमेज या पुराने प्रेजेंटेशन अपलोड करके ChatGPT से उन्हें स्लाइड्स में बदलने के लिए कह सकते हैं.
मान लीजिए आपके पास किसी मीटिंग के नोट्स और कंपनी का परफॉर्मेंस डेटा है. ऐसे में ChatGPT से 10 स्लाइड्स वाला बोर्ड प्रेजेंटेशन बनाने के लिए कहा जा सकता है. इसमें एग्जीक्यूटिव समरी, रिस्क सेक्शन और अगले कदम जैसी जरूरी चीजें भी शामिल होंगी. सबसे अच्छी बात यह है कि तैयार स्लाइड्स पूरी तरह एडिटेबल रहेंगी ताकि जरूरत पड़ने पर बदलाव किए जा सकें.
सिर्फ स्लाइड्स नहीं, प्रेजेंटेशन की कमियां भी बताएगा AI
यह फीचर केवल कंटेंट लिखने तक सीमित नहीं है. ChatGPT प्रेजेंटेशन का रिव्यू भी कर सकता है. यह बताएगा कि कहानी कहने का फ्लो कहां कमजोर है, कौन सी जानकारी गायब है और किन सवालों के लिए आपको तैयार रहना चाहिए. इससे प्रेजेंटेशन ज्यादा प्रभावी और प्रोफेशनल बन सकती है. खासकर बिजनेस मीटिंग्स और क्लाइंट प्रेजेंटेशन में यह फीचर काफी मददगार साबित हो सकता है.
स्क्रीनशॉट से भी बन जाएंगी एडिटेबल स्लाइड्स
OpenAI ने बताया कि ChatGPT स्लाइड्स को बेहतर बनाने के लिए कई एडिटिंग टास्क भी संभाल सकता है. यूजर चैटबॉट से कंटेंट छोटा करने, भाषा आसान बनाने, मुख्य पॉइंट्स साफ करने या टेबल से चार्ट स्लाइड तैयार करने के लिए कह सकते हैं. इतना ही नहीं, स्क्रीनशॉट को भी एडिटेबल PowerPoint स्लाइड्स में बदला जा सकेगा. इससे पुराने कंटेंट को दोबारा इस्तेमाल करना काफी आसान हो जाएगा.
बिजनेस यूजर्स को मिलेगा बड़ा फायदा
कंपनियों के लिए यह फीचर काफी उपयोगी माना जा रहा है. उदाहरण के तौर पर, किसी खास क्लाइंट के लिए अलग प्रेजेंटेशन तैयार करने हेतु अकाउंट नोट्स और उपयोग डेटा अपलोड किया जा सकता है. इसके बाद ChatGPT उसी हिसाब से कस्टमाइज्ड बिजनेस रिव्यू डेक तैयार कर देगा. रिसर्च नोट्स को भी कंपनी टेम्पलेट के अनुसार क्लाइंट-रेडी प्रेजेंटेशन में बदला जा सकता है.
किन यूजर्स को मिलेगा नया फीचर?
PowerPoint के लिए ChatGPT इंटीग्रेशन फिलहाल बीटा रोलआउट में उपलब्ध है. इसे दुनिया भर में कई प्लान्स के यूजर्स इस्तेमाल कर सकेंगे. इनमें ChatGPT Free, Go, Plus, Pro, Business, Enterprise, Edu, Teachers और K-12 सब्सक्रिप्शन शामिल हैं.
PowerPoint में ChatGPT कैसे इस्तेमाल करें?
इस फीचर को शुरू करने के लिए यूजर्स को PowerPoint के Add-ins सेक्शन या Microsoft Marketplace से ChatGPT for PowerPoint ऐड-इन इंस्टॉल करना होगा. इसके बाद OpenAI अकाउंट से साइन-इन करते ही ChatGPT PowerPoint के अंदर साइडबार में दिखाई देने लगेगा. यहीं से यूजर फाइल्स अपलोड करके सीधे प्रेजेंटेशन पर काम कर पाएंगे.
AI प्रोडक्टिविटी टूल्स की दिशा में बड़ा कदम
PowerPoint इंटीग्रेशन से पहले OpenAI Excel और Google Sheets के लिए भी AI टूल्स पेश कर चुका है. इनकी मदद से स्प्रेडशीट बनाना, फॉर्मूला एडिट करना और डेटा एनालिसिस करना आसान हुआ था. अब इसी AI तकनीक को प्रेजेंटेशन बनाने तक बढ़ाया जा रहा है ताकि यूजर्स का समय बचे और काम पहले से ज्यादा तेज हो सके.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>HDD और SDD में क्या होता है फर्क? बदलने से पहले जरूर पता होनी चाहिए ये चीजें</title>
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        <description><![CDATA[ HDD Vs SDD: आजकल लैपटॉप और कंप्यूटर की स्पीड को लेकर लोग काफी सजग हो गए हैं. अगर सिस्टम धीमा चलने लगे तो सबसे पहले स्टोरेज बदलने की सलाह दी जाती है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर HDD और SSD में फर्क क्या होता है और कौन-सा विकल्प बेहतर है. अगर आप भी अपने पुराने लैपटॉप या PC की स्टोरेज बदलने की सोच रहे हैं तो पहले इन दोनों तकनीकों को समझना बेहद जरूरी है.
क्या होती है HDD?
Hard Disk Drive यानी Hard Disk Drive एक पुराने स्टोरेज डिवाइस है जो कई सालों से कंप्यूटर में इस्तेमाल की जा रही है. इसमें अंदर घूमने वाली डिस्क और मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं जिनकी मदद से डेटा स्टोर और पढ़ा जाता है.
HDD की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम कीमत है. कम बजट में ज्यादा स्टोरेज चाहिए तो यह अच्छा विकल्प माना जाता है. यही कारण है कि पुराने लैपटॉप और डेस्कटॉप में HDD ज्यादा देखने को मिलती है.
SSD क्या है और क्यों हो रही है इतनी लोकप्रिय?
Solid State Drive नई तकनीक पर आधारित स्टोरेज डिवाइस है. इसमें कोई घूमने वाली डिस्क नहीं होती बल्कि डेटा फ्लैश मेमोरी चिप्स में सेव होता है. इसी वजह से SSD की स्पीड HDD की तुलना में कई गुना ज्यादा होती है. कंप्यूटर जल्दी ऑन होता है, ऐप्स तेजी से खुलते हैं और फाइल ट्रांसफर भी काफी फास्ट हो जाता है. गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और मल्टीटास्किंग करने वाले लोग आजकल SSD को ज्यादा पसंद करते हैं.
HDD और SSD में सबसे बड़ा फर्क
दोनों स्टोरेज डिवाइस का काम डेटा सेव करना है लेकिन काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है. HDD मैकेनिकल सिस्टम पर आधारित होती है जबकि SSD इलेक्ट्रॉनिक चिप्स से चलती है. स्पीड की बात करें तो SSD कहीं ज्यादा तेज होती है. वहीं HDD की रीड-राइट स्पीड कम होने के कारण सिस्टम कई बार स्लो महसूस होता है. इसके अलावा SSD कम बिजली खर्च करती है जिससे लैपटॉप की बैटरी लाइफ भी बेहतर हो सकती है.
कौन ज्यादा टिकाऊ होती है?
HDD में मूविंग पार्ट्स होते हैं इसलिए गिरने या झटका लगने पर खराब होने का खतरा ज्यादा रहता है. दूसरी तरफ SSD में कोई मैकेनिकल पार्ट नहीं होता, इसलिए यह ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ मानी जाती है. हालांकि, लंबे समय तक भारी डेटा राइटिंग करने पर SSD की लाइफ भी धीरे-धीरे कम हो सकती है लेकिन सामान्य इस्तेमाल में यह कई साल आराम से चल जाती है.
स्टोरेज बदलने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आपका लैपटॉप बहुत स्लो हो गया है तो SSD में अपग्रेड करना अच्छा फैसला साबित हो सकता है. लेकिन बदलने से पहले यह जरूर जांच लें कि आपका सिस्टम SATA SSD सपोर्ट करता है या NVMe SSD. इसके अलावा बजट और जरूरत का भी ध्यान रखें. ज्यादा स्टोरेज कम कीमत में चाहिए तो HDD सही है लेकिन तेज परफॉर्मेंस चाहिए तो SSD बेहतर विकल्प मानी जाती है.
आखिर किसे चुनना चाहिए?
अगर आप सिर्फ फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट स्टोर करना चाहते हैं तो HDD आपके लिए ठीक रह सकती है. लेकिन अगर आपको तेज स्पीड, स्मूथ परफॉर्मेंस और बेहतर अनुभव चाहिए तो SSD पर जाना ज्यादा फायदे का सौदा होगा. आज के समय में ज्यादातर नए लैपटॉप SSD के साथ ही आ रहे हैं क्योंकि यह सिस्टम की परफॉर्मेंस को काफी बेहतर बना देती है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>चीन के सबसे बड़े शॉपिंग इवेंट में होगा बड़ा धमाका! पहली बार नीलाम होगा Humanoid Robot, जानिए पूरी जानकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Humanoid Robot: चीन की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी JD.com ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह अपने सालाना 618 शॉपिंग फेस्टिवल के दौरान दुनिया की पहली ह्यूमनॉइड रोबोट नीलामी आयोजित करने जा रही है. कंपनी ने 2026 के 618 शॉपिंग फेस्टिवल लॉन्च इवेंट में इस योजना का खुलासा किया.
कंपनी के मुताबिक, यह नीलामी सिर्फ एक तकनीकी प्रदर्शन नहीं होगी बल्कि पूरे शॉपिंग फेस्टिवल के दौरान चलने वाले खास ऑफर्स और प्रमोशनल गतिविधियों का हिस्सा बनेगी. माना जा रहा है कि इस इवेंट में टेक कंपनियां, रिसर्च संस्थान और रोबोट कलेक्टर बड़ी दिलचस्पी दिखा सकते हैं क्योंकि उन्हें अगली पीढ़ी के ह्यूमनॉइड रोबोट्स तक शुरुआती पहुंच मिल सकती है. हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि नीलामी में कौन-कौन से रोबोट मॉडल शामिल होंगे.
अगले 5 साल में लाखों रोबोट तैनात करने की तैयारी
JD.com ने सोमवार को बताया कि आने वाले पांच वर्षों में वह बड़े पैमाने पर रोबोटिक्स तकनीक अपनाने की तैयारी कर रही है. कंपनी की योजना करीब 30 लाख रोबोट, 10 लाख ऑटोनॉमस व्हीकल और 1 लाख ड्रोन तैनात करने की है.
इसके साथ ही JD Retail का लक्ष्य 2026 तक रोबोट ब्रांड्स से 1.47 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार हासिल करना है. कंपनी यह भी चाहती है कि नए प्रोडक्ट लॉन्च करने का समय करीब 30 प्रतिशत तक कम किया जाए.
करोड़ों डिवाइस से जुड़ेगा रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म
JD के JoyInside रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म के प्रमुख दाई वेनजुन ने बताया कि इस साल यह प्लेटफॉर्म 1 करोड़ से ज्यादा टर्मिनल डिवाइस से जुड़ जाएगा. रोबोटिक्स सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां जैसे Unitree Robotics और Noetix Robotics पहले ही इस प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट हो चुकी हैं. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि चीन रोबोटिक्स और AI तकनीक को तेजी से आम जिंदगी में उतारना चाहता है.
फैक्ट्रियों में भी नजर आएंगे ह्यूमनॉइड रोबोट
चीन सिर्फ लोगों के बीच रोबोट लाने तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि उन्हें फैक्ट्रियों में भी इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है. Shanghai प्रशासन ने घोषणा की है कि वह AI और ह्यूमनॉइड रोबोट्स की वास्तविक दुनिया में तैनाती को तेज करेगा. शंघाई म्यूनिसिपल कमीशन ऑफ इकॉनमी एंड इंफॉर्मेटाइजेशन के निदेशक तांग वेनकान के अनुसार, 2026 से 2030 के बीच चलने वाली चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक शहर की फैक्ट्रियों में 1 लाख ह्यूमनॉइड रोबोट लगाए जाने का लक्ष्य है.
इसके अलावा, बड़े औद्योगिक उद्यमों में AI एजेंट्स का उपयोग 80 प्रतिशत से ज्यादा तक पहुंचाने की योजना भी बनाई गई है. यह AI Plus अभियान का हिस्सा होगा जिसका उद्देश्य उद्योगों को स्मार्ट और ऑटोमेटेड बनाना है.
लैब से निकलकर बाजार तक पहुंचे रोबोट
चीन के उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सदस्य पैन हेलिन ने कहा कि पहले ह्यूमनॉइड रोबोट केवल लैब और डेमो तक सीमित थे लेकिन अब उनका इस्तेमाल रिटेल, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और पब्लिक सर्विस जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है.
उनका मानना है कि ऐसी नीलामी रोबोट बनाने वाली कंपनियों के लिए नया बिजनेस मॉडल तैयार कर सकती है. साथ ही लोग ह्यूमनॉइड रोबोट्स को सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं बल्कि रोजमर्रा के उपयोगी उपकरण के रूप में देखने लगेंगे.
AI और रोबोटिक्स में आगे निकलने की दौड़
यह ऐलान दिखाता है कि चीन की कंपनियां embodied AI और ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रही हैं. दुनियाभर की कंपनियां इस बात पर काम कर रही हैं कि भविष्य में रोबोट वेयरहाउस, फैक्ट्री, कस्टमर सर्विस, अस्पतालों और यहां तक कि घरों में भी इंसानों की मदद कर सकें.
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        <title>AI से ले रहे हैं Financial Advice? भूलकर भी Chat में शेयर न करें ये 5 चीजें</title>
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        <description><![CDATA[ AI Financial Advice: आजकल लोग खर्चों का हिसाब रखने, बजट बनाने और निवेश की सलाह लेने के लिए AI चैटबॉट्स का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं. कई यूजर्स अपनी बैंकिंग आदतें, सब्सक्रिप्शन और खर्चों से जुड़ी जानकारी भी AI टूल्स के साथ शेयर कर रहे हैं ताकि उन्हें पर्सनलाइज्ड सलाह मिल सके. लेकिन सुविधा के इस दौर में प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं.
हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग AI चैटबॉट्स में निजी और गोपनीय जानकारी डाल चुके हैं जिनमें वित्तीय और स्वास्थ्य से जुड़ा डेटा भी शामिल है. विशेषज्ञों का मानना है कि लोग शायद यह पूरी तरह नहीं समझ पा रहे कि AI सिस्टम उनके डेटा को कैसे स्टोर, प्रोसेस या इस्तेमाल करते हैं.
