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    <title>Attention India Hindi &amp; : लाइफस्टाइल</title>
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    <description>Attention India Hindi &amp; : लाइफस्टाइल</description>
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    <dc:rights>Copyright 2024 Attention India&amp; All Rights Reserved.</dc:rights>
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        <title>Indian Thali: क्या भारतीय थाली सच में बढ़ाती है डायबिटीज, जानें किन लोगों के लिए सही नहीं है दाल&amp;रोटी?</title>
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        <description><![CDATA[ Does Indian Thali Increase Diabetes Risk: भारत में खाने की बात हो और थाली में दाल, रोटी और चावल न हों, ऐसा कम ही देखने को मिलता है. कई घरों में आज भी लोग एक ही भोजन में चावल और रोटी दोनों खाते हैं. यह सिर्फ स्वाद या आदत का मामला नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है. लेकिन अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यही आदत कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है.
क्यों हो रही है दिक्कत?
भारत पहले से ही दुनिया में सबसे ज्यादा डायबिटीज मरीजों वाले देशों में गिना जाता है. ऐसे में डॉक्टर अब उन खानपान की आदतों पर भी नजर डाल रहे हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाने और मोटापे का जोखिम बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं. सीके बिरला हॉस्पिटल, जयपुर की सीनियर डाइटिशियन दिव्या जैन बताती हैं कि समस्या दाल, रोटी या चावल में नहीं है, बल्कि इन्हें किस मात्रा में और किस तरह खाया जा रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है.
भारतीय थाली किन लोगों को कर रही बीमार?
दरअसल, एक सामान्य भारतीय थाली में अक्सर चावल, रोटी, आलू की सब्जी, दाल, मिठाई और कभी-कभी मीठे पेय भी शामिल होते हैं. इनमें से ज्यादातर चीजें कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती हैं. जब एक ही भोजन में कई कार्ब स्रोत शामिल हो जाते हैं, तो शरीर पर ग्लूकोज का भार बढ़ जाता है. इसका असर खासतौर पर उन लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है जो पहले से प्रीडायबिटीज, डायबिटीज, मोटापे, हाई ब्लड प्रेशर या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
क्या करते हैं हम गलती?
दिव्या जैन कहती हैं कि आज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों की थाली में कार्बोहाइड्रेट तो भरपूर होता है, लेकिन प्रोटीन और फाइबर की मात्रा कम होती है। कई लोग दो-तीन रोटियों के साथ चावल भी खाते हैं, जबकि पनीर, दही, अंडे, मछली, चिकन या दाल जैसी प्रोटीन वाली चीजें सीमित मात्रा में लेते हैं, वहीं सब्जियों को अक्सर सिर्फ साइड डिश की तरह देखा जाता है.
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हमें किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
आधुनिक लाइफस्टाइल ने इस समस्या को और बढ़ाया है। पहले लोग अधिक शारीरिक मेहनत करते थे, जिससे शरीर अतिरिक्त एनर्जी का उपयोग कर लेता था. लेकिन अब लंबे समय तक बैठकर काम करना, कम शारीरिक गतिविधि और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा रहा है. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको चावल या रोटी खाना बंद कर देना चाहिए. एक्सपर्ट के अनुसार दोनों ही संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं. जरूरत इस बात की है कि थाली का संतुलन सही रखा जाए.

