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    <title>Attention India Hindi &amp; : लाइफस्टाइल</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : लाइफस्टाइल</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>Stainless Steel: बर्तन सूखते ही क्यों पड़ जाते हैं सफेद निशान? 2 मिनट में ऐसे चमकाएं</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove White Water Spots From Stainless Steel: स्टील के बर्तन धोने के बाद जब उन्हें देखते हैं तो कई बार उनकी चमक गायब सी लगती है. बर्तन अच्छी तरह धुले हुए होते हैं, फिर भी उन पर छोटे-छोटे गोल निशान, सफेद दाग या पानी की बूंदों के निशान दिखाई देते हैं. खासकर बर्तन सूखने के बाद ये निशान और साफ नजर आते हैं. अगर आपके स्टील के बर्तनों पर भी ऐसा होता है, तो जरूरी नहीं कि बर्तन खराब हो गए हों. अक्सर इसकी वजह पानी में मौजूद मिनरल और बर्तन को धोने या सुखाने का तरीका होता है.
स्टेनलेस स्टील मजबूत होता है और रोजाना इस्तेमाल के बाद भी लंबे समय तक चल सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसकी सतह पर कभी दाग नहीं आएंगे. पानी सूखने के बाद उसमें मौजूद कुछ मिनरल स्टील की सतह पर रह जाते हैं और यही छोटे-छोटे गोल या सफेद निशान के रूप में दिखाई दे सकते हैं.
पानी सूखने के बाद क्यों बनते हैं गोल निशान?
अगर आपके घर में हार्ड वॉटर यानी ऐसा पानी आता है जिसमें कैल्शियम और दूसरे मिनरल की मात्रा ज्यादा है, तो बर्तन पर पानी के दाग बनने की संभावना अधिक होती है. जब बर्तन धोने के बाद उसकी सतह पर पानी की बूंदें रह जाती हैं और धीरे-धीरे सूखती हैं, तो पानी तो उड़ जाता है लेकिन उसमें मौजूद मिनरल पीछे रह जाते हैं. यही जमा हुआ मिनरल सफेद गोल निशान या हल्की परत जैसा दिखाई देता है. इसी वजह से कई बार बर्तन धोते समय बिल्कुल साफ दिखता है, लेकिन सूखने के कुछ देर बाद उस पर दाग नजर आने लगते हैं.

नमक भी छोड़ सकता है सफेद निशान
स्टील के बर्तन में खाना बनाते समय नमक डालने का तरीका भी फर्क डाल सकता है. अगर सूखे बर्तन में सीधे नमक डाल दिया जाए या ठंडे पानी में नमक डालकर उसे बिना घोले छोड़ दिया जाए, तो नमक बर्तन के नीचे चिपक सकता है और सफेद निशान बना सकता है. बहुत लंबे समय तक ऐसा होने पर स्टील की सतह पर छोटे-छोटे गड्ढे भी बन सकते हैं. इसलिए पानी उबलने के बाद नमक डालना और उसे अच्छी तरह घोलना बेहतर माना जाता है.

डिशवॉशिंग के बाद सफेद परत क्यों दिखती है?
अगर आप स्टील के बर्तनों को डिशवॉशर में साफ करते हैं, तो कभी-कभी उन पर हल्की सफेद या धुंधली परत दिखाई दे सकती है. इसकी वजह पानी में मौजूद मिनरल हो सकते हैं, जो बर्तन धोने और सुखाने के दौरान सतह पर जम जाते हैं.
हालांकि हाथ से बर्तन धोने पर भी ऐसा हो सकता है. अगर साबुन या डिशवॉशिंग लिक्विड पूरी तरह से साफ पानी से नहीं निकला, तो उसका थोड़ा सा हिस्सा स्टील पर रह सकता है. बर्तन सूखने के बाद यह परत चमक को कम कर सकती है और सतह पर दाग जैसी दिखाई दे सकती है. इसलिए बर्तन धोने के बाद सिर्फ पानी डाल देना काफी नहीं है. साबुन अच्छी तरह निकलने तक साफ पानी से धोना जरूरी है.
स्टील पर इंद्रधनुष जैसे निशान भी दिख सकते हैं
कभी-कभी स्टील के बर्तन पर सफेद दाग की जगह नीले, पीले या बैंगनी रंग की हल्की परत दिखाई देती है. यह आमतौर पर ज्यादा गर्मी की वजह से हो सकता है. अगर खाली स्टील के बर्तन को बहुत तेज आंच पर काफी देर तक गर्म किया जाए, तो उसकी सतह पर मौजूद क्रोमियम और ऑक्सीजन के बीच प्रतिक्रिया के कारण ऐसा रंग दिखाई दे सकता है. यह देखने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बर्तन तुरंत खराब हो गया है.
इन पानी के निशानों को कैसे हटाएं?
अगर स्टील के बर्तन पर सफेद पानी के दाग जमा हो गए हैं, तो उन्हें हटाने के लिए घर में मौजूद सिरके का इस्तेमाल किया जा सकता है. एक बराबर मात्रा में सिरका और पानी लें और इसे बर्तन के उस हिस्से पर डालें जहां निशान हैं. इसे कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद मुलायम स्पंज से हल्के हाथ से साफ करें. फिर बर्तन को सामान्य तरीके से धोकर अच्छी तरह सुखा लें. अगर निशान ज्यादा जिद्दी हैं, तो पानी और सिरके के मिश्रण को बर्तन में डालकर हल्का गर्म भी किया जा सकता है. मिश्रण को कुछ देर गर्म करने के बाद आंच बंद कर दें और बर्तन ठंडा होने दें. फिर इसे धोकर अच्छी तरह सुखाएं. स्टील की सतह पर बहुत खुरदुरे स्क्रबर का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे उस पर खरोंच पड़ सकती है.
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बर्तन पर पानी के दाग दोबारा न पड़ें, इसके लिए क्या करें?
सबसे आसान तरीका है कि बर्तन धोने के बाद उन्हें अपने आप हवा में सूखने के लिए न छोड़ें. साफ और मुलायम कपड़े से बर्तन को तुरंत पोंछकर सुखा दें. इससे पानी की बूंदें सतह पर सूखेंगी नहीं और उनके साथ मिनरल की परत जमने की संभावना भी कम होगी. खाना बनाते समय भी खाली स्टील के बर्तन को बहुत तेज आंच पर गर्म करने से बचें. अगर बर्तन में पानी उबाल रहे हैं, तो नमक पानी उबलने के बाद डालें और उसे अच्छी तरह घोलें. इसके साथ ही बर्तन धोते समय साबुन या क्लीनर की सही मात्रा इस्तेमाल करें और उसे साफ पानी से अच्छी तरह निकालें.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Wall Paint: पेंट फूलकर पपड़ी बनकर गिर रहा है? तुरंत अपनाएं ये उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Peeling Paint Due To Wall Moisture: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि दीवार का ऊपर वाला हिस्सा ठीक रहता है, लेकिन नीचे की तरफ का पेंट जल्दी उखड़ने, फूलने या खराब होने लगता है? घर की सफाई करते समय या फर्नीचर हटाने पर नीचे की दीवार पर पेंट की हालत देखकर यह सवाल जरूर आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है. अगर आपके घर में भी दीवार के निचले हिस्से का पेंट बार-बार खराब हो रहा है, तो इसे सिर्फ पुराने पेंट की समस्या समझकर नजरअंदाज न करें. कई बार इसके पीछे दीवार में मौजूद नमी या सतह से जुड़ी कोई दूसरी समस्या हो सकती है.
पेंट का काम सिर्फ दीवार को सुंदर बनाना नहीं है. वह तभी लंबे समय तक टिका रहता है, जब दीवार की सतह सूखी, साफ और सही तरह से तैयार हो. नीचे के हिस्से में नमी और गंदगी का असर ज्यादा पड़ने की वजह से यहां पेंट ऊपर की तुलना में जल्दी खराब हो सकता है.
नीचे की दीवार में नमी ज्यादा क्यों रहती है?
दीवार के निचले हिस्से में पेंट खराब होने की सबसे आम वजह नमी हो सकती है. जमीन के पास होने के कारण नीचे की दीवार पानी और नमी के संपर्क में ज्यादा आ सकती है. अगर कहीं से पानी दीवार में धीरे-धीरे जा रहा है, तो उसका असर अक्सर निचले हिस्से पर पहले दिखाई देता है. बारिश के पानी का रिसाव, खराब वॉटरप्रूफिंग, बाथरूम या किचन की नमी और पाइप में छिपा हुआ लीकेज इसके पीछे वजह हो सकते हैं. नमी दीवार के अंदर पहुंचने के बाद पेंट की पकड़ कमजोर कर सकती है. धीरे-धीरे पेंट फूलने, उसमें बुलबुले बनने, दरार आने या परत उखड़ने जैसी समस्या दिखाई देने लगती है.

सिर्फ सीलन ही नहीं, पानी के दाग भी संकेत हैं
अगर दीवार के नीचे का पेंट बार-बार खराब हो रहा है, तो आसपास के हिस्से को ध्यान से देखें. क्या वहां दीवार ठंडी या नम महसूस होती है? क्या पेंट के नीचे गहरे रंग के दाग दिखाई दे रहे हैं? क्या सफेद पाउडर जैसी परत जमा हो रही है? ये संकेत बताते हैं कि दीवार के अंदर नमी हो सकती है. कई बार पानी के साथ दीवार में मौजूद लवण सतह तक आ जाते हैं और पानी सूखने के बाद सफेद पाउडर जैसा निशान छोड़ देते हैं. ऐसे में ऊपर से नया पेंट कर देने से समस्या खत्म नहीं होती. कुछ समय बाद पेंट फिर से खराब हो सकता है.
सफाई के दौरान भी नीचे का पेंट प्रभावित होता है
दीवार के निचले हिस्से पर घर की सफाई का असर भी ज्यादा पड़ता है. पोंछा लगाते समय पानी या क्लीनर दीवार के नीचे तक पहुंच सकता है. अगर यह नमी बार-बार बनी रहती है, तो समय के साथ पेंट की सतह कमजोर हो सकती है. इसी तरह बच्चों के हाथ, जूते, फर्नीचर या रोजमर्रा की आवाजाही से नीचे की दीवार पर गंदगी और रगड़ ज्यादा पड़ती है. अगर पहले से पेंट की पकड़ कमजोर है, तो यह छोटी-छोटी चीजें उसकी हालत और खराब कर सकती हैं.

पेंट लगाने से पहले तैयारी सही न हो तो भी समस्या होगी
कई बार पेंट जल्दी खराब होने की वजह पुराना पेंट नहीं, बल्कि पेंटिंग के समय की गई गलती होती है. अगर दीवार को ठीक से साफ किए बिना पेंट कर दिया गया, सतह पर धूल या तेल जमा था, प्लास्टर पूरी तरह सूखा नहीं था या प्राइमर का इस्तेमाल नहीं किया गया, तो नए पेंट की पकड़ कमजोर रह सकती है. खासकर नमी वाली दीवार पर सीधे पेंट कर देना सही तरीका नहीं है. पहले नमी की वजह खत्म करनी होगी. इसके बाद खराब और ढीली पेंट की परत हटाकर सतह को साफ और समतल करना चाहिए.
पुरानी पेंट की कई परतें भी बन सकती हैं वजह
अगर किसी दीवार पर सालों से बार-बार नया पेंट किया जाता रहा है, तो पुरानी परतों की संख्या बढ़ती जाती है. एक समय के बाद ये परतें आपस में अच्छी तरह चिपकी नहीं रहतीं. ऐसे में नीचे की कमजोर परत के साथ ऊपर का पेंट भी उखड़ने लग सकता है. अगर पेंट हाथ लगाने पर पहले से ढीला या फूला हुआ महसूस हो रहा है, तो उसके ऊपर नया पेंट करना समस्या को छिपाएगा, ठीक नहीं करेगा.
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खराब पेंट को सही तरीके से कैसे ठीक करें?
अगर नीचे की दीवार का पेंट उखड़ रहा है, तो सबसे पहले पूरी तरह ढीली और खराब परत को स्क्रेपर या पुट्टी नाइफ की मदद से हटा दें. इसके बाद सतह को हल्का सैंड करके किनारों को बराबर करें, ताकि नया पेंट लगाने के बाद ऊंच-नीच नजर न आए. जहां दरार या छोटे गड्ढे हों, वहां वॉल फिलर या पैचिंग कंपाउंड लगाया जा सकता है. उसके सूखने के बाद सतह को फिर से सैंड करें और धूल साफ कर लें. अगर समस्या नमी की वजह से है, तो प्राइमर और पेंट लगाने से पहले नमी के स्रोत को ठीक करना सबसे जरूरी है. जरूरत के हिसाब से नमी रोकने वाला या स्टेन-ब्लॉकिंग प्राइमर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद अच्छी क्वालिटी का पेंट लगाएं.
समस्या दोबारा न हो, इसके लिए क्या करें?
दीवार के निचले हिस्से को लंबे समय तक ठीक रखने के लिए सबसे पहले पानी और नमी पर नजर रखें. पाइप में लीकेज हो तो तुरंत ठीक करवाएं. बाथरूम और किचन में वेंटिलेशन सही रखें और सफाई करते समय दीवार के नीचे जरूरत से ज्यादा पानी न लगने दें. अगर बाहरी दीवार से पानी अंदर आ रहा है, तो वॉटरप्रूफिंग और दरारों की जांच करवाएं. फर्नीचर को दीवार से बिल्कुल चिपकाकर रखने के बजाय थोड़ा गैप रखें, ताकि हवा का आना-जाना बना रहे.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>White Powder On Walls: दीवार पर जम गया है सफेद पाउडर? तुरंत जान लें सीलन की असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Why White Powder Appears On Interior Walls: क्या आपने कभी दीवार पर सफेद रंग का पाउडर या चॉक जैसा पदार्थ जमा हुआ देखा है? पहली नजर में यह धूल, फफूंदी या खराब हो रहा पेंट लग सकता है. लेकिन कई बार इसकी असली वजह कुछ और होती है. दीवार पर दिखाई देने वाली यह सफेद परत इस बात का संकेत हो सकती है कि दीवार के अंदर कहीं नमी मौजूद है और पानी धीरे-धीरे सतह की ओर आ रहा है.
इस सफेद जमाव को आमतौर पर एफ्लोरेसेंस कहा जाता है. यह तब बनता है जब पानी ईंट, सीमेंट, कंक्रीट या प्लास्टर जैसी छिद्र वाली सतह के अंदर से गुजरता है. इस दौरान पानी अपने साथ इन निर्माण सामग्री में मौजूद घुले हुए लवण यानी नमक को भी ऊपर ले आता है. जब पानी सतह पर पहुंचकर सूख जाता है, तो ये लवण पीछे सफेद पाउडर जैसी परत छोड़ देते हैं. सिर्फ इस सफेद परत को साफ कर देना समस्या का पूरा समाधान नहीं है. असली चिंता उस नमी की है, जिसकी वजह से यह परत बन रही है.
दीवार पर सफेद पाउडर क्यों जमता है?
एफ्लोरेसेंस बनने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की जरूरत होती है- नमी, घुलनशील लवण और ऐसी निर्माण सामग्री जिसमें पानी अंदर जा सके. अगर ये तीनों चीजें एक साथ मौजूद हैं, तो दीवार पर सफेद दाग या पाउडर दिखाई देना शुरू हो सकता है. इसकी सबसे आम वजह दीवार में पानी का रिसाव हो सकता है. बारिश का पानी अगर बाहरी दीवार की दरारों या खराब हुई सतह से अंदर पहुंच रहा है, तो वह धीरे-धीरे दीवार के भीतर आगे बढ़ सकता है. इसी के साथ दीवार में मौजूद लवण भी सतह तक पहुंचते हैं और पानी सूखने के बाद सफेद निशान छोड़ जाते हैं.
खराब वॉटरप्रूफिंग भी हो सकती है वजह
अगर घर की वॉटरप्रूफिंग पुरानी हो गई है या कहीं से खराब हो चुकी है, तो नमी दीवार के अंदर प्रवेश कर सकती है. शुरुआत में यह समस्या सिर्फ सफेद पाउडर के रूप में दिखाई दे सकती है, लेकिन समय के साथ पेंट उखड़ने या दीवार पर नमी के दाग पड़ने जैसी समस्याएं भी नजर आ सकती हैं. बाथरूम, किचन या ऐसी जगहों पर भी यह समस्या हो सकती है जहां लगातार नमी रहती है.

पाइप में छिपा रिसाव भी जांचें
कभी-कभी दीवार के अंदर पानी की पाइप में छोटा सा रिसाव होता रहता है. बाहर से पानी दिखाई नहीं देता, लेकिन लगातार नमी बनी रहने के कारण दीवार पर सफेद परत बन सकती है.
अगर किसी खास हिस्से में सफेद पाउडर बार-बार वापस आ रहा है, तो वहां छिपे हुए पाइप लीकेज की जांच करवाना बेहतर है. नई बनी दीवारों में भी कभी-कभी ऐसी सफेद परत दिखाई दे सकती है. निर्माण के दौरान सीमेंट और प्लास्टर के अंदर मौजूद नमी जब धीरे-धीरे बाहर निकलती है, तो उसके साथ लवण सतह पर आ सकते हैं. हालांकि अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार लौटे, तो नमी के दूसरे स्रोत की जांच जरूरी हो सकती है.
क्या यह फफूंदी है?
हर सफेद परत को फफूंदी समझना सही नहीं है. एफ्लोरेसेंस आमतौर पर सफेद और पाउडर जैसा दिखाई देता है और इसमें फफूंदी जैसी गंध नहीं होती. यह खुद कोई फंगस नहीं है, बल्कि दीवार के अंदर से नमी के आने का संकेत है. हालांकि इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए. असली समस्या सफेद पाउडर से ज्यादा उसके पीछे छिपी नमी हो सकती है. अगर दीवार लंबे समय तक नम रहती है, तो पेंट खराब हो सकता है, प्लास्टर कमजोर पड़ सकता है और कुछ मामलों में फफूंदी जैसी दूसरी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं. इसलिए सफेद पाउडर को सिर्फ एक कॉस्मेटिक समस्या मानकर छोड़ देना ठीक नहीं है.

सिर्फ पेंट करने से समस्या नहीं जाएगी
अगर दीवार पर सफेद पाउडर जमा हो गया है, तो उसके ऊपर नया पेंट कर देना आसान उपाय जरूर लगता है, लेकिन इससे समस्या हमेशा के लिए खत्म नहीं होगी. अगर दीवार के अंदर नमी का स्रोत मौजूद है, तो सफेद परत दोबारा दिखाई दे सकती है और नया पेंट भी कुछ समय बाद उखड़ सकता है. पहले यह पता लगाना जरूरी है कि नमी कहां से आ रही है. जरूरत पड़ने पर दीवार की नमी की जांच, पाइप लीकेज की जांच और बाहरी दीवार, छत, खिड़कियों या बालकनी जैसी जगहों की जांच की जा सकती है.
सफेद परत को कैसे साफ करें?
अगर नमी की वजह पहले ही ठीक कर दी गई है, तो बची हुई सफेद परत को साफ किया जा सकता है. हल्की परत के लिए सूखे और मुलायम ब्रश से इसे हटाया जा सकता है. ढीले पाउडर को वैक्यूम से भी साफ किया जा सकता है. बहुत जिद्दी या बार-बार लौटने वाली परत के मामले में सही सफाई का तरीका सतह के प्रकार पर निर्भर करेगा. इसलिए जरूरत पड़ने पर किसी एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर है.
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आगे से कैसे बचें?
दीवारों को इस समस्या से बचाने का सबसे अच्छा तरीका नमी को अंदर जाने से रोकना है. दीवारों में आई दरारों को समय पर ठीक करें, खराब वॉटरप्रूफिंग की मरम्मत करवाएं और पाइप में किसी भी तरह के रिसाव को नजरअंदाज न करें. जहां नमी ज्यादा रहती है, वहां सही वेंटिलेशन रखना भी जरूरी है. साथ ही छत, बाहरी दीवारों और पानी की निकासी वाली जगहों की समय-समय पर जांच करते रहें.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>बाथरूम के नल पर सफेद परत जम गई, बिना मेहनत ऐसे करें साफ</title>
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        <description><![CDATA[ बाथरूम की सफाई करते समय हम फर्श, शीशे और वॉश बेसिन पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन नल पर जमी सफेद परत अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. कुछ समय बाद यह परत इतनी मोटी हो जाती है कि नल पुराना और गंदा दिखने लगता है. असल में यह परत पानी में मौजूद मिनरल्स की वजह से जमती है. खासकर जिस जगह पानी ज्यादा हार्ड होता है, वहां नल पर सफेद दाग जल्दी दिखाई देने लगते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे साफ करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं होती. घर में रखी कुछ आसान चीजों से नल को फिर से साफ और चमकदार बनाया जा सकता है.
सिरके से आसानी से हटाएं सफेद परत
नल पर जमी सफेद परत साफ करने के लिए सफेद सिरका इस्तेमाल किया जाता है. एक कटोरी में थोड़ा सिरका लें और उसमें कपड़ा भिगो दें. अब इस कपड़े को नल के उस हिस्से पर कुछ देर के लिए लपेटकर रखें, जहां सफेद परत जमी है. करीब 15 से 20 मिनट बाद कपड़ा हटाकर नल को पुराने टूथब्रश या मुलायम स्क्रब से हल्के हाथ से रगड़ें. इसके बाद साफ पानी से नल धो लें और सूखे कपड़े से पोंछ दें. सिरका परत को ढीला करने में मदद करता है, जिससे सफाई आसान हो जाती है. अगर परत ज्यादा मोटी है तो इस प्रक्रिया को दोबारा किया जा सकता है.
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नींबू और बेकिंग सोडा भी आएगा काम
अगर घर में सिरका नहीं है तो नींबू और बेकिंग सोडा से भी सफाई की जा सकती है. पहले नल पर थोड़ा नींबू का रस लगाएं. इसके ऊपर हल्का सा बेकिंग सोडा डालकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद मुलायम ब्रश से धीरे-धीरे रगड़ें. ज्यादा जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे नल की सतह पर खरोंच आ सकती है. सफाई के बाद नल को पानी से अच्छी तरह धोकर सूखे कपड़े से पोंछ दें. नींबू में मौजूद एसिड और बेकिंग सोडा जमी गंदगी को ढीला करने में मदद करते हैं. हालांकि, किसी भी नए मिश्रण को इस्तेमाल करने से पहले नल की सतह और निर्माता की सफाई संबंधी सलाह देखना बेहतर रहता है.
सफाई के बाद ऐसे रखें नल चमकदार
नल पर सफेद परत बार-बार न जमे, इसके लिए रोजाना की छोटी सी सफाई काफी मदद करती है. बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद नल पर पानी की बूंदें ज्यादा देर तक न रहने दें. एक सूखे और मुलायम कपड़े से नल को पोंछ दें. इससे पानी के दाग जमने की संभावना कम होती है. हफ्ते में एक बार नल की अच्छी तरह सफाई भी की जा सकती है. अगर नल पर पहले से बहुत मोटी परत जम चुकी है तो उसे चाकू या किसी नुकीली चीज से खुरचने की कोशिश न करें. इससे नल पर खरोंच आ सकती है. हल्के हाथ से सफाई करना ही बेहतर रहता है. इस तरह थोड़ी सी नियमित सफाई से नल लंबे समय तक साफ और चमकदार दिखता है.
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        <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 05:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Floor Cleaning: पोंछा लगाने के बाद भी बनी रहती है फर्श पर चिपचिप, जानें सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Sticky Residue On Tiled Floors: पोंछा लगाने के बाद जब फर्श साफ और चमकदार दिखे, साथ ही पैरों के नीचे एकदम साफ और चिकना महसूस हो, तो मन भी खुश हो जाता है. लेकिन कई घरों में ऐसा नहीं होता. फर्श को कोने-कोने तक साफ करने के बाद भी उस पर चिपचिपाहट बनी रहती है. कभी पैर रखने पर फर्श चिपचिपा महसूस होता है, तो कभी सूखने के बाद उस पर धूल और गंदगी जल्दी जमने लगती है.
अगर आपके घर में भी पोंछा लगाने के बाद फर्श ऐसा ही महसूस होता है, तो जरूरी नहीं कि वजह सिर्फ गंदगी हो. कई बार सफाई करने का तरीका ही फर्श पर ऐसी परत छोड़ देता है, जिसकी वजह से वह साफ होने के बावजूद चिपचिपा लगता है. अच्छी बात यह है कि इसकी वजह समझकर इस परेशानी को आसानी से कम किया जा सकता है.
पोंछा लगाने के बाद फर्श चिपचिपा क्यों हो जाता है?
सबसे आम वजह सफाई वाले प्रोडक्ट का बचा हुआ हिस्सा हो सकता है. कई फ्लोर क्लीनर में साबुन या वैक्स जैसी चीजें होती हैं. अगर पोंछा लगाने के बाद इनका हिस्सा फर्श से अच्छी तरह साफ नहीं होता, तो पानी सूखने के बाद इसकी एक हल्की परत सतह पर रह सकती है. यही परत फर्श को चिपचिपा बना सकती है. इतना ही नहीं, इस तरह की परत पर धूल और गंदगी भी जल्दी चिपकने लगती है. नतीजा यह होता है कि अगली बार पोंछा लगाने के बाद भी फर्श उतना साफ महसूस नहीं होता.

गंदे पानी से पोंछा लगाना भी बड़ी गलती है
अगर आप एक ही बाल्टी के पानी से पूरे घर का पोंछा लगाते हैं और पानी काफी गंदा होने के बाद भी उसे नहीं बदलते, तो आप अनजाने में गंदगी को फर्श पर दोबारा फैला सकते हैं. पोंछे में मौजूद मिट्टी, तेल और सफाई वाले प्रोडक्ट के अवशेष पानी में मिल जाते हैं. यही गंदा पानी जब बार-बार फर्श पर लगाया जाता है, तो साफ करने के बजाय वहां एक परत छोड़ सकता है. इसलिए पोंछा लगाते समय पानी को जरूरत के हिसाब से बदलते रहना जरूरी है.
पानी की वजह से भी हो सकती है परेशानी
हर जगह इस्तेमाल होने वाला पानी एक जैसा नहीं होता. कुछ जगहों पर पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल ज्यादा होते हैं, जिसे हार्ड वॉटर कहा जाता है. ऐसे पानी में मौजूद मिनरल सफाई वाले प्रोडक्ट के साथ मिलकर फर्श पर हल्की परत छोड़ सकते हैं. पानी सूखने के बाद यह परत फर्श को चिपचिपा या मैला महसूस करा सकती है. अगर आपके घर में पोंछा लगाने के बाद बार-बार ऐसा होता है, तो पानी की गुणवत्ता भी इसकी एक वजह हो सकती है.

हर फर्श के लिए एक ही क्लीनर सही नहीं
एक और गलती यह है कि घर के हर तरह के फर्श पर एक ही क्लीनर इस्तेमाल किया जाता है. टाइल, पत्थर, लकड़ी या लैमिनेट जैसे अलग-अलग फर्श के लिए सफाई का तरीका अलग हो सकता है. गलत तरह का क्लीनर इस्तेमाल करने पर फर्श की ऊपरी परत प्रभावित हो सकती है और उस पर चिपचिपी परत बनने की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए फर्श की सतह के हिसाब से सही क्लीनिंग प्रोडक्ट चुनना बेहतर रहता है.
चिपचिपे फर्श को साफ करने का सही तरीका
अगर पोंछा लगाने के बाद फर्श चिपचिपा महसूस हो रहा है, तो एक बार सिर्फ साफ पानी से पोंछा लगाने की कोशिश करें. पहले सामान्य तरीके से फ्लोर क्लीनर से पोंछा लगाएं. इसके बाद साफ पानी में साफ मॉप डुबोकर अच्छी तरह निचोड़ें और दोबारा फर्श पर लगाएं. इससे फर्श पर बचा हुआ क्लीनर हटाने में मदद मिल सकती है. साथ ही पोंछे का पानी ज्यादा गंदा होने का इंतजार न करें. पानी गंदा दिखने लगे या उसमें मिट्टी और गंदगी ज्यादा जमा हो जाए, तो उसे बदल दें. साफ पानी इस्तेमाल करने से गंदगी को दोबारा फर्श पर फैलाने से बचा जा सकता है.
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क्लीनर की मात्रा भी रखें सही
कई बार लोग यह सोचकर ज्यादा फ्लोर क्लीनर डाल देते हैं कि इससे फर्श ज्यादा साफ होगा. लेकिन जरूरत से ज्यादा क्लीनर इस्तेमाल करने पर उसका अवशेष फर्श पर रह सकता है. इसलिए हमेशा क्लीनर के लेबल पर दी गई मात्रा के हिसाब से उसे पानी में मिलाएं. अगर पोंछा लगाने के बाद हल्की परत या चिपचिपाहट महसूस हो, तो साफ पानी से दोबारा पोंछा लगाना मददगार हो सकता है.
पोंछा लगाने से पहले फर्श से सूखी धूल और मिट्टी हटाना भी जरूरी है. इसके लिए पहले झाड़ू या वैक्यूम का इस्तेमाल करें. इसके बाद पोंछा लगाएं. इससे मॉप के साथ मिट्टी इधर-उधर फैलने की समस्या कम होगी. आखिर में फर्श को साफ कपड़े या सूखे मॉप से सुखाना भी अच्छा रहता है. इससे पानी के निशान और मिनरल की परत बनने की संभावना कम हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Roti Making Tips: रोटी नहीं फूल रही, कहीं आटा गूंथने में ये गलती तो नहीं कर रहे?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Rotis Do Not Puff Up On Tawa: रोटी का फूलना देखने में भले ही छोटी सी बात लगे, लेकिन जब रोटी तवे पर अच्छे से फूलकर गुब्बारे जैसी हो जाती है, तो समझ आता है कि आटा और उसे बनाने का तरीका सही रहा है. वहीं अगर रोटी बार-बार सपाट रह जाती है, सूखी या सख्त हो जाती है, तो इसकी वजह सिर्फ बेलने या तवे की गर्मी नहीं होती. कई बार गलती आटा गूंथते समय ही हो जाती है.
रोटी को अच्छा फूलाने के लिए आटे का सही होना सबसे जरूरी है. अगर आटा बहुत कड़ा है, बहुत ढीला है या ठीक से गूंथा नहीं गया है, तो बाद में कितनी भी सावधानी से रोटी बेल लें, उसके फूलने में परेशानी आ सकती है.
आटा न बहुत सख्त हो, न बहुत चिपचिपा
रोटी के लिए आटा नरम और मुलायम होना चाहिए. हाथ से छूने पर यह आसानी से दब जाए और बहुत ज्यादा चिपके भी नहीं. अगर आटा गूंथने के बाद कड़ा महसूस हो रहा है, तो संभव है कि उसमें पानी कम पड़ा हो. बहुत कम पानी डालने से आटा सूखा और सख्त हो सकता है. ऐसा आटा बेलते समय किनारों से फटने लगता है और इससे बनी रोटी भी नरम होने के बजाय कड़ी हो सकती है. दूसरी तरफ पानी बहुत ज्यादा पड़ जाए तो आटा चिपचिपा हो जाता है और उसे बेलना मुश्किल हो जाता है. इसलिए पानी एक साथ डालने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके डालें. लगभग एक कप आटे के लिए करीब 150 मिलीलीटर गुनगुना पानी इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि पानी की सही मात्रा आटे की किस्म पर भी निर्भर करती है.

आटा गूंथते समय ये गलती न करें
कई लोग आटा नरम करने के चक्कर में उसे जरूरत से ज्यादा गूंथते रहते हैं. अच्छी रोटी के लिए आटे को ठीक से गूंथना जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा गूंथने से हर बार बेहतर नतीजा नहीं मिलता. आटा इतना नरम होना चाहिए कि दबाने पर हल्का सा वापस अपनी जगह आ जाए. अगर यह बहुत कड़ा है और बेलते समय बार-बार सिकुड़ रहा है, तो सिर्फ जोर लगाकर गूंथते रहने के बजाय उसकी नमी पर ध्यान दें. आटा तैयार होने के बाद उसे तुरंत बेलना भी सही नहीं है. उसे कुछ समय आराम देना जरूरी है.
गूंथे हुए आटे को आराम जरूर दें
आटा गूंथने के बाद उसे ढककर करीब 20 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें. इससे आटा सेट होता है और उसमें मौजूद ग्लूटेन को आराम मिलता है. इससे आटा ज्यादा आसानी से बेलने लायक बनता है और रोटी के फूलने में भी मदद मिलती है. अगर आटा बेलते समय बार-बार सिकुड़ रहा है, तो हो सकता है कि आपने उसे पर्याप्त समय आराम नहीं दिया हो. आटे को ढककर रखने से वह सूखता भी नहीं है. कुछ लोग आटा गूंथकर तुरंत लोइयां बनाकर बेलना शुरू कर देते हैं. जल्दबाजी में किया गया यह काम रोटी की बनावट पर असर डाल सकता है. इसलिए गूंथने के बाद थोड़ा इंतजार करना बेहतर है.

कौन सा आटा इस्तेमाल कर रहे हैं, यह भी मायने रखता है
रोटी बनाने के लिए गेहूं का आटा यानी अट्&amp;zwnj;टा इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. आटे की किस्म बदलने पर पानी की जरूरत और उसकी बनावट भी बदल सकती है. इसलिए अगर आटा जरूरत से ज्यादा चिपक रहा है या बहुत सख्त हो रहा है, तो सिर्फ गूंथने के तरीके को दोष देने के बजाय आटे की किस्म पर भी ध्यान दें.
आटा सही है, फिर भी रोटी नहीं फूल रही?
अगर आटा नरम है, अच्छी तरह गूंथा गया है और उसे आराम भी दिया है, फिर भी रोटी नहीं फूल रही, तो अगली चीज बेलने का तरीका है. रोटी की मोटाई हर जगह लगभग बराबर रखें. कहीं बहुत मोटी और कहीं बहुत पतली रोटी होने पर वह एक जैसी नहीं पकती और भाप भी बराबर नहीं बन पाती. बहुत ज्यादा सूखा आटा लगाकर बेलने से भी रोटी सूखी और सख्त हो सकती है. बस हल्का सा सूखा आटा लगाएं और अतिरिक्त आटा झाड़ दें. रोटी को जितना हो सके गोल और बराबर मोटाई का बेलें. बेलते समय बहुत ज्यादा दबाव डालने की जरूरत नहीं है. हल्के और बराबर हाथ से बेलने की कोशिश करें.
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तवे की गर्मी को भी नजरअंदाज न करें
कभी-कभी आटा सही होने के बावजूद तवे की गर्मी रोटी को फूलने नहीं देती. तवा बहुत ठंडा होगा तो रोटी धीरे-धीरे सूखने लगेगी और फूलने से पहले ही सख्त हो सकती है. वहीं बहुत ज्यादा गर्म तवे पर रोटी बाहर से जल्दी पक या जल सकती है, जबकि अंदर ठीक से नहीं पकती. रोटी सेंकने से पहले तवे को अच्छी तरह गर्म करें. तवे पर पानी की कुछ बूंदें डालकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है. पानी तुरंत चटककर जल्दी सूख जाए तो तवा काफी गर्म है. रोटी डालने के बाद उसे बार-बार पलटने की जरूरत नहीं है. जब हल्के बुलबुले दिखाई देने लगें, तब उसे पलटें. दूसरी तरफ हल्के भूरे निशान आने के बाद दोबारा पलटकर हल्के हाथ से दबाने पर रोटी फूल सकती है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Squeaky Door: दरवाजे से आ रही चर्र&amp;चर्र की आवाज, बढ़ई बुलाए बिना करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Ways To Stop Door Creaking Noise: दरवाजा खोलते या बंद करते ही अगर उसमें से चर्र-चर्र की आवाज आने लगे, तो यह आवाज धीरे-धीरे काफी परेशान करने वाली हो जाती है. खासकर सुबह या रात के समय जब घर में सन्नाटा हो, तब एक छोटी सी आवाज भी साफ सुनाई देती है. ऐसे में हर बार बढ़ई को बुलाने की जरूरत नहीं होती. कई बार दरवाजे की इस आवाज को घर पर ही कुछ आसान तरीकों से ठीक किया जा सकता है.
दरवाजे के चरमराने की वजह हमेशा सिर्फ कब्जे में तेल की कमी नहीं होती. कई बार दरवाजे के स्क्रू ढीले हो जाते हैं, कब्जे में जंग लग जाती है, दरवाजे का फ्रेम थोड़ा खिसक जाता है या पेंट की मोटी परत के कारण दरवाजा ठीक से नहीं बैठ पाता. इसलिए पहले आवाज की वजह समझना जरूरी है.
ढीले स्क्रू की वजह से तो नहीं आ रही आवाज?
समय के साथ लकड़ी के भारी दरवाजे का वजन कब्जों पर पड़ता रहता है. इससे कब्जे के स्क्रू धीरे-धीरे ढीले हो सकते हैं. जब ऐसा होता है तो दरवाजा थोड़ा नीचे की तरफ झुक सकता है और उसका किनारा फ्रेम से रगड़ खाने लगता है. इसी वजह से चर्र-चर्र की आवाज आ सकती है.

अगर कोई स्क्रू कसते समय घूमता ही रहे और लकड़ी में पकड़ न बनाए, तो हो सकता है कि उसका छेद ढीला हो गया हो. ऐसे में पुराने छेद में कुछ लकड़ी की माचिस की तीलियां डालकर उसे फिर से मजबूत किया जा सकता है. इसके लिए माचिस की तीली का ज्वलन वाला सिरा हटा दें और लकड़ी वाले हिस्से पर थोड़ा वुड ग्लू लगाकर उसे स्क्रू के छेद में डालें. सूखने के बाद अतिरिक्त हिस्सा हटा दें और वहां थोड़ा लंबा लकड़ी का स्क्रू लगा दें. इससे स्क्रू को लकड़ी में दोबारा अच्छी पकड़ मिल सकती है.
कब्जे में घर्षण है तो पिन निकालकर करें सफाई
अगर सारे स्क्रू अच्छी तरह कसे हुए हैं, लेकिन दरवाजा हिलाने पर फिर भी आवाज आती है, तो समस्या कब्जे के अंदर हो सकती है. दरवाजे के कब्जे में लगा पिन लगातार घूमता रहता है और समय के साथ वहां घर्षण बढ़ सकता है. दरवाजे को थोड़ा खोलकर उसके नीचे कोई मजबूत सहारा दें, ताकि पिन निकालते समय उसका वजन कब्जे पर न पड़े. इसके बाद पतली कील और हल्के हथौड़े की मदद से कब्जे के पिन को नीचे से धीरे-धीरे ऊपर की तरफ निकालें.

पिन बाहर आने के बाद उसके ऊपर पैराफिन वैक्स या साधारण मोम की हल्की परत लगा सकते हैं. ड्राई सिलिकॉन स्प्रे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद पिन को वापस कब्जे में लगाकर अच्छी तरह बैठा दें. इससे धातु के हिस्सों के बीच घर्षण कम हो सकता है और आवाज भी कम हो सकती है.
पिन पर जंग लगी है तो पहले उसे हटाएं
कई बार नमी की वजह से कब्जे के अंदर लगे पिन पर हल्की जंग जम जाती है. देखने में जंग बहुत कम हो सकती है, लेकिन दरवाजा खुलने-बंद होने पर यही खुरदरी सतह आवाज पैदा कर सकती है. अगर पिन निकालने पर उस पर जंग, गंदगी या खुरदरापन दिखाई दे, तो उसके ऊपर सीधे लुब्रिकेंट लगाने के बजाय पहले उसे साफ करें. बारीक स्टील वूल से पिन को अच्छी तरह रगड़ें. इससे जंग और जमा गंदगी हटाने में मदद मिलेगी. इसके बाद सूखे माइक्रोफाइबर कपड़े से उसे साफ करके वापस कब्जे में लगा दें.
फ्रेम और कब्जे के बीच का तालमेल भी देखें
अगर दरवाजा बंद करते समय ही चर्र या टिक जैसी आवाज आती है, तो संभव है कि दरवाजा और उसका फ्रेम ठीक से अलाइन न हो. समय के साथ लकड़ी का फ्रेम थोड़ा खिसक सकता है और कब्जे के हिस्से एक-दूसरे पर दबाव डालने लगते हैं. ऐसे में कब्जे की प्लेट के पीछे पतले कार्डबोर्ड या खास हिंग शिम की बहुत पतली परत लगाई जा सकती है. इससे कब्जे की स्थिति थोड़ी बदलती है और दबाव वाले हिस्से को राहत मिल सकती है. हालांकि इसे करते समय स्क्रू और कब्जे को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखें.
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पेंट की मोटी परत भी बन सकती है वजह
पुराने घरों में दरवाजे और कब्जों पर कई बार पेंट की एक के ऊपर एक परत चढ़ जाती है. अगर कब्जे के आसपास बहुत ज्यादा पेंट जमा हो गया है, तो कब्जे की प्लेट लकड़ी पर पूरी तरह सपाट नहीं बैठ पाती. इससे दरवाजा बंद करते समय रगड़ पैदा हो सकती है और आवाज आने लगती है. ऐसी स्थिति में तेज क्राफ्ट नाइफ या स्क्रेपर की मदद से पेंट की अतिरिक्त परत को सावधानी से हटाया जा सकता है. काम करते समय हाथ और लकड़ी दोनों को सुरक्षित रखें.
जरूरत पड़े तो कब्जे बदलना भी आसान उपाय है
अगर पुराने कब्जे बहुत ज्यादा घिस चुके हैं, टेढ़े हैं या लंबे समय से समस्या दे रहे हैं, तो उन्हें बदलना ज्यादा सही विकल्प हो सकता है. भारी लकड़ी के दरवाजों के लिए बॉल-बेयरिंग वाले कब्जे भी इस्तेमाल किए जाते हैं. इनमें घर्षण कम करने के लिए बेयरिंग होती है, जिससे दरवाजा ज्यादा आसानी से खुल और बंद हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Lemon Juice Hack: नींबू से नहीं निकलता रस? काटने से पहले करें ये 1 काम, बहेगा रस</title>
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        <description><![CDATA[ Kitchen Hacks To Squeeze Extra Lemon Juice: कई बार खाना बनाते समय नींबू की जरूरत पड़ती है, लेकिन जैसे ही उसे काटकर निचोड़ते हैं, उम्मीद के मुताबिक रस नहीं निकलता. नींबू हाथ में ही रह जाता है और लगता है कि इसमें रस ही नहीं है. ऐसे में ज्यादातर लोग नींबू को और जोर से दबाने लगते हैं, जिससे हाथ भी चिपचिपे हो जाते हैं और बीज व गूदा भी रस में गिर जाता है.
अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो नींबू काटने से पहले एक छोटा सा तरीका आजमाकर देख सकते हैं. नींबू को सीधे काटकर निचोड़ने के बजाय पहले उसे हल्का सा रोल करने से अंदर मौजूद रस को बाहर निकालना आसान हो सकता है. यह तरीका बेहद आसान है और इसके लिए किसी खास उपकरण की भी जरूरत नहीं पड़ती.
नींबू काटने से पहले क्या करें?
सबसे पहले नींबू को हथेली के नीचे रखें और हल्के दबाव के साथ उसे किसी समतल सतह पर आगे-पीछे रोल करें. इसे बहुत ज्यादा दबाने की जरूरत नहीं है. कुछ सेकंड तक रोल करने के बाद नींबू को बीच से काट लें और फिर निचोड़ें. रोल करने के दौरान नींबू के अंदर मौजूद गूदे पर हल्का दबाव पड़ता है. इससे रस निकालने में आसानी हो सकती है और नींबू को निचोड़ने के लिए बहुत ज्यादा ताकत लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. खासतौर पर जब नींबू थोड़ा सख्त हो, तब यह तरीका ज्यादा सुविधाजनक लग सकता है.

हालांकि, सिर्फ रोल करने से हर नींबू से अचानक बहुत ज्यादा रस निकलने लगेगा, ऐसा जरूरी नहीं है. नींबू का आकार, उसकी ताजगी और पकने की अवस्था भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है.
नींबू की ताजगी भी मायने रखती है
अच्छा रस पाने के लिए नींबू का सही होना भी जरूरी है. बहुत ज्यादा सख्त नींबू को निचोड़ना मुश्किल हो सकता है, जबकि हल्का नरम और पका हुआ नींबू आमतौर पर आसानी से दब जाता है. इसलिए बाजार से नींबू खरीदते समय ऐसे नींबू चुनें जो हाथ से हल्का दबाने पर थोड़ा नरम महसूस हों. बहुत सूखा या काफी समय से रखा हुआ नींबू बाहर से ठीक दिख सकता है, लेकिन उसके अंदर रस कम हो सकता है. ऐसे नींबू को चाहे जितना दबा लें, ज्यादा फायदा नहीं होगा.

अगर बीज और गूदा परेशान करते हैं तो ये तरीका अपनाएं
नींबू को हाथ से निचोड़ने पर अक्सर बीज और गूदे के छोटे टुकड़े भी रस में गिर जाते हैं. अगर आप नींबू का रस चाय, सलाद, शरबत या किसी डिश में डाल रहे हैं और उसमें बीज नहीं चाहते, तो रस को सीधे किसी छोटी छलनी से छान सकते हैं. एक और आसान तरीका है मैनुअल साइट्रस प्रेस का इस्तेमाल करना. इसमें नींबू को सिर्फ दो हिस्सों में काटकर प्रेस करना होता है. यह तरीका कम गंदगी करता है और बीज को रस से अलग रखने में भी मदद करता है. अगर आपके घर में अक्सर नींबू का इस्तेमाल होता है तो यह छोटा सा उपकरण काम आ सकता है.
एक और तरीका है बिना नींबू काटे रस निकालना
नींबू से रस निकालने का एक अलग तरीका भी है, जिसमें उसे पहले काटा नहीं जाता. इसमें नींबू के एक सिरे पर लकड़ी की सींक या मोटी स्ट्रॉ से छोटा सा छेद किया जाता है. इसके बाद नींबू को दबाने पर उसी छेद से रस निकाला जा सकता है.
इसे भी पढ़ें:&amp;nbsp;Healthy Recipe for Kids: बच्चों के लिए बनाएं गाजर-चुकंदर कटलेट, सब्जियां खिलाने का हिट फॉर्म्युला
इस तरीके का फायदा यह है कि पूरा नींबू एक साथ काटना नहीं पड़ता. जितना रस चाहिए, उतना निकालकर बाकी नींबू को बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए नींबू का थोड़ा नरम और अच्छी तरह पका होना बेहतर रहता है. ज्यादा सख्त नींबू को दबाने पर छिलका फट सकता है और रस दूसरी तरफ से भी निकल सकता है, जिससे किचन में गंदगी फैल सकती है.
कितना रस मिलेगा, यह नींबू पर निर्भर करता है
यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी ट्रिक से हर नींबू से एक जैसी मात्रा में रस नहीं निकलेगा. आमतौर पर एक नींबू से करीब 2 से 3 बड़े चम्मच रस मिल सकता है, लेकिन आकार और पकने के हिसाब से यह मात्रा बदल सकती है. इसलिए अगली बार नींबू काटने से पहले उसे कुछ सेकंड हथेली के नीचे हल्के दबाव से रोल करके देखें. इसके बाद काटकर निचोड़ें. तरीका छोटा है, इसमें कोई अतिरिक्त सामान नहीं चाहिए और नींबू का रस निकालना थोड़ा आसान हो सकता है. अगर फिर भी रस कम निकल रहा है, तो समस्या आपके निचोड़ने के तरीके में नहीं बल्कि नींबू के सूखे या कम रसीले होने में हो सकती है.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Back Itching: पीठ की खुजली से हैं परेशान? बिना खुजलाए ऐसे पाएं तुरंत आराम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Stop Back Itching Fast At Home: पीठ में खुजली होना काफी परेशान करने वाला हो सकता है, खासकर तब जब खुजली ऐसी जगह हो जहां हाथ आसानी से न पहुंच पाए. कई बार खुजलाने के बाद कुछ सेकंड के लिए आराम मिलता है, लेकिन थोड़ी देर बाद खुजली फिर शुरू हो जाती है और पहले से ज्यादा तेज महसूस होने लगती है. बार-बार खुजलाने से त्वचा में जलन, लालिमा और सूजन भी हो सकती है. अगर आपकी पीठ में भी खुजली हो रही है और खुजलाने वाला कोई नहीं है, तो कुछ आसान उपायों की मदद से खुजली की तलब को शांत किया जा सकता है.
क्या होता है कारण?
पीठ में खुजली के पीछे कई कारण हो सकते हैं. त्वचा का रूखा होना इसका एक आम कारण है. मौसम में बदलाव, ज्यादा गर्म पानी से नहाना या त्वचा की नमी कम होने पर पीठ में खुजली महसूस हो सकती है. इसके अलावा पसीना, धूल-मिट्टी, किसी साबुन या डिटर्जेंट से एलर्जी, कीड़े के काटने और त्वचा संबंधी समस्याओं के कारण भी खुजली हो सकती है. एक्जिमा और सोरायसिस जैसी कुछ त्वचा संबंधी स्थितियों में भी लंबे समय तक खुजली परेशान कर सकती है.

कैसे करें शांत
अगर पीठ में अचानक खुजली हो रही है, तो सबसे पहले ठंडी सिकाई करके राहत पाई जा सकती है. इसके लिए बर्फ के कुछ टुकड़ों को किसी साफ कपड़े में लपेटें और पीठ के खुजली वाले हिस्से पर हल्के हाथ से लगाएं. ठंडक त्वचा को शांत करने और जलन कम करने में मदद कर सकती है. बर्फ को सीधे त्वचा पर लगाने से बचें.
मॉइश्चराइजर भी फायदेमंद&amp;nbsp;
रूखी त्वचा की वजह से होने वाली खुजली में मॉइश्चराइजर लगाना फायदेमंद हो सकता है. नहाने के बाद त्वचा को पूरी तरह रगड़ने के बजाय हल्के हाथ से सुखाएं और पीठ पर अच्छी तरह मॉइश्चराइजर लगाएं. इससे त्वचा में नमी बनी रहती है और खुजली कम हो सकती है. अगर पीठ तक हाथ नहीं पहुंच रहा है, तो लंबे हैंडल वाले लोशन एप्लिकेटर की मदद से मॉइश्चराइजर लगाया जा सकता है.
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एलोवेरा जेल का यूज
एलोवेरा जेल भी त्वचा को ठंडक और आराम दे सकता है. आप साफ एलोवेरा जेल की एक पतली परत पीठ पर लगा सकते हैं. इससे खुजली और जलन में कुछ राहत मिल सकती है. इसी तरह कैलामाइन लोशन का इस्तेमाल भी खुजली वाली त्वचा को ठंडक देने के लिए किया जाता है. इसे लगाने से पहले दिए गए निर्देशों को जरूर पढ़ें. अगर गर्मी और पसीने के कारण पीठ में खुजली हो रही है, तो शरीर को ठंडा रखना जरूरी है. ठंडे या सामान्य तापमान के पानी से नहाएं और पसीना आने के बाद कपड़े बदल लें. बहुत ज्यादा टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि इनमें पसीना फंस सकता है और खुजली बढ़ सकती है. ढीले और आरामदायक कपड़े त्वचा को हवा लगने देते हैं.

इन चीजों से भी मिल सकती है राहत
ओटमील बाथ भी खुजली वाली त्वचा को आराम पहुंचा सकता है. नहाने के पानी में कोलॉइडल ओटमील मिलाकर कुछ देर उसमें रहने से त्वचा को राहत मिल सकती है. इसके अलावा, नहाने के लिए बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल न करें. गर्म पानी त्वचा के प्राकृतिक तेल को कम कर सकता है, जिससे रूखापन और खुजली बढ़ सकती है. खुजली होने पर बार-बार नाखूनों से त्वचा को रगड़ना ठीक नहीं है. इससे त्वचा छिल सकती है और&amp;nbsp; का खतरा भी बढ़ सकता है. अगर खुजली की तलब बहुत तेज हो, तो खुजलाने की बजाय ठंडी सिकाई करें या प्रभावित जगह पर हल्के हाथ से थपथपाएं. नाखूनों को छोटा और साफ रखना भी बेहतर होता है. हालांकि, अगर पीठ में लगातार कई दिनों तक खुजली बनी रहे, त्वचा पर दाने, लाल चकत्ते, सूजन या घाव दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें. कुछ मामलों में लगातार खुजली किसी त्वचा संबंधी समस्या या दूसरी स्वास्थ्य स्थिति का संकेत भी हो सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Back, Itching:, पीठ, की, खुजली, से, हैं, परेशान, बिना, खुजलाए, ऐसे, पाएं, तुरंत, आराम</media:keywords>
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        <title>Tawa Cleaning: लोहे का तवा हमेशा रहेगा नए जैसा, साफ करने के बाद करें ये 1 काम</title>
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        <description><![CDATA[ Viral Salt Hack For Cleaning Iron Tawa: लोहे के तवे पर बनी रोटी, डोसा या पराठे का स्वाद ही अलग होता है. लेकिन जितना अच्छा खाना लोहे के तवे पर बनता है, उतनी ही परेशानी कई बार इसकी सफाई में होती है. लगातार इस्तेमाल के बाद तवे की सतह पर तेल, जले हुए खाने के अवशेष और काली परत जमने लगती है. इसे साफ करने के लिए लोग कई तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं. इन दिनों तवे की सफाई से जुड़ा एक हैक काफी वायरल है, जिसमें तवे पर नमक डालकर उसे साफ करने की बात कही जाती है.&amp;nbsp;
कई वीडियो में दिखाया जाता है कि नमक डालकर रगड़ने के बाद तवे का कालापन काफी हद तक हट जाता है. लेकिन आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या नमक सच में तवे का कालापन गायब कर देता है या इसके पीछे कोई और वजह है?
नमक से तवे का कालापन क्यों कम होता है?
दरअसल, तवे पर जमा काली परत हमेशा तवे के लोहे का रंग नहीं होती. लंबे समय तक खाना बनाने के कारण उस पर तेल, चिकनाई और खाने के जले हुए छोटे-छोटे अवशेष चिपक सकते हैं. जब नमक को तवे की सतह पर डालकर रगड़ा जाता है तो उसके मोटे दाने एक तरह से स्क्रब की तरह काम करते हैं. रगड़ने से तवे पर चिपकी चिकनाई और खाने के अवशेष ढीले होकर निकलने लगते हैं. यही वजह है कि सफाई के बाद तवा पहले की तुलना में कम काला नजर आता है. यानी नमक कोई जादुई तरीके से लोहे का कालापन खत्म नहीं करता, बल्कि सतह पर जमी गंदगी और अवशेष को हटाने में मदद करता है.

नमक के साथ नींबू का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
कई घरेलू तरीकों में नमक के साथ नींबू का इस्तेमाल भी किया जाता है. इसके लिए तवे के थोड़ा ठंडा होने के बाद उस पर मोटा नमक फैलाया जाता है. फिर आधे कटे नींबू से तवे की सतह को हल्के हाथों से रगड़ा जाता है. नमक के दाने रगड़ने का काम करते हैं, जबकि नींबू की अम्लीय प्रकृति चिकनाई और कुछ तरह के अवशेषों को ढीला करने में मदद कर सकती है. साथ ही इससे तवे पर मौजूद खाने की गंध भी कम हो सकती है.
हालांकि, लोहे के तवे की सीजनिंग यानी उसकी बनी हुई सुरक्षात्मक तेल की परत को बचाना भी जरूरी है. इसलिए नींबू जैसी एसिडिक चीज का इस्तेमाल बहुत ज्यादा या बार-बार करने से बचना चाहिए, खासकर अगर तवे की सीजनिंग अच्छी तरह बनी हुई हो.
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तवे को साफ करने का सही तरीका क्या है?
अगर तवे पर खाना चिपका हुआ है तो उसे तुरंत तेज रगड़ने के बजाय कुछ देर के लिए हल्के गर्म पानी की मदद से ढीला किया जा सकता है. इसके बाद मोटे नमक से सतह को हल्के हाथों से रगड़ें. जरूरत हो तो नींबू का इस्तेमाल किया जा सकता है. सफाई के बाद तवे को पानी से धोकर तुरंत अच्छी तरह सुखाना बहुत जरूरी है. लोहे का तवा गीला छोड़ने पर उसमें जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए कपड़े से पोंछने के बाद उसे थोड़ी देर गर्म तवे पर रखकर बची हुई नमी भी खत्म की जा सकती है.

सफाई के बाद करें ये छोटा सा काम
लोहे के तवे को लंबे समय तक अच्छी हालत में रखने के लिए सफाई के बाद उस पर तेल की बहुत हल्की परत लगाना अच्छा रहता है. इसके लिए तवा सूखने के बाद थोड़ा सा तेल डालकर पूरे तवे पर पतली परत की तरह फैला दें. जरूरत से ज्यादा तेल लगाने की जरूरत नहीं है. इससे तवे की सीजनिंग बनी रहने में मदद मिलती है और जंग लगने का खतरा भी कम होता है. समय-समय पर तवे को दोबारा सीजन करना भी जरूरी हो सकता है, खासकर तब जब उसकी सतह ज्यादा सूखी या खुरदरी नजर आने लगे.
लोहे के तवे को साफ करते समय इन गलतियों से बचें
लोहे के तवे को लंबे समय तक पानी में भिगोकर नहीं रखना चाहिए. ऐसा करने से उसमें जंग लग सकती है. इसी तरह हर बार तेज साबुन या बहुत ज्यादा रगड़ने से उसकी सीजनिंग खराब हो सकती है. अगर तवे पर जंग लग गई है तो उसे हटाने के लिए सफेद सिरके की मदद ली जा सकती है. जंग वाली जगह पर सिरके में भिगोया हुआ कपड़ा करीब 30 मिनट तक रख सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Monsoon Home Tips: बरसात में बढ़ गया है मक्खी&amp;चींटी का आतंक? पोंछे में मिलाएं 1 चीज</title>
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        <description><![CDATA[ Salt Water Mopping Hacks For Ants And Insects: बारिश का मौसम आते ही जहां गर्मी से राहत मिलती है, वहीं घर में नमी और उमस बढ़ने लगती है. यही वजह है कि इस मौसम में मक्खी, चींटी, मच्छर, कॉकरोच और दूसरे छोटे कीड़े घर में ज्यादा नजर आने लगते हैं. खासकर किचन, सिंक, खिड़की-दरवाजों और घर के कोनों में इनका आना-जाना बढ़ जाता है.
ऐसे में लोग अक्सर कीड़ों को दूर रखने के लिए बाजार में मिलने वाले स्प्रे और पाउडर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अगर आप बिना ज्यादा खर्च के घर की सफाई के साथ इनसे बचाव करना चाहते हैं तो किचन में मौजूद कुछ चीजें काम आ सकती हैं. इनमें नमक एक आसान विकल्प है. पोंछे के पानी में इसकी थोड़ी मात्रा मिलाकर फर्श साफ करने से चींटियों के आने-जाने वाले रास्तों को प्रभावित करने में मदद मिल सकती है.
पोंछे के पानी में मिलाएं एक चुटकी नमक
फर्श पर पोंछा लगाते समय पानी में एक चुटकी सामान्य नमक मिलाया जा सकता है. नमक का इस्तेमाल घर की सफाई में लंबे समय से किया जाता रहा है और यह चींटियों जैसे छोटे कीड़ों के लिए एक तरह का रोकने में मदद कर सकता है. खासकर जहां से चींटियां बार-बार घर में आती हैं, वहां नियमित सफाई करने से उनके छोड़े हुए रास्ते और खाने के छोटे अवशेष हटाने में मदद मिलती है. हालांकि, सिर्फ नमक डालने से घर में मौजूद हर मक्खी या चींटी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं है. सफाई के साथ-साथ खाने की चीजों और नमी को नियंत्रित करना भी जरूरी है.

बारिश में क्यों बढ़ जाते हैं कीड़े?
मानसून में हवा में नमी बढ़ जाती है. घर के कोनों, सिंक के आसपास और ऐसी जगहों पर जहां पानी जमा रहता है, वहां कीड़ों के लिए अनुकूल माहौल बन सकता है. इसके अलावा खुले में रखे फल, सब्जियां, मीठी चीजें और खाने के छोटे टुकड़े मक्खियों और चींटियों को आसानी से आकर्षित करते हैं. इसलिए सिर्फ पोंछे के पानी में कोई चीज मिलाना ही काफी नहीं है. घर में खाने की चीजें खुली न छोड़ें और फर्श पर गिरे खाने के टुकड़ों को तुरंत साफ करें.
सिरका भी आ सकता है काम
चींटियों और फ्रूट फ्लाइज से बचने के लिए सफेद या एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल भी किया जाता है. चींटियों के रास्ते, दरवाजे और खिड़की की चौखट पर बराबर मात्रा में सिरका और पानी का मिश्रण स्प्रे करने से उनकी छोड़ी हुई गंध की राह को हटाने में मदद मिल सकती है. फ्रूट फ्लाइज के लिए एक छोटी कटोरी में एप्पल साइडर विनेगर और कुछ बूंदें लिक्विड डिश सोप की डालकर रख सकते हैं. इसकी गंध मक्खियों को आकर्षित कर सकती है, जबकि साबुन पानी की सतह के तनाव को कम करता है, जिससे वे उसमें फंस सकती हैं.

नींबू की खुशबू से भी दूरी बनाते हैं कुछ कीड़े
नींबू जैसी खट्टी चीजों की तेज खुशबू कई कीड़ों को पसंद नहीं आती. घर के दरवाजे, खिड़कियों और दूसरे प्रवेश वाले हिस्सों के आसपास नींबू के छिलके रखना एक आसान घरेलू उपाय हो सकता है. नींबू के छिलके को कूड़े में डालने के बजाय उन जगहों पर रखा जा सकता है जहां से कीड़े घर में आते हैं. हालांकि, छिलकों को लंबे समय तक पड़ा न रहने दें और खराब होने पर तुरंत हटा दें.
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लहसुन और पुदीना भी आजमा सकते हैं
लहसुन की तेज गंध भी कई कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है. कुछ लहसुन की कलियों को कुचलकर पानी में कुछ घंटे रखने के बाद पानी को छानकर प्रवेश वाले हिस्सों के आसपास इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी तरह पुदीने की तेज खुशबू भी कुछ कीड़ों को पसंद नहीं आती. दरवाजे, खिड़की और पेंट्री के आसपास ताजा पुदीने की पत्तियां या पेपरमिंट ऑयल में भिगोई हुई कॉटन बॉल रखी जा सकती हैं.
दालचीनी और लौंग भी हैं आसान विकल्प
चींटियों के आने-जाने वाले रास्ते या दरवाजे की चौखट के आसपास थोड़ी सी दालचीनी रखने से भी उन्हें रोकने में मदद मिल सकती है. इसे किचन कैबिनेट और पेंट्री के आसपास भी रखा जा सकता है. लौंग की तेज खुशबू भी मक्खियों और मच्छरों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है. इन्हें छोटे कपड़े की पोटली में डालकर खिड़की या दरवाजे के पास लटकाया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>कितना घातक है रूम फ्रेशनर स्प्रे? इससे कौनसी बीमारी की रहती है आशंका</title>
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        <description><![CDATA[ घर, ऑफिस और कार में अच्छी खुशबू के लिए लोग रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करते हैं. इसकी तेज खुशबू कुछ समय के लिए कमरे की बदबू को दूर कर देती है, लेकिन इसमें मौजूद कुछ कैमिकल शरीर के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं. खासकर बंद कमरे में इसका ज्यादा इस्तेमाल सांस लेने में दिक्कत और एलर्जी जैसी समस्या को बढ़ाती है. इसलिए रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
रूम फ्रेशनर में क्या होता है?&amp;nbsp;
रूम फ्रेशनर में खुशबू देने वाले कई तरह के कैमिकल इस्तेमाल किए जाते हैं. जैसे वाष्पशील कार्बनिक यौगिक जो हवा ताजा करने का काम करते हैं. इसके अलावा डाइक्लोरोबेंजीन जैसे और भी कई कैमिकल. रूम फ्रेशनर स्प्रे करने पर ये बहुत छोटे कणों के रूप में हवा में फैल जाते हैं और कुछ समय तक कमरे की हवा में मौजूद रहते हैं. जब हम सांस लेते हैं तो ये कण हमारे शरीर के अंदर जाते हैं. हर व्यक्ति पर इनका असर अलग-अलग होता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में इनके संपर्क में आने से आंखों, नाक और गले में जलन हो सकती है. कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर या बेचैनी भी महसूस होती है. बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को तेज खुशबू वाले स्प्रे से ज्यादा परेशान कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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ज्यादा इस्तेमाल से हो सकती है सांस की परेशानी
रूम फ्रेशनर का लगातार और ज्यादा इस्तेमाल करने से सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है. जिन लोगों को पहले से अस्थमा या एलर्जी है, उनमें स्प्रे की तेज खुशबू खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकती है. कमरे में स्प्रे करने के तुरंत बाद वहां लंबे समय तक रहना भी ठीक नहीं माना जाता है. खासकर छोटे और बंद कमरे में स्प्रे करने से हवा में इसकी मात्रा ज्यादा देर तक बनी रहती है. इसलिए कमरे में रूम फ्रेशनर इस्तेमाल करने के बाद खिड़की या दरवाजा खोलकर हवा का रास्ता बनाना बेहतर माना जाता है. इससे कमरे की हवा बाहर निकलती है और ताजी हवा अंदर आती है.
इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
रूम फ्रेशनर को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इसे सीधे चेहरे, आंखों या त्वचा पर स्प्रे न करें. खाना बनाने वाली जगह और बच्चों के आसपास भी इसका इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए. अगर स्प्रे करने के बाद खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी महसूस होती है तो इसका इस्तेमाल रोक देना बेहतर है. घर में खुशबू के लिए कमरे की सफाई और हवा का सही आना-जाना सबसे आसान तरीका है. खिड़कियां खोलने और कमरे को साफ रखने से बदबू कम करने में मदद मिलती है. अगर किसी व्यक्ति को रूम फ्रेशनर के इस्तेमाल के बाद बार-बार सांस की परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ladies Business Ideas: सिलाई से लेकर पार्लर तक, घर से शुरू करें ये 5 लेडीज बिजनेस&amp; तगड़ी होगी कमाई</title>
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        <description><![CDATA[ Best Business Ideas For Women At Home: घर संभालने के साथ अगर आप अपना काम शुरू करना चाहती हैं, तो इसके लिए हमेशा बड़ी दुकान या भारी-भरकम निवेश की जरूरत नहीं होती. आपकी अपनी कोई कला, हुनर या पसंद ही कमाई का जरिया बन सकती है. आज के समय में कई महिलाएं घर से छोटे स्तर पर काम शुरू करके धीरे-धीरे उसे बिजनेस में बदल रही हैं. खास बात यह है कि ऐसे कामों में आप अपनी सुविधा के हिसाब से समय दे सकती हैं और शुरुआत भी सीमित बजट में की जा सकती है. अगर आपको सिलाई आती है, खाना बनाने का शौक है, मेकअप और ब्यूटी का काम पसंद है या हाथ से चीजें बनाने का हुनर है, तो आपके लिए कई विकल्प मौजूद हैं.&amp;nbsp;
सिलाई और बुटीक का काम
अगर आपको कपड़े सिलने और डिजाइन करने का शौक है, तो घर से सिलाई का काम शुरू करना अच्छा विकल्प हो सकता है. शुरुआत में आप आसपास की महिलाओं के कपड़े, ब्लाउज, सूट और बच्चों के कपड़े सिल सकती हैं. त्योहारों और शादी के सीजन में डिजाइनर ब्लाउज और खास कपड़ों की डिमांड भी बढ़ सकती है. धीरे-धीरे आप कस्टमाइज्ड कपड़ों का काम बढ़ा सकती हैं. ग्राहकों को अपनी पसंद का डिजाइन, फिटिंग और कपड़े के हिसाब से सिलाई की सुविधा देकर अलग पहचान बनाई जा सकती है. अपने काम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करने से आसपास के इलाकों के बाहर भी ग्राहक मिल सकते हैं.

&amp;nbsp;घर से ब्यूटी पार्लर
ब्यूटी और मेकअप में रुचि रखने वाली महिलाओं के लिए घर से छोटा पार्लर शुरू करना एक विकल्प हो सकता है. इसके लिए शुरुआत में बहुत सारी सेवाएं देने के बजाय कुछ बेसिक सर्विस से शुरुआत की जा सकती है, जैसे फेशियल, वैक्सिंग, थ्रेडिंग, मेहंदी या बेसिक मेकअप.अगर आपके पास ट्रेनिंग और जरूरी अनुभव है, तो बाद में ब्राइडल मेकअप, हेयर स्टाइलिंग और अन्य सेवाएं भी जोड़ी जा सकती हैं. पार्लर को घर के एक छोटे से साफ-सुथरे हिस्से से शुरू किया जा सकता है. अच्छी सर्विस मिलने पर पुराने ग्राहक दोबारा आ सकते हैं और उनके जरिए नए ग्राहक भी बन सकते हैं.
&amp;nbsp;घर का टिफिन या कैटरिंग बिजनेस
खाना बनाना आपकी खासियत है तो इसे कमाई के काम में बदला जा सकता है. घर से टिफिन सर्विस शुरू करके आसपास रहने वाले ऑफिस कर्मचारियों, छात्रों या ऐसे परिवारों तक खाना पहुंचाया जा सकता है, जिन्हें रोज घर का खाना बनाने का समय नहीं मिलता. शुरुआत कुछ टिफिन से की जा सकती है. इसके बाद मांग बढ़ने पर छोटे फंक्शन, जन्मदिन या पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए होम कैटरिंग का काम लिया जा सकता है. स्वाद, साफ-सफाई, समय पर डिलीवरी और एक जैसा अच्छा क्वालिटी बनाए रखना इस बिजनेस में काफी अहम है.

&amp;nbsp;होममेड प्रोडक्ट्स का बिजनेस
अगर आपको चीजें बनाना पसंद है, तो घर पर तैयार किए जाने वाले प्रोडक्ट्स भी कमाई का जरिया बन सकते हैं. महिलाएं अपनी रुचि और हुनर के हिसाब से सजावटी सामान, गिफ्ट आइटम, मोमबत्तियां, हैंडमेड ज्वेलरी, राखी या दूसरे क्राफ्ट प्रोडक्ट तैयार कर सकती हैं. इस तरह के बिजनेस की शुरुआत रिश्तेदारों, दोस्तों और आसपास के लोगों से ऑर्डर लेकर की जा सकती है. बाद में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाई जा सकती है. खास मौकों जैसे त्योहार, शादी और बर्थडे के लिए कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट बनाना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
&amp;nbsp;घर से मेहंदी और मेकअप सर्विस
अगर आपको मेहंदी लगाने या मेकअप करने का हुनर आता है, तो इसे भी घर से शुरू किया जा सकता है. शादी और त्योहारों के सीजन में मेहंदी आर्टिस्ट और मेकअप सर्विस की मांग बढ़ जाती है. शुरुआत में आप अपने आसपास की महिलाओं और रिश्तेदारों के लिए मेहंदी लगाने का काम कर सकती हैं. मेकअप में अच्छी ट्रेनिंग होने पर पार्टी मेकअप या छोटे फंक्शन के लिए सर्विस दी जा सकती है. बाद में ब्राइडल मेकअप जैसी सर्विस जोड़कर काम का दायरा बढ़ाया जा सकता है. अपने पुराने काम की तस्वीरें और ग्राहक की अनुमति से तैयार किए गए लुक सोशल मीडिया पर दिखाने से नए ऑर्डर पाने में मदद मिल सकती है.
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छोटे से शुरू करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं काम
घर से बिजनेस शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शुरुआत अपनी क्षमता और बजट के हिसाब से की जा सकती है. जरूरी नहीं कि पहले दिन से ही बड़ी संख्या में ग्राहक मिल जाएं. शुरुआत में कम ऑर्डर लेकर क्वालिटी पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर रहता है. सबसे पहले यह तय करें कि आपको कौन सा काम सबसे अच्छी तरह आता है और उसमें कितनी मांग हो सकती है. फिर जरूरी सामान, समय और खर्च का हिसाब लगाकर छोटा सेटअप तैयार करें. अपने काम की जानकारी आसपास के लोगों, WhatsApp और सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Smelly Kitchen Mop: फर्श चमकाने वाला पोछा हो गया है मैला? ऐसे करें डीप क्लीन</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Ways To Disinfect Dirty Floor Mop At Home: घर की सफाई करते समय हम फर्श, किचन और बाथरूम को तो अच्छी तरह साफ कर लेते हैं, लेकिन जिस पोछे से ये सारी सफाई होती है, उसकी सफाई पर अक्सर ध्यान नहीं देते. यही गीला पोछा कुछ समय बाद घर में बदबू की वजह बन सकता है. खासकर किचन में इस्तेमाल होने वाले पोछे में तेल, खाने के छोटे कण, धूल और नमी जमा हो जाती है. अगर इसे धोने के बाद ठीक से सुखाया न जाए, तो इसमें बैक्टीरिया और फफूंद पनपने लग सकते हैं और तेज दुर्गंध आने लगती है.
कई बार लोग इस बदबू को दूर करने के लिए पोछे पर सीधे तेज केमिकल डाल देते हैं, लेकिन सही तरीके से सफाई करना ज्यादा जरूरी है. अच्छी बात यह है कि पोछे को साफ करने के लिए आपको हर बार कोई महंगा क्लीनर खरीदने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों और सही तरीके से धोने से पोछे की गंदगी और बदबू काफी हद तक कम की जा सकती है.
सबसे पहले पोछे को अच्छी तरह धोएं
पोछा इस्तेमाल करने के तुरंत बाद उसकी सफाई करना सबसे जरूरी है. सबसे पहले उसे साफ बहते पानी में अच्छी तरह धोएं, ताकि उसमें फंसी धूल, मिट्टी, तेल और गंदगी निकल जाए. पानी तब तक बदलते रहें, जब तक पोछे से निकलने वाला पानी काफी हद तक साफ न दिखाई देने लगे. सिर्फ एक बार पानी में डुबोकर निचोड़ देना काफी नहीं है. अगर पोछे में किचन का तेल या चिपचिपी गंदगी लगी है, तो उसे अच्छी तरह रगड़कर साफ करना जरूरी है.

साबुन के पानी में भिगोकर रखें
एक बाल्टी में गुनगुना पानी लें और उसमें थोड़ा सा डिशवॉशिंग लिक्विड या हल्का क्लीनिंग सॉल्यूशन मिला दें. अब पोछे को इस पानी में करीब 20 से 30 मिनट के लिए भिगोकर रख दें. इससे पोछे के रेशों में जमा चिकनाई और गंदगी ढीली होने लगती है. इसके बाद पोछे को हाथ या किसी साफ ब्रश की मदद से हल्के हाथों से रगड़ें. खासतौर पर उन हिस्सों पर ध्यान दें जहां ज्यादा गंदगी जमा है.
इसके बाद साफ पानी से करें रिंस
सफाई के बाद पोछे को साफ पानी में अच्छी तरह धोना न भूलें. जब तक साबुन या क्लीनर पूरी तरह निकल न जाए, तब तक इसे पानी से धोते रहें. अगर पोछे में क्लीनर की परत रह गई, तो अगली बार फर्श पर पोछा लगाने के दौरान यह गंदगी के साथ फैल सकती है. अगर पोछे से काफी ज्यादा बदबू आ रही है, तो धोने के बाद उसे कुछ देर खुले और हवादार स्थान पर रखें. सबसे जरूरी बात है कि पोछा पूरी तरह सूख जाए.

पोछे को गीला छोड़ना सबसे बड़ी गलती
कई घरों में पोछा धोने के बाद उसे निचोड़कर किचन के किसी कोने में रख दिया जाता है. यही आदत बदबू को बढ़ा सकती है. नमी और बंद जगह बैक्टीरिया और फफूंद के लिए अनुकूल माहौल बना सकती है. इसलिए पोछे को धोने के बाद जितना संभव हो उतना पानी निचोड़ें और उसे किसी हवादार जगह पर लटकाकर सुखाएं. उसे फर्श पर या बंद बाल्टी के अंदर गीला छोड़ने से बचें.
अलग-अलग पोछे की सफाई का तरीका भी अलग
अगर आपके घर में कॉटन का पोछा है, तो उसे हर इस्तेमाल के बाद गुनगुने साबुन वाले पानी में धोना बेहतर रहता है. इसे अच्छी तरह निचोड़कर खुली हवा में सुखाएं. माइक्रोफाइबर पोछे के पैड को कई बार वॉशिंग मशीन में धोया जा सकता है, लेकिन उसे धोते समय फैब्रिक सॉफ्टनर का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे उसके रेशों की सफाई क्षमता प्रभावित हो सकती है. निर्माता के निर्देशों के मुताबिक उसे धोना और सुखाना बेहतर है. स्पंज वाले पोछे को हर इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह धोना चाहिए. अगर स्पंज पुराना, खराब या लगातार बदबूदार हो गया है, तो उसे बदल देना ज्यादा सही रहेगा.
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सिरका और बेकिंग सोडा साथ न मिलाएं
बदबू दूर करने के लिए कई लोग सिरका या बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, इन्हें एक साथ मिलाने की जरूरत नहीं है. एक समय में किसी एक तरीके का इस्तेमाल करना बेहतर है. सबसे जरूरी बात यह है कि सिरका या किसी दूसरे घरेलू क्लीनर को ब्लीच के साथ कभी न मिलाएं. कुछ क्लीनिंग प्रोडक्ट्स को मिलाने से खतरनाक गैस बन सकती है.
कब बदल दें पुराना पोछा?
अगर पोछे को अच्छी तरह धोने और सुखाने के बाद भी उसमें लगातार बदबू बनी रहती है, उसके रेशे खराब हो चुके हैं या वह फर्श पर गंदगी फैलाने लगा है, तो उसे बदल देना ही बेहतर है. बहुत पुराना पोछा साफ करने के बावजूद पूरी तरह स्वच्छ नहीं हो पाता.
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        <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 07:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर में कैसे बनाएं गोल्डन मोदक? कमाल की है यह रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ गणेश जी को मोदक बहुत पसंद माने जाते हैं, इसलिए गणेश उत्सव के दौरान घरों में तरह-तरह के मोदक बनाए जाते हैं. आमतौर पर लोग स्टीम वाले मोदक या चॉकलेट मोदक बनाते हैं, लेकिन इस बार आप कुछ अलग ट्राई कर सकते हैं. गोल्डन मोदक देखने में काफी खूबसूरत लगते हैं और इन्हें घर पर आसानी से बनाया जा सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए आपको बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं पड़ेगी. थोड़ी सी मेहनत और कुछ आसान सामग्री की मदद से आप घर पर ही स्वादिष्ट गोल्डन मोदक तैयार कर सकते हैं. आइए जानते हैं गोल्डन मोदक बनाने का आसान तरीका.
गोल्डन मोदक बनाने के लिए चाहिए ये सामान
गोल्डन मोदक बनाने के लिए आपको मावा, पिसी हुई चीनी, मिल्क पाउडर, इलायची पाउडर और थोड़े से ड्राई फ्रूट्स की जरूरत होगी। गोल्डन लुक देने के लिए खाने में इस्तेमाल होने वाला एडिबल गोल्ड डस्ट या गोल्ड फूड कलर इन मोदक में डाला जाता है. ध्यान रखें कि जो भी गोल्ड डस्ट इस्तेमाल करते वक़्त ध्यान रखें की &amp;nbsp;वह खाने के लिए सुरक्षित और फूड-ग्रेड हो.
सबसे पहले तैयार करें मोदक का मिश्रण
एक बड़े पैन में मावा डालकर धीमी व मध्यम आंच पर हल्का भून लें. जब मावा थोड़ा नरम और खुशबूदार हो जाए तो गैस की फ्लेम को बंद कर दें. अब इसमें पिसी हुई चीनी, मिल्क पाउडर, इलायची पाउडर और बारीक कटे ड्राई फ्रूट्स डालकर अच्छी तरह मिला लें. मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें ताकि इसे आसानी से आकार दिया जा सके. अगर मिश्रण गर्म होगा तो आपके हाथ भी जल सकते हैं.
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अब मोदक को दें खास शेप
जब मिश्रण हाथ से छूने जैसा ठंडा हो जाए तो हाथों में थोड़ा घी लगाएं. अब मिश्रण की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें मोदक के सांचे में रखें. सांचे को हल्का दबाएं और मोदक को बाहर निकाल लें. इसी तरह सारे मोदक तैयार कर लें. अगर आपके पास मोदक का सांचा नहीं है तो हाथ से भी इसे मोदक जैसा आकार दिया जा सकता है.
ऐसे मिलेगा मोदक को गोल्डन लुक
अब तैयार मोदक को एक प्लेट में रखें और उन पर हल्का सा सुरक्षित फूड-ग्रेड और गोल्ड डस्ट लगाएं. इसे मोदक पर बहुत ज्यादा लगाने की जरूरत नहीं है. हल्की गोल्डन परत ही मोदक को सुंदर और चमकदार लुक देने के लिए काफी है. आप चाहें तो इसे सजाने के लिए इसके ऊपर से थोड़ा कटा हुआ पिस्ता या बादाम भी लगा सकते हैं.
तैयार हैं आपके गोल्डन मोदक
इसी इतने आसान तरीके से आपके गोल्डन मोदक तैयार हो जाएंगे. इन्हें कुछ देर फ्रिज में रखकर हल्का ठंडा कर लें और फिर गणेश जी को भोग में चढ़ाएं. देखने में ये बिल्कुल अलग और आकर्षक लगेंगे. घर आए मेहमानों को भी आप ये मोदक खिला सकते हैं. अगर आपको इस बार गणेश उत्सव पर कुछ नया बनाने का मन है तो यह रेसिपी जरूर ट्राई की जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 19:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>ब्रेकअप से नहीं हो पा रहा Move on? इन तरीकों से मिलेगी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ लंबे समय के बाद ब्रेकअप होना किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है. यह एक भावनात्मक स्थिती होती है, जिसमें व्यक्ति एक साथ कई इमोशन्स को फेस करता है. व्यक्ति इस दौरान अकेलापन, याद आना, चिड़चिड़ापन और उदासी जैसी परिस्थिती से गुजरता है. चाहें ब्रेकअप आपकी सहमति से ही क्यों न हुआ हो लेकिन थोड़े दिन तक उदासी होना आम समस्या होती है. ऐसे में उदास होने की बजाय धीरे-धीरे मूव ऑन करने की कोशिश करें. आइए जानते हैं मूव ऑन करने के लिए कुछ आसान और असरदार तरीकों के बारे में.
अपने आप को ब्लेम न करें
किसी भी रिश्ते में ब्रेकअप दो लोगों की सहमति से होता है. ऐसे में अपने आप को ब्लेम करने के बजाय अपने पसंद के कामों में ध्यान लगाएं. ऐसा करने से आपको खुशी मिलेगी और आप अच्छा महसूस करेंगे. कुछ लोग ब्रेकअप के बाद अपने आप को कमरे में बंद कर लेते हैं, ऐसा करने से व्यक्ति डिप्रेशन में जा सकता है. घर में रहने के बजाय दोस्तों और परिवार वालों से मिलने से मन हल्का होता है.
अपने एक्स की फोटो देखना बंद करें
कई लोग ब्रेकअप होने के बाद अपने एक्स के फोटोज देखते रहते हैं. ऐसा करने से आप कभी भी मूव ऑन कर नहीं पाएंगें. ब्रेकअप के बाद याद आना आम बात है लेकिन बार-बार एक्स की फोटो देखना, उनके सोशल मीडिया को चेंक करना सही नहीं है. यह आपको कमजोर कर देता है. ऐसे में नए लोगों से मिलना, घूमना और बाहर खाना खाना आपके लिए बेहतर हो सकता है.
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संतुलित आहार खाएं
कुछ लोग अक्सर स्ट्रेस इटिंग करते हैं. आप ऐसी गलती न करें स्ट्रेस इटिंग से आपकी सेहत पर बूरा असर पड़ सकता है. वहीं दुख की वजह से खाना छोड़ देना भी सही नहीं होता. अच्छा महसूस करने के लिए संतुलित आहार लेना सबसे जरूरी है. अच्छा और पोष्टिक खाना खाने से आप बेहतर महसूस करते हैं. पूरानी यादों को छोड़कर नई शुरूआत करें. जैसे एक्स के साथ बिताए पल याद आने पर उदास होने की बजाय किसी ओर काम में अपना मन लगाने की कोशिश करें. वहीं आप कुछ अच्छी फिल्म देखकर भी बेहतर महसूस कर सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 19:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Bag Cleaning Tips: स्कूल या ऑफिस बैग अंदर से क्यों होता है गंदा? ऐसे करें डीप क्लीन</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean School And Office Bags: स्कूल या ऑफिस बैग दिनभर हमारे साथ कई जगह जाता है. कभी बस या मेट्रो में, कभी ऑफिस की कुर्सी के नीचे, तो कभी किसी दुकान या रेस्टोरेंट में. ऐसे में बैग का बाहर से गंदा होना तो समझ आता है, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि उसका अंदरूनी हिस्सा भी बहुत जल्दी गंदा क्यों हो जाता है? कई बार बैग के अंदर धूल, कागज के छोटे टुकड़े, खाने के कण और दूसरी गंदगी जमा होती रहती है और हमें इसका पता तब चलता है, जब बैग से बदबू आने लगती है या अंदर की परत चिपचिपी महसूस होने लगती है.
दरअसल, बैग के अंदर रखी जाने वाली रोजमर्रा की चीजें ही इसकी गंदगी की बड़ी वजह बन सकती हैं. मोबाइल, चाबी, पर्स, टिफिन, पानी की बोतल, हेडफोन, कॉस्मेटिक्स और इस्तेमाल किए हुए टिश्यू जैसी चीजें बैग के अंदर लगातार आती-जाती रहती हैं. इनके साथ धूल और दूसरे कण भी अंदर पहुंच जाते हैं.
बैग का निचला हिस्सा सबसे ज्यादा गंदा हो सकता है
बैग का निचला हिस्सा अक्सर सबसे ज्यादा गंदगी जमा करने वाली जगह बन जाता है. हम बैग को कभी फर्श पर, कभी बस की सीट के नीचे और कभी ऑफिस या किसी सार्वजनिक जगह पर रख देते हैं. बाहर की सतह पर लगी धूल और गंदगी बैग के दूसरे हिस्सों के साथ अंदर तक पहुंच सकती है. बैग के हैंडल भी लगातार हाथों के संपर्क में रहते हैं. हाथों से मोबाइल, दरवाजे के हैंडल, रेलिंग और दूसरी सतहें छूने के बाद वही हाथ बैग को पकड़ते हैं. इस तरह बैग की सतह पर गंदगी और सूक्ष्मजीव जमा हो सकते हैं.

अंदर रखी चीजें भी बढ़ाती हैं गंदगी
कई बार समस्या बैग की नहीं, बल्कि उसके अंदर रखी चीजों की होती है. उदाहरण के लिए, फोन हम लगभग हर जगह ले जाते हैं और कई लोग इसे बाथरूम तक में इस्तेमाल करते हैं. चाबी भी लगातार अलग-अलग जगहों पर रखी जाती है. इन चीजों की सतह पर मौजूद गंदगी बैग के अंदर पहुंच सकती है. इसके अलावा टिफिन में बचा खाना, बिस्किट या स्नैक्स के टुकड़े और पानी या दूसरी चीजों का रिसाव भी बैग के अंदर गंदगी बढ़ा सकता है. अगर खाने के छोटे टुकड़े कई दिनों तक बैग में पड़े रहें, तो वहां बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बन सकता है.
इस्तेमाल किए हुए टिश्यू तुरंत निकालें
बैग के अंदर इस्तेमाल किए हुए टिश्यू पड़े रहना भी आम बात है. नाक या चेहरा साफ करने के बाद लोग कई बार टिश्यू को तुरंत डस्टबिन में डालने के बजाय बैग में रख देते हैं. इसी तरह अगर बैग में खाने के कण जमा होते रहते हैं और उसे लंबे समय तक साफ नहीं किया जाता, तो वह धीरे-धीरे अंदर से गंदा और बदबूदार हो सकता है. इसलिए बैग को अस्थायी डस्टबिन की तरह इस्तेमाल करने से बचना जरूरी है.

बैग कितने दिन में साफ करें?
बैग की सफाई कितनी बार करनी चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे कितनी बार इस्तेमाल करते हैं और वह किन जगहों पर जाता है. अगर स्कूल या ऑफिस बैग रोजाना इस्तेमाल होता है और सार्वजनिक परिवहन में भी साथ जाता है, तो उसे हर एक-दो हफ्ते में अच्छी तरह साफ करना बेहतर हो सकता है. जो बैग कभी-कभार इस्तेमाल होते हैं, उन्हें इस्तेमाल के बाद साफ करके रखने से गंदगी जमा होने से रोका जा सकता है. बैग के हैंडल और नीचे के हिस्से को हफ्ते में कुछ बार साफ करना भी उपयोगी हो सकता है.
ऐसे करें बैग की अंदर से सफाई
सबसे पहले बैग को पूरी तरह खाली कर दें. सभी जेबों को खोलकर देखें और उनमें जमा कागज के टुकड़े, धूल, खाने के कण या दूसरी गंदगी निकाल दें. इसके बाद माइक्रोफाइबर कपड़े को हल्के साबुन और पानी के पतले घोल से थोड़ा गीला करें और बैग के अंदर और बाहर की सतह को धीरे-धीरे पोंछें. बैग को जोर से रगड़ने के बजाय हल्के हाथ से साफ करें, खासकर अगर उसका मटेरियल नाजुक है.
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कपड़े के बैग को साफ करने का तरीका उसके मटेरियल पर निर्भर करता है. कुछ फैब्रिक बैग मशीन में हल्के और ठंडे वॉश साइकल पर धोए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले बैग पर दिए गए केयर इंस्ट्रक्शन जरूर देख लें. सफाई के बाद बैग को पूरी तरह सूखने दें. उसे नमी के साथ बंद करके रखने से फफूंद और बदबू की समस्या हो सकती है.
बैग के अंदर रखने वाली चीजें भी साफ करें
सिर्फ बैग साफ कर देना काफी नहीं है. उसे दोबारा इस्तेमाल करने से पहले अंदर रखी जाने वाली चीजों को भी साफ कर लेना चाहिए. मोबाइल, चाबी, हेडफोन, मेकअप पाउच और दूसरी रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों पर भी ध्यान दें. बैग में खाने की चीजें खुली न रखें और टिफिन या पानी की बोतल लीक होने पर तुरंत बैग साफ करें. इस्तेमाल किए हुए टिश्यू और कचरे को भी बैग में जमा न होने दें.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 19:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Ganesh Chaturthi: गणेश उत्सव से पहले ऐसे करें घर की सफाई, मिनटों में चमकेगा हर कोना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ganesh-chaturthi-गणेश-उत्सव-से-पहले-ऐसे-करें-घर-की-सफाई-मिनटों-में-चमकेगा-हर-कोना</link>
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        <description><![CDATA[ Ganesh Puja Home Deep Cleaning Tips: गणेश पूजा आने वाली हो तो घर की साफ-सफाई की तैयारी भी शुरू हो जाती है. त्योहार पर घर में भगवान गणेश की स्थापना से लेकर पूजा की तैयारियों तक कई काम होते हैं. ऐसे में अगर सफाई का पूरा जिम्मा आखिरी दिन के लिए छोड़ दिया जाए, तो काम काफी थकाने वाला लग सकता है. ऊपर से त्योहार के दौरान रिश्तेदारों और दोस्तों का आना-जाना भी लगा रहता है.
लेकिन घर की सफाई के लिए जरूरी नहीं कि आप सुबह से शाम तक हर कोने की सफाई में लगी रहें. अगर थोड़ा स्मार्ट तरीका अपनाया जाए और काम को प्राथमिकता के हिसाब से बांटा जाए, तो कम मेहनत में भी घर को साफ और व्यवस्थित किया जा सकता है. गणेश पूजा से पहले घर की सफाई करते समय ये आसान ट्रिक्स आपके काम आ सकती हैं.
सबसे पहले सफाई का प्लान बनाएं
त्योहार से पहले सफाई शुरू करते समय बिना प्लान के एक कमरे से दूसरे कमरे में घूमते रहने से समय ज्यादा लग सकता है. इसलिए शुरुआत में ही तय कर लें कि किस जगह की सफाई पहले करनी है. घर के उन हिस्सों को सबसे पहले साफ करें जहां परिवार के लोग ज्यादा समय बिताते हैं या मेहमानों का आना-जाना ज्यादा होता है. जैसे ड्राइंग रूम, पूजा की जगह, प्रवेश द्वार और किचन. हर कोने को एक ही दिन में चमकाने के बजाय काम को छोटे हिस्सों में बांट लें.

&amp;nbsp;हर चीज को बराबर समय देने की जरूरत नहीं
सफाई करते समय सबसे जरूरी काम पहले करना काफी फायदेमंद रहता है. पंखे, लाइट, खिड़कियां, दरवाजे, फर्नीचर और ऐसी चीजें जिन पर धूल साफ नजर आती है, उन्हें प्राथमिकता दें. अगर घर में सामान बहुत ज्यादा फैला हुआ है, तो पहले उसे व्यवस्थित करें. बेकार या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली चीजों को अलग कर दें. इससे सफाई करना भी आसान होगा और घर पहले से ज्यादा खुला-खुला नजर आएगा.

काम को कल पर टालने से बचें
अक्सर सफाई शुरू तो कर दी जाती है, लेकिन एक कमरे का आधा काम करके उसे अगले दिन के लिए छोड़ दिया जाता है. फिर दूसरे कामों के बीच वही सफाई पीछे छूट जाती है. त्योहार के समय ऐसा करने से आखिरी वक्त पर काम का बोझ बढ़ सकता है. इसलिए जिस हिस्से की सफाई शुरू करें, उसे अपनी क्षमता के अनुसार पूरा करके ही आगे बढ़ें. अगर पूरा घर एक दिन में साफ करना मुश्किल है, तो रोज एक या दो हिस्से तय करके काम पूरा करें. इससे धीरे-धीरे पूरा घर तैयार हो जाएगा.
हर काम के लिए समय तय करें
सफाई में सबसे ज्यादा समय कई बार इसलिए लग जाता है क्योंकि हम किसी एक काम में जरूरत से ज्यादा समय दे देते हैं. इससे बचने के लिए हर काम के लिए एक तय समय रखें. उदाहरण के लिए, पंखे और लाइट की सफाई के लिए अलग समय, खिड़कियों और दरवाजों के लिए अलग और फर्नीचर को व्यवस्थित करने के लिए अलग समय तय किया जा सकता है. समय तय होने से आपका ध्यान एक ही काम पर रहेगा और सफाई का काम ज्यादा व्यवस्थित तरीके से पूरा होगा.
&amp;nbsp;किचन की सफाई को बिल्कुल न छोड़ें
त्योहार के दौरान घर का किचन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली जगहों में से एक होता है. पूजा और मेहमानों के लिए तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं, इसलिए किचन साफ और व्यवस्थित होना जरूरी है. सबसे पहले किचन प्लेटफॉर्म से अतिरिक्त सामान हटा दें. गैस स्टोव, सिंक और आसपास की सतहों को अच्छी तरह साफ करें. जिन डिब्बों और सामान का रोज इस्तेमाल नहीं होता, उन्हें व्यवस्थित करके रखें. फ्रिज के बाहर और अंदर जहां जरूरत हो, वहां भी सफाई कर लें.
पूजा की जगह पर दें खास ध्यान
गणेश पूजा से पहले पूजा वाली जगह को साफ करना सबसे जरूरी कामों में शामिल है. वहां जमा धूल और अनावश्यक सामान हटा दें. पूजा की चौकी, आसपास की जगह और सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाली चीजों को पहले से साफ करके रख लें. अगर पूजा की जगह पहले से साफ और व्यवस्थित होगी, तो त्योहार वाले दिन आपको ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी.
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सफाई के दौरान ये तरीका अपनाएं
एक साथ पूरा घर साफ करने के बजाय ऊपर से नीचे की तरफ सफाई करना बेहतर रहता है. पहले पंखे, लाइट और ऊंची जगहों की धूल साफ करें, फिर फर्नीचर और दूसरी सतहों की सफाई करें और आखिर में फर्श पर पोछा लगाएं. इससे ऊपर से गिरने वाली धूल दोबारा साफ किए गए फर्श को गंदा नहीं करेगी.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Desi Surma: घर पर कैसे बनाएं देसी सुरमा? आंखों को मिलेगी जबरदस्त ठंडक</title>
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        <description><![CDATA[ Traditional Method To Prepare Almond Surma: आजकल लोग अपनी डाइट से लेकर स्किनकेयर और मेकअप तक, हर चीज में नेचुरल और घर पर तैयार किए गए विकल्पों को पसंद करने लगे हैं. यही वजह है कि पुराने समय में घरों में इस्तेमाल होने वाले देसी नुस्खे एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. सुरमा भी ऐसी ही पारंपरिक चीज है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है. कई परिवारों में इसे आंखों को ठंडक देने वाला माना जाता है और बच्चों से लेकर बड़ों तक की आंखों में लगाने की परंपरा रही है.
पहले के जमाने में बाजार से काजल या सुरमा खरीदने के बजाय इसे घर पर ही तैयार किया जाता था. इसे बनाने का तरीका भी बहुत मुश्किल नहीं था. घी, तेल, बादाम और अजवाइन जैसी चीजों की मदद से कालिख तैयार की जाती थी, जिसे बाद में सुरमे या काजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि, आंखें बेहद संवेदनशील होती हैं, इसलिए घर पर तैयार किसी भी चीज को आंखों के अंदर या वॉटरलाइन पर लगाने से पहले साफ-सफाई और सुरक्षा का खास ध्यान रखना जरूरी है.
घर पर देसी सुरमा बनाने का पारंपरिक तरीका
देसी सुरमा तैयार करने के लिए सबसे पहले एक छोटा मिट्टी या धातु का दीया लें. इसमें साफ और अच्छी क्वालिटी का अरंडी का तेल या शुद्ध घी डालकर बाती जलाएं. अब दीये को दो ईंटों या समान ऊंचाई वाले किसी मजबूत आधार के बीच रखें.

इसके ऊपर एक साफ और मोटी धातु की प्लेट इस तरह रखें कि दीये की लौ का ऊपरी हिस्सा प्लेट के निचले हिस्से को छू सके. ध्यान रखें कि दीया और प्लेट पूरी तरह स्थिर हों और आसपास कोई ज्वलनशील सामान न रखा हो. धीरे-धीरे जलने के दौरान दीये की लौ से निकलने वाली कालिख प्लेट की सतह पर जमा होने लगेगी. पारंपरिक तरीके में इसे करीब 40 से 50 मिनट तक जमा होने दिया जाता है. इसके बाद दीया बुझा दें और प्लेट को पूरी तरह ठंडा होने दें.
अब प्लेट पर जमा काली कालिख को साफ चम्मच या किसी साफ उपकरण की मदद से धीरे-धीरे खुरचकर एक साफ बर्तन में इकट्ठा करें. इस कालिख में थोड़ी मात्रा में शुद्ध घी मिलाकर पारंपरिक तरीके से गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है. अगर इसे सूखे सुरमे की तरह रखना चाहते हैं, तो घी की मात्रा बहुत कम रखी जाती है. तैयार मिश्रण को किसी साफ, सूखे और एयरटाइट छोटे कंटेनर में रखा जा सकता है. पुराने समय में इसी तरह तैयार कालिख को सुरमा या काजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.

बादाम और अजवाइन वाला देसी तरीका
कुछ घरों में सुरमा तैयार करते समय बादाम और अजवाइन का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए बादाम या अजवाइन को दीये की लौ के ऊपर इस तरह रखा जाता है कि उनसे निकलने वाली कालिख प्लेट पर जमा हो सके. बादाम से मिलने वाली कालिख सुरमे को गहरा काला रंग देने में मदद करती है, जबकि अजवाइन को पारंपरिक रूप से आंखों के लिए ठंडक देने वाली चीज माना जाता रहा है. यही वजह है कि देसी सुरमे को सिर्फ मेकअप का हिस्सा नहीं माना जाता था. दादी-नानी के समय में इसे आंखों की देखभाल से जोड़कर भी देखा जाता था. हालांकि, आंखों को ठंडक मिलने या संक्रमण से बचाने जैसे दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. इसलिए इसे किसी आंख की बीमारी का इलाज समझकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
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सुरमा लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर सुरमा आंखों के आसपास मेकअप के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो हमेशा साफ हाथ और साफ एप्लीकेटर का इस्तेमाल करें. किसी दूसरे व्यक्ति के साथ सुरमा या काजल शेयर न करें. कंटेनर को खुला छोड़ने से भी बचें, क्योंकि उसमें धूल और बैक्टीरिया पहुंच सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Iodine Rich Foods: नमक के अलावा किन चीजों से पूरा होता है आयोडीन का कोटा? जान लें जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ Best Iodine Rich Foods Besides Salt: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आयोडीन एक जरूरी खनिज है. आमतौर पर आयोडीन का नाम आते ही सबसे पहले आयोडीन युक्त नमक का ध्यान आता है, लेकिन क्या आपको पता है कि खाने की कई दूसरी चीजों से भी शरीर को आयोडीन मिल सकता है? दूध-दही से लेकर अंडे और कुछ तरह की मछलियों तक, कई खाद्य पदार्थ आयोडीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं.
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट healthline के अनुसार, वयस्कों के लिए रोजाना करीब 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत बताई जाती है. गर्भवती और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को इसकी ज्यादा जरूरत होती है. शरीर में आयोडीन की कमी होने पर थायरॉयड ग्रंथि से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए रोज के खाने में आयोडीन देने वाली चीजों को शामिल करना जरूरी है.
समुद्री साग सबसे अच्छे सोर्स में शामिल
समुद्री साग आयोडीन के सबसे अच्छे नेचुरल सोर्स में गिना जाता है. हालांकि इसमें आयोडीन की मात्रा हर तरह के समुद्री साग में एक जैसी नहीं होती. यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह किस जगह उगा है और उसे किस तरह तैयार किया गया है. समुद्री साग की अलग-अलग किस्मों में कोम्बू में आयोडीन की मात्रा काफी अधिक पाई जा सकती है. वाकामे और नोरी में भी आयोडीन मिलता है, लेकिन इनकी मात्रा अलग-अलग होती है. खास बात यह है कि समुद्री साग में आयोडीन की मात्रा बहुत ज्यादा भी हो सकती है, इसलिए इसे जरूरत से ज्यादा खाना सही नहीं माना जाता.

कुछ मछलियों से भी मिलता है आयोडीन
मछली खाने वालों के लिए भी आयोडीन की जरूरत पूरी करने के कई विकल्प मौजूद हैं. कॉड जैसी कम वसा वाली मछलियां आयोडीन का अच्छा स्रोत हो सकती हैं. करीब 85 ग्राम कॉड में लगभग 63 से 99 माइक्रोग्राम आयोडीन पाया जा सकता है. हालांकि मछली में आयोडीन की मात्रा उसके प्रकार, उसे पालने या पकड़ने के तरीके और उसके क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है. झींगा भी आयोडीन देने वाले समुद्री खाद्य पदार्थों में शामिल है. करीब 85 ग्राम झींगे में लगभग 35 माइक्रोग्राम आयोडीन मिल सकता है. समुद्री जीवों में आयोडीन होने की एक वजह यह भी है कि वे समुद्र में मौजूद आयोडीन का कुछ हिस्सा अपने शरीर में जमा करते हैं.
ट्यूना मछली में भी आयोडीन होता है, हालांकि इसकी मात्रा कम वसा वाली मछलियों की तुलना में कम हो सकती है. करीब 85 ग्राम ट्यूना से लगभग 17 माइक्रोग्राम आयोडीन मिल सकता है.

दूध और दही को न करें नजरअंदाज
अगर आप रोज दूध या दही लेते हैं, तो ये भी आयोडीन पाने के आसान खाद्य स्रोत हो सकते हैं. दूध में आयोडीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है और यह पशुओं के चारे तथा दूध निकालने के दौरान इस्तेमाल होने वाले आयोडीन वाले पदार्थों जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है. दही भी आयोडीन का अच्छा स्रोत माना जाता है. एक कप सादा दही रोजाना जरूरी आयोडीन की मात्रा का करीब आधा हिस्सा दे सकता है. पनीर और दूसरे डेयरी उत्पादों में भी आयोडीन पाया जाता है, हालांकि इसकी मात्रा हर उत्पाद में अलग हो सकती है.
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अंडे का पीला हिस्सा भी है काम का
अंडा भी आयोडीन देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल है. खास बात यह है कि अंडे में मौजूद आयोडीन का बड़ा हिस्सा पीली जर्दी में पाया जाता है. एक बड़े अंडे में औसतन करीब 24 माइक्रोग्राम आयोडीन हो सकता है. हालांकि अंडे में आयोडीन की मात्रा मुर्गियों के चारे में मौजूद आयोडीन के आधार पर बदल सकती है. इसलिए हर अंडे में बिल्कुल समान मात्रा में आयोडीन मिले, यह जरूरी नहीं है.
सूखे आलूबुखारे भी दे सकते हैं आयोडीन
आयोडीन के लिए सिर्फ नमकीन या समुद्री खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. सूखे आलूबुखारे यानी प्रून्स भी आयोडीन का एक शाकाहारी स्रोत हैं. करीब पांच सूखे आलूबुखारों से लगभग 13 माइक्रोग्राम आयोडीन मिल सकता है. इनमें रेशा, विटामिन और दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, इसलिए इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है.
लीमा बीन्स भी एक विकल्प
लीमा बीन्स में रेशा, मैग्नीशियम और फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं और इनमें आयोडीन भी मौजूद होता है. एक कप पकी हुई लीमा बीन्स में औसतन करीब 16 माइक्रोग्राम आयोडीन पाया जा सकता है. हालांकि पौधों में आयोडीन की मात्रा मिट्टी, सिंचाई के पानी और खाद जैसे कई कारकों के कारण बदल सकती है. इसलिए अलग-अलग जगह उगाई गई एक ही खाद्य चीज में आयोडीन की मात्रा समान हो, यह जरूरी नहीं है.
सिर्फ एक चीज पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं
आयोडीन शरीर के लिए जरूरी है और इसे रोज के खाने के जरिए प्राप्त किया जा सकता है. नमक आयोडीन पाने का आसान जरिया है, लेकिन इसके अलावा दूध, दही, अंडे, कुछ मछलियां, झींगा, समुद्री साग और कुछ फलियां भी आहार में आयोडीन जोड़ सकती हैं.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Indore Jalebi Recipe: घर में कैसे बनाएं इंदौर की मशहूर जलेबी? इस आसान रेसिपी से मिलेगा गजब स्वाद</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Crispy Jalebi At Home: इंदौर में पोहा और जलेबी काफी फेमस है. अगर आपको इसको खाने का मन है तो हर बार बाजार जैसी पतली, कुरकुरी और रस से भरी जलेबी खाने के लिए हर बार मिठाई की दुकान जाने की जरूरत नहीं है. जलेबी घर पर भी बनाई जा सकती है और अगर घोल की सही गाढ़ापन और तेल का तापमान ठीक रखा जाए, तो इसका स्वाद काफी हद तक दुकान वाली जलेबी जैसा आ सकता है. खास बात यह है कि इस तरीके से बनाई गई जलेबी कुछ घंटों तक कुरकुरी रह सकती है और इसे गर्म दूध या मलाईदार रबड़ी के साथ खाने का मजा ही अलग है.
जलेबी का नाम आते ही कई लोगों को त्योहार, रविवार की सुबह और गर्मागर्म मिठाई की याद आ जाती है. उत्तर भारत में जलेबी को नाश्ते से लेकर मिठाई तक कई तरह से पसंद किया जाता है. हालांकि बाजार में तुरंत तैयार होने वाली जलेबी भी मिलती है, लेकिन पारंपरिक तरीके से तैयार जलेबी का स्वाद अलग होता है. घोल को कुछ घंटे खमीर उठने के लिए रखने से इसमें हल्की खटास आती है, जो जलेबी के स्वाद को खास बनाती है.
जलेबी बनाने के लिए क्या चाहिए?
घर पर जलेबी बनाने के लिए सबसे पहले मैदा, थोड़ा बेसन, दही, बेकिंग पाउडर और बेकिंग सोडा चाहिए. स्वाद के लिए इलायची पाउडर डाला जा सकता है और चाहें तो जलेबी को बाजार जैसा रंग देने के लिए थोड़ा खाने वाला रंग भी इस्तेमाल कर सकते हैं. चाशनी के लिए चीनी, पानी, इलायची, केसर और थोड़ा नींबू का रस चाहिए. जलेबी तलने के लिए तेल, घी या दोनों का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है.

सबसे जरूरी है जलेबी के घोल का सही गाढ़ापन
एक बड़े बर्तन में मैदा, बेसन, बेकिंग पाउडर और बेकिंग सोडा डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें दही और इलायची पाउडर डालें. जरूरत के अनुसार पानी डालते हुए ऐसा घोल तैयार करें जो आसानी से बह सके, लेकिन बहुत पतला न हो. घोल इतना गाढ़ा भी नहीं होना चाहिए कि बोतल से बाहर ही न निकले. अगर घोल तेल में डालते ही फैलने लगे, तो समझिए कि यह बहुत पतला है. ऐसी स्थिति में थोड़ा मैदा मिलाया जा सकता है. वहीं अगर घोल को आसानी से दबाकर बाहर नहीं निकाल पा रहे हैं, तो थोड़ा पानी डालें. पानी हमेशा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डालें, ताकि घोल जरूरत से ज्यादा पतला न हो जाए.

घोल को कुछ घंटे रखें
अब घोल को ढककर गर्म जगह पर करीब 10 से 12 घंटे के लिए रख दें, ताकि उसमें खमीर उठ सके. ठंडे मौसम में इसमें ज्यादा समय लग सकता है. तैयार घोल की सतह पर छोटे-छोटे बुलबुले दिखाई देने लगें, तो समझ सकते हैं कि यह अच्छी तरह तैयार हो गया है. जलेबी बनाने से पहले घोल को हल्के हाथ से फेंट लें. अगर इस समय घोल ज्यादा गाढ़ा लग रहा हो, तो करीब एक बड़ा चम्मच पानी डालकर उसे सही बहने वाले गाढ़ेपन में ले आएं.
चाशनी बनाते समय रखें ध्यान
अब एक पैन में चीनी और पानी डालकर उबालें. उबाल आने के बाद इसमें इलायची पाउडर, केसर की कुछ किस्में और थोड़ा नींबू का रस डालें. चाशनी को तब तक पकाएं, जब तक वह हल्की चिपचिपी न हो जाए. अगर आप एक तार की चाशनी बनाना चाहते हैं, तो थोड़ी चाशनी अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर दोनों उंगलियों को अलग करें. अगर इनके बीच एक पतली तार जैसी लकीर बनने लगे, तो चाशनी तैयार है. चाशनी को गर्म रखें, लेकिन बहुत ज्यादा पकाकर गाढ़ा न करें.
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जलेबी का आकार बनाने का सही तरीका
तैयार घोल को किसी निचोड़ने वाली बोतल में भर लें. ऐसी बोतल चुनें जिसका मुंह बहुत चौड़ा न हो, क्योंकि पतली जलेबी के लिए छोटा मुंह बेहतर रहता है. अब कड़ाही में तेल या घी गर्म करें, लेकिन शुरुआत में आंच मध्यम से धीमी रखें. यही वह चरण है जहां थोड़ी सावधानी जरूरी है. अगर तेल बहुत ज्यादा गर्म होगा, तो घोल डालते ही फैल सकता है और जलेबी का सही आकार बनाना मुश्किल हो जाएगा. बोतल को दबाते हुए घोल को तेल में अंदर से बाहर की ओर गोल-गोल घुमाकर डालें. जब जलेबी का आकार बन जाए, तब आंच को मध्यम से तेज कर दें और दोनों तरफ से कुरकुरा होने तक तलें.
गर्म जलेबी को तुरंत चाशनी में डालें
जलेबी जब सुनहरी और कुरकुरी हो जाए, तो उसे तेल से निकालकर तुरंत गर्म चाशनी में डालें. दोनों तरफ कुछ सेकंड रखने के बाद जलेबी को बाहर निकाल लें. इसे बहुत देर तक चाशनी में रखने की जरूरत नहीं है, वरना कुरकुरापन कम हो सकता है. तैयार जलेबी को प्लेट में निकालें और चाहें तो ऊपर से कुछ कटे हुए मेवे डाल दें. इसे गर्म दूध या रबड़ी के साथ परोसें. घर पर जलेबी बनाते समय दो बातें सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली हैं,घोल न बहुत पतला हो और न बहुत गाढ़ा, और जलेबी का आकार बनाते समय तेल की आंच बहुत तेज न हो. इन दोनों बातों का ध्यान रखेंगे, तो पतली, कुरकुरी और रस से भरी जलेबी घर पर बनाना काफी आसान हो जाएगा.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Lentils Soaking Tips: 30 मिनट तक जरूर भिगोनी चाहिए ये दालें, वरना रह जाती हैं कच्ची</title>
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        <description><![CDATA[ Why Soaking Dal Before Cooking Is Important: दाल रोज के खाने का अहम हिस्सा है, लेकिन कई बार इसे बनाने के बाद भी दाल अच्छी तरह गलती नहीं है. कुछ दालें जल्दी पक जाती हैं, जबकि कुछ को पहले भिगोने पर ही बेहतर नतीजा मिलता है. खासकर साबुत दालों और कुछ मोटे दानों वाली दालों को सीधे पकाने के बजाय कुछ देर पानी में भिगोना फायदेमंद रहता है. इससे दाल को पकने में कम समय लग सकता है और वह ज्यादा आसानी से गल जाती है.
हालांकि, हर दाल को घंटों भिगोने की जरूरत नहीं होती. दाल किस तरह की है, इसके आधार पर भिगोने का समय तय करना चाहिए. कुछ फूटी हुई दालों के लिए 30 मिनट से 1 घंटे तक का समय पर्याप्त हो सकता है, जबकि साबुत दालों को इससे ज्यादा समय देना पड़ सकता है.
30 मिनट भिगोने से क्या फायदा होता है?
दाल को पानी में भिगोने से उसके दाने पानी सोखने लगते हैं. इससे दाल नरम होती है और पकाते समय पानी और गर्मी उसके अंदर तक आसानी से पहुंच पाती है. नतीजा यह होता है कि दाल अपेक्षाकृत जल्दी और समान रूप से पक सकती है. अगर आप फूटी हुई दाल को बिना भिगोए सीधे पकाते हैं, तो वह भी आमतौर पर पक जाती है, लेकिन थोड़ी देर भिगोने से पकाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है. खासकर जब दाल पुरानी हो या उसके दाने थोड़े सख्त हों, तब भिगोना ज्यादा उपयोगी हो सकता है.

कौन-सी दालें 30 मिनट भिगो सकते हैं?
धुली और फूटी हुई दालों को आमतौर पर बहुत लंबे समय तक भिगोने की जरूरत नहीं होती. मूंग दाल जैसी कुछ जल्दी पकने वाली दालें बिना भिगोए भी आसानी से पक सकती हैं. लेकिन अगर आप इन्हें पहले से भिगोते हैं, तो 30 मिनट से 1 घंटे का समय काफी हो सकता है. मसूर दाल और दूसरी फूटी हुई दालों के मामले में भी जरूरत के अनुसार थोड़ी देर भिगोना उपयोगी हो सकता है. अगर दाल के दाने पुराने हैं या आपको लगता है कि वे जल्दी नहीं गलेंगे, तो भिगोने से फायदा मिल सकता है.
साबुत दालों को ज्यादा समय चाहिए
साबुत उड़द, साबुत मसूर या दूसरी साबुत दालों के दाने फूटी हुई दालों की तुलना में ज्यादा सख्त होते हैं. इसलिए इन्हें सिर्फ 30 मिनट भिगोना हमेशा पर्याप्त नहीं होगा. साबुत दालों को करीब 2 घंटे या उससे ज्यादा समय तक भिगोया जा सकता है. इससे दाने अच्छी तरह पानी सोखते हैं और पकने में आसानी होती है. राजमा, छोले और चने जैसी साबुत फलियों को तो आमतौर पर कई घंटे भिगोने की जरूरत होती है. इन्हें रातभर या करीब 8 से 12 घंटे तक भिगोना आम तरीका है. इसलिए इनके लिए 30 मिनट का समय पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए.

दाल भिगोने का सही तरीका क्या है?
सबसे पहले दाल को अच्छी तरह छांट लें और उसमें मौजूद कंकड़ या खराब दाने अलग कर दें. इसके बाद दाल को पानी से अच्छी तरह धोएं. पानी बदलकर दो-तीन बार हल्के हाथ से धोना बेहतर रहता है. अब दाल को एक साफ बर्तन में डालकर पर्याप्त पानी भर दें. ध्यान रखें कि दाल पानी सोखकर फूल सकती है, इसलिए पानी की मात्रा बहुत कम न रखें. फूटी हुई दाल के लिए करीब 30 मिनट से 1 घंटे तक भिगोना काफी हो सकता है, जबकि साबुत दाल को ज्यादा समय दिया जा सकता है. भिगोने के बाद पानी निकाल दें और दाल को एक बार फिर साफ पानी से धो लें.
भिगोया हुआ पानी क्यों फेंक देते हैं?
दाल और फलियों में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं जो पाचन में परेशानी या गैस जैसी समस्या से जुड़े हो सकते हैं. भिगोने के दौरान इनमें से कुछ पानी में निकल सकते हैं. इसी वजह से कई लोग भिगोने के बाद उस पानी को फेंककर दाल को ताजे पानी से पकाते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दाल को भिगोना हर व्यक्ति के लिए पाचन संबंधी समस्या का पक्का समाधान है. यह सिर्फ खाना तैयार करने का एक सामान्य तरीका है.
इसे भी पढ़ें- Milk Storage Tips: उबला दूध फ्रिज में क्यों हो जाता है खराब? जान लें असली वजह
ज्यादा देर तक भिगोने की भी जरूरत नहीं
दाल को जरूरत से ज्यादा समय तक पानी में छोड़ना जरूरी नहीं है. खासकर गर्म मौसम में बहुत लंबे समय तक भिगोकर रखने से दाल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. इसलिए मौसम और दाल के प्रकार के हिसाब से समय तय करें. अगर दाल जल्दी पकने वाली है, तो सिर्फ थोड़ी देर भिगोना पर्याप्त हो सकता है. वहीं साबुत दाल और चने जैसी फलियों को ज्यादा समय चाहिए.
अगर दाल फिर भी नहीं गल रही तो?
कई बार सही तरीके से भिगोने के बाद भी दाल देर से गलती है. इसकी एक वजह दाल का पुराना होना हो सकती है. पुरानी दाल के दाने ज्यादा सख्त हो सकते हैं और उन्हें पकने में अधिक समय लग सकता है. इसलिए दाल खरीदते समय बहुत पुराना स्टॉक लेने से बचें और उसे सूखी, साफ जगह पर अच्छी तरह बंद करके रखें.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Sweat Stains On Collar: धोने के बाद भी पीला रहता है कॉलर? 1 आसान ट्रिक से चमकाएं</title>
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        <description><![CDATA[ Why Shirt Collars Turn Yellow After Washing: कपड़े धोने के बाद शर्ट साफ तो दिखती है, लेकिन कॉलर पर पसीने के पीले या गहरे निशान फिर भी नजर आते हैं? कई बार ऐसा लगता है कि कपड़े को अच्छी तरह धोने के बावजूद कॉलर की सफाई पूरी नहीं हुई. दरअसल, कॉलर पर दिखाई देने वाले ये निशान सिर्फ पसीने की वजह से नहीं बनते. इसमें त्वचा का तेल, पसीना, धूल-मिट्टी और रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद भी शामिल होते हैं. ये चीजें कपड़े के रेशों में धीरे-धीरे जमा होती रहती हैं और समय के साथ दाग गहरे दिखाई देने लगते हैं.
कॉलर पर ही ज्यादा निशान क्यों पड़ते हैं?
शर्ट का कॉलर लगातार गर्दन की त्वचा के संपर्क में रहता है. इसी वजह से यहां पसीना और त्वचा का प्राकृतिक तेल बाकी हिस्सों की तुलना में ज्यादा पहुंचता है. गर्दन और कॉलर के बीच होने वाला लगातार घर्षण भी इस समस्या को बढ़ा सकता है. जब आप शर्ट पहनते हैं, तो शरीर से निकलने वाला पसीना और त्वचा का तेल कॉलर के रेशों में पहुंच जाता है. शुरुआत में यह दिखाई नहीं देता, लेकिन बार-बार पहनने के बाद यही परत जमा होने लगती है. इसी कारण सफेद या हल्के रंग की शर्ट के कॉलर पर कुछ समय बाद पीले, भूरे या धूसर निशान नजर आने लगते हैं.
सिर्फ पसीना ही दाग की वजह नहीं है
पसीना मुख्य रूप से पानी होता है, लेकिन इसमें नमक, प्रोटीन और दूसरे पदार्थ भी मौजूद होते हैं. जब पसीना सूखता है, तो पानी तो उड़ जाता है, लेकिन ये पदार्थ कपड़े के रेशों पर रह जाते हैं. अगर शर्ट को बार-बार पहना जाए, तो पसीने के ये अवशेष लगातार जमा होते रहते हैं. ऊपर से शरीर का प्राकृतिक तेल इन अवशेषों को कपड़े पर और मजबूती से चिपकने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई बार सामान्य धुलाई के बाद भी कॉलर पूरी तरह साफ नहीं लगता.

स्किन का तेल भी कर सकता है रंग खराब
हमारी त्वचा स्वाभाविक रूप से तेल बनाती है. यह त्वचा की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन कॉलर के लिए यही तेल दाग की एक बड़ी वजह बन सकता है. गर्दन से निकलने वाला तेल सीधे कपड़े के संपर्क में आता है और रेशों में समा सकता है. तेल अपने साथ धूल और पसीने के अवशेषों को भी पकड़ सकता है. समय के साथ यह जमा परत कॉलर का रंग बदलने लगती है. इसी वजह से कुछ शर्ट के कॉलर धीरे-धीरे पीले या गहरे दिखाई देने लगते हैं.

डियोड्रेंट और दूसरे उत्पाद भी जिम्मेदार हो सकते हैं
कई बार दाग का कारण सिर्फ शरीर से निकलने वाला पसीना नहीं होता. डियोड्रेंट, परफ्यूम, आफ्टरशेव, बालों में लगाए जाने वाले उत्पाद, सनस्क्रीन या त्वचा पर लगाई जाने वाली क्रीम भी कॉलर पर लग सकती है. इन उत्पादों के कुछ घटक कपड़े के रेशों पर टिक सकते हैं. जब ये पसीने और त्वचा के तेल के साथ मिलते हैं, तो कॉलर पर जमा होने वाली परत और बढ़ सकती है. यही वजह है कि शर्ट धोने के बाद भी पुराने निशान पूरी तरह नहीं जाते.
कॉलर पीला क्यों पड़ जाता है?
पसीने और तेल के अवशेष जब लंबे समय तक कपड़े के रेशों में रहते हैं, तो हवा, गर्मी और समय के असर से उनका रंग बदल सकता है. इसी प्रक्रिया की वजह से सफेद शर्ट के कॉलर पर पीले निशान ज्यादा साफ दिखाई देते हैं. एक बार यह परत रेशों के अंदर तक पहुंच जाए, तो सिर्फ सामान्य मशीन वॉश से इसे पूरी तरह हटाना मुश्किल हो सकता है. ऊपर से बार-बार गर्म पानी या तेज तरीके से धोने की कोशिश करने से कपड़े को नुकसान भी पहुंच सकता है.
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सिर्फ कपड़े धोना हमेशा काफी क्यों नहीं होता?
सामान्य कपड़े धोने से सतह पर मौजूद गंदगी और पसीने के कुछ अवशेष निकल जाते हैं, लेकिन जो तेल और दूसरे पदार्थ रेशों के अंदर तक पहुंच चुके हैं, उन्हें हर बार पूरी तरह निकाल पाना आसान नहीं होता. इसीलिए ऐसा हो सकता है कि शर्ट धोने के तुरंत बाद साफ लगे, लेकिन पहनने और कुछ बार धोने के बाद कॉलर पर पुराने निशान फिर से नजर आने लगें. खासकर अगर हर बार कॉलर पर जमा होने वाली गंदगी को अलग से साफ नहीं किया जाता, तो धीरे-धीरे यह परत मोटी होती जाती है.
कपड़े का प्रकार भी डालता है असर
हर कपड़ा पसीने और तेल को एक तरह से नहीं सोखता. सूती जैसे कुछ प्राकृतिक रेशे नमी को अच्छी तरह सोखते हैं, इसलिए उनमें पसीने और त्वचा के तेल के अवशेष जमा हो सकते हैं. कॉलर का लगातार गर्दन से रगड़ना इस समस्या को और बढ़ा देता है. इसी वजह से सफेद सूती शर्ट के कॉलर पर दाग अपेक्षाकृत जल्दी नजर आ सकते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे कपड़ों पर निशान नहीं पड़ेंगे.
कॉलर को साफ रखने के लिए क्या करें?
अगर आपकी शर्ट के कॉलर पर बार-बार निशान पड़ते हैं, तो उन्हें बहुत पुराना होने का इंतजार न करें. शर्ट उतारने के बाद कॉलर की स्थिति देख लें और जरूरत हो तो उसे धोने से पहले अलग से साफ करें. पसीने वाले कपड़ों को लंबे समय तक गंदे कपड़ों के ढेर में छोड़ने से भी बचें. जितनी जल्दी पसीने और तेल के अवशेष साफ होंगे, उतना ही उनके कपड़े के रेशों में जमने की संभावना कम होगी. कपड़े पहनने से पहले गर्दन पर लगाए जाने वाले उत्पादों को पूरी तरह सूखने देना भी मदद कर सकता है. इससे गीले उत्पाद सीधे कॉलर पर लगने से बचेंगे.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>विदाई में नहीं आ रहा रोना? इन हैक्स से आएंगे फेक आंसू&amp; दुल्हन के काम की खबर</title>
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        <description><![CDATA[ शादी का दिन दुल्हन के लिए जितना खास होता है, उतना ही मजेदार और भावुक भी होता है. शादी की सारी रस्में पूरी होने के बाद आखिर में आती है विदाई, जहां दुल्हन से लेकर परिवार के लोग तक इमोशनल हो जाते हैं. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि दुल्हन के मन में इमोशन तो बहुत होते हैं, लेकिन आंखों से आंसू निकलने का नाम ही नहीं लेते. ऊपर से कैमरा लगातार सामने होता है और सबकी नजर दुल्हन पर रहती है. ऐसे में अगर आपको भी विदाई में रोना न आएं तो परेशानी हो जाती है. अगर विदाई में रोना नहीं आ रहा तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. कुछ छोटे-छोटे आईडिया हैं, जिनसे आंखों में पानी आ सकता है और फोटो में भी थोड़ा इमोशनल लुक मिल सकेगा.
रोना नहीं आ रहा तो पुरानी बातें याद करें
अगर विदाई में आंखें सूखी की सूखी हैं तो सबसे पहले अपनी पुरानी यादों का सहारा लें. मम्मी-पापा के साथ बिताए बचपन के पल, भाई-बहन की शरारतें या घर में बिताया कोई खास दिन याद करिए.अगर आप चाहें तो शादी से पहले की कोई पुरानी फोटो भी देख सकती हैं. इन चीजों को याद करते-करते इमोशन अपने आप आंसू &amp;nbsp;आ सकते हैं. फिर कैमरे के सामने एक्सप्रेशन भी एकदम नेचुरल लगेगा.
एक बार उबासी लेकर देखिए
अगर भावुक होने के बाद भी आंसू नहीं निकल रहे हैं तो एक उबासी वाला आईडिया भी आजमा सकती हैं. कई लोगों की आंखों में उबासी लेते समय अपने आप पानी आ जाता है. इसलिए विदाई की फोटो या वीडियो से पहले एक-दो बार उबासी लेने की कोशिश की जा सकती है. बस ध्यान रहे कि कैमरे के सामने उबासी लेते हुए फोटो न खिंच जाए.
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थोड़ी देर पलकें कम झपकाएं
आंखों में हल्की नमी लाने के लिए कुछ सेकंड तक पलकें कम झपकाने का तरीका भी काम आ सकता है. जब आंखें कुछ देर तक कम झपकती हैं तो उनमें पानी आ सकता है. इसके बाद कैमरे की तरफ देखकर थोड़ा इमोशनल एक्सप्रेशन दे सकते हैं. हालांकि इसे ज्यादा देर तक करने की जरूरत नहीं है. आंखों में जलन या परेशानी लगे तो तुरंत सही तरीके तरीके से पलकें झपकाएं.
&amp;nbsp;प्याज वाला आईडिया अपनाने से बचें
अब कोई कहता है कि आंसू चाहिए तो प्याज काट लो. लेकिन विदाई के दिन ये आईडिया&amp;nbsp; उल्टा भी पड़ सकता है. आंखों में जलन होने से आंखें ज्यादा लाल हो सकती हैं और आपका मेकअप भी खराब हो सकता है. इसलिए प्याज, मिर्च, परफ्यूम या ऐसी किसी चीज का इस्तेमाल आंखों में जानबूझकर पानी लाने के लिए नहीं करना चाहिए. आखिर में अगर आंसू के चक्कर में पूरा मेकअप बह गया तो आपकी फोटोज भी अच्छी नही आएगी.
आंसू नहीं आए तो भी टेंशन नहीं
सबसे जरूरी बात ये है कि विदाई में रोना जरूरी नहीं है. हर दुल्हन का इमोशन दिखाने का तरीका अलग होता है. किसी की आंखों से खूब आंसू आते हैं तो कोई रोने की बजाय मुस्कुराती रहती है. अगर आपके आंसू नहीं आ रहे हैं तो जबरदस्ती रोने की जरूरत नहीं. परिवार के साथ उस पल को एंजॉय करें और कैमरे के सामने नेचुरल रहें. आखिर विदाई आपकी जिंदगी का खास पल है, सिर्फ फोटोज के लिए आंसू लाने की जरूरत नहीं लगती.
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        <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 03:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>नींद&amp;डिप्रेशन की दवाएं बढ़ाती हैं बुजुर्गों में गिरने का खतरा, स्टडी में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. इस दौरान नींद ठीक से न आना और डिप्रेशन जैसी परेशानियां भी आम हो जाती हैं. ऐसे में डॉक्टर कुछ लोगों को नींद या डिप्रेशन की दवाएं देते हैं. इन दवाओं से परेशानी कम करने में मदद मिलती है, लेकिन इनका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता. खासकर बुजुर्गों में कुछ दवाओं से ज्यादा नींद, चक्कर या चलने में परेशानी हो सकती है. इससे उनके गिरने का खतरा बढ़ जाता है. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, सैन फ्रांसिस्को के डॉक्टरों की स्टडी में भी दवाओं और बुजुर्गों के गिरने के बीच संबंध सामने आया है.
दवा लेने के बाद क्यों बढ़ जाता है गिरने का खतरा?&amp;nbsp;
नींद की कुछ दवाएं दिमाग को शांत करती हैं और नींद लाने में मदद करती हैं. कई बार इनका असर सुबह उठने के बाद भी बना रहता है. बुजुर्गों को उठने के बाद सुस्ती, चक्कर या कमजोरी महसूस हो सकती है. इससे चलते समय शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है. खासकर रात में बाथरूम जाने के लिए अचानक उठने पर गिरने का खतरा ज्यादा रहता है. डिप्रेशन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं भी चक्कर या नींद जैसी परेशानी पैदा कर सकती हैं. उम्र बढ़ने के साथ शरीर इन दवाओं को पहले की तुलना में धीरे-धीरे बाहर निकालता है. इसलिए बुजुर्गों में दवाओं का असर ज्यादा देर तक दिखता है.&amp;nbsp;
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स्टडी में क्या सामने आया?&amp;nbsp;
शोधकर्ताओं ने बड़ी संख्या में बुजुर्ग लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ो को देखा. इसमें उन लोगों पर ध्यान दिया गया, जो नींद से जुड़ी परेशानी के लिए दवाएं ले रहे थे. स्टडी में पाया गया कि ऐसी दवाएं लेने वाले बुजुर्गों में गिरने का खतरा उन लोगों के मुकाबले ज्यादा था, जो ऐसी दवाएं नहीं ले रहे थे. इसमें नींद की दवाओं के साथ कुछ डिप्रेशन की दवाएं भी शामिल थीं. एक से ज्यादा ऐसी दवाएं लेने वाले लोगों में भी सावधानी की जरूरत ज्यादा बताई गई है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दवा लेने वाला हर बुजुर्ग&amp;nbsp; गिरेगा ही. दवा का असर व्यक्ति की उम्र, शरीर और दूसरी दवाओं पर भी निर्भर करता है.
दवा अपनी मर्जी से बंद न करें
अगर कोई बुजुर्ग नींद या डिप्रेशन की दवा ले रहा है तो उसे अपनी मर्जी से दवा बंद नहीं करनी चाहिए. दवा की मात्रा कम या ज्यादा करने का फैसला भी डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए. परिवार के लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि दवा लेने के बाद बुजुर्ग को चक्कर, ज्यादा नींद या चलने में परेशानी तो नहीं हो रही है. घर में फर्श पर सामान न रखें और रात में बाथरूम जाने के रास्ते में पर्याप्त रोशनी रखें. इससे गिरने की आशंका कम की जा सकती है. नींद की परेशानी के लिए डॉक्टर दवा के अलावा नींद सुधारने के दूसरे तरीके भी बताते हैं जैसे व्यायाम, प्राणायाम ओर भी कई चीजे&amp;nbsp; .
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Switchboard Cleaning: सफेद से काले हो गए हैं घर के स्विच बोर्ड, इस तरीके से करें सफाई</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Dirty Switchboards Safely: घर की सफाई करते समय हम फर्श, खिड़कियां, दरवाजे और फर्नीचर पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन स्विच बोर्ड अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं. रोजाना हाथ लगाने की वजह से इन पर उंगलियों के निशान, धूल और गंदगी जमती रहती है. धीरे-धीरे सफेद स्विच बोर्ड का रंग फीका पड़ने लगता है और कई बार वे इतने काले या मैले दिखने लगते हैं कि पूरा बोर्ड गंदा नजर आता है.
सिर्फ सामान्य सूखे कपड़े से पोंछने पर हर तरह के निशान साफ नहीं होते. ऐसे में कुछ आसान घरेलू तरीकों से स्विच बोर्ड की बाहरी सतह पर जमी गंदगी को हटाया जा सकता है. हालांकि, बिजली से जुड़े सामान की सफाई करते समय सबसे पहले सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है.
सफाई शुरू करने से पहले बिजली बंद करें
स्विच बोर्ड साफ करने से पहले उस सर्किट की बिजली सप्लाई बंद कर दें. केवल स्विच को बंद करना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए. मेन स्विच या संबंधित सर्किट ब्रेकर बंद करने के बाद ही सफाई शुरू करें. इसके अलावा, स्विच बोर्ड पर सीधे पानी, नींबू का रस या कोई दूसरा तरल न डालें. सफाई के दौरान बोर्ड और उसके आसपास की जगह सूखी होनी चाहिए. बिजली का कनेक्शन बंद होने के बाद भी किसी भी तरल पदार्थ को बोर्ड के अंदर जाने से बचाना जरूरी है.

टूथपेस्ट से हटाएं हल्की गंदगी
सफेद प्लेन टूथपेस्ट का इस्तेमाल कुछ प्लास्टिक सतहों पर जमी हल्की गंदगी और निशान हटाने के लिए किया जा सकता है. इसके लिए थोड़ी मात्रा में टूथपेस्ट किसी पुराने, मुलायम टूथब्रश पर लगाएं और स्विच बोर्ड की बाहरी सतह पर बहुत हल्के हाथ से रगड़ें. कोनों और किनारों पर खास ध्यान दें, क्योंकि वहां धूल ज्यादा जमा हो सकती है. सफाई के बाद सूखे और मुलायम कपड़े से टूथपेस्ट को अच्छी तरह हटा दें. ध्यान रखें कि हर स्विच बोर्ड की प्लास्टिक फिनिश एक जैसी नहीं होती. इसलिए पहले किसी छोटे और कम दिखाई देने वाले हिस्से पर इसे आजमाना बेहतर है.
नींबू और नमक का इस्तेमाल सावधानी से करें
नींबू और नमक का इस्तेमाल घर की कई चीजों की सफाई में किया जाता है. नींबू में मौजूद एसिडिक गुण गंदगी को ढीला करने में मदद कर सकते हैं, जबकि नमक हल्के घर्षण के जरिए निशान हटाने में मदद करता है. लेकिन स्विच बोर्ड बिजली से जुड़ा सामान है, इसलिए इस तरीके में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है. नींबू या किसी भी तरल पदार्थ को सीधे बोर्ड पर न लगाएं. अगर बिजली पूरी तरह बंद है, तो भी बहुत कम मात्रा में नमी वाले कपड़े से केवल बाहरी प्लास्टिक सतह को साफ करें और तुरंत सूखे कपड़े से पोंछ दें. किसी भी तरल को स्विच, सॉकेट या किनारों के अंदर जाने न दें.

जिद्दी काले निशानों पर क्या करें?
कुछ स्विच बोर्ड पर लंबे समय से जमा गंदगी, स्याही या रगड़ के निशान सामान्य सफाई से नहीं निकलते. ऐसे निशानों के लिए तेज केमिकल का इस्तेमाल करने के बजाय पहले हल्के क्लीनिंग तरीके आजमाना बेहतर है.
नाखून साफ करने वाले रिमूवर जैसे सॉल्वेंट कुछ प्लास्टिक की सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं, उसका रंग बदल सकते हैं या चमकदार फिनिश खराब कर सकते हैं. इसलिए इन्हें स्विच बोर्ड पर इस्तेमाल करना सामान्य सफाई के लिए अच्छा विकल्प नहीं है. खासकर अगर बोर्ड पर प्रिंटेड निशान, पेंट या सजावटी कोटिंग हो, तो ऐसे केमिकल से बचें.
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सूखे कपड़े से नियमित सफाई करें
स्विच बोर्ड को बहुत ज्यादा काला होने से बचाने का सबसे आसान तरीका है कि उसकी नियमित सफाई की जाए. हफ्ते में एक बार सूखे माइक्रोफाइबर या मुलायम कपड़े से बाहरी सतह पोंछने से धूल और उंगलियों के निशान जमा होने कम किए जा सकते हैं. अगर बोर्ड पर सिर्फ हल्की गंदगी है, तो किसी भी तरह के तेज क्लीनर की जरूरत नहीं पड़ती. नियमित और हल्की सफाई ज्यादा सुरक्षित तरीका है.
सफाई करते समय इन गलतियों से बचें
स्विच बोर्ड पर पानी का छिड़काव न करें. गीले हाथों से उसे न छुएं और सफाई के दौरान गीले फर्श पर खड़े होकर काम न करें. किसी भी तरल क्लीनर को सीधे स्विच या सॉकेट में डालना खतरनाक हो सकता है. सफाई पूरी करने के बाद बोर्ड और आसपास की सतह पूरी तरह सूखने दें. इसके बाद ही बिजली की सप्लाई चालू करें. अगर स्विच बोर्ड ढीला है, टूटा हुआ है, उसमें जलने के निशान हैं या किसी सॉकेट से स्पार्किंग होती है, तो खुद सफाई या मरम्मत करने के बजाय किसी योग्य इलेक्ट्रीशियन की मदद लें.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Salt Storage Tips: गैस चूल्हे के पास रखती हैं नमक? तुरंत बदलें ये 1 आदत</title>
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        <description><![CDATA[ Why You Should Not Keep Salt Near Gas Stove: रसोई में खाना बनाते समय नमक सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में से एक है. इसलिए ज्यादातर लोग इसे ऐसी जगह रखना पसंद करते हैं, जहां हाथ बढ़ाते ही नमक आसानी से मिल जाए. कई घरों में नमक का डिब्बा गैस स्टोव के ठीक पास या उसके आसपास ही रखा रहता है. यह तरीका सुविधाजनक जरूर लगता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गैस के पास लगातार रखा नमक आपकी रोजमर्रा की कुकिंग में परेशानी पैदा कर सकता है?
नमक सामान्य तौर पर जल्दी खराब होने वाली चीज नहीं है. साधारण नमक यानी सोडियम क्लोराइड लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है. लेकिन नमक की एक खासियत है कि वह हवा में मौजूद नमी को सोख लेता है. यही वजह है कि सही तरीके से स्टोर न करने पर नमक में गांठें पड़ने लगती हैं और वह डिब्बे से आसानी से निकलना बंद कर देता है.
गैस के पास नमक रखने से क्या होता है?
खाना बनाते समय गैस के आसपास सिर्फ गर्मी ही नहीं होती, बल्कि भाप और नमी भी बनती है. जब पानी उबलता है या किसी बर्तन से भाप निकलती है, तो वह ऊपर उठकर आसपास की चीजों तक पहुंचती है. अगर नमक का डिब्बा लगातार गैस के पास रखा है, तो यह नमी उसके अंदर पहुंच सकती है. नमक हवा से नमी सोखता है. बार-बार ऐसा होने पर नमक के छोटे-छोटे दाने आपस में चिपकने लगते हैं और धीरे-धीरे उसमें कड़े गुच्छे बन सकते हैं. कुछ समय बाद नमक डिब्बे से निकालना मुश्किल हो जाता है और शेकर के छेद भी जाम हो सकते हैं.

इसका मतलब यह नहीं है कि गैस के पास रखा नमक तुरंत खराब हो जाएगा. समस्या मुख्य रूप से उसकी नमी और इस्तेमाल में आने वाली परेशानी की है. अगर डिब्बा खुला रहता है या ढक्कन ठीक से बंद नहीं होता, तो यह परेशानी और जल्दी हो सकती है.
सिंक के पास भी नमक रखने से बचें
सिर्फ गैस ही नहीं, रसोई का सिंक भी नमक रखने के लिए सही जगह नहीं है. सिंक के आसपास आमतौर पर नमी ज्यादा रहती है. बर्तन धोने, पानी के छींटे पड़ने और लगातार नमी रहने से नमक हवा से ज्यादा नमी खींच सकता है. इसलिए नमक को ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां पानी, भाप और गर्मी का सीधा संपर्क कम हो. गैस स्टोव और सिंक से थोड़ी दूरी पर मौजूद सूखी कैबिनेट या किचन शेल्फ इसके लिए बेहतर जगह हो सकती है.

नमक को रखने के लिए कैसा डिब्बा सही है?
नमक को सूखा रखने के लिए ऐसा कंटेनर इस्तेमाल करें जिसका ढक्कन अच्छी तरह बंद हो. कांच, सिरेमिक या अच्छी क्वालिटी के फूड-ग्रेड प्लास्टिक के कंटेनर इसके लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. अगर आप रोजाना खाना बनाते समय नमक शेकर में रखते हैं, तो कोशिश करें कि इस्तेमाल के बाद ढक्कन ठीक से बंद हो. नमक का डिब्बा खुला छोड़ने से रसोई की हवा की नमी आसानी से अंदर जा सकती है. नमक निकालते समय हमेशा सूखी चम्मच का इस्तेमाल करें. गीली चम्मच से नमक निकालने पर उसके अंदर सीधे नमी पहुंच सकती है और दाने तेजी से चिपकने लग सकते हैं.
नमक में गांठें पड़ जाएं तो क्या करें?
अगर नमक पहले ही गांठों में बदल गया है, तो सिर्फ इसकी वजह से उसे फेंकने की जरूरत नहीं है. अगर नमक साफ है और उसमें किसी तरह की गंदगी या दूसरी चीज नहीं मिली है, तो गांठों को चम्मच की मदद से तोड़ा जा सकता है. कुछ लोग नमक के डिब्बे में थोड़े सूखे चावल के दाने भी रखते हैं. इसका उद्देश्य अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करना है. हालांकि इससे भी ज्यादा जरूरी है कि नमक का कंटेनर सूखा रहे और उसका ढक्कन ठीक से बंद हो.
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क्या नमक को फ्रिज में रखना चाहिए?
नमक को फ्रिज में रखने की जरूरत नहीं होती. फ्रिज के अंदर भी नमी रहती है और बार-बार दरवाजा खुलने-बंद होने से तापमान और नमी में बदलाव होता रहता है. इससे नमक में गांठें पड़ने की समस्या बढ़ सकती है. नमक के लिए ठंडी, सूखी और रोशनी से दूर किचन कैबिनेट ज्यादा बेहतर जगह है. इसे ऐसी जगह रखें जहां गैस की गर्मी, भाप या सिंक के पानी का असर न हो.
आयोडीन वाले नमक का भी रखें ध्यान
अगर आप आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करते हैं, तो उसे नमी, गर्मी और रोशनी से बचाकर रखना और भी जरूरी है. समय के साथ इसमें मौजूद आयोडीन की मात्रा कम हो सकती है, खासकर अगर नमक को गलत तरीके से स्टोर किया जाए. इसलिए नमक को गैस के पास रखने की आदत भले ही छोटी लगे, लेकिन रोजाना इस्तेमाल में इससे कई परेशानियां हो सकती हैं. डिब्बे को स्टोव से दूर, सूखी जगह पर रखें, ढक्कन हमेशा बंद रखें और नमक निकालने के लिए सूखी चम्मच का इस्तेमाल करें. इन छोटी-छोटी सावधानियों से नमक लंबे समय तक सूखा और आसानी से इस्तेमाल करने लायक बना रह सकता है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Roti Storage Tips: रोटियों को लंबे समय तक रखना है नरम? तुरंत छोड़ें ये 1 आदत</title>
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        <description><![CDATA[ How To Store Cooked Rotis Fresh For Longer: गरमागरम रोटी खाना किसे पसंद नहीं होता? तवे से उतरती हुई नरम रोटी जब सीधे थाली में आती है, तो खाने का स्वाद ही अलग होता है. लेकिन रोटी बनाने के बाद उसे संभालकर रखने का तरीका भी उतना ही जरूरी है. खासकर अगर आप बची हुई रोटियां बाद में खाने के लिए रखते हैं या लंच बॉक्स में पैक करते हैं, तो एक छोटी-सी गलती उनकी क्वालिटी और ताजगी दोनों पर असर डाल सकती है.
अक्सर लोग तवे से रोटी उतारते ही उसे एक के ऊपर एक रखते हैं और तुरंत एयरटाइट डिब्बे का ढक्कन बंद कर देते हैं. इससे रोटी कुछ समय तक नरम जरूर रह सकती है, लेकिन ज्यादा देर तक गर्म और भाप से भरे माहौल में रखने पर यही तरीका रोटियों को चिपचिपा और नम बना सकता है. अगर इन्हें लंबे समय तक इसी तरह रखा जाए, तो नमी की वजह से रोटियां जल्दी खराब भी हो सकती हैं.
गर्म रोटी को तुरंत बंद डिब्बे में रखने पर क्या होता है?
ताजी रोटी में पकने के बाद भी काफी गर्मी और नमी रहती है. जब उसे तुरंत बंद डिब्बे में डाल दिया जाता है, तो यह भाप बाहर नहीं निकल पाती. धीरे-धीरे भाप डिब्बे की अंदरूनी सतह पर पानी की बूंदों में बदलने लगती है. यही नमी वापस रोटी की सतह पर आ जाती है. इससे रोटी नरम तो महसूस हो सकती है, लेकिन अगर डिब्बे में बहुत ज्यादा नमी जमा हो जाए और रोटियां लंबे समय तक कमरे के तापमान पर पड़ी रहें, तो यह बैक्टीरिया और फफूंद के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बना सकती है. यही वजह है कि रोटियों को लंबे समय तक स्टोर करते समय सिर्फ एयरटाइट डिब्बे का इस्तेमाल करना ही काफी नहीं है.

रोटी को कैसे रखें ताकि वह ज्यादा देर तक अच्छी रहे?
अगर रोटियां कुछ घंटों के अंदर खानी हैं, तो उन्हें एक साफ सूती या मलमल के कपड़े में रखकर ढकना बेहतर तरीका हो सकता है. इससे अतिरिक्त भाप को निकलने की थोड़ी जगह मिलती है और रोटियां बहुत ज्यादा गीली भी नहीं होतीं. अगर आपका मकसद रोटियों को नरम रखना है, तो उन्हें तवे से उतरते ही बहुत देर तक खुले में छोड़ना भी सही नहीं है. रोटियों को थोड़ी देर भाप निकलने देने के बाद साफ कपड़े में लपेटकर कंटेनर में रखा जा सकता है. इस तरह रोटी की नमी काफी हद तक बनी रहती है, लेकिन डिब्बे के अंदर जरूरत से ज्यादा पानी जमा होने का खतरा कम होता है.
लंच बॉक्स के लिए खास ध्यान रखें
लंच बॉक्स में रोटी पैक करते समय भी यही बात ध्यान रखने वाली है. अगर बहुत गर्म रोटियां तुरंत पूरी तरह बंद डिब्बे में पैक कर दी जाएं, तो अंदर भाप फंस सकती है. कुछ समय बाद ढक्कन के अंदर नमी दिखाई देने लगती है और रोटियां गीली या चिपचिपी हो सकती हैं. इसलिए रोटियों को पैक करने से पहले थोड़ी देर भाप निकलने देना और फिर साफ कपड़े या पेपर टॉवल की मदद से पैक करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है. खासकर गर्म मौसम में रोटियों को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर बंद डिब्बे में रखने से बचना चाहिए.

बची हुई रोटियों को लंबे समय के लिए कैसे रखें?
अगर रोटियां अगले दिन या उससे बाद में खानी हैं, तो उन्हें सिर्फ कमरे के तापमान पर बंद डिब्बे में रखकर छोड़ना सही तरीका नहीं है. पहले रोटियों को सामान्य तापमान तक आने दें और फिर उन्हें साफ, सूखे और ढक्कन वाले कंटेनर में रखकर फ्रिज में स्टोर करें. खाने के समय इन्हें दोबारा गर्म किया जा सकता है. अगर रोटी थोड़ी सख्त हो गई है, तो हल्की नमी के साथ गर्म करने से उसकी नरमी कुछ हद तक वापस आ सकती है.
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सिर्फ नरमी नहीं, सफाई भी जरूरी है
रोटियों को नरम रखने के चक्कर में सफाई और सही स्टोरेज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जिस कपड़े, डिब्बे या कंटेनर में रोटियां रखी जा रही हैं, वह पूरी तरह साफ और सूखा होना चाहिए. अगर रोटी में अजीब गंध आने लगे, उस पर फफूंद दिखाई दे या उसकी बनावट असामान्य लगे, तो उसे खाना सुरक्षित नहीं माना जाता. रोटी को लंबे समय तक ताजा रखने का मतलब सिर्फ उसे गर्म रखना नहीं है. सही तापमान, नमी और साफ-सफाई का संतुलन भी जरूरी है. इसलिए तवे से उतरी रोटियों को तुरंत भाप बंद करके रखने की आदत के बजाय, उन्हें थोड़ी देर भाप निकलने दें और फिर जरूरत के हिसाब से स्टोर करें. छोटी-सी सावधानी रोटी का स्वाद और टेक्सचर बनाए रखने के साथ-साथ उसे जल्दी खराब होने से बचाने में भी मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>शरीर में कहां चाकू लगने से तुरंत हो जाती है मौत? यहां जानें</title>
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        <description><![CDATA[ चाकू किचन में सब्जियां और जिन चीजो के लिए बना है उनके लिए काम आए तो ठीक है, लेकिन आगे किसी को चोट पहुंचा दे तो यह गंभीर बात हो सकती है. हाल ही में जयपुर के आमेर में चाकू से हमले के बाद एक टूरिस्ट गाइड की मौत का मामला सामने आया है जिसमें इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद आप सोच सकते हैं कि चाकू लगने के बाद मौत का खतरा भी रहता है. चाकू का लगना सिर्फ घाव की जगह पर निर्भर नहीं करता, बल्कि चोट कितनी गहरी है, अंदर कौन-सी नस या अंग पर लगी है. कितना खून बहा है, इन चीजों पर भी निर्भर करता है. इसलिए चाकू से लगी किसी भी गंभीर चोट में तुरंत डॉक्टर की &amp;nbsp;मदद लेना जरूरी होता है.
चाकू की चोट को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
चाकू से लगी चोट को सिर्फ बाहर दिखाई देने वाले घाव से नहीं पहचानना चाहिए. घाव छोटा होने के बावजूद अंदरूनी हिस्से में गंभीर नुकसान या ज्यादा खून बहा सकता है. चोट कितनी गहरी है और शरीर के अंदर कोनसा अंग प्रभावित हुआ है, ये चाकू लगने पर बाहरी चौट को देखने पर ध्यान नहीं पड़ती. इसलिए चाकू लगने के बाद &amp;nbsp;अगर व्यक्ति को चक्कर आए या असहज महसूस हो , तब चोट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
शरीर के इन हिस्सों में चोट लगना हो सकता है ज्यादा खतरनाक
चाकू की चोट का असर सिर, गर्दन, छाती और पेट जैसे हिस्सों पर ज्यादा होता है. और यहा गहरी चाकू की चोट खतरनाक हो सकती है, क्योंकि यहां शरीर की कई महत्वपूर्ण संरचनाएं और अंग होते हैं. ऐसी चोट में शरीर के अंदर ही खून बहना या दूसरे गंभीर नुकसान का खतरा हो सकती है. हालांकि सिर्फ चोट की जगह देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि मौत तुरंत होगी या नहीं, क्योंकि खतरा चोट की गहराई और अंदर हुए नुकसान पर भी निर्भर करता है.
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ऐसी चोट लगने पर क्या करना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति को चाकू लग जाए तो सबसे पहले उसे जल्द से जल्द मेडिकल मदद दिलानी चाहिए. बाहर से खून बह रहा हो तो साफ कपड़े या गॉज से घाव पर लगातार दबाव दे. अगर चाकू या कोई दूसरी चीज शरीर में फंसी हुई है तो उसे खुद निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. घायल व्यक्ति को कम से कम हिलाते हुए तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है.
हर चाकू की चोट से नहीं होती मौत
चाकू लगने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की मौत तुरंत हो जाएगी. ये शरीर के उस हिस्से पर निर्भर करता है की चौट कहां और कैसे लगी है. इसका असर चोट की गहराई, रक्तस्राव, अंदरूनी अंगों को हुए नुकसान और इलाज मिलने में लगे समय पर निर्भर करता है. कई मामलों में समय पर इलाज मिलने से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है. इसलिए किसी भी गहरी या ज्यादा खून बहने वाली चोट को इमरजेंसी मानना चाहिए.
जयपुर के आमेर में क्या हुआ?
हाल ही में जयपुर के आमेर में 7 सितंबर 2026 चाकू से हमले का मामला सामने आया, जिसमें टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. रिपोर्टों के मुताबिक, वाहन को आमेर किले की ओर ले जाने को लेकर हुए विवाद के बाद उन पर हमला किया गया उन्हें 8 सितंबर 2026 &amp;nbsp;को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना के बाद आमेर इलाके में लोगों ने विरोध जताया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
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        <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 11:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>घर पर बनाएं बनारस की खास खस्ता कचौड़ी, छा जाएगा जादू</title>
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        <description><![CDATA[ बनारस का नाम आते ही वहां के स्वादिष्ट और चटपटे खाने की याद आ जाती है और यहां की कचौड़ी तो सुनके ही मुंह में पानी आ जाता है. और यहां की कचौड़ी काफी पसंद भी की जाती है. बाहर से कुरकुरी कचौड़ी और अंदर से मसालेदार भरावन वाली खस्ता कचौड़ी सुबह के नाश्ते या शाम की चाय के साथ खाने में मजा ही कुछ और है. अगर आपको भी बनारस की कचौड़ी का स्वाद पसंद है तो इसे घर पर बनाना काफी आसान है. बस आटा गूंथते समय और कचौड़ी तलते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.आइए जानते हैं की आखिर घर पर कैसे बनाते है बनारस खास खस्ता कचौड़ी.
खस्ता कचौड़ी बनाने के लिए सामग्री
बनारसी खस्ता कचौड़ी बनाने के लिए सबसे पहले इसकी सामग्री तैयार कर लें. इसके लिए मैदा, मूंग या उड़द की दाल, तेल या घी, नमक, हींग, जीरा, सौंफ, धनिया पाउडर, लाल मिर्च, अमचूर और थोड़ा गरम मसाला चाहिए. आटा गूंथने से पहले उसमे मोईन डालने के लिए थोड़ा तेल या घी और फिर गूंथने के लिए पानी. कचौड़ियां &amp;nbsp;को तलने के लिए पर्याप्त तेल. अगर आपको कचौड़ी का स्वाद थोड़ा ज्यादा चटपटा पसंद है तो उसके मसालें में थोड़ी कसूरी मेथी भी डाल सकते हैं.
सबसे पहले तैयार करें मसालेदार भरावन
सबसे पहले उड़द या मूंग की दाल को कुछ घंटे के लिए पानी में भिगो दें. इसके बाद पानी निकालकर दाल को पीस ले ध्यान रखें की दाल पूरी तरह छोटी ना हो जाएं. अब कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें और उसमें जीरा, सौंफ और हींग डालें. इसके बाद पिसी हुई दाल डालकर इसे अच्छी तरह भूनें. इसमें नमक, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, अमचूर और गरम मसाला डालकर मिलाएं. भरावन को तब तक पकाएं, जब तक इसका पानी पूरी तरह सूख न जाए. इसके बाद इसे ठंडा होने के लिए रख दें.
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आटा गूंथते समय रखें खास ध्यान
अब कचौड़ी के लिए आटा तैयार करें. एक बड़े बर्तन में मैदा लें और इसमें थोड़ा नमक डालें. इसके बाद मोईन के लिए तेल या घी डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह मिलाएं. इसे इतना मिलाएं कि मैदा हाथ में दबाने पर हल्का लड्डू जैसा बंधने लगे. अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें. आटा न बहुत सख्त होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा नरम. अब इसे ढककर करीब 15 से 20 मिनट के लिए रख दें, इससे कचौड़ी बेलने में आसानी होगी.
कचौड़ी में भरें तैयार मसाला
आटा सेट होने के बाद इसकी छोटी-छोटी लोइयां बना लें. एक लोई को हाथ से थोड़ा फैलाएं और बीच में तैयार दाल की भरावन को भरें. अब किनारों को उठाकर मसाले को अच्छी तरह अंदर बंद कर दें. इसके बाद इसे हल्के हाथों से दबाकर कचौड़ी का आकार दें. कचौड़ी को बहुत पतला न करें, क्योंकि थोड़ी मोटी कचौड़ी ही तलने के बाद बाहर से खस्ता और अंदर से अच्छी बनती है. इसी तरह सारी कचौड़ियां तैयार कर लें.
धीमी आंच पर तलें कचौड़ी
अब कड़ाही में पर्याप्त तेल गर्म करें. तेल बहुत ज्यादा तेज गर्म न हो, वरना कचौड़ी ऊपर से जल्दी सुनहरी हो जाएगी लेकिन अंदर से ठीक से नहीं सिकेगी. कचौड़ियों को धीरे से तेल में डालें और धीमी आंच पर तलें. बीच-बीच में इन्हें पलटते रहें, ताकि दोनों तरफ से एक जैसा रंग आए और कचौड़ी अच्छी तरह कुरकुरी हो जाए. सुनहरी और खस्ता होने के बाद इन्हें निकालकर गरम आलू की सब्जी, हरी चटनी और अचार के साथ सर्व करें.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Arhar Dal: भगोने में कैसे बनाएं अरहर की देसी स्टाइल वाली दाल? खुशबू से खिंचे चले आएंगे लोग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/arhar-dal-भगोने-में-कैसे-बनाएं-अरहर-की-देसी-स्टाइल-वाली-दाल-खुशबू-से-खिंचे-चले-आएंगे-लोग</link>
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        <description><![CDATA[ How To Cook Arhar Dal Without Pressure Cooker: दाल भारतीय घरों के खाने का ऐसा हिस्सा है, जिसके बिना बहुत सी थालियां अधूरी लगती हैं. गरमा-गरम चावल के साथ हो या रोटी, पराठे या जीरा राइस के साथ, दाल का स्वाद हर बार खाने को पूरा कर देता है. अरहर की दाल यानी तूर दाल तो खासतौर पर ज्यादातर घरों में बनाई जाती है. इसका स्वाद हल्का होता है और अच्छी तरह पकने के बाद यह इतनी नरम और क्रीमी हो जाती है कि मसालों के साथ आसानी से घुल-मिल जाती है.
हालांकि, दाल बनाना आसान लगता है, लेकिन सही स्वाद और गाढ़ापन लाना हर बार आसान नहीं होता. कभी दाल बहुत पतली हो जाती है, तो कभी इतनी गाढ़ी कि चावल के साथ मिलाना मुश्किल लगे. कई बार दाल पक तो जाती है, लेकिन उसमें वो देसी स्वाद और खुशबू नहीं आती, जिसकी वजह से पूरा खाना फीका लगने लगता है. अगर आपके पास प्रेशर कुकर नहीं है या आप दाल को बिल्कुल देसी तरीके से भगोने में बनाना चाहते हैं, तो इसका तरीका काफी आसान है. बस दाल को सही तरह से भिगोने, पकाने और आखिर में तड़का लगाने पर थोड़ा ध्यान देना होगा.
अरहर की दाल के लिए चाहिए ये सामान
एक कप अरहर दाल, एक बारीक कटा प्याज, एक टमाटर, दो हरी मिर्च, 4 से 5 लहसुन की कलियां, आधा चम्मच हल्दी, लाल मिर्च पाउडर स्वाद के अनुसार, एक चम्मच जीरा, नमक, हरा धनिया, पानी और तड़के के लिए घी या तेल लें. देसी स्वाद के लिए घी का इस्तेमाल किया जाए तो दाल की खुशबू और स्वाद दोनों काफी बढ़ जाते हैं.

सबसे पहले दाल को भिगोएं
एक कप अरहर दाल को दो से तीन बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. जब तक पानी काफी हद तक साफ न हो जाए, दाल को धोते रहें. इसके बाद दाल को करीब 20 से 30 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रख दें. इस छोटे से स्टेप से दाल जल्दी गलती है और भगोने में पकाने का समय भी कुछ कम हो जाता है. साथ ही दाल पकने के बाद ज्यादा अच्छी तरह नरम होती है.
भगोने में ऐसे पकाएं दाल
अब एक भारी तले वाला भगोना लें और उसमें भीगी हुई दाल डाल दें. इसमें करीब 3 से 4 कप पानी, हल्दी और थोड़ा नमक डालें. भगोने को मध्यम आंच पर रखें और दाल को पकने दें. जब पानी में उबाल आने लगे, तो ऊपर जमा होने वाला झाग चम्मच से निकाल सकते हैं. अब आंच धीमी से मध्यम रखें और दाल को धीरे-धीरे पकने दें. बीच-बीच में इसे चलाते रहें, ताकि दाल नीचे से चिपके नहीं. भगोने में अरहर दाल को पूरी तरह नरम होने में आमतौर पर कुकर से ज्यादा समय लग सकता है, इसलिए इसे जल्दबाजी में तेज आंच पर पकाने के बजाय धीमी आंच पर पकाना बेहतर है.

जब दाल के दाने अच्छी तरह गल जाएं और आसानी से दबने लगें, तो चम्मच या दाल घोटने वाले उपकरण से इसे हल्का मैश कर दें. इससे दाल का टेक्सचर ज्यादा मलाईदार हो जाएगा. अगर दाल बहुत गाढ़ी लगे, तो थोड़ा गर्म पानी डालकर मनचाहा गाढ़ापन तैयार कर सकते हैं.
अब आएगा असली देसी स्वाद वाला तड़का
दाल का स्वाद बढ़ाने में तड़के का सबसे बड़ा हाथ होता है. इसके लिए एक छोटी कड़ाही गर्म करें और उसमें एक से दो चम्मच घी डालें. घी गर्म होने पर जीरा डालें. जीरा चटकने लगे तो बारीक कटा हुआ लहसुन और हरी मिर्च डाल दें. लहसुन को तब तक भूनें जब तक उसका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए. इसके बाद कटा हुआ प्याज डालकर भूनें. प्याज के नरम और हल्के सुनहरे होने तक इसे पकाएं. अब इसमें कटे हुए टमाटर डालें और तब तक पकाएं जब तक टमाटर अच्छी तरह गलकर मसाले के साथ मिल न जाएं. अंत में लाल मिर्च पाउडर डालें और कुछ सेकंड के लिए भूनें. इस समय तड़के से आने वाली खुशबू ही बता देगी कि दाल में स्वाद आने वाला है.
दाल में तड़का मिलाकर ऐसे पकाएं
अब तैयार तड़के को भगोने में पक रही दाल में डाल दें और अच्छी तरह मिला दें. दाल को धीमी आंच पर करीब 5 से 7 मिनट और पकने दें. इससे तड़के का स्वाद दाल में अच्छी तरह घुल जाएगा और उसकी खुशबू भी और बढ़ जाएगी. अगर दाल ज्यादा गाढ़ी हो गई है, तो थोड़ा गर्म पानी डाल सकते हैं. वहीं अगर दाल बहुत पतली है, तो कुछ मिनट बिना ढके धीमी आंच पर पकाने से वह गाढ़ी हो जाएगी. आखिर में ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालें और चाहें तो एक चम्मच घी भी डाल दें.
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दाल को किसके साथ परोसें?
गरमा-गरम देसी अरहर दाल को सादे चावल, जीरा राइस, रोटी, फुल्के या पराठे के साथ परोसा जा सकता है. साथ में पापड़, अचार, प्याज, सलाद और थोड़ा दही हो तो साधारण खाना भी पूरा देसी स्वाद देने लगता है. अगर आपको दाल में हल्की खटास पसंद है, तो परोसने से ठीक पहले थोड़ा नींबू का रस भी डाल सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>सितंबर में घूमने के लिए ये हैं 7 जगहें, मानसून के बाद दिखती हैं खूबसूरत</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सितंबर-में-घूमने-के-लिए-ये-हैं-7-जगहें-मानसून-के-बाद-दिखती-हैं-खूबसूरत</link>
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        <description><![CDATA[ सितंबर यानी मानसून का सुहावना मौसम. यह मौसम घूमने के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इस समय प्रकृति अपने चरम पर होती है. इस समय अगर आप भी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो भारत की ये 7 जगहें आपकी ट्रिप को यादगार तो बनाएंगी , साथ ही आपके मन को प्राकृतिक सौंदर्य से तरोताजा कर देंगी. मानसून का मजा लेने के लिए आप अपनी ट्रिप में कूर्ग, मुन्नार और उदयपुर&amp;nbsp; जैसी 7 बेहतरीन जगहों को जोड़ सकते हैं.
कूर्ग और चिकमगलूर, कर्नाटक
कर्नाटक के कूर्ग और चिकमगलूर अपनी हरियाली, पहाड़ियों, कॉफी के बागानों और झरनों के लिए जाने जाते हैं. कूर्ग को भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है. सितंबर में बारिश के बाद यहां का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है. चारों तरफ फैले कॉफी के पौधे, ठंडी हवा और पहाड़ियों के बीच बहते झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. वहीं चिकमगलूर पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के बीच बसा है. यहां कॉफी एस्टेट में घूमने के साथ प्रकृति के शांत वातावरण का आनंद लिया जा सकता है. फोटोग्राफी पसंद करने वालों के लिए भी दोनों जगहें काफी अच्छी हैं.
मुन्नार और वैली ऑफ फ्लावर्स
केरल का मुन्नार अपने हरे-भरे चाय के बागानों और धुंध से ढकी पहाड़ियों के लिए मशहूर है. सितंबर में बारिश के बाद यहां की हरियाली और भी निखर जाती है. पहाड़ियों के बीच घूमते समय बादलों और धुंध का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है. दूसरी ओर उत्तराखंड की वैली ऑफ फ्लावर्स प्रकृति प्रेमियों के लिए खास जगह है. यहां सितंबर में रंग-बिरंगे फूलों और हरी-भरी वादियों का सुंदर नजारा दिखाई देता है. पहाड़ों के बीच ट्रेकिंग करते हुए यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को करीब से देखा जा सकता है.
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झीलों के किनारे बिताएं सुकून भरे पल
राजस्थान का उदयपुर सितंबर में घूमने के लिए अच्छा ऑप्सन है . बारिश के बाद शहर की झीलें और आसपास की हरियाली इसकी खूबसूरती बढ़ा देती है. झीलों के किनारे बैठकर शांत वातावरण का आनंद लिया जा सकता है. वहीं कश्मीर का श्रीनगर भी सितंबर में काफी आकर्षक नजर आता है. यहां डल झील में शिकारा की सवारी, पहाड़ों का नजारा और सुहावना मौसम यात्रा को यादगार बना देते हैं. अगर आपको झीलों और शांत वातावरण वाली जगहें पसंद हैं, तो उदयपुर और श्रीनगर दोनों अच्छे विकल्प हैं.
लैंसडाउन
उत्तराखंड का लैंसडाउन दिल्ली-एनसीआर से छोटी ट्रिप के लिए पसंद किया जाने वाला पहाड़ी जगह है . यहां देवदार के घने जंगल, पहाड़ और शांत वातावरण देखने को मिलता है. सितंबर में बारिश के बाद यहां की हरियाली और भी खूबसूरत नजर आती है. शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय सुकून से बिताने के लिए लैंसडाउन अच्छा ऑप्सन है. यहां पहाड़ी रास्तों पर घूमने, प्रकृति को देखने और खूबसूरत तस्वीरें खींचने का मजा लिया जा सकता है. सितंबर में इन सभी जगहों पर जाने से पहले मौसम और स्थानीय यात्रा से जुड़ी जानकारी जरूर जांच लें.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>How To Sharpen Knife: किचन के चाकू की धार कम हो गई? घर पर ऐसे करें तेज</title>
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        <description><![CDATA[ How To Sharpen Kitchen Knife At Home: किचन में रोज सब्जियां, फल और दूसरी चीजें काटते-काटते चाकू की धार धीरे-धीरे कम हो जाती है. शुरुआत में इसका ज्यादा पता नहीं चलता, लेकिन कुछ समय बाद वही चाकू टमाटर या प्याज काटने में भी परेशानी करने लगता है. कई बार लोग धार कम होने पर चाकू बदलने या बाहर से शार्प करवाने के बारे में सोचते हैं. हालांकि, हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं है. सही तरीका पता हो तो घर पर भी चाकू की धार को काफी हद तक बेहतर किया जा सकता है.
एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि कुंद चाकू हमेशा ज्यादा सुरक्षित नहीं होता. धार कम होने पर किसी चीज को काटने के लिए ज्यादा दबाव लगाना पड़ सकता है. दबाव बढ़ने से चाकू अचानक फिसल सकता है और हाथ या उंगलियों पर चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए चाकू की धार को सही स्थिति में रखना सिर्फ सुविधा के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से काम करने के लिए भी जरूरी है.
चाकू की धार आखिर कम क्यों होती है?
चाकू का इस्तेमाल लगातार करने से उसकी धार धीरे-धीरे घिसती है. लेकिन सिर्फ ज्यादा इस्तेमाल ही इसकी वजह नहीं है. अगर आप चाकू से कांच, पत्थर या मार्बल जैसी सख्त सतह पर काटते हैं, तो उसकी धार जल्दी खराब हो सकती है. चाकू को बिना किसी सुरक्षा के दूसरे बर्तनों के साथ दराज में रखने से भी ब्लेड पर असर पड़ सकता है. इसी तरह डिशवॉशर में धोने से गर्म पानी, तेज हलचल और दूसरे बर्तनों से टकराने के कारण चाकू की धार कमजोर हो सकती है.

व्हेटस्टोन से करें धार तेज
अगर चाकू काफी ज्यादा कुंद हो गया है, तो व्हेटस्टोन एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इस्तेमाल से पहले स्टोन को निर्माता के निर्देश के अनुसार पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद चाकू की धार को स्टोन पर लगभग 15 से 20 डिग्री के कोण पर रखते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर चलाया जाता है.
इसी प्रक्रिया को ब्लेड के दोनों तरफ दोहराएं. इसमें थोड़ा समय और अभ्यास लग सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा कुंद चाकू की धार सुधारने में यह तरीका प्रभावी हो सकता है. शुरुआती लोग चाकू को स्थिर रखने और सही कोण बनाए रखने पर खास ध्यान दें.

सिरेमिक मग का इस्तेमाल कर सकते हैं
अगर घर में शार्पनिंग स्टोन नहीं है, तो एक साधारण सिरेमिक मग कुछ हद तक मदद कर सकता है. मग को उल्टा करके उसके नीचे बने बिना ग्लेज वाले खुरदरे हिस्से को देखें. इस हिस्से पर चाकू की धार को हल्के हाथ से उसी तरह चलाया जा सकता है जैसे शार्पनिंग स्टोन पर चलाते हैं. हालांकि, इसे नियमित शार्पनिंग टूल का विकल्प नहीं समझना चाहिए. यह सिर्फ जरूरत पड़ने पर घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.
होनिंग रॉड से धार को सही रखें
होनिंग रॉड को अक्सर चाकू तेज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसका काम थोड़ा अलग है. यह वास्तव में धातु को ज्यादा हटाकर नई धार नहीं बनाता, बल्कि चाकू की मौजूदा धार को सीधा और सही स्थिति में लाने में मदद करता है. अगर चाकू बहुत ज्यादा कुंद नहीं हुआ है और सिर्फ उसकी धार थोड़ी मुड़ गई है, तो होनिंग रॉड उपयोगी हो सकती है. रॉड को सीधा पकड़कर चाकू को हल्के दबाव के साथ एक समान कोण पर दोनों तरफ चलाएं.
सैंडपेपर भी हो सकता है विकल्प
जरूरत पड़ने पर बारीक सैंडपेपर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. लगभग 1000 से 2000 ग्रिट का सैंडपेपर किसी सपाट सतह पर रखें और ब्लेड को हल्के हाथ से एक समान कोण पर चलाएं. यह नियमित रूप से चाकू तेज करने का सबसे अच्छा तरीका नहीं है, लेकिन जब सही उपकरण उपलब्ध न हो, तब थोड़ी धार वापस लाने में मदद कर सकता है.
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चाकू की धार जल्दी खराब न हो, इसके लिए इन गलतियों से बचें
चाकू को तेज करने के बाद उसकी सही देखभाल करना भी जरूरी है. सब्जियां काटने के लिए कांच, मार्बल या पत्थर की सतह का इस्तेमाल न करें. लकड़ी या अच्छी क्वालिटी के प्लास्टिक का कटिंग बोर्ड बेहतर विकल्प हो सकता है. चाकू को दूसरे बर्तनों के साथ दराज में फेंककर रखने के बजाय नाइफ ब्लॉक या मैग्नेटिक स्ट्रिप जैसी सुरक्षित जगह पर रखें. चाकू को हाथ से धोकर तुरंत सुखाना भी उसकी धार और पूरी स्थिति को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>How To Wash Rice: क्या है चावल धोने का सही तरीका, कहीं आप भी तो नहीं करतीं ये गलतियां?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/how-to-wash-rice-क्या-है-चावल-धोने-का-सही-तरीका-कहीं-आप-भी-तो-नहीं-करतीं-ये-गलतियां</link>
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        <description><![CDATA[ How To Wash Rice Properly Before Cooking: चावल बनाने से पहले उसे धोना ज्यादातर घरों में रोज की रसोई का हिस्सा है. लेकिन क्या आप वाकई चावल को सही तरीके से धोती हैं? कई लोग चावल को एक बार पानी डालकर तुरंत निकाल देते हैं, जबकि कुछ लोग इसे बार-बार इतनी जोर से रगड़ते हैं कि चावल की बनावट ही बदल जाती है. चावल धोने का सही तरीका पता हो, तो इसमें मौजूद धूल-मिट्टी और अतिरिक्त महीन अवशेष हटाने के साथ-साथ पकने के बाद चावल की बनावट भी बेहतर रखी जा सकती है.
चावल खेत से लेकर पैकेट और फिर हमारी रसोई तक पहुंचने के दौरान कई प्रक्रियाओं से गुजरता है. इस दौरान उसके साथ धूल या दूसरे छोटे कण आ सकते हैं. इसके अलावा पैकेट में रखे चावल के दानों के आपस में रगड़ने से उनकी सतह पर महीन स्टार्च पाउडर भी जमा हो सकता है. अगर इसे बिना धोए पकाया जाए, तो चावल जरूरत से ज्यादा चिपचिपा या भारी लग सकता है.
क्या हर तरह के चावल को धोना चाहिए?
आम तौर पर सफेद, ब्राउन, लंबे दाने वाले और छोटे दाने वाले चावल को पकाने से पहले धोया जा सकता है. चावल को धोने का मुख्य उद्देश्य उसकी सतह पर मौजूद धूल, छोटे अवशेष और अतिरिक्त महीन कणों को हटाना है. हालांकि, चावल को धोने से पानी में घुलने वाले कुछ पोषक तत्वों, खासकर कुछ बी विटामिन, की थोड़ी मात्रा कम हो सकती है. फोर्टिफाइड या विटामिन से समृद्ध चावल में यह असर ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है. इसलिए चावल को बहुत ज्यादा देर तक पानी में भिगोकर या बार-बार जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं है. सामान्य तरीके से अच्छी तरह धोना काफी है.

चावल धोते समय पानी साफ होने तक धोएं
चावल धोने का सबसे आसान तरीका है कि इसे किसी बर्तन या बड़े कटोरे में डालें और इतना पानी डालें कि सारे दाने उसमें डूब जाएं. अब हाथ से चावल को हल्के-हल्के घुमाएं. पानी तुरंत सफेद और धुंधला नजर आने लगेगा. उस पानी को निकाल दें और फिर साफ पानी डालें. यही प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक पानी पहले की तुलना में काफी साफ नजर आने न लगे. इसका मतलब यह नहीं है कि पानी बिल्कुल कांच की तरह पारदर्शी होना ही चाहिए. चावल की किस्म के अनुसार पानी में थोड़ी धुंधलापन रह सकता है.
हाथ से धोने का तरीका क्यों आसान है?
कटोरे में चावल धोते समय हाथ से दानों को हल्के से घुमाने पर उनकी सतह पर मौजूद महीन पाउडर और अवशेष पानी में निकलने लगते हैं. इससे आपको यह समझने में भी आसानी होती है कि चावल कितना साफ हो चुका है. बस ध्यान रखें कि दानों को बहुत जोर से न रगड़ें. ज्यादा रगड़ने से चावल टूट सकते हैं और जरूरत से ज्यादा स्टार्च भी निकल सकता है. हल्के हाथ से कुछ बार घुमाना पर्याप्त है.

छलनी से भी धो सकते हैं चावल
अगर आप कटोरे में चावल धोना पसंद नहीं करतीं, तो बारीक जाली वाली छलनी का इस्तेमाल किया जा सकता है. चावल को छलनी में डालकर उसके ऊपर सामान्य या ठंडा पानी बहाएं. पानी तब तक डालें जब तक वह काफी साफ न दिखाई देने लगे. अगर बहते पानी की सफाई समझना मुश्किल हो, तो छलनी के नीचे निकलने वाले पानी को एक पारदर्शी गिलास में इकट्ठा करके देखा जा सकता है. इससे अंदाजा लगाना आसान होगा कि पानी में अभी कितनी धुंधलापन है.
चावल धोना और भिगोना एक जैसा नहीं है
एक आम गलती यह है कि लोग चावल धोने और भिगोने को एक ही प्रक्रिया समझ लेते हैं. दोनों का मकसद अलग है. चावल धोने से मुख्य रूप से सतह की धूल, अवशेष और अतिरिक्त महीन स्टार्च हटाने में मदद मिलती है, जबकि भिगोने का इस्तेमाल कुछ किस्म के चावल को जल्दी और समान रूप से पकाने के लिए किया जाता है. इसलिए सिर्फ चावल धोने के लिए उसे लंबे समय तक पानी में छोड़ना जरूरी नहीं है. अगर किसी खास रेसिपी में चावल भिगोने की जरूरत हो, तो उसके अनुसार अलग से ऐसा किया जा सकता है.
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क्या चावल धोने से आर्सेनिक निकल जाता है?
चावल में आर्सेनिक की मौजूदगी एक अलग विषय है. केवल सामान्य तरीके से चावल धोने से आर्सेनिक की मात्रा में बड़ी कमी नहीं आती. इसलिए चावल धोने को इसका पूरा समाधान नहीं समझना चाहिए. पकाने का तरीका इस मामले में ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
इन गलतियों से बचें
चावल को सिर्फ एक बार पानी डालकर तुरंत निकाल देना सही सफाई नहीं देता. वहीं, उसे बहुत देर तक बहते पानी के नीचे रखने की भी जरूरत नहीं है. दानों को जोर से रगड़ने से बचें और धोने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें. सबसे आसान तरीका यही है कि चावल को कटोरे में लें, पानी डालें, हाथ से हल्के से घुमाएं और धुंधला पानी निकाल दें. जरूरत के अनुसार यह प्रक्रिया दोहराएं. जब पानी काफी साफ दिखाई देने लगे, तो चावल पकाने के लिए तैयार है.
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        <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 23:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>केवल रेगिस्तान ही नहीं, हरियाली से लदे हैं राजस्थान के ये 5 शहर</title>
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        <description><![CDATA[ राजस्थान भारत का ऐसा राज्य है जिसे लोग अक्सर रेगिस्तान से जोड़कर देखते हैं. जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जैसे इलाकों में दूर-दूर तक फैली रेत और रेगिस्तानी नजारे देखने को मिलते हैं. लेकिन राजस्थान की पहचान सिर्फ रेगिस्तान तक सीमित नहीं है. राज्य के कई हिस्सों में घने पेड़, पहाड़, झीलें और हरियाली भी देखने को मिलती है. कुछ शहर तो अपनी हरियाली और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए खास तौर पर जाने जाते हैं. अगर आप राजस्थान घूमने का प्लान बना रहे हैं और रेगिस्तान से अलग कुछ देखना चाहते हैं तो इन 5 शहरों को अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं.
उदयपुर
उदयपुर को राजस्थान के सबसे खूबसूरत शहरों में गिना जाता है. यहां कई झीलें, पहाड़ और पेड़ों से घिरे इलाके देखने को मिलते हैं. पिछोला झील और फतेह सागर झील के आसपास का नजारा शहर की खूबसूरती को और बढ़ाता है. अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे उदयपुर में आपको राजस्थान का एक ऐसा रूप देखने को मिलता है, जो रेगिस्तान से बिल्कुल अलग है. बारिश के मौसम में आसपास की हरियाली और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आती है.
माउंट आबू
राजस्थान में अगर किसी जगह को हरियाली और पहाड़ों के लिए जाना जाता है तो माउंट आबू का नाम सबसे पहले आता है. यह राज्य का एकमात्र प्रमुख हिल स्टेशन है और यहां का मौसम भी राजस्थान के दूसरे इलाकों से काफी अलग महसूस होता है. चारों तरफ पहाड़, पेड़ और हरियाली इस जगह को खास बनाते हैं. नक्की झील के आसपास घूमना और पहाड़ी रास्तों पर प्राकृतिक नजारों का आनंद लेना यहां की ट्रिप का खास हिस्सा हो सकता है.
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अलवर
अलवर भी राजस्थान के उन शहरों में शामिल है जहां प्रकृति और हरियाली के साथ घूमने का मौका मिलता है. शहर के आसपास अरावली की पहाड़ियां और वन क्षेत्र हैं. सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर जिले की सबसे खास जगहों में से एक है, जहां जंगल और वन्यजीवों को देखा जा सकता है. इसके अलावा सिलिसेढ़ झील के आसपास का इलाका भी हरियाली और शांत माहौल के लिए जाना जाता है. इसलिए प्रकृति पसंद करने वालों के लिए अलवर अच्छा विकल्प हो सकता है.
कोटा
चंबल नदी के किनारे बसा कोटा सिर्फ शिक्षा के लिए ही मशहूर नहीं है. शहर और उसके आसपास कई हरे-भरे इलाके और प्राकृतिक जगहें भी हैं. चंबल नदी के किनारे का क्षेत्र, चंबल गार्डन और आसपास के पार्क शहर को एक अलग रूप देते हैं. मानसून के दौरान यहां की हरियाली और भी बढ़ जाती है. अगर राजस्थान में किसी ऐसे शहर की तलाश है जहां शहरी सुविधाओं के साथ नदी और हरियाली का नजारा भी मिल सके तो कोटा को देखा जा सकता है.
जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर को भले ही किले, महलों और गुलाबी रंग की इमारतों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां भी कई हरे-भरे स्थान हैं. शहर में सेंट्रल पार्क जैसे बड़े हरियाली वाले क्षेत्र हैं. इसके अलावा जयपुर के आसपास अरावली की पहाड़ियां और कई प्राकृतिक जगहें देखने को मिलती हैं. मानसून के समय पहाड़ियों और आसपास के इलाकों में हरियाली बढ़ जाती है. इसलिए जयपुर घूमने पर सिर्फ ऐतिहासिक इमारतें ही नहीं, बल्कि शहर का हरियाली वाला हिस्सा भी देखा जा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Flour Bugs: आटे में कीड़े और घुन से हैं परेशान? 1 ट्रिक से पाएं छुटकारा</title>
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        <description><![CDATA[ Pantry Pests And Flour Weevils Prevention Tips: रसोई में कुछ बनाने के लिए जैसे ही आप आटे की डिब्बी खोलते हैं और उसके आसपास छोटे-छोटे कीड़े दिखाई देने लगते हैं, तो सबसे पहले यही ख्याल आता है कि कहीं पूरा आटा खराब तो नहीं हो गया. कई बार आटे में सचमुच छोटे कीड़े या उनके लार्वा दिखाई दे सकते हैं. लेकिन ऐसा होने का मतलब यह नहीं है कि घर गंदा है या आपने आटे को सही तरीके से नहीं रखा था.
दरअसल, आटा और दूसरे सूखे खाद्य पदार्थों में कुछ ऐसे कीट लग सकते हैं जिन्हें पैंट्री पेस्ट कहा जाता है. ये कीड़े घर के साफ-सुथरे किचन में भी पहुंच सकते हैं. कई बार इनके अंडे या लार्वा पहले से ही किसी खाद्य पैकेट में मौजूद होते हैं और सामान खरीदकर घर लाने के बाद इनकी संख्या बढ़ने लगती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आटे के अलावा ये कीड़े सूजी, बेसन, कॉर्नमील, ओट्स, चावल, दाल, अनाज, पास्ता, सीरियल, मसाले, मेवे, ड्राई फ्रूट्स, बिस्किट, केक मिक्स, चॉकलेट और पालतू जानवरों के खाने जैसी चीजों में भी मिल सकते हैं. इसलिए अगर एक पैकेट में कीड़े दिखाई दें, तो आसपास रखे दूसरे सामान को भी जरूर चेक करना चाहिए.
आटे में दिखने वाले ये छोटे कीड़े कौन से होते हैं?
पैंट्री में मिलने वाले कीट आमतौर पर दो तरह के होते हैं. इनमें एक तरफ छोटे बीटल यानी भृंग होते हैं और दूसरी तरफ पतंगे. आटे में मिलने वाले बीटल लाल-भूरे से लेकर काले रंग के हो सकते हैं और इनका आकार काफी छोटा होता है. दूसरी ओर, अगर आपको आटे या उसके आसपास छोटे सफेद या क्रीम रंग के कीड़े रेंगते दिखाई दें, तो ये किसी पतंगे के लार्वा हो सकते हैं.

कई बार पतंगों के लार्वा के अलावा उनकी चिपचिपी जाली जैसी संरचना भी दिखाई देती है. ये जालियां डिब्बे, पैकेट, शेल्फ या कैबिनेट के कोनों में भी मिल सकती हैं. कुछ मामलों में बड़े कीड़े दिखाई नहीं देते, लेकिन उनके अंडे या लार्वा खाद्य पदार्थ में मौजूद हो सकते हैं.
आटे में कीड़े दिखें तो सबसे पहले क्या करें?
सबसे पहले उस आटे को अलग कर दें जिसमें कीड़े दिखाई दिए हैं. अगर उसमें कीड़े, लार्वा या जाले साफ नजर आ रहे हैं, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय एक बैग में अच्छी तरह बंद करके घर के बाहर रखे कूड़ेदान में फेंकना बेहतर है. इसके बाद सिर्फ उसी डिब्बे को साफ करके रुक न जाएं. जिस जगह आटा रखा था, उसके आसपास मौजूद सभी पैकेट और डिब्बों को ध्यान से देखें. चावल, दाल, सूजी, मसाले, पास्ता, बिस्किट और दूसरे सूखे सामान में भी किसी तरह के कीड़े, लार्वा या जाले तो नहीं हैं, यह जरूर चेक करें. रसोई की दूसरी अलमारियों और मसालों वाली जगह को भी नजरअंदाज न करें. पैंट्री पेस्ट एक खाद्य पदार्थ से दूसरे तक पहुंच सकते हैं, इसलिए पूरी स्टोरेज एरिया की जांच करना जरूरी है.

इसके बाद शेल्फ, कैबिनेट के कोनों और दरारों को अच्छी तरह वैक्यूम करें. खासतौर पर जहां शेल्फ और दीवार मिलती है, वहां आटा या अनाज के छोटे कण जमा हो सकते हैं. इन्हीं जगहों पर कुछ कीट अंडे भी छोड़ सकते हैं. अगर कहीं चिपचिपी जाली या कीड़ों के खोल दिखाई दें, तो उन्हें हटाकर तुरंत फेंक दें. सिर्फ ऊपर से कपड़ा फेर देने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी.
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सिर्फ तेजपत्ता रखने से समस्या खत्म नहीं होगी
आटे में कीड़े दिखाई देने पर कई लोग डिब्बे में तेजपत्ता, नींबू का तेल या दूसरे घरेलू उपाय इस्तेमाल करने लगते हैं. लेकिन इन उपायों के प्रभावी होने के पर्याप्त साइंटफिक कारण नहीं हैं. इसलिए संक्रमित आटे में कोई घरेलू चीज डालकर उसे बचाने की कोशिश करने के बजाय पहले संक्रमण के सोर्स को ढूंढना ज्यादा जरूरी है. एक बार सफाई करने के बाद करीब दो हफ्ते बाद रसोई की दोबारा जांच करें. अगर कई हफ्तों तक सफाई और जांच के बावजूद कीड़े लगातार नजर आते रहें, तो पेस्ट कंट्रोल प्रोफेशनल की मदद लेना बेहतर रहेगा.
आगे से आटे में कीड़े न पड़ें, इसके लिए क्या करें?
आटा, अनाज और दूसरे सूखे खाद्य पदार्थों को उनकी खुली पैकिंग में रखने के बजाय एयरटाइट कंटेनर में रखना बेहतर है. कांच के जार या अच्छी तरह सील होने वाले कंटेनर इसके लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. सामान खरीदते समय पैकेट को ध्यान से देखें. फटे, खुले या क्षतिग्रस्त पैकेट लेने से बचें. पुराने आटे और अनाज को पहले इस्तेमाल करें और संभव हो तो आटे जैसे कुछ खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक रखने के लिए फ्रिज या फ्रीजर का इस्तेमाल किया जा सकता है. रसोई में आटा, चावल या दूसरे अनाज गिर जाएं तो उन्हें तुरंत साफ करें. अलमारियों और उनके कोनों की समय-समय पर सफाई और वैक्यूमिंग भी जरूरी है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Pressure Cooker Rubber: कुकर की रबर ढीली हो गई, जानें इसे सही करने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Loose Pressure Cooker Rubber: प्रेशर कुकर रोजमर्रा की रसोई का ऐसा बर्तन है, जिसका इस्तेमाल दाल और सब्जियां बनाने से लेकर कई चीजों को जल्दी पकाने तक किया जाता है. इसमें खाना कम समय में तैयार हो जाता है, इसलिए ज्यादातर घरों में यह रोजाना इस्तेमाल होने वाले बर्तनों में शामिल है. लेकिन प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करते समय थोड़ी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है. खासकर कुकर के ढक्कन में लगी रबर यानी गैसकेट को लेकर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.
कुकर की रबर ढक्कन को ठीक से बंद रखने और अंदर दबाव बनने में अहम भूमिका निभाती है. अगर यह रबर ढीली हो जाए, अपनी जगह से निकलने लगे या ठीक से फिट न बैठे, तो कुकर में दबाव बनने में परेशानी हो सकती है. ऐसे में कई लोग घर पर ही रबर को दोबारा कसने के तरीके खोजने लगते हैं. लेकिन यहां सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि खराब या ढीली गैसकेट को किसी अस्थायी जुगाड़ से ठीक करके कुकर चलाना सही तरीका नहीं है.
सबसे पहले रबर की हालत जरूर जांचें
अगर कुकर की रबर पहले की तुलना में ढीली महसूस हो रही है, तो उसे ध्यान से देखें. रबर में दरार, कट, ज्यादा खिंचाव, कठोरपन या किसी हिस्से में असमानता दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. लंबे समय तक इस्तेमाल होने के बाद गैसकेट अपना लचीलापन खो सकती है और ढक्कन में सही तरह से फिट नहीं बैठती. ऐसी स्थिति में सिर्फ रबर को ठंडा करके या किसी तरीके से सिकोड़कर दोबारा इस्तेमाल करने की कोशिश करने के बजाय उसे बदलना बेहतर है. कुकर के मॉडल के अनुसार सही आकार और निर्माता द्वारा बताए गए गैसकेट का ही इस्तेमाल करना चाहिए.

ठंडा करने से रबर कुछ समय के लिए कस सकती है
दिए गए स्रोत में ढीली रबर को ठंडा करने का तरीका बताया गया है. इसमें रबर पर ठंडा पानी डालने या कुछ समय के लिए ठंडी जगह पर रखने की बात कही गई है, जिससे वह थोड़ी सिकुड़ सकती है और ढक्कन में आसानी से फिट हो सकती है. हालांकि यह स्थायी समाधान नहीं माना जाना चाहिए. अगर रबर बार-बार ढीली हो रही है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि गैसकेट बदलने का समय आ गया है. कुकर में दबाव बनने के दौरान ढक्कन को हाथ से पकड़कर रखने जैसे उपाय भी नहीं करने चाहिए. दबाव वाले कुकर को जबरदस्ती बंद रखने या अस्थायी तरीके से सील करने की कोशिश जोखिम भरी हो सकती है.
आटे या टेप से सील करने का जुगाड़ न करें
दिए गए कंटेंट में ढक्कन के आसपास आटा लगाने और रबर पर टेप चिपकाने जैसे घरेलू उपायों का भी जिक्र है. लेकिन प्रेशर कुकर के मामले में ऐसे जुगाड़ से बचना ही समझदारी है. कुकर के अंदर दबाव बनता है और उसकी सीलिंग प्रणाली किसी अस्थायी सामग्री पर निर्भर करने के लिए नहीं बनाई जाती. आटा या चिपकने वाला टेप रबर का सही विकल्प नहीं है. इससे ढक्कन की सीलिंग, कुकर के दबाव और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. इसलिए अगर रबर ठीक से फिट नहीं हो रही है, तो कुकर को चलाने के बजाय पहले समस्या को ठीक करना जरूरी है.

कुकर को हमेशा समतल जगह पर रखें. प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करते समय उसे सीधी और स्थिर सतह पर रखना चाहिए. इससे खाना बनाते समय कुकर सही स्थिति में रहता है और ढक्कन तथा गैसकेट पर अनावश्यक दबाव पड़ने की संभावना कम होती है. इसके अलावा कुकर को जरूरत से ज्यादा गर्म करने या खाली कुकर चलाने जैसी गलतियों से भी बचना चाहिए.
हर इस्तेमाल के बाद रबर की सफाई करें
खाना बनाने के बाद कुकर की रबर को निकालकर अच्छी तरह धोना जरूरी है. इसमें दाल, मसाले, तेल या खाने के छोटे कण फंस सकते हैं. अगर इन्हें लंबे समय तक साफ न किया जाए, तो रबर पर गंदगी जम सकती है और उसकी हालत खराब हो सकती है. रबर को धोने के बाद उसे अच्छी तरह सुखाकर ही दोबारा लगाएं. दिए गए स्रोत में इसे डिशवॉशर में न डालने की सलाह भी दी गई है. बेहतर होगा कि गैसकेट की सफाई और देखभाल के लिए अपने कुकर के निर्माता द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें.
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ढीली रबर को नजरअंदाज करना सही नहीं
अगर कुकर की रबर ढीली हो गई है और बार-बार अपनी जगह से निकल रही है, तो इसे छोटी समस्या समझकर कोई घरेलू जुगाड़ करने के बजाय बदल देना सबसे सुरक्षित विकल्प है. खासकर अगर रबर पुरानी, फटी हुई या कठोर हो चुकी है, तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. प्रेशर कुकर में सुविधा के साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. इसलिए रबर ढीली होने पर उसे किसी टेप, आटे या दूसरे अस्थायी तरीके से कसने के बजाय सही गैसकेट लगाएं. इससे कुकर का ढक्कन ठीक तरह से फिट रहेगा और खाना बनाते समय अनावश्यक जोखिम से भी बचा जा सकेगा.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Musty Smell in Home: बारिश के बाद घर में सीलन की बदबू, जानें इसे दूर करने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Musty Damp Smell From House: बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ घर में नमी और सीलन की समस्या भी बढ़ जाती है. बारिश रुकने के बाद जब आप घर के किसी कमरे में जाते हैं और वहां गीले कपड़े या नम तौलिये जैसी अजीब सी गंध महसूस होती है, तो इसकी वजह सिर्फ बंद कमरा नहीं होती. लगातार बढ़ी हुई नमी, गीली सतहों और हवा का ठीक से आवागमन न होने के कारण घर में ऐसी बदबू टिकने लगती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सावधानियों और सही देखभाल से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
बारिश के बाद घर में सीलन की बदबू क्यों आती है?
बारिश के दिनों में हवा में नमी काफी बढ़ जाती है. यह नमी दीवारों, कालीन, फर्नीचर और घर के दूसरे सामान में भी समा सकती है. जब घर के अंदर की सतहें लंबे समय तक नम रहती हैं, तो वहां फफूंद और मिल्ड्यू पनपने का खतरा बढ़ जाता है. इन्हीं की वजह से घर में एक खास तरह की बासी और सीलन भरी गंध आने लगती है. इसके अलावा, घर के आसपास जमा पानी, बंद नालियां, गीले कपड़े, जूते और छाते भी इस बदबू को बढ़ा सकते हैं. बारिश के दौरान खिड़कियां और दरवाजे लंबे समय तक बंद रखने से ताजी हवा अंदर नहीं आ पाती और पहले से मौजूद गंध कमरे में ही बनी रहती है.

घर में नमी को जमा न होने दें
सीलन की बदबू को दूर करने का सबसे जरूरी तरीका है कि नमी को ज्यादा देर तक टिकने न दिया जाए. बारिश के बाद घर की दीवारों, फर्श और दूसरी गीली सतहों को अच्छी तरह पोंछकर सुखाएं. अगर किसी दीवार या कोने में पानी रिसने की समस्या दिखाई दे रही है, तो उसे नजरअंदाज न करें. अलमारियों और ऐसे कोनों पर भी ध्यान दें जहां हवा कम पहुंचती है. जिन जगहों पर बार-बार नमी जमा होती है, वहां नमी सोखने वाले उत्पाद रखे जा सकते हैं. इससे बंद जगहों में अतिरिक्त नमी को कम करने में मदद मिल सकती है और सीलन की गंध बढ़ने की संभावना भी कम होती है.
बारिश रुकते ही घर में हवा आने दें
बारिश के दौरान खिड़कियां बंद रखना जरूरी हो सकता है, लेकिन बारिश रुकने के बाद घर को लंबे समय तक बंद न रखें. जब बाहर का मौसम ठीक हो, तो खिड़कियां और दरवाजे खोल दें ताकि ताजी हवा घर के अंदर आ सके. अगर घर में आमने-सामने की खिड़कियां या दरवाजे हैं, तो उन्हें खोलने से हवा का बेहतर प्रवाह हो सकता है. अच्छा वेंटिलेशन घर के अंदर जमा नमी को कम करने में मदद करता है. इससे फफूंद और मिल्ड्यू के बढ़ने की संभावना भी घटती है और धीरे-धीरे बासी गंध कम होने लगती है.

अगर किसी कमरे में हवा का आवागमन कम है और वहां नमी लगातार बनी रहती है, तो नमी कम करने वाली मशीन यानी डीह्यूमिडिफायर उपयोगी हो सकता है. यह हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को खींचने में मदद करता है. बारिश के मौसम में इसका इस्तेमाल घर के अंदर का वातावरण ज्यादा आरामदायक रखने और नमी से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है.
घर के अंदर पौधे लगाते समय रखें ध्यान
कुछ पौधे घर के वातावरण को बेहतर बनाने और हवा में मौजूद नमी को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं. पीस लिली, फर्न और इंग्लिश आइवी जैसे पौधे घर की सजावट भी बढ़ाते हैं. हालांकि सिर्फ पौधे रखने से सीलन की समस्या खत्म नहीं होगी. अगर घर में नमी बहुत ज्यादा है, तो उसके मुख्य कारण जैसे रिसाव और खराब वेंटिलेशन को ठीक करना भी जरूरी है.
बदबू कम करने के लिए आजमाएं ये घरेलू तरीके
अगर कमरे में सीलन की गंध बनी हुई है, तो सफेद सिरके को एक खुले कटोरे में रखकर कुछ समय के लिए कमरे में रखा जा सकता है. यह बंद कमरों और बाथरूम जैसी जगहों में मौजूद बासी गंध को कम करने में मदद कर सकता है. इसी तरह कालीन या कपड़े के सोफे जैसी सतहों पर बेकिंग सोडा छिड़ककर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ सकते हैं. इसके बाद उसे अच्छी तरह वैक्यूम कर दें. इन तरीकों का इस्तेमाल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि जिस जगह पर सफाई की जा रही है, वहां नमी या फफूंद की असली समस्या तो नहीं है. सिर्फ बदबू को दबाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती.
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गीले कपड़े और जूते घर में न छोड़ें
बारिश के मौसम में गीले कपड़े, जूते और छाते घर के अंदर रखने से नमी तेजी से बढ़ सकती है. कोशिश करें कि कपड़ों को अच्छी तरह हवा वाली जगह पर सुखाया जाए. अगर बाहर सुखाना संभव न हो, तो उन्हें ऐसे कमरे में रखें जहां पर्याप्त हवा आती-जाती हो. गीले जूतों और छातों को भी इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, वरना उनकी नमी पूरे कमरे में सीलन जैसी गंध फैला सकती है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Iodine Deficiency: आयोडीन की कमी से हैं परेशान? डाइट में शामिल करें ये 4 चीजें</title>
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        <description><![CDATA[ Why Iodine Is Essential For Thyroid Health: आयोडीन शरीर के लिए जरूरी खनिजों में से एक है, जिसकी मात्रा भले ही कम चाहिए होती है, लेकिन इसकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. यह शरीर में थायरॉइड हार्मोन बनाने में मदद करता है. ये हार्मोन मेटाबॉलिज्म, एनर्जी के स्तर और शरीर की सामान्य वृद्धि जैसे कई जरूरी कामों को प्रभावित करते हैं. खासकर बच्चों के ब्रेन विकास और सीखने-समझने की क्षमता के लिए पर्याप्त आयोडीन जरूरी माना जाता है. गर्भावस्था के दौरान भी आयोडीन की जरूरत पर खास ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यह भ्रूण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार, शरीर में आयोडीन की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो इसका असर स्वास्थ्य पर अलग-अलग तरीकों से दिखाई दे सकता है. आयोडीन की कमी से गले में थायरॉइड ग्रंथि बढ़ने की समस्या हो सकती है, जिसे घेंघा कहा जाता है. इसके अलावा थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम होने से थकान, वजन बढ़ना और ठंड ज्यादा महसूस होना जैसी परेशानियां हो सकती हैं. बच्चों में इसकी कमी विकास और मानसिक क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है. एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी दिक्कतें भी आयोडीन की कमी से जुड़ी हो सकती हैं. गर्भावस्था में पर्याप्त आयोडीन न मिलना भी चिंता का विषय हो सकता है.
आयोडीन शरीर के लिए क्यों है इतना जरूरी?
आयोडीन का सबसे अहम काम थायरॉइड हार्मोन के निर्माण में मदद करना है. ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ ऊर्जा के इस्तेमाल और सामान्य विकास में भी भूमिका निभाते हैं. बच्चों के विकास के दौरान इसका महत्व और बढ़ जाता है. गर्भावस्था में पर्याप्त आयोडीन भ्रूण के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी होता है. इसलिए रोजाना के भोजन में आयोडीन के पर्याप्त सोर्स शामिल करना जरूरी है.

आयोडीन की कमी से बचने के लिए क्या खाएं?
आयोडीन पाने का सबसे आसान तरीका आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है. रोजाना खाना बनाते समय सामान्य नमक की जगह आयोडीन युक्त नमक चुनकर शरीर की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है. हालांकि नमक का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा करना सही नहीं है, इसलिए आयोडीन पाने के लिए नमक की मात्रा बढ़ाने के बजाय सही प्रकार का नमक चुनना बेहतर तरीका है.
समुद्री खाद्य पदार्थ भी आयोडीन के अच्छे स्रोतों में शामिल हैं. समुद्री शैवाल में प्राकृतिक रूप से आयोडीन की मात्रा काफी अधिक हो सकती है. मछली और दूसरे समुद्री खाद्य पदार्थों से भी आयोडीन मिल सकता है. इन्हें अपनी सामान्य खानपान की आदतों और उपलब्धता के अनुसार आहार में शामिल किया जा सकता है.

दूध और उससे बने उत्पाद भी आयोडीन देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल हैं. दूध, दही और चीज जैसे डेयरी उत्पादों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है. अंडे भी आयोडीन का एक अच्छा सोर्स हैं और इनमें प्रोटीन भी मिलता है, इसलिए इन्हें भोजन में शामिल करना एक उपयोगी विकल्प हो सकता है.
आलू में भी कुछ मात्रा में आयोडीन पाया जाता है. हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग खाद्य स्रोतों को मिलाकर संतुलित आहार लेना बेहतर रहता है. इनके साथ ही अंडे भी आयोडीन का अच्छा सोर्स माने जाते हैं. अंडे में आयोडीन के अलावा प्रोटीन भी मिलता है, इसलिए यह रोजाना के संतुलित आहार में उपयोगी विकल्प हो सकता है.
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आयोडीन युक्त नमक को कैसे रखें सुरक्षित?
आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना जितना जरूरी है, उसे सही तरीके से रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. आयोडीन नमी, गर्मी और लंबे समय तक रोशनी के संपर्क में रहने से कम हो सकता है. इसलिए नमक को खुले बर्तन में रखने के बजाय सूखे और अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखना बेहतर है. खाना बनाते समय भी नमक को जरूरत से बहुत पहले डालने के बजाय खाना लगभग तैयार होने के आसपास डालना आयोडीन को बनाए रखने में मदद कर सकता है.
कुछ खाद्य पदार्थों को लेकर क्यों बरतें सावधानी?
कुछ खाद्य पदार्थों को गोइट्रोजेनिक खाद्य पदार्थ कहा जाता है, जो थायरॉइड से जुड़ी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं. इनमें पत्तागोभी, फूलगोभी और सोयाबीन जैसी चीजें शामिल हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें पूरी तरह खाना बंद कर देना चाहिए. संतुलित मात्रा में इनका सेवन सामान्य आहार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन आयोडीन की कमी से जूझ रहे लोगों को अपने खानपान को लेकर एक्सपर्ट की सलाह लेना उपयोगी हो सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>लकड़ी के चॉपिंग बोर्ड से आ रही है बदबू, ऐसे करें डीप क्लीन</title>
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        <description><![CDATA[ लकड़ी का चॉपिंग बोर्ड लगभग हर किचन में रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीज है. इसका इस्तेमाल सब्जियों और खाना बनाने वाली अन्य सामग्रियों को काटने में होता है. चॉपिंग बोर्ड किचन में देखने में जितना सुंदर लगता है उसे साफ करना उतना ही मुश्किल है. बार-बार इस्तेमाल और सही तरीके से सफाई न होने पर लकड़ी के बोर्ड में खाने की गंध और नमी रह जाती है, कुछ समय बाद यही वजह बोर्ड से बदबू आने का कारण बन जाती है. ऐसे में बोर्ड की डीप क्लीनिंग करना जरूरी है. कुछ आसान घरेलू तरीकों से आप लकड़ी के चॉपिंग बोर्ड को साफ कर सकते हैं और उसमें फंसी पुरानी गंध को कम कर सकते हैं.
पहले बोर्ड को अच्छी तरह साफ करें
सबसे पहले चॉपिंग बोर्ड पर लगे खाने के छोटे टुकड़ों को हटा दें. इसके बाद हल्के डिश सोप और गुनगुने पानी की मदद से दोनों तरफ से बोर्ड को साफ करें. साफ करने के लिए नरम स्क्रबर या स्पंज इस्तेमाल करें. बहुत ज्यादा पानी में लकड़ी के बोर्ड को भिगोकर न रखें, क्योंकि लकड़ी पानी सोख लेती है. और बाद में उसमें नमी रह जाती है. सफाई के बाद बोर्ड को साफ कपड़े से पोंछ दें.
नमक और नींबू से हटाएं गंध
बोर्ड की बदबू कम करने के लिए नमक और नींबू का इस्तेमाल किया जाता है. बोर्ड की सतह पर थोड़ा नमक फैलाएं और फिर आधे नींबू से पूरी सतह को हल्के हाथ से रगड़ें. खासकर उन जगहों पर थोड़ा ध्यान दें जहां प्याज, लहसुन या मसाले काटे गए हों. कुछ मिनट बाद बोर्ड को साफ पानी से धो लें. इसके बाद इसे तुरंत सुखाना जरूरी है.
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बेकिंग सोडा से करें डीप क्लीन
अगर बोर्ड में काफी समय से बदबू बनी हुई है तो बेकिंग सोडा भी इस्तेमाल कर सकते हैं. थोड़ा बेकिंग सोडा लेकर उसमें पानी की कुछ बूंदें मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को बोर्ड पर लगाकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें और फिर नरम स्पंज से हल्के हाथ से साफ करें. इसके बाद बोर्ड को अच्छी तरह धोकर साफ कपड़े से पोंछें. ध्यान रखें कि सफाई के बाद बोर्ड को गीला छोड़ना नहीं है.
बोर्ड को धूप और हवा में सुखाएं
लकड़ी के चॉपिंग बोर्ड को साफ करने के बाद उसे तुरंत बंद जगह पर ना रखें. बोर्ड को ऐसी जगह रखें जहां हवा अच्छी तरह आती हो और वह पूरी तरह सूख सके. हल्की धूप में कुछ समय रखना भी रख सकते हैं. बोर्ड को दोनों तरफ से अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, क्योंकि अंदर नमी रहने पर बदबू फिर से आती है. पूरी तरह सूखने के बाद ही इसे किचन में इसकी जगह रखें.
लंबे समय तक बोर्ड को सही रखने का तरीका
चॉपिंग बोर्ड की बदबू को बार-बार आने से रोकने के लिए हर इस्तेमाल के बाद उसकी सफाई करें और उसे अच्छी तरह सुखाएं. कच्चे मांस या मछली के लिए इस्तेमाल किए गए बोर्ड को सब्जियों और फलों के लिए इस्तेमाल न करें. अगर बोर्ड पर बहुत गहरी दरारें या कट के निशान बन गए हैं और उन्हें साफ करना मुश्किल हो रहा है, तो बोर्ड बदल देना चाहिए. लकड़ी के बोर्ड को लंबे समय तक पानी में भिगोने और डिशवॉशर में भी नहीं डालना चाहिए. इससे चॉपिंग बोर्ड में नमी आ जाती है.
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        <title>घर में कैसे बनाएं अचारी चिकन? देखें ये आसान रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपको चिकन की अलग-अलग रेसिपी ट्राई करना पसंद है तो इस बार अचारी चिकन बना सकते हैं. इसमें चिकन का स्वाद अचार के मसालों के साथ मिलकर काफी अलग हो जाता है. इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामान की जरूरत भी नहीं पड़ती. घर में मौजूद मसालों से ही इसका मसाला तैयार किया जा सकता है. अचारी चिकन को रोटी, नान, पराठे या चावल के साथ खाया जा सकता है. अगर आप घर पर रेस्टोरेंट जैसा स्वाद पाना चाहते हैं तो इस आसान रेसिपी को ट्राई कर सकते हैं.
अचारी चिकन बनाने के लिए सामग्री
इसके लिए करीब 500 ग्राम चिकन, 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल, 1 प्याज, 2 टमाटर, 2-3 हरी मिर्च और थोड़ा अदरक-लहसुन चाहिए. मसालों में हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, नमक और थोड़ा गरम मसाला लें. अचारी स्वाद के लिए सौंफ, राई, मेथी दाना, कलौंजी और जीरा लिया जा सकता है. आप चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ा नींबू का रस या अमचूर भी डाल सकते हैं.
सबसे पहले चिकन को करें मैरिनेट
चिकन को अच्छी तरह धोकर एक बर्तन में लें. इसमें दही, हल्दी, लाल मिर्च, नमक, थोड़ा अदरक-लहसुन का पेस्ट और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसे कम से कम 30 मिनट के लिए रख दें। अगर आपके पास समय है तो चिकन को 1-2 घंटे मैरिनेट करने से मसालों का स्वाद इसमें अच्छी तरह आ सकता है.
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&amp;nbsp;तैयार करें अचारी मसाला
अब एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें. इसमें जीरा, राई, सौंफ, मेथी दाना और कलौंजी डालकर हल्का भूनें। मसालों को ज्यादा देर तक न भूनें, वरना मेथी दाना कड़वा हो सकता है। इसके बाद प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें. फिर अदरक-लहसुन और हरी मिर्च डालें। टमाटर डालकर तब तक पकाएं जब तक मसाला अच्छी तरह नरम होकर तेल छोड़ने न लगे।
अब इसमें मैरिनेट किया हुआ चिकन डालें
मसाला तैयार होने के बाद इसमें मैरिनेट किया हुआ चिकन डालकर तेज आंच पर कुछ मिनट अच्छी तरह भूनें. इसके बाद आंच मध्यम कर दें और चिकन को मसाले के साथ पकने दें. जरूरत के हिसाब से थोड़ा पानी डालकर कड़ाही को ढक दें। चिकन को बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह नीचे चिपके नहीं और मसाला अच्छी तरह मिल जाए.
ऐसे तैयार होगा स्वादिष्ट अचारी चिकन
जब चिकन अच्छी तरह पक जाए और मसाला गाढ़ा हो जाए तो इसमें थोड़ा गरम मसाला और अमचूर या नींबू का रस डाल सकते हैं। ऊपर से थोड़ा हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें. तैयार अचारी चिकन को गरमागरम रोटी, नान, पराठे या चावल के साथ सर्व करें। सरसों के तेल और अचार वाले मसालों की खुशबू इस डिश को खास स्वाद देती है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>रिटायरमेंट के बाद कैसे जिएं अपनी जिंदगी, इन 5 तरीकों से मिलेगी मन को शांति</title>
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        <description><![CDATA[ रिटायरमेंट को अक्सर जिंदगी का ऐसा पड़ाव माना जाता है, जहां नौकरी की जिम्मेदारियां खत्म होने के साथ जीवन में खालीपन आने लगता है. रोज सुबह ऑफिस जाने की आदत, अपने साथियों से बातचीत और काम से जुड़ी व्यस्तता अचानक खत्म हो जाती है. ऐसे में अक्सर लोगों को यह समझ नहीं आत कि अब अपना समय कैसे बिताएं. इस दौर में सबसे जरूरी यह है कि व्यक्ति अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखे और उन चीजों के लिए समय निकाले, जिन्हें नौकरी के दौरान वह समय नहीं दे पाता था. अगर आप भी रिटायरमेंट के बाद सुकून और खुशी से जिंदगी जीना चाहते हैं, तो इन 5 तरीकों को अपनाकर आप मन की शांति पा सकते हैं.
अपनी पसंद के काम करें
नौकरी के दौरान हमें अक्सर जिम्मेदारियों के कारण अपने शौक पूरे करने का समय नहीं मिल पाता. रिटायरमेंट के बाद आप पढ़ना, लिखना, संगीत सुनना, बागवानी, खाना बनाना या अपनी पसंद की कोई भी आदत शुरू कर सकते हैं. अपने पुराने शौक को फिर से अपनाने से मन व्यस्त रहता है और खालीप कम हो जाता है. अगर आप कोई नया हुनर सीखने की इच्छा रखते हैं, तो यह उसके लिए भी अच्छा समय है.
परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं
रिटायरमेंट के बाद लोगों से जुड़ाव बनाए रखना बेहद जरूरी है. परिवार के साथ समय बिताने के अलावा पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते रहें. आप चाहें तो अपने आसपास के लोगों के साथ सुबह की सैर या शाम की छोटी-सी बैठक को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं. दूसरों से बातचीत करने और अपने अनुभव शेयर करने से अकेलापन कम महसूस होता है.
सेहत को भी दें समय
रिटायरमेंट के बाद अपनी सेहत पर ध्यान देना सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक होता है. अपनी सेहत के अनुसार रोजाना टहलना, योग या हल्की एक्सरसाइज करना फायदेमंद होता है. साथ ही खान-पान को संतुलित रखें और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाते रहें. अच्छी सेहत आपको अपने पसंद के कामों का आनंद लेने में मदद करेग.
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खर्च पर दें ध्यान
रिटायरमेंट के बाद नियमित वेतन बंद हो जाता है, इसलिए खर्च और बचत को लेकर पहले से योजना बनाना जरूरी है. अपनी मासिक जरूरतो, मेडिकल खर्च और दूसरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बजट बनाएं. बिना जरूरत बड़े खर्च करने से बचें.
समाज और नई गतिविधियों से जुड़ें
रिटायरमेंट के बाद खुद को पूरी तरह घर तक सीमित न करें. आप अपनी रुचि के अनुसार किसी सामाजिक संस्था, क्लब, धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधि या कम्युनिटी ग्रूप से जुड़ सकते हैं. अगर आपके पास किसी क्षेत्र का लंबा अनुभव है, तो उसे दूसरों के साथ शेयर कर के भी अपना समय व्यतित कर सकते हैं. जैसे बच्चों को पढ़ाना, किसी सामाजिक काम में मदद करना या जरूरतमंदों के लिए समय देना जीवन में खालीपन को कम करता है.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गणेश चतुर्थी पर घर पर ही बनाएं ये स्वादिष्ट मोदक, जानें आसान रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Ganesh Chaturthi 2026 Modak: गणेश चतुर्थी का त्योहार देशभर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के साथ उन्हें उनके प्रिय भोग भी अर्पित किए जाते हैं. इन भोगों में मोदक का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि मोदक भगवान गणेश को बेहद प्रिय होते है. बाजार के मोदक स्वादिष्ट तो होते हैं, लेकिन यदि आप भगवान गणेश को अपने हाथों से बना भोग लगाना चाहते हैं, तो आप घर पर आसान तरीके से स्वादिष्ट मोदक बना सकते हैं. मोदक कई तरह से बनाए जाते हैं, लेकिन पारंपरिक उकडीचे मोदक अपनी खास मिठास, मुलायम बाहरी परत और स्वादिष्ट नारियल-गुड़ की भरावन के कारण बेहद लोकप्रिय होते हैं. अगर आप भी इस गणेश चतुर्थी पर घर में मोदक बनाना चाहते हैं, तो यह आसान रेसिपी आपके लिए ह.
भरावन को करें तैयार
सबसे पहले एक पैन में थोड़ा घी गर्म करें और उसमें कद्दूकस किया हुआ नारियल डालकर थोड़ी देर तक भूनें. अब इसमें गुड़ डालकर धीमी आंच पर तब तक पकाएं, जब तक गुड़ अच्छी तरह पिघलकर नारियल के साथ मिल न जाए. अब इसमें इलायची पाउडर और कटे हुए मेवे डालें. ध्यान रहे है कि मिश्रण ज्यादा न पके, वरना भरावन बहुत सूखी हो सकती है. तैयार मिश्रण को ठंडा होने के लिए अलग रख दें.
मोदक बनेंगे सोफ्ट
अब मोदक की बाहरी परत तैयार करने के लिए एक पैन में पानी, घी और एक चुटकी नमक डालकर उबालें. पानी में उबाल आने पर गैस धीमी करें और धीरे-धीरे चावल का आटा डालते हुए लगातार चलाएं. ध्यान रखें कि इसमें गांठें न पड़ें. अब गैस बंद करके मिश्रण को कुछ मिनट ढककर रख दें. जब मिश्रण हल्का ठंडा हो जाए और हाथ से संभालने लायक हो, तब इसे अच्छी तरह गूंदकर मलायम आटा तैयार कर लें. आप जरूरत पड़ने पर हाथों पर थोड़ा घी या पानी भी लगा सकते हैं.
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सुंदर दिखेंगे मोदक
अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं. एक लोई को हथेली पर रखें और उंगलियों की मदद से इसे कटोरी का आकार दें. इसके बीच में तैयार नारियल-गुड़ की भरावन को रखें. अब किनारों पर छोटी-छोटी पंखुड़ियां बनाते हुए उन्हें ऊपर की ओर मोड़ें और सभी किनारों को जोड़कर मोदक का आकार दें. इसी तरह सभी मोदक तैयार कर लें. यदि आपके पास मोदक बनाने का सांचा है, तो आप उसका उपयोग भी कर सकते हैं.
मोदक को स्टीम करें
अब इन्हें स्टीमर में रखें और करीब 10 से 15 मिनट तक भाप में पकाएं. जब मोदक की बाहरी परत थोड़ी चमकदार और मुलायम दिखाई देने लगे, तो समझिए मोदक तैयार हैं. तैयार मोदक पर थोड़ा घी लगाएं. आप चाहें तो ऊपर से केसर या थोड़े से सूखे मेवे से भी इन्हें सजा सकते हैं. घर पर बने ताजे मोदक न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि त्योहार की खुशी और पारिवारिक माहौल को भी खास बना देते हैं.
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        <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Roti Dough: आटा गूंथकर फ्रिज में रखते हैं, कितने घंटे बाद तक इस्तेमाल करना सही?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Store Kneaded Dough In Fridge: भारतीय घरों में आटा पहले से गूंथकर फ्रिज में रख देना कोई नई बात नहीं है. खासकर सुबह के समय जल्दी होती है, तो रात में आटा गूंथकर रख देने से रोटी या पराठे बनाना काफी आसान हो जाता है. इससे समय भी बचता है और सुबह-सुबह आटा गूंथने की मेहनत भी नहीं करनी पड़ती.
लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि फ्रिज में रखा हुआ गूंथा आटा आखिर कितने समय तक इस्तेमाल करना सही है. क्या रात में गूंथा हुआ आटा अगली सुबह तक ठीक रहता है या इसे कुछ घंटों के अंदर ही इस्तेमाल कर लेना चाहिए? साथ ही, क्या फ्रिज में रखने से आटे की ताजगी या क्वालिटी पर असर पड़ता है? अगर आप भी आटा पहले से गूंथकर रखते हैं, तो इसे सही तरीके से स्टोर करना और इस्तेमाल करने से पहले उसकी स्थिति जांचना जरूरी है.
क्या गूंथा हुआ आटा फ्रिज में रखना सही है?
गूंथे हुए आटे को फ्रिज में रखा जा सकता है. इसे फ्रिज में रखने से खराब होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और आटा कुछ समय तक इस्तेमाल करने लायक बना रहता है. हालांकि, आटे को बिना ढके या खुले बर्तन में फ्रिज में रखना सही तरीका नहीं है. इससे आटे की ऊपरी सतह सूख सकती है और उसमें फ्रिज में रखी दूसरी चीजों की गंध भी आ सकती है. अगर आपने रात में आटा गूंथकर फ्रिज में रखा है, तो आमतौर पर अगले दिन इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन अगर आटा 24 घंटे से ज्यादा पुराना हो गया है, तो इस्तेमाल करने से पहले उसकी गंध, रंग और बनावट जरूर जांच लें.

फ्रिज से निकालते ही रोटी न बनाएं
फ्रिज में रखा आटा ठंडा और थोड़ा सख्त हो जाता है. इसलिए इसे निकालते ही बेलने की कोशिश करने पर आटा आसानी से नहीं फैलेगा और रोटी बनाने में ज्यादा मेहनत लग सकती है. बेहतर होगा कि आटे को रोटी बनाने से करीब 15 से 20 मिनट पहले फ्रिज से निकालकर सामान्य तापमान पर आने दें. इससे आटा थोड़ा नरम हो जाएगा और उसे बेलना आसान रहेगा.
कैसे पहचानें कि आटा खराब हो गया है?
अगर गूंथा हुआ आटा 24 घंटे से ज्यादा समय से फ्रिज में रखा है, तो इस्तेमाल करने से पहले उसे ध्यान से जांचना जरूरी है. सबसे पहले आटे को थोड़ा हाथ से दबाकर देखें. अगर उसकी बनावट सामान्य है और वह जरूरत से ज्यादा चिपचिपा या लिसलिसा नहीं हुआ है, तो यह एक अच्छा संकेत है. लेकिन अगर आटा बहुत ज्यादा चिपचिपा या स्लाइमी महसूस हो, तो उसे इस्तेमाल करने से बचें. इसके बाद आटे को सूंघकर देखें. अगर उसमें सामान्य आटे जैसी गंध के बजाय खट्टी या अजीब गंध आ रही है, तो उसे फेंक देना बेहतर है.

आटे पर काले, हरे या सफेद रंग के फफूंद जैसे धब्बे दिखाई दें, तो इसे बिल्कुल इस्तेमाल न करें. इसी तरह आटे को खींचने पर अगर उसमें असामान्य रूप से पतले धागे जैसी लचक दिखाई दे, तो यह भी खराब होने का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर का हिस्सा हटाकर नीचे का आटा इस्तेमाल करने की कोशिश न करें.
आटा ज्यादा समय तक फ्रेश रखने के लिए ये तरीके अपनाएं
गूंथते समय आटे में थोड़ा तेल या घी मिला सकते हैं. इससे आटा नरम बना रहता है और फ्रिज में रखने के बाद बहुत जल्दी सूखता नहीं है. आटा गूंथने के बाद उसे किसी एयरटाइट कंटेनर में रखें. अगर कंटेनर इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो आटे को अच्छी तरह फूड रैप या एल्युमिनियम फॉयल से ढक सकते हैं. ध्यान रखें कि आटे की सतह हवा के सीधे संपर्क में न रहे.
आप चाहें तो जिप लॉक बैग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. आटे को बैग में डालने के बाद जितनी हो सके उतनी अतिरिक्त हवा निकालकर बैग को अच्छी तरह बंद कर दें. इससे आटा सूखने से बच सकता है. अगर आटे को कंटेनर में रख रहे हैं, तो ढक्कन अच्छी तरह बंद होना चाहिए. आटे को खुले कटोरे में रखकर फ्रिज में रखने से उसकी सतह जल्दी सख्त हो सकती है.
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कितने घंटे के अंदर इस्तेमाल करना बेहतर है?
अगर आप सुविधा के लिए रात में आटा गूंथकर अगले दिन सुबह रोटियां बनाते हैं, तो इसे फ्रिज में सही तरीके से ढककर रखना एक आसान तरीका है. सामान्य तौर पर 24 घंटे के अंदर इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. लेकिन सिर्फ समय देखकर यह तय नहीं करना चाहिए कि आटा खाने लायक है या नहीं. फ्रिज का तापमान, आटे को कितनी साफ-सफाई से तैयार किया गया था और उसे किस तरह स्टोर किया गया, इन सभी चीजों का असर पड़ता है.
इसलिए 24 घंटे के बाद आटा इस्तेमाल करने से पहले उसकी गंध, रंग और बनावट जरूर जांचें. अगर इनमें कोई असामान्य बदलाव नजर आए, तो जोखिम लेने के बजाय उसे फेंक देना ही बेहतर है. सबसे आसान तरीका यही है कि जरूरत के हिसाब से आटा गूंथें और अगर पहले से तैयार करना हो, तो उसे अच्छी तरह ढककर तुरंत फ्रिज में रखें. इस तरह अगली सुबह रोटी या पराठे बनाना भी आसान रहेगा और आटे की क्वालिटी भी बेहतर बनी रहेगी.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 13:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Coconut Storage Tips: काटा हुआ नारियल महीनों नहीं होगा खराब! जान लें स्टोर करने का तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/coconut-storage-tips-काटा-हुआ-नारियल-महीनों-नहीं-होगा-खराब-जान-लें-स्टोर-करने-का-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ Easy Ways To Keep Cut Coconut Fresh For Days: नारियल का इस्तेमाल मिठाई से लेकर सब्जी, चटनी और कई तरह की डिशेज में किया जाता है. ताजा नारियल स्वाद के साथ-साथ नारियल पानी और कई पोषक तत्वों के लिए भी पसंद किया जाता है. लेकिन इसकी एक परेशानी यह है कि नारियल काटने के बाद ज्यादा दिनों तक फ्रेश रखना आसान नहीं होता. कुछ ही समय में इसका स्वाद और खुशबू बदलने लगती है और सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो यह खराब भी हो सकता है.
दरअसल, ताजे नारियल में पानी और प्राकृतिक शुगर की मात्रा काफी होती है. काटने के बाद जब इसका अंदरूनी हिस्सा हवा के संपर्क में आता है, तो इसमें ऑक्सीडेशन शुरू हो सकता है और गर्म वातावरण में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं. यही वजह है कि पूरा नारियल और काटा हुआ नारियल अलग-अलग तरीके से स्टोर करना चाहिए. अगर आप नारियल को एक बार काटने के बाद कई दिनों तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इन आसान तरीकों को आजमा सकते हैं.
पूरा नारियल कैसे रखें?
अगर नारियल अभी तक काटा नहीं गया है, तो इसे कुछ समय तक कमरे के तापमान पर भी रखा जा सकता है. इसके लिए नारियल को ऐसी जगह रखें जो ठंडी, सूखी और हवादार हो. इसे सीधे धूप या ज्यादा नमी वाली जगह पर रखने से बचें. ठंडे मौसम में पूरा नारियल करीब एक से दो हफ्ते तक ठीक रह सकता है, जबकि गर्म या उमस वाले मौसम में इसकी शेल्फ लाइफ कम हो सकती है.

अगर आप इसे ज्यादा समय तक रखना चाहते हैं, तो फ्रिज बेहतर विकल्प है. पूरे नारियल को फ्रिज के क्रिस्पर ड्रॉअर में रखा जा सकता है. ठंडा तापमान इसके खराब होने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है और यह कई हफ्तों तक चल सकता है. एक आसान तरीका यह भी है कि नारियल खरीदते समय या स्टोर करने से पहले उसे हल्का हिलाकर देखें. अगर अंदर नारियल पानी की आवाज सुनाई देती है, तो यह ताजगी का एक संकेत हो सकता है.
काटे हुए नारियल को ऐसे रखें
एक बार नारियल काट दिया जाए, तो उसे बाहर रखने के बजाय जल्द से जल्द फ्रिज में रखना बेहतर है. सबसे पहले नारियल के सफेद गूदे को खोल से अलग कर लें. अगर उसे धोना जरूरी हो, तो साफ पानी से जल्दी से धोकर अच्छी तरह सुखा लें. इसके बाद नारियल के टुकड़ों को एक साफ और एयरटाइट कंटेनर में रखें और कंटेनर को तुरंत फ्रिज में रख दें. नारियल को खुला छोड़ने से उसमें मौजूद नमी और हवा के संपर्क की वजह से वह जल्दी खराब हो सकता है. सही तरीके से पैक करके रखा गया काटा हुआ नारियल आमतौर पर कुछ दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इस्तेमाल करने से पहले उसकी गंध, रंग और बनावट जरूर जांच लें.

नारियल पानी को भी ऐसे बचाएं
अगर नारियल काटने के बाद उसका पानी बच गया है, तो उसे भी कमरे के तापमान पर छोड़ना ठीक नहीं है. नारियल पानी को किसी साफ, ढक्कन वाले कांच के बोतल या कंटेनर में डालकर तुरंत फ्रिज में रखें. इसे ज्यादा दिनों तक स्टोर करने के बजाय जल्द इस्तेमाल करना बेहतर है. अगर नारियल पानी में खट्टी या अजीब गंध आने लगे या उसमें बुलबुले और फिजी जैसा टेक्सचर दिखाई दे, तो इसे पीने से बचें. ये खराब होने के संकेत हो सकते हैं.
ज्यादा दिनों के लिए फ्रीजर का इस्तेमाल करें
अगर आपके पास नारियल ज्यादा मात्रा में है और आप उसे लंबे समय तक बचाकर रखना चाहते हैं, तो फ्रीज करना सबसे आसान विकल्पों में से एक है. नारियल के सफेद गूदे को छोटे टुकड़ों में काट लें या कद्दूकस कर लें. फिर इसे फ्रीजर-सेफ बैग या एयरटाइट कंटेनर में डालें. कोशिश करें कि पैकेट में ज्यादा हवा न रहे. बैग या कंटेनर पर स्टोरेज की तारीख लिखना भी अच्छा रहेगा.
फ्रीजर में रखा नारियल कई महीनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, फ्रीज करने के बाद इसके स्वाद और टेक्सचर में थोड़ा बदलाव आ सकता है. कद्दूकस किया हुआ नारियल स्मूदी, मिठाई और खाना बनाने में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. नारियल पानी को भी आइस क्यूब ट्रे में डालकर फ्रीज किया जा सकता है. जमने के बाद इन क्यूब्स को सीलबंद फ्रीजर बैग में रख दें. ये स्मूदी या खाना बनाने के लिए काम आ सकते हैं.
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खराब नारियल की पहचान कैसे करें?
स्टोर करने के बाद नारियल इस्तेमाल करने से पहले उसे ध्यान से देख लें. अगर उसमें खट्टी या सड़ी हुई गंध आ रही है, गूदा चिपचिपा या बहुत नरम हो गया है, रंग पीला, ग्रे या काला पड़ने लगा है या कहीं फफूंद दिखाई दे रही है, तो उसे इस्तेमाल न करें. कड़वा या अजीब स्वाद भी खराब होने का संकेत हो सकता है. ऐसे नारियल को बचाने या उसका खराब हिस्सा हटाकर बाकी खाने की कोशिश करने के बजाय पूरा नारियल फेंक देना बेहतर है.
ये गलतियां न करें
काटे हुए नारियल को कई घंटों तक कमरे के तापमान पर छोड़ना, कंटेनर को ठीक से बंद न करना, गंदे चम्मच या चाकू का इस्तेमाल करना और काटने के बाद फ्रिज में रखने में देर करना इसकी ताजगी जल्दी खत्म कर सकता है. नारियल को दूसरी खराब हो चुकी चीजों के साथ रखने से भी बचें. साथ ही, इसे तेज गंध वाली चीजों से दूर रखें, क्योंकि नारियल आसपास के खाने की गंध आसानी से सोख सकता है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>वियतनाम का Love Market, साल में एक बार &amp;apos;एक्स&amp;apos; से मिलने आते हैं बिछड़े प्रेमी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/वियतनाम-का-love-market-साल-में-एक-बार-एक्स-से-मिलने-आते-हैं-बिछड़े-प्रेमी</link>
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        <description><![CDATA[ दुनिया में प्यार को लेकर अलग-अलग तरह की परंपराएं देखने को मिलती हैं, लेकिन वियतनाम का खाऊ वाई लव मार्केट अपनी अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है. यह कोई सामान्य बाजार नहीं, जहां लोग सामान खरीदारी के लिए पहुंचते हों. यहां भावनाएं, पुरानी यादें और स्थानीय संस्कृति एक साथ दिखाई देती हैं. साल में एक बार होने वाले इस आयोजन में ऐसे लोग भी पहुंचते हैं, जिनके रास्ते कभी अलग हो चुके हैं.
यह अनोखा आयोजन उत्तरी वियतनाम के हा जियांग क्षेत्र में होता है. यहां अलग-अलग स्थानीय समुदायों के लोग जुटते हैं. इस जगह की सबसे खास बात यह है कि यहां पुराने प्रेमी एक-दूसरे से मुलाकात करते हैं, बातचीत करते हैं और बीते रिश्ते की यादों को साझा करते हैं. वियतनाम में इस मुलाकात को सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है.
एक अधूरी प्रेम कहानी से शुरू हुई परंपरा
खाऊ वाई लव मार्केट के पीछे एक पुरानी लोककथा बताई जाती है. कहानी दो अलग जातीय समुदायों से जुड़े युवक-युवती की है, जिनके बीच प्रेम तो हुआ, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण उनका विवाह नहीं हो सका. कहा जाता है कि अलग होने से पहले दोनों ने तय किया कि वे साल में एक दिन खाऊ वाई में जरूर मिलेंगे. आज भी इस कहानी को इस आयोजन की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा जाता है.
यहां सिर्फ पुराने प्रेमी ही नहीं आते
जगह का नाम भले ही Love Market है, लेकिन यहा केवल पूर्व प्रेमी जोड़े नहीं आते बल्कि विवाहित लोग भी संभावित जीवनसाथी की तलाश में पहुंचते हैं. कई विवाहित लोग और परिवार भी उत्सव में हिस्सा लेते हैं. यानी यह आयोजन रिश्तों की एक ही परिभाषा तक सीमित नहीं है. किसी के लिए यह पुराने साथी से मिलने का अवसर है, तो किसी के लिए नए रिश्ते की शुरुआत की जगह. वहीं स्थानीय लोगों के लिए यह उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
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कब होता है आयोजन?
यह आयोजन चंद्र कैलेंडर के अनुसार तीसरे चंद्र महीने की 27वीं तारीख को आयोजित किया जाता है, जो आमतौर पर अप्रैल या मई के आसपास आती है. तारीख हर साल सामान्य कैलेंडर में बदलती है. यहां मुलाकात का मकसद जरूरी नहीं कि पुराने रिश्ते को फिर से शुरू करना हो. कई लोगों के लिए यह अतीत को स्वीकार करने, पुरानी यादों को सम्मान देने और फिर अपनी जिंदगी में लौट जाने का अवसर माना जाता है.
2021 में मिली सांस्कृतिक पहचान
खाऊ वाई की इस परंपरा को 2021 में वियतनाम के संस्कृति मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी गई. इससे इस आयोजन की सांस्कृतिक अहमियत को आधिकारिक पहचान मिली. खाऊ वाई लव मार्केट की परंपरा यह दिखाती है कि किसी पुराने रिश्ते को याद करना हमेशा उसे वापस पाने की कोशिश नहीं होता. कभी-कभी अतीत से मिलना सिर्फ उसे स्वीकार करने और मुस्कुराकर आगे बढ़ने का तरीका भी होता है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ऑनलाइन Grocery खरीदते हैं? अब हर सामान पर दिखेगी ‘Best Before’ डेट</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल घर बैठे Grocery मंगाना लोगों के लिए बेहद आसान हो गया है. आटा, दाल और तेल से लेकर दूध, बिस्किट तक सभी चीजें कुछ ही मिनटों में घर आ जाती हैं. लेकिन अक्सर ऑनलाइन खरीदारी में लोगों को एक समस्या होती है कि उन्हें सामान खरीदने से पहले यह पता नहीं चलता कि उसकी Best Before या Use By Date क्या है.
ऐसे में सरकार ने ऑनलाइन Grocery और Quick Commerce प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खाद्य उत्पादों की तारीख से जुड़ी जानकारी ग्राहकों को आसानी से उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इसका उदेश्य ग्राहकों को सामान ऑर्डर करने से पहले ही उसकी इस्तेमाल की अवधि के बारे में बताना है.
अब तक क्या हो रहा था?
दुकान से सामान खरीदते समय ग्राहक पैकेट उठाकर उसकी तारीख देख सकता है. अगर किसी बिस्किट, दूध या दूसरे पैकेज्ड फूड की Best Before Date बहुत करीब है तो वह दूसरा पैकेट चुन लेता है. लेकिन ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक के पास ऐसा विकल्प नहीं होता. स्क्रीन पर प्रोडक्ट की फोटो और दूसरी अन्य जानकारी दिखाई देती है, लेकिन कई मामलों में पैकेट पर छपी जरूरी तारीख साफतौर पर उपलब्ध नहीं होती. यही वजह है कि ग्राहक को कई बार सामान घर पहुंचने के बाद ही पता चलता है कि उसकी Best Before Date काफी नजदीक है.
सरकार क्यों कर रही है यह बदलाव?
हाल ही में इस मुद्दे को लेकर उपभोक्ता संगठन LocalCircles ने एक सर्वे किया था. सर्वे में बड़ी संख्या में ऑनलाइन Grocery खरीदने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट की Best Before Date पहले से दिखाई नहीं देती. रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में आठ बड़े ऑनलाइन Grocery प्लेटफॉर्म की जांच की गई थी. इनमें से पांच प्लेटफॉर्म पर Best Before Date से जुड़ी जानकारी को लेकर कमी पाई गई. FSSAI के नियमों में ऑनलाइन बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों के लिए कम से कम 30 प्रतिशत Shelf Life या 45 दिन की बची अवधि बताने का प्रावधान है.
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Best Before और Use By में क्या अंतर होता है?
ग्राहकों के लिए इन दोनों शब्दों को समझना भी जरूरी है. Best Before आमतौर पर उस समय को बताता है जब तक किसी उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर रहने की उम्मीद होती है. वहीं Use By/Expiry तारीख उत्पाद की निर्धारित उपयोग अवधि से जुड़ी होती है. इसलिए ऑनलाइन खरीदारी करते समय सिर्फ प्रोडक्ट का नाम, कीमत या डिस्काउंट देखना काफी नहीं है. तारीख और Shelf Life की जानकारी देखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Suhagrat Paan Tradition: सुहागरात पर क्यों खिलाया जाता है पान? जानें असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Why Eating Paan On Wedding Night: भारत में पान खाने का चलन प्राचीन समय से रहा है. पहले के दौर में घर-घर में पान रखा जाता था और मेहमानों को भी पान खिलाकर उनका स्वागत किया जाता था. समय बदला तो रोजाना पान खाने वालों की संख्या कम होती गई, लेकिन शादी-विवाह जैसे खास मौकों पर पान की परंपरा आज भी बनी हुई है. खासकर नवविवाहित जोड़ों से जुड़ी रस्मों में पान का अपना अलग महत्व माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सुहाग रात के दिन पान क्यों खाया या खिलाया जाता है? इसके पीछे सिर्फ एक नहीं बल्कि परंपरा और मान्यताओं से जुड़े कई कारण बताए जाते हैं.
शादी की रस्मों में क्यों शामिल है पान?
भारतीय कल्चर में पान को शुभ माना जाता है. पूजा-पाठ से लेकर शादी-विवाह तक कई रस्मों में पान के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है. मेहमानों को भोजन के बाद पान खिलाने की भी पुरानी परंपरा रही है. शादी के बाद नवविवाहित जोड़े को पान देना भी कई जगहों की परंपरा का हिस्सा है. सुहाग रात के मौके पर पान को प्रेम और दांपत्य जीवन की नई शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है. पुराने समय में यह माना जाता था कि पान नवविवाहित जोड़े के बीच प्रेम और अपनापन बढ़ाने का प्रतीक है. हालांकि, हर जगह सुहाग रात में पान खिलाने की एक जैसी रस्म नहीं होती. अलग-अलग राज्यों और परिवारों में इसे लेकर अपनी-अपनी परंपराएं हैं.

क्या कामेच्छा बढ़ाने के लिए खिलाया जाता है पान?
पारंपरिक मान्यताओं में पान को कामेच्छा से भी जोड़कर देखा जाता रहा है. यही वजह है कि सुहाग रात में पान खिलाने के पीछे यह कारण भी बताया जाता है. पुराने समय में लोगों का मानना था कि पान खाने से शरीर में ताजगी आती है और यह दांपत्य जीवन की शुरुआत के लिए अच्छा माना जाता है. हालांकि, पान खाने से कामेच्छा बढ़ती है, इस बात के पर्याप्त साइंटफिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं. सुहाग रात में पान खाने की परंपरा को मुख्य रूप से पुरानी मान्यताओं और सांस्कृतिक रस्मों से जोड़कर देखा जाता है.
मुंह की ताजगी के लिए भी खाया जाता है पान
पान खाने की एक बड़ी वजह मुंह में ताजगी महसूस होना भी है. खासतौर पर मीठे पान में सौंफ, इलायची, नारियल और गुलकंद जैसी चीजें डाली जाती हैं. ये चीजें पान के स्वाद और खुशबू को बढ़ाने का काम करती हैं. इलायची और सौंफ की खुशबू के कारण पान खाने के बाद मुंह में ताजगी महसूस हो सकती है. यही कारण है कि पहले भोजन के बाद पान खाने का चलन काफी आम था. शादी-ब्याह के दौरान भी दावत के बाद मेहमानों को पान दिया जाता था. सुहाग रात में भी पान को इसी तरह ताजगी और खास मौके से जोड़कर देखा जाता है.

आयुर्वेद में भी होता है पान के पत्ते का इस्तेमाल
पान के पत्ते का इस्तेमाल लंबे समय से पारंपरिक और आयुर्वेदिक तरीकों में किया जाता रहा है. पान के पत्तों में कई तरह के प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए अलग-अलग घरेलू नुस्खों में भी इसका उपयोग किया जाता रहा है. हालांकि, किसी बीमारी के इलाज के लिए सिर्फ पान के पत्ते पर निर्भर रहना सही नहीं है. मस्सों और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के लिए भी पान के पत्ते के इस्तेमाल से जुड़े कई पारंपरिक नुस्खे प्रचलित हैं. इसी तरह फोड़े-फुंसियों के लिए पान के पत्ते को गर्म करके लगाने की सलाह भी पुराने घरेलू नुस्खों में दी जाती रही है. लेकिन इंफेक्शन त्वचा की गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
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पान खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
सुहागरात हो या कोई दूसरा खास मौका, पान खाते समय यह जानना जरूरी है कि हर तरह का पान सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होता. तंबाकू, गुटखा और ज्यादा सुपारी वाले पान से बचना चाहिए. ये चीजें मुंह के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती हैं.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>बुखार उतर गया, लेकिन सीने की जकड़न नहीं गई? लक्षणों को न करें नजरअंदाज</title>
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        <description><![CDATA[ बुखार अक्सर संक्रमण के दौरान शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया के रूप में आता है और कुछ दिनों में दवा लेने और आराम करने से ठीक भी हो जाता है. लेकिन अगर आपको बुखार उतरने के बाद भी सीने में जकड़न, भारीपन, खांसी या सांस लेने में परेशानी बनी रहती है तो ऐसे लक्षणों को केवल बुखार के बाद होने वाली कमजोरी मानना सही नहीं है.
सीने में जकड़न कई कारणों से हो सकते हैं. वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के बाद श्वसन तंत्र में सूजन और बलगम जमा होने से सांस लेने में असहजता महसूस होती है. वहीं कुछ लोगों में संक्रमण के बाद लंबे समय तक खांसी या छाती में भारीपन भी बना रहता है.
निमोनिया के हो सकते हैं लक्षण
फ्लू, वायरल संक्रमण या अन्य श्वसन संक्रमण के दौरान फेफड़ों और सांस की नलियों पर असर पड़ता है. कभी-कभी संक्रमण कम होने के बाद भी सूजन कुछ समय तक बनी रहती है, जिसकी वजह से छाती में जकड़न, सांस फूलना या खांसी की शिकायत रहती है. ऐसी स्थिति में कुछ मामलों में ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसी समस्या भी हो सकती है. खासकर यदि बुखार दोबारा आने लगे, खांसी बढ़ रही हो या सांस लेने में परेशानी पहले से ज्यादा हो रही हो तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए.
किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें?
अगर सीने में जकड़न के साथ सांस लेने में ज्यादा परेशानी, तेज सीने का दर्द, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या खून वाली खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. इसी तरह, यदि बुखार उतरने के बाद फिर से तेज बुखार आता है, सांस लेने में तकलीफ बढ़ती है या सामान्य गतिविधियों के दौरान भी सांस फूलने लगती है तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है.
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किन बातों का ध्यान रखें?
पर्याप्त आराम और पानी पीना रिकवरी में मदद करता है. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड जैसी दवाएं शुरू न करें. संतुलित आहार खाएं और एक्टिव लाइफस्टाइल को अपनाएं. आज के समय में काम की वजह से लोगों को स्ट्रेस भी होता है. ऐसे में शारीरिक गतिविधि पर ध्यान दें और समय मिलने पर बाहर घूमने जाएं. वहीं बुखार उतरने के बाद भी अगर कोई गंभीर संक्रमण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Gas Stove Flame: नीली से पीली हो गई गैस चूल्हे की लौ, न करें नजरअंदाज</title>
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        <description><![CDATA[ Why Gas Stove Flame Turns Yellow Or Red: गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय अगर आपने कभी ध्यान दिया हो कि उसकी लौ पहले नीली थी, लेकिन अब पीली या लाल दिखाई देने लगी है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें. गैस की लौ का रंग सिर्फ चूल्हे की सफाई या उसकी खूबसूरती से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी हो सकता है कि गैस सही तरीके से नहीं जल रही.
आमतौर पर LPG गैस साफ और सही तरीके से जलती है, तो लौ नीली दिखाई देती है. इसका मतलब है कि गैस को जलने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है और दहन ठीक तरह से हो रहा है. वहीं, पीली या लाल लौ इस बात का संकेत हो सकती है कि गैस पूरी तरह नहीं जल रही है. ऐसी स्थिति में चूल्हे को लगातार इस्तेमाल करते रहना ठीक नहीं है, क्योंकि अधूरा दहन कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी खतरनाक गैस पैदा कर सकता है. इसके अलावा, पीली लौ से बर्तन के नीचे कालिख भी जम सकती है और गैस की खपत बढ़ सकती है.

गैस की लौ पीली क्यों हो जाती है?
गैस चूल्हे की लौ का रंग बदलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे आम वजह बर्नर में जमा गंदगी होती है. खाना बनाते समय तेल, मसाले, धूल और खाने के छोटे कण बर्नर के छोटे-छोटे छेदों में जमा हो सकते हैं. इससे गैस और हवा का सही मिश्रण प्रभावित होता है और लौ नीली के बजाय पीली दिखाई देने लगती है. कई बार गैस और हवा का अनुपात सही न होने पर भी ऐसा हो सकता है. गैस को पूरी तरह जलने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन चाहिए. अगर हवा कम मिल रही है, तो दहन अधूरा रह सकता है. गैस का कम दबाव, गैस की सप्लाई में किसी तरह की समस्या या चूल्हे के किसी हिस्से की गलत फिटिंग भी लौ का रंग बदल सकती है.

पीली लौ से कालिख क्यों जमती है?
अगर चूल्हे की लौ पीली है और कुछ समय बाद बर्तन के नीचे काले निशान दिखाई देने लगें, तो इसे भी चेतावनी के तौर पर लें. अधूरे दहन से कालिख बन सकती है, जो बर्तन के नीचे जमा होती है. कालिख सिर्फ बर्तनों को गंदा नहीं करती, बल्कि यह संकेत देती है कि गैस ठीक तरह से नहीं जल रही. ऐसी स्थिति में चूल्हे की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है और सामान्य से ज्यादा गैस खर्च हो सकती है.
सबसे पहले बर्नर की सफाई करें
अगर लौ का रंग अचानक बदल गया है, तो सबसे पहले गैस बंद करें और चूल्हे को पूरी तरह ठंडा होने दें. इसके बाद बर्नर के हटाए जा सकने वाले हिस्सों को निकालकर साफ करें. गर्म पानी और हल्के साबुन की मदद से जमा तेल और गंदगी हटाई जा सकती है. बर्नर के छोटे छेदों में गंदगी फंसी हो, तो उन्हें सावधानी से साफ करें. किसी नुकीली चीज से छेद को बड़ा या नुकसान न पहुंचाएं. सफाई के बाद सभी हिस्सों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. बर्नर में पानी या नमी रह जाने पर गैस जलाने में परेशानी हो सकती है.
गैस की सप्लाई और रेगुलेटर भी जांचें
अगर बर्नर साफ करने के बाद भी लौ पीली या लाल बनी हुई है, तो समस्या सिर्फ बर्नर में नहीं हो सकती. गैस का दबाव या सप्लाई भी इसकी वजह हो सकती है. ऐसी स्थिति में गैस की पाइप, रेगुलेटर और दूसरे कनेक्शन को खुद खोलकर या उनमें बदलाव करने के बजाय किसी योग्य गैस तकनीशियन से जांच करवाना बेहतर है. गैस से जुड़े हिस्सों के साथ प्रयोग करना जोखिम भरा हो सकता है.
चूल्हे के आसपास हवा का ध्यान रखें
गैस की लौ पर तेज हवा का असर भी पड़ सकता है. अगर चूल्हा खिड़की, दरवाजे या तेज हवा आने वाली जगह के पास रखा है, तो लौ अस्थिर हो सकती है. इसके साथ ही, खाना बनाते समय रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन होना जरूरी है. हवा आने-जाने के रास्ते बंद न रखें, ताकि दहन के दौरान पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे.
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कब एक्सपर्ट की मदद लें?
अगर बर्नर साफ करने के बाद भी लौ लगातार पीली या लाल दिखाई दे, बर्तन के नीचे कालिख जमती रहे या गैस जलने की स्थिति सामान्य न लगे, तो चूल्हे का इस्तेमाल जारी न रखें और योग्य तकनीशियन से जांच करवाएं. खासकर अगर गैस की गंध भी महसूस हो रही हो, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें. गैस की सप्लाई बंद करके सुरक्षित तरीके से बाहर निकलें और जरूरत पड़ने पर संबंधित गैस सेवा या प्रशिक्षित तकनीशियन से मदद लें.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>मसूड़ों की बीमारी से हो सकता है अल्जाइमर; नई रिसर्च में चौंकाने वाला दावा</title>
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        <description><![CDATA[ मशहूर साइंस जर्नल साइंस एडवांसेज में छपी एक रिसर्च ने पूरी दुनिया के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. इस स्टडी के मुताबिक, मसूड़ों की गंभीर बीमारी पैदा करने वाला एक बैक्टीरिया अल्जाइमर यानी भूलने की बीमारी से पीड़ित मरीजों के दिमाग में पाया गया है. इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मसूड़ों की बीमारी ही अल्जाइमर की मुख्य वजह है? आइए जानते हैं कि इस पूरी रिसर्च का सच क्या है और वैज्ञानिकों का इस पर क्या कहना है.
मसूड़ों के बैक्टीरिया का दिमाग से क्या है कनेक्शन?
इस पूरी रिसर्च के केंद्र में पोर्फिरोमोनस जिंजिवैलिस नाम का एक खतरनाक बैक्टीरिया है. यह बैक्टीरिया मसूड़ों की एक गंभीर और पुरानी बीमारी पीरियडोन्टाइटिस के लिए जिम्मेदार होता है. वैज्ञानिकों ने जब अल्जाइमर से मरने वाले लोगों के दिमाग के टिश्यूज की जांच की, तो उन्हें चौंकाने वाले नतीजे मिले. अल्जाइमर के करीब 96 प्रतिशत ब्रेन सैंपल्स में इस बैक्टीरिया द्वारा पैदा किए जाने वाले जहरीले एंजाइम्स मौजूद थे. इसके अलावा, कुछ जीवित मरीजों के ब्रेन फ्लूइड में भी इस बैक्टीरिया के डीएनए के अंश पाए गए हैं.
मुंह का बैक्टीरिया दिमाग तक पहुंचता कैसे है?
डॉक्टरों का कहना है कि जब हमारे मसूड़ों में गंभीर सूजन या संक्रमण होता है, तो वहां की महीन रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं. ब्रश करते समय या खाना चबाते समय ये बैक्टीरिया खून के बहाव में शामिल हो जाते हैं. खून के जरिए तैरते हुए ये बैक्टीरिया शरीर के बाकी हिस्सों और आखिरकार हमारे दिमाग तक पहुंच जाते हैं. दिमाग में पहुंचकर ये जहरीले एंजाइम्स न्यूरॉन्स को नुकसान पहुंचाते हैं और सूजन पैदा करते हैं, जिससे याददाश्त कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है.
चूहों पर किए गए प्रयोग में क्या दिखा?
वैज्ञानिकों ने इस थ्योरी को जांचने के लिए चूहों पर भी एक एक्सपेरिमेंट किया. जब चूहों के मुंह में इस बैक्टीरिया का इन्फेक्शन फैलाया गया, तो कुछ समय बाद यह बैक्टीरिया उनके दिमाग तक पहुंच गया. चूहों के दिमाग में जाते ही इसने एमाइलॉयड बीटा नाम के एक खराब प्रोटीन का निर्माण तेज कर दिया. बता दें कि यही वह प्रोटीन है जो अल्जाइमर के मरीजों के दिमाग में गुच्छे या प्लाक बनाता है. हालांकि, जब चूहों को इस एंजाइम को ब्लॉक करने वाली दवाएं दी गईं, तो उनके दिमाग में सूजन कम हो गई और कोशिकाएं सुरक्षित रहीं.
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क्या मसूड़ों की बीमारी ही अल्जाइमर का असली कारण है?
रिसर्च के ये आंकड़े सुनकर ऐसा लग सकता है कि दांत साफ न रखने से अल्जाइमर हो जाता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. मसूड़ों के बैक्टीरिया और अल्जाइमर के बीच एक संबंध जरूर मिला है, लेकिन यह साबित नहीं हुआ है कि यही अल्जाइमर की मुख्य या इकलौती वजह है.&amp;nbsp;
अल्जाइमर एक बेहद जटिल बीमारी है, जो बुढ़ापे, हाई ब्लड प्रेशर और दिमाग में प्रोटीन का संतुलन बिगड़ने जैसे कई कारणों से मिलकर होती है. इंसानों पर किए गए बड़े क्लिनिकल ट्रायल में इस बैक्टीरिया को मारने वाली दवाएं अल्जाइमर के मरीजों को पूरी तरह ठीक करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाईं.
क्यों महत्वपूर्ण है यह नई रिसर्च?
भले ही यह सीधे तौर पर मुख्य कारण न हो, लेकिन इस रिसर्च ने मेडिकल साइंस के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है. अब वैज्ञानिक इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या शरीर के अंदरूनी इन्फेक्शन और सूजन को कंट्रोल करके दिमाग की सेहत को बेहतर रखा जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Causes Of Wall Dampness: छत नहीं टपक रही, फिर भी दीवार पर सीलन? 1 मिनट में पहचानें लीकेज की वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Causes Of Wall Seepage Without Roof Leak: घर की दीवार पर सीलन दिखे तो सबसे पहले ध्यान छत या बारिश के पानी पर जाता है. लेकिन अगर छत से पानी नहीं टपक रहा, फिर भी दीवार पर नमी, दाग या पेंट उखड़ने जैसी समस्या दिखाई दे रही है, तो इसकी वजह कहीं और भी हो सकती है. कई बार पानी बाहर से नहीं, बल्कि दीवार के अंदर छिपे पाइप, आसपास की नमी या घर के किसी ऐसे हिस्से से आ रहा होता है, जिस पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता.
सीलन की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है. शुरुआत में दीवार पर हल्का गीला निशान या रंग बदलता हुआ हिस्सा नजर आता है. इसके बाद पेंट फूलने लगता है, प्लास्टर कमजोर पड़ सकता है और कुछ जगहों पर सफेद पाउडर जैसे निशान भी दिखाई देने लगते हैं. इसलिए छत से पानी न टपकने के बावजूद दीवार पर सीलन दिखे, तो इन जगहों को जरूर चेक करें.
दीवार के अंदर छिपा पाइप तो लीक नहीं कर रहा?
दीवार पर सीलन आने की सबसे आम वजहों में से एक छिपी हुई पाइपलाइन का लीकेज हो सकता है. बाथरूम, किचन या वॉश एरिया की पानी की पाइप अगर अंदर से धीरे-धीरे लीक हो रही है, तो बाहर पानी की कोई बूंद दिखाई नहीं देगी. लेकिन यही पानी धीरे-धीरे दीवार में नमी बढ़ा सकता है. अगर सीलन बाथरूम या किचन से लगी दीवार पर है, तो पाइपलाइन और उसके कनेक्शन जरूर चेक करवाएं. खासकर तब, जब दीवार का एक खास हिस्सा लगातार गीला या ठंडा महसूस हो.