AI चैटबॉट्स आपकी जिंदगी के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं
विशेषज्ञों के मुताबिक, वित्तीय जानकारी सिर्फ आपकी कमाई नहीं बताती बल्कि आपकी जीवनशैली, खर्च करने की आदतें, कर्ज, जिम्मेदारियां और कमजोरियों तक का अंदाजा दे सकती है. जब कोई व्यक्ति AI से सलाह लेने के लिए अपने बैंक ट्रांजैक्शन, सैलरी, निवेश या कर्ज की जानकारी शेयर करता है तो सिस्टम के पास उसकी आर्थिक स्थिति की बेहद विस्तृत तस्वीर पहुंच जाती है. यही वजह है कि AI आधारित फाइनेंस टूल्स सामान्य चैटिंग ऐप्स से कहीं ज्यादा संवेदनशील बन जाते हैं.
सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि कई प्लेटफॉर्म बातचीत का डेटा भविष्य के AI मॉडल ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ मामलों में डेटा कितने समय तक स्टोर रहेगा, यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता.
AI Finance Tools में ये 5 चीजें कभी शेयर न करें
बैंक लॉगिन और पासवर्ड
किसी भी AI चैटबॉट में नेट बैंकिंग पासवर्ड, यूजर आईडी या लॉगिन क्रेडेंशियल्स डालना बेहद खतरनाक हो सकता है. अगर डेटा लीक हुआ तो आपका अकाउंट सीधे खतरे में पड़ सकता है.
पूरा बैंक अकाउंट या कार्ड नंबर
बहुत से लोग सोचते हैं कि पूरी बैंक डिटेल देने से AI बेहतर सलाह देगा, लेकिन ऐसा करना फ्रॉड और पहचान चोरी का जोखिम बढ़ा सकता है.
UPI PIN, OTP और CVV
UPI PIN, OTP, CVV या किसी भी तरह के सिक्योरिटी कोड कभी भी AI चैट में शेयर नहीं करने चाहिए. कोई भी भरोसेमंद प्लेटफॉर्म इन जानकारियों की मांग नहीं करता.
PAN कार्ड और सैलरी स्लिप
सरकारी दस्तावेज, टैक्स डिटेल, PAN नंबर, सैलरी स्लिप या अन्य वित्तीय रिकॉर्ड साझा करना आपकी पहचान और वित्तीय सुरक्षा दोनों के लिए जोखिम बन सकता है.
निवेश और कर्ज की पूरी जानकारी
आपका निवेश पोर्टफोलियो, लोन डिटेल या देनदारियों की पूरी जानकारी AI को आपकी आर्थिक प्रोफाइल का गहरा एक्सेस दे सकती है. बाद में यही डेटा गलत हाथों में जाने पर परेशानी पैदा कर सकता है.
प्राइवेसी से बड़ा बन सकता है जवाबदेही का सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में AI कंपनियों पर भी वैसे ही नियम लागू हो सकते हैं जैसे वित्तीय संस्थानों पर लागू होते हैं. सवाल सिर्फ प्राइवेसी पॉलिसी का नहीं है बल्कि इस बात का है कि कंपनियां यह साबित कैसे करेंगी कि यूजर डेटा को कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया.
AI इस्तेमाल करें, लेकिन सावधानी के साथ
AI आधारित फाइनेंस टूल्स बजटिंग और खर्चों को समझने में मददगार हो सकते हैं लेकिन यूजर्स को हर जानकारी शेयर करने से पहले सोचने की जरूरत है. जिस तरह आप किसी अजनबी, बैंक कर्मचारी या फाइनेंशियल एडवाइजर को निजी जानकारी देते समय सावधानी बरतते हैं, उसी तरह AI चैटबॉट्स के साथ भी सतर्क रहना जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टेक गिफ्ट देने के लिए जेब पर नहीं डालना पड़ेगा बोझ, 200 रुपये से भी कम में आ जाएंगी काम की एक्सेसरीज</title>
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        <description><![CDATA[ Budget Tech Accessories to Gift: आप टेक के शौकीन हैं या आपका कोई दोस्त टेक का दीवाना है और आप उसे गिफ्ट देना चाहते हैं तो बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं है. आप कई ऐसी एक्सेसरीज गिफ्ट कर सकते हैं, जिनकी कीमत 200 रुपये से भी कम है, लेकिन काम आने के मामले में ये किसी महंगे गैजेट से कम नहीं हैं. इनकी खास बात यह भी है कि इन एक्सेसरीज को स्टूडेंट्स लेकर वर्किंग प्रोफेशनल्स तक सब यूज कर सकते हैं और ये आसानी से हर जगह अवेलेबल हैं.
किफायती और काम के टेक गिफ्ट
फोल्डेबल मोबाइल स्टैंड- अगर आप किसी ऐसे दोस्त को गिफ्ट देना चाहते हैं, जो पूरा दिन फोन से चिपका रहता है तो उसे फोल्डेबल मोबाइल स्टैंड दिया जा सकता है. मूवी देखनी हो, वीडियो कॉल करनी हो या रेसिपी देखकर कुछ खाना बनाना, यह स्टैंड हर जगह काम आएगा.
USB LED Light- गर्मियों के मौसम में पावर कट होना कोई बड़ी बात नहीं है. ऐसी स्थिति में USB LED लाइट बड़े काम आ सकती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे पावर बैंक और लैपटॉप समेत किसी भी डिवाइस के साथ यूज किया जा सकता है. सिर्फ प्लग-इन करने की जरूरत है और अगले ही पल अंधेरा गायब. गिफ्ट के लिए यह एक सस्ता और अच्छा ऑप्शन है.
स्क्रीन क्लीनिंग किट- आजकल लोग दिन के कई घंटे स्क्रीन के आगे ही बिताने लगे हैं. अगर फोन स्क्रीन की बात करें तो यह पसीने, धूल, फेस ऑयल और फिंगप्रिंट आदि के कारण गंदी हो जाती है. इसी तरह टैबलेट भी फिंगरप्रिंट आदि के कारण गंदे हो जाते हैं. अगर आपके दोस्तों के पास मोबाइल, लैपटॉप और टैब जैसे गैजेट हैं तो उन्हें स्क्रीन क्लीनिंग किट भी दी जा सकती है.
ईयरफोन केस- ट्रैवल के दौरान या ऑफिस आते-जाते समय म्यूजिक और पॉडकास्ट आदि सुनने के लिए ईयरफोन अपने पास ही रखते हैं. आमतौर पर इन्हें जेब या बैग में ठूंस दिया जाता है. जेब से जहां गिरने का डर रहता है, वहीं बैग में ये बाकी सामान के नीचे दब जाते हैं. इसलिए ईयरफोन केस बहुत काम की एक्सेसरी बन जाती है. अगर आप यह किसी को गिफ्ट करते हैं तो उसके काफी काम आएगा.
ये सस्ती चीजें भी आती हैं काम
इनके अलावा आप कीबोर्ड ब्रश, केबल ऑर्गेनाइजर, मोबाइल ग्रिप और वेबकैम प्राइवेसी कवर समेत दूसरी टेक एक्सेसरीज भी गिफ्ट कर सकते हैं. ये ऐसी एक्सेसरीज हैं, जिनकी जरूरत सभी को पड़ती है, लेकिन ज्यादातर लोग इन्हें खरीदना अवॉयड करते हैं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सख्ती! 1 जून से इस देश में सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर लगेगी रोक</title>
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        <description><![CDATA[ Social Media Ban: मलेशिया सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है. 1 जून से देश में ऐसे नए नियम लागू होंगे, जिनके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाना आसान नहीं रहेगा. सरकार चाहती है कि कम उम्र के यूजर्स को इंटरनेट पर मौजूद खतरनाक और नुकसानदायक कंटेंट से बचाया जा सके.
सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी
मलेशिया के कम्युनिकेशंस एंड मल्टीमीडिया कमीशन (MCMC) के अनुसार नए नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर होगी. यानी अब सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कम उम्र के बच्चे आसानी से अकाउंट न बना सकें.
इसके अलावा कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन मजबूत करना होगा, शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी और विज्ञापन देने वालों की पहचान भी सही तरीके से जांचनी होगी. अगर किसी कंटेंट में बदलाव या छेड़छाड़ की गई है तो उसे साफ तौर पर लेबल करना भी जरूरी होगा. हालांकि इन नियमों को लागू करने के लिए कंपनियों को कुछ समय की छूट दी जाएगी लेकिन इसकी अवधि अभी तय नहीं की गई है.
बच्चों की सुरक्षा पर सरकार का फोकस
पिछले कुछ वर्षों में मलेशिया में ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट के मामले तेजी से बढ़े हैं. इसी वजह से सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी बढ़ा रही है.
सरकार जिन खतरों को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है, उनमें ऑनलाइन जुआ, स्कैम, बच्चों का शोषण, साइबर बुलिंग और धर्म या नस्ल से जुड़ा भड़काऊ कंटेंट शामिल है. अधिकारियों का मानना है कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे कंटेंट से दूर रखना बेहद जरूरी हो गया है.
जल्द शुरू हो सकता है एज वेरिफिकेशन सिस्टम
मलेशिया इस साल यूजर्स के लिए एज वेरिफिकेशन सिस्टम भी शुरू करने की तैयारी में है. इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की उम्र की पुष्टि करनी पड़ सकती है. हालांकि यही सबसे बड़ी चुनौती भी मानी जा रही है. अगर प्लेटफॉर्म्स पहचान पत्र मांगते हैं तो लोगों की प्राइवेसी को खतरा हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ थर्ड-पार्टी एज वेरिफिकेशन टूल्स की सटीकता पर भी सवाल उठते रहे हैं. अब देखने वाली बात होगी कि मलेशिया इस संतुलन को कैसे संभालता है.
दुनिया के कई देशों में बढ़ रही सख्ती
मलेशिया अकेला ऐसा देश नहीं है जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती कर रहा है. ऑस्ट्रेलिया ने 2024 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगभग पूरी तरह रोक लगाने वाला कानून पास किया था.
इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के कई राज्यों में भी इसी तरह के नियम लागू किए जा चुके हैं. भारत में भी गोवा सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश दिया है.
Meta, TikTok और YouTube जैसी कंपनियों पर असर
नए नियमों का असर दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों पर भी पड़ेगा. Meta, TikTok, YouTube और X जैसी कंपनियों को अब मलेशिया में अपने सिस्टम और नीतियों में बदलाव करने पड़ सकते हैं.
दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़ी संख्या में युवा इंटरनेट यूजर्स मौजूद हैं, इसलिए यह इलाका टेक कंपनियों के लिए बेहद अहम माना जाता है. लेकिन अब बढ़ते सरकारी नियम इन कंपनियों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं.
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UPI ID को लेकर भारी पड़ सकती है लापरवाही, पलक झपकते ही उड़ जाएगा अकाउंट का पैसा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>UPI ID को लेकर भारी पड़ सकती है लापरवाही, पलक झपकते ही उड़ जाएगा अकाउंट का पैसा</title>
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        <description><![CDATA[ Old UPI ID Risk: देश में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन तेजी से बढ़ा है और इसमें UPI पेमेंट का हिस्सा सबसे बड़ा है. सड़क किनारे फल बेचने वाले से लेकर बड़े से बड़े स्टोर तक, हर जगह लोग UPI के जरिए लेनदेन कर रहे हैं. दरअसल, UPI का इस्तेमाल एकदम आसान और सेफ भी माना जाता है. हालांकि, कई बार लापरवाही महंगी पड़ सकती है. कई लोग अपनी पुरानी UPI ID को डिएक्टिवेट किए बिना ही नई ID बना लेते हैं. ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है और देखते ही देखते आपके अकाउंट में रखा पैसा उड़ जाएगा. ज हम आपको बता रहे हैं कि UPI ID को बंद किए बिना नई ID बना लेना कितना खतरनाक हो सकता है.&amp;nbsp;
Old UPI ID को बंद करना है जरूरी
कई लोग फोन बदलने या दूसरे कारणों से नई UPI ID बना लेते हैं. कई लोगों को यह भी लगता है कि फोन से ऐप डिलीट करने के साथ ही UPI ID डिलीट हो जाती है. इस कारण भी लोग नई पेमेंट ऐप इंस्टॉल कर नई ID यूज करना शुरू कर देते हैं. उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि ऐप डिलीट करने या फोन रिप्लेस करने से UPI ID डिलीट नहीं होती. अगर आप ऐप अनइंस्टॉल कर देते हैं तो भी उसकी UPI ID, लिंक्ड अकाउंट, UPI Lite और ऑटो-पे मैंडेट समेत सारी चीजें एक्टिव रहती हैं. इन्हें ऐप में जाकर डिलीट या डिएक्टिवेट करना पड़ता है.
चुटकियों में उड़ जाएगा पैसा
अगर आपकी UPI ID ऐसे किसी नंबर से लिंक्ड है, जो इनएक्टिव हो गया है तो यह बहुत नुकसान कर सकती है. दरअसल, कंपनियां कुछ समय बाद इनएक्टिव नंबर को दूसरे यूजर्स को दे देती है. अगर आपकी UPID ID इससे लिंक रह गई है तो मोबाइल नंबर के नए यूजर के पास नोटिफिकेशन और अलर्ट जाने शुरू हो सकते हैं. अगर यह नंबर स्कैमर के हाथ लग जाए तो वो सिम-स्वैप कर आपके बैंक अकाउंट तक पहुंच सकते हैं. एक बार एक्सेस मिलने पर आपका पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा.
इन बातों का ध्यान रखना जरूरी

अगर आप ऐप डिलीट या फोन रिप्लेस कर रहे हैं तो पहले UPI ID को डिलीट करें. इससे पहले बैंक अकाउंट को डी-लिंक और पे-मैंडेट को बंद कर दें.&amp;nbsp;
मोबाइल नंबर बदले की सूरत में बैंक से अपना नया नंबर अपडेट करवा लें.