कैसी होनी चाहिए हमारी थाली?
स्वस्थ थाली के लिए आधी प्लेट में सब्जियां और सलाद रखें. एक चौथाई हिस्से में दाल, पनीर, अंडा, चिकन, मछली या दही जैसे प्रोटीन स्रोत शामिल करें. बाकी एक चौथाई हिस्से में रोटी या चावल रखें. नियमित रूप से बड़ी मात्रा में चावल और रोटी दोनों एक साथ खाने से बचें. एक्सपर्ट का कहना है कि डायबिटीज का खतरा किसी एक खाद्य पदार्थ से नहीं, बल्कि लंबे समय तक बनी असंतुलित खाने की आदतों से बढ़ता है. इसलिए दाल-रोटी छोड़ने की नहीं, बल्कि थाली को संतुलित बनाने की जरूरत है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rice Breakfast Recipes: रात को बचे चावल से बना सकते हैं बेहतरीन नाश्ता, उंगलियां चाट&amp;चाटकर खाएंगे बच्चे</title>
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        <description><![CDATA[ How To Use Leftover Rice For Breakfast: भारतीय घरों में चावल अक्सर ज्यादा बन जाते हैं और अगले दिन तक बच ही जाते हैं. कई लोग इन्हें दोबारा गर्म करके खा लेते हैं, जबकि कुछ लोग इन्हें फेंक देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रात के बचे हुए चावल से ऐसा स्वादिष्ट नाश्ता तैयार किया जा सकता है जिसे बच्चे भी बड़े चाव से खाएं? थोड़ी-सी क्रिएटिविटी और कुछ सामान्य सामग्री की मदद से बचे हुए चावल को एकदम नई डिश में बदला जा सकता है. अगर आपके फ्रिज में रात के बचे चावल रखे हैं, तो अगली सुबह उन्हें फेंकने की बजाय इन मजेदार और टेस्टी रेसिपीज में इस्तेमाल करें.
&amp;nbsp;झटपट बनाएं वेज फ्राइड राइस
सुबह के समय अगर जल्दी में नाश्ता तैयार करना हो तो बचे हुए चावल सबसे अच्छे साबित हो सकते हैं. कड़ाही में थोड़ा तेल गर्म करें, उसमें प्याज, गाजर, शिमला मिर्च जैसी सब्जियां डालें और फिर चावल मिलाकर हल्का-सा भून लें. स्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ा सोया सॉस या अपनी पसंद के मसाले डाल सकते हैं. कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट फ्राइड राइस तैयार हो जाएंगे.
कुरकुरा चावल चीला
बेसन और सूजी के चीले तो आपने कई बार खाए होंगे, लेकिन चावल का चीला भी उतना ही स्वादिष्ट होता है. बचे हुए चावल को मिक्सर में पीस लें और उसमें हरी मिर्च, प्याज, धनिया और मसाले मिलाकर घोल तैयार करें. तवे पर इसे फैलाकर सुनहरा होने तक सेंकें. यह नाश्ता बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आएगा.
&amp;nbsp;चावल के टेस्टी पॉप्स
अगर बच्चे रोज एक जैसा नाश्ता खाकर बोर हो गए हैं तो चावल के पॉप्स ट्राई करें. चावल में उबली सब्जियां, मसाले और थोड़ा चीज मिलाकर छोटी-छोटी बॉल्स बनाएं. इन्हें ब्रेड क्रम्ब्स में लपेटकर सुनहरा होने तक फ्राई करें. बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम ये पॉप्स बच्चों के फेवरेट बन सकते हैं.
चावल का पराठा
बचे हुए चावल का पराठा भी एक बेहतरीन विकल्प है. चावल को हल्का मैश करके उसमें नमक, हरी मिर्च, धनिया और मसाले मिलाएं. इस मिश्रण को आटे की लोई में भरकर पराठा बेलें और तवे पर सेंक लें. दही या अचार के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
चावल के पकौड़े
शाम के स्नैक की तरह चावल के पकौड़े नाश्ते में भी खूब पसंद किए जाते हैं. चावल में उबला आलू, प्याज, हरी मिर्च और मसाले मिलाकर छोटे-छोटे पकौड़े तैयार करें. इन्हें सुनहरा होने तक तलें और चाय या चटनी के साथ परोसें.
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लेमन राइस का मजा लें
अगर आपको साउथ इंडियन स्वाद पसंद है तो बचे हुए चावल से लेमन राइस बनाना सबसे आसान तरीका है. राई, करी पत्ता, मूंगफली और नींबू के रस के साथ तैयार यह डिश स्वाद और खुशबू दोनों में शानदार होती है. अब अगली बार जब रात के चावल बच जाएं, तो उन्हें बेकार समझकर फेंकने की बजाय इन स्वादिष्ट नाश्तों में बदल दें. यकीन मानिए, बच्चे उंगलियां चाटते रह जाएंगे.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Wall Dampness Treatment: नया फर्श बनवाने के बाद भी कमरे में आ जाती है सीलन? जान लें इसका इलाज</title>
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        <description><![CDATA[ Why Dampness Appears Even After New Flooring: कई लोग घर की सीलन से परेशान होकर दीवारों की मरम्मत करवाते हैं, नई टाइल्स लगवाते हैं या फिर पूरी फर्श ही बदलवा देते हैं. लेकिन परेशानी तब बढ़ जाती है जब इतना खर्च करने के बाद भी कुछ ही समय में कमरे में दोबारा सीलन दिखने लगती है. दीवारों पर पपड़ी उतरना, बदबू आना, पेंट खराब होना और कोनों में फफूंदी जमना इस बात के संकेत हैं कि समस्या सिर्फ फर्श की नहीं, बल्कि कहीं और भी हो सकती है.&amp;nbsp;
क्यों होती है दिक्कत?
होम एक्सपर्ट के अनुसार सीलन कई कारणों से हो सकती है और केवल नया फर्श लगवा देने से इसका स्थायी समाधान नहीं होता. सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सीलन आ क्यों रही है. &amp;nbsp;अगर जमीन के भीतर मौजूद नमी दीवारों के जरिए ऊपर चढ़ रही है, तो इसे राइजिंग डैम्प कहा जाता है. ऐसे मामलों में नया फर्श लगाने के बाद भी नमी दीवारों और कमरे में बनी रह सकती है. वहीं अगर बाहर की दीवारों में दरारें हैं, छत से पानी रिस रहा है या पाइपलाइन में लीकेज है, तो पानी धीरे-धीरे अंदर प्रवेश करके सीलन पैदा कर सकता है.&amp;nbsp;
वेंटिलेशन न होने के कारण भी सीलन&amp;nbsp;
कई बार कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन न होने के कारण भी सीलन की समस्या बढ़ जाती है. जब हवा में मौजूद नमी ठंडी दीवारों से टकराती है तो पानी की बूंदें बनने लगती हैं. यह स्थिति खासतौर पर बरसात और सर्दियों में ज्यादा देखने को मिलती है.&amp;nbsp;
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सही जांच जरूरी
सीलन की सही वजह जानने के लिए सबसे पहले दीवारों और फर्श का निरीक्षण करें. यदि पेंट उखड़ रहा है, दीवार पर गीले धब्बे दिखाई दे रहे हैं या फफूंदी बन रही है, तो यह नमी का संकेत हो सकता है. कई विशेषज्ञ नमी मापने वाले मीटर की मदद से भी जांच करते हैं ताकि समस्या की गंभीरता का पता लगाया जा सके.
सीलन दूर करने के लिए क्या करना चाहिए?
सीलन को दूर करने के लिए सबसे पहले उसके सोर्स को खत्म करना जरूरी है. यदि पाइपलाइन में लीकेज है तो उसे तुरंत ठीक कराएं. दीवारों में दरारें हैं तो उन्हें वाटरप्रूफ सामग्री से भरें. छत से पानी रिस रहा है तो उसकी मरम्मत कराएं. घर के आसपास ड्रेनेज सिस्टम सही रखें ताकि बारिश का पानी दीवारों के पास जमा न हो. कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन भी बेहद जरूरी है. खिड़कियां खोलकर रखें, एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करें और नमी वाले कमरों में हवा का आवागमन बढ़ाएं. जरूरत पड़ने पर दीवारों पर डैम्प-प्रूफ या वाटरप्रूफ कोटिंग भी करवाई जा सकती है. &amp;nbsp;यदि दीवारों पर फफूंदी या काले धब्बे बन चुके हैं, तो पहले उन्हें साफ करें और उसके बाद एंटी-फंगल या एंटी-मोल्ड पेंट लगाएं. इससे दोबारा सीलन बनने का खतरा कम हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Air Pollution Effects On Brain: सावधान! वायु प्रदूषण से कमजोर होती है याददाश्त, दिमाग को भी पहुंच रहा भारी नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ How Air Pollution Affects Memory And Brain Function: हम रोज जिस हवा में सांस लेते हैं, उसका असर सिर्फ लंग्स और हार्ट तक सीमित नहीं है. नई रिसर्च बताती है कि वायु प्रदूषण हमारे ब्रेन और याददाश्त को भी नुकसान पहुंचा सकता है. खासतौर पर ट्रैफिक, इंडस्ट्री और जंगलों में लगने वाली आग से निकलने वाले सूक्ष्म प्रदूषक कणों का संबंध कमजोर होती कॉग्निटिव फंक्शन से पाया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे प्रदूषण आपके ब्रेन को प्रभावित कर रहा है.&amp;nbsp;
क्या सच में ब्रेन पर पड़ता है असर?
यह स्टडी कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के रिसर्चर की तरफ से किया गया है और 13 मई 2026 को जर्नल स्ट्रोक में ऑनलाइन पब्लिश हुआ. रिसर्च में पाया गया कि जिन इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर अधिक था, वहां रहने वाले लोगों का प्रदर्शन याददाश्त, समझने की क्षमता और मानसिक गति से जुड़े परीक्षणों में अपेक्षाकृत कमजोर रहा. दिलचस्प बात यह है कि यह असर उन क्षेत्रों में भी देखा गया जहां वायु प्रदूषण का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से कम माना जाता है.
किस प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर होता है?
रिसर्च के दौरान यह भी सामने आया कि ट्रैफिक से पैदा होने वाले प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों के दिमाग में एमआरआई स्कैन के जरिए कुछ सूक्ष्म क्षति के संकेत दिखाई दिए. महिलाओं में यह प्रभाव और अधिक स्पष्ट पाया गया. रिसर्चर ने हाईबीपी, डायबिटीज और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जैसे हार्ट रोग संबंधी जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखा, लेकिन इसके बावजूद वायु प्रदूषण और दिमागी बदलावों के बीच संबंध बना रहा.&amp;nbsp;
धीरे- धीरे प्रभावित करते हैं
मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च मेथड्स, एविडेंस एंड इम्पैक्ट के एसोसिएट प्रोफेसर रसेल डी सूजा कहते हैं कि डिमेंशिया अचानक नहीं होता. यह कई दशकों में धीरे-धीरे विकसित होता है. ऐसे कारकों की पहचान करना जो शुरुआती चरण में दिमाग को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जिन्हें रोका जा सकता है, भविष्य में ब्रेन हेल्थ &amp;nbsp;की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. &amp;nbsp;हालांकि यह स्टडी सीधे तौर पर यह साबित नहीं करता कि वायु प्रदूषण डिमेंशिया का कारण बनता है, लेकिन यह उन बढ़ते साइंटफिक प्रमाणों में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ता है जो बताते हैं कि हवा की गुणवत्ता उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है.
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इस अध्ययन की प्रमुख लेखक और मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन की असिस्टेंट प्रोफेसर सैंडी अज़ाब कहती हैं कि कनाडा की हवा को अक्सर साफ माना जाता है, लेकिन हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि कम स्तर का वायु प्रदूषण भी ब्रेन हेल्थ पर असर डाल सकता है. ये बदलाव कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों पहले शुरू हो जाते हैं.&amp;nbsp;
लोगों की सोचने-समझने की क्षमता पर स्टडी
शोधकर्ताओं ने करीब 7,000 मध्यम आयु वर्ग के लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. उन्होंने पीएम2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क और लोगों की सोचने-समझने की क्षमता के बीच संबंध का स्टडी किया. एक्सपर्ट का मानना है कि भविष्य में और लंबे समय तक किए जाने वाले स्टडी यह समझने में मदद करेंगे कि स्वच्छ हवा किस तरह दिमाग और याददाश्त को सुरक्षित रखने में भूमिका निभा सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Dementia Early Signs: नाम भूलना सामान्य पर चेहरा भूलना बड़ी बीमारी का संकेत, एक्सपर्ट ने दी बड़ी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ Difference Between Forgetting Names And Forgetting Faces: क्या किसी का नाम भूल जाना और उसका चेहरा भूल जाना एक ही बात है? पहली नजर में यह दोनों सामान्य भूलने की आदत लग सकती हैं, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि हमारे दिमाग में इन दोनों के लिए अलग-अलग सिस्टम काम करते हैं. यही वजह है कि किसी परिचित व्यक्ति का चेहरा पहचान लेने के बावजूद उसका नाम याद न आना आम बात है, जबकि किसी करीबी का चेहरा ही न पहचान पाना कहीं अधिक गंभीर संकेत माना जाता है.&amp;nbsp;
क्यों भूल जाता है इंसान?
कल्पना कीजिए कि आप किसी समारोह में पहुंचे और सामने खड़े व्यक्ति को देखते ही पहचान गए, लेकिन उसका नाम याद नहीं आया. ऐसा अक्सर कई लोगों के साथ होता है. दरअसल, नाम याद रखना और उसे सही समय पर दिमाग से निकाल पाना भाषा और याद से जुड़े नेटवर्क पर निर्भर करता है. वहीं चेहरों की पहचान करने का काम दिमाग के स्पेशल विजुअल रिकग्निशन नेटवर्क की तरफ किया जाता है. एपोक एल्डर केयर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और को- फाउंडर, डिमेंशिया विशेषज्ञ एवं क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट नेहा सिन्हा के अनुसार &quot;किसी का नाम भूलना और किसी का चेहरा भूलना देखने में समान लग सकता है, लेकिन इनके पीछे काम करने वाले ब्रेन मार्ग पूरी तरह अलग होते हैं. यह पहचान और स्मरण के बीच का अंतर है.&quot;
क्या नाम भूल जाना सामान्य होता है?
एक्सपर्ट का कहना है कि नाम केवल एक शब्द या पहचान का लेबल होता है, जिसका अक्सर किसी सीन छवि से सीधा संबंध नहीं होता. इसलिए तनाव, थकान, व्यस्तता या एक साथ कई लोगों से मिलने जैसी परिस्थितियों में नाम भूल जाना सामान्य माना जाता है. नेहा सिन्हा बताती हैं कि तेज रफ्तार सामाजिक माहौल में किसी का नाम भूल जाना पूरी तरह सामान्य बात है और अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के साथ ऐसा कभी न कभी होता है.
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क्या इससे कोई दिक्कत होती है?
हालांकि, चेहरों को पहचानने की क्षमता ह्यूमन इवोल्यूशन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. इंसान हजारों वर्षों से अपने परिवार, दोस्तों और संभावित खतरों की पहचान चेहरे के आधार पर करता आया है. यही कारण है कि ब्रेन में चेहरे पहचानने के लिए विशेष नेटवर्क मौजूद होते हैं. रिसर्च बताते हैं कि इन नेटवर्क्स में किसी प्रकार की गड़बड़ी या गिरावट होने पर प्रोसोपैग्नोसिया यानी फेस ब्लाइंडनेस जैसी स्थिति विकसित हो सकती है. कुछ मामलों में इसका संबंध अल्जाइमर रोग, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से भी देखा गया है. बार-बार होने वाली स्मृति संबंधी समस्याएं न्यूरोकॉग्निटिव गिरावट का शुरुआती संकेत हो सकती हैं. खासकर अल्जाइमर और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया जैसी स्थितियों में कई बार चेहरे पहचानने की क्षमता प्रभावित होना अन्य लक्षणों से पहले भी दिखाई दे सकता है. इसलिए यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य, जीवनसाथी या बेहद करीबी लोगों को पहचानने में कठिनाई महसूस करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
कब एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी?
असल अंतर यही है कि कभी-कभार किसी का नाम भूल जाना उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन परिचित चेहरों को पहचानने में लगातार कठिनाई होना गंभीर चेतावनी संकेत साबित हो सकता है. इसलिए हर छोटी भूल पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि स्मृति संबंधी बदलाव बार-बार होने लगें, बढ़ते जाएं या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, तो एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>How To Clean A Tea Strainer: चाय छानते&amp;छानते बंद हो गए हैं छलनी के छेद, ऐसे करें एकदम नई जैसी</title>
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        <description><![CDATA[ How To Unclog Tea Strainer Holes At Home: अगर आपकी चाय की छलनी के छेद धीरे-धीरे बंद होने लगे हैं और चाय छानते समय पानी नीचे जाने में परेशानी हो रही है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ज्यादातर लोग ऐसी स्थिति में नई छलनी खरीद लेते हैं, जबकि सच यह है कि कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर पुरानी छलनी को फिर से नई जैसी चमकदार और इस्तेमाल लायक बनाया जा सकता है. दरअसल, रोजाना चाय बनाने के दौरान चायपत्ती के बारीक कण, दूध की परत और पानी में मौजूद खनिज तत्व छलनी के छोटे-छोटे छेदों में जमा होने लगते हैं. धीरे-धीरे यह जमाव इतना बढ़ जाता है कि चाय का बहाव कम हो जाता है और छलनी ठीक से काम नहीं करती. ऐसे में सबसे पहले जरूरी है कि जमा हुई गंदगी को पूरी तरह हटाया जाए.&amp;nbsp;
कैसे इसको साफ कर सकते हैं?
इसके लिए बेकिंग सोडा और सिरके का इस्तेमाल काफी कारगर माना जाता है. एक कटोरी में छलनी रखें और उसके ऊपर थोड़ा बेकिंग सोडा छिड़क दें. अब इसमें सफेद सिरका डालें। कुछ ही सेकंड में झाग बनने लगेगा, जो छलनी में जमी गंदगी और दाग-धब्बों को ढीला करने का काम करता है. करीब 10 मिनट बाद छलनी को गर्म पानी से धो लें. इससे छेदों में फंसी गंदगी आसानी से निकल जाती है.
उबलते पानी का भी यूज करना सही
अगर छलनी बहुत ज्यादा जाम हो चुकी है तो उबलते पानी का सहारा लिया जा सकता है. एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें छलनी को कुछ मिनट के लिए डाल दें. गर्म पानी जमी हुई परत को नरम कर देता है, जिससे सफाई आसान हो जाती है.
इसे भी पढ़ें- Low Shower Water Pressure: प्लंबर को बुलाने से पहले ये जुगाड़ करके देखें, एकदम ठीक चलने लगेगा शॉवर
नींबू का रस भी कारगर
नींबू का रस भी इस काम में काफी मददगार साबित हो सकता है. नींबू में मौजूद प्राकृतिक अम्ल गंदगी और चाय के दागों को तोड़ने का काम करते हैं. छलनी पर नींबू का रस लगाकर कुछ देर छोड़ दें और फिर साफ पानी से धो लें. इससे न सिर्फ छलनी साफ होगी, बल्कि उसमें आने वाली बदबू भी दूर हो जाएगी.
टूथब्रश और बर्तन धोने वाले लिक्विड का इस्तेमाल
जिद्दी गंदगी हटाने के लिए पुराने टूथब्रश और बर्तन धोने वाले लिक्विड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. ब्रश की मदद से छलनी के कोनों और छेदों को हल्के हाथों से रगड़ें. इससे वहां फंसे चायपत्ती के कण आसानी से बाहर निकल जाते हैं.&amp;nbsp;
कितने दिनों में सफाई करना जरूरी?
एक्सपर्ट के अनुसार, अगर हर सप्ताह या 10 से 15 दिन में एक बार छलनी की अच्छी तरह सफाई कर ली जाए, तो उसके छेद बंद होने की समस्या काफी हद तक रोकी जा सकती है. इससे चाय का स्वाद भी बेहतर बना रहता है और छलनी की उम्र भी बढ़ती है.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Lemon Water: नींबू पानी में भूलकर भी ना डालें ये चीज, जहर बन जाएगी फायदा देने वाली ये ड्रिंक</title>
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        <description><![CDATA[ Why You Should Avoid Adding Sugar To Lemon Water: गर्मी के मौसम में नींबू पानी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले पेयों में से एक है. शरीर को ठंडक पहुंचाने से लेकर डिहाइड्रेशन से बचाने तक, इसके कई फायदे बताए जाते हैं. लेकिन अक्सर लोग इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें भरपूर मात्रा में चीनी मिला देते हैं. यही आदत इस हेल्दी ड्रिंक के फायदों को कम कर सकती है. अगर आप भी रोजाना नींबू पानी पीते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इसमें जरूरत से ज्यादा चीनी मिलाना आपकी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता.
नींबू पानी पीना फायदेमंद
नींबू पानी बिना चीनी के भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. पारंपरिक निंबू पानी में अक्सर काला नमक, सेंधा नमक या भुना हुआ जीरा मिलाया जाता है. यह मिश्रण शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करने में मदद करता है. खासकर गर्मी और उमस के दिनों में यह ड्रिंक काफी राहत देती है. आयुर्वेद में भी नींबू को महत्वपूर्ण माना गया है. कई लोग सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीते हैं. माना जाता है कि इससे पाचन क्रिया को सक्रिय करने, शरीर को तरोताजा रखने और दिन की शुरुआत बेहतर तरीके से करने में मदद मिल सकती है. नींबू में मौजूद विटामिन-सी शरीर की इम्यून क्षमता को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है.
चीनी मिलाने से क्या दिक्कत?
Utopian की रिपोर्ट के अनुसार, जब नींबू पानी में ज्यादा चीनी मिला दी जाती है, तो इसकी कैलोरी बढ़ जाती है. नियमित रूप से अधिक चीनी का सेवन वजन बढ़ने, ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होने और अन्य हेल्थ समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है. यही वजह है कि आजकल कई हेल्थ एक्सपर्ट और डाइट एक्सपर्ट नींबू पानी को बिना चीनी या कम चीनी के पीने की सलाह देते हैं.
संतरे के जूस में भी नहीं मिलाना चाहिए
सिर्फ नींबू ही नहीं, संतरे का जूस भी बिना चीनी के ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. संतरे में प्राकृतिक रूप से मिठास होती है, इसलिए इसमें अतिरिक्त चीनी मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती. बिना चीनी वाला ताजा संतरे का जूस विटामिन-सी का अच्छा सोर्स है और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है. यही कारण है कि फिटनेस और हेल्थ को लेकर जागरूक लोग अब ऐसे पेयों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनमें अतिरिक्त चीनी न हो.
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स्वाद बढ़ाने के लिए क्या करें?
अगर आपको नींबू पानी का स्वाद बढ़ाना है, तो चीनी की जगह पुदीने की पत्तियां, काला नमक, सेंधा नमक या भुना जीरा इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे स्वाद भी बेहतर होगा और पेय की पौष्टिकता भी बनी रहेगी. वहीं संतरे का जूस हमेशा ताजा और बिना अतिरिक्त चीनी के पीना बेहतर माना जाता है. आज के समय में जब लोग पैकेज्ड और ज्यादा मीठे पेयों से दूरी बना रहे हैं, तब नींबू पानी और संतरे का जूस जैसे प्राकृतिक विकल्प फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं. इसलिए अगली बार जब आप नींबू पानी बनाएं, तो उसमें चीनी डालने से पहले एक बार जरूर सोचें. कई बार छोटी-सी आदत ही आपकी हेल्थ पर बड़ा असर डाल सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Kadhai Cleaning Tips: इस आसान ट्रिक से चकाचक चमक जाएंगे कड़ाही के काले हैंडल, बस करना होगा यह काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Clean Black Kadhai Handles At Home: रोजाना इस्तेमाल होने वाली कड़ाही समय के साथ गंदी होना शुरू हो जाती है. खाना बनाते समय तेल, मसाले और गर्मी का असर सिर्फ कड़ाही के अंदर ही नहीं, बल्कि उसके हैंडल पर भी दिखाई देने लगता है. खासकर काले रंग के हैंडल कुछ समय बाद धूल, चिकनाई और जमी हुई गंदगी की वजह से फीके और बदरंग नजर आने लगते हैं. कई लोग कड़ाही को तो अच्छी तरह साफ कर लेते हैं, लेकिन हैंडल की सफाई पर ध्यान नहीं देते. नतीजा यह होता है कि पूरी कड़ाही साफ होने के बावजूद उसका लुक खराब दिखाई देता है.
अगर आपकी कड़ाही के काले हैंडल भी अपनी चमक खो चुके हैं, तो उन्हें साफ करने के लिए महंगे क्लीनर खरीदने की जरूरत नहीं है. घर में मौजूद कुछ साधारण चीजों की मदद से आप आसानी से इन्हें फिर से चमका सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि ये तरीके आसान होने के साथ-साथ किफायती भी हैं.&amp;nbsp;
नींबू और नमक का इस्तेमाल
सबसे पहले नींबू और नमक का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए कड़ाही को हल्का गर्म कर लें और फिर हैंडल पर थोड़ा नमक छिड़क दें. इसके बाद नींबू का रस लगाकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. अब किसी ब्रश या स्क्रबर की मदद से हल्के हाथों से रगड़ें. नींबू की प्राकृतिक एसिडिक और नमक की खुरदरी बनावट जमी हुई चिकनाई और दागों को हटाने में मदद करती है. इससे हैंडल पहले से ज्यादा साफ और चमकदार नजर आने लगते हैं.
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&amp;nbsp;बेकिंग सोडा का इस्तेमाल
दूसरा आसान उपाय बेकिंग सोडा है. बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें और इसे हैंडल पर लगा दें. करीब 10 मिनट बाद ब्रश से रगड़कर साफ करें. यह तरीका पुराने दाग और जिद्दी गंदगी को हटाने में काफी कारगर माना जाता है. नियमित रूप से ऐसा करने पर हैंडल पर जमी मैल आसानी से निकलने लगती है. अगर दाग काफी पुराने हैं तो सिरका और डिशवॉश लिक्विड का मिश्रण भी काम आ सकता है. दोनों को मिलाकर हैंडल पर लगाएं और कुछ देर के लिए छोड़ दें. इसके बाद ब्रश से साफ करें. यह मिश्रण चिकनाई और जमे हुए दागों को ढीला कर देता है, जिससे सफाई आसान हो जाती है.
राख और सरसों के तेल यूज करके
पारंपरिक घरेलू उपायों में राख और सरसों के तेल का भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. दोनों को मिलाकर पेस्ट बनाएं और हैंडल पर लगाकर रगड़ें.यह काफी प्रभावी भी माना जाता है. वहीं, अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है तो गर्म पानी और डिटर्जेंट का सहारा ले सकते हैं. एक कपड़े को इस घोल में भिगोकर हैंडल पर लगाएं और कुछ देर बाद साफ कर लें. इन आसान घरेलू उपायों को अपनाकर आप कड़ाही के काले और फीके पड़ चुके हैंडल को दोबारा चमका सकते हैं. थोड़ी सी मेहनत और सही तरीका अपनाने से आपकी पुरानी कड़ाही भी नई जैसी नजर आने लगेगी.
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        <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Dark Knees: शॉर्ट ड्रेस पहनने का है मन लेकिन काले घुटनों से आ रही शर्म? इस जुगाड़ से तुरंत हो जाएंगे साफ</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Dark Knees Naturally: शॉर्ट ड्रेस, स्कर्ट या शॉर्ट्स पहनने का मन तो कई बार करता है, लेकिन घुटनों का कालापन आत्मविश्वास कम कर देता है. कई लोग चेहरे और हाथों की देखभाल पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन घुटनों और कोहनियों की स्किन को नजरअंदाज कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि समय के साथ इन हिस्सों की त्वचा बाकी शरीर की तुलना में ज्यादा काली और रूखी दिखाई देने लगती है.&amp;nbsp;
क्यों होता है घुटपों पर कालापन?
दरअसल, घुटनों का कालापन एक आम समस्या है. इसकी सबसे बड़ी वजह लगातार होने वाला घर्षण, त्वचा का सूखापन और डेड स्किन का जमा होना है. घुटनों पर बार-बार दबाव पड़ने, फर्श पर बैठने या लंबे समय तक घुटनों के बल काम करने से भी वहां की त्वचा मोटी और काली हो सकती है. इसके अलावा धूप का असर और शरीर में नमी की कमी भी इस समस्या को बढ़ा सकती है.
कैसे करें कालेपन को दूर?
अगर आप भी काले घुटनों से परेशान हैं, तो सबसे पहले त्वचा की नियमित सफाई और एक्सफोलिएशन पर ध्यान दें. एक्सफोलिएशन का मतलब है त्वचा पर जमी डेड सेल्स को हटाना. जब डेड स्किन हटती है तो त्वचा की रंगत धीरे-धीरे साफ और एक समान दिखने लगती है. हालांकि स्क्रब का इस्तेमाल बहुत ज्यादा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा में जलन हो सकती है.
मॉइस्चराइजिंग बेहद जरूरी
घुटनों को साफ और मुलायम बनाए रखने के लिए मॉइस्चराइजिंग भी बेहद जरूरी है. अक्सर लोग शरीर के इस हिस्से पर मॉइस्चराइजर लगाना भूल जाते हैं, जिससे त्वचा और ज्यादा रूखी हो जाती है। रोजाना अच्छी क्वालिटी का मॉइस्चराइजर लगाने से त्वचा में नमी बनी रहती है और उसका टेक्सचर बेहतर होता है. स्किन एक्सपर्ट के अनुसार, कुछ ऐसे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स भी मौजूद हैं जिनमें ग्लाइकोलिक एसिड, विटामिन-सी और नींबू के छिलके से जुड़े तत्व पाए जाते हैं. ये तत्व त्वचा की ऊपरी परत पर जमा डेड स्किन को हटाने और रंगत को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. ग्लाइकोलिक एसिड हल्के एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है, जबकि विटामिन-सी त्वचा को ब्राइट दिखाने में सहायक माना जाता है.&amp;nbsp;
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धूप से बचाव भी जरूरी
इसके साथ ही धूप से बचाव भी बेहद जरूरी है. अगर घुटने अक्सर खुले रहते हैं, तो बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं. सूरज की पराबैंगनी किरणें त्वचा में मेलेनिन बढ़ा सकती हैं, जिससे कालापन और गहरा हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Low Shower Water Pressure: प्लंबर को बुलाने से पहले ये जुगाड़ करके देखें, एकदम ठीक चलने लगेगा शॉवर</title>
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        <description><![CDATA[ How To Fix Low Shower Water Pressure At Home: सुबह नहाने के लिए शॉवर चालू किया और पानी की धार इतनी धीमी निकली कि पूरा मूड खराब हो गया? आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग तुरंत प्लंबर को बुलाने का सोचते हैं, लेकिन कई बार समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए पैसे खर्च किए जाएं. कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर आप शॉवर की पानी की धार को पहले जैसा तेज बना सकते हैं.&amp;nbsp;
शॉवर में क्यों प्रेशर कम बनता है?
दरअसल, ज्यादातर मामलों में शॉवर का प्रेशर कम होने की वजह शॉवर हेड में जमा गंदगी और कैल्शियम की परत होती है. समय के साथ पानी में मौजूद खनिज पदार्थ शॉवर के छोटे-छोटे छेद में जमा होने लगते हैं, जिससे पानी का बहाव प्रभावित होता है. अच्छी बात यह है कि इस समस्या को घर बैठे ही ठीक किया जा सकता है.
कैसे ठीक कर सकते हैं समस्या?
इसके लिए सबसे पहले शॉवर हेड को निकाल लें. अब एक बर्तन में बराबर मात्रा में सफेद सिरका और पानी मिलाएं. शॉवर हेड को इस घोल में 3 से 4 घंटे के लिए डुबोकर छोड़ दें. अगर जमा गंदगी ज्यादा है तो इसे रातभर भी रखा जा सकता है. सिरका कैल्शियम और खनिजों की जमी हुई परत को धीरे-धीरे घोल देता है.
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अच्छे तरीके से साफ करना
इसके बाद एक पुराने टूथब्रश की मदद से शॉवर हेड को अच्छी तरह साफ करें. खासकर उन छिद्रों को साफ करें जहां से पानी निकलता है. सफाई के बाद इसे साफ पानी से धोकर दोबारा फिट कर दें. कई बार सिर्फ इस उपाय से ही शॉवर की धार में बड़ा फर्क दिखाई देने लगता है.&amp;nbsp;
इन चीजों की भी जांच करना जरूरी
अगर इसके बावजूद पानी का प्रेशर कम है, तो शॉवर के ड्रेन की भी जांच करें. बाल, साबुन की परत और अन्य गंदगी ड्रेन में जमा होकर पानी के बहाव को प्रभावित कर सकती है. प्लंजर या ड्रेन क्लीनर की मदद से ड्रेन की सफाई करने पर भी समस्या दूर हो सकती है. कुछ घरों में पानी का प्रेशर रेगुलेटर भी लगा होता है. यदि इसकी सेटिंग कम हो गई हो तो शॉवर में पानी की धार कमजोर पड़ सकती है. ऐसे में रेगुलेटर की जांच कर उसे सही स्तर पर सेट करना मददगार हो सकता है. होम एक्सपर्ट का मानना है कि शॉवर हेड और ड्रेन की नियमित सफाई करने से इस तरह की समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है. हर कुछ महीनों में शॉवर हेड को सिरके से साफ करने की आदत पानी के बहाव को बेहतर बनाए रखती है.
हालांकि, यदि इन उपायों के बाद भी समस्या बनी रहती है, तो पाइपलाइन, वाल्व या पानी की सप्लाई में कोई तकनीकी खराबी हो सकती है. ऐसी स्थिति में प्लंबर की मदद लेना बेहतर रहेगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Bladder Cancer: सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी से थमेगा ब्लैडर कैंसर, दोबारा बीमारी लौटने का खतरा हुआ बेहद कम</title>
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        <description><![CDATA[ How Radiation Therapy Helps In Bladder Cancer Treatment: ब्लैडर कैंसर के इलाज में सर्जरी को सबसे प्रभावी तरीकों में से एक माना जाता है, लेकिन कई मरीजों में ऑपरेशन के बाद भी बीमारी दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है. खासतौर पर हाई-रिस्क मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर के मरीजों में यह चुनौती अधिक देखने को मिलती है. ऐसे में एक नए स्टडी ने संकेत दिया है कि सर्जरी के बाद दी जाने वाली रेडिएशन थेरेपी मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है और कैंसर की वापसी के जोखिम को कम कर सकती है.&amp;nbsp;
कैसे काम करती है रेडिएशन थेरेपी?
&amp;nbsp;जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी में पब्लिश रिसर्च निष्कर्ष में &amp;nbsp;एक फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल से सामने आया है. रिसर्चर ने पाया कि ब्लैडर को सर्जरी के जरिए हटाने और कीमोथेरेपी लेने के बाद रेडिएशन थेरेपी कराने वाले मरीजों में कैंसर के दोबारा उसी क्षेत्र में लौटने की संभावना कम रही. स्टडी के अनुसार, रेडिएशन थेरेपी से बीमारी पर बेहतर नियंत्रण हासिल किया जा सकता है, हालांकि कुल जीवित रहने की दर और बीमारी- मुक्त रहने की अवधि में दिखा सुधार पूरी तरह महत्वपूर्ण नहीं माना गया.&amp;nbsp;
किन लोगों को रिसर्च में शामिल किया गया?
यह टेस्ट भारत के चार शैक्षणिक चिकित्सा केंद्रों में किया गया, जिसमें नॉन-मेटास्टेटिक मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर से पीड़ित 153 मरीज शामिल थे. इनमें से 71 प्रतिशत मरीजों को सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी दी गई थी, जबकि करीब 20 प्रतिशत मरीजों ने सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी प्राप्त की. इसके बाद कुछ मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी गई, जबकि अन्य मरीजों को केवल निगरानी में रखा गया.
क्या निकला इसका रिजल्ट?
रेडियोथेरेपी सर्जरी या अंतिम कीमोथेरेपी सत्र के आठ सप्ताह के भीतर शुरू की गई. लगभग 47 महीने तक मरीजों की निगरानी के बाद रिसर्चर ने पाया कि दो साल तक कैंसर के स्थानीय या आसपास के हिस्सों में दोबारा न लौटने की दर रेडिएशन समूह में 87.1 प्रतिशत रही, जबकि केवल निगरानी वाले समूह में यह आंकड़ा 76 प्रतिशत था. रिसर्चर ने कहा कि एडजुवेंट पेल्विक इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी ने हाई-रिस्क यूरोथेलियल मसल-इनवेसिव ब्लैडर कैंसर मरीजों में लोकल कंट्रोल बेहतर किया और इसके साथ गंभीर बुरे प्रभाव में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं देखी गई. यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे सर्जरी के बाद दिए जाने वाले उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहे हैं.
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डिजीज-फ्री सर्वाइवल 71.6 प्रतिशत&amp;nbsp;
स्टडी में यह भी देखा गया कि रेडिएशन लेने वाले मरीजों में डिजीज-फ्री सर्वाइवल 71.6 प्रतिशत रही, जबकि दूसरे समूह में यह 58.7 प्रतिशत थी. इसी तरह ब्लैडर कैंसर-विशिष्ट सर्वाइवल और ओवरऑल सर्वाइवल के आंकड़े भी रेडिएशन समूह में बेहतर पाए गए. &amp;nbsp;हालांकि इन परिणामों को स्टेटिकल फॉर्म से निर्णायक नहीं माना गया. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिन मरीजों को पेल्विक रेडिएशन दी गई, उनमें लोकल या क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर की पुनरावृत्ति केवल 7.9 प्रतिशत मामलों में हुई. वहीं, निगरानी वाले समूह में यह दर 25.6 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि रेडिएशन थेरेपी कैंसर को उसी क्षेत्र में वापस आने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Sundar Pichai Success Tips: गुस्सा और तुरंत जवाब देने की आदत छोड़ें, सुंदर पिचाई से सीखें लाइफ बदलने वाले ये 3 मंत्र</title>
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        <description><![CDATA[ What We Can Learn From Sundar Pichai&#039;s Leadership Style: दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक गूगल का नेतृत्व करने वाले सुंदर पिचाई की एक खास बात अक्सर लोगों का ध्यान खींचती है. वह है उनका शांत स्वभाव. चाहे किसी सरकारी समिति के सामने कठिन सवालों का जवाब देना हो, कंपनी से जुड़े विवादों का सामना करना हो या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज होती दौड़ में गूगल को आगे बनाए रखना हो, सुंदर पिचाई शायद ही कभी घबराए हुए या भावनात्मक प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आप उनसे क्या सीख सकते हैं.&amp;nbsp;
तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए
सुंदर पिचाई के काम करने के तरीके से पहली सीख मिलती है कि किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए. उनके साथ काम कर चुके कई लोग बताते हैं कि वह एक अच्छे लिसनर हैं. जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है तो अक्सर सामने वाले की बात पूरी सुने बिना ही जवाब तैयार करने लगता है. लेकिन पिचाई पहले पूरी बात समझने की कोशिश करते हैं और फिर प्रतिक्रिया देते हैं. यही कारण है कि उनके फैसले अधिक संतुलित नजर आते हैं. कई बार कुछ मिनट रुककर सोचना किसी भी विवाद को बढ़ने से रोक सकता है.
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समस्या का समाधान खोजने पर ध्यान दें
दूसरी महत्वपूर्ण सीख है कि समस्या का समाधान खोजने पर ध्यान दें, अपने अहंकार की रक्षा करने पर नहीं. बड़े संगठनों में मतभेद होना सामान्य बात है. लेकिन कई लोग समाधान ढूंढ़ने के बजाय यह साबित करने में लग जाते हैं कि वही सही हैं. सुंदर पिचाई को हमेशा सहयोगी नेतृत्व शैली के लिए जाना जाता है. वह बहस जीतने से ज्यादा बेहतर नतीजे हासिल करने को महत्व देते हैं. यही सोच व्यक्तिगत जीवन में भी मददगार साबित हो सकती है. कई बार रिश्ते इसलिए बिगड़ते हैं क्योंकि हम अपनी बात मनवाने पर अड़ जाते हैं, जबकि असली जरूरत समस्या को सुलझाने की होती है.&amp;nbsp;
दूरगामी सोच रखना
तीसरी और शायद सबसे अहम बात है दूरगामी सोच रखनाय. आज गूगल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सुंदर पिचाई शायद ही कभी घबराहट भरे अंदाज में बात करते दिखाई देते हैं. इसकी वजह यह है कि वह हर चुनौती को लंबे समय के नजरिए से देखते हैं. उनका मानना है कि एक खराब दिन, एक असफल बैठक या एक गलती पूरी यात्रा को तय नहीं करती. चेन्नई से निकलकर दुनिया की सबसे प्रभावशाली टेक कंपनियों में से एक के सीईओ बनने तक का उनका सफर भी इसी धैर्य और निरंतर प्रयास का उदाहरण है.
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Best Drinks for Liver Health: फैटी लिवर में बड़े काम की हैं ये पांच ड्रिंक, पीते ही जिगर को मिलेगी जोरदार ठंडक</title>
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        <description><![CDATA[ Best Drinks for Liver Health: आजकल खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड और आलस की वजह से बहुत से लोगों में फैटी लिवर की समस्या आम हो गई है. इसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है, जिसके कारण यह कमजोर हो जाता है और अच्छी तरह काम नहीं कर पाता. शुरुआती दौर में इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते, लेकिन यही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकते हैं.
हालांकि, आप आप महंगी दवाइयों के बजाय सही खानपान और हेल्दी ड्रिंक्स की मदद से इसे समय रहते कंट्रोल कर सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसी ड्रिंक्स के बारे में, जो लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद कर सकती हैं.&amp;nbsp;
ग्रीन टी और नींबू पानी से मिल सकता है फायदा
यह तो हम सभी जानते हैं कि ग्रीन टी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारे शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. ग्रीन टी में कैटेचिन्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो लिवर की सूजन और तनाव को कम करता है. इसके अलावा यह लिवर की कार्यक्षमता को भी बेहतर बनाता है. अगर कोई व्यक्ति रोजाना 2 से 3 कप ग्रीन टी पीता है तो उसके लिवर एंजाइम्स का स्तर संतुलित रहता है और वजन भी कंट्रोल में रहता है. वहीं सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना भी काफी लाभदायक माना जाता है. बता दें कि नींबू में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. ये लिवर के ग्लूटाथियोन जैसे जरूरी एंजाइम को बढ़ाते हैं, जो लिवर को जहरीले तत्वों यानी डिटॉक्स प्रक्रिया में मदद करता है. साथ ही यह शरीर में पित्त के निर्माण को बढ़ाता है, जिससे खाना आसानी से पचता है और पेट साफ रहता है.&amp;nbsp;
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चुकंदर का जूस और ब्लैक कॉफी भी है असरदार
चुकंदर का जूस पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें बेटालेंस और बीटेन नामक तत्व होते हैं, जो लिवर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. यह शरीर से हानिकारक तत्वों और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में सहायक होता है. साथ ही यह लिवर को नुकसान पहुंचने से रोकता है और इसकी खराब हो चुकी कोशिकाओं को दोबारा ठीक करने में भी मदद करता है. बता दें कि हफ्ते में 2 से 3 बार चुकंदर का रस पीने से लिवर एंजाइम्स का स्तर सुधरता है और लिवर में चर्बी जमा नहीं होती. दूसरी ओर ब्लैक कॉफी भी फैटी लिवर से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद मानी जाती है. लिवर की सेहत के लिए ब्लैक कॉफी पर दुनिया भर में सबसे ज्यादा रिसर्च की गई है. इसमें क्लोरोजेनिक एसिड और कैफीन होता है, जो लिवर की सूजन को कम करते हैं और कोशिकाओं में चर्बी जमा होने से रोकते हैं. हालांकि इसमें चीनी मिलाने से बचना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिल पाता है.&amp;nbsp;
एप्पल साइडर विनेगर के साथ अपनाएं हेल्दी लाइफस्टाइल
फैटी लिवर की समस्या में एप्पल साइडर विनेगर भी काफी चर्चा में रहता है. माना जाता है कि एप्पल साइडर विनेगर में एसिटिक एसिड होता है, जो मेटाबॉलिज्म यानी भोजन से ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया को तेज करता है. साथ ही यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी को तोड़कर लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद करता है. हालांकि इसे हमेशा पानी में मिलाकर ही पीना चाहिए. ध्यान रखें कि केवल ड्रिंक्स के भरोसे फैटी लिवर को ठीक नहीं किया जा सकता. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन को नियंत्रित रखना भी बेहद जरूरी है. अगर आप इन बातों का ध्यान रखते हैं, तो लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Daily Water Intake Myth: दिन में पानी की मात्रा को लेकर आपसे बोला गया है सबसे बड़ा झूठ, जानिए क्या है इसे पीने का सही तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ Daily Water Intake Myth : हममें से ज्यादातर लोगों को बचपन से यह बताया जाता रहा है कि हेल्दी रहने के लिए रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास &amp;nbsp;या 2 से 3 लीटर पानी पीना जरूरी है. कई लोग तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाकर हर घंटे पानी पीते हैं, चाहे प्यास न लगी हो फिर भी पानी पी लेते हैं. कुछ लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, उतना शरीर हेल्दी रहेगा. हालांकि, वैज्ञानिकों और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस पर सवाल उठाए हैं. कई शोध बताते हैं कि हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत अलग-अलग होती है और एक तय मात्रा सभी पर लागू नहीं की जा सकती है. &amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स का कहना है कि शरीर खुद हमें संकेत देता है कि उसे कब पानी चाहिए यानी जब प्यास लगे, तब पानी पीना ही शरीर की सबसे हेल्दी और सुरक्षित जरूरत माना जाता है. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि &amp;nbsp;दिन में पानी की मात्रा को लेकर आपसे बोला गया सबसे बड़ा झूठ क्या है और इसे पीने का सही तरीका क्या है.&amp;nbsp;
शरीर के लिए पानी कितना जरूरी क्यों है?
शरीर का लगभग 50 से 65 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है. शरीर के हर सेल्स, टिशू और पार्ट को ठीक तरह से काम करने के लिए पानी की जरूरत होती है. पानी शरीर में कई जरूरी काम करता है, जैसे शरीर का टेंपरेचर कंट्रोल रखना, पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाना, पोषक तत्वों को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना, यूरिन और पसीने के जरिए टॉसिन बाहर निकालना, जोड़ों को चिकनाई देना, दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करना और एनर्जी लेवल को बनाए रखना. यही कारण है कि बॉडी को सही मात्रा में पानी न मिलने पर इसकी काम करने की ताकत पर असर होने लगता है.&amp;nbsp;
दिन में पानी की मात्रा को लेकर आपसे बोला गया सबसे बड़ा झूठ क्या है?
दिन में पानी की मात्रा को लेकर सबसे बड़ा झूठ यह माना जाता है कि हर व्यक्ति को रोजाना 8 गिलास या 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए, चाहे उसे प्यास लगे या नहीं, &amp;nbsp;वहीं एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है. यह उसकी उम्र, वजन, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और हेल्थ पर निर्भर करती है. ऑस्ट्रेलिया में हुई एक रिसर्च में भी पाया गया कि जब शरीर को पूरा पानी मिल जाता है, तो दिमाग खुद ज्यादा पानी पीने से रोकने के लिए निगलने की प्रक्रिया को मुश्किल बना देता है.
ऑस्ट्रेलिया की एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने लोगों को दो अलग-अलग परिस्थितियों में पानी पिलाया. जिसमें पहली बार उन्हें एक्सरसाइज के तुरंत बाद पानी दिया गया, जब वे प्यासे थे और दूसरी बार उन्हें तब पानी पीने को कहा गया जब उन्हें प्यास नहीं थी. ऐसे में जब लोगों को प्यास नहीं थी, तब पानी निगलना उन्हें लगभग तीन गुना ज्यादा मुश्किल लगा. वैज्ञानिकों ने पाया कि जब शरीर को पूरा पानी मिल जाता है, तो दिमाग निगलने की प्रक्रिया को धीमा करने लगता है. यह शरीर का प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र है, जो जरूरत से ज्यादा पानी पीने से रोकता है.&amp;nbsp;
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पानी पीने का सही तरीका क्या है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्यास लगना शरीर का प्राकृतिक अलार्म सिस्टम है. जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तो दिमाग प्यास का संकेत देता है. इसलिए ज्यादातर हेल्दी लोगों के लिए प्यास लगने पर पानी पीना सही माना जाता है. हालांकि कुछ स्थितियों में केवल प्यास पर निर्भर रहना सही नहीं हो सकता, जैसे बुजुर्गों में, छोटे बच्चों में, गंभीर बीमारी के दौरान, ज्यादा गर्म मौसम में या वर्कआउट करते समय, इन परिस्थितियों में ज्यादा पानी पीने की जरूरत पड़ सकती है.&amp;nbsp;
जरूरत से ज्यादा पानी पीना कैसे हो सकता है खतरनाक?
कई लोग सोचते हैं कि ज्यादा पानी पीने का कोई नुकसान नहीं होता है. लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. जरूरत से ज्यादा पानी पीने पर शरीर में सोडियम का लेवल बहुत कम हो सकता है. इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है. इससे सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी, चक्कर, दौरे पड़ना और गंभीर मामलों में जान का खतरा जैसे समस्याएं हो सकती हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Health Tips: दिनभर धूप में करते हैं काम तो जा सकती है जान, इन स्मार्ट तरीकों से खुद का रखें ख्याल</title>
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        <description><![CDATA[ Summer Health Tips:&amp;nbsp;गर्मियों का मौसम आते ही सूरज की तपिश लोगों की मुश्किलें बढ़ाने लगती है. जून के महीने में सूरज का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. तापमान हर दिन अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है हर दिन 42 सो 45 पार तापमान में लोगों का हाल बेहाल हो गया है. साथ ही लू और चिलचिलाती धूप की वजह लोग कई सारी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं. ऐसे में जरूरी है कि लोग अपना ख्याल रखें. खासकर उन लोगों के लिए जो दिनभर बाहर काम करते हैं, जैसे मजदूर, डिलीवरी बॉय, ट्रैफिक पुलिसकर्मी, या किसान, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है.
कई बार लोग काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन लगातार तेज धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी, चक्कर आना, थकान और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है. इसलिए गर्मी के मौसम में काम के साथ-साथ अपनी सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है.
शरीर को ठंडा रखना है सबसे जरूरी
अगर आपको लंबे समय तक धूप में रहना पड़ता है तो सबसे पहले अपने शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है. ध्यान रखें घर से निकलने से पहले पर्याप्त पानी पिएं और अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें. सिर्फ प्यास लगने पर ही पानी न पिएं, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी लेते रहें. इसके अलावा नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और घर में बने शरबत भी शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं. जब भी बाहर से घर लौटें तो तुरंत बहुत ठंडा पानी पीने के बजाय सामान्य तापमान वाला पानी लें. इससे शरीर को अचानक तापमान बदलने का झटका नहीं लगता. साथ ही हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने चाहिए, ताकि शरीर में हवा आसानी से पहुंच सके और गर्मी कम महसूस हो.&amp;nbsp;
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घर लौटने के बाद कभी न करें ये गलती&amp;nbsp;
कई लोग धूप से आते ही सीधे पंखे या एसी के सामने बैठ जाते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. &amp;nbsp;बाहर से आने के बाद कुछ मिनट आराम करें और शरीर का तापमान सामान्य होने दें. इसके बाद ही चेहरा, हाथ और पैरो को ठंडे पानी से धोएं. यदि संभव हो तो स्नान भी कर सकते हैं. इससे शरीर को राहत मिलती है और थकान कम हो जाती है. गर्मी में काम करने के बाद ताजे फल खाना भी काफी फायदेमंद माना जाता है. जैसे &amp;nbsp;तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा जैसे फलों में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं. साथ ही ये शरीर को ऊर्जा भी देते हैं.&amp;nbsp;
छोटी-छोटी सावधानियां बचा सकती हैं बड़ी परेशानी से
गर्मी के मौसम में अपनी सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. यदि काम के दौरान सिर दर्द, ज्यादा पसीना, चक्कर आना, कमजोरी या उलझन महसूस हो तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें. डॉक्टर के अनुसार &amp;nbsp;ये हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. ऐसे में तुरंत छांव वाली जगह पर जाएं, पानी पिएं और आराम करें. &amp;nbsp;थोड़ी सी सावधानी और सही आदतें अपनाकर आप गर्मियों में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं और कई गंभीर समस्याओं से बच सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <title>Snake Bite Myths: जहरीले सांप के बाइट के बाद भी कैसे जान बचा लेते हैं तांत्रिक, क्या है इसके पीछे का साइंस?</title>
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        <description><![CDATA[ Snake Bite Myths : भारत के गांवों और छोटे कस्बों में आज भी सांप के काटने की घटनाएं आम हैं. कई जगहों पर जैसे ही किसी व्यक्ति को सांप काटता है, तो अक्सर लोग घबरा जाते हैं और अस्पताल ले जाने की जगह सबसे पहले तांत्रिक, भोपा या झाड़फूंक करने वाले लोगों के पास ले जाया जाता है. ऐसे कई किस्से सुनने को मिलते हैं कि तांत्रिक ने मंत्र पढ़े, झाड़फूंक की और मरीज बच गया.
इन घटनाओं को देखकर लोगों का विश्वास और मजबूत हो जाता है कि तंत्र-मंत्र या झाड़फूंक से सांप का जहर उतर जाता है. हालांकि, बहुत से लोगों के मन में यह सवाल भी रहता है कि क्या सचमुच ऐसा होता है? तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि जहरीले सांप के बाइट के बाद भी आखिर कैसे ढोंगी तांत्रिक जान बचा लेते हैं और इसके पीछे का साइंस क्या है.&amp;nbsp;
आखिर कैसे ढोंगी तांत्रिक जान बचा लेते हैं?
कई बार लोग सोचते हैं कि सांप काटने के बाद अगर कोई व्यक्ति तांत्रिक या झाड़फूंक कराने के बाद बच गया, तो उसकी जान तंत्र-मंत्र से बची है. लेकिन ऐसा नहीं होता है. कोबरा जैसे जहरीले सांप हर बार काटते समय जहर नहीं छोड़ते हैं. कई बार जहरीले सांप सिर्फ डराने या बचाव के लिए काटते हैं, जिसे फॉल्स बाइट या ड्राई बाइट कहा जाता है. ऐसे में सांप के दांत तो लग जाते हैं, लेकिन शरीर में जहर नहीं जाता है. इसलिए व्यक्ति बिना किसी खास इलाज के भी ठीक हो सकता है. जब ऐसा होता है तो कुछ ढोंगी तांत्रिक इसका क्रेडिट अपनी झाड़फूंक या तंत्र-मंत्र को दे देते हैं, जबकि असल वजह सांप का जहर न छोड़ना होता है.&amp;nbsp;
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क्या होती है ड्राई बाइट?
ड्राई बाइट का मतलब है ऐसा काटना जिसमें सांप जहर नहीं छोड़ता है. वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि जहरीले सांपों के काटने के लगभग 20 से 25 प्रतिशत मामलों में जहर शरीर में नहीं पहुंचता है. ऐसे मामलों में व्यक्ति को काटने का निशान तो दिखाई देता है लेकिन गंभीर जहरीले लक्षण नहीं दिखते हैं. इसी कारण कई लोग यह मान लेते हैं कि किसी बाबा, तांत्रिक या झाड़फूंक करने वाले ने उनका इलाज कर दिया है.&amp;nbsp;
सांप काटने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो सबसे पहले उसे घबराने न दें और शांत रखने की कोशिश करें, क्योंकि डर और घबराहट से दिल की धड़कन तेज हो जाती है, जिससे जहर शरीर में जल्दी फैल सकता है. इसके अलावा मरीज को ज्यादा चलने-फिरने न दें और आराम से सीधा लिटाकर रखें जिससे शरीर की एक्टिविटी कम रहे. इसके साथ ही बिना समय गंवाए उसे तुरंत नजदीकी हॉस्पिटल ले जाएं और झाड़फूंक या तांत्रिकों के चक्कर में न पड़ें. जहां सांप ने काटा है, उस जगह को बार-बार हाथ न लगाएं, न दबाएं और न ही कोई घरेलू उपाय करें. साथ ही मरीज की सांस और होश पर लगातार नजर रखें. अगर उसे सांस लेने में परेशानी होने लगे या वह बेहोश होने लगे, तो तुरंत डॉक्टरों की मदद लें.&amp;nbsp;&amp;nbsp;यह भी पढ़ें - कंस्ट्रक्शन सेक्टर में आ रही नई क्रांति, अब बनेंगे सस्ते-मजबूत और एनवायरनफ्रेंडली घर! ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Mango Storage Tips: आम फ्रिज में रखने चाहिए या नहीं, जानें कैसे रख सकते हैं एक सप्ताह तक एकदम फ्रेश?</title>
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        <description><![CDATA[ Mango Storage Tips: आम फ्रिज में रखने चाहिए या नहीं, जानें कैसे रख सकते हैं एक सप्ताह तक एकदम फ्रेश? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Women&amp;apos;s Health: पीरियड्स पेन और PMOS से पीड़ित हैं लाखों महिलाएं, एक्सपर्ट की चेतावनी&amp; यह कोई सामान्य बात नहीं</title>
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        <description><![CDATA[ Why Period Pain Should Not Be Ignored: पीरियड्स का दर्द, पीएमओएस और बार-बार होने वाले यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन महिलाओं की उन हेल्थ समस्याओं में शामिल हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. पीढ़ियों से महिलाओं को यह समझाया जाता रहा है कि पीरियड्स में दर्द होना, पीरियड्स का अनियमित होना या यूरिन के दौरान जलन महसूस होना आम बात है. धीरे-धीरे कई महिलाएं इन परेशानियों के साथ जीना सीख लेती हैं और अपनी रूटीन तक इन्हीं लक्षणों के हिसाब से तय करने लगती हैं. लेकिन किसी समस्या का आम होना यह साबित नहीं करता कि वह सामान्य भी है.&amp;nbsp;
कई वर्षों तक पता नहीं चलता&amp;nbsp;
पिंकी प्रॉमिस की सीईओ और को- फाउंडर दिव्या बालाजी कामेरकर के अनुसार, महिलाओं की हेल्थ संबंधी परेशानियों को सामान्य मान लेने की यही सोच समय पर इलाज में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है. उनका कहना है कि कई महिलाओं को वर्षों तक यह एहसास ही नहीं होता कि उनके शरीर में कुछ गड़बड़ है, क्योंकि आसपास के लोग भी उन्हें यही बताते रहते हैं कि ऐसा तो हर महिला के साथ होता है.
भारत में लाखों महिलाएं इससे पीड़ित
भारत में लाखों महिलाएं पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं, पीएमओएस और यूटीआई से प्रभावित हैं. जामा नेटवर्क में प्रकाशित रिसर्च ने भारतीय महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज के बढ़ते बोझ को रेखांकित किया है. कई नेशनल स्टडी में भी सामने आया है कि यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और बड़ी संख्या में महिलाएं लंबे समय तक इसका इलाज नहीं करा पातीं. इसके बावजूद इन विषयों पर खुलकर बातचीत कम ही होती है. महिलाएं अक्सर दोस्तों से सलाह लेती हैं, इंटरनेट पर घरेलू उपाय खोजती हैं या फिर खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेती हैं.
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हर साल पांच में से एक महिला होती है शिकार
दिव्या बालाजी कामेरकर बताती हैं कि अनुमान के मुताबिक लगभग हर पांच में से एक महिला पीएमओएस से प्रभावित हो सकती है. वहीं यूटीआई महिलाओं के अस्पताल या क्लिनिक पहुंचने की सबसे आम वजहों में से एक है. पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं भी लगभग हर महिला किसी न किसी स्तर पर अनुभव करती है. यही वजह है कि इन लक्षणों को अक्सर गंभीरता से नहीं लिया जाता.
कब पीरियड्स पेन को नहीं मानना चाहिए सामान्य?
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर पीरियड्स का दर्द इतना अधिक हो कि रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होने लगें, तो इसे सामान्य नहीं माना जाना चाहिए. अत्यधिक ब्लीडिंग, चक्कर आना, लगातार थकान, मतली या असहनीय ऐंठन जैसी समस्याएं एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस, फाइब्रॉइड्स, थायरॉयड विकार या पीएमओएस जैसी स्थितियों का संकेत हो सकती हैं. इसी तरह बार-बार होने वाला यूटीआई भी केवल एक अस्थायी परेशानी नहीं है, बल्कि यह शरीर की किसी गहरी समस्या की ओर इशारा कर सकता है. हालांकि अब टेली-कंसल्टेशन, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन कम्युनिटी जैसी सुविधाओं ने मदद लेना पहले से आसान बना दिया है. फिर भी सबसे बड़ा बदलाव सोच में आने की जरूरत है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Benefits of Quitting Smartphone: एक महीने न करें स्मार्टफोन का इस्तेमाल तो शरीर में आ जाएंगे ये बदलाव, भरपूर होगा फायदा</title>
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        <description><![CDATA[ Benefits of Quitting Smartphone: आज के समय में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो स्मार्टफोन का इस्तेमाल न करता हो. सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक ज्यादातर लोगों का काफी समय मोबाइल स्क्रीन के सामने ही बीत जाता है. &amp;nbsp;सोशल मीडिया, वीडियो, गेम और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन लोगों को घंटों फोन से जोड़े रखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर एक महीने के लिए स्मार्टफोन से दूरी बना ली जाए तो शरीर और दिमाग पर इसका क्या असर पड़ सकता है? हाल ही में कई लोगों ने एक महीने तक स्मार्टफोन छोड़कर अपना अनुभव साझा किया, जिसमें उन्हें कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले है.&amp;nbsp;
दिमाग पहले से ज्यादा शांत और फोकस्ड हो सकता है
स्मार्टफोन का लगातार इस्तेमाल दिमाग को हर समय नई जानकारी और नोटिफिकेशन से घेरकर रखता है. ऐसे में ध्यान भटकना और किसी एक काम पर लंबे समय तक फोकस न कर पाना आम बात हो जाती है. ऐसे में एक महीने तक स्मार्टफोन से दूरी बनाने वाले लोगों ने बताया कि उनका ध्यान पहले से बेहतर हुआ और वे अपने काम पर ज्यादा फोकस कर पा रहे हैं.&amp;nbsp;
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नींद में आ सकता है सुधार
कई लोग रात में सोने से पहले काफी देर तक फोन चलाते हैं. इससे आंखों और दिमाग को आराम नहीं मिल पाता. स्मार्टफोन से दूरी बनाने के बाद लोगों ने महसूस किया कि उनकी नींद पहले से बेहतर होने लगी. वे जल्दी सो पाए और सुबह ज्यादा तरोताजा महसूस करने लगे. &amp;nbsp;विशेषज्ञ भी मानते हैं कि स्क्रीन टाइम कम करने से नींद की गुणवत्ता पर अच्छा असर पड़ सकता है. जब फोन हाथ में नहीं होता तो लोग अपने आसपास की चीजों पर ज्यादा ध्यान देने लगते हैं. कई लोगों ने बताया कि उन्होंने परिवार और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताया. साथ ही कुछ लोगों ने नए दोस्त भी बनाए और आमने-सामने बातचीत करने में अधिक रुचि दिखाई. &amp;nbsp;फोन की जगह किताबें पढ़ना, टहलना या किसी शौक पर समय देना आसान हो गया. इससे मानसिक संतुष्टि भी बढ़ी.&amp;nbsp;
हर खाली समय में फोन देखने की आदत छूट सकती है
स्मार्टफोन की सबसे बड़ी आदत यह है कि लोग थोड़ी सी फुर्सत मिलते ही स्क्रीन देखने लगते हैं. एक महीने तक फोन से दूर रहने वाले लोगों ने महसूस किया कि वे धीरे-धीरे इस आदत से बाहर आने लगे. &amp;nbsp;बस का इंतजार करते समय, लाइन में खड़े रहते समय या खाली बैठने पर भी उनका ध्यान फोन की ओर नहीं जाता था. इससे दिमाग को आराम मिला और लोग अपने विचारों के साथ ज्यादा समय बिता सके. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि स्क्रीन टाइम कम करना, बेवजह सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग से बचना और दिन के कुछ घंटे फोन से दूर रहना फायदेमंद हो सकता है. एक महीने का डिजिटल ब्रेक हर किसी के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन इससे यह जरूर समझा जा सकता है कि तकनीक का संतुलित इस्तेमाल हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए कितना महत्वपूर्ण है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 13:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Aamir Khan And Gauri Spratt: आमिर खान और गौरी स्प्रैट के बीच 14 साल का अंतर, जानें परफेक्ट रिश्ते के लिए कितना गैप है सही</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/aamir-khan-and-gauri-spratt-आमिर-खान-और-गौरी-स्प्रैट-के-बीच-14-साल-का-अंतर-जानें-परफेक्ट-रिश्ते-के-लिए-कितना-गैप-है-सही</link>
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        <description><![CDATA[ Does Age Gap Matter In A Successful Relationship: बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान तीसरी बार दूल्हा बनने जा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अपनी पार्टनर गौरी स्प्रैट के साथ 5 जुलाई को शादी करने की पुष्टि कर दी है. इस खबर के सामने आते ही दोनों के रिश्ते के साथ-साथ उनके बीच मौजूद 14 साल के उम्र के अंतर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सफल रिश्ते के लिए पति-पत्नी के बीच उम्र का एक तय अंतर होना जरूरी है या फिर यह सिर्फ सामाजिक सोच का हिस्सा है?.&amp;nbsp;
क्या है भारतीय समाज में नियम?
भारतीय समाज में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि पति की उम्र पत्नी से अधिक होनी चाहिए. आमतौर पर तीन से पांच साल का अंतर परफेक्ट माना जाता है, खासकर अरेंज मैरिज में. हालांकि बदलते दौर में यह सोच धीरे-धीरे बदल रही है. आज कई ऐसे चर्चित कपल हैं जिन्होंने उम्र के पारंपरिक नियमों को चुनौती दी है. उदाहरण के तौर पर प्रियंका चोपड़ा &amp;nbsp;और निक जोनास के बीच करीब 10 साल का अंतर है, जबकि शाहिद कपूर और मीरा राजपूत के रिश्ते में लगभग 15 साल का अंतर है। इसके बावजूद इनके रिश्ते सफल माने जाते हैं.&amp;nbsp;
एज गैप से क्या पड़ता है फर्क?
साइंस की बात करें एक्सपर्ट मानते हैं कि शादी में केवल उम्र नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और इमोशनल परिपक्वता ज्यादा अहम भूमिका निभाती है. साइंटफिक स्टजी के अनुसार लड़कियों में हार्मोनल बदलाव आमतौर पर लड़कों की तुलना में पहले शुरू हो जाते हैं. यही वजह है कि कई मामलों में महिलाएं इमोशनल रूप से अपेक्षाकृत जल्दी परिपक्व हो जाती हैं. भारत में विवाह की कानूनी उम्र लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है, इसलिए तीन साल का अंतर अक्सर संतुलित माना जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे अधिक उम्र का अंतर रिश्ते को कमजोर बना देगा.
क्या चीजें रखती हैं मायने?
रिलेशनशिप के बिषयों पर जानकारी देने वाली बेवसाइट Psychcentral के अनुसार, अमेरिकी साइकोलॉजिस्ट डॉ. लॉरेन ओल्सन का विचार काफी दिलचस्प है. उनका कहना है कि ज्यादातर कपल्स को लगता है कि वे एक ही उम्र के हैं. हमारे पास क्रोनोलॉजिकल उम्र, साइकोलॉजिकल उम्र, शारीरिक उम्र और यौन उम्र होती है. उम्र में अंतर वाले कई कपल्स आखिरी तीन पहलुओं में काफी हद तक एक जैसे होते हैं. यानी रिश्ता केवल जन्मतिथि से तय नहीं होता, बल्कि सोच, भावनाओं और लाइफस्टाइल की समानता भी महत्वपूर्ण होती है.&amp;nbsp;
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ज्यादा एज गैप में क्या होती है दिक्कत?
&amp;nbsp;बड़े उम्र के अंतर वाले रिश्तों में कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. काउंसलर ब्रैंडी पोर्चे के अनुसार, 10 से 15 साल या उससे अधिक के अंतर में दोनों पार्टनर्स के जीवन अनुभव अलग हो सकते हैं. वहीं मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट जीनामेरी गुआरिनो का मानना है कि ऐसे रिश्तों में स्वास्थ्य, एनर्जी स्तर, परिवार शुरू करने की योजना और जीवन की प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद देखने को मिल सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>House Fire Causes: घर में आग लगने की सबसे बड़ी वजह होती हैं ये चीजें, तुरंत चेक करें चेक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/house-fire-causes-घर-में-आग-लगने-की-सबसे-बड़ी-वजह-होती-हैं-ये-चीजें-तुरंत-चेक-करें-चेक</link>
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        <description><![CDATA[ Common Causes Of Fire In The Home: दिल्ली के मालवीय नगर में फ्लोरिश स्टे बी एंड बी नाम के होटल में आग लगने से कम से कम 21 लोगों की मौत रिपोर्ट निकल कर सामने आई है, ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि घर में आग न लगे इसके लिए क्या ध्यान रखना चाहिए. &amp;nbsp;घर में आग लगने की घटनाएं अक्सर अचानक होती हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में इनके पीछे कुछ ऐसी गलतियां होती हैं जिन्हें समय रहते रोका जा सकता है. लोग आमतौर पर गैस सिलेंडर या मोमबत्ती को ही आग लगने की वजह मानते हैं, जबकि घर के अंदर मौजूद कई दूसरी चीजें भी बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं. ऐसे में कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है.
&amp;nbsp;किचन और खाना बनाते समय लापरवाही
घर में आग लगने की सबसे बड़ी वजह किचन से जुड़ी होती है. खाना बनाते समय गैस को बिना निगरानी के छोड़ देना, बहुत ज्यादा तापमान पर कुकिंग करना या गैस चूल्हे के पास कपड़ा रखना आग का कारण बन सकता है. इसलिए खाना बनाते समय हमेशा सतर्क रहें और किचन को साफ रखें.
खराब वायरिंग और ओवरलोडेड सॉकेट
पुरानी वायरिंग, एक ही सॉकेट में कई उपकरण लगाना और खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान का इस्तेमाल आग का जोखिम बढ़ा देता है. कई बार तारों में शॉर्ट सर्किट होने से आग दीवारों के अंदर ही फैलने लगती है. इसलिए समय-समय पर वायरिंग और बिजली के उपकरणों की जांच करानी चाहिए.
&amp;nbsp;चार्जर, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
मोबाइल, लैपटॉप, पावर बैंक और दूसरी रिचार्जेबल बैटरियां भी आग का कारण बन सकती हैं. खराब या नकली चार्जर इस्तेमाल करने से बैटरी ओवरहीट हो सकती है और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. डिवाइस को रातभर चार्जिंग पर छोड़ने से भी बचना चाहिए.
&amp;nbsp;मोमबत्ती और खुली आग वाली चीजें
मोमबत्ती, अगरबत्ती, दीया, बारबेक्यू या फायर पिट जैसी चीजों का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है इन्हें पर्दों, कागज या दूसरे ज्वलनशील सामान के पास रखने से आग तेजी से फैल सकती है. घर से बाहर निकलने से पहले सभी खुली आग वाली चीजों को पूरी तरह बुझा देना चाहिए.
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एयरोसोल कैन और ज्वलनशील सामान
डिओडोरेंट, एयर फ्रेशनर और ड्राई शैंपू जैसी एयरोसोल कैन गर्मी के संपर्क में आने पर फट सकती हैं. इन्हें गैस चूल्हे, हीटर या सीधे धूप वाली जगह पर रखने से बचना चाहिए. छोटी सी लापरवाही बड़ा हादसा बन सकती है.
घर में फैला कबाड़ और अव्यवस्था
घर में जरूरत से ज्यादा सामान जमा करना भी आग के खतरे को बढ़ाता है. कागज, पुराने कपड़े और अन्य ज्वलनशील वस्तुएं आग को तेजी से फैलाने का काम करती हैं. इसके अलावा ज्यादा सामान होने से आपात स्थिति में बाहर निकलना भी मुश्किल हो सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि आग से बचाव का सबसे आसान तरीका सतर्कता है. घर की वायरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, किचन और ज्वलनशील वस्तुओं की नियमित जांच करने से बड़े हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है. छोटी-छोटी सावधानियां आपके परिवार और घर दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>घर बनवा रहे या करा रहे पेंटिंग तो हो जाएं अलर्ट, आपका पेंट आग और जहरीले धुएं का कारण तो नहीं?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/घर-बनवा-रहे-या-करा-रहे-पेंटिंग-तो-हो-जाएं-अलर्ट-आपका-पेंट-आग-और-जहरीले-धुएं-का-कारण-तो-नहीं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/घर-बनवा-रहे-या-करा-रहे-पेंटिंग-तो-हो-जाएं-अलर्ट-आपका-पेंट-आग-और-जहरीले-धुएं-का-कारण-तो-नहीं</guid>
        <description><![CDATA[ दिल्ली से लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर तक आग की घटनाओं ने हर किसी का दिल दहला दिया है. क्या आप जानते हैं कि आग लगने की घटनाओं में ज्यादातर मौतें आग की लपटों से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं से दम घुटने के कारण होती हैं? क्या आप यह भी जानते हैं कि आपकी खूबसूरत दीवारों पर लगा पेंट इस जहरीले धुएं का बहुत बड़ा कारण हो सकता है? गौर करने वाली बात यह है कि आजकल हर कोई अपने घर को सुंदर और सुरक्षित बनाना चाहता है. हम घर के दरवाजों, वायरिंग और अन्य सुरक्षा चीजों पर तो लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन दीवारों के पेंट पर ध्यान नहीं देते. बाजार में ऐसे कई पेंट मौजूद हैं, जो फायर रेसिस्टेंट तकनीक के हिसाब से तैयार किए जाते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में..
क्या है भारत में आग लगने का आंकड़ा?
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में ही भारत में आग लगने की 7000 से ज्यादा घटनाएं हुईं, जिनमें करीब 6900 लोगों ने अपनी जान गंवाईं. साल 2026 तक आते-आते यह आंकड़ा और भी डरावना हो गया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बंद इमारतों या घरों में जब आग लगती है तो लोग लपटों से कम और दीवारों के पेंट या प्लास्टिक के जलने से निकलने वाले जहरीले धुएं (कार्बन मोनोऑक्साइड आदि) के कारण ज्यादा जान गंवाते हैं. दिल्ली-मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में हुए हालिया हादसे इसके सबसे बड़े और दुखद उदाहरण हैं.
आपका पुराना पेंट आग में कैसे बन जाता है &#039;ईंधन&#039;?
ज्यादातर भारतीय घरों में आज भी एक्रिलिक और प्लास्टिक-इमल्शन पेंट (Plastic-Emulsion Paint) का इस्तेमाल होता है. यह पेंट बहुत चमकता है और सस्ता भी पड़ता है, लेकिन इसमें &#039;पेट्रोलियम-पॉलिमर&#039; का बेस होता है. आसान शब्दों में कहें तो इन पेंट्स में एक तरह का केमिकल होता है, जो आग लगने पर बिल्कुल पेट्रोल या प्लास्टिक की तरह काम करता है. जब आग लगती है तो यह पेंट दीवारों पर तेजी से जलने लगता है और पूरे घर में जहरीला धुआं फैला देता है. इससे घर में फंसे लोगों का दम घुटने लगता है और उन्हें बाहर निकलने का समय ही नहीं मिल पाता है.
इसका समाधान क्या है?
इस जानलेवा समस्या को रोकने के लिए &#039;सिलिकेट मिनरल पेंट&#039; सबसे बेहतरीन और सुरक्षित उपाय बनकर सामने आए हैं. ये पेंट पूरी तरह से प्राकृतिक और अकार्बनिक होते हैं. इन्हें पोटैशियम सिलिकेट और खनिजों से बनाया जाता है. इनमें पेट्रोलियम बेस नहीं होता, इसलिए ये आग नहीं पकड़ते हैं. अगर कमरे में भीषण आग लग भी जाए तो यह पेंट जलेगा नहीं, सिर्फ थोड़ा झुलस जाएगा. सबसे बड़ी बात यह है कि ये पेंट किसी तरह का जहरीला धुआं नहीं छोड़ते हैं.
दीवार का हिस्सा बन जाता है यह पेंट
जायडेक्स ग्रुप के एमडी डॉ. मौलिक रांका के मुताबिक, पारंपरिक पेंट दीवार के ऊपर सिर्फ प्लास्टिक की परत बनाते हैं, जो आग में पपड़ी बनकर जलने लगती है. वहीं, मिनरल पेंट कंक्रीट, ईंट या प्लास्टर के साथ एक रासायनिक बंधन बना लेता है. यह पेंट पुतने के बाद दीवार का हिस्सा बन जाता है. ऐसे में यह न तो कभी पपड़ी बनकर गिरता है और न ही आग को फैलने देता है. यह धुएं को कम करके लोगों को घर से सुरक्षित बाहर निकलने के लिए ज्यादा समय देता है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>घर, बनवा, रहे, या, करा, रहे, पेंटिंग, तो, हो, जाएं, अलर्ट, आपका, पेंट, आग, और, जहरीले, धुएं, का, कारण, तो, नहीं</media:keywords>
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        <title>कंस्ट्रक्शन सेक्टर में आ रही नई क्रांति, अब बनेंगे सस्ते&amp;मजबूत और एनवायरनफ्रेंडली घर!</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप जानते हैं कि आने वाले समय में हमारा देश, हमारे घर और हमारी सड़कें कितनी तेजी से बदलने वाले हैं? अगर आप अपना घर बनाने की सोच रहे हैं या रियल एस्टेट में निवेश करना चाहते हैं तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि भारत का कंस्ट्रक्शन सेक्टर किस दिशा में जा रहा है?&amp;nbsp;
घर बनाना होगा मॉडर्न और सस्ता
आज के समय में घर बनाना काफी महंगा और समय लेने वाला काम है, लेकिन अब कई नई तकनीक आ चुकी हैं, जो इस परेशानी को दूर कर सकती हैं. इनमें से एक है प्रीकास्ट टेक्नोलॉजी, जिसमें फैक्ट्री में पहले से बनी दीवारों और छत को सिर्फ जोड़ना होता है. इस तरह के नए तरह के सीमेंट और कंस्ट्रक्शन केमिकल जैसी चीजों से घर बहुत तेजी से और मजबूती के साथ बनाए जा सकेंगे. बता दें कि इस तरह की तकनीक को लेकर मुंबई में वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया 2026 एग्जिबिशन के 12वें एडिशन का आयोजन किया गया. इसमें बताया गया कि नई-नई तकनीकों से भविष्य में बनने वाले घर न सिर्फ मजबूत होंगे, बल्कि आम आदमी के बजट में भी आएंगे.
अब पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना होगा कंस्ट्रक्शन
जब भी कोई बिल्डिंग बनती है तो बहुत धूल और प्रदूषण होता है. नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स के डीजी डॉ. एलपी सिंह के मुताबिक, भारत में सीमेंट का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. 2047 तक भारत आज के मुकाबले 4 गुना ज्यादा सीमेंट बनाने लगेगा, लेकिन यह सारा विकास इको-फ्रेंडली होगा. दरअसल, अब ऐसा सीमेंट और सामान बनाया जा रहा है, जिससे कार्बन का उत्सर्जन कम हो और प्रदूषण न फैले.
पक्की होंगी सड़कें, गड्ढों से मिलेगी छुट्टी!
बारिश के मौसम में सड़कों पर होने वाले गड्ढे हर किसी को परेशान करते हैं. मुंबई नगर निगम के डिप्टी चीफ इंजीनियर डॉ. विशाल ठोंबरे के मुताबिक, कोलतार की सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं. ऐसे में अब सड़कों को कंक्रीट से बनाया जा रहा है. सिर्फ मुंबई में ही 2035 किमी सड़कों में से 1400 किमी सड़कों को कंक्रीट से बनाया गया है. ये सड़कें न सिर्फ कई साल तक चलेंगी, बल्कि आम जनता को बार-बार लगने वाले ट्रैफिक जाम और गड्ढों से भी छुटकारा दिलाएंगी.
कितना बढ़ जाएगा कंस्ट्रक्शन सेक्टर?
इन्फॉर्म मार्केट्स इन इंडिया के एमडी योगेश मुद्रास के मुताबिक, देश का कंस्ट्रक्शन सेक्टर 2030 तक 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. ट्रांसपोर्ट, हाई-स्पीड रेल और लॉजिस्टिक कॉरिडोर में इनवेस्टमेंट बढ़ने से कंस्ट्रक्शन सेक्टर काफी तेजी से बढ़ रहा है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Human Body Facts: खाल पर घास की तरह बाल और आंखों में कांच वाला हीरा, चमत्कार से कम नहीं इंसानी शरीर</title>
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        <description><![CDATA[ Human Body Facts: हम रोज आईने में अपना चेहरा देखते हैं, वहीं एक इंसान रोज अपने हर एक अंग का उपयोग करके कोई न कोई काम करता है. लेकिन क्या कभी किसी ने गौर किया है कि हमारा शरीर अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है. जिस शरीर को हम नॉर्मल मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, उसके अंदर ऐसी अनगिनत प्रक्रियाएं चलती रहती है, जिन्हें समझना किसी अजूबे से कम नहीं है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं की खाल पर घास की तरह बाल और आंखों में कांच वाला हीरा इंसानी शरीर कैसे किसी चमत्कार से कम नहीं है.&amp;nbsp;
एक कोशिका से बन जाता है पूरा इंसान&amp;nbsp;
मानव शरीर लगभग 100 ट्रिलियन कोशिकाओं से मिलकर बना है, हैरानी की बात यह है कि इन सभी कोशिकाओं की शुरुआत केवल एक ही कोशिका से होती है. शरीर में हर मिनट करीब 300 करोड़ कोशिकाएं नष्ट होती है, लेकिन उसी के साथ नई कोशिकाओं का निर्माण भी लगातार जारी रहता है. वैज्ञानिकों के अनुसार शरीर रोजाना लगभग 300 अरब नई कोशिकाएं बनता है, जिससे शरीर खुद को लगातार मरम्मत और पुननिर्मित करता रहता है.&amp;nbsp;
बिना बिजली के दिन रात धड़कता है दिल&amp;nbsp;
इंसानी शरीर के चमत्कार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हमारा दिल बिना बिजली के भी दिनरात धड़कता &amp;nbsp;रहता है. दिल को शरीर की सबसे मेहनती मशीन कहा जाता है. यह बिना रुके दिन-रात काम करता रहता है. एक नॉर्मल व्यक्ति का दिल दिन भर में करीब एक लाख बार धड़कता सकता है. वहीं शरीर का पूरा ब्लड बार-बार पूरे शरीर का चक्कर लगाता रहता है और यह प्रक्रिया बिना किसी बाहरी ऊर्जा सोर्स के चलती रहती है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है.&amp;nbsp;
किडनी रोज करती है खून की सफाई&amp;nbsp;
शरीर की किडनी भी किसी आधुनिक फिल्टर प्लांट से कम नहीं है. यह लगातार खून को साफ करने, शरीर के अंदर से गंदगी को अलग करने और शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने का काम करती है. जिस काम के लिए गंभीर बीमारियों में डायलिसिस की जरूरत पड़ती है, वहीं काम हेल्दी किडनी हर दिन लगातार करती रहती है.&amp;nbsp;
आंखों के अंदर मौजूद है नेचुरल लेंस&amp;nbsp;
मानव आंख में मौजूद प्राकृतिक लेंस को क्रिस्टलाइन का लेंस कहा जाता है. यह एक पारदर्शी और दोनों तरफ से उभरी हुई संरचना होती है, जो मुख्य रूप से पानी और प्रोटीन से बनी होती है. यही लेंस आंख में आने वाली रोशनी को मोड़कर रेटिना पर केंद्रित करता है, जिससे हमें साफ दिखाई देता है. एक नॉर्मल व्यक्ति की आंख का यह लेंस लगभग 10 मिलीमीटर चौड़ा होता है. वहीं एक व्यक्ति की आंखों से देखना भी इंसानी शरीर के किसी चमत्कार से कम नहीं है.&amp;nbsp;
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खाल पर उगते हैं, हजारों बाल&amp;nbsp;
हर व्यक्ति रोजाना औसत 60 से 100 बाल खो देता है. इसके बावजूद सिर पर मौजूद बालों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि नॉर्मल रूप से इसका असर दिखाई नहीं देता. बालों की संरचना भी बहुत मजबूत मानी जाती है और वह बहुत धीरे-धीरे नष्ट होते हैं.&amp;nbsp;
दिमाग किसी कंप्यूटर से कम नहीं&amp;nbsp;
इंसानी दिमाग को दुनिया का सबसे जटिल जैविक कंप्यूटर माना जाता है. यह लगभग 80 प्रतिशत पानी से बना होता है, लेकिन इसके बावजूद अरबों सूचनाओं को संसाधित करने की क्षमता रखता है. दिमाग में संदेश पहुंचाने वाले तांत्रिक संकेत सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यात्रा कर सकते हैं.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Human, Body, Facts:, खाल, पर, घास, की, तरह, बाल, और, आंखों, में, कांच, वाला, हीरा, चमत्कार, से, कम, नहीं, इंसानी, शरीर</media:keywords>
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        <title>World Famous Rivers: जिंदगी क्या है एक सफर... इन 7 नदियों के किनारे बसती है दुनिया, सैर करके आ जाएगा मजा</title>
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        <description><![CDATA[ Most Culturally Important Rivers In The World: दुनिया की कई बड़ी सभ्यताएं नदियों के किनारे बसकर विकसित हुईं. धर्म, व्यापार, खानपान, संस्कृति और साम्राज्यों की नींव इन नदियों ने ही रखी. आज भी कई नदियां सिर्फ पानी का बहाव नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, इतिहास और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. इन नदियों के किनारे होने वाले त्योहार, पूजा-पाठ, संगीत, खानपान और परंपराएं यात्रियों को किसी किताब से ज्यादा गहराई से संस्कृति को समझने का मौका देती हैं. यही वजह है कि दुनिया की ये मशहूर नदियां आज भी ट्रैवलर्स को अपनी तरफ खींचती हैं.
गंगा नदी