बाथरूम की नमी दीवार तक तो नहीं पहुंच रही?
हर बार पानी का सीधे दीवार में रिसना जरूरी नहीं है. बाथरूम में नहाने के दौरान बनने वाली भाप और नमी अगर बाहर नहीं निकलती, तो वह दीवारों पर जम सकती है. लंबे समय तक ऐसा होने पर कोनों, खिड़की के आसपास और छत से जुड़े हिस्सों में सीलन या फफूंद दिखाई दे सकती है. बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन चलाना और इस्तेमाल के बाद पर्याप्त वेंटिलेशन रखना इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है.
किचन से लगी दीवार को भी नजरअंदाज न करें
खाना बनाते समय निकलने वाली भाप और नमी भी आसपास की दीवारों को प्रभावित कर सकती है. अगर किचन में हवा के बाहर निकलने का सही इंतजाम नहीं है, तो नमी धीरे-धीरे दीवारों में जमा हो सकती है. किचन की जिस दीवार पर बार-बार पेंट उखड़ता है या काले धब्बे बनने लगते हैं, वहां सिर्फ पेंट कराने के बजाय नमी का स्रोत तलाशना जरूरी है.

बाहर की दीवार में दरार तो नहीं?
कई बार बारिश का पानी छत से नहीं, बल्कि बाहरी दीवार से अंदर आता है. दीवार पर मौजूद छोटी दरारें, खराब प्लास्टर या पुराना पेंट पानी को अंदर जाने का रास्ता दे सकते हैं. बारिश के बाद अगर किसी खास हिस्से की सीलन ज्यादा बढ़ जाती है, तो उस दीवार के बाहरी हिस्से की जांच जरूर करें. खिड़की के आसपास की दरारें और दीवार के जोड़ों को भी ध्यान से देखना चाहिए, क्योंकि इन्हीं जगहों से पानी अंदर पहुंच सकता है.
खिड़की और दरवाजे के आसपास पानी तो नहीं रुकता?
खिड़की के फ्रेम और दीवार के बीच की छोटी सी जगह भी सीलन की वजह बन सकती है. बारिश के दौरान पानी अगर फ्रेम के आसपास जमा होता है और वहां सही सीलिंग नहीं है, तो नमी धीरे-धीरे दीवार में जा सकती है. अगर सीलन सिर्फ खिड़की के आसपास दिखाई दे रही है, तो फ्रेम की सीलिंग और बाहरी हिस्से की जांच करवाना बेहतर है.
घर में नमी ज्यादा तो नहीं?
कपड़े घर के अंदर सुखाना, कम वेंटिलेशन, लगातार बंद कमरे और धूप की कमी भी दीवारों में नमी बढ़ा सकती है. ऐसी सीलन अक्सर कोनों, अलमारी के पीछे और खिड़कियों के आसपास दिखाई देती है. अगर दीवार पर काले धब्बे या फफूंद भी दिखने लगे, तो सिर्फ उस हिस्से को पेंट करने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. कमरे में हवा का सही प्रवाह बनाए रखना जरूरी है.
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अलमारी के पीछे की दीवार जरूर देखें
बड़ी अलमारी या फर्नीचर अगर दीवार से बिल्कुल सटा हुआ है, तो उसके पीछे हवा का आना-जाना कम हो जाता है. इससे नमी फंस सकती है और धीरे-धीरे दीवार पर फफूंद या सीलन दिखाई देने लगती है. अगर सीलन सिर्फ अलमारी के पीछे है, तो फर्नीचर को थोड़ा आगे करके दीवार को सूखने का मौका दें और उस हिस्से में नमी का कारण देखें.
सिर्फ पेंट कराने से समस्या खत्म नहीं होगी
सीलन वाली दीवार पर बार-बार नया पेंट कराना आसान समाधान लग सकता है, लेकिन अगर पानी या नमी का स्रोत वहीं मौजूद है, तो कुछ समय बाद समस्या दोबारा दिखाई दे सकती है. पहले यह पता करना जरूरी है कि नमी कहां से आ रही है. इसके बाद दरार, पाइपलाइन, बाहरी दीवार, वेंटिलेशन या वॉटरप्रूफिंग से जुड़ी समस्या को ठीक किया जाना चाहिए.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 19:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fridge Water Leakage: फ्रिज में बार&amp;बार जमा हो रहा है पानी? मैकेनिक बुलाने से पहले करें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ Why Water Accumulates Under Fridge Crisper Tray: फ्रिज में सब्जियां रखने वाली ट्रे के नीचे बार-बार पानी जमा होना आम बात लग सकती है. कई लोग इसे साफ करके छोड़ देते हैं और सोचते हैं कि शायद सब्जियों से पानी निकला होगा. लेकिन अगर ट्रे में लगातार पानी इकट्ठा हो रहा है, तो इसे सिर्फ सफाई की समस्या समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. इसके पीछे फ्रिज के अंदर की ड्रेनेज व्यवस्था, दरवाजे की सील या तापमान से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
कई बार यह समस्या छोटी होती है और घर पर कुछ चीजें चेक करके ठीक की जा सकती है. लेकिन अगर पानी बार-बार लौटकर आ रहा है, तो यह फ्रिज के किसी हिस्से में खराबी का संकेत भी हो सकता है. इसलिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि पानी आखिर जमा कहां से हो रहा है.
सबसे पहले ड्रेन होल चेक करें
सब्जियों की ट्रे के नीचे पानी जमा होने की सबसे आम वजह फ्रिज का ड्रेन होल ब्लॉक होना हो सकती है. फ्रिज के अंदर पीछे की तरफ या सब्जियों वाली ट्रे के नीचे एक छोटा सा ड्रेन होल होता है. डीफ्रॉस्ट प्रक्रिया के दौरान बनने वाला पानी इसी रास्ते से बाहर निकलता है. अगर इसमें खाने के छोटे टुकड़े, गंदगी या बर्फ जम जाए, तो पानी बाहर निकलने के बजाय फ्रिज के अंदर ही जमा होने लगता है. धीरे-धीरे यही पानी सब्जियों की ट्रे के नीचे दिखाई देने लगता है.

ड्रेन होल के आसपास गंदगी दिखे तो फ्रिज बंद करके और सुरक्षित तरीके से उसे साफ किया जा सकता है. हल्के गुनगुने पानी से रास्ता साफ करने में मदद मिल सकती है. अगर अंदर बर्फ जमी है, तो उसे जबरदस्ती खुरचने के बजाय प्राकृतिक रूप से पिघलने देना बेहतर है.
फ्रिज का दरवाजा ठीक से बंद हो रहा है?
अगर फ्रिज का दरवाजा पूरी तरह सील नहीं हो रहा है, तो बाहर की गर्म हवा अंदर पहुंचती रहती है. इस गर्म हवा में मौजूद नमी ठंडी सतहों के संपर्क में आकर पानी की बूंदों में बदल सकती है. यही नमी धीरे-धीरे फ्रिज के अंदर जमा होने लगती है. दरवाजे के आसपास लगी रबर सील को ध्यान से देखें. अगर वह गंदी, ढीली, फटी या कहीं से मुड़ी हुई है, तो सीलिंग ठीक से नहीं हो पाएगी. इसे हल्के साबुन और पानी से साफ करके देखें. अगर रबर खराब हो चुकी है, तो उसे बदलवाने की जरूरत पड़ सकती है.

एक आसान पेपर टेस्ट भी किया जा सकता है. दरवाजे और सील के बीच कागज का एक टुकड़ा रखकर दरवाजा बंद करें. अगर कागज बहुत आसानी से बाहर निकल जाता है, तो सील कमजोर हो सकती है.
फ्रिज का तापमान बहुत कम या ज्यादा तो नहीं?
गलत तापमान सेटिंग भी फ्रिज में जरूरत से ज्यादा नमी या बर्फ बनने की वजह बन सकती है. सामान्य तौर पर फ्रिज का तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस रखना उचित माना जाता है. अगर तापमान बहुत कम है, तो कुछ हिस्सों में बर्फ जम सकती है और बाद में उसके पिघलने से पानी जमा हो सकता है. वहीं तापमान जरूरत से ज्यादा होने पर फ्रिज की कूलिंग और नमी नियंत्रण प्रभावित हो सकता है.
गर्म खाना सीधे फ्रिज में तो नहीं रख रहे?
गर्म खाने को सीधे फ्रिज में रखने से उसके अंदर अतिरिक्त नमी पहुंचती है. गर्म भोजन से निकलने वाली भाप ठंडी होकर पानी की बूंदों में बदल सकती है. अगर ऐसा रोज होता है, तो फ्रिज के अंदर नमी बढ़ने लगती है और सब्जियों की ट्रे के आसपास पानी जमा हो सकता है. खाने को सुरक्षित तरीके से थोड़ा ठंडा होने दें और फिर ढककर फ्रिज में रखें. खुले बर्तन रखने से भी नमी बढ़ सकती है, इसलिए खाने को ढककर रखना बेहतर है.
फ्रिज को जरूरत से ज्यादा भर तो नहीं दिया?
सब्जियों और दूसरे सामान से फ्रिज को पूरी तरह ठूंस देने पर ठंडी हवा का सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है. हवा सही तरीके से नहीं घूमेगी तो कुछ हिस्सों में ज्यादा नमी या पानी की बूंदें दिखाई दे सकती हैं. सब्जियों की ट्रे और पीछे की दीवार के बीच पर्याप्त जगह रखें. फ्रिज के एयर वेंट को सामान से ढकने से भी बचें.
पानी फिल्टर या डिस्पेंसर से तो नहीं आ रहा?
अगर आपके फ्रिज में वॉटर डिस्पेंसर या आइस मेकर लगा है, तो उसके आसपास की पाइप या कनेक्शन भी चेक करें. किसी पाइप में लीकेज होने पर पानी धीरे-धीरे अंदर पहुंच सकता है और नीचे जमा हो सकता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ सब्जियों की ट्रे साफ करने से समस्या दूर नहीं होगी. पानी किस रास्ते से आ रहा है, यह पता करना जरूरी है.
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कब मैकेनिक को बुलाना चाहिए?
अगर ड्रेन होल साफ करने, दरवाजे की रबर सील देखने और तापमान सही करने के बाद भी सब्जियों की ट्रे में पानी लगातार जमा हो रहा है, तो समस्या अंदर के किसी हिस्से में हो सकती है. ड्रेन सिस्टम, डीफ्रॉस्ट सिस्टम, थर्मोस्टेट या पानी की पाइपलाइन में खराबी की स्थिति में तकनीशियन की मदद लेना बेहतर है. इसलिए अगली बार फ्रिज की सब्जियों वाली ट्रे के नीचे पानी दिखे तो सिर्फ उसे पोंछकर छोड़ न दें. पहले ड्रेन होल, दरवाजे की सील, तापमान, एयर सर्कुलेशन और किसी संभावित लीकेज को चेक करें. छोटी सी समस्या समय रहते पकड़ ली जाए, तो फ्रिज की बड़ी खराबी और महंगी मरम्मत से बचने में मदद मिल सकती है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 19:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Xप्लेन: FSSAI और वेदों का दावा&amp; सुबह&amp;दोपहर&amp;शाम का खाना गलत? जानें पूरा सच</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/xप्लेन-fssai-और-वेदों-का-दावा-सुबह-दोपहर-शाम-का-खाना-गलत-जानें-पूरा-सच</link>
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        <description><![CDATA[ आप सुबह उठे, चाय-नाश्ता किया, दोपहर में दाल-रोटी और रात को फिर से खाना खा लिया. तीन वक्त का खाना आज की जिंदगी का इतना हिस्सा बन गया है कि हमें लगता है, &#039;यही तो सही तरीका है.&#039; लेकिन क्या सच में ऐसा है? खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के CEO राजित पुन्हानी ने कहा, &#039;भारतीय परंपरा में तीन नहीं, बल्कि दो बार भोजन करने की सलाह दी गई थी.&#039; तो क्या वाकई वेदों और पुराणों में दो वक्त के खाने की बात कही गई है. अगर हां, तो फिर हम तीन बार खाने के आदी कैसे हो गए...
FSSAI CEO राजित पुन्हानी ने क्या कहा?
2 सितंबर 2026 को FSSAI CEO राजित पुन्हानी ने मीडिया से इंटरव्यू में कहा, &#039;भारतीय परंपरा में तीन निश्चित भोजन यानी ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का चलन नहीं था. दो भोजन अधिक पारंपरिक पैटर्न था.&#039;
पुन्हानी ने यह भी कहा कि आज के जमाने में पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड इतना आम हो गया है कि लोग सुबह के नाश्ते को भी बाजार से खरीदे गए पैकेटों पर निर्भर करते हैं. FSSAI की &#039;ईट राइट थाली&#039; मुहिम इसी बात पर जोर देती है कि हमें अपनी पारंपरिक, घर में बनी, स्थानीय चीजों पर वापस लौटना चाहिए.
FSSAI ने 2025 में 424 पेज की एक किताब भी जारी की. इसमें 29 राज्यों की पारंपरिक थालियों को दिखाया गया. किताब में कहा गया कि पारंपरिक भारतीय खाना ज्यादातर पौधों पर आधारित था यानी अनाज, दालें, मसाले, मौसमी सब्जियां, फल और दूध से बनी चीजें.
अब सवाल यह है कि क्या यह बात सिर्फ FSSAI CEO का अपना विचार है, या इसके पीछे कोई ठोस सबूत है...
वेदों और पुराणों में क्या लिखा है?
वेदों-पुराणों में भोजन पर लिखी बातों को 4 पॉइंट्स में समझते हैं...
1. वेदों में सीधा उल्लेख
तैत्तिरीय ब्राह्मण (1.4.9) में साफ-साफ लिखा है, &#039;मनुष्य को दिन में सिर्फ दो बार भोजन करना चाहिए.&#039;
ऋग्वेद संहिता (4.30.3) में भी भोजन करते समय बैठने की मुद्रा का जिक्र है, जो दिखाता है कि उस वक्त भोजन को एक गंभीर अनुष्ठान की तरह लिया जाता था. एक प्राचीन आयुर्वेदिक कहावत या लोक-उक्ति के मुताबिक, &#039;जो दिन में एक बार भोजन करता है वह योगी है, जो दो बार करता है वह भोगी है और जो तीन बार करता है वह रोगी है.&#039;
2. धर्मशास्त्रों और गृह्यसूत्रों में नियम
गौतम धर्मसूत्र (IX.59), बौधायन धर्मसूत्र (II.7.36), मनुस्मृति (II.56) और संवर्त स्मृति (12) में एक ही बात कही गई है, &#039;एक गृहस्थ को रोजाना सिर्फ दो भोजन करने चाहिए और बीच में कुछ नहीं खाना चाहिए. जो ऐसा करता है, वह उपवास का पुण्य फल पाता है.&#039;
गोभिल स्मृति (II.33) भी यही कहती है और यह भी बताती है कि रात का भोजन रात होने के साढ़े चार घंटे (1.5 प्रहर) तक किया जा सकता है.
खादिर-गृह्यसूत्र (I.2.23) में भी लिखा है, &#039;दिन में दो भोजन होते हैं.&#039; आपस्तम्ब धर्मसूत्र (II.8.19.10) में थोड़ी छूट दी गई है. दो मुख्य भोजनों के बीच जड़ें और फल खाए जा सकते हैं.
3. महाभारत में भीष्म पितामह की सलाह
महाभारत के शांति पर्व में भीष्म पितामह कहते हैं, &#039;देवताओं ने मनुष्यों के लिए दो समय निर्धारित किए हैं- सुबह और शाम. इसके बीच में कुछ नहीं खाना चाहिए.&#039;
4. सुश्रुत संहिता (आयुर्वेद) में समय का नियम
आयुर्वेद के जनक आचार्य सुश्रुत ने भी दिन में दो बार भोजन की इजाजत दी है. एक बार सुबह और एक बार शाम (रात) को. सुश्रुत संहिता के मुताबिक, जो लोग दो बार भोजन करने के आदी हैं, उन्हें सुबह साढ़े तीन प्रहर (करीब 8:30 बजे) पर हल्का आधा भोजन करना चाहिए. दूसरा, तीसरे और चौथे प्रहर के बीच (दोपहर 3 से शाम 5:30 के बीच) करना चाहिए.
हालांकि, एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि ये नियम सबके लिए एक जैसे नहीं थे. जिन्होंने वैदिक अग्निहोत्र (अग्नि की पूजा) की दीक्षा ली थी, उनके लिए यह नियम नहीं था. वे दिन में कई बार भोजन कर सकते थे.
भारतीय परंपरा में दो बार खाने के पीछे का साइंस क्या है?
भारतीय परंपरा में सिर्फ भोजन कितनी बार नहीं, बल्कि कब खाना चाहिए भी लिखा है...

पाचन को समय: आयुर्वेद और योग दोनों में इस बात पर जोर दिया जाता है कि भोजन को पूरी तरह पचने में समय लगता है. वैदिक दिनचर्या के मुताबिक, भोजन को पचने में 8 से 11 घंटे लगते हैं. अगर आप हर 3-4 घंटे में कुछ खाते रहेंगे, तो पाचन कभी पूरा नहीं हो पाता.
अंतराल का महत्व: प्राचीन योगिक पद्धति के मुताबिक, दो मुख्य भोजनों के बीच कम से कम 6 से 8 घंटे का गैप होना चाहिए. सद्गुरु भी यही सलाह देते हैं, &#039;अगर आपकी उम्र 35 से ज्यादा है, तो दो बार का भोजन आपके लिए ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होगा. हालांकि, जब तक कि आप बहुत एक्टिव न हों या कोई मेडिकल समस्या न हो.&#039;
ऋतु और शरीर: आयुर्वेद में सिर्फ &#039;कितनी बार&#039; नहीं, बल्कि &#039;कब&#039; खाना है, इस पर भी बहुत जोर है. सुश्रुत ने कहा, &#039;भोजन दिन के दो छोर पर करना चाहिए. एक बार सुबह और एक बार शाम (रात को).&#039;

तो फिर तीन बार खाने का चलन कहां से आया?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक,

ब्रिटिश और पश्चिमी प्रभाव: भारत पर ब्रिटिश राज के दौरान पश्चिमी खान-पान की आदतों का असर बढ़ा. ब्रिटिश लोग तीन वक्त का खाना (नाश्ता, दोपहर का भोजन, रात का भोजन) लाते थे. धीरे-धीरे यह भारतीय मध्यम वर्ग में भी फैल गया.
औद्योगीकरण और 9 से 5 नौकरी: जैसे-जैसे लोग कारखानों और दफ्तरों में काम करने लगे, वैसे-वैसे तय समय पर खाना (लंच ब्रेक) एक जरूरत बन गया. दो वक्त का खाना खेतों या घर के कामों के हिसाब से था. घड़ी के हिसाब से चलने वाली नौकरियों में फिट नहीं बैठता था.
पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री का मार्केटिंग हथकंडा: आज ब्रेकफास्ट सीरियल, एनर्जी बार और पैकेटबंद स्नैक्स कंपनियां &#039;नाश्ता सबसे जरूरी भोजन है&#039; का नारा देकर अपना माल बेचती हैं. FSSAI CEO ने भी इसी तरफ इशारा किया कि पैकेज्ड फूड को &#039;सुविधाजनक नाश्ता&#039; के रूप में बेचा जाता है.

मॉडर्न साइंस &amp;nbsp;क्या कहता है?
पिछले कुछ सालों में इंटरमिटेंट फास्टिंग यानी कुछ घंटे खाना, बाकी समय उपवास का दुनिया भर में चलन शुरू हुआ है.  ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Pressure Cooker Problems: कुकर में सीटी देर से आती है? 1 आसान ट्रिक से मिनटों में गलेगी दाल</title>
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        <description><![CDATA[ Why Dal Takes Longer To Cook In Pressure Cooker: भारतीय घरों में दाल रोज बनने वाली सबसे आम डिश में से एक है. इसलिए अगर वही दाल अचानक पहले से ज्यादा समय लेने लगे, तो सबसे पहले शक प्रेशर कुकर पर जाता है. लगता है कि शायद कुकर में कोई खराबी आ गई है. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. कई बार कुकर बिल्कुल ठीक होता है और दाल को ज्यादा समय लगने की वजह कोई दूसरी होती है.
दाल जल्दी और सही तरीके से पकाने के लिए सिर्फ कुकर ही जिम्मेदार नहीं होता. दाल का प्रकार, पानी की मात्रा, उसे कितनी देर भिगोया गया है और गैस की आंच जैसी चीजें भी काफी फर्क डालती हैं. इसलिए कुकर को खराब मानने से पहले इन चीजों को जरूर चेक करें.
सबसे पहले देखें कुकर में प्रेशर ठीक से बन रहा है या नहीं&amp;zwnj;?
अगर कुकर में पहले की तुलना में सीटी आने में ज्यादा समय लग रहा है, तो हो सकता है कि प्रेशर ठीक से नहीं बन रहा हो. कुकर की रबर गैसकेट पुरानी या ढीली होने पर भाप बाहर निकल सकती है और अंदर पर्याप्त दबाव बनने में ज्यादा समय लग सकता है. कुकर का ढक्कन बंद करने के बाद अगर किनारों से भाप निकलती दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें. गैसकेट को निकालकर उसकी हालत देखें. अगर वह सख्त, ढीली या खराब हो गई है, तो उसे बदलने की जरूरत हो सकती है.

सीटी या वेंट ट्यूब में गंदगी तो नहीं?
कई बार कुकर खराब नहीं होता, लेकिन उसका वेंट ट्यूब या सीटी वाला हिस्सा ठीक से साफ नहीं होता. दाल या दूसरे खाने के छोटे कण इसमें फंस जाएं, तो भाप के निकलने और प्रेशर बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कुकर ठंडा होने के बाद सीटी और वेंट ट्यूब को अच्छी तरह साफ करें. अगर वेंट में रुकावट दिखाई दे रही है, तो उसे ठीक करवाना बेहतर है. कुकर के प्रेशर वाले हिस्से में किसी नुकीली चीज से जोर लगाकर सफाई करने से बचें.
दाल का प्रकार बदलने से भी समय बदल सकता है
हर दाल एक ही समय में नहीं पकती. मूंग दाल जल्दी गल जाती है, जबकि चना दाल को ज्यादा समय लग सकता है. अरहर या तूर दाल भी उसकी उम्र और क्वालिटी के हिसाब से अलग समय ले सकती है. मसलन, पीली मूंग दाल को आमतौर पर ज्यादा सीटी की जरूरत नहीं पड़ती, जबकि चना दाल को पकाने से पहले कुछ घंटे भिगोना फायदेमंद रहता है. अगर आपने दाल का प्रकार बदला है और उसे पहले वाली दाल जितने समय में पकाने की कोशिश कर रहे हैं, तो अंतर स्वाभाविक है.

दाल पुरानी तो नहीं है?
कई बार दाल दिखने में बिल्कुल सामान्य लगती है, लेकिन काफी पुरानी होने पर उसे गलने में ज्यादा समय लग सकता है. खासकर अगर दाल लंबे समय से स्टोर करके रखी गई हो. अगर कुकर और बाकी सभी चीजें ठीक हैं, लेकिन एक खास पैकेट की दाल बार-बार ज्यादा समय ले रही है, तो दाल की क्वालिटी और स्टोरेज पर भी ध्यान दें.
पानी कम डालना भी पड़ सकता है भारी
दाल के लिए पानी की मात्रा सही होना जरूरी है. बहुत कम पानी होने पर दाल ठीक से नहीं गलती और नीचे चिपकने या जलने का खतरा भी बढ़ सकता है. वहीं जरूरत से ज्यादा पानी डालने पर दाल पक तो सकती है, लेकिन बहुत पतली हो सकती है और बाद में उसे गाढ़ा करने में अतिरिक्त समय लगेगा. आमतौर पर अलग-अलग दालों के लिए पानी की जरूरत अलग होती है. इसलिए हर दाल के लिए एक ही अनुपात अपनाने के बजाय उसके प्रकार के हिसाब से पानी डालें.
दाल भिगोकर देखिए
अगर आप चना दाल, साबुत मूंग जैसी दाल बना रहे हैं, तो उन्हें कुछ समय भिगोने से पकने में आसानी हो सकती है. अरहर दाल को भी करीब 30 मिनट भिगोया जा सकता है, हालांकि यह हमेशा जरूरी नहीं है. दाल को भिगोने से उसका पकने का समय कम हो सकता है और वह ज्यादा आसानी से नरम हो जाती है. अगर अचानक दाल पकने में ज्यादा समय लेने लगी है, तो यह छोटा सा बदलाव करके भी देखा जा सकता है.
गैस की आंच पर भी ध्यान दें
कुकर को लगातार बहुत धीमी आंच पर रखने से प्रेशर बनने में ज्यादा समय लग सकता है. वहीं जरूरत से ज्यादा तेज आंच पर पकाने से भी फायदा नहीं होता. आम तौर पर शुरुआत में तेज आंच पर प्रेशर बनने दें और इसके बाद जरूरत के मुताबिक आंच कम करें. सिर्फ सीटी की संख्या गिनना ही काफी नहीं है. दाल की मात्रा, पानी, भिगोने का समय और आंच सभी मिलकर खाना पकने का समय तय करते हैं.
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फिर भी दाल पहले से ज्यादा समय ले रही है तो कुकर चेक करवाएं
अगर सही दाल, सही मात्रा में पानी और सही आंच के बावजूद कुकर में प्रेशर बनने में लगातार ज्यादा समय लग रहा है, तो कुकर के कुछ हिस्सों की जांच जरूरी है. गैसकेट, वेंट ट्यूब, सीटी और ढक्कन की सीलिंग को ध्यान से देखें. अगर कुकर से असामान्य तरीके से भाप निकल रही है या प्रेशर ठीक से नहीं बन रहा, तो उसे इस्तेमाल करते रहने के बजाय किसी अधिकृत सर्विस सेंटर या योग्य तकनीशियन से जांच करवाना बेहतर है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Sink Repair: किचन सिंक की नाली से बाहर आ रहा पानी, बिना प्लंबर बुलाए करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ Baking Soda And Vinegar Sink Unclog Hacks: किचन सिंक में पानी डालते ही अगर वह नीचे जाने के बजाय वापस ऊपर आने लगे, तो समझिए नाली में कहीं न कहीं रुकावट बन गई है. शुरुआत में पानी धीरे-धीरे निकलता है और कुछ समय बाद सिंक में जमा होने लगता है. कई लोग ऐसी स्थिति में तुरंत प्लंबर को बुला लेते हैं, लेकिन हर बार इसकी जरूरत नहीं होती. अगर रुकावट बहुत गंभीर नहीं है, तो कुछ आसान तरीकों से आप खुद भी सिंक की नाली साफ कर सकते हैं.
किचन सिंक में आमतौर पर खाने के छोटे टुकड़े, तेल, ग्रीस और दूसरी गंदगी जमा होने से जाम की समस्या होती है. इसलिए पानी का वापस आना सिर्फ सफाई की कमी नहीं, बल्कि पाइप के अंदर जमा हो चुकी गंदगी का संकेत भी हो सकता है.
सबसे पहले सिंक के नीचे का हिस्सा चेक करें
किचन सिंक जाम होने पर सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि समस्या कचरा निपटाने वाले यूनिट में तो नहीं है, अगर आपके सिंक में यह सुविधा लगी है. अगर यूनिट चल रही है लेकिन पानी नीचे नहीं जा रहा, तो रुकावट इसके आगे पाइप में हो सकती है. अगर यूनिट सिर्फ आवाज कर रही है और घूम नहीं रही, तो उसके अंदर भी कोई चीज फंस सकती है. ऐसी स्थिति में इसे खोलने या हाथ डालने की कोशिश न करें. पहले बिजली का कनेक्शन बंद करना जरूरी है.

बेकिंग सोडा और सिरका आजमा सकते हैं
अगर पानी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और धीरे-धीरे नीचे जा रहा है, तो बेकिंग सोडा और सफेद सिरके का तरीका आजमाया जा सकता है. हालांकि यह तरीका हल्की रुकावट पर ही ज्यादा काम आता है. बड़ी या जमी हुई रुकावट को इससे हटाना मुश्किल हो सकता है.

इसके लिए पहले सिंक में जमा पानी निकाल दें और जितना पानी अपने आप नीचे जा सकता है, उसे जाने दें. अब नाली में करीब एक कप बेकिंग सोडा डालें. इसके बाद एक कप सफेद सिरका डालकर नाली को करीब 15 मिनट के लिए ढक दें. थोड़ी देर बाद गर्म नल के पानी से नाली को फ्लश करें. अगर पानी पहले से बेहतर तरीके से निकलने लगे, तो जरूरत के मुताबिक इसे दोबारा किया जा सकता है. ध्यान रखें कि उबलता हुआ पानी सीधे नाली में डालकर जाम खोलने की कोशिश न करें. एक्सपर्ट के मुताबिक ग्रीस या नरम ठोस पदार्थ इससे कुछ समय के लिए पिघल सकते हैं, लेकिन पाइप में आगे जाकर दोबारा जमने की संभावना रहती है.
फिर भी पानी वापस आ रहा है तो P-Trap देखें
अगर बेकिंग सोडा और सिरके से फायदा नहीं हुआ, तो सिंक के नीचे लगा मुड़ा हुआ पाइप यानी P-Trap चेक करना अगला कदम हो सकता है. खाने के टुकड़े, ग्रीस और दूसरी गंदगी अक्सर इसी हिस्से में जमा हो जाती है. सिंक के नीचे पाइप खोलने से पहले उसके नीचे एक बाल्टी जरूर रख दें, क्योंकि अंदर जमा पानी अचानक बाहर निकल सकता है. इसके बाद रिंच की मदद से P-Trap को सावधानी से खोलें और उसमें फंसी गंदगी साफ करें. फिर पाइप को वापस उसी तरह जोड़कर देखें कि पानी सामान्य तरीके से निकल रहा है या नहीं.
P-Trap साफ है, फिर भी नाली जाम है?
अगर P-Trap में कुछ नहीं मिला और पानी अब भी सिंक में वापस आ रहा है, तो रुकावट दीवार की तरफ जाने वाले ड्रेन पाइप में हो सकती है. ऐसी स्थिति में ड्रेन स्नेक या auger का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए पहले P-Trap हटाकर उस पाइप तक पहुंच बनाई जाती है और फिर ऑगर को धीरे-धीरे पाइप के अंदर आगे बढ़ाया जाता है, ताकि फंसी हुई रुकावट को पकड़ा या हटाया जा सके. अगर आपको पाइप खोलने या ऑगर इस्तेमाल करने का अनुभव नहीं है, तो इस चरण पर ज्यादा जोर लगाने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है. गलत तरीके से पाइप खोलने या उपकरण इस्तेमाल करने से नुकसान हो सकता है.
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सिंक दोबारा जाम न हो, इसके लिए क्या करें?
किचन सिंक को बार-बार जाम होने से बचाने के लिए नाली में ड्रेन स्क्रीन लगाना आसान तरीका है. इससे खाने के टुकड़े और दूसरी गंदगी पाइप के अंदर जाने से पहले ही रुक जाती है. सबसे जरूरी बात, सिंक में तेल और ग्रीस न डालें. गर्म तेल पाइप के अंदर जाकर बाद में ठंडा होकर जम सकता है और धीरे-धीरे रास्ता संकरा कर सकता है. किचन के सिंक में जाने वाले खाने के कचरे को भी पहले अलग कर दें. बाजार में मिलने वाले तेज केमिकल ड्रेन क्लीनर का इस्तेमाल भी सोच-समझकर करें. एक्सपर्ट के मुताबिक ये हमेशा असरदार नहीं होते और बाद में पाइप को हाथ से खोलते समय खतरनाक स्थिति पैदा कर सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Mughlai Cuisine: क्या कोरमा और कबाब मुगलों ने बनाया था? जानिए दावों का पूरा सच</title>
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        <description><![CDATA[ Tukaram Munde, Food Safety: महाराष्ट्र में फूड-सेफ्टी को लेकर FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे की कार्रवाई इन दिनों चर्चा में है. इसी बीच &amp;nbsp;ट्विंकल खन्ना ने अपने हालिया &#039;मिसेज फनीबोन्स&#039; कॉलम के जरिए इस पूरे मामले पर चुटकी ली. उन्होंने फूड बिजनेस पर हो रही कार्रवाई को अपनी रसोई से जोड़ते हुए मजाकिया अंदाज में बताया कि मुंडे के अभियान से प्रभावित होकर उन्होंने घर में भी &#039;छापेमारी&#039; करने का फैसला किया.
ट्विंकल ने लिखा कि अपनी रसोई की जांच के दौरान उन्हें &#039;शाही मसाला&#039; का एक पुराना पैकेट मिला. उन्होंने इसकी एक्सपायरी डेट को लेकर व्यंग्य करते हुए लिखा कि ऐसा लगा जैसे वह &quot;मुगल साम्राज्य के समय&quot; का हो. इसी मजाक के जरिए उन्होंने मुगल इतिहास और उससे जुड़े खानपान को लेकर चल रही बहस पर भी तंज कसा. उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि अगर इतिहास की किताबों से मुगलों के प्रभाव को हटाने की कोशिश की जा रही है, तो फिर उनके दौर से जुड़ी मानी जाने वाली चीजों को लेकर भी सवाल उठना चाहिए. इसी सिलसिले में उन्होंने कोफ्ते, कोरमा और कबाब जैसे लोकप्रिय व्यंजनों का जिक्र किया.
मुगलई खाने की जड़ें उन शाही रसोइयों से जुड़ी मानी जाती हैं, जहां भारतीय उपमहाद्वीप पर 16वीं सदी की शुरुआत से लेकर 19वीं सदी के मध्य तक शासन करने वाले मुगल बादशाहों के लिए खाना तैयार किया जाता था. मध्य एशिया से आए मुगल अपने साथ फ़ारसी, तुर्की और अफगान खानपान की परंपराएं भी लेकर आए. जब इन परंपराओं का मेल भारत की समृद्ध मसाला संस्कृति से हुआ, तो एक ऐसी पाक शैली विकसित हुई, जिसे आज मुगलई खाना कहा जाता है. मुगल वंश के संस्थापक बादशाह बाबर के बारे में कहा जाता है कि भारत आने के बाद यहां के खाने की सादगी से वह बहुत प्रभावित नहीं हुए थे. इसके बाद वह फारसी रसोइयों को अपने साथ लेकर आए, जिन्होंने मध्य एशियाई पकाने की तकनीकों को भारतीय सामग्री और मसालों के साथ मिलाना शुरू किया. इसी मेल को मुगलई खानपान की शुरुआती नींव माना जाता है.

शाहजहां और औरंगजेब के दौर में शाही खानपान
शाहजहां और औरंगजेब के शासनकाल में मुगलई खानपान अपने चरम पर पहुंचा. शाही रसोइयों में सैकड़ों रसोइए काम करते थे और अलग-अलग लोग खास व्यंजनों को तैयार करने में माहिर होते थे. इसी दौर में बिरयानी, कोरमा, निहारी और कबाब जैसे व्यंजनों को खास पहचान मिली और उन्हें बेहतर तरीके से तैयार किया गया. मुगलई खानपान में धीमी आंच पर खाना पकाने की तकनीक का भी खास महत्व रहा. दम पुख्त में बर्तन को अच्छी तरह बंद करके कम आंच पर खाना पकाया जाता है, जिससे सामग्री के स्वाद धीरे-धीरे विकसित होते हैं. वहीं तंदूर में पकाने की परंपरा ने तंदूरी रोटी, नान और तंदूरी चिकन जैसे व्यंजनों को पहचान दी. अलग-अलग मसालों को सही अनुपात में मिलाकर गहरे और कई परतों वाले स्वाद तैयार करना भी इस पाक शैली की खासियत रही.
कबाब
mughlaimagic के अनुसार, कबाब को मुगलई खानपान की एक खास पहचान माना जाता है. मुगल दरबारों की रसोई में भुने और आग पर पकाए गए मांस पर खास जोर दिया जाता था. आमतौर पर मांस को मसालों के साथ तैयार करके आराम से पकाया जाता, ताकि आग उसका स्वाद और खुशबू उभार सके. आगे चलकर भारतीय उपमहाद्वीप में इस शैली के कई रूप विकसित हुए. सीख कबाब से लेकर लखनऊ की बेहद नरम और मुंह में घुल जाने वाली कबाब की किस्मों तक, इसकी कई अलग-अलग शैलियां सामने आईं.

हालांकि, इंटरनेट पर यह भी दावा किया जाता है कि आग पर भुने जाने वाले मांस के सीख वाले व्यंजन मुगल साम्राज्य से काफी पहले से मौजूद थे. यह भी कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत के दौर में ही साधारण कबाब भारत में सदियों पहले पहुंच चुके थे. मुगलों ने इसको बेहतर किया.&amp;nbsp;
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कोरमा
कोरमा शाही खानपान से जुड़ा एक गाढ़ा और मलाईदार व्यंजन है, जिसे आमतौर पर दही, क्रीम, पिसे हुए मेवों और मसालों के साथ तैयार किया जाता है. इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है, ताकि मांस और मसालों का स्वाद धीरे-धीरे विकसित हो. इसकी खासियत तेज स्वाद के बजाय ऐसा स्वाद है, जो खाने के बाद भी धीरे-धीरे बना रहता है. इंटरनेट पर तमाम जगहों पर ये दावा किया जाता है कि इसकी मुगल इसको लेकर नहीं आए. शुरुआती मुगल रिकॉर्ड्स में &#039;आइन-ए-अकबरी&#039; का नाम भी सामने आता है, लेकिन इसमें आज के समय में खाए जाने वाले क्रीमी कोरमा का जिक्र नहीं मिलता. बाद में भारतीय शाही रसोइयों ने पतले फारसी शोरबों को स्थानीय पिसे हुए मेवों, केसर और भारतीय मसालों के साथ मिलाया. इसी प्रक्रिया के दौरान वह गाढ़ी, मेवेदार और दही पर आधारित ग्रेवी विकसित हुई, जिसे आज कोरमा के तौर पर जाना जाता है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Butter In Dal Makhani: 4 लोगों के लिए दाल मखनी में कितना मिलाएं मक्खन? जान लें तगड़ी रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ How Much Butter To Add In Dal Makhani: दाल मखनी का नाम आते ही दिमाग में सबसे पहले इसका क्रीमी टेक्सचर और ऊपर से दिखता हुआ मक्खन याद आता है. यह दाल जितनी धीमी आंच पर पकती है, उतनी ही स्वादिष्ट और मलाईदार बनती है. लेकिन घर पर दाल मखनी बनाते समय एक सवाल अक्सर परेशान करता है कि आखिर 4 लोगों के लिए इसमें कितना मक्खन डालना चाहिए.
सिर्फ ज्यादा मक्खन डाल देने से दाल मखनी रेस्टोरेंट जैसी नहीं बनती. इसका असली स्वाद साबुत उड़द दाल और राजमा को अच्छी तरह पकाने, टमाटर की मसालेदार ग्रेवी को सही तरह भूनने और आखिर में मक्खन व क्रीम डालकर धीमी आंच पर पकाने से आता है. 4 लोगों के लिए करीब 30 ग्राम मक्खन यानी लगभग 2 बड़े चम्मच काफी रहता है. इसके साथ करीब आधा कप फ्रेश क्रीम डालने से दाल को वह गाढ़ा और क्रीमी स्वाद मिलता है.
दाल मखनी के लिए सामग्री
4 लोगों के लिए आपको 1 कप साबुत उड़द दाल और करीब 1/4 कप राजमा चाहिए. इसके अलावा 1 मीडियम प्याज, करीब 25 ग्राम अदरक, 2 हरी मिर्च, 2 बड़ी इलायची, 2 तेजपत्ते और स्वादानुसार नमक लें. टमाटर की ग्रेवी के लिए करीब 500 ग्राम पके हुए टमाटर, 2 बड़े चम्मच घी या तेल, आधा चम्मच जीरा, एक चुटकी हींग, 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच गरम मसाला और नमक लें. सबसे आखिर में 30 ग्राम मक्खन, 3 से 4 कलियां कटा हुआ लहसुन, 1 छोटा चम्मच कसूरी मेथी, 1/4 छोटा चम्मच गरम मसाला और आधा कप फ्रेश क्रीम डालनी है.

दाल को रातभर भिगोना न भूलें
दाल मखनी को अच्छा बनाने का पहला नियम है कि साबुत उड़द दाल और राजमा को पर्याप्त समय तक भिगोया जाए. दोनों को साफ करके रातभर या कम से कम 8 घंटे पानी में भिगोकर रखें. अगले दिन पानी निकालकर दाल और राजमा को अच्छी तरह धो लें. अब इन्हें प्रेशर कुकर में करीब 1200 मिलीलीटर पानी के साथ डालें. इसमें बड़ी इलायची, तेजपत्ता, नमक, बारीक कटा प्याज, अदरक और हरी मिर्च डालें.
दाल को तब तक पकाएं जब तक उड़द और राजमा पूरी तरह नरम न हो जाएं. प्रेशर कुकर में इसे मध्यम से धीमी आंच पर पकने में करीब 30 से 35 मिनट लग सकते हैं. दाल इतनी नरम होनी चाहिए कि इसे आसानी से चम्मच से दबाया जा सके.

अब तैयार करें टमाटर का मसाला
एक भारी तले वाले पैन में 2 बड़े चम्मच घी या तेल गर्म करें. इसमें जीरा और हींग डालें. जीरा चटकने लगे तो अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर तब तक भूनें जब तक कच्ची खुशबू खत्म न हो जाए. अब लाल मिर्च पाउडर और गरम मसाला डालें और करीब 30 सेकंड तक भूनें. इसके बाद पिसे हुए टमाटर और नमक डालकर धीमी आंच पर पकाएं. यहां जल्दबाजी न करें. टमाटर को तब तक पकाना है जब तक उसका अतिरिक्त पानी सूख न जाए और मसाले के किनारों से तेल अलग दिखाई देने लगे. यही स्टेज दाल के स्वाद को काफी बेहतर बनाती है.
दाल और मसाले को धीमी आंच पर पकाएं
अब तैयार टमाटर मसाले को पकी हुई दाल और राजमा में मिला दें. इसे धीमी आंच पर कम से कम 30 से 45 मिनट तक पकने दें. बीच-बीच में दाल को चलाते रहें ताकि वह नीचे चिपके नहीं. अगर दाल बहुत ज्यादा गाढ़ी हो रही है, तो थोड़ा पानी डाल सकते हैं. अच्छी दाल मखनी न तो बहुत पतली होनी चाहिए और न ही इतनी गाढ़ी कि चम्मच चलाना मुश्किल हो जाए.
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आखिर में कितना मक्खन डालें?
यही इस रेसिपी का सबसे जरूरी हिस्सा है. 4 लोगों के लिए करीब 30 ग्राम मक्खन यानी लगभग 2 बड़े चम्मच पर्याप्त है. एक छोटे पैन में मक्खन पिघलाएं और उसमें कटा हुआ लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें. गैस बंद करने के बाद इसमें कसूरी मेथी और थोड़ा गरम मसाला डालें. अब इस गरम लहसुन-मक्खन को सीधे दाल में डाल दें. मक्खन डालने के बाद दाल को कुछ देर और धीमी आंच पर पकाएं. आखिर में गैस बंद करके आधा कप फ्रेश क्रीम मिलाएं. क्रीम डालने के बाद दाल को बहुत तेज आंच पर पकाने की जरूरत नहीं है. ऊपर से थोड़ी क्रीम, कसूरी मेथी और चाहें तो थोड़ा मक्खन डालकर गर्मागर्म सर्व करें. इसे नान, रोटी या बासमती चावल के साथ खाया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>कृष्ण जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें  खास शुभकामनाएं, देखें कोट्स और व्हाट्सऐप स्टेटस</title>
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        <description><![CDATA[ कृष्ण जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें  खास शुभकामनाएं, देखें कोट्स और व्हाट्सऐप स्टेटस ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>जिम में अचानक होती मौत का सच आया सामने, ICMR की रिपोर्ट में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ जिम में कसरत करते वक्त, डांस करते हुए या रोजमर्रा के काम के दौरान अचानक जान गंवा देने वाले युवाओं के मामले पिछले कुछ सालों में लगातार सामने आए हैं. ऐसी मौतों के पीछे आखिर वजह क्या है, इसे समझने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर ने एक बड़ा अध्ययन किया है. इस अध्ययन में सामने आया है कि कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने और खून का थक्का बनने के पीछे आनुवंशिक इतिहास, पहले से चली आ रही बीमारियां और धूम्रपान जैसी आदतें प्रमुख वजह हैं.&amp;nbsp;
कैसे हुआ अध्ययन?
आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन देश के 25 बड़े अस्पतालों में किया. इसमें उन मरीजों को शामिल किया गया, जिन्हें समय पर इलाज मिलने की वजह से बचा लिया गया था. अध्ययन का मकसद यह समझना था कि कम उम्र में दिल के दौरे और खून के थक्के बनने के पीछे कौन से कारण जिम्मेदार होते हैं. इसके लिए 18 से 45 साल की उम्र के 767 मरीजों को अध्ययन में शामिल किया गया.&amp;nbsp;
इनमें से 432 यानी करीब 56.3 फीसदी मरीजों को दिल का दौरा पड़ा था, जबकि करीब 25.8 फीसदी मरीजों को दिमाग की नस में खून का प्रवाह रुकने की समस्या यानी स्ट्रोक हुआ था. दोनों तरह के मामलों को मिलाकर देखें तो यह कुल मरीजों का करीब 82 फीसदी हिस्सा बनता है. खास बात यह रही कि इनमें से 614 यानी करीब 80.1 फीसदी मरीज 31 से 45 साल की उम्र के थे.&amp;nbsp;
किन कारणों से बढ़ता है खतरा?
अध्ययन में कुछ खास जोखिम वाले कारकों की पहचान की गई है, जिनसे दिल के दौरे और खून के थक्के का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. जिन मरीजों को पहले भी कभी खून का थक्का बनने की समस्या हो चुकी थी, उनमें दिल के दौरे का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले करीब 60 गुना ज्यादा पाया गया. वहीं जिन मरीजों को पहले से कोई दूसरी बीमारी थी, उनमें यह खतरा करीब 4.6 गुना ज्यादा मिला. धूम्रपान करने वाले लोगों में दिल के दौरे का खतरा साढ़े तीन गुना ज्यादा पाया गया. इसके अलावा जिन मरीजों के परिवार में पहले किसी को खून का थक्का बनने की समस्या रह चुकी थी, उनमें भी यह खतरा 3.3 गुना ज्यादा देखा गया.&amp;nbsp;
कोविड और वैक्सीन को लेकर क्या मिला?
अध्ययन में यह भी देखा गया कि जो लोग पहले कोविड की वजह से अस्पताल में भर्ती हो चुके थे, उनमें भी आगे चलकर खून का थक्का बनने के मामले सामने आए. हालांकि इस पूरे अध्ययन की सबसे राहत भरी बात यह रही कि कोविड टीका लगवाने वाले लोगों में इस वजह से कोई अतिरिक्त नुकसान नहीं देखा गया.
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डॉक्टरों की सलाह क्यों जरूरी?
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन के नतीजे उन युवाओं के लिए खास तौर पर काम के हैं, जिनकी जीवनशैली में धूम्रपान, अनियमित खानपान या बिना जांच के तेज कसरत जैसी आदतें शामिल हैं. जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को कम उम्र में दिल का दौरा या खून का थक्का बनने की समस्या रही हो, उन्हें जिम या तेज कसरत शुरू करने से पहले डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>रोटी में घी लगाने से कौन सी बीमारी ठीक होती है? जानें इसके फायदे</title>
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        <description><![CDATA[ भारतीय घरों में सदियों से रोटी पर घी लगाकर खाने का रिवाज चला आ रहा है. दादी-नानी अक्सर कहती थीं कि रोटी में घी लगाकर खाने से सेहत अच्छी रहती है और शरीर मजबूत बनता है. आज भी पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि सही मात्रा में देसी घी का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. आइए जानते हैं रोटी पर घी लगाकर खाने से शरीर को कौन-कौन से फायदे मिलते हैं.&amp;nbsp;
ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मददगार
रोटी पर घी लगाने से रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो जाता है, जिसका मतलब है कि यह खून में शुगर को उतनी तेजी से नहीं बढ़ाती, जितनी बिना घी वाली रोटी बढ़ा सकती है. इस वजह से जिन लोगों को ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव की चिंता रहती है, उनके लिए घी लगी रोटी एक बेहतर विकल्प मानी जाती है. हालांकि जो लोग पहले से डायबिटीज जैसी किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें अपनी डाइट में कोई भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
पेट और पाचन के लिए फायदेमंद
घी में मौजूद हेल्दी फैट्स पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं. यह आंतों को चिकनाई देता है, जिससे कब्ज जैसी समस्या में राहत मिलती है. इसके अलावा घी लगी रोटी खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार भूख लगने और अनहेल्दी नमकीन-मीठा खाने की आदत भी कम होती है। यही वजह है कि जो लोग वजन नियंत्रित करना चाहते हैं, उनके लिए भी सीमित मात्रा में घी लगी रोटी अच्छा विकल्प मानी जाती है.
हड्डियों और जोड़ों के लिए अच्छा
घी में विटामिन-ए, विटामिन-ई और विटामिन-डी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों और जोड़ों की मजबूती के लिए जरूरी माने जाते हैं. आयुर्वेद में पुराने समय से यह माना जाता रहा है कि युवावस्था में नियमित रूप से घी का सेवन करने वालों को उम्र बढ़ने पर घुटनों और जोड़ों की तकलीफ कम होती है. यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में घी लगी रोटी खाने की सलाह खासतौर पर दी जाती है.
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त्वचा में निखार और एनर्जी बूस्ट
देसी घी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो त्वचा को अंदर से पोषण देकर उसकी चमक बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके साथ ही घी में मौजूद शॉर्ट-चेन और मीडियम-चेन फैटी एसिड शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं. यही वजह है कि पुराने समय में किसान और मेहनत-मजदूरी करने वाले लोग सुबह के भोजन में घी लगी रोटी खाना पसंद करते थे, ताकि दिनभर शरीर में ताकत बनी रहे.
कितनी मात्रा में खाना है सही?
विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी चीज की तरह घी का सेवन भी सीमित मात्रा में ही फायदेमंद होता है. आमतौर पर एक रोटी पर करीब एक छोटा चम्मच घी काफी माना जाता है. जरूरत से ज्यादा घी खाने से वजन बढ़ने और दूसरी दिक्कतें होने की आशंका रहती है, इसलिए संतुलित मात्रा में इसे अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करना ही सेहत के लिए सबसे बेहतर तरीका माना जाता है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>कपड़ों पर तेल का दाग लग गया, तुरंत करें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ कपड़ों पर खाना बनाते समय या खाते वक्त तेल गिर जाना आम बात है. तेल का दाग अगर तुरंत साफ न किया जाए तो यह कपड़े के रेशों में अच्छी तरह चिपक जाता है. और बाद में इसे हटाना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में दाग पर तुरंत पानी डालने के बजाय कुछ आसान चीजों की मदद ले सकते हैं. घर में मौजूद डिशवॉश लिक्विड, बेकिंग सोडा या टिश्यू जैसी चीजों से तेल के ताजे दाग को साफ करने की कोशिश की जा सकती है. जानें कपड़ो पर दाग लगने पर क्या करें.
&amp;nbsp;सबसे पहले टिश्यू से तेल सोखें
अगर कपड़े पर अभी-अभी तेल गिरा है तो उसे &amp;nbsp;तुरंत रगड़ने की गलती न करें. इससे वह गिरा तेल और भी जगह फैल सकता है. इसके लिए सबसे पहले साफ टिश्यू या पेपर टॉवल को दाग वाली जगह पर हल्के हाथ से दबाएं. इससे कपड़े में मौजूद ज्यादा तेल को बाहर निकलने में मदद मिलेगी. ध्यान रखें कि टिश्यू को दाग पर घिसें नहीं, वरना तेल आसपास भी फैल सकता है.
&amp;nbsp;बेकिंग सोडा या पाउडर लगाएं
तेल सोखने के लिए दाग वाली जगह पर थोड़ा बेकिंग सोडा डाल सकते हैं. और इसे कुछ मिनट के लिए कपड़े पर लगा रहने दें, ताकि यह तेल को अच्छे से सोख सके. इसके बाद इसे हल्के हाथ से हटाएं. अगर घर में बेकिंग सोडा नहीं है तो कॉर्नस्टार्च या टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
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डिशवॉश लिक्विड से दाग साफ करें
तेल हटाने के लिए डिशवॉश लिक्विड भी मददगार होता है क्योंकि यह चिकनाई को तोड़ने के लिए बनाया जाता है. दाग पर थोड़ी मात्रा में लिक्विड लगाकर उंगलियों से बहुत हल्के हाथ से फैलाएं. इसे कुछ मिनट छोड़ने के बाद कपड़े को उसके फैब्रिक के हिसाब से धो लें.
कपड़े को धोने से पहले दाग जरूर जांचें
कपड़ा धोने के बाद उसे सुखाने से पहले देख लें कि तेल का दाग पूरी तरह गया है या नहीं. अगर दाग अभी भी दिखाई दे रहा है तो दोबारा सफाई की कोशिश करें. दाग पूरी तरह निकलने से पहले कपड़े को तेज गर्मी में सुखाने से बचें, क्योंकि गर्मी दाग को और स्थायी बना सकती है.
पुराने दाग पर थोड़ा ज्यादा समय दें
अगर तेल का दाग पुराना हो चुका है तो उसे हटाने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. ऐसे में दाग पर डिशवॉश लिक्विड लगाकर कुछ देर छोड़ सकते हैं और फिर कपड़े के लेबल पर दिए निर्देश के अनुसार धो सकते हैं. नाजुक, रेशमी या महंगे कपड़ों पर किसी भी घरेलू उपाय को पहले कपड़े के छिपे हिस्से पर जांच लेना बेहतर है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Constipation Relief: 3 दिन से हो रही कब्ज? इन एक नुस्खे से साफ हो जाएगा आपका पेट</title>
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        <description><![CDATA[ Prunes Benefits For Gut Health And Digestion: अगर आपको तीन दिन से पेट साफ नहीं हुआ है, पेट भारी लग रहा है या शौच के दौरान काफी जोर लगाना पड़ रहा है, तो यह कब्ज की समस्या हो सकती है. कब्ज होने पर सिर्फ पेट में भारीपन ही नहीं रहता, बल्कि गैस, ब्लोटिंग और बेचैनी जैसी दिक्कतें भी परेशान कर सकती हैं. ऐसे में खान-पान और रोजमर्रा की आदतों में कुछ बदलाव काफी मददगार हो सकते हैं. इनमें एक आसान और प्राकृतिक उपाय है सूखा आलूबुखारा यानी प्रून्स खाना.
प्रून्स को लंबे समय से कब्ज दूर करने वाले नेचुरल फूड्स में गिना जाता है. इनमें फाइबर के साथ सोर्बिटोल नाम का एक शुगर अल्कोहल पाया जाता है, जिसका हल्का लैक्सेटिव प्रभाव हो सकता है. यह आंतों में पानी खींचने में मदद करता है, जिससे मल नरम हो सकता है और उसे बाहर निकालना आसान हो जाता है.
कब्ज में क्यों काम आ सकता है प्रून?
&amp;nbsp;हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट Medicalnewstoday के अनुसार,&amp;nbsp; कब्ज के दौरान मल अक्सर सख्त और सूखा हो जाता है, जिससे उसे पास करने में परेशानी होती है. प्रून्स में मौजूद फाइबर मल में मात्रा बढ़ाने और उसकी बनावट को बेहतर करने में मदद कर सकता है. वहीं, इसमें मौजूद सोर्बिटोल आंतों में पानी की मात्रा बढ़ाकर मल को नरम करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि प्रून्स को कब्ज के लिए एक आसान घरेलू विकल्प माना जाता है. उपलब्ध शोध में भी प्रून्स को कब्ज से राहत देने में प्रभावी पाया गया है. करीब 50 ग्राम यानी लगभग 7 मध्यम आकार के प्रून्स दिन में दो बार लेने की मात्रा पर भी अध्ययन हुआ है.
हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है. अगर आपको किसी खास खाद्य पदार्थ से परेशानी होती है या पहले से पाचन संबंधी समस्या है, तो इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है.

सिर्फ प्रून खाना काफी नहीं, पानी भी जरूरी
कब्ज की एक बड़ी वजह शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है. जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, तो मल अधिक सख्त हो सकता है और उसे बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है. इसलिए कब्ज होने पर दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है. पानी के साथ फाइबर से भरपूर चीजों को डाइट में शामिल करने से भी फायदा मिल सकता है. कुछ अध्ययनों में स्पार्कलिंग वॉटर को भी कब्ज में मददगार पाया गया है, हालांकि कुछ लोगों में इससे गैस या पाचन संबंधी परेशानी बढ़ सकती है.
डाइट में फाइबर बढ़ाएं
कब्ज से बचने के लिए फाइबर का पर्याप्त सेवन भी जरूरी है. सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और बीज फाइबर के अच्छे सोर्स हैं. फाइबर मल को अधिक मात्रा देने और उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद कर सकता है. घुलनशील फाइबर पानी को सोखकर जेल जैसी बनावट तैयार करता है, जिससे मल नरम हो सकता है. इस तरह का फाइबर कब्ज से परेशान लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है. साइलियम यानी इसबगोल भी घुलनशील फाइबर का एक स्रोत है, जिसे कब्ज की समस्या में इस्तेमाल किया जाता है.

लेकिन ध्यान रखें कि अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना भी हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता. कुछ लोगों में इससे गैस, पेट फूलना या दूसरी पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. इसलिए फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है.
रोज थोड़ा चलना भी फायदेमंद
अगर आपकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि बहुत कम है, तो इससे भी कब्ज की समस्या बढ़ सकती है. नियमित हल्की एक्सरसाइज या पैदल चलना पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है. इसके लिए जरूरी नहीं कि आप बहुत कठिन एक्सरसाइज करें. रोजाना कुछ देर तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी सामान्य गतिविधियां भी की जा सकती हैं. कुछ शोध में पाया गया है कि एक्सरसाइज कब्ज के कुछ लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है.
कॉफी से भी कुछ लोगों को राहत
कुछ लोगों में कॉफी पीने के बाद शौच की इच्छा बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि कॉफी पाचन तंत्र की मांसपेशियों को सक्रिय कर सकती है. कैफीन वाली कॉफी का यह प्रभाव कुछ लोगों में ज्यादा देखा गया है. हालांकि, अगर आपको इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या है, तो कैफीन से गैस या पेट की दूसरी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए हर व्यक्ति के लिए कॉफी को कब्ज का इलाज मानना सही नहीं होगा.
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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कभी-कभार कब्ज होती है तो खान-पान, पानी और फिजिकल एक्टिविटी में बदलाव मदद कर सकते हैं. लेकिन अगर कई दिनों तक पेट साफ नहीं होता, समस्या बार-बार होती है या घरेलू उपायों से राहत नहीं मिलती, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. कब्ज के लिए कई तरह की लैक्सेटिव दवाएं भी उपलब्ध हैं, लेकिन इन्हें नियमित रूप से अपनी मर्जी से लेना ठीक नहीं है. डॉक्टर या फार्मासिस्ट आपकी स्थिति के हिसाब से सही विकल्प बता सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली में क्यों बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, इससे बचने के लिए कौन&amp;सा मास्क बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ देश के कई हिस्सों में मौसमी इन्फ्लुएंजा बढ़ने की खबर सामने आ रही हैं. खालकर, दिल्ली में इन दिनों Influenza A (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल बढ़ रहा है कि आखिर संक्रमण इतनी तेजी से क्यों फैल रहा है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और बचाव के लिए कौनसा मास्क&amp;nbsp; पहनना चाहिए.
क्यों बढ़ रहे हैं स्वाइन फ्लू के मामले?
स्वाइन फ्लू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली सांस की बूंदों और निकट संपर्क से फैलता है. दिल्ली में मानसून और बदलते मौसम के दौरान वायरल संक्रमण के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो जाती हैं. वहीं भीड़भाड़ वाले बाजार जगह, ऑफिस, मॉल्स और स्कूल्स में रहने से संक्रमण तेजी से फैल रहा है.
कौन-सा मास्क है सबसे बेहतर?
अगर आप H1N1 से बचाव के लिए मास्क चुन रहे हैं, तो इसके लिए अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क बेहतर विकल्प माना जाता है, खासकर अगर आप भीड़भाड़ वाली जगहों, अस्पतालों या फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में है तो यह आपके लिए सबसे बेहतर है. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने भी फ्लू के लक्षण होने पर N95 मास्क पहनने की सलाह दी है. N95 मास्क चेहरे पर अच्छी तरह फिट होकर हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों को अच्छे से फिल्टर करता है.
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मास्क के साथ इन बातों का भी रखें ध्यान
संक्रमण से बचने के लिए सिर्फ मास्क पहनना ही पर्याप्त नहीं है. हाथों को साबुन-पानी से बार-बार धोना भी जरूरी है. खांसते या छींकते समय मुंह-नाक जरूर ढकें जिससे दूसरों को संक्रमण न हो. वहीं आंख, नाक व मुंह को गंदे हाथों से छूने से भी बचें, इससे भी आपको संक्रमण हो सकता है. अगर आपको फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो ऐसे में भीड़ से दूरी बनाएं और घर पर ही आराम करें. तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी ये सभी फ्लू के लक्षण होते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि H1N1 के लक्षण दिखने पर खुद से एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा शुरू न करें. स्थिती गंभीर होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है.
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        <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>कश्मीर टू कन्याकुमारी... Railway का फुल टूर पैकेज, फटाफट करें बुकिंग</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप उत्तर भारत में रहते हैं और दक्षिण भारत की सैर करने का प्लान बना रहे हैं तो भारतीय रेलवे आपके लिए &#039;फुल टूर पैकेज&#039; लेकर आया है. दरअसल, भारतीय रेल उत्तर भारत में रहने वाले लोगों के लिए विशेष भारत गौरव ट्रेन चल रही है. यह ट्रेन उत्तर भारत के श्रद्धालुओं को दक्षिण भारत में कई ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराएगी.
एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन लिमिटेड के संयुक्त महाप्रबंधक हर्षदीप ने बताया कि कि जम्मू रेल मंडल ने यह विशेष ट्रेन शुरू की है. यह ट्रेन 14 नवंबर से चलेगी और 26 नवंबर को वापस जम्मू पहुंचेगी.
पांच धार्मिक स्थलों को कवर करेगी ट्रेन&amp;nbsp;
भारतीय रेलवे इस ट्रेन से पांच धार्मिक स्थल कवर करने जा रहा है. इसमें रामेश्वरम, मदुरई, कन्याकुमार, तिरुपति और मारकपुर शामिल हैं. यह ट्रेन 12 रातें और 13 दिन में इस पूरे रूट को कवर करेगी. इस ट्रेन में जो यात्री अपनी बुकिंग कराएंगे वह रामेश्वरम में श्री रामनाथ स्वामी मंदिर, मदुरई में मीनाक्षी मंदिर, कन्याकुमारी में विभिन्न पर्यटक स्थल, तिरुपति में वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर और मार्करपुर में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें: एयरपोर्ट पर सबसे पहले क्या करना चाहिए? पहली बार उड़ने वालों के लिए गाइड
तीन कैटिगिरी में होगी बुकिंग&amp;nbsp;
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन में तीन कैटिगरीज में लोग बुकिंग कर सकते हैं. सेकंड एसी क्लास को कंफर्ट का नाम दिया गया है जिसका किराया 56830 रूपये है. इसके साथ ही थर्ड एसी को स्टैंडर्ड कैटेगरी में रखा गया है, जिसका किराया 42605 रुपए है. वहीं, इकोनामिक क्लास का किराया 26895 रुपए रखा गया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
किराए में खाने से लेकर होटल बुकिंग तक&amp;nbsp;
जम्मू रेल मंडल की ओर से चलाई जा रही इस ट्रेन में सभी यात्रियों को कन्फर्म ट्रेन टिकट के साथ-साथ ऑन बोर्ड और ऑफ बोर्ड नाश्ता और दो वक्त का खाना उपलब्ध कराया जाएगा. इसके साथ ही होटल बुकिंग और साइटसीइंग भी शामिल हैं. रेलवे अधिकारी हर्षदीप ने बताया कि अगर कोई आम यात्री इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना चाहता है तो उसके लिए सबसे बड़ी मुश्किल रेलवे की टिकट बुकिंग है. इसके साथ ही फिर हर रेलवे स्टेशन पर कनेक्टिंग रेल पकड़ना और फिर हर जगह पर अपना होटल और गाड़ी का इंतजाम करना एक बड़ी चुनौती है. ऐसे में यह टूर पैकेज यात्रियों को सुविधा के साथ पूरा पैकेज उपलब्ध कराता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: वृंदावन जा रहे हैं तो ये 8 गलतियां न करें, वरना होगी परेशानी
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या मोटापे से घटती है आपकी उम्र? एक्सपर्ट से जानें इसका कंट्रोल</title>
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        <description><![CDATA[ मोटापा आज पूरी दुनिया में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर सामने आ रहा है. गलत लाइफस्टाइल, खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी की वजह से बच्चों से लेकर बूढ़ों तक हर कोई मोटापे से जूझ रहा है. मोटापा अपने साथ डायबिटीज, हाई बीपी और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियां लेकर आता है. हांलाकि, समय रहते कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं और इससे होने वाली गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे मोटापा आपकी उम्र कम कर रहा है.
मोटापा बढ़ाता है बीमारियों का खतरा
मोटापा बढ़ने से कई बीमारियों को खतरा बढ़ जाता है. खासकर पेट में अधिक चर्बी बढ़ने से इंसूलिन की कार्य क्षमता प्रभावित होती है. मोटापा होने से शरीर के कई हिस्सों में सूजन जैसी समस्या भी देखने को मिलती है. अधिक मोटापा होने से शरीर में हार्मोनल बदलाव होने की समस्या भी देखी जाती है. लंबे समय तक मोटापा रहने से टाइप-2 डायबिटीज, हाई बल्ड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. कई मामलों में हार्ट से संबंधित बीमारियों में भी मोटापा ही वजह होता है.
मोटापा कम करता है उम्र
यह कहना गलत होगा कि केवल वजन ज्यादा होने से किसी व्यक्ति की उम्र कम होती है. असल में ऐसा मोटापे के साथ आने वाली बीमारियों की वजह से होता है. अगर कोई व्यक्ति अपना एक किलो वजन भी घटाता है तो उसके इन बीमारियों के होने की संभावना भी कम हो जाती है. हांलाकि मोटापा केवल गलत खान-पान से ही नहीं होता है. कुछ मामलों में परिवार की हेल्थ हिस्ट्री भी होती है. यदि आपके माता-पिता भी मोटापे से जूझ रहें हैं या परिवीर में कोई व्यक्ति मोटापे का शिकार है, तो आपके मोटापे की वजह यह हो सकती हैं. लेकिन, आप इसे समय रहते नियंत्रित कर सकते हैं और अपने आप को सुरक्षित रख सकते हैं.
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डाइट नहीं छोटी-छोटी आदतो में करें सुधार
कई लोग मोटापा कम करने के लिए डाइट का सहारा लेते हैं, जिससे व्यक्ति को कमजोरी आ जाती है. अपने दैनिक आदतों में कुछ सुधार कर के भी आप मोटापा कम कर सकते हैं. रोज सुबह और शाम समय मिलने पर घूमने जाएं. अपने आहार में पौष्टिक सब्जियां शामिल करें और तले-गले को कुछ समय के लिए छोड़ दें. शारीरिक गतिविधि पर ध्यान दें और नींद का समय सुधारें. एक साथ वजन कम करने की बजाय धीरे-धीरे वजन कम करें और जरूरत पड़ने पर किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लें.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gold Cleaning Scams: सफाई के नाम पर ऐसे सोना चुराते हैं ज्वैलरी शॉप वाले, रहें सावधान</title>
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        <description><![CDATA[ How Door To Door Scammers Steal Gold: सोने के गहनों को साफ कराने के लिए अगर आप किसी अनजान व्यक्ति या घर-घर घूमकर सफाई करने वाले के पास जाते हैं, तो सावधान हो जाइए. गहने को चमकाने के नाम पर ठगी का ऐसा खेल चल रहा है, जिसमें कुछ ही मिनटों में आपके कीमती सोने का हिस्सा गायब हो सकता है. गहना साफ होने के बाद पहली नजर में भले ही पहले से ज्यादा चमकदार दिखाई दे, लेकिन उसका वजन कम हो चुका होता है. कई बार जब तक ग्राहक को इस धोखाधड़ी का पता चलता है, तब तक ठग अपना ठिकाना बदल चुके होते हैं.
हाल ही में गुजरात के देवभूमि द्वारका में पुलिस ने बिहार से जुड़े एक गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ग्रामीण इलाकों में फिनाइल बेचने के बहाने घरों में दाखिल होते थे. इसके बाद वे महिलाओं को भरोसे में लेकर भगवान की मूर्तियों और फिर चांदी और सोने के गहनों को साफ करने का झांसा देते थे. पुलिस ने आरोपियों के पास से सोने-चांदी के सामान, मोबाइल फोन, बाइक और सफाई में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें बरामद कीं.
पहले भरोसा जीतते हैं, फिर शुरू होता है असली खेल
ऐसे मामलों में ठगी की शुरुआत सीधे सोने से नहीं होती. आरोपी पहले सामान्य सामान बेचने या कोई छोटी-मोटी सेवा देने के बहाने घर में प्रवेश करते हैं. बातचीत के दौरान वे यह भरोसा दिलाते हैं कि उन्हें गहने और पूजा की मूर्तियां साफ करने का अच्छा अनुभव है. कई बार वे पहले भगवान की मूर्ति साफ करके दिखाते हैं. जब सामने वाले को मूर्ति चमकती हुई दिखाई देती है तो उसका भरोसा बढ़ जाता है. इसके बाद वे चांदी के गहनों और फिर सोने के आभूषण साफ करने की बात कहते हैं. यहीं से सबसे बड़ा खतरा शुरू होता है.

केमिकल से चमकता है गहना, लेकिन घट जाता है वजन
गहनों की सफाई के लिए अलग-अलग रसायनों और पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है. देवभूमि द्वारका मामले में पुलिस ने आरोपियों के पास से एसिड, फिनाइल, ब्रश, पाउडर, हल्दी, फिटकरी और दूसरे सामान बरामद किए थे. ग्राहक को लगता है कि गहने पर जमी पुरानी गंदगी हट रही है और सोना अपनी असली चमक में वापस आ रहा है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान गहने के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है. ठग सफाई के बहाने सोने का कुछ हिस्सा निकाल लेते हैं या गहने के वजन को कम कर देते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि साफ होने के तुरंत बाद गहना देखने में काफी अच्छा लगता है. इसलिए ग्राहक को उसी समय शक नहीं होता.
चमक देखकर खुश न हों, वजन जरूर जांचें
गहना साफ कराने के बाद सिर्फ उसकी चमक देखकर यह मान लेना कि सफाई सही तरीके से हुई है, बड़ी गलती हो सकती है. अगर सफाई के बाद गहने का वजन पहले की तुलना में कम हो गया है, तो यह गंभीर संकेत है. मसलन, अगर कोई आभूषण सफाई से पहले 6 ग्राम का था और सफाई के बाद उसका वजन काफी कम निकलता है, तो ग्राहक को तुरंत सवाल करना चाहिए. यही वजह है कि गहने को सफाई के लिए देने से पहले उसका वजन किसी भरोसेमंद जगह पर चेक कराना बेहतर है.

गांवों और घरों में पहुंचकर करते हैं शिकार
इस तरह की ठगी में ग्रामीण इलाकों और ऐसे घरों को निशाना बनाए जाने की आशंका ज्यादा रहती है, जहां महिलाओं या बुजुर्गों के अकेले होने की संभावना हो. कई गांवों में बाजार या ज्वेलरी की दुकान दूर होने के कारण लोग घर पर ही गहने साफ कराने का आसान विकल्प चुन लेते हैं. ठग इसी सुविधा का फायदा उठाते हैं. वे खुद ग्राहक के घर पहुंचते हैं, कुछ मिनटों में गहना चमकाने का दावा करते हैं और भरोसा बनने के बाद कीमती आभूषण अपने हाथ में ले लेते हैं.
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अनजान लोगों से कभी न साफ कराएं सोना
सोने की सफाई के मामले में सबसे जरूरी सावधानी यही है कि घर-घर घूमने वाले या रास्ते में मिलने वाले किसी अनजान व्यक्ति को अपना गहना न दें. गहने की सफाई हमेशा ऐसे ज्वेलर से कराएं, जिसकी दुकान और पहचान दोनों भरोसेमंद हों. गहना देने से पहले उसका वजन नोट कर लें और सफाई के बाद दोबारा वजन जरूर कराएं. अगर कोई व्यक्ति सफाई के लिए जल्दबाजी करे, गहना अपने पास रखने की कोशिश करे या प्रक्रिया के बारे में साफ जानकारी न दे, तो ऐसे व्यक्ति से दूरी बनाना ही बेहतर है.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>घर पर ऐसे बनाएं माखन मिश्री का भोग, उंगलियां चाटते रह जाएंगे भक्त</title>
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        <description><![CDATA[ घर पर ऐसे बनाएं माखन मिश्री का भोग, उंगलियां चाटते रह जाएंगे भक्त ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>13 साल से एम्स में सर्जरी का इंतजार कर रही लड़की की मौत, जानें पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली एम्स से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. राजस्थान के कोटा की रहने वाली 15 साल की तन्वी, जो बचपन से ही दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी, मंगलवार को इलाज के दौरान चल बसी. तन्वी को महज दो साल की उम्र में दिल में गड़बड़ी का पता चला था और तभी से उसका परिवार बेहतर इलाज की उम्मीद में एम्स दिल्ली के चक्कर लगा रहा था. करीब 13 साल के लंबे इतंजार के बाद भी उसकी सर्जरी नहीं हो पाई और आखिरकार हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की तैयारी के बीच ही उसने दम तोड़ दिया.&amp;nbsp;
दो साल की उम्र में हुआ था बीमारी का पता
तन्वी को साल 2012 में, जब वह करीब दो साल की थी, वेंट्रिकुलर डिफेक्ट यानी दिल में छेद और पल्मोनरी एट्रेसिया नाम की बीमारी का पता चला था. इस बीमारी में फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली नसें ठीक तरीके से काम नहीं करती, जिसकी वजह से शरीर में ऑक्सीजन की कमी, सांस फूलना और थकान जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं. किसी परिचित की सलाह पर परिवार तन्वी को इलाज के लिए दिल्ली एम्स लेकर आया था. साल 2013 में उसकी सर्जरी को लेकर जांच भी की गई, लेकिन आगे चलकर मामला टलता चला गया.&amp;nbsp;
2018 में सर्जरी को माना गया खतरनाक&amp;nbsp;
एम्स के सीटीवीएस विभाग के डॉक्टरों के मुताबिक, 2018 में हुई जांच में सामने आया कि तन्वी के फेफड़ो को खून पहुंचाने वाली मुख्य नसें ही ठीक से मौजूद नहीं थी और उसके दिल की बनावट बेहद पेचीदा हो चुकी थी. डॉक्टरों का मानना था कि ऐसी हालत में सर्जरी करना जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए उस वक्त ऑपरेशन नहीं किया गया और तन्वी का इलाज दवाओं के सहारे ही चलता रहा. इसके बाद परिवार को हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट के विकल्प के बारे में बताया गया था.&amp;nbsp;
पिछले हफ्ते ही बिगड़ी हालत
तन्वी के पिता पिछले हफ्ते उसे गंभीर हालत में एम्स लेकर पहुंचे थे. डॉक्टरों ने उसे हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना को ध्यान में रखते हुए भर्ती किया. जरूरी जांचें शुरू हुईं और सोमवार शाम उसकी एंडोस्कोपी भी की गई. ट्रांसप्लांट की तैयारियां चल रही थीं कि मंगलवार को करीब 2 बजे तन्वी की तबीयत अचानक बिगड़ गई. डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सुबह करीब 5 बजे कार्डियक अरेस्ट के चलते उसे मृत घोषित कर दिया गया.&amp;nbsp;
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परिवार का आरोप
तन्वी के माता-पिता का आरोप है कि अगर समय रहते उनकी बेटी की सर्जरी कर दी जाती, तो शायद उसकी जान बच सकती थी. उनका कहना है कि 13 साल तक एम्स के चक्कर लगाने के बावजूद बेटी को सही इलाज नहीं मिल पाया. वहीं दूसरी तरफ एम्स प्रशासन का कहना है कि तन्वी के मामले में डॉक्टरों ने पहले ही सर्जरी को सुरक्षित नहीं माना था, इसी वजह से उसका इलाज दवाओं के जरिए किया जा रहा था और ऑपरेशन का जोखिम नहीं उठाया गया.&amp;nbsp;
जांच के बाद ही साफ होगी असली वजह
तन्वी की मौत ने एक बड़ा सवाल भी छोड़ दिया है कि जन्म से दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों को समय पर सही इलाज और सर्जरी आखिर क्यों नहीं मिल पाती. फिलहाल परिवार के आरोपों और अस्पताल में हुए पूरे इलाज की प्रक्रिया की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि देरी बीमारी की गंभीरता के कारण हुई या इलाज व्यवस्था में कहीं कोई चूक हुई थी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>व्रत में ये 5 चीजें ज्यादा न खाएं, वरना हो जाएगी दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ धार्मिक मान्यताओं में जन्माष्टमी के व्रत को संयम और सात्विकता से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, व्रत में खाई जाने वाली हर चीज को ज्यादा मात्रा में खाना सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होता. कुछ खाद्य पदार्थ अधिक खाने से गैस, एसिडिटी, पेट फूलना, कमजोरी या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है. ऐसे में इस जन्माष्टमी पर जानिए व्रत के दौरान भोजन की सही मात्रा और किन चिजों के सेवन से बचना चाहिए.
साबूदाना में होता है कार्बोहाइड्रेट
व्रत में साबूदाने की खिचड़ी, खीर या वड़ा खूब खाया जाता है. साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है. इसे बहुत अधिक मात्रा में खाने पर शरीर को जरूरत से ज्यादा कैलोरी मिल सकती है और लंबे समय तक पेट भारी महसूस हो सकता है. साबूदाना खाते समय इसमें मूंगफली, सब्जियों या दही जैसे संतुलित विकल्प शामिल करना बेहतर माना जाता है.
सिमित मात्रा में खाएं आलू
व्रत में आलू सबसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में से एक है. आलू की सब्जी, चिप्स या फ्राई किए हुए आलू स्वादिष्ट जरूर लगते हैं, लेकिन इनका ज्यादा सेवन कैलोरी और तेल की मात्रा बढ़ा सकता है. खासकर डीप फ्राई किए हुए आलू अधिक खाने से पेट में भारीपन और एसिडिटी की समस्या हो सकती है. इसलिए व्रत में आलू को कम तेल में बनाकर सीमित मात्रा में खाना बेहतर विकल्प है.
कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी तली चीजें
कुट्टू और सिंघाड़े का आटा व्रत में खूब इस्तेमाल होता है. लेकिन इनसे बनी पूड़ी, पकौड़ी या पूरी तरह तली हुई चीजों का अधिक सेवन पाचन के लिए परेशानी पैदा कर सकता है. ज्यादा तेल और कैलोरी के कारण पेट भारी होने के साथ सुस्ती भी महसूस हो सकती है. इनकी जगह कम तेल में बनी रोटी या चीला लेना बेहतर होता है.
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मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स होगें बेहतर
बादाम, काजू, अखरोट और किशमिश जैसे ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें असीमित मात्रा में खाया जाए. इनमें कैलोरी और फैट की मात्रा अधिक होती है. ज्यादा खाने पर कुछ लोगों को पेट फूलने या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है. इसलिए मुट्ठी भर से अधिक ड्राई फ्रूट्स खाने से बचना बेहतर है.
ज्यादा मीठी चीजों के सवन से बचें
व्रत में फलाहारी मिठाइयां, साबूदाने की खीर, मिठाई या चीनी से बने पेय का सेवन बढ़ जाता है. ज्यादा मीठा खाने से शरीर को अचानक अधिक शुगर मिलती है और कुछ समय बाद भूख या थकान महसूस हो सकती है. इसलिए व्रत में प्राकृतिक मिठास के लिए फल या उनसे बना ताजा रस लेना बेहतर विकल्प होता है.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>शादियों का आ रहा है सीजन, इन आउटफिट्स का बनाएं कॉम्बो&amp; देखती रह जाएंगी लड़कियां</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल शादी का सीजन आते ही लड़कियों के साथ-साथ लड़के भी अपने आउटफिट को लेकर एक्सपेरिमेट करने लगते हैं. अब शादी में लड़को के लिए सिर्फ एक सिंपल कुर्ता-पायजामा पहनकर जाना ही काफी नहीं रह गया है. हल्दी, मेहंदी, संगत और रिसेप्शन जैसे हर फंक्शन के लिए अलग और स्टाइलिश लुक ट्राई किया जाता है. अगर आप भी इस वेडिंग सीजन में ऐसा लुक चाहते हैं, जो ट्रेडिशनल होने के साथ मॉडर्न भी लगे और सबकी नजरें आप पर टिक जाएं, तो इन आउटफिट कॉम्बिनेशन को जरूर ट्राई करें.
कुर्ता-पायजामा के साथ नेहरू जैकेट
कुर्ता-पायजामा लड़कों के लिए सबसे क्लासिक वेडिंग आउटफिट है. लेकिन अगर इसे थोड़ा स्टाइलिश बनाना है तो इसके ऊपर नेहरू जैकेट पहनने से आप इसे एक शानदार लूक दे सकते हैं. सफेद या क्रीम कुर्ते के साथ पेस्टल, ब्लू, ऑलिव या वाइन कलर की जैकेट शानदार लगती है. इसके साथ लोफर्स या ट्रेडिशनल मोजड़ी पहनकर लुक को पूरा किया जा सकता है. यह कॉम्बिनेशन मेहंदी या पूजा जैसे फंक्शन के लिए परफेक्ट है.
कुर्ते के साथ धोती पैंट
अगर आप कुछ ट्रेंडी और हटकर पहनना चाहते हैं तो कुर्ते के साथ धोती पैंट का कॉम्बिनेशन जरर ट्राई करें. यह लुक ट्रेडिशनल होने के साथ काफी मॉडर्न भी दिखाई देता है. शॉर्ट कुर्ते के साथ धोती पैंट और स्टाइलिश फुटवियर पहनें. हल्की एम्ब्रॉयडरी या प्रिंट वाला कुर्ता इस लुक को और आकर्षक बना सकता है. संगीत या कॉकटेल फंक्शन के लिए यह एक शानदार विकल्प है.
बंदगला सूट के साथ ट्राउजर
रिसेप्शन या शादी के मुख्य फंक्शन के लिए बंदगला सूट एक बेहतरन विकल्प है. यह आउटफिट आपको रॉयल और एलिगेंट लुक देता है. ब्लैक, नेवी, चारकोल या डीप ब्राउन जैसे सॉलिड शेड्स क्लासी लगते हैं. अगर आप थोड़ा एक्सपेरिमेंट करना चाहते हैं तो टेक्सचर्ड या हल्के प्रिंट वाला बंदगला भी चुन सकते हैं. इसके साथ क्लासिक लोफर्स पहनें.
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इंडो-वेस्टर्न के साथ स्नीकर्स
अगर आपका स्टाइल ट्रेडिशनल से ज्यादा मॉडर्न है तो इंडो-वेस्टर्न आउटफिट आपके लिए अच्छा विकल्प है. कुर्ते, स्ट्रेट पैंट और शॉर्ट जैकेट का कॉम्बिनेशन काफी स्टाइलिश लगता है. इस लुक के साथ क्लीन और मिनिमल स्नीकर्स पहनकर आप ट्रेडिशनल आउटफिट को मॉडर्न ट्विस्ट दे सकते हैं. हालांकि, जूते और कपड़ों के रंगों का कॉम्बिनेशन सही रखना भी उतना ही जरूरी है.
शेरवानी के साथ मोजड़ी
अगर आप दूल्हे के दोस्त या करीबी रिश्तेदार हैं और शादी के दिन रॉयल लुक चाहते हैं तो शेरवानी एक शानदार विकल्प है. क्रीम, आइवरी, गोल्डन, पेस्टल और बेज जैसे शेड्स खासतौर पर वेडिंग फंक्शन में अच्छे लगते हैं. शेरवानी के साथ मैचिंग या कॉन्ट्रास्ट मोजड़ी पहनें. एक अच्छी घड़ी और हल्की ज्वेलरी आपके लुक को पूरा कर सकती है.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>जन्माष्टमी पर क्या पहनें? ये हैं 7 ट्रेंडिंग लुक्स</title>
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        <description><![CDATA[ जन्माष्टमी के खास अवसर पर हर कोई अपने लुक को खास बनाना चाहता है. पूजा हो, घर में सेलिब्रेशन हो या कोई फंक्शन, इस दिन ट्रेडिशनल कपड़े बेहद अच्छे लगते हैं. अगर आप इस बार कुछ ऐसा पहनना चाहते हैं जो पारंपरिक भी हो और स्टाइलिश भी, तो बहुत सारे ऑप्शन मौजूद हैं. जरूरी नहीं कि जन्माष्टमी पर सिर्फ एक ही तरह के कपड़े पहने जाएं. लड़के, लड़कियां और बच्चे अपनी पसंद और कम्फर्ट के हिसाब से अलग-अलग आउटफिट चुन सकते हैं. आइए जानते हैं जन्माष्टमी पर पहनने के लिए 7 ट्रेंडिंग लुक्स.
कुर्ता-पायजामा और धोती लुक
छोटे बच्चों के लिए जन्माष्टमी बेहद खास होती है. इस दिन इन्हें बाल गोपाल के रूप में देखा जाता है और उनके जैसा तैयार भी किया जाता है. लड़कों और बच्चों के लिए जन्माष्टमी पर कुर्ता-पायजामा या धोती एक अच्छा ऑप्शन है. पीला, सफेद, नीला या क्रीम रंग चुन सकते हैं. इसके साथ जैकेट, माला या छोटी बांसुरी लगाकर लुक को और अच्छा बनाया जा सकता है.
साड़ी वाला ट्रेडिशनल लुक
महिलाओं और लड़कियों के लिए साड़ी का अच्छा आप्शन हो सकता है. अगर आपको साड़ी पहनना पसंद है तो जन्माष्टमी पर ट्रेडिशनल साड़ी पहन सकती हैं. पीली, हरी, लाल या नीली साड़ी इस मौके पर बेहद अच्छी लगेगी . इस साड़ी के साथ हल्की ज्वेलरी और बिंदी लगाकर लुक को पूरा करें. ज्यादा हैवी साड़ी की जगह हल्की साड़ी भी चुन सकती हैं.
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लहंगा-चोली
लड़कियों के लिए अगर थोड़ा ज्यादा फेस्टिव और स्टाइलिश लुक चाहिए तो लहंगा-चोली अच्छा रहेगा. इसके लिए पीला, हरा, गुलाबी या नीला रंग का लहंगा-चोली चुन सकते हैं. इसके साथ आप हल्की ज्वेलरी और मैचिंग दुपट्टा भी लें सकती हैं ये लुक को और खूबसूरत बनाएगा.
अनारकली या एथनिक सूट
जो महिलायें और लड़कियां साड़ी या लहंगा नहीं पहनना चाहते, उनके लिए जन्माष्टमी के दिन अनारकली या एथनिक सूट अच्छा ऑप्शन है. फ्लोरल प्रिंट या हल्की कढ़ाई वाला सूट जन्माष्टमी के लिए बेहद अच्छा लग सकता हैं. अपने लुक को निखारने के लिए आप इस लुक के साथ आप मैचिंग झुमके और जूतियां पहन सकती हैं.
इंडो-वेस्टर्न लुक
अगर आप जन्माष्टमी के अवसर पर ट्रेडिशनल कपड़ों से थोड़ा अलग दिखना चाहते हैं तो इंडो-वेस्टर्न आउटफिट ट्राई करें. लड़के कुर्ते के साथ जैकेट या धोती और पैंट पहन सकते हैं, जबकि लड़कियां क्रॉप टॉप के साथ लॉन्ग स्कर्ट या धोती पैंट भी पहन सकती हैं.
राधा-कृष्ण थीम वाले लुक
जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण थीम भी काफी खास लगती है. एक व्यक्ति राधा और दूसरा कृष्ण के लुक में तैयार हो सकता है. खासकर बच्चों को भी इसी थीम पर तैयार किया जा सकता है. पीले, नीले और हरे रंग के कपड़ों के साथ मोरपंख, बांसुरी और ट्रेडिशनल ज्वेलरी के इस्तेमाल से लुक को और खास बना सकती हैं.
कपल या बच्चों का ट्विनिंग लुक
जन्माष्टमी पर कपल या भाई-बहन के लिए ट्विनिंग लुक भी ट्राई कर सकते हैं. दोनों एक जैसे या मैचिंग रंग के ट्रेडिशनल कपड़े पहन सकते हैं. बच्चों के लिए पीली धोती और फ्रॉक या एथनिक ड्रेस का कॉम्बिनेशन भी अच्छा लगेगा. इससे त्योहार की तस्वीरें भी काफी प्यारी आएंगी.
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rashifal 2 September 2026: मेष राशि में चंद्रमा, इन 4 राशियों को धन और करियर में मिल सकती है अच्छी खबर</title>
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        <description><![CDATA[ Aaj Ka Rashifal 2 September 2026: आज 2 सितंबर 2026, बुधवार है. भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और भरणी नक्षत्र रहेगा. चंद्रमा पूरे दिन मेष राशि में संचार करेगा. सूर्य और बुध सिंह राशि में हैं, जबकि मंगल मिथुन राशि में गोचर कर रहा है. चंद्रमा और मंगल की यह स्थिति फैसलों में तेजी ला सकती है. हालांकि जल्दबाजी नुकसान भी करा सकती है.
आज मेष, मिथुन, सिंह और कुंभ राशि वालों को करियर या कारोबार में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है. कन्या और मकर राशि वालों को खर्च, सेहत और कार्यक्षेत्र में सावधानी रखनी होगी. आइए जानते हैं मेष से मीन राशि तक का आज का राशिफल.

आज का पंचांग

दिन: बुधवार
तिथि: भाद्रपद कृष्ण षष्ठी
नक्षत्र: भरणी
चंद्र राशि: मेष
सूर्य राशि: सिंह
राहुकाल: दोपहर में, स्थानीय सूर्योदय के अनुसार समय में अंतर संभव
अभिजीत मुहूर्त: बुधवार होने के कारण अभिजीत मुहूर्त मान्य नहीं
दिन का उपाय: गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें

मेष राशि
पारिवारिक जीवन: मेष राशि वालों के लिए आज का दिन नई खुशियां लेकर आएगा. आज आपकी किस्मत पूरी तरह से आपके साथ है. पारिवारिक माहौल आज अच्छा रहेगा. आपकी संतान की किसी बड़ी सफलता से पूरा परिवार गदगद हो जाएगा. रिश्तेदार और मित्र बधाई देने आपके घर पर आएंगे. आज घर पर एक छोटी पार्टी का आयोजन कर सकते हैं, जिससे सभी का बेहतरीन मनोरंजन होगा और घर में खुशहाली बनी रहेगी.
व्यापार और नौकरी: आज व्यापारियों की किस्मत चमकेगी. कोई जरूरी और लाभदायक यात्रा हो सकती है, जो आपके व्यापार के लिए अच्छे सौदे लेकर आएगी. नौकरीपेशा लोगों को भी काम के लिए सराहना मिलेगी.
करियर और शिक्षा: छात्रों के लिए आज का दिन उत्पादक रहेगा. आपका अनुशासन आपको जल्द सफलता दिलाएगा. पढ़ाई और अन्य कामों के बीच एक बेहतरीन बैलेंस बना रहेगा, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा.
स्वास्थ्य: आज आपका स्वास्थ्य उत्तम रहेगा. पारिवार की खुशी और घर पर होने वाले मनोरंजन से मानसिक तनाव पूरी तरह दूर होगा. बस स्वयं को शांत रखें और संतुलित आहार लें.
आर्थिक स्थिति: व्यापार में आज शानदार धनलाभ होने के योग बन रहे हैं. अटकी हुई रकम भी वापस आ सकती है. इससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आप भविष्य की योजनाओं पर खर्च कर सकते हैं.
प्रेम जीवन: घर पर होने वाली पार्टी का सकारात्मक असर आपके प्रेम जीवन पर भी दिखेगा. जीवनसाथी के साथ मधुर और रोमांटिक बातचीत होगी, जिससे आपसी प्रेम में नयी ताजगी आएगी. प्रेमी जोड़ों के लिए समय अनुकूल रहेगा.

लकी अंक-9
लकी रंग- लाल

उपाय- सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और साथ में लाल रंग के गेंदे के फूल भी चढ़ाएं, इससे कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी.
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वृष राशि
पारिवारिक जीवन: आज आपके दिन की शुरुआत अनुकूल होने वाली है, जिसका सीधा असर आपके पारिवारिक जीवन पर भी सकारात्मक रहेगा. घर का वातावरण शांत और प्रसन्न रहेगा. परिवारजनों का पूरा सहयोग आपको मिलेगा. किसी बड़े सदस्य का आशीर्वाद आपके लिए वरदान साबित होगा और घर पर कोई छोटा मंगलकार्य भी संपन्न हो सकता है.
व्यापार और नौकरी: वर्किंग प्लेस पर आज आप खूब मेहनत करेंगे. आपको कई नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिन्हें आप अपनी क्षमता से बहुत अच्छी तरह से निभाएंगे. अपनी उपलब्धियों पर आपको गर्व महसूस होगा. रियल एस्टेट बिजनेस के लोग आज कोई नया हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च कर सकते हैं, जिसमें शुरुआती सफलता मिलेगी.
करियर और शिक्षा: इस राशि के मनोरंजन उद्योग से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन बहुत फायदेमंद होगा. आपकी क्रिएटिव फील्ड आज बेहद मजबूत होगी, जिससे आपकी कला को सराहना मिलेगी. वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में पूरी तरह लगेगा. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को अच्छे परिणाम मिलने की प्रबल संभावना है.
स्वास्थ्य: आज आपका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा. पिछले कुछ समय से चल रही कोई छोटी-मोटी शारीरिक परेशानी या थकान दूर हो सकती है. आप ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे. बस अपनी दिनचर्या का ध्यान रखें.
आर्थिक स्थिति: आर्थिक रूप से आज का दिन लाभकारी रहेगा. आपकी मेहनत के कारण धन लाभ के योग बन रहे हैं. पुराने रुके हुए पैसे वापस आने की संभावना है. आप अपनी बचत में भी वृद्धि कर पाएंगे.
प्रेम जीवन: प्रेमी जोड़ों के लिए दिन रोमांटिक रहेगा. आप अपने पार्टनर को कोई खास तोहफा दे सकते हैं. विवाहित जीवन में पति-पत्नी के बीच प्यार और समझदारी बढ़ेगी.

लकी अंक: 7
लकी रंग: बैंगनी

उपाय: घर में सुख-समृद्धि और करियर में तरक्की के लिए आज सुबह किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को मिठाई का दान अवश्य करें.
मिथुन राशि
पारिवारिक जीवन: आज पारिवारिक जीवन में शांति और सकारात्मकता बनी रहेगी. परिवार के सदस्यों का सहयोग मिलने से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. घर में किसी शुभ समाचार के आने से खुशी का माहौल बन सकता है. समाज में आपके मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होने के संकेत हैं.&amp;nbsp;
व्यापार और नौकरी: व्यापार की दृष्टि से आज का दिन लाभदायक रहने वाला है. बिजनेस पार्टनर के साथ मिलकर किए गए कार्यों में सफलता मिलने और अच्छा आर्थिक लाभ होने की संभावना है. नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है. कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यक्षमता की सराहना होगी.
करियर और शिक्षा: छात्रों को आज अपने करियर को लेकर गंभीरता बनाए रखनी चाहिए. पढ़ाई में आपका फोकस अच्छा रहेगा, जिससे कठिन विषयों को समझने में आसानी होगी. जो विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है. नई स्किल सीखने वालों के लिए भी दिन अनुकूल रहेगा.
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य के मामले में आज आप काफी जागरूक रहेंगे. अपनी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव करने की प ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 07:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>White Socks Washing Tips: काले पड़ गए हैं सफेद मोजे? 1 आसान ट्रिक से चमकेंगे नए जैसे</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Ways To Whiten Stained White Socks: दुकान से नए खरीदे गए सफेद मोजे कुछ समय तक एकदम साफ और चमकदार दिखते हैं. लेकिन रोजाना पहनने के बाद खासकर तलवों का हिस्सा धीरे-धीरे काला या धूसर नजर आने लगता है. कई बार इन्हें वॉशिंग मशीन में धोने के बाद भी तलवों की गंदगी पूरी तरह साफ नहीं होती. इसकी वजह सिर्फ मोजों की सफाई नहीं, बल्कि फर्श और उन्हें धोने के तरीके से भी जुड़ी हो सकती है.
अगर आप चाहते हैं कि सफेद मोजे लंबे समय तक साफ दिखें, तो गंदगी को मोजों तक पहुंचने से रोकना और धुलाई से पहले सही तैयारी करना जरूरी है. कुछ आसान तरीकों से मोजों को फिर से साफ और सफेद बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
सफेद मोजों के तलवे जल्दी काले क्यों पड़ते हैं?
मोजों के तलवों पर गंदगी जमा होने की सबसे बड़ी वजह घर का फर्श हो सकता है. फर्श पर मौजूद धूल और मिट्टी चलते समय सीधे मोजों के संपर्क में आती है. अगर फर्श नियमित रूप से साफ नहीं होता, तो सफेद मोजों के तलवों पर गंदगी जल्दी जमने लगती है. घर में बाहर के जूते पहनकर चलने से भी फर्श पर मिट्टी और गंदगी आ सकती है. इसलिए फर्श की नियमित सफाई के साथ घर के अंदर बाहर वाले जूते न पहनने की आदत मोजों को साफ रखने में मदद कर सकती है.

मोजों को दूसरे कपड़ों से अलग धोएं
सफेद मोजों को गहरे रंग के कपड़ों के साथ धोने से बचें. काली टी-शर्ट, जींस या दूसरे गहरे रंग के कपड़ों से निकलने वाला रंग सफेद मोजों पर भी असर डाल सकता है. अगर ऐसा बार-बार होता रहे, तो सफेद मोजे धीरे-धीरे धूसर दिखने लगते हैं. इसलिए सफेद मोजों को सफेद कपड़ों के साथ ही धोना बेहतर है. इससे उन पर दूसरे कपड़ों का रंग चढ़ने की संभावना कम रहती है.
पहनने से पहले तलवों की गंदगी पर ध्यान दें
अगर मोजों के तलवों पर पहले से मिट्टी या गंदगी लगी है, तो उन्हें सीधे वॉशिंग मशीन में डालने के बजाय धुलाई से पहले उस हिस्से पर ध्यान दें. मोजों को सही तरफ करके धोना भी सफेदी बनाए रखने में मदद कर सकता है. आमतौर पर मोजों को अंदर की तरफ करके धोने से पसीना और पैरों से जुड़ी गंदगी साफ करने में मदद मिलती है, लेकिन अगर प्राथमिकता सफेद रंग बनाए रखना है, तो उन्हें सही तरफ करके धोना बेहतर हो सकता है.

ऑक्सीजन व्हाइटनर का इस्तेमाल करें
जब सफेद मोजों को गहरी सफाई की जरूरत हो, तो ऑक्सीजन व्हाइटनर एक विकल्प हो सकता है. यह ब्लीच का विकल्प है और मोजों से जमी गंदगी हटाने में मदद कर सकता है. मोजों को गर्म पानी और ऑक्सीजन व्हाइटनर वाले पानी में भिगोया जा सकता है. इसके बाद उन्हें धोया जा सकता है. वॉशिंग मशीन में भी उपलब्ध होने पर सोक सेटिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है.
मोजों को बहुत ज्यादा कपड़ों के साथ न भरें
वॉशिंग मशीन में अगर मोजों को बहुत ज्यादा कपड़ों के बीच ठूंसकर धोया जाता है, तो उन्हें घूमने और अच्छी तरह साफ होने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती. खासकर पैंट और दूसरे कपड़ों में मोजे उलझकर फंस सकते हैं, जिससे गंदगी और डिटर्जेंट ठीक से निकल नहीं पाते. सफेद मोजों को छोटे लोड में धोना बेहतर हो सकता है. इससे उन्हें पानी में अच्छी तरह घूमने और साफ होने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है.
गर्म या गुनगुने पानी में धोएं
बहुत ठंडे पानी वाला वॉश साइकल हल्के या नाजुक कपड़ों के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन ज्यादा गंदे मोजों के लिए गर्म या गुनगुना पानी अधिक प्रभावी हो सकता है. ज्यादा तापमान वाला पानी मोजों से बैक्टीरिया और दूसरी गंदगी हटाने में मदद कर सकता है. हालांकि, मोजों को धोने से पहले उनके केयर लेबल पर दिए निर्देश जरूर देखें और उसी के अनुसार पानी का तापमान चुनें.
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फर्श साफ रखना भी जरूरी है
सफेद मोजों को साफ रखने के लिए सिर्फ लॉन्ड्री रूटीन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. घर के फर्श की नियमित वैक्यूमिंग और सफाई भी जरूरी है. इससे धूल और मिट्टी की मात्रा कम होगी और मोजों के तलवों पर गंदगी जमा होने की संभावना भी घटेगी. घर में चप्पल पहनना भी मोजों को सीधे फर्श के संपर्क से बचाने का एक आसान तरीका है. मोजों के ऊपर चप्पल पहनने से तलवों पर धूल और गंदगी कम पहुंचती है. सफेद मोजों को बाहर पहनकर चलने से भी बचें. बाहर की मिट्टी और धूल उनके तलवों को जल्दी गंदा कर सकती है.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सब्जी में नहीं आती रंगत, इन तरीकों से बर्तन में तैरने लगेगा रोगन</title>
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        <description><![CDATA[ घर पर सब्जी बनाते समय अक्सर एक शिकायत रहती है कि ग्रेवी में तेल यानी रोगन ऊपर तैरता हुआ नजर नहीं आता. कई बार सब्जी स्वादिष्ट तो होती है, लेकिन देखने में काफा फीकी लगती है. खासकर जब घर पर मेहमान आने वाले हों, तब सब्जी में अच्छी रंगत और ऊपर तैरता हुआ तेल उसकी खूबसूरती बढ़ा देता है. अगर आपकी सब्जी में भी रोगन अलग से नजर नहीं आता, तो कुछ सामान्य गलतियों को नजरअंदाज कर के आप उसकी रंगत बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं कुकिंग के दौरान किन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
मसाले को सही तरह से भूनें
सब्जी में रंगत और रोगन लाने का सबसे अहम तरीका है मसालों को अच्छी तरह भूनना. प्याज, टमाटर, अदरक और लहसुन का पेस्ट डालने के बाद उसे जल्दबाजी में न पकाएं. मसाले को मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक भूनें, जब तक उसका कच्चापन खत्म न हो जाए. जब मसाले से तेल अलग होकर किनारों पर नजर आने लगे, तभी समझें कि मसाला अच्छी तरह भुन चुका है. इससे ग्रेवी का स्वाद भी बेहतर होता है.
टमाटर का इस्तेमाल बढ़ाएं
अगर आप चाहते हैं कि सब्जी में प्राकृतिक लाल रंग और अच्छी चमक आए, तो टमाटर का सही इस्तेमाल करें. पके हुए लाल टमाटर ग्रेवी को बेहतर रंग देते हैं. टमाटर की प्यूरी या बारीक पिसे टमाटर डालने के बाद उसे अच्छी तरह पकाएं. टमाटर डालते ही बहुत ज्यादा पानी न डालें. पहले टमाटर और मसालों को तेल में पकने दें. जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे और तेल अलग दिखाई देने लगे, तब जरूरत के अनुसार ह पानी डालें.
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तेल की मात्रा पर दें ध्यान
बहुत कम तेल में बनी सब्जी में ऊपर तेल की परत नजर आना मुश्किल होता है. इसका मतलब यह नहीं है कि स्वादिष्ट सब्जी बनाने के लिए बहुत ज्यादा तेल डालना जरूरी है. बल्कि तेल की उचित मात्रा और सही भुनाई ज्यादा महत्वपूर्ण है. शुरुआत में तेल डालकर मसालों को अच्छी तरह पकाएं. अगर ग्रेवी बहुत ज्यादा सूखी हो जाए तो थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर पकाएं. इससे मसाला तेल के साथ अच्छी तरह पकता है और अंत में रोगन अलग दिखाई देता है.
मसाले डालने का सही समय
हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और गरम मसाला जैसे मसालों को सीधे बहुत ज्यादा पानी में डालने से उनकी खुशबू और रंग उतना प्रभावी नहीं रहता. बेहतर परिणाम के लिए सूखे मसालों को प्याज-टमाटर के भुने हुए मिश्रण में डालकर थोड़ी देर पकाएं. उसके बाद जरूरत के अनुसार पानी डालें.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर पर कैसे बनाएं बाजार जैसा मटन रोगन जोश? जानें पूरी रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ मटन की कई डिशेज में रोगन जोश का स्वाद और खुशबू अलग ही पहचान रखते हैं. इसका गाढ़ा लाल रंग, मसालों की खुशबू और नरम मटन इसे खास बनाता है. हालांकि घर पर इसे बनाते समय अक्सर शिकायत होती है कि मटन बाजार या रेस्टोरेंट जैसा स्वादिष्ट और रंगदार नहीं बनता. इसकी वजह गलत मसालों का इस्तेमाल, मटन को ठीक से न भूनना या ग्रेवी को सही तरीके से पकाना हो सकती है. लेकन कुछ आसान टिप्स और सही प्रक्रिया अपनाकर आप घर पर भी स्वादिष्ट मटन रोगन जोश बना सकते हैं.
सबसे पहले मटन को भूनें
एक भारी तले की कड़ाही या प्रेशर कुकर में सरसों या अपनी पसंग का तेल गर्म करें. तेल अच्छी तरह गर्म होने के बाद आंच थोड़ी कम करें और इसमें तेजपत्ता, लौंग, इलायची और दालचीनी डालें. जब मसालों से खुशबू आने लगे, तब मटन डालकर अच्छी तरह भूनें. मटन को कुछ मिनट तक चलाते हुए पकाएं, ताकि उसका रंग बदल जाए और वह मसालों के साथ अच्छी तरह कोट हो जाए.
दही और मसालों का सही इस्तेमाल
एक कटोरी में दही को अच्छी तरह फेंट लें. अब आंच धीमी करके दही को थोड़ा-थोड़ा करके मटन में डालें और लगातार चलाते रहें. इससे दही फटेगा नहीं और ग्रेवी का टेक्सचर भी अच्छा रहेगा. इसके बाद कश्मीरी लाल मिर्च, सौंफ पाउडर और सोंठ पाउडर डालें. सभी मसालों को मटन के साथ अच्छी तरह भूनें. ध्यान रखें कि मसालों को बहुत तेज आंच पर न पकाएं, वरना वे जल सकते हैं और ग्रेवी का स्वाद कड़वा हो सकता है.
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धीमी आंच पर पकाएं
जब मसाले अच्छी तरह भुन जाएं और तेल किनारों पर दिखाई देने लगे, तब जरूरत के अनुसार गर्म पानी डालें. अब मटन को ढककर धीमी आंच पर पकाएं. अगर प्रेशर कुकर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो मटन को गलने तक पकाएं. मटन के नरम होने के बाद ढक्कन खोलकर ग्रेवी की कंसीस्टेंसी देखें. अगर ग्रेवी ज्यादा पतली है तो कुछ मिनट बिना ढके पकाएं. इससे अतिरिक्त पानी कम होगा और ऊपर तेल की हल्की परत भी नजर आने लगेगी.
मटन तैयार होने के बाद इसे कुछ मिनट ढककर रख दें. ऐसा करन से मसालों का स्वाद मटन में अच्छी तरह समा जाता है. इसे गरमा-गरम चावल, नान, रोटी या तंदूरी रोटी के साथ परोसकर इसका आनंद लें.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ganesh Chaturthi 2026: दिल्ली और मुंबई में एक समय पर नहीं बैठेंगे बप्पा, नोट करें सही मुहूर्त</title>
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        <description><![CDATA[ Ganesh Chaturthi 2026 Date Time: गणेश चतुर्थी की तारीख पूरे देश में एक है, लेकिन गणपति स्थापना का समय एक नहीं होगा. 14 सितंबर 2026 को दिल्ली में बप्पा की स्थापना सुबह 11:02 बजे से की जा सकेगी. मुंबई में शुभ मुहूर्त 18 मिनट बाद, सुबह 11:20 बजे शुरू होगा.
ऐसे में इंटरनेट पर दिख रहे किसी भी मुहूर्त को अपने शहर का समय मान लेना ठीक नहीं होगा. शहर बदलते ही सूर्योदय, सूर्यास्त और मध्याह्न काल बदल जाता है. इसी कारण गणपति स्थापना के समय में भी अंतर आता है. हिंदू पंचांग में दिल्ली और मुंबई के लिए अलग-अलग मुहूर्त दिए गए हैं.

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?
गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी. तिथि का समापन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा.
चतुर्थी 15 सितंबर की सुबह तक रहने के बावजूद गणपति स्थापना 14 सितंबर को ही की जाएगी. गणेश चतुर्थी तय करने में केवल सूर्योदय की तिथि नहीं देखी जाती. इसके लिए मध्याह्न व्यापिनी चतुर्थी को महत्व दिया जाता है.
मान्यता है कि भगवान गणेश का प्राकट्य मध्याह्न काल में हुआ था. 14 सितंबर को मध्याह्न के समय चतुर्थी तिथि रहेगी. इसलिए गणेश चतुर्थी का व्रत, गणपति स्थापना और मुख्य पूजा इसी दिन होगी.

गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026, सोमवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे

यह भी पढ़ें- Bhadrapada Month 2026: 29 अगस्त से शुरू हो रहा है भादो का महीना, जानिए जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी सहित प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट
दिल्ली में गणपति स्थापना का मुहूर्त
दिल्ली में गणपति स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. श्रद्धालुओं को लगभग 2 घंटे 28 मिनट का समय मिलेगा.
घर में गणपति स्थापना करनी है तो चौकी सजाने, पूजा सामग्री रखने और मंडप तैयार करने का काम पहले पूरा कर लें. शुभ मुहूर्त शुरू होने पर बप्पा की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद संकल्प, प्राण प्रतिष्ठा और विधिवत पूजन किया जा सकता है.
दिल्ली का स्थापना और पूजा मुहूर्त: सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक.
मुंबई में कब विराजेंगे गणपति?
मुंबई में गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त दिल्ली से 18 मिनट बाद शुरू होगा. यहां 14 सितंबर को सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक बप्पा की स्थापना और पूजा की जा सकेगी.
मुंबई में सार्वजनिक गणेश मंडलों के साथ बड़ी संख्या में लोग घरों में भी प्रतिमा स्थापित करते हैं. मंडप में प्रतिमा पहले लाई जा सकती है, लेकिन विधिवत स्थापना और मुख्य पूजा स्थानीय मध्याह्न मुहूर्त में करना श्रेष्ठ माना गया है.
मुंबई का स्थापना और पूजा मुहूर्त: सुबह 11:20 से दोपहर 1:48 बजे तक.
दिल्ली और मुंबई के मुहूर्त में अंतर क्यों?
दिल्ली और मुंबई दोनों भारतीय मानक समय यानी IST का पालन करते हैं. इसके बाद भी दोनों शहरों में सूर्य उगने और अस्त होने का समय एक नहीं होता. वैदिक पंचांग में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को अलग-अलग भागों में बांटा जाता है. इन्हीं में एक भाग मध्याह्न कहलाता है.
गणेश पूजा के लिए मध्याह्न काल को सबसे शुभ माना गया है. इस काल की शुरुआत और समाप्ति स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के आधार पर निकाली जाती है. इसलिए दिल्ली का मध्याह्न मुंबई पर और मुंबई का मध्याह्न दिल्ली पर लागू नहीं किया जाना चाहिए.
यही वजह है कि किसी वेबसाइट पर दिख रहा सामान्य भारतीय मुहूर्त हर शहर के लिए सटीक नहीं हो सकता. गणपति स्थापना से पहले स्थान के अनुसार समय जांचना जरूरी है.
स्थापना और पूजा अलग-अलग समय पर करें?
गणपति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए दो अलग मुहूर्त खोजने की जरूरत नहीं है. मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त के दौरान प्रतिमा स्थापना, प्राण प्रतिष्ठा और मुख्य पूजन किया जा सकता है.
सबसे पहले साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखें. जल से भरा कलश स्थापित करें. इसके बाद गणपति का ध्यान कर पूजा का संकल्प लें. बप्पा को सिंदूर, अक्षत, फूल, दूर्वा, फल और मोदक अर्पित करें. अंत में आरती करें और परिवार के लोगों में प्रसाद बांटें.
घर में स्थापना के लिए मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमा चुनना बेहतर रहेगा. इससे घर पर विसर्जन करना आसान होगा और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा.
चंद्र दर्शन को लेकर रखें सावधानी
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से बचने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन चंद्र दर्शन से व्यक्ति पर झूठा आरोप या मिथ्या कलंक लग सकता है.
दिल्ली में 14 सितंबर को सुबह 9:06 से रात 8:04 बजे तक चंद्र दर्शन से बचने का समय रहेगा. मुंबई में सुबह 9:10 से रात 8:37 बजे तक चंद्रमा न देखने की सलाह दी गई है.
अनजाने में चंद्र दर्शन हो जाए तो भगवान गणेश का ध्यान करें और स्यमंतक मणि की कथा का पाठ या श्रवण करें.
गणेश विसर्जन 2026 कब है?
दस दिवसीय गणेशोत्सव का मुख्य विसर्जन शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी पर किया जाएगा. अनंत चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11:18 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर को रात 11:06 बजे समाप्त होगी.
पारिवारिक परंपरा के अनुसार भक्त इससे पहले भी विसर्जन कर सकते हैं.

डेढ़ दिन का विसर्जन: 15 सितंबर
तीसरे दिन का विसर्जन: 16 सितंबर
पांचवें दिन का विसर्जन: 18 सितंबर
सातवें दिन का विसर्जन: 20 सितंबर
अनंत चतुर्दशी का मुख्य विसर्जन: 25 सितंबर 2026

इस गणेश चतुर्थी केवल तारीख नोट करना काफी नहीं है. दिल्ली और मुंबई में गणपति स्थापना के मुहूर्त में 18 मिनट का अंतर है. इसलिए बप्पा को घर लाने से पहले अपने शहर का सही समय जरूर देख लें.
FAQ
गणेश चतुर्थी 2026 कब है?गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी.
चतुर्थी तिथि कब शुरू होगी?भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 14 सि ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Dry Fruits Storage: काजू&amp;बादाम पड़ जाते हैं नरम? 1 आसान ट्रिक से रहेंगे हमेशा क्रंची</title>
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        <description><![CDATA[ How To Store Dry Fruits Fresh And Crunchy: सूखे मेवे घर में रखने के लिए काफी आसान माने जाते हैं. पैकेट खोला, जरूरत के हिसाब से बादाम-काजू निकाले और बाकी सामान वापस अलमारी में रख दिया. लेकिन यही छोटी-सी आदत धीरे-धीरे सूखे मेवों की क्रंची बनावट खराब कर सकती है. कुछ दिनों बाद बादाम पहले जैसे कुरकुरे नहीं लगते, काजू की क्रिस्पनेस कम हो जाती है और किशमिश चिपचिपी महसूस होने लगती है.
अक्सर इसके पीछे सबसे बड़ी वजह नमी होती है. पैकेट खुलने के बाद सूखे मेवे आसपास की हवा में मौजूद नमी सोखने लगते हैं. खासकर उमस वाले मौसम में यह प्रक्रिया और तेज हो सकती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान स्टोरेज टिप्स अपनाकर आप सूखे मेवों को लंबे समय तक स्वादिष्ट और कुरकुरा बनाए रख सकते हैं.
सूखे मेवे नरम क्यों पड़ जाते हैं?
सूखे मेवों को लंबे समय तक अच्छा बनाए रखने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी क्रंची बनावट क्यों खराब होती है. नमी सूखे मेवों की सबसे बड़ी दुश्मनों में से एक है. जब बादाम, काजू या दूसरे ड्राई फ्रूट्स बार-बार नम हवा के संपर्क में आते हैं, तो वे धीरे-धीरे नमी सोख लेते हैं. इससे उनकी बनावट सख्त और कुरकुरी रहने के बजाय नरम पड़ने लगती है. इसलिए इन्हें सिंक, गैस चूल्हे, भाप निकलने वाली जगह या ऐसी अलमारी में रखने से बचें जहां नमी रहती हो. सूखे मेवे निकालते समय हाथ और चम्मच भी पूरी तरह सूखे होने चाहिए.

एयरटाइट कंटेनर में रखें
सूखे मेवों को कुरकुरा बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है कि खुले पैकेट को लंबे समय तक वैसे ही न छोड़ें. पैकेट खोलने के बाद इन्हें साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कंटेनर में डाल दें. कंटेनर का ढक्कन अच्छी तरह बंद होना चाहिए, ताकि बाहर की नम हवा अंदर न पहुंच सके. कांच के जार भी इसके लिए अच्छा विकल्प हैं. इनमें अंदर नमी या पानी की बूंदें जमा होने पर आसानी से नजर आ जाती हैं. अगर कंटेनर के अंदर कंडेनसेशन दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज न करें. सूखे मेवे निकालकर कंटेनर को अच्छी तरह सुखाएं और फिर स्टोरेज करें.
चूल्हे और धूप से दूर रखें
किचन में गर्मी भी सूखे मेवों की क्वालिटी पर असर डाल सकती है. इसलिए इनके कंटेनर को गैस चूल्हे, ओवन या ऐसी जगह के पास न रखें जहां लगातार गर्मी मिलती हो. सीधी धूप से भी बचाएं. रोजाना इस्तेमाल होने वाले सूखे मेवों के लिए ठंडी और सूखी अलमारी बेहतर रहती है. ज्यादा गर्म जगह पर रखने से इनकी स्टोरेज लाइफ कम हो सकती है और खासकर नट्स के स्वाद पर भी असर पड़ सकता है.

ज्यादा समय के लिए फ्रिज में रखें
अगर आपके किचन में गर्मी या उमस ज्यादा रहती है, तो सूखे मेवों को फ्रिज में रखना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि इन्हें खुले में रखने के बजाय अच्छी तरह सील किए हुए कंटेनर में रखना जरूरी है. इससे फ्रिज की दूसरी चीजों की गंध भी सूखे मेवों में आसानी से नहीं जाएगी. बादाम, काजू और दूसरे ऐसे नट्स जिनमें प्राकृतिक तेल ज्यादा होता है, उन्हें लंबे समय तक गर्म वातावरण में रखने से स्वाद और क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. ऐसे में सही तरीके से पैक करके रेफ्रिजरेट करना मददगार हो सकता है.
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बड़ी मात्रा को छोटे हिस्सों में बांटें
अगर आप एक साथ काफी मात्रा में सूखे मेवे खरीदते हैं, तो पूरी मात्रा को एक ही कंटेनर में रखने के बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दें. एक छोटा कंटेनर रोजाना इस्तेमाल के लिए रखें और बाकी हिस्सों को अच्छी तरह बंद करके रखें. इससे हर दिन पूरी मात्रा को हवा और नमी के संपर्क में आने से बचाया जा सकता है. जितनी कम बार मुख्य स्टॉक का कंटेनर खोला जाएगा, उतना ही उसकी क्वालिटी बनाए रखना आसान होगा.
इन गलतियों से बचना भी जरूरी
सूखे मेवों का पैकेट खोलकर सिर्फ उसका मुंह मोड़ देना लंबे समय के स्टोरेज के लिए पर्याप्त नहीं है. अगर इन्हें कुछ दिनों से ज्यादा रखना है, तो एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें. इन्हें किचन सिंक के पास भी न रखें. बर्तन धोने के दौरान पानी के छींटे और भाप आसपास की नमी बढ़ा सकते हैं. इसी तरह गीले हाथ या चम्मच से सूखे मेवे निकालने की गलती न करें. थोड़ी-सी नमी भी पूरे कंटेनर की बनावट को प्रभावित कर सकती है. एक और जरूरी बात है कि पुराने और नए सूखे मेवों को एक साथ न मिलाएं. पहले पुराना स्टॉक खत्म करें, फिर कंटेनर को धोकर पूरी तरह सुखाएं और उसके बाद नया बैच भरें. इससे पुराना सामान लंबे समय तक पड़ा रहने से भी बचेगा और आपको स्टोरेज की स्थिति पर नजर रखने में आसानी होगी.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 19:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>रेस्टोरेंट में क्या ऑर्डर करें? Menu देख होने वाला कन्फ्यूजन दूर करेंगे ये टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ रेस्टोरेंट में बैठते ही मेन्यू कार्ड हाथ में आते ही अक्सर लोगों का कन्फ्यूजन शुरू हो जाता है, क्योंकि इतने सारे ऑप्शन देखकर भूख तो बढ़ जाती है, लेकिन क्या ऑर्डर करना है यह तय करना मुश्किल हो जाता है. यही जल्दबाजी अक्सर जरूरत से ज्यादा ऑर्डर करने और बिल बढ़ने की वजह बन जाती है. आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स, जिनकी मदद से मेन्यू देखते ही सही डिश चुनना आसान हो जाएगा.
पहले भूख का सही अंदाजा लगाएं
मेन्यू देखने से पहले खुद से यह पूछना जरूरी है कि असल में कितनी भूख है. अक्सर मेन्यू में लिखी डिशेज के नाम और उनकी तस्वीरें देखकर भूख असल जरूरत से कहीं ज्यादा महसूस होने लगती है, जिससे लोग जरूरत से ज्यादा खाना ऑर्डर कर बैठते हैं. सही मात्रा में ऑर्डर करने से न सिर्फ खाना बर्बाद होने से बचता है, बल्कि बिल भी बजट में रहता है.
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मेन्यू के झांसे में न आएं
कई रेस्टोरेंट अपने मेन्यू में कुछ खास डिशेज को बड़े और दिलचस्तप रीके से हाईलाइट करते हैं, ताकि ग्राहकों का ध्यान उन्हीं की तरफ खिंचे. बेहतर यही है है कि सिर्फ दिखावे में न बहकर, अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से सीधे काम की चीज चुनें.
वेटर को समझदारी से सुनें
वेटर अक्सर कोई खास डिश सजेस्ट करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वही हमेशा सबसे अच्छा ऑप्शन हो. कई बार यह सिफारिश रेस्टोरेंट के मुनाफे को ध्यान में रखकर भी की जाती है. इसलिए वेटर का सुझाव सुनना ठीक है, लेकिन आखिरी फैसला अपनी पसंद और बजट के हिसाब से ही लें.
ट्रेंड में बहकर ऑर्डर न करें
रेस्टोरेंट का माहौल जैसे धीमा म्यूजिक, हल्की लाइटिंग और अच्छी खुशबू, ग्राहकों को आराम से बैठने और बार बार कुछ न कुछ ऑर्डर करने कि कोशिश करता है. जितनी देर बैठा जाए उतना ज्यादा खर्च होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए ट्रेंड में बहकर एक्स्ट्रा ऑर्डर करने से बचें.
&amp;nbsp;हल्की चीजें से करें शुरुआत
अगर मेन्यू बहुत बड़ा और कन्फ्यूजिंग लगे, तो शुरुआत में कोई हल्की स्टार्टर डिश ऑर्डर करना बेहतर रहता है. इससे रेस्टोरेंट के खाने का स्वाद और क्वालिटी का अंदाजा भी लग जाता है, और बाद में मेन कोर्स तय करना आसान हो जाता है.
यहां समझदारी से काम लें
कई रेस्टोरेंट कॉम्बो ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को ज्यादा खाना ऑर्डर करने कि कोशिश करते हैं. ऐसे ऑफर्स में बचत जरूर दिखती है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि वाकई उतना खाना चाहिए भी या नहीं. जरूरत से ज्यादा कॉम्बो लेने की बजाय अपनी असल भूख के हिसाब से ऑर्डर करना समझदारी भरा फैसला होता है.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>फटे दूध से सिर्फ पनीर नहीं बनता, घर पर ट्राई करें ये आसान रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ घर में दूध का फट जाना कोई नई बात नहीं है. यह हर भारतीस किचन में होने वाली एक आम समस्या है. कई बार दूध गर्म करने पर फट जाता है, तो कभी ज्यादा देर तक रखने की वजह से उसका स्वाद बदल जाता है. ऐसे में ज्यादातर लोग उससे पनीर बना लेते हैं. लेकिन अगर आप कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं, तो फटे दूध से कई स्वादिष्ट डिश तैयार की जा सकती हैं. लेकिन फटे दूध को इस्तेमाल करने से पहले यह जरूर देख लें कि उसमें सड़ी हुई गंध, फफूंदी या कोई असामान्य रंग न हो. अगर दूध खराब नहीं हुआ है और सिर्फ फटा है, तो आप इन आसान रेसिपी को ट्राई कर सकते हैं.
फटे दूध के कटलेट
फटे दूध से आप स्वादिष्ट और क्रिस्पी कटलेट बना सकते हैं. इसके लिए फटे दूध को मलमल के कपड़े में छानकर अतिरिक्त पानी निकाल लें. अब इसमें दो उबले और मैश किए हुए आलू, बारीक कटी हरी मिर्च, धनिया, थोड़ा अदरक, नमक, लाल मिर्च और गरम मसाला डालें. मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर इसमें 2-3 चम्मच ब्रेड क्रम्ब्स या सूजी डालें. अब हाथों से छोटे-छोटे कटलेट बनाएं. तवे पर थोड़ा तेल गर्म करके कटलेट को दोनों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी होने तक सेंक लें. इन्हें हरी चटनी या टोमैटो सॉस के साथ सर्व कर के आप इनका आनंद ले सकते हैं.
फटे दूध की मीठी टिक्की
अगर आपका मन कुछ मीठा खाने का है, तो फटे दूध से आप मीठी टिक्की भी बना सकते हैं. सबसे पहले फटे दूध को छानकर उसका पानी अच्छी तरह निकाल लें. अब इसमें थोड़ा बारीक सूजी, चीनी या पिसी हुई शक्कर, इलायची पाउडर और थोड़े कटे हुए ड्राई फ्रूट्स मिलाएं. मिश्रण को कुछ मिनट के लिए रख दें ताकि सूजी नमी सोख ले. इसके बाद इसकी छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर हल्के घी या तेल में धीमी आंच पर सेंकें. टिक्कियां दोनों तरफ से हल्की सुनहरी हो जाएं तो इन्हें निकाल लें. आप इन्हें गरमा-गरम या ठंडा करके भी सर्व कर सकते हैं.
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फटे दूध से मिठाई
फटे दूध से एक आसान देसी मिठाई भी तैयार की जा सकती है. इसके लिए छाने हुए दूध के ठोस हिस्से को एक कड़ाही में डालें और धीमी आंच पर चलाते हुए पकाएं. इसमें स्वादानुसार चीनी और इलायची पाउडर डालें. जब मिश्रण थोड़ा गाढ़ा होने लगे, तब इसमें कटे हुए काजू, बादाम या पिस्ता डालें. लगातार चलाते रहें, जब तक मिश्रण कड़ाही छोड़ने न लगे. अब इसे एक प्लेट में फैलाकर ठंडा करें और मनचाहे आकार में काट लें. चाहें तो आप इसे ऊपर से थोड़े ड्राई फ्रूट्स डालकर भी सजा सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>नारियल तेल में क्या मिलाने से टूटना बंद हो जाते हैं बाल? जान लें जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ नारियल तेल में क्या मिलाने से टूटना बंद हो जाते हैं बाल? जान लें जवाब ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Oil Stain On Clothes: कपड़ों पर लग गया तेल का दाग, पाउडर डालें या पानी से करें साफ?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/oil-stain-on-clothes-कपड़ों-पर-लग-गया-तेल-का-दाग-पाउडर-डालें-या-पानी-से-करें-साफ</link>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Oil Stains From Clothes: कपड़ों पर तेल का दाग लगना कोई नई बात नहीं है. खाना बनाते समय सब्जी या तड़के का तेल कपड़ों पर गिर जाए, घी की छींट पड़ जाए या फिर कोई चिकना पदार्थ कपड़े पर लग जाए, तो उसे सामान्य तरीके से धोना हमेशा आसान नहीं होता. खासकर तब, जब दाग को तुरंत साफ करने के बजाय कपड़ा कुछ समय के लिए पड़ा रह जाए.
तेल के दाग के साथ सबसे बड़ी परेशानी यह है कि तेल और पानी आपस में आसानी से नहीं मिलते. इसलिए अगर तेल लगा कपड़ा सीधे नल के नीचे रखकर पानी से धोने की कोशिश की जाए, तो पानी तेल को आसानी से हटा नहीं पाता. उल्टा दाग थोड़ा फैल भी सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि तेल का दाग लगने के बाद पहले पानी डालना चाहिए या पाउडर? सही तरीका है कि पानी से पहले तेल को सोखने की कोशिश करें.
पानी से पहले पाउडर का इस्तेमाल क्यों?
तेल का दाग लगते ही सबसे पहले उस पर कॉर्नस्टार्च या बेकिंग सोडा डालना मददगार हो सकता है. ये पाउडर कपड़े की सतह पर मौजूद तेल को सोखने में मदद करते हैं. दाग वाले हिस्से को अच्छी तरह पाउडर से ढक दें और कम से कम 15 मिनट के लिए छोड़ दें.
अगर दाग ज्यादा है या कपड़ा मोटा है, तो इसे करीब 30 मिनट तक रखा जा सकता है. इसके बाद पाउडर को रगड़कर हटाने के बजाय हल्के हाथ से झाड़ दें. मुलायम ब्रश या चम्मच के पिछले हिस्से से भी इसे धीरे-धीरे हटाया जा सकता है. अगर पाउडर का रंग बदल गया है या वह जगह-जगह चिपक गया है, तो इसका मतलब है कि उसने तेल सोखा है. दाग लगने के तुरंत बाद यह कदम उठाना ज्यादा असरदार रहता है. तेल जितनी देर कपड़े में रहेगा, उसे निकालना उतना ही मुश्किल हो सकता है.

तेल का दाग साफ करने का आसान तरीका
सबसे पहले साफ सफेद कपड़े या पेपर टॉवल से दाग वाली जगह को हल्के हाथ से दबाएं, ताकि ऊपर मौजूद अतिरिक्त तेल निकल सके. कपड़े को इधर-उधर रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे तेल कपड़े के रेशों में और फैल सकता है. इसके बाद दाग पर कॉर्नस्टार्च या बेकिंग सोडा डालकर 15 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें. पाउडर हटाने के बाद दाग वाली जगह पर थोड़ी मात्रा में डिश सोप लगाएं. इस समय साबुन को पानी में मिलाकर पतला करने की जरूरत नहीं है.
अब उंगली या मुलायम टूथब्रश की मदद से डिश सोप को कपड़े में हल्के हाथ से लगाएं. छोटे गोलाकार मूवमेंट में करीब 60 से 90 सेकंड तक इसे काम करने दें. डिश सोप में मौजूद सफाई करने वाले तत्व तेल से जुड़ने में मदद करते हैं, जिससे बाद में उसे पानी के साथ हटाना आसान हो जाता है. इसके बाद कपड़े के दाग वाले हिस्से को ठंडे पानी से धोएं. दाग को रोशनी में देखकर जांच लें. अगर निशान अभी भी दिखाई दे रहा है, तो डिश सोप दोबारा लगाकर यही प्रक्रिया दोहराई जा सकती है.

इसके बाद कपड़ा कैसे धोएं?
जब दाग काफी हद तक निकल जाए, तो कपड़े को ठंडे पानी में एंजाइम वाले लॉन्ड्री डिटर्जेंट से धोया जा सकता है. मशीन में धोने के बाद कपड़े को तुरंत ड्रायर में डालने की गलती न करें. पहले दाग वाली जगह अच्छी तरह जांचें. अगर तेल का हल्का निशान भी बचा है, तो कपड़े को सुखाने से पहले दोबारा उसी हिस्से का इलाज करें. ड्रायर की गर्मी बचे हुए तेल के दाग को कपड़े के रेशों में स्थायी रूप से जमा कर सकती है.
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गर्म पानी से क्यों बचना चाहिए?
तेल के दाग पर गर्म पानी का इस्तेमाल न करना बेहतर है. गर्मी तेल को कपड़े के रेशों से और मजबूती से जोड़ सकती है. इसी तरह तेल के दाग वाले कपड़े को तब तक ड्रायर में नहीं डालना चाहिए, जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित न हो जाए कि दाग निकल चुका है.
हर कपड़े पर एक जैसा तरीका न अपनाएं
कॉटन और पॉलिएस्टर जैसे कपड़ों पर कॉर्नस्टार्च और डिश सोप वाला तरीका इस्तेमाल किया जा सकता है. डेनिम भी इस तरह की सफाई को अपेक्षाकृत आसानी से सह सकता है. वहीं सिल्क, जॉर्जेट और कैश्मीयर जैसे नाजुक कपड़ों पर घर में प्रयोग करने से बचना चाहिए. ऐसे कपड़ों पर पानी या डिश सोप गलत तरीके से इस्तेमाल करने से कपड़े की बनावट या फिनिश खराब हो सकती है. अगर कपड़े पर &amp;lsquo;ड्राई क्लीन ओनली&amp;rsquo; लिखा है, तो प्रोफेशनल सफाई बेहतर विकल्प है. तेल के दाग को हटाने में सबसे जरूरी बात यही है कि दाग लगते ही पानी डालकर रगड़ना शुरू न करें. पहले अतिरिक्त तेल सोखें, फिर पाउडर से उसे खींचने की कोशिश करें और उसके बाद डिश सोप व ठंडे पानी से सफाई करें. दाग सूखने या गर्मी के संपर्क में आने से पहले कार्रवाई करने पर उसे हटाना काफी आसान हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Soap Bar Storage: सिंक के पास रखा साबुन जल्दी गल जाता है? 1 ट्रिक से चलेगा महीनों</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Hacks To Make Soap Bars Last Longer: क्या आपके घर में भी सिंक के पास रखी साबुन की टिकिया कुछ ही दिनों में नरम होकर चिपचिपी होने लगती है? हाथ धोने के बाद साबुन को उसी गीली साबुनदानी में रख देना आसान लगता है, लेकिन बार-बार पानी के संपर्क में आने से साबुन धीरे-धीरे घुलने लगता है. कुछ समय बाद साबुनदानी में पानी और साबुन की परत जमा हो जाती है और साबुन का काफी हिस्सा बेकार चला जाता है.
अक्सर लोग इसके लिए साबुन की क्वालिटी को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि कई बार समस्या साबुन रखने की जगह और तरीके में होती है. सिंक के आसपास पानी के छींटे, लगातार नमी और ठीक से हवा न लगने के कारण साबुन सूख नहीं पाता. अच्छी बात यह है कि कुछ छोटी आदतें बदलकर साबुन को लंबे समय तक सही हालत में रखा जा सकता है.
साबुन जल्दी क्यों गलने लगता है?
साबुन के जल्दी नरम पड़ने की सबसे बड़ी वजह उसका लगातार पानी के संपर्क में रहना है. अगर साबुन ऐसी साबुनदानी में रखा है जिसमें पानी जमा होता रहता है, तो उसका निचला हिस्सा हर समय गीला रहता है. इससे साबुन धीरे-धीरे घुलकर नरम और चिपचिपा हो जाता है. सिंक के पास रखे साबुन पर नल चलाते समय पानी के छींटे भी पड़ते रहते हैं. अगर हर बार इस्तेमाल के बाद साबुन को सूखने का मौका नहीं मिलता, तो उसकी टिकिया तेजी से छोटी होने लगती है. इसके अलावा, बाथरूम या किचन में ज्यादा नमी होने पर हवा में मौजूद नमी भी साबुन को नरम कर सकती है. बारिश के मौसम में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है.

पानी जमा होने वाली साबुनदानी से बचें
साबुन को लंबे समय तक ठीक रखने के लिए सबसे जरूरी है कि उसके नीचे पानी जमा न हो. ऐसी साबुनदानी इस्तेमाल करें जिसमें पानी निकलने के लिए छोटे छेद या ड्रेनेज की व्यवस्था हो. अगर साबुनदानी में पानी जमा हो गया है, तो उसे खाली करके साबुन को सूखी जगह पर रख दें. साबुन के नीचे लगातार पानी रहने से वह सूखने के बजाय घुलता रहेगा. साबुनदानी को भी समय-समय पर साफ करते रहें. उसमें जमा साबुन की चिपचिपी परत पानी के निकलने के रास्ते को बंद कर सकती है.
सिंक के बिल्कुल पास साबुन न रखें
अगर संभव हो, तो साबुन को नल की सीधी पहुंच से थोड़ा दूर रखें. हाथ धोते समय पानी के छींटे सीधे साबुन पर पड़ने से उसकी सतह जल्दी नरम हो सकती है. ऐसी जगह चुनें जहां साबुन इस्तेमाल के बाद आसानी से सूख सके. सिर्फ कुछ इंच की दूरी भी फर्क डाल सकती है, खासकर अगर सिंक छोटा है और नल से पानी के छींटे ज्यादा आते हैं.
इस्तेमाल के बाद साबुन को सूखने दें
साबुन इस्तेमाल करने के बाद उसे तुरंत पानी वाली जगह पर रखने के बजाय कुछ देर सूखने देना बेहतर है. टिकिया पर अगर बहुत ज्यादा पानी लगा है, तो उसे हल्के हाथ से झटक दें और फिर ऐसी साबुनदानी में रखें जहां हवा आसानी से पहुंच सके. साबुन को लगातार गीला रखने के बजाय उसे सूखने का समय देने से वह ज्यादा समय तक मजबूत बना रहता है.

एक साथ कई साबुन इस्तेमाल करना भी मददगार
अगर घर में एक से ज्यादा साबुन की टिकिया इस्तेमाल होती हैं, तो उन्हें बारी-बारी से इस्तेमाल किया जा सकता है. एक साबुन को लगातार गीला रखने के बजाय दूसरे साबुन का इस्तेमाल करने से पहली टिकिया को सूखने का पर्याप्त समय मिल जाता है. हालांकि, इस्तेमाल न किए जाने वाले साबुन को सिंक या बाथरूम के पास खुले में रखने के बजाय किसी सूखी और ठंडी जगह पर रखना बेहतर है. इससे वह अनावश्यक नमी के संपर्क में आने से बचा रहेगा.
साबुन को गर्मी और धूप से दूर रखें
पानी के अलावा गर्मी भी साबुन को नरम कर सकती है. इसलिए इसे ऐसी जगह न रखें जहां सीधी धूप आती हो या लगातार गर्मी रहती हो. सिंक के पास खिड़की हो और वहां धूप आती हो, तो साबुन रखने के लिए कोई दूसरी जगह चुनना बेहतर रहेगा. अगर आपके पास साबुन की अतिरिक्त टिकिया हैं, तो उन्हें सूखी अलमारी या किसी ठंडी जगह पर पैक करके रखें. इससे इस्तेमाल से पहले ही साबुन के नरम पड़ने की समस्या कम होगी.
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साबुन की टिकिया जल्दी खत्म होने से ऐसे बचाएं
अगर साबुन इस्तेमाल के कुछ ही दिनों में गलकर खत्म हो रहा है, तो हर बार नया साबुन खरीदने से पहले उसकी स्टोरेज की जगह पर ध्यान दें. साबुन को गीली सतह पर न रखें, साबुनदानी में पानी जमा न होने दें और इस्तेमाल के बाद उसे सूखने का मौका दें. सिंक के पास साबुन रखना सुविधाजनक जरूर है, लेकिन उसे नल के छींटों और जमा पानी से बचाना उतना ही जरूरी है. एक अच्छी ड्रेनिंग वाली साबुनदानी और सूखी जगह साबुन की उम्र बढ़ाने में काफी मदद कर सकती है.
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        <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>छूकर भी नहीं निकलेगी कैंसर जैसी बीमारी, अपनी जिंदगी में लाएं ये बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ कैंसर का नाम सुनते ही मन में डर लगताहै, क्योंकि यह बीमारी आज भी दुनिया की सबसे जानलेवा बीमारियों में गिनी जाती है. लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक अच्छी खबर यह है कि सिर्फ जेनेटिक्स ही इसकी वजह नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा की आदतें और जीवनशैली भी कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम या बढ़ा सकती हैं. आइए जानते हैं वे कौन सी आदतें हैं, जिन्हें अपनाकर कैंसर के खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है?
तंबाकू और धूम्रपान से बनाएं दूरी
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन फेफड़ों, मुंह, गले, पैनक्रियाज और किडनी समेत कई तरह के कैंसर की सबसे बड़ी वजह माना जाता है. सिर्फ खुद धूम्रपान करना ही नहीं, बल्कि किसी और के धुएं से इफेक्ट होना भी है जिसे सेकेंडहैंड भी उतना ही खतरनाक होता है. अगर तंबाकू छोड़ना मुश्किल लग रहा हो, तो डॉक्टरी मदद जरूर लेंं
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स्वस्थ और मुनासिब खानपान&amp;nbsp;
खाने में फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसे खानपान को प्रायोरिटी दें. हरी सब्जियां, मौसमी फल, ग्रीन टी, हल्दी और फाइबर से भरपूर खाना कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार है. वहीं प्रोसेस्ड फूड, रेड मीट, तलीभुनी चीजें और ज्यादा चीनी वाले खाने से जितना हो सके, बचना चाहिए.
नियमित एक्सरसाइज है जरूरी
शरीर को एक्टिव रखना सिर्फ फिटनेस के लिए नहीं, बल्कि कैंसर से बचाव के लिए भी जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज, योगा और मन की शांति तनाव को कम करते हैं, इम्यूनिटी को बेहतर बनाते हैं और शरीर को एक्टीव रखते हैं, जिससे कैंसर का खतरा कम होता है.
शराब से भी बनाएं दूरी
शराब का सेवन भी कई तरह के कैंसर से जुड़ा हुआ पाया गया है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि शराब से दूरी बनाना या इसका सेवन कम से कम रखना कैंसर से बचाव के लिए एक जरूरी कदम है.
इसे कभी हल्के में न लें
लगातार तनाव में रहने से शरीर की इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ने लगती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. मेडिटेशन करना, संगीत सुनना, किताबें पढ़ना और अपनों के साथ वक्त बिताना, ये सभी आदतें मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करती हैं.
कैमिकल्स के संपर्क से बचें
प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना रखना, हेयर डाई, पेंट और कीटनाशकों के ज्यादा संपर्क में आने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इनमें कुछ ऐसे रसायन हो सकते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं.
&amp;nbsp;लक्षणों को न करें नजरअंदाज
कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर साफ नजर नहीं आते है, इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी हैं. अगर लगातार थकान, अचानक वजन घटना, खून की उल्टी, शरीर में गांठ या ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. समय पर पहचान होने से इलाज कहीं ज्यादा आसान और असरदार साबित होता है.
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>खाई जाने वाली ब्रेड में मिला दें पालक, स्टडी में दिखा चौंकाने वाला असर</title>
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        <description><![CDATA[ नाश्ते में ब्रेड लगभग हर घर की रसोई का हिस्सा हैवन चुका है, लेकिन क्या इसमें थोड़ा सा बदलाव करके इसे ज्यादा पौष्टिक बनाया जा सकता है? फ्यूचर फूड जर्नल में 2026 में छपी एक स्टडी ने ठीक यही सवाल खोजने की कोशिश की. रिसर्चर्स ने 20 प्रतिशत पालक मिलाकर बनाई गई ब्रेड को सफेद ब्रेड से 15 सेहतमंद अडल्ट पर टेस्ट करके कंपेयर किया है. मकसद सीधा था, लोगों की खाने की आदतें पूरी तरह बदलने की बजाय, जो चीजें वह पहले से खाते हैं उन्हीं को थोड़ा बेहतर बनाया दिया जाए. नतीजे हैरान कर रहे हैं, लेकिन इन्हें खास ध्यान से समझने की जरूरत है.
पोषक तत्वों में आया बड़ा उछाल
पालक मिलाकर बनाई गई ब्रेड के पोषण प्रोफाइल में साफ सुधार देखा गया है. सामान्य सफेद ब्रेड के मुकाबले इसमें विटामिन A 7.7 गुना, पोटैशियम 2.1 गुना, आयरन 1.9 गुना, कैल्शियम 1.8 गुना और मैग्नीशियम 1.6 गुना ज्यादा देखा गया है. &amp;nbsp;फोलेट में 58 प्रतिशत और फाइबर में करीब 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसके अलावा इस ब्रेड में प्रति 100 ग्राम 60.6 मिलीग्राम टोटल पॉलीफेनॉल्स भी मौजूद थे. प्रोटीन करीब 8 प्रतिशत ज्यादा था, जबकि स्टार्च की मात्रा करीब 5 प्रतिशत कम पाई गई है. खास बात यह रही कि दोनों ब्रेड की कैलोरी लगभग बराबर थी.
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ब्लड शुगर पर असर नहीं दिखा
हालांकि इस स्टडी ने यह साबित नहीं किया &amp;nbsp;है कि पालक वाली ब्रेड ब्लड शुगर को सीधे कम कर देती है. सामान्य ब्रेड के मुकाबले पालक ब्रेड खाने के बाद ग्लूकोज और इंसुलिन एक्सपोजर में कोई बड़ा अंतर नहीं पाया गया है. और पीक ग्लूकोज लेवल भी दोनों में लगभग एक जैसा देखा गया है. फर्क सिर्फ इतना था कि पालक ब्रेड खाने के बाद इंसुलिन पीक करीब 30 मिनट देरी से आया. यह स्टडी यह साबित नहीं करती है कि पालक ब्रेड डायबिटीज को रोकती है या ब्लड शुगर को कंट्रोल करती है.
भूख पर दिखा दिलचस्प असर
डॉक्टर के मुताबिक ग्लूकोज और इंसुलिन रिस्पॉन्स कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे डाइट, फिज़िकल एक्टिविटी, नींद, तनाव, शरीर का वजन और मौजूदा सेहत भी. स्टडी में एक और दिलचस्प बात सामने आई है. खाने के तीन घंटे बाद सफेद ब्रेड खाने वालों में भूख का स्कोर बढ़ जाता है. लेकिन पालक ब्रेड खाने के बाद ऐसा नहीं देखा गया. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि पालक ब्रेड अपने आप कम खाने पर मजबूर कर सकती है, क्योंकि यह स्टडी सिर्फ 15 सेहतमंद नजवानों पर की गई थी.
असली सवाल सिर्फ पालक ब्रेड तक सीमित नहीं
डॉक्टर के मुताबिक यह स्टडी पोषण को लेकर सोचने का एक अलग नजरिया देती है. उनके मुताबिक सिर्फ कैलोरी कम करना ही मकसद नहीं होना चाहिए, बल्कि रोज के खाने की नूट्रिशन क्वालिटी सुधारने पर भी ध्यान होना चाहिए. भारत में जहां सब्ज़ियां अक्सर अलग डिश के तौर पर खाई जाती हैं और हर मील में शामिल नहीं हो पातीं, वहां ब्रेड, रोटी या स्नैक्स जैसी पहले से खाई जाने वाली चीजें में सब्जियां मिलाना सब्जियों की खपत बढ़ाने का एक तरीका बन सकता है. हालांकि यह पूरी सब्जी खाने की जगह नहीं ले सकता, बल्कि उसे पूरक बना सकता है.
हेल्दी इंग्रीडिएंट पूरी डाइट को ठीक नहीं कर सकता
पालक ब्रेड को सुपरफूड कहना गलत होगा. यह स्टडी सिर्फ तुरंत होने वाले असर को देखने के लिए काफी थी, और इसमें शामिल लोग पहले से सेहतमंद अडल्ट थे. यह नहीं बताती कि लंबे समय तक पालक ब्रेड खाने से डायबिटीज़, मोटापा या दिल की बीमारी का खतरा कम होगा या नहीं. रिसर्चर्स ने खुद कहा है कि मेटाबॉलिक बीमारियों से परीशान लोगों पर आगे और रिसर्च की जरूरत है. डायबिटीज, प्री डायबिटीज या मोटापे से परीशान लोगों के लिए मील क्वालिटी, पोर्शन साइज, एक्टिविटी, नींद और पूरा डाइट पैटर्न, ये सभी चीजें मिलकर ही मायने रखती हैं.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें
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        <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>How To Store Paneer: पनीर फ्रिज में रखने से पहले करें ये 1 काम, हफ्तों रहेगा ताजा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/how-to-store-paneer-पनीर-फ्रिज-में-रखने-से-पहले-करें-ये-1-काम-हफ्तों-रहेगा-ताजा</link>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Paneer Fresh In Fridge: पनीर ऐसी चीज है जिसे भारतीय घरों में कभी भी कम नहीं पड़ने दिया जाता. कभी सब्जी बनाने के लिए तो कभी टिक्का, पराठे या किसी खास डिश के लिए लोग बाजार से पनीर का बड़ा पैकेट ले आते हैं. लेकिन अक्सर परेशानी तब शुरू होती है, जब बचा हुआ पनीर एक-दो दिन बाद फ्रिज में ही खराब होने लगता है. उसमें अजीब सी गंध आने लगती है, सतह चिपचिपी हो जाती है या किनारे हल्के पीले दिखाई देने लगते हैं.
अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो सिर्फ पनीर को फ्रिज में रख देना काफी नहीं है. इसे किस बर्तन में और किस तरीके से रखा जा रहा है, इसका भी काफी असर पड़ता है. सही तरीके से स्टोर करने पर पनीर को जल्दी खराब होने से बचाया जा सकता है.
पनीर जल्दी खराब क्यों होता है?
पनीर एक ताजा चीज है और इसमें नमी काफी ज्यादा होती है. इसमें प्रिजर्वेटिव नहीं होते, इसलिए बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना भी रहती है. हवा के संपर्क में आने पर पनीर की सतह सूखने लगती है और उसका रंग बदल सकता है. वहीं, अगर फ्रिज का तापमान पर्याप्त ठंडा न हो तो इसके खराब होने की प्रक्रिया और तेज हो सकती है. यही वजह है कि पनीर को फ्रिज के ऐसे हिस्से में रखना चाहिए जहां तापमान सबसे ज्यादा स्थिर और ठंडा रहता हो. आमतौर पर फ्रिज की निचली शेल्फ इसके लिए बेहतर जगह मानी जाती है. फ्रिज के दरवाजे में पनीर रखने से बचें, क्योंकि वहां तापमान बार-बार बदलता रहता है.
पनीर को फ्रिज में रखने का सही तरीका
अगर आपने बाजार से पनीर खरीदा है और उसे एक-दो दिन में इस्तेमाल नहीं करना है तो उसे खुले पैकेट में न छोड़ें. पनीर को छोटे हिस्सों में बांट लें, ताकि जरूरत के मुताबिक ही टुकड़ा निकालना पड़े. इसके बाद पनीर के टुकड़ों को एक साफ, फूड-सेफ और अच्छी तरह बंद होने वाले कंटेनर में रखें. कंटेनर में इतना ठंडा पानी डालें कि पनीर पूरी तरह उसमें डूब जाए. ढक्कन को अच्छी तरह बंद करके कंटेनर को फ्रिज की निचली शेल्फ पर रख दें. यह तरीका पनीर की नमी बनाए रखने में मदद करता है. यहां एक बात सबसे ज्यादा जरूरी है, पानी रोज बदलें. पुराने पानी को लंबे समय तक कंटेनर में छोड़ने से पनीर की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. पानी बदलते समय कंटेनर को भी साफ कर लें.

सिर्फ एक दिन के लिए रखना हो तो ये तरीका अपनाएं
अगर पनीर का थोड़ा सा हिस्सा बचा है और उसे अगले दिन ही इस्तेमाल करना है तो उसे पानी में डुबोकर रखना जरूरी नहीं है. ऐसे में साफ गीले मलमल या सूती कपड़े में पनीर को लपेट सकते हैं. इसके बाद इसे एक बंद कंटेनर में रखकर फ्रिज में रखें. कपड़ा पनीर की सतह को सूखने से बचाने में मदद करता है. हालांकि, यह तरीका कम समय के लिए ही बेहतर है. एक-दो दिन से ज्यादा पनीर रखना हो तो पानी वाला तरीका ज्यादा उपयोगी हो सकता है.
क्लिंग फिल्म में लपेटकर रखने की गलती न करें
कई लोग पनीर को सीधे क्लिंग फिल्म में लपेटकर फ्रिज में रख देते हैं. लेकिन इससे पनीर की सतह के आसपास नमी फंस सकती है. ऐसी स्थिति में पनीर जल्दी खट्टा पड़ सकता है. वहीं, पनीर को बिना ढके किसी खुले बर्तन में रखने से वह फ्रिज में मौजूद दूसरी चीजों की गंध सोख सकता है और उसकी सतह भी जल्दी सूख सकती है. इसलिए अच्छी तरह बंद होने वाला कंटेनर इस्तेमाल करना बेहतर है.

ज्यादा पनीर खरीद लिया है तो फ्रीज कर सकते हैं
अगर आपने जरूरत से ज्यादा पनीर खरीद लिया है और अगले कुछ दिनों में उसका इस्तेमाल नहीं होने वाला, तो इसे फ्रीजर में रखा जा सकता है. इसके लिए पनीर को पहले छोटे टुकड़ों में काटें. पनीर के टुकड़ों को थोड़ी देर उबलते पानी में डालकर तुरंत ठंडे पानी में निकालें. इसके बाद उन्हें अच्छी तरह सुखाकर एयरटाइट फ्रीजर-सेफ कंटेनर में रखें. कंटेनर पर तारीख लिख देना भी अच्छा रहेगा, ताकि आपको पता रहे कि इसे कब फ्रीज किया गया था. जब पनीर इस्तेमाल करना हो तो उसे कमरे के तापमान पर छोड़ने के बजाय रातभर फ्रिज में रखकर धीरे-धीरे डीफ्रॉस्ट करना बेहतर है. इससे उसके टेक्सचर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
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कैसे पहचानें कि पनीर खराब हो चुका है?
पनीर इस्तेमाल करने से पहले उसका रंग, गंध और टेक्सचर जरूर देखें. ताजा पनीर की गंध हल्की और दूध जैसी होती है. अगर उसमें तेज खट्टी या अजीब गंध आने लगे तो उसे इस्तेमाल न करें. इसी तरह ताजा पनीर की सतह सामान्य तौर पर साफ और मुलायम होती है. अगर वह बहुत ज्यादा चिपचिपा महसूस हो या असामान्य तरीके से टूटने लगे तो यह खराब होने का संकेत हो सकता है. किनारों पर पीला या धूसर रंग दिखाई देना भी सावधानी बरतने का संकेत है. ऐसी स्थिति में सिर्फ खराब हिस्सा काटकर बाकी पनीर इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए. अगर पनीर की गंध, रंग या बनावट को लेकर जरा भी संदेह हो तो उसे फेंक देना बेहतर है.
घर पर पनीर स्टोर करते समय याद रखें ये बातें
पनीर को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए तीन चीजें सबसे ज्यादा जरूरी हैं,फ्रिज का सही तापमान, साफ और बंद कंटेनर और सही तरीके से नमी बनाए रखना. अगर पानी में पनीर रख रहे हैं तो पानी रोज बदलें. कम समय के लिए रखने पर साफ गीले कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है. पनीर को फ्रिज के दरवाजे में रखने, खुले में छोड़ने या लंबे समय तक एक ही पानी में रखने से बचें. अगर पनीर में खट्टी गंध, चिपचिपी सतह या असामान्य रंग दिखाई दे तो उसे खाने का जोखिम न लें.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अब पैकेज्ड फूड पर दिखेगी हाई शुगर और सॉल्ट की वॉर्निंग, इससे क्या फायदा?</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी पैकेट वाले चिप्स, बिस्किट, नमकीन या कोल्ड ड्रिंक खरीदते वक्त पैकेट के पीछे लिखी बारीक इंग्रीडिएंट लिस्ट पढ़ने में उलझ जाते हैं, तो अब आपकी यह परेशानी जल्द खत्म हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है. यानी अब पैकेट पलटकर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि पैकेट के आगे वाले हिस्से पर ही साफ-साफ लिखा मिलेगा कि उसमें कितनी चीनी, कितना नमक और कितना फैट है.
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि पैकेट वाले खाने पर सामने की तरफ चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य किया जाए. इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने FSSAI के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई. जस्टिस पार्डीवाला ने तो यहां तक कह दिया कि क्या सरकार अदालत को मजाक समझ रही है. कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला सीधे जनहित से जुड़ा है और अगर सरकार खुद इस पर ठोस कदम नहीं उठाती है तो अदालत को खुद आदेश देना पड़ सकता है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या सरकार चाहती है कि देश के लोग, खासकर बढ़ते हुए बच्चे, सेहतमंद न रहें.
कैसा होगा नया वार्निंग लेबल?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जानकारी के मुताबिक, ऐसे उत्पादों के लिए लाल रंग का हेक्सागोनल यानी षटकोण आकार का लेबल इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया है. यह लेबल उन पैकेज्ड फूड आइटम पर लगेगा, जिनमें फैट, शुगर या नमक में से कम से कम दो चीजें तय सीमा से ज्यादा पाई जाएंगी. FSSAI ने अदालत में कहा है कि इस व्यवस्था का मकसद एक ऐसा उपभोक्ता-अनुकूल लेबलिंग सिस्टम तैयार करना है, जिससे लोग खाना खरीदते वक्त सोच-समझकर सही फैसला ले सकें.
FSSAI ने क्या दी थी दलील?
सुनवाई के दौरान FSSAI ने अदालत में यह भी कहा था कि अगर ऐसे सख्त वार्निंग लेबल लागू कर दिए गए, तो नमकीन जैसे कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ भी ज्यादा फैट, शुगर या नमक वाले उत्पादों की श्रेणी में आ जाएंगे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नजर नहीं आया और उसने साफ कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में इस तरह की दलीलें स्वीकार नहीं की जा सकतीं.
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इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
इस नए नियम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोगों को अब खाने का सामान खरीदते वक्त पैकेट पलटकर बारीक अक्षरों में लिखी इंग्रीडिएंट लिस्ट ढूंढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी. एक नजर में ही यह पता चल जाएगा कि किसी भी पैकेट वाले खाने में शुगर, नमक या फैट खतरनाक स्तर तक तो नहीं है. इससे खासतौर पर बच्चों और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपनी सेहत के हिसाब से सही चुनाव करने में मदद मिलेगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 22:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>उबलकर गैस पर गिर जाता है दूध, ये ट्रिक आएगी आपके काम</title>
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        <description><![CDATA[ रोजाना सुबह चाय या दूध गर्म करते समय एक समस्या लगभग हर घर में देखने को मिलती है. दूध जरा सी लापरवाही होते ही उबलकर बाहर गिर जाता है और पूरा गैस स्टोव गंदा हो जाता है. इससे न सिर्फ किचन साफ करने में समय लगता है, बल्कि दूध भी बर्बाद हो जाता है. लेकिन कुछ आसान ट्रिक्स अपनाकर इस झंझट से बचा जा सकता है.
क्यों उबलकर बाहर गिर जाता है दूध?
दूध में पानी, फैट और प्रोटीन होते हैं. जैसे ही दूध गर्म होना शुरू होता है, उसकी ऊपरी सतह पर एक मलाई की परत बनने लगती है. यह परत भाप को बाहर निकलने से रोकती है. इससे बर्तन के अंदर भाप और बुलबुले जमा होते रहते हैं और जब दबाव ज्यादा बढ़ जाता है तो दूध अचानक ऊपर उठकर बाहर गिर जाता है. ज्यादातर लोगों के साथ यह समस्या तब होती है जब वे दूध गर्म करते समय दूसरे काम में लग जाते हैं और स्टोव पर ध्यान नहीं दे पाते.
बड़े बर्तन का करें इस्तेमाल
दूध गर्म करने के लिए हमेशा ऐसा बर्तन चुनें जो दूध की मात्रा से कम से कम दोगुना बड़ा हो. छोटे बर्तन में दूध भरकर गर्म करने पर उसके उबलने और बाहर गिरने की संभावना ज्यादा रहती है. बड़े बर्तन में दूध को उबलने के लिए ज्यादा जगह मिलती है, जिससे वह आसानी से बाहर नहीं गिरता.
लकड़ी का चम्मच रखें बर्तन के ऊपर
यह एक पुरानी और बेहद असरदार ट्रिक है. दूध गर्म करते समय बर्तन के ऊपर एक लकड़ी का चम्मच आड़ा रखकर छोड़ दें. जब दूध ऊपर उठने लगता है, तो लकड़ी का चम्मच उसके बुलबुलों को फोड़ देता है, जिससे दूध बर्तन के अंदर ही रह जाता है और बाहर नहीं गिरता. यह तरीका बिना गैस के पास खड़े रहे भी काम करता है.
धीमी आंच पर गर्म करें
दूध को हमेशा मीडियम या धीमी आंच पर गर्म करना चाहिए. तेज आंच पर दूध बहुत जल्दी उबाल पर आ जाता है और उसे संभालने का समय नहीं मिल पाता. धीमी आंच पर दूध धीरे-धीरे गर्म होता है, जिससे उबाल आने का समय पहले से पता चल जाता है और समय रहते गैस बंद की जा सकती है.
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बर्तन में स्टील की कटोरी या चम्मच डालें
कुछ लोग बर्तन के अंदर एक उल्टी स्टील की कटोरी या बड़ा चम्मच डाल देते हैं. इससे दूध में उठने वाले बुलबुले बीच-बीच में टूटते रहते हैं और दूध का उबाल कंट्रोल में रहता है. यह ट्रिक खासतौर पर तब काम आती है जब एक साथ ज्यादा मात्रा में दूध गर्म करना हो.
गैस के पास ही रहें&amp;nbsp;
चाहे कोई भी ट्रिक अपनाई जाए, दूध गर्म करते समय पूरी तरह गैस से दूर जाना सही नहीं है. दूध में जैसे ही हल्की झाग बननी शुरू हो, आंच धीमी कर देनी चाहिए या कुछ देर के लिए गैस बंद कर देनी चाहिए. इससे दूध को संभालना आसान हो जाता है और उसके बाहर गिरने का खतरा भी कम हो जाता है.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 22:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Daulat Ki Chaat: घर पर कैसे बनाएं दिल्ली की मशहूर दौलत की चाट&amp; ये है आसान रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Daulat Ki Chaat At Home: दिल्ली की गलियों में मिलने वाली दौलत की चाट का नाम सुनते ही एक ऐसी मिठाई की तस्वीर सामने आती है, जो स्वाद के साथ-साथ अपनी हल्की और झागदार बनावट के लिए भी जानी जाती है. इसे मक्खन मलाई के नाम से भी जाना जाता है. देखने में यह जितनी नाजुक लगती है, इसे बनाने का तरीका भी उतना ही खास है.
दूध से तैयार होने वाली यह मिठाई आम चाट से बिल्कुल अलग है. इसमें दूध को अच्छी तरह फेंटकर बेहद हल्का और मलाईदार झाग तैयार किया जाता है. इसके ऊपर केसर, मावा, पिस्ता, गुलाब की पंखुड़ियां और चांदी का वर्क लगाया जाता है. पुरानी दिल्ली जाकर इसका स्वाद लेना तो एक अलग अनुभव है, लेकिन अगर घर पर ही दौलत की चाट बनाने का मन हो तो इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है. बस इसे बनाने में थोड़ा धैर्य रखना जरूरी है.
दौलत की चाट बनाने के लिए क्या चाहिए?
घर पर दौलत की चाट बनाने के लिए आपको 1.5 लीटर फुल-फैट दूध लेना होगा. इसके अलावा 1 कप मलाई, आधा चम्मच क्रीम ऑफ टार्टर, जरूरत के मुताबिक बर्फ के टुकड़े और एक बड़ी चुटकी केसर चाहिए. केसर को पहले थोड़े से पानी में भिगोकर रख लें. चाट को सजाने के लिए पीनट चिक्की, पिसी हुई चीनी, कद्दूकस किया हुआ मावा, कटे हुए पिस्ते और सूखी गुलाब की पंखुड़ियां इस्तेमाल की जा सकती हैं. अगर आप इसे बिल्कुल पुराने दिल्ली वाले अंदाज में पेश करना चाहते हैं तो ऊपर से खाने योग्य चांदी का वर्क भी लगा सकते हैं.

सबसे पहले दूध को अच्छी तरह तैयार करें
दौलत की चाट की असली खासियत उसका हल्का और फूला हुआ टेक्सचर है. इसलिए शुरुआत दूध से ही सही तरीके से करनी होगी. एक गहरे बर्तन में फुल-फैट दूध डालकर उबाल लें. दूध को बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह बर्तन के तले में न लगे. दूध में अच्छी तरह उबाल आने के बाद गैस बंद कर दें और इसे कमरे के तापमान तक ठंडा होने दें. इसके बाद ठंडे दूध को एक बड़े बर्तन में निकालें. इसमें मलाई और आधा चम्मच क्रीम ऑफ टार्टर डालकर अच्छी तरह फेंटें. इस मिश्रण को ढककर रातभर फ्रिज में रख दें. यह स्टेप जल्दी में न करें, क्योंकि दूध को अच्छी तरह ठंडा होने का समय मिलने से आगे झाग तैयार करना आसान हो जाता है.
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अब तैयार करें दौलत की चाट का झाग
अगले दिन एक बड़े और चौड़े बर्तन में बर्फ के टुकड़े डालें. इसके ऊपर दूध वाला बर्तन रखें, ताकि मिश्रण अच्छी तरह ठंडा रहे. अब इलेक्ट्रिक हैंड ब्लेंडर की मदद से दूध को लगातार फेंटना शुरू करें. कुछ देर बाद दूध के ऊपर हल्का और झागदार फोम बनने लगेगा. इसी फोम को धीरे-धीरे निकालकर एक अलग बर्तन में रखते जाएं. पूरा मिश्रण एक साथ फेंटने के बजाय इसे हिस्सों में करना ज्यादा आसान रहेगा.

अब तैयार फोम के एक हिस्से में पानी में भिगोया हुआ केसर डालें और फिर से अच्छी तरह फेंटें. इससे फोम में केसर का रंग और खुशबू आ जाएगी. केसर वाला फोम भी अलग बर्तन में निकाल लें. इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं, जब तक पूरा दूध फेंट न जाए. तैयार सफेद और केसर वाले फोम को करीब 10 से 15 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें.
ऐसे दें पुरानी दिल्ली वाला स्वाद
जब फोम अच्छी तरह ठंडा हो जाए तो इसे सर्विंग बाउल में डालें. पहले सफेद फोम की एक परत रखें और उसके ऊपर केसर वाला फोम डालें. अब बारी आती है इसकी सबसे खास सजावट की. पीनट चिक्की को हल्का दरदरा कूट लें. इसके बाद फोम के ऊपर पिसी हुई चीनी, कद्दूकस किया हुआ मावा, कुटी हुई पीनट चिक्की और कटे हुए पिस्ते डालें. ऊपर से सूखी गुलाब की पंखुड़ियां हल्की सी क्रश करके छिड़कें. आखिर में कुछ केसर के धागे और चांदी का वर्क लगाया जा सकता है. दौलत की चाट तैयार है. इसे सजाने के बाद तुरंत सर्व करें, क्योंकि इसका झागदार टेक्सचर ज्यादा देर तक वैसा नहीं रहता.
इन बातों का रखें ध्यान
दौलत की चाट बनाते समय सबसे जरूरी बात है कि फुल-फैट दूध का ही इस्तेमाल करें. दूध में फैट कम होने पर मनचाहा झाग और टेक्सचर मिलना मुश्किल हो सकता है. दूसरी बात, दूध को फेंटते समय जल्दबाजी न करें. अच्छा फोम तैयार होने में थोड़ा समय लगता है. चीनी की मात्रा आप अपने स्वाद के हिसाब से कम या ज्यादा कर सकते हैं. इसे हमेशा चौड़े और हल्के गहरे बाउल में सर्व करना बेहतर रहता है. इससे इसका नाजुक झाग ज्यादा देर तक बना रहता है.
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Everest हींग की ब्रिक्री पर तुरंत रोक, FSSAI की जांच में सैंपल फेल</title>
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        <description><![CDATA[ खाने-पीने की चीजों की जांच करने वाली सरकारी संस्था FSSAI ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स की कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी है. यह रोक कंपनी की हींग के सभी वेरिएंट पर अगले आदेश तक लागू रहेगी. FSSAI ने यह कार्रवाई जांच में हींग के तय मानकों पर खरा नहीं उतरने के बाद की है. इसी तरह की कार्रवाई पुरानी हींग कंपनी लालजी गोधू एंड कंपनी के खिलाफ भी की गई है.
क्या गड़बड़ी मिली?
FSSAI के मुताबिक, सरकारी लैब में एवरेस्ट की हींग के सैंपल जांचे गए. जांच में कुछ सैंपल मिसब्रांडेड और सब-स्टैंडर्ड पाए गए. सबसे बड़ी गड़बड़ी अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट में मिली. नियम के मुताबिक, कंपाउंडेड हींग में यह मात्रा कम से कम 5 फीसदी होनी चाहिए, लेकिन एक सैंपल में यह मात्रा 0 फीसदी मिली. वहीं पीली हींग के एक सैंपल में यह 3.29 फीसदी और काली हींग में 4.4 फीसदी पाई गई. यानी तीनों ही तय 5 फीसदी के मानक से नीचे थे.
अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट क्या होता है?
आसान भाषा में समझें तो बाजार में मिलने वाली कंपाउंडेड हींग पूरी तरह शुद्ध हींग नहीं होती. इसमें असली हींग के साथ आटा, स्टार्च और दूसरी चीजें मिलाई जाती हैं. अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट यह बताने वाला एक पैमाना है कि इसमें असली हींग का हिस्सा कितना है यानी इसकी मात्रा जितनी कम होगी उत्पाद में असली हींग का हिस्सा उतना कम माना जाएगा. एक सैंपल में 0 फीसदी मिलना इसलिए बड़ी गड़बड़ी मानी गई.
एवरेस्ट पर पहले भी उठे सवाल
FSSAI के आदेश के मुताबिक एवरेस्ट के कुछ दूसरे प्रोडक्ट्स को लेकर भी पहले शिकायतें और नियमों की खामियां सामने आ चुकी हैं. चिकन मसाला, गरम मसाला और एग करी पाउडर में लेबल से जुड़ी गड़बड़ियां मिलने का भी आदेश में जिक्र है. FSSAI का कहना है कि अलग-अलग जगहों से लिए गए हींग के सैंपलों में बार-बार एक जैसी समस्या मिली और अल्कोहलिक एक्सट्रैक्ट 5 फीसदी से कम पाया गया.
अब कंपनी को क्या करना होगा?
FSSAI ने कंपनी से इस मामले में एक्शन प्लान देने को कहा है. कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे सिर्फ तय मानकों के मुताबिक ही उत्पाद बेचे जाएं.&amp;nbsp; अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला या नियमों का पालन नहीं किया गया तो कंपनी के खिलाफ आगे भी कार्रवाई हो सकती है.
2024 में भी विवाद में आया था एवरेस्ट
साल 2024 में हांगकांग और सिंगापुर में एवरेस्ट समेत कुछ मसाला ब्रांड्स के उत्पादों को लेकर एथिलीन ऑक्साइड के इस्तेमाल पर सवाल उठे थे. इसके बाद भारत में भी FSSAI ने मसालों के सैंपल लेकर जांच शुरू की थी. हालांकि मौजूदा मामला अलग है. इस बार कार्रवाई हींग के मानकों और उसकी गुणवत्ता से जुड़ी है.
FSSAI ने लालजी गोधू एंड कंपनी के खिलाफ भी तत्काल रोक का आदेश जारी किया है. जांच में कंपनी की कंपाउंडेड हींग के सैंपल तय मानकों के मुताबिक नहीं पाए गए.&amp;nbsp; साथ ही कंपाउंडेड हींग बनाने में इस्तेमाल होने वाली कच्ची हींग की अलग-अलग किस्मों में भी तय मात्रा से ज्यादा स्टार्च पाया गया.&amp;nbsp; FSSAI ने कहा कि यह गड़बड़ी अलग-अलग बैचों में लगातार सामने आई है. इसलिए कंपनी की कंपाउंडेड हींग की बिक्री और मैन्युफैक्चरिंग पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है.यह भी पढ़ें: स्वाइन फ्लू का कहर: किस राज्य में कितने मरीज? देखें पूरी लिस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 06:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>जन्माष्टमी के लिए लकड़ी का झूला पंचक में खरीद सकते हैं? कान्हा की तैयारी से पहले जान लें नियम</title>
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        <guid>https://hindi.attentionindia.com/जन्माष्टमी-के-लिए-लकड़ी-का-झूला-पंचक-में-खरीद-सकते-हैं-कान्हा-की-तैयारी-से-पहले-जान-लें-नियम</guid>
        <description><![CDATA[ Panchak Rules: जन्माष्टमी आने वाली है और घरों में लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारी शुरू हो चुकी है. कोई कान्हा की नई पोशाक खरीद रहा है तो कोई मुकुट, बांसुरी और झूला. लेकिन इस बार खरीदारी के बीच पंचक ने लोगों को उलझन में डाल दिया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पंचक के दौरान जन्माष्टमी के लिए लकड़ी का झूला खरीदा जा सकता है?
पंचांग के अनुसार मौजूदा पंचक 27 अगस्त 2026 की दोपहर से शुरू हुआ है और 1 सितंबर की तड़के समाप्त होगा. वहीं जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. इसलिए झूला खरीदने के लिए पंचक समाप्त होने के बाद भी पर्याप्त समय मिलेगा. फिर भी अगर झूला पहले बुक कर दिया है या पंचक में उसकी डिलीवरी आ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है.
पंचक में लकड़ी खरीदने की मनाही क्यों?
पंचक उस अवधि को कहा जाता है, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम भाग से गुजरते हुए शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है. यह समय लगभग पांच दिन का होता है.
लोक परंपराओं और मुहूर्त संबंधी मान्यताओं में पंचक के दौरान लकड़ी, घास, उपले और दूसरी ज्वलनशील वस्तुओं का बड़ा भंडार जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है. घर की छत डलवाना, चारपाई बुनना या नया पलंग तैयार करवाना भी इस अवधि में उचित नहीं माना जाता.
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लेकिन यहीं एक जरूरी अंतर समझना होगा. यह मनाही मुख्य रूप से बड़ी मात्रा में लकड़ी जमा करने, निर्माण शुरू करने और सोने के लिए नई शय्या तैयार करने से जुड़ी है. भगवान की पूजा के लिए खरीदा जाने वाला छोटा लकड़ी का झूला न तो ईंधन का भंडार है और न ही मनुष्य के सोने के लिए तैयार की गई शय्या.
क्या कान्हा का झूला खरीद सकते हैं?
धार्मिक उपयोग के लिए लाया गया छोटा झूला सामान्य फर्नीचर से अलग माना जा सकता है. इसलिए यदि किसी कारण से जन्माष्टमी का झूला पंचक में खरीदना जरूरी हो तो इसे बड़ा दोष मानकर डरने की आवश्यकता नहीं है.
फिर भी परिवार की परंपरा में पंचक के दौरान लकड़ी की कोई वस्तु न खरीदने का नियम माना जाता है तो 1 सितंबर की सुबह के बाद खरीदारी करना बेहतर रहेगा. इससे मन में कोई संदेह भी नहीं रहेगा और जन्माष्टमी की तैयारी के लिए समय भी मिल जाएगा.
ध्यान रहे, श्रद्धा से की जाने वाली पूजा में भय की जगह नहीं होनी चाहिए. केवल सोशल मीडिया पर चल रही &amp;ldquo;पंचक में लकड़ी आई तो पांच संकट आएंगे&amp;rdquo; जैसी बातों को शास्त्र का अंतिम निर्णय नहीं मानना चाहिए.
पहले ऑर्डर किया था, डिलीवरी अब आई तो क्या करें?
आज अधिकतर लोग पूजा का सामान ऑनलाइन खरीदते हैं. हो सकता है कि झूला पंचक शुरू होने से पहले ऑर्डर और भुगतान किया गया हो, लेकिन उसकी डिलीवरी पंचक के बीच हो. ऐसी स्थिति में पार्सल लेने से मना करना जरूरी नहीं है.
आप झूले को घर में सुरक्षित रख सकते हैं. यदि मन में संकोच हो तो पंचक समाप्त होने तक उसे पैक ही रहने दें. 1 सितंबर को स्नान के बाद पूजा स्थान साफ करें. फिर झूले को गंगाजल से शुद्ध करके उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और लड्डू गोपाल को विराजमान करें.
झूला पहले से घर में मौजूद है और केवल उसकी सफाई या सजावट करनी है तो इसे नई लकड़ी खरीदने या नया निर्माण शुरू करने जैसा नहीं माना जाएगा. पुराने झूले को साफ करना, कपड़ा बदलना, फूल लगाना या उसकी मामूली मरम्मत कराना सामान्य तैयारी है.
बढ़ई से नया झूला बनवाना हो तो क्या करें?
तैयार झूला खरीदने और कच्ची लकड़ी मंगाकर नया झूला बनवाने में अंतर है. यदि बढ़ई से बिल्कुल नया झूला बनवाना है और काम टाला जा सकता है तो पंचक समाप्त होने के बाद शुरू करवाना बेहतर होगा. यदि काम पहले ही शुरू हो चुका है तो उसे बीच में रुकवाने की जरूरत नहीं है. पंचक में नया आरंभ करने और पहले से चल रहे काम को पूरा करने के नियम अलग माने जाते हैं.
प्लास्टिक या धातु के झूले पर भी लागू होगा नियम?
लकड़ी इकट्ठा करने वाली परंपरागत मनाही धातु, चांदी, पीतल या प्लास्टिक के छोटे पूजन-झूले पर सीधे लागू नहीं होती. फिर भी झूला खरीदते समय केवल सुंदरता न देखें. उसका आकार लड्डू गोपाल के विग्रह के अनुसार हो, किनारे नुकीले न हों और वह हिलाते समय असंतुलित न हो.
अंतिम बात साफ है. पंचक में जन्माष्टमी के लिए छोटा लकड़ी का झूला खरीदना कोई ऐसा अपराध नहीं है जिससे पूजा निष्फल हो जाए. समय उपलब्ध हो तो पंचक समाप्त होने के बाद खरीदें. पहले से मंगाया झूला आ जाए तो उसे रख लें और बाद में शुद्ध करके इस्तेमाल करें. कान्हा के जन्मोत्सव में सबसे महत्वपूर्ण महंगा झूला नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्वच्छता और सेवा का भाव है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Half Lemon Storage: आधा नींबू बच गया, इस ट्रिक से लंबे समय तक रहेगा एकदम ताजा</title>
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        <description><![CDATA[ How To Store Half Cut Lemon In Fridge: नींबू का इस्तेमाल अक्सर एक साथ पूरा नहीं हो पाता. कभी चाय में कुछ बूंदें डालनी होती हैं, कभी सलाद पर नींबू निचोड़ना होता है या किसी सब्जी और दूसरी डिश में इसका रस चाहिए होता है. ऐसे में नींबू का आधा हिस्सा बच जाता है और उसे फ्रिज में रख दिया जाता है. लेकिन अगर इसे बिना ढके रख दिया जाए तो कुछ ही समय में इसका कटा हुआ हिस्सा सूखने लगता है और नींबू की ताजगी भी कम हो जाती है.
अगर आपके घर में भी आधा नींबू अक्सर बच जाता है, तो उसे फ्रिज में रखने से पहले एक आसान ट्रिक आजमा सकते हैं. इसके लिए नींबू के कटे हुए हिस्से को एल्युमिनियम फॉयल से अच्छी तरह ढक दें और फिर इसे फ्रिज में रख दें. यह तरीका बहुत आसान है और इसके लिए किसी खास कंटेनर की जरूरत भी नहीं पड़ती.
एल्युमिनियम फॉयल कैसे करेगा मदद?
नींबू को काटते ही उसका अंदर का गूदा सीधे हवा के संपर्क में आ जाता है. फ्रिज की ठंडी हवा के कारण कटे हुए हिस्से की नमी धीरे-धीरे कम हो सकती है. इससे नींबू का कटा हुआ हिस्सा सूखा और थोड़ा सख्त नजर आने लगता है. एल्युमिनियम फॉयल कटे हुए हिस्से को ढक देता है, जिससे उसका हवा के साथ सीधा संपर्क कम हो जाता है. साथ ही, फ्रिज में रखे दूसरे खाद्य पदार्थों की तेज गंध भी नींबू तक आसानी से नहीं पहुंचती. इससे नींबू को कुछ समय तक बेहतर स्थिति में रखने में मदद मिल सकती है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फॉयल में लपेटा हुआ नींबू हमेशा ताजा रहेगा. कटा हुआ फल जल्दी इस्तेमाल करना ही बेहतर होता है. इसे हमेशा फ्रिज में रखें और बहुत लंबे समय तक स्टोर करने से बचें.
फ्रिज की दूसरी गंध नींबू में कम पहुंचेगी
फ्रिज में प्याज, लहसुन, मसालेदार खाना या बची हुई सब्जियां रखी होती हैं, जिनकी गंध काफी तेज हो सकती है. खुला हुआ आधा नींबू इन गंधों को अपने अंदर सोख सकता है. कटे हुए हिस्से को फॉयल से ढकने पर नींबू का गूदा आसपास की गंध के सीधे संपर्क में कम आता है. इससे नींबू की अपनी ताजी और खट्टी खुशबू को बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

नींबू की नमी जल्दी कम नहीं होगी
आधा नींबू खुला छोड़ने पर उसके कटे हुए हिस्से की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है. कुछ समय बाद वह हिस्सा सूखा और सिकुड़ा हुआ दिखाई दे सकता है. फॉयल की परत कटे हुए हिस्से को ढककर रखती है और फ्रिज की सूखी हवा के सीधे संपर्क को कम करती है. इससे नींबू के अंदर की नमी को कुछ समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
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कटे हुए हिस्से को हवा से कुछ सुरक्षा मिलती है
नींबू काटने के बाद उसके अंदर का हिस्सा ऑक्सीजन के संपर्क में आता है. समय के साथ हवा के संपर्क से फल में कुछ प्राकृतिक बदलाव हो सकते हैं. कटे हुए हिस्से को ढकने से हवा का सीधा संपर्क कम किया जा सकता है. इससे नींबू की ताजगी और गुणवत्ता को थोड़े समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. फिर भी इसे लंबे समय तक बचाकर रखने के बजाय जल्द इस्तेमाल करना ज्यादा अच्छा है.
कटा हुआ हिस्सा ज्यादा सूखा और सख्त नहीं होगा
बिना ढका हुआ आधा नींबू फ्रिज में रखने पर उसके कटे हुए हिस्से पर सूखी और सख्त परत बन सकती है. बाद में जब आप इसे इस्तेमाल करने के लिए निकालते हैं, तो रस निकालना भी थोड़ा मुश्किल लग सकता है. फॉयल से ढकने पर कटे हुए हिस्से को सीधे ठंडी हवा से कुछ सुरक्षा मिलती है. इससे नींबू का ऊपरी हिस्सा तुलना में बेहतर बना रह सकता है और इस्तेमाल के समय उसे निचोड़ना आसान हो सकता है.
&amp;nbsp;नींबू की प्राकृतिक खुशबू बनी रहने में मदद मिलेगी
नींबू की खास पहचान उसकी ताजा खट्टी खुशबू भी है. कटने के बाद अगर इसे खुला छोड़ दिया जाए तो इसकी खुशबू धीरे-धीरे कम हो सकती है और फ्रिज में रखे दूसरे खाने की चीजों की गंध भी उस पर असर डाल सकती है. कटे हुए हिस्से को ढककर रखने से नींबू की प्राकृतिक खुशबू को कुछ समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.
फॉयल के अलावा ये तरीके भी आजमा सकते हैं
अगर आप हर बार एल्युमिनियम फॉयल इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो आधे नींबू को रखने के लिए एयरटाइट फूड कंटेनर का इस्तेमाल कर सकते हैं. नींबू को कटे हुए हिस्से की तरफ नीचे करके कंटेनर में रखें और ढक्कन अच्छी तरह बंद कर दें. इससे हवा और फ्रिज की दूसरी गंधों से बचाने में मदद मिल सकती है. रीयूजेबल सिलिकॉन फूड कवर भी एक अच्छा विकल्प है. इसे नींबू के कटे हुए हिस्से पर लगाकर फ्रिज में रखा जा सकता है. इसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, इसलिए रोजाना नींबू इस्तेमाल करने वाले घरों में यह सुविधाजनक हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 18:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Floor Cleaning Tips: झाड़ू लगाने के बाद भी फर्श पर आती है धूल? न करें ये 1 गलती</title>
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        <description><![CDATA[ Why Dust Settles After Sweeping: घर की सफाई करने के बाद फर्श साफ-सुथरा दिखता है, लेकिन कुछ ही देर बाद उस पर बारीक धूल फिर नजर आने लगती है. ऐसे में लगता है कि अभी-अभी सफाई करने के बावजूद घर में धूल कम क्यों नहीं हो रही. कई बार इसकी वजह घर के बाहर की मिट्टी या धूल नहीं, बल्कि सफाई करने का तरीका भी हो सकता है. अगर झाड़ू लगाने का तरीका सही नहीं है या घर की कुछ जगहों पर जमा धूल को नजरअंदाज किया जा रहा है, तो वह दोबारा फर्श पर आ सकती है.
अगर आपके घर में भी झाड़ू लगाने के कुछ समय बाद फर्श पर बारीक धूल दिखाई देने लगती है, तो सफाई का तरीका थोड़ा बदलकर देखें. कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से सफाई ज्यादा असरदार हो सकती है.
झाड़ू हमेशा ऊपर से नीचे की तरफ लगाएं
सफाई करते समय सबसे पहले ऊंची जगहों की धूल साफ करना बेहतर रहता है और उसके बाद फर्श की सफाई करनी चाहिए. अगर आप पहले फर्श पर झाड़ू लगा देंगे और फिर पंखे, टेबल या दूसरी ऊंची जगहों की धूल साफ करेंगे, तो वहां से गिरी धूल दोबारा साफ किए हुए फर्श पर पहुंच जाएगी. इसलिए सफाई का क्रम ऊपर से नीचे रखें. पहले पंखे, ऊंची अलमारियां और दूसरी सतहों की धूल साफ करें. इसके बाद फर्नीचर और अंत में फर्श की सफाई करें. इससे एक ही जगह को बार-बार साफ करने की जरूरत कम पड़ सकती है.

सूखे कपड़े की जगह हल्का गीला कपड़ा इस्तेमाल करें
फर्नीचर और दूसरी सतहों से धूल हटाने के लिए सूखे कपड़े का इस्तेमाल करने पर धूल पूरी तरह पकड़ में आने के बजाय हवा में उड़ सकती है और बाद में फर्श पर बैठ सकती है. इसके बजाय माइक्रोफाइबर कपड़े को हल्का गीला करके इस्तेमाल करना ज्यादा कारगर हो सकता है. कपड़ा इतना ही गीला रखें कि वह धूल को पकड़ सके. खासकर लकड़ी के फर्नीचर पर बहुत ज्यादा पानी या नमी का इस्तेमाल न करें. अगर किसी सतह पर बहुत ज्यादा धूल जमी है, तो पहले सूखे कपड़े से मोटी परत हटा सकते हैं और फिर हल्के गीले कपड़े से सफाई कर सकते हैं.
फेदर डस्टर हर जगह काम नहीं आता
पंख वाले डस्टर देखने में अच्छे लगते हैं, लेकिन इनसे धूल पूरी तरह हटने के बजाय एक जगह से दूसरी जगह जाने की संभावना रहती है. अगर आपका मकसद धूल को उठाकर हटाना है, तो माइक्रोफाइबर या ऐसे डस्टर का इस्तेमाल करें जो धूल को पकड़ सके. सिर्फ फर्नीचर पर डस्टर घुमाने से धूल गायब नहीं होती. वह आसपास की सतहों या फर्श पर जाकर बैठ सकती है. इसलिए धूल को पकड़ने वाला कपड़ा या डस्टर बेहतर विकल्प हो सकता है.

फर्नीचर के नीचे की जगह न भूलें
सोफा, बेड, कुर्सियों और दूसरी भारी चीजों के नीचे अक्सर महीनों तक धूल जमा होती रहती है. ऊपर से झाड़ू लगाने के बाद भी अगर इन जगहों की सफाई नहीं होती, तो वहां जमा धूल धीरे-धीरे कमरे में फैल सकती है. इसलिए महीने में कम से कम एक बार फर्नीचर के नीचे की जगह जरूर साफ करें. जहां झाड़ू पहुंचाना मुश्किल हो, वहां लंबी डस्टिंग स्टिक, डस्ट मॉप या वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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पंखे की सफाई भी जरूरी है
सीलिंग फैन पर धूल बहुत जल्दी जमा हो सकती है. पंखा चलने पर उसके ब्लेड पर जमी धूल हवा के साथ कमरे में फैल सकती है और बाद में फर्श या फर्नीचर पर बैठ सकती है. इसलिए पंखे की सफाई को भी घर की नियमित सफाई का हिस्सा बनाएं. खासकर लंबे समय से बंद पड़े पंखे को दोबारा चलाने से पहले उसके ब्लेड साफ कर लेना बेहतर है. पंखे की सफाई करते समय नीचे की सतहों और फर्श को बाद में साफ करें, ताकि गिरी हुई धूल दोबारा कमरे में न फैले.
फर्नीचर पॉलिश का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें
फर्नीचर को चमकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली पॉलिश ज्यादा मात्रा में लगाने से सतह पर चिपचिपी परत बन सकती है. समय के साथ यह परत धूल को आकर्षित कर सकती है, जिससे फर्नीचर जल्दी गंदा दिखने लगता है. अगर पॉलिश का इस्तेमाल करना पसंद है तो इसे जरूरत के मुताबिक ही लगाएं. पॉलिश को सीधे फर्नीचर पर छिड़कने के बजाय पहले कपड़े पर लगाना भी बेहतर तरीका है. इससे मात्रा को नियंत्रित करना आसान रहता है.
वैक्यूम करने का सही समय रखें
अगर आप पहले फर्श को वैक्यूम कर लेते हैं और उसके बाद फर्नीचर की धूल साफ करते हैं, तो फर्नीचर से गिरी धूल दोबारा साफ फर्श पर पहुंच जाएगी. इसलिए पहले ऊपर और फर्नीचर की सतहों की धूल साफ करें और अंत में फर्श को वैक्यूम या साफ करें. अगर वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करते हैं, तो उसका डस्ट कंटेनर या बैग भी समय-समय पर खाली करें. बहुत ज्यादा भरा हुआ कंटेनर मशीन की सफाई क्षमता को प्रभावित कर सकता है और धूल के वापस फैलने की समस्या हो सकती है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 18:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Swine Flu: स्वाइन फ्लू का कहर: किस राज्य में कितने मरीज? देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Swine Flu H1N1 Cases In India: देश के कई हिस्सों में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के मामले बढ़ रहे हैं. खासकर मानसून के दौरान इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत कई जगहों से नए मामले सामने आए हैं. हेल्थ विभागों के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ राज्यों में इस साल अब तक सामने आए मामले पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हैं.
दिल्ली में 2,729 H1N1 केस
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू का इंफेक्शन लगातार बढ़ रहा है. स्वास्थ्य विभाग के 27 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में H1N1 के कुल 2,729 मामले सामने आ चुके हैं. अकेले 27 अगस्त को 125 नए मरीज मिले. इन्फ्लुएंजा ए और बी को मिलाकर दिल्ली में कुल मामलों की संख्या 3,736 हो गई है. इनमें करीब तीन-चौथाई मामले H1N1 के हैं. पिछले साल की तुलना में इस साल दिल्ली में इंफेक्शन के मामले काफी ज्यादा दर्ज किए गए हैं.
कर्नाटक में 4,428 मरीज
कर्नाटक में भी H1N1 और इन्फ्लुएंजा के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं. 24 अगस्त तक राज्य में 4,428 लैब से पुष्टि किए गए H1N1/इन्फ्लुएंजा के मामले दर्ज किए गए. कर्नाटक में इन्फ्लुएंजा का असर आमतौर पर साल में दो बार ज्यादा देखने को मिलता है. पहला दौर जनवरी से मार्च के बीच और दूसरा जुलाई से सितंबर के बीच आता है. कर्नाटक में हेल्थ विभाग ने इसको लेकर एडवाइजरी भी जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है.

महाराष्ट्र में पिछले साल से ज्यादा मामले
महाराष्ट्र में भी इस साल H1N1 के मामले तेजी से बढ़े हैं. 21 अगस्त तक राज्य में 1,109 H1N1 मरीज सामने आ चुके थे. यह संख्या पूरे 2025 में दर्ज किए गए 942 मामलों से भी ज्यादा है. राज्य में मुंबई और पुणे H1N1 के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं. दोनों शहरों में राज्य के कुल संक्रमण के करीब 65 फीसदी मामले दर्ज किए गए हैं. महाराष्ट्र के राज्य महामारी एक्सपर्ट डॉ. राजू सुले के मुताबिक, मानसून के दौरान इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी सामान्य है, लेकिन इस साल के आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा हैं.

हालांकि, ICMR ने साफ किया है कि फिलहाल किसी नए स्ट्रेन की पहचान नहीं हुई है. देश में फैल रहे Influenza A (H1N1) pdm09 वायरस 2025 से ही मौजूद हैं. ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
राजस्थान में अगस्त में सबसे ज्यादा केस
राजस्थान में भी अगस्त के दौरान H1N1 के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अगस्त में अब तक 55 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. यह इस साल किसी एक महीने में दर्ज किए गए मामलों की सबसे ज्यादा संख्या है. जनवरी से अगस्त 2026 तक राजस्थान में H1N1 के कुल 146 मामले सामने आए हैं. इनमें जनवरी में 2, फरवरी में 3, मार्च में 20, अप्रैल में 22, मई में 25, जून में 14, जुलाई में 5 और अगस्त में 55 मामले दर्ज किए गए. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, फिलहाल H1N1 के किसी नए या ज्यादा खतरनाक स्ट्रेन के फैलने की पुष्टि नहीं हुई है.
लखनऊ में नए मरीज मिले
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी H1N1 के मामले सामने आ रहे हैं. बलरामपुर अस्पताल में H1N1 से इंफेक्टेड एक महिला की मौत के एक दिन बाद दो और मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई. दोनों मरीजों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है. अस्पताल के मुताबिक, RT-PCR जांच में दोनों मरीजों में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी 75 जिलों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
गुरुग्राम में 12 मामले
हरियाणा के गुरुग्राम में भी H1N1 के 12 मामले सामने आए हैं. बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है. राज्य सरकार भी संक्रमण की स्थिति पर नजर रख रही है और इससे निपटने की तैयारियां की जा रही हैं.
चंडीगढ़ में इस साल 14 मरीज
चंडीगढ़ में भी मानसून के दौरान H1N1 के मामले बढ़े हैं. अगस्त में अब तक 7 मरीज सामने आए हैं. इस साल शहर में संक्रमण के कुल 14 मामले दर्ज किए गए हैं. आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में सबसे ज्यादा मामले सामने आए. इसके अलावा जून और जुलाई में एक-एक, मई में दो, अप्रैल में एक और मार्च में दो मामले दर्ज किए गए.
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कोलकाता में भी बढ़े मामले
22 जुलाई तक की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता में पिछले करीब दो हफ्तों में स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी देखी गई थी. कई मरीजों को गंभीर लक्षणों के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. मानसून की बारिश तेज होने के साथ संक्रमण के मामले बढ़े. डॉक्टरों के मुताबिक, मरीजों में लगातार तेज बुखार, सांस से जुड़ी समस्या, शरीर में तेज दर्द और डायरिया जैसे लक्षण देखने को मिले. शहर के पीयरलेस अस्पताल में करीब तीन हफ्तों से स्वाइन फ्लू के मरीज लगातार पहुंच रहे थे. 9 मरीजों को एक दिन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि कई अन्य मरीजों का इलाज ओपीडी में किया गया था.
मानसून के दौरान देश के कई हिस्सों में H1N1 का संक्रमण बढ़ रहा है. हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी नए और ज्यादा खतरनाक H1N1 स्ट्रेन के फैलने की पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय इंफेक्शन से बचाव के लिए सावधानी बरतने और लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 18:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Wedding Night Bedsheet: सुहाग की सेज पर किस रंग की चादर बिछाएं? जानें हर बात</title>
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        <description><![CDATA[ Best Bedsheet Colors For Wedding Night: शादी का दिन जिंदगी के सबसे खास और यादगार दिनों में से एक होता है. इस दिन फूलों से लेकर सजावट तक हर चीज को सोच-समझकर चुना जाता है, ताकि माहौल कपल की पसंद और अंदाज के मुताबिक नजर आए. इसी तरह शादी की पहली रात के लिए बेडशीट का रंग भी कमरे के माहौल को खास बनाने में भूमिका निभा सकता है. अलग-अलग रंग कमरे में अलग तरह का मूड और एहसास पैदा करते हैं, इसलिए चादर चुनते समय रंग पर भी ध्यान दिया जा सकता है.
लाल रंग की चादर से बनेगा रोमांटिक माहौल
लाल रंग को अक्सर प्यार, जुनून और आकर्षण से जोड़कर देखा जाता है. यह एक गहरा और प्रभावशाली रंग है, जो कमरे में रोमांटिक और उत्साह भरा माहौल बनाने में मदद कर सकता है. अगर आप शादी की पहली रात के कमरे में प्यार और गर्मजोशी का एहसास चाहते हैं, तो लाल रंग की चादर एक विकल्प हो सकती है.

नीला रंग देगा सुकून का एहसास
नीला रंग शांत और सुकून देने वाला माना जाता है. खासकर हल्के नीले रंग जैसे आसमानी या बेबी ब्लू कमरे में शांति और आराम का एहसास ला सकते हैं. ऐसे रंग उन कपल्स के लिए अच्छे हो सकते हैं जो शादी की भागदौड़ के बाद अपने कमरे में शांत और आरामदायक माहौल चाहते हैं.
सफेद चादर से दिखेगा कमरा साफ और खूबसूरत
सफेद रंग शुद्धता और नई शुरुआत से जुड़ा माना जाता है. यह एक ऐसा रंग है जो लगभग किसी भी तरह की शादी की सजावट के साथ आसानी से मेल खा सकता है. सफेद चादर कमरे को साफ, सादा और खूबसूरत लुक देती है. इसके साथ कमरे की दूसरी सजावटी चीजों के रंगों को भी आसानी से जोड़ा जा सकता है.

बैंगनी रंग देगा शाही लुक
बैंगनी रंग को लग्जरी, रचनात्मकता और रहस्य से जोड़ा जाता है. इसके अलग-अलग शेड कमरे का माहौल भी अलग बना सकते हैं. गहरा बैंगनी रंग कमरे को ड्रामेटिक और शाही लुक दे सकता है, जबकि हल्का बैंगनी रंग नरम और रोमांटिक एहसास देता है. अगर कमरे को थोड़ा भव्य और खास दिखाना है, तो बैंगनी रंग की चादर चुनी जा सकती है.
हरे रंग से आएगा ताजगी और संतुलन
हरा रंग प्रकृति, विकास और सामंजस्य से जुड़ा होता है. हल्के हरे रंग कमरे में ताजगी और नई शुरुआत का एहसास दे सकते हैं, जबकि गहरे हरे रंग से कमरे को थोड़ा गंभीर और खूबसूरत लुक मिल सकता है. जो कपल अपने कमरे में संतुलित और प्राकृतिक माहौल चाहते हैं, उनके लिए हरा रंग एक विकल्प हो सकता है.
पीला रंग कमरे में लाएगा खुशी
पीला रंग खुशमिजाज और ऊर्जा से भरा माना जाता है. हल्का या पेस्टल पीला रंग कमरे में गर्म और स्वागत करने वाला माहौल बना सकता है. वहीं ज्यादा चमकीला पीला रंग कमरे में उत्साह और जीवंतता जोड़ सकता है. यह रंग बेडरूम को ज्यादा खुशनुमा बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
शादी की सजावट से भी मिलाएं चादर का रंग
चादर का रंग चुनते समय सिर्फ रंगों से जुड़े पारंपरिक अर्थों पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है. कमरे में आप जिस तरह का माहौल बनाना चाहते हैं, उसके हिसाब से रंग चुना जा सकता है. शादी की सजावट, फूलों, पर्दों और कमरे की बाकी चीजों के रंगों को ध्यान में रखकर चादर चुनने से पूरा कमरा ज्यादा संतुलित दिखाई दे सकता है.
अगर कमरे में एक ही रंग के अलग-अलग शेड इस्तेमाल किए जाएं, तो एक सादा और एक जैसा लुक बनाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, नीले रंग को मुख्य रंग रखते हुए चादर, पर्दों और सजावटी सामान में नीले रंग के अलग-अलग शेड इस्तेमाल किए जा सकते हैं. वहीं अगर कमरे में थोड़ा कंट्रास्ट चाहिए, तो ऐसे रंग चुने जा सकते हैं जो एक-दूसरे से अलग दिखाई दें. जैसे बैंगनी चादर के साथ सुनहरे या पीले रंग की सजावट कमरे को भव्य लुक दे सकती है.
सिर्फ रंग नहीं, चादर का कपड़ा भी रखें ध्यान में
चादर चुनते समय रंग के साथ उसकी बनावट और पैटर्न पर भी ध्यान देना जरूरी है. साटन या सिल्क की चादर कमरे को लग्जरी लुक दे सकती है, जबकि कॉटन की चादर ज्यादा आरामदायक और सुकून भरा एहसास देती है. चादर का पैटर्न भी कमरे के मूड को प्रभावित कर सकता है. हल्के फूलों वाले पैटर्न से रोमांटिक और नरम लुक मिल सकता है, जबकि ज्योमेट्रिक डिजाइन कमरे को आधुनिक अंदाज दे सकता है.
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चादर का चुनाव दोनों की पसंद से करें
आखिर में चादर का रंग ऐसा होना चाहिए जो दोनों की पसंद से मेल खाए. रंगों के पारंपरिक मतलब पसंद न आएं तो सिर्फ उसी वजह से किसी रंग को चुनना जरूरी नहीं है. अगर किसी खास रंग से दोनों की कोई याद या जुड़ाव है, तो उसे बेडशीट में शामिल किया जा सकता है. शादी के बाद बेडरूम दोनों की साझा जिंदगी और पसंद का हिस्सा बनता है, इसलिए उसमें दोनों की पसंद दिखाई देना ज्यादा मायने रखता है.
समय के साथ बदल सकते हैं कमरे के रंग
शादी के बाद भी बेडशीट और कमरे के रंगों को समय और मौके के हिसाब से बदला जा सकता है. गर्मियों और वसंत के मौसम में हल्के और ठंडे रंग कमरे को ताजा एहसास दे सकते हैं, जबकि सर्दियों में गहरे और गर्म रंग ज्यादा आरामदायक माहौल बना सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sofa Cleaning Tips: सोफे पर चाय गिर जाए तो तुरंत क्या करें, पाउडर या पानी...क्या आएगा काम?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Tea Stains From Fabric Sofa: सोफे पर चाय गिरते ही सबसे पहले यही समझ नहीं आता कि इसे साफ कैसे करें. घबराहट में कई लोग दाग को जोर-जोर से रगड़ने लगते हैं, तो कुछ लोग तुरंत कोई पाउडर डाल देते हैं. लेकिन चाय के दाग के मामले में हर चीज काम नहीं करती. अगर आप सही समय पर सही तरीका अपनाएं, तो ताजा दाग को काफी हद तक साफ करना आसान हो सकता है.
चाय गिरने के बाद सबसे जरूरी है कि देर न करें. दाग जितनी जल्दी साफ किया जाए, उसके निकलने की संभावना उतनी बेहतर रहती है. इसलिए सबसे पहले एक साफ और सूखा कपड़ा लें और चाय को सोखने के लिए दाग वाली जगह पर हल्के हाथ से दबाएं. कपड़े को इधर-उधर रगड़ने की गलती न करें. रगड़ने से चाय फैब्रिक के रेशों के अंदर तक जा सकती है और दाग आसपास भी फैल सकता है.
चाय के दाग पर पाउडर डालें या पानी?
अगर सोफे पर चाय गिरी है, तो आमतौर पर पाउडर डालना पहला उपाय नहीं है. पाउडर खासतौर पर तेल और ग्रीस जैसे दागों को सोखने में ज्यादा उपयोगी होता है. ताजा चाय के दाग के लिए ठंडा पानी और हल्का लिक्विड डिटर्जेंट ज्यादा उपयुक्त विकल्प है. एक चम्मच माइल्ड लिक्विड डिटर्जेंट को करीब दो कप ठंडे पानी में मिलाएं. अब एक साफ मुलायम कपड़े को इस घोल में हल्का गीला करें और दाग वाली जगह पर धीरे-धीरे डैब करें. कोशिश करें कि दाग के बाहरी हिस्से से अंदर की ओर सफाई करें, ताकि चाय और ज्यादा न फैले.

इसके बाद एक दूसरे साफ कपड़े को सादे ठंडे पानी से हल्का गीला करें और उस जगह को डैब करें. इससे डिटर्जेंट के बचे हुए हिस्से को हटाने में मदद मिलेगी. आखिर में सूखे तौलिए से जगह को हल्के हाथ से दबाकर अतिरिक्त नमी सोख लें.
सफाई से पहले सोफे का टैग जरूर देखें
हर सोफे के फैब्रिक पर एक जैसा क्लीनिंग तरीका काम नहीं करता. इसलिए कोई भी घोल लगाने से पहले सोफे पर लगे क्लीनिंग कोड को देख लेना जरूरी है. यह टैग अक्सर कुशन के नीचे या सोफे के फ्रेम पर मिल सकता है. अगर टैग पर W लिखा है, तो पानी आधारित क्लीनर इस्तेमाल किए जा सकते हैं. S का मतलब है कि पानी वाले क्लीनर से बचना चाहिए और सॉल्वेंट आधारित क्लीनर की जरूरत होती है. WS वाले फैब्रिक पर दोनों तरह के क्लीनर इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जबकि X कोड वाले फैब्रिक पर लिक्विड क्लीनर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

अगर टैग नहीं है या समझ नहीं आ रहा कि कौन सा क्लीनर सुरक्षित रहेगा, तो पहले सोफे के किसी छिपे हुए हिस्से पर थोड़ा सा घोल लगाकर देखें. इससे सामने दिखाई देने वाले हिस्से पर रंग या फैब्रिक खराब होने का जोखिम कम रहेगा.
अगर चाय का दाग सूख गया है तो?
ताजा दाग की तुलना में सूखे हुए चाय के दाग को साफ करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. ऐसे में सफेद सिरके और पानी का हल्का घोल मदद कर सकता है. एक हिस्सा सफेद सिरका और दो हिस्से पानी मिलाकर घोल तैयार किया जा सकता है. इसे भी सीधे सोफे पर डालने के बजाय साफ कपड़े की मदद से दाग वाली जगह पर हल्के हाथ से डैब करें. इसके बाद साफ पानी से हल्का डैब करके घोल के अवशेष हटाएं.
हालांकि, सिल्क या वेलवेट जैसे नाजुक फैब्रिक पर सिरके का इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है. ऐसे कपड़ों पर पहले छिपे हुए हिस्से पर टेस्ट करना जरूरी है और फैब्रिक के क्लीनिंग निर्देशों को प्राथमिकता देनी चाहिए.
गलती से भी दाग को जोर से न रगड़ें
सोफे पर चाय गिरने के बाद सबसे आम गलती दाग को रगड़ना है. ऐसा करने पर चाय फैब्रिक के अंदर और गहराई तक जा सकती है. इसके अलावा, लगातार रगड़ने से कपड़े के रेशे घिस सकते हैं या उनका रंग भी प्रभावित हो सकता है. इसलिए सफाई के दौरान सिर्फ डैब करने वाला तरीका अपनाएं. यानी कपड़े से दाग वाली जगह को दबाकर चाय को सोखें, लेकिन कपड़े को आगे-पीछे घुमाकर न रगड़ें.
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सोफे को ज्यादा गीला न करें
दाग हटाने के चक्कर में सोफे पर बहुत ज्यादा पानी डालना भी ठीक नहीं है. अगर पानी या सफाई का घोल फोम के अंदर तक पहुंच जाए और वहां लंबे समय तक नमी बनी रहे, तो बाद में बदबू या फफूंद जैसी परेशानी हो सकती है. इसलिए कपड़ा सिर्फ हल्का गीला रखें और जरूरत के मुताबिक ही इस्तेमाल करें. सफाई के बाद सोफे को अच्छी तरह सूखने दें.
पाउडर कब काम आएगा?
अगर सोफे पर चाय नहीं बल्कि तेल या ग्रीस गिर गया है, तब पाउडर ज्यादा काम आ सकता है. ऐसे दाग पर टैल्कम पाउडर, कॉर्नस्टार्च या बेकिंग सोडा डालकर कुछ समय के लिए छोड़ने से तेल को सोखने में मदद मिल सकती है. इसके बाद पाउडर को धीरे से हटाकर आगे की सफाई की जा सकती है. यानी चाय के दाग के लिए पानी और हल्का डिटर्जेंट ज्यादा सही दिशा है, जबकि तेल वाले दाग के लिए पाउडर उपयोगी हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 02:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सफेद कपड़े पीले पड़ गए हैं, ऐसे लौट जाएगी चमक</title>
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        <description><![CDATA[ सफेद कपड़े हर किसी की अलमारी का अहम हिस्सा होते हैं, क्योंकि ये साफ सुथरे और खुबसूरत दिखते हैं. लेकिन कुछ समय बाद यही कपड़े पीले पड़ने लगते हैं और इनकी चमक फीकी नजर आने लगती है, जिससे ये पुराने और बेकार जैसे दिखने लगते हैं. दरअसल इसके पीछे धूप, पसीना और गलत धुलाई जैसी वजहें जिम्मेदार होती हैं. आइए जानते हैं कुछ आसान तरीके, जिनसे सफेद कपड़ों की खोई हुई चमक दोबारा वापस लाई जा सकती है.
खास तौर पर इन गलतियों से बचें
अक्सर लोग सफेद कपड़े धोते वक्त कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे रंग खराब हो जाता है. जरूरत से ज्यादा कठोर डिटर्जेंट का इस्तेमाल करना, फैब्रिक सॉफ्टनर का हद से ज्यादा इस्तेमाल, गंदी वॉशिंग मशीन में कपड़े धोना या गरम पानी का इस्तेमाल करना, ये सभी वजह कपड़ों के रेशों को कमजोर कर देते हैं, जिससे उनकी सफेदी धीरे धीरे खत्म होने लगती है.
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व्हाइटनिंग सॉल्यूशन से लौटती है चमक
अगर कपड़े पहले से ही पीले पड़ चुके हैं, तो व्हाइटनिंग सॉल्यूशन एक अच्छा विकल्प साबित माना जा सकता है. यह खासतौर पर कपड़ों की चमक वापस लाने के लिए बनाया जाता है. इसे धुलाई से पहले प्री ट्रीटमेंट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे कपड़े लंबे समय तक सफेद बने रहते हैं.
ऑक्सीजन बेस्ड ब्लीच भी है बेहतर&amp;nbsp;
ऑक्सीजन बेस्ड ब्लीच सफेद कपड़ों के दाग और पीलापन दूर करने में मददगार साबित होता है. हालांकि इसका इस्तेमाल ध्यान से करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा इस्तेमाल से कपड़ों के रेशे कमजोर हो सकते हैं. हमेशा पैकेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही घोल तैयार करें, और कपड़ों को लंबे समय तक इसमें भिगोकर रखने से बचें.
जान लें सबसे असरदार घरेलू उपाय
घरेलू उपायों में बेकिंग सोडा काफी असरदार माना जाता है. इसे सीधे वॉशिंग मशीन में डाला जा सकता है, या पानी में घोलकर कपड़ों को कुछ देर भिगोया जा सकता है. इससे कपड़ों की सफेदी बरकरार रहती है और साथ ही बदबू भी दूर हो जाती है.
यह खास तरीका करता है &amp;nbsp;कमाल
सफेद सिरका एक नैचुरल क्लीनिंग एजेंट माना जाता है, जो कपड़ों की चमक बढ़ाने और बदबू हटाने में मदद करता है. इसे गुनगुने पानी में मिलाकर कपड़े भिगोए जा सकते हैं, या धुलाई के दौरान डिटर्जेंट के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
कैसे धोएं सफेद कपड़े, जान लें राज
सफेद कपड़े धोते वक्त लिक्विड डिटर्जेंट का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है, क्योंकि यह गंदगी को ज्यादा असरदार तरीके से हटाता है. गुनगुना पानी भी दाग धब्बों को बेहतर तरीके से साफ करने में मदद करता है. सबसे जरूरी बात यह है कि कपड़ों पर दिए गए केयर लेबल के निर्देशों का पालन जरूर करना चाहिए, ताकि कपड़े की क्वालिटी को नुकसान न पहुंचे.
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        <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 02:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>Pest Control: घर में बार&amp;बार आ जाती हैं चींटियां? ऐसे करें सफाया</title>
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        <description><![CDATA[ Best Ways To Get Rid Of Ant Colony At Home: घर में अचानक बहुत ज्यादा चींटियां दिखने लगें तो हर बार सिर्फ उनके रास्ते को साफ करना ही समाधान नहीं होता. किचन के प्लेटफॉर्म पर चलती चींटियों की लंबी लाइन अक्सर असली समस्या नहीं होती. यह उस छिपी हुई कॉलोनी तक आने-जाने का रास्ता हो सकता है, जहां से चींटियां खाने, पानी और दूसरी जरूरी चीजों की तलाश में निकलती हैं. ऐसे में अगर घर में बार-बार चींटियां दिखाई दे रही हैं, तो उनका रास्ता मिटाने के बजाय यह पता लगाना ज्यादा जरूरी है कि उनकी &amp;nbsp;कॉलोनी आखिर कहां है.
घर के बाहर भी चींटियों का रास्ता कई बार सीधे उनके घोंसले तक पहुंचा सकता है. यह रास्ता बगीचे की किनारी, फर्श के पत्थरों, दीवार, बाड़, पेड़ की जड़ों या घर की बाहरी दीवार के साथ दिखाई दे सकता है. सुबह जल्दी या शाम के समय टॉर्च की मदद से देखने पर उनकी गतिविधि ज्यादा आसानी से नजर आ सकती है. बारिश के बाद या लंबे समय तक मौसम सूखा रहने पर भी कई जगहों पर चींटियों की गतिविधि अचानक बढ़ सकती है.
चींटियां अपनी कॉलोनी किन जगहों पर बनाती हैं
चींटियों का &amp;nbsp;कॉलोनी हमेशा जमीन पर बना बड़ा सा टीला नहीं होता. कई प्रजातियां ऐसी जगहों पर कॉलोनी बनाती हैं जो आसानी से दिखाई नहीं देतीं. कंक्रीट की दरारों, फर्श के नीचे, दीवार के अंदर की खाली जगह, गीली लकड़ी, पुराने पेड़ के ठूंठ, गमले की मिट्टी या घर के आसपास बिछी मल्च के नीचे भी घोंसला हो सकता है. अगर किसी छोटी सी जगह से लगातार चींटियां अंदर-बाहर आती दिखाई दें, तो उसे ध्यान से देखें. प्रवेश वाली जगह के आसपास ढीली मिट्टी, बारीक रेत या छोटे-छोटे कण जमा मिलें तो यह जमीन के अंदर मौजूद घोंसले का संकेत हो सकता है.

&amp;nbsp;
घर के अंदर किचन, बाथरूम और कपड़े धोने वाली जगह के आसपास भी चींटियां अपना ठिकाना बना सकती हैं या बाहर मौजूद कॉलोनी से अंदर आने के लिए इन जगहों का इस्तेमाल कर सकती हैं. अगर चींटियों की लाइन किसी अलमारी, फर्श, पाइप या दीवार के पास बनी छोटी दरार से निकल रही है, तो यह जरूरी नहीं कि घोंसला ठीक उसी जगह हो. कॉलोनी बाहर भी हो सकती है और चींटियां दीवार या किसी खाली जगह को सुरक्षित रास्ते की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं.
खाने और नमी की वजह से बार-बार लौट सकती हैं चींटियां
चींटियों को घर की तरफ खींचने वाली चीजों पर भी ध्यान देना जरूरी है. बिस्किट के टुकड़े, पालतू जानवरों का बचा हुआ खाना, मीठी चीजों का चिपचिपा हिस्सा या फर्श पर गिरा कोई तरल चींटियों को बार-बार उसी जगह ला सकता है. चींटियां सिर्फ मीठी चीजों की तलाश नहीं करतीं, बल्कि प्रोटीन, तेल और पानी की तरफ भी आकर्षित होती हैं. किचन के उपकरणों के नीचे, कूड़ेदान के आसपास, पालतू जानवरों के खाने की जगह और अलमारी के कोनों को साफ रखें. खाने की चीजों को बंद डिब्बों में रखना और सतह को साबुन वाले पानी से साफ करना उनके छोड़े हुए गंध के निशान को भी कम कर सकता है.

नमी भी चींटियों की लगातार मौजूदगी की एक वजह हो सकती है. अगर बाथरूम, किचन सिंक, कपड़े धोने की जगह या पानी के पाइप के आसपास बार-बार चींटियां दिख रही हैं, तो वहां रिसाव, जमा नमी या गीली लकड़ी की जांच करें. बाहर टपकते नल, बंद नालियां, गमलों के नीचे जमा पानी और पानी देने वाली पाइप भी चींटियों को घर के पास बनाए रख सकती हैं. घर की दीवार से लगी बहुत ज्यादा मल्च, लकड़ी या घनी वनस्पति भी उन्हें छिपने की जगह दे सकती है.
कैसे समझें कि घोंसला मिल गया है
घोंसला मिलने का सबसे मजबूत संकेत एक ही जगह से चींटियों का लगातार आना-जाना है. लेकिन सिर्फ एक चींटी को किसी दरार से निकलते देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कॉलोनी वहीं है. किसी जगह पर गतिविधि बार-बार दिखाई दे और दिन के अलग-अलग समय में उसी रास्ते से चींटियां आती-जाती रहें, तो उस स्थान की जांच करना ज्यादा जरूरी हो जाता है.
सिर्फ स्प्रे करने से खत्म नहीं होगी समस्या
सिर्फ ऊपर से दिखाई देने वाली चींटियों पर स्प्रे करना भी हमेशा समस्या खत्म नहीं करता. स्प्रे से सामने मौजूद चींटियां मर सकती हैं, लेकिन घोंसले के अंदर मौजूद पूरी कॉलोनी तक इसका असर नहीं पहुंचता. कुछ मामलों में रास्ते पर स्प्रे करने से चींटियां अलग-अलग समूहों में बंटकर दूसरी जगह जा सकती हैं. चींटी के लिए इस्तेमाल होने वाला चारा कॉलोनी तक पहुंचाने में मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
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कब समझें कि मामला बड़ा हो सकता है
अगर चींटियां बार-बार साफ करने के बाद भी उसी जगह लौट रही हैं, दीवार या छत की खाली जगह से निकल रही हैं या लकड़ी के आसपास लगातार दिखाई दे रही हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें. खासकर अगर गीली या सड़ी लकड़ी, नरम स्कर्टिंग बोर्ड, मिट्टी जैसी लकीरें या लकड़ी के नुकसान के संकेत भी मिलें, तो सिर्फ चींटियों की समस्या मानकर न चलें. ऐसे मामलों में दीमक की जांच भी जरूरी हो सकती है, क्योंकि चींटियां दिखाई देने का मतलब हमेशा दीमक होना नहीं है.
दोबारा चींटियां न आएं, इसके लिए क्या करें
चींटियों की समस्या खत्म होने के बाद दोबारा उनका घोंसला बनने से रोकने के लिए पाइप, खिड़की, दरवाजे और दीवार के आसपास मौजूद साफ दिखाई देने वाली दरारों को सील करें. खाने की चीजों को खुला न छोड़ें, नमी के स्रोत को ठीक करें और घर के आसपास की मिट्टी, पौधों और बाहरी दीवारों की समय-समय पर जांच करते रहें. अगर चींटियां बार-बार उसी जगह लौट रही हैं, तो सिर्फ ज्यादा मजबूत केमिकल इस्तेमाल करने के बजाय यह पता लगाना बेहतर है कि उनके लौटने की असली वजह क्या है.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Potato Buying Tips: आलू काटने पर निकल रहा है काला? खरीदने से पहले पहचानें ये संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ How To Identify Bad Potatoes: आलू खरीदते समय अक्सर हम सिर्फ उसके आकार और बाहरी रंग को देखकर ही उसे टोकरी में रख लेते हैं. लेकिन कई बार बाहर से ठीक दिखने वाला आलू अंदर से खराब निकल सकता है. आलू काटने पर काला या भूरा हिस्सा दिखाई दे, उसकी सतह सिकुड़ी हुई हो या वह जरूरत से ज्यादा नरम लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सही आलू चुनने के लिए उसके कुछ संकेतों को खरीदते समय ही पहचानना जरूरी है.
आलू कितना समय तक सही रहता है?
कच्चे और पूरे आलू को अगर ठंडी, अंधेरी और सूखी जगह पर रखा जाए, तो वे आमतौर पर दो से तीन महीने तक चल सकते हैं. वहीं कमरे के तापमान पर रखे आलू करीब एक से दो सप्ताह तक ही ठीक रह सकते हैं. इसलिए आलू को खरीदने के साथ-साथ उन्हें रखने की जगह पर भी ध्यान देना जरूरी है.
आलू खरीदते समय उसकी सतह जरूर देखें
अच्छा कच्चा आलू छूने पर सख्त महसूस होता है. अगर आलू बहुत नरम या दबाने पर ज्यादा पिचक रहा है, तो यह उसके खराब होने का संकेत हो सकता है. आलू की बाहरी त्वचा भी ज्यादा सिकुड़ी हुई नहीं होनी चाहिए. अगर आलू की त्वचा पर झुर्रियां दिखाई दे रही हैं और साथ में काले धब्बे या चोट के निशान भी मौजूद हैं, तो ऐसे आलू को खरीदने से बचना बेहतर है. सिर्फ ऊपर से छोटा सा निशान देखकर हर बार आलू खराब नहीं माना जा सकता, लेकिन नरमी, सिकुड़ी त्वचा और गहरे धब्बे एक साथ दिखाई दें तो ध्यान देना जरूरी है.

आलू के अंदर काला हिस्सा क्यों चिंता की बात हो सकता है?
आलू काटने के बाद अगर अंदर काले या गहरे भूरे हिस्से दिखाई देते हैं, तो उसकी स्थिति को ध्यान से देखना चाहिए. खासकर अगर इसके साथ आलू नरम हो, बदबू आ रही हो या सड़ने के दूसरे संकेत भी दिखाई दे रहे हों, तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. आलू का अंदरूनी हिस्सा बाहर से दिखाई नहीं देता, इसलिए खरीदते समय उसके बाहरी संकेतों को देखना ज्यादा जरूरी है. ऐसे आलू जिनमें चोट, गहरे धब्बे या सिकुड़न दिखाई दे रही हो, उनके अंदर भी नुकसान हो सकता है.
फफूंद दिखे तो आलू न रखें
आलू पर फफूंद दिखाई दे तो उसे सामान्य हिस्सा मानकर सिर्फ फफूंद काटकर इस्तेमाल करना सही नहीं है. फफूंद के ऐसे हिस्से हो सकते हैं जो आंखों से दिखाई नहीं देते. इसलिए अगर आलू पर साफ तौर पर फफूंद लगी दिखाई दे रही है, तो उसे फेंक देना चाहिए. आलू से तेज या खराब गंध आना भी अच्छा संकेत नहीं है. सामान्य कच्चे आलू में मिट्टी जैसी हल्की प्राकृतिक गंध होती है. अगर उसमें बहुत तेज और खराब गंध आ रही है, तो यह अंदर से सड़ने या फफूंद लगने की ओर इशारा कर सकती है.
हरा आलू दिखे तो सावधान रहें
आलू की त्वचा पर हरा रंग दिखाई देना भी खरीदते समय ध्यान देने वाली बात है. रोशनी के संपर्क में आने पर आलू हरा हो सकता है. यह हरा रंग क्लोरोफिल की वजह से आता है, लेकिन हरे आलू में सोलनिन नामक यौगिक का स्तर भी बढ़ सकता है, जो ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए बहुत ज्यादा हरा दिखाई देने वाला आलू खरीदने से बचना बेहतर है. आलू को घर पर भी ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उस पर सीधी रोशनी न पड़े.

आलू में अंकुर निकल आएं तो क्या करें?
आलू में छोटे-छोटे अंकुर निकलना भी इस बात का संकेत है कि वह लंबे समय से रखा हुआ है और उसकी स्थिति बदल रही है. अंकुर निकलने के साथ आलू में ग्लाइकोएल्कलॉइड यौगिकों का स्तर बढ़ सकता है. ज्यादा मात्रा में इनका सेवन पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी परेशानी से जुड़ा हो सकता है. इसलिए खरीदते समय ऐसे आलू चुनें जिनमें अंकुर दिखाई न दे रहे हों. अगर घर में रखे आलू में बड़े अंकुर निकल आए हैं, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है.
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अलग-अलग तरह के आलू में भी यही संकेत देखें
लाल आलू हो या रसेट आलू, खराब होने के संकेत काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं. सिकुड़ी हुई त्वचा, गहरे धब्बे, बहुत नरम बनावट, खराब गंध, फफूंद, अंकुर या हरा रंग दिखाई दे तो ऐसे आलू को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. सिर्फ आलू का रंग या आकार देखकर उसकी गुणवत्ता तय नहीं की जा सकती. उसे छूकर उसकी मजबूती देखना और त्वचा पर किसी असामान्य बदलाव को पहचानना ज्यादा जरूरी है.
आलू को लंबे समय तक ताजा कैसे रखें?
आलू को लंबे समय तक सही रखने के लिए उन्हें ठंडी, अंधेरी और सूखी जगह पर रखें. पेंट्री, अलमारी या ऐसा कैबिनेट जहां सीधी धूप न आती हो, इसके लिए बेहतर जगह हो सकती है. इस तरह रखने से आलू में जल्दी अंकुर निकलने और फफूंद बनने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. कच्चे आलू को फ्रीजर में रखना भी सही नहीं है. इससे उनकी बनावट नरम हो सकती है और रंग भूरा पड़ सकता है. इसलिए आलू को ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां वे बहुत गर्मी, नमी और रोशनी से बचे रहें.
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        <pubDate>Fri, 28 Aug 2026 14:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बदल रही खाने की थाली! अब स्वाद के साथ प्रोटीन और पोषण पर जोर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बदल-रही-खाने-की-थाली-अब-स्वाद-के-साथ-प्रोटीन-और-पोषण-पर-जोर</link>
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        <description><![CDATA[ आपकी खाने की थाली आने वाले समय में पहले से काफी अलग हो सकती है. अब लोग सिर्फ पेट भरने या स्वाद के लिए फूड नहीं चुन रहे, बल्कि यह भी देख रहे हैं कि उसमें कितना प्रोटीन है, कितने पोषक तत्व हैं और वह सेहत के लिए कितना बेहतर है. इस पसंद का असर अब देश के फूड सेक्टर में भी नजर आने लगा है. प्लांट-बेस्ड प्रोटीन, फंक्शनल फूड, न्यूट्रास्युटिकल्स और प्राकृतिक इनग्रेडिएंट्स की डिमांड काफी तेजी से बढ़ी है. इसका मतलब है कि आने वाले वक्त में सुपरमार्केट और ऑनलाइन ग्रॉसरी ऐप्स पर आपको ऐसे फूड ऑप्शंस मिलेंगे, जो स्वाद के साथ पोषण का भी दावा करेंगे.
कैलोरी गिनने से आगे बढ़े लोग, अब प्रोटीन पर नजर
कुछ साल पहले तक हेल्दी डाइट का मतलब अक्सर कम कैलोरी वाला खाना माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. मुंबई में चल रहे एफआई इंडिया 2026 और प्रोपैक इंडिया 2026 में फूड इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने बताया कि लोगों में अब कैलोरी से ज्यादा पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. खासकर प्रोटीन को लेकर लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है.
ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स असोसिएशन के वेस्ट जोन चेयरमैन डॉ. प्रबोध हल्दे के मुताबिक, इसका असर युवाओं, जिम जाने वालों और फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों के साथ-साथ आम परिवारों की खरीदारी पर भी नजर आने लगा है. दाल, सोया, पनीर और दूध जैसे पारंपरिक प्रोटीन सोर्सेज के साथ अब बाजार में प्लांट-बेस्ड मीट, प्रोटीन ड्रिंक, प्रोटीन स्नैक्स और दूसरे हाई-प्रोटीन फूड्स के ऑप्शंस भी बढ़ रहे हैं.
क्यों बढ़ रहा प्लांट बेस्ड फूड?
प्लांट-बेस्ड फूड ऐसे प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें पौधों से मिलने वाली सामग्री इस्तेमाल होती है. इनमें सोया, मटर, दाल और दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. प्लांट-बेस्ड फूड्स इंडस्ट्री असोसिएशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रवीर श्रीवास्तव के मुताबिक, भारत के इस सेक्टर की ग्रोथ करीब 18 पर्सेंट की सालाना की स्पीड से हो रही है. वहीं, इसका ग्लोबल औसत 7-8 पर्सेंट है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही इसकी डिमांड?
इसका बड़ा कारण लोगों का अपनी डाइट को लेकर ज्यादा जागरूक होना है. कुछ लोग मीट का सेवन कम करना चाहते हैं तो कुछ लोग पर्यावरण को लेकर चिंतित हैं और कुछ लोग अपनी डाइट में नए प्रोटीन ऑप्शंस जोड़ना चाहते हैं. इन सभी वजहों से प्लांट-बेस्ड फूड की मांग बढ़ रही है।
5 साल में दोगुना हो सकता है प्लांट प्रोटीन का बाजार
भारत में प्लांट-प्रोटीन इनग्रेडिएंट्स का बाजार अभी करीब 4500 करोड़ रुपये का है. इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के एमडी योगेश मुद्रास की मानें तो अगले पांच साल में यह बाजार दोगुना हो सकता है. हालांकि, दिलचस्प पहलू यह है कि अभी भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 90 पर्सेंट प्लांट-प्रोटीन इनग्रेडिएंट्स विदेशों से आते हैं. इनका उत्पादन देश में बढ़ता है तो भारतीय ग्राहकों को ऐसे प्रोडक्ट्स के ज्यादा ऑप्शंस मिल सकते हैं.
आपकी थाली में आने वाले हैं नए हेल्दी ऑप्शन
फंक्शनल फूड और न्यूट्रास्युटिकल्स भी इस बदलाव का हिस्सा हैं. आसान भाषा में समझें तो ऐसे फूड प्रोडक्ट्स, जिनमें सामान्य पोषण के अलावा किसी खास हेल्थ नीड्स को ध्यान में रखकर प्रोडक्ट तैयार किया जाता है, उनकी मांग बढ़ रही है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में बाजार में आपको प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल और दूसरे पोषक तत्वों पर फोकस करने वाले नए प्रोडक्ट्स ज्यादा देखने को मिल सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Termite Signs: सीलन है या दीमक का आतंक? दीवार से झड़ती मिट्टी से ऐसे पहचानें</title>
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        <description><![CDATA[ Difference Between Wall Dampness And Termites: घर की दीवार से अचानक मिट्टी झड़ने लगे तो इसे सिर्फ पुरानी पपड़ी या सीलन समझकर नजरअंदाज न करें. कई बार दीवार से निकलता मिट्टी जैसा बारीक मलबा घर में छिपी दीमक का संकेत भी हो सकता है. खासकर अगर दीवार पर मिट्टी की पतली लकीरें, सुरंग जैसी परत या लकड़ी के आसपास मिट्टी जमा दिखाई दे रही हो, तो मामला गंभीर हो सकता है. हालांकि, हर जगह झड़ती मिट्टी का मतलब दीमक नहीं होता. ऐसे में कुछ आसान संकेतों से समझा जा सकता है कि परेशानी सीलन की है या दीमक की.
दीवार पर मिट्टी की पतली सुरंग दिखे तो दें ध्यान
अंडरग्राउंड टर्माइट यानी जमीन के अंदर रहने वाली दीमक आमतौर पर मिट्टी और लकड़ी के बीच आने-जाने के लिए छोटी-छोटी मिट्टी की सुरंग बनाती है. ये सुरंगें दीमक को सूखने से बचाती हैं और उन्हें खुले में आए बिना लकड़ी तक पहुंचने में मदद करती हैं. यही वजह है कि घर की नींव, दीवारों, लकड़ी के दरवाजों, चौखट, फर्नीचर, बाड़ या छायादार हिस्सों में ऐसी मिट्टी की लकीरें दिखाई दे सकती हैं. अगर दीवार पर मिट्टी की कोई सीधी या टेढ़ी-मेढ़ी पट्टी जमीन से ऊपर की ओर जाती दिख रही है, तो इसे सामान्य गंदगी मानकर साफ कर देना ठीक नहीं है. यह दीमक की बनाई हुई सुरंग हो सकती है.

सीलन में आमतौर पर क्या दिखता है?
सीलन की वजह से दीवार पर अक्सर नमी के धब्बे, पेंट का फूलना, प्लास्टर का उखड़ना या सफेद नमक जैसी परत दिखाई देती है. कई बार दीवार छूने पर ठंडी या नम महसूस होती है और लंबे समय तक समस्या रहने पर पपड़ी लगातार झड़ती रहती है. वहीं दीमक की मौजूदगी में तस्वीर थोड़ी अलग हो सकती है. दीवार के पास मिट्टी जमा मिल सकती है, लकड़ी खोखली लग सकती है या सतह पर बहुत बारीक दरारों के साथ मिट्टी की सुरंग जैसी संरचना दिखाई दे सकती है. हालांकि, सिर्फ एक संकेत देखकर यह तय करना मुश्किल है कि दीवार में दीमक है या नहीं.
मिट्टी की सुरंग कहां दिखती है, यह भी है अहम
दीमक की मिट्टी वाली सुरंगें अक्सर उन जगहों पर दिखाई देती हैं जहां जमीन और लकड़ी या दीवार का संपर्क आसान होता है. नींव के आसपास, लकड़ी के दरवाजे-खिड़की की चौखट, फर्श के किनारे, क्रॉल स्पेस, लकड़ी के खंभे और घर से लगी बाड़ ऐसी जगहें हैं जहां इनका बनना संभव है. अगर मिट्टी की पतली पट्टी जमीन से शुरू होकर दीवार या लकड़ी तक पहुंच रही है, तो इसे खास तौर पर जांचना चाहिए. कुछ मामलों में दीमक दीवार में मौजूद छोटी दरारों या पाइप और अन्य यूटिलिटी के रास्तों का भी इस्तेमाल कर सकती है.

सूखी सुरंग देखकर यह न मानें कि दीमक खत्म हो गई
कई लोगों को लगता है कि अगर दीमक की बनाई मिट्टी की सुरंग सूखी है या उसमें कोई कीड़ा नजर नहीं आ रहा, तो खतरा खत्म हो चुका है. ऐसा जरूरी नहीं है. दीमक किसी पुराने रास्ते को छोड़कर दूसरी जगह भी सक्रिय हो सकती है. इसलिए सिर्फ सुरंग को देखकर या उसे तोड़कर तुरंत निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. अगर उसके आसपास लकड़ी में नुकसान, खोखलापन या दूसरी संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे रही है, तो पूरे हिस्से की जांच जरूरी है.
दीमक लकड़ी को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है
दीमक की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उसका नुकसान हमेशा शुरुआत में बाहर से दिखाई नहीं देता. इसलिए दरवाजे, चौखट या लकड़ी का कोई हिस्सा बाहर से ठीक दिखने के बावजूद अंदर से कमजोर हो सकता है. अगर लकड़ी दबाने पर असामान्य रूप से नरम लगे, खोखली आवाज आए या उसके पास मिट्टी की सुरंग दिखाई दे, तो इसे गंभीर संकेत मानना चाहिए.
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नमी दीमक की समस्या को बढ़ा सकती है
सीलन और दीमक हमेशा एक ही समस्या नहीं हैं, लेकिन दोनों का संबंध जरूर हो सकता है. जमीन के पास लगातार नमी, पानी का रिसाव, गीली मिट्टी, लकड़ी के आसपास जमा पानी और छायादार हिस्से दीमक के लिए अनुकूल वातावरण बना सकते हैं. इसीलिए अगर दीवार से मिट्टी झड़ रही है और उसी जगह नमी भी मौजूद है, तो केवल पेंट या प्लास्टर ठीक कराने से समस्या खत्म नहीं होगी. पानी कहां से आ रहा है और दीमक की गतिविधि है या नहीं, दोनों की जांच करनी होगी.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>नेपाल में जहां आई बाढ़, वहां क्यों पहुंचते हैं हजारों विदेशी पर्यटक?</title>
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        <description><![CDATA[ नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर के टूटने से अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों को तबाह कर दिया है. इस हादसे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी प्रभावित हुए हैं. नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, नेपाल में लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं. इनमें भारत समेत 30 से अधिक देशों के नागरिकों के होने की आशंका हैं. ऐसे में यवाल यह है कि आखिर इन दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में हजारों विदेशी पर्यटक पहुंचते ही क्यों हैं?
हिमालय का आकर्षण सबसे बड़ा कारण
नेपाल दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों का घर है और यही वजह है कि यह लंबे समय से पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहा है. माउंट एवरेस्ट के अलावा लांगटांग, अन्नपूर्णा, मनास्लू और अन्य पर्वतीय क्षेत्र दुनियाभर के ट्रेकर्स को आकर्षित करते हैं. वहीं ट्रेकिंग देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है. नेपाल सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 11.47 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक नेपाल पहुंचे थे. बाढ़ से प्रभावित रसुवा जिले का क्षेत्र भी इसी वजह से महत्वपूर्ण है. स्याफ्रुबेसी और तिमुरे जैसे स्थान लांगटांग वैली तथा तमांग हेरिटेज ट्रेल की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों में आते हैं. यही क्षेत्र तिब्बत जाने वाले यात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है.
कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्रमुख रास्ता
इस इलाके में विदेशी यात्रियों की बड़ी मौजूदगी का दूसरा बड़ा कारण धार्मिक पर्यटन है. नेपाल के रास्ते बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य देशों के तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा करते हैं. नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित मार्ग इस यात्रा के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है. यही वजह है कि बाढ़ के समय प्रभावित इलाकों में केवल ट्रेकर्स ही नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के तीर्थयात्री भी मौजूद थे.
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नेपाल सिर्फ एवरेस्ट तक सीमित नहीं
विदेशी पर्यटकों के लिए नेपाल का आकर्षण केवल एवरेस्ट नहीं है. यहां बर्फ से ढके पहाड़, झीलें, बौद्ध मठ, हिंदू मंदिर, जंगल और ग्रामीण संस्कृति एक साथ देखने को मिलती हैं. कई पर्यटक शहरों से दूर छोटे गांवों में होमस्टे और स्थानीय जीवन का अनुभव लेने भी पहुंचते हैं. रसुवा क्षेत्र में गोसाइंकुंड जैसे धार्मिक और प्राकृतिक स्थल भी यात्रियों को आकर्षित करते हैं. इसलिए बाढ़ से प्रभावित इलाकों में पर्यटकों की मौजूदगी कोई असामान्य बात नहीं थी. ये क्षेत्र सामान्य परिस्थितियों में नेपाल के लोकप्रिय पर्यटन गलियारों का हिस्सा हैं.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Hollow Tiles: टाइल पर पैर रखते ही आती है खोखली आवाज? टूटने से पहले ऐसे करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ Why Floor Tiles Sound Hollow: कई बार जब आप टाइल पर पैर या उंगली से हल्का दबाते हैं, तो उसमें से खोखली आवाज आती है. ऐसा महसूस होता है जैसे टाइल अंदर से खाली है. यह सामान्य बात नहीं है, भले ही टाइल ऊपर से बिल्कुल ठीक दिखाई दे. न कोई दरार, न कोई हलचल, कुछ भी दिखाई नहीं देता. ज्यादातर लोग इस आवाज को नजरअंदाज कर देते हैं. उन्हें लगता है कि यह छोटी और मामूली समस्या है. लेकिन समय के साथ यह खोखली आवाज ढीली टाइल, ग्राउट लाइन टूटने या टाइल के पूरी तरह बाहर निकलने की वजह बन सकती है.
क्यों आती है आवाज?
खोखली आवाज का मतलब है कि टाइल नीचे की सतह से पूरी तरह चिपकी हुई नहीं है. टाइल के नीचे कुछ खाली जगह है. बॉन्डिंग एक जैसी नहीं है. कुछ हिस्से चिपके हुए हैं और कुछ हिस्से नहीं. इस वजह से टाइल को पूरा सपोर्ट नहीं मिलता. जब लोग उस पर चलते हैं, जब पानी अंदर जाता है या तापमान में बदलाव होता है, तो टाइल के नीचे दबाव बनने लगता है. शुरुआत में सिर्फ आवाज सुनाई देती है. बाद में वास्तविक नुकसान शुरू हो जाता है. यह टाइल की ऊपरी सतह की समस्या नहीं है. यह बॉन्डिंग की समस्या है.
खोखली टाइल गंभीर समस्या क्यों बन जाती है?
खोखली टाइल आमतौर पर तुरंत खराब नहीं होती. वे हफ्तों या महीनों तक अपनी जगह पर बनी रह सकती हैं. यही वजह है कि कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन धीरे-धीरे रोजाना इस्तेमाल कमजोर हिस्सों को और कमजोर करता है. चलने, फर्नीचर के वजन और सफाई के पानी से बार-बार दबाव पड़ता है. बाथरूम में समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि नमी टाइल के नीचे मौजूद खाली जगह में चली जाती है. कुछ समय बाद टाइल में दरार आ सकती है, ग्राउट खुल सकता है या टाइल अचानक बाहर निकल सकती है. तब मरम्मत महंगी और परेशानी वाली हो जाती है.

टाइल लगाते समय खोखली आवाज क्यों आती है
खोखली आवाज बिना वजह नहीं आती. ज्यादातर मामलों में इसकी वजह टाइल लगाते समय होने वाली समस्या होती है.
&amp;nbsp;कारण हैं-
एडहेसिव ठीक से न फैलानाटाइल के नीचे बहुत कम एडहेसिव का इस्तेमाल करनाटाइल को ठीक से दबाकर या एडजस्ट न करना
जब एडहेसिव की कवरेज एक जैसी नहीं होती, तो टाइल के नीचे हवा फंस जाती है. यही एयर पॉकेट बाद में खोखली आवाज पैदा करते हैं. यह समस्या फर्श की टाइल और बड़े आकार की टाइल में ज्यादा आम है.
टाइल एडहेसिव का क्या है रोल?
टाइल एडहेसिव खोखली आवाज को रोकने में मदद करता है, लेकिन तभी जब इसका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए. अच्छा एडहेसिव भी लापरवाही से किए गए काम को ठीक नहीं कर सकता. अगर टाइल लगाने से पहले एडहेसिव बहुत ज्यादा सूख जाए, तो बॉन्डिंग कमजोर हो जाती है. अगर इसे असमान तरीके से फैलाया जाए या बहुत देर तक खुला छोड़ दिया जाए, तो इसकी सतह पर एक पतली परत बन जाती है. ऐसे एडहेसिव पर लगाई गई टाइल ठीक से चिपकती नहीं है. सही तरीके से लगाए जाने पर टाइल एडहेसिव बेहतर बॉन्डिंग बनाने में मदद करता है. इसके अलावा, अगर टाइल लगाते समय उसे मजबूती से दबाया नहीं जाता, तो उसके नीचे हवा रह जाती है. बाद में यही खोखली आवाज में बदल जाती है.
ग्राउटिंग खोखली टाइल की समस्या क्यों ठीक नहीं कर सकती?
कुछ लोगों को लगता है कि ग्राउटिंग से खोखली आवाज ठीक हो जाएगी. यह एक गलतफहमी है. ग्राउट सिर्फ टाइलों के बीच की जगह को भरता है. टाइल के नीचे इसका कोई काम नहीं है. अगर टाइल खोखली है, तो ग्राउटिंग कुछ समय के लिए सिर्फ समस्या को छिपाएगी. जोड़ों से पानी फिर भी अंदर जा सकता है और नीचे मौजूद खाली जगह तक पहुंच सकता है. अच्छा ग्राउट जोड़ों को सील करने में मदद करता है, लेकिन खोखली बॉन्डिंग को ठीक नहीं कर सकता. एक बार टाइल पर ग्राउट हो जाने के बाद खोखली टाइल को ठीक करना और मुश्किल हो जाता है. इसलिए ग्राउटिंग शुरू होने से पहले बॉन्डिंग सही होनी चाहिए.
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खोखली टाइल से बचने के आसान तरीके
खोखली टाइल से बचना मुश्किल नहीं है. बस सही समय पर ध्यान देने की जरूरत होती है. सतह साफ, सूखी और समतल होनी चाहिए. एडहेसिव ताजा होना चाहिए और उसे समान रूप से फैलाना चाहिए. टाइल को ठीक से दबाना चाहिए ताकि हवा बाहर निकल जाए. टाइल स्पेसर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल सही दूरी और अलाइनमेंट बनाए रखने में मदद करता है. एक बार में बहुत बड़े हिस्से पर एडहेसिव न फैलाएं. एडहेसिव के काम करने लायक रहने के दौरान ही टाइल लगाएं. ये छोटे कदम बड़ा फर्क पैदा करते हैं.
अगर टाइल से खोखली आवाज आए तो क्या करें?
अगर खोखली आवाज का पता जल्दी चल जाए, तो प्रभावित टाइल को निकालकर दोबारा लगाना चाहिए. इंतजार करने से समस्या आमतौर पर और बढ़ जाती है. बाथरूम, किचन या ज्यादा आवाजाही वाली जगहों पर खोखली टाइल को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते इसे ठीक करने से पैसे बचते हैं और बाद में होने वाली बड़ी मरम्मत से बचा जा सकता है.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Rat Prevention Tips: किचन में चूहों के आतंक से हैं परेशान? ऐसे हमेशा के लिए करें सफाया ]]></description>
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        <title>Fridge Maintenance: फ्रिज में पानी जमा होने से हैं परेशान? ऐसे करें मिनटों में ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Fridge Water Condensation At Home: फ्रिज खोलते ही अगर शेल्फ पर पानी की बूंदें दिखाई दें या सब्जियों वाली ट्रे के नीचे थोड़ा पानी जमा हो, तो इसे सिर्फ छोटी सी परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें. थोड़ी बहुत नमी फ्रिज में सामान्य हो सकती है, खासकर जब दरवाजा बार-बार खोला गया हो या गर्म खाना अंदर रखा गया हो. लेकिन अगर खाना रखने के बाद बार-बार पानी की बूंदें बनने लगें, शेल्फ गीली रहती है या पानी जमा होने लगे, तो इसकी वजह समझना जरूरी है.
अक्सर ऐसी समस्या फ्रिज का दरवाजा ठीक से बंद न होने, गलत तापमान सेटिंग, खाने को खुला रखने या अंदर हवा का सही तरीके से न घूमने के कारण होती है. कुछ मामलों में पानी बाहर निकलने वाली ड्रेन लाइन में रुकावट भी इसकी वजह बन सकती है. अच्छी बात यह है कि कई छोटी गलतियों को घर पर ही ठीक किया जा सकता है.
सबसे पहले फ्रिज का दरवाजा चेक करें
फ्रिज के दरवाजे के चारों तरफ लगी रबर सील पर ध्यान दें. अगर यह ठीक से चिपक नहीं रही है, तो बाहर की गर्म हवा अंदर जा सकती है और फ्रिज के अंदर नमी बढ़ने लगती है. इसका एक आसान तरीका है कि दरवाजे और रबर सील के बीच कागज की एक पट्टी रखकर दरवाजा बंद करें. अब कागज को धीरे-धीरे बाहर खींचें. अगर कागज बहुत आसानी से निकल जाए, तो उस जगह की सील ठीक से काम नहीं कर रही हो सकती है.

रबर के अंदर धूल, खाने के छोटे टुकड़े या चिपचिपी गंदगी भी जमा हो सकती है. इसे गुनगुने साबुन वाले पानी से साफ करके अच्छी तरह सुखा दें. अगर रबर में कट या दरार दिखाई दे, तो उसे बदलवाने की जरूरत पड़ सकती है.
फ्रिज का तापमान सही रखें
गलत तापमान भी फ्रिज में ज्यादा नमी की वजह बन सकता है. आमतौर पर फ्रिज का तापमान करीब 2 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना सही माना जाता है. केवल फ्रिज के डायल पर दिए नंबर पर भरोसा करने के बजाय जरूरत हो तो अलग से अपलाइन थर्मामीटर की मदद से अंदर का तापमान चेक करें. तापमान बहुत ज्यादा रखने पर फ्रिज के अंदर की सतह पर्याप्त ठंडी नहीं रह पाती और नमी पानी की बूंदों में बदल सकती है. दूसरी तरफ बहुत कम तापमान रखने से पीछे की दीवार पर जरूरत से ज्यादा बर्फ जम सकती है, जो बाद में पिघलकर पानी जमा होने की वजह बन सकती है.

खाना खुला रखकर फ्रिज में न रखें
फ्रिज में रखा खाना भी अंदर की नमी बढ़ा सकता है. फल, सब्जियां और बचा हुआ खाना धीरे-धीरे नमी छोड़ते रहते हैं. अगर इन्हें खुला छोड़ दिया जाए, तो यह नमी फ्रिज की हवा में मिल जाती है और बाद में बूंदों के रूप में दिखाई दे सकती है. सब्जियों को फ्रिज में रखने से पहले अगर उन्हें धोया है, तो अतिरिक्त पानी अच्छी तरह सुखा लें. बचे हुए खाने को ढककर रखें और कोशिश करें कि खुले कटोरे की जगह एयरटाइट डिब्बे या अच्छी तरह बंद बैग का इस्तेमाल करें.
फ्रिज को जरूरत से ज्यादा न भरें
फ्रिज में सामान ठूंसकर रखने से भी समस्या हो सकती है. अगर खाने के डिब्बे अंदर लगे एयर वेंट को ढक देते हैं या सामान पीछे की दीवार से बिल्कुल सटाकर रखा जाता है, तो ठंडी हवा ठीक से घूम नहीं पाती. इससे फ्रिज के कुछ हिस्से ज्यादा गर्म और कुछ हिस्से ज्यादा ठंडे हो सकते हैं. इसलिए सामान के बीच थोड़ी जगह रखें और एयर वेंट को खुला रहने दें. इससे ठंडी हवा पूरे फ्रिज में बेहतर तरीके से घूम सकेगी और नमी भी कम जमा होगी.
ड्रेन में रुकावट तो नहीं?
फ्रिज के अंदर जमा होने वाला अतिरिक्त पानी एक छोटी ड्रेन लाइन के जरिए बाहर निकलता है. अगर इसमें खाने के टुकड़े या गंदगी फंस जाए, तो पानी बाहर जाने के बजाय फ्रिज के अंदर जमा हो सकता है. अगर आपको ड्रेन बंद होने का शक है, तो पहले फ्रिज को अनप्लग करें. इसके बाद पाइप क्लीनर या पतली वायर की मदद से रुकावट को धीरे से हटाया जा सकता है. ड्रेन में सीधे बहुत गर्म पानी डालने से बचें, क्योंकि इससे फ्रिज के अंदर के हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है.
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फ्रिज का लेवल भी चेक करें
कई बार फ्रिज के अंदर पानी जमा होने की वजह उसका सही तरीके से लेवल में न होना भी हो सकता है. अगर फ्रिज एक तरफ ज्यादा झुका हुआ है, तो पानी सही दिशा में ड्रेन तक नहीं पहुंच पाता और किसी एक हिस्से में जमा हो सकता है. फ्रिज के ऊपर बबल लेवल रखकर देखें कि वह सीधा है या नहीं.&amp;nbsp;
छोटी गलती से बढ़ सकती है समस्या
फ्रिज में पानी की बूंदें बनने की समस्या अक्सर किसी बड़ी खराबी के बजाय छोटी-छोटी गलतियों से शुरू होती है. इसलिए सबसे पहले दरवाजे की रबर सील, तापमान, खाने को रखने का तरीका, एयरफ्लो और ड्रेन को चेक करें. साथ ही फ्रिज को सही लेवल पर रखना भी जरूरी है.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Home Remedies For Lizards: घर में बार&amp;बार आती है छिपकली? बिना मारे भगाने के आसान हैक्स</title>
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        <description><![CDATA[ Home Remedies To Keep House Lizards Away: गर्मी और बरसात के मौसम में घर में छिपकलियां दिखना आम हो जाता है. कई बार ये खिड़की, दरवाजे या दीवार में बनी छोटी सी जगह से कमरे के अंदर आ जाती हैं. घर के अंदर इन्हें देखकर डर या परेशानी होना स्वाभाविक है, खासकर जब ये अचानक दीवार, छत या रसोई की अलमारी पर नजर आ जाएं. हालांकि छिपकलियां आमतौर पर इंसानों के लिए नुकसानदायक नहीं होतीं और घर में मौजूद छोटे कीड़े-मकौड़ों को खाकर उनकी संख्या कम करने में मदद करती हैं.
फिर भी अगर छिपकली कमरे में आ गई है, तो उसे मारने या किसी तेज केमिकल का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान घरेलू तरीकों की मदद से आप उसे बिना नुकसान पहुंचाए बाहर निकाल सकते हैं. साथ ही घर में कुछ छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखकर आगे छिपकलियों के आने की संभावना भी कम की जा सकती है.
घर के अंदर क्यों आती हैं छिपकलियां?
गर्मी के मौसम में बाहर का तापमान बढ़ जाता है, इसलिए छिपकलियां ठंडी और शांत जगह तलाशती हैं. घर के अंदर उन्हें छिपने के लिए अंधेरे कोने, फर्नीचर के पीछे की जगह और अलमारियों के आसपास सुरक्षित जगह मिल जाती है. इसके अलावा घर में मौजूद मच्छर, मक्खियां, चींटियां और दूसरे छोटे कीड़े उनके लिए खाने का काम करते हैं. खिड़की या दरवाजे खुले रहने, दीवारों में दरार होने या वेंटिलेशन की जगह से भी छिपकलियां अंदर आ सकती हैं. इसलिए उन्हें बाहर निकालने के साथ-साथ उन रास्तों को बंद करना भी जरूरी है, जहां से वे बार-बार अंदर आती हैं.
कमरे में छिपकली आ जाए तो क्या करें?
खिड़की और दरवाजा खोल दें
अगर छिपकली कमरे में आ गई है, तो सबसे पहले घबराएं नहीं. कमरे की खिड़की या दरवाजा खोल दें और अगर संभव हो तो कमरे की बाकी लाइट बंद कर दें. बाहर की तरफ रोशनी या खुली जगह होने से छिपकली को बाहर जाने का रास्ता मिल सकता है. उसे भगाने के लिए डंडे या किसी नुकीली चीज का इस्तेमाल न करें.

घर में आने वाले रास्ते बंद करें
छिपकलियां बहुत छोटी जगह से भी अंदर आ सकती हैं. खिड़की, दरवाजे, बाथरूम वेंट और दीवारों में बनी दरारों को अच्छी तरह देखें. जहां गैप दिखाई दे, वहां उसे सील करें. खिड़कियों पर जाली और दरवाजे के नीचे डोर स्वीप लगाने से भी अंदर आने का रास्ता कम किया जा सकता है.
घर को साफ रखें
छिपकलियां अक्सर वहां आती हैं जहां उन्हें खाने के लिए कीड़े मिलते हैं. घर में मच्छर, मक्खियां और चींटियां ज्यादा होंगी, तो छिपकलियों के आने की संभावना भी बढ़ सकती है. इसलिए फर्श की नियमित सफाई करें, रातभर गंदे बर्तन न छोड़ें और कूड़ेदान को समय पर खाली करें. खाने की चीजों को खुला रखने से भी बचें.