अगर आपको सारी UPI ID याद नहीं है तो NPCI की वेबसाइट पर चेक करें. यहां आपको मोबाइल नंबर से लिंक्ड सारी आईडी दिख जाएंगी. बैंकिंग ऐप से भी ऐसा किया जा सकता है.&amp;nbsp;

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        <title>AI से मदद लेना पड़ सकता है भारी! Senior Citizens भूलकर भी न करें ये गलती, वरना खाली हो सकता है बैंक अकाउंट</title>
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        <description><![CDATA[ AI Assistant: आज के समय में AI तकनीक तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. खासकर 2026 में बड़ी संख्या में सीनियर सिटीज़न्स अब AI Assistants का इस्तेमाल कर रहे हैं. दवाइयों का रिमाइंडर लगाना हो, वीडियो कॉल करना हो, खबरें सुननी हों या बैंक बैलेंस चेक करना हो AI आधारित टूल्स बुजुर्गों की जिंदगी को पहले से आसान बना रहे हैं.
Amazon की Alexa, Apple की Siri, Google Assistant और दूसरे AI चैटबॉट्स अब घर-घर में इस्तेमाल हो रहे हैं. लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन स्कैम भी तेजी से बढ़ रहे हैं.
क्यों तेजी से बढ़ रहा है AI Assistants का इस्तेमाल?
कई बुजुर्ग अब छोटे-छोटे कामों के लिए AI टूल्स पर निर्भर हो चुके हैं. स्मार्ट स्पीकर्स और स्मार्टफोन्स सिर्फ आवाज सुनकर सवालों के जवाब दे सकते हैं, मौसम बता सकते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग में मदद कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी सहायता भी उपलब्ध करा सकते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में Voice Assistant का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है. इसकी बड़ी वजह यह है कि अब इन डिवाइसेज को इस्तेमाल करना पहले के मुकाबले आसान हो गया है.
सुविधा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI इस्तेमाल करते समय सबसे पहले अकाउंट की सुरक्षा मजबूत करनी चाहिए. इसके लिए लंबा और मजबूत पासवर्ड रखना बेहद जरूरी है. साथ ही जहां संभव हो, Two-Factor Authentication भी चालू करना चाहिए ताकि कोई दूसरा व्यक्ति आसानी से अकाउंट एक्सेस न कर सके.
इसके अलावा AI Assistants की Privacy Settings भी समय-समय पर जांचनी चाहिए. कई डिवाइसेज लगातार वॉइस कमांड सुनने के लिए एक्टिव रहते हैं जिससे गलती से निजी बातचीत भी रिकॉर्ड हो सकती है. इसी वजह से पुराने Voice Recordings को समय-समय पर डिलीट करना और माइक्रोफोन परमिशन सीमित रखना बेहतर माना जाता है.
बैंकिंग जानकारी जोड़ते समय रहें बेहद सावधान
विशेषज्ञों की सबसे बड़ी सलाह यही है कि AI Assistants को सीधे बैंकिंग ऐप्स, पेमेंट वॉलेट्स या संवेदनशील ईमेल अकाउंट्स से लिंक करने से बचना चाहिए. अगर किसी वजह से ऐसा करना जरूरी हो तो पहले उसकी सुरक्षा सेटिंग्स और प्राइवेसी पॉलिसी जरूर जांचनी चाहिए. छोटी सी लापरवाही बैंक खाते और निजी डेटा दोनों को खतरे में डाल सकती है.
2026 में बढ़ गए हैं AI Scams
अब साइबर अपराधी AI की मदद से लोगों को ठगने के नए तरीके अपना रहे हैं. कई मामलों में ठग परिवार के सदस्य की नकली आवाज बनाकर इमरजेंसी कॉल करते हैं और पैसों की मांग करते हैं. ऐसे में सबसे जरूरी नियम यह माना जा रहा है कि किसी भी घबराहट वाले कॉल पर तुरंत भरोसा न करें. पहले फोन काटें और उस व्यक्ति को उसके सेव नंबर पर दोबारा कॉल करके पुष्टि करें. कई परिवार अब सुरक्षा के लिए Safe Word भी तय कर रहे हैं जिसे सिर्फ परिवार के लोग जानते हैं.
इन छोटी आदतों से रह सकते हैं सुरक्षित
फोन और ऐप्स को हमेशा अपडेट रखना, पब्लिक USB चार्जिंग स्टेशनों से बचना और हर महीने ऐप परमिशन चेक करना डिजिटल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है. इसके अलावा अगर कोई मैसेज, WhatsApp लिंक या ईमेल संदिग्ध लगे तो उस पर क्लिक करने से बचना चाहिए, चाहे वह कितना भी आधिकारिक क्यों न दिखे.
AI Assistants बुजुर्गों की जिंदगी को आसान जरूर बना सकते हैं लेकिन सुरक्षित इस्तेमाल करना आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है. थोड़ी सतर्कता और सही डिजिटल आदतें ऑनलाइन ठगी से बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>WhatsApp पर आ रही फर्जी Calls से हैं परेशान? तुरंत ON करें ये Setting, अनजान नंबर खुद हो जाएंगे Silent</title>
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        <description><![CDATA[ Whatsapp Spam Calls: आजकल WhatsApp पर स्पैम कॉल्स तेजी से बढ़ रही हैं. स्कैमर्स अब इंटरनेशनल और अनजान नंबरों से कॉल करके लोगों को निशाना बना रहे हैं. कई बार ये लोग खुद को बैंक कर्मचारी, डिलीवरी एजेंट या कस्टमर केयर बताकर ठगी करने की कोशिश करते हैं. ऐसे में एक खास WhatsApp सेटिंग आपकी बड़ी मदद कर सकती है जो बिना किसी नंबर को ब्लॉक किए फालतू कॉल्स से राहत दिलाती है.
कौन-सी है WhatsApp की ये खास सेटिंग?
WhatsApp में Silence Unknown Callers नाम का एक इनबिल्ट फीचर मिलता है. इसे ऑन करने के बाद उन नंबरों से आने वाली Voice और Video Calls अपने आप साइलेंट हो जाती हैं जिन्हें आपने सेव नहीं किया है या जिनसे पहले कभी बातचीत नहीं की है.
इसका मतलब यह नहीं कि कॉल पूरी तरह ब्लॉक हो जाएगी. कॉल आपके फोन में नोटिफिकेशन और WhatsApp Call History में दिखाई देती रहेगी लेकिन फोन नहीं बजेगा. इससे बार-बार आने वाली अनचाही कॉल्स से काफी राहत मिलती है.
कैसे ऑन करें ये सेटिंग?
इस फीचर को एक्टिव करना बेहद आसान है और इसमें एक मिनट से भी कम समय लगता है. सबसे पहले WhatsApp खोलें. इसके बाद Settings में जाएं. फिर Privacy ऑप्शन चुनें और Calls सेक्शन पर टैप करें. यहां आपको Silence Unknown Callers का विकल्प मिलेगा जिसे ऑन करना होगा. Android फोन में Settings का ऑप्शन ऊपर दाईं तरफ दिए गए तीन डॉट मेन्यू में मिलता है जबकि iPhone में यह नीचे की तरफ दिखाई देता है.
इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा
इस सेटिंग की खास बात यह है कि यह किसी नंबर को पूरी तरह ब्लॉक नहीं करती. अगर किसी जरूरी व्यक्ति ने नए नंबर से कॉल किया है तो आप बाद में Missed Call देखकर तय कर सकते हैं कि कॉल बैक करना है या नहीं. यानी जरूरी कॉल मिस होने का खतरा भी कम रहता है.
लेकिन यहां है एक छोटी-सी लिमिटेशन
अगर आपने पहले किसी अनसेव्ड नंबर पर मैसेज किया है या उससे बात की है, तो WhatsApp उसे Unknown नहीं मानेगा. ऐसे में उस नंबर से आने वाली अगली कॉल सामान्य तरीके से बज सकती है. यह दिक्कत खासतौर पर डिलीवरी एजेंट्स, ऑफिस के अस्थायी नंबर या एक बार इस्तेमाल होने वाले कॉन्टैक्ट्स के साथ देखने को मिल सकती है.
क्यों जरूरी है ये फीचर?
अगर आप काम के दौरान, मीटिंग में या रात के समय बार-बार आने वाली WhatsApp कॉल्स से परेशान रहते हैं तो यह प्राइवेसी फीचर काफी काम का साबित हो सकता है. यह स्पैम कॉल्स को पूरी तरह खत्म तो नहीं करता लेकिन यह जरूर तय करता है कि आपकी शांति कौन भंग कर सकता है और कौन नहीं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:57 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>धमाल मचाने की तैयारी में सैमसंग, स्लाइड और रोल होने वाले 2 फोन के डिजाइन करवाएं पेटेंट</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Rollable Phone Design: फोल्डेबल फोन सेगमेंट में अपनी बादशाहत कायम करने के बाद अब सैमसंग नए एक्सपेरिमेंट कर रही है. कंपनी अब स्लाइड और रोल होने वाले फोन के डिजाइन पर काम में लगी हुई है. इसे लेकर दो पेटेंट दायर किए गए हैं, जिससे यह झलक मिलती है कि सैमसंग मोबाइल के नए फॉर्म फैक्टर को लेकर क्या सोच रही है. आइए जानते हैं कि सैमसंग भविष्य में किस तरह के फोन लॉन्च कर सकती है.
स्लाइड होकर बड़ा हो जाएगा डिस्प्ले
पहले पेटेंट में ऐसे फोन का कॉन्सेप्ट दिखाया गया है, जो देखने में एक नॉर्मल स्मार्टफोन की तरह दिखता है, लेकिन इसके डिस्प्ले को हॉरिजॉन्टली स्लाइड किया जा सकता है. यह फोन अभी तक मौजूद किसी फोन की तरह फोल्ड या फ्लिप नहीं होगा बल्कि स्लाइड होकर यूजर को बड़ा डिस्प्ले ऑफर करेगा. काम पूरा होने के बाद इसे वापस स्लाइड कर एक नॉर्मल फोन की तरह कैरी किया जा सकेगा.
दूसरा कॉन्सेप्ट है ज्यादा इंट्रेस्टिंग
सैमसंग का दूसरा कॉन्सेप्ट काफी इंट्रेस्टिंग है. इसमें डिस्प्ले पूरी तरह डिवाइस की बॉडी के अंदर रहेगा. डिवाइस की दोनों साइड को खींचने पर डिस्प्ले बाहर आ जाएगा. सैमसंग का कहना है कि इस तरह बड़े डिस्प्ले को स्क्रैचेज और दूसरे डैमेज से बचाया जा सकता है. यूज होने के बाद यह डिस्प्ले फिर रोल होकर डिवाइस की बॉडी के अंदर चला जाएगा. पेटेंट में यह भी बताया गया है कि डिवाइस में सेंसर लगे होंगे, जो यह डिटेक्ट कर पाएंगे कि डिस्प्ले कितना खींचा गया है और इसकी रफ्तार कितनी रही. इसी आधार पर फोन का सॉफ्टवेयर इंटरफेस एडजस्ट हो जाएगा.
क्या प्रोडक्शन स्टेज में पहुंचेंगे ये फोन?
अभी सैमसंग ने इन दोनों डिजाइन के लिए पेटेंट दायर किया है और इनके प्रोडक्शन स्टेज में पहुंचने की कोई गारंटी नही है. दरअसल, कंपनियां हर साल हजारों डिजाइन पेटेंट करवाती हैं, लेकिन उनमें से बहुत ही कम कागजों से आगे बढ़ पाते हैं. ऐसे में पूरे &amp;nbsp;विश्वास के साथ यह नहीं कहा जा सकता है कि सैमसंग इन पेटेंट को हकीकत बनाकर मार्केट में उतारेगी.
इस कैटेगरी में है सैमसंग की दिलचस्पी
सैमसंग रोल और स्लाइड होने वाले डिवाइस को कैटेगरी में काफी दिलचस्पी ले रही है. कंपनी की डिस्प्ले यूनिट ने स्लाइड और रोल होने वाले OLED प्रोटोटाइप को कई जगहों पर पेश किया है. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि सैमसंग इस कैटेगरी को लेकर सीरियसली काम कर रही है. अगर ये फोन प्रोडक्शन स्टेज में पहुंच पाते हैं तो फोल्डेबल फोन की कई दिक्कतों को दूर कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:54 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कितनी बिजली खपत करता है घर ले लगा Smart TV? जानिए कौन सा मॉडल बढ़ाता है सबसे ज्यादा बिजली बिल</title>
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        <description><![CDATA[ Smart TV Electricity Consumption: आज के समय में Smart TV सिर्फ एंटरटेनमेंट का साधन नहीं रहा, बल्कि हर घर की जरूरत बन चुका है. लेकिन बड़ी स्क्रीन, 4K क्वालिटी और लगातार OTT देखने की आदत के बीच कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है क्या Smart TV ज्यादा बिजली खाता है? और अगर हां, तो कौन सा मॉडल बिजली बिल सबसे ज्यादा बढ़ाता है?
असल में Smart TV की बिजली खपत उसके स्क्रीन साइज, डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करती है. सही जानकारी होने पर आप बिजली बिल को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं.
Smart TV की बिजली खपत कैसे तय होती है?
किसी भी Smart TV की बिजली खपत उसकी वॉट क्षमता से मापी जाती है. जितना ज्यादा वॉट, उतनी ज्यादा बिजली की खपत. उदाहरण के तौर पर 32 इंच का LED Smart TV आमतौर पर 30 से 50 वॉट तक बिजली इस्तेमाल करता है जबकि 55 इंच का 4K TV 100 से 200 वॉट तक बिजली ले सकता है.
अगर टीवी रोज 5 से 6 घंटे चलता है तो महीने के बिजली बिल में इसका असर साफ दिखाई देता है. खासकर बड़े स्क्रीन वाले टीवी ज्यादा यूनिट खर्च करते हैं.
कौन सा Smart TV सबसे ज्यादा बिजली खाता है?
सभी Smart TV एक जैसे नहीं होते. अलग-अलग डिस्प्ले टेक्नोलॉजी की वजह से उनकी बिजली खपत भी बदल जाती है.
OLED TV
OLED टीवी शानदार पिक्चर क्वालिटी देते हैं लेकिन इनकी बिजली खपत कई बार ज्यादा हो सकती है. खासकर जब स्क्रीन की ब्राइटनेस हाई हो. बड़े OLED मॉडल बिजली बिल बढ़ाने में आगे रहते हैं.
QLED TV
QLED टीवी ब्राइट और कलरफुल डिस्प्ले देते हैं. इनकी बिजली खपत OLED से थोड़ी कम हो सकती है लेकिन स्क्रीन साइज बड़ा होने पर खर्च बढ़ जाता है.
LED TV
सामान्य LED Smart TV सबसे ज्यादा बिजली बचाने वाले माने जाते हैं. छोटे और मिड-साइज LED टीवी कम पावर इस्तेमाल करते हैं और घरेलू इस्तेमाल के लिए बेहतर ऑप्शन साबित होते हैं.