गंगा नदी को भारत की आध्यात्मिक जीवनरेखा कहा जाता है. हिंदू धर्म में इसका बेहद खास महत्व है और उत्तर भारत के लाखों लोगों की जिंदगी इससे जुड़ी हुई है. लोग यहां पवित्र स्नान करने, अंतिम संस्कार करने और शाम की आरती देखने दूर-दूर से आते हैं. वाराणसी, हरिद्वार और ऋषिकेश गंगा को अलग-अलग रूप में महसूस करवाते हैं. वाराणसी अपनी सदियों पुरानी गलियों और घाटों के लिए मशहूर है, हरिद्वार धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र माना जाता है, जबकि ऋषिकेश योग, अध्यात्म और एडवेंचर टूरिज्म का अनोखा मेल दिखाता है.&amp;nbsp;
नील नदी

नील नदी को प्राचीन मिस्र सभ्यता की रीढ़ माना जाता है. इसको लेकर कहा जाता है कि अगर नील नदी ना होती तो मिस्र जैसी महान सभ्यता शायद कभी विकसित ही नहीं हो पाती. हजारों सालों तक इस नदी ने खेती, व्यापार और परिवहन को सहारा दिया. आज भी नील नदी के किनारे मंदिर, मकबरे और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें देखने दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं. यहां क्रूज यात्रा के दौरान इतिहास और वर्तमान दोनों एक साथ दिखाई देते हैं.&amp;nbsp;
मेकॉन्ग नदी&amp;nbsp;

मेकॉन्ग नदी दक्षिण-पूर्व एशिया की सांस्कृतिक धड़कन मानी जाती है. चीन, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम से गुजरने वाली यह नदी अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ती है. कहीं शांत बौद्ध गांव दिखाई देते हैं तो कहीं तैरते बाजार और पानी पर बसे गांव. वियतनाम का डेल्टा इलाका धान के खेतों, नहरों और फलों के बागानों के लिए जाना जाता है. यह नदी आज भी लाखों लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बनी हुई है.
डेन्यूब नदी

डेन्यूब नदी को यूरोप के साम्राज्यों की नदी कहा जाता है. &amp;nbsp;यह कई देशों से होकर गुजरती है और सदियों से संस्कृतियों को जोड़ने का काम करती रही है. वियना, बुडापेस्ट और बेलग्रेड जैसे शहर इसी नदी के किनारे विकसित हुए. यहां यात्रा करने पर हर शहर की भाषा, खाना और संस्कृति बदलती नजर आती है.&amp;nbsp;
अमेजन नदी

अमेजन नदी दुनिया की सबसे विशाल नदी सिस्टम में से एक है. इसकी खासियत यह है कि यहां आज भी प्रकृति इंसानी निर्माण पर भारी पड़ती है. पेरू, ब्राजील और कोलंबिया के घने जंगलों से गुजरती यह नदी जंगली जीवन, गुलाबी डॉल्फिन, आदिवासी संस्कृतियों और दूर-दराज गांवों की झलक दिखाती है.
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यांग्त्जी नदी

यांग्त्जी नदी चीन की सबसे लंबी नदी है और इसे देश की तरक्की का प्रतीक माना जाता है. सदियों से यह व्यापार, खेती और उद्योग का आधार रही है. यहां पुराने नदी किनारे बसे शहरों के साथ आधुनिक इमारतें, विशाल पुल और बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट एक साथ दिखाई देते हैं.
मिसिसिपी नदी

मिसिसिपी नदी अमेरिका की संगीत और प्रवास संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है. ब्लूज़ म्यूजिक, साहित्य और व्यापारिक इतिहास में इसका बड़ा योगदान माना जाता है. न्यू ऑरलियन्स जैसे शहर इस नदी की वजह से ही अपनी खास पहचान रखते हैं. यहां की यात्रा कई अलग-अलग अमेरिकी संस्कृतियों को एक साथ देखने जैसा अनुभव देती है.
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Meat Storage: गोश्त को कितने वक्त तक कर सकते हैं प्रिजर्व, जानें इसे सड़ने में लगते हैं कितने दिन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/meat-storage-गोश्त-को-कितने-वक्त-तक-कर-सकते-हैं-प्रिजर्व-जानें-इसे-सड़ने-में-लगते-हैं-कितने-दिन</link>
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        <description><![CDATA[ How Long Can Meat Be Safely Stored In The Fridge: किसी खास मौके पर घर में अक्सर जरूरत से ज्यादा गोश्त आ जाता है, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर मांस को कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है और कब तक इसे खाना सही रहता है. अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो गोश्त में बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
कैसे रख सकते हैं इसको सुरक्षित?
&amp;nbsp;गोश्त को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका फ्रीजर में स्टोर करना है. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के मुताबिक -18&amp;deg;C या उससे कम तापमान पर रखा गया मांस लंबे समय तक सुरक्षित रह सकता है, क्योंकि इस तापमान पर बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव निष्क्रिय हो जाते हैं, हालांकि समय के साथ इसके स्वाद और क्वालिटी में कमी आ सकती है.
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कच्चे गोश्त के लिए क्या है नियम?
अगर बात फ्रिज की करें तो कच्चे गोश्त को बहुत लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता. यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की गाइडलाइन के अनुसार, अधिकांश कच्चा मांस फ्रिज में केवल 3 से 5 दिन तक ही सुरक्षित रहता है. वहीं कीमा या पिसा हुआ मांस सिर्फ 1 से 2 दिन तक ही फ्रिज में रखना चाहिए. इसके बाद खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. चिकन और अन्य पोल्ट्री उत्पादों की स्टोरेज अवधि और भी कम होती है. कच्चा चिकन फ्रिज में केवल 1 से 2 दिन तक ही सुरक्षित माना जाता है. अगर चिकन पकाया जा चुका है तो इसे 3 से 4 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लेना चाहिए. ज्यादा देर तक रखने पर बैक्टीरिया बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है.
फ्रीजर में कितने दिनों तक कर सकते हैं स्टोर?
फ्रीजर में रखने पर गोश्त की उम्र काफी बढ़ जाती है. फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, &amp;nbsp;रोस्ट को 4 से 12 महीने तक और चिकन को लगभग 1 साल तक फ्रीज किया जा सकता है। वहीं मछली की अलग-अलग किस्में 2 से 8 महीने तक सुरक्षित रह सकती हैं. हालांकि, फूड एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बेहतर स्वाद और क्वालिटी के लिए इन्हें निर्धारित समय के भीतर ही इस्तेमाल कर लेना चाहिए.
फ्रीज में गोश्त रखने के क्या हैं नियम?
मांस को फ्रीज करने से पहले उसे अच्छी तरह पैक करना भी बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट का कहना है कि मूल पैकेजिंग के ऊपर प्लास्टिक रैप या फॉयल की एक अतिरिक्त परत लगाने से नमी बाहर नहीं निकलती और मांस लंबे समय तक ताजा बना रहता है. जितना ताजा गोश्त फ्रीज किया जाएगा, उसकी गुणवत्ता उतनी ही बेहतर बनी रहेगी. गोश्त को डीफ्रॉस्ट यानी पिघलाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है. &amp;nbsp;जमे हुए मांस को कमरे के तापमान पर छोड़कर पिघलाना सुरक्षित नहीं माना जाता. इसे या तो फ्रिज में, ठंडे पानी में बंद पैकेट के साथ या माइक्रोवेव की मदद से डीफ्रॉस्ट करना चाहिए. गलत तरीके से पिघलाने पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Height Growth In Children: सिर्फ जेनेटिक्स नहीं, बच्चों की लंबाई बढ़ाने में काम आएगी यह कड़क डाइट, देखें पूरी लिस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Best Foods For Height Growth In Children:&amp;nbsp;हर माता-पिता कभी न कभी यह जरूर सोचते हैं कि क्या बच्चे की लंबाई बढ़ाने में खानपान की कोई भूमिका होती है? न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के मुताबिक कद काफी हद तक जेनेटिक्स पर निर्भर करता है, लेकिन सही पोषण भी उतना ही जरूरी है. अगर बच्चे को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें, तो वह अपनी नेचुरल ग्रोथ क्षमता तक बेहतर तरीके से पहुंच सकता है.
क्यों जरुरी है अच्छी डाइट?
बच्चों की हड्डियों, मांसपेशियों, एनर्जी और यहां तक कि नींद की क्वालिटी भी उनके खानपान से जुड़ी होती है. अच्छी डाइट शरीर को विकास के लिए जरूरी पोषण देती है, जबकि पोषक तत्वों की कमी ग्रोथ की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है. अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी महंगे सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती.
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हाइट ग्रोथ के लिए जरूरी फूड
दूध और डेयरी उत्पाद बच्चों की ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी खाद्य पदार्थों में गिने जाते हैं. दूध में कैल्शियम, विटामिन D और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. अगर बच्चा सादा दूध नहीं पीना चाहता तो दही, पनीर और चीज जैसे विकल्प भी उसकी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
अंडा भी बेहतर विकल्प
अंडे भी बच्चों की लंबाई और शारीरिक विकास के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, विटामिन B12 और राइबोफ्लेविन मौजूद होता है. नाश्ते में उबले अंडे, ऑमलेट या पराठे में अंडा मिलाकर बच्चों को आसानी से खिलाया जा सकता है.
हरी पत्तेदार सब्जियां डाइट में करें शामिल
हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, ब्रोकली और केल कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन K से भरपूर होती हैं. ये पोषक तत्व हड्डियों की मजबूती और ग्रोथ को सपोर्ट करते हैं. अगर बच्चा इन्हें सीधे खाने से मना करता है तो इन्हें सूप, पास्ता या रैप्स में मिलाकर दिया जा सकता है.
बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज और अलसी&amp;nbsp;
बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज और अलसी जैसे ड्राई फ्रूट्स और सीड्स भी बच्चों की ग्रोथ के लिए अच्छे माने जाते हैं. इनमें प्रोटीन, हेल्दी फैट्स और कई जरूरी मिनरल्स होते हैं. रोजाना थोड़ी मात्रा में इनका सेवन हड्डियों और दिमाग दोनों के विकास में मदद कर सकता है.
मछली &amp;nbsp;भी बेहतर विकल्प
जो परिवार मछली खाते हैं, उनके लिए सैल्मन, मैकरेल और सार्डिन जैसी फैटी फिश बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं. इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन D शरीर को कैल्शियम बेहतर तरीके से अब्जार्व करने में मदद करते हैं. वहीं ओट्स, ब्राउन राइस और साबुत अनाज भी बच्चों को लंबे समय तक एनर्जी देने के साथ कई जरूरी खनिज प्रदान करते हैं.&amp;nbsp;
इनको भी कर सकते हैं शामिल
इसके अलावा राजमा, चना, मूंग और मसूर जैसी दालें भी बच्चों की डाइट का अहम हिस्सा होनी चाहिए. इनमें प्रोटीन, आयरन, जिंक और बी-विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं. अलग-अलग दालों को नियमित रूप से भोजन में शामिल करने से बच्चे की ग्रोथ, पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rajasthani Malai Pyaz: राजस्थान की वर्ल्ड फेमस &amp;apos;मलाई प्याज&amp;apos; कैसे बनाते हैं? नोट कर लें रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Rajasthan Famous Malai Pyaz: राजस्थान का नाम आते ही दाल-बाटी, गट्टे की सब्जी और केर-सांगरी जैसे पारंपरिक व्यंजन याद आ जाते हैं. लेकिन इसी राज्य की एक और खास डिश है, जो अपने अनोखे स्वाद और मलाईदार टेक्सचर के लिए काफी पसंद की जाती है. इसका नाम है &#039;मलाई प्याज&#039;. यह एक ऐसी सब्जी है जिसमें छोटे प्याज, ताजी मलाई और मसालों का शानदार मेल देखने को मिलता है. अगर आप रोजमर्रा के खाने में कुछ नया और स्वादिष्ट ट्राई करना चाहते हैं, तो यह राजस्थानी डिश आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है.
क्या है मलाई प्याज की खासियत?
मलाई प्याज की खासियत यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाले छोटे-छोटे प्याज सब्जी को अलग स्वाद देते हैं. जब ये प्याज मसालों और क्रीम के साथ पकते हैं तो इनका स्वाद और भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि राजस्थान के कई इलाकों में यह डिश खास मौकों के अलावा सामान्य भोजन में भी बनाई जाती है. &amp;nbsp;
क्या होती है इसकी रेसिपी?
इस स्वादिष्ट सब्जी को बनाने के लिए लगभग 20 से 25 छोटे प्याज, दो चम्मच घी, एक चम्मच जीरा, एक तेजपत्ता, एक बड़ा बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, काली इलायची, हल्दी, टमाटर की प्यूरी, ताजी क्रीम, कसूरी मेथी, गरम मसाला, नमक और हरा धनिया की जरूरत होगी.
बनाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
सबसे पहले छोटे प्याज को अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद इन्हें हल्का सा तेल और नमक लगाकर धीमी आंच पर भून लें. चाहें तो एयर फ्रायर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. प्याज तब तक पकाएं जब तक उनका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए। यही स्टेप इस डिश के स्वाद को खास बनाता है. अब एक कढ़ाई में घी गर्म करें। इसमें जीरा, तेजपत्ता और काली इलायची डालकर कुछ सेकंड तक भूनें. जब मसालों की खुशबू आने लगे तो इसमें बारीक कटा प्याज डालें और हल्का सुनहरा होने तक पकाएं, इसके बाद हरी मिर्च, अदरक और लहसुन डालकर कुछ देर भूनें,&amp;nbsp;
अब लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर, गरम मसाला और स्वादानुसार नमक मिलाएं. मसालों को अच्छी तरह चलाने के बाद थोड़ा पानी और टमाटर की प्यूरी डाल दें, कढ़ाई को ढककर लगभग 7 से 8 मिनट तक पकाएं ताकि मसाले अच्छी तरह तैयार हो जाएं और उनका कच्चापन खत्म हो जाए.
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क्रीम डालने के लिए क्या हैं नियम?
जब मसाला अच्छी तरह पक जाए तो इसमें ताजी क्रीम डालें और दो से तीन मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें. इससे ग्रेवी में गाढ़ापन और मलाईदार स्वाद आ जाएगा. अब पहले से भुने हुए छोटे प्याज इसमें डालें और सभी चीजों को अच्छे से मिला लें. आखिर में ऊपर से थोड़ी क्रीम डालें और कसूरी मेथी व ताजा हरा धनिया छिड़ककर सजाएं. गरमा-गरम मलाई प्याज को रोटी, पराठे या नान के साथ परोसें. इसका रिच और क्रीमी स्वाद खाने का मजा कई गुना बढ़ा देता है.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Valley Of Flowers: पर्यटकों के लिए खुली फूलों की घाटी, जानें ट्रेकिंग का सही समय और जरूरी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Valley Of Flowers: पर्यटकों के लिए खुली फूलों की घाटी, जानें ट्रेकिंग का सही समय और जरूरी बातें ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kidney Disease: 2040 तक मौत का 5वां बड़ा कारण बनेगी किडनी की बीमारी, लैंसेट की रिपोर्ट में डरावना खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Early Warning Signs Of Chronic Kidney Disease: हमारे शरीर में किडनी दिन-रात बिना रुके काम करती है. यह खून से वेस्ट पदार्थों को फिल्टर करने, शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और हड्डियों व ब्लड वेसल्स को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. लेकिन चिंता की बात यह है कि जब किडनी की काम करने की क्षमता कम होने लगती है, तब शरीर अक्सर शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता. यही कारण है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज को एक साइलेंट.बीमारी माना जाता है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रही है दुनियाभर में किडनी की बीमारी?
हाल ही में मेडिकल जर्नल द लैंसेटमें पब्लिश तीन रिसर्च पत्रों की तरफ से एक &amp;nbsp;चेतावनी दी गई है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हेल्थ चुनौतियों में से एक बनती जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब 788 से 844 मिलियन एडल्ट इस बीमारी से प्रभावित हैं और वर्ष 2040 तक यह वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में पांचवें स्थान पर पहुंच सकती है.
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एक्सपर्ट का कहना है कि किडनी रोग के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, हृदय रोग और बढ़ती उम्र जैसे कारण जिम्मेदार हैं. इसके अलावा आजकल की अनियमित लाइफस्टाइल और खराब खानपान भी किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी मानता है कि किडनी रोग अक्सर शुरुआती चरण में बिना लक्षणों के बढ़ता है, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
किडनी की बीमारी का जल्दी पता लगाना क्यों जरूरी?
द लैंसेट की पहली स्टडी में बताया गया कि अब किडनी रोग की पहचान के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट टेस्ट, एल्ब्यूमिन्यूरिया जांच, एडवांस इमेजिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आधुनिक तकनीकें बीमारी को शुरुआती अवस्था में पकड़ने में मदद कर रही हैं. रिसर्चर का मानना है कि जितनी जल्दी बीमारी का पता चलेगा, किडनी को उतना ही बेहतर तरीके से बचाया जा सकेगा.
महिलाओं और पुरुषों के किडनी डिजीज में क्या अंतर?
दूसरी स्टडी में एक दिलचस्प तथ्य सामने आया. रिसर्चर ने पाया कि पुरुषों और महिलाओं में किडनी रोग का असर एक जैसा नहीं होता. दोनों के शरीर में किडनी की बनावट, बीमारी की प्रगति और इलाज के प्रति प्रतिक्रिया अलग हो सकती है. इसलिए भविष्य में किडनी रोग के इलाज को अधिक व्यक्तिगत और जरूरत के अनुसार तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.
उम्मीद की किरण जग रही
तीसरी स्टडी उम्मीद जगाने वाली है। इसमें बताया गया कि नई दवाओं जैसे एसजीएलटी2 इनहिबिटर्स , ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट और अन्य आधुनिक उपचारों ने किडनी रोग की प्रगति को धीमा करने में अच्छे परिणाम दिखाए हैं. इसके &amp;nbsp;साथ ही ये दवाएं हृदय स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों में अक्सर डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग जैसी कई समस्याएं एक साथ होती हैं, इसलिए समग्र उपचार की आवश्यकता होती है.
किडनी को किन चीजों से होती है दिक्कत?
अमन पुरी, फाउंडर, स्टेडफास्ट न्यूट्रिशन के अनुसार खानपान की गलत आदतें भी किडनी पर बुरा असर डाल सकती हैं. उनका कहना है कि हाई-प्रोटीन डाइट, जरूरत से ज्यादा नमक, चीनी और अस्वस्थ वसा का सेवन किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि हाथों, पैरों या आंखों के आसपास लगातार सूजन, यूरिन में बदलाव, झागदार यूरिन, लगातार थकान, भूख कम लगना, मुंह में धातु जैसा स्वाद और रात में मांसपेशियों में ऐंठन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Visceral Fat: क्या बाहर से दुबला&amp;पतला दिख रहा शख्स अंदर से हो सकता है मोटा? जानें इसका कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Can A Slim Person Be Fat From Inside: कई लोग ऐसे होते हैं जो बाहर से बिल्कुल दुबले-पतले और फिट दिखाई देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनके शरीर में फैट नहीं है, हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों के शरीर में अंदरूनी अंगों के आसपास खतरनाक फैट जमा हो जाता है, जिसे विसरल फैट कहा जाता है. ऐसे लोगों को मेडिकल भाषा में थिन आउटसाइड, फैट इंसाइड भी कहा जाता है.&amp;nbsp;
क्या होता है विसरल फैट?
यानी कोई व्यक्ति देखने में स्लिम हो सकता है, उसका बीएमआई भी सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर उसकी लाइफस्टाइल खराब है, खानपान अनहेल्दी है, फिजिकल एक्टिविटी कम है या वह ज्यादा शराब और स्मोकिंग करता है, तो शरीर के अंदर चुपचाप फैट जमा होने लगता है. यही छिपा हुआ फैट बाद में कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है. डाइटिशियन एलिसन क्लार्क के मुताबिक, कमर के आसपास जमा होने वाला फैट अक्सर विसरल फैट होता है. यही वजह है कि कई बार पतले दिखने वाले लोगों में भी बीयर बेली जैसी समस्या दिखाई देने लगती है.&amp;nbsp;
क्या हमारे लिए यह नुकसानदायक है?
इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. जेन्ना मैकिओची अपनी किताबयोर ब्लूप्रिंट फॉर स्ट्रॉन्ग इम्युनिटी में बताती हैं कि शरीर के हाथ, पैर और त्वचा के नीचे जमा फैट को सबक्यूटेनियस फैट कहा जाता है, जो अपेक्षाकृत कम खतरनाक माना जाता है. लेकिन विसरल फैट सीधे अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होता है और शरीर के लिए ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
हिडन फैट से क्या होती है दिक्कत?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह हिडन फैट सिर्फ वजन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहता. यह शरीर में हार्मोनल बदलाव और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ा सकता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. &amp;nbsp;अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की 2021 की रिसर्च के अनुसार, विसरल फैट फैटी लिवर डिजीज का भी संकेत हो सकता है.&amp;nbsp;
कैसे इसका पता लगा सकते हैं?
डॉक्टर्स के मुताबिक, सिर्फ वजन देखकर हेल्थ का अंदाजा लगाना सही नहीं है. अगर किसी व्यक्ति की कमर का आकार ज्यादा बढ़ रहा हो, पेट बाहर निकल रहा हो या लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत हो, तो यह अंदरूनी फैट का संकेत हो सकता है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि कमर की माप नियमित रूप से चेक करनी चाहिए, क्योंकि यह विसरल फैट का पता लगाने का आसान तरीका माना जाता है.
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इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस छिपे हुए फैट को कम करने के लिए सख्त डाइटिंग से ज्यादा जरूरी है. सही लाइफस्टाइल अपनाना. मेडिटेरेनियन डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित वॉक और एक्सरसाइज काफी मददगार मानी जाती है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि रोजाना हल्की फिजिकल एक्टिविटी और मसल्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती हैं और अंदर जमा खतरनाक फैट को कम करने में मदद कर सकती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Marriage Problems: टीवी सीरियल्स नहीं हकीकत में खतरनाक हैं टॉक्सिक सास&amp;ससुर, डील करने के लिए अपनाएं ये तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ How To Deal With Toxic In Laws: मॉडल ट्विशा शर्मा की खबर हर तरफ छाई हुई है कि ससुराल वालों ने उसको मार दिया और सास ने उसपर आरोप लगाया है कि वो नशा करती थी. दरअसल &amp;nbsp;टीवी सीरियल्स में सास-बहू के झगड़े देखना जितना आसान और मजेदार लगता है, असल जिंदगी में वही हालात इंसान को अंदर से तोड़ देते हैं. &amp;nbsp;ऐसे ससुराल वाले जो हर बात में दखल दें, ताने मारें, इमोशनल दबाव बनाएं या हर समय तनाव पैदा करें, उनसे निपटना किसी बड़ी मानसिक लड़ाई से कम नहीं होता.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;परेशानी की जड़ को समझने की कोशिश कीजिए
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर परेशानी की जड़ क्या है. अक्सर ऐसा व्यवहार अचानक नहीं होता, उसके पीछे नियंत्रण की भावना या इमोशनल सीमाओं की कमी होती है. कई बार ससुराल वाले आपकी परवरिश के तरीकों को नजरअंदाज करते हैं, बिना बताए घर आ जाते हैं या फिर इमोशनल दबाव बनाते हैं. जैसे आपकी निजी जगह की जरूरत को स्वार्थी कहना या खुद को बेबस दिखाकर आपको अपराधबोध महसूस करवाना.&amp;nbsp;
पति -पत्नी के बीच अच्छे कम्युनिकेशन होने जरूरी
रिश्तों के विशेषज्ञ मानते हैं कि ससुराल की परेशानी अक्सर पति-पत्नी के रिश्ते की परीक्षा बन जाती है. इसलिए सबसे जरूरी है कि दोनों एक टीम की तरह खड़े रहें. अगर किसी के माता-पिता बार-बार सीमाएं पार कर रहे हैं, तो उसी व्यक्ति को अपने परिवार से बात करनी चाहिए. क्योंकि अगर दूसरा जीवनसाथी शिकायत करेगा, तो अक्सर यह धारणा बन जाती है कि उसने परिवार को अलग कर दिया.
चीजों के लिए नियम होना जरूरी
सीमाएं तय करना भी बेहद जरूरी है, लेकिन सिर्फ नियम बना देने से कुछ नहीं होता. इसका मतलब साफ तौर पर यह तय करना है कि आप क्या सहन करेंगे और क्या नहीं. एक्सपर्ट कहते हैं कि बार-बार सफाई देने से सामने वाला बहस करने लगता है.
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खुद को ऐसे करें तैयार
कुछ हालात ऐसे होते हैं जहां समझाने का भी असर नहीं होता. ऐसे समय में मनोवैज्ञानिक ग्रे रॉक तरीका अपनाने की सलाह देते हैं. यानी खुद को इतना शांत और सामान्य रखना कि सामने वाले को झगड़ा बढ़ाने का मौका ही ना मिले. छोटे और सीधे जवाब जैसे ठीक है, हम्म या समझ गई या गया कई बार बेवजह के विवाद को खत्म कर देते हैं. इसके अलावा लंबे घरेलू मेल-मिलाप की जगह बाहर थोड़ी देर के लिए मिलना बेहतर माना जाता है. इससे माहौल भी हल्का रहता है और जरूरत पड़ने पर वहां से निकलना भी आसान होता है. अगर व्यवहार मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाने लगे, तो दूरी बना लेना भी गलत नहीं माना जाता.
इस चीज का रखें ध्यान
सबसे जरूरी बात यह है कि आप दूसरों का व्यवहार नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन अपनी प्रतिक्रिया जरूर संभाल सकते हैं. अगर आपकी तय की गई सीमाओं पर सामने वाला गुस्सा करता है, नाराज होता है या चुप्पी साध लेता है, तो यह उनकी सोच दिखाता है, आपकी गलती नहीं. अपनी मेंटल को प्राथमिकता दें.
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Mango Kheer: घर में ऐसे बनाएं मैंगो खीर, एक क्लिक में जान लें इसकी पूरी रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Mango Kheer: गर्मियों का मौसम अब अपने चरम पर है और चिलचिलाती धूप व उमस भरे इस समय में हर कोई कुछ ठंडा-ठंडा, कूल-कूल और ताजगी से भरपूर खाने की सोच रहा है. ऐसे में जब आप फ्रिज खोलते हैं तो फलों के राजा आम की खुशबू महकती है, जो दिल को दिल को गार्डन-गार्डन कर देती है. वैसे तो आपने इस मौसम में आम से शेक और आइसक्रीम तो कई बार ट्राई की होगी, लेकिन इस बार आप अपने समर मेन्यू में कुछ बेहद खास और शाही जोड़ सकते हैं और वह और कोई नहीं बल्कि है मलाईदार मैंगो खीर.&amp;nbsp;
गर्मी को कहना है बाय तो मैंगो खीर झट से बनाएं
मलाईदार मैंगो खीर एक पारंपरिक, धीमी आंच पर पकी चावल की रबड़ीदार खीर और ताजा, मीठे आम के पल्प (प्यूरी) का एक ऐसा लाजवाब और अनोखा कॉम्बिनेशन है, जो मुंह में जाते ही घुल जाता है. इसके साथ ही इसका हर एक चम्मच मलाईदार स्वाद और आम की नेचुरल मिठास से भरपूर होता है. इस गर्मी में चाहे घर पर कोई खास मेहमान आने वाले हों, किटी पार्टी हो या फिर वीकेंड पर परिवार के साथ कुछ कूल-कूल और मीठा खाने का मूड हो यह रेसिपी हर मौके के लिए एकदम परफेक्ट है. इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात यह है कि ये बेहद कम समय में और रसोई में मौजूद बेसिक चीजों से बनकर तैयार हो जाती है.आइए जानते हैं इस तपती गर्मी में आपके दिल और दिमाग को ठंडक पहुंचाने वाली मलाईदार मैंगो खीर की आसान, इंस्टेंट और परफेक्ट रेसिपी.
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आवश्यक सामग्री

फुल क्रीम दूध- 1 लीटर
बासमती या कतरनी चावल- 1/4 कप (आधे घंटे भीगे हुए)
पके हुए आम का पल्प (प्यूरी)- 1 कप (अलफोंसो या दशहरी सबसे बेस्ट ऑप्शन हैं )
चीनी- 4 से 5 बड़े चम्मच
इलायची पाउडर- 1/2 छोटा चम्मच
कटे हुए ड्राई फ्रूट्स- 2 बड़े चम्मच
केसर के धागे- 8-10 (एक चम्मच गुनगुने दूध में भीगे हुए) &amp;nbsp;