कमरे का सामान व्यवस्थित रखें
फर्नीचर के पीछे, पुराने डिब्बों, अखबारों और बेकार सामान के बीच छिपकलियां आसानी से छिप सकती हैं. कमरे और स्टोर की सफाई करते समय ऐसे सामान को हटाएं और कोनों को भी अच्छी तरह साफ करें. सामान कम और व्यवस्थित रखने से छिपकली को छिपने की जगह नहीं मिलेगी.
पुदीने के तेल का स्प्रे आजमा सकते हैं
छिपकलियां तेज गंध वाली कुछ चीजों से दूर रह सकती हैं. पुदीने के तेल का हल्का स्प्रे खिड़की के आसपास, कोनों और उन जगहों पर किया जा सकता है जहां छिपकली अक्सर दिखाई देती है. इसके लिए पानी में पुदीने के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर स्प्रे तैयार किया जा सकता है. इसकी गंध कम होने पर दोबारा स्प्रे किया जा सकता है.
प्याज और लहसुन भी रख सकते हैं
प्याज और लहसुन की तेज गंध भी छिपकलियों को पसंद नहीं आती. प्याज के टुकड़े या छीले हुए लहसुन की कलियां उन जगहों के पास रखी जा सकती हैं जहां से छिपकली अंदर आती है. हालांकि इन्हें समय-समय पर बदलते रहें, ताकि खराब होने की वजह से दूसरी परेशानी न हो.
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अंडे के छिलके का तरीका
साफ और सूखे अंडे के छिलकों को छोटे टुकड़ों में करके खिड़की, बालकनी या कमरे के कोनों के पास रखा जा सकता है. यह एक घरेलू तरीका है जिसे कुछ लोग छिपकलियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं. छिलकों को कुछ दिनों के बाद बदल देना चाहिए.
छिपकली को मारने की जरूरत नहीं
अगर घर में छिपकली बार-बार आ रही है, तो सबसे अच्छा तरीका है कि उसके आने की वजह को कम किया जाए. घर साफ रखें, कीड़े-मकौड़ों को दूर रखें और खिड़की, दरवाजे व दीवारों के छोटे गैप बंद करें. किसी छिपकली को कमरे में देखकर उसे मारने के बजाय बाहर निकलने का रास्ता देना बेहतर है.
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        <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 06:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>शीशा चमकाने के लिए यूज करते हैं अखबार? बिना मेहनत ऐसे होगा साफ</title>
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        <description><![CDATA[ बाथरूम या घर में लगा शीशा रोज़ाना इस्तेमाल में आता है, लेकिन पानी के छींटे, साबुन की परत और भाप जमकर उसे धुंधला बना देते हैं. ऐसे में ज़्यादातर लोग शीशा साफ करने के लिए पुराना अखबार इस्तेमाल करते हैं, और यह तरीका काफी हद तक कारगर भी है. लेकिन सिर्फ अखबार से रगड़ने से &amp;nbsp;रिज़ल्ट नहीं मिलता है, बल्कि इसके साथ सही तरीका अपनाना भी उतना ही जरूरी है. आइए जानते हैं बिना ज्यादा मेहनत किए शीशे को चमकदार बनाने का सही तरीका क्या है.
ऐसे करें सफाई
शीशा साफ करने से पहले एक स्प्रे बोतल में पानी और सफेद सिरका मिला लें. इस मिश्रण को शीशे पर स्प्रे करके 2 से 3 मिनट के लिए छोड़ दें, ताकि जमी हुई गंदगी और दाग ढीला पड़ जाएं. सिरका एक नैचुरल क्लीनर माना जाता है, जो केमिकल क्लीनर के बिना भी शीशे की गंदगी आसानी से हटा देता है.
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अखबार से ऐसे करें सफाई
सिरके से सफाई करने के बाद असली कमाल अखबार से होता है. शीशे को साफ कपड़े या सूखे अखबार से पोंछ लें, इससे शीशे पर कोई दाग या लकीर नहीं बचेगी और वह चमक उठेगा. दरअसल अखबार के कागज में मौजूद हल्का रफ टेक्सचर शीशे पर बिना खरोंच डाले पानी और सिरके की बूंदों को अच्छी तरह सोख लेता है, जिससे स्ट्रीक फ्री चमक मिलती है.
&amp;nbsp;जिद्दी दागों के लिए यह जादुई तरीका&amp;nbsp;
अगर शीशा इतना धुंधला हो चुका है कि उसमें चेहरा देखना भी मुश्किल हो, जान लें कि दाग काफी पुराने और मोटे हो चुके हैं. ऐसे मामलों में गर्म सिरका शीशे पर स्प्रे करें और सिरके में भीगे पेपर टॉवल को 10 से 20 मिनट के लिए शीशे पर चिपका दें, इससे जिद्दी दाग भी आसानी से निकल जाते हैं.
यह भी एक कारगर तरीका
शीशे पर हल्की खरोंच या धुंध जमी हो, तो टूथपेस्ट भी काम आ सकता है. शीशे पर थोड़ा टूथपेस्ट लगाकर हल्के हाथों से रगड़ें, फिर 2 3 मिनट बाद गीले कपड़े से पोंछ दें. इससे हल्की खरोंच और धुंध दोनों हट जाती हैं.
जान लें चमकाने का राज
नींबू का रस और सफेद सिरका मिलाकर भी शीशे की चमक बढ़ाई सकते है. यह मिश्रण जिद्दी दाग धब्बों को हटाने में मदद करता है, और शीशे को नैचुरल तरीके से चमकदार बना देता है.
कब करें सफाई?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक हफ्ते में कम से कम दो बार शीशा साफ करना चाहिए, क्योंकि हार्ड पानी के दाग जल्दी जमते हैं. सफाई करते वक्त बहुत ज्यादा जोर से रगड़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शीशे की सतह खराब हो सकती है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या बच्चों की तस्वीर देखने से सच में क्यूट पैदा होता है नवजात? जान लें सच</title>
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        <description><![CDATA[ गर्भावस्था से जुड़ी कई बातें परिवारों और समाज में लंबे समय से कही जात रही हैं. इन्हीं में एक आम धारणा है कि अगर गर्भवती महिला खूबसूरत या प्यारे बच्चों की तस्वीरें देखे, तो उसका होने वाला बच्चा भी उतना ही क्यूट पैदा होगा. कई लोग तो यह भी मानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान मां जिस तरह की तस्वीरें देखती है या जिन चीजों के बारे में सोचती है, उनका असर बच्चे के चेहरे पर उसी प्रकार पड़ता है. लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की सच्चाई.
माता-पिता के जीन करते हैं असर
वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसा कोई मजबूत प्रमाण नहीं है कि गर्भावस्था के दौरान बच्चों की तस्वीरे देखने से नवजात के चेहरे की बनावट या सुंदरता बदल जाती है. बच्चे की शारीरिक विशेषताएं मुख्य रूप से माता-पिता के जीन और आनुवंशिक संरचना से निर्धारित होती हैं. आंखों का आकार, नाक की बनावट, चेहरे का आकार, बालों की प्रकृति और त्वचा से जुड़े कई गुण माता-पिता से मिलने वाले आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होते हैं. इसलिए केवल किसी तस्वीर को देखने से बच्चे के चेहरे की विशेषताओं में बदलाव होने की बात वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है.
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पारंपरिक मान्यताएं
इस तरह की बातें अलग-अलग संस्कृतियों और परिवारों में पीढ़ियों से सुनने को मिलती रही हैं. गर्भावस्था को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं हैं, जिनमें मां के विचारों, पसंद और आसपास के वातावरण को बच्चे के व्यक्तित्व या रूप-रंग से जोड़ा जाता है. हालांकि इन मान्यताओं का सांस्कृतिक या भावनात्मक महत्व हो सकता है, लेकिन इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता. किसी बच्चे के चेहरे की बनावट को केवल मां के देखे हुए चित्रों या उसकी कल्पनाओं से जोड़ना सही नहीं है.
बच्चे की &amp;ldquo;क्यूटनेस&amp;rdquo; किस पर निर्भर करती है?
किसी नवजात को क्यूट या प्यारा लगना केवल उसके चेहरे की बनावट पर निर्भर नहीं करता. नवजात बच्चों में बड़ी आंखें, गोल चेहरा, छोटी नाक और नरम त्वचा जैसी विशेषताएं अक्सर लोगों में स्वाभाविक रूप से स्नेह की भावना पैदा करती हैं. इसके अलावा बच्चे के चेहरे की विशेषताओं पर आनुवंशिकता के साथ-साथ विकास और जन्म के बाद होने वाले प्राकृतिक बदलावों का भी प्रभाव पड़ता है. कई नवजातों के चेहरे जन्म के तुरंत बाद थोड़े सूजे हुए दिखाई दे सकत हैं, जो समय के साथ सामान्य हो जाते हैं.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>लड़की के दिल में कैसे जगाएं अपने लिए प्यार? जानें टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Healthy Relationship:&amp;nbsp; लड़की के दिल में अपने लिए प्यार जगाना कोई जादू या ट्रिक नहीं है. प्यार तभी गहरा होता है, जब दोनों के बीच भरोसा, सम्मान और अच्छी समझ हो. अगर आप किसी लड़की को पसंद करते हैं और चाहते हैं कि वह भी आपको पसंद करे, तो उसके साथ इमानदार रहें और उसकी भावनाओ की कद्र करें. उसकी बात ध्यान से सुनें, छोटी-छोटी बातों में केयर दिखाएं और उसे सहज महसूस कराएं. साथ ही, उसकी सीमाओं और फैसलों का सम्मान करना भी जरुरी है. याद रखें, प्यार किसी पर थोपा नहीं जा सकता, बल्कि समय के साथ विश्वास और समझ से पैदा होता है.
उसकी बात समझें और सम्मान करें
अगर आप चाहते हैं कि कोई लड़की आपको पसंद करे, तो सबसे पहले उसकी बात ध्यान से सुनें और उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. उसकी पसंद-नापसंद, परेशानियों और विचारों को महत्व दें. बातचीत के दौरान उसे बीच में रोकने के बजाय उसकी बात पूरी सुनें. साथ ही, उसकी राय, फैसलों और पर्सनल स्पेस का सम्मान करें. किसी भी रिश्ते में सम्मान और भरोसा सबसे जरूरी होता है. छोटी-छोटी बातों में उसकी केयर करना और जरूरत के समय उसका साथ देना भी आपके बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ा सकता है.
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साथ में क्वालिटी टाइम बिताएं
रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए एक-दूसरे के साथ अच्छा समय बिताना जरुरी है. आप साथ में घूमने जा सकते हैं, अपनी पसंद की चीजें कर सकते हैं या बस आराम से बैठकर बातचीत कर सकते हैं. इस दौरान खुद को बेहतर दिखाने के लिए झूठ या दिखावे का सहारा न लें. अपनी पर्सनैलिटी पर काम करें, आत्मविश्वास रखें और बातचीत में सकारात्मक रहें. हालांकि, हर समय मैसेज या कॉल करने से बचें. सामने वाले को पर्याप्त स्पेस देना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ रिश्ते में साथ के साथ व्यक्तिगत आजादी भी मायने रखती है.
ईमानदारी रखें और उसकी पसंद का सम्मान करें
किसी लड़की को अपने प्यार में लाने के लिए कोई जबरदस्ती की ट्रिक नहीं होती. प्यार समय के साथ भरोसे, समझ और अच्छे व्यवहार से पैदा होता है. इसलिए अपनी भावनाओं को लेकर ईमानदार रहें और झूठे वादे या दिखावा करने से बचें. अगर आपको लगता है कि वह भी आपको पसंद करती है, तो सही समय पर अपनी भावनाएं बता सकते हैं. लेकिन अगर वह आपके साथ रिश्ता नहीं चाहती, तो उसके फैसले को स्वीकार करना जरूरी है. सच्चा प्यार वही है, जिसमें दोनों की इच्छा, सम्मान और सहमति की जगह हो.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>किस तरह की एक्सरसाइज करने पर होता है हार्ट अटैक का खतरा? जानिए सावधानी</title>
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        <description><![CDATA[ Heart Attack Risk: एक्सरसाइज शरीर को फिट रखने के लिए जरूरी है, लेकिन बिना तैयारी के अचानक बहुत ज्यादा या तेज एक्सरसाइज करना कुछ लोगों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है. खासतौर पर लंबे समय से एक्सरसाइज न करने वालों को अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए. सही तरीके से किया गया वर्कआउट शरीर को एक्टिव रखने में मदद कर सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा मेहनत करने से बचना भी उतना ही जरुरी है.
अचानक ज्यादा मेहनत करने से बचें
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहा है और अचानक बहुत तेज दौड़ना, भारी वजन उठाना या हाई इंटेंसिटी वर्कआउट शुरू कर देता है, तो शरीर पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ सकता है. ऐसे वर्कआउट के दौरान दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकते हैं. अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाने या गलत तकनीक अपनाने से भी शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. इसलिए वर्कआउट की शुरुआत हल्की एक्सरसाइज और वार्म-अप से करें और धीरे-धीरे इसकी तिव्रता बढ़ाएं. अगर आप पहली बार जिम जा रहे हैं या लंबे समय के बाद दोबारा एक्सरसाइज शुरू कर रहे हैं, तो शुरुआत में हल्की गतिविधियों को शामिल करना बेहतर होता है. शरीर को समय देने से आप धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ा सकते हैं.
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किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए
जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें तेज एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. अधिक उम्र के लोगों या लंबे समय से बिल्कुल एक्सरसाइज न करने वालों को भी धीरे-धीरे शुरुआत करनी चाहिए. वेट ट्रेनिंग करते समय सही तकनीक और उचित वजन चुनना जरूरी है. बहुत भारी वजन उठाते समय सांस रोकने से भी ब्लड प्रेशर पर असर पड़ सकता है. अगर एक्सरसाइज के दौरान सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, चक्कर, अचानक कमजोरी, अत्यधिक थकान या असामान्य धड़कन महसुस हो, तो तुरंत एक्सरसाइज रोक दें और चिकित्सकीय मदद लें. ऐसे लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
वार्म-अप और कूल-डाउन को न करें नजरअंदाज
एक्सरसाइज से पहले कुछ मिनट वार्म-अप करने से शरीर को वर्कआउट के लिए तैयार करने में मदद मिलती है. इसी तरह एक्सरसाइज खत्म करने के बाद अचानक रुकने के बजाय कुछ देर हल्की गतिविधि और स्ट्रेचिंग करना बेहतर हो सकता है. शुरुआत के लिए तेज चाल से पैदल चलना, हल्की साइकिलिंग या अपनी क्षमता के अनुसार सामान्य एरोबिक गतिविधियां बेहतर विकल्प हो सकती हैं. फिटनेस बढ़ने के साथ धीरे-धीरे वर्कआउट का समय और तीव्रता बढ़ाई जा सकती है. याद रखें, हार्ट अटैक का खतरा केवल किसी एक एक्सरसाइज की वजह से तय नहीं होता, बल्कि व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, फिटनेस और अन्य जोखिम कारकों पर भी निर्भर करता है. इसलिए नियमित और संतुलित वर्कआउट करें और किसी स्वास्थ्य समस्या या असामान्य लक्षण की स्थिती में विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 17:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Delhi Style Dahi Bhalla: घर में कैसे बनाएं दिल्ली जैसे दही भल्ले? ये रेसिपी आएगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Soft Dahi Bhalla At Home: दही भल्ले का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है. दिल्ली की गलियों में मिलने वाले नरम और स्वादिष्ट दही भल्ले हर किसी को पसंद आते हैं. उड़द दाल से बने मुलायम भल्लों के ऊपर ठंडा दही, मीठी चटनी और खट्टी-मीठी चटपटी चीजें डाली जाती हैं, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देती हैं. लेकिन घर पर दही भल्ले बनाते समय सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि भल्ले बाजार जैसे नरम और फूले हुए नहीं बन पाते.
कई बार भल्ले तलने के बाद सख्त हो जाते हैं, तो कभी बैटर सही न होने की वजह से वे अच्छी तरह फूलते नहीं हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप घर पर भी नरम और फूले हुए दही भल्ले बना सकते हैं. दाल चुनने से लेकर बैटर तैयार करने और तलने से पहले उसकी जांच करने तक हर छोटा स्टेप इसमें काम आता है.
सही दाल चुनना है सबसे जरूरी
अच्छे दही भल्ले बनाने की शुरुआत सही दाल से होती है. इसके लिए आमतौर पर उड़द दाल का इस्तेमाल किया जाता है. उड़द दाल भल्लों को नरम और हल्का बनाने में मदद करती है. इसमें थोड़ी सी मूंग दाल मिलाने से स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर हो जाते हैं. अगर आप घर पर दिल्ली जैसे दही भल्ले बनाना चाहते हैं, तो दाल की मात्रा का ध्यान रखें. उड़द दाल मुख्य रूप से रखें और उसमें थोड़ी मूंग दाल मिलाएं. दाल को अच्छी तरह धोकर कुछ घंटे के लिए पानी में भिगो दें. इससे दाल आसानी से पिसेगी और बैटर भी अच्छा तैयार होगा.

पानी एक साथ ज्यादा न डालें
दाल पीसते समय पानी डालने में जल्दबाजी न करें. एक साथ ज्यादा पानी डालने से बैटर पतला हो सकता है और फिर भल्ले ठीक से नहीं बनेंगे. दाल को पीसते समय थोड़ा-थोड़ा पानी डालें और जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करें. बैटर इतना गाढ़ा होना चाहिए कि वह आसानी से आकार ले सके. बहुत पतला बैटर होने पर भल्ले तेल में फैल सकते हैं और उनका टेक्सचर भी सही नहीं आएगा. इसलिए पानी हमेशा कम मात्रा में डालना बेहतर है और जरूरत पड़ने पर बाद में थोड़ा और पानी मिलाया जा सकता है.
बैटर में थोड़ा नमक जरूर डालें
दाल पीसते समय एक छोटी सी बात का ध्यान रखना भी जरूरी है. बैटर में थोड़ा नमक जरूर डालें. यह एक सामान्य सी बात लग सकती है, लेकिन कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. नमक बैटर के स्वाद को बेहतर करता है और भल्ले बनाने की तैयारी में इसका भी अपना महत्व है. इसलिए दाल पीसते समय इसमें स्वाद के अनुसार थोड़ा नमक जरूर मिलाएं.

दाल को अच्छी तरह पीसें
नरम और फूले हुए भल्लों के लिए बैटर अच्छी तरह तैयार होना चाहिए. दाल को इतना पीसें कि बैटर स्मूद और एकसार हो जाए. अच्छी तरह पिसा हुआ बैटर भल्लों को हल्का और नरम बनाने में मदद करता है. बैटर को हाथ से भी अच्छी तरह फेंटा जा सकता है या इसके लिए मिक्सर या स्टैंड मिक्सर की मदद ली जा सकती है. बैटर को अच्छी तरह फेंटने से उसमें हवा शामिल होती है, जिससे तलने के बाद भल्ले ज्यादा हल्के और फूले हुए बन सकते हैं.
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बैटर का छोटा सा ड्रॉप टेस्ट करें
भल्ले तलने से पहले बैटर की जांच करने का एक आसान तरीका है ड्रॉप टेस्ट. इसके लिए तैयार बैटर का थोड़ा सा हिस्सा लें और उसे पानी से भरे कटोरे में डालें. अगर बैटर का हिस्सा पानी में डालने के बाद ऊपर तैरने लगे, तो यह अच्छा संकेत माना जाता है. इसका मतलब है कि बैटर में पर्याप्त हवा आ गई है और अब इसे भल्ले बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर बैटर नीचे बैठ जाता है, तो उसे कुछ देर और अच्छी तरह फेंटें और फिर दोबारा जांच करें.
अब बनाएं नरम दही भल्ले
जब बैटर तैयार हो जाए, तो कड़ाही में तेल गर्म करें. बैटर को छोटे हिस्सों में लेकर तेल में डालें और भल्लों को मध्यम आंच पर तलें. उन्हें बहुत तेज आंच पर तलने से बाहर की सतह जल्दी सख्त हो सकती है, जबकि अंदर का हिस्सा ठीक से नहीं पक पाएगा. भल्ले सुनहरे होने पर उन्हें तेल से निकाल लें. इसके बाद इन्हें पानी में डालकर कुछ देर रखें, ताकि वे नरम हो जाएं. पानी से निकालने के बाद हल्के हाथ से अतिरिक्त पानी दबाकर निकालें. अब इन नरम भल्लों के ऊपर फेंटा हुआ ठंडा दही डालें. इसके बाद मीठी चटनी, खट्टी चटनी और अपनी पसंद के मसाले डाल सकते हैं. ऊपर से थोड़ा भुना जीरा और लाल मिर्च डालने से स्वाद और बढ़ जाता है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 17:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gas Lighter Repair: कमजोर पड़ गई है गैस लाइटर की चिंगारी? 2 मिनट में ऐसे करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Gas Lighter Weak Spark: किचन में गैस लाइटर का इस्तेमाल करते समय उसकी तेज चिंगारी और क्लिक की आवाज सामान्य लगती है. लेकिन जब अचानक चिंगारी कमजोर पड़ने लगे या लाइटर बार-बार क्लिक करने के बावजूद गैस न जले, तो ज्यादातर लोग इसे खराब समझकर नया लाइटर खरीद लेते हैं. हालांकि, कई बार समस्या लाइटर के पूरी तरह खराब होने की नहीं होती, बल्कि छोटी-सी गड़बड़ी के कारण वह ठीक से काम नहीं कर पाता. ऐसे में नया लाइटर खरीदने से पहले कुछ चीजें जरूर चेक कर लेनी चाहिए.
गैस लाइटर की चिंगारी कमजोर होने की एक आम वजह स्पार्क पिन पर जमा कार्बन या काली गंदगी हो सकती है. किचन में लगातार इस्तेमाल के कारण इसके सिरे पर तेल, धुआं और दूसरी गंदगी जमा हो जाती है, जिससे स्पार्क ठीक से नहीं बन पाता. लाइटर को गैस से दूर और सुरक्षित स्थिति में रखकर स्पार्क पिन को सूखे कपड़े या मुलायम ब्रश से साफ करें. सफाई करते समय किसी नुकीली धातु की चीज से जोर लगाकर रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे पिन या आसपास का हिस्सा खराब हो सकता है. कई बार सिर्फ सफाई करने से ही चिंगारी पहले जैसी हो जाती है.
बटन दबाने में कोई दिक्कत तो नहीं?
अगर लाइटर का बटन पहले की तुलना में सख्त हो गया है या दबाने के बाद ठीक से वापस नहीं आ रहा, तो इसकी वजह अंदर जमा गंदगी या नमी हो सकती है. किचन में खाना बनाते समय निकलने वाली भाप और तेल के छोटे कण लाइटर के मैकेनिज्म को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में लाइटर को बाहर से अच्छी तरह साफ करें और देखें कि बटन सामान्य तरीके से दब और वापस आ रहा है या नहीं. बटन को जबरदस्ती दबाने या उसके अंदर कोई तरल पदार्थ डालने से बचें.

लाइटर गिर गया है तो ये हिस्सा देखें
कई बार लाइटर बार-बार गिरने या जोर से टकराने के बाद उसकी चिंगारी कमजोर हो जाती है. इसकी वजह अंदर के किसी हिस्से का अपनी जगह से थोड़ा हट जाना हो सकता है. अगर लाइटर का बाहरी हिस्सा टूटा नहीं है, तो सबसे पहले देखें कि कहीं कोई हिस्सा ढीला तो नहीं हुआ.&amp;nbsp;
नमी की वजह से भी कमजोर हो सकती है चिंगारी
अगर लाइटर सिंक के पास रखा रहता है या खाना बनाते समय लगातार भाप के संपर्क में आता है, तो उसके अंदर नमी पहुंच सकती है. इससे स्पार्क सिस्टम ठीक से काम नहीं करता. ऐसे में लाइटर को कुछ घंटों के लिए सूखी और हवादार जगह पर रख दें. उसे इस्तेमाल करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह पूरी तरह सूखा हो. लाइटर को गर्म करने, धूप में बहुत देर तक रखने या किसी गर्म उपकरण के पास रखने की कोशिश न करें.

कुछ लाइटर में फ्लिंट भी होता है
हर गैस लाइटर एक जैसा नहीं होता. कुछ पुराने या अलग डिजाइन वाले लाइटर में फ्लिंट का इस्तेमाल किया जाता है. अगर लाइटर का पहिया घूम रहा है, लेकिन उससे चिंगारी नहीं निकल रही, तो फ्लिंट घिस चुका हो सकता है. ऐसे लाइटर में निर्माता के निर्देश के अनुसार फ्लिंट बदला जा सकता है. अगर आपको लाइटर खोलने या उसका मैकेनिज्म समझने में परेशानी हो रही है, तो इसे खुद खोलने के बजाय किसी एक्सपर्ट से दिखाना बेहतर है.
जंग या खराबी भी हो सकती है वजह
लंबे समय तक इस्तेमाल किए गए लाइटर के अंदर या धातु वाले हिस्सों पर जंग लग सकती है. इससे स्पार्क बनाने वाला सिस्टम प्रभावित हो सकता है. अगर सिर्फ हल्की सतही गंदगी है तो बाहरी हिस्से की सफाई की जा सकती है, लेकिन ज्यादा जंग लगे या खराब हिस्से को खुद ठीक करने की कोशिश न करें. खासकर अगर लाइटर का बॉडी हिस्सा टूट गया है, ट्रिगर क्षतिग्रस्त है या गैस से जुड़ा कोई हिस्सा खराब दिखाई दे रहा है, तो उसे इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है.
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गैस की गंध आए तो लाइटर इस्तेमाल न करें
सबसे जरूरी बात यह है कि लाइटर से गैस की गंध आ रही हो, गैस लीक दिखाई दे रही हो या उसका ईंधन वाला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो, तो उसे ठीक करने की कोशिश बिल्कुल न करें. ऐसे लाइटर को आग, चूल्हे और दूसरे गर्म स्रोतों से दूर रखें और सुरक्षित तरीके से बदल दें. इसी तरह अगर लाइटर की बॉडी में दरार आ गई है या वह असामान्य तरीके से गर्म हो रहा है, तो उसे इस्तेमाल करना बंद कर देना चाहिए. गैस और आग से जुड़े उपकरणों में छोटी-सी लापरवाही भी हादसे की वजह बन सकती है.
नया लाइटर खरीदने से पहले क्या करें?
अगर लाइटर सिर्फ कमजोर चिंगारी की वजह से परेशान कर रहा है, तो सबसे पहले उसकी सफाई, नमी और बाहरी स्थिति चेक करें. कई मामलों में समस्या छोटी होती है और सफाई के बाद लाइटर दोबारा सामान्य तरीके से काम करने लगता है. लेकिन अगर समस्या गैस लीक, टूटी बॉडी, खराब गैस वाल्व या किसी दूसरे गंभीर नुकसान से जुड़ी है, तो पुराने लाइटर को बचाने की कोशिश करना सही नहीं है. ऐसे में नया लाइटर लेना ही सुरक्षित विकल्प है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली की इन मंडियों में कौड़ी के भाव बिकता है प्याज!</title>
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        <description><![CDATA[ प्याज की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की रसोई के बजट की चिंता को बढ़ा दिया है. देशभर में प्याज का खुदरा भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि दिल्ली में यह 65 रुपये किलो तक बिक रहा है. हालांकि दिल्ली एनसीआर की हर मंडी में प्याज एक जैसी कीमत पर नहीं मिल रहा है, कहीं यह 25 रुपये किलो के आसपास है तो कहीं इसकी कीमत 39 रुपये किलो तक जा पहुंची है. आइए जानते हैं इस वक्त किस मंडी में प्याज सबसे सस्ता मिल रहा है.
आजादपुर मंडी का भाव
दिल्ली की आजादपुर मंडी प्याज के सबसे बड़े थोक बाजारों में गिनी जाती है. यहां प्याज का ताजा थोक भाव करीब 25.31 रुपये प्रति किलो है. 21 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक यहां प्याज 17.50 रुपये से लेकर 32.50 रुपये प्रति किलो तक बिका था, यानी किस्म और क्वालिटी के हिसाब से कीमत में साफ फर्क देखने को मिल रहा है.
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केशोपुर मंडी भाव भी जानें&amp;nbsp;
केशोपुर मंडी में प्याज का औसत भाव करीब 39 रुपये प्रति किलो है. 22 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार यहां भाव 22 रुपये और ज्यादा से ज्यादा भाव 46 रुपये प्रति किलो रहा. यानी आजादपुर और केशोपुर मंडी की कीमतों में अच्छा खासा फर्क देखने को मिल रहा है, इसलिए ज्यादा मात्रा में प्याज खरीदने वालों के लिए ताऐज़ा भाव पता करना फायदेमंद रहता है.
क्या है गाजीपुर मंडी में का प्याज भाव&amp;nbsp;
पूर्वी दिल्ली की गाजीपुर सब्जी मंडी में 23 अगस्त को बड़े साइज का प्याज 29 रुपये प्रति किलो बिका, जबकि खुदरा बाजार में यही प्याज 32 से 38 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था. वहीं छोटे प्याज की मंडी कीमत करीब 50 रुपये किलो रही, जबकि खुदरा बाजार में यह 55 से 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है.
गाजियाबाद मंडी में भी अलग रेट&amp;nbsp;
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी प्याज की कीमत साइज और क्वालिटी के हिसाब से अलग अलग है. 24 अगस्त को यहां बड़े साइज का प्याज 33 रुपये प्रति किलो बिका है, जबकि छोटे प्याज का भाव करीब 55 रुपये प्रति किलो रहा था. खुदरा बाजार में बड़े प्याज की कीमत 36 से 43 रुपये और छोटे प्याज की कीमत 61 से 72 रुपये प्रति किलो तक पहुंची है.
सरकार ने लिए कदम&amp;nbsp;
प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार अब बफर स्टॉक से बाजार में सप्लाई बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए नासिक से दिल्ली समेत कई शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए कांदा एक्सप्रेस चलाई जाएगी, ताकि जिन इलाकों में कीमतें ज्यादा हैं वहां राहत पहुंचाई जा सके.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>सुबह उठकर प्राणायाम करने से कौनसे फायदे होते हैं?</title>
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        <description><![CDATA[ Morning Pranayama: सुबह का समय शरीर और दिमाग को शांत रखने के लिए बेहतर माना जाता है. ऐसे में अगर दिन की शुरुआत प्राणायाम से की जाए, तो यह शरीर को एक्टिव रखने और मन को शांत करने में मदद कर सकता है. प्राणायाम सांसों को नियंत्रित करने की एक योगिक तकनीक है, जिसमें अलग-अलग तरीकों से सांस लेने और छोड़ने का अभ्यास किया जाता है. इसे रोजाना कुछ समय करने से सुबह की शुरुआत एक बेहतर और शांत माहौल में हो सकती है. हालांकि, प्राणायाम करते समय सही तरीके और अपनी क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है.
तनाव और एकाग्रता में मदद
प्राणायाम के दौरान सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से मन शांत हो सकता है. नियमित अभ्यास तनाव और बेचैनी को कम करने में मदद कर सकता है. साथ ही, सांसों पर ध्यान लगाने से एकाग्रता बढ़ाने और दिन की शुरुआत ज्यादा शांत व सकारात्मक तरीके से करने में मदद मिल सकती है. पढ़ाई या काम करने वालो के लिए भी यह एक अच्छा सुबह का रूटीन हो सकता है. कुछ देर शांत बैठकर सांसों पर ध्यान देने से मन को आराम मिल सकता है और दिनभर के काम पर फोकस बनाए रखने में मदद मिल सकती है. सुबह के समय इसका अभ्यास करने से व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत ज्यादा व्यवस्थित तरीके से कर सकता है.
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सांस और शरीर को एक्टिव रखने में सहायक
प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाता है. नियमित अभ्यास से सांसों के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है और श्वसन क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. सुबह प्राणायाम करने से शरीर में ताजगी महसूस हो सकती है और सुस्ती कम करने में भी मदद मिल सकती है. कुछ लोग इसे हल्की एक्सरसाइज या योग के साथ भी अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं. हालांकि, सांस से जुड़े अभ्यास हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही करने चाहिए. बहुत तेजी से सांस लेने या लंबे समय तक सांस रोकने से बचना चाहिए, खासकर अगर इसकी आदत न हो.
नींद और दिनचर्या के लिए फायदेमंद
नियमित रूप से रिलैक्सेशन और सांसों से जुड़े योग अभ्यास करने से शरीर और दिमाग को शांत करने में मदद मिल सकती है. इससे कुछ लोगों को रात में बेहतर नींद लेने में सहायता मिल सकती है. प्राणायाम को रोजाना की दिनचर्या में शामिल करने से सुबह का समय भी व्यवस्थित हो सकता है. इसके साथ हल्की एक्सरसाइज, पर्याप्त पानी और संतुलित नाश्ता दिन की स्वस्थ शुरुआत में मदद कर सकते हैं. अगर व्यक्ति सुबह उठकर कुछ समय प्राणायाम करता है, तो यह उसके लिए एक अच्छी आदत बन सकती है. हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को सांस से जुड़ी समस्या है, तो प्राणायाम शुरू करने से पहले विशेशज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>उम्र नहीं बढ़ी, लेकिन दिल&amp;दिमाग हो गया बूढ़ा? इस टेस्ट से लगता है पता</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/उम्र-नहीं-बढ़ी-लेकिन-दिल-दिमाग-हो-गया-बूढ़ा-इस-टेस्ट-से-लगता-है-पता</link>
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        <description><![CDATA[ हम सभी की एक उम्र वो होती है जो जन्म की तारीख से गिनी जाती है, लेकिन शरीर के अंदर हमारे दिल, दिमाग और बाकी अंगों की एक अलग ही &quot;असली उम्र&quot; होती है. कई बार ऐसा होता है कि इंसान की उम्र तो कम होती है, लेकिन उसका दिमाग समय से पहले ही बूढ़ा होने लगता है. अब इसी बात का पता लगाने के लिए अमेरिका की मशहूर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजिस्ट टोनी वायस-कोरे और उनकी टीम ने एक खास टेस्ट तैयार किया है. यह एक ब्लड टेस्ट है, जो सिर्फ एक बार खून की जांच करके बता देता है कि शरीर के 11 अलग-अलग अंग, खासकर दिमाग, उम्र के हिसाब से जवान हैं या फिर बूढ़े हो चुके हैं. यह रिसर्च नेचर मेडिसिन नाम की मशहूर साइंस पत्रिका में छपी है और इसे स्वास्थ्य जगत में एक बड़ी खोज माना जा रहा है.
टेस्ट कैसे काम करता है और क्या पता चलता है
यह टेस्ट खून में मौजूद खास तरह के प्रोटीन को जांचता है. हर अंग अपने अलग प्रोटीन छोड़ता है, और इन्हीं प्रोटीन के लेवल को देखकर वैज्ञानिक पता लगा लेते हैं कि वह अंग अपनी असली उम्र से जवान काम कर रहा है या बूढ़ा. रिसर्च टीम ने करीब 45,000 लोगों पर यह टेस्ट किया, जिनकी सेहत को कई सालों तक फॉलो किया गया. नतीजों में पाया गया कि जिन लोगों का दिमाग अपनी उम्र से कहीं ज्यादा बूढ़ा निकला, उनमें अल्जाइमर बीमारी होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा था. इतना ही नहीं, ऐसे लोगों की अगले 15 सालों में मौत होने की आशंका भी काफी ज्यादा बढ़ गई थी. वहीं दूसरी तरफ, जिन लोगों का दिमाग अपनी उम्र से जवान पाया गया, उनमें मौत का खतरा काफी कम देखा गया। यानी यह टेस्ट सिर्फ यह नहीं बताता कि दिमाग कैसा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले सालों में सेहत को लेकर क्या खतरे हो सकते हैं.
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डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्यों है यह जरूरी
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह टेस्ट आने वाले समय में डॉक्टरों के लिए बहुत काम का साबित हो सकता है. अगर किसी व्यक्ति के दिमाग की उम्र समय से पहले बढ़ती दिख रही है, तो डॉक्टर उसे पहले ही सावधान कर सकते हैं और सही इलाज या जीवनशैली में बदलाव की सलाह दे सकते हैं, ताकि आगे चलकर अल्जाइमर जैसी बीमारी से बचा जा सके. खास बात यह है कि यह टेस्ट सिर्फ जीन यानी जेनेटिक जांच पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह बताता है कि समय के साथ शरीर में बदलाव कैसे हो रहे हैं, जिससे इलाज को व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से बनाया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल यह टेस्ट अभी आम अस्पतालों और क्लीनिकों में उपलब्ध नहीं है और इसे मेडिकल इस्तेमाल के लिए तैयार होने में अभी कुछ समय लग सकता है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज भविष्य में उम्र से जुड़ी बीमारियों को पहले ही पहचानने और रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 01:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Weight Gain Reasons: सिर्फ 2 रोटी खाते हैं फिर भी बढ़ रहा वजन? ये हो सकती है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Hidden Causes Of Unexplained Weight Gain: अगर आप खाने में सिर्फ 2 रोटी खाते हैं और फिर भी वजन लगातार बढ़ रहा है, तो इसका कारण सिर्फ रोटी को मान लेना सही नहीं होगा. वजन बढ़ने पर सबसे पहले लोग यह सोचते हैं कि शायद वे ज्यादा खा रहे हैं, लेकिन शरीर के वजन पर खान-पान के अलावा भी कई चीजों का असर पड़ता है. तनाव, नींद की कमी, दिनभर कम एक्टिव रहना और कुछ दवाइयां भी वजन बढ़ने की वजह बन सकती हैं. इसलिए अगर आपकी डाइट में रोटी की मात्रा कम है, फिर भी वजन बढ़ रहा है, तो पूरे दिन की खाने की आदतों और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है.
सिर्फ रोटी कम करना काफी नहीं
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन के अनुसार, वजन बढ़ने का संबंध सिर्फ इस बात से नहीं है कि आपने कितनी रोटियां खाईं. अगर बाकी खाने में ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, मीठी चीजें या ज्यादा कैलोरी वाली चीजें शामिल हैं, तो कम रोटी खाने के बावजूद वजन बढ़ सकता है. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में अक्सर कैलोरी ज्यादा होती है, जबकि प्रोटीन और फाइबर जैसे पोषक तत्व कम होते हैं. ऐसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस नहीं होता और व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खा सकता है. पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड, मीठे सीरियल और रेडी-टू-ईट खाने इसके उदाहरण हैं.

खाने में छिपी चीनी भी बन सकती है वजह
अगर आप दो रोटी खाते हैं लेकिन दिनभर चाय, कॉफी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक या दूसरे मीठे पेय लेते रहते हैं, तो कुल कैलोरी काफी बढ़ सकती है. ज्यादा चीनी वाले खाने और ड्रिंक्स को वजन बढ़ने से जोड़ा गया है. खासकर मीठे पेय आसानी से ज्यादा कैलोरी दे सकते हैं, क्योंकि इन्हें पीने पर उतनी देर तक पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता जितना ठोस खाना खाने के बाद हो सकता है. इसलिए वजन को समझने के लिए सिर्फ रोटी की गिनती करने के बजाय पूरे दिन क्या और कितना खाया-पीया जा रहा है, यह देखना जरूरी है.
दिनभर बैठे रहना भी पड़ सकता है भारी
अगर आपका काम ज्यादातर बैठकर होता है, ऑफिस के बाद भी टीवी या मोबाइल के सामने समय गुजरता है और रोजाना चलना-फिरना कम है, तो शरीर की एक्टिविटी काफी कम हो सकती है. एक स्टडी में ज्यादा वजन वाले लोगों के बीच रोजाना कई घंटे बैठने का समय देखा गया था. रिसर्च में यह भी पाया गया कि लंबे समय तक बैठे रहने की जगह कुछ समय खड़े रहने से शरीर की फैट मास और कमर के घेराव में सुधार देखा जा सकता है.

इसलिए अगर वजन बढ़ रहा है, तो सिर्फ खाना कम करने के बजाय रोजाना की फिजिकल एक्टिविटी पर भी ध्यान देना जरूरी है. खाने के बाद थोड़ी देर टहलना, लंच ब्रेक में चलना या दिनभर बैठने के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना मददगार हो सकता है.
बार-बार डाइट बदलना भी सही तरीका नहीं
कई लोग वजन कम करने के लिए अचानक बहुत कम खाना शुरू कर देते हैं. कुछ समय तक वजन कम होता है और फिर सामान्य डाइट पर लौटने के बाद वजन दोबारा बढ़ जाता है. वजन कम करने और फिर वापस बढ़ने के इस चक्र को यो-यो डाइटिंग कहा जाता है. सख्त डाइट लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. इसलिए वजन कम करने के लिए ऐसी आदतें बनाना ज्यादा बेहतर है जिन्हें लंबे समय तक जारी रखा जा सके. नियमित एक्सरसाइज, संतुलित खाना और कम प्रोसेस्ड फूड इसमें मदद कर सकते हैं.
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नींद कम है तो इसे भी देखें
वजन बढ़ने के पीछे नींद की कमी भी एक वजह हो सकती है. अगर आप रोजाना पर्याप्त नींद नहीं लेते, रात में बार-बार जागते हैं या आपकी नींद की क्वालिटी खराब है, तो इसका असर खाने की आदतों और फिजिकल एक्टिविटी पर पड़ सकता है. रिसर्च की समीक्षा में खराब नींद को ज्यादा बार खाने और कार्बोहाइड्रेट व अनहेल्दी फैट वाले खाने की अधिक खपत से जोड़ा गया है. आम तौर पर कम नींद को भी वजन बढ़ने और मोटापे के जोखिम से जोड़ा गया है. इसलिए सिर्फ डाइट पर ध्यान देने के साथ रोजाना पर्याप्त और अच्छी क्वालिटी की नींद लेना भी जरूरी है.
शरीर से जुड़ी कोई समस्या भी हो सकती है
अगर खाने-पीने और लाइफस्टाइल में खास बदलाव नहीं हुआ है, फिर भी वजन लगातार बढ़ रहा है, तो इसके पीछे कोई स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकता है. हाइपोथायरॉइडिज्म, डिप्रेशन, डायबिटीज जैसी कुछ स्थितियां अनचाहे वजन बढ़ने से जुड़ी हो सकती हैं. कुछ दवाइयों, खासकर कुछ एंटीडिप्रेसेंट और एंटीसाइकोटिक दवाओं से भी वजन बढ़ सकता है. अगर आपको लगता है कि वजन बढ़ने का संबंध किसी दवा या स्वास्थ्य समस्या से हो सकता है, तो डॉक्टर से बात करना बेहतर है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>4 साल से छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती हैं कफ सिरप, सरकार ने लगाई सख्त पाबंदी</title>
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        <description><![CDATA[ बदलते मौसम में अक्सर बीमारियों का प्रकोप काफी तेजी से फैल जाता है, जिसकी चपेट में बच्चे सबसे पहले आ जाते हैं. मानो सर्दी-जुकाम इस मौसम में एक आम बीमारी बन जाती है, ऐसे में माता-पिता घर में रखी दवा खुद ही दे देते हैं. लेकिन अब उनको जानकर हैरानी होगी कि अब ऐसा करना खतरनाक साबित हो सकता है. बता दें कि केंद्र सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड वाले फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन यानी FDC दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग, बिक्री और वितरण पर नई पाबंदी लगाई है. यह फैसला बच्चों की जान बचाने के मकसद से लिया गया है, क्योंकि ऐसी दवाओं से कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आई थीं. आइए जानते हैं इस नए नियम के बारे में पूरी जानकारी.
किन दवाओं पर लगी है रोक?
सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मेलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाली सभी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है. ये दोनों तत्व आमतौर पर सर्दी, जुकाम और बहती नाक की दवाओं में इस्तेमाल होते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि सर्दी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाले ये तत्व छोटे बच्चों के लिए स्वास्थ्य को लेकर खतरा पैदा कर सकते हैं, और विशेषज्ञ समिति का मानना है कि इससे छोटे बच्चों के लिए बाजार में और भी सुरक्षित दवाएं मौजूद हैं. कंपनियों को अब इन दवाओं के लेबल, पैकेट और प्रचार सामग्री पर साफ चेतावनी लिखनी होगी ताकि माता-पिता को पहले से ही सतर्क किया जा सके. यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि एक्सपर्ट कमेटी और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड यानी DTAB की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है.
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने बच्चों की दवाओं को लेकर सख्ती दिखाई हो. इससे पहले अक्टूबर 2025 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप देने पर रोक लगाई थी. यह फैसला मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद लिया गया था. उस समय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा था कि आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए.
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माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने माता-पिता से अपील की है कि वे छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सर्दी-जुकाम की दवा या सिरप न दें. दरअसल छोटे बच्चों का शरीर बड़ों जैसा मजबूत नहीं होता, इसलिए तेज असर वाली दवाएं उन पर उल्टा असर डाल सकती हैं. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ज्यादातर सर्दी-जुकाम एक से दो हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाते हैं, और बच्चे बिना दवा लिए भी सामान्य रूप से ठीक हो सकते हैं. इसलिए हल्की सर्दी-जुकाम होने पर घबराने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सही तरीका है.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Rat Prevention Tips: किचन में चूहों के आतंक से हैं परेशान? ऐसे हमेशा के लिए करें सफाया</title>
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        <description><![CDATA[ How To Get Rid Of Rats In Kitchen: किचन में अगर चूहे या चुहिया ने आने-जाने का रास्ता बना लिया है, तो सिर्फ उस छेद को बंद कर देना काफी नहीं होता. चूहे खाने की गंध से आसानी से आकर्षित होते हैं और किचन में उन्हें खाने के साथ पानी और छिपने की जगह भी मिल जाती है. ऐसे में एक बार रास्ता मिलने के बाद वे बार-बार उसी जगह या आसपास से अंदर आने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए छेद बंद करने के साथ-साथ किचन को उनके लिए कम आकर्षक बनाना भी जरूरी है.
चूहे सिर्फ गंदगी फैलाने वाले कीड़े-मकौड़े नहीं हैं. वे खाने, किचन की सतहों और बर्तनों को अपने मल, पेशाब या लार से दूषित कर सकते हैं. इसके अलावा, चूहे तार, पाइप और इंसुलेशन जैसी चीजों को भी कुतर सकते हैं, जिससे घर में नुकसान होने का खतरा रहता है. इसलिए किचन में उनकी मौजूदगी को नजरअंदाज करना सही नहीं है.
सबसे पहले छेद और आने का रास्ता पहचानें
अगर किचन में चूहे का रास्ता नजर आ गया है, तो सबसे पहले यह देखें कि वे अंदर कहां से आ रहे हैं. सिर्फ एक बड़े छेद को देखना काफी नहीं है. खिड़की, दरवाजे, पाइप के आसपास, वेंट और दीवार में बने छोटे गैप भी चूहों के लिए रास्ता बन सकते हैं. इसलिए किचन के आसपास अच्छी तरह जांच करें. चूहे बहुत छोटे गैप से भी अंदर घुस सकते हैं. इसलिए जहां भी दरार, छेद या खाली जगह दिखे, उसे नजरअंदाज न करें. छेद को बंद करने के लिए मजबूत सामग्री का इस्तेमाल करना जरूरी है, ताकि चूहे उसे दोबारा कुतरकर रास्ता न बना सकें.
छेद बंद करने से पहले ये काम करें
सिर्फ छेद बंद कर देने से पहले यह देखना जरूरी है कि किचन में चूहों को खाने या पानी का कोई आसान स्रोत तो नहीं मिल रहा. अगर किचन में खुले में खाना रखा है, फर्श पर खाने के टुकड़े पड़े रहते हैं या कूड़ेदान खुला रहता है, तो चूहे दोबारा किसी दूसरे रास्ते से अंदर आने की कोशिश कर सकते हैं.
अनाज, आटा, पास्ता, बिस्किट और दूसरी सूखी चीजों को खुले पैकेट में रखने के बजाय एयरटाइट डिब्बों में रखें. इसके लिए धातु, कांच या मजबूत प्लास्टिक के कंटेनर बेहतर विकल्प हो सकते हैं. खाने की गंध जितनी कम बाहर जाएगी, किचन चूहों के लिए उतना ही कम आकर्षक रहेगा.

खाने के टुकड़े और गिरे हुए सामान तुरंत साफ करें
किचन को साफ रखना चूहों को दूर रखने के सबसे आसान तरीकों में से एक है. खाना बनाने या खाने के बाद काउंटर को साफ करें और फर्श पर गिरे टुकड़ों को तुरंत हटा दें. अगर कोई चीज गिर गई है या पानी फैल गया है, तो उसे भी जल्द साफ कर दें. कूड़ेदान को लंबे समय तक खुला न छोड़ें. उसमें खाने का कचरा है तो उसे समय पर बाहर करें और ढक्कन वाले डस्टबिन का इस्तेमाल करें. छोटी-सी सफाई की आदत भी चूहों के लिए उपलब्ध खाने के स्रोत को कम कर सकती है.
पेट फूड को भी खुला न छोड़ें
अगर घर में पालतू जानवर हैं और उन्हें किचन में खाना दिया जाता है, तो उनके बचे हुए खाने पर भी ध्यान दें. पेट फूड को खुले पैकेट में रखने के बजाय एयरटाइट कंटेनर में रखें और बचा हुआ खाना तुरंत हटा दें. चूहों को पेट फूड की गंध भी आसानी से आकर्षित कर सकती है. इसलिए किचन में रखा हर तरह का खाद्य पदार्थ उनकी पहुंच से दूर रखना जरूरी है.

रातभर सिंक में गंदे बर्तन न छोड़ें
रात में सिंक में गंदे बर्तन छोड़ना भी किचन को चूहों के लिए आकर्षक बना सकता है. खाने के छोटे टुकड़े और बर्तनों पर बची गंध उन्हें अपनी ओर खींच सकती है. इसलिए सोने से पहले बर्तन साफ कर लें और सिंक को भी अच्छी तरह धो दें. इसके साथ ही किचन में पानी का कोई रिसाव है तो उसे भी ठीक कराएं. टपकता नल या पाइप चूहों को पानी का सोर्स उपलब्ध करा सकता है.
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छोटे गैप को भी नजरअंदाज न करें
चूहों को रोकने के लिए सिर्फ उस छेद पर ध्यान न दें जहां से वे दिखाई दिए हैं. खिड़की, दरवाजे, पाइप और वेंट के आसपास मौजूद छोटे गैप भी जांचें. ऐसे खुले हिस्सों को स्टील वूल, कौल्क या वायर मेश जैसी मजबूत सामग्री से बंद किया जा सकता है. हालांकि, अगर आपको लगातार चूहों की आवाज सुनाई दे रही है, जगह-जगह उनकी मौजूदगी के निशान मिल रहे हैं या कई जगह से रास्ते बने हुए हैं, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय एक्सपर्ट की मदद लेना बेहतर हो सकता है.
किचन को चूहों से बचाने का आसान तरीका
चूहों को किचन से दूर रखने के लिए एक ही उपाय पर निर्भर रहने के बजाय कई छोटी सावधानियां एक साथ अपनाना ज्यादा उपयोगी है. खाने को बंद डिब्बों में रखें, काउंटर और फर्श साफ रखें, कूड़ेदान ढककर रखें, पानी के रिसाव को ठीक करें और संभावित रास्तों की नियमित जांच करें. कुछ घरेलू उपायों में पेपरमिंट ऑयल या लौंग जैसी चीजों की गंध का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी जाती है, लेकिन इनका असर हर स्थिति में एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है.
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        <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 13:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Robotic Knee Replacement: सफदरजंग में पहली रोबोटिक नी सर्जरी सफल, जानें खर्च और फ्री इलाज के नियम</title>
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        <description><![CDATA[ Safdarjung Hospital First Robotic Knee Replacement: घुटनों का दर्द धीरे-धीरे रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना सकता है. चलने, सीढ़ियां चढ़ने या कुछ देर खड़े रहने में भी परेशानी होने लगती है. ऐसे में घुटने का रिप्लेसमेंट कई मरीजों के लिए राहत का विकल्प बनता है. अब इस इलाज में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है, जिससे सर्जरी को ज्यादा सटीक तरीके से करने में मदद मिलती है.
दिल्ली के VMMC और सफदरजंग अस्पताल के सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स ने एडवांस ऑर्थोपेडिक इलाज के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है. अस्पताल में पहली बार रोबोट-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट &amp;nbsp;सफलतापूर्वक किया गया. यह सर्जरी 22 अगस्त को 75 वर्षीय आर्थिक रूप से कमजोर पुरुष मरीज की हुई और आयुष्मान भारत योजना के तहत इसका पूरा इलाज मुफ्त किया गया.
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट क्या होता है?
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट एक आधुनिक सर्जिकल तकनीक है, जिसमें रोबोट-गाइडेड सिस्टम डॉक्टर को घुटने की सर्जरी ज्यादा सटीकता से करने में मदद करता है. इसका मतलब यह नहीं है कि ऑपरेशन रोबोट खुद करता है. सर्जरी का पूरा नियंत्रण सर्जन के पास ही रहता है और रोबोटिक सिस्टम डॉक्टर को सटीकता के साथ प्रक्रिया पूरी करने में सहायता करता है. इस तकनीक का उद्देश्य घुटने के रिप्लेसमेंट के दौरान बेहतर सटीकता हासिल करना है. मरीजों में इलाज के बाद घुटने की मूवमेंट बेहतर होने, दर्द कम होने और रिकवरी जल्दी होने जैसे फायदे देखे जा सकते हैं.

कितनी है रोबोटिक सर्जरी की कीमत?
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की अनुमानित कीमत प्रति घुटना करीब 2.10 लाख रुपये से 4.20 लाख रुपये तक बताई गई है. हालांकि, हर मरीज के लिए खर्च एक जैसा नहीं होता. अस्पताल, सर्जन, इंप्लांट और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर कुल लागत बदल सकती है. इसलिए सर्जरी कराने से पहले अस्पताल से पूरी लागत के बारे में जानकारी लेना जरूरी है.

किन चीजों से बदल सकता है खर्च?
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट की कीमत पर सबसे पहले सर्जन का अनुभव असर डाल सकता है. इसके अलावा किस तरह का इंप्लांट इस्तेमाल किया जा रहा है, इससे भी खर्च में अंतर आता है. हाई-एंड या विदेशी इंप्लांट की कीमत ज्यादा हो सकती है. अस्पताल का चयन भी खर्च को प्रभावित करता है. एडवांस रोबोटिक सिस्टम से लैस बड़े अस्पतालों में इलाज की लागत अलग हो सकती है. मरीज को पहले से कोई दूसरी बीमारी है तो उसकी अतिरिक्त जांच और देखभाल की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा फिजियोथेरेपी, जांच, इमेजिंग और दूसरी मेडिकल सेवाएं भी कुल खर्च में शामिल हो सकती हैं.
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फ्री कैसे हुआ इलाज?
सफदरजंग अस्पताल में 75 वर्षीय आर्थिक रूप से कमजोर मरीज का रोबोट-असिस्टेड टोटल नी रिप्लेसमेंट 22 अगस्त को आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त किया गया. यानी इस मरीज को इस एडवांस तकनीक से इलाज के लिए अपनी जेब से भुगतान नहीं करना पड़ा. अस्पताल के मुताबिक, केंद्र सरकार के अस्पताल में आयुष्मान भारत के तहत इस तरह की तकनीक उपलब्ध कराना आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए एडवांस रोबोटिक ऑर्थोपेडिक इलाज को ज्यादा सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. अगर आप भी इस योजना के तहत इलाज कराना चाहते हैं, तो पात्रता और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी संबंधित अस्पताल के आयुष्मान भारत डेस्क से लेना जरूरी है.&amp;nbsp;
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट के क्या फायदे हैं?
रोबोटिक सर्जरी में ज्यादा सटीकता पर जोर दिया जाता है. इसके संभावित फायदों में सर्जरी के बाद कम दर्द, कम ब्लीडिंग, जल्दी रिकवरी और अस्पताल में कम समय तक रहने जैसी बातें शामिल हैं. इसके अलावा घुटने की मूवमेंट ज्यादा सहज और प्राकृतिक महसूस होने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इन फायदों का अनुभव हर मरीज में एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है. मरीज की उम्र, स्वास्थ्य और घुटने की स्थिति भी रिकवरी को प्रभावित कर सकती है.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>एयरपोर्ट पर सबसे पहले क्या करना चाहिए? पहली बार उड़ने वालों के लिए गाइड</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एयरपोर्ट-पर-सबसे-पहले-क्या-करना-चाहिए-पहली-बार-उड़ने-वालों-के-लिए-गाइड</link>
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        <description><![CDATA[ पहली बार फ्लाइट से यात्रा करना थोड़ा रोमांचक होने के साथ-साथ घबराहट भरा भी होता है. एयरपोर्ट की बड़ी बिल्डिंग, चेक-इन काउंटर, सिक्योरिटी चेक और बोर्डिंग गेट देखकर कई यात्रियों को समझ नहीं आता कि सबसे पहले क्या करना है. हालांकि, अगर आपको पूरी प्रक्रिया पहले से पता हो तो एयरपोर्ट पर सफर काफी आसान हो जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि एयरपोर्ट पहुंचने पर आपको सबसे पहले क्या करना चाहिए और किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.
पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेजों को रखें साथ
सबसे पहले अपनी फ्लाइट टिकट या ई-टिकट और पहचान पत्र अपने पास रखें. अगर आपने ऑनलाइन चेक-इन नहीं किया है, तो एयरलाइन के चेक-इन काउंटर या सेल्फ चेक-इन कियोस्क की तरफ जाएं. आप एयरपोर्ट की स्क्रीन पर अपनी एयरलाइन और फ्लाइट नंबर देखकर संबंधित काउंटर का पता लगा सकते हैं.
सामान की जांच और चेक-इन
अगर आपके पास चेक-इन बैगेज है, तो काउंटर पर उसे जमा करना होगा. एयरलाइन आपके सामान का वजन करके उसे टैग करेगी और आपको बोर्डिंग पास दिया जाएगा. अगर आपके पास केवल हैंड बैगेज है और आपने ऑनलाइन चेक-इन कर लिया है, तो कई मामलों में आप सीधे सिक्योरिटी चेक की ओर जा सकते हैं. हालांकि, इस बात का ध्यान जरूर रखें कि हर एयरलाइन और एयरपोर्ट के नियम अलग हो सकते हैं.
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सिक्योरिटी चेक के लिए जाएं
चेक-इन के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण सिक्योरिटी चेक होता है. यहां आपको बोर्डिंग पास और पहचान पत्र दिखाना पड़ता है. सिक्योरिटी जांच के दौरान मोबाइल, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान को अलग ट्रे में रखने के निर्देश दिए जाते हैं. बेल्ट, जैकेट या जेब में रखी चीजों को भी सुरक्षा जांच के दौरान निकालने के लिए कहा जा सकता है. एयरपोर्ट पर प्रतिबंधित सामान ले जाने से बचें और अपने एयरलाइन तथा एयरपोर्ट के बैगेज नियम पहले से जांच लें.
बोर्डिंग गेट का रखें ध्यान
सिक्योरिटी चेक पूरा होने के बाद अपने बोर्डिंग गेट नंबर को देखें. यह जानकारी बोर्डिंग पास पर हो सकती है और एयरपोर्ट की स्क्रीन पर भी दिखाई जाती है. कुछ स्तिथीयों में गेट बदल भी सकता है, इसलिए सिर्फ शुरुआत में गेट देखकर न बैठें. समय-समय पर एयरपोर्ट की स्क्रीन पर अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करते रहें.
पहली यात्रा पर घबराएं नहीं
पहली बार यात्रा कर रहे हैं तो एयरपोर्ट पर घबराने की जरूरत नहीं है. किसी चीज को लेकर भ्रम हो तो एयरपोर्ट या एयरलाइन के स्टाफ से पूछने में बिल्कुल संकोच न करें. अपनी फ्लाइट के समय से काफी पहले एयरपोर्ट पहुंचें. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एयरलाइन द्वारा बताए गए रिपोर्टिंग समय का पालन करना उचित होता है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cucumber Storage Tips: फ्रिज में नरम पड़ जाता है खीरा? 1 आसान ट्रिक से 20 दिन रखें फ्रेश</title>
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        <description><![CDATA[ How To Store Cucumbers To Keep Them Crunchy: खीरा सलाद और खाने के साथ पसंद की जाने वाली ऐसी सब्जी है, जिसे ठंडा और क्रिस्पी खाने का मजा ही अलग होता है. लेकिन कई बार बाजार से ताजा खीरा लाने के कुछ दिनों बाद ही वह नरम, सिकुड़ा हुआ या चिपचिपा लगने लगता है. खासकर जब इसे फ्रिज में बिना किसी पैकिंग के रख दिया जाता है, तो इसकी ताजगी ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रहती. खीरे को सही तरीके से स्टोर करने से उसकी क्रंची बनावट और ताजगी को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है.
खीरे को स्टोर करने के कई तरीके आजमाए गए हैं और इनमें कुछ तरीके बाकी से ज्यादा असरदार पाए गए. बिना किसी पैकिंग के फ्रिज में रखने पर खीरे करीब एक हफ्ते में नरम और सिकुड़ने लगे, जबकि पेपर टॉवल और बैग का इस्तेमाल करने वाले तरीकों में खीरे ज्यादा समय तक अच्छे रहे.
क्या दिनों तक सुरक्षित रखने के लिए क्या करें
अगर आप भी चाहते हैं कि फ्रिज में रखा खीरा जल्दी नरम न पड़े, तो एक आसान तरीका अपना सकते हैं. सबसे पहले खीरों को अच्छी तरह सुखा लें. अगर उन पर पानी या नमी है, तो उन्हें साफ कपड़े या पेपर टॉवल से पूरी तरह पोंछना जरूरी है. इसके बाद हर खीरे को अलग-अलग पेपर टॉवल में लपेट दें. अब इन खीरों को एक जिप-टॉप बैग में रखें और बैग को अच्छी तरह बंद कर दें. इसके बाद इसे फ्रिज की शेल्फ पर रखें.

इस तरीके में पेपर टॉवल की भूमिका काफी अहम है. खीरे के आसपास जमा होने वाली अतिरिक्त नमी को पेपर टॉवल सोख लेता है. वहीं, बंद जिप-टॉप बैग खीरे को फ्रिज के वातावरण से अतिरिक्त सुरक्षा देता है. यही वजह है कि बिना लपेटे रखे गए खीरों की तुलना में इस तरीके से रखे खीरे ज्यादा समय तक ताजा और बेहतर बने रहे. टेस्ट में पेपर टॉवल में लपेटकर सील किए गए जिप-टॉप बैग में रखे खीरे सबसे लंबे समय तक अच्छे रहे. कुछ खीरे 16 दिन तक ठीक रहे, जबकि कुछ 19 दिन तक भी इस्तेमाल करने लायक स्थिति में रहे. इस दौरान दूसरे तरीकों की तुलना में उनकी बनावट भी बेहतर बनी रही. हालांकि, खीरे की किस्म और उसकी शुरुआती ताजगी के आधार पर नतीजे अलग हो सकते हैं.
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इस तरीके को भी अजमा सकते हैं?
एक और तरीका भी टेस्ट में काफी अच्छा रहा. इसमें खीरों को पेपर टॉवल में लपेटकर एक ढीले बैग में रखा गया और फिर फ्रिज के क्रिस्पर ड्रॉअर में रखा गया. इस तरीके से खीरे करीब 10 दिन तक अच्छे रहे. लेकिन सील किए गए जिप-टॉप बैग वाला तरीका ज्यादा असरदार साबित हुआ. इसके उलट, खीरे को सीधे फ्रिज की शेल्फ या क्रिस्पर में बिना लपेटे रखने पर वे जल्दी नरम और सिकुड़ने लगे. करीब चार दिन बाद ही उनमें नरमी दिखने लगी और सातवें दिन तक कई खीरों में सॉफ्ट स्पॉट और सिकुड़े हुए सिरे नजर आए. इससे साफ होता है कि खीरे को फ्रिज में खुला छोड़ने के बजाय किसी तरह की सुरक्षा देना ज्यादा बेहतर है.

खीरे को प्लास्टिक रैप में लपेटकर फ्रिज में रखने का तरीका भी टेस्ट किया गया. इसमें खीरे करीब 12 दिन तक अच्छे रहे. लेकिन इस तरीके में प्लास्टिक रैप का इस्तेमाल होता है, इसलिए पेपर टॉवल और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले जिप-टॉप बैग वाला तरीका ज्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकता है.
क्यों जल्दी खराब होता है खीरा?
दरअसल, खीरे के जल्दी खराब होने में नमी की बड़ी भूमिका होती है. बहुत ज्यादा नमी जमा होने से खीरा चिपचिपा और नरम हो सकता है, जबकि नमी बहुत तेजी से निकलने पर वह सिकुड़ने लगता है. इसलिए स्टोरेज का ऐसा तरीका बेहतर रहता है, जिसमें खीरे को अतिरिक्त नमी से भी बचाया जाए और उसकी नमी पूरी तरह बाहर निकलने से भी रोका जाए.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>कपड़े धोने के बाद भी रह जाती है बदबू, डिटर्जेंट नहीं ये चीजें बदलें</title>
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        <description><![CDATA[ कपड़े धोने के बाद साफ और चमकदार दिखने चाहिए, लेकिन अकसर धुले हुए कपड़ों में भी अजीब सी बदबू रह जाती है. ज्यादातर लोग इसे डिटर्जेंट की क्वालिटी या मशीन की गड़बड़ी समझ लेते हैं, लेकिन असल वजह कुछ और होती है. दरअसल धुलाई के दौरान कपड़ों से शरीर का तेल, बैक्टीरिया, डिटर्जेंट का जमाव और पानी में मौजूद मिनरल्स पूरी तरह नहीं निकलता है, और यही चीजें बदबू की जड़ बन जाती हैं. आइए जानते हैं ऐसी कौन सी आम गलतियां हैं जिनकी वजह से कपड़े धोने के बाद भी बदबू नहीं जाती.
जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालना
यह सोचना आम है कि ज्यादा डिटर्जेंट डालने से कपड़े ज्यादा साफ हो जाएंगे, लेकिन इसका उल्टा असर होता है. एक्स्ट्रा डिटर्जेंट पूरी तरह धुल नहीं पाता, जिससे कपड़ों में उसका बचा हुआ भाग रह जाता है, और यही बचा हुआ भाग &amp;nbsp;शरीर के तेल और बैक्टीरिया को अपने अंदर फंसा लेता है,और यही बदबू की वजह होती है.
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मशीन में कपड़े ज्यादा भर देना
वॉशिंग मशीन का ड्रम भरा हुआ तो होना चाहिए, लेकिन ठोस कर भरना सही तरीका नहीं है. एक आसान तरीका यह है, कि ड्रम में हाथ डालकर उसे थोड़ा घुमाने लायक जगह होनी चाहिए, ताके कपड़े सही तरीके से धुल सके.
इन चीजों का रखें ख्याल न&amp;nbsp;
रोजमर्रा के कपड़ों के लिए ठंडा पानी अच्छा बेहतर होता है, खासकर सिल्क, रेयॉन, वूल और स्पैंडेक्स जैसे नाजुक कपड़ों के लिए यह बेहतर माना जाता है. लेकिन तौलिये, बेडशीट और पसीने से भीगे वर्कआउट कपड़ों के लिए गर्म पानी शरीर के तेल और गंदगी को बेहतर तरीके से निकालता है.
इस काम को ज्यादा न करें
कई बार सही मात्रा में डिटर्जेंट डालने के बावजूद कपड़ों में उसका असर रह जाता है, खासकर तौलिये, बेडशीट और वर्कआउट वाले कपड़ों में. ऐसे में एक एक्स्ट्रा रिंस साइकल चलाना फायदेमंद होता है, इससे बचा हुआ डिटर्जेंट, तेल और गंदगी अच्छी तरह बाहर निकल जाती है.
गीले कपड़ों को न छोड़ें
साफ धुले कपड़े भी अगर लंबे समय तक मशीन में गीले रखते हैं, तो उनमें बदबू पैदा हो सकती है. नमी की वजह से बदबू फैलाने वाले बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं, जिससे कपड़े ड्रायर तक पहुंचने से पहले ही सीली सीली गंध देने लगता है. इसलिए धुलाई खत्म होते ही कपड़ों को ड्रायर में डालना या सुखाने के लिए टांग दें.
सफाई है जरुरी&amp;nbsp;
वॉशिंग मशीन खुद कपड़े साफ करती है, लेकिन उसे भी सफाई की जरूरत होती है. समय के साथ डिटर्जेंट का जमाव, शरीर का तेल और सख्त पानी से बनने वाले मिनरल्स मशीन के अंदर जमा हो जाते हैं, जिससे मशीन की सफाई करने की ताकत कम हो जाती है और बदबू की समस्या और बढ़ जाती है. महीने में एक बार मशीन का सेल्फ क्लीन साइकल या गर्म पानी के साथ क्लीनर इस्तेमाल करना चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>किसी को मच्छर ज्यादा काटते हैं किसी को कम, आखिर क्या है वजह?</title>
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        <description><![CDATA[ Mosquito Mystery: अपने कई बार महसूस किया होगा या देखा होगा की एक ही जगह बैठे लोगों में से किसी एक को मच्छर जियादा काटते हैं, तो वहीं पास बैठे इंसान को मच्छर बिल्कुल नहीं काटता यह महज इतफाक नहीं है. वैज्ञानिकों के मुताबिक मच्छर पहले दूर से सांस के साथ निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को महसूस करते हैं, फिर शरीर की गंध, गर्मी और नमी जैसे संकेतों की मदद से अपने लक्ष्य के करीब पहुंचते हैं.
शरीर की गंध और गर्मी बनती है बड़ी वजह
हर इंसान के शरीर की गंध अलग होती है, क्योंकि त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया पसीने और त्वचा से निकलने वाले पदार्थों को बदलकर ऐसे केमिकल बना देते हैं जिनकी गंध मच्छरों को आकर्षित करती है. 2022 की एक रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों की त्वचा से कुछ खास कार्बोक्सिलिक एसिड ज्यादा निकलते थे, वे Aedes aegypti मच्छरों के लिए ज्यादा आकर्षक थे, और 2026 की एक हालिया रिसर्च ने भी शरीर की गंध और मच्छरों की पसंद के बीच संबंध पाया है. इसका मतलब यह कतई नहीं कि साफ-सफाई की कमी से मच्छर ज्यादा काटते हैं. यह गंध माइक्रोबायोम, जेनेटिक्स और शरीर के केमिकल्स जैसी प्राकृतिक चीजों से बनती है. इसी तरह अगर शरीर गर्म है या पसीना ज्यादा आ रहा है, तो मच्छरों के लिए पहचानना आसान हो जाता है, यही वजह है कि एक्सरसाइज या मेहनत के बाद मच्छर ज्यादा काटते हैं.
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क्या ब्लड ग्रुप और गर्भावस्था से भी पड़ता है फर्क?
ब्लड ग्रुप को लेकर अक्सर यह धारणा रही है कि O ब्लड ग्रुप वाले लोगों को मच्छर ज्यादा काटते हैं और कुछ अध्ययनों में इस तरह का आकर्षण देखा भी गया है. लेकिन वैज्ञानिक इसे मच्छरों के काटने की सबसे बड़ी या निश्चित वजह नहीं मानते, क्योंकि त्वचा की गन्ध, CO₂ और शरीर की गर्मी जैसे संकेत अक्सर इससे कहीं ज्यादा अहम भूमिका निभाते हैं. इसी तरह गर्भावस्था के दौरान भी कुछ महिलाओं की ओर मच्छरों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिसकी वजह शरीर से निकलने वाली ज्यादा CO₂ और शरीर के तापमान में होने वाला बदलाव बताई जाती है. हालांकि यह असर हर मच्छर प्रजाति और हर परिस्थिति में एक जैसा हो, यह जरुरी नहीं. वहीं &#039;मीठा खून&#039; होने की बात भी अक्सर सुनने को मिलती है, लेकिन इसे किसी वैज्ञानिक आधार पर सही नहीं माना जाता. असल में मच्छर किसी एक इंसान को चुनने से पहले कई अलग-अलग संकेतों को एक साथ परखते हैं.
मच्छरों से बचाव के आसान और असरदार तरीके
मच्छरों से बचने के लिए शाम और रात के समय शरीर को अच्छी तरह ढककर रखना जरुरी है, घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली या स्क्रीन लगाकर मच्छरों को घर में आने से रोका जा सकता है, आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें और जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें. यह जानना भी दिलचस्प है कि केवल मादा मच्छर ही इंसानों को काटती हैं, क्योंकि उन्हें अंडे बनाने के लिए खून की जरूरत होती है, जबकि नर मच्छर पौधों के रस पर ही निर्भर रहते हैं.
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        <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>शाहरुख खान जैसी जिंदगी जीनी है? आज से ही करें ये बदलाव</title>
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        <description><![CDATA[ शाहरुख खान का नाम आते ही जेहन में एक ऐसा सुपरस्टार आता है, जिसने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के अपनी मेहनत से पूरी दुनिया में अपना नाम बनाया. दिल्ली में पले-बढ़े शाहरुख खान ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी और वहां से निकलकर वह आज बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं. उनकी कहानी सिर्फ एक एक्टर बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह सिखाती है कि अगर मेहनत, अनुशासन और सही सोच के साथ आगे बढ़ा जाए, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है.
अगर आप भी अपनी जिंदगी में बड़ा मुकाम हासिल करना चाहते हैं, तो शाहरुख खान की जिंदगी से कुछ जरूरी बातें सीखी जा सकती हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी अपनी सोच और काम करने के तरीके को बदल सकते हैं.
मेहनत और अनुशासन को बनाएं अपनी आदत
शाहरुख खान की सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी मेहनत और अनुशासन है. उन्होंने मुंबई आने से पहले दिल्ली में मशहूर थिएटर डायरेक्टर बैरी जॉन के साथ काम करते हुए एक्टिंग की बारीकियां सीखी थीं. उनके पास न तो कोई फिल्मी परिवार का सहारा था और न ही कोई गॉडफादर, फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर टीवी सीरियल्स से शुरुआत करके फिल्मों तक का सफर तय किया. अगर आप भी अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने काम को लेकर अनुशासन अपनाना जरूरी है. रोजाना एक तय समय पर काम करना, अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना और मुश्किल हालातों में भी हार न मानना, यही आदतें किसी भी इंसान को आगे बढ़ने में मदद करती हैं.
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विनम्रता और सकारात्मक सोच है असली पहचान
शाहरुख खान की एक खासियत यह भी रही है कि सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद वह हमेशा जमीन से जुड़े और विनम्र बने रहे. वह अक्सर अपने इंटरव्यू में कहते हैं कि असफलता से घबराने की बजाय उससे सीखना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए. उनकी यह सोच बताती है कि सफलता पाने के बाद भी घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार रखना चाहिए. इसके अलावा शाहरुख खान अपने फैंस और काम के प्रति जो समर्पण दिखाते हैं, वह भी सीखने लायक है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>इस तरह से बनाएं अंडा करी, पूरा परिवार हो जाएगा आपका दीवाना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इस-तरह-से-बनाएं-अंडा-करी-पूरा-परिवार-हो-जाएगा-आपका-दीवाना</link>
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        <description><![CDATA[ रोज की सब्जियों से अगर कुछ अलग और टेस्टी खाने का मन हो, तो अंडा करी एक बढ़िया ऑप्शन हो सकती है. उबले हुए अंडों को मसालेदार प्याज-टमाटर की ग्रेवी में पकाकर तैयार की जाने वाली यह डिश टेस्ट में भरपूर है और इसे बनाना भी ज्यादा मुश्किल नहीं है. इसकी खासियत है कि ग्रेवी में इस्तेमाल होने वाले मसालों का टेस्ट अंडे के साथ अच्छी तरह घुल जाता है. इसे रोटी, तंदूरी नान, सादा पराठा, प्लेन बासमती राइस या जीरा राइस के साथ परोसा जा सकता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि अंडा करी किस तरह से बनाएं, जिससे पूरा परिवार आपका दीवाना हो जाएगा.&amp;nbsp;
अंडा करी किस तरह से बनाएं?
1. अंडा करी बनाने के लिए सबसे पहले इसकी ग्रेवी तैयार करनी होगी. इसके लिए एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें मोटे तौर पर कटे हुए प्याज डालकर हल्का भूनें. इसके बाद हरी मिर्च, अदरक और लहसुन डालें. अब इसमें जीरा, धनिया, दालचीनी, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, तेजपत्ता और लौंग डालकर मसालों को अच्छी तरह भून लें.
2. इसके बाद हल्दी पाउडर और देगी मिर्च पाउडर डालकर मिलाएं. अब इसमें मोटे कटे हुए टमाटर और काजू डालें. थोड़ा पानी डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. ग्रेवी को करीब 5 से 6 मिनट तक पकाएं, जब तक इसका पानी अच्छी तरह सूखने न लगे.&amp;nbsp;
3. अब गैस बंद कर दें और इसमें बर्फ डालें. इससे ग्रेवी जल्दी ठंडी होगी और इसका रंग भी अच्छा आएगा. ठंडी होने के बाद इस मिश्रण को मिक्सर जार में डालकर एकदम स्मूद पेस्ट तैयार कर लें.&amp;nbsp;
अंडों को ऐसे करें फ्राई
अब उबले हुए अंडे लें और उन पर हल्के कट लगा दें. एक पैन में तेल गर्म करें और अंडों को डालकर चारों तरफ से अच्छी तरह पलटकर फ्राई करें. जब अंडे अच्छी तरह फ्राई हो जाएं, तो उन्हें निकालकर एक बाउल में रख दें.&amp;nbsp;
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अब तैयार करें अंडा करी की ग्रेवी
1. अब दूसरे पैन में थोड़ा तेल गर्म करें. इसमें जीरा, कटी हुई हरी मिर्च और कटा हुआ प्याज डालकर अच्छी तरह भूनें. इसके बाद कटा हुआ लहसुन डालें और इसे भी भून लें. अब हल्दी पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डालकर मिलाएं.
2. इसके बाद कटे हुए टमाटर डालें और टेस्ट के अनुसार नमक मिलाएं. अब जीरा पाउडर और धनिया पाउडर डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. थोड़ा पानी डालें और मसाले को पकने दें.
3. जब मसाला अच्छी तरह पक जाए, तो पहले तैयार किया हुआ स्मूद ग्रेवी पेस्ट इसमें डालें और अच्छी तरह मिलाएं.
4. इसके बाद गर्म पानी डालकर ग्रेवी को पकाएं. इसमें थोड़ा बटर भी डालें और करीब 5 से 6 मिनट तक पकने दें.&amp;nbsp;
आखिर में डालें अंडे और ये चीजें
अब फ्राई किए हुए अंडों को तैयार ग्रेवी में डालें. इसके बाद कटा हुआ हरा धनिया डालें. कसूरी मेथी को हाथों से हल्का क्रश करके इसमें डालें और सब कुछ अच्छी तरह मिला लें. आखिर में थोड़ी-सी क्रीम और देसी घी डालकर मिक्स करें. अब आपकी मसालेदार और टेस्ट से भरपूर अंडा करी तैयार है. इसे सर्विंग बाउल में निकालें, ऊपर से हरा धनिया, हरी मिर्च और थोड़ा चिली ऑयल डालकर सजाएं. इसे रोटी, तंदूरी नान, सादे पराठे, बासमती राइस या जीरा राइस के साथ गरमा गरम सर्व करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>फेस्टिव सीजन आते ही बाजार में बिक रहा नकली मावा, ऐसे करें असली की पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ त्योहारों का मौसम शुरू होते ही बाजार में मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है. मिठाई बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में मावा है. मांग बढ़ने के साथ बाजार में नकली या मिलावटी मावा आने का खतरा भी बढ़ जाता है. नकली मावा खाने से सेहत को नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे खरीदते समय थोड़ा सावधान रहना जरूरी है.
हालांकि, केवल देखकर हर बार असली और नकली मावे की पहचान करना आसान नहीं होता. फिर भी कुछ सामान्य बातों पर ध्यान देकर मिलावटी मावे से &amp;nbsp;बचा जा सकता है. आइए जानते हैं मावा खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें.
रंग और बनावट पर ध्यान दें
असली मावा आमतौर पर हल्के क्रीम या सफेद रंग का होता है और इसकी बनावट नरम रहती है. बहुत ज्यादा चमकदार, जरूरत से ज्यादा सफेद या अजीब रंग का मावा देखकर सावधान हो जाएं. मावे को हाथ से हल्का दबाने पर उसकी बनावट भी समझ में आ सकती है. अगर वह बहुत ज्यादा रबड़ जैसा या असामान्य रूप से सख्त लगे तो उसे नहीं खरीदे.
खुशबू से भी लग सकता है पता
असली मावे में दूध की हल्की प्राकृतिक खुशबू आती है. अगर मावे से तेज केमिकल जैसी गंध, साबुन जैसी महक या कोई अजीब गंध आ रही है तो उसे न खरीदें. कई बार खराब या मिलावटी मावे में दूध जैसी सामान्य खुशबू नहीं होती. हालांकि सिर्फ खुशबू के आधार पर मावे को पूरी तरह असली मान लेना भी सही नहीं है.
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थोड़ा सा मावा चखकर देखें
अगर दुकान पर मावा चखने की सुविधा हो तो बहुत थोड़ा सा लेकर स्वाद देखा जा सकता है. असली मावे में दूध और हल्की मिठास जैसा स्वाद होता है. अगर स्वाद बहुत अलग, कड़वा, साबुन जैसा या अजीब लगे तो उसे खरीदने से बचें. मावे का स्वाद सामान्य से बहुत ज्यादा मीठा लगे तो भी सावधानी रखें.
घर पर आयोडीन से कर सकते हैं जांच
मावे में स्टार्च की मिलावट का पता लगाने के लिए घर पर आयोडीन टेस्ट किया जा सकता है. इसके लिए थोड़ा मावा लेकर उसमें पानी मिलाकर गर्म करें और ठंडा होने दें. इसके बाद आयोडीन की कुछ बूंदें डालें. अगर मिश्रण का रंग नीला या नीला-काला होने लगे तो इसमें स्टार्च होने की संभावना हो सकती है. यह घरेलू जांच सिर्फ शुरुआती संकेत देती है, इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए.
विश्वसनीय दुकान से ही खरीदें
मावा खरीदते समय सबसे जरूरी बात यह है कि इसे किसी भरोसेमंद दुकान या डेयरी से लें. बहुत सस्ता मावा मिलने पर उसकी गुणवत्ता जरूर देखें. पैक्ड मावा खरीद रहे हैं तो पैकेट की तारीख, पैकिंग और दूसरी जरूरी जानकारी जरूर देखें. अगर मावे की गुणवत्ता को लेकर शक हो तो उसे न खाएं.
मिलावट का शक हो तो क्या करें
अगर मावे का रंग, गंध या स्वाद सही नहीं है तो उसे इस्तेमाल न करें. घर पर की गई जांच से सिर्फ कुछ तरह की मिलावट का अंदाजा लगाया जा सकता है. पक्का पता लगाने के लिए खाद्य जांच प्रयोगशाला में जांच कराना ज्यादा सही तरीका है. त्योहारों में मिठाई और मावा खरीदते समय थोड़ी सावधानी बरतकर आप अपने परिवार को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने की कोशिश कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>होटल में हमेशा सफेद तौलिया ही क्यों होता है, जानें इसका कारण?</title>
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        <description><![CDATA[ होटल में ठहरने के दौरान आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. वहां बेडशीट से लेकर तकिया तक हर चीज सफेद रंग की ही होती है. खासकर होटल के बाथरूम में रखे तौलिए भी सफेद रंग के दिखाई देते हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर होटल सफेद तौलिया ही क्यों इस्तेमाल करते हैं? असल में इसके पीछे के सफाई, रखरखाव, ग्राहक का भरोसा और होटल इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वजहें हैं.
गंदगी आसानी से दिखाई देती है
सफेद तौलिए का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन पर गंदगी, दाग और धब्बे आसानी से दिखाई दे जाते हैं. होटल के कर्मचारी अगर तौलिए में हल्का सा भी दाग देखते हैं तो उसे तुरंत लॉन्ड्री के लिए भेजना आसान हो जाता है. इससे साफ-सफाई के स्तर को बनाए रखने में मदद मिलती है. रंगीन तौलिए में कई बार छोटे दाग आसानी से नजर नहीं आते. ऐसे में सफेद रंग होटल स्टाफ के लिए एक तरह का विजुअल चेक भी बन जाता है.
ब्लीच से सफाई करना आसान
होटलों में बड़ी संख्या में तौलिए रोजाना धोए जाते हैं. सफेद कपड़े को जरूरत पड़ने पर ब्लीच और अन्य लॉन्ड्री प्रक्रियाओं के जरिए अच्छी तरह साफ किया जाता है. इससे तौलियों की स्वच्छता बनाए रखने में सुविधा होती है. वहीं, रंगीन तौलिए पर तेज केमिकल का इस्तेमाल करने से उनका रंग फीका पड़ हो जाता है. सफेद तौलिए में यह समस्या अपेक्षाकृत कम होती है.
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सफेद रंग देता है साफ-सुथरा एहसास
मनोवैज्ञानिक रूप से सफेद रंग को स्वच्छता, शांति और ताजगी से जोड़ा जाता है. जब होटल के कमरे में सफेद तौलिया, सफेद चादर और सफेद तकिया दिखाई देता है तो मेहमान को साफ और व्यवस्थित माहौल का अनुभव होता है. यही वजह है कि होटल इंडस्ट्री में सफेद रंग को लंबे समय से पसंद किया जाता रहा है.
होटल की ब्रांड इमेज भी जुड़ी है
सफेद तौलिया अब हर होटल की पहचान का हिस्सा बन चुका है. मेहमान सफेद और साफ तौलिया देखकर होटल की हाइजीन को लेकर सकारात्मक धारणा बना लेते हैं. कई होटल सफेद लिनेन का इस्तेमाल इसलिए भी करते हैं ताकि उनके कमरे एक समान, प्रीमियम और प्रोफेशनल नजर आएं.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 17:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>गद्दा कितने साल में बदलना चाहिए, जानें कब हो जाता है खराब?</title>
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        <description><![CDATA[ रात में अच्छी नींद के लिए आरामदायक बिस्तर बेहद जरूरी है. हम अक्सर चादर, तकिया और बेड की सफाई पर ध्यान देते हैं, लेकिन गद्दे को लेकर उतना गंभीर नहीं होते. कई लोग सालों तक एक ही गद्दे का इस्तेमाल करते रहते हैं. हालांकि, समय के साथ गद्दे की मजबूती और सपोर्ट कम होने लगता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गद्दा कितने साल में बदल देना चाहिए और कैसे पता लगाएं कि वह खराब हो चुका है?
आमतौर पर एक अच्छे गद्दे की उम्र करीब 7 से 10 साल तक मानी जाती है. हांलाकि, यह गद्दे की क्वालिटी, इस्तेमाल, वजन और उसकी देखभाल पर निर्भर करता है. कुछ गद्दे इससे पहले ही खराब होने लगते हैं, जबकि अच्छी क्वालिटी के गद्दे उचित देखभाल के साथ ज्यादा समय तक चलते हैं. अगर गद्दे का इस्तेमाल रोजाना किया जाता है, तो कुछ वर्षों बाद उसके अंदर मौजूद फोम या स्प्रिंग का सपोर्ट धीरे-धीरे कम होने लगता है.
गद्दा खराब होने के संकेत
गद्दा बदलने का सबसे बड़ा संकेत उसकी सतह का असमान हो जाना है. अगर गद्दे के बीच या किसी हिस्से में गड्ढा बनने लगा है और उस पर लेटने के बाद शरीर एक तरफ झुकता महसूस होता है, तो यह गद्दे के खराब होने का संकेत होते हैं.
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सुबह उठने पर शरीर में दर्द
अगर रोज सुबह उठने के बाद कमर, कंधे या गर्दन में अकड़न महसूस होती है और इसका कोई दूसरा स्पष्ट कारण नहीं है, तो गद्दे का सपोर्ट भी एक वजह हो सकता है. पुराना या बहुत ज्यादा धंस चुका गद्दा शरीर को सही सपोर्ट नहीं दे पाता. जिससे शरीर दर्द करने गलता है.
गद्दे से आवाज आने लगे
स्प्रिंग वाले गद्दों में समय के साथ स्प्रिंग कमजोर या खराब हो जाते हैं. अगर करवट बदलते या बैठते समय गद्दे से लगातार आवाज आने लगे, तो यह उसके पुराने होने का संकेत हो सकता है. ऐसे में गद्दे को बदलने पर विचार किया जाना चाहिए.
कब बदलें गद्दा
अगर गद्दे में बहुत ज्यादा धंसाव, टूट-फूट, स्प्रिंग बाहर निकलना, असमान सतह या लगातार असहजता जैसी समस्या है, तो केवल उसकी उम्र पूरी होने का इंतजार करना जरूरी नहीं है. कुल मिलाकर, 7 से 10 साल एक सामान्य अनुमान है, लेकिन गद्दा बदलने का सही समय उसकी वास्तविक स्थिति पर निर्भर करता है. अगर गद्दा शरीर को पर्याप्त सपोर्ट नहीं दे रहा, उसकी सतह खराब हो गई है या उस पर सोने के बाद आराम महसूस नहीं होता, तो उसे बदलने का समय आ गया है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 17:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>Sugar Alternatives: चीनी महंगी हुई तो क्या खाएं? जानें गुड़, शहद और खजूर में कौन बेहतर</title>
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        <description><![CDATA[ Best Sugar Alternatives Jaggery Honey Dates: चीनी की कीमत बढ़ने के बाद अगर आप रोजमर्रा की चाय, मिठाई या दूसरी चीजों में इसका विकल्प तलाश रहे हैं, तो गुड़, शहद और खजूर तीन ऐसे नाम हैं जो सबसे पहले ध्यान में आते हैं. &amp;nbsp;हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है. मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई. मंत्रालय ने इसके पीछे घरेलू उत्पादन उम्मीद से कम रहना, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर सप्लाई में कमी और कुछ हिस्सों में जमाखोरी जैसे कारण बताए हैं.
ऐसे में अगर आप चीनी का इस्तेमाल कम करना चाहते हैं, तो गुड़, शहद और खजूर विकल्प हो सकते हैं. लेकिन इन्हें चुनते समय यह समझना जरूरी है कि इनमें से कोई भी चीज जरूरत से ज्यादा खाने पर हेल्दी नहीं बन जाती.
गुड़- चीनी से कम प्रोसेस्ड, लेकिन मीठा उतना ही संभलकर
भारतीय घरों में गुड़ का इस्तेमाल लंबे समय से चीनी के विकल्प के रूप में होता रहा है. यह गन्ने के रस से बनता है और सफेद चीनी की तुलना में कम प्रोसेस्ड होता है. इसमें थोड़ी मात्रा में आयरन और दूसरे मिनरल्स भी मिलते हैं, जो इसे पोषण के लिहाज से चीनी से कुछ अलग बनाते हैं. लेकिन गुड़ को बिना किसी सीमा के खाना सही नहीं है. इसमें कैलोरी और प्राकृतिक शर्करा की मात्रा काफी होती है और यह ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है. यानी अगर किसी का लक्ष्य सिर्फ सफेद चीनी कम करना है, तो सीमित मात्रा में गुड़ एक विकल्प हो सकता है. लेकिन वजन या ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले लोगों के लिए इसे चीनी का पूरी तरह बेफिक्र होकर इस्तेमाल किया जाने वाला विकल्प नहीं माना जा सकता.

शहद- स्वाद के साथ एंटीऑक्सीडेंट भी, लेकिन मात्रा का रखें ध्यान
शहद को अक्सर चीनी से ज्यादा प्राकृतिक और हेल्दी माना जाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट और कुछ एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं. इसका स्वाद चीनी की तुलना में ज्यादा मीठा महसूस हो सकता है, इसलिए कई बार कम मात्रा में भी काम चल जाता है. हालांकि, शहद भी आखिरकार मीठा पदार्थ है और इसमें मौजूद शर्करा ब्लड शुगर पर असर डाल सकती है. इसलिए सिर्फ यह सोचकर कि शहद प्राकृतिक है, इसे ज्यादा मात्रा में लेना सही नहीं है. जिन लोगों को डायबिटीज है या जो वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें शहद की मात्रा पर भी नजर रखनी चाहिए.

खजूर- फाइबर के साथ मिलती है मिठास
अगर बात खजूर की करें, तो यह सिर्फ मिठास ही नहीं देता बल्कि इसमें फाइबर और कुछ मिनरल्स भी होते हैं. यही वजह है कि खजूर को चीनी के मुकाबले एक पोषण से भरपूर विकल्प माना जाता है. इसे सीधे खाया जा सकता है या घर की कुछ मिठाइयों, शेक और दूसरी रेसिपीज में इस्तेमाल किया जा सकता है. खजूर से बनी मिठास या डेट शुगर में फाइबर होने की वजह से यह साधारण रिफाइंड चीनी से अलग है. फिर भी इसमें प्राकृतिक शर्करा और कैलोरी मौजूद होती है. इसलिए इसे भी जरूरत से ज्यादा खाना सही नहीं है. खासकर ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को इसकी मात्रा को लेकर सावधानी रखनी चाहिए.
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तो आखिर चीनी की जगह कौन बेहतर?
अगर सिर्फ तीनों विकल्पों की बात करें, तो चुनाव आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. पारंपरिक स्वाद और कम प्रोसेस्ड विकल्प चाहिए तो सीमित मात्रा में गुड़ लिया जा सकता है. एंटीऑक्सीडेंट के साथ मीठा स्वाद चाहिए तो शहद एक विकल्प हो सकता है. वहीं, मिठास के साथ फाइबर और कुछ पोषक तत्व भी चाहिए तो खजूर को डाइट में शामिल किया जा सकता है.
यह समझना जरूरी है कि गुड़, शहद और खजूर तीनों में मिठास और कैलोरी मौजूद होती है. इसलिए चीनी महंगी होने पर इन्हें सीधे असीमित मात्रा में इस्तेमाल करना सही नहीं है. बेहतर विकल्प वही होगा जो आपकी जरूरत और डाइट के हिसाब से हो और जिसकी मात्रा नियंत्रित रखी जाए. खासकर डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या वाले लोगों को मीठे विकल्प चुनने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए.
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>घर का दही रातभर में खट्टा क्यों? जानें जमाने का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ घर का दही रातभर में खट्टा क्यों? जानें जमाने का सही तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>प्रेग्नेंसी में कब्ज की परेशानी? जानें डाइट और खाने का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इनका असर खान-पान पर भी पड़ता है. इस समय पेट भरने के साथ यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि मां और बच्चे को जरूरी पोषण मिल रहा है या नहीं, कई महिलाओं को कब्ज, थकान, पैरों में ऐंठन और मतली जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.ऐसे में डाइट में छोटे-छोटे बदलाव काफी मददगार हो सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में कब्ज की परेशानी के लिए डाइट और खाने का सही तरीका क्या है.
प्रेग्नेंसी में खाने का सही तरीका क्या है?
प्रेग्नेंसी में बड़े और भारी खाने की जगह कम मात्रा में लेकिन बार-बार खाना बेहतर तरीका बताया गया. इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी और दूसरे लिक्विड लेना भी जरूरी है. हर मील में पोषण का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. साथ ही मौसमी और स्थानीय फलों को डाइट का हिस्सा बनाना भी फायदेमंद हो सकता है.&amp;nbsp;
प्रेग्नेंसी में कब्ज की परेशानी के लिए सही डाइट क्या है?
1. &amp;nbsp;डाइट में फाइबर वाले फल शामिल करें. सेब, अमरूद, कीवी, आड़ू, बेर और एवोकाडो जैसे फल डाइट में शामिल किए जा सकते हैं. इनमें फाइबर पाया जाता है, जो कब्ज और पाचन से जुड़ी परेशानी में मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;प्रेग्नेंसी में सिर्फ प्यास लगने पर पानी पीना पर्याप्त नहीं है. पानी, नारियल पानी, लस्सी, छाछ और नींबू पानी जैसे लिक्विड प्रोडक्ट्स लिए जा सकते हैं. खरबूजा और तरबूज भी पानी की ज्यादा मात्रा के कारण हाइड्रेशन में मदद कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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3. अंडे, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स और दालें प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं. दही में प्रोटीन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, इसलिए इसे भी डाइट में शामिल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
4. कब्ज की परेशानी में अंजीर को रातभर भिगोकर प्रून्स के साथ खाने की सलाह दी गई है. वहीं अदरक मतली और पाचन में मदद कर सकता है. भीगे हुए बादाम भी डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
5. मीठी चीजों, प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा शुगर वाले सोडा का सेवन कम करने की सलाह दी गई है.चाय-कॉफी की मात्रा भी सीमित रखनी चाहिए. शेक, शरबत और ठंडाई लेते समय उनमें मौजूद शुगर का ध्यान रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
जेस्टेशनल डायबिटीज में फलों की मात्रा रखें ध्यान
प्रेग्नेंसी में फल खाना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन उनकी मात्रा पर ध्यान देना भी जरूरी है, खासकर जेस्टेशनल डायबिटीज होने पर आम, खरबूजा, तरबूज, केला, अंगूर और चीकू जैसे शुगर वाले फलों से ब्लड शुगर बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में फल की सही मात्रा के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. सामान्य तौर पर दिन में 2 से 3 फल सर्विंग को प्रेग्नेंसी में पर्याप्त बताया गया है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 23 Aug 2026 01:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>लड़ते रहें अमेरिका&amp;ईरान, हम तो अपना ही देश घूम लेंगे</title>
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        <description><![CDATA[ भारत का ट्रैवल सेक्टर इस समय बड़े बदलाव से गुजर रहा है. विदेश यात्रा से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारतीय पर्यटक अब देश के भीतर घूमने के लिए ज्यादा विकल्प तलाश रहे हैं. घरेलू पर्यटन, डेस्टिनेशन वेडिंग और MICE यानी मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशंस सेक्टर ट्रैवल इंडस्ट्री की ग्रोथ को नई रफ्तार दे रहे हैं. यह खुलासा मुंबई में चल रहे टीटीएफ 2026 में हुआ, जहां ट्रैवल इंडस्ट्री के दिग्गजों ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितता, वीजा की मुश्किलों और महंगे एयर फ्यूल के बावजूद भारत का घरेलू पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
विदेश यात्रा मुश्किल, घरेलू टूरिज्म बना सहारा
ट्रैवल एजेंट्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (TAAI) के वेस्टर्न रीजन के अध्यक्ष राजेश पोद्दार के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के बदलते हालात, वीजा से जुड़ी चुनौतियों और पश्चिम एशिया में तनाव ने इंटरनेशनल ट्रैवल को प्रभावित किया है. इसके अलावा विमान ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में बढ़ोतरी से हवाई यात्रा भी महंगी हुई है. इससे विदेश घूमने का बजट बढ़ रहा है. ऐसे में भारतीय पर्यटक देश के भीतर नए और कम चर्चित डेस्टिनेशन तलाश रहे हैं.
2025 में 4.3 अरब से ज्यादा घरेलू यात्राएं
टीएएआई के मुताबिक, भारत में 2025 के दौरान 4.3 अरब से ज्यादा डोमेस्टिक ट्रैवल दर्ज किए गए. वहीं, करीब 3.28 करोड़ भारतीयों ने विदेश यात्रा की. यह आंकड़ा 2024 के मुकाबले 6.3 पर्सेंट ज्यादा बताया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि भारतीयों ने विदेश यात्रा काफी ज्यादा की हैं, लेकिन देश के भीतर घूमने का चलन उससे कहीं ज्यादा बढ़ा है.
MICE और डेस्टिनेशन वेडिंग में भी तेजी
गौर करने वाली बात यह है कि ट्रैवल इंडस्ट्री की ग्रोथ सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है. &amp;nbsp;कॉरपोरेट MICE और डेस्टिनेशन वेडिंग भी तेजी से बढ़ रहे हैं. बता दें कि कॉरपोरेट MICE में करीब 10-15 पर्सेंट और डेस्टिनेशन वेडिंग में 15-20 पर्सेंट की ग्रोथ हुई है. इस पूरे सेगमेंट में अगले कुछ वर्षों में करीब 12-14 फीसदी सालाना ग्रोथ का अनुमान है.
ये शहर भी बन रहे पसंद
डेस्टिनेशन वेडिंग और MICE के लिए अब गोवा, उदयपुर, जयपुर, कोच्चि, वाराणसी और इंदौर जैसे शहर भी पसंद किए जा रहे हैं. इस ट्रेंड का फायदा सिर्फ होटल और एयरलाइंस को नहीं, बल्कि लोकल बिजनेस को भी मिल सकता है.&amp;nbsp;
इन बिजनेस को हो सकता है फायदा

होटल और रिसॉर्ट
होमस्टे
स्थानीय टैक्सी और ट्रांसपोर्ट
रेस्टोरेंट
टूर गाइड
लोकल हैंडीक्राफ्ट
इवेंट और वेडिंग कंपनियां

आध्यात्मिक और वेलनेस टूरिज्म भी बढ़ा
ट्रैवल इंडस्ट्री के मुताबिक, भारतीय पर्यटन का दायरा अब सिर्फ पहाड़, समुद्र और ऐतिहासिक जगहों तक सीमित नहीं है. स्प्रिचुअल टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म और स्पोर्ट्स टूरिज्म भी तेजी से बढ़ रहा है. अयोध्या-वाराणसी जैसे धार्मिक शहरों से लेकर वेलनेस और मेडिकल टूरिज्म से जुड़े डेस्टिनेशन पर्यटकों के लिए नए ऑप्शन बन रहे हैं.
बता दें कि भारत करीब 231.6 अरब डॉलर के योगदान के साथ ग्लोबल टूरिज्म इकोनॉमी में 8वें पायदान पर पहुंच चुका है. &amp;nbsp;फेयरफेस्ट मीडिया लिमिटेड के अध्यक्ष और सीईओ संजीव अग्रवाल के मुताबिक, दुनिया में भले ही ट्रैवल को लेकर अनिश्चितता दिखे, लेकिन भारत के लोग देश के भीतर पहले से कहीं ज्यादा ट्रैवल कर रहे हैं. डोमेस्टिक टूरिज्म आज ग्लोबल लेवल की सबसे मजबूत कहानी है और मुंबई इस बाजार का मुख्य केंद्र है.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पीरियड की हर परेशानी हार्मोनल नहीं! ये संकेत हो सकते हैं गंभीर बीमारी का इशारा</title>
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        <description><![CDATA[ पीरियड के दौरान पेट दर्द, मूड में बदलाव, थकान या कभी-कभी पीरियड की तारीख में थोड़ा बदलाव सामान्य हो सकता है. हालांकि, हर परेशानी को सिर्फ हार्मोनल समस्या &amp;nbsp;मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं होता. अगर पीरियड में लगातार असामान्य बदलाव, बहुत ज्यादा दर्द या अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की वजह भी हो सकती है. ऐसे लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहज जरूरी है.
बहुत ज्यादा ब्लीडिंग को न करें नजरअंदाज
अगर पीरियड के दौरान सामान्य से काफी ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, बार-बार पैड बदलना पड़ रहा है या कई दिनों तक अत्यधिक ब्लीडिंग रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं, फाइब्रॉएड, पॉलीप या अन्य स्थितियां शामिल हो सकती हैं. लगातार ज्यादा ब्लीडिंग होने से शरीर में आयरन की कमी और एनीमिया भी हो सकता है, ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें.
असहनीय पीरियड दर्द हो सकता है संकेत
हल्का या मध्यम दर्द कई लोगों में सामान्य हो सकता है, लेकिन ऐसा दर्द जो रोजमर्रा के काम, पढ़ाई या नौकरी को प्रभावित करे, सामान्य मानकर सहना उचित नहीं है. बहुत तेज और लगातार दर्द कभी-कभी एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस या अन्य स्त्रीरोग संबंधी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है. खासकर अगर दर्द समय के साथ बढ़ रहा है या सामान्य दर्द की दवाओं से राहत नहीं मिल रही तो जांच जरूर करवाएं.
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पीरियड अनियमित होने पर दें ध्यान
कभी-कबार पीरियड जल्दी या देर से आना कई कारणों से हो सकता है. लंबे समय तक पीरियड अनियमित रहना, कई महीनों तक पीरियड न आना या बार-बार चक्र में बड़ा बदलाव होना जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है. इसके पीछे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), थायरॉयड की समस्या, वजन में बदलाव या अन्य स्वास्थ्य कारण हो सकते हैं. गर्भावस्था की संभावना होने पर सबसे पहले उसकी जांच करना भी जरूरी है.
पीरियड के साथ लगातार कमजोरी और चक्कर
अगर ज्यादा ब्लीडिंग के साथ लगातार कमजोरी, थकान, सांस फूलना या चक्कर आने जैसे लक्षण हैं तो शरीर में आयरन की कमी या एनीमिया की आशंका हो सकती है. ऐसे लक्षणों में डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण है. पीरियड से जुड़ी परेशानियों के पीछे हार्मोनल बदलाव एक कारण हो सकता है, लेकिन यही एकमात्र कारण नहीं होता है. लक्षणों की अवधि और गंभीरता पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Meghalaya Tourism: टूरिज्म से हर साल कितना कमाता है मेघालय, विवाद से कितना नुकसान?</title>
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        <description><![CDATA[ Meghalaya Tourism: मेघालय को देश के प्रमुख नेचर और एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन में गिना जाता है. शिलॉन्ग, चेरापूंजी, मावसिनराम, डावकी, नोंग्रियाट और जैंतिया हिल्स जैसे इलाकों की वजह से राज्य में हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते हैं. बीते कुछ वर्षों में सरकार ने प्राकृतिक पर्यटन के साथ-साथ म्यूजिक फेस्टिवल, कॉन्सर्ट और कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया है. जिसकी वजह से मेघालय की टूरिज्म इकॉनमी में बढ़ोतरी हुई थी. ऐसे में सवाल यह है कि मेघालय की टूरिज्म इकॉनमी कितनी बड़ी है और हालिया हिंसा-विवाद से इसे कितना नुकसान हो सकता है?
2024 में 16 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे
मेघालय सरकार के फरवरी 2026 के गजट में दिए आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में करीब 16 लाख पर्यटकों ने राज्य का दौरा किया, जो 2023 के मुकाबले 13.04 प्रतिशत ज्यादा था. इसी साल विदेशी पर्यटकों की संख्या भी 15.24 प्रतिशत बढ़कर करीब 23,000 पहुंच गई. यह आंकड़ा बताता है कि कोविड के बाद मेघालय टूरिज्म ने अच्छी रिकवरी की है. सितंबर 2025 में सामने आए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले 2024 में राज्य में 15.86 लाख केवल घरेलू पर्यटक &amp;nbsp;दर्ज हुए थे, जो 2023 की तुलना में करीब 1.83 लाख अधिक थे.
टूरिज्म को बढ़ाने का है प्लान
मेघालय ने टूरिज्म को बढ़ाने के लिए अपने संगीत और सांस्कृतिक आयोजनों को भी आर्थिक मॉडल का हिस्सा बनाया है. मेघालय के एक आधिकारिक गजट के अनुसार, राज्य की टूरज्म इंडस्ट्री की वेल्युएशन 2022 में करीब 1,600 करोड़ रूपए थी. सरकार ने इसे 2028 तक लगभग 12,000 करोड़ रूपए तक पहुंचाने का अनुमान रखा है.
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म्यूजिक फेस्टिवल और कॉन्सर्ट्स से बढ़े पर्यटक
विभिन्न आयोजनों की वजह से मेघालय में आने वाले पर्यटकों के लिए सिर्फ घूमना ही आकर्षण नहीं रह गया, बल्कि लाइव म्यूजिक और स्थानीय संस्कृति का अनुभव भी उनकी यात्रा का हिस्सा बन गया है. बड़े कलाकारों के कार्यक्रमों के दौरान दूसरे राज्यों से आने वाले लोग कई दिनों तक शिलॉन्ग और आसपास के इलाकों में रुकते हैं. इससे होटल, होमस्टे, टैक्सी, रेस्टोरेंट और छोटे स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिलता है.
विवाद से हुआ नुकसान
19 अगस्त 2026 को शिलोंग में खासी स्टूडेंट यूनिसन (KSU) की ब्लैक फ्लैग बाइक रैली के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई. इस घटना की वजह से टूरिज्म सेक्टर और उससे जुड़े कारोबार पर असर पड़ता दिखाई दे रहा है. पर्यटकों में डर का माहौल होने की वजह से बूकिंग केन्सेलेशन्स जैसी बात भी सामने आई है.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Monsoon Cleaning Tips: बारिश में चिपचिपाने लगा है कमरे का फर्श, ऐसे करें सफाई</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Cleaning Tips: बारिश का मौसम आते ही घर में नमी बढ़ जाती है. इसका असर खासतौर पर कमरे के फर्श पर दिखाई देता है. नमी और धूल के कारण फर्श चिपचिपा महसूस होने लग जाता है. कई बार सामान्य पोछा लगाने के बाद भी फर्श की चिकनाहट पूरी तरह दूर नहीं होती. ऐसे में सफाई का सही तरीका अपनाना जरूरी है. कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से आप बारिश के मौसम में भी फर्श को साफ, सूखा और चमकदार रख सकते हैं.
फर्श से हटाएं धूल और गंदगी
चिपचिपे फर्श को साफ करने से पहले उस पर जमा धूल, मिट्टी और छोटे कणों को अच्छी तरह हटा लें. इसके लिए आप झाड़ू या वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर फर्श पर पहले से पानी मौजूद है तो उसे सूखे कपड़े या मॉप से साफ कर लें. धूल और पानी एक साथ मिलकर फर्श पर गंदगी की परत बना लेते हैं ऐसे में सफाई की शुरुआत हमेशा सूखी गंदगी हटाने से करना बेहतर होता है.
गुनगुने पानी से पोछा लगाना होगा असरदार
फर्श की चिपचिपाहट दूर करने के लिए आप गुनगुने पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं. एक बाल्टी गुनगुने पानी में फर्श साफ करने वाला माइल्ड क्लीनर मिलाएं. अब मॉप को अच्छी तरह निचोड़कर फर्श पर लगाएं. बहुत ज्यादा पानी का इस्तेमाल करने से बचें क्योंकि बारिश के मौसम में फर्श देर से सूखता है और अधिक नमी होने से समस्या बढ़ सकती है.
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बेकिंग सोडा का करें इस्तेमाल
अगर फर्श पर किसी जगह गंदगी या चिकनाहट ज्यादा जमा है, तो सफाई के लिए आप बेकिंग सोडा का हल्का घोल इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन किसी भी घरेलू मिश्रण को पूरे फर्श पर लगाने से पहले फर्श के छोटे और कम दिखाई देने वाले हिस्से पर परीक्षण कर लें. सफाई के लिए हमेशा फर्श के प्रकार के अनुसार उपयुक्त क्लीनर चुनें और उत्पाद के निर्देशों का पालन करें.
कमरे में रखें वेंटिलेशन
बारिश के मौसम में कमरे को पूरी तरह बंद रखने से कमरे में नमी बढ़ जाती है. पंखे का इस्तेमाल भी फर्श और कमरे की नमी कम करने में मदद करता है. अगर घर में लगातार सीलन, फर्श पर पानी जमा होना या फफूंद की समस्या बनी रहती है, तो केवल सफाई पर निर्भर न रहें. नमी के स्रोत की पहचान करके उसका समाधान करना ज्यादा जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Jaggery Storage Tips: डिब्बे में रखा गुड़ होने लगा है चिपचिपा? एक आसान हैक से करें ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Store Jaggery Without Melting: गुड़ भारतीय रसोई का एक अहम हिस्सा है. चाय से लेकर लड्डू, खीर और दूसरी मिठाइयों तक इसका इस्तेमाल किया जाता है. कई लोग खाना खाने के बाद भी गुड़ का एक छोटा टुकड़ा खाना पसंद करते हैं. लेकिन अक्सर घर में रखा गुड़ कुछ दिनों बाद नरम होने लगता है, उसकी सतह पर चिपचिपाहट आ जाती है और कई बार ऐसा लगता है जैसे गुड़ पिघल रहा हो. खासकर बारिश और उमस के मौसम में यह परेशानी ज्यादा देखने को मिलती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर गुड़ में यह बदलाव क्यों आता है और इसे लंबे समय तक सही तरीके से कैसे रखा जा सकता है.
क्यों गुड़ होता है चिपचिपा?
दरअसल, गुड़ में नमी को अपनी ओर खींचने की क्षमता होती है. हवा में मौजूद नमी के संपर्क में आने पर गुड़ उसे सोखने लगता है. इसी वजह से उसका सख्त टुकड़ा धीरे-धीरे मुलायम और चिपचिपा हो सकता है. ज्यादा नमी मिलने पर उसकी बाहरी सतह गीली या सिरप जैसी भी नजर आने लगती है. यही कारण है कि खुले में या सही तरीके से पैक किए बिना रखा गया गुड़ जल्दी खराब होने लगता है.
कैसे इसको बचा कर रख सकते हैं?
गुड़ को चिपचिपा होने से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि उसे हवा और नमी से दूर रखा जाए. पैकेट खोलने के बाद गुड़ को किसी एयरटाइट कंटेनर में रख देना चाहिए. ढक्कन ऐसा हो जो अच्छी तरह बंद हो जाए, ताकि बाहर की हवा और नमी अंदर न पहुंच सके. इसके लिए कांच का जार या अच्छी क्वालिटी का ढक्कन वाला कंटेनर इस्तेमाल किया जा सकता है. गुड़ रखने के लिए जगह का चुनाव भी काफी मायने रखता है. इसे हमेशा ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखना बेहतर होता है. किचन में गैस के बिल्कुल पास या ऐसी जगह जहां बार-बार भाप और नमी पहुंचती हो, वहां गुड़ रखने से बचना चाहिए. बारिश के दिनों में इसे खुले बर्तन या ढीले पैकेट में रखना और भी नुकसानदायक हो सकता है.

क्या इसके लिए फ्रिज का यूज सही?
कई लोग गुड़ को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन ऐसा करना हमेशा सही नहीं माना जाता. फ्रिज की ठंडक गुड़ को काफी सख्त बना सकती है, जिससे जरूरत के समय उसे तोड़ना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा, फ्रिज से बाहर निकालने के बाद तापमान में बदलाव के कारण गुड़ की सतह पर नमी जम सकती है. यह नमी उसे और ज्यादा चिपचिपा बना सकती है. इसलिए सामान्य तौर पर गुड़ को सूखी जगह पर एयरटाइट कंटेनर में रखना बेहतर विकल्प हो सकता है.
अगर आपने गुड़ का बड़ा टुकड़ा खरीदा है, तो उसे जरूरत के हिसाब से छोटे टुकड़ों में बांटकर रखा जा सकता है. लंबे समय तक स्टोर करना हो तो छोटे टुकड़ों को पहले अच्छी तरह बंद होने वाले जिप बैग में रखें और उसमें से अतिरिक्त हवा निकाल दें. इसके बाद उस बैग को एयरटाइट कंटेनर में रख सकते हैं. इस तरह गुड़ को नमी से अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है.
ऐसे तोड़ सकते हैं गुड़
गुड़ का पूरा इस्तेमाल करना भी कई बार मुश्किल हो जाता है. अगर वह बहुत सख्त हो गया है और आपको केवल थोड़ी मात्रा चाहिए, तो पूरे को तोड़ने की जरूरत नहीं है. इसे कुछ सेकंड के लिए हल्की गर्मी देकर थोड़ा नरम किया जा सकता है. माइक्रोवेव में माइक्रोवेव-सेफ बाउल में रखकर लगभग 10 से 15 सेकंड तक हल्की गर्मी दी जा सकती है. इससे गुड़ थोड़ा नरम हो सकता है और जरूरत के अनुसार काटना या निकालना आसान हो जाता है. हालांकि, इसे ज्यादा देर गर्म नहीं करना चाहिए, क्योंकि गर्म गुड़ पिघलकर बेहद चिपचिपा हो सकता है और हाथ जलने का खतरा भी रहता है.

अगर गुड़ ज्यादा पुराना नहीं है, तो मजबूत चाकू की मदद से भी उसका छोटा टुकड़ा निकाला जा सकता है. इसे किसी स्थिर और मजबूत सतह पर रखकर सावधानी से छोटे हिस्से अलग करें. बहुत जोर से काटने की कोशिश करने के बजाय धीरे-धीरे किनारे से टुकड़ा निकालना ज्यादा सुरक्षित रहता है. अगर गुड़ बहुत ज्यादा सख्त हो गया है, तो उसे मोटे और साफ कपड़े में लपेटकर हल्के से थपथपाकर छोटे टुकड़ों में तोड़ा जा सकता है.
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जो लोग गुड़ के बड़े टुकड़ों को संभालने की परेशानी से बचना चाहते हैं, उनके लिए गुड़ पाउडर भी आसान विकल्प हो सकता है. इसे मापना आसान होता है और चाय, दूध, मिठाई या दूसरी चीजों में सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, पाउडर वाला गुड़ भी नमी के संपर्क में आने पर गुठलियां बना सकता है, इसलिए इसे भी हमेशा अच्छी तरह बंद कंटेनर में रखना जरूरी है.
खरीदते समय इसका रखें ध्यान
गुड़ खरीदते समय उसकी क्वालिटी पर ध्यान देना भी जरूरी है. प्राकृतिक रंग और सामान्य खुशबू वाला गुड़ चुनें. बहुत ज्यादा असामान्य रूप से हल्का या चमकीला पीला दिखने वाले गुड़ की क्वालिटी को लेकर सतर्क रहना चाहिए. सही क्वालिटी का गुड़ खरीदने के साथ-साथ उसे सही तरीके से स्टोर करना भी उतना ही जरूरी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 13:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दिल्ली में बढ़ रहे H1N1के केस, मरीजों में गिर रहा ऑक्सीजन लेवल</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली में मौसमी बीमारियों और H1N1 इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य तैयारियों की समीक्षा की गई. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली सरकार की तैयारियों, अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और मौसमी व वेक्टर जनित बीमारियों की स्थिति पर चर्चा हुई.
बैठक में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि राजधानी में वर्ष 2026 के दौरान अब तक इन्फ्लूएंजा-ए के 2392 मामले सामने आए हैं. इनमें H1N1 के 1777 मामले दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा H1 के 37, H3 के 138 और अन्य श्रेणियों के 440 मामले रिपोर्ट किए गए हैं.
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मरीजों की निगरानी के निर्देश&amp;nbsp;
डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली पूरी तरह तैयार है और अस्पतालों में बेड, डॉक्टर, दवाइयों और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर जांच और इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार निगरानी कर रही है. दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के जरिए ILI, SARI और इन्फ्लूएंजा के मामलों पर रोजाना नजर रख रहा है. अस्पतालों और जिला स्तर के स्वास्थ्य अधिकारियों को स्क्रीनिंग, रिपोर्टिंग और मरीजों की निगरानी के लिए निर्देश जारी किए गए हैं.
डेंगू-मलेरिया के भी बढ़ रहे मामले
स्वास्थ्य विभाग ने इलाज, मरीजों की श्रेणी तय करने, वेंटिलेटर प्रबंधन, मास्क और होम केयर से जुड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. स्वास्थ्यकर्मियों को लक्षणों की पहचान और मरीजों के फॉलो-अप को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बैठक में डेंगू और मलेरिया की स्थिति की भी समीक्षा की गई. दिल्ली में अब तक डेंगू के 246 मामले सामने आए हैं, जबकि मलेरिया के 80 मामले दर्ज किए गए हैं. चिकनगुनिया के 19 मामले रिपोर्ट हुए हैं. राहत की बात यह है कि इन तीनों बीमारियों से अब तक किसी मौत की सूचना नहीं है.
91000 से ज्यादा घरों में मच्छरों की मौजूदगी
वेक्टर नियंत्रण अभियान के तहत स्थानीय निकायों ने अब तक 2.38 करोड़ घरों का दौरा किया है. करीब 3.20 लाख घरों में स्प्रे किया गया है, जबकि 91,217 घरों में मच्छरों की मौजूदगी पाई गई. नियमों के उल्लंघन पर 74,591 कानूनी नोटिस जारी किए गए और 6,724 मामलों में कार्रवाई की गई.
दिल्ली में बीमारी की निगरानी के लिए 35 सेंटिनल सर्विलांस अस्पताल हैं. इसके अलावा AIIMS और NCDC में दो एपेक्स रेफरल लैब तथा MAMC में मलेरिया रेफरेंस लैब काम कर रही है. डॉ. पंकज कुमार सिंह ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत रखना एक सतत प्रक्रिया है और सरकार की प्राथमिकता बीमारियों की जल्द पहचान, समय पर इलाज और अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करना है.
H1N1 के लक्षण क्या हैं?
H1N1 से अचानक तेज बुखार, सूखी खांसी, बदन दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, कंपकंपी और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं. कुछ मामलों में मरीजों को सांस लेने में दिक्कत और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी समस्या भी हो सकती है. अगर किसी को सांस फूलना, सीने में दर्द, लगातार तेज़ बुखार, कंफ्यूज़न या होंठों का नीला पड़ना जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
बुज़ुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज, दिल या फेफड़ों की पुरानी बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को गंभीर बीमारी का ज्यादा खतरा रहता है. ऐसे हाई रिस्क मरीजों और मध्यम से गंभीर बीमारी वाले लोगों के लिए समय पर इलाज लेना बेहद जरूरी माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 09:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>How To Remove Rice Insects: चावल में दिखने लगे हैं जाले जैसे धागे? 1 आसान हैक से करें साफ</title>
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        <description><![CDATA[ Why Cobwebs And Weevils Appear In Rice: कई बार चावल निकालते समय उसमें छोटे-छोटे जाले जैसे सफेद धागे दिखाई देने लगते हैं. कुछ लोगों को चावल के दानों के बीच बारीक रेशे, छोटे कीड़े या सफेद रंग के लार्वा भी नजर आते हैं. यह देखकर अक्सर सवाल उठता है कि चावल में आखिर ये जाले जैसे धागे कहां से आ गए और क्या अब इन्हें खाना सुरक्षित है? दरअसल, ऐसा अक्सर स्टोर किए गए चावल में कीड़े लगने के कारण होता है.
चावल में छोटे जाले जैसे धागे क्यों बनने लगते हैं?
चावल, आटा, दाल, सूजी और बेसन जैसे सूखे अनाज में कई तरह के स्टोरेज कीड़े लग सकते हैं. इनमें राइस वीविल यानी चावल का घुन भी शामिल है. ये बहुत छोटे, भूरे या काले रंग के कीड़े होते हैं, जो अनाज में पनप सकते हैं. इनके अंडे और लार्वा भी अनाज के बीच विकसित हो सकते हैं. हालांकि, चावल में दिखाई देने वाले जाले जैसे बारीक धागे सिर्फ राइस वीविल की पहचान नहीं होते. ऐसे रेशे कई बार दूसरे स्टोर किए हुए अनाज के कीड़ों के लार्वा से भी बन सकते हैं. इसलिए सिर्फ जाले जैसे धागे देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि चावल में केवल एक ही तरह का कीड़ा लगा है.

कीड़े चावल में कहां से आते हैं?
कई बार लोग सोचते हैं कि चावल को सही तरीके से न रखने के कारण ही उसमें कीड़े लग गए, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. कुछ कीड़े या उनके अंडे अनाज के पैक होने से पहले ही मौजूद हो सकते हैं. ये अंडे इतने छोटे होते हैं कि आसानी से दिखाई नहीं देते. बाद में अनुकूल माहौल मिलने पर इनसे लार्वा या कीड़े निकल सकते हैं. गर्मी और नमी की वजह से इनकी गतिविधियां बढ़ सकती हैं. लंबे समय तक चावल को स्टोर करके रखना, डिब्बे में नमी रह जाना या कंटेनर को ठीक से बंद न करना भी समस्या बढ़ा सकता है. यही कारण है कि कई बार चावल खरीदते समय बिल्कुल साफ दिखाई देता है, लेकिन कुछ समय बाद उसमें छोटे कीड़े, सफेद लार्वा या जाले जैसे धागे नजर आने लगते हैं.
चावल में छोटे छेद भी हो सकते हैं संकेत
अगर चावल के दानों में छोटे-छोटे छेद दिखाई दें और साथ में छोटे भूरे या काले कीड़े नजर आएं, तो यह राइस वीविल की मौजूदगी का संकेत हो सकता है. राइस वीविल अनाज के दानों के अंदर अंडे दे सकते हैं और उनके विकसित होने के बाद दाने में छेद दिखाई दे सकता है. चावल धोते समय अगर कुछ छोटे कीड़े या लार्वा पानी के ऊपर तैरने लगें तो भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सबसे पहले चावल की अच्छी तरह जांच करें और यह भी देखें कि आसपास रखे आटा, दाल, बेसन या सूजी में तो कीड़े नहीं लगे हैं. स्टोर किए गए अनाज में कीड़े एक जगह से दूसरी जगह फैल सकते हैं.

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चावल में जाले जैसे धागे दिखें तो कैसे हटाएं?
अगर चावल में हल्की मात्रा में कीड़े या जाले जैसे धागे दिखाई दें तो सबसे पहले उसे दूसरे अनाज से अलग कर दें. इसके बाद चावल को किसी साफ और सूखी जगह पर फैलाकर अच्छी तरह जांचें. धूप वाले दिन चावल को कुछ समय के लिए तेज धूप में फैलाना एक पारंपरिक तरीका है, जिससे कीड़ों की गतिविधि कम हो सकती है और कई कीड़े बाहर निकल सकते हैं. एक दूसरा तरीका चावल को फ्रीजर में रखना भी है. चावल को एयरटाइट पैक या कंटेनर में रखकर कुछ दिनों के लिए फ्रीजर में रखने से कई तरह के स्टोरेज कीड़ों के अंडे और लार्वा को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
डिब्बे की सफाई करना भी है जरूरी
सिर्फ चावल से कीड़े निकाल देना काफी नहीं है. जिस डिब्बे में चावल रखा था, उसकी सफाई करना भी जरूरी है. डिब्बे को पूरी तरह खाली करें और उसमें बचे पुराने दानों और धूल को हटा दें. इसके बाद डिब्बे को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखाएं. सबसे जरूरी बात यह है कि डिब्बे में बिल्कुल नमी नहीं रहनी चाहिए. हल्की सी नमी भी अनाज को लंबे समय तक स्टोर करने में परेशानी पैदा कर सकती है. डिब्बा पूरी तरह सूखने के बाद ही उसमें चावल भरें.
इन गलतियों से बचें
नया चावल खरीदकर उसे पुराने चावल के ऊपर डाल देना कई लोगों की आम आदत होती है. अगर पुराने चावल में कीड़े या अंडे मौजूद हैं तो वे नए चावल में भी फैल सकते हैं. इसलिए पुराना स्टॉक खत्म करने के बाद कंटेनर साफ करके ही नया चावल भरें. चावल को लंबे समय तक खुले पैकेट या ढीले ढक्कन वाले डिब्बे में रखने से भी बचें. एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें और उसे गर्मी और नमी वाली जगह से दूर रखें. कम मात्रा में चावल खरीदना भी बेहतर हो सकता है, ताकि वह महीनों तक स्टोर न रहे.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Personal Hygiene Tips: प्राइवेट पार्ट और पर्सनल हाइजीन का रखें खास ख्याल, इन बातों को न करें नजरअंदाज</title>
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        <description><![CDATA[ &amp;nbsp;Personal Hygiene Tips: जब ग्रूमिंग या स्किन केयर की बात आती है तो हम सभी ही अपनी ग्रूमिंग और चेहरे के लिए काफी पैसा खर्च करते हैं और कई प्रकार के प्रोडक्ट्स का भी उपयोग करते हैं पर जितना जरूरी मानते हैं और अपनी स्किन के बाकी हिस्सों का ध्यान रखते हैं उतना ही जरूरी है कि प्राइवेट पार्ट/ पर्सनल हाइजीन का भी ख्याल रखा जाए क्योंकि इससे पसीना, गंदगी और बैक्टीरिया जमा होने से रोक सकते हैं.
पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना क्यों है जरूरी?
पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना सेहत के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि सही देखभाल न करने से इन्फेक्शन, जलन, बदबू और कई तरह की परेशानियां का सामना करना पड़ सकता है. खासकर महिलाओं में गलत सफाई के तरीकों, जैसे वजाइनल डूशिंग या केमिकल वाले साबुन के इस्तेमाल करने से प्राकृतिक पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे बार-बार इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है.
वहीं, पुरुषों में अगर फोरस्किन के नीचे सफाई न हो तो वहां गंदगी जमा होकर संक्रमण की वजह बन जाती है. इसके अलावा सही हाइजीन न रखने से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो दर्दनाक होने के साथ-साथ बार-बार हो सकती हैं यह शुरुआत में तो छोटी पर बार बार होने पर बड़ी समस्या का कारण बन जाती है.
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प्राइवेट पार्ट और पर्सनल हाइजीन कैसे रखें ध्यान?
महिलाओं को केवल बाहरी सफाई की जरूरत है. हाइजीन का ध्यान रखने के लिए उन्हें सिर्फ वल्वा यानी बाहरी हिस्से को गुनगुने पानी या हल्के बिना खुशबू वाले साबुन से साफ करना चाहिए और अगर आप टिशू पप्पर का उपयोग करती है तो टॉयलेट के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर पोंछना चाहिए. वहीं, पीरियड्स में पैड हर 4-6 घंटे में और टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप निर्देशों के अनुसार बदलें, जिससे आपको किसी प्रकार के इन्फेक्शन का खतरा न हो.
वहीं, पुरुषों को भी रोजाना प्राइवेट पार्ट धोना चाहिए और फोरस्किन को धीरे से पीछे करके अंदर का हिस्सा साफ करने के बाद अच्छी तरह सुखाना चाहिए. दोनों को ही सूती अंडरवियर पहनना और रोजाना बदलना चाहिए, वर्कआउट या तैराकी के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक नहीं रहना चाहिए, उससे रेसेज व अन्य बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है और शारीरिक संबंध के बाद पेशाब करना भी जरूरी है. यह यूटीआई से बचाव में मददगार साबित होता है. अगर फिर भी कोई असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Lemon Storage Tips: नींबू फ्रिज में रखने के बाद भी सूख जाता है? ऐसे रखें लंबे समय तक फ्रेश</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Lemons Fresh And Juicy: नींबू ऐसी चीज है जो लगभग हर घर की रसोई में मिल जाती है. सलाद में डालना हो, शिकंजी बनानी हो, चाय का स्वाद बढ़ाना हो या किसी सब्जी और डिश में खट्टापन लाना हो, नींबू का इस्तेमाल कई तरह से होता है. लेकिन अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि नींबू फ्रिज में रखने के बाद भी कुछ दिनों में सूखने लगता है. उसका छिलका सिकुड़ जाता है, नींबू सख्त महसूस होने लगता है और काटने पर पहले जैसी मात्रा में रस भी नहीं निकलता. ऐसे में सवाल है कि नींबू को लंबे समय तक फ्रेश और रसीला कैसे रखा जाए?
नींबू को लंबे समय तक सही रखने की शुरुआत खरीदते समय ही हो जाती है. बाजार से ऐसे नींबू चुनें जो चमकीले पीले रंग के हों, छूने पर सख्त महसूस हों और जिनका छिलका ज्यादा सिकुड़ा हुआ न हो. बहुत नरम, दबे हुए या झुर्रियों वाले नींबू जल्दी सूख सकते हैं. ताजा और सही नींबू खरीदने के बाद उन्हें सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है.
फ्रिज में रखने का सही तरीका
पके हुए नींबू को लंबे समय तक फ्रेश रखने के लिए फ्रिज अच्छा विकल्प हो सकता है. लेकिन सिर्फ नींबू को फ्रिज में रख देने से ही हर बार फायदा नहीं मिलता. उन्हें फ्रिज के वेजिटेबल या क्रिस्पर ड्रॉअर में रखा जा सकता है. यह हिस्सा फलों और सब्जियों को कुछ समय तक बेहतर स्थिति में रखने के लिए बनाया जाता है. नींबू को क्रिस्पर ड्रॉअर में अलग-अलग रख सकते हैं. अगर आपके फ्रिज में नमी और हवा को कंट्रोल करने की सुविधा है, तो नींबू के लिए कम नमी वाला वातावरण बेहतर हो सकता है. सही स्थिति में रखे गए नींबू कई हफ्तों तक फ्रेश रह सकते हैं.

हवा लगने दें, लेकिन नमी से बचाएं
नींबू को स्टोर करते समय लोग अक्सर उन्हें प्लास्टिक बैग में डालकर कसकर बंद कर देते हैं. लेकिन ऐसा करने से अंदर नमी जमा हो सकती है, जिससे नींबू जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ सकता है. इसके बजाय पेपर बैग या दोबारा इस्तेमाल होने वाले जालीदार बैग का उपयोग किया जा सकता है.

ऐसे बैग में हवा का सर्कुलेशन बना रहता है. इससे नींबू के आसपास जरूरत से ज्यादा नमी जमा नहीं होती. हालांकि, नींबू को बहुत खुले और सूखे स्थान पर भी लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ज्यादा हवा लगने से वह धीरे-धीरे अपना पानी खो सकता है और सूखने लगता है.
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पानी में रखकर स्टोर करने का तरीका
कुछ लोग पूरे नींबू को पानी से भरे जार में रखकर फ्रिज में स्टोर करते हैं. इस तरीके में नींबू पानी के अंदर रहते हैं, जिससे उनका छिलका लंबे समय तक सूखने से बच सकता है. हालांकि, पानी को साफ रखना जरूरी है. नींबू की बाहरी सतह पर मौजूद गंदगी या बैक्टीरिया पानी में जा सकते हैं. अगर आप यह तरीका अपनाते हैं, तो नींबू को रखने से पहले अच्छी तरह साफ कर लें और पानी व जार की सफाई का भी ध्यान रखें. इस तरीके से नींबू को कुछ समय तक फ्रेश रखने में मदद मिल सकती है.
दूसरे फलों से दूर रखें नींबू
नींबू को फ्रिज में कहां रखा जा रहा है, यह भी काफी मायने रखता है. केले, सेब, टमाटर, खरबूजे और एवोकाडो जैसे कुछ फल और सब्जियां एथिलीन गैस छोड़ते हैं. यह गैस आसपास रखे फलों और सब्जियों के पकने और खराब होने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है. नींबू भी इस गैस के असर के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं. इसलिए उन्हें ऐसे फलों और सब्जियों के बिल्कुल साथ रखने से बचें. अलग जगह रखने से नींबू को ज्यादा समय तक बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है.
कटे हुए नींबू को ऐसे रखें
पूरा नींबू स्टोर करना आसान है, लेकिन आधा या कटा हुआ नींबू जल्दी सूख सकता है. अगर किसी रेसिपी में आधा नींबू इस्तेमाल करने के बाद बाकी बच गया है, तो कटे हुए हिस्से को खुला छोड़ने की गलती न करें. कटे हुए हिस्से को प्लास्टिक रैप से अच्छी तरह कवर कर दें और फिर एयरटाइट कंटेनर में रखकर फ्रिज में रखें. इससे नींबू की खुली सतह सीधे हवा के संपर्क में नहीं आएगी और वह जल्दी सूखने से बच सकता है. कटे हुए नींबू को कई दिनों तक रखने के बजाय जल्द इस्तेमाल करना बेहतर रहता है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>How To Fix Mushy Rice: चावल में पड़ गया ज्यादा पानी, एक ब्रेड से खिले&amp;खिले हो जाएंगे राइस</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Soggy Rice Using Bread: चावल पकाते समय कई बार छोटी-सी गलती पूरा स्वाद बिगाड़ देती है. कभी पानी थोड़ा ज्यादा पड़ जाता है तो कभी चावल जरूरत से ज्यादा देर तक पक जाते हैं. नतीजा यह होता है कि दाने अलग-अलग और खिले-खिले रहने के बजाय आपस में चिपकने लगते हैं और चावल गीले या गूदे जैसे हो जाते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. किचन में रखी एक साधारण ब्रेड की स्लाइस इस समस्या को काफी हद तक ठीक करने में मदद कर सकती है.
दरअसल, जब चावल में पानी ज्यादा हो जाता है या उन्हें जरूरत से अधिक समय तक पकाया जाता है, तो दाने ज्यादा नमी सोख लेते हैं. इससे उनका आकार और बनावट बिगड़ने लगती है. ज्यादा पकने पर चावल के दाने नरम होकर टूटने और चिपकने लगते हैं. हालांकि, अगर चावल पूरी तरह से गले नहीं हैं और दाने अभी भी कुछ हद तक अपनी शेप में हैं, तो ब्रेड वाला तरीका काम आ सकता है.
गीले चावल को कैसे कर सकते हैं ठीक?
ज्यादा गीले चावल को ठीक करने के लिए सबसे पहले पतीले में बचा हुआ अतिरिक्त पानी निकाल दें. अगर चावल में पानी अलग से दिखाई दे रहा है, तो उसे सावधानी से छानकर निकालना जरूरी है. इसके बाद चावल के ऊपर एक मोटी और थोड़ी सूखी ब्रेड की स्लाइस रख दें. ब्रेड जितनी मोटी और सूखी होगी, वह उतनी ही अच्छी तरह अतिरिक्त नमी सोख सकती है.

कैसे काम करती है यह ट्रिक?
अब पतीले को ढक्कन से ढक दें और गैस को बहुत धीमी आंच पर रखें. कुछ मिनट तक ऐसे ही रहने दें, ताकि ब्रेड चावल में मौजूद अतिरिक्त नमी को सोख सके. ब्रेड की सूखी बनावट स्पंज की तरह काम करती है और जरूरत से ज्यादा पानी को अपने अंदर खींच लेती है. इससे चावल की नमी कुछ कम हो सकती है और दाने पहले के मुकाबले ज्यादा अलग-अलग नजर आ सकते हैं.
ज्यादा गीले चावल के लिए क्या है उपाय?
अगर आपने ज्यादा मात्रा में चावल बनाए हैं और उनमें पानी भी काफी ज्यादा है, तो एक ब्रेड की स्लाइस पर्याप्त नहीं हो सकती. ऐसे में दो या तीन सूखी ब्रेड स्लाइस का इस्तेमाल किया जा सकता है. स्लाइस को चावल के ऊपर अलग-अलग हिस्सों में रखें और ढक्कन बंद कर दें. कुछ मिनट बाद ब्रेड को निकाल दें. ध्यान रखें कि ब्रेड को बहुत लंबे समय तक पतीले में न छोड़ें, क्योंकि ज्यादा नमी सोखने के बाद वह खुद भी गीली और नरम हो जाएगी.

यह ट्रिक तभी ज्यादा असरदार होती है, जब चावल केवल जरूरत से ज्यादा गीले हों. अगर चावल इतने ज्यादा पक चुके हैं कि उनके दाने पूरी तरह टूटकर खिचड़ी या दलिया जैसी बनावट में बदल गए हैं, तो ब्रेड उन्हें दोबारा खिले-खिले चावल में नहीं बदल सकती. ब्रेड केवल अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करती है, टूटे हुए दानों को फिर से पहले जैसा नहीं बना सकती.
कुकर के लिए भी कारगर उपाय
अगर आप राइस कुकर में चावल बनाते हैं और गलती से पानी ज्यादा डाल दिया है, तो यह तरीका वहां भी आजमाया जा सकता है. पहले देखें कि चावल पूरी तरह पक चुके हैं या नहीं. अगर अतिरिक्त नमी बची हुई है और दाने सही स्थिति में हैं, तो ऊपर सूखी ब्रेड की स्लाइस रखकर कुछ देर के लिए ढक्कन बंद किया जा सकता है. ब्रेड अतिरिक्त नमी सोखने में मदद कर सकती है.
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वैसे, चावल ज्यादा गीले होने की सबसे आम वजह जरूरत से ज्यादा पानी डालना और उन्हें लंबे समय तक पकाना है. हर तरह के चावल के लिए पानी की मात्रा अलग हो सकती है, इसलिए पैकेट पर दिए गए निर्देशों या जिस रेसिपी को फॉलो कर रहे हैं, उसके अनुसार पानी नापकर डालना बेहतर रहता है. कई बार बिना मापे बहुत ज्यादा पानी डालने से भी चावल जरूरत से ज्यादा पक जाते हैं और दाने अपनी बनावट खोने लगते हैं.
इस बात का जरूर रखें ध्यान
चावल पकाते समय बार-बार ढक्कन खोलना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे अंदर बनी भाप बाहर निकल सकती है और पकने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. सही समय पर गैस बंद करना और चावल को जरूरत से ज्यादा देर तक आंच पर न रखना भी जरूरी है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>How To Fix Roof Leakage: छत की लीकेज और सीलन से हैं परेशान? ऐसे करें दरारों की पक्की मरम्मत</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Roof Water Leakage In Rainy Season: बारिश के मौसम में पुरानी छत से पानी टपकना एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है. शुरुआत अक्सर छत पर किसी बड़े छेद या टूट-फूट से नहीं होती. कई बार तेज बारिश के बाद छत पर पानी जमा रह जाता है, दीवार या सीलिंग पर हल्का गीला निशान दिखाई देता है या पैरापेट के पास बारीक दरारें नजर आने लगती हैं. इन्हें नजरअंदाज करने पर धीरे-धीरे पानी अंदर तक पहुंच सकता है. इससे सीलन बढ़ने, पेंट उखड़ने और कंक्रीट को नुकसान पहुंचने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
पुरानी छत को देखकर कई लोग सीधे पूरी छत दोबारा बनवाने के बारे में सोचने लगते हैं, जबकि हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं होता. अगर समय रहते पानी आने की असली जगह पहचान ली जाए और सही तरीके से दरारों व कमजोर हिस्सों की मरम्मत की जाए, तो कई मामलों में समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है. पुरानी छत पर धूप, बारिश और तापमान में बदलाव का असर सालों तक पड़ता रहता है. कंक्रीट बार-बार फैलता और सिकुड़ता है, जिससे बारीक दरारें और कमजोर जोड़ बन सकते हैं. पुरानी वॉटरप्रूफिंग परत भी समय के साथ अपनी पकड़ खो सकती है.
सबसे पहले पानी आने की सही जगह पहचानें
छत से पानी टपकने पर सिर्फ कमरे की सीलिंग पर बने गीले निशान को देखकर मरम्मत शुरू नहीं करनी चाहिए. कई बार पानी छत की एक जगह से अंदर जाता है और कंक्रीट के भीतर से रास्ता बनाते हुए किसी दूसरी जगह दिखाई देता है. इसलिए जहां सीलिंग से पानी टपक रहा है, उसके ठीक ऊपर ही रिसाव हो, यह जरूरी नहीं है. केवल अंदर दिख रहे गीले हिस्से को ठीक करने से समस्या कुछ समय बाद फिर लौट सकती है.

रिसाव की जांच करते समय छत पर बनी दरारों, पैरापेट की दीवारों के किनारों, एक्सपेंशन जॉइंट और पानी निकलने वाले ड्रेन आउटलेट को ध्यान से देखें. बारिश के बाद किन जगहों पर पानी लंबे समय तक जमा रहता है, यह भी जांचना जरूरी है. अगर रिसाव की जगह आसानी से समझ न आए, तो अलग-अलग हिस्सों पर सीमित मात्रा में पानी डालकर जांच की जा सकती है. एक साथ पूरी छत को भिगोने के बजाय छोटे हिस्सों की जांच करने से समस्या वाली जगह पहचानना आसान हो सकता है.
बारीक दरारों को हल्के में न लें
पुरानी छत पर दिखने वाली हेयरलाइन क्रैक यानी बेहद पतली दरारें अक्सर मामूली लगती हैं. लेकिन समय के साथ इन्हीं दरारों से नमी वॉटरप्रूफिंग परत के नीचे पहुंच सकती है. ऐसी दरारों की पहले अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए और उनमें जमा धूल व ढीले कण हटाने चाहिए. इसके बाद छत के लिए उपयुक्त क्रैक फिलर या सीलेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर इसके ऊपर अनुकूल वॉटरप्रूफ कोटिंग की परत लगाई जाती है. छोटी दरारों की समय रहते मरम्मत करना आगे होने वाले बड़े नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है.
हर दरार का इलाज एक जैसा नहीं होता. चौड़ी और गहरी दरारें सामान्य सतही दरारों से अलग हो सकती हैं. अगर दरार बढ़ रही है या संरचना में लगातार हलचल की वजह से बन रही है, तो केवल ऊपर से फिलर लगाना पर्याप्त नहीं हो सकता. ऐसे मामलों में सही कारण की जांच और जरूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहता है. गंभीर बनावट दरारों के लिए अलग तरह की मरम्मत की जरूरत हो सकती है.

पैरापेट और ड्रेन के पास ज्यादा ध्यान दें
पुरानी छतों में पैरापेट की दीवार और छत के जोड़ वाले हिस्से अक्सर रिसाव का कारण बनते हैं. यहां अलग-अलग सतहें मिलती हैं और मौसम के साथ होने वाली हलचल का असर भी पड़ता है. इसी तरह ड्रेन आउटलेट के आसपास लगातार पानी का बहाव रहता है. अगर इन जगहों की पुरानी सीलिंग खराब हो गई है या दरारें बन गई हैं, तो पानी आसानी से अंदर जा सकता है.
पुरानी वॉटरप्रूफिंग के ऊपर नई परत लगाने से पहले जांच जरूरी
अगर छत पर पहले से वॉटरप्रूफिंग या कोई पुरानी कोटिंग लगी हुई है, तो उसके ऊपर सीधे नई परत लगाना हमेशा सही तरीका नहीं है. पहले यह देखना जरूरी है कि पुरानी परत सतह से मजबूती से चिपकी हुई है या नहीं. अगर उसमें जगह-जगह से परत उखड़ रही है, फफोले जैसे हिस्से बन गए हैं, नीचे नमी फंसी हुई है या बड़े हिस्से में दरारें हैं, तो उसके ऊपर नई कोटिंग लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं मिलेगा.
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नई परत पुराने खराब हिस्से के साथ ही दोबारा उखड़ सकती है. वहीं, अगर पुरानी कोटिंग अच्छी तरह चिपकी हुई है और नुकसान केवल कुछ जगहों तक सीमित है, तो सतह की अच्छी सफाई और जरूरी मरम्मत के बाद अनुकूल नई कोटिंग लगाना संभव हो सकता है. सामग्री की आपसी अनुकूलता और निर्माता के निर्देशों को ध्यान में रखना जरूरी है.
मरम्मत के बाद तुरंत छत का इस्तेमाल न करें
सीलेंट या वॉटरप्रूफिंग कोटिंग लगाने के बाद उसका पूरी तरह सूखना और सेट होना जरूरी है. केवल सतह का छूने पर सूखा महसूस होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह पूरी तरह तैयार हो चुकी है. अलग-अलग उत्पादों को पूरी तरह सेट होने में अलग समय लग सकता है.
कब सिर्फ एक हिस्से की मरम्मत काफी है और कब पूरी छत पर काम जरूरी?
अगर रिसाव केवल एक या दो जगहों पर है, बाकी वॉटरप्रूफिंग सही स्थिति में है और दरारें सीमित हैं, तो स्थानीय स्तर पर मरम्मत काफी हो सकती है. लेकिन हर बारिश में छत की कई जगहों से पानी आने लगे, पुरानी कोटिंग जगह-जगह उखड़ रही हो या मरम्मत बार-बार करनी पड़ रही हो, तो पूरी छत की वॉटरप्रूफिंग की जरूरत पड़ सकती है. शुरुआत में इसका खर्च ज्यादा लग सकता है, लेकिन हर मानसून में अलग-अलग जगह आपातकालीन मरम्मत कराने से बेहतर साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>How To Soften Chickpeas: भिगोने के बाद भी नहीं गलते छोले? इस एक तरीके से बन जाएगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Soften Hard Chickpeas Quickly: छोले बनाने से पहले उन्हें रातभर पानी में भिगोना जरूरी माना जाता है. आमतौर पर 8 से 12 घंटे तक भिगोने के बाद छोले आसानी से पक जाते हैं, लेकिन कई बार घंटों पानी में रखने के बाद भी कुकर में डालने पर वे ठीक से नहीं गलते. सीटी पर सीटी लगती रहती है, फिर भी छोले अंदर से सख्त बने रहते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो इसके पीछे छोले की उम्र, पानी की क्वालिटी और पकाने का तरीका जैसी कई वजहें हो सकती हैं. सबसे पहले जानिए कि छोले गलते क्यों नहीं हैं. छोले के अंदर मौजूद स्टार्च तक पानी पहुंचने और उनकी बाहरी परत को नरम होने में समय लगता है. अगर इस प्रक्रिया में रुकावट आती है तो छोले लंबे समय तक पकाने के बाद भी सख्त रह सकते हैं.
पुराने छोले हो सकते हैं वजह
सूखे छोले लंबे समय तक खराब नहीं होते, लेकिन बहुत पुराने होने पर उन्हें गलाना मुश्किल हो सकता है. लंबे समय तक रखे रहने पर छोले में मौजूद नमी कम होती जाती है और उनमें बदलाव आने लगता है. ऐसे छोले कई घंटों तक भिगोने और पकाने के बाद भी अंदर से सख्त रह सकते हैं. अगर छोले को काफी देर तक पकाने के बाद भी उनका बीच वाला हिस्सा कच्चा या सख्त लग रहा है, तो हो सकता है कि छोले काफी पुराने हों. इसलिए बहुत लंबे समय से रखे हुए छोले इस्तेमाल करने के बजाय ताजे छोले खरीदना बेहतर रहता है.

कहीं पानी तो वजह नहीं?
कई बार समस्या छोले में नहीं बल्कि पानी में होती है. जिस पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स की मात्रा ज्यादा होती है, उसे हार्ड वॉटर कहा जाता है. ऐसा पानी भी छोले को नरम होने में परेशानी पैदा कर सकता है. अगर आपके घर के पानी में मिनरल्स की मात्रा ज्यादा है और छोले बार-बार गलने में समय लेते हैं तो उन्हें भिगोने और पकाने के लिए फिल्टर्ड पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे फर्क देखने को मिल सकता है.
टमाटर और खट्टी चीजें कब डालें?
छोले बनाते समय एक गलती कई लोग करते हैं. छोले पूरी तरह गलने से पहले ही उनमें टमाटर, नींबू या दूसरी खट्टी चीजें डाल देते हैं. इससे छोले के नरम होने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और वे सख्त रह सकते हैं. इसलिए पहले छोले को अच्छी तरह गलने दें. जब वे आपकी पसंद के अनुसार नरम हो जाएं, उसके बाद ही टमाटर, नींबू या दूसरी खट्टी सामग्री डालें. इससे छोले गलाने में घंटों इंतजार करने की परेशानी से बचा जा सकता है.

नहीं गल रहे छोले तो अपनाएं ये एक तरीका
अगर छोले रातभर भिगोने और काफी देर तक पकाने के बाद भी नहीं गल रहे हैं तो बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है. बेकिंग सोडा पानी की प्रकृति को बदलकर छोले की बाहरी परत को जल्दी नरम होने में मदद करता है. यही कारण है कि सख्त छोले गलाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए छोले भिगोते समय पानी में करीब आधा चम्मच बेकिंग सोडा डाला जा सकता है. अगर छोले पहले से पक रहे हैं और फिर भी नरम नहीं हो रहे हैं तो पकाते समय पानी में एक चौथाई से आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाया जा सकता है. लेकिन बेकिंग सोडा की मात्रा ज्यादा नहीं होनी चाहिए. जरूरत से ज्यादा डालने पर छोले का स्वाद बिगड़ सकता है और वे जरूरत से ज्यादा गलकर टूट भी सकते हैं.
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रातभर भिगोना क्यों जरूरी है?
छोले को 8 से 12 घंटे तक पानी में भिगोने से पानी धीरे-धीरे उनके अंदर तक पहुंचता है. इससे पकाने के दौरान छोले एक समान तरीके से गलने में मदद मिलती है. अगर छोले बाहर से नरम लेकिन अंदर से सख्त रह जाते हैं तो हो सकता है कि उन्हें पर्याप्त समय तक नहीं भिगोया गया हो. अगर रात में छोले भिगोना भूल गए हैं तो एक दूसरा तरीका भी अपनाया जा सकता है. सूखे छोले को पानी में डालकर लगभग 2 मिनट तक उबालें. इसके बाद गैस बंद कर दें और बर्तन को ढककर करीब एक घंटे के लिए छोड़ दें. फिर पानी निकालकर छोले को धो लें और अपनी जरूरत के अनुसार पकाएं.
प्रेशर कुकर भी कर सकता है काम आसान
भिगोने के बाद भी अगर छोले जल्दी नहीं गलते तो प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है. ज्यादा दबाव में भाप और गर्मी छोले के अंदर तक पहुंचती है, जिससे उन्हें नरम करने में मदद मिलती है. बिना भिगोए सूखे छोले को पकाने में ज्यादा समय लग सकता है, जबकि पहले से भिगोए हुए छोले कम समय में पक सकते हैं. छोले को गलाने के लिए सबसे जरूरी है कि वे बहुत पुराने न हों, उन्हें सही समय तक भिगोया जाए और खट्टी चीजें डालने से पहले अच्छी तरह पकाया जाए. इसके बाद भी छोले सख्त रह जाएं तो थोड़ी मात्रा में बेकिंग सोडा डालने का तरीका काम आ सकता है. बस इसकी मात्रा का ध्यान रखें, ताकि छोले का स्वाद और टेक्सचर खराब न हो.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Monsoon Trip In India: मानसून में जन्नत बन जाते हैं भारत के ये पांच शहर, आज करें ट्रिप प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Trip In India: भीषण गर्मी के बाद मानसून का मौसम हर किसी को राहत देता है और बारिश के साथ ही चारों तरफ हरियाली भी फैलने लगती है. यही वजह है कि मानसून को घूमने के लिए भी सबसे खास मौसम माना जाता है. अगर आप भी इस सीजन में परिवार या दोस्तों के साथ ट्रिप प्लान करने की सोच रहे हैं तो भारत के कुछ शहर ऐसे हैं जहां बारिश के बाद प्राकृतिक नजारे जन्नत जैसे खूबसूरत हो जाते हैं. आइए जानते हैं ऐसी ही पांच बेहतरीन जगहों के बारे में.
शिलांग पूर्व का स्कॉटलैंड
मेघालय की राजधानी शिलांग को यूं ही पूर्व का स्कॉटलैंड नहीं कहा जाता. बारिश के लैंडस्केप, घनी हरियाली और कई वॉटरफॉल इसे प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं बनाते. यहां उमियाम झील पर बोटिंग और एलिफेंट फॉल्स की सैर मानसून ट्रिप का सबसे यादगार हिस्सा बन सकती है, वहीं पास के चेरापूंजी के झरने और लिविंग रूट ब्रिज भी मानसून के दौरान बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं.
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कुर्ग कॉफी के बागानों की धरती
कर्नाटक का कुर्ग यानी कोडागु अपनी हरियाली, कॉफी के बागानों और पहाड़ी खूबसूरती के लिए मशहूर है. बारिश के मौसम में यहां का मौसम और भी ज्यादा मनमोहक हो जाता है, जब कॉफी के बागानों के बीच धुंध फैली रहती है और हर तरफ बारिश से भीगी हरियाली नजर आती है. यहां एबी फॉल्स और राजा सीट जैसे पर्यटन स्थल मानसून में घूमने लायक बेहतरीन जगहें हैं.
मुन्नार केरल का हिल स्टेशन
केरल का मशहूर हिल स्टेशन मुन्नार बारिश के मौसम में और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाता है. यहां के चाय के बागान, बादलों से ढकी पहाड़ियां और झरने मानसून में इसका लुक कई गुना बढ़ा देते हैं. अगर मौसम सही रहे, तो मुन्नार मानसून ट्रिप के लिए शानदार डेस्टिनेशन साबित हो सकता है.
लोनावला पश्चिमी घाटै का खूबसूरत हिल स्टेशन
पश्चिमी घाट में बसा लोनावला अपने दिल लुभा देने वाला नजारा, हरी भरी वादियों और कई जलप्रपातों के लिए जाना जाता है. मानसून का मौसम इस इलाके को और भी ज़्यादा खूबसूरत बना देता है, यही वजह है कि मुंबई और पुणे के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह मानसून वीकेंड ट्रिप का पसंदीदा ठिकाना बन जाता है.
मेघालय का बारिश लवर्स के लिए जन्नत&amp;nbsp;
जिन्हें बारिश में घूमना पसंद है, उनके लिए मेघालय किसी स्वर्ग से कम नहीं. चेरापूंजी के झरने, घने जंगल और मशहूर लिविंग रूट ब्रिज मानसून के दौरान अपनी असली खूबसूरती में नजर आते हैं. यह जगह दुनिया की सबसे जयादा बारिश वाले इलाकों में गिनी जाती है, इसलिए यहां का मानसून अनुभव बाकी जगहों से बिल्कुल अलग होता है.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sergio Gor Kashmir Visit: सर्जियो गोर ने कश्मीर की जिन पॉइंट्स की सैर की, वहां कैसे जा सकते हैं आप?</title>
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        <description><![CDATA[ US Ambassador Sergio Gor Srinagar Visit: अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर बुधवार 19 अगस्त को पहली बार श्रीनगर पहुंचे. अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. उनके इस बयान पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई, जबकि भारत में कई लोगों ने इसे जम्मू-कश्मीर पर नई दिल्ली के लंबे समय से चले आ रहे रुख के समर्थन के तौर पर देखा. यह दौरा इसलिए भी खास रहा क्योंकि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत का घाटी का यह पहला अलग दौरा बताया गया.
सर्जियो गोर ने श्रीनगर में दो खास पर्यटन स्थलों परी महल और डल झील की सैर की. अगर आप भी कश्मीर जाने का प्लान बना रहे हैं तो इन दोनों जगहों को अपनी ट्रिप में शामिल कर सकते हैं. एक तरफ परी महल इतिहास और खूबसूरत वास्तुकला के लिए जाना जाता है, वहीं डल झील श्रीनगर की सबसे बड़ी पहचान में शामिल है.
परी महल- पहाड़ी पर बसा ऐतिहासिक स्थल
सर्जियो गोर ने श्रीनगर के परी महल का दौरा किया. इसे &amp;lsquo;द एंजल्स अबोड&amp;rsquo; यानी फरिश्तों का ठिकाना भी कहा जाता है. परी महल जबरवान पर्वत श्रृंखला की चोटी पर बना सात सीढ़ीनुमा बागों वाला ऐतिहासिक स्थल है. यहां से श्रीनगर शहर और डल झील का नजारा देखा जा सकता है. इसकी वास्तुकला में मुगल काल के दौरान इस्लामी वास्तुकला और कला संरक्षण की झलक मिलती है.

परी महल का निर्माण मुगल राजकुमार दारा शिकोह ने 17वीं सदी के मध्य में कराया था. यह उनके रहने की जगह और पुस्तकालय के रूप में इस्तेमाल होता था. दारा शिकोह के बारे में बताया जाता है कि वह 1640, 1645 और 1654 में इस इलाके में रहे थे. बाद में इस जगह का इस्तेमाल ज्योतिष और खगोल विज्ञान की शिक्षा के लिए वेधशाला के तौर पर भी किया गया.
यह चश्मे शाही गार्डन से करीब पांच मिनट की ड्राइव पर है. परी महल को &amp;lsquo;हाउस ऑफ फेयरीज&amp;rsquo; भी कहा जाता है और इसे &amp;lsquo;कुंटिलोन&amp;rsquo; के नाम से भी जाना जाता है. श्रीनगर शहर के केंद्र से इसकी दूरी करीब 10 किलोमीटर है. यहां एक सुंदर लॉन और उसके बीच पानी का एक झरना भी है. 17वीं सदी के मध्य से पहले इस जगह पर बौद्ध मठ के अवशेष मौजूद थे. बाद में दारा शिकोह ने इसी स्थान पर इस खूबसूरत इमारत का निर्माण कराया.




परी महल कैसे पहुंचें?
हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए परी महल, श्रीनगर के शेख उल आलम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 24 किलोमीटर दूर है. श्रीनगर रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 22 किलोमीटर है. अगर आप लाल चौक से जा रहे हैं तो सड़क मार्ग से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करना होगा. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या लाल चौक से टैक्सी और कैब लेकर परी महल पहुंचा जा सकता है. लोकल वाहन से जाने से पहले किराया जरूर तय कर लें. खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि आप किस जगह से निकल रहे हैं और किस तरह का वाहन लेते हैं. यहां आप कम बजट में भी घूम सकते हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

Wonderful to experience the beauty of Srinagar with visits to Pari Mahal and the iconic Dal Lake! pic.twitter.com/y6nbjv6pBi
&amp;mdash; Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) August 19, 2026



डल झील: श्रीनगर की पहचान
&amp;nbsp;सर्जियो गोर डल झील पहुंचे. डल कश्मीरी भाषा में झील को कहा जाता है. यह श्रीनगर की एक शहरी झील है और कश्मीर के पर्यटन व मनोरंजन का अहम हिस्सा है. इसे &amp;lsquo;कश्मीर के ताज का गहना&amp;rsquo; और &amp;lsquo;श्रीनगर का गहना&amp;rsquo; भी कहा जाता है.डल झील का किनारा करीब 15.5 किलोमीटर लंबा है. इसके आसपास मुगल काल के बाग, पार्क, हाउसबोट और होटल हैं. झील के किनारे से शालीमार बाग और निशात बाग जैसे मुगल गार्डन के खूबसूरत नजारे देखे जा सकते हैं. रंग-बिरंगी शिकारा में झील की सैर करना यहां आने वाले पर्यटकों के लिए खास अनुभव माना जाता है.
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झील का क्षेत्रफल करीब 18 वर्ग किलोमीटर है और यह एक प्राकृतिक वेटलैंड का हिस्सा है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 21.1 वर्ग किलोमीटर है. इसमें तैरते हुए बगीचे भी हैं, जिन्हें कश्मीरी में &amp;lsquo;राद&amp;rsquo; कहा जाता है. जुलाई और अगस्त के दौरान इन बगीचों में कमल के फूल खिलते हैं.
डल झील कैसे पहुंचें और कितना खर्च होगा?
शेख उल आलम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से डल झील करीब 17 किलोमीटर दूर है. श्रीनगर रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी लगभग 14 किलोमीटर है. वहीं, लाल चौक से सड़क मार्ग से यह करीब 5 किलोमीटर दूर है. यहां टैक्सी, कैब या स्थानीय परिवहन से पहुंचा जा सकता है. डल झील पहुंचने के बाद शिकारा की सैर और हाउसबोट में ठहरने जैसे विकल्प मिलते हैं. इनका खर्च सीजन, समय के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. इसलिए शिकारा की सैर शुरू करने या हाउसबोट बुक करने से पहले किराया और समय की जानकारी जरूर ले लें.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Dal Foam: दाल बनाते वक्त क्या वाकई हटा देना चाहिए झाग? जानें सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Dal Foam: भारतीय थाली में दाल रोज का हिस्सा है, लेकिन इसे पकाते वक्त ऊपर आने वाला सफेद झाग अक्सर लोगों के मन में डर पैदा कर देता है. सोशल मीडिया पर इस झाग को यूरिक एसिड बढ़ाने, जोड़ों में दर्द और यहां तक कि धीमा जहर तक बताया जाता रहा है. हालांकि, असल में यह झाग सेहत के लिए कितना नुकसानदायक है और इसे हटाना वाकई जरूरी है या नहीं? आइए एक्सपर्ट्स की राय से इस पूरे मामले की सच्चाई जानते हैं.
झाग बनता क्यों है?
जब मसूर, मूंग, अरहर जैसी दालों को उबाला जाता है तो उसमें मौजूद प्रोटीन और घुलनशील फाइबर पानी में घुलने लगते हैं. यही प्रोटीन, स्टार्च और सैपोनिन नाम का तत्व मिलकर उबलते पानी के ऊपर सफेद या हल्के रंग का झाग बना देते हैं, जो पूरी तरह एक नैचुरल प्रोसेस है.
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क्या झाग सच में हानिकारक है?
फूड साइंटिस्ट के मुताबिक, दाल के झाग में सैपोनिन के अलावा प्रोटीन और स्टार्च का भी योगदान होता है, लेकिन इससे शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की बात में कोई दम नहीं है. यानी सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा यह डर वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं ठहरता. ऑन्कोलॉजिस्ट डाक्टर ने भी इस भ्रम को दूर करते हुए बताया कि दाल का सफेद झाग हटाना पूरी तरह वैकल्पिक है, जरूरी नहीं. उनके मुताबिक बेहतर पाचन के लिए दाल को पकाने से पहले अच्छी तरह धोना और कुछ घंटों तक भिगोना फायदेमंद रहता है, इससे सैपोनिन की मात्रा अपने आप कम हो जाती है.
कुछ स्थितियों में झाग हटाना बेहतर
हालांकि, झाग हानिकारक नहीं है, फिर भी कुछ परिस्थितियों में इसे हटाना अच्छा माना जाता है. जैसे अगर पानी साफ न हो, दाल अच्छी तरह धोई न गई हो या दाल सस्ते और असंगठित जगह से खरीदी गई हो, जिसमें गंदगी या कीटनाशकों के अंश होने की अंदेशा हो. ऐसे मामलों में झाग हटाने से दाल थोड़ी साफसुथरी जरूर लगती है.
स्वाद और लुक के लिए भी हटाते हैं लोग झाग
झाग हटाने की सबसे आम वजह अक्सर सेहत नहीं, बल्कि दाल का लुक और टेक्सचर होती है. झाग रहने पर दाल का पानी थोड़ा मटमैला दिख सकता है, इसलिए जिन्हें एकदम साफ, हल्की और स्मूद दाल पसंद है, वह उबाल आने के बाद ऊपर जमा झाग को चम्मच से निकाल सकते हैं. लेकिन रोज के खाने के लिए दाल बनाते वक्त अगर थोड़ा झाग रह भी जाए, तो इससे कोई परेशानी नहीं होती.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>How To Identify Real Cinnamon: कैसे करें असली दालचीनी की पहचान, बड़े काम की है ये ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Identify Real Ceylon Cinnamon: दालचीनी का इस्तेमाल लगभग हर भारतीय रसोई में होता है. चाय से लेकर बिरयानी, पुलाव, मिठाई और कई तरह की डिश में इसका स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है. बाजार में मिलने वाली हर दालचीनी एक जैसी नहीं होती. आमतौर पर दालचीनी के दो प्रकार ज्यादा चर्चा में रहते हैं, जिनमें एक है सीलोन दालचीनी, जिसे असली या ट्रू सिनेमन भी कहा जाता है. दूसरी है कैसिया दालचीनी, जो देखने में काफी हद तक मिलती-जुलती हो सकती है.
कई लोग कैसिया को नकली दालचीनी समझ लेते हैं, जबकि यह भी दालचीनी का ही एक प्रकार है. फर्क तब होता है, जब किसी दूसरे प्रकार की दालचीनी को सीलोन दालचीनी बताकर बेचा जाए. ऐसे में अगर आप असली यानी सीलोन दालचीनी खरीदना चाहते हैं तो कुछ आसान बातों पर ध्यान देकर इसकी पहचान कर सकते हैं.
रंग देखकर करें पहचान
दालचीनी खरीदते समय सबसे पहले उसके रंग पर ध्यान दें. सीलोन दालचीनी का रंग आमतौर पर हल्का लाल-भूरा होता है. वहीं कैसिया दालचीनी अपेक्षाकृत गहरे लाल-भूरे रंग की दिखाई दे सकती है. हालांकि, केवल रंग देखकर ही असली दालचीनी की पूरी तरह पहचान नहीं की जा सकती. अलग-अलग दालचीनी के रंग में प्राकृतिक रूप से भी अंतर हो सकता है. इसलिए रंग को सिर्फ पहचान का एक संकेत मानें और दूसरी चीजों को भी जरूर जांचें.
छाल की परतों को गौर से देखें
असली दालचीनी की पहचान करने का एक आसान तरीका उसकी छाल को देखना है. सीलोन दालचीनी की स्टिक कई पतली-पतली परतों से मिलकर बनी होती है. ये परतें एक-दूसरे के ऊपर लिपटी हुई दिखाई देती हैं, जिससे स्टिक का अंदरूनी हिस्सा काफी लेयर्ड नजर आता है.
वहीं कैसिया की छाल आमतौर पर ज्यादा मोटी और सख्त होती है. इसमें सीलोन दालचीनी की तरह बहुत सारी पतली परतें आसानी से दिखाई नहीं देतीं. यह फर्क साबुत दालचीनी में ज्यादा आसानी से समझ आता है. अगर दालचीनी पिसी हुई है तो उसकी पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता है.

स्टिक को तोड़कर भी देख सकते हैं
सीलोन दालचीनी की परतें पतली होती हैं, इसलिए यह अपेक्षाकृत नाजुक होती है. वहीं कैसिया की स्टिक मोटी और ज्यादा सख्त हो सकती है. आप साबुत दालचीनी को ध्यान से देखकर और हल्के से तोड़ने या मोड़ने की कोशिश करके इसके बारे में अंदाजा लगा सकते हैं. अगर दालचीनी की स्टिक कई पतली परतों में लिपटी हुई और हल्की दिखाई दे रही है तो यह सीलोन दालचीनी हो सकती है. हालांकि, सिर्फ इस तरीके पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए, क्योंकि नमी और प्रोसेसिंग के कारण भी स्टिक की बनावट में फर्क आ सकता है.

खुशबू से भी समझ सकते हैं फर्क
दालचीनी की खुशबू भी इसकी पहचान में मदद कर सकती है. सीलोन दालचीनी की खुशबू को आमतौर पर हल्की, मीठी और मुलायम बताया जाता है. इसके मुकाबले कैसिया की खुशबू ज्यादा तेज और तीखी महसूस हो सकती है. अगर आपके पास दोनों प्रकार की दालचीनी हैं तो उनकी खुशबू की तुलना करके फर्क समझना आसान हो सकता है. हालांकि, सिर्फ खुशबू के आधार पर दालचीनी के प्रकार की पूरी तरह पुष्टि नहीं की जा सकती.
स्वाद में भी होता है अंतर
स्वाद भी दालचीनी के अलग-अलग प्रकारों में फर्क बताने में मदद कर सकता है. सीलोन दालचीनी का स्वाद हल्का और थोड़ा मीठा माना जाता है. वहीं कैसिया का स्वाद ज्यादा तेज, मसालेदार और कसैला हो सकता है. लेकिन केवल स्वाद चखकर यह पक्के तौर पर नहीं बताया जा सकता कि दालचीनी असली सीलोन है या नहीं. अलग-अलग किस्मों की अपनी अलग विशेषताएं होती हैं और सिर्फ स्वाद के आधार पर हर तरह की मिलावट या गलत लेबलिंग पकड़ना संभव नहीं है.
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लेबल जरूर पढ़ें
अगर आप खासतौर पर सीलोन दालचीनी खरीदना चाहते हैं तो पैकेट का लेबल जरूर पढ़ें. असली या ट्रू सिनेमन के लिए Cinnamomum verum नाम देखा जा सकता है. इसे Ceylon Cinnamon के नाम से भी बेचा जाता है. कैसिया, इंडोनेशियन दालचीनी और वियतनामी दालचीनी भी बाजार में मिलती हैं. ये सभी व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल होने वाली दालचीनी की अलग-अलग किस्में हैं. इसलिए हर पैकेट पर सिर्फ दालचीनी लिखा होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि वह सीलोन दालचीनी ही हो.
पिसी हुई दालचीनी की पहचान है मुश्किल
अगर आप पिसी हुई दालचीनी खरीद रहे हैं तो सिर्फ देखकर असली सीलोन दालचीनी की पहचान करना काफी मुश्किल है. पीसने के बाद छाल की परतें और उसकी दूसरी खास पहचान खत्म हो जाती है. ऐसे में रंग और बनावट देखकर सही किस्म की पहचान करना आसान नहीं होता. इसलिए अगर आपको खासतौर पर सीलोन दालचीनी चाहिए तो साबुत स्टिक खरीदना ज्यादा आसान विकल्प हो सकता है. स्टिक में आप उसकी परतों, रंग और बनावट को देखकर बेहतर अंदाजा लगा सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 05:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Money Plant Facts: क्या मनी प्लांट घर में रखने से सच में आता है पैसा? जानें सच</title>
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        <description><![CDATA[ Money Plant Facts: मनी प्लांट को आप अक्सर कई घरों में आसानी से देख सकते हैं. इसकी बैल और पत्तियां घर को एक खूबसूरत लूक देती हैं. वहीं कम देखभाल में भी यह आसानी से बढ़ता है. मनी प्लांट को लेकर हमेशा यह सुनने में आता है कि इसे घर में रखने से धन की वर्षा होती है. इसी वजह से इसे मनी प्लांट यानि की धन का पौधा भी कहा जाता है. वास्तु शास्त्र और लोकमान्यताओं में इसे आर्थिक संपत्ति और स्मृद्धि का प्रतिक माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या घर में मनी प्लांट रखने से सच में धन वृद्धि होती है या नहीं.
मनी प्लांट होता है समृद्धि का प्रतीक
अपने नाम के अनुसार ही कई लोगों का यह मानना है कि मनी प्लांट मतलब पैसों का पौधा. लेकिन यह सिर्फ पौधे का नाम है, इसका कोई वैज्ञानिक कारण नहीं होता है. वहीं कुछ लोगों का मानना होता है कि इस पौधे की बैल जितनी बढ़ेगी घर में धन की वृद्धि भी उतनी ही होती है. इसी वजह से लोग इसे अपने घर, दुकान और ऑफिस में लगाना पसंद करते हैं. हालांकि, इसका कोई प्रमाण नहीं है. लेकिन घर में पौधा होना घर में सकारात्मकता जरूर बढ़ाता है क्योंकि इसकी हरी-भरी पत्तियां घर में शांत वातावरण बनाती है.
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मनी प्लांट से आएगी सकारात्मकता
मनी पलांट का घर में होना कुछ लोगों के लिए घर के वातावरण में सकारात्मकता का कारण हो सकता है. हरियाली घर में होने से मन शांत रहता है और आप अच्छा महसूस करते हैं. मनी प्लांट आपके घर को आकर्षक बनाता है. वहीं पैसे बढ़ाने के लिए मनी पलांट पर निर्भर रहना सही नहीं है. इसके लिए आप कम खर्च, बेहतर निवेश और बचत करने जैसे कदम उठा सकते हैं.
मनी प्लांट रखने के लिए सही जगह
वास्तु मान्यताओं में मनी प्लांट को घर के कुछ विशेष स्थानों पर रखने की सलाह दी जाती है. आमतौर पर इसे दक्षिण-पूर्व दिशा से जोड़कर देखा जाता है. कुछ लोग इसे लिविंग रूम या बालकनी में भी रखते हैं. हालांकि, पौधे की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता देना ज्यादा महत्वपूर्ण है. मनी प्लांट को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उसे पर्याप्त अप्रत्यक्ष रोशनी मिले और पानी का उचित निकास हो. बहुत तेज धूप पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि अत्यधिक पानी भी जड़ों को खराब कर सकता है.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Darjeeling Couple Tour: केवल इतने रुपयों में हो जाएगा दार्जिलिंग का कपल टूर, ऐसे लगाएं हिसाब</title>
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        <description><![CDATA[ Darjeeling Couple Tour: दार्जिलिंग भारत के पश्चिम बंगाल में स्थित काफी प्रसिद्ध हिल स्टेशनों में से एक है. पहाड़ों की खूबसूरती, ठंडी हवाएं और रोमांटिक माहौल कपल्स के लिए दार्जिलिंग को बेहद खास बनाता है. दार्जिलिंग कपल्स के लिए भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक हिल डेस्टिनेशन्स में से एक है. यहां के ठंडे वातावरण की वजह से यह कपल्स के बीच काफी लोकप्रिय है. यहां के पहाड़, चाय के बागन और सनसेट और सनराइज के शानदार नजारे आपकी ट्रिप को यादगार बना देते हैं. अगर आप दार्जिलिंग के लिए ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो सबसे पहले बजट बनाना बेहद जरूरी है.
आने-जाने का खर्च करें तय
बजट ट्रिप के लिए ट्रेन सबसे बेहतर विकल्प होती है. दार्जिलिंग का सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी &amp;nbsp;है. यहां पहुंचने के बाद दार्जिलिंग के लिए शेयर टैक्सी या बस का विकल्प लिया जा सकता है. दो लोगों के लिए ट्रेन का आने-जाने का किराया क्लास और बुकिंग के समय के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. कपल के लिए ट्रेन और स्थानीय ट्रांसफर का कुल खर्च लगभग 5,000 से 8,000 रूपए के आसपास हो सकता है. वहीं अगर फ्लाइट से यात्रा करते हैं तो बजट काफी बढ़ सकता है, इसलिए कम खर्च वाली यात्रा के लिए ट्रेन बेहतर विकल्प है.
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बजट में होटल का करें चुनाव
दार्जिलिंग में आपको सस्ते होटल और होमस्टे विकल्प आसानी से मिल जाते हैं. किसी लग्जरी होटल में ठहरने की बजाय किसी छोटे लेकिन साफ-सुथरे रूम का चुनाव करना बेहतर होगा. आपको ऐसे रूम आसानी से 1,500 से 2,500 रूपए प्रति दिन के बजट में मिल सकते हैं. इस हिसाब से 3 दिन के ट्रिप के लिए 4,500 रूपए का बजट बनाया जा सकता है.
स्थानीय कैफे और रेस्टोरेंट को दें प्राथमिकता
अगर आप दार्जिलिंग जा रहें हैं तो अपने शहर या जगह का खाना ढूंढने की बजाय वहां के स्थानीय कैफे और रेस्टोरेंट को ट्राएं करें. जिससे आपको लॉकल खाने के साथ वहां के स्वाद के बारे में भी पता चलेगा. वहीं स्थानीय कैफे के चुनाव से आप एक दिन में 800 से 1200 रूपए में खाना खा सकते हैं. दार्जिलिंग में आपको कई सस्ते और अच्छे रेस्टोरेंट्स आसानी से मिल सकते हैं. मोमो, थुकपा और स्थानीय स्नैक्स खाना आपके बजट के लिए फिट है.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Milk Mistakes: इन पांच गलतियों से फट जाता है दूध, ऐसे रखें ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ Milk Mistakes: दूध हमारी रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा होता है. चाय, कॉफी, मिठाई या फिर सीधे पीने के लिए ज्यादातर घरों में रोज दूध का इस्तेमाल होता है. लेकिन कई बार दूध गर्म करते समय वह अचानक फट जाता है. इससे न सिर्फ दूध खराब हो जाता है, बल्कि उसका इस्तेमाल करना भी मुश्किल हो जाता है. अक्सर लोग इसके लिए दूध की क्वालिटी को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि कई बार हमारी छोटी-छोटी गलतियां भी इसकी वजह बन जाती हैं. आइए जानते हैं दूध फटने की पांच आम गलतियां और उनसे बचने के आसान तरीको के बारे में.
बहुत तेज आंच पर दूध गर्म करना
दूध को तेज आंच पर गर्म करने से वह जल्दी उबलने लगता है जिससे उसकी बर्तन के तले में चिपकने की संभावना बढ़ जाती है. ज्यादा तापमान के कारण दूध के प्रोटीन में बदलाव आता है, जिससे दूध फटने या नीचे से जलने की समस्या पैदा हो सकती है. इसलिए दूध हमेशा मध्यम या धीमी आंच पर गर्म करें. बीच-बीच में चम्मच से चलाते रहें ताकि दूध बर्तन के तले में न लगे.
खट्टे बर्तन में दूध डालना
अगर जिस बर्तन में दूध गर्म किया जा रहा है, उसमें पहले से नींबू, टमाटर, दही या किसी दूसरी खट्टी चीज के अवशेष मौजूद हैं, तो दूध फट सकता है. थोड़ी मात्रा में बचा हुआ एसिड भी दूध के प्रोटीन को अलग कर सकता है. इसलिए दूध गर्म करने से पहले बर्तन को अच्छी तरह धोकर साफ और सूखा कर ही उसमें दूध लें.
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&amp;nbsp;गर्म दूध में तुरंत खट्टी चीज डालना
नींबू का रस, सिरका या कोई अन्य ऐसिडिक पदार्थ दूध को फाड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए अगर गर्म दूध में गलती से ऐसी चीज मिल जाए, तो उसके फटने की संभावना बढ़ जाती है. खासतौर पर चाय या किसी रेसिपी में सामग्री डालते समय मात्रा और क्रम का ध्यान रखना जरूरी बेहद जरूरी होता है. खट्टी सामग्री डालने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह रेसिपी में आवश्यक हो और उसका उपयोग कैसे किया जाता है.
दूध को लंबे समय तक बाहर रखना
कच्चे दूध को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर छोड़ने से उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. जिससे दूध की अम्लता बढ़ जाती है और बाद में गर्म करने पर वह फट जाता है। इसलिए दूध को इस्तेमाल के बाद जल्द से जल्द फ्रिज में रखना बेहतर होता है. गर्म मौसम में इसे बाहर रखने को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
बार-बार गर्म करना
दूध को बार-बार उबालने और फिर ठंडा करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. बार-बार तापमान बदलने पर दूध के स्वाद और बनावट में भी बदलाव आता है. कोशिश करें कि जितनी मात्रा की जरूरत हो, उतना ही दूध गर्म करें. बचा हुआ दूध हो तो उसे जल्दी ठंडा करके साफ, ढके हुए बर्तन में फ्रिज में रखें और जरूरत पड़ने पर दोबारा गर्म कर लें.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Facial Cleansing: कोरियन या हाइड्रा, कौन&amp;सा फेशियल करेगा आपकी स्किन पर काम?</title>
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        <description><![CDATA[ Facial Cleansing: फेशियल करवाने से त्वचा की सफाई &amp;nbsp;गहराई &amp;nbsp;से &amp;nbsp;होती है साथ ही खून का दौरा भी बढ़ जाता है जिससे स्किन काफी खिली खिली और निखरी हुई दिखाई पड़ती है साथ ही फेशियल करवाने तनाव भी कम होता है फैशल करवाने से &amp;nbsp;रोमछिद्रों में जमी गंदगी और तेल बाहर निकल जाते हैं और डेड स्किन भी हट जाती है जिससे चेहरे पर &amp;nbsp;निखार और चमक बनी रहती है और चेहरा तरोताजा और चमकदार दिखता है इससे एंटी-एजिंग झुर्रियां कम होती हैं और कसावट भी आती है वहीं आज कल ग्लोइंग, क्लीन व क्लेयर स्किन पाने के लिए कोरियन फेशियल और &amp;nbsp;हाइड्रा फेशियल काफी लोकप्रिय हैं अगर आप भी सोच रहीं हैं फेशियल करवाने का तो कौनसा फेशियल करेगा आपकी स्किन पर काम.&amp;nbsp;
कौन करवा सकता है कोरियन फेशियल?
&amp;nbsp;अगर आपकी स्किन &amp;nbsp;रूखी, तैलीय, सेंसीटिव &amp;nbsp;या बेजान है तो आप &amp;nbsp;करवा सकते कोरियन फेशियल हैं यह आपके चेहरे पर &amp;nbsp;ताजगी और चमक लाने के साथ ही स्किन को अंदर से निखारता है &amp;nbsp;हालांकि, चेहरे पर ज्यादा मुंहासे, घाव या संक्रमण होने पर इसे करवाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें इसमें सबसे पहले चेहरे की डबल क्लींजिंग की जाती है, फिर हल्की एक्सफोलिएशन के बाद टोनर, एसेंस और सीरम लगाया जाता है, इसके बाद शीट मास्क, मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन लगाकर प्रक्रिया पूरी की जाती है कोरियन फेशियल त्वचा को साफ करने और नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे चेहरा मुलायम और फ्रेश नजर आता है &amp;nbsp;इसमें इस्तेमाल होने वाले सीरम और मास्क त्वचा को हाइड्रेट करते हैं, जबकि हल्की मसाज से चेहरे मसल्स को &amp;nbsp;आराम मिलता है.&amp;nbsp;
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कैसे करता है हाइड्रा फेशियल काम&amp;nbsp;
हाइड्रा फेशियल रूखी, तैलीय, कॉम्बिनेशन और सेंसेटिव &amp;nbsp;त्वचा वाले लोग करवा सकते हैं यह ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स, खुले पोर्स, ज्यादा ऑइली &amp;nbsp;त्वचा और हल्के दाग-धब्बों की समस्या में मदद करता है &amp;nbsp;इसमें पहले मशीन से चेहरे की सफाई और डेड स्किन &amp;nbsp;हटाई जाती है फिरपील से &amp;nbsp;पोर्स की गंदगी को साफ किया जाता है इसके बाद वैक्यूम तकनीक से ब्लैकहेड्स और गंदगी निकाली जाती है और अंत में हाइलूरोनिक एसिड व अन्य पोषक तत्वों वाले सीरम से त्वचा को हाइड्रेट करते हैं &amp;nbsp; इस फेशियल के बाद त्वचा साफ, मुलायम और हाइड्रेटेड नजर है मृत त्वचा आत &amp;nbsp;और गंदगी हटने से चेहरा ज्यादा फ्रेश और चमकदार दिखाई देने लगता है &amp;nbsp;साथ ही पोर्स की सफाई से त्वचा का टेक्सचर बेहतर लग सकता है&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Gift Ideas to surprise your Boyfriend: बॉयफ्रेंड के गिफ्ट को लेकर हैं कन्फ्यूज? इन शानदार तोहफों से करें सरप्राइज</title>
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        <description><![CDATA[ Gift Ideas to surprise your Boyfriend: लड़कियां गिफ्ट करने के मामले में काफी आसानी से पसंद कर लेती हैं. उन्हें किस अवसर पर किसे क्या गिफ्ट करना है, लेकिन अगर वहीं बात आती है कि अपने बॉयफ्रेंड को वह ऐसा क्या गिफ्ट करें कि वह स्पेशियल होने के साथ ही उनके बॉयफ्रेंड को भी पसंद आए, तो वह बहुत कन्फ्यूज हो जाती हैं. वह सोचती हैं कि तोहफा केवल महंगा ही नहीं बल्कि पर्सनल और यादगार भी हो. आप बॉयफ्रेंड को गिफ्ट करने के लिए उनकी पसंद को ध्यान में रखकर कुछ प्लान कर सकती हैं. अगर आप अब भी कन्फ्यूज हैं तो इन शानदार तोहफों से करें उन्हें सरप्राइज.
ये हो सकते हैं शानदार गिफ्ट्स
अगर आप ऐसा गिफ्ट देना चाहती हैं जो उनके रोजाना काम में भी आए और आपके रिश्ते की याद भी दिलाए, तो पर्सनलाइज्ड वॉलेट और कीचेन का कॉम्बिनेशन गिफ्ट करना एक बहुत ही अच्छा ऑप्शन है. वॉलेट पर उनका नाम, आपकी फोटो, उनके माता-पिता की फोटो या कोई खास तारीख लिखवा सकती हैं और कीचेन पर आप दोनों के नाम के शुरुआती अक्षर या छोटा-सा मैसेज लिखवा सकती हैं. यह छोटा-सा पर्सनल टच गिफ्ट को काफी खास बना देता है.
वहीं अगर आप स्क्रैपबुक और सरप्राइज गिफ्ट बॉक्स गिफ्ट करती हैं तो यह गिफ्ट और भी ज्यादा इमोशनल और यादगार होगा. आप उन्हें हाथ से बनी स्क्रैपबुक के साथ एक छोटा सरप्राइज बॉक्स दे सकती हैं. स्क्रैपबुक में आपकी तस्वीरें, खास यादें और दिल की बातें लिखें, जैसे कि आपकी पहली मुलाकात, वहीं बॉक्स में उनकी पसंद की चॉकलेट, कोई छोटा गिफ्ट और हाथ से लिखा हुआ नोट भी रख सकती हैं.
अगर आपके बॉयफ्रेंड को अपनी पर्सनैलिटी और लुक का ध्यान रखना पसंद है, तो आप उनकी पसंद की खुशबू वाला परफ्यूम और ग्रूमिंग किट गिफ्ट कर सकते हैं. यह भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. उनकी पसंद और जरूरत के हिसाब से चीजें चुनें, ताकि गिफ्ट सिर्फ दिखने में अच्छा न हो बल्कि रोजाना इस्तेमाल में भी आ सके. यह गिफ्ट उनके प्रति आपकी केयर को भी दर्शाता है. वहीं जब-जब भी वह परफ्यूम का इस्तेमाल करेंगे तो यह उन्हें आपका अहसास दिलाएगा.
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गिफ्ट चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान
गिफ्ट चुनते समय सिर्फ उसकी कीमत पर ध्यान देने के बजाय बॉयफ्रेंड की पसंद और जरूरतों को ध्यान में रखकर गिफ्ट का चुनाव करें. उनकी हॉबी, पसंदीदा रंग, ब्रांड या रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा तोहफा उन्हें ज्यादा पसंद आ सकता है. अगर उन्हें क्रिकेट, गेमिंग, म्यूजिक, किताबें या फिटनेस पसंद है, तो उसी से जुड़ी कोई चीज चुनें. आप कम बजट में भी अच्छा गिफ्ट दे सकती हैं, जैसे पर्सनलाइज्ड कीचेन, फोटो फ्रेम या हाथ से लिखा छोटा-सा नोट गिफ्ट को और खास बना देगा. इसके अलावा गिफ्ट देने का तरीका भी थोड़ा खास रखें, जैसे डेट या डिनर के दौरान उन्हें सरप्राइज देना, ताकि तोहफा ही नहीं बल्कि पूरा पल उनके लिए यादगार बन जाए.
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        <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 12:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Suhagrat Milk: सुहागरात के लिए कैसे तैयार करें दूध का गिलास, क्या&amp;क्या चीजें मिलाएं?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Prepare Suhagrat Kesar Badam Milk: शादी के बाद सुहागरात पर दूध का गिलास ले जाने की परंपरा भारत में लंबे समय से चली आ रही है. फिल्मों और टीवी सीरियल्स में भी अक्सर दुल्हन को दूल्हे के कमरे में दूध का गिलास लेकर जाते हुए दिखाया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस गिलास में आखिर क्या मिलाया जाता है? आमतौर पर गर्म दूध में केसर और बादाम मिलाने की परंपरा रही है. कुछ जगहों पर स्वाद और पसंद के अनुसार अन्य चीजें भी डाली जाती हैं.
दरअसल, शादी के दिन होने वाली रस्में काफी लंबी और थकाने वाली होती हैं. ऐसे में दिनभर की भागदौड़ के बाद एक गर्म पेय शरीर को आराम देने वाला महसूस हो सकता है. दूध में बादाम और केसर मिलाकर तैयार किया गया ड्रिंक स्वाद के साथ-साथ न्यूट्रिशन भी देता है.&amp;nbsp;
सुहागरात के दूध में क्या मिलाएं?
अगर आप सुहागरात की परंपरा के लिए स्वादिष्ट केसर-बादाम दूध तैयार करना चाहते हैं, तो इसके लिए 2 गिलास फुल क्रीम या अपनी पसंद का दूध लें. इसमें 5 से 6 बादाम, 4 से 5 केसर के धागे और स्वादानुसार 1 से 2 छोटी चम्मच चीनी मिलाएं. खुशबू और स्वाद बढ़ाने के लिए एक चुटकी इलायची पाउडर भी डाल सकते हैं. चाहें तो इसमें 1 से 2 काजू और थोड़ा-सा पिस्ता भी मिलाया जा सकता है. सबसे पहले बादाम को तैयार कर लें. बादाम को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए उन्हें कुछ घंटों के लिए पानी में भिगो सकते हैं.
इसके बाद छिलका उतारकर बादाम को बारीक काट लें या हल्का दरदरा पीस लें. अगर समय कम है, तो बादाम को सीधे बारीक काटकर भी दूध में मिलाया जा सकता है. बादाम दूध में प्रोटीन और अन्य न्यूट्रिशन तत्व जोड़ते हैं. साथ ही इनसे दूध का स्वाद भी ज्यादा रिच हो जाता है. चाहें तो बादाम के साथ थोड़ी मात्रा में काजू और पिस्ता भी मिला सकते हैं.

केसर डालने का सही तरीका
केसर इस दूध को खास खुशबू और स्वाद देता है. इसके लिए 4 से 5 केसर के धागे लें. आप इन्हें थोड़ा-से गर्म दूध में कुछ मिनट के लिए भिगो सकते हैं. इससे केसर का रंग और खुशबू दूध में बेहतर तरीके से मिल सकती है. ध्यान रखें कि केसर की बहुत ज्यादा मात्रा डालने की जरूरत नहीं होती. कम मात्रा में भी इसका स्वाद और रंग दूध में आ जाता है.
अब इस तरह तैयार करें दूध
सबसे पहले एक पैन में दूध डालकर धीमी से मध्यम आंच पर गर्म करें. दूध को उबाल आने तक पकाएं. इसके बाद इसमें कटे या पिसे हुए बादाम डाल दें. अब दूध में पहले से भिगोया हुआ केसर डालें और अच्छी तरह चलाएं. इसके बाद स्वाद के अनुसार चीनी मिलाएं. चाहें तो चीनी की जगह थोड़ी मात्रा में अन्य स्वीटनर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, लेकिन पारंपरिक स्वाद के लिए चीनी का इस्तेमाल आम है. आखिर में एक चुटकी इलायची पाउडर डालें. इससे दूध की खुशबू और स्वाद और बेहतर हो जाएगा. दूध को 2 से 3 मिनट धीमी आंच पर पकने दें, ताकि सभी चीजों का स्वाद अच्छी तरह मिल जाए. इसके बाद गैस बंद कर दें और दूध को हल्का गुनगुना होने दें. बहुत गर्म दूध तुरंत पीने से बचें.

बादाम-केसर दूध क्यों है खास?
दूध, बादाम और केसर का मेल स्वाद और पोषण के लिहाज से पसंद किया जाता है. दूध में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जबकि बादाम में हेल्दी फैट, प्रोटीन और कई अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं. केसर में एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं और इसका इस्तेमाल कम मात्रा में स्वाद व खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है. शादी के बाद दूध पीने की परंपरा को कई जगह शुभ शुरुआत और रिश्ते में मिठास से भी जोड़कर देखा जाता है. हिंदू परंपराओं में दूध का इस्तेमाल कई शुभ अवसरों और धार्मिक रस्मों में भी होता है. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस परंपरा को निभाने का तरीका अलग हो सकता है.
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क्या और चीजें भी मिला सकते हैं?
अगर आप दूध का स्वाद बदलना चाहते हैं, तो इसमें बादाम और केसर के अलावा थोड़ी मात्रा में पिस्ता, काजू या इलायची भी डाल सकते हैं. कुछ लोग सौंफ का हल्का स्वाद भी पसंद करते हैं. हालांकि, बहुत सारी चीजें एक साथ मिलाने के बजाय स्वाद को संतुलित रखना बेहतर है. अगर किसी को नट्स से एलर्जी है या दूध से जुड़ी कोई परेशानी है, तो उस व्यक्ति की जरूरत और पसंद के अनुसार सामग्री चुनें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Rakhi Blouse designs: राखी पर ट्राई करें ये डिजाइनर ब्लाउज, सबसे अलग दिखेगा लुक</title>
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        <description><![CDATA[ Rakhi Blouse designs: राखी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे भाई-बहन के प्यार और रिश्ते के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. त्यौहार के मौके पर हर कोई खास और खूबसूरत दिखना चाहता है. खासकर राखी के त्यौहार पर महिलाएं. ऐसे में त्योहारों पर महिलाओं के साड़ी का विकल्प अच्छा होता है. अगर आप भी इस बार रक्षाबंधन पर साड़ी पहनने की सोच रही हैं तो ब्लाउज की डिजाइन भी आपके पूरे लुक को और भी शानदार बना सकता है. आइए जानते हैं ऐसे ट्रेंडी ब्लाउज डिजाइंस के बारे में, जो आपके लुक को और भी खास बना देंगे.
बैकलेस ब्लाउज से पाएं स्टाइलिश लुक
आप साड़ी के साथ राखी पर थोड़ा मॉडर्न लुक चाहती है तो आपके लिए बैकलेस ब्लाउज अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें आप अपने हिसाब से गले का आकार चुन सकती हैं. अपनी पसंद से डीपनेक या सिंपल बैक डिजाइन चुन सकती हैं. आप चाहें तो इस पर मनपसंद कढ़ाई वर्क भी करवा सकती हैं. हल्का बॉर्डर वाला बैकलेस ब्लाउज सिंपल साड़ी के साथ काफी अच्छा लगता है.
फुल स्लीव्स ब्लाउज भी करें ट्राई
राखी के मौके पर अगर आप ब्लाउज में ज्यादा मॉडर्न टच और बोल्ड डिजाइन नहीं रखना चाहती हैं तो फुल स्लीव्स ब्लाउज अच्छा विकल्प हो सकता है. नेट, जॉर्जेट या शिमर फैब्रिक की फुल स्लीव्स आपके ट्रेडिशनल लुक में स्टाइल का तड़का लगा सकती हैं. इसे सिल्क या बनारसी साड़ी के साथ स्टाइल करना और भी अच्छा रहेगा.
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डिजाइनर स्लीव्स से बढ़ाएं खूबसूरती
ब्लाउज की स्लीव्स में बदलाव करके भी आप अपने लुक को एकदम खास बना सकती हैं. ट्रेंडी पफ स्लीव्स, बेल स्लीव्स या हल्की फ्रिल वाली स्लीव्स एक बार फिर फैशन में हैं. अगर आपकी साड़ी सिंपल है तो ऐसी स्लीव्स वाला ब्लाउज आपके लुक को और भी आकर्षक बना देगा.
एम्ब्रॉयडरी वाला ब्लाउज देगा रॉयल लुक
राखी जैसे त्योहार पर अगर आप रॉयल और ट्रेडिशनल लुक चाहती हैं तो एम्ब्रॉयडरी या जरी वर्क वाला ब्लाउज पहन सकती हैं. गोल्डन या सिल्वर वर्क वाला ब्लाउज साड़ी की खूबसूरती को बढ़ा सकता है. खासकर प्लेन साड़ी के साथ ऐसा ब्लाउज पहनने पर पूरा लुक बेहद खूबसूरत और पार्टी वियर जैसा नजर आता है.
सही ब्लाउज से पूरा लुक होगा खास
राखी पर साड़ी के साथ ब्लाउज चुनते समय सिर्फ ट्रेंड ही नहीं, बल्कि अपने कंफर्ट और साड़ी के डिजाइन का भी ध्यान रखें. ऐसा ब्लाउज चुनें, जो साड़ी के रंग और पैटर्न के साथ अच्छी तरह मैच हो सके. सही डिजाइन और फिटिंग वाला ब्लाउज आपके पूरे ट्रेडिशनल लुक को स्टाइलिश बनाने में अहम होता है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Side Effects Of Drinking Tea: रोज सुबह चाय पीने के होते हैं भयंकर नुकसान, जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ Side Effects Of Drinking Tea: भारत में अगर सबसे ज्यादा बिक्री किसी ड्रिंक की होती है तो वह है चाय. दरअसल, भारत के अधिकांश लोग सुबह उठते ही सबसे पहले कुछ पीते हैं तो वह चाय है. लोगों का मानना है कि सुबह चाय पीने से शरीर में फुर्ती आती है और सुस्ती दूर होती है. हालांकि, डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट चाय पीना सेहत के लिए बेहद हानिकारक और खतरनाक साबित हो सकता है. अगर आप भी रोज सुबह खाली पेट चाय पीते हैं तो इसके भयंकर नुकसानों के बारे में जरूर जान लें, ताकि आप गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से बच सकें.&amp;nbsp;
एसिडिटी होना और पाचन तंत्र का कमजोर होना
सुबह उठते ही हमारे पेट में एसिड का स्तर पहले से ही बढ़ा हुआ होता है. ऐसे में जब हम खाली पेट चाय पी लेते हैं, तो चाय में मौजूद एसिड पेट के प्राकृतिक एसिड के साथ मिल जाता है. इससे पेट में अत्यधिक गैस, गंभीर एसिडिटी और सीने में जलन होने लगती है. लंबे समय तक ऐसा करने से पेट में अल्सर होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
खाली पेट चाय पीने का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है. क्योंकि चाय में पाए जाने वाले तत्व पेट की अंदरूनी सतह को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके कारण खाना पचाने वाले जरूरी पाचक रस का संतुलन बिगड़ जाता है. नतीजतन, व्यक्ति को कब्ज, पेट फूलना और अपच जैसी पेट की स्थायी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी
दरअसल, चाय में कैफीन की मात्रा होती है, जो शरीर में डाइयुरेटिक यानी मूत्रवर्धक के रूप में काम करता है. इसका मतलब यह है कि खाली पेट चाय पीने के बाद आपको बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है. रात भर सोने के कारण हमारा शरीर सुबह पहले से ही डिहाइड्रेटेड होता है, और ऐसे में खाली पेट चाय पीने से शरीर में पानी की भयंकर कमी हो जाती है.&amp;nbsp;
दइसके अलावा, चाय में टैनिन नाम का एक तत्व पाया जाता है. टैनिन हमारे भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों, विशेष रूप से आयरन और कैल्शियम को शरीर में अवशोषित होने से रोक देता है. जो लोग रोज सुबह खाली पेट चाय पीते हैं, उनके शरीर में धीरे-धीरे खून की कमी होने लगती है और हड्डियां कमजोर होने के कारण शरीर में हर वक्त थकान बनी रहती है.
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दांतो में सड़न और नींद न आना
सुबह हमारे मुंह के अंदर बैक्टीरिया का स्तर बढ़ जाता है. ऐसे में जब हम खाली पेट चीनी वाली चाय पीते हैं, तो चाय की मिठास और एसिड मुंह के बैक्टीरिया के साथ मिलकर दांतों के सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे दांतों में सड़न, कैविटी, पीलापन और सेंसिटिविटी की समस्या पैदा हो जाती है.&amp;nbsp;
साथ ही खाली पेट कैफीन का भारी सेवन हमारे नर्वस सिस्टम को अचानक बहुत तेजी से उत्तेजित कर देता है. सुबह-सुबह खाली पेट चाय पीने से कई लोगों को दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव महसूस होने लगता है. यह आदत आपके सोने और जागने के प्राकृतिक चक्र को भी बुरी तरह प्रभावित करती है.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>JP Nadda Angioplasty : जेपी नड्डा की हुई एंजियोप्लास्टी, जानें कब और क्यों पड़ती है जरूरत?</title>
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        <description><![CDATA[ JP Nadda Angioplasty : जेपी नड्डा की हुई एंजियोप्लास्टी, जानें कब और क्यों पड़ती है जरूरत? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Keep Rice Away From Moisture:  चावल में नहीं पड़ेंगे कीड़े, बस डिब्बे में डाल दें ये एक चीज</title>
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        <description><![CDATA[ Keep Rice Away From Moisture:&amp;nbsp; बरसात के मौसम में घर के आंगन की कीचड़ से हर कोई परेशान हो जाता है, उतना ही घर के अंदर नमी का प्रकोप छा जाता है जिससे किचन में रखे राशन के सामान में कीड़े लग जाते हैं. जिनमें चावल का नाम सबसे पहले आता है. दरअसल चावल का डिब्बा रोजाना खुलने में से एक होता है, जिसके कारण उसके अंदर नमी चली जाती है और कीड़ों को पनपने के लिए माहौल बना देती है.
इसके अलावा अगर डिब्बे का ढक्कन अच्छी तरह से बंद नहीं किया या फिर उसमें पुराने बचा हुआ चावल मिला दिया जाता है तो भी कीड़े और तेजी से पनपते हैं. इस बात का खास ध्यान इसलिए भी रखना चाहिए क्योंकि चावल एक ऐसा अनाज है जिसमें कीड़े लग जाने के बाद उसे पूरा फेंकना पड़ जाता है, जिससे पैसा और मेहनत दोनों बर्बाद हो जाती है. ऐसे में आपको जान कर खुशी होगी कि इस परेशानी से आप घर में ही बच सकते हैं बस जरूरी है तो सही जानकारी की. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.&amp;nbsp;
तेज पत्ता कैसे करता है बचाव
इस परेशानी से बचने के लिए आप तेज पत्ता का इस्तेमाल कर सकते हैं जो अधिकतर बार हर घर में मौजूद रहता है. आप केवल तेज पत्ते के उपयोग से चावल में कीड़े लगने से बचा सकते हैं. बता दें कि तेज पत्ते में एक तेज और तीखी खुशबू होती है, जो कीड़ों और छोटे कीटों को पसंद नहीं आती. इसी वजह से जब सूखे तेज पत्ते चावल के डिब्बे में डाले जाते हैं, तो उनकी गंध कीड़ों को दूर रखने में मदद करती है. साथ ही इस घरेलू उपाय को इस्तेमाल करने का तरीका भी बहुत आसान है इसमें आप चावल के डिब्बे में 4 से 5 सूखे तेज पत्ते डाल दें और डिब्बे को अच्छी तरह बंद कर दें. हर 2-3 महीने में पुराने तेज पत्तों को बदलकर नए डाल देना बेहतर रहता है, क्योंकि समय के साथ उनकी खुशबू कम हो जाती है.
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ध्यान रखने वाली अन्य बातें
तेज पत्ते के साथ-साथ कुछ और बातों का ध्यान रखा जाए तो चावल लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है. सबसे जरूरी है कि चावल को हमेशा सूखी और नमी रहित जगह पर रखा जाए, क्योंकि नमी कीड़ों के पनपने की मुख्य वजह होती है. डिब्बा एयरटाइट यानी पूरी तरह हवाबंद होना चाहिए ताकि बाहर से नमी और कीड़े अंदर न जा सकें. साथ ही, नया चावल लाने पर उसे पुराने बचे हुए चावल के साथ मिलाने से बचना चाहिए, क्योंकि अगर पुराने चावल में पहले से कीड़े हों तो वे नए चावल में भी फैल सकते हैं. इसके अलावा तेज पत्ते के अलावा लहसुन की कलियां या सूखी लाल मिर्च भी इसी तरह डिब्बे में डाली जा सकती हैं, ये भी अपनी तेज गंध से कीड़ों को दूर रखने में मदद करती हैं.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Menstrual Care While Traveling: हनीमून पर आ गए हैं पीरियड्स? इन तरीकों से यादगार बनाएं ट्रिप</title>
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Eating With Henna Hands: मेहंदी लगे हाथ से खाना खाना कितना खतरनाक? जानिए सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Eating With Henna Hands: अक्सर सावन के महीना आते ही ज्यादातर महिलाओं के दोनों हाथों में मेहंदी रच ही जाती है. ऐसे में कई बार लोगों के दिमाग में ये सवाल आता है कि जहां डॉक्टर खाना खाने से पहले हाथ धोने की सलाह देते हैं, वहीं अगर हाथों में मेहंदी रची हुई हो, तो क्या उस हाथ से खाने बनाने या खाने खाने से शरीर को कुछ नुकसान होता है या नहीं. ऐसे में आपको बता दें कि मेहंदी एक पौधे से बनती है जिसे हिना कहते हैं. असली और शुद्ध मेहंदी सेहत के लिए नुकसानदायक नहीं मानी जाती, क्योंकि यह प्राकृतिक चीजों से बनती है.
लेकिन आजकल बाजारों में मिलने वाली बहुत सारी मेहंदी में केमिकल मिलाए जाते हैं, ताकि रंग जल्दी और गहरा चढ़े. इसे &quot;ब्लैक मेहंदी&quot; कहा जाता है और इसमें एक केमिकल होता है जिसे PPD कहते हैं. यह केमिकल स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है और कुछ लोगों को इससे एलर्जी, जलन या खुजली भी हो सकती है. अगर यही केमिकल वाली मेहंदी हाथ में लगी हो और उसी हाथ से बार-बार खाना खाया जाए, तो पेट में हल्की गड़बड़ी या एलर्जी जैसी दिक्कत हो सकती है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपने कौन सी मेहंदी लगाई है शुद्ध या केमिकल वाली. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
क्या सच में मेहंदी लगे हाथ से खाना खाने से बीमारी होती है
आम तौर पर देखा जाए तो सिर्फ मेहंदी लगे हाथ से खाना खाने से कोई बड़ी या गंभीर बीमारी होने के सबूत नहीं मिलते, अगर मेहंदी शुद्ध और नेचुरल हो. लेकिन एक बात का ध्यान रखना जरूरी है - जब हम त्योहार या शादी में मेहंदी लगाते हैं, तो हाथ पूरी तरह ढके रहते हैं और उंगलियों तक ठीक से धोना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में हाथों पर मिट्टी, बैक्टीरिया या जर्म्स रह सकते हैं, जो खाना खाते समय पेट में चले जाते हैं. यही वजह है कि पेट दर्द, उल्टी या दस्त जैसी शिकायत हो सकती है. यह समस्या मेहंदी की वजह से नहीं, बल्कि हाथों की सफाई सही तरीके से न होने की वजह से होती है.
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बचाव के लिए क्या करें
सबसे अच्छा तरीका यही है कि जब भी मेहंदी लगवाएं, कोशिश करें कि नेचुरल और अच्छी क्वालिटी की मेहंदी ही लगवाएं, बाजार की सस्ती केमिकल वाली ब्लैक मेहंदी से बचें. मेहंदी लगाने के बाद हाथों को अच्छी तरह पानी और साबुन से साफ करें, खासकर उंगलियों के बीच का हिस्सा. अगर मेहंदी अभी गीली है या पूरी तरह सूखी नहीं है, तो उस समय खाना खाने से बचना चाहिए. वहीं अगर हाथ में जलन, खुजली या लाल निशान दिखें, तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. कुल मिलाकर, मेहंदी खुद खतरनाक नहीं होती, लेकिन उसमें मिलने वाले केमिकल और हाथों की सफाई का ध्यान न रखना दिक्कत की असली वजह बन सकता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Death During Running: रनिंग से पहले इन बातों का रखें ध्यान, वरना हो सकती है मौत</title>
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        <description><![CDATA[ Death During Running: अक्सर आपने ये बात सुनी होगी कि रनिंग करने से सेहत में सुधार होती है, लेकिन क्या होगा आपको पता चले कि रनिंग करने से आपकी जान भी जा सकती है, जी हां अगर आपके पास सही जानकारी नहीं है और आप पूरी जानकारी के बिना रनिंग करते हैं तो इससे आपकी जान भी जा सकती है. हाल ही में देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में एक कैडेट की मौत भी कुछ इसी प्रकार थी जिसकी खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है. बता दें कि हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले कैडेट निशांत धनखड़ 9 अगस्त को दौड़ लगाते समय अचानक बेहोश हो गए थे.
जिसके तुरंत बाद उन्हें अस्पताल में लेकर जाया गया लेकिन उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें फौरन दिल्ली रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज चल रहा था जिसके दौरान 15 अगस्त को उनकी मौत हो गई. बताया जा रहा है कि उनकी मौत का कारण गलत तरीके से रनिंग करना था, हालांकि इस बात की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है कि आखिर मौत की असली वजह क्या है.
इस घटना के बाद ये बात हर किसी को समझना चाहिए कि अपने शरीर को फिट रखने के लिए केवल रनिंग करना एक्सरसाइज करना ही काफी नहीं होता है बल्कि, सही तरीके से करना ज्यादा जरूरी होता है नहीं तो ये आपके लिए कब जानलेवा साबित हो जाएगा आपको अंदाजा भी नहीं है. ऐसे में जरूरी है कि आप रनिंग करने से पहले कुछ चीजों का ध्यान रखें जिससे आप अपने आप को मौत के कुएं में धकेलने से रोक सकते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
रनिंग से पहले इन बातों का रखें खास ध्यान
अक्सर ज्यादातर लोग सुबह उठने के बाद घर से निकलते ही दौड़ना शुरू कर देते हैं, जो कि सबसे ज्यादा गलत तरीका होता है. बता दें कि रनिंग करने से पहले सबसे पहले जरूरी है कि आप अपने शरीर को उसके लिए तैयार कर लें. इसमें सबसे पहले हल्की स्ट्रेचिंग और वॉर्मअप जरूर करें, ताकि मांसपेशियां और जोड़ दौड़ने के लिए तैयार हो जाएं. खाली पेट या बहुत भारी खाना खाकर दौड़ना नहीं चाहिए. शरीर में पानी की कमी न हो, इसका ध्यान रखें और दौड़ने से पहले पर्याप्त पानी पिएं. अगर मौसम बहुत गर्म या उमस भरा है, तो तेज धूप में दौड़ने से बचें, क्योंकि इससे शरीर का तापमान अचानक बढ़ सकता है और लू लगने का खतरा रहता है. वहीं जिन लोगों को दिल की बीमारी, सांस की तकलीफ या कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें दौड़ शुरू करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए.
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शरीर के संकेतों को न करें नजरअंदाज
दौड़ते समय अगर सिर घूमना, सांस फूलना, सीने में दर्द, बहुत ज्यादा थकान या चक्कर जैसा महसूस हो, तो तुरंत दौड़ना बंद कर देना चाहिए. कई बार लोग इन संकेतों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर बड़ी दिक्कत बन सकता है. दौड़ने के बाद अचानक रुकने की बजाय धीरे-धीरे स्पीड कम करनी चाहिए, ताकि दिल की धड़कन सामान्य हो सके. ट्रेनिंग या फिटनेस से जुड़ी संस्थाओं में भी यह जरूरी है कि हर कैडेट या स्टूडेंट की समय-समय पर मेडिकल जांच हो, ताकि किसी बीमारी का पता पहले ही चल सके.
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        <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 07:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>Monsoon Window Open Or Closed: पंखा चलाते समय खिड़की खोलें या बंद रखें, मानसून सीजन में क्या है सही तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Window Open Or Closed: मानसून के मौसम में एक सवाल हर घर में बार बार उठता है, पंखा चलाते वक्त खिड़की खोलकर रखें या बंद. ज्यादातर लोग बारिश के डर से खिड़कियां बंद रखना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं, लेकिन असल में यही आदत घर में नमी और सीलन बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह बन सकती है.
बंद खिड़कियां बढ़ाती हैं नमी
घर के अंदर की हवा जब लगातार बंद रहती है, तो नमी बाहर नहीं निकल पाती और धीरे धीरे दीवारों, अलमारी और सोफे के आसपास सीलन जमा होने लगती है. मानसून में भारत के कई हिस्सों में घर के अंदर नमी का स्तर 70 से 80 फीसदी तक पहुंच जाता है, जो फफूंद और बैक्टीरिया पनपने के लिए एकदम अनुकूल माहौल बना देता है.
मौसम साफ हो, तभी खोल दें खिड़की
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि जब भी बारिश थम जाए तो और मौसम साफ हो, तब कुछ घंटों के लिए खिड़की और दरवाजे जरूर खोलने चाहिए. इससे ताजी हवा अंदर आती है और नमी बाहर निकलती है, जो फफूंद बनने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करती है. सिर्फ पंखा चलाते रहने से घर के अंदर की सीली हवा वापस उसी में घूमती रहती है, जिससे असल समस्या हल नहीं होती.
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तेज बारिश के दौरान रखें बंद
हालांकि जब बारिश तेज हो या तूफान जैसी स्थिति बन रही हो, तब खिड़कियां खोलना सही नहीं, क्योंकि इससे सीधे कमरे में पानी आ सकता है. ऐसे समय में खिड़की बंद रखकर सिर्फ एग्जॉस्ट फैन या सीलिंग फैन का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है, ताकि हवा का हल्का सर्कुलेशन बना रहे.
रसोई और बाथरूम पर दें खास ध्यान
खाना बनाते वक्त एग्जॉस्ट फैन जरूर चलाएं और जहां तक संभव हो, किचन को हवादार बनाए रखें. इसी तरह नहाने के बाद बाथरूम की खिड़की खोलकर या एग्जॉस्ट फैन चलाकर भाप को बाहर निकालना जरूरी है, क्योंकि यही दो जगहें घर में सबसे ज्यादा नमी पैदा करती हैं.
फर्नीचर और दीवारों का भी रखें ख्याल
अलमारी, सोफा और बड़े फर्नीचर को दीवार से बिल्कुल सटाकर न रखें, इससे हवा का आवागमन रुक जाता है, और नमी वहीं जमा होने लगती है. दीवार और फर्नीचर के बीच कुछ इंच की जगह छोड़ना बेहतर रहता है, ताकि हवा आसानी से आती जाती रहे.
संतुलन ही है सही तरीका
कुल मिलाकर न हमेशा खिड़की बंद रखना सही है, न हर वक्त खुली छोड़ना. मौसम के हिसाब से संतुलन बनाना ही मानसून में घर को नमी, सीलन और फफूंद से बचाने का सबसे कारगर तरीका है.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Bathroom Tiles Cleaning Tips:बाथरूम की टाइल्स काली पड़ रही हैं? ऐसे हटाएं जमी गंदगी</title>
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        <description><![CDATA[ &amp;nbsp;Bathroom Tiles Cleaning Tips: बाथरूम की सफाई नियमित रूप से करने के बावजूद कुछ ही हफ्तों में टाइल्स काली पड़ने लगती हैं और उन पर जिद्दी दाग धब्बे जम जाते हैं. वजह साफ है लगातार नमी पानी में मौजूद खनिज तत्व और साबुन का झाग मिलकर धीरे धीरे टाइल्स की चमक छीन लेते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे साफ करने के लिए महंगे प्रोडक्ट की जरूरत नहीं, घर में मौजूद कुछ चीजें ही यह काम आसानी से कर देती हैं.
यह है सबसे असरदार
जिद्दी दाग और काली परत हटाने के लिए सफेद सिरका और बेकिंग सोडा का पेस्ट सबसे भरोसेमंद घरेलू उपाय माना जाता है. दोनों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें और फिर इसे दाग वाली जगह पर 10 से 15 मिनट तक लगा रख दें. इसके बाद मुलायम ब्रश से हल्के हाथों से रगड़कर पानी से साफ कर लें, जमी हुई गंदगी काफी हद तक निकल जाएगी.
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यह देसी नुस्खा भी है कारगर
नींबू में मौजूद प्राकृतिक एसिड गंदगी और दाग तोड़ने में मदद करता है. नींबू के रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर इसे टाइल्स पर लगाएं और करीब 15 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद ब्रश से हल्के हाथों से साफ कर लें, यह तरीका जिद्दी दाग हटाने के साथ साथ बाथरूम को ताजा महक भी देता है.
हल्की गंदगी के लिए यह जादुई पानी काफी
अगर दाग बहुत ज्यादा जिद्दी न हों, तो रोजाना की सफाई के लिए एक बाल्टी गर्म पानी में थोड़ा सा डिटर्जेंट पाउडर मिलाकर स्पंज या ब्रश से टाइल्स साफ करना काफी रहता है. यह तरीका टाइल्स को लंबे समय तक नए जैसा बनाए रखने में मदद करता है.
इन जगहों को कभी न करें नजरअंदाज
ज्यादातर लोग टाइल्स की सतह तो साफ कर लेते हैं, लेकिन टाइल्स के बीच की पतली लाइन यानी ग्राउट को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यहीं सबसे ज्यादा गंदगी और फंगस जमा होता है. पुराने टूथब्रश से इन लाइनों को अलग से साफ करना जरूरी है, ताकि टाइल्स पूरी तरह चमकदार दिखें.
सफाई के बाद टाइल्स सुखाना भी है जरूरी
टाइल्स साफ करने के बाद उन्हें अच्छी तरह सुखाना उतना ही जरूरी है, जितना उन्हें साफ करना. गीली टाइल्स पर दोबारा जल्दी दाग जम सकते हैं, इसलिए सफाई के बाद सूखे कपड़े से पोंछना बेहतर रहता है.
नियमितता ही है सबसे बड़ा उपाय
हफ्ते में एक बार इन आसान तरीकों को अपनाकर बाथरूम की टाइल्स को हमेशा नई जैसी चमकदार बनाए रखा जा सकता है, और काली परत जमने की नौबत ही नहीं आएगी.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>H1N1 Virus Symptoms: बेंगलुरु के स्कूल में 500 छात्र और 21 स्टाफ बीमार, 2 में H1N1 की पुष्टि</title>
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        <description><![CDATA[ H1N1 Flu Symptoms Causes And Prevention: बेंगलुरु के रिचर्ड्स टाउन स्थित क्लेरेंस हाई स्कूल में बड़ी संख्या में छात्र और स्टाफ के बीमार पड़ने से चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल के 500 से अधिक छात्र और 21 स्टाफ सदस्य बुखार, सर्दी, खांसी और शरीर में दर्द जैसी समस्याओं से प्रभावित हुए हैं. इनमें से दो छात्रों में H1N1 इंफेक्शन की पुष्टि हुई है. बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के बाद स्कूल को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है.
बताया जा रहा है कि बीमार होने वाले छात्रों और कर्मचारियों में एक जैसे लक्षण देखने को मिले हैं. कई लोगों को बुखार, खांसी, जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत हुई. दो छात्रों की जांच में H1N1 की पुष्टि होने के बाद स्कूल प्रशासन और अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है. अब छात्रों और स्टाफ की सेहत पर नजर रखी जा रही है, ताकि इंफेक्शन के अन्य मामलों का समय पर पता लगाया जा सके.
&amp;nbsp;साफ-सफाई को लेकर चिंता&amp;nbsp;
स्कूल प्रशासन ने इस स्थिति के लिए स्कूल के आसपास की साफ-सफाई को लेकर भी चिंता जताई है. अधिकारियों के मुताबिक, आसपास के स्ट्रीट फूड स्टॉल और अन्य दुकानों के पास कचरा जमा रहता है और स्वच्छता की स्थिति ठीक नहीं है. स्कूल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी नगर निकाय के अधिकारियों के सामने अपनी चिंता रखी थी, लेकिन आरोप है कि अब तक इस समस्या को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं.

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूल के आसपास जमा कचरे या स्ट्रीट फूड स्टॉल की स्थिति का H1N1 संक्रमण से सीधा संबंध है या नहीं. उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह पुष्टि हो सके कि संक्रमण का स्रोत यही जगहें थीं. स्कूल प्रशासन ने स्वच्छता को लेकर चिंता जरूर जताई है, लेकिन बीमारी फैलने की असली वजह जानने के लिए आगे जांच और स्वास्थ्य संबंधी आकलन की जरूरत हो सकती है.
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स्कूल में इंफेक्शन जैसी स्थिति सामने आने के बाद इसे दो दिनों के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है. इस दौरान बीमार छात्रों और कर्मचारियों को ठीक होने का समय मिलेगा और संक्रमण नियंत्रण से जुड़े जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे. स्कूल बंद रहने के दौरान यह भी देखा जा सकता है कि क्या अन्य छात्रों या स्टाफ में इसी तरह के लक्षण विकसित हो रहे हैं और नए मामलों का संबंध इन्फ्लूएंजा से है या किसी दूसरी बीमारी से.
कैसे फैलती है यह बीमारी?
H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो इंफेक्टेड व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकलने वाली श्वसन बूंदों के जरिए फैल सकता है. स्कूल जैसी जगहों पर छात्र और कर्मचारी लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ बंद या साझा स्थानों में रहते हैं. ऐसे माहौल में सांस से जुड़ा इंफेक्शन फैलने की संभावना बढ़ सकती है, खासकर जब किसी इंफेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में कई लोग आए हों.

क्या होते हैं इसके लक्षण?
H1N1 के दौरान बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं. कई लोग सामान्य देखभाल के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इन्फ्लूएंजा से मुश्किल भी हो सकती हैं. खासतौर पर उन लोगों को अधिक सावधानी की जरूरत हो सकती है, जिनकी सेहत पहले से कमजोर है या जो इंफेक्शन के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <title>First Night Gown Ideas: फर्स्ट नाइट पर कैसा गाउन पहनें, किन बातों का रखें ध्यान?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/first-night-gown-ideas-फर्स्ट-नाइट-पर-कैसा-गाउन-पहनें-किन-बातों-का-रखें-ध्यान</link>
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        <description><![CDATA[ Best Bridal Nightwear For First Night: शादी की तैयारियां महीनों पहले शुरू हो जाती हैं. दुल्हन अपने लहंगे, ज्वेलरी, मेकअप, फूलों की सजावट, खाने और फोटोग्राफी तक हर छोटी-बड़ी चीज पर ध्यान देती है. लेकिन इन सभी तैयारियों के बीच एक चीज अक्सर आखिरी समय के लिए छोड़ दी जाती है, वह है फर्स्ट नाइट के लिए नाइटवियर. हालांकि, शादी की पहली रात के लिए सही गाउन चुनना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि यह आपको खूबसूरत दिखने के साथ-साथ सहज और आत्मविश्वास से भरा महसूस कराने में मदद करता है.
फर्स्ट नाइट के लिए गाउन चुनते समय सिर्फ डिजाइन देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. फैब्रिक, फिटिंग, लंबाई और मौसम जैसी कई बातों को ध्यान में रखना जरूरी है. चलिए जानते हैं कि पहली रात के लिए कैसा गाउन चुनें और खरीदारी करते समय किन बातों का ध्यान रखें.
सैटिन गाउन और रोब सेट हो सकता है अच्छा विकल्प
फर्स्ट नाइट के लिए सैटिन नाइटगाउन काफी पसंद किया जाता है. इस फैब्रिक की खासियत इसकी स्मूद और शाइनी फिनिश है, जो इसे एक एलिगेंट लुक देती है. सैटिन का गाउन शरीर पर आसानी से बैठता है और हल्का होने की वजह से पहनने में भी आरामदायक हो सकता है.

अगर आप थोड़ा खास लुक चाहती हैं, तो सैटिन नाइटगाउन के साथ मैचिंग रोब भी चुन सकती हैं. यह कॉम्बिनेशन स्टाइलिश और ग्रेसफुल दिखता है. आइवरी, ब्लश पिंक, शैंपेन और डीप बरगंडी जैसे रंग ब्राइडल लुक के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं. हालांकि, रंग चुनते समय सबसे जरूरी बात यह है कि आप वही रंग चुनें, जिसमें आप खुद को अच्छा और कॉन्फिडेंट महसूस करें.
ब्राइडल गाउन चुनते समय फिटिंग का रखें ध्यान
अगर आपको रोब के साथ लेयरिंग पसंद नहीं है, तो एक सिंपल और अच्छी फिटिंग वाला ब्राइडल गाउन भी चुन सकती हैं. आजकल ऐसे गाउन पसंद किए जाते हैं, जिनमें हल्के लेस डिटेल्स, एडजस्टेबल स्ट्रैप्स और फ्लोई फैब्रिक हो. बहुत ज्यादा टाइट गाउन चुनने के बजाय ऐसा डिजाइन लें, जिसमें आप आराम से चल-फिर और बैठ सकें. फ्लोर लेंथ गाउन आपको ज्यादा पारंपरिक और ग्रेसफुल लुक दे सकता है, जबकि मिडी या नी-लेंथ गाउन मॉडर्न और आसान विकल्प हो सकता है. इसलिए लंबाई का चुनाव अपनी पसंद और कंफर्ट के हिसाब से करें. सबसे जरूरी बात यह है कि गाउन पहनने के बाद आपको उसे बार-बार एडजस्ट न करना पड़े.

फैब्रिक चुनते समय मौसम का भी ध्यान रखें
गाउन खरीदते समय केवल उसका लुक ही नहीं, बल्कि फैब्रिक भी बहुत मायने रखता है. गर्म मौसम या समुद्र किनारे वाली जगहों पर हनीमून के लिए हल्के और सांस लेने वाले फैब्रिक बेहतर रहेंगे. ऐसे में सैटिन, कॉटन या दूसरे हल्के फैब्रिक चुने जा सकते हैं. वहीं, अगर आप किसी ठंडी जगह जैसे शिमला, किसी हिल स्टेशन या यूरोप की यात्रा पर जा रही हैं, तो सिर्फ हल्का गाउन पर्याप्त नहीं हो सकता. ऐसे में गाउन के साथ रोब रखना अच्छा विकल्प है. बाद की रातों के लिए गर्म और आरामदायक नाइट सूट भी पैक किया जा सकता है.
बहुत ज्यादा टाइट या भारी डिजाइन से बचें
पहली रात के लिए कपड़े चुनते समय कंफर्ट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. गाउन चाहे कितना भी खूबसूरत क्यों न दिखे, अगर वह बहुत ज्यादा टाइट है, चुभ रहा है या पहनने के बाद आपको बार-बार उसे ठीक करना पड़ रहा है, तो वह सही विकल्प नहीं होगा. ऐसा गाउन चुनें, जिसकी फिटिंग आपके शरीर के अनुसार हो और जिसमें आप सहज महसूस करें. खरीदते समय सिर्फ हैंगर पर डिजाइन देखकर फैसला न करें. अगर संभव हो, तो पहनकर जरूर देखें और चेक करें कि उसका फैब्रिक त्वचा पर कैसा महसूस हो रहा है. सही नाइटवियर वही है, जिसे पहनने के बाद आप खुद को सहज और आत्मविश्वासी महसूस करें.
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रंग और डिजाइन अपनी पसंद से चुनें
फर्स्ट नाइट के लिए आइवरी और व्हाइट जैसे रंग काफी लोकप्रिय हैं. इसके अलावा ब्लश पिंक, रोज गोल्ड और सॉफ्ट लिलैक जैसे रंग भी ब्राइडल नाइटवियर में पसंद किए जा रहे हैं. लेकिन जरूरी नहीं कि आप सिर्फ पारंपरिक रंग ही चुनें. अगर आपको कोई दूसरा रंग ज्यादा पसंद है और वह आप पर अच्छा लगता है, तो उसे चुन सकती हैं. डिजाइन के मामले में भी अपनी पसंद को प्राथमिकता दें. फ्लोई गाउन, सिंपल सैटिन नाइटगाउन या लेस डिटेल वाला डिजाइन, वही चुनें जिसमें आप सबसे ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करें.
हनीमून के लिए कैसे करें नाइटवियर की पैकिंग?
हनीमून की पैकिंग करते समय सिर्फ पहली रात के गाउन पर ध्यान न दें. पहली रात के लिए अपना पसंदीदा स्टेटमेंट गाउन या सैटिन गाउन-रोब सेट रखें. इसके बाद की एक-दो रातों के लिए हल्के, आरामदायक लेकिन स्टाइलिश नाइटवियर पैक कर सकती हैं. बाकी दिनों के लिए कॉटन या दूसरे आरामदायक फैब्रिक के अच्छे नाइट सूट रखना बेहतर रहेगा, ताकि यात्रा के दौरान आपको आराम मिल सके. जरूरत से कम पैकिंग करने के बजाय एक एक्स्ट्रा नाइटवियर साथ रखना भी समझदारी हो सकती है.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>How To Cook Fluffy Rice: चावल हमेशा चिपक जाते हैं? इस ट्रिक से हमेशा बनेंगे खिले&amp;खिले</title>
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        <description><![CDATA[ How To Cook Perfect Fluffy Rice: चावल बनाना आसान लगता है, लेकिन इन्हें सही तरीके से पकाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. कई बार बर्तन खोलते ही चावल आपस में चिपके हुए मिलते हैं. कहीं दाने जरूरत से ज्यादा नरम हो जाते हैं, तो कहीं नीचे का हिस्सा गीला और ऊपर का चावल कच्चा रह जाता है. खासकर रोजाना बनने वाले चावल में यह परेशानी आम है. हालांकि, इसके लिए हमेशा चावल की क्वालिटी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. इन्हें पकाने का तरीका भी काफी मायने रखता है.
अगर आप चाहते हैं कि चावल के दाने अलग-अलग और खिले-खिले बनें, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना होगा. सबसे जरूरी है चावल से अतिरिक्त स्टार्च हटाना, पानी की सही मात्रा रखना और पकते समय चावल को बार-बार न छेड़ना.
चावल चिपचिपे क्यों हो जाते हैं?
चावल के दानों की बाहरी सतह पर स्टार्च मौजूद होता है. पकाते समय यही स्टार्च पानी में निकलता है. अगर चावल को अच्छी तरह नहीं धोया गया, पानी जरूरत से ज्यादा डाल दिया गया या चावल को बहुत देर तक पकाया गया, तो यह स्टार्च दानों को आपस में चिपका सकता है. बार-बार चम्मच चलाने से भी दाने टूटते हैं और ज्यादा स्टार्च बाहर निकलता है. इसलिए खिले-खिले चावल बनाने के लिए सिर्फ पानी की मात्रा ही नहीं, बल्कि धोने और पकाने का तरीका भी सही होना चाहिए.

चावल को 3-4 बार जरूर धोएं
चावल पकाने से पहले उसे अच्छी तरह धोना सबसे आसान और असरदार तरीका है. कच्चे चावल को एक बर्तन में लेकर ठंडे पानी से धोएं और हाथों से हल्के-हल्के घुमाएं. पानी सफेद और धुंधला दिखाई देगा. इसे निकालकर दोबारा साफ पानी डालें. ऐसा करीब 3-4 बार करें, जब तक पानी पहले की तुलना में काफी साफ न दिखाई देने लगे. इससे दानों की सतह पर मौजूद अतिरिक्त स्टार्च कम होता है और पकने के बाद चावल के आपस में चिपकने की संभावना घट सकती है.
पकाने से पहले थोड़ी देर भिगोएं
चावल को पकाने से पहले करीब 20 मिनट भिगोना भी मददगार हो सकता है. इससे दाने पानी सोख लेते हैं और पकाते समय ज्यादा समान रूप से पक सकते हैं. बासमती चावल को भी करीब 20-30 मिनट तक भिगोया जा सकता है. हालांकि, चावल को बहुत लंबे समय तक पानी में छोड़ना ठीक नहीं है. ज्यादा देर भिगोने से दाने कमजोर हो सकते हैं और पकाते समय टूटने की संभावना बढ़ सकती है.
पानी की मात्रा सबसे ज्यादा जरूरी
चावल चिपकने की एक बड़ी वजह पानी का गलत अनुपात भी है. बहुत ज्यादा पानी डालने पर चावल जरूरत से ज्यादा नरम हो सकते हैं और दाने आपस में चिपकने लगते हैं. आम तौर पर लंबे दाने वाले सफेद चावल के लिए 1 कप चावल में करीब 1.25 कप पानी से शुरुआत की जा सकती है, जबकि कुछ सामान्य चावल में ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है. सही मात्रा चावल की किस्म, बर्तन और पकाने के तरीके पर भी निर्भर करती है. इसलिए एक ही अनुपात हर तरह के चावल पर लागू नहीं होता.

उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें
चावल और पानी को बर्तन में डालकर पहले उबाल आने दें. जैसे ही पानी अच्छी तरह उबलने लगे, आंच धीमी कर दें और ढक्कन लगा दें. इसके बाद चावल को तेज आंच पर लगातार पकाने की जरूरत नहीं होती. धीमी आंच पर चावल भाप में धीरे-धीरे पकते हैं और उनके दाने ज्यादा अच्छी तरह अपनी शक्ल बनाए रख सकते हैं.
पकते समय चावल को बार-बार न चलाएं
यह छोटी सी गलती चावल की पूरी बनावट बदल सकती है. चावल पकाते समय बार-बार चम्मच चलाने से दाने टूट सकते हैं और उनमें मौजूद स्टार्च पानी में ज्यादा निकल सकता है. इससे चावल चिपचिपे होने लगते हैं. इसलिए पानी उबलने के बाद चावल को ढककर पकने दें. बार-बार ढक्कन उठाकर देखने की भी जरूरत नहीं है.
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गैस बंद करने के बाद तुरंत ढक्कन न खोलें
चावल पक जाने के बाद गैस बंद कर दें और उन्हें कुछ देर आराम करने दें. करीब 5-10 मिनट का रेस्ट देने से बचे हुए पानी और भाप को दानों में समान रूप से फैलने का समय मिलता है. कुछ लोग चावल को पकने के तुरंत बाद परोसना शुरू कर देते हैं, जिससे ऊपर और नीचे के दानों की नमी अलग-अलग रह सकती है. थोड़ा इंतजार करने से चावल की बनावट बेहतर हो सकती है.
आखिर में ऐसे करें चावल को फ्लफ
चावल पकने के बाद उन्हें जोर से चलाने या दबाने की बजाय कांटे या चपटे चम्मच की मदद से हल्के हाथ से ऊपर-नीचे करें. इससे दाने अलग होने में मदद मिलती है और वे टूटते भी कम हैं. अगर आप खिले-खिले चावल चाहते हैं, तो बस इन बातों को ध्यान में रखें, चावल अच्छी तरह धोएं, जरूरत के हिसाब से पानी डालें, पकाते समय ज्यादा न चलाएं, उबाल आने के बाद धीमी आंच रखें और पकने के बाद कुछ देर रेस्ट दें. इन छोटी-छोटी गलतियों को सुधारने से रोजाना बनने वाले चावल की बनावट में काफी फर्क नजर आ सकता है.
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Why Salt Gets Wet In Monsoon: बरसात में नमक गीला हो जाता है, चीनी क्यों नहीं?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Salt Dry In Rainy Season: बरसात का मौसम आते ही रसोई में नमी की समस्या बढ़ जाती है. कभी नमकदानी में रखा नमक गीला होकर चिपकने लगता है, तो कभी उसमें गांठें बन जाती हैं. वहीं, चीनी कई बार बिल्कुल सूखी दिखाई देती है. ऐसे में मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब हवा में नमी बढ़ने पर नमक पानी खींच लेता है, तो चीनी पर इसका असर उतना जल्दी क्यों नहीं दिखता? इसके पीछे नमी को सोखने की क्षमता और दोनों पदार्थों की केमिकल प्रकृति अहम भूमिका निभाती है.
दरअसल, नमक और चीनी दोनों ही हवा से कुछ मात्रा में नमी प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन दोनों का व्यवहार एक जैसा नहीं होता. हालांकि, ज्यादा नमी होने पर चीनी भी चिपचिपी हो सकती है और उसमें गांठें बन सकती हैं. हालांकि, आमतौर पर रसोई में इस्तेमाल होने वाला नमक ज्यादा जल्दी गीला दिखाई देता है.
नमक जल्दी गीला क्यों हो जाता है?
हम जो टेबल सॉल्ट इस्तेमाल करते हैं, वह मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड से बना होता है. शुद्ध सोडियम क्लोराइड सामान्य परिस्थितियों में हवा से नमी को इतनी आसानी से नहीं खींचता कि वह तुरंत पानी जैसा हो जाए. लेकिन बाजार में मिलने वाले खाने के नमक में बहुत कम मात्रा में कुछ अन्य खनिज और यौगिक मौजूद हो सकते हैं. इनमें कैल्शियम और मैग्नीशियम से जुड़े कुछ लवण नमी को तेजी से सोखने वाले होते हैं. जब बरसात में हवा की आर्द्रता बढ़ जाती है, तो हवा में मौजूद जलवाष्प नमक के संपर्क में आती है. नमी सोखने वाले घटक पानी को अपनी ओर खींच सकते हैं. धीरे-धीरे नमक के दाने आपस में चिपकने लगते हैं और ज्यादा नमी होने पर गीले से दिखाई देने लगते हैं. इसी वजह से कई बार नमकदानी में नमक आसानी से निकलना बंद हो जाता है.

चीनी का व्यवहार नमक से अलग है
चीनी भी हवा में मौजूद नमी से प्रभावित होती है. खासतौर पर ज्यादा आर्द्रता में चीनी के दाने नमी सोख सकते हैं, जिससे वे चिपकने लगते हैं और गांठें बन सकती हैं. लेकिन सफेद दानेदार चीनी अक्सर नमक की तरह तुरंत गीली या घुली हुई नहीं दिखती. इसकी वजह यह है कि चीनी और नमक की संरचना अलग-अलग होती है और नमी के साथ दोनों की प्रतिक्रिया भी अलग होती है. चीनी के दानों की सतह पर नमी जमा होने से वे एक-दूसरे से चिपक सकते हैं. इसलिए बरसात में अगर चीनी का डिब्बा खुला छोड़ दिया जाए या उसमें गीला चम्मच डाल दिया जाए, तो वह भी गीली, चिपचिपी और गांठदार हो सकती है.

यानी नमक गीला होता है और चीनी पर बिल्कुल असर नहीं पड़ता, ऐसा नहीं है. अंतर सिर्फ इतना है कि नमी के संपर्क में आने पर दोनों के बदलने का तरीका अलग होता है. नमक अक्सर गीला और चिपचिपा दिखाई देता है, जबकि चीनी में पहले गांठें बनने की समस्या ज्यादा नजर आ सकती है.
बरसात में नमक और चीनी को ऐसे रखें सूखा
मानसून में नमी से बचाने के लिए नमक और चीनी को सही तरीके से स्टोर करना जरूरी है. सबसे पहले इन्हें साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कंटेनर में रखें. डिब्बे का ढक्कन ठीक से बंद होना चाहिए, ताकि बार-बार नमी वाली हवा अंदर न जा सके. नमक और चीनी के कंटेनर को सिंक के पास रखने से बचें. चूल्हे या गैस के बिल्कुल पास भी इन्हें रखना ठीक नहीं है, क्योंकि वहां भाप और तापमान में बदलाव हो सकता है. इन्हें रसोई की किसी सूखी और ठंडी जगह पर रखें.
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नमक या चीनी निकालने के लिए हमेशा साफ और सूखे चम्मच का ही इस्तेमाल करें. गीला चम्मच डिब्बे के अंदर जाते ही नमी पहुंचा सकता है, जिससे दाने चिपकने लगते हैं. हाथ गीले हों तो सीधे नमक या चीनी को छूने से भी बचना चाहिए. अगर बरसात में घर में नमी बहुत ज्यादा रहती है, तो एक बड़े डिब्बे को बार-बार खोलने की बजाय नमक और चीनी को छोटे-छोटे कंटेनर में बांटकर रखा जा सकता है. इससे पूरा स्टॉक हर बार नमी वाली हवा के संपर्क में नहीं आएगा.
ऐसे करें इस्तेमाल
नमक में नमी की समस्या होने पर उसे इस्तेमाल से पहले सूखे चम्मच से हल्के हाथ से अलग किया जा सकता है. वहीं, चीनी में बनी छोटी गांठों को भी सूखे चम्मच से तोड़ा जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Turmeric For Wounds: हर जख्म के लिए हल्दी का करते हैं इस्तेमाल? ये कितना सही</title>
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        <description><![CDATA[ Turmeric For Wounds: भारतीय घरों में जब भी कोई चोट लगती है या कट लग जाता है, तो सबसे पहले हल्दी लगाने की सलाह दी जाती है. यह नुस्खा सालों से चला आ रहा है और लगभग हर घर में इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या यह सोच सही है कि हल्दी हर तरह के जख्म के लिए फायदेमंद है? आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी की&amp;nbsp; हल्दी वाकई जख्म भरने में कितनी मदद करती है और इसका इस्तेमाल कब और कैसे करना चाहिए.&amp;nbsp;
हल्दी में ऐसा क्या है जो जख्म भरने में मदद करता है
हल्दी में मौजूद कर्क्यूमिन नाम का तत्व इसे खास बनाता है. कई वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि कर्क्यूमिन में सूजन कम करने वाले, बैक्टीरिया से लड़ने वाले और घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करने वाले गुण होते हैं. जानवरों पर हुए शोध में देखा गया है कि हल्दी लगाने से घाव जल्दी भरता है और उसमें नए टिशू बनने की प्रक्रिया तेज होती है. वहीं इंसानों पर हुए कुछ छोटे अध्ययनों में भी हल्दी का इस्तेमाल करने पर घाव में सूजन, दर्द और बदबू कम होते देखी गई है. यही वजह है कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में हल्दी को सदियों से घाव भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.&amp;nbsp;
लेकिन यह सोचना गलत है कि हल्दी हर तरह के जख्म के लिए काम करती है. छोटी खरोंच या हल्के कट के लिए हल्दी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन गहरे घाव, जलने के गंभीर जख्म या ऐसे घाव जिनमें बहुत खून बह रहा हो, उनके लिए सिर्फ हल्दी पर भरोसा करना ठीक नहीं है. ऐसे मामलों में सही सफाई और डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है. इसके अलावा, कच्ची हल्दी सीधे खुले घाव पर लगाने से कुछ लोगों को जलन, खुजली या एलर्जी जैसी दिक्कत भी हो सकती है, क्योंकि हल्दी पूरी तरह से स्टेराइल नहीं होती है.&amp;nbsp;
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हल्दी का सही इस्तेमाल कैसे करें
अगर आप हल्दी का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले घाव को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उसमें मिट्टी या गंदगी न रहे. इसके बाद हल्दी को सीधे कच्चे रूप में लगाने की बजाय, इसे किसी साफ और सुरक्षित तरीके से जैसे हल्दी वाले मरहम या शहद के साथ मिलाकर हल्के कट या खरोंच पर लगाएं. फिर साफ पट्टी से ढक दें, ताकि उसमें और गंदगी न जाए. वहीं अगर घाव गहरा है, बहुत दर्द हो रहा है, सूजन बढ़ रही है या कुछ दिनों में ठीक नहीं हो रहा, तो तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Issue of Make Up Weekend Sleep: वीकेंड में नींद पूरी कर लेंगे... ये सोचते हैं तो हो जाएं सावधान!</title>
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        <description><![CDATA[ Issue Of Make Up Weekend Sleep: सोमवार से शुक्रवार तक देर रात तक जागना और सुबह जल्दी उठना, फिर शनिवार रविवार को ज्यादा देर तक सोकर नींद पूरी करने की कोशिश करना आजकल काफी आम आदत है. कई लोगों को लगता है कि पूरे हफ्ते की कम नींद की भरपाई वीकेंड में कुछ घंटे ज्यादा सोकर की जा सकती है. लेकिन नींद को लेकर हुई रिसर्च बताती है कि सिर्फ वीकेंड पर ज्यादा सोना नियमित और पर्याप्त नींद का बेहतर ऑप्शन नहीं माना जा सकता है .
कम नींद बनाती है स्लीप देब्ट&amp;nbsp;
जब किसी व्यक्ति को लगातार अपनी जरूरत से कम नींद मिलती है, तो शरीर में नींद की कमी जमा होती जाती है. इसे आम तौर पर स्लीप देब्ट&amp;nbsp;कहा जाता है. वीकेंड में ज्यादा सोने से थकान और नींद की कमी से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन इससे पूरे सप्ताह की खराब नींद की आदत खत्म नहीं हो जाती. एक रेवेव में पाया गया कि वीकेंड में ज्यादा सोना थकान और मूड जैसी कुछ चीजों में थोड़े समय के लिए मदद कर सकता है, लेकिन इसे लंबे समय तक नींद की कमी की भरपाई करने की बेहतर तरीका नहीं माना जाना चाहिए.
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बहुत देर तक सोना भी सही तरीका नहीं
वीकेंड में सामान्य समय से ज्यादा देर तक सोने से सोने और जागने का समय बदल सकता है. इससे शरीर की नियमित स्लीप रूटीन पर असर हो सकती है. यही वजह है कि सिर्फ शनिवार और रविवार को लंबी नींद लेने के बजाय पूरे सप्ताह सोने का समय नियमित रखना ज्यादा जरूरी माना जाता है. हालांकि यहां एक जरूरी बात यह है, कि रिसर्च में वीकेंड में नींद पूरी कर को लेकर सभी नतीजे एक जैसे नहीं हैं. 2024 में पखुलासा हुआ कि एक बड़े अध्ययन में 73,513 लोगों के आंकड़ों का अनैलिसिस किया गया और वीकेंड में नींद पूरी करना का मौत या दिल के बीमारी के जोखिम से कोई डायरेक्ट संबंध नहीं मिला.
किनके लिए नींद और भी जरूरी?
नींद की जरूरत उम्र के हिसाब से अलग होती है. डॉक्टर्स के अनुसार, 13 से 18 साल के किशोरों को नियमित रूप से 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए. पर्याप्त नींद ध्यान, सीखने, याददाश्त और दिन के समय अलर्ट्नेस के लिए जरूरी है.
नींद का समय रखें लगभग एक जैसा
अगर पूरे सप्ताह सोने और उठने का समय लगभग एक जैसा रखा जाए तो शरीर को सही नींद मिलती है. वीकेंड में थोड़ी ज्यादा नींद जरूरत के मुताबिक ली जा सकती है, लेकिन उसे पूरे सप्ताह की कम नींद की भरपाई का तरीका नहीं बनाना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Stale Tea Poison:कितनी देर पहले बनी चाय पीनी चाहिए, कब बन जाती है जहर?</title>
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        <description><![CDATA[ Stale Tea Poison: सुबह जल्दबाजी में एक साथ दो-तीन कप चाय बनाकर रख देना, फिर घंटों बाद उसे दोबारा गर्म करके पी लेना, यह आदत ज्यादातर चाय के शौकीनों में बेहद आम है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही आदत सेहत के लिए कितनी नुकसानदायक साबित हो सकती है? आइए जानते हैं.
कुछ घंटे बाद ही शुरू हो जाता है असली खतरा
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर चाय बनाकर 3 से 4 घंटे तक ऐसे ही रख दी जाए और उसके बाद पी जाए, तो यह शरीर के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकती है. वजह यह है कि इतनी देर तक रखी चाय में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जो शरीर में जाकर जहर जैसा असर दिखा सकते हैं.
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किस चाय में खतरा है सबसे ज्यादा?
खासतौर पर दूध और चीनी वाली चाय को दोबारा गर्म करना ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है. दूध में मौजूद पोषक तत्व बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए एकदम अनुकूल माहौल तैयार कर देते हैं, यही वजह है कि लंबे समय तक रखी दूध वाली चाय फूड पॉइजनिंग की सबसे बड़ी वजह बन सकती है.
क्या करने से खत्म हो जाते हैं फायदेमंद गुण?
सिर्फ बैक्टीरिया ही नहीं, ग्रीन टी, हर्बल टी या फ्रूटी टी को बार बार गर्म करने से उसके ज्यादातर फायदेमंद गुण भी खत्म हो जाते हैं. यूं समझे जिस सेहत के फायदे के लिए यह चाय पी जाती है, दोबारा गर्म करने पर वही फायदा काफी हद तक बेअसर हो जाता है.
सेहत ज्यादा जरूरी
बहुत से लोग बची हुई चाय को फेंकने के बजाय दोबारा गर्म करना बेहतर समझते हैं, क्योंकि इससे दूध, चायपत्ती, चीनी और अदरक जैसी चीजों की बर्बादी बच जाती है. लेकिन एक्सपर्ट्स की सलाह है कि यह छोटी सी बचत सेहत से समझौता करने लायक बिल्कुल नहीं है, खासकर जब बात फूड पॉइजनिंग जैसे गंभीर खतरे की हो.
क्या है सुरक्षित तरीका?
सबसे सुरक्षित उपाय यही है कि चाय हमेशा उतनी ही बनाई जाए, जितनी उसी वक्त पी जानी हो. अगर फिर भी चाय ज्यादा बन जाए, तो उसे 1से 2 घंटे के भीतर ही खत्म कर लेना बेहतर रहता है. इससे ज्यादा देर रखी चाय को दोबारा गर्म करके पीने से बचना ही समझदारी है.
ये है बड़ा फायदा
चाय के शौकीनों के लिए यह आदत बदलना शुरुआत में मुश्किल लग सकता है, लेकिन सेहत को ध्यान में रखते हुए ताजा चाय बनाना और तय समय के भीतर ही पी लेना, यही सबसे समझदारी भरा और सुरक्षित तरीका माना जाता है.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Stale, Tea, Poison:कितनी, देर, पहले, बनी, चाय, पीनी, चाहिए, कब, बन, जाती, है, जहर</media:keywords>
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        <title>Pressure Cooker Gasket Hack: प्रेशर कुकर की ढीली रबड़ मिनटों में होगी टाइट, करें बस यह 1 काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Loose Pressure Cooker Gasket: प्रेशर कुकर आज हर किचन का जरूरी हिस्सा बन चुका है. इससे खाना जल्दी तैयार हो जाता है और गैस के साथ-साथ समय की भी बचत होती है. दाल, चावल से लेकर सब्जियां और कई तरह के दूसरे पकवान बनाने में प्रेशर कुकर काफी काम आता है. यही वजह है कि किचन में इसका इस्तेमाल लगभग रोजाना होता है. लेकिन लगातार इस्तेमाल के कारण कई बार प्रेशर कुकर में छोटी-बड़ी परेशानियां आने लगती हैं.
इनमें सबसे आम समस्या कुकर के ढक्कन में लगी रबड़ यानी गैसकेट को लेकर होती है. कई बार रबड़ ढीली पड़ जाती है और ढक्कन ठीक तरह से बंद नहीं हो पाता. ऐसे में कुकर के अंदर प्रेशर बनने में परेशानी होती है और खाना पकाने में ज्यादा समय लग सकता है. कई बार कुकर से भाप भी बाहर निकलने लगती है. अगर आपके प्रेशर कुकर के साथ भी ऐसी समस्या बार-बार हो रही है, तो हर बार नई रबड़ खरीदने से पहले यह आसान हैक आजमा सकते हैं.
हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रेशर कुकर की ढीली रबड़ को ठीक करने का एक आसान तरीका वायरल हुआ. इसे डिजिटल क्रिएटर दीप्ति कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया था. वीडियो में उन्होंने बताया कि अगर प्रेशर कुकर की रबड़ ढीली हो गई है और ढक्कन पर ठीक से फिट नहीं हो रही है, तो इसे कुछ आसान स्टेप्स की मदद से दोबारा फिट किया जा सकता है.
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कैसे करें यह हैक?
इसके लिए सबसे पहले प्रेशर कुकर का ढक्कन उतार लें. इसके बाद ढक्कन के अंदर लगी रबड़ को सावधानी से निकालें. अब एक कटोरी में पानी लें और रबड़ को उसमें कुछ देर डुबोएं. इसके बाद एक प्लेट में थोड़ा सा गेहूं का आटा यानी आटा लें. पानी से निकालने के बाद रबड़ को आटे में हल्के से लगाएं.

इसके बाद रबड़ को दोबारा प्रेशर कुकर के ढक्कन में सही तरीके से फिट कर दें. दावा है कि ऐसा करने के बाद ढीली रबड़ ढक्कन पर बेहतर तरीके से फिट हो जाती है और कुकर का ढक्कन पहले की तुलना में ठीक से बंद होने लगता है. इस आसान तरीके की खास बात यह है कि इसके लिए आपको किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं पड़ती. घर में मौजूद पानी और आटे की मदद से ही इसे आजमाया जा सकता है.
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सोशल मीडिया पर लोगों को पसंद आया हैक
इस हैक का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. एक यूजर ने बताया कि वह बिना पानी के भी आटे का इस्तेमाल करके ऐसा कर चुके हैं और उन्हें भी इसका फायदा मिला. वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि प्रेशर कुकर की रबड़ को लेकर लगभग हर किसी को कभी न कभी इस परेशानी का सामना करना पड़ता है और यह तरीका काफी काम का है. एक दूसरे यूजर ने रबड़ को करीब 10 मिनट के लिए फ्रीजर में रखने का सुझाव भी दिया.
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि प्रेशर कुकर में इस्तेमाल होने वाली रबड़ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा वाला हिस्सा है. अगर रबड़ बहुत ज्यादा पुरानी, फटी हुई, सख्त या खराब हो चुकी है, तो सिर्फ किसी हैक के भरोसे उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में नई और सही साइज की गैसकेट लगाना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है. कुकर का इस्तेमाल करने से पहले यह भी देख लें कि रबड़ अपनी जगह पर सही तरीके से लगी है और ढक्कन ठीक से लॉक हो रहा है.
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        <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 11:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Pressure, Cooker, Gasket, Hack:, प्रेशर, कुकर, की, ढीली, रबड़, मिनटों, में, होगी, टाइट, करें, बस, यह, काम</media:keywords>
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        <title>Room Freshness Tips: कमरे को दिनभर फ्रेश और सुगंधित कैसे रखें? जानें आसान घरेलू उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Room Fresh Without Room Freshener: घर में कदम रखते ही अगर कमरे से ताजी और साफ खुशबू आए, तो पूरा माहौल अच्छा लगने लगता है. लेकिन कई बार कमरा साफ होने के बावजूद उसमें सीलन, बासी हवा, कपड़ों या कूड़े की गंध बनी रहती है. खासकर ऐसे कमरे जहां खिड़कियां कम खुलती हैं या हवा का आना-जाना ठीक नहीं होता, वहां बदबू जल्दी जमा हो सकती है. गंध सिर्फ हवा में ही नहीं रहती, बल्कि कई बार बिस्तर, गद्दे, कालीन, पर्दों और फर्नीचर के कपड़े में भी बस जाती है.
अगर आपके कमरे में भी दिनभर ताजगी नहीं रहती, तो सिर्फ महंगे रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों और रोजाना की छोटी-छोटी आदतों की मदद से कमरे को ज्यादा समय तक फ्रेश रखा जा सकता है. सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कमरे में बदबू आखिर आती कहां से है.
कमरे में बदबू की सबसे बड़ी वजह क्या है?
बंद कमरे में बासी हवा जमा होना बदबू की एक बड़ी वजह हो सकती है. इसके अलावा गीले कपड़े, लंबे समय से न धोए गए बेडशीट, गंदे कपड़ों की टोकरी, जूते, पालतू जानवरों की चीजें और कमरे में जमा धूल भी गंध बढ़ा सकती है. अगर कमरे में नमी ज्यादा है, तो सीलन और फफूंद जैसी समस्या भी बदबू का कारण बन सकती है. खाना पकाने से पैदा होने वाली गंध भी हवा के साथ कमरे में पहुंच सकती है.