कौन सा स्क्रीन साइज ज्यादा खर्च बढ़ाता है?
टीवी जितना बड़ा होगा बिजली की खपत उतनी ज्यादा होगी. उदाहरण के लिए:
32 इंच TV &amp;ndash; कम बिजली खपत
43 इंच TV &amp;ndash; मध्यम खपत
55 इंच और उससे बड़े TV &amp;ndash; ज्यादा बिजली खर्च
अगर आपका इस्तेमाल नॉर्मल है तो बहुत बड़ी स्क्रीन लेने से बिजली बिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.
बिजली बिल कम करने के आसान तरीके
Smart TV इस्तेमाल करते समय कुछ छोटी आदतें बिजली की बचत में मदद कर सकती हैं. टीवी की ब्राइटनेस जरूरत से ज्यादा न रखें. इस्तेमाल न होने पर TV को पूरी तरह बंद करें, सिर्फ रिमोट से स्टैंडबाय मोड में न छोड़ें. साथ ही पावर सेविंग मोड ऑन रखने से भी बिजली खपत कम होती है.
क्या Smart TV सच में बिजली बिल बढ़ाता है?
अगर घर में बड़ा 4K या OLED Smart TV लंबे समय तक चलता है तो बिजली बिल बढ़ना तय है. हालांकि सही स्क्रीन साइज, ऊर्जा बचाने वाली सेटिंग्स और सीमित इस्तेमाल से इसका असर काफी कम किया जा सकता है. इसलिए नया Smart TV खरीदते समय सिर्फ फीचर्स ही नहीं, उसकी बिजली खपत पर भी ध्यान देना जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:50 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>स्क्रीन देखते ही जलती हैं आंखें? फोन और लैपटॉप की ये 2 छुपी सेटिंग्स मिनटों में देंगी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ Tech Tips: आज के समय में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया या फिर देर रात तक वेब सीरीज देखना स्क्रीन से दूरी लगभग नामुमकिन हो गई है. लेकिन लगातार स्क्रीन देखने का असर सबसे पहले हमारी आंखों पर पड़ता है. कई लोगों को आंखों में जलन, पानी आना, सिरदर्द और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं होने लगती हैं.
अच्छी बात यह है कि आपके फोन और लैपटॉप में पहले से ही ऐसी कुछ सेटिंग्स मौजूद होती हैं जो आंखों पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम कर सकती हैं. हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोग इनके बारे में जानते ही नहीं हैं.
ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड करें ऑन
फोन और लैपटॉप स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. यही वजह है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने के बाद आंखों में जलन और थकान महसूस होने लगती है. इस समस्या से राहत पाने के लिए आप अपने डिवाइस में मौजूद ब्लू लाइट फिल्टर, नाइट लाइट या आई कम्फर्ट मोड जैसी सेटिंग्स को ऑन कर सकते हैं. यह फीचर स्क्रीन की तेज नीली रोशनी को कम करके उसे हल्का गर्म रंग देता है जिससे आंखों पर दबाव कम पड़ता है.
एंड्रॉयड फोन में यह सेटिंग अक्सर Display सेक्शन में मिल जाती है जबकि Windows लैपटॉप में Night Light नाम से उपलब्ध होती है. इसे शाम के समय ऑटोमैटिक ऑन होने के लिए भी सेट किया जा सकता है.
स्क्रीन ब्राइटनेस को ऑटो मोड पर रखें
कई लोग दिन और रात दोनों समय एक जैसी ब्राइटनेस पर फोन इस्तेमाल करते रहते हैं. यही आदत आंखों में जलन और दर्द की बड़ी वजह बन सकती है. अगर स्क्रीन जरूरत से ज्यादा तेज होगी तो आंखों को लगातार एडजस्ट करना पड़ता है जिससे थकान बढ़ती है. वहीं बहुत कम ब्राइटनेस भी आंखों पर असर डाल सकती है. इसलिए सबसे बेहतर तरीका है कि Adaptive Brightness या Auto Brightness फीचर को ऑन रखा जाए.
यह सेटिंग आसपास की रोशनी के हिसाब से स्क्रीन की चमक अपने आप कम या ज्यादा कर देती है. इससे आंखों को आराम मिलता है और बैटरी की भी बचत होती है.
सिर्फ सेटिंग्स नहीं ये आदतें भी जरूरी
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए केवल सेटिंग्स बदलना ही काफी नहीं है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हर 20 मिनट बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर दूर देखें. इसे 20-20-20 नियम कहा जाता है.
इसके अलावा अंधेरे कमरे में फोन इस्तेमाल करने से बचें और स्क्रीन को आंखों से बहुत करीब न रखें. अगर लगातार जलन या दर्द बना रहता है तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
छोटी सेटिंग्स, बड़ा आराम
अक्सर लोग आंखों की परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि फोन और लैपटॉप की छोटी-छोटी सेटिंग्स बड़ा फर्क ला सकती हैं. अगर आप भी लंबे समय तक स्क्रीन इस्तेमाल करते हैं तो आज ही इन दो फीचर्स को ऑन करें. इससे आपकी आंखों को राहत मिलेगी और स्क्रीन टाइम भी पहले से ज्यादा आरामदायक महसूस होगा.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:47 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब AirPods बनेंगे ‘कान के डॉक्टर’! Apple ने भारत में लॉन्च किया ऐसा फीचर, घर बैठे कर सकेंगे Hearing Test</title>
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        <description><![CDATA[ Apple AirPods: Apple ने भारत में अपने प्रीमियम ईयरबड्स के लिए एक बड़ा हेल्थ अपडेट जारी किया है. अब AirPods केवल गाने सुनने का साधन नहीं रहेंगे बल्कि ये यूजर्स की सुनने की क्षमता यानी Hearing Health पर भी नजर रखेंगे. कंपनी ने भारत में नया Hearing Test फीचर शुरू किया है जिसकी मदद से लोग घर बैठे कुछ ही मिनटों में अपनी सुनने की क्षमता की जांच कर सकेंगे.
घर बैठे सिर्फ 5 मिनट में होगा Hearing Test
Apple के अनुसार यह नया फीचर AirPods Pro 2 और उससे आगे के मॉडल्स में काम करेगा. इसके लिए डिवाइस में लेटेस्ट Firmware होना जरूरी है और उसे iOS 18 या iPadOS 18 वाले iPhone या iPad से कनेक्ट करना होगा.
कंपनी का कहना है कि पूरा टेस्ट लगभग पांच मिनट में पूरा हो जाता है और इसके लिए किसी क्लिनिक या अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यूजर आराम से घर पर बैठकर ही यह टेस्ट कर सकता है.
कैसे काम करेगा यह नया फीचर?
Hearing Test के दौरान यूजर को AirPods पहनने होंगे. इसके बाद दोनों कानों में अलग-अलग ऑडियो टोन सुनाई देंगे. जब भी कोई आवाज सुनाई देगी यूजर को उसका जवाब देना होगा.
टेस्ट पूरा होने के बाद सिस्टम एक डिटेल रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें दोनों कानों की Hearing Level, Hearing Loss की स्थिति, जरूरी सुझाव और Audiogram Chart शामिल होगा. यह चार्ट अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर सुनने की क्षमता को दिखाता है. यह सभी डेटा सुरक्षित तरीके से Apple Health App में सेव रहेगा. जरूरत पड़ने पर यूजर इसे डॉक्टर या हेल्थ एक्सपर्ट के साथ भी शेयर कर सकता है.
शुरुआती दौर में ही पकड़ में आएगी Hearing Problem
Apple का मानना है कि कई बार लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उनकी सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो रही है. ऐसे में यह फीचर शुरुआती स्टेज में ही समस्या की पहचान करने में मदद करेगा.
कंपनी की Health and Fitness टीम की वाइस प्रेसिडेंट ने कहा कि टेक्नोलॉजी का मकसद लोगों को अपनी हेल्थ पर बेहतर कंट्रोल देना होना चाहिए. इसी सोच के तहत यह फीचर तैयार किया गया है.
Hearing Aid की तरह भी काम करेंगे AirPods
इस अपडेट के बाद AirPods Pro हल्की या मध्यम Hearing Loss वाले लोगों के लिए Hearing Assistance डिवाइस की तरह भी काम कर सकेंगे. टेस्ट के दौरान बने पर्सनल Hearing Profile के आधार पर AirPods आसपास की आवाजों और बातचीत को रियल टाइम में ज्यादा साफ और तेज सुनाने में मदद करेंगे. इससे रोजमर्रा की बातचीत समझना आसान हो सकता है.
कई सालों की रिसर्च के बाद तैयार हुआ फीचर
Apple के मुताबिक कंपनी पिछले कई वर्षों से Hearing Health टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है. शुरुआत में Connected Headphones के जरिए सही रिजल्ट हासिल करने में दिक्कतें आती थीं क्योंकि आसपास का शोर और हार्डवेयर क्वालिटी बड़ी चुनौती थी. हालांकि अब AirPods के बेहतर हार्डवेयर और Noise Isolation तकनीक की मदद से कंपनी ज्यादा भरोसेमंद और क्लिनिकल स्तर के करीब परिणाम देने का दावा कर रही है.
Apple अब हेल्थ टेक्नोलॉजी पर दे रहा बड़ा फोकस
यह अपडेट दिखाता है कि Apple अब अपने डिवाइसेज को सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं बल्कि हेल्थ कंपेनियन के रूप में पेश करना चाहता है. Hearing फीचर्स के अलावा कंपनी ने भारत में Apple Watch यूजर्स के लिए Sleep Apnoea Notification फीचर भी शुरू किया है. यह फीचर सोते समय सांस रुकने जैसी समस्याओं के संकेत पहचानने में मदद करेगा.
Apple Watch में मौजूद सेंसर और Accelerometer सोते समय शरीर की हलचल और Breathing Pattern को ट्रैक करके संभावित समस्या का पता लगाने की कोशिश करेंगे.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:44 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सैमसंग के हाथ लगी बड़ी कामयाबी, इस मामले में ऐप्पल को छोड़ दिया पीछे</title>
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        <description><![CDATA[ Samsung Overtakes Apple: इस साल की शुरुआत में सैमसंग को पीछे छोड़कर ऐप्पल दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी बनी थी. अब दक्षिण कोरियाई दिग्गज सैमसंग ने एक अलग मामले में ऐप्पल को पछाड़ दिया है. अमेरिकन कस्टमर सेटिस्फेक्शन इंडेक्स की नई स्टडी के मुताबिक, कस्टमर सेटिस्फेक्शन के मामले में सैमसंग ऐप्पल से आगे निकल गई है. मोबाइल फोन को लेकर सैमसंग के यूजर ऐप्पल यूजर्स से ज्यादा सेटिस्फाई हैं. हालांकि, अमेरिकी टेक दिग्गज भी इस लिस्ट में ज्यादा पीछे नहीं है.
दोनों कंपनियों के बीच मामूली अंतर
इंडेक्स की नई सेलफोन रैंकिंग में 81 अंकों के साथ सैमसंग सबसे आगे बनी हुई है, जबकि 80 अंकों के साथ ऐप्पल दूसरे स्थान पर है. पिछले साल दोनों कंपनियों के बीच मुकाबला टाई रहा था. अगर ओवरऑल फोन इंडस्ट्री का स्कोर देखें तो यह एक प्रतिशत बढ़कर 79 प्रतिशत हो गया है. 2025 में इसमें 4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई थी और यह एक दशक में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था.
यूजर सेटिस्फेक्शन का क्या मतलब?
रिपोर्ट के मुताबिक, जब फोन में मिलने वाले नए फीचर बिना किसी दिकक्त के यूजर्स की डेली लाइफ में काम आने लगे तो सेटिस्फेक्शन बढ़ती है. इस बार रैंकिंग में पहली बार एआई फीचर्स को भी शामिल किया गया है और इसे 85 स्कोर मिला है. इसका मतलब है कि यूजर्स को न सिर्फ एआई फीचर्स के बारे में जानकारी है बल्कि वो उन्हें अपने कामों के लिए यूज भी कर रहे हैं.
इन मॉडल्स से यूजर्स सबसे ज्यादा खुश
नए मॉडल्स की बात करें तो सैमसंग की लेटेस्ट गैलेक्सी एस26 सीरीज मॉडल्स के ऑनर 84 अंकों के साथ सबसे ज्यादा संतुष्ट पाए गए. इसके बाद 82 अंकों के साथ नए आईफोन यूजर दूसरे और गूगल के फ्लैगशिप मॉडल यूज करने वाले लोग 80 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. रैंकिंग के अनुसार, लोग पुराने और फोल्डेबल फोन की तुलना में नए फ्लैगशिप मॉडल्स से ज्यादा खुश हैं.
फोल्डेबल सेगमेंट में सैमसंग आगे, लेकिन ऐप्पल पर भी नजर
इस रिपोर्ट के मुताबिक, फोल्डेबल फोन सेगमेंट में भी सैमसंग सबसे आगे है और उसे रैंकिंग में 80 नंबर मिले हैं. इसके बाद 72 प्वाइंट के साथ गूगल दूसरे और मोटोरोला 70 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर मौजूद है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप्पल की इस सेगमेंट में एंट्री के बाद डायनामिक्स पूरी तरह बदल सकते हैं. बता दें कि ऐप्पल इस साल सितंबर में iPhone Ultra नाम से अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करने जा रही है.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सैमसंग, के, हाथ, लगी, बड़ी, कामयाबी, इस, मामले, में, ऐप्पल, को, छोड़, दिया, पीछे</media:keywords>
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        <title>पूरा दिन गेमिंग करने से भी डिस्चार्ज नहीं होगी बैटरी, इस सेटिंग के ऑन करते ही हो जाएगा कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ Bypass Charging: गेमिंग हो स्ट्रीमिंग, फोन की बैटरी कुछ ही घंटो में डिस्चार्ज हो जाती है. इस कारण फोन को बार-बार चार्जिंग पर डालना पड़ता है. अगर आप इस झंझट से परेशान हैं तो एक जरूरी सेटिंग आपके काम आ सकती है. दरअसल, कई मॉडर्न फोन में बाइपास चार्जिंग का ऑप्शन मिलता है. इसका मतलब है कि आपका फोन बैटरी से पावर न लेकर सीधे एडेप्टर से पावर लेगा. इस तरह आप सुबह से शाम तक गेमिंग और स्ट्रीमिंग कर सकते हैं और इससे बैटरी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. न तो आपको बैटरी डिस्चार्ज होने की टेंशन रहेगी और न ही चार्ज पर लगाने के कारण गेम प्रोग्रेस लॉस्ट होने की. आइए जानते हैं कि बाइपास चार्जिंग क्या है और इसके क्या फायदे हैं.