बनाने की सुपरफास्ट विधि&amp;nbsp;
मैंगो खीर बनाने के लिए सबसे पहले एक भारी तले वाले बर्तन या कढ़ाई में फुल क्रीम दूध डालकर मीडियम आंच पर उबलने के लिए रख दें. जब तक दूध उबल रहा है, तब तक पहले से भीगे हुए बासमती चावलों का पानी छान लें और उन्हें हाथों से क्रश कर लें या मिक्सी में हल्का दरदरा पीस लें. दूध में पहला उबाल आते ही आंच को धीमा करें और इसमें ये क्रश किए हुए चावल डाल दें. अब चमचे से दूध को लगातार चलाते रहें जिससे चावल बर्तन के निचले हिस्से में चिपके नहीं. धीमी आंच पर इसे तब तक पकाएं जब तक कि दूध घटकर आधा न हो जाए और चावल पूरी तरह से मलाईदार होकर दूध के साथ मिक्स न हो जाएं. इस प्रक्रिया में करीब 15-20 मिनट का समय लगेगा.&amp;nbsp;
जब चावल अच्छी तरह पक जाएं, तब इसमें चीनी, इलायची का पाउडर और गुनगुने दूध में भीगे हुए केसर के धागे डालें. फिर इन सबको अच्छी तरह मिलाकर 5 मिनट तक और पकाएं जिससे चीनी पूरी तरह घुल जाए और केसर अपना खूबसूरत रंग छोड़ दे. इसके बाद इसमें कटे हुए काजू, बादाम और पिस्ता डालकर मिक्स करें और गैस को बंद कर दें. अब इस तैयार खीर को रुम टेंपरेचर पर पूरी तरह से ठंडा होने के लिए छोड़ दें. जब खीर पूरी तरह ठंडी हो जाए, तभी इसमें एक कप ताजे आम का गाढ़ा पल्प मिलाएं. क्योंकि गरम खीर में आम डालने से दूध फट सकता है, इसलिए इसे ठंडा करना बहुत जरूरी है. फिर पल्प को अच्छी तरह फेंटकर मिलाने के बाद इसे दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दें और ठंडी-ठंडी मलाईदार मैंगो खीर का आनंद लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Itchy Skin In Summer: रोज नहाते हैं फिर भी गर्मियों में स्किन पर होती है खुजली, ये तरीके आजमाए तो तुरंत मिलेगी राहत</title>
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        <description><![CDATA[ Why Does My Skin Itch After Showering In Summer: गर्मियों के मौसम में पसीना, धूल और चिपचिपाहट से राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग रोज नहाते हैं. कई लोग तो दिन में दो बार भी शॉवर लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद त्वचा में खुजली, रूखापन और जलन की समस्या बनी रहती है. ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर रोज नहाने के बाद भी स्किन में खुजली क्यों हो रही है? एक्सपर्ट के मुताबिक इसकी वजह सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि हमारी कुछ गलत आदतें भी हो सकती हैं।
किस कीरण से होती है दिक्कत?
पर्सनल केयर के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट innovist के अनुसार, दरअसल, नहाने के दौरान त्वचा की ऊपरी परत से प्राकृतिक नमी कम हो सकती है. जब स्किन अपनी जरूरी नमी खोने लगती है तो उसमें रूखापन, खिंचाव और खुजली महसूस होने लगती है। इस प्रक्रिया को ट्रांसएपिडर्मल वॉटर लॉस कहा जाता है, जिसमें त्वचा से पानी तेजी से बाहर निकलने लगता है और स्किन का प्राकृतिक बैरियर कमजोर पड़ जाता है.
साबुन या बॉडी वॉश भी वजह
खुजली की एक और बड़ी वजह साबुन या बॉडी वॉश भी हो सकता है. तेज खुशबू वाले या ज्यादा केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनमें मौजूद सल्फेट्स और अन्य तत्व स्किन के पीएच संतुलन को बिगाड़ देते हैं, जिससे रूखापन और जलन बढ़ सकती है. संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को ऐसे प्रोडक्ट्स से बचना चाहिए और हल्के, फ्रेगरेंस-फ्री क्लेंजर का इस्तेमाल करना चाहिए.
हार्ड वॉटर की भी दिक्कत
कुछ इलाकों में हार्ड वॉटर भी समस्या की वजह बन सकता है. ऐसे पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज अधिक मात्रा में होते हैं, जो त्वचा पर परत छोड़ सकते हैं. इससे स्किन में खुजली और रूखापन महसूस हो सकता है. अगर आपके क्षेत्र में हार्ड वॉटर की समस्या है तो शॉवर फिल्टर लगाना फायदेमंद हो सकता है.&amp;nbsp;
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तौलिए से रगड़ने से बचना चाहिए
नहाने के बाद त्वचा को जोर-जोर से तौलिए से रगड़ना भी नुकसान पहुंचा सकता है. इससे त्वचा में घर्षण बढ़ता है और उसकी नमी कम हो जाती है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि नहाने के बाद त्वचा को हल्के हाथों से थपथपाकर सुखाएं. इससे स्किन की प्राकृतिक नमी लंबे समय तक बनी रहती है.&amp;nbsp;
खुजली से बचने के लिए क्या करें?
खुजली से राहत पाने के लिए नहाने के तुरंत बाद मॉइस्चराइजर लगाना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट के अनुसार शॉवर लेने के तीन से पांच मिनट के भीतर बॉडी लोशन या मॉइस्चराइजर लगाने से त्वचा में नमी लॉक हो जाती है और रूखापन कम होता है. इससे खुजली और जलन की समस्या में भी राहत मिल सकती है. अगर खुजली के साथ त्वचा पर लालिमा, छोटे दाने, जलन, सूजन या त्वचा फटने जैसी समस्या भी दिखाई दे रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लगातार बनी रहने वाली खुजली किसी स्किन समस्या या एलर्जी का संकेत भी हो सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 03:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Daraxonrasib: पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में गेम चेंजर साबित हो सकती है यह गोली, ट्रायल में मिले शानदार नतीजे</title>
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        <description><![CDATA[ New Pill For Pancreatic Cancer Treatment: पैंक्रियाटिक कैंसर को दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में गिना जाता है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है, जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है. ऐसे में इलाज के विकल्प सीमित रह जाते हैं और मरीजों के जीवित रहने की संभावना भी कम हो जाती है. लेकिन अब एक नई गोली ने डॉक्टरों और साइंटिस्ट के बीच उम्मीद की नई किरण जगाई है. हाल ही में सामने आए एक क्लीनिकल ट्रायल के नतीजों ने संकेत दिया है कि यह दवा पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है.&amp;nbsp;
कौन सी दवा है कारगर?
दुनिया के सबसे बड़े कैंसर सम्मेलन में पेश किए गए रिसर्च के अनुसार डाराक्सोनरासिब नाम की यह दवा एडवांस स्टेज पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों में जीवित रहने की अवधि को लगभग दोगुना करने में सफल रही. इस ट्रायल में 500 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जिनका कैंसर शरीर में फैल चुका था. रिसर्चर ने पाया कि यह गोली लेने वाले मरीज औसतन 13.2 महीने तक जीवित रहे, जबकि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों की औसत जीवन अवधि 6.6 से 6.7 महीने के बीच रही.
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यह स्टडी शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी &amp;nbsp;की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया गया. बोस्टन स्थित विश्व प्रसिद्ध डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट के रिसर्च ने इस ट्रायल का नेतृत्व किया. रिजल्ट सामने आने के बाद कैंसर विशेषज्ञों ने इसे पिछले कई दशकों की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक बताया है.
गेम चेंजर साबित हो सकती है दवा 
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना कैंसर सेंटर में ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख और एएससीओ की गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर एक्सपर्ट डॉ. रचना श्रॉफ ने कहा कि यह नतीजे कैंसर इलाज की तस्वीर बदलने वाले साबित हो सकते हैं. डॉ. रचना श्रॉफ के मुताबिक, उन्होंने 16 वर्षों तक पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों का इलाज किया है, लेकिन इस स्टडी के नतीजे देखकर वह भावुक हो गईं. उनका कहना है कि इस तरह का जीवित रहने का लाभ पहले कभी नहीं देखा गया. एएससीओ की मुख्य चिकित्सा अधिकारी और कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. जूली ग्रालो ने भी इस दवा को गेम चेंजर बताया। उनके अनुसार यह केवल एक अच्छी सफलता नहीं, बल्कि कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है.
कैसे बनती है यह दवा?
डाराक्सोनरासिब दवा KRAS नामक प्रोटीन को निशाना बनाती है, जो अधिकांश पैंक्रियाटिक कैंसर मामलों में कैंसर सेल्स के ग्रोथ के लिए जिम्मेदार माना जाता है. रिसर्चर के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक मरीजों में KRAS जीन में बदलाव पाया जाता है. यह दवा उसी प्रक्रिया को रोककर कैंसर की बढ़त को धीमा करने का काम करती है.
मरीजों को मिल सकती है राहत
यूके स्थित पैंक्रियाटिक कैंसर एक्शन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पाउला हैनफोर्ड और पैंक्रियाटिक कैंसर यूके की रिसर्च एवं इनोवेशन निदेशक अन्ना ज्वेल ने भी इन नतीजों को बेहद उत्साहजनक बताया है. एक्सपर्ट का मानना है कि यदि आगे के परीक्षण भी सफल रहते हैं और यह दवा व्यापक रूप से उपलब्ध हो पाती है, तो पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों को अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने का अवसर मिल सकता है. यही वजह है कि इस नई गोली को पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में संभावित गेम चेंजर माना जा रहा है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>भीषण गर्मी को कैसे मात दे भारत, कौन चुका रहा इसकी सबसे ज्यादा कीमत?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/भीषण-गर्मी-को-कैसे-मात-दे-भारत-कौन-चुका-रहा-इसकी-सबसे-ज्यादा-कीमत</link>
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        <description><![CDATA[ आपने तपती गर्मी में आइसक्रीम खाने या छांव वाली जगह पर पहुंचने पर महसूस किया होगा कि गर्मी से राहत मिलना कैसा होता है. अब खुद से एक सवाल पूछिए, आपको ऐसी तमाम सेवाएं देने पहुंचाने वालों को क्या गर्मी से राहत मिल पाती है? गोवा के मिरामार बीच पर खड़े एक दुकानदार ने कहा, &#039;हम गर्मी में लोगों को सुकून पाने में मदद करते हैं, लेकिन हमारे पास अपनी मदद करने का कोई उपाय नहीं है.&#039; कुल मिलाकर भीषण गर्मी अब वैश्विक औसत तापमान में सिर्फ अमूर्त की दिखने वाली बढ़ोतरी नहीं रह गई. यह भारत सहित संपूर्ण दक्षिण एशिया में गंभीर मानवीय संकट का रूप ले चुकी है. इसका सीधा असर मानव गरिमा, कार्यक्षमता और जीवन पर पड़ रहा है. इसकी सर्वाधिक कीमत रेहड़ी-पटरी वालों, गिग वर्कर्स, निर्माण श्रमिकों और किसानों को चुकानी पड़ रही है.
भारत में लू के जोखिम वाले राज्यों की संख्या 23 है. इनमें से लगभग 57 प्रतिशत जिलों में तापमान का उच्च से बहुत उच्च जोखिम मौजूद है, जहां देश की तीन-चौथाई आबादी रहती है. अगर एशिया की बात करें तो यह वैश्विक औसत तापमान की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है. भले ही गर्मी अपने पीछे बाढ़ या चक्रवात जैसे तबाही के निशान नहीं छोड़ती है, लेकिन यह अदृश्य रहकर हमारी काम करने की क्षमता को घटा देती है, स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव डालती है और असमानता को बढ़ाती है.&amp;nbsp;
गर्मी का सामना करने के लिए देश में एक व्यवस्थित क्षमता बनाने की शुरुआत हो चुकी है. हालांकि, इसे पूर्ण रूप से विस्तार देने की जरूरत है. 2013 में अहमदाबाद में हीट एक्शन प्लान मॉडल लागू हुआ था, जो अब लगभग 23 राज्यों के 200 से अधिक शहरों तक पहुंच चुका है. इसे बनाने में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना और बजट आवंटन के जरिए इसे मजबूत बनाना बहुत जरूरी है. सामुदायिक नेतृत्व वाले &#039;कूल रूफ&#039; कार्यक्रम और महिला श्रमिकों के लिए &#039;पैरामीट्रिक हीट इंश्योरेंस&#039; जैसे उपाय बताते हैं कि गर्मी का सामना करने क्षमता (रेजिलियंस) तैयार की जा सकती है और इसके लिए वित्त भी जुटाया जा सकता है. ऐसा करने के लिए सभी जरूरी घटक मौजूद हैं. अगर कमी है तो उस राजनीतिक और संस्थागत इच्छाशक्ति की, जो सभी घटकों को मिलाकर इन्हें प्रभावी ढंग से लागू कर सके. इस दिशा में ये उपाय मददगार हो सकते हैं:
सबसे पहले क्लाइमेट इंटेलिजेंस को एक सार्वजनिक ढांचे के रूप में विकसित करें और इसे दैनिक फैसलों का आधार बनाएं. इस काम में एआई प्लेटफॉर्म &#039;क्लाइमेट रेजिलिएंस एनालिटिक्स एंड विज़ुअलाइजेशन इंटेलिजेंस सिस्टम&#039; (CRAVIS) मदद कर सकता है, जिसे सीईईडब्ल्यू ने &amp;lsquo;कोलैबोरेटिव डेटा कॉमन्स&amp;rsquo; के रूप में विकसित किया है. यह प्लेटफॉर्म 40 वर्षों से अधिक समय के जलवायु आंकड़ों का आकलन करता है और इसे 2070 तक के अनुमानों से जोड़ता है. इसका इस्तेमाल करके जिला मजिस्ट्रेट, शहरी नियोजक या जनस्वास्थ्य अधिकारी जैसे तमाम निर्णयनकर्ता सरल भाषा में अपने सवालों के जवाब पा सकते हैं. उदाहरण के लिए, यह बढ़ती गर्मी से बिजली की मांग पर क्या असर होगा, कहां पर असामान्य रूप से गर्म रातें होंगी या किन जिलों को लंबे सूखे का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कई सवालों के जवाब दे सकता है. क्रैविस ने अगले दो दशकों में भारत में प्रतिवर्ष 15 से 40 असामान्य रूप से गर्म दिन और 20 से 40 असामान्य रूप से गर्म रातें बढ़ने का अनुमान लगाया है. मौसम पूर्वानुमान की तरह ऐसी जानकारियों को नियमित बनाने से आपदा के बाद प्रतिक्रिया करने की जगह पर पूर्वानुमान आधारित पूर्व-सक्रिय उपायों को लाया जा सकता है.
दूसरा, गर्मी और स्वास्थ्य के क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र को संस्थागत रूप देना होगा, क्योंकि भीषण गर्मी सीमाओं से नहीं बंधी है और दक्षिण एशिया के सभी देशों में इसके जोखिम का पैटर्न भी एक जैसा है. क्षेत्रीय स्तर पर पहले से व्यावहारिक अनुभवों का खजाना मौजूद है. बस उसे एक ऐसे मंच की जरूरत है, जो इन्हें साझा मानकों, संयुक्त प्रशिक्षणों और सह-वित्तपोषित प्रयासों में बदल सकें. इसमें हाल ही में शुरू हुआ ग्लोबल हीट हेल्थ इंफॉर्मेशन नेटवर्क (जीएचएचआईएन) का &#039;दक्षिण एशिया हब&#039; अहम भूमिका निभा सकता है. यह प्रमुख अनुसंधान, नीति और विकास संगठनों का एक समूह है. इसका लक्ष्य 60 से अधिक संस्थानों को जोड़ना, स्वास्थ्य, जलवायु व शहरी लचीलेपन में 500 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करना और कम से कम चार देशों में हीट एक्शन प्लान को मजबूती देना है.
तीसरा, गर्मी को एक संरचनागत जोखिम मानकर, जो कि पहले ही बन चुका है, वित्तीय व्यवस्था को नए सिरे से ढालना होगा. अब तापमान एक सीमा से ऊपर जाने पर ऑटोमेटिक भुगतान करने वाला &#039;पैरामीट्रिक हीट इंश्योरेंस&#039;, बुनियादी ढांचे में जलवायु आधारित निवेश और नगर निगम के बजट में हीट रेजिलिएंस लाने की शर्तें जोड़ने जैसे काम सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रह सकते हैं. ये नए सामाजिक अनुबंधों की बुनियाद बनने चाहिए, जिसमें गर्मी को व्यक्तिगत समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाए और सार्वजनिक तंत्र को समाधान उपलब्ध कराने में सक्षम बनाया जाए.
चूंकि, भीषण गर्मी के जोखिम पूर्वानुमान किया जा सकता है, इसलिए उचित संस्थागत व्यवस्थाओं के जरिए इसे रोका भी जा सकता है. अपने प्रयासों से भारत इस बात का उदाहरण पेश कर सकता है कि अगर योजनाबद्ध तरीके से नीतिगत प्रयास हो तो सबसे अधिक गर्मी वाली जगहें भी रेजिलिएंट (लचीले) बन सकती हैं.
(लेखकों के विचार निजी हैं) ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Maternal Health: मैटरनल मोर्टलिटी घटी, पर 57% महिलाओं में एनीमिया अब भी बड़ा खतरा, एक्सपर्ट ने किया अलर्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/maternal-health-मैटरनल-मोर्टलिटी-घटी-पर-57-महिलाओं-में-एनीमिया-अब-भी-बड़ा-खतरा-एक्सपर्ट-ने-किया-अलर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ Safe Motherhood And Maternal Health Care: भारत में मैटरनल हेल्थ के क्षेत्र में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है. &#039;द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनाकोलॉजी एंड वीमेन हेल्थ&#039; में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, देश की मैटरनल हेल्थ दर वर्ष 2000 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 384 मौतों से घटकर 2023 में 88 रह गई है. यह गिरावट दुनिया में सबसे तेज सुधारों में से एक मानी जा रही है. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि इस उपलब्धि को आगे भी बनाए रखने के लिए एनीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पर विशेष ध्यान देना होगा.&amp;nbsp;
मैटरनल हेल्थ में सुधार के क्या हैं रीजन?
देश में महिलाओं की मैटरनल यात्रा अलग-अलग परिस्थितियों से गुजरती है. शहरी क्षेत्रों में कई महिलाएं शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए देर से परिवार बढ़ाने का निर्णय ले रही हैं. वहीं ग्रामीण इलाकों में महिलाएं कम उम्र में गर्भधारण तो कर लेती हैं, लेकिन उन्हें गर्भावस्था से पहले और बाद की नियमित हेल्थ सेवाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल पातीं. ऐसे में सुरक्षित मैटरनल हेल्थ सुनिश्चित करने के लिए व्यापक और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
57 प्रतिशत महिलाएं इस दिक्कत से जूझ रहीं हैं
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों के मुताबिक, 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. पिछली सर्वे रिपोर्ट में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत था. एक्सपर्ट के अनुसार एनीमिया गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग, इंफेक्शन और समय से पहले प्रसव जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ा देता है. यही वजह है कि इसे ब्लीडिंग से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों में गिना जाता है.
आयरन की कमी के क्या हैं कारण?
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि आयरन की कमी एक दिन में नहीं होता. भोजन में पोषक तत्वों की कमी, पर्याप्त आहार विविधता का अभाव और पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग के कारण शरीर में आयरन का स्तर धीरे-धीरे कम होता जाता है। .इसी वजह से महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स को समय रहते महिलाओं तक पहुंचाना जरूरी बताया गया है.&amp;nbsp;
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एनीमिया की दिक्कत से बचने के उपाय?
हल्के और मध्यम एनीमिया के मामलों में आयरन की गोलियां उपचार का पहला विकल्प मानी जाती हैं क्योंकि वे सस्ती, सुलभ और प्रभावी हैं. हालांकि कई बार महिलाओं के लिए इन्हें नियमित रूप से लेना आसान नहीं होता या शरीर में इनका एब्जॉर्व पर्याप्त नहीं हो पाता. ऐसे मामलों में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज आईवी-एफसीएम जैसी नसों के माध्यम से दी जाने वाली आयरन थेरेपी महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है, विशेषकर उन गर्भवती महिलाओं के लिए जिन्हें गर्भावस्था के अंतिम महीनों में गंभीर एनीमिया का पता चलता है.&amp;nbsp;
किस स्टेज में सबसे ज्यादा होते हैं मैटरनल मोर्टलिटी?
भारत में प्रसव के बाद होने वाला अत्यधिक ब्लीडिंग यानी पोस्टपार्टम हेमरेज आज भी मैटरनल मोर्टलिटी के प्रमुख कारणों में शामिल है. इससे निपटने के लिए ई-मोटिव बंडल जैसे उपाय प्रभावी साबित हुए हैं. सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में दो लाख से अधिक प्रसवों पर किए गए परीक्षणों में इस मॉडल ने गंभीर ब्लीडिंग से जुड़ी दिक्कतों को 60 प्रतिशत तक कम किया.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Fish &amp;amp; Milk Myth: क्या मछली खाने के बाद दूध पीने से सच में हो जाते हैं सफेद दाग? एक्सपर्ट से जानें</title>
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        <description><![CDATA[ Fish &amp;amp; Milk Myth: क्या मछली खाने के बाद आपके घर में भी दूध पीने से मना किया जाता है? अगर हां तो आप इकलौते नहीं है. ज्यादातर भारतीय घरों में मछली के बाद दूध पीने से मना किया जाता है. पुराने समय से ही इस फूड कॉम्बिनेशन को सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि मछली और दूध एक साथ खाने से स्किन पर सफेद दाग हो जाते हैं, तो कोई इस फूड कॉम्बिनेशन को गैस और अपच जैसी समस्याओं से जोड़ता है. इस मान्यता में कितनी सच्चाई है या यह महज एक अंधविश्वास है. आइए जानते हैं....
सफेद दाग क्या होता है?
विटिलिगो (Vitiligo) एक त्वचा संबंधी बीमारी है, जिसमें त्वचा के कुछ हिस्सों का रंग धीरे-धीरे सफेद पड़ने लगता है. यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब त्वचा में मेलानिन बनाने वाली कोशिकाएं जिन्हें मेलानोसाइट्स कहते हैं किसी कारण से नष्ट हो जाती हैं या सही ढंग से काम करना बंद कर देती हैं. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और शरीर के किसी भी हिस्से पर दिख सकती है. यह बीमारी कवक संक्रमण या मेलानोसाइट्स नामक वर्णक बनाने वाली कोशिकाओं के नष्ट होने का परिणाम होती है, केवल मछली और दूध के संयोजन से यह स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकती.
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&amp;nbsp;मछली और दूध को लेकर फैली मान्यता&amp;nbsp;
आयुर्वेद और लोक परंपराओं में मछली और दूध को &quot;विरुद्ध आहार&quot; माना गया है. यानी ऐसा भोजन जिनका एक साथ सेवन शरीर के लिए हानिकारक बताया गया है. इसी आधार पर पीढ़ियों से यह धारणा चली आ रही है कि दोनों को साथ खाने से त्वचा रोग विशेषकर सफेद दाग हो सकते हैं. यह मान्यता इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि लोग बिना किसी प्रमाण के इसे सच मान लेते हैं.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, मछली और दूध का एक साथ सेवन करने से सफेद दाग होने का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण आज तक सामने नहीं आया है. विशेषज्ञों के अनुसार, विटिलिगो का मुख्य कारण ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है,&amp;nbsp; जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपनी ही मेलानोसाइट कोशिकाओं पर हमला करने लगती है. इसके अलावा आनुवंशिक कारक और पर्यावरणीय तत्व भी इस बीमारी में भूमिका निभाते हैं. अब तक हुई किसी भी प्रमाणिक रिसर्च में मछली-दूध के संयुक्त सेवन और सफेद दाग के बीच कोई सीधा संबंध सिद्ध नहीं हुआ है.
आयुर्वेद क्या कहता है?&amp;nbsp;
आयुर्वेद के अनुसार, दूध की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है. जबकि मछली की तासीर गर्म होती है और यह शरीर में गर्माहट बनाए रखता है. ऐसे में अगर मछली और दूध को एक साथ लिया जाता है तो पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. मछली और दूध को एक साथ लेने से पाचन-तंत्र गड़बड़ा सकता है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Infant Mortality In India: भारत में शिशु मृत्यु दर में सुधार, लेकिन अब भी हर 42 में से एक बच्चा नहीं मना पाता पहला जन्मदिन</title>
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        <description><![CDATA[ States With Highest Infant Mortality Rate In India: भारत में इन्फेंट फर्टिलिटी रेट में पिछले एक दशक के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु दर घटकर 24 रह गई है. साल 2019 में यह आंकड़ा 30 था. यह सुधार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और संस्थागत प्रसव में हुई बढ़ोतरी का परिणाम माना जा रहा है. हालांकि नेशनल लेवल पर तस्वीर बेहतर दिखती है, लेकिन राज्यों के बीच अब भी बड़ा अंतर मौजूद है.&amp;nbsp;
42 में से एक बच्चे नहीं देख पाते पहला जन्मदिन
रिपोर्ट बताती है कि भारत में अब भी हर 42 में से एक शिशु अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पाता. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है, जहां हर 37 में से एक शिशु की एक साल की उम्र से पहले मौत हो जाती है. शहरी इलाकों में यह अनुपात बेहतर है और वहां हर 59 में से एक शिशु की मृत्यु दर्ज की गई. एक्सपर्ट का मानना है कि संस्थागत प्रसव में वृद्धि ने शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्ष 2019 में जहां 83 प्रतिशत से कम प्रसव अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहे थे, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा 95 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया. इसके बावजूद रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि केवल अस्पताल में प्रसव कराने से ही समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि जन्म के बाद नवजात की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.&amp;nbsp;
किन राज्यों में स्थिति सबसे बेकार
राज्यों की बात करें तो छत्तीसगढ़ सबसे चिंताजनक स्थिति में दिखाई देता है. यहां शिशु मृत्यु दर 36 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई, जो देश में सबसे अधिक है. इसके बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का स्थान रहा, जहां यह आंकड़ा 35 रहा।.नवजात मृत्यु दर के मामले में भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सबसे ऊपर रहे, जबकि उत्तर प्रदेश भी चिंताजनक स्थिति में बना हुआ है.&amp;nbsp;
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किन राज्यों में बेहतर है स्थिति
इसके उलट गोवा और सिक्किम देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य बनकर उभरे हैं. दोनों राज्यों में शिशु मृत्यु दर केवल 7 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई. केरल 8 के साथ तीसरे स्थान पर रहा. तमिलनाडु और दिल्ली में यह आंकड़ा 11, जबकि त्रिपुरा में 12 दर्ज किया गया. महाराष्ट्र ने 14, कर्नाटक ने 15, पंजाब ने 16, तेलंगाना ने 17 और आंध्र प्रदेश ने 18 की दर दर्ज कर राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया.
अब भी क्या है सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि सबसे बड़ी चुनौती अब भी नवजात शिशुओं की मौत है. &amp;nbsp;रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में होने वाली कुल शिशु मौतों में करीब 73 प्रतिशत मौतें जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर हुईं. एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले वर्षों में शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए गर्भावस्था के दौरान बेहतर देखभाल, मातृ पोषण, सुरक्षित प्रसव और जन्म के बाद नवजात की क्वालिटी मेडिकल सेवाओं पर अधिक ध्यान देना होगा. भारत ने इस दिशा में लंबी दूरी तय की है, लेकिन अभी भी कई राज्यों में सुधार की बड़ी गुंजाइश बनी हुई है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Budget International Trip: सिर्फ 50 हजार में होगी ऊंची&amp;ऊंची इमारतों से लेकर डिज्नीलैंड तक की सैर, iPhone भी मिलता है सस्ता</title>
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        <description><![CDATA[ International Trip Under 50000 Rupees From India: विदेश घूमने का सपना देखने वाले ज्यादातर लोगों को लगता है कि इसके लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ेंगे. लेकिन अगर आपका बजट सिर्फ 50 हजार रुपये है, तब भी आप ऐसी जगह की सैर कर सकते हैं जहां ऊंची-ऊंची इमारतें, चमचमाती सड़कें, डिज्नीलैंड और सस्ती शॉपिंग सब कुछ एक साथ मिल जाता है. हम बात कर रहे हैं हॉन्ग कॉन्ग की, जो भारतीय पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
हॉन्ग कॉन्ग बेहतरीन विकल्प?
हॉन्ग कॉन्ग को एशिया के सबसे आधुनिक और आकर्षक शहरों में गिना जाता है. यहां की शानदार स्काईलाइन दुनिया भर में मशहूर है. विक्टोरिया हार्बर के किनारे खड़े होकर रात में &#039;सिम्फनी ऑफ लाइट्स&#039; शो देखना किसी सपने से कम नहीं लगता. गगनचुंबी इमारतों से सजा यह शहर हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. अगर आप डिज्नीलैंड के दीवाने हैं, तो हॉन्ग कॉन्ग आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. यहां मौजूद हॉन्ग कॉन्ग डिज्नीलैंड बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को रोमांच से भर देता है. रंग-बिरंगी परेड, थीम राइड्स और डिज्नी कैरेक्टर्स के साथ बिताया गया समय यात्रा को यादगार बना देता है. यही वजह है कि परिवारों के बीच यह जगह काफी लोकप्रिय है.&amp;nbsp;
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कितना होता है खर्च?
अलग- अलग ब्लागर इसको लेकर अपना अलग- अलग एक्सपीरियंस देते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि हॉन्ग कॉन्ग जाना अब पहले जितना महंगा नहीं रहा. रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से हॉन्ग कॉन्ग की रिटर्न फ्लाइट करीब 24 हजार रुपये से शुरू हो जाती है. यदि टिकट पहले से बुक कर लिया जाए और बजट होटल चुने जाएं, तो पूरा ट्रिप लगभग 50 हजार रुपये के भीतर प्लान किया जा सकता है.
कहां घूम सकते हैं आप?
घूमने के लिए यहां विक्टोरिया पीक, बिग बुद्धा, नैन लियान गार्डन और मोंग कोक के स्ट्रीट मार्केट जैसे कई मशहूर आकर्षण मौजूद हैं. एक ही शहर में आधुनिकता, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का ऐसा संगम कम ही देखने को मिलता है. पर्यटक चाहें तो यहां से मकाऊ की छोटी ट्रिप भी प्लान कर सकते हैं. शॉपिंग के शौकीनों के लिए भी हॉन्ग कॉन्ग किसी जन्नत से कम नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स और कई ब्रांडेड प्रोडक्ट्स यहां आकर्षक कीमतों पर मिल जाते हैं. यही कारण है कि कई भारतीय पर्यटक यहां से आईफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना पसंद करते हैं. हालांकि कीमतें मॉडल और टैक्स नियमों के अनुसार बदल सकती हैं.
भारतीयों के लिए नहीं दिक्कत
भारतीय यात्रियों के लिए यह शहर और भी सुविधाजनक माना जाता है. यहां अंग्रेजी व्यापक रूप से बोली जाती है, भारतीय रेस्टोरेंट आसानी से मिल जाते हैं और कई पर्यटन स्थलों पर भारतीय पर्यटकों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाता है. ऐसे में अगर आप कम बजट में विदेश यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो हॉन्ग कॉन्ग आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 19:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Home Tips For Cleaning: घिस&amp;घिसकर थक गए हैं लेकिन नहीं जा रही कढ़ाई में जमी चिकनाई, इस तरीके से हो जाएगी एकदम नई</title>
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        <description><![CDATA[ Home Tips For Cleaning: कढ़ाई में जमी जिद्दी चिकनाई और कालापन हर घर की बड़ी समस्या है. कई बार घंटों रगड़ने के बाद भी कढ़ाई साफ नहीं होती है. मेहनत भी बेकार जाती है और हाथ भी दर्द करने लगते हैं. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो अब चिंता छोड़ दीजिए. आज हम आपको एक ऐसा चमत्कारी तरीका बताएंगे जिससे आपकी कढ़ाई बिना मेहनत के चमक उठेगी.
रसोई की यह दो चीजें करेंगी जादू
कढ़ाई को चमकाने के लिए आपको बाजार से कोई महंगा केमिकल लाने की जरूरत नहीं है. आपकी रसोई में मौजूद बेकिंग सोडा और सफेद सिरका यानी विनेगर ही इसके लिए काफी है. यह दोनों चीजें मिलकर एक शक्तिशाली घोल बनाती हैं. यह घोल कढ़ाई में जमी सालों पुरानी काली परत और तेल की चिकनाई को तुरंत ढीला कर देता है.
बस 5 मिनट का यह आसान तरीका अपनाएं
सबसे पहले अपनी गंदी कढ़ाई में दो गिलास पानी डालें. अब इस पानी में दो चम्मच बेकिंग सोडा और दो चम्मच सफेद सिरका मिला दें. इसके बाद इसमें एक चम्मच कपड़े धोने का पाउडर या बर्तन धोने वाला लिक्विड डालें. अब कढ़ाई को गैस पर रख दें और इस पानी को अच्छी तरह उबलने दें. पानी को कम से कम 5 मिनट तक उबलने दें. आप देखेंगे कि कढ़ाई की जमी हुई चिकनाई धीरे-धीरे अपने आप छूटकर पानी के ऊपर तैरने लगेगी.
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बिना रगड़े छूटेगा सालों पुराना कालापन
जब पानी अच्छी तरह उबल जाए तो गैस बंद कर दें. इस गर्म पानी को कढ़ाई में ही 15 मिनट के लिए छोड़ दें ताकि चिकनाई पूरी तरह फूल जाए. 15 मिनट बाद पानी को सिंक में फेंक दें. अब कढ़ाई थोड़ी गुनगुनी होगी. एक साधारण जूना या स्क्रबर लें. उस पर थोड़ा सा बर्तन धोने वाला साबुन लगाएं. अब हल्के हाथों से कढ़ाई को साफ करें. आपको ज्यादा ताकत लगाने की जरूरत बिल्कुल नहीं पड़ेगी. सारा कालापन उतर जाएगा.
अब हमेशा चमकेगी आपकी कढ़ाई
कढ़ाई को साफ पानी से धो लें. आपकी पुरानी और काली कढ़ाई बिल्कुल नई जैसी चमकने लगेगी. इस तरीके से आपका समय भी बचेगा और मेहनत भी नहीं लगेगी. लोहे की कढ़ाई को धोने के बाद उस पर हल्का सा सरसों का तेल लगाकर रखें. ऐसा करने से लोहे की कढ़ाई में कभी जंग नहीं लगेगा. इस आसान घरेलू नुस्खे को आज ही आजमाएं और अपनी रसोई के बर्तनों को हमेशा चमकदार बनाए रखें.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Gen&amp;Z बदल रहे हैं घूमने का तरीका, लंबी छुट्टियों की जगह अब कर रहे शॉर्ट ट्रिप</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप सोचते हैं कि आजकल के युवा घूमने-फिरने में कंजूस हो गए हैं तो शायद आप गलत हैं. वे घूम रहे हैं, बस तरीका बदल गया है. Airbnb ने एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसका नाम है Never the Same: The New Rules of Gen-Z Travel in India. इस रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के Gen-Z यानी तकरीबन 18 से 27 साल के युवा अब साल में एक लॉन्ग ट्रिप लगाने के बजाय तीन-तीन शॉर्ट ट्रिप्स करना पसंद करते हैं.
रिपोर्ट में सामने आई यह बात
रिपोर्ट के मुताबिक, 10 में से सात Gen-Z युवा यही पसंद करते हैं. 87 फीसदी युवाओं की पसंदीदा यात्रा एक हफ्ते से भी कम की होती है. इसका मतलब यह है कि लंबे टूर पैकेज का जमाना जाता दिख रहा है.&amp;nbsp;
बुकिंग कब करते हैं यूथ?
दिलचस्प बात यह है कि ये युवा बुकिंग भी बहुत पहले से नहीं करते. 66 फीसदी युवा यात्रा से बस कुछ दिन या कुछ हफ्ते पहले ही टिकट और जगह बुक करते हैं. कोई अचानक लंबा वीकेंड मिला, दोस्तों ने अचानक प्लान बनाया तो निकल पड़े. इसे कहते हैं आज की यात्रा.
सिर्फ घूमने के लिए ट्रैवल नहीं कर रहे युवा
गौर करने वाली बात यह है कि जेन जी की यह यात्रा सिर्फ घूमने के लिए नहीं होती है. रिपोर्ट कहती है कि 87 फीसदी युवाओं को लगता है कि वे जैसे घूमते हैं, वह उनकी पहचान को दर्शाता है. ऐसे में 95 फीसदी युवा चाहते हैं कि उनकी यात्रा बाकी सबसे अलग हो और उनकी अपनी हो. इसके अलावा 90 फीसदी ऐसी जगहें ढूंढते हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल न हुई हों. इंस्टाग्राम पर जिस जगह की पोस्ट ज्यादा वायरल हो रही हैं, वहां जेन-जी जाना पसंद नहीं करते हैं.
ठहरने के लिए चुनते हैं ऐसी जगह
बता दें कि यूथ अब होटल की जगह घर जैसी जगह पर रहना ज्यादा पसंद करते हैं. 63 फीसदी ने कहा कि उन्होंने कोई जगह इसलिए चुनी, क्योंकि वहां रहने की व्यवस्था उन्हें अच्छी लगी, न कि सिर्फ उस शहर या जगह की वजह से. जब वह दोस्तों के साथ जाते हैं तो आधे से ज्यादा युवा अलग-अलग होटल कमरों की बजाय एक ही घर में साथ रहना पसंद करते हैं. इसके अलावा यात्रा में पार्टनर की भी अहमियत है. चार में से तीन Gen-Z युवाओं के लिए यह ज्यादा जरूरी है कि वे किसके साथ जा रहे हैं.
हर यात्रा से पता चलता है सोचने का तरीका
Airbnb के भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कंट्री हेड अमनप्रीत बजाज ने कहा कि Gen-Z के लिए यात्रा जीवन के सबसे निजी फैसलों में से एक बन गई है. वे कहां जाते हैं, किसके साथ जाते हैं और कहां ठहरते हैं, इन सब चीजों से वे खुद को जाहिर करते हैं. Airbnb के आंकड़ों में भी यह बदलाव साफ दिखता है. गर्मियों में भारतीय Gen-Z की सर्च 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है. दो से छह रातों की छोटी यात्राओं की घरेलू बुकिंग में करीब 80 फीसदी की बढ़त हुई है. दोस्तों के साथ ग्रुप ट्रिप में भी 55 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है.
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Cool Places Near Delhi: दिल्ली की तपती गर्मी से चाहिए राहत? ये 5 जगहें गर्मियों में भी रहती हैं 25°C से नीचे</title>
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        <description><![CDATA[ Cool Places Near Delhi: दिल्ली की तपती गर्मी से चाहिए राहत? ये 5 जगहें गर्मियों में भी रहती हैं 25°C से नीचे ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Divorce: शादी के कितने साल बाद सबसे ज्यादा होते हैं तलाक? जानें रिश्तों में दरार आने की वजह</title>
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        <description><![CDATA[ After How Many Years Do Most Couples Divorce: शादी को अक्सर जिंदगी का सबसे मजबूत रिश्ता माना जाता है, लेकिन हर रिश्ता हमेशा एक जैसा नहीं रहता. समय के साथ लोगों की सोच, जरूरतें और भावनाएं बदलती हैं और कई बार यही बदलाव रिश्तों में दूरी की वजह बन जाते हैं. हाल के वर्षों में तलाक के बढ़ते मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शादी के कौन से साल रिश्ते के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल साबित होते हैं.
किस साल में सबसे ज्यादा होते हैं तलाक?
रिलेशनशिप के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट मैरिज डॉट कॉम के अनुसार, &amp;nbsp;शादी के शुरुआती दो साल और फिर पांचवें से आठवें साल के बीच तलाक का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता है. रिसर्च में यह भी सामने आया कि सातवां और आठवां साल रिश्तों के लिए सबसे &amp;nbsp;खतरनाक दौर माना जाता है. कई एक्सपर्ट्स इसे सेवन ईयर इच से जोड़कर देखते हैं. यह एक पुरानी थ्योरी है, जिसके मुताबिक शादी के करीब सात साल बाद कई कपल्स के रिश्ते में पहले जैसी दिलचस्पी कम होने लगती है. हालांकि यह पूरी तरह साबित नहीं हुई है, लेकिन कई रिसर्च और आंकड़ों में सातवें-आठवें साल के दौरान तलाक के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई.
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कब रिश्ते में आता है ठहराव?
स्टडी में यह भी बताया गया कि जो रिश्ते इस दौर को पार कर लेते हैं, उनमें अगले कुछ सालों तक तलाक का खतरा कम हो जाता है. शादी के 9वें से 15वें साल के बीच कई कपल्स अपने रिश्ते में ज्यादा स्थिरता और समझ महसूस करते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस समय तक लोग अपने पार्टनर, बच्चों, करियर और जिम्मेदारियों के साथ बेहतर तालमेल बैठा लेते हैं.&amp;nbsp;
किस वजह से आती है रिश्ते में दरार?
रिश्तों में दरार आने के पीछे सिर्फ एक वजह जिम्मेदार नहीं होती. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आर्थिक तनाव तलाक की सबसे बड़ी वजहों में से एक माना जाता है.पैसों की कमी, कर्ज या नौकरी जाने जैसी परिस्थितियां रिश्तों पर भारी दबाव डाल सकती हैं. इसके अलावा समय के साथ भविष्य को लेकर सोच बदलना भी रिश्तों में दूरी पैदा कर सकता है. कई बार शादी के कुछ साल बाद पति-पत्नी के लक्ष्य, करियर या परिवार को लेकर विचार अलग हो जाते हैं, जिससे टकराव बढ़ने लगता है. एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि बेवफाई, परिवार के साथ खराब रिश्ते, घरेलू हिंसा और इमोशनल सपोर्ट की कमी भी तलाक की बड़ी वजह बनती हैं. वहीं कम उम्र में शादी और जल्दी पैरेंट्स बनना भी कई कपल्स के लिए रिश्ते संभालना मुश्किल बना देता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>White Water Discharge: अगर बार बार हो रहा व्हाइट वॉटर डिस्चार्ज तो संभल जाएं, इस गंभीर बीमारी का हो सकता है खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ White Water Discharge:&amp;nbsp;महिलाओं के शरीर में समय-समय पर कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं. उम्र बढ़ने, पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या तनाव जैसी स्थितियों का असर सीधे उनकी सेहत पर पड़ता है. इन बदलावों के कारण शरीर में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते हैं, जिनमें व्हाइट वॉटर डिस्चार्ज यानी सफेद पानी आना भी शामिल है. आमतौर पर यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे या इसके साथ बदबू, खुजली और जलन जैसी समस्याएं भी दिखाई दें, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसे में इसे नजरअंदाज करने के बजाय इसके कारणों और लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
सामान्य सफेद पानी आमतौर पर बिना बदबू का और हल्के सफेद रंग का होता है. लेकिन अगर डिस्चार्ज का रंग पीला, हरा या भूरा होने लगे, उसमें तेज बदबू आने लगे या प्राइवेट पार्ट में खुजली और जलन महसूस हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है. &amp;nbsp;वहीं कुछ मामलों में पेशाब करते समय दर्द या जलन भी महसूस हो सकती है. &amp;nbsp;डॉक्टरों के अनुसार ऐसे लक्षण बैक्टीरियल वेजिनोसिस, यीस्ट इंफेक्शन या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) जैसी समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं. &amp;nbsp;अगर समस्या लगातार बनी रहे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए.&amp;nbsp;
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बार-बार डिस्चार्ज होने के पीछे क्या हैं कारण?
बार-बार व्हाइट डिस्चार्ज होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. हार्मोन में बदलाव, तनाव, थकान, खराब साफ-सफाई और संक्रमण इसके मुख्य कारण माने जाते हैं. वहीं &amp;nbsp;पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या हार्मोनल बदलाव के दौरान भी इसकी मात्रा बढ़ सकती है. &amp;nbsp;वहीं गंदे या बहुत टाइट कपड़े पहनना, लंबे समय तक नमी बने रहना और प्राइवेट हाइजीन का ध्यान न रखना संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सफेद पानी के साथ दर्द, खुजली या दुर्गंध हो तो यह केवल सामान्य बदलाव नहीं बल्कि किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है.&amp;nbsp;
बचाव और इलाज के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
इस समस्या से बचने के लिए रोजाना साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है. हमेशा सूती अंडरवियर पहनें और उन्हें नियमित रूप से बदलें. ज्यादा केमिकल वाले साबुन और खुशबूदार प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कम करें. खाने में दही, छाछ और विटामिन-सी से भरपूर फलों को शामिल करें क्योंकि ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा पर्याप्त पानी पिएं और तनाव कम करने की कोशिश करें. अगर घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी 5 से 7 दिनों तक समस्या में सुधार न हो या लक्षण बढ़ते जाएं, तो तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से सलाह लेना चाहिए. सही समय पर इलाज करवाने से बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Digestive Health: दस्त के साथ भयंकर कब्ज को न करें इग्नोर, हो सकता है कैंसर का संकेत, जानें लक्षण</title>
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        <description><![CDATA[ Why Watery Diarrhoea Happens After Constipation: अगर आपको कभी ऐसा महसूस हुआ है कि पहले पानी जैसे दस्त हुए और फिर कई दिनों तक कब्ज बनी रही, तो इसे सामान्य डाइजेशन समस्या समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. यह स्थिति भले ही उलझन पैदा करती हो, लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार इसके पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या छिपी हो सकती है, जिसे समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है.
ओवरफ्लो डायरिया की दिक्कत
लेक एरी कॉलेज ऑफ ऑस्टियोपैथिक मेडिसिन से बोर्ड-सर्टिफाइड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ सालहाब ने हाल ही में इस विषय पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि कई बार व्यक्ति को दस्त जैसा महसूस होता है, जबकि वास्तव में वह गंभीर कब्ज से जूझ रहा होता है. इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ओवरफ्लो डायरिया कहा जाता है.&amp;nbsp;
क्या हो सकती है इससे दिक्कत?
डॉ. जोसेफ सालहाब के अनुसार, ओवरफ्लो डायरिया सुनने में भले ही दस्त जैसी समस्या लगे, लेकिन यह वास्तव में कब्ज का ही एक रूप है. उन्होंने बताया कि जब बड़ी आंत में लंबे समय तक सख्त मल जमा रहता है और वह बाहर नहीं निकल पाता, तब केवल पानी उस मल के आसपास से रास्ता बनाकर बाहर निकलता है. चूंकि इस पानी का कोई ठोस आकार नहीं होता, इसलिए यह दस्त जैसा दिखाई देता है. कई दिनों तक मल त्याग न होने के बाद अचानक पानी जैसे दस्त होना इसी स्थिति का संकेत हो सकता है.
किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए इग्नोर?
एक्सपर्ट का कहना है कि इस समस्या के साथ पेट दर्द, पेट फूलना, मतली, मल का रिसाव और बार-बार पतले दस्त जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. गंभीर मामलों में अस्पताल में जांच की आवश्यकता पड़ सकती है, जिसमें शारीरिक परीक्षण, पेट का एक्स-रे, सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट और अन्य जांच शामिल हो सकती हैं.&amp;nbsp;
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कैंसर की भी हो सकती है दिक्कत
एक्सपर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि कुछ मामलों में कोलन कैंसर भी ओवरफ्लो डायरिया जैसे लक्षणों के रूप में सामने आ सकता है. कोलन में सिकुड़न या रुकावट बनने के कारण कब्ज और दस्त दोनों जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं. यदि इसके साथ वजन तेजी से कम होना, मल में खून आना, एनीमिया, तेज पेट दर्द, उल्टी या लगातार बढ़ती कब्ज जैसे लक्षण दिखें तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉ. जोसेफ सालहाब का कहना है कि ऐसे लक्षणों का इलाज खुद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. &amp;nbsp;अगर समस्या लगातार बनी रहे या गंभीर हो, तो सही जांच और चिकित्सा सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>मसालदानी में रखी हल्दी असली है या नकली, ऐसे करें पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ हल्दी भारतीय रसोई का सबसे महत्वपूर्ण और भरोसेमंद मसाला है. यह सिर्फ खाने का रंग और स्वाद ही नहीं बढ़ाती, बल्कि सदियों से इसे आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. हालांकि, आज बाजार में मिलावटी हल्दी की भरमार है, जिसमें कृत्रिम रंग और हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आपके घर की मसालेदानी में रखी हल्दी असली है या नकली.
नकली हल्दी क्यों होती है खतरनाक?
मिलावटी हल्दी में अक्सर मेटानिल येलो जैसे खतरनाक सिंथेटिक रंग मिलाए जाते हैं, जो खाद्य पदार्थों में उपयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित हैं. इनके नियमित सेवन से पेट दर्द, अपच और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर लिवर और किडनी पर भी बुरा असर पड़ सकता है. बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इसलिए उनके लिए यह मिलावट और भी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है.
हल्दी के साथ करें पानी वाला टेस्ट
यह सबसे आसान और भरोसेमंद घरेलू तरीका है. एक साफ गिलास पानी में एक चम्मच हल्दी डालें और बिना हिलाए 3 से 5 मिनट के लिए छोड़ दें. अगर हल्दी धीरे-धीरे नीचे बैठ जाती है और पानी काफी हद तक साफ रहता है तो यह असली हल्दी की निशानी है. अगर हल्दी तुरंत घुलने लगे और पानी गहरा पीला हो जाए तो समझ लीजिए उसमें कृत्रिम रंग मिलाया गया है.
हथेली पर रगड़कर पहचानें
एक और बेहद सरल तरीका है थोड़ी सी हल्दी हथेली पर लें और धीरे-धीरे रगड़ें. असली हल्दी की खुशबू प्राकृतिक, मिट्टी जैसी और हल्की तीखी होती है जो तुरंत पहचान में आती है. वहीं नकली हल्दी में रंग बहुत तेज और चमकीला होता है. उसकी गंध असामान्य या रासायनिक महसूस हो सकती है.
टिश्यू पेपर टेस्ट
एक गीले टिश्यू पेपर या सफेद कपड़े पर थोड़ी सी हल्दी रखें. अगर कुछ ही सेकंड में बहुत चमकीला और तेज पीला रंग फैलने लगे तो मिलावट की आशंका प्रबल है. शुद्ध हल्दी का रंग धीरे-धीरे और हल्के पीले रंग में फैलता है. वह इतनी आसानी से और तेजी से नहीं छोड़ता.
खरीदते समय रखें ये सावधानियां
हल्दी हमेशा किसी भरोसेमंद ब्रांड या विश्वसनीय दुकानदार से ही खरीदें. पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें. बाजार में अगर कोई हल्दी बहुत सस्ती मिल रही है तो उससे सावधान रहें. सस्ते में शुद्धता की गारंटी नहीं होती.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Testosterone Reducing Foods: ये चीजें रोज खाते हैं तो तुरंत छोड़ दीजिए, गिर जाएगा टेस्टोस्टेरोन और कम हो जाएगी कामेच्छा</title>
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        <description><![CDATA[ Foods That May Lower Testosterone Levels: पुरुषों की सेहत में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह न केवल मसल्स की ताकत और एनर्जी को प्रभावित करता है, बल्कि फिजिकल रिलेशन में बहुत अहम रोल प्ले करता है. एक्सपर्ट के अनुसार, शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हार्ट रोग और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि उम्र, लाइफस्टाइल और हेल्थ रिलेटेड कई चीजें टेस्टोस्टेरोन को प्रभावित करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी खाने-पीने की चीजें भी हैं जिनका अधिक सेवन इस हार्मोन के स्तर को प्रभावित कर सकता है. &amp;nbsp;चलिए उनके बारे में आपको बताते हैं.&amp;nbsp;
पुदीना
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट healthline के एक्सपर्ट के अनुसार, पुदीना यानी मिंट से बनी कुछ चीजें टेस्टोस्टेरोन पर असर डाल सकती हैं. एक 12 सप्ताह के अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से स्पीयरमिंट हर्बल टी पीने वाले लोगों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट देखी गई. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि इस विषय पर और अधिक रिसर्च की आवश्यकता है.
मुलेठी की जड़
इसी तरह मुलेठी की जड़ को लेकर भी कई स्टडी सामने आए हैं. वर्ष 2003 के एक अध्ययन में 25 पुरुषों को प्रतिदिन 7 ग्राम मुलेठी की जड़ दी गई, जिसके बाद केवल एक सप्ताह में टेस्टोस्टेरोन स्तर में लगभग 26 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.&amp;nbsp;
अलसी के बीज
अलसी के बीज &amp;nbsp;को आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन कुछ रिसर्च में यह भी संकेत मिला है कि इनमें मौजूद लिग्नान नामक तत्व टेस्टोस्टेरोन को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को बढ़ा सकते हैं. प्रोस्टेट कैंसर से जुड़े एक स्टडी में भी इसके प्रभाव देखे गए थे.
प्रोसेस्ड फूड्स
प्रोसेस्ड फूड्स में पाए जाने वाले ट्रांस फैट्स भी चिंता का विषय हैं. 209 पुरुषों पर किए गए एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों ने सबसे ज्यादा ट्रांस फैट का सेवन किया, उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर अन्य लोगों की तुलना में करीब 15 प्रतिशत कम था.
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शराब का भी अहम रोल
शराब का अधिक सेवन भी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है. 2004 के एक अध्ययन में पाया गया कि लगातार तीन सप्ताह तक रोजाना 30 से 40 ग्राम अल्कोहल लेने वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 6.8 प्रतिशत तक घट गया.
इनसे भी हो सकती है दिक्कत
इसके अलावा कुछ अध्ययनों में अखरोट और बादाम जैसे कुछ नट्स के टेस्टोस्टेरोन पर प्रभाव की भी चर्चा की गई है. हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि इन निष्कर्षों को अंतिम नहीं माना जा सकता. इसलिए किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Testosterone, Reducing, Foods:, ये, चीजें, रोज, खाते, हैं, तो, तुरंत, छोड़, दीजिए, गिर, जाएगा, टेस्टोस्टेरोन, और, कम, हो, जाएगी, कामेच्छा</media:keywords>
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        <title>How To Remove Skin Tanning: तेज धूप में स्किन हो गई है टैन? घर पर बना ये फेस पैक करेगा हीलिंग में मदद</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Skin Tanning: गर्मियों का मौसम शुरू होते ही उसका सबसे ज्यादा असर हमारी स्किन पर ही देखने को मिलता है. ये बात तो जग-जाहिर है कि तेज धूप, गर्म हवाएं और पसीना चेहरे की चमक छीन लेते हैं. ऐसे में कई लोगों की स्किन टैन हो जाती है, तो किसी के चेहरे पर लालपन, जलन और रूखापन दिखने लगता है. खासकर जब पारा 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तब स्किन को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत पड़ती है. ऐसी परिस्थिति में लोग महंगे फेस पैक, ब्यूटी ट्रीटमेंट और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं, लेकिन हर बार मनचाहा रिजल्ट नहीं मिल पाता. कई बार तो यह भी देखने में आता है कि ये प्रोडक्ट्स स्किन को और ज्यादा नुकसान पहुंचा देते हैं.
अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं और महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करके थक चुके हैं तो अब आपको परेशान होने कि बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. क्योंकि आज हम आपको बताएंगे आपके किचन में मौजूद कुछ ऐसी चीजों के बारे में जिनका इस्तेमाल करके आप गर्मियों में &amp;nbsp;स्किन को कूल रखने के साथ-साथ नमी और नेचुरल ग्लो भी पा सकते हैं. आइए अब जानते हैं कौन-सी हैं वो चीजें.&amp;nbsp;
स्किन को हील करेगा एलोवेरा, शहद और हल्दी&amp;nbsp;
गर्मियों की तेज धूप में अगर आपकी स्किन भी टैन हो जाती है तो एलोवेरा, शहद और हल्दी का मिश्रण आपकी स्किन के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. ये तीनों चीजें चेहरे को अंदर से ठीक करने में मदद करती हैं और धूप से डैमेज हुई स्किन को राहत देती हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि ये तरीका सस्ता, आसान और काफी असरदार है. इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरा फ्रेश, साफ और चमकदार दिखने लगता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: Skincare Tips: केवल धूप और पसीना नहीं, आपका फेवरेट फूड भी है पिंपल्स की वजह
ऐसे बनाएं &amp;nbsp;नेचुरल फेस पैक
अगर आप घर पर आसान तरीके से इस फेस पैक को बनाना चाहते हैं, तो इन सामानों की जरूरत होगी.
एलोवेरा जेल- 2 चम्मचशहद- 1 चम्मच&amp;nbsp;हल्दी- एक चुटकी&amp;nbsp;
इन तीनों ही चीजों को किसी साफ बर्तन में डालकर अच्छे से मिला लें. जब स्मूद पेस्ट तैयार हो जाए, तब इसे चेहरे पर लगाने के लिए इस्तेमाल करें.
चेहरे पर लगाने का सही तरीका&amp;nbsp;
सबसे पहले चेहरे को साफ पानी या फेस वॉश से धो लें जिससे चेहरे से धूल और गंदगी हट जाए. अब तैयार पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से लगाएं. करीब 5 मिनट तक धीरे-धीरे मसाज करें. इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा प्रेशर न डालें. इसके बाद इस पेस्ट को 10 मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें. फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें. चेहरा धोने के बाद हल्का मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं, अगर आप हफ्ते में 2 बार रात में सोने से पहले इसका इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ दिनों में स्किन पर अच्छा फर्क दिख सकता है.
इस्तेमाल करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान&amp;nbsp;
1.हल्दी ज्यादा मात्रा में न डालें, वरना चेहरा पीला दिख सकता है.&amp;nbsp;
2.अगर आपकी स्किन बहुत सेंसिटिव है, तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें.
3.फेस पैक लगाने से पहले चेहरा साफ होना चाहिए.
4.चेहरा धोने के बाद मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें.
5.दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ebola Virus: इबोला का नया स्ट्रेन ग्लोबल इमरजेंसी घोषित, इससे भारत को कितना डरना चाहिए?</title>
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        <description><![CDATA[ Should India Be Worried About Ebola Virus: दुनिया एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर सतर्क हो गई है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि हुई है और शुरुआती जेनेटिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह वायरस कई हफ्तों, संभव है कई महीनों से चुपचाप फैल रहा था. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस नए स्ट्रेन के व्यवहार और इसकी क्षमता को लेकर अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. ऐसे में दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस वायरस से डरने की जरूरत है.&amp;nbsp;
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
एक्सपर्ट &amp;nbsp;के अनुसार इबोला उन वायरसों में शामिल नहीं है जो हवा के जरिए तेजी से फैलते हैं. यह वायरस शरीर में तभी प्रवेश करता है जब इंफेक्टेड व्यक्ति के खून, लार, मल, यूरिन या अन्य शारीरिक द्रव के सीधे संपर्क में आया जाए. लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉ. डेविड हेमन, जिन्होंने 1976 में पहली बार इबोला पर स्टडी किया था, बताते हैं कि यह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में मुख्य रूप से शारीरिक लिक्यूड के जरिए फैलता है. यही कारण है कि मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और परिवार के सदस्य सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं.&amp;nbsp;
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शरीर में कैसे फैलता है यह?
वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे इम्यून सिस्टम पर हमला करता है. जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ मेंज के वायरोलॉजी प्रोफेसर डॉ. बोडो प्लाख्टर के अनुसार वायरस पहले लसीका ग्लैंड में अपनी संख्या बढ़ाता है और फिर खून के जरिए शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंच जाता है. &amp;nbsp;यह उन सेल्स को निशाना बनाता है जो सामान्य परिस्थितियों में शरीर को इंफेक्शन से बचाती हैं. जब यही इन्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है तो वायरस तेजी से पूरे शरीर में फैलने लगता है.
पहचानना क्यों होता है मुश्किल?
इबोला की सबसे बड़ी चुनौती इसके शुरुआती लक्षण हैं. शुरुआत में मरीज को सामान्य बुखार, सर्दी, इंफेक्शन या मलेरिया जैसी परेशानी महसूस हो सकती है. कई बार मरीज को कुछ समय के लिए राहत भी महसूस होती है, लेकिन इसके बाद बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. डॉ. डेविड हेमन के अनुसार बाद के चरण में शरीर के विभिन्न हिस्सों से ब्लड निकलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. यही वह समय होता है जब मरीज सबसे ज्यादा संक्रामक होता है और इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
भारत में क्या स्थिति है?
अब सवाल यह है कि भारत को कितना डरना चाहिए. मई 2026 तक भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट clinikk के एक्सपर्ट के आकलन के मुताबिक भारतीय आबादी के लिए फिलहाल सीधा खतरा कम है. देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर निगरानी व्यवस्था, स्वास्थ्य जांच, बड़े अस्पतालों में त्वरित जांच सुविधाएं और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की चेतावनी सिस्टम संभावित मामलों की पहचान में मदद कर रही हैं. हालांकि अफ्रीकी देशों के साथ यात्रा और व्यापारिक संबंधों को देखते हुए सतर्कता बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 02:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Best Sugar Options: वजन घटाने के लिए छोड़ रहे हैं शुगर, मीठे की जरूरत के लिए ये हैं हेल्दी ऑप्शन</title>
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        <description><![CDATA[ Best Sugar Options: आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान के कारण बढ़ता वजन एक गंभीर समस्या बन चुका है. ऐसे में वजन घटाने के क्रम में सबसे पहला और जरूरी कदम सफेद चीनी को अपनी डाइट से पूरी तरह बाहर करना होता है. इस शुगर को एम्प्टी कैलोरी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कोई पोषक तत्व नहीं होते और यह शरीर में सीधे फैट के रूप में जमा होती है.&amp;nbsp;
जब हम अचानक चीनी छोड़ देते हैं तो शरीर में शुगर क्रेविंग्स यानी मीठा खाने की तीव्र इच्छा होने लगती है. इस स्थिति में खुद को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है और कई लोग अपनी वेट लॉस जर्नी बीच में ही छोड़ देते हैं. यहां ये बात ध्यान देने वाली है कि वजन घटाने का मतलब मीठे से हमेशा के लिए नाता तोड़ना नहीं है, बल्कि समझदारी से सही और सेहतमंद ऑप्शन चुनना है. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ नेचुरल और हेल्दी ऑप्शन्स के बारे में, जो बिना वजन बढ़ाए आपके इस स्वीट लव को पूरा करते हैं.
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1. स्टीविया- स्टीविया एक नेचरल प्लांट है, जिसकी पत्तियों से मीठा पाउडर या ड्रॉप्स तैयार की जाती हैं. यह चीनी से लगभग 200 गुना अधिक मीठा होता है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट बिल्कुल नहीं होते हैं. वहीं, यह ब्लड शुगर और इंसुलिन के लेवल को भी प्रभावित नहीं करता है. वजन घटाने वाले लोगों और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह चीनी का सबसे सुरक्षित और बेहतरीन ऑप्शन है. इसे आप अपनी सुबह की चाय, कॉफी या नींबू पानी में आसानी से मिलाकर यूज कर सकते हैं.&amp;nbsp;
2. ताजे और मौसमी फल- जब भी दोपहर या शाम को मीठा खाने की तेज इच्छा हो, तो पेस्ट्री, चॉकलेट या बिस्कुट खाने के बजाय एक कटोरी ताजे फल खाएं. सेब, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, संतरा, अमरूद और पपीता जैसे फलों में नेचुरल स्वीट्नेस (फ्रुक्टोज) होती है. इसके साथ ही इनमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. फाइबर के कारण ये फल धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और पेट लंबे समय तक भरा रहता है.&amp;nbsp;
3. खजूर- ये बात तो आप जानते ही होंगे कि खजूर को प्रकृति का अनमोल उपहार माना जाता है. यह न केवल मीठा होता है बल्कि फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन का एक बेहतरीन सोर्स भी है. वजन घटाने के दौरान अगर आपको मीठे की तेज क्रेविंग हो, तो आप 1 या 2 खजूर खा सकते हैं. इसके अलावा, घर पर वजन घटाने वाली स्मूदी, ओट्स या हेल्दी शेक बनाते समय चीनी की जगह खजूर के पेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. &amp;nbsp;क्योंकि इसमें नेचुरल कैलोरी होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना ठीक रहता है.&amp;nbsp;
4. कच्चा शहद- सीमित मात्रा में लिया गया शुद्ध या जैविक शहद चीनी का एक बहुत अच्छा ऑप्शन है. सफेद चीनी के उलट, शहद में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो शरीर को पाचन क्षमता को दुरुस्त करते हैं.&amp;nbsp; सुबह गुनगुने पानी में आधा चम्मच शहद और नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर के फैट को बर्न करने में मदद मिलती है. हालांकि, शहद में कैलोरी होती है, इसलिए इसका उपयोग केवल स्वाद बदलने के लिए कम मात्रा में ही करना चाहिए.
5. गुड़- सफेद चीनी के मुकाबले गुड़ एक बिना केमिकल प्रोसेस के तैयार किया गया बेहतर ऑप्शन है. वहीं, गुड़ में आयरन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी मिनरल्स होते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं. भोजन करने के बाद अक्सर लोगों को मीठा खाने की आदत होती है, ऐसे में चीनी की बनी मिठाई की जगह एक छोटा टुकड़ा गुड़ खाने से मीठे की इच्छा भी शांत होती है और खाना भी आसानी से पच जाता है.&amp;nbsp;
6. मेवे- बादाम, काजू और अखरोट जैसे मेवे प्रोटीन और हेल्दी फैट से भरपूर होते हैं ऐसे में इनका सेवन जरूर करना चाहिए साथ ही मीठे की तलब मिटाने के लिए मुट्ठी भर भुने हुए मेवों के साथ थोड़ी सी किशमिश मिलाकर खाने से काफी फायदा होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Food Choking: कुरकुरे के टुकड़े ने ली युवक की जान! Food Choking कितना खतरनाक, कैसे बचाई जा सकती है जान?</title>
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        <description><![CDATA[ Food Choking: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. यहां 28 वर्षीय युवक की मौत सिर्फ इसलिए हो गई, क्योंकि कुरकुरे का एक टुकड़ा उसकी सांस की नली में फंस गया था. इस हादसे के बाद न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा गांव सदमे में है. एक्सपर्ट का कहना है कि खाने के दौरान की गई छोटी सी लापरवाही भी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि फूड चोकिंग कितना खतरनाक है और इससे कैसे जान बचाई जा सकती है.&amp;nbsp;
कुरकुरा खाते ही बिगड़ी थी तबीयत&amp;nbsp;
जानकारी के अनुसार, अर्की उपमंडल की घनागुघाट पंचायत के ताल गांव निवासी हेमंत शर्मा कसौली के एक निजी होटल में काम करते थे. परिजनों के अनुसार, वह घर पर कुरकुरे खा रहे थे, तभी उनका एक टुकड़ा गले में फंस गया. कुछ ही देर में उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और हालत गंभीर होती चली गई. परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया. पीजीआई में डॉक्टरों ने इलाज किया लेकिन तमाम कोशिशें के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. युवक की मौत की खबर मिलते ही गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई.&amp;nbsp;
क्या होता है फूड चोकिंग?&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोई खाने का पदार्थ सांस की नली में फंस जाता है और फेफड़ों तक हवा पहुंचने का रास्ता बाधित कर देता है तो इस स्थिति को फूड चोकिंग कहा जाता है. यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, क्योंकि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने पर कुछ ही मिनट में गंभीर नुकसान हो सकता है.&amp;nbsp;
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गले में क्यों फंस जाता है खाना?&amp;nbsp;
डॉक्टर बताते हैं कि हमारे गले में एपिग्लॉटिस नाम का एक हिस्सा होता है, जो खाने और सांस की नली के बीच संतुलन बनाए रखना है. जब कोई व्यक्ति खाना खाते समय बात करता है, हंसता है या बहुत तेजी से निगलता है तो खाने का टुकड़ा गलत रास्ते में जाकर श्वास नली में फंस सकता है. ऐसी स्थिति में सांस लेने में कठिनाई शुरू हो जाती है.&amp;nbsp;
किसी के गले में खाना फंस जाए तो क्या करें?
एक्सपर्ट के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के गले में खाना फंस जाए और वह खांस पा रहा है तो उसे लगातार खांसने के लिए कहना चाहिए. क्योंकि कई बार इससे फंसी हुई वस्तु बाहर निकल आ जाती है. अगर स्थिति गंभीर हो तो व्यक्ति को आगे की ओर झुकाकर पीठ के ऊपरी हिस्से पर जोरदार थपकी दी जा सकती है. इसके अलावा एक्सपर्ट व्यक्ति हेमलिच मैनूवर का इस्तेमाल भी कर सकता है. इस प्रक्रिया में पीड़ित के पीछे खड़े होकर पेट के ऊपरी हिस्से पर दबाव डाला जाता है, जिससे फेफड़ों में मौजूद हवा के दबाव से फंसी हुई वस्तु बाहर निकल सकती है.
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Pankaj Bhadouria Breast Cancer:मास्टरशेफ विनर पंकज भदौरिया को ब्रेस्ट कैंसर, 50 के पार महिलाओं में क्यों बढ़ जाता है खतरा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/pankaj-bhadouria-breast-cancerमास्टरशेफ-विनर-पंकज-भदौरिया-को-ब्रेस्ट-कैंसर-50-के-पार-महिलाओं-में-क्यों-बढ़-जाता-है-खतरा</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/pankaj-bhadouria-breast-cancerमास्टरशेफ-विनर-पंकज-भदौरिया-को-ब्रेस्ट-कैंसर-50-के-पार-महिलाओं-में-क्यों-बढ़-जाता-है-खतरा</guid>
        <description><![CDATA[ MasterChef Winner Pankaj Bhadouria Breast Cancer: मास्टरशेफ इंडिया सीजन 1 की विजेता और मशहूर सेलिब्रिटी शेफ पंकज भदौरिया ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर बताया कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चला है. इस पोस्ट के सामने आने के बाद उनके फैंस में चिंता बढ़ गई है. पंकज भदौरिया ने लोगों से अपनी सेहत के लिए स्पोर्ट की अपील भी की है.&amp;nbsp;
ब्रेस्ट कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है. हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं, हालांकि यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 50 साल की उम्र के बाद इसका खतरा काफी बढ़ जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले हार्मोनल और जैविक बदलाव इसकी बड़ी वजह बनते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर ब्रेस्ट कैंसर क्या है, 50 साल के बाद महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा क्यों हो जाता है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं.&amp;nbsp;
क्या होता है ब्रेस्ट कैंसर?
ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें ब्रेस्ट की कुछ कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं. समय के साथ ये कोशिकाएं एक गांठ या ट्यूमर का रूप ले सकती हैं. अगर समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो कैंसर कोशिकाएं शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकती हैं. यही वजह है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान और समय पर इलाज को बेहद जरूरी मानते हैं.&amp;nbsp;
50 &amp;nbsp;के बाद महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा क्यों हो जाता है?
1. विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र बढ़ने के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम भी बढ़ता जाता है. खासतौर पर 50 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कई ऐसे बदलाव होते हैं जो कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं.&amp;nbsp;
2.महिलाओं में एक उम्र के बाद पीरियड्स बंद हो जाते हैं, जिसे मेनोपॉज कहा जाता है. इस दौरान शरीर में हार्मोन का संतुलन बदलने लगता है. हार्मोन में होने वाले अंतर ब्रेस्ट के टिशू को प्रभावित कर सकते हैं और असामान्य कोशिकाओं के विकसित होने का खतरा बढ़ा सकते हैं. यही कारण है कि मेनोपॉज के बाद ब्रेस्ट कैंसर के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं.
3. हमारे शरीर की कोशिकाएं लगातार काम करती रहती हैं.बढ़ती उम्र के साथ डीएनए में छोटी-छोटी परेशानियां जमा होने लगती हैं.सामान्य परिस्थितियों में शरीर इनकी मरम्मत कर लेता है, लेकिन उम्र बढ़ने पर यह क्षमता कमजोर होने लगती है. इससे खराब कोशिकाओं के तेजी से बढ़ने और कैंसर में बदलने का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
4. 50 वर्ष के बाद महिलाओं में वजन बढ़ने की समस्या आम हो जाती है.विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में अतिरिक्त चर्बी एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकती है. जब शरीर में फैट ज्यादा होता है तो सूजन की स्थिति भी बनी रहती है, जो कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने के लिए तैयार कर सकती है.&amp;nbsp;
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किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
कुछ महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सामान्य से ज्यादा हो सकता है. जैसे परिवार में किसी को पहले ब्रेस्ट कैंसर रहा हो, &amp;nbsp;ज्यादा वजन या मोटापे की समस्या, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, देर से मेनोपॉज होना, अस्वस्थ खानपान और लाइफस्टाइल, धूम्रपान और शराब का सेवन इन स्थितियों में नियमित जांच कराना और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है.&amp;nbsp;
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर दर्द नहीं होता, इसलिए कई महिलाएं इसके संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं. हालांकि कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. &amp;nbsp;जैसे स्तन या बगल में गांठ, स्तन के आकार में बदलाव, स्किन में बदलाव, निप्पल में बदलाव, निप्पल से असामान्य डिसचार्ज. डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का जितना जल्दी पता चल जाता है, उसका इलाज उतना ही आसान और सफल होता है. शुरुआती अवस्था में कैंसर आमतौर पर ब्रेस्ट तक ही सीमित रहता है. ऐसे में सर्जरी, दवाओं और अन्य ट्रीटमेंट से बचाव किया जा सकता है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 01:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Pankaj, Bhadouria, Breast, Cancer:मास्टरशेफ, विनर, पंकज, भदौरिया, को, ब्रेस्ट, कैंसर, के, पार, महिलाओं, में, क्यों, बढ़, जाता, है, खतरा</media:keywords>
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        <title>Power Nap Benefits: दोपहर में कितनी देर के लिए लेनी चाहिए पावर नैप? रीसेट हो जाएगा पूरा दिन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/power-nap-benefits-दोपहर-में-कितनी-देर-के-लिए-लेनी-चाहिए-पावर-नैप-रीसेट-हो-जाएगा-पूरा-दिन</link>
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        <description><![CDATA[ Power Nap Benefits: दोपहर में कितनी देर के लिए लेनी चाहिए पावर नैप? रीसेट हो जाएगा पूरा दिन ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Short Height Fashion Tips: हाइट कम है तो तुरंत छोड़ दें ऐसे कपड़े पहनना, इस तरीके से दिखेंगे लंबे</title>
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Heel Pain Is A Big Problem: सुबह उठते ही एड़ियों में होता है तेज दर्द, जानें यह किस बीमारी का संकेत?</title>
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        <description><![CDATA[ HEEL Pain Is A Big Problem:&amp;nbsp;क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सुबह बिस्तर से नीचे पैर रखते ही एड़ी में सुई चुभने जैसा तेज दर्द होता है? सुबह के कुछ कदम चलना आपके लिए एक सजा जैसा बन जाता है? &amp;nbsp;तो इसे मामूली थकान या कमजोरी समझकर भूलने की गलती बिल्कुल न करें. यह आपके शरीर में हो रही एक खास बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसे मेडिकल साइंस में प्लांटर फैशियटिस कहा जाता है. आइए समझते हैं इस बीमारी के बारे में और इससे बचने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं.
क्यों होता है सुबह-सुबह एड़ियों में दर्द?
हमारे पैर के तलवे में एड़ी की हड्डी से लेकर उंगलियों तक एक मोटी और मजबूत टिशू की पट्टी होती है, जिसे प्लांटर फैशिया कहते हैं. यह पट्टी चलते या दौड़ते समय हमारे पैरों को झटके से बचाती है.
जब इस पट्टी पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है, तो इसमें छोटे-छोटे बारीक कट लग जाते हैं और सूजन आ जाती है. रात को सोते समय हमारे पैर आराम की मुद्रा में होते हैं, जिससे यह टिशू सिकुड़ जाता है. जैसे ही सुबह उठकर आप पहला कदम जमीन पर रखते हैं, यह सिकुड़ा हुआ टिशू अचानक से दोबारा खिंच जाता है और आपको बहुत तेज दर्द का अहसास होता है.
किस वजह से होती है यह बीमारी?