सबसे पहले कमरे की हवा बदलें
कमरे की बदबू दूर करने का सबसे आसान तरीका है कि उसमें ताजी हवा का रास्ता बनाया जाए. जब बाहर की हवा साफ हो और मौसम ठीक हो, तो कुछ देर के लिए खिड़कियां और दरवाजे खोल दें. इससे कमरे में जमा बासी हवा बाहर निकलने में मदद मिलेगी और ताजी हवा अंदर आएगी. अगर कमरे में पंखा है, तो उसे कुछ देर चलाकर हवा का सर्कुलेशन भी बेहतर किया जा सकता है.
बिस्तर को रोजाना थोड़ा खुला रखें
सुबह उठते ही बेड को तुरंत पूरी तरह ढक देने के बजाय कुछ देर चादर और कंबल को पीछे कर दें. इससे बिस्तर में फंसी गर्मी और नमी बाहर निकलने में मदद करती है. करीब आधे घंटे बाद बेड को दोबारा व्यवस्थित कर सकते हैं. बेडशीट और तकिए के कवर को समय-समय पर धोना भी जरूरी है, क्योंकि लंबे समय तक इस्तेमाल होने पर इनमें पसीने और दूसरी गंध जमा हो सकती है.

बेकिंग सोडा आएगा काम
अगर गद्दे या कालीन से बदबू आ रही है, तो बेकिंग सोडा एक आसान घरेलू विकल्प हो सकता है. गद्दे की सतह को पहले अच्छी तरह वैक्यूम करें. इसके बाद उस पर थोड़ी मात्रा में बेकिंग सोडा छिड़ककर कम से कम एक घंटे के लिए छोड़ दें. फिर इसे अच्छी तरह वैक्यूम कर लें. बेकिंग सोडा गंध को सिर्फ छिपाने के बजाय उसे न्यूट्रलाइज करने में मदद कर सकता है. यही तरीका कालीन और रग पर भी आजमाया जा सकता है.
एक कटोरी में रखें बेकिंग सोडा
कमरे की हवा में मौजूद हल्की बदबू को सोखने के लिए एक उथली कटोरी में बेकिंग सोडा भरकर कमरे के किसी कोने में रखा जा सकता है. इसे ऐसी जगह रखें जहां बच्चे या पालतू जानवर आसानी से न पहुंच सकें. इसके अलावा सूखे कॉफी ग्राउंड्स को कपड़े की छोटी पोटली में रखकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. एक्टिवेटेड चारकोल भी गंध को सोखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
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कमरे की सफाई में इन जगहों को न भूलें
सिर्फ फर्श और टेबल साफ करने से काम पूरा नहीं होता. पर्दे, कालीन, गद्दा, सोफा, बेड के आसपास की जगह और दीवारों पर जमी धूल भी कमरे की गंध को प्रभावित कर सकती है. माइक्रोफाइबर कपड़े से दीवारों और दूसरी सतहों की सफाई करें. अगर कमरे में सीलिंग फैन है, तो उसके ब्लेड पर जमा धूल भी साफ करें.
कमरे में खुशबू के लिए पौधे लगाएं
रूम को नेचुरल तरीके से फ्रेश रखने के लिए घर में कुछ पौधे भी लगाए जा सकते हैं. मिंट, तुलसी, रोजमेरी और थाइम जैसे हर्ब्स हल्की प्राकृतिक खुशबू दे सकते हैं. लैवेंडर और जैस्मिन जैसे खुशबूदार पौधे भी कमरे के माहौल को बेहतर बना सकते हैं. पौधों को ऐसी जगह रखें जहां उन्हें उनकी जरूरत के मुताबिक रोशनी और हवा मिल सके.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Room, Freshness, Tips:, कमरे, को, दिनभर, फ्रेश, और, सुगंधित, कैसे, रखें, जानें, आसान, घरेलू, उपाय</media:keywords>
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        <title>How To Fix Salty Food: सब्जी में ज्यादा हो गया नमक या मिर्च? तुरंत अपनाएं ये 5 आसान हैक्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/how-to-fix-salty-food-सब्जी-में-ज्यादा-हो-गया-नमक-या-मिर्च-तुरंत-अपनाएं-ये-5-आसान-हैक्स</link>
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        <description><![CDATA[ How To Reduce Excess Salt In Food: खाने में नमक और मसाले स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं. लेकिन कई बार खाना बनाते समय थोड़ा ज्यादा नमक या मिर्च पड़ जाती है और पूरी सब्जी का स्वाद बिगड़ जाता है. खासकर जब खाना लगभग तैयार हो चुका हो, तब उसे दोबारा बनाना संभव नहीं होता. ऐसे में ज्यादातर लोग परेशान हो जाते हैं कि अब तेज नमक या मिर्च वाले खाने को कैसे ठीक किया जाए. अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. किचन में मौजूद कुछ सामान्य चीजों की मदद से सब्जी, करी या सूप के स्वाद को काफी हद तक बैलेंस किया जा सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए आपको पूरी सब्जी फेंकने या दोबारा बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बस सही मात्रा में कुछ चीजें मिलानी होंगी.
टमाटर, नींबू या थोड़ा सिरका करें इस्तेमाल
अगर सब्जी में नमक थोड़ा ज्यादा हो गया है, तो उसमें टमाटर की प्यूरी, थोड़ा नींबू का रस या कुछ बूंदें सिरके की डाली जा सकती हैं. इन चीजों में मौजूद खट्टापन खाने के स्वाद को बैलेंस करने में मदद करता है. इससे नमक का तेज स्वाद कुछ कम महसूस हो सकता है और सब्जी में हल्का खट्टापन भी आ जाता है.
हालांकि, इन चीजों को एक साथ डालने की जरूरत नहीं है. सब्जी के स्वाद के हिसाब से इनमें से किसी एक चीज की थोड़ी मात्रा डालें और फिर चखकर देखें. खासकर नींबू या सिरका ज्यादा डालने से सब्जी का स्वाद खट्टा हो सकता है.

सब्जी की मात्रा बढ़ा दें
अगर नमक या मिर्च काफी ज्यादा पड़ गई है, तो सबसे आसान तरीका है कि सब्जी की मात्रा बढ़ा दी जाए. इसके लिए उसी सब्जी की थोड़ी और मात्रा बिना नमक के बनाकर इसमें मिला सकते हैं. इससे अतिरिक्त नमक और मसाले बाकी सामग्री में फैल जाएंगे और उनका तेज स्वाद कम हो जाएगा.
कुछ सब्जियों में उबले हुए आलू जैसी स्टार्च वाली चीजें भी मिलाई जा सकती हैं. आलू सब्जी की मात्रा बढ़ाने के साथ उसके स्वाद को भी बैलेंस करने में मदद कर सकता है. इस तरीके से खाने का मूल स्वाद ज्यादा नहीं बदलता.
थोड़ा पानी डालकर करें बैलेंस
अगर ग्रेवी वाली सब्जी या करी में नमक तेज हो गया है, तो उसमें थोड़ा पानी मिलाना भी काम आ सकता है. पानी डालने से सब्जी में नमक की मात्रा फैल जाती है और उसका स्वाद पहले की तुलना में हल्का हो जाता है. लेकिन पानी एक साथ ज्यादा न डालें. थोड़ा-थोड़ा करके मिलाएं और सब्जी को कुछ देर पकने दें. अगर ग्रेवी बहुत पतली हो जाए, तो उसे थोड़ी देर खुला पकाकर दोबारा गाढ़ा किया जा सकता है. इस तरीके का इस्तेमाल खासकर करी और सूप में आसानी से किया जा सकता है.

चुटकी भर चीनी से कम करें तेज स्वाद
अगर सब्जी में नमक ज्यादा हो गया है और आपके पास दूसरी चीजें उपलब्ध नहीं हैं, तो बहुत थोड़ी मात्रा में चीनी भी इस्तेमाल की जा सकती है. चीनी नमक के तेज स्वाद को बैलेंस करने में मदद करती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सब्जी में मिठास लानी है. इसके लिए बस एक छोटी चुटकी चीनी डालें, अच्छी तरह मिलाएं और फिर स्वाद चखें. जरूरत महसूस हो तो ही थोड़ी और मात्रा डालें. ज्यादा चीनी डालने से सब्जी का असली स्वाद बदल सकता है.
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क्रीम या दूध से बैलेंस करें मसाला
अगर क्रीमी ग्रेवी, पनीर या किसी ऐसी सब्जी में नमक या मिर्च ज्यादा हो गई है जिसमें दूध या क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है, तो थोड़ी फ्रेश क्रीम या दूध मिलाया जा सकता है. इससे ग्रेवी का स्वाद हल्का और बैलेंस हो सकता है. साथ ही, सब्जी में क्रीमी टेक्सचर भी आ जाता है. हालांकि, हर तरह की सब्जी में दूध या क्रीम डालना सही नहीं रहेगा. इसलिए इसका इस्तेमाल उसी डिश में करें, जिसमें इन चीजों का स्वाद अच्छी तरह मेल खाता हो.
मिर्च ज्यादा हो जाए तो क्या करें?
अगर सब्जी में नमक की जगह मिर्च तेज हो गई है, तो भी इन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. सब्जी की मात्रा बढ़ाना, थोड़ा पानी या ग्रेवी बढ़ाना और जरूरत के हिसाब से दूध या क्रीम मिलाना मिर्च के तेजपन को कम कर सकता है. टमाटर या थोड़ा नींबू भी स्वाद को बैलेंस करने में मदद कर सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी चीज को एक साथ ज्यादा मात्रा में न डालें. थोड़ा-थोड़ा मिलाकर हर बार स्वाद चखें. इससे सब्जी का स्वाद बिगड़ने से बचाया जा सकता है और जरूरत के मुताबिक उसे आसानी से बैलेंस किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Brass Utensils Cleaning: तांबे&amp;पीतल के बर्तन पड़ गए हैं काले? बिना घिसे मिनटों में चमकाएं</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Brass And Copper Utensils At Home: पीतल और तांबे के बर्तन भारतीय घरों का हिस्सा सदियों से रहे हैं. पूजा की थाली हो, घर में रखे सजावटी सामान हों या फिर दादी-नानी के जमाने के पुराने बर्तन, इन धातुओं की अपनी अलग चमक और खूबसूरती होती है. लेकिन समय के साथ इनकी चमक फीकी पड़ने लगती है. हवा, नमी और रोजाना इस्तेमाल के कारण तांबे और पीतल के बर्तन धीरे-धीरे काले और दागदार दिखाई देने लगते हैं.
खासकर पुराने बर्तनों को देखकर ऐसा लगता है कि इन्हें दोबारा चमकाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी. कई लोग इन्हें नींबू, नमक या इमली से रगड़कर साफ करते हैं. इससे हल्के दाग तो निकल जाते हैं, लेकिन जिद्दी कालापन हटाने में काफी समय और मेहनत लग सकती है. अगर आप भी पीतल और तांबे के बर्तनों को बिना ज्यादा घिसे चमकाना चाहते हैं, तो एक आसान तरीका आपके काम आ सकता है.
दरअसल, बाजार में पीतल और तांबे की सफाई के लिए खास तौर पर बनाए गए क्लीनिंग पाउडर मिलते हैं. इनमें पितांबरी शाइनिंग पाउडर भी काफी इस्तेमाल किया जाता है. इसे खासतौर पर तांबे और पीतल की सतह पर जमी गंदगी, कालापन और धब्बे हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसकी मदद से बर्तनों को लंबे समय तक घिसने की जरूरत नहीं पड़ती और कुछ ही मिनटों में उनकी चमक वापस लाई जा सकती है.

क्यों काले पड़ जाते हैं तांबे और पीतल के बर्तन?
दरअसल, तांबा और पीतल हवा में मौजूद ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे प्रतिक्रिया करते हैं. इसे ऑक्सीडेशन कहा जाता है. इसी वजह से बर्तनों की सतह पर एक गहरी परत जमने लगती है और उनका रंग काला या मटमैला दिखाई देने लगता है. इसके अलावा खाना पकाने के दौरान तेल और मसालों का संपर्क, बर्तन धोने के बाद बची नमी, लंबे समय तक बर्तनों को इस्तेमाल न करना और ज्यादा नमी वाली जगह पर रखना भी उनकी चमक कम कर सकता है. नींबू, इमली और सिरका जैसी खट्टी चीजों के लगातार संपर्क में आने से भी धातु की सतह पर असर पड़ सकता है.
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पीतल और तांबे के बर्तन चमकाने का आसान तरीका
अगर बर्तन बहुत ज्यादा काले या दागदार नहीं हैं, तो घर पर ही पितांबरी शाइनिंग पाउडर की मदद से उन्हें साफ किया जा सकता है. इसके लिए सबसे पहले बर्तन की सतह पर थोड़ी मात्रा में पाउडर लें. इसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर हल्का पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को बर्तन की पूरी सतह पर अच्छी तरह लगा दें. इसके बाद उंगलियों, मुलायम कपड़े, स्पंज या सॉफ्ट स्क्रबर की मदद से हल्के हाथों से गोल-गोल घुमाते हुए साफ करें. बहुत ज्यादा जोर लगाकर रगड़ने की जरूरत नहीं है. अगर किसी हिस्से पर कालापन या दाग ज्यादा जिद्दी है, तो पेस्ट को करीब 1-2 मिनट के लिए लगा रहने दें.

इसके बाद बर्तन को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और तुरंत सूखे, साफ कपड़े से पोंछ दें. बर्तन सूखने के बाद उसकी सतह पर पहले से ज्यादा चमक नजर आ सकती है. इस तरीके की खास बात यह है कि आपको लंबे समय तक बर्तन को घिसने की जरूरत नहीं पड़ती.
नींबू-नमक और इमली से भी करते हैं सफाई
पीतल और तांबे के बर्तनों को साफ करने के लिए कई घरों में नींबू और नमक का इस्तेमाल भी किया जाता है. नींबू की खटास और नमक की हल्की रगड़ सतह पर जमी गंदगी हटाने में मदद कर सकती है. हालांकि, अगर बर्तन पर काफी पुराना कालापन जमा है, तो इसे हटाने में ज्यादा मेहनत लग सकती है.
इसी तरह इमली का इस्तेमाल भी पुराने समय से पीतल और तांबे के बर्तन साफ करने के लिए किया जाता रहा है. इमली का पेस्ट लगाकर कुछ देर रखने के बाद बर्तन को साफ किया जाता है. लेकिन इसमें पेस्ट तैयार करने और बाद में अच्छी तरह सफाई करने में समय लग सकता है.
सफाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान
तांबे और पीतल के बर्तनों को साफ करते समय बहुत ज्यादा खुरदरे स्क्रबर या स्टील वूल का इस्तेमाल करने से बचें. इससे बर्तन की सतह पर खरोंच आ सकती है. किसी भी क्लीनिंग प्रोडक्ट को जरूरत से ज्यादा देर तक बर्तन पर लगा न छोड़ें और इस्तेमाल के बाद उसे साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. बर्तन धोने के बाद उन्हें गीला छोड़ने के बजाय साफ कपड़े से अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है. इससे नमी के कारण दोबारा दाग और धब्बे बनने की संभावना कम हो सकती है. अगर आपके घर में पुराने पीतल या तांबे के बर्तन रखे हैं और उनकी चमक पूरी तरह गायब हो गई है, तो उन्हें फेंकने या नया खरीदने की जरूरत नहीं है. सही तरीके से सफाई करने पर उनकी पुरानी चमक काफी हद तक वापस लाई जा सकती है.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Gas Cylinder Fire: गैस सिलेंडर में आग लग जाए तो क्या करें, बड़े काम के हैं ये सेफ्टी टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Gas Cylinder Fire: रसोई में गैस सिलेंडर का इस्तेमाल तो हर घर में होता है, लेकिन जरा सी लापरवाही बड़ा हादसा बन सकती है. अगर कभी गैस सिलेंडर में आग लग जाए, तो ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं और समझ नहीं पाते कि क्या करें. लेकिन सही जानकारी हो तो ऐसी स्थिति में बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि गैस सिलेंडर में आग लगने पर क्या करना चाहिए और आगे से ऐसा हादसा होने से कैसे बचा जा सकता है.
आग लगते ही सबसे पहले क्या करें
अगर गैस सिलेंडर के पास या रेगुलेटर में आग लग जाए, तो सबसे पहले घबराएं नहीं और तुरंत गैस का रेगुलेटर बंद करने की कोशिश करें. अगर रेगुलेटर तक हाथ आसानी से पहुंच सकता है, तो एक गीला मोटा कपड़ा या तौलिया लेकर उसे रेगुलेटर के ऊपर डाल दें, इससे आग को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी और वह बुझ सकती है. ध्यान रहे कि इस दौरान कभी भी पानी सीधे आग पर न डालें, क्योंकि गैस की आग पानी से और भड़क सकती है. अगर आग बड़ी हो गई है और खुद बुझाना मुश्किल लग रहा है, तो तुरंत घर के सभी लोगों को बाहर निकालें और सुरक्षित दूरी पर चले जाएं.
अगर आग तेजी से फैल रही है, तो देर न करते हुए तुरंत फायर ब्रिगेड यानी 101 नंबर पर कॉल करें. इसके साथ ही पड़ोसियों को भी सतर्क कर दें, ताकि वे भी सुरक्षित जगह चले जाएं. घर में अगर फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद है, तो उसका इस्तेमाल करें, लेकिन ध्यान रखें कि आग के बहुत करीब न जाएं. जब तक आग पूरी तरह बुझ न जाए, तब तक सिलेंडर को हिलाने या उठाने की कोशिश बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे विस्फोट का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही आसपास मौजूद माचिस, मोमबत्ती या किसी भी जलने वाली चीज को तुरंत हटा दें.
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आगे से हादसा रोकने के लिए ये सेफ्टी टिप्स अपनाएं

हादसा होने से पहले ही सावधानी बरतना सबसे अच्छा तरीका है. सबसे पहले, गैस सिलेंडर और चूल्हे के बीच हमेशा ISI मार्क वाला रबर ट्यूब इस्तेमाल करें और उसे समय-समय पर बदलते रहें.&amp;nbsp;
खाना बनाने के बाद रेगुलेटर को हमेशा बंद कर दें, इसे कभी खुला न छोड़ें.
रसोई में हवा आने-जाने का रास्ता जरूर रखें, ताकि अगर गैस लीक हो तो वह जमा न हो.&amp;nbsp;
सिलेंडर को हमेशा सीधा रखें और उसे किसी गर्म चीज या आग के पास न रखें.
अगर कभी गैस की गंध महसूस हो, तो तुरंत खिड़की-दरवाजे खोल दें, बिजली का कोई भी स्विच न दबाएं और गैस कंपनी को तुरंत सूचना दें.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 23:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>Fake Beauty Products: हर 4 में 1 को कॉस्मेटिक्स से एलर्जी, 40% को मिला नकली ब्यूटी प्रोडक्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Fake Cosmetics Survey Report India: फेस क्रीम, सनस्क्रीन, लिपस्टिक, शैंपू और दूसरे ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदना आज ज्यादातर लोगों की रोजमर्रा की शॉपिंग का हिस्सा बन चुका है. ऑनलाइन ऐप और वेबसाइट से लेकर कॉस्मेटिक स्टोर और लोकल मार्केट तक, लोगों के पास खरीदारी के कई विकल्प हैं. लेकिन एक नए सर्वे ने ब्यूटी और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स को लेकर चिंता बढ़ा दी है. सर्वे के मुताबिक, पिछले तीन साल में कॉस्मेटिक्स खरीदने वाले 40 फीसदी लोगों को एक या उससे ज्यादा प्रोडक्ट नकली या काउंटरफिट मिले. वहीं, करीब हर चार में से एक व्यक्ति ने कॉस्मेटिक इस्तेमाल करने के बाद एलर्जी होने की बात कही.
यह राष्ट्रीय सर्वे LocalCircles ने किया, जिसमें भारत के 318 जिलों के 23 हजार से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं ने हिस्सा लिया. सर्वे में सामने आया कि 26 फीसदी लोगों को पिछले तीन साल के दौरान एक या उससे ज्यादा कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल के बाद एलर्जिक रिएक्शन हुआ.
ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट के तेजी से बढ़ने के साथ नकली और खराब गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट्स को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. देश के कई राज्यों में नियामक एजेंसियां बिना लाइसेंस, गलत लेबल वाले और नकली कॉस्मेटिक्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं. यह मामला सिर्फ नकली सामान खरीदकर पैसे गंवाने तक सीमित नहीं है. क्रीम, लिपस्टिक, सनस्क्रीन और दूसरे कॉस्मेटिक्स सीधे त्वचा, होंठ, बाल और कई बार आंखों के आसपास लगाए जाते हैं. ऐसे में खराब क्वालिटी या गलत तरीके से बने प्रोडक्ट्स से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी हो सकता है.

40 फीसदी लोगों को मिले नकली कॉस्मेटिक्स
सर्वे में लोगों से पिछले तीन साल के दौरान कॉस्मेटिक्स और ब्यूटी प्रोडक्ट्स से जुड़ी परेशानियों के बारे में पूछा गया. 18 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने कोई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट खरीदा और बाद में पता चला कि वह नकली या काउंटरफिट था.
वहीं, 22 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके साथ दोनों तरह की समस्याएं हुईं. यानी उन्होंने नकली कॉस्मेटिक प्रोडक्ट भी खरीदा और किसी कॉस्मेटिक के इस्तेमाल के बाद एलर्जिक रिएक्शन का भी सामना किया. इन दोनों आंकड़ों को मिलाकर 40 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें पिछले तीन साल में खरीदा गया एक या उससे ज्यादा कॉस्मेटिक नकली मिला. दूसरी तरफ, 26 फीसदी लोगों ने एलर्जी होने की बात कही. करीब आधे लोगों ने बताया कि उन्हें इनमें से कोई समस्या नहीं हुई, जबकि पांच फीसदी लोग इसे लेकर निश्चित नहीं थे. इस सवाल में किसी भी व्यक्ति ने कॉस्मेटिक के कारण गंभीर बीमारी होने की जानकारी नहीं दी.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ज्यादा मिले नकली प्रोडक्ट
सर्वे में यह भी जानने की कोशिश की गई कि जिन कॉस्मेटिक्स को बाद में नकली पाया गया, वे कहां से खरीदे गए थे. इसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ऐप और वेबसाइट सबसे बड़ा सोर्स बनकर सामने आए. सर्वे में शामिल 23 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से ऐसा कॉस्मेटिक खरीदा, जो बाद में नकली या काउंटरफिट निकला. इसके बाद ब्यूटी, कॉस्मेटिक या जनरल स्टोर का नंबर रहा, जहां से 18 फीसदी लोगों ने नकली प्रोडक्ट खरीदने की बात कही. वहीं, 14 फीसदी लोगों ने लोकल दुकानों या बाजार के स्टॉल से ऐसे प्रोडक्ट खरीदने की जानकारी दी.
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट की कुल बिक्री में ऑनलाइन की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है. इसके बावजूद सर्वे में नकली कॉस्मेटिक्स खरीदने की 23 फीसदी शिकायतें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी मिलीं. ऑनलाइन खरीदारी में कई बार यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि प्रोडक्ट का असली निर्माता कौन है या उसे बेचने वाला व्यक्ति या विक्रेता अधिकृत है या नहीं.
नकली कॉस्मेटिक्स से बढ़ सकती है चिंता
नकली कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किए गए इंग्रीडिएंट्स, उन्हें बनाने की प्रक्रिया और क्वालिटी की सही जानकारी नहीं होती. यही वजह है कि ऐसे प्रोडक्ट्स चिंता का विषय बन सकते हैं. हाल ही में भारत में हुई कुछ कार्रवाई ने इस समस्या की गंभीरता को भी दिखाया है. जून में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने मुंबई और भिवंडी में छापेमारी कर 1.52 करोड़ रुपये के अवैध कॉस्मेटिक्स और मैन्युफैक्चरिंग मशीनरी जब्त की थी. अधिकारियों को कई प्रोडक्ट्स पर बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट जैसी जरूरी जानकारी अधूरी या गायब मिली.
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रिपोर्ट में नागपुर में इस्तेमाल की जा रही एक स्किन लाइटनिंग क्रीम का मामला भी सामने आया. जांच में इस प्रोडक्ट में पारा यानी मर्करी की मात्रा कानूनी सीमा से 752 गुना ज्यादा मिलने की बात कही गई. इसके बाद प्रोडक्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया.
एलर्जी भी बड़ी समस्या
सर्वे में 26 फीसदी लोगों ने कॉस्मेटिक के इस्तेमाल के बाद एलर्जिक रिएक्शन की जानकारी दी. हालांकि, सभी एलर्जी के मामले नकली प्रोडक्ट से जुड़े हों, यह जरूरी नहीं है. फिर भी सर्वे में दोनों समस्याओं के बीच काफी समानता देखने को मिली. कॉस्मेटिक इस्तेमाल करने के बाद खुजली, त्वचा लाल होना, जलन, सूजन या रैशेज जैसी समस्याएं एलर्जिक रिएक्शन का संकेत हो सकती हैं. अगर किसी प्रोडक्ट के इस्तेमाल के बाद ऐसी परेशानी हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए. समस्या बनी रहे या ज्यादा गंभीर हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
खरीदने से पहले इन बातों पर दें ध्यान
कॉस्मेटिक खरीदने से पहले उसकी पैकेजिंग और लेबल जरूर जांचें. प्रोडक्ट पर निर्माता का नाम और पता, बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग की जानकारी और एक्सपायरी डेट जैसी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए. अगर कोई जानकारी गायब, बदली हुई या संदिग्ध लगे, तो सावधान हो जाना चाहिए. ऑनलाइन खरीदारी करते समय विक्रेता की जानकारी जांचना भी जरूरी है. बहुत कम कीमत पर मिलने वाले महंगे ब्रांड के प्रोडक्ट्स को लेकर भी सतर्क रहना चाहिए. पैकेज खुलने के बाद उसकी खुशबू, ट ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Delhi NCR Health Study: दिल्ली&amp;NCR में हर 20 में से 1 को 2 गंभीर बीमारियां! स्टडी में बड़ा खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi NCR Max Healthcare Study Report: दिल्ली-एनसीआर में करीब हर 20 में से एक एडल्ट डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन, दोनों से एक साथ जूझ रहा है. एक नए स्टडी में यह बात सामने आई है कि दोनों बीमारियां लोगों में एक साथ उतनी अधिक देखने को मिल रही हैं, जितनी इनके अलग-अलग होने की स्थिति में अनुमानित थी. स्टडी में 56 हजार से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का एनालिसिस किया गया.
मैक्स हेल्थकेयर के क्लिनिकल रिसर्च और प्रिवेंटिव हेल्थ प्रोग्राम विभाग ने यह अध्ययन किया. इसके लिए जनवरी 2021 से दिसंबर 2024 के बीच दिल्ली-एनसीआर के चुनिंदा मैक्स हेल्थकेयर नेटवर्क अस्पतालों में जुटाए गए स्वास्थ्य रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया. इसमें मैक्स हॉस्पिटल साकेत, बीएलके-मैक्स हॉस्पिटल, मैक्स हॉस्पिटल वैशाली, मैक्स मल्टी स्पेशलिटी सेंटर पंचशील पार्क, मैक्स हॉस्पिटल नोएडा और मैक्स हॉस्पिटल द्वारका शामिल थे.
40 की उम्र के बाद तेजी से बढ़ा खतरा
स्टडी के अनुसार, डायबिटीज और हाइपरटेंशन दोनों बीमारियों का एक साथ होना करीब 40 साल की उम्र के बाद तेजी से बढ़ने लगता है. यह आंकड़ा लगभग 58 साल की उम्र तक बढ़ता रहा और इसके बाद धीरे-धीरे स्थिर होने लगा. करीब 70 साल की उम्र तक पहुंचने पर अध्ययन में शामिल लगभग 17 फीसदी लोगों में दोनों बीमारियां पाई गईं.

रिपोर्ट में दोनों बीमारियों के बीच मजबूत संबंध भी सामने आया. डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हाइपरटेंशन होने की संभावना, डायबिटीज न होने वाले लोगों की तुलना में करीब चार गुना अधिक थी. वहीं, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में डायबिटीज होने की संभावना हाइपरटेंशन न होने वाले लोगों की तुलना में करीब 2.5 गुना ज्यादा पाई गई.
लोग इसे हल्के में लेते हैं
मैक्स हेल्थकेयर के सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन डॉ. रोमल टिक्कू के अनुसार, यह समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि यह पूरे एशिया और खासतौर पर दक्षिण एशिया में देखने को मिल रही है. इसके पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ बदलती लाइफस्टाइल भी अहम भूमिका निभाती है. उन्होंने बताया कि उनके पास रोजाना कम उम्र से लेकर बुजुर्गों तक ऐसे मरीज आते हैं, जो डायबिटीज और हाइपरटेंशन से जूझ रहे हैं. बड़ी समस्या यह है कि लोग इन बीमारियों को गंभीरता से नहीं लेते. पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी कई बार नियमित जांच कराने या डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेने से बचते हैं.
सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी भी परेशानी बढ़ा रही है. डायबिटीज और हाइपरटेंशन को जल्दी ठीक करने के दावे, फेड डाइट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सलाह के कारण कई लोग गलत तरीके अपनाने लगते हैं. डॉ. टिक्कू ने वजन कम करने वाली दवाओं, जैसे ओजेम्पिक, का उदाहरण देते हुए कहा कि कई लोग बिना जरूरत इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि जिन लोगों को वास्तव में इलाज की जरूरत है, वे इसे नहीं ले रहे.

मोटापा भी बढ़ा रहा है जोखिम
देश में बढ़ता मोटापा इस चिंता को और गंभीर बना रहा है. हाल के ICMR-INDIAB स्टडी के अनुमान के मुताबिक, भारत में 25 करोड़ से ज्यादा लोग सामान्य मोटापे से प्रभावित हैं, जबकि 35 करोड़ से अधिक लोगों में पेट के आसपास बढ़े फैट यानी एब्डॉमिनल ओबेसिटी की समस्या है.
डॉ. टिक्कू ने चेतावनी दी कि डायबिटीज और हाइपरटेंशन का इलाज न होने पर समय के साथ शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं. इन बीमारियों को सही दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिए नियंत्रित करना जरूरी है. उनके अनुसार, डायबिटीज कंट्रोल में न रहने पर फैटी लिवर और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. वहीं, स्मोकिंग और शराब का सेवन जोखिम को और बढ़ा देता है. इन दोनों बीमारियों का असर दिल और किडनी की कार्यक्षमता पर भी पड़ सकता है. इसलिए सिर्फ बीमारी का पता चलना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे नियमित रूप से कंट्रोल में रखना भी जरूरी है.
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दोनों की एक साथ जांच क्यों जरूरी?
दुनियाभर में डायबिटीज और हाइपरटेंशन का बोझ तेजी से बढ़ रहा है. 2021 में प्रकाशित एक लैंसेट विश्लेषण के मुताबिक, 1990 से 2019 के बीच 30 से 79 साल की उम्र के हाइपरटेंशन मरीजों की संख्या बढ़कर 1.28 अरब हो गई. वहीं, 2024 के एक अन्य विश्लेषण में अनुमान लगाया गया कि 2022 में दुनिया में 82.8 करोड़ वयस्क डायबिटीज के साथ जी रहे थे.
दिल्ली-एनसीआर के इस स्टडी का कहना है कि खासतौर पर 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप में बदलाव की जरूरत है. डायबिटीज और हाइपरटेंशन की जांच अलग-अलग करने के बजाय ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की जांच एक साथ की जानी चाहिए. इससे दोनों बीमारियों का जल्द पता लगाया जा सकता है और समय पर इलाज शुरू हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Spices Getting Clumpy: मसालों को सीलन और गांठों से कैसे बचाएं? जानें 4 सीक्रेट किचन टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ How To Prevent Lumps In Ground Spices: किचन में रखे मसालों को इस्तेमाल करते समय अगर उनमें छोटी-छोटी गांठें दिखाई देने लगी हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, दालचीनी, लहसुन पाउडर या दूसरे बारीक पिसे मसालों में अक्सर यह समस्या देखने को मिलती है. ज्यादातर मामलों में इसकी वजह मसाले का खराब होना नहीं, बल्कि उसमें नमी पहुंचना होता है. हालांकि गांठें पड़ने को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए. अगर मसाले की खुशबू, रंग या स्वाद बदल गया है या उसमें फफूंदी दिखाई दे रही है, तो उसे इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. मसालों में गांठें क्यों पड़ती हैं और इन्हें लंबे समय तक सूखा व सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं.
नमी पहुंचते ही बनने लगती हैं गांठें
मसाले के डिब्बे में थोड़ी सी भी नमी पहुंच जाए तो बारीक पाउडर के कण आपस में चिपकने लगते हैं. किचन में खाना बनाते समय उठने वाली भाप भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है. कई लोग मसाले का डिब्बा खोलकर सीधे गर्म कढ़ाही या उबलते हुए खाने के ऊपर से मसाला डालते हैं. इस दौरान भाप डिब्बे के अंदर पहुंच सकती है और धीरे-धीरे मसाले में गांठें बनने लगती हैं.

बारिश या ज्यादा नमी वाले मौसम में यह समस्या और बढ़ सकती है. तापमान में बदलाव के कारण बनने वाली कंडेनसेशन भी मसालों को प्रभावित कर सकती है. इसलिए मसालों को हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां नमी और भाप कम पहुंचती हो.
क्या गांठें पड़ने का मतलब मसाला खराब हो गया?
सिर्फ गांठें पड़ जाने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि मसाला खराब हो गया है. अगर मसाले की खुशबू और रंग सामान्य है और उसमें फफूंदी या कोई असामान्य बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है, तो कई मामलों में उसे इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन मसाले से अजीब या बासी गंध आने लगे, रंग काफी बदल जाए, स्वाद सामान्य से अलग लगे या उसमें फंगस दिखाई दे, तो उसे फेंक देना बेहतर है. इसी तरह अगर पूरा मसाला नमी की वजह से बहुत ज्यादा सख्त होकर एक ठोस गुठली जैसा बन गया है, तो सावधानी बरतनी चाहिए.
गांठें पड़ने से मसाले को नापना और खाने में बराबर मात्रा में मिलाना मुश्किल हो सकता है. इससे कभी खाने में मसाला कम तो कभी ज्यादा पड़ सकता है. बड़े टुकड़े सीधे खाने में चले जाएं तो स्वाद भी बिगड़ सकता है.
छोटी गांठें हैं तो ऐसे करें ठीक
अगर मसाले में केवल कुछ छोटी गांठें बनी हैं और खराब होने के कोई संकेत नहीं हैं, तो उन्हें आसानी से अलग किया जा सकता है. साफ और पूरी तरह सूखे चम्मच के पिछले हिस्से से गांठों को हल्के हाथ से तोड़ सकते हैं.

ज्यादा गांठें बनने पर मसाले को किसी साफ और सूखी प्लेट या बर्तन में निकालकर महीन छलनी से छाना जा सकता है. इससे बड़े टुकड़े अलग हो जाएंगे और मसाला फिर से बारीक हो सकता है. इसके बाद उसे किसी साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कंटेनर में भर दें. यह ध्यान रखना जरूरी है कि गांठें तोड़ने या मसाला निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाला चम्मच बिल्कुल सूखा हो. हल्की सी नमी भी दोबारा समस्या पैदा कर सकती है.
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कुछ मसालों में ज्यादा होती है गांठ पड़ने की समस्या
बारीक पिसे हुए मसाले नमी जल्दी सोख लेते हैं. इसलिए लहसुन पाउडर, प्याज पाउडर, दालचीनी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और पपरिका जैसे मसालों में गांठें जल्दी बन सकती हैं. कुछ मसालों में प्राकृतिक तेल भी मौजूद होते हैं. जीरा, हल्दी और जायफल जैसे मसाले समय के साथ आपस में चिपक सकते हैं. दूसरी ओर, साबुत मसालों और सूखी जड़ी-बूटियों में आमतौर पर यह समस्या कम देखने को मिलती है, क्योंकि वे बारीक पाउडर की तरह नमी को आसानी से नहीं पकड़ते.
एयरटाइट डिब्बे में ही रखें
मसालों को सुरक्षित रखने का सबसे आसान तरीका है कि उन्हें अच्छी तरह बंद होने वाले एयरटाइट कंटेनर में रखा जाए. ढक्कन ठीक से बंद न होने पर हवा और नमी धीरे-धीरे अंदर पहुंच सकती है. अगर मसाले प्लास्टिक या पेपर पैकेट में रखे हैं और पैकेट बार-बार खुलता है, तो उन्हें एयरटाइट जार में ट्रांसफर करना बेहतर हो सकता है. कंटेनर में मसाला भरने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह पूरी तरह साफ और सूखा हो.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Why Food Makes You Hungry: लजीज खाना देखकर मुंह में क्यों आता है पानी? जानें इसका साइंस</title>
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        <description><![CDATA[ Why Mouth Waters When Seeing Food Science: कभी आपने गौर किया है कि पसंदीदा खाना सामने आते ही या उसकी खुशबू महसूस होते ही मुंह में पानी आने लगता है? कई बार भूख भी ज्यादा नहीं लगी होती, लेकिन बिरयानी, पिज्जा, समोसे या अपनी पसंद की किसी डिश को देखकर अचानक खाने का मन करने लगता है. सिर्फ इतना ही नहीं, कई लोगों के साथ तो खाने की तस्वीर देखकर या उसके बारे में सोचकर भी ऐसा होता है.
यह शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है, जिसके पीछे दिमाग और शरीर के बीच होने वाली खास प्रक्रिया काम करती है. दरअसल, खाना मुंह में जाने से पहले ही हमारा दिमाग शरीर को उसके लिए तैयार करना शुरू कर सकता है. हम किसी चीज को देखते हैं, उसकी खुशबू लेते हैं या उससे जुड़ी पुरानी यादें ताजा होती हैं, तो दिमाग इन संकेतों को समझकर शरीर को बता सकता है कि अब खाने का समय आने वाला है. इसी वजह से स्वादिष्ट खाना सामने आते ही मुंह में पानी यानी लार बनने लगती है.
खाना खाने से पहले ही तैयारी शुरू कर देता है दिमाग
यथार्थ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और ग्रुप डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी डॉ. कुणाल बहरानी के अनुसार, शरीर खाना खाने से पहले ही उसके लिए तैयार होना शुरू कर सकता है. हमारा दिमाग आसपास की चीजों से लगातार जानकारी लेता रहता है. जब हम अपनी पसंद की कोई चीज देखते हैं, उसकी खुशबू महसूस करते हैं या उसके बारे में सोचते हैं, तो ये संकेत नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर सकते हैं. इसके बाद शरीर में लार का उत्पादन बढ़ सकता है और पाचन से जुड़ी दूसरी प्रक्रियाओं की तैयारी शुरू हो सकती है.

सरल शब्दों में कहें तो दिमाग पहले ही समझ लेता है कि हम जल्द ही कुछ खाने वाले हैं. इसी उम्मीद में शरीर खुद को तैयार करने लगता है. यही कारण है कि पहला निवाला मुंह में जाने से पहले ही मुंह में पानी आने लगता है.
क्या है सेफेलिक स्टेफ ऑफ डाइजेशन?
खाना देखकर या उसकी खुशबू से शरीर में होने वाली इस शुरुआती तैयारी को सेफेलिक स्टेफ ऑफ डाइजेशन कहा जाता है. यह पाचन प्रक्रिया का शुरुआती चरण है, जिसमें खाना पेट में पहुंचने से पहले ही शरीर पाचन के लिए तैयार होने लगता है. इस प्रक्रिया को सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं, बल्कि उसे देखना, उसकी खुशबू महसूस करना, उसके बारे में सोचना या उससे जुड़ी पुरानी यादें भी ट्रिगर कर सकती हैं. उदाहरण के लिए, बचपन में दादी या मां के हाथ की बनी किसी पसंदीदा डिश की खुशबू आपको अचानक भूख का एहसास करा सकती है.
इस दौरान दिमाग अलग-अलग संकेतों को समझकर नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है. इसके बाद लार और पाचन से जुड़े कुछ रसों का उत्पादन बढ़ सकता है. यानी पाचन की प्रक्रिया सिर्फ खाना निगलने के बाद ही शुरू नहीं होती, शरीर कई बार उससे पहले ही तैयारी करने लगता है.
लार क्यों जरूरी है?
मुंह में बनने वाली लार सिर्फ पानी नहीं है. यह खाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. लार खाने को गीला और मुलायम बनाने में मदद करती है, जिससे उसे चबाना और निगलना आसान हो जाता है. साथ ही यह पाचन की शुरुआती प्रक्रिया में भी भूमिका निभाती है. इसलिए जब पसंदीदा खाना देखकर मुंह में पानी आता है, तो यह शरीर की कोई बेवजह प्रतिक्रिया नहीं है. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर खाने के लिए तैयार हो रहा है.
सिर्फ भूख की वजह से नहीं आता मुंह में पानी
मुंह में पानी आने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपका पेट पूरी तरह खाली है. कई बार पेट भरा होने के बावजूद पसंदीदा मिठाई, पकवान या किसी खास डिश को देखकर खाने का मन कर सकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भूख और भूख लगने का एहसास सिर्फ शरीर को ऊर्जा की जरूरत पर निर्भर नहीं करता. हमारी यादें, भावनाएं, अनुभव और इंद्रियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं.

किसी खास खाने की खुशबू आपको किसी पुराने अनुभव या जगह की याद दिला सकती है. यही वजह है कि रसोई से आती किसी परिचित डिश की खुशबू अचानक भूख बढ़ा सकती है. दिमाग उस खुशबू को एक संकेत की तरह लेता है और शरीर को खाने के लिए तैयार करने लगता है.
खराब चीज देखकर उल्टा क्यों होता है असर?
दिलचस्प बात यह है कि दिमाग और शरीर का यही सिस्टम बिल्कुल उलटी प्रतिक्रिया भी दे सकता है. जहां स्वादिष्ट खाना देखकर मुंह में पानी आता है, वहीं सड़ा हुआ खाना, तेज बदबू या कोई घिनौनी चीज देखकर अचानक मतली महसूस हो सकती है.
डॉ. कुणाल बहरानी बताते हैं कि अगर कोई गंध, दृश्य या याद हमें घिन महसूस कराती है, तो दिमाग शरीर में बिल्कुल अलग प्रतिक्रिया शुरू कर सकता है. ऐसे में जी मिचलाना, उल्टी जैसा महसूस होना, खाने की इच्छा खत्म हो जाना या गले में उबकाई आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. यह सिर्फ किसी चीज को पसंद या नापसंद करने की बात नहीं है.&amp;nbsp;
सड़ी चीज देखकर क्यों आती है उल्टी?
शरीर के पास ऐसी व्यवस्थाएं होती हैं, जो संभावित रूप से हानिकारक चीजों को खाने से रोकने में मदद करती हैं. अगर कोई चीज सड़ी हुई दिखती है, उससे बहुत खराब गंध आती है या उसे देखकर घिन महसूस होती है, तो दिमाग इसे खतरे के संकेत के रूप में ले सकता है. इसके बाद शरीर खाने से बचने वाली प्रतिक्रिया दे सकता है. भूख कम होना, मतली, ज्यादा लार बनना, उबकाई आना और कुछ मामलों में उल्टी होना भी इसी प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है. यानी शरीर कई बार उस चीज को खाने से पहले ही उससे दूरी बनाने की कोशिश शुरू कर देता है.
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सिर्फ याद से भी हो सकती है ऐसी प्रतिक्रिया
कई बार खराब चीज का सामने होना भी जरूरी नहीं है. किसी खाने से जुड़ा बुरा अनुभव उसकी याद या खुशबू से भी दोबारा मतली पैदा कर सकता है. मान लीजिए किसी व्यक्ति ने कोई खास खाना खाया और उसके बाद वह बीमार पड़ गया. बाद में उसी खाने की खुशबू से भी उसे जी मिचलाने लगे, तो इसके पीछे दिमाग का उस खुशबू को पुराने खराब अनुभव से जोड़ना हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Dhaba Style Chole: ढाबे जैसे छोले घर पर नहीं बनते, ये स्टेप मिस तो नहीं करते आप?</title>
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        <description><![CDATA[ Dhaba Style Chole: घर पर छोले बनाते समय हम मसाले, प्याज, टमाटर और बाकी चीजें तो डाल देते हैं, लेकिन फिर भी उनका स्वाद ढाबे जैसा नहीं आता. छोले का रंग भी हल्का रहता है और उसमें वह खट्टा और हल्का धुएं जैसा स्वाद नहीं मिल पाता. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखें.
छोलों को रातभर यानी कम से कम 8 घंटे पानी में भिगोना चाहिए. कम समय तक भिगोने से छोले अच्छे से नरम नहीं होते. भिगोते समय पानी में थोड़ा नमक और बहुत कम बेकिंग सोडा डाल सकते हैं. इससे छोले जल्दी नरम हो जाते हैं. ढाबे जैसे गहरे रंग के लिए चाय की पोटली काफी काम आती है. छोले उबालते समय थोड़ी चाय पत्ती को कपड़े में बांधकर पानी में डाल सकते हैं. साथ में सूखा आंवला भी डाल सकते हैं. इससे छोलों का रंग गहरा भूरा हो जाता है. छोलों को केवल पानी में उबालने से उनका स्वाद उतना अच्छा नहीं आता. उबालते समय तेजपत्ता, दालचीनी, बड़ी इलायची और थोड़ा नमक डालें. इससे छोले अंदर से भी स्वाद वाले बनते हैं.
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मसाले को अच्छे से पकाना और सही स्वाद लाना
प्याज, टमाटर, अदरक और लहसुन का पेस्ट बनाकर उसे अच्छे से भूनना बहुत जरूरी है. मसाले को तब तक पकाएं, जब तक उसके किनारों से तेल दिखने न लगे. अगर मसाला कच्चा रह गया, तो छोलों का स्वाद भी अच्छा नहीं आएगा. सिर्फ एक पैकेट छोले मसाला डालने से ढाबे जैसा स्वाद नहीं आता. जीरा, धनिया पाउडर, आमचूर, कसूरी मेथी और थोड़ा गरम मसाला भी डाल सकते हैं. इन मसालों से छोलों का स्वाद और अच्छा हो जाता है.
ढाबे के छोले थोड़े खट्टे होते हैं, इसके लिए आमचूर या अनारदाना डाल सकते हैं. इसके अलावा टमाटर से भी खट्टापन आता है, लेकिन केवल टमाटर पर निर्भर रहने से वह स्वाद नहीं आता. इसलिए खटास अपनी पसंद के हिसाब से रखें.
आखिर में दें ये छोटा सा टच
छोले बनने के बाद हाथों से थोड़ी कसूरी मेथी मसलकर डालें. ऊपर से थोड़ा घी या मक्खन और हरा धनिया डाल सकते हैं. इससे छोलों का स्वाद और भी अच्छा हो जाता है और वे देखने में भी स्वादिष्ट लगते हैं. ढाबे जैसे छोले बनाने के लिए किसी खास चीज की जरूरत नहीं है. बस छोले सही समय तक भिगोएं, चाय की पोटली के साथ उबालें, मसाले को अच्छे से पकाएं और आखिर में सही चीजें डालें. इन आसान बातों का ध्यान रखेंगे, तो घर के छोले भी गहरे रंग के और स्वाद में ढाबे जैसे बन सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 19:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Pickle Storage Tips: अचार में पड़ने लगी है फफूंदी, इसे ऐसे बचाएं</title>
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        <description><![CDATA[ How To Prevent Fungus In Pickles: अचार भारतीय खाने का अहम हिस्सा है, लेकिन बरसात के मौसम में इसकी देखभाल थोड़ी मुश्किल हो जाती है. कई बार महीनों से रखा अचार अचानक ऊपर से सफेद या हरे रंग की फफूंदी से ढकने लगता है. ऐसे में लोग अक्सर सोचते हैं कि फफूंदी की ऊपरी परत हटाकर अचार को बचाया जा सकता है. लेकिन अगर अचार में साफ तौर पर फफूंदी दिखाई दे रही है, तो सिर्फ ऊपर की परत हटाकर बाकी अचार खाना सुरक्षित नहीं माना जाता.
दरअसल, अचार में फफूंदी लगने की सबसे बड़ी वजह नमी का पहुंचना है. बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है और हर बार डिब्बा खोलने पर नम हवा अंदर जा सकती है. इसके अलावा गीला चम्मच इस्तेमाल करना, डिब्बे को अच्छी तरह सुखाए बिना अचार भरना या ढक्कन का ढीला होना भी खराब होने की वजह बन सकता है. तापमान में बदलाव से डिब्बे के अंदर नमी जमने की संभावना भी रहती है. अगर अचार में अभी फफूंदी नहीं लगी है, लेकिन आपको लग रहा है कि नमी बढ़ने से यह जल्दी खराब हो सकता है, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर इसे सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है.
सूखा चम्मच इस्तेमाल करना है सबसे जरूरी
अचार निकालते समय हमेशा पूरी तरह सूखे और साफ चम्मच का इस्तेमाल करें. गीले चम्मच की एक-दो बूंद भी अचार के लिए परेशानी पैदा कर सकती है. पानी के साथ बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव पहुंच सकते हैं, जिससे अचार जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. अक्सर लोग चम्मच को धोने के बाद तुरंत अचार में डाल देते हैं. ऐसा करने से बचें. चम्मच को पहले पूरी तरह सुखा लें. यही छोटी सी आदत अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.

अचार के टुकड़ों को तेल में डूबा रहने दें
तेल वाले पारंपरिक अचार में यह देखना जरूरी है कि अचार के टुकड़े तेल की सतह से ऊपर न निकलें. अगर कुछ टुकड़े लगातार तेल से बाहर रहते हैं, तो उन पर हवा और नमी का असर ज्यादा हो सकता है और फफूंदी बनने का खतरा बढ़ सकता है.
इसलिए अचार निकालने के बाद डिब्बे को देखकर सुनिश्चित करें कि बचे हुए टुकड़े तेल से ढके हुए हों. अगर किसी पारंपरिक रेसिपी में तेल संरक्षण का अहम हिस्सा है और समय के साथ उसका स्तर कम हो गया है, तो उसी रेसिपी के अनुसार उचित मात्रा में तेल मिलाने पर विचार किया जा सकता है. अलग-अलग अचार की रेसिपी अलग होती है, इसलिए नमक और तेल की मात्रा मनमाने तरीके से बदलने से बचें.

एयरटाइट कांच के जार में रखें
अचार रखने के लिए साफ और अच्छी तरह सूखा हुआ कांच का जार एक अच्छा विकल्प हो सकता है. कांच नमी को सोखता नहीं है और सही ढक्कन होने पर बाहरी हवा व नमी के संपर्क को कम करने में मदद मिलती है. डिब्बे का ढक्कन हर बार इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह बंद करें. अचार को खुले बर्तन या ढीले ढक्कन वाले कंटेनर में लंबे समय तक न रखें. अगर जार का ढक्कन ठीक से बंद नहीं हो रहा है, तो उसे बदल देना बेहतर है.
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अचार को सही जगह पर रखें
अचार के डिब्बे को गैस स्टोव के ठीक पास या ऐसी जगह न रखें, जहां लगातार गर्मी और तापमान में बदलाव होता रहता हो. इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखना बेहतर हो सकता है. खिड़की के पास रखने से भी बचें, खासतौर पर वहां जहां नमी या सीधी धूप का असर पड़ता हो. खुले हुए अचार, खासकर कम नमक वाले अचार को बरसात के मौसम में फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है.
जार लगभग खाली हो जाए तो बदल दें कंटेनर
अचार धीरे-धीरे खत्म होने पर बड़े जार में काफी खाली जगह बच जाती है. इस खाली हिस्से में हवा रहती है, जो नमी वाली स्थिति में परेशानी बढ़ा सकती है. इसलिए अगर जार में बहुत कम अचार बचा है, तो उसे साफ और पूरी तरह सूखे छोटे एयरटाइट जार में ट्रांसफर किया जा सकता है. इसके साथ ही जार के मुंह पर लगा तेल, मसाला या अचार का रस साफ करना भी जरूरी है. हर बार इस्तेमाल के बाद जार का किनारा साफ रखने और ढक्कन अच्छी तरह बंद करने से सफाई बनी रहती है.
फफूंदी लग जाए तो क्या करें?
अगर अचार की सतह पर सफेद या हरे रंग की फफूंदी, रुई जैसी परत या चिपचिपापन दिखाई दे, तो उसे चखकर जांचने की कोशिश न करें. इसी तरह बदबू, तेल का असामान्य रूप से धुंधला या दूधिया दिखना और अचार के टुकड़ों का जरूरत से ज्यादा मुलायम होकर टूटना भी खराब होने के संकेत हो सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>How Ants Choose The Best Path: फैसले लेने में बेस्ट क्यों मानी जाती हैं चींटियां, इनसे क्या सीखना जरूरी?</title>
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        <description><![CDATA[ How Ants Make Decisions Science And Lessons: फैसले लेना हमेशा आसान नहीं होता. कई विकल्प सामने हों तो सही चुनाव करना और मुश्किल हो जाता है. हम अक्सर ज्यादा सोचते हैं, अलग-अलग संभावनाओं की तुलना करते हैं और फिर भी कई बार गलत फैसला कर बैठते हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि बेहद छोटे दिमाग वाली चींटियां समूह में ऐसे फैसले लेती हैं, जिनसे इंसानों के लिए भी सीख निकलती है. उनके सामूहिक तरीके ने वास्तविक दुनिया में शेड्यूलिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स जैसी समस्याओं को हल करने वाले एल्गोरिदम को भी प्रेरित किया है.
खाने तक पहुंचने का सबसे अच्छा रास्ता कैसे चुनती हैं चींटियां?
चींटियों के सामने भी कई विकल्प होते हैं. जब उन्हें भोजन की तलाश में बाहर निकलना होता है, तो शुरुआत में कई चींटियां अलग-अलग दिशाओं और रास्तों पर जाती हैं. वे एक ही रास्ते पर आंख बंद करके नहीं चलतीं, बल्कि अलग-अलग विकल्प तलाशती हैं. रास्ते में वे जमीन पर फेरोमोन नामक रासायनिक संकेत छोड़ती हैं. बाद में दूसरी चींटियां इन संकेतों का अनुसरण कर सकती हैं. हालांकि ये निशान हमेशा नहीं रहते, बल्कि समय के साथ कमजोर पड़ते जाते हैं. इसलिए जिस रास्ते पर ज्यादा चींटियों का आना-जाना होता है, वहां संकेत भी ज्यादा मजबूत हो जाते हैं. यहीं से शुरू होता है उनका दिलचस्प फैसला लेने का तरीका.

जो रास्ता बेहतर होता है, वह धीरे-धीरे मजबूत होता जाता है
मान लीजिए कई चींटियां भोजन की तलाश में अलग-अलग रास्तों पर निकलती हैं. जिस रास्ते से भोजन जल्दी और आसानी से मिल जाता है, उस रास्ते से चींटियां जल्दी वापस लौटती हैं. वापस आते समय वे उसी रास्ते पर फिर से फेरोमोन छोड़ती हैं. इससे उस रास्ते का संकेत मजबूत हो जाता है. अगली चींटियों के लिए उस रास्ते को पहचानना आसान हो जाता है और वे भी उसी दिशा में जाने लगती हैं. जैसे-जैसे ज्यादा चींटियां उस रास्ते का इस्तेमाल करती हैं, संकेत और मजबूत होता जाता है.
दूसरी तरफ, लंबे या कम उपयोगी रास्तों पर चींटियों की आवाजाही कम रहती है. वहां मौजूद फेरोमोन समय के साथ कमजोर होकर खत्म होने लगता है. इस तरह धीरे-धीरे सबसे छोटा या ज्यादा प्रभावी रास्ता मजबूत होता जाता है और बाकी विकल्प पीछे छूट जाते हैं.

किसी एक चींटी के पास नहीं होता पूरा नियंत्रण
चींटियों के फैसले की सबसे खास बात यह है कि पूरी कॉलोनी को निर्देश देने वाला कोई एक चींटी नेता हर रास्ता तय नहीं करता. हर चींटी के पास सीमित जानकारी होती है और वह अपने आसपास के संकेतों के आधार पर प्रतिक्रिया देती है. फिर भी पूरे समूह का नतीजा काफी प्रभावी हो सकता है. यही बात इंसानों के लिए भी एक बड़ी सीख है. हर जटिल समस्या को हल करने के लिए जरूरी नहीं कि किसी एक व्यक्ति के पास सारी जानकारी हो. कई बार अलग-अलग लोगों की छोटी-छोटी जानकारियां और अनुभव मिलकर बेहतर समाधान तक पहुंचा सकते हैं.
पहले विकल्प तलाशें, फिर सबसे बेहतर पर ध्यान दें
चींटियों का तरीका यह भी सिखाता है कि फैसला लेने से पहले विकल्पों को तलाशना जरूरी है. अगर शुरुआत में ही किसी एक विकल्प को सबसे अच्छा मान लिया जाए, तो बेहतर अवसर छूट सकते हैं. चींटियां भोजन की तलाश में शुरुआत में अलग-अलग रास्तों की खोज करती हैं. इसके बाद अनुभव के आधार पर बेहतर रास्ता मजबूत होता जाता है. इंसान भी किसी बड़े फैसले में पहले उपलब्ध विकल्पों को समझ सकता है, उनकी तुलना कर सकता है और फिर मिलने वाले नतीजों के आधार पर अपना चुनाव कर सकता है.
इसका मतलब यह नहीं कि हर फैसले में अनगिनत विकल्पों पर समय खर्च किया जाए. ज्यादा विकल्प कई बार उलझन भी बढ़ा देते हैं. इसलिए जरूरी विकल्पों को तलाशने के बाद मिले संकेतों और नतीजों के आधार पर आगे बढ़ना अधिक व्यावहारिक हो सकता है.
अच्छे नतीजे मिलने पर उसी दिशा को मजबूत करें
चींटियों के व्यवहार से यह भी सीख मिलती है कि किसी तरीका के लगातार अच्छे परिणाम देने पर उसे पहचानना चाहिए. केवल नया होने की वजह से बार-बार दिशा बदलना हमेशा फायदेमंद नहीं होता. अगर किसी काम का तरीका बार-बार अच्छे नतीजे दे रहा है, समय बचा रहा है और लक्ष्य तक आसानी से पहुंचा रहा है, तो उस अनुभव को नजरअंदाज करने के बजाय उसे मजबूत किया जा सकता है. हालांकि परिस्थितियां बदलने पर नए विकल्प तलाशना भी जरूरी है. यही संतुलन बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है.
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हर संकेत को हमेशा के लिए सही न मानें
चींटियों के रास्ते पर बने रासायनिक संकेत समय के साथ कमजोर हो जाते हैं. यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुराने संकेत हमेशा सही नहीं हो सकते. अगर किसी रास्ते पर अब पहले जैसा फायदा नहीं मिल रहा, तो उसका प्रभाव धीरे-धीरे कम हो सकता है और दूसरे विकल्पों को मौका मिलता है. इंसानों के लिए भी यह एक दिलचस्प सीख है. कोई फैसला या तरीका पहले सफल रहा हो, इसका मतलब यह नहीं कि वह हर बदलती परिस्थिति में हमेशा सही रहेगा. पुराने अनुभवों से सीखना जरूरी है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा परखना भी उतना ही जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 03:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>How To Make Makhana Crispy Again: मखाने की सीलन होगी 5 मिनट में गायब! जानें कुरकुरा बनाने का तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/how-to-make-makhana-crispy-again-मखाने-की-सीलन-होगी-5-मिनट-में-गायब-जानें-कुरकुरा-बनाने-का-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ How To Make Soggy Makhana Crispy Again: मखाना हेल्दी स्नैक के तौर पर काफी पसंद किया जाता है, लेकिन खुला रखने के कुछ समय बाद ही इसकी सबसे बड़ी समस्या सामने आ जाती है. कुरकुरे मखाने नमी खींचकर नरम पड़ जाते हैं और उनका स्वाद भी पहले जैसा नहीं लगता. खासकर बरसात या ज्यादा नमी वाले मौसम में यह परेशानी जल्दी हो सकती है. अच्छी बात यह है कि अगर मखाने में सिर्फ नमी आई है और वे खराब होने के संकेत नहीं दिखा रहे हैं, तो उन्हें दोबारा भूनकर कुरकुरा बनाया जा सकता है.
सबसे पहले जांच लें&amp;nbsp;
अगर मखाना सिर्फ नमी की वजह से नरम हुआ है और उसमें अजीब गंध, फफूंदी या असामान्य रंग दिखाई नहीं दे रहा है, तो उसे दोबारा कुरकुरा किया जा सकता है. लेकिन अगर मखाने से खराब या बासी गंध आ रही है, उस पर फंगस दिखाई दे रही है या स्वाद बहुत ज्यादा बदल गया है, तो उसे खाने से बचना बेहतर है. सिर्फ कुरकुरापन खत्म होने और खराब होने में अंतर समझना जरूरी है. कई बार एयरटाइट डिब्बा ठीक से बंद न होने या लंबे समय तक खुला रहने से मखाना नमी सोख लेता है.
कड़ाही को पहले हल्का गर्म करें
नरम पड़े मखाने को दोबारा कुरकुरा करने के लिए भारी तले वाली कड़ाही या पैन का इस्तेमाल करें. पहले खाली पैन को मध्यम से धीमी आंच पर करीब एक-दो मिनट हल्का गर्म कर लें. तेज आंच पर मखाना जल्दी जल सकता है, जबकि अंदर मौजूद नमी पूरी तरह निकल नहीं पाती. इसलिए धीमी या मध्यम-धीमी आंच बेहतर रहती है. जब पैन हल्का गर्म हो जाए, तब उसमें मखाना डालें.
5 से 7 मिनट तक ड्राई रोस्ट करें
मखाने को बिना पानी डाले और जरूरत न हो तो बिना घी या तेल के सूखा भूनें. उन्हें लगातार चलाते या हल्के हाथ से हिलाते रहें, ताकि हर तरफ से समान गर्मी मिल सके. आमतौर पर कुछ मिनट की ड्राई रोस्टिंग से नमी निकलने लगती है और मखाना दोबारा कुरकुरा हो सकता है. इसे एक जगह छोड़कर न रखें, क्योंकि पैन के संपर्क में रहने वाला हिस्सा जल्दी जल सकता है. हर कुछ सेकंड में मखाने को चलाते रहना बेहतर है. अगर आप पहले से भुने हुए मखाने को दोबारा क्रिस्प कर रहे हैं, तो बहुत ज्यादा देर तक भूनने की जरूरत नहीं होती. लक्ष्य सिर्फ उनमें पहुंची नमी को निकालना है, न कि उन्हें दोबारा ज्यादा पकाना.

ऐसे पहचानें कि मखाना कुरकुरा हो गया है
रोस्टिंग के दौरान एक-दो मखाने निकालकर थोड़ा ठंडा होने दें और फिर चखकर देखें. अगर वह आसानी से टूट रहा है और कुरकुरा महसूस हो रहा है, तो मखाना तैयार है. मखाने को पैन से निकालने के तुरंत बाद उसका सही टेक्सचर जांचना कई बार मुश्किल हो सकता है, क्योंकि गर्म होने पर बनावट अलग महसूस हो सकती है. इसलिए एक-दो मिनट ठंडा होने के बाद चखना बेहतर रहता है.
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भूनने के बाद गर्म मखाने को डिब्बे में न भरें
यह गलती मखाने को दोबारा नरम कर सकती है. भूनने के बाद गर्म मखाने को तुरंत एयरटाइट कंटेनर में बंद करने से अंदर भाप फंस सकती है. बाद में यही भाप नमी बनकर मखाने की कुरकुराहट कम कर सकती है. इसलिए भुने हुए मखाने को किसी प्लेट या ट्रे में फैलाकर कमरे के तापमान तक ठंडा होने दें. उन्हें एक जगह गर्म-गर्म ढेर लगाकर रखने से भी भाप फंस सकती है. पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही स्टोर करें.

ज्यादा घी या तेल डालने से बचें
मखाने को भूनते समय चाहें तो थोड़ी मात्रा में घी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा घी या तेल डालने से बचना चाहिए. बहुत अधिक फैट मखाने को चिकना कर सकता है और सही तरह से ड्राई होने में परेशानी पैदा कर सकता है. अगर मखाना पहले से ही नरम हो चुका है, तो उसे दोबारा कुरकुरा करने के लिए ड्राई रोस्टिंग सबसे आसान तरीका है. स्वाद के लिए बाद में जरूरत के अनुसार हल्का घी और सूखे मसाले मिलाए जा सकते हैं.
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>15 अगस्त को राशि के हिसाब से पहनें ये रंग, तिरंगे के साथ खास लगेगा आपका Independence Day Look</title>
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        <description><![CDATA[ Independence Day 2026: 15 अगस्त के लिए आउटफिट चुनना इस बार सिर्फ सफेद कुर्ते या तिरंगे के दुपट्टे तक सीमित नहीं है. Gen-Z अपने लुक में देशभक्ति के साथ स्टाइल, पर्सनैलिटी और सोशल मीडिया अपील भी चाहता है. कॉलेज का कार्यक्रम हो, ऑफिस सेलिब्रेशन या दोस्तों के साथ फोटोशूट, हर कोई ऐसा लुक चाहता है जो थीम से जुड़ा भी हो और कॉपी-पेस्ट जैसा भी न लगे.
इस बार आप अपने Independence Day Look को राशि के शुभ रंग से पर्सनल टच दे सकते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि पूरा आउटफिट उसी रंग का होना चाहिए. राशि का रंग जैकेट, स्कार्फ, जूती, बैग, घड़ी, ब्रेसलेट या किसी छोटी-सी एक्सेसरी में भी शामिल किया जा सकता है.
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15 अगस्त 2026 को शनिवार है. ज्योतिष में शनिवार पर शनि का प्रभाव माना जाता है, जबकि स्वतंत्रता दिवस सूर्य से जुड़े आत्मसम्मान, नेतृत्व और राष्ट्र गौरव का प्रतीक है. ऐसे में राशि के अनुसार रंग चुनकर आप अपने लुक को थोड़ा अलग और अर्थपूर्ण बना सकते हैं.
मेष राशि: केसरिया और लाल
मेष राशि के स्वामी मंगल हैं. इस राशि के लोगों पर लाल और केसरिया रंग खूब जंचते हैं. 15 अगस्त को सफेद टी-शर्ट या कुर्ते के साथ केसरिया ओवरशर्ट पहन सकते हैं. लड़कियां लाल या केसरिया दुपट्टा, स्लिंग बैग अथवा इयररिंग्स चुन सकती हैं. पूरा लाल आउटफिट पहनने के बजाय इस रंग को हाईलाइट की तरह इस्तेमाल करें. इससे लुक बोल्ड रहेगा, लेकिन तिरंगे की थीम भी नहीं दबेगी.
वृषभ राशि: सफेद और पेस्टल ग्रीन
शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ राशि को एलिगेंट और क्लीन लुक ज्यादा सूट करता है. आपके लिए सफेद, क्रीम और पेस्टल ग्रीन अच्छे विकल्प हैं. ऑफ-व्हाइट चिकनकारी कुर्ता, पेस्टल ग्रीन दुपट्टा या सफेद शर्ट के साथ हरे स्नीकर्स ट्राई किए जा सकते हैं. यह कॉम्बिनेशन मिनिमल होने के साथ कैमरे में भी काफी रिफाइंड दिखाई देगा.
मिथुन राशि: हरा
मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और इसका प्रमुख शुभ रंग हरा माना जाता है. आप ऑलिव ग्रीन कार्गो के साथ सफेद टी-शर्ट या हरे प्रिंट वाली शर्ट पहन सकते हैं. लड़कियां सफेद कुर्ती के साथ ग्रीन पलाजो या स्कार्फ चुन सकती हैं. अगर सिंपल लुक पसंद है तो हरे रंग का फोन कवर, ब्रेसलेट या बैग भी आपके आउटफिट में सही मात्रा में रंग जोड़ देगा.
कर्क राशि: सफेद और सिल्वर
चंद्रमा की राशि कर्क के लिए सफेद, मोती और सिल्वर टोन खास माने जाते हैं. स्वतंत्रता दिवस पर व्हाइट कुर्ता, कॉटन साड़ी या इंडो-वेस्टर्न ड्रेस चुनें. इसके साथ सिल्वर ज्वेलरी या मोजड़ी लुक को पूरा कर सकती है. सफेद आउटफिट में छोटा-सा तिरंगा ब्रोच लगाएं. ऐसा लुक बिना ज्यादा मेहनत के शालीन और आकर्षक लगेगा.
सिंह राशि: नारंगी और गोल्डन
सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं. इसलिए नारंगी, केसरिया और गोल्डन रंग आपके आत्मविश्वास को सबसे अच्छी तरह सामने लाते हैं. सफेद कुर्ते के ऊपर केसरिया नेहरू जैकेट एक मजबूत विकल्प है. लड़कियां नारंगी साड़ी, गोल्डन झुमके या केसरिया श्रग चुन सकती हैं. आपका लुक थोड़ा स्टेटमेंट वाला हो सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा चमकीले कपड़ों और एक्सेसरीज को एक साथ पहनने से बचें.
कन्या राशि: ऑलिव और आइवरी
कन्या राशि पर भी बुध का स्वामित्व है, लेकिन इस राशि पर सॉफ्ट और अर्थी शेड्स ज्यादा अच्छे लगते हैं. ऑलिव ग्रीन, आइवरी या बेज रंग चुनें. सफेद शर्ट के साथ ऑलिव पैंट अथवा आइवरी कुर्ती के साथ हरा दुपट्टा अच्छा लगेगा. क्लीन हेयरस्टाइल, छोटे इयररिंग्स और न्यूट्रल फुटवियर के साथ आपको एक शानदार &amp;lsquo;quiet luxury&amp;rsquo; लुक मिल सकता है.
तुला राशि: पेस्टल पिंक और सफेद
शुक्र की राशि तुला के लिए संतुलित और एस्थेटिक लुक सबसे बेहतर रहेगा. पेस्टल पिंक को सफेद और हरे रंग के साथ पेयर करें. लड़कियां पेस्टल पिंक कुर्ती के साथ सफेद पलाजो और हरा दुपट्टा कैरी कर सकती हैं. लड़के सफेद शर्ट के साथ हल्का गुलाबी जैकेट या पॉकेट स्क्वायर चुन सकते हैं. यह कॉम्बिनेशन ट्रेडिशनल थीम में Gen-Z वाला सॉफ्ट और फ्रेश टच देगा.
वृश्चिक राशि: मैरून और केसरिया
वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं. आपके लिए मैरून, गहरा लाल और केसरिया शुभ माने जाते हैं. सफेद आउटफिट के साथ मैरून जैकेट, वेस्टकोट या दुपट्टा पहनें. थोड़ा एड्जी लुक चाहिए तो मैरून शर्ट के साथ ऑफ-व्हाइट ट्राउजर ट्राई करें. तिरंगे का छोटा ब्रोच इस गहरे रंग को Independence Day की थीम से जोड़ देगा.
धनु राशि: पीला और केसरिया
गुरु की राशि धनु के लिए पीला और केसरिया रंग बेहतर माने जाते हैं. मस्टर्ड कुर्ता, पीली शर्ट या केसरिया स्टोल आपको उत्साह से भरा लुक देगा. लड़कियां मस्टर्ड कुर्ती के साथ सफेद बॉटम और हरी चूड़ियां पहन सकती हैं. यह कॉम्बिनेशन रंगीन जरूर होगा, लेकिन सही शेड चुनने पर बिल्कुल ओवर नहीं लगेगा.
मकर राशि: नेवी ब्लू
मकर राशि के स्वामी शनि हैं. आपके लिए नेवी ब्लू, इंडिगो और गहरे रंग खास माने जाते हैं. 15 अगस्त के लुक में अशोक चक्र का नीला रंग शामिल करना एक अच्छा विकल्प है. नेवी ब्लू जैकेट को सफेद कुर्ते के साथ पहनें. इंडिगो प्रिंट वाली ड्रेस या साड़ी भी चुनी जा सकती है. यह रंग तिरंगे की थीम से जुड़ते हुए आपको भीड़ से अलग दिखाएगा.
कुंभ राशि: इलेक्ट्रिक ब्लू
कुंभ राशि के लोग अक्सर अपने लुक में कुछ नया पसंद करते हैं. आपके लिए इलेक्ट्रिक ब्लू या स्काई ब्लू बेहतर रहेगा. ब्लू डेनिम जैकेट को सफेद कुर्ते के साथ स्टाइल कर सकते हैं. लड़कियां स्काई ब्लू कॉटन ड्रेस के साथ तिरंगे रंग की छोटी एक्सेसरी चुनें. ट्रेडिशनल कपड़े पसंद न हों तो सफेद टी-शर्ट, ब्लू डेनिम और केसरिया बैंडना से स्मार्ट फ्यूजन लुक तैयार हो सकता है.
मीन राशि: सी-ग्रीन और हल्का पीला
गुरु की राशि मीन के लिए सी-ग्रीन, हल्का पीला और क्रीम रंग शुभ माने जाते हैं. ये शेड्स सॉफ्ट, फ्रेश और कैमरा-फ्रेंडली भी होते हैं. सी-ग्रीन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Paint Bubbling On Walls: दीवार का पेंट फूलकर बन रहे हैं बुलबुले? तुरंत अपनाएं ये आसान उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Paint Bubbles On Wall: घर की दीवार पर नया या पुराना पेंट अचानक जगह-जगह से फूलने लगे और उसके नीचे छोटे-छोटे बुलबुले दिखाई दें, तो इसे केवल पेंट की खराबी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार इसके पीछे दीवार में नमी, पानी का रिसाव या पेंट करने से पहले सतह की सही तैयारी न होना जैसी समस्याएं होती हैं. अगर समय रहते कारण का पता लगाकर जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो पेंट उखड़ सकता है और दीवार की मरम्मत का खर्च भी बढ़ सकता है.
पेंट के नीचे बनने वाले बुलबुले छोटे गोल निशान या उभरे हुए हिस्सों के रूप में दिखाई दे सकते हैं. कुछ जगहों पर पेंट दीवार से अलग होता हुआ भी नजर आता है. यह समस्या दीवारों के साथ-साथ छत पर भी हो सकती है.
सबसे पहले बुलबुले बनने की वजह पता करें
बिना वजह जाने सीधे दोबारा पेंट करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. सबसे पहले देखें कि प्रभावित दीवार पर नमी तो नहीं है. अगर बुलबुले वाली जगह के पास पानी की पाइपलाइन है, बाथरूम दूसरी तरफ है या बारिश के दौरान उस हिस्से में सीलन आती है, तो नमी इसकी बड़ी वजह हो सकती है.

दीवार के अंदर से आने वाली नमी पेंट और सतह के बीच पहुंच जाती है. पानी वहां फंसने के बाद पेंट की पकड़ कमजोर होने लगती है और सतह फूलकर बुलबुले जैसी दिखने लगती है. किचन और बाथरूम जैसी ज्यादा नमी वाली जगहों पर यह समस्या अधिक देखने को मिल सकती है.
पानी का रिसाव है तो पहले उसे ठीक कराएं
अगर पेंट के नीचे बुलबुले बनने की वजह लीकेज है, तो सिर्फ खराब पेंट हटाकर दोबारा रंग कर देना काफी नहीं होगा. पहले पानी के स्रोत को बंद करना जरूरी है. पाइप से रिसाव, छत से पानी टपकना या बाहरी दीवार से बारिश का पानी अंदर आना, इन सभी कारणों की जांच कराएं. लीकेज ठीक होने के बाद भी तुरंत पेंट न करें. दीवार के अंदर मौजूद नमी को पूरी तरह सूखने का समय दें. गीली या नम सतह पर दोबारा पेंट करने से कुछ समय बाद वही समस्या फिर सामने आ सकती है.
खराब और उभरे हुए पेंट को सावधानी से हटाएं
जब दीवार पूरी तरह सूख जाए और समस्या की वजह दूर हो जाए, तब उभरे हुए और ढीले पेंट को हटाया जा सकता है. इसके लिए स्क्रेपर या पुट्टी नाइफ की मदद से केवल खराब हिस्से को सावधानी से निकालें. जो पेंट अभी भी दीवार पर मजबूती से चिपका हुआ है, उसे जबरन हटाने की जरूरत नहीं होती. ढीला पेंट हटाने के बाद सतह ऊबड़-खाबड़ दिखाई दे सकती है. ऐसी स्थिति में सैंडपेपर से उस हिस्से को हल्के हाथ से घिसकर बराबर किया जा सकता है. इससे नई कोटिंग को बेहतर सतह मिलती है.

दोबारा पेंट करने से पहले दीवार को साफ करें
कई बार पेंट के नीचे धूल, ग्रीस या फफूंदी होने के कारण भी उसकी पकड़ कमजोर पड़ सकती है. इसलिए खराब पेंट हटाने के बाद सतह को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. अगर दीवार पर फंगस या फफूंदी दिखाई दे रही है, तो उसे पहले पूरी तरह साफ करें और सतह को दोबारा सूखने दें. पेंट करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि दीवार पर धूल या नमी न बची हो. सतह जितनी साफ और सूखी होगी, नए पेंट के चिपकने की संभावना उतनी बेहतर होगी.
प्राइमर लगाना न भूलें
सतह की तैयारी के बाद सीधे पेंट करने के बजाय जरूरत के अनुसार सही प्राइमर लगाना मददगार हो सकता है. प्राइमर दीवार और पेंट के बीच एक बेस तैयार करता है और सतह को अधिक समान बनाने में मदद करता है. प्राइमर बहुत मोटी परत में लगाने के बजाय उसे बराबर तरीके से लगाएं. इसे अच्छी तरह सूखने दें और इसके बाद ही पेंट करें. अगर दीवार में पहले नमी की समस्या रही है, तो उसके लिए उपयुक्त प्राइमर और अन्य ट्रीटमेंट का चुनाव करना जरूरी है.
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पेंट लगाते समय ये गलतियां न करें
कई बार पेंट करने के तरीके की वजह से भी छोटे एयर बबल्स बन सकते हैं. बहुत मोटी कोटिंग लगाने, जरूरत से ज्यादा तेजी से रोलर चलाने या गलत रोलर इस्तेमाल करने से पेंट की सतह समान नहीं बनती. इसलिए पेंट को जरूरत के अनुसार तैयार करें और एक समान दबाव के साथ रोलर चलाएं. बहुत मोटी परत लगाने के बजाय पतली और समान कोटिंग करना बेहतर रहता है. एक कोट पूरी तरह सूखने के बाद ही अगली कोट लगाएं.
तेज धूप और ज्यादा गर्मी में सावधानी रखें
बाहरी दीवारों पर सीधी धूप और ज्यादा गर्मी भी पेंट की सतह को प्रभावित कर सकती है. बहुत तेज गर्मी में पेंट तेजी से सूख सकता है, जिससे उसकी सतह के नीचे हवा फंसने की संभावना बढ़ सकती है. इसलिए बाहरी दीवार पर पेंट करते समय मौसम और निर्माता की सलाह का ध्यान रखें.
घर में हलचल या दरारों को भी नजरअंदाज न करें
पुरानी इमारतों में समय के साथ दीवारों में हल्की दरारें आ सकती हैं. अगर दीवार की सतह में लगातार हलचल हो रही है या दरारें बढ़ रही हैं, तो पेंट पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे मामलों में केवल पेंट की मरम्मत करने के बजाय पहले दरार या दूसरी मूल समस्या को ठीक कराना जरूरी है.
इसे भी पढें:&amp;nbsp;Budget Family Trip: फैमिली ट्रिप प्लान कर रहे हैं? ये हैं कम बजट वाली शानदार डेस्टिनेशन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Amrit Udyan Opening: आम लोगों के लिए खुल रहा अमृत उद्यान, जानें टाइमिंग से लेकर टिकट तक की डिटेल्स</title>
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        <description><![CDATA[ गुलाब की तमाम किस्मों समेत तरह-तरह के फूलों का दीदार करने के शौकीन हैं तो आपके लिए गुड न्यूज है. दरअसल, राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम लोगों के लिए खुलने वाला है, जिसका ऐलान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार (14 अगस्त) को किया. आइए जानते हैं कि अमृत उद्यान कब से कब तक खुलेगा? इसकी टाइमिंग क्या रहेगी और टिकट आदि की बुकिंग कैसे होगी?
कब से कब तक खुलेगा अमृत उद्यान?
जानकारी के मुताबिक, आम लोगों के लिए अमृत उद्यान 16 अगस्त 2026 से 15 सितंबर 2026 तक खुलेगा. इसे सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक देखा जा सकेगा. हालांकि, लास्ट एंट्री की टाइमिंग शाम 5 बजे रखी गई है. वहीं, हर सोमवार को यह उद्यान मेंटिनेंस की वजह से बंद रहेगा.
किस गेट से मिलेगी एंट्री?
बता दें कि अमृत उद्यान में एंट्री के लिए नॉर्थ एवेन्यू रोड स्थित राष्ट्रपति भवन के गेट नंबर 35 पर पहुंचना होगा. इस उद्यान को देखने के लिए राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट visit.rashtrapatibhavan.gov.in पर ऑनलाइन टिकट बुक करना होगा. हालांकि, इस टिकट के लिए कोई भी चार्ज नहीं देना होगा.
किसी भी दिन के बुकिंग स्लॉट उससे एक दिन पहले सुबह 10 बजे बंद हो जाएंगे. यानी अगर आप 16 अगस्त को अमृत उद्यान देखने जाना चाहते हैं तो आपको 15 अगस्त सुबह 10 बजे से पहले बुकिंग करनी होगी. गौर करने वाली बात यह है कि अमृत उद्यान देखने के लिए किसी भी तरह की ऑन-स्पॉट बुकिंग या ऑफलाइन बुकिंग उपलब्ध नहीं है.
विजिट के दौरान मिलेंगी ये सुविधाएं
अगर आप अमृत उद्यान देखने जा रहे हैं तो आपको कई तरह की सुविधाएं भी मिलेंगी. बता दें कि विजिटर्स की सहूलियत के लिए पीने के पानी के स्टॉल्स, फर्स्ट एड स्पॉर्ट्स, रेन शेल्टर और रेस्टरूम की व्यवस्था पूरे रूट पर की गई है. इसके अलावा विजिटर्स की सुविधा के लिए केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर शटल बस सर्विस का इंतजाम किया गया है.
इस बस सर्विस पर &#039;शटल फॉर अमृत उद्यान&#039; का बैनर लगा होगा. यह शटल बस सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक हर 30 मिनट पर केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से अमृत उद्यान के एंट्री पॉइंट के फेरे लगाएगी. फिलहाल, यह जानकारी नहीं है कि यह बस सर्विस फ्री मिलेगी या नहीं.
ये भी पढ़ें: 15 अगस्त पर दिल्ली की ये जगहें जरूर देखें, मिलेगा देशभक्ति का एहसास ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 15 Aug 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>15 अगस्त पर दिल्ली की ये जगहें जरूर देखें, मिलेगा देशभक्ति का एहसास</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/15-अगस्त-पर-दिल्ली-की-ये-जगहें-जरूर-देखें-मिलेगा-देशभक्ति-का-एहसास</link>
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        <description><![CDATA[ Places to visit on 15th august: 15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए खास होता है. अगर आप दिल्ली में हैं तो इस दिन देश की आजादी से जुड़ी खास जगहों पर जा सकते हैं. दिल्ली में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जाकर आपको देश की आजादी और शहीदों के बारे में जानने का मौका मिलेगा. आइए जानते हैं स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली की किन जगहों पर जाना चाहिए.
लाल किला
15 अगस्त 1947 को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले के लाहौरी गेट से तिरंगा फहराया था. तभी से हर साल स्वतंत्रता दिवस पर यहां यह परंपरा चली आ रही है. हर साल प्रधानमंत्री यहां झंडा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं.
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राजघाट
महात्मा गांधी की समाधि राजघाट में है. यह यमुना नदी के किनारे स्थित है. यहां काले संगमरमर के चबूतरे पर &quot;हे राम&quot; लिखा हुआ है. यह गांधीजी के आखिरी शब्दों की याद दिलाता है. यह जगह हरे-भरे पेड़ों और पौधों से घिरी हुई है. यहां शांति का माहौल रहता है.
इंडिया गेट
युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में बना इंडिया गेट दिल्ली की सबसे मशहूर जगहों में से एक है. इंडिया गेट 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए जवानों की याद में बनाई गई अमर जवान ज्योति का भी स्थान रहा है. अब अमर जवान ज्योति को नेशनल वॉर मेमोरियल में रखा गया है.
नेशनल वॉर मेमोरियल
इंडिया गेट से करीब 750 मीटर दूर नेशनल वॉर मेमोरियल बना हुआ है. यह करीब 40 एकड़ में फैला है. यहां भारत-पाकिस्तान, भारत-चीन और कारगिल युद्ध समेत कई युद्धों में शहीद हुए 25,942 सैनिकों के नाम 16 दीवारों पर लिखे गए हैं.
प्रधानमंत्री संग्रहालय
तीन मूर्ति भवन में प्रधानमंत्री संग्रहालय बना हुआ है. यहां भारत के सभी प्रधानमंत्रियों के काम के बारे में बताया गया है. संग्रहालय में नई तकनीक, होलोग्राम और स्क्रीन की मदद से आजादी के बाद भारत के सफर को दिखाया गया है.
इन जगहों तक पहुंचने के लिए मेट्रो रूट
दिल्ली मेट्रो इन सभी जगहों तक जाने में काफी मदद करती है. लाल किला और चांदनी चौक वायलेट और यलो लाइन से जुड़े हैं. राजघाट के लिए दिल्ली गेट मेट्रो स्टेशन पास है.
इंडिया गेट, नेशनल वॉर मेमोरियल और प्रधानमंत्री संग्रहालय जाने के लिए केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से जाना आसान है. वहां से बाकी जगहों तक ऑटो या पैदल जा सकते हैं.
समय और टिकट का ध्यान रखें
15 अगस्त के आसपास इन सभी जगहों पर सुरक्षा काफी बढ़ा दी जाती है. इसलिए घर से जल्दी निकलना बेहतर रहेगा.
लाल किले के 15 अगस्त वाले कार्यक्रम की टिकट, बुकिंग की तारीख और आने का समय हर साल बदल सकता है. इसलिए जाने से पहले आधिकारिक आमंत्रण पोर्टल पर दी गई नई जानकारी जरूर देख लें.
राजघाट, इंडिया गेट और नेशनल वॉर मेमोरियल जैसी जगहों पर सामान्य दिनों में जाने के लिए टिकट नहीं लगता. लेकिन 15 अगस्त के आसपास सुरक्षा जांच ज्यादा हो सकती है. इसलिए बैग और पानी की बोतल जैसी चीजें साथ ले जाने से पहले नियम जरूर देख लें.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Window Weatherstripping Tips: खिड़की के किनारों से रिस रहा है पानी? 5 मिनट में ऐसे करें बंद</title>
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        <description><![CDATA[ Rainwater Coming Through Window: बारिश के मौसम में तेज हवा और भारी बारिश के साथ घर की खिड़कियों से पानी अंदर आने की समस्या आम हो जाती है. कई बार खिड़की के किनारों से हल्का-हल्का पानी रिसने लगता है, लेकिन लोग इसे छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही पानी धीरे-धीरे फर्श, दीवार, खिड़की के फ्रेम और आसपास के सामान को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर आपके घर की खिड़की से भी बारिश का पानी अंदर आ रहा है, तो फर्श खराब होने से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच कर लेनी चाहिए.
खिड़कियों से पानी आने के पीछे अक्सर छोटी-छोटी कमियां जिम्मेदार होती हैं. जैसे सीलेंट या कॉर्किंग का टूट जाना, वेदर स्ट्रिपिंग का घिस जाना, खिड़की के फ्रेम में गैप होना या पानी की निकासी ठीक से न होना. तेज बारिश के दौरान इन छोटी दरारों से पानी घर के अंदर पहुंच सकता है.
खिड़की के आसपास कॉर्किंग जरूर जांचें
सबसे पहले खिड़की के बाहरी किनारों को ध्यान से देखें. खिड़की के फ्रेम के आसपास लगी कॉर्किंग या सीलेंट में दरार पड़ गई है, वह सूखकर टूटने लगी है या फ्रेम से निकल रही है, तो वहां से बारिश का पानी अंदर आ सकता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ ऊपर से नया सीलेंट लगाने के बजाय पुरानी और खराब कॉर्किंग को हटाकर जरूरत के अनुसार बाहरी इस्तेमाल के लिए बने सीलेंट से दोबारा सील करना बेहतर होता है. इससे खिड़की के किनारों पर मौजूद छोटे गैप बंद करने में मदद मिलती है.
वेदर स्ट्रिपिंग भी हो सकती है वजह
खिड़की के खुलने और बंद होने वाले हिस्सों के बीच लगी वेदर स्ट्रिपिंग बारिश, हवा और बाहर की नमी को अंदर आने से रोकने में मदद करती है. समय के साथ यह घिस सकती है, दब सकती है या अपनी जगह से निकल सकती है. अगर खिड़की बंद करने के बाद भी किनारों से हवा आती है या कोई गैप नजर आता है, तो वेदर स्ट्रिपिंग की जांच करें. खराब या ढीली वेदर स्ट्रिपिंग को बदलने से खिड़की की सीलिंग बेहतर हो सकती है और पानी अंदर आने का खतरा कम हो सकता है.
खिड़की के फ्रेम को नजरअंदाज न करें
कई बार समस्या सिर्फ सीलेंट या रबर की नहीं होती, बल्कि खिड़की का फ्रेम भी खराब हो सकता है. लकड़ी के फ्रेम में लगातार नमी की वजह से सड़न आ सकती है, जबकि कुछ पुराने फ्रेम समय के साथ ढीले या अपनी जगह से थोड़ा खिसक सकते हैं. फ्रेम पर दरार, रंग बदलना, सॉफ्ट हिस्सा या दीवार और फ्रेम के बीच गैप दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें. अगर लकड़ी का फ्रेम अंदर से गलने लगा है, तो केवल उसके ऊपर सीलेंट लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. ऐसी स्थिति में पहले नमी और नुकसान की सही जांच कराना जरूरी हो सकता है.
पानी की निकासी का भी रखें ध्यान
बारिश का पानी सिर्फ खिड़की की दरार से ही घर में नहीं आता. अगर घर के आसपास पानी जमा हो रहा है या छत से गिरने वाला पानी लगातार खिड़की के ऊपर और आसपास पड़ रहा है, तो खिड़की की सील पर दबाव बढ़ सकता है. बारिश के मौसम में गटर और पानी की निकासी वाली जगहों को साफ रखें. पत्तियां, मिट्टी और कचरा जमा होने पर पानी सही दिशा में नहीं बह पाता. यह भी देखें कि डाउनस्पाउट का पानी घर की नींव या खिड़कियों के पास जमा न हो. घर के आसपास की मिट्टी का ढलान भी ऐसा होना चाहिए कि पानी घर की तरफ आने के बजाय बाहर की तरफ जाए.

अगर खिड़की के बाहर ड्रेनेज होल या पानी निकलने की जगह बनी है, तो उसे भी साफ रखें. इनमें कचरा जमा होने पर पानी रुक सकता है और तेज बारिश के दौरान रिसाव की समस्या बढ़ सकती है.
पानी आने के शुरुआती संकेतों को पहचानें
हर बार खिड़की से पानी सीधे फर्श पर गिरता हुआ दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार पानी धीरे-धीरे दीवार या फ्रेम के अंदर पहुंचता रहता है और नुकसान बाद में नजर आता है. खिड़की के आसपास पेंट उखड़ना, दीवार पर बुलबुले दिखाई देना, लकड़ी का फूलना या नरम होना, सील के पास पानी के निशान और कमरे में सीलन जैसी गंध आना भी नमी के संकेत हो सकते हैं. खिड़की के नीचे कारपेट या फर्श बार-बार नम महसूस हो, तो इसकी वजह भी तलाशनी चाहिए. इन संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है, क्योंकि नमी दीवार के पीछे, फर्श के नीचे या दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकती है.
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बारिश के दौरान पानी अंदर आ जाए तो क्या करें?
अगर तेज बारिश के दौरान खिड़की से पानी अंदर आने लगे, तो सबसे पहले वहां रखा फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कारपेट और जरूरी चीजें हटा दें. इससे पानी की वजह से सामान खराब होने का खतरा कम होगा. हल्का पानी आने पर तौलिये से पानी सोख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर बाल्टी या दूसरे बर्तन का इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन सिर्फ फर्श पर दिखने वाला पानी हटाकर निश्चिंत न हों. पानी दीवार के पीछे, फर्श के नीचे या खिड़की के फ्रेम के अंदर भी पहुंच सकता है. बारिश रुकने के बाद प्रभावित जगह को ध्यान से जांचें. दीवार, फर्श, खिड़की की सिल और आसपास की लकड़ी पर नमी या पानी के निशान देखें. नुकसान ज्यादा हो तो उसकी तस्वीरें लेना भी उपयोगी हो सकता है, खासकर अगर आपको मरम्मत या बीमा से जुड़ी प्रक्रिया करनी हो.

फर्श खराब होने से पहले करें ये काम
बारिश शुरू होने से पहले खिड़की की कॉर्किंग, वेदर स्ट्रिपिंग और फ्रेम की जांच करना एक अच्छी आदत हो सकती है. साथ ही यह सुनिश्चित करें कि घर के आसपास पानी की निकासी ठीक हो और बारिश का पानी लगातार खिड़कियों के आसपास जमा न हो. अगर खिड़की से लगातार पानी आ रहा है या फ्रेम के अंदर नमी और सड़न नजर आ रही है, तो केवल बाहर से गैप भरने के बजाय समस्या की असली वजह पता करना जरूरी है.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Moringa Paratha: घर में कैसे बनाएं मोरिंगा का परांठा? आपको कर देगा तंदुरुस्त</title>
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        <description><![CDATA[ Moringa Paratha: मोरिंगा यानी सहजन की पत्तियां सेहत के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं. इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी और शरीर के लिए जरूरी कई चीजें पाई जाती हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करती हैं. लेकिन कई लोग इसका स्वाद पसंद न होने की वजह से इसे खाने से बचते हैं. ऐसे में अगर मोरिंगा की पत्तियों को परांठे में मिलाकर बनाया जाए, तो यह न सिर्फ स्वादिष्ट लगता है बल्कि सेहत के लिए भी अच्छा होता है. आइए जानते हैं घर पर आसानी से मोरिंगा परांठा बनाने की विधि.
सामग्री

2 कप गेहूं का आटा.
1 कप मोरिंगा की ताजी पत्तियां, बारीक कटी हुई.
1 बारीक कटा प्याज.
2 बारीक कटी हरी मिर्च.
1 छोटा चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक.
1/2 छोटा चम्मच अजवाइन.
1/2 छोटा चम्मच हल्दी.
1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर.
1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर.
2 बड़े चम्मच दही.
नमक स्वाद के अनुसार.
परांठा सेंकने के लिए घी या तेल

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बनाने का तरीका
मोरिंगा की पत्तियां तैयार करें
सबसे पहले मोरिंगा की पत्तियों को डंठल से अलग कर लें. इन्हें पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद पत्तियों को बारीक काट लें. अगर आपको पत्तियों का स्वाद थोड़ा कड़वा लगता है, तो इन्हें हल्के गुनगुने पानी में 5 मिनट के लिए रख सकते हैं. इससे कड़वाहट थोड़ी कम हो जाएगी.
आटा गूंथें
एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा लें. इसमें कटी हुई मोरिंगा की पत्तियां, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, अजवाइन, हल्दी, लाल मिर्च, जीरा पाउडर, दही और नमक डालें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें.
अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें. आटे को गीले कपड़े से ढककर 15 से 20 मिनट के लिए रख दें. इससे आटा अच्छी तरह तैयार हो जाएगा.
परांठा बेलें और सेंकें
अब आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें. एक लोई लेकर उस पर थोड़ा सूखा आटा लगाएं और गोल परांठा बेल लें.
तवे को धीमी आंच पर गर्म करें और परांठे को दोनों तरफ से हल्का सेंक लें. इसके बाद दोनों तरफ थोड़ा घी या तेल लगाकर परांठे को सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंकें. ध्यान रखें कि गैस बहुत तेज न हो. तेज आंच पर परांठा बाहर से जल सकता है और अंदर से कच्चा रह सकता है.
परांठे को ऐसे परोसें
गरमागरम मोरिंगा परांठे को दही, हरी चटनी या अचार के साथ परोस सकते हैं. इसे सुबह के नाश्ते में खाया जा सकता है. बच्चों के टिफिन के लिए भी यह अच्छा है.
सेहत के लिए क्यों अच्छा है
मोरिंगा की पत्तियों में आयरन और कैल्शियम पाया जाता है. आयरन शरीर के लिए जरूरी होता है और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है. इसमें फाइबर भी होता है, जो पेट को ठीक रखने में मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स
परांठे में एक चम्मच बेसन मिलाने से इसका स्वाद और अच्छा हो सकता है.अगर ताजी मोरिंगा की पत्तियां नहीं मिलती हैं, तो मोरिंगा पाउडर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.परांठे में थोड़ा कद्दूकस किया हुआ पनीर भी मिला सकते हैं.घी में सेंकने से परांठा ज्यादा स्वादिष्ट और कुरकुरा बनता है.
मोरिंगा परांठा स्वाद और सेहत दोनों के लिए अच्छा विकल्प है. इसे बनाना भी काफी आसान है. अगर आप अपने खाने में मोरिंगा की पत्तियां शामिल करना चाहते हैं, तो इस आसान रेसिपी से परांठा बनाकर जरूर ट्राई कर सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Independence Day 2026: तिरंगा मेकअप करना है? पहले जान लें ये 10 जरूरी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Independence Day 2026 Tiranga Makeup:
आपने सोशल मीडिया पर अपने आस-पास कई लोगों को तिरंगे मेकअप में देखा होगा, तिरंगा मेकअप आज के समय में देशभक्ति दिखाने का एक बहुत ही क्रिएटिव और ट्रेंडी तरीका है. इस दौरान लोग हरे, सफेद, केसरिया और नीले रंग से चेहरे पर मेकअप करते नजर आ रहे हैं। लेकिन सिर्फ इन रंगों को चेहरे पर लगा लेना आपको सही लुक नहीं देता. तिरंगा मेकअप करते वक्त आपको ओवरडू से बचना चाहिए.इसके अलावा सही कलर बैलेंस, आई मेकअप, लिपस्टिक का सही कॉम्बिनेशन सेट करने के साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित मेकअप और स्किन-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स का चुनाव करना भी जरूरी है। चलिए जानते हैं परफेक्ट तिरंगा मेकअप कैसे होता है।
ओवरडू से बचें
तिरंगा मेकअप करने में हरे, सफेद, नीले और साथ ही नारंगी रंग का उपयोग किया जाता है, पर ये काफी गहरे रंग हैं। इनके साथ गहरी लिपस्टिक और भरा बेस चेहरे को अत्यधिक भारी व भड़कीला दिखाने लगता है.अब ऐसे में क्या करें, आपको अपने चेहरे का मेकअप बेस बहुत ही साधारण रखना चाहिए. तीनों रंगों को बहुत ज्यादा न लगाएं और बस चेहरे के एक ही हिस्से को हाइलाइट करें जिससे आपका तिरंगा मेकअप भी आपके चेहरे &amp;nbsp;पर निखर कर आएगा, साथ ही चेहरे पर मेकअप को केकी लुक आने से भी बचाता है।
सही कलर बैलेंस चुनें
किसी भी मेकअप को अच्छा दिखाने में कलर बैलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.तीनों रंगों को सही मात्रा में चेहरे पर बैलेंस बना कर लगाएं, जिससे सिर्फ किसी एक रंग पर ध्यान न जाए और वह अजीब न लगे। तीनों रंगों को आपस में अच्छे से ब्लेंड करें, जिससे वे अलग न दिखें। बहुत ही ज्यादा चमकीले रंगों का उपयोग न करें. हमेशा रंगों को सही क्रम में लगाएं, ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा
आई मेकअप को ऐसे करें बैलेंस
आई मेकअप किसी भी मेकअप को और निखार देता है ऐसे में जब हम तिरंगे मेकअप की बात करते हैं, तो यह इस मेकअप में चार चांद लगा देता है पर आपको आंखों का मेकअप करने के लिए बहुत ज्यादा चमक न लगाते हुए वॉटरलाइनर व हरा काजल लगा सकती हैं यह आपकी आंखों को तिरंगा लुक देने के साथ ही अट्रैक्टिव भी दिखाते हैं
लिप्स को दें सही शेड
तिरंगे मेकअप में काफी गहरे रंगों का उपयोग किया जाता है उसके साथ ही अगर आप गहरी या डार्क रंग की लिपस्टिक लगा लेती हैं, तो यह आपके मेकअप को काफी भड़कीला दिखाता है इससे बचने के लिए आप न्यूड या लाइट शेड लिपस्टिक लगा सकती हैं या सिर्फ लिप लाइनर या लिप ग्लॉस भी आपके लुक को बेहद सिंपल व एलिगेंट बनाता है
बच्चों के लिए सुरक्षित मेकअप
अगर आप तिरंगा मेकअप किसी बच्चे को करने वाली हैं, तो ध्यान रखें बच्चों की त्वचा बहुत नाजुक होती है उनके मेकअप के लिए आप कम केमिकल वाले या प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर सकती हैं और उनका ओवर मेकअप न करते हुए उनके चेहरे पर झंडा या तिरंगा डॉट बना सकती हैं और ध्यान रखें कि बच्चों का मेकअप निकालते हुए आप नारियल तेल से उनका मेकअप निकालें
स्किन-फ्रेंडली प्रोडक्ट्स
बाजार में मिलने वाले सस्ते व घटिया प्रोडक्ट्स से सावधान रहें. मेकअप करते समय इस चीज का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि आप अपनी स्किन के हिसाब से सुरक्षित प्रोडक्ट का चुनाव करें हमेशा वॉटरप्रूफ आईलाइनर का उपयोग करें, जिससे आपका लुक न बिगड़े मेकअप उतारे बिना न सोएं. मेकअप उतारने के लिए नारियल तेल या मेकअप रिमूवल का उपयोग करें
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इन बातों का रखें ख्याल
तिरंगा मेकअप करते समय पोस्टर कलर, फैब्रिक कलर या किसी भी आर्ट पेंट का इस्तेमाल चेहरे पर न करें, क्योंकि ये त्वचा के लिए नहीं बनाए जाते और जलन या एलर्जी कर सकते हैं. हमेशा स्किन-फ्रेंडली कॉस्मेटिक या फेस पेंट ही चुनें। मेकअप से पहले चेहरे को साफ करके मॉइस्चराइजर लगाएं और जरूरत के अनुसार प्राइमर का इस्तेमाल करें। लुक को आकर्षक बनाने के लिए कॉस्मेटिक-ग्रेड ग्लिटर लगाया जा सकता है, लेकिन इसे आंखों के बहुत पास लगाने से बचें. कार्यक्रम खत्म होने के बाद मेकअप को अच्छी तरह रिमूव करें, चेहरा साफ करें और अंत में मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें
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        <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Wheat Flour Storage: क्या आपका आटा भी हो जाता है खराब? ऐसे रखें महीनों तक फ्रेश</title>
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        <description><![CDATA[ How To Store Wheat Flour To Prevent Bugs: गेहूं का आटा लगभग हर भारतीय किचन में रोजाना इस्तेमाल होता है. रोटी, पराठे और कई तरह की दूसरी चीजें बनाने के लिए आटा हमेशा घर में रखा रहता है. अक्सर लोग सुविधा के लिए एक साथ ज्यादा मात्रा में आटा खरीद लेते हैं और फिर उसे कई दिनों या महीनों तक इस्तेमाल करते रहते हैं. लेकिन अगर आटे को सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो उसमें कीड़े लगने, नमी आने या उसकी गंध बदलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
कई बार आटे के डिब्बे में छोटे-छोटे कीड़े दिखाई देने लगते हैं और पूरा आटा खराब होने का डर रहता है. अच्छी बात यह है कि आटे को सही जगह और सही तरीके से रखने से इन परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता है. इसके लिए सबसे जरूरी है कि आटे को खुली पैकिंग में छोड़ने के बजाय अच्छी तरह बंद होने वाले एयरटाइट डिब्बे में रखा जाए.
आटे में कीड़े क्यों लगते हैं?
आटा लंबे समय तक हवा, नमी और गर्मी के संपर्क में रहे तो उसकी क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. खासकर अगर आटे का पैकेट खुला हुआ हो या उसे ऐसी जगह रखा गया हो जहां नमी ज्यादा हो, तो उसके खराब होने की संभावना बढ़ जाती है. सूरज की सीधी रोशनी और ज्यादा गर्मी भी आटे की ताजगी पर असर डाल सकती है. इसलिए सिर्फ आटा खरीदना ही काफी नहीं है. उसे रखने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है. सही स्टोरेज से आटा ज्यादा समय तक ताजा रह सकता है और कीड़ों से भी बचा रह सकता है.

आटे को तुरंत एयरटाइट डिब्बे में रखें
आटा खरीदने के बाद उसे लंबे समय तक उसी पेपर पैकेट में रखने के बजाय किसी साफ और अच्छी तरह बंद होने वाले एयरटाइट कंटेनर में ट्रांसफर करना बेहतर माना जाता है. इसके लिए प्लास्टिक का फूड-ग्रेड कंटेनर या कांच का जार इस्तेमाल किया जा सकता है. एयरटाइट डिब्बा आटे को बाहर की हवा और नमी से बचाने में मदद करता है. साथ ही, यह आटे में पनपने वाले कीड़ों और दूसरे पेस्ट्स को दूर रखने में भी मददगार हो सकता है. डिब्बा इस्तेमाल करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित करें कि वह साफ और पूरी तरह सूखा हुआ हो.
डिब्बे को कहां रखें, यह भी जरूरी
आटे को एयरटाइट डिब्बे में रखने के बाद उसे कहीं भी रख देना सही तरीका नहीं है. इसे ऐसी जगह रखें जो ठंडी, सूखी और अंधेरी हो. किचन की ऐसी अलमारी या पेंट्री इसके लिए बेहतर जगह हो सकती है, जहां सीधी धूप न आती हो. बहुत ज्यादा गर्मी आटे की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती है, जबकि नमी आटे को गीला और चिपचिपा बना सकती है. इसलिए सिंक या ऐसी जगह के पास आटे का डिब्बा रखने से बचें जहां पानी या भाप ज्यादा पहुंचती हो.

अगर आटा कम इस्तेमाल होता है तो फ्रिज में रखें
अगर घर में आटे का इस्तेमाल कम होता है या आपने एक साथ काफी ज्यादा आटा खरीद लिया है, तो उसे फ्रिज में रखना भी एक विकल्प हो सकता है. सही तरीके से एयरटाइट कंटेनर में रखा गया आटा लंबे समय तक चल सकता है. फ्रिज में रखते समय भी ध्यान रखें कि आटे का डिब्बा ऐसी चीजों के पास न हो जहां से नमी पहुंच सकती है. नमी के संपर्क में आने से आटा गुठलियों में बदल सकता है और उसकी क्वालिटी खराब हो सकती है. इसलिए कंटेनर को अच्छी तरह बंद रखना जरूरी है.
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लंबे समय के लिए फ्रीजर भी है विकल्प
अगर आप आटे का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं या थोक में आटा खरीदते हैं, तो लंबे समय तक स्टोर करने के लिए फ्रीजर का विकल्प भी इस्तेमाल किया जा सकता है. फ्रीजर में रखते समय आटे को अच्छी तरह सील किए हुए कंटेनर में रखना जरूरी है ताकि उसमें हवा और नमी न पहुंचे. फ्रीजर से आटा निकालने के बाद तुरंत कंटेनर न खोलें. पहले उसे कमरे के तापमान तक आने दें और उसके बाद ही डिब्बा खोलें. इससे बाहर की नमी आटे के संपर्क में आने और उसमें गीलापन पैदा होने की संभावना कम हो सकती है.

पुराने आटे की पहचान कैसे करें?
अगर आटे से बासी, खट्टी या सीलन जैसी गंध आने लगे, तो उसे इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इसके अलावा अगर आटे में फफूंद दिखाई दे, उसका रंग बदल गया हो या उसमें असामान्य गुठलियां नजर आएं, तो उसे फेंक देना बेहतर है. अलग-अलग तरह के आटे की शेल्फ लाइफ भी अलग हो सकती है. गेहूं के आटे जैसे कुछ आटे सही तरीके से स्टोर करने पर कई महीनों तक चल सकते हैं, जबकि कुछ स्पेशलिटी फ्लोर जल्दी खराब हो सकते हैं. इसलिए कम इस्तेमाल होने वाले आटे को ठंडी जगह या फ्रीजर में रखना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है.
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        <title>15 Special Recipes On 15 August : आजादी का स्वाद! भारत के 15 राज्यों की मशहूर डिश चखें</title>
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        <description><![CDATA[ 15 Special Recipes On15 August : 15 अगस्त सिर्फ झंडा फहराने और देशभक्ति गाने सुनने का दिन नहीं, बल्कि देश की आजादी को स्वाद के जरिए महसूस करने का भी मौका है. भारत के हर राज्य की अपनी एक आइकॉनिक डिश है, जिसका स्वाद जितना खास है, उतनी ही दिलचस्प उसकी कहानी भी है. इस 15 अगस्त अगर आप चाहें तो घर पर ही इनमें से कुछ डिशेज बनाकर पूरे देश का स्वाद एक थाली में समेट सकते हैं. आइए जानते हैं 15 राज्यों की मशहूर डिश, उनका इतिहास और घर पर बनाने का आसान तरीका.
पंजाब से छोले भटूरे
पंजाब की पहचान बन चुकी यह डिश ढाबा से निकलकर पूरे देश में मशहूर हुई. घर पर बनाने के लिए छोलों को उबालकर मसालों में पकाएं, और मैदे के आटे को फुलाकर तेल में तलकर भटूरे तैयार करें.
राजस्थान से दाल बाटी चूरमा
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में लंबे समय तक टिकने वाले खाने की जरूरत से यह डिश बनी. घर पर बाटी को आटे से बनाकर सेंकें, दाल को घी-मसालों में पकाएं और चूरमा गुड़-घी मिलाकर तैयार करें.
गुजरात का ढोकला
ढोकला गुजरात की पारंपरिक फरमेंटेड डिश है, जो हल्का और सेहतमंद दोनों माना जाता है. बेसन के घोल को फर्मेंट करके भाप में पकाकर इसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है.
महाराष्ट्र का वड़ा पाव
मुंबई की सड़कों से निकलकर यह डिश पूरे देश की पहचान बन गई है. आलू की मसालेदार टिक्की को बेसन में लपेटकर तलें, और पाव, तली हुई हरी मिर्च के साथ चटनी लगाकर सर्व करें.
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गोवा का फिश करी राइस
गोवा के तटीय इलाकों की वजह से यहां सीफूड का चलन ज्यादा है. नारियल और मसालों से बनी करी में मछली पकाकर चावल के साथ परोसा जाता है.
केरल का अप्पम स्ट्यू
केरल की यह डिश नारियल के दूध से बने स्ट्यू और चावल के फर्मेंटेड अप्पम का कॉम्बिनेशन है. घर पर अप्पम पैन में हल्का सा तेल लगाकर इसे बना सकते हैं.
साउथ इंडिया का डोसा
दक्षिण भारत की पहचान बन चुकी यह डिश चावल-दाल के घोल से बनती है, जिसे फर्मेंटेशन के बाद बनाया जाता है. डोसे को तवे पर पतला फैलाकर सेंकें फिर इसे सांबर और नारियल की चटनी के साथ परोसें.
कर्नाटक से बिसी बेले बाथ
चावल, दाल और सब्जियों से बनने वाली यह डिश एक ही बर्तन में तैयार हो जाती है, इसलिए घर पर बनाना बेहद आसान है.
हैदराबादी बिरयानी
निजामों के दौर से चली आ रही यह बिरयानी दम पुख्त तकनीक से तैयार होती है, जिसमें चावल और मसालेदार मीट को धीमी आंच पर पकाया जाता है.
पश्चिम बंगाल का मछली भात&amp;nbsp;
बंगाल में मछली और चावल को वहां की संस्कृति का हिस्सा माना जाता है. सरसों के तेल में मछली को हल्दी और मसालों के साथ पकाकर चावल के साथ परोसा जाता है.
बिहार का मशहूर लिट्टी चोखा
सत्तू भरकर सेंकी गई लिट्टी को बैंगन और आलू के चोखे के साथ खाया जाता है, जो बिहार की पारंपरिक और सेहतमंद डिश मानी जाती है.
उत्तर प्रदेश का कबाब और नान है मशहूर
अवध के नवाबी खानसामों की देन मानी जाने वाली यह डिश आज भी लखनऊ की पहचान है. घर पर मसालेदार मीट को सींक पर भूनकर कबाब को नान के साथ परोसा जा सकता है.
हिमाचल से जुड़ा सिड्डू
पहाड़ी इलाकों की ठंड में एनर्जी देने के लिए बनने वाला यह स्टीम्ड ब्रेड डिश घी के साथ खाया जाता है.
असम का मासोर टेंगा
असम की यह खट्टी मछली करी टमाटर और नींबू से बनती है, जो हल्की और पाचन के लिए बेहद अच्छी मानी जाती है.
ओडिशा से पखाला भात
गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए बना यह फर्मेंटेड चावल दही और सब्जियों के साथ परोसा जाता है.
भारत का फूड मैप
उत्तर भारत में गेहूं और तंदूरी स्वाद हावी है, पश्चिम में मीठे नमकीन का संतुलन दिखता है, दक्षिण में चावल और नारियल ज्यादातर खाना मिलता है, वहीं पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में मछली, फर्मेंटेड फूड और हल्के मसालों का चलन है.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Living Room Home Tips: सोफे के नीचे बार&amp;बार चला जाता है सामान? अपनाएं ये 4 आसान हैक्स</title>
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        <description><![CDATA[ How To Stop Items Sliding Under Sofa: घर में सोफा सिर्फ बैठने की जगह नहीं होता, बल्कि लिविंग रूम का अहम हिस्सा भी होता है. लेकिन कई बार सोफे के नीचे बनी खाली जगह रोज की परेशानी बन जाती है. बच्चों के खिलौने, टीवी रिमोट, चप्पल, सिक्के या दूसरी छोटी चीजें बार-बार सोफे के नीचे चली जाती हैं. फिर हर बार उन्हें निकालने के लिए झुकना पड़ता है या सोफा खिसकाना पड़ता है. अगर आपके घर में भी यह समस्या रहती है, तो कुछ आसान उपाय अपनाकर सोफे के नीचे सामान जाने से रोका जा सकता है.
सोफे के नीचे सामान क्यों चला जाता है?
सोफे और फर्श के बीच खाली जगह होने की वजह से छोटी चीजें आसानी से उसके नीचे पहुंच जाती हैं. खासकर बच्चों वाले घरों में खिलौने और गेंदें अक्सर सोफे के नीचे चली जाती हैं. वहीं, सफाई करते समय भी छोटी चीजें अनजाने में नीचे खिसक सकती हैं.

अगर सोफा फर्श पर अपनी जगह से बार-बार सरकता है, तो समस्या और बढ़ सकती है. चिकने टाइल्स, लकड़ी, लैमिनेट या विनाइल फर्श पर सोफे के पैर आसानी से खिसक सकते हैं. बैठने, उठने, बच्चों के कूदने या सफाई के दौरान धीरे-धीरे सोफा अपनी जगह से हटता रहता है. इससे सोफे और दीवार या दूसरे फर्नीचर के बीच का गैप भी बदल सकता है और सामान नीचे पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है.
सोफे के पैरों के नीचे लगाएं रबर ग्रिपर
अगर आपका सोफा बार-बार खिसकता है, तो सबसे पहले उसके पैरों को स्थिर करना जरूरी है. इसके लिए सोफे के हर पैर के नीचे रबर ग्रिपर या एंटी-स्लिप पैड लगाए जा सकते हैं. रबर ग्रिपर सोफे और फर्श के बीच पकड़ बनाने में मदद करते हैं. इससे सोफा बार-बार सरकने से बच सकता है. यह तरीका खासतौर पर टाइल्स, लकड़ी, लैमिनेट और दूसरे चिकने फर्श पर उपयोगी हो सकता है.
अगर आपकी मुख्य समस्या सोफे का खिसकना है, तो केवल फेल्ट पैड लगाने से ज्यादा फायदा नहीं मिल सकता. फेल्ट पैड फर्श को खरोंच से बचाने में मदद करते हैं, लेकिन उनमें रबर जैसी पकड़ नहीं होती. इसलिए एंटी-स्लिप रबर पैड बेहतर विकल्प हो सकते हैं.

फर्नीचर कप का कर सकते हैं इस्तेमाल
बड़े और भारी सोफे के लिए फर्नीचर कप भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इन्हें सोफे के पैरों के नीचे रखा जाता है, जिससे पैर अपनी जगह पर टिके रहने में मदद मिलती है. इससे सोफा खिसकने की समस्या कम हो सकती है और फर्श पर दबाव भी सीधे एक छोटे हिस्से पर नहीं पड़ता. अगर सोफा भारी है और उसे बार-बार अपनी जगह से हटाना मुश्किल होता है, तो यह तरीका काम आ सकता है.
सोफे के नीचे खाली जगह को करें कवर
अगर मुख्य परेशानी सोफे के नीचे सामान चले जाने की है, तो खाली जगह को ब्लॉक करना सबसे सीधा उपाय हो सकता है. इसके लिए सोफे के नीचे फिट होने वाले अंडर-सोफा ब्लॉकर या गैप कवर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
ऐसे कवर सोफे और फर्श के बीच की खाली जगह को ढकने में मदद करते हैं, जिससे रिमोट, खिलौने, चप्पल और दूसरी छोटी चीजें आसानी से नीचे नहीं जा पातीं. इन्हें सोफे के साइज और नीचे मौजूद गैप के हिसाब से चुना जा सकता है. अगर तैयार ब्लॉकर नहीं लगाना चाहते, तो घर में मौजूद मजबूत बोर्ड या दूसरे उपयुक्त कवर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. बस ध्यान रखें कि लगाया गया सामान स्थिर हो और जरूरत पड़ने पर सफाई के लिए आसानी से हटाया जा सके.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;क्या आपके कमरे में भी आती हैं छिपकलियां? जानें भगाने का सही तरीका
नॉन-स्लिप मैट भी आएगी काम
सोफे को अपनी जगह पर रखने के लिए नॉन-स्लिप मैट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे जरूरत के हिसाब से काटकर सोफे के पैरों के नीचे रखा जा सकता है. यह तरीका उन लोगों के लिए आसान हो सकता है, जो चिपकाने वाले टेप या किसी स्थायी उपाय का इस्तेमाल नहीं करना चाहते. रबर जैसी पकड़ वाली नॉन-स्लिप मैट सोफे को फर्श पर बेहतर ग्रिप देने में मदद कर सकती है.
अगर सोफा हल्का है, तो इस तरीके से उसके बार-बार सरकने की समस्या कम हो सकती है. साथ ही, सोफा अपनी जगह पर रहेगा तो नीचे जाने वाला सामान निकालने के लिए बार-बार उसे खिसकाने की जरूरत भी कम होगी.
रग और एंटी-स्लिप पैड का इस्तेमाल करें
लिविंग रूम में रग बिछाने से भी सोफे को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, सिर्फ रग बिछा देने से हर बार समस्या खत्म नहीं होती. अगर रग खुद ही फर्श पर खिसकती है, तो उसके नीचे एंटी-स्लिप रग पैड लगाना बेहतर हो सकता है. रग और उसके नीचे लगा पैड फर्श पर अतिरिक्त पकड़ बनाने में मदद करते हैं. कोशिश करें कि रग इतनी बड़ी हो कि सोफे के कम से कम आगे वाले पैर उसके ऊपर टिक सकें. अगर जगह हो, तो पूरा सोफा बड़े रग पर रखना और भी बेहतर हो सकता है. इससे सोफा स्थिर रहने में मदद मिलती है और लिविंग रूम भी ज्यादा व्यवस्थित दिखाई देता है.
सोफा दीवार से बहुत दूर न रखें
कई बार सोफे को दीवार से काफी दूर रखने पर उसके पीछे और नीचे सामान जाने की समस्या बढ़ जाती है. अगर आपके कमरे की व्यवस्था ऐसी है कि सोफा दीवार के पास रखा जा सकता है, तो जरूरत से ज्यादा गैप न छोड़ें. सोफे और दीवार के बीच बहुत ज्यादा जगह होने पर रिमोट, खिलौने या दूसरी चीजें पीछे भी गिर सकती हैं. इसलिए फर्नीचर की जगह तय करते समय इस बात का भी ध्यान रखें.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Potato Storage Tips: कटे आलू को 24 घंटे तक रखें फ्रेश! अपनाएं ये आसान किचन ट्रिक्स</title>
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        <description><![CDATA[ How To Stop Cut Potatoes From Turning Black: आलू लगभग हर भारतीय किचन में इस्तेमाल होते हैं. कभी सब्जी बनाने के लिए, तो कभी पराठे, टिक्की, कटलेट या फ्राइज के लिए इन्हें पहले से छीलकर और काटकर रख दिया जाता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कुछ देर बाद कटे हुए आलू का रंग बदलने लगता है. खासकर फ्रिज में रखने के बाद उन पर भूरे या काले धब्बे नजर आने लगते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आलू का रंग क्यों बदल जाता है और उन्हें स्टोर करने से पहले क्या करना चाहिए?
दरअसल, कटे हुए आलू का भूरा या काला पड़ना एक सामान्य प्रक्रिया है. इसे ऑक्सीडेशन कहा जाता है. आलू को काटने या छीलने के बाद उसका अंदरूनी हिस्सा हवा के संपर्क में आ जाता है. आलू में मौजूद स्टार्च और दूसरे तत्व ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर रंग बदलने लगते हैं. यही वजह है कि कुछ समय बाद आलू भूरे, स्लेटी या काले नजर आ सकते हैं.
क्या काले या भूरे पड़े आलू खाना सुरक्षित है?
अगर आलू सिर्फ हवा के संपर्क में आने की वजह से भूरे या काले हुए हैं, तो आमतौर पर इन्हें खाना सुरक्षित होता है. ऑक्सीडेशन की वजह से होने वाला रंग का बदलाव आलू के स्वाद और बनावट पर कोई बड़ा असर नहीं डालता. हालांकि, देखने में ये आलू अच्छे नहीं लगते, इसलिए लोग इन्हें इस्तेमाल करने से बचते हैं. कटे हुए आलू का रंग बदलने से रोकना मुश्किल नहीं है. स्टोर करने से पहले कुछ आसान तरीके अपनाकर इन्हें ज्यादा समय तक सफेद और ताजा दिखने में मदद मिल सकती है.
आलू को बहुत पहले से काटकर न रखें
आलू को काला पड़ने से बचाने का सबसे आसान तरीका है कि उन्हें जरूरत से बहुत पहले न काटें. अगर आप खाना बनाने वाले हैं, तो कोशिश करें कि आलू को पकाने के समय के आसपास ही छीलें और काटें. कटे हुए आलू जितनी देर तक हवा के संपर्क में रहेंगे, ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया उतनी ही तेजी से हो सकती है. इसलिए आलू काटने के बाद उन्हें किचन के प्लेटफॉर्म या किसी प्लेट में खुला छोड़ने से बचें. अगर तुरंत खाना बनाना है, तो काटने के बाद सीधे इस्तेमाल कर लें.
ठंडे पानी में डालकर फ्रिज में रखें
अगर आपको आलू पहले से काटकर स्टोर करने हैं, तो उन्हें ठंडे पानी में डालना सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका है. एक बाउल में इतना पानी लें कि कटे हुए आलू पूरी तरह उसमें डूब जाएं. इसके बाद बाउल को फ्रिज में रख दें. पानी में पूरी तरह डूबे रहने से आलू का संपर्क सीधे हवा से कम हो जाता है, जिससे उनका रंग जल्दी बदलने से बच सकता है. यह तरीका उन लोगों के लिए काफी काम का है, जिन्हें अगले दिन के खाने की तैयारी पहले से करनी होती है.

ध्यान रखें कि आलू को गर्म पानी में न डालें. स्टोर करने के लिए ठंडा पानी बेहतर रहता है. गर्म पानी आलू के स्टार्च पर असर डाल सकता है, इसलिए रंग बदलने से बचाने के लिए ठंडे पानी का ही इस्तेमाल करें.
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पानी में डालें नींबू का रस या सिरका
अगर आप कटे हुए आलू को पानी में रख रहे हैं, तो उसमें थोड़ा सा नींबू का रस मिलाना भी फायदेमंद हो सकता है. नींबू का रस एसिडिक होता है और ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकता है. इसके लिए पानी में बहुत ज्यादा नींबू डालने की जरूरत नहीं है. थोड़ी मात्रा काफी होती है. अगर घर में नींबू नहीं है, तो सफेद सिरके का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे भी आलू का रंग जल्दी बदलने से रोकने में मदद मिल सकती है.

यह तरीका खासतौर पर तब उपयोगी हो सकता है, जब आपको आलू को कुछ घंटों के लिए फ्रिज में स्टोर करना हो. इस्तेमाल से पहले आलू को पानी से निकालकर जरूरत के अनुसार धोया जा सकता है.
कांच के बाउल में स्टोर करना बेहतर
कटे हुए आलू को किस बर्तन में रखा जा रहा है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए. कुछ धातु या एल्युमिनियम के बर्तन कटे हुए आलू के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं, जिससे उनका रंग जल्दी बदल सकता है. इससे बचने के लिए आलू को पानी के साथ कांच के बाउल या ग्लास डिश में रखना बेहतर विकल्प हो सकता है. अगर आपके पास कांच का बर्तन है, तो उसमें कटे हुए आलू डालें, ऊपर से पानी भरें और फिर फ्रिज में रख दें.
कितने समय पहले छीलकर रख सकते हैं आलू?
अगर अगले दिन किसी डिश के लिए आलू की जरूरत है, तो उन्हें एक दिन पहले छीलकर और काटकर रखा जा सकता है. लेकिन कोशिश करें कि इन्हें 24 घंटे से ज्यादा समय तक पानी में स्टोर न करें. लंबे समय तक पानी में रहने से आलू ज्यादा पानी सोखने लगते हैं. इससे उनकी बनावट बदल सकती है और पकने के बाद वे ज्यादा पानी वाले या थोड़े दानेदार महसूस हो सकते हैं. इसलिए आलू को पहले से तैयार करना है, तो एक दिन से ज्यादा समय पहले न काटें.
कुछ किस्म के आलू पानी में रखने पर बेहतर बने रह सकते हैं, क्योंकि उनमें स्टार्च कम और नमी ज्यादा होती है. जबकि ज्यादा स्टार्च वाले आलू पानी ज्यादा सोख सकते हैं. फिर भी सामान्य तौर पर कटे हुए आलू को पानी में डालकर फ्रिज में 24 घंटे तक रखना ही बेहतर माना जाता है.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों को कैसे समझाएं आजादी का मतलब?</title>
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        <description><![CDATA[ Explain Freedom To Kids 15 August: 15 अगस्त आते ही हर घर में तिरंगा, मिठाई और देशभक्ति के गाने सुनाई देने लगते हैं. लेकिन बच्चे अक्सर पूछते हैं, &quot;आजादी क्या होती है?&quot; या &quot;हम झंडा क्यों फहराते हैं?&quot; ऐसे सवालों का जवाब बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से आसान भाषा में देना चाहिए. आइए जानते हैं कि बच्चों को आजादी का मतलब कैसे समझाएं.
उम्र के हिसाब से समझाने के तरीके
छोटे बच्चे (3 से 6 साल)
इस उम्र में बच्चों को इतिहास की ज्यादा बातें बताने की जरूरत नहीं है. उन्हें बस इतना बताएं कि आजादी का मतलब अपनी पसंद से जीना, अपनी भाषा बोलना और अपने देश में खुशी से रहना है. आप उन्हें तिरंगे के तीन रंगों के बारे में भी आसान तरीके से बता सकते हैं. केसरिया रंग बहादुरी, सफेद रंग शांति और हरा रंग खुशहाली का प्रतीक है.
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बड़े बच्चे (7 से 12 साल)
इस उम्र के बच्चे थोड़ी और बातें समझ सकते हैं. उन्हें बताएं कि पहले भारत पर अंग्रेजों का राज था. उस समय भारतीयों को अपनी मर्जी से कई फैसले लेने की आजादी नहीं थी. देश को आजाद कराने के लिए बहुत से लोगों ने मिलकर लड़ाई लड़ी. इस दौरान महात्मा गांधी और भगत सिंह जैसे लोगों के बारे में बच्चों को आसान भाषा में बताया जा सकता है.
किशोर (13 साल से ऊपर)
इस उम्र में बच्चों को आजादी का मतलब थोड़ा विस्तार से समझाया जा सकता है. उन्हें बताएं कि आजादी का मतलब सिर्फ देश का आजाद होना नहीं है. अपनी बात कहने, अपनी पसंद का काम चुनने और अपने सपनों को पूरा करने की आजादी भी जरूरी है. साथ ही उन्हें बताएं कि देश की आजादी और शांति बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है.
कहानी और गेम्स से समझाएं
बच्चे कहानियों और खेलों से जल्दी सीखते हैं. आप उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों की छोटी और आसान कहानियां सुना सकते हैं. इसके अलावा घर पर कुछ मजेदार एक्टिविटी भी कर सकते हैं.

तिरंगे के रंगों पर आसान क्विज बनाएं
आजादी के हीरो नाम से कार्ड गेम बनाएं
देशभक्ति के गानों पर छोटा सा नाटक करवाएं
बच्चों से तिरंगा बनाने की क्राफ्ट एक्टिविटी करवाएं

इन एक्टिविटी से बच्चे खेल-खेल में आजादी के बारे में सीखेंगे और उन्हें बातें लंबे समय तक याद भी रहेंगी.
रियल लाइफ उदाहरण दें
बच्चों को कोई भी बात समझाने का सबसे आसान तरीका रोज की जिंदगी से उदाहरण देना है. जैसे अगर कोई बच्चा दूसरे बच्चे का खिलौना बिना पूछे ले ले, तो उसे बुरा लगता है क्योंकि उसकी चीज पर उसका हक था. इसी तरह पहले भारत में भी लोगों के पास अपने देश से जुड़े कई फैसले लेने का हक नहीं था. बच्चों को यह भी बताएं कि आज हम अपनी पसंद का स्कूल चुन सकते हैं, अपनी भाषा बोल सकते हैं और अपने सपनों के लिए मेहनत कर सकते हैं. ये भी आजादी का ही हिस्सा है.
परिवार की भूमिका
बच्चों को आजादी का मतलब समझाने में परिवार की बड़ी भूमिका होती है. इसके लिए परिवार कुछ आसान काम कर सकता है.

15 अगस्त पर बच्चों के साथ झंडा फहराएं और उसका महत्व बताएं.
बच्चों के साथ देश से जुड़ी आसान फिल्म या वीडियो देखें.
दादा-दादी या घर के बड़े लोगों से आजादी से जुड़ी कहानियां सुनवाएं.बच्चों के सवालों को ध्यान से सुनें और प्यार से जवाब दें.

जब बच्चे परिवार के साथ मिलकर 15 अगस्त मनाते हैं, तो उन्हें इस दिन का महत्व ज्यादा अच्छे से समझ आता है.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Independence Day 2026:15 अगस्त पर हर भारतीय को करने चाहिए ये 15 संकल्प, पढ़ें पूरी लिस्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/independence-day-202615-अगस्त-पर-हर-भारतीय-को-करने-चाहिए-ये-15-संकल्प-पढ़ें-पूरी-लिस्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Happy Independence Day 2026: 15 अगस्त सिर्फ झंडा फहराने और फिर पूरा दिन छुट्टी मनाने के लिए नहीं है. क्योंकि आजादी सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि हर दिन निभाई जाने वाली जिम्मेदारी भी है. इस 15 अगस्त अगर हर भारतीय कुछ छोटे छोटे संकल्प ले लें, तो इसका असर पूरे देश पर दिख सकता है. आइए जानते हैं ऐसे ही 15 संकल्प, जिन्हें अपनाकर हम इस Independence Day को सच में यादगार बना सकते हैं.
स्वदेशी अपनाना
जहां तक मुमकिन हो, भारत में बने प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दें. इससे न सिर्फ लोकल कारोबार में इजाफा होता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है.
पानी बचाना
नल खुला छोड़ने की आदत छोड़ें और पानी का इस्तेमाल सोचकर करें. आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाना अब सिर्फ सलाह नहीं, जरूरत बन चुका है.
ट्रैफिक नियमों का पालन
हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना और सिग्नल तोड़ने से बचना छोटी छोटी बातें लगती हैं, लेकिन यही आदतें हजारों जानें बचा सकती हैं.
टैक्स में ईमानदारी
समय पर और सही तरीके से टैक्स भरना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. यही पैसा सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी सुविधाओं में लगता है.
मतदान जरूर करें
वोट डालना सिर्फ अधिकार नहीं, एक बड़ी जिम्मेदारी है. हर चुनाव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतंत्र को मजबूत बना रहे.&amp;nbsp;
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पर्यावरण का ख्याल
पेड़ लगाना, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना और कचरा सही जगह फेंकना जैसी छोटी आदतें पर्यावरण को बड़ा फायदा पहुंचा सकती हैं.
डिजिटल सुरक्षा अपनाना
अपनी निजी जानकारी को ऑनलाइन सुरक्षित रखें, फ्रॉड कॉल्स और मैसेज से सतर्क रहें और मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करने की आदत डालें.
सामाजिक जिम्मेदारी निभाना
जरूरतमंदों की मदद करना, महिलाओं और बुजुर्गों का सम्मान करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देना हर नागरिक का अहम फर्ज है.
सफाई का ध्यान रखना
सिर्फ घर नहीं, आस पड़ोस और सार्वजनिक जगहों को भी साफ रखने की आदत डालें, ताकि स्वच्छता एक आदत बने न कि सिर्फ अभियान.
बिजली की बचत
जरूरत न होने पर पंखा, लाइट और बाकी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बंद रखें, इससे बिजली भी बचेगी और खर्च भी कम होगा.
लोकल भाषाओं का सम्मान
अपनी मातृभाषा के साथ साथ देश की बाकी भाषाओं और संस्कृतियों का भी सम्मान करना राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाता है.
कानून का पालन
छोटे मोटे नियम तोड़ने की आदत को छोड़कर कानून का सम्मान करना हर नागरिक की बुनियादी जिम्मेदारी है.
जागरूक उपभोक्ता बनना
खरीदारी करते वक्त प्रोडक्ट की क्वालिटी और उसके असली एमआरपी की जानकारी रखें, ताकि ठगी से बचा जा सके.
रक्तदान और अंगदान के लिए आगे आना
साल में कम से कम एक बार रक्तदान करने का संकल्प लें, यह किसी की जान बचाने का सबसे आसान तरीका है और अगर हो सके तो अंगदान के लिए भी संकल्प करना चाहिए.
देशभक्ति के संस्कार&amp;nbsp;
बच्चों को देश के इतिहास, संविधान और नागरिक कर्तव्यों के बारे में बताना, ताकि आने वाली पीढ़ी भी जिम्मेदार नागरिक बने.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>15 अगस्त की छुट्टी में निपटा लें घर के ये 15 जरूरी काम</title>
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        <description><![CDATA[ Independence Day Holiday Home Productivity: इस साल 15 अगस्त अपने साथ एक बेहतरीन वीकेंड लेकर आ रहा है, जिसमें शनिवार और रविवार दो छुट्टियां मिल रही हैं. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ज्यादातर दफ्तरों और स्कूलों में छुट्टी रहती है. अक्सर लोग इस छुट्टी का इस्तेमाल सिर्फ सोने, टीवी या कहीं घूमने में बिता देते हैं. लेकिन अगर आप चाहें तो दो दिन की छुट्टी का सही इस्तेमाल करके अपने घर के उन कामों को निपटा सकते हैं, जो भागदौड़ भरी लाइफ में डेली अधूरे रह जाते हैं. घर की साफ-सफाई और चीजों को सही ढंग से व्यवस्थित करने से न सिर्फ घर सुंदर दिखता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है.&amp;nbsp;
वार्डरोब की सेटिंग
रोज ऑफिस जाने से कपड़ों की अलमारी ठीक करने का तो बिल्कुल समय नहीं मिलता है. ऐसे में अलमारी से उन कपड़ों को बाहर निकालें जिन्हें आपने पिछले एक साल से नहीं पहना है. इन कपड़ों को किसी जरूरतमंद को दान कर दें. साथ ही आने वाले कुछ महीनों बाद हल्की ठंड शुरू हो जाएगी. ऐसे में अभी से भारी कंबलों और जैकेट्स को धूप दिखाकर अलग बॉक्स में संभाल कर रख लें. इसके अलावा स्टोर रूम में जमा कबाड़, खाली डिब्बे और टूटी-फूटी चीजों को बाहर का रास्ता दिखाएं.
किचन और फर्स्ट-एड बॉक्स
किचन के उन डिब्बों को साफ करें जिन पर तेल या चिपचिपाहट जमा हो गई है. एक बार किचन में रखे सॉस, डिब्बाबंद फूड और राशन की एक्सपायरी डेट जरूर चेक कर लें और खराब हो चुकी चीजों को फेंक दें. साथ ही घर के मेडिकल बॉक्स को खोलकर सभी दवाओं और कफ सिरप की एक्सपायरी डेट जांच लें. जरूरी पट्टियां, डेटॉल और पेनकिलर नई खरीदकर अलग बॉक्स में रख लें. इसके अलावा फ्रिज के सारे रैक निकालकर धोएं और अंदर जमी बर्फ व दाग-धब्बों को साफ कर लें.&amp;nbsp;
जरूरी डॉक्यूमेंट्स और गैजेट्स
आधार कार्ड, पैन कार्ड, इंश्योरेंस, गाड़ी के पेपर्स और मेडिकल बिलों को फाइल के अलग-अलग फोल्डर में व्यवस्थित करके रखें और अपने मोबाइल व लैपटॉप से फालतू की फोटो, वीडियो और भारी फाइल्स को डिलीट कर दे या उन्हें हार्ड डिस्क में ट्रांसफर कर दे. साथ ही घर के एसी के फिल्टर को साफ कर दे, वाई-फाई राउटर की डस्टिंग करें और खराब पड़े एक्सटेंशन बोर्ड या तारों को ठीक करवा लें.&amp;nbsp;
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पौधों की देखभाल और घर की सफाई
गमलों में जमी सूखी पत्तियों और खरपतवार को हटा दें. पौधों में नई खाद डालें और उनकी सही से कटाई-छंटनी कर दें. सीलिंग फैन, ट्यूबलाइट और कमरों के कोनों में लगे जालों को साफ करें. घर के पुराने पर्दों और बेडशीट को बदलकर नए या साफ धुले हुए पर्दे लगाएं. ऐसा करने से घर का लुक तुरंत बदल जाएगा. शू-रैक से उन जूतों को हटा दें जो छोटे हो चुके हैं या टूट गए हैं. बाकी जूतों को पॉलिश करके सही से रखें. घर के एंट्री गेट को साफ करें, नेमप्लेट चमकाएं और प्रवेश द्वार पर एक सुंदर सा इंडोर प्लांट रखें.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Health Self Check: क्या आप हेल्दी हैं? 15 अगस्त पर खुद करें ये 15 टेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Health Self Check: 15 अगस्त सिर्फ देश की आजादी का जश्न मनाने का दिन नहीं, बल्कि एक पल रुककर खुद को भी जांचने का अच्छा मौका है. अक्सर हम अपनी सेहत को लेकर तभी गंभीर होते हैं, जब कोई दिक्कत सामने आ जाती है, जबकि कुछ आसान टेस्ट घर बैठे ही यह बता सकते हैं कि शरीर और दिमाग असल में कैसा महसूस कर रहा है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ 15 आसान सेल्फ-चेक के तरीके, जिन्हें आप इस 15 अगस्त पर खुद पर आजमा सकते हैं.
BMI
बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI यह बताता है कि आपका वजन आपकी हाइट के हिसाब से सही है या नहीं. इसे निकालने के लिए वजन को हाइट के स्क्वायर से भाग दिया जाता है. सामान्य BMI रेंज 18.5 से 24.9 के बीच मानी जाती है.
कमर का घेराव
सिर्फ वजन ही नहीं, कमर का घेराव भी सेहत का एक अहम संकेत है. पेट के आस पास ज्यादा फैट जमा होना दिल की बीमारी और डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है. घर पर इसे मापने वाले टेप से नाभि के पास कमर नापकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि यह सामान्य रेंज में है या नहीं.
ब्लड प्रेशर
ब्लड प्रेशर शरीर की सेहत का एक बड़ा इंडिकेटर होता है. घर पर मौजूद बीपी मशीन से इसे आसानी से चेक किया जा सकता है. सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 के आसपास माना जाता है, और अगर यह लगातार ज्यादा या कम रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
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ब्लड शुगर
ब्लड शुगर लेवल यह बताता है कि शरीर इंसुलिन को कितनी सही तरह से इस्तेमाल कर पा रहा है. ग्लूकोमीटर की मदद से घर पर ही फास्टिंग और पोस्ट मील शुगर लेवल चेक किया जा सकता है. लगातार हाई शुगर लेवल डायबिटीज जैसी बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है.
हार्ट रेट
हार्ट रेट भी सेहत के बारे में काफी कुछ बताती है. सामान्य तौर पर यह 60 से 100 बीट प्रति मिनट के बीच होनी चाहिए. इसे चेक करने के लिए कलाई या गर्दन पर उंगली रखकर एक मिनट तक धड़कनों को गिना जा सकता है. अगर यह नॉर्मल है तो चिंता की कोई बात नहीं है.
नींद
अच्छी सेहत की नींव अच्छी नींद पर टिकी होती है. रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है. अगर बार बार नींद टूटती है, सुबह उठने पर थकान महसूस होती है, या नींद आने में देर लगती है, तो यह शरीर के तनाव में होने का संकेत हो सकता है.
पानी पीने की आदत
दिन भर में कम से कम 8 गिलास पानी पिएं. बार बार प्यास लगना या मुंह सूखना पानी की कमी का इशारा हो सकता है, इसलिए पानी पीना बिल्कुल न भूलें.
मानसिक स्वास्थ्य का सेल्फ चेक
खुद से यह सवाल पूछें कि क्या लगातार काम या फिर थकान की वजह से चिड़चिड़ापन, उदासी या बेचैनी तो महसूस नहीं हो रही है? अगर लगातार ऐसा महसूस हो तो किसी करीबी और हेल्थ एक्सपर्ट से बात करें.
सांस रोकने की क्षमता
कुछ देर आराम से बैठकर गहरी सांस लें और देखें कि आप कितनी देर सांस रोक पा रहे हैं, यह फेफड़ों की सेहत के बारे में बताता है.&amp;nbsp;
फ्लेक्सिबिलिटी टेस्ट
खड़े होकर बिना घुटने मोड़े पैर के अंगूठे छूने की कोशिश करें. यह शरीर की लचक और मसल्स हेल्थ बताता है.
पाचन तंत्र
खाने के बाद पेट फूलना, गैस या भारीपन महसूस होना पाचन तंत्र की सेहत पर सवाल खड़े कर सकता है, अगर ऐसा हो रहा है तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
आंखों की रोशनी
दूर या नजदीक की किसी चीज को साफ देख पा रहे हैं या नहीं, यह आसान सेल्फ चेक आंखों की सेहत का शुरुआती अंदाजा देता है.
त्वचा और नाखूनों की सेहत
रूखी त्वचा, बार बार टूटते नाखून या बालों का झड़ना शरीर में पोषण की कमी का इशारा हो सकता है.
एनर्जी लेवल
दिन भर बिना वजह थकान महसूस होना शरीर के अंदर किसी कमी या तनाव का संकेत हो सकता है.
रिकवरी टाइम
सीढ़ियां चढ़ने या हल्की एक्सरसाइज के बाद सांस और धड़कन कितनी जल्दी सामान्य होती है, यह भी फिटनेस लेवल का अच्छा पैमाना है.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>15 August Look: ऑफिस से कॉलेज तक, 15 अगस्त के 10 एलिगेंट ब्यूटी लुक्स</title>
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        <description><![CDATA[ 15 August Look: 15 अगस्त पर देशभक्ति का जोश तो रहता ही है, पर साथ ही हर कोई चाहता है कि उस दिन वो स्टाइलिश और एलिगेंट भी दिखे, चाहे वो ऑफिस जा रहा हो या कॉलेज. अच्छी बात यह है कि बिना भारी मेकअप या महंगे कपड़ों के भी बहुत खूबसूरत और सिंपल लुक तैयार किया जा सकता है. आइए जानते हैं कुछ ऐसे आसान ब्यूटी आइडिया, जो हर उम्र और हर मौके पर फिट बैठते हैं.
नो-मेकअप मेकअप
ऑफिस जाने वालों के लिए नो-मेकअप मेकअप लुक सबसे बेहतर विकल्प है. इसमें हल्की बीबी क्रीम या टिंटेड मॉइश्चराइजर लगाएं, गालों पर हल्का सा पीच या गुलाबी ब्लश लगाएं और होंठों पर न्यूड या हल्के गुलाबी रंग का लिप बाम या लिपस्टिक लगा सकते हैं. आंखों पर सिर्फ काजल और हल्का मस्कारा ही काफी है. यह लुक इतना सिंपल होता है कि देखने में लगता ही नहीं कि मेकअप किया है, पर चेहरा फ्रेश और खिला-खिला नजर आता है.
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इंडो-वेस्टर्न लुक
कॉलेज जाने वाली लड़कियों और लड़कों के लिए इंडो-वेस्टर्न लुक एक बेहतरीन विकल्प है. जींस के साथ कुर्ती या भारतीय प्रिंट वाली शर्ट पहनी जा सकती है, या फिर प्लाजो के साथ क्रॉप टॉप भी एक स्टाइलिश कॉम्बिनेशन बनाता है. तिरंगे रंग की थीम रखते हुए हरे, सफेद या नारंगी रंग के कपड़े चुनना इस मौके को और खास बना देता है. यह लुक आरामदायक भी होता है और स्टाइलिश भी, जो पूरे दिन कॉलेज में आसानी से कैरी किया जा सकता है.
मिनिमल ग्लैम
अगर शाम को किसी फंक्शन या पार्टी में जाना हो तो मिनिमल ग्लैम लुक अपनाया जा सकता है. इसमें हल्का शिमरी आईशैडो, पतली आईलाइनर लाइन और मैट या सटिन फिनिश वाली लिपस्टिक अच्छी लगती है. हाईलाइटर का हल्का टच गालों की हड्डी पर लगाने से चेहरे में नेचुरल चमक आ जाती है. इस लुक में ओवर करने की जरूरत नहीं, बस थोड़ी सी चमक और साफ-सुथरा फिनिश ही काफी है.
हेयरस्टाइल
हेयरस्टाइल किसी भी लुक को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाता है. ऑफिस के लिए सिंपल पोनीटेल या लो बन एक क्लासिक और प्रोफेशनल विकल्प है. कॉलेज के लिए ओपन कर्ल्स या साइड ब्रेड ज्यादा ट्रेंडी और यंग लगते हैं. अगर एथनिक लुक कैरी करना हो, तो बालों में गजरा या छोटे-छोटे फूल लगाना भी बहुत अच्छा लगता है और त्योहार वाला फील देता है.
एक्सेसरीज का तालमेल
एक्सेसरीज लुक में चार चांद लगा देती हैं, बस इन्हें सही तरीके से चुनना जरूरी है. तिरंगे रंग की चूड़ियां, झुमके या हेयर एक्सेसरी पूरे लुक को थीम के हिसाब से परफेक्ट बना देती हैं. ऑफिस के लिए हल्के और छोटे इयररिंग्स अच्छे रहते हैं, जबकि कॉलेज या पार्टी के लिए थोड़े बड़े और स्टेटमेंट पीस भी कैरी किए जा सकते हैं. ध्यान रखें कि एक्सेसरीज ज्यादा भारी ना हों, वरना पूरा लुक ओवरलोडेड लग सकता है.
कोई जरूरी नहीं हैवी मेकअप और महंगे कपड़े
15 अगस्त पर एलिगेंट दिखने के लिए भारी मेकअप या महंगे कपड़ों की जरूरत नहीं है. बस सही मेकअप स्टाइल, आरामदायक इंडो-वेस्टर्न आउटफिट, सिंपल हेयरस्टाइल और सही एक्सेसरीज का तालमेल बिठाकर आप ऑफिस से लेकर कॉलेज तक, हर जगह खूबसूरत और स्टाइलिश दिख सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Places to Visit on Independence Day: यहां आज भी ताजा हैं भगत सिंह की यादें, ऐसे बनाएं घूमने का प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ Places to Visit on Independence Day: 15 अगस्त आते ही हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जाग उठती है. इस मौके पर पूरे देश में नेशनल हॉलीडे होता है. ऐसे में अगर आप इस मौके पर अगर आप कुछ अलग करना चाहते हैं या घूमने का प्लान बनाते हैं तो आप शहीद भगत सिंह से जुड़ी जगहों पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. पंजाब में ऐसी कई जगहें हैं जहां भगत सिंह की यादें आज भी जिंदा हैं. इन जगहों पर जाकर आप न सिर्फ इतिहास को करीब से महसूस करेंगे, बल्कि बच्चों को भी देश के लिए कुर्बानी देने वाले इस महान क्रांतिकारी की कहानी बता पाएंगे. आइए जानते हैं कि इस 15 अगस्त को आप कहां-कहां पर घूम सकते हैं.
खटकड़ कलां- भगत सिंह का पैतृक गांव
भगत सिंह की कुर्बानी पूरे देश के लिए एक सबसे महत्वपूर्ण कुर्बानी रहेगी, जिसे देश का हर बच्चा, बूढ़ा अपनी अंतिम सांस तक याद रखेगा. बता दें कि भगत सिंह का जन्म भले ही लायलपुर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है, लेकिन उनका पैतृक गांव पंजाब के खटकड़ कलां में है, जहां उनका पुश्तैनी मकान आज भी मौजूद है और इसकी देखरेख पुरातत्व विभाग करता है. बताया जाता है कि भगत सिंह बचपन में अपने दादा अर्जुन सिंह के साथ छुट्टियां बिताने यहां आते थे. इस पुश्तैनी घर में आज भी परिवार की पुरानी चीजें रखी हुई हैं, जो उस दौर की झलक दिखाती हैं. इसी गांव में एक विशाल स्मारक और म्यूजियम बनाया गया है, जो 11 एकड़ में फैला हुआ है. यहां भगत सिंह से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज और उनकी जिंदगी की कहानी को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है. परिवार के साथ घूमने और बच्चों को इतिहास सिखाने के लिए यह जगह बेहद खास है.
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हुसैनीवाला- जहां हुआ था अंतिम संस्कार
पंजाब के फिरोजपुर जिले में स्थित हुसैनीवाला राष्ट्रीय शहीदी स्मारक भगत सिंह, सुखदेव थापर और राजगुरु की याद में बनाया गया है. कहा जाता है कि इसी जगह सतलुज नदी के किनारे तीनों क्रांतिकारियों का अंतिम संस्कार किया गया था, इसलिए यह स्थान देशभक्तों के लिए एक तीर्थ जैसा माना जाता है. खास बात यह है कि यहां भारत और पाकिस्तान की सेनाओं द्वारा हर शाम एक झंडा उतारने की रस्म निभाई जाती है, जो वाघा-अटारी बॉर्डर सेरेमनी जैसी ही होती है. अगर आप 15 अगस्त पर यहां जाते हैं तो शाम की इस सेरेमनी को देखना बिल्कुल न भूलें, यह अनुभव रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>15 August Home Decoration: 500 रुपये में दें घर को देशभक्ति वाला नया लुक, जानें कैसे?</title>
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        <description><![CDATA[ 15 August Home Decoration: 15 अगस्त पर घर को सजाने के लिए महंगे डेकोरेशन आइटम खरीदना जरूरी नहीं है. थोड़ी सी क्रिएटिविटी और घर में मौजूद चीजों का सही इस्तेमाल करके सिर्फ 500 रुपए में भी घर को देशभक्ति वाला शानदार लुक दिया जा सकता है. तो चलिए जानते हैं कि कैसे कम बजट में भी घर को खूबसूरती से सजाया जा सकता है.
DIY डेकोरेशन
खुद से बनाई गई सजावट ना सिर्फ बजट में आती है बल्कि उसमें अपनापन भी नजर आता है. घर में पड़े रंगीन कागज, कपड़े या रिबन से तिरंगा बंटिंग बनाई जा सकती है, जिसे दीवार या बालकनी पर लटकाया जा सकता है. इसके अलावा गत्ते और कागज से छोटे-छोटे झंडे और बैज बनाकर बच्चों के साथ मिलकर भी सजावट की जा सकती है, जिससे घर में त्योहार का माहौल और मजेदार बन जाता है.
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पेपर क्राफ्ट
घर को सजाने का पेपर क्राफ्ट सबसे सस्ता और आसान तरीका है. रंगीन कागज से फूल, कागज की चेन या ओरिगेमी झंडे बनाकर दीवारों, खिड़कियों और दरवाजों पर लगाए जा सकते हैं. थोड़ी मेहनत से पेपर लालटेन भी बनाई जा सकती है, जिसमें हरे, सफेद और नारंगी रंग के कागज का इस्तेमाल करके अंदर छोटा दीया या एलईडी लाइट रखी जा सकती है. ये देखने में बहुत खूबसूरत लगती हैं और खर्चा भी बहुत कम आता है.
पुराने सामान का इस्तेमाल
घर में पड़ी पुरानी चीजों को फेंकने की बजाय उन्हें दोबारा इस्तेमाल करना एक स्मार्ट तरीका है. पुरानी बोतलों को रंग कर उनमें फूल रखे जा सकते हैं, पुराने कपड़ों से बंटिंग या तोरण बनाया जा सकता है, और पुराने डिब्बों को सजाकर उनमें मोमबत्ती या दीया रखा जा सकता है. इससे घर सजता भी है और पैसे भी बचते हैं, साथ ही रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलता है.
लाइटिंग
लाइटिंग किसी भी सजावट में जान डाल देती है. महंगी लाइट्स की जगह छोटे एलईडी बल्ब की सस्ती लड़ियां बालकनी, खिड़की या एंट्रेंस पर लगाई जा सकती हैं. दीयों का इस्तेमाल करना भी एक अच्छा और बजट-फ्रेंडली विकल्प है, जिन्हें तिरंगे के रंग में सजाकर रखा जा सकता है. शाम होते ही जब ये लाइट्स जलती हैं, तो घर का पूरा लुक ही बदल जाता है.
बालकनी और एंट्रेंस की सजावट
घर की सबसे पहली नजर बालकनी और एंट्रेंस पर ही पड़ती है, इसलिए इन्हें सजाना सबसे जरूरी है. एंट्रेंस पर तिरंगे रंग की रंगोली बनाई जा सकती है, जिसमें हल्दी, चावल और गुलाल जैसी सस्ती चीजों का इस्तेमाल हो सकता है. बालकनी की रेलिंग पर बंटिंग या फूलों की माला बांधी जा सकती है, और दरवाजे पर छोटा सा तोरण या पेपर फ्लावर बॉर्डर लगाया जा सकता है. इससे घर में आते ही देशभक्ति का माहौल महसूस होने लगता है.
थोड़ी सी सूझबूझ और मेहनत से आएगा शानदार लुक
घर को देशभक्ति वाला लुक देने के लिए महंगे सामान की जरूरत नहीं है, बस थोड़ी सी सूझबूझ और मेहनत चाहिए. DIY डेकोरेशन, पेपर क्राफ्ट, पुराने सामान का दोबारा इस्तेमाल, सस्ती लाइटिंग और बालकनी-एंट्रेंस की सजावट पर ध्यान देकर सिर्फ 500 रुपए में भी घर को बेहद खूबसूरत और त्योहार जैसा बनाया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 07:30:02 +0530</pubDate>
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        <title> Independence Day15 August:15 अगस्त पर घर में ऐसा माहौल बनाएं, बढ़ेगा देशभक्ति का जज्बा</title>
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        <description><![CDATA[ &amp;nbsp;Independence Day15 August:15 अगस्त सिर्फ एक छुट्टी का दिन नहीं, बल्कि देश की आजा को याद करने और उसका जश्न मनाने का मौका है. लेकिन ज्यादतर घरों में यह दिन झंडा फहराने और टीवी पर परेड देखने तक ही सिमट कर रह जाता है. अगर आप चाहें तो इस बार कुछ आसान तरीकों से घर के अंदर ही देशभक्ति से भरा माहौल बना सकते हैं, जिसमें पूरा परिवार शामिल हो सके. आइए जानते हैं कुछ ऐसे आइडियाज, जो इस Independence Day को बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके लिए यादगार बना देंगे.
पूरे परिवार के साथ मनाने के तरीके
15 अगस्त की सुबह पूरे परिवार को साथ बिठाकर झंडा फहराने की छोटी सी रस्म से शुरुआत करें. इसके बाद सब मिलकर तिरंगे के रंग वाला नाश्ता बनाएं, जैसे केसरी हलवा, सफेद इडली और हरी चटनी. शाम को घर के सभी लोग मिलकर देश से जुड़ी पुरानी कहानियां और परिवार के बुज़ुर्गों के आजादी से जुड़े किस्से सुनें और सुनाएं. इससे बच्चों को इतिहास भी पता चलेगा और परिवार का वक्त भी क्वालिटी टाइम में बदल जाएगा.
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बच्चों के लिए एक्टिविटीज&amp;nbsp;
बच्चों को सिर्फ छुट्टी का मजा नहीं, बल्कि सीखने का मौका भी दें. उनसे तिरंगे की पेंटिंग बनवाएं, कागज के झंडे बनवाएं या फ्रीडम फाइटर्स के बारे में एक छोटा क्विज खेलें. चाहें तो घर में ही छोटा सा फैंसी ड्रेस सेशन रखें, जिसमें बच्चे किसी स्वतंत्रता सेनानी की तरह तैयार हों. इससे बच्चों में देश के इतिहास को लेकर दिलचस्पी बढ़ती है और सीखना भी मजेदार बन जाता है.
देशभक्ति प्लेलिस्ट
घर के माहौल को खास बनाने के लिए एक अच्छी देशभक्ति प्लेलिस्ट जरूर तैयार करें. ऐ मेरे वतन के लोगों, मां तुझे सलाम, जय हो और ये देश है वीर जवानों का जैसे गाने माहौल में जोश भर देते हैं. सुबह नाश्ते के वक्त या शाम की चाय के दौरान ये प्लेलिस्ट बैकग्राउंड में चलाएं, इससे पूरे दिन घर में देशभक्ति का माहौल बना रहेगा.
घर की सजावट
&amp;nbsp;सजावट में तिरंगे के रंगों का खुलकर इस्तेमाल करें. दरवाजे पर तिरंगा तोरण लगाएं, बालकनी में केसरी सफेद हरे गुब्बारे सजाएं और घर के अंदर छोटी छोटी लाइटिंग से माहौल को खास बनाएं. अगर बच्चे हैं तो उनसे बनाए गए हाथ के बने डेकोरेशन पीस भी दीवारों पर लगाएं, इससे घर की सजावट में उनकी मेहनत और जुड़ाव दोनों झलकेंगे.
&amp;nbsp;स्क्रीन फ्री फैमिली टाइम
इस दिन को खास बनाने के लिए कुछ घंटे मोबाइल और टीवी से दूर रहने की कोशिश करें. इसकी जगह पूरा परिवार मिलकर बोर्ड गेम्स खेलें, देश से जुड़ी क्विज करें या साथ बैठकर पुरानी फैमिली फोटोज देखें. स्क्रीन फ्री टाइम न सिर्फ रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि त्योहार को असली मायने में यादगार भी बना देता है.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords> Independence, Day15, August:15, अगस्त, पर, घर, में, ऐसा, माहौल, बनाएं, बढ़ेगा, देशभक्ति, का, जज्बा</media:keywords>
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        <title>15 August home decoration: 15 अगस्त पर घर सजाएं, लेकिन न करें ये 10 गलतियां</title>
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        <description><![CDATA[ 15 August home decoration: 15 अगस्त पर घर को सजाना हर किसी को अच्छा लगता है, पर जोश-जोश में कई बार हम कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनसे तिरंगे का सम्मान भी कम होता है और सजावट भी खूबसूरत नहीं दिखती. तो चलिए जानते हैं कि इस बार घर सजाते वक्त किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
तिरंगे का सम्मान रखते हुए सजावट
सबसे पहली और सबसे जरूरी बात, तिरंगे को कभी भी उल्टा नहीं लगाना चाहिए, यानी केसरिया रंग हमेशा ऊपर ही रहना चाहिए. झंडे को जमीन पर गिरने देना या पैरों तले आना भी बड़ी गलती है, इसलिए उसे ऐसी जगह लगाएं जहां वो सुरक्षित रहे. साथ ही झंडे को फटा-पुराना या गंदा इस्तेमाल करने से भी बचें. शाम होते ही झंडे को सम्मान के साथ उतार लेना चाहिए, उसे यूं ही टंगा हुआ नहीं छोड़ना चाहिए.
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प्लास्टिक डेकोरेशन से बचें
आजकल बाजार में प्लास्टिक के झंडे, बैलून और बंटिंग बहुत आसानी से मिल जाते हैं, पर ये ना तो पर्यावरण के लिए अच्छे होते हैं और ना ही ज्यादा दिन टिकते हैं. इसकी जगह कागज, कपड़े या रीसाइकल की हुई चीजों से सजावट करना बेहतर रहता है. इससे घर भी अच्छा दिखता है और आप एक जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज भी निभाते हैं.
बच्चों के लिए सुरक्षित सजावट
घर में अगर बच्चे हैं तो सजावट करते वक्त उनकी सुरक्षा का खास ध्यान रखना चाहिए. नुकीली पिन, कांच की चीजें या बिजली की लटकती हुई लड़ियां बच्चों की पहुंच से दूर रखें. दीये या मोमबत्ती जलाकर सजावट करते वक्त भी सावधानी बरतें और उन्हें कभी अकेला ना छोड़ें. कोशिश करें कि सजावट में ऐसी चीजें इस्तेमाल हों जिनसे बच्चों को कोई नुकसान ना पहुंचे.
मानसून-फ्रेंडली डेकोर
15 अगस्त बारिश के मौसम में आता है, इसलिए बाहर की सजावट करते वक्त इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि वो पानी से खराब ना हो. कागज के झंडे या बंटिंग बारिश में जल्दी गीले होकर खराब हो जाते हैं, इसलिए बेहतर होगा कि वॉटरप्रूफ या कपड़े की चीजें इस्तेमाल करें. बालकनी या छत पर सजावट करते वक्त बिजली के तार खुले ना रहें, इसका खास ख्याल रखें, क्योंकि नमी में करंट लगने का खतरा बढ़ जाता है.
कम बजट में प्रीमियम लुक
महंगी सजावट खरीदे बिना भी घर को शानदार दिखाया जा सकता है. घर में पड़े पुराने कपड़ों से तिरंगा बंटिंग बनाई जा सकती है, या फिर रंगीन कागज से फूल और झंडियां बनाकर दीवारों पर सजाई जा सकती हैं. गमलों में हरे, सफेद और नारंगी फूल लगाना भी एक सस्ता और खूबसूरत तरीका है. थोड़ी सी क्रिएटिविटी से कम खर्च में भी घर प्रीमियम और त्योहार जैसा लग सकता है.
कुल मिलाकर बात यह है
15 अगस्त की सजावट करते वक्त बस इतना ध्यान रखें कि तिरंगे का सम्मान बना रहे, प्लास्टिक की जगह पर्यावरण के अनुकूल चीजों का इस्तेमाल हो, बच्चों की सुरक्षा का खयाल रखा जाए और मौसम के हिसाब से सही सामान चुना जाए. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप बिना ज्यादा खर्च किए भी अपने घर को इस स्वतंत्रता दिवस पर सबसे खूबसूरत बना सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>15 August Tiranga Thali: 15 अगस्त पर बनाएं तिरंगा थाली, जानें क्या रखें मेन्यू में?</title>
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        <description><![CDATA[ 15 August Tiranga Thali: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर घर में झंडा फहराने के साथ-साथ अगर खाने की थाली भी तिरंगे रंग में सज जाए, तो त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है. बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको तिरंगा थाली देखकर बड़ा उत्साह आता है. तो चलिए जानते हैं कि इस बार आप अपनी तिरंगा थाली में क्या-क्या शामिल कर सकते हैं.
स्टार्टर से लेकर डेजर्ट तक पूरा मेन्यू
तिरंगा थाली की शुरुआत हल्के-फुल्के स्टार्टर से करें. हरे रंग के लिए पालक या धनिया-पुदीना कटलेट बना सकते हैं, सफेद रंग के लिए दही वड़ा या पनीर टिक्का रखें और नारंगी रंग के लिए गाजर या शकरकंद की टिक्की परोसें. मेन कोर्स में एक तरफ पालक पनीर या हरी सब्जी, बीच में दही या पनीर की सफेद ग्रेवी और दूसरी तरफ पनीर टमाटर या शाही पनीर जैसी नारंगी-लाल सब्जी रखी जा सकती है.
साथ में जीरा राइस या साधारण रोटी परोसें. आखिर में डेजर्ट के लिए तिरंगा तिरंगा त्रि-रंग बर्फी या केसर-पिस्ता-पालक फ्लेवर वाली कुल्फी बनाई जा सकती है, जो देखने में भी सुंदर लगती है और खाने में भी लाजवाब.
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बच्चों और मेहमानों के लिए अलग ऑप्शन
घर में अगर बच्चे हैं तो उनके लिए थोड़ा मजेदार और आसान खाना बनाना अच्छा रहता है, जैसे तिरंगा सैंडविच, जिसमें हरी चटनी, सफेद मेयो और गाजर की परत लगाई जा सकती है. इसके अलावा तिरंगा पास्ता या फ्रूट चाट भी बच्चों को बहुत पसंद आती है.
वहीं मेहमानों के लिए थोड़ा ट्रेडिशनल और भारी मेन्यू रखा जा सकता है, जैसे पुलाव, कढ़ी और मिठाई का पूरा सेट, जिससे त्योहार का माहौल और भी खास बन जाए.
शाकाहारी और हाई-प्रोटीन ऑप्शन
आजकल बहुत से लोग हेल्दी और हाई-प्रोटीन खाना पसंद करते हैं, तो उनके लिए भी तिरंगा थाली में अच्छे विकल्प रखे जा सकते हैं. स्प्राउट्स सलाद, पनीर भुर्जी, दाल तड़का और चना चाट जैसी चीजें प्रोटीन से भरपूर होती हैं और शाकाहारी भी हैं.
चाहें तो पालक, पनीर और गाजर को मिलाकर एक हेल्दी तिरंगा सलाद भी बनाया जा सकता है, जो सेहत के साथ-साथ रंग-बिरंगा भी दिखता है.
प्लेटिंग आइडिया
तिरंगा थाली को खास बनाने में प्लेटिंग का भी बड़ा हाथ होता है. थाली में खाना ऐसे सजाएं कि ऊपर हरा रंग, बीच में सफेद और नीचे नारंगी रंग की चीजें हों, बिल्कुल झंडे जैसा क्रम रखें. बीच में एक छोटा सा अशोक चक्र बनाने के लिए दही या रायते के ऊपर काली तिल या धनिया से गोला बना सकते हैं.
थाली के किनारों पर पुदीने की पत्ती या छोटे झंडे की टूथपिक लगाकर सजावट और भी सुंदर बनाई जा सकती है.
कुल मिलाकर बात यह है
15 अगस्त पर तिरंगा थाली बनाना ना तो मुश्किल है और ना ही महंगा, बस थोड़ी सी क्रिएटिविटी और रंगों का सही इस्तेमाल चाहिए.
हरे, सफेद और नारंगी रंग की चीजों को सही तरीके से सजाकर आप घर पर ही एक शानदार और यादगार तिरंगा थाली बना सकते हैं, जो बच्चों और बड़ों दोनों को खूब पसंद आएगी.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Independence Day skin care: 15 अगस्त पर मिनटों में पाएं नेचुरल ग्लो, अपनाएं ये टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Independence Day skin care: 15 अगस्त आ रहा है और हर कोई चाहता है कि उस दिन उसका चेहरा एकदम फ्रेश और चमकदार दिखे. पर बारिश के मौसम में स्किन का ख्याल रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. कभी चेहरा चिपचिपा लगता है तो कभी बेजान सा दिखता है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, बस कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप बिना पार्लर गए भी नेचुरल ग्लो पा सकते हैं.
मानसून में स्किन का रखें खास ख्याल
बारिश के दिनों में हवा में नमी ज्यादा होती है, जिससे चेहरे पर पसीना और तेल जल्दी जमा हो जाता है. इस मौसम में हल्का और वॉटर-बेस्ड मॉइश्चराइजर लगाना चाहिए, ताकि स्किन ना ज्यादा ऑयली लगे और ना ही रूखी. साथ ही दिन में दो-तीन बार चेहरा साफ पानी से धोते रहें, जिससे धूल-मिट्टी और पसीना हट जाए और पिंपल्स होने का खतरा कम हो जाए.
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रोज करें CTM रूटीन
चेहरे की चमक बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है CTM रूटीन, यानी क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग. सबसे पहले माइल्ड फेस वॉश से चेहरा साफ करें ताकि गंदगी निकल जाए. इसके बाद गुलाब जल जैसा हल्का टोनर लगाएं, इससे स्किन के पोर्स टाइट होते हैं और चेहरा ताजा लगता है. आखिर में हल्का मॉइश्चराइजर लगाकर स्किन को नमी दें. रोज सुबह-शाम बस पांच मिनट का यह रूटीन अपनाने से चेहरे पर अपने आप निखार आने लगता है.
इंस्टेंट ग्लो के लिए घरेलू नुस्खे
अगर 15 अगस्त पर जल्दी में तुरंत ग्लो चाहिए तो घर में रखी चीजें ही काफी हैं. एक चम्मच बेसन में थोड़ा दूध और शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं, दस मिनट बाद हल्के हाथों से धो लें, चेहरा एकदम चमक उठेगा. इसके अलावा ठंडी चाय की पत्ती वाला पानी या बर्फ के टुकड़े चेहरे पर रगड़ने से भी तुरंत निखार आता है और चेहरे की सूजन भी कम होती है. बेसन और हल्दी का पैक भी बरसों पुराना नुस्खा है, जो आज भी उतना ही असरदार है.
मेकअप से पहले जरूरी है स्किन प्रेप
अच्छे मेकअप की शुरुआत अच्छी स्किन प्रेप से होती है. मेकअप लगाने से पहले चेहरा अच्छे से साफ करें और मॉइश्चराइजर लगाकर कुछ मिनट रुकें, ताकि वह स्किन में अच्छे से समा जाए. इसके बाद हल्का प्राइमर लगाएं, इससे मेकअप ज्यादा देर तक टिका रहता है और चेहरा नेचुरल भी दिखता है. बारिश के मौसम में वॉटरप्रूफ या लॉन्ग-लास्टिंग प्रोडक्ट चुनना बेहतर रहता है, ताकि पसीने या नमी की वजह से मेकअप खराब ना हो.
कुल मिलाकर बात यह है
15 अगस्त के जश्न में शामिल होने के लिए महंगे पार्लर ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं है.बस मानसून के हिसाब से स्किन का ध्यान रखें, रोज CTM रूटीन अपनाएं, जरूरत पड़ने पर घरेलू नुस्खों का सहारा लें और मेकअप से पहले स्किन को अच्छे से तैयार करें. इन छोटी-छोटी आदतों से ही चेहरे पर नेचुरल ग्लो आ जाता है और आप बिना किसी झंझट के इस स्वतंत्रता दिवस पर खिले-खिले नजर आएंगे.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Wheat Flour Storage Tips in Monsoon:  मानसून में आटे में लग जाते हैं कीड़े, ऐसे करें स्टोर</title>
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        <description><![CDATA[ Wheat Flour Storage Tips in Monsoon:&amp;nbsp; बारिश का मौसम जितना सुकून भरा होता है उतना ही इस मौसम में बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है. बीमारियों के अलावा एक और सबसे बड़ी परेशानी होती है जो आम हो जाती है वो है उमस का बढ़ जाना, जिसके कारण घर में नमी बढ़ जाती है. और इसी नमी की वजह से रसोई में रखा आटा सबसे पहले खराब होना शुरू होता है. कई बार कुछ ही दिनों में आटे में छोटे-छोटे भूरे रंग के कीड़े दिखने लगते हैं, जिन्हें देखकर पूरा आटा फेंकना पड़ता है. यह समस्या लगभग हर घर में मानसून के दौरान देखने को मिलती है. लेकिन वहीं अगर आटे को सही तरीके से स्टोर किया जाए, तो इसमें कीड़े लगने से बचाया जा सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी कि क्या है सही तरीका.
आटे में कीड़े क्यों लगते हैं?
मानसून में हवा में नमी की मात्रा बहुत बढ़ जाती है. जब यह नमी आटे के डिब्बे या पैकेट के अंदर पहुंचती है, तो आटा हल्का सा गीला होने लगता है. यही गीलापन कीड़ों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है. इसके अलावा अगर आटे का डिब्बा ठीक से बंद न हो, तो बाहर से हवा और नमी अंदर जाती रहती है, जिससे कीड़े और भी तेजी से बढ़ते रहते हैं और देखते ही देखते कुछ ही दिनों में वे पूरे आटे को बर्बाद कर देते हैं. कई बार पुराना आटा या बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ रखा गया आटा भी जल्दी खराब हो जाता है, क्योंकि वह ज्यादा दिनों तक डिब्बे में बंद पड़ा रहता है और उसमें नमी जमा होने लगती है.
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आटे को कीड़ों से बचाने के आसान तरीके
आटे को कीड़ों से बचाने के लिए सबसे पहला तरीका है कि उसे हमेशा एयरटाइट यानी पूरी तरह बंद होने वाले डिब्बे में रखें. डिब्बे को हर बार इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह बंद करना चाहिए. इसके अलावा आटे के डिब्बे में कुछ तेजपत्ते डालने से भी कीड़े नहीं लगते, क्योंकि तेजपत्ते की खुशबू कीड़ों को दूर रखती है. साथ ही आप तेजपत्ते के अलावा नीम की कुछ सूखी पत्तियां भी डाल सकते हैं जो कि सबसे पुराना और एक असरदार तरीका है. साथ ही आटे में तेजपत्ता और नीम के पत्ते मिलाने से रोटी बनाने में अच्छी खुशबू और नीम के कारण शरीर को कुछ पोषण भी मिलते हैं. वहीं कुछ लोग आटे के डिब्बे में एक साफ कपड़े में लौंग बांधकर भी रख देते हैं, इससे भी कीड़े लगने का खतरा कम हो जाता है. ध्यान रखने वाली बात है कि मानसून में आटा एक बार में ज्यादा मात्रा में नहीं खरीदना चाहिए, इससे उसको एक बार में स्टोर करने में दिक्कत आती है.
आटे को स्टोर करते समय बरतें ये सावधानियां
आटे के डिब्बे को हमेशा सूखी और ठंडी जगह पर रखना चाहिए, सीधे धूप या गैस के पास रखने से बचें. डिब्बे में आटा भरने से पहले यह जरूर देख लें कि डिब्बा पूरी तरह सूखा हो, उसमें पानी की एक भी बूंद न हो. हर 10-15 दिन में डिब्बे को खाली करके अच्छी तरह साफ करना चाहिए और उसके बाद ही नया आटा डालें. इसके अलावा आटा को इस्तेमाल करते वक्त भी ध्यान देना चाहिए कि आपका हाथ सूखा हो गीला हो, कई बार पानी की एक दो बूंद ही आटे के खराब करने के लिए काफी होता है.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Love Marriage Problems:लव मैरीज के बाद किन परेशानियों का करना पड़ता सामना?</title>
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        <description><![CDATA[ Love Marriage Problems: आजकल लव मैरिज का चलन तेजी से बढ़ रहा है, और ज्यदातर कपल्स प्यार में शादी करने का फैसला बड़े जोश के साथ लेते हैं. लेकिन शादी से पहले जो रिश्ता आसान और खूबसूरत लगता है, वो शादी के बाद अचानक मुश्किल क्यों हो जाता है? कई बार देखा गया है कि लव मैरिज करने वाले कपल्स कुछ साल बाद ही एक दूसरे से दूरियां महसूस करने लगते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर लव मैरिज के बाद कपल्स को किन किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
घरवालों की नाराजगी सबसे बड़ी दिक्कत
अगर किसी कपल ने घरवालों की मर्जी के बिना शादी की है, तो सबसे पहली दिक्कत यहीं से शुरू होती है. ससुराल वाले शुरुआत में बहू या दामाद को दिल से नहीं अपनाते, जिससे रिश्तों में तनाव बना रहता है. कई बार यही खटास सालों तक चलती है, और कपल्स को दोनों तरफ के परिवारों के बीच रिशता में काफी मेहनत करनी पड़ती है.
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पार्टनर की आदतें अब चुभने लगती हैं
शादी से पहले पार्टनर की हर बात अच्छी लगती है, लेकिन शादी के बाद वही आदतें परेशान करने लगती हैं. दरअसल लोग मन ही मन सोचते हैं कि शादी के बाद पार्टनर बदल जाएगा, लेकिन जब ऐसा नहीं होता, तो झगड़े शुरू हो जाते हैं. यही उम्मीद और हकीकत का फर्क आगे चलकर बड़ी दूरी बना देता है.
पैसों को लेकर होने लगते हैं झगड़े
शादी के बाद खर्चों की जिम्मेदारी अचानक बढ़ जाती है. घर का खर्च, बचत और निवेश जैसे मुद्दों पर दोनों पार्टनर्स का एक राय होना जरूरी है. अगर एक पार्टनर खर्च करने में यकीन रखता है और दूसरा बचत में, तो पैसों को लेकर विवाद होना लाजमी है.
कल्चर और सोच का फर्क सामने आने लगता है
लव मैरिज में अक्सर दोनों पार्टनर अलग अलग बैकग्राउंड और कल्चर से आते हैं. रिश्ते की शुरुआत में यह फर्क रोमांचक लगता है, लेकिन शादी के बाद रोजमर्रा की जिंदगी में यही अंतर टकराव की वजह बनने लगता है. खाने पीने की आदतों से लेकर त्योहार मनाने के तरीके तक, हर छोटी बात पर मतभेद हो सकते हैं.
निजी आजादी में आती है कमी
शादी के बाद कई बार लोगों को अपने पर्सनल टाइम और आजादी में कमी महसूस होती है. सिंगल लाइफ के मुकाबले अब हर फैसला पार्टनर से पूछकर लेना पड़ता है, जो शुरुआत में अजीब और बोझिल लग सकता है.
समाज का ताना का सामना भी करना पड़ता है
भले ही आज के दौर में लव मैरिज आम बात हो चुकी है, लेकिन कई बार समाज इसे अब भी शक की नजर से देखता है. खासकर अलग धर्म या जाति में हुई शादी को लेकर लोग तरह तरह की बातें करते हैं, जिसका मानसिक असर कपल्स पर पड़ता है.
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Love, Marriage, Problems:लव, मैरीज, के, बाद, किन, परेशानियों, का, करना, पड़ता, सामना</media:keywords>
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        <title>Overripe Banana Recipes: केले ज्यादा पक गए? फेंकने के बजाय बनाएं ये रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ अक्सर हमारे घरों में जब भी केले ज्यादा पक जाते हैं या उनके छिलके काले पड़ने लगते हैं, तो लोग उन्हें खराब समझकर कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं. लेकिन ज्यादा पके हुए केले देखने में भले ही थोड़े अजीब लगें, पर असल में वे सामान्य केलों से ज्यादा मीठे, मुलायम और पौष्टिक होते हैं. जब केला ज्यादा पक जाता है, तो उसका स्टार्च प्राकृतिक शुगर में बदल जाता है, जिससे उसका स्वाद और बढ़ जाता है. अगली बार अगर आपके किचन में भी केले ज्यादा पक जाएं, तो उन्हें फेंकने की गलती बिल्कुल न करें. क्योंकि आप उनसे बेहद स्वादिष्ट, आसान और हेल्दी डिशेज बना सकते हैं.&amp;nbsp;
बनाना पैनकेक
Overripe Banana Recipes: अगर आप सुबह के नाश्ते में कुछ मीठा और हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो इस डिश के लिए ज्यादा पके केले बेस्ट माने जाते हैं. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में केलों को चम्मच या कांटे की मदद से अच्छी तरह मैश कर लें. अब इसमें आटा, दूध और दालचीनी पाउडर डालकर एक गाढ़ा घोल तैयार कर लें. फिर एक नॉन-स्टिक तवे पर थोड़ा सा मक्खन या घी लगाएं और इस घोल को छोटे-छोटे पैनकेक के आकार में फैलाएं. दोनों तरफ से हल्का सुनहरा होने तक सेकें. इसके बाद ऊपर से शहद डालकर गरमा-गरम परोसें.&amp;nbsp;
केले के गुलगुले या पुए
उत्तर भारत के घरों में पके हुए केलों से गुलगुले बनाने का चलन बहुत पुराना है. इसे शाम की चाय के लिए एक बेहतरीन स्नैक माना जाता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले गुड़ को थोड़े से पानी में घोल लें. एक बड़े बर्तन में केलों को अच्छी तरह मैश करें, फिर उसमें गेहूं का आटा, सौंफ और गुड़ का पानी डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें और हाथ से छोटी-छोटी पकौड़ियों के आकार में इस मिश्रण को तेल में डालें. इसे धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तलें. ऐसे आपके गुलगुले तैयार है.&amp;nbsp;
बनाना मिल्कशैक या स्मूदी
ज्यादा पके केलों में नेचुरल शुगर बहुत ज्यादा होती है, इसलिए इनकी स्मूदी बनाने में आपको अलग से चीनी डालने की जरूरत नहीं पड़ती. इसे बनाने के लिए मिक्सी के जार में पके हुए केलों को काटकर डालें। इसमें ठंडा दूध और ड्राई फ्रूट्स मिलाएं. फिर इसे अच्छी तरह ब्लेंड कर लें. अगर आप इसे और हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो इसमें एक चम्मच ओट्स या पीनट बटर भी मिला सकते हैं. यह जिम जाने वालों और बच्चों के लिए एक बेहतरीन एनर्जी ड्रिंक है.
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केले की बर्फी या हलवा
जब भी मीठा खाने का मन हो, तो आप यह डिश ट्राय कर सकते है. इसे बनाने के लिए केलों को मिक्सी में पीसकर पेस्ट बना लें। एक कड़ाही में घी गर्म करें और सूजी या आटे को अच्छी तरह भून लें. जब आटा खुशबू देने लगे, तो इसमें केले का पेस्ट और चीनी डाल दें. इसे धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि मिश्रण कड़ाही को छोड़ने न लगे और घी अलग न हो जाए. फिर ऊपर से ड्राई फ्रूट्स और इलायची पाउडर डाल दें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Ranchi Travel Tips : दिल्ली से रांची पहुंचने का सबसे आसान और सस्ता रास्ता कौनसा है?</title>
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        <description><![CDATA[ Ranchi Travel Tips : रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है. JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं और इसी बीच प्रदर्शनकारी छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया. छात्र पूरे दिन विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करते रहे, जिसके बाद शाम को उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए थे. ऐसे में अगर आप दिल्ली से रांची जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके सामने ट्रेन, फ्लाइट, बस और कार जैसे कई ऑप्शन हैं. दिल्ली से रांची की दूरी करीब 1,032 से 1,189 किलोमीटर के बीच है, जबकि सड़क से यह दूरी लगभग 1,160.6 किलोमीटर है. ऐसे में यात्रा का साधन चुनते समय आपको अपने बजट और उपलब्ध समय को ध्यान में रखना होगा. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि दिल्ली से रांची पहुंचने का सबसे आसान और सस्ता रास्ता कौनसा है.&amp;nbsp;
दिल्ली से रांची पहुंचने का सबसे आसान और सस्ता रास्ता कौनसा है
अगर आपका बजट कम है और आप आराम से लंबी यात्रा कर सकते हैं, तो ट्रेन सबसे सस्ता ऑप्शन हो सकता है. नई दिल्ली से रांची के लिए सीधी ट्रेन उपलब्ध है. ट्रेन नई दिल्ली स्टेशन से चलती है और रांची स्टेशन तक पहुंचती है. &amp;nbsp;ट्रेन से सफर में करीब 19 घंटे 10 मिनट से 19 घंटे 20 मिनट तक का समय लग सकता है. टिकट की कीमत लगभग 600 रुपये से 4,500 रुपये तक है.&amp;nbsp;
फ्लाइट से दिल्ली से रांची कैसे पहुंचें
अगर आप कम समय में रांची पहुंचना चहाते हैं, तो फ्लाइट सबसे तेज ऑप्शन है. दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट ली जा सकती है. &amp;nbsp;दिल्ली से रांची की उड़ान में करीब 1 घंटा 35 मिनट का फ्लाइट टाइम है, जबकि ट्रांसफर सहित कुल यात्रा करीब 3 घंटे 20 मिनट में पूरी हो सकती है. फ्लाइट का खर्च लगभग 6,000 से 13,000 रुपये तक हो सकता है.&amp;nbsp;
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बस से दिल्ली से रांची की यात्रा
रूट के अनुसार दिल्ली से पहले वाराणसी और फिर वाराणसी से रांची जाना होता है. &amp;nbsp;बस से पूरी यात्रा में करीब 24 घंटे 58 मिनट लग सकते हैं. बस सेवा दिल्ली के करोल बाग टर्मिनल-दिल्ली से शुरू होकर वाराणसी के रास्ते रांची तक पहुंचती है.&amp;nbsp;
कार से दिल्ली से रांची जाएं
अगर आप अपनी कार से सफर करना चाहते हैं, तो दिल्ली से रांची की सड़क दूरी करीब 1,160.6 किलोमीटर है. कार से यात्रा में लगभग 14 घंटे का समय लग सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>मानसून में पहाड़ घूमते वक्त न करें ये गलतियां, हो सकता है जानलेवा</title>
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        <description><![CDATA[ मानसून में पहाड़ घूमते वक्त न करें ये गलतियां, हो सकता है जानलेवा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>AIIMS Dual Kidney Transplant: सेना के हेलीकॉप्टर से ट्रांसपोर्ट हुई ब्रेन डेड महिला की किडनी, AIIMS में हुआ ड्यूल ट्रांसप्लांट</title>
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        <description><![CDATA[ AIIMS Dual Kidney Transplant : दिल्ली के AIIMS से हाल ही में मार्जिनल डोनर की दोनों किडनी एक ही मरीज में ट्रांसप्लांट करने का मामला सामने आया है, जहां चंडीगढ़ से सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए लाई गईं दो किडनी 56 वर्षीय महिला को इंप्लांटेड की गईं. ये किडनी 70 वर्षीय ब्रेन डेड महिला की थीं, जिन्हें कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर, चंडीगढ़ में ब्रेन डेड घोषित किया गया था.
खास बात यह रही कि दोनों किडनी को एक ही मरीज में लगाया गया. AIIMS में मार्जिनल डोनर की दोनों किडनी एक ही मरीज में ट्रांसप्लांट करने का यह दूसरा मामला है. डोनर की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों को देखते हुए उनकी किडनी को मार्जिनल डोनर किडनी माना गया था.&amp;nbsp;
चंडीगढ़ से हेलीकॉप्टर के जरिए दिल्ली लाई गईं किडनी
70 वर्षीय महिला कई बीमारियों से पीड़ित थीं और चंडीगढ़ के कमांड अस्पताल में भर्ती थीं. ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके परिवार की सहमति से अंगदान किया गया. उनके शरीर से मिली दोनों किडनी और लिवर का इस्तेमाल दो अलग-अलग मरीजों की जान बचाने के लिए किया गया. जिसमें दोनों किडनी को सेना के हेलीकॉप्टर से चंडीगढ़ से दिल्ली लाया गया. पालम एयरपोर्ट पर हेलीकॉप्टर के उतरने के बाद सैन्य पुलिस ने स्थानीय प्रशासन की मदद से AIIMS तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे अंगों को कम से कम समय में अस्पताल पहुंचाया जा सके. लिवर का ट्रांसप्लांटेशन दिल्ली के सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में भर्ती एक अन्य मरीज में किया गया, जबकि दोनों किडनी AIIMS में भर्ती 56 वर्षीय महिला को लगाई गईं.&amp;nbsp;
एक ही मरीज में क्यों लगाई गईं दोनों किडनी?
AIIMS के सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. असुरी कृष्ण ने बताया कि डोनर की उम्र ज्यादा थी और उन्हें कई बीमारियां भी थीं. इस वजह से उनकी किडनी को मार्जिनल डोनर किडनी माना गया. ऐसी किडनी की कार्यक्षमता सामान्य और स्वस्थ डोनर की किडनी की तुलना में सीमित हो सकती है. इसलिए डॉक्टरों ने दोनों किडनी को अलग-अलग मरीजों में लगाने की जगह एक ही मरीज में इंप्लांटेड करने का फैसला किया. 56 वर्षीय महिला के शरीर के दाहिने हिस्से में दोनों किडनी इंप्लांटेड की गईं.&amp;nbsp;
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12 घंटे के कोल्ड इस्कीमिया के बाद भी सफल ट्रांसप्लांट
इस ट्रांसप्लांट की एक खास बात यह भी रही कि किडनी करीब 12 घंटे के कोल्ड इस्कीमिया टाइम के बाद मरीज में इंप्लांटेड की गईं. कोल्ड इस्कीमिया उस समय को कहा जाता है, जब किसी अंग को शरीर से निकालने के बाद ट्रांसप्लांट होने तक उसे ठंडे तापमान में रखा जाता है. इसके बाद भी ट्रांसप्लांट के तुरंत बाद दोनों किडनी ने काम करना शुरू कर दिया. मरीज की रिकवरी भी सामान्य रही और किडनी का काम ठीक रहने के बाद उन्हें 10 दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.&amp;nbsp;
AIIMS में दूसरी बार हुआ ड्यूल किडनी ट्रांसप्लांट
AIIMS में किसी मार्जिनल डोनर की दोनों किडनी एक ही मरीज में &amp;nbsp;इंप्लांटेड करने का यह दूसरा मामला है. यह ड्यूल किडनी ट्रांसप्लांट 28 जुलाई 2026 को किया गया. इस पूरे अंग ट्रांसप्लांटेशन में आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल, नई दिल्ली और AIIMS की अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर कोर्डिनेशन रहा. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Copper&amp;T Pregnancy Risks: Copper&amp;T के साथ प्रेग्नेंसी, जानें मां&amp;बच्चे पर कितना असर?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/copper-t-pregnancy-risks-copper-t-के-साथ-प्रेग्नेंसी-जानें-मां-बच्चे-पर-कितना-असर</link>
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        <description><![CDATA[ Copper-T Pregnancy Risks : Copper-T लंबे समय तक प्रेग्नेंसी रोकने के सबसे भरोसेमंद तरीकों में से एक माना जाता है. यही वजह है कि कई महिलाओं को लगता है कि इसे लगवाने के बाद प्रेग्नेंसी की संभावना लगभग खत्म हो जाती है, लेकिन कोई भी कॉन्ट्रासेप्शन तरीका 100 फीसदी असरदार नहीं होता है.
Copper-T के इस्तेमाल के बाद भी अगर प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आ जाए, तो महिला के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या बच्चा सुरक्षित रहेगा और क्या Copper-T की वजह से बच्चे को कोई नुकसान हो सकता है. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि Copper-T के साथ प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे पर कितना असर होता है.&amp;nbsp;
Copper-T के बाद भी प्रेग्नेंसी कितनी आम है?
Copper-T सबसे भरोसेमंद कॉन्ट्रासेप्शन तरीकों में से एक है. इसे इस्तेमाल करने वाली 100 में से एक से भी कम महिलाओं को एक साल में प्रेग्नेंसी होती है. डॉक्टर के अनुसार, कई मामलों में इसकी वजह Copper-T का अपनी सही जगह से खिसक जाना होता है. Copper-T यूट्रस के मुंह यानी cervix में खिसक सकता है, बिना पता चले शरीर से बाहर निकल सकता है या यूट्रस की दीवार में फंस सकता है.
इसके अलावा, अगर इसे इसकी तय अवधि से ज्यादा समय तक रखा जाए, तो भी यह प्रभावी नहीं रह सकता है. आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला Cu T 380A 10 साल तक के लिए approved है. भारत में डिलीवरी के तुरंत बाद भी कई महिलाओं को Copper-T लगाया जाता है. ऐसे मामलों में अगर नियमित follow-up न हो, तो इसके बाहर निकल जाने की जानकारी महिला को नहीं हो पाती और बाद में प्रेग्नेंसी हो सकती है.&amp;nbsp;
प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आए तो क्या करें?
अगर Copper-T लगे होने के बाद भी प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो डॉक्टर से मिलने में हफ्तों की देरी नहीं करनी चाहिए. इसमें सबसे जरूरी जांच शुरुआती Transvaginal Ultrasound होती है. इससे पता चलता है कि प्रेग्नेंसी यूट्रस के अंदर है या नहीं और Copper-T प्रेग्नेंसी के मुकाबले किस जगह पर है.&amp;nbsp;
Ectopic Pregnancy का क्यों रहता है डर?
Copper-T के साथ प्रेग्नेंसी होने पर डॉक्टर सबसे पहले Ectopic Pregnancy की संभावना को देखते हैं. इसमें प्रेग्नेंसी यूट्रस के बाहर, आमतौर पर Fallopian Tube में विकसित होती है और इसका समय पर इलाज जरूरी है. अगर एक तरफ पेट में तेज दर्द, कंधे के सिरे पर दर्द, बेहोशी या ज्यादा वेजाइनल ब्लीडिंग हो, तो तुरंत मेडिकल केयर लेना चाहिए.&amp;nbsp;
Copper-T के साथ प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे पर कितना असर होता है?
अगर प्रेग्नेंसी यूट्रस के अंदर है और Copper-T को सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है, तो डॉक्टर आमतौर पर इसे जल्द हटाने की सलाह देते हैं. इसे निकालने में मिसकैरेज का थोड़ा रिस्क रहता है, लेकिन Copper-T को अंदर छोड़ने पर मिसकैरेज, यूट्रस में इंफेक्शन, पानी की थैली जल्दी फटने और प्रीमेच्योर बर्थ जैसी कॉम्प्लिकेशन का खतरा ज्यादा हो सकता है. अगर Copper-T के धागे दिखाई नहीं दे रहे हैं, तो डॉक्टर उसे निकालने के लिए अंदर से जबरदस्ती तलाश नहीं करते, क्योंकि ऐसा करने से प्रेग्नेंसी को नुकसान पहुंच सकता है.
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क्या Copper-T से सीधा बच्चे को नुकसान होता है?
Copper-T गर्भ में मौजूद बच्चे के आसपास की पानी की थैली के बाहर रहता है और सीधे बच्चे के संपर्क में नहीं आता है. जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी आगे बढ़ती है और यूट्रस का साइज बढ़ता है, Copper-T एक तरफ खिसक सकता है. इसलिए Copper-T से सबसे बड़ा खतरा बच्चे की ग्रोथ को लेकर नहीं, बल्कि प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली दूसरी परेशानियों का होता है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. &amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Monsoon Picnic Safety Tips: मानसून पिकनिक पर जा रहे हैं? बच्चों को जरूर बताएं ये पांच सेफ्टी टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Picnic Safety Tips: सावन और मानसून की बारिश में जब चारों ओर हरीयाली छा जाती है तो ऐसे मौसम में हर कोई घूमने जाने का प्लान बनाता है. खासकर बच्चों को बारिश के दिनों में किसी वॉटरफॉल, नदी के किनारे या पहाड़ों पर पिकनिक मनाने का काफी मन होता है. हालांकि, मानसून के दौरान अक्सर पिकनिक स्पॉट्स से हादसों की कई परेशान करने वाली खबरें सामने आती हैं. ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी दोगुनी हो जाती है. अगर आप भी इस वीकेंड बच्चों के साथ मानसून पिकनिक का प्लान बना रहे हैं, तो निकलने से पहले अपने बच्चों को इन बातों को जरूर समझा दें.&amp;nbsp;
बहते पानी और वाटरफाल से रहें दूर
बारिश के दिनों में पहाड़ों और झरनों का पानी अचानक और बहुत तेजी से बढ़ता है, जिसे फ्लैश फ्लड कहते हैं. ऐसे में बच्चों को साफतौर पर बता दें कि पानी कितना भी शांत या कम क्यों न दिख रहा हो, उसमें पैर डालने या नहाने की जिद बिल्कुल न करें. साथ ही वॉटरफॉल या नदी के किनारे सेल्फी लेने या रील बनाने के चक्कर में बच्चों को पत्थरों पर न जाने दें, क्योंकि मानसून में काई जमने की वजह से पैर फिसलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.&amp;nbsp;
जंगली झाड़ियों से बनाए दूरी
मानसून में हरियाली जितनी खूबसूरत लगती है, अपने साथ उतने ही खतरे भी लाती है. बारिश के मौसम में जमीन के अंदर पानी भर जाने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले कीड़े-मकोड़े बाहर निकल आते हैं. इसलिए बच्चों बताएं कि वे पिकनिक स्पॉट पर किसी घनी झाड़ी, लंबी घास या खोखले पेड़ों के पास न जाएं और न ही वहां छुपम-छुपाई जैसा कोई खेल खेलें. खेलते समय हमेशा खुली और साफ जगह पर ही रहें.&amp;nbsp;
परफेक्ट कपड़े और जूते पहनकर जाएं
पिकनिक पर जाते समय बच्चे अक्सर फैशनेबल कपड़े या चप्पल पहनने की जिद करते हैं, जो मानसून में खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए बच्चों को पूरी आस्तीन के ढीले कपड़े और ट्रैक पैंट पहनाएं ताकि वे मच्छरों और कीड़ों के काटने से बचे रहें. साथ ही उन्हें चप्पल या सैंडल के बजाय अच्छी ग्रिप वाले स्पोर्ट्स शूज पहनाएं. इससे रेतीली या फिसलन भरी मिट्टी पर उनकी पकड़ मजबूत रहेगी और पैर फिसलने का डर नहीं रहेगा.&amp;nbsp;
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बाहर के खाने और पानी से बचाएं
मानसून के मौसम में फूड पॉइजनिंग, डायरिया और पेट का इंफेक्शन बहुत तेजी से फैलता है. ऐसे में पिकनिक स्पॉट्स पर मिलने वाला खुला खाना या चाट-पकौड़ी बच्चों को बीमार कर सकती है. बच्चों की आदत होती है कि वे कहीं भी बहता हुआ पानी देखकर उसे छूते हैं या पीने की कोशिश करते हैं. इसलिए उन्हें समझाएं कि घर से लाया हुआ उबला या फिल्टर पानी ही पिएं. पिकनिक के लिए हमेशा घर का बना सूखा और ताजा खाना ही बेस्ट रहता है.&amp;nbsp;
सब साथ रहें
पिकनिक स्पॉट पर अक्सर भीड़ होती है और बच्चे खेल-खेल में माता-पिता की नजरों से दूर निकल जाते हैं. ऐसे में बच्चों को साफ समझा दें कि वे आपके रहकर ही खेलें. अगर वे वॉशरूम भी जा रहे हैं, तो परिवार के किसी बड़े सदस्य के साथ ही जाएं. उन्हें समझाएं कि अनजान लोगों से कोई खाने की चीज न लें और न ही उनके साथ कहीं जाएं.
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gut Bacteria species:  भारतीय जनजातियों में मिले 14 नए बैक्टीरिया, क्यों खास है खोज</title>
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        <description><![CDATA[ Gut Bacteria species: पुणे स्थित नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस NCCS में हुई रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने देश के आठ जनजातीय समुदायों की आंत के माइक्रोबायोम पर रिसर्च के दौरान 14 नई बैक्टीरियल प्रजातियों की पहचान की है. इसके अलावा करीब 200 ऐसे मिक्रोबियल स्ट्रेन भी मिले हैं, जिनकी पहले कभी पहचान नहीं हुई थी. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह खोज भारतीय आबादी की आंत के माइक्रोबायोम और उससे जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
क्या है गट माइक्रोबायोम&amp;nbsp;
गट माइक्रोबायोम हमारी आंतो में रहने वाले बैक्टीरिया और दूसरे छोटे जीवों का एक समुदाय होता है. यह हमारे शरीर के भीतर एक अदृश्य अंग की तरह काम करते हैं, जिसका वजन लगभग 1 से 2 किलोग्राम होता है. यह भोजन के पाचन, पोषक तत्वों के इस्तेमाल, शरीर की इम्युनिटी जैसे कई जरूरी कामों में भूमिका निभाते हैं. हर व्यक्ति के गट माइक्रोबायोम एक जैसा नहीं होता है, इस पर खानपान, रहने की जगह, दवाइयों, जीवनशैली और वातावरण का असर पड़ता है. यही वजह है कि अलग-अलग समुदाय के गट माइक्रोबायोम को समझना स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी रिसर्च के लिए जरूरी है.
&amp;nbsp;जनजातीय समुदायों का किया गया अध्ययन &amp;nbsp;
रिसर्च में भारत के अलग-अलग भोगोलिक क्षेत्रो में रहने वाले आठ जनजातीय समुदायों को अध्ययन में शामिल किया गया. इनमें वारली, गोंड, माड़िया, कबुई, बोतो, बाल्टी, ब्रोकपा और पुरिगपा जैसे समुदाय शामिल थे. वैज्ञानिकों ने इन समुदायों के गट माइक्रोबायोम की जांच कर वहां के गट बैक्टीरिया की जानकारी ली. इस अध्ययन में 14 नए बैक्टीरियल प्रजातियों और करीब 200 नए माइक्रोबियल स्ट्रेन की पहचान की गई.&amp;nbsp;
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प्रोबायोटिक्स के लिए क्यों खास है यह खोज
वैज्ञानिकों ने बिफिडोबैक्टीरियम एडोलसेंटिस जैसे बैक्टीरिया का भी अध्ययन किया, इसका इस्तेमाल प्रोबायोटिक्स से जुड़ी रिसर्च में किया जाता है. भारतीय समुदायों से मिले कुछ बैक्टीरिया दूसरे देशों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से आनुवंशिक रूप से अलग थे. इससे भविष्य में भारतीय लोगों के लिए प्रोबायोटिक्स और खानपान से जुड़ी रिसर्च को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है.
अलग-अलग समुदायों में दिखी विविधता&amp;nbsp;
अध्ययन में सामने आया कि इन सभी समुदायों की आंतों में कुछ बैक्टीरिया समान थे, लेकिन कई सूक्ष्मजीवों की संख्या और प्रकार अलग-अलग थे. भारतीय समुदायों में पाए गए कुछ बैक्टीरिया दूसरे देशों की आबादी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से आनुवंशिक रूप से अलग थे. इससे भारतीय लोगों के लिए अलग से आंतों के सूक्ष्मजीवों का आंकड़ा तैयार करने की जरूरत सामने आती है.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिसर्च
भारत में अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों के खानपान और जीवनशैली में काफी विविधता है. ऐसे में यहां के लोगों की आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों को समझना स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. 14 नई बैक्टीरियल प्रजातियों और करीब 200 नए सूक्ष्मजीवी स्ट्रेन की पहचान भारतीय लोगों की आंतों के सूक्ष्मजीवों पर आगे होने वाली रिसर्च के लिए नई दिशा दे सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>12 अगस्त को एक साथ अमावस्या और सूर्य ग्रहण, पूजा करें या लगेगा सूतक? जानें सही नियम</title>
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        <description><![CDATA[ 12 August 2026 Amavasya: जीवन में कुछ तिथियां केवल पूजा-पाठ के लिए नहीं आतीं. वे रुककर अपने भीतर देखने, पुराना बोझ उतारने और नई शुरुआत का संकल्प लेने का अवसर देती हैं.
12 अगस्त 2026 की अमावस्या ऐसी ही एक तिथि है. बुधवार को पड़ रही यह श्रावण अमावस्या पितरों की कृपा, शिव आराधना, दान और प्रकृति की सेवा से जुड़ी है. इसे हरियाली अमावस्या भी कहा जाएगा.

यदि घर में बार-बार तनाव बढ़ रहा है, मेहनत का परिणाम नहीं मिल रहा, धन टिक नहीं रहा या मन किसी अज्ञात भय से घिरा रहता है तो इस तिथि को सामान्य दिन समझकर न निकालें. धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या पर श्रद्धा से किए गए छोटे-से उपाय भी जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकल्प बन सकते हैं.
12 अगस्त को कितने बजे लगेगी अमावस्या?
पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष की 12 अगस्त को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी। यह तिथि रात 1:52 बजे शुरू होकर रात 11:06 बजे समाप्त होगी. इस कारण स्नान, दान, तर्पण और अमावस्या से संबंधित पूजा 12 अगस्त को ही की जाएगी. पंचांग का समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट बदल सकता है, इसलिए स्थानीय समय अवश्य देख लें.
इस दिन प्रातःकाल पुष्य नक्षत्र रहेगा. इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र प्रारंभ होगा. बुधवार होने के कारण भगवान गणेश और बुध ग्रह की उपासना का भी विशेष संयोग बन रहा है.
इस बार अमावस्या को &amp;lsquo;वरदान&amp;rsquo; क्यों माना जा रहा है?
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का समय है. अमावस्या पितरों, आत्मचिंतन और पुराने कर्मों के परिमार्जन से जुड़ी तिथि मानी जाती है. वहीं हरियाली अमावस्या प्रकृति, वृक्ष और पृथ्वी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है.
इस प्रकार 12 अगस्त को तीन भाव एक साथ जुड़ रहे हैं, शिव कृपा, पितृ आशीर्वाद और प्रकृति संरक्षण. यही इस तिथि की सबसे बड़ी विशेषता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा के साथ कोई वास्तविक शुभ कार्य किया जाए तो उसका प्रभाव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता. वह व्यक्ति के व्यवहार, घर के वातावरण और आने वाले निर्णयों को भी बदल सकता है.
यहां &#039;वरदान&amp;rdquo; का अर्थ अचानक चमत्कार होना नहीं है. इसका अर्थ है ऐसी तिथि, जब व्यक्ति अपने जीवन की गलतियों को पहचानकर सही दिशा में पहला कदम रख सकता है.
पितरों के लिए जरूर करें यह छोटा काम
अमावस्या को पितरों के निमित्त जल अर्पित करने की परंपरा है. प्रातः स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके स्वच्छ जल में काले तिल मिलाएं और पितरों का स्मरण करते हुए अर्पित करें.
परिवार में जिन पूर्वजों के नाम ज्ञात हों, उनका मन ही मन स्मरण करें. नाम याद न होने पर भी समस्त कुल-पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जा सकती है.
इसके बाद किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं या आटा, चावल, दाल, वस्त्र अथवा सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दें. धार्मिक विश्वास है कि पितरों के नाम से किया गया दान परिवार में शांति और संतोष बढ़ाता है.
यदि परिवार में विधिवत श्राद्ध या तर्पण की परंपरा है तो किसी योग्य विद्वान की सहायता लें. केवल सोशल मीडिया पर बताए गए कठिन अनुष्ठान स्वयं न करें.
धन संबंधी रुकावट हो तो क्या करें?
12 अगस्त की सुबह घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करें. इसके बाद अपनी आय में से थोड़ी राशि अलग निकालकर किसी जरूरतमंद की सहायता के लिए रखें.
ध्यान रहे, अमावस्या का उपाय केवल धन मांगना नहीं है. यह धन के प्रति अनुशासन बनाने का दिन भी है. इसलिए उस दिन अनावश्यक खर्च रोकने, पुराने कर्ज की सूची बनाने और नियमित बचत शुरू करने का संकल्प लें. धार्मिक उपाय के साथ किया गया व्यावहारिक निर्णय ही लंबे समय में वास्तविक लाभ देता है.
कारोबार करने वाले लोग कार्यस्थल की सफाई करें. टूटा सामान, अनुपयोगी कागज और लंबे समय से जमा कचरा हटाएं. शाम को मुख्य द्वार के पास सुरक्षित स्थान पर दीपक जला सकते हैं. इसे घर और कारोबार से जड़ता दूर करने का प्रतीक माना जाता है.
मन अशांत रहता है तो शिवजी को अर्पित करें जल
श्रावण अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा विशेष मानी जाती है. प्रातः शिवलिंग पर सामान्य स्वच्छ जल अर्पित करें. बेलपत्र उपलब्ध हो तो साफ और अखंड बेलपत्र चढ़ाएं. इसके बाद कम से कम 108 बार &#039;ॐ नमः शिवाय&amp;rdquo; का जप करें.
पूजा के समय बहुत सारी इच्छाएं बोलने के बजाय एक स्पष्ट संकल्प लें&amp;mdash;क्रोध कम करना है, गलत आदत छोड़नी है, संबंध सुधारना है या काम में नियमितता लानी है. अमावस्या भीतर के अंधकार को पहचानने और उसे दूर करने का संदेश देती है.
हरियाली अमावस्या पर पौधा लगाना क्यों है सबसे बड़ा उपाय?
इस अमावस्या का नाम ही हरियाली से जुड़ा है. इसलिए केवल मंदिर में पूजा करना पर्याप्त नहीं माना जाता. किसी उपयुक्त स्थान पर नीम, पीपल, बरगद, आंवला, बेल या क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल पौधा लगाएं. पौधा वहीं लगाएं, जहां उसकी नियमित देखभाल संभव हो.
यदि जगह नहीं है तो किसी पुराने पौधे की सेवा करें. उसमें पानी दें, आसपास की गंदगी हटाएं और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लें. केवल फोटो खिंचवाने के लिए पौधा लगाना इस पर्व की भावना नहीं है. पौधे को बचाना ही वास्तविक पूजा है.
सूर्य ग्रहण को लेकर न हों भ्रमित
12 अगस्त 2026 को दुनिया के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा. हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. सामान्य रूप से माने जाने वाले दृश्यता-आधारित पंचांग नियम के अनुसार भारत में इसका सूतक लागू नहीं होगा. स्थानीय मंदिर या परिवार की परंपरा अलग हो सकती है.
इसलिए भारत में श्रद्धालु भय या भ्रम के बजाय सामान्य रूप से अमावस्या का स्नान, दान और पूजन कर सकते हैं. विदेश में रहने वाले लोगों को अपने शहर के अनुसार ग्रहण और सूतक का समय देखना चाहिए.
अमावस्या पर ये गलतियां न करें
इस दिन किसी बुजुर्ग, जरूरतमंद या घर आए व्यक्ति का अपमान न करें. नशा, मांसाहार और अनावश्यक विवाद से दूरी रखें. पितरों के नाम पर दिखावा न करें और पशु-पक्षियों  ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>&amp;apos;Proteinmaxxing&amp;apos; क्या है, ज्यादा प्रोटीन लेने का ट्रेंड कितना सही?</title>
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        <description><![CDATA[ Protein Maxxing Trend: आजकल फिटनेस और वेट लॉस की दुनिया में एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है. इस ट्रेंड का नाम Protein Maxxing है. जिम जाने वाले लोगों से लेकर वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों तक,लोग अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन शामिल करने पर जोर दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी हाई-प्रोटीन डाइट को वजन घटाने और मसल्स बनाए रखने के आसान तरीके के तौर पर देखा जा रहा है.
हालांकि, सवाल यह है कि क्या ज्यादा प्रोटीन खाना हर किसी के लिए फायदेमंद है? एक्सपर्ट्स और एक नई स्टडी ने इस ट्रेंड को लेकर कुछ जरूरी सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि Proteinmaxxing क्या है और ज्यादा प्रोटीन लेने का ट्रेंड कितना सही है.&amp;nbsp;
क्या है Protein Maxxing?
Protein Maxxing एक ऐसा तरीका है जिसमें हर डाइट में प्रोटीन को प्राथमिकता दी जाती है. इसका उद्देश्य रोजाना शरीर की जरूरत के मुताबिक पूरा प्रोटीन लेना है. इस ट्रेंड में लोग चिकन, अंडे, ग्रीक योगर्ट, पनीर, मछली, दाल, टोफू और प्रोटीन सप्लीमेंट्स जैसी चीजों को अपनी डाइट में ज्यादा शामिल करते हैं. वजन घटाने के लिए भी प्रोटीन को जरूरी माना जाता है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है. साथ ही इसे पचाने में शरीर को कार्बोहाइड्रेट और फैट की तुलना में ज्यादा एनर्जी खर्च करनी पड़ती है. कैलोरी कम करने के दौरान पूरा प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने में भी मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
ज्यादा प्रोटीन लेने का ट्रेंड कितना सही है.
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जरूरत से बहुत ज्यादा प्रोटीन लेना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है. औसत वयस्क को शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम करीब 0.8 से 1.2 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. एथलीट्स और बुजुर्गों को मांसपेशियों की मरम्मत के लिए इससे ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो सकती है. &amp;nbsp;बहुत ज्यादा प्रोटीन लेने का असर किडनी पर भी पड़ सकता है. शरीर में प्रोटीन से बनने वाले नाइट्रोजन जैसे पदार्थों को फिल्टर करने का काम किडनी करती है. ज्यादा प्रोटीन लेने पर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. खासतौर पर जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें प्रोटीन का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है.&amp;nbsp;
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नई स्टडी ने भी उठाए सवाल
Cell Press Blue जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में हाई-प्रोटीन डाइट को लेकर एक अलग बात सामने आई है. शोधकर्ताओं Bailey A. Knopf और Dudley W. Lamming के मुताबिक, कुछ स्थितियों में प्रोटीन की मात्रा कम रखना मेटाबॉलिक हेल्थ, लंबी उम्र और हेल्दी एजिंग के लिए फायदेमंद हो सकता है. स्टडी के अनुसार, हाई-प्रोटीन डाइट शरीर में mTORC1 सिस्टम को ज्यादा एक्टिव कर सकती है. यह सिस्टम सेल्स की ग्रोथ से जुड़ा है, लेकिन लगातार एक्टिव रहने पर सेल्स की सफाई और रिपेयर की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. शोधकर्ताओं ने खासतौर पर मेथियोनिन की मात्रा सीमित करने के संभावित फायदों का जिक्र किया है. हालांकि इसका मतलब पूरी तरह प्रोटीन छोड़ना नहीं है, बल्कि सही मात्रा और सही स्रोत चुनना है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Wheat Flour Recipes: एक ही आटे से पराठा, चीला और स्नैक, नोट करें 3 आसान रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Wheat Flour Recipes: आटे का इस्तेमाल हर घर में और हर दिन होता है. हालांकि, ज्यादातर लोग रोज-रोज रोटी खा-खाकर बोर हो जाते हैं, ऐसे में आप आटे से रोटी के अलावा और भी कई रेसिपी बना सकते हैं. सिर्फ एक ही आटा गूंथकर आप तीन अलग-अलग स्वादिष्ट चीजें बना सकते हैं जैसे पराठा, चीला और एक हल्का स्नैक. खास बात यह है कि ना तो इसको बनाने में ज्यादा समय लगता है ना ही ज्यादा मेहनत. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी कि आटे से इतनी सारी रेसिपी कैसे तैयार होती है.&amp;nbsp;
आटा कैसे तैयार करें?
एक बड़े बर्तन में दो कटोरी गेहूं का आटा लें. इसमें आधा कटोरी बेसन मिलाएं, इससे आटे में हल्का कुरकुरापन और स्वाद आता है. अब इसमें एक बारीक कटा हुआ प्याज, एक हरी मिर्च बारीक कटी हुई, थोड़ा हरा धनिया, आधा चम्मच जीरा, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें. सभी चीजों को अच्छे से मिलाएं और फिर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें. आटे को गूंथने के बाद 10 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि यह अच्छे से सेट हो जाए. यही एक आटा अब आपके तीनों नाश्ते के लिए तैयार है.&amp;nbsp;
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पराठा और चीला बनाने का तरीका
पराठा बनाने के लिए आटे की एक लोई लें और उसे हल्के हाथों से बेल लें. तवा गरम करें और उस पर पराठा डालें. दोनों तरफ थोड़ा तेल या घी लगाकर सुनहरा होने तक सेकें. यह पराठा बिना अलग से सब्जी ना भी लें तो भी स्वादिष्ट लगता है, क्योंकि आटे में पहले से ही मसाले मिले हुए हैं. अब बात करते हैं चीले की, तो चीला बनाने के लिए उसी आटे में थोड़ा और पानी मिलाकर उसे पतला घोल जैसा बना लें, जैसे डोसा बनाने के लिए बैटर तैयार करते हैं ठीक उसी तरह. अब गरम तवे पर थोड़ा तेल लगाकर घोल को गोल आकार में फैलाएं. दोनों तरफ हल्का सुनहरा होने तक सेकें. इस चीले को बनाना रोटी से आसान है, यही वजह है कि ये कई लोगों के पसंदीदा नाश्ता होता है और खाने में भी हल्का होता है.&amp;nbsp;
झटपट स्नैक कैसे बनाएं
अगर घर में अचानक मेहमान आ जाएं या शाम को कुछ चटपटा खाने का मन करे, तो इसी आटे से एक बढ़िया स्नैक भी बन सकता है. इसके लिए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें थोड़ा मोटा बेल लें. अब चाकू की मदद से इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों या स्ट्रिप्स के आकार में काट लें. एक कड़ाही में तेल गरम करें और इन टुकड़ों को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लें. तलने के बाद इन्हें एक प्लेट में निकालें और ऊपर से थोड़ा चाट मसाला छिड़क दें. यह स्नैक चाय के साथ खाने में बहुत बढ़िया लगता है और बच्चों को भी बहुत पसंद आता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Cold Water Causes Cold: क्या ठंडा पानी पीने से सच में हो जाता है जुकाम? या कोई और है वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Cold Water Causes Cold: गर्मी और उमस भरे मौसम के दौरान जब भी कोई ठंडा पानी पीता है तो बड़े बुजुर्ग अक्सर उन्हें टोकते हुए कहते हैं कि इससे जुकाम हो जाएगा. यह बात हमारे समाज में इतनी आम है कि लगभग हर घर में सुनने को मिल जाती है. बहुत से लोग यह भी मानते हैं कि अगर किसी को पहले से जुकाम है, तो उसे ठंडा पानी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए, वरना तबीयत और बिगड़ जाती है. लेकिन क्या यह बात वाकई सच है या फिर यह सिर्फ एक पुरानी सोच है, जिसका असली कारण कुछ और है. हाल ही में डॉक्टरों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय साफ तौर पर सामने रखी है, आइए जानते हैं मेडिकल साइंस इस बारे में क्या कहता है.
डॉक्टर क्या कहते हैं इस बारे में
डॉक्टरों के मुताबिक, सिर्फ ठंडा पानी पीने से जुकाम नहीं होता है. जुकाम असल में एक वायरस की वजह से होने वाला इंफेक्शन है, जो हवा में मौजूद ड्रॉपलेट्स यानी बूंदों के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान तक फैलता है. जब कोई जुकाम से पीड़ित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो उसकी सांस के साथ निकलने वाले वायरस के कण हवा में फैल जाते हैं. अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति उस सतह को छूकर अपने नाक या मुंह पर हाथ लगा लेता है, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच जाता है और धीरे-धीरे जुकाम के लक्षण दिखने लगते हैं. यानी जुकाम होने की असली वजह वायरस का संक्रमण है, न कि ठंडा पानी पीना.
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तो फिर ठंडा पानी से क्या दिक्कत हो सकती है
हालांकि यह जरूर सच है कि बहुत ज्यादा ठंडा पानी शरीर के लिए पूरी तरह फायदेमंद नहीं होता. डॉक्टरों का कहना है कि बहुत ठंडा पानी पीने से गले की नसें अचानक सिकुड़ सकती हैं, जिससे कुछ लोगों को गले में हल्की जलन या खराश महसूस हो सकती है.&amp;nbsp; साथ ही अगर शरीर गर्मी से बहुत तप रहा हो और उसी समय एकदम ठंडा पानी पी लिया जाए, तो शरीर का तापमान अचानक बदलने से इम्यून सिस्टम कुछ समय के लिए कमजोर पड़ जाता है. इससे शरीर के लिए पहले से मौजूद वायरस या बैक्टीरिया से लड़ना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, जिससे जुकाम के लक्षण उभर सकते हैं. इसलिए बेहतर यही है कि बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचा जाए और सामान्य या हल्का ठंडा पानी ही पिया जाए, ताकि शरीर को किसी तरह का झटका न लगे. कुल मिलाकर, जुकाम का असली कारण वायरस है, ठंडा पानी सीधे तौर पर इसकी वजह नहीं बनता.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gum Disease Can Cause Heart Attack: मसूड़ों से खून को न करें नजरअंदाज, दिल से है कनेक्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Gum Disease Can Cause Heart Attack: ज्यादातर लोगों को अपने दांतों से जुड़ी कई सारी परेशानियां होती हैं. उन्हीं में से एक है मसूड़ों में से खून निकलना. अक्सर लोग मसूड़ों से खून आने को मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन ऐसे में डॉक्टर्स का कहना है कि ये परेशानी बस आपके दांत और मसूड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये आपके दिल की सेहत से भी जुड़ी हो सकती है. ऐसा ही एक उदाहरण है, जो एक डॉक्टर ने अपने पोस्ट से शेयर किया, जिनका नाम डेंटिस्ट डॉ. मार्क बुरहेन था. उन्होंने बताया कि उनकी एक मरीज थी, जिसकी उम्र करीब 40 साल थी और वह पूरी तरह स्वस्थ मानी जाती थी, लेकिन उसके मसूड़ों से खून आता था. कुछ महीनों बाद उस महिला को हार्ट अटैक आ गया. डॉ. बुरहेन ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि मसूड़ों की बीमारी सीधे हार्ट अटैक का कारण बनती है, बल्कि मसूड़ों में लगातार बनी रहने वाली सूजन और दिल की बीमारी के बीच गहरा जैविक संबंध पाया गया है.
मसूड़ों की बीमारी और दिल की सेहत का कनेक्शन
डॉक्टर के मुताबिक जब मसूड़ों में सूजन होती है, तो वहां मौजूद बैक्टीरिया खून में मिल जाते हैं और यही बैक्टीरिया बाद में धमनियों में जमा प्लाक के अंदर भी पाए गए हैं. इसके अलावा शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन भी दिल की बीमारियों से जुड़ी होती है, क्योंकि यह धमनियों को सख्त और सिकुड़ा हुआ बना सकती है.
साथ ही अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सबसे पहले 2012 में मसूड़ों की बीमारी और दिल की बीमारी के बीच संबंध के बारे में बताया था और 2025 में इस पर दोबारा शोध करने पर पाया गया कि यह संबंध दिल की धड़कन अनियमित होने और हार्ट फेलियर जैसी दूसरी बीमारियों से भी जुड़ा हो सकता है. डॉक्टर का कहना है कि मुंह की सेहत को अक्सर शरीर के बाकी हिस्सों से अलग समझा जाता है, जबकि असल में इसका दिल की सेहत से गहरा नाता होता है.
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बचाव के लिए क्या करें
डॉ. बुरहेन के मुताबिक मसूड़ों और दिल दोनों को सुरक्षित रखने के लिए तीन आसान आदतें बहुत जरूरी हैं, जैसे रोजाना ब्रश करना, फ्लॉस करना और समय-समय पर डेंटिस्ट के पास जांच कराना. नियमित डेंटल चेकअप से मसूड़ों की सूजन और बीमारी शुरुआत में ही पकड़ में आ जाती है, जबकि सही तरीके से ब्रश और फ्लॉस करने से मुंह में बैक्टीरिया जमा नहीं हो पाते. हालांकि डॉक्टर यह भी कहते हैं कि मुंह की सफाई दिल की बीमारी से बचाव के अन्य जरूरी उपायों की जगह नहीं ले सकती, जैसे ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना, डायबिटीज को मैनेज करना, सही खान-पान, नियमित व्यायाम और धूम्रपान से दूर रहना.
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        <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कैसे बनाते हैं कच्चे पपीते की चटनी, सेहत के साथ स्वाद का जायका</title>
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        <description><![CDATA[ How to make green papaya chutney: कच्चा पपीता सिर्फ सब्जी बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि एक टेस्टी चटनी बनाने के लिए भी बहुत अच्छा होता है. यह चटनी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती है. अगर आप कुछ हल्का और अलग ट्राई करना चाहते हैं, तो कच्चे पपीते की चटनी एक बहुत अच्छा ऑप्शन है.
दरअसल, कच्चा पपीता पेट के लिए बहुत हल्का माना जाता है. इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो खाना पचाने में मदद करते हैं. इसे खाने से पेट फूलना, गैस या कब्ज जैसी दिक्कतें भी कम हो सकती हैं. साथ ही यह वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत कम होती है.
जरूरी सामान

1 कच्चा पपीता (छिला और कद्दूकस किया हुआ)
2 हरी मिर्च
आधा इंच अदरक का टुकड़ा
4-5 लहसुन की कलियां
1 नींबू का रस
1 टेबलस्पून तेल
आधा टीस्पून राई
आधा टीस्पून जीरा
1 चुटकी हींग
स्वादानुसार नमक
थोड़ा सा धनिया पत्ती

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बनाने का तरीका
सबसे पहले कच्चे पपीते को अच्छे से धोकर छील लें और उसे कद्दूकस कर लें. इसके बाद एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें राई, जीरा और हींग डालकर हल्का सा भून लें. अब इसमें कद्दूकस किया हुआ पपीता डाल दें और उसे हल्की आंच पर 5-7 मिनट तक पकने दें, जब तक वह थोड़ा नरम न हो जाए. पपीता पकने के बाद उसे ठंडा होने के लिए रख दें. जब यह ठंडा हो जाए, तो इसे हरी मिर्च, अदरक, लहसुन और नमक के साथ मिक्सर में डालकर पीस लें. अगर चटनी थोड़ी गाढ़ी लगे, तो उसमें थोड़ा पानी मिला सकते हैं. पीसने के बाद इसमें नींबू का रस और बारीक कटी धनिया पत्ती मिला दें. अब आपकी कच्चे पपीते की चटनी तैयार है. इसे किसी भी बर्तन में निकालकर परांठे, इडली, डोसा या चावल के साथ परोस सकते हैं.
चटनी को और स्वादिष्ट बनाने के टिप्स
अगर आपको तीखा पसंद है, तो हरी मिर्च की मात्रा बढ़ा सकते हैं. कुछ लोग इसमें थोड़ी सी भुनी हुई मूंगफली या भुना जीरा भी डालते हैं, इससे चटनी का स्वाद और भी अच्छा हो जाता है. अगर आप खट्टापन कम रखना चाहते हैं, तो नींबू की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से कम-ज्यादा कर सकते हैं.
कैसे करें स्टोर?
अगर आपने ज्यादा मात्रा में चटनी बना ली है, तो इसे फ्रिज में रखें. एक एयरटाइट डिब्बे में रखने से यह 3-4 दिन तक ताजा बनी रहती है. खाते समय इसे कुछ मिनट पहले फ्रिज से बाहर निकाल लें, ताकि इसका असली स्वाद वापस आ जाए. कच्चे पपीते की यह चटनी बनाने में जितनी आसान है, खाने में उतनी ही टेस्टी भी है. अगली बार जब भी आपके पास कच्चा पपीता हो, तो इसे सब्जी की जगह एक बार चटनी बनाकर जरूर ट्राई करें
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Post Meal Sleepiness:दोपहर में खाना खाते ही क्यों आने लगती है नींद, शरीर में क्या होता है?</title>
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        <description><![CDATA[ Post Meal Sleepiness: दोपहर का खाना खाने के बाद अचानक आंखें भारी होने लगती हैं और काम में मन नहीं लगता. कई लोगों को खाना खाने के कुछ देर बाद ऐसी सुस्ती महसूस होती है. इसे आम तौर पर खाने के बाद आने वाली नींद कहा जाता है. यह हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होती. शरीर की प्राकृतिक घड़ी, खाने की मात्रा और खाने में मौजूद चीजें इसके पीछे भूमिका निभा सकती हैं.&amp;nbsp;
दोपहर के समय शरीर की 24 घंटे वाली प्राकृतिक घड़ी में ऐसा बदलाव आता है, जिससे जागे रहने का संकेत कुछ कम हो जाता है. इसी वजह से खाना न खाने पर भी कई लोगों को दोपहर में सुस्ती महसूस हो सकती है. खाना खाने के बाद यह असर और ज्यादा महसूस हो सकता है.
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क्यों बढ़ जाती है सुस्ती
अगर दोपहर का खाना बहुत ज्यादा या बहुत भारी है, तो खाने के बाद नींद और सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है. खासकर बहुत ज्यादा कैलोरी, तली-भुनी चीजों या ज्यादा मीठे और सफेद आटे जैसे खाने से यह असर बढ़ सकता है.&amp;nbsp; खाने के बाद शरीर में पाचन से जुड़े कई बदलाव होते हैं. आखिर में मिलने वाले संकेत, खून में ग्लूकोज और दूसरे पोषक तत्वों में बदलाव और दिमाग के जागने से जुड़े संकेतों में परिवर्तन मिलकर नींद जैसा एहसास पैदा कर सकते हैं. अक्सर कहा जाता है कि खाना खाने के बाद सारा खून पेट में चला जाता है, और इसी वजह से दिमाग में खून कम पहुंचता है, इसलिए नींद आती है. लेकिन यह इस घटना की सही और पूरी वजह नहीं मानी जाती. खाना खाने के बाद आने वाली सुस्ती कई शारीरिक प्रक्रियाओं के मिले-जुले असर से होती है.
क्यों दोपहर में असर ज्यादा
अगर रात में नींद पूरी नहीं हुई है, तो दोपहर के खाने के बाद सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है. लंबे समय तक जागे रहने के साथ शरीर की नींद की जरूरत बढ़ती जाती है. इसलिए पर्याप्त और अच्छी नींद लेना भी दिन में सतर्क रहने के लिए जरूरी है.
खाने के बाद क्या करें
बहुत भारी खाना खाने के बजाय संतुलित और जरूरत के हिसाब से खाना लेना मददगार हो सकता है. खाने के बाद थोड़ी देर हल्की चाल से चलना भी सुस्ती कम करने में मदद कर सकता है.&amp;nbsp; पानी पीना और रात में अच्छी नींद लेना भी जरूरी है.&amp;nbsp; अगर हर दिन खाने के बाद बहुत ज्यादा नींद, चक्कर या कमजोरी महसूस होती है, या यह समस्या रोजमर्रा के काम को असर कर रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. कभी कभी लगातार ज्यादा नींद आना नींद की समस्या, खून की कमी, थायरॉइड या ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी के साथ भी देखा जा सकता है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Monsoon Travel Insurance: घूमने से पहले करा लें Monsoon Travel Insurance, इसमें क्या&amp;क्या कवर?</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Travel Insurance; बारिश के मौसम में घूमने का अपना ही मजा है, पहाड़, झरने और हरियाली किसी को भी लुभा सकते हैं. लेकिन यही मौसम कभी कभी फ्लाइट डिले, ट्रिप कैंसिलेशन और अचानक मेडिकल इमरजेंसी जैसी मुसीबतें भी साथ लेकर आता है. यही वजह है कि मानसून में सफर से पहले ट्रैवल इंश्योरेंस को गंभीरता से लेना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी माना जाने लगा है.
क्यों है इसकी अहमियत
ज्यादातर भारतीय अब तक ट्रैवल इंश्योरेंस को नजरअंदाज करते आए हैं, आमतौर पर बजट की वजह से इसे फालतू खर्च समझा जाता रहा है. लेकिन बदलते मौसम और बढ़ती मॉनसून&amp;nbsp; के बीच अब यह सोच धीरे धीरे बदल रही है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि मानसून के दौरान अचानक भारी बारिश, बाढ़ या भूस्खलन जैसी घटनाएं सफर की प्लैनिंग को पूरी तरह बिगाड़ सकती हैं, और ऐसे में इंश्योरेंस ही आर्थिक नुकसान से बचने का सबसे भरोसेमंद जरिया बनता है.
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कैंसिलेशन पर मिलती है राहत
मानसून में सबसे आम परेशानी है फ्लाइट का देरी से आना या रद्द होना. ट्रैवल इंश्योरेंस में फ्लाइट डिले कवरेज के तहत निर्धारित समय से ज्यादा देरी होने पर मुआवजा मिल सकता है, हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर देरी की वजह असाधारण परिस्थिति हो, यानी एयरलाइन के नियंत्रण से बाहर की बात हो, तो कंपनी हमेशा नुकसान की भरपाई करना के लिए जिम्मेदार नहीं है.
मेडिकल इमरजेंसी भी है कवर
अगर खराब मौसम की वजह से पूरी ट्रिप ही रद्द करनी पड़े, तो ट्रिप कैंसिलेशन कवरेज के जरिए होटल और सफर&amp;nbsp; बुकिंग में खर्च हुए पैसे वापस मिल सकते हैं. हालांकि अगर कैंसिलेशन किसी नॉन कवर्ड वजह से हो, जैसे सिर्फ मौसम खराब लगने की वजह से खुद ट्रिप कैंसिल करना, तो कंपनी मुआवजा नहीं देगी. इसके अलावा पॉलिसी में मेडिकल इमरजेंसी, अस्पताल में भर्ती होने का खर्च और इमरजेंसी इवैक्युएशन जैसी सुविधाएं भी शामिल होती हैं, जो पहाड़ी या दुर्गम इलाकों में सफर करने वालों के लिए खासतौर पर अहम हो जाती हैं.
सामान खोने और देरी का भी है कवरेज
बारिश में सफर के दौरान सामान भीगने, खोने या देरी से मिलने की आशंका भी बढ़ जाती है. ज्यादातर पॉलिसी में इसके लिए भी अलग से कवरेज मिलता है, जिससे नुकसान की भरपाई हो सके. साथ ही घरेलू यात्रा बीमा में भी सामान की चोरी और ट्रिप में देरी जैसे हालातों के लिए आर्थिक सहायता का इंतजाम होता है.
पहले यह जरूर जांचें
पॉलिसी खरीदते वक्त प्रीमियम के साथ यह जरूर देखें कि उसमें मेडिकल इमरजेंसी, ट्रिप कैंसिलेशन और सामान खोने जैसे जरूरी कवरेज शामिल हैं या नहीं. साथ ही ऐसी कंपनी चुनें जिसका क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड अच्छा हो, ताकि जरूरत पड़ने पर क्लेम मिलने में दिक्कत न आए.
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 19:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Haunted Places In India: भूतिया जगहों पर जाने का मन करता है? ये हैं भारत के टॉप हॉन्टेड प्लेस</title>
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        <description><![CDATA[ Most Haunted Places In India: भारत में रहस्यमयी और भूतिया जगहों को लेकर लोगों की दिलचस्पी आज भी कम नहीं हुई है. इसकी वजह सिर्फ डर नहीं, बल्कि इन जगहों से जुड़ी कहानियां, इतिहास और लोक मान्यताएं भी हैं. देश में कई ऐसी जगहें हैं, जहां कभी लोगों की चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन आज वहां सन्नाटा पसरा रहता है. कहीं पूरा गांव खाली पड़ा है, तो कहीं पुराने किले और इमारतें समय के साथ खंडहर में बदल चुकी हैं.
इन जगहों को लेकर पीढ़ियों से कई तरह की कहानियां सुनाई जाती रही हैं. कुछ जगहों को किसी पुराने श्राप से जोड़ा जाता है, तो कुछ के पीछे दर्दनाक इतिहास बताया जाता है. हालांकि, इन कहानियों में कितनी सच्चाई है, इसे साबित करना मुश्किल है. फिर भी इन जगहों का माहौल और उनसे जुड़ी लोककथाएं इन्हें खास बना देती हैं.
भारत में किसी जगह को हॉन्टेड क्यों माना जाता है?
भारत में किसी जगह के भूतिया होने की कहानी अक्सर किसी एक घटना तक सीमित नहीं रहती. लंबे समय से चली आ रही लोककथाएं, अचानक हुआ पलायन, अधूरी इमारतें, पुरानी त्रासदियां और स्थानीय लोगों की मान्यताएं मिलकर किसी जगह की रहस्यमयी पहचान बना देती हैं. कई बार इन जगहों के आसपास रहने वाले लोग भी रात में वहां जाने से बचते हैं. यही वजह है कि दिन में सामान्य नजर आने वाली कुछ जगहें अंधेरा होने के बाद लोगों को डरावनी महसूस होने लगती हैं.

कुलधरा गांव, राजस्थान
राजस्थान का कुलधरा गांव भारत की सबसे चर्चित रहस्यमयी जगहों में शामिल है. जैसलमेर के पास स्थित यह गांव कभी आबाद हुआ करता था, लेकिन 19वीं सदी में यहां रहने वाले लोग अचानक गांव छोड़कर चले गए. कुलधरा को लेकर सबसे ज्यादा चर्चित कहानी एक श्राप से जुड़ी है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, गांव छोड़ते समय यहां के लोगों ने श्राप दिया था कि दोबारा यहां कोई आबादी नहीं बस पाएगी. हालांकि, गांव के खाली होने की वास्तविक वजह को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत मिलते हैं. आज यहां पुराने घर, संकरी गलियां और खंडहर दिखाई देते हैं. सुनसान माहौल इसकी रहस्यमयी छवि को और मजबूत करता है.
रॉस आइलैंड, अंडमान
अंडमान का रॉस आइलैंड भूतिया कहानियों से ज्यादा अपने औपनिवेशिक इतिहास और वीरान पड़े ढांचों की वजह से रहस्यमयी लगता है. ब्रिटिश शासन के दौरान यह अंडमान का प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था. समय के साथ भूकंप, युद्ध और दूसरे कारणों से यहां की गतिविधियां खत्म होती गईं और यह इलाका धीरे-धीरे वीरान हो गया. आज पुराने चर्च, अधिकारियों के आवास और दूसरी इमारतों के अवशेष पेड़ों और जंगल के बीच नजर आते हैं. यहां का माहौल डर से ज्यादा बीते दौर की याद दिलाता है. ऐसा लगता है जैसे किसी समय की पूरी दुनिया अचानक पीछे छूट गई हो.

डुमस बीच, गुजरात
गुजरात का डुमस बीच दिन में एक सामान्य समुद्र तट जैसा दिखाई देता है, लेकिन रात में इससे जुड़ी डरावनी कहानियां इसे भारत की चर्चित हॉन्टेड जगहों में शामिल करती हैं. स्थानीय लोगों के बीच यहां रात में अजीब आवाजें सुनाई देने और किसी के नाम पुकारने जैसी कई कहानियां प्रचलित हैं. समुद्र तट के आसपास अंतिम संस्कार से जुड़ी मान्यताओं को भी इन कहानियों से जोड़ा जाता है. हालांकि, इन दावों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. फिर भी अंधेरा, सुनसान समुद्र तट और स्थानीय लोककथाएं मिलकर यहां एक अलग तरह का माहौल जरूर बना देती हैं.
लांबी देहर माइंस, उत्तराखंड
उत्तराखंड की लांबी देहर माइंस भी उन जगहों में शामिल है, जिनसे जुड़ी कहानियां लोगों को आकर्षित करती हैं. यहां कभी खनन का काम होता था और खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में मजदूरों की मौत होने की बातें कही जाती हैं. बाद में खदानें बंद हो गईं और इलाका काफी हद तक वीरान हो गया. आसपास के जंगल, सुनसान रास्ते और खदानों के पुराने हिस्से जगह को बेहद रहस्यमयी बना देते हैं. रात में सुनाई देने वाली आवाजों और चीखों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर कई दावे किए जाते हैं. हालांकि, तेज हवा और पहाड़ी इलाके में आवाजों की गूंज भी ऐसे अनुभवों की वजह हो सकती है.
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भानगढ़ किला, राजस्थान
राजस्थान का भानगढ़ किला भारत की सबसे प्रसिद्ध हॉन्टेड जगहों में गिना जाता है. किले से जुड़ी कई लोककथाएं और श्राप की कहानियां लंबे समय से सुनाई जाती रही हैं. किले के अंदर पुराने मंदिर, महल और खंडहर आज भी मौजूद हैं. आसपास का जंगल और सुनसान रास्ते इसके रहस्यमयी माहौल को और बढ़ाते हैं. भानगढ़ को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि यहां सूर्यास्त के बाद प्रवेश की अनुमति नहीं है. इसलिए रोमांच के चक्कर में नियमों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है.
हॉन्टेड जगहों पर जाते समय इन बातों का रखें ध्यान
इन जगहों को देखने का रोमांच अपनी जगह है, लेकिन सुरक्षा सबसे जरूरी है. कई हॉन्टेड लोकेशन असल में पुरानी या जर्जर इमारतें, सुनसान जंगल और बंद पड़ी खदानें हैं. ऐसे में असली खतरा किसी भूत से ज्यादा कमजोर ढांचे, जंगली जानवर, अंधेरा या रास्ते की जानकारी न होने से हो सकता है. किसी भी जगह के स्थानीय नियमों का पालन करें. जहां रात में जाने की अनुमति नहीं है, वहां जबरदस्ती प्रवेश न करें. सुनसान इलाकों में अकेले जाने से बचें और जरूरत पड़ने पर स्थानीय गाइड की मदद लें.
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Monsoon Bed Dampness: गीला गद्दा और बदबूदार चादर? मानसून में नमी दूर करने के हैक्स</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Sweat Odor From Bedsheet: बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है. बाहर बारिश हो, ठंडी हवा चले और मिट्टी की खुशबू आए तो मौसम सुहावना लगने लगता है. लेकिन लगातार कई दिनों तक बारिश होने के बाद घर के अंदर एक अलग तरह की परेशानी शुरू हो जाती है. कमरे में नमी बढ़ने लगती है और इसका असर सबसे पहले बिस्तर, गद्दे और चादरों पर दिखाई देता है. कई बार सुबह उठने पर चादर थोड़ी नम या भारी महसूस होती है, जबकि उस पर पानी गिरा भी नहीं होता. कमरे में हल्की सी सीलन की गंध आने लगती है और गद्दे पर लेटने में भी पहले जैसी ताजगी महसूस नहीं होती. अगर आपके कमरे में भी ऐसा हो रहा है, तो इसकी वजह सिर्फ गीली चादर नहीं, बल्कि कमरे में जमा ज्यादा नमी हो सकती है.
बरसात में कमरे की नमी क्यों बढ़ जाती है?
बारिश के मौसम में हवा में नमी काफी बढ़ जाती है. खासकर उन कमरों में जहां खिड़कियां लंबे समय तक बंद रहती हैं और हवा का आना-जाना कम होता है. कमरे की हवा में मौजूद नमी धीरे-धीरे कपड़ों, गद्दे, तकिए और दूसरी चीजों में जमा होने लगती है. गद्दा एक ऐसी चीज है जो नमी को आसानी से सोख सकता है. इसके अलावा रात में सोते समय शरीर से निकलने वाला पसीना भी गद्दे और चादर में पहुंचता है. अगर कमरे में हवा का संचार ठीक नहीं है, तो यह नमी आसानी से बाहर नहीं निकल पाती. यही स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो सीलन और बदबू की समस्या शुरू हो सकती है.
कमरे में ये गलती बिल्कुल न करें
बरसात में कमरे की खिड़कियां और दरवाजे हर समय बंद रखना सबसे आम गलतियों में से एक है. बारिश से बचने के लिए खिड़कियां बंद रखना जरूरी हो सकता है, लेकिन जब भी मौसम थोड़ा साफ हो और बाहर की हवा अपेक्षाकृत सूखी हो, कमरे में हवा का रास्ता जरूर बनाएं. कुछ समय के लिए खिड़कियां खोलने से कमरे की बंद और भारी हवा बाहर निकल सकती है. अगर कमरे में दूसरी तरफ खिड़की या दरवाजा है, तो दोनों तरफ से हवा आने-जाने दें. इससे कमरे के साथ-साथ बिस्तर में जमा नमी को भी बाहर निकलने में मदद मिलेगी.

गद्दे को सीधे फर्श पर न रखें
अगर गद्दा सीधे फर्श पर रखा है, तो उसके नीचे हवा का रास्ता बहुत कम हो जाता है. बारिश के मौसम में फर्श भी नमी पकड़ सकता है और यह नमी धीरे-धीरे गद्दे तक पहुंच सकती है. इसलिए कोशिश करें कि गद्दे को ऐसे बेड या बेस पर रखें, जहां नीचे से हवा का थोड़ा रास्ता बना रहे. स्लैट वाले बेड बेस इस मामले में बेहतर हो सकते हैं, क्योंकि उनके नीचे हवा का आवागमन बना रहता है.
धूप निकले तो गद्दे को हवा जरूर लगवाएं
बरसात में धूप लगातार नहीं निकलती, लेकिन जब भी कुछ घंटों के लिए मौसम साफ हो, उस समय का फायदा उठाएं. खिड़कियां खोलें और कमरे में हवा आने दें. अगर संभव हो तो गद्दे को बेड से थोड़ा उठाकर उसके नीचे की तरफ भी हवा लगने दें. गद्दे को धूप दिखाने का मौका मिले तो कुछ समय के लिए ऐसा किया जा सकता है. हालांकि, गद्दे को लंबे समय तक तेज धूप में रखने से पहले उसके निर्माता के निर्देश जरूर देखें.

हल्की गीली चादर बिस्तर पर न बिछाएं
बरसात में कपड़े सूखने में ज्यादा समय लेते हैं. कई बार चादर ऊपर से सूखी लगती है, लेकिन अंदर से हल्की नम होती है. ऐसी चादर को बिस्तर पर बिछाने से गद्दे में भी नमी पहुंच सकती है. इसलिए चादर और बेडशीट को पूरी तरह सूखने के बाद ही बिस्तर पर बिछाएं. अगर घर के अंदर सुखा रहे हैं, तो उन्हें एक-दूसरे के ऊपर ढेर करके न रखें. हवा का रास्ता बना रहने दें.
गद्दे पर नमी रोकने के लिए प्रोटेक्टर लगाएं
बारिश के मौसम में मैट्रेस प्रोटेक्टर भी काम आ सकता है. यह शरीर के पसीने और दूसरी नमी को सीधे गद्दे के अंदर जाने से रोकने में मदद करता है. हालांकि, ऐसा प्रोटेक्टर चुनना बेहतर है जो हवा का रास्ता पूरी तरह बंद न करे. प्रोटेक्टर को भी समय-समय पर धोकर पूरी तरह सुखाना जरूरी है.
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कमरे में नमी कम करने के लिए क्या करें?
अगर कमरे में लगातार सीलन रहती है, तो नमी कम करने के लिए डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा कमरे में हवा का बेहतर आवागमन बनाए रखना भी जरूरी है. अलमारी, बेड और दीवार के बीच थोड़ी जगह रखना भी उपयोगी हो सकता है. फर्नीचर को दीवार से बिल्कुल चिपकाकर रखने पर वहां हवा का संचार कम हो जाता है और नमी जमा हो सकती है.
सीलन की गंध को नजरअंदाज न करें
अगर कमरे या गद्दे से लगातार मिट्टी जैसी या सीलन वाली गंध आने लगी है, तो इसे सिर्फ मौसम की सामान्य गंध समझकर नजरअंदाज न करें. यह कमरे या गद्दे में ज्यादा नमी जमा होने का संकेत हो सकता है. गद्दे पर छोटे-छोटे दाग, नमी या फफूंद जैसी चीज दिखाई दे तो उसे गंभीरता से लें. ऐसी स्थिति में सिर्फ खुशबू वाले स्प्रे का इस्तेमाल करने से समस्या खत्म नहीं होगी. नमी का कारण दूर करना जरूरी है.
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        <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 03:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>GLP&amp;1 Drugs Obesity Treatment: GLP&amp;1 दवाओं से बदल रहा मोटापे का इलाज, क्या अब सर्जरी की जरूरत कम होगी?</title>
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        <description><![CDATA[  GLP-1 Drugs Obesity Treatment: GLP-1 दवाएं भूख कम करने और पेट भरा महसूस कराने में मदद करती हैं. लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक मोटापे के इलाज में अभी भी सर्जरी, सही खान पान और रोज की शारीरिक गतिविधि की अहम भूमिका बनी हुई है. मोटापे के इलाज में पिछले कुछ समय में GLP-1 दवाओं की चर्चा तेजी से बढ़ी है. इन दवाओं से भूख कम करने, पेट भरा महसूस कराने और वजन घटाने में मदद मिल सकती है. ऐसे लोगों के लिए यह एक नया ऑप्शन बनकर सामने आया है, जो वजन घटाने की सर्जरी नहीं कराना चाहते. हालांकि डॉक्टरों का कहना है, कि इन दवाओं के आने का मतलब यह नहीं है कि सर्जरी की जरूरत खत्म हो गई है.
GLP-1 दवाओं से क्यों बदला इलाज का तरीका
GLP-1 दवाएं भूख को कंट्रोल&amp;nbsp; करने और खाना खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद करती हैं. इससे व्यक्ति के लिए कम खाना और वजन कम करना आसान हो सकता है. डॉक्टर&amp;nbsp; के मुताबिक इन दवाओं ने मोटापे के इलाज को काफी बदला है. हालांकि इन्हें किसी जादुई इंजेक्शन की तरह नहीं देखना चाहिए. दवा शुरू करने से पहले व्यक्ति की पूरी सेहत सही होना, वजन बढ़ने की वजह और दूसरी बीमारियों की जांच जरूरी है. इसके साथ खान पान, फिजिकल एक्टिविटी और रोज की आदतों में बदलाव भी जरूरी है.
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वजन घटाने के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं
ऐसा कहना सही नहीं होगा. बहुत ज्यादा मोटापे वाले कुछ मरीजों में सर्जरी अब भी महत्वपूर्ण इलाज हो सकती है. खासकर जब मोटापे के साथ टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, फैटी लिवर या नींद के दौरान सांस रुकने जैसी समस्याएं भी हों. एक्सपर्ट्स के मुताबिक मोटापा लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है. इसलिए इलाज का फैसला केवल वजन देखकर नहीं किया जा सकता. मरीज की सेहत, मोटापे की गंभीरता, दूसरी बीमारियां और पहले किए गए इलाज को भी ध्यान में रखना पड़ता है.
GLP-1 दवाओं को आसान रास्ता न समझें
डॉक्टरों की चिंता यह भी है कि बढ़ती लोकप्रियता के वजह से&amp;nbsp; कुछ लोग इन दवाओं को बिना सही जांच और निगरानी के इस्तेमाल कर सकते हैं. GLP-1 दवाएं जल्दी वजन घटाने का कोई आसान तरीका नहीं हैं. इनके इस्तेमाल के दौरान दवा की मात्रा, खान पान&amp;nbsp; और नियमित जांच पर ध्यान देना जरूरी है. दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों का वजन फिर बढ़ सकता है. इसलिए लंबे समय तक फायदा बनाए रखने के लिए खाने की आदतों और रोज की गतिविधियों पर काम करना बेहद जरूरी है.
खान पान का रखें ध्यान
GLP-1 दवाएं भूख कम कर सकती हैं, इसलिए दवा लेने वाले व्यक्ति के लिए कम पोषण लेना जरूरी है. डाइट एक्सपर्ट के मुताबिक खाने में पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, खनिज और पानी मिलना चाहिए. इसके साथ रोज की फिजिकल एक्टिविटी, अच्छी नींद और तनाव को संभालना भी जरूरी है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर के साथ डाइट एक्सपर्ट, व्यायाम विशेषज्ञ और साइकोलॉजिस्ट की मदद ली जा सकती है.
किस आधार पर लें फैसला?
हर मरीज के लिए एक ही इलाज सही नहीं होता. कुछ लोगों को GLP-1 दवाओं से फायदा मिल सकता है, जबकि गंभीर मोटापे या उससे जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. कुछ मामलों में अलग अलग समय पर अलग इलाज भी अपनाया जा सकता है. इसलिए डॉक्टर से जांच कराने के बाद ही इलाज का फैसला करना जरूरी है.&amp;nbsp;
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Budget Family Trip: फैमिली ट्रिप प्लान कर रहे हैं? ये हैं कम बजट वाली शानदार डेस्टिनेशन</title>
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        <description><![CDATA[ Budget Family Trip: फैमिली ट्रिप प्लान कर रहे हैं? ये हैं कम बजट वाली शानदार डेस्टिनेशन ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Facial Scan Apps Depression: सांप के काटने पर घोड़े कैसे बचाते हैं इंसान की जान, यहां जानें?</title>
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        <description><![CDATA[ Facial Scan Apps Depression : सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे कई फेशियल स्कैन ऐप तेजी से फेमस हो रहे हैं, जो दावा करते हैं कि वे चेहरे को स्कैन करके उसकी कमियां बता सकते हैं और खूबसूरती बढ़ाने के लिए सुझाव दे सकते हैं. इन ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले कई लोग अब अपने चेहरे को पहले से अलग नजर से देखने लगे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ऐप्स महिलाओं के कॉन्फिडेंस और मेंटल हेल्थ पर नेगेटिव असर डाल सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ये फेशियल स्कैन ऐप कैसे काम करते हैं और विशेषज्ञ इन्हें लेकर क्या कमियां बता रहे हैं.&amp;nbsp;
फेशियल स्कैन ऐप कैसे काम करते हैं?
फेशियल स्कैन ऐप में यूजर अपनी सेल्फी या चेहरे की तस्वीर अपलोड करता है. इसके बाद ऐप एआई और इमेज एनालिसिस तकनीक की मदद से चेहरे के अलग-अलग हिस्सों, जैसे नाक, आंखें, होंठ, जबड़े, त्वचा और चेहरे के आकार का विश्लेषण करता है फिर यह एक रिपोर्ट तैयार करता है, जिसमें चेहरे की कथित कमियां बताई जाती हैं और उन्हें सुधारने के लिए बोटोक्स, फिलर्स, प्लास्टिक सर्जरी, स्किन ट्रीटमेंट या ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसी सलाह दी जाती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;फेशियल स्कैन ऐप कैसे बढ़ा रहे हैं डिप्रेशन?
37 वर्षीय डेनियल पहले मॉडलिंग करती थीं, लेकिन पिछले कुछ समय से उन्हें काम कम मिलने लगा. इसी दौरान सोशल मीडिया पर उन्हें फेशियल एनालिसिस करने वाली कंपनियों के विज्ञापन दिखाई दिए. डेनियल ने करीब 32 हजार रुपये खर्च करके अपनी सेल्फी एक फेशियल एनालिसिस कंपनी को भेजी. कुछ दिनों बाद उन्हें करीब 30 पन्नों की रिपोर्ट मिली. इसमें उनके चेहरे, कान और अन्य फीचर्स का विश्लेषण किया गया और राइनोप्लास्टी, चिन इम्प्लांट, बोटोक्स, फिलर्स समेत कई कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं की सलाह दी गई. डेनियल का कहना है कि अब उन्हें लगता है कि अपनी पसंद के अनुसार सुंदर दिखने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे. वह फिलहाल अपना कर्ज चुकाने के बाद सर्जरी कराने की योजना बना रही हैं.&amp;nbsp;
दूसरी महिला का एक्सपीरियंस भी रहा ऐसा ही
फ्रांस में रहने वाली 25 वर्षीय ओसियन बचपन से ही अपने चेहरे को लेकर असहज महसूस करती थीं. उन्होंने भी इसी कंपनी से अपनी रिपोर्ट मंगवाई. रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें कुछ बातों में राहत जरूर मिली, लेकिन उनके चेहरे की कथित कमियों को लेकर असुरक्षा पहले से ज्यादा बढ़ गई.
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विशेषज्ञ इन्हें लेकर क्या कमियां बता रहे हैं?
जब विशेषज्ञों ने भी Qoves और Epica जैसे फेशियल स्कैन ऐप्स का इस्तेमाल किया. Qoves ने उन्हें चेहरे का विस्तृत विश्लेषण और 16 पन्नों का ब्यूटी प्रोटोकॉल दिया. रिपोर्ट में एआई की मदद से यह भी दिखाया गया कि बोटोक्स, लिप फिलर्स और अन्य कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं के बाद उनका चेहरा कैसा दिखाई देगा. वहीं Epica ऐप ने उनकी स्किन हेल्थ 61 प्रतिशत बताई और स्किम के अन इवन कलर को समस्या बताते हुए कई महंगे सीरम के विज्ञापन दिखाए. बाद में जब उन्होंने सिर्फ अलग रोशनी में नई सेल्फी ली, तो स्किन हेल्थ स्कोर बढ़कर 81 प्रतिशत हो गया. लेखिका ने बताया कि इन रिपोर्ट्स से पहले उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि उनका मुंह ज्यादा चौड़ा है या उन्हें इतनी कम उम्र में बोटोक्स की जरूरत है, लेकिन रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने आईने में खुद को लेकर संकोच महसूस करना शुरू कर दिया.
विशेषज्ञों ने क्या जताई चिंता?
ओटावा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. ट्रेसी वेलैनकोर्ट का कहना है कि जिन लोगों को पहले से बॉडी डिस्मॉर्फिया, कम कॉन्फिडेंस या ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए ऐसी रिपोर्ट्स मेंटल हेल्थ पर गंभीर नेगेटिव असर डाल सकती हैं. उनके मुताबिक, इस तरह के ऐप लोगों को बार-बार अपनी तुलना दूसरों से करने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे वे खुद को कभी पर्याप्त अच्छा महसूस नहीं कर पाते है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>AIIMS Delhi: AIIMS के डॉक्टरों का चमत्कार, 209 kg के मरीज को दी नई जिंदगी</title>
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        <description><![CDATA[ AIIMS Delhi Bariatric Surgery 209kg Patient: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण मामले में सफलता हासिल करते हुए 209 किलोग्राम वजन वाले 32 वर्षीय मरीज को नई जिंदगी दी है. मरीज की हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि उसे सांस लेने में लगातार परेशानी हो रही थी और वह लंबे समय तक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर मशीन के सहारे सांस ले रहा था. डॉक्टरों ने करीब एक महीने तक स्पेशल तैयारी करने के बाद सफल बैरिएट्रिक सर्जरी की, जिसके बाद मरीज की सेहत में सुधार देखने को मिला.
सांस लेना भी हो गया था मुश्किल
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल के अनुसार, मरीज का बॉडी मास इंडेक्स 74 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर था, जो सामान्य स्तर से कई गुना अधिक हैय अत्यधिक मोटापे के कारण वह गंभीर ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया , सांस लेने में दिक्कत , हाई ब्लड प्रेशर, प्रीडायबिटीज और डिस्लिपिडिमिया जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था. हालत इतनी बिगड़ गई थी कि मरीज को इमरजेंसी ट्रेकियोस्टॉमी करनी पड़ी, ताकि उसकी सांस की नली खुली रहे और उसे पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके. इसके बाद भी वह एक महीने से अधिक समय तक CPAP सपोर्ट पर ही निर्भर रहा.
सिर्फ वजन नहीं, शरीर का आकार भी बना चुनौती
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मरीज का वजन नहीं था, बल्कि उसके पेट का अत्यधिक आकार भी था. मरीज के पेट की परिधि लगभग 198 सेंटीमीटर थी, जिसके कारण उसे सामान्य ऑपरेशन टेबल पर सुरक्षित तरीके से लिटाना भी संभव नहीं था. ऐसी स्थिति में एम्स के कई विभागों के एक्सपर्ट ने मिलकर इलाज की रणनीति तैयार की. इस टीम में बैरिएट्रिक सर्जन, एनेस्थीसिया एक्सपर्ट, इंटेंसिविस्ट, फिजिशियन, इंफेक्शन कंट्रोल एक्सपर्ट, डाइटिशियन और फिजियोथेरेपिस्ट शामिल थे. सभी ने मिलकर मरीज को सर्जरी के लिए तैयार करने की योजना बनाई.
32 दिनों तक चली खास तैयारी
ऑपरेशन से पहले मरीज को 32 दिनों तक बहुत कम कैलोरी वाला विशेष आहार दिया गया. इसके साथ नियमित श्वसन फिजियोथेरेपी, इंफेक्शन &amp;nbsp;कंट्रोल और पोषण संबंधी काउंसलिंग भी कराई गई. इस तैयारी का असर साफ दिखाई दिया. मरीज का वजन 209 किलोग्राम से घटकर 172 किलोग्राम हो गया. वहीं पेट की परिधि भी लगभग 20 सेंटीमीटर कम हो गई. इसके बाद डॉक्टर मरीज को विशेष रूप से संशोधित ऑपरेशन टेबल पर सुरक्षित तरीके से लिटाने में सफल रहे. इस टेबल में अतिरिक्त साइड एक्सटेंशन लगाए गए थे, ताकि सर्जरी के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो.
&amp;nbsp;

दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों ने एक 209 किलो के मरीज को नई जिंदगी दी है।32 साल के युवक को सुपर-सुपर ओबेसिटी के साथ स्लीप एपनिया की बीमारी थी।इस कारण उसकी सांस बार-बार रुकती थी. इस समस्या के कारण हर रात में CPAP मशीन की मदद से सांस लेनी पड़ती थी. ऐसे में डॉक्टरों ने पहले उनकी&amp;hellip; pic.twitter.com/lu08UzGuCz
&amp;mdash; डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) August 6, 2026




दो घंटे में पूरी हुई सर्जरी
जब डॉक्टरों को लगा कि मरीज की स्थिति ऑपरेशन के लिए उपयुक्त हो गई है, तब उन्होंने लैप्रोस्कोपिक वन एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की. यह पूरी प्रक्रिया करीब दो घंटे में सफलतापूर्वक पूरी हुई और ऑपरेशन के दौरान कोई बड़ी मुश्किल सामने नहीं आई. एम्स के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारुति पोल ने बताया कि ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने लंबे समय तक मरीज की सांस की स्थिति को स्थिर किया. ऑपरेशन थिएटर में ही मरीज के बेड पर आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी की गई थी, जिसके बाद उसे सुरक्षित रूप से वजन घटाने की सर्जरी के लिए तैयार किया गया.
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सर्जरी के बाद तेजी से हुआ सुधार
ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत लगातार बेहतर होती गई। धीरे-धीरे उसे CPAP मशीन से हटाया गया और सर्जरी के 13वें दिन वह बिना किसी सहारे के सामान्य रूप से सांस लेने लगा। इतना ही नहीं, वह अपने पैरों पर चलने लगा और रोजमर्रा के काम भी खुद करने लगा. अस्पताल से छुट्टी मिलने तक उसका वजन और घटकर 160 किलोग्राम रह गया. वहीं पेट की परिधि भी 155 सेंटीमीटर तक कम हो चुकी थी.
डॉक्टरों ने क्या कहा?
इलाज करने वाली टीम का कहना है कि यह मामला साबित करता है कि अत्यधिक मोटापे यानी सुपर-सुपर ओबेसिटी से जूझ रहे मरीजों का भी सफल इलाज संभव है, बशर्ते सर्जरी से पहले सही तैयारी की जाए और अलग-अलग एक्सपर्ट मिलकर इलाज करें. डॉक्टरों के मुताबिक, इस केस में केवल वजन कम करना ही महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि पेट की परिधि कम करना सबसे अहम साबित हुआ. इसी वजह से मरीज को ऑपरेशन टेबल पर सुरक्षित तरीके से रखा जा सका और सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हो पाई.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Blood Pressure Diet: आपका बीपी कंट्रोल करेंगी ये सब्जियां, देख लें लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Vegetables To Lower High Blood Pressure: आजकल हाई ब्लड प्रेशर यानी बढ़ा हुआ बीपी हर उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही समस्या बन चुका है. लंबे समय तक बीपी कंट्रोल में न रहे तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी की बीमारी और आंखों से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है. अच्छी बात यह है कि दवाओं के साथ सही खानपान भी बीपी को कंट्रोल रखने में अहम भूमिका निभाता है. खासतौर पर कुछ सब्जियां ऐसी हैं, जिनमें मौजूद पोटैशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और नाइट्रेट्स ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं. अगर आप भी अपनी डाइट के जरिए बीपी को नियंत्रित रखना चाहते हैं, तो इन सब्जियों को रोजाना के भोजन में जरूर शामिल करें.
पालक
पालक हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए सबसे फायदेमंद हरी सब्जियों में गिनी जाती है. इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और नाइट्रेट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. ये पोषक तत्व ब्लड वेसल्स को आराम देने और शरीर से अतिरिक्त सोडियम बाहर निकालने में मदद करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहने में सहायता मिल सकती है.
चुकंदर
चुकंदर प्राकृतिक नाइट्रेट्स का अच्छा स्रोत है. शरीर में पहुंचने के बाद ये नाइट्रेट्स नाइट्रिक ऑक्साइड में बदल जाते हैं, जो ब्लड वेसल्स को चौड़ा करने में मदद करता है. इससे ब्लड का फ्लो बेहतर होता है और बीपी कम करने में मदद मिल सकती है.