Bypass Charging का क्या मतलब?
जैसा नाम से ही जाहिर है, इस चार्जिंग मेथड में बैटरी को बाइपास कर दिया जाता है. यानी पावर लेने के लिए फोन बैटरी को यूज नहीं करता है. यह सीधा चार्जिंग एडेप्टर से ही पावर लेकर फोन को ऑपरेट करता है. इसमें फोन उतनी ही पावर ड्रॉ करता है, जितनी प्रोसेसर, डिस्प्ले और अन्य कंपोनेंट्स के लिए जरूरी है. अगर फोन चार्जिंग पर लगा है तो इसके कंपोनेंट्स बैटरी को छोड़कर सीधे एडेप्टर से पावर ले लेंगे. जैसे ही एडेप्टर बंद हो जाएगा, बैटरी अपना काम करना शुरू कर देगी.
इन बातों का रखना होगा ध्यान
गेमिंग और स्ट्रीमिंग के अलावा दूसरी ऐप्स के लिए भी बाइपास चार्जिंग को यूज किया जा सकता है. हालांकि, आमतौर पर लोग उन कामों के लिए इस तरीके को ज्यादा यूज करते हैं, जिनमें बैटरी की खपत ज्यादा होती है. बाइपास चार्जिंग के लिए चार्जर कंपैटिबल होना बहुत जरूरी है और बैटरी के कम से कम 20 प्रतिशत चार्ज होने के बाद ही इस मोड को ऑन करना चाहिए. फोन की चार्जिंग सेटिंग में जाकर इस फीचर को ऑन किया जा सकता है. बता दें कि अभी यह फीचर सेलेक्टेड फोन में ही मौजूद है और इस पर कई लिमिटेशन भी है.&amp;nbsp;
क्या इससे फोन ओवरहीट नहीं होता?
बाइपास चार्जिंग को लेकर एक डर ओवरहीटिंग का बना रहता है. अगर आपको भी यह चिंता है तो बता दें कि बाइपास चार्जिंग से फोन हीट नहीं होता. इसमें बैटरी की भूमिका लगभग खत्म हो जाती है. इसलिए इसमें हीट जनरेट नहीं होती और घंटों तक फोन यूज किया जा सकता है. इस प्रोसेस से बैटरी पर लोड कम हो जाता है, जो बैटरी लाइफ को बढ़ाने में मदद करता है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>कम सोलर पैनल से बनेगी ज्यादा बिजली, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला नया तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ High Efficiency Solar Panel: सोलर पावर इस समय दुनिया के लिए क्लीन एनर्जी का सबसे जरूरी सोर्स बना हुआ है. इसे ज्यादा से ज्यादा यूटिलाइज करने के लिए साइंटिस्ट लगातार सोलर पैनल को एफिशिएंट और किफायती बनाने में जुटे हुए हैं. इस दिशा में perovskite&amp;ndash;silicon tandem solar cell टेक्नोलॉजी को सबसे कारगर माना जा रहा है. इसमें अलग-अलग लाइट एब्जॉर्बिंग मैटेरियल मिलकर सनलाइट से ज्यादा एनर्जी कैप्चर कर लेते हैं. ये सिलिकॉन सोलर पैनल के मुकाबले काफी एफिशिएंट माने जाते हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका ढूंढा है, जिससे इनका मास लेवल प्रोडक्शन आसान हो जाएगा.&amp;nbsp;
कैसे काम करते हैं ये पैनल?
Perovskite&amp;ndash;silicon tandem cells सनलाइट को अलग-अलग एनर्जी रेंज में डिवाइड कर लेती हैं. perovskite से बनी टॉप लेयर हाई-एनर्जी वाली ब्लू और अल्ट्रा वायलेट लाइट को सोख लेती है, जबकि इसके नीचे लगी सिलिकॉन लेयर कम एनर्जी वाली रेड और इंफ्रारेड लाइट को सोखती है. इस तरह ये दोनों लेयर मिलकर ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस कर पाती हैं. बेशक इनकी एफिशिएंसी ज्यादा है, लेकिन इन्हें बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चर करना काफी मुश्किल रहा है और सबसे बड़ी दिक्कत सिलिकॉल सरफेस को perovskite की एकदम पतली लेयर से कोट करने में इसमें लगने वाले समय को लेकर आई है.
साइंटिस्ट ने निकाल लिया नया तरीका
मैन्युफैक्चरिंग में आने वाली दिक्कत को दूर करने के लिए साइंटिस्ट ने नया तरीका निकाल लिया है. उन्होंने क्लोज-स्पेस सबलिमेशन की प्रोसेस को इंप्रूव किया है. इसमें सॉलिड प्रीकर्सर मैटेरियल को तब तक गर्म किया जाता है, जब तक वह भाप नहीं बन जाता. भाप बनने के बाद यह थोड़ी ही दूर लगे सिलिकॉन सरफेस पर जाकर चिपक जाता है. यहां केमिकल रिएक्शन कर यह perovskite की लेयर बना लेता है. इस प्रोसेस में लिक्विड सॉल्वेंट की जरूरत नहीं पड़ती. यह प्रोसेस एकदम क्लीन और किफायती भी है.
प्रोसेस में लगने वाला समय भी हुआ कम
रिसर्चर ने बताया कि यह प्रोसेस काफी तेज है और इसकी रफ्तार ने उन्हें भी चौंका दिया. perovskite लेयर को पूरी तरह बनने में सिर्फ 10 मिनट का समय लगा, जो इस टेक्निक के लिए बड़ी सफलता है. साथ ही यह प्रोसेसर सिलिकॉन के अलग-अलग सरफेस जैसे स्मूद, नैनो-टेक्सचर्ड और माइक्रो टेक्सचर्ज समेत सब पर काम कर सकती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सेल्स की एफिशिएंसी 34 प्रतिशत तक जा सकती है, जो आज मार्केट में कमर्शियली मौजूद पैनल के मुकाबले बहुत ज्यादा है. इसका फायदा यह होगा कि कम पैनल से ज्यादा एनर्जी जनरेट की जा सकेगी.&amp;nbsp;
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&#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; पर बड़ा एक्शन, भारत में बंद हुआ &#039;X&#039; अकाउंट ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Cockroach Janata Party: कॉकरोच इज बैक... पहले अकाउंट पर रोक के बाद की दमदार वापसी, 1 घंटे में 25 हजार फॉलोअर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Cockroach Janata Party: सोशल मीडिया पर तहलका मचाने वाले &amp;nbsp;&#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; (CJP) के संस्थापक ने इंटरनेट पर अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है. भारतीय सरकार के कानूनी आदेश के बाद माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; (पहले ट्विटर) ने इस ग्रुप के मेन अकाउंट को देश में ब्लॉक कर दिया था. इस डिजिटल कार्रवाई के तुरंत बाद इसके क्रिएटर ने &#039;कॉकरोच इज बैक&#039; (@Cockroachisback) नाम से एक नया हैंडल एक्टिव कर लिया है.
&#039;कॉकरोच कभी मरते नहीं&#039; के नारे से वापसी
नए अकाउंट के प्रोफाइल बायो में एक बेहद दिलचस्प और कड़ा संदेश लिखा गया है- &quot;कॉकरोचेस डोंट डाई!&quot; (कॉकरोच कभी मरते नहीं). इस मुहिम के पीछे मुख्य दिमाग माने जाने वाले पॉलिटिकल स्ट्रेटजिस्ट अभिजीत दीपके ने यह कदम तब उठाया, जब भारत सरकार के निर्देश का पालन करते हुए &#039;एक्स&#039; ने आंदोलन के मुख्य हैंडल (@CJP_2029) को देश के अंदर पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था. सरकार के इस एक्शन के कुछ ही घंटों के भीतर इस डिजिटल ग्रुप ने नया प्लेटफॉर्म तैयार कर अपनी मौजूदगी दोबारा दर्ज करा दी.
बीजेपी और कांग्रेस को दी थी कड़ी टक्कर
सरकार की इस कानूनी कार्रवाई से ठीक पहले इस ग्रुप ने सोशल मीडिया की दुनिया में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया था. इंस्टाग्राम पर &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; के अचानक लगभग 14 मिलियन (1.4 करोड़) फॉलोअर्स हो गए थे. फॉलोअर्स के इस विशाल आंकड़े के साथ इस पेज ने देश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी (BJP) के आधिकारिक हैंडल को भी पीछे छोड़ दिया था और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (INC) के बराबर आ खड़ा हुआ था. खबर लिखे जाने तक Cockroach is Back के एक घंटे में एक्स पर 25 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. इसे बनाने वाले सूत्रधार अभिजीत दीपके ने अपने निजी प्रोफाइल से एक्स अकाउंट के ब्लॉक होने की जानकारी दी थी. लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने बैकअप के तौर पर एक नया हैंडल बना दिया.
यह भी पढ़ें: &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; पर बड़ा एक्शन, भारत में बंद हुआ &#039;X&#039; अकाउंट
चीफ जस्टिस के बयान से शुरू हुआ पूरा विवाद
इंटरनेट पर तूफान खड़ा करने वाली इस &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; (CJP) का गठन 16 मई को हुआ था. दरअसल, यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा की गई एक तल्ख टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ था. फर्जी डिग्री के एक मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने डिजिटल एक्टिविज्म (इंटरनेट पर सक्रियता) से जुड़े कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में &#039;कॉकरोच&#039; शब्द का इस्तेमाल किया था.
बयान पर दी सफाई पर युवाओं का गुस्सा
हालांकि, विवाद बढ़ता देख मुख्य न्यायाधीश ने बाद में इस पर सफाई भी दी थी. उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और उनकी टिप्पणी सिर्फ फर्जी डिग्री के सहारे काम करने वाले धोखेबाज पेशेवरों के खिलाफ थी. इसके बावजूद, देश के नाराज और हताश युवाओं ने इस शब्द को सरकार और व्यवस्था के खिलाफ एक बड़े हथियार में बदल दिया. खुद को &amp;lsquo;आलसी और बेरोजगारों की आवाज&amp;rsquo; बताने वाले इस व्यंग्यात्मक मंच को उन युवाओं का भारी समर्थन मिला, जो नौकरी की कमी और बार-बार होने वाले पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.&amp;nbsp;
कॉकरोच जनता पार्टी ने जारी किया घोषणा पत्र
इस अनोखे आंदोलन ने सोशल मीडिया पर काफी आक्रामक रुख अपना रखा है और अपना एक 5 सूत्रीय घोषणापत्र (मैनिफेस्टो) भी जारी किया है. इस घोषणापत्र के जरिए न्यायपालिका में पूरी पारदर्शिता लाने और जजों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले राजनीतिक फायदों व पदों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है. इस मुहिम की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक इंटरनेट के जरिए 3,50,000 (साढ़े तीन लाख) से अधिक लोग इस पार्टी के आधिकारिक सदस्य के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं.
यह भी पढ़ें: 25000 से आगाज और 4 दिन में 14 मिलियन पार, इंस्टाग्राम पर BJP को &#039;पंजा&#039; मारकर आगे निकली Cockroach Janata Party ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>25000 से आगाज और 4 दिन में 14 मिलियन पार, इंस्टाग्राम पर BJP को &amp;apos;पंजा&amp;apos; मारकर आगे निकली Cockroach Janata Party</title>
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        <description><![CDATA[ Cockroach Janata Party: खुद को आलसी और बेरोजगार लोगों की आवाज बताने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है. हालांकि, आज सुबह भारत में CJP के एक्स अकाउंट को बंद कर दिया गया, लेकिन इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोवर्स तेजी से बढ़ रहे हैं. इंस्टाग्राम पर CJP के फॉलोवर्स की संख्या 14 मिलियन से भी पार हो गई है. 16 मई की रात को शुरू होने वाले इस कैंपेन ने 4-5 दिनों में ही इंस्टाग्राम फॉलोवर्स के मामले में दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत कई पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है. आइए जानते हैं कि इस कैंपेन की शुरुआत कैसे हुई और कैसे लोग इससे जुड़ते चले गए.
16 मई से हुई शुरुआत
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने एक बयान में बेरोजगारी युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी. हालांकि, बाद में उन्होंने इस पर सफाई भी दी, लेकिन यहीं से एक नए सोशल मीडिया कैंपेन की शुरुआत हो गई. 16 मई को बॉस्टन यूनिवर्सटी में पढ़ने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा कि वो कॉकरोच के लिए एक नए प्लेटफॉर्म की शुरुआत कर रहे हैं. इसी के साथ CJP की शुरुआत हुई और देखते ही देखते इसके साथ लोगों के जुड़ने का सफर भी शुरू हो गया.&amp;nbsp;
कौन हैं अभिजीत दीपके?
CJP के फाउंडर 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं और उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की है. इसके बाद वे हायर स्टडी के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने मशहूर बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. दीपके पेशे से एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटजिस्ट हैं, जो राजनीतिक दलों के लिए डिजिटल स्ट्रैटजी तैयार करते हैं. वो आम आदमी पार्टी के साथ भी कुछ समय तक काम कर चुके हैं.
बड़ी-बड़ी पार्टियों को छोड़ा पीछे
CJP ने इंस्टाग्राम पर बड़ी-बड़ी पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है. खबर लिखे जाने तक CJP के इंस्टाग्राम फॉलोवर्स की संख्या 14.2 मिलियन थी. BJP के 8.8 मिलियन, कांग्रेस के 13.3 मिलियन, आम आदमी पार्टी के 1.9 मिलियन और समाजवादी पार्टी के 870K फॉलोवर्स हैं. इस तरह CJP सबको पछाड़ते हुए आगे निकल चुकी है.&amp;nbsp;
कैसे जुड़ते गए लोग?
इंटरनेट पर युवा लोग CJP के साथ जुड़ रहे हैं. इसके अलावा कई नेता और सेलिब्रिटी भी इस कैंपेन को फॉलो कर रहे हैं. इनमें अनुराग कश्यप, दीया मिर्जा, विशाल डडलानी, कोंकणा सेना, ईशा गुप्ता आदि शामिल हैं. इनके अलावा कई इंफ्लुएंसर्स भी फॉलोवर लिस्ट में शामिल हैं.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Cockroach Janta Party: X पर Withheld और Suspend में क्या होता है अंतर, कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ रहा इसका कनेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Cockroach Janta Party: इंस्टाग्राम पर पिछले कुछ दिनों से &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; लगातार छाई हुई है. CJI सूर्यकांत के एक बयान से जन्मी इस पार्टी&#039; ने महज 4 दिन में बीजेपी और कांग्रेस जैसी दिग्गज पॉलिटिकल पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है और इसके 14 मिलियन फॉलोअर्स हो गए हैं. जेन Z में बढ़ते क्रेज के बीच &#039;कॉकरोच जनता पार्टी&#039; के &#039;एक्स&#039; अकाउंट को भारत में बैन (Withheld) कर दिया गया.