शरीर का बढ़ा हुआ मोटापा एड़ियों पर सीधा और बहुत ज्यादा दबाव डालता है.
बहुत पतले या बिना आर्च सपोर्ट वाले चप्पल-जूते पहनने से भी तलवों को नुकसान पहुंचता है.
यदि आपका काम ऐसा है जिसमें आपको घंटों लगातार खड़े रहना पड़ता है, तो भी आपको यह दिक्कत हो सकती है.
&amp;nbsp;शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने, हड्डियों के कमजोर होने या विटामिन डी की कमी से भी एड़ियों में दर्द बढ़ जाता है.

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यह घरेलू उपाय जिनसे मिल सकता है राहत

&amp;nbsp;दिन में 2 से 3 बार अपनी एड़ी पर 15 मिनट के लिए बर्फ से सिकाई करें, इससे सूजन कम होगी.
बिस्तर से उठने से पहले अपने पैरों और उंगलियों को आगे-पीछे स्ट्रेच करें ताकि पैर एकाएक न खिंचे.
हमेशा मोटे कुशन वाले और आरामदायक फुटवियर पहनें. घर के अंदर भी नंगे पैर चलने से बचें.
&amp;nbsp;यदि यह दर्द लगातार कई दिनों तक बना रहे और चलने-फिरने में ज्यादा दिक्कत होने लगे, तो तुरंत किसी आर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लें.

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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या खराब ओरल हेल्थ बन रही मां बनने में दिक्कत? फर्टिलिटी को लेकर नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ क्या खराब ओरल हेल्थ बन रही मां बनने में दिक्कत? फर्टिलिटी को लेकर नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 31 May 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Bhandara Style Kaddu Ki Sabji: घर पर ऐसे बनाएं भंडारा स्टाइल कद्दू की सब्जी, सब चाटते रह जाएंगे उंगलियां</title>
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        <description><![CDATA[ Bhandara Style Kaddu Ki Sabji: एक सवाल जो लगभग हर घर में पूछा ही जाता है और वो है, मम्मी आज खाने में क्या बना है? जैसे ही किचन से जवाब आता है कद्दू की सब्जी, बच्चों का तुरंत मुंह बन जाता है. कद्दू का नाम सुनते ही बच्चे ही नहीं, कई बार बड़े भी मुंह बनाने लगते हैं. अगर आपके घर का भी यही हाल है, तो अब आपको परेशान होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. आज आपको बताएंगे कद्दू की एक ऐसी जादुई रेसिपी, जिसे खाकर बच्चे कद्दू के दीवाने हो जाएंगे.
ये जादुई &amp;nbsp;रेसिपी और कोई नहीं बल्कि भंडारे में मिलने वाली खट्टी-मीठी कद्दू की सब्जी की है. भंडारे वाली इस सब्जी की खुशबू इतनी लाजवाब होती है कि भूख न होने पर भी मुंह में पानी आ ही जाता है. साथ ही इसका वो चटपटा, थोड़ा खट्टा और थोड़ा मीठा स्वाद बच्चों को उंगलियां चाटने पर मजबूर कर देता है. खास बात यह है कि इस तरीके से बनाई गई सब्जी में कद्दू का पारंपरिक स्वाद पूरी तरह बदल जाता है. आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान और झटपट विधि.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें: Kanpuriya Aloo Dhaniya: घर में झटपट कैसे बनाएं कनपुरिया स्टाइल आलू धनिया, एक क्लिक में जान लें इसकी ए टू जेड रेसिपी
आवश्यक सामग्री&amp;nbsp;
कद्दू- 500 ग्राम (छोटे टुकड़ों में कटा हुआ)
सरसों का तेल- 2 से 3 बड़े चम्मच
मेथी दाना और सौंफ- 1-1 छोटा चम्मच (तड़के के लिए)
तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च- 2-2 पीस&amp;nbsp;
हरी मिर्च और अदरक- बारीक कटे हुए&amp;nbsp;
मसाले- हल्दी,कश्मीरी लाल मिर्च,धनिया पाउडर, गरम मसाला&amp;nbsp;
खटास के लिए- आमचूर पाउडर या इमली का पल्प (1 चम्मच)
मिठास के लिए- गुड़ या चीनी (2 चम्मच)
हरा धनिया- बारीक कटा हुआ&amp;nbsp;
बनाने की इंस्टेंट विधि&amp;nbsp;
भंडारे वाली खट्टी-मीठी कद्दू की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले एक कड़ाही में दो से तीन बड़े चम्मच सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें. जब तेल से धुआं निकलने लगे, तब गैस धीमी करके उसमें मेथी दाना, सौंफ, तेजपत्ता, हींग और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाएं. साथ ही इन मसालों के चटकते ही बारीक कटी हरी मिर्च और कद्दूकस किया हुआ अदरक डालकर कुछ सेकंड के लिए भून लें. अब कड़ाही में कद्दू के छोटे-छोटे टुकड़े डालें और तेज आंच पर दो मिनट तक लगातार चलाते हुए भूनें. इसके बाद फ्लेम धीमा करें और कद्दू में हल्दी, धनिया पाउडर,कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाएं. मसालों को अच्छी तरह मिलाने के बाद सब्जी में आधा कप पानी का छींटा मारें और कड़ाही को ढककर धीमी आंच पर 8 से 10 मिनट तक कद्दू के एकदम नरम होने तक पकने दें.
जब कद्दू अच्छी तरह गल जाए, तब इसमें सीक्रेट ट्विस्ट देने के लिए दो चम्मच पिसा हुआ गुड़ या चीनी और एक चम्मच आमचूर पाउडर डालें. साथ ही कड़छी की मदद से कद्दू के कुछ टुकड़ों को हल्का सा मैश कर दें, जिससे सब्जी की ग्रेवी गाढ़ी और लुटपुटी हो जाएगी. अब इसे बिना ढके दो मिनट तक पकाएं ताकि खट्टा-मीठा स्वाद कद्दू में अच्छी तरह मिल जाए. आखिर में ऊपर से आधा चम्मच गरम मसाला और ढेर सारा ताजा बारीक कटा हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें. आपकी गरमा-गरम, खुशबूदार भंडारा स्टाइल कद्दू की सब्जी तैयार है, अब इसे गरमागरम पूड़ी के साथ सर्व करें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Precautions During Swimming: गर्मियों में स्वीमिंग करते वक्त कभी न करना ये गलती, वरना शरीर को हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/precautions-during-swimming-गर्मियों-में-स्वीमिंग-करते-वक्त-कभी-न-करना-ये-गलती-वरना-शरीर-को-हो-जाएगा-बड़ा-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ Precautions During Swimming: गर्मियों का मौसम आ चुका है ऐसे में सूरज ने भी आग बरसाना शुरु कर दिया है, तो इससे बचने के लिए लोगों की भीड़ अब स्विमिंग पूल की ओर उमड़ने लगी है. वैसे ये बात तो सही है कि ठंडे पानी में गोता लगाना मजेदार होता है, लेकिन इसके साथ ही ये खतरनाक भी हो सकता है.
आपकी जरा सी लापरवाही स्किन इंफेक्शन, फंगल प्रॉब्लम या आंखों में जलन जैसी समस्याओं को दावत दे सकती है. इसलिए जब भी पूल में मस्ती करने का प्लान बनाएं तो सावधानियां जरूर बरतें. आइए जान लेते हैं कौन-सी हैं वो गलतियां, जिनसे बचना बहुत जरूरी है.&amp;nbsp;
1.सीधे धूप से आकर तुरंत पानी में कूदना- जब आप तेज गर्मी और धूप में होते हैं, तो आपके शरीर का तापमान बहुत अधिक होता है. ऐसे में बिना सामान्य हुए तुरंत ठंडे पानी में छलांग लगाने से शरीर का तापमान अचानक गिर जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है.इससे मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना, दिल की धड़कन का असामान्य होना या यहां &amp;nbsp;तक कि हीटस्ट्रोक भी हो सकता है.
&amp;nbsp;2. आंखों और त्वचा की सुरक्षा को इग्नोर करना- अक्सर देखने में आता है की ज्यादातर स्विमिंग पूल्स के पानी को साफ रखने के लिए क्लोरीन और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. अगर आप बिना प्रोटेक्टिव गियर के पानी में जाते हैं, तो यह आपकी त्वचा और आंखों &amp;nbsp;के लिए भी खतरनाक हो सकता है. वहीं, बिना गॉगल्स के तैरने पर आंखों में गंभीर जलन, लालपन या सूखापन की समस्या हो सकती है. साथ ही क्लोरीनयुक्त पानी आपकी त्वचा के नेचुरल ऑयल को छीनकर उसे रूखा और बेजान बना देता है.&amp;nbsp;
3.सनस्क्रीन और मॉइस्चराइजर न लगाना- अगर आप खुले या आउटडोर पूल में दिन के समय तैरने जाते हैं,तो सूरज की यूवी किरणें त्वचा को तेजी से डैमेज करती हैं. इसके साथ ही बिना वाटरप्रूफ सनस्क्रीन लगाए स्विमिंग करने से भयानक सन टैनिंग और सनबर्न हो सकता है, जिससे त्वचा झुलस सकती है.&amp;nbsp;
4.तैरने के दौरान डिहाइड्रेटेड रहना- लोगों को लगता है कि पानी में रहने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती, लेकिन यह बात सच नहीं है. स्विमिंग एक भारी फिजिकल एक्सरसाइज है, जिसमें पसीना आता है और शरीर से मिनरल्स बाहर निकलते हैं. ऐसे में पानी में रहने के बावजूद अगर आप पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं लेते हैं, तो थकान, सिरदर्द, और चक्कर आने की समस्या हो सकती है.&amp;nbsp;
5.गंदे पूल में तैरना- पब्लिक स्विमिंग पूल्स जहां साफ-सफाई और क्लोरीन के लेवल का सही ध्यान नहीं रखा जाता, वहाँ बैक्टीरिया और फंगस आसानी से पनपते हैं. ऐसे दूषित पानी में तैरने से त्वचा पर रैशेज,खुजली,फंगल इन्फेक्शन और कान में संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.&amp;nbsp;
6.पेट भरकर तुरंत पानी में उतरना- भारी भोजन करने के तुरंत बाद स्विमिंग करने से पेट में भारीपन और एसिडिटी की समस्या होती है. वहीं,खाना खाने के तुरंत बाद तैरने से पाचन क्रिया प्रभावित होती है, जिससे पेट में दर्द और क्रैम्प्स की समस्या आ सकती है.&amp;nbsp;
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बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यान
गर्म से ठंडे का बैलेंस- जब भी धूप से आएं, तो पहले शरीर के तापमान को थोड़ा सामान्य होने दें. 5-10 मिनट आराम करें, हल्का सादा पानी पिएं और फिर पूल में उतरें.सनस्क्रीन का इस्तेमाल- वहीं,पानी में उतरने से कम से कम 20 मिनट पहले वाटरप्रूफ सनस्क्रीन जरूर लगाएं.&amp;nbsp;गॉगल्स और इयरप्लग- अपनी आंखों और कानों की सुरक्षा के लिए हमेशा स्विमिंग गॉगल्स और इयरप्लग का इस्तेमाल करें.हाइड्रेटेड रहें- इसके साथ ही स्विमिंग सेशन के दौरान बीच-बीच में नारियल पानी, नींबू पानी या सादा पानी का सेवन करते रहें.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>37 की हो अब तक शादी नहीं की...कोरियन लड़की का जवाब दिल जीत लेगा, क्यों लिया सिंगल रहने का फैसला?</title>
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        <description><![CDATA[ &#039;37 साल की हो गई हो, अब तक शादी क्यों नहीं की?&#039; यह सवाल दुनियाभर की कई महिलाओं को अक्सर सुनना पड़ता है. अब इस मुद्दे पर दक्षिण कोरिया की 37 वर्षीय कंटेंट क्रिएटर टिफनी सॉन्ग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. टिफिन ने अपने वीडियो में बताया कि आखिर उन्होंने अब तक शादी क्यों नहीं की और कैसे उनके अंकल की एक सलाह ने उनकी पूरी सोच बदल दी.
टिफनी सॉन्ग ने इंस्टाग्राम रील में बताया कि करीब 10 साल पहले जब उन्होंने अपना पीएचडी प्रोग्राम छोड़ दिया, तब वह जिंदगी में काफी खोया हुआ महसूस कर रही थीं. उस समय उन्हें लगा था कि शायद शादी ही जिंदगी का अगला रास्ता है. टिफनी ने कहा मैं उसे वक्त बहुत परेशान थी, मुझे लग रहा था कि अब जिंदगी में हासिल करने के लिए कुछ नहीं बचा. तब मैंने शादी को एक तरह के एस्केप यानी सहारे के रूप में देखना शुरू कर दिया था.
अंकल की सलाह ने बदली जिंदगी
टिफनी सॉन्ग के अनुसार, उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव उनके अंकल की एक बात से आया. उन्होंने कहा मेरे अंकल ने मुझे कहा था कि सबसे पहले खुद को प्राथमिकता दो, शादी से पहले तुम्हारी खुशी जरूरी है. टिफनी ने बताया कि इसी सलाह ने उन्हें खुद को समझने और जिंदगी को अपने तरीके से जीने का हौसला दिया. उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने सिर्फ अकेलेपन या सहारे के लिए शादी कर ली तो शायद वह कभी खुश नहीं रह पाती.