मेथी
मेथी की पत्तियों में फाइबर, पोटैशियम और कई जरूरी एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. नियमित रूप से मेथी का सेवन करने से दिल की सेहत बेहतर रहती है और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है.
ब्रोकली
ब्रोकली में फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन-सी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है. ये सभी पोषक तत्व ब्लड वेसल्स के बेहतर कामकाज में मदद करते हैं और हाई बीपी के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं.
&amp;nbsp;लौकी
लौकी में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है और सोडियम बहुत कम होता है. यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में भी मदद कर सकती है. गर्मियों में लौकी का सेवन शरीर के लिए और भी फायदेमंद माना जाता है.

&amp;nbsp;टमाटर
टमाटर में लाइकोपीन, पोटैशियम और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये दिल की सेहत को बेहतर बनाने और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं. सलाद, सब्जी या सूप के रूप में इसका सेवन किया जा सकता है.
गाजर
गाजर सिर्फ आंखों के लिए ही नहीं, बल्कि दिल के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. इसमें मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक असर पड़ सकता है.
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शकरकंद
शकरकंद में पोटैशियम और फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है. यह शरीर में सोडियम के प्रभाव को कम करने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है.
पत्तागोभी
पत्तागोभी में फाइबर, विटामिन-के और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. इसे नियमित डाइट का हिस्सा बनाने से दिल की सेहत बेहतर बनी रह सकती है और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है.
सहजन&amp;nbsp;
सहजन की फली और पत्तियां दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं. इनमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने और बीपी को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं.
क्यों फायदेमंद हैं ये सब्जियां?
mayoclinic के अनुसार, इन सब्जियों में मौजूद पोटैशियम शरीर से अतिरिक्त सोडियम बाहर निकालने में मदद करता है. वहीं मैग्नीशियम ब्लड वेसल्स को आराम देता है और फाइबर दिल की सेहत को बेहतर बनाता है. अगर इन्हें कम नमक और कम तेल में पकाकर खाया जाए, तो इनके फायदे और बढ़ सकते हैं.
सिर्फ सब्जियां खाना ही काफी नहीं
अगर आप बीपी को लंबे समय तक कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो सब्जियों के साथ कुछ अच्छी आदतें भी अपनानी जरूरी हैं. रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें, नमक का सेवन सीमित रखें, पर्याप्त पानी पिएं, तनाव कम करें और अच्छी नींद लें. अगर डॉक्टर ने दवा दी है, तो उसे बिना सलाह बंद न करें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>ब्रेड बच गई... इसे फ्रिज में रखें या नॉर्मल टेंपरेचर पर? जानें यहां</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ब्रेड-बच-गई-इसे-फ्रिज-में-रखें-या-नॉर्मल-टेंपरेचर-पर-जानें-यहां</link>
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        <description><![CDATA[ घर में अक्सर ऐसा होता है कि ब्रेड का पूरा पैकेट एक साथ खत्म नहीं होता. कुछ स्लाइस बच जाती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि बची हुई ब्रेड को फ्रिज में रखें या बाहर? अगर सही तरीके से नहीं रखा जाए तो ब्रेड जल्दी खराब भी हो सकती है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि ब्रेड को कैसे और कहां रखना चाहिए.
बाहर रखें या फ्रिज में, कब क्या सही है?
अगर मौसम ज्यादा गर्म नहीं है और आप 2 से 3 दिन के अंदर ब्रेड खा लेंगे, तो इसे नॉर्मल टेंपरेचर पर भी रखा जा सकता है. बस ध्यान रखें कि ब्रेड को उसके पैकेट में अच्छी तरह बंद करके रखें. इसे सूखी और साफ जगह पर रखें. जहां सीधी धूप आती हो, वहां ब्रेड बिल्कुल न रखें. इससे वह जल्दी खराब हो सकती है. साथ ही अगर मौसम बहुत गर्म है या बरसात का समय है, तो ब्रेड को फ्रिज में रखना बेहतर रहता है. इससे ब्रेड पर जल्दी फफूंदी नहीं लगती. हालांकि, फ्रिज में रखने से ब्रेड थोड़ी सख्त हो सकती है. जब भी खाना हो, उसे कुछ मिनट बाहर रख दें या हल्का सा टोस्ट कर लें. इससे उसका स्वाद पहले जैसा लगने लगता है.
ब्रेड का पैकेट हमेशा अच्छी तरह बंद रखें. अगर पैकेट खुला रह जाएगा, तो हवा अंदर जाएगी और ब्रेड जल्दी सूख जाएगी. ब्रेड को गीले हाथों से भी न छुएं. अगर एक बार ब्रेड निकाल ली है, तो बाकी स्लाइस को तुरंत पैकेट में बंद कर दें. इससे वह ज्यादा समय तक सही रहती है.
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खराब ब्रेड की पहचान कैसे करें
अगर ब्रेड पर हरे, काले या सफेद रंग के धब्बे दिखें, अजीब सी बदबू आए या वह बहुत चिपचिपी लगे, तो उसे बिल्कुल न खाएं. ऐसी ब्रेड खाने से पेट खराब हो सकता है. कई लोग खराब हिस्सा हटाकर बाकी ब्रेड खा लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए. पूरी ब्रेड फेंक देना ही सही रहता है. अगर आपको पता है कि ब्रेड कई दिनों तक इस्तेमाल नहीं होगी, तो उसे फ्रीजर में रख सकते हैं. जरूरत पड़ने पर जितनी स्लाइस चाहिए, उतनी निकालें और थोड़ी देर बाद इस्तेमाल कर लें. इससे ब्रेड लंबे समय तक सही रहती है और बार-बार बाजार से नई ब्रेड लाने की जरूरत भी नहीं पड़ती.
इन छोटी बातों का रखें ध्यान
ब्रेड को गैस, ओवन या किसी गर्म जगह के पास न रखें. हमेशा साफ जगह पर रखें. पैकेट को खुला छोड़ने की आदत भी ठीक नहीं है. अगर घर में छोटे बच्चे हैं, तो उन्हें भी समझाएं कि ब्रेड निकालने के बाद पैकेट को अच्छी तरह बंद करें. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से ब्रेड ज्यादा समय तक ताजा रहती है और खराब होने से बच जाती है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Zero Oil Cooking: क्या होती है जीरो ऑयल कुकिंग? इससे क्या होता है फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Is Zero Oil Cooking Healthy: आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों के बीच जीरो ऑयल कुकिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है. कई लोग वजन कम करने, हार्ट को स्वस्थ रखने या डायबिटीज जैसी बीमारियों से बचने के लिए इस तरीके को अपना रहे हैं. लेकिन क्या बिना तेल के बना खाना वास्तव में फायदेमंद होता है? और क्या रोजमर्रा की कुकिंग में इसे अपनाया जा सकता है?. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
क्या होती है जीरो ऑयल कुकिंग?
zoilkitchen के अनुसार, जीरो ऑयल कुकिंग का मतलब है खाना बनाने के दौरान तेल या घी का इस्तेमाल न करना. इसमें सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों को उनकी प्राकृतिक नमी, पानी, सब्जियों के स्टॉक, भाप या नॉन-स्टिक बर्तनों की मदद से पकाया जाता है. इस तरीके में खाने का स्वाद बनाए रखने के लिए मसालों, जड़ी-बूटियों, नींबू, अदरक, लहसुन और अन्य प्राकृतिक फ्लेवर का सहारा लिया जाता है. इसका उद्देश्य सिर्फ तेल कम करना नहीं, बल्कि शरीर में अनावश्यक फैट और अतिरिक्त कैलोरी की मात्रा को भी घटाना होता है.
दिल की सेहत के लिए हो सकती है फायदेमंद
तेल में मौजूद सैचुरेटेड और ट्रांस फैट का अधिक सेवन लंबे समय में दिल की सेहत पर असर डाल सकता है. अगर खाना बिना तेल के या बहुत कम तेल में बनाया जाए, तो शरीर में ऐसे फैट की मात्रा कम पहुंचती है. इससे हृदय को स्वस्थ रखने और हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.

वजन कम करने में मिल सकती है मदद
तेल कैलोरी का बड़ा सोर्स होता है. सिर्फ एक चम्मच तेल में भी काफी कैलोरी होती है. ऐसे में जब खाना बिना तेल के तैयार किया जाता है, तो कुल कैलोरी की मात्रा अपने आप कम हो जाती है. अगर इसके साथ संतुलित आहार और नियमित एक्सरसाइज भी की जाए, तो वजन घटाने में आसानी हो सकती है.
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखने में सहायक
बढ़ा हुआ एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों का बड़ा कारण माना जाता है. जीरो ऑयल कुकिंग अपनाने से शरीर में अतिरिक्त फैट की मात्रा कम पहुंचती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि इसके साथ संतुलित डाइट और डॉक्टर की सलाह भी जरूरी है.

ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है सकारात्मक असर
हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को अक्सर कम तेल और कम नमक वाला भोजन खाने की सलाह दी जाती है. जीरो ऑयल कुकिंग इस दिशा में एक अच्छा विकल्प हो सकती है. जब खाना हल्का और कम फैट वाला होता है, तो यह दिल और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव कम करने में मदद कर सकता है.
डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बेहतर विकल्प
अगर भोजन में तेल और प्रोसेस्ड फैट की मात्रा कम हो, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर तरीके से काम कर सकता है. साबुत अनाज, दालें, सब्जियां और बिना तेल के बना भोजन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने वाली हेल्दी डाइट का हिस्सा माना जाता है. यही वजह है कि कई न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डायबिटीज के मरीजों को भी कम तेल वाला भोजन लेने की सलाह देते हैं.
जीरो ऑयल कुकिंग कैसे करें?
नॉन-स्टिक पैन या अच्छी गुणवत्ता वाले बर्तनों का इस्तेमाल करें.सब्जियों को तेल की जगह पानी या वेजिटेबल स्टॉक में हल्का पकाएं.स्टीमिंग, उबालना, ग्रिलिंग और बेकिंग जैसे कुकिंग तरीके अपनाएं.स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू, काली मिर्च, धनिया, पुदीना, अदरक, लहसुन और दूसरे प्राकृतिक मसालों का इस्तेमाल करें.तली हुई चीजों की बजाय भाप में पके या ग्रिल किए गए व्यंजन चुनें.
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क्या बिना तेल के खाना स्वादिष्ट हो सकता है?
बहुत से लोगों को लगता है कि बिना तेल के खाना बेस्वाद होगा, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. अगर सही मसाले, ताजी सब्जियां और सही कुकिंग तकनीक अपनाई जाए, तो बिना तेल का भोजन भी स्वादिष्ट बन सकता है. आजकल कई लोग बिना तेल की सब्जी, सूप, दाल, कटलेट, इडली, ढोकला और कई दूसरी डिशेज भी पसंद कर रहे हैं.
क्या हर किसी को जीरो ऑयल डाइट अपनानी चाहिए?
यह समझना जरूरी है कि शरीर को थोड़ी मात्रा में हेल्दी फैट की भी जरूरत होती है. बादाम, अखरोट, बीज, एवोकाडो और सीमित मात्रा में सरसों, मूंगफली या ऑलिव ऑयल जैसे सोर्स शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. इसलिए बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के पूरी तरह तेल बंद करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है.
इसे भी पढ़ें:&amp;nbsp;Relationship Cheating: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अचानक हुई गलती नहीं, जानें क्या कहती है रिसर्च
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गंजापन रोकने के लिए सलमान खान ने कराई PRP थेरेपी, इसमें कितना खर्चा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/गंजापन-रोकने-के-लिए-सलमान-खान-ने-कराई-prp-थेरेपी-इसमें-कितना-खर्चा</link>
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        <description><![CDATA[ Salman Khan PRP Therapy: बाल झड़ना आजकल आम समस्या बन चुकी है. इसकी एक बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल, असंतुलित खानपान, तनाव और पोषण की कमी मानी जाती है. ऐसे में कई लोग हेयरफॉल को कम करने के लिए PRP थेरेपी का सहारा ले रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता सलमान खान ने भी बालों से जुड़ी समस्या के लिए PRP थेरेपी करवाई थी.
सलमान खान ने जब ये यह थेरेपी कराई है, यह ट्रीटमेंट तब से चर्चा का विषय बना हुआ है. अगर आप भी बाल झड़ने की समस्या से परेशान हैं और PRP थेरेपी करवाने के बारे में सोच रहे हैं, तो आइये जानते हैं PRP थेरेपी क्या है, यह कैसे काम करती है, इसके फायदे और इसे करवाने में कितना खर्चा आता है?
PRP थेरेपी क्या है&amp;nbsp;
PRP थेरेपी यानी Platelate Rich Plasma एक आधुनिक हेयर ट्रीटमेंट है, जिसमे मरीज के अपने खून का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले मरीज के शरीर से थोड़ी मात्रा में खून लिया जाता है इसके बाद मशीन की मदद से उस खून में मौजूद प्लेटलेट्स को अलग किया जाता है फिर इन्हें सिर की त्वचा स्कैल्प में इंजेक्ट किया जाता है. माना जाता है कि इससे हेयर फॉलिकल्स को पोषण मिलता है और बालों की ग्रोथ को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे हेयर फॉल की समस्या से राहत मिलती है.
PRP थेरेपी कराने में कितना खर्च आता है
भारत में PRP थेरेपी का खर्च शहर, अस्पताल, क्लिनिक और डॉक्टर के अनुभव के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. आमतौर पर एक सिटिंग की कीमत 3,000 से 10,000 रुपये के बीच होती है. बेहतर परिणाम के लिए डॉक्टर अक्सर 3 से 6 सिटिंग्स कराने की सलाह देते हैं. ऐसे में पूरे ट्रीटमेंट पर 15,000 से 60,000 रुपये या इससे अधिक का खर्च आ सकता है. अगर यह थेरेपी किसी बड़े शहर या प्रीमियम क्लिनिक में कराई जाती है, तो इसकी कीमत और भी ज्यादा हो सकती है. इसलिए इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर से कुल खर्च और सिटिंग्स की जानकारी लेना जरूरी है.
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हेयर फॉल को रोकने में कितनी असरदार है PRP थेरेपी
विशेषज्ञों के अनुसार, PRP थेरेपी कमजोर हो चुके हेयर फॉलिकल्स को सक्रिय करने में मदद करती है. इससे बाल झड़ने की गति कम हो सकती है और नए बाल उगने की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है. बेहतर परिणाम के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार कई सिटिंग्स की सलाह देते हैं.
क्या इसके साइड इफेक्ट्स भी हैं
PRP थेरेपी में मरीज के अपने खून का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है. फिर भी कुछ लोगों को इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन, लालपन या कुछ समय के लिए असहजता महसूस हो सकती है. अगर यह प्रक्रिया किसी अनुभवी डॉक्टर से कराई जाए, तो गंभीर जोखिम की संभावना काफी कम रहती है. अगर आप PRP थेरेपी कराने की योजना बना रहे हैं तो पहले किसी योग्य डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं. साथ ही, किसी प्रमाणित क्लिनिक का ही चयन करें. डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी या पहले से चल रही दवाओं की जानकारी देना भी जरूरी है, ताकि इलाज सुरक्षित तरीके से किया जा सके.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Xप्लेन: कैंसर से भारत कैसे बच सकता है? ऐसे पहचानें हर रोज दोहराने वाला दर्दनाक सच</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के कैंसर अस्पतालों में हर दिन एक ही नजारा देखने को मिलता है, 70% से ज्यादा मरीज ऐसे आते हैं जिनका कैंसर आखिरी स्टेज पर पहुंच चुका होता है. इस स्टेज पर इलाज महंगा और मुश्किल होता है. कामयाबी की संभावना बहुत कम हो जाती है. पिछले दो दशकों में भारत ने दुनिया के बेहतरीन कैंसर सेंटर बनए हैं, रेडिएशन थेरेपी और सर्जरी के आधुनिक तरीके अपनाए हैं, लेकिन ये सारी तरक्की तब बेकार हो जाती है, जब मरीज इतनी देर से आएं कि कुछ किया न जा सके. तो आखिर कैसे भारत कैंसर से बच सकता है...
भारत में कितना बड़ा है कैंसर का संकट?
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत में 15.33 लाख नए कैंसर के मामले दर्ज किए गए. वहीं, कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा 8.74 लाख तक पहुंच गया. बात सिर्फ इतनी नहीं है, 2015 से 2024 के बीच कैंसर के मामलों में 10.4% की बढ़ोतरी हुई है. कैंसर से मौतों में 28.6% का उछाल आया है. यानी मौतें तीन गुना तेजी से बढ़ रही हैं. यह साफ संकेत है कि हम मरीजों को समय रहते नहीं बचा पा रहे हैं.
हर 9 में से 1 भारतीय को अपनी जिंदगी में कभी न कभी कैंसर होने का खतरा है. कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में तो यह खतरा 20% से भी ज्यादा है. बढ़ती उम्र और बदलती जीवनशैली के साथ यह आंकड़ा और बढ़ेगा.
इलाज में देर से आना क्यों है सबसे बड़ी समस्या?
दिल्ली के एक्शन कैंसर हॉस्पिटल और एक्शन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल ऑनकोलॉजी एंड इम्यूनोथैरेपी के डायरेक्टर डॉ. जे. बी. शर्मा बताते हैं, भारत में कैंसर की पहचान अक्सर तब होती है जब लक्षण इतने गंभीर हो जाएं कि रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल हो जाए. तब तक ठीक करने के मौके हाथ से निकल चुके होते हैं. इस देरी की कीमत सिर्फ जान नहीं है, बल्कि यह गरीबी की वजह भी बनती है. कैंसर से पीड़ित 75% से ज्यादा परिवारों को इलाज के खर्च ने आर्थिक रूप से तबाह कर दिया है.
भारत में फेफड़ों के कैंसर से 5 साल तक जीवित रहने की दर सिर्फ 4% है, जबकि जापान में यह 33% है. यह फर्क इलाज की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि यह उस स्टेज का है जब मरीज डॉक्टर के पास पहुंचता है.
तो कैसे बदलेगी यह तस्वीर?
डॉ. जे. बी. शर्मा के मुताबिक, इसके लिए तीन बड़े कदम उठाने होंगे:
कदम-1: स्कूलों से शुरू होगी बदलाव की क्रांति
कैंसर से बचाव की बात करें तो लगभग आधे कैंसर रोके जा सकते हैं. लेकिन बड़ों को जागरूक करने से फायदा सीमित होता है, क्योंकि जीवनशैली की आदतें बचपन में ही पक्की हो जाती हैं. एक बार आदतें बन गईं तो जागरूकता अभियानों से उन्हें बदलना बहुत मुश्किल है.
इस वजह से स्वास्थ्य शिक्षा स्कूलों से शुरू होनी चाहिए, जहां &#039;जीवन कौशल&#039; को गणित और विज्ञान जितना ही महत्व दिया जाए. ये जीवन कौशल सिर्फ कैंसर से ही नहीं, बल्कि दिल की बीमारी, डायबिटीज, न्यूरोलॉजिकल और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियों से भी बचाएंगे. इसमें शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य, नशे से बचाव, खानपान, वैक्सीनेशन और परिवार-समाज के लिए जिम्मेदारियां सब शामिल होनी चाहिए.
कदम- 2: तीन हफ्ते का नियम और स्क्रीनिंग की ताकत
आम आदमी को बस एक बात याद रखनी चाहिए कि अगर कोई लक्षण तीन हफ्ते से ज्यादा बना रहे तो डॉक्टर को दिखाओ. यह एक आसान सा नियम कैंसर की पहचान में बड़ी देरी को कम कर सकता है, लेकिन जागरूकता अकेले काफी नहीं है. स्क्रीनिंग हमारा सबसे ताकतवर हथियार है, लेकिन जब लक्षण दिखने से पहले ही कैंसर का पता लग जाए. अब तक स्क्रीनिंग ज्यादातर सर्वाइकल, ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर तक ही सीमित थी. अब विज्ञान ने नए रास्ते खोले हैं.
कदम- 3: एक ब्लड सैंपल में 10 कैंसर की पहचान
सबसे बड़ी उम्मीद मल्टी-कैंसर अर्ली डिटेक्शन (MCED) टेस्ट से है. यह एक ब्लड टेस्ट है जो एक ही सैंपल में 10 तरह के कैंसर के बायोलॉजिकल सिग्नल पकड़ सकता है. कोलोरेक्टल, फेफड़ा, लिवर, पैंक्रियाज, ओवेरियन, गैस्ट्रिक, एसोफेजियल, ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और ब्लैडर कैंसर.
जुलाई 2026 में अपोलो कैंसर सेंटर्स ने शील्ड मल्टी-कैंसर डिटेक्शन (MCD) टेस्ट भारत में लॉन्च किया है. यह 45 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए डिजाइन किया गया है. जायडस लाइफसाइंसेज ने अपोलो हॉस्पिटल्स के साथ मिलकर इसे पूरे देश में उपलब्ध कराने के लिए समझौता किया है. हालांकि इसे पूरे देश में लागू करने से पहले सावधानीपूर्वक मूल्यांकन की जरूरत है, लेकिन यह कैंसर रिसर्च के सबसे उम्मीद भरे क्षेत्रों में से एक है.
भारत के हिसाब से अपना मॉडल
1.4 अरब लोगों के देश में एक ही स्क्रीनिंग प्रोग्राम काम नहीं कर सकता. भारत को अपनी हकीकत के हिसाब से समाधान बनाने होंगे. एक लेयर्ड मॉडल जिसमें शामिल हो:

कम्युनिटी हेल्थ वर्कर्स गांव-गांव जाकर लोगों को समझाएं.
डिजिटल रिस्क असेसमेंट के जरिए ऑनलाइन टूल्स से पहचान करना आसान.
AI की मदद से एक्स-रे और रिपोर्ट्स पढ़कर खतरे के संकेत बताए.
मोबाइल डायग्नोस्टिक सर्विसेज से दूरदराज के इलाकों तक पहुंच.
प्राइमरी केयर से कैंसर सेंटर तक की मजबूत रेफरल व्यवस्था.

NITI Aayog का इमेजिंग बायोबैंक
अच्छी खबर यह है कि नींव पहले से पड़ रही है. NITI Aayog 20,000 से ज्यादा कैंसर मरीजों की रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी इमेजेज का डेटाबेस बना रहा है. यह इमेजिंग बायोबैंक AI टूल्स को ट्रेन करने में मदद करेगा, ताकि फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स संदिग्ध नोड्यूल्स की पहचान कर सकें और मरीजों को सही विशेषज्ञ के पास भेज सकें.
नेशनल हेल्थ रिसर्च पॉलिसी 2026
ड्राफ्ट नेशनल हेल्थ रिसर्च पॉलिसी 2026 इस बदलाव को तेज करने का मौका देती है. इसके तहत 2047 तक स्वास्थ्य अनुसंधान पर खर्च को मौजूदा स्तर से 6.25 गुना बढ़ाने का लक्ष्य है. कैंसर, टीबी, डायबिटीज, हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य जैसी बड़ी बीमारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. AI, डिजिटल हेल्थ, डेटा साइंस, सेल और जीन थेरेपी जैसे इमर्जिंग एरियाज पर भी फोकस होगा.
यह नीति &#039;पब्लिकेशन-ड्रिवन&#039; से &#039;इम्प्लीमेंटेशन साइंस&#039; की ओर शिफ्ट का संकेत देती है. यानी  ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IRCTC Japan Tour Package: कम बजट में करें जापान की सैर! IRCTC लाया 10 दिन का स्पेशल पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ Japan Tour Package From Delhi IRCTC: अगर आप लंबे समय से जापान घूमने का सपना देख रहे हैं, लेकिन यात्रा की प्लानिंग, वीजा, होटल और लोकल ट्रांसपोर्ट जैसी चीजों को लेकर असमंजस में हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन ने भारतीय यात्रियों के लिए 10 दिन और 9 रात का जापान टूर पैकेज लॉन्च किया है. यह ग्रुप टूर 6 सितंबर को दिल्ली से रवाना होगा और 15 सितंबर को वापस लौटेगा. इस दौरान यात्रियों को जापान के कई मशहूर शहरों और पर्यटन स्थलों को करीब से देखने का मौका मिलेगा.
कितना है पैकेज का किराया?
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन &amp;nbsp;के मुताबिक, ट्रिपल शेयरिंग के आधार पर प्रति व्यक्ति पैकेज की कीमत 3,45,999 रुपये रखी गई है. ट्विन शेयरिंग के लिए यह 3,49,999 रुपये है, जबकि सिंगल ऑक्यूपेंसी चुनने पर 4,73,999 रुपये खर्च करने होंगे. 5 से 11 साल के बच्चों के लिए भी अलग किराया तय किया गया है. बेड के साथ पैकेज की कीमत 2,92,499 रुपये और बिना बेड के 2,63,999 रुपये है.

पैकेज में क्या-क्या शामिल है?
इस टूर पैकेज में आने-जाने की इकोनॉमी क्लास फ्लाइट, फोर स्टार होटलों में ठहरने की सुविधा, जापान का टूरिस्ट वीजा, रोजाना नाश्ता, दोपहर और रात का खाना, एयरपोर्ट ट्रांसफर, एयर कंडीशंड कोच से साइटसीइंग, 70 वर्ष से कम उम्र के यात्रियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस, अंग्रेजी बोलने वाला टूर गाइड और सभी लागू टैक्स शामिल हैं. यात्रा दिल्ली से टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट तक होगी. हालांकि, एयरलाइन के संचालन के अनुसार फ्लाइट के समय में बदलाव संभव है, जिससे यात्रा कार्यक्रम में भी थोड़ा परिवर्तन किया जा सकता है.
किन-किन जगहों पर घूमने का मिलेगा मौका?
इस टूर में जापान की आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति दोनों का अनुभव कराया जाएगा. टोक्यो में पर्यटक असाकुसा मंदिर, नाकामिसे शॉपिंग स्ट्रीट, उएनो पार्क, ओडाइबा और मशहूर डिजिटल आर्ट म्यूजियम टीमलैब प्लैनेट्स देखेंगे. मौसम अनुकूल रहने पर माउंट फूजी के फिफ्थ स्टेशन तक भी ले जाया जाएगा. अगर मौसम खराब हुआ तो उसकी जगह ओशिनो हक्काई का भ्रमण कराया जाएगा. इसके अलावा हाकोने रोपवे, ओवाकुदानी वैली, लेक आशी में पाइरेट शिप क्रूज, टोयोटा म्यूजियम और SCMAGLEV रेलवे म्यूजियम भी यात्रा का हिस्सा हैं. यात्रियों को जापान की विश्व प्रसिद्ध शिंकानसेन बुलेट ट्रेन में सफर करने का भी अवसर मिलेगा.
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इन शहरों की भी होगी सैर
यात्रा के दौरान क्योटो में अराशियामा बांस वन, किंकाकु-जी मंदिर और फुशिमी इनारी ताइशा जैसे ऐतिहासिक स्थल दिखाए जाएंगे. ओसाका में प्रसिद्ध ओसाका कैसल और स्थानीय खानपान का अनुभव मिलेगा, जबकि नारा में टोडाइ-जी मंदिर और खुले में घूमते हिरण पर्यटकों का आकर्षण होंगे. हिरोशिमा में पीस मेमोरियल पार्क, मियाजिमा द्वीप और इत्सुकुशिमा श्राइन का भ्रमण कराया जाएगा, जहां पर्यटक जापान के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जान सकेंगे.
यात्रा से पहले किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन के अनुसार, यात्रियों का पासपोर्ट वापसी की तारीख से कम से कम छह महीने तक वैध होना चाहिए. इसके अलावा जापान का वीजा पाने के लिए पैन कार्ड, बैंक और आय से जुड़े दस्तावेज तथा रोजगार संबंधी जरूरी कागजात भी जमा करने होंगे.
क्या ग्रुप टूर हर किसी के लिए सही विकल्प है?
ट्रैवल कंसल्टेंट और सिक्किम एक्सपेडिशंस के सीईओ डीके घटानी का कहना है कि जो लोग पहली बार जापान जा रहे हैं, उनके लिए एस्कॉर्टेड ग्रुप टूर काफी सुविधाजनक साबित हो सकता है. इसमें होटल, लोकल ट्रांसपोर्ट, साइटसीइंग और गाइड जैसी व्यवस्थाएं पहले से तय रहती हैं, जिससे भाषा और नए माहौल की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाती है. हालांकि, ऐसे टूर की सबसे बड़ी सीमा यह है कि पूरा कार्यक्रम पहले से तय होता है. ऐसे में अपनी पसंद की जगहों पर ज्यादा समय बिताने या स्थानीय कैफे, बाजार और गलियों को आराम से घूमने की आजादी कम मिलती है. इसलिए पैकेज बुक करने से पहले यह जरूर देखें कि इसमें फ्लाइट, वीजा, होटल, भोजन, टिकट, लोकल ट्रांसपोर्ट, इंश्योरेंस और टैक्स जैसी कौन-कौन सी सुविधाएं शामिल हैं और क्या इसकी कीमत आपके बजट के हिसाब से सही बैठती है.
जापान जाने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए जरूरी सलाह
यात्रा के दौरान आरामदायक जूते, हल्के गर्म कपड़े, रेन जैकेट और एक छोटा छाता साथ रखें, क्योंकि मौसम अचानक बदल सकता है. इसके अलावा जापान की स्थानीय संस्कृति का सम्मान करना भी जरूरी है. सार्वजनिक परिवहन में धीरे बात करें, लाइन का पालन करें, साफ-सफाई का ध्यान रखें और मंदिरों व सार्वजनिक स्थानों के नियमों का सम्मान करें.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 23:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>कील मुहासों से 15 दिन में मिलेगा छुटकारा, अपनाएं ये रूटीन</title>
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        <description><![CDATA[ Acne care: चेहरे पर कील-मुहांसे होना आजकल बहुत आम बात है. धूल, तेल, गलत खाना, तनाव और त्वचा की सही देखभाल न करने की वजह से यह समस्या हो सकती है. अगर आप रोज एक आसान रूटीन अपनाते हैं तो कुछ लोगों को 15 दिन में फर्क दिखना शुरू हो सकता है. हालांकि, हर किसी की त्वचा अलग होती है, इसलिए नतीजे भी अलग हो सकते हैं. अगर मुहांसे ज्यादा हैं या लंबे समय से बने हुए हैं, तो सिर्फ घरेलू उपायों पर भरोसा करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना भी जरूरी है.
कील-मुहांसे क्यों होते हैं?
जब त्वचा पर ज्यादा तेल बनने लगता है और रोमछिद्र बंद हो जाते हैं, तब मुहांसे निकल सकते हैं. कई बार हार्मोन में बदलाव, कम पानी पीना और ज्यादा तला-भुना खाना भी इसकी वजह बन जाता है. इसके अलावा देर रात तक जागना, तनाव लेना और बार-बार चेहरे को गंदे हाथों से छूना भी मुहांसों की समस्या बढ़ा सकता है.
कई लोगों की त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली होती है, इसलिए उन्हें यह परेशानी बार-बार हो सकती है. ऐसे में रोजाना सही तरीके से त्वचा की सफाई करना बहुत जरूरी होता है.
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सुबह इस रूटीन को अपनाएं
सुबह उठने के बाद सबसे पहले हल्के फेसवॉश से चेहरा धोएं. बहुत ज्यादा बार चेहरा धोने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इससे त्वचा रूखी भी हो सकती है. चेहरा धोने के बाद हल्का मॉइश्चराइजर लगाएं ताकि त्वचा में नमी बनी रहे. अगर बाहर जाना हो तो सनस्क्रीन जरूर लगाएं. इससे त्वचा को धूप से बचाने में मदद मिलती है. कोशिश करें कि दिनभर चेहरे पर ज्यादा धूल-मिट्टी न जमे. अगर बाहर से घर लौटें तो चेहरा साफ पानी से धो सकते हैं.
रात में त्वचा की ऐसे करें देखभाल
रात को सोने से पहले चेहरा अच्छी तरह साफ करें. अगर आपने मेकअप किया है तो उसे पूरी तरह हटाकर ही सोएं. इसके बाद हल्का फेसवॉश इस्तेमाल करें. अगर डॉक्टर ने कोई क्रीम या जेल दी है तो उसे सही तरीके से लगाएं. बिना सलाह के बार-बार नई क्रीम या दवा का इस्तेमाल न करें. कई लोग जल्दी असर पाने के लिए एक साथ कई प्रोडक्ट लगाने लगते हैं, लेकिन इससे त्वचा को नुकसान भी हो सकता है.
इन बातों का भी रखें ध्यान
दिनभर खूब पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. तला-भुना, बहुत मीठा और जंक फूड कम खाएं. फल, हरी सब्जियां, दाल और घर का बना खाना ज्यादा खाएं. रोजाना अच्छी नींद लेने की कोशिश करें, क्योंकि कम नींद का असर भी त्वचा पर पड़ सकता है. मुहांसों को हाथ से छूने या फोड़ने की गलती बिल्कुल न करें. इससे दाग पड़ सकते हैं खतरा भी बढ़ सकता है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Snake Prevention: इतनी संकरी जगह से भी घर में घुस सकता है सांप! तुरंत करें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ How Snakes Enter House Through Door Gap: घर में अचानक सांप दिखाई देना किसी भी व्यक्ति के लिए डराने वाला अनुभव हो सकता है. ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर सांप अंदर आया कैसे? कई बार लोग खिड़कियों या खुले दरवाजों पर शक करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दरवाजे के नीचे छोड़ी गई छोटी-सी जगह भी सांप के लिए घर में घुसने का रास्ता बन सकती है.
कितनी छोटी जगह से घुस सकता है सांप?
सांप का शरीर बेहद लचीला होता है. उसके पास इंसानों की तरह कंधे या पैर नहीं होते, इसलिए वह अपने शरीर को दबाकर बहुत संकरी जगह से भी निकल सकता है. छोटे आकार के कई सांप करीब 6 से 7 मिलीमीटर (लगभग एक चौथाई इंच) की दरार से भी अंदर घुस सकते हैं. वहीं बड़े सांपों को थोड़ी ज्यादा जगह की जरूरत होती है, लेकिन अगर दरवाजे के नीचे साफ नजर आने वाला गैप है, तो कुछ न कुछ प्रजाति का सांप वहां से निकल सकता है. यही वजह है कि दरवाजे के नीचे का छोटा गैप भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
आखिर सांप घर के अंदर क्यों आता है?
ज्यादातर मामलों में सांप इंसानों पर हमला करने के इरादे से घर में नहीं आता. वह भोजन, पानी या सुरक्षित जगह की तलाश में भटकते हुए घर तक पहुंच जाता है. अगर घर के आसपास चूहे, छिपकलियां, मेंढक या कीड़े-मकोड़े ज्यादा हैं, तो सांप भी वहां आने की संभावना बढ़ जाती है. कई बार वह इन्हीं शिकार का पीछा करते हुए दरवाजे के नीचे या दीवार की दरार से अंदर पहुंच जाता है.

मौसम भी बनता है वजह
गर्मी के दिनों में सांप ठंडी जगह तलाशते हैं, जबकि तेज बारिश या सर्द मौसम में उन्हें सूखी और सुरक्षित जगह चाहिए होती है. ऐसे समय में घर का स्टोर रूम, बेसमेंट, गैराज या कम इस्तेमाल होने वाले कमरे उन्हें सुरक्षित ठिकाना लग सकते हैं. अगर दरवाजे के नीचे पर्याप्त जगह हो, तो सांप आसानी से अंदर पहुंच सकता है.
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कौन-कौन से सांप घर में ज्यादा दिखाई देते हैं?
भारत में घरों के आसपास दिखाई देने वाले अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते. चूहे खाने वाले कई सामान्य सांप अक्सर इंसानी बस्तियों के आसपास घूमते रहते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि खतरा बिल्कुल नहीं है. कुछ इलाकों में कोबरा, करैत या वाइपर जैसी जहरीली प्रजातियां भी घरों के आसपास पहुंच सकती हैं. इसलिए घर के अंदर दिखने वाले किसी भी सांप को पहचानने की कोशिश में उसके पास जाना सही नहीं माना जाता.
कैसे पता चले कि सांप घर में घुसा है?
अगर आपको घर में सांप दिखाई नहीं भी दे, तब भी कुछ संकेत उसकी मौजूदगी का इशारा कर सकते हैं. घर के किसी कोने में सांप की उतरी हुई केंचुल मिलना, धूल वाली जगह पर रेंगने के निशान दिखना या अचानक घर में चूहों की संख्या कम हो जाना ऐसे संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा दरवाजे, गैराज या स्टोर रूम के पास बार-बार सांप दिखाई देना भी इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं कोई रास्ता खुला हुआ है.

दरवाजे से सांप को अंदर आने से कैसे रोकें?
अगर दरवाजे के नीचे गैप ज्यादा है, तो सबसे पहले उसे बंद करना चाहिए. इसके लिए डोर स्वीप, रबर सील या वेदर स्ट्रिप लगाई जा सकती है. इससे न सिर्फ सांप बल्कि कई दूसरे कीड़े और छोटे जीव भी घर में नहीं घुस पाएंगे. इसके साथ ही समय-समय पर दरवाजे के किनारों और चौखट की जांच करते रहें. अगर कहीं दरार या टूट-फूट दिखाई दे, तो उसे जल्द ठीक करवा लें.
घर के बाहर भी रखें सफाई
सिर्फ दरवाजा बंद करना ही काफी नहीं है. घर के आसपास लंबी घास, लकड़ियों का ढेर, कबाड़ या पत्थरों का जमाव भी सांपों को छिपने की जगह देता है. इसलिए आंगन और बगीचे को साफ रखना जरूरी है. अगर घर के आसपास चूहों की संख्या ज्यादा है, तो पहले उनकी समस्या का समाधान करें. क्योंकि जहां चूहे होंगे, वहां सांप आने की संभावना भी बढ़ जाती है.
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        <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>India First High Altitude Ladakh Safari : लद्दाख में शुरू होगी भारत की पहली हाई&amp;एल्टीट्यूड सफारी, जानें क्या है खास?</title>
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        <description><![CDATA[ India First High Altitude Ladakh Safari : पहाड़ों की खूबसूरती, बर्फ से ढके पहाड़ और वन्यजीवों के लिए मशहूर लद्दाख अब टूरिस्ट को एक बिल्कुल नया एक्सपीरियंस देने की तैयारी में है. यहां आने वाले समय में लोग सिर्फ प्राकृतिक नजारों का ही नहीं, बल्कि स्नो लेपर्ड और रेयर पक्षियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखने का भी मौका पा सकेंगे. इस पहल का उद्देश्य सिर्फ टूरिज्म बढ़ाना नहीं, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ना भी है. इसी दिशा में प्रशासन ने भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू करने का फैसला लिया है. तो आइए जानते हैं कि लद्दाख में शुरू होने वाली भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड सफारी में क्या खास है.&amp;nbsp;
भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ सफारी होगी शुरू
लद्दाख प्रशासन ने ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में हो रही गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए गाइडेड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू करने का फैसला लिया है. इसके तहत उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने स्नो लेपर्ड और बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स पर गाइडेड जीप सफारी को मंजूरी दी है. इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल टूरिज्म को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को संरक्षण और रोजगार से जोड़ना है.&amp;nbsp;SHAN कंजर्वेशन सोसाइटी की बैठक में लिया गया फैसला
अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला हाल ही में गठित स्नो लेपर्ड एंड हाई-एल्टीट्यूड नेचर (SHAN) कंजर्वेशन सोसाइटी की पहली गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिया गया. इस बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने की.&amp;nbsp;
भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड सफारी में क्या खास है?
वन विभाग को काजीरंगा और रणथंभौर जैसे राष्ट्रीय उद्यानों की तर्ज पर गाइडेड जीप सफारी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके लिए खास डिजाइन वाली ओपन-बैक जीपों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिन्हें प्रशिक्षित स्थानीय ड्राइवर और गाइड संचालित करेंगे. &amp;nbsp;सफारी के लिए वन विभाग को हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, नुब्रा, ज़ंस्कार, शाम, करगिल और द्रास जैसे वन्यजीवों से भरपूर इलाकों में संभावित रूट चिन्हित करने के लिए कहा गया है. ये क्षेत्र स्नो लेपर्ड और कई टेरय पक्षियों के लिए फेमस हैं.&amp;nbsp;
सफारी शुरू करने का उद्देश्य क्या है?
इस गाइडेड सफारी का मुख्य उद्देश्य गैर-कानूनी ऑफ-रोडिंग पर रोक लगाना और वन्यजीवों को होने वाली परेशानी को कम करना है. इसके साथ ही टूरिस्ट्स को सुरक्षित, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल टूरिज्म का एक्सपीरियंस देना भी इस योजना का जरूरी लक्ष्य है.&amp;nbsp;
लोगों को भी मिलेगा फायदा
इस पहल के तहत ऐसा मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसमें स्थानीय समुदाय लद्दाख के नाजुक इकोसिस्टम की सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे. साथ ही संरक्षण से जुड़े टूरिज्म के जरिए उन्हें आर्थिक लाभ भी मिलेगा. &amp;nbsp;उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि लद्दाख की अनोखी वन्यजीव संपदा और ऊंचाई वाले नाजुक प्राकृतिक क्षेत्र इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं. संरक्षण तभी सफल होगा, जब स्थानीय लोग इसमें बराबर की भागीदारी निभाएं और उन्हें इससे आर्थिक फायदा भी मिले.&amp;nbsp;
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युवाओं को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
इस योजना के तहत 20 स्थानीय युवाओं का चयन किया जाएगा. उन्हें बर्ड वॉचिंग, पक्षियों की पहचान और उन्हें खोजने से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी. इसके अलावा उन्हें दूरबीन भी उपलब्ध कराई जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख क्षेत्रों में 10 बर्ड वॉचिंग हाइड्स भी बनाई जाएंगी.&amp;nbsp;
लद्दाख में सबसे ज्यादा हैं स्नो लेपर्ड
लद्दाख भारत में स्नो लेपर्ड का सबसे बड़ा आवास है, जहां देश के अनुमानित 718 में से 477 हिम तेंदुए पाए जाते हैं. यहां 38 से ज्यादा स्तनधारी, करीब 340 पक्षियों और लगभग 1,800 पौधों की प्रजातियां भी मौजूद हैं, इसलिए इसे जरूरी जैव-विविधता क्षेत्र माना जाता है. इस योजना के तहत स्थानीय युवाओं को गाइड की ट्रेनिंग दी जाएगी, महिला कारीगरों को बढ़ावा मिलेगा और 40 गांवों में 300 रंग-कोड वाले कूड़ेदान, पोर्टेबल डस्टबिन और प्लास्टिक-मुक्त टूरिज्म अभियान जैसे संरक्षण उपाय भी शुरू किए जाएंगे.&amp;nbsp;
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        <title>Snakes In Monsoon: मानसून में घर के पास क्यों आते हैं जहरीले सांप? जानें बचाव के तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ Which Snakes Enter House First In Rain: बारिश शुरू होते ही घर के आसपास सांप दिखाई देने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. खासकर तेज बारिश के बाद सांप खेत, झाड़ियों और अपने बिलों से निकलकर सूखी और सुरक्षित जगह तलाशने लगते हैं. बिलों में पानी भरने के साथ चूहे और मेंढक जैसे जीव भी घरों के आसपास आने लगते हैं, जिनकी तलाश में सांप भी आबादी वाले इलाकों तक पहुंच सकते हैं. यही वजह है कि मानसून के दौरान घर, स्टोर रूम, सीढ़ियों के नीचे, बगीचे और नालियों के आसपास सांप मिलने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि बारिश में कौन से सांप घरों के आसपास ज्यादा दिखाई दे सकते हैं और इनसे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
बारिश में घर में आ सकता है कॉमन करैत
मानसून के दौरान कॉमन करैत को लेकर खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है. यह बेहद जहरीला सांप है और आमतौर पर रात के समय ज्यादा सक्रिय रहता है. यह अंधेरी और शांत जगहों में छिप सकता है और चूहों की तलाश में घरों के आसपास भी पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
करैत का काटना खासतौर पर खतरनाक माना जाता है, क्योंकि कई बार इसके काटने पर शुरुआत में ज्यादा दर्द महसूस नहीं होता. इसका जहर नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है और गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी तथा लकवा जैसी समस्या पैदा हो सकती है. इसलिए रात के समय घर के अंधेरे हिस्सों में बिना रोशनी के जाने से बचना चाहिए.

इंडियन कोबरा भी पहुंच सकता है घर के पास
इंडियन कोबरा भारत में पाए जाने वाले सबसे पहचाने जाने वाले जहरीले सांपों में शामिल है. बारिश के दौरान इसके प्राकृतिक ठिकानों में पानी भरने पर यह सूखी जगह की तलाश में बाहर निकल सकता है. खेतों, खुले मैदानों, बगीचों और इंसानी बस्तियों के आसपास भी कोबरा देखा जा सकता है. कोबरा का जहर नर्वस सिस्टम पर असर डालता है. इसके काटने पर सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. घर के आसपास चूहे ज्यादा हैं तो सांपों के आने की संभावना भी बढ़ सकती है, क्योंकि चूहे कई सांपों का शिकार होते हैं.
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रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर से भी रहें सावधान
रसेल वाइपर आमतौर पर घास वाले इलाकों और खेतों में पाया जाता है. इसका शरीर मोटा होता है और पीठ पर गहरे रंग के अंडाकार निशान दिखाई देते है. इसका जहर खून और शरीर के ऊतकों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.

वहीं, सॉ-स्केल्ड वाइपर आकार में छोटा होता है और रेतीले, सूखे तथा झाड़ियों वाले इलाकों में ज्यादा पाया जाता है. बारिश में घर के आसपास घास, झाड़ियां या सामान का ढेर है तो ऐसी जगहों पर हाथ-पैर रखने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए.
घर के आसपास सांप होने के ये हो सकते हैं संकेत
सांप हमेशा सीधे दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। कई बार घर के आसपास कुछ संकेत उसकी मौजूदगी की तरफ इशारा कर सकते हैं. सांप की उतरी हुई केंचुल इनमें सबसे आसानी से पहचाने जाने वाले संकेतों में से एक है.यह पुराने फर्नीचर के पीछे, लकड़ी के ढेर, बगीचे के कचरे या शांत कोनों में मिल सकती है. धूल या मिट्टी में लहरदार निशान भी किसी सांप के गुजरने का संकेत हो सकते हैं. ये निशान स्टोर रूम, गैराज या ऐसी जगहों पर ज्यादा आसानी से दिखाई देते हैं जहां लोगों का आना-जाना कम होता है. किसी अंधेरे कोने से फुफकार जैसी आवाज सुनाई दे तो वहां खुद जाकर जांच करने से बचें.
घर में सांप घुसने से कैसे बचाएं?
मानसून शुरू होने से पहले घर के आसपास की सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए. बड़ी घास और झाड़ियों को समय-समय पर साफ करें। लकड़ी, पुराने डिब्बे, ईंट और बेकार सामान का ढेर घर की दीवार से लगाकर न रखें. ऐसी जगहें सांपों को छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाना दे सकती हैं. दरवाजों के नीचे ज्यादा खाली जगह है तो उसे बंद करें. दीवारों में मौजूद दरारों और छेदों को भी ठीक करवाएं. नालियों और पाइप के खुले हिस्सों को उचित जाली से सुरक्षित किया जा सकता है. घर में चूहों की समस्या है तो उसे भी नियंत्रित करना जरूरी है.
रात में बाहर निकलते समय टॉर्च या पर्याप्त रोशनी का इस्तेमाल करें. बगीचे में काम करते समय बंद जूते और दस्ताने पहनना बेहतर है. पत्तियों, लकड़ियों या पुराने सामान के ढेर में सीधे हाथ डालने से बचें.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kala Chana Chole Recipe: घर पर कैसे बनाएं बाजार जैसी काले छोले की सब्जी? यहां जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ Kala Chana Chole Recipe: हफ्ते में केवल एक ही दिन ऐसा होता है, जब आप काम काज कि फिकर छोड़ कर केवल ये सेचते हैं कि आज क्या खास बाना कर खाए. ऐसे में छोले बनाने का खयाल दिमाग में आ ही जाता है. और अगर बात हो &amp;nbsp;काले चने का छोले कि सब्जी की तो मन और खुश हो जाता है. ऐसे में कई लोगों कि शिकायत रहती है कि काले चने बनाते वक्त उनका वैसा स्वाद नहीं आता है जैसा बाजार में मिलने वाली सब्जी का आता है और उनका पूरा मूड खराब हो जाता है. ऐसे में वे सोचते हैं कि उनको दुकानदार ने अच्छे चने नहीं दिये आ फिर उनके मसाले ज्यादा स्वादिष्ट नहीं है. लेकिन उनको इस बात कि जानकारी नहीं होती है कि गलती चने या मसाले में नहीं है, बल्कि उसको बनाने के प्रोसेस में है, बस ध्यान रखने वाली बात है कि आप इसको बनाने के लिए कुछ स्टेपस का पालन करें. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.&amp;nbsp;
पहले चने को अच्छी तरह भिगोएं
काले चने को बनाने से पहले जरूरी है कि वे चने अच्छी तरह से फूले हुए और नरम हों, जिसके लिए आपको चने के कम से कम रात भर के लिए भिगो कर रख देना चाहिए, इससे चने अच्छी तरह फूल जाते हैं, और ग्रेवी बनाते समय ये अच्छी तरह बाकी मसालों में मील जाते हैं. इसके लिए आप 1 कप चने को 3 कप पानी डाल कर रात भर के लिए भीगो कर रख दें. &amp;nbsp;इसके अलावा ये खाने में भी आसान होते हैं. &amp;nbsp;वहीं अगर आपको जल्द बाजी में बनाना हो तो आप इसे गुनगुने पानी में कम से कम 2 से 3 घंटे के लिए छोड़ दें.&amp;nbsp;
फिर बनाने के लिए सबसे पहले भिगोए हुए चने को पानी से अलग कर के धो लें और एक प्रेशर कुकर में नमक, भिगोए हुए चने, 3 कप पानी, चाहें तो आप बैंकिंग सोडा, तेज पता, दालचीनी और काले इलायची को डाल कर 5 से 6 सीटी लगा लें, जब तक चना मुलायम नहीं हो जाता.&amp;nbsp;
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मसाला तैयार करें और छोले पकाएं
चने को अच्छी तरह पका लेने के बाद, मसाला का बैस तैयार करें जिसके लिए एक पैन में तेल या फिर घी को गरम करें, फिर उसमें जीरा और हिंग डालकर उसको हलका भुने, फिर उसमें ग्रेवी के लिए कटे हुए प्याज, हरी मिर्च और अदरक- लेहसून का पेस्ट डालें, फिर अच्छी तरह इसको पका लें, और ध्यान रखें कि आपके चूल्हा मध्यम आंच पर हो. &amp;nbsp;फिर इसमें मसाले डाले जैसे- हल्दी, धनिया पाउडर, कश्मीरी लाल मिर्च और जीरा पाउडर डाल कर अच्छी तरह से मिला कर अच्छी तरह पका लें. फिर सबसे आखिरी में &amp;nbsp;इसमें टमाटर डालें और तबतक पकाये जब तक तेल अलग से न दिखने लगे. फिर आखिर में उबले हुए चने को पकाए हुए मसाले में मिला दें और 10 से 15 मिनट तक पकाए. और आप चाहें तो आप ऊपर से छोले मसाले, गरम मसाले या फिर आम चूर &amp;nbsp;पाउडर भी मिला सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Toilet Yellow Stains: बार&amp;बार रगड़ने पर भी नहीं छूट रहे टॉयलेट के दाग? जानें असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Yellow Stains From Toilet Bowl: घर की सफाई में टॉयलेट की सफाई सबसे जरूरी कामों में से एक है. कई लोग टॉयलेट को नियमित रूप से साफ करते हैं और ब्रश से अच्छी तरह रगड़ते भी हैं, लेकिन इसके बावजूद टॉयलेट बाउल पर पीले निशान या पीली रिंग दिखाई देती रहती है. कई बार बार-बार रगड़ने के बाद भी ये निशान पूरी तरह साफ नहीं होते. ऐसे में सिर्फ गंदगी को इसकी वजह मानना सही नहीं है. टॉयलेट पर बनने वाले पीले निशानों के पीछे पानी में मौजूद मिनरल्स भी जिम्मेदार हो सकते हैं.
टॉयलेट बाउल में आमतौर पर मिनरल्स, जंग, कॉपर और फफूंद के कारण अलग-अलग रंग के दाग बन सकते हैं. दाग का रंग देखकर काफी हद तक अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके पीछे वजह क्या है. इसलिए किसी भी दाग को हटाने से पहले उसकी वजह समझना जरूरी है.
क्यों बनते हैं पीले निशान?
अगर टॉयलेट बाउल पर सफेद, पीले या भूरे रंग की रिंग दिखाई दे रही है तो इसकी एक बड़ी वजह हार्ड वॉटर हो सकता है. हार्ड वॉटर में कैल्शियम, मैग्नीशियम और लाइमस्केल जैसे मिनरल्स अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं. पानी लगातार टॉयलेट बाउल के संपर्क में रहता है. समय के साथ ये मिनरल्स सतह पर जमा होने लगते हैं और पीले या भूरे निशान का रूप ले सकते हैं.

यही वजह है कि कई बार टॉयलेट ब्रश से अच्छी तरह रगड़ने के बाद भी पीले निशान नहीं जाते. लंबे समय तक जमा रहने पर मिनरल्स की परत और सख्त हो सकती है. ऐसे में केवल सामान्य सफाई से इसे हटाना मुश्किल हो जाता है.
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दाग के रंग से समझें वजह
टॉयलेट में हर दाग हार्ड वॉटर की वजह से नहीं बनता. अगर बाउल पर गहरे नारंगी या लाल रंग के निशान दिखाई दे रहे हैं तो इसकी वजह जंग हो सकती है. पुराने या खराब होते पाइप से पानी में जंग मिल सकती है, जो धीरे-धीरे टॉयलेट की सफेद सतह पर निशान छोड़ देती है.

वहीं, नीले या हरे रंग के दाग पानी में कॉपर की अधिक मात्रा या कॉपर पाइप में हो रहे क्षरण के कारण दिखाई दे सकते हैं. अगर टॉयलेट में काले या हरे छोटे-छोटे धब्बे दिखाई दे रहे हैं और साथ में सीलन जैसी गंध भी आ रही है तो इसकी वजह फफूंद हो सकती है. बाथरूम में ज्यादा नमी और नियमित सफाई न होने पर ऐसी समस्या बढ़ सकती है.
नए पीले निशान कैसे साफ करें?
अगर टॉयलेट में पीले निशान अभी बनने शुरू हुए हैं तो उन्हें साफ करने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी हल्की खुरदरी बनावट सतह पर जमा गंदगी और मिनरल्स की शुरुआती परत को हटाने में मदद कर सकती है. साथ ही यह बदबू कम करने में भी उपयोगी हो सकता है.
इसके लिए टॉयलेट बाउल में लगभग एक कप बेकिंग सोडा डालें. इसके बाद करीब डेढ़ कप सफेद सिरका डाल सकते हैं. दोनों के मिलने पर झाग बनने लगेगा. इसे कुछ देर तक रहने दें. हल्के निशान होने पर कुछ समय बाद टॉयलेट को फ्लश किया जा सकता है. अगर निशान पुराने हैं तो मिश्रण को ज्यादा देर तक छोड़ने के बाद ब्रश से साफ किया जा सकता है.
पुराने और जिद्दी निशानों का क्या करें?
कई महीनों से जमा पीले या भूरे निशानों को हटाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लंबे समय तक जमा रहने के कारण मिनरल्स की मोटी परत बन जाती है. ऐसी स्थिति में सफाई से पहले टॉयलेट बाउल में मौजूद पानी कम करने से क्लीनिंग प्रोडक्ट सीधे दाग के संपर्क में आ सकता है. इसके बाद टॉयलेट के लिए बने क्लीनर का इस्तेमाल उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है. क्लीनर को कुछ समय तक दाग पर रहने देने के बाद टॉयलेट ब्रश से रगड़ें. बहुत ज्यादा जिद्दी मिनरल जमा होने पर पोर्सिलेन के लिए सुरक्षित प्यूमिक स्टोन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इसे पहले पानी से अच्छी तरह गीला करना जरूरी है और बहुत हल्के हाथ से इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि टॉयलेट की सतह को नुकसान न पहुंचे. दो अलग-अलग क्लीनिंग केमिकल्स को आपस में मिलाने से बचें. खासकर ब्लीच और एसिड वाले टॉयलेट क्लीनर को कभी एक साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे खतरनाक गैस बन सकती है.
दोबारा पीले निशान बनने से कैसे रोकें?
पीले निशानों से बचने का सबसे आसान तरीका नियमित सफाई है. टॉयलेट को सप्ताह में कम से कम एक बार अच्छी तरह साफ करने से मिनरल्स की मोटी परत बनने की संभावना कम हो सकती है. अगर आपके घर में हार्ड वॉटर आता है तो सफाई के बीच लंबा अंतर रखने से पीले निशान जल्दी वापस दिखाई दे सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>रात की बची रोटियों से ऐसे बनाएं स्वादिष्ट नाश्ता, चाव से खाएंग बच्चे</title>
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Leftover Roti Breakfast: रात की बची हुई रोटियों को कई लोग सुबह फेंक देते हैं. लेकिन अगर आप चाहें तो इन्हीं रोटियों से बहुत ही स्वादिष्ट और हेल्दी नाश्ता बना सकते हैं. इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और बच्चे भी इसे बड़े चाव से खाते हैं. अगर आपके घर में भी रोटियां बच जाती हैं, तो इस आसान रेसिपी को एक बार जरूर ट्राई करें.
इस नाश्ते को बनाने के लिए सबसे पहले 2 से 3 बची हुई रोटियां लें और उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें. अब एक पैन में 1 से 2 चम्मच तेल या घी गर्म करें. तेल गर्म होने के बाद उसमें थोड़ा सा जीरा डालें. जब जीरा चटकने लगे, तब इसमें बारीक कटा हुआ प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च और शिमला मिर्च डालें. इन्हें 2 से 3 मिनट तक अच्छी तरह पकाएं. अगर आपके घर में मटर, गाजर, कॉर्न या बीन्स जैसी सब्जियां मौजूद हैं, तो उन्हें भी इसमें मिला सकते हैं. इससे नाश्ता और भी स्वादिष्ट और पौष्टिक बन जाएगा.
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ऐसे करें तैयार
अब सब्जियों में आधा चम्मच हल्दी, थोड़ा सा लाल मिर्च पाउडर, स्वाद के अनुसार नमक और थोड़ा सा चाट मसाला डालें. अगर आपको हल्का मसालेदार स्वाद पसंद है, तो थोड़ा सा काली मिर्च पाउडर भी डाल सकते हैं. मसालों को सब्जियों के साथ अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद रोटी के टुकड़े पैन में डाल दें और सभी चीजों को अच्छे से मिलाएं. अब इसे 3 से 4 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं ताकि मसालों का स्वाद रोटी में अच्छी तरह आ जाए.
आखिर में बारीक कटा हरा धनिया डाल दें. अगर बच्चे चीज या पनीर खाना पसंद करते हैं, तो ऊपर से थोड़ा सा कद्दूकस किया हुआ पनीर या चीज भी डाल सकते हैं. इससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाएगा.
स्वाद बढ़ाने के लिए करें ये काम
इस नाश्ते को आप टमाटर सॉस, हरी चटनी या दही के साथ परोस सकते हैं. अगर चाहें तो ऊपर से थोड़ा सा नींबू का रस भी निचोड़ दें. इससे इसका स्वाद और भी ताजा और मजेदार हो जाता है. आप इसमें थोड़ा सा भुना हुआ मूंगफली का चूरा भी डाल सकते हैं. इससे खाने में हल्का कुरकुरापन आ जाएगा और बच्चे इसे और भी पसंद करेंगे. अगर सुबह जल्दी ऑफिस या स्कूल जाना हो, तो यह नाश्ता बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है.
क्यों है यह नाश्ता खास?
इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात यह है कि इससे बची हुई रोटियों का सही इस्तेमाल हो जाता है. इससे खाने की बर्बादी भी नहीं होती और कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट नाश्ता तैयार हो जाता है. अगर इसमें अलग-अलग सब्जियां डाल दी जाएं, तो यह और भी पौष्टिक बन जाता है. यह नाश्ता पेट भी लंबे समय तक भरा रखता है और सुबह के लिए अच्छी ऊर्जा देता है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Broom Cleaning Tips: क्या आपकी पुरानी झाड़ू भी हो गई है फैली? फेंकने से पहले करें यह काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Bent Broom Bristles At Home: घर की सफाई के लिए आज वैक्यूम क्लीनर, माइक्रोफाइबर मॉप और रोबोटिक क्लीनर जैसे कई आधुनिक विकल्प मौजूद हैं. इसके बावजूद ज्यादातर घरों में झाड़ू का इस्तेमाल आज भी रोजाना होता है. फर्श पर पड़े बाल, धूल, खाने के टुकड़े और दूसरी गंदगी को जल्दी समेटना हो तो झाड़ू सबसे आसान तरीका लगता है. हालांकि लगातार इस्तेमाल के कारण कुछ समय बाद झाड़ू के बाल फैलने और मुड़ने लगते हैं. इसके बाद झाड़ू लगाने पर पहले जैसी सफाई नहीं हो पाती.
ऐसी झाड़ू से सफाई करते समय कई बार एक ही जगह पर बार-बार झाड़ू लगानी पड़ती है. कोनों में जमा धूल निकालने में भी परेशानी होती है. ज्यादातर लोग इसे देखकर मान लेते हैं कि झाड़ू खराब हो चुकी है और नई खरीदने का समय आ गया है. लेकिन अगर झाड़ू के बाल केवल मुड़े या नीचे से फैल गए हैं तो इसे तुरंत फेंकने की जरूरत नहीं है. एक आसान तरीका अपनाकर इसे कुछ समय के लिए दोबारा इस्तेमाल लायक बनाया जा सकता है.
क्यों फैलने लगते हैं झाड़ू के बाल?
लगातार फर्श से रगड़ खाने के कारण झाड़ू के बाल धीरे-धीरे अपनी पुरानी शेप खोने लगते हैं. शुरुआत में इनके सिरे सीधे और एक समान रहते हैं, जिससे धूल और छोटी गंदगी आसानी से इकट्ठा हो जाती है. लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद यही सिरे अलग-अलग दिशा में फैलने और मुड़ने लगते हैं.

अगर झाड़ू को इस्तेमाल करने के बाद हमेशा उसके बालों के सहारे जमीन पर खड़ा करके रखा जाता है तो समस्या और जल्दी हो सकती है. लंबे समय तक झाड़ू का पूरा वजन बालों पर रहने से वे दबकर मुड़ सकते हैं. इसके अलावा झाड़ू गीली रह जाए या उसके बालों में गंदगी जमा रहे तो भी उसकी शेप खराब हो सकती है.
पहले झाड़ू को अच्छी तरह साफ करें
झाड़ू के फैले हुए बालों को ठीक करने से पहले उसमें फंसी धूल, बाल और दूसरी गंदगी निकालना जरूरी है. अगर झाड़ू धोने योग्य है तो एक बाल्टी या सिंक में पानी लेकर उसमें थोड़ा डिशवॉश लिक्विड मिला सकते हैं. इसके बाद झाड़ू के बालों वाले हिस्से को पानी में डालकर धीरे-धीरे साफ करें.
ध्यान रखें कि झाड़ू का हैंडल या ऐसा हिस्सा पानी में न डुबोएं जिसे गीला करने से नुकसान हो सकता है. सफाई के बाद झाड़ू को अच्छी तरह सुखा लें. बाल पूरी तरह सूखने के बाद ही उन्हें काटने का तरीका अपनाएं.
फैले बालों को दें हल्की ट्रिमिंग
अगर झाड़ू साफ होने के बाद भी उसके बाल नीचे से बेतरतीब और फैले हुए दिखाई दे रहे हैं तो उन्हें हल्का ट्रिम किया जा सकता है. इसे ठीक उसी तरह समझ सकते हैं जैसे दोमुंहे और खराब बालों के सिरों को काटकर बराबर किया जाता है.

इसके लिए एक मजबूत और अच्छी धार वाली कैंची लें. किचन में इस्तेमाल होने वाली मजबूत कैंची भी काम आ सकती है. अब झाड़ू के बालों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उनके फैले और खराब सिरों को काटना शुरू करें. बहुत ज्यादा हिस्सा एक साथ काटने की जरूरत नहीं है. केवल उतना हिस्सा हटाएं जहां तक बाल ज्यादा मुड़े या खराब दिखाई दे रहे हों.
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सभी बाल बराबर काटना है जरूरी
ट्रिमिंग करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि झाड़ू के बाल जरूरत से ज्यादा छोटे न हो जाएं. हर हिस्से से लगभग बराबर मात्रा में बाल काटने की कोशिश करें. अगर एक तरफ से ज्यादा और दूसरी तरफ से कम काट दिया तो झाड़ू की शेप खराब हो सकती है और सफाई करते समय वह फर्श पर ठीक तरह से नहीं बैठेगी.
बालों को सीधा रखने के लिए चौड़े दांत वाली कंघी की मदद भी ली जा सकती है. पहले बालों को एक दिशा में व्यवस्थित करें और फिर नीचे से फैले हुए हिस्से को थोड़ा-थोड़ा काटें. इससे कटिंग ज्यादा बराबर हो सकती है.
झाड़ू का एंगल खराब न करें
कई झाड़ू के बाल नीचे से बिल्कुल सीधे नहीं होते बल्कि हल्के एंगल में कटे होते हैं. यह डिजाइन खासतौर पर दीवार के किनारों, फर्नीचर के नीचे और कोनों से धूल निकालने में मदद करता है. इसलिए ट्रिमिंग करते समय झाड़ू के पुराने एंगल को बनाए रखना जरूरी है. अगर झाड़ू का एक किनारा पहले से छोटा और दूसरा थोड़ा लंबा है तो सभी बालों को एक सीधी लाइन में काटने की गलती न करें. उसकी मौजूदा शेप के अनुसार केवल खराब सिरों को हटाएं. इससे झाड़ू की सफाई करने की क्षमता बनी रह सकती है.
दोबारा जल्दी न फैलें बाल
ट्रिमिंग के बाद झाड़ू को सही तरीके से रखने पर उसके बाल ज्यादा समय तक ठीक रह सकते हैं. इस्तेमाल के बाद झाड़ू को बालों के सहारे जमीन पर खड़ा रखने के बजाय हैंडल से लटकाकर रखना बेहतर है. अगर लटकाने की जगह नहीं है तो ऐसी स्थिति में रखें जहां बालों पर लगातार वजन न पड़े. समय-समय पर झाड़ू में फंसे बाल और धूल निकालते रहें. जरूरत पड़ने पर उसे साफ करके पूरी तरह सुखाएं. थोड़ी देखभाल और समय पर हल्की ट्रिमिंग से पुरानी झाड़ू को तुरंत फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वह कुछ समय तक दोबारा बेहतर तरीके से सफाई कर सकेगी.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 15:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Broom, Cleaning, Tips:, क्या, आपकी, पुरानी, झाड़ू, भी, हो, गई, है, फैली, फेंकने, से, पहले, करें, यह, काम</media:keywords>
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        <title>Water Tank Cleaning: बारिश के मौसम में गंदा हो रहा है टंकी का पानी? अपनाएं ये टिप्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/water-tank-cleaning-बारिश-के-मौसम-में-गंदा-हो-रहा-है-टंकी-का-पानी-अपनाएं-ये-टिप्स</link>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Overhead Water Tank In Monsoon: बरसात का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इस दौरान घर में इस्तेमाल होने वाले पानी की साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. बारिश में पानी की टंकी में गंदगी, बैक्टीरिया और दूसरे हानिकारक तत्व पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है. घरों में टंकी के पानी का इस्तेमाल नहाने, कपड़े धोने, खाना बनाने और कई बार पीने के लिए भी किया जाता है. ऐसे में टंकी की सफाई को नजरअंदाज करना पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है.
बारिश के पानी के साथ धूल-मिट्टी, पत्तियां और छोटे कीड़े भी टंकी के आसपास जमा हो सकते हैं. अगर टंकी का ढक्कन ठीक से बंद नहीं है या उसमें दरार है तो गंदगी अंदर पहुंच सकती है. लंबे समय तक पानी जमा रहने से भी टंकी के अंदर गंदगी और काई जम सकती है. इसलिए मानसून में कुछ बातों का ध्यान रखकर पानी की टंकी को साफ और सुरक्षित रखा जा सकता है.
टंकी का ढक्कन हमेशा बंद रखें
बारिश के दिनों में टंकी का ढक्कन ठीक से बंद रखना बेहद जरूरी है. खुली या आधी ढकी टंकी में बारिश का पानी, धूल, पत्तियां और कीड़े आसानी से पहुंच सकते हैं. इससे पानी दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए समय-समय पर देखें कि टंकी का ढक्कन सही तरीके से फिट हो रहा है या नहीं. अगर ढक्कन टूट गया है या उसमें ज्यादा खाली जगह है तो उसे ठीक करवाएं या बदल दें. इससे बाहरी गंदगी को टंकी के अंदर जाने से रोकने में मदद मिलेगी.

दरार और लीकेज की जांच करते रहें
पानी की टंकी में छोटी सी दरार को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बारिश में दरार या क्षतिग्रस्त हिस्से के रास्ते बाहरी गंदा पानी और मिट्टी टंकी के अंदर पहुंच सकती है. इसलिए मानसून के दौरान टंकी के बाहरी हिस्से की समय-समय पर जांच करते रहें. अगर कहीं से पानी लीक हो रहा है या टंकी में दरार दिखाई दे रही है तो उसे जल्द ठीक करवाएं. टंकी के आसपास लगातार पानी जमा रहने पर भी ध्यान देना जरूरी है.
इनलेट, आउटलेट और ओवरफ्लो पाइप करें साफ
सिर्फ टंकी की सफाई करना ही पर्याप्त नहीं है. उससे जुड़े इनलेट, आउटलेट और ओवरफ्लो पाइप की सफाई भी जरूरी है. बारिश में पत्तियां, मिट्टी और दूसरी गंदगी पाइप या उसके आसपास जमा हो सकती है. पाइप ब्लॉक होने से पानी का फ्लो प्रभावित हो सकता है. साथ ही गंदगी पानी तक भी पहुंच सकती है. इसलिए बारिश के मौसम में इन पाइपों की नियमित जांच करें और किसी तरह की रुकावट दिखाई देने पर उसे साफ करवाएं.

लंबे समय तक जमा न रहने दें पानी
अगर टंकी का पानी लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होता है तो उसमें काई और सूक्ष्मजीव पनपने की संभावना बढ़ सकती है. इसलिए कोशिश करें कि पानी लंबे समय तक एक ही जगह जमा न रहे. जरूरत के हिसाब से पानी का इस्तेमाल करते रहें और टंकी में ताजा पानी भरते रहें. अगर किसी कारण से घर लंबे समय तक बंद रहने वाला है तो वापस आने के बाद पुराने पानी का सीधे इस्तेमाल करने के बजाय टंकी और पानी की स्थिति जरूर जांचें.
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पानी में बदलाव दिखे तो न करें नजरअंदाज
टंकी के पानी में कुछ बदलाव सफाई की जरूरत का संकेत हो सकते हैं. अगर पानी सामान्य से ज्यादा मटमैला या रंग बदला हुआ दिखाई दे, उसमें अजीब गंध आए या टंकी के अंदर गंदगी और काई दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में टंकी की जांच और सफाई करवाना बेहतर है. सिर्फ पानी देखने में साफ है, इसका मतलब यह नहीं कि टंकी भी पूरी तरह साफ है. इसलिए नियमित सफाई जरूरी है.
धूप और गंदगी से टंकी को बचाएं
जहां तक संभव हो, टंकी और उसके आसपास के हिस्से को साफ रखें. टंकी पर सीधे तेज धूप पड़ने और उसके आसपास गंदगी जमा होने से बचाना चाहिए. टंकी की क्वालिटी और उसकी स्थिति भी पानी को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. मानसून में टंकी की नियमित सफाई, ढक्कन को ठीक से बंद रखना, पाइप की जांच करना और लीकेज को समय पर ठीक करवाना जैसी छोटी सावधानियां काफी काम आ सकती हैं.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Water, Tank, Cleaning:, बारिश, के, मौसम, में, गंदा, हो, रहा, है, टंकी, का, पानी, अपनाएं, ये, टिप्स</media:keywords>
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        <title>Identify Hidden Talent in Kids: कैसे पहचानें बच्चे में छिपा कलाकार? इस उम्र में कराएं ट्रेंनिंग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/identify-hidden-talent-in-kids-कैसे-पहचानें-बच्चे-में-छिपा-कलाकार-इस-उम्र-में-कराएं-ट्रेंनिंग</link>
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        <description><![CDATA[ Identify Hidden Talent in Kids: बहुत से माता-पिता बच्चों के ज्यादा पढ़ाई न करने बल्कि उसकी जगह अगर बच्चा खेलता है, ड्रॉइंग करता है या डांस करता है, या फिर गाने सुनता है तो माता-पिता अक्सर इसे नखरेबाजी या शरारत बोलकर बच्चे को डांट देते हैं. लेकिन कई बार वे यह चीज नजरअंदाज कर देते हैं कि हर बच्चा एक समान नहीं होता. हर बच्चे में अपनी अलग खूबी होती है. किसी को पढ़ाई करना पसंद होता है तो किसी को खेल खेलना, ड्रॉइंग करना, डांस करना. वे यह बात भूल जाते हैं कि अगर बच्चे के अंदर इस चीज का टैलेंट है तो इसके साथ भी वह अपनी जिंदगी में कामयाब भी बन सकता है. इसलिए जरूरत है तो बस थोड़ा ध्यान देने की, ताकि आप समझ सकें कि आपका बच्चा किस चीज को करने में ज्यादा खुश होता है और वह कौन सा काम दिल से और अच्छी तरह से करता है. क्योंकि जहां बच्चों को खुशी नहीं मिलेगी, वहां वे कभी कामयाब नहीं हो सकते.&amp;nbsp;
बच्चे में छिपे कलाकार को कैसे पहचानें?
ऐसे में कई माता-पिता का यह भी सवाल रहता है कि हमारे बच्चे में किस चीज का टैलेंट है, इस बात का कैसे पता लगाएं. ऐसे में आपको बता दें कि बच्चे के टैलेंट को पहचानना कोई मुश्किल भरा काम नहीं है. बस जरूरी है कि आप अपने बच्चे पर नजर रखें, क्योंकि कई बार बच्चे अपने माता-पिता को यह खुलकर बता नहीं पाते कि असल में उन्हें क्या करना पसंद है. ऐसे में आप अपने बच्चे के मित्र बनें और उसे प्रेरित करें कि अगर उसको गाना गाना पसंद है तो वह आपको भी गाकर सुनाए. अगर वह अपनी किताब में, दीवारों पर ड्रॉइंग बनाता है तो समझ जाएं कि आपका बच्चा ड्रॉइंग में रुचि रखता है. कुछ बच्चे कहानियां सुनाना पसंद करते हैं, नाटक करते हैं या घर में ही किसी किरदार की नकल उतारते हैं, ऐसे हो सकता है कि आपका बच्चा एक्टिंग में रुचि रखता हो.
इसके अलावा सबसे जरूरी बात यह भी है कि आप अपने बच्चे की बातों को ध्यान से सुनें. वह क्या खेलना पसंद करता है, किस काम में वह समय का पता ही नहीं चलने देता, यह सारी बातें इस चीज को दर्शाती हैं कि उसे कौन सा काम करने में ज्यादा रुचि है. साथ ही बच्चे को हमेशा प्रेरित करें कि वह स्कूल में पढ़ाई के अलावा बाकी एक्टिविटीज में भी भाग ले.
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ट्रेनिंग शुरू करने की सही उम्र
अगर आपको पता चल गया है कि आपका बच्चा किस चीज में रुचि रखता है तो आपका फर्ज बनता है कि आप अपने बच्चे को उस कला क्षेत्र में सही ट्रेनिंग दें. क्योंकि कई बार बढ़ती उम्र के साथ-साथ बच्चे पढ़ाई के प्रेशर में इस तरह दब जाते हैं कि वे भूल जाते हैं कि उनका असली टैलेंट क्या था. इसलिए जरूरी है कि आप समय रहते बच्चे के टैलेंट को पहचानें और उसे उस क्षेत्र में आगे बढ़ाएं. जिसकी शुरुआत 5 से 6 साल की उम्र में ही कर देनी चाहिए.
इन सबके अलावा माता-पिता की एक आदत होती है, जो अक्सर हर पेरेंट्स में होती है, वह है दबाव डालना. ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों पर कभी भी किसी भी प्रकार का प्रेशर नहीं डालना चाहिए. हो सकता है आपका बच्चा अभी ड्रॉइंग में रुचि रखता हो, लेकिन आगे चलकर वही बच्चा डांस में रुचि लेने लगे. इससे बच्चों का समय व्यर्थ नहीं होता बल्कि वे मल्टीटैलेंटेड बनते हैं.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chole Without Soaking: बगैर गलाए भी आसानी से बनेगी छोले की सब्जी, इस ट्रिक को आजमाएं</title>
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        <description><![CDATA[ How To Cook Chole Without Soaking: छोले की सब्जी उत्तर भारत की सबसे पसंदीदा डिश में से एक है. शादी-पार्टी से लेकर घर में मेहमान आने तक, खाने के मेन्यू में छोले अक्सर शामिल किए जाते हैं. गर्मागर्म भटूरे के साथ छोले का स्वाद सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, लेकिन इसे नान, रोटी, चावल या ब्रेड के साथ भी खाया जा सकता है. घर पर छोले बनाना मुश्किल नहीं है, लेकिन इसकी तैयारी में लगने वाला समय कई बार परेशानी बन जाता है.
दरअसल, छोले बनाने से पहले इन्हें आमतौर पर रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है. इससे छोले फूल जाते हैं और प्रेशर कुकर में जल्दी नरम हो जाते हैं. परेशानी तब होती है जब अचानक छोले खाने का मन हो या घर पर मेहमान आ जाएं और छोले पहले से भिगोकर न रखे हों. ऐसे में अगले दिन तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है. एक आसान ट्रिक की मदद से बिना रातभर भिगोए भी छोले तैयार किए जा सकते हैं.
बिना भिगोए कैसे नरम होंगे छोले?
इस तरीके में छोले को रातभर पानी में रखने के बजाय पहले गर्म पानी में उबाला जाता है और फिर इसमें एकदम ठंडा पानी डाला जाता है. इसके बाद प्रेशर कुकर में छोले पकाए जाते हैं. इससे लंबे समय तक भिगोकर रखने की जरूरत नहीं पड़ती और उसी दिन छोले की सब्जी बनाई जा सकती है.
हालांकि छोले कितनी जल्दी नरम होंगे, यह उनकी क्वालिटी और कितने पुराने हैं, इस पर भी निर्भर कर सकता है. इसलिए प्रेशर कुकर खोलने के बाद एक छोला दबाकर जरूर देखें. अगर वह आसानी से दब रहा है तो सब्जी बनाने के लिए तैयार है. जरूरत पड़ने पर इसे कुछ और देर प्रेशर कुकर में पकाया जा सकता है.
छोले बनाने के लिए सामग्री
इस रेसिपी के लिए एक कप छोले लें. इसके अलावा करीब डेढ़ गिलास बर्फ जैसा ठंडा पानी, एक बड़ा चम्मच वेजिटेबल ऑयल, एक छोटा चम्मच जीरा, एक छोटा चम्मच सरसों, दो साबुत लाल मिर्च, तीन लौंग, एक दालचीनी का टुकड़ा और दो तेजपत्ते की जरूरत होगी.
मसाला तैयार करने के लिए एक छोटा चम्मच बारीक कटा अदरक, दो छोटे चम्मच कटा लहसुन, दो हरी मिर्च, एक कप बारीक कटा प्याज और दो कप बारीक कटे टमाटर लें. इसके साथ एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, दो छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक बड़ा चम्मच धनिया पाउडर और करीब दो छोटे चम्मच नमक रखें. स्वाद बढ़ाने के लिए दो छोटे चम्मच नींबू का रस, थोड़ा हरा धनिया और मक्खन भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
सबसे पहले अपनाएं ये ट्रिक
प्रेशर कुकर में बिना भिगोए हुए एक कप छोले डालें. इसमें करीब आधा गिलास सामान्य तापमान वाला पानी और एक छोटा चम्मच नमक डाल दें. अब कुकर को बिना ढक्कन लगाए तेज आंच पर रखें और पानी को अच्छी तरह उबलने दें.

छोले को इसी तरह लगभग 9 से 10 मिनट तक तेज उबाल आने दें. इसके बाद इसमें करीब डेढ़ गिलास बर्फ जैसा ठंडा पानी डालें. अब तुरंत प्रेशर कुकर का ढक्कन बंद कर दें और छोले को पकने दें.
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लगभग 13 से 14 सीटी आने के बाद गैस बंद कर दें. प्रेशर को खुद निकलने दें और तुरंत कुकर खोलने की कोशिश न करें. प्रेशर पूरी तरह खत्म होने के बाद ढक्कन खोलें और एक-दो छोले दबाकर देखें. अगर छोले नरम हो चुके हैं तो आगे सब्जी तैयार की जा सकती है.
ऐसे तैयार करें छोले का मसाला
जब छोले प्रेशर कुकर में पक रहे हों, तब दूसरी तरफ उनका मसाला तैयार कर लें. एक पैन में एक बड़ा चम्मच तेल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें. इसमें जीरा, सरसों, साबुत लाल मिर्च, लौंग, दालचीनी और तेजपत्ता डालें. अब बारीक कटा अदरक, लहसुन और हरी मिर्च डालकर करीब एक मिनट तक पकाएं. इसके बाद बारीक कटा प्याज डाल दें. प्याज नरम होने तक इसे मध्यम आंच पर पकाएं.

प्याज नरम होने के बाद बारीक कटे टमाटर डालें. इसके साथ हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और स्वाद के अनुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. मसाले को मध्यम से धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक टमाटर पूरी तरह नरम न हो जाएं और मसाला तेल छोड़ने लगे.
अब तैयार होंगे बिना भिगोए छोले
मसाला अच्छी तरह पकने के बाद प्रेशर कुकर में उबले हुए छोले इसमें डाल दें. छोले के साथ कुकर में बचा हुआ पानी भी डालें, क्योंकि इससे सब्जी की ग्रेवी तैयार करने में मदद मिलेगी. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर मध्यम आंच पर करीब 6 से 8 मिनट तक पकाएं. अगर आपको छोले की ग्रेवी थोड़ी गाढ़ी पसंद है तो कुछ छोले चम्मच की मदद से हल्के मैश भी कर सकते हैं. आखिर में नींबू का रस डालें. स्वाद को थोड़ा रिच बनाने के लिए मक्खन भी मिलाया जा सकता है. गैस बंद करने के बाद ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालें. इस तरह बिना रातभर पानी में भिगोए भी छोले की सब्जी तैयार हो जाएगी. इसे भटूरे, रोटी, नान, चावल और दही के साथ गर्मागर्म परोसा जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chana Pulao Recipe : घर पर ऐसे बनाएं चना पुलाव, बाजार का खाना भूल जाएंगे घर वाले</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chana-pulao-recipe-घर-पर-ऐसे-बनाएं-चना-पुलाव-बाजार-का-खाना-भूल-जाएंगे-घर-वाले</link>
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        <description><![CDATA[ Chana Pulao Recipe : अगर रोज-रोज एक जैसी सब्जी और चावल खाकर बोर हो गए हैं और कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो टेस्टी होने के साथ पेट भरने वाला भी हो, तो चना पुलाव एक बेहतरीन ऑप्शन हो सकता है. यह रेसिपी बनाने में ज्यादा मुश्किल नहीं है और इसे कम मसालों में भी आसानी से तैयार किया जा सकता है. सफेद काबुली चने और बासमती चावल से बनने वाला यह पुलाव टेस्ट के साथ-साथ पोषण भी देता है. खास बात यह है कि इसे लंच, डिनर या टिफिन के लिए भी बनाया जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि घर पर कैसे चना पुलाव बनाएं, जिसे घा कर घर वाले बाजार का खाना भूल जाएंगे.
घर पर कैसे चना पुलाव बनाएं
1. घर पर चना पुलाव बनाने के लिए सबसे पहले सफेद काबुली चने को रातभर पानी में भिगो दें और सुबह पानी निकाल लें. इसके बाद बासमती चावल को धोकर 10 मिनट के लिए गर्म पानी या 30 मिनट के लिए सामान्य पानी में भिगो दें. प्याज को लंबा काट लें और हरी मिर्च को बीच से चीर लें.&amp;nbsp;
2. अब एक छोटे प्रेशर कुकर में तेल या घी गर्म करें. इसमें दालचीनी, लौंग, इलायची, तेजपत्ता और स्टार ऐनीस डालकर तड़का लगाएं. इसके बाद कटे हुए प्याज और हरी मिर्च डालकर प्याज के हल्का भूरा होने तक भूनें.&amp;nbsp;
3. इसके बाद इसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और कच्ची खुशबू खत्म होने तक पकाएं. ध्यान रखें कि इसे ज्यादा न जलाएं. इसके बाद चना मसाला डालकर हल्का सा चलाएं.&amp;nbsp;
4. अब भीगे हुए चावल, भीगे हुए काबुली चने और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें फिर इसमें आधा कप पानी और नींबू का रस डालें.&amp;nbsp;
5. अब इसे उबाल आने तक पकाएं. इसके बाद आंच बिल्कुल धीमी कर दें और 12 से 14 मिनट तक पकाएं. अगर प्रेशर कुकर में बना रहे हैं तो मीडियम आंच पर 2 सीटी आने तक पकाएं.&amp;nbsp;
6. पकने के बाद कुकर खोलें और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर हल्के हाथ से मिला दें. आपका टेस्टी चना पुलाव तैयार है.&amp;nbsp;
चना पुलाव के साथ क्या परोसें?
चना पुलाव के साथ आप रायता, पापड़, फ्रायम्स या चिप्स के साथ परोसा जा सकता है. आप चाहें तो इसे टिफिन में भी पैक कर सकते हैं.
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टेस्ट बढ़ाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
1. पुलाव अच्छा बनाने के लिए पानी की मात्रा सही रखें.&amp;nbsp;
2. हमेशा धीमी आंच पर पकाएं, इससे चावल अच्छी तरह फूलते हैं.&amp;nbsp;
3.प्याज को सिर्फ हल्का भूनें, ज्यादा ब्राउन करने से पुलाव का रंग बदल सकता है.&amp;nbsp;
4. अदरक-लहसुन का ताजा पेस्ट इस्तेमाल करने से टेस्ट बेहतर आता है.
5.काबुली चने को रातभर भिगोना जरूरी है, इससे वे आसानी से पक जाते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 03:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>किन लोगों को नहीं लगाना चाहिए फेस&amp;पैक, क्या हो सकती हैं दिक्कतें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/किन-लोगों-को-नहीं-लगाना-चाहिए-फेस-पैक-क्या-हो-सकती-हैं-दिक्कतें</link>
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        <description><![CDATA[ Who should avoid face packs: केयर तो आज के समय में ज्यादा से ज्यादा लोग करते हैं. आजकल फेस-पैक लगाना स्किन केयर रूटीन का बहुत जरूरी हिस्सा बन गया है. लोग घर पर बने फेस-पैक हों या बाजार से खरीदे गए, हर कोई अपनी स्किन को चमकदार बनाना चाहता है. लेकिन जैसा कि हम सभी जानते हैं की हर किसी की स्किन एक जैसी नहीं होती, उसके अनुसार फेस-पैक हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता कुछ लोगों को फेस-पैक लगाने से बचना चाहिए, वरना फायदे की जगह नुकसान हो सकता है. आइये जानते हैं उसके बारे में.
किन लोगों को नहीं लगाना चाहिए फेस-पैक
एक्ने या पिंपल्स वाले- जिनके चेहरे पर पहले से ही पिंपल्स या एक्ने की दिक्कत है, उन्हें कुछ खास तरह के फेस-पैक से बचना चाहिए. खासकर वो फेस-पैक जिनमें ज्यादा तेल या भारी चीजें होती हैं, वो पोर्स को बंद कर सकते हैं, जिससे एक्ने की दिक्कत और बढ़ सकती है.
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एलर्जी वाले- अगर किसी को पहले से किसी चीज से एलर्जी है, जैसे किसी फल, दूध या किसी खास इंग्रीडिएंट से, तो उन्हें फेस-पैक में डाली गई चीजों को अच्छे से चेक करना चाहिए. बिना जांचे फेस-पैक लगाने से स्किन पर रैशेज या सूजन हो सकती है.
प्रेग्नेंसी के दौरान- प्रेग्नेंसी के समय भी कुछ खास केमिकल वाले फेस-पैक लगाने से बचना चाहिए. इस दौरान स्किन पहले से ज्यादा सेंसिटिव हो जाती है, इसलिए इस समय बेहतर यह होगा कि डॉक्टर या स्किन एक्सपर्ट से पूछकर ही कोई फेस-पैक लगाया जाए.
फेस-पैक लगाने से क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं
गलत फेस-पैक लगाने से चेहरा लाल हो सकता है, खुजली और जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कई बार स्किन पर छोटे-छोटे दाने भी निकल आते हैं. कुछ लोगों को फेस-पैक हटाने के बाद स्किन बहुत ज्यादा ड्राई या टाइट महसूस होती है. अगर फेस-पैक में कोई ऐसी चीज हो जिससे एलर्जी हो, तो चेहरा सूजने का डर भी हो सकता है.
किन बातों का रखें ध्यान
फेस-पैक लगाने से पहले हमेशा हाथ या कान के पीछे थोड़ा सा लगाकर देख लें कि कोई रिएक्शन तो नहीं हो रहा. इसे पैच टेस्ट कहते हैं. अगर 15-20 मिनट में कोई जलन या चहरा लाल नहीं दिखे, तभी चेहरे पर लगाएं. फेस-पैक को एक समय से ज्यादा देर तक चेहरे पर न रखें, क्योंकि इसकी वजह से स्किन ड्राई हो सकती है. अगर कोई भी दिक्कत महसूस हो, तो तुरंत पानी से चेहरा धो लें और डॉक्टर से संपर्क जरूर करें. हर किसी की स्किन अलग होती है, इसलिए फेस-पैक चुनते समय अपनी स्किन टाइप का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अगर स्किन को लेकर कोई पुरानी परेशानी है, तो फेस-पैक लगाने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Right Age for Ear and Nose Piercing: नाक&amp;कान छिदवाने की सही उम्र क्या है, क्या कहते हैं डॉक्टर्स?</title>
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        <description><![CDATA[ Right Age for Ear and Nose Piercing: भारत में ज्यादातर परिवारों में बच्चे का कान नाक छिदवाने का परंपरा है. कई बार ज्यादातर लोगों को सही जानकारी नहीं होती है कि वे किस उम्र में अपने बच्चे के नाक-कान छिदवाएं. इस पर जरूरी है कि ये बात जान लें कि इस बात पर डॉक्टर्स की क्या राय है? वे क्या सलाह देते हैं?&amp;nbsp;
रिपोर्ट के अनुसार, अगर कान-नाक छिदवाने का काम बहुत सफाई के साथ किया जाए तो ये बात मायने नहीं रखती है कि आप किस उम्र में नाक छिदवा रहे हो. दरअसल, इसमें कोई खतरा नहीं होता है. हालांकि, डॉक्टर्स यह भी सलाह देते हैं कि जब तक बच्चा खुद अपने आप कान और नाक के घाव की सफाई और देखभाल करने लायक न हो जाए, तब तक माता पिता को इंतजार करना चाहिए. &amp;nbsp;अगर परिवार की परंपरा या संस्कृति की वजह से जल्दी कान छिदवाना जरूरी लगे तो डॉक्टर्स सुझाव देते हैं कि कम से कम 2 महीने की उम्र तक रुकें, जब तक बच्चे को शुरुआती टीके न लग जाएं. इससे इन्फेक्शन का खतरा काफी कम हो जाता है. नवजात बच्चों में इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, इसलिए बहुत छोटी उम्र में कान छिदवाने से इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. &amp;nbsp;
कान छिदवाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
कान- नाक छिदवाते समय उम्र के साथ-साथ &amp;nbsp;कुछ सावधानियां पर रखनी चाहिए. सबसे पहली बात कि हमेशा किसी ट्रेंड प्रोफेशनल से ही ये काम करवाएं, जो साफ और &amp;nbsp;सुरक्षित औजारों का इस्तेमाल करता हो. आज के समय में ज्यादातर जगहों पर कान छेदने के लिए छिदने वाले गन के इस्तेमाल करते हैं लेकिन एस पर डॉक्टर्स बताते हैं कि गन से छेद करवाने कि जगह पर सुई से छेद करवाना ज्यादा बेहतर होता है, क्योंकि इससे इन्फेक्शन और घाव पर निशान पड़ने का खतरा कम होता है.
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नाक छिदवाने के बारे में डॉक्टर्स की राय
नाक छिदवाने को लेकर भी वही सावधानियां लागू होती हैं जो कान छिदवाने में बताई गई हैं. भारतीय संस्कृति में नाक छिदवाने का चलन बहुत पुराना है, लेकिन डॉक्टर्स की सलाह है कि यह काम भी सिर्फ किसी अच्छी जगह और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखने वाले प्रोफेशनल से ही करवाना चाहिए. &amp;nbsp;छोटे बच्चों की नाक में इन्फेक्शन का खतरा कान से भी ज्यादा हो सकता है, क्योंकि नाक का हिस्सा ज्यादा नाजुक होता है और बच्चे बार-बार नाक कि तरफ हाथ लगाते हैं, जिससे घाव के बड़ जाने का खतरा बना रहता है. &amp;nbsp;इसलिए डॉक्टर्स सुझाव देते हैं कि जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए और खुद अपनी सफाई का ध्यान रख सके, तभी नाक छिदवाना ज्यादा सुरक्षित रहता है. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>दिल के स्टेंट में ऐसे ठगते हैं अस्पताल, जानें क्या है सही कीमत?</title>
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        <description><![CDATA[ Stent Accurate Price: अस्पताल जाना आज के समय में किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है. &amp;nbsp;जरा सोचिए, कोई मरीज दिल की बीमारी से पहले ही परेशान होकर अस्पताल पहुंचता है और वहां उसे जिंदगी बचाने के नाम पर ऐसे बिजनेस जाल में फंसाया जाता है कि उसकी आधी जिंदगी की कमाई इलाज के बिल चुकाने में निकल जाती है. इस खेल का सबसे बड़ा हथियार है स्टेंट. जब भी एनजियोप्लास्टी की बात आती है, तो अस्पतालों में अलग-अलग ब्रांड और मेडिकल शब्दों की इतनी जानकारी दी जाती है कि मरीज और उसके परिवार वाले बिना पूरी बात समझे ही डॉक्टर की सलाह मान लेते हैं. &amp;nbsp;और डर के मारे आंख मूंदकर कागजों पर दस्तखत कर देते हैं. फिर यहीं से शुरू होता है मरीजों को बेवकूफ बनाने का खेल.
लूट का जाल
अक्सर अस्पतालों में यह भ्रम फैलाया जाता है कि जितना महंगा स्टेंट डलेगा, दिल उतना ही सुरक्षित रहेगा. आपको ऐसे समझाया जाता है मानो स्टेंट कोई ब्रांडेड स्मार्टफोन हो जितना महंगा मॉडल, उतना ही शानदार परफॉर्मेंस. जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है.&amp;nbsp; आपको बता दें कि बाजार में मिलने वाले ड्रग-इल्यूटिंग स्टेंट की एक तय कीमत सरकार द्वारा तय की गई है, जो कि ज्यादा से ज्यादा 30 से 40 हजार रुपये के आसपास होती है. लेकिन अस्पताल अपनी मनमानी मार्जिन, कंसल्टेशन फीस और खास तकनीक का हवाला देकर उसी स्टेंट की कीमत बिल में डेढ़ से दो लाख रुपये तक दिखा देते हैं. खेल तब और खतरनाक हो जाता है जब डॉक्टर मरीजों या उनके परिवार को यह कहकर डराते हैं कि सस्ता स्टेंट कुछ ही महीनों में ब्लॉक हो जाएगा, इसलिए आपको महंगा स्टेंट ही लगवाना चाहिए.&amp;nbsp;
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कौन सा स्टेंट होता है असल में सही?
जानकारी के लिए आपको बता दें कि दिल की नसों की बनावट और ब्लॉकेज की स्थिति हर मरीज में अलग होती है. लेकिन मेडिकल साइंस और कई रिपोर्ट्स साफ कहती हैं कि महंगा स्टेंट हमेशा बेहतर हो, यह जरूरी नहीं है.&amp;nbsp; वहीं, भारत सरकार द्वारा तय किए गए मेडिकली अप्रूव्ड स्टेंट पूरी तरह सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं. इसलिए जरूरी है कि आप ब्रांड पर नहीं क्वालिटी पर फोकस करें.&amp;nbsp;
डॉक्टर की सलाह के बाद यह देखना जरूरी है कि स्टेंट की मेटल बॉडी और उस पर चढ़ी दवा कैसी है, न कि उसका विदेशी ब्रांड नाम. साथ यहां सबसे अहम बात ये है कि स्टेंट की कीमत से ज्यादा इस बात का महत्व है कि कार्डियोलॉजिस्ट ने उसे कितनी सफाई से नसों में फिट किया है. एक अच्छा डॉक्टर सामान्य स्टेंट से भी मरीज की जान बचा सकता है, जबकि गलत तरीके से लगाया गया महंगा स्टेंट भी फेल हो जाता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>नया वायरस Chandipura, बच्चों को क्यों है सबसे ज्यादा खतरा?</title>
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        <description><![CDATA[ नया वायरस Chandipura, बच्चों को क्यों है सबसे ज्यादा खतरा? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Biryani Cooking Tips: हैदराबादी या मुरादाबादी... कौन सी बिरयानी में दम? घर पर खुद बनाकर देखो</title>
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        <description><![CDATA[ Hyderabadi Vs Muradabadi Biryani Difference: बिरयानी का नाम सुनते ही लंबे बासमती चावल, मसालों की खुशबू और नरम मांस का स्वाद याद आने लगता है. भारत में अलग-अलग शहरों की अपनी खास बिरयानी है और हर जगह इसे बनाने का तरीका भी अलग है. इन्हीं में हैदराबादी और मुरादाबादी बिरयानी काफी पसंद की जाती हैं. एक अपने तीखे मसालों, दम और भरपूर स्वाद के लिए मशहूर है, तो दूसरी हल्के मसालों और सादगी के लिए जानी जाती है. अगर आपको भी समझ नहीं आता कि हैदराबादी या मुरादाबादी बिरयानी में से कौन ज्यादा स्वादिष्ट है तो दोनों के बीच का अंतर जानने के साथ इन्हें घर पर बनाकर भी देख सकते हैं.
क्यों खास है हैदराबादी बिरयानी?
हैदराबादी बिरयानी की कहानी हैदराबाद के निजामों की शाही रसोई से जुड़ी मानी जाती है. इसमें मुगलई और दक्कनी खाने की झलक मिलती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका दम पर पकाया जाना है. हैदराबादी बिरयानी में मांस को दही, लाल मिर्च, गरम मसाला और दूसरे मसालों के साथ मैरीनेट किया जाता है. इसके बाद इसे आधे पके बासमती चावल के साथ परतों में लगाया जाता है. ऊपर से तले हुए प्याज, पुदीना, केसर और घी डालकर बर्तन को अच्छी तरह बंद कर धीमी आंच पर पकाया जाता है. दम पर पकने के दौरान मांस से निकलने वाला रस और मसालों की खुशबू चावल में समा जाती है. यही तरीका हैदराबादी बिरयानी को मसालेदार और खुशबूदार स्वाद देता है.
मुरादाबादी बिरयानी का स्वाद है अलग
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से निकली मुरादाबादी बिरयानी अपने हल्के और सादे स्वाद के लिए जानी जाती है. इसमें हैदराबादी बिरयानी की तरह बहुत सारे मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसका स्वाद मुख्य रूप से चावल, मांस और यखनी से आता है. मुरादाबादी बिरयानी में काली मिर्च, बड़ी इलायची, तेजपत्ता और लौंग जैसे साबुत मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. इसका स्वाद ज्यादा तीखा नहीं होता, इसलिए हल्की बिरयानी पसंद करने वालों के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकती है.

यखनी से आता है मुरादाबादी बिरयानी में स्वाद
मुरादाबादी बिरयानी तैयार करने में यखनी की अहम भूमिका होती है. इसके लिए चिकन या मटन को पानी और साबुत मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है. इससे तैयार होने वाले खुशबूदार स्टॉक यानी यखनी का इस्तेमाल चावल पकाने के लिए किया जाता है. यखनी में चावल पकने से हर दाने में मांस और मसालों का हल्का स्वाद आ जाता है. इसके बाद पके हुए मांस को चावल के साथ मिलाया जाता है. इस तरीके से तैयार बिरयानी का स्वाद हल्का और आराम से खाया जाने वाला होता है.

घर पर ऐसे बनाएं मुरादाबादी बिरयानी
मुरादाबादी बिरयानी बनाने के लिए सबसे पहले चिकन या मटन को पानी में नमक, काली मिर्च, लौंग, तेजपत्ता, बड़ी इलायची और दूसरे साबुत मसालों के साथ पकाएं. मांस नरम होने के बाद तैयार यखनी को अलग कर लें. अब बासमती चावल को धोकर कुछ देर भिगो दें और इन्हें तैयार यखनी में पकाएं. चावल लगभग पक जाएं तो इसमें तैयार मांस डालें. ऊपर से जरूरत के मुताबिक तला हुआ प्याज और थोड़ा घी डाल सकते हैं. इसे कुछ देर धीमी आंच पर पकने दें. इस बिरयानी में मसाले कम रखें ताकि यखनी का असली स्वाद बना रहे.
घर पर ऐसे बनाएं हैदराबादी बिरयानी
हैदराबादी बिरयानी बनाने के लिए चिकन या मटन को दही, अदरक-लहसुन, लाल मिर्च, गरम मसाला, नमक और दूसरे पसंदीदा बिरयानी मसालों के साथ मैरीनेट करें. बेहतर स्वाद के लिए इसे कुछ समय के लिए रख दें. दूसरी तरफ बासमती चावल को साबुत मसालों के साथ आधा पकाएं. अब भारी तले वाले बर्तन में मैरीनेट किया हुआ मांस रखें और उसके ऊपर चावल की परत लगाएं. फिर तला हुआ प्याज, पुदीना, केसर वाला दूध और थोड़ा घी डालें. बर्तन को अच्छी तरह बंद करके पहले कुछ मिनट मध्यम और फिर धीमी आंच पर दम दें. इस दौरान भाप बर्तन के अंदर रहती है और मांस तथा चावल एक साथ पकते हैं. तैयार होने के बाद बिरयानी को रायता या सालन के साथ परोस सकते हैं.
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दोनों के स्वाद में क्या है बड़ा अंतर?
अगर आपको तीखे मसाले, तले हुए प्याज, केसर, घी और दम पर पके मांस का भरपूर स्वाद पसंद है तो हैदराबादी बिरयानी आपको ज्यादा पसंद आ सकती है. इसका स्वाद ज्यादा मसालेदार और कई परतों वाला होता है. वहीं, अगर आप ज्यादा मसालेदार खाना पसंद नहीं करते और चावल तथा मांस का हल्का स्वाद चाहते हैं तो मुरादाबादी बिरयानी बेहतर लग सकती है. इसमें यखनी और साबुत मसालों का स्वाद ज्यादा उभरकर आता है.
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        <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>40 दिनों का सफर और करोड़ों लोगों की आस्था...जानिए &amp;apos;चेहल्लुम&amp;apos; का इतिहास और संदेश</title>
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        <description><![CDATA[ KARBALA ARBAEEN: चेहल्लुम... शोक, सब्र और इंसानियत की एक ऐसी दास्तान, जो सदियों बाद भी दुनिया भर में न्याय की लौ जलाए हुए है. आज 4 अगस्त 2026 को दुनिया भर में चेहल्लुम की अकीदत निभाई जा रही है. मुहर्रम की 10 तारीख (अशूरा) के ठीक 40 दिन बाद यह दिन आता है.
चेहल्लुम केवल एक तारीख नहीं है. यह जुल्म के खिलाफ खड़े होने, शांति चुनने और इंसानियत को बचाने का प्रतीक है.

&#039;चेहल्लुम&#039; का अर्थ और इतिहास
&#039;चेहल्लुम&#039; फारसी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है &#039;40वां&#039;. अरबी में इसे &#039;अर्बईन&#039; कहा जाता है. किसी अपनों के गुजर जाने के 40वें दिन उनकी याद में दुआ करना और शोक मनाना एक पुरानी परंपरा रही है.
सन् 680 ईस्वी में कर्बला की सरजमीं पर एक ऐतिहासिक जंग हुई थी. इसमें पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद कर दिए गए थे. इमाम हुसैन ने उस वक्त के जालिम शासक यजीद के आगे सिर झुकाने और उसके जुल्म को सहने से साफ इनकार कर दिया था.
जंग के बाद इमाम के परिवार को बंदी बना लिया गया. जब वे यजीद की कैद से रिहा हुए, तो सबसे पहले कर्बला पहुंचे. शहीदों की मजारों पर पहला शोक सभा (अजादारी) आयोजित हुआ, और यहीं से चेहल्लुम की शुरुआत हुई.
हजरत जैनब का ऐतिहासिक साहस
चेहल्लुम की दास्तान हजरत जैनब&amp;nbsp;के बिना अधूरी है. वे इमाम हुसैन की बहन थीं, जिन्होंने कर्बला के बाद हक और सच की अलख जगाए रखी.
कैद में होने के बावजूद, उन्होंने यज़ीद के भरे दरबार में बेबाक होकर सच बोला. उन्होंने कर्बला के दर्द और यज़ीद के जुल्म को दुनिया के सामने बेनकाब किया. चेहल्लुम का दिन उनके इसी अटूट साहस और कर्बला वापसी की याद दिलाता है.
&#039;अरबईन वॉक (Arbaeen Walk)&#039; आस्था का सबसे बड़ा पैदल सफर
आज चेहल्लुम का सबसे भव्य रूप इराक में देखने को मिलता है, जिसे &#039;अरबईन वॉक (Arbaeen Walk)&#039; कहते हैं. इस सफर में करीब 2 करोड़ से ज्यादा लोग एक साथ कदम मिलाते हैं.
लोग नजफ शहर से कर्बला तक 80 किलोमीटर का रास्ता नंगे पैर तय करते हैं. रास्ते भर स्थानीय इराकी नागरिक ज़ायरीन (यात्रियों) के लिए खाना, पानी और रहने का मुफ़्त इंतज़ाम करते हैं.
यहा न कोई अमीर होता है, न गरीब. कोई जाति या धर्म का भेद नहीं होता, बस सिर्फ सेवा और भाईचारे का भाव दिखता है.
भारत में साझी संस्कृति का प्रतीक
भारत में चेहल्लुम हमारी गंगा-जमुनी तहजीब का एक जीवंत हिस्सा है. लखनऊ, दिल्ली, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में इस दिन ऐतिहासिक जुलूस निकाले जाते हैं.
सड़कों पर ताज़िए और अलम (झंडे) के साथ मातमी जुलूस निकलते हैं. भारत में कई धर्मों के लोग इस दिन लंगर बांटते हैं और पानी-शर्बत की सबीलें लगाते हैं. भारत का &#039;हुसैनी ब्राह्मण&#039; समुदाय भी इमाम हुसैन की याद में चेहल्लुम का शोक पूरी श्रद्धा से मनाता है.
आज के दौर में चेहल्लुम का संदेश
आज की दुनिया में चेहल्लुम का संदेश बेहद अहम हो जाता है. यह दिन हमें तीन बड़ी बातें सिखाता है:

अन्याय के आगे न झुकना: परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, सच का साथ कभी न छोड़ें.
सब्र और संयम: मुश्किल से मुश्किल दौर में भी अपने नैतिक मूल्यों पर टिके रहें.
निःस्वार्थ सेवा: बिना किसी स्वार्थ और भेद के दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएं.

चेहल्लुम किसी एक समुदाय तक सीमित दिन नहीं है. यह हर उस दिल की आवाज है, जो दुनिया में शांति, न्याय और इंसानियत का परचम लहराना चाहता है.
मशहूर शायर जोश मलीहाबादी ने एक बहुत प्यारा शेर लिखा है. यह शेर उनकी एक मशहूर नज़्म &#039;क्या सिर्फ मुसलमानों के प्यारे हैं हुसैन&#039; का हिस्सा है, जिसे उन्होंने कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन की याद और उनके सार्वभौमिकता (universal) संदेश को समर्पित करते हुए लिखा था. वे फरमाते हैं-
क्या सिर्फ मुसलमानों के प्यारे हैं हुसैनचर्खे नौए बशर के तारे हैं हुसैनइंसान को बेदार तो हो लेने दोहर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन
आज 4 अगस्त 2026 को चेहल्लुम के मौके पर सबसे सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके दिखाए रास्ते पर चलें और अपने समाज में मोहब्बत व भाईचारा फैलाएं.
FAQ
चेहल्लुम कब मनाया जाता है?चेहल्लुम इस्लामी कैलेंडर के सफर महीने की 20वीं तारीख को, आशूरा के 40 दिन बाद मनाया जाता है. चांद दिखने के अनुसार तारीख में क्षेत्रीय अंतर हो सकता है.
चेहल्लुम और अरबईन में क्या अंतर है?दोनों एक ही अवसर के नाम हैं. &amp;lsquo;चेहल्लुम&amp;rsquo; फ़ारसी और &amp;lsquo;अर्बईन&amp;rsquo; अरबी शब्द है; दोनों का अर्थ 40वां होता है.
चेहल्लुम क्यों मनाया जाता है?यह इमाम हुसैन और कर्बला में शहीद हुए उनके साथियों की याद में मनाया जाता है.
अर्बईन वॉक कहां से कहां तक होती है?इसका सबसे प्रसिद्ध पैदल मार्ग इराक के नजफ शहर से कर्बला तक है, जिसकी दूरी लगभग 80 किलोमीटर है.
चेहल्लुम का प्रमुख संदेश क्या है?इसका केंद्रीय संदेश अन्याय के सामने न झुकना, कठिन परिस्थितियों में सब्र रखना और निःस्वार्थ भाव से इंसानियत की सेवा करना है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिनों, का, सफर, और, करोड़ों, लोगों, की, आस्था...जानिए, चेहल्लुम, का, इतिहास, और, संदेश</media:keywords>
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        <title>FSSAI Alcohol Ban: क्या अब नहीं बिकेंगी आपकी पसंदीदा ये रम और व्हिस्की? FSSAI ने लगाई रोक</title>
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        <description><![CDATA[ Artificial Flavors In Rum And Whiskey: अगर आप रम या व्हिस्की पीते हैं तो यह खबर आपके लिए अहम हो सकती है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अल्कोहलिक बेवरेज में एक जैसे या आर्टिफिशियल फ्लेवर के इस्तेमाल को लेकर अपना रुख साफ किया है. फूड रेगुलेटर ने नियमों का पालन नहीं करने वाले कुछ मैन्युफैक्चरर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है. इसके साथ ही कई मशहूर रम और व्हिस्की की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है.
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के मुताबिक, कई कंपनियां तय मानकों के अनुसार स्टैंडर्ड अल्कोहलिक बेवरेज का उत्पादन कर रही हैं. हालांकि कुछ मैन्युफैक्चरर्स ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिनकी अनुमति मौजूदा नियमों के तहत नहीं है. इन्हीं मामलों को लेकर रेगुलेटर ने कार्रवाई की है.
रम और व्हिस्की में क्यों मिलाया जा रहा फ्लेवर?
FSSAI के अनुसार, कुछ मैन्युफैक्चरर्स अपने अल्कोहलिक बेवरेज को मुख्य रूप से न्यूट्रल अल्कोहल या एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल से तैयार कर रहे हैं. इस तरह के अल्कोहल में उस ड्रिंक का प्राकृतिक और खास फ्लेवर मौजूद नहीं होता, जिसकी उम्मीद आमतौर पर रम या व्हिस्की जैसे स्टैंडर्ड अल्कोहलिक बेवरेज से की जाती है. इसके बाद ड्रिंक में वही स्वाद और खुशबू पैदा करने के लिए आइडेंटिकल या आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग पदार्थ मिलाए जा रहे हैं. आसान शब्दों में कहें तो रम या व्हिस्की का जो खास स्वाद उसकी उत्पादन प्रक्रिया और कच्चे माल से आना चाहिए, उसे कुछ मामलों में अलग से फ्लेवर डालकर तैयार किया जा रहा था.

FSSAI ने क्या कहा?
फूड रेगुलेटर का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई मान्यता प्राप्त मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस नहीं है, जिसमें रम का मूल स्वाद पैदा करने के लिए रम में अलग से रम फ्लेवर या व्हिस्की का स्वाद तैयार करने के लिए व्हिस्की में अलग से व्हिस्की फ्लेवर मिलाया जाता हो. FSSAI के मुताबिक, अल्कोहलिक बेवरेज के लिए बनाए गए मानकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनकी केमिकल कंपोजिशन उनके मूल कच्चे माल और उत्पादन प्रक्रिया के अनुरूप रहे.

रेगुलेटर ने यह भी साफ किया है कि फूड बिजनेस ऐसी किसी सामग्री या एडिटिव का इस्तेमाल नहीं कर सकते, जिससे प्रोडक्ट को लेकर ग्राहक भ्रमित हो. यानी किसी स्टैंडर्ड रम या व्हिस्की की पहचान और उसके स्वाद को केवल अलग से फ्लेवर मिलाकर तैयार करना नियमों के दायरे में नहीं आता.
ओल्ड मॉन्क की इन तीन रम की बिक्री पर रोक
FSSAI की इस कार्रवाई के दायरे में कई जाने-माने ब्रांड आए हैं. नियामक ने मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर की खोपोली इकाई में तैयार की जाने वाली ओल्ड मॉन्क रम की तीन किस्मों की बिक्री पर रोक लगाई है. इनमें ओल्ड मॉन्क द लीजेंड, ओल्ड मॉन्क गोल्ड रिजर्व और ओल्ड मॉन्क XXX मैच्योर्ड रम शामिल हैं. इसके अलावा यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती इकाई में तैयार होने वाली मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है.
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बैगपाइपर और ओल्ड कास्क भी लिस्ट में
FSSAI की कार्रवाई केवल ओल्ड मॉन्क और मैकडॉवेल्स तक सीमित नहीं है. मध्य प्रदेश में इनब्रू बेवरेजेज द्वारा तैयार की जाने वाली बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम की बिक्री पर भी रोक लगाई गई है. इसके अलावा मध्य प्रदेश में एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज द्वारा तैयार की जाने वाली सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर्ड XXX रम भी कार्रवाई के दायरे में हैं.
एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज पर भी रोक
FSSAI ने मध्य प्रदेश में यूनाइटेड स्पिरिट्स द्वारा तैयार की जाने वाली एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की की बिक्री पर भी रोक लगाई है. इस तरह नियामक की कार्रवाई के दायरे में रम के साथ कई व्हिस्की भी आई हैं. हालांकि यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि FSSAI की कार्रवाई में संबंधित ब्रांड के साथ खास निर्माण इकाइयों में तैयार उत्पादों का जिक्र किया गया है.
&amp;nbsp;

Position of FSSAI on the use of identical flavours in Alcoholic Beverages pic.twitter.com/Uex8wYv9AL
&amp;mdash; FSSAI (@fssaiindia) August 2, 2026



क्यों अहम है FSSAI की यह कार्रवाई?
FSSAI का पूरा जोर अल्कोहलिक बेवरेज की पहचान और उसकी वास्तविक बनावट को बनाए रखने पर है. अगर कोई ड्रिंक स्टैंडर्ड रम या व्हिस्की के नाम से बेची जा रही है तो उसकी खासियत केवल बाद में मिलाए गए आर्टिफिशियल या आइडेंटिकल फ्लेवर से तैयार नहीं की जानी चाहिए. रेगुलेटर का कहना है कि तय मानक इसलिए बनाए गए हैं ताकि अल्कोहलिक बेवरेज की केमिकल कंपोजिशन उसके कच्चे माल के मूल स्रोत के मुताबिक बनी रहे और ग्राहक को प्रोडक्ट की वास्तविक प्रकृति को लेकर गुमराह न किया जाए. फिलहाल FSSAI ने साफ किया है कि कई मैन्युफैक्चरर्स तय नियमों के मुताबिक ही स्टैंडर्ड अल्कोहलिक बेवरेज बना रहे हैं. कार्रवाई उन खास मैन्युफैक्चरर्स के खिलाफ शुरू की गई है, जहां गैर-अनुमत तरीके से आइडेंटिकल या आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>FSSAI, Alcohol, Ban:, क्या, अब, नहीं, बिकेंगी, आपकी, पसंदीदा, ये, रम, और, व्हिस्की, FSSAI, ने, लगाई, रोक</media:keywords>
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        <title>Babies Sleep Listening To Lullaby: लोरी सुनते ही कैसे सो जाता है बच्चा, इसका नींद से क्या कनेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Babies Sleep Listening To Lullaby: सदियों से भारतीय समाज में बच्चों को सुलाने के लिए लोरी सुनाने की परंपरा चली आ रही है. मां की धीमी और मीठी आवाज में लोरी सुनते ही रोता हुआ बच्चा भी पल भर में शांत हो जाता है और गहरी नींद में सो जाता है.आखिर लोरी और नींद का ऐसा क्या कनेक्शन है कि लोरी सुनते ही बच्चे को तुरंत नींद आ जाती है. तेज आवाज में रोता हुआ बच्चा एक लोरी में गहरी नींद लेने लगता है. इसके पीछे कोई बड़ा साइंस नहीं है, दरअसल लोरी की लय बच्चों के दिल की धड़कन को शांत करता है, जिससे बच्चा सोने लग जाता है.&amp;nbsp;
लोरी का अहसास
जब बच्चा मां के पेट में होता है, तब से ही वो मां की आवाज और उसके दिल की धड़कन को सुनता रहता है. ऐसे में जब मां बच्चे को सीने से लगाकर धीमी आवाज में लोरी गाती है तो बच्चे को वहीं सुरक्षित माहौल याद आ जाता है. मां की यह सुरीली आवाज बच्चे को याद दिलाती है कि वह बिल्कुल सुरक्षित है. सुरक्षित होने का यही अहसास बच्चे को सोने में मदद करता है. साथ ही जब बच्चा छोटा होता है, तब उसका नर्वस सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है. इस वजह से जब कोई तेज आवाज में बोलता है या चिल्लाता है तो ऐसे माहौल से बच्चे डर जाते हैं और फिर वह रोने लगते हैं.
साइंस के मुताबिक, जब बच्चा एक ही लय में गाए जाने वाली लोरी या संगीत को सुनता है, तो उसके दिल की धड़कन और सांस लेने की गति धीमी हो जाती है. लोरी का शांत संगीत बच्चे के शरीर को रीलेक्स कर देता है जिससे उसे सुस्ती आने लगती है और वह सोने लगता है.
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तनाव कम करने वाले हार्मोन का कम होना
जब बच्चा रोता है या चिड़चिड़ा होने लगता है, तब उसके शरीर में कॉर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ने लगता है. ऐसे समय में जब वह माता-पिता की शांत आवाज को सुनता है तो उसका दिमाग तुरंत शांत हो जाता है. इससे बच्चे के शरीर में ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन जैसे खुशी के हार्मोन रिलीज होते हैं. ये हार्मोन बच्चे के दर्द और तनाव को कम करते हैं. जिससे बच्चा आसानी से सो जाता है. साथ ही छोटे बच्चे अक्सर अपने आसपास की तेज आवाजों या खुद के किसी तेज दर्द जैसे दांत दर्द, पैर दर्द से रोने लग जाते हैं.
ऐसे में जब बच्चे लोरी सुनते है तो उनका ध्यान अपनी तकलीफ और दर्द से हटकर लोरी की मीठी आवाज की ओर केंद्रित होने लगता है. इसे मेडिकल भाषा में ऑडियो विजुअल डिस्ट्रेक्शन कहते है. जब बच्चे का ध्यान कहीं ओर चला जाता है तो वह अपने दर्द को भुलकर आंखें बंद कर लेता है और सो जाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Lipedema Symptoms: जांघ की चर्बी को न मान लेना नॉर्मल फैट, हो सकती है यह बीमारी</title>
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        <description><![CDATA[ Lipedema Causes Symptoms And Treatment: शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैट जमा होना आम बात है. वजन बढ़ने पर पेट, कमर और जांघों पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है. लेकिन अगर आपकी जांघों, हिप्स और पैरों के निचले हिस्से में दोनों तरफ असामान्य तरीके से फैट बढ़ रहा है और वजन कम करने के बावजूद इसमें खास बदलाव नहीं दिख रहा, तो इसे केवल मोटापा समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. इसके पीछे लिपेडेमा नाम की एक लंबे समय तक रहने वाली समस्या भी हो सकती है.
लिपेडेमा में शरीर के निचले हिस्से में असामान्य तरीके से फैट जमा होने लगता है. इसका असर आमतौर पर हिप्स, जांघों और पिंडलियों पर दिखाई देता है. कुछ लोगों में ऊपरी बांहों पर भी फैट जमा हो सकता है. खास बात यह है कि आमतौर पर इसका असर हाथों और पैरों के पंजों पर नहीं पड़ता.
नॉर्मल फैट से कैसे अलग है लिपेडेमा?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार, लिपेडेमा को कई बार सामान्य मोटापा समझ लिया जाता है. इसकी एक वजह यह है कि इस समस्या में शरीर का निचला हिस्सा ज्यादा भारी दिखाई दे सकता है. हालांकि लिपेडेमा और सामान्य बॉडी फैट एक जैसे नहीं हैं. सामान्य फैट में आमतौर पर दर्द नहीं होता, जबकि लिपेडेमा में जमा फैट को छूने या दबाने पर दर्द हो सकता है. त्वचा के नीचे छोटी-छोटी गांठ या कंकड़ जैसी बनावट भी महसूस हो सकती है. इसके अलावा पैरों में भारीपन और सूजन की शिकायत हो सकती है.

लिपेडेमा में एक और बड़ा अंतर वजन घटाते समय दिखाई दे सकता है. डाइट और एक्सरसाइज से शरीर के ऊपरी हिस्से का वजन कम हो सकता है, लेकिन लिपेडेमा से प्रभावित जांघों और पैरों में उसी अनुपात में बदलाव नहीं दिखाई देता.
इन लक्षणों पर दें ध्यान
लिपेडेमा में दोनों तरफ हिप्स, जांघों और पिंडलियों में फैट जमा हो सकता है. कुछ लोगों की ऊपरी बांहों में भी ऐसा हो सकता है. प्रभावित हिस्से में हल्के से लेकर तेज दर्द तक की शिकायत हो सकती है. कुछ लोगों को लगातार दर्द रहता है, जबकि कुछ को केवल उस हिस्से को दबाने पर दर्द महसूस होता है. पैरों में भारीपन, सूजन, जल्दी नील पड़ना और सामान्य से ज्यादा थकान भी इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं. बीमारी बढ़ने पर त्वचा की बनावट भी बदल सकती है और वह असमान दिखाई देने लगती है.

क्यों होता है लिपेडेमा?
लिपेडेमा होने की सही वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. हालांकि कुछ मामलों में इसका संबंध परिवार से देखा गया है. करीब 20 से 60 फीसदी मामलों में यह समस्या परिवार के दूसरे सदस्यों में भी हो सकती है. यह समस्या लगभग पूरी तरह महिलाओं में देखी जाती है. इसके पीछे हार्मोन की भूमिका होने की भी संभावना मानी जाती है, क्योंकि लिपेडेमा की शुरुआत या इसके लक्षणों का बढ़ना अक्सर प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज जैसे हार्मोनल बदलावों के दौरान देखा जाता है. मोटापा लिपेडेमा का कारण नहीं माना जाता. हालांकि इस समस्या से जूझ रहे कई लोगों का बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI ज्यादा हो सकता है.
समय के साथ बढ़ सकती है समस्या
कई लोगों में लिपेडेमा धीरे-धीरे बढ़ता है. शुरुआती स्टेज में त्वचा सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन उसके नीचे छोटी गांठों जैसी बनावट महसूस हो सकती है. इस दौरान दर्द और आसानी से नील पड़ने की शिकायत भी हो सकती है. अगली स्टेज में त्वचा की सतह असमान और गड्ढेदार दिखाई देने लग सकती है. समस्या ज्यादा बढ़ने पर पैरों में फैट के बड़े हिस्से और त्वचा की सिलवटें बनने लग सकती हैं, जिससे चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है. गंभीर स्थिति में लिपेडेमा के साथ लिम्फेडेमा भी हो सकता है, जिसमें शरीर में लिम्फ फ्लूइड जमा होने लगता है.
कैसे होती है इसकी पहचान?
लिपेडेमा की पहचान के लिए कोई एक निश्चित टेस्ट नहीं है. डॉक्टर आमतौर पर मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर इसका पता लगाते हैं. प्रभावित हिस्से में दर्द वाला फैट और पैरों के पंजों की तुलना में पैरों का असामान्य रूप से बड़ा दिखाई देना इसकी पहचान में मदद कर सकता है. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दूसरी समस्याओं को बाहर करने के लिए ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, MRI या सीटी स्कैन जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं.
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क्या लिपेडेमा का इलाज संभव है?
फिलहाल लिपेडेमा का कोई ऐसा इलाज नहीं है, जो इसे पूरी तरह खत्म कर दे. हालांकि सही मैनेजमेंट से दर्द, सूजन और दूसरी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है. डॉक्टर एक्सरसाइज, कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स और कुछ मामलों में लिम्फेटिक ड्रेनेज मसाज जैसी थेरेपी की सलाह दे सकते हैं. स्विमिंग, वॉकिंग और साइकिलिंग जैसी एक्टिविटी मोबिलिटी बेहतर करने में मदद कर सकती हैं. कुछ मामलों में डॉक्टर लिपोसक्शन जैसे विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं. इलाज व्यक्ति की स्थिति और बीमारी की स्टेज के आधार पर तय किया जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इन गलतियों की वजह से बढ़ जाता है यूरिक एसिड, ऐसे करें कम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इन-गलतियों-की-वजह-से-बढ़-जाता-है-यूरिक-एसिड-ऐसे-करें-कम</link>
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        <description><![CDATA[ 















How to Reduce Uric Acid: आजकल यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या बहुत आम हो गई है. यूरिक एसिड शरीर में तब बनता है जब हम प्यूरिन नाम के तत्व वाला खाना खाते हैं और इसे किडनी फिल्टर करके बाहर निकालती है. हालांकि, गलत खाना जैसे तला हुआ और खराब लाइफस्टाइल की वजह से इसकी मात्रा बढ़ जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द और सूजन जैसी परेशानियां हो सकती हैं. आइए जानते हैं इसकी वजहें और बचाव के तरीके.
















यूरिक एसिड बढ़ने की मुख्य वजहें
रेड मीट, ऑर्गन मीट जैसे लीवर, किडनी, और सी-फूड में प्यूरिन ज्यादा होता है. शरीर में प्यूरिन टूटने से ही यूरिक एसिड बनता है, इसलिए इनका ज्यादा सेवन यूरिक एसिड का स्तर तेजी से बढ़ा देता है. इसी तरह चीनी से भरपूर ड्रिंक्स, खासकर फ्रुक्टोज वाली कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड जूस भी यूरिक एसिड बढ़ाने में बड़ा रोल निभाते हैं.
शराब, खासकर बीयर, प्यूरिन से भरपूर होती है और शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकालने की प्रक्रिया को भी धीमा कर देती है, जिससे यह शरीर में जमा होने लगता है. इसके अलावा पानी कम पीने से किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती और यूरिक एसिड बाहर निकालने में दिक्कत होती है. साथ ही शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत भी यूरिक एसिड बढ़ने का एक बड़ा कारण है. इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर टॉक्सिन्स को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाता.
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यूरिक एसिड कम करने के आसान तरीके
रेड मीट, ऑर्गन मीट और ज्यादा सी-फूड खाने से बचें, इनकी जगह हल्का खाना खाएं. फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने से शरीर से यूरिक एसिड बाहर निकालने में मदद मिलती है. खीरा, पपीता और सेब जैसी चीजें खासतौर पर फायदेमंद मानी जाती हैं. मीठी चीजों और पैकेज्ड ड्रिंक्स का सेवन जितना हो सके कम करें, इनकी जगह नारियल पानी या नींबू पानी जैसे हेल्दी ऑप्शन चुनें. इसके साथ ही रोज हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, जैसे सुबह टहलना या योगा करना, शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और वजन भी कंट्रोल में रहता है. साथ ही शराब का सेवन कम से कम करें या पूरी तरह बंद कर दें, इससे यूरिक एसिड कंट्रोल करने में काफी मदद मिलती है.
कब लें डॉक्टर की सलाह
अगर जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न महसूस हो रही है, तो यह यूरिक एसिड बढ़ने का संकेत हो सकता है. ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए और उनकी सलाह के अनुसार ही इलाज लेना चाहिए. सही खान-पान और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाकर यूरिक एसिड को काफी हद तक कंट्रोल में रखा जा सकता है, जिससे जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>अब आयुष्मान भारत से होगा किडनी ट्रांसप्लांट, जुग जुग जियो अभियान शुरू</title>
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        <description><![CDATA[ देश में अंगदान को बढ़ावा देने और अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को और मजबूत बनाने के मकसद से सोमवार (3 अगस्त) को 16वां भारतीय अंगदान दिवस मनाया गया. इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कई नई पहल कीं. उन्होंने कहा कि अंगदान इंसानियत की सबसे बड़ी सेवा है, क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद को नई जिंदगी मिलती है.
दुनिया का तीसरा देश बना भारत
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान पोर्टल शुरू होने के बाद से अब तक 5 लाख से अधिक लोगों ने आधार सत्यापित अंगदान की शपथ ली है. उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की अपील और सरकार के जागरूकता अभियान का लोगों पर सकारात्मक असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि भारत में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है. वर्ष 2013 में 4990 अंग प्रत्यारोपण हुए थे. वहीं, 2025 में यह संख्या बढ़कर 20138 हो गई, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. इसके साथ भारत कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है.
प्रत्यारोपण में भी हुआ इजाफा
मंत्री ने बताया कि मृत अंगदाताओं (Deceased Donors) से होने वाले प्रत्यारोपण भी 2013 के 837 से बढ़कर 2025 में 3,526 तक पहुंच गए हैं. उन्होंने माना कि अब भी अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है, जिसे कम करना सरकार की प्राथमिकता है. इस अवसर पर केंद्र सरकार ने &#039;जुग जुग जियो अभियान&#039; की शुरुआत की. यह एक साल तक चलने वाला राष्ट्रीय जागरूकता अभियान होगा, जिसका उद्देश्य गांव-गांव तक अंगदान का संदेश पहुंचाना और लोगों को इसके लिए प्रेरित करना है.
सरकार ने लॉन्च किया नया प्लेटफॉर्म
सरकार ने &#039;ई-प्रत्यारोपण&#039; नाम का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए अस्पताल, डॉक्टर, मरीज, अंगदाता और अन्य सभी संबंधित संस्थाएं एक ही डिजिटल नेटवर्क से जुड़ सकेंगी. इससे रजिस्ट्रेशन, वेटिंग लिस्ट, अंग आवंटन और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान होगी. इसके अलावा NOTTO मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया, जिससे आम लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को अंगदान और प्रत्यारोपण से जुड़ी जानकारी और सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी.
आयुष्मान भारत में किडनी प्रत्यारोपण भी शामिल
कार्यक्रम के दौरान ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन के राष्ट्रीय दिशा-निर्देश और स्वैप ट्रांसप्लांटेशन गाइडलाइंस भी जारी की गईं. इनका उद्देश्य पूरे देश में अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को एक समान, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है. अनुप्रिया पटेल ने कहा कि कई लोग आज भी अंगदान को लेकर गलत धारणाएं रखते हैं, जबकि देश का कोई भी प्रमुख धर्म अंगदान का विरोध नहीं करता. सभी धर्म मानव सेवा और जीवन बचाने को सर्वोच्च मानते हैं.
उन्होंने बताया कि सरकार राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के तहत राज्यों को बुनियादी ढांचे, अंग संरक्षण, परिवहन और अन्य सुविधाओं के लिए आर्थिक सहायता दे रही है. वहीं, आयुष्मान भारत योजना में किडनी प्रत्यारोपण को भी शामिल किया गया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मदद मिल रही है.
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Steroids and Hormonal Imbalance: क्यों लड़कों का निकल रहा है लड़कियों की तरह ब्रेस्ट, जान लें इसका चौंकाने वाला राज</title>
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        <description><![CDATA[ Steroids and Hormonal Imbalance: आजकल जिम में जल्दी बॉडी बनाने की चाहत कई युवाओं पर भारी पड़ रही है. डॉक्टरों का कहना है कि बिना मेडिकल सलाह के स्टेरॉयड लेने का चलन बढ़ने से हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है. इसका असर इतना गंभीर हो सकता है कि कुछ लड़कों की छाती महिलाओं की तरह उभरने लगती है. इस कंडीशन&amp;nbsp; को मेडिकल भाषा में गायनेकोमैस्टिया कहा जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिर्फ शरीर में होने वाला बदलाव नहीं है, बल्कि कई युवाओं के आत्मविश्वास और मानसिक सेहत पर भी असर डालता है. कई मामलों में समस्या इतनी बढ़ जाती है कि सर्जरी तक करानी पड़ती है.
स्टेरॉयड कैसे बिगाड़ देता है शरीर
विशेषज्ञ बताते हैं कि पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन दोनों हार्मोन मौजूद रहते हैं. आम कंडीशन में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अधिक होता है, लेकिन एनाबॉलिक स्टेरॉयड का गलत इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक हार्मोन सिस्टम पर बेहद असर&amp;nbsp; कर सकता है. इससे टेस्टोस्टेरोन का संतुलन बिगड़ता है और एस्ट्रोजन का असर बढ़ने लगता है. यही बदलाव छाती के आसपास मौजूद ब्रेस्ट टिश्यू को बढ़ा सकता है, जिससे पुरुषों में महिलाओं जैसी ब्रेस्ट दिखाई देने लगती है.
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हर मामला स्टेरॉयड से नहीं जुड़ा होता
डॉक्टरों के अनुसार गायनेकोमैस्टिया की वजह सिर्फ स्टेरॉयड नहीं होती है. मोटापा, बालिग हालत&amp;nbsp; में हार्मोनल बदलाव, कुछ दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल, लिवर या किडनी से जुड़ी बीमारियां और हार्मोन असंतुलन भी इसके कारण हो सकते हैं. हालांकि प्लास्टिक सर्जरी और एंडोक्राइन विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में जिम में बिना सलाह लिए स्टेरॉयड और कुछ सप्लीमेंट का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ऐसे मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है.&amp;nbsp;
कब पड़ती है सर्जरी की जरूरत
कई उम्र के बढ़ते हालात में यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ अपने आप ठीक हो जाती है. लेकिन अगर ब्रेस्ट का आकार लगातार बढ़ रहा हो, दर्द महसूस हो रहा हो या व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान रहने लगे तो डॉक्टर जांच की सलाह देते हैं. हार्मोन प्रोफाइल समेत दीगर&amp;nbsp; जरूरी टेस्ट के बाद इलाज तय किया जाता है. अगर दवाओं से फायदा नहीं मिलता और ब्रेस्ट टिश्यू ज्यादा बढ़ चुका होता है, तो सर्जरी सबसे असरदार तरीका मानी जाती है. आधुनिक तकनीक से होने वाली यह प्रक्रिया सुरक्षित मानी जाती है और रिकवरी भी पहले की तुलना में काफी तेज होती है.
इन बातों का रखें खास ध्यान
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बॉडी बनाने के लिए कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड या हार्मोन वाले सप्लीमेंट का इस्तेमाल न करें. संतुलित खानपान, नियमित एक्सरसाइज&amp;nbsp; और सही मेडिकल सलाह हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मदद करती है. अगर छाती में असामान्य बदलाव, सूजन या दर्द महसूस हो तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. समय पर इलाज कराने से न सिर्फ वक्त पर मुमकिन इलाज है, बल्कि भविष्य में होने वाली मानसिक और शारीरिक परेशानियों से भी बचा जा सकता है
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        <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Store Green Chillies: हरी मिर्च&amp;धनिया 1 महीने तक नहीं होंगे खराब, अपनाएं यह छोटी सी ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ Green Chilli Storage Hack: रसोई में हरा धनिया और हरी मिर्च लगभग रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें हैं. लेकिन इन्हें सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो कुछ ही दिनों में ये मुरझाने, सूखने या खराब होने लगते हैं. अगर आप भी बार-बार इन्हें फेंकने को मजबूर हो जाते हैं, तो स्टोर करने का तरीका बदलना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. कुछ आसान ट्रिक्स अपनाकर धनिया और हरी मिर्च को लंबे समय तक ताजा रखा जा सकता है.
धनिया स्टोर करने का सही तरीका
अगर धनिया को उसी प्लास्टिक बैग में फ्रिज में रख दिया जाए, जिसमें वह बाजार से आता है, तो बैग के अंदर नमी जमा होने लगती है. इससे कुछ ही दिनों में पत्तियां गलने लगती हैं. इसकी जगह सबसे आसान तरीका है कि धनिया को हल्के हाथों से सुखाकर एयरटाइट कंटेनर में रखें. कंटेनर के नीचे एक सूखा पेपर टॉवल बिछा दें, ताकि अतिरिक्त नमी उसमें सोख ली जाए. इसके बाद धनिया को एक परत में रखें और कंटेनर बंद करके फ्रिज में रख दें. इससे धनिया ज्यादा समय तक हरा और ताजा बना रह सकता है.
एक दूसरा तरीका यह भी है कि धनिया की डंठल का निचला हिस्सा हल्का-सा काटकर उसे थोड़ा पानी भरे कांच के गिलास में रखें और ऊपर से ढीले तरीके से प्लास्टिक बैग ढक दें. इससे डंठल को नमी मिलती रहती है और पत्तियां लंबे समय तक ताजी बनी रहती हैं. हालांकि, इस तरीके में हर दो-तीन दिन में पानी बदलना जरूरी होता है.
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हरी मिर्च को ऐसे करें स्टोर
हरी मिर्च को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए सबसे पहले उसकी डंठल निकाल दें. इसके बाद हल्दी मिले पानी से मिर्च को धोकर साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. अब सूती कपड़े से मिर्च को पूरी तरह सुखा लें. ध्यान रखें कि उस पर बिल्कुल भी नमी न रहे. इसके बाद मिर्च को जिप-लॉक बैग में रखें और उसमें छिली हुई लहसुन की दो या तीन कलियां डाल दें. अब बैग को बंद करके फ्रिज में रख दें. इससे हरी मिर्च जल्दी सूखने या सिकुड़ने से बच सकती है.
दरअसल, फ्रिज हवा से नमी कम करता है, जिससे हरी मिर्च और धनिया जैसी चीजें धीरे-धीरे अपनी नमी खोने लगती हैं. अगर इन्हें खुला रखा जाए या इनमें पानी रह जाए, तो वे जल्दी खराब हो सकती हैं. इसलिए इन्हें स्टोर करने से पहले अच्छी तरह सुखाना और सही कंटेनर का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. इस ट्रिक्स को अपनाकर आप हरी मिर्च और धनिया को लंबे समय तक ताजा रख सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Copper T Pregnancy: कॉपर टी के बावजूद हो गई प्रेग्नेंसी, जानें कितना है खतरा?</title>
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        <description><![CDATA[ Pregnancy With Copper T Risks And Causes: प्रेग्नेंसी से बचने के लिए कॉपर-टी को गर्भनिरोध के प्रभावी तरीकों में से एक माना जाता है. इसकी सफलता दर काफी ज्यादा होती है, लेकिन दूसरे गर्भनिरोधक तरीकों की तरह यह भी 100 फीसदी गारंटी नहीं देता. बहुत ही कम मामलों में कॉपर-टी लगे होने के बावजूद महिला प्रेग्नेंट हो सकती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी हो जाए तो क्या होगा और क्या ऐसी प्रेग्नेंसी सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सकती है?
मदरहुड हॉस्पिटल्स, सेक्टर-48, नोएडा की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पवना एचएन के मुताबिक, कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी होने पर जल्द मेडिकल जांच की जरूरत होती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में प्रेग्नेंसी में गंभीर समस्या होगी. सही समय पर डॉक्टर से संपर्क और लगातार निगरानी में कई मामलों में स्वस्थ प्रेग्नेंसी संभव हो सकती है.

कॉपर-टी के बावजूद कैसे हो सकती है प्रेग्नेंसी?
डॉ. पवना के मुताबिक, प्रेग्नेंसी रोकने में कॉपर-टी 99 फीसदी से ज्यादा प्रभावी है. इसके बावजूद कोई भी गर्भनिरोधक तरीका पूरी तरह फुलप्रूफ नहीं होता. बहुत कम मामलों में कॉपर-टी अपनी सही जगह से खिसक सकती है या गर्भाशय से बाहर निकल सकती है. ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी होने की संभावना बन सकती है. कॉपर-टी लगे होने के दौरान प्रेग्नेंसी होना काफी दुर्लभ है, लेकिन ऐसा होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करके मेडिकल जांच करवानी चाहिए, ताकि प्रेग्नेंसी की स्थिति और कॉपर-टी की जगह का पता लगाया जा सके.
क्या बढ़ सकते हैं प्रेग्नेंसी से जुड़े खतरे?
कॉपर-टी लगे होने के बावजूद प्रेग्नेंसी होने पर कुछ जटिलताओं का खतरा सामान्य प्रेग्नेंसी के मुकाबले ज्यादा हो सकता है. डॉ. पवना के अनुसार, ऐसी स्थिति में मिसकैरेज यानी गर्भपात, गर्भाशय में इंफेक्शन और समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ सकता है. इसी वजह से ऐसी प्रेग्नेंसी में ऑब्स्टेट्रिशियन की निगरानी जरूरी होती है. नियमित जांच के जरिए डॉक्टर प्रेग्नेंसी की स्थिति और संभावित जोखिमों पर नजर रखते हैं.

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की जांच भी है जरूरी
कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी होने पर डॉक्टर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की संभावना की भी जांच करते हैं. एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में फर्टिलाइज्ड एग गर्भाशय के अंदर अपनी सामान्य जगह पर इम्प्लांट होने की बजाय गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगता है. ज्यादातर मामलों में यह फैलोपियन ट्यूब में हो सकता है. यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और इसका तुरंत इलाज जरूरी है. इसलिए कॉपर-टी इस्तेमाल करने वाली महिला का प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए.
क्या प्रेग्नेंसी होने पर कॉपर-टी निकालना जरूरी?
हर मामले में इसका जवाब एक जैसा नहीं होता. कॉपर-टी निकालनी है या नहीं, इसका फैसला उसकी स्थिति और प्रेग्नेंसी को देखकर डॉक्टर करते हैं. डॉ. पवना के अनुसार, अगर कॉपर-टी के धागे दिखाई दे रहे हों और डॉक्टर को लगे कि इसे सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है तो आमतौर पर प्रेग्नेंसी के शुरुआती चरण में इसे निकालने की सलाह दी जा सकती है. इससे आगे होने वाली कुछ जटिलताओं का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि कॉपर-टी को खुद से निकालने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. इसे निकालना सुरक्षित है या नहीं, इसका फैसला मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर ही कर सकते हैं.
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क्या स्वस्थ बच्चे को जन्म देना संभव?
कॉपर-टी के बावजूद गर्भ ठहरने का मतलब यह नहीं है कि प्रेग्नेंसी सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकती. डॉ. पवना के मुताबिक, कई महिलाएं ऐसी स्थिति के बाद भी स्वस्थ और फुल टर्म प्रेग्नेंसी पूरी करती हैं. खासकर अगर शुरुआती समय में कॉपर-टी को सुरक्षित तरीके से निकाल दिया जाए और इसके बाद प्रेग्नेंसी की नियमित निगरानी होती रहे तो बेहतर परिणाम की संभावना हो सकती है. शुरुआती एंटीनैटल केयर इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर कॉपर-टी लगी हुई है और आपको प्रेग्नेंसी का शक हो रहा है तो प्रेग्नेंसी टेस्ट करने में देरी न करें. टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. इसके अलावा तेज पेट दर्द, वजाइनल ब्लीडिंग, चक्कर आना, बेहोशी, कंधे में दर्द, बुखार या लगातार पेल्विक एरिया में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए. ये लक्षण एक्टोपिक प्रेग्नेंसी या किसी दूसरी गंभीर जटिलता की ओर इशारा कर सकते हैं. कॉपर-टी के साथ प्रेग्नेंसी दुर्लभ जरूर है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. समय पर जांच से डॉक्टर संभावित समस्या की पहचान जल्दी कर सकते हैं. इसलिए ऐसी स्थिति में घबराने या इंतजार करने की बजाय जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना और उनकी निगरानी में आगे बढ़ना जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kitchen Chimney Cleaning Tips: किचन की चिमनी पर तेल के जिद्दी दाग? बिना मेहनत ऐसे करें साफ</title>
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        <description><![CDATA[ Kitchen Chimney Cleaning Tips: किचन की चिमनी पर तेल के जिद्दी दाग? बिना मेहनत ऐसे करें साफ ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>सावन सोमवार स्पेशल: फ्रूट एंड नट खीर, व्रत में खाएं ये टेस्टी मिठाई</title>
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        <description><![CDATA[ Sawan Somwar Kheer Recipe: सावन का महीना शुरू होते ही बाबा भोलेनाथ की भक्ति का माहौल बन जाता है. इस दौरान लोग सोमवार का व्रत रखते हैं और मंदिर जाकर पूजा अर्चना करते हैं. सावन के सोमवार का अपना अलग महत्व भी है. इस व्रत में सादा खाना खाया जाता है, जिसमें अनाज नहीं होता. ऐसे में फ्रूट एंड नट खीर एक बहुत अच्छा ऑप्शन है, जो दूध, मखाने, फल और मेवों से बनती है और व्रत के दौरान शरीर को ताकत भी देती है.
आम खीर से कैसे अलग है ये खीर?
आमतौर पर खीर चावल और चीनी से बनाई जाती है, लेकिन व्रत वाली इस खीर में चावल की जगह मखाना डाला जाता है और साथ में ताजे फल व मेवे मिलाए जाते हैं. मखाना कमल के बीज से मिलता है और यह हल्का और पचाने में आसान होता है, इसलिए व्रत के खाने में बरसों से इस्तेमाल होता आ रहा है. मखाने की सबसे अच्छी बात यह है कि यह हमारे शरीर को जरूरी पोषण देता है और व्रत में भी शरीर की एनर्जी को बनाए रखता है.&amp;nbsp;
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खाने में क्या-क्या अच्छा मिलता है?
दूध और मखाने से शरीर को कैल्शियम मिलता है, जो हड्डियों के लिए अच्छा है. बादाम, काजू और पिस्ता जैसे मेवे दिल और त्वचा के लिए अच्छे माने जाते हैं. इसमें डाले गए ताजे फल भी शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं. यानी ये खीर सिर्फ स्वाद ही नहीं, सेहत के लिए भी अच्छी है.
जरूरी सामान

1 लीटर फुल-क्रीम दूध
2 कप मखाना
10 बादाम, कटे हुए
10 काजू, कटे हुए
8 पिस्ता, कटे हुए
2 टेबलस्पून किशमिश
1 सेब, कटा हुआ
आधा कप अनार के दाने
आधा टीस्पून इलायची पाउडर
2-3 टेबलस्पून गुड़ पाउडर या चीनी&amp;nbsp;
1 टीस्पून घी

बनाने का तरीका
सबसे पहले घी गर्म करके मखाने को हल्का कुरकुरा होने तक भून लें. आधे मखाने को हल्का सा तोड़ लें और बाकी आधे साबुत ही रहने दें. अब दूध को उबालें और थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाएं. इसमें टूटा हुआ और साबुत मखाना डाल दें, फिर बादाम, काजू, पिस्ता, किशमिश और इलायची पाउडर मिलाएं. खीर को थोड़ा ठंडा होने दें, उसके बाद कटे हुए फल डालें और सबको हल्के हाथों से मिला लें. अगर ठंडा खाना चाहें तो इसे फ्रिज में रख दें, और परोसने से पहले ऊपर से थोड़े और फल-मेवे डालकर सजा दें.
इसे और हेल्दी बनाने के आसान तरीके

फुल-क्रीम दूध की जगह लो-फैट दूध इस्तेमाल करें
मीठे फल ज्यादा डालें और चीनी या गुड़ की मात्रा कम रखें
मखाना भूनते समय ज्यादा घी न डालें
बादाम और पिस्ता की मात्रा थोड़ी बढ़ा दें
चिया सीड्स या अलसी के बीज भी डाल सकते हैं
ताजे और मौसमी फल ही इस्तेमाल करें












इस खीर में दूध, मखाना, फल और मेवे जैसी व्रत वाली चीजें ही डाली जाती हैं, इसलिए यह सावन सोमवार व्रत के लिए बिल्कुल सही है. इसे बिना चीनी के भी बनाया जा सकता है, क्योंकि पके हुए मीठे फलों से ही यह खीर काफी मीठी लगती है, चाहें तो थोड़ा गुड़ भी डाला जा सकता है. इसमें सेब, अनार, केला, अंगूर और चीकू जैसे फल अच्छे लगते हैं, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ इसे और अच्छा भी बनाते हैं.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Green Saree Makeup: ग्रीन साड़ी के साथ कौन&amp;सा मेकअप लगेगा बेस्ट? सावन में ऐसे लगें ट्रेंडी</title>
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        <description><![CDATA[ Green Saree Styling Tips For Sawan: सावन का महीना आते ही हरे रंग का क्रेज बढ़ जाता है. इस दौरान महिलाएं हरी साड़ी, हरी चूड़ियां और ट्रेडिशनल ज्वेलरी पहनना पसंद करती हैं. खासतौर पर हरियाली तीज, सावन सोमवार या घर में होने वाले किसी फंक्शन के लिए ग्रीन साड़ी खूबसूरत ऑप्शन हो सकती है. लेकिन साड़ी का पूरा लुक तभी निखरकर सामने आता है, जब उसके साथ मेकअप, ज्वेलरी और हेयरस्टाइल का सही कॉम्बिनेशन हो. अगर इस सावन आप भी ग्रीन साड़ी पहनने वाली हैं तो कुछ आसान स्टाइलिंग टिप्स आपके लुक को ट्रेडिशनल होने के साथ ट्रेंडी भी बना सकते हैं.
डार्क ग्रीन साड़ी के साथ रखें ऐसा मेकअप
अगर आप डार्क ग्रीन, बॉटल ग्रीन या एमराल्ड ग्रीन साड़ी पहन रही हैं तो इसके साथ थोड़ा बोल्ड मेकअप अच्छा लग सकता है. चेहरे पर बहुत ज्यादा फाउंडेशन लगाने की बजाय ऐसा बेस तैयार करें, जो स्किन को नेचुरल फिनिश दे. इसके बाद आंखों को हाइलाइट किया जा सकता है. डार्क ग्रीन साड़ी के साथ गोल्डन या ब्रॉन्ज आई मेकअप खूबसूरत कॉम्बिनेशन बना सकता है. आईलिड्स पर हल्का गोल्डन आईशैडो और काजल के साथ मस्कारा लगाया जा सकता है. फेस्टिव लुक चाहिए तो आईलाइनर को थोड़ा बोल्ड रखा जा सकता है. लिपस्टिक में रेड, डीप पिंक या न्यूड ब्राउन जैसे शेड्स चुने जा सकते हैं. अगर आंखों का मेकअप ज्यादा बोल्ड रखा है तो लिपस्टिक को थोड़ा सॉफ्ट रखें, ताकि पूरा लुक बैलेंस नजर आए.

लाइट ग्रीन साड़ी के साथ सॉफ्ट मेकअप
मिंट ग्रीन, पिस्ता ग्रीन या दूसरे हल्के हरे रंग की साड़ी सावन में फ्रेश लुक देती है. खासतौर पर दिन के समय होने वाले फंक्शन के लिए लाइट ग्रीन साड़ी चुनी है तो उसके साथ बहुत हैवी मेकअप करने की जरूरत नहीं है. ऐसी साड़ी के साथ सॉफ्ट और नेचुरल मेकअप अच्छा लग सकता है. आंखों पर हल्का ब्राउन, पीच या न्यूड आईशैडो लगाएं. पतला आईलाइनर और मस्कारा आंखों को बिना ज्यादा बोल्ड बनाए हाइलाइट कर सकता है. लिपस्टिक के लिए पिंक, पीच या न्यूड शेड्स चुन सकती हैं. गालों पर हल्का ब्लश और थोड़ा हाइलाइटर आपके मेकअप को फ्रेश फिनिश देगा.

बिंदी से पूरा करें सावन वाला लुक
ग्रीन साड़ी के साथ बिंदी पूरे ट्रेडिशनल लुक को बदल सकती है. अगर आपने डार्क ग्रीन साड़ी पहनी है तो रेड या मैरून बिंदी खूबसूरत लग सकती है. वहीं लाइट ग्रीन साड़ी के साथ छोटी लाल या ग्रीन बिंदी चुनी जा सकती है. सावन या हरियाली तीज के लिए तैयार हो रही हैं तो हरी चूड़ियां भी लुक में शामिल कर सकती हैं. इससे बिना ज्यादा एक्सेसरीज पहने भी ट्रेडिशनल टच मिल जाएगा.
ज्वेलरी भी चुनें साड़ी के हिसाब से
डार्क ग्रीन साड़ी के साथ गोल्ड ज्वेलरी क्लासिक कॉम्बिनेशन है. अगर किसी शादी, तीज या बड़े फंक्शन के लिए तैयार हो रही हैं तो गोल्डन झुमके, चूड़ियां और नेकलेस पहन सकती हैं. ज्यादा रॉयल लुक के लिए कुंदन या पोल्की ज्वेलरी भी ग्रीन साड़ी के साथ अच्छी लग सकती है. वहीं लाइट ग्रीन साड़ी के साथ पर्ल या ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर ज्वेलरी खूबसूरत कॉम्बिनेशन बना सकती है. दिन के फंक्शन में हल्के झुमके और पतला ब्रेसलेट भी काफी है. अगर साड़ी पहले से ही हैवी है तो बहुत ज्यादा ज्वेलरी पहनने से बचें.
हेयरस्टाइल से बढ़ाएं ट्रेडिशनल टच
ग्रीन साड़ी के साथ हेयरस्टाइल भी पूरे लुक में बड़ा फर्क डाल सकती है. अगर सावन में पूरी तरह ट्रेडिशनल लुक चाहती हैं तो बालों का स्लीक बन बनाकर उसमें ताजे फूल या गजरा लगाया जा सकता है. थोड़ा मॉडर्न लुक चाहिए तो मेसी बन बनाकर उसमें गोल्डन हेयर एक्सेसरीज लगा सकती हैं. वहीं सिंपल डे-टाइम लुक के लिए बालों को खुला रखकर सॉफ्ट वेव्स भी बनाई जा सकती हैं.
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ब्लाउज का कॉम्बिनेशन भी है खास
डार्क ग्रीन साड़ी के साथ गोल्डन या बेज ब्लाउज ट्रेडिशनल और रॉयल लुक दे सकता है. चाहें तो साड़ी के ही रंग का ब्लाउज पहनकर मोनोक्रोम लुक भी बनाया जा सकता है. लाइट ग्रीन साड़ी के साथ ब्लश पिंक या पेस्टल येलो ब्लाउज फ्रेश कॉम्बिनेशन बना सकता है. अगर कुछ मॉडर्न ट्राई करना चाहती हैं तो जैकेट या पेप्लम पैटर्न वाला ब्लाउज भी चुना जा सकता है.
मेकअप और एक्सेसरीज में रखें बैलेंस
ग्रीन साड़ी को स्टाइल करते समय सबसे जरूरी है कि मेकअप और ज्वेलरी के बीच बैलेंस बना रहे. अगर साड़ी और ज्वेलरी दोनों हैवी हैं तो मेकअप को थोड़ा सॉफ्ट रखें. वहीं सिंपल ग्रीन साड़ी के साथ आंखों या लिप्स में से किसी एक को हाइलाइट किया जा सकता है.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 15:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Make Dosa On Normal Pan: डोसा तवा नहीं है? नॉर्मल पैन पर भी बनेगा परफेक्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Make Dosa On Normal Pan: भारतीय घरों में डोसा खाना हर किसी को पसंद होता है. इसका नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है. क्योंकि यह एक ऐसा टेस्टी नाश्ता है, जिसे बच्चे हो या बड़े, सब चाव से खाते हैं. साउथ इंडिया की ये डिश अब पूरे देश में फेमस है. लेकिन कई बार घर पर डोसा बनाने का मन तो होता है, पर हमारे पास स्पेशल डोसा तवा नहीं होता. ऐसे में बहुत से लोग यह सोचकर डोसा बनाना छोड़ देते हैं कि नॉर्मल पैन या साधारण लोहे के तवे पर डोसा चिपक जाएगा और टूट जाएगा. अगर आपके पास डोसा तवा नहीं है, तो कोई टेंशन लेने की जरूरत नहीं. आप अपने घर में मौजूद नॉर्मल पैन या आम तवे पर भी क्रिस्पी और परफेक्ट डोसा बना सकते हैं.&amp;nbsp;
नॉर्मल पैन पर ऐसे बनाए डोसा
अगर आप साधारण कड़ाही या फ्राई पैन का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे सीधे गैस पर रखकर डोसा का घोल न डालें. सबसे पहले पैन को गैस पर कम आंच पर गर्म करें. जब पैन गर्म हो जाए, तो उस पर आधा चम्मच कुकिंग ऑयल डालें. फिर एक टिश्यू पेपर या साफ सूती कपड़े की मदद से उस तेल को पूरे पैन पर अच्छी तरह फैलाते हुए पोंछ लें. ऐसा करने से पैन की सतह चिकनी हो जाती है जिससे डोसा चिपकता नहीं है.&amp;nbsp;
लोहे के नॉर्मल तवे पर कैसे बनाए
अगर आप उस तवे का इस्तेमाल कर रहे हैं जिस पर रोज रोटियां बनती हैं, तो उस पर डोसा बनाना थोड़ा मुश्किल होता है. लेकिन इसके लिए एक बहुत पुराना और घरेलू नुस्खा है. इसमें आप सबसे पहले एक साबुत प्याज को बीच से आधा काट लें. फिर तवे पर थोड़ा सा तेल लगाएं और कटे हुए प्याज को पूरे तवे पर अच्छी तरह रगड़ें. क्योंकि प्याज का रस और तेल मिलकर लोहे के तवे पर एक ऐसी परत बना देते हैं जो बिल्कुल नॉन-स्टिक तवे की तरह काम करती है. ऐसा करने से &amp;nbsp;डोसा तवे पर चिपकेगा नहीं.
यह भी पढ़ें: मखाने की खीर में डाल दें बस यह चीज, दोगुना हो जाएगा स्वाद
कम आंच पर बनाएं डोसा
नॉर्मल पैन पर डोसा खराब होने का सबसे बड़ा कारण तवे का बहुत ज्यादा गर्म होना है. क्योंकि जब तवा बहुत गर्म हो जाता है, तो घोल डालते ही वह एक जगह चिपक जाता है और फैल नहीं पाता. साथ ही हर बार नया डोसा बनाने से पहले गर्म तवे पर पानी की कुछ बूंदें छिड़कें. इससे तवे का तापमान थोड़ा कम हो जाता है. पानी छिड़कने के बाद तवे को कपड़े से पोंछ लें और आंच को धीमा कर दें. इसके बाद ही डोसा का घोल तवे के बीच में डालें. जब डोसा पूरी तरह फैल जाए, उसके बाद ही गैस की आंच को तेज करें. क्योंकि तेज आंच पर ही डोसा क्रिस्पी और सुनहरा बनता है. साथ ही जब डोसा ऊपर से हल्का सूखने लगे और उसका रंग बदलने लगे, तब उस पर थोड़ा सा तेल, घी या बटर लगाएं. इससे डोसा नीचे से अच्छी तरह पकेगा और अपने आप किनारों को छोड़ने लगेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Spider Man Brand New Day: स्पाइडर&amp;मैन प्रीमियर में &amp;apos;स्पाइडी साड़ी&amp;apos; का ट्रेंड, टॉम&amp;जेंडया भी छाए</title>
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        <description><![CDATA[ Spider Man Brand New Day:&amp;nbsp;फिल्म &quot;स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे&quot; के लंदन प्रीमियर में कई बड़े सितारों ने महंगे और शानदार आउटफिट पहने, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में एक साड़ी रही. यह साड़ी लंदन में रहने वाली मेकअप आर्टिस्ट और ब्यूटी कंटेंट क्रिएटर आतिफा अर्शद ने पहनी थी, जिसे लोग &quot;स्पाइडी साड़ी&quot; कह रहे हैं. यह काले रंग की साड़ी लंदन की लेबनानी डिजाइनर रीता करनबाख ने डिजाइन की थी, जिस पर लाल रंग की बारीक कढ़ाई से स्पाइडर-मैन के मशहूर वेब पैटर्न जैसा डिजाइन बनाया गया था.&amp;nbsp;
इस साड़ी का पल्लू सबसे खास था, जिस पर बड़ा सा स्पाइडरवेब यानी मकड़ी के जाले जैसा डिजाइन बना हुआ था, जो जमीन तक फैला हुआ था. हालांकि साड़ी को डिजाइन रीता ने किया था, लेकिन इसे आतिफा के परिवार के दर्जी ने पाकिस्तान में सिला था.&amp;nbsp;



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टॉम होलैंड और जेंडया ने भी दिखाई स्पाइडर-मैन थीम
इस प्रीमियर में फिल्म के मुख्य कलाकार और असल जिंदगी में कपल टॉम होलैंड और जेंडया ने भी स्पाइडर-मैन थीम को अपने कपड़ों में उतारा.&amp;nbsp; टॉम होलैंड ने अपनी मरून रंग की टाई पर एक शानदार स्पाइडर ब्रोच लगाया, जिसमें कई रंगों वाला पत्थर लगा हुआ था और जिसके पैर सोने के बने हुए थे. वहीं जेंडया की गाउन की पीठ पर एक चमकदार सुनहरा स्पाइडर ब्रोच लगा हुआ था, जो स्पाइडर-मैन को खास तरीके से श्रद्धांजलि देता था.&amp;nbsp;



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यह भी पढ़ेंः Madras Checks Fashion Trend: फैशन की दुनिया में फिर लौटे मद्रास चेक्स, जानें क्या है नया?
फैंस और सोशल मीडिया पर मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स
आतिफा अर्शद की स्पाइडी साड़ी को सोशल मीडिया पर लोगों ने बहुत पसंद किया और इसकी जमकर तारीफ हुई. कई फैशन जानकारों का कहना है कि इतने सारे महंगे कपड़ों के बीच एक साड़ी का सबसे ज्यादा चर्चा में आना अपने आप में बड़ी बात है. टॉम होलैंड और जेंडया की जोड़ी को भी रेड कार्पेट पर साथ पोज देते हुए फैंस ने बहुत पसंद किया, क्योंकि दोनों ने अपने कपड़ों के जरिए फिल्म की थीम को खूबसूरती से दिखाया.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Best Time To Mop House: रात में पोछा लगाना सही या गलत? जान लें सफाई एक्सपर्ट्स का जवाब ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Monsoon Humidity Tips: हल्की सी बारिश हो गई है उमस? बगैर एसी ऐसे रखें अपने रूम को ठंडा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/monsoon-humidity-tips-हल्की-सी-बारिश-हो-गई-है-उमस-बगैर-एसी-ऐसे-रखें-अपने-रूम-को-ठंडा</link>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Humidity Tips: हल्की बारिश हुई नहीं कि गर्मी की जगह उमस ने डेरा जमा लिया. पंखा कूलर पूरी स्पीड पर चल रहा है, फिर भी कमरा भट्टी जैसा महसूस हो रहा है. दरअसल मानसून की यही सबसे बड़ी परेशानी है, तापमान भले कम हो जाए, लेकिन हवा में नमी इतनी बढ़ जाती है, कि बिना एसी घर में रहना मुश्किल हो जाता है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान देसी तरीकों से इस उमस को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.
बारिश रुकते ही करें सही वेंटिलेशन
जैसे ही बारिश रुके, पहले बाहर का मौसम देखें. अगर बाहर की हवा में ज्यादा नमी नहीं है, तो कुछ देर के लिए खिड़कियां और दरवाजे खोल दें. साथ ही पंखा या एग्जॉस्ट फैन चलाएं, ताकि कमरे की बंद और नमी वाली हवा बाहर निकल सके. हालांकि अगर बाहर भी ज्यादा उमस हो, तो खिड़कियां बंद रखना बेहतर रहेगा.
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बर्फ और टेबल फैन का जबरदस्त जुगाड़
जब सीलिंग फैन भी गर्म हवा फेंकने लगे, तो यह ट्रिक आजमाएं. एक बड़े कटोरे में ढेर सारी बर्फ डालें और उसे टेबल फैन या पेडेस्टल फैन के ठीक सामने रख दें. पंखे की हवा जब बर्फ से टकराकर कमरे में फैलती है, तो नमी सोखते हुए एकदम ठंडी और ताजा हवा देती है, ठीक वैसे ही जैसे किसी हल्के एसी का एहसास हो.
पंप बंद रखने की समझदारी दिखाएं
अक्सर लोग कूलर ऑन करते ही पानी वाला पंप भी तुरंत चालू कर देते हैं, और यही सबसे बड़ी गलती है. बंद कमरे में लगातार पानी चलने से हवा में मॉइस्चर बहुत बढ़ जाता है, नतीजा कमरा ठंडा होने के बजाय उमस से भर जाता है. सही तरीका यह है, कमरा जैसे ही थोड़ा ठंडा हो जाए, पंप बंद कर सिर्फ फैन मोड पर कूलर चलाएं.
जान लें यह राज
गर्मी और उमस के मौसम में मिट्टी का घड़ा आसपास के माहौल को ठंडा महसूस कराने में मदद करता है. वहीं एलोवेरा, स्नेक प्लांट और तुलसी जैसे इनडोर पौधे हवा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के साथ रूम को फ्रेश रखने में भी मददगार हो सकते हैं.
दोपहर में पर्दे बंद रखना न भूलें
धूप सीधे कमरे में आने से गर्मी और उमस दोनों बढ़ जाती हैं. दिन में जब सूरज तेज हो, उस वक्त खिड़कियों के पर्दे बंद रखें, इससे कमरे का तापमान काफी हद तक नियंत्रण में रहता है.
कमरे को खाली और साफ रखना भी है जरूरी
कमरे में जितना ज्यादा सामान भरा होगा, हवा का घूमना उतना ही मुश्किल हो जाएगा. भारी फर्नीचर, बेकार की चीजें और ज्यादा कपड़े हटाकर कमरे को खुला रखें, जिससे हवा आसानी से पूरे कमरे में सर्कुलेट हो सके. साथ ही पीले बल्ब की जगह एलईडी लाइट का इस्तेमाल करें, क्योंकि पीले बल्ब सामान्य एलईडी से कहीं ज्यादा गर्मी छोड़ते हैं.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chana Dal Cooking Tips: चने की दाल नहीं पक रही? जानें दाल गलाने के आसान टिप्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chana-dal-cooking-tips-चने-की-दाल-नहीं-पक-रही-जानें-दाल-गलाने-के-आसान-टिप्स</link>
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        <description><![CDATA[ Chana Dal Cooking Tips:&amp;nbsp;अक्सर हर घर में रोजाना खाने में रोटी-सब्जी के साथ दाल बन ही जाती है. वैसे तो दाल को बनाने में उतनी मेहनत नहीं होती है, केवल कुकर में 3 से 4 सीटी में दाल बन जाती है. लेकिन कई बार जब चने की दाल बना रहे होते हैं, तो यह दिक्कत आती है कि इस दाल को कितनी देर भी पकाओ, फिर भी यह पूरी तरह नहीं गलती और सख्त ही रहती है. इसके पीछे किसी को समझ नहीं आता कि आखिर ऐसा क्यों होता है.
ऐसे में आपको बता दें कि इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं. जैसे शायद आपकी दाल पुरानी हो. क्योंकि बहुत दिनों से रखी दाल जल्दी नहीं गलती है, क्योंकि उसमें मौजूद नमी सूख जाती है और वह सख्त हो जाती है. वहीं दूसरी वजह है दाल बनाते वक्त पानी की सही मात्रा न होना. अगर दाल में कम पानी डाला जाए, तो वह ठीक से नहीं पकती है. इसके अलावा अगर पानी में आपने पहले से ही खट्टी चीज डाल दी हो, जैसे टमाटर या नमक, तो इसमें दाल गलने में काफी समय लगता है. इसलिए दाल बनाने से पहले जरूरी है कि आपको सही बात की जानकारी हो, ताकि दाल आसानी से और सही तरीके से बन जाए.
दाल गलाने के आसान और असरदार तरीके
चने की दाल को बनाने का सबसे पहला और आसान तरीका है दाल को बनाने से पहले उसे पानी में भिगोकर रखना. दाल को कम से कम 1 से 2 घंटे पहले पानी में भिगो दें, इससे दाना पानी सोख लेता है और जल्दी नरम हो जाता है. वहीं अगर आपको जल्दी बनाना हो और आपके पास समय कम हो, तो आप दाल को गुनगुने पानी में भिगोकर 10 से 15 मिनट तक रख दें. इससे भी दाल जल्दी फूल जाती है. साथ ही दाल पकाते समय एक चुटकी बेकिंग सोडा डालने से भी दाल जल्दी गल जाती है, क्योंकि सोडा दाल के छिलके को नरम कर देता है. हालांकि बेकिंग सोडा बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं डालना चाहिए, वरना दाल का स्वाद बदल सकता है. इसके अलावा प्रेशर कुकर में दाल पकाते समय अगर 4 से 5 सीटी आने के बाद भी दाल सख्त लगे, तो गैस धीमी करके कुकर को कुछ देर और चढ़ा रहने दें. इससे भाप अंदर ही अंदर दाल को अच्छी तरह गला देती है.
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दाल बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान
दाल पकाते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से दाल आसानी से गल जाती है. सबसे जरूरी बात यह है कि नमक, टमाटर या नींबू जैसी खट्टी चीजें दाल के पूरी तरह गलने के बाद ही डालें. शुरू में डालने से दाल सख्त रह जाती है. दाल में पानी की मात्रा हमेशा जरूरत से थोड़ी ज्यादा रखें, ताकि पकाते समय पानी कम न पड़े. अगर दाल पुरानी लग रही हो, तो उसे थोड़ी देर ज्यादा भिगोकर रखें. साथ ही दाल खरीदते समय हमेशा ताजी और अच्छी क्वालिटी की दाल चुनें. इससे पकाने में कम समय लगता है और स्वाद भी बेहतर आता है.
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        <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Girlfriend Period Blood: गर्लफ्रेंड का पीरियड ब्लड फ्रीज कर रहा ये शख्स, इससे कैसे बढ़ेगी उम्र?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/girlfriend-period-blood-गर्लफ्रेंड-का-पीरियड-ब्लड-फ्रीज-कर-रहा-ये-शख्स-इससे-कैसे-बढ़ेगी-उम्र</link>
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        <description><![CDATA[ Bryan Johnson Girlfriend Period Blood Experiment: लंबी उम्र पाने और बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने के लिए दुनियाभर में तरह-तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं. इन्हीं प्रयोगों के लिए मशहूर टेक कारोबारी ब्रायन जॉनसन एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनकी गर्लफ्रेंड के पीरियड्स के खून को जमा करके रखना है. जॉनसन ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड केट टोलो के पीरियड्स के ब्लड का सेंपल बेहद कम तापमान पर सुरक्षित रखा है. इसके बाद से सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा करने की जरूरत क्या है और क्या इससे सच में उम्र बढ़ाने में कोई मदद मिल सकती है?
ब्रायन जॉनसन लंबे समय से बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने के लिए अपने शरीर पर कई तरह के प्रयोग करते रहे हैं. वह हर साल इन प्रयोगों पर लाखों डॉलर खर्च करते हैं. उन्होंने हाल ही में बताया कि अपनी गर्लफ्रेंड के पीरियड्स के करीब 10 मिलीलीटर खून को लैब के एक स्पेशल टेक्निक में शून्य से 80 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान पर सुरक्षित रखा गया है. जानकारी सामने आते ही इंटरनेट पर चर्चा शुरू हो गई. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि लंबी उम्र पाने की उनकी कोशिश कहीं हद से आगे तो नहीं बढ़ रही है. वहीं, कुछ लोगों ने इसके पीछे छिपी साइंटफिक संभावनाओं में दिलचस्पी दिखाई.
क्यों जमा किया गर्लफ्रेंड का पीरियड्स का खून?
जॉनसन का कहना है कि पीरियड्स के खून को सुरक्षित रखने के पीछे मकसद कोई सनसनीखेज प्रयोग करना नहीं, बल्कि इससे स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां हासिल करना है. उनके मुताबिक, पीरियड्स का खून शरीर के बारे में ऐसी जानकारी दे सकता है, जो सामान्य खून की जांच से मिलना मुश्किल हो सकता है. इसकी वजह यह है कि पीरियड्स का खून सीधे यूट्रस से आता है. इसमें यूट्रस की सेल्स के साथ इम्यून से जुड़ी सेल्स और मूल सेल्स भी मिल सकती हैं. इनका अध्ययन करके यूट्रस और महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने की संभावना तलाशी जा रही है.

इसके अलावा जॉनसन का दावा है कि इस खून की जांच से शरीर में मौजूद बेहद छोटे प्लास्टिक कणों और लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहने वाले कुछ हानिकारक रसायनों का भी पता लगाया जा सकता है. साइंटिस्ट इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि ऐसे पदार्थों का इंसान के स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.
क्या इससे सच में बढ़ सकती है उम्र?
यह समझना जरूरी है कि पीरियड्स के खून को जमा करके रखने से सीधे किसी व्यक्ति की उम्र बढ़ने का अभी कोई प्रमाण नहीं है. न तो इससे ब्रायन जॉनसन की उम्र बढ़ेगी और न ही इसे उनकी गर्लफ्रेंड की उम्र बढ़ाने वाला कोई इलाज माना जा सकता है.

इसके पीछे विचार यह है कि अगर पीरियड्स के खून की जांच से शरीर में होने वाले बदलाव, यूट्रस से जुड़ी समस्याएं या हानिकारक पदार्थों का समय रहते पता लगाया जा सके तो भविष्य में स्वास्थ्य की निगरानी में मदद मिल सकती है. बीमारियों या स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को जल्दी पहचानने की ऐसी कोशिशों को लंबी और स्वस्थ जिंदगी से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, यह अभी शोध का विषय है और इसे उम्र बढ़ाने का प्रमाणित तरीका नहीं कहा जा सकता.
एक्सपर्ट ने इसको लेकर क्या बताया?
मुंबई की प्रजनन एक्सपर्ट डॉ. प्रज्ञा शेट्टी के मुताबिक, इस मामले को जिस तरह लोगों के सामने पेश किया गया है, वह कुछ लोगों को असहज कर सकता है, लेकिन इसके पीछे का साइंटफिक विचार बेबुनियाद नहीं है. उनका कहना है कि मासिक धर्म के दौरान निकलने वाले ऊतक खास हैं, क्योंकि शरीर इन्हें हर महीने बाहर निकालता है और फिर से तैयार करता है. इसी वजह से इनके जरिए बिना किसी बड़ी चिकित्सकीय प्रक्रिया के गर्भाशय के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी हासिल करने की संभावना है.
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डॉ. शेट्टी के मुताबिक, दुनियाभर में रिसर्चर पीरियड्स के खून की मदद से एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी की पहचान करने की संभावनाओं पर भी काम कर रहे हैं. इस बीमारी का पता लगाने में कई बार सात से दस साल तक का समय लग सकता है. अगर भविष्य में &amp;nbsp;पीरियड्स के खून से इसकी पहचान आसान होती है तो महिलाओं को बड़ी चिकित्सकीय जांच से बचाने में मदद मिल सकती है.
शून्य से 80 डिग्री नीचे क्यों रखा खून?
डॉ. शेट्टी ने यह भी साफ किया कि मासिक धर्म के खून को शून्य से 80 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान पर रखना अपने आप में कोई असामान्य बात नहीं है. शोध के लिए बॉयोलॉजिकल सेंपल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए बेहद कम तापमान का इस्तेमाल किया जाता है. उनके मुताबिक, मासिक धर्म के खून में बेहद छोटे प्लास्टिक कणों और कुछ हानिकारक केमिकल की तलाश भी महत्वपूर्ण हो सकती है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>How to Store Roti: रोटी टाइट हो जाती है? ऐसे करेंगे स्टोर तो घंटो रहेगी मुलायम</title>
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How to Store Roti: अक्सर हर घर में रोजाना रोटी बनती ही है. रोटी के बिना हर खाना अधूरा ही लगता है. ऐसे में हर घर में यह समस्या देखी जाती है कि सुबह बनाई गई नरम रोटी कुछ ही देर में सख्त और टाइट हो जाती है. खासकर जब रोटी टिफिन में पैक करनी हो या बाद में खानी हो, तो यह परेशानी और बढ़ जाती है. असल में रोटी सख्त इसलिए होती है क्योंकि उसमें मौजूद नमी हवा के संपर्क में आते ही उड़ने लगती है. लेकिन क्या आप जानते हैं, अगर आप रोटी बनाने के तुरंत बाद उसे सही तरीके से स्टोर करते हैं, तो वह घंटों तक नरम और स्वादिष्ट बनी रह सकती है. इसके लिए आपको किसी खास सामान की जरूरत नहीं होती, बस कुछ आसान तरीके अपनाने होते हैं.
गरम रोटी को कपड़े और घी से नरम बनाए रखें









सबसे पहला और जरूरी तरीका है रोटी को गरम रहते हुए ही एक साफ सूती कपड़े में लपेटना. जैसे ही रोटी तवे से उतरे, उसे तुरंत एक मोटे सूती कपड़े में रखें और ऊपर से अच्छी तरह ढक दें. कपड़ा रोटी की भाप को अंदर ही रोक लेता है, जिससे रोटी में नमी बनी रहती है और वह देर तक मुलायम रहती है. इसके अलावा रोटी बनाते समय हल्का सा घी या मक्खन लगाना भी फायदेमंद होता है. घी न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है बल्कि रोटी की सतह पर एक हल्की परत बना देता है, जिससे नमी बाहर नहीं निकल पाती. जिन लोगों को घी पसंद नहीं है, वे हल्का पानी का हाथ भी रोटी पर लगा सकते हैं, इससे भी रोटी नरम बनी रहती है.&amp;nbsp;
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हॉट केस और फॉयल से रोटी को घंटों गरम रखें
दूसरा तरीका है रोटी को हॉट केस या कैसरोल में रखना. बाजार में मिलने वाले हॉट केस अंदर की गर्मी और भाप को लंबे समय तक बनाए रखते हैं, जिससे रोटी घंटों तक गरम और मुलायम बनी रहती है. रोटी को कपड़े में लपेटकर सीधे हॉट केस में रखें, इससे दोहरी सुरक्षा मिलती है. अगर टिफिन में रोटी पैक करनी है, तो उसे एल्युमिनियम फॉयल में लपेटें, इससे भाप अंदर ही बनी रहती है और रोटी शाम तक भी नरम रहती है. एक बात का खास ध्यान रखें कि रोटियों को एक-दूसरे के ऊपर सीधे न रखें, बल्कि हर रोटी के बीच पतला कपड़ा या फॉयल रखें ताकि हवा अंदर न जा सके और नमी बराबर बनी रहे. साथ ही रोटी को कभी भी खुली हवा या पंखे के नीचे न रखें, क्योंकि हवा लगने से रोटी बहुत जल्दी सूख जाती है.
तीसरी और आखिरी जरूरी बात यह है कि रोटी को कभी भी फ्रिज में सीधे बिना ढके न रखें, क्योंकि फ्रिज की ठंडी और सूखी हवा रोटी से नमी खींच लेती है और वह जल्दी सख्त हो जाती है. अगर रोटी को कुछ घंटों बाद ही खाना है तो उसे कमरे के तापमान पर हॉट केस या कपड़े में ही रखें वहीं अगर बाद में खानी है तो एयरटाइट डिब्बे में कपड़े के साथ रखकर फ्रिज में रख सकते हैं और खाने से पहले हल्का गरम कर लें. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से रोटी घंटों तक ताजा, नरम और स्वादिष्ट बनी रहती है और खाने का असली मजा भी बना रहता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Kunal Khemu Kashmir House Tour: कुनाल खेमू के कश्मीर वाले घर का टूर, देखें कैसा है इंटीरियर?</title>
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        <description><![CDATA[ Kunal Khemu Kashmir House Tour: कुनाल खेमू के कश्मीर वाले घर का टूर, देखें कैसा है इंटीरियर? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Madras Checks Fashion Trend: फैशन की दुनिया में फिर लौटे मद्रास चेक्स, जानें क्या है नया?</title>
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        <description><![CDATA[ Madras Checks Fashion Trend: फैशन की दुनिया में फिर लौटे मद्रास चेक्स, जानें क्या है नया? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Text Neck Syndrome : मोबाइल की लत बना रही है गर्दन को बूढ़ा, जानें कैसे?</title>
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        <description><![CDATA[ Text Neck Syndrome : आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसके हाथ में दिनभर मोबाइल न रहता हो. सुबह उठते ही फोन देखना, घंटों सोशल मीडिया चलाना, ऑनलाइन काम करना, वीडियो देखना और चैटिंग करना अब लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है. यही आदत धीरे-धीरे हमारी सेहत पर भारी पड़ रही है.
लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर झुक कर देखने की वजह से गर्दन पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे एक ऐसी समस्या तेजी से बढ़ रही है जिसे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम कहा जाता है. विशेषज्ञ इसे डिजिटल दौर की ऐसी परेशानी मानते हैं, जो समय से पहले गर्दन और रीढ़ की हड्डी को कमजोर बना सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मोबाइल की लत कैसे गर्दन को बूढ़ा बना रही है, टेक्स्ट नेक सिंड्रोम क्या है और इसके लक्षण क्या हैं
क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम?
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम गर्दन और सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी एक समस्या है, जो लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन देखने के लिए सिर को आगे झुकाकर रखने से होती है. लगातार गलत पोश्चर में रहने से गर्दन की मांसपेशियों, रीढ़ की हड्डी और कंधों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने लगता है. सामान्य स्थिति में इंसान के सिर का वजन लगभग 10 से 12 पाउंड माना जाता है, लेकिन जैसे-जैसे सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन पर पड़ने वाला दबाव तेजी से बढ़ जाता है. केवल 15 डिग्री झुकने पर यह दबाव लगभग 27 पाउंड तक पहुंच जाता है, जबकि 60 डिग्री तक सिर झुकाने पर गर्दन को लगभग 60 पाउंड तक का भार महसूस हो सकता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर की बनावट और रीढ़ की हड्डी पर भी असर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
मोबाइल की लत कैसे बना रही है गर्दन को बूढ़ा?
लगातार मोबाइल देखने की आदत के कारण लोग घंटों तक गर्दन झुकाकर बैठे रहते हैं. इससे गर्दन की मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं और धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. समय के साथ यह दबाव रीढ़ की हड्डी की सामान्य स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है. इसी वजह से कई विशेषज्ञ इसे डिजिटल एजिंग या गर्दन के समय से पहले बूढ़ा होने की समस्या भी मानते हैं.&amp;nbsp;
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के क्या हैं लक्षण?
अगर किसी व्यक्ति को टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की समस्या हो रही है तो उसे कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं. जैसे गर्दन में लगातार दर्द और अकड़न, कंधों में दर्द या जकड़न, पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, सिरदर्द, गर्दन को घुमाने में परेशानी, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन, हाथों और उंगलियों में सुन्नपन, शरीर के पोश्चर में बदलाव, जैसे झुके हुए कंधे या आगे निकली गर्दन. अगर इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो समस्या और गंभीर हो सकती है.&amp;nbsp;
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टेक्स्ट नेक सिंड्रोम क्यों होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह मॉडर्न लाइफस्टाइल है. लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करना, घंटों लैपटॉप पर गलत तरीके से बैठकर काम करना, बिना ब्रेक लिए लगातार स्क्रीन देखना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना इस समस्या का मुख्य कारण माना जाता है. खराब एर्गोनॉमिक्स यानी सही बैठने की व्यवस्था न होना भी गर्दन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा देता है.&amp;nbsp;
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम से बचने के लिए क्या करें?
इस समस्या से बचने के लिए सबसे पहले मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करना जरूरी है. मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करते समय स्क्रीन को आंखों के बराबर रखने की कोशिश करें. बैठते समय रीढ़ सीधी रखें और कंधों को पीछे की ओर रखें. हर 20 मिनट बाद कुछ सेकंड का ब्रेक लें .गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग भी फायदेमंद हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 11:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>World Lung Cancer Day: भारत में लंग कैंसर के 50% मरीज नॉन स्मोकर्स, फिर क्यों हो रहे बीमार?</title>
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        <description><![CDATA[ Lung Cancer Causes In Non Smokers: हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे मनाया जाता है. लंग कैंसर का नाम सुनते ही सबसे पहले सिगरेट और स्मोकिंग का ख्याल आता है. लंबे समय से स्मोकिंग को लंग कैंसर का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर माना जाता रहा है. लेकिन भारत में अब इस बीमारी की तस्वीर बदल रही है. डॉक्टरों के मुताबिक, महिलाओं, कम उम्र के लोगों और ऐसे लोगों में भी लंग कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने जिंदगी में कभी सिगरेट नहीं पी.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, लंग कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है. भारत में भी डॉक्टर अब ऐसे मरीजों को देख रहे हैं, जो लंग कैंसर के पारंपरिक हाई रिस्क ग्रुप में शामिल नहीं हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि नॉन-स्मोकर्स को लंग कैंसर क्यों हो रहा है और किन टेस्ट की मदद से बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सकता है?
नॉन-स्मोकर्स को क्यों हो रहा लंग कैंसर?
आकाश हेल्थकेयर में रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट और हेड डॉ. अक्षय बुधराजा के मुताबिक, लंग कैंसर के मरीजों की प्रोफाइल में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. डॉ. अक्षय बुधराजा का कहना है कि स्मोकिंग न करने वाली महिलाओं में भी लंग कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं. इसके पीछे इंडोर एयर पॉल्यूशन, खाना पकाने के लिए बायोमास फ्यूल का इस्तेमाल, सेकेंड हैंड स्मोक और काम करने की जगह पर हानिकारक चीजों के संपर्क में आना जैसी वजहें हो सकती हैं.
उनके मुताबिक, भारतीय महिलाओं में तंबाकू का इस्तेमाल 10 प्रतिशत से कम है. ऐसे में खराब होती एयर क्वालिटी और घर के अंदर मौजूद पॉल्यूशन को इसकी संभावित वजहों में देखा जा रहा है.

डॉ. बुधराजा का कहना है कि अब अस्पतालों में केवल 60 साल से ज्यादा उम्र के ऐसे मरीज नहीं आ रहे, जिन्होंने लंबे समय तक स्मोकिंग की हो. कम उम्र के लोग, महिलाएं और जिंदगी में कभी सिगरेट न पीने वाले लोग भी लंग कैंसर के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं. एयर पॉल्यूशन, काम की जगह पर हानिकारक चीजों का संपर्क और जेनेटिक कारण इसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.
स्मोकिंग अभी भी सबसे बड़ा खतरा
नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के मामले सामने आने का मतलब यह नहीं है कि सिगरेट से होने वाला खतरा कम हो गया है. डॉ. अक्षय बुधराजा के मुताबिक, स्मोकिंग करने वालों में नॉन-स्मोकर्स के मुकाबले लंग कैंसर का खतरा करीब 20 गुना ज्यादा हो सकता है. वहीं, खुद सिगरेट न पीने के बावजूद दूसरे लोगों की सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहना यानी सेकेंड हैंड स्मोक भी खतरा बढ़ा सकता है. घर या काम की जगह पर लगातार सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहने वाले लोगों को भी इसका नुकसान हो सकता है.

इसके अलावा रेडॉन गैस भी लंग कैंसर का एक रिस्क फैक्टर है. यह घर के अंदर मौजूद हो सकती है और आमतौर पर इसका आसानी से पता नहीं चलता. घर में रेडॉन गैस की मौजूदगी का पता टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है.
एयर पॉल्यूशन भी बढ़ा रहा खतरा
सिर्फ बाहर का एयर पॉल्यूशन ही नहीं, घर के अंदर की खराब हवा भी लंग्स के लिए नुकसानदायक हो सकती है. खाना बनाने के दौरान लकड़ी, कोयला या दूसरे बायोमास फ्यूल से निकलने वाला धुआं और घर में हवा की आवाजाही ठीक न होना लंबे समय तक लंग्स को प्रभावित कर सकता है. कुछ लोगों को काम के दौरान धूल, धुएं, केमिकल और दूसरी हानिकारक चीजों के संपर्क में रहना पड़ता है. इसे ऑक्यूपेशनल एक्सपोजर कहा जाता है. डॉक्टर इसे भी लंग कैंसर के संभावित रिस्क फैक्टर में शामिल करते हैं. इसके अलावा कुछ लोगों में जेनेटिक कारण भी बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं.
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70 से 80 प्रतिशत मरीज देर से पहुंचते हैं अस्पताल
भारत में लंग कैंसर के इलाज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बीमारी का देर से पता चलना है. एक्शन कैंसर हॉस्पिटल, दिल्ली के एक्शन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल ऑन्कोलॉजी एंड इम्यूनोथेरेपी के डायरेक्टर डॉ. जे.बी. शर्मा के मुताबिक, करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं, जब लंग कैंसर स्टेज 3 या स्टेज 4 तक पहुंच चुका होता है. इसकी एक बड़ी वजह शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना है. लगातार खांसी, सीने में परेशानी और सांस फूलने जैसे लक्षणों को कई लोग सामान्य इंफेक्शन या पॉल्यूशन से होने वाली एलर्जी समझ लेते हैं. इसी वजह से सही जांच और इलाज शुरू होने में देरी हो सकती है.
कौन-से टेस्ट कराने चाहिए?
एक्सपर्ट मुताबिक, लो-डोज सीटी यानी एलडीसीटी स्कैन और मॉलिक्यूलर बायोमार्कर टेस्टिंग जैसी जांच लंग कैंसर को जल्दी पकड़ने में मदद कर सकती हैं. इनकी मदद से कुछ मामलों में ट्यूमर को शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने से पहले पहचाना जा सकता है. हालांकि, हर व्यक्ति को अपने आप एलडीसीटी स्कैन कराने की जरूरत नहीं होती. उम्र, स्मोकिंग हिस्ट्री और दूसरे रिस्क फैक्टर को देखकर डॉक्टर तय कर सकते हैं कि किस व्यक्ति को लंग कैंसर की स्क्रीनिंग की जरूरत है.
अगर लंबे समय से खांसी बनी हुई है, सांस लेने में परेशानी हो रही है या सीने में लगातार तकलीफ है तो इसे केवल पॉल्यूशन या सामान्य इंफेक्शन मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
जेनेटिक टेस्ट से कैसे तय होता है इलाज?
स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु के सीनियर कंसल्टेंट-सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. पलानीअप्पन रामनाथन के मुताबिक, लंग कैंसर का इलाज अब हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं रह गया है. अब कैंसर की खासियत को समझकर मरीज के लिए इलाज तय किया जा सकता है. जीनोमिक प्रोफाइलिंग की मदद से ईजीएफआर, एएलके और आरओएस1 जैसे म्यूटेशन की पहचान की जा सकती है. इनके मिलने पर डॉक्टर कुछ मरीजों को टारगेटेड ओरल थेरेपी दे सकते हैं. वहीं, एडवांस स्टेज के मरीजों में इम्यूनोथेरेपी ने भी इलाज के तरीके को बदला है. इसमें शरीर के इम्यून सिस्टम की मदद से कैंसर सेल्स से लड़ने की कोशिश की जाती है.
कैंसर का डर भी करा  ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Mosquito Control Tips: बारिश में घर में बढ़ रहे हैं मच्छर&amp;मक्खी, तुरंत अपनाएं ये उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ Dengue And Malaria Prevention Tips At Home: मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन बारिश के साथ घर में मच्छर, मक्खियां और दूसरे कीड़े-मकौड़ों की समस्या भी बढ़ने लगती है. घर के आसपास जमा पानी, नमी और खुला पड़ा खाना इन्हें आकर्षित कर सकता है. मच्छरों की कुछ प्रजातियां मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां भी फैला सकती हैं. ऐसे में बारिश के दिनों में घर की साफ-सफाई के साथ कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
मच्छर और मक्खियों से बचने के लिए लोग अक्सर नीम का तेल, लौंग, दालचीनी और सिट्रोनेला जैसे घरेलू उपाय अपनाते हैं. इनमें से कुछ चीजों को लेकर रिसर्च भी हुई है, लेकिन केवल इन्हीं उपायों पर निर्भर रहने के बजाय घर में उन जगहों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है, जहां से कीड़े अंदर आते हैं या उन्हें पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिलता है.
घर के आसपास पानी जमा न होने दें
मच्छरों को घर से दूर रखने के लिए सबसे पहले जमा पानी पर ध्यान दें. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की डेंगू से बचाव संबंधी जानकारी के अनुसार, डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर साफ और रुके हुए पानी में अंडे दे सकते हैं. इसलिए घर में पानी जमा होने वाली छोटी से छोटी जगह की नियमित जांच जरूरी है. कूलर, बाल्टी, गमलों के नीचे रखी ट्रे, एसी की ट्रे या दूसरी ऐसी जगहों पर पानी कई दिनों तक जमा न रहने दें. पानी स्टोर करने वाले बर्तनों को ढककर रखें और नियमित रूप से साफ करें. बारिश के बाद बालकनी या छत पर रखे सामान में भी पानी जमा हो सकता है, इसलिए इन जगहों को नजरअंदाज न करें.

खिड़की-दरवाजों से बंद करें एंट्री
घर कितना भी साफ क्यों न हो, अगर खिड़कियों और दरवाजों से मच्छर-मक्खियां आसानी से अंदर आ रहे हैं तो परेशानी बनी रहेगी. खिड़कियों और वेंटिलेशन वाली जगहों पर अच्छी तरह फिट होने वाली जाली लगाना इन्हें रोकने का आसान तरीका हो सकता है. दरवाजों और खिड़कियों के आसपास कोई गैप है तो उसे भी बंद करवाएं. खासकर शाम के समय दरवाजे लंबे समय तक खुले रखने से बचें. इस तरह किसी केमिकल या घरेलू नुस्खे पर निर्भर हुए बिना ही काफी हद तक कीड़ों की एंट्री कम की जा सकती है.
खाना खुला छोड़ने की आदत बदलें
मक्खियों और कॉकरोच को खाने की चीजें और कचरा आकर्षित कर सकते हैं. इसलिए किचन काउंटर पर खाना खुला न छोड़ें. पके हुए भोजन को ढककर रखें और खाने के बाद काउंटर तथा डाइनिंग टेबल पर गिरे टुकड़ों को साफ कर दें. किचन के कूड़ेदान के लिए ढक्कन वाले डस्टबिन का इस्तेमाल करना बेहतर है. कचरा लंबे समय तक घर के अंदर जमा करके रखने से भी बचें. सिंक में रातभर गंदे बर्तन छोड़ना भी कीड़ों को आकर्षित कर सकता है, इसलिए किचन को जितना संभव हो साफ और सूखा रखें.\

घर में नमी को न करें नजरअंदाज
मानसून में घर के अंदर नमी बढ़ना आम समस्या है. बाथरूम, किचन और कम हवादार कमरों में नमी ज्यादा समय तक रह सकती है. ऐसे में एग्जॉस्ट फैन चलाना और जहां संभव हो वहां वेंटिलेशन बेहतर रखना फायदेमंद हो सकता है. लकड़ी के फर्नीचर को भी लगातार नमी से बचाना चाहिए. नम लकड़ी दीमक के लिए अनुकूल हो सकती है. इसलिए लकड़ी के फर्नीचर को सूखा रखें और दीवार में सीलन होने पर फर्नीचर को उससे सटाकर रखने से बचें.
नीम का तेल कहां आ सकता है काम?
नीम के तेल को लेकर हुई कुछ रिसर्च में लकड़ी को दीमक से बचाने में इसके संभावित फायदे सामने आए हैं. ऐसे में इसे लकड़ी के फर्नीचर की सुरक्षा के लिए बचाव के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, अगर फर्नीचर में पहले से बहुत ज्यादा दीमक लग चुकी है तो केवल नीम के तेल पर निर्भर रहने के बजाय जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल पेस्ट कंट्रोल की मदद लेना बेहतर हो सकता है.
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लौंग और दालचीनी का इस्तेमाल सोच-समझकर करें
लौंग और दालचीनी को भी अक्सर कीड़ों को भगाने के घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कुछ अध्ययनों में लौंग और दालचीनी से जुड़े उत्पादों ने अनाज में लगने वाले कुछ कीड़ों के खिलाफ असर दिखाया है. इसलिए चावल, दाल या आटा जैसी चीजों को सुरक्षित रखने में इनका सीमित इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, पूरे कमरे में दालचीनी पाउडर छिड़क देने से हर तरह के मच्छर और मक्खियां दूर हो जाएंगी, इसका पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं है. इसलिए घरेलू उपायों का इस्तेमाल उसी काम के लिए करना बेहतर है, जिसके लिए उनके प्रभाव के प्रमाण मौजूद हैं.
एसेंशियल ऑयल भी हो सकते हैं विकल्प
सिट्रोनेला, लैवेंडर, पेपरमिंट और लेमनग्रास जैसे कुछ एसेंशियल ऑयल पर मच्छरों को दूर रखने को लेकर रिसर्च हुई है. कुछ स्टडी में इनमें मच्छर भगाने वाले गुण पाए गए हैं. हालांकि, इनका प्रभाव इस्तेमाल के तरीके और मात्रा पर निर्भर कर सकता है. केवल कमरे के कोनों में बहुत पतला तेल छिड़क देना मच्छरों को रोकने का पक्का तरीका नहीं माना जा सकता.
बारिश में मच्छर और मक्खियों से बचने के लिए किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय कई छोटी आदतों को एक साथ अपनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है. घर के आसपास पानी जमा न होने देना, खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाना, खाना ढककर रखना, कचरा नियमित निकालना और घर में नमी कम रखना सबसे जरूरी कदम हैं.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Seasonal Flu: सीजनल फ्लू हो जाए तो क्या खाना चाहिए, किससे होगी फास्ट रिकवरी?</title>
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        <description><![CDATA[ Seasonal Flu:&amp;nbsp;मौसम बदलते ही कई लोग सीजनल फ्लू की चपेट में आ जाते हैं. इसमें बुखार, सर्दी, खांसी, गले में दर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. लोगों को लगता है कि ऐसा मौसम बदलने की वजह से हो रहा, यह सोचकर वह इसे नजरअंदाज कर देते हैें. जबकि, ऐसा नहीं करना चाहिए. आपको बता दें कि ऐसे समय में सिर्फ दवा ही नहीं, सही खानपान भी जल्दी ठीक होने में मदद करता है. अगर आप भी सीजनल फ्लू से परेशान हैं तो अपनी डाइट में कुछ आसान और हेल्दी चीजें जरूर शामिल करें.
शरीर में पानी की कमी न होने दें
सीजनल फ्लू के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है. इसलिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, सूप और गर्म हर्बल ड्रिंक भी पी सकते हैं. इससे शरीर हाइड्रेट रहता है और कमजोरी कम महसूस होती है.&amp;nbsp;
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हल्का और पौष्टिक खाना खाएं
फ्लू होने पर तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना खाने से बचना चाहिए. इसकी जगह खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल, सादी रोटी और उबली हुई सब्जियां खाएं. ये खाना आसानी से पच जाता है और शरीर को जरूरी पोषण भी देता है. साथ ही आपको बीमार होने से बचाता है.
फल और सब्जियां जरूर शामिल करें
संतरा, मौसमी, अमरूद, कीवी और पपीता जैसे फल शरीर को विटामिन C देते हैं, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है. साथ ही पालक, गाजर, टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियां भी फायदेमंद मानी जाती हैं.
गर्म सूप और काढ़ा दे सकते हैं आराम
अगर गले में दर्द या नाक बंद है, तो गर्म सब्जियों का सूप. इसको पी सकते हैं. अदरक, तुलसी और काली मिर्च से बना हल्का काढ़ा भी राहत दे सकता है. हालांकि इसे जरूरत से ज्यादा नहीं पीना चाहिए.
प्रोटीन वाली चीजें भी खाएं
बीमारी के समय शरीर को ताकत की जरूरत होती है. इसलिए दाल, पनीर, दही, दूध, अंडा या सोया जैसी प्रोटीन वाली चीजें अपनी डाइट में शामिल करें. इससे शरीर जल्दी रिकवर होने में मदद मिल सकती है.
इन चीजों से करें परहेज
फ्लू के दौरान कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, ज्यादा मीठी चीजें और बहुत तला-भुना खाना खाने से बचें. ये शरीर की रिकवरी को धीमा कर सकते हैं. साथ ही पर्याप्त आराम करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें. सीजनल फ्लू में सही खानपान, भरपूर पानी, अच्छी नींद और आराम बहुत जरूरी है. अगर तेज बुखार कई दिनों तक रहे, सांस लेने में परेशानी हो या हालत ज्यादा खराब लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>How To Make Puffed Poori: पूड़ी नहीं फूलती? बेलते वक्त ये गलती तो नहीं कर रहे आप</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Fluffy Poori At Home: घर में गरमा-गरम फूली हुई पूड़ियां बन जाएं तो सब्जी से लेकर खीर और हलवे तक का स्वाद बढ़ जाता है. लेकिन कई बार सारी तैयारी सही होने के बावजूद पूड़ियां कढ़ाही में जाते ही फूलने के बजाय सपाट रह जाती हैं. कुछ पूड़ियां एक तरफ से फूलती हैं तो दूसरी तरफ से मोटी रह जाती हैं. वहीं, कई बार पूड़ी तलने के बाद बहुत ज्यादा तेल सोख लेती है. ऐसे में अक्सर लोगों को लगता है कि आटा गूंथने में ही कोई गलती हुई होगी, जबकि परेशानी पूड़ी बेलने के तरीके में भी हो सकती है.
फूली और अच्छी पूड़ी बनाने के लिए आटा गूंथने से लेकर उसे बेलने और तेल के तापमान तक कई छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता है. खासतौर पर पूड़ी की मोटाई सही न होने पर वह कढ़ाही में अच्छी तरह नहीं फूलती. अगर आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है तो अगली बार पूड़ी बनाते समय इन बातों का ध्यान रखें.
बहुत पतली न बेलें पूड़ी
पूड़ी बेलते समय होने वाली सबसे आम गलतियों में से एक है उसे रोटी की तरह बहुत पतला बेल देना. कई लोगों को लगता है कि पतली पूड़ी ज्यादा कुरकुरी बनेगी, लेकिन जरूरत से ज्यादा पतला बेलने पर पूड़ी के फूलने में परेशानी हो सकती है. बेलते समय कोशिश करें कि पूड़ी न बहुत पतली हो और न ही बहुत मोटी. सबसे जरूरी बात है कि उसकी मोटाई चारों तरफ लगभग बराबर रहे. अगर बीच का हिस्सा पतला और किनारे मोटे रह गए या एक तरफ ज्यादा दबाव देकर बेल दिया गया तो तलते समय पूड़ी समान रूप से नहीं फूल पाएगी.
बेलते समय एक तरफ ज्यादा दबाव न डालें
पूड़ी को गोल बनाने की कोशिश में कई बार बेलन का दबाव एक हिस्से पर ज्यादा पड़ जाता है. देखने में पूड़ी बिल्कुल गोल लग सकती है, लेकिन उसकी मोटाई हर तरफ बराबर नहीं होती. यही छोटी सी गलती कढ़ाही में डालने के बाद नजर आती है. पूड़ी को हल्के और बराबर दबाव के साथ बेलें. बेलन को बीच से किनारों की तरफ चलाते हुए पूड़ी को थोड़ा-थोड़ा घुमाते रहें. इससे उसका आकार भी गोल रहेगा और मोटाई भी एक जैसी रखने में आसानी होगी.
बहुत ज्यादा सूखा आटा लगाने से बचें
रोटी बेलते समय सूखा आटा लगाना आम है, लेकिन पूड़ी के साथ ऐसा करना सही नहीं माना जाता. ज्यादा सूखा आटा लगाने से तलते समय यह तेल में गिर सकता है और जलने लगता है. इससे तेल भी जल्दी खराब हो सकता है. अगर आटा सही तरीके से गूंथा गया है तो पूड़ी बेलने के दौरान बहुत ज्यादा सूखे आटे की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए. जरूरत लगे तो बेलन और सतह पर बहुत हल्का तेल लगाया जा सकता है. इससे लोई चिपकेगी नहीं और पूड़ी आसानी से बेली जा सकेगी.
आटा बहुत नरम तो नहीं गूंथ रहे?
सिर्फ बेलने का तरीका ही नहीं, आटे की कंसिस्टेंसी भी पूड़ी के फूलने में अहम भूमिका निभाती है. पूड़ी के लिए आटा रोटी के आटे की तुलना में थोड़ा सख्त रखना बेहतर होता है. अगर आटा बहुत नरम हो गया तो पूड़ियां बेलते समय ज्यादा फैल सकती हैं और तलते समय सही तरीके से फूलने में परेशानी हो सकती है. पानी एक साथ डालने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके डालें और अच्छी तरह आटा गूंथें. आटे में नमी बराबर होनी चाहिए. गूंथने के बाद इसे कुछ देर ढककर रखा जा सकता है, जिससे आटा सेट हो जाए और पूड़ियां बेलना आसान हो.
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बेलकर बहुत देर तक खुला न छोड़ें
अगर आप सारी पूड़ियां पहले बेल लेते हैं और उसके बाद तलना शुरू करते हैं तो उन्हें खुला छोड़ने से बचें. लंबे समय तक हवा के संपर्क में रहने पर उनकी ऊपरी सतह सूख सकती है. इसका असर तलते समय पूड़ी के फूलने पर पड़ सकता है. अगर एक साथ कई पूड़ियां बेल रहे हैं तो उन्हें किसी साफ कपड़े से ढककर रखें. बेहतर तरीका यह है कि जरूरत के हिसाब से कुछ पूड़ियां बेलें और उन्हें तलते जाएं.

तेल का तापमान भी है जरूरी
आपने आटा सही गूंथा और पूड़ी भी बराबर मोटाई में बेल ली, लेकिन तेल सही गर्म नहीं है तो सारी मेहनत खराब हो सकती है. कम गर्म तेल में पूड़ी डालने पर वह तेल ज्यादा सोख सकती है और फूलने में भी समय लेती है. पूड़ी डालने से पहले तेल अच्छी तरह गर्म होना चाहिए. हालांकि, तेल इतना तेज गर्म भी न हो कि पूड़ी डालते ही बाहर से जलने लगे. तेल का तापमान जांचने के लिए आटे का बहुत छोटा टुकड़ा डालकर देख सकते हैं. अगर वह नीचे जाकर धीरे-धीरे ऊपर आ रहा है तो तेल को थोड़ा और गर्म होने दें.

कढ़ाही में डालते ही हल्का दबाएं
पूड़ी को गर्म तेल में डालने के बाद कलछी से ऊपर की तरफ बहुत हल्का दबाव देने पर उसे फूलने में मदद मिल सकती है. जैसे ही पूड़ी फूल जाए, उसे पलटकर दूसरी तरफ से भी तल लें. एक साथ बहुत सारी पूड़ियां कढ़ाही में डालने से बचें, क्योंकि इससे तेल का तापमान अचानक कम हो सकता है. अगली बार पूड़ी न फूले तो केवल आटे को दोष देने के बजाय बेलने का तरीका भी देखें. पूड़ी की मोटाई हर तरफ बराबर रखना, ज्यादा सूखा आटा इस्तेमाल न करना, आटे को बहुत नरम न गूंथना और सही गर्म तेल में तलना जैसी छोटी बातें बड़ा फर्क डाल सकती हैं. इनका ध्यान रखा जाए तो घर पर भी गोल और अच्छी तरह फूली हुई पूड़ियां तैयार की जा सकती हैं.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Relationship Cheating: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर अचानक हुई गलती नहीं, जानें क्या कहती है रिसर्च</title>
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        <description><![CDATA[ Why People Cheat In Relationships Psychology: किसी भी रिश्ते में भरोसा उसकी सबसे मजबूत नींव माना जाता है. लेकिन जब पार्टनर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ भावनात्मक या शारीरिक रूप से जुड़ने लगता है तो यही भरोसा टूटने लगता है. अक्सर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर या पार्टनर को चीट करने के बाद लोग इसे एक &#039;गलती&#039; बताकर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं. कोई इसे कमजोर पल का नतीजा बताता है तो कोई कहता है कि परिस्थितियां ऐसी थीं कि सब कुछ अचानक हो गया. लेकिन क्या किसी रिश्ते में बेवफाई वास्तव में अचानक हुई गलती होती है या इसके पीछे व्यक्ति के फैसले और व्यवहार की भूमिका होती है?
रिलेशनशिप साइकोलॉजी में इस सवाल को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है. कई रिसर्च बताती हैं कि चीटिंग के पीछे केवल रिश्ते में नाखुशी ही जिम्मेदार नहीं होती. कई बार अच्छे और संतोषजनक रिश्ते में रहने वाले लोग भी अपने पार्टनर को धोखा दे सकते हैं. इसके पीछे मौका मिलने से लेकर इंपल्सिव बिहेवियर, भावनात्मक जरूरतें और दूसरे कई कारण हो सकते हैं.

क्या होता है रिश्ते में धोखा?
बेवफाई का मतलब केवल किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाना नहीं है. रिश्ते में रहते हुए पार्टनर से छिपाकर किसी दूसरे व्यक्ति के साथ भावनात्मक, रोमांटिक या सेक्सुअल रिश्ता बनाना भी इसके दायरे में आ सकता है. इसे आमतौर पर सेक्सुअल, इमोशनल, दोनों के कॉम्बिनेशन और इंटरनेट इन्फिडेलिटी जैसी अलग-अलग कैटेगरी में समझा जाता है. आज सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के कारण इंटरनेट इन्फिडेलिटी की चर्चा भी बढ़ी है. इसमें व्यक्ति अपने पार्टनर से छिपाकर किसी दूसरे के साथ ऑनलाइन ऐसा भावनात्मक या रोमांटिक रिश्ता बना सकता है, जो उसके मौजूदा रिश्ते में तय सीमाओं को तोड़ता हो.

क्या अचानक हो जाती है चीटिंग?
पार्टनर को धोखा देने के बाद अक्सर सुनने को मिलता है कि &#039;बस हो गया&#039; या &#039;उस समय समझ नहीं आया&#039;. इंपल्सिव बिहेवियर यानी बिना परिणाम के बारे में ज्यादा सोचे तुरंत फैसला लेना किसी व्यक्ति में चीटिंग की संभावना को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंपल्सिव व्यक्ति अपने फैसलों के लिए जिम्मेदार नहीं है.
2016 की एक स्टडी में सेक्सुअल इंपल्सिविटी को इन्फिडेलिटी और जोखिम वाले सेक्सुअल बिहेवियर जैसी चीजों से जोड़ा गया था. इसके बावजूद किसी व्यक्ति का व्यवहार केवल इंपल्सिविटी से तय नहीं होता. उसकी पर्सनैलिटी, खुद पर नियंत्रण, निजी मूल्य और रिश्ते को लेकर उसकी सोच भी फैसले को प्रभावित कर सकती है.
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चीटिंग के बाद क्या सभी को होता है पछतावा?
आमतौर पर माना जाता है कि अफेयर के बाद व्यक्ति को बहुत ज्यादा पछतावा होता होगा, लेकिन रिसर्च इससे कहीं ज्यादा जटिल तस्वीर दिखाती है. 2023 में Aआर्काइव्स ऑफ सेक्सुअल बिहेवियर में प्रकाशित एक रिसर्च में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करने वाले शादीशुदा लोगों के अनुभवों का अध्ययन किया गया. रिसर्च में पाया गया कि कई प्रतिभागियों ने अपने अफेयर से सेक्सुअल और इमोशनल संतुष्टि मिलने की बात कही और उनमें पछतावे का स्तर अपेक्षाकृत कम था. रिसर्च से यह भी सामने आया कि कुछ लोग यह नहीं मानते थे कि अफेयर के कारण उनकी शादी को नुकसान पहुंचा है.
लोग अपने पार्टनर को चीट क्यों करते हैं?
इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं है. साइकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, चीटिंग के पीछे अलग-अलग लोगों की अलग वजहें हो सकती हैं. यह जरूरी नहीं है कि जो व्यक्ति चीट कर रहा है, वह अपने मौजूदा रिश्ते से पूरी तरह नाखुश ही हो. कुछ मामलों में किसी दूसरे व्यक्ति के साथ नजदीकी बढ़ने का मौका मिलना बड़ी भूमिका निभा सकता है. 2023 की एक स्टडी से जुड़े शोधकर्ताओं के अनुसार, कई बार लोग पहले से चीटिंग की योजना नहीं बनाते, लेकिन मौका मिलने पर थकान, शराब के प्रभाव, ध्यान भटकने या कमजोर सेल्फ-कंट्रोल जैसी परिस्थितियों में प्रलोभन को रोक नहीं पाते.
रिसर्च में पुरुषों और महिलाओं की वजहों में कुछ अंतर की ओर भी इशारा किया गया है. कुछ पुरुष सेक्सुअल जरूरतें पूरी न होने को वजह मान सकते हैं, जबकि कुछ महिलाओं में भावनात्मक जरूरतें पूरी न होना एक कारण हो सकता है. हालांकि, इसे हर व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता.
पावर और चीटिंग के बीच भी है कनेक्शन?
2024 में आर्काइव्स ऑफ सेक्सुअल बिहेवियर में प्रकाशित एक स्टडी में रिश्तों के भीतर पावर और बेवफाई के बीच संबंध को भी देखा गया. शोधकर्ताओं के अनुसार, रिश्ते में खुद को ज्यादा शक्तिशाली महसूस करने वाले कुछ लोगों को लग सकता है कि उनके पास मौजूदा पार्टनर के अलावा दूसरे विकल्प भी उपलब्ध हैं. ऐसा व्यक्ति खुद को दूसरे लोगों के लिए ज्यादा आकर्षक पार्टनर मान सकता है. दूसरे विकल्प मौजूद होने का यह विश्वास कुछ मामलों में मौजूदा रिश्ते के प्रति कमिटमेंट को कमजोर कर सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर सफल या प्रभावशाली व्यक्ति अपने पार्टनर को धोखा देगा.
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 22:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Exercising During Periods: पीरियड्स में भी ज्ञानेश्वरी ने उठाया 111 किलो वजन, ऐसे बनाए रखें अपनी एनर्जी</title>
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        <description><![CDATA[ Period Impact On Women Sports Performance: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया. लेकिन उनकी जीत से ज्यादा चर्चा उस बात की हुई, जो उन्होंने मुकाबले के बाद सबके सामने बेझिझक कही. मेडल जीतने के बाद ज्ञानेश्वरी ने बताया कि प्रतियोगिता का दिन उनके पीरियड्स का पहला दिन था. उन्होंने कहा कि &#039;आज मेरे पीरियड्स का पहला दिन था. मुझे नहीं पता था कि मेरा शरीर कैसा प्रदर्शन करेगा. फिर भी मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की. मेरे कोच ने मुझ पर भरोसा जताते हुए 111 किलो वजन उठाने का मौका दिया. मैंने ट्रेनिंग में यह वजन उठाया था, लेकिन क्लीन एंड जर्क में पहले कभी ऐसा नहीं कर पाई थी.&#039;
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और एक बार फिर यह सवाल उठने लगा कि क्या पीरियड्स के दौरान महिलाएं अपनी पूरी क्षमता से खेल सकती हैं? क्या मासिक धर्म के दौरान ताकत, स्टैमिना और प्रदर्शन वास्तव में कम हो जाता है या यह सिर्फ एक आम धारणा है?
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हर महिला का अनुभव अलग होता है
गायनेकोलॉजिस्ट और आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. अर्चना धवन बजाज ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पीरियड्स के शुरुआती दिनों में कई महिलाओं को पेट दर्द, थकान, पेट फूलना और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में एक्सरसाइज या खेल के दौरान शरीर पहले से ज्यादा थका हुआ महसूस हो सकता है. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर महिला का प्रदर्शन खराब ही होगा. डॉक्टर बताती हैं कि अब तक हुई वैज्ञानिक रिसर्च में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि पीरियड्स के दौरान सभी महिलाओं की ताकत, सहनशक्ति या पावर में एक जैसी कमी आती है.
कई एथलीट्स पीरियड्स में भी जीतती हैं बड़े मुकाबले
डॉ. बजाज कहती हैं कि दुनिया की कई शीर्ष महिला खिलाड़ी अपने मासिक धर्म के दौरान भी नियमित ट्रेनिंग करती हैं और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करती हैं. हालांकि जिन महिलाओं को अत्यधिक दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग या गंभीर असहजता होती है, उनके लिए ट्रेनिंग और रिकवरी थोड़ी मुश्किल हो सकती है. उनके अनुसार हर महिला का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है. इसलिए किसी एक नियम को सभी पर लागू नहीं किया जा सकता. खिलाड़ियों के लिए उनकी शारीरिक स्थिति और लक्षणों के अनुसार अलग-अलग रणनीति अपनाना ज्यादा फायदेमंद होता है.
हार्मोन में बदलाव का असर पड़ सकता है
पीरियड्स के दौरान शरीर में हार्मोन लगातार बदलते रहते हैं. यही बदलाव कई बार ऊर्जा, मूड और ट्रेनिंग करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. डॉक्टर बताती हैं कि पीरियड्स के बाद आने वाले फॉलिक्युलर फेज में एस्ट्रोजन हार्मोन धीरे-धीरे बढ़ता है. इस दौरान कुछ महिलाओं को पहले की तुलना में ज्यादा ऊर्जा महसूस होती है और वर्कआउट के बाद रिकवरी भी बेहतर होती है. वहीं ल्यूटल फेज में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ने के कारण कुछ महिलाओं को अधिक थकान, शरीर का तापमान बढ़ने और एक्सरसाइज के दौरान जल्दी थकने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं. हालांकि ये बदलाव हर महिला में समान नहीं होते। इसलिए सिर्फ पीरियड्स के चरणों के आधार पर ट्रेनिंग प्लान तैयार करना साइंटिस्ट रूप से सही नहीं माना जाता.

ट्रेनिंग नहीं, शरीर के संकेतों को समझना ज्यादा जरूरी
एक्सपर्ट का मानना है कि खिलाड़ियों को अपने शरीर के संकेतों को समझना सीखना चाहिए. अगर किसी दिन दर्द ज्यादा है या थकान महसूस हो रही है तो ट्रेनिंग की तीव्रता कम की जा सकती है. वहीं जब शरीर अच्छा महसूस करे तो सामान्य तरीके से अभ्यास जारी रखा जा सकता है. कोच और खिलाड़ियों के बीच बेहतर संवाद भी जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर ट्रेनिंग, आराम और रिकवरी में बदलाव किया जा सके. हर खिलाड़ी के लिए एक जैसा प्लान कारगर नहीं होता.
पीरियड्स के दौरान कैसे बनाए रखें बेहतर प्रदर्शन?
डॉ. अर्चना धवन बजाज के अनुसार सही खानपान, पर्याप्त पानी और अच्छी रिकवरी पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकती है. वह सलाह देती हैं कि आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे पालक, बीन्स, दालें, फोर्टिफाइड अनाज और लीन मीट को भोजन में शामिल करना चाहिए, क्योंकि ब्लीडिंग के दौरान शरीर से आयरन की कमी हो सकती है. मांसपेशियों की रिकवरी के लिए पर्याप्त प्रोटीन लेना जरूरी है, जबकि कार्बोहाइड्रेट शरीर को दोबारा ऊर्जा देने में मदद करते हैं. इसके अलावा पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद जरूरी है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिन्हें ज्यादा ब्लीडिंग होती है.

दर्द को नजरअंदाज न करें
अगर पीरियड्स के दौरान दर्द या ऐंठन ज्यादा हो रही है तो हल्का वार्म-अप, स्ट्रेचिंग, हीट थेरेपी और डॉक्टर की सलाह से एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं राहत दे सकती हैं. अच्छी नींद लेना और शरीर को पर्याप्त आराम देना भी उतना ही जरूरी है. डॉक्टर यह भी सलाह देती हैं कि अगर किसी महिला को हर महीने असहनीय दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग या अनियमित पीरियड्स की समस्या रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है ताकि किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का समय रहते इलाज किया जा सके.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 06:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Slippers At Home Benefits: क्या घर में चप्पल पहनकर चलना सही है, जानें क्या कहती है रिसर्च?</title>
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        <description><![CDATA[ Walking Barefoot Vs Wearing Slippers At Home: घर में चप्पल पहनकर चलना चाहिए या नंगे पैर रहना बेहतर है? यह सवाल लगभग हर घर में कभी न कभी जरूर उठता है. कुछ लोग मानते हैं कि नंगे पैर चलना पैरों के लिए फायदेमंद होता है, जबकि कई लोग घर के अंदर भी चप्पल पहनने की सलाह देते हैं. हाल के वर्षों में इस विषय पर कई रिसर्च हुई हैं और एक्सपर्ट का मानना है कि इसका जवाब पूरी तरह &#039;हां&#039; या &#039;नहीं&#039; में नहीं दिया जा सकता. असल बात इस पर निर्भर करती है कि आप किस तरह की सतह पर चलते हैं और आपकी सेहत कैसी है.
नंगे पैर चलने से मजबूत होती हैं पैरों की मांसपेशियां
रिसर्च बताती है कि समय-समय पर नंगे पैर चलने से पैरों की छोटी-छोटी मांसपेशियां अधिक सक्रिय होती हैं. इससे पैरों की पकड़ मजबूत होती है, आर्च को बेहतर सपोर्ट मिलता है और उंगलियों की ताकत भी बढ़ती है. मजबूत पैर शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं और लंबे समय तक चलने या खड़े रहने पर थकान भी कम महसूस होती है.
घर का फर्श भी रखता है मायने 
हालांकि यह फायदा तब ज्यादा मिलता है जब आप घास, मिट्टी या प्राकृतिक सतह पर नंगे पैर चलते हैं. भारत के ज्यादातर घरों में मार्बल, टाइल्स या सीमेंट का सख्त फर्श होता है. ऐसी सतह पर लंबे समय तक बिना चप्पल के चलने से एड़ी और पैरों के आर्च पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्थान clevelandclinic के अनुसार, जिन लोगों को पहले से प्लांटर फेशियाइटिस, फ्लैट फीट या एड़ी में दर्द की समस्या है, उनके लिए यह परेशानी बढ़ा सकता है.
सही चप्पल सिर्फ पैरों ही नहीं, पूरे शरीर को देती है सहारा
एक्सपर्ट के अनुसार अच्छी क्वालिटी की सपोर्टिव चप्पल पहनने से शरीर का वजन पैरों पर समान रूप से बंटता है. इससे पैरों पर पड़ने वाला झटका कम होता है, जिसका फायदा टखनों, घुटनों, कूल्हों और कमर तक पहुंचता है. खासकर वे लोग जो घर में लंबे समय तक खड़े रहकर काम करते हैं, उनके लिए आर्च सपोर्ट वाली चप्पल पीठ और पैरों के दर्द को कम करने में मददगार हो सकती है.
संतुलन और बॉडी कंट्रोल के लिए फायदेमंद है नंगे पैर चलना
रिसर्च में यह भी पाया गया है कि नंगे पैर चलने से शरीर की &#039;प्रोप्रियोसेप्शन&#039; यानी अपने शरीर की स्थिति को महसूस करने की क्षमता बेहतर होती है. इससे संतुलन, चाल और शरीर का नियंत्रण मजबूत होता है. युवा लोगों में यह बेहतर पोस्टर और कोऑर्डिनेशन बनाए रखने में भी मदद कर सकता है. इसलिए थोड़ी देर नंगे पैर चलना पैरों की प्राकृतिक क्षमता को बनाए रखने के लिए अच्छा माना जाता है.
हर चप्पल नहीं होती फायदेमंद 
अगर आप सोचते हैं कि कोई भी रबर की चप्पल पहन लेना काफी है, तो ऐसा नहीं है. बिना आर्च सपोर्ट और कुशनिंग वाली पतली चप्पल कई बार नंगे पैर चलने से भी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसी चप्पलें पैरों को पर्याप्त सहारा नहीं देतीं और लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर दर्द, असंतुलन और गिरने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए घर के लिए ऐसी चप्पल चुनें जिसमें अच्छी कुशनिंग और आर्च सपोर्ट हो.

डायबिटीज के मरीजों को नंगे पैर नहीं चलना चाहिए
डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए घर में नंगे पैर चलना जोखिम भरा हो सकता है। कई बार पैरों की संवेदनशीलता कम होने के कारण छोटी-सी चोट, कट या खरोंच का पता नहीं चलता। यही मामूली चोट बाद में गंभीर इंफेक्शन का रूप ले सकती है। इसी वजह से डॉक्टर और फुट हेल्थ एक्सपर्ट डायबिटीज के मरीजों को घर के अंदर भी हमेशा सुरक्षित और आरामदायक फुटवियर पहनने की सलाह देते हैं.
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क्या घर की चप्पल इंफेक्शन से भी बचाती है?
घर का फर्श साफ दिखने का मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह कीटाणु मुक्त भी हो. धूल, नमी और बाहर से आने वाले बैक्टीरिया व फंगस फर्श पर मौजूद हो सकते हैं. लंबे समय तक नंगे पैर रहने से फंगल संक्रमण या एथलीट फुट जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में घर के अंदर साफ और आरामदायक चप्पल पहनना पैरों को अतिरिक्त सुरक्षा देता है.
तो क्या है सबसे सही तरीका?
रिसर्च के आधार पर एक्सपर्ट मानते हैं कि नंगे पैर और चप्पल, दोनों का संतुलित इस्तेमाल सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है. अगर फर्श साफ है और आप कुछ समय के लिए नंगे पैर चलते हैं, तो इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. वहीं लंबे समय तक घर में काम करते समय या सख्त फर्श पर चलते हुए अच्छी क्वालिटी की सपोर्टिव चप्पल पहनना पैरों और जोड़ों की सुरक्षा के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 06:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Medicine Storage In Monsoon: बारिश में खराब हो सकती हैं दवाएं! जानें मानसून में मेडिसिन स्टोर करने का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Protect Medicines From Moisture In Rainy Season: भारत में मानसून अपने साथ सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि कई तरह की चुनौतियां भी लेकर आता है. एक तरफ यह भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर बढ़ी हुई नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव रोजमर्रा की कई चीजों को प्रभावित करते हैं. इन्हीं में से एक है घर में रखी दवाइयों की क्वालिटी. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर दवाओं को सही तरीके से स्टोर नहीं किया जाए, तो उनकी असर करने की क्षमता एक्सपायरी डेट से पहले ही कम हो सकती है. इसलिए बारिश के मौसम में दवाओं को रखने का सही तरीका जानना बेहद जरूरी है.
&amp;nbsp;कंसल्टेंट डॉ. अरविंद एस. एन. के अनुसार, अधिक नमी और गर्मी दवाओं के केमिकल गुणों को प्रभावित कर सकती है. खासतौर पर ऐसी गोलियां और कैप्सूल जो आसानी से नमी सोख लेते हैं, वे जल्दी खराब हो सकते हैं. ऐसे में वे नरम पड़ सकते हैं, चिपचिपे हो सकते हैं, फूल सकते हैं या फिर टूटने लगते हैं. वहीं, इफरवेसेंट टैबलेट और ड्राई पाउडर वाली दवाएं भी नमी के प्रति काफी सेंसिटिव होती हैं.

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गर्मी और नमी क्यों कम कर देती हैं दवाओं का असर?
डॉ. अरविंद बताते हैं कि कुछ दवाएं, जैसे इंसुलिन, वैक्सीन, बायोलॉजिकल मेडिसिन और कुछ लिक्विड दवाएं, तापमान के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं. इन्हें हमेशा निर्माता द्वारा बताए गए निर्देशों के अनुसार ही स्टोर करना चाहिए. इसी तरह क्रीम और सपोजिटरी भी ज्यादा गर्मी में पिघल सकती हैं या उनकी बनावट बदल सकती है.
कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सबसे आम गलती बाथरूम में दवाएं रखना है. नहाने के दौरान बनने वाली भाप और लगातार रहने वाली नमी दवाओं को नुकसान पहुंचा सकती है. इसके अलावा रसोई में गैस स्टोव, सिंक या खिड़की के पास दवाएं रखना भी सही नहीं है, क्योंकि इन जगहों पर तापमान और नमी लगातार बदलती रहती है. डॉ. अरविंद यह भी सलाह देते हैं कि दवाओं को उनकी मूल ब्लिस्टर पैकिंग से निकालकर खुले डिब्बों या बिना ढक्कन वाले कंटेनर में न रखें. ऐसा करने से दवाएं नमी के सीधे संपर्क में आ जाती हैं. वहीं, गीले हाथों से दवाएं छूना या बोतल का ढक्कन ठीक से बंद न करना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है.

इंसुलिन को लेकर क्या है नियम?
डॉ. प्रणव घोडी बताते हैं कि इंसुलिन को हमेशा उसी तरह स्टोर करना चाहिए, जैसा निर्माता ने निर्देश दिया है. एक बार खुलने के बाद अधिकांश इंसुलिन पेन या वायल सामान्य कमरे के तापमान पर रखे जा सकते हैं, लेकिन उन्हें सीधी धूप, अत्यधिक गर्मी और नमी से बचाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि इंसुलिन का रंग, बनावट या पारदर्शिता बदल जाए तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. यदि दवा अत्यधिक गर्मी या बहुत ठंड के संपर्क में आ गई हो, तो भी उसे इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
दवा को फ्रिज में रखना सही है?
डॉ. अरविंद के अनुसार, केवल वही दवाएं फ्रिज में रखनी चाहिए जिनके लेबल पर ऐसा करने की सलाह दी गई हो या डॉक्टर ने स्पेशल रूप से कहा हो. जिन दवाओं को सामान्य कमरे के तापमान पर रखने की सलाह होती है, उन्हें बिना जरूरत फ्रिज में रखने से भी नुकसान हो सकता है. इससे दवा में कंडेनसेशन या जमने जैसी समस्या हो सकती है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. उन्होंने बताया कि जिन दवाओं को कोल्ड स्टोरेज की जरूरत होती है, उन्हें आमतौर पर 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाता है। हालांकि यह पूरी तरह दवा के प्रकार पर निर्भर करता है.
अगर दवा भीग जाए तो क्या करें?
बारिश, बाढ़ या किसी भी कारण से अगर दवा पानी में भीग जाए, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. खासकर यदि वह गंदे या दूषित पानी के संपर्क में आई हो. यह सलाह सिर्फ टैबलेट और कैप्सूल ही नहीं, बल्कि सिरप, इंजेक्शन, इनहेलर और त्वचा पर लगाने वाली दवाओं पर भी लागू होती है. भीगी हुई गोलियों या कैप्सूल को सुखाकर दोबारा इस्तेमाल करने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए.
बिना एसी वाले घरों में दवाएं कहां रखें?
अगर घर में एयर कंडीशनर नहीं है, तो दवाओं को घर के सबसे ठंडे और सूखे हिस्से में किसी बंद अलमारी या स्टोरेज बॉक्स में रखें. इन्हें बाथरूम, रसोई, खिड़की और सीधी धूप से दूर रखना चाहिए. इसके साथ ही दवाओं को हमेशा उनकी मूल पैकिंग में ही रखें और कंटेनर का ढक्कन अच्छी तरह बंद रखें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Salt Storage Tips: नमक बरसात में गीला क्यों हो जाता है? बचाने के उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Salt Dry In Monsoon: बरसात का मौसम आते ही रसोई में एक समस्या लगभग हर घर में देखने को मिलती है. नमक और चीनी के डिब्बे खोलते ही पता चलता है कि दोनों में नमी आ गई है. कई बार नमक इतना चिपक जाता है कि उसे चम्मच से निकालना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बारिश के मौसम में नमक जल्दी गीला क्यों हो जाता है और इससे बचने का आसान तरीका क्या है?
दरअसल, इसका सबसे बड़ा कारण हवा में बढ़ी हुई नमी होती है. मानसून के दौरान वातावरण में ह्यूमिडिटी काफी बढ़ जाती है. नमक की खासियत यह है कि वह हवा से नमी को आसानी से अपनी ओर खींच लेता है. यही वजह है कि कुछ ही दिनों में वह गीला होकर जमने लगता है. हालांकि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है.
आखिर नमक बरसात में गीला क्यों हो जाता है?
बारिश के मौसम में हवा में पानी की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा होती है. नमक में मौजूद कण इस नमी को तेजी से सोख लेते हैं. जब कंटेनर बार-बार खोला जाता है, तो हर बार नमी अंदर पहुंचती है और धीरे-धीरे पूरा नमक गीला होने लगता है. अगर डिब्बा ठीक से बंद न हो या उसे नमी वाली जगह पर रखा जाए, तो यह समस्या और भी बढ़ जाती है.
नमक के डिब्बे में रखें कुछ चावल
बरसात में नमक को सूखा रखने का सबसे आसान और पुराना तरीका है उसमें कुछ चावल के दाने डाल देना. चावल प्राकृतिक रूप से अतिरिक्त नमी को सोख लेते हैं, जिससे नमक लंबे समय तक सूखा रहता है.अगर नमकदानी छोटी है तो उसमें कुछ दाने सीधे डाल सकते हैं. वहीं बड़े डिब्बे में चावल को एक छोटे कपड़े या पेपर पाउच में बांधकर रखना ज्यादा बेहतर माना जाता है.
कॉफी बीन्स भी आ सकती हैं काम
अगर घर में कॉफी बीन्स मौजूद हैं, तो उनका इस्तेमाल भी किया जा सकता है. कॉफी बीन्स हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करती हैं. अच्छी बात यह है कि इससे नमक या चीनी के स्वाद पर कोई खास असर नहीं पड़ता.

लौंग का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
लौंग सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि रसोई की कई छोटी समस्याओं में भी काम आती है. यह नमी को कम करने में मदद कर सकती है. हालांकि लौंग की तेज खुशबू नमक या चीनी में आ सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि लौंग को किसी साफ कपड़े में बांधकर डिब्बे के अंदर रखें.
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राजमा के दाने भी हैं असरदार
बहुत कम लोग जानते हैं कि सूखे राजमा के कुछ दाने भी अतिरिक्त नमी को सोखने का काम करते हैं. यही वजह है कि कई लोग मानसून के दौरान नमक और चीनी के डिब्बों में कुछ राजमा के दाने डाल देते हैं. इससे इनमें नमी कम आने की संभावना रहती है.

सही जगह पर रखें नमक का डिब्बा
नमक को सुरक्षित रखने में सिर्फ घरेलू उपाय ही नहीं, बल्कि स्टोरेज की जगह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. कोशिश करें कि नमक और चीनी के डिब्बे को हमेशा ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर रखें. उन्हें गैस चूल्हे, सिंक, खिड़की या ऐसी जगह के पास न रखें जहां भाप या नमी ज्यादा आती हो. खाना बनाते समय निकलने वाली भाप भी धीरे-धीरे नमक में नमी बढ़ा सकती है.
एयरटाइट कंटेनर का करें इस्तेमाल
अगर नमक को लंबे समय तक सूखा रखना चाहते हैं, तो हमेशा अच्छी क्वालिटी के एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें. कंटेनर खोलने के बाद उसे तुरंत अच्छी तरह बंद कर दें. इससे बाहर की नमी अंदर नहीं पहुंच पाएगी और नमक जल्दी खराब नहीं होगा.
गीले चम्मच से बचें
कई बार लोग जल्दीबाजी में गीला या हल्का नम चम्मच नमक के डिब्बे में डाल देते हैं. इससे भी नमक में नमी बढ़ जाती है और वह जल्दी जमने लगता है. इसलिए हमेशा पूरी तरह सूखे चम्मच का ही इस्तेमाल करें.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>IRCTC Tour Package: कम बजट में घूमें गंगटोक और दार्जिलिंग, आईआरसीटीसी लाया खास टूर पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ IRCTC Himalayan Tranquility Tour Package: अगर आप इस साल पहाड़ों की सैर का प्लान बना रहे हैं और एक ही ट्रिप में हिमालय की खूबसूरती, शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन का हिमालयन ट्रैंक्विलिटी रेल टूर आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. इस पैकेज के जरिए आपको पूर्वोत्तर भारत के तीन बेहद लोकप्रिय हिल स्टेशन, गंगटोक, कालिम्पोंग और दार्जिलिंग घूमने का मौका मिलेगा. यह यात्रा उन लोगों के लिए खास है जो परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ यादगार छुट्टियां बिताना चाहते हैं.
यह टूर हर रविवार को हावड़ा रेलवे स्टेशन से शुरू होता है और पूरे सफर के दौरान ट्रेन, होटल और दर्शनीय स्थलों की यात्रा जैसी कई सुविधाएं एक ही पैकेज में मिलती हैं. ऐसे में बार-बार होटल या टैक्सी बुक करने की चिंता भी नहीं रहती.
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तीन खूबसूरत हिल स्टेशनों की सैर
इस पैकेज में सबसे पहले कालिम्पोंग ले जाया जाएगा. पूर्वी हिमालय की गोद में बसा यह छोटा और शांत शहर अपने सुहाने मौसम, रंग-बिरंगे फूलों की नर्सरी, बौद्ध मठों और शानदार पर्वतीय दृश्यों के लिए जाना जाता है. अगर आप शहर की भागदौड़ से दूर कुछ दिन सुकून में बिताना चाहते हैं, तो यह जगह आपको जरूर पसंद आएगी.
इसके बाद यात्रा गंगटोक पहुंचेगी, जो सिक्किम की राजधानी है. बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों के बीच बसा यह शहर प्राकृतिक सुंदरता और आधुनिक सुविधाओं का बेहतरीन मेल है. यहां की प्रसिद्ध एमजी मार्ग, खूबसूरत व्यू पॉइंट्स और बौद्ध मठ पर्यटकों को खासा आकर्षित करते हैं. गंगटोक से सिक्किम के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक भी आसानी से पहुंचा जा सकता है.

यात्रा का अंतिम पड़ाव दार्जिलिंग होगा, जिसे &#039;क्वीन ऑफ द हिल्स&#039; भी कहा जाता है. विश्व प्रसिद्ध चाय बागान, कंचनजंघा की मनमोहक झलक, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और औपनिवेशिक दौर की विरासत इस शहर की खास पहचान हैं. यहां का शांत वातावरण और स्थानीय संस्कृति हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है.
कब और कहां से होगी यात्रा?
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन का यह पैकेज हर रविवार हावड़ा रेलवे स्टेशन से शुरू होगा. यात्रियों की ट्रेन शाम 6:35 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) पहुंचेगी. वापसी की यात्रा शनिवार को होगी, जहां से ट्रेन शाम 5:25 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह हावड़ा पहुंचेगी. हालांकि रेलवे ने साफ किया है कि परिचालन संबंधी कारणों से ट्रेन के समय में बदलाव हो सकता है.
कितना होगा किराया?
इस पैकेज की शुरुआती कीमत 29,150 रुपये प्रति व्यक्ति (लीन पीरियड में ट्रिपल शेयरिंग) रखी गई है. वहीं पीक सीजन में यही किराया 31,450 रुपये प्रति व्यक्ति होगा. अगर आप डबल या सिंगल शेयरिंग में यात्रा करना चाहते हैं, तो उसके अनुसार अलग-अलग किराया तय किया गया है. बच्चों के लिए भी अलग शुल्क निर्धारित किया गया है. इसलिए बुकिंग से पहले अपनी जरूरत के अनुसार कैटेगरी चुन सकते हैं.
पैकेज में क्या-क्या मिलेगा?
इस टूर पैकेज में यात्रियों को थर्ड एसी कैटेगरी का कन्फर्म ट्रेन टिकट दिया जाएगा. इसके अलावा यात्रा कार्यक्रम के अनुसार होटल में ठहरने की सुविधा भी मिलेगी. लोकल टूरिस्ट स्थानों की सैर और एक शहर से दूसरे शहर तक आने-जाने के लिए एसी वाहन की व्यवस्था की जाएगी. खाने में रोजाना नाश्ता और डिनर शामिल रहेगा. इसके साथ ही यात्रियों को ट्रैवल इंश्योरेंस और लागू टैक्स का लाभ भी मिलेगा.
किन सुविधाओं के लिए अलग से करना होगा भुगतान?
पैकेज में दोपहर का भोजन शामिल नहीं है. ट्रेन यात्रा के दौरान मिलने वाला भोजन भी यात्रियों को खुद खरीदना होगा. इसके अलावा एंट्री टिकट, बोटिंग, फॉरेस्ट एंट्री फीस, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विशेष दर्शन पास, राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, लॉन्ड्री, मिनरल वाटर, टिप्स, कैमरा शुल्क और अन्य व्यक्तिगत खर्च पैकेज का हिस्सा नहीं हैं. अगर मौसम खराब होने, भूस्खलन, सड़क बंद होने या किसी राजनीतिक कारण से यात्रा प्रभावित होती है, तो उससे होने वाला अतिरिक्त खर्च भी यात्रियों को खुद देना होगा.
कहां मिलेगा ठहरने का इंतजाम?
इस पैकेज के तहत कालिम्पोंग में एक रात गोल्डन कुंसेल या इसी श्रेणी के होटल में ठहरने की व्यवस्था रहेगी. गंगटोक में दो रात समिट ग्रैंड या समान श्रेणी के होटल में रुकने का मौका मिलेगा. वहीं दार्जिलिंग में दो रात सुमिटेल क्वींस यार्ड या इसी श्रेणी के होटल में ठहराया जाएगा. अगर आप बिना किसी झंझट के हिमालय की खूबसूरत वादियों में छुट्टियां बिताना चाहते हैं, तो IRCTC का यह पैकेज एक सुविधाजनक और बजट फ्रेंडली विकल्प साबित हो सकता है. ट्रेन यात्रा, होटल, स्थानीय परिवहन और कई जरूरी सुविधाएं एक ही पैकेज में मिलने से आपकी यात्रा आरामदायक और यादगार बन सकती है.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Energy Drinks India: एनर्जी ड्रिंक्स कितने सुरक्षित? संसद में पेश हुए आंकड़े</title>
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        <description><![CDATA[ Energy Drinks India: एनर्जी ड्रिंक्स और कैफीन वाले पेय पदार्थों की बढ़ती खपत के बीच सरकार ने निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है. संसद में दिए जवाब में सरकार ने बताया कि FSSAI लगातार जांच, लेबलिंग पर कार्रवाई और मिलावट रोकने के अभियान चला रहा है. साथ ही जांच के जो आंकड़े सामने आए हैं उन्होंने भी चिंता बढ़ा दी है.&amp;nbsp;
सरकार के मुताबिक 2025-26 में देशभर से 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई. इनमें 40,023 नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. इन मामलों में 31,878 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 1,918 आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध हुए हुए.
&#039;हेल्थ ड्रिंक&#039; के नाम पर बेचने पर भी सख्ती
FSSAI ने पहले ही साफ कर दिया है कि &#039;Health Drink&#039; नाम की कोई कानूनी श्रेणी नहीं है. इसके बाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए गए कि ऐसे उत्पादों को गलत कैटेगरी में न दिखाया जाए और उन्हें सही श्रेणी में रखा जाए.&amp;nbsp;
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कैफीन की भी तय है सीमा
सरकार के मुताबिक, कैफीन वाले पेय में 145 से 300 मिलीग्राम प्रति लीटर तक ही कैफीन हो सकती है. हर उत्पाद पर यह चेतावनी भी लिखना जरूरी है कि 500 मिलीलीटर से ज्यादा एक दिन में सेवन न करें.&amp;nbsp;
मिलावट रोकने के लिए FSSAI ने क्या किया?
सरकार ने बताया कि FSSAI #NoToAdulteration अभियान चला रहा है. इसके अलावा Food Safety on Wheels, RAPID टेस्ट किट, DART बुकलेट और मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के जरिए मिलावट की जांच और लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है.&amp;nbsp;
कैंसर और हार्ट डिजीज पर क्या बोली सरकार?
संसद में पूछा गया था कि क्या मिलावटी एनर्जी ड्रिंक्स और ज्यादा कैफीन की वजह से कैंसर, लकवा और दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं. सरकार ने अपने जवाब में ऐसे किसी सीधे वैज्ञानिक संबंध की पुष्टि नहीं की. जवाब में सरकार ने बस नियमों, तय मानकों और कार्रवाई की जानकारी दी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 18:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>House Cleaning Tips: घर का कौन&amp;सा कोना सबसे पहले साफ करना चाहिए? ज्यादातर लोग करते हैं गलती</title>
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        <description><![CDATA[ Best Cleaning Order for Your Home: घर की सफाई करते समय ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे किसी भी कमरे से शुरुआत कर देते हैं. कोई बेडरूम से सफाई शुरू करता है तो कोई ड्रॉइंग रूम से. कई लोग तो सबसे पहले झाड़ू-पोछा लगाने लगते हैं. लेकिन अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो हो सकता है कि आपकी मेहनत और समय दोनों ज्यादा लग रहे हों. सफाई से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि घर साफ करने का भी एक सही क्रम होता है और अगर उसी के अनुसार काम किया जाए तो पूरा घर कम समय में ज्यादा व्यवस्थित और साफ नजर आता है.&amp;nbsp;
अगर सवाल यह है कि घर का कौन-सा हिस्सा सबसे पहले साफ करना चाहिए, तो जवाब है रसोई. यह सुनकर कई लोगों को हैरानी हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि सफाई की शुरुआत हमेशा किचन से करनी चाहिए. इसकी वजह सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि सफाई को आसान और प्रभावी बनाना भी है.
क्यों किचन की सफाई पहले जरूरी?
दरअसल, किचन घर का वह हिस्सा है जहां सबसे ज्यादा तरह की सफाई करनी पड़ती है. यहां काउंटर, गैस स्टोव, सिंक, चिमनी, कैबिनेट, फ्रिज और कई छोटे-बड़े उपकरण रोज इस्तेमाल होते हैं. खाना बनाने के दौरान तेल की चिकनाई, मसालों के दाग, खाने के छोटे-छोटे कण और नमी आसानी से जमा हो जाती है. अगर इनकी नियमित सफाई न हो तो बैक्टीरिया पनपने का खतरा भी बढ़ जाता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ सबसे पहले इसी हिस्से को साफ करने की सलाह देते हैं.

मुश्किल काम आसान हो जाता है
किचन की सफाई पहले करने का एक और फायदा यह है कि सबसे मुश्किल काम शुरुआत में ही पूरा हो जाता है. जब घर का सबसे मेहनत वाला हिस्सा चमकने लगता है तो मनोवैज्ञानिक रूप से भी एक संतुष्टि मिलती है. इससे बाकी कमरों की सफाई करने का उत्साह बना रहता है और काम अधूरा छोड़ने का मन नहीं करता.
किचन के बाद किसको साफ करें?
किचन के बाद अगला नंबर बाथरूम का होना चाहिए। यह भी घर का ऐसा हिस्सा है, जिसका सीधा संबंध साफ-सफाई और स्वच्छता से होता है. बाथरूम की सफाई में ज्यादा समय नहीं लगता, लेकिन इसे साफ करने के बाद पूरा घर ज्यादा फ्रेश महसूस होने लगता है. अगर घर में मेहमान आने वाले हों, तब भी किचन और बाथरूम सबसे पहले साफ करने की सलाह दी जाती है.
&amp;nbsp;ड्रॉइंग रूम या लिविंग रूम की सफाई
इसके बाद ड्रॉइंग रूम या लिविंग रूम की सफाई करें. यह घर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला हिस्सा होता है, जहां परिवार के सदस्य और मेहमान सबसे ज्यादा समय बिताते हैं. यहां बिखरे सामान को व्यवस्थित करें, कुशन और कंबल ठीक करें, सेंटर टेबल और दूसरी सतहों की धूल साफ करें. अगर कालीन बिछा है तो आखिर में वैक्यूम क्लीनर या झाड़ू का इस्तेमाल करें.

बेडरूम की सफाई&amp;nbsp;
लिविंग रूम के बाद बेडरूम की सफाई करें. चादर बदलें, तकिए व्यवस्थित करें, फर्नीचर की धूल साफ करें और जरूरत के मुताबिक सामान को अपनी जगह पर रखें. क्योंकि बेडरूम में आमतौर पर आवाजाही कम होती है, इसलिए इसे आखिर में साफ करना ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है. सिर्फ कमरे का क्रम ही नहीं, बल्कि हर कमरे के अंदर सफाई करने का तरीका भी मायने रखता है. एक्सपर्ट के मुताबिक हमेशा ऊपर से नीचे की ओर सफाई करनी चाहिए. यानी सबसे पहले पंखे, लाइट, शेल्फ और ऊंची सतहों की धूल साफ करें. इसके बाद टेबल, कुर्सियां और बाकी फर्नीचर साफ करें. सबसे आखिर में झाड़ू, वैक्यूम और पोछा लगाएं. अगर शुरुआत में ही फर्श साफ कर देंगे तो ऊपर से गिरने वाली धूल और कचरा दोबारा फर्श पर जमा हो जाएगा और मेहनत बेकार चली जाएगी.
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कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए?
सफाई के दौरान कुछ गलतियां भी अक्सर देखने को मिलती हैं. सबसे बड़ी गलती है एक कमरे का काम अधूरा छोड़कर दूसरे कमरे में चले जाना. ऐसा करने से समय भी ज्यादा लगता है और कोई भी कमरा पूरी तरह साफ नहीं हो पाता. बेहतर होगा कि एक कमरे की सफाई पूरी करने के बाद ही अगले कमरे की तरफ बढ़ें. सफाई शुरू करने से पहले जरूरी सामान भी एक जगह रख लें. झाड़न, माइक्रोफाइबर कपड़ा, क्लीनर, ब्रश, ग्लव्स और कूड़ेदान का बैग पहले से तैयार रहेगा तो बार-बार सामान ढूंढने में समय बर्बाद नहीं होगा. अगर चाहें तो सफाई की एक छोटी-सी चेकलिस्ट भी बना सकते हैं, ताकि कोई जरूरी जगह छूट न जाए.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Junk Food Ban Near Schools: बच्चों में बढ़ते मोटापे को रोकने के लिए बड़ा कदम, स्कूलों के पास जंक फूड बैन</title>
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        <description><![CDATA[ Maharashtra School Junk Food Ban: स्कूल की छुट्टी होते ही बाहर लगे समोसे, वड़ा पाव और ठंडी ड्रिंक के ठेलों पर बच्चों की भीड़ लगना आम बात है. लेकिन महाराष्ट्र में अब यह नजारा बदल सकता है. राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने स्कूलों के आसपास बच्चों को जंक फूड से दूर रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है. नए निर्देश के मुताबिक राज्य के किसी भी स्कूल के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री, वितरण और प्रचार पर रोक लगा दी गई है.
इस फैसले का मतलब सिर्फ स्कूल की कैंटीन तक सीमित नहीं है. अब स्कूल के बाहर सड़क किनारे लगने वाले ठेले और दुकानें भी इस दायरे में आएंगी. यानी अगर कोई विक्रेता स्कूल के गेट के पास समोसा, वड़ा पाव, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट या इसी तरह की दूसरी चीजें बेचता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
किन चीजों पर लगी है रोक?
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन आयुक्त तुकाराम मुंडे के अनुसार, स्कूलों और उनके 50 मीटर के दायरे में अधिक वसा, ट्रांस फैट और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी. इसमें गहरे तेल में तली हुई चीजें, वड़ा पाव, समोसा, शक्कर वाले पेय पदार्थ, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, आइसक्रीम और अन्य जंक फूड शामिल हैं. इसके अलावा इन खाद्य पदार्थों का मुफ्त वितरण या विज्ञापन भी इस क्षेत्र में नहीं किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि बच्चों के आसपास स्वस्थ खानपान का माहौल बनाना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है.