हालांकि, कुछ ही देर बाद एक्स पर &#039;कॉकरोच इज बैक&#039; नाम से नया पेज क्रिएट हो गया. ऐसे में बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;X&#039; पर Withheld और Suspend क्या होता है? कब कोई अकाउंट Withheld किया जाता है और कब Suspend ? और इसको लेकर नियम क्या हैं? चलिए जानते हैं...&amp;nbsp;
एक्स पर &#039;Suspend&#039; क्या होता है?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#039;एक्स&#039; कोई अकाउंट Suspend तब होता है जब &#039;X&#039; खुद किसी अकाउंट को नियम या शर्तों का उल्लंघन करते हुए पाता है. ऐसे में कंपनी द्वारा ही इस अकाउंट को स्थाई या अस्थाई तौर पर निलंबित कर दिया जाता है. यह फैसला पूरी तरह से &#039;X&#039; का अपना होता है. ऐसे अकाउंट्स पर स्पैम या फर्जी अकाउंट चलाने, नफरत फैलाने, हिंसा भड़काने या बाल सुरक्षा और कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई होती है.&amp;nbsp; बार-बार नियम तोड़ने पर परमानेंट सस्पेंशन भी हो सकता है. सस्पेंड होने पर प्रोफाइल पर लिखा आता है अकाउंट सस्पेंड, जिसके बाद यह अकाउंट दुनिया में कहीं से भी किसी को नहीं दिखता.
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एक्स पर &#039;Withheld&#039; क्या होता है?
Withheld एक देश-विशेष प्रतिबंध है. जब किसी देश की सरकार या अदालत &#039;X&#039; कानूनी आदेश देती है, तब X उस अकाउंट या ट्वीट को सिर्फ उसी देश में रोक दिया जाता है, बाकी पूरी दुनिया में अकाउंट वैसे ही चलता रहता है. जहां तक भारत की बात है तो IT Act की धारा 69A के तहत सरकार या अदालत &#039;X&#039; को नोटिस भेजती है. &#039;X&#039; उस आदेश को मानता है और अकाउंट सिर्फ भारत में बंद कर देता है बाकी दुनिया में वह अकाउंट पहले की तरह चलता रहता है.&amp;nbsp; जिस यूज़र का अकाउंट Withheld होता है, उसकी प्रोफाइल पर भारत में यह संदेश दिखता है &#039;अकाउंट विदहेल्ड इन इंडिया इन रिस्पांस तो ए लीगल डिमांड&#039;
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 21:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Cockroach, Janta, Party:, पर, Withheld, और, Suspend, में, क्या, होता, है, अंतर, कॉकरोच, जनता, पार्टी, से, जुड़, रहा, इसका, कनेक्शन</media:keywords>
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        <title>जेब में फट सकता है आपका Smartphone! गर्मी में Phone Cover में रखी ये 5 चीजें बना सकती हैं चलता&amp;फिरता बम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/जेब-में-फट-सकता-है-आपका-smartphone-गर्मी-में-phone-cover-में-रखी-ये-5-चीजें-बना-सकती-हैं-चलता-फिरता-बम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/जेब-में-फट-सकता-है-आपका-smartphone-गर्मी-में-phone-cover-में-रखी-ये-5-चीजें-बना-सकती-हैं-चलता-फिरता-बम</guid>
        <description><![CDATA[ Tech Tips: गर्मी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच अगर आप अपने फोन कवर में कुछ गलत चीजें रख रहे हैं तो आपका स्मार्टफोन ओवरहीट होकर खराब भी हो सकता है. कई मामलों में बैटरी फूलने, फोन गर्म होकर बंद होने और यहां तक कि ब्लास्ट होने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं.
अक्सर लोग सुविधा के लिए फोन कवर के अंदर नोट, कार्ड या दूसरी छोटी चीजें रख लेते हैं लेकिन यही आदत गर्मियों में बड़ा खतरा बन सकती है. आइए जानते हैं वे 5 चीजें जिन्हें भूलकर भी फोन कवर में नहीं रखना चाहिए.
नकद पैसे और कागज
बहुत से लोग फोन कवर के पीछे पैसे या बिल दबाकर रखते हैं. लेकिन कागज गर्मी को रोकता है और फोन से निकलने वाली हीट बाहर नहीं निकल पाती. इससे डिवाइस तेजी से गर्म होने लगता है. लगातार ओवरहीटिंग बैटरी पर दबाव डालती है जिससे फोन की लाइफ कम हो सकती है.
एटीएम और क्रेडिट कार्ड
फोन कवर में कार्ड रखना आजकल आम बात हो गई है. लेकिन स्मार्टफोन लगातार गर्म होता रहता है और ज्यादा तापमान कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप या चिप को नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार इससे कार्ड काम करना बंद कर देते हैं. साथ ही मोटा कवर फोन की कूलिंग को भी प्रभावित करता है.
धातु की चीजें या चाबी
कुछ लोग फोन कवर में छोटी चाबी, सिम पिन या धातु की पतली चीजें रख लेते हैं. यह बेहद खतरनाक हो सकता है. धातु गर्मी को तेजी से बढ़ाती है और अगर वह चार्जिंग पोर्ट या बैटरी एरिया के संपर्क में आ जाए तो शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ सकता है.
पुरानी रसीदें और प्लास्टिक पेपर
रसीदें या प्लास्टिक कार्ड जैसी चीजें फोन के पीछे एयरफ्लो रोक देती हैं. गर्मी के मौसम में फोन को पहले ही ज्यादा कूलिंग की जरूरत होती है. ऐसे में बंद जगह में हीट फंसने लगती है और फोन जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है. लगातार ऐसा होने पर बैटरी फूल सकती है.
मोटा और सस्ता Phone Cover
सिर्फ कवर के अंदर रखी चीजें ही नहीं बल्कि खराब क्वालिटी का कवर भी खतरा बढ़ा सकता है. मोटे और सस्ते प्लास्टिक कवर गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते. खासकर गेमिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग या फास्ट चार्जिंग के दौरान फोन तेजी से गर्म होता है. ऐसे में हीट फंसने से फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
गर्मी में Smartphone को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
गर्मी के मौसम में फोन को सीधे धूप में रखने से बचें. चार्जिंग के दौरान गेमिंग या भारी ऐप्स का इस्तेमाल न करें. अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म लगे तो तुरंत कवर हटाकर उसे कुछ देर ठंडा होने दें. साथ ही हमेशा अच्छी क्वालिटी का पतला और हीट-रेसिस्टेंट कवर इस्तेमाल करें. थोड़ी सी लापरवाही आपका महंगा स्मार्टफोन खराब कर सकती है. इसलिए आज ही अपने फोन कवर की जांच करें और इन चीजों को तुरंत बाहर निकाल दें.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Solar Rooftop vs Solar Panels: दोनों में कितना अंतर और क्या हैं फायदे&amp;नुकसान? यहां जानें सारी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Solar Rooftop Vs Solar Panels: पिछले कुछ सालों से सोलर एनर्जी की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है और यही वजह है कि अब गांव हो या शहर, हर जगह सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. घरों के साथ-साथ लोग कमर्शियल जरूरतों के लिए भी सोलर पावर यूज कर रहे हैं. अगर आप भी सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने की सोच रहे हैं तो इसके लिए बाजार में दो तरह के ऑप्शन मौजूद हैं. आप सोलर पैनल के अलावा सोलर रूफ टाइल्स को भी सेलेक्ट कर सकते हैं. आज हम आपको इन दोनों के बीच के अंतर और फायदे-नुकसान के बारे में बताएंगे.
सोलर रूफ टाइल्स क्या होती हैं?
इन्हें सोलर टाइल्स भी कहा जाता है. ये छत पर लगाने में यूज होने वाली टाइल्स होती हैं, जिनमें फोटोवॉल्टिक (PV) सेल्स लगी होती हैं. सोलर पैनल की तरह ही सनलाइट से ही पावर जनरेट करती हैं. सोलर टाइल्स को फर्श में ही लगा दिया जाता है. इससे फर्श की सुंदरता भी बढ़ती है और इसके लिए पैनल की तरह अलग से स्पेस की जरूरत नहीं पड़ती. यानी ये टाइल्स आपकी बिल्डिंग को प्रोटेक्ट करने के साथ-साथ सोलर पावर भी प्रोड्यूस करेंगी.
फायदे

ये फर्श के डिजाइन में ही इंटीग्रेट हो जाती है, जिससे फर्श की सुंदरता बढ़ती है.
इनमें यूज होने वाला मैटेरियल काफी ड्यूरेबल होता है, जिससे ये सालों-साल चलती हैं.
इन्हें यूज करने के लिए पैनल की तरह अतिरिक्त स्पेस नहीं चाहिए. ये कम स्पेस वाले घरों पर खूब काम आ सकती हैं.

नुकसान

इनकी अपफ्रंट कॉस्ट पैनल से ज्यादा है. यानी इन्हें लगाने के लिए पैनल से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा.
पुराने घरों पर इन्हें लगाना थोड़ा मुश्किल होता है और इनके इंस्टॉलेशन में टाइम भी ज्यादा लगता है.
इनकी एफिशिएंसी सोलर पैनल के मुकाबले काफी कम है.&amp;nbsp;

सोलर पैनल
सोलर पैनल सोलर एनर्जी टेक्नोलॉजी की सबसे कॉमन फॉर्म है. ये इंडिविजुअल सोलर सेल्स से बने होते हैं, जो सनलाइट को बिजली में बदल देते हैं. इन्हें छत या स्टैंड लगाकर माउंट किया जाता है. इन्हें अलग-अलग साइज और कॉन्फिगरेशन में खरीदा जा सकता है. इन्हें किसी भी तरह की छत पर लगाया जा सकता है. मार्केट में इनके बहुत ऑप्शन है और ज्यादा एक्सेसिबल हैं.
फायदे&amp;nbsp;

सोलर पैनल सालों से यूज हो रहे हैं. इस तरह यह एक प्रूवन टेक्नोलॉजी है और अलग-अलग कीमत पर इसके कई तरह के ऑप्शन अवेलेबल हैं.
सोलर पैनल की एफिशिएंसी ज्यादा होती है. इस कारण घरों से लेकर बिजनेसेस तक की एनर्जी नीड्स के लिए इन्हें यूज किया जा रहा है.
इसे इंस्टॉल करने की लागत कम है और इसमें समय भी कम लगता है.&amp;nbsp;

नुकसान

इन्हें छत के ऊपर लगाना पड़ता है और ये दूर से नजर आते हैं. इससे बिल्डिंग का एस्थेटिक खराब हो सकता है.
सोलर पैनल माउंट करने के लिए स्ट्रक्चर बनानी पड़ती है, जिसके लिए काफी स्पेस चाहिए.
इन्हें समय-समय पर सफाई और मैंटेनेंस की जरूरत पड़ती है.

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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>mAadhaar ऐप होने जा रहा बंद! जानिए नए Aadhaar App पर कैसे करें शिफ्ट, वरना बाद में पड़ेगा पछताना</title>
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        <description><![CDATA[ Aadhaar App: भारत में आधार सेवाओं को संभालने वाली संस्था Unique Identification Authority of India यानी UIDAI ने साफ कर दिया है कि पुराना mAadhaar ऐप जल्द बंद होने वाला है. इसकी जगह अब नया Aadhaar App लाया गया है जिसे पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और आसान बताया जा रहा है. UIDAI ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर जानकारी देते हुए कहा कि नया प्लेटफॉर्म यूजर्स को स्मार्ट, फास्ट और ज्यादा सिक्योर डिजिटल अनुभव देगा. नया ऐप अब Android और iPhone दोनों के लिए उपलब्ध है.
नए Aadhaar App में क्या मिलेगा खास?
नए Aadhaar App में कई ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं जो यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को पहले से बेहतर बनाते हैं. सबसे बड़ा बदलाव QR Code आधारित Aadhaar शेयरिंग फीचर है. इसकी मदद से यूजर बिना पूरा आधार नंबर दिखाए अपनी पहचान वेरिफाई कर सकते हैं.
ऐप में Selective Share नाम का नया विकल्प भी दिया गया है. इसके जरिए यूजर तय कर सकते हैं कि वेरिफिकेशन के दौरान कौन-सी जानकारी शेयर करनी है और कौन-सी छिपानी है. इससे डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों बेहतर होती हैं.
इसके अलावा ऐप ऑफलाइन QR वेरिफिकेशन को भी सपोर्ट करता है. यानी इंटरनेट के बिना भी अधिकृत टर्मिनल पर QR स्कैन करके पहचान सत्यापित की जा सकेगी. UIDAI के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म 13 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है ताकि अलग-अलग राज्यों के लोगों को इस्तेमाल में आसानी हो.
बायोमेट्रिक लॉक से बढ़ेगी सुरक्षा
नए ऐप में बायोमेट्रिक लॉक फीचर भी दिया गया है. यूजर अब सीधे ऐप के जरिए फिंगरप्रिंट, फेस और आइरिस ऑथेंटिकेशन को लॉक कर सकते हैं ताकि किसी तरह के गलत इस्तेमाल से बचा जा सके. जरूरत पड़ने पर यही लॉक बाद में ऐप के माध्यम से हटाया भी जा सकता है.
एक ऐप में जोड़ सकेंगे परिवार के सदस्य
Aadhaar App में फैमिली प्रोफाइल फीचर भी जोड़ा गया है. इसके तहत एक अकाउंट में अधिकतम 5 परिवार के सदस्यों को जोड़ा जा सकता है. इससे एक ही जगह से कई आधार प्रोफाइल मैनेज करना आसान हो जाएगा. हालांकि UIDAI ने चेतावनी दी है कि अगर लिंक मोबाइल नंबर या डिवाइस का एक्सेस खो जाता है तो कुछ समय के लिए आधार सेवाओं तक पहुंच रुक सकती है.
नए Aadhaar App को कैसे करें सेटअप?