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शादी होमवर्क नहीं, एक गिफ्ट है
टिफनी सॉन्ग वीडियो में बताती है कि 37 साल की उम्र में वह खुद को पूरी तरह संतुष्ट और कॉन्फिडेंट मानती हैं. उन्होंने कहा कि अब मुझे नहीं लगता कि जिंदगी पूरी करने के लिए शादी जरूरी है. शादी अब मेरे लिए कोई होमवर्क नहीं बल्कि एक गिफ्ट की तरह है, जो कभी भी जिंदगी में आ सकता है. वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा मैरिज इस ए गिफ्ट, नॉट ए होमवर्क खुद के साथ खुश रहना सबसे ज्यादा जरूरी है.
सोशल मीडिया पर लोगों ने भी किया सपोर्ट
टिफनी सॉन्ग का वीडियो वायरल होने के बाद हजारों लोग उनके समर्थन में उतर आए. एक यूजर ने लिखा शादी अकेलेपन को भरने का तरीका नहीं हो सकती है. दूसरे यूजर ने कहा 36 से 38 साल जिंदगी जीने की सबसे शानदार उम्र होती है, घूमो, खुद को एक्सप्लोरर करो. वहीं एक और यूजर कमेंट में लिखता है शादी हर किसी के लिए जरूरी नहीं होती, यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. वहीं एक महिला यूजर ने कमेंट किया मैं भी जल्दी 37 की होने वाली हूं और मुझे कभी अकेलापन महसूस नहीं हुआ. एक और यूजर ने लिखा स्वास्थ्य और आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है न की शादी को. कई लोगों ने टिफनी सॉन्ग के अंकल की भी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत समझदारी वाली सलाह दी है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>की, हो, अब, तक, शादी, नहीं, की...कोरियन, लड़की, का, जवाब, दिल, जीत, लेगा, क्यों, लिया, सिंगल, रहने, का, फैसला</media:keywords>
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        <title>NFHS 6 Report: अस्पतालों में डिलीवरी बढ़ी, लेकिन डायबिटी और ब्लड प्रेशर के मामले बढ़े; NFHS की रिपोर्ट में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ NFHS 6 Report: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवहन और कल्याण मंत्रालय ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 की रिपोर्ट जारी की है. 2023-24 में एक किए गए सर्वे में देश के 715 जिलों के करीब 6.89 लाख परिवारों को शामिल किया गया है. रिपोर्ट में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और महिलाओं के आर्थिक व डिजिटल सशक्तिकरण से जुड़े कई जरूरी संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है.
सर्वे के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में चलाए गए विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों का असर अब बड़े आंकड़ों में दिखाई देने लगा है. अस्पताल में डिलीवरी कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है. बच्चों का टीकाकरण कवरेज बेहतर हुआ है और कुपोषण के कई संकेतकों में कमी दर्ज की गई है. हालांकि रिपोर्ट में मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों को लेकर भी चिंता जताई है.&amp;nbsp;
अस्पताल में डिलीवरी का आंकड़ा 90 प्रतिशत के पार&amp;nbsp;
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, देश में संस्थागत डिलीवरी यानी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में होने वाली डिलीवरी का प्रतिशत बढ़कर 90.6 फीसदी पहुंच गया है. पिछली एनएफएचएस-5 रिपोर्ट में यह आंकड़ा 88.6 प्रतिशत था. इसके साथ ही ट्रेनी स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में होने वाले डिलीवरी की संख्या भी बढ़ी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार हुआ है. एंटीनेटल केयर प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 95.9 फीसदी हो गया है. पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या 70 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 फीसदी तक पहुंच गई है. वह कम से कम चार बार गर्भावस्था की जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 58.5 फीसदी से बढ़कर 65.2 फीसदी दर्ज किया गया है.
बच्चों के टीकाकरण में भी हुई बढ़ोतरी&amp;nbsp;
सर्वे के अनुसार, 12 से 23 महीनों के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 87.1 फीसदी हो गया, जबकि पिछली रिपोर्ट में यह 83.8 फीसदी था. यह रिपोर्ट बताती है कि अधिकांश बच्चों के टीके सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से लगाए गए. रोटावायरस वैक्सीन कवरेज में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई जो 36.4 फीसदी से बढ़कर 85.4 फीसदी पहुंच गई. वहीं खसरा युक्त वैक्सीन के दूसरी डोस लेने वाले बच्चों का प्रतिशत भी 58.6 फीसदी से बढ़कर 71.8 फीसदी हो गया. स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है की सार्वभौमिक टीकाकरण अभियान और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है.&amp;nbsp;
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बच्चों में कुपोषण के संकेत में भी सुधार&amp;nbsp;
रिपोर्ट में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की पोषण स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है. उम्र के हिसाब से कम लंबाई वाले बच्चों का प्रतिशत 35.5 फीसदी से घटकर 29.3 फीसदी रह गया. वहीं गंभीर दुबलापन 7.7 फीसदी से घटकर 5.2 फीसदी हो गया. कम वजन वाले बच्चों की संख्या में भी मामूली कमी दर्ज की गई. इसके अलावा बच्चों में तीव्र श्वसन संक्रमण और गंभीर डायरिया के मामलों में भी गिरावट देखने को मिली है. रिपोर्ट के अनुसार जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराने वाली माताओं की संख्या बढ़ी है और छह से 8 महीने के बच्चों को पूरक आहार देने की स्थिति में भी सुधार हुआ है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;
बढ़ता मोटापा और लाइफस्टाइल बीमारियां बनी चुनौती&amp;nbsp;
जहां एक और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई संकेतकों में सुधार दर्ज हुआ है. वहीं रिपोर्ट में गैर संचारी रोगों को लेकर भी चिंता जताई है. सर्वे में मोटापा डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. एक्सपर्ट्स का कहना है की बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतें आने वाले समय में देश के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kanpur Famous Mohan Khasta: घर में आसानी से कैसे बनाएं कानपुर के फेमस मोहन खस्ते, एक क्लिक में जान लीजिए रेसीपी</title>
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        <description><![CDATA[ Kanpur Famous Mohan Khasta: अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और कभी उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर गए हैं तो आपने मोहन के खस्ते का नाम तो जरूर सुना होगा. कानपुर की संकरी गलियों से निकलकर पूरे देश में मशहूर हो चुका यह जायका सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि एक इमोशन है. सुबह-सुबह गरम-गरम, एकदम कुरकुरे खस्ते और उसके साथ मिलने वाले चटपटे, बिना लहसुन-प्याज के आलू-छोले की सब्जी का स्वाद जुबान पर ऐसा चढ़ता है कि इंसान उंगलियां चाटता रह जाए.
अक्सर लोग सोचते हैं कि बाजार जैसा यह खस्तापन और सोंधापन घर की रसोई में लाना नामुमकिन है लेकिन ऐसा नहीं है. कुछ सीक्रेट ट्रिक्स और सही माप के साथ आप इसे अपने किचन में बेहद आसानी से तैयार कर सकते हैं. आइए जानते हैं कानपुर के इस मशहूर स्वाद को घर पर बनाने की सबसे आसान रेसिपी और इसके कुछ खास सीक्रेट्स.&amp;nbsp;
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आवश्यक सामग्री
खस्ते के आटे के लिएमैदा- 2 कपसूजी- 2 बड़े चम्मच (क्रंची टेक्सचर के लिए)घी या तेल (मोयन के लिए)- 1/4 कपअजवाइन- 1 छोटा चम्मचनमक- स्वादानुसारगुनगुना पानी- आटा गूंधने के लिएखास भरावन के लिएधुली उड़द दाल- 1/2 कप (भिगोकर दरदरी पिसी हुई)सोंठ पाउडरसौंफ पाउडरजीरा पाउडरहींग और गरम मसाला- 1-1 छोटा चम्मच&amp;nbsp;तेल-1 बड़ा चम्मच
बनाने की आसान विधि
कानपुर के मशहूर मोहन खस्ते बनाने के लिए सबसे पहले एक परात में मैदा,सूजी,नमक और अजवाइन को एक साथ डालकर हाथों से अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें घी या तेल का मोयन डालें और मैदा को हथेलियों से तब तक रगड़ें जब तक कि मुट्ठी बांधने पर मैदा का लड्डू न बनने लगे, क्योंकि हलवाई जैसा खस्तापन लाने का असली सीक्रेट यही मोयन ही है. इसके बाद गुनगुने पानी की मदद से एक सख्त आटा गूंध लें और उसे गीले कपड़े से ढककर 20 मिनट के लिए सेट होने के लिए रख दें. इसी बीच भरावन तैयार करने के लिए एक पैन में थोड़ा सा तेल गरम करके हींग और दरदरी पिसी हुई उड़द दाल डालें और धीमी आंच पर भूनें. फिर इसमें सौंफ,सोंठ,जीरा पाउडर,गरम मसाला और नमक मिलाकर दाल के बिल्कुल सूखा और खुशबूदार होने तक भून लें और मिश्रण को ठंडा होने दें.&amp;nbsp;
इसके बाद सेट हो चुके आटे की छोटी-छोटी लोइयां तोड़ें और हर लोई को कटोरी का आकार देकर बीच में एक चम्मच दाल की स्टफिंग भरकर चारों तरफ से अच्छी तरह बंद कर दें. अब इसे बेलन से बेलने के बजाए हथेलियों की मदद से हल्का सा दबाते हुए चपटा और बड़ा आकार दें. आखिर में कढ़ाई में तेल को बिल्कुल धीमा गरम करें और इन खस्तों को तेल में डालकर एकदम धीमी आंच पर उलट -पलट कर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तल लें. वहीं,धीमी आंच पर तलने से खस्ते अंदर तक पूरी तरह पकते हैं और बाजार जैसा खस्तापन आता है. आपके खस्ते एकदम तैयार हैं.अब गरम-गरम खस्तों को कटी प्याज, हरी मिर्च और चटपटी सब्जी के साथ परोसें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Mango And Blood Sugar: शुगर के मरीजों के लिए जहर नहीं है आम, एक्सपर्ट से जानें इसे खाने का बिल्कुल सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Can Diabetics Eat Mangoes Without Raising Blood Sugar: गर्मी का मौसम आते ही आम की मिठास लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है. चाहे दोपहर के खाने के साथ कटे हुए आम हों या रात में ठंडे आम का बाउल, यह फल स्वाद के साथ कई यादें भी लेकर आता है. लेकिन डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए आम का मौसम अक्सर एक सवाल भी लेकर आता है कि क्या आम खाना सुरक्षित है या इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है?. चलिए जानते हैं कि एक्सपर्ट इसको लेकर क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या आम खान सुरक्षित है?
सच यह है कि आम को लेकर जितना डर फैलाया जाता है, हकीकत उससे कहीं ज्यादा संतुलित है. आम में प्राकृतिक शुगर होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि डायबिटीज के मरीज इसे बिल्कुल नहीं खा सकते. एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम खाने से ज्यादा जरूरी यह समझना है कि उसे कितनी मात्रा में, किस समय और किन चीजों के साथ खाया जा रहा है. डॉ. ऐश्वर्या कृष्णमूर्ति ने TOI को बताया कि डायबिटीज के मरीजों को आम से पूरी तरह दूरी बनाने की जरूरत नहीं है. उनका कहना है कि सही मात्रा और सही तरीके से खाया गया आम संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकता है.&amp;nbsp;
क्या मीठा आम नुकसानदायक होता है?
आम मीठा जरूर होता है, लेकिन सिर्फ मिठास ही यह तय नहीं करती कि कोई चीज नुकसानदेह है या नहीं. पके हुए आम में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. फाइबर डाइजेशन की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे ब्लड शुगर उतनी तेजी से नहीं बढ़ता जितना मीठे ड्रिंक्स या डेजर्ट खाने के बाद बढ़ सकता है. रिसर्च भी बताती है कि कार्बोहाइड्रेट का असर इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस सोर्स से आ रहा है और उसमें फाइबर कितना है.&amp;nbsp;
आम खाते समय क्या नहीं करनी चाहिए गलती?
हालांकि समस्या तब शुरू होती है जब आम को गलत तरीके से खाया जाता है. खाली पेट आम का जूस, शेक या मीठे डेजर्ट ब्लड शुगर में तेजी से उछाल ला सकते हैं. डॉ. कृष्णमूर्ति सलाह देती हैं कि आम के टुकड़ों को प्रोटीन या हेल्दी फैट वाली चीजों जैसे बादाम, बीज, ग्रीक योगर्ट या पनीर के साथ खाना बेहतर रहता है. इससे पाचन धीमा होता है और ब्लड शुगर ज्यादा स्थिर रहता है. &amp;nbsp;आम खाने का समय भी काफी मायने रखता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार दिन के समय आम खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है, क्योंकि उस समय शरीर ज्यादा सक्रिय होता है और इंसुलिन बेहतर तरीके से काम करता है. देर रात आम खाने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. इसलिए छोटे हिस्से में आम खाएं, दिन में खाएं और इसे मीठे डेजर्ट या पैकेज्ड ड्रिंक्स के साथ लेने से बचें.
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डायबिटीज के मरीज को क्या रखना चाहिए ध्यान?
मात्रा पर नियंत्रण सबसे जरूरी है. ज्यादातर डायबिटीज मरीज कभी-कभार आधा से एक कप आम आराम से खा सकते हैं, हालांकि यह उनकी दवा, शुगर कंट्रोल और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि डर की बजाय जागरूकता जरूरी है. किसी पसंदीदा मौसमी फल को पूरी तरह छोड़ देने के बजाय उसे संतुलित मात्रा में खाना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Childhood Cancer: अब जानलेवा नहीं रहा चाइल्डहुड कैंसर! 85% बच्चों की बच रही जान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/childhood-cancer-अब-जानलेवा-नहीं-रहा-चाइल्डहुड-कैंसर-85-बच्चों-की-बच-रही-जान</link>
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        <description><![CDATA[ Childhood Cancer Is No Longer A Death Sentence: कुछ दशक पहले तक बच्चों में कैंसर का पता चलना परिवारों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं माना जाता था. इलाज के सीमित विकल्प और कम सर्वाइवल रेट के कारण कई माता-पिता उम्मीद छोड़ देते थे. लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. मेडिकल साइंस में हुई प्रगति की बदौलत आज बड़ी संख्या में बच्चे कैंसर को मात देकर सामान्य और हेल्दी लाइफ जी रहे हैं.
पूरी तरह ठीक हो रहे काफी मामले&amp;nbsp;
एक्सपर्ट के मुताबिक चाइल्डहुड कैंसर अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा इलाज योग्य और कई मामलों में पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी बन चुका है. बेहतर दवाएं, शुरुआती पहचान, आधुनिक इलाज और स्पेशलाइज्ड अस्पतालों की उपलब्धता ने बच्चों के इलाज के नतीजों को पूरी तरह बदल दिया है.
डॉ. प्रमोद कुमार, फोर्टिस नई दिल्ली बताते हैं कि पिछले दो दशकों में चाइल्डहुड कैंसर के इलाज में जबरदस्त सुधार आया है. उनके अनुसार मौजूदा उपचार पद्धतियों के साथ कैंसर से पीड़ित करीब 80 से 85 फीसदी बच्चे लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं. वहीं एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया &amp;nbsp;जैसे कुछ कैंसर में सही समय पर इलाज मिलने पर ठीक होने की संभावना 90 फीसदी से भी ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
बच्चों में कैंसर ठीक होने के मामले किन चीजों पर निर्भर करते हैं?
डॉक्टरों का कहना है कि इलाज की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है. कैंसर का प्रकार, बीमारी किस स्टेज में पकड़ में आई, बच्चे की जेनेटिक प्रोफाइल और शरीर इलाज पर कैसी प्रतिक्रिया देता है, ये सभी बातें अहम भूमिका निभाती हैं. बच्चों का शरीर कीमोथेरेपी को एडल्ट की तुलना में बेहतर तरीके से सहन कर लेता है, जिससे इलाज के सफल होने की संभावना भी बढ़ जाती है.&amp;nbsp;
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बदला इलाज का तरीका
चाइल्डहुड कैंसर के इलाज में सबसे बड़ा बदलाव पर्सनलाइज्ड और रिस्क-आधारित ट्रीटमेंट के रूप में देखा जा रहा है. पहले सभी मरीजों को लगभग एक जैसी थेरेपी दी जाती थी, लेकिन अब डॉक्टर हर बच्चे की स्थिति के हिसाब से इलाज तय करते हैं. इससे इलाज ज्यादा प्रभावी होने के साथ-साथ साइड इफेक्ट्स भी कम होते हैं.,&amp;nbsp;
आज बच्चों में कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, सर्जरी, रेडिएशन और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है वहीं कठिन और दोबारा लौटने वाले कैंसर के मामलों में CAR-T सेल थेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट नई उम्मीद बनकर उभरे हैं. खासतौर पर ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे ब्लड कैंसर में इन तकनीकों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं.
भारत में बेहतर हो रहे हैं मामले
भारत में भी चाइल्डहुड कैंसर के मामलों में सर्वाइवल रेट लगातार बेहतर हो रहा है. जागरूकता बढ़ने, बेहतर डायग्नोसिस और स्पेशलाइज्ड कैंसर सेंटरों की उपलब्धता ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर लगातार बुखार, बार-बार इंफेक्शन, असामान्य ब्लीडिंग, अत्यधिक थकान, सूजन या अचानक वजन कम होने जैसे संकेत दिखें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Pimples Before Periods: पीरियड्स से पहले चेहरे पर आने लगते हैं पिंपल्स, समझिए शरीर का ये खास इशारा</title>
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        <description><![CDATA[ Why Do Pimples Appear Before Periods: कई महिलाओं के लिए पीरियड्स आने से कुछ दिन पहले चेहरे पर पिंपल्स निकलना एक आम समस्या बन चुका है. जैसे ही त्वचा साफ दिखने लगती है, ठुड्डी, जॉलाइन या गालों के आसपास अचानक दर्द वाले दाने दिखाई देने लगते हैं. ज्यादातर लोग इसका दोष स्किन केयर प्रोडक्ट्स या खानपान को देते हैं, लेकिन असली वजह अक्सर शरीर के अंदर हो रहे हार्मोनल बदलाव होते हैं.&amp;nbsp;
क्यों निकलते हैं पिंपल्स?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट flo.health के मुताबिक एक सामान्य पीरियड लगभग 28 दिनों का होता है और इस दौरान शरीर में कई हार्मोन्स के लेवल बदलते रहते हैं. शुरुआत में एस्ट्रोजन बढ़ता है, जबकि बाद के दिनों में प्रोजेस्टेरोन का स्तर ऊपर जाता है. पीरियड्स नजदीक आते-आते इन दोनों हार्मोन्स का स्तर कम होने लगता है, लेकिन टेस्टोस्टेरोन अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय हो जाता है. यही बदलाव त्वचा पर असर डालना शुरू कर देता है. ?
पीरियड्स से पहले बढ़ा हुआ प्रोजेस्टेरोन त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स को ज्यादा सक्रिय कर देता है. इससे सीबम यानी नेचुरल ऑयल &amp;nbsp;का उत्पादन बढ़ जाता है. इसके साथ ही त्वचा के रोमछिद्रों में सूजन भी आ सकती है, जिससे अतिरिक्त तेल बाहर नहीं निकल पाता और पोर्स बंद होने लगते हैं.&amp;nbsp;
चेहरे के किन हिस्सों पर पिंपल्स ज्यादा आते हैं?
जब टेस्टोस्टेरोन की सक्रियता बढ़ती है तो ऑयल प्रोडक्शन और ज्यादा बढ़ जाता है. यह अतिरिक्त तेल, धूल, गंदगी और डेड सेल्स के साथ मिलकर पोर्स को ब्लॉक कर देता है. यही वजह है कि कुछ महिलाओं को पीरियड्स से पहले बार-बार पिंपल्स की समस्या होती है. &amp;nbsp;
बंद पोर्स में बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे सूजन और इंफेक्शन बढ़ सकता है. इसके परिणामस्वरूप ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स, लाल दाने, पस वाले पिंपल्स, त्वचा के अंदर बनने वाली गांठें और दर्द भरे सिस्ट तक दिखाई दे सकते हैं. खासतौर पर ठुड्डी और जॉलाइन का हिस्सा इस तरह के हार्मोनल एक्ने से ज्यादा प्रभावित होता है.&amp;nbsp;
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कैसे इसको रोक सकते हैं?
अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतों से इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. चेहरे को साफ रखना, बार-बार हाथ न लगाना, मोबाइल स्क्रीन की सफाई करना और धूम्रपान से दूरी बनाना मददगार साबित हो सकता है. इसके अलावा संतुलित वजन बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि मोटापा हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है. &amp;nbsp;
एक्सपर्ट जिंक, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी, डी और ई से भरपूर भोजन लेने की सलाह भी देते हैं. सीफूड, नट्स, पनीर, पालक और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं. हालांकि सिर्फ विटामिन्स पर निर्भर रहने की बजाय संतुलित डाइट और सही स्किन केयर रूटीन अपनाना ज्यादा जरूरी है.
कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर पिंपल्स बार-बार निकलते हैं या बहुत ज्यादा गंभीर हो जाते हैं, तो स्किन रोग एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है. कुछ मामलों में डॉक्टर दवाएं, हार्मोनल ट्रीटमेंट या दूसरी मेडिकल थेरेपी की सलाह दे सकते हैं. इसलिए पीरियड्स से पहले चेहरे पर निकलने वाले पिंपल्स को सिर्फ ब्यूटी प्रॉब्लम समझकर नजरअंदाज न करें. कई बार यह शरीर की ओर से मिलने वाला एक अहम हार्मोनल संकेत भी हो सकता है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Easy Way To Remove Sock Odor: सुबह पहने और शाम तक आने लगती है मोजों से बदबू, ये ट्रिक आएगी आपके काम</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Way To Remove Sock Odor: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सुबह आप एकदम साफ मोजे पहनते हैं, लेकिन शाम को घर लौटते ही जैसे ही जूते उतारते हैं तो पूरे कमरे में एक ऐसी बदबू फैल जाती है. इतनी कि वहां बैठना दूभर हो जाता है.ऑफिस हो, दोस्तों के साथ हों या घर पर, मोजों की यह दुर्गंध किसी को भी शर्मिंदा करने के लिए काफी है. कई बार तो लोग इस डर से दूसरों के सामने जूते उतारने से भी कतराते हैं.
अगर आप भी मोजों से आने वाली बदबू से परेशान हैं तो अब आपको हिचकिचाने की जरूरत नहीं है. क्योंकि हम आपको बताएंगे कुछ ऐसे जादुई और बेहद आसान घरेलू नुस्खे, जो मोजों और जूतों की बदबू को जड़ से खत्म कर देंगे और आपके पैरों को पूरे दिन तरोताजा रखेंगे. आइए जानते हैं इन असरदार ट्रिक्स के बारे में.
क्यों आती है मोजों से बदबू
मोजों की बदबू खत्म करने की ट्रिक्स जानने से पहले आइए जान लेते हैं कि आखिर मोजों से ये बदबू क्यों आती है? दरअसल, मोजों और पैरों से बदबू आने का मुख्य कारण पसीना और बैक्टीरिया हैं. हमारे पैरों में हजारों पसीने की ग्रंथियां होती हैं. जब बंद जूतों में पसीना बाहर नहीं निकल पाता,तो वहां नमी जमा हो जाती है. इस नमी में त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और पसीने को खाकर एसिड बनाते हैं, जिससे यह तीखी दुर्गंध पैदा होती है. आइए अब जानते हैं इससे छुटकारा पाने के लिए कौन-से उपाय करने चाहिए.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp;1.सिरका वॉशिंग- मोजों से आने वाली गंदी बदबू को दूर करने के लिए उन्हें हमेशा गर्म पानी से धोएं. इसके बाद,1 बाल्टी पानी में 1 छोटा चम्मच सफेद सिरका मिलाएं और धुले हुए मोजों को इसमें 15-20 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद मोजों को बिना निचोड़े झटककर धूप में सुखाएं. यह मोजे को कड़ा होने से बचाता है और बदबू वाले बैक्टीरिया को खत्म करता है.
&amp;nbsp;2.पहनने से पहले करें ये काम- अगर आपके मोजों से बदबू आती है तो मोजे पहनने से पहले अपने पैरों के तलवों और उंगलियों के बीच टेलकम पाउडर या बेबी पाउडर का इस्तेमाल करें. इससे पाउडर पसीने को सोख लेगा, जिससे पैर और मोजे पूरे दिन फ्रेश रहेंगे.&amp;nbsp;
3.फ्रेशनेस के लिए बेकिंग सोडा- जूतों की नमी और बदबू को दूर करने के लिए रात को जूते उतारने के बाद उनके अंदर थोड़ा सा बेकिंग सोडा छिड़क दें. फिर सुबह पहनने से पहले जूतों को अच्छी तरह झाड़ लें. ऐसा करने से बेकिंग सोडा जूतों से दुर्गंध और नमी को पूरी तरह सोख लेगा.&amp;nbsp;
4.पैरों को साफ रखने के लिए फिटकरी- नहाते समय पैरों की सफाई का विशेष ध्यान रखें. आधी बाल्टी पानी में एक चुटकी फिटकरी का पाउडर और थोड़ा-सा पिपरमिंट क्रिस्टल मिलाएं और इस पानी से अपने पैरों को अच्छी तरह धोएं. यह नेचुरल तरीके से बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है.&amp;nbsp;
5.सही मोजे और जूते चुनें- हमेशा सिंथेटिक की जगह कॉटन या बांस के रेशे वाले सांस लेने योग्य मोजे चुनें. इसके अलावा,प्लास्टिक या खराब क्वालिटी के जूते पहनने से बचें, क्योंकि ये हवा पास नहीं होने देते.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Why Women Live Longer Than Men: मर्दों से ज्यादा क्यों होती है औरतों की उम्र, क्या है जिंदगी लंबी होने की वजह?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Do Women Live Longer Than Men: दुनिया के लगभग हर देश में एक बात समान दिखाई देती है कि महिलाएं औसतन पुरुषों की तुलना में ज्यादा लंबी उम्र जीती हैं. आंकड़े बताते हैं कि 65 साल से अधिक उम्र की आबादी में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा होती है और उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर और बड़ा हो जाता है.
हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार,&amp;nbsp; वर्ल्ड लेवल पर भी महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से करीब 7 साल अधिक मानी जाती है. आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई जैविक और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण जिम्मेदार हैं.
क्या कारण है इसके पीछे?
हार्वर्ड हेल्थ के एक्सपर्ट के अनुसार पुरुषों और महिलाओं के बीच यह अंतर बचपन से ही शुरू हो जाता है. रिसर्च बताती है कि लड़कों में निर्णय लेने और किसी काम के परिणामों को समझने वाला ब्रेन का हिस्सा लड़कियों की तुलना में थोड़ा देर से विकसित होता है.
यही वजह है कि कम उम्र में लड़के ज्यादा जोखिम लेने वाले व्यवहार की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं और हिंसक घटनाओं में उनकी मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
नौकरी भी एक बड़ा कारण
पुरुषों की कम उम्र की एक बड़ी वजह उनका पेशा भी माना जाता है. सेना, अग्निशमन सेवा, निर्माण कार्य और अन्य जोखिम भरे क्षेत्रों में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में कहीं अधिक होती है. ऐसे कामों में दुर्घटना और स्वास्थ्य संबंधी खतरे ज्यादा होते हैं, जिसका असर जीवन प्रत्याशा पर भी पड़ता है.&amp;nbsp;
हार्ट की बीमारी का भी असर
दिल की बीमारियां भी इस अंतर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में हृदय रोग से मौत का खतरा महिलाओं की तुलना में लगभग 50 फीसदी अधिक होता है. इसके पीछे हार्मोनल अंतर के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर, खराब कोलेस्ट्रॉल और स्वास्थ्य की अनदेखी जैसे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं.
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मेंटल हेल्थ के मामले में भी पुरुष पीछे
मेंटल स्वास्थ्य के मामले में भी पुरुष अक्सर पीछे रह जाते हैं. आंकड़े बताते हैं कि पुरुष महिलाओं की तुलना में आत्महत्या ज्यादा करते हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि कई पुरुष डिप्रेशन या मेंटल तनाव के बावजूद मदद लेने से बचते हैं. समाज में मौजूद कुछ धारणाएं भी उन्हें अपनी समस्याएं खुलकर बताने से रोकती हैं, जिसका गंभीर असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है.
ये भी हैं कारण
रिसर्च यह भी बताती है कि महिलाओं के सामाजिक संबंध आमतौर पर पुरुषों की तुलना में ज्यादा मजबूत होते हैं. परिवार, दोस्त और सामाजिक दायरे से जुड़े रहना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसके उलट, सामाजिक रूप से अलग-थलग रहने वाले लोगों में मृत्यु दर अधिक देखी गई है और यह स्थिति पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 30 May 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>K&amp;Beauty: स्किन केयर का बेताज बादशाह नहीं रहा अमेरिका, इस देश ने ऐसी दी धोबीपछाड़ कि बदल गया मार्केट</title>
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        <description><![CDATA[ South Korea Becomes Second Largest Beauty Exporter: दुनिया में इस समय साउथ कोरिया की ब्यूटी इंडस्ट्री का जबरदस्त दबदबा देखने को मिल रहा है. अगर आप अपने घर में रखे स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर नजर डालें, तो काफी संभावना है कि उनमें कोई न कोई कोरियन प्रोडक्ट जरूर शामिल होगा. फेस मास्क से लेकर वायरल स्नेल म्यूसीन क्रीम तक, कोरियन ब्यूटी प्रोडक्ट्स का क्रेज अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा. अब साउथ कोरिया ने कॉस्मेटिक एक्सपोर्ट के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ब्यूटी एक्सपोर्टर बनने का रिकॉर्ड बना लिया है. इस लिस्ट में अब उससे आगे सिर्फ फ्रांस है.&amp;nbsp;
क्या है कोरियन ब्यूटी के सफलता का राज?
दरअसल, इस बड़ी सफलता के पीछे सबसे बड़ा रोल स्किन केयर प्रोडक्ट्स का रहा. आंकड़ों के मुताबिक बेसिक स्किन केयर प्रोडक्ट्स ने अकेले 8.5 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार किया, जो कुल एक्सपोर्ट का करीब 75 प्रतिशत है. खासतौर पर फेस मास्क और फेस पैक की डिमांड में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. इनकी घरेलू प्रोडक्शन में करीब 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं लिपस्टिक और लिप बाम जैसे मेकअप प्रोडक्ट्स की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है.
कोरियन ब्यूटी इंडस्ट्री में पुरानी बड़ी कंपनियां अब भी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, लेकिन नए ब्रांड्स भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. एक नया ब्रांड सिर्फ एक साल में 21वें स्थान से छलांग लगाकर चौथे नंबर पर पहुंच गया. वहीं कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अरबों डॉलर की प्रोडक्शन वैल्यू तक पहुंच चुकी हैं.&amp;nbsp;
बदल रही है तस्वीर
पहले कोरियन ब्यूटी प्रोडक्ट्स को सिर्फ सस्ते और ट्रेंडी सामान के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि के-ब्यूटी अब कोई छोटा-मोटा ट्रेंड नहीं, बल्कि ग्लोबल ब्यूटी मार्केट का स्थायी हिस्सा बन चुकी है. खासकर अमेरिका और यूरोप के ग्राहक कोरियन ब्रांड्स पर लगातार भरोसा जता रहे हैं.
साउथ कोरिया मिनिस्ट्री ऑफ फूड एंड ड्रग सेफ्टी &amp;nbsp;के मुताबिक, पिछले साल के-ब्यूटी एक्सपोर्ट में 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा रिकॉर्ड 11.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया. सबसे खास बात यह रही कि कॉस्मेटिक ट्रेड सरप्लस पहली बार 10 अरब डॉलर के पार चला गया साउथ कोरिया के कुल राष्ट्रीय व्यापार लाभ में अकेले ब्यूटी इंडस्ट्री का योगदान लगभग 13 प्रतिशत रहा.
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अमेरिका के लोग हो रहे कोरियन प्रोडक्ट के दीवाने
सबसे बड़ा बदलाव एक्सपोर्ट बाजार में देखने को मिला. पहले चीन कोरियन ब्यूटी ब्रांड्स का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता था, लेकिन अब अमेरिका ने उसकी जगह ले ली है. अमेरिकी ग्राहकों ने करीब 2.2 अरब डॉलर के कोरियन कॉस्मेटिक्स खरीदे, जो कुल एक्सपोर्ट का लगभग पांचवां हिस्सा है. दूसरी तरफ चीन को होने वाले एक्सपोर्ट में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जापान तीसरे स्थान पर बना हुआ है.&amp;nbsp;
यूरोप में भी बोलबाला
यूरोप में भी कोरियन ब्यूटी प्रोडक्ट्स की पॉपुलैरिटी तेजी से बढ़ रही है. पोलैंड में कोरियन कॉस्मेटिक्स की खरीद 115 प्रतिशत तक बढ़ गई. वहीं फ्रांस, जिसे लग्जरी ब्यूटी इंडस्ट्री का गढ़ माना जाता है, वहां भी कोरियन ब्यूटी प्रोडक्ट्स की डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. पिछले साल फ्रांस को होने वाली सप्लाई में 71.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह आंकड़ा 10 करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया. पेरिस के मशहूर डिपार्टमेंट स्टोर में अब अलग से के-ब्यूटी सेक्शन बनाया गया है, जहां कई कोरियन ब्रांड्स आसानी से मिल रहे हैं.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Self Improvement: 3 घंटे की नींद और हर बात पर हां... आपकी ये नॉर्मल आदतें ही कर रही हैं आपको अंदर से बीमार</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/self-improvement-3-घंटे-की-नींद-और-हर-बात-पर-हां-आपकी-ये-नॉर्मल-आदतें-ही-कर-रही-हैं-आपको-अंदर-से-बीमार</link>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Dark Skin Trend: गोरेपन का क्रेज छोड़िए, सांवला दिखने के लिए लाखों लुटा रहे विदेशी, वजह कर देगी हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Why Tanned Skin Is Becoming A Beauty Trend: भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग गोरा दिखने की चाहत रखते हैं. फेयरनेस क्रीम से लेकर कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट तक, लोग रंग निखारने के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च कर देते हैं. लेकिन दुनिया के कुछ देशों में तस्वीर बिल्कुल उलटी है। वहां लोग अपनी त्वचा को और ज्यादा सांवला या टैन दिखाने के लिए मोटी रकम खर्च कर रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर लोग सांवला दिखने के लिए लोग इतने रुपये क्यों खर्च कर दे रहे हैं.&amp;nbsp;
सांवला दिखने का कल्चर
अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में टैनिंग अब सिर्फ एक ब्यूटी ट्रेंड नहीं, बल्कि एक बड़ा कारोबार बन चुका है. गर्मियां आते ही लोग धूप में घंटों समय बिताते हैं, टैनिंग सैलून जाते हैं और अलग-अलग कॉस्मेटिक तरीकों का सहारा लेते हैं ताकि उनकी त्वचा सुनहरी या गहरे रंग की दिखाई दे. युवाओं से लेकर मॉडल्स और सेलिब्रिटीज तक, यह ट्रेंड हर वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. दरअसल, वहां सांवली या टैन स्किन को आकर्षक और फिटनेस से जोड़कर देखा जाता है. कई लोगों का मानना है कि हल्का टैन चेहरा और शरीर को ज्यादा ग्लोइंग और आकर्षक बनाता है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी टैन लुक से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल होते हैं.
अमीरी की निशानी
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन देशों में सांवला रंग सिर्फ व्यूटी का नहीं, बल्कि अमीरी और एक्टिव लाइफस्टाइल को दिखाने का एक तरीका है. &amp;nbsp;इस बढ़ती मांग का असर कारोबार पर भी साफ दिखाई देता है. कई टैनिंग सैलून सालभर व्यस्त रहते हैं. एक टैनिंग सेशन के लिए 4 हजार से लेकर लोग 17 हजार रुपये खर्च करने को तैयार रहते हैं, जबकि नियमित ग्राहक सालभर में लाखों रुपये तक खर्च कर देते हैं ताकि उनकी त्वचा का वही लुक बना रहे.
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ब्रॉन्ज ग्लो को फैशन बना दिया
दिलचस्प बात यह है कि जहां भारत में गोरे रंग को अक्सर खूबसूरती, बेहतर अवसरों और सामाजिक स्वीकृति से जोड़कर देखा जाता है, वहीं अमेरिका जैसे देशों में सांवली त्वचा को प्रीमियम ब्यूटी ट्रेंड माना जा रहा है. &amp;nbsp;हॉलीवुड, फैशन इंडस्ट्री और सोशल मीडिया ने इसको काफी आगे बढ़ा दिया है. &amp;nbsp;किम कार्दशियन, जेनिफर लोपेज जैसी सेलिब्रिटीज आज इसके लिए ऑइकन बन चुके हैं.&amp;nbsp;
हेल्थ को भी खतरा
इस ट्रेंड को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट लगातार चेतावनी भी देते रहे हैं. उनका कहना है कि जरूरत से ज्यादा टैनिंग त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है और लंबे समय में गंभीर समस्याओं जैसे कि स्किन कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है. इसके बावजूद टैनिंग का क्रेज कम होता नजर नहीं आ रहा. सोशल मीडिया ने भी इस ट्रेंड को नई रफ्तार दी है. इंस्टाग्राम और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर टैन स्किन को लेकर लाखों पोस्ट मौजूद है. कई लोग अपनी तस्वीरें साझा कर दूसरों को भी इसी लुक के लिए प्रेरित करते हैं.&amp;nbsp;
भारतीयों से अलग सोच&amp;nbsp;
&amp;nbsp;एक तरफ भारत में लोग गोरा होने के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के कई हिस्सों में लोग सांवला दिखने के लिए लाखों रुपये बहा रहे हैं. यह दिखाता है कि खूबसूरती का पैमाना हर समाज और कल्चर में अलग-अलग हो सकता है और समय के साथ यह लगातार बदलता भी रहता है.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Kanpuriya Aloo Dhaniya: घर में झटपट कैसे बनाएं कनपुरिया स्टाइल आलू धनिया, एक क्लिक में जान लें इसकी ए टू जेड रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ अगर आप भी चटपटा खाने के शौकीन हैं और खोज रहे हैं कुछ ऐसी डिस जो मिनटों में बनकर तैयार हो जाए और स्वाद भी ऐसा हो कि जुबान को छू जाए तो कानपुर का मशहूर आलू धनिया आपके लिए एक परफेक्ट विकल्प हो सकता है. यह सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि कानपुर की गलियों का वो मशहूर स्ट्रीट फूड है जिसका नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है.
उबले हुए आलुओं पर लिपटी तीखी हरी धनिया की चटनी और ऊपर से सरसों के तेल का वो कनपुरिया तड़का जिसकी खुशबू ही किसी को भी अपना दीवाना बना ले. आइए जान लेते हैं इसको बनाने को संपूर्ण विधि.&amp;nbsp;
आलू धनिया का अतरंगी इतिहास&amp;nbsp;
आलू धनिया की रेसिपी जानने से पहले आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ और बातें, आलू धनिया को धनिया के आलू के नाम से भी जाना जाता है और ये उत्तर प्रदेश में खाई जाने वाली एक बहुत ही चटपटी डिश है. खासतौर से कानपुर में इसे खूब पसंद किया जाता है. इसीलिए ही तो वहां की ज्यादातर चाट की दुकानों पर आपको आलू धनिया मिल जाते हैं. कुछ लोग इन्हें चटनी के आलू भी कहते हैं. वहीं, बात करें इसके इतिहास की तो इसकी शुरुआत 1970 के आसपास कानपुर के स्थानीय चाट विक्रेताओं ने की थी. वैसे आलू चाट की उत्पत्ति तो उत्तर प्रदेश में हुई ही थी, लेकिन कानपुर के लोगों ने अपने अतरंग का परिचय देते हुए इसमें हरी धनिया को एड करके इसे एक नया ट्विस्ट दे दिया. आइए अब जानते हैं इसको बनाने का आसान तरीका.&amp;nbsp;
आवश्यक सामग्री
उबले आलू- 4-5 (मीडियम आकार के)
हरा धनिया- 1 बड़ा कप (बारीक कटा हुआ)
हरी मिर्च- 2-3&amp;nbsp;
अदरक- 1 इंच का टुकड़ा
सरसों का तेल- 1-2 बड़े चम्मच
जीरा- 1 छोटा चम्मच
हींग- 2 चुटकी
नींबू का रस- 1 छोटा चम्मच&amp;nbsp;
नमक- स्वादानुसार
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बनाने के झटपट विधि&amp;nbsp;
कनपुरिया स्टाइल चटपटे धनिया के आलू बनाने के लिए सबसे पहले आपको 4 से 5 उबले हुए आलुओं को छीलकर छोटे और चौकोर टुकड़ों में काट लेना है. इसके बाद इसकी मुख्य जान यानी तीखी हरी चटनी तैयार करने के लिए एक मिक्सर जार में एक बड़ा कप साफ धुला हुआ हरा धनिया, 3 से 4 हरी मिर्च और एक इंच अदरक का टुकड़ा डालना है. साथ ही इसमें बहुत थोड़ा सा पानी मिलाकर एक गाढ़ा और महीन पेस्ट बना लेना है. फिर इस पिसे हुए पेस्ट यानी चटनी को एक कटोरी में निकाल लेना है और उसमें स्वाद बढ़ाने के लिए एक छोटा चम्मच चाट मसाला, आधा छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर, आधा छोटा चम्मच काला नमक और स्वादानुसार सादा नमक मिला देना है. &amp;nbsp;
इसके बाद चटनी में दो चम्मच ताजा नींबू का रस निचोड़ना है , ऐसा करने से इसका तीखापन बैलेंस होगा और चटनी का रंग बिल्कुल हरा-भरा बना रहेगा. अब एक बड़े मिक्सिंग बाउल में कटे हुए उबले आलू लेना है और उसके ऊपर यह तैयार चटपटी धनिया की चटनी डाल देना है. इसके बाद चम्मच की मदद से या बर्तन को हिलाकर आलुओं को हल्के हाथों से तब तक टॉस करना है, जब तक कि चटनी की एक गाढ़ी परत हर एक आलू के टुकड़े पर अच्छी तरह से लिपट न जाए. इस स्टेप पर ध्यान रहे कि आलू फूटे नहीं. लीजिए आपका कनपुरिया स्ट्रीट स्टाइल आलू धनिया तैयार है, इसे टूथपिक लगाकर परोसें.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bashir Badra Death : मशहूर शायर बशीर बद्र इस बीमारी से थे पीड़ित, मौत से पहले ही इंसान भूल जाता है सबकुछ</title>
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        <description><![CDATA[ Bashir Badra Death : मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है. अपनी खूबसूरत शायरी, मोहब्बत से लबरेज गजलों और आम जिंदगी के एहसासों को अल्फाज देने वाले बशीर बद्र लंबे समय से डिमेंशिया नाम की बीमारी से जूझ रहे थे. यह वही बीमारी है, जो धीरे-धीरे इंसान की याददाश्त छीन लेती है. बताया जा रहा है कि जिंदगी के आखिरी दिनों में वह अपने करीबी लोगों तक को पहचान नहीं पा रहे थे. जिन शब्दों से उन्होंने लाखों दिलों को छुआ, आखिर में वही शख्स अपनी यादों की दुनिया में अकेला पड़ता चला गया.
ऐसे में मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन के बाद अब लोगों के बीच डिमेंशिया को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं और इसके बारे में काफी कुछ सर्च भी किया जा रहा है. तो आइए जानते हैं कि आखिर डिमेंशिया क्या है, यह कितनी खतरनाक बीमारी है और इसमें कैसे इंसान मौत से पहले ही सबकुछ भूल जाता है.&amp;nbsp;
क्या होती है डिमेंशिया बीमारी?
डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई मानसिक समस्याओं का रूप है. इसमें इंसान की सोचने, समझने, याद रखने और फैसले लेने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है. शुरुआत में मरीज छोटी-छोटी बातें भूलता है, लेकिन समय बीतने के साथ हालत इतनी बिगड़ सकती है कि वह अपने परिवार, दोस्तों और रोजमर्रा की चीजों को भी पहचानना बंद कर देता है. यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखने को मिलती है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ होने वाली सामान्य भूलने की आदत और डिमेंशिया में बड़ा फर्क होता है. आम भूलने की समस्या में इंसान थोड़ी देर बाद चीजें याद कर लेता है, जबकि डिमेंशिया में यादें लगातार खत्म होती जाती हैं.&amp;nbsp;
डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
इस बीमारी की शुरुआत बहुत धीरे-धीरे होती है. कई बार परिवार वाले भी इसे सामान्य बुढ़ापे की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. डिमेंशिया के कुछ सामान्य लक्षण हैं. जैसे बार-बार बातें भूल जाना, लोगों के नाम या चेहरे याद न रहना, एक ही सवाल कई बार पूछना, बातचीत में सही शब्द न ढूंढ पाना, चीजें रखकर भूल जाना, रास्ते भूल जाना, फैसले लेने में परेशानी होना, स्वभाव में अचानक बदलाव आना, गुस्सा, चिड़चिड़ापन या उदासी बढ़ जाना और बीमारी बढ़ने पर मरीज खाना खाना, कपड़े पहनना और रोजमर्रा के काम करना भी भूल सकता है.&amp;nbsp;
क्यों हो जाती है यह बीमारी?
डिमेंशिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं. सबसे आम वजह अल्जाइमर बीमारी मानी जाती है. इसके अलावा दिमाग की नसों में दिक्कत, सिर में चोट, पार्किंसन, स्ट्रोक, विटामिन B12 की कमी, थायराइड की समस्या और लंबे समय तक शराब या नशे का सेवन भी इसकी वजह बन सकता है. कुछ मामलों में यह बीमारी तेजी से बढ़ती है, जबकि कई लोगों में सालों तक धीरे-धीरे असर दिखता है.&amp;nbsp;
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इसमें कैसे इंसान मौत से पहले ही सबकुछ भूल जाता है?
इस बीमारी में इंसान धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खोने लगता है. वह पहले छोटी-छोटी बातें भूलता है, फिर लोगों के नाम, चेहरे और जरूरी बातें याद नहीं रहतीं, बीमारी बढ़ने पर वह अपने परिवार और करीबी लोगों को भी पहचान नहीं पाता है. कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि इंसान को अपनी ही जिंदगी की बातें तक याद नहीं रहतीं, इसलिए कहा जाता है कि डिमेंशिया में व्यक्ति मौत से पहले ही सबकुछ भूलने लगता है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;क्या है डिमेंशिया का इलाज&amp;nbsp;
डॉक्टरों के मुताबिक डिमेंशिया को पूरी तरह खत्म करने वाली कोई दवा फिलहाल मौजूद नहीं है, लेकिन सही इलाज और देखभाल से इसकी रफ्तार को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है. मरीज को समय पर दवाएं देना, मानसिक रूप से सक्रिय रखना, परिवार का साथ और शांत माहौल देना बहुत जरूरी माना जाता है. कई मामलों में अगर बीमारी किसी दूसरी वजह से हुई हो, जैसे विटामिन की कमी या थायराइड की समस्या, तो इलाज से सुधार भी हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Vaibhav Suryavanshi: गेल का रिकॉर्ड तोड़ने वाले वैभव का घर देखकर हैरान रह जाएंगे, पिता का संघर्ष जीत लेगा आपका दिल</title>
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        <description><![CDATA[ Vaibhav Suryavanshi Family And Struggle Story: बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव से निकलकर देशभर में अपनी पहचान बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी आज करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं.एक 15 साल का लड़का दुनिया के दिग्गज गेंदबाजों को अपने रडार पर ले लेता है. &amp;nbsp;बेहद साधारण परिवार से आने वाले इस युवा खिलाड़ी की कहानी मेहनत, संघर्ष और परिवार के त्याग की मिसाल बन चुकी है. 27 मार्च 2011 को जन्मे वैभव ने बहुत छोटी उम्र में ही क्रिकेट की दुनिया में बड़ा नाम कमाना शुरू कर दिया था.&amp;nbsp;
उम्र कम रिकॉर्ड बड़े
सिर्फ 15 साल की उम्र में वैभव ने आईपीएल में ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जिसने बड़े-बड़े दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया. आईपीएल 2026 सीजन में उन्होंने 65 छक्के जड़ दिए और एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इससे पहले यह रिकॉर्ड लंबे समय तक क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने 2012 में 59 छक्के लगाए थे. इतनी कम उम्र में ऐसा कारनामा करने के बाद वैभव को भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माना जा रहा है.

सबसे कम उम्र में चुने जाने वाले खिलाड़ी भी बन चुके हैं
वैभव सूर्यवंशी आईपीएल इतिहास के सबसे कम उम्र में चुने जाने वाले खिलाड़ी भी बन चुके हैं. बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव ने जनवरी 2024 में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था. इसके बाद अंडर-19 क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कई शतक लगाए और अपनी बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींच लिया. राजस्थान की टीम ने 2025 में उन्हें 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा था और शानदार प्रदर्शन के बाद 2026 सीजन के लिए भी टीम ने उन्हें अपने साथ बनाए रखा.

साधारण घर से आते हैं वैभव
आज भले ही वैभव क्रिकेट की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहे हों, लेकिन उनका घर अब भी उनकी सादगी और जमीन से जुड़े होने की कहानी बयान करता है. बिहार के ताजपुर में मौजूद उनका दो मंजिला घर बेहद साधारण है. घर में बालकनी, खुला आंगन और आसपास हरियाली दिखाई देती है. यह कोई आलीशान बंगला नहीं, बल्कि मेहनत और सपनों से बना एक ऐसा घर है, जहां हर दीवार संघर्ष की कहानी कहती है.

पिता ने काफी त्याग किया
वैभव के पिता ने बेटे के क्रिकेट सपने को पूरा करने के लिए काफी त्याग किया. उन्होंने घर के पास ही नेट प्रैक्टिस की व्यवस्था करवाई ताकि बेटा लगातार अभ्यास कर सके. इंटरनेट पर उनके पिता के संघर्ष और समर्पण की कहानियां अक्सर वायरल होती रहती हैं. परिवार आज भी बेहद सामान्य जिंदगी जीता है और यही सादगी लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है.
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दिखावे वाली चमक दमक नहीं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैभव का घर बिहार के छोटे शहरों में दिखने वाले सामान्य स्वतंत्र मकानों जैसा है. घर में जरूरत की सभी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन दिखावे वाली चमक-दमक नहीं है. वैभव अक्सर अपने परिवार के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं, जिनमें उनका पारिवारिक जुड़ाव साफ दिखाई देता है.