नियम नहीं मानने पर स्कूलों पर भी होगी कार्रवाई
इस आदेश की सबसे अहम बात यह है कि इसकी जिम्मेदारी सिर्फ दुकानदारों या ठेला संचालकों पर नहीं होगी. अगर कोई स्कूल इस नियम का पालन कराने में लापरवाही करता है, तो उसके प्राचार्य और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने साफ किया है कि जल्द ही पूरे राज्य में निरीक्षण अभियान शुरू किया जाएगा. ऐसे में यह सिर्फ सलाह या जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि लागू किया जाने वाला नियम है.
करीब 2 करोड़ छात्रों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का असर महाराष्ट्र के लगभग 1.08 लाख स्कूलों और करीब 2 करोड़ छात्रों पर पड़ेगा. यह नियम सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी और आवासीय सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा. चाहे स्कूल किसी भी शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हो, जैसे राज्य बोर्ड, सीबीएसई या एआसीएसई, सभी को इन निर्देशों का पालन करना होगा.

बच्चों में बढ़ रहा मोटापा बना चिंता
राज्य सरकार का मानना है कि बच्चों में बढ़ता मोटापा और खराब खानपान की आदतें अब गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी हैं. इसी वजह से सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र अभियान के तहत यह कदम उठाया गया है. अधिकारियों का कहना है कि लगातार जंक फूड खाने की आदत बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और दूसरी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ा रही है. अगर स्कूलों के आसपास स्वस्थ भोजन का माहौल बनाया जाए, तो बच्चों की खानपान संबंधी आदतों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है.
भारत में तेजी से बढ़ रही समस्या
आज भारत सिर्फ कुपोषण की चुनौती से ही नहीं जूझ रहा, बल्कि बच्चों में बढ़ते मोटापे की समस्या भी तेजी से सामने आ रही है. वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026 के मुताबिक, देश में 5 से 19 साल की उम्र के 4.1 करोड़ से ज्यादा बच्चे अधिक वजन या मोटापे का शिकार हैं. इस मामले में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है. एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं. बड़ी संख्या में किशोर पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते. वहीं, कई बच्चों को नियमित और संतुलित भोजन भी नहीं मिल पाता. दूसरी ओर प्रोसेस्ड स्नैक्स, मीठे पेय पदार्थ, बढ़ता स्क्रीन टाइम और खेलकूद के लिए कम समय जैसी आदतें इस समस्या को और गंभीर बना रही हैं.
आने वाले वर्षों में बढ़ सकती है चुनौती
एक्सपर्ट की चिंता सिर्फ मौजूदा स्थिति तक सीमित नहीं है. अगर बच्चों की खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. अनुमान है कि 2040 तक भारत में करीब 5.6 करोड़ बच्चे अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में पहुंच सकते हैं. इसके साथ ही कम उम्र में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और लिवर से जुड़ी बीमारियों के मामलों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
इसे भी पढ़ेंः Exam Preparation: क्या रातभर जागकर पढ़ते हैं? जानें बड़े नुकसान
इसी खतरे को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों के आसपास जंक फूड की उपलब्धता कम करने की दिशा में यह कदम उठाया है. सरकार को उम्मीद है कि इससे बच्चों के बीच स्वस्थ खानपान की आदतों को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिलेगी.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>राखी के लिए घर पर ही बन जाएगा डिजाइनर ब्लाउज, इन टिप्स को करें फॉलो</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/राखी-के-लिए-घर-पर-ही-बन-जाएगा-डिजाइनर-ब्लाउज-इन-टिप्स-को-करें-फॉलो</link>
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        <description><![CDATA[ Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला है. ऐसे में ज्यादातर महिलाएं सुंदर दिखना पसंद करती है. नई साड़ी के साथ सुंदर ब्लाउज पहनना पसंद करती हैं, लेकिन हर बार नया डिजाइनर ब्लाउज सिलवाना न तो आसान होता है और न ही जरूरी. ऐसे में अगर आपके पास पुराना सिंपल ब्लाउज है तो उसे भी घर पर थोड़ा-सा बदलकर नया और स्टाइलिश लुक दिया जा सकता है. इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी और यह आसानी से तैयारी भी हो जाएगा. आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स...
नेकलाइन और स्लीव्स में करें छोटा-सा बदलाव
सबसे पहले ब्लाउज की नेकलाइन पर ध्यान दें. अगर आपका ब्लाउज सिंपल है तो उसकी नेकलाइन पर लेस, गोटा या छोटी-छोटी मोतियों की पट्टी लगा सकते हैं. इससे ब्लाउज का लुक तुरंत बदल जाएगा. अगर आपके पास पुराने दुपट्टे या ड्रेस का बचा हुआ कपड़ा है तो उससे ब्लाउज की स्लीव्स को नया डिजाइन दे सकते हैं. अलग रंग या प्रिंट का कपड़ा लगाने से ब्लाउज और भी आकर्षक दिखता है.
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डोरी, लटकन और मिरर वर्क से मिलेगा नया लुक
आजकल पीछे की तरफ डोरी वाले ब्लाउज भी काफी पसंद किए जाते हैं. अगर आपका ब्लाउज प्लेन है, तो पीछे सुंदर डोरी लगाकर उस पर छोटे-छोटे टैसल या लटकन लगा सकते हैं. इससे ब्लाउज डिजाइनर जैसा दिखने लगता है. ब्लाउज पर हल्की-सी कढ़ाई, मिरर वर्क या छोटे स्टोन भी लगाए जा सकते हैं. अगर आपको सिलाई नहीं आती, तो बाजार में मिलने वाले रेडीमेड फैब्रिक पैच या स्टिकर स्टोन का इस्तेमाल कर सकते हैं. इन्हें लगाना आसान होता है और ब्लाउज का लुक भी बेहतर हो जाता है.
कम खर्च में पाएं डिजाइनर ब्लाउज जैसा लुक
अगर समय कम है तो सिर्फ मैचिंग लेस या बॉर्डर लगाकर भी ब्लाउज को नया लुक दिया जा सकता है. यह तरीका आसान भी है और कम खर्च में काम हो जाता है. ध्यान रखें कि ब्लाउज में बहुत ज्यादा डिजाइन जोड़ने की बजाय हल्का और साफ-सुथरा डिजाइन चुनें. इससे ब्लाउज ज्यादा सुंदर लगता है और साड़ी के साथ भी अच्छी तरह मैच करता है.
रक्षाबंधन पर खूबसूरत दिखने के लिए महंगा डिजाइनर ब्लाउज खरीदना जरूरी नहीं है. थोड़ी-सी मेहनत और कुछ आसान बदलाव करके आप अपने पुराने ब्लाउज को भी नया और स्टाइलिश बना सकते हैं. इससे आपके पैसे भी बचेंगे और आपका त्योहारी लुक भी सबसे अलग नजर आएगा.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Increasing Cases of Dengue Virus: महामारी बनेगा डेंगू! देश में एक साथ एक्टिव हुए चारों स्ट्रेन</title>
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        <description><![CDATA[ Dengue Virus: बारिश में जितना आनंद आता है उतना ही इस मौसम में मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से फैलता है, जिससे देश भर में डेंगू जैसी गंभीर बीमारी के मामले बढ़ना शुरू हो जाते हैं. आंकड़ों को देखें तो बीते कुछ सालों में डेंगू का खतरा काफी बढ़ गया है. अब ICMR ( Indian council of medical research) की एक ताजा स्टडी में हैरान कर देने वाली बात सामने आई है.
इस स्टडी में सामने आया है कि देश में डेंगू के चारों स्ट्रेन यानी DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 एक साथ सक्रिय हो चुके हैं. खास बात यह है कि इनमें से DENV-2 अभी भी सबसे ज्यादा फैलने वाला स्ट्रेन है, जबकि कई राज्यों में DENV-3 भी तेजी से बढ़ रहा है. इतना ही नहीं कई मरीजों में तो एक साथ दो-दो स्ट्रेन का इंफेक्शन पाया गया. ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि जब एक ही समय में इतने सारे स्ट्रेन सक्रिय हो जाते हैं, तो बीमारी की पहचान करने और उसका इलाज करना दोनों ही मुश्किल हो जाता है.&amp;nbsp;
बार-बार डेंगू क्यों बन रहा है खतरनाक?
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बारिश में जगह-जगह पानी जमा होना है. बारिश के जमा पानी में मच्छरों को पनपने की सही जगह मिल जाती है. इसके अलावा लोगों में साफ-सफाई को लेकर लापरवाही, घरों के आसपास कूलर, गमले और टायरों में पानी का जमा रहना भी मच्छरों को बढ़ावा देता है. यही वजह है कि देश भर में डेंगू के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं.
बात यहीं तक सीमित नहीं है,सबसे चिंता यह है कि एक स्ट्रेन से ठीक होने के बाद भी शरीर बाकी तीन स्ट्रेन से सुरक्षित नहीं रहता. यानी एक इंसान को जीवन में चार बार तक डेंगू हो सकता है. इससे भी खतरनाक बात यह है कि दूसरी बार अगर किसी दूसरे स्ट्रेन से डेंगू होता है तो उसकी हालत और गंभीर हो जाती है. इसी वजह से एक्सपर्ट्स लगातार इस स्थिति को लेकर अलर्ट रहने की सलाह दें रहे हैं. इतना ही नहीं भारत दुनिया के उन टॉप देशों में शामिल है जहां डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं. यही वजह है कि इस स्टडी ने सबका ध्यान अपनी और खींच लिया है. &amp;nbsp;
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डेंगू की नई वैक्सीन किस स्ट्रेन पर कितनी असरदार?
भारत में डेंगू की वैक्सीन Qdenga को मंजूरी मिल गई है, जो चारों स्ट्रेन से बचाव के लिए बनाई गई है. कंपनी के मुताबिक, दूसरी डोज के एक साल बाद यह वैक्सीन करीब 80 प्रतिशत तक डेंगू से बचाती है, और इतना ही नहीं ये 90 प्रतिशत मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से बचाती है. हालांकि, इसके सामने एक चुनौती भी है कि हर स्ट्रेन पर इसका असर एक जैसा नहीं होता है. स्टडी के अनुसार, यह वैक्सीन DENV-2 के खिलाफ सबसे ज्यादा असरदार है, क्योंकि इसी स्ट्रेन के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे थे. इसलिए इसके आधार पर ही वैक्सीन को डेवलप किया गया है, जबकि बाकी तीन स्ट्रेन के खिलाफ इसका असर उन्हीं लोगों में ज्यादा दिखता है जिन्हें पहले कभी डेंगू हो चुका होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Water Tank Cleaning: पानी की टंकी साफ दिखती है, फिर भी कितने महीने में साफ करनी चाहिए?</title>
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        <description><![CDATA[ How Often Should You Clean a Water Tank: घर की पानी की टंकी ऊपर से देखने में बिल्कुल साफ दिखाई दे सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसके अंदर जमा पानी भी पूरी तरह सुरक्षित है. अक्सर लोग टंकी की सफाई तभी करवाते हैं, जब पानी का रंग बदलने लगे या उसमें बदबू आने लगे. जबकि एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसा होने का इंतजार करना सही नहीं है. टंकी की नियमित सफाई न सिर्फ पानी की क्वालिटी बनाए रखती है, बल्कि परिवार को बैक्टीरिया, शैवाल और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों से भी बचाती है.
दरअसल, पानी की टंकी लंबे समय तक बंद रहने के कारण उसके अंदर धीरे-धीरे धूल, मिट्टी, जंग के कण और खनिज जमा होने लगते हैं. अगर टंकी छत पर रखी है और लगातार धूप पड़ती है तो उसके अंदर एल्गी और बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं. बाहर से टंकी बिल्कुल साफ दिखने के बावजूद अंदर की सतह पर गंदगी जमा हो सकती है, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले पानी को प्रभावित करती है.
कितने महीने में करनी चाहिए सफाई?
अगर आपके घर में सामान्य पानी की सप्लाई आती है, तो पानी की टंकी की सफाई हर 6 महीने में एक बार जरूर करानी चाहिए. यही सबसे सुरक्षित अंतराल माना जाता है. हालांकि कुछ परिस्थितियों में यह समय और कम भी हो सकता है. अगर आपके इलाके में हार्ड वॉटर की समस्या है, पानी की सप्लाई बार-बार बाधित होती है, आसपास धूल ज्यादा रहती है या मानसून के दौरान पानी की क्वालिटी खराब हो जाती है, तो टंकी की सफाई हर 3 से 4 महीने में कराना बेहतर रहेगा. वहीं किसी भी स्थिति में टंकी को 12 महीने से ज्यादा बिना साफ किए नहीं छोड़ना चाहिए.
कौन-से संकेत बताते हैं कि अब सफाई जरूरी है?
कई बार टंकी खुद संकेत देने लगती है कि अब सफाई का समय आ गया है. अगर नल के पानी का स्वाद बदल जाए, उसमें हल्की बदबू आने लगे या पानी का रंग पीला, भूरा या धुंधला दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा गिलास में पानी भरने पर नीचे महीन कण दिखाई देना, पानी का दबाव कम होना या पाइपलाइन में बार-बार रुकावट आना भी टंकी के अंदर गंदगी जमा होने के संकेत हो सकते हैं. अगर टंकी के अंदर टॉर्च से देखने पर हरे रंग की परत या एल्गी नजर आए तो तुरंत सफाई करानी चाहिए.
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टंकी की सफाई कैसे करें?
सबसे पहले पानी की सप्लाई बंद करें और टंकी को पूरी तरह खाली कर दें. इसके बाद लंबे हैंडल वाले ब्रश या पोछे की मदद से टंकी की अंदरूनी दीवारों और तली को अच्छी तरह रगड़कर साफ करें. जिद्दी दाग होने पर हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद साफ पानी से टंकी को कई बार धोएं ताकि सारी गंदगी और साबुन पूरी तरह निकल जाए. अंतिम चरण में घरेलू ब्लीच से तैयार की गई कीटाणुनाशक घोल का इस्तेमाल करें. इसे कुछ समय तक टंकी में रहने दें ताकि बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव खत्म हो जाएं. आखिर में टंकी को दोबारा साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही भरें.

कुछ छोटी बातें भी रखें ध्यान
सिर्फ सफाई करना ही काफी नहीं है. समय-समय पर टंकी का ढक्कन भी जांचते रहें. अगर ढक्कन टूटा हुआ है या ठीक से बंद नहीं होता, तो धूल, कीड़े-मकौड़े और बारिश का गंदा पानी आसानी से अंदर पहुंच सकता है. इससे पानी जल्दी दूषित होने लगता है. अगर टंकी लंबे समय तक आधी खाली रहती है और पानी कई दिनों तक उसी में जमा रहता है, तो भी बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए कोशिश करें कि पानी का नियमित इस्तेमाल होता रहे और टंकी में लंबे समय तक ठहरा हुआ पानी न रहे.

सफाई का समय पहले से तय करें
अक्सर लोग टंकी की सफाई तब याद करते हैं, जब कोई समस्या सामने आती है. बेहतर होगा कि हर छह महीने का रिमाइंडर पहले से कैलेंडर या मोबाइल में सेट कर लें. इससे सफाई समय पर होती रहेगी और पानी की क्वालिटी भी बनी रहेगी. याद रखें, सिर्फ इसलिए कि पानी की टंकी बाहर से साफ दिख रही है, यह मान लेना ठीक नहीं कि अंदर भी सब कुछ साफ है.
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        <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 02:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Snake Prevention Tips: बारिश में न आएं सांप, अपनाएं ये आसान टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Snakes Away In Monsoon: मानसून का मौसम जहां हरियाली और ठंडक लेकर आता है, वहीं सांपों के घरों के आसपास दिखाई देने की घटनाएं भी इसी दौरान बढ़ जाती हैं. लगातार बारिश होने पर बिलों और जमीन के नीचे मौजूद जगहों में पानी भर जाता है, जिससे सांप सुरक्षित और सूखी जगह की तलाश में निकल पड़ते हैं. यही वजह है कि कई बार वे घर, बगीचे, बालकनी या छत तक पहुंच जाते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि सांप इंसानों पर हमला करने के लिए घरों में नहीं आते, बल्कि उन्हें भोजन, पानी और छिपने की सुरक्षित जगह आकर्षित करती है. ऐसे में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
घर और बालकनी में बेकार सामान जमा न होने दें
बारिश के मौसम में घर की छत, बालकनी या गार्डन में अक्सर पुराने गमले, ईंटें, लकड़ी, पाइप, कार्डबोर्ड के डिब्बे और सूखे पत्ते जमा हो जाते हैं. ये सभी जगहें सांपों के छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाना बन सकती हैं. इसलिए समय-समय पर इनकी सफाई करें और जिन चीजों की जरूरत नहीं है उन्हें हटा दें. अगर बालकनी या टैरेस पर पौधे लगाए हैं तो उनके आसपास भी सफाई बनाए रखें और घास या बेलों को जरूरत से ज्यादा बढ़ने न दें.

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घर में आने के रास्ते बंद करें
छोटे-छोटे छेद और दरारें भी सांपों के लिए घर में प्रवेश का रास्ता बन सकती हैं. दरवाजे के नीचे का गैप, दीवारों की दरारें, पाइपलाइन के आसपास की खुली जगह, ड्रेनेज आउटलेट और वेंटिलेशन जैसी जगहों की जांच करें. जहां जरूरत हो वहां सीलेंट लगाएं और ड्रेन या वेंट पर मजबूत जाली लगाएं. अगर घर की छत पर पानी निकालने का पाइप खुला है तो उस पर भी महीन वायर मेश लगाना बेहतर रहेगा.
पानी जमा न होने दें
बारिश के दौरान गमलों की ट्रे, बाल्टी, टायर या अन्य बर्तनों में पानी जमा रहना आम बात है. यह न सिर्फ मच्छरों के पनपने की वजह बनता है बल्कि मेंढक और कीड़ों को भी आकर्षित करता है. चूंकि सांप इन्हीं जीवों का शिकार करते हैं, इसलिए ऐसी जगहों पर उनके आने की संभावना बढ़ जाती है बारिश के बाद गमलों की ट्रे खाली करें, लीकेज ठीक कराएं और इस बात का ध्यान रखें कि कहीं भी लंबे समय तक पानी जमा न रहे.
पेड़ों की शाखाएं और बेलें समय पर काटें
अगर आपके घर की बालकनी या छत के पास पेड़ों की शाखाएं पहुंच रही हैं या दीवारों पर घनी बेलें फैली हुई हैं तो उन्हें समय-समय पर काटते रहें. कई प्रजातियों के सांप खुरदरी सतहों, पाइपों, पेड़ों की डालियों और बेलों के सहारे ऊपर तक चढ़ सकते हैं. इसलिए कोशिश करें कि कोई भी शाखा या बेल घर की रेलिंग या दीवार को न छुए.

घर के आसपास चूहे और दूसरे कीट न पनपने दें
एक्सपर्ट के मुताबिक सांप वहां ज्यादा आते हैं जहां उन्हें आसानी से भोजन मिल सके. अगर घर के आसपास चूहे, मेंढक या बड़े कीड़ों की संख्या अधिक है तो सांपों के आने की संभावना भी बढ़ जाती है. पालतू जानवरों का खाना खुले में न छोड़ें, कूड़ेदान को ढककर रखें, गिरे हुए फल तुरंत हटा दें और यदि चूहों की समस्या हो तो समय रहते उसका समाधान करें. जब भोजन के स्रोत कम होंगे तो सांप भी उस जगह की ओर कम आकर्षित होंगे.
रोशनी का भी रखें ध्यान
रातभर जलने वाली तेज सफेद रोशनी बड़ी संख्या में कीड़ों को आकर्षित करती है. इसके बाद मेंढक और अन्य छोटे जीव वहां पहुंचते हैं और उनके पीछे सांप भी आ सकते हैं. ऐसे में बाहर की लाइट के लिए पीले रंग की एलईडी या मोशन सेंसर लाइट का इस्तेमाल बेहतर विकल्प माना जाता है. इससे जरूरत के समय रोशनी भी मिलती है और पूरी रात कीड़ों की आवाजाही भी कम रहती है.
घरेलू उपायों पर पूरी तरह भरोसा न करें
अक्सर लोग लहसुन, नीम की पत्तियां, लौंग का तेल, तंबाकू या नेफ्थलीन की गोलियों को सांप भगाने का असरदार उपाय मानते हैं. हालांकि इनके प्रभाव को लेकर साइंटफिक प्रमाण बहुत सीमित हैं. इसलिए इन्हें सुरक्षा का मुख्य उपाय मानने के बजाय अतिरिक्त सावधानी के तौर पर ही इस्तेमाल करें. यदि नेफ्थलीन की गोलियां रखें तो उन्हें बच्चों, पालतू जानवरों और खाने-पीने की चीजों से दूर रखें.
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>घर पर आसानी से बना सकते हैं डिजाइनर राखी, इन टिप्स को करें फॉलो</title>
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        <description><![CDATA[ रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. बाजार में कई तरह की राखियां मिल जाती हैं, लेकिन अगर आप अपने हाथों से राखी बनाते हैं तो उसकी बात ही अलग होती है. घर पर बनी राखी देखने में भी सुंदर लगती है और इसमें आपके प्यार की झलक भी दिखती है. अच्छी बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा खर्च भी नहीं आता.
सबसे पहले सामान तैयार करें
राखी बनाने के लिए आपको रंगीन धागा, साटन रिबन, मोती, कुंदन, छोटे फूल, गोंद, कैंची और फेल्ट शीट जैसी चीजों की जरूरत पड़ सकती है. इनमें से ज्यादातर सामान आसानी से बाजार या स्टेशनरी की दुकान पर मिल जाता है.
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पहले डिजाइन सोच लें
राखी बनाने से पहले तय कर लें कि आप कैसी राखी बनाना चाहते हैं. अगर आपको सिंपल डिजाइन पसंद है, तो सिर्फ मोती और धागे से भी सुंदर राखी बना सकते हैं. अगर थोड़ा अलग लुक चाहिए तो कुंदन, छोटे फूल या रंगीन स्टोन का इस्तेमाल कर सकते हैं.
गोंद का सही इस्तेमाल करें
राखी बनाते समय गोंद अच्छी क्वालिटी की रखें ताकि मोती या सजावट आसानी से निकलें नहीं. सभी चीजों को चिपकाने के बाद कुछ देर तक सूखने दें. इससे राखी ज्यादा मजबूत बनती है.
रंगों का रखें ध्यान
राखी बनाते समय ऐसे रंग चुनें जो एक-दूसरे के साथ अच्छे लगें. लाल, पीला, सुनहरा और हरा रंग रक्षाबंधन पर काफी पसंद किए जाते हैं. आप चाहें तो भाई की पसंद के रंग से भी राखी तैयार कर सकते हैं.
आखिर में दें फाइनल टच
जब राखी पूरी बन जाए, तो एक बार उसे अच्छी तरह देख लें. अगर कहीं धागा बाहर निकल रहा है या कोई मोती ढीला है तो उसे ठीक कर दें. इसके बाद राखी को किसी छोटे डिब्बे या सुंदर पैकिंग में रख सकते हैं.
अगर इस रक्षाबंधन आप कुछ अलग करना चाहते हैं तो घर पर डिजाइनर राखी बनाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इससे पैसे भी बचेंगे और आपके हाथों से बनी राखी भाई के लिए हमेशा खास याद बन जाएगी.
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Unnecessary Blood Tests: क्या आप भी बार&amp;बार कराते हैं ब्लड टेस्ट? जानें नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Disadvantages Of Unnecessary Medical Tests: बार-बार ब्लड टेस्ट कराना आजकल कई लोगों की आदत बन गया है. थोड़ा-सा थकान महसूस हुई तो विटामिन B12 की जांच, वजन बढ़ा तो थायरॉयड टेस्ट, और फिटनेस पर ध्यान देना है तो दर्जनों जांचों वाला हेल्थ पैकेज. लेकिन क्या हर बार ब्लड टेस्ट कराना वास्तव में जरूरी होता है? एक्सपर्ट का कहना है कि जरूरत से ज्यादा जांच कई बार फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है.
अक्सर ऐसा होता है कि किसी रिपोर्ट में कोई एक वैल्यू सामान्य सीमा से थोड़ा ऊपर या नीचे आ जाती है. इसे देखकर लोग घबरा जाते हैं, जबकि हर मामूली बदलाव किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता. इसके बाद एक के बाद एक नई जांचें, डॉक्टर के चक्कर और अनावश्यक इलाज की स्थिति बन सकती है. इसलिए सिर्फ इसलिए बार-बार टेस्ट कराना कि वह आसानी से उपलब्ध है, सही तरीका नहीं माना जाता.
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद के इंटरनल मेडिसिन विभाग के निदेशक डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल ने TOI को बताया कि, ब्लड टेस्ट हमेशा व्यक्ति के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम कारकों को ध्यान में रखकर ही कराए जाने चाहिए. बिना किसी स्पष्ट वजह के बार-बार जांच कराने से बचना बेहतर है.
किन जांचों को लोग जरूरत से ज्यादा दोहराते हैं?
डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि विटामिन D, विटामिन B12, थायरॉयड फंक्शन टेस्ट, HbA1c, कोलेस्ट्रॉल और कम्प्लीट ब्लड काउंट जैसी जांचें अक्सर लोग बिना जरूरत दोहराते रहते हैं. यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी नहीं है, इलाज में कोई बदलाव नहीं हुआ है और कोई नया लक्षण भी सामने नहीं आया है, तो इन जांचों को बार-बार कराने से आमतौर पर कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता. जांच कब करानी है, इसका फैसला डॉक्टर की सलाह और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर होना चाहिए.
जरूरत से ज्यादा ब्लड टेस्ट के क्या नुकसान हैं?
बार-बार ब्लड टेस्ट कराने से केवल सुई चुभने की परेशानी ही नहीं होती, बल्कि इसके दूसरे नुकसान भी हो सकते हैं। रिपोर्ट में मामूली उतार-चढ़ाव देखकर कई लोग मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं. कई बार रिपोर्ट में फॉल्स पॉजिटिव यानी गलत तरीके से असामान्य परिणाम भी आ सकते हैं, जिसके कारण अतिरिक्त जांच, अनावश्यक खर्च और ऐसे इलाज शुरू हो सकते हैं जिनकी वास्तव में जरूरत ही न हो. इसके अलावा, बार-बार नस से खून निकालने की प्रक्रिया से सूजन, नील पड़ना या नसों में जलन जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. कुछ मामलों में, खासकर महिलाओं में, लगातार ब्लड निकाले जाने से एनीमिया का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि ब्लड टेस्ट तभी कराया जाए जब उसके पीछे कोई स्पष्ट चिकित्सीय कारण हो.

स्वस्थ व्यक्ति को कितनी बार ब्लड टेस्ट कराना चाहिए?
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, यदि कोई एडल्ट पूरी तरह स्वस्थ है और उसे कोई लक्षण नहीं हैं, तो आमतौर पर हर एक से तीन साल में एक बार नियमित ब्लड टेस्ट कराना पर्याप्त हो सकता है. हालांकि इसकी अवधि व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक स्वास्थ्य इतिहास और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करती है. रूटीन जांच में आमतौर पर कम्प्लीट ब्लड काउंट , ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, किडनी फंक्शन टेस्ट और जरूरत होने पर लिवर व थायरॉयड फंक्शन टेस्ट शामिल किए जा सकते हैं. इसके साथ-साथ ब्लड प्रेशर, वजन और लाइफस्टाइल का नियमित आकलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
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एक्सपर्ट का मानना है कि अच्छी सेहत का मतलब ज्यादा से ज्यादा टेस्ट कराना नहीं, बल्कि सही समय पर सही जांच कराना है. यदि कोई नया लक्षण दिखाई दे, पहले से कोई बीमारी हो या डॉक्टर किसी जांच की सलाह दें, तभी ब्लड टेस्ट कराना सबसे उचित रहता है. बिना वजह बार-बार जांच कराने के बजाय संतुलित लाइफस्टाइल अपनाना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना लंबे समय तक स्वस्थ रहने का बेहतर तरीका है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Snail Mail Trend: इंस्टेंट मैसेज के दौर में क्यों बढ़ रहा &amp;apos;स्नेल मेल क्लब&amp;apos; का क्रेज?</title>
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        <description><![CDATA[ Snail Mail Trend:&amp;nbsp;एक जमाना था जब घर की घंटी बजते ही एक अलग सी खुशी मिलती है कोई चिट्ठी, मनी ऑर्डर लाया है. लेकिन आज घंटी बजने से पहले ही सोसाइटी की ऐप बता देती है कि कौन सी डिलीवरी आ रही है, चाहे वह अमेजन हो, ब्लिंकिट हो या स्विगी. हर दिन दरवाजे पर डिलीवरी की लाइन लगी रहती है, लेकिन उसमें अब वह मजा नहीं बचा, सिर्फ इंस्टेंट सैटिस्फैक्शन रह गया है. यही वजह है कि इसी इंस्टेंट कल्चर के बीच लोग अब फिर से असली चिट्ठियों का इंतजार करने लगे हैं. इंस्टाग्राम या पिंटरेस्ट पर स्नेल मेल सर्च करते ही खूबसूरती से सजाए गए लिफाफे दिखते हैं, जिन पर टेप, पुराने जमाने की स्टैंप, सूखे फूल, रंग-बिरंगे स्टिकर और खूबसूरत हैंडराइटिंग होती है.&amp;nbsp;
स्नेल मेल क्लब में होता क्या है?
आज के डिजिटल थकान भरे माहौल में लोग खुद को जोड़े रखने और छोटे-छोटे कम्युनिटी बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और इसी वजह से स्नेल मेल क्लब का ट्रेंड में चल रहा है.&amp;nbsp; स्नेल मेल कोई नया शब्द नहीं है, यह पुराने जमाने से ही इस्तेमाल होता आ रहा है, क्योंकि डाक से आने वाली चिट्ठी घोंघे जैसी धीमी रफ्तार से पहुंचती थी. इसमें होता यह है कि कोई सोशल मीडिया अकाउंट हर महीने आपको हाथ से लिखी हुई एक खूबसूरत चिट्ठी, कोई आर्टिस्टिक पोस्टकार्ड और कुछ स्टेशनरी आइटम भेजता है. साथ में कभी-कभी बुकमार्क या फ्रिज मैग्नेट जैसी चीजें भी होती हैं, और कई बार एक सरप्राइज एलिमेंट भी रखा जाता है. यह पूरी तरह सब्सक्रिप्शन बेस्ड मॉडल है, जिसकी कीमत आमतौर पर 300 से 500 रुपये महीना होती है, हालांकि क्लब के हिसाब से यह बदल भी सकता है.&amp;nbsp;



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यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp; दूल्हा घोड़ी पर ही क्यों आता है? शादी की इस रस्म के पीछे छिपी है दिलचस्प कहानी
Gen Z को क्यों भा रहा है यह ट्रेंड?
बहुत सारे Gen Z लोगों के लिए यह ट्रेंड सिर्फ पुरानी यादों को याद करने के बारे में नहीं है, बल्कि इसमें उन्हें एनालॉग एक्सपीरियंस की नयापन ज्यादा आकर्षित करती है. पेन पल्स से लेकर लेटर-राइटिंग वर्कशॉप तक, चिट्ठियों की यह भावना हमेशा से मौजूद रही है, बस हर पीढ़ी ने इससे जुड़ने का अपना तरीका खोज लिया है. इस क्लब का मकसद बस इतना है कि लोगों को चिट्ठी पाने की खुशी फिर से महसूस हो, वे रुककर उस चिट्ठी के साथ थोड़ा वक्त बिताएं, उसकी आर्टवर्क को देखें, खुद के बारे में सोचें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Smartwatch Cancer Risk: क्या स्मार्टवॉच पहनने से होता है कैंसर, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/smartwatch-cancer-risk-क्या-स्मार्टवॉच-पहनने-से-होता-है-कैंसर-क्या-कहते-हैं-एक्सपर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Smartwatch Cancer Risk:&amp;nbsp;आजकल लगभग हर दूसरे व्यक्ति की कलाई पर स्मार्ट वॉच दिखाई देती है. यह वॉच हार्ट रेट, कदमों की गिनती और नींद जैसी कई चीजें ट्रैक करती है, इसलिए लोग इसे पूरे दिन और कई बार रात में भी पहन कर सो जाते हैं. &amp;nbsp;लेकिन कई लोग ये दावा करते हैं कि स्मार्ट वॉच से निकलने वाली रेडिएशन से कैंसर जैसा खतरा बढ़ जाता है. ऐसी बाते सुन कर और देखकर लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि कहीं उनके रोजाना स्मार्ट वॉच पहनने से अनकी सेहत के लिए खतरनाक तो नहीं बन जाएगा. ऐसे में इधर उधर की बात सुनने के बजाय यह जानना जरूरी है कि इस पर एक्सपर्ट क्या कहते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.&amp;nbsp;
स्मार्ट वॉच से निकलती है किस तरह की रेडिएशन?
स्मार्ट वॉच ब्लूटूथ, वाई-फाई और सीधे सिम कनेक्शन के जरिए फोन या इंटरनेट से जुड़ी रहती है. यह कनेक्शन बनाने के लिए वॉच बहुत कम पावर वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन छोड़ती है. यह वही तरह की एनर्जी है जो रेडियो तरंगों और रोशनी में पाई जाती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि यह रेडिएशन एक्स-रे जैसी आयोनाइजिंग रेडिएशन से बिल्कुल अलग होती है, क्योंकि इसमें शरीर को सीधे नुकसान पहुंचाने जितनी ताकत नहीं होती. साथ ही ज्यादातर स्मार्ट वॉच तो ब्लूटूथ के जरिए काम करती हैं, जो बहुत ही कम पावर पर सिग्नल भेजता है.&amp;nbsp;
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एक्सपर्ट और रिसर्च क्या कहते हैं?
दुनिया भर की बड़ी स्वास्थ्य संस्थाओं का मानना है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला है, जो यह साबित कर सके कि स्मार्ट वॉच से निकलने वाली कम पावर की रेडियो फ्रीक्वेंसी कैंसर का कारण बनती है. एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कोशिकाओं, जानवरों या इंसानों पर हुई किसी स्टडी में ऐसा सबूत नहीं मिला जो रेडियो फ्रीक्वेंसी एनर्जी को कैंसर से जोड़ता हो.&amp;nbsp; हालांकि कुछ एक्सपर्ट सावधानी बरतने की सलाह भी देते हैं, क्योंकि लंबे समय तक और लगातार डिवाइस को त्वचा से चिपकाकर रखने के असर पर अभी और रिसर्च होना बाकी है. कुल मिलाकर फैलाई गई बात पर, जिनमें स्मार्ट वॉच को खतरनाक बताया जाता है, वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं हैं.&amp;nbsp;
लेकिन एक्सपर्ट फिर भी कुछ आसान सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं. जैसे रात को सोते समय स्मार्ट वॉच उतार देना, जरूरत न होने पर ब्लूटूथ और इंटरनेट कनेक्शन बंद रखना, और बच्चों को लगातार लंबे समय तक स्मार्ट वॉच पहनने से बचाना, क्योंकि उनका शरीर अभी कमजोर होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Udaipur Budget Trip: उदयपुर घूमने का बना लीजिए प्लान, 10 हजार में ऐसे करें कपल विजिट</title>
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        <description><![CDATA[ Udaipur Budget Travel Guide For Couples: उदयपुर को झीलों का शहर कहा जाता है. यहां की खूबसूरत झीलें, राजसी महल, ऐतिहासिक इमारतें और रंग-बिरंगे बाजार हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. हालांकि कई लोग यह सोचकर उदयपुर घूमने का प्लान नहीं बनाते कि यहां छुट्टियां बिताना काफी महंगा होगा. लेकिन सच यह है कि अगर पहले से थोड़ी प्लानिंग कर ली जाए तो एक कपल आराम से करीब 10 हजार रुपये के बजट में उदयपुर की शानदार यात्रा कर सकता है. सही समय पर टिकट बुक करने, बजट होटल चुनने और लोकल ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने से खर्च काफी कम हो जाता है.
कब जाएं ताकि खर्च भी कम हो और घूमने का मजा भी आए?
अगर कम बजट में उदयपुर घूमना चाहते हैं तो अप्रैल से सितंबर के बीच का समय अच्छा माना जाता है. इस दौरान पर्यटकों की भीड़ अपेक्षाकृत कम रहती है, इसलिए होटल और ट्रैवल का खर्च भी कम हो जाता है. ऑफ-सीजन में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों से फ्लाइट 2,000 से 3,000 रुपये तक मिल सकती है. वहीं ट्रेन से यात्रा करना और भी किफायती विकल्प है. दिल्ली से मेवाड़ एक्सप्रेस या चेतक एक्सप्रेस के जरिए आराम से उदयपुर पहुंचा जा सकता है. स्लीपर क्लास का आने-जाने का किराया लगभग 800 रुपये और 3AC का किराया करीब 2,000 के आसपास रुपये तक पड़ सकता है.&amp;nbsp;

बजट में कहां ठहरें?
उदयपुर में हर बजट के हिसाब से ठहरने के विकल्प मौजूद हैं. अगर खर्च कम रखना चाहते हैं तो गेस्ट हाउस, होमस्टे या बजट होटल चुन सकते हैं. यहां 800 से 1,500 रुपये प्रति रात में साफ-सुथरे कमरे आसानी से मिल जाते हैं. कई जगहों पर नाश्ता और मुफ्त वाई-फाई जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. अगर थोड़ा बेहतर अनुभव चाहते हैं तो मेवाड़ हवेली, जनक निवास गेस्ट हाउस या फतेह सागर झील के पास मौजूद कुछ हेरिटेज होटल अच्छे विकल्प हो सकते हैं. वहीं बैकपैकर्स और युवा कपल्स के लिए हॉस्टल भी किफायती रहते हैं, जहां 500 से 1,000 रुपये प्रति रात में ठहरने की सुविधा मिल जाती है.
खाने-पीने में भी नहीं होगा ज्यादा खर्च
राजस्थान का पारंपरिक खाना उदयपुर यात्रा का सबसे खास हिस्सा माना जाता है. यहां दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, प्याज कचौरी और स्थानीय मिठाइयों का स्वाद जरूर लेना चाहिए. शहर के स्थानीय रेस्टोरेंट और ढाबों में 150 से 250 रुपये प्रति व्यक्ति में अच्छा भोजन मिल जाता है. अगर स्ट्रीट फूड पसंद है तो हाथीपोल बाजार और बड़ा बाजार में कचौरी, समोसा, लस्सी और दूसरे स्थानीय व्यंजन कम कीमत में मिल जाते हैं. वहीं थोड़ा खास डिनर करना चाहते हैं तो अंबराई रेस्टोरेंट में झील के किनारे शानदार माहौल के साथ भोजन का आनंद लिया जा सकता है.कम बजट वालों के लिए जैसमिन रेस्टोरेंट भी अच्छा विकल्प माना जाता है.

शहर घूमने का सबसे सस्ता तरीका
उदयपुर में घूमने के लिए लोकल बस, ऑटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा और स्कूटी रेंट पर लेने जैसे कई किफायती विकल्प मौजूद हैं. लोकल बस का किराया 10 से 50 रुपये तक होता है, जबकि छोटी दूरी के लिए ऑटो 50 से 100 रुपये में मिल जाता है. अगर पूरे दिन अपनी सुविधा से घूमना चाहते हैं तो 300 से 400 रुपये प्रतिदिन में स्कूटी किराये पर लेकर शहर की खूबसूरत सड़कों और झीलों का आनंद ले सकते हैं.
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इन जगहों को जरूर करें एक्सप्लोर
उदयपुर जाएं और सिटी पैलेस न देखें, ऐसा शायद ही कोई करता हो. महाराणा उदय सिंह द्वारा बनवाया गया यह महल शहर की सबसे प्रसिद्ध पहचान है. यहां से पिछोला झील का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है. शाम के समय होने वाला लाइट एंड साउंड शो भी देखने लायक होता है. इसके अलावा पिछोला झील में बोट राइड का अनुभव यात्रा को और यादगार बना देता है. एक घंटे की बोट राइड के दौरान झील, घाट और जगमंदिर पैलेस का शानदार दृश्य देखने को मिलता है. अगर शाम के समय बोट राइड करें तो सूर्यास्त का नजारा और भी खूबसूरत दिखाई देता है. भारतीय लोक कला मंडल में होने वाला पारंपरिक कठपुतली शो भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है. इसके अलावा पुरानी गलियों में साइकिल टूर, आसपास की पहाड़ियों में ट्रेकिंग और कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य की सैर भी यात्रा को रोमांचक बना सकती है.
खरीदारी का भी लें मजा
उदयपुर खरीदारी के शौकीनों के लिए भी बेहतरीन जगह है. हाथीपोल बाजार, बड़ा बाजार, पैलेस रोड और चेतक सर्किल से राजस्थानी मिनिएचर पेंटिंग, चांदी के आभूषण, बंधनी साड़ियां, मोजड़ी और हस्तशिल्प की खूबसूरत चीजें खरीदी जा सकती हैं. यहां मोलभाव करने की गुंजाइश भी रहती है, इसलिए खरीदारी करते समय थोड़ा मोलभाव जरूर करें. अगर दो से तीन दिन की यात्रा की प्लानिंग की जाए तो एक कपल करीब 10 हजार रुपये में आराम से उदयपुर घूम सकता है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Udaipur, Budget, Trip:, उदयपुर, घूमने, का, बना, लीजिए, प्लान, हजार, में, ऐसे, करें, कपल, विजिट</media:keywords>
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        <title>रफ स्किन और ड्राई हेयर का हो जाएगा कायापलट, ये घरेलू नुस्खे आएंगे काम</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपकी स्किन रफ हो गई है और बाल बहुत ज्यादा ड्राई लगते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसा कई बार मौसम, धूप, कम पानी पीना और गलत खानपान की वजह से ऐसा होने लगता है. ऐसे में कुछ आसान घरेलू नुस्खे आपकी मदद कर सकते हैं. जिससे आपको इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. हालांकि, अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे या बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें. क्योंकि वह आपको इसकी वजह बताएंगे साथ ही आपको जरूरत पड़ने पर दवा भी दे सकते हैं इसलिए आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
1. नारियल तेल का इस्तेमाल करें
नारियल का तेल स्किन और बाल दोनों के लिए अच्छा माना जाता है. इसलिए आपको नारियल का तेल इस्तेमाल करना चाहिए और नहाने से पहले हल्के हाथों से स्किन पर लगाएं. वहीं बालों में तेल लगाकर 30 से 40 मिनट बाद शैंपू कर लें. इससे ड्राईनेस कम हो सकती है.
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2. एलोवेरा जेल लगाएं
एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करने से स्किन को ठंडक देता है और उसे नमी बनाए रखने में मदद करता है. इसलिए आप ताजा एलोवेरा जेल चेहरे या रफ स्किन पर 15 से 20 मिनट लगाकर धो लें. बालों में भी इसे हेयर मास्क की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है.
3. दही और शहद का पैक
दो चम्मच दही में एक चम्मच शहद मिलाकर स्किन पर लगाएं. 15 मिनट बाद साफ पानी से धो लें. यही मिश्रण बालों पर भी लगाया जा सकता है. दही और शहद की मदद से बाल मुलायम महसूस हो सकते हैं.
4. खूब पानी पिएं
सिर्फ बाहर से देखभाल करने से काम नहीं चलता. शरीर में पानी की कमी भी स्किन और बालों को ड्राई बना सकती है. इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें.
5. हेल्दी खाना खाएं
हरी सब्जियां, फल, मेवे और प्रोटीन वाली चीजें खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है. इसका असर स्किन और बालों पर भी दिखाई देता है.
इन बातों का रखें ध्यान 
हर किसी की स्किन और बाल अलग होते हैं. इसलिए कोई भी घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले एक बार पैच टेस्ट कर लें. अगर खुजली, जलन या एलर्जी महसूस हो, तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें. ऐसा करना आपके लिए जरूरी है इससे आगे चलकर आपको परेशानी का सामना करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. साथ ही आप छोटी-छोटी अच्छी आदतें अपनाकर आप अपनी स्किन और बालों की देखभाल कर सकते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि नियमित देखभाल और सही खानपान से रफ स्किन और ड्राई हेयर की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>रफ, स्किन, और, ड्राई, हेयर, का, हो, जाएगा, कायापलट, ये, घरेलू, नुस्खे, आएंगे, काम</media:keywords>
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        <title>Frozen Food Health Risks: 16 में फ्रोजन फूड से हुई डायबिटीज, 11 कंपनियों पर केस; भारत में कितना खतरा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/frozen-food-health-risks-16-में-फ्रोजन-फूड-से-हुई-डायबिटीज-11-कंपनियों-पर-केस-भारत-में-कितना-खतरा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/frozen-food-health-risks-16-में-फ्रोजन-फूड-से-हुई-डायबिटीज-11-कंपनियों-पर-केस-भारत-में-कितना-खतरा</guid>
        <description><![CDATA[ Bryce Martinez Food Company Lawsuit: अमेरिका में एक 18 वर्षीय युवक ने 11 बड़ी फूड कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर कर पूरी दुनिया में फ्रोजन और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर नई बहस छेड़ दी है. युवक का आरोप है कि बचपन से ऐसे खाने की चीजों की वजह से उसे महज 16 साल की उम्र में टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियां हो गईं. इस मामले के सामने आने के बाद अमेरिका में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और फ्रोजन फूड की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भारत में तेजी से बढ़ रहा फ्रोजन फूड बाजार भी भविष्य में ऐसी चिंता की वजह बन सकता है?
कैसे सामने आया मामला?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पेंसिल्वेनिया निवासी ब्राइस मार्टिनेज &amp;nbsp;को 16 साल की उम्र में अचानक सीने के पास तेज दर्द महसूस हुआ. शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद अस्थमा का दौरा पड़ रहा है, लेकिन स्कूल की नर्स ने जब उनका ब्लड प्रेशर जांचा तो स्थिति गंभीर निकली. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर डिजीज है. ब्राइस के लिए यह खबर चौंकाने वाली थी. बचपन से उनका वजन ज्यादा जरूर था, लेकिन इसके अलावा उन्हें कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या महसूस नहीं हुई थी. उन्हें यह भी नहीं पता था कि कम उम्र में भी टाइप-2 डायबिटीज हो सकती है.&amp;nbsp;
बीमारी के बारे में जानकारी जुटाया
बीमारी का पता चलने के बाद उन्होंने इंटरनेट पर अपनी बीमारी से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की. इसी दौरान उन्हें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, बच्चों को टारगेट करके किए जाने वाले फूड मार्केटिंग और खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले नमक, चीनी, फैट और एडिटिव्स के बारे में जानकारी मिली. उनका कहना है कि बचपन में उनके खाने का बड़ा हिस्सा ऐसे ही पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट उत्पादों से जुड़ा था. सुबह मीठे सीरियल, स्कूल में पिज्जा, बर्गर और मैकरोनी, जबकि घर लौटने पर माइक्रोवेव में तैयार होने वाला पैक्ड खाना उनकी डेली रूटीन का हिस्सा था.
11 कंपनियों के खिलाफ मुकदमा किया
18 साल की उम्र में उन्होंने 11 बड़ी फूड कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया. इनमें क्राफ्ट हेंज, कोका-कोला, पेप्सिको और नेस्ले यूएसए जैसी कंपनियां शामिल हैं. उनका आरोप है कि कंपनियों ने बच्चों को ध्यान में रखकर ऐसे उत्पाद तैयार किए और उनका प्रचार किया, जिनके लगातार सेवन से उनकी सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हुई. इसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से जुड़ा पहला पर्सनल इंजरी मुकदमा माना जा रहा है. इसके बाद अमेरिका में इसी तरह के कई अन्य मामले भी सामने आए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों ने कम उम्र में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाया.
भारत में क्या है स्थिति?
अमेरिका में चल रही बहस के बीच भारत में भी फ्रोजन फूड का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. कभी सिर्फ खास मौकों पर खरीदे जाने वाले फ्रोजन उत्पाद अब धीरे-धीरे रोजमर्रा की रसोई का हिस्सा बनते जा रहे हैं. फ्रोजन मोमोज, नगेट्स, फ्राइज, कबाब, बर्गर पैटी और रेडी-टू-कुक स्नैक्स अब बड़ी संख्या में घरों के फ्रीजर में जगह बना रहे हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह तेजी से बदलती लाइफस्टाइल मानी जा रही है. कामकाजी परिवारों की संख्या बढ़ने, समय की कमी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म की आसान उपलब्धता के कारण लोग ऐसे विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं, जिन्हें कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सके.
fortuneindia की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट रिसर्च फ्यूचर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फ्रोजन फूड बाजार 2025 से 2035 के बीच औसतन 14.5 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है. वहींमिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज का कहना है कि कोल्ड-चेन और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ने से इस सेक्टर का विस्तार हो रहा है और उत्पादों की उपलब्धता भी पहले से बेहतर हुई है.
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एक्सपर्ट का कहना है कि फ्रोजन फूड का मतलब हमेशा अनहेल्दी भोजन नहीं होता. कई फ्रोजन उत्पाद सुरक्षित तकनीक से तैयार किए जाते हैं और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने के लिए फ्रीज किए जाते हैं. हालांकि समस्या तब बढ़ सकती है, जब लोग जरूरत से ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड, हाई-सोडियम, हाई-शुगर और हाई-फैट वाले रेडी-टू-ईट उत्पादों का नियमित सेवन करने लगें. फूड इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि आज लोग सुविधा के साथ ताजे स्वाद की भी तलाश में हैं. यही वजह है कि ऐसे उत्पाद ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं, जिन्हें घर पर पकाकर ताजा परोसा जा सके. नगेट्स, फ्राइज और मोमोज जैसी कैटेगरी में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है.

क्या रखें ध्यान
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, फ्रोजन फूड को पूरी तरह गलत मानने के बजाय उसका चुनाव समझदारी से करना चाहिए. पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना, नमक और चीनी की मात्रा पर ध्यान देना और ताजा घर के बने भोजन को प्राथमिकता देना सबसे बेहतर विकल्प है. अगर फ्रोजन या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कभी-कभार और संतुलित मात्रा में खाए जाएं तो जोखिम कम रहता है, लेकिन अगर यही रोजमर्रा के भोजन का मुख्य हिस्सा बन जाएं तो लंबे समय में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Frozen, Food, Health, Risks:, में, फ्रोजन, फूड, से, हुई, डायबिटीज, कंपनियों, पर, केस, भारत, में, कितना, खतरा</media:keywords>
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        <title>Healthy Protein Breakfast: घर पर ये दो चीजें मिलाकर बनाएं दुनिया का सबसे स्वादिष्ट चीला, यहां देखें रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Healthy Protein Breakfast: चीला भारतीय रसोई में झटपट बन जाने वाला एक स्वादिष्ट नाश्ता है. &amp;nbsp;हर कोई इसे अपने अपने तरीकों से बनाता है पर कई बार यह नरम &amp;nbsp;बन जाते &amp;nbsp;है तो कई बार यह ठीक से पकता ही नही. ऐसे में नाश्ते के साथ मन भी बिगड़ जाता है पर घबराने &amp;nbsp;की कोई बात नही है इन दो चीजों को मिलाने से यही चीले स्वादिष्ट व कुरकुरे बनेंगे और घर वाले तारीफ करते नही थकेंगे &amp;nbsp;. खास बात यह है की यह कोई बहुत महंगी चीजें नहीं आपकी ही रसोई की आम चीजें हैं&amp;nbsp;
चीले बनाने की सामग्री&amp;nbsp;
1 कप बेसन, 1/2 सूजी, 1/2 दहीबारीक कटी हरी मिर्च, घिसा हुआ अदरक, हरा धनिया&amp;nbsp;1 कप बारीक कटा प्याज, टमाटर, कद्दूकस की गई गाजर ,शिमला मिर्च और पनीर&amp;nbsp;
ऐसे बनाए परफेक्ट घोल&amp;nbsp;
बेसन में पहले &amp;nbsp;स्वाद अनुसार नमक, मिर्च व हल्दी पाउडर डाल कर व सूजी डाल कर अच्छे से मिलाएं ताकि उसमें छोटे-छोटे दाने न रह जाए और वो अच्छे से मिल जाए इसमें अब थोड़ा थोड़ा करके पानी मिलाएं ताकि पानी अधिक न हो जाए &amp;nbsp;जब पेस्ट थोड़ा थीक होने लगे &amp;nbsp;उसमें कटी हरी मिर्च, घिसा हुआ अदरक, हरा धनिया, कटा प्याज, टमाटर, कद्दूकस की गई गाजर ,शिमला मिर्च मिलाएं अब इसकी कंसिस्टेंसी चेक करते हुए थोड़ा थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट रेडी कर लीजिए.
अब इसे ऐसे पकाएं&amp;nbsp;
अब आप नॉन स्टिक तावा या आपके घर पर उपलब्ध कोई भी तावा ले सकते हैं इसे अच्छे से गरम होने पर तावे पर आयल या बटर डाल कर ग्रीस करलें जब तेल अच्छे से गरम होने लगे उसमें तैयार किया गया बेसन का घोल फैलाएं. जब एक ओर से चीला हल्का सुनहरा होने लगे तब उसे पलट कर पकाएं व थोड़ा तेल लगाएं अब गैस को थोड़ा तेज करके चीले को क्रिस्पी होने दे जब वह दोनों और से सुनहरा हो जाए तब अपर से पनीर डाल कर गैस बंद दें&amp;nbsp;
स्वाद बढ़ाने के लिए टिप्स&amp;nbsp;
आप स्वाद को बढ़ाने के लिए इसमे &amp;nbsp;घोल बनाते समय थोड़ा जीरावन भी मिला सकते हैं. पनीर के साथ आप उबले हुए कॉर्न भी डाल सकते हैं अब यह तैयार है इसे आप हरी चटनी, टमाटर की चटनी या दही के साथ सर्व करें जिससे चीलों का स्वाद और बढ़ जाएगा &amp;nbsp; &amp;nbsp;
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स्वाद और पोषण भी&amp;nbsp;
बेसन और सब्जियों से बना यह चीला स्वास्थ के लिए पौष्टिक भोजन है. बेसन और पनीर दोनों ही प्रोटीने से भरपूर होते है जो मांसपेशियों की मरम्मत का काम करते हैं . साथ ही सब्जियों व बेसन में मोजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है. यह आपके वजन घटाने की जर्नी में भी सहायक रहता &amp;nbsp;है इससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ रहता है जिससे बार खाने की क्रैविंग नही होती.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>How To Keep Bugs Away: लाइट जलते ही घर में आते कीड़े? अपनाएं यह आसान ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ Home Remedies For Flying Insects In Rainy Season: मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं अपने साथ कई परेशानियां भी लेकर आती है. इनमें सबसे आम समस्या है रात होते ही घर में मच्छरों, मक्खियों, चींटियों, कॉकरोच और दूसरे उड़ने वाले कीड़ों का बढ़ जाना. शाम ढलते ही लाइट जलने के बाद ये कीड़े घर के अंदर पहुंचने लगते हैं, जिससे न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है बल्कि कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और जगह-जगह जमा पानी इनके पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर देता है. हालांकि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
घर के आसपास पानी जमा न होने दें
बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने की सबसे बड़ी वजह रुका हुआ पानी होता है. बाल्टी, कूलर, गमलों की ट्रे, बंद नालियां या घर के बाहर रखे छोटे बर्तनों में जमा पानी मच्छरों के लार्वा के लिए आदर्श जगह बन जाता है. इसलिए सप्ताह में कम से कम एक बार इन सभी जगहों की जांच करें और जमा पानी को तुरंत खाली करें. पानी की टंकियों और स्टोरेज कंटेनरों को हमेशा ढककर रखें. अगर किसी बर्तन में पानी रखना जरूरी हो तो उसमें तांबे का सिक्का या मिट्टी के तेल की एक बूंद डालने से मच्छरों के लार्वा विकसित होने की संभावना कम हो सकती है.

मच्छरदानी और जाली का करें इस्तेमाल
अगर रात में बार-बार कीड़े घर के अंदर आ जाते हैं तो दरवाजों और खिड़कियों पर महीन जाली लगाना एक आसान और असरदार तरीका है. इससे हवा भी आती रहती है और कीड़े भी अंदर नहीं पहुंच पाते. सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने से पूरी रात मच्छरों से बचाव मिलता है. यह तरीका बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता.
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घर को साफ और सूखा रखें
कॉकरोच, मक्खियां और कई दूसरे कीड़े गंदगी और नमी वाली जगहों पर तेजी से पनपते हैं. इसलिए बारिश के मौसम में घर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है. फर्श को रोज पोछें और रसोई, बाथरूम तथा स्टोर रूम को सूखा रखने की कोशिश करें. खाने की चीजों को हमेशा ढककर रखें और कूड़ेदान को समय पर खाली करें. सिंक के नीचे, ड्रेनेज के आसपास और घरेलू उपकरणों के पीछे जमी गंदगी की भी नियमित सफाई करें. चाहें तो सफेद सिरका, नींबू का रस और बेकिंग सोडा मिलाकर घरेलू क्लीनिंग स्प्रे भी तैयार कर सकते हैं, जो सफाई के साथ कीड़ों को दूर रखने में भी मदद कर सकता है.

सफेद रोशनी की जगह पीली या वॉर्म लाइट लगाएं
बहुत कम लोग जानते हैं कि सफेद और नीली रोशनी की ओर कीड़े ज्यादा आकर्षित होते हैं. अगर बालकनी, बरामदे या घर के मुख्य दरवाजे के बाहर पीले या वॉर्म टोन वाले बल्ब लगाए जाएं तो रात में कीड़ों की संख्या कम हो सकती है. इस तरह की रोशनी अधिकांश कीड़ों को कम आकर्षित करती है और घर के बाहर का माहौल भी आरामदायक बना रहता है.
कपूर और लहसुन का लें सहारा
भारतीय घरों में कपूर का इस्तेमाल लंबे समय से प्राकृतिक कीट-रोधी उपाय के रूप में किया जाता रहा है. कमरे में कपूर जलाने या पानी से भरे कटोरे में कपूर की टिकिया रखकर अलग-अलग कोनों में रखने से मच्छरों और कॉकरोच को दूर रखने में मदद मिल सकती है. इसी तरह लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबालकर ठंडा करें और इस घोल को स्प्रे बोतल में भर लें. इसे सिंक के नीचे, कूड़ेदान के आसपास और अंधेरे कोनों में छिड़कने से कीड़े वहां आने से बचते हैं. इन दोनों की तेज गंध कीड़े पसंद नहीं करते.
बाहर निकलते समय पूरे कपड़े पहनें
अगर बारिश के मौसम में शाम के समय बाहर जाना पड़ता है तो हल्के रंग के फुल स्लीव कपड़े पहनना बेहतर माना जाता है. मच्छर गहरे रंग और खुली त्वचा की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं. अतिरिक्त सुरक्षा के लिए नारियल तेल में नीम या सिट्रोनेला जैसे एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें मिलाकर खुली त्वचा पर लगाया जा सकता है. इससे मच्छरों के काटने का खतरा कम हो सकता है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सावन 2026 Fashion Trends: इस सावन साड़ी के साथ ट्राई करें ये Stylish Bindi Designs</title>
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        <description><![CDATA[ Sawan 2026: सावन का महीना शुरू होते ही हर तरफ हरियाली और त्योहारों का माहौल देखने को मिलता है. इस महीने में कई महिलाएं और लड़कियां साड़ी पहनना पसंद करती हैं. अगर आप भी इस सावन साड़ी पहनने का प्लान बना रही हैं. तो सिर्फ अच्छी साड़ी ही नहीं. बल्कि सही बिंदी चुनना भी जरूरी है. छोटी सी बिंदी आपके पूरे लुक को और भी सुंदर बना सकती है. आज हम आपको कुछ ऐसे Stylish Bindi Designs बता रहे हैं. जिन्हें आप इस सावन ट्राई कर सकती हैं.
राउंड रेड बिंदी
अगर आप सिंपल और क्लासिक लुक चाहती हैं. तो गोल लाल बिंदी सबसे अच्छा ऑप्शन है. यह लगभग हर रंग की साड़ी के साथ अच्छी लगती है. खासकर हरी. पीली और लाल साड़ी के साथ इसका लुक और भी खूबसूरत दिखाई देता है.
यह भी पढ़े: पहले क्रीम लगाएं या सनस्क्रीन, क्या है सही तरीका?
ग्रीन स्टोन बिंदी
सावन में हरे रंग की खास अहमियत होती है. ऐसे में ग्रीन स्टोन वाली बिंदी आपके ट्रेडिशनल लुक को और बेहतर बना सकती है. इसे सिल्क. कॉटन या जॉर्जेट साड़ी के साथ आसानी से कैरी किया जा सकता है.
लॉन्ग बिंदी
अगर आप थोड़ा अलग और एलिगेंट लुक चाहती हैं. तो लॉन्ग बिंदी ट्राई कर सकती हैं. यह खासकर बनारसी या प्लेन साड़ी के साथ काफी अच्छी लगती है. इसके साथ हल्की ज्वेलरी पहनें. ताकि आपका पूरा लुक बैलेंस लगे.
ब्लैक बिंदी
ब्लैक बिंदी सिर्फ वेस्टर्न आउटफिट ही नहीं. बल्कि कई ट्रेडिशनल लुक्स के साथ भी अच्छी लगती है. अगर आपकी साड़ी का रंग हल्का है. तो छोटी ब्लैक बिंदी आपके लुक को स्टाइलिश बना सकती है.
स्टोन वर्क बिंदी
अगर आप किसी पूजा. फंक्शन या फैमिली गेट-टुगेदर में जा रही हैं. तो स्टोन वर्क वाली बिंदी चुन सकती हैं. यह चेहरे पर अलग ही ग्रेस देती है और साड़ी के साथ अच्छा मैच करती है.
लीफ शेप बिंदी
इस समय लीफ शेप बिंदी भी काफी पसंद की जा रही है. खासकर सावन के मौके पर यह डिजाइन बहुत अच्छा लगता है. इसे आप ग्रीन या गोल्डन बॉर्डर वाली साड़ी के साथ पहन सकती हैं.
मल्टीकलर बिंदी
अगर आपकी साड़ी में कई रंग हैं. तो मल्टीकलर बिंदी भी अच्छा ऑप्शन हो सकती है. इससे आपको ट्रेडिशनल के साथ थोड़ा मॉडर्न टच भी मिलेगा.
ध्यान रखें ये छोटी-सी बात
बिंदी हमेशा अपने चेहरे के शेप और साड़ी के रंग के हिसाब से चुनें. अगर आपकी ज्वेलरी हैवी है. तो सिंपल बिंदी रखें. वहीं अगर ज्वेलरी हल्की है. तो स्टोन या डिजाइनर बिंदी ट्राई कर सकती हैं. सही बिंदी आपके पूरे लुक को और भी खूबसूरत बना सकती है.
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        <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 08:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>बच्चों की मालिश कब तक करनी चाहिए, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में नए पैदा हुए बच्चों और छोटे बच्चों की मालिश करना एक पुरानी परंपरा है. माना जाता है कि समय समय से मालिश से बच्चे को आराम मिलता है और उसकी नींद भी बेहतर होती है. हालांकि, कई माता-पिता के मन में यह सवाल रहता है कि बच्चे की मालिश कितने समय तक करनी चाहिए. आइए जानते हैं कि इस बारे में एक्सपर्ट क्या सलाह देते हैं.
जन्म के बाद कब शुरू करें मालिश?
अगर बच्चा स्वस्थ है, तो जन्म के कुछ दिनों बाद हल्के हाथों से मालिश शुरू की जा सकती है. समय और तरीका जानने के लिए अपने बच्चे के रोग की एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहता है, खासकर अगर बच्चा समय से पहले पैदा हुआ हो या उसे कोई स्वास्थ्य समस्या हो.
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कितनी उम्र तक करनी चाहिए मालिश?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, पहले एक साल तक नियमित और हल्के हाथों से मालिश करना फायदेमंद माना जाता है. इसके बाद भी अगर बच्चा मालिश पसंद करता है, तो 2 से 3 साल की उम्र तक जरूरत के अनुसार मालिश की जा सकती है. हालांकि, यह कोई जरूरी नियम नहीं है. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी जरूरत और पसंद के अनुसार फैसला लिया जा सकता है.
मालिश के क्या हैं फायदे?
नियमित और सही तरीके से की गई मालिश से बच्चे को आराम महसूस हो&amp;nbsp; सकता है. इससे उसकी नींद बेहतर हो सकती है और माता-पिता साथ ही बच्चे के बीच जुड़ाव भी मजबूत होता है. कुछ बच्चों में मालिश के बाद बेचैनी कम होने और शरीर को आराम मिलने की भी बात कही जाती है.
मालिश करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
मालिश हमेशा हल्के हाथों से करें. बहुत ज्यादा दबाव न डालें. बच्चे की त्वचा के अनुसार ही तेल चुनें. अगर तेल लगाने के बाद त्वचा पर लालपन, खुजली या दाने दिखाई दें, तो उसका इस्तेमाल बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें. अगर बच्चा रो रहा हो, बुखार हो या उसकी तबीयत ठीक न हो, तो मालिश बिल्किल न करें.
कौन-सा तेल इस्तेमाल करें?
बाजार में कई तरह के बेबी ऑयल मिलते हैं. आप डॉक्टर की सलाह के अनुसार या बच्चे की त्वचा को सूट करने वाला हल्का तेल चुन सकते हैं. किसी भी नए तेल का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर जांच करना अच्छा रहता है.
इस बात का रखें ध्यान
बच्चों की मालिश उनके आराम और देखभाल का हिस्सा हो सकती है. पहले एक साल तक नियमित मालिश करना आमतौर पर फायदेमंद माना जाता है. इसके बाद जरूरत और बच्चे की पसंद के अनुसार इसे जारी रखा जा सकता है. अगर बच्चे को कोई स्वास्थ्य समस्या है या मालिश के बाद त्वचा पर परेशानी दिखाई दे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पहले क्रीम लगाएं या सनस्क्रीन, क्या है सही तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल ज्यादातर लोग अपनी त्वचा की देखभाल के लिए मॉइश्चराइजर, फेस क्रीम और सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर पहले क्या लगाना चाहिए, क्रीम या सनस्क्रीन? अगर स्किनकेयर प्रोडक्ट्स को सही क्रम में नहीं लगाया जाए, तो उनका पूरा फायदा नहीं मिल पाता. ऐसे में सही तरीका जानना जरूरी है, ताकि त्वचा को फायदा भी मिले और धूप से भी पूरी सुरक्षा मिल सके.
सबसे पहले करें चेहरे की सफाई
स्किनकेयर की शुरुआत हमेशा चेहरे की सफाई से करनी चाहिए. अपने चेहरे को किसी हल्के फेस वॉश से धो लें. इससे धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल हट जाता है और त्वचा स्किनकेयर प्रोडक्ट्स को बेहतर तरीके से सोख पाती है.
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पहले लगाएं मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम
चेहरा साफ करने के बाद अपनी स्किन टाइप के अनुसार मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम लगाएं. अगर आपकी त्वचा रूखी है, तो थोड़ा गाढ़ा मॉइश्चराइजर चुनें. वहीं दूसरी ओर, ऑयली स्किन वाले लोग हल्का और जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे लगाने के बाद 2 से 5 मिनट तक इंतजार करें, ताकि यह त्वचा में अच्छी तरह समा जाए.
सबसे आखिर में लगाएं सनस्क्रीन
मॉइश्चराइजर के बाद सनस्क्रीन लगानी चाहिए. सनस्क्रीन त्वचा के ऊपर एक सुरक्षा लेवल बनाती है, जो सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से बचाती है. अगर पहले सनस्क्रीन लगाकर उसके ऊपर क्रीम लगा दी जाए, तो सनस्क्रीन की सुरक्षा कम हो सकती है. इसलिए हमेशा सनस्क्रीन को स्किनकेयर रूटीन का आखिरी स्टेप रखें.
कौन-सी सनस्क्रीन चुनें?
रोजाना इस्तेमाल के लिए कम से कम SPF 30 वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं या बाहर काम करते हैं, तो हर 2 से 3 घंटे में सनस्क्रीन दोबारा लगानी चाहिए. पसीना आने या चेहरा धोने के बाद भी सनस्क्रीन दोबारा लगाना जरूरी होता है.
मेकअप करने वालों के लिए सही क्रम
अगर आप मेकअप करती हैं, तो सबसे पहले चेहरा साफ करें. इसके बाद मॉइश्चराइजर लगाएं, फिर सनस्क्रीन लगाएं. सनस्क्रीन के कुछ मिनट बाद प्राइमर और फिर मेकअप करें. इससे सनस्क्रीन की सुरक्षा बनी रहती है और मेकअप भी बेहतर तरीके से सेट होता है.
इस बात का रखें ध्यान
स्किनकेयर में सिर्फ अच्छे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सही तरीके में लगाना भी उतना ही जरूरी है. हमेशा पहले चेहरा साफ करें, फिर मॉइश्चराइजर या फेस क्रीम लगाएं और सबसे आखिर में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. यह आसान तरीका आपकी त्वचा को मुलायम बनाने के साथ-साथ सूरज की हानिकारक किरणों से भी बचाने में मदद करेगा.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Gas Stove Cleaning: गैस पर जले दूध के निशान कैसे हटाएं? जानें आसान उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ Remove Burnt Tea Stains From Gas Stove: किचन में चाय या दूध बनाते समय थोड़ी सी नजर हटी और बर्तन से दूध उबलकर गैस पर फैल गया. ऐसा लगभग हर घर में होता है. परेशानी तब बढ़ती है, जब गिरा हुआ दूध गैस की गर्म सतह पर जलकर चिपक जाता है. शुरुआत में सफेद दिखने वाला दूध कुछ देर बाद भूरे या काले जिद्दी निशान में बदल सकता है. कई बार सामान्य साबुन और पानी से रगड़ने के बाद भी ये दाग पूरी तरह नहीं निकलते. ज्यादा जोर लगाकर रगड़ने से गैस की सतह पर स्क्रैच आने का खतरा भी रहता है. ऐसे में कुछ आसान तरीकों की मदद से जले दूध और चाय के निशानों को साफ किया जा सकता है.
बेकिंग सोडा से करें सफाई
गैस पर दूध या चाय जलकर चिपक गई है तो बेकिंग सोडा काम आ सकता है. सबसे पहले गैस को पूरी तरह ठंडा होने दें. इसके बाद जले हुए हिस्से पर थोड़ा पानी लगाकर बेकिंग सोडा छिड़क दें. कुछ देर इसे ऐसे ही रहने दें. फिर मुलायम स्पंज की मदद से धीरे-धीरे दाग को रगड़ें. बेकिंग सोडा जमी हुई गंदगी को ढीला करने में मदद करता है, जिससे उसे हटाना आसान हो सकता है. आखिर में साफ गीले कपड़े से सतह को पोंछ दें.

बेकिंग सोडा का पेस्ट लगाएं
अगर दूध काफी ज्यादा जल चुका है और निशान आसानी से नहीं निकल रहा है तो बेकिंग सोडा का पेस्ट इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए बेकिंग सोडा में थोड़ा गर्म पानी या नींबू का रस मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें. इसे जले हुए हिस्से पर अच्छी तरह फैला दें और करीब 15 से 20 मिनट के लिए छोड़ दें. इससे सूखा और जला हुआ दूध धीरे-धीरे नरम होने लगेगा. इसके बाद स्पंज या मुलायम ब्रश से हल्के हाथों से रगड़कर साफ करें.
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पुराने टूथब्रश से साफ करें किनारे
दूध उबलकर गिरने पर वह अक्सर बर्नर के आसपास और छोटे किनारों में जाकर जम जाता है. इन जगहों तक स्पंज आसानी से नहीं पहुंच पाता. ऐसे में पुराना टूथब्रश इस्तेमाल किया जा सकता है. बेकिंग सोडा का पेस्ट दाग पर लगाने के बाद टूथब्रश से धीरे-धीरे रगड़ें. ब्रश के छोटे ब्रिसल्स कोनों और बर्नर के आसपास जमा गंदगी तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं. सफाई करते समय ध्यान रखें कि गैस पूरी तरह बंद और ठंडी हो.

नींबू और बेकिंग सोडा का इस्तेमाल
किचन की सफाई में नींबू भी उपयोगी हो सकता है. जले दूध के हल्के निशान के लिए थोड़ा बेकिंग सोडा छिड़ककर उसके ऊपर नींबू का रस लगाया जा सकता है. इसे कुछ मिनट तक रहने दें और फिर मुलायम स्पंज से साफ करें. अगर गैस की सतह किसी खास मटेरियल की बनी है, तो पहले एक छोटे हिस्से पर इसे आजमाना बेहतर रहेगा.
बहुत जिद्दी दाग पर क्या करें?
अगर घरेलू उपायों के बाद भी जले दूध का निशान नहीं निकल रहा है तो स्टोव के लिए बने क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, किसी भी क्लीनर को लगाने से पहले उसके लेबल पर दिए गए निर्देश जरूर पढ़ें. गैस स्टोव, ग्लास कुकटॉप और दूसरे प्रकार की कुकिंग सतहों के लिए सफाई का तरीका अलग हो सकता है. गलत केमिकल या ज्यादा कठोर स्क्रबर सतह को नुकसान पहुंचा सकता है.
सफाई के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
जले हुए दूध को साफ करने की जल्दबाजी में चाकू, ब्लेड या दूसरी नुकीली चीज से दाग खुरचना ठीक नहीं है. इससे गैस की सतह पर स्थायी स्क्रैच पड़ सकते हैं. खासतौर पर ग्लास टॉप पर ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. सफाई शुरू करने से पहले गैस बंद करें और सतह पूरी तरह ठंडी होने का इंतजार करें. बर्नर के आसपास सफाई करते समय ज्यादा पानी डालने से भी बचें. सबसे आसान तरीका यही है कि दूध या चाय गिरने के बाद गैस ठंडी होते ही उसे साफ कर दिया जाए. जितनी देर दाग गर्म सतह पर पड़ा रहेगा, उसके जलकर जिद्दी परत में बदलने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dog Cancer Detection: कैंसर की जांच का नया तरीका, कुत्ते सूंघकर करेंगे पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ Dognosis Cancer Screening Technology: बेंगलुरु की डीप-टेक स्टार्टअप डॉग्नोसिस एक ऐसी कैंसर स्क्रीनिंग तकनीक विकसित कर रही है, जो भारत में स्वास्थ्य जांच के तरीके को बदल सकती है. कंपनी का &#039;BreathEasy&#039; नाम का प्लेटफॉर्म कुत्तों की सूंघने की क्षमता और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक को मिलाकर तैयार किया जा रहा है. इसका उद्देश्य कैंसर का अंतिम इलाज करना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों की पहचान करना है जिनमें कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है, ताकि उन्हें आगे की मेडिकल जांच के लिए भेजा जा सके.
कंपनी की योजना है कि अगर मौजूदा क्लिनिकल ट्रायल सफल रहते हैं तो 2027 की शुरुआत में इसे भारत में व्यावसायिक रूप से लॉन्च किया जाए. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी ब्लड टेस्ट या स्कैन की जरूरत नहीं होगी. व्यक्ति को केवल लगभग 10 मिनट तक एक विशेष मास्क में सांस लेनी होगी, जिसके बाद उसके सांस के नमूने का एनालिसिस किया जाएगा. डॉग्नोसिस का मानना है कि भविष्य में यह टेस्ट केवल लक्षण दिखने के बाद नहीं, बल्कि सालाना हेल्थ चेकअप का हिस्सा बन सकता है. इससे शुरुआती स्तर पर जोखिम वाले लोगों की पहचान आसान हो सकती है और समय रहते आगे की जांच कराई जा सकेगी.
कैसे करता है काम?
BreathEasy एक वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है. जब शरीर में कैंसर कोशिकाएं विकसित होती हैं, तो वे वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स नामक सूक्ष्म रासायनिक अणु छोड़ती हैं, जो सांस के जरिए बाहर निकलते हैं. इंसानों की तुलना में कुत्तों की सूंघने की क्षमता कहीं अधिक तेज होती है, इसलिए वे इन बेहद हल्के रासायनिक संकेतों को भी पहचान सकते हैं. कंपनी मुख्य रूप से बीगल नस्ल के कुत्तों का इस्तेमाल करती है, हालांकि अन्य नस्लों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है. डॉग्नोसिस का दावा है कि उसकी तकनीक सिर्फ कुत्तों के व्यवहार पर निर्भर नहीं रहती. इसके लिए एक विशेष ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस विकसित किया गया है, जो नमूने को सूंघते समय कुत्ते के ब्रेन की एक्टिविटी को रिकॉर्ड और विश्लेषित करता है. इससे केवल संकेत देने के व्यवहार पर निर्भरता कम हो जाती है.

सांस के नमूने को कंपनी के स्वचालित प्लेटफॉर्म &amp;nbsp;में जांचा जाता है. कंपनी के मुताबिक, यह सिस्टम एक सत्र में बिना किसी ह्यूमन हेल्प के 200 से अधिक नमूनों की जांच कर सकता है. भविष्य में कई यूनिट एक साथ संचालित कर हर साल लगभग 10 लाख नमूनों की जांच करने का लक्ष्य रखा गया है. नमूने अस्पतालों, डायग्नोस्टिक लैब या अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से एकत्र कर जांच केंद्र तक भेजे जा सकेंगे.
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अभी जारी है क्लिनिकल परीक्षण
BreathEasy फिलहाल बड़े स्तर के क्लिनिकल ट्रायल से गुजर रहा है. इन स्टडी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि यह तकनीक वास्तविक परिस्थितियों में कितनी सटीक और भरोसेमंद साबित होती है. हाल ही में जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी में पाया गया कि जिन प्रतिभागियों को कैंसर नहीं था, उनमें से करीब 9 प्रतिशत को गलती से पॉजिटिव बताया गया. वहीं लगभग 9 प्रतिशत कैंसर मरीजों की पहचान नहीं हो सकी.

हालांकि कंपनी का कहना है कि इन आंकड़ों को सीधे आम आबादी पर लागू नहीं किया जा सकता. अध्ययन में जानबूझकर कैंसर मरीजों की संख्या अधिक रखी गई थी ताकि तकनीक की वैज्ञानिक क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके. वास्तविक आबादी में कैंसर के मामलों का अनुपात काफी कम होता है, इसलिए स्क्रीनिंग के नतीजे अलग हो सकते हैं. मौजूदा ट्रायल से ऐसे आंकड़े मिलने की उम्मीद है जो वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से दर्शाएंगे.
इलाज नहीं, शुरुआती स्क्रीनिंग का माध्यम
डॉग्नोसिस साफ तौर पर कहती है कि BreathEasy का उद्देश्य कैंसर का अंतिम निदान करना नहीं है. इसे एक रिस्क स्ट्रैटिफिकेशन या शुरुआती स्क्रीनिंग टूल के रूप में विकसित किया जा रहा है. यानी यह केवल उन लोगों की पहचान करेगा जिनमें कैंसर होने की संभावना अधिक हो सकती है. ऐसे लोगों को बाद में इमेजिंग, ब्लड-बेस्ड टेस्ट या बायोप्सी जैसी पारंपरिक जांच करानी होगी. कंपनी का मानना है कि इससे महंगी और जटिल जांच केवल जरूरतमंद लोगों तक सीमित रहेगी, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोझ भी कम हो सकता है.स्वतंत्र एक्सपर्ट इस तकनीक को दिलचस्प और संभावनाओं से भरपूर मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि इसे स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाने से पहले बड़े पैमाने पर क्लिनिकल प्रमाण जरूरी होंगे. अभी इसकी वास्तविक उपयोगिता, बड़े पैमाने पर संचालन और विश्वसनीयता से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Atrial Fibrillation: दिल की इस बीमारी से अनजान हैं करोड़ों भारतीय</title>
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        <description><![CDATA[ Atrial Fibrillation Symptoms And Causes: दिल की धड़कन अचानक तेज होना, सीने में फड़फड़ाहट महसूस होना या बिना किसी खास वजह के सांस फूलना अक्सर लोग सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. हालांकि बार-बार ऐसा होना दिल से जुड़ी एक समस्या एट्रियल फिब्रिलेशन का संकेत हो सकता है. यह दुनिया में दिल की धड़कन की लय से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है. चिंता की बात यह है कि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते और बीमारी का पता गंभीर समस्या होने के बाद चलता है.
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के अनुमानों के मुताबिक, भारत में करीब 80 लाख लोग एट्रियल फिब्रिलेशन के साथ रह रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ मोटापा, डायबिटीज और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ता बोझ भी इसके मामलों में बढ़ोतरी की वजह बन रहा है. ड्यूक यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. क्रिस्टोफर ग्रेंजर ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया कि एट्रियल फिब्रिलेशन उस समय होता है, जब दिल के ऊपरी चैंबर यानी एट्रिया में असामान्य इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी होने लगती है. इसके कारण दिल सामान्य और व्यवस्थित तरीके से धड़कने के बजाय अनियमित रूप से धड़कने लगता है.
एट्रियल फिब्रिलेशन के क्या हैं लक्षण?
एट्रियल फिब्रिलेशन की पहचान हर व्यक्ति में आसान नहीं होती. कुछ लोगों में इसके लक्षण साफ दिखाई देते हैं, जबकि कई लोगों में यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हो सकता है. इसे साइलेंट एट्रियल फिब्रिलेशन कहा जाता है. ऐसे मामलों में गंभीर समस्या होने तक बीमारी का पता नहीं चल पाता. दिल की धड़कन बहुत तेज होना या धड़कन महसूस होना, सांस फूलना, ज्यादा थकान महसूस होना, एक्सरसाइज करने की क्षमता कम होना और पल्स का अनियमित होना इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं.
डॉ. ग्रेंजर के मुताबिक, लगातार होने वाली दिल की धड़कन या आराम करते समय अचानक हार्ट रेट बढ़ने को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अनियमित हार्ट रिदम का पता लगाने वाली स्मार्टवॉच भी कुछ लोगों में इस समस्या की पहचान में मदद कर सकती हैं. हालांकि इसके बाद आगे की जांच के लिए ईसीजी की जरूरत पड़ सकती है.
क्यों खतरनाक है एट्रियल फिब्रिलेशन?
एट्रियल फिब्रिलेशन से जुड़ा सबसे बड़ा खतरा स्ट्रोक है. जब दिल के ऊपरी चैंबर सामान्य तरीके से सिकुड़ नहीं पाते तो दिल के अंदर खून जमा हो सकता है. इससे खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है. अगर यह थक्का दिल से निकलकर दिमाग तक पहुंच जाए तो वहां खून का प्रवाह रोक सकता है और इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बन सकता है. डॉ. ग्रेंजर के मुताबिक, एट्रियल फिब्रिलेशन स्ट्रोक के खतरे को करीब पांच गुना तक बढ़ा देता है. हर पांच में से एक स्ट्रोक इस समस्या से जुड़ा होता है. एट्रियल फिब्रिलेशन से जुड़े स्ट्रोक अक्सर ज्यादा गंभीर होते हैं और मरीज में स्थायी विकलांगता का खतरा भी अधिक हो सकता है.

यह समस्या केवल स्ट्रोक तक सीमित नहीं है. एट्रियल फिब्रिलेशन दिल की पंपिंग क्षमता को प्रभावित कर हार्ट फेलियर में भी योगदान दे सकता है. इससे फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने और सांस फूलने जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं.
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इलाज से 70 फीसदी तक स्ट्रोक रोकना संभव
एट्रियल फिब्रिलेशन से जुड़े स्ट्रोक को रोकने में समय पर एंटीकोएगुलेंट दवाओं का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है. इन्हें आमतौर पर ब्लड थिनर भी कहा जाता है. डॉ. ग्रेंजर के अनुसार, प्रभावी ब्लड थिनर का इस्तेमाल एट्रियल फिब्रिलेशन के कारण होने वाले करीब 70 फीसदी स्ट्रोक को रोक सकता है. इसके इलाज में दिल की धड़कन की गति या उसकी लय को नियंत्रित करने वाली दवाएं भी दी जा सकती हैं. कुछ मरीजों में कैथेटर एब्लेशन की जरूरत पड़ सकती है. यह एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल को रोककर दिल की सामान्य लय बहाल करने की कोशिश की जाती है.

क्या एट्रियल फिब्रिलेशन से बचाव संभव है?
उम्र और जेनेटिक्स जैसे कुछ जोखिम कारकों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारणों को नियंत्रित करके इसके खतरे को कम या बीमारी को देर से होने में मदद मिल सकती है. डॉ. ग्रेंजर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को मैनेज करने, स्वस्थ वजन बनाए रखने और नियमित एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं. इसके अलावा धूम्रपान से बचना, शराब का सेवन सीमित करना और पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है. स्लीप एपनिया की आशंका होने पर इसकी जांच कराने की सलाह दी जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि सीमित मात्रा में चाय या कॉफी पीने से एट्रियल फिब्रिलेशन का खतरा बढ़ता हुआ नहीं दिखाई देता. कुछ अध्ययनों में इसका संबंध कम जोखिम से भी देखा गया है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 16:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>दूल्हा घोड़ी पर ही क्यों आता है? शादी की इस रस्म के पीछे छिपी है दिलचस्प कहानी</title>
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        <description><![CDATA[ Ghudchadi Ritual: भारतीय शादियों में जब बारात का माहौल बनता है, तो सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र &#039;घुड़चढ़ी&#039; की रस्म होती है. बैंड-बाजे की धुनों, आतिशबाजी के उजाले और रिश्तेदारों के नाच-गाने के बीच सज-धजकर बैठा दूल्हा जब घोड़ी पर सवार होकर आगे बढ़ता है, तो वह पल पूरे उत्सव का सबसे यादगार हिस्सा बन जाता है.
ज्यादातर लोग इसे केवल एक राजसी एहसास, भव्यता का प्रतीक या सिर्फ फोटो खिंचवाने का एक जरिया मानते हैं. लेकिन अगर आप हमारी वैदिक संस्कृति और प्राचीन ग्रंथ विवाह-विज्ञान के दृष्टिकोण से देखें, तो इस परंपरा के पीछे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक विज्ञान का एक गहरा ताना-बाना बुना गया है.
प्राचीन आचार्यों और ऋषियों ने विवाह संस्कार से जुड़ी हर एक क्रिया को मानव जीवन के कल्याण और स्वास्थ्य से जोड़ा था. घुड़चढ़ी की यह परंपरा भी उसी वैज्ञानिक सोच का एक हिस्सा थी, जिसका सीधा संबंध दूल्हे की शारीरिक फिटनेस, मानसिक संतुलन और उसके निर्णय लेने की क्षमता से था.
आज के आधुनिक दौर में भले ही हम इस रस्म को सिर्फ एक परंपरा मानकर निभाते हों, लेकिन इसके पीछे छिपे असल विज्ञान को समझना बेहद दिलचस्प और आंखें खोल देने वाला है.

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शारीरिक क्षमता और न्यूरोलॉजिकल कंट्रोल का पब्लिक टेस्ट
प्राचीन समय में आज की तरह शादी से पहले कोई मेडिकल टेस्ट, फिटनेस सर्टिफिकेट या फोटो-वीडियो का चलन नहीं होता था. ऐसे में समाज के सामने दूल्हे के स्वास्थ्य और उसकी शारीरिक योग्यता की पुष्टि करना बेहद जरूरी माना जाता था. घुड़चढ़ी की रस्म असल में दूल्हे की शारीरिक फिटनेस और उसके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) का एक सार्वजनिक परीक्षण हुआ करती थी.
घोड़ी पर सवार होकर चलने के लिए व्यक्ति के पास बेहतरीन बॉडी बैलेंस, मजबूत कोर मसल्स और सटीक रिफ्लेक्स का होना बेहद जरूरी है. बारात के समय जब आसपास तेज आवाज में ढोल-नगाड़े बजते हैं, पटाखे छूटते हैं और लोगों की भारी भीड़ शोर मचाती है, तो घोड़ी का विचलित या चंचल होना स्वाभाविक होता है.
ऐसी स्थिति में उस चंचल जानवर को अपने नियंत्रण में रखते हुए सीधा बैठना और संतुलन बनाए रखना साधारण बात नहीं है. यह प्रक्रिया दूल्हे के रिफ्लेक्स एक्शन, शारीरिक ताकत और रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन की खुली परीक्षा लेती थी.
मानसिक संतुलन और तनाव प्रबंधन का गहरा मनोविज्ञान
गृहस्थ जीवन में प्रवेश करना कोई आसान सफर नहीं होता. इसमें कई तरह की अप्रत्याशित चुनौतियां, जिम्मेदारियां और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है. प्राचीन आचार्यों का मानना था कि जो व्यक्ति विपरीत और अशांत परिस्थितियों में खुद को शांत रख सके, वही एक सफल परिवार का संचालन कर सकता है.
घोड़ी पर बैठकर बाजे-गाजे के शोर के बीच गुजरना दूल्हे के लिए तनाव प्रबंधन (Stress Management) का एक जरिया था. चारों तरफ से आ रहे तेज शोर, भीड़ के दबाव और जानवर की अनिश्चित हलचल के बीच भी जो दूल्हा घबराता नहीं था और अपना आपा खोए बिना संतुलन बनाए रखता था, वह मानसिक रूप से परिपक्व माना जाता था. यह रस्म यह दर्शाती थी कि दूल्हा जीवन के आने वाले किसी भी मोड़ पर परिस्थितियों के आगे घबराएगा नहीं, बल्कि धैर्य और विवेक से काम लेगा.
घोड़ी ही क्यों, कोई अन्य सवारी या घोड़ा क्यों नहीं?
इस परंपरा से जुड़ा एक सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बारात के लिए हमेशा घोड़ी का ही चयन क्यों किया जाता है, घोड़े या किसी अन्य सवारी का क्यों नहीं? इसके पीछे भी एक बहुत ही गहरा व्यवहार वैज्ञानिक कारण है.
जीव विज्ञान और पशु मनोविज्ञान के अनुसार, नर घोड़े की तुलना में घोड़ी अधिक संवेदनशील, तेज और पर्यावरण के प्रति बेहद प्रतिक्रियाशील होती है. घोड़ी आसपास के माहौल और ध्वनि तरंगों को बहुत जल्दी महसूस करती है. इसके अलावा, घोड़ी को नियंत्रित करने के लिए केवल शारीरिक बल की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि उसके साथ तालमेल बिठाने के लिए सौम्यता, धैर्य और स्पर्श की समझ चाहिए होती है.
शास्त्रों के अनुसार, गृहस्थ जीवन की गाड़ी चलाने के लिए भी केवल कठोरता या बल काम नहीं आता, बल्कि वहां सहचरी के साथ प्यार, धैर्य और संवेदनशीलता का तालमेल बिठाना पड़ता है. घोड़ी की सवारी दूल्हे को यह प्रतीकात्मक सीख देती थी कि उसे आने वाले जीवन में शक्तियों का इस्तेमाल नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और समझदारी से हर स्थिति को संभालना है.
भावी जिम्मेदारियों और आत्मरक्षा का प्रतीक
प्राचीन काल में यात्राएं आज जैसी सुरक्षित नहीं होती थीं. जब एक बारात अपने गांव या नगर से निकलकर दूसरे गांव जाती थी, तो रास्ते में जंगली जानवरों, डाकुओं या अन्य प्राकृतिक रुकावटों का खतरा हमेशा बना रहता था. ऐसी स्थिति में दूल्हे को परिवार और अपनी जीवनसंगिनी का रक्षक माना जाता था.
घोड़ी पर सवार होना इस बात का प्रतीक था कि युवक केवल एक गृही बनने नहीं जा रहा, बल्कि वह एक योद्धा और रक्षक की भूमिका निभाने के लिए भी पूरी तरह तैयार है. जो व्यक्ति एक चंचल सवारी को आसानी से संभाल सकता है, वह जरूरत पड़ने पर अपने परिवार की रक्षा के लिए भी तत्पर रह सकता है. इस प्रकार यह रस्म समाज और कन्या पक्ष को एक भरोसा देती थी कि उनकी बेटी एक सक्षम और मजबूत हाथों में सौंपी जा रही है.
आधुनिक दौर में इस परंपरा का बदलता रूप और सीख
आज के समय में बारात के दौरान दूल्हे को सहारा देकर घोड़ी पर बैठाया जाता है या केवल कुछ मीटर की दूरी तय करके रस्म पूरी कर ली जाती है. आधुनिक गाड़ियों और एसी बग्घियों के इस दौर में भले ही इस परंपरा का व्यावहारिक रूप बदल गया हो, लेकिन इसके पीछे की भावना और सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक है.
हमारी प्राचीन भारतीय परंपराएं किसी भी नियम को केवल आदेश के रूप में थोपती नहीं थीं, बल्कि उन्हें उत्सव, संगीत और रंग-बिरंगे रीति-रिवाजों में ढाल देती थीं. घोड़ी पर आने की रस्म भी केवल एक दिखावा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दूल्हा, घोड़ी, पर, ही, क्यों, आता, है, शादी, की, इस, रस्म, के, पीछे, छिपी, है, दिलचस्प, कहानी</media:keywords>
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        <title>Silver Cleaning Tips: काले पड़ गए चांदी के बर्तन? घर पर ही ऐसे लौटेगी चमक</title>
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        <description><![CDATA[ Silver Utensils Cleaning: घर में रखे चांदी के बर्तन अपनी चमक की वजह से बेहद खूबसूरत लगते हैं. कई घरों में चांदी की कटोरी, गिलास, चम्मच और पूजा में इस्तेमाल होने वाले बर्तन सालों से संभालकर रखे जाते हैं. लेकिन लंबे समय तक रखे रहने या लगातार इस्तेमाल के कारण चांदी की चमक धीरे-धीरे कम होने लगती है. कई बार बर्तन इतने काले पड़ जाते हैं कि उन्हें देखकर लगता है कि अब पुरानी चमक वापस लाना मुश्किल होगा. हालांकि, हर बार इन्हें साफ करवाने के लिए बाहर ले जाने की जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद कुछ चीजों और सही तरीके की मदद से चांदी पर जमा कालापन हटाया जा सकता है.
चांदी का काला पड़ना केवल गंदगी जमा होने की वजह से नहीं होता. हवा में मौजूद सल्फर कंपाउंड्स के संपर्क में आने पर चांदी की सतह पर टार्निश बनने लगता है. इसी वजह से समय के साथ उसका रंग काला या फीका दिखाई देने लगता है. इसे साफ करते समय ज्यादा रगड़ना भी सही नहीं है, क्योंकि इससे सतह पर खरोंच आ सकती है.
हल्के दाग के लिए साबुन और गर्म पानी
अगर चांदी के बर्तन बहुत ज्यादा काले नहीं हुए हैं और उन पर केवल उंगलियों के निशान, धूल या हल्की चिकनाई जमा है तो सबसे पहले हल्के साबुन और पानी का तरीका अपनाया जा सकता है. एक बर्तन में हल्का गर्म पानी लें और उसमें कुछ बूंदें माइल्ड डिशवॉश लिक्विड की मिलाएं. अब मुलायम स्पंज या कपड़े की मदद से चांदी के बर्तन को धीरे-धीरे साफ करें. सफाई के बाद बर्तन को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और तुरंत मुलायम कपड़े से सुखा दें. खासकर डिजाइन या खांचे वाले चांदी के बर्तन में पानी जमा न रहने दें. नमी लंबे समय तक रहने पर बर्तन की चमक प्रभावित हो सकती है. नियमित रूप से हल्की सफाई करने से चांदी पर मोटी काली परत बनने की संभावना भी कम हो सकती है.

एल्युमिनियम फॉयल से हटाएं कालापन
ज्यादा काले पड़ चुके चांदी के बर्तनों के लिए एल्युमिनियम फॉयल वाला तरीका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए किसी कंटेनर के अंदर एल्युमिनियम फॉयल बिछाएं और उसमें गर्म पानी डालें. इसमें वॉशिंग सोडा घोलें. इसके बाद चांदी के बर्तन को इस तरह रखें कि वह एल्युमिनियम फॉयल के संपर्क में रहे. कुछ मिनट तक इसे ऐसे ही रहने दें. इस प्रक्रिया के दौरान चांदी पर जमा टार्निश हटने लगता है. इसके बाद बर्तन को बाहर निकालकर साफ पानी से अच्छी तरह धोएं और तुरंत सुखा लें. अगर बर्तन थोड़ा फीका दिखाई दे तो मुलायम कपड़े से हल्के हाथ से पॉलिश कर सकते हैं. ध्यान रखें कि वॉशिंग सोडा और बेकिंग सोडा अलग-अलग चीजें हैं. इस तरीके में वॉशिंग सोडा का इस्तेमाल किया जाता है.
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ज्यादा काले निशान के लिए कैल्शियम कार्बोनेट
अगर सामान्य सफाई के बाद भी चांदी का कालापन नहीं निकल रहा है तो बहुत महीन प्रिसिपिटेटेड कैल्शियम कार्बोनेट यानी शुद्ध महीन चॉक पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा और चिकना पेस्ट तैयार करें. अब मुलायम कपड़े से इस पेस्ट को चांदी की सतह पर धीरे-धीरे लगाएं. इसे गोल-गोल घुमाकर रगड़ने के बजाय एक सीधी दिशा में हल्के हाथ से साफ करना बेहतर होता है. सफाई के बाद बर्तन को अच्छी तरह धोकर तुरंत सुखा लें. सामान्य चॉक पाउडर को इसका विकल्प न मानें, क्योंकि उसमें मौजूद मोटे कण चांदी की सतह पर बारीक खरोंच छोड़ सकते हैं.

सफाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान
चांदी के बर्तन साफ करते समय उन्हें पकड़ने का तरीका भी मायने रखता है. हाथों पर मौजूद प्राकृतिक तेल और पसीना चांदी की सतह पर निशान छोड़ सकता है. इसलिए बहुत कीमती चांदी की चीजों को साफ करते समय साफ कॉटन ग्लव्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. रबर या लेटेक्स के दस्ताने इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है. अगर चांदी के बर्तन में लकड़ी, हड्डी या किसी दूसरे मटेरियल का हैंडल लगा हुआ है तो उसे पानी में पूरी तरह न डुबोएं. इसी तरह खोखले हिस्सों या चिपकाकर जोड़े गए डिजाइन वाले बर्तनों को लंबे समय तक पानी में भिगोकर रखना ठीक नहीं है. इनके अंदर नमी फंस सकती है, जिसे बाद में पूरी तरह सुखाना मुश्किल होता है.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Ker Sangri Sabzi: घर पर ऐसे बनाएं राजस्थान की फेमस केर सांगरी की खट्टी&amp;मीठी सब्जी</title>
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        <description><![CDATA[ Ker Sangri Recipe Rajasthani Style: राजस्थानी खाने का नाम सुनते ही सबसे पहले दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी या लाल मास जैसी डिशेज याद आती हैं. लेकिन राजस्थान का पारंपरिक खाना केवल इन्हीं व्यंजनों तक सीमित नहीं है. यहां कई ऐसी डिशेज बनाई जाती हैं, जिनका स्वाद और इन्हें बनाने का तरीका दोनों ही खास हैं. इन्हीं में से एक है केर सांगरी की सब्जी. खट्टे-मीठे और मसालेदार स्वाद वाली यह सब्जी खासतौर पर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की पहचान मानी जाती है.
केर सांगरी की खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. सूखी केर और सांगरी के साथ घर में मौजूद कुछ सामान्य मसालों से इसे तैयार किया जा सकता है. राजस्थान में इसे रोटी, बाजरे की रोटी, पूरी या पराठे के साथ खूब पसंद किया जाता है. अगर आप भी घर पर राजस्थानी स्वाद का मजा लेना चाहते हैं तो केर सांगरी की सब्जी आसानी से तैयार कर सकते हैं.

क्या होती है केर और सांगरी?
केर और सांगरी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में मिलने वाली पारंपरिक चीजें हैं. केर छोटी बेर जैसी होती है, जबकि सांगरी खेजड़ी के पेड़ पर लगने वाली लंबी फलियां होती हैं. राजस्थान के थार रेगिस्तान जैसे शुष्क इलाकों में जहां हरी सब्जियों की उपलब्धता पहले सीमित रहती थी, वहां केर और सांगरी भोजन का अहम हिस्सा बन गईं. इन दोनों को तोड़ने के बाद सुखाकर लंबे समय तक रखा जा सकता है. यही वजह है कि मौसम खत्म होने के बाद भी सूखी केर और सांगरी से सब्जी बनाई जाती है. आज राजस्थान के अलावा दूसरे शहरों में भी सूखी केर और सांगरी किराना दुकानों या ऑनलाइन आसानी से मिल जाती है.
केर सांगरी की सब्जी के लिए सामग्री
इस सब्जी को बनाने के लिए करीब 1 कप सूखी सांगरी और आधा कप केर ले सकते हैं. इसके अलावा दही, तेल, जीरा, राई, सौंफ, अजवाइन, हींग, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और अमचूर पाउडर की जरूरत होगी. खट्टा-मीठा स्वाद बढ़ाने के लिए किशमिश और सूखे आम के टुकड़े भी डाले जा सकते हैं. नमक स्वाद के अनुसार रखें. अलग-अलग घरों में केर सांगरी बनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है. कुछ लोग इसमें दही डालते हैं तो कुछ बिना दही के इसे तैयार करते हैं. इसी तरह प्याज और लहसुन का इस्तेमाल भी पसंद के अनुसार किया जाता है. पारंपरिक मारवाड़ी और जैन तरीके में इसे बिना प्याज-लहसुन के भी बनाया जाता है.

बनाने से पहले केर सांगरी को भिगोना जरूरी
सूखी केर और सांगरी को सीधे कड़ाही में डालकर सब्जी नहीं बनानी चाहिए. सबसे पहले दोनों को अच्छी तरह साफ कर पानी से दो से तीन बार धो लें. इसके बाद इन्हें कई घंटों या रातभर पानी में भिगोकर रखा जा सकता है. कुछ रेसिपी में कड़वाहट कम करने के लिए दही में भिगोने का तरीका भी अपनाया जाता है. अच्छी तरह भीग जाने के बाद केर और सांगरी को नरम होने तक उबालें. उबालने के बाद पानी निकाल दें और एक बार फिर साफ पानी से धो लें. इससे इनका तेज या कड़वा स्वाद कम करने में मदद मिलती है. अब अतिरिक्त पानी निकालकर इन्हें अलग रख दें.
ऐसे तैयार करें केर सांगरी का मसाला
अब कड़ाही गर्म करके उसमें जरूरत के अनुसार तेल डालें. तेल गर्म होने पर राई और जीरा डालें. इसके बाद सौंफ, अजवाइन और थोड़ी सी हींग डालकर हल्का भूनें. मसालों की खुशबू आने लगे तो आंच धीमी कर दें. अब इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और जरूरत के अनुसार दूसरे सूखे मसाले डालें. अगर अदरक-लहसुन का स्वाद पसंद है तो इसका पेस्ट भी इस समय डाला जा सकता है. मसालों को धीमी आंच पर पकाएं ताकि वे जलें नहीं.
मसाले में मिलाएं उबली केर सांगरी
मसाला तैयार होने के बाद इसमें उबली हुई केर और सांगरी डालकर अच्छी तरह मिला दें. अब स्वाद के अनुसार नमक डालें और धीमी से मध्यम आंच पर कुछ मिनट तक भूनें. इससे मसाले केर और सांगरी पर अच्छी तरह चढ़ जाएंगे. खट्टा स्वाद लाने के लिए इसमें अमचूर पाउडर डालें. वहीं हल्की मिठास के लिए किशमिश मिलाई जा सकती है. सूखे आम के टुकड़े उपलब्ध हैं तो उन्हें भी डाल सकते हैं. इससे सब्जी में खट्टे और मीठे स्वाद का अच्छा संतुलन आता है. अगर दही इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे अच्छी तरह फेंटकर धीमी आंच पर डालें और लगातार चलाते रहें, ताकि दही फटे नहीं.
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धीमी आंच पर पकने दें सब्जी
सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद सब्जी को कुछ मिनट धीमी आंच पर पकाएं. केर सांगरी की सब्जी आमतौर पर सूखी या बहुत कम ग्रेवी वाली रखी जाती है, इसलिए इसमें ज्यादा पानी डालने की जरूरत नहीं होती. मसाले अच्छी तरह मिल जाएं और तेल हल्का अलग दिखाई देने लगे तो गैस बंद कर दें. तैयार केर सांगरी को बाजरे की गर्म रोटी के साथ परोस सकते हैं. इसके अलावा गेहूं की रोटी, पराठे या पूरी के साथ भी इसका स्वाद अच्छा लगता है. दाल-चावल के साथ इसे साइड डिश की तरह भी खाया जा सकता है. खट्टा, मीठा और मसालेदार स्वाद एक साथ मिलने के कारण केर सांगरी साधारण खाने को भी खास राजस्थानी स्वाद दे सकती है.
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        <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 04:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Milk Cake Recipe: हलवाई की दुकान जैसा मिल्क केक खाना है? घर पर ऐसे करें तैयार</title>
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        <description><![CDATA[ Milk Cake Recipe: मिठाई की दुकान पर सजा दानेदार, हल्का भूरा मिल्क केक देखकर मन ललचाना लाजमी है. ज्यादातर लोग इसे घर पर बनाने से सिर्फ इसलिए बचते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह बेहद मुश्किल प्रोसेस है. सच तो यह है कि सही तकनीक और थोड़े धैर्य से यही हलवाई वाला स्वाद और टेक्सचर घर की रसोई में भी आसानी से तैयार किया जा सकता है.
आखिर कैसे बनता है मशहूर दानेदार टेक्सचर?
मिल्क केक की पहचान उसका दानेदार टेक्सचर ही है और यह टेक्सचर दूध को फाड़ने की सही तकनीक से बनता है. इसके लिए दो तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं, कुछ कारीगर बेहद कम मात्रा में फिटकरी का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ नींबू के रस से यही असर हासिल करते हैं. दोनों ही तरीकों में उद्देश एक है, दूध को हल्का फाड़कर उसमें बारीक दाने बनाना.
जान लें यह पारंपरिक तरीका
सबसे पहले ताजा दूध को लगातार चलाते हुए अच्छी तरह उबाला जाता है, ताकि वह तले में न लगे. जब दूध पूरी तरह उबल जाए, तब उसमें बेहद कम मात्रा में फिटकरी डाली जाती है, करीब 5 लीटर दूध में सिर्फ एक चुटकी. फिटकरी डालते ही दूध फटकर दानेदार होने लगता है. इसके बाद मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है, जब तक यह गाढ़ा होकर खोवे जैसा न बन जाए.
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यह देसी जुगाड़ भी करेगा कमाल
अगर फिटकरी से परहेज करना हो, तो नींबू का रस भी उतना ही असरदार विकल्प है. इसके लिए भारी तले के बर्तन में दूध को लगातार चलाते हुए तब तक पकाया जाता है, जब तक वह आधा न रह जाए. इसके बाद बूंद बूंद करके नींबू का रस डाला जाता है, जिससे दूध में हल्के दाने बनने लगते हैं. ध्यान रहे, नींबू का रस जरूरत से ज्यादा या बहुत जल्दी न डालें, वरना टेक्सचर और स्वाद दोनों बिगड़ सकते हैं.
यह आखिरी स्टेप ही देता है असली बाजार वाला स्वाद
दाने बनने के बाद दोनों ही तरीकों में अगला स्टेप एक जैसा है, दूध पूरी तरह गाढ़ा होने पर उसमें स्वादानुसार चीनी मिलाई जाती है, आमतौर पर 5 किलो खोवे में 2.5 से 3 किलो चीनी सही मानी जाती है. इसके बाद मिश्रण को हल्का भूनकर इसमें देसी घी और इलायची पाउडर मिलाया जाता है. चाहें तो ऊपर से कटे बादाम, पिस्ता और केसर से सजावट भी कर सकते हैं.
जल्दबाजी की तो बिगड़ जाएगा पूरा मिल्क केक
तैयार मिश्रण को घी लगी ट्रे या मोल्ड में डालकर समान रूप से फैलाया जाता है और कमरे के तापमान पर ठंडा होने दिया जाता है. इसके बाद इसे कम से कम 4 से 5 घंटे या पूरी रात सेट होने के लिए रखा जाता है. जल्दबाजी में काटने से टुकड़े टूट सकते हैं, इसलिए पूरी तरह ठंडा और सेट होने के बाद ही चाकू से मनचाहे आकार में काटें. इस तरह घर पर ही बिल्कुल हलवाई की दुकान जैसा दानेदार, मुलायम और स्वादिष्ट मिल्क केक तैयार हो जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Matka Kulfi Recipe: इन 4 चीजों को मिलाकर घर में बनाएं बाजार जैसी मटका कुल्फी, दीवाने हो जाएंगे बच्चे</title>
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        <description><![CDATA[ Matka Kulfi Recipe: इन 4 चीजों को मिलाकर घर में बनाएं बाजार जैसी मटका कुल्फी, दीवाने हो जाएंगे बच्चे ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Weight Loss Tips: बिना पोर्शन कंट्रोल घटाया 15 किलो वजन, PMOS से जूझ रही इन्फ्लुएंसर ने बताया राज</title>
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        <description><![CDATA[ Weight Loss Tips: वजन घटाना वैसे भी आसान नहीं होता, लेकिन अगर साथ में PMOS यानी पॉलिसिस्टिक मेटाबॉलिक ओवरी सिंड्रोम जैसी स्थिति भी हो, तो यह चुनौती और बड़ी हो जाती है. यह एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति है, जो अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ने, एक्ने, चेहरे पर अतिरिक्त बाल और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि वजन घटाने के लिए सख्त कैलोरी काउंटिंग ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन इन्फ्लुएंसर तान्या सिंह की कहानी इस सोच को पूरी तरह बदल देती है. तान्या ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट [ User I&#039;d itistanyasingh] पर एक वीडियो शेयर करते हुए अपना पूरा वेट लॉस सफर सबके साथ साझा किया, जिसे देखते ही देखते लोगों का जबरदस्त प्रशंसा करने लगे.
बिना कैलोरी गिने कैसे घटाया 15 किलो वजन?
तान्या सिंह ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि उन्होंने PMOS को मैनेज करते हुए किस तरह 15 किलो वजन घटाया, वो भी बिना एक भी कैलोरी गिने. उन्होंने बताया, &quot;मैंने कैलोरी को लेकर परेशान होना बंद कर दिया.&quot; उनके मुताबिक, न्यूट्रिशनिस्ट्स ने उन्हें बताया कि PMOS के साथ हर कैलोरी गिनने की जरूरत नहीं है, बल्कि शरीर को सही पोषण देने और संतुलित भोजन पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.



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दिनभर में क्या खाती हैं तान्या?
तान्या के नाश्ते में उबले अंडे, अंडा भुर्जी, पनीर भुर्जी और बेरीज के साथ हाई प्रोटीन दही शामिल होता है, जो प्रोटीन से भरपूर होने की वजह से लंबे समय तक पेट भरा रखता है. लंच में वे दो रागी रोटी, एक कटोरी दाल राजमा या छोले, और लौकी, तोरी या भिंडी जैसी सब्जी लेती हैं, जिससे प्रोटीन, फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स का सही संतुलन बनता है. शाम के स्नैक में भुने मखाने, डार्क चॉकलेट और बेरीज शामिल हैं, जो क्रेविंग को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. डिनर में वे कार्ब्स पूरी तरह स्किप करती हैं और इसकी जगह तंदूरी चिकन या तंदूरी प्रॉन्स जैसा हाई प्रोटीन फूड लेती हैं, जो सोने तक पेट भरा रखता है.
&amp;nbsp;पोर्शन कंट्रोल भी नहीं किया, फिर भी दिखा असर
तान्या ने यह भी बताया कि उन्होंने न तो पोर्शन कंट्रोल किया और न ही कैलोरी गिनने में समय बिताया. उनका पूरा फोकस पौष्टिक और संतुलित भोजन खाने पर रहा. हालांकि हर महिला का PMOS सफर अलग होता है, लेकिन तान्या की यह रूटीन यह जरूर दिखाती है कि हेल्दी वेट लॉस का मतलब हमेशा कम खाना नहीं होता, बल्कि सही और पौष्टिक चीजें चुनना भी उतना ही मायने रखता है.
डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और किसी योग्य मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है. PMOS या किसी भी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़े डाइट प्लान को अपनाने से पहले किसी विशेषज्ञ या अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 20:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>Birth Order And Intelligence: एक ही घर में पले&amp;बढ़े भाई&amp;बहनों का दिमाग क्यों होता है अलग?</title>
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        <description><![CDATA[ Which Sibling Has Highest IQ According To Science: एक ही घर में पले-बढ़े भाई-बहनों के बीच अक्सर यह देखा जाता है कि उनकी बुद्धि, सोचने का तरीका और व्यवहार एक-दूसरे से काफी अलग होता है. समान परवरिश, एक जैसे संसाधन और एक ही माहौल के बावजूद यह अंतर क्यों आता है, यह सवाल लंबे समय से सॉइकोलॉजिस्ट और रिसर्चर को आकर्षित करता रहा है. अब रिसर्च इस रहस्य को कुछ हद तक समझाने लगे हैं, जहां जन्म क्रम भी एक अहम भूमिका निभाता नजर आता है.
कौन सा बच्चा ज्यादा बुद्धिमान?
अक्सर यह माना जाता है कि पहला बच्चा सबसे ज्यादा बुद्धिमान होता है. इस धारणा के पीछे कुछ साइंटफिक आधार भी मिलते हैं. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के एक स्टडी के अनुसार, पहले जन्मे बच्चों में सोचने-समझने की क्षमता अपने छोटे भाई-बहनों की तुलना में अधिक विकसित पाई गई. इसी तरह एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, एनालिसिस ग्रुप और सिडनी विश्वविद्यालय के इकोनॉमिस्ट ने अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों का एनालिसिस किया. इस रिसर्च में पाया गया कि पहले जन्मे बच्चे एक साल की उम्र से ही इंटेलिजेंस टेस्ट में अपने भाई-बहनों से आगे रहने लगते हैं.
क्या होते हैं इस अंतर के कारण?
इस अंतर के पीछे कई कारण बताए गए हैं. पहला कारण है माता-पिता का पूरा ध्यान. परिवार में जब पहला बच्चा होता है, तो उसे माता-पिता का पूरा समय और मार्गदर्शन मिलता है. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के रिसर्च में यह भी सामने आया कि भले ही माता-पिता सभी बच्चों को इमोशनल रूप से समान समर्थन देते हों, लेकिन पहले बच्चे को मानसिक विकास से जुड़े कार्यों में अधिक मदद मिलती है.
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सिखाने का भी प्रभाव
दूसरा महत्वपूर्ण कारण है सिखाने का प्रभाव. बड़ा बच्चा अक्सर अपने छोटे भाई-बहनों को चीजें सिखाता है. यह प्रक्रिया उसके अपने ज्ञान और समझ को और मजबूत करती है. यानी सिखाने से उसकी सीखने की क्षमता और बेहतर हो जाती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मंझला या सबसे छोटा बच्चा कम बुद्धिमान होता है. कई बार छोटे बच्चे अलग तरह की क्षमताओं में आगे निकल जाते हैं, जैसे क्रीएइवटिविटी, सामाजिक समझ या नए विचारों के प्रति खुलापन.
पालन-पोषण में बदलाव का असर
एक और महत्वपूर्ण पहलू है पालन-पोषण में बदलाव. हर बच्चे के साथ माता-पिता का व्यवहार थोड़ा बदल जाता है. अनुभव बढ़ने के साथ उनका तरीका भी बदलता है, जो अनजाने में बच्चों के आत्मविश्वास, सोच और व्यक्तित्व को प्रभावित करता है. माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे बच्चों को किसी एक पहचान में बांधकर न रखें. यह सबसे होशियार है या यह शरारती है जैसे लेबल बच्चों के मन पर गहरा असर डालते हैं और वे खुद को उसी नजर से देखने लगते हैं. इसके बजाय बच्चों के प्रयास, मेहनत और प्रगति पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Kargil Vijay Diwas 2026: कारगिल घूमने का प्लान है? इन 8 जगहों को देखे बिना न लौटें</title>
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        <description><![CDATA[ Kargil Vijay Diwas 2026: कारगिल घूमने का प्लान है? इन 8 जगहों को देखे बिना न लौटें ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Friendship Boundaries: जिगरी दोस्त से भी कभी शेयर न करें ये 5 बातें, वरना बर्बाद हो सकती है पर्सनल लाइफ</title>
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        <description><![CDATA[ Things You Should Never Share With Best Friend: हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा दोस्त जरूर होता है, जो आपके बचपन की शरारतों से लेकर आपकी पसंद-नापसंद तक सब कुछ जानता है. कई बार दोस्ती इतनी गहरी हो जाती है कि हम अपनी जिंदगी की लगभग हर बात उनसे साझा करने लगते हैं. लेकिन हर बात बता देना और एक-दूसरे पर भरोसा करना, दोनों अलग बातें हैं. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह समझ आ जाता है कि कुछ बातें सिर्फ अपने तक रखना ही बेहतर होता है. इससे न केवल आपकी निजी जिंदगी सुरक्षित रहती है, बल्कि रिश्ते भी स्वस्थ बने रहते हैं.
पार्टनर के साथ हर छोटी लड़ाई
अक्सर लोग पार्टनर से झगड़ा होने के तुरंत बाद अपने सबसे अच्छे दोस्त को पूरी कहानी बता देते हैं. लेकिन अगले दिन जब आपकी सुलह हो जाती है, तब भी दोस्त के मन में वही निगेटिव तस्वीर बनी रह सकती है. अगर मामला गंभीर है, जैसे मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना, तो जरूर मदद लें. लेकिन छोटी-छोटी बहसों को हर बार दूसरों तक पहुंचाना सही नहीं माना जाता.
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&amp;nbsp;पासवर्ड और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी
कभी भी अपने फोन का पासवर्ड, यूपीआई पिन, ईमेल का पासवर्ड या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी दोस्त के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. भले ही सामने वाला कितना भी भरोसेमंद क्यों न हो, लेकिन ऐसी जानकारी हमेशा निजी रहनी चाहिए. जिस तरह घर का ताला हर किसी को नहीं सौंपते, उसी तरह डिजिटल सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है.
किसी और का राज
अगर परिवार का कोई सदस्य या कोई करीबी आप पर भरोसा करके अपनी निजी बात बताता है, तो उसे आगे किसी और को नहीं बताना चाहिए. चाहे वह आपका सबसे अच्छा दोस्त ही क्यों न हो. किसी का भरोसा बनाए रखना आपकी अच्छी आदत और मजबूत व्यक्तित्व की पहचान होती है.
अधूरे सपने और भविष्य की योजनाएं
नई नौकरी, विदेश जाने की तैयारी या किसी बड़े फैसले जैसी बातें तब तक साझा न करें, जब तक वे तय न हो जाएं. कई बार लोग बार-बार सवाल पूछने लगते हैं और अगर योजना पूरी न हो पाए तो बेवजह दबाव महसूस होने लगता है. बेहतर है कि पहले अपने लक्ष्य पर काम करें और सफलता मिलने के बाद खुशखबरी साझा करें.
अपनी हर असुरक्षा
हर किसी के जीवन में ऐसे दिन आते हैं, जब आत्मविश्वास कम महसूस होता है. ऐसे समय में दोस्त से बात करना गलत नहीं है, लेकिन हर बातचीत में खुद की कमियां गिनाना भी ठीक नहीं. बार-बार अपनी कमजोरियों की चर्चा करने से वही बातें धीरे-धीरे सच जैसी लगने लगती हैं. अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करें, लेकिन उन्हें अपनी पहचान न बनने दें. दोस्ती का मतलब यह नहीं कि आप अपनी जिंदगी की हर बात सामने वाले को बता दें. मजबूत दोस्ती भरोसे, सम्मान और समझ पर टिकी होती है.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Glass Cleaning Hacks: अगर धुंधले होने लगे हैं कांच के बर्तन, तो इस तरीके से करें सफाई; तुरंत लौटेगी चमक</title>
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        <description><![CDATA[ White Vinegar Hacks For Foggy Glass Cups: अगर बर्तन धोने के बाद भी आपके कांच के गिलास साफ और चमकदार नहीं दिखते, बल्कि उन पर सफेद या धुंधली परत नजर आती है, तो इसकी वजह सिर्फ गंदगी नहीं होती. कई बार डिशवॉशर, हार्ड वॉटर या गलत तरीके से सफाई करने के कारण गिलास अपनी चमक खो देते हैं. अच्छी बात यह है कि हर बार नए गिलास खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. अगर धुंधलापन हार्ड वॉटर की वजह से है, तो कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर उन्हें फिर से चमकदार बनाया जा सकता है.
क्यों धुंघले होते हैं गिलास?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि गिलास धुंधले क्यों होते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसकी सबसे आम वजह हार्ड वॉटर में मौजूद कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स हैं. ये धीरे-धीरे गिलास की सतह पर जम जाते हैं और सफेद या धुंधली परत बना देते हैं. वहीं अगर गिलास लंबे समय तक डिशवॉशर की तेज गर्मी और डिटर्जेंट के संपर्क में रहते हैं, तो उनकी सतह पर स्थायी नुकसान भी हो सकता है. इसे एचिंग कहा जाता है। ऐसी स्थिति में गिलास की चमक वापस लाना संभव नहीं होता.&amp;nbsp;
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कैसे कर सकते हैं साफ?
अगर धुंधलापन केवल मिनरल्स की परत की वजह से है, तो सफेद सिरका आपकी मदद कर सकता है. एक बर्तन में इतना सफेद सिरका लें कि गिलास उसमें डूब जाएं. अब गिलासों को करीब पांच मिनट तक इसमें भिगोकर रखें. सिरके की नेचुरल एसिडिटी जमे हुए मिनरल्स को धीरे-धीरे घोल देती है. अगर दाग ज्यादा पुराने हैं, तो सिरके को हल्का गुनगुना करके इस्तेमाल किया जा सकता है.
भिगोने के बाद गिलास को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. यदि कहीं हल्के दाग बाकी रह जाएं, तो उंगली पर थोड़ा-सा बेकिंग सोडा लेकर बहुत हल्के हाथ से रगड़ें. चाहें तो इसमें कुछ बूंद पानी मिलाकर पेस्ट भी बना सकते हैं. ध्यान रखें कि ज्यादा जोर से रगड़ने से कांच पर खरोंच आ सकती है.&amp;nbsp;
पोंछते समय किस बात का रखें ध्यान?
धोने के बाद गिलास को अपने आप सूखने के लिए छोड़ने के बजाय माइक्रोफाइबर कपड़े या बिना रेशे वाले साफ कपड़े से तुरंत पोंछ दें. इससे पानी के नए दाग नहीं बनते और गिलास पहले जैसी चमक बनाए रखते हैं. अगर आपके घर में हार्ड वॉटर की समस्या है, तो भविष्य में गिलास धुंधले होने से बचाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें. महंगे या पसंदीदा कांच के गिलासों को डिशवॉशर में धोने के बजाय हाथ से साफ करें. डिशवॉशर का इस्तेमाल करना ही पड़े, तो जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट न डालें और मशीन को जरूरत से ज्यादा न भरें, ताकि पानी और डिटर्जेंट हर गिलास तक आसानी से पहुंच सके. वॉश साइकिल खत्म होते ही गिलास निकाल लें और हाथ से सुखा दें.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>McDonald&amp;apos;s और Burger King के बर्गर जैसा स्वाद चाहिए? घर पर बनाते समय डालना न भूलें ये चीज</title>
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        <description><![CDATA[ Burger Recipe: घर पर बर्गर बनाना अब कोई मुश्किल काम नहीं रहा. फिर भी ज्यादातर लोगों की शिकायत रहती है कि अच्छा बन, ताजी सब्जियां और स्वादिष्ट पैटी लगाने के बावजूद उसमें McDonald&#039;s और Burger King जैसा स्वाद नहीं आ पाता. असल में यह फर्क किसी एक सामग्री की कमी से नहीं आता, बल्कि सही तकनीक और चीजों के सही कॉम्बिनेशन को न समझने से आता है. जब तक इन बुनियादी बातों को नजरअंदाज किया जाता रहेगा, तब तक घर का बर्गर रेस्टोरेंट जैसा फील नहीं देगा.
पैटी को सही तरीके से पकाना है जरूरी
रेस्टोरेंट स्टाइल पैटी हमेशा तेज आंच पर जल्दी सेंकी की जाती है. इससे बाहर से हल्की कुरकुरी परत बनती है और अंदर की नमी बरकरार रहती है. धीमी आंच पर देर तक पकाने से पैटी सूख जाती है और उसका असली स्वाद खत्म हो जाता है. बन को हल्का बटर लगाकर सेकना भी उतना ही जरूरी है. इससे बर्गर में वह खास कुरकुरापन और खुशबू आती है जो बड़े ब्रांड्स के बर्गर में मिलती है. कई लोग इस स्टेप को छोड़ देते हैं, जिस वजह से बन नरम और बेस्वाद लगने लगता है.
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यह एक चीज बदल देती है पूरा स्वाद
सबसे अहम स्टेप है अचार वाले खीरे यानी Pickles का इस्तेमाल. यह बर्गर में हल्का खट्टापन जोड़ता है, जो पैटी, चीज और सॉस के भारी स्वाद को संतुलित करता है. बिना इसके बर्गर अधूरा लगता है, भले ही बाकी सामग्री कितनी भी बेहतरीन क्यों न हो. इसके साथ ही सॉस का सही कॉम्बिनेशन भी मायने रखता है. मेयोनेज़, टमाटर केचप और मस्टर्ड सॉस में थोड़ा गार्लिक पाउडर, प्याज पाउडर और एक चुटकी स्मोक्ड पपरिका मिलाकर घर पर ही रेस्टोरेंट जैसी सॉस तैयार की जा सकती हैं. यह सॉस बर्गर को गहराई और रिचनेस देती है, जो आमतौर पर घर की सादी सॉस में नहीं मिलती.
ताजी सामग्री और सही तरकीब का ध्यान रखें
ताजी लेट्यूस, बारीक कटा प्याज, टमाटर की पतली स्लाइस और अच्छी क्वालिटी की चीज का इस्तेमाल जरूरी है. सभी सामग्री को सही क्रम में लगाने से हर बाइट में स्वाद बराबर बना रहता है, वरना कुछ हिस्सों में स्वाद फीका या असंतुलित लग सकता है. बड़े फास्ट फूड ब्रांड्स अपनी खास और गोपनीय रेसिपी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए घर पर बना बर्गर बिल्कुल वैसा नहीं बन सकता. लेकिन सही पैटी तकनीक, संतुलित सॉस और खासतौर पर अचार वाले खीरों के इस्तेमाल से उसका काफी करीबी और संतोषजनक स्वाद जरूर पाया जा सकता है, जो हर बाइट में रेस्टोरेंट जैसा एहसास देगा.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>पहली बार कांवड़ लाने जा रहे हैं तो कौन&amp;सा रूट सबसे बेस्ट? पैदल आने वाले जान लें डिटेल्स</title>
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        <description><![CDATA[ Kanwar Yatra 2026: सावन का महीना शुरू होते ही देशभर से लाखों शिव भक्त कांवड़ यात्रा पर निकल पड़ते हैं. हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख जैसे जगहों से गंगाजल लेकर श्रद्धालु अपने शहर और गांव तक पैदल पहुंचते हैं. अगर आप इस साल पहली बार कांवड़ यात्रा करने जा रहे हैं, तो सही रूट चुनना बहुत जरूरी है. इससे यात्रा आसान भी होगी और परेशानी भी कम होगी.
अगर आप पहली बार कांवड़ ला रहे हैं, तो हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाला रूट सबसे अच्छा माना जाता है. ज्यादातर श्रद्धालु इसी रास्ते से यात्रा करते हैं. यहां कांवड़ियों के लिए जगह-जगह खाने, पीने, आराम करने और मेडिकल की व्यवस्था रहती है. रास्ते में पुलिस और प्रशासन की भी मदद मिलती रहती है.
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पैदल चलने वालों के लिए क्या-क्या सुविधा मिलती हैं?
कांवड़ यात्रा के दौरान कई जगहों पर भंडारे लगाए जाते हैं, जहां खाने-पीने की मुफ्त व्यवस्था होती है. इसके अलावा मेडिकल कैंप, पीने का पानी, मोबाइल टॉयलेट और आराम करने की जगह भी बनाई जाती है. इससे लंबी यात्रा करने वालों को काफी मदद मिलती है.
यात्रा पर निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप पैदल यात्रा कर रहे हैं, तो आरामदायक जूते या चप्पल पहनें. अपने साथ पानी की बोतल, जरूरी दवाइयां, टॉर्च, रेनकोट या छाता और मोबाइल चार्जर जरूर रखें. मौसम खराब होने पर जल्दबाजी में आगे बढ़ने की बजाय सुरक्षित जगह पर रुकना बेहतर होता है. ज्यादातर कांवड़िए सुबह जल्दी या शाम के समय पैदल चलना पसंद करते हैं. इस समय धूप कम होती है और चलने में ज्यादा परेशानी नहीं होती. दोपहर की तेज गर्मी में लंबी दूरी तय करने से बचना चाहिए.
इन नियमों का भी रखें ध्यान
यात्रा के दौरान प्रशासन की ओर से बनाए गए नियमों का पालन करें. तय किए गए रास्ते से ही चलें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखें. अगर आप किसी ग्रुप के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखें. किसी भी परेशानी की स्थिति में पुलिस या हेल्प डेस्क से मदद लें. कांवड़ यात्रा आस्था का पर्व है. अगर सही तैयारी और सही रूट के साथ यात्रा शुरू करेंगे, तो सफर ज्यादा आसान और सुरक्षित रहेगा.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Coffee Side Effect: दिन में 2 कप कॉफी पीने से कम होता दिल की बीमारियों का खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ Coffee Side Effect: दुनिया में लाखों के लोगों दिन की शुरुआत एक कप कॉफी से होती है. ऐसे में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा किए गए अब तक के सबसे बड़े रिसर्च से राहत भरी खबर मिली है. रिसर्च के अनुसार अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए प्रतिदिन 400 मिलीग्राम तक कैफीन का सेवन करना सुरक्षित होता है. इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और हृदय विफलता का खतरा भी कम होता है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि सभी प्रकार के कैफीन पदार्थ एक जैसे नहीं होते. जैसे कि एनर्जी ड्रिंक्स और कैफीन शॉट्स, जिनमें बहुत कम मात्रा में भी काफी ज्यादा कैफीन होता है. ये आपको फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं.&amp;nbsp; मैक्स हेल्थकेयर के कार्डियक साइंसेज के चेयरमैन डॉ.बलबीर सिंह के मुताबिक कॉफी पीने से एट्रियल फाइब्रिलेशन से पीड़ित लोगों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, और एट्रियल फाइब्रिलेशन दिल की धड़कन की सबसे खराब स्थिति है. जिसमें दिल का ऊपरी हिस्सा तेजी से और अनियमित रूप से धड़कने लगता है, जिससे स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और अन्य हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
कॉफी हृदय स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा सर्कुलेशन पत्रिका में प्रकाशित नए वैज्ञानिक बयानों के मुताबिक कम मात्रा में कॉफी का सेवन से अधिकांश लोगों में हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा नहीं बढ़ता है. साथ ही वो कहते है कि अगर चीनी, सिरप या ब्लैक कॉफी पीना छोड़ दें, तो इससे हृदय रोग, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और शुगर जैसी कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.&amp;nbsp;
एनर्जी ड्रिंक्स की कहानी अलग क्यों
हालांकि कम मात्रा में कॉफी पीना सुरक्षित होता है, लेकिन एनर्जी ड्रिंक्स के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता. क्योंकि कई एनर्जी ड्रिंक्स और एनर्जी शॉट्स में सामान्य कॉफी की तुलना में तीन से चार गुना अधिक कैफीन होता है. और इन चीजों में अक्सर ऐसी दवाएँ या तत्व मिलाए जाते हैं, जो शरीर में कैफीन को बहुत तेजी से असर करने में मदद करते हैं. इस रिसर्च में पाया गया कि एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन की ज्यादा मात्रा रक्तचाप और हृदय गति को बढ़ा सकती है. यहां तक ​​कि स्वस्थ युवाओं को भी इन पेय पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करने के बाद हृदय गति में गड़बड़ी का अनुभव हुआ है.&amp;nbsp;
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कैफीन के फायदे
दिलचस्प बात यह है कि शोधकर्ताओं का कहना है कि कॉफी के बहुत से स्वास्थ्य लाभ भी हैं. कॉफी में सैंकड़ों ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करते हैं और खून की नसों को सुरक्षित रखते हैं. शायद इसीलिए कई अध्ययनों में कॉफी अक्सर सप्लीमेंट या एनर्जी ड्रिंक्स के माध्यम से सेवन किए गए कैफीन से अच्छा परिणाम देती है. इस रिसर्च के जटिल होने का एक कारण यह है कि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग-अलग होता है. हर व्यक्ति के शरीर पर कॉफी का असर अलग तरीके से होता है. आपकी उम्र, जीन, लिवर की क्षमता, दवाइयां और आप कितनी बार कॉफी पीते हैं. इन सब बातों से तय होता है कि आपका शरीर कैफीन को कितनी जल्दी पचा पाता है. यही वजह है कि कुछ लोग बिना किसी परेशानी के कई कप कॉफी पी लेते हैं, जबकि कुछ लोगों को एक ही कप में घबराहट, तेज धड़कन या नींद न आने जैसी समस्या होने लगती है.&amp;nbsp;
तो दिन में कितनी कॉफी पीनी चाहिए
कई अध्ययनों में लगातार यह बात सामने आई है कि रोज दो से चार कप कॉफी पीना सबसे सही होता है. लेकिन जब इससे ज्यादा कॉफी का सेवन कर लिया जाए, तो कुछ लोगों में हृदय गति रुकने का खतरा बढ़ सकता है. इससे यह बात साफ हो जाती है कि किसी भी चीज को सीमित मात्रा में लेना ही सबसे समझदारी भरा काम होता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 08:30:03 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Coffee, Side, Effect:, दिन, में, कप, कॉफी, पीने, से, कम, होता, दिल, की, बीमारियों, का, खतरा</media:keywords>
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        <title>BP Risk in Adulthood Study : बचपन में जूस और मीठे ड्रिंक्स पीना पड़ सकता है भारी! बढ़ सकता है हाई BP का खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ BP Risk in Adulthood Study : बचपन में जूस और मीठे ड्रिंक्स पीना पड़ सकता है भारी! बढ़ सकता है हाई BP का खतरा ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Why Cockroaches Come Out At Night: रात में ही किचन में क्यों निकलते हैं सबसे ज्यादा कॉकरोच? जानिए वजह और भगाने के आसान उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ Cockroach Gel And Trap Uses For Kitchen: अगर रात में किचन की लाइट जलाते ही कॉकरोच इधर-उधर भागते नजर आते हैं, तो यह कोई बड़ी नहीं है. कॉकरोच स्वभाव से रात में सक्रिय रहने वाले कीड़े होते हैं. दिनभर ये अंधेरी और सुरक्षित जगहों पर छिपे रहते हैं, जबकि रात होते ही खाना और पानी की तलाश में बाहर निकल आते हैं. कॉकरोचों को तेज रोशनी बिल्कुल पसंद नहीं होती. यही वजह है कि दिन के समय वे सिंक के नीचे, गैस के पीछे, अलमारी की दरारों, पाइपलाइन के आसपास या किचन के दूसरे अंधेरे हिस्सों में छिपे रहते हैं. जैसे ही घर में शांति होती है और लाइटें बंद होने लगती हैं, वे बाहर निकलकर खाने की तलाश शुरू कर देते हैं.
क्यों रात में होती है कॉकरोच की एंट्री?
किचन में बचा हुआ खाना, खुले बर्तन, गिरे हुए खाने के टुकड़े और कूड़ेदान की गंध कॉकरोचों को सबसे ज्यादा आकर्षित करती है. अगर रात में बर्तन बिना धोए छोड़ दिए जाएं या सिंक में खाना जमा रहे, तो कॉकरोचों के आने की संभावना और बढ़ जाती है. इसके अलावा किचन में मौजूद नमी भी इन्हें अपनी ओर खींचती है. लीक हो रहे पाइप, गीला सिंक या पानी जमा रहने वाली जगहें इनके लिए आदर्श ठिकाना बन जाती हैं.
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रात का समय कॉकरोचों के प्रजनन के लिए भी अनुकूल माना जाता है. अंधेरे और शांत माहौल में वे तेजी से अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं. इसलिए अगर आपको अक्सर रात में कॉकरोच दिखाई देते हैं, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि उनकी संख्या घर में बढ़ रही है.
कॉकरोचों को घर से कैसे भगाएं?
कॉकरोचों से छुटकारा पाने के लिए सबसे जरूरी है कि किचन हमेशा साफ रखें. रात में सोने से पहले बर्तन जरूर धो लें और गैस, स्लैब व सिंक पर गिरे खाने के कण साफ कर दें. कूड़ेदान को रोज खाली करें और उसे ढक्कन लगाकर रखें, ताकि उसकी गंध कॉकरोचों को आकर्षित न करे.खाने-पीने की सभी चीजों को एयरटाइट डिब्बों में रखें. फर्श और सिंक पर पानी जमा न रहने दें और अगर कहीं पाइप से रिसाव हो रहा है, तो उसे जल्द ठीक कराएं. किचन की दीवारों, अलमारियों और पाइप के आसपास मौजूद दरारों को भी बंद कर दें, क्योंकि इन्हीं रास्तों से कॉकरोच घर के अंदर आते हैं.&amp;nbsp;
इन चीजों का करें इस्तेमाल
जरूरत पड़ने पर कॉकरोच ट्रैप या जेल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो उनकी संख्या कम करने में मदद करता है. अगर समस्या लगातार बनी रहे और कॉकरोच तेजी से बढ़ रहे हों, तो घरेलू उपायों के बजाय पेस्ट कंट्रोल कराना बेहतर रहेगा.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>IRCTC Goa Tour Package: मात्र ₹18,680 में गोवा की फ्लाइट, 4&amp;स्टार होटल और खाना! IRCTC का &amp;apos;गोवा डिलाइट&amp;apos; पैकेज</title>
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        <description><![CDATA[ IRCTC Goa Delight Air Tour Package 2026: अगर आप बारिश के मौसम या सितंबर में गोवा घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन आपके लिए खास एयर टूर पैकेज लेकर आया है. इस पैकेज के तहत पर्यटक कम खर्च में गोवा के खूबसूरत समुद्र तटों, प्राकृतिक नजारों और स्थानीय संस्कृति का आनंद ले सकते हैं. पैकेज में आने-जाने की फ्लाइट, होटल में ठहरने, नाश्ता और डिनर सहित कई सुविधाएं शामिल हैं.
&amp;nbsp;इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन &amp;nbsp;के इस पैकेज का नाम &#039;गोवा डिलाइट&#039; है और इसका पैकेज कोड SHA03 है. यात्रा हैदराबाद एयरपोर्ट से फ्लाइट के जरिए कराई जाएगी. यह टूर दो बैच में आयोजित होगा। पहली यात्रा 26 अगस्त 2026 से शुरू होगी, जबकि दूसरी 9 सितंबर 2026 को रवाना होगी. दोनों पैकेज 4 दिन और 3 रात के हैं.
कहां-कहां घूम सकेंगे आप?
यात्रा के दौरान पर्यटक गोवा के प्रसिद्ध समुद्र तटों जैसे कोलवा, कैंडोलिम, मीरामार, अंजुना और वरका बीच का आनंद ले सकेंगे. अरब सागर के किनारे बसे इन बीचों की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण पर्यटकों को यादगार अनुभव देगा. पहले बैच में 26 अगस्त को इंडिगो की फ्लाइट से हैदराबाद से गोवा (मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट) के लिए उड़ान भरी जाएगी. वापसी 29 अगस्त को गोवा से हैदराबाद होगी. वहीं दूसरे बैच में 9 सितंबर को प्रस्थान और 12 सितंबर को वापसी होगी.&amp;nbsp;
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कितना होगा खर्च?
अगर पैकेज की कीमत की बात करें तो अगस्त बैच में ट्रिपल शेयरिंग पर प्रति व्यक्ति 21,000 रुपये, डबल शेयरिंग पर 21,500 रुपये और सिंगल ऑक्यूपेंसी पर 26,950 रुपये खर्च होंगे. वहीं सितंबर बैच में ट्रिपल शेयरिंग का किराया 18,680 रुपये, डबल शेयरिंग का 19,200 रुपये और सिंगल ऑक्यूपेंसी का 24,640 रुपये रखा गया है. बच्चों के लिए भी अलग-अलग श्रेणी के अनुसार स्पेशल शुल्क निर्धारित किया गया है.
क्या-क्या मिलेंगी सुविधा?
इस पैकेज में हैदराबाद से गोवा और वापसी की हवाई यात्रा, गोवा में 4-स्टार होटल नीलम्स द ग्रैंड में 3 रात ठहरने की व्यवस्था, तीन नाश्ते और तीन डिनर, एसी वाहन से स्थानीय दर्शनीय स्थलों की सैर, ट्रैवल इंश्योरेंस, &amp;nbsp;इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन एस्कॉर्ट की सुविधा और सभी लागू टैक्स शामिल हैं. हालांकि कुछ सुविधाएं इस पैकेज का हिस्सा नहीं हैं. हैदराबाद एयरपोर्ट तक आने-जाने का खर्च यात्रियों को स्वयं उठाना होगा. लंच, फ्लाइट में मिलने वाला भोजन, मंडोवी रिवर क्रूज, गाइड शुल्क, व्यक्तिगत खर्च, लॉन्ड्री, मिनरल वाटर, टिप्स और अन्य अतिरिक्त सेवाओं का भुगतान अलग से करना होगा. यदि एयरफेयर, एयरपोर्ट टैक्स या फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी होती है, तो उसका अतिरिक्त शुल्क भी यात्रियों को देना होगा.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>IRCTC, Goa, Tour, Package:, मात्र, ₹18, 680, में, गोवा, की, फ्लाइट, 4-स्टार, होटल, और, खाना, IRCTC, का, गोवा, डिलाइट, पैकेज</media:keywords>
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        <title>How To Prevent Lizards: क्या दीवार पर छिपकली देखकर लगता है डर? किचन और कमरों से भगाने का 1 पक्का इलाज</title>
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        <description><![CDATA[ How To Get Rid Of Lizards At Home 2026: अगर घर में बार-बार छिपकलियां दिखाई देने लगी हैं, तो इसकी वजह सिर्फ मौसम नहीं होती. दरअसल, छिपकलियां वहीं रहती हैं जहां उन्हें आसानी से खाना, पानी और छिपने की सुरक्षित जगह मिल जाती है. ऐसे में अगर घर का माहौल उनके लिए अनुकूल हो जाए, तो वे बार-बार लौटकर आने लगती हैं.&amp;nbsp;
क्यों बार-बार आती है छिपकली?
छिपकलियों की सबसे बड़ी पसंद छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़े होते हैं. अगर घर में मच्छर, मक्खियां, चींटियां, पतंगे, दीमक या मकड़ियां ज्यादा हैं, तो छिपकलियां भी वहां आसानी से पहुंच जाती हैं. रात के समय जलने वाली तेज लाइटें भी उन्हें आकर्षित करती हैं, क्योंकि रोशनी के आसपास उड़ने वाले कीड़े इकट्ठा हो जाते हैं और छिपकलियों को आसानी से भोजन मिल जाता है.
इन जगहों को सूखा रखना जरूरी
घर में रखे फल, पौधे और किचन का खुला सामान भी कई बार छिपकलियों को आकर्षित करता है. कुछ प्रजातियां फलों और पौधों को भी नुकसान पहुंचाती हैं. इसलिए कटे हुए फल लंबे समय तक खुले में रखने से बचना चाहिए और फलों को ढककर या फ्रिज में रखना बेहतर होता है. पानी भी छिपकलियों को घर की ओर खींचने का एक बड़ा कारण है. अगर घर में कहीं पाइप से रिसाव हो रहा है, सिंक के आसपास हमेशा नमी रहती है या बाथरूम और किचन में पानी जमा रहता है, तो यह उनके लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है. इसलिए घर को जितना हो सके सूखा और साफ रखना जरूरी है.
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घर में छिपकलियों को आने से कैसे रोकें?
अगर आप चाहते हैं कि छिपकलियां घर में न आएं, तो सबसे पहले उनके खाने का इंतजाम खत्म करें. यानी घर में कीड़े-मकोड़ों की संख्या कम रखें. नियमित सफाई करें और कचरे को लंबे समय तक जमा न रहने दें. दरवाजों, खिड़कियों और दीवारों में मौजूद दरारों या छोटे छेदों को अच्छी तरह बंद कर दें. इन्हीं रास्तों से छिपकलियां आसानी से घर के अंदर प्रवेश कर जाती हैं. स्टोर रूम, किचन के नीचे की जगह, बाथरूम और फर्नीचर के पीछे जैसी जगहों की भी समय-समय पर सफाई करते रहें, ताकि उन्हें छिपने की जगह न मिले.
ये घरेलू उपाय भी कारगर
कई घरेलू उपाय भी छिपकलियों को दूर रखने में मदद कर सकते हैं. लहसुन की तेज गंध, काली मिर्च या मिर्च पाउडर का इस्तेमाल, अंडे के छिलके और कुछ लोग नेफ्थलीन की गोलियों का भी उपयोग करते हैं. हालांकि इनका इस्तेमाल करते समय बच्चों और पालतू जानवरों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है.अगर घर में छिपकलियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सफाई या घरेलू उपायों के बाद भी समस्या कम नहीं हो रही, तो यह किसी छिपे हुए इंफेक्शन या बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Birth Weight And Adult Health: क्या जन्म के समय आपका वजन भी था कम? रिसर्च का ये &amp;apos;स्ट्रोक&amp;apos; कनेक्शन उड़ा देगा होश</title>
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        <description><![CDATA[ Does Low Birth Weight Increase Stroke Risk In Adults: कम जन्म वजन को अक्सर लोग जन्म के समय की एक साधारण जानकारी मानकर भूल जाते हैं. लेकिन पिछले दो दशकों में रिसर्चर ने इस पर फिर से ध्यान देना शुरू किया है. सवाल यह है कि क्या जन्म के समय का वजन आगे चलकर वयस्क जीवन में स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन लोगों में भी जो बाहर से बिल्कुल स्वस्थ दिखते हैं? इसका जवाब सीधा नहीं है, लेकिन लगातार मिल रहे संकेत बताते हैं कि कम जन्म वजन भविष्य में स्ट्रोक के खतरे को थोड़ा बढ़ा सकता है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ मुरली चेकुरी ने TOI को बताया कि कम जन्म वजन को सिर्फ शिशु अवस्था तक सीमित समस्या मानना सही नहीं है. गर्भ में जब शिशु को सीमित पोषण या ऑक्सीजन मिलती है, तो उसका शरीर खुद को उस माहौल के हिसाब से ढाल लेता है. यह बदलाव बाद में पूरी तरह ठीक नहीं होते. इसी को स्वास्थ्य और डेवलपमेंट ऑफ ऑर्गन डिजीज उत्पत्ति का सिद्धांत कहा जाता है, जिसके अनुसार गर्भ के दौरान की परिस्थितियां शरीर के अंगों और प्रणालियों के काम करने के तरीके को जीवनभर के लिए प्रभावित कर सकती हैं.
क्या होते हैं बदलाव?
डॉ मुरली चेकुरी बताते हैं कि ऐसे बच्चों में आगे चलकर हाईबीपी, मेटाबॉलिज्म और ब्लड वेसल्स के काम में सूक्ष्म बदलाव आ सकते हैं. समय के साथ यही बदलाव हाई बीपी, इंसुलिन प्रतिरोध और ब्लड वेसल्स से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं, जो स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं.
स्टडी में क्या निकला?
इस संबंध को समझने के लिए बड़े स्तर पर स्टडी भी किए गए हैं. स्वीडन में किए गए एक बड़े स्टडी में लगभग आठ लाख लोगों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि जिन लोगों का जन्म वजन औसत 3.5 किलोग्राम से कम था, उनमें स्ट्रोक का खतरा 21 प्रतिशत अधिक था. पुरुषों में यह जोखिम 23 प्रतिशत और महिलाओं में 18 प्रतिशत तक देखा गया, इसके साथ ही यह भी पाया गया कि जन्म वजन में हर एक स्तर की कमी के साथ स्ट्रोक का खतरा करीब 11 प्रतिशत बढ़ता है.
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डॉ इसे सरल तरीके से समझाते हैं.&amp;nbsp; उनके अनुसार, गर्भ में विकास के दौरान शरीर के महत्वपूर्ण अंग जीवित रहने के लिए खुद को ढाल लेते हैं. इससे ब्लड वेसल्स थोड़ी छोटी या कठोर हो सकती हैं, लीवर के काम करने के तरीके में बदलाव आ सकता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है. ये बदलाव लंबे समय में शरीर को कमजोर बना सकते हैं.
क्या सबको होती है दिक्कत?
इसका मतलब यह नहीं है कि कम जन्म वजन वाले हर व्यक्ति को स्ट्रोक होगा. डॉ कहते हैं कि यह केवल जोखिम को थोड़ा बढ़ाता है, न कि निश्चित रूप से बीमारी तय करता है. एक्सपर्ट अगर इसके साथ धूम्रपान, हाई बीपी , ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं जुड़ जाएं, तभी खतरा ज्यादा बढ़ता है. इसलिए जरूरी है जागरूकता, न कि डर. नियमित रूप से रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच, सक्रिय लाइफस्टाइल, पर्याप्त नींद और तनाव कंट्रोल जैसे कदम इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, समय रहते सावधानी बरतना ही सबसे बेहतर तरीका है, ताकि भविष्य में होने वाले खतरे को टाला जा सके.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 16:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>आम का अचार बना रहे हैं? जानिए कितने दिन धूप दिखाना है सही</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आम-का-अचार-बना-रहे-हैं-जानिए-कितने-दिन-धूप-दिखाना-है-सही</link>
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        <description><![CDATA[ Mango Pickle: गर्मी का मौसम आते ही कई घरों में आम का अचार बनना शुरू हो जाता है. सालभर खाने के लिए लोग अलग-अलग तरह का अचार तैयार करते हैं, लेकिन आम का अचार हर किसी को भाता है. हालांकि, कई लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि अचार को कितने दिन धूप में रखना चाहिए. अगर अचार को सही तरीके से धूप नहीं दिखाई जाए तो उसका स्वाद भी बिगड़ सकता है और वह जल्दी खराब भी हो सकता है.
आमतौर पर आम के अचार को 7 से 10 दिन तक अच्छी धूप में रखना चाहिए. अगर धूप तेज है तो 5 से 7 दिन भी काफी हो सकते हैं. अचार को दिन में धूप में रखें और शाम होने पर घर के अंदर ले आएं, ताकि उसमें नमी न पहुंचे.
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रोज एक बार अचार को चलाएं
अचार को रोज एक बार साफ और सूखे चम्मच से अच्छी तरह मिला दें. इससे मसाले और तेल आम के सभी टुकड़ों पर बराबर लगते हैं. साथ ही अचार में फफूंदी लगने का खतरा भी कम हो जाता है. इसके अलावा, अचार में इतना तेल होना चाहिए कि आम के सभी टुकड़े अच्छी तरह डूबे रहें. अगर तेल कम होगा तो अचार जल्दी खराब हो सकता है. ज्यादातर लोग सरसों के तेल का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इससे अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और स्वाद भी अच्छा आता है.
नमी से बचाकर रखें.
अचार हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे कांच के जार में रखें. जार में जरा-सी भी नमी या पानी चला गया तो अचार खराब हो सकता है. अचार निकालते समय भी हमेशा सूखे चम्मच का ही इस्तेमाल करें. जब आम के टुकड़े थोड़े नरम हो जाएं और मसालों का स्वाद अच्छी तरह उनमें समा जाए, तो समझिए कि अचार तैयार है. इसके बाद आप इसे आराम से खा सकते हैं. अचार तैयार होने के बाद उसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें. हमेशा सूखे चम्मच से ही अचार निकालें. अगर अचार से बदबू आने लगे, फफूंदी दिखे या उसका रंग बदल जाए तो उसे खाने से बचें, क्योंकि ऐसा अचार खराब हो सकता है, जिससे बीमार होने का भी खतरा बना रहता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Saudi Arabia Vs Israel: सऊदी अरब बनाम इजरायल, पर्यटन में कौन अव्वल और कौन पिछड़ा? आंकड़ों से समझें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/saudi-arabia-vs-israel-सऊदी-अरब-बनाम-इजरायल-पर्यटन-में-कौन-अव्वल-और-कौन-पिछड़ा-आंकड़ों-से-समझें</link>
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        <description><![CDATA[ OECD Foreign Tourist Arrivals Report: कोरोना महामारी के बाद दुनियाभर में पर्यटन इंडस्ट्री तेजी से पटरी पर लौटा है, लेकिन सभी देशों की वापसी एक जैसी नहीं रही. कुछ देशों ने रिकॉर्ड संख्या में विदेशी पर्यटकों का स्वागत किया, जबकि कुछ अब भी महामारी और अन्य चुनौतियों का असर झेल रहे हैं. हालिया आंकड़े बताते हैं कि पर्यटन के मामले में सऊदी अरब और इजरायल की तस्वीर बिल्कुल अलग है. एक ओर सऊदी अरब दुनिया के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन केंद्रों में शामिल हो गया है, वहीं दूसरी ओर इसरायल विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में सबसे ज्यादा पिछड़ गया है.
सऊदी अरब का क्या है हाल?
ओईसीडी &amp;nbsp;के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 की तुलना में 2025 तक सऊदी अरब में &amp;nbsp;इंटरनेशनल टूरिस्ट की संख्या में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह सभी सर्वे किए गए देशों में सबसे अधिक है. इसके बाद मोरक्को, मिस्र, ब्राजील और कोलंबिया जैसे देशों का स्थान रहा, जहां भी पर्यटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली.
क्या सऊदी अरब कर रहा है ग्रो?
सऊदी अरब की इस सफलता के पीछे उसकी महत्वाकांक्षी विजन 2030 योजना को अहम माना जा रहा है. इस योजना के तहत सरकार ने वीजा प्रक्रिया को आसान बनाया, नई इंडस्ट्री उड़ानों की संख्या बढ़ाई और पर्यटन, संस्कृति तथा मनोरंजन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया. धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अब देश एडवेंचर, ऐतिहासिक स्थलों, समुद्री पर्यटन और मनोरंजन गतिविधियों पर भी जोर दे रहा है.
कितने लोग सऊदी घूमने गए?
पर्यटन मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में सऊदी अरब में कुल 12.3 करोड़ पर्यटकों ने यात्रा की. इनमें करीब 2.93 करोड़ विदेशी पर्यटक शामिल रहे. पर्यटन से देश को 304 अरब सऊदी रियाल की आय हुई, जबकि इस क्षेत्र में 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला. खास बात यह रही कि पर्यटन क्षेत्र में कार्यरत सऊदी नागरिकों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 47 प्रतिशत तक पहुंच गई.
इजरायल की क्या है स्थिति?
वहीं दूसरी तरफ इजरायल की स्थिति चिंताजनक रही. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2019 की तुलना में 71 प्रतिशत कम रही, जो सर्वे में शामिल सभी देशों में सबसे बड़ी गिरावट है. एक्सपर्ट का मानना है कि अक्टूबर 2023 में शुरू हुए युद्ध के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने इंटरनेशनल पर्यटकों को इसरायल से दूर कर दिया. इसका सीधा असर वहां के पर्यटन उद्योग पर पड़ा.
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हालांकि 2026 की शुरुआत में ईरान के साथ तनाव के कारण सऊदी अरब के पर्यटन क्षेत्र की रफ्तार में थोड़ी कमी जरूर आई, लेकिन हज और उमराह के लिए लगातार पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं ने इस असर को काफी हद तक संतुलित रखा. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक पर्यटन का देश की जीडीपी में योगदान दोगुना होकर 10 प्रतिशत तक पहुंच जाए.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Balcony Railing Rust: अगर बारिश में जंग खा गई है बालकनी की रेलिंग तो ऐसे करें सफाई, दूर होगी पूरी गंदगी</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Ways To Clean Balcony Iron Railing: बालकनी की लोहे की रेलिंग समय के साथ बारिश, नमी और धूल के संपर्क में आने से जंग पकड़ने लगती है. शुरुआत में यह केवल छोटे-छोटे भूरे धब्बों के रूप में दिखाई देती है, लेकिन अगर समय रहते इसे साफ न किया जाए तो जंग धीरे-धीरे लोहे को अंदर से कमजोर करने लगती है. इससे रेलिंग की मजबूती भी प्रभावित हो सकती है और उसकी चमक भी खत्म हो जाती है. ऐसे में कुछ आसान तरीकों को अपनाकर रेलिंग पर जमी जंग को साफ किया जा सकता है और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
रेलिंग पर जमी जंग को अच्छी तरह साफ करना&amp;nbsp;
सबसे पहले रेलिंग पर जमी जंग को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है, क्योंकि जंग हटाए बिना उस पर किया गया पेंट या कोई भी कोटिंग ज्यादा समय तक टिक नहीं पाती. इसके लिए सबसे आसान तरीका है सैंडपेपर या वायर ब्रश का इस्तेमाल करना. जंग वाली जगह पर धीरे-धीरे रगड़ें ताकि ऊपर की जंग हट जाए, लेकिन लोहे की सतह को नुकसान न पहुंचे. कोनों या छोटी जगहों पर जंग जमा हो तो वहां पतले वायर ब्रश या एमरी पेपर की मदद ली जा सकती है. सफाई पूरी होने के बाद सूखे कपड़े से धूल अच्छी तरह हटा दें.
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रस्ट रिमूवर का इस्तेमाल
अगर रेलिंग पर जंग ज्यादा जम गई है और सामान्य सफाई से नहीं हट रही है तो बाजार में मिलने वाले रस्ट रिमूवर का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे प्रोडक्ट जंग को ढीला करके उसे आसानी से हटाने में मदद करते हैं. इस्तेमाल करते समय हमेशा निर्माता द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें और हाथों की सुरक्षा के लिए दस्ताने जरूर पहनें, क्योंकि इनमें मौजूद केमिकल त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
रस्ट कन्वर्टर का भी यूज
एक दूसरा विकल्प रस्ट कन्वर्टर का भी है, जिसमें टैनिक एसिड होता है. यह जंग के साथ प्रतिक्रिया करके उसे एक मजबूत सुरक्षात्मक परत में बदल देता है, जिससे आगे जंग फैलने की संभावना कम हो जाती है. यह तरीका उन रेलिंग के लिए उपयोगी माना जाता है, जहां जंग बार-बार बनने लगती है.
इस चीज का रखें ध्यान
जंग साफ करने के बाद रेलिंग के सभी स्क्रू, बोल्ट और जोड़ की जांच जरूर करें. अगर कोई हिस्सा ढीला हो गया है तो उसे स्क्रूड्राइवर या रिंच की मदद से कस दें. जिन बोल्ट या स्क्रू पर जंग लग चुकी हो, उन पर पहले थोड़ा लुब्रिकेंट ऑयल स्प्रे करें. कुछ मिनट बाद उन्हें खोलना या कसना आसान हो जाएगा. अगर कोई स्क्रू या फास्टनर पूरी तरह खराब हो चुका है तो उसे नए से बदल देना बेहतर रहेगा. अगर रेलिंग का निचला हिस्सा जंग की वजह से काफी खराब हो गया है, तो केवल सफाई करना काफी नहीं होगा. ऐसे में क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाकर नया हिस्सा लगवाना ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है.
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        <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>सिर्फ पलकें देखकर पकड़ें झूठ, साइकोलॉजी के 5 ऐसे हैक्स जो आपको बना देंगे &amp;apos;माइंड रीडर&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप जानते हैं कि सिर्फ पलकें देखकर आप झूठ पकड़ सकते हैं. जी हां साइकोलॉजी के हिसाब से आप ऐसा कर सकते हैं. साथ ही मन की बात पूरी तरह पढ़ना संभव नहीं है, लेकिन साइकोलॉजी के कुछ संकेत आपको लोगों के व्यवहार और भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकते हैं.
क्या सच में किसी का मन पढ़ा जा सकता है?
अक्सर लोग कहते हैं कि सामने वाले के चेहरे या आंखों को देखकर उसके मन की बात समझी जा सकती है. हालांकि, साइकोलॉजी के अनुसार किसी एक इशारे से यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ. लेकिन कुछ व्यवहार ऐसे होते हैं, जो व्यक्ति की घबराहट, आत्मविश्वास या असहजता के बारे में संकेत दे सकते हैं.
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बार-बार पलक झपकाना
अगर कोई व्यक्ति सामान्य से ज्यादा तेजी से पलकें झपका रहा है, तो यह तनाव, घबराहट या दबाव का संकेत हो सकता है. हालांकि, सिर्फ इसी आधार पर किसी को झूठा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि थकान या आंखों की परेशानी की वजह से भी ऐसा हो सकता है.
आंखों से नजरें चुराना
कई लोग मानते हैं कि नजरें चुराने वाला इंसान झूठ बोल रहा होता है, लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता. कुछ लोग शर्म, डर या आत्मविश्वास की कमी की वजह से भी आंखों में देखकर बात नहीं कर पाते. इसलिए इस संकेत को दूसरे व्यवहारों के साथ देखकर ही समझना चाहिए.
चेहरे के भाव अचानक बदलना
साइकोलॉजी के मुताबिक, कई बार व्यक्ति के चेहरे पर एक पल के लिए ऐसे भाव आ जाते हैं जिन्हें वह छिपाने की कोशिश करता है. इन्हें माइक्रो एक्सप्रेशन कहा जाता है. ये खुशी, गुस्सा, डर या हैरानी जैसी भावनाओं का संकेत दे सकते हैं.
बात करने का तरीका बदल जाना
अगर कोई व्यक्ति अचानक बहुत धीरे, बहुत तेज या जरूरत से ज्यादा सफाई देकर बात करने लगे, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि वह दबाव महसूस कर रहा है. हालांकि, इसका मतलब हमेशा झूठ बोलना नहीं होता.
एक संकेत नहीं, पूरा व्यवहार देखें
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक इशारे या आदत के आधार पर यह फैसला नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति झूठ बोल रहा है. किसी के व्यवहार को समझने के लिए उसकी आवाज, चेहरे के भाव, बोलने का तरीका और परिस्थितियों को एक साथ देखना जरूरी होता है.
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Male Infertility: क्या पुरुषों में बढ़ रही इनफर्टिलिटी बनी IVF बूम की वजह, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े?</title>
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        <description><![CDATA[ Causes Of Male Infertility In Young Adults: भारत में अब इन्फर्टिलिटी को केवल महिलाओं की समस्या मानने की सोच तेजी से बदल रही है. फर्टिलिटी एक्सपर्ट का कहना है कि अब बड़ी संख्या में पुरुष भी जांच और इलाज के लिए आगे आ रहे हैं. बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव और देर से परिवार शुरू करने की प्रवृत्ति के कारण पुरुषों में प्रजनन क्षमता से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं. इसका असर देश के आईवीएफ इंडस्ट्री पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट के मुताबिक, आज पुरुषों से जुड़े कारण अकेले या महिलाओं के साथ मिलकर करीब 40 से 50 प्रतिशत &amp;nbsp;इन्फर्टिलिटी के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं. यही वजह है कि फर्टिलिटी क्लीनिक अब पुरुषों की जांच और इलाज से जुड़ी सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रहे हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड कोलकाता के नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रोहित गुटगुटिया के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में उनके केंद्र पर पुरुषों मेंइन्फर्टिलिटी के मामलों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सबसे ज्यादा जांच कराने वाले पुरुषों की उम्र 30 से 35 साल के बीच है.
बढ़ रहा है इसका बिजनेस
इसी के साथ भारत का इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है. करीब 1.4 अरब डॉलर के इस इंडस्ट्री में देशभर में 2,000 से अधिक आईवीएफ क्लीनिक संचालित हैं. वर्तमान में भारत में हर साल लगभग 2 लाख से 2.5 लाख आईवीएफ साइकिल किए जाते हैं. एक्सपर्ट का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर करीब 4 लाख तक पहुंच सकती है. इस वृद्धि में टियर-2 और टियर-3 शहरों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है.
इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट के अनुसार, कई छोटे और मध्यम आईवीएफ सेंटरों की कुल आय का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़ी जांच, परामर्श और उपचार से आता है. दिल्ली के एक आईवीएफ सेंटर के अधिकारी के मुताबिक, आईसीएसआई जैसी एडवांस तकनीक के एक साइकिल का खर्च लगभग 1.2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक हो सकता है. वहीं शुरुआती परामर्श, जांच और टेस्ट पर भी उम्र और क्लीनिक के आधार पर 20 हजार रुपये या उससे अधिक का खर्च आ सकता है.
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पहले की तुलना में बढ़ रही है दिक्कत?
गौडियम आईवीएफ की चेयरपर्सन डॉ. मणिका खन्ना बताती हैं कि पहले चार में से एक दंपती में पुरुष कारण सामने आता था, लेकिन अब यह आंकड़ा लगभग तीन में से एक तक पहुंच गया है. इसकी एक वजह जागरूकता बढ़ना है, वहीं दूसरी ओर स्पर्म की संख्या कम होना, उनकी गति कमजोर होना और उनकी बनावट में असामान्यता जैसी समस्याएं भी पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं.
बढ़ते इन्फर्टिलिटी के पीछे क्या कारण है जिम्मेदार?
डॉक्टरों का कहना है कि पुरुषों में बढ़ते इन्फर्टिलिटी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. मोटापा, डायबिटीज, धूम्रपान, लगातार तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और घंटों बैठे रहकर काम करना प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है. लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखकर काम करना, बहुत तंग कपड़े पहनना और लगातार बैठने की आदत भी टेस्टिकल्स के तापमान को बढ़ाकर स्पर्म बनने की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है.
गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है
इसके अलावा प्लास्टिक, कीटनाशकों, फूड पैकेजिंग और औद्योगिक प्रदूषण में मौजूद कुछ रसायन शरीर के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकते हैं. वहीं मांसपेशियां बढ़ाने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के एनाबॉलिक स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता के लिए नुकसानदायक माना जा रहा है. एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि करियर और आर्थिक कारणों से देर से शादी या देर से परिवार शुरू करने का फैसला भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर डाल रहा है. बढ़ती उम्र के साथ स्पर्म की क्वालिटी में गिरावट आने लगती है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है.
अब केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगर ही नहीं, बल्कि वाराणसी, गोरखपुर, भोपाल जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी पुरुष फर्टिलिटी जांच कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. डॉक्टरों का कहना है कि इन्फर्टिलिटी केवल महिला या पुरुष की समस्या नहीं, बल्कि दंपती दोनों से जुड़ा विषय है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Cholesterol Lowering Pill: कोलेस्ट्रॉल पर एम्स के डॉक्टर का बड़ा खुलासा! जानिए दिल को सुरक्षित रखने का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ PCSK9 Inhibitor Oral Tablet For Cholesterol: बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए अब तक स्टैटिन दवाओं को सबसे प्रभावी इलाज माना जाता रहा है, हालांकि, हर मरीज में ये दवाएं समान रूप से असर नहीं करतीं. खासकर जिन लोगों में हार्ट अटैक या अन्य हार्ट रोगों का खतरा ज्यादा होता है, उन्हें अतिरिक्त दवाओं की जरूरत पड़ती है. अब तक ऐसे मरीजों के लिए महंगे इंजेक्शन ही विकल्प थे, लेकिन अब एक नई गोली उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है.
अमेरिकी फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने लिपफेंड्रा नाम की नई दवा को मंजूरी दी है. यह रोजाना एक बार ली जाने वाली टैबलेट है, जो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को 50 से 60 प्रतिशत तक कम करने में मदद कर सकती है. यह दवा PCSK9 इनहिबिटर वर्ग की है, जो स्टैटिन से अलग तरीके से काम करती है.
प्रोटीन को ब्लॉक करती है PCSK9 
जहां स्टैटिन लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं, वहीं लिपफेंड्रा शरीर में मौजूद PCSK9 प्रोटीन को ब्लॉक करती है. यह प्रोटीन सामान्य तौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल रिसेप्टर्स को नष्ट कर देता है. जब यह रुक जाता है तो लिवर खून से ज्यादा मात्रा में बैड कोलेस्ट्रॉल निकालने लगता है, जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर तेजी से घटता है. यह दवा खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका है, एंजियोप्लास्टी या स्टेंटिंग करानी पड़ी है या जिन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज है. इसके अलावा, जिन लोगों का बैड कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा रहता है या जिनके परिवार में कम उम्र में हार्ट रोग का इतिहास है, उन्हें भी इससे लाभ मिल सकता है.
चर्बी जमा कर हार्ट रोग का खतरा बढ़ाते हैं
दिल्ली एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, लिपफेंड्रा सिर्फ LDL ही नहीं घटाती, बल्कि ApoB नाम के प्रोटीन को भी लगभग 50 प्रतिशत तक कम करती है. ApoB उन कणों की संख्या बताता है जो आर्टरीज में चर्बी जमा कर हार्ट रोग का खतरा बढ़ाते हैं. भारतीयों में इसका स्तर पश्चिमी देशों की तुलना में अधिक पाया जाता है, इसलिए इसकी कमी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इसे भी पढ़ें:&amp;nbsp;मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल?
हालांकि एक्सपर्ट &amp;nbsp;का कहना है कि स्टैटिन दवाएं अभी भी इलाज की पहली पसंद बनी रहेंगी, क्योंकि वे सस्ती हैं और कई वर्षों से उनकी प्रभावशीलता साबित हो चुकी है. जिन मरीजों में स्टैटिन असर नहीं करतीं या उनसे बुरे प्रभाव होते हैं, उनके लिए यह नई गोली बेहतर विकल्प बन सकती है. फिलहाल यह दवा LDL कम करने के आधार पर मंजूर हुई है. यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कितना कम करती है, इसे लेकर अभी अध्ययन जारी है.
इसको लेकर क्या करना जरूरी?
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि 18 से 29 वर्ष की उम्र के बीच हर व्यक्ति को कम से कम एक बार अपना कोलेस्ट्रॉल जरूर जांचना चाहिए. वहीं डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या परिवार में हार्ट रोग के लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए. दवाओं के साथ संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और धूम्रपान से दूरी भी स्वस्थ हार्ट के लिए बेहद जरूरी है.
इसे भी पढ़ें:&amp;nbsp;Monsoon Health Care Tips: मानसून सीजन में जल्दी बीमार पड़ जाते हैं बच्चे, ऐसे रखें उनकी सेहत का ख्याल?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Travel Weather Advisory: क्या बारिश और आंधी बिगाड़ देगी आपका ट्रिप? सफर पर निकलने से पहले पढ़ें IMD का अलर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/travel-weather-advisory-क्या-बारिश-और-आंधी-बिगाड़-देगी-आपका-ट्रिप-सफर-पर-निकलने-से-पहले-पढ़ें-imd-का-अलर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ How Weather Affects Travel Plans In India: अगर आप आने वाले दिनों में कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मौसम का हाल जानना बेहद जरूरी है. भारत मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक, तेज हवाएं और तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इसका असर आपकी यात्रा, फ्लाइट, रोड ट्रिप और घूमने के प्लान पर पड़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आप अपना ट्रिप प्लान कर सकते हैं.&amp;nbsp;
कहां कैसा है मौसम का हाल?
दिल्ली की बात करें तो यहां भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिलने के संकेत हैं. 24 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है. इस दिन मौसम विभाग ने हल्की बारिश या बूंदाबांदी का पूर्वानुमान जारी किया है. 25 जुलाई को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. वहीं, 26 जुलाई को तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. पूरे दिन बादल छाए रहेंगे और मौसम सामान्य रहेगा.&amp;nbsp;
दिल्ली में घूमना मजेदार
इसका मतलब यह है कि दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल जैसे लाल किला, कुतुब मीनार या चांदनी चौक जैसे बाजारों में घूमना सुबह और शाम के समय ज्यादा आसान हो सकता है. हालांकि, अचानक आने वाले तूफान या धूल भरी आंधी आपके प्लान को थोड़ा बिगाड़ सकते हैं, इसलिए समय-समय पर मौसम की जानकारी लेते रहना जरूरी है.&amp;nbsp;
उत्तर-पश्चिम भारत में क्या है हाल?
उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी मौसम तेजी से बदल सकता है. यहां तेज हवाएं और बारिश के साथ कुछ जगहों पर आंधी भी आ सकती है. खासकर हाईवे या खुले इलाकों में यात्रा करते समय धूल भरी आंधी दृश्यता कम कर सकती है, जिससे सावधानी जरूरी हो जाती है. &amp;nbsp;
पूर्वोत्तर भारत का क्या है हाल?
पूर्वोत्तर भारत इस समय सबसे ज्यादा बारिश वाला क्षेत्र बना रहेगा. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों में भारी बारिश हो सकती है. यहां की हरियाली और झरने इस मौसम में बेहद खूबसूरत दिखेंगे, लेकिन यात्रा के दौरान रास्ते धीमे हो सकते हैं और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं.&amp;nbsp;
पूर्वी भारत में क्या है हाल?
पूर्वी भारत जैसे पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार और ओडिशा में भी बारिश और गरज-चमक का असर रहेगा. इससे दिन का तापमान थोड़ा कम होगा, लेकिन यात्रा के दौरान देरी की संभावना बढ़ सकती है. &amp;nbsp;वहीं मध्य भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश से गर्मी में थोड़ी राहत मिल सकती है.&amp;nbsp;
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दक्षिण भारत का प्लान
दक्षिण भारत में भी कई राज्यों में बारिश का दौर देखने को मिलेगा. केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में ज्यादा बारिश हो सकती है, जिससे मौसम सुहावना रहेगा और नजारे भी खूबसूरत हो जाएंगे. &amp;nbsp;
इन इलाकों में अभी गर्मी
हालांकि, कुछ इलाकों जैसे गुजरात, राजस्थान और विदर्भ में अभी भी गर्मी का असर बना रह सकता है. ऐसे में अगर आपकी यात्रा इन जगहों पर है, तो सुबह जल्दी घूमना, दोपहर में आराम करना और पानी की कमी न होने देना बेहद जरूरी है. &amp;nbsp;यह समय मौसम के बदलने का है, जहां कहीं राहत मिलेगी तो कहीं अचानक बदलाव देखने को मिलेगा. ऐसे में अगर आप यात्रा कर रहे हैं तो अपने प्लान को थोड़ा लचीला रखें और जरूरी सामान के साथ हल्की बारिश से बचाव की तैयारी जरूर करें.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Foods For Overall Health: क्या आपका गलत खानपान अंदर ही अंदर शरीर को कर रहा है खोखला? एक्सपर्ट से जानें सच</title>
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        <description><![CDATA[ Foods That Support Liver Detox Naturally: हमारा शरीर किसी एक मशीन की तरह नहीं, बल्कि कई छोटे-छोटे सिस्टम का समूह है, जहां हर अंग का अपना काम और अपनी जरूरत होती है. हम रोज जो खाना खाते हैं, वही तय करता है कि फेफड़े कितनी आसानी से काम करेंगे, लिवर कितनी अच्छी तरह टॉक्सिक तत्वों को बाहर निकालेगा, डाइजेशन सिस्टम पोषक तत्वों को कितना सही तरीके से सोखेगा और आंखें थकान को कितना झेल पाएंगी.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
न्यूट्रिशियन एक्सपर्ट लवनीत बत्रा ने के अनुसार सही खानपान इन सभी सिस्टम को मजबूत बना सकता है, जबकि गलत आदतें धीरे-धीरे इन्हें कमजोर कर देती हैं. जरूरी यह नहीं कि आप बहुत मुश्किल डाइट अपनाएं, बल्कि यह समझें कि कौन-सा पोषक तत्व शरीर के किस हिस्से के लिए जरूरी है और उसी हिसाब से छोटे-छोटे बदलाव करें.
लंग्स के लिए क्या खाएं?
सांस लेना भले ही सहज लगता हो, लेकिन लंग्स की सेहत काफी हद तक हमारे खानपान पर निर्भर करती है. प्रदूषण, तनाव और इंफेक्शन से ट्रेकिया प्रभावित होती हैं. ऐसे में अदरक और हल्दी जैसे घरेलू मसाले मददगार साबित होते हैं. इनमें मौजूद तत्व सूजन को कम करने में सहायक होते हैं. वहीं संतरे जैसे खट्टे फल शरीर को विटामिन सी देते हैं, जो लंग्स को नुकसान से बचाने में मदद करता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के स्टडी में भी बताया गया है कि एंटीऑक्सीडेंट लंग्स को बाहरी प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभाते हैं.
लीवर की देखभाल कैसे करें?
यकृत दिन-रात शरीर की सफाई में लगा रहता है, लेकिन हम अक्सर इसकी देखभाल पर ध्यान नहीं देते. ब्रोकली जैसी सब्जियों में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर से टॉक्सिक पदार्थों को निकालने में मदद करते हैं. हरी चाय और जैतून का तेल भी लंग्स को स्वस्थ रखने में सहायक माने जाते हैं. मधुमेह और पाचन तंत्र से जुड़े राष्ट्रीय संस्थान के अनुसार, सही आहार फैटी लिवर जैसी समस्याओं से बचाने में अहम भूमिका निभाता है.
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डाइजेशन को कैसे मजबूत रखें?
डाइजेशन सिस्टम को अक्सर शरीर का दूसरा दिमाग कहा जाता है. यह सिर्फ भोजन पचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता और मनोदशा पर भी असर डालता है. दही में मौजूद अच्छे वैक्टीरिया पाचन को बेहतर बनाते हैं. वहीं केला और चिया बीज इन जीवाणुओं को पोषण देते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, आंत माइक्रोबायोम पोषक तत्वों के एब्जॉर्व को बेहतर बनाता है और सूजन से जुड़ी बीमारियों को कम करता है.
आंखों के लिए क्या जरूरी?
आज के समय में स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ने से आंखों पर दबाव बढ़ गया है. ऐसे में गाजर और शकरकंद जैसे खाद्य पदार्थ, जिनमें बीटा कैरोटीन होता है, आंखों के लिए बेहद फायदेमंद हैं. आंवला भी आंखों की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें भरपूर विटामिन सी होता है, जो आंखों को नुकसान से बचाने में मदद करता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>दो छिपकलियों की लड़ाई देखकर न करें नजरअंदाज, शकुन शास्त्र में बताया गया है अर्थ</title>
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        <description><![CDATA[ Shakun Shastra:&amp;nbsp;अक्सर हम घर की दीवारों पर दो छिपकलियों को आपस में लड़ते या एक-दूसरे का पीछा करते हुए देखते हैं. कई लोग इसे एक सामान्य प्राकृतिक घटना मानकर अनदेखा कर देते हैं, तो कई लोग इसे देखकर असहज हो जाते हैं.
सनातन परंपरा, प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों और विशेष रूप से नारद संहिता के शकुन विचार अध्याय में घर के भीतर छिपकलियों की हर गतिविधि का बहुत गहरा अर्थ बताया गया है.

शकुन शास्त्र में छिपकली को घर की ऊर्जा, देवी लक्ष्मी के आगमन और भविष्य में घटने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं का सूचक माना गया है. ऐसे में दीवार पर दो छिपकलियों का आपस में लड़ना आपके जीवन और घर के वातावरण पर क्या प्रभाव डालता है, यह जानना बेहद जरूरी है.
नारद संहिता के शकुन विचार प्रकरण के अनुसार, घर के भीतर दो छिपकलियों का आपस में भिड़ना एक स्पष्ट नकारात्मक ऊर्जा और आने वाले विवाद का पूर्व संकेत माना गया है.
यदि आप अपने मुख्य कक्ष या पूजा घर के आसपास दो छिपकलियों को आपस में लड़ते हुए देखते हैं, तो नारद संहिता के अनुसार यह परिवार के सदस्यों के बीच अकारण मतभेद और वाद-विवाद बढ़ने की ओर इशारा करता है.
पति-पत्नी या भाइयों के बीच तनाव का संकेत
यह पति-पत्नी या भाइयों के बीच अचानक कड़वाहट पैदा होने का सूचक है. इसके अलावा, शास्त्रों में माना गया है कि छिपकलियों की लड़ाई आपके किसी पुराने मित्र, रिश्तेदार या व्यापारिक साझेदार से संबंध बिगड़ने का भी संकेत देती है. छिपकलियों का इस तरह हिंसक रूप से भिड़ना घर के वातावरण में एकाएक तनाव और नकारात्मकता को बढ़ा देता है, जिससे घर के सदस्यों को निर्णय लेने में असमंजस और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है.
स्थान के हिसाब से भी इसके अलग-अलग फल बताए गए हैं. यदि मंदिर या पूजा घर की दीवार पर दो छिपकलियों का युद्ध दिखे, तो इसे वास्तु दोष और पूजा-पाठ में एकाग्रता की कमी से जोड़कर देखा जाता है, जो यह दर्शाता है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो रहा है.
वहीं धन स्थान या तिजोरी के आसपास छिपकलियों का लड़ना आर्थिक नुकसान, अकारण खर्चे या व्यापार में मंदी आने का अंदेशा देता है. इसी तरह रसोई घर में छिपकलियों का भिड़ना घर के सदस्यों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव और अन्न की बरकत में कमी का संकेत माना गया है.
उड़ सकती है घर की शांति!
ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से छिपकली का संबंध राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों से माना जाता है, जबकि उनके बीच का आपसी संघर्ष मंगल के उग्र स्वभाव का प्रतिनिधित्व करता है. जब घर में दो छिपकलियां बार-बार लड़ती हुई दिखाई देती हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि घर में राहु का प्रभाव बढ़ रहा है और मंगल ग्रह दोष उत्पन्न कर रहा है. जब मंगल और राहु का यह संयोजन बनता है, तो घर के सदस्यों का गुस्सा अचानक बढ़ जाता है और वे छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा खोने लगते हैं.
गंगाजल और सेंधा नमक मिला पानी छिड़क दें
यदि आपके घर में अक्सर छिपकलियों का आपस में लड़ना दिखता है, तो नारद संहिता और वास्तु शास्त्र में कुछ बेहद आसान उपाय बताए गए हैं. छिपकलियों की लड़ाई दिखने के तुरंत बाद उस स्थान पर थोड़ा सा गंगाजल और सेंधा नमक मिला हुआ पानी छिड़क दें, जिससे वहां पैदा हुई नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है.
संध्याकाल के समय घर के मंदिर में सरसों के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं और लोबान या गूगल की धूनी दिखाएं, जिससे राहु का दूषित प्रभाव कम होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जहाँ मोर पंख लगा होता है, वहां छिपकलियां कम आती हैं और उनका आपस में भिड़ना भी बंद हो जाता है. शास्त्रों के अनुसार किसी भी जीव को चोट पहुंचाना पाप माना गया है, इसलिए उन्हें मारने के बजाय मोर पंख की मदद से दूर भगाने का प्रयास करें.
संक्षेप में कहें तो दो छिपकलियों का आपस में लड़ना नारद संहिता के अनुसार आने वाले गृह-क्लेश या अकारण तनाव की पूर्व चेतावनी है. इसका उद्देश्य आपको डराना नहीं, बल्कि सतर्क करना है ताकि आप अपने व्यवहार में संयम रखें और पारिवारिक बातचीत में मिठास बनाए रखें.
घर में स्वच्छता, नियमित पूजा-पाठ और वास्तु के छोटे-छोटे नियमों का पालन करके आप इन नकारात्मक संकेतों के प्रभाव को पूरी तरह बेअसर कर सकते हैं.
FAQ
दो छिपकलियों का आपस में लड़ना क्या संकेत देता है?लोक मान्यताओं और शकुन विचार में इसे घर में बढ़ते तनाव या मतभेद से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह छिपकलियों का स्वाभाविक क्षेत्रीय व्यवहार भी हो सकता है.
पूजा घर में छिपकलियों का लड़ना अशुभ होता है?वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में इसे सकारात्मक वातावरण में बाधा का संकेत माना जाता है, लेकिन इसका कोई प्रमाणित वैज्ञानिक आधार नहीं है.
रसोई में छिपकलियों का लड़ना क्या दर्शाता है?परंपरागत मान्यताएं इसे स्वास्थ्य और अन्न से संबंधित चिंता से जोड़ती हैं. व्यावहारिक रूप से रसोई की सफाई और खाद्य पदार्थों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए.
क्या छिपकलियों को घर से भगाना चाहिए?उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना खिड़की या सुरक्षित रास्ते से बाहर निकालना चाहिए. कीड़े-मकौड़े कम रखने और दरारें बंद करने से उनका आना घट सकता है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Hair Fall Control: शैंपू से भी नहीं रुक रहा हेयर फॉल? ये 5 &amp;apos;सोया फूड्स&amp;apos; जड़ों से करेंगे मजबूत</title>
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        <description><![CDATA[ How To Reduce Hair Fall Naturally With Diet: बाल झड़ना आजकल लगभग हर किसी की समस्या बन गया है. कभी यह सिर्फ कुछ बालों तक सीमित रहता है, तो कभी ऐसा लगता है जैसे बाल तेजी से पतले हो रहे हैं. लोग अक्सर इसका कारण तनाव, हार्मोन या जेनेटिक मानते हैं, लेकिन सच यह है कि खानपान भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. बालों की मजबूती और ग्रोथ काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आप क्या खा रहे हैं. TOI की रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसे में सोया से बने कुछ साधारण खाद्य पदार्थ चुपचाप आपके बालों को अंदर से मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. &amp;nbsp;
टोफू सबसे अच्छा विकल्प
सबसे पहले बात करें टोफू की. यह सोया दूध से बना होता है और इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है. बालों की बनावट मुख्य रूप से प्रोटीन पर ही आधारित होती है, इसलिए अगर शरीर में इसकी कमी हो, तो बालों की ग्रोथ प्रभावित होती है. टोफू इस कमी को आसानी से पूरा कर सकता है. इसके साथ ही इसमें आयरन और कैल्शियम भी होता है, जो स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद करता है.&amp;nbsp;
सोया दूध भी शानदार विकल्प
सोया दूध भी एक आसान और असरदार विकल्प है. इसे आप सीधे पी सकते हैं या फिर चाय, कॉफी या स्मूदी में इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें मौजूद अमीनो एसिड और प्रोटीन बालों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं और टूटने की समस्या को कम करते हैं. कुछ सोया दूध में जरूरी विटामिन भी मिलाए जाते हैं, जो बालों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;कच्चे सोयाबीन भी बालों के लिए अच्छे&amp;nbsp;
एडामेमे यानी कच्चे सोयाबीन भी बालों के लिए अच्छे माने जाते हैं. इनमें प्रोटीन, आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व होते हैं. खासकर आयरन की कमी बाल झड़ने का एक बड़ा कारण होती है, इसलिए इसका संतुलन बनाए रखना जरूरी है. &amp;nbsp;फोलेट बालों की कोशिकाओं के विकास में मदद करता है, जिससे बाल मजबूत बनते हैं.&amp;nbsp;
सोया नट्स भी एक अच्छा स्नैक विकल्प&amp;nbsp;
सोया नट्स भी एक अच्छा स्नैक विकल्प हैं. ये भुने हुए सोयाबीन होते हैं और इनमें जिंक पाया जाता है, जो बालों की मरम्मत और मजबूती के लिए जरूरी होता है. जिंक की कमी से बाल कमजोर और बेजान हो सकते हैं, इसलिए इसे डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है.&amp;nbsp;
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टेम्पेह
टेम्पेह थोड़ा कम जाना-पहचाना विकल्प है, लेकिन यह भी काफी पौष्टिक होता है. यह फर्मेंटेड &amp;nbsp;सोयाबीन से बनता है, जिससे इसे पचाना आसान होता है. इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन को बेहतर बनाते हैं, और जब पाचन सही होता है, तो शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से एब्जॉर्व कर पाता है. इसका सीधा फायदा बालों को मिलता है. हालांकि यह समझना जरूरी है कि ये सभी चीजें कोई जादुई इलाज नहीं हैं. बालों की ग्रोथ एक धीमी प्रक्रिया है, जिसमें समय लगता है. लेकिन अगर शरीर को लगातार सही पोषण मिलता रहे, तो बाल धीरे-धीरे मजबूत और स्वस्थ होने लगते हैं.&amp;nbsp;
कब जांच करवाना जरूरी
अगर बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं, तो सिर्फ खानपान पर निर्भर रहना ठीक नहीं है. ऐसे में अंदरूनी कारणों की जांच कराना भी जरूरी होता है. लेकिन अगर आपकी डाइट सही नहीं है, तो उसमें सोया से जुड़े इन खाद्य पदार्थों को शामिल करना एक आसान और असरदार शुरुआत हो सकती है.
इसे भी पढ़ें-प्रेग्नेंसी के टाइम मलेरिया तो हो जाएं सावधान, बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह&amp;nbsp;
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Kitchen Cleaning Tips: क्या आपके किचन के प्लास्टिक डिब्बे भी हो गए हैं चिपचिपे? इस जादुई ट्रिक से मिनटों में चमकाएं</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Sticky Plastic Containers: किचन में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के डिब्बे मसाले, तेल, घी और दूसरी खाने-पीने की चीजों को स्टोर करने के लिए सबसे ज्यादा काम आते हैं. लेकिन रोजाना इस्तेमाल के कारण इन डिब्बों के बाहरी हिस्से पर तेल की चिकनाई जमने लगती है. समय के साथ यह चिकनाई धूल और गंदगी को अपनी ओर खींचती है, जिससे डिब्बे चिपचिपे और गंदे दिखाई देने लगते हैं. कई बार सामान्य पानी या साबुन से भी यह चिकनाई आसानी से नहीं निकलती. अगर आपके किचन के प्लास्टिक कंटेनर भी ऐसे ही चिपचिपे हो गए हैं, तो कुछ आसान घरेलू तरीके अपनाकर इन्हें फिर से साफ और चमकदार बनाया जा सकता है.
&amp;nbsp;खाने के तेल से हटाएं पुरानी चिकनाई
सुनने में यह तरीका थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन तेल से तेल की जमी हुई परत आसानी से ढीली हो जाती है. इसके लिए किसी भी कुकिंग ऑयल की कुछ बूंदें चिकनाई वाली जगह पर लगाएं और स्पंज या मुलायम कपड़े से हल्के हाथों से रगड़ें. इसके बाद गुनगुने पानी और डिशवॉश लिक्विड से डिब्बे को धो लें. इससे पुरानी चिकनाई आसानी से साफ हो जाती है.
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&amp;nbsp;चावल का माड़ आएगा काम
चावल उबालने के बाद बचा हुआ माड़ सिर्फ त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि सफाई के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है. चिकनाई वाले प्लास्टिक के डिब्बों को चावल के माड़ से साफ करें. कुछ देर माड़ लगाकर रखें और फिर स्पंज से रगड़कर पानी से धो लें. इससे गंदगी और चिपचिपापन काफी हद तक हट जाता है.
टूथपेस्ट से करें सफाई
टूथपेस्ट सिर्फ दांतों की सफाई तक सीमित नहीं है। इसे प्लास्टिक के डिब्बों पर लगी चिकनाई हटाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है. डिब्बे पर थोड़ा सा टूथपेस्ट लगाकर स्पंज या ब्रश से हल्के हाथों से रगड़ें. इसके बाद साफ पानी से धो लें। इससे डिब्बा पहले की तुलना में ज्यादा साफ नजर आएगा.
नारियल तेल और लाल मिर्च का पेस्ट
अगर डिब्बों पर जिद्दी चिकनाई जम गई है, तो नारियल तेल में थोड़ा सा लाल मिर्च का पेस्ट मिलाकर प्रभावित हिस्से पर लगाएं. कुछ देर बाद स्पंज या कपड़े से रगड़ें और फिर साफ पानी से धो लें. यह तरीका जमी हुई चिकनाई को ढीला करने में मदद कर सकता है.
&amp;nbsp;नींबू और नमक का इस्तेमाल करें
नींबू प्राकृतिक क्लीनर की तरह काम करता है. इसमें नमक मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे चिकनाई वाले हिस्से पर लगाएं. 10-15 मिनट बाद स्पंज से रगड़कर पानी से धो लें. नींबू का एसिड और नमक की हल्की रगड़ चिकनाई हटाने में मदद करती है और डिब्बों की चमक भी लौट आती है. इन आसान घरेलू तरीकों की मदद से किचन के प्लास्टिक डिब्बों पर जमी तेल की चिकनाई आसानी से हटाई जा सकती है.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Room Cleaning Tips: झाड़ू लगाने के बाद भी कमरे में दिखती है धूल? सफाई का यह तरीका तुरंत बदल देगा गेम</title>
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        <description><![CDATA[ Correct Order Of Cleaning Home: अगर रोज झाड़ू लगाने के बाद भी कमरे में धूल और गंदगी नजर आती है, तो जरूरी नहीं कि इसकी वजह सफाई की कमी हो. कई बार सफाई करने का तरीका ही ऐसा होता है कि धूल पूरी तरह हटने के बजाय दोबारा कमरे में फैल जाती है. कुछ छोटी-छोटी गलतियां ऐसी हैं, जिन्हें सुधारकर आप कमरे को ज्यादा साफ और लंबे समय तक धूल-मुक्त रख सकते हैं.&amp;nbsp;
कैसे करें सफाई?
सबसे पहले हमेशा ऊपर से नीचे की ओर सफाई करें. कई लोग पहले फर्श साफ कर लेते हैं और बाद में टेबल, शेल्फ या दूसरी ऊंची जगहों की धूल हटाते हैं. ऐसा करने से ऊपर की धूल दोबारा नीचे गिर जाती है और फर्श फिर गंदा हो जाता है. इसलिए पहले ऊंची जगहों की सफाई करें और आखिर में झाड़ू या वैक्यूम करें. अगर आप वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करते हैं, तो धूल साफ करने के बाद ही वैक्यूम करें. पहले वैक्यूम और बाद में फर्नीचर की धूल हटाने से सारी धूल फिर से फर्श पर गिर जाती है. इसके साथ ही वैक्यूम का डस्ट बैग या डस्ट कलेक्टर भी समय-समय पर खाली करें, क्योंकि भरा हुआ वैक्यूम धूल को दोबारा कमरे में फैला सकता है.&amp;nbsp;
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इस चीज का न करें इस्तेमाल?
धूल साफ करने के लिए फेदर डस्टर का इस्तेमाल करने से बचें. यह धूल हटाने के बजाय उसे हवा में उड़ा देता है. इसकी जगह माइक्रोफाइबर कपड़ा या लैम्ब्सवूल डस्टर बेहतर विकल्प माना जाता है, क्योंकि यह धूल को अपनी सतह पर पकड़ लेता है. बहुत ज्यादा धूल जमी हो तो केवल सूखे कपड़े से सफाई करने के बजाय हल्के गीले माइक्रोफाइबर कपड़े का इस्तेमाल करें. इससे धूल उड़ती नहीं है और आसानी से साफ हो जाती है. हालांकि कपड़ा इतना गीला भी नहीं होना चाहिए कि फर्नीचर को नुकसान पहुंचे.
इन जगहों को न करें नजरअंदाज
कमरे की सफाई करते समय बेड, सोफा और कुर्सियों के नीचे की जगह को नजरअंदाज न करें. इन जगहों पर जमा धूल धीरे-धीरे पूरे कमरे में फैलती रहती है. कम से कम महीने में एक बार इन हिस्सों की अच्छी तरह सफाई जरूर करें. सीलिंग फैन की सफाई भी बेहद जरूरी है. पंखा चलता रहे या बंद रहे, उसकी पंखुड़ियों पर लगातार धूल जमा होती रहती है. लंबे समय तक सफाई न करने पर यही धूल दोबारा पूरे कमरे में फैलने लगती है. इसलिए महीने में कम से कम एक बार पंखे की सफाई जरूर करें.
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Healthcare Workers Report : हर 10 में 4 हेल्थकेयर वर्कर्स पर बढ़ती हिंसा बनी वैश्विक संकट, WHO ने दी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ Healthcare Workers Report : अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों, नर्सों और दूसरे हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा पर खतरा बढ़ता जा रहा है. &amp;nbsp;मरीजों की जान बचाने में दिन-रात जुटे हेल्थकेयर वर्कर्स अब कई देशों में हिंसा, मारपीट और अभद्र व्यवहार का सामना कर रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया है. संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में बड़ी संख्या में हेल्थकेयर वर्कर्स अपने करियर के दौरान किसी न किसी तरह की हिंसा झेलते हैं. भारत में भी डॉक्टरों पर हमले लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिससे हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं.&amp;nbsp;
WHO की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 10 में से 4 हेल्थकेयर वर्कर्स अपने करियर में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा का शिकार होते हैं. अगर गाली-गलौज, धमकी और गलत तरीके से बात करने को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. अस्पतालों में काम करने वाले बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी किसी न किसी रूप में हिंसा का सामना कर रहे हैं.&amp;nbsp;
किन देशों में सबसे ज्यादा डॉक्टर हिंसा का शिकार?
Atenci&amp;oacute;n Primaria मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स के खिलाफ हिंसा सिर्फ विकासशील देशों की नहीं, बल्कि विकसित देशों की भी गंभीर समस्या बन चुकी है. अध्ययन में सबसे ज्यादा हिंसा के मामले जर्मनी में 91 प्रतिशत दर्ज किए गए, इसके बाद चीन में 90 प्रतिशत, पेरू में 84.5 प्रतिशत, तुर्की में 84 प्रतिशत और भारत में 77.3 प्रतिशत का नंबर है. वहीं जॉर्डन में 63 प्रतिशत, बुल्गारिया में 55 प्रतिशत, इटली में 51.5 प्रतिशत, पोलैंड में 51 प्रतिशत और अमेरिका के 47 प्रतिशत इमरजेंसी डॉक्टरों ने भी अपने कार्यकाल के दौरान हिंसा का सामना करने की बात कही.&amp;nbsp;
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं डॉक्टरों पर हमले?
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में कारण लगभग एक जैसे हैं. अस्पतालों में मरीजों की ज्यादा संख्या, हेल्थकेयर वर्कर्स की कमी, लंबा इंतजार, डॉक्टर और मरीज के बीच सही संवाद का अभाव साथ ही इलाज से जुड़ी उम्मीदें अक्सर तनाव की स्थिति पैदा करती हैं, यही हालात कई बार हिंसा का रूप ले लेते हैं, &amp;nbsp;पूर्व राज्य IMA अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम का कहना है कि लोगों मे पेशंस लगातार कम होता जा रहा है. लोग इलाज पर खर्च करने के बाद तुरंत और पूरी तरह सफल परिणाम की उम्मीद करते हैं. जब ऐसा नहीं होता, तो कई बार गुस्सा हेल्थकेयर वर्कर्स पर निकलता है.
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भारत में क्या है स्थिति?
भारत के 19 राज्यों ने &amp;nbsp;हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कानून बनाए हैं, लेकिन डॉक्टरों पर हमले अभी भी जारी हैं. महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. सुहास पिंगले का कहना है कि अलग-अलग राज्यों की जगह पूरे देश में एक समान राष्ट्रीय कानून की जरूरत है. महाराष्ट्र में 2010 से 2021 के बीच &amp;nbsp;हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा से जुड़े कानून के तहत 738 मामले दर्ज किए गए.&amp;nbsp;
दूसरे देश कैसे कर रहे हैं डॉक्टरों की सुरक्षा?
कई देशों ने हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कदम उठाए हैं. &amp;nbsp;स्पेन ने डॉक्टरों पर हमले को राज्य के खिलाफ अपराध की श्रेणी में रखा. इसके बाद दो सालों में हिंसा के मामलों में करीब 16 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. सिंगापुर में हेल्थकेयर वर्कर्स से गलत तरीके से बात करने पर 5,000 सिंगापुर डॉलर तक जुर्माना, 12 महीने तक की जेल, या दोनों सजा दी जा सकती है. यहां हेल्थकेयर वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है. यूनाइटेड किंगडम में हिंसक व्यवहार करने वाले मरीजों को जनरल प्रैक्टिशनर की लिस्ट से हटाया जा सकता है और ऐसे मरीजों को सिस्टम में चिन्हित भी किया जाता है. अमेरिका के कई राज्यों में &amp;nbsp;पर हेल्थकेयर वर्कर्स हमला करने को ज्यादा गंभीर अपराध मानने वाले कानून लागू किए गए हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Pumpkin Seed Oil Tips: घर में बनाना चाहते हैं कद्दू के बीज के तेल, जान लें बालों को बढ़ाने वाले ये सीक्रेट टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Pumpkin Seed Oil Tips: नवजवान लड़के और लड़कियां अक्सर अपने बालों के बारे में बहुत सोचते हैं. कभी ऑनलाइन तो कभी ऑफलाइन सिर्फ तेलों के बारे में सर्च करते रहते हैं. लेकिन रसोई में रखी एक ऐसी सामग्री है, जिसके बीज का तेल आपके बालों को बढ़ने, जड़ों को मजबूत करने और बालों की मोटाई बढ़ाने में जबरदस्त मदद कर सकता है. ये छोटे-छोटे बीज पोषक तत्वों का खजाना होते हैं. इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, जरूरी फैटी एसिड, विटामिन ई, प्लांट स्टेरॉल्स, जिंक और मैग्नीशियम पाए जाते हैं. कद्दू के बीज का तेल अपनी गुणवत्ता के कारण खूब जाना जाता है. यह अपने गुणों के कारण बालों की बढ़त को बढ़ावा देने, बालों को मजबूत बनाने और जड़ों को पोषण देने के लिए दूसरे तेलों से अलग माना जाता है. हालांकि, कुछ शोध बताते हैं कि कद्दू के बीज का तेल बालों के झड़ने और पतले बालों की समस्या में मदद कर सकता है. हालांकि, इसे गंजेपन का इलाज नहीं माना जाता. जानिए, घर में कैसे बनाते हैं कद्दू के बीज का तेल.
कद्दू के बीज के तेल के फायदे
कद्दू के बीज का तेल पोषक तत्वों का खजाना होते हैं, इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, जरूरी फैटी एसिड, विटामिन ई, पौधों का स्टेरॉल्स, जिंक और मैग्नीशियम पाया जाता है. यह तेल प्रदूषण, UV किरणों और यहां तक कि सूजन (inflammation) के कारण होने वाला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है. सेहतमंद रहने का मतलब है बेहतर बाल का होना. इस तेल के सूजनरोधी [ anti-inflammatory] गुण जिसमें खुजली, पपड़ी, लालिमा की लक्षणों का खातमा करता है.&amp;nbsp;
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घर पर ऐसे बनाएं कद्दू के बीज का तेल
सबसे पहले आधा कप कच्चे कद्दू के बीज लें. इसके साथ एक कप नारियल या मीठे बादाम का तेल और चाहें तो एक बड़ा चम्मच अरंडी का तेल भी मिला सकते हैं.
कद्दू के बीजों को 2 से 3 मिनट तक हल्की आंच पर भून लें और फिर उन्हें दरदरा कूट लें. अब डबल बॉयलर की मदद से कैरियर ऑयल को हल्का गर्म करें और उसमें कुटे हुए बीज डाल दें. इस मिश्रण को 30 से 40 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. ठंडा होने के बाद मलमल के कपड़े से छानकर गहरे रंग की कांच की बोतल में भर लें. इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखने से तेल लगभग 2 से 3 महीने तक सुरक्षित रह सकता है.
इस तरह करें इस्तेमाल
हफ्ते में एक बार स्कैल्प की मालिश करें: ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने के लिए 5-10 मिनट तक स्कैल्प पर तेल से मालिश करें. कद्दू के बीज का तेल से हेयर मास्क बनाएं और इसे रात भर लगा रहने दें, फिर हलका ठंड पानी से धो लें. इसे रोज़मेरी ऑयल के साथ भी मिलाया जा सकता है: इस मिश्रण में रोजमेरी एसेंशियल ऑयल की 2-3 बूंदें मिलाएं, क्योंकि माना जाता है कि इसमें बालों के झड़ने को रोकने वाले गुण होते हैं.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: Quit Smoking: ये 4 तरीके अपना लिए तो तुरंत छूट जाएगी सिगरेट, गलती से भी नहीं लगाएंगे हाथ ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Joint Pain in Monsoon: मानसून में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द, जानें डॉक्टर की राय</title>
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        <description><![CDATA[ Joint Pain in Monsoon: मानसून में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द, जानें डॉक्टर की राय ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 08:30:02 +0530</pubDate>
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        <title>Causes of Poop Color Change: अपने मल के रंग से पता करें शरीर के अंदर की कहानी, जानिए क्या बताती है किस रंग की पॉटी?</title>
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        <description><![CDATA[ Causes of Poop Color Change: हमारे शरीर की सेहत के कई संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं, और उनमें से एक है मल यानी पॉटी का रंग. ज्यादातर लोग इसे सिर्फ एक रोजमर्रा की प्रक्रिया मानते हैं और इस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके मल का रंग भी आपकी सेहत के जुड़ी बाते बताता है? जी हां आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल मल के रंग से आप इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि आपकी सेहत बेहतर है. असल में मल का रंग हमारे पाचन तंत्र, लीवर, और आंतों की सेहत के बारे में काफी कुछ बता सकता है.&amp;nbsp; ऐसे में आपको अपनी पाचन क्रिया को लेकर थोड़े जागरूक रहना चाहिए, और मल के रंग में कोई बदलाव नजर आया है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.&amp;nbsp;
कौन-सा रंग क्या बताता है?
सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति का मल भूरे रंग का होता है, और इसकी वजह लीवर से निकलने वाला पित्त होता है. अगर मल का रंग पीला दिखे, तो यह शरीर द्वारा पोषण को सही तरीके से न सोख पाने का संकेत हो सकता है. अगर मल हरे रंग का दिखे तो यह ज्यादातर हरी पत्तेदार सब्जियों के सेवन की वजह से हो सकता है, हालांकि ऐसे में कोई परेशानी कि बात नहीं होती है. वहीं अगर मल नारंगी रंग का दिखे, तो इसका कारण गाजर या शकरकंद जैसी चीजों का ज्यादा सेवन हो सकता है, क्योंकि इनमें मौजूद बीटा-कैरोटीन नाम का तत्व मल का रंग बदल देता है.&amp;nbsp;
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कब हो जाएं सावधान?
जब बात गंभीर संकेतों की आती है, तो कुछ रंगों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. खासतौर पर काले, टार जैसे चिपचिपे मल को डॉक्टर तुरंत जांच कराने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह पेट के ऊपरी हिस्से में आंतरिक रक्तस्राव का संकेत हो सकता है. इसी तरह अगर मल में लाल रंग दिखे और यह बीटरूट जैसी किसी चीज खाने की वजह से न हो, तो यह भी पेट के निचले हिस्से में खून आने का संकेत हो सकता है. कई बार डाइट में बदलाव की वजह से मल के रंग में हल्का-फुल्का बदलाव आना सामान्य बात है, लेकिन अगर बिना किसी वजह के मल का रंग लगातार अजीब दिखे, तो ऐसे में&amp;nbsp; डॉक्टर से जांच करवाना ही सबसे सही तरीका माना जाता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AI in Healthcare: क्या चैटजीपीटी के भरोसे मरीजों की जिंदगी? भारत में 54% डॉक्टर कर रहे हैं AI का इस्तेमाल</title>
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        <description><![CDATA[ ChatGPT vs Medical AI In Healthcare: भारत में डॉक्टरों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यूज लगातार बढ़ रहा है. मेडिकल रिसर्च, क्लिनिकल नोट्स तैयार करने, मरीजों को बीमारी के बारे में समझाने और इलाज से जुड़े फैसलों में मदद लेने के लिए कई डॉक्टर अब एआई टूल्स का सहारा ले रहे हैं. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि इस बढ़ते इस्तेमाल के साथ एक बड़ा जोखिम भी जुड़ा है, क्योंकि कई डॉक्टर ऐसे सामान्य एआई चैटबॉट्स का उपयोग कर रहे हैं जिन्हें मेडिकल निर्णय लेने के लिए तैयार नहीं किया गया है.
एआई के भरोसे इतने प्रतिशत डॉक्टर
साइंटफिक पब्लिकेशन संस्था एल्सेवियर की क्लिनिशियन ऑफ द फ्यूचर 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सर्वे में शामिल 48 प्रतिशत डॉक्टर और क्लिनिशियन अपने काम में एआई का उपयोग कर रहे हैं. इनमें 54 प्रतिशत डॉक्टर अक्सर चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे सामान्य एआई टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, जबकि केवल 26 प्रतिशत डॉक्टर ही मेडिकल रिसर्च और क्लिनिकल डेटा पर आधारित स्पेशल एआई प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग करते हैं। नर्सों में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां सामान्य एआई का उपयोग विशेष मेडिकल एआई की तुलना में अधिक पाया गया.
क्या इससे कोई दिक्कत है?
एल्सेवियर के लीड क्लिनिकल एग्जीक्यूटिव और चिकित्सक डॉ. राहुल गोयल का कहना है कि सामान्य एआई टूल्स इंटरनेट पर उपलब्ध अलग-अलग स्रोतों से जानकारी लेते हैं, जिनमें कई बार अप्रमाणित या गैर-साइंटफिक जानकारी भी शामिल हो सकती है. इसके विपरीत, मेडिकल एआई प्लेटफॉर्म प्रमाणित मेडिकल किताबों, रिसर्च जर्नल और क्लिनिकल गाइडलाइंस पर आधारित होते हैं.यदि किसी सवाल का पर्याप्त साइंटफिक प्रमाण उपलब्ध नहीं होता, तो ऐसे प्लेटफॉर्म स्पष्ट रूप से इसकी जानकारी देते हैं, बजाय इसके कि अनुमान के आधार पर जवाब तैयार करें.
डॉ. गोयल ने कहा कि जब डॉक्टर किसी मरीज के इलाज या बीमारी का फैसला कर रहे होते हैं, तब छोटी-सी गलती भी गंभीर परिणाम दे सकती है. यदि कोई डॉक्टर सामान्य एआई की गलत सलाह पर भरोसा करता है, तो कानूनी जिम्मेदारी एआई की नहीं बल्कि डॉक्टर की ही होगी. उन्होंने इसे लायबिलिटी सिंक की स्थिति बताया, जिसमें अंतिम जवाबदेही हमेशा चिकित्सक पर रहती है.&amp;nbsp;
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इन लोगों को किया गया शामिल
रिपोर्ट में 118 देशों के 2,757 स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया गया. इनमें भारत से सबसे अधिक 426 डॉक्टर और 112 पैरामेडिक्स शामिल थे. भारतीय डॉक्टर एआई का सबसे ज्यादा उपयोग मेडिकल रिसर्च, नई जानकारी हासिल करने, दवाओं की जानकारी खोजने, मरीजों को शिक्षित करने, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट और डॉक्यूमेंटेशन जैसे कामों में कर रहे हैं.
एक्सपर्ट का मानना है कि एआई डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकता, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल होने पर यह इलाज की क्वालिटी बेहतर बना सकता है. खासकर भारत जैसे बड़े देश में, जहां एक्सपर्ट डॉक्टरों की उपलब्धता हर जगह समान नहीं है, वहां प्रमाणित मेडिकल एआई छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर इलाज सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है. &amp;nbsp;रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय डॉक्टर ऐसे एआई सिस्टम पर ज्यादा भरोसा करेंगे जो इस्तेमाल में आसान हों, स्वतंत्र एक्सपर्ट द्वारा सत्यापित हों, अपने जवाबों के साथ भरोसेमंद संदर्भ दें, नुकसान से बचाने के लिए प्रशिक्षित हों और कई हाई क्वालिटी वाले मेडिकल सोर्स से जानकारी लेते हों.
किन बात का रखना चाहिए ध्यान?
एक्सपर्ट का मानना है कि एआई डॉक्टरों का एक अच्छा सहायक बन सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा डॉक्टर के अनुभव, क्लिनिकल समझ और मरीज की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए. मरीजों की गोपनीयता और सुरक्षित इलाज की जिम्मेदारी भी अंततः डॉक्टर की ही रहेगी.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Helmet Odor in Monsoon: बारिश में हेलमेट से आ रही है बदबू? इस तरीके से करें सफाई, तुरंत दूर होगी गंदी स्मेल</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Hacks To Clean Bike Helmet Padding: बारिश के मौसम में हेलमेट पहनना जितना जरूरी होता है, उतना ही मुश्किल उसके अंदर आने वाली बदबू से छुटकारा पाना भी हो सकता है. लगातार नमी, पसीना और कम धूप मिलने की वजह से हेलमेट के अंदर बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं. यही कारण है कि कुछ ही दिनों में हेलमेट से तेज बदबू आने लगती है. अगर समय रहते इसकी सफाई न की जाए, तो यह सिर्फ परेशानी ही नहीं बल्कि त्वचा और सिर से जुड़ी समस्याओं की वजह भी बन सकती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है.&amp;nbsp;
पैड और लाइनर की सफाई&amp;nbsp;
सबसे पहले हेलमेट के अंदर लगे पैड और लाइनर की सफाई पर ध्यान दें. अगर आपके हेलमेट में रिमूवेबल लाइनर है, तो उसे निकालकर हल्के साबुन या शैंपू वाले गुनगुने पानी से धो लें. पूरी तरह सूखने के बाद ही दोबारा हेलमेट में लगाएं. गीले पैड लगाने से बदबू और बढ़ सकती है. अगर लाइनर नहीं निकलता है, तो माइक्रोफाइबर कपड़े को हल्के साबुन वाले पानी में भिगोकर अंदर की सतह साफ करें. इसके बाद सूखे कपड़े से नमी हटाएं और हेलमेट को अच्छी हवा वाली जगह पर रख दें. तेज धूप में लंबे समय तक रखने से हेलमेट की बाहरी परत और अंदर की फोम को नुकसान पहुंच सकता है.
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इस बात का रखें विशेष ध्यान
बारिश में हेलमेट भीग जाए, तो उसे कभी भी बंद अलमारी, बैग या बाइक की डिक्की में तुरंत न रखें. ऐसा करने से नमी अंदर ही फंस जाती है और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं. हेलमेट को पहले अच्छी तरह सुखाएं, तभी उसे स्टोर करें.
हेलमेट सैनिटाइजर स्प्रे का इस्तेमाल
बदबू दूर करने के लिए हेलमेट के अंदर हेलमेट सैनिटाइजर स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर यह उपलब्ध नहीं है, तो हल्के एंटीबैक्टीरियल स्प्रे का भी सीमित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है. तेज परफ्यूम या डियोड्रेंट सीधे हेलमेट के अंदर स्प्रे करने से बचें, क्योंकि इनमें मौजूद केमिकल्स अंदर की फोम को नुकसान पहुंचा सकते हैं. हेलमेट पहनने से पहले सिर और बालों को साफ रखना भी जरूरी है. गीले बालों या ज्यादा पसीने के साथ हेलमेट पहनने से नमी लंबे समय तक अंदर बनी रहती है. चाहें तो कॉटन का हेलमेट कैप पहन सकते हैं, जो पसीना सोखने में मदद करता है और लाइनर को जल्दी गंदा होने से बचाता है. अगर रोजाना हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं, तो सप्ताह में कम से कम एक बार उसकी सफाई जरूर करें. इसके साथ ही समय-समय पर अंदर के पैड की स्थिति भी जांचते रहें। अगर पैड बहुत पुराने, फटे हुए या लगातार बदबू कर रहे हैं, तो उन्हें बदल देना बेहतर होता है.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>How To Clear Stomach In Morning: सुबह नहीं होता पेट साफ तो अपनी डाइट में शामिल करें ये चीजें, एक्सपर्ट्स से जानें डाइट प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clear Stomach In Morning: आजकल बाजार में मिलावटी खाद्य सामग्रियां काफी बढ़ चुकी हैं. ऐसे में इन मिलावटी चीजों के सेवन से लोगों की हेल्थ पर काफी बुरा असर पड़ रहा है. ऐसे में एक समस्या जो काफी ज्यादा सुनने को मिलती है, वह है पेट का साफ न होना. कई लोग सुबह उठते ही इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका पेट साफ नहीं होता. ऐसे में कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि दवाओं के बजाय अगर हम अपनी रोज की डाइट में कुछ आसान बदलाव करें, तो इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि सुबह पेट साफ करने के लिए आपको अपनी डाइट में किन चीजों को शामिल करना चाहिए...
पेट साफ न होने के कारण&amp;nbsp;
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डाइट प्लान जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर पेट साफ क्यों नहीं होता. दरअसल जब हमारे भोजन में फाइबर की कमी हो जाती है, तब हमें ऐसी समस्या देखने को मिलती है. हमारे शरीर को फाइबर भोजन में हरी सब्जियों और फलों से मिलता है. साथ ही शरीर में पानी की कमी होना भी पेट के खराब होने का एक बड़ा कारण बन सकता है. अगर आप दिनभर एक जगह बैठे रहते है और एक्सरसाइज नहीं कर पा रहे हैं, तो ऐसे में आपको भी यह समस्या हो सकती है.&amp;nbsp;
इन चीजों को डाइट में करें शामिल&amp;nbsp;
अगर आप सुबह बिना किसी परेशानी के पेट साफ करना चाहते हैं, तो आपको सुबह उठते ही बिना ब्रश किए 1 से 2 गिलास गुनगुना पानी पीना शुरु कर दें, यह आंतों को सक्रिय करता है और मल को आगे बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही रात को 3-4 मुनक्के या 2 सूखे अंजीर पानी में भिगोकर रख दें, सुबह खाली पेट इनका सेवन करें और वह पानी भी पी लें. पपीता हमारें पेट के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसमें &#039;पपेन&#039; नामक एंजाइम और भरपूर फाइबर होता है, जो पाचन क्रिया को तेज करता है. आप चाहें तो दोपहर या सुबह के नाश्ते में ओट्स या गेहूं का दलिया खा सकते हैं, क्योंकि इस में घुलनशील फाइबर होता है, जो पेट को अंदर से साफ रखता है.&amp;nbsp;
साथ ही आप अपने भोजन में पालक, बथुआ और मेथी जैसी सब्जियों को खाना शुरु करें, क्योंकी इनमें फाइबर के साथ-साथ पानी की मात्रा भी अच्छी होती है, जो कब्ज को दूर रखती है. और दोपहर के खाने में एक गिलास छाछ या एक कटोरी दही जरूर लें. इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया आंतों को स्वस्थ रखते हैं.&amp;nbsp;
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इन चीजों से रहें दूर&amp;nbsp;
अगर आप चाहते हैं कि आपका पाचन तंत्र हमेशा सही रहे, तो मैदा और बेकरी प्रोडक्ट्स, ज्यादा चाय-कॉफी, पैकिंग जूस और कोल्ड ड्रिंक्स से हमेशा के लिए दूरी बना लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Weekly Fasting Benefits:हफ्ते में एक बार उपवास रखने के क्या हैं फायदे? लेकिन इन चीजों का रखना होगा ध्यान</title>
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        <description><![CDATA[ Weekly Fasting Benefits: सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, आजकल कई लोग बेहतर सेहत और फिटनेस के लिए भी हफ्ते में एक दिन उपवास रखते हैं. माना जाता है कि सीमित समय तक खान पान से दूरी बनाने से पाचन तंत्र को आराम मिल सकता है, और खानपान पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है. हालांकि, हर व्यक्ति के लिए उपवास का असर एक जैसा नहीं होता, इसलिए इसके फायदे जानने के साथ साथ जरूरी सावधानियों को समझना भी बेहद जरूरी है.
क्या हफ्ते में एक दिन उपवास रखने से मिलते हैं ये फायदे?
एक्सपर्ट &amp;nbsp;के अनुसार, अगर स्वस्थ व्यक्ति सही तरीके से सप्ताह में एक दिन उपवास रखता है, तो इससे पाचन तंत्र को कुछ समय का आराम मिल सकता है. कई लोगों को कैलोरी नियंत्रण में मदद मिलती है, जिससे वजन प्रबंधन आसान हो सकता है. इसके अलावा, उपवास के दौरान लोग अक्सर तले भुने और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाते हैं, जिससे खानपान की आदतों में सुधार आ सकता है. रिसर्च बताती है कि कुछ तरीकों से उपवास (intermittent fasting) रखने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है और मेटाबॉलिज्म अच्छा होता है. लेकिन इसके फायदों के लिए अच्छा खाना और हेल्दी लाइफस्टाइल होना भी बहुत ज़रूरी है.
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उपवास के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान
उपवास का मतलब पूरे दिन पानी न पीना या जरूरत से ज्यादा भूखे रहना नहीं है. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है. अगर आपका उपवास इसकी अनुमति देता है, तो फल, दही, दूध, मेवे और हल्के पौष्टिक खाद्य शामिल करें. उपवास खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा भोजन करने से बचें, क्योंकि इससे पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है. चाय, कॉफी, मीठे पेय और तले हुए वाले खान पान का ज्यादा खाने भी फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है.
किन लोगों को बिना सलाह के उपवास नहीं करना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, बच्चों, बुजुर्गों, टाइप-1 डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना उपवास नहीं रखना चाहिए. जो लोग नियमित दवाएं लेते हैं, उन्हें भी उपवास शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. उपवास के दौरान चक्कर आना, कमजोरी, अत्यधिक थकान या ब्लड शुगर कम होने जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत उपवास तोड़ना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सही तरीके और संतुलित आहार के साथ किया गया उपवास कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए एक समान स्वास्थ्य उपाय नहीं माना जा सकता.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dal Cooking Tips: अगर देर से गलती है दाल तो इस तरीके से पकाएं, मिनटों में तैयार करने का आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Hacks To Soften Pulses Quickly: दाल भारतीय रसोई का ऐसा हिस्सा है जो लगभग हर घर में रोज बनती है. कभी सादी दाल-चावल, कभी तड़का दाल तो कभी खिचड़ी, हर रूप में इसका स्वाद पसंद किया जाता है. लेकिन कई बार जल्दी खाना बनाना हो और दाल गलने में ज्यादा समय ले ले, तो पूरा काम धीमा पड़ जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाकर दाल को कम समय में अच्छी तरह गलाया जा सकता है, बिना उसके स्वाद और पोषण से समझौता किए.
कैसे पकानी चाहिए दाल?
सबसे पहला तरीका है दाल को पकाने से पहले हल्का-सा सूखा भून लेना. एक पैन में दाल को 2 से 3 मिनट तक धीमी आंच पर चलाते हुए भूनें. इससे दाल जल्दी पकती है और उसका स्वाद भी पहले से ज्यादा अच्छा हो जाता है. ध्यान रखें कि दाल का रंग न बदले, सिर्फ हल्की खुशबू आने तक ही भूनें. अगर आपके पास समय कम है, तो सही दाल का चुनाव भी जरूरी है. साबुत दालों की तुलना में मसूर दाल, मूंग दाल और अरहर दाल जैसी छिलका उतरी दालें जल्दी गल जाती हैं. रोजमर्रा के खाने के लिए ये बेहतर विकल्प हो सकती हैं.
नमक को लेकर रखें ध्यान
दाल पकाते समय एक और बात का ध्यान रखें कि नमक शुरुआत में न डालें. कई कुकिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि नमक पहले डालने से दाल नरम होने में ज्यादा समय ले सकती है. इसलिए पहले दाल को अच्छी तरह पकने दें और आखिर में नमक मिलाएं. इससे दाल जल्दी भी गलती है और स्वाद भी बेहतर आता है.
इसका भी रखें ध्यान
इसी तरह टमाटर, इमली या नींबू जैसी खट्टी चीजें भी शुरुआत में डालने से बचें. इनमें मौजूद अम्लीय तत्व दाल को नरम होने में समय लगवा सकते हैं. बेहतर होगा कि दाल लगभग पक जाने के बाद ही टमाटर डालें और फिर तड़का तैयार करें. अगर दाल जल्दी तैयार करनी हो, तो एक चुटकी बेकिंग सोडा भी मदद कर सकता है. यह दाल को तेजी से नरम करने में सहायक माना जाता है. हालांकि इसकी मात्रा बहुत कम रखें, क्योंकि ज्यादा बेकिंग सोडा दाल के स्वाद और रंग को प्रभावित कर सकता है.&amp;nbsp;
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इन गलतियों से बचना चाहिए
दाल पकाते समय कुछ छोटी-छोटी गलतियां भी समय बढ़ा देती हैं. जैसे दाल को बिना धोए पकाना, जरूरत से ज्यादा पानी डाल देना या शुरुआत से ही बहुत धीमी आंच पर पकाना. दाल को पहले अच्छी तरह धोएं, जरूरत के अनुसार ही पानी डालें और शुरुआत में तेज उबाल आने दें. इसके बाद आंच कम करके पकाएं. दाल स्वादिष्ट बनाने के लिए आखिर में घी, जीरा, लहसुन, प्याज और हरी धनिया का तड़का जरूर लगाएं. इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ता है बल्कि साधारण दाल भी बेहद लाजवाब बन जाती है.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Monsoon Hair Care Tips: बारिश में सबसे ज्यादा टूटते हैं बाल, ऐसे करें इनकी देखभाल</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Hair Care Tips : बारिश का मौसम भले ही तेज गर्मी से राहत देता हो, लेकिन यही मौसम बालों के लिए कई परेशानियां भी साथ लेकर आता है. इस दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे स्कैल्प ज्यादा ऑयली हो सकती है. इसके कारण डैंड्रफ, खुजली, फंगल संक्रमण और बालों के झड़ने जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. कई लोग इस समस्या से बचने के लिए महंगे हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते हैं, लेकिन उनका असर हमेशा लंबे समय तक नहीं रहता है. ऐसे में बालों की सही देखभाल, घरेलू उपाय और बैलेंस डाइट अपनाकर इस मौसम में भी बालों को मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि बारिश में सबसे ज्यादा बाल क्यों टूटते हैं &amp;nbsp;और कैसे इनकी देखभाल करें.&amp;nbsp;
बारिश में सबसे ज्यादा टूटते हैं बाल?
मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी बालों की जड़ों को कमजोर कर सकती है. इसके अलावा लगातार गीलापन स्कैल्प पर फंगल संक्रमण और डैंड्रफ की समस्या बढ़ा सकता है. बारिश का पानी धूल और प्रदूषण के साथ मिलकर स्कैल्प पर जमा हो जाता है, जिससे बालों के पोर्स प्रभावित हो सकते हैं. वहीं गीले बाल जल्दी उलझते हैं और कंघी करने पर आसानी से टूटने लगते हैं. कम धूप मिलने की वजह से शरीर में विटामिन D का स्तर भी प्रभावित हो सकता है, जिसका असर बालों की सेहत पर पड़ता है.
कैसे बालों की देखभाल करें?
1. स्कैल्प को साफ और सूखा रखें - हफ्ते में 2 से 3 बार माइल्ड और सल्फेट-फ्री शैंपू से बाल धोएं. बालों को लंबे समय तक गीला न रहने दें और माइक्रोफाइबर तौलिये या ठंडी हवा वाले हेयर ड्रायर से धीरे-धीरे सुखाएं. अगर बारिश में भीग जाएं, तो घर पहुंचकर बाल जरूर धो लें.
2. हल्का कंडीशनर इस्तेमाल करें - मानसून में बाल रूखे और उलझे हुए लग सकते हैं. ऐसे में हल्के कंडीशनर का इस्तेमाल करें, लेकिन इसे स्कैल्प पर लगाने की बजाय केवल बालों की लंबाई और सिरों पर ही लगाएं.
3. नियमित तेल मालिश करें - बाल धोने से पहले नारियल तेल, बादाम तेल या रोजमेरी तेल से 5 से 10 मिनट तक हल्की मालिश करें. इससे स्कैल्प में ब्लड फ्लो बेहतर हो सकता है.
4. बहुत टाइट हेयर स्टाइल न बनाएं - बहुत कसकर पोनीटेल या चोटी बांधने से बालों पर दबाव पड़ता है और टूटने की संभावना बढ़ जाती है. कोशिश करें कि बालों को ढीला रखें.
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5. बैलेंस डाइट और ज्यादा पानी लें - प्रोटीन से भरपूर फूड प्रोडक्ट्स जैसे अंडे, दालें और ड्राई फ्रूट्स साथ ही विटामिन से भरपूर हरी सब्जियां और खट्टे फल अपनी डाइट में शामिल करें. साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें.
6. बारिश के पानी से बालों को बचाएं - अगर बारिश में बाहर निकलना पड़े, तो बालों को छाते या स्कार्फ से ढकें. बारिश का पानी बालों पर पड़ने के बाद घर आकर उन्हें साफ पानी से धो लें.
7. समय-समय पर ट्रिमिंग कराएं - हर 6 से 8 हफ्ते में बालों की ट्रिमिंग कराने से दोमुंहे बाल बढ़ने से रोके जा सकते हैं और टूटने की समस्या कम हो सकती है.
8. हीट स्टाइलिंग कम करें - बार-बार ब्लो ड्रायर, स्ट्रेटनर या कर्लिंग मशीन का इस्तेमाल करने से बाल कमजोर हो सकते हैं. जहां तक संभव हो, बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें.
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        <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 07:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kitchen Garden Care Tips: गर्मियों में कैसे करें अपने किचन गार्डन की देखरेख? इन उपायों से हमेशा हरा भरा रहेगा गार्डन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/kitchen-garden-care-tips-गर्मियों-में-कैसे-करें-अपने-किचन-गार्डन-की-देखरेख-इन-उपायों-से-हमेशा-हरा-भरा-रहेगा-गार्डन</link>
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        <description><![CDATA[ Kitchen Garden Care Tips : गर्मियों का मौसम सिर्फ लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि घर के किचन गार्डन के लिए भी बड़ी चुनौती लेकर आता है. तेज धूप, लू और बढ़ता तापमान पौधों की नमी तेजी से खत्म कर देता है. ऐसे में अगर समय रहते सही देखभाल न की जाए तो हरे-भरे पौधे भी सूख सकते हैं. हालांकि कुछ आसान उपाय अपनाकर गर्मी के मौसम में भी किचन गार्डन को स्वस्थ और हरा-भरा रखा जा सकता है. गर्मियों में पौधों की देखभाल करते समय पानी देने का समय, मिट्टी की नमी बनाए रखना, सही खाद का इस्तेमाल और पौधों को तेज धूप से बचाना सबसे जरूरी होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गर्मियों में अपने किचन गार्डन की देखरेख कैसे करें और किन उपायों से हमेशा गार्डन हरा भरा रहेगा.&amp;nbsp;
गर्मियों में अपने किचन गार्डन की देखरेख कैसे करें?
1. ग्रीन नेट लगाएं- तेज धूप सीधे पौधों पर पड़ने से उनकी पत्तियां झुलसने लगती हैं. ऐसे में पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उनके ऊपर ग्रीन नेट लगाना सबसे प्रभावी तरीका है. ग्रीन नेट सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकने में मदद करता है और आसपास का तापमान लगभग 5 से 6 डिग्री तक कम कर देता है. इससे पौधों को पर्याप्त रोशनी भी मिलती रहती है और लू के असर से बचे रहते हैं.&amp;nbsp;
2. सही समय पर पानी दें - गर्मियों में पौधों को कब और कैसे पानी दिया जाए, यह बहुत जरूरी होता है. दोपहर की तेज धूप में पानी देने से मिट्टी ज्यादा गर्म हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए हमेशा सुबह सूरज निकलने से पहले या शाम को सूर्यास्त के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए. इस समय दिया गया पानी मिट्टी में अच्छी तरह समा जाता है और पौधों को पूरे दिन नमी मिलती रहती है.&amp;nbsp;
3. मल्चिंग करें &amp;nbsp;- गमलों और क्यारियों की मिट्टी को जल्दी सूखने से बचाने के लिए मल्चिंग एक अच्छा उपाय माना जाता है. इसके लिए मिट्टी के ऊपर सूखी पत्तियां, धान की भूसी या कोकोपीट की 2 से 3 इंच मोटी परत बिछाई जा सकती है. यह परत मिट्टी को सीधे धूप से बचाती है, जिससे पानी जल्दी नहीं सूखता और पौधों को बार-बार पानी देने की जरूरत भी कम पड़ती है.&amp;nbsp;
4. रासायनिक खाद का यूज न करें - गर्मी में रासायनिक खादों का यूज नहीं करना चाहिए. यूरिया और डीएपी जैसी खादें गर्म प्रकृति की होती हैं, जो इस मौसम में पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. गर्मी की वजह से पौधे पहले ही कमजोर रहते हैं और ऐसे में ज्यादा मात्रा में रासायनिक खाद देने से पूरी तरह सूख सकते हैं. इस दौरान केवल ठंडी प्रकृति वाली जैविक खाद का ही सीमित मात्रा में यूज करनी चाहिए.&amp;nbsp;
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5. पानी का छिड़काव करें - सिर्फ जड़ों में पानी देना ही काफी नहीं होता है. गर्मियों में पौधों के आसपास का वातावरण भी ठंडा बनाए रखना जरूरी है. इसके लिए दिन में कम से कम दो बार स्प्रे बोतल या पाइप की मदद से पौधों की पत्तियों पर हल्का पानी छिड़कें. इससे पत्तियों का तापमान कम होता है और उन पर जमी धूल भी साफ हो जाती है, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर बनी रहती है.&amp;nbsp;
किन उपायों से हमेशा गार्डन हरा भरा रहेगा
1. अगर पौधे छोटे गमलों या प्लास्टिक के बर्तनों में लगे हैं, तो उन्हें तेज धूप और गर्म दीवारों से दूर रखना चाहिए. कंक्रीट की छत या बालकनी के पास रखे गमले बहुत जल्दी गर्म हो जाते हैं. ऐसे गमलों को किसी छायादार जगह पर एक साथ रख देना चाहिए. पौधों को एक जगह रखने से उनके आसपास नमी बनी रहती है और गर्मी से जल्दी प्रभावित नहीं होते हैं.
2. गर्मियों में किचन गार्डन की नियमित सफाई भी बहुत जरूरी होती है. पौधों की सूखी, पीली और खराब पत्तियों के साथ रोग वाली टहनियों को समय पर काट देना चाहिए.&amp;nbsp;
3. इसके अलावा गमलों में उगने वाले खरपतवार को भी हटाते रहना चाहिए. इससे पौधे की एनर्जी और पोषण बेकार नहीं होता और वह गर्मियों में भी स्वस्थ बना रहता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Kitchen, Garden, Care, Tips:, गर्मियों, में, कैसे, करें, अपने, किचन, गार्डन, की, देखरेख, इन, उपायों, से, हमेशा, हरा, भरा, रहेगा, गार्डन</media:keywords>
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        <title>भारत में हर 5 मिनट में आ रहा इस गंभीर बीमारी का एक केस, ये हैं बचाव के उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ Blood cancer: आजकल ब्लड कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. कई रिपोर्टों के अनुसार, भारत में हर 5 मिनट में ब्लड कैंसर का एक नया मामला सामने आ रहा है. यह एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर समय रहते इसका पता चल जाए, तो इलाज शुरू किया जा सकता है. इसलिए इसके लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर के पास जाना बहुत जरूरी है.
ब्लड कैंसर क्या है?
ब्लड कैंसर खून से जुड़ी एक बीमारी है. इसमें शरीर की कुछ खून की कोशिकाएं ठीक से काम नहीं करती हैं. इसका असर शरीर की ताकत और बीमारियों से लड़ने की क्षमता पर पड़ सकता है. यह बीमारी बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक किसी को भी हो सकती है.
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ये लक्षण दिखें तो देर न करें:
अगर बिना किसी वजह के कई दिनों तक बुखार रहे, हर समय थकान महसूस हो, बार-बार बीमारी हो, शरीर पर नीले निशान दिखने लगें, नाक या मसूड़ों से खून आने लगे या अचानक वजन कम होने लगे, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं. जरूरी नहीं कि ये लक्षण सिर्फ ब्लड कैंसर के हों, लेकिन इन्हें नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए.
बचाव के लिए क्या करें?
ब्लड कैंसर से पूरी तरह बचने का कोई पक्का तरीका नहीं है. लेकिन कुछ अच्छी आदतें अपनाकर इसका खतरा कम किया जा सकता है. तंबाकू और सिगरेट से दूर रहें. रोज ताजा और घर का बना खाना खाएं. हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें और शरीर को फिट रखें. अगर कोई परेशानी लंबे समय तक बनी रहे, तो खुद दवा खाने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें.
समय पर जांच से मिल सकती है मदद:
ब्लड कैंसर का इलाज जितना जल्दी शुरू होता है, उतना ही अच्छा माना जाता है. इसलिए अगर शरीर में लंबे समय तक कोई परेशानी दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें. समय पर जांच कराने से बीमारी का जल्दी पता चल सकता है और इलाज शुरू करने में आसानी होती है. छोटी-सी सावधानी आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Cyclospora Infection: तेजी से फैल रही यह खतरनाक बीमारी, दिन में 30 बार जाना पड़ रहा टॉयलेट, दवाएं फेल</title>
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        <description><![CDATA[ Cyclospora Symptoms And Treatment Guide: अमेरिका में इन दिनों साइक्लोस्पोरा नाम के एक सूक्ष्म परजीवी का इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है. हालात ऐसे हैं कि इंफेक्टेड एक महिला को दिन में करीब 30 बार टॉयलेट जाना पड़ा. लगातार पानी जैसे दस्त, डिहाइड्रेशन और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आने के बाद इस इंफेक्शन ने हेल्थ एक्सपर्ट की चिंता बढ़ा दी है. इस साल अमेरिका में साइक्लोस्पोरा के मामले 2019 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ चुके हैं.
कितनी खतरनाक है यह बीमारी?
हेपेटोलॉजिस्ट, क्लीनिकल साइंटिस्ट और पब्लिक हेल्थ रिसर्चर डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स के अनुसार, साइक्लोस्पोरा इंफेक्शन को अक्सर सामान्य फूड पॉइजनिंग या वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस समझ लिया जाता है. लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह बीमारी कुछ दिनों में खत्म नहीं होती. जहां सामान्य फूड पॉइजनिंग 1 से 3 दिन और वायरल संक्रमण 2 से 3 दिन में ठीक हो जाता है, वहीं साइक्लोस्पोरा कई हफ्तों तक परेशान कर सकता है और मरीज ठीक होने के बाद दोबारा भी बीमार पड़ सकता है.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
डॉ. फिलिप्स बताते हैं कि यह एक प्रोटोजोआ है, यानी एक सेल्स वाला सूक्ष्म जीव, जो शरीर के अंदर बढ़ता रहता है. इसके लक्षणों में तेज पानी जैसे दस्त, भूख कम लगना, तेजी से वजन घटना, पेट में दर्द और सूजन, गैस बनना तथा लंबे समय तक रहने वाली थकान शामिल हैं. हालांकि उल्टी इस बीमारी का प्रमुख लक्षण नहीं होती और मल में न तो खून आता है और न ही पस.
कैसे होता है इसका इलाज?
इलाज के मामले में भी यह इंफेक्शन अलग है. सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं जैसे मेट्रोनिडाजोल, एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लॉक्सासिन और नॉरफ्लॉक्सासिन अक्सर असर नहीं करतीं। वहीं को-ट्रिमोक्साजोल दवा देने पर मरीजों में तेजी से सुधार देखा जाता है. यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बिना खून वाले पानी जैसे दस्त बने रहें तो डॉक्टर साइक्लोस्पोरा की जांच कराने की सलाह देते हैं. इसकी पहचान सामान्य स्टूल टेस्ट से नहीं होती, बल्कि इसके लिए विशेष जांच करानी पड़ती है.
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सबसे पहले कब हुई थी इसकी पहचान?
साइक्लोस्पोरा कायेटानेन्सिस की पहचान इंसानों में पहली बार 1979 में हुई थी और 1994 में इसे आधिकारिक नाम मिला. 2023 में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन &amp;nbsp;की रिसर्च में सामने आया कि इसके कम से कम तीन अलग-अलग प्रकार इंसानों में इंफेक्शन फैला सकते हैं. यह परजीवी छोटी आंत की परत में छिपकर बढ़ता है, जिससे शरीर पोषक तत्व ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता और दस्त रुकने के बाद भी कमजोरी व वजन कम होने की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है.
भारत में क्या है स्थिति?
भारत में इस इंफेक्शन के मामलों पर ज्यादा डेटा उपलब्ध नहीं है. हालांकि आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉलरा एंड एंटेरिक डिजीज, कोलकाता की 2025 की स्टडी में पूर्वी भारत के करीब 2 प्रतिशत डायरिया मरीजों में यह इंफेक्शन मिला. जुलाई और अगस्त में यह आंकड़ा 7 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि 5 से 12 साल के बच्चों में इंफेक्शन सबसे ज्यादा पाया गया. यह परजीवी दूषित सिंचाई के पानी, कच्ची सब्जियों, पत्तेदार साग और फलों के जरिए फैलता है. इसकी बाहरी परत इतनी मजबूत होती है कि क्लोरीन भी इसे आसानी से खत्म नहीं कर पाती.
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        <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 11:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>How Long Does Cooking Oil Last: क्या रसोई में रखा तेल भी हो सकता है खराब, जानिए कितने दिनों तक इस्तेमाल करना सुरक्षित?</title>
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        <description><![CDATA[ Shelf Life Of Different Cooking Oils: रसोई में रखा खाने का तेल महीनों तक चलता है, इसलिए अक्सर लोग एक बार खरीदने के बाद उसे खत्म होने तक इस्तेमाल करते रहते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तेल भी खराब हो सकता है? अगर नहीं, तो यह जानना जरूरी है कि हर तरह के कुकिंग ऑयल की एक तय शेल्फ लाइफ होती है. सही तरीके से स्टोर न करने पर तेल जल्दी खराब हो सकता है, जिससे खाने का स्वाद ही नहीं, सेहत भी प्रभावित हो सकती है.
कब खराब होता है तेल?
होम एक्सपर्ट के अनुसार, तेल दूध या ब्रेड की तरह तुरंत खराब नहीं होता, लेकिन समय के साथ ऑक्सीजन, रोशनी और गर्मी के संपर्क में आने से इसमें ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इसी वजह से तेल बासी होने लगता है. एक्सपर्ट के अनुसार, कभी-कभार थोड़ा बासी तेल खाने से तुरंत कोई बड़ी परेशानी नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक ऐसे तेल का सेवन शरीर में फ्री रेडिकल्स बनने का कारण बन सकता है.
कब होने लगता है तेल खराब?
तेल कितने समय तक सुरक्षित रहता है, यह उसके प्रकार पर भी निर्भर करता है. रिफाइंड वेजिटेबल या कैनोला ऑयल बंद बोतल में करीब 1 से 2 साल तक ठीक रह सकता है, जबकि खोलने के बाद इसे 6 से 12 महीने के भीतर इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल बंद पैक में लगभग 24 महीने और खोलने के बाद 3 से 6 महीने तक अच्छा रहता है. नारियल का तेल करीब 2 साल तक चल सकता है. वहीं तिल का तेल खोलने के बाद लगभग 6 महीने और फ्लैक्ससीड ऑयल बंद पैक में 6 से 8 महीने तक सुरक्षित रहता है. फ्लैक्ससीड ऑयल को खोलने के बाद फ्रिज में रखना चाहिए. एवोकाडो ऑयल भी खोलने के बाद लगभग 6 महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
कैसे पता करें कि एक्सपायर हुआ या नहीं?
तेल खरीदते समय बोतल पर लिखी Best Before या Use By तारीख जरूर देखें. यह तारीख तेल की सबसे अच्छी गुणवत्ता का संकेत देती है, न कि यह कि उसी दिन के बाद तेल तुरंत असुरक्षित हो जाएगा. हालांकि, अगर तेल को सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया हो, तो वह एक्सपायरी डेट से पहले भी खराब हो सकता है. इसलिए बोतल खोलने की तारीख लिख लेना भी एक अच्छी आदत हो सकती है.
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सबसे पहले उसकी गंध पर ध्यान दें
अगर यह समझना हो कि तेल खराब हो चुका है या नहीं, तो सबसे पहले उसकी गंध पर ध्यान दें. खराब तेल से खट्टी, बासी या अजीब सी गंध आने लगती है. स्वाद कड़वा, खट्टा या साबुन जैसा महसूस हो सकता है. इसके अलावा तेल का रंग बदल जाना, तल में तलछट जमना या सामान्य से ज्यादा गाढ़ा हो जाना भी इसके खराब होने का संकेत हो सकता है. हालांकि, ऑलिव ऑयल को फ्रिज में रखने पर उसका हल्का धुंधला होना सामान्य माना जाता है और कमरे के तापमान पर वह फिर सामान्य हो जाता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Why Girls Fear Lizards: शेर&amp;चीते से बेखौफ रहने वाली लड़कियां छिपकली देखकर क्यों चीख पड़ती हैं? सामने आया असली राज</title>
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        <description><![CDATA[ Why Are People Afraid Of Lizards: अक्सर आपने देखा होगा कि कई लड़कियां कुत्ते, घोड़े या दूसरे बड़े जानवरों के साथ बिना किसी डर के रहती हैं, लेकिन जैसे ही दीवार पर छिपकली दिखाई देती है, वे घबरा जाती हैं. चीखना, अचानक पीछे हट जाना या तुरंत वहां से भाग जाना आम बात है. सवाल यह है कि आखिर एक छोटी और लगभग नुकसान न पहुंचाने वाली छिपकली से इतना डर क्यों लगता है?, जबकि वो तो हमें काटती भी नहीं हैं. &amp;nbsp;इसका जवाब सिर्फ आदत या वहम नहीं, बल्कि हमारे ब्रेन के सिस्टम में छिपा है.
क्यों होता है ऐसा?
एक्सपर्ट के अनुसार, जब दिमाग किसी चीज को खतरे के रूप में महसूस करता है, तो वह तुरंत प्रतिक्रिया देता है. इस प्रक्रिया में दिमाग का एक हिस्सा, जिसे एमिग्डाला &amp;nbsp;कहा जाता है, सक्रिय हो जाता है। यही हिस्सा भावनाओं को कंट्रोल करता है और शरीर में &#039;फाइट या फ्लाइट&#039; यानी मुकाबला करने या वहां से भागने की प्रतिक्रिया शुरू कर देता है. इसके बाद शरीर में एड्रेनालिन जैसे तनाव वाले हार्मोन निकलने लगते हैं, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, सांसें तेजी से चलने लगती हैं और पसीना आने लगता है. यही वजह है कि कई लोगों को छिपकली देखते ही घबराहट महसूस होने लगती है, जबकि वे जानते हैं कि उससे कोई वास्तविक खतरा नहीं है.&amp;nbsp;
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डर के पीछे होता है यह कारण?
चार्ल्स यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट के मुताबिक, हमारा दिमाग हर बार असली खतरे और केवल महसूस होने वाले खतरे में तुरंत फर्क नहीं कर पाता. अगर किसी चीज को लेकर एक बार डर की प्रतिक्रिया बन जाए, तो शरीर कई बार सोचने-समझने से पहले ही उसी तरह प्रतिक्रिया देने लगता है. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन भी मानता है कि फोबिया में व्यक्ति का डर वास्तविक खतरे की तुलना में कहीं ज्यादा होता है, लेकिन उसे यह डर पूरी तरह सच महसूस होता है.
क्यों पनपता होता है डर?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, छिपकली का डर कई वजहों से विकसित हो सकता है. कुछ लोगों में यह बचपन के किसी अनुभव से जुड़ा होता है, जबकि कई लोग अपने माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों को छिपकली से डरते हुए देखकर भी यही डर सीख लेते हैं. इसे स्पेसिफिक फोबिया कहा जाता है, जिसमें किसी खास चीज या स्थिति को लेकर जरूरत से ज्यादा डर महसूस होता है. हालांकि यह फोबिया सांप या मकड़ी के डर जितना आम नहीं है, लेकिन इसके बनने की प्रक्रिया लगभग वैसी ही होती है. स्टडी में यह भी सामने आया है कि इंसानों का दिमाग उन जीवों के प्रति ज्यादा सतर्क रहता है, जो अचानक तेजी से हरकत करते हैं. छिपकली का अचानक दौड़ना, उसकी अलग शारीरिक बनावट और बिना किसी चेतावनी के सामने आ जाना दिमाग में खतरे की भावना पैदा कर सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Why Are People Afraid of Dogs: क्या कुत्ता देखकर आपके भी छूट जाते हैं पसीने? जानिए इसके पीछे का असली कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Why Are People Afraid Of Dogs: कुत्तों को अक्सर इंसान का सबसे अच्छा दोस्त कहा जाता है, लेकिन इसके बावजूद कई लोग उन्हें देखते ही घबरा जाते हैं. कोई रास्ता बदल लेता है, कोई वहीं रुक जाता है तो कुछ लोग डर के कारण दूर भागने की कोशिश करते हैं. दिलचस्प बात यह है कि बिल्लियां भी दुनिया के सबसे लोकप्रिय पालतू जानवरों में शामिल हैं, लेकिन उनसे डरने वाले लोगों की संख्या कुत्तों के मुकाबले काफी कम होती है.
डॉ. विनोद शर्मा, डायरेक्टर और हेड वेटरिनेरियन के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह जानवर नहीं बल्कि लोगों की सोच, अनुभव और उनकी धारणा होती है. उनका कहना है कि कुत्ते आमतौर पर आकार में बड़े, ताकतवर और सार्वजनिक जगहों पर ज्यादा दिखाई देते हैं. ऐसे में लोगों को लगता है कि अगर कुत्ता हमला कर दे तो चोट ज्यादा गंभीर हो सकती है. यही वजह है कि लोगों के मन में कुत्तों को लेकर डर ज्यादा बैठ जाता है.
क्या होता है इसके पीछे कारण?
डॉ. शर्मा बताते हैं कि यह डर कई बार जन्मजात नहीं होता, बल्कि समय के साथ विकसित होता है. बचपन में कुत्ते के साथ कोई बुरा अनुभव, परिवार के लोगों से सुनी बातें या फिर कुत्तों के हमले से जुड़ी खबरें लोगों के मन में डर पैदा कर देती हैं. इसलिए ज्यादातर मामलों में यह डर कुत्तों के स्वभाव से ज्यादा लोगों की सोच और अनुभव से जुड़ा होता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुत्तों से डरने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कोई व्यक्ति जानवरों से नफरत करता है. कई बार लोग ऐसे लोगों को गलत तरीके से &#039;एनिमल हेटर&#039; कह देते हैं, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है. उनके अनुसार, कई लोगों में यह डर फोबिया का रूप भी ले सकता है.
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क्या होते हैं इसके संकेत?
डॉ. शर्मा बताते हैं कि फोबिया सिर्फ असहज महसूस करना नहीं है. इसमें व्यक्ति को तेज घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना, पसीना आना, कांपना या रोने जैसी शारीरिक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं. इतना ही नहीं, कई लोग इस डर की वजह से उन जगहों पर जाने से भी बचते हैं, जहां कुत्तों के मिलने की संभावना होती है. वहीं, जिन्हें सिर्फ कुत्ते पसंद नहीं होते, वे उनसे दूरी बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें घबराहट या पैनिक जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.
&amp;nbsp;कुत्तों के व्यवहार को भी गलत समझ लेते हैं
डॉ. शर्मा के अनुसार, लोग अक्सर कुत्तों के व्यवहार को भी गलत समझ लेते हैं. सबसे आम गलतफहमी पूंछ हिलाने को लेकर होती है. हर बार पूंछ हिलाने का मतलब यह नहीं होता कि कुत्ता खुश है. अगर उसकी पूंछ ऊपर की ओर कड़ी हो और तेजी से हिल रही हो, तो यह तनाव या उत्तेजना का संकेत भी हो सकता है. &amp;nbsp;इसी तरह कई लोग कुत्ते के बार-बार होंठ चाटने, जम्हाई लेने या नजरें फेरने को सामान्य व्यवहार समझते हैं, जबकि ये उसके तनाव या असहज महसूस करने के संकेत हो सकते हैं.
कैसे कम सकते हैं डर?
एक्सपर्ट मानना है कि कुत्तों के व्यवहार को सही तरीके से समझना लोगों के डर को काफी हद तक कम कर सकता है. इसके साथ ही, किसी अनजान कुत्ते के पास तभी जाना चाहिए जब उसका मालिक इसकी अनुमति दे. कुत्ते की निजी जगह का सम्मान करना और उसके व्यवहार को समझना सुरक्षित रहने का सबसे अच्छा तरीका है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>How to Clean LED Bulbs: क्या आपके घर के बल्ब की रोशनी भी हो गई है धीमी? नया खरीदने से पहले अपनाएं ये आसान हैक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean LED Bulbs For More Light: अगर आपको लग रहा है कि घर के बल्ब की रोशनी पहले जैसी नहीं रही और कमरा पहले की तुलना में ज्यादा अंधेरा नजर आने लगा है, तो हर बार नया बल्ब खरीदने की जरूरत नहीं होती. कई बार इसकी वजह सिर्फ बल्ब पर जमी धूल होती है. खासकर आजकल इस्तेमाल होने वाले एलईडी और सीएफएल बल्ब सालों तक चलते हैं, इसलिए उन पर धीरे-धीरे धूल की मोटी परत जमने लगती है, जिससे उनकी रोशनी कम दिखाई देने लगती है.
पहले के समय में इस्तेमाल होने वाले इनकैंडेसेंट बल्ब करीब 1,000 घंटे तक ही चलते थे. ऐसे में वे खराब होकर बदल दिए जाते थे और धूल जमने का ज्यादा मौका नहीं मिलता था। लेकिन आज के एलईडी बल्ब करीब 25,000 घंटे यानी लगभग 25 साल तक चल सकते हैं. इतने लंबे समय में उन पर धूल जमा होना बिल्कुल सामान्य है.
कैसे कर सकते हैं सफाई?
एक्सपर्ट के अनुसार, धूल से ढके बल्ब साफ बल्ब की तुलना में करीब 50 प्रतिशत तक कम रोशनी दे सकते हैं. खास बात यह है कि बिजली की खपत उतनी ही रहती है, लेकिन धूल की वजह से रोशनी कम महसूस होती ह.। इसलिए अगर घर के किसी कमरे में अचानक रोशनी कम लगने लगे, तो पहले बल्ब की सफाई करके जरूर देखें. बल्ब साफ करने से पहले सबसे जरूरी बात यह है कि जिस कमरे का बल्ब साफ करना है, वहां का स्विच या लैंप बंद कर दें. अगर बल्ब कुछ देर पहले जल रहा था, तो उसे पूरी तरह ठंडा होने दें. हालांकि एलईडी बल्ब पुराने बल्बों की तुलना में कम गर्म होते हैं, फिर भी उन्हें ठंडा होने के बाद ही छूना सुरक्षित रहता है.&amp;nbsp;
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बल्ब की पूरी सतह को हल्के हाथों से साफ करें
अब एक साफ और सूखा माइक्रोफाइबर कपड़ा, डस्टिंग ग्लव या हैंड डस्टर लें और बल्ब की पूरी सतह को हल्के हाथों से साफ करें. इससे धूल आसानी से हट जाएगी और बल्ब की रोशनी पहले से बेहतर नजर आने लगेगी. अगर बल्ब किचन में लगा है और उस पर धूल के साथ चिकनाई भी जम गई है, तो पहले उसे होल्डर से निकाल लें. इसके बाद हल्के गीले कपड़े से सिर्फ उस हिस्से को साफ करें, जहां से रोशनी निकलती है. सफाई के बाद बल्ब को पूरी तरह सूखने दें और तभी दोबारा फिट करें.
कम से कम दो बार जरूर साफ करें
अक्सर लोग घर की सफाई करते समय सिर्फ फर्नीचर और दूसरी सतहों की धूल हटाते हैं, लेकिन बल्बों की सफाई भूल जाते हैं. कोशिश करें कि घर के सभी बल्ब, यहां तक कि ऊंचाई पर लगे बल्ब भी, साल में कम से कम दो बार जरूर साफ करें. इससे उनकी रोशनी बेहतर बनी रहती है और बिना अतिरिक्त बिजली खर्च किए घर ज्यादा रोशन दिखाई देता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cancer Treatment: क्या पपीते की पत्तियों से हो सकता है कैंसर का इलाज? नई रिसर्च पर छिड़ी बहस</title>
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        <description><![CDATA[ Papaya Leaf Extract Cancer Chemotherapy Study: क्या पपीते की पत्तियों से कैंसर का इलाज संभव है? हाल ही में आई एक रिसर्च के बाद यह सवाल मेडिकल जगत में चर्चा का विषय बन गया है. देश के प्रतिष्ठित टाटा मेमोरियल सेंटर की एक क्लीनिकल ट्रायल में दावा किया गया है कि कैरिका पपाया लीफ एक्सट्रैक्ट कीमोथेरेपी करा रहे मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से रिकवर करने में मदद कर सकता है. हालांकि इस स्टडी को लेकर अब विवाद भी शुरू हो गया है.
यह रिसर्च जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी ग्लोबल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुई थी. लेकिन बाद में केरल के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स की शिकायत के बाद जर्नल ने इस पेपर पर एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न जारी कर दिया. इसका मतलब यह नहीं है कि रिसर्च को गलत साबित कर दिया गया है, बल्कि जर्नल फिलहाल उठाए गए सवालों की जांच कर रहा है.&amp;nbsp;
कीमोथेरेपी टालने या दवा की डोज कम
रिसर्च में करीब 200 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी कीमोथेरेपी के दौरान प्लेटलेट्स काफी कम हो गए थे. रिसर्चर के मुताबिक, जिन मरीजों को CPLE दिया गया, उनके प्लेटलेट्स प्लेसीबो ग्रुप की तुलना में चौथे दिन से ही तेजी से बढ़ने लग.। इतना ही नहीं, इन मरीजों में कीमोथेरेपी टालने या दवा की डोज कम करने की जरूरत भी काफी कम पड़ी. स्टडी के मुताबिक, सीपीईल लेने वाले केवल 25 प्रतिशत मरीजों को इलाज में देरी या डोज कम करनी पड़ी, जबकि प्लेसीबो ग्रुप में यह आंकड़ा 43 प्रतिशत था. रिसर्च के दौरान किसी गंभीर साइड इफेक्ट की भी जानकारी नहीं मिली. करीब 10 दिन का यह सपोर्टिव ट्रीटमेंट लगभग 300 रुपये में पूरा हो सकता है.
&amp;nbsp;स्टडी में गड़बड़ी की आशंका
हा डॉ. साइरिएक एबी फिलिप्स ने सोशल मीडिया पर इस रिसर्च पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर मामला बताया. उनका कहना है कि स्टडी में गड़बड़ी की आशंका है. वहीं टाटा मेमोरियल सेंटर के साइंटिस्ट का कहना है कि एक्सप्रेशन ऑफ कंसर्न केवल जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है, इसे किसी तरह की साइंटफिक गड़बड़ी या धोखाधड़ी का सबूत नहीं माना जा सकता. स्टडी के को-राइटर और सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कुमार प्रभाष ने कहा कि यह रिसर्च पूरी तरह साइंटफिक तरीके से की गई है और इंटरनेशनल पीयर रिव्यू के बाद प्रकाशित हुई. उन्होंने बताया कि 2025 में इस स्टडी को अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी की सालाना बैठक में भी पेश किया गया था. उनका कहना है कि अगर नतीजे निगेटिव भी आते तो उन्हें भी प्रकाशित किया जाता.
&amp;nbsp;

The much celebrated Papaya leaf extract for low platelet count in chemotherapy patients has now received an Expression of Concern from the Journal due to doubts regarding fraud after I notified the Journal.https://t.co/IdFzVzWjX1This is a black spot on Tata Memorial Cancer&amp;hellip; pic.twitter.com/oVTeg2HTvb
&amp;mdash; TheLiverDoc&amp;trade; (@theliverdoc) July 15, 2026



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क्या पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज?
वहीं, प्रमुख रिसर्चर डॉ. विकास ओस्टवाल ने कहा कि उनकी टीम अपने सभी निष्कर्षों पर कायम है. जर्नल ने अब तक रिसर्च टीम से कोई वैज्ञानिक सवाल नहीं पूछा है और यदि कोई सवाल आता है तो उसका जवाब वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा. टीएमसी के एक अन्य ऑन्कोलॉजिस्ट ने भी कहा कि किसी स्टडी पर सवाल उठाना गलत नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला सोशल मीडिया नहीं बल्कि साइंटफिक जांच और सबूतों के आधार पर होना चाहिए. साइंटिस्ट का कहना है कि फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि पपीते की पत्तियां कैंसर का इलाज हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 23:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Omelette Recipe: कैसे बनता है दुनिया का सबसे स्वादिष्ट ऑमलेट? यहां जान लीजिए आसान रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Omelette Recipe: सुबह-सुबह गर्मागर्म, फूला हुआ और मक्खन जैसा मुलायम ऑमलेट प्लेट में आ जाए, तो नाश्ते का मजा ही अलग होता है. लेकिन कई बार घर पर बनाया गया ऑमलेट होटल जैसा स्वाद और टेक्सचर नहीं दे पाता. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. सिर्फ एक छोटी सी कुकिंग ट्रिक और सही तरीके से फेंटे गए अंडे आपके साधारण ऑमलेट को भी बेहद स्वादिष्ट, हल्का और बना सकते हैं. खास बात यह है कि इसके लिए किसी महंगे इंग्रीडिएंट की जरूरत नहीं पड़ेगी. आइए जानते हैं आसान रेसिपी, जिससे हर बार आपका ऑमलेट इतना लाजवाब बनेगा कि घर वाले भी इसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाएंगे.
इन चीजों की होगी जरूरत
2 अंडे, 2 चम्मच दूध, 1 बारीक कटा प्याज, 1 छोटा टमाटर, 1 हरी मिर्च, थोड़ा हरा धनिया, स्वादानुसार नमक, काली मिर्च और 1 चम्मच मक्खन या तेल.
ऑमलेट को मुलायम और स्वादिष्ट बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले अंडों को एक बाउल में फोड़कर अच्छी तरह फेंट लें. अब इसमें 2 चम्मच दूध डालकर दोबारा फेंटें. इसके बाद प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया, नमक और काली मिर्च मिलाएं. मिश्रण को अच्छी तरह फेंटने से उसमें हवा शामिल होती है, जिससे ऑमलेट की बनावट ज्यादा हल्की और फूली हुई हो सकती है.
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अब ऐसे करें पकाने की तैयारी
नॉन-स्टिक पैन या तवे को मध्यम आंच पर गर्म करें. उस पर थोड़ा मक्खन या तेल डालें. अब तैयार मिश्रण को धीरे-धीरे पैन पर फैलाएं. तेज आंच की बजाय मध्यम आंच पर पकाएं, ताकि ऑमलेट बाहर से जले नहीं और अंदर तक समान रूप से पक जाए.
दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें
जब नीचे की सतह हल्की सुनहरी दिखाई देने लगे, तब सावधानी से ऑमलेट को पलट दें. दूसरी तरफ भी 1 से 2 मिनट तक पकाएं. तैयार ऑमलेट को ब्रेड, टोस्ट, पराठे या अपनी पसंद की चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें.
स्वाद बढ़ाने के लिए अपनाएं ये टिप्स
अगर आप ऑमलेट को और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो ऊपर से थोड़ा चीज, ओरिगैनो, काली मिर्च या ताजा हरा धनिया डाल सकते हैं. ध्यान रखें कि दूध की मात्रा ज्यादा न हो, क्योंकि अधिक दूध से ऑमलेट का मिश्रण पतला हो सकता है. आमतौर पर 2 अंडों के लिए 2 चम्मच दूध पर्याप्त माना जाता है.