सबसे पहले Google Play Store या Apple App Store से नया Aadhaar App डाउनलोड करें. इसके बाद ऐप खोलकर अपनी पसंदीदा भाषा चुनें. अब आधार से लिंक मोबाइल नंबर या किसी दूसरे नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करें. फिर अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें और OTP वेरिफिकेशन पूरा करें. इसके बाद सही रोशनी में फेस ऑथेंटिकेशन करना होगा. आखिर में 6 अंकों का ऐप पासवर्ड बनाकर सेटअप पूरा किया जा सकता है.
पुराने mAadhaar यूजर्स को क्या करना होगा?
UIDAI ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि पुराने mAadhaar ऐप का डेटा अपने-आप नए ऐप में ट्रांसफर होगा या नहीं. ऐसे में संभावना है कि मौजूदा यूजर्स को नए ऐप में प्रोफाइल दोबारा मैन्युअली सेट करनी पड़ सकती है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>mAadhaar, ऐप, होने, जा, रहा, बंद, जानिए, नए, Aadhaar, App, पर, कैसे, करें, शिफ्ट, वरना, बाद, में, पड़ेगा, पछताना</media:keywords>
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        <title>iPhone 16 Pro Vs Galaxy S24 Ultra: 2026 में कौन&amp;सा फ्लैगशिप फोन है आपके लिए बेस्ट? कंपैरिजन से समझें</title>
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        <description><![CDATA[ iPhone 16 Pro Vs Samsung Galaxy S24 Ultra: स्मार्टफोन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और RAM समेत कई कंपोनेंट्स महंगे होते जा रहे हैं. ऐसे में अब लोग हर साल नया फोन खरीदने से पहले कई बार सोच रहे हैं. यही वजह है कि पुराने फ्लैगशिप स्मार्टफोन भी 2026 में काफी आकर्षक विकल्प बन चुके हैं.
ऐसे ही दो प्रीमियम फोन हैं Apple iPhone 16 Pro और Samsung Galaxy S24 Ultra. दोनों डिवाइस एक साल से ज्यादा पुराने होने के बावजूद शानदार कैमरा, दमदार परफॉर्मेंस और प्रीमियम डिजाइन के साथ आज भी टॉप फ्लैगशिप एक्सपीरियंस देते हैं. आइिए जानते हैं कि 2026 में इनमें से कौन-सा फोन खरीदना ज्यादा समझदारी होगी.
डिजाइन और डिस्प्ले
Apple iPhone 16 Pro में 6.3 इंच का LTPO Super Retina XDR OLED डिस्प्ले मिलता है. फोन का डिजाइन कॉम्पैक्ट है जिससे इसे एक हाथ से इस्तेमाल करना काफी आसान लगता है. Apple ने इसमें टाइटेनियम फ्रेम और Ceramic Shield प्रोटेक्शन दिया है. साथ ही इसकी पीक ब्राइटनेस 2000 निट्स तक जाती है.
दूसरी तरफ Samsung Galaxy S24 Ultra बड़े 6.8 इंच Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले के साथ आता है. इसमें QHD+ रेजोल्यूशन, Gorilla Armor प्रोटेक्शन और एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग दी गई है. इसकी पीक ब्राइटनेस 2600 निट्स तक पहुंचती है जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन ज्यादा साफ दिखाई देती है.
अगर आप छोटा और आसानी से पकड़ने वाला फोन चाहते हैं तो iPhone बेहतर लगेगा. लेकिन वीडियो देखने, गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए Samsung का बड़ा डिस्प्ले ज्यादा शानदार अनुभव देता है.
परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर
Apple iPhone 16 Pro में Apple का A18 Pro चिपसेट मिलता है जो iOS 18 पर चलता है और आगे iOS 26.5 तक अपडेट हो सकता है. गेमिंग और रोजमर्रा के इस्तेमाल में इसकी परफॉर्मेंस आज भी बेहद स्मूद मानी जाती है.
वहीं Samsung Galaxy S24 Ultra Qualcomm Snapdragon 8 Gen 3 प्रोसेसर और One UI 8.5 के साथ आता है. Samsung इस फोन के लिए लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट और 7 Android अपडेट्स देने का वादा भी कर चुका है.
कैमरा में कौन आगे?
कैमरा के मामले में दोनों फोन अपनी-अपनी खासियत रखते हैं. Apple iPhone 16 Pro Dolby Vision रिकॉर्डिंग, ProRes वीडियो सपोर्ट और स्पेशल वीडियो कैप्चर जैसे फीचर्स के साथ आता है. खासतौर पर सोशल मीडिया वीडियो और सिनेमैटिक रिकॉर्डिंग में iPhone का आउटपुट काफी प्रोफेशनल और नैचुरल लगता है.
दूसरी ओर Samsung Galaxy S24 Ultra में 200MP का प्राइमरी कैमरा, ड्यूल टेलीफोटो लेंस और शानदार जूम क्षमता मिलती है. दूर की फोटो खींचने और अलग-अलग फोटोग्राफी स्टाइल के लिए Samsung ज्यादा वर्सेटाइल साबित होता है.
बैटरी और कीमत
बैटरी के मामले में Samsung साफ बढ़त बनाता है. Galaxy S24 Ultra में 5000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जबकि iPhone 16 Pro में 3582mAh बैटरी मिलती है.
फिलहाल इनकी कीमतें कुछ इस प्रकार हैं.
Apple iPhone 16 Pro की कीमत लगभग ₹1,03,990 है.
Samsung Galaxy S24 Ultra की कीमत करीब ₹1,19,950 है.
आखिर कौन-सा फोन खरीदना चाहिए?
अगर आप पहले से Apple ecosystem जैसे MacBook या iPad इस्तेमाल करते हैं तो iPhone 16 Pro आज भी 2026 में शानदार विकल्प साबित हो सकता है. इसकी परफॉर्मेंस, कैमरा क्वालिटी और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस काफी भरोसेमंद हैं. लेकिन यदि आप बड़ा डिस्प्ले, लंबी बैटरी लाइफ, S Pen सपोर्ट और ज्यादा एडवांस कैमरा फीचर्स चाहते हैं तो Galaxy S24 Ultra ज्यादा कम्प्लीट फ्लैगशिप पैकेज नजर आता है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>iPhone, Pro, Galaxy, S24, Ultra:, 2026, में, कौन-सा, फ्लैगशिप, फोन, है, आपके, लिए, बेस्ट, कंपैरिजन, से, समझें</media:keywords>
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        <title>सस्ता होने का इंतजार कर रहे हैं आपका ड्रीम Smartphone? शायद अब कभी न मिले वो मौका</title>
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        <description><![CDATA[ Smartphone Prices: अगर आप भी हर साल नए Smartphone के लॉन्च के बाद यह सोचकर इंतज़ार करते हैं कि कुछ महीनों बाद सस्ता हो जाएगा तो अब यह रणनीति शायद काम न आए. भारत में Smartphone मार्केट तेजी से बदल रहा है और 2026 में हालात ऐसे बन गए हैं कि कई Phones लॉन्च के महीनों बाद भी महंगे बने हुए हैं. कुछ Models की कीमत तो समय के साथ और बढ़ गई है.
क्यों महंगे होते जा रहे हैं Smartphones?
इसकी सबसे बड़ी वजह AI टेक्नोलॉजी की बढ़ती डिमांड मानी जा रही है जिन Memory Chips और Components का इस्तेमाल Smartphones में होता है, वही अब AI Servers और Data Centres में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. AI कंपनियां इन Chips को भारी मात्रा में खरीद रही हैं जिसके कारण Smartphone कंपनियों के लिए Components काफी महंगे हो गए हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ Memory Components की कीमत कई गुना तक बढ़ चुकी है. इसका सीधा असर Smartphone निर्माण लागत पर पड़ा है और कंपनियों के पास या तो कीमत बढ़ाने या Features कम करने का ही विकल्प बचा है.
अब Phones लॉन्च के बाद जल्दी सस्ते नहीं हो रहे
पहले ऐसा होता था कि ₹30,000 का Phone कुछ महीनों बाद Sale और Offers में ₹24,000-25,000 तक मिल जाता था. लेकिन अब यह ट्रेंड टूटता दिख रहा है. Industry Analysts का कहना है कि Brands अब लंबे समय तक कीमतें ऊंची बनाए रख रहे हैं.
कई Smartphones की कीमतें लॉन्च के बाद घटने की बजाय बढ़ी हैं. खासतौर पर Budget और Mid-range Segment में लगातार Price Hike देखने को मिल रही है. Experts के अनुसार 2026 की शुरुआत से कई Models के दाम 30% से 40% तक बढ़ चुके हैं.
Budget Smartphones में हो रही है कटौती
कीमत कंट्रोल करने के लिए कई कंपनियां अब पुराने Phones को नए नाम से दोबारा लॉन्च कर रही हैं. कुछ Brands कैमरा क्वालिटी, Storage और Features में कटौती भी कर रहे हैं. यहां तक कि कुछ नए Budget Phones में 5G हटाकर फिर से 4G दिया जा रहा है ताकि लागत कम की जा सके. यानी अब कम कीमत में पहले जैसे दमदार Features मिलना मुश्किल होता जा रहा है.
Premium Brands पर कम असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि Premium Smartphone Brands इस संकट से बेहतर तरीके से निपट रहे हैं. उदाहरण के तौर पर Apple और Samsung जैसी कंपनियों के पास लंबे समय के Supply Agreements और मजबूत Financial Backup है. वहीं Budget Segment पर निर्भर Brands जैसे Xiaomi, Realme, OPPO और vivo ज्यादा दबाव में हैं.
क्या अब Smartphone खरीदने के लिए Sale का इंतज़ार बेकार है?
Experts का मानना है कि आने वाले समय में बड़े Discounts कम देखने को मिल सकते हैं. कंपनियां Exchange Offers, Cashback और EMI जैसे विकल्प तो देती रहेंगी लेकिन भारी Price Drop अब पहले जितना आम नहीं रहेगा.
अगर आपको नया Phone सच में चाहिए तो सिर्फ &amp;ldquo;सस्ता होने&amp;rdquo; का इंतज़ार करना नुकसानदायक भी हो सकता है. क्योंकि जिस Phone को आप बाद में खरीदने की सोच रहे हैं वह आने वाले महीनों में और महंगा भी हो सकता है.
बदल रही है Smartphone खरीदने की आदत
भारत में Smartphone Market अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है जहां लोग जरूरत के हिसाब से खरीदारी करने लगे हैं, ना कि सिर्फ Sale और Discounts के भरोसे. बढ़ती AI Demand, Memory Crisis और महंगे Components ने पूरे बाजार की तस्वीर बदल दी है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google I/O 2026: AI Search से Ask YouTube तक, ये रहीं इवेंट की सबसे बड़ी अनाउंसमेंट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/google-io-2026-ai-search-से-ask-youtube-तक-ये-रहीं-इवेंट-की-सबसे-बड़ी-अनाउंसमेंट</link>
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        <description><![CDATA[ Google I/O 2026 Major Announcement: I/O 2026 के कीनोट में गूगल ने कंप्यूटिंग, एंड्रॉयड, प्रोडक्टिविटी ऐप्स और वीयरेबल डिवाइसेस के फ्यूचर की झलक पेश कर दी है. इस इवेंट का खास फोकस उम्मीद के मुताबिक जेमिनी एआई पर ही रहा. कंपनी ने Gemini 3.5 AI मॉडल्स और अपनी सर्विसेस के लिए नए फीचर्स समेत कई बड़े ऐलान किए हैं. इसके साथ गूगल ने पहले Android XR Audio Glasses को भी रिवील कर दिया है. आइए इस इवेंट की कुछ सबसे बड़ी अनाउंसमेंट के बारे में जानते हैं.
Google I/O 2026 के बड़े ऐलान
Agentic Gemini Era- गूगल सीईओ सुंदर पिचई ने कहा कि गूगल अब एजेंटिक जेमिनी एरा में प्रवेश कर रही है. इसका मतलब है कि अब एआई सिस्टम सिर्फ प्रॉम्प्ट का ही जवाब नहीं देंगे. अलग-अलग ऐप्स और डिवाइसेस में ये खुद से टास्क भी कंप्लीट कर सकेंगे.&amp;nbsp;
Gemini 3.5- गूगल ने इवेंट में अपडेटेड एआई मॉडल भी लॉन्च किए हैं. अब कंपनी की सर्विसेस के लिए Gemini 3.5 Flash डिफॉल्ट मॉडल की तरह काम करेगा और इसका प्रो वर्जन अगले महीने लॉन्च हो रहा है. नए मॉडल फास्ट हैं और एजेंटिक टास्क को बेहतर तरीके से हैंडल कर पाएंगे. साथ ही कंपनी ने जेमिनी ऐप को भी रिडिजाइन किया है.
Gemini Omni- Gemini 3.5 के साथ गूगल जेमिनी ओमनी नाम से नए मॉडल उतारेगी. इसका पहला प्रोडक्ट Omni Flash आज से जेमिनी ऐप, गूगल फ्लो और यूट्यूब शॉर्ट्स के लिए रोल आउट होना शुरू हो गया है. कंपनी का कहना है कि यह किसी भी इनपुट से कोई भी आउटपुट जनरेट कर सकता है. यानी इसे टेक्स्ट, फोटो, वीडियो और ऑडियो के तौर पर कोई भी इनपुट दी ज सकती है.
Gemini Spark- OpenClaw को टक्कर देने के लिए गूगल नया ऑलवेज-ऑन एआई एजेंट Gemini Spark लेकर आई है. यह ईमेल लिखने, स्टडी गाइड बनाने समेत कई काम कर सकेगा. यह गूगल क्लाउड पर रन करेगा और गूगल सर्विसेस के साथ-साथ केन्वा और इंस्टाकार्ट समेत कई थर्ड-पार्टी ऐप्स के साथ इंटीग्रेड हो जाएगा. गूगल इसे लोकल फाइल एक्सेस करने की कैपेबिलिटीज भी देने जा रही है.
सर्च को भी मिला नया एआई रिडिजाइन- गूगल ने बताया कि सर्च में एआई मोड के मंथली एक्टिव यूजर्स एक बिलियन को पार कर गए हैं. अब कंपनी ने सर्च को नए एआई-पावर्ड इंटरफेस के साथ रिडिजाइन किया है. टेक्स्ट के साथ-साथ इसमें फोटो, वीडियो, फाइल्स और ब्राउजर टैब्स को भी इनपुट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसमें इंफोर्मेशन एजेंट भी जोड़े जाएंगे, जो स्पेसिफिक टॉपिक की समरी प्रोवाइड करेंगे.