कितना है वैभव के घर की कीमत?
बताया जाता है कि बिहार के छोटे शहरों में इस तरह के घरों की कीमत लगभग 20 लाख से 60 लाख रुपये के बीच हो सकती है. हालांकि वैभव के घर की असली पहचान उसकी कीमत नहीं, बल्कि उससे जुड़ी मेहनत और संघर्ष की कहानी है.वैभव सूर्यवंशी ने जनवरी 2024 में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था और अंडर-19 क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर लगातार सुर्खियां बटोरीं. राजस्थान की टीम ने उन्हें 2025 में 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा था और बेहतरीन प्रदर्शन के बाद टीम ने उन्हें 2026 सीजन के लिए भी अपने साथ बनाए रखा.
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>मानसून में मनाली&amp;शिमला का सफर हो सकता है खतरनाक, सफर के लिए ये हैं खूबसूरत डेस्टिनेशन के विकल्प</title>
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        <description><![CDATA[ मानसून में मनाली-शिमला का सफर हो सकता है खतरनाक, सफर के लिए ये हैं खूबसूरत डेस्टिनेशन के विकल्प ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Relationship Dissatisfaction Signs: इन पांच साइन से पहचानें, आपसे संतुष्ट नहीं है आपकी महिला पार्टनर&amp; ऐसे करें खुद को साबित</title>
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        <pubDate>Fri, 29 May 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Low Effort Love बना नया ट्रेंड.. रिश्तों में क्यों घट रही मिठास, कैसे पा सकते हैं इससे छुटकारा?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Modern Relationships Are Losing Emotional Connection: आज के डिजिटल दौर में रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे. शुरुआत में प्यार, उत्साह और घंटों चलने वाली बातें धीरे-धीरे सिर्फ छोटे जवाबों और जरूरी बातचीत तक सिमटती जा रही हैं. अब रिश्तों में एक नया चलन तेजी से चर्चा में है, जिसे लोग लो एफर्ट लव कह रहे हैं. यानी ऐसा रिश्ता, जहां प्यार तो होता है, लेकिन उसे निभाने की कोशिश धीरे-धीरे खत्म होने लगती है.
क्या होता है लो एफर्ट?
असल में लो एफर्ट लव का मतलब सिर्फ भूल जाना या व्यस्त रहना नहीं है. यह वह स्थिति है, जब साथी रिश्ते में बहुत कम समय, भावना और एनर्जी लगाता है. शुरुआत में सब सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे रिश्ते की मिठास कम होने लगती है. बातचीत कम हो जाती है, साथ समय बिताने की इच्छा घट जाती है और रिश्ता सिर्फ निभाने भर तक सीमित रह जाता है.&amp;nbsp;
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इसके पीछे क्या होते हैं कारण?
आज की आधुनिक डेटिंग कल्चर को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है. सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स ने रिश्तों को बेहद आसान बना दिया है. एक क्लिक में नया जुड़ाव मिल जाता है, लेकिन इसी आसानी ने लोगों को इमोशनल रूप से दूर भी कर दिया है. सोशल मीडिया पर दिखने वाले परफेक्ट रिश्ते लोगों की उम्मीदें बदल रहे हैं. कई लोग असली रिश्तों में जरूरी मेहनत करने के बजाय सिर्फ दिखावे या सुविधाजनक प्यार तक सीमित हो रहे हैं.
इमोशन खुलकर जाहिर नहीं करते हैं लोग?
एक बड़ी वजह लोगों का अपनी इमोशन खुलकर जाहिर न करना भी है. कई लोग अपने मन की बातें सामने रखने से बचते हैं, क्योंकि उन्हें अस्वीकार किए जाने या जरूरत से ज्यादा जुड़ाव दिखने का डर रहता है. इसके अलावा भागदौड़ भरी जिंदगी में रिश्ते धीरे-धीरे दूसरी प्राथमिकता बनते जा रहे हैं. लो एफर्ट रिश्ते के कुछ संकेत साफ दिखाई देने लगते हैं. जैसे हर बार आप ही बातचीत शुरू करें, मिलने का कार्यक्रम बनाएं या झगड़े के बाद रिश्ता संभालने की कोशिश करें. कई जोड़ों के बीच बातचीत सिर्फ रोजमर्रा के कामों तक सीमित रह जाती है. दिल की बातें, भावनात्मक सहारा और भविष्य को लेकर चर्चा लगभग खत्म हो जाती है.
&amp;nbsp;दूरी को सामान्य मानने लगते हैं लोग?
धीरे-धीरे रिश्ता ऐसा लगने लगता है जैसे उसमें सब कुछ है, लेकिन फिर भी कुछ कमी है. सबसे खतरनाक बात यह है कि लोग इस दूरी को सामान्य मानने लगते हैं. कई बार इंसान इतना समझौता कर लेता है कि उसे एहसास ही नहीं होता कि वह इमोशनल उपेक्षा झेल रहा है. एक्सपर्ट मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसे रिश्ते में रहने से आत्मविश्वास कम हो सकता है. इंसान खुद को कमतर समझने लगता है और हमेशा कोशिश करते-करते मानसिक रूप से थक जाता है. रिश्ते में चुप्पी, नाराजगी और अकेलेपन की भावना बढ़ने लगती है.
कैसे निकल सकते हैं इससे?
हालांकि इससे बाहर निकलना नामुमकिन नहीं है. एक्सपर्ट के मुताबिक, रिश्तों में मिठास वापस लाने के लिए बड़े सरप्राइज नहीं, बल्कि छोटी और लगातार कोशिशें जरूरी होती हैं. साथी की बातें ध्यान से सुनना, समय निकालना, छोटी-छोटी चीजें याद रखना और भावनात्मक सहारा देना रिश्ते को मजबूत बनाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या आप भी फेंक देते हैं किचन वेस्ट? बड़े काम का है कचरा, किचन गार्डन में ऐसे आएगा काम</title>
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        <description><![CDATA[ क्या आप भी फेंक देते हैं किचन वेस्ट? बड़े काम का है कचरा, किचन गार्डन में ऐसे आएगा काम ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Nita Ambani Grooming Budget: नीता अंबानी के अलग हैं ठाठ, जिसे देख विदेशी मीडिया भी रह गया दंग! जानें उनका ग्रूमिंग बजट</title>
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        <description><![CDATA[ Nita Ambani Grooming Budget: रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी अक्सर अपने रॉयल अंदाज को लेकर चर्चा में रहती है. कुछ समय पहले ही इटली के वेनिस में आयोजित वेनिस बिएनले डिनर में जब वह बनारसी साड़ी पहन कर पहुंची तो वहां मौजूद विदेशी मीडिया से लेकर फैशन इंडस्ट्री तक उनके स्टाइल की चर्चा होने लगी. इस तरह के इवेंट्स में अक्सर नीता अंबानी भारतीय कला, शिल्प और लग्जरी फैशन का ऐसा मेल दिखाती है, जिससे वह सभी लोगों का ध्यान खींच लेती है. उनके लुक में सिर्फ महंगे कपड़े या ज्वेलरी ही नहीं, बल्कि भारतीय कारीगरी की झलक भी साफ दिखाई देती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि नीता अंबानी का ग्रूमिंग बजट कितना है, जिसे देखकर विदेशी मीडिया भी दंग रह गया.&amp;nbsp;
5 महीने में तैयार हुई नीता अंबानी की खास साड़ी&amp;nbsp;
वेनिस में आयोजित इंडियन पवेलियन के उद्घाटन समारोह के दौरान नीता अंबानी ने पारंपरिक बनारसी ब्रोकेड कड़वा साड़ी पहनी थी. नीता अंबानी की इस साड़ी को देश के मास्टर कारीगरों ने करीब पांच महीनों की मेहनत से तैयार किया था. साड़ी की बुनाई, टेक्सचर और डिजाइन पूरी तरह हाथ से तैयार किए गए थे. जिनमें भारत की पारंपरिक कड़वा कला की झलक दिखाई दे रही थी. विदेश में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम में उनका यह लुक भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाला माना गया. इसके अलावा नीता अंबानी ने अपने ट्रेडिशनल साड़ी लूक को मॉडर्न टच देने के लिए डिजाइनर मनीष मल्होत्रा की ओर से डिजाइन किया गया गोल्ड चैंटिली लेस ब्लाउज पहना. जिसके बाद अब नीता अंबानी के इस लुक की सोशल मीडिया पर फोटो खूब वायरल हो रही है.&amp;nbsp;
नीता अंबानी की ज्वेलरी भी रहती है अक्सर चर्चा में
नीता अंबानी के हर लुक के साथ-साथ सबसे ज्यादा उनकी ज्वेलरी भी अक्सर चर्चा में रहती है. इटली में हुए इस इवेंट में उन्होंने रत्ना रिविएर नेकलेस पहना था, जिसे मशहूर ज्वेलर्स कांतिलाल छोटेलाल ने डिजाइन किया था. इस नेकलेस में बर्मी रूबी, कोलम्बियन एमराल्ड व्हाइट और पीले डायमंड लगाए गए थे. बताया गया है कि इसमें इस्तेमाल किए गए कई रत्न उनके कलेक्शन का हिस्सा थे. वहीं अपने लुक को खास बनाने के लिए नीता अंबानी ने टेंपल आर्ट से प्रेरित हैंड कार्व्ड क्लच कैरी किया. गोल्ड और रूबी से सजे इस क्लच ने उनके ट्रेडिशनल अंदाज को रॉयल बना दिया.&amp;nbsp;
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स्किन केयर और ग्रूमिंग पर भी रहती है खास नजर&amp;nbsp;
नीता अंबानी सिर्फ अपने कपड़ों, ज्वेलरी के लिए ही नहीं बल्कि अपनी स्किन और ग्रूमिंग को लेकर भी काफी चर्चा में रहती है. रिपोर्ट के अनुसार वह अपनी स्किन केयर रूटीन में क्लींजिंग, टोनिंग, मॉइश्चराइजिंग और सन प्रोटेक्शन का खास ध्यान रखती है. इसके अलावा नियमित एक्सफोलिएशन फेस मास्क और हाइड्रेशन भी उनकी लाइफस्टाइल का हिस्सा है. बताया जाता है कि वह अपनी डाइट में फलों, सब्जी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजों को शामिल करती है. साथ ही मेडिटेशन और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर भी फोकस करती है.
नीता अंबानी के मेकअप आर्टिस्ट&amp;nbsp;
नीता अंबानी के पर्सनल मेकअप आर्टिस्ट मिक्की कांट्रैक्टर है, जो बॉलीवुड के सबसे चर्चित मेकअप का आर्टिस्टों में गिने जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार मिक्की एक व्यक्ति का मेकअप करने के लिए 75 हजार से 1 लाख रुपये तक चार्ज करते हैं. वह सिर्फ नीता अंबानी ही नहीं बल्कि ईशा अंबानी, श्लोका मेहता और बॉलीवुड सितारों के साथ भी काम कर चुके हैं. उनके क्लाइंट्स की लिस्ट में ऐश्वर्या राय बच्चन, करीना कपूर खान, दीपिका पादुकोण और अनुष्का शर्मा जैसे नाम शामिल है.
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        <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>DADT Relationship: यूथ के बीच ट्रेंड हो रहा DADT क्या है, रिलेशनशिप को कैसे खोखला कर रहा यह टर्म?</title>
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        <description><![CDATA[ DADT Relationship: आज के समय में युवाओं के बीच एक नया रिलेशनशिप टर्म तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जिसे DADT कहा जाता है. DADT का मतलब होता है &amp;ldquo;Don&amp;rsquo;t Ask, Don&amp;rsquo;t Tell&amp;rdquo; यानी &amp;ldquo;मत पूछो, मत बताओ&amp;rdquo;. इस रिलेशनशिप में कपल एक-दूसरे को यह मानकर चलते हैं कि अगर कोई बाहर किसी और व्यक्ति से भी जुड़ रहा है, तो उसके बारे में सवाल नहीं पूछेंगे और न ही पूरी जानकारी देंगे. &amp;nbsp;यह एक तरह का ओपन रिलेशनशिप का मॉडर्न रूप माना जाता है, जिसमें प्राइमरी पार्टनर की जगह बनी रहती है, लेकिन बाहर के रिश्तों पर पूरी तरह रोक नहीं होती, बस उसकी चर्चा नहीं होती.&amp;nbsp;
DADT रिलेशनशिप कैसे काम करता है?
DADT में दो लोग एक साथ रिलेशनशिप में रहते हैं, लेकिन दोनों के बीच यह समझ होती है कि वे अपने बाहर के रिलेशन के बारे में एक-दूसरे से बात नहीं करेंगे. इसका मतलब है कि अगर कोई पार्टनर किसी और व्यक्ति से भी जुड़ता है, तो वह अपने मुख्य रिलेशन को बचाए रखता है और बाहर की बातों को छुपाकर नहीं, बल्कि &amp;ldquo;न पूछने&amp;rdquo; की शर्त पर आगे बढ़ता है.&amp;nbsp;
इस तरह के रिश्ते में लोग अपनी पर्सनल फ्रीडम को ज्यादा अहमियत देते हैं. उन्हें लगता है कि इससे रिश्ते में झगड़े, जलन और शक कम होता है. कई कपल्स इसे इसलिए चुनते हैं ताकि वे बिना दबाव के अपनी लाइफ को जी सकें और अपने प्राइमरी रिश्ते को भी बनाए रख सकते हैं.&amp;nbsp;
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युवाओं में DADT क्यों बढ़ रहा है?
आज की जनरेशन में रिश्तों को लेकर सोच बदल रही है. युवा अब सिर्फ &amp;ldquo;कमिटमेंट&amp;rdquo; तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि अपनी पर्सनल ग्रोथ और आजादी को भी महत्व देते हैं. कई बार लंबे रिश्तों में लोग इमोशनल दूरी, समझ की कमी या उम्मीदों के दबाव से परेशान हो जाते हैं. इन्हीं वजहों से कुछ लोग DADT जैसे रिलेशनशिप को अपनाते हैं. उन्हें लगता है कि इससे वे अपने मुख्य रिश्ते को बचाते हुए भी अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं. इसके अलावा, सोशल मीडिया और बदलती लाइफस्टाइल ने भी लोगों की सोच को ज्यादा ओपन बना दिया है.&amp;nbsp;
DADT रिश्ते का असर और खतरे
हालांकि DADT सुनने में आसान और फ्रीडम वाला रिलेशन लगता है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं. सबसे बड़ा खतरा भरोसे (Trust) का कमजोर होना है. जब पार्टनर एक-दूसरे से पूरी बात शेयर नहीं करते, तो रिश्ते में दूरी बढ़ सकती है. इसके अलावा, यह रिलेशनशिप कई बार गलतफहमियों और इमोशनल स्ट्रेस का कारण भी बन सकता है. &amp;nbsp;हर व्यक्ति के लिए ऐसे रिश्ते सही नहीं होते, क्योंकि इसमें मजबूत समझ और साफ नियमों की जरूरत होती है. &amp;nbsp;अगर दोनों के बीच सही कम्युनिकेशन नहीं है, तो यह रिश्ता जल्दी टूट भी सकता है. &amp;nbsp;इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि DADT हर किसी के लिए सही नहीं है और इसे अपनाने से पहले अच्छे से सोच-विचार जरूरी है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>DADT, Relationship:, यूथ, के, बीच, ट्रेंड, हो, रहा, DADT, क्या, है, रिलेशनशिप, को, कैसे, खोखला, कर, रहा, यह, टर्म</media:keywords>
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        <title>Heatwave Effects: 50°C की गर्मी में लोग क्यों हो जाते हैं ज्यादा गुस्सैल? साइंस ने बता दिया सच</title>
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        <description><![CDATA[ How Extreme Heat Affects Human Behaviour: भीषण गर्मी सिर्फ शरीर को ही नहीं, इंसान के व्यवहार और मूड को भी बुरी तरह प्रभावित करती है. जब तापमान एक लिमिट से अधिक हो जाती है, तो लोग छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा चिड़चिड़े, गुस्सैल और बेचैन महसूस करने लगते हैं. कई लोगों को लगता है कि यह सिर्फ थकान या असहज मौसम की वजह से होता है, लेकिन अब साइंस और डॉक्टरों ने इसके पीछे की असली वजह समझाई है.&amp;nbsp;
क्या आने लगता है ज्यादा गुस्सा?
दरअसल, तेज गर्मी में शरीर लगातार खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता रहता है. &amp;nbsp;इसी कारण शरीर पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के एक्सपर्ट &amp;nbsp;डॉ. अल्बर्स ने बताया कि जब मौसम बहुत गर्म होता है, तो शरीर ओवरड्राइव मोड में चला जाता है. इससे शरीर में कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने लगता है. यही हार्मोन इंसान को जल्दी गुस्सा दिलाने, बेचैन करने और मानसिक रूप से थका देने का काम करता है.&amp;nbsp;
गर्मी बढ़ने के क्या होने लगती है दिक्कत?
डॉ. अल्बर्स के मुताबिक, हीटवेव के दौरान इमरजेंसी रूम विजिट, आक्रामक व्यवहार, हिंसा और यहां तक कि आत्महत्या के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है. साइंटिस्ट का मानना है कि जब शरीर लगातार गर्मी से लड़ रहा होता है, तब दिमाग के पास इमोशन को कंट्रोल करने की ऊर्जा कम बचती है. ऐसे में छोटी परेशानियां भी बड़ी लगने लगती हैं.&amp;nbsp;
किस चीज पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर?
गर्मी का सबसे बड़ा असर नींद पर पड़ता है. उमस भरी रातों में लोग ठीक से सो नहीं पाते. बार-बार नींद टूटना, देर से नींद आना और कम घंटों की नींद दिमाग को पूरी तरह आराम नहीं दे पाती. लगातार कई दिनों तक खराब नींद होने से इंसान ज्यादा चिड़चिड़ा, अधीर और तनावग्रस्त महसूस करने लगता है. यही वजह है कि गर्मियों में कई लोगों का मूड अचानक खराब रहने लगता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;डिहाइड्रेशन से होती है यह दिक्कत?
इसके अलावा डिहाइड्रेशन भी मेंटल स्थिति को प्रभावित करता है. &amp;nbsp;ज्यादा पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है. डॉ के अनुसार, दिमाग को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. जब शरीर में पानी कम होता है, तो सिरदर्द, थकान, ध्यान लगाने में दिक्कत, बेचैनी और लो मूड जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. कई बार लोगों को घबराहट और दिल की धड़कन तेज होने जैसी दिक्कतें भी महसूस होती हैं, जिससे एंग्जायटी और बढ़ जाती है.
इसे भी पढ़ें- Heatwave Health Risks: हीटवेव से ब्रेन और किडनी पर हो रहा असर, गर्मी के इन खतरनाक लक्षणों को कतई न करें इग्नोर
लाइफस्टाइल पर भी होता है असर
हीटवेव का असर लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ता है. तेज गर्मी में लोग बाहर निकलना कम कर देते हैं. एक्सरसाइज, घूमना-फिरना और दोस्तों से मिलना कम हो जाता है. लंबे समय तक घर में बंद रहने और फिजिकल एक्टिविटी घटने से मानसिक थकान और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है. यही कारण है कि कई लोग गर्मियों में ज्यादा उदास, तनावग्रस्त या गुस्सैल महसूस करने लगते हैं.
इससे बचने के लिए क्या कर सकते हैं आप?
डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के दौरान अपने मूड पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. ज्यादा गर्मी में भारी काम, बहस या तनाव वाले काम दिन के सबसे गर्म समय में करने से बचना चाहिए. सुबह या शाम के समय जरूरी काम करना बेहतर माना जाता है. इसके साथ ही पर्याप्त पानी पीना, हल्का भोजन करना और अच्छी नींद लेना मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने में मदद कर सकता है.
इसे भी पढ़ें-Heart Health: सुबह का सिरदर्द-थकान है साइलेंट किलर का अलर्ट, न करें इग्नोर वरना होंगे खतरनाक बीमारी के शिकार
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cold Water Side Effects: गर्मी में बार&amp;बार ठंडा पीने की आदत कर देगी बीमार, इन स्मार्ट तरीकों से अपने शरीर को बनाएं बेवकूफ</title>
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        <description><![CDATA[ Why Drinking Ice Cold Water In Summer Can Be Harmful: भीषण गर्मी में घर लौटते ही फ्रिज खोलकर बर्फ जैसा ठंडा पानी पीना लगभग हर किसी की आदत बन चुकी है. तेज धूप, पसीना और थकान के बाद एकदम ठंडा पानी शरीर को कुछ सेकंड के लिए राहत जरूर देता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यही आदत धीरे-धीरे शरीर को बीमार भी बना सकती है. खासकर जब लोग दिनभर बार-बार ठंडी ड्रिंक, बर्फ वाला पानी या चिल्ड कोल्ड ड्रिंक्स पीते रहते हैं.&amp;nbsp;
क्या होता है इससे दिक्कत?
दरअसल, गर्मियों में हमारा शरीर लगातार खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता रहता है. तेज तापमान के कारण शरीर ज्यादा पसीना निकालता है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और शरीर तेजी से पानी खोने लगता है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति बाहर की झुलसाने वाली गर्मी से आते ही तुरंत बर्फ जैसा ठंडा पानी पी लेता है, तो शरीर को अचानक तापमान के बड़े बदलाव का सामना करना पड़ता है. यही चीज कई बार शरीर के सिस्टम को कन्फ्यूज कर देती है.
अचानक ठंडा पानी पीने से क्या होता है दिक्कत?
डॉक्टरों का कहना है कि समस्या ठंडे पानी से नहीं, बल्कि उसे पीने के तरीके और टाइमिंग से होती है. जब शरीर अंदर से बहुत गर्म हो और उसी समय तेजी से बर्फ वाला पानी पिया जाए, तो इससे पेट में ऐंठन, सिरदर्द, गले में जलन और चक्कर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कुछ लोगों में यह ब्लड सर्कुलेशन और हार्ट रेट पर भी असर डाल सकता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि शरीर को गर्मी से आने के बाद कुछ मिनट खुद से नॉर्मल होने देना चाहिए. यानी सीधे फ्रिज की बोतल मुंह से लगाने के बजाय पहले चेहरे और हाथों को सामान्य पानी से धोना बेहतर होता है. इसके बाद धीरे-धीरे पानी पीना शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.&amp;nbsp;
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कैसे अपने आप को रख सकते हैं सुरक्षित?
इससे बचने का स्मार्ट तरीका यही है कि शरीर को अचानक शॉक न दिया जाए. अगर आप पूरे दिन थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें, तो शरीर को एकदम से ठंडे पानी की जरूरत महसूस ही नहीं होगी. यही वजह है कि डॉक्टर बार-बार हाइड्रेटेड रहने की सलाह देते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बहुत ज्यादा ठंडा पानी कुछ लोगों में डाइजेशन को भी धीमा कर सकता है. इससे पेट भारी लगना, ब्लोटिंग और गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. जिन लोगों को माइग्रेन, साइनस या संवेदनशील पेट की परेशानी रहती है, उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए.
कैसे रखें शरीर को ठंडा?
डॉक्टरों के अनुसार, गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सबसे अच्छे विकल्प हैं कि नॉर्मल पानी, हल्का ठंडा पानी, नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और ओरल रिहाइड्रेशन ड्रिंक्स. ये शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करते हैं, बिना शरीर को झटका दिए. इसके साथ ही लौटने के तुरंत बाद कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Air Pollution: प्रदूषण से कौन&amp;कौन सी बीमारियां होती हैं? कैंसर से लेकर हार्ट अटैक तक का खतरा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/air-pollution-प्रदूषण-से-कौन-कौन-सी-बीमारियां-होती-हैं-कैंसर-से-लेकर-हार्ट-अटैक-तक-का-खतरा</link>
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        <description><![CDATA[ Air Pollution: आज के समय में हवा में बढ़ता प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या बन गया है. &amp;nbsp;गाड़ियों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाली गैसें और धूल मिट्टी मिलकर हवा को खराब कर देती हैं. वहीं जब हम ऐसी हवा में सांस लेते हैं, तो यह धीरे-धीरे हमारे शरीर के अंदर पहुंचकर नुकसान करना शुरू कर देती है. शुरुआत में यह हल्की परेशानी लगती है, लेकिन लंबे समय तक इसका असर बहुत गंभीर हो साबीत ह सकता है. साथ ही प्रदूषित हवा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक होती है. &amp;nbsp;यही कारण है कि डॉक्टर बार-बार साफ हवा में रहने की सलाह देते हैं.&amp;nbsp;
प्रदूषण से होने वाली सांस और फेफड़ों की बीमारियां
वायु प्रदूषण के स्तर को मापने के लिए AQI (Air Quality Index) &amp;nbsp;का उपयोग किया जाता है. यदि वायु में यह इंडेक्स 0-50 के बीच होता है तो यह सामान्य माना जाता है लेकिन यदि यह इंडेक्स 200 से ऊपर की ओर जाता है तो इससे पता चलता है कि वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है. ऐसे में प्रदूषण का सबसे पहला असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है. इससे खांसी, सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी और दमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं. साथ ही लंबे समय तक खराब हवा में रहने से फेफड़ों की ताकत कम हो जाती है और व्यक्ति को हमेशा थकान महसूस हो सकती है. बच्चों में यह समस्या ज्यादा तेजी से बढ़ती है क्योंकि उनका शरीर अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता है. कई बार प्रदूषण के कारण फेफड़ों में गंभीर संक्रमण भी हो सकता है, जो आगे चलकर बड़ी बीमारी का रूप ले सकता है. इसलिए साफ हवा में सांस लेना बहुत जरूरी हो जाता है.&amp;nbsp;
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हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर का बढ़ता खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, हवा का प्रदूषण सिर्फ सांस की बीमारी ही नहीं बल्कि दिल की बीमारियों का भी बड़ा कारण बन सकता है. प्रदूषित हवा में मौजूद छोटे-छोटे कण शरीर में जाकर खून की नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सायत ही इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का भी खतरा हो सकता है. यह शरीर के अंदर धीरे-धीरे असर करता है, इसलिए लोग शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लेते है. लेकिन समय के साथ यह बहुत खतरनाक साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
प्रदूषण से बचाव कैसे करें और सावधानी क्यों जरूरी है
प्रदूषण से बचने के लिए हमें कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपनानी चाहिए. बाहर निकलते समय मास्क पहनना, सुबह या शाम के समय कम प्रदूषण वाली जगहों पर जाना और घर में पौधे लगाना मदद कर सकता है. बच्चों और बुजुर्गों को खास तौर पर धूल और धुएं से बचाना चाहिए. साथ ही घर में साफ हवा के लिए खिड़कियां खोलना और एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना भी फायदेमंद हो सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Air, Pollution:, प्रदूषण, से, कौन-कौन, सी, बीमारियां, होती, हैं, कैंसर, से, लेकर, हार्ट, अटैक, तक, का, खतरा</media:keywords>
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        <title>AC Side Effects: AC बन रहा जानलेवा! गर्मी सहन करने की शक्ति धीरे धीरे खो रहा इंसान, डरा देगा सच</title>
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        <description><![CDATA[ Can Excessive AC Use Reduce Heat Tolerance: देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव का कहर जारी है. बाहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंच रहा है, ऐसे में लोग राहत पाने के लिए घंटों एसी में रहना पसंद कर रहे हैं. ऑफिस हो, कार हो या घर, अब बिना एसी के रहना मुश्किल सा लगने लगा है. लेकिन डॉक्टरों और रिसर्चर्स का कहना है कि लगातार एसी में रहने की आदत धीरे-धीरे इंसान की गर्मी सहने की प्राकृतिक क्षमता को कमजोर कर सकती है.&amp;nbsp;
क्यों एसी हमारे शरीर के नुकसानदायक है?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट webmd के एक्सपर्ट के अनुसार, हमारा शरीर मौसम के हिसाब से खुद को ढालने की क्षमता रखता है. जब हम गर्म वातावरण में रहते हैं, तो शरीर पसीना निकालकर खुद को ठंडा रखना सीखता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति ज्यादातर समय एयर कंडीशनर में बिताने लगे, तो शरीर की यही नेचुरल कूलिंग सिस्टम कमजोर होने लगती है. साइंटिस्ट &amp;nbsp;इसे एडेप्टिव कम्फर्टेबल मॉडल कहते हैं. इसका मतलब है कि जिस तापमान में इंसान ज्यादा समय बिताता है, उसका शरीर उसी का आदी हो जाता है
यानी अगर आप हर समय एसी में रहेंगे, तो हल्की गर्मी भी आपको असहनीय लगने लगेगी. &amp;nbsp;यही वजह है कि आज कई लोग थोड़ी देर बिजली जाने पर भी बेचैन होने लगते हैं. शरीर धीरे-धीरे नेचुरल गर्मी झेलने की ताकत खोने लगता है.&amp;nbsp;
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ज्यादा एसी के यूज से क्या होता है नुकसान?
डॉक्टरों के अनुसार, एसी का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल शरीर को डिहाइड्रेट भी कर सकता है. एयर कंडीशनर कमरे की नमी कम करता है, जिससे त्वचा और शरीर दोनों सूखने लगते हैं. लंबे समय तक एसी में रहने वाले लोगों को ड्राई स्किन, आंखों में जलन और गले में सूखापन जैसी समस्याएं ज्यादा होती हैं. कई लोगों को आंखों में खुजली और धुंधला दिखने की शिकायत भी होने लगती है.
लोगों में होने लगती है ये दिक्कत
इतना ही नहीं, खराब तरीके से मेंटेन किए गए एसी और बंद कमरों की हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है. इसमें सिरदर्द, चक्कर, थकान, सूखी खांसी, सांस लेने में परेशानी और ध्यान लगाने में दिक्कत जैसी समस्याएं शामिल हैं।.रिसर्च में पाया गया है कि जिन लोगों के ऑफिस में प्राकृतिक वेंटिलेशन कम होता है और एसी ज्यादा चलता है, उनमें रेस्पिरेटरी समस्याएं अधिक देखी जाती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Gardening Tips In Summer: भीषण गर्मी में कुछ दिन के लिए जा रहे घर से दूर, वापस आने तक इस तरीके से हरा&amp;भरा रहेगा गार्डन</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Plants Green While Away From Home: गर्मी के मौसम में अगर कुछ दिनों के लिए घर से बाहर जाना पड़े तो सबसे बड़ी चिंता घर के पौधों और गार्डन की होती है. तेज धूप और गर्म हवाओं में कुछ ही दिनों की लापरवाही पौधों को सूखा सकती है. खासकर इन दिनों जब कई शहरों में तापमान लगातार बढ़ रहा है, तब बिना देखभाल के पौधों का हरा-भरा रहना मुश्किल हो जाता है. हालांकि कुछ आसान तरीकों को अपनाकर आप छुट्टियों से लौटने तक अपने गार्डन को ताजा और सुरक्षित रख सकते हैं.&amp;nbsp;
पौधों का कैसे रख सकते हैं ध्यान?
गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाहर जाने से पहले पौधों को अच्छी तरह पानी देना सबसे जरूरी कदम है. अगर मिट्टी में पर्याप्त नमी हो तो ज्यादातर पौधे करीब एक हफ्ते तक आसानी से सर्वाइव कर सकते हैं. ध्यान रखें कि पानी देने के बाद पौधों को ऐसी जगह रखें जहां सीधी धूप कम पहुंचे. लगातार धूप पड़ने से मिट्टी का पानी जल्दी सूख जाता है और पौधे मुरझाने लगते हैं. इंडोर और आउटडोर दोनों तरह के पौधों को कुछ दिनों के लिए छांव या ठंडी जगह पर रखना बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
पानी का रखें ध्यान
एक्सपर्ट बताते हैं कि पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी देना भी नुकसान पहुंचा सकता है. अधिक पानी की वजह से जड़ों में सड़न यानी रूट रॉट की समस्या हो सकती है. इसलिए मिट्टी में सिर्फ उतनी ही नमी रखें जितनी पौधों के लिए जरूरी हो. कुछ लोग बाहर जाने से पहले गमलों को कुछ देर पानी से भरे टब या सिंक में रखते हैं ताकि मिट्टी अच्छी तरह नमी सोख ले. लगभग आधे घंटे बाद अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए.
सेल्फ-वॉटरिंग ट्रिक
अगर आप कुछ ज्यादा दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं तो सेल्फ-वॉटरिंग ट्रिक काफी काम आ सकती है. इसके लिए सूती कपड़ा या प्राकृतिक फाइबर वाली रस्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है. रस्सी का एक सिरा पानी से भरे बर्तन में रखें और दूसरा सिरा मिट्टी में 2 से 3 इंच अंदर दबा दें. कपड़ा धीरे-धीरे पानी सोखकर मिट्टी तक पहुंचाता रहेगा, जिससे पौधों को लगातार नमी मिलती रहेगी.
&amp;nbsp;इसे&amp;nbsp;भी पढ़ें: Healthy Milk Choice: फुल क्रीम मिल्क और टोंड दूध में क्या अंतर होता है? खरीदने से पहले जान लें
पौधों की मिट्टी को ढंकना
एक और जरूरी तरीका है पौधों की मिट्टी को ढंकना. एक्सपर्ट्स के अनुसार, मिट्टी के ऊपर पीट, कम्पोस्ट या मल्च की पतली परत बिछाने से नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे मिट्टी जल्दी सूखती नहीं और पौधों को कम पानी में भी राहत मिलती है.&amp;nbsp;
इस बात का भी रखें ध्यान
इसके अलावा बाहर जाने से पहले पौधों की लाइटिंग भी एडजस्ट करना जरूरी है. अगर पौधों को थोड़ी कम रोशनी मिले तो उनकी ग्रोथ धीमी हो जाती है और पानी की जरूरत भी कम पड़ती है. हालांकि उन्हें पूरी तरह अंधेरी जगह पर नहीं रखना चाहिए. सही रोशनी और पर्याप्त नमी के साथ पौधे गर्मी में भी लंबे समय तक हरे-भरे बने रह सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ebola Virus Outbreak: इबोला का कहर जारी,  900 से ज्यादा केस, भारत में अलर्ट और एडवाइजरी जारी; पढ़ें बड़े अपडेट</title>
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        <description><![CDATA[ WHO Declares Ebola Outbreak Global Health Emergency: अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. हालात की गंभीरता को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है. इस बार इंफेक्शन दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की वजह से फैल रहा है, जो तेजी से इंफेक्शन फैलाने के लिए जाना जाता है. एक्सपर्ट की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि फिलहाल इस स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है.&amp;nbsp;
900 से ज्यादा संदिग्ध मामले
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 101 मामलों की पुष्टि हुई है. संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बताया कि इटुरी प्रांत, जो इस प्रकोप का केंद्र बना हुआ है, वहां करीब 50 लाख लोग संघर्ष और अस्थिर हालात के बीच रह रहे हैं.
119 संदिग्ध मौतें और 10 पुष्ट मौतें दर्ज
यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, कांगो में अब तक 904 संदिग्ध मामले, 101 पुष्ट मामले, 119 संदिग्ध मौतें और 10 पुष्ट मौतें दर्ज की गई हैं. वहीं 24 मई तक युगांडा में 5 पुष्ट मामलों और 1 मौत की पुष्टि हुई है. 23 मई को तीन नए लैब-प्रमाणित मामलों की जानकारी सामने आने के बाद वहां संक्रमितों की संख्या और बढ़ गई.
तेजी से फैल रहा है वायरस
22 मई को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन &amp;nbsp;ने राष्ट्रीय स्तर पर जोखिम की श्रेणी को हाई रिस्क कर दिया, हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर इसे हाई रिस्क और वैश्विक स्तर पर कम खतरा माना गया है. शुरुआत में &amp;nbsp;इंफेक्शन कांगो के इटुरी और नॉर्थ-किवु प्रांतों तक सीमित था, लेकिन अब यह साउथ-किवु प्रांत तक फैल चुका है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वायरस अब समुदायों के भीतर फैल रहा है और स्थानीय स्तर पर नियंत्रण के प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हो रहे. युगांडा में 24 मई तक 5 पुष्ट मामले और 1 मौत की पुष्टि हुई है. 23 मई को तीन नए लैब-प्रमाणित मामलों की जानकारी सामने आई थी.
भारत में बरती जा रही है एहतियात
इधर भारत सरकार ने भी एहतियात बढ़ा दी गई है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने या वहां से ट्रांजिट करने वाले यात्रियों के लिए हेल्थ एडवाइजरी जारी की है. सरकार ने कहा है कि जिन यात्रियों में बुखार, उल्टी, सिरदर्द, असामान्य ब्लीडिंग या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने जैसे लक्षण हों, वे इमिग्रेशन क्लियरेंस से पहले तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर्स को जानकारी दें.
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भारत में अभी तक इबोला के मामले नहीं
फिलहाल भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग, लैब तैयारियों और क्वारंटीन व्यवस्था को मजबूत किया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी है.&amp;nbsp;
आंध्र प्रदेश में स्थिति से निपटने के लिए तैयारी
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं. स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने कहा कि सरकार हाई अलर्ट पर है और मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. इससे पहले तमिलनाडु सरकार ने भी केंद्र की एडवाइजरी के बाद एयरपोर्ट्स, बंदरगाहों और सरकारी अस्पतालों में निगरानी और सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए थे.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Food Preservation: जब नहीं था फ्रिज तो गर्मी में खाना ताजा कैसे रखते थे बुजुर्ग, जान लें देसी तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/food-preservation-जब-नहीं-था-फ्रिज-तो-गर्मी-में-खाना-ताजा-कैसे-रखते-थे-बुजुर्ग-जान-लें-देसी-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ Food Preservation Without Fridge : आज के समय में अगर घर में फ्रिज खराब हो जाए तो सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि दूध, सब्जियां और बचा हुआ खाना कैसे बचेगा. हर रसोई में फ्रिज अब जरूरत बन चुका है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे दादा-दादी और नाना-नानी के जमाने में जब बिजली भी हर घर में नहीं थी और फ्रिज जैसी चीजें मौजूद नहीं थी, तब लोग गर्मियों में खाना ताजा कैसे रखते थे. दरअसल पुराने समय के लोग प्रकृति और मौसम को समझकर ऐसे देसी तरीके अपनाते थे. जिनसे बिना बिजली के भी खाना लंबे समय तक सुरक्षित रहता था. आज भी भारत और दुनिया के कई गांवों और पहाड़ी इलाकों में ये पारंपरिक तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं. खास बात यह है कि ये तरीके सस्ते, आसान और पर्यावरण के लिए भी अच्छे माने जाते हैं. तो आइए जानते हैं कि जब फ्रिज नहीं था तो बुजुर्ग गर्मी में खाना ताजा कैसे रखते थे.&amp;nbsp;
1. मिट्टी का घड़ा - &amp;nbsp;पुराने समय में मिट्टी के घड़े और मटके का इस्तेमाल सिर्फ पानी ठंडा रखने के लिए नहीं, बल्कि खाने को सुरक्षित रखने के लिए भी किया जाता था. मिट्टी में प्राकृतिक ठंडक होती है. जब घड़े की बाहरी सतह से पानी धीरे-धीरे सूखता है तो अंदर का तापमान कम हो जाता है, गांवों में लोग दूध, दही, छाछ और पका हुआ चावल तक मिट्टी के बर्तनों में रखते थे. कई जगह इन बर्तनों को गीले कपड़े से ढक दिया जाता था जिससे अंदर ज्यादा देर तक ठंडक बनी रहे.
2. जीर पॉट - अफ्रीका और मध्य पूर्व के इलाकों में एक खास तकनीक काफी मशहूर रही है, जिसे जीर पॉट कहा जाता है. इसे प्राकृतिक फ्रिज भी माना जाता है. इसमें एक बड़े मिट्टी के बर्तन के अंदर छोटा बर्तन रखा जाता है और दोनों के बीच गीली रेत भर दी जाती है. ऊपर से गीला कपड़ा ढक दिया जाता है. जब पानी सूखता है तो अंदर ठंडक पैदा होती है. इससे फल, सब्जियां और दूध एक-दो दिन तक ताजा रह सकते हैं. भारत के कई सूखे और गर्म इलाकों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए जाते रहे हैं.
3. बहते पानी का यूज - पहाड़ी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लोग प्राकृतिक झरनों और बहते पानी का इस्तेमाल करते थे. खाने के बर्तन या टोकरी को बहते पानी के पास या ऊपर लटका दिया जाता था. पानी की ठंडक खाने को जल्दी खराब होने से बचाती थी. साथ ही लगातार हवा मिलने से नमी कम रहती थी और बैक्टीरिया भी कम पनपते थे.आज भी कई दूरदराज के पहाड़ी गांवों में यह तरीका देखने को मिल जाता है.
4. नमक और धूप - फ्रिज आने से पहले सबसे ज्यादा यूज नमक और धूप का होता था. लोग मछली, मांस और सब्जियों को नमक लगाकर धूप में सुखा देते थे.धूप से खाने की नमी निकल जाती थी और नमक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता था. इससे खाना लंबे समय तक खराब नहीं होता था. भारत के कई राज्यों में आज भी आम का अचार, सूखी मछली, पापड़ और बड़ी इसी तकनीक से बनाए जाते हैं. कच्चे आम के टुकड़ों को नमक लगाकर सुखाया जाए तो कई महीनों तक चल जाते हैं.
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5. जमीन के अंदर भंडारण - कश्मीर, नेपाल और ठंडे इलाकों में लोग जमीन के अंदर गड्ढे बनाकर सब्जियां और अनाज रखते थे. जमीन के नीचे तापमान सामान्य रहता है, इसलिए आलू, प्याज, गाजर जैसी चीजें लंबे समय तक सुरक्षित रहती थीं.कुछ गांवों में आज भी लोग घर के आंगन में छोटे भंडारण गड्ढे बनाते हैं.
6. राख और भूसी - महाराष्ट्र, ओडिशा और कई ग्रामीण इलाकों में लोग अदरक, हल्दी, लहसुन और शकरकंद जैसी चीजों को सूखी राख या भूसी में दबाकर रखते थे.राख नमी सोख लेती थी और कीड़ों को दूर रखती थी. इससे सब्जियां जल्दी खराब नहीं होती थीं और लंबे समय तक ताजा बनी रहती थीं.
7. फर्मेंटेशन - पहाड़ी इलाकों में लोग सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फर्मेंटेशन का सहारा लेते थे. इसमें सब्जियों को नमक और मसालों के साथ बंद करके रखा जाता था. कुछ दिनों बाद उनमें प्राकृतिक फर्मेंटेशन शुरू हो जाता था. इससे भोजन लंबे समय तक सुरक्षित रहता था और उसका भी टेस्ट बढ़ जाता था.हिमालयी क्षेत्रों में बनने वाले कई पारंपरिक खाद्य पदार्थ आज भी इसी तकनीक से तैयार किए जाते हैं.
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Food, Preservation:, जब, नहीं, था, फ्रिज, तो, गर्मी, में, खाना, ताजा, कैसे, रखते, थे, बुजुर्ग, जान, लें, देसी, तरीका</media:keywords>
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        <title>Edible Oil Adulteration: एडिबल ऑयल में हो रही मिलावट से शरीर हो रहा खोखला, जानिए कैसे मौत के नजदीक जा रहे आप</title>
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        <description><![CDATA[ Edible Oil Adulteration: देश भर में खाने में मिलावट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अब खाने के तेल को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाले सरसों, रिफाइंड तेल और दूसरे खाद्य तेल कई जगह पर मिलावटी पाए जा रहे हैं, जो धीरे-धीरे लोगों के शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कुछ कारोबारी तेल में ऐसे रसायन और सस्ते तेल तत्व मिला देते हैं, जो लीवर, किडनी, दिल और इम्यूनिटी सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एडिबल ऑयल में मिलावट से शरीर कैसे खोखला हो रहा है और इससे आप मौत के नजदीक कैसे जा रहे हैं.&amp;nbsp;
शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाता है मिलावटी तेल&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार नकली सरसों तेल बनाने में बटर येलो डाई जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है. यह एक कार्सिनोजेनिक तत्व माना जाता है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है. इसके अलावा आर्जीमोन नामक जहरीले बीज का तेल भी सरसों तेल में मिलाया जाता है. यह बीज खरीदने में सरसों जैसा होता है जो पेराई के दौरान आसानी से मिल जाता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आर्जीमोन मिला तेल शरीर के कई अंगों पर बुरा असर डालता है. इससे ड्रॉप्सी जैसी बीमारी हो सकती है, जिसमें शरीर में सूजन, सांस लेने में परेशानी और दिल से जुड़ी दिक्कतें बढ़ जाती है. भारत में पहले भी सरसों तेल में मिलावट के कारण कई लोगों की मौत और गंभीर बीमारी के मामले सामने आ चुके हैं.&amp;nbsp;
नकली तेल में क्या-क्या मिलाया जाता है?&amp;nbsp;
जानकारी के अनुसार नकली तेल तैयार करने के लिए पाम ऑयल, राइस ब्राउन तेल, सिंथेटिक रंग, अल्कोहल और एसेंस का इस्तेमाल किया जाता है. तेल को सरसों जैसा रंग देने के लिए केमिकल मिलाए जाते हैं, जबकि उसकी गंध बदलने के लिए अलग से एसेंस डाला जाता है. कई बार सस्ते तेलों को मिलाकर उन्हें शुद्ध सरसों तेल के नाम पर बाजार में बेच दिया जाता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार लगातार मिलावटी तेल खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है. कुछ तेलों को बार-बार गर्म करने से उनमें जहरीले तत्व बनने लगते हैं जो शरीर में सूजन और कैंसर जैसी बीमारियों की वजह बन सकते हैं.&amp;nbsp;
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किन तेलों को लेकर बढ़ रही चिंता?&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ तेलों का अत्यधिक इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. पाम तेल में सैचुरेटेड फैट ज्यादा मात्रा में होता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का काम करता है. वहीं कनोला और सनफ्लावर ऑयल को बहुत ज्यादा तापमान पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे उनमें हानिकारक तत्व पैदा हो सकते हैं. हालांकि डॉक्टर कहते हैं कि हर तेल नुकसानदायक नहीं होता, सीमित मात्रा में शुद्ध घी, सरसों तेल और एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. इनमें मौजूद ओमेगा 3, विटामिन ए और दूसरे पोषक तत्व दिल और पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद करते हैं.&amp;nbsp;
घर बैठे ऐसे पहचाने तेल असली है या नकली&amp;nbsp;
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटी तेल पहचान के कुछ आसान घरेलू तरीके बताएं. अगर सरसों तेल को कुछ देर फ्रिज में रखने पर नीचे सफेद परत जमने लगे तो उसमें पाम तेल की मिलावट हो सकती है. शुद्ध सरसों तेल सामान्य तौर पर ठंड में भी तरल बना रहता है. तेल की कुछ बूंदे हाथ पर रगड़ने पर अगर रंग निकलने लगे तो समझ जाना चाहिए तो उसमें सिंथेटिक रंग मिलाया गया है. वहीं असली सरसों तेल की गंध तेज होती है और गर्म करने पर आंखों में हल्की जलन महसूस होती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Edible, Oil, Adulteration:, एडिबल, ऑयल, में, हो, रही, मिलावट, से, शरीर, हो, रहा, खोखला, जानिए, कैसे, मौत, के, नजदीक, जा, रहे, आप</media:keywords>
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        <title>Social Media Health Advice: क्या आप भी इन्फ्लुएंसर्स की सलाह पर खाते हैं दवाएं, जानें सेहत पर कितने भारी ऐसे हेल्थ टिप्स?</title>
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        <description><![CDATA[ Can You Trust Health Influencers On Social Media: आजकल सोशल मीडिया सिर्फ एंटरटेनमेंट का प्लेटफॉर्म नहीं रहा, बल्कि लोग यहां स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह भी बड़ी संख्या में लेने लगे हैं. वजन कम करने से लेकर बेहतर नींद, ब्लड शुगर कंट्रोल, मेंटल हेल्थ और लंबी उम्र तक, हर समस्या का समाधान बताने वाले हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी हर सलाह पर भरोसा करना सुरक्षित है? डॉक्टर्स और रिसर्चर्स का मानना है कि बिना जांचे-परखे ऑनलाइन हेल्थ टिप्स को फॉलो करना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया के भरोसे
प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 50 साल से कम उम्र के करीब आधे लोग हेल्थ और वेलनेस से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स या पॉडकास्टर्स से लेते हैं. इस रिसर्च में लगभग 13 हजार ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स का एनालिसिस किया गया जिनके 1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. हैरानी की बात यह रही कि इनमें से पांच में से केवल एक व्यक्ति ही डॉक्टर, नर्स या मेडिकल प्रोफेशनल था. बाकी लोग खुद को लाइफ कोच, डाइट कोच, एंटरप्रेन्योर या पैरेंट के तौर पर पेश कर रहे थे.&amp;nbsp;
क्यों लोग बड़ी संख्या में इसको फॉलो कर रहे हैं?
यूएस के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में डिजिटल वेलनेस कम्युनिटी पर रिसर्च करने वाली मारिया वेलमैन कहती हैं कि लोग अब सिर्फ फैशन या लाइफस्टाइल ही नहीं, बल्कि अपने शरीर और स्वास्थ्य से जुड़े फैसले भी सोशल मीडिया से प्रभावित होकर लेने लगे हैं. वहीं वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की हेल्थ मिसइन्फॉर्मेशन रिसर्चर &amp;nbsp;रेचल मोरान &amp;nbsp;के मुताबिक, कई लोग पारंपरिक मेडिकल सिस्टम पर भरोसा कम कर रहे हैं और इसी वजह से वे ऐसे इन्फ्लुएंसर्स की तरफ आकर्षित होते हैं जो खुद को सामान्य लोगों जैसा दिखाते हैं.
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क्यों सोशल मीडिया की जानकारी काम नहीं आती?
एक्सपर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर गलत हेल्थ जानकारी तेजी से फैलती है क्योंकि लोग निजी अनुभवों से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं. अगर कोई इन्फ्लुएंसर अपनी वेट लॉस जर्नी, कैंसर से लड़ाई या किसी बीमारी के अनुभव को साझा करता है, तो लोग उसे आसानी से सच मान लेते हैं. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि किसी एक व्यक्ति का अनुभव हर किसी पर लागू नहीं हो सकता.
नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी ऑफ मिसइनफॉर्मेशन लैब की डायरेक्टर ब्रायोनी स्वायर-थॉम्पसन बताती हैं कि कई लोग मुनाफे के लिए गलत स्वास्थ्य जानकारी फैलाते हैं और फिर उससे जुड़े प्रोडक्ट्स या कोर्स बेचते हैं. कुछ फर्जी दावों में कैंसर का घरेलू इलाज, बिना साइंटफिक प्रमाण वाले सप्लीमेंट्स और चमत्कारी इलाज शामिल होते हैं.
आपको क्या करना चाहिए?
डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर हेल्थ टिप पर भरोसा करने से पहले उसकी जांच जरूर करें. देखें कि सलाह देने वाले व्यक्ति के पास मेडिकल डिग्री है या नहीं, क्या उसकी बात साइंटफिक रिसर्च पर आधारित है और क्या वह किसी प्रोडक्ट को बेचकर फायदा कमा रहा है. एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि सही जानकारी के लिए भरोसेमंद सोर्स को प्राथमिकता देनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 27 May 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Social, Media, Health, Advice:, क्या, आप, भी, इन्फ्लुएंसर्स, की, सलाह, पर, खाते, हैं, दवाएं, जानें, सेहत, पर, कितने, भारी, ऐसे, हेल्थ, टिप्स</media:keywords>
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        <title>Summer Cooler Mango Mastani: गर्मियों का हेल्दी ड्रिंक, घर में ऐसे बनाएं पुणे स्टाइल मैंगो मस्तानी</title>
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        <description><![CDATA[ गर्मियों का मौसम शुरु हो चुका है और अब आगे आने वाले समय में भीषण गर्मी के आसार हैं. ऐसे में कुछ ठंडा और मीठा पीने का मन हर किसी का करता है.वहीं,अगर आप वजन कम करना चाहते हैं और स्वाद से भी बिल्कुल समझौता नहीं करना चाहते, तो पुणे की मशहूर मैंगो मस्तानी का यह हेल्दी वर्जन आपके लिए सबसे अच्छा ऑप्शन हो सकता है. जैसा कि आप जानते हैं पारंपरिक मैंगो मस्तानी में भारी मात्रा में आइसक्रीम और चीनी का उपयोग होता है, लेकिन यह रेसिपी बिना एक्स्ट्रा कैलोरी के आपको वही लाजवाब स्वाद देगी. आइए जानते हैं पुणे की प्रसिद्ध मैंगो मस्तानी के हेल्दी वर्ज़न को बनाने का झटपट और आसान तरीका.&amp;nbsp;
मैंगो मस्तानी का मस्ताना इतिहास
पुणे की प्रसिद्ध मैंगो मस्तानी को बनाने की विधि जानने से पहले आइए जान लेते हैं क्या है इसका इतिहास? अगर बात करें इसके इतिहास के बारे में तो मैंगो मस्तानी की शुरुआत 20 वीं सदी में महाराष्ट्र के पुणे शहर से हुई थी.इसके नाम को लेकर दो कहानियां प्रचलित हैं पहली कहानी के अनुसार, इसका नाम पेशवा बाजीराव प्रथम की खूबसूरत पत्नी रानी मस्तानी के नाम पर रखा गया था, इसका कारण यह दिया जाता है कि यह ड्रिंक दिखने में बेहद खूबसूरत और शाही लगती है. वहीं दूसरी कहानी मानती है कि इसे पीकर लोग खुशी से मस्त बोल उठते थे, इसलिए इसका नाम मस्तानी पड़ गया.&amp;nbsp;आइए अब जान लेते हैं इसको बनाने की संपूर्ण विधि.
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रेसिपी की खास बातें