स्वाद के साथ पोषण भीऑमलेट प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है, जो शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. अगर आप संतुलित नाश्ता चाहते हैं, तो इसे साबुत अनाज की ब्रेड और ताजी सब्जियों के साथ परोस सकते हैं.

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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gas After Eating: खाने के तुरंत बाद होने लगती है गैस? ये पांच गलतियां बार बार कर रहे हैं आप&amp; आज ही कर लें सुधार</title>
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        <description><![CDATA[ Gas After Eating: खाने के तुरंत बाद होने लगती है गैस? ये पांच गलतियां बार बार कर रहे हैं आप- आज ही कर लें सुधार ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Womens Health: महिलाओं को रोजाना क्यों नहीं छोड़ना चाहिए नाश्ता? डॉक्टर ने बताए 5 बड़े नुकसान </title>
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        <description><![CDATA[ Womens Health:&amp;nbsp;सुबह का नाश्ता दिन की शुरुआत का सबसे अहम भोजन माना जाता है, लेकिन आज की व्यस्त लाइफस्टाइल में कई महिलाएं रोजाना नाश्ता छोड़ देती है. कभी समय की कमी तो कभी वजन कम करने की कोशिश में यह आदत आम हो जाती है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना एक लंबे समय तक नियमित रूप से नाश्ता नहीं किया जाए और शरीर को जरूरी पोषण न मिले तो इसका असर केवल ऊर्जा पर ही नहीं, बल्कि मेटाबॉलिज्म हार्मोनल हेल्थ और ओवरऑल हेल्थ पर भी पढ़ सकता है.&amp;nbsp;
ब्लड शुगर में हो सकता है उतार-चढ़ाव&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार महिलाओं के लिए सुबह का खाना ब्लड शुगर को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. लंबे समय तक खाली पेट रहने से ब्लड शुगर का स्तर अस्थिर हो जाता है. इसका असर यह होता है कि दिन में मीठा या जंक फूड खाने की इच्छा बढ़ सकती है. लगातार ऐसे होने पर वजन बढ़ने के साथ-साथ भविष्य में डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
हार्मोन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती है&amp;nbsp;
डॉक्टर का मानना है कि जिन महिलाओं को पहले से पीसीओएस, थायराइड या अनियमित पीरियड्स जैसी समस्याएं हैं. उनके लिए नियमित समय पर भोजन करना और भी जरूरी हो जाता है. बार-बार नाश्ता छोड़ने से शरीर पर अतिरिक्त तनाव पड़ सकता है. जिससे हार्मोनल असंतुलन बढ़ने और पहले से मौजूद समस्याओं के गंभीर होने की आशंका रहती है.&amp;nbsp;
जरूरी पोषक तत्वों की हो सकती है कमी&amp;nbsp;
नाश्ता केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि दिनभर के जरूरी पोषक तत्वों की शुरुआत भी होता है. सुबह के भोजन में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और कई जरूरी विटामिन शामिल किए जाते जा सकते हैं. अगर कोई महिला नियमित रूप से नाश्ता छोड़ती है और बाकी समय भी संतुलित भोजन नहीं करती तो शरीर में पोषण की कमी हो सकती है.&amp;nbsp;
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भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी होते हैं प्रभावित&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार सुबह का भोजन छोड़ने से शरीर के वे हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं, जो भूख को कंट्रोल करते हैं. इसका परिणाम यह हो सकता है कि दिन के बाद के समय में ज्यादा भूख लगे और व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोजन कर लें. इससे वजन नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है.
हर किसी के लिए एक जैसा नियम नहीं&amp;nbsp;
डॉक्टर्स भी कहते हैं कि हर व्यक्ति की फिजिकल जरूरत अलग-अलग होती है. कुछ महिलाएं इंटरमीडिएट फास्टिंग जैसे तरीके का पालन करती है और फिर भी पूरे दिन में आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त कर लेती है. इसलिए सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिले.
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>COVID Alert in Andra Pradesh:  आंध्र प्रदेश में 4 कोरोना मरीजों में मिला खतरनाक ओमिक्रॉन RF.5 वैरिएंट, जानें यह कितना खतरनाक?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/covid-alert-in-andra-pradesh-आंध्र-प्रदेश-में-4-कोरोना-मरीजों-में-मिला-खतरनाक-ओमिक्रॉन-rf5-वैरिएंट-जानें-यह-कितना-खतरनाक</link>
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        <description><![CDATA[ COVID Alert in Andra Pradesh: आंध्र प्रदेश से कोरोना को लेकर एक नई खबर सामने आई है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने बताया है कि आंध्र प्रदेश में ओमिक्रॉन के RF.5 वैरिएंट का पता चला है. कडप्पा जिले में कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए चार मरीजों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पुणे की एक वायरोलॉजी लैब भेजे गए थे, और अब वहां से आई रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि चारों सैंपल में ओमिक्रॉन के RF.5 सब-लीनिएज पाई गई है. मंत्री ने शनिवार रात जारी अपने आधिकारिक प्रेस बयान में इसकी जानकारी दी और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ फोन पर इस मामले पर चर्चा भी की. आइए जानते है क्या है पूरा मामला.&amp;nbsp;
क्या है RF.5 वैरिएंट और यह कहां से आया?
RF.5, कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट का ही एक सब-लीनिएज यानी उसकी एक शाखा है.&amp;nbsp; दुनियाभर में ओमिक्रॉन के ऐसे कई सब-लीनिएज पहचाने जा चुके हैं, और RF.5 भी उन्हीं में से एक है. मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर विष्णुवर्धन ने बताया कि यह वैरिएंट स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ है और इसकी शुरूआत JN.1 वैरिएंट से हुई है, जो LF.7 से होते हुए PY.1.1.1 शाखा तक पहुंचा और फिर उससे RF.5 बना. अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कोई दो वैरिएंट के मिलने से बना वैरिएंट नहीं है. बल्कि यह वैरिएंट कोरोना वायरस पर नजर रखने वाली रूटीन जीनोमिक सर्विलांस प्रक्रिया के तहत ही पकड़ में आया है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः&amp;nbsp; Quit Smoking: ये 4 तरीके अपना लिए तो तुरंत छूट जाएगी सिगरेट, गलती से भी नहीं लगाएंगे हाथ
क्या यह वैरिएंट खतरनाक है और इसके लक्षण क्या हैं?
अभी तक मिले वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर विष्णुवर्धन ने कहा है कि ऐसा कोई संकेत नहीं है कि RF.5 बाकीओमिक्रॉन वैरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक है. उन्होंने लोगों से कहा है कि बस सतर्क रहने की जरूरत है. RF.5 के लक्षण भी बाकी ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट्स जैसे ही हैं, जिनमें गले में खराश, खांसी, बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द शामिल हैं. यानी अगर आपको ये लक्षण महसूस हों, तो यह जरूरी नहीं कि यह कोई नया या बहुत गंभीर मामला हो, लेकिन जांच करवाना और डॉक्टर से सलाह लेना फिर भी जरूरी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 07:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Raksha Bandhan Blouse Designs 2026: रक्षाबंधन पर पहनने के लिए सिलवाएं ये पांच डिजाइनर ब्लाउज, परिवार में अलग ही दिखेगी आपकी चमक</title>
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        <description><![CDATA[ Raksha Bandhan Blouse Designs 2026: रक्षाबंधन पर पहनने के लिए सिलवाएं ये पांच डिजाइनर ब्लाउज, परिवार में अलग ही दिखेगी आपकी चमक ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Raksha, Bandhan, Blouse, Designs, 2026:, रक्षाबंधन, पर, पहनने, के, लिए, सिलवाएं, ये, पांच, डिजाइनर, ब्लाउज, परिवार, में, अलग, ही, दिखेगी, आपकी, चमक</media:keywords>
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        <title>Mopping Tips: पोछा लगाने के बाद भी नहीं महकता घर? पानी की बाल्टी में डालें ये चीज, आ जाएगी खुशबू</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep House Smelling Fresh After Mopping: घर की सफाई करने के बाद हर किसी की यही इच्छा होती है कि कमरों में लंबे समय तक ताजगी भरी खुशबू बनी रहे. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि पोछा लगाने के कुछ ही मिनट बाद महक गायब हो जाती है और घर पहले जैसा ही महसूस होने लगता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो महंगे रूम फ्रेशनर या केमिकल क्लीनर खरीदने की जरूरत नहीं है. एक छोटा-सा घरेलू तरीका आपके पूरे घर को देर तक महका सकता है.
इस आसान उपाय के लिए आपको सिर्फ एसेंशियल ऑयल की जरूरत होगी. पोछा लगाने के लिए जब भी गुनगुने पानी की बाल्टी तैयार करें, उसमें अपनी पसंद के एसेंशियल ऑयल की केवल 2 से 3 बूंदें मिला दें. इसके बाद उसी पानी से पूरे घर में पोछा लगाएं. फर्श सूखने के बाद भी हल्की और प्राकृतिक खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है.
गुनगुने पानी का करें इस्तेमाल
अगर आप ठंडे पानी की जगह हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल करते हैं तो एसेंशियल ऑयल की खुशबू ज्यादा अच्छी तरह फैलती है. गर्माहट की वजह से इसकी महक पूरे कमरे में आसानी से पहुंचती है और फर्श सूखने के बाद भी देर तक महसूस होती रहती है.
कौन-सा एसेंशियल ऑयल है बेहतर?
घर को फ्रेश महक देने के लिए लैवेंडर, लेमनग्रास, ऑरेंज और यूकेलिप्टस एसेंशियल ऑयल अच्छे विकल्प माने जाते हैं. इनकी खुशबू तेज होने के बजाय हल्की और सुकून देने वाली होती है. ध्यान रखें कि ज्यादा मात्रा में ऑयल डालने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसकी कुछ बूंदें ही पूरे घर के लिए काफी होती हैं.
पोछा ज्यादा गीला न रखें
अगर पोछा बहुत ज्यादा भीगा होगा तो पानी जल्दी फैल जाएगा और एसेंशियल ऑयल का असर कम हो सकता है. इसलिए पोछे को हल्का निचोड़कर इस्तेमाल करें. इससे खुशबू फर्श पर समान रूप से फैलती है और ज्यादा समय तक बनी रहती है.
बाल्टी की सफाई भी है जरूरी
कई बार पोछा लगाने वाली बाल्टी में पहले से जमी गंदगी या बदबू भी खुशबू को खराब कर देती है. इसलिए हर बार इस्तेमाल से पहले बाल्टी को अच्छी तरह धो लें. इससे एसेंशियल ऑयल की असली खुशबू बनी रहती है.
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सफाई के बाद थोड़ी देर खिड़कियां खोलें
पोछा लगाने के बाद कुछ मिनट के लिए घर की खिड़कियां खोल दें. इससे ताजी हवा के साथ खुशबू पूरे घर में आसानी से फैल जाती है और कमरों में एक अलग ही फ्रेशनेस महसूस होती है.
इस एक चीज से और बढ़ेगा असर
अगर फर्श से पुरानी बदबू पूरी तरह हटानी है तो पोछे के पानी में एक छोटा चम्मच सफेद सिरका भी मिला सकते हैं. यह फर्श पर मौजूद पुराने दुर्गंध वाले कणों को हटाने में मदद करता है, जिससे एसेंशियल ऑयल की खुशबू और ज्यादा साफ व लंबे समय तक टिकती है. चाहें तो एक-दो बूंद माइल्ड लिक्विड सोप भी मिला सकते हैं, इससे ऑयल पानी में अच्छी तरह घुल जाता है.

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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>White&amp;bellied Redstart: दक्षिण&amp;पूर्व एशिया से किन्नौर पहुंचा मौसमी मेहमान, रकछम&amp;छितकुल बना पसंदीदा प्रजनन स्थल</title>
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        <description><![CDATA[ हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले स्थित रकछम&amp;ndash;छितकुल वन्यजीव अभयारण्य इन दिनों दुर्लभ और खूबसूरत हिमालयी पक्षी व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट का पसंदीदा प्रजनन स्थल बना हुआ है. मई से सितंबर तक यह शर्मीला गीत-पक्षी यहां की ऊेचाई वाली झाड़ियों में अपना घोंसला बनाता है और प्रजनन करता है. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह पक्षी हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक है.
हिमाचल क्यों आता है यह पक्षी?
व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट का वैज्ञानिक नाम Luscinia phaenicuroides है. हर साल बर्फ पिघलने के बाद रकछम&amp;ndash;छितकुल अभयारण्य की ऊंचाई वाली झाड़ियों में लौट आता है. कश्मल, जूनिपर और बुरांश की घनी झाड़ियों के बीच यह पक्षी अपना प्रजनन काल बिताता है. इसकी मधुर सीटी और तीखी &#039;टुक-टुक&#039; पुकार इसकी मौजूदगी का एहसास कराती है, जबकि यह खुद झाड़ियों में छिपा रहता है.
कैसा नजर आता है यह पक्षी?
विशेषज्ञों के अनुसार, नर पक्षी स्लेटी-नीले रंग, सफेद पेट और लाल-भूरी पूंछ के कारण बेहद आकर्षक दिखाई देता है, जबकि मादा का भूरा रंग उसे प्राकृतिक परिवेश में छिपे रहने में मदद करता है. यह पक्षी 2800 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर घोंसला बनाता है और आमतौर पर दो से तीन नीले या नीले-हरे अंडे देता है.
कई जगहों पर हुई पक्षी की मौजूदगी की पुष्टि
बर्ड काउंट इंडिया के क्षेत्रीय समन्वयक एवं वन अधिकारी संतोष कुमार ठाकुर के अनुसार, पिछले दो प्रजनन कालों में अभयारण्य के सात से आठ स्थानों पर इस पक्षी के प्रजनन की पुष्टि हुई है. उनका कहना है कि व्यवस्थित सर्वेक्षण किए जाएं तो ऐसे कई और प्रजनन स्थल सामने आ सकते हैं. प्रजनन काल में यह पक्षी मुख्य रूप से कीड़ों के लार्वा पर निर्भर रहता है.
कैसी है इस पक्षी की आदत?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मल और जूनिपर जैसी घनी झाड़ियां इस पक्षी को घोंसला बनाने और शिकारियों से बचाव के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करती हैं. सर्दियों के आगमन पर यह पक्षी निचली और अपेक्षाकृत गर्म घाटियों की ओर प्रवास कर जाता है. विशेषज्ञों ने इस प्रजाति के संरक्षण के लिए लगातार शोध, निगरानी और आवास संरक्षण को बेहद जरूरी बताया है.
उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने कहा कि जिले की समृद्ध प्राकृतिक विरासत इसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि रकछम&amp;ndash;छितकुल अभयारण्य में बढ़ते प्रजनन रिकॉर्ड हिमालयी जैव-विविधता संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Prevent Milk From Boiling Over: दूध उबलकर हर बार गैस पर गिर जाता है? अपनाएं ये आसान ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ Prevent Milk From Boiling Over: वैसे तो भारतीय घरों में दूध का गिरना शुभ माना जाता है, लेकिन यह बात तभी अच्छी लगती है जब कोई शुभ काम करना हो. रोजमर्रा की जिंदगी में ज्यादातर हर घर में सुबह और शाम दूध को उबालना एक आम काम है. ऐसे में कई लोगों की शिकायत होती है कि कुछ पल के लिए दूध से नजर हटती है, तभी वह उबलकर गिर जाता है. इससे दूध की बर्बादी के साथ-साथ गैस चूल्हा भी गंदा हो जाता है. इसे साफ करने में समय के साथ-साथ मेहनत भी उतनी ही लगती है. यह समस्या लगभग हर घर में देखने को मिलती है. ऐसे में आपको जानकर राहत मिलेगी कि आप कुछ आसान तरीकों से इस झंझट से पूरी तरह छुटकारा पा सकते हैं. यानी दूध को बार-बार गैस चूल्हे पर गिरने से बचा सकते हैं. आइए जानते हैं क्या हैं वे अनोखे तरीके.
दूध उफनने से बचाने की आसान ट्रिक
आपको जानकर हैरानी होगी कि आप केवल घी और मक्खन की मदद से दूध को गिरने से बचा सकते हैं. जी हां, केवल घी और मक्खन की मदद से. इसमें बस आपको घी या मक्खन को बर्तन के किनारों पर लगाना है. मतलब दूध को उबालने से पहले ही बर्तन के ऊपरी किनारों पर घी की पतली परत लगा दें. ऐसा करने से जब दूध उबलकर ऊपर आता है, तब घी उसके उबाल और झाग को कम कर देता है और दूध पतीले के अंदर ही रहता है.
इसके अलावा दूसरे तरीके के रूप में आप दूध उबालने से पहले एक लकड़ी का चम्मच या फिर कलछी आड़ी करके रख सकते हैं. इससे झाग एक जगह इकट्ठा नहीं होता और दूध की उबलने की रफ्तार भी कम हो जाती है. तीसरा और सबसे आसान उपाय है दूध को तेज आंच पर उबालने के बजाय मध्यम आंच पर उबालना. आंच को नियंत्रित रखने से दूध की उबाल भी नियंत्रित रहती है.
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ध्यान रखने वाली अन्य बातें
इन ट्रिक्स के साथ-साथ कुछ छोटी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है. दूध उबालते समय बर्तन का चौड़ा मुंह होना बेहतर रहता है, क्योंकि इससे झाग फैलने की जगह मिल जाती है और वह ऊपर से बाहर नहीं गिरता. साथ ही जैसे ही दूध में उबाल आने वाला हो, आंच थोड़ी कम कर दें. इससे दूध धीरे-धीरे उबलता है और उफनने का खतरा कम हो जाता है. इसके अलावा दूध को गिरने से बचाने का सबसे आसान तरीका है कि बर्तन के पास खड़े होकर दूध उबालें, क्योंकि पहला उबाल आते ही अगर आंच तुरंत कम कर दी जाए तो दूध बाहर गिरने से पहले ही रुक जाता है.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Normal Fever vs Dengue: हर बुखार डेंगू नहीं होता... मानसून सीजन में ऐसे पहचानें कौन सा फीवर नॉर्मल और कौन सा नहीं?</title>
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        <description><![CDATA[ Normal Fever vs Dengue: चिलचिलाती धूप, पसीने और गर्मी के बाद देश में हर तरफ मानसून का आगमन हो चुका है. जितना ही यह पल गर्मी से राहत दे रहा है, उतना ही अपने साथ कई बीमारियां भी लेकर आ रहा है. बारिश का मौसम शुरू होते ही ज्यादातर घरों में बुखार के मामले बढ़ जाते हैं. बरसात के इस सीज में&amp;nbsp; मौसमी बुखार होना एक आम बात होती है. कुछ दवाइयों और थोड़ी सावधानी बरतने से यह ठीक भी हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मौसम में बुखार होने का मतलब यह नहीं है कि आपको केवल मौसमी बुखार हुआ है.
कई बार यह किसी गंभीर बीमारी की तरफ भी इशारा करता है, जैसे डेंगू या मलेरिया के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं, जिन्हें पहचानना मुश्किल होता है. ऐसे में अगर आपको इस बात की जानकारी होगी कि आपको किस तरह का बुखार हुआ है ताे समय से इलाज शुरू किया जा सकता है.&amp;nbsp;
नॉर्मल बुखार के लक्षण
अगर बरसात में होने वाले मौसमी बुखार की बात करें तो इसके शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य होते हैं, जैसे बदन में दर्द, हल्की खांसी, गले में खराश और थकान जैसे लक्षण. इसमें केवल सही तरह से आराम, कुछ दवाइयों और नियमित देखभाल से बुखार अपने आप 2 से 3 दिन में कम होने लगता है. साथ ही इस दौरान मरीज को भूख कम लगती है. इन लक्षणों के अलावा मौसमी बुखार में और कोई भी खास लक्षण देखने को नहीं मिलते हैं. केवल ध्यान रखना है तो बस अच्छे खानपान का, बाहर का खाना खाने से बचें, बरसात में न भीगें, नियमित रूप से पानी पीते रहें और बुखार के दौरान हल्का-फुल्का खाना खाते रहें, वरना कमजोरी ज्यादा हो सकती है.
यह भी पढ़ेंः Quit Smoking: ये 4 तरीके अपना लिए तो तुरंत छूट जाएगी सिगरेट, गलती से भी नहीं लगाएंगे हाथ
डेंगू के लक्षण कैसे पहचानें
इसके शुरुआती लक्षण में ही सामान्य बुखार से कहीं ज्यादा तेज बुखार होता है और यह अचानक बहुत ज्यादा तापमान के साथ शुरू होता है. इसमें शरीर में दर्द के साथ-साथ आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में काफी ज्यादा दर्द होता है. इसको पहचानने का सबसे आसान तरीका है कि कई मामलों में इस बीमारी के दौरान आपके शरीर पर छोटे-छोटे लाल रंग के दाने दिखने लगते हैं. साथ ही मसूड़ों या नाक से खून आना, बहुत ज्यादा कमजोरी और उल्टी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. अगर बुखार तीन दिन से ज्यादा रहे, तापमान बार-बार बहुत ज्यादा बढ़े या शरीर पर दाने दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए और खून की जांच में प्लेटलेट्स की गिनती जरूर करानी चाहिए.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 15:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Easy Garlic Peeling Trick : इस ट्रिक से 30 सेकेंड में छिल जाएगा पूरा लहसुन, नहीं पड़ेगी चाकू की जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Garlic Peeling Trick : खाना बनाते समय लहसुन की छोटी-छोटी कलियों का छिलका निकालना आसान नहीं होता. कई बार नाखूनों में दर्द होने लगता है, हाथों में लहसुन की तेज गंध रह जाती है और जल्दी में पूरा काम और मुश्किल लगने लगता है. अगर आप भी हर दिन इस परेशानी से गुजरते हैं, तो एक आसान देसी ट्रिक की मदद से बिना चाकू और बिना किसी महंगे किचन टूल के सिर्फ 30 सेकेंड में काफी सारी लहसुन की कलियां छील सकते हैं.
इस तरीके के लिए सिर्फ ढक्कन वाला एक डिब्बा या दो स्टील की कटोरियां चाहिए. यह तरीका पहले से कई घरों में इस्तेमाल होता रहा है. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि किस ट्रिक से 30 सेकेंड में पूरा लहसुन छिल जाएगा और इसके लिए चाकू की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.&amp;nbsp;
लहसुन छीलना इतना मुश्किल क्यों लगता है?
लहसुन की कलियां छोटी होती हैं, इसलिए उनका छिलका निकालने में समय लगता है. कई लोग नाखूनों या चाकू की मदद से इसे छीलते हैं. इससे उंगलियों में दर्द हो सकता है और कई बार लहसुन की कलियां भी टूट जाती हैं. इतना ही नहीं, लहसुन की तेज गंध हाथों में लंबे समय तक बनी रहती है, जो कई बार साबुन से हाथ धोने के बाद भी आसानी से नहीं जाती है. यही वजह है कि कुछ लोग जरूरत होने के बाद भी लहसुन का इस्तेमाल कम कर देते हैं.&amp;nbsp;
किस ट्रिक से 30 सेकेंड में पूरा लहसुन छिल जाएगा
इस आसान ट्रिक के लिए सबसे पहले लहसुन की सभी कलियों को अलग कर लें. अब इन्हें किसी ढक्कन वाले डिब्बे में डालें और ढक्कन अच्छी तरह बंद कर दें. इसके बाद डिब्बे को करीब 20 से 30 सेकेंड तक जोर-जोर से हिलाएं. अगर आपके पास ढक्कन वाला डिब्बा नहीं है, तो दो स्टील की कटोरियों के बीच लहसुन रखकर भी इसी तरह हिलाया जा सकता है. &amp;nbsp;कुछ ही सेकेंड बाद आप देखेंगे कि लहसुन के छिलके अपने आप अलग होने लगेंगे और कलियां आसानी से निकल जाएंगी.&amp;nbsp;
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यह ट्रिक कैसे काम करती है?
इस ट्रिक के पीछे बहुत आसान वजह है. जब डिब्बे या कटोरियों को तेजी से हिलाया जाता है, तो लहसुन की कलियां आपस में टकराती हैं. इससे फ्रिक्शन पैदा होती है और उसी फ्रिक्शन की वजह से छिलका ढीला होकर अलग हो जाता है. हाथों से एक-एक कली छीलने की तुलना में यह तरीका ज्यादा तेज और आसान माना जाता है. साथ ही इसमें लहसुन की कलियां टूटती भी नहीं हैं, जिससे उनका टेस्ट और खुशबू बनी रहती है.&amp;nbsp;
लहसुन जल्दी छीलने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप चाहते हैं कि लहसुन का छिलका और आसानी से निकल जाए, तो डिब्बे में डालने से पहले कलियों को हल्का-सा दबा सकते हैं. इससे छिलका जल्दी ढीला हो जाता है. छीलने के बाद लहसुन को एयरटाइट डिब्बे में भरकर फ्रिज में रखें. इससे वह ज्यादा समय तक ताजा बना रहता है और रसोई में सफाई भी बनी रहती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Nelson Mandela International Day: साउथ अफ्रीका घूमने जाने का है प्लान, जानें किस महीने में मिलेगा बेस्ट एक्सपीरियंस?</title>
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        <description><![CDATA[ Nelson Mandela International Day: हर साल दुनियाभर में 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला डे मनाया जाता है. यह दिन साऊथ अफ्रीका के महान नेता नेल्सन मंडेला के शांति, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के संघर्ष को याद करने के रूप में मनाया जाता है. इस दौरान बहुत से पर्यटक साउथ अफ्रीका पहुंचते हैं. इस खास मौके पर अगर आप भी साऊथ अफ्रीका की खूबसूरत नदियों, जंगलो और इतिहास को करीब से देखने का मन बना रहे हैं तो यह फैसला आपके लिए बेहद यादगार साबित हो सकता है. हालांकि, साऊथ अफ्रीका जाने से पहले आपको यह जान लेना होगा कि वहां घूमने लायक जगह कौन सी हैं और किस महीने में जाने से आपको बेस्ट एक्सपीरियंस मिलेगा.&amp;nbsp;
वाइल्डलाइफ और सफारी के लिए बेस्ट समय&amp;nbsp;
यदि आपको वाइल्डलाइफ और सफारी टूर करना बेहद पसंद है तो साऊथ अफ्रीका जाने के लिए मई से सितम्बर का महीना सबसे बेस्ट रहेगा. ये महीने साऊथ अफ्रीका में सर्दियों के होते हैं, जिससे जंगलों की झाड़ियां सूख जाती हैं और जानवरों को दूर से भी देखा जा सकता है. साथ ही पानी की कमी के कारण सभी जंगली जानवर नदियों और तालाबों के किनारे इकट्ठा हो जाते हैं, जिससे सफारी टूर का रोमांच दोगुना हो जाता है.
समुद्र के किनारे समय बिताना&amp;nbsp;
यदि आपको समुद्र के किनारे बैठकर समय बिताना, वाइन पीना और सुहावनी धूप लेना पसंद हैं तो नवम्बर से मार्च के बीच साऊथ अफ्रीका जानें का प्लान बनाएं. इस दौरान वहां गर्मियों का समय होता है. केप टाउन और टेबल माउन्टेन घूमने के लिए यह समय सबसे शानदार माना जाता है. दिसंबर और जनवरी के महीनों में यहां का माहौल उत्सव जैसा होता है, इसलिए इस दौरान यहां पर्यटकों की भीड़ और खर्च दोनों बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
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व्हेल्स देखने का अनुभव&amp;nbsp;
अगर आपको समुद्री जीवों जैसे व्हेल्स को करीब से देखना पसंद हैं तो जुलाई से नवम्बर का समय सबसे अच्छा होता है. क्योंकि अफ्रीका का हरमानस शहर दुनिया भर में व्हेल वाचिंग के लिए जाना जाता है. इस समय व्हेल मछलियां बच्चों को जन्म देने के लिए तट के बेहद नजदीक आ जाती हैं.&amp;nbsp;
मंडेला का इतिहास&amp;nbsp;
साऊथ अफ्रीका की यात्रा नेल्सन मंडेला के इतिहास को जाने बिना अधूरी है. आप साल के किसी भी महीने जाएं तो रोबेन आइलैंड और सोवेतो मंडेला हाउस जरुर जाएं, क्योंकि केप टाउन के पास रोबेन आइलैंड पर स्थित यह वही जेल है, जहां मंडेला ने अपने जीवन के 18 साल गुजारे और जोहान्सबर्ग का मंडेला हाउस मंडेला के शुरूआती संघर्षों का गवाह रहा है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Nelson, Mandela, International, Day:, साउथ, अफ्रीका, घूमने, जाने, का, है, प्लान, जानें, किस, महीने, में, मिलेगा, बेस्ट, एक्सपीरियंस</media:keywords>
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        <title>Home made ghewar: घर पर आसानी से बनेंगे राजस्थान के स्वादिष्ट घेवर, इस रेसिपी को फटाफट कर लें नोट</title>
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        <description><![CDATA[ Ghevar Recipe: राजस्थान की मशहूर मिठाइयों में से एक है घेवर. यह खासतौर पर सावन और त्योहारों के समय ज्यादा बनाया और खाया जाता है. बाजार में मिलने वाला घेवर तो सभी खाते हैं, लेकिन आप चाहें तो इसे घर पर भी आसानी से बना सकते हैं. थोड़ी सी मेहनत और सही तरीके से आप घर में ही स्वादिष्ट और कुरकुरा घेवर तैयार कर सकते हैं. आइए जानते हैं इसकी आसान रेसिपी.
घेवर बनाने के लिए जरूरी सामग्री
घेवर बनाने के लिए आपको ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके लिए मैदा, घी, दूध, पानी, चीनी, इलायची और सूखे मेवों की जरूरत होगी. इसके अलावा घेवर को तलने के लिए आप घी या तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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ऐसे तैयार करें घेवर का घोल
सबसे पहले एक बर्तन में घी लें और उसे अच्छी तरह फेंट लें. अब इसमें थोड़ा-थोड़ा करके मैदा मिलाएं. इसके बाद इसमें दूध और ठंडा पानी डालकर पतला घोल तैयार कर लें. ध्यान रखें कि घोल ज्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए. क्योंकि घेवर की खासियत उसकी जालीदार बनावट होती है इसलिए इस बात का ध्यान रखना जरूरी है.
घेवर बनाने का आसान तरीका
अब एक गहरी कढ़ाई में घी गर्म करें. जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाए तो इसमें थोड़ा-थोड़ा करके घोल डालें. घोल डालते समय बीच में जगह बनती रहेगी, जिससे घेवर की जालीदार शेप तैयार होगी. उसके बाद जब घेवर हल्का सुनहरा हो जाए तो इसे सावधानी से निकाल लें. आप बिल्कुल इसी तरह बाकी घोल से भी घेवर बना सकते हैं.
चाशनी और सजाने का तरीका
अब एक पैन में चीनी और पानी डालकर चाशनी तैयार कर लें. जो तैयार हुआ घेवर है उसको थोड़ी देर के लिए चाशनी में डालें और फिर बाहर निकाल लें. इसके ऊपर मलाई, इसके बाद रबड़ी या सूखे मेवे डालकर इसे और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. जिससे खाने वाला बहुत खुश हो जाएगा.
घेवर बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
घेवर बनाते समय घोल को ज्यादा गाढ़ा न रखें. साथ ही घी अच्छी तरह गर्म होना चाहिए, तभी घेवर कुरकुरा और अच्छा बनेगा. पहली बार घेवर बनाते समय थोड़ी सावधानी रखनी पड़ती है. लेकिन सही तरीके से बनाने पर घर का बना घेवर भी बाजार जैसा स्वाद दे सकता है. इसलिए अगर आप आगे से घेवर बनाएं तो इसी प्रकार से बनाएं, क्योंकि घर पर बना घेवर स्वादिष्ट होने के साथ-साथ साफ-सफाई से भी तैयार होता है. आप इसे त्योहारों या किसी खास मौके पर अपने परिवार और दोस्तों के साथ परोस सकते हैं. साथ ही आप इस आसान रेसिपी से आप घर पर ही राजस्थान की फेमस मिठाई का स्वाद ले सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Egg Malai Makhani Recipe:  शेफ रणवीर बराड़ ने बताई हाई&amp;प्रोटीन अंडा मलाई मखनी रेसिपी, जानें बनाने का आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Egg Malai Makhani Recipe:&amp;nbsp;आजकल हर कोई अपनी डाइट में प्रोटीन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, और सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़ी जानकारी हर जगह देखने को मिल रही है. हाल ही में मशहूर शेफ और मास्टरशेफ इंडिया के जज रणवीर बराड़ ने भी इसी ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए एक रेसिपी शेयर की है, जिसमें स्वाद के साथ-साथ प्रोटीन का भी पूरा ख्याल रखा गया है. उन्होनें अपने यूट्यूब चैनल पर अंडा मलाई मखनी की रेसिपी शेयर की, जिसे बनाने में करीब 35 मिनट का समय लगता है.




जानें रेसिपी बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए
इस रेसिपी को बनाने के लिए इस प्रकार की सामग्री की जरूरत होती है:&amp;nbsp;
ग्रेवी बनाने के लिए:

2 टेबलस्पून घी
1 बड़ा प्याज (कटा हुआ)
1 टेबलस्पून अदरक-लहसुन का पेस्ट
उबले हुए मगज के बीज और काजू
2 तेजपत्ता
आधा इंच दालचीनी
2 कप दही (फेंटा हुआ)
1 हरी मिर्च
⅓ कप पानी
2 कप गर्म पानी

उबालने के लिए:

जरूरत अनुसार पानी
स्वादानुसार नमक
2 टेबलस्पून मगज़ के बीज
7-8 काजू

सब्जियां भूनने के लिए:

1 टेबलस्पून घी
2-3 सूखी कश्मीरी लाल मिर्च
1 मध्यम टमाटर (कटा हुआ)
1 मध्यम शिमला मिर्च (कटी हुई)
2 मध्यम प्याज (कटे हुए)
स्वादानुसार नमक

यह भी पढ़ेंः Quit Smoking: ये 4 तरीके अपना लिए तो तुरंत छूट जाएगी सिगरेट, गलती से भी नहीं लगाएंगे हाथ
मसाले के लिए:

2 टेबलस्पून काली मिर्च
2 टेबलस्पून जीरा
1 टेबलस्पून धनिया के बीज
2-4 लौंग
स्वादानुसार नमक
2 टेबलस्पून कसूरी मेथी

अंडा मलाई मखनी के लिए:

2 टेबलस्पून तेल
1 टीस्पून जीरा
8-9 उबले अंडे
जरूरत अनुसार पानी
तैयार ग्रेवी
स्वादानुसार नमक
1-2 टेबलस्पून मक्खन
भुनी हुई सब्जियां

गार्निश के लिए:

तैयार मसाला
ताजा क्रीम
चिली ऑयल
हरा धनिया

कैसे बनाएं यह टेस्टी और हेल्दी डिश
सबसे पहले ग्रेवी बनाने के लिए एक हांडी में घी गरम करें और उसमें प्याज डालकर दो मिनट तक भूनें। फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर एक मिनट तक पकाएं.&amp;nbsp; इसके बाद उबले मगज के बीज, काजू, तेजपत्ता, दालचीनी और दही डालकर सात से आठ मिनट तक पकाएं, जब तक मसाले से तेल अलग न होने लगे. अब हरी मिर्च और पानी डालकर उबाल लें, फिर गर्म पानी डालकर ढककर सात से आठ मिनट और पकाएं.&amp;nbsp;
दूसरी तरफ एक पैन में पानी, नमक, मगज के बीज और काजू डालकर दो से तीन मिनट उबाल लें और छान लें. अब एक पैन में घी गरम करके उसमें सूखी लाल मिर्च, टमाटर, शिमला मिर्च, प्याज और नमक डालकर तेज आंच पर दो से तीन मिनट भून लें. इसके बाद मसाले के लिए एक पैन में काली मिर्च, जीरा, धनिया के बीज, लौंग और नमक डालकर उसे भूनें, फिर कसूरी मेथी डालकर एक मिनट भूनें और इसे पीसकर बारीक पाउडर बना लें. अब आखिरी स्टेप के लिए एक पैन में तेल गरम करके जीरा और उबले अंडे डालकर एक मिनट तक पकाएं. अंत में इसे सर्विंग डिश में निकालकर ऊपर से तैयार मसाला, ताजा क्रीम, चिली ऑयल और हरा धनिया डालकर गार्निश करें, और गरमागरम रोटी या नान के साथ परोसें.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 03:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Egg, Malai, Makhani, Recipe:, शेफ, रणवीर, बराड़, ने, बताई, हाई-प्रोटीन, अंडा, मलाई, मखनी, रेसिपी, जानें, बनाने, का, आसान, तरीका</media:keywords>
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        <title>Palamu Mustard Oil Incident: मिलावटी सरसों का तेल कितना खतरनाक, जिसने झारखंड में छीन लीं 6 लोगों की सांसें?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/palamu-mustard-oil-incident-मिलावटी-सरसों-का-तेल-कितना-खतरनाक-जिसने-झारखंड-में-छीन-लीं-6-लोगों-की-सांसें</link>
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        <description><![CDATA[ Palamu Mustard Oil Incident: आजकल बाजार में मिलावटी चीजें काफी बढ़ चुकी हैं. ऐसे में झारखंड के पलामू जिले के सिक्का गांव में मिलावटी सरसों के तेल के सेवन से एक ही परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. शुरुआती जांच में पता चला है कि पीड़ित परिवार जिस तेल का इस्तेमाल कर रहे थे, उसमें आर्जिमोन मैक्सिकाना यानी &#039;सत्यानाशी&#039; या &#039;पीले धतूरे&#039; के तेल की मिलावट थी. रांची की स्टेट फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट के अनुसार इन छह लोगों की मौत &#039;एपिडेमिक ड्रॉप्सी&#039; नामक जानलेवा बीमारी से हुई है. आइए जानते हैं कि ऐसा तेल कितना खतरनाक है?&amp;nbsp;
कैसे हुई छह लोगों की मौत?&amp;nbsp;
पलामू जिले के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने इन मौतों के पीछे की वजह की पुष्टि की है. उनका कहना है कि ये मौतें किसी रहस्यमयी बीमारी की वजह से नहीं, बल्कि आर्जिमोन मैक्सिकाना यानी मिलावटी सरसों के तेल के इस्तेमाल से हुई हैं. परिवार में सबसे पहले 19 जून को कुलदीप महतो की मौत हुई. अगले ही दिन उनकी बेटी बबिता कुमारी ने अंतिम सांस ली. अपने पिता और बहन की मौत की खबर सुनकर बेंगलुरु में काम करने वाले अनुज महतो तत्काल घर लौट आए. 26 जून को अनुज की छोटी बहन इंदु कुमारी और 28 जून को अनुज की पत्नी श्वेता देवी की मौत हो गई.&amp;nbsp; 29 जून को उनके भाई नकुल महतो और 8 जुलाई को उनकी मां लाखो देवी ने भी दम तोड़ दिया.
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मिलावटी सरसों का तेल कितना खतरनाक?
दरअसल, सरसों के बीज और आर्जिमोन (सत्यानाशी) के बीज दिखने में काफी हद तक एक जैसे होते हैं. मिलावटी तेल के रूप में जब यह हमारे शरीर में जाता है तो यह एक धीमे जहर की तरह काम करता है. आर्जिमोन ऑयल में सैन्गुइनरीन नाम का जहरीला तत्व होता है, जो सीधे दिल, लीवर और किडनी &amp;nbsp;जैसे नाजुक अंगों को डैमेज करता है.&amp;nbsp;
मिलावटी सरसों के तेल से कैसे बचें?&amp;nbsp;
ऐसे में आप घर पर भी शुद्ध और मिलावटी सरसों के तेल की पहचान कर सकते हैं. शुद्ध सरसों के तेल की खुशबू &amp;nbsp;बेहद तीखी और नाक में झनझनाहट पैदा करने वाली होती है. अगर तेल में से गंध गायब है या अजीब सी महक आ रही है तो तेल मिलावटी हो सकता है. वहीं, शुद्ध तेल का रंग गहरा पीला और गाढ़ा होता है. वहीं, बहुत ज्यादा साफ, हल्का या पानी जैसा पतला दिखने वाला तेल मिलावटी हो सकता है.&amp;nbsp;आजकल बाजार में मिलावटी तेल और अन्य खाद्य सामग्री काफी ज्यादा मात्रा में बिकने लगी हैं, ऐसे में हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि कहीं दुकानदार हमें तो मिलावटी चीजें नहीं दे रहा है.
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Palamu, Mustard, Oil, Incident:, मिलावटी, सरसों, का, तेल, कितना, खतरनाक, जिसने, झारखंड, में, छीन, लीं, लोगों, की, सांसें</media:keywords>
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        <title>Quit Smoking: ये 4 तरीके अपना लिए तो तुरंत छूट जाएगी सिगरेट, गलती से भी नहीं लगाएंगे हाथ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/quit-smoking-ये-4-तरीके-अपना-लिए-तो-तुरंत-छूट-जाएगी-सिगरेट-गलती-से-भी-नहीं-लगाएंगे-हाथ</link>
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        <description><![CDATA[ Quit Smoking: धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है. इस तरह का बयान तो आप पढ़ते या सुनते रहे होंगे. आपने यह संदेश सिगरेट के पैकेट पर बड़े मोटे अक्षरों में लिखा देखा होगा. फिर भी लोग नजरअंदाज करते हुए बड़े शौक से सिगरेट निकालते हैं और पीते हैं. सिगरेट छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन सही तरीका अपनाया जाए तो इसकी लत से बाहर निकला जा सकता है. धूम्रपान करने से दमा, टीबी, और कैंसर जैसी कई &amp;nbsp;गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सिगरेट छोड़ने की शुरुआत छोटे, लेकिन प्रभावी कदमों से की जा सकती है. आइए जानते हैं ऐसे 4 तरीके, जो इस आदत को छोड़ने में मददगार साबित हो सकते हैं.
छोड़ने की तारीख तय करें और उसी पर टिके रहें
सबसे पहले एक निश्चित तारीख तय करें कि उस दिन के बाद सिगरेट नहीं पीनी है. इस फैसले की जानकारी परिवार या दोस्तों को भी दें, ताकि वे आपका हौसला बढ़ा सकें. तय लक्ष्य होने से अपने फैसले पर टिके रहना आसान हो सकता है.
लत बढ़ाने वाले ट्रिगर्स से बनाएं दूरी
कुछ लोगों को चाय, कॉफी, तनाव या दोस्तों के साथ बैठने पर सिगरेट पीने की इच्छा होती है. ऐसे ट्रिगर्स की पहचान करें और उनसे बचने की कोशिश करें. जब सिगरेट की तलब महसूस हो, तब पानी पिएं, च्यूइंग गम चबाएं या थोड़ी देर टहल लें.
यह भी पढ़ें: Cancer Survivors: कैंसर से जिंदा बचना काफी नहीं, अब बेहतर जिंदगी जीना भी जरूरी
व्यायाम और नई आदतों को दिनचर्या में शामिल करें
रोजाना हल्की एक्सरसाइज, योग या तेज चाल से पैदल चलना तनाव कम करने में मदद कर सकता है. इसके साथ ही कोई नया शौक अपनाना या खुद को व्यस्त रखना भी बार-बार सिगरेट पीने की इच्छा को कम करने में सहायक हो सकता है.
जरूरत पड़े तो डॉक्टर की सलाह लें
अगर बार-बार कोशिश करने के बाद भी सिगरेट नहीं छूट रही है तो डॉक्टर या तंबाकू मुक्ति विशेषज्ञ से सलाह लें. जरूरत पड़ने पर वे निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT), दवाओं या काउंसलिंग की सलाह दे सकते हैं. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा शुरू न करें.
तुरंत छोड़ने के लिए अपनाएं सीक्रेट तरीका
&#039;4-D&#039; फॉर्मूला सबसे असरदार तरीका माना जाता है. जब भी तलब लगे तो इंतजार करें, क्योंकि तलब पांच मिनट में टल जाती है, गहरी सांसें लें, पानी पिएं और किसी अन्य काम में ध्यान भटकाएं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Elderly Care Tips: क्या आप भी माता&amp;पिता के लिए चुन रहे हैं केयरगिवर? इन जरूरी बातों को कभी न भूलें</title>
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        <description><![CDATA[ How To Choose Caregiver For Elderly Parents: बढ़ती उम्र के साथ कई माता-पिता को रोजमर्रा के कामों में मदद की जरूरत पड़ने लगती है. ऐसे में परिवार अक्सर उनके लिए एक केयरगिवर रखने का फैसला करता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को सिर्फ अनुभव या कम खर्च देखकर चुन लेना सही नहीं है. सही केयरगिवर का चुनाव आपके माता-पिता की सेहत, सुरक्षा और मानसिक आराम से जुड़ा होता है. इसलिए कुछ जरूरी बातों को पहले समझ लेना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
किस बात का ध्यान रखना सबसे जरूरी?
सबसे पहले यह तय करें कि आपके माता-पिता को किस तरह की देखभाल की जरूरत है. अगर उन्हें अल्जाइमर, डिमेंशिया या किसी दूसरी गंभीर बीमारी है, तो प्रशिक्षित केयरगिवर की जरूरत होगी. वहीं अगर उन्हें सिर्फ दवा समय पर देने, खाना खिलाने या रोजमर्रा के कामों में मदद चाहिए, तो सामान्य केयरगिवर भी पर्याप्त हो सकता है. केयरगिवर तय करने से पहले रोजाना की जरूरतों की एक सूची बना लें. जैसे नहाने, कपड़े बदलने, खाना खाने, वॉशरूम जाने, दवा लेने या रात में देखभाल की जरूरत कितनी है. इससे सही व्यक्ति का चुनाव करना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;
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सवाल पूछते समय किन बातों का रखें ध्यान?
इंटरव्यू के दौरान सिर्फ अनुभव पूछना काफी नहीं है. यह भी जानें कि उन्होंने पहले किन मरीजों की देखभाल की है, क्या वे दवाइयों का समय संभाल सकते हैं, जरूरत पड़ने पर खाना बना सकते हैं और किसी मेडिकल इमरजेंसी में सही फैसला लेने की क्षमता रखते हैं. अगर मरीज व्हीलचेयर का इस्तेमाल करता है या बिस्तर से उठाने में मदद चाहिए, तो इस बारे में भी पहले बात कर लें.
माता- पिता से मुलाकात?
फैसला लेने से पहले केयरगिवर की मुलाकात माता-पिता से जरूर कराएं. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि दोनों एक-दूसरे के साथ सहज हैं या नहीं. कई बार व्यवहार और बातचीत का तरीका अनुभव से भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होता है.ध्यान रखें कि हर केयरगिवर प्रशिक्षित नहीं होता. कई लोगों के पास बुजुर्गों की देखभाल का व्यावहारिक अनुभव या मेडिकल ट्रेनिंग नहीं होती. ऐसे में अगर मरीज को इंसुलिन देना, ब्लड शुगर की निगरानी करना, घाव की ड्रेसिंग करना या दूसरी नर्सिंग संबंधी देखभाल की जरूरत है, तो प्रशिक्षित केयरगिवर ही चुनें.
&amp;nbsp;परिवार की जिम्मेदारी
एक और बात जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, वह है परिवार की जिम्मेदारी. केयरगिवर रखने का मतलब यह नहीं कि परिवार पूरी तरह जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाए. समय-समय पर निगरानी रखना, मरीज की स्थिति पर नजर रखना और केयरगिवर का सहयोग करना भी उतना ही जरूरी है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Elderly, Care, Tips:, क्या, आप, भी, माता-पिता, के, लिए, चुन, रहे, हैं, केयरगिवर, इन, जरूरी, बातों, को, कभी, न, भूलें</media:keywords>
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        <title>Hair Wash During Periods: पीरियड्स के पहले दिन बाल धो लिए तो क्या सच में बढ़ जाती है ब्लीडिंग, क्या कहते हैं डॉक्टर्स?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hair-wash-during-periods-पीरियड्स-के-पहले-दिन-बाल-धो-लिए-तो-क्या-सच-में-बढ़-जाती-है-ब्लीडिंग-क्या-कहते-हैं-डॉक्टर्स</link>
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        <description><![CDATA[ Can We Wash Hair On First Day Of Period: पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग कई तरह की सलाह देते हैं. इनमें सबसे आम बात यह सुनने को मिलती है कि पीरियड्स के पहले दिन बाल नहीं धोने चाहिए, क्योंकि इससे ब्लीडिंग बढ़ जाती है या दर्द ज्यादा होने लगता है. लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? डॉक्टरों के मुताबिक, इस धारणा के पीछे कोई ठोस साइंटफिक प्रमाण नहीं है. पीरियड्स के दौरान बाल धोना पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है. हां, हार्मोनल बदलाव की वजह से कुछ महिलाओं को हल्की असहजता जरूर महसूस हो सकती है.
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम&amp;nbsp;
डॉ. कल्याणी बनर्जी के अनुसार, पीरियड्स के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है. इसी समय गर्भाशय की अंदरूनी परत निकलती है, जिससे ब्लीडिंग होती है. इस दौरान कुछ महिलाओं को ऐंठन, थकान और शरीर के तापमान में हल्के बदलाव महसूस हो सकते हैं. इन हार्मोनल बदलावों का असर स्कैल्प पर भी पड़ता है, जिससे बाल अधिक ऑयली या सिर की त्वचा थोड़ी संवेदनशील हो सकती है.
धोने और पीरियड्स की ब्लीडिंग का संबंध
डॉक्टरों का कहना है कि बाल धोने और पीरियड्स की ब्लीडिंग के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है. पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग पूरी तरह हार्मोन और गर्भाशय की प्रक्रिया से नियंत्रित होती है. बाल धोने, नहाने या सिर पर पानी डालने से ब्लीडिंग न तो बढ़ती है और न ही कम होती है. हालांकि, अगर आप बहुत ठंडे पानी से सिर धोती हैं तो कुछ समय के लिए ठंड ज्यादा महसूस हो सकती है. कुछ महिलाओं में इससे सिरदर्द, हल्की कंपकंपी या ऐंठन थोड़ी बढ़ी हुई महसूस हो सकती है. लेकिन यह असर अस्थायी होता है और इसका पीरियड्स की प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.
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इन चीजों का ध्यान रखना जरूरी
पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. बाल धोने से स्कैल्प में जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी साफ होती है, जिससे ताजगी महसूस होती है और मूड भी बेहतर हो सकता है. अगर इस दौरान थकान ज्यादा हो या शरीर कमजोर महसूस हो रहा हो, तो लंबे समय तक बाल धोने या बहुत देर तक खड़े रहने से बचना बेहतर है. डॉक्टर सलाह देते हैं कि पीरियड्स के दौरान बाल धोते समय बहुत ठंडे या बहुत गर्म पानी की बजाय गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें. अगर स्कैल्प संवेदनशील महसूस हो रहा हो तो माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें और बाल धोने के बाद उन्हें अच्छी तरह सुखा लें, ताकि ठंड न लगे.
अगर पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, तेज दर्द हो, चक्कर आए, लगातार कमजोरी महसूस हो या हर महीने असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो इसे बाल धोने से जोड़ने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Leftover idli recipe: रात को बच गई थी इडली? सुबह इससे बनाएं टेस्टी नाश्ता, जान लें रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Leftover idli recipe: साउथ इंडियन फूड में इडली बेहद पसंद किया जाने वाला फूड है. लोग इसे अक्सर नाश्ते और शाम के स्नेक में खाना पसंद करते हैं. हालांकि, कई बार इडली ज्यादा बनाने पर अगले दिन खानी पड़ती है या फिर उसे फेंकना पड़ता है. अब इडली को फेंकने के बजाए बची हुई इडली से 4 तरह का आसान और स्वादिष्ट नाश्ता तैयार किया जा सकता है. बची हुई इडली से फिंगर चिप्स, इडली पकौड़ा, इडली उपमा और दही वड़ा जैसी कई टेस्टी रेसिपी आसानी से बनाई जा सकती हैं. आइए जानते हैं इन्हें बनाने का आसान तरीका.
मिनटों में बनेंगे&amp;nbsp;कुरकुरे फिंगर चिप्स
बची हुई इडली को लंबी स्टिक की स्लाइस काटिंग करें. इसमें थोड़ा पानी छिड़ककर कॉर्नफ्लोर, नमक और काली मिर्च लगाएं. इसके बाद गर्म तेल में सुनहरा होने तक तल लें. आखिर में काला नमक, चाट मसाला, भुना जीरा पाउडर और लाल मिर्च पाउडर छिड़ककर परोसें.
इडली पकौड़ा देगा नया स्वाद
बेसन में नमक, लाल मिर्च, हल्दी और अजवाइन डालकर घोल तैयार करें. दूसरी तरफ मसालेदार आलू की स्टफिंग बनाएं. इडली को त्रिकोण आकार में काटकर उसमें हरी और मीठी चटनी के साथ आलू की स्टफिंग भरें. फिर बेसन के घोल में डुबोकर सुनहरा होने तक हलकी आंच में तलें.
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इडली उपमा बनेगा झटपट नाश्ता
एक पैन में तेल गर्म करें. इसमें राई, करी पत्ता, हरी मिर्च, हींग और प्याज भूनें। फिर हल्दी, नमक, लाल मिर्च, थोड़ा चीनी, नींबू का रस और थोड़ा पानी डालें. अब कटी हुई इडली डालकर अच्छी तरह मिलाएं. ऊपर से धनिया, सेव, प्याज, अनारदाना और नारियल बुरादा डालकर परोसें.
दही वड़ा जैसा स्वाद भी मिलेगा
इडली को प्लेट में रखें और उसके ऊपर फेंटा हुआ दही डालें. फिर हरी चटनी, मीठी चटनी, काला नमक, भुना जीरा पाउडर, चाट मसाला और लाल मिर्च पाउडर छिड़कें. आखिर में धनिया, हरी मिर्च, सेव और अनारदाना से गार्निश करें. कुछ ही मिनटों में दही वड़ा जैसा स्वाद तैयार हो जाएगा.
बची हुई इडली का करें पूरा इस्तेमाल
अगर घर में इडली बच गई है, तो उसे दोबारा गर्म करके खाने की बजाय इन आसान रेसिपी को ट्राई किया जा सकता है. इससे खाने की बर्बादी भी नहीं होगी और सुबह का नाश्ता भी स्वादिष्ट बन जाएगा.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Breathless While Climbing Stairs: क्या सीढ़ियां चढ़ते वक्त फूलती है आपकी भी सांस, जानें यह किस बीमारी का लक्षण?</title>
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        <description><![CDATA[ Breathless While Climbing Stairs: सीढ़ियां चढ़ते वक्त अधिकतर लोगों की सांस फूल जाती है लेकिन इसे कभी भी सामान्य समझकर यूं ही नहीं छोड़ देना चाहिए. कई बार ऐसा कमजोरी, बढ़ते वजन या फिटनेस की कमी की वजह से होता है. लेकिन अगर थोड़ी सी सीढ़ियां चढ़ने पर ही बार-बार सांस फूलने लगे तो यह किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है.
सांस फूलने की क्या वजह हो सकती है?
दिल से जुड़ी बीमारी होने पर सांस फूल सकती है. जब दिल ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाने में दिक्कत होती है. ऐसे में थोड़ी मेहनत करने पर भी सांस तेज चलने लगती है मतलब फूलने लगती है. साथ ही सांस फूलने का अलग कारणों में से अस्थमा की बिमारी भी शामिल है. और खून की कमी यानी एनीमिया भी इसकी वजह हो सकती है. आपको बता दें की वजन ज्यादा होने या रोजाना एक्सरसाइज न करने पर भी सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूल सकती है.
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कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, थोड़ी सी मेहनत में ही सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो, चक्कर आए या आराम करने के बाद भी सांस सामान्य न हो, तो डॉक्टर से मिलकर अपनी समस्या जरूर बताएं. ऐसे में डॉक्टर आपको दवाई भी दे सकते हैं.
इस समस्या से कैसे बचें? 
इससे बचने के लिए आपको रोजाना हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए, हेल्थी फूड खाना चाहिए, इसके साथ ही आप अपने वजन को अच्छा रखें. अगर आपको पहले से दिल या फेफड़ों की कोई बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज कराएं.
सांस फूलना हर बार किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता है इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tandoori Roti in a Pressure Cooker: बिना तंदूर घर पर कुकर में भी बना सकते हैं तंदूरी रोटी, जान लीजिए आसान तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Tandoori Roti: तंदूरी रोटी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों को लगता है कि इसे बनाने के लिए तंदूर होना जरूरी है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. अगर आपके घर में प्रेशर कुकर है, तो आप बिना तंदूर के भी बिल्कुल रेस्टोरेंट जैसी स्वादिष्ट और मुलायम तंदूरी रोटी बना सकते हैं. इसके लिए आपको केवल कुछ आसान स्टेप्स अपनाने होंगे जिसको अपनाने के बाद तंदूरी रोटी तैयार हो जाएगी.
तंदूरी रोटी बनाने के लिए सामग्री:

2 कप गेहूं का आटा
1/2 कप मैदा (वैकल्पिक)
1/2 छोटा चम्मच नमक
1/2 छोटा चम्मच चीनी
1/2 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर
2 बड़े चम्मच दही
1 छोटा चम्मच तेल
जरूरत अनुसार गुनगुना पानी
मक्खन या घी (सर्व करने के लिए)

ऐसे तैयार करें आटा
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में आटा, मैदा, नमक, चीनी और बेकिंग पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें दही और तेल डालें. धीरे-धीरे गुनगुना पानी डालते हुए मुलायम आटा गूंध लें. आटे को ढककर कम से कम 30 मिनट के लिए रख दें, ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए.
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कुकर में किस प्रकार बनाएं तंदूरी रोटी?
सबसे पहले प्रेशर कुकर की रबर और सीटी निकाल दें. खाली कुकर को 8 से 10 मिनट तक मध्यम आंच पर अच्छी तरह गर्म करें. अब आटे की लोई बनाकर हल्का मोटा बेल लें. रोटी के एक तरफ हल्का पानी लगाएं. पानी लगी हुई इस साइड को कुकर की अंदर वाली दीवार पर चिपका दें. ध्यान रखें कि पानी की लगी हुइ साइड ही कुकर से चिपके. कुकर को ढक दें और 1 से 2 मिनट तक रोटी पकने दें. जब रोटी फूलने लगे और ऊपर से पक जाए, तब कुकर को सावधानी से उल्टा करके रोटी को सीधे आंच की तरफ करें. इससे रोटी पर तंदूर जैसी हल्की सुनहरी और काली चित्तियां आ जाएंगी.
रोटी पकने के बाद चिमटे की मदद से निकाल लें और उस पर मक्खन या घी लगा दें. इसी तरह बाकी रोटियां भी तैयार कर लें.
इन बातों का रखें ध्यान:

कुकर में रबर और सीटी बिल्कुल न लगाएं.
कुकर को पहले अच्छी तरह गर्म करना जरूरी है, तभी रोटी अच्छी तरह चिपकेगी.
रोटी पर पानी बराबर लगाएं, ताकि वह कुकर की दीवार पर आसानी से चिपक जाए.
रोटी को निकालते समय चिमटे का इस्तेमाल करें, ताकि हाथ न जले.
तंदूरी रोटी को गरमागरम दाल, पनीर, छोले या किसी भी सब्जी के साथ परोसें.

अगर आपके घर में तंदूर नहीं है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है. केवल एक प्रेशर कुकर की मदद से आप घर पर ही मुलायम, स्वादिष्ट और रेस्टोरेंट जैसी तंदूरी रोटी आसानी से बना सकते हैं और इसका स्वाद ले सकते हैं. यह तरीका आसान होने के साथ-साथ आपका समय भी बचाएगा और पैसे भी.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Interrupted Urination: रुक&amp;रुककर हो रहा है पेशाब? कहीं इस चीज का खतरा तो नहीं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/interrupted-urination-रुक-रुककर-हो-रहा-है-पेशाब-कहीं-इस-चीज-का-खतरा-तो-नहीं</link>
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        <description><![CDATA[ Interrupted Urination: पेशाब का रुक-रुककर आना एक ऐसी समस्या है, जिसे कई लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. हालांकि, अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे या इसके साथ दर्द, जलन या पेशाब करने में जोर लगाना पड़े तो यह शरीर में किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. यह समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकती है. इसकी वजह इंफेक्शन से लेकर मूत्राशय या प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. आइए जानते हैं कि रुक-रुककर पेशाब आने के पीछे कौन से कारण हो सकते हैं और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
शरीर के ये संकेत नहीं करने चाहिए नजरअंदाज&amp;nbsp;
अगर पेशाब के दौरान बार बार रुकावट महसूस हो, मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास हो या पेशाब करने में काफी समय लगे, तो यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती. अगर यह परेशानी लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
यूरिन इंफेक्शन भी बन सकता है बड़ी वजह
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) होने पर पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना और रुक-रुककर पेशाब आने जैसी दिक्कत हो सकती है. संक्रमण बढ़ने पर बुखार, पेट के निचले हिस्से में दर्द और बदबूदार पेशाब जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.
पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या से भी जुड़ सकता है मामला
बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ सकता है. इससे मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ता है और पेशाब की धार कमजोर हो सकती है या रुक-रुककर पेशाब आने की समस्या हो सकती है. ऐसे मामलों में समय पर जांच जरूरी होती है
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पथरी और नसों से जुड़ी दिक्कत भी हो सकती है कारण
किडनी या मूत्राशय की पथरी मूत्र के प्रवाह में रुकावट पैदा कर सकती है. वहीं, डायबिटीज, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कुछ बीमारियां या नसों को प्रभावित करने वाली स्थितियां भी पेशाब करने की प्रक्रिया पर असर डाल सकती हैं.
इन लक्षणों के साथ तुरंत लें डॉक्टर की सलाह
अगर पेशाब में खून दिखाई दे, तेज दर्द हो, बुखार आए, बिल्कुल पेशाब न हो पाए या यह समस्या लगातार बनी रहे तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. समय पर जांच और सही इलाज से कई गंभीर समस्याओं का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Fitness States Report: फिटनेस में बिहार&amp;झारखंड ने मारी बाजी! जानें दूसरे किन राज्यों के लोग माने गए सबसे ज्यादा फिट?</title>
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        <description><![CDATA[ Fitness States Report : बढ़ता मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दूसरी लाइफस्टाइल बीमारियों ने लोगों को अपनी सेहत के प्रति पहले से ज्यादा जागरूक कर दिया है. यही वजह है कि अब लोग जिम, योग, मॉर्निंग वॉक और हेल्दी डाइट को अपनी रूटीन का हिस्सा बना रहे हैं. हालांकि देशभर में फिटनेस को लेकर जागरूकता बढ़ने के बाद भी कुछ राज्यों ने मोटापे के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार और झारखंड समेत कुछ राज्यों में मोटापे की दर देश के बाकी हिस्सों की तुलना में काफी कम है. तो आइए जानते हैं कि रिपोर्ट में क्या सामने आया है और दूसरे किन राज्यों के लोग सबसे ज्यादा फिट माने गए हैं.&amp;nbsp;
बिहार और झारखंड के लोग सबसे ज्यादा फिट
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) की ओर से जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के अनुसार, बिहार और झारखंड ऐसे राज्य हैं, जहां 20 फीसदी से भी कम लोग मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 16.8 फीसदी पुरुष और 16.9 फीसदी महिलाएं मोटापे की श्रेणी में हैं. बिहार में 19.4 फीसदी पुरुष और 19.8 फीसदी महिलाएं मोटापे से प्रभावित हैं.&amp;nbsp;
देश में बढ़ रहा है मोटापा
रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के 27.3 फीसदी पुरुष और 30.7 फीसदी महिलाएं मोटापे से प्रभावित हैं. इससे पहले NFHS-5 (2021) में यह आंकड़ा 22.9 फीसदी और 24 फीसदी था. तीन साल में पुरुषों में मोटापे की दर करीब 4 फीसदी और महिलाओं में करीब 6 फीसदी बढ़ी है. इससे साफ है कि देश में मोटापा लगातार बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
दूसरे किन राज्यों के लोग सबसे ज्यादा फिट माने गए हैं?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) की ओर से जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के अनुसार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मेघालय भी ऐसे राज्य हैं, जहां 20 फीसदी से भी कम वयस्क मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं. वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में मोटापे की दर 40 फीसदी तक पहुंच चुकी है. रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 16.1 फीसदी पुरुष और 20.3 फीसदी महिलाएं, मध्य प्रदेश में 17.6 फीसदी पुरुष और 22 फीसदी महिलाएं, जबकि मेघालय में 15.6 फीसदी पुरुष और 13.8 फीसदी महिलाएं मोटापे का शिकार हैं. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 21.8 फीसदी पुरुष और 26.7 फीसदी महिलाएं मोटापे की समस्या से जूझ रही हैं. वहीं उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में मोटापे की दर 28 से 35 फीसदी के बीच दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है.&amp;nbsp;
फिट रहने के लिए लोग बदल रहे हैं अपनी लाइफस्टाइल
आज हर उम्र के लोग फिट रहने पर पहले से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. लोग नियमित रूप से जिम, योग, मॉर्निंग वॉक, एरोबिक्स और दूसरी एक्सरसाइज कर रहे हैं. इसके साथ ही हेल्दी डाइट और पर्याप्त पानी पीने जैसी आदतों को भी अपनाया जा रहा है. पिछले कुछ सालों में जिम की संख्या तेजी से बढ़ी है. ऐसे में फिटनेस को लेकर लोगों का इंटरेस्ट लगातार बढ़ रहा है.&amp;nbsp;
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एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के अनुसार, देश में सिर्फ मोटापे से जुड़े आंकड़ों में ही बदलाव नहीं आया है, बल्कि मेटरनल हेल्थ के क्षेत्र में भी सुधार देखने को मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब 90.6 फीसदी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं, जो पहले 88.6 फीसदी थे. वहीं, स्किल्ड हेल्थ वर्कर्स की देखरेख में होने वाली डिलीवरी 89.4 फीसदी से बढ़कर 91.3 फीसदी हो गई है. इसके अलावा, प्रेगनेंस की पहली तिमाही में प्रसवपूर्व जांच (ANC) कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 70 फीसदी से बढ़कर 76.2 फीसदी पहुंच गया है. साथ ही, प्रेगनेंसी के दौरान आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट लेने वाली महिलाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मेटरनल हेल्थ सेवाओं तक बेहतर पहुंच का संकेत है.&amp;nbsp;
बच्चों के स्वास्थ्य में भी हुआ सुधार
NFHS-6 के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के कई संकेतकों में सुधार देखने को मिला है. बच्चों में बौनापन (Stunting) 35.5 फीसदी से घटकर 29.3 फीसदी हो गया. वहीं गंभीर कुपोषण 7.7 फीसदी से घटकर 5.2 फीसदी रह गया. इसके अलावा 12 से 23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण 83.8 फीसदी से बढ़कर 87.1 फीसदी हो गया.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>World Emoji Day: ऐसे करें Emoji का सही इस्तेमाल, जानें आपकी पर्सनालिटी के बारे में ये क्या बताते हैं?</title>
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        <description><![CDATA[ World Emoji Day 2026 : आज डिजिटल बातचीत बिना इमोजी के अधूरी सी लगती है. कई बार एक छोटा-सा इमोजी उन फिलिंग्स को आसानी से एक्सप्रेस कर देता है, जिन्हें शब्दों में समझाना मुश्किल होता है. ऐसे में हर साल 17 जुलाई को विश्व इमोजी दिवस (World Emoji Day) मनाया जाता है. &amp;nbsp;व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स और ईमेल जैसे प्लेटफॉर्म पर इमोजी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. हालांकि हर इमोजी का एक तय मतलब होता है और अगर उसे गलत जगह या गलत बात में इस्तेमाल किया जाए, तो सामने वाला उसका अलग मतलब भी निकाल सकता है. इसलिए सिर्फ इमोजी भेजना ही नहीं, बल्कि उनका सही मतलब और सही यूज जानना भी जरूरी है. तो आइए जानते हैं कि Emoji का सही इस्तेमाल कैसे करें और आपकी पर्सनालिटी के बारे में ये क्या बताते हैं.&amp;nbsp;
वर्ल्ड इमोजी डे की शुरुआत कैसे हुई?
हर साल 17 जुलाई को वर्ल्ड इमोजी डे मनाया जाता है. इसकी शुरुआत साल 2014 में इमोजीपीडिया (Emojipedia) के संस्थापक जेरेमी बर्ग ने की थी. 17 जुलाई की तारीख एप्पल के कैलेंडर इमोजी से जुड़ी होने की वजह से चुनी गई थी. आज यह दिन दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है और लोगों को डिजिटल बातचीत में इमोजी की अहम भूमिका के बारे में जागरूक करता है.&amp;nbsp;
Emoji का सही इस्तेमाल कैसे करें?
1. खुशी, प्यार और सहमति के लिए सही इमोजी चुनें - हंसते-हंसते आंखों में आंसू आ जाने वाला इमोजी हंसी और खुशी जताने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लाल दिल वाला इमोजी प्यार, अपनापन और फिलिंग्स दिखाता है. &amp;nbsp;स्माइलिंग फेस वाला इमोजी खुशी का संकेत देता है, जबकि&amp;nbsp;थम्ब्स अप सहमति, तारीफ या ओके कहने के लिए यूज किया जाता है.&amp;nbsp;
2. धन्यवाद और सम्मान जताने के लिए सही इमोजी इस्तेमाल करें - फोल्डेड हैंड्स वाले इमोजी का मतलब सिर्फ नमस्ते नहीं होता है, इसका यूज धन्यवाद, सम्मान, प्रार्थना या किसी से रिक्वेस्ट करने के लिए भी किया जाता है.&amp;nbsp;
3. हर प्लेटफॉर्म और बातचीत के अनुसार इमोजी चुनें - दोस्तों और परिवार के साथ इमोजी का इस्तेमाल नॉर्मल है, लेकिन प्रोफेशनल ईमेल या आधिकारिक बातचीत में इनका सीमित और सोच-समझकर यूज करना बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
4. &amp;nbsp;इमोजी अलग-अलग मतलब - &amp;nbsp;कुछ इमोजी अलग-अलग लोग अलग मतलब में समझ सकते हैं. जैसे हंसते-हंसते आंखों में आंसू आ जाने वाला इमोजी मजाक ही नहीं, बल्कि राहत या हल्की शर्मिंदगी भी दिखा सकता है. वहीं जोर-जोर से रोने वाला चेहरे का इमोजी हमेशा दुख नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा खुशी या इमोशनल होने का संकेत भी हो सकता है.&amp;nbsp;
5. सही इमोशन एक्सप्रेस करने के लिए इमोजी चुनें - अगर किसी चीज या व्यक्ति को बहुत पसंद करना हो तो दिल वाली आंखों वाले इमोजी का इस्तेमाल किया जाता है. &amp;nbsp;काला चश्मा पहने मुस्कुराता चेहरा वाले इमोजी कॉन्फिडेंस &amp;nbsp;और कूल अंदाज दिखाता है, जबकि आग वाला इमोजी किसी चीज के शानदार, ट्रेंडिंग या बेहद लोकप्रिय होने का संकेत देता है.&amp;nbsp;
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इमोजी आपकी पर्सनालिटी के बारे में क्या बताते हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि हम जिन इमोजी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, वे हमारी सोच और पर्सनालिटी के बारे में भी काफी कुछ बताते हैं. यही इमोजी हमारी फीलिंग्स को बार-बार एक्सप्रेस करने का माध्यम बनते हैं, इसलिए इनसे यह भी पता चलता है कि हम खुद को दूसरों के सामने किस तरह पेश करना चाहते हैं. &amp;nbsp;इस समय सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पांच इमोजी हैं. जिसमें खुशी के आंसुओं वाला चेहरा, लाल दिल, &amp;nbsp;हंसते-हंसते लोटपोट होना, थम्ब्स अप और जोर-जोर से रोने वाला चेहरा शामिल है.&amp;nbsp;
डिजिटल बातचीत को आसान बनाते हैं इमोजी
इमोजी डिजिटल बातचीत को आमने-सामने की बातचीत जैसा इमोशनल बना देते हैं. &amp;nbsp;चेट में फिलिंगस समझना कई बार मुश्किल होता है, लेकिन इमोजी इस कमी को काफी हद तक पूरा कर देते हैं. &amp;nbsp;शोधकर्ताओं का कहना है कि लोग अक्सर इमोजी का इस्तेमाल अपनी बात के इमोशन को साफ करने के लिए करते हैं, जिससे गलतफहमी की संभावना भी कम हो सकती है. साथ ही, टेक्स्ट, ईमेल या सोशल मीडिया पर जवाब देने से पहले लोग सोचने का समय भी लेते हैं, जिससे बातचीत कई बार आमने-सामने की बातचीत की तुलना में ज्यादा बैलेंस हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या बार&amp;बार उल्टी कर रहा है आपका पालतू जानवर? तुरंत हो जाएं सतर्क, हो सकती है बड़ी गड़बड़</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आपका पालतू कुत्ता या बिल्ली बार-बार उल्टी कर रहा है, तो इसे हल्के में लेने की गलती न करें। कई बार यह सामान्य कारणों से हो सकता है, लेकिन लगातार उल्टी किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है ऐसे में सही समय पर इसकी वजह समझना और जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक से सलाह लेना बेहद जरूरी है. पलतू जानवर अपनी तकलीफ को शब्दों में नहीं बता सकते. ऐसे में उनकी आदतों और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखना जरूरी होता है. अगर आपका पालतू बार-बार उल्टी कर रहा है, तो आइए जानते हैं इसके पीछे क्या वजह हो सकती है और किन लक्षणों पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए.
क्या सिर्फ खाना ही है वजह या छिपी है कोई और परेशानी?
कई बार पालतू जानवर जरूरत से ज्यादा या बहुत तेजी से खाना खा लेते हैं. इसके अलावा बासी खाना, अचानक डाइट बदलना या ऐसी चीज खा लेना जो उनके लिए सही न हो, उल्टी की वजह बन सकता है. अगर एक-दो बार उल्टी हो और फिर जानवर सामान्य व्यवहार करे, तो ज्यादा चिंता की बात नहीं होती. लेकिन बार-बार ऐसा होने पर कारण जानना जरूरी है.
बार-बार उल्टी के पीछे हो सकती है गंभीर बीमारी
अगर उल्टी के साथ सुस्ती, दस्त, भूख कम लगना, वजन घटना या बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो यह पेट के संक्रमण, लीवर या किडनी की समस्या, पाचन तंत्र की गड़बड़ी या किसी अन्य बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में बिना देरी किए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
क्या आपके पालतू ने निगल ली कोई ऐसी चीज?
कुत्ते और बिल्लियां खेलते समय कई बार प्लास्टिक, कपड़े का टुकड़ा, खिलौने का हिस्सा या दूसरी छोटी चीजें निगल लेते हैं. इससे पेट या आंत में रुकावट आ सकती है, जिसकी वजह से लगातार उल्टी होने लगती है. यह स्थिति गंभीर हो सकती है और तुरंत इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
इन चीजों का सेवन भी बन सकता है खतरे की वजह
चॉकलेट, अंगूर, प्याज, कुछ दवाएं, जहरीले पौधे और केमिकल जैसी चीजें पालतू जानवरों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं. अगर ऐसी किसी चीज के सेवन के बाद उल्टी शुरू हो जाए, तो इसे इमरजेंसी मानते हुए तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
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इन संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
अगर 24 घंटे के भीतर कई बार उल्टी हो, उल्टी में खून दिखाई दे, पालतू पानी भी न पी पा रहा हो, लगातार सुस्त रहे, सांस लेने में दिक्कत हो या पेट में तेज दर्द के संकेत दिखें, तो बिना इंतजार किए डॉक्टर के पास जाएं। छोटे पिल्लों, बिल्ली के बच्चों और उम्रदराज पालतू जानवरों में यह स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है. समय पर सही इलाज मिलने से कई गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. इसलिए अगर आपका पालतू बार-बार उल्टी कर रहा है, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज करने की बजाय सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 07:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Lifestyle Tips: बिना किसी को दुखी किए ऑफिस और पर्सनल लाइफ में कैसे कहें &amp;apos;ना&amp;apos;? ये 5 टिप्स आएंगे काम</title>
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        <description><![CDATA[ Lifestyle Tips: कई बार हम सिर्फ सामने वाले का दिल रखने के लिए हर बात पर &#039;हां&#039; कह देते हैं. चाहे ऑफिस में कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी हो या पर्सनल लाइफ में किसी की मदद करनी हो, हर बार हामी भरना सही नहीं होता. इससे आपके काम का दबाव बढ़ सकता है और मानसिक तनाव भी महसूस हो सकता है. ऐसे में जरूरत पड़ने पर विनम्रता से &#039;ना&#039; कहना भी एक जरूरी स्किल है. आइए जानते हैं ऐसे 5 आसान टिप्स, जिनकी मदद से आप बिना किसी को दुखी किए अपनी बात रख सकते हैं.
सम्मान के साथ अपनी बात रखें
अगर आप किसी काम के लिए मना करना चाहते हैं तो हमेशा विनम्र भाषा का इस्तेमाल करें. &#039;ना&#039; कहने का तरीका ही तय करता है कि सामने वाला आपकी बात को कैसे लेगा. इसलिए अपनी बात शांत और सम्मानजनक अंदाज में रखें. इसके अलावा हर बार लंबी सफाई देने की जरूरत नहीं होती. अगर जरूरी लगे तो अपनी स्थिति के बारे में दो-तीन शब्दों में बता सकते हैं. इससे सामने वाले को आपकी बात समझने में आसानी होगी.
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अगर संभव हो तो दूसरा विकल्प दें
अगर आप किसी काम के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो कोई दूसरा समय या तरीका सुझा सकते हैं. इससे सामने वाले को यह महसूस होगा कि आप उसकी बात को महत्व देते हैं, लेकिन फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं. अगर कोई अचानक आपसे किसी काम के लिए कहे तो उसी समय जवाब देने की जरूरत नहीं है. पहले अपने समय और जिम्मेदारियों को देखें, फिर फैसला लें. इससे आप बिना दबाव के सही निर्णय ले पाएंगे. वहीं, हर व्यक्ति की अपनी क्षमता और प्राथमिकताएं होती हैं. अगर आप हर बार दूसरों की उम्मीदों के अनुसार चलते रहेंगे तो इसका असर आपकी सेहत और काम दोनों पर पड़ सकता है. इसलिए जरूरत पड़ने पर आत्मविश्वास के साथ &#039;ना&#039; कहना सीखें.
&#039;ना&#039; कहना क्यों जरूरी है?
हर किसी को खुश रखना संभव नहीं है. सही समय पर और सही तरीके से कहा गया &#039;ना&#039; आपके रिश्तों को कमजोर नहीं करता, बल्कि आपकी ईमानदारी और स्पष्टता को दिखाता है. जब आप अपनी प्राथमिकताओं का सम्मान करते हैं, तब आप अपने काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन बना पाते हैं. इसलिए &#039;ना&#039; कहना कोई गलत बात नहीं, बल्कि एक अच्छी आदत है जो आपको तनाव से बचाने और बेहतर फैसले लेने में मदद कर सकती है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Madhya Pradesh Tour Package: क्या कम बजट में घूमना चाहते हैं मध्य प्रदेश? IRCTC लाया 9 दिनों का ये धांसू टूर पैकेज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/madhya-pradesh-tour-package-क्या-कम-बजट-में-घूमना-चाहते-हैं-मध्य-प्रदेश-irctc-लाया-9-दिनों-का-ये-धांसू-टूर-पैकेज</link>
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        <description><![CDATA[ IRCTC MP Wildlife And Heritage Rail Tour: अगर आप नेचर, वन्यजीव और ऐतिहासिक धरोहरों को एक ही यात्रा में करीब से देखना चाहते हैं, तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन का &#039;MP Wildlife &amp;amp; Heritage Rail Tour&#039; आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है. यह टूर 8 रात और 9 दिन का है, जिसमें मध्य प्रदेश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर कराई जाएगी. पैकेज की शुरुआती कीमत 33,700 रुपये प्रति व्यक्ति रखी गई है. यात्रा ट्रेन और सड़क मार्ग के जरिए पूरी होगी और इसमें होटल में ठहरने, परिवहन, भोजन और ट्रैवल इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं.&amp;nbsp;
शानदार है एमपी की खूबसूरती
मध्य प्रदेश अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, घने जंगलों, ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है. विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह राज्य नर्मदा, बेतवा, चंबल, ताप्ती और सोन जैसी नदियों की वजह से भी खास पहचान रखता है. यहां के राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. खास तौर पर बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान सफेद बाघों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है.
&amp;nbsp;

Journey through Madhya Pradesh&#039;s untamed wilderness and timeless heritage with IRCTC Tourism. Starting at just ₹33,700 per person*, this all-inclusive, 8N/9D package promises a seamless blend of wildlife, culture, and spirituality. Book your adventure today!&amp;hellip; pic.twitter.com/fLiuShVbG0
&amp;mdash; IRCTC (@IRCTCofficial) July 13, 2026



कहां- कहां घूमने का मिलेगा मौका?
इस टूर में यात्रियों को कान्हा, जबलपुर, खजुराहो, बांधवगढ़ और अमरकंटक घूमने का मौका मिलेगा. यात्रा की शुरुआत कोलकाता के हावड़ा रेलवे स्टेशन से होगी. ट्रेन प्रत्येक शनिवार शाम 7:30 बजे रवाना होगी और वापसी भी शनिवार को ही निर्धारित है. हालांकि ट्रेन के समय में परिचालन संबंधी कारणों से बदलाव संभव है. पैकेज के तहत यात्रियों को थर्ड एसी कैटेगरी में कन्फर्म ट्रेन टिकट उपलब्ध कराया जाएगा. ठहरने की व्यवस्था कान्हा में एक रात, जबलपुर में एक रात, खजुराहो में दो रात, बांधवगढ़ में एक रात और अमरकंटक में एक रात के लिए होटल में रहेगी. पूरे टूर के दौरान स्थानीय भ्रमण और ट्रांसफर के लिए एयर कंडीशंड कार की सुविधा मिलेगी. भोजन की बात करें तो जबलपुर, खजुराहो और अमरकंटक में नाश्ता शामिल रहेगा, जबकि कान्हा और बांधवगढ़ में नाश्ते के साथ डिनर भी दिया जाएगा. इसके अलावा ट्रैवल इंश्योरेंस और लागू टैक्स भी पैकेज का हिस्सा हैं.&amp;nbsp;
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कितना होगा खर्च?
1 मई से 30 सितंबर 2026 तक की यात्रा के लिए ट्रिपल शेयरिंग में प्रति व्यक्ति किराया 33,700 रुपये है. वहीं 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक यही किराया 34,550 रुपये प्रति व्यक्ति रहेगा. अलग-अलग शेयरिंग विकल्पों के अनुसार पैकेज की कीमतें भी अलग निर्धारित की गई हैं. हालांकि, इस पैकेज में दोपहर का भोजन, ट्रेन यात्रा के दौरान खाने की व्यवस्था, जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान की एंट्री फीस, बोटिंग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, व्यक्तिगत खर्च, पोर्टर शुल्क, मिनरल वॉटर, अतिरिक्त दर्शनीय स्थल, हावड़ा स्टेशन तक आने-जाने की सुविधा जैसे अतिरिक्त खर्च शामिल नहीं है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Why Kids Forget Overnight: रात को याद किया और सुबह भूल गए... बच्चों के साथ ऐसा क्यों होता है? जानें इसका साइंस</title>
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        <description><![CDATA[ बच्चों का दिमाग &#039;बच्चा&#039; ही होता है. अक्सर उन्हें रात में जो कुछ भी याद करवाओ, अगली सुबह उन्हें याद ही नहीं रहता. चाहें रात में बच्चों के साथ किया गया कोई वायदा हो या याद किया गया होमवर्क. स्कूल पहुंचते-पहुंचते उनके दिमाग से ज्यादातर चीजें गायब ही हो जाती हैं. लेकिन आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?&amp;nbsp;
दरअसल, बच्चों का दिमाग में मेमोरी को याद रखने वाला हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं होता है. ऐसे में आइए जानते हैं वो तरीके, जिससे आप अपने बच्चे की मेमोरी और याद करने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं.&amp;nbsp;
पूरी नींद न लेना:
अच्छी नींद दिमाग को पढ़ी हुई बातों को याद रखने में मदद करती है, क्योंकि अच्छी नींद के दौरान दिमाग दिनभर सीखी हुई बातों को व्यवस्थित और मजबूत करता है. इसे मेमोरी कंसोलिडेशन (Memory Consolidation) कहते हैं. वहीं दूसरी ओर अगर बच्चा देर से सोता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो याद की गई चीज़ें जल्दी भूल सकती हैं.
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पढ़ाई के बाद मोबाइल चलाना
पढ़ाई के तुरंत बाद मोबाइल, टीवी या गेम खेलने से दिमाग का ध्यान दूसरी चीज़ों में चला जाता है, जिससे पढ़ा हुआ कमजोर पड़ सकता है. इसलिए बच्चों को तुरंत पढ़ाई के बाद मोबाइल न दें और ना ही गेम खेलने की इजाजत दें. आप कुछ समय बाद बच्चे को इसकी इजाजत दे सकते हैं.
तनाव या घबराहट
परीक्षा का डर या ज़्यादा तनाव होने पर बच्चे को याद की हुई बातें भी समय पर याद नहीं आतीं, क्योंकि जैसा की हम सभी जानते हैं कि परीक्षा का डर बच्चों के अंदर कितना ज्यादा होता है और फिर वो ही डर तनाव बनकर बाहर आता है जिस वजह से बच्चे अक्सर पढ़ा हुआ भी भूल जाते हैं
दोबारा पढ़ाई न करना
अगर बच्चा एक बार पढ़कर छोड़ देता है और वह दोबारा नहीं दोहराता है तो पढ़ा हुआ जल्दी भूल सकता है, क्योंकि याद रखने के लिए बच्चे को उस विष्य को समझना जरूरी होता है.
बच्चे की याददाश्त कैसे बढ़ाएं?

बच्चे को समझकर पढ़ने की आदत डालें.
रोज़ थोड़ा-थोड़ा रिविजन कराएं.
8&amp;ndash;10 घंटे की अच्छी नींद लेने दें.
पढ़ाई के बीच-बीच में छोटे ब्रेक दें.
पढ़ाई के बाद कुछ समय मोबाइल से दूर रखें.

क्या यह चिंता की बात है?
कभी-कभी सुबह पढ़ा हुआ भूल जाना सामान्य बात है. लेकिन अगर बच्चा बार-बार बहुत सी बातें भूलने लगे या रोज़मर्रा की चीज़ें भी याद न रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना सही रहेगा. साथ ही कोशिश कीजिएगा की बच्चे को डराए या धमकाएं नहीं क्योंकि उससे फिर बच्चे के दिमाग पर असर पड़ता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Why, Kids, Forget, Overnight:, रात, को, याद, किया, और, सुबह, भूल, गए..., बच्चों, के, साथ, ऐसा, क्यों, होता, है, जानें, इसका, साइंस</media:keywords>
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        <title>Dustbin Cleaning: डस्टबिन की बदबू और जिद्दी दागों से हैं परेशान? आजमाएं ये आसान हैक्स, तुरंत मिलेगी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Dustbin At Home: घर की सफाई के दौरान अक्सर डस्टबिन की सफाई पर कम ध्यान दिया जाता है. लेकिन समय के साथ इसमें जमा गंदगी, दाग और नमी के कारण तेज बदबू आने लगती है. अगर नियमित रूप से इसकी सफाई न की जाए तो बैक्टीरिया और फफूंदी भी पनप सकती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू चीजों की मदद से डस्टबिन को साफ, दाग-धब्बों से मुक्त और बदबू रहित रखा जा सकता है.
कैसे करें डस्टबिन की सफाई?
डस्टबिन की साप्ताहिक सफाई के लिए सबसे पहले उसमें रखा कचरा और बैग पूरी तरह निकाल दें. इसके बाद गुनगुने पानी से डस्टबिन को अच्छी तरह धो लें, ताकि अंदर जमा ढीली गंदगी निकल जाए. अब स्पंज या पुराने टूथब्रश पर थोड़ा डिश सोप लगाकर पूरे डस्टबिन को अच्छी तरह रगड़ें. खासतौर पर किनारों और कोनों की सफाई जरूर करें, क्योंकि यहां सबसे ज्यादा गंदगी जमा होती है. इसके बाद साफ पानी से अच्छी तरह धोकर किसी साफ कपड़े से पोंछ लें या उल्टा रखकर पूरी तरह सूखने दें. डस्टबिन पूरी तरह सूखने के बाद ही उसमें नया कचरा बैग लगाएं.&amp;nbsp;
जिद्दी दाग हटाने का तरीका?
अगर डस्टबिन पर जिद्दी दाग पड़ गए हैं या बदबू लगातार बनी हुई है, तो महीने में एक बार डीप क्लीनिंग करना फायदेमंद रहेगा. इसके लिए बेकिंग सोडा और पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और इसे डस्टबिन के अंदर अच्छी तरह लगा दें. करीब 10 मिनट बाद इसके ऊपर सफेद सिरका स्प्रे करें. दोनों के मिलने से बनने वाला झाग जमी हुई गंदगी और दाग हटाने में मदद करता है. इसके बाद गर्म पानी से अच्छी तरह धो लें.
डस्टबिन की बदबू कैसे हटाएं?
डस्टबिन से बदबू हटाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय भी कारगर हैं. खाली और सूखे डस्टबिन में रातभर के लिए बेकिंग सोडा छिड़क दें. सुबह इसे निकाल दें। यह बदबू को सोखने में मदद करता है. इसके अलावा आधे नींबू पर नमक लगाकर डस्टबिन के अंदर रगड़ने से चिकनाई और दुर्गंध दोनों कम हो सकती हैं. अगर बदबू बार-बार लौट आती है, तो डस्टबिन को दो घंटे तक धूप में रखने से भी बैक्टीरिया कम होते हैं और दुर्गंध दूर करने में मदद मिलती है.
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सेंसर वाले डस्टबिन को साफ करने का तरीका?
अगर आप सेंसर वाले डस्टबिन का इस्तेमाल करते हैं, तो उसके ढक्कन को कभी भी पानी में न डुबोएं, क्योंकि उसमें इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स लगे होते हैं. ढक्कन को केवल हल्के गीले कपड़े से साफ करें, जबकि डस्टबिन के बॉडी हिस्से को अलग करके धोया जा सकता है. सेंसर वाली खिड़की को समय-समय पर सूखे, मुलायम कपड़े से साफ करना भी जरूरी है, ताकि सेंसर सही तरीके से काम करता रहे. &amp;nbsp;डस्टबिन को लंबे समय तक साफ रखने के लिए हमेशा कचरा बैग का इस्तेमाल करें, गीले कचरे को रोजाना बाहर निकालें और बैग के नीचे थोड़ा-सा बेकिंग सोडा छिड़क दें.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Skin Care Tips: सिर्फ Sunscreen लगाने से नहीं चलेगा काम, टैनिंग से बचने के लिए बदलनी पड़ेंगी ये 5 आदतें</title>
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        <description><![CDATA[ Skin Care Tips: गर्मियों में तेज धूप और हानिकारक UV किरणों की वजह से त्वचा पर टैनिंग की समस्या आम हो जाती है. कई लोग इससे बचने के लिए सिर्फ सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन केवल सनस्क्रीन लगाना ही काफी नहीं होता. त्वचा को धूप से सुरक्षित रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करना भी जरूरी होता है.
टैनिंग से बचने के लिए सही स्किन केयर रूटीन के साथ-साथ धूप में निकलने के तरीके, खान-पान और कुछ छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान देना चाहिए. आइए जानते हैं ऐसी 5 आदतों के बारे में, जो त्वचा को धूप के असर से बचाने में मदद कर सकती हैं.
सही आदतों से होता है धूप से बचाव&amp;nbsp;
सनस्क्रीन UV किरणों से बचाव का एक अहम हिस्सा है, लेकिन इसे सही तरीके से लगाना भी जरूरी है. घर से बाहर निकलने से कुछ समय पहले सनस्क्रीन लगाना और जरूरत के अनुसार दोबारा इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. इसके साथ धूप से बचने के दूसरे तरीकों को अपनाना भी जरूरी है.
तेज धूप में निकलने का समय बदलना होगा
दिन के बीच के समय में सूरज की किरणें ज्यादा तेज होती हैं. इस दौरान लंबे समय तक सीधे धूप के संपर्क में रहने से त्वचा पर टैनिंग बढ़ सकती है. अगर संभव हो तो दोपहर के समय ज्यादा देर तक धूप में रहने से बचना चाहिए और बाहर निकलते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए.
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सिर्फ चेहरा नहीं, शरीर के खुले हिस्सों की भी करें देखभाल
अक्सर लोग केवल चेहरे पर ध्यान देते हैं, लेकिन हाथ, गर्दन, पैर और शरीर के दूसरे खुले हिस्से भी धूप से प्रभावित होते हैं. इसलिए त्वचा के सभी खुले हिस्सों की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है. कपड़ों और अन्य सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है. छाता, टोपी, स्कार्फ और सनग्लास जैसी चीजें सीधे धूप से बचाव में मदद कर सकती हैं. ये उपाय खासतौर पर तब जरूरी हो जाते हैं, जब लंबे समय तक बाहर रहना पड़े. केवल स्किन प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहने की बजाय इन तरीकों को भी अपनाना चाहिए.
खान-पान और त्वचा की देखभाल पर भी दें ध्यान
त्वचा की सेहत के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना जरूरी है. फल, सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं. इसके अलावा बाहर से आने के बाद त्वचा की सफाई और मॉइस्चराइजिंग जैसी सामान्य देखभाल भी जरूरी होती है. बता दें, टैनिंग एक दिन में खत्म होने वाली समस्या नहीं है. त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए नियमित देखभाल और धूप से बचाव की आदतें अपनानी पड़ती हैं. सनस्क्रीन के साथ सही लाइफस्टाइल और सावधानियां अपनाकर त्वचा को UV किरणों के प्रभाव से काफी हद तक बचाया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bihar Heli Tourism: बिहार में हेली टूरिज्म शुरू, सिर्फ ₹2100 में पटना तो ₹6000 में होगी कैमूर की हवाई सैर</title>
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        <description><![CDATA[ Bihar Heli Tourism Service Launch 2026: अगर आप बिहार को एक अलग अंदाज में देखना चाहते हैं, तो अब आपके लिए शानदार मौका है. राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेली टूरिज्म और एयर टूरिज्म सेवा शुरू करने का फैसला लिया है. 15 जुलाई से शुरू होने वाली इस पायलट परियोजना के तहत पर्यटक हेलीकॉप्टर और छोटे विमान के जरिए बिहार के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक कम समय में पहुंच सकेंगे. इसके साथ ही अब आसमान से पटना शहर और कैमूर की खूबसूरत वादियों का नजारा देखने का भी मौका मिलेगा. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आपको घूमने जाना है, तो आपको कितना खर्च करना पड़ेगा.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;पटना से राजगीर के लिए हेलीकॉप्टर
इस योजना के तहत पटना से राजगीर के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जा रही है, जिसमें प्रति यात्री 4,000 रुपये का किराया तय किया गया है. वहीं बिहार के एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व वाले वाल्मीकिनगर तक छोटे विमान से यात्रा की सुविधा मिलेगी. इसके लिए प्रति सीट 5,000 रुपये खर्च करने होंगे. अगर आप कैमूर जिले में स्थित प्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध रहेगी. इस यात्रा का किराया 6,000 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है. इससे सड़क मार्ग की तुलना में यात्रा काफी आसान और समय बचाने वाली होगी. इसके अलावा आपको शानदार व्यू देखने का मजा मिलेगा.&amp;nbsp;
पटना घूमने के शौकीनों के लिए भी खास इंतजाम
बिहार की राजधानी पटना घूमने के शौकीनों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं. हर सप्ताहांत 10 मिनट की हेलीकॉप्टर जॉय राइड कराई जाएगी. इस दौरान पर्यटक आसमान से पटना शहर का नजारा देख सकेंगे. एक हेलीकॉप्टर में अधिकतम पांच यात्रियों को बैठने की अनुमति होगी और प्रति व्यक्ति किराया 2,100 रुपये रखा गया है. जो लोग पहली बार हेलीकॉप्टर की सवारी करना चाहते हैं, उनके लिए यह अनुभव यादगार साबित हो सकता है.
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कौन करेगा इसका संचालन?
अब आते हैं इस मुद्दे पर कि यह पूरा कार्यक्रम किसकी देखरेख में होगा. इस पूरी योजना की बुकिंग, रिफंड और टूर पैकेज का संचालन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम करेगा, जबकि उड़ानों का संचालन नागरिक उड्डयन निदेशालय की निगरानी में होगा. यात्रियों की सुरक्षा और हेलिपैड की व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन भी जिम्मेदार रहेगा. राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से बिहार के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। हाल के वर्षों में राज्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में हवाई पर्यटन शुरू होने से राजगीर, वाल्मीकिनगर, कैमूर और पटना जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से अधिक आसान होगी.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>China Companionship Economy: अकेलापन बना बिजनेस! चीन में लोग पैसे देकर खरीद रहे &amp;apos;अपनापन&amp;apos;, बदल रही मॉडर्न लाइफस्टाइल</title>
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        <description><![CDATA[ China Companionship Economy: आपने अक्सर सुना होगा कि अकेलापन कम करने के लिए लोग बाहर घूमने जाते हैं, अपने परिवार और दोस्तों से बात करते हैं. हालांकि, आपको जानकर थोड़ी हैरानी जरूर होगी कि कोई अकेलापन दूर करने के लिए पैसे भी दे रहा है. जी हां, पैसे देकर अपना अकेलापन दूर करना. इन दिनों चीन में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है, जिसमें लोग अकेलेपन को एक बिजनेस की नजर से देखने लगे हैं. इसे उन्होंने &#039;कंपेनियनशिप इकॉनमी&#039; का नाम दिया है, जिसका मतलब है साथ देने वाली कंपनी.
इसमें लोग किसी अजनबी को कुछ घंटों के लिए हायर करते हैं, ताकि वह उनके साथ समय बिताएं. उनकी बातें सुने और उन्हें अकेलापन महसूस न हो. हालांकि, बात यहीं तक सीमित नहीं है, इस सर्विस में लोग हाइकिंग पर भी जाते हैं, साथ में घूमने जाते हैं. कुल मिलाकर उनका काम बस एक-दूसरे का अकेलापन दूर करना होता है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
कितना बड़ा है यह बिजनेस?&amp;nbsp;
इस सर्विस के पीछे की सबसे बड़ी वजह मॉडर्न लाइफस्टाइल है, यानी जो युवा अपने परिवार से दूर रहता है, काम के चक्कर में फंसा रहता है और घर-परिवार की चिंता में रहता है. उनका सहारा बनना और उन्हें अकेलेपन से दूर रखना ही इस सर्विस का मकसद है. इस कंपेनियनशिप इकॉनमी का कोई सरकारी आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन सरकारी मीडिया के अनुमान के मुताबिक साल 2025 में इसकी कीमत करीब 50 अरब युआन यानी 7.4 अरब डॉलर के आसपास रही है.
यह काम ज्यादातर स्टूडेंट्स और युवा गिग वर्कर्स कर रहे हैं, जो डौयिन और श्याओहोंगशू जैसे सोशल मीडिया ऐप पर अपनी सर्विस का प्रचार करते हैं. इस सर्विस में केवल कामकाज से परेशान युवा या युवतियों के लिए ही नहीं, बल्कि रिलेशनशिप से परेशान लोग, हेल्थ इश्यू से जूझ रहे लोग और हर तरह की परेशानियों से गुजर रहे लोगों को भी शामिल किया गया है.
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अकेलेपन के पीछे की असली वजह&amp;nbsp;
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई सामाजिक वजहें हैं. चीन में लंबे समय से चल रही युवा बेरोजगारी की वजह से भी बहुत से ग्रेजुएट्स गिग वर्क की तरफ जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें स्थायी नौकरी नहीं मिल पा रही. इसके अलावा इसके पीछे एक और बड़ी वजह है कि चीन में एक परिवार में एक बच्चा वाला नियम रहा है, जिसका असर यह हुआ कि कई बच्चों के भाई-बहन नहीं हैं. इसी वजह से वहां अकेलापन ज्यादा देखने को मिलता है. आज की जनरेशन में युवा अपनी परेशानियों को अपने परिवार और दोस्तों तक से शेयर करना पसंद नहीं करते, जिसके कारण वे अकेले ही रहते हैं. ऐसे में पैसे देकर किसी अनजान व्यक्ति से अपनी परेशानियां शेयर करना उन्हें ज्यादा आसान लगता है. यही वजह है कि यह सर्विस धीरे-धीरे लोगों के बीच चर्चा में आ रही है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>China, Companionship, Economy:, अकेलापन, बना, बिजनेस, चीन, में, लोग, पैसे, देकर, खरीद, रहे, अपनापन, बदल, रही, मॉडर्न, लाइफस्टाइल</media:keywords>
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        <title>Khasta Samosa Recipe: हलवाई जैसे खस्ता समोसे घर पर क्यों नहीं बनते? नोट कर लें आटा गूंथने और तलने का यह सीक्रेट तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/khasta-samosa-recipe-हलवाई-जैसे-खस्ता-समोसे-घर-पर-क्यों-नहीं-बनते-नोट-कर-लें-आटा-गूंथने-और-तलने-का-यह-सीक्रेट-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ Khasta Samosa Recipe: चाय के साथ गरमा-गरम समोसे खाने को मिल जाएं तो मजा आ जाता है. अब तो वैसे भी बरसात का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में खस्ता-समोसे खाने की चाह तो सभी को होने लगती है. हालांकि, हर बार हलवाई के पास से खस्ता और समोसे लाना संभव नहीं हो पात. ऐसे में आप घर पर ही क्रिस्पी समोसे और खस्ते बनाना चाहते होंगे. ऐसे में आप कुछ आसान से स्टेप फॉलो करेंगे तो घर पर भी हलवाई जैसा खस्ता और समोसे का स्वाद का लुत्फ उठा सकते हैं. चलिए जानते हैं तरीका..&amp;nbsp;
आटा गूंथते समय करें ये काम
समोसे एकदम करारे बनाने के लिए आप आटे में थोड़ी सी सूजी मिला सकते हैं. अगर एक कप आटा ले रहे हैं तो दो चम्मच सूजी मिला दें. अगर सूजी दानेदार हो तो आप मिक्सर में ग्राइंड कर के मिला सकते हैं. क्योंकि खस्तापन एड करने का काम सूजी ही करती है, इसलिए इसे जरूर मिलाएं.
समोसे की बाहरी परत को टेस्टी बनाने का सीक्रेट तरीका
समोसे की स्टफिंग के साथ-साथ इसकी बाहरी परत का भी स्वादिष्ट होना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp; इसके लिए आटा गूंथते समय हाथों से रगड़कर (क्रश करके) थोड़ी सी अजवाइन डालें. इससे समोसे में बेहतरीन खुशबू और लाजवाब फ्लेवर आता है. इसके अलावा आटे में सही मात्रा में नमक जरूर मिलाएं, इससे समोसे की बाहरी परत खाने में बिल्कुल भी फीकी नहीं लगेगी.
यह भी&amp;nbsp; पढ़ेंः Recipes With Curdled Milk : ज्यादातर लोग फटे दूध से सिर्फ पनीर बनाते हैं, लेकिन यही फटा हुआ दूध कई टेस्टी मिठाइयों और दूसरी डिशेज बनाने में भी काम आता है.
खस्ता समोसे बनाने के लिए ऐसे लगाए मोयन
आटा गूंथते समय मोयन लगाना सबसे जरूरी होता है. वैसे तो मोयन तेल या घी का लगाएं यह आप पर निर्भर करता है, लेकिन स्वाद के लिहाज से देखा जाए तो घी का उपयोग बेहतर होता है, खास बात यह कि इससे हलवाई जैसा समोसे खस्ते बनते हैं और उनकी खुशबू भी बेहद अच्छी आती है.
&amp;nbsp;आटा गूंथने का सीक्रेट तरीका जानना है जरूरी&amp;nbsp;
आटे में मोयन मिक्स करने के बाद, थोड़ा-थोड़ा पानी डालें और उसे इकट्ठा करते हुए एक कड़ा डोव तैयार कर लें. हलवाई जैसे खस्ता समोसे के लिए फिर इसे ढककर कम से कम 15 से 20 तक छेड़ दें. ताकि मिला हुआ सूजी और मोयन अच्छे से सेट हो जाए. अब आप इससे समोसे बनाकर तैयार कर सकते हैं वह भी हलवाई जैसे खस्ता समोसे.
यह भी&amp;nbsp; पढ़ेंः Kathal Biryani Recipe: घर पर ऐसे बनाएं कटहल बिरयानी, नॉनवेज लवर भी छोड़ देंगे चिकन मटन? ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Fiber Rich Foods : बिना सलाद खाए फाइबर कैसे बढ़ाएं? रोज के खाने में इन 4 देसी चीजों को मिलाकर पेट रखें एकदम साफ</title>
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        <description><![CDATA[ Fiber Rich Foods : आजकल ज्यादातर लोग पेट साफ न होना, कब्ज, गैस और पाचन से जुड़ी समस्याओं से परेशान रहते हैं. ऐसे में अक्सर सबसे पहले सलाद खाने की सलाह दी जाती है. हालांकि कई लोग रोजाना सलाद खाना पसंद नहीं करते या फिर इसे अपनी डाइट में नियमित रूप से शामिल नहीं कर पाते हैं. ऐसे में शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ाने के लिए सिर्फ सलाद पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. डेली के खाने में मौजूद कुछ आसान और देसी चीजों की मदद से भी पूरी मात्रा में फाइबर लिया जा सकता है.
फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद करता है, बल्कि कब्ज से राहत देने, लंबे समय तक पेट भरा रखने और दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के खतरे को कम करने में भी जरूरी होता है. तो आइए जानते हैं कि बिना सलाद खाए किन 4 चीजों को डाइट में शामिल करके फाइबर बढ़ाया जा सकता है.
शरीर के लिए फाइबर क्यों जरूरी है?
फाइबर एक तरह का कार्बोहाइड्रेट है, जो पौधों से मिलने वाले फूड प्रोडक्ट्स में पाया जाता है. यह फल, सब्जियां, दालें, बीन्स, मटर, आलू, चावल, ब्रेड, पास्ता, मेवे और बीज जैसी चीजों में मौजूद होता है. फाइबर पाचन तंत्र को हेल्दी रखने, कब्ज से बचाने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. कई रिसर्च में यह भी बताया गया है कि फाइबर से भरपूर डाइट दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, रोज लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए.
क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना जरूरी है?
आजकल बाजार में फाइबर पाउडर और सप्लीमेंट आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन इन्हें हमेशा सबसे अच्छा ऑप्शन नहीं माना जाता है. कई बार इनके सेवन से पेट फूलना या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है. वहीं फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसे नेचुरल फाइबर वाले फूड प्रोडक्ट्स शरीर को फाइबर के साथ कई जरूरी विटामिन और मिनरल भी देते हैं. इसलिए फाइबर की जरूरत पूरी करने के लिए नेचुरल फूड प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है.
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बिना सलाद खाए फाइबर बढ़ाने वाली 4 देसी चीजें
1. चिया सीड्स - अगर आप बिना ज्यादा मेहनत के फाइबर बढ़ाना चाहते हैं, तो चिया सीड्स अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं. सिर्फ 2 बड़े चम्मच चिया सीड्स में लगभग 10 ग्राम फाइबर होता है. इन्हें पानी में भिगोकर, दही में मिलाकर या स्मूदी में डालकर खाया जा सकता है.
2. लें और बीन्स - चना, राजमा, लोबिया, मटर और मसूर जैसी दालें फाइबर और प्रोटीन दोनों का अच्छा स्रोत हैं. लगभग 1 कप पकी हुई दाल या बीन्स में 12 से 15 ग्राम तक फाइबर मिल सकता है. इन्हें दाल, करी, चाट, सूप या सलाद में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है.
3. ओट्स या जौ - ओट्स और जौ भी फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हैं. 1 कप पके हुए ओट्स या जौ में लगभग 5 से 6 ग्राम फाइबर होता है. ओट्स में मौजूद बीटा-ग्लूकॉन नाम का फाइबर शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद करता है. इन्हें नाश्ते में दलिया, ओवरनाइट ओट्स या दूसरे तरीकों &amp;nbsp;से खाया जा सकता है.
4. इसबगोल - इसबगोल (Psyllium Husk) फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है. 1 बड़ा चम्मच इसबगोल में लगभग 7 से 10 ग्राम फाइबर होता है. यह मल को नरम बनाने और उसे आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है. इसे रात में गुनगुने पानी या दूध के साथ लिया जा सकता है. इसबगोल को सिर्फ पानी या दूध के साथ ही नहीं, बल्कि ब्रेड, रोटी, केक और अन्य बेक की जाने वाली रेसिपी में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है, जबकि टेस्ट पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है.&amp;nbsp;
फाइबर बढ़ाने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान
फाइबर बढ़ाने के लिए आप अपनी डाइट में ब्राउन राइस, होल व्हीट ब्रेड, ओट्स और होल व्हीट पास्ता भी शामिल कर सकते हैं. इसके अलावा रोजाना फल, हरी सब्जियां, बीन्स, मटर, दालें, मेवे और बीज खाने से भी शरीर को भरपूर फाइबर मिलता है, जिससे पाचन बेहतर रहता है और पेट स्वस्थ रहता है. साथ ही फलों, सब्जियों और आलू के छिलके हटाने की जगह अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें. इनके छिलकों में भी अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - &amp;nbsp;क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Mughlai Chicken Recipe:घर पर मुगलई चिकन बनाने के लिए किन मसालों की होगी जरूरत? जानिए इसकी आसान रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Mughlai Chicken Recipe: मुगलाई चिकन एक रेस्टोरेंट स्टाइल की उत्तर भारतीय रेसिपी है. ये अपनी गाढ़ी, क्रीमी ग्रेवी और मसालों के खास संतुलन के लिए जाना जाता है. यह डिश मुगलई खानपान की लोकप्रिय रेसिपीज में शामिल है और खास मौकों पर अक्सर बनाई जाती है. अगर आप भी घर पर रेस्टोरेंट जैसा स्वाद चाहते हैं, तो सही मसालों का चुनाव और पकाने का तरीका जानना जरूरी है. थोड़ी-सी तैयारी और सही सामग्री के साथ आप आसानी से स्वादिष्ट मुगलई चिकन बना सकते हैं.
मुगलई चिकन बनाने के लिए जरूरी सामग्री
इस रेसिपी के लिए चिकन के साथ दही, प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट, काजू का पेस्ट, ताजी क्रीम, घी या तेल और हरी धनिया की जरूरत होगी. मसालों में लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर, गरम मसाला, काली मिर्च, इलायची, लौंग, दालचीनी, तेजपत्ता और नमक शामिल करें. चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए केसर या जावित्री का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
ऐसे करें मैरीनेट&amp;nbsp;
सबसे पहले चिकन को गाढ़ा दही या योगर्ट, अदरक-लहसुन पेस्ट, नमक और थोड़े से मसालों के साथ 30 मिनट तक मैरिनेट करें. इसके बाद कड़ाही में घी या तेल गर्म करके साबुत मसालों का तड़का लगाएं. बारीक कटा प्याज सुनहरा होने तक भूनें और फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें. अब पिसे हुए मसाले डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह भूने, इसके बाद काजू का पेस्ट मिलाएं और कुछ मिनट पकाने के बाद मैरिनेट किया हुआ चिकन डाल दें. चिकन को मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाकर ढककर पकाएं. जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालें और चिकन के नरम होने तक धीमी आंच पर पकने दें, 15-20 मिनट बाद चिकन पक जाएगा. आखिर में ताजी क्रीम और गरम मसाला मिलाकर 3&amp;ndash;5 मिनट और पकाएं.
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यह सीक्रेट तरीका याद रखें: &amp;nbsp;
काजू और बादाम को उबलते पानी में 15 मिनट के लिए भिगो दें. फिर दोनों को पानी सहित ब्लेंडर में डालें और चिकना होने तक ब्लेंड करें. बादाम का पेस्ट एकदम चिकना बनाने के लिए आपको शायद और पानी की आवश्यकता हो सकती है. आप चाहें तो पिसे हुए बादाम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं
परोसने का तरीका
तैयार मुगलई चिकन को हरा धनिया से सजाकर गर्मागर्म परोसें. इसका स्वाद बटर नान, तंदूरी रोटी, रूमाली रोटी, पराठे या जीरा राइस के साथ सबसे अच्छा लगता है. यदि चाहें तो ऊपर से थोड़ी फ्रेश क्रीम डालकर इसे और आकर्षक बना सकते हैं.
ध्यान रखने योग्य बातें
मुगलई चिकन का असली स्वाद धीमी आंच पर पकाने से आता है. मसालों को अच्छी तरह भूनें, लेकिन जलने न दें. काजू का पेस्ट और क्रीम ग्रेवी को गाढ़ापन और मलाईदार स्वाद देते हैं, इसलिए इन्हें अंत में सही मात्रा में मिलाएं. मैरिनेशन के लिए पर्याप्त समय देने से चिकन अधिक मुलायम और स्वादिष्ट बनता है.
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        <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Best Shiva Temples: मानसून में स्वर्ग से कम नहीं लगते भारत के ये मंदिर, सावन में जरूर करें यहां के दर्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Best Shiva Temples:&amp;nbsp;सावन का महीना आते ही देशभर के कई श्रद्धालु दर्शन करने महादेव के मंदिर जाते हैं. जिसके कारण देशभर के हर शिव मंदिरों में भीड़ बनी रहती है. वैसे तो शिव भगवान का हर मंदिर बहुत सुंदर होता ही है, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे होते हैं जो देखने में किसी स्वर्ग से कम नहीं लगते हैं. और सबसे खास बात है ये सारे मंदिर भारत में ही उपलब्ध है, जहां जाना हर किसी के लिए एक अलग ही अनुभव होता है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
हिमालय की गोद में बसे मंदिर
स्वर्ग की बात करें तो उत्तराखंड का नाम सबसे पहले आता है और उत्तराखंड में स्थित महादेव का मंदिर यानी केदारनाथ धाम की तो बात ही अलग है.&amp;nbsp; बर्फीले पहाड़ों के बीच स्थित ये मंदिर मानसून में बादलों से घिरा रहता है और चारों तरफ हरियाली फैली रहती है, जो इसे बेहद खूबसूरत बना देती है.&amp;nbsp; इसी तरह तुंगनाथ मंदिर भी है, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है.&amp;nbsp; यहां तक पहुंचने के लिए थोड़ी ट्रेकिंग करनी पड़ती है, लेकिन रास्ते का नजारा इतना सुंदर होता है कि थकान महसूस ही नहीं होती. &amp;nbsp;कश्मीर में अमरनाथ गुफा भी इसी मौसम में यात्रा के लिए खुलती है, जहां बर्फ से बना प्राकृतिक शिवलिंग हर साल श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.&amp;nbsp; पहाड़ी इलाकों के ये मंदिर मानसून में जितने पवित्र लगते हैं, उतने ही मनमोहक भी नजर आते हैं.&amp;nbsp;
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मैदानी इलाकों के प्रसिद्ध शिव मंदिर
पहाड़ों के अलावा अगर हम मैदानी इलाकों की बात करें तो, मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और सावन के हर सोमवार को यहां भव्य सवारी निकाली जाती है. इसके अलावा वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर भी सावन में विशेष रूप से सजाया जाता है, जहां गंगा नदी के किनारे भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. साथ ही दक्षिण भारत में कर्नाटक के मैसूर शहर के पास चामुंडी हिल्स पर बना मंदिर भी मानसून में हरियाली से घिरा रहता है. यही वजह है कि हर साल यहां लाखों में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Healthy Millet Khichdi Kids Will Love: घर में रखे इन मोटे अनाजों से ऐसे बनाएं हेल्दी और स्वादिष्ट खिचड़ी, उंगलियां चाटने लगेंगे बच्चे</title>
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        <description><![CDATA[ Healthy Millet Khichdi Kids Will Love: बच्चों के कितने नखरे होते हैं खाने को लेकर ये बात तो हम सभी जानते हैं इसलिए बच्चों के लिए अक्सर इस प्रकार का खाना बनाएं जो उन्हें पसंद आए और वह पूरा खा भी जाए बिना किसी नखरे किए. ऐसे में आप मोटे अनाजों की मदद से ऐसी खिचड़ी बना सकते हैं जो बच्चों के लिए हेल्दी भी है और स्वादिष्ट भी और बच्चे इस प्रकार से बनी हुई खिचड़ी को मजे में खाना पसंद करेंगे. साथ ही यह खिचड़ी 3 से 4 बच्चों के लिए बन सकती है और यह बड़ों के लिए भी पर्याप्त है.
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इस खिचड़ी को बनाने के लिए इन सामग्रियों की जरूरत पड़ेगी:
इस खिचड़ी को बनाने के लिए आपको जरूरत पड़ेगी आधा कप बाजरा, एक चौथाई कप ज्वार, एक चौथाई कप रागी लेकिन यह वैकल्पिक है यानी अगर आप चाहें तो इसका उपयोग खिचड़ी की सामग्री में कर सकते हैं. उसके बाद आधा कप धुली मूंग दाल, एक छोटा बारीक कटा हुआ प्याज, एक टमाटर उसे भी बारीक काट लें, एक छोटी कटी हुई गाजर, एक चौथाई हरी मटर, एक छोटा चम्मच जीरा, एक छोटा चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक, आधा छोटा चम्मच हल्दी, आधा छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर इसको भी आप स्वादानुसार डाल सकते हैं. देसी घी, चार से पांच कप पानी, और हरा धनिया लेकिन धनिया का प्रयोग खिचड़ी बनने के बाद करना है उसके ऊपर से डालने के लिए क्योंकि बच्चों को अक्सर सजी हुई चीजें ही पसंद आती हैं.
इस प्रकार बनाएं खिचड़ी को:
सबसे पहले बाजरा लीजिए और फिर ज्वार और मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर 4 से 5 घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद प्रेशर कुकर में देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा डालकर चटकाएं. अब अदरक और प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इसके बाद टमाटर, गाजर और मटर डालकर 2 से 3 मिनट तक पकाएं. अब हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक इन सभी को डालकर अच्छी तरह मिला लें. फिर भीगे हुए मोटे अनाज और मूंग दाल डालकर 2 मिनट तक हल्का भूनें. जब यह भुन जाए इसके बाद 4 से 5 कप पानी डालकर कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर 5 से 6 सीटी आने तक पकाएं. प्रेशर निकलने के बाद खिचड़ी को अच्छी तरह चला लें. अगर खिचड़ी ज्यादा गाढ़ी लगे तो थोड़ा गर्म पानी मिलाकर अपनी पसंद के अनुसार पतली कर सकते हैं. आखिर में ऊपर से एक चम्मच देसी घी और हरा धनिया डालें. इसे दही, अचार या पापड़ के साथ गर्मागर्म बच्चों के लिए परोस सकते हैं.
अगर आप हमेशा इस प्रकार ही इस खिचड़ी को बनाते हैं तो बच्चे इस खिचड़ी को खाना पसंद करेंगे और वो आगे आपसे यह खिचड़ी खाने के लिए कहेंगे भी. साथ ही जब भी आप यह खिचड़ी को बनाएं तो हमेशा उनकी थाली सजाकर परोसें क्योंकि बच्चों को आकर्षित चीजें दिलचस्प लगती हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Temple Dating: मंदिरों में डेटिंग कैंप से बढ़ेगी आबादी? घटती जन्मदर रोकने के लिए सरकार का अनोखा दांव</title>
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        <description><![CDATA[ Buddhist Temple Matchmaking Event 2026: दुनियाभर में कई देश घटती जन्मदर की चुनौती से जूझ रहे हैं, लेकिन साउथ कोरिया ने इससे निपटने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया है, जिसकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है. यहां सरकार और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से बौद्ध मंदिरों में खास डेटिंग कैंप आयोजित किए जा रहे हैं. इनका मकसद युवाओं को एक-दूसरे से मिलने, रिश्ते बनाने और आगे चलकर शादी के लिए प्रेरित करना है, ताकि देश में लगातार गिर रही जन्मदर को बढ़ाने में मदद मिल सके.&amp;nbsp;
क्या है इस कैंपों का उद्देश्य?
इन कैंपों का आयोजन शांत और प्राकृतिक वातावरण वाले बौद्ध मंदिरों में किया जाता है. इसमें शामिल होने वाले युवक-युवतियां अलग-अलग गतिविधियों के जरिए एक-दूसरे को करीब से जानने का मौका पाते हैं. चाय पर बातचीत, जंगल में साथ टहलना, समूह गतिविधियां, योग सत्र, परिचय कार्यक्रम और छोटे-छोटे डेटिंग राउंड जैसी कई गतिविधियां इसमें शामिल होती हैं. इनका उद्देश्य केवल जोड़ी बनाना नहीं, बल्कि युवाओं को बिना किसी दबाव के एक-दूसरे को समझने का अवसर देना है.
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&amp;nbsp;रिश्ते की शुरुआत करने का बेहतर अवसर
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में आयोजित ऐसे एक कार्यक्रम में महज 20 सीटों के लिए 4,225 से अधिक लोगों ने आवेदन किया. इससे पता चलता है कि युवाओं में ऐसे आयोजनों को लेकर काफी दिलचस्पी बढ़ रही है. इनमें हिस्सा लेने वाले कई लोगों का कहना है कि आज की व्यस्त लाइफस्टाइल में नए लोगों से मिलना आसान नहीं रह गया है. ऐसे में मंदिर का शांत माहौल उन्हें गंभीरता से किसी रिश्ते की शुरुआत करने का बेहतर अवसर देता है.
भविष्य से जुड़ी एक सामाजिक पहल
आयोजकों का मानना है कि यह सिर्फ डेटिंग कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ी एक सामाजिक पहल है. उनका कहना है कि युवाओं के बीच संवाद बढ़ेगा तो शादी और परिवार शुरू करने को लेकर सकारात्मक सोच भी विकसित हो सकती है. यही वजह है कि इन कार्यक्रमों में धार्मिक माहौल के साथ सामाजिक जुड़ाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है.
दुनिया की सबसे कम जन्मदर वाले देशों में शामिल
साउथ कोरिया कई वर्षों से दुनिया की सबसे कम जन्मदर वाले देशों में शामिल रहा है. हालांकि हाल के दो वर्षों में जन्मदर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, फिर भी यह आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी स्तर से काफी नीचे है. एक्सपर्ट का मानना है कि महंगी जीवनशैली, करियर की प्राथमिकता, देर से शादी और युवाओं के बीच घटती सामाजिक मेलजोल जैसी वजहों ने इस स्थिति को और गंभीर बनाया है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Indoor pure air tips: घर के अंदर की हवा को बनाएं एकदम शुद्ध! ये 5 इंडोर प्लांट्स बढ़ाएंगे घर की खूबसूरती और ऑक्सीजन</title>
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        <description><![CDATA[ Indoor pure air tips:&amp;nbsp; हम बाहर की प्रदूषण की चिंता करते हैं वहीं हमें घर के वातावरण की भी चिंता करनी चाहिए, क्योंकि धुआं, धूल&amp;nbsp; और अन्य तत्व, और कम वैन्टीलेशन घर के वातावरण को जहरीला बना सकता है. घर को हरा भरा और ताजगी से भरपूर बनाने के लिए लोग अक्सर इनडोर पौधे लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ पौधे ऐसे भी हैं जो दिन रात ऑक्सीजन देने और घर की हवा को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे इनडोर पौधों के बारे में जिनकी देखभाल करना बेहद आसान है. ये पौधे न सिर्फ घर की खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि वायु गुणवत्ता सुधारने, तनाव कम करने और बेहतर वातावरण बनाने में भी सहायक माने जाते हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि ये पौधे 24 घंटे घर को फ्रेश रखते हैं.
घर के अंदर की हवा क्यों खराब होती है
प्राकृतिक हवा का न आना, रसोई में खाना बनाते समय निकलने वाला धुआं, तड़का और गैस स्टोव से खतरनाक गैस का निकलना, घर के अंदर अगरबत्ती जलाना भारी प्रदूषण पैदा करते हैं. फिनाइल स्प्रे और केमिकल वाले क्लीनर वाष्पशील कार्बनिक यौगिक छोड़ते हैं जो हवा को जहरीला बनाते हैं. &amp;nbsp;ऐसे में घर के अंदर की हवा एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है. यहां तक कि स्वस्थ लोग भी एलर्जी या दूसरी बीमारियां की चपेट में आ सकते हैं.
यह भी&amp;nbsp; पढ़ेंः &amp;nbsp;Rats In House: क्या चूहों ने कर दिया है नाक में दम? देखें बिना जहर के घर से बाहर खदेड़ने की जादुई ट्रिक
इंडोर प्लांट्स फायदेमंद क्यों माने जाते हैं
इंडोर प्लांट्स प्राकृतिक रूप से एयर प्यूरीफायर की तरह काम करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ये हवा से कार्बन डाईऑक्साइड को कम करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं, हानिकारक प्रदूषणों को दूर कर देते हैं. इसके अलावा, ये घर की सजावट को प्राकृतिक रूप देते हैं और कार्य क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

पीस लिली: एक ऐसा पसंदीदा पौधा है जो घर के अंदर भी आसानी से खिल जाता है. ये पौधे अनोखे फूल देते हैं. इसे सबसे प्रभावी पौधों में से एक माना जाता है, जो हवाओं को शुद्ध करते है. &amp;nbsp;
&amp;nbsp;एलोवेरा: एलोवेरा एक ऐसा पौधा जो हर घर में आम होता है, हालांकि, यह हवा को शुद्ध करने की क्षमता भी रखता है, जिससे घरेलू डिटर्जेंट, पेंट और गोंद में पाए जाने वाले कुछ सामान्य रसायनों घर को फ्रेश रखते हैं.
स्नेक प्लांट: यह कम रोशनी और कम पानी में भी आसानी से पनपता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रात के समय भी कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलता है, जिससे बेडरूम के लिए यह सबसे उत्तम पौधा माना जाता है
मनी प्लांट: वास्तु और विज्ञान दोनों के लिहाज से यह बेहद लोकप्रिय है, यह घर के बंद कमरों में खराब हवा को फ्रेश करने और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाने में मदद करता है
स्पाइडर प्लांट: अपनी लंबी, धारीदार पत्तियों वाला यह पौधा बहुत तेजी से बढ़ता है और इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. यह हवा से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को दूर करने में बहुत कारगर है.

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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:16 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Indoor, pure, air, tips:, घर, के, अंदर, की, हवा, को, बनाएं, एकदम, शुद्ध, ये, इंडोर, प्लांट्स, बढ़ाएंगे, घर, की, खूबसूरती, और, ऑक्सीजन</media:keywords>
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        <title>Crispy Medu Vada: क्या मेदू वड़े बाहर से कुरकुरे और अंदर से सॉफ्ट नहीं बनते? आज ही नोट करें ये सीक्रेट टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Soft And Fluffy Medu Wada Recipe Tips: दक्षिण भारत का मशहूर स्नैक मेदू वड़ा अब पूरे देश में पसंद किया जाता है. नारियल की चटनी और सांभर के साथ परोसा जाने वाला यह व्यंजन बाहर से सुनहरा और कुरकुरा, जबकि अंदर से बेहद मुलायम होता है. हालांकि, घर पर मेदू वड़ा बनाते समय कई लोगों की शिकायत रहती है कि वड़ा या तो सख्त हो जाता है या फिर तलते समय ज्यादा तेल सोख लेता है. अगर आप भी रेस्टोरेंट जैसा परफेक्ट मेदू वड़ा बनाना चाहते हैं, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
दाल को 2 से 3 घंटे तक पानी में भिगो दें
मेदू वड़ा बनाने के लिए सबसे पहले साबुत उड़द दाल को 2 से 3 घंटे तक पानी में भिगो दें. इसके बाद दाल का पानी पूरी तरह निकाल लें और बहुत कम पानी डालकर गाढ़ा बैटर पीसें. बैटर जितना गाढ़ा और स्मूद होगा, वड़ा उतना ही अच्छी तरह आकार लेगा और तलते समय नहीं फैलेगा.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp;5 से 8 मिनट तक अच्छी तरह फेंटें
बैटर तैयार होने के बाद उसे तुरंत इस्तेमाल न करें. पहले लकड़ी के चम्मच, व्हिस्क या हाथों की मदद से 5 से 8 मिनट तक अच्छी तरह फेंटें. इस प्रक्रिया से बैटर में हवा भरती है, जिससे मेदू वड़ा बाहर से क्रिस्पी और अंदर से हल्का व स्पंजी बनता है. बैटर सही तैयार हुआ है या नहीं, इसकी जांच करने के लिए उसका थोड़ा-सा हिस्सा पानी से भरे बर्तन में डालें. अगर बैटर पानी की सतह पर तैरने लगे, तो समझिए वह तलने के लिए तैयार है.
अब बैटर में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, अदरक, करी पत्ता, हींग और स्वादानुसार नमक मिलाएं. चाहें तो बारीक कटी गाजर और हरा धनिया भी डाल सकते हैं. अगर मेदू वड़ा किसी पूजा या प्रसाद के लिए बना रहे हैं, तो प्याज की जगह कुटी हुई काली मिर्च और जीरा डालना बेहतर रहेगा.
वड़ा बनाते समय क्या रखें ध्यान?
वड़ा का आकार बनाते समय हाथों या चम्मच को हल्का गीला रखें. इससे बैटर चिपकेगा नहीं और बीच में छेद बनाना भी आसान होगा. तेल को पहले अच्छी तरह गर्म करें, लेकिन वड़ा हमेशा मध्यम आंच पर ही तलें. तेज आंच पर वड़ा बाहर से जल्दी भूरा हो जाएगा और अंदर से कच्चा रह सकता है, जबकि बहुत धीमी आंच पर वह ज्यादा तेल सोख लेगा. तलते समय वड़े को बीच-बीच में पलटते रहें, ताकि वह हर तरफ से समान रूप से सुनहरा और कुरकुरा बने. अगर बैटर गलती से पतला हो जाए, तो उसमें थोड़ा-सा चावल का आटा, सूजी या मैदा मिलाकर उसे गाढ़ा किया जा सकता है. वहीं अतिरिक्त कुरकुरापन पाने के लिए एक चुटकी बेकिंग सोडा भी मिलाया जा सकता है. यदि वड़ा ज्यादा तेल सोख रहा हो, तो थोड़ा-सा मैदा मिलाने से यह समस्या कम हो सकती है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Roti Pizza Recipe : बासी रोटी को फेंकने की गलती मत करना! 5 मिनट में ऐसे बनेगा बाजार जैसा लजीज रोटी&amp;पिज्जा</title>
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        <description><![CDATA[ Roti Pizza Recipe : रात की बची हुई रोटियों को अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि इन्हीं रोटियों से कुछ ही मिनटों में टेस्टी और बाजार जैसा रोटी-पिज्जा बनाया जा सकता है. इसके लिए अलग से पिज्जा बेस तैयार करने, आटा गूंथने या ओवन की जरूरत नहीं पड़ती है. बची हुई रोटी को ही पिज्जा बेस की तरह इस्तेमाल किया जाता है और कुछ ही मिनटों में टेस्टी रोटी पिज्जा तैयार हो जाता है. तो आइए जानते हैं कि बाजार जैसा लजीज रोटी-पिज्जा बनाने का आसान तरीका क्या है.&amp;nbsp;
कैसे बनता है रोटी पिज्जा?
रोटी पिज्जा में बची हुई चपाती या रोटी को पिज्जा बेस की तरह इस्तेमाल किया जाता है. यह उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है जो कम समय में टेस्टी स्नैक बनाना चाहते हैं. इसमें घर में मौजूद सब्जियां, टोमैटो सॉस और चीज का इस्तेमाल करके तवे या पैन पर ही पिज्जा तैयार किया जाता है. इसके लिए ओवन की जरूरत नहीं होती है. इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बची हुई रोटियों का अच्छा इस्तेमाल हो जाता है. इससे पिज्जा बेस बनाने के लिए अलग से आटा गूंथने और उसे फूलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती है. गेहूं की रोटी का इस्तेमाल होने की वजह से यह मैदे वाले पिज्जा बेस की तुलना में हेल्दी ऑप्शन भी माना जाता है. इसका पतला और कुरकुरा बेस भी खाने में काफी टेस्टी लगता है.
बाजार जैसा लजीज रोटी-पिज्जा बनाने का आसान तरीका क्या है?
1. बाजार जैसा लजीज रोटी-पिज्जा बनाने के लिए सबसे पहले बासी रोटी लें और उसे हल्का सा सेंक लें, &amp;nbsp;जिससे वह कुरकुरी बेस की तरह तैयार हो जाए.
2. अब वरोटी के ऊपर हल्की परत में टोमैटो सॉस लगाएं. इसके बाद शिमला मिर्च, प्याज, टमाटर, स्वीट कॉर्न जैसी बारीक कटी सब्जियां फैलाएं.
3. इसके बाद सब्जियों के ऊपर अच्छी मात्रा में मोजरेला या प्रोसेस्ड चीज डालें.&amp;nbsp;
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4. &amp;nbsp;बाजार जैसा टेस्ट पाने के लिए ऊपर से ओरिगैनो और चिल्ली फ्लेक्स जरूर डालें. चाहें तो थोड़ा मिक्स्ड हर्ब्स भी डाल सकते हैं.इस रेसिपी में आप अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग टॉपिंग्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.
5. इस रेसिपी के लिए ओवन की जरूरत नहीं होती है. इसे आसानी से तवे या नॉन-स्टिक पैन पर बनाया जा सकता है. सभी टॉपिंग्स डालने के बाद रोटी-पिज्जा को ढक्कन लगाकर मीडियम आंच पर 4 से 5 मिनट तक पकाएं, जिससे चीज अच्छी तरह पिघल जाए और सब्जियां हल्की पक जाएं.
6. अब तैयार रोटी-पिज्जा को गरमा गरम परोसें. चाहें तो ऊपर से थोड़ा और ओरिगैनो, चिल्ली फ्लेक्स या चीज डालकर इसका टेस्ट और भी बढ़ा सकते हैं.
रोटी पिज्जा बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान
1.इस रेसिपी के लिए कमरे के तापमान पर रखी बची हुई रोटी सबसे अच्छी रहती है. ताजी और बहुत मुलायम रोटी पिज्जा बेस के लिए सही नहीं मानी जाती है.&amp;nbsp;
2. टॉपिंग्स डालने से पहले रोटी को हल्का सेंक लें. इससे बेस कुरकुरा बनता है और जल्दी नरम नहीं पड़ता है.&amp;nbsp;
3. रोटी पर टोमैटो सॉस की पतली परत ही लगाएं. ज्यादा सॉस लगाने से बेस गीला हो सकता है.
4. सभी सब्जियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें, जिससे जल्दी पक जाएं और चीज के साथ अच्छी तरह मिल जाएं.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Roti, Pizza, Recipe, बासी, रोटी, को, फेंकने, की, गलती, मत, करना, मिनट, में, ऐसे, बनेगा, बाजार, जैसा, लजीज, रोटी-पिज्जा</media:keywords>
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        <title>Expensive Fruits During Monsoon: बरसात के दिनों में कौन&amp;कौन से फल हो जाते हैं महंगे? एक क्लिक में देख लें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Expensive Fruits During Monsoon:&amp;nbsp; हेल्दी डाइट की बात करें तो कई लोग रोजाना फिट रहने के लिए अपनी डाइट में फलों को जरूर शामिल करते हैं. ऐसे में उनके लिए बरसात के दौरान फलों की खरीदारी करने में एक परेशानी का सामना करना पड़ता है, वह है उनके बढ़ते दाम. बरसात के मौसम में फलों के दाम अचानक बढ़ जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है ट्रांसपोर्ट की दिक्कत. भारी बारिश से सड़कें खराब हो जाती हैं, जिस वजह से दाम बढ़ जाते हैं. दूसरी वजह है नमी. बारिश में नमी बहुत ज्यादा होती है, जिससे फल जल्दी खराब होने लगते हैं. खासकर वे फल जो बाहर से ट्रांसपोर्ट होकर आते हैं. ऐसे में खरीदारी कर रहे लोगों को समझ नहीं आता कि कौन-कौन से फल बरसात में महंगे हो जाते हैं, किन फलों को खरीदने से पहले सोच-विचार करना चाहिए. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
बरसात में कौन-कौन से फल महंगे होते हैं
सबसे महंगे फलों की बात करें तो बरसात के मौसम में सेब, अनार, अंगूर, संतरा और केला जैसे फलों के दाम सबसे ज्यादा बढ़ते हैं. सेब चूंकि पहाड़ी इलाकों से आता है, इसलिए बारिश के दौरान ऐसे रास्तों में सफर करना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि कई जगहों पर इसके दाम बढ़ जाते हैं. साथ ही अनार और अंगूर के महंगे होने के पीछे की वजह थोड़ी अलग है, वह है नमी. बरसात में नमी बढ़ जाती है, जिसके कारण इस प्रकार के फल सड़ने लगते हैं, इसलिए इनके दाम भी तेजी से बढ़ जाते हैं.
इसके अलावा यह जानकारी उन लोगों के लिए सबसे जरूरी होगी जो लोग केले का सेवन रोजाना अपने नाश्ते में करते हैं. केले की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है, लेकिन बारिश में ट्रांसपोर्ट की दिक्कत से इसके दाम में भी कुछ बदलाव देखने को मिलते हैं. वहीं अगर संतरे की बात करें तो इनको भी दूसरे राज्यों से मंगाया जाता है, इसलिए इसकी कीमत में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है.
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आम लोगों के लिए क्या करें और क्या न करें
इस जानकारी के बाद हर किसी के दिमाग में यही सवाल आता है कि क्या बरसात में ऐसा कोई फल नहीं है जो सही दाम में मिल जाए. ऐसे में इसके जवाब में बता दें कि बरसात में हमेशा लोकल और मौसमी फलों का ही सेवन करना चाहिए, जैसे जामुन और नाशपाती. क्योंकि ये सही मौसमी फल होते हैं, साथ ही ये अच्छे दाम में भी मिल जाते हैं.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Roof Leakage Signs: छत टपकने से पहले घर में दिखते हैं ये बदलाव? मानसून में भारी नुकसान से पहले हो जाएं अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Signs Of Roof Leakage Before Rain: मानसून शुरू होते ही सबसे बड़ी परेशानी तब होती है, जब अचानक घर की छत से पानी टपकने लगता है. कई बार लोग तब तक इंतजार करते हैं, जब तक पानी कमरे में आने न लगे, जबकि छत पहले ही कई संकेत देने लगती है कि उसे मरम्मत की जरूरत है. अगर इन शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो बड़े नुकसान और महंगे रिपेयर से बचा जा सकता है.
छत या दीवार पर पानी के दाग दिखना
अगर छत या दीवार पर पीले, भूरे या हल्के स्लेटी रंग के गोल निशान दिखाई देने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि बारिश का पानी धीरे-धीरे छत के अंदर तक पहुंच रहा है. कई लोग ऐसे दागों पर सिर्फ पेंट करा देते हैं, लेकिन इससे समस्या खत्म नहीं होती. पहले पानी आने की असली वजह का पता लगाना जरूरी है.
छत की टाइलें टूटना या अपनी जगह से खिसकना
अगर आपके घर की ढलानदार छत पर टाइलें लगी हैं, तो समय-समय पर नीचे से ही उनकी स्थिति देखें. कोई टाइल टूटी हुई, टेढ़ी या अपनी जगह से खिसकी हुई दिखाई दे, तो बारिश का पानी आसानी से अंदर जा सकता है. तेज बारिश और आंधी के बाद ऐसी समस्या अधिक देखने को मिलती है.
छत का किसी हिस्से से झुकना
अगर छत का कोई हिस्सा पहले की तुलना में नीचे झुका हुआ नजर आए, तो इसे गंभीर चेतावनी समझें. लंबे समय तक पानी रिसने से लकड़ी या अंदरूनी ढांचा कमजोर हो सकता है. ऐसी स्थिति में छत की मजबूती प्रभावित होती है और समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो बड़ा हादसा भी हो सकता है.
काई, फफूंदी या शैवाल का ज्यादा जमना
बरसात के मौसम में थोड़ी-बहुत काई दिखना सामान्य बात है, लेकिन अगर छत पर मोटी परत जमने लगे या काले धब्बे तेजी से फैलने लगें, तो यह नमी के लगातार बने रहने का संकेत हो सकता है. इससे छत की सतह जल्दी खराब होती है और रिसाव की संभावना बढ़ जाती है.
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बार-बार सीलन या बदबू महसूस होना
अगर घर के किसी कमरे में लगातार सीलन की गंध आती है या दीवारें नम महसूस होती हैं, तो इसकी वजह छत से होने वाला धीमा रिसाव भी हो सकता है. यह संकेत बताता है कि पानी अंदर तक पहुंच रहा है और समय रहते जांच कराना जरूरी है.&amp;nbsp;
ऐसे करें बचाव?
अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखाई दे, तो सबसे पहले उसकी तस्वीरें खींच लें, ताकि समस्या का रिकॉर्ड रहे. कमरे में रखे फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और जरूरी वस्तुओं को सुरक्षित जगह पर रख दें। अगर पानी टपक रहा हो, तो नीचे बाल्टी या किसी बड़े बर्तन का इस्तेमाल करें ताकि फर्श खराब न हो.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 23:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Nita Ambani Saree: नीता अंबानी ने हीरों के गहनों संग दिखाई शाही शान, 2 महीने में तैयार हुई यह बनारसी साड़ी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/nita-ambani-saree-नीता-अंबानी-ने-हीरों-के-गहनों-संग-दिखाई-शाही-शान-2-महीने-में-तैयार-हुई-यह-बनारसी-साड़ी</link>
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        <description><![CDATA[ Fortune Most Powerful Women Event Nita Ambani: रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी एक बार फिर अपने शाही अंदाज को लेकर चर्चा में हैं. हाल ही में आयोजित फॉर्च्यून मोस्ट पावरफुल वुमेन इवेंट में उन्होंने ऐसी बनारसी साड़ी पहनी, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. उनकी यह खास साड़ी वाराणसी की प्रसिद्ध गुलाब होली से प्रेरित थी और इसे तैयार करने में दो महीने का समय लगा. पारंपरिक कारीगरी और शानदार डिजाइन के साथ यह साड़ी भारतीय हस्तशिल्प की खूबसूरती को बखूबी दिखाती है.&amp;nbsp;
पिंक रंग की टंचोई बनारसी सिल्क साड़ी&amp;nbsp;
नीता अंबानी ने इस मौके पर स्वदेश की ब्लश पिंक रंग की टंचोई बनारसी सिल्क साड़ी पहनी. इस साड़ी का डिजाइन वाराणसी की मशहूर गुलाब होली से प्रेरित है, जहां रंगों के साथ गुलाब की पंखुड़ियों की बारिश भी होती है. हल्के गुलाबी रंग की यह साड़ी बेहद आकर्षक नजर आई और इसमें पारंपरिक बनारसी बुनाई की खूबसूरती साफ दिखाई दी.
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पूरे हिस्से में बारीक फ्लोरल जाल
साड़ी पर पूरे हिस्से में बारीक फ्लोरल जाल का काम किया गया था, जिसे आइवरी और एंटीक गोल्ड रंग के खूबसूरत फ्लोरल बुटों से सजाया गया. टंचोई बुनाई की खासियत इसकी महीन कारीगरी और दोनों तरफ लगभग एक जैसी फिनिश होती है, जो इसे बेहद खास बनाती है. यही वजह है कि इस साड़ी में पारंपरिक शिल्प और शाही अंदाज का बेहतरीन मेल देखने को मिला.&amp;nbsp;
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क्या है इसकी खास बात?
इस साड़ी की सबसे खास बात इसकी कारीगरी है. इसे बनारस के मास्टर बुनकर आरुषि लोहिया और कृष्णा लोहिया ने हाथों से तैयार किया. इस शानदार साड़ी को पूरा करने में करीब दो महीने का समय लगा. यह केवल एक परिधान नहीं, बल्कि बनारस की सदियों पुरानी बुनाई कला और कारीगरों की मेहनत का खूबसूरत उदाहरण है. नीता अंबानी ने अपनी इस खूबसूरत साड़ी के साथ मैचिंग ब्लश पिंक रंग का एल्बो स्लीव्स ब्लाउज पहना, जिसमें क्लासिक स्क्वायर नेकलाइन दी गई थी. सादा लेकिन एलिगेंट ब्लाउज ने साड़ी की बारीक कारीगरी को और ज्यादा उभारने का काम किया.

अपने लुक को शाही अंदाज देने के लिए उन्होंने डायमंड ज्वेलरी चुनी. फ्लोरल डिजाइन वाले डायमंड स्टड ईयररिंग्स, हार्ट शेप डायमंड पेंडेंट, टेनिस ब्रेसलेट, स्टेटमेंट रिंग और लग्जरी वॉच ने उनके पूरे लुक में चार चांद लगा दिए. ज्वेलरी का चयन ऐसा था, जिसने साड़ी की खूबसूरती को और निखार दिया, लेकिन उस पर हावी नहीं हुआ.

सॉफ्ट और नेचुरल ग्लैम लुक&amp;nbsp;
मेकअप की बात करें तो नीता अंबानी ने सॉफ्ट और नेचुरल ग्लैम लुक अपनाया. हल्का बेस, आईलाइनर, मस्कारा, गुलाबी लिपस्टिक और हल्का ब्लश उनके चेहरे पर निखार ला रहा था. माथे पर छोटी-सी लाल बिंदी और बीच से मांग निकालकर बनाए गए लो बन में लगे ताजे फूलों ने उनके पूरे लुक को पारंपरिक और शाही अंदाज दिया.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Switch Board Cleaning Tips: घर के स्विच बोर्ड पीले पड़ गए हैं? इन आसान घरेलू उपायों से मिनटों में लाएं नई जैसी चमक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Switchboards At Home: घर की नियमित सफाई के बावजूद अक्सर एक चीज ऐसी रह जाती है जिस पर कम ही लोगों का ध्यान जाता है और वह है स्विच बोर्ड. समय के साथ इन पर धूल, गंदगी, उंगलियों के निशान और पीलेपन की परत जमने लगती है, जिससे पूरा कमरा साफ होने के बाद भी स्विच बोर्ड पुराने और गंदे दिखाई देते हैं. अच्छी बात यह है कि इन्हें साफ करने के लिए महंगे केमिकल क्लीनर खरीदने की जरूरत नहीं है. &amp;nbsp;घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों की मदद से ही स्विच बोर्ड की चमक वापस लाई जा सकती है.
सफेद टूथपेस्ट सबसे आसान उपाय
अगर स्विच बोर्ड पर हल्की गंदगी या पीलेपन की परत है तो सफेद टूथपेस्ट सबसे आसान उपाय हो सकता है. इसके लिए किसी पुराने टूथब्रश पर थोड़ा-सा टूथपेस्ट लगाएं और स्विच बोर्ड पर धीरे-धीरे रगड़ें. खासकर किनारों और कोनों की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद सूखे और साफ कपड़े से पोंछ दें. कुछ ही मिनटों में स्विच बोर्ड पहले से ज्यादा साफ और चमकदार नजर आने लगेगा. बेहतर परिणाम के लिए जेल वाले टूथपेस्ट की बजाय साधारण सफेद टूथपेस्ट का इस्तेमाल करे.&amp;nbsp;
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नींबू और नमक का मिश्रण
यदि गंदगी ज्यादा जमी हुई है तो नींबू और नमक का मिश्रण कारगर साबित हो सकता है. नींबू में मौजूद प्राकृतिक एसिड जिद्दी मैल को ढीला करने में मदद करता है, जबकि नमक हल्के स्क्रबर की तरह काम करता है. &amp;nbsp;आधे कटे नींबू पर थोड़ा-सा नमक छिड़कें और उससे स्विच बोर्ड को हल्के हाथों से साफ करें. इसके बाद सूखे कपड़े से पोंछ लें।. यह तरीका बिना प्लास्टिक को नुकसान पहुंचाए सफाई करने में मदद करता है.
&amp;nbsp;नेल पॉलिश रिमूवर का यूज
कुछ स्विच बोर्ड पर स्याही के निशान, काले दाग या पुराने जिद्दी धब्बे रह जाते हैं, जिन्हें हटाना आसान नहीं होता. ऐसे में थोड़ी-सी नेल पॉलिश रिमूवर को कॉटन या मुलायम कपड़े पर लेकर दाग वाली जगह पर हल्के हाथों से साफ किया जा सकता है. इसमें मौजूद एसीटोन कठिन दागों को हटाने में मदद करता है. हालांकि इसका इस्तेमाल बहुत कम मात्रा में करें और पहले किसी छिपी हुई जगह पर टेस्ट जरूर कर लें, क्योंकि ज्यादा मात्रा प्लास्टिक की फिनिश को प्रभावित कर सकती है.
इस बात का ध्यान रखना जरूरी
स्विच बोर्ड की सफाई करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सफाई शुरू करने से पहले संबंधित बिजली सप्लाई बंद कर दें। हमेशा सूखी जगह पर खड़े होकर और सूखे हाथों से ही सफाई करें. गीले कपड़े या अधिक पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. नींबू का रस या नेल पॉलिश रिमूवर जैसे किसी भी तरल पदार्थ का उपयोग करते समय यह सुनिश्चित करें कि स्विच बोर्ड पूरी तरह सूखा हो, तभी बिजली चालू करें. इसके अलावा कभी भी गीले हाथों या नंगे पैर स्विच बोर्ड, प्लग या तारों को न छुएं. बिजली से जुड़े किसी भी उपकरण के आसपास जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ का इस्तेमाल करने से बचें.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Best Places To Visit In Bihar: बारिश में जन्नत से कम नहीं लगतीं बिहार की ये जगहें, आज ही बना लें घूमने का प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ Best Places To Visit In Bihar During Monsoon: अगर आपको बारिश के मौसम में हरियाली, झरने और पहाड़ों के बीच सुकून भरे पल बिताना पसंद है, तो बिहार की कुछ जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. मानसून आते ही यहां का नजारा पूरी तरह बदल जाता है. चारों ओर फैली हरियाली, ऊंचे-ऊंचे पहाड़, कल-कल बहते झरने और बादलों से घिरे खूबसूरत नजारे किसी जन्नत से कम नहीं लगते. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक इन जगहों का रुख करते हैं. चलिए आपको इनके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
करमचट डैम, रोहतास
रोहतास जिले के चेनारी के पास स्थित करमचट डैम मानसून में बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. सासाराम से करीब 35 किलोमीटर दूर मौजूद यह डैम सूर्योदय और सूर्यास्त के समय और भी आकर्षक लगता है. चारों तरफ फैली हरियाली और शांत वातावरण इसे परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए शानदार जगह बनाते हैं. बारिश के मौसम में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है.
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करकटगढ़ वॉटरफॉल, कैमूर
कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के भीतर स्थित करकटगढ़ वॉटरफॉल बारिश के दिनों में अपनी पूरी रफ्तार में नजर आता है. लगभग 100 फीट ऊंचा और 300 फीट चौड़ा यह झरना दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है. आसपास का जंगल, पहाड़ और झरने की गूंज मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं जिसे देखकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो जाए.
कैमूर की पहाड़ियां
अगर आप प्रकृति के साथ-साथ इतिहास में भी रुचि रखते हैं, तो कैमूर की पहाड़ियां आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं. यहां घने जंगल, गहरी घाटियां, प्राकृतिक गुफाएं और कई खूबसूरत झरने देखने को मिलते हैं. मानसून के दौरान इन पहाड़ियों की हरियाली और बढ़ जाती है, जिससे पूरा इलाका बेहद मनमोहक दिखाई देता है. यहां प्राचीन शैलचित्र और ऐतिहासिक अवशेष भी मौजूद हैं, जो इस जगह को और खास बनाते हैं.
विश्व शांति स्तूप, राजगीर
राजगीर की रत्नागिरी पहाड़ी पर लगभग 400 मीटर की ऊंचाई पर बना विश्व शांति स्तूप मानसून में बादलों के बीच बेहद आकर्षक नजर आता है. सफेद संगमरमर से बना यह स्तूप शांति और आध्यात्मिकता का अनूठा अनुभव कराता है. यहां तक पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां से आसपास के पहाड़ों का शानदार दृश्य दिखाई देता है.
गुरपा हिल, गया
गया जिले में बिहार-झारखंड सीमा के पास स्थित गुरपा हिल प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. बारिश के मौसम में यहां के जंगल, झरने और पहाड़ों का दृश्य देखते ही बनता है. पहाड़ी की चोटी से आसपास का मनोरम नजारा दिखाई देता है, जबकि यहां मौजूद गुरुपद मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>UP से लेकर महाराष्ट्र&amp;आंध्र प्रदेश तक मिले कोरोना के केस, क्या 2026 में दोबारा लौटेगा कोविड&amp;19?</title>
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        <description><![CDATA[ देश के कई शहरों में कोरोना के मामले मिलने के बाद सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस की वापसी और भारत में लॉकडाउन 2026 जैसी चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं. इन वायरल मैसेजेस ने लोगों के मन में फिर से डर पैदा कर दिया है कि क्या हम एक बार फिर 2020 जैसी भयावह स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं. हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स, डॉक्टरों और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आम जनता को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसे में जानते हैं कि देश के किन शहरों में कोरोना के मामले मिले हैं और इस पर एक्सपर्ट्स की क्या राय है?&amp;nbsp;
देश में कहां-कहां मिले कोरोना के नए केस?
देश के कुछ राज्यों में मिले कोरोना के नए मामलों ने हेल्थ डिपार्टमेंट को अलर्ट कर दिया है. आइए जानते हैं कि देश में इस वक्त कोरोना के मामले कहां-कहां से सामने आए हैं?

उत्तर प्रदेश (वाराणसी): हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी कोरोना का नया मामला सामने आया है. वाराणसी के आशापुर इलाके के रहने वाले 27 वर्षीय एक युवक को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी. जब उसे काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल के चेस्ट एंड टीबी विभाग में दिखाया गया और कोरोना जांच की गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई. फिलहाल, इस युवक को बीएचयू अस्पताल में ही भर्ती करके उसका इलाज किया जा रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, यह मामला बताता है कि वायरस की रफ्तार भले ही धीमी पड़ गई है, लेकिन यह अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है.
आंध्र प्रदेश: सबसे ज्यादा चिंताजनक मामले दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश से सामने आए हैं. फिलहाल राज्य में कोरोना के 8 एक्टिव केस रिकॉर्ड किए गए हैं. पिछले कुछ हफ्तों के भीतर आंध्र प्रदेश में कोरोना से दो लोगों की मौत भी हो चुकी है. हाल ही में कडप्पा के मासापेटा इलाके के रहने वाले 46 वर्षीय एक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से जान चली गई. वहीं, एक अन्य मामला अन्नमैया जिले के राजमपेटा से भी सामने आया था. इन मामलों के बाद मरीजों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं, ताकि कोरोना के वैरिएंट का पता लगाया जा सके.
महाराष्ट्र (मुंबई): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी कोरोना वायरस का एक नया मामला मिला है. इसके अलावा जाने-माने सिंगर कुमार सानू के बेटे जान कुमार सानू भी हाल ही में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. उनका इलाज चल रहा है.&amp;nbsp;

क्या कहता है मेडिकल साइंस?
मेडिकल साइंस के अनुसार, कोरोना वायरस अब एंडेमिक स्टेज में पहुंच चुका है. इसका सीधा मतलब यह है कि यह वायरस अब हमारे वातावरण से पूरी तरह कभी खत्म नहीं होगा. जैसे मौसम बदलने पर सर्दी, खांसी या आम फ्लू होता है, वैसे ही कोरोना के भी छिटपुट मामले समय-समय पर सामने आते रहेंगे. हमारे शरीर में अब वैक्सीन और पहले के इंफेक्शन की वजह से एंटीबॉडी बन चुकी है, जिससे यह वायरस अब पहले जैसा जानलेवा नहीं रहा.
अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग की क्या है तैयारी?
इन नए मामलों को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकारें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं. राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने तुरंत रैपिड रिस्पॉन्स टीम का गठन किया है और स्थिति पर नजर रखने के लिए खास कोविड कंट्रोल रूम भी चालू किए गए हैं. वहीं, अस्पतालों के अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां कम से कम 10 बेड वाला अलग आइसोलेशन वॉर्ड हमेशा तैयार रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को भर्ती किया जा सके. सभी सरकारी और बड़े प्राइवेट अस्पतालों को आदेश दिया गया है कि वे कोरोना की जांच के लिए टेस्टिंग किट, जरूरी दवाइयां, डॉक्टरों और स्टाफ के लिए PPE किट और N95 मास्क का पर्याप्त स्टॉक हर समय उपलब्ध रखें.
क्या है लॉकडाउन की अफवाहों का सच
सोशल मीडिया पर चल रही 2026 में लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वायरस के इक्का-दुक्का मामले भविष्य में भी आते रहेंगे. अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी तरह का पैनिक न फैलाएं. देश में अभी यात्रा करने, स्कूल-कॉलेज जाने या काम करने पर कोई पाबंदी नहीं है. सरकार ने मास्क पहनना भी अनिवार्य नहीं किया है.
कैसे करें अपना बचाव?&amp;nbsp;

कमजोर इम्युनिटी वाले रहें सतर्क: बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी जैसे शुगर, बीपी या हार्ट प्रॉब्लम से जूझ रहे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए.
लक्षण दिखने पर जांच: अगर आपको तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है तो तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें और कोरोना की जांच कराएं.
मास्क और साफ-सफाई: भीड़भाड़ वाली जगहों, अस्पतालों या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में जाते समय मास्क पहनना अच्छी आदत है. यह आपको कोरोना के साथ-साथ प्रदूषण और अन्य बीमारियों से भी बचाता है. अपने हाथों को समय-समय पर धोते रहें.

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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Pregnancy in Monsoon: मानसून में कैसे रखें गर्भ में पल रहे बच्चे का ख्याल, Mother to be के लिए बड़े काम की है खबर</title>
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        <description><![CDATA[ Pregnancy in Monsoon: मानसून में कैसे रखें गर्भ में पल रहे बच्चे का ख्याल, Mother to be के लिए बड़े काम की है खबर ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>पोछा लगाने के बाद फर्श हो जाता है चिपचिपा? पानी में मिलाएं ये चीज, शीशे जैसा चमकेगा घर</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Sticky Floors After Mopping: घर में पोछा लगाने के बाद अगर फर्श साफ दिखने के बजाय चिपचिपा महसूस होता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपने ठीक से सफाई नहीं की. कई बार सफाई का तरीका या इस्तेमाल किया गया क्लीनर ही इस समस्या की वजह बन जाता है. ऐसे में अगर पोछे के पानी में सही चीजें मिलाई जाएं और कुछ आसान बातों का ध्यान रखा जाए, तो फर्श न सिर्फ चमकदार बनेगा बल्कि चिपचिपाहट की समस्या भी दूर हो सकती है.
सफेद सिरका मिलाएं
अगर आपके घर में टाइल्स या विनाइल फ्लोरिंग है, तो पोछे के पानी में थोड़ा सा सफेद सिरका मिलाना फायदेमंद हो सकता है. यह फर्श पर जमी साबुन या क्लीनर की परत को हटाने में मदद करता है और चिपचिपापन कम करता है. हालांकि, लकड़ी या मार्बल के फर्श पर सिरके का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सतह को नुकसान पहुंच सकता है.
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सही मात्रा में ही क्लीनर डालें
अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा क्लीनर डालने से फर्श ज्यादा साफ होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. जरूरत से ज्यादा क्लीनर इस्तेमाल करने पर उसकी परत फर्श पर रह जाती है, जो बाद में धूल और गंदगी को जल्दी आकर्षित करती है. इसलिए हमेशा पैक पर लिखी गई मात्रा के अनुसार ही क्लीनर मिलाएं.
हर बार साफ पानी का इस्तेमाल करें
अगर पोछा लगाने के दौरान बार-बार उसी गंदे पानी का इस्तेमाल किया जाता है, तो गंदगी दोबारा फर्श पर फैल जाती है. बेहतर होगा कि पानी गंदा होते ही उसे बदल दें. इससे फर्श ज्यादा साफ रहेगा और चिपचिपाहट की संभावना भी कम होगी.
आखिर में एक बार सादे पानी से पोछा जरूर लगाएं
कई लोग क्लीनर वाले पानी से पोछा लगाने के बाद वहीं रुक जाते हैं, जबकि सबसे जरूरी कदम आखिर में साफ पानी से दोबारा पोछा लगाना है. इससे फर्श पर बचा हुआ क्लीनर या सिरके का अवशेष पूरी तरह हट जाता है और फर्श मुलायम व चमकदार नजर आता है.
गंदे पोछे से न करें सफाई
अगर पोछा पहले से गंदा है, तो वह फर्श साफ करने के बजाय पुरानी गंदगी और चिकनाई को फिर से फैला देगा. इसलिए हर बार पोछा लगाने से पहले उसे अच्छी तरह धो लें. माइक्रोफाइबर पोछा इस्तेमाल कर रहे हैं, तो हर उपयोग के बाद उसे साफ करना न भूलें.
फर्श के अनुसार चुनें सही क्लीनर
हर तरह की फ्लोरिंग के लिए एक जैसा क्लीनर सही नहीं होता. लकड़ी, लैमिनेट, टाइल्स और मार्बल के लिए अलग-अलग प्रकार के क्लीनर बाजार में उपलब्ध हैं. गलत क्लीनर इस्तेमाल करने से फर्श पर परत जम सकती है और चिपचिपाहट बढ़ सकती है. इसलिए हमेशा फर्श के प्रकार के अनुसार ही उत्पाद चुनें. अगर इन आसान बातों का ध्यान रखा जाए, तो पोछा लगाने के बाद फर्श पर चिपचिपाहट नहीं रहेगी.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Rajasthan Monsoon Travel: मानसून में जन्नत बन जाता है राजस्थान, बारिश के मौसम में जरूर घूमें ये खूबसूरत जगहें</title>
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        <description><![CDATA[ Best Places To Visit In Rajasthan During Monsoon: राजस्थान का नाम आते ही लोगों के मन में रेगिस्तान, तपती धूप और ऐतिहासिक किलों की तस्वीर उभरती है. लेकिन जैसे ही मानसून की बारिश दस्तक देती है, यह शाही राज्य बिल्कुल अलग रंग में नजर आता है. अरावली की पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं, झीलें लबालब भर जाती हैं और मौसम इतना सुहावना हो जाता है कि घूमने का मजा कई गुना बढ़ जाता है. यही वजह है कि बारिश का मौसम राजस्थान घूमने के लिए सबसे बेहतरीन समय माना जाता है. अगर आप मानसून में किसी यादगार ट्रिप की योजना बना रहे हैं, तो राजस्थान की खूबसूरत जगहों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें. यहां का ठंडा मौसम, कम भीड़ और प्राकृतिक नजारे आपकी यात्रा को खास बना देंगे.
माउंट आबू&amp;nbsp;
मानसून में सबसे पहले माउंट आबू का रुख किया जा सकता है. राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन बारिश के दौरान बादलों, हरियाली और झरनों से घिर जाता है. यहां की ठंडी हवाएं और शांत वातावरण सुकून का एहसास कराते हैं. दिलवाड़ा जैन मंदिर, नक्की झील और सनसेट प्वाइंट जैसी जगहें इस मौसम में और भी आकर्षक लगती हैं.
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उदयपुर&amp;nbsp;
उदयपुर को झीलों की नगरी कहा जाता है और बारिश के मौसम में इसकी खूबसूरती अपने चरम पर होती है. पिछोला झील, फतेह सागर झील और सिटी पैलेस के आसपास का नजारा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है. अरावली की हरियाली और ठंडी हवा इस शहर को रोमांटिक ट्रिप के लिए भी खास बनाती है.
&amp;nbsp;बूंदी&amp;nbsp;
इसके बाद बूंदी भी घूमने के लिए शानदार विकल्प है. बावड़ियों, महलों और ऐतिहासिक किलों के लिए मशहूर यह शहर बारिश में और भी खूबसूरत नजर आता है. यहां का तारागढ़ किला और जैत सागर झील मानसून के दौरान अलग ही नजारा पेश करते हैं.
कुंभलगढ़&amp;nbsp;
अगर आपको इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता दोनों पसंद हैं, तो कुंभलगढ़ जरूर जाएं. बारिश के मौसम में विशाल किला बादलों और हरियाली के बीच बेहद आकर्षक दिखाई देता है. वहीं चित्तौड़गढ़ का ऐतिहासिक किला भी हल्की बारिश और धुंध के बीच किसी फिल्मी दृश्य जैसा लगता है.
रणथंभौर
वन्यजीव प्रेमियों के लिए रणथंभौर भी शानदार विकल्प है. मानसून में जंगल पूरी तरह हरे-भरे हो जाते हैं और बफर जोन में सफारी का अलग ही रोमांच मिलता है. वहीं पुष्कर में बारिश के दौरान झील के किनारे का शांत माहौल और मंदिरों की भव्यता यात्रियों को खूब पसंद आती है.
जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर
जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे शहर भी मानसून में घूमने के लिए बेहतरीन रहते हैं. बारिश के कारण तापमान कम हो जाता है, जिससे किलों, महलों और बाजारों की सैर आराम से की जा सकती है. कम भीड़ होने की वजह से आप इन जगहों का आनंद बिना जल्दबाजी के ले सकते हैं. बारिश के मौसम में यहां की खूबसूरती सचमुच किसी जन्नत से कम नहीं लगती.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gas Burner Cleaning: गैस बर्नर के जाम छेद मिनटों में होंगे साफ! बस आजमाएं रसोई में रखी यह जादुई चीज</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Gas Burner Holes At Home: अगर गैस बर्नर की लौ पहले जैसी तेज नहीं रही, नीली लौ की जगह पीली आग निकल रही है या खाना बनने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है, तो इसकी वजह बर्नर के छोटे-छोटे छेद बंद होना हो सकती है. समय के साथ इनमें तेल, मसाले और जली हुई गंदगी जमा हो जाती है, जिससे गैस का फ्लो प्रभावित होता है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान तरीकों से घर पर ही इन्हें साफ किया जा सकता है.&amp;nbsp;
घर पर कैसे साफ करें बर्नर?
सबसे पहले गैस का रेगुलेटर बंद करें और बर्नर को पूरी तरह ठंडा होने दें. गर्म बर्नर को कभी भी साफ करने की कोशिश न करें. इसके बाद गैस स्टोव से ग्रेट्स, बर्नर कैप और बर्नर हेड को सावधानी से निकाल लें ताकि हर हिस्से की अच्छी तरह सफाई की जा सके. अब एक बर्तन में गुनगुना पानी लें और उसमें थोड़ा-सा लिक्विड डिशवॉश या साबुन मिलाकर बर्नर के हिस्सों को 20 से 30 मिनट तक भिगो दें. इससे जमी हुई चिकनाई और गंदगी नरम हो जाएगी, जिससे सफाई करना आसान हो जाएगा.
जिद्दी दाग कैसे हटाएं?
भिगोने के बाद किसी पुराने टूथब्रश या मुलायम ब्रश की मदद से बर्नर को हल्के हाथों से साफ करें. अगर जिद्दी दाग रह जाएं तो बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी या सिरका मिलाकर पेस्ट तैयार करें और उसे दाग वाली जगह पर लगाकर कुछ मिनट बाद ब्रश से रगड़ दें. इससे गंदगी आसानी से निकलने लगेगी. बर्नर के छोटे-छोटे छेद साफ करना सबसे जरूरी होता है. इन्हीं छेदों से गैस बाहर निकलती है. इन्हें साफ करने के लिए सेफ्टी पिन या पतली धातु की पिन का इस्तेमाल करें और हर छेद में धीरे-धीरे डालकर जमी हुई गंदगी निकालें. ध्यान रखें कि छेद को बड़ा करने की कोशिश न करें, क्योंकि इससे गैस की फ्लेम प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
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अच्छी तरह पोंछकर पूरी तरह सूखने दें
इसके बाद सभी हिस्सों को साफ पानी से धो लें और सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछकर पूरी तरह सूखने दें. गीले बर्नर को दोबारा लगाने से इग्निशन में परेशानी आ सकती है. जब सभी हिस्से पूरी तरह सूख जाएं, तब उन्हें सही जगह पर लगाएं और गैस चालू करके फ्लेम चेक करें. अगर लौ नीली और समान रूप से निकल रही है तो समझिए कि सफाई सही तरीके से हुई है. बर्नर की अच्छी परफॉर्मेंस बनाए रखने के लिए रोजाना खाना बनने के बाद गैस स्टोव को पोंछने की आदत डालें. सप्ताह में एक बार हल्की सफाई और महीने में एक बार बर्नर की पूरी सफाई करने से गैस की खपत भी कम होती है और खाना जल्दी पकता है.&amp;nbsp;
इन गलतियों से बचना चाहिए?
सफाई के दौरान कुछ गलतियां करने से बचना भी जरूरी है. गर्म बर्नर को कभी न धोएं, तेज धार वाले चाकू या नुकीली वस्तु से छेदों को न कुरेदें, स्टील वूल जैसे कठोर स्क्रबर का इस्तेमाल न करें और गीले बर्नर को दोबारा स्टोव पर न लगाएं.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Veg Momos Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसे टेस्टी मोमोज, इस सीक्रेट रेसिपी से उंगलियां चाटेंगे घरवाले</title>
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        <description><![CDATA[ Veg Momos Recipe: बाजार में मिलने वाले गर्मागर्म मोमोज आज लगभग हर किसी के पसंदीदा स्ट्रीट फूड बन चुके हैं. इसकी सॉफ्ट लेयर, अंदर भरी टेस्टी सब्जियों की स्टफिंग और तीखी चटनी का टेस्ट लोगों को खूब पसंद आता है. कई लोग घर पर भी बिल्कुल बाजार जैसे मोमोज बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन अक्सर उनका टेस्ट वैसा नहीं बन पाता है. अगर आप भी घर पर सॉफ्ट और टेस्टी मोमोज बनाना चाहते हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि घर पर बाजार जैसे टेस्टी मोमोज कैसे बनाएं और कैसे इस सीक्रेट रेसिपी से घर वाले उंगलियां चाटेंगे.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;घर पर बाजार जैसे टेस्टी मोमोज कैसे बनाएं?
1. सबसे पहले आटा तैयार करें - एक बाउल में मैदा, नमक और थोड़ा सा तेल मिलाकर धीरे-धीरे पानी डालें और नरम लेकिन हल्का सख्त आटा गूंध लें फिर इसे गीले कपड़े से ढककर लगभग 30 मिनट के लिए रख दें.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;वेज स्टफिंग बनाएं - कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें. इसमें लहसुन, हरा प्याज और बारीक कटी पत्ता गोभी, गाजर, फ्रेंच बीन्स, शिमला मिर्च जैसी सब्जियां डालकर तेज आंच पर भूनें फिर सोया सॉस, काली मिर्च और नमक मिलाकर स्टफिंग तैयार करें और ठंडी होने दें.&amp;nbsp;
3. मोमोज की लोइयां बेलें - आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें पतला गोल बेलें. ध्यान रखें कि किनारे पतले और बीच का हिस्सा थोड़ा मोटा रहे, ताकि मोमोज अच्छी तरह बंद हो सकें.&amp;nbsp;
4. स्टफिंग भरकर मोमोज का साइज दें - बेली हुई लोई के बीच में 2 से 3 चम्मच स्टफिंग रखें. अब किनारों को मोड़ते हुए प्लीट बनाकर अच्छी तरह बंद कर दें. चाहें तो गुजिया की तरह भी मोमोज का साइज दे सकते हैं.&amp;nbsp;
5. भाप में पकाएं - स्टीमर की प्लेट पर हल्का तेल लगाएं और मोमोज को थोड़ी दूरी पर रखें फिर इन्हें 5 से 7 मिनट तक स्टीम करें. जब बाहरी परत हल्की ट्रांसपेरेंट दिखने लगे और चिपचिपी न रहे, तो मोमोज तैयार हैं.&amp;nbsp;
6. गर्मागर्म चटनी के साथ परोसें - तैयार मोमोज को मोमोज चटनी, लाल मिर्च-लहसुन चटनी, शेजवान सॉस या टमाटर सॉस के साथ गर्मागर्म परोसें. तीखी चटनी के साथ इनका टेस्ट और भी बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
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मोमोज बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
1. &amp;nbsp;आटा नरम होना चाहि, इसे बहुत ज्यादा ज्यादा ढीला न रखें.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
2. स्टफिंग में अपनी पसंद की सब्जियां इस्तेमाल की जा सकती हैं. चाहें तो मशरूम, पनीर या उबले आलू भी मिला सकते हैं.&amp;nbsp;
3. टेस्ट बढ़ाने के लिए सोया सॉस डाला जाता है, लेकिन अपनी पसंद के अनुसार दूसरे मसाले और सीजनिंग भी इस्तेमाल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
4. स्टीमर में मोमोज के बीच थोड़ी दूरी रखें, पकने के बाद उनका साइज थोड़ा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
5. अगर ग्लूटेन-फ्री मोमोज बनाना चाहते हैं, तो मैदा की जगह बाजरे या चावल के आटे का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि ऐसे मोमोज को साइज देना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Potato Boiling Guide: एक, दो या तीन... कुकर में कितनी सीटी में पक जाते हैं आलू? जान लें काम की बात</title>
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        <description><![CDATA[ How Many Whistles For Boiling Potatoes In Cooker: आलू भारतीय रसोई की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सब्जियों में से एक है. सब्जी, पराठा, चाट, टिक्की या स्नैक्स, लगभग हर डिश में इसका इस्तेमाल होता है. लेकिन कई बार लोग आलू उबालते समय यह समझ नहीं पाते कि कुकर में कितनी सीटी लगानी चाहिए. कम सीटी होने पर आलू कच्चे रह जाते हैं, जबकि ज्यादा सीटी लगने पर वे जरूरत से ज्यादा गल जाते हैं. ऐसे में सही तरीका जानना जरूरी है.&amp;nbsp;
कितनी सीटी बेहतर?
अगर आप मध्यम आकार के आलू उबाल रहे हैं, तो प्रेशर कुकर में आमतौर पर 2 सीटी पर्याप्त होती हैं. इससे आलू अच्छी तरह पक जाते हैं और उनका आकार भी बना रहता है. गैस बंद करने के बाद कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें. इसके बाद ढक्कन खोलकर चाकू या कांटे की मदद से आलू चेक करें. अगर चाकू आसानी से अंदर चला जाए, तो समझिए आलू पूरी तरह पक चुके हैं.&amp;nbsp;
बड़े आलू को कैसे पकाएं?
अगर आलू बड़े आकार के हैं, तो उन्हें पकने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है. ऐसे में 3 सीटी लगाना बेहतर रहता है. वहीं अगर आलू बहुत छोटे हैं या पहले से आधे कटे हुए हैं, तो कई बार 1 से 2 सीटी में ही काम हो जाता है. इसलिए सीटी की संख्या तय करते समय आलू का आकार जरूर ध्यान में रखें.
किस बात का रखें ध्यान?
कुकर में आलू उबालने के लिए सबसे पहले इतने पानी का इस्तेमाल करें कि सभी आलू पूरी तरह उसमें डूब जाएं. चाहें तो स्वाद के लिए एक चुटकी नमक भी डाल सकते हैं. इसके बाद कुकर का ढक्कन अच्छी तरह बंद करें और मध्यम आंच पर पकाएं. जरूरत से ज्यादा तेज आंच पर पकाने से कई बार आलू बाहर से ज्यादा और अंदर से कम पकते हैं. जब आलू पक जाएं, तो उन्हें कुछ मिनट ठंडा होने दें. इसके बाद ठंडे पानी में डालने से उनका छिलका आसानी से उतर जाता है. इससे आलू का इस्तेमाल पराठा, चाट, सैंडविच, सब्जी या किसी भी दूसरी डिश में करना आसान हो जाता है.&amp;nbsp;
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माइक्रोवेव भी बेहतर विकल्प
अगर आपके पास प्रेशर कुकर नहीं है, तो माइक्रोवेव में भी आलू उबाले जा सकते हैं. इसके लिए आलू को टुकड़ों में काटकर माइक्रोवेव-सेफ बाउल में रखें, पानी डालें और करीब 5 मिनट तक पकाएं. इसके बाद चाकू से जांच लें। जरूरत हो तो 2&amp;ndash;3 मिनट और पकाया जा सकता है.
आलू खरीदते समय क्या रखें ध्यान?
आलू खरीदते समय हमेशा ऐसे आलू चुनें जिनका छिलका चिकना हो, जिनमें अंकुर न निकले हों और जो सिकुड़े हुए न दिखें. इन्हें ठंडी और सूखी जगह पर रखें. फ्रिज में रखने से इनका स्वाद और बनावट प्रभावित हो सकती है.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Best Roti for Health: मक्का&amp;ज्वार&amp;बाजरा या गेहूं... सबसे जल्दी पचती है किसकी रोटी, किसमें होती है सबसे ज्यादा ताकत?</title>
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        <description><![CDATA[ Which Roti Is Best For Health And Digestion: भारतीय रसोई में रोटी सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि रोजाना की डाइट का अहम हिस्सा है. हालांकि आज सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी और कई दूसरे अनाजों के आटे की रोटियां भी खूब खाई जा रही हैं. ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर कौन-सी रोटी सबसे जल्दी पचती है और किसमें शरीर को सबसे ज्यादा पोषण और ताकत मिलती है. इसका जवाब आपकी उम्र, स्वास्थ्य और जरूरतों पर भी निर्भर करता है.
गेहूं की रोटी
अगर बात रोजमर्रा की डाइट की करें तो गेहूं की रोटी सबसे लोकप्रिय विकल्प है. इसमें फाइबर, प्रोटीन, सेलेनियम, मैंगनीज और फॉस्फोरस जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. साबुत गेहूं का आटा डाइजेशन को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी रिफाइंड आटे की तुलना में कम होता है, इसलिए यह कई लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है.&amp;nbsp;
मक्के की रोटी
मक्के की रोटी स्वाद के साथ-साथ अच्छी ऊर्जा भी देती है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसकी खास बात यह है कि इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे लंबे समय तक ऊर्जा मिलती रहती है. इसके साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं.&amp;nbsp;
ज्वार की रोटी
ज्वार की रोटी उन लोगों के लिए अच्छी मानी जाती है जो ग्लूटेन से बचना चाहते हैं. ज्वार में फाइबर, आयरन, जिंक और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं. यह पाचन को बेहतर बनाने के साथ-साथ ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी मदद कर सकती है. इसकी रोटी हल्की होती है और कई लोगों को यह आसानी से पच जाती है.
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बाजरे की रोटी
बाजरे की रोटी पोषण के मामले में किसी सुपरफूड से कम नहीं मानी जाती. इसमें प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं. कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने की वजह से यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बेहतर विकल्प मानी जाती है. सर्दियों में बाजरे की रोटी शरीर को गर्म रखने और लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करती है. अगर सबसे ज्यादा पोषण की बात करें तो रागी की रोटी भी पीछे नहीं है. रागी में कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं. यह हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों के लिए और वजन नियंत्रित रखने में मददगार मानी जाती है.
सबसे बेहतर किसकी रोटी?
फूड के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट hyugalife के अनुसार, अगर रोजमर्रा की डाइट के लिए संतुलित विकल्प चाहिए तो साबुत गेहूं अच्छा है. ज्यादा पोषण के लिए बाजरा और रागी फायदेमंद हैं, जबकि ग्लूटेन-फ्री विकल्प चाहने वालों के लिए ज्वार और मक्का बेहतर माने जाते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Rekha Luxury Home: सबकुछ देखा तो भी एक बार जरूर देखें रेखा का घर, दिल जीत लेगी एक&amp;एक लग्जरी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rekha-luxury-home-सबकुछ-देखा-तो-भी-एक-बार-जरूर-देखें-रेखा-का-घर-दिल-जीत-लेगी-एक-एक-लग्जरी</link>
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        <description><![CDATA[ Actress Rekha Bungalow Basera Inside Tour: बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस रेखा जितनी अपनी शानदार एक्टिंग और खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, उतनी ही चर्चा उनके आलीशान घर की भी होती है. मुंबई के सबसे पॉश इलाकों में शामिल बांद्रा के समुद्र किनारे स्थित उनका बंगला पहली नजर में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है. बाहर से देखने में यह जितना सादा लगता है, अंदर की सजावट और शाही अंदाज उतना ही खास है. यही वजह है कि रेखा का घर बॉलीवुड के सबसे चर्चित लग्जरी घरों में गिना जाता है.&amp;nbsp;
समंदर के किनारे शानदार बंगला
&#039;बसेरा&#039; नाम से मशहूर यह बंगला समुद्र के किनारे मौजूद है. इसकी कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जाती है. आसपास कई बड़े सितारों के घर होने के बावजूद रेखा का आशियाना अपनी अलग पहचान रखता है. यहां दिखावे से ज्यादा सादगी और शाही स्वाद का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है.

मुगल शैली और आधुनिक डिजाइन की झलक
घर की सबसे खास बात इसका आर्किटेक्चर है. इसमें पारंपरिक मुगल शैली और आधुनिक डिजाइन का ऐसा मिश्रण देखने को मिलता है, जो इसे बाकी घरों से अलग बनाता है. मुख्य प्रवेश द्वार पर बना आकर्षक ढांचा दूर से ही लोगों का ध्यान खींच लेता है. वहीं सफेद रंग की बाहरी दीवारें न सिर्फ घर को क्लासिक लुक देती हैं, बल्कि गर्मी के मौसम में अंदर का तापमान भी संतुलित रखने में मदद करती हैं.&amp;nbsp;
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शाही महल का फील
घर के अंदर कदम रखते ही ऐसा एहसास होता है जैसे किसी शाही महल में प्रवेश कर रहे हों. दीवारों पर खूबसूरत टेक्सचर और हल्के रंगों की सजावट पूरे माहौल को बेहद सुकूनभरा बना देती है. बड़े-बड़े झरोखे और चौड़ी खिड़कियां प्राकृतिक रोशनी और समुद्र से आने वाली ठंडी हवा को सीधे घर के भीतर पहुंचाती हैं, जिससे हर कमरा खुला और ताजगी से भरा महसूस होता है.&amp;nbsp;

&amp;nbsp;सजावट को लेकर काफी सजग
रेखा अपने घर की सजावट को लेकर काफी सजग मानी जाती हैं. कहा जाता है कि उन्होंने घर की हर छोटी-बड़ी चीज खुद पसंद की है. लकड़ी की बारीक नक्काशी वाला फर्नीचर, पीतल की सजावटी वस्तुएं, मिट्टी की कलाकृतियां और हाथ से तैयार किए गए शोपीस घर की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. हर कोने में ऐसी चीजें नजर आती हैं जो उनकी कला और पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प के प्रति पसंद को दर्शाती हैं. &amp;nbsp;घर में भारी रेशमी पर्दे, पुराने दौर के झूमर और एंटीक फर्नीचर इसकी शाही पहचान को और मजबूत बनाते हैं. यहां आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्रस्तुति इतनी संतुलित है कि पारंपरिक आकर्षण कहीं भी कम नहीं पड़ता. यही वजह है कि यह बंगला लग्जरी और भारतीय संस्कृति का बेहतरीन मेल माना जाता है.&amp;nbsp;

हमेशा लाइमलाइट से दूर रहती हैं रेखा
रेखा अपनी निजी जिंदगी को हमेशा लाइमलाइट से दूर रखती हैं और उनके घर में भी यही सादगी झलकती है. &amp;nbsp;बताया जाता है कि वह सीमित लोगों से ही मुलाकात करती हैं और अपने निजी समय को काफी महत्व देती हैं. ध्यान, संगीत और शांत माहौल उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं. शाम के समय समुद्र के किनारे डूबते सूरज का नजारा उनके इस खूबसूरत आशियाने की सबसे खास बातों में से एक माना जाता है.

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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या &amp;apos;अविकली&amp;apos; इंजेक्शन बनेगा शुगर मरीजों के लिए रामबाण? पटना के सीनियर डॉक्टर का बड़ा दावा</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में 10 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं. इनमें बड़ी आबादी ऐसी है, जिन्हें अपने ब्लड शुगर लेवल को काबू में रखने के लिए हर दिन इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है. रोज-रोज सुई चुभाने का यह दर्द मरीजों के लिए किसी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से कम नहीं होता. इसी बीच डायबिटीज के मरीजों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है.&amp;nbsp;
डेनमार्क की मशहूर दवा निर्माता कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपना एक नया और आधुनिक इंसुलिन इंजेक्शन लॉन्च किया है, जिसका नाम अविकली है. इस दवा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक &#039;साप्ताहिक बेसल इंसुलिन&#039; है. इसका मतलब यह है कि इसे रोज लगवाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि हफ्ते में सिर्फ एक बार लेने से ही काम चल जाएगा.
क्या सच में यह दवा डायबिटीज के इलाज में कोई जादुई चमत्कार या &#039;रामबाण&#039; साबित होगी? इस सवाल पर पटना के जाने-माने डायबिटीज विशेषज्ञ और बिहार सरकार के &#039;गार्डिनर सुपर स्पेशियालिटी अस्पताल&#039; के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार ने बड़ा दावा किया और मरीजों को थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी है.
क्या वाकई चमत्कार करेगी &#039;अविकली&#039;?&amp;nbsp;
डॉ. मनोज कुमार ने इस नई दवा को लेकर खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि यह बात सच है कि डेनमार्क की कंपनी ने जो दवा लॉन्च की है, वह एक तरह का इंसुलिन ही है और इसे हफ्ते में एक बार देने के लिए डिजाइन किया गया है. इस दवा को बाजार में उतारने से पहले काफी समय तक रिसर्च और क्लिनिकल स्टडीज की गईं. यह दवा शरीर में जाकर धीरे-धीरे असर करती है और हफ्ते भर शुगर को कंट्रोल रखने का दावा करती है.
हालांकि, डॉ. मनोज कुमार ने मरीजों को सचेत करते हुए कहा कि अभी इस दवा को डायबिटीज का &#039;रामबाण&#039; या अचूक इलाज मान लेना जल्दबाजी होगी. सिर्फ एक इंसुलिन के दम पर पूरे हफ्ते का ब्लड शुगर पूरी तरह नॉर्मल रहेगा, यह प्रैक्टिकल तौर पर कहना अभी थोड़ा मुश्किल है.
दवा का असली टेस्ट अभी बाकी
डॉ. मनोज कुमार के मुताबिक, जब कोई नई दवा बाजार में आती है तो कागजी दावों और हकीकत में थोड़ा अंतर हो सकता है. उन्होंने बताया कि जब हम डॉक्टर इस दवा को अपने मरीजों पर प्रैक्टिकल तौर पर इस्तेमाल करना शुरू करेंगे, तभी इसके असली नतीजों और कंडीशन के बारे में पता चलेगा. जब तक कोई डॉक्टर खुद मरीजों पर इसका रिस्पॉन्स नहीं देख लेता, तब तक किसी भी नई दवा को सौ फीसदी परफेक्ट नहीं कहा जा सकता.
उन्होंने एक पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि मेडिकल साइंस में इस तरह के प्रयोग पहले भी हो चुके हैं. पहले भी कुछ ऐसी दवाइयां या इंसुलिन आए थे, जो लंबे समय तक असर का दावा करते थे, लेकिन व्यावहारिक जीवन में वे बहुत ज्यादा कामयाब या लोकप्रिय नहीं हो पाए.&amp;nbsp;
कंपनियां कर रहीं रिसर्च, पर अभी इंतजार जरूरी
दुनियाभर में कई बड़ी दवा कंपनियां इस बात पर लगातार रिसर्च कर रही हैं कि मरीजों को रोज-रोज इंसुलिन की सुई लगाने से मुक्ति मिल सके. हफ्ते में एक दिन का सिस्टम बन जाने से मरीजों की जिंदगी बहुत आसान हो जाएगी.&amp;nbsp;
डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि यह सोचना कि आपने हफ्ते में एक बार &#039;अविकली&#039; इंजेक्शन लगा लिया और अब आप खान-पान या लाइफस्टाइल को लेकर बिल्कुल लापरवाह हो सकते हैं तो यह बिल्कुल गलत होगा. उन्होंने कहा कि जैसे ही यह दवा हमारे पास उपलब्ध होगी, हम मरीजों की स्थिति देखकर इसका इस्तेमाल शुरू करेंगे. इसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि भारतीय मरीजों के शरीर पर यह नई साप्ताहिक दवा कितनी असरदार और सुरक्षित साबित हो रही है.
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        <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Snakebite Hotspots in World : दुनिया की ये जगहें हैं सांपों का सबसे खतरनाक अड्डा, घूमने से पहले जरूर जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ Snakebite Hotspots in World : दुनिया की ये जगहें हैं सांपों का सबसे खतरनाक अड्डा, घूमने से पहले जरूर जान लें ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Monsoon Stomach Infection: मानसून में पेट के इंफेक्शन से बचना है तो आज ही बदल लें ये आदतें, डॉक्टरों ने बताए ये आसान उपाय </title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Stomach Infection: बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम जरूर लेकर आता है, लेकिन यही मौसम पेट से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. मानसून के दौरान उल्टी, दस्त, फूड प्वाइजनिंग, गैस्ट्रोएन्टराइटिस, टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए जैसे संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हैं.
इसकी सबसे बड़ी वजह बारिश के दौरान पानी का दूषित होना, नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस का तेजी से बढ़ाना और खुले में रखा खाना जल्दी खराब होना है. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि मानसून में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपना कर इस इंफेक्शन से बहुत हद तक बचा जा सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपको भी मानसून में पेट के संक्रमण से बचना है, तो आपको कौन सी आदतें आज ही बदल लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
सबसे पहले पीने के पानी पर ध्यान दें&amp;nbsp;
मानसून में पेट के अधिकांश संक्रमण दूषित पानी की वजह से होते हैं. भारी बारिश के दौरान बैक्टीरिया सीवर का पानी और गंदे पीने के पानी के सोर्स तक पहुंच सकते हैं. ऐसे में साफ दिखने वाला पानी भी पूरी तरह सुरक्षित हो यह जरूरी नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार हमेशा उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या पैक्ड पानी ही पीना चाहिए. अगर पानी की क्वालिटी को लेकर संदेह हो तो अच्छे वाटर प्यूरीफायर या क्लोरीनेशन टैबलेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि बाहर का पानी या बाहर के ड्रिंक पीने से बचना चाहिए. और अपने साथ पीने का पानी हमेशा रखना ज्यादा फायदेमंद होता है.&amp;nbsp;
ताजा और घर का बना खाना सबसे सुरक्षित&amp;nbsp;
डॉक्टरों के अनुसार बारिश के मौसम में लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए. नमी के कारण बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ते हैं, जिससे भोजन दूषित हो सकता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर का ताजा बना भोजन सबसे सुरक्षित रहता है. सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, पहले से कटे हुए फल और लंबे समय से बाहर रखे स्नैक्स खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है.&amp;nbsp;
फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोना जरूरी&amp;nbsp;
अक्सर लोग फल और सब्जियों को सिर्फ पानी से धोकर इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन मानसून में इतनी सावधानी काफी नहीं होती है. इनके ऊपर मिट्टी, कीटनाशक और कई तरह के सूक्ष्म जीव मौजूद हो सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना चाहिए, जरूरत पड़ने पर कुछ मिनट के लिए सिरके वाली पानी में भिगोकर भी साफ किया जा सकता है. साथ ही कच्चे स्प्राउट्स और पहले से कटे हुए फलों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा रहता है.&amp;nbsp;
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हाथ धोने की आदत बना सकती है बड़ा फर्क&amp;nbsp;
डॉक्टर के अनुसार हाथ धोना इंफेक्शन से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका है. &amp;nbsp;खाना बनाने से पहले, टॉयलेट के इस्तेमाल के बाद और बाहर से आने पर साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना चाहिए. वहीं अगर किसी व्यक्ति को दस्त या उल्टी की समस्या हो जाए, तो शरीर में पानी की कमी न होने दें. हल्का भोजन करें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहे. अगर तेज बुखार, खून वाली उल्टी या दस्त की समस्या हो या कुछ दिनों तक आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर से कांटेक्ट करना चाहिए.
ये भी पढ़ें-Cancer Risk: लगातार 30 मिनट से ज्यादा बैठना बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा, नई रिसर्च में दावा, जानें इसकी वजह
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली हाट में Meghalaya Pineapple Festival, दुनिया का सबसे मीठा अनानास चखने का आज आखिरी मौका</title>
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        <description><![CDATA[ राष्ट्रीय राजधानी के दिल्ली हाट में शुक्रवार से मेघालय पाइनएप्पल फेस्टिवल चल रहा है. अगर आप भी दुनिया का सबसे मीठा अनानास चखना चाहते हैं तो आपके पास सिर्फ आज का ही दिन बाकी है. दरअसल, 10 से 12 जुलाई तक चलने वाले इस आयोजन में मेघालय के विश्व प्रसिद्ध प्रीमियम अनानास के साथ राज्य की संस्कृति, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और किसानों की सफलता की कहानी को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है. इस बार फेस्टिवल सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को देश-विदेश के बड़े बाजारों से जोड़ने, निर्यात बढ़ाने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है.
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन

फेस्टिवल का उद्घाटन केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की मौजूदगी में किया. कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, रिटेल कंपनियां, निर्यातक, उद्यमी और राज्य के किसान समूह भी शामिल हुए. मेघालय सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से आयोजित यह फेस्टिवल अब राज्य के सबसे महत्वपूर्ण कृषि ब्रांडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में पहचान बना चुका है.
मेघालय के अनानास की मिठास ने बनाई अलग पहचान
मेघालय का अनानास अपनी तेज सुगंध, कम अम्लता और अधिक मिठास के लिए जाना जाता है. इसका ब्रिक्स वैल्यू 16 से 18 के बीच होता है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है. री-भोई, गारो हिल्स, खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स की वर्षा आधारित पहाड़ियों में इसकी खेती होती है और हजारों किसान परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है. फेस्टिवल में खास तौर पर मशहूर &#039;क्यू&#039; (Kew) किस्म के ताजे अनानास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.
Flipkart और NeML के साथ हुए अहम समझौते
फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में फ्लिपकार्ट और नेशनल ई-मार्केट सर्विसेज लिमिटेड (NeML) के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए. इन साझेदारियों से मेघालय के अनानास उत्पादकों को संगठित रिटेल, संस्थागत खरीदारों और डिजिटल मार्केटप्लेस तक बेहतर पहुंच मिलेगी. इससे किसानों को देशभर में नए बाजार उपलब्ध कराने और बेहतर कीमत दिलाने की दिशा में मदद मिलेगी.
मेघालय वैश्विक बाजार में तेजी से बना रहा पहचान

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के नेतृत्व में मेघालय ने दूरदर्शी नीतियों, सामुदायिक भागीदारी और किसान केंद्रित योजनाओं के जरिए उल्लेखनीय बदलाव किया है. उन्होंने कहा कि मेघालय का अनानास अपनी मिठास, सुगंध और गुणवत्ता के कारण अब अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों तक पहुंच चुका है. उन्होंने CM FARM+, MLAMP और Meghalaya State Organic Mission जैसी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि राज्य वैश्विक स्तर की कृषि वैल्यू चेन विकसित कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि मेघालय के अनानास, लाकाडोंग हल्दी, संस्कृति और आतिथ्य से राज्य की अंतरराष्ट्रीय पहचान लगातार मजबूत हो रही है.
किसानों की आय बढ़ाना सरकार का मुख्य लक्ष्य
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर नई साझेदारी और हर नए बाजार का लाभ सीधे किसानों और आम लोगों तक पहुंचाना है. उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में यह फेस्टिवल केवल अनानास के प्रचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसानों, स्वयं सहायता समूहों, उद्यमियों, कारीगरों, कलाकारों और मेघालय की समृद्ध संस्कृति को देश के सामने लाने का बड़ा मंच बन चुका है. उन्होंने कहा कि हर संस्करण को पहले से अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है और देशभर से मिल रहे सकारात्मक सहयोग ने इस पहल को नई ऊंचाई दी है.
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का भी मिल रहा सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब पिछड़े क्षेत्र की नहीं, बल्कि तेजी से विकसित होती आर्थिक शक्ति की पहचान बना रहा है. फ्लिपकार्ट, अमेजन, सफाल और अन्य बड़े बाजार भागीदारों के साथ-साथ एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), विश्व बैंक, IFAD सहित कई विकास सहयोगी संस्थानों के समर्थन से किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और उद्यमियों के लिए मजबूत और टिकाऊ वैल्यू चेन तैयार की जा रही है.
प्रधानमंत्री से लेकर दुबई तक पहुंचा मेघालय का अनानास

हाल के वर्षों में मेघालय के अनानास को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संयुक्त अरब अमीरात दौरे के दौरान वहां के राष्ट्रपति को मेघालय का अनानास भेंट किया था. वहीं जून 2026 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दुबई के Lulu Retail के लिए दो मीट्रिक टन मेघालय अनानास की खेप को रवाना किया था. अब तक Meghalaya State Agricultural Marketing Board (MSAMB) के जरिए 100 मीट्रिक टन से अधिक अनानास का घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विपणन एवं निर्यात किया जा चुका है.
चार संस्करणों में दोगुनी हुई दिल्ली भेजी जाने वाली खेप
कार्यक्रम के दौरान &#039;Meghalaya Pineapple: A Four-Edition Journey&#039; पुस्तक का भी विमोचन किया गया. इसमें वर्ष 2023 से शुरू हुए फेस्टिवल की यात्रा को दर्ज किया गया है. पहले संस्करण में जहां दिल्ली के लिए 7.7 मीट्रिक टन ताजा अनानास भेजा गया था, वहीं 2025 तक यह मात्रा बढ़कर 15 मीट्रिक टन से अधिक हो गई. इससे उत्पादकों, रिटेल कंपनियों और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत संस्थागत नेटवर्क भी तैयार हुआ है.
महिला किसानों की भागीदारी बनी बड़ी ताकत
राज्य में 40 PRIME हब विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से 12 पहले ही शुरू हो चुके हैं. इसके अलावा 650 से अधिक स्पोक सुविधाएं प्रोसेसिंग, स्टोरेज और एग्रीगेशन का काम कर रही हैं. Community Public-Private Partnership (CPPP) मॉडल और जिरांग ऑर्गेनिक एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC) जैसे किसान संगठनों ने किसानों को बड़े खरीदारों से जोड़ा है. यह एफपीसी 18 गांवों के 433 कि ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>दिल्ली, हाट, में, Meghalaya, Pineapple, Festival, दुनिया, का, सबसे, मीठा, अनानास, चखने, का, आज, आखिरी, मौका</media:keywords>
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        <title>Kitchen Cockroach Control: किचन में आने लगे हैं कॉकरोच? ये 5 उपाय कर लें, आपके घर से कोसों दूर रहेगा ये कीड़ा</title>
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        <description><![CDATA[ Kitchen Cockroach Control:&amp;nbsp; किचन में कॉकरोच का दिखना एक बहुत ही आम है लेकिन परेशान करने वाली समस्या है. दरअसल कॉकरोच को नमी, गंदगी और खाने की चीजें बहुत पसंद होती हैं, और किचन में यह तीनों चीजें आसानी से मिल जाती हैं. सिंक के पास जमा पानी, जूठे बर्तन, खुले में रखा खाना और कचरे की बदबू कॉकरोच को अपनी तरफ खींच लेते हैं. एक बार जब कॉकरोच किचन में अपना ठिकाना बना लेते हैं, तो इन्हें भगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है. लेकिन आपको जान कर खुशी होगी की कुछ आसान और घरेलू उपायों को अपनाकर आप कॉकरोच को अपने किचन से हमेशा के लिए दूर रख सकते हैं.
अपनाएं ये 5 आसान उपाय
कॉकरोच से छुटकारा पाने के लिए नीचे दिए गए 5 उपाय काफी असरदार माने जाते हैं:

बेकिंग सोडा और चीनी: बेकिंग सोडा और चीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर किचन के उन कोनों में रख दें, जहां कॉकरोच सबसे ज्यादा दिखते हैं. चीनी की खुशबू कॉकरोच को अपनी तरफ खींचती है और बेकिंग सोडा उन्हें खत्म करने में मदद करता है.
बोरिक पाउडर का इस्तेमाल: बोरिक पाउडर को सिंक के नीचे, किचन के कोनों और दरारों में हल्का सा छिड़क दें. यह कॉकरोच के लिए काफी असरदार उपाय माना जाता है, लेकिन इसे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें.
तेजपत्ते का इस्तेमाल: तेजपत्ते की खुशबू कॉकरोच को बिल्कुल पसंद नहीं होती. आप कुछ तेजपत्ते किचन की अलमारी और कोनों में रख सकते हैं, इससे कॉकरोच वहां आने से बचेंगे.
नीम के तेल का स्प्रे: पानी में नीम के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर एक स्प्रे बना लें और इसे किचन के कोनों में छिड़कें. नीम की तेज गंध कॉकरोच को दूर भगाने में मदद करती है.
खीरे के छिलके: खीरे के छिलकों को किचन में उन जगहों पर रख दें, जहां कॉकरोच ज्यादा दिखते हैं. कई लोग मानते हैं कि खीरे की गंध से कॉकरोच वहां से दूर भाग जाते हैं.

यह भी पढ़ेंः Kitchen Spices Safety Tips :किचन के मसालों का रंग बदल गया? ऐसे पहचानें इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं
साफ-सफाई का रखें खास ध्यान
इन उपायों के साथ-साथ किचन की नियमित साफ-सफाई भी बहुत जरूरी है, वरना कॉकरोच बार-बार वापस आ जाते हैं.&amp;nbsp; ऐसे में रोजाना बर्तन धोकर रखना चाहिए. खाने-पीने की चीजों को हमेशा ढककर या एयरटाइट डिब्बों में रखें, ताकि कॉकरोच उन तक न पहुंच पाएं. साथ ही किचन में कहीं भी पानी जमा न होने दें, क्योंकि नमी वाली जगह कॉकरोच को सबसे ज्यादा पसंद आती है. कचरे को रोजाना बाहर फेंकें और कूड़ेदान को हमेशा ढककर रखें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Home Cleaning Tips : घर के इस कोने में सबसे ज्यादा छिपे होते हैं बैक्टीरिया, जानें कैसे करें सफाई? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kitchen Spices Safety Tips :किचन के मसालों का रंग बदल गया? ऐसे पहचानें इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं</title>
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        <description><![CDATA[ Kitchen Spices Safety Tips : खाने का टेस्ट बढ़ाने में मसालों का इस्तेमाल ही सबसे जरूरी होता है. हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा और गरम मसाला जैसे मसाले लगभग हर भारतीय रसोई का हिस्सा हैं. लेकिन कई बार लोग एक बार खरीदे गए मसालों को महीनों या सालों तक यूज करते रहते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुराने मसाले सुरक्षित हैं या उन्हें बदल देना चाहिए.
अगर मसालों का रंग बदल गया है, खुशबू पहले जैसी नहीं रही या उनका टेस्ट फीका पड़ गया है, तो इन्हें इस्तेमाल करने से पहले कुछ बातों की जांच करना जरूरी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मसाले कब खराब माने जाते हैं और कैसे पहचानें इन्हें इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं.&amp;nbsp;
मसाले कब खराब माने जाते हैं?&amp;nbsp;मसाले दूध, दही या सब्जियों की तरह जल्दी खराब नहीं होते, लेकिन समय के साथ उनकी क्वालिटी जरूर कम होने लगती है. लंबे समय तक रखने पर ऑक्सीजन के संपर्क में आने से मसालों का टेस्ट और खुशबू धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. इसे ऑक्सीकरण कहा जाता है. ऐसे मसाले खाने में पहले जैसा टेस्ट नहीं दे पाते है.
कैसे पहचानें इन्हें इस्तेमाल करना सुरक्षित है या नहीं?
मसाले खराब होने का सबसे आसान तरीका उसकी खुशबू, रंग और बनावट से पता लगाया जा सकता है.अगर मसाले की खुशबू पहले जैसी तेज नहीं रही हो तो इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता है. इसके अलावा रंग फीका, मटमैला या बदला हुआ दिखाई दे या मसाला चिपचिपा महसूस हो तो भी इन्हें इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं होता है. साथ ही उसमें अजीब गंध आने लगे और छोटे कीड़े या सफेद परत दिखाई दे, जो फंगस का संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में उस मसाले का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
क्या पुराने मसाले खाने से बीमारी हो सकती है?
अगर मसाला सूखा है और उसमें नमी, फफूंदी या कीड़े नहीं हैं, तो एक्सपायरी डेट निकलने के बाद भी वह जरूरी नहीं कि आपको बीमार कर दे. हालांकि उसका टेस्ट और खुशबू काफी कम हो सकती है, लेकिन अगर मसाले में नमी आ गई हो, फंगस लग गई हो, कीड़े दिखाई दें या बदबू आने लगे, तो ऐसे मसाले खाने से पेट दर्द, गैस, एलर्जी और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. बारिश और गर्मी के मौसम में ऐसे मसाले जल्दी खराब हो सकते हैं.
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मसालों को कितने समय तक इस्तेमाल करना सही है?
पिसे हुए मसाले आमतौर पर करीब 3 से 6 महीने तक सबसे अच्छा टेस्ट देते हैं.वहीं सामान्य तौर पर इन्हें 6 महीने से 1 साल के भीतर इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. साबुत मसाले पिसे मसालों की तुलना में ज्यादा समय तक टिकते हैं, लेकिन उन्हें भी लंबे समय तक रखने से टेस्ट कम होने लगता है.
मसालों को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?
1. मसालों की क्वालिटी बनाए रखने के लिए इन्हें सही तरीके से स्टोर करना जरूरी है. मसालों को हमेशा एयरटाइट डिब्बे या कांच के जार में रखें.
2. गीला चम्मच कभी भी मसाले के डिब्बे में न डालें.
3. मसालों को गैस चूल्हे की गर्मी और सीधी धूप से दूर रखें.
4. ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें.
6. जरूरत से ज्यादा मात्रा में मसाले खरीदने की जगह थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदें.
7. बेहतर टेस्ट के लिए साबुत मसाले खरीदें और जरूरत के अनुसार घर पर पीसें.
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Home Cleaning Tips : घर के इस कोने में सबसे ज्यादा छिपे होते हैं बैक्टीरिया, जानें कैसे करें सफाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Home Cleaning Tips : घर के चमकने, फर्श साफ दिखने और हर चीज अपनी जगह पर रखे होने के बाद भी जरूरी नहीं होता है कि आपका घर पूरी तरह बैक्टीरिया फ्री है. घर में कुछ ऐसी चीजें और कोने होते हैं जिन्हें हम दिन में कई बार यूज करते हैं, लेकिन उनकी नियमित सफाई करना भूल जाते हैं. यही जगह धीरे-धीरे बैक्टीरिया और वायरस के पनपने का कारण बन सकती हैं.
खासकर मौसम बदलने के दौरान वायरल संक्रमण, सर्दी-खांसी और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में सिर्फ दिखाई देने वाली गंदगी हटाना काफी नहीं है, बल्कि उन जगहों की भी सफाई जरूरी है जहां सबसे ज्यादा बैक्टीरिया जमा होते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि घर के कौन से कोने में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया छिपे होते हैं और इनकी सफाई कैसे करें.&amp;nbsp;
घर के कौन से कोने में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया छिपे होते हैं?
1. किचन सिंक और ड्रेन - घर में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया किचन सिंक और उसके ड्रेन में पाए जाते हैं. खाने के बचे हुए कण और नमी की वजह से यहां बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं.&amp;nbsp;
2. बर्तन धोने वाला स्पंज - गीला रहने और रोज इस्तेमाल होने के कारण स्पंज में लाखों बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. इसलिए इसे नियमित रूप से साफ करना और हर 2 से 3 हफ्ते में बदलना चाहिए.
3. दरवाजों के हैंडल और स्विच बोर्ड - इन चीजों को घर के सभी लोग दिनभर कई बार छूते हैं, जिससे इन पर बैक्टीरिया और वायरस आसानी से जमा हो सकते हैं.
4. मोबाइल, रिमोट और कीबोर्ड - बार-बार हाथ लगाने की वजह से मोबाइल फोन, टीवी, एसी का रिमोट और कंप्यूटर कीबोर्ड भी बैक्टीरिया का बड़ा सोर्स बन सकते हैं.
5. चॉपिंग बोर्ड और किचन प्लेटफॉर्म - सब्जियां और अन्य फूड प्रोडक्ट्स काटने की वजह से चॉपिंग बोर्ड के कट्स में बैक्टीरिया पनप सकते हैं. वहीं किचन प्लेटफॉर्म की सफाई न करने पर भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
6 बाथरूम सिंक, पानी की बोतलें और दरवाजे का मैट - बाथरूम का सिंक, रोज इस्तेमाल होने वाली पानी की बोतलें और घर के बाहर रखा मैट भी बैक्टीरिया जमा होने की आम जगहें हैं. इनकी नियमित सफाई जरूरी है.
यह भी पढ़ें - Pillow Cleaning Tips: तकिए से आ रही है अजीब बदबू? बिना धोए चुटकियों में फ्रेश करने की नोट करें ये सीक्रेट ट्रिक&amp;nbsp;
इनकी सफाई कैसे करें?
घर की इन चीजों को साफ रखने के लिए किचन सिंक पर बेकिंग सोडा छिड़ककर साफ करें, फिर सिरका और पानी का घोल स्प्रे करें और आखिर में ड्रेन में गर्म पानी डालें. बर्तन धोने वाले स्पंज को रातभर सिरके के घोल में भिगोएं या गीले स्पंज को करीब 2 मिनट माइक्रोवेव में गर्म करें और हर 2 से 3 हफ्ते में बदल दें. दरवाजों के हैंडल, स्विच बोर्ड, मोबाइल, रिमोट और कीबोर्ड को रोजाना डिसइंफेक्टेंट वाइप्स या साफ माइक्रोफाइबर कपड़े से पोछें. वहीं चॉपिंग बोर्ड और किचन प्लेटफॉर्म को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और साबुन से साफ करें. इसके अलावा बाथरूम सिंक, पानी की बोतलों और दरवाजे के मैट की भी नियमित सफाई करें, जिससे बैक्टीरिया और वायरस पनपने का खतरा कम हो सके.&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - Termite Prevention: क्या बारिश में आपके घर भी लग रही है दीमक? भूलकर भी न करें ये गलतियां, ऐसे रखें सुरक्षित ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cancer Drug  kerala Case : दवा के इंतजार में कोर्ट केस ही लड़ती रही कैंसर पेशेंट, 57 बार टली सुनवाई और हो गई मौत</title>
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        <description><![CDATA[ Cancer Drug &amp;nbsp;kerala Case : कैंसर दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है. ऐसे में समय पर सही इलाज और लाइफ सेवर दवाएं मिलना मरीजों के लिए बेहद जरूरी होता है, लेकिन जब इलाज महंगा हो और उससे जुड़ा मामला लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में फंसा रहे तो इसका सीधा असर मरीज की जिंदगी पर पड़ सकता है. ऐसा ही एक मामला केरल हाईकोर्ट से सामने आया है.
यहां कैंसर की लाइफ सेवर दवा रिबोसिक्लिब को सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका 57 बार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई, लेकिन आखिरी सुनवाई नहीं हो सकी. इसी दौरान याचिकाकर्ता महिला की मौत हो गई. अब इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश से जल्द सुनवाई कराने की अपील की गई है, जिससे दवाओं तक पहुंच से जुड़े इस जरूरी मामले पर जल्द फैसला हो सके. यह मामला महंगी कैंसर दवाओं तक मरीजों की पहुंच और न्यायिक प्रक्रिया की रफ्तार पर भी सवाल खड़े कर रहा है.&amp;nbsp;
दवा के इंतजार में कोर्ट केस ही लड़ती रही कैंसर पेशेंट
यह याचिका जून 2022 में केरल हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी. इसका उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर की लाइफ सेवर दवा रिबोसिक्लिब को आम मरीजों के लिए किफायती बनाना था. जनवरी 2023 से अब तक इस मामले को 57 बार आखिरी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया, लेकिन किसी भी तारीख पर आखिरी बहस नहीं हो सकी. इसी बीच याचिकाकर्ता महिला की मृत्यु हो गई, हालांकि महिला की मौत के बाद भी केरल हाईकोर्ट ने इस मामले को आम लोगों के हित से जुड़ा मानते हुए, याचिकाकर्ता की मौत के बाद भी अपने स्तर पर इसकी सुनवाई जारी रखने का फैसला किया.&amp;nbsp;
याचिका में क्या मांग की गई थी?
याचिका में केंद्र सरकार से पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत गवर्नमेंट यूज लाइसेंस जारी करने की मांग की गई थी. अगर ऐसा होता, तो इस दवा का जेनेरिक संस्करण भारत में बनाया जा सकता था और इसकी कीमत में 90 से 95 प्रतिशत तक कमी आ सकती थी. बताया गया कि फिलहाल रिबोसिक्लिब की कीमत करीब 78,400 रुपये प्रति माह है, जबकि दूसरी दवा एबेमासिक्लिब की कीमत 47,700 रुपये से 95,500 रुपये प्रति माह तक बताई गई है.&amp;nbsp;
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सरकार ने क्या दिया जवाब?
सरकार ने माना कि रिबोसिक्लिब एक प्रभावी दवा है, लेकिन गवर्नमेंट यूज लाइसेंस जारी करने से इनकार कर दिया. सरकार का कहना था कि ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति को राष्ट्रीय आपातकाल की श्रेणी में नहीं माना जा सकता है. वहीं याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य का अधिकार, जीवन के अधिकार का हिस्सा है. इसलिए दवाओं तक सस्ती पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. मामले में केंद्र सरकार, दवा निर्माता कंपनियों और अन्य पक्ष अदालत में अपने विस्तृत जवाब दाखिल कर चुके हैं. अदालत ने इस मामले में एक एमिकस क्यूरी भी नियुक्त किया था. वर्किंग ग्रुप का कहना है कि सभी पक्षों की दलीलें और अदालत के तहत मांगी गई रिपोर्टें जमा हो चुकी हैं. इसके बाद भी दवाओं तक पहुंच से जुड़े संवैधानिक सवालों पर अब तक आखिरी फैसला नहीं आया है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cancer Risk: लगातार 30 मिनट से ज्यादा बैठना बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा, नई रिसर्च में दावा, जानें इसकी वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Prolonged Sitting Cancer Risk Study: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना आम बात हो गई है. ऑफिस में लंबे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठना, घर से काम करना, टीवी देखना या मोबाइल पर लगातार समय बिताना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. पहले से ही माना जाता रहा है कि लंबे समय तक बैठे रहने से मोटापा, डायबिटीज और हार्ट रोग का खतरा बढ़ता है. अब एक नई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि अगर कोई व्यक्ति बिना उठे लगातार 30 मिनट या उससे ज्यादा समय तक बैठा रहता है, तो इससे कैंसर से मौत का खतरा भी बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
12 साल तक हेल्थ ट्रैक किया गया
यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो &amp;nbsp;के रिसर्चर ने किया है, जिसे मेडिकल जर्नल पीएलओएस मेडिसिन में प्रकाशित किया गया. रिसर्च में यूके बायोबैंक से जुड़े 91 हजार से अधिक लोगों के आंकड़ों का एनालिसीस किया गया. खास बात यह रही कि प्रतिभागियों से सिर्फ सवाल नहीं पूछे गए, बल्कि उन्हें एक सप्ताह तक कलाई पर पहनने वाले ट्रैकर दिए गए, जिससे उनकी वास्तविक फिजिकल एक्टिविटी और बैठने के समय को रिकॉर्ड किया गया. इसके बाद लगभग 12 वर्षों तक उनकी सेहत पर नजर रखी गई.
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किन लोगों में कैंसर का खतरा ज्यादा?
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग दिनभर में बार-बार 30 मिनट या उससे ज्यादा समय तक लगातार बैठे रहते थे, उनमें कैंसर से मौत का खतरा अधिक देखा गया. रिसर्चर के मुताबिक, लंबे समय तक लगातार बैठने के हर अतिरिक्त एक घंटे के साथ यह खतरा करीब 9 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. दिलचस्प बात यह है कि पूरे दिन कुल कितने घंटे बैठे रहे, उससे ज्यादा असर लगातार बिना उठे बैठे रहने की आदत का देखा गया.&amp;nbsp;
कैसे कर सकते हैं बचाव?
हालांकि, इस रिसर्च में एक अच्छी खबर भी सामने आई. अगर लंबे समय तक बैठे रहने की बजाय बीच-बीच में हल्की-फुल्की गतिविधियां की जाएं तो जोखिम कम हो सकता है. स्टडी के अनुसार, लगातार बैठने के एक घंटे की जगह हल्की शारीरिक गतिविधि, जैसे कुछ देर टहलना, घर के छोटे-मोटे काम करना या थोड़ा इधर-उधर चलना, कैंसर से मौत के खतरे को करीब 12 प्रतिशत तक कम कर सकता है. वहीं लगभग 30 मिनट की तेज चाल से वॉक करने जैसी मध्यम गतिविधि से यह जोखिम करीब 8 प्रतिशत घट सकता है. इतना ही नहीं, सिर्फ 5 मिनट की तेज एक्सरसाइज भी कैंसर से मौत के खतरे को करीब 22 प्रतिशत तक कम करने से जुड़ी पाई गई.
आदत को भी बदलने की जरूरत
इस &amp;nbsp;स्टडी का नेतृत्व करने वाले डॉ. फ्रेडरिक हो ने किया, जो यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो में पब्लिक हेल्थ के सीनियर लेक्चरर हैं. उनका कहना है कि लोगों को सिर्फ नियमित व्यायाम पर ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत को भी बदलने की जरूरत है. उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति रोज जिम नहीं जा सकता, तब भी हर आधे घंटे में कुछ मिनट के लिए उठकर चलना या हल्की गतिविधि करना फायदेमंद हो सकता है. एक्सपर्ट का मानना है कि लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय हो जाती हैं. इससे ब्लड शुगर का संतुलन बिगड़ सकता है, इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकती है और शरीर में सूजन की प्रक्रिया तेज हो सकती है. &amp;nbsp;हालांकि, रिसर्चर ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल एक संबंध दिखाता है. इससे यह साबित नहीं होता कि लंबे समय तक बैठना सीधे कैंसर से मौत का कारण बनता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Rajesh Sharma Health: कीड़े के काटने से होने वाला इंफेक्शन कितना खतरनाक, जिससे जूझ रहे एक्टर राजेश शर्मा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rajesh-sharma-health-कीड़े-के-काटने-से-होने-वाला-इंफेक्शन-कितना-खतरनाक-जिससे-जूझ-रहे-एक्टर-राजेश-शर्मा</link>
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        <description><![CDATA[ Rajesh Sharma Health Update: बॉलीवुड और बंगाली फिल्मों के जाने-माने अभिनेता राजेश शर्मा इन दिनों अस्पताल में भर्ती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रभास की फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें किसी कीड़े या जहरीली मकड़ी ने काट लिया था. शुरुआत में उन्होंने इसे मामूली समझकर शूटिंग पूरी कर ली, लेकिन कुछ घंटों बाद उनके पैर में तेज दर्द शुरू हो गया और तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. कोलकाता लौटने तक उन्हें तेज बुखार भी आ गया, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर किसी कीड़े के काटने से होने वाला इंफेक्शन कितना खतरनाक हो सकता है?
कितना खतरनाक होता है कीड़े का काटना?
आमतौर पर मच्छर, चींटी, मधुमक्खी या दूसरे छोटे कीड़ों के काटने पर हल्की खुजली, लालपन या सूजन होना सामान्य माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यही छोटा-सा घाव गंभीर इंफेक्शन का कारण बन सकता है. अगर काटने वाला कीड़ा जहरीला हो या उसके जरिए बैक्टीरिया शरीर में पहुंच जाएं तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है.
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट healthline के एक्सपर्ट के अनुसार, अगर कीड़े के काटने वाली जगह पर लालपन लगातार बढ़ने लगे, सूजन फैलने लगे, तेज दर्द हो, पस निकलने लगे या बुखार आने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ये सभी संकेत बताते हैं कि इंफेक्शन शरीर में फैल रहा है और समय रहते इलाज न मिलने पर यह त्वचा की गहरी परतों तक पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
कब गंभीर हो सकती है समस्या?
कुछ मामलों में यह इंफेक्शन सेल्युलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है. इसमें त्वचा और उसके नीचे के ऊतकों में बैक्टीरिया तेजी से फैलने लगते हैं. अगर इसका इलाज समय पर न किया जाए, तो इंफेक्शन खून तक पहुंच सकता है और जानलेवा स्थिति भी पैदा कर सकता है. यही वजह है कि डॉक्टर लगातार सलाह देते हैं कि कीड़े के काटने के बाद होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.&amp;nbsp;
कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
अगर काटने वाली जगह से लाल लकीरें शरीर के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ती दिखाई दें, लिम्फ नोड्स में सूजन आ जाए या तेज ठंड के साथ बुखार आने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. कुछ लोगों में कीड़े के जहर या एलर्जी की वजह से सांस लेने में तकलीफ, चेहरे या गले में सूजन और बेहोशी जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है. ऐसी स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है.&amp;nbsp;
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बचाव के लिए ये हैं उपाय?
इंफेक्शन से बचने के लिए सबसे पहले काटे गए हिस्से को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए. खुजली होने पर बार-बार उसे खरोंचने से बचें, क्योंकि इससे बैक्टीरिया घाव के अंदर पहुंच सकते हैं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक क्रीम या दूसरी दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर दर्द, सूजन या बुखार लगातार बढ़ रहा हो, तो बिना देर किए अस्पताल पहुंचना सबसे सुरक्षित विकल्प है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rajesh, Sharma, Health:, कीड़े, के, काटने, से, होने, वाला, इंफेक्शन, कितना, खतरनाक, जिससे, जूझ, रहे, एक्टर, राजेश, शर्मा</media:keywords>
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        <title>Rashifal 11 July 2026: शनि देव की कृपा से सिंह सहित 5 राशियों के हाथ लगेगा बड़ा मौका, करियर में वृद्धि के योग, मेष से मीन तक राशिफल देखें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rashifal-11-july-2026-शनि-देव-की-कृपा-से-सिंह-सहित-5-राशियों-के-हाथ-लगेगा-बड़ा-मौका-करियर-में-वृद्धि-के-योग-मेष-से-मीन-तक-राशिफल-देखें</link>
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        <description><![CDATA[ Rashifal 11 July 2026: आज 11 जुलाई 2026 दिन शनिवार है.पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्णपक्ष तिथि द्वादशी,रात्रि 11बजकर 58 मिनट तक रहेगा,उपरांत त्रयोदशी तिथि आरम्भ हो जाएगी.सूर्योदय कालीन ग्रहों की बात करें तो शनि मीन में राशि है,राहु कुम्भ राशि विराजमान रहेगे,मंगल वृषभ राशि में रहेगे,देव गुरु बृहस्पति और बुध मिथुन राशि में रहेगे,सूर्य ,मिथुन राशि में रहेगे केतु सिंह राशि में संचरण करेगे.
शुक्र सिंह राशि में है चंद्रमा वृषभ राशि में संचरण करेगे,आज का दिन कैसा रहेगा अगर आप जानना चाहते है,तो चिंता नहीं करे आपकी राशि पर पड़ने वाले ग्रह तथा नक्षत्रों के प्रभाव कैसा,रहेगा,आइए जानते है,ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से मेष से लेकर मीन राशि के लिए आज का दिन कैसा रहेगा.
मेष राशि

पारिवारिक जीवन: आज चंद्रमा आपके राशि के दूसरे भाव में संचरण करेंगे,आज का दिन आपके लिए उत्तम रहने वाला है. परिवार के सदस्यों के साथ आपके संबंध बेहद प्रगाढ़ और मधुर रहेंगे. आज परिवार वालों के साथ मिलकर बाहर जाकर किसी मूवी को देखने का शानदार प्लान बन सकता है. यह समय आप सब को एक-दूसरे के करीब लाएगा और परिवार में खुशहाल माहौल बना रहेगा.
व्यापार और नौकरी: व्यापार और नौकरी के क्षेत्र में आज आप किसी अहम बात या प्रोजेक्ट को लेकर उलझन में रह सकते हैं. इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए आप अपने किसी खास मित्र से इसे शेयर करेंगे, जिससे आपको मार्गदर्शन मिलेगा. कोई भी बड़ा वित्तीय निर्णय शांत मन से लें.
करियर और शिक्षा: आज आप अपने करियर को नई दिशा देने के लिए किसी नई स्किल या तकनीक को सीखने का विचार कर सकते हैं. आपकी यह मेहनत और सीखने की ललक आपको भविष्य में बहुत बड़ा लाभ और सफलता जरूर दिलाएगी.
स्वास्थ्य: आज आपका स्वास्थ्य पूरी तरह से उत्तम बना रहेगा. आज आप अपने दोस्तों की बर्थडे पार्टी में शामिल होंगे, जहाँ बाकी दोस्तों के साथ मस्ती करने और इंज्वॉय करने का मौका मिलेगा. इससे आपका मानसिक तनाव दूर होगा और आप खुश रहेंगे.
आर्थिक स्थिति: आर्थिक तौर पर आज का दिन आपके लिए अनुकूल है. आपके मन में आज कोई नया वाहन खरीदने का ख्याल आ सकता है. आपकी बचत आज इस काम के लिए आपको प्रेरित करेगी, बस बजट का पूरा ध्यान रखें.
प्रेम जीवन: आज का दिन प्रेम जीवन के लिए बेहद रोमांटिक रहने वाला है. आपके और आपके जीवनसाथी के बीच प्यार की बहार रहेगी. आज आपको अपने जीवनसाथी से कोई खास और अनमोल उपहार मिलेगा, जिसे पाकर आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा.
लकी अंक: 7
लकी रंग: पीला
उपाय: सुबह उठकर सूर्य देव को जल और लाल फूल अर्पित करें, इससे आपके कामकाज में आ रही उलझनें दूर होंगी और दिन और भी शुभ होगा.

वृष राशि

पारिवारिक जीवन: आज चंद्रमा आपके राशि के पहले भाव में संचरण करेंगे,आज का दिन परिवार के साथ शांति भरा रहेगा. शाम के समय आपका मन धार्मिक कार्यक्रमों की ओर अधिक आकर्षित होगा. आप परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर किसी पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा ले सकते हैं.
व्यापार और नौकरी: ऑफिस में आज वर्कलोड काफी बढ़ सकता है, जिसके कारण आपको ओवरटाइम (OT) करना पड़ सकता है. हालांकि, आप अपनी मेहनत से ऑफिस में रुके हुए सभी कामों को समय से पूरा करने में सफल रहेंगे. व्यापार में टूर-एंड-ट्रेवल्स तथा मीडिया संबंधी बिजनेस करने वालों के लिए आज का दिन किसी नए मोड़ ला सकता है.
करियर और शिक्षा: करियर के स्तर पर आज आपको अपने वरिष्ठों या एक्सपर्ट से सीखने का अच्छा मौका मिलेगा. छात्रों को अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित रखने की जरूरत है. पिछले समय के रुके हुए कामों या प्रोजेक्ट्स को आज पूरा करने से भविष्य में बड़ा फायदा मिलेगा.
स्वास्थ्य: काम का अधिक बोझ और ओवरटाइम की वजह से शारीरिक थकान हो सकती है. इसलिए, बीच-बीच में आराम लें और पानी का पर्याप्त सेवन करें. लंबे समय तक लैपटॉप या स्क्रीन के सामने बैठने से आंखों में जलन हो सकती है.
आर्थिक स्थिति: आज रुपए-पैसों के मामले में थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है. कोई भी लापरवाही करने पर आर्थिक नुकसान हो सकता है. हालांकि, किसी करीबी व्यक्ति से आपको बहुत ही फायदेमंद सलाह मिलेगी. आर्थिक निर्णय लेने से पहले किसी एक्सपर्ट से परामर्श जरूर लें, वह आपके लिए मददगार साबित होगा.
प्रेम जीवन: काम के अत्यधिक बोझ के कारण प्रेम जीवन में आज थोड़ा समय कम मिल सकता है. हालांकि, आपका पार्टनर आपकी इस व्यस्तता को समझेगा. रात को समय निकालकर अपने प्रियजन के साथ अच्छी बातचीत करें.
लकी अंक: 1
लकी रंग: पर्पल
उपाय: सुबह ऑफिस जाने से पहले घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें, इससे आज आपके सभी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी.

मिथुन राशि

पारिवारिक जीवन: आज चंद्रमा आपके राशि के द्वादश भाव में संचरण करेंगे,आज का दिन आपके पारिवारिक जीवन के लिए बेहद अनुकूल और खुशहाल रहने वाला है. आप अपनी संतान के साथ पिकनिक या किसी खूबसूरत स्थान पर घूमने जा सकते हैं और उनके साथ बहुत ही अच्छा व यादगार समय बिताएंगे. विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह दिन बहुत ही शुभ और लाभदायक रहेगा.
व्यापार और नौकरी: कार्यक्षेत्र में आज आपकी चल रही हर परेशानी का हल चुटकियों में निकल आएगा. अगर आप कोई सरकारी कार्य कर रहे हैं या सरकारी योजनाओं से जुड़े हैं, तो आपको बड़े लाभ की संभावना है. नौकरीपेशा लोगों को उच्च अधिकारियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा.
करियर और शिक्षा: छात्रों के लिए आज का दिन काफी उत्साहवर्धक रहेगा. पढ़ाई में ध्यान लगाने की क्षमता में वृद्धि होगी. करियर के संबंध में आप कोई नई और बेहतरीन योजना बना सकते हैं. आपके किए गए कामों को देखते हुए समाज में आपका नाम और प्रतिष्ठा ऊंची होगी.
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य की दृष्टि से आज का दिन आपके लिए सामान्य और बेहतरीन रहेगा. पिछले कुछ समय से चल रहा मानसिक तनाव दूर होगा और आप खुद को बिल्कुल ऊर्जावान महसूस करेंगे. बस सावधानी इतनी ही रखें कि तेज धूप में लंबे समय तक न रहें.
आर्थिक स्थित ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rashifal, July, 2026:, शनि, देव, की, कृपा, से, सिंह, सहित, राशियों, के, हाथ, लगेगा, बड़ा, मौका, करियर, में, वृद्धि, के, योग, मेष, से, मीन, तक, राशिफल, देखें</media:keywords>
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        <title>Frequent Urination: सफर के दौरान बार&amp;बार नहीं जाना पड़ेगा टॉयलेट! निकलने से पहले बस कर लें ये 5 आसान काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Control Frequent Urination During Travel: लंबे सफर पर निकलने से पहले ज्यादातर लोग बैग, टिकट और जरूरी सामान की तैयारी करते हैं, लेकिन अगर आपको बार-बार पेशाब आने की समस्या रहती है, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है. रास्ते में बार-बार टॉयलेट न मिलने की वजह से परेशानी बढ़ सकती है और सफर का मजा भी खराब हो सकता है. ऐसे में कुछ आसान तैयारियां आपकी यात्रा को काफी आरामदायक बना सकती हैं. चलिए आपको इनके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;यात्रा से पहले रूट और टॉयलेट की जानकारी लें
अगर आप कार से लंबी दूरी तय करने वाले हैं, तो पहले ही यह देख लें कि रास्ते में पेट्रोल पंप, रेस्ट एरिया या सार्वजनिक शौचालय कहां-कहां पड़ेंगे. इससे जरूरत पड़ने पर आपको घबराहट नहीं होगी और समय रहते टॉयलेट मिल जाएगा.
&amp;nbsp;निकलने से पहले खानपान का रखें ध्यान
सफर से कुछ घंटे पहले ऐसी चीजें खाने-पीने से बचें जो ब्लैडर को ज्यादा सक्रिय कर सकती हैं. चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, शराब, ज्यादा मसालेदार भोजन और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स कई लोगों में बार-बार पेशाब आने की वजह बन सकती हैं. हल्का और संतुलित भोजन चुनें ताकि शरीर भी आरामदायक महसूस करे.
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&amp;nbsp;पानी पीना पूरी तरह बंद न करें
कई लोग सोचते हैं कि कम पानी पीने से बार-बार पेशाब नहीं आएगा. हालांकि, शरीर को पूरी तरह डिहाइड्रेट करना सही तरीका नहीं है. सफर से पहले जरूरत के अनुसार पानी पिएं, लेकिन एक साथ बहुत ज्यादा तरल पदार्थ लेने से बचें. इससे शरीर में पानी की कमी भी नहीं होगी और बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत भी कम पड़ेगी.
&amp;nbsp;जरूरत का सामान साथ रखें
अगर आपको पहले से यूरिन लीकेज या बार-बार पेशाब आने की समस्या है, तो अतिरिक्त अंडरगारमेंट्स, टिश्यू, वेट वाइप्स, हैंड सैनिटाइजर और जरूरत पड़ने पर एब्जॉर्बेंट पैड साथ रखें. इससे अचानक स्थिति बनने पर भी आप बिना तनाव के उसे संभाल सकेंगे और सफर आराम से जारी रख पाएंगे.
घबराएं नहीं, ब्लैडर को शांत रखने की कोशिश करें
कई बार टॉयलेट की चिंता ही बार-बार पेशाब आने की इच्छा को बढ़ा देती है. ऐसी स्थिति में गहरी सांस लें और खुद को शांत रखने की कोशिश करें. यदि डॉक्टर ने पहले से पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज या केगल एक्सरसाइज करने की सलाह दी है, तो जरूरत पड़ने पर उनका अभ्यास भी कुछ समय के लिए पेशाब की तीव्र इच्छा को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. अगर लंबे समय से बार-बार पेशाब आने, अचानक तेज यूरिन की इच्छा होने या यूरिन लीकेज जैसी समस्या बनी हुई है और इसकी वजह से सफर या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि सही जांच और इलाज से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Frequent, Urination:, सफर, के, दौरान, बार-बार, नहीं, जाना, पड़ेगा, टॉयलेट, निकलने, से, पहले, बस, कर, लें, ये, आसान, काम</media:keywords>
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        <title>Termite Prevention: क्या बारिश में आपके घर भी लग रही है दीमक? भूलकर भी न करें ये गलतियां, ऐसे रखें सुरक्षित</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/termite-prevention-क्या-बारिश-में-आपके-घर-भी-लग-रही-है-दीमक-भूलकर-भी-न-करें-ये-गलतियां-ऐसे-रखें-सुरक्षित</link>
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        <description><![CDATA[ How To Protect Wooden Furniture From Termites: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं घरों में नमी बढ़ने के साथ कई तरह की परेशानियां भी शुरू हो जाती हैं. इन्हीं में से एक है दीमक का खतरा. नमी और सीलन वाले वातावरण में दीमक तेजी से पनपती है और धीरे-धीरे लकड़ी के फर्नीचर, दरवाजों, खिड़कियों और अन्य लकड़ी के सामान को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाने लगती है. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो काफी नुकसान हो सकता है. चलिए आपको कुछ ऐसे उपाय बताते हैं, जिन्हें अपनाकर आप मानसून के दौरान अपने घर को दीमक से काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं.
सबसे जरूरी बात&amp;nbsp;
सबसे पहले घर में कहीं भी पानी का रिसाव या सीलन हो तो उसे तुरंत ठीक कराएं. छत से टपकता पानी, दीवारों की नमी, लीक होते नल या पाइप दीमक को पनपने के लिए अनुकूल माहौल देते हैं. &amp;nbsp;इसलिए बारिश के मौसम में समय-समय पर इन जगहों की जांच करते रहें.&amp;nbsp;
घर में हवा का सही से आवागमन
घर में हवा का सही आवागमन भी बहुत जरूरी है. बाथरूम, स्टोर रूम और बेसमेंट जैसी जगहों पर अक्सर नमी बनी रहती है. ऐसे स्थानों पर एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें और जब मौसम साफ हो तो खिड़कियां खोलकर कमरे में ताजी हवा आने दें. इससे सीलन कम होगी और दीमक के पनपने की संभावना भी घटेगी.
फर्नीचर को रखने का सही तरीका जरूरी
अगर घर में लकड़ी का फर्नीचर है तो उसे सीधे गीली दीवार या फर्श से सटाकर न रखें. जहां तक संभव हो, फर्नीचर और दीवार के बीच थोड़ा अंतर रखें ताकि हवा आती-जाती रहे. समय-समय पर फर्नीचर को साफ करें और उस पर एंटी-टर्माइट पॉलिश या वार्निश लगवाते रहें। इससे लकड़ी को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है. बारिश के मौसम में पुराने अखबार, गत्ते के डिब्बे और बेकार लकड़ी को फर्श पर रखने से बचें. ये चीजें नमी सोख लेती हैं और दीमक को आकर्षित करती हैं. अगर इन्हें रखना जरूरी हो तो धातु की रैक पर रखें और समय-समय पर उनकी सफाई करते रहें.&amp;nbsp;
साफ- सफाई पर विशेष ध्यान
घर के आसपास भी सफाई का विशेष ध्यान रखें. दीवारों के पास लकड़ी के टुकड़े, सूखे पत्ते या मिट्टी का ढेर न लगने दें. इससे दीमक को घर तक पहुंचने का रास्ता मिल सकता है. इसके साथ ही, खिड़कियों, दरवाजों और वेंटिलेशन वाली जगहों पर महीन जाली लगाना भी फायदेमंद रहता है.&amp;nbsp;
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ये घरेलू उपाय अपना सकते हैं?
घरेलू उपाय के तौर पर नीम का तेल, संतरे के तेल या सफेद सिरका और नींबू के मिश्रण का सीमित इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि ये उपाय केवल शुरुआती स्तर पर ही कुछ हद तक मददगार होते हैं और बड़ी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं.
इन चीजों को न करें नजरअंदाज
अगर दीवारों पर मिट्टी की पतली सुरंगें दिखाई दें, लकड़ी थपथपाने पर खोखली आवाज आए, फर्नीचर में छोटे-छोटे छेद नजर आए या खिड़कियों के पास दीमक के पंख दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज न करें. ऐसे संकेत गंभीर संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं. इस स्थिति में जल्द से जल्द किसी पेशेवर पेस्ट कंट्रोल विशेषज्ञ से जांच और उपचार कराना बेहतर रहता है.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>सावधान! कहीं आपकी 12 साल पुरानी या &amp;apos;प्रीमियम एज्ड&amp;apos; शराब में मिलावट तो नहीं? FSSAI ने कसा शिकंजा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सावधान-कहीं-आपकी-12-साल-पुरानी-या-प्रीमियम-एज्ड-शराब-में-मिलावट-तो-नहीं-fssai-ने-कसा-शिकंजा</link>
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        <description><![CDATA[ अगर आप शराब की बोतल पर लिखा &#039;12 साल पुरानी&#039;, &#039;प्रीमियम एज्ड&#039; या किसी खास फ्लेवर का दावा देखकर उसे खरीदते हैं तो यह खबर आपके लिए है. फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI ने कई शराब बनाने वाली कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए. आरोप है कि कुछ कंपनियां नियमों के खिलाफ शराब में फ्लेवर मिला रही हैं और उसकी उम्र यानी Age को लेकर ऐसे दावे कर रही हैं, जो नियमों के मुताबिक नहीं हैं.
क्या है मामला?
FSSAI के मुताबिक जांच में तीन तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं.

पहली गड़बड़ी: शराब में बाहर से फ्लेवर मिलाने को लेकर है. नियमों के मुताबिक रम, ब्रांडी, जिन, व्हिस्की, वाइन और बीयर जैसे प्रोडक्ट्स में केवल उनका प्राकृतिक स्वाद और खुशबू ही होनी चाहिए, लेकिन कुछ कंपनियों पर आरोप है कि वे अतिरिक्त फ्लेवर मिलाकर असली स्वाद जैसा एहसास देने की कोशिश कर रही हैं.
दूसरी गड़बड़ी: शराब की उम्र (Age) को लेकर किए जा रहे दावों से जुड़ी है. FSSAI का कहना है कि कुछ कंपनियां अपनी शराब को ज्यादा पुरानी या मैच्योर बताने वाले शब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं, जबकि इसके लिए तय नियमों का पालन नहीं किया गया.
तीसरी गड़बड़ी: ब्लेंडेड शराब की उम्र बताने में पाई गई है. नियम कहता है कि अगर किसी बोतल पर 12 साल पुरानी शराब लिखा है तो उसमें इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र की स्पिरिट भी कम से कम 12 साल पुरानी होनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं है तो यह ग्राहकों को गुमराह करने वाला दावा माना जाएगा.

कंपनियों से मांगा जवाब
FSSAI ने संबंधित कंपनियों से जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए. अगर कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
अगले हफ्ते होगी बैठक
शराब उद्योग के संगठन CIABC के मुताबिक, FSSAI ने अगले हफ्ते इंडस्ट्री और दूसरे पक्षों के साथ बैठक बुलाई है. इसमें इन नियमों और उनके पालन को लेकर चर्चा होगी.
पहले भी दिखा चुका है सख्त रुख
हाल ही में FSSAI ने शराब की बोतलों पर स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी को और स्पष्ट तरीके से लिखना अनिवार्य किया है. इसके अलावा कुछ समय पहले कई बड़ी बेवरेज कंपनियों को भी नोटिस भेजा गया था. उन पर अपने उत्पादों को &#039;एनर्जी ड्रिंक&#039; बताकर बेचने का आरोप था, जबकि FSSAI ने इस श्रेणी के लिए अलग मानक तय नहीं किए हैं. फिलहाल FSSAI ने नोटिस पाने वाली शराब कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं. ऐसे में अभी यह साफ नहीं है कि कार्रवाई किन-किन ब्रांड्स पर हो सकती है.
ये भी पढ़ें: आप जो पैकेज्ड फूड खरीद रहे हैं, कहीं वह रीपैक्ड और एक्सपायर तो नहीं? जानें चेक करने के तरीके ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सावधान, कहीं, आपकी, साल, पुरानी, या, प्रीमियम, एज्ड, शराब, में, मिलावट, तो, नहीं, FSSAI, ने, कसा, शिकंजा</media:keywords>
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        <title>Diabetes Treatment: रोज का खर्च सिर्फ ₹50! भारत में लॉन्च हुआ हफ्ते में 1 बार वाला इंसुलिन, जानें पूरी डिटेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/diabetes-treatment-रोज-का-खर्च-सिर्फ-50-भारत-में-लॉन्च-हुआ-हफ्ते-में-1-बार-वाला-इंसुलिन-जानें-पूरी-डिटेल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/diabetes-treatment-रोज-का-खर्च-सिर्फ-50-भारत-में-लॉन्च-हुआ-हफ्ते-में-1-बार-वाला-इंसुलिन-जानें-पूरी-डिटेल</guid>
        <description><![CDATA[ Weekly Insulin Launch In India 2026: डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी खबर है. भारत में अब ऐसा इंसुलिन उपलब्ध हो गया है, जिसे हर दिन नहीं बल्कि पूरे हफ्ते में सिर्फ एक बार लेना होगा. फार्मास्युटिकल कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने &#039;अवीक्ली&#039; ब्रांड नाम से अपना वीकली इंसुलिन लॉन्च किया है. कंपनी का दावा है कि यह दवा उन मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, जिन्हें रोजाना इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं या जो बार-बार सुई लगवाने से बचते हैं.
किन लोगों लिए फायदेमंद?
डॉक्टरों का कहना है कि कई डायबिटीज मरीज इंसुलिन शुरू करने से सिर्फ इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें रोज इंजेक्शन लेने का डर रहता है. कुछ लोग लगातार यात्रा करते हैं, जबकि कई लोगों की व्यस्त दिनचर्या के कारण रोजाना समय पर इंसुलिन लेना मुश्किल हो जाता है. ऐसे मरीजों के लिए सप्ताह में एक बार लगने वाला यह इंसुलिन इलाज को पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान बना सकता है.&amp;nbsp;
बड़ी संख्या में मरीज इंसुलिन लेने से बचते हैं
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. एस. के. वांगनू के अनुसार, जिन मरीजों को डायबिटीज हुए 8 से 10 साल हो चुके हैं और जिनकी ब्लड शुगर दवाइयों से नियंत्रित नहीं हो रही है, उन्हें समय पर इंसुलिन शुरू कर देना चाहिए. ऐसा करने से आंखों, किडनी, नसों और शरीर के अन्य अंगों को होने वाले नुकसान का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में मरीज इंसुलिन लेने से बचते हैं, जिससे भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं.&amp;nbsp;
नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया &amp;nbsp;का कहना है कि फिलहाल भारत में करीब 60 लाख लोग इंसुलिन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि इसकी जरूरत इससे कहीं ज्यादा लोगों को है. उनका मानना है कि सप्ताह में सिर्फ एक बार लगने वाला इंसुलिन इलाज को आसान बनाएगा और इससे ज्यादा मरीज डॉक्टर की सलाह पर इंसुलिन लेना शुरू करेंगे.
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कितनी होगी कीमत
अगर कीमत की बात करें तो यह नया इंसुलिन बाजार में मौजूद कई दूसरे इंसुलिन विकल्पों की तुलना में सस्ता बताया जा रहा है. कंपनी के मुताबिक इसकी औसत लागत करीब 261 रुपये प्रति सप्ताह यानी लगभग 50 रुपये प्रतिदिन पड़ती है. यह दवा दो प्री-फिल्ड पेन में उपलब्ध होगी. पहला 700 यूनिट/मिली वाला पेन 2,611 रुपये और दूसरा 2,100 यूनिट/मिली वाला पेन 7,883 रुपये का है. &amp;nbsp;आमतौर पर एक मरीज को सप्ताह में करीब 70 यूनिट इंसुलिन की जरूरत पड़ती है, हालांकि डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार इसकी मात्रा तय करेंगे. &amp;nbsp;कंपनी का मानना है कि इस नई तकनीक से ज्यादा से ज्यादा मरीज समय पर इंसुलिन लेना शुरू करेंगे. इससे ब्लड शुगर को लंबे समय तक नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी और HbA1c का स्तर भी बेहतर हो सकता है. HbA1c वह टेस्ट होता है, जिससे पिछले लगभग तीन महीनों की औसत ब्लड शुगर का पता चलता है.
क्या इसके नुकसान भी हैं?
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस दवा के कुछ संभावित साइड इफेक्ट भी हैं. सबसे सामान्य दुष्प्रभाव हाइपोग्लाइसीमिया है, यानी ब्लड शुगर का जरूरत से ज्यादा कम हो जाना. डॉक्टरों के अनुसार यह जोखिम रोजाना लगाए जाने वाले इंसुलिन जितना ही है. वहीं टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में लो ब्लड शुगर की समस्या कुछ अधिक देखने को मिल सकती है. ऐसे मरीजों को भोजन से पहले लगने वाला फास्ट-एक्टिंग इंसुलिन पहले की तरह जारी रखना होगा, जबकि रोज लगने वाले लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन की जगह इस साप्ताहिक इंसुलिन का इस्तेमाल किया जा सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह नया इंसुलिन मरीजों के लिए सुविधा जरूर बढ़ाता है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Explained: एक बेसिल इंसुलिन और पूरे हफ्ते डायबिटीज की छुट्टी! जानें 40% सस्ती दवा कब, कहां और कैसे मिलेगी?</title>
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        <description><![CDATA[ 9 जुलाई 2026 को डेनमार्क की दिग्गज दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में इंसुलिन आइकोडेक अविक्लि लॉन्च कर दिया है. यह दुनिया का पहला हफ्ते में एक बार लगने वाला बेसल इंसुलिन है. भारत इस दवा को लॉन्च करने वाला दुनिया का छठा देश बन गया है. अब तक डायबिटीज के मरीजों को रोजाना इंसुलिन का इंजेक्शन लगाना पड़ता था यानी साल में 365 इंजेक्शन. अविक्लि आने के बाद यह संख्या घटकर साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन रह जाएगी. तो आइए जानते हैं कि नई दवा के फायदे क्या हैं, कीमत कितनी है और डायबिटीज से हमेशा छुटकारा दिलाएगी या नहीं...
आखिर यह नया इंसुलिन है क्या चीज?
अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिसीज की रिपोर्ट के मुताबिक,&amp;nbsp;यह एक तरह का बेसल इंसुलिन है. बेसल इंसुलिन वो होता है जो दिनभर शरीर में बैकग्राउंड में काम करता है और ब्लड शुगर को एक समान बनाए रखता है. अभी तक भारत में जितने भी बेसल इंसुलिन उपलब्ध थे, उन्हें रोजाना एक या दो बार लगाने की जरूरत पड़ती थी. लेकिन यह नया इंसुलिन आइकोडेक शरीर में धीरे-धीरे और लगातार रिलीज होता है, जिससे इसका असर पूरे एक हफ्ते तक बना रहता है.
कीमत का गणित: 40% तक सस्ती कैसे पड़ेगी डोज?
यहीं पर पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू है. इस नए इंसुलिन के एक प्री-फिल्ड पेन की कीमत 2,611 रुपये रखी गई है. अब आप सोचेंगे कि इतनी महंगी कीमत में 40% सस्ता होने का दावा कैसे सही हो सकता है? दरअसल, यह बचत कीमत की नहीं, बल्कि इंजेक्शन की संख्या की है.

अगर आप रोजाना लगने वाला बेसल इंसुलिन लेते हैं तो आपको हफ्ते में 7 इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं.
इस नए इंसुलिन का सिर्फ 1 इंजेक्शन पूरे हफ्ते का काम कर देता है.

कंपनी का दावा है कि मरीजों को अपनी पूरी इंसुलिन जरूरत (बेसल और भोजन के समय वाली दोनों) मिलाकर देखें तो यह थेरेपी लगभग 40% तक ज्यादा किफायती साबित हो सकती है. इसका कारण है कि इंजेक्शन की संख्या साल में 365 से घटकर सिर्फ 52 रह जाएगी. सुई, सीरिंज और बार-बार डॉक्टर के पास जाने का खर्च भी बचेगा.
कैसे काम करता है यह हफ्ते भर चलने वाला इंजेक्शन?
यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) के मुताबिक,&amp;nbsp;इस इंसुलिन की खासियत इसके मॉलीक्यूल की बनावट में छिपी है. सामान्य इंसुलिन शरीर में जल्दी घुलकर खून में मिल जाता है. लेकिन इंसुलिन आइकोडेक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह खून में मौजूद एल्ब्यूमिन नाम के प्रोटीन से चिपक जाता है. इससे यह बहुत धीरे-धीरे और लगातार रिलीज होता रहता है और शुगर पर इसका असर सात दिनों तक एक समान बना रहता है. यह कोई जादू नहीं, बल्कि बायोटेक्नोलॉजी का कमाल है.
लगाने का तरीका और खुराक: पहली बार डॉक्टर की सलाह है जरूरी
EMA के मुताबिक, यह इंजेक्शन पहले से भरे हुए पेन (प्री-फिल्ड पेन) में आता है, जिसे लगाना बहुत आसान है. मरीज इसे बिना किसी परेशानी के खुद लगा सकते हैं. लेकिन एक बेहद अहम बात:

यह इंसुलिन सिर्फ उन्हीं वयस्क मरीजों के लिए है जिन्हें टाइप-2 डायबिटीज है.
इसकी शुरुआती खुराक और इसे शुरू करने का फैसला कभी भी खुद से नहीं करना चाहिए. डॉक्टर मरीज की पूरी जांच करेंगे और पुराने डेली इंसुलिन की डोज के हिसाब से हफ्ते वाली डोज का सटीक गणित बैठाएंगे.
इसे हफ्ते के एक ही तय दिन, एक ही समय पर लगाना होगा.