Android XR Audio Glasses- गूगल ने अपने पहले Android XR Audio Glasses को भी रिवील कर दिया है. जेमिनी पावर्ड इन ग्लासेस में डिस्प्ले नहीं होगा और ये ऑडियो इनपुट के आधार पर काम करेंगे. गूगल ने सैमसंग और क्वालकॉम के साथ मिलकर इस डिवाइस को डेवलप किया है.&amp;nbsp;
पर्सनलाइड समरी के लिए आया Daily Brief- गूगल ने इवेंट में डेली ब्रीफ को भी इंट्रोड्यूस किया है. यह जीमेल, टास्क और कैलेंडर डेटा के आधार पर यूजर के लिए डेली अपडेट ब्रीफ करता है और उसे स्क्रीन पर ही सारी जानकारी दे देता है.
AI Detection Tools होंगे और एक्सेसिबल- एआई से जनरेटेड या एडिटेड इमेज का पता लगाने के लिए गूगल ने अपने एआई डिटेक्शन टूल को एक्सपैंड कर रही है. आज से ये क्रोम और सर्च में अवेलेबल होंगे. इसमें यूजर कोई इमेज अपलोड या सर्च कर उसके बारे में डिटेल जुटा सकता है.&amp;nbsp;
Ask YouTube- गूगल ने कुछ दिन पहले मैप्स के लिए आस्क मैप्स फीचर लॉन्च किया था. अब यह फीचर यूट्यूब के लिए लाया जा रहा है. इससे यूजर यूट्यूब पर नैचुरल लैंग्वेज यानी बातचीत की भाषा में वीडियो सर्च कर पाएंगे. अब उन्हें कीवर्ड-बेस्ड सर्च की जगह कन्वर्सेशनल वॉइस प्रॉम्प्ट से वीडियो सर्च करने का फीचर मिलेगा. शुरुआत में इसे अमेरिका के प्रीमियम यूजर्स के लिए रोलआउट किया जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Google I/O 2026: अब मुंह से बोलते ही मिलेंगे मनचाहे Videos! YouTube में आया नया AI फीचर, जानिए कैसे करेगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ YouTube AI Feature: कैलिफोर्निया के शोरलाइन एम्फीथिएटर में आयोजित Google I/O 2026 के दौरान Google ने कई बड़े AI अपडेट पेश किए. इस साल के सबसे बड़े टेक इवेंट में Sundar Pichai ने YouTube के लिए एक नया AI आधारित फीचर Ask YouTube लॉन्च किया जो वीडियो खोजने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है.
अब कीवर्ड नहीं नॉर्मल भाषा में पूछ सकेंगे सवाल
नए Ask YouTube फीचर की मदद से यूजर्स अब YouTube पर सामान्य बातचीत की तरह सवाल पूछकर वीडियो खोज पाएंगे. यानी अब सिर्फ छोटे-छोटे कीवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं होगी. यूजर सीधे अपनी भाषा में पूछ सकेंगे कि उन्हें क्या देखना है और AI उसी हिसाब से जवाब देगा.
उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर पूछे कि &amp;ldquo;2026 में सबसे अच्छे कैमरा फोन कौन से हैं? या घर पर आसान फिटनेस एक्सरसाइज बताओ तो YouTube AI उस सवाल को समझकर संबंधित वीडियो सुझाएगा. इसमें Shorts और लंबे वीडियो दोनों शामिल होंगे.
Google Search के AI Mode जैसा अनुभव
Google का कहना है कि यह फीचर काफी हद तक Google Search के AI Mode जैसा काम करेगा लेकिन पूरा अनुभव वीडियो फॉर्मेट में मिलेगा. AI यूजर्स के सवालों को समझकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट से सबसे उपयुक्त वीडियो चुनकर दिखाएगा.
सिर्फ इतना ही नहीं यूजर्स आगे और सवाल पूछकर अपने रिजल्ट को और बेहतर बना सकेंगे. यानी यह फीचर एक इंटरैक्टिव बातचीत की तरह काम करेगा, जहां AI लगातार यूजर की जरूरत समझता रहेगा.
पुराने सर्च रिजल्ट से अलग होगा अनुभव
कंपनी के मुताबिक, Ask YouTube में रिजल्ट पारंपरिक सर्च लिस्ट की तरह नहीं दिखेंगे. इसके बजाय यूजर्स को AI आधारित इंटरैक्टिव जवाब मिलेंगे जिनमें सीधे उपयोगी वीडियो और संबंधित जानकारी दिखाई जाएगी. इसका मकसद YouTube पर ज्यादा स्मार्ट और संदर्भ आधारित सर्च अनुभव देना है ताकि यूजर कम समय में सही वीडियो तक पहुंच सकें.
फिलहाल सिर्फ Premium यूजर्स के लिए उपलब्ध
अभी यह नया फीचर अमेरिका में 18 साल या उससे अधिक उम्र के YouTube Premium यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है. इसे youtube.com/new के जरिए एक्सेस किया जा सकता है. Google ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इसे ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाया जाएगा.
Gemini Omni के साथ YouTube Shorts में AI Remix
Ask YouTube के अलावा Google ने YouTube Shorts Remix और YouTube Create ऐप के लिए Gemini Omni सपोर्ट भी पेश किया है. इस फीचर की मदद से यूजर्स किसी मौजूदा Shorts वीडियो को टेक्स्ट प्रॉम्प्ट या तस्वीरों की सहायता से नया रूप दे सकेंगे.
AI वीडियो के विजुअल, सीन और ऑडियो को समझकर बदलाव करेगा, जिससे एडिटिंग पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगी. Google का कहना है कि इससे मैन्युअल एडिटिंग की जरूरत कम होगी.
AI वीडियो पर होंगे डिजिटल वॉटरमार्क
Google ने साफ किया है कि AI से तैयार किए गए Remix वीडियो में डिजिटल वॉटरमार्क, मेटाडेटा टैग और ओरिजिनल वीडियो का रेफरेंस शामिल रहेगा. इससे यह पहचानना आसान होगा कि कंटेंट AI की मदद से बनाया गया है. इसके साथ ही क्रिएटर्स को यह विकल्प भी मिलेगा कि वे चाहें तो अपनी वीडियो पर Visual Remix फीचर को बंद कर सकते हैं.
Creator सुरक्षा के लिए नया Likeness Detection Tool
कंपनी ने बताया कि उसका Likeness Detection Tool अब 18 साल से अधिक उम्र वाले क्रिएटर्स तक बढ़ाया जा रहा है. यह टूल क्रिएटर्स को यह पता लगाने में मदद करेगा कि उनकी पहचान या चेहरे का इस्तेमाल कहां और कैसे किया जा रहा है.
Google के अनुसार, Gemini Omni आधारित Remix फीचर आज से ही YouTube Shorts Remix और YouTube Create ऐप में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के रोलआउट किया जा रहा है. आने वाले समय में इसे AI Playground के साथ भी जोड़ा जाएगा.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>मालवेयर और स्कैम की नहीं रहेगी कोई चिंता, Android 17 में मिलेंगे फुलप्रूफ सिक्योरिटी फीचर्स</title>
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        <description><![CDATA[ Android 17 Security Features: गूगल ने कुछ दिन पहले एंड्रॉयड 17 अपडेट के फीचर्स की झलक दिखाई थी. इससे पता चला है कि कंपनी ने सिक्योरिटी और प्राइवेसी अपडेट पर खास ध्यान देने वाली है. फाइनेंशियल फ्रॉड, चोरी और ऐप ट्रैकिंग आदि के खतरों से बचाने के लिए गूगल ने नई अपडेट में कई फीचर्स दिए हैं. इनमें स्पूफिंग रोकने के लिए वेरिफाईड फाइनेंशियल कॉल्स, बायोमेट्रिक-इन्हैंस्ड थेफ्ट प्रोटेक्शन और लोकेशन के लिए नए प्राइवेसी कंट्रोल आदि शामिल है. साथ ही कंपनी ने रियल-टाइम थ्रेट डिटेक्शन को इंटीग्रेट कर अनऑथोराइज्ड एक्सेस को भी मुश्किल बना दिया है. कुल मिलाकर कंपनी ने मालवेयर और स्कैम से सुरक्षा के लिए कई फीचर जोड़े हैं. इनके बावजूद फुल सेफ्टी के लिए यूजर को भी अलर्ट रहना जरूरी है.
स्पूफिंग को रोकेगा यह नया फीचर
स्पूफिंग के मामलो में स्कैमर बैंक अधिकारी आदि बनकर लोगों को चूना लगाते हैं. इस कारण दुनियाभर के यूजर्स को हर साल अरबों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. इसके रोकने के लिए गूगल वेरिफाईड फाइनेंशियल कॉल्स का फीचर लेकर आई है. यह एंड्रॉयड 11 के बाद के वर्जन पर चलने वाले डिवाइसेस के लिए अवेलेबल होगा और बैंकिंग ऐप्स के साथ बैकग्राउंड में काम करेगा. जब भी आपके फोन पर कोई कॉल आएगी, यह सिस्टम बैंक से कंफर्मेंशन मांगेगा. अगर बैंक कॉल को कन्फर्म नहीं करता है तो यह अपने आप कॉल डिस्कनेक्ट कर देगा.&amp;nbsp;
एआई से रहेगी ऐप्स पर नजर&amp;nbsp;एंड्रॉयड 17 एआई की मदद से ऐप्स पर नजर रखेगा. अगर कोई ऐप इंस्टॉल होने के बाद मैसेज फॉरवर्ड या कोई और गड़बड़ करने की कोशिश करेगी तो तो नया लाइव थ्रेट डिटेक्शन ऑन-डिवाइस एआई की मदद से यह पैटर्न देखकर यूजर को अलर्ट कर देगा. साथ ही यह सिस्टम ऐप को डाउनलोड करते समय ही मालवेयर की पड़ताल कर लेगा, जिससे यूजर को ऐप इंस्टॉल करने से पहले ही इसकी जानकारी मिल जाएगी.
फोन चुराना होगा और मुश्किल&amp;nbsp;
नई अपडेट चोरी होने के बाद फोन को किसी काम का नहीं छोड़ेगी. इसमें &#039;मार्क एज लॉस्ट&#039; फीचर के लिए नया बायोमेट्रिक लॉक आ रहा है. यानी अगर फोन चोरी के बाद चोर को आपके पासकोड भी पता चल जाते हैं तो भी वह ट्रैकिंग को बंद नहीं कर पाएगा. साथ ही उसे फोन को एक्सेस करने के लिए यूजर के फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन की जरूरत पड़ेगी. अगर कोई आपसे फोन छीनकर भागता है तो नई अपडेट उसी समय फोन के रिमोट लॉक और थेफ्ट डिटेक्शन लॉक को इनेबल कर देगी.
लोकेशन शेयरिंग के लिए वन टाइम परमिशन
एंड्रॉयड 17 अपडेट में एक टेंपरेरी लोकेशन बटन मिलेगा. यह किसी ऐप को GPS की परमानेंट एक्सेस देने की बजाय किसी एक समय के लिए लोकेशन एक्सेस करने देगा. इससे काम पूरा होने के बाद वह ऐप लगातार आपकी लोकेशन को एक्सेस नहीं कर पाएगी.
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Google का बड़ा कदम! अब AI से बनी फर्जी फोटो&amp;वीडियो पकड़ना होगा आसान, आ गया नया फीचर</title>
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        <description><![CDATA[ Google SynthID: दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे AI कंटेंट के बीच अब Google ने अपनी खास तकनीक SynthID को और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया है. इस टूल की मदद से यूजर्स आसानी से पहचान सकेंगे कि कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो असली है या फिर उसे AI की मदद से बनाया या एडिट किया गया है.
Search और Chrome में भी मिलेगा SynthID सपोर्ट
Alphabet के स्वामित्व वाली Google ने बताया कि SynthID फीचर अब केवल Gemini AI ऐप तक सीमित नहीं रहेगा. कंपनी इसे जल्द ही अपने Search प्लेटफॉर्म और Chrome ब्राउज़र में भी जोड़ने जा रही है. Google के CEO Sundar Pichai ने कैलिफोर्निया में आयोजित कंपनी के सालाना I/O इवेंट के दौरान इस बड़े अपडेट की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर तेजी से बढ़ रहे AI कंटेंट के दौर में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है.
क्या है SynthID और कैसे करता है काम?
Google ने SynthID को पहली बार साल 2023 में पेश किया था. यह एक तरह का इनविज़िबल वॉटरमार्क है जो AI द्वारा बनाए गए या AI टूल्स से एडिट किए गए कंटेंट में छिपा होता है. यह वॉटरमार्क सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देता, लेकिन इसकी मदद से सिस्टम यह पहचान सकता है कि कोई इमेज, वीडियो या ऑडियो AI से तैयार किया गया है या नहीं. Google का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य जनरेटिव AI के दौर में भरोसा और पारदर्शिता बनाए रखना है.
AI फोटो दिखाकर समझाया खतरा
इवेंट के दौरान सुंदर पिचाई ने एक वायरल AI-जनरेटेड तस्वीर दिखाई जिसमें वह खुद, Elon Musk, Jensen Huang और Sam Altman मैकडॉनल्ड्स खाते हुए नजर आ रहे थे. पिचाई ने मजाकिया अंदाज में कहा कि यह तस्वीर पूरी तरह नकली है क्योंकि वह हैमबर्गर नहीं खाते. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हर व्यक्ति के लिए AI और असली तस्वीर में फर्क समझ पाना आसान नहीं होता. ऐसे में SynthID जैसे टूल काफी मददगार साबित हो सकते हैं.
दूसरे AI प्लेटफॉर्म भी अपनाएंगे तकनीक
Google ने यह भी साफ किया कि केवल एक कंपनी के स्तर पर इस तकनीक का इस्तेमाल काफी नहीं होगा. इसे असरदार बनाने के लिए दूसरी AI कंपनियों का साथ आना भी जरूरी है. पिचाई के मुताबिक OpenAI, Kakao और ElevenLabs जैसी कंपनियां भी अब SynthID स्टैंडर्ड को अपनाने के लिए तैयार हो गई हैं. वहीं Nvidia पहले ही इस पहल से जुड़ चुकी है.
100 अरब से ज्यादा फाइलों पर लग चुका है वॉटरमार्क
Google के अनुसार अब तक करीब 100 अरब से ज्यादा फोटो, वीडियो और ऑडियो फाइलों पर SynthID वॉटरमार्क लगाया जा चुका है. कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में AI कंटेंट की पहचान के लिए यह तकनीक इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बन सकती है.
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