तैयारी का समय- 10 मिनट
पकने में &amp;nbsp;समय- 0 मिनट (बिना गैस जलाए)
सर्विंग- 2 गिलास
कैलोरी- केवल 180 कैलोरी (प्रति गिलास)
स्वाद- मलाईदार, मीठा और ताजगी देने वाला&amp;nbsp;

आवश्यक सामग्री

पका हुआ आम (कटा हुआ)- 2
ठंडा लो-फैट दूध- 1 कप
गाढ़ा दही- 1/2 कप
शहद- &amp;nbsp;1 छोटा चम्मच
कटे हुए बादाम और पिस्ता- 2 बड़े चम्मच
आम के छोटे टुकड़े (गार्निश के लिए)- 2 बड़े चम्मच

बनाने की झटपट विधि&amp;nbsp;
मैंगो मस्तानी बनाने के लिए सबसे पहले एक ब्लेंडर में कटे हुए आम,ठंडा दूध,दही और शहद डालकर स्मूथ होने तक पीस लें. इसको बाद दो सर्विंग गिलास लें और उसमें नीचे थोड़े बर्फ के टुकड़े डालें. फिर तैयार गाढ़े मैंगो शेक को गिलास में डालें. इसके बाद इसमें ऊपर से आम के टुकड़े,कटे हुए बादाम और पिस्ता डालकर सजाएं. आपका मैंगो मस्तानी अब पूरी तरह तैयार है. यहां इस बात का विशेष ध्यान दें कि इसे तुरंत ठंडा-ठंडा परोसें. साथ अगर आप इस ड्रिंक को और भी अधिक पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो इसमें चिया सीड्स या ओट्स का पाउडर मिला सकते हैं. वहीं, इस भीषण गर्मी में इस सेहतमंद ड्रिंक का बिना वजन बढ़ने के डर के सेवन करके आप ताजगी का एहसास कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Summer, Cooler, Mango, Mastani:, गर्मियों, का, हेल्दी, ड्रिंक, घर, में, ऐसे, बनाएं, पुणे, स्टाइल, मैंगो, मस्तानी</media:keywords>
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        <title>Ebola Virus: अफ्रीका में तेजी से फैल रहा इबोला वायरस, जानिए क्या हैं इससे बचाव के उपाय?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Ebola Virus Is Spreading Rapidly In Africa: अफ्रीका के कई हिस्सों में इबोला वायरस एक बार फिर तेजी से फैल रहा है और इसे लेकर दुनियाभर की स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है. खासतौर पर कांगो और युगांडा में सामने आए मामलों ने हेल्थ एक्सपर्ट्स को अलर्ट कर दिया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और इम्पीरियल कॉलेज लंदन के रिसर्चर्स की एक नई एनालिसिस में दावा किया गया है कि कांगो में इबोला इंफेक्शन के वास्तविक मामले आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकते हैं.&amp;nbsp;
रिपोर्ट के मुताबिक, मई के मध्य तक इबोला के 400 से 800 मामले सामने आ चुके हो सकते हैं, जबकि कुछ एक्सपर्ट्स ने यह संख्या 1000 से ज्यादा होने की आशंका भी जताई है। सबसे ज्यादा मामले कांगो के इटुरी प्रांत में मिले हैं, जहां अप्रैल के आखिर से लगातार संक्रमण फैल रहा है.&amp;nbsp;
कैसे फैलता है इसका खतरा?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, इबोला एक बेहद खतरनाक वायरल बीमारी है, जो इंफेक्टेड व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार या दूसरे बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क में आने से फैलती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह वायरस हवा या पानी से नहीं फैलता, लेकिन इंफेक्टेड व्यक्ति के बहुत करीब आने पर खतरा बढ़ जाता है. खासकर डॉक्टर, नर्स और मरीज की देखभाल करने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं.
क्या होते हैं इसके शुरुआती लक्षण?
इबोला के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए शुरुआत में इसकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है. इंफेक्टेड व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी और गले में दर्द महसूस हो सकता है. बीमारी बढ़ने पर उल्टी, दस्त, स्किन रैश और कई मामलों में अंदरूनी या बाहरी ब्लीडिंग भी शुरू हो सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंफेक्शन के बाद लक्षण दिखने में 2 से 21 दिन तक लग सकते हैं. हालांकि, औसतन 8 से 10 दिन के भीतर मरीज में बीमारी के संकेत दिखने लगते हैं. राहत की बात यह है कि लक्षण शुरू होने से पहले इंफेक्टेड व्यक्ति वायरस नहीं फैलाता.
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कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?
अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के मुताबिक, इबोला से बचाव के लिए सावधानी सबसे जरूरी हथियार है. इंफेक्टेड मरीज के संपर्क में आने से बचें, हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और किसी भी बीमार व्यक्ति के खून या बॉडी फ्लूइड्स को छूने से बचें. अगर कोई व्यक्ति हाल ही में इबोला प्रभावित इलाके से लौटा हो और उसे तेज बुखार या कमजोरी महसूस हो रही हो, तो तुरंत मेडिकल जांच करवानी चाहिए. हेल्थ एजेंसियां यह भी मानती हैं कि वैक्सीनेशन और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग इबोला को रोकने में सबसे प्रभावी हथियार साबित हो रहे हैं. &amp;nbsp;वहीं, हेल्थ वर्कर्स के लिए पीपीई किट, मास्क, ग्लव्स और सख्त संक्रमण नियंत्रण उपायों को बेहद जरूरी बताया गया है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Moringa Paratha: नाश्ते में खाएं मोरिंगा के पत्तों का परांठा, भर&amp;भरकर मिलते हैं इतने सारे विटामिन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/moringa-paratha-नाश्ते-में-खाएं-मोरिंगा-के-पत्तों-का-परांठा-भर-भरकर-मिलते-हैं-इतने-सारे-विटामिन</link>
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        <description><![CDATA[ Benefits Of Eating Moringa Paratha For Breakfast: मोरिंगा की पत्तियां, जिन्हें कई जगहों पर सहजन के पत्ते भी कहा जाता है, आजकल सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर इन्हें रोजाना के खानपान में शामिल किया जाए तो शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व एक साथ मिल सकते हैं. खासकर सुबह के नाश्ते में मोरिंगा के पत्तों का परांठा खाना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं.
कौन से विटामिन इससे मिलता है?
एक्सपर्ट के अनुसार, मोरिंगा की पत्तियां विटामिन ए, सी और बी6 का अच्छा सोर्स हैं. इसके अलावा इनमें कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स भी मौजूद होते हैं. यही वजह है कि इसे नेचुरल पोषण का पावरहाउस कहा जाता है. हेल्थ रिसर्च में भी यह सामने आया है कि मोरिंगा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद कर सकते हैं.
क्या इससे इम्यून सिस्टम को फायदा होता है?
डॉक्टर्स का कहना है कि मोरिंगा की पत्तियां इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करती हैं. इनमें मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक माना जाता है, जिससे इंफेक्शन से लड़ने की ताकत बेहतर हो सकती है. इसके अलावा ये शरीर में सूजन कम करने में भी मददगार हो सकती हैं. यही कारण है कि जोड़ों के दर्द या सूजन से परेशान लोगों के लिए भी इसे फायदेमंद माना जाता है.
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आपके हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद
मोरिंगा का असर दिल की सेहत पर भी पॉजिटिव माना जाता है. कई स्टडी में यह बात सामने आई है कि यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. वहीं इसमें मौजूद फाइबर डाइजेशन सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करता है. जिन लोगों को कब्ज, गैस या पेट फूलने जैसी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए मोरिंगा फायदेमंद माना जाता है.
कैसे बना सकते हैं आप इसे?
अगर आप इसे स्वादिष्ट तरीके से अपनी डाइट में शामिल करना चाहते हैं, तो मोरिंगा परांठा एक आसान और हेल्दी विकल्प हो सकता है. इसे बनाने के लिए गेहूं के आटे में बारीक कटी मोरिंगा की पत्तियां, हरी मिर्च, अजवाइन, हल्दी और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है. इसके बाद फिर इसमें थोड़ा तेल डालकर नरम आटा गूंथ लिया जाता है. इसके बाद छोटी लोइयां बनाकर परांठा बेलें और तवे पर हल्का घी या तेल लगाकर सुनहरा होने तक सेंक लें. यह परांठा दही, अचार या चाय के साथ खाया जा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सुबह के नाश्ते में मोरिंगा परांठा खाने से शरीर को लंबे समय तक एनर्जी मिलती है और दिनभर एक्टिव महसूस करने में मदद मिल सकती है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Drinking Cold Water In Summer: गर्मी में बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना सेहत के लिए सही है या नहीं? यहां जानें डॉक्टर्स की सलाह</title>
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        <description><![CDATA[ Is Drinking Ice Cold Water In Summer Harmful: गर्मी में बाहर से घर लौटते ही फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी पीना ज्यादातर लोगों की आदत होती है. तेज धूप और पसीने के बाद ठंडा पानी तुरंत राहत जरूर देता है, लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि बहुत ज्यादा ठंडा पानी शरीर के लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होता. खासकर जब शरीर तेज गर्मी से पहले ही गर्म हो चुका हो, तब अचानक बर्फ जैसा पानी पीना कई लोगों में असहजता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है.
क्यों अचानक ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, जब हम धूप से आते हैं तो शरीर खुद को ठंडा करने की प्रक्रिया में लगा होता है. इस दौरान ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है और शरीर का तापमान सामान्य करने की कोशिश चल रही होती है. ऐसे समय में अचानक बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर को टेम्परेचर शॉक लग सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे ब्लड वेसल्स अचानक सिकुड़ सकते हैं, जिससे सिरदर्द, चक्कर या असहज महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
क्या हो सकती है दिक्कत?
डॉक्टर्स बताते हैं कि ठंडा पानी मुंह और गले को तुरंत ठंडक पहुंचाता है, इसलिए लोग इसे राहत मानते हैं. लेकिन अंदरूनी तौर पर शरीर को धीरे-धीरे ठंडा होने की जरूरत होती है. बहुत ज्यादा ठंडा पानी डाइजेशन सिस्टम की गति को कुछ समय के लिए धीमा कर सकता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स और पारंपरिक चिकित्सा एक्सपर्ट का कहना है कि इससे डाइजेस्टिव एंजाइम्स की गतिविधि कम हो सकती है और पेट को भोजन पचाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है. कुछ लोगों में पेट फूलना, अपच और पेट दर्द जैसी शिकायतें भी देखी जाती हैं.
पसीना आने के तुरंत बाद चिल्ड पानी पीने से क्या होती है दिक्कत?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पसीना आने के तुरंत बाद बर्फ जैसा पानी पीने से गले में जलन हो सकती है. इससे गले में खराश, बलगम बढ़ना, खांसी और गले में तकलीफ जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. जिन लोगों को ठंडी चीजों से जल्दी परेशानी होती है, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है.
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आपको क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट के अनुसार, कुछ लोगों में बहुत ठंडा पानी ब्रेन फ्रीज यानी अचानक सिरदर्द भी ट्रिगर कर सकता है. ऐसा तब होता है जब ठंडा पानी मुंह और गले की संवेदनशील नसों पर अचानक असर डालता है. वहीं जिन लोगों को पहले से हार्ट की समस्या है, उनके लिए भी बर्फ जैसा ठंडा पानी सही नहीं माना जाता. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अचानक तापमान बदलने से वेगस नर्व प्रभावित हो सकती है, जिससे कुछ समय के लिए हार्ट रेट या ब्लड प्रेशर पर असर पड़ सकता है. डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि धूप से आने के बाद तुरंत बहुत ठंडा पानी पीने के बजाय कुछ मिनट आराम करें और फिर सामान्य तापमान या हल्का ठंडा पानी धीरे-धीरे पिएं. मिट्टी के घड़े का पानी, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ओआरएस जैसे विकल्प शरीर को बेहतर तरीके से हाइड्रेट करने में मदद करते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Drinking, Cold, Water, Summer:, गर्मी, में, बहुत, ज्यादा, ठंडा, पानी, पीना, सेहत, के, लिए, सही, है, या, नहीं, यहां, जानें, डॉक्टर्स, की, सलाह</media:keywords>
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        <title>Sweet Muskmelon Buying Tips: खरबूजा मीठा है या नहीं... खरीदने से पहले ऐसे करें चेक, जान लें तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Sweet Muskmelon Buying Tips: खरबूजा मीठा है या नहीं... खरीदने से पहले ऐसे करें चेक, जान लें तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Family Relationships: पार्टनर से ज्यादा अटैच है बच्चा तो न लें टेंशन, एक्सपर्ट के ये पैरेंटिंग टिप्स आएंगे आपके काम</title>
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        <description><![CDATA[ Why Children Prefer One Parent Over Another: कई माता-पिता शायद खुलकर यह स्वीकार नहीं करते, लेकिन अपने ही बच्चे को पार्टनर के ज्यादा करीब देखकर जलन महसूस होना बेहद सामान्य बात है. यह भावना अक्सर अचानक आती है और भीतर तक चुभ सकती है. जब बच्चा हर छोटी मदद के लिए एक ही पैरेंट को पुकारे, उनके साथ ज्यादा खुश दिखे या हर बार उन्हीं की गोद में जाना चाहे, तो दूसरे पैरेंट के मन में अनदेखा किए जाने का एहसास पैदा हो सकता है.&amp;nbsp;
क्यों होता है ऐसा रिएक्शन?
असल में यह भावना सिर्फ बच्चे की पसंद तक सीमित नहीं होती. कई बार इसके पीछे थकान, इमोशनल असुरक्षा, तुलना या खुद को कम महत्वपूर्ण महसूस करने का डर छिपा होता है. पँरेंटिंग को हमेशा निस्वार्थ और संतुलित रूप में दिखाया जाता है, इसलिए ऐसे भाव आने पर लोग खुद को दोष देने लगते हैं. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि यह किसी बुरे माता-पिता की निशानी नहीं, बल्कि एक इमोशनल प्रतिक्रिया है.
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क्यों एक पैरेंट को चुनते हैं?
बच्चे अक्सर किसी एक पैरेंट को इसलिए ज्यादा चुनते हैं क्योंकि उस समय वह उन्हें ज्यादा खेलते हुए, शांत, उपलब्ध या मजेदार लग रहा होता है. कई बार जिस पैरेंट के साथ बच्चा कम समय बिताता है, उसकी ओर अट्रैक्शन ज्यादा हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि दूसरा पैरेंट कम प्यार करता है या बच्चा उससे दूर हो रहा है. बच्चों की भावनाएं लगातार बदलती रहती हैं और उनका लगाव भी समय के साथ अलग-अलग रूप लेता है. &amp;nbsp;यह स्थिति खासतौर पर तब ज्यादा तकलीफ देती है जब एक पैरेंट घर की जिम्मेदारियों, स्कूल, खाने और अनुशासन जैसी अदृश्य मेहनत में लगा रहता है, जबकि दूसरे को बच्चे की मुस्कान और प्यार ज्यादा मिलता दिखाई देता है. ऐसे में जलन केवल रिश्ते से नहीं, बल्कि मेहनत और भावनात्मक थकान से भी जुड़ जाती है.
भावनाओं को समझना क्यों जरूरी?
एक्सपर्ट का मानना है कि इस भावना को दबाने के बजाय समझना जरूरी है. खुद से यह सवाल पूछना मददगार हो सकता है कि आखिर सबसे ज्यादा चोट किस बात से लग रही है कि बच्चे से दूरी, पार्टनर से तुलना या खुद को कम पसंद किया जाना? जब भावना स्पष्ट होने लगती है, तो उसे संभालना आसान हो जाता है. ऐसे समय में बच्चे का प्यार जीतने की प्रतियोगिता शुरू करना उल्टा असर डाल सकता है. जरूरत इस बात की होती है कि रिश्ता धीरे-धीरे और स्वाभाविक तरीके से मजबूत किया जाए. बच्चे के साथ छोटी-छोटी निजी आदतें बनाना, जैसे रात की कहानी, साथ टहलना या कोई छोटा खेल, रिश्ते में अपनापन बढ़ा सकता है. बच्चे परफेक्शन नहीं, भरोसेमंद मौजूदगी याद रखते हैं. अगर यह भावना बहुत गहरी हो जाए और बार-बार खुद की कीमत पर सवाल उठने लगें, तो एक्सपर्ट मेंटल हेल्थ सहायता लेने की सलाह भी देते हैं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kesar Mixed Makhana Kheer: जाफरान डालकर ऐसे बनाएं मखाने की खीर, सेहत के साथ मिलेगा जन्नत वाला स्वाद</title>
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        <description><![CDATA[ Kesar Mixed Makhana Kheer: मखाने की खीर लगभग सभी को पसंद आती ही है. दूध के अंदर डूबे हुए मखाने जितने देखने में सुंदर लगते हैं उतने ही खाने में भी स्वादिष्ट होते हैं. जाफरान जिसे आम भाषा में केसर के नाम से जाना जाता है अगर इसे इस खीर में मिला दिया जाए तो इसका स्वाद और पौष्टिकता दोनों ही बढ़ जाती है, आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है यह स्वादिष्ट खीर?
लाजवाब खीर की रेसिपी
केसर डालकर मखाने की खीर बनाना बहुत आसान है, लेकिन इसे सावधानी से बनाना पड़ता है क्योंकि थोड़ी सी भी गलती से यह खराब हो सकती है.
बनाने की विधि

सबसे पहले मखाने के ⅔ भाग को 1 चम्मच घी में भून लें, फिर इसका पीसकर पाउडर बना लीजिए और ⅓ भाग को साबुत रखिए. आप चाहें तो इन्हें बारीक काट भी सकते हैं. पीसने से खीर में एक चिकनी और मुलायम बनावट आती है.
एक सॉस पैन या मोटे तले वाले बर्तन में 2 कप दूध (500 मिली) गरम करें. आंच को धीमा रखें. दूध को बीच-बीच में चलाते रहें ताकि वह नीचे से जले नहीं.
साथ ही, चार हरी इलायची की फलियों से इलायची के बीज और एक चुटकी केसर के धागे भी उसमें डालें.
दूध पक जाने के बाद उसमें इलायची की फली के बजाय लगभग आधा चम्मच इलायची पाउडर मिला सकते हैं.
जब दूध उबलने लगे तो उसमें 3 से 4 बड़े चम्मच या अपने स्वादानुसार चीनी डालें.
अब पिसा हुआ मखाना डालें. फिर बचा हुआ ⅓ कप मखाना डालें.
मखाना नरम होने और दूध थोड़ा गाढ़ा होने तक, धीमी से मीडियम आंच पर 9 से 10 मिनट तक इसे पकाएं. बीच-बीच में इसे चलाते रहें. किनारों पर जमे हुए दूध के मलाई को खुरचकर खीर में मिला दें.
अंत में सुनहरे काजू और किशमिश से इसे गार्निश करें. अब तैयार है आपकी स्वादिष्ट खीर.

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इस खीर के फायदे

दूध में कैल्शियम होता है और मखाना मैग्नीशियम और फास्फोरस का अच्छा स्रोत है. इसमें केसर का मिश्रण जोड़ों के दर्द और गठिया में आराम देता है.
यह खीर शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देती है, जिससे दिनभर की थकान और कमजोरी मिट जाती है. व्रत में भी यह खाई जाती है.
कम कैलोरी और हाई फाइबर होने के कारण, यह पेट को देर तक भरा रखता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है और वजन भी नहीं बढ़ता.

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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Silent Breakup: बिना झगड़े टूट रहे हैं आजकल के रिश्ते, साइलेंट ब्रेकअप का ट्रेंड युवाओं पर पड़ रहा भारी</title>
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        <description><![CDATA[ Signs Your Relationship Is Quietly Ending: रिश्तों में ब्रेकअप का मतलब कभी जोरदार बहस, रोना-धोना या आखिरी बातचीत हुआ करता था. लेकिन अब डेटिंग और रिश्तों की दुनिया तेजी से बदल रही है. आजकल कई रिश्ते बिना किसी बड़े झगड़े के धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। इसे ही अब साइलेंट ब्रेकअप या सॉफ्ट एग्जीक्यूशन कहा जा रहा है. इस तरह के रिश्ते में कोई व्यक्ति सीधे यह नहीं कहता कि रिश्ता खत्म हो चुका है. बल्कि वह धीरे-धीरे खुद को इमोशनल रूप से दूर करने लगता है. बातचीत कम हो जाती है, मिलने की कोशिशें खत्म होने लगती हैं और रिश्ता बिना किसी ऑफिशियल अंत के चुपचाप टूटने लगता है.
कैसे खत्म हो रहा है रिश्ता?
शुरुआत में अक्सर यह बदलाव समझ नहीं आता. पहले जो लंबी बातचीत, देर रात की चैट और साथ बिताए गए खास पल होते थे, उनकी जगह छोटे जवाब, औपचारिक बातें और सिर्फ इमोजी रह जाते हैं. सामने वाला व्यक्ति हमेशा व्यस्त दिखने लगता है। कभी काम का बहाना, कभी थकान, तो कभी खुद के लिए समय चाहिए होने की बात. धीरे-धीरे एहसास होता है कि रिश्ते को बचाने की कोशिश सिर्फ एक ही व्यक्ति कर रहा है. मैसेज वही करता है, प्लान वही बनाता है और दूसरा इंसान सिर्फ मौजूद रहता है.&amp;nbsp;
क्या है इस तरह रिश्ते खत्म होने की वजह?
रिलेशनशिप थेरेपिस्ट्स के मुताबिक इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है टकराव से बचने की आदत. कई लोग सीधे ब्रेकअप की बातचीत से डरते हैं क्योंकि उन्हें सामने वाले की नाराजगी, दुख या सवालों का सामना करने से परेशानी होती है. इसलिए वे रिश्ते को धीरे-धीरे खत्म होने देते हैं. आजकल एक और चीज तेजी से देखने को मिल रही है जिसे वेपनाइज्ड थेरेपी स्पीक कहा जाता है. जैसे कि मेरे पास अभी इमोशनल कैपसिटी नहीं है या मैं इमोशनली अवेलेबल नहीं हूं. सुनने में ये बातें समझदार लगती हैं, लेकिन कई बार यह जिम्मेदारी से बचने का तरीका बन जाती हैं. डेटिंग ऐप्स और लगातार नए विकल्प मिलने की मानसिकता ने भी रिश्तों को ज्यादा अस्थायी बना दिया है.
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क्या यह ज्यादा दुख देता है?
सॉइकोलॉजिस्ट का मानना है कि साइलेंट ब्रेकअप कई बार सामान्य ब्रेकअप से ज्यादा दर्दनाक होता है. क्योंकि यहां रिश्ता खत्म होने की कोई स्पष्ट रेखा नहीं होती. इंसान लगातार हर मैसेज, हर देरी और हर बदलाव का मतलब निकालने की कोशिश करता रहता है. दिमाग बार-बार यही सोचता है कि शायद सामने वाला सिर्फ तनाव में है, या शायद गलती खुद से हुई है. यही इमोशनल अनिश्चितता चिंता और मानसिक थकान बढ़ा देती है. यह समस्या सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं है. अब क्वाइट डिवोर्स जैसे मामले लंबे समय से शादीशुदा लोगों में भी दिखाई दे रहे हैं. खासतौर पर कई महिलाएं, जो सालों तक रिश्ते और परिवार की इमोशनल जिम्मेदारी संभालती रहती हैं, एक समय बाद मानसिक रूप से रिश्ता छोड़ देती हैं, जबकि कानूनी तौर पर शादी जारी रहती है.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>इंसानी शरीर की सीमा पर पहुंची गर्मी!” WHO की पूर्व वैज्ञानिक की चेतावनी&amp; हीटवेव अब बन सकती है जानलेवा</title>
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        <description><![CDATA[ देश में बढ़ती गर्मी को लेकर अब सिर्फ मौसम की बात नहीं, बल्कि सीधे जान के खतरे की चेतावनी दी जा रही है. पूर्व WHO चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने एक वीडियो के माध्यम से साफ कहा है कि भारत में तापमान अब इंसानी शरीर की सहन क्षमता की सीमा के बेहद करीब पहुंच चुका है. यानी हालात ऐसे बन रहे हैं जहां थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है. उनका कहना है कि हीटवेव अब सिर्फ गर्मी नहीं, बल्कि एक बड़ी हेल्थ इमरजेंसी बनती जा रही है, जिसके लिए तुरंत बड़े स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है.
भारत में हीटवेव बना बड़ा खतरा
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा हिस्सा इस समय हीटवेव के खतरे में है. तापमान इतना ज्यादा हो रहा है कि शरीर के लिए उसे झेलना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे बीमारियां और मौत का खतरा बढ़ सकता है.

#WATCH | Delhi: On heat wave, former WHO Chief Scientist, Dr Soumya Swaminathan says, &amp;ldquo;&amp;hellip;a large part of India is very vulnerable to the impact of heat&amp;hellip;the kind of temperatures we are seeing now are very close to the limit of human tolerability. We need a multi-sectoral response&amp;hellip; pic.twitter.com/VxCXM3IncH
&amp;mdash; ANI (@ANI) May 25, 2026



सिर्फ अस्पताल नहीं, पूरे सिस्टम को तैयार होना होगा
डॉ. स्वामीनाथन ने ये भी कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ अस्पतालों को तैयार करना काफी नहीं है. सरकार के कई विभागों को मिलकर काम करना होगा. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत में एक &amp;ldquo;हीट कमीशन&amp;rdquo; बनाया जाए, जो लोगों को बचाने के लिए जरूरी प्लान तैयार करे.
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नमी वाली गर्मी सबसे ज्यादा खतरनाक
उन्होंने बताया कि नमी वाली गर्मी (ह्यूमिड हीट) ज्यादा खतरनाक होती है. इसमें शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा नहीं कर पाता, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. एक बार हीट स्ट्रोक होने पर हालत बहुत जल्दी गंभीर हो सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अलग-अलग इलाकों के हिसाब से हीटवेव की चेतावनी देनी चाहिए. लोगों को पहले से जानकारी और सही सलाह मिले, तो वे खुद को सुरक्षित रख सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 26 May 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Maa Kali Kavach: क्या केवल मंत्र नहीं, मानसिक शक्ति का भी प्रतीक है मां काली कवच? जानें पूजा विधि, कवच और साधना का गहरा अर्थ</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/maa-kali-kavach-क्या-केवल-मंत्र-नहीं-मानसिक-शक्ति-का-भी-प्रतीक-है-मां-काली-कवच-जानें-पूजा-विधि-कवच-और-साधना-का-गहरा-अर्थ</link>
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        <description><![CDATA[ Maa Kali Kavach: मां काली का कवच भी ऐसी ही एक शक्तिशाली स्तुति मानी जाती है, जिसे तांत्रिक और शाक्त(भगवती शक्ति की उपासना) परंपरा में विशेष महत्व दिया गया है. यह कवच साधक को भय, बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों से बचाने का आध्यात्मिक माध्यम बनता है. इसे किसी चमत्कारी शॉर्टकट की तरह नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ की जाने वाली साधना के रूप में समझना चाहिए.
मां काली कवच क्या है?
काली कवच संस्कृत श्लोकों से बना एक विशेष स्तोत्र है, जिसमें मां काली के अलग-अलग स्वरूपों का स्मरण करते हुए जीवन, शरीर और मन की रक्षा की प्रार्थना की जाती है. इसमें देवी से नेत्र, हृदय, हाथ, पैरों और जीवन के विभिन्न पक्षों की रक्षा की कामना की गई है. भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में &amp;ldquo;कवच&amp;rdquo; केवल बाहरी सुरक्षा नहीं, बल्कि भीतर की निडरता और चेतना को मजबूत करने का भी प्रतीक माना गया है.

मां काली कवच की पूजा विधि:
1. पूजा का सही समय
मां काली की पूजा विशेष रूप से अमावस्या, शुक्रवार और मंगलवार की रात्रि में शुभ मानी जाती है.&amp;nbsp;
2. पूजा स्थान तैयार करें
घर के शांत और स्वच्छ स्थान पर लाल या काले वस्त्र का आसन बिछाएं. मां काली की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीपक, धूप, लाल फूल तथा नैवेद्य अर्पित करें.
3. मंत्र जाप करें
पूजा के बाद फूल माला से इस मंत्र का जाप किया जाता है&amp;mdash;
॥ ॐ क्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं महाकालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा ॥
माना जाता है कि यह मंत्र साधक के भीतर आत्मबल और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक होता है.
महाकाली कवच-
शिरो मे कालिका पातु क्रींकारैकाक्षरी परा,क्रीं क्रीं क्रीं मे ललाटं च कालिका खड्गधारिणी।हूं हूं पातु नेत्रयुग्मं ह्रीं ह्रीं पातु श्रुती मम,महाकालिके पातु प्राणयुग्मं महेश्वरी॥
क्रीं ह्रीं ह्रीं रसनां पातु हूं हूं पातु कपोलकम्,वदनं सकलं पातु ह्रीं ह्रीं स्वाहा स्वरूपिणी।द्वाविंशत्याक्षरी स्कन्धौ महाविद्या सुखप्रदा,खड्गमुण्डधरा काली सर्वाङ्गमभितोऽवतु॥
क्रीं हूं ह्रीं त्र्यक्षरी पातु चामुण्डा हृदयं मम,ऐं हूं ॐ स्तनद्वन्द्वं ह्रीं फट् स्वाहा ककुत्स्थलम्।अष्टाक्षरी महाविद्या भुजौ पातु सकर्तृका,क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं पातु करौ षडक्षरी मम॥
क्रीं नाभिं मध्यमं च दक्षिणे कालिकेऽवतु,क्रीं स्वाहा पातु पृष्ठं च कालिका सा दशाक्षरी।क्रीं मे गुह्यं सदा पातु कालिकायै नमो नमः,सप्ताक्षरी महाविद्या सर्वतन्त्रेषु गोपिता॥
ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके हूं हूं पातु कटिद्वयम्,काली दशाक्षरी विद्या स्वाहान्ता चोरुद्वयम्।ॐ क्रीं क्रीं मे स्वाहा पातु जानुनी कालिका सदा,काली हृन्नामविद्येयं चतुर्वर्गफलप्रदा॥
क्रीं हूं ह्रीं पातु सा गुल्फं दक्षिणे कालिकेऽवतु,क्रीं हूं ह्रीं स्वाहा पदं पातु चतुर्दशाक्षरी मम।खड्गमुण्डधरा काली वरदाभयधारिणी,विद्याभिः सकलाभिः सा सर्वाङ्गमभितोऽवतु॥
काली कपालिनी कुल्ला कुरुकुल्ला विरोधिनी,विप्रचित्ता तथोग्रोग्रा प्रभादीप्ता धनत्विषा।नीला घना बलाका च मात्रा मुद्रा मिता च माम्,एताः सर्वाः खड्गधरा मुण्डमाला विभूषणा॥
रक्षन्तु मां दिग्विदिक्षु ब्राह्मी नारायणी तथा,माहेश्वरी च चामुण्डा कौमारी चापराजिता॥
वाराही नारसिंही च सर्वाश्चामितभूषणाः,रक्षन्तु स्वायुधैर्दिक्षु मां यथा तथा॥
मां काली कवच के आध्यात्मिक लाभ:
मानसिक शांति और एकाग्रता- मां काली कवच का नियमित पाठ मन को शांत और स्थिर बनाने में मदद कर सकता है. मंत्रों का जाप व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक भटकाव कम करने में सहायक माना जाता है.
भय और नकारात्मकता से राहत- कई लोग मां काली की साधना को भय, तनाव और नकारात्मक सोच से बाहर निकलने का आध्यात्मिक माध्यम मानते हैं. यह साधना भीतर साहस और सकारात्मक ऊर्जा जगाने का प्रतीक मानी जाती है.
आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती- नियमित मंत्र जाप और कवच पाठ व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता को मजबूत करने में मदद कर सकता है. कठिन परिस्थितियों में भी यह साधना मन को मजबूत बनाए रखने की प्रेरणा देती है.
कठिन समय में आध्यात्मिक सहारा- मां काली को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है. इसलिए उनकी उपासना जीवन के संघर्षपूर्ण समय में मानसिक सहारा और आंतरिक शक्ति देने वाली मानी जाती है.
अनुशासन और आंतरिक ऊर्जा का जागरण- आध्यात्मिक दृष्टि से मां काली कवच की साधना अनुशासन, ध्यान और भीतर की सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने का प्रतीक भी मानी जाती है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Maa, Kali, Kavach:, क्या, केवल, मंत्र, नहीं, मानसिक, शक्ति, का, भी, प्रतीक, है, मां, काली, कवच, जानें, पूजा, विधि, कवच, और, साधना, का, गहरा, अर्थ</media:keywords>
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        <title>Life after Good bye Caffeine: चाय&amp;कॉफी छोड़ने के 10 दिन बाद क्या होता है, जानें शरीर में कैसे होते हैं बदलाव?</title>
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        <description><![CDATA[ भारत के हर घर में एक चीज अक्सर देखने को मिलती है और वह यह है कि भारतीय घरों में लोग अपनी सुबह की शुरुआत बिना चाय या कॉफी के नहीं कर सकते हैं. पूरे दिन ऊर्जावान बने रहने के लिए लोग सुबह की शुरुआत एक कप चाय या कॉफी के साथ करते हैं.लेकिन सोचकर देखिए क्या होगा अगर आप अपनी इस चाय-कॉफी पीने की आदत को छोड़ दें,आइए जानते हैं अगर आप अचानक से चाय-कॉफी पीना छोड़ दें तो इसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;यह बात तो पूरी तरह सच है कि एक कप चाय या कॉफी से कोई नुकसान नहीं होता है लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है कि हर चीज की एक सीमा होती है ठीक उसी प्रकार से ज्यादा मात्रा में चाय-कॉफी का सेवन आपके किए हानिकारक हो सकता है. साथ ही इनका अधिक मात्रा में सेवन करने कैफीन हमारे शरीर के तंत्रिका तंत्र &amp;nbsp;को प्रभावित करती है. वहीं इसको अचानक छोड़ने पर शरीर में कई सकारात्मक और कुछ नकारात्मक बदलाव होते &amp;nbsp;हैं.&amp;nbsp;
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पहले कुछ दिनों के लक्षण&amp;nbsp;
चाय-कॉफी छोड़ने के शुरुआती 24 से 48 घंटों में कैफीन की कमी के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं.
सिरदर्द और थकान- कैफीन मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ता है.इसे छोड़ने पर ये वाहिकाएं फैलती हैं, जिससे भयंकर सिरदर्द हो सकता है.चिड़चिड़ापन और आलस- शरीर में ऊर्जा की कमी और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत महसूस हो सकती है.&amp;nbsp;
दस दिन बाद शरीर में होने वाले बदलाव
शुरुआती परेशानियों के बाद, जब 10 दिन बीत जाते हैं तो शरीर कैफीन-मुक्त हो जाता है और बदलाव महसूस होते हैं
1.नींद की गुणवत्ता में सुधार- चाय-कॉफी में मौजूद कैफीन आपकी प्राकृतिक स्लीप साइकिल को बाधित करता है. 10 दिन बाद कैफीन का असर पूरी तरह खत्म हो जाने से आपको रात में गहरी और सुकून भरी नींद आने लगती है, और सुबह उठने पर ताजगी महसूस होती है.&amp;nbsp;
2.पाचन क्रिया होती है दुरुस्त- कैफीन आपके पेट में एसिड और गैस का लेवल बढ़ा सकता है,जिससे सीने में जलन या डिहाइड्रेशन हो सकता है. चाय-कॉफी बंद करने से आपका पाचन तंत्र बेहतर होता है और पेट से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं.
3.तनाव में कमी- कैफीन शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन)के लेवल को बढ़ा देता है.इसे छोड़ने से घबराहट और तनाव में कमी आती है और मानसिक शांति मिलती है.&amp;nbsp;
4. प्राकृतिक ऊर्जा- शुरुआती थकान के बाद, दसवें दिन तक शरीर कैफीन पर निर्भरता खत्म कर देता है. अब आपकी ऊर्जा प्राकृतिक रूप से बनी रहती है.&amp;nbsp;
5. ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल- चाय-कॉफी में आमतौर पर बहुत अधिक चीनी का इस्तेमाल होता है. इसे छोड़ने से ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में बहुत हद तक मदद मिलती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Life, after, Good, bye, Caffeine:, चाय-कॉफी, छोड़ने, के, दिन, बाद, क्या, होता, है, जानें, शरीर, में, कैसे, होते, हैं, बदलाव</media:keywords>
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        <title>Covid Steroid Side Effects: कोरोना में खाई थी यह दवाई तो अंदर से खराब हो सकती है कूल्हे की हड्डी, डॉक्टरों ने किया अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Covid Steroid Side Effects : कोरोना महामारी भले ही अब काफी हद तक खत्म हो चुकी हो, लेकिन इसके असर अभी भी लोगों की सेहत पर दिखाई दे रहे हैं. अब डॉक्टरों ने एक नई और चिंताजनक समस्या को लेकर चेतावनी दी है. देशभर के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के दौरान यूज की गई कुछ दवाइयों, खासकर स्टेरॉयड, की वजह से लोगों में कूल्हे की हड्डी खराब होने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
दिल्ली में आयोजित DELHI HIP 360 Conference में देशभर के हड्डी रोग विशेषज्ञों ने बताया कि कोरोना के बाद अब बड़ी संख्या में लोग Hip Arthritis और Avascular Necrosis (AVN) जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. यह बीमारी खासतौर पर 30 से 40 साल के युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रही है.
क्या है AVN बीमारी?
Avascular Necrosis यानी AVN एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें कूल्हे की हड्डी तक खून की सप्लाई कम या बंद हो जाती है. जब हड्डी तक पूरा ब्लड नहीं पहुंचता तो धीरे-धीरे हड्डी कमजोर होकर खराब होने लगती है. &amp;nbsp;अगर समय रहते इलाज न हो तो कूल्हे का जोड़ पूरी तरह डैमेज हो सकता है और मरीज को चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है. कई मामलों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीज को Total Hip Replacement Surgery तक करवानी पड़ती है.
कोरोना की कौन सी दवाई बन रही खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार कोविड महामारी के दौरान कई मरीजों को स्टेरॉयड दवाइयां दी गई थीं. इन दवाओं ने उस समय कई गंभीर मरीजों की जान बचाने में मदद की, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से साइड इफेक्ट भी सामने आए. विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड लेने से शरीर की ब्लड वेसल्स &amp;nbsp;पर असर पड़ सकता है, जिससे कूल्हे की हड्डी तक ब्लड सप्लाई प्रभावित होने लगती है. यही आगे चलकर AVN और हड्डियों के खराब होने की वजह बन सकती है.
युवाओं में तेजी से बढ़ रहे मामले
डॉक्टरों ने बताया कि पहले यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों या गंभीर चोट लगने वाले मरीजों में देखी जाती थी, लेकिन अब 30 से 40 साल की उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है जिन्हें चलने में दर्द, लंगड़ाहट, कूल्हों में जकड़न और बैठने-उठने में परेशानी हो रही है. जांच के बाद इनमें से कई मरीजों में AVN और शुरुआती Hip Arthritis पाया जा रहा है.
डॉक्टरों ने क्या कहा?
&amp;nbsp;डॉक्टरों ने बताया कि कोविड के बाद युवाओं में Hip Replacement Surgery के मामलों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है. उनके अनुसार स्टेरॉयड उस समय जरूरी थे, लेकिन कुछ मरीजों में इनके गलत या लंबे इस्तेमाल ने कूल्हे की हड्डियों को नुकसान पहुंचाया. उन्होंने कहा कि अब कम उम्र के मरीजों में भी कूल्हे की हड्डी टूटने, जोड़ खराब होने और गंभीर गठिया जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. वहीं डॉक्टरों &amp;nbsp;ने यह भी कहा कि इस बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं. कई लोग कमर या जांघ के दर्द को सामान्य मांसपेशियों का दर्द समझते रहते हैं. जब तक जांच कराते हैं तब तक कूल्हे की हड्डी काफी खराब हो चुकी होती है.
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किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
अगर किसी व्यक्ति को कोविड के बाद लंबे समय तक कूल्हे या जांघ में लगातार दर्द, चलने में दिक्कत, बैठने-उठने में परेशानी, सीढ़ियां चढ़ते समय दर्द, कूल्हों में जकड़न, पैरों की मूवमेंट कम होना जैसी समस्याएं हो रही हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती स्टेज में MRI जांच से बीमारी का पता लगाया जा सकता है.
समय पर इलाज क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर AVN की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो बिना सर्जरी के भी इलाज हो सकता है. लेकिन देर होने पर हड्डी का जोड़ पूरी तरह खराब हो सकता है, जिसके बाद Hip