उपलब्धता: आपको कहां मिलेगा?
कंपनी ने इसे देशभर के प्रमुख शहरों में मेडिकल स्टोर्स और अस्पतालों के जरिए उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है. उम्मीद है कि जल्द ही यह ऑनलाइन फार्मेसी पर भी उपलब्ध होगा. यह सिर्फ डॉक्टर के पर्चे पर ही मिलेगा, इसलिए बिना डॉक्टरी सलाह के इसे खरीदने न जाएं.
किन लोगों को बिल्कुल नहीं लेना चाहिए?
यह दवा भले ही एक बड़ी उपलब्धि हो, लेकिन हर किसी के लिए नहीं है:

टाइप-1 डायबिटीज के मरीज: यह इंसुलिन फिलहाल उनके लिए नहीं है.
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं: इस पर अभी स्टडी पूरी नहीं हुई है.
लिवर या किडनी की गंभीर बीमारी वाले मरीज: ऐसे में डॉक्टर को खास सावधानी बरतनी होगी.
हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड शुगर) का खतरा: किसी भी इंसुलिन की तरह, अगर खुराक ज्यादा हो जाए या खाना समय से न खाया जाए तो शुगर बहुत कम हो सकती है. इस नए इंसुलिन का असर लंबा होने के कारण यह स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है, इसलिए लक्षणों की पहचान जरूरी है.

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
जाने-माने डायबिटोलॉजिस्ट और डॉ. मोहन डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर के चेयरमैन डॉ. वी. मोहन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस इंसुलिन इसे डायबिटीज केयर में एक बड़ा बदलाव मानते हैं. उनका कहना है कि रोजाना इंजेक्शन का दर्द और झिझक कई मरीजों को इलाज बीच में ही छोड़ने पर मजबूर कर देती है. हफ्ते का एक इंजेक्शन इस परेशानी को काफी हद तक खत्म करेगा और मरीज नियमित इलाज कर पाएंगे. हालांकि, वे यह भी चेतावनी देते हैं कि शुरुआत में डॉक्टरों को इसकी डोज एडजस्टमेंट पर खास ध्यान देना होगा.
नई दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. एस. के. वांगनू के मुताबिक, इंसुलिन कई मरीजों के लिए डायबिटीज मैनेजमेंट की नींव बना हुआ है, फिर भी देरी से शुरू रना और लापरवाही क्लिनिकल प्रैक्टिस में रिजल्ट को कमजोर करता रहता है.
तो क्या यह सचमुच संजीवनी है?
अगर आप टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं और रोजाना इंसुलिन लेने की परेशानी से गुजर रहे हैं, तो यह दवा आपकी जिंदगी बदल सकती है. साल में 365 की जगह 52 इंजेक्शन लगाना एक बहुत बड़ी राहत है. कीमत के मामले में शुरुआती निवेश ज्यादा लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह जेब पर भी हल्की पड़ेगी और सबसे बढ़कर, मानसिक तनाव को कम करेगी. बस, इसे शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूरी सलाह जरूर लें. यह इंसुलिन डायबिटीज को जड़ से खत्म नहीं करती है.
लीलावती हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शशांक जोशी कहते हैं, &#039;यह हमारे उपचार विकल्पों में एक उपयोगी जोड़ है, लेकिन यह उन मरीजों ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Homemade Potato Chips: घर पर ऐसे बनाएं Lays और Uncle chips जैसे टेस्टी चिप्स, उंगलियां चाटते रह जाएंगे बच्चे</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Crispy Potato Chips At Home: अगर आपके बच्चे बार-बार बाजार से चिप्स लाने की जिद करते हैं, तो इस बार उन्हें घर पर बने कुरकुरे आलू के चिप्स खिलाकर सरप्राइज दें. सही तरीका अपनाने पर ये चिप्स इतने क्रिस्पी बनते हैं कि हर बाइट में वही मजा मिलता है, लेकिन बिना किसी प्रिजर्वेटिव के. खास बात यह है कि इन्हें बनाने के लिए आपको सिर्फ कुछ सामान्य किचन सामग्री की जरूरत होगी.&amp;nbsp;
कैसे घर पर बना सकते हैं टेस्टी चिप्स?
सबसे पहले 2 बड़े आलू अच्छी तरह धो लें. चाहें तो उनका छिलका उतार दें. अब किसी तेज चाकू या स्लाइसर की मदद से आलू के बेहद पतले-पतले स्लाइस काट लें. चिप्स जितने पतले होंगे, उतने ही ज्यादा कुरकुरे बनेंगे. अब एक बड़े बाउल में ठंडा पानी लें और उसमें 2 चम्मच नमक मिलाकर घोल तैयार करें. कटे हुए आलू के स्लाइस इसमें 15 से 20 मिनट के लिए भिगो दें. ऐसा करने से आलू का अतिरिक्त स्टार्च निकल जाता है, जिससे चिप्स तलने के बाद ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं और जल्दी काले भी नहीं पड़ते.&amp;nbsp;
चम्मच सफेद सिरका डाल दें
इसके बाद एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें 2 बड़े चम्मच सफेद सिरका डाल दें. अब भीगे हुए आलू के स्लाइस को 3 से 4 मिनट तक हल्का उबाल लें. सिरका चिप्स को बेहतर टेक्सचर देने में मदद करता है और तलने के दौरान उनका रंग भी अच्छा बना रहता है. उबालने के बाद स्लाइस निकालकर किचन टॉवल पर फैला दें और अच्छी तरह सूखने दें. ध्यान रखें कि स्लाइस पर पानी बिल्कुल नहीं होना चाहिए.&amp;nbsp;
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कैसे छानें?
अब एक गहरे पैन या कढ़ाही में तेल गर्म करें. जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब आलू के स्लाइस थोड़ी-थोड़ी मात्रा में डालें. एक साथ बहुत ज्यादा स्लाइस डालने से चिप्स आपस में चिपक सकते हैं और ठीक से नहीं पकेंगे. चिप्स को मध्यम आंच पर तब तक तलें, जब तक उनका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए और तेल में बनने वाले बुलबुले कम न हो जाएं. इसके बाद चिप्स निकालकर टिश्यू पेपर पर रखें, ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए. अब गर्मागर्म चिप्स पर स्वादानुसार नमक, काली मिर्च, चाट मसाला, पुदीना पाउडर, पेरी-पेरी मसाला या अपनी पसंद का कोई भी सीजनिंग छिड़क दें और हल्के हाथों से मिला लें.&amp;nbsp;
एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें
अगर एक बार में सारे चिप्स खत्म न हों, तो उन्हें पूरी तरह ठंडा होने दें और फिर एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें. इस तरह स्टोर किए गए चिप्स कई दिनों तक कुरकुरे बने रहते हैं. कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें. आलू के स्लाइस जितने पतले होंगे, चिप्स उतने बेहतर बनेंगे. तलने से पहले उन्हें अच्छी तरह सुखाना जरूरी है और हमेशा मध्यम आंच पर ही तलें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Pregnant Women Health: गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक हैं ये कॉस्मेटिक्स, AIIMS की रिसर्च में बड़ा खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Harmful Chemicals In Cosmetics: गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल होने वाले कॉस्मेटिक्स, प्लास्टिक और कुछ पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स को लेकर एक नई स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस , नई दिल्ली की अगुवाई में हुई संयुक्त रिसर्च में पाया गया है कि गर्भवती महिलाओं के शरीर में ऐसे रसायनों की मात्रा बढ़ रही है, जो हार्मोन के सामान्य कामकाज में बाधा डाल सकते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि ये केमिकल मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर भी लंबे समय तक असर डाल सकते हैं.&amp;nbsp;
कब होता है इनका यूज?
रिसर्च के दौरान 641 स्वस्थ गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया. गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में उनके यूरिन सैंपल लेकर जांच की गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शरीर में इन रसायनों की मौजूदगी कितनी है. जांच में सबसे ज्यादा मात्रा मिथाइलपैराबेन &amp;nbsp;की मिली. यह एक ऐसा प्रिजर्वेटिव है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर कॉस्मेटिक्स, स्किन केयर प्रोडक्ट्स, लोशन, शैंपू और कई अन्य पर्सनल केयर उत्पादों में किया जाता है.
मोनोएथाइल फ्थेलेट की मात्रा भी अधिक
इसके अलावा शोधकर्ताओं को मोनोएथाइल फ्थेलेट &amp;nbsp;भी अधिक मात्रा में मिला. यह रसायन प्लास्टिक से बने उत्पादों और सिंथेटिक खुशबू वाले कई सामानों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है. साइंटिस्ट के अनुसार, ये दोनों एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स की श्रेणी में आते हैं, जो शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं.
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दूसरी तिमाही के दौरान इन रसायनों का स्तर सबसे अधिक
स्टडी में यह भी सामने आया कि गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान इन रसायनों का स्तर सबसे अधिक पाया गया. एम्स के रिसर्चर तरंग गुप्ता के अनुसार, यही वह समय होता है जब गर्भ में पल रहे शिशु के अंगों और शरीर का तेजी से विकास होता है. ऐसे संवेदनशील दौर में हार्मोन के कामकाज में दखल देने वाले रसायनों का ज्यादा संपर्क भविष्य में बच्चे के स्वास्थ्य पर निगेटिव असर डाल सकता है.
एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर राजेश खड़गावत ने बताया कि जिन महिलाओं में इन रसायनों का स्तर अधिक था, उनके नवजात शिशुओं में जन्म के समय वजन, लंबाई और विटामिन-डी के स्तर पर भी असर देखने को मिला. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्टडी इन संबंधों की ओर संकेत करता है, लेकिन इसे पूरी तरह स्थापित करने के लिए बड़े स्तर पर और विस्तृत रिसर्च की जरूरत होगी.
सख्त नियम बनाए जाने की आवश्यकता&amp;nbsp;
एक्सपर्ट भारत में इन रसायनों के उपयोग और उनकी निगरानी को लेकर सख्त नियम बनाए जाने की आवश्यकता है. इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को यह जानकारी देना भी जरूरी है कि प्लास्टिक के अत्यधिक इस्तेमाल और कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों में मौजूद रसायन संभावित जोखिम पैदा कर सकते हैं. ऐसे में जहां तक संभव हो, सुरक्षित और कम रसायन वाले पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स का चयन करना बेहतर विकल्प हो सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Mango Face Pack: आम को छीलें फिर गूदे में यह खट्टी चीज मिलाकर बनाएं देसी फेसपैक, होगा जोरदार फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Mango Face Pack For Glowing Skin: आम सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा की देखभाल के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. अगर धूप, पसीने और धूल की वजह से चेहरे की चमक कम हो गई है या टैनिंग परेशान कर रही है, तो पके हुए आम के गूदे से बना एक आसान देसी फेसपैक आपकी स्किन को तरोताजा महसूस करा सकता है. खास बात यह है कि इसमें एक खट्टी चीज मिलाई जाती है, जो त्वचा को अतिरिक्त निखार देने में मदद कर सकती है.&amp;nbsp;
पका आम क्यों फायदेमंद?
पके आम में विटामिन ए, सी और ई के साथ कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. ये त्वचा को पोषण देने, रूखेपन को कम करने और चेहरे को फ्रेश लुक देने में मदद करते हैं. वहीं खट्टी चीज के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला दही त्वचा को नमी देने के साथ उसे मुलायम बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है. जब दोनों चीजें एक साथ मिलती हैं, तो एक ऐसा फेसपैक तैयार होता है जो गर्मियों में स्किन केयर रूटीन का हिस्सा बन सकता है.
ऐसे बनाएं फेसपैक
इसके लिए एक अच्छी तरह पका हुआ आम लें और उसका छिलका हटाकर गूदा निकाल लें. अब इस गूदे में एक चम्मच दही मिलाएं. इसके बाद तीन चम्मच मुल्तानी मिट्टी और दो चम्मच गुलाब जल डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. जब मिश्रण मुलायम पेस्ट की तरह तैयार हो जाए, तब इसे चेहरे और गर्दन पर समान रूप से लगा दें. फेसपैक को 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें, इसके बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इससे त्वचा साफ और ताजगी भरी महसूस हो सकती है. सप्ताह में एक या दो बार इस फेसपैक का इस्तेमाल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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बेजान और रफ नजर स्किन के लिए ये उपाय
अगर आपकी त्वचा बेजान और रफ नजर आती है, तो आम के गूदे में ओटमील, थोड़ा-सा कच्चा दूध और पिसा हुआ बादाम मिलाकर भी फेसपैक तैयार किया जा सकता है. यह मिश्रण स्किन की हल्की एक्सफोलिएशन करने में मदद करता है और स्किन को स्मूद महसूस करा सकता है. आम में मौजूद विटामिन सी त्वचा की रंगत को बेहतर बनाने में मदद करता है, जबकि विटामिन ए त्वचा की प्राकृतिक इलास्टिसिटी बनाए रखने में सहायक माना जाता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को कम करने में भी भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा आम की प्राकृतिक नमी त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करती है, जिससे चेहरा अधिक फ्रेश और ग्लोइंग दिखाई दे सकता है.&amp;nbsp;
पैच टेस्ट जरूर करें
हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इसलिए किसी भी घरेलू फेसपैक को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ के एक छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर जलन, खुजली या एलर्जी जैसी कोई समस्या महसूस हो, तो इसका इस्तेमाल न करें. &amp;nbsp;यदि आपकी त्वचा बहुत सेंसिटिव है या पहले से कोई स्किन संबंधी समस्या है, तो घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले त्वचा एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहेगा.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:09 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Mango, Face, Pack:, आम, को, छीलें, फिर, गूदे, में, यह, खट्टी, चीज, मिलाकर, बनाएं, देसी, फेसपैक, होगा, जोरदार, फायदा</media:keywords>
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        <title>Delhi Health Report: दिल्ली में नवजात मौतें घटीं, लेकिन मातृ मृत्यु दर बढ़ी; सरकारी रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता</title>
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        <description><![CDATA[ Delhi Health Report: दिल्ली सरकार ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट का नाम &quot;दिल्ली स्टेट इंडिकेटर फ्रेमवर्क: स्टेटस रिपोर्ट 2025&quot; है, जिसे सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों यानी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स की दिशा में साल 2030 तक दिल्ली की प्रगति पर नजर रखने के लिए तैयार किया है. सरकार का मकसद है कि इस रिपोर्ट की मदद से नीति बनाने वालों को यह पता चल सके कि किन क्षेत्रों में सुधार हुआ है और कहां अभी भी काम करने की जरूरत है.&amp;nbsp;
नवजातों की मृत्युदर घटी, माताओं की बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में नवजात मृत्यु दर में सुधार देखने को मिला है. 2015 में दिल्ली के अंदर नवजात मृत्यु दर 1000 बच्चों में 15.8 थी, जो 2024 में घटकर 14.1 रह गई है. हालांकि, दूसरी तरफ मातृ मृत्यु दर के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. साल 2015 में हर एक लाख जीवित जन्मों पर 37 महिलाओं की मौत होती थी, जो अब बढ़कर 44 हो गई है. यह बढ़ोतरी तब हुई है जब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की निगरानी में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं की संख्या 2015 के 84.4 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 96.1 प्रतिशत हो चुकी है.&amp;nbsp;
स्वास्थ्य के अलावा रिपोर्ट में शिक्षा, गरीबी और रोजगार के क्षेत्र में भी सुधार की बात कही गई है. दिल्ली के स्कूलों में अब बिजली और डिजिटल सुविधाएं लगभग सभी जगह पहुंच चुकी हैं, वहीं उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या भी बढ़ी है. हालांकि, बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़े मिले-जुले रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से चली आ रही कुपोषण की समस्या तो कम हुई है, लेकिन कम वजन वाले बच्चों की संख्या में खास बदलाव नहीं आया है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Gen Z vs Millennials : क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
पर्यावरण के मोर्चे पर भी सुधार
पर्यावरण के क्षेत्र में भी दिल्ली ने कुछ बेहतर काम किए हैं. जैसे कचरा प्रबंधन में सुधार हुआ है और अब पहले से कहीं ज्यादा कचरे का सही तरीके से निपटारा किया जा रहा है. &amp;nbsp;साथ ही वायु प्रदूषण में भी दस साल पहले के मुकाबले थोड़ी कमी आई है, हालांकि यह अभी भी तय मानकों से काफी ज्यादा बना हुआ है. &amp;nbsp;इसके साथ ही दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जो 2015-16 में सिर्फ 24 हजार 420 थी और अब 2024-25 में बढ़कर 4 लाख से ज्यादा हो चुकी है. एक अधिकारी ने कहा कि कुल मिलाकर दिल्ली ने कई सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों में अच्छी प्रगति की है, लेकिन मातृ और नवजात मृत्यु दर के आंकड़े यह दिखाते हैं कि मां और बच्चों के स्वास्थ्य पर अभी और ध्यान देने की जरूरत है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chicken Pulao Recipe: चिकन बिरयानी भूल जाएंगे! इस सीक्रेट तरीके से बनाएं चिकन पुलाव, खिला&amp;खिला रहेगा एक&amp;एक दाना</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Chicken Pulao At Home: अगर हर बार चिकन बिरयानी बनाकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो इस बार चिकन पुलाव जरूर बनाएं. स्वाद के मामले में यह किसी से कम नहीं होता, लेकिन इसे बनाने में कम समय लगता है और मसाले भी हल्के होते हैं. सही तरीका अपनाया जाए तो पुलाव का हर चावल अलग-अलग, खुशबूदार और स्वाद से भरपूर बनता है. खास बात यह है कि यह रेसिपी सिर्फ 30 मिनट में तैयार हो जाती है और एक ही कुकर या पैन में आसानी से बन सकती है.&amp;nbsp;
चिकन पुलाव बनाने के लिए क्या करें?
इस पुलाव के लिए सबसे पहले चिकन को मैरिनेट करना जरूरी है. एक बाउल में चिकन लें और उसमें लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, गरम मसाला, अदरक-लहसुन का पेस्ट, नमक, नींबू का रस और थोड़ा-सा तेल डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसे कम से कम 15 से 20 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि मसालों का स्वाद चिकन के अंदर तक पहुंच जाए. इस बीच बासमती चावल को 3 से 4 बार अच्छी तरह धो लें और करीब 20 मिनट के लिए पानी में भिगो दें. इससे चावल पकने के बाद लंबे और अलग-अलग बनते हैं. अगर संभव हो तो अच्छी क्वालिटी के बासमती चावल का इस्तेमाल करें.&amp;nbsp;
पकाते समय इन चीजों को मिक्स करें
अब प्रेशर कुकर या मोटे तले वाले पैन में थोड़ा घी और तेल गर्म करें. इसमें तेजपत्ता, लौंग, दालचीनी, बड़ी और छोटी इलायची, काली मिर्च, सौंफ और स्टार ऐनिस जैसे साबुत मसाले डालकर कुछ सेकंड भूनें. इसके बाद हरी मिर्च, अदरक-लहसुन का पेस्ट और पतले कटे प्याज डालकर सुनहरा होने तक पकाएं. अब मैरिनेट किया हुआ चिकन डालें और मध्यम आंच पर 5 से 6 मिनट तक पकाएं, जब तक उसका रंग गुलाबी से सफेद न हो जाए. फिर कटे हुए टमाटर, हरा धनिया और पुदीना डालकर तब तक पकाएं, जब तक टमाटर पूरी तरह नरम न हो जाएं.
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&amp;nbsp;हल्का क्रीमी स्वाद और बेहतरीन खुशबू
इसके बाद इसमें नारियल का दूध डालें। नारियल का दूध पुलाव को हल्का क्रीमी स्वाद और बेहतरीन खुशबू देता है. यदि नारियल का दूध उपलब्ध न हो, तो इसकी जगह गाढ़ा दही भी इस्तेमाल किया जा सकता है. अब लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और जरूरत के अनुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें.
एक-दो मिनट हल्के हाथ से चलाएं
भीगे हुए चावल का पानी निकालकर कुकर में डालें और एक-दो मिनट हल्के हाथ से चलाएं. इसके बाद गर्म पानी डालें। ध्यान रखें कि एक कप चावल के लिए लगभग डेढ़ कप तरल पर्याप्त होता है. कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर एक सीटी आने तक पकाएं. प्रेशर अपने आप निकलने के बाद ढक्कन खोलें और कांटे की मदद से पुलाव को हल्के हाथों से फुलाएं. आखिर में ऊपर से थोड़ा घी, नींबू का रस, हरा धनिया, पुदीना, फ्राइड प्याज या काजू डालकर गार्निश करें. तैयार चिकन पुलाव को प्याज के रायते, खीरे के रायते या अपनी पसंद की ग्रेवी के साथ गर्मागर्म परोसें.
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        <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 02:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Ear Care Tips: क्यों बारिश के मौसम में बंद हो जाते हैं कई लोगों के कान, जानिए इससे छुटकारा पाने के घरेलू उपाय</title>
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        <description><![CDATA[ Ear Care Tips: महीनों भर की चिलचिलाती धूप और गर्मी के बाद बरसात ने अब दस्तक देना शुरू कर दिया है. बारिश का मौसम आते ही हर जगह ठंडी-ठंडी हवा चलने लगती है. इसका कारण है कि बरसात के मौसम आते ही हवा में नमी का बढ़ जाना. जितना ही यह मौसम चिलचिलाती गर्मी के बाद राहत देता है, उतना ही यह पल कई लोगों को परेशान भी करता है.&amp;nbsp; कई लोगों की शिकायत रहती है कि बरसात के मौसम में उनके कानों में दर्द होने लगता है, जिसके पीछे की वजह उन्हें समझ नहीं आती कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. ऐसे में आपको बता दें कि हवा में नमी कानों की सेहत के लिए मुश्किल पैदा करती है.
माना जाता है कि हमारे कानों के अंदर का हिस्सा हमेशा सूखा रहना चाहिए, लेकिन बरसात में लगातार नमी के कारण कान में मौजूद वैक्स नरम होने लगती है और उसके काम करने की क्षमता में रुकावटें आती हैं.&amp;nbsp;साथ ही जिन लोगों को कान से जुड़ी समस्या होती है, उनके कान में बैक्टीरिया और फंगस बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. कई मामलों में कान में दर्द होने का कारण कोई बड़ी बीमारी नहीं होती है. कई बार सर्दी-जुकाम या फिर एलर्जी की वजह से भी कान में दर्द होने लगता है.
कानों को नमी से बचाने के आसान तरीके
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों को कानों से जुड़ी परेशानी है, उन्हें सबसे पहले तो बारिश में भीगना नहीं चाहिए और अगर भीग जाएं ,तो उन्हें कानों को अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए. वहीं अगर हर उपाय अपनाने के बाद भी कान में पानी महसूस हो, तो उसको सुखाने के लिए हेयर ड्रायर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
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घरेलू उपाय जो दे सकते हैं राहत
इसके अलावा अगर कान से पानी सुखाने के बाद भी कान बंद या फिर भारीपन महसूस होता है, तो आप कुछ आसान और असरदार घरेलू उपाय भी अपना सकते हैं.&amp;nbsp; जैसे गर्म पानी या फिर किसी गर्म कपड़े से कान के इर्द-गिर्द सेकाई करना, गर्म पानी से 5 से 10 मिनट तक भाप लेना. साथ ही गुनगुने पानी से गरारे करना भी गले और कान की नली को राहत पहुंचा सकता है. लेकिन सबसे जरूरी बात का ध्यान रखना चाहिए कि ये सारे घरेलू उपाय बस शुरुआती दर्द को ठीक कर सकते हैं.&amp;nbsp; अगर कान में दर्द और भारीपन ज्यादा देर तक रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Monsoon Budget Travel Tips: वीकेंड ट्रिप का है प्लान? 20 हजार में एक्सप्लोर करें ये 5 ऑफबीट डेस्टिनेशन</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Budget Travel Tips: वीकेंड ट्रिप का है प्लान? 20 हजार में एक्सप्लोर करें ये 5 ऑफबीट डेस्टिनेशन ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Fairness Cream Side Effects: गोरा रंग तो मिल जाएगा, लेकिन सेहत को चुकानी पड़ेगी कीमत&amp; जानें फेयरनेस क्रीम के खतरे</title>
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        <description><![CDATA[ Fairness Cream Side Effects: गोरा रंग तो मिल जाएगा, लेकिन सेहत को चुकानी पड़ेगी कीमत- जानें फेयरनेस क्रीम के खतरे ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Gen Z vs Millennials : क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z? नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Gen Z vs Millennials : आज की नई जनरेशन पहले से कहीं ज्यादा हेल्थ कॉन्शियस नजर आती है. सोशल मीडिया पर फिटनेस, हेल्दी डाइट, अच्छी नींद, मानसिक स्वास्थ्य और योग जैसी चीजों पर लगातार बात होती रहती है. खासकर Gen Z अपनी फिटनेस और वेलनेस को लेकर काफी जागरूक दिखाई देती है. वहीं Millennials को अक्सर लंबे समय तक काम करने, तनाव और थकान से जूझने वाली पीढ़ी के रूप में देखा जाता है. लेकिन क्या सिर्फ हेल्थ की जानकारी होना ही अच्छी सेहत की निशानी है. विशेषज्ञों और नई रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z केबीच फिटनेस और वेलनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसका नहीं कहा जा सकता है कि Gen Z पूरी तरह Millennials से ज्यादा हेल्दी है.&amp;nbsp;
क्या Millennials से ज्यादा फिट और हेल्दी है Gen Z?&amp;nbsp;
विशेषज्ञों के मुताबिक Gen Z मानसिक स्वास्थ्य, फिटनेस, अच्छी नींद और बीमारी से बचाव को लेकर पहले की पीढ़ी के मुकाबले ज्यादा खुलकर बात करती है. वहीं Millennials ने योग, हेल्दी खाना, जिम, मेडिटेशन और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसी चीजों को फेमस बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. इसके बाद Gen Z ने इन्हीं आदतों को आगे बढ़ाया और थेरेपी, बर्नआउट, भावनात्मक स्वास्थ्य और प्रिवेंटिव हेल्थ जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा शुरू की. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि जागरूक होना और सच में स्वस्थ होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं.
हेल्थ को लेकर Gen Z और Millennials क्या देखते हैं?&amp;nbsp;
Millennials की फिटनेस का मेन गोल अक्सर वजन कम करना और दिखने में फिट लगना होता था. वहीं Gen Z अब सिर्फ वजन पर नहीं, बल्कि मसल्स, बॉडी कंपोजिशन और शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी पर ज्यादा ध्यान देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव पॉजिटिव है. हालांकि उनका कहना है कि हेल्थ को लेकर जरूरत से ज्यादा जागरूकता भी कई बार तनाव की वजह बन जाती है. आज कई युवा इस बात को लेकर भी तनाव में रहते हैं कि उन्हें हर समय सही खानपान और अच्छी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए.&amp;nbsp;
नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
विशेषज्ञों के अनुसार आज की युवा पीढ़ी में कई ऐसी बीमारियां पहले की तुलना में कम उम्र में देखने को मिल रही हैं, जो पहले आमतौर पर ज्यादा उम्र में होती थीं. डॉक्टरों का कहना है कि अब 30 से 40 साल की उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और यहां तक कि हार्ट अटैक के मामले भी सामने आ रहे हैं. इसके पीछे लगातार तनाव, नींद की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसी वजहें बताई गई हैं. इसके अलावा चिंता, डिप्रेशन, अनिद्रा, मोटापा, पीसीओएस और शुरुआती डायबिटीज जैसी समस्याएं भी युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही हैं.
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मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करती है Gen Z
विशेषज्ञों का कहना है कि Gen Z मानसिक स्वास्थ्य को लेकर पहले की पीढ़ियों की तुलना में कहीं ज्यादा खुली सोच रखती है. यह पीढ़ी जरूरत पड़ने पर थेरेपी लेने और मदद मांगने में झिझक महसूस नहीं करती है. डॉक्टरों के अनुसार आज मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पहले से ज्यादा सामने इसलिए भी आ रही हैं. अब लोग इन्हें छिपाने की जगह एक्सेप्ट कर रहे हैं. साथ ही जागरूकता बढ़ी है, इलाज लेने की इच्छा बढ़ी है और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में एक्सेप्ट भी पहले से बेहतर हुई है. हालांकि मॉर्डन लाइफस्टाइल, लगातार तनाव, कम नींद, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, लगातार स्क्रीन पर समय बिताना और सामाजिक परेशानी जैसी वजहों से मानसिक दबाव भी बढ़ा है.
डिजिटल लाइफस्टाइल भी बन रही है चुनौती
विशेषज्ञों के मुताबिक Millennials और Gen Z के तनाव से निपटने के तरीके भी अलग है. Millennials पुराने गाने सुनकर या पुरानी यादों को याद करके खुद को बेहतर महसूस करने की कोशिश करते हैं. वहीं Gen Z अक्सर लगातार मोबाइल स्क्रॉल करने यानी डूम स्क्रॉलिंग को अपना सहारा बना लेती है. डॉक्टरों का कहना है कि लगातार ऑनलाइन रहना, सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना करना, हर समय अपडेट रहने का दबाव और कुछ छूट जाने का डर भी मानसिक थकान और बर्नआउट की बड़ी वजह बन रहा है. पहले ऑनलाइन और ऑफलाइन जीवन के बीच कुछ दूरी रहती थी, लेकिन अब यह अंतर काफी कम हो गया है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Monsoon 2026: मानसून आते ही क्यों बढ़ जाती है पकौड़े और चाय की तलब? जानिए एक्सपर्ट की राय </title>
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        <description><![CDATA[ बारिश की पहली फुहार पड़ते ही मन अपने आप गरमा गरम चाय और कुरकुरे-पकौड़े की तरफ खींचने लगता है. तेज गर्मी से राहत देने वाला यह मौसम अपने साथ हरियाली, ठंडी हवा और बारिश की सुहानी बूंदों के साथ एक खास तरह की क्रेविंग भी लेकर आता है. सोशल मीडिया पर बारिश के मौसम में स्नेक्स की तस्वीरों की बाढ़ आ जाती है. &amp;nbsp;कैफे में भी भीड़ बढ़ जाती है और घर-घर में लोग चाय की चुस्कियों के साथ पकौड़े, भुट्टा, मसालेदार मैगी और समोसे जैसी चीजों का लुफ्त उठाने लगते हैं. लेकिन क्या सच में बारिश के मौसम में शरीर को इन तली भुनी चीजों की ज्यादा जरूरत होती है या फिर इसके पीछे कुछ और वजह है. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि मानसून में चाय और पकोड़े की तलब क्यों बढ़ जाती है और इसे लेकर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
भूख नहीं, यादें बढ़ाती है तलब&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बारिश का मौसम हमारे अंदर पुरानी यादों को ताजा कर देता है. कई लोगों के लिए मानसून का मतलब खिड़की के पास बैठकर चाय पीना, परिवार के साथ पकौड़े खाना, भुट्टा सेंकना या दोस्तों के साथ गरमा-गरम स्नेक्स का आनंद लेना होता है. बार-बार दोहराए गए ऐसे एक्सपीरियंस दिमाग में एक मजबूत जुड़ाव बना देते हैं. जब मौसम फिर वैसा ही होता है, तो दिमाग उन यादों को दोबारा एक्टिव कर देता है और उन्हें स्नैक्स खाने की चीजों की तलब बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
आखिर क्यों इतने अच्छे लगते हैं पकौड़े और दूसरे स्नैक्स?&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ज्यादातर कम्फर्ट फूड में रिफाइंड, कार्बोहाइड्रेट, नमक और फैट की मात्रा ज्यादा होती है. यही कारण है कि इन्हें खाने पर तुरंत स्वाद और संतुष्टि का एहसास होता है. वहीं बारिश के दौरान गर्म चाय, सूप या गरमा-गरम स्नैक्स शरीर को आराम और गर्माहट का एहसास भी कराते हैं. इसके अलावा मानसून में लोग बाहर कम निकलते हैं. कई लोग घर से काम करते हैं, स्क्रीन टाइम बढ़ जाता है और फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है. ऐसे में बोरियत, तनाव या सिर्फ समय बिताने के लिए भी लोग बार-बार कुछ न कुछ खाते रहते हैं, जबकि उन्हें सच में भूख नहीं होती है. इसे लेकर एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि कोई भी स्नैक्स खाने से पहले खुद को एक सवाल जरूर पूछना चाहिए कि क्या आपको सच में भूख लगी है या फिर सिर्फ आराम, गर्माहट या थोड़ा ब्रेक लेने का मन है. यह छोटी सी आदत जरूरत से ज्यादा खाने से भी बचा सकती है.&amp;nbsp;
क्या मानसून में पकोड़े खाना गलत है?
पोषण एक्सपर्ट्स का कहना है की बारिश के मौसम में कभी-कभार चाय और पकौड़े का आनंद लेना बिल्कुल गलत नहीं है. हेल्दी खानपान का मतलब अपनी पसंदीदा चीजों को पूरी तरह छोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें सीमित मात्रा में खाना है. अगर पकौड़े खाने का मन है, तो उन्हें घर पर ताजी सब्जियों के साथ बनाना अच्छा माना जाता है. चाहे तो एयर फ्रायर या बेकिंग का इस्तेमाल करके तेल की मात्रा कम की जा सकती है. हालांकि इस दौरान भी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
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मानसून में इन हेल्दी स्नैक्स को भी बना सकते हैं ऑप्शन&amp;nbsp;
अगर बार-बार तला हुआ खाना खाने का मन करता है तो उसकी जगह कुछ पौष्टिक ऑप्शन भी आप ले सकते हैं. जैसे भुना चना, मखाना, मूंगफली, कॉर्न चाट, स्प्राउट्स चाट, ढोकला, बेसन चीला, घर का बना वेजिटेबल सैंडविच और पोहा. इनमें प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा रहता है और हेल्दी स्नैकिंग की आदत भी कम होती है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Monsoon, 2026:, मानसून, आते, ही, क्यों, बढ़, जाती, है, पकौड़े, और, चाय, की, तलब, जानिए, एक्सपर्ट, की, राय </media:keywords>
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        <title>House Fly Control Tips: घर में पोछा लगाने के बाद भी आ जाती हैं मक्खियां? हमेशा के लिए भगाने की नोट करें सीक्रेट ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ Why Do Flies Appear After Mopping: घर की सफाई में पोछा लगाना रोजमर्रा का हिस्सा है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि फर्श चमकने के कुछ ही समय बाद घर में मक्खियां मंडराने लगती हैं. ऐसे में लोगों को लगता है कि आखिर सफाई के बाद भी मक्खियां क्यों आ रही हैं. दरअसल, सिर्फ पोछा लगाने से मक्खियों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती. अगर घर में कुछ ऐसी चीजें मौजूद हैं जो उन्हें आकर्षित करती हैं, तो वे बार-बार लौट आती हैं.
क्यों आ जाती हैं मक्खियां?
मक्खियां सबसे ज्यादा उन जगहों की ओर खिंचती हैं जहां सड़ा-गला भोजन, खुला कूड़ादान, गीला कचरा या पालतू जानवरों की गंदगी मौजूद हो. इसके अलावा, अगर पोछा लगाने के बाद फर्श या कोनों में ज्यादा नमी बनी रहती है, तो भी यह वातावरण मक्खियों को आकर्षित कर सकता है. रात के समय घर के बाहर जलने वाली तेज रोशनी भी कई बार मक्खियों और दूसरे कीड़ों को घर की ओर खींच लाती है.&amp;nbsp;
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कैसे पा सकते हैं इनसे छुटकारा?
अगर बार-बार मक्खियां परेशान कर रही हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर उनसे राहत पाई जा सकती है. तुलसी, लैवेंडर, गेंदा और पार्सले जैसे पौधों की खुशबू मक्खियों को पसंद नहीं होती. इन्हें घर की बालकनी, खिड़की या प्रवेश द्वार के पास लगाने से मक्खियों की संख्या कम हो सकती है. फ्रूट फ्लाई जैसी छोटी मक्खियों से छुटकारा पाने के लिए सिरका और लिक्विड डिश सोप का मिश्रण भी कारगर माना जाता है. इसके लिए एक गिलास में बराबर मात्रा में पानी और सिरका मिलाएं और उसमें लिक्विड डिश सोप की कुछ बूंदें डाल दें. गिलास को प्लास्टिक रैप से ढककर ऊपर छोटे-छोटे छेद कर दें. सिरके की गंध मक्खियों को अपनी ओर आकर्षित करती है, लेकिन डिश सोप के कारण वे बाहर नहीं निकल पातीं.&amp;nbsp;
कीटनाशक का भी इस्तेमाल फायदेमंद
बाजार में मिलने वाले स्टिकी ट्रैप, लाइट ट्रैप और घर के अंदर इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक भी मक्खियों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, कीटनाशक का इस्तेमाल हमेशा निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए और कमरे में अच्छी तरह हवा का आने-जाने का इंतजाम रखना चाहिए.&amp;nbsp;
इन चीजों की साफ-सफाई जरूरी
मक्खियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है कि उन्हें घर में आने और पनपने का मौका ही न मिले. इसके लिए खिड़कियों और दरवाजों की जालियों को सही रखें, कूड़ेदान को हमेशा ढक्कन से बंद रखें, गीले कचरे को देर तक घर में न रखें और भोजन को हमेशा एयरटाइट डिब्बों में स्टोर करें. इसके अलावा, गंदे बर्तन लंबे समय तक सिंक में न छोड़ें और घर के आसपास पत्तियां या जैविक कचरा सड़ने न दें.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>House, Fly, Control, Tips:, घर, में, पोछा, लगाने, के, बाद, भी, आ, जाती, हैं, मक्खियां, हमेशा, के, लिए, भगाने, की, नोट, करें, सीक्रेट, ट्रिक</media:keywords>
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        <title>How To Cut Bhindi: कहीं आप भी तो गलत तरीके से नहीं काट रहे भिंडी? जानें इसे काटने का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Tips To Remove Okra Stickiness: भिंडी भी एक ऐसी सब्जी है जो ज्यादातर भारतीय घरों में बनती है. किसी को कुरकुरी भिंडी पसंद होती है तो किसी को मसाला भिंडी या भरवां भिंडी. लेकिन कई बार पूरी मेहनत के बाद भी भिंडी चिपचिपी बन जाती है और उसका स्वाद बिगड़ जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह मसाले नहीं, बल्कि भिंडी काटने का गलत तरीका होता है. अगर आप भी भिंडी काटते समय कुछ छोटी-छोटी गलतियां करते हैं, तो आपकी सब्जी का स्वाद और टेक्सचर दोनों खराब हो सकते हैं. ऐसे में जानिए भिंडी काटने का सही तरीका, जिससे वह कम चिपचिपी रहे और स्वाद भी बेहतरीन आए.&amp;nbsp;
क्या गलती करते हैं हम?
सबसे पहली गलती जो कई लोग करते हैं, वह है भिंडी को धोने के तुरंत बाद काट देना. ऐसा करने से भिंडी में मौजूद नमी बढ़ जाती है और काटते समय ज्यादा लसलसापन निकलता है. बेहतर होगा कि पहले भिंडी को अच्छी तरह धो लें और फिर उसे छलनी या कपड़े पर फैलाकर पूरी तरह सूखने दें. चाहें तो साफ किचन टॉवल से भी उसे पोंछ सकते हैं. जब भिंडी पूरी तरह सूख जाए, तभी उसे काटें.

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तेज और सूखे चाकू का इस्तेमाल
भिंडी काटने के लिए हमेशा तेज और सूखे चाकू का इस्तेमाल करें. गीला चाकू या गीला चॉपिंग बोर्ड भिंडी की चिपचिपाहट को और बढ़ा सकता है. अगर काटते समय चाकू पर लसलसापन जमा होने लगे, तो उस पर हल्का-सा नींबू रगड़ सकते हैं. इससे चाकू साफ रहता है और भिंडी आसानी से कटती है.
काटते समय क्या रखें ध्यान?
भिंडी काटते समय उसके दोनों सिरों को पहले हल्का-सा काटकर अलग कर दें. इसके बाद अपनी रेसिपी के अनुसार उसे गोल या लंबाई में काटें. कोशिश करें कि सभी टुकड़े लगभग एक समान आकार के हों. इससे भिंडी एक जैसी पकती है और उसका स्वाद भी बेहतर आता है. अगर आप कुरकुरी भिंडी बना रहे हैं तो थोड़े पतले टुकड़े ठीक रहते हैं, जबकि मसाला या भरवां भिंडी के लिए बड़े टुकड़े ज्यादा अच्छे माने जाते हैं.
काटने के बाद उसे दोबारा पानी से बिल्कुल न धोएं
एक और जरूरी बात यह है कि भिंडी काटने के बाद उसे दोबारा पानी से बिल्कुल न धोएं. कई लोग सफाई के नाम पर ऐसा कर देते हैं, लेकिन इससे भिंडी और ज्यादा चिपचिपी हो जाती है. इसलिए पहले धोएं, अच्छी तरह सुखाएं और फिर सीधे काटकर पकाएं. अगर पकाते समय भी भिंडी में हल्का लसलसापन महसूस हो, तो उसमें थोड़ा-सा नींबू का रस, दही या अमचूर पाउडर डाल सकते हैं. इन चीजों की हल्की खटास चिपचिपाहट कम करने में मदद करती है और स्वाद भी बढ़ाती है.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>How To Dry Wet Shoes: बारिश में गीले जूते सुखाने में न करें ये गलती, नोट करें झटपट ठीक करने का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Shoe Care During Monsoon: बारिश का मौसम जितना सुहाना होता है, उतनी ही परेशानी गीले जूतों की भी लेकर आता है. ऑफिस जाते समय, कॉलेज या बाजार में अचानक बारिश हो जाए तो जूते पूरी तरह भीग जाते हैं. कई लोग घर पहुंचते ही उन्हें धूप में रख देते हैं या हीटर के पास सुखाने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना हर बार सही नहीं होता. गलत तरीके से जूते सुखाने पर उनका आकार बिगड़ सकता है, गोंद ढीली पड़ सकती है और उनमें से बदबू भी आने लगती है. ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपके जूते जल्दी सूखें और लंबे समय तक अच्छे बने रहें, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
घर पर सबसे पहले करें ये काम
सबसे पहले जैसे ही घर पहुंचें, जूतों में भरा अतिरिक्त पानी निकाल दें. जूतों को हल्के से झटकें और फिर किसी सूखे तौलिये से बाहर और अंदर की नमी सोख लें. जितनी जल्दी अतिरिक्त पानी निकल जाएगा, जूते उतनी ही जल्दी सूखेंगे. इसके बाद जूतों के फीते और इनसोल निकाल दें. अक्सर इन दोनों हिस्सों में सबसे ज्यादा नमी रहती है. इन्हें अलग-अलग सुखाने से हवा अच्छी तरह लगती है और पूरा जूता जल्दी सूख जाता है. जब तक ये पूरी तरह सूख न जाएं, इन्हें वापस जूते में न लगाएं.
अखबार या पेपर टॉवल भर दें
अगर जूतों के अंदर ज्यादा पानी है तो उनमें पुराने अखबार या पेपर टॉवल भर दें. कागज अंदर की नमी को तेजी से सोख लेता है. अगर कागज गीला हो जाए तो कुछ घंटों बाद उसे बदल दें. यह तरीका बारिश के मौसम में सबसे आसान और असरदार माना जाता है.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp;पंखे के सामने रख दें
जूते सुखाने के लिए अच्छी हवा भी बहुत जरूरी होती है. उन्हें ऐसे कमरे में रखें जहां हवा का आना-जाना बना रहे या फिर पंखे के सामने रख दें. लगातार हवा मिलने से जूते प्राकृतिक तरीके से सूखते हैं और उन पर किसी तरह का नुकसान भी नहीं होता. कई लोग जूते जल्दी सुखाने के लिए उन्हें तेज धूप, हीटर या हाई सेटिंग वाले हेयर ड्रायर के सामने रख देते हैं. ऐसा करने से खासकर लेदर और सिंथेटिक जूतों की चमक फीकी पड़ सकती है, उनमें दरारें आ सकती हैं और उनका आकार भी खराब हो सकता है. इसलिए तेज गर्मी की बजाय सामान्य हवा में जूते सुखाना ज्यादा सुरक्षित होता है.&amp;nbsp;
इसका भी कर सकते हैं यूज
अगर आपके पास सिलिका जेल के छोटे पैकेट हैं, जो अक्सर नए जूतों या इलेक्ट्रॉनिक सामान के डिब्बों में मिलते हैं, तो उन्हें जूतों के अंदर रख सकते हैं. ये नमी को तेजी से सोखने में मदद करते हैं. वहीं, अगर कोई दूसरा विकल्प न हो तो कच्चे चावल से भरे डिब्बे में कुछ घंटों के लिए जूते रखे जा सकते हैं. चावल भी नमी कम करने में मदद करता है. जूते सूखने के बाद उनमें हल्का-सा बेकिंग सोडा छिड़ककर रातभर के लिए छोड़ दें.
इससे नमी के कारण आने वाली बदबू काफी हद तक खत्म हो जाती है और जूते ताजगी बनाए रखते हैं. अगर बारिश के मौसम में रोजाना बाहर निकलना पड़ता है, तो जल्दी सूखने वाले या वाटर-रेसिस्टेंट जूतों का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. थोड़ी-सी सावधानी और सही तरीके से देखभाल करने पर आपके जूते न सिर्फ जल्दी सूखेंगे, बल्कि लंबे समय तक नए जैसे भी बने रहेंगे.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Yoga for Neck Pain : सुबह के गर्दन दर्द को जड़ से खत्म कर सकते हैं योगा के 5 आसन, आज ही कर दें शुरू</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/yoga-for-neck-pain-सुबह-के-गर्दन-दर्द-को-जड़-से-खत्म-कर-सकते-हैं-योगा-के-5-आसन-आज-ही-कर-दें-शुरू</link>
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        <description><![CDATA[ Yoga for Neck Pain : सुबह के गर्दन दर्द को जड़ से खत्म कर सकते हैं योगा के 5 आसन, आज ही कर दें शुरू ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Soft Roti Tips: आटे में गूंथते समय मिला लें यह एक चीज, हर रोटी बनेगी एकदम सॉफ्ट और स्वाद में बेहद लाजवाब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/soft-roti-tips-आटे-में-गूंथते-समय-मिला-लें-यह-एक-चीज-हर-रोटी-बनेगी-एकदम-सॉफ्ट-और-स्वाद-में-बेहद-लाजवाब</link>
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        <description><![CDATA[ Secret Ingredient For Soft Chapati: रोटी भारतीय खाने का सबसे अहम हिस्सा है. लेकिन कई बार अच्छी क्वालिटी का आटा इस्तेमाल करने के बाद भी रोटियां सख्त बन जाती हैं या थोड़ी देर में उनका स्वाद और नरमाहट दोनों कम हो जाते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आटा गूंथते समय एक छोटा-सा बदलाव आपकी रोटियों को पहले से कहीं ज्यादा मुलायम और स्वादिष्ट बना सकता है.&amp;nbsp;
कैसे बना सकते हैं मुलायम रोटी?
खाना बनाने से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि आटा गूंथने से पहले उसमें एक चुटकी चीनी मिलाना काफी फायदेमंद हो सकता है. इसके साथ चाहें तो स्वाद के अनुसार थोड़ा नमक भी मिला सकते हैं. चीनी की यह छोटी-सी मात्रा रोटी को मीठा नहीं बनाती, बल्कि उसकी बनावट को बेहतर बनाने में मदद करती है। इससे रोटियां लंबे समय तक नरम बनी रहती हैं और खाने में भी ज्यादा स्वादिष्ट लगती हैं. कुछ एक्सपर्ट्स साधारण नमक की जगह काला नमक मिलाने की भी सलाह देते हैं. काला नमक पाचन के लिए बेहतर माना जाता है और गैस, अपच व पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी मदद कर सकता है.
आटा गूंथने का तरीका भी जरूरी
सिर्फ चीनी मिलाना ही काफी नहीं है, आटा गूंथने का तरीका भी उतना ही जरूरी है. हमेशा गुनगुने पानी से आटा गूंथने की कोशिश करें। इससे आटा अच्छी तरह तैयार होता है और उसकी बनावट मुलायम रहती है. पानी एकदम ज्यादा या कम नहीं होना चाहिए. आटा इतना नरम होना चाहिए कि उंगली से दबाने पर हल्का निशान बन जाए, लेकिन वह हाथों से चिपके नहीं. आटा गूंथने के बाद उसे तुरंत बेलने की बजाय कम से कम 20 से 30 मिनट के लिए ढककर रख दें. इसके लिए साफ सूती कपड़े या प्लेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस दौरान आटा अच्छी तरह सेट हो जाता है, जिससे रोटियां बेलना आसान होता है और पकने के बाद वे ज्यादा मुलायम बनती हैं.&amp;nbsp;
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रोटी बेलते समय क्या रखें ध्यान?
रोटी बेलते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि उसकी मोटाई हर तरफ बराबर हो. अगर कहीं ज्यादा मोटी और कहीं ज्यादा पतली होगी, तो रोटी सही तरीके से नहीं फूलेगी और उसकी बनावट भी अच्छी नहीं आएगी. तवा भी पहले से अच्छी तरह गर्म होना चाहिए. ठंडे तवे पर रोटी डालने से वह ज्यादा देर तक पकती है, जिससे उसके सख्त होने की संभावना बढ़ जाती है. रोटी तवे से उतरने के बाद उस पर हल्का-सा देसी घी लगा दें. इससे न सिर्फ उसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि रोटियां लंबे समय तक मुलायम भी बनी रहती हैं.
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>क्या सच में सुअर की चर्बी से बनते हैं दवा वाले कैप्सूल? वेज वालों के काम की है खबर</title>
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        <description><![CDATA[ अक्सर कई बीमारियों में डॉक्टर उस बीमारी को ठीक करने के लिए कैप्सूल देते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को यह सुनकर हैरानी होगी की उन्हें दी गई कैप्सूल शाकाहारी नहीं, बल्कि मांसाहारी भी हो सकती है.&amp;nbsp;
दरअसल, कैप्सूल का ऊपर वाला खोल यानी उसका कवर एक चीज से बनता है जिसे जिलेटिन कहते हैं. जिलेटिन एक प्राकृतिक पदार्थ है जो कोलेजन से बनता है, और यह कोलेजन जानवरों की हड्डियों, त्वचा और मांसपेशियों में पाया जाता है. यानी सीधे शब्दों में कहें तो जिलेटिन जानवरों के शरीर के हिस्सों से ही तैयार होता है, चर्बी या तेल से नहीं. कई लोग सोचते हैं कि यह सिर्फ चर्बी से बनता है, लेकिन असल में इसे बनाने में जानवरों की हड्डी और खाल का इस्तेमाल ज्यादा होता है.
जिलेटिन क्या है और कैसे बनता है?
अब सवाल यह है कि यह जिलेटिन आता कहां से है. आपको जानकर हैरानी होगी कि कैप्सूल बनाने में सबसे ज्यादा सुअर की खाल, गाय की खाल, जानवरों की हड्डियां और मछली की खाल का इस्तेमाल होता है. यानी दवा कंपनी के हिसाब से यह सुअर से भी बन सकता है और गाय या मछली से भी. दुनियाभर में सालों से यही तरीका इस्तेमाल हो रहा है क्योंकि जिलेटिन के कैप्सूल पिछले सौ साल से इस्तेमाल हो रहे हैं.
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शाकाहारी कैप्सूल भी हैं बाजार में
अच्छी खबर यह है कि अब बाजार में शाकाहारी कैप्सूल भी मौजूद हैं. इन्हें पौधों से मिलने वाले पदार्थों से बनाया जाता है, जिसे एचपीएमसी (HPMC) कहते हैं. यह पूरी तरह पौधों से बना होता है और इसे जिलेटिन कैप्सूल का शाकाहारी विकल्प माना जाता है. लेकिन दिक्कत यह है कि यह विकल्प महंगा होता है, इसलिए ज्यादातर कंपनियां आज भी सस्ते जिलेटिन कैप्सूल का ही इस्तेमाल करती हैं.&amp;nbsp;
इस जानकारी के बाद शाकाहारी लोगों के दिमाग में यह सवाल आता है कि इसको कैसे पहचानें, क्या अनजाने में वे अपना धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं? ऐसे में आप क्या कर सकते हैं? बता दें कि भारत में शाकाहारी चीजों पर हरा गोल निशान और मांसाहारी चीजों पर भूरा या लाल गोल निशान बना होता है, यह नियम दवाओं पर भी लागू होता है. इसके अलावा पैकेट या दवा की जानकारी में &quot;Vegetarian Capsule&quot; या &quot;HPMC Capsule&quot; लिखा हो तो समझ लीजिए कि यह शाकाहारी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Fertility Diet: मां बनने में आ रही है दिक्कत तो आज ही अपने खाने में शामिल कर लें ये चीजें, जल्द गूंजेगी किलकारी</title>
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        <description><![CDATA[ Fertility Diet: गर्भधारण की कोशिश कर रहे हैं कई कपल्स के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या खानपान का असर भी प्रजनन क्षमता पर पड़ता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार सिर्फ भोजन के भरोसे गर्भधारण की संभावना तय नहीं की जा सकती, लेकिन सही और संतुलित डाइट शरीर को गर्भधारण के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने में बड़ी भूमिका निभाती है. पौष्टिक आहार, हार्मोन संतुलन बनाए रखना, ओव्यूलेशन को सपोर्ट करने, स्पर्म की क्वालिटी बेहतर करने और शुरुआती गर्भावस्था के लिए शरीर को तैयार करने में मदद कर सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपको भी मां बनने में दिक्कत आ रही है तो आप अपने खाने में कौन सी चीज शामिल कर सकते हैं.&amp;nbsp;
हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें&amp;nbsp;
पालक, मेथी, केल और चोली जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां फर्टिलिटी डाइट का अहम हिस्सा मानी जाती है. इनमें फोलेट भरपूर मात्रा में होता है, जो हेल्दी एग्स के विकास और गर्भधारण के शुरुआती चरण के लिए जरूरी माना जाता है. इसके अलावा इनमें आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं.&amp;nbsp;
साबुत अनाज&amp;nbsp;
ब्राउन राइस, ओट्स, क्विनोआ और मिलेट्स जैसे साबुत अनाज शरीर में ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करते हैं. ब्लड शुगर का संतुलन इंसुलिन और प्रजनन हार्मोन पर भी पॉजिटिव असर डालता है. &amp;nbsp;खासकर पीसीओएस या अनियमित पीरियड से जूझ रही महिलाओं के लिए रिफाइंड अनाज की जगह साबुत अनाज अच्छा ऑप्शन माना जाता है.&amp;nbsp;
बेरीज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल&amp;nbsp;
स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, संतरा, कीवी और अनार जैसे फल विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं. यह एग्स और स्पर्म को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं. अनार को गर्भाशय में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने के लिए भी उपयोगी माना जाता है, जिससे एंब्रियो के इंप्लांटेशन में मदद मिलती है.&amp;nbsp;
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फैटी फिश&amp;nbsp;
सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियां ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा सोर्स है. ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर में सूजन कम करने, हार्मोन बनाने की प्रक्रिया को सहयोग देने और प्रजनन अंगों तक बेहतर ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने में मदद करता है. पुरुषों में यह स्पर्म की क्वालिटी को बेहतर बनाने में सहायता करता है. जबकि महिलाओं में पीरियड और गर्भधारण की प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकता है.&amp;nbsp;
नट्स और बीज&amp;nbsp;
अखरोट, बादाम, अलसी, कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन ए, जिंक, सेलेनियम और हेल्दी फैट से भरपूर होते हैं. यह पोषक तत्व महिलाओं में एग्स के स्वास्थ्य और पुरुषों में स्पर्म की क्वालिटी बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. एक रिसर्च में यह भी पाया गया कि नियमित मात्रा में अखरोट खाने से स्पर्म की क्वालिटी और में सुधार देखा गया है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Easy Monsoon Snacks: बारिश के मौसम में झटपट बनाएं ये टेस्टी नाश्ता, मेहमान भी कहेंगे कहां से सीखा?</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Monsoon Snacks: बारिश के मौसम में झटपट बनाएं ये टेस्टी नाश्ता, मेहमान भी कहेंगे कहां से सीखा? ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Annual Health Checkup : हर साल जरूर कराएं ये 5 बॉडी टेस्ट, गंभीर बीमारी का टल जाएगा खतरा, यहां जानिए</title>
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        <description><![CDATA[ Annual Health Checkup : हर साल जरूर कराएं ये 5 बॉडी टेस्ट, गंभीर बीमारी का टल जाएगा खतरा, यहां जानिए ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>When To Replace Mop: कितने दिनों में बदलना चाहिए घर में यूज होने वाला पोछा, लापरवाही से इन बीमारियों का रहता है खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ When To Replace Mop:&amp;nbsp;घर की सफाई के लिए हम रोज पोछा लगाते हैं, ताकि फर्श साफ और चमकदार दिखे. लेकिन बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि यही पोछा कुछ समय बाद खुद गंदगी और कीटाणुओं का घर बन जाता है. हम सोचते हैं कि पोछा लगाने से फर्श साफ हो रहा है, लेकिन अगर पोछा खुद गंदा है तो वह सफाई की जगह बीमारियां फैलाने का काम करता है. पोछे का कपड़ा नमी सोखता है और नमी में बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ते हैं.
जब हम पोछे को गीला करके फर्श पर घुमाते हैं और फिर उसे बिना ठीक से सुखाए एक कोने में रख देते हैं, तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि गीले पोछे में हजारों की संख्या में बैक्टीरिया कुछ ही घंटों में बढ़ सकते हैं. यही कारण है कि पुराना या ठीक से न सुखाया गया पोछा फर्श को साफ करने की बजाय कीटाणु और फैला देता है.&amp;nbsp;
कितने समय बाद बदल देना चाहिए पोछा?
सामान्य तौर पर घर में इस्तेमाल होने वाले पोछे को हर एक से दो महीने में बदल देना चाहिए. अगर घर में बच्चे, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति हैं, तो सफाई से जुड़े खतरे ज्यादा होते हैं, इसलिए ऐसे घरों में पोछा एक महीने के अंदर बदलना बेहतर माना जाता है. &amp;nbsp;अगर पोछे का कपड़ा घिसने लगे, उसमें से बदबू आने लगे, उसका रंग बदल जाए या धोने के बाद भी वह साफ न लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि अब पोछा बदलने का समय आ गया है, भले ही एक महीना पूरा न हुआ हो.&amp;nbsp;
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पोछे की सही सफाई और रखरखाव का तरीका
पोछे को बार-बार बदलना ही काफी नहीं है, बल्कि रोजाना सही तरीके से उसकी सफाई करना भी उतना ही जरूरी है. पोछा लगाने के बाद उसे साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए, ताकि उसमें मिट्टी और साबुन का असर न रह जाए. हफ्ते में एक या दो बार पोछे को हल्के गर्म पानी में डिटर्जेंट या फिनाइल डालकर भिगोना चाहिए, इससे उसमें छिपे बैक्टीरिया काफी हद तक खत्म हो जाते हैं. &amp;nbsp;सबसे जरूरी बात यह है कि पोछे को धोने के बाद धूप में सुखाना चाहिए, क्योंकि सूरज की रोशनी में मौजूद प्राकृतिक तत्व कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करते हैं. बंद कमरे या नमी वाली जगह पर पोछे को सुखाने से बैक्टीरिया और तेजी से बढ़ते हैं.&amp;nbsp;
गंदे पोछे से बढ़ सकता है इन बीमारियों का खतरा
अगर पोछे की सफाई और उसे बदलने में लापरवाही की जाए, तो इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. गंदे पोछे में मौजूद बैक्टीरिया जैसे ई-कोलाई और साल्मोनेला फर्श पर फैल सकते हैं, जिससे पेट में इन्फेक्शन, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नमी और फंगस से भरा पोछा सांस से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से एलर्जी या अस्थमा की शिकायत है. इसके अलावा अगर घर में कोई घाव या कटा हुआ पैर लेकर गंदे फर्श पर चलता है, तो त्वचा में इन्फेक्शन होने का खतरा भी रहता है. छोटे बच्चे फर्श पर ज्यादा समय बिताते हैं और अक्सर हाथ मुंह में डालते हैं, इसलिए उन पर इसका असर जल्दी और ज्यादा पड़ता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Spider Webs In House: सफाई के बाद बार&amp;बार लग जाते हैं मकड़ी के जाले? नोट करें इन्हें हमेशा के लिए हटाने की आसान ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ Why Do Spider Webs Reappear So Fast: घर की अच्छी तरह सफाई करने के बाद भी अगर कुछ ही दिनों में कोनों, छत या खिड़कियों के पास फिर से मकड़ी के जाले दिखाई देने लगते हैं, तो इसका मतलब सिर्फ यह नहीं है कि सफाई ठीक से नहीं हुई. असल वजह यह है कि घर में अब भी मकड़ियां मौजूद हैं और उन्हें वहां रहने के लिए अनुकूल माहौल मिल रहा है. ऐसे में जाले हटाने से समस्या कुछ समय के लिए तो खत्म हो जाती है, लेकिन मकड़ियां दोबारा नए जाले बना लेती हैं.&amp;nbsp;
क्यों मकड़ियां बनाती हैं बार-बार जाला?
दरअसल, मकड़ियों के लिए जाला सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि शिकार पकड़ने का सबसे अहम तरीका होता है. अगर उनका जाला टूट जाए या हटा दिया जाए, तो वे बहुत कम समय में नया जाला बना लेती हैं. कई घरेलू मकड़ियां आधे घंटे से एक घंटे के भीतर दोबारा जाला तैयार कर सकती हैं. यही वजह है कि सुबह साफ किए गए कोनों में शाम तक फिर जाले नजर आने लगते हैं. &amp;nbsp;घर के कुछ हिस्सों में जाले ज्यादा बनने की संभावना रहती है. जैसे कम इस्तेमाल होने वाले कमरे, स्टोर रूम, बेसमेंट, छत के कोने, खिड़कियों और दरवाजों के आसपास की जगहें. इन स्थानों पर लोगों की आवाजाही कम होती है और उड़ने वाले छोटे कीड़े भी ज्यादा आते हैं. मकड़ियां इन्हीं कीड़ों का शिकार करने के लिए वहां अपने जाले बनाती हैं.&amp;nbsp;
बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा आतंक
बारिश और गर्मी के मौसम में मकड़ियों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं. इस दौरान नमी और कीड़ों की संख्या बढ़ने से उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है. इसलिए इन मौसमों में घर में जाले बनने की समस्या अधिक देखने को मिलती है.&amp;nbsp;
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हमेशा के लिए खत्म करने के लिए क्या करें?
अगर आप चाहते हैं कि बार-बार जाले न बनें, तो सिर्फ उन्हें हटाना काफी नहीं है. सबसे पहले घर के कोनों, खिड़कियों और छत की नियमित सफाई करें. जहां धूल और गंदगी जमा होती है, वहां मकड़ियां जल्दी जाले बनाती हैं. घर में उड़ने वाले छोटे कीड़ों को कम करने के लिए खिड़कियों पर जाली लगाएं और रात में बेवजह तेज रोशनी जलाकर न रखें, क्योंकि रोशनी की ओर कीड़े आकर्षित होते हैं.
छोटी-छोटी दरारों को भी बंद कर दें
&amp;nbsp;दीवारों, दरवाजों और खिड़कियों के आसपास मौजूद छोटी-छोटी दरारों को भी बंद कर दें, ताकि मकड़ियां आसानी से घर के अंदर न आ सकें. अगर नियमित सफाई के बावजूद बड़ी संख्या में जाले बन रहे हैं या मकड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो यह किसी छिपे हुए इंफेक्शन का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में पेशेवर पेस्ट कंट्रोल की मदद लेना बेहतर विकल्प हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Difference Between Mumbai And Delhi: विदेशी ट्रैवलर्स ने दिल्ली को क्यों दिए &amp;apos;0&amp;apos; नंबर? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Which City Is Better Mumbai Or Delhi For Tourists: मुंबई बनाम दिल्ली दो शहर, एक तुलना और ऐसा फैसला जिसने लोगों को चौंका दिया. यात्रा से जुड़े वीडियो बनाने वाले स्टीव और इवाना ने जब मुंबई और दिल्ली की तुलना की, तो यह सिर्फ दो शहरों का सामान्य आकलन नहीं था, बल्कि लोगों की सोच को छू जाने वाली बात बन गई. &amp;nbsp;उन्होंने मुंबई को पर्यटक अनुभव के तौर पर दिल्ली से &quot;सौ बनाम शून्य&quot; बताया, जिसके बाद लोगों के बीच बहस भी शुरू हो गई.&amp;nbsp;
क्या है मामला?
असल में यह कहानी दो विदेशी यात्रियों के नजरिए की है, जो शहरों को सिर्फ देखने से नहीं, बल्कि महसूस करने से समझते हैं. वीडियो की शुरुआत में ही स्टीव साफ कहते हैं कि मुंबई दिल्ली से कहीं आगे है और फिर अपने अनुभव के आधार पर इसकी वजह भी बताते हैं.&amp;nbsp;
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मुंबई का अनुभव
मुंबई में घूमते हुए स्टीव को सबसे ज्यादा जो चीज महसूस हुई, वह थी भीड़ के बीच खुद का अनदेखा रह जाना. उनका कहना है कि वहां किसी को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह कौन हैं या कहां से आए हैं. उन्होंने इसे एक तरह की आज़ादी बताया. भीड़, शोर और लगातार बजते वाहन के हॉर्न के बावजूद उन्हें वहां सहज महसूस हुआ. &amp;nbsp;उनके अनुसार, एक यात्री के तौर पर वहां कोई उन्हें परेशान नहीं करता, जिससे वे खुलकर शहर को देख और महसूस कर पाए.&amp;nbsp;
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इवाना भी इस अनुभव से सहमत दिखती हैं. उनके लिए मुंबई ऐसा शहर रहा, जहां वे बिना किसी दखल के सब कुछ देख सकती थीं. स्टीव ने वहां की इमारतों और पुरानी वास्तुकला की भी तारीफ की. उन्होंने बताया कि शहर में अलग-अलग दौर की झलक मिलती है, कहीं पुरानी विदेशी शैली का असर दिखता है तो कहीं दूसरी तरह की बनावट. यही विविधता शहर को खास बनाती है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इतनी बड़ी और शोर भरी जगह में रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता.
दिल्ली में कैसा रहा अनुभव?
वहीं दिल्ली में उनका अनुभव बिल्कुल अलग रहा. स्टीव के मुताबिक, वहां लोग उन्हें लगातार देख रहे थे, उनके आसपास जमा हो रहे थे और उनसे बात करने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने खुद को जैसे आकर्षण का केंद्र महसूस किया। यह अनुभव उनके लिए थोड़ा भारी साबित हुआ. दरअसल, दिल्ली और मुंबई दोनों की सामाजिक बनावट अलग है. दिल्ली में लोग ज्यादा सीधे और खुलकर बातचीत करने वाले होते हैं, जबकि मुंबई में लोग अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहते हैं. यही फर्क यात्रियों के अनुभव को भी बदल देता है.
दोनों में क्या है अंतर?
कुछ लोगों के लिए मुंबई की यह दूरी सुकून देती है तो कुछ के लिए यह अलगाव जैसा लग सकता है. वहीं दिल्ली की खुली बातचीत कुछ के लिए रोचक होती है, तो कुछ के लिए ज्यादा भारी पड़ सकती है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Right Way To Drink Water: गटागट पानी पीने की आदत कहीं कर न दे बीमार? डॉक्टर से जानें पानी पीने का सही नियम</title>
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        <description><![CDATA[ Why You Should Drink Water Slowly: पानी पीना एक साधारण आदत है, लेकिन इसे कैसे पिया जाता है, इसका असर शरीर पर गहरा पड़ता है. &amp;nbsp;धीरे-धीरे पानी पीने से पाचन बेहतर होता है और पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता. &amp;nbsp;वहीं जल्दबाजी में एक साथ पानी पी लेने से शरीर को उसे संभालने में समय लगता है. असल में डाइजेशन की प्रक्रिया मुंह से ही शुरू हो जाती है. जब हम पानी को घूंट-घूंट करके पीते हैं, तो वह लार के साथ मिलकर धीरे-धीरे नीचे जाता है. इससे पेट पहले से तैयार रहता है और खाना आसानी से पचने लगता है.&amp;nbsp;
एकबार में ज्यादा पानी पीने से क्या होती है दिक्कत?
जब पानी एक ही बार में ज्यादा मात्रा में पिया जाता है, तो शरीर को अचानक उसे संभालना पड़ता है. इससे पाचन की लय थोड़ी बिगड़ सकती है. ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट भी बताती है कि शरीर पानी को धीरे-धीरे लेने पर बेहतर तरीके से उपयोग कर पाता है. &amp;nbsp;डॉक्टर विनीत कुमार गुप्ता के अनुसार, धीरे-धीरे पानी पीने से यह शरीर में अच्छी तरह घुलता है और पाचन में मदद करता है. वहीं बहुत तेजी से पानी पीने पर कुछ समय के लिए पेट में भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है.&amp;nbsp;
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धीरे- धीरे पानी पीने के फायदे
धीरे-धीरे पानी पीने का एक फायदा यह भी है कि शरीर का संतुलन बना रहता है. पेट को एकदम से ज्यादा मात्रा नहीं मिलती, जिससे पाचन रस ठीक तरह से काम करते रहते हैं. &amp;nbsp;इससे कब्ज जैसी समस्याओं से भी राहत मिलती है और शरीर में पानी की कमी नहीं होती. &amp;nbsp;हालांकि कुछ स्थितियों में जल्दी पानी पीना जरूरी हो सकता है, जैसे तेज गर्मी या ज्यादा मेहनत के बाद. &amp;nbsp;लेकिन रोजमर्रा की आदत के रूप में यह तरीका सही नहीं माना जाता. &amp;nbsp;खासकर खाना खाते समय ज्यादा पानी पीने से पाचन धीमा हो सकता है.&amp;nbsp;
पानी पीने की टाइमिंग भी है जरूरी
एक बात यह भी है कि पानी पीने का सही समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसका तरीका. बेहतर है कि दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें, खाने के बीच में घूंट लें और एक बार में ज्यादा मात्रा लेने से बचें. &amp;nbsp;शरीर की जरूरत को समझकर ही पानी पीना सबसे सही तरीका है, जिससे पाचन और सेहत दोनों बेहतर रहते हैं. पानी पीने का तरीका छोटा बदलाव जरूर है, लेकिन इसका असर बड़ा होता है. धीरे-धीरे पानी पीने की आदत न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाती है, बल्कि पूरे दिन शरीर को हल्का और संतुलित महसूस कराती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Tree Of Death: बारिश में इस पेड़ के नीचे खड़े हुए तो जा सकती है जान? जानें &amp;apos;ट्री ऑफ डेथ&amp;apos; का सच</title>
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        <description><![CDATA[ Is Manchineel Tree Really Deadly: नेचर हमेशा संतुलन बनाए रखती है, जहां एक तरफ सुंदरता और जीवन देने वाली चीजें हैं, वहीं दूसरी तरफ खतरे भी छिपे होते हैं. &amp;nbsp;इसी संतुलन का एक चौंकाने वाला उदाहरण है मैनशिनील पेड़, जिसे &quot;ट्री ऑफ डेथ&quot; यानी मौत का पेड़ कहा जाता है. समुद्री किनारों पर पाए जाने वाला यह पेड़ जितना साधारण दिखता है, उतना ही खतरनाक भी है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
कई पौधे हमें अपने रंग-बिरंगे फूलों और स्वादिष्ट फलों से आकर्षित करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो चुपचाप खड़े रहते हैं और अपने भीतर ऐसे जोखिम छिपाए रखते हैं. जिनसे अनजान व्यक्ति को गंभीर नुकसान हो सकता है. समुद्री तटों से लेकर घने जंगलों तक, ऐसे कई पौधे हैं जिन्होंने खुद को बचाने के लिए बेहद खास तरह की क्षमता विकसित की है. यही वजह है कि इनके पास जाते समय उत्सुकता के साथ सावधानी भी जरूरी हो जाती है.
ट्री ऑफ डेथ क्या है?
इन्हीं खतरनाक पौधों में सबसे आगे है मैनशिनील, जिसे उसकी जहरीली प्रकृति के कारण &quot;ट्री ऑफ डेथ&quot; कहा जाता है. इसका नाम स्पेनिश शब्द &quot;मंजानिला&quot; से आया है, जिसका मतलब होता है &quot;छोटा सेब&quot;, क्योंकि इसके फल दिखने में छोटे सेब जैसे लगते हैं. लेकिन यही मासूम दिखने वाला फल अपने अंदर जानलेवा राज छिपाए रहता है.&amp;nbsp;
कहां मिलते हैं पेड़?
यह पेड़ मुख्य रूप से कैरेबियन इलाकों, फ्लोरिडा, बहामास, सेंट्रल अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्सों में पाया जाता है. इसकी ऊंचाई लगभग 15 से 50 फीट तक हो सकती है और कई बार यह झाड़ी जैसा भी दिखाई देता है. इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके हर हिस्से छाल, पत्ते, रस और फल में जहरीले तत्व मौजूद होते हैं.
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क्या होती है इससे दिक्कत?
इस पेड़ के पास जाना भी जोखिम भरा हो सकता है. बारिश के दौरान इसके नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसकी पत्तियों से गिरने वाला पानी जहरीला हो सकता है और त्वचा पर जलन या छाले पैदा कर सकता है. &amp;nbsp;फ्लोरिडा विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका दूधिया रस त्वचा पर जलन, तेज खुजली, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ तक पैदा कर सकता है. यहां तक कि इसकी लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं आंखों में जलन और अस्थायी अंधापन भी ला सकता है.&amp;nbsp;
मौत का छोटा सेब
इसके फल को मौत का छोटा सेब भी कहा जाता है. शुरुआत में इसका स्वाद मीठा लगता है, लेकिन कुछ ही देर बाद मुंह में जलन, गले में दर्द और निगलने में परेशानी शुरू हो जाती है. रेडियोलॉजिस्ट निकोला स्ट्रिकलैंड ने अपने अनुभव में बताया कि फल खाने के कुछ समय बाद ही मुंह में तेज जलन और गले में जकड़न महसूस होने लगी, जो धीरे-धीरे बेहद दर्दनाक हो गई. इसके प्रभाव में उल्टी, खून आना और डाइजेशन सिस्टम को गंभीर नुकसान तक हो सकता है.
इतना खतरनाक होने के बावजूद, यह पेड़ प्रकृति के लिए जरूरी है. इसकी जड़ें समुद्र किनारे की मिट्टी को मजबूती देती हैं और कटाव को रोकती हैं. इसके साथ ही, कुछ जीव जैसे इगुआना इसके फल को बिना नुकसान के खा लेते हैं और इसी पर अपना आश्रय भी बनाते हैं.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Late Night Eating: रात में देर से खाना खाने की आदत सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाती है? एक्सपर्ट से समझिए पूरी बात</title>
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        <description><![CDATA[ Side Effects Of Eating Late At Night: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी और देर तक काम करने की वजह से कई लोग रात में काफी देर से खाना खाते हैं. कुछ लोगों के लिए यह रोजमर्रा की आदत बन चुकी है, लेकिन क्या यह आदत सेहत के लिए सही है? डाइट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता. देर रात खाना खाने का असर आपकी सेहत, लाइफस्टाइल और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है.&amp;nbsp;
देर रात खाना खाने का क्या होता है असर?
Univerity of Rochester Medical Center के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को एसिड रिफ्लक्स &amp;nbsp;या डायबिटीज जैसी समस्या है, तो देर रात खाना खाने से परेशानी बढ़ सकती है. सोने से ठीक पहले खाना खाने पर पेट में बनने वाला एसिड ऊपर की ओर आ सकता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. &amp;nbsp;इसलिए ऐसे लोगों को सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले रात का खाना खा लेना चाहिए.&amp;nbsp;
इसे भी पढ़ेंः&amp;nbsp; Brain Cancer: ब्रेन कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, Vitamin B12 थैरेपी ने दिखाया कमाल
डायबिटीड के मरीजों के लिए क्या दिक्कत?
डायबिटीज के मरीजों के लिए भी देर रात खाना नुकसानदायक हो सकता है. तय समय से अलग भोजन करने पर ब्लड शुगर का स्तर ऊपर-नीचे हो सकता है. इससे नींद प्रभावित होती है और अगले दिन भूख भी असामान्य महसूस हो सकती है. ऐसे लोगों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही रात के भोजन का समय तय करना चाहिए. अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं और किसी गंभीर बीमारी से नहीं जूझ रहे हैं, तो कभी-कभार देर से खाना खाना बड़ी समस्या नहीं माना जाता. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ आदत या बोरियत की वजह से खाने से बचना चाहिए. पहले यह समझें कि आपको वास्तव में भूख लगी है या आप सिर्फ समय बिताने के लिए कुछ खा रहे हैं.&amp;nbsp;
रात में क्या खाने से बचना चाहिए?
रात में क्या खा रहे हैं, यह भी उतना ही जरूरी है जितना कि कब खा रहे हैं. अगर आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या है, तो सोने से पहले ज्यादा तला-भुना या मांस, चीज, अंडे और अधिक डेयरी प्रोडक्ट्स खाने से बचें. इसकी बजाय मेवे, नट बटर या हल्के पौधों से बने स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं. वहीं डायबिटीज के मरीजों को ऐसा स्नैक चुनना चाहिए जिसमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट का संतुलन हो, ताकि ब्लड शुगर नियंत्रित रहे. दांतों की सेहत के लिए भी देर रात मीठी या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें खाना ठीक नहीं माना जाता. ऐसे खाद्य पदार्थ मुंह में लंबे समय तक शुगर छोड़ते हैं, जिससे कैविटी का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए रात में कुछ भी खाने के बाद ब्रश करना और दांतों की सफाई करना जरूरी है.&amp;nbsp;
रात में भूख लगने पर क्या करें?
अगर आपको रोज रात में भूख लगती है, तो इसकी वजह दिनभर पर्याप्त भोजन न करना, तनाव, बोरियत, इमोशनल कारण, ज्यादा एक्सरसाइज या फिर शरीर में प्रोटीन और फाइबर की कमी भी हो सकती है. ऐसे में सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि भूख असली है या सिर्फ आदत. अगर सच में भूख लगी है तो हल्का और संतुलित स्नैक लें, लेकिन अगर यह सिर्फ आदत है तो उसे धीरे-धीरे बदलने की कोशिश करें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Bug Bite Itching: मच्छर या कीड़ा काटे तो खुजली करने से पहले 2 बार सोचें, रिसर्च में हुआ बेहद चौंकाने वाला खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Why Scratching Mosquito Bites Makes It Worse: मच्छर, मक्खी या किसी दूसरे कीड़े के काटने के बाद खुजली होना आम बात है. ऐसे में ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे उस जगह को खुजलाने लगते हैं, क्योंकि इससे कुछ देर के लिए राहत मिलती है. लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि यह राहत सिर्फ थोड़ी देर की होती है. बार-बार खुजलाने से सूजन, जलन और खुजली पहले से ज्यादा बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
खुजलाना क्यों नहीं चाहिए?
रिसर्चर के मुताबिक, डॉक्टर लंबे समय से लोगों को सलाह देते रहे हैं कि कीड़े के काटने या एलर्जी वाली जगह को ज्यादा न खुजलाएं. अब साइंटिस्ट ने यह भी समझ लिया है कि ऐसा करने से शरीर के अंदर आखिर क्या होता है. इस रिसर्च के लिए साइंटिस्ट ने चूहों पर स्टडी किया और पाया कि खुजलाने से शरीर की इम्यून सिस्टम ज्यादा सक्रिय हो जाती है, जिससे प्रभावित हिस्से में सूजन और खुजली बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
इसे भी पढ़ेंः&amp;nbsp;&amp;nbsp;Brain Cancer: ब्रेन कैंसर के इलाज में नई उम्मीद, Vitamin B12 थैरेपी ने दिखाया कमाल
किसपर किया गया था रिसर्च?
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग &amp;nbsp;के स्किन रोग एक्सपर्ट डॉ. डैनियल कैपलन &amp;nbsp;और उनकी टीम ने इस स्टडी में चूहों की त्वचा पर एलर्जी पैदा करने वाला पदार्थ लगाया। जिन चूहों ने खुजलाया, उनके शरीर में सूजन बढ़ाने वाली इम्यून सिस्टम तेजी से उस जगह पहुंच गईं. वहीं जिन चूहों को खुजलाने से रोका गया, उनमें सूजन काफी कम रही. इससे साफ हुआ कि खुजलाना खुद समस्या को और बढ़ा देता है. &amp;nbsp;डॉ. कैपलन का कहना है कि अगर मच्छर काटने के बाद उसे बिल्कुल न खुजलाया जाए, तो ज्यादातर लोगों में खुजली 5 से 10 मिनट के भीतर कम होने लगती है. लेकिन अगर उसी जगह को बार-बार खुजलाया जाए, तो वही छोटा-सा दाना कई दिनों तक परेशान कर सकता है.
खुजलाने से क्या होती है दिक्कत?
रिसर्च में यह भी सामने आया कि खुजलाने पर शरीर की दर्द महसूस करने वाली नसें सक्रिय हो जाती हैं. इसके बाद सब्सटेंस पी नाम का एक केमिकल मैसेंजरनिकलता है, जो त्वचा में मौजूद मास्ट सेल्स को सक्रिय कर देता है. ये सेल्स हिस्टामिन जैसे रसायन छोड़ती हैं, जिससे खुजली और सूजन दोनों बढ़ जाती हैं. यही वजह है कि खुजलाने के बाद कुछ देर राहत जरूर मिलती है, लेकिन बाद में परेशानी और बढ़ जाती है.
क्या खुजलाने से कोई फायदा भी होता है?
हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि हल्का-सा खुजलाने से शरीर को एक छोटा फायदा भी मिल सकता है. स्टडी में देखा गया कि खुजलाने वाले चूहों की त्वचा पर कुछ बैक्टीरिया की मात्रा कम थी. माना जा रहा है कि सूजन की वजह से शरीर कुछ हानिकारक जीवाणुओं से लड़ने में मदद करता है. लेकिन एक्सपर्ट स्पष्ट कहते हैं कि यह फायदा इतना बड़ा नहीं है कि खुजलाने की आदत को सही माना जाए.&amp;nbsp;
खुजली होने पर क्या करना चाहिए?
अगर मच्छर, मक्खी या किसी कीड़े के काटने के बाद तेज खुजली हो रही है, तो उसे नाखूनों से खुजलाने की बजाय हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम, कैलामाइन लोशन या मेंथॉल युक्त एंटी-इच क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे खुजली शांत होती है और त्वचा को नुकसान पहुंचने का खतरा भी कम रहता है. एक्सपर्ट के अनुसार, खुजली को सहन करना भले ही आसान न हो, लेकिन बार-बार खुजलाने से बचना ही त्वचा को जल्दी ठीक होने का सबसे बेहतर तरीका है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Pakistan Tourist Places: खूबसूरती में किसी स्वर्ग से कम नहीं पाकिस्तान की ये जगहें, विदेशी सैलानियों की लगी रहती है कतार</title>
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        <description><![CDATA[ Beautiful Tourist Places In Pakistan: बंटवारे से पहले भारत और पाकिस्तान एक देश थे, लेकिन बंटवारे में भारत के कुछ खूबसूरत इलाके पाकिस्तान के हिस्से में चले गए. जिन्हें देखने दुनियाभर से लोग आते हैं. यहां बर्फ से ढकी चोटियों, हरी-भरी वादियों, रेगिस्तान, समुद्र तटों, झीलों और ऐतिहासिक धरोहरों का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. एडवेंचर पसंद करने वालों से लेकर प्रकृति और इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले यात्रियों तक, हर किसी के लिए यहां कुछ न कुछ खास मौजूद है. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पाकिस्तान की खूबसूरत जगहों को देखने पहुंचते हैं.&amp;nbsp;
हुंजा वैली
सबसे पहले बात करें हुंजा वैली की, जिसे पाकिस्तान की सबसे खूबसूरत जगहों में गिना जाता है. गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थित यह घाटी बर्फीले पहाड़ों, साफ मौसम और हरियाली के लिए मशहूर है. यहां राफ्टिंग, कयाकिंग और कैनोइंग जैसी एडवेंचर एक्टिविटीज का भी आनंद लिया जा सकता है.
नीलम वैली
नीलम वैली भी विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल है. पीओके में स्थित इस घाटी को कई लोग &#039;धरती का स्वर्ग&#039; भी कहते हैं. ऊंचे पहाड़, बहती नदियां और घने जंगल इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं. यहां शारदा किला, कुट्टन, जगरान और हेलमेट जैसे पर्यटन स्थल भी देखने लायक हैं.
चूर्णा आइलैंड
अगर समुद्र और वॉटर स्पोर्ट्स पसंद हैं तो चूर्णा आइलैंड बेहतरीन विकल्प है. अरब सागर में स्थित यह द्वीप अपने साफ नीले पानी, गुफाओं और चट्टानों के लिए जाना जाता है. यहां स्कूबा डाइविंग, क्लिफ डाइविंग और स्नॉर्कलिंग जैसी रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को खासा आकर्षित करती हैं.
गोरख हिल
सिंध प्रांत का गोरख हिल भी अपनी अलग पहचान रखता है. यह सिंध का सबसे ऊंचा स्थान माना जाता है. यहां का पहाड़ी और चट्टानी नजारा उत्तर पाकिस्तान की हरियाली से बिल्कुल अलग अनुभव देता है, जो एडवेंचर पसंद लोगों को खूब पसंद आता है.
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शोगरान और सिरी
उत्तर पाकिस्तान में स्थित शोगरान और सिरी पाये भी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर हैं. यहां तक पहुंचने के लिए जीप सफारी करनी पड़ती है. &amp;nbsp;रास्ते में हरे-भरे मैदान, रंग-बिरंगे फूल और बादलों से घिरी पहाड़ियां किसी पोस्टकार्ड जैसे दृश्य का एहसास कराती हैं.
कराची के समुद्र तट&amp;nbsp;
कराची के समुद्र तट भी विदेशी सैलानियों को आकर्षित करते हैं. क्लिफ्टन बीच, हॉक्स बे, पैराडाइज पॉइंट और मनोरा आइलैंड जैसे बीच सूर्यास्त का शानदार नजारा पेश करते हैं. यहां ऊंट और घुड़सवारी के साथ समुद्र किनारे सैर का अलग ही आनंद मिलता है.&amp;nbsp;
ये जगहें भी हैं फेमस
इसके अलावा खानपुर डैम एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए मशहूर है, जहां जेट स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग और क्लिफ डाइविंग जैसी गतिविधियां होती हैं. वहीं हिंगोल नेशनल पार्क अपनी अनोखी पहाड़ियों, वन्यजीवों और मड वॉल्केनो के कारण प्रकृति प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है. इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटक सुक्कुर भी जरूर पहुंचते हैं, जहां खूबसूरत मस्जिदें, ऐतिहासिक मकबरे और शानदार पत्थर की नक्काशी की झलक दिखती है.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Gas Stove Cleaning: गैस चूल्हे पर जम गई है तेल&amp;मसाले की काली परत? नोट करें मिनटों में चमकाने की ये जादुई ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Gas Stove Stains At Home: रोजाना खाना बनाते समय गैस चूल्हे पर तेल के छींटे, मसालों के दाग और जली हुई ग्रेवी की परत जमना आम बात है. अगर समय रहते इन्हें साफ न किया जाए तो चूल्हा चिपचिपा दिखने लगता है और उसकी चमक भी गायब हो जाती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू तरीकों की मदद से सिर्फ 10 मिनट में चूल्हे की सफाई की जा सकती है और वह फिर से नए जैसा नजर आने लगता है.&amp;nbsp;
सफाई करने से पहले क्या रखें ध्यान?
सफाई शुरू करने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि गैस चूल्हा पूरी तरह ठंडा हो चुका हो. गर्म चूल्हे पर सफाई करने से दुर्घटना का खतरा रहता है. इसके बाद बर्नर कैप और ग्रिल को निकालकर अलग रख दें, ताकि पूरी सतह अच्छी तरह साफ हो सके.
कैसे करें सफाई?
&amp;nbsp;चूल्हे की सतह पर जहां-जहां तेल और मसाले की परत जमी हो, वहां हल्का-सा बेकिंग सोडा छिड़क दें, इसके ऊपर सफेद सिरके का स्प्रे करें. कुछ ही सेकंड में झाग बनने लगेगा, जो जमी हुई चिकनाई और गंदगी को ढीला करने का काम करता है. इसे करीब पांच मिनट तक ऐसे ही छोड़ दें, अगर दाग ज्यादा पुराने और जिद्दी हैं तो 10 मिनट तक इंतजार करें.
कपड़े से धीरे-धीरें पोंछें
इसके बाद गुनगुने पानी में भीगे मुलायम कपड़े से पूरी सतह को एक दिशा में पोंछें. इससे ढीली हुई चिकनाई आसानी से निकल जाएगी. आखिर में सूखे माइक्रोफाइबर कपड़े से चूल्हे को अच्छी तरह पोंछ लें, ताकि पानी के निशान न रहें और सतह चमकदार दिखे. इसके बाद बर्नर और ग्रिल को वापस अपनी जगह लगा दें.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;डीप क्लीनिंग भी जरूर करें
अगर बर्नर पर कालिख या गंदगी जमा हो गई है तो महीने में एक बार उसकी डीप क्लीनिंग भी जरूर करें. इसके लिए गर्म पानी में बेकिंग सोडा और थोड़ा-सा डिशवॉश लिक्विड मिलाकर ग्रिल को करीब 30 मिनट तक भिगो दें. इसके बाद में ब्रश से रगड़कर साफ करें. वहीं बर्नर के छोटे-छोटे छेद बंद हो गए हों तो पतली पिन की मदद से उन्हें धीरे-धीरे साफ करें. इससे गैस की लौ बराबर जलती है और खाना भी अच्छी तरह पकता है. अगर गैस की लौ नीली की जगह पीली या नारंगी दिखाई दे रही है या एक तरफ से ही जल रही है, तो समझ लें कि बर्नर के छेदों में गंदगी जमा हो गई है. ऐसे में तुरंत सफाई करना जरूरी है.&amp;nbsp;
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चमकाने के लिए अपनाएं ये उपाय
चूल्हे को हमेशा साफ और चमकदार बनाए रखने के लिए हर बार खाना बनाने के बाद सिर्फ 30 सेकंड निकालकर उसे हल्के गीले कपड़े से पोंछ दें. तलने-भूनने के दौरान स्प्लैटर गार्ड का इस्तेमाल करें, ताकि तेल के छींटे कम फैलें. अगर आपके गैस चूल्हे में ड्रिप ट्रे है तो उस पर एल्युमिनियम फॉयल बिछा सकते हैं. इससे गंदगी ट्रे पर नहीं जमेगी और जरूरत पड़ने पर सिर्फ फॉयल बदलनी होगी.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Gas, Stove, Cleaning:, गैस, चूल्हे, पर, जम, गई, है, तेल-मसाले, की, काली, परत, नोट, करें, मिनटों, में, चमकाने, की, ये, जादुई, ट्रिक</media:keywords>
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        <title>FSSAI Notice: क्या सच में &amp;apos;फ्रेश&amp;apos; और &amp;apos;हेल्दी&amp;apos; है आपका पनीर? FSSAI की इस कार्रवाई ने खोली पोल</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप बाजार से पैकेट वाला पनीर खरीदते समय उस पर लिखे &#039;Fresh&#039;, &#039;Healthy&#039; या ऐसे ही दूसरे दावों को देखकर फैसला करते हैं तो यह खबर आपके लिए है. अब देश का फूड रेगुलेटर FSSAI ऐसे दावों पर सख्ती से कार्रवाई कर रहा है. इसी कड़ी में अब Heritage Foods को नोटिस जारी किया गया है.
FSSAI ने कंपनी के Heritage Fresh Paneer पर लिखे &#039;फ्रेश&#039; और &#039;Healthy Happiness&#039; जैसे दावों पर सवाल उठाए हैं. रेगुलेटर का कहना है कि पैकेट पर लिखा हर दावा नियमों के मुताबिक होना चाहिए. अगर कोई दावा ग्राहकों को गलत संदेश देता है या भ्रम पैदा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
क्या है पूरा मामला?
FSSAI को Heritage Fresh Paneer को लेकर शिकायत मिली थी. इसके बाद जांच की गई. जांच में रेगुलेटर ने दो मुख्य आपत्तियां दर्ज कीं. पहली आपत्ति &#039;फ्रेश&#039; शब्द को लेकर है. FSSAI का कहना है कि कंपनी का प्रॉडक्ट &#039;फ्रेश&#039; शब्द के इस्तेमाल के लिए तय शर्तों को पूरा नहीं करता. ऐसे में पैकेट पर &#039;Fresh Paneer&#039; लिखना ग्राहकों को गुमराह कर सकता है.
दूसरी आपत्ति &#039;Healthy Happiness&#039; नाम में इस्तेमाल किए गए &#039;हेल्दी&#039; शब्द पर है. FSSAI के मुताबिक, इससे ग्राहकों को यह संदेश जा सकता है कि यह प्रोडक्ट अपने आप में सेहत के लिए खास तौर पर फायदेमंद है. ऐसे दावों के लिए अलग नियम हैं और उनका पालन करना जरूरी है.
क्या है आजकल का ट्रेंड?
आजकल ज्यादातर लोग पैकेट पर लिखे शब्द देखकर सामान खरीदते हैं. &#039;Fresh&#039;, &#039;Healthy&#039;, &#039;Natural&#039;, &#039;No Added Sugar&#039; और &#039;Heart Healthy&#039; जैसे दावे लोगों को यह भरोसा दिलाते हैं कि प्रॉडक्ट बेहतर या ज्यादा सेहतमंद है, लेकिन अगर ऐसे दावों का वैज्ञानिक या कानूनी आधार नहीं है तो ग्राहक गलत जानकारी के आधार पर खरीदारी कर सकता है.
क्या है FSSAI का मकसद?
इसी वजह से FSSAI अब सिर्फ खाने की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि पैकेट पर लिखे हर दावे की भी जांच कर रहा है. इसका मकसद यह है कि कंपनियां सिर्फ मार्केटिंग के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करें और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिले. अब किसी भी कंपनी के लिए पैकेट पर आकर्षक दावे लिख देना काफी नहीं है. अगर &#039;फ्रेश&#039;, &#039;हेल्दी&#039;, &#039;नेचुरल&#039; या किसी दूसरे दावे का इस्तेमाल किया जाता है तो उसे नियमों के मुताबिक साबित भी करना होगा।
पनीर पर खास नजर क्यों?
FSSAI पिछले कुछ समय से पनीर को लेकर भी खास सतर्क है. बाजार में नकली या एनालॉग पनीर को असली पनीर बताकर बेचने की शिकायतें बढ़ी हैं. इसी वजह से रेगुलेटर पनीर की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी पैकेजिंग और उस पर लिखे दावों की भी जांच कर रहा है. कुल मिलाकर यह कार्रवाई सिर्फ एक कंपनी के खिलाफ नहीं है. यह उन सभी फूड कंपनियों के लिए संदेश है, जो अपने प्रॉडक्ट बेचने के लिए बड़े-बड़े दावे करती हैं. आने वाले समय में पैकेट पर लिखा हर दावा जांच के दायरे में होगा.
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        <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Udaipur Monsoon Travel Guide: बारिश में जन्नत बन जाता है उदयपुर, यहां देखिए पूरे हफ्ते का टूर प्लान और खर्च</title>
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        <description><![CDATA[ Udaipur Monsoon Travel Guide: बारिश में जन्नत बन जाता है उदयपुर, यहां देखिए पूरे हफ्ते का टूर प्लान और खर्च ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Vegetarian Protein Sources: नॉनवेज नहीं खाते तो इन वेज ऑप्शन पर तुरंत हो जाएं शिफ्ट, दूर हो जाएगी अमीनो एसिड्स की कमी</title>
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Haunted Beach In India: ये भारत का सबसे डरावना बीच, हर तरफ है भटकती आत्माओं का साया? डरा देंगी ये घटनाएं</title>
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        <description><![CDATA[ Why Dumas Beach Is Considered Haunted: भारत में समुद्र किनारों की बात होती है तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले गोवा या मुंबई जैसे नाम आते हैं, लेकिन गुजरात का डुमस बीच अपनी खूबसूरती से ज्यादा रहस्यमयी कहानियों के लिए जाना जाता है, &amp;nbsp;सूरत शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित यह बीच दिन में जितना शांत और खूबसूरत दिखाई देता है, रात होते ही उतना ही डरावना महसूस होने लगता है. यही वजह है कि इसे भारत के सबसे डरावने बीचों में गिना जाता है.&amp;nbsp;
डुमस बीच की क्या है पहचान?
डुमस बीच की सबसे अलग पहचान इसकी काली रेत है. जहां ज्यादातर समुद्र तटों पर सुनहरी रेत दिखाई देती है, वहीं यहां की रेत गहरे काले रंग की है. समुद्र की लहरें, दूर तक फैली काली जमीन और शाम के बाद छाने वाला सन्नाटा इस जगह को किसी डरावनी फिल्म जैसा माहौल दे देता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह इलाका कभी हिंदू श्मशान घाट हुआ करता था. कहा जाता है कि वर्षों पहले यहां अंतिम संस्कार किए जाते थे और उसी के बाद से यह जगह रहस्यमयी घटनाओं के लिए मशहूर हो गई.&amp;nbsp;
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अजीब-अवाजें सुनने का दावा
कई लोगों का दावा है कि उन्होंने यहां रात के समय अजीब आवाजें सुनी हैं. कुछ पर्यटकों का कहना है कि शाम ढलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उनका पीछा कर रहा हो या उन्हें लगातार देख रहा हो. कई बार यहां घूमने वाले कुत्ते भी अचानक अंधेरे की तरफ देखकर भौंकने लगते हैं, जिससे लोगों का डर और बढ़ जाता है. हालांकि इन बातों का कोई साइंटिस्ट प्रमाण नहीं है, लेकिन डुमस बीच की कहानियां आज भी लोगों के बीच रोमांच और डर दोनों पैदा करती हैं.&amp;nbsp;
स्थानीय लोगों का क्या कहना?
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा रहती है कि यहां कुछ लोग रहस्यमयी तरीके से गायब हो चुके हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन ऐसी कहानियां इस जगह को और ज्यादा रहस्यमयी बना देती हैं. यही कारण है कि सूरज ढलने के बाद ज्यादातर लोग यहां ज्यादा देर रुकने से बचते हैं.
लोगों को अपनी तरफ खींचती है खूबसूरती 
हालांकि डर और रहस्य के बीच डुमस बीच की खूबसूरती भी लोगों को अपनी तरफ खींचती है. काली रेत और नीले समुद्र का मेल बेहद अलग और आकर्षक दृश्य बनाता है. यहां ज्यादा भीड़भाड़ नहीं होती, इसलिए जो लोग शांत माहौल पसंद करते हैं, उनके लिए यह जगह खास अनुभव बन सकती है. बीच के आसपास मिलने वाले भजिया, पाव भाजी, गुजराती स्नैक्स और नारियल पानी यहां आने वालों के सफर को और मजेदार बना देते हैं. साइंटिस्ट का मानना है कि यहां की काली रेत प्राकृतिक खनिजों की वजह से हो सकती है और रात में सुनाई देने वाली आवाजें समुद्री हवाओं और लहरों का असर भी हो सकती हैं. लेकिन सच चाहे जो भी हो, डुमस बीच आज भी उन लोगों के लिए बेहद खास माना जाता है, जो यात्रा में सिर्फ खूबसूरती नहीं बल्कि रोमांच और रहस्य भी तलाशते हैं.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Reasons Behind Depression: पेट की खराबी कैसे देती है डिप्रेशन और एंग्जायटी को जन्म? जानें आंतों को साफ रखने का नुस्खा</title>
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        <description><![CDATA[ Reasons Behind Depression:&amp;nbsp;आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान और तनाव के चलते ज्यादातर लोगों को पेट से जुड़ी परेशानियां होने लगी हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पेट का सीधा असर हमारे दिमाग और मूड पर भी पड़ता है. डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे पेट और दिमाग के बीच एक गहरा नाता होता है. इसका मतलब है कि पेट और दिमाग आपस में एक नस के जरिए जुड़े रहते हैं और लगातार एक-दूसरे को संकेत भेजते रहते हैं. अगर पेट में गड़बड़ी हो, तो इसका सीधा असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
गट माइक्रोबायोटा और सेरोटोनिन का मानसिक स्वास्थ्य से रिश्ता
असल में हमारी आंतों में काफी अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोटा कहा जाता है. &amp;nbsp;यही बैक्टीरिया शरीर में सेरोटोनिन नाम का हार्मोन बनाने में मदद करते हैं, जिसे खुशी का हार्मोन भी कहा जाता है. जब पेट में गंदगी जमा हो जाती है या पाचन ठीक से नहीं होता, तो इन अच्छे बैक्टीरिया की संख्या कम होने लगती है. इससे शरीर में सूजन बढ़ जाती है और यह सूजन खून के रास्ते दिमाग तक पहुंच जाती है. इससे दिमाग के काम करने के तरीके पर असर पड़ता है और इंसान को बिना किसी वजह उदासी, घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है. यही वजह है कि जिन लोगों को लंबे समय तक कब्ज, गैस या पेट फूलने जैसी परेशानी रहती है, उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण दिखने की संभावना ज्यादा होती है.&amp;nbsp;
अगर आपको भी बार-बार पेट में भारीपन, गैस, कब्ज, नींद न आना, बिना वजह चिड़चिड़ापन या मन उदास रहना जैसी दिक्कतें महसूस होती हैं, तो यह पेट की खराबी और दिमाग पर उसके असर का संकेत हो सकता है. ऐसे में समय रहते अपने खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो जाता है.
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आंतों को स्वस्थ रखने के आसान और असरदार उपाय
ऐसे में आंतों को साफ और सेहतमंद रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जाती हैं. सबसे पहले रोजाना खूब पानी पीना चाहिए, ताकि पाचन तंत्र ठीक से काम करे. खाने में हरी सब्जियां, फल, दही और साबुत अनाज जैसी फाइबर वाली चीजें शामिल करनी चाहिए, क्योंकि यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करती हैं. साथ ही तला-भुना और बाहर का जंक फूड जितना हो सके कम खाना चाहिए. वहीं रोजाना कम से कम आधे घंटे की सैर या हल्की एक्सरसाइज करने से भी पाचन बेहतर होता है और मन भी शांत रहता है. &amp;nbsp;इसके अलावा भरपूर नींद लेना और तनाव को कम करने के लिए योग या मेडिटेशन को दिनचर्या में शामिल करना भी बहुत फायदेमंद माना जाता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Healthy Relationship Tips: विदेशों में क्यों बढ़ रहा अलग सोने का चलन, प्यार बढ़ाने और नींद के लिए यह तरीका कितना कारगर?</title>
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        <description><![CDATA[ Separate Beds For Couples: एक समय था जब पति-पत्नी का एक ही बिस्तर पर सोना मजबूत रिश्ते की निशानी माना जाता था. लेकिन अब विदेशों में कई कपल्स इस सोच से अलग रास्ता अपना रहे हैं. अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में &quot;स्लीप डिवोर्स&quot; यानी अलग-अलग कमरे या बिस्तर पर सोने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. नाम सुनकर यह किसी रिश्ते में दूरी का संकेत लग सकता है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. कई लोगों का मानना है कि इससे न सिर्फ अच्छी नींद मिलती है, बल्कि रिश्तों में प्यार और समझ भी बढ़ती है.&amp;nbsp;
क्यों अलग- अलग सो रहे हैं कपल्स?
दरअसल, कई कपल्स की नींद रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों से प्रभावित होती है. किसी का तेज खर्राटे लेना, रात में बार-बार करवट बदलना, अलग समय पर सोना या जागना, मोबाइल इस्तेमाल करना या कमरे का तापमान अलग पसंद होना जैसी आदतें दूसरे साथी की नींद खराब कर देती हैं. लगातार कई दिनों तक अच्छी नींद न मिलने का असर मूड, मेंटल हेल्थ और रिश्तों पर भी पड़ने लगता है. इसी वजह से अब कई लोग रात में अलग-अलग कमरे में सोना बेहतर विकल्प मान रहे हैं. इससे दोनों अपनी सुविधा के अनुसार सो पाते हैं और सुबह उठने पर पहले की तुलना में ज्यादा तरोताजा महसूस करते हैं. एक्सपर्ट का भी कहना है कि भरपूर और अच्छी नींद व्यक्ति को शांत, धैर्यवान और इमोशनल रूप से संतुलित बनाए रखने में मदद करती है.
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कौन-कौन अपना रहा है यह ट्रेंड?
अलग-अलग सोने का यह चलन सिर्फ बुजुर्ग दंपतियों तक सीमित नहीं है. युवा कपल्स भी इसे अपना रहे हैं. किसी का ऑफिस देर रात तक चलता है तो किसी को सुबह जल्दी उठना पड़ता है. ऐसे में दोनों की रूटीन अलग होने के कारण एक-दूसरे की नींद प्रभावित होती है. वहीं छोटे बच्चों वाले परिवारों में भी कई बार माता-पिता बारी-बारी से बच्चे की देखभाल करने के लिए अलग सोने का फैसला लेते हैं, ताकि कम से कम एक व्यक्ति की नींद पूरी हो सके.&amp;nbsp;
क्या इससे रिश्ते पर असर पड़ता है?
अलग-अलग सोने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रिश्ते में प्यार कम हो गया है. रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का कहना है कि मजबूत रिश्ता सिर्फ एक बिस्तर साझा करने से नहीं बनता, बल्कि एक-दूसरे के साथ बिताए गए समय, बातचीत, भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव से बनता है. कई कपल्स सोने से पहले साथ समय बिताते हैं, बातें करते हैं और फिर बेहतर नींद के लिए अपने-अपने कमरे में चले जाते हैं. लगातार नींद पूरी न होने पर व्यक्ति चिड़चिड़ा हो सकता है और छोटी-छोटी बातों पर भी बहस होने लगती है. वहीं अच्छी नींद मिलने पर तनाव कम रहता है और रिश्ते में धैर्य और सकारात्मकता बनी रहती है. यही वजह है कि विदेशों में कई लोग अब इस व्यवस्था को रिश्ते को बचाने का नहीं, बल्कि उसे और बेहतर बनाने का तरीका मान रहे हैं.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>राजनीति नहीं स्वाद से नाता! फेमस डिश &amp;apos;Eggs Kejriwal&amp;apos; का दिलचस्प इतिहास, जानें इसकी रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Eggs Kejriwal Recipe Mumbai Style: अगर आप अंडे से बनी नई-नई डिश ट्राई करना पसंद करते हैं, तो एग्स केजरीवाल आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. नाम सुनकर भले ही इसका राजनीति से कोई संबंध लगता हो, लेकिन असल में यह मुंबई की एक मशहूर डिश है, जिसका किसी राजनीतिक व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है. ब्रेड, चीज़, अंडे और हरी मिर्च से तैयार होने वाली यह डिश अपने लाजवाब स्वाद और दिलचस्प कहानी की वजह से आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. चलिए आपको इस डिश की कहानी बताते हैं और यह बताते हैं कि इसको आप घर पर कैसे बना सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या है एग्स केजरीवाल की कहानी?
एग्स केजरीवाल की शुरुआत 1960 के दशक में मुंबई के साउथ मुंबई स्थित विलिंगडन स्पोर्ट्स क्लब से हुई थी. कहा जाता है कि क्लब के नियमित सदस्य और कारोबारी देवी प्रसाद केजरीवाल अक्सर नाश्ते में टोस्ट पर अंडा, चीज़ और बारीक कटी हरी मिर्च वाली यही डिश ऑर्डर किया करते थे. धीरे-धीरे दूसरे सदस्य भी वही डिश मांगने लगे और किचन स्टाफ से कहते थे कि जो केजरीवाल खा रहे हैं, वही दे दीजिए. &amp;nbsp;यही वजह है कि बाद में इस डिश का नाम एग्स केजरीवाल पड़ गया और यह नाम हमेशा के लिए मशहूर हो गया.&amp;nbsp;
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देशभर में मशहूर
समय के साथ यह डिश क्लब की सीमाओं से निकलकर देशभर के कैफे और रेस्तरां के मेन्यू तक पहुंच गई. हालांकि कई जगह इसमें अलग-अलग तरह के चीज या ब्रेड का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसका मूल स्वाद ब्रेड, चीज, अंडे और हरी मिर्च के बेहतरीन मेल में ही छिपा है.&amp;nbsp;
कैसे इसको बना सकते हैं आप?
अगर आप इसे घर पर बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले ब्रेड स्लाइस को हल्का टोस्ट कर लें. अब कद्दूकस किया हुआ चीज, बारीक कटी हरी मिर्च, स्प्रिंग अनियन और थोड़ा सा काली मिर्च पाउडर मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें. इस मिश्रण को टोस्ट पर अच्छी तरह फैलाएं और पहले से गर्म ओवन में तब तक बेक करें, जब तक चीज सुनहरा होकर पिघल न जाए. &amp;nbsp;दूसरी तरफ एक पैन में थोड़ा सा तेल डालकर अंडा फ्राई करें. &amp;nbsp;ऊपर से थोड़ा चीज, स्प्रिंग अनियन और हरी मिर्च डालें. &amp;nbsp;जब अंडे का सफेद हिस्सा पक जाए और जर्दी हल्की नरम रहे, तब इसे तैयार चीज टोस्ट के ऊपर रख दें. चाहें तो इसे टोमैटो केचप के साथ तुरंत गर्मागर्म परोस सकते हैं. क्रिस्पी टोस्ट, पिघला हुआ चीज़, हल्की तीखी हरी मिर्च और सॉफ्ट अंडे का स्वाद इस डिश को बेहद खास बना देता है.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Glass Cleaning Hacks: धुंधले पड़ गए हैं घर के खिड़की&amp;दरवाजों के कांच? इस आसान घरेलू तरीके से लाएं चकाचक चमक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Window Glass At Home: घर की साफ-सफाई तभी पूरी मानी जाती है, जब खिड़की और दरवाजों के कांच भी एकदम साफ और चमकदार दिखें. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि सफाई के बाद भी कांच पर धब्बे, पानी के निशान या लकीरें रह जाती हैं, जिससे उनकी चमक फीकी पड़ जाती है. अगर आप चाहते हैं कि घर के कांच बिना ज्यादा मेहनत के नए जैसे चमकें, तो सफाई के दौरान कुछ आसान बातों का ध्यान रखना काफी है.
सफाई के दौरान क्या रखें ध्यान?
सबसे पहले हमेशा कांच की सफाई ऊपर से नीचे की ओर करें. ऐसा करने से ऊपर से गिरने वाली पानी या क्लीनर की बूंदें पहले से साफ हिस्से को खराब नहीं करतीं और पूरा कांच एक समान साफ दिखाई देता है. &amp;nbsp;अगर संभव हो तो तेज धूप में कांच साफ करने से बचें. धूप में क्लीनर बहुत जल्दी सूख जाता है, जिससे कांच पर दाग और लकीरें पड़ सकती हैं. हल्के बादल वाले दिन या सुबह-शाम का समय कांच साफ करने के लिए बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
कपड़े की जगह स्क्वीजी का यूज
सिर्फ कपड़े से कांच पोंछने के बजाय स्क्वीजी का इस्तेमाल करें. इससे अतिरिक्त पानी और क्लीनर आसानी से हट जाता है और कांच पर किसी तरह की लकीर नहीं बनती. बड़े या ऊंचे कांच की सफाई के लिए लंबे हैंडल वाली स्क्वीजी और भी ज्यादा सुविधाजनक रहती है. कई बार कांच के कोनों में धूल और गंदगी जमा हो जाती है, जिसे कपड़े से साफ करना आसान नहीं होता. ऐसे में कॉटन स्वैब यानी ईयर बड्स की मदद से कोनों की सफाई आसानी से की जा सकती है. इससे हर कोना अच्छी तरह साफ हो जाता है. पुरानी कॉटन टी-शर्ट भी कांच साफ करने के लिए बेहतरीन विकल्प है. इसका कपड़ा मुलायम होता है और यह कांच पर रेशे नहीं छोड़ता. इससे कांच आसानी से चमकने लगता है और अलग से महंगे कपड़े खरीदने की जरूरत भी नहीं पड़ती.&amp;nbsp;
किससे करें सफाई इनकी?
अगर आप बाजार के क्लीनर की जगह घरेलू उपाय अपनाना चाहते हैं, तो एक कप पानी, एक कप रबिंग अल्कोहल और एक बड़ा चम्मच सफेद सिरका मिलाकर स्प्रे तैयार कर सकते हैं. यह मिश्रण जल्दी सूखता है और कांच पर दाग या धुंधलापन नहीं छोड़ता. इसका इस्तेमाल शीशे के अलावा टाइल्स और क्रोम जैसी सतहों पर भी किया जा सकता है. कांच साफ करते समय माइक्रोफाइबर कपड़ा सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह रेशे नहीं छोड़ता और बिना लकीरों के सफाई करता है. वहीं पेपर टॉवल का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे अक्सर कांच पर छोटे-छोटे रेशे चिपक जाते हैं.
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इस बात का भी रखें ध्यान
एक और जरूरी बात यह है कि क्लीनर को एक साथ पूरे कांच पर स्प्रे करने के बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में लगाएं और धीरे-धीरे ऊपर से नीचे की ओर सफाई करें. इसके साथ ही, अगर खिड़की या दरवाजे का फ्रेम लकड़ी का है, तो उस पर क्लीनर ज्यादा न गिरने दें, क्योंकि इससे लकड़ी को नुकसान हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>दिनभर ऑफिस की कुर्सी पर बैठे रहने का खतरा, इस डेस्क वर्कआउट से आसानी से हो जाएगा कम</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल नौकरी कर रहे लोगों की सबसे आम परेशानी होती है कि वे अपने काम के चक्कर में दिनभर कुर्सी पर ही बैठे रह जाते हैं. सुबह ऑफिस पहुंचने से लेकर शाम को घर जाने तक कई लोग 8 से 9 घंटे तक लगातार बैठे रह जाते हैं. लेकिन हर किसी को इसकी जानकारी नहीं होती कि उनके देर तक बैठे रहने से उनकी सेहत पर कितना असर पड़ रहा है.
कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि लंबे समय तक बैठे रहना शरीर के लिए उतना ही खतरनाक है, जितना धूम्रपान करना या मोटापा. यही वजह है कि अब डॉक्टर और फिटनेस एक्सपर्ट भी ऑफिस में काम करने वाले लोगों को बीच-बीच में उठकर हिलने-डुलने की सलाह देते हैं.
लंबे समय तक बैठने से बढ़ सकता है इन बीमारियों का खतरा
लंबे समय तक बैठे रहने से परेशानियों की बात करें तो लगातार बैठे रहने से शरीर में कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. जैसे कमर और गर्दन में दर्द रहना, क्योंकि लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी पर लगातार दबाव पड़ता रहता है. इसके अलावा कंधे झुकने लगते हैं और पीठ का पोस्चर भी खराब हो जाता है. एक रिसर्च में यह भी पाया गया है कि जो लोग दिन में 8 घंटे से ज्यादा बैठे रहते हैं, उनमें दिल की बीमारी होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है. इसके साथ ही मोटापा, शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या भी हो सकती है, क्योंकि माना जाता है कि लंबे समय से बैठे रहने से शरीर में कैलोरी बर्न करने की क्षमता बहुत कम पड़ जाती है.
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डेस्क वर्कआउट से ऐसे कम करें घंटों बैठने का नुकसान
इस पर कई लोगों के दिमाग में यह सवाल आता है कि आखिर ऐसी स्थिति में करें क्या. ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सिर्फ अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे भी कुछ आसान एक्सरसाइज करके इसका असर काफी हद तक कम किया जा सकता है. जैसे हर आधे-एक घंटे में कुछ मिनट के लिए खड़े होकर टहलना चाहिए. साथ ही कुर्सी पर बैठे-बैठे गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाना चाहिए, इससे गर्दन का अकड़ना कम होता है.
पैरों को सीधा करके ऊपर उठाना, एड़ियों को ऊपर-नीचे करना और कलाइयों को घुमाना जैसी छोटी एक्सरसाइज भी कुर्सी पर बैठे-बैठे आसानी से की जा सकती हैं. इसके अलावा बैठे-बैठे कमर को हल्के से दाएं-बाएं मोड़ना यानी चेयर ट्विस्ट करने से पीठ को आराम मिलता है और शरीर में हल्कापन महसूस होता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>IRCTC Tour Package 2026: &amp;apos;देश में ही दिखेगी जन्नत&amp;apos;! IRCTC के इस सस्ते पैकेज से एक साथ घूम आएं 3 सबसे खूबसूरत राज्य</title>
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        <description><![CDATA[ Bharat Gaurav Special Tourist Train Package: अगर आप पितृ पक्ष के दौरान प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन आपके लिए एक शानदार मौका लेकर आया है. आईआरसीटीसी ने &#039;पितृ पक्ष तीर्थ यात्रा (पुरी-गंगासागर- बैद्यनाथ धाम)&#039; नाम से भारत गौरव स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन पैकेज की घोषणा की है. यह यात्रा 30 सितंबर 2026 से शुरू होकर 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगी. कुल 9 दिन और 8 रातों के इस पैकेज में श्रद्धालुओं को कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे.&amp;nbsp;
कहां से शुरू होगी यह यात्रा?
यह विशेष ट्रेन महाराष्ट्र के सोलापुर से रवाना होगी. रास्ते में कुर्डुवाड़ी, दौंड, पुणे, लोनावला, कर्जत, पनवेल, कल्याण, नासिक, मनमाड, चालीसगांव, भुसावल, अकोला, बदनेरा, वर्धा और नागपुर जैसे स्टेशनों से यात्री इसमें सवार हो सकेंगे.
कहां-कहां होंगे दर्शन?
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ओडिशा के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर, कोणार्क सूर्य मंदिर और भुवनेश्वर स्थित लिंगराज मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में काली माता मंदिर और गंगासागर तथा झारखंड के जसीडीह स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर भी इस यात्रा का हिस्सा होंगे. इस तरह एक ही पैकेज में कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर मिलेगा.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

Some journeys are undertaken to explore the world. Others are meant to seek blessings and inner peace.Embark on the Pitru Paksha Tirth Yatra by Bharat Gaurav Tourist Train.Reserve your sacred journey today.https://t.co/hAUufr98uT#Odisha #Westbengal #Jharkhand pic.twitter.com/v6SwaPvVsp
&amp;mdash; IRCTC Bharat Gaurav Tourist Train (@IR_BharatGaurav) July 2, 2026



कितना होगा इसके लिए खर्च?
आईआरसीटीसी ने यात्रियों की सुविधा के लिए तीन श्रेणियों में पैकेज उपलब्ध कराया है. स्लीपर क्लास का किराया 18,040 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है. थर्ड एसी श्रेणी के लिए 32,130 रुपये, जबकि सेकंड एसी कैटेगरी के लिए 43,070 रुपये प्रति व्यक्ति देने होंगे. 5 से 11 वर्ष तक के बच्चों के लिए भी अलग रियायती किराया निर्धारित किया गया है.
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क्या- क्या मिलेंगी सुविधाएं?
इस पैकेज में ट्रेन यात्रा के अलावा ठहरने की व्यवस्था, शाकाहारी भोजन, स्थानीय दर्शनीय स्थलों तक बस से आने-जाने की सुविधा, यात्रा बीमा, ट्रेन में सुरक्षा व्यवस्था और सभी लागू कर शामिल हैं. स्लीपर श्रेणी के यात्रियों के लिए नॉन-एसी होटल, जबकि थर्ड एसी और सेकंड एसी श्रेणी के यात्रियों के लिए एसी बजट होटल में ठहरने की व्यवस्था की जाएगी. सेकंड एसी श्रेणी के यात्रियों को स्थानीय यात्रा के लिए एसी वाहन की सुविधा भी मिलेगी.&amp;nbsp;
इनके खर्च खुद उठाने होंगे
हालांकि, स्मारकों के प्रवेश शुल्क, नौकायन या एडवेंचर गतिविधियों का खर्च, स्थानीय गाइड शुल्क, रूम सर्विस, व्यक्तिगत खर्च, लॉन्ड्री, पैकेज में शामिल भोजन के अलावा अन्य खाने-पीने की चीजें और टिप्स जैसी सुविधाएं इस पैकेज का हिस्सा नहीं होंगी. इनका भुगतान यात्रियों को स्वयं करना होगा. अगर आप पितृ पक्ष के दौरान परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर जाने का विचार कर रहे हैं, तो यह 9 दिन का टूर पैकेज एक सुविधाजनक और किफायती विकल्प साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Fashion Hacks: इस सीजन का सबसे बड़ा ट्रेंड, पुराने कपड़ों को रीसायकल कर ऐसे पाएं सेलिब्रिटी लुक</title>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Homemade Face Pack For Glowing Skin : ग्लोइंग स्किन का सीक्रेट! केमिकल वाले प्रोडक्ट्स छोड़ें, घर पर बनाएं ये 2 जादुई फेस पैक</title>
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        <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Mini Hill Stations In Uttar Pradesh: &amp;apos;यूपी नहीं देखा तो क्या देखा&amp;apos;! शिमला&amp;मनाली भूल जाएंगे, ये हैं UP के शानदार मिनी हिल स्टेशन</title>
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        <description><![CDATA[ Mini Hill Stations In Uttar Pradesh You Must Visit: हिल स्टेशन घूमने का प्लान बनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में शिमला, मनाली, नैनीताल या मसूरी का नाम आता है. लेकिन अगर आप सोचते हैं कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ धार्मिक स्थल ही हैं, तो आपको अपनी यह धारणा बदलने की जरूरत है. यहां भी कई ऐसी जगहें मौजूद हैं, जहां पहाड़, झरने, हरियाली और शांत वातावरण मिलकर किसी मिनी हिल स्टेशन जैसा एहसास कराते हैं. खास बात यह है कि इन जगहों तक पहुंचना आसान है और कम बजट में शानदार वीकेंड ट्रिप का मजा लिया जा सकता है. चलिए आपको इनके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
सोनभद्र
उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण सबसे अलग माना जाता है. विंध्य और कैमूर की पहाड़ियों के बीच बसा यह इलाका झरनों, घने जंगलों और पहाड़ी नजारों के लिए प्रसिद्ध है. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसकी खूबसूरती को देखकर इसे &#039;भारत का स्विट्जरलैंड&#039; तक कहा था. यहां मुक्खा फॉल, रिहंद डैम, कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी, सालखन फॉसिल पार्क और कई प्राचीन मंदिर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. प्रकृति और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए यह बेहतरीन जगह है.&amp;nbsp;
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चित्रकूट
अगर आप ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां प्रकृति और आस्था दोनों का संगम हो, तो चित्रकूट आपके लिए बेहतरीन विकल्प है. विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित इस स्थान का संबंध भगवान राम के वनवास से माना जाता है. यहां रामघाट, कामदगिरि, हनुमान धारा, गुप्त गोदावरी, स्फटिक शिला और भरत मिलाप जैसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं. वहीं सूर्योदय का खूबसूरत नजारा और आसपास की पहाड़ियां इस जगह को खास बनाती हैं.
महोबा
महोबा को वीरों की धरती के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के खूबसूरत पहाड़ी इलाकों में भी गिना जाता है. यहां का गोखर पहाड़, चर्खारी की छोटी पहाड़ियां, झीलें और हरियाली पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं. इतिहास और प्रकृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह किसी छिपे हुए पर्यटन स्थल से कम नहीं है. यहां कई प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक स्थल भी देखने को मिलते हैं.
मिर्जापुर
वेब सीरीज की वजह से चर्चा में रहने वाला मिर्जापुर असल जिंदगी में अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. गंगा किनारे बसा यह शहर पहाड़ियों, झरनों और धार्मिक स्थलों से घिरा हुआ है. यहां विंध्यम वाटरफॉल, लखनिया दरी, टांडा वाटरफॉल, चुनार किला, सीता कुंड और कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं. मानसून के दौरान यहां की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है. वेब सीरीज के बाद मिर्जापुर पूरे देश&amp;nbsp; में चर्चा का विषय बना रहता है, यहां का भौकाल झलकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Oral Cancer Treatment: अल्ट्रासाउंड से हो सकता है ओरल कैंसर सेल्स का खात्मा, इस स्टडी ने जगाई उम्मीद</title>
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        <description><![CDATA[ Can Ultrasound Kill Oral Cancer Cells: भारत में ओरल कैंसर सबसे तेजी से बढ़ने वाले कैंसरों में से एक है. इसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू और सुपारी का अधिक सेवन माना जाता है. अब तक इस बीमारी के इलाज के लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का सहारा लिया जाता है, लेकिन इन तरीकों में कैंसर सेल्स के साथ-साथ स्वस्थ सेल्स को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. ऐसे में मरीजों को कई तरह के दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ता है. हालांकि अब एक नई रिसर्च ने इलाज को लेकर उम्मीद की नई किरण दिखाई है.
साइंटिस्ट ने क्या नया खोजा?
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के साइंटिस्ट ने अपनी नई स्टडी में पाया है कि लो-फ्रीक्वेंसी वाले अल्ट्रासाउंड की मदद से ओरल कैंसर की सेल्स को निशाना बनाया जा सकता है. सबसे खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में आसपास की हेल्दी सेल्स पर बहुत कम असर पड़ता है. अगर आगे के शोध में भी ऐसे ही नतीजे सामने आते हैं, तो भविष्य में यह तकनीक ओरल कैंसर के इलाज का सुरक्षित और कम नुकसान पहुंचाने वाला विकल्प बन सकती है.
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ओरल ट्यूमर के नमूनों पर परीक्षण किया गया
इस शोध के दौरान साइंटिस्ट ने एमएस रामैया मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के डॉक्टरों के साथ मिलकर मरीजों से प्राप्त ओरल ट्यूमर के नमूनों पर परीक्षण किया. लैब में तैयार कैंसर सेल्स की बजाय सीधे मरीजों से लिए गए सैंपल का इस्तेमाल करने से रिसर्चर को वास्तविक परिस्थितियों के ज्यादा सटीक परिणाम मिले.&amp;nbsp;
हल्के मैकेनिकल दबाव को सहन नहीं कर पातीं
स्टडी में सामने आया कि ओरल कैंसर की सेल्स अल्ट्रासाउंड से पैदा होने वाले हल्के मैकेनिकल दबाव को सहन नहीं कर पातीं. इसकी एक वजह ट्रोपोमायोसिन 2.1 नामक प्रोटीन का कम स्तर माना गया है. यह प्रोटीन सामान्य सेल्स को बाहरी दबाव महसूस करने और उससे बचाव करने में मदद करता है. जब कैंसर सेल्स पर अल्ट्रासाउंड का प्रभाव डाला गया तो वे नष्ट होने लगीं, जबकि स्वस्थ सेल्स पर इसका असर बेहद सीमित रहा.
अल्ट्रासाउंड कैसे फायदेमंद?
रिसर्चर ने यह भी पाया कि अल्ट्रासाउंड न सिर्फ कैंसर सेल्स को खत्म करने में मदद करता है, बल्कि उनके फैलने की क्षमता को भी काफी हद तक कम कर देता है. यह तकनीक ट्यूमर के चारों ओर बनी उस सुरक्षात्मक परत को भी कमजोर करती है, जो कई बार दवाओं और शरीर की इम्यून सेल्स को कैंसर तक पहुंचने से रोकती है. इससे भविष्य में दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
भविष्य के लिए खोल सकता है रास्ता
साइंटिस्ट का कहना है कि अल्ट्रासाउंड पहले से ही चिकित्सा क्षेत्र में सुरक्षित और नॉन ऑफेंसिव तकनीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसलिए यदि आगे के प्रीक्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षणों में भी इसके पॉजिटिव परिणाम मिलते हैं, तो यह ओरल कैंसर के साथ-साथ ब्रेस्ट और स्किन कैंसर जैसे अन्य कैंसरों के इलाज में भी नई संभावनाएं खोल सकता है. हालांकि फिलहाल यह रिसर्च शुरुआती चरण में है और इसे रेगुलर इलाज के रूप में अपनाने से पहले कई और परीक्षण किए जाएंगे.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Raw Rice vs Parboiled Rice Biryani : कच्चे चावल या पक्के चावल, जानिए किससे बनती है सबसे बेहतरीन बिरयानी</title>
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        <description><![CDATA[ Raw Rice vs Parboiled Rice Biryani : बिरयानी आज ज्यादातर लोगों की सबसे पसंदीदा डिश में से एक बन चुकी है. कुछ लोग चिकन या मटन बिरयानी खाना पसंद करते हैं, तो कई लोगों को वेज बिरयानी का टेस्ट खूब भाता है और इस बिरयानी के दीवाने होते हैं.
घर हो या रेस्टोरेंट, चिकन, मटन और वेज बिरयानी हर किसी की पसंद होती है, लेकिन जब बेहतरीन बिरयानी बनाने की बात आती है तो अक्सर एक सवाल सामने आता है कि आखिर बिरयानी के लिए कच्चे चावल बेहतर होते हैं या पक्के यानी सेला चावल, कई लोग इसे चावल पकाने के तरीके से जोड़ देते हैं, जबकि असल में चावल की दो अलग-अलग किस्मों पर ध्यान देना भी जरूरी होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कच्चे और पक्के चावल में क्या अंतर होता है और बिरयानी के लिए किसका इस्तेमाल ज्यादा बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
कच्चे चावल और पक्के चावल में क्या अंतर है?
कच्चे चावल और पक्के चावल के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी प्रोसेसिंग यानी तैयार करने की प्रक्रिया का होता है. कच्चे चावल सीधे धान को सुखाकर और उसका छिलका हटाकर तैयार किए जाते हैं. वहीं पक्के या सेला चावल बनाने के लिए धान को पहले छिलके सहित पानी में उबाला या भाप दी जाती है. इसके बाद उसे सुखाकर मिलिंग की जाती है और फिर उसका छिलका हटाया जाता है. दोनों चावल एक ही धान से बनते हैं, लेकिन उन्हें तैयार करने का तरीका अलग होता है.&amp;nbsp;
कच्चे चावल या पक्के चावल, किससे बनती है सबसे बेहतरीन बिरयानी?
कच्चे चावल या पक्के चावल दोनों तरह के चावल से टेस्टी और खुशबूदार बिरयानी तैयार की जा सकती है. बिरयानी का असली टेस्ट इस बात पर निर्भर करता है कि उसे किस तरीके से बनाया गया है. अगर अच्छी क्वालिटी के चावल का इस्तेमाल किया जाए और सही तकनीक के साथ धीमी आंच पर दम देकर पकाया जाए, तो कच्चे और पक्के दोनों तरह के चावल से बेहतरीन बिरयानी बनाई जा सकती है.&amp;nbsp;
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पकाने की तकनीक क्यों मानी जाती है सबसे जरूरी?
बेहतरीन बिरयानी का सबसे बड़ा राज दम यानी पकाने की तकनीक में छिपा होता है. दम पकाने में बर्तन को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है जिससे अंदर बनने वाली भाप बाहर न निकल सके. इस प्रक्रिया के दौरान मसालों की खुशबू चावल के हर दाने तक पहुंचती है. साथ ही मांस का रस चावल में अच्छी तरह मिल जाता है और बिरयानी सूखती नहीं है. इससे सभी टेस्ट धीरे-धीरे एक-दूसरे में घुल जाते हैं. चावल पूरी तरह पकते हैं लेकिन चिपचिपे नहीं होते हैं. अगर दम सही तरीके से न दिया जाए तो बिरयानी में वह गहराई वाला टेस्ट नहीं आ पाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>सुबह सिर्फ 10 मिनट का ये योगा बदल देगा आपका दिन, एनर्जी, फोकस और फिटनेस तीनों में होगा फायदा </title>
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        <description><![CDATA[ Morning Yoga Routine: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोगों के पास सुबह लंबा वर्कआउट करने का समय नहीं होता है. ऐसे में कई लोग बिना किसी फिजिकल एक्टिविटी के ही अपने दिन की शुरुआत कर देते हैं. लेकिन फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आप रोजाना सिर्फ 10 मिनट योग के लिए निकल लें तो इससे शरीर को एक्टिव करने, दिमाग को शांत करने और पूरे दिन एनर्जी बनाए रखने में मदद मिल सकती है. यह छोटा सा मॉर्निंग योग रूटीन शरीर को धीरे-धीरे जगाता है और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत से होने वाली जकड़न को भी कम करने में मदद करता है.&amp;nbsp;
सिर्फ 10 मिनट का योग होगा फायदेमंद&amp;nbsp;
भले ही10 मिनट का समय कम लगे, लेकिन इस दौरान किए गए योगासन शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने, नर्वस सिस्टम को एक्टिव करने और मांसपेशियों की जकड़न दूर करने में मदद कर सकते हैं, खासकर वे लोग जो लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करते हैं. उनके लिए सुबह का यह छोटा योगा सेशन काफी उपयोगी हो सकता है. फिटनेस एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि छोटे-छोटे वर्कआउट मांसपेशियों को एक्टिव रखने, शरीर की रोजाना कैलोरी खर्च करने की क्षमता बढ़ाने और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि अगर किसी का टारगेट मसल्स बढ़ाना, शरीर की बनावट में बदलाव लाना है, तो इसके लिए लंबे सेशन और अलग तरह के ट्रेनिंग की जरूरत होती है.&amp;nbsp;
घर पर ऐसे करें 10 मिनट का योग फ्लो

इस आसन योग रूटीन की शुरुआत डाउनवर्ड फेसिंग डॉग से आप कर सकते हैं. इसके लिए थ्री लेग्ड डॉग की मुद्रा में जाएं और फिर धीरे-धीरे रिवॉल्व्ड लो लंज में आए.
इसके बाद दोनों पैरों की तरफ बारी-बारी से रिवॉल्व्ड को लंज विद पुश-पुल करें और हर तरफ करीब 30 सेकंड तक रुकें.
फिर लो लंज या हाफ स्प्लिट करें और दोनों तरफ 30-30 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहे.
इसके बाद लिजर्ड पोज में जाएं और धीरे-धीरे अपने कूल्हों को दाएं बाएं मूव करें. इस मुद्रा को भी दोनों तरफ करीब 30 सेकंड तक करें.
अब स्कंदासन करें और फिर ट्विस्टेड वाइड लेग्ड फॉरवर्ड फोल्ड की मुद्रा में जाएं. दोनों आसनों में हर तरफ लगभग 30 सेकंड तक रुकें.
लास्ट में वाइड लेग्ड फॉरवर्ड फोल्ड, स्ट्रैडल और फॉलन ट्रायंगल की मुद्राओं से होते हुए, वापस डाउनवर्ड फेसिंग डॉग में आकर इस योग फ्लो को पूरा करें.
योग करते समय जल्दबाजी न करें. हर आसान को धीरे-धीरे करें, गहरी और लंबी सांस लेते रहे और शरीर को उतना ही मोड़े या खींचे जितना आरामदायक महसूस हो.&amp;nbsp;

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रोजाना करने से मिल सकते हैं अच्छे रिजल्ट&amp;nbsp;
एक्सपर्ट के अनुसार इस योग में सबसे ज्यादा मायने इसका समय नहीं, बल्कि नियमितता रखती है. अगर कोई व्यक्ति रोज 10 मिनट भी योग करता है, तो लंबे समय तक कोई एक्सरसाइज न करने से कहीं बेहतर है. छोटी और आसान लाइफस्टाइल अपनाने से उसे नियमित बनाए रखने में भी आसान होता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>सुबह, सिर्फ, मिनट, का, ये, योगा, बदल, देगा, आपका, दिन, एनर्जी, फोकस, और, फिटनेस, तीनों, में, होगा, फायदा </media:keywords>
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        <title>Malaria Test : मलेरिया टेस्ट कब कराना चाहिए? एक्सपर्ट से जानिए सही समय और जांच के तरीके</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/malaria-test-मलेरिया-टेस्ट-कब-कराना-चाहिए-एक्सपर्ट-से-जानिए-सही-समय-और-जांच-के-तरीके</link>
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        <description><![CDATA[ Malaria Test : बारिश का मौसम आते ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. इनमें मलेरिया सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है. कई बार लोग तेज बुखार, ठंड लगना या शरीर दर्द जैसी शुरुआती परेशानियों को सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही बीमारी को गंभीर बना सकती है. इसलिए समय रहते मलेरिया की जांच कराना और सही इलाज शुरू करना बेहद जरूरी होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मलेरिया टेस्ट कब कराना चाहिए. एक्सपर्ट के अनुसार सही समय और जांच के तरीके क्या है.&amp;nbsp;
मलेरिया टेस्ट कब कराना चाहिए?
एक्सपर्ट के अनुसार, मलेरिया के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं. यही वजह है कि कई लोग समय पर डॉक्टर के पास नहीं पहुंचते. आमतौर पर मरीजों को बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द, शरीर में दर्द, बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होती है. कई लोग इन लक्षणों को सामान्य वायरल संक्रमण मान लेते हैं, जबकि यह मलेरिया भी हो सकता है.अगर किसी व्यक्ति में बुखार के साथ ठंड लगना या बहुत ज्यादा पसीना आना, बार-बार बुखार आना, ज्यादा थकान महसूस होना और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे मलेरिया की जांच करानी चाहिए. इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति ऐसे इलाके में रहता है या हाल ही में ऐसे स्थान की यात्रा करके आया है जहां मलेरिया के मामले ज्यादा आते हैं, तो उसे भी जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए.
एक्सपर्ट के अनुसार सही समय क्या है?
अगर बुखार या अन्य लक्षण 24 से 48 घंटे के अंदर ठीक नहीं होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. मरीज को बुखार कम करने की दवा लेने के बाद भी अगर राहत नहीं मिल रही है तो मेडिकल जांच जरूरी हो जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर लैब जांच कराने से मरीज का इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है. इससे मलेरिया की गंभीर जटिलताओं का खतरा कम होता है. साथ ही बिना जरूरत एंटीबायोटिक या मलेरिया की दवाएं लेने से भी बचा जा सकता है.&amp;nbsp;
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समय पर जांच क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञ के अनुसार, प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम परजीवी से होने वाला मलेरिया काफी गंभीर हो सकता है. अगर इसकी पहचान और इलाज में देरी हो जाए, तो मरीज को कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इनमें दिमाग पर असर पड़ना, किडनी को नुकसान, गंभीर एनीमिया, सांस लेने में दिक्कत और कई अंगों के एक साथ प्रभावित होने जैसी स्थितियां शामिल हैं.समय पर जांच होने से सही इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है, जिससे बीमारी के गंभीर रूप लेने का खतरा काफी कम हो जाता है.
एक्सपर्ट के अनुसार जांच के तरीके क्या है?
हर जगह माइक्रोस्कोपी की सुविधा उपलब्ध नहीं होती. ऐसे में डॉक्टर दूसरी जांचों की मदद लेते हैं. इनमें रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) शामिल है. यह जांच कम समय में रिपोर्ट देने में मदद करती है. इसके अलावा क्वांटिटेटिव बफी कोट (QBC) टेस्ट कुछ विशेष मामलों में तेजी से जांच के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) टेस्ट जरूरत पड़ने पर ज्यादा सटीक और संवेदनशील जांच के लिए इस टेस्ट का यूज किया जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा 2026 पर जा रहे हैं? इन खूबसूरत जगहों को बिल्कुल ना करें मिस&amp; खूबसूरत बनेगा सफर</title>
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Sawan 2026 Vrat Recipes: उपवास में बनाएं ये पारंपरिक फलाहारी डिश, जिससे मिलेगा स्वाद और बनेगी सेहत </title>
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        <description><![CDATA[ Sawan 2026 Vrat Recipes: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और भक्ति का विशेष समय माना जाता है. वहीं इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है और यह 28 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सावन सोमवार का व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन का पालन करते हैं. व्रत में आमतौर पर लहसुन, प्याज, नॉनवेज और सामान्य अनाज से परहेज किया जाता है. इसके बजाय साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरी, सामा, मखाना, आलू, दूध, दही, फल और सूखे मेवे जैसी चीजों का सेवन किया जाता है. ऐसे में चलिए आज हम भी आपको बताते हैं कि आप सावन के उपवास में कौन सी फलाहारी डिशेज बना सकते हैं, जिनसे आपको स्वाद में मिलेगा और आपकी सेहत भी बनी रहेगी.&amp;nbsp;
दही वाले आलू&amp;nbsp;
व्रत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले डिशेज में दही वाले आलू शामिल है. इसमें उबले हुए आलू को दही की गाड़ी ग्रेवी में पकाया जाता है. ग्रेवी को कुट्टू के आटे से हल्का गाढ़ापन दिया जाता है और सेंधा नमक और व्रत में इस्तेमाल होने वाले मसाले से इसका स्वाद बढ़ाया जाता है. इसे कुट्टू की पूरी के साथ खाया जा सकता है.&amp;nbsp;
कुट्टू की कुरकुरी पूरी&amp;nbsp;
सावन व्रत में कुट्टू की पूरी लगभग हर घर में बनाई जाती है. कुट्टू के आटे में उबले आलू मिलाकर नरम आटा तैयार किया जाता है, जिससे पूरी तलने पर बाहर से कुरकुरे और अंदर से मुलायम बनती है. इसे दही वाले आलू, दही या फलहार सब्जी के साथ परोसा जा सकता है.&amp;nbsp;
साबूदाना खिचड़ी&amp;nbsp;
साबूदाना खिचड़ी व्रत की सबसे पॉपुलर डिशेज में से एक मानी जाती है. इसमें भीगे हुए साबूदाना में भुनी मूंगफली का पाउडर, उबले आलू, जीरा, हरी मिर्च और घी का तड़का लगाया जाता है. आखिर में नींबू रस और हरा धनिया डालकर उसका स्वाद और बढ़ाया जाता है. यह पेट भरने के साथ-साथ लंबे समय तक एनर्जी भी देता है.&amp;nbsp;
मखाना खीर&amp;nbsp;
अगर आपका मीठा खाने का मन है, तो मखाना खीर सावन के उपवास में एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. भुने हुए मखानों को दूध में धीमी आंच पर पकाया जाता है और इसमें चीनी, इलायची और मेवे मिलाए जाते हैं. कई घरों में इसे भगवान शिव को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में भी परोसा जाता है.&amp;nbsp;
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व्रत वाली आलू चाट&amp;nbsp;
अगर कुछ चटपटा खाने का मन हो तो सावन के व्रत में आप आलू चाट बना सकते है. इसमें उबले आलू को हल्का-तलकर उसमें सेंधा नमक, दही, हरी चटनी, और ऊपर से अनार के दाने डालकर परोसा जाता है. यह स्वाद और ताजगी दोनों का अच्छा कॉम्बिनेशन माना जाता है.&amp;nbsp;
फलाहारी डोसा और सामा वड़ा&amp;nbsp;
अगर व्रत में कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो समा और राजगीर के आटे से तैयार फराली डोसा बना सकते हैं. इससे खट्टी छाछ, अदरक और हरी मिर्च के साथ तैयार किया जाता है और मूंगफली दही की चटनी के साथ परोसा जाता है. वहीं इसके अलावा सामा के आटे, उबले आलू, मूंगफली, तिल और हरी मिर्च से तैयार सामा वड़ा भी व्रत के लिए बहुत पॉपुलर डिश है, इसे डिप फ्राई करके दही के साथ परोसा जा सकता है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bathroom Cleaning Tips: बाथरूम या नल के नीचे जमी जिद्दी काई से हैं परेशान? इन घरेलू चीजों से लाएं चकाचक चमक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Blue Stains From Bathroom Taps: बाथरूम की सफाई करना हर घर की जरूरत है, लेकिन कई बार नियमित सफाई के बावजूद नल, वॉशबेसिन, टाइल्स या कमोड के आसपास नीले-हरे रंग की जिद्दी काई और दाग जमने लगते हैं. ये निशान देखने में बेहद गंदे लगते हैं और पूरे बाथरूम की चमक फीकी कर देते हैं. अच्छी बात यह है कि इन्हें हटाने के लिए हमेशा महंगे क्लीनर खरीदने की जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों की मदद से भी इन जिद्दी दागों को आसानी से साफ किया जा सकता है.&amp;nbsp;
क्यों बनते हैं हरे रंग के निशान?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ये नीले या हरे रंग के निशान आखिर बनते क्यों हैं. कई बार लोग इन्हें फफूंदी समझ लेते हैं, जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता. अगर घर में कॉपर की पाइपलाइन लगी है तो समय के साथ उसके ऑक्सीडाइज होने की वजह से इस तरह के नीले-हरे दाग दिखाई देने लगते हैं. वहीं बाथरूम में लगातार नमी रहने के कारण कई जगह फफूंदी और काई भी जम सकती है. इसके अलावा पानी में मौजूद कुछ खनिज या पाइपों में जंग लगने की वजह से भी ऐसे निशान बन जाते हैं.&amp;nbsp;
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कैसे कर सकते हैं इसको साफ?
अगर आपके बाथरूम में ऐसे दाग दिखाई दे रहे हैं तो सफेद सिरका, नमक और आटे का मिक्स काफी असरदार साबित हो सकता है. तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और दाग वाली जगह पर करीब 30 मिनट के लिए लगा दें. इसके बाद हल्के ब्रश या स्पंज से रगड़कर पानी से धो लें. इससे जमे हुए दाग काफी हद तक साफ हो जाते हैं.
नमक का भी यूज फायदेमंद
सिर्फ नमक का इस्तेमाल भी फायदेमंद माना जाता है. दाग वाली जगह पर थोड़ा नमक छिड़कें और मुलायम कपड़े से धीरे-धीरे रगड़ें. वहीं अगर नमक के साथ आधा कटा हुआ नींबू इस्तेमाल किया जाए तो सफाई और भी बेहतर हो सकती है. नींबू में मौजूद प्राकृतिक एसिड और नमक मिलकर जिद्दी दागों को ढीला करने में मदद करते हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;बेकिंग सोडा और सफेद सिरके का पेस्ट&amp;nbsp;
इसके अलावा बेकिंग सोडा और सफेद सिरके का पेस्ट भी काफी लोकप्रिय घरेलू उपाय है. दोनों को मिलाकर पेस्ट बनाएं, इसे दाग वाली जगह पर 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर ब्रश से साफ कर दें. टाइल्स पर जमे दाग हटाने के लिए बेकिंग सोडा का पेस्ट, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, टूथपेस्ट या रबिंग अल्कोहल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि किसी भी नए क्लीनिंग सॉल्यूशन को पहले किसी छोटे हिस्से पर जरूर आजमाएं, ताकि टाइल्स या फिटिंग्स को नुकसान न पहुंचे.
इस बात का जरूर रखें ध्यान
अगर बार-बार सफाई करने के बाद भी नीले-हरे दाग वापस आ जाते हैं तो इसकी वजह पानी की क्वालिटी या पाइपलाइन की समस्या भी हो सकती है. ऐसे में पानी की जांच करवाना या प्लंबर से पाइपलाइन की जांच कराना बेहतर रहेगा. वहीं बाथरूम में नमी कम रखने के लिए नहाने के बाद एग्जॉस्ट फैन चलाएं, दीवारों और टाइल्स पर जमा पानी को वाइपर से साफ करें और नियमित सफाई की आदत बनाए रखें. इससे काई और दाग बनने की संभावना काफी कम हो जाती है और आपका बाथरूम लंबे समय तक साफ और चमकदार बना रहता है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gulab Jamun Recipe: क्या घर पर बनाते समय बिखर जाते हैं गुलाब जामुन? इस आसान तरीके से बनेंगे हलवाई जैसे स्पंजी</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Perfect Gulab Jamun At Home: गुलाब जामुन ऐसा भारतीय मिठाई है जिसके बिना त्योहार, शादी या किसी खास मौके की मिठास अधूरी लगती है. हालांकि, जब लोग इसे घर पर बनाने की कोशिश करते हैं तो अक्सर एक समस्या सामने आती है. तलते समय गुलाब जामुन फूटने लगते हैं या फिर उनका आकार बिगड़ जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है. कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप हर बार मुलायम, गोल और बिना फूटे हुए गुलाब जामुन बना सकते हैं.&amp;nbsp;
गुलाब जामुन के लिए सबसे जरूरी बात&amp;nbsp;
सबसे पहले सही सामग्री का चुनाव करना बेहद जरूरी है. अगर आप मिल्क पाउडर से गुलाब जामुन बना रहे हैं तो फुल-फैट मिल्क पाउडर का इस्तेमाल करें. लो-फैट मिल्क पाउडर से जामुन अक्सर सूखे बनते हैं और तलते समय टूटने या फूटने की संभावना बढ़ जाती है. इसके साथ ही मैदा की मात्रा भी संतुलित रखें. बहुत ज्यादा मैदा डालने से गुलाब जामुन सख्त हो जाते हैं, जबकि बहुत कम मैदा होने पर वे तेल में बिखर सकते हैं.
आटा गूंथते इस बात का रखें ध्यान
आटा गूंथते समय भी जल्दबाजी न करें. मिक्स में जितना तरल चाहिए उतना ही डालें और आटा तैयार करने के बाद उसे 5 मिनट के लिए ढककर रख दें. इससे सारी सामग्री अच्छी तरह सेट हो जाती है. तैयार आटा नरम और चिकना होना चाहिए. अगर उसमें दरारें दिखाई देंगी तो तलते समय गुलाब जामुन फट सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों फूट जाते हैं गुलाब जामुन?
गुलाब जामुन बनाते समय बेकिंग पाउडर का इस्तेमाल करें, लेकिन बेकिंग सोडा ज्यादा न डालें. जरूरत से ज्यादा बेकिंग सोडा डालने पर जामुन तेल में जाते ही फूट सकते हैं. यही गलती कई लोग अनजाने में कर बैठते हैं. गोलियां बनाते समय हाथों पर थोड़ा-सा घी लगा लें और बिना किसी दरार के चिकने बॉल तैयार करें. अगर सतह पर हल्की सी भी क्रैक होगी तो गर्म तेल में वही हिस्सा पहले फटेगा. इसलिए इस स्टेप को बिल्कुल नजरअंदाज न करें.&amp;nbsp;
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तलते समय इस बात का ध्यान रखें
तलने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है. हमेशा मध्यम से धीमी आंच पर ही गुलाब जामुन तलें. अगर तेल बहुत ज्यादा गर्म होगा तो बाहर का हिस्सा जल्दी ब्राउन हो जाएगा, जबकि अंदर का भाग कच्चा रह जाएगा और जामुन फूट सकता है. तलते समय उन्हें धीरे-धीरे पलटते रहें ताकि चारों तरफ से समान रूप से पकें.&amp;nbsp;
चाशनी को लेकर क्या तैयारी करें?
चाशनी भी हल्की गर्म होनी चाहिए. बहुत ज्यादा उबलती हुई चाशनी में गर्म गुलाब जामुन डालने से वे अचानक फैल सकते हैं और टूट सकते हैं. इसलिए तलने के तुरंत बाद उन्हें गुनगुनी चाशनी में डालें और कम से कम 2 से 3 घंटे तक उसमें भीगने दें. इससे गुलाब जामुन अंदर तक चाशनी सोख लेते हैं और स्वाद के साथ-साथ उनकी बनावट भी बेहतरीन हो जाती है.
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        <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एनर्जी बढ़ाने का दावा या ग्राहकों से धोखा? FSSAI के निशाने पर Red Bull और Sting जैसे टॉप ब्रांड्स</title>
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        <description><![CDATA[ बाजार में मिलने वाले कई लोकप्रिय पेय, जिन्हें कंपनियां Energy Drink के नाम से बेच रही हैं, अब उन पर ही सवाल खड़े हो गए हैं. खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने Red Bull, Sting, Monster, Campa Energy, Hell Energy, Adrenaline Rush और Gold Boost समेत कई बड़े ब्रांड्स को नोटिस जारी किया है. आरोप है कि कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग और दावों के जरिए ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं.&amp;nbsp;
आखिर FSSAI को आपत्ति किस बात पर है?
FSSAI का कहना है कि भारत में अब तक Energy Drink नाम की कोई आधिकारिक फूड कैटेगरी या उसका कोई अलग मानक तय नहीं किया गया है. इसका मतलब यह है कि किसी प्रोडक्ट को सिर्फ Energy Drink कहकर बेचना या उसी नाम से प्रचार करना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता. नियामक का कहना है कि फूड कैटेगरी सिस्टम केवल प्रशासनिक वर्गीकरण के लिए है. इसे प्रोडक्ट का नाम या मार्केटिंग टर्म नहीं बनाया जा सकता.
किन-किन ब्रांड्स को मिला नोटिस?
नोटिस पाने वाले ब्रांड्स में Red Bull, Sting, Monster Energy, Campa Energy, Adrenaline Rush, Hell Energy और Gold Boost शामिल हैं. FSSAI का कहना है कि इन प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग पर Energy Drink लिखा गया है. कुछ मामलों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी इन्हें इसी नाम से प्रमोट किया जा रहा है.
सिर्फ नाम नहीं, दावों पर भी सवाल
FSSAI ने केवल Energy Drink शब्द पर ही आपत्ति नहीं जताई है, बल्कि उन दावों पर भी सवाल उठाए हैं, जिनमें कहा जाता है कि यह ड्रिंक एनर्जी बढ़ाती है. फोकस बेहतर करती है या कमजोरी दूर करती है. नियामक का कहना है कि फूड प्रॉडक्ट्स के लिए इस तरह के फंक्शनल या थेरेप्यूटिक दावे नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं हैं, जब तक उनके लिए नियामकीय अनुमति न हो.
इसका मतलब आपके लिए क्या है?
इस नोटिस का मतलब यह नहीं है कि इन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. फिलहाल FSSAI ने कंपनियों से जवाब मांगा है और लेबलिंग व मार्केटिंग को नियमों के मुताबिक करने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल सवाल इस बात पर है कि कंपनियां अपने प्रॉडक्ट्स को किस नाम और किन दावों के साथ बेच रही हैं न कि इस बात पर कि ये प्रॉडक्ट्स बाजार में बिक नहीं सकते हैं.
अब आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर कंपनियों के जवाब पर होगी. अगर FSSAI को कंपनियों का जवाब संतोषजनक नहीं लगता है तो आगे नियामकीय कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल इस मामले में कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Aaj Ka Panchang 3 July 2026: आज कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी पर पंचक और भद्रा, देखें शुभ मुहूर्त, योग और पूरा पंचांग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/aaj-ka-panchang-3-july-2026-आज-कृष्ण-पिंगल-संकष्टी-चतुर्थी-पर-पंचक-और-भद्रा-देखें-शुभ-मुहूर्त-योग-और-पूरा-पंचांग</link>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang, 3 July 2026: आज आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि है. इस दिन आषाढ़ माह की कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी और पंचक लग रहे हैं. ये रोग पंचक होंगे. &#039;संकष्टी&#039; का अर्थ ही संकटों का नाश करने वाली तिथि है। इसलिए इस दिन रखा गया व्रत विशेष फलदायी माना जाता है.&amp;nbsp;
आज का व्रत&amp;nbsp;
कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी पर सुबह और शाम को गणेश जी की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, इसके बाद पूजा संपन्न होती है. आज चंद्रोदय समय - रात 9.53 मिनट पर

3 जुलाई का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 3 July 2026)

तिथि - तृतीया (2 जुलाई 2026, सुबह 9.37 - 3 जुलाई 2026, सुबह 11.20)
वार- गुरुवार
नक्षत्र- उत्तराषाढ़ा
योग- विष्कंभ, सर्वार्थ सिद्धि योग
सूर्योदय- सुबह 5.54
सूर्यास्त- रात 07.13
चंद्रोदय- रात 9.53
चंद्रोस्त- सुबह 08.07
चंद्र राशि- मकर

चौघड़िया मुहूर्त

सुबह का चौघड़िया -&amp;nbsp; सुबह 5.27 - सुबह 10.41
शाम का चौघड़िया -सुबह 9.54 - रात 11.10

राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)

राहुकाल -&amp;nbsp; सुबह 10.41 - दोपहर0 12.25
यमगण्ड काल- दोपहर 3.54 - शाम 5.39
गुलिक काल - सुबह 7.12 - सुबह 8.56
भद्रा काल - सुबह 5.28 - सुबह 11.20
पंचक - देर रात 12.48

ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 3 July 2026)

सूर्य- मिथुन
चंद्रमा - मकर
मंगल- वृषभ
बुध- कर्क
गुरु- मिथुन
शुक्र- मिथुन
शनि- मीन
राहु- कुंभ
केतु- सिंह

3 जुलाई 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है









मेष
करियर और व्यापार में नई सफलता मिलने के योग हैं. रुका हुआ धन वापस मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
वृषभ
भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और व्यापार विस्तार के अच्छे अवसर बनेंगे. नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि मिल सकती है.
मिथुन
कार्यस्थल पर सावधानी बरतें, विवाद और गलतफहमियों से बचें. निवेश और नए फैसलों में धैर्य रखना बेहतर रहेगा.
कर्क
नौकरी और व्यापार में उन्नति के अच्छे संकेत हैं. प्रेम जीवन और आर्थिक मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.
सिंह
विरोधियों पर जीत मिलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है. करियर में नई जिम्मेदारियां और सम्मान मिलने के योग हैं.
कन्या
विदेशी संपर्कों से व्यापार में लाभ मिल सकता है. नौकरी और पढ़ाई में आपकी प्रतिभा सभी को प्रभावित करेगी.
तुला
आर्थिक मामलों और कार्यस्थल पर सतर्क रहने की जरूरत है. पारिवारिक और प्रेम संबंधों में संयम से काम लें.
वृश्चिक
व्यापार विस्तार और विदेशी अवसरों से बड़ा लाभ मिलने के योग हैं. करियर और उच्च शिक्षा से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है.
धनु
रुका हुआ धन मिलने और वेतन वृद्धि के संकेत हैं. व्यापार और नौकरी दोनों में मेहनत का अच्छा फल मिलेगा.
मकर
नई योजनाओं और स्टार्टअप में सफलता मिलने की संभावना है. करियर में बड़ा अवसर और व्यापार में विस्तार के योग बन रहे हैं.
कुंभ
ऑनलाइन लेन-देन और कार्यस्थल पर विशेष सावधानी रखें. जल्दबाजी और गलत फैसले आर्थिक नुकसान का कारण बन सकते हैं.
मीन
व्यापार और नौकरी में आपकी मेहनत रंग लाएगी. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और करियर में नई पहचान मिलने के योग हैं.























आज का उपाय 

संकष्टी चतुर्थी का व्रत घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना जाता है. इस दिन बप्पा की पूजा में हल्दी, मोदक और दू्वा का खास ख्याल रखें.















आज का लकी कलर&amp;nbsp;
पीला और लाल रंग शुभ है
Surya Gochar in Kark 2026: सूर्य का कर्क राशि में गोचर, 16 जुलाई से 4 राशियों के जीवन में आएगा बड़ा बदलाव
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Aaj, Panchang, July, 2026:, आज, कृष्ण, पिंगल, संकष्टी, चतुर्थी, पर, पंचक, और, भद्रा, देखें, शुभ, मुहूर्त, योग, और, पूरा, पंचांग</media:keywords>
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        <title>Monsoon Vegetable Buying Tips : बारिश में सबसे पहले सड़ती हैं ये 7 सब्जियां, खरीदते वक्त रहें सावधान</title>
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        <description><![CDATA[ Monsoon Vegetable Buying Tips : बारिश में सबसे पहले सड़ती हैं ये 7 सब्जियां, खरीदते वक्त रहें सावधान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Exclusive: रिश्ता टूटने से बचाना है तो आशुतोष राणा का यह ‘गोल्डन रूल’ अभी जान लीजिए, खोल देगा आपकी आंखें</title>
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        <description><![CDATA[ आज की इस भागती-दौड़ती जिंदगी में जहां इंसान के पास भौतिक सुख-सुविधाओं के तमाम साधन मौजूद हैं, वहीं दो चीजें कहीं पीछे छूटती नजर आ रही हैं. पहली चुनौती गहरे और सच्चे रिश्तों को बचाए रखने की है, तो दूसरी चुनौती मन की शांति यानी अध्यात्म से जुड़े रहने की है.
आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z और Millennials) के सामने सबसे बड़ा संकट यही है कि वे इन दोनों के बीच संतुलन कैसे कायम करें. इसी सिलसिले में मशहूर अभिनेता, लेखक और दार्शनिक आशुतोष राणा ने अपनी नई स्पिरिचुअल पहल &#039;दुर्लभ दर्शन&#039; (6D VR टेक्नोलॉजी के जरिए महाकाल और अयोध्या के दर्शन) के मौके पर एबीपी लाइव से एक खास बातचीत की.

इस संवाद में उन्होंने जीवन, अध्यात्म और आज की पीढ़ी के बदलते रिश्तों को लेकर कुछ बेहद गहरे और व्यावहारिक सूत्र दिए हैं, जिन्हें सनातन धर्म के दर्शन और पौराणिक प्रमाणों के साथ समझना बेहद जरूरी है.
रिश्तों की शुरुआत और ठहराव का अनूठा सूत्र
आशुतोष राणा ने आज के वैवाहिक जीवन और रिलेशनशिप की सबसे बड़ी कमजोरी पर चोट करते हुए एक अद्भुत बात कही है. उनका मानना है कि कोई भी रिश्ता शुरू करने से पहले हमें पूरी जागरूकता के साथ सामने वाले इंसान को समझ लेना चाहिए, यानी तब अपनी पूरी आंखें खुली रखनी चाहिए.
लेकिन एक बार जब आप किसी के साथ रिश्ते के बंधन में जुड़ जाते हैं, तो उसके बाद अपनी आधी आंखें बंद कर लेनी चाहिए. इसका सीधा सा मतलब यह है कि रिश्ता बन जाने के बाद हर छोटी-मोटी कमी को कुरेदने या उस पर शिकायत करने के बजाय कुछ बातों को अनदेखा करना भी जरूरी होता है.
यह भी पढ़ें- 30 सेकंड का वीडियो और 24 घंटे का स्टेटस: जानिए कैसे अनजाने में बिखर रही है आपके घर की सुख-शांति
सनातन दर्शन भी यही सिखाता है कि इस संसार में कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं है और हर किसी में कुछ गुण तो कुछ दोष अवश्य होते हैं. श्रीमद्भगवद्गीता के अठारहवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने भी यही कहा है कि जैसे अग्नि हमेशा धुएं से ढकी रहती है, वैसे ही हर मनुष्य या हर कर्म में कोई न कोई कमी या दोष जरूर होता है.
पौराणिक संदर्भों में देखें तो माता सीता और भगवान श्रीराम के जीवन में भी यही संतुलन दिखता है, जहां विवाह से पहले पात्रता को परखा गया लेकिन विवाह के बाद दोनों ने एक-दूसरे की मानवीय सीमाओं को स्वीकार कर केवल प्रेम और कर्तव्य को सर्वोपरि रखा.
आज के दौर में रिश्ते इसलिए जल्दी टूट रहे हैं क्योंकि लोग शादी के बाद अपने पार्टनर को बदलने की कोशिश में लग जाते हैं, जबकि आधी आंखें बंद करने का मतलब उदासीनता नहीं बल्कि सामने वाले को उसकी कमियों के साथ स्वीकार करने की परिपक्वता है.
सलाहकार नहीं बल्कि एक संवेदनशील श्रोता बनें
इस बातचीत के दौरान आशुतोष राणा ने एक और बेहद महत्वपूर्ण व्यावहारिक बात उठाई जो आज के दौर में संवादहीनता को दूर कर सकती है. उन्होंने कहा कि जब भी आपका जीवनसाथी या कोई अपना अपनी कोई परेशानी आपके साथ साझा करे, तो तुरंत उसे कोई समाधान या सलाह देने की कोशिश मत कीजिए.
दरअसल, ज्यादातर लोगों के पास अपनी समस्याओं का हल पहले से ही मौजूद होता है, उन्हें बस एक ऐसा संवेदनशील कान चाहिए होता है जो बिना उन्हें जज किए या बिना किसी पूर्वाग्रह के उनकी बात को पूरे धैर्य के साथ सुन सके.
भारतीय दर्शन में भी &#039;श्रवण&#039; यानी गहरे से सुनने को सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, चाहे वह अध्यात्म का क्षेत्र हो या व्यावहारिक जीवन का. इसका सबसे बड़ा प्रमाण महाभारत के युद्ध क्षेत्र में मिलता है, जब अर्जुन भारी अवसाद और दुविधा से घिरे हुए थे.

उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने तुरंत उपदेश देना शुरू नहीं किया, बल्कि वे गीता के पहले अध्याय में चुपचाप अर्जुन की हर पीड़ा, उनके आंसुओं और उनके तर्कों को सुनते रहे. जब अर्जुन अपनी पूरी बात कहकर शांत हो गए, तब जाकर कृष्ण ने बोलना शुरू किया.
आज के रिश्तों में लोग समझने के लिए नहीं बल्कि तुरंत पलटकर जवाब देने या खुद को सही साबित करने के लिए सुनते हैं, जबकि किसी अपने की बात को बिना किसी जजमेंट के ध्यान से सुन लेना ही उसके आधे मानसिक तनाव को समाप्त कर देता है.
श्रीराम और महादेव के चरित्र से आधुनिक जीवन की सीख
आशुतोष राणा ने भगवान श्रीराम और देवों के देव महादेव के चरित्र को आज की पीढ़ी के लिए एक महान सीख के रूप में प्रस्तुत किया है. उन्होंने समझाया कि यदि हमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम से कुछ सीखना है, तो यह सीखना चाहिए कि धर्म और मर्यादा का निर्वाह कैसे किया जाता है, चाहे वह मित्र का धर्म हो, शत्रु का धर्म हो, पुत्र का हो या फिर पति का.
वहीं दूसरी ओर भगवान शिव के चरित्र से हमें यह सीखना चाहिए कि जीवन की तमाम विसंगतियों के बीच संगति और सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाता है.
अगर महादेव के परिवार को देखें तो वहां हर स्तर पर विरोधी स्वभाव के जीव एक साथ रहते हैं, जैसे महादेव के गले में सांप है तो उनके पुत्र कार्तिकेय का वाहन मोर है, जो एक-दूसरे के कड़वे दुश्मन हैं. इसके बावजूद वहां परम शांति है, जो यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों और अलग स्वभाव के लोगों के बीच तालमेल कैसे बैठाया जाए.
आज के आधुनिक परिवारों में वैचारिक मतभेद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि हम महादेव के इस सूत्र को अपना लें कि भिन्न स्वभाव के बावजूद एक साथ प्रेमपूर्वक कैसे रहा जाता है, तो किसी भी परिवार को बिखरने से बचाया जा सकता है.
विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम है दुर्लभ दर्शन
इंटरव्यू के अंत में आशुतोष राणा ने अपनी नई आध्यात्मिक पहल &#039;दुर्लभ दर्शन&#039; का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल वही है जो इंसान को भटकाने के बजाय उसकी जड़ों और परमात्मा से जोड़ने का काम करे.
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जो बुजुर्ग, बीमार या अत्यधिक व्यस्त लोग भौतिक रूप से बाबा महाकाल की भस्म आरती या अयोध्या धाम नहीं जा पाते हैं, वे इस 6D VR (वर्चुअल रियलिटी) तकनीक के माध्यम से घर बैठ ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 23:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ceiling Fan Cleaning Tips: बिना धूल उड़ाए मिनटों में चमकेगा सीलिंग फैन, नोट करें साफ करने की धांसू देसी ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ Household Cleaning Hacks: गर्मियों में सीलिंग फैन लगभग हर घर में पूरे दिन चलता रहता है, लेकिन इसकी सफाई पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता. धीरे-धीरे इसकी पंखियों पर धूल, मिट्टी और कई बार चिकनाई भी जमने लगती है. जब पंखा चलता है तो यही गंदगी कमरे की हवा में फैलने लगती है, जिससे घर की साफ-सफाई और हवा दोनों प्रभावित होती हैं. इसलिए समय-समय पर सीलिंग फैन की सफाई करना जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको कैसे साफ कर सकते हैं.&amp;nbsp;
फैन साफ करने से पहले जरूरी बात
फैन साफ करने से पहले सबसे जरूरी बात सुरक्षा है. सफाई शुरू करने से पहले पंखा पूरी तरह बंद कर दें. अगर संभव हो तो स्विच बोर्ड से उसकी बिजली भी बंद कर दें. इससे सफाई के दौरान किसी तरह की दुर्घटना का खतरा नहीं रहता और आप आराम से काम कर सकते हैं.&amp;nbsp;
सफाई करते समय इसका रखें ध्यान
चूंकि सीलिंग फैन ऊंचाई पर लगा होता है, इसलिए उस तक पहुंचने के लिए मजबूत सीढ़ी या स्टेप स्टूल का इस्तेमाल करें. कुर्सी या डगमगाने वाले फर्नीचर पर चढ़ने से बचें. सफाई करते समय शरीर का संतुलन बनाए रखें ताकि किसी तरह की फिसलन या चोट से बचा जा सके.&amp;nbsp;
कैसे साफ कर सकते हैं इसको?
अगर पंखे पर काफी धूल जमी है तो पुराने तकिए के कवर का इस्तेमाल एक आसान तरीका साबित हो सकता है. तकिए का कवर पंखे की हर ब्लेड पर चढ़ाकर धीरे-धीरे बाहर की ओर खींचें. इससे धूल सीधे कवर के अंदर जमा हो जाएगी और कमरे में इधर-उधर नहीं फैलेगी। यह तरीका सफाई को आसान और कम गंदा बनाता है. सिर्फ धूल हटाना ही काफी नहीं होता. &amp;nbsp;इसके बाद हल्के गीले कपड़े से पंखे की ब्लेड अच्छी तरह पोंछें ताकि उस पर जमी चिकनाई और जिद्दी गंदगी भी साफ हो जाए. कपड़े को ज्यादा गीला न रखें, क्योंकि अधिक पानी फैन की सतह को नुकसान पहुंचा सकता है. जरूरत पड़े तो हल्के क्लीनिंग सॉल्यूशन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
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इन हिस्सों को भी साफ करना जरूरी
अक्सर लोग सिर्फ पंखियों की सफाई करके काम खत्म मान लेते हैं, जबकि मोटर का बाहरी हिस्सा, पुल चेन और लाइट फिटिंग पर भी धूल जमा होती रहती है. इन हिस्सों को भी गीले कपड़े से साफ करें. अगर फैन में कांच की लाइट कवर लगी है तो उसे निकालकर अलग से साफ करना बेहतर रहेगा.
चालू करके चेक कर लें
सफाई पूरी होने के बाद एक बार पंखे को चलाकर जरूर देखें. अगर पंखा हिल रहा है, आवाज कर रहा है या ब्लेड असंतुलित लग रही हैं, तो स्क्रू कस दें और जरूरत पड़ने पर उसकी सर्विस कराएं. रेगुलर सफाई न सिर्फ कमरे की हवा को साफ रखने में मदद करती है, बल्कि पंखे की परफॉर्मेंस और उसकी उम्र भी बढ़ाती है.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 23:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chutney Recipes: मोमोज खाना हो या इडली डोसा.. घर में फटाफट बनाएं ये 5 चटनियां, उंगलियां चाटते रह जाएंगे लोग</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/chutney-recipes-मोमोज-खाना-हो-या-इडली-डोसा-घर-में-फटाफट-बनाएं-ये-5-चटनियां-उंगलियां-चाटते-रह-जाएंगे-लोग</link>
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        <description><![CDATA[ Chutney Recipes: मोमोज खाना हो या इडली डोसा.. घर में फटाफट बनाएं ये 5 चटनियां, उंगलियां चाटते रह जाएंगे लोग ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 23:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Dhirendra Krishna Shastri Birthday 2026: 4 जुलाई को मनाएंगे 30वां जन्मदिन, जानें क्या होने वाला है खास</title>
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        <description><![CDATA[ Dhirendra Krishna Shastri Birthday 2026:&amp;nbsp; बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 4 जुलाई 2026 को अपना 30वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं. 
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से निकलकर देश-विदेश में अपनी कथाओं और धार्मिक आयोजनों के जरिए पहचान बनाने वाले धीरेंद्र शास्त्री आज सनातन धर्म के चर्चित चेहरों में गिने जाते हैं. उनका जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा गांव में हुआ था.

इस बार उनका जन्मदिन केवल उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा. बागेश्वर धाम की ओर से इसे &#039;शिक्षा, दान और ध्यान दिवस&#039; के रूप में मनाने की घोषणा की गई है. धीरेंद्र शास्त्री ने अपने जन्मदिन पर होने वाले खर्च को जरूरतमंद बेटियों की शिक्षा के लिए समर्पित करने की बात भी कही है.
कौन हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर और प्रसिद्ध कथावाचक हैं. उन्होंने कम उम्र में ही रामकथा, श्रीमद्भागवत कथा और हनुमान भक्ति के माध्यम से लाखों लोगों तक अपनी बात पहुंचाई. उनके धार्मिक कार्यक्रमों में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं.
सनातन धर्म के प्रचार में क्या है योगदान?
पिछले कुछ वर्षों में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने प्रवचनों और कथाओं में लगातार सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया है. वे युवाओं को अपनी संस्कृति, धर्मग्रंथों और भारतीय सभ्यता से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं. उनके कार्यक्रमों में श्रीराम, हनुमान भक्ति, गौ सेवा, संस्कार, परिवार और भारतीय संस्कृति जैसे विषय प्रमुखता से शामिल रहते हैं.
इसके अलावा वे भारत और विदेशों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का कार्य कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी उनके प्रवचन करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं.
जन्मदिन पर क्या रहेगी खास तैयारी?
इस वर्ष धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने जन्मदिन को सेवा और समाजहित से जोड़ने का निर्णय लिया है. बागेश्वर धाम की ओर से इसे &#039;शिक्षा, दान और ध्यान दिवस&#039; के रूप में मनाया जाएगा. उन्होंने अपने अनुयायियों से अपील की है कि जन्मदिन पर महंगे उपहार देने के बजाय जरूरतमंद बेटियों की शिक्षा में सहयोग करें. साथ ही ध्यान, सेवा और दान के कार्यों में भाग लें.
माना जा रहा है कि इस अवसर पर बागेश्वर धाम में विशेष पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, भंडारे और धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है.
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क्यों रहते हैं चर्चा में?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री समय-समय पर अपनी धार्मिक कथाओं, सामाजिक संदेशों, सनातन धर्म से जुड़े बयानों और देशभर में होने वाले दिव्य दरबारों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. सोशल मीडिया पर भी उनके कार्यक्रमों के वीडियो तेजी से वायरल होते हैं.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 23:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Synthetic Cells: इंसानों ने बनाई &amp;apos;जिंदा&amp;apos; कोशिका! जानें क्या है स्पडसेल, जो बदल देगी मेडिकल साइंस की दुनिया?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/synthetic-cells-इंसानों-ने-बनाई-जिंदा-कोशिका-जानें-क्या-है-स्पडसेल-जो-बदल-देगी-मेडिकल-साइंस-की-दुनिया</link>
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        <description><![CDATA[ Synthetic Cells Research University Of Minnesota: बायोलॉजी के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है. रिसर्चर ने ऐसी सिंथेटिक सेल्स विकसित की हैं, जो प्राकृतिक सेल्स की तरह पोषण लेकर बढ़ सकती हैं और अपनी संख्या भी बढ़ा सकती हैं. साइंटिस्ट का मानना है कि यह खोज भविष्य में निर्जीव पदार्थों से जीवित जैसे सिस्टम विकसित करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है. इस परियोजना को स्पडसेल नाम दिया गया है और इसे अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है.&amp;nbsp;
क्या है इसका खासियत?
रिसर्च का नेतृत्व करने वाली वैज्ञानिक केट एडामाला के मुताबिक, उनकी टीम ने केमिस्ट्री की मदद से उन प्रक्रियाओं को दोहराने में सफलता हासिल की है, जिन्हें अब तक केवल जीवित सेल्स की विशेषता माना जाता था. उनका कहना है कि सेल्स का बढ़ना और अपनी प्रतिकृति बनाना जैसे जीवन के मूल गुण किसी रहस्यमयी शक्ति पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि इन्हें वैज्ञानिक तरीके से भी तैयार किया जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्पडसेल को पूरी तरह जीवित जीव नहीं कहा जा सकता.&amp;nbsp;
दरअसल, यह सिंथेटिक सेल्स अभी भी कई मामलों में प्राकृतिक सेल्स से पीछे है. इसे जीवित रहने के लिए बाहर से पोषक तत्व और राइबोसोम की जरूरत पड़ती है, जो प्रोटीन बनाने का काम करते हैं. इसके अलावा इसमें खुद को इंफेक्शन से बचाने की क्षमता नहीं है और न ही यह अपशिष्ट पदार्थों को प्रभावी ढंग से बाहर निकाल सकती है. यानी यह अपने आप लंबे समय तक जीवित रहने में सक्षम नहीं है.&amp;nbsp;
क्यों इस खोज को माना जा रहा महत्वपूर्ण?
एक्सपर्ट इस उपलब्धि को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं. उनका कहना है कि पहली बार किसी सिंथेटिक प्रणाली में जीवन जैसी मूलभूत प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है. साइंटिस्ट का मानना है कि अगर इस तकनीक को आगे विकसित किया गया तो भविष्य में जरूरत के अनुसार डिजाइन किए गए सूक्ष्म जीवित सिस्टम या &#039;लिविंग मशीन&#039; तैयार किए जा सकेंगे, जिनका इस्तेमाल चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण और बायोटेक्नोलॉजी &amp;nbsp;जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है.
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नेचुरल सेल्स से कितना अलग है यह?
स्पडसेल को प्राकृतिक सेल्स की तुलना में काफी सरल बनाया गया है. सामान्य सेल्स विभाजन के लिए साइटोस्केलेटन नामक आंतरिक संरचना का उपयोग करती हैं, लेकिन स्पडसेल में साइंटिस्ट ने अलग रणनीति अपनाई. इसमें कुछ विशेष प्रोटीन कोशिका की झिल्ली पर इकट्ठा होकर इतना दबाव बनाते हैं कि झिल्ली दो हिस्सों में विभाजित हो जाती है. रिसर्चर ने इसमें एक जैनेटिक बदलाव भी किया, जिससे एक खास फ्यूजन प्रोटीन का उत्पादन बढ़ गया. इसका परिणाम यह हुआ कि सेल्स पहले की तुलना में तेजी से बढ़ीं और अधिक नई सेल्स बनाने लगीं.
बायोलॉजिकल रिसर्च के लिए बेहद अहम&amp;nbsp;
साइंटिस्ट ने बताया कि पांच पीढ़ियों के बाद तेज़ी से बढ़ने वाली सेल्स ने शुरुआती सेल्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. एक और खास बात यह है कि जहां मानव जीनोम का आकार लगभग 30 लाख किलोबेस पेयर का होता है, वहीं स्पडसेल का जीनोम केवल 90 किलोबेस पेयर का है. इसका जैनेटिक पदार्थ एक बड़े क्रोमोसोम की जगह सात अलग-अलग डीएनए प्लास्मिड में बांटा गया है, जिससे साइंटिफिक सेल्स के अलग-अलग कार्यों को स्वतंत्र रूप से नियंत्रित और प्रोग्राम कर सकते हैं. यही विशेषता इस तकनीक को भविष्य के बायोलॉजिकल रिसर्च के लिए बेहद अहम बनाती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 23:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>IAS Awanish Sharan: 45 की उम्र में 20 जैसी फिटनेस! IAS अफसर का गजब ट्रांसफॉर्मेशन, सोशल मीडिया पर खोला राज</title>
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        <description><![CDATA[ IAS Awanish Sharan Weight Loss Journey: दुनियाभर में इंसान आज जो सबसे ज्यादा कर रहा है, वह है कि वह खुद को किसी भी तरह फिट रखना चाहता है. कई लोग इसके लिए जिम का सहारा ले रहे हैं, कुछ सुबह-शाम दौड़ लगा रहे हैं, तो कुछ कसरत और योग का सहारा ले रहे हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि आज की बदलती लाइफस्टाइल ने तमाम तरह की बीमारियों को बढ़ा दिया है. कम उम्र के लोग भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं. क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, इसके बारे में ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं है. ऐसे में समाज के कुछ लोग अपनी फिटनेस से लोगों को मोटिवेट कर रहे हैं. चलिए आपको ऐसे ही एक आईएएस अधिकारी के बारे में बताते हैं, जो कुछ दिनों से सुर्खियों में हैं.
सुर्खियों में हैं अवनीश शरण 
अवनीश शरण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी फिटनेस जर्नी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने साल 2020 में, जब उनकी उम्र 39 साल थी, तभी फैसला कर लिया था कि उन्हें पहले से ज्यादा स्वस्थ बनना है. हालांकि, शुरुआत आसान नहीं रही. नौकरी का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और रोजमर्रा की व्यस्तता के कारण उनका रूटीन कई बार टूटता रहा. फिर 2024 में हुई एक सर्जरी के बाद उनकी फिटनेस यात्रा पूरी तरह रुक गई. इसके बाद जून 2025 से उन्होंने नई शुरुआत की. इस बार उनका लक्ष्य सिर्फ वजन कम करना नहीं था, बल्कि शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से स्वस्थ बनाना था. उन्होंने अपने लिए एक आसान लेकिन सख्त नियम बनाया कि समझदारी से एक्सरसाइज करना, संतुलित भोजन खाना, अच्छी नींद लेना और हर दिन इसी रूटीन को बिना रुके दोहराना.
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क्या है उनकी फिटनेस का राज?
उन्होंने सप्ताह में पांच से छह दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाया. मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए धीरे-धीरे वर्कआउट की तीव्रता बढ़ाई. कार्डियो एक्सरसाइज भी की, लेकिन उसका फोकस सीमित रखा. रोजाना पैदल चलना उनकी दिनचर्या का जरूरी हिस्सा बन गया. इसके साथ ही शरीर की रिकवरी और स्ट्रेचिंग पर भी बराबर ध्यान दिया, ताकि फिटनेस लंबे समय तक बनी रहे.
डाइट प्लान में क्या-क्या किया शामिल?
डाइट में उन्होंने किसी महंगे या फैन्सी प्लान की बजाय घर का बना खाना चुना. भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, हरी सब्जियां और मौसमी फल शामिल किए. उन्होंने कैलोरी पर नजर रखी, प्रोसेस्ड फूड और चीनी कम की तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत बनाई. इसके अलावा, रोज छह से सात घंटे की अच्छी नींद को भी उन्होंने अपनी फिटनेस का अहम हिस्सा माना. साल 2026 की शुरुआत में उन्होंने खुद को एक खास लक्ष्य दिया. उन्होंने तय किया कि 27 जून, यानी अपनी बेटी वेदिका के जन्मदिन तक वह अपने जीवन की सबसे अच्छी फिटनेस हासिल करेंगे.
हेल्थ में भी दिखा बदलाव
अवनीश शरण के मुताबिक, असली सफलता सिर्फ वजन कम होने में नहीं, बल्कि हेल्थ रिपोर्ट में दिखने वाले बदलावों में थी. सितंबर 2025 से मई 2026 के बीच उनका कुल कोलेस्ट्रॉल 278 से घटकर 158 हो गया. एलडीएल 205.2 से 83 पर पहुंच गया, जबकि अच्छा कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल 51 से बढ़कर 62.8 हो गया. वहीं ट्राइग्लिसराइड्स 109 से घटकर 61.9 रह गए.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Quit Sugar For 30 Days: 30 दिन के लिए छोड़ देंगे चीनी तो क्या होगा, जानें कितनी बदल जाएगी आपकी बॉडी?</title>
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        <description><![CDATA[ What Happens If You Quit Sugar For 30 Days: अगर आप 30 दिनों के लिए चीनी खाना छोड़ दें, तो इसका असर सिर्फ वजन पर ही नहीं, बल्कि शरीर के कई हिस्सों पर दिखाई दे सकता है. दरअसल, ज्यादा चीनी खाने की आदत मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हार्ट रोग और फैटी लिवर जैसी कई गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है. यही वजह है कि आजकल कई लोग &#039;नो शुगर चैलेंज&#039; अपनाकर अपनी डाइट से अतिरिक्त चीनी को कुछ समय के लिए पूरी तरह बाहर कर देते हैं.
क्यों इसको अपना रहे हैं लोग?
इस चैलेंज का मतलब प्राकृतिक मिठास वाले फल, सब्जियां या दूध छोड़ना नहीं है. इसमें केवल उन चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है, जिनमें अतिरिक्त चीनी मिलाई जाती है, जैसे कोल्ड ड्रिंक, मिठाइयां, कैंडी, केक, कुकीज, मीठे पेय, फ्लेवर वाले दही, पैक्ड जूस और कई तरह की सॉस. इसकी जगह ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, अंडे, मछली, चिकन, मेवे और घर का बना संतुलित भोजन खाने की सलाह दी जाती है.
इससे क्या होता है फायदा?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन के अनुसार, &amp;nbsp;अगर आप लगातार 30 दिनों तक अतिरिक्त चीनी से दूरी बनाए रखते हैं, तो सबसे पहले इसका फायदा ब्लड शुगर पर देखने को मिल सकता है. बार-बार मीठा खाने से शरीर में ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, जिससे समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में चीनी कम करने से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है.
किन लोगों के लिए फायदेमंद?
वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी यह बदलाव फायदेमंद साबित हो सकता है. ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों में कैलोरी अधिक होती है, जबकि फाइबर और प्रोटीन कम होते हैं. ऐसे में इन्हें कम करने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी की मात्रा घट सकती है और वजन कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है. दांतों की सेहत पर भी इसका पॉजिटिव असर पड़ सकता है. मुंह में मौजूद बैक्टीरिया चीनी को तोड़कर एसिड बनाते हैं, जो दांतों को नुकसान पहुंचाता है. अगर मीठी चीजों का सेवन कम किया जाए, तो कैविटी और दांतों के सड़ने का खतरा भी कम हो सकता है.
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लिवर और हार्ट के लिए भी फायदेमंद
लिवर और दिल की सेहत के लिए भी अतिरिक्त चीनी कम करना फायदेमंद माना जाता है. खासतौर पर ज्यादा फ्रुक्टोज वाली चीजें फैटी लिवर की समस्या का खतरा बढ़ा सकती हैं. वहीं जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन हाई कोलेस्ट्रॉल, बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड्स और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से भी जुड़ा माना जाता है, जो आगे चलकर हार्ट रोग का जोखिम बढ़ा सकती हैं. कुछ रिसर्च यह भी बताती हैं कि चीनी कम करने से शरीर में ऊर्जा का लेवल ज्यादा स्थिर रह सकता है. मीठी चीजें खाने के बाद मिलने वाली तुरंत ऊर्जा कुछ ही समय में खत्म हो जाती है, जिससे थकान महसूस होने लगती है. वहीं साबुत अनाज, फल, सब्जियां और प्रोटीन से भरपूर भोजन शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Amarnath Yatra 2026 Travelling Tips : अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं? आपके फर्स्ट एड किट में जरूर होनी चाहिए ये दवाएं</title>
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        <description><![CDATA[ Amarnath Yatra 2026 Travelling Tips : अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं? आपके फर्स्ट एड किट में जरूर होनी चाहिए ये दवाएं ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Hotel Style Egg Curry: उंगलियां चाटते रह जाएंगे लोग, घर पर ऐसे बनाएं बिल्कुल होटल जैसी परफेक्ट अंडा करी</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Restaurant Style Egg Curry At Home: होटल जैसी अंडा करी का स्वाद घर पर भी आसानी से पाया जा सकता है. कई लोगों को लगता है कि रेस्टोरेंट में बनने वाली अंडा करी का गाढ़ा और रिच स्वाद सिर्फ क्रीम, काजू या महंगे मसालों की वजह से आता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. सही तरीके से मसाला तैयार किया जाए और कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो घर में मौजूद सामान्य सामग्री से भी बेहद स्वादिष्ट और होटल स्टाइल अंडा करी बनाई जा सकती है.&amp;nbsp;
मस्त अंडा करी बनाने के लिए क्या जरूरी?
इस रेसिपी की सबसे खास बात यह है कि इसमें उबले हुए अंडों के साथ प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन, साबुत धनिया, जीरा और हरा धनिया मिलाकर मसाले का बेस तैयार किया जाता है. इसके अलावा कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर, हल्दी और गरम मसाला करी को शानदार रंग और स्वाद देते हैं. वहीं तेजपत्ता, दालचीनी, लौंग, हरी इलायची और हरी मिर्च जैसी साबुत सामग्री इसकी खुशबू को और भी बढ़ा देती है.&amp;nbsp;
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अंडा उबालते समय इसका रखें ध्यान
अगर आप चाहते हैं कि अंडे बिल्कुल सही तरीके से उबलें, तो पहले पानी को अच्छी तरह उबाल ले.। इसके बाद अंडों को धीरे-धीरे पानी में डालें और मध्यम से तेज आंच पर करीब 12 मिनट तक पकाएं. उबलने के बाद तुरंत ठंडे पानी में 10 मिनट के लिए रखें. इससे अंडों का छिलका आसानी से उतर जाएगा और उनका टेक्सचर भी बेहतर रहेगा.&amp;nbsp;
करी बनाने समय इस बातों का जरूर रखें ध्यान
करी का असली स्वाद उसके मसाले में छिपा होता है. इसलिए प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और साबुत मसालों को तब तक पकाएं, जब तक उनमें हल्का सुनहरा रंग न आ जाए. इसके बाद इन्हें पीसकर स्मूद पेस्ट तैयार करें. अब इस पेस्ट को तेल में धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनें. जब मसाले के किनारों से तेल अलग होने लगे, तब समझिए कि ग्रेवी पूरी तरह तैयार हो चुकी है. यही स्टेप होटल जैसी खुशबू और स्वाद लाने में सबसे ज्यादा मदद करता है. इस रेसिपी में तेल की मात्रा बहुत कम न रखें, क्योंकि क्रीम या काजू का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.
दोनों को मिक्स करते समय क्या करना चाहिए?
अंडों को ग्रेवी में डालने का तरीका भी स्वाद पर असर डालता है. पूरे अंडे डालने की बजाय उन्हें बीच से दो हिस्सों में काटकर करी में डालें. इससे अंडों पर मसाले की अच्छी परत चढ़ती है और हर निवाले में भरपूर स्वाद मिलता है. अगर आप इस करी में थोड़ा बदलाव करना चाहते हैं, तो अंडों की जगह पनीर, मशरूम या अपनी पसंद की सब्जियों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. पनीर को आखिर में डालना बेहतर रहता है, जबकि मशरूम और सब्जियों को पहले से हल्का पकाकर ग्रेवी में मिलाना चाहिए. वहीं ज्यादा रिच स्वाद पसंद हो तो आखिर में 1 से 2 चम्मच फ्रेश क्रीम डाल सकते हैं. चाहें तो 6 से 8 काजू मसाले के साथ पीसकर भी ग्रेवी को और ज्यादा मलाईदार बनाया जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 07:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kopi Luwak: इस जानवर की पॉटी से बनती है दुनिया की सबसे महंगी  ड्रिंक! एक कप की कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश</title>
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        <description><![CDATA[ Animal Behind The World&#039;s Most Expensive Coffee: दुनिया में कॉफी पीने वालों की कमी नहीं है, लेकिन क्या आप ऐसी कॉफी के बारे में जानते हैं, जो एक जंगली जानवर की पॉटी से तैयार होती है? सुनने में यह अजीब जरूर लगता है, लेकिन यही सच है. इस खास कॉफी का नाम कोपी लुवाक है, जिसे दुनिया की सबसे महंगी कॉफी में गिना जाता है. इसकी कीमत इतनी ज्यादा है कि एक कप के लिए 8 हजार रुपये से अधिक तक चुकाने पड़ सकते हैं, जबकि एक किलो कॉफी 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये से भी ज्यादा में बिकती है.
क्या है इसके पीछे की कहानी?
इस अनोखी कॉफी की कहानी दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाने वाले एशियन पाम सिवेट नाम के छोटे जंगली जानवर से जुड़ी है. यह जानवर रात में सक्रिय रहता है और जंगलों में अकेले रहना पसंद करता है. पहले इसका भोजन फल, जामुन, कीड़े-मकोड़े और छोटे जीव होते थे, लेकिन जब इंडोनेशिया के जावा, सुमात्रा और सुलावेसी जैसे इलाकों में कॉफी की खेती शुरू हुई तो इसे कॉफी चेरी बेहद पसंद आने लगी.
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पॉटी से बाहर निकलता है
सिवेट पके हुए कॉफी चेरी खा जाता है, लेकिन उसके पेट में मौजूद बीज पूरी तरह पचते नहीं हैं. यही बीज उसकी पॉटी के साथ बाहर निकल आते हैं. सालों पहले कॉफी बागानों में काम करने वाले मजदूरों ने इस बात पर ध्यान दिया. उन्होंने इन बीजों को इकट्ठा किया, अच्छी तरह साफ किया और फिर उन्हें भूनकर कॉफी बनाई. हैरानी की बात यह थी कि इस तरह तैयार कॉफी का स्वाद सामान्य कॉफी से बिल्कुल अलग निकला.
क्यों होता है यह खास?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सिवेट के डाइजेशन सिस्टम से गुजरने के दौरान प्राकृतिक एंजाइम और पेट के एसिड कॉफी बीन्स में मौजूद कुछ प्रोटीन को तोड़ देते हैं. इससे कॉफी की कड़वाहट कम हो जाती है और उसका स्वाद ज्यादा स्मूद, खुशबूदार और हल्का चॉकलेटी हो जाता है. यही वजह है कि इसे दुनियाभर के कई कॉफी शौकीन बेहद खास मानते हैं. जंगल में रहने वाले सिवेट सिर्फ सबसे अच्छी और पूरी तरह पकी हुई कॉफी चेरी ही चुनते हैं. यही कारण है कि प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाली कोपी लुवाक की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है. लेकिन इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने इस जानवर के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है.
अब होता है इनके ऊपर अत्याचार
आज बड़ी मात्रा में कोपी लुवाक बनाने के लिए कई जगह सिवेट को जंगल से पकड़कर छोटे-छोटे पिंजरों में कैद कर दिया जाता है. उन्हें जबरन सिर्फ कॉफी चेरी खिलाई जाती है, जबकि उनका प्राकृतिक भोजन और खुला वातावरण उनसे छीन लिया जाता है. लगातार कैद में रहने और एक जैसा भोजन मिलने से ये जानवर तनाव, कुपोषण और कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. कई मामलों में उनकी समय से पहले मौत भी हो जाती है. हालांकि इंडोनेशिया में जंगली सिवेट को पकड़ने पर नियम और सीमाएं तय हैं, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि इनका पालन हर जगह प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता. यही वजह है कि कोपी लुवाक का कारोबार आज भी पशु क्रूरता और वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवालों के घेरे में रहता है.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Sink Trap Leak: किचन सिंक से टपक रहा पानी तो अपनाएं ये ट्रिक्स, बिना प्लंबर के मिनटों में होगा ठीक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix A Leaking Sink Trap: घर में सिंक के नीचे से पानी टपकने की समस्या आम लग सकती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है. धीरे-धीरे होने वाला रिसाव किचन कैबिनेट, फर्श और वहां रखे सामान को नुकसान पहुंचा सकता है. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में इस समस्या को बिना ज्यादा खर्च किए आसानी से ठीक किया जा सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आप इसको आसानी से सही कर सकते हैं.&amp;nbsp;
कैसे ठीक कर सकते हैं सिंक?
प्लंबिंग एक्सपर्ट के मुताबिक सिंक ट्रैप, जिसे पी-ट्रैप भी कहा जाता है, में लीकेज की सबसे आम वजह ढीले कनेक्शन, घिस चुके वॉशर, पाइप की गलत फिटिंग या फिर पुराने और टूटे हुए पार्ट्स होते हैं. ऐसे में सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि पानी आखिर किस जगह से निकल रहा है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि जांच शुरू करने से पहले पूरे ट्रैप को अच्छी तरह सूखे कपड़े से साफ कर लें. इसके बाद सिंक के नीचे एक बाल्टी रखें और कुछ मिनट तक गर्म पानी चलाएं. अब हर कनेक्शन को ध्यान से देखें. जरूरत पड़ने पर टॉर्च का इस्तेमाल करें. कई बार पानी ऊपर की किसी जगह से रिसता है और नीचे किसी दूसरे हिस्से से टपकता है, जिससे असली वजह समझना मुश्किल हो जाता है.
इस बात का रखें ध्यान
अधिकतर मामलों में लीकेज स्लिप-जॉइंट नट्स के पास दिखाई देती है. यदि कनेक्शन ढीला है तो उसे हाथ से कसना काफी हो सकता है. जरूरत पड़ने पर प्लायर की मदद से हल्का सा अतिरिक्त टर्न दिया जा सकता है. हालांकि एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि जरूरत से ज्यादा कसने पर प्लास्टिक फिटिंग टूट सकती है या वॉशर खराब हो सकता है. अगर नट्स कसने के बाद भी रिसाव बंद नहीं होता, तो वॉशर की जांच करनी चाहिए. समय के साथ वॉशर सख्त या चपटे हो जाते हैं, जिससे सीलिंग ठीक से नहीं हो पाती. ऐसे में नए वॉशर लगाना सबसे आसान और सस्ता समाधान माना जाता है.
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ट्रैप में दरार आने पर क्या करें?
वहीं यदि ट्रैप में दरार आ गई हो या धातु का पाइप जंग खा चुका हो, तो पूरे ट्रैप को बदलना बेहतर विकल्प है. बाजार में मिलने वाले पीवीसी पी-ट्रैप कम कीमत में उपलब्ध हैं और जंग लगने की समस्या से भी बचाते हैं. नया ट्रैप लगाते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी वॉशर सही दिशा में लगे हों और पाइप एक-दूसरे के साथ ठीक से अलाइन हों. प्लंबिंग एक्सपर्ट का कहना है कि यदि बार-बार लीकेज हो रही है या फिटिंग के धागे खराब हो चुके हैं, तो केवल एक हिस्से को बदलने की बजाय पूरी असेंबली बदलना ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ समाधान साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Digital Parenting: पाबंदी लगाने से काम नहीं चलेगा, बच्चों की सेफ डिजिटल लाइफ के लिए पेरेंट्स अपनाएं ये तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ How Much Online Freedom Should Children Have: आज के माता-पिता ऐसी दुनिया में बच्चों की परवरिश कर रहे हैं, जहां दस साल के बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन होना बिल्कुल आम बात बन चुका है. गेमिंग ऐप्स, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, यूट्यूब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैट टूल्स और स्कूल के डिजिटल डिवाइस अब बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में कितनी आजादी दी जाए और किस उम्र में दी जाए. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सिर्फ स्क्रीन टाइम का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की डिजिटल समझ और मानसिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही है माता- पिता की जिम्मेदारी?
लॉस एंजेलिस बेस्ड सिलिकॉन वैली हाई स्कूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड स्मिथ, जो टेक्नोलॉजी आधारित ऑनलाइन एजुकेशन पर काम करते हैं, वे कहते हैं कि आज बच्चे एक साथ कई डिवाइस इस्तेमाल करते हैं. माता-पिता अब सिर्फ एक मोबाइल स्क्रीन नहीं संभाल रहे, बल्कि ऐप्स, गेम्स और ऑनलाइन कम्युनिटीज की पूरी दुनिया से जूझ रहे हैं. कई प्लेटफॉर्म बच्चों को ज्यादा देर तक जोड़े रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है.
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क्या सिर्फ पाबंदी लगाने से काम चलेगा?
हालांकि सही तरीके से दी गई ऑनलाइन आजादी बच्चों के लिए फायदेमंद भी हो सकती है. इंटरनेट बच्चों को नई जानकारी, क्रिएटिविटी और सीखने के मौके देता है. जर्नल ऑफ कम्युनिकेशन &amp;nbsp;में प्रकाशित 2017 की एक बड़ी यूरोपियन स्टडी में 8 देशों के 6,400 बच्चों और उनके माता-पिता को शामिल किया गया था. इसमें पाया गया कि जिन माता-पिता ने सिर्फ रोक लगाने के बजाय बच्चों से खुलकर बातचीत की, उनके बच्चों में बेहतर डिजिटल स्किल्स और सुरक्षित ऑनलाइन आदतें विकसित हुईं. रिसर्च में यह भी सामने आया कि जरूरत से ज्यादा पाबंदियां बच्चों की सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने की क्षमता को सीमित कर सकती हैं.
कब सीमाएं तय करना जरूरी?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चों को ऑनलाइन आजादी देने का फैसला सिर्फ उम्र देखकर नहीं होना चाहिए. डेविड स्मिथ के मुताबिक दो एक ही उम्र के बच्चों की समझ और जिम्मेदारी लेने की क्षमता बिल्कुल अलग हो सकती है. अगर बच्चा खुलकर अपनी ऑनलाइन एक्टिविटी के बारे में बात करता है, गलत चीज दिखने पर माता-पिता को बताता है और तय नियमों का पालन करता है, तो यह इस बात का संकेत है कि वह ज्यादा डिजिटल आजादी संभाल सकता है. वहीं अगर बच्चा ऑनलाइन एक्टिविटी छिपाने लगे, ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाए या स्क्रीन टाइम कंट्रोल ना कर पाए, तो उसे अभी और सीमाओं की जरूरत है.&amp;nbsp;
बच्चों से बातचीत करना क्यों जरूरी?
कंप्यूटर्स इन ह्यूमन बिहेवियर जर्नल में 2023 में छपी एक स्टडी में करीब 3,000 माता-पिता और बच्चों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि जो माता-पिता बच्चों से खुलकर बातचीत करते थे, उन्हें बच्चों की असली ऑनलाइन जिंदगी के बारे में ज्यादा सही जानकारी रहती थी. जबकि सिर्फ मॉनिटरिंग ऐप्स और तकनीकी निगरानी पर भरोसा करने वाले माता-पिता कई बार झूठी तसल्ली में रहते थे. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बच्चों के साथ भरोसे वाला रिश्ता बनाना किसी भी पैरेंटल कंट्रोल ऐप से ज्यादा जरूरी है.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Heatwave Health: चिपचिप वाली प्रचंड गर्मी में भी जाम छलका रहे हैं आप? हो सकती है यह दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ What Happens If You Drink Alcohol In Hot Weather: गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर छुट्टियां, पिकनिक, पूल पार्टी, बीच ट्रिप या दोस्तों के साथ आउटडोर ट्रेवल का आनंद लेते हैं. ऐसे मौकों पर कई लोग शराब का सेवन भी करते हैं, लेकिन तेज गर्मी और शराब का यह मेल शरीर के लिए भारी पड़ सकता है. खासकर जब मौसम बेहद गर्म और उमस भरा हो, तब शराब पीने से शरीर पर इसका असर कई गुना बढ़ सकता है. ऐसे में डिहाइड्रेशन से लेकर हीट स्ट्रोक और हादसों तक का खतरा बढ़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे क्या दिक्कत हो सकती है.&amp;nbsp;
गर्मी में जाम छलकाने से क्या दिक्कत हो सकती है?
शराब शरीर में पानी की कमी तेजी से बढ़ाती है. दरअसल, यह एक डाइयूरेटिक ड्रिंक है, यानी इसे पीने के बाद शरीर सामान्य से ज्यादा तरल पदार्थ बाहर निकालने लगता है. दूसरी ओर गर्मी में शरीर पहले से ही पसीने के जरिए पानी खो रहा होता है. ऐसे में दोनों चीजें मिलकर शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट कर सकती हैं. अगर शराब पीने के बाद उल्टी भी हो जाए, तो शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी और बढ़ सकती है. इसलिए अगर कोई शराब पी रहा है, तो उसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी माना जाता है.
&amp;nbsp;हीट स्ट्रोक का भी रहता है खतरा
Pennfoundation संस्था के अनुसार, तेज गर्मी में शराब पीने का एक बड़ा खतरा हीट स्ट्रोक भी है. सामान्य स्थिति में शरीर पसीने के जरिए अपने तापमान को नियंत्रित करता है, लेकिन जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं कर पाती. ऐसे में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और हीट स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है. सिरदर्द, चक्कर आना, भ्रम होना, बेहोशी, दौरे पड़ना या जरूरत से ज्यादा कमजोरी महसूस होना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी होता है.
शराब पीकर इन जगहों जाने से बचना चाहिए
अगर आप गर्मियों में स्विमिंग पूल, नदी, झील या समुद्र के किनारे जा रहे हैं, तो शराब का सेवन और भी ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है. शराब पीने के बाद शरीर का संतुलन, निर्णय लेने की क्षमता और प्रतिक्रिया देने की गति प्रभावित होती है. ऐसे में पानी में फिसलने, डूबने या तैरते समय दूरी का सही अनुमान न लगा पाने का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट शराब पीने के तुरंत बाद पानी में उतरने से बचने की सलाह देते हैं. नाव की सैर के दौरान भी शराब गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है. नाव पर संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, लेकिन शराब पीने के बाद यह क्षमता कमजोर पड़ जाती है. इसके अलावा व्यक्ति जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास में आकर तेज गति से नाव चलाने या जोखिम भरे फैसले लेने लगता है, जिससे हादसे की आशंका बढ़ सकती है.
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किस बात का रखें ध्यान
अगर गर्मियों में कभी शराब का सेवन करें, तो मात्रा सीमित रखें और खुद को ठंडी जगह पर रखने की कोशिश करें. साथ ही पर्याप्त पानी पीते रहें और शराब पीने के बाद वाहन चलाने या पानी में उतरने जैसी एक्टिविटी से बचें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Screen Time For Babies: 2 साल से छोटा है बच्चा तो गलती से भी न देना फोन, &amp;apos;मम्मी&amp;apos; सुनने को तरस जाएंगी आप</title>
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        <description><![CDATA[ Why Babies Under 2 Should Avoid Screen Time: आजकल छोटे बच्चे के रोते ही कई माता-पिता उसे चुप कराने के लिए मोबाइल फोन या टैबलेट थमा देते हैं. कुछ ही सेकंड में बच्चा स्क्रीन देखने में व्यस्त हो जाता है और रोना बंद कर देता है. यह तरीका भले ही आसान लगता हो, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी कीमत बच्चे के भविष्य को चुकानी पड़ सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आपने बच्चों के लिए दिक्कत पैदा कर रहे हैं.&amp;nbsp;
लंबे समय तक डाल सकता है असर
ब्रिटेन की चार यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ने शिशुओं और दो साल से कम उम्र के बच्चों में स्क्रीन टाइम को लेकर कई स्टडी की समीक्षा की है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जीवन के शुरुआती दो साल में बच्चों को जानबूझकर मोबाइल, टैबलेट या किसी भी तरह की स्क्रीन से दूर रखना चाहिए. रिसर्चर का मानना है कि इस उम्र में स्क्रीन का कोई खास फायदा नहीं है, जबकि इसके नुकसान लंबे समय तक असर डाल सकते हैं.
किन चीजों की हो सकती है दिक्कत?
रिपोर्ट के मुताबिक, जो बच्चे कम उम्र से ही नियमित रूप से स्क्रीन देखने लगते हैं, उनमें भाषा सीखने की रफ्तार धीमी हो सकती है. कई बार वे अपने माता-पिता से बातचीत करने की बजाय स्क्रीन में ज्यादा रुचि लेने लगते हैं. ऐसे बच्चों को बोलने में देर हो सकती है और वे &#039;मम्मी&#039; या &#039;पापा&#039; जैसे शुरुआती शब्द भी अपेक्षाकृत देर से बोलते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि बच्चे के शुरुआती साल उसके दिमाग के सबसे तेज विकास का समय होते हैं. इस दौरान वह अपने आसपास के लोगों से बात करके, चेहरे के हाव-भाव देखकर, खेलकर और नई चीजें छूकर सीखता है. अगर यही समय मोबाइल स्क्रीन के सामने बीतने लगे, तो उसके सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
मां-बाप से हो सकती है दूरी
अध्ययन में यह भी सामने आया कि ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में माता-पिता के साथ &amp;nbsp;इमोशनल जुड़ाव कमजोर पड़ सकता है. धीरे-धीरे वे रोने या बेचैन होने पर मां-बाप की गोद में आने की बजाय मोबाइल देखकर शांत होने की आदत विकसित कर सकते हैं. लंबे समय में इसका असर उनके भावनात्मक विकास पर भी पड़ सकता है. रिसर्चर ने यह भी बताया कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की नींद खराब कर सकता है. इसके अलावा आंखों पर असर, शारीरिक गतिविधियों में कमी और आगे चलकर मोटापे का खतरा भी बढ़ सकता है. कम उम्र में मोबाइल की आदत बच्चों को बाहर खेलने, दौड़ने-भागने और आसपास की दुनिया को समझने के अवसरों से भी दूर कर देती है.
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बच्चों की किस चीज की जरूरत होती है
शोध से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में स्क्रीन से पूरी तरह बचना आसान नहीं है, लेकिन दो साल से कम उम्र के बच्चों को जानबूझकर मोबाइल या टैबलेट देना सही फैसला नहीं माना जा सकता. उनका मानना है कि इस उम्र में बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत माता-पिता के साथ बातचीत, खेल, कहानियां सुनने और प्यार भरे स्पर्श की होती है, क्योंकि यही चीजें उनके मानसिक, इमोशनल और भाषा विकास की मजबूत नींव तैयार करती हैं.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Beautiful Places In India: कम बजट में विदेश जैसी छुट्टियां! गुलमर्ग से खज्जियार तक, ये हैं भारत के खूबसूरत &amp;apos;स्विट्जरलैंड&amp;apos;</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/beautiful-places-in-india-कम-बजट-में-विदेश-जैसी-छुट्टियां-गुलमर्ग-से-खज्जियार-तक-ये-हैं-भारत-के-खूबसूरत-स्विट्जरलैंड</link>
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        <description><![CDATA[ Mini Switzerland Destinations In India: विदेश घूमने का सपना देखने वाले ज्यादातर लोगों की ट्रैवल लिस्ट में स्विट्जरलैंड जरूर शामिल होता है. बर्फ से ढके पहाड़, हरी-भरी वादियां, शांत झीलें और खूबसूरत लकड़ी के घर इसकी पहचान हैं. हालांकि, हर किसी के लिए वहां घूमना आसान नहीं होता. अच्छी बात यह है कि भारत में भी कई ऐसी जगहें हैं, जहां पहुंचकर आपको स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरती और सुकून का एहसास हो सकता है. अगर आप कम बजट में शानदार पहाड़ी छुट्टियां बिताना चाहते हैं, तो इन डेस्टिनेशन को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें.
&amp;nbsp;गुलमर्ग
सबसे पहले बात करते हैं गुलमर्ग की. जम्मू-कश्मीर में बसा यह खूबसूरत हिल स्टेशन सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लेता है. दूर-दूर तक फैली बर्फ, देवदार के जंगल और लकड़ी के कॉटेज यहां का नजारा किसी यूरोपीय देश से कम नहीं लगता. यहां की मशहूर गोंडोला राइड पर्यटकों को पहाड़ों की ऐसी खूबसूरती दिखाती है, जिसे लंबे समय तक भुला पाना मुश्किल है. वहीं गर्मियों में यही इलाका हरे-भरे घास के मैदानों और रंग-बिरंगे फूलों से भर जाता है.
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कौसानी&amp;nbsp;
अगर आपको प्रकृति के बीच शांति से वक्त बिताना पसंद है, तो कौसानी बेहतरीन विकल्प हो सकता है. उत्तराखंड का यह छोटा-सा हिल स्टेशन हिमालय की ऊंची चोटियों के शानदार नजारों के लिए जाना जाता है. सुबह का सूर्योदय यहां की सबसे बड़ी खासियत माना जाता है. चीड़ के जंगल, चाय के बागान और शांत वातावरण इसे परिवार और कपल्स दोनों के लिए खास बनाते हैं.
खज्जियार
खज्जियार को लंबे समय से भारत का &#039;मिनी स्विट्जरलैंड&#039; कहा जाता है. हिमाचल प्रदेश में स्थित यह जगह अपनी विशाल हरी घास, घने देवदार के जंगल और बीच में मौजूद छोटी झील के कारण बेहद आकर्षक लगती है. यहां घुड़सवारी करने से लेकर खुले मैदानों में बैठकर प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेने तक, हर पल यादगार बन जाता है. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं.
औली
एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए औली किसी जन्नत से कम नहीं है. सर्दियों में यहां की बर्फीली ढलानें स्कीइंग के लिए मशहूर हैं. वहीं रोपवे की सवारी के दौरान दिखाई देने वाले पहाड़ और घाटियां सफर को और भी यादगार बना देते हैं. गर्मियों में बर्फ पिघलने के बाद यहां फैले हरे-भरे बुग्याल और रंग-बिरंगे फूल इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं.
मुनस्यारी
अगर भीड़-भाड़ से दूर किसी शांत जगह की तलाश है, तो मुनस्यारी आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. उत्तराखंड का यह छोटा-सा कस्बा बर्फ से ढकी चोटियों, शांत माहौल और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. यहां की साफ रातें, तारों से भरा आसमान और सुकून भरा वातावरण उन लोगों को खास पसंद आता है, जो प्रकृति के बीच कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं.
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Kathal Biryani Recipe: घर पर ऐसे बनाएं कटहल बिरयानी, नॉनवेज लवर भी छोड़ देंगे चिकन मटन?</title>
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        <description><![CDATA[ Kathal Biryani Recipe : बिरयानी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. खुशबूदार बासमती चावल, मसालों की महक और हल्की आंच पर पकी बिरयानी का टेस्ट हर किसी को पसंद आता है. आमतौर पर लोग चिकन, मटन या वेज बिरयानी खाते हैं, लेकिन अगर आप वेजिटेरियन हैं और कुछ नया बनाना चाहते हैं, तो कटहल की बिरयानी आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है.
आजकल कटहल की बिरयानी वेजिटेरियन लोगों के बीच काफी पसंद की जा रही है. कटहल को कई लोग वेजिटेरियन मटन भी कहते हैं. इसकी बनावट और टेस्ट काफी हद तक नॉनवेज जैसा महसूस होता है. यही वजह है कि यह डिश नॉनवेज पसंद करने वाले लोगों को भी पसंद आ सकती है. अगर आप घर पर कुछ अलग और टेस्टी बनाना चाहते हैं, तो कटहल की बिरयानी जरूर ट्राई करें. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि घर पर कटहल की बिरयानी कैसे बनाएं.&amp;nbsp;
घर पर कटहल की बिरयानी कैसे बनाएं?
कटहल की बिरयानी बनाने के लिए हमेशा कच्चे कटहल का इस्तेमाल करें. सबसे पहले कटहल को अच्छी तरह छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. ध्यान रखें कि कटहल काटने से पहले अपने हाथों, चाकू और कटिंग बोर्ड पर सरसों का तेल लगा लें. इससे कटहल का चिपचिपा रस हाथों और बर्तनों में नहीं चिपकेगा. इसके बाद कटहल को हल्का उबाल लें या फिर नमक डालकर थोड़ा फ्राई कर लें. इससे उसका कच्चापन खत्म हो जाता है और टेस्ट भी बेहतर हो जाता है.&amp;nbsp;
चावल ऐसे करें तैयार
बासमती चावल को अच्छी तरह धोकर लगभग 30 मिनट तक पानी में भिगो दें. इसके बाद एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें नमक, तेज पत्ता, दालचीनी और इलायची डालें. अब चावल को लगभग 70 प्रतिशत तक पका लें और फिर पानी निकालकर अलग रख दें. ध्यान रखें कि चावल पूरी तरह न पकें, क्योंकि बाद में इन्हें हल्की आंच पर भी पकाना होता है.&amp;nbsp;
ऐसे तैयार करें मसाला
अब एक कढ़ाई में तेल या घी गर्म करें. &amp;nbsp;इसमें जीरा, तेज पत्ता, लौंग और इलायची डालकर तड़का लगाएं. इसके बाद बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें. अब अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर अच्छी तरह पकाएं फिर टमाटर डालकर मसाला तैयार करें. जब मसाला अच्छी तरह पक जाए, तब इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और बिरयानी मसाला डालें.अब इसमें पहले से तैयार किया हुआ कटहल डालकर मसालों में अच्छी तरह मिलाएं. आप चाहें तो इसमें थोड़ा दही भी मिला सकते हैं. इसके बाद इसे कुछ मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, जिससे कटहल में मसालों का टेस्ट अच्छी तरह मिक्स हो जाए.&amp;nbsp;
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अब बिरयानी को इस तरह पकाएं
बिरयानी को पकाने के लिए एक भारी तले का बर्तन लें. इसमें सबसे पहले कटहल के मसाले की एक परत बिछाएं. इसके ऊपर आधे पके चावल की एक परत लगाएं. अब ऊपर से थोड़ा केसर वाला दूध, घी, फ्राई किया हुआ प्याज और बादाम-काजू डालें.
इसी तरह दो से तीन परतें तैयार करें. इसके बाद बर्तन को अच्छी तरह ढक दें.चाहें तो ढक्कन को आटे से सील भी कर सकते हैं जिससे भाप बाहर न निकले. अब इसे धीमी आंच पर लगभग 10 से 20 मिनट तक पकाएं. इससे चावल और मसालों का टेस्ट आपस में अच्छी तरह मिल जाता है और बिरयानी का फ्लेवर कई गुना बढ़ जाता है. जब बिरयानी पूरी तरह तैयार हो जाए, तो इसे गर्मागर्म निकालें और रायते या अपनी पसंद की चटनी के साथ सर्व करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 03:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली पुलिस में जाने का है सपना और रोड़ा बन रही हाइट, ये हैं लंबाई बढ़ाने के टॉप&amp;5 आइडिया</title>
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        <description><![CDATA[ दिल्ली पुलिस में जाने का है सपना और रोड़ा बन रही हाइट, ये हैं लंबाई बढ़ाने के टॉप-5 आइडिया ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Air Cooler Humidity Tips: बदलते मौसम में आपका कूलर भी फेंकने लगा है चिपचिपी हवा, तुरंत अपनाएं ये ट्रिक्स</title>
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        <description><![CDATA[ How to Stop Air Cooler from Making the Room Humid: मानसून की दस्तक के साथ ही मौसम तो सुहाना हो जाता है, लेकिन घरों में एक नई परेशानी शुरू हो जाती है. कई लोग शिकायत करते हैं कि जैसे ही कूलर चलाते हैं, कमरे में ठंडक की जगह चिपचिपाहट महसूस होने लगती है. हवा ठंडी कम और नमी से भरी ज्यादा लगती है. ऐसे में लोग या तो कूलर बंद कर देते हैं या फिर उसी चिपचिपे माहौल में बैठे रहते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान और सस्ते घरेलू उपाय अपनाकर आप कमरे की नमी को काफी हद तक कम कर सकते हैं और कूलर की कूलिंग भी बेहतर बना सकते हैं.
कूलर में हमेशा पानी भरना जरूरी नहीं
ज्यादातर लोगों को लगता है कि कूलर बिना पानी के नहीं चल सकता. लेकिन बारिश के मौसम में हवा में पहले से ही काफी नमी होती है. ऐसे में कूलर में ज्यादा पानी भरने से कमरा और ज्यादा चिपचिपा महसूस हो सकता है. अगर मौसम बहुत ज्यादा उमस भरा है, तो एक बार बिना पानी के कूलर चलाकर भी देख सकते हैं. इससे हवा का सर्कुलेशन बना रहेगा और अतिरिक्त नमी नहीं बढ़ेगी.
पंखे का भी लें सहारा
बरसात के मौसम में सिर्फ कूलर चलाना हमेशा सही विकल्प नहीं होता. अगर कूलर के साथ सीलिंग फैन या पेडेस्टल फैन भी चला दिया जाए, तो कमरे में हवा तेजी से घूमती रहती है और नमी कम महसूस होती है. अगर घर में एग्जॉस्ट फैन है, तो उसे भी कुछ देर के लिए चालू कर दें. साथ ही खिड़की को थोड़ा खुला रखें, ताकि ताजी हवा आती रहे और कमरे में नमी जमा न हो.
5 रुपये वाली चीज करेगी कमाल
अगर कमरे में जरूरत से ज्यादा नमी महसूस हो रही है, तो बेकिंग सोडा आपकी मदद कर सकता है. यह हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को सोखने की क्षमता रखता है. इसके लिए थोड़ा-सा बेकिंग सोडा किसी कपड़े में बांधकर कमरे के एक कोने में टांग दें. इससे कमरे की चिपचिपाहट कम होने में मदद मिल सकती है. अच्छी बात यह है कि बेकिंग सोडा बाजार में बेहद कम कीमत पर आसानी से मिल जाता है.
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कूलर कहां रखा है, यह भी मायने रखता है
अगर कूलर को सही जगह नहीं रखा गया है, तो उसकी कूलिंग भी प्रभावित हो सकती है. कोशिश करें कि कूलर को खिड़की या दरवाजे के पास रखें, ताकि वह बाहर की ताजी हवा खींच सके. इससे कमरे में हवा का प्रवाह बेहतर होगा और उमस भी कम महसूस होगी.
इन छोटी बातों का भी रखें ध्यान
कूलर चलाते समय उसकी फैन स्पीड तेज रखें, ताकि हवा पूरे कमरे में अच्छी तरह फैल सके. अगर आपके कूलर में खस की घास लगी है, तो उसे साफ रखें और उसमें फफूंदी न लगने दें. इसके अलावा कमरे में भारी कालीन या मोटे पर्दे हों, तो उन्हें कुछ समय के लिए हटा दें, क्योंकि ये नमी को रोककर रखते हैं और चिपचिपाहट बढ़ा सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Jamun Buying Tips : जामुन मीठे हैं या नहीं? खरीदने से पहले बिना चखे ऐसे पहचानें</title>
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        <description><![CDATA[ Jamun Buying Tips : जामुन मीठे हैं या नहीं? खरीदने से पहले बिना चखे ऐसे पहचानें ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Thyroid Problems in Women: मर्दों के बजाय महिलाओं को ज्यादा क्यों होती है थायराइड की समस्या, जानें इसके पीछे की वजह?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Women Get Thyroid Problems: अगर किसी घर में एक ही बीमारी की बात सबसे ज्यादा सुनने को मिलती है, तो वह थायराइड है और हैरानी की बात यह है कि इसके मरीजों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं ज्यादा होती है. कई बार लोग इसे सिर्फ बढ़ते वजन या कमजोरी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन सच यह है कि थायराइड शरीर के कई जरूरी कामों को प्रभावित करता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थायराइड की समस्या ज्यादा क्यों होती है? इसके पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई जैविक और हार्मोनल कारण जिम्मेदार माने जाते हैं.
महिलाओं में क्यों होती है यह दिक्कत ज्यादा?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली cadabamsdiagnostics के अनुसार, अपने जीवनकाल में हर आठ में से एक महिला को कभी न कभी थायराइड की समस्या हो सकती है. महिलाओं में यह बीमारी होने का खतरा पुरुषों की तुलना में करीब पांच से आठ गुना ज्यादा माना जाता है. उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम भी बढ़ता जाता है और कई मामलों में इसके लक्षण लंबे समय तक पहचान में नहीं आते. दरअसल, थायराइड गर्दन में मौजूद तितली के आकार की एक ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और विकास को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है. जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तब हाइपोथायराइडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं.
क्या होते हैं इसके पीछे के कारण?
महिलाओं में थायराइड की समस्या ज्यादा होने की सबसे बड़ी वजह हार्मोनल बदलाव और ऑटोइम्यून बीमारियां मानी जाती हैं. महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन और इम्यून सिस्टम पुरुषों से अलग होती है. यही कारण है कि ऑटोइम्यून बीमारियां महिलाओं में अधिक देखने को मिलती हैं. ऐसी स्थिति में शरीर की इम्यून सिस्टम गलती से थायराइड ग्रंथि पर ही हमला करने लगती है, जिससे हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस और ग्रेव्स डिजीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
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महिलाओं के लाइफ में किन फेस में होते हैं ये बदलाव?
महिलाओं के जीवन के कुछ खास पड़ाव भी थायराइड के जोखिम को बढ़ा देते हैं. गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद का समय और &amp;nbsp;मेनोपॉज के दौरान शरीर में हार्मोन तेजी से बदलते हैं. इन बदलावों का असर थायराइड ग्रंथि पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि इन चरणों में महिलाओं को नियमित जांच कराने की सलाह दी जाती है. थायराइड का असर सिर्फ वजन या थकान तक सीमित नहीं रहता. यह पीरियड्स को अनियमित कर सकता है, गर्भधारण में दिक्कत पैदा कर सकता है और गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है. वहीं बढ़ती उम्र में इसके लक्षण कई बार मेनोपॉज जैसे लगते हैं, जिससे बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है.
किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए इग्नोर?
अगर बिना किसी वजह के लगातार थकान महसूस हो, अचानक वजन बढ़ने या घटने लगे, बाल झड़ने लगें, त्वचा रूखी हो जाए, मूड बार-बार बदलने लगे या गर्दन में सूजन दिखाई दे, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेकर टीएसएच, टी3 और टी4 जैसे जरूरी ब्लड टेस्ट कराना बेहतर रहता है. समय पर जांच और सही इलाज से थायराइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Why Do Girls Grow Beard And Mustache: चेहरे पर अनचाहे बाल! लड़कियों में क्यों होती है दाढ़ी&amp;मूंछ की दिक्कत? भूलकर भी न करें इग्नोर</title>
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        <description><![CDATA[ Why Do Women Have Beard And Mustache:&amp;nbsp;महिलाओं के दाढ़ी-मूंछ क्यों निकलते हैं? जैसे ही आपके मुंह से ये सवाल निकलता है, आपके आसपास बैठे लोगों के ज्ञान चक्षु से धड़ाधड़ ज्ञान का सागर बहने लगता है. लोग अपने-अपने हिसाब से इसको अलग-अलग नया नाम दे देते हैं. शहरों में फिर भी इस तरह के गॉसिप कम देखने को मिलते हैं. लेकिन अगर गांवों में किसी को गलती से भी पता चल जाए कि किसी लड़की को इस तरह की दिक्कत है, फिर वह चर्चा का विषय बन जाती है. खैर, लोगों को छोड़ना चाहिए क्योंकि ये उनके अपने विचार और ज्ञान हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर लड़कियों में दाढ़ी-मूंछ क्यों निकलती है और क्या इसके पीछे कोई दिक्कत होती है.
लड़कियों के दाढ़ी मूछ क्यों?
&amp;nbsp;मेडिकल के बारे में जानकारी देने वाली संस्था Mayoclinic के अनुसार, महिलाओं के चेहरे, चेस्ट, पीठ या शरीर के अन्य हिस्सों पर जरूरत से ज्यादा काले और मोटे बाल उगना हिर्सुटिज्म कहलाता है. इस स्थिति में बालों का बढ़ने का पैटर्न पुरुषों जैसा हो जाता है. सबसे अधिक बाल होंठों के ऊपर, ठुड्डी, छाती, पेट, जांघों के अंदरूनी हिस्से और पीठ पर दिखाई देते हैं. यह केवल सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि कई बार शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है.&amp;nbsp;
किस कारण से होती है यह दिक्कत?
हिर्सुटिज्म का सबसे बड़ा कारण शरीर में पुरुष हार्मोन यानी एंड्रोजन का सामान्य से अधिक होना है. इनमें टेस्टोस्टेरोन प्रमुख हार्मोन है. जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है तो महिलाओं के शरीर में अनचाहे बाल तेजी से उगने लगते हैं. कुछ मामलों में इसके साथ आवाज भारी होना, सिर के बाल झड़ना, मुंहासे बढ़ना, ब्रेस्ट का आकार कम होना, मांसपेशियां उभरना और क्लिटोरिस का आकार बढ़ना जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं.&amp;nbsp;
क्या हेल्थ दिक्कत भी होती है?
अब आते हैं कि क्या इस समस्या के पीछे कोई हेल्थ कारण भी छिपे हो सकते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे आम वजह पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम जिसे अब पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम कहा जाता है, वह है, जिसमें हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है. इसके अलावा कुशिंग सिंड्रोम, जन्म से होने वाली कॉनजेनिटल एड्रिनल हाइपरप्लासिया, ओवरी या एड्रिनल ग्रंथि में बनने वाले कुछ दुर्लभ ट्यूमर भी इसकी वजह बन सकते हैं. कुछ दवाएं जैसे मिनॉक्सिडिल, डैनाजोल, टेस्टोस्टेरोन या डीएचईए सप्लीमेंट लेने से भी शरीर पर अतिरिक्त बाल उग सकते हैं. हालांकि कई महिलाओं में कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता.&amp;nbsp;
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किनमें अधिक होता है इसका खतरा?
कुछ महिलाओं में हिर्सुटिज्म का खतरा दूसरों की तुलना में अधिक होता है. अगर परिवार में किसी को पीसीओएस या जन्मजात हार्मोन संबंधी बीमारी रही है तो जोखिम बढ़ सकता है. भूमध्यसागरीय, मध्य-पूर्वी और दक्षिण एशियाई मूल की महिलाओं में भी यह समस्या अपेक्षाकृत ज्यादा देखी जाती है. वहीं मोटापा भी एंड्रोजन हार्मोन के स्तर को बढ़ाकर इस स्थिति को और गंभीर बना सकता है.
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
हिर्सुटिज्म जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन इसका मानसिक असर काफी गहरा हो सकता है। कई महिलाएं अपने लुक को लेकर असहज महसूस करती हैं और आत्मविश्वास में कमी या तनाव का सामना करती हैं. यदि इसके पीरियड अनरेगुलर हो, चेहरे या शरीर पर अचानक तेजी से बाल बढ़ने लगें या आवाज में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WhatsApp पर मिलेगा आयुष्मान भारत का पूरा सिस्टम, सरकार ने लॉन्च किया &amp;apos;आयुष्मान सारथी&amp;apos; AI चैटबॉट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/whatsapp-पर-मिलेगा-आयुष्मान-भारत-का-पूरा-सिस्टम-सरकार-ने-लॉन्च-किया-आयुष्मान-सारथी-ai-चैटबॉट</link>
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        <description><![CDATA[ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना PM-JAY से जुड़ी सेवाओं को और आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने &#039;आयुष्मान सारथी&#039; नाम से आधिकारिक WhatsApp चैटबॉट लॉन्च किया है. सरकार का कहना है कि अब लाभार्थियों को कई जरूरी सेवाओं के लिए सरकारी दफ्तर या कॉल सेंटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वे सीधे WhatsApp के जरिए 24 घंटे सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे.
WhatsApp पर मिलेंगी कई जरूरी सेवाएं
आयुष्मान सारथी के जरिए लाभार्थी PM-JAY के तहत अपनी पात्रता जांच सकेंगे. नया आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर सकेंगे. कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और eKYC दोबारा कर सकेंगे. इसके अलावा आधार लिंक करना, कार्ड लॉक या अनलॉक करना, इलाज का रिकॉर्ड देखना, वॉलेट बैलेंस चेक करना आसान होगा. वहीं, 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए आयुष्मान वय वंदना कार्ड से जुड़ी सेवाएं भी इसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी.
अस्पताल खोजने से लेकर शिकायत दर्ज करने तक की सुविधा
चैटबॉट सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए लाभार्थी अपने नजदीकी पैनल वाले अस्पताल खोज सकते हैं. शिकायत दर्ज कर सकते हैं. शिकायत की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं या जरूरत पड़ने पर उसे वापस भी ले सकते हैं. इसके अलावा कॉल बैक की सुविधा और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद फीडबैक देने का विकल्प भी मिलेगा.
सरकार का दावा- सेवा होगी तेज और पारदर्शी
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, आयुष्मान सारथी सुरक्षित API आधारित सिस्टम पर काम करता है और सीधे PM-JAY प्लेटफॉर्म से जुड़ा है. इससे लाभार्थियों को रियल-टाइम जानकारी मिलेगी, सेवा वितरण तेज होगा और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम पड़ेगी. मंत्रालय का मानना है कि इससे शिकायत निवारण और सेवा की निगरानी भी बेहतर होगी.
कैसे करें इस्तेमाल?
आयुष्मान सारथी का इस्तेमाल करना बेहद आसान है. लाभार्थी WhatsApp नंबर +91 72908 23838 पर &quot;HI&quot; भेजकर चैटबॉट शुरू कर सकते हैं या सरकार की ओर से जारी QR कोड स्कैन कर सकते हैं. इसके बाद उन्हें सभी उपलब्ध सेवाओं के विकल्प WhatsApp पर ही मिल जाएंगे.
क्यों है अहम यह पहल?
आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है, जिससे करोड़ों लोग जुड़े हैं. ऐसे में WhatsApp जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म पर सेवाएं उपलब्ध होने से लाभार्थियों के लिए योजना का उपयोग पहले से कहीं अधिक आसान, तेज और सुविधाजनक होने की उम्मीद है. खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों और डिजिटल सेवाओं का सीमित अनुभव रखने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>अब छोटे क्लिनिक और OPD भी होंगे डिजिटल, सरकार लाई Cloud&amp;Based हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/अब-छोटे-क्लिनिक-और-opd-भी-होंगे-डिजिटल-सरकार-लाई-cloud-based-हॉस्पिटल-मैनेजमेंट-सिस्टम</link>
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        <description><![CDATA[ Cloud-Based Hospital Management System: देश में लाखों छोटे क्लिनिक और डॉक्टर आज भी रजिस्टर और कागज़ी रिकॉर्ड पर निर्भर हैं. इसी को बदलने के लिए सरकार एक ऐसा क्लाउड आधारित सिस्टम लेकर आई है, जिससे ये छोटे क्लिनिक भी आसानी से डिजिटल हो सकेंगे. आज इस सिस्टम से जुड़े एक प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जिसका नाम है eSushrut@Clinic.
यह एक क्लाउड पर चलने वाला Hospital Management Information System यानी HMIS है. इसे खासतौर पर छोटे OPD क्लिनिक की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया गया है. सरकार की योजना इसे सरकारी प्राइमरी हेल्थ सेंटर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर सब-सेंटर और प्राइवेट क्लिनिक सभी के लिए खोलने की है.
कहां आ रही थी दिक्कत?&amp;nbsp;
अभी तक जो बड़े HMIS सॉफ्टवेयर बाजार में हैं वो छोटे क्लिनिक के लिए महंगे और काफी जटिल साबित होते रहे हैं. यही वजह है कि डिजिटल हेल्थ की दौड़ में छोटे क्लिनिक पीछे रह जाते थे और ज्यादातर अब भी हाथ से लिखे रिकॉर्ड पर ही काम चला रहे थे. काफी समय से एक ऐसे सरकारी और सस्ते HMIS की मांग उठ रही थी जो छोटी जगहों के लिए हो. कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भी अपनी सरकारी हेल्थ फैसिलिटी के लिए ऐसे हल्के HMIS में दिलचस्पी दिखाई थी.
क्या-क्या कर सकेगा यह सिस्टम?
इस प्लेटफॉर्म से क्लिनिक के रोजमर्रा के काम अपने आप होने लगेंगे. इसमें मरीज का रजिस्ट्रेशन बिलिंग और MIS रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं हैं. साथ ही speech-to-text की सुविधा भी है, यानी डॉक्टर बोलकर भी जानकारी दर्ज करा सकेंगे. इसमें Clinical Decision Support System भी दिया गया है जो इलाज से जुड़े फैसलों में डॉक्टर की मदद करेगा और गलती की गुंजाइश घटाएगा.
खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए ज्यादा टेक्निकल जानकारी की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसे किसी भी डिवाइस से एक्सेस किया जा सकेगा. इसमें कोई जटिल सेटअप नहीं लगाना पड़ेगा. यह सिस्टम Ayushman Bharat Digital Mission यानी ABDM के नए फीचर्स से भी जुड़ा है जिसमें Find ABHA Scan &amp;amp; Share और CDSS जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
कौन इस्तेमाल कर सकेगा?
इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए Health Professional Registry यानी HPR और Health Facility Registry यानी HFR का हिस्सा होना जरूरी है. जो डॉक्टर HPR में रजिस्टर्ड नहीं हैं वो इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इससे यह पक्का होगा कि सिर्फ असली और प्रमाणित डॉक्टर ही इस सिस्टम को चला सकें.
कितनी होगी कीमत?
यह सॉफ्टवेयर पांच यूजर तक के लिए 499 रुपये प्रति माह की दर पर मिलेगा. NHA के साथ समझौते के तहत इस पर 200 रुपये की छूट मिलेगी, जिसके बाद असल में हर महीने सिर्फ 299 रुपये देने होंगे. शुरुआती तीन महीने के लिए यह सॉफ्टवेयर बिल्कुल मुफ्त रहेगा. अगर कोई क्लिनिक पांच से ज्यादा यूजर जोड़ना चाहे तो हर अतिरिक्त यूजर के लिए 50 रुपये देने होंगे.
NHA और C-DAC का समझौता
डिजिटल हेल्थ और ABDM को बढ़ावा देने के लिए National Health Authority यानी NHA ने C-DAC के साथ एक समझौता किया है. इसके मुताबिक सॉफ्टवेयर की देखरेख और अपडेट का काम C-DAC संभालेगा जबकि NHA सहूलियत और आर्थिक मदद देगा. मरीजों को ABDM से जुड़े SMS भेजने और क्लाउड होस्टिंग का खर्च NHA उठाएगा. ग्राहकों को शुरुआती मदद देने के लिए NHA अपनी कॉल सेंटर सेवा भी देगा जबकि कॉल सेंटर कर्मचारियों की ट्रेनिंग और क्वालिटी ऑडिट C-DAC करेगा.
अब तक कितने क्लिनिक जुड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 800 से ज्यादा हेल्थ फैसिलिटी eSushrut@Clinic से जुड़ चुकी हैं और इन पर 680 से ज्यादा हेल्थ रिकॉर्ड बन चुके हैं. इसके अलावा C-DAC का पूरा eSushrut सॉफ्टवेयर देश के 15 से ज्यादा AIIMS और कई राज्य सरकार के अस्पतालों में पहले से चल रहा है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अब, छोटे, क्लिनिक, और, OPD, भी, होंगे, डिजिटल, सरकार, लाई, Cloud-Based, हॉस्पिटल, मैनेजमेंट, सिस्टम</media:keywords>
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        <title>Girlfriend Travel Tips: गर्लफ्रेंड के साथ ट्रैवल का बना रहे हैं प्लान? इन जरूरी बातों का रखें ध्यान, सफर रहेगा सेफ</title>
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        <description><![CDATA[ Safety Tips Before Travelling with Your Girlfriend: चारों तरफ शांत पहाड़ियां, झरने, नदियां और इसके साथ आप अपनी प्रेमिका के साथ दो मीठी-मीठी बातें कर रहे हैं. मौसम का लुत्फ उठा रहे हैं, तो फिर आपको जिंदगी में इससे खूबसूरत पल क्या चाहिए. हर प्रेमी युगल यही सोचता है कि वह ऐसे मोमेंट का आनंद ले सके. अगर आप भी ऐसे किसी ट्रिप का प्लान बना रहे हैं, तो थोड़ा जल्दबाजी करने से पहले ठहरना चाहिए. ऐसे ट्रिप के लिए कुछ प्लानिंग की जरूरत होती है, ताकि रास्ते या फिर डेस्टिनेशन पर आपको किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े. चलिए आपको बताते हैं कि किन चीजों की तैयारी करना जरूरी है?
जरूरी डॉक्यूमेंट और फोन हमेशा तैयार रखें
यह सबसे पहली और सबसे जरूरी बात है कि यात्रा के दौरान फोन पूरी तरह चार्ज रखें और साथ में पावर बैंक भी रखें. आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र अपने पास रखें. साथ ही मोबाइल में इमरजेंसी नंबर सेव रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सके.
फर्स्ट एड और जरूरी दवाइयां साथ रखें
सफर में कब किस चीज की जरूरत पड़ जाए, कहा नहीं जा सकता. इसलिए फर्स्ट एड किट, नियमित दवाइयां, सैनिटाइजर, टिश्यू और पानी की बोतल जैसे जरूरी सामान अपने बैग में जरूर रखें.
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बजट पहले ही तय कर लें
घूमने का मजा तभी आता है, जब पैसों को लेकर बार-बार सोचने की जरूरत न पड़े. इसलिए होटल, खाने-पीने, घूमने और शॉपिंग का बजट पहले ही तय कर लें. इससे बाद में किसी तरह की गलतफहमी या बहस की संभावना कम हो जाती है.
ट्रिप से पहले खुलकर बात करें
हर इंसान छुट्टियां अलग तरीके से बिताना पसंद करता है. किसी को एडवेंचर पसंद होता है तो कोई सिर्फ आराम करना चाहता है. इसलिए निकलने से पहले इस बात पर चर्चा कर लें कि आप दोनों इस ट्रिप से क्या चाहते हैं. इससे जगह चुनने और प्लान बनाने में आसानी होगी.
एक-दूसरे की पसंद को भी मौका दें
जरूरी नहीं कि आपकी हर पसंद पार्टनर से मिले. अगर उन्हें ट्रैकिंग पसंद है या किसी नई एक्टिविटी को आजमाना चाहते हैं, तो एक बार जरूर कोशिश करें. हो सकता है वही चीज आपकी भी पसंद बन जाए. रिश्तों में समझौते से ज्यादा जरूरी एक-दूसरे की पसंद का सम्मान करना होता है.
सारी जिम्मेदारी अकेले न उठाएं
होटल बुक करना, टिकट कराना, घूमने की जगहें ढूंढ़ना या जरूरी सामान की लिस्ट बनाना, इन सभी कामों को आपस में बांट लें. इससे किसी एक व्यक्ति पर पूरा दबाव नहीं पड़ेगा और ट्रिप शुरू होने से पहले ही तनाव भी नहीं होगा.
प्राइवेसी और सुरक्षा का रखें ध्यान
होटल बुक करते समय उसकी लोकेशन, सुरक्षा और प्राइवेसी जरूर चेक करें. कोशिश करें कि ऐसी जगह रुकें, जहां आप दोनों सहज महसूस करें. साथ ही जरूरी डॉक्यूमेंट्स की कॉपी अपने पास रखें और परिवार या किसी करीबी को अपनी ट्रैवल डिटेल्स जरूर बता दें.
सुनसान जगहों पर जाने से बचें
अगर किसी नई जगह घूमने जा रहे हैं, तो रात में सुनसान इलाकों या कम भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचें. हमेशा ऐसी जगहों का चुनाव करें, जहां लोगों की आवाजाही हो और जरूरत पड़ने पर मदद आसानी से मिल सके.
छोटी बातों पर नाराज न हों
यात्रा के दौरान फ्लाइट लेट होना, ट्रैफिक में फंसना या होटल में छोटी-मोटी दिक्कत आना सामान्य बात है. ऐसे समय में एक-दूसरे पर गुस्सा करने के बजाय शांत रहना बेहतर होता है. आखिर ट्रिप का मकसद अच्छे पल बिताना है, न कि छोटी-छोटी बातों पर बहस करना.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Delhi Chor Bazaar: कौड़ियों के दाम मिलते हैं ब्रांडेड कपड़े व गैजेट्स! जानें दिल्ली में कहां&amp;कब लगता है चोर बाजार?</title>
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        <description><![CDATA[ What To Buy In Delhi Chor Bazaar: चोर बाजार... जब हम ये शब्द सुनते हैं, तो हमारे मन में एक नहीं, बल्कि तमाम तस्वीरें बनती हैं. जैसे कि सस्ते में फोन, कपड़े और बाकी चीजें मिल रही हैं और हम झोला भर-भरकर शॉपिंग कर रहे हैं. दिल्ली अपने बाजारों के लिए सिर्फ आसपास के राज्यों में ही नहीं, बल्कि साउथ से लेकर नॉर्थ-ईस्ट के सुदूर इलाकों तक फेमस है. लोग यहां कपड़े खरीदने और बाकी दूसरी जरूरत की चीजें लेने आते रहते हैं. राजधानी में लगने वाले तमाम फेमस बाजारों में से एक है चोर बाजार. नाम ऐसा कि लोगों को लगे कि यहां रास्ते का माल सस्ते में मिल रहा होगा. चलिए आपको बताते हैं कि यह बाजार कब और कहां लगता है. इसके अलावा यहां कितने सस्ते में चीजें उपलब्ध रहती हैं.
कहां लगता है दिल्ली का चोर बाजार?
दिल्ली का चोर बाजार पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के पास लगता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां लोग खरीदारी के लिए सुबह जल्दी आ जाते हैं. रविवार को लगने वाला यह बाजार जामा मस्जिद से लेकर दरियागंज और चावड़ी बाजार तक फैला रहता है. यहां सामान खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं. यहां आपको किताबों से लेकर कपड़े, कैमरे, मोबाइल, जूते, बैग, जिम का सामान, स्टेशनरी, एंटीक पीस और स्वादिष्ट खाना तक सब कुछ मिल जाएगा. यही वजह है कि यहां अच्छी-खासी भीड़ रहती है.
सस्ती किताबें
अगर आपको किताबें पढ़ने का शौक है, तो रविवार के दिन यहां जरूर जाएं. चोर बाजार के पास लगने वाला दरियागंज का मशहूर संडे बुक मार्केट बेहद लोकप्रिय है. यहां उपन्यास, प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें, स्कूल-कॉलेज की किताबें और प्लानर बेहद कम कीमत पर मिल जाते हैं. कई किताबें 20 रुपये से शुरू होती हैं, जबकि कुछ दुकानों पर किताबें किलो के हिसाब से भी बेची जाती हैं.
कपड़ों के दाम काफी कम
फैशन पसंद करने वालों के लिए भी यह बाजार किसी खजाने से कम नहीं है. यहां कई बड़े ब्रांड्स के एक्सपोर्ट सरप्लस या रिजेक्टेड कपड़े बेहद सस्ते दामों पर मिल जाते हैं. सुबह जल्दी पहुंचने वाले लोगों को बेहतर विकल्प मिलने की संभावना रहती है. इसी तरह बैग, वॉलेट और जूतों की भी अच्छी वैरायटी देखने को मिलती है.
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फोन, कैमरे और लैपटॉप
अगर आप कैमरा, मोबाइल या इनके एक्सेसरीज खरीदना चाहते हैं, तो यहां कई विकल्प मिल जाएंगे. कैमरे, लेंस, चार्जर, हेडफोन, मेमोरी कार्ड, टैबलेट और लैपटॉप भी मिल जाएंगे. हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते समय उसकी अच्छी तरह जांच-पड़ताल करना जरूरी है, क्योंकि यहां ओरिजिनल के साथ डुप्लीकेट सामान भी मिल सकता है.
स्पोर्ट्स और फिटनेस का सामान
स्पोर्ट्स और फिटनेस का सामान भी यहां आसानी से मिल जाता है. डंबल, वेट्स, बैट, रैकेट, स्केट्स, हेलमेट और दूसरी खेल सामग्री बाजार की तुलना में कम कीमत पर खरीदी जा सकती है. इसके अलावा स्टेशनरी पसंद करने वालों के लिए भी यहां कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं, जहां कम बजट में अच्छी क्वालिटी का सामान मिल जाता है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Water Tank Cleaning: पानी की टंकी में बार&amp;बार जम जाती है काई, बस डाल दें इस पेड़ की लकड़ी, दूर हो जाएगी दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ How to Clean a Water Tank: घर पर रखी पानी की टंकी को समय-समय पर साफ करना जरूरी होता है. अगर आप इसका ध्यान नहीं रखते हैं, तो टंकी में काई और गंदगी जमने लगती है, जिससे पानी का फ्लो कम हो सकता है और कई बार पाइपलाइन भी प्रभावित हो जाती है. लोग टंकी को साफ करने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं. कोई घरेलू नुस्खे आजमाता है तो कोई बाजार से महंगे प्रोडक्ट खरीदकर लाता है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी लकड़ी के बारे में बता रहे हैं, जिसकी मदद से आप टंकी को लंबे समय तक साफ रख सकते हैं और इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.
कैसे करें टंकी साफ?
अगर आप बार-बार टंकी साफ करने की परेशानी से बचना चाहते हैं, तो एक पारंपरिक तरीका आपके काम आ सकता है. माना जाता है कि जामुन के पेड़ की लकड़ी पानी को लंबे समय तक साफ रखने में मदद करती है और टंकी में काई जमने की समस्या को कम कर सकती है. होम एक्सपर्ट्स के अनुसार, जामुन की लकड़ी में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे पानी की टंकी में रखने से बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकने में मदद मिल सकती है. इससे पानी में काई बनने की संभावना कम होती है और बदबू की समस्या भी काफी हद तक नियंत्रित रह सकती है.
पानी के स्वाद पर भी होता है असर
कई लोगों का मानना है कि जामुन की लकड़ी पानी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करती है. इससे पानी का स्वाद बेहतर महसूस हो सकता है और घरेलू उपयोग के लिए पानी लंबे समय तक साफ बना रह सकता है. हालांकि, पीने के पानी की सुरक्षा के लिए केवल इस उपाय पर निर्भर रहने के बजाय जरूरी गुणवत्ता जांच और उचित शुद्धिकरण भी जरूरी है. इस उपाय का एक बड़ा फायदा यह भी माना जाता है कि टंकी को बार-बार साफ करने की जरूरत कम पड़ती है. इससे समय और मेहनत दोनों की बचत हो सकती है. महंगे वॉटर फिल्टर या दूसरे उपकरणों की तुलना में यह एक आसान और कम खर्च वाला घरेलू तरीका माना जाता है.
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कैसे करें इस्तेमाल?
अब बात करते हैं कि आप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले जामुन की लकड़ी को अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद इसे पानी की टंकी में रख दें. जब भी टंकी की सफाई करें, उस समय लकड़ी को भी साफ पानी से धोकर दोबारा टंकी में रख दें. माना जाता है कि इससे लंबे समय तक टंकी में काई और बदबू की समस्या कम हो सकती है. ध्यान रखें कि यह एक पारंपरिक घरेलू उपाय है. अगर टंकी का पानी पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो उसकी नियमित सफाई, समय-समय पर जांच और जरूरत पड़ने पर उचित वॉटर प्यूरीफिकेशन कराना भी उतना ही जरूरी है.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Cancer Risk: युवाओं में क्यों बढ़ रहा कैंसर? चौंकाने वाली स्टडी में खुलासा&amp; उम्र से पहले बूढ़ा हो रहा है शरीर</title>
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        <description><![CDATA[ Cancer in Young Adults: पिछले कुछ वर्षों में डॉक्टरों ने एक बात पर खास ध्यान दिया है कि पहले जहां कैंसर को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, वहीं अब 30 से 40 साल के लोगों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? हाल ही में नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी ने इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की है. इस रिसर्च के मुताबिक, आज की युवा पीढ़ी का शरीर पहले की तुलना में तेजी से जैविक रूप से बूढ़ा हो रहा है और यही बदलाव कम उम्र में कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है.
कब बढ़ने लगता है खतरा?
इस स्टडी का जिक्र करते हुए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अफशीन एमरानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि शरीर की उम्र अब केवल जन्मतिथि से नहीं, बल्कि उसकी अंदरूनी स्थिति से भी तय होती है. यानी आपकी असली उम्र और शरीर की जैविक उम्र में जितना ज्यादा अंतर होगा, बीमारी का खतरा भी उतना बढ़ सकता है. रिसर्च में ब्रिटेन के यूके बायोबैंक के 1.54 लाख से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल और अमेरिका के ऑल ऑफ अस&#039; रिसर्च प्रोग्राम के 10 हजार से ज्यादा लोगों के हेल्थ डेटा का एनालिसिस किया गया. वैज्ञानिकों ने 1950 के दशक में जन्मे लोगों की तुलना 1965 से 1974 और 1990 के दशक में जन्मे लोगों से की. नतीजों में पाया गया कि नई पीढ़ी में जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज है.
&amp;nbsp;

I&#039;m a cardiologist. A study published four days ago in Nature Medicine just proved something I&#039;ve been trying to tell you on this platform for months: your body is aging faster than your parents&#039; body did at the same age. And that accelerated aging is driving the cancer epidemic&amp;hellip;
&amp;mdash; Afshine Emrani MD FACC (@afshineemrani) June 28, 2026



&amp;nbsp;जैविक उम्र और वास्तविक उम्र के बीच अंतर से क्या खतरा?
रिसर्च के मुताबिक, शरीर की जैविक उम्र और वास्तविक उम्र के बीच जितना ज्यादा अंतर होगा, कैंसर का खतरा भी उतना बढ़ सकता है. स्टडी में यह भी सामने आया कि जिन लोगों का इम्यून सिस्टम अपनी वास्तविक उम्र से ज्यादा बूढ़ा दिखाई दिया, उनमें कम उम्र में फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक था. वहीं जिन लोगों के फैट टिश्यू तेजी से बूढ़े हो रहे थे, उनमें कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम ज्यादा देखा गया.
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उम्र के साथ इन चीजों को होने लगता है नुकसान
एक्सपर्ट का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचना सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन अगर यही नुकसान कम उम्र में तेजी से होने लगे, तो शरीर समय से पहले बूढ़ा होने लगता है. इसकी वजह खराब खानपान, मोटापा, धूम्रपान, प्रदूषण, शारीरिक गतिविधि की कमी और नींद पूरी न होना जैसे कई कारक हो सकते हैं.
क्या इसको धीमा किया जा सकता है?
&amp;nbsp;राहत की बात यह है कि जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है. एक्सपर्ट नियमित व्यायाम करने, संतुलित आहार लेने, स्वस्थ वजन बनाए रखने, धूम्रपान से बचने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह देते हैं. रिसर्चर का मानना है कि अगर कम उम्र में ही अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान हो जाए, तो समय रहते जांच और बचाव के जरिए कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>IRCTC Tour Package: IRCTC का धमाकेदार ऑफर! मानसून में बेहद सस्ते में घूमें साउथ इंडिया, नोट कर लें पूरा टूर प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ IRCTC Dakshin Bharat Yatra: अगर आप दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो आईआरसीटीसी का नया &#039;दक्षिण भारत यात्रा&#039; पैकेज आपके लिए शानदार मौका हो सकता है. भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन के जरिए संचालित यह यात्रा 31 जुलाई 2026 से 11 अगस्त 2026 तक चलेगी. कुल 11 रात और 12 दिन की इस यात्रा में श्रद्धालुओं को तिरुपति बालाजी, रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी और श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए जाएंगे. इस पैकेज की शुरुआती कीमत 23,560 रुपये प्रति व्यक्ति रखी गई है.
कहां से चलेगी ट्रेन?
यह विशेष ट्रेन गोरखपुर से रवाना होगी. रास्ते में मनकापुर, अयोध्या कैंट, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज संगम, रायबरेली, लखनऊ, कानपुर सेंट्रल, उरई, वीरांगना लक्ष्मीबाई (झांसी) और ललितपुर जैसे स्टेशनों से यात्री ट्रेन में सवार हो सकेंगे. यात्रा के दौरान पहले पड़ाव पर ट्रेन रेनिगुंटा पहुंचेगी, जहां से यात्रियों को सड़क मार्ग से तिरुपति ले जाया जाएगा. यहां दो रात रुकने की व्यवस्था रहेगी. इस दौरान श्रद्धालु तिरुपति बालाजी मंदिर के दर्शन कर सकेंगे. हालांकि, तिरुमला दर्शन की व्यवस्था यात्रियों को स्वयं करनी होगी. इसके अलावा श्री कालहस्ती मंदिर और पद्मावती मंदिर के दर्शन भी कराए जाएंगे.
&amp;nbsp;

The sacred south is calling. Experience the profound spirituality of Tirupati Balaji, Rameswaram, Madurai, Kanniyakumari, and Mallikarjuna Jyotirlinga on our 12-day Dakshin Bharat Yatra. Secure your journey today.https://t.co/WDSeNOK7TM(Package Code=NZBG80)@RailMinIndia pic.twitter.com/TG0YjQKrKQ
&amp;mdash; IRCTC Bharat Gaurav Tourist Train (@IR_BharatGaurav) June 25, 2026



&amp;nbsp;रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन&amp;nbsp;
इसके बाद यात्रा रामेश्वरम पहुंचेगी. यहां प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे और यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था भी होगी. यदि किसी कारणवश ट्रेन रामेश्वरम स्टेशन तक नहीं जा पाती है, तो यात्रियों को कुदालनगर या मनामदुरई स्टेशन से सड़क मार्ग के जरिए ले जाया जाएगा. इसके बाद मदुरै में प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे.
प्रमुख स्थानीय स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा
यात्रा के अगले चरण में श्रद्धालु कन्याकुमारी पहुंचेंगे. यहां विवेकानंद रॉक मेमोरियल समेत प्रमुख स्थानीय स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा. इसके बाद ट्रेन मार्कापुर रोड पहुंचेगी, जहां से बस के जरिए श्रीशैलम ले जाकर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए जाएंगे. दर्शन के बाद वापसी की यात्रा शुरू होगी और ट्रेन 11 अगस्त को वापस गोरखपुर पहुंचेगी.
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कितना होगा खर्च?
इस पैकेज की शुरुआती कीमत 23,560 रुपये प्रति व्यक्ति रखी गई है, जो स्लीपर इकोनॉमी श्रेणी के लिए है. वहीं 3ACस्टैंडर्ड श्रेणी का किराया 39,100 रुपये और 2AC कंफर्ट श्रेणी का किराया 51,760 रुपये प्रति व्यक्ति है. बच्चों के लिए अलग किराया निर्धारित किया गया है. यदि कोई यात्री सिंगल बुकिंग कराता है, तो उसे डबल या ट्रिपल शेयरिंग के आधार पर दूसरे यात्री के साथ कमरा साझा करना होगा. इस पैकेज में भारत गौरव ट्रेन से यात्रा, श्रेणी के अनुसार होटल में ठहरने की सुविधा, वॉश एंड चेंज, सुबह की चाय, नाश्ता, दोपहर और रात का शाकाहारी भोजन, स्थानीय परिवहन, ट्रैवल इंश्योरेंस, टूर एस्कॉर्ट और पूरे सफर के दौरान आईआरसीटीसी टूर मैनेजर की सेवाएं शामिल हैं. सभी लागू टैक्स भी पैकेज का हिस्सा हैं.
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        <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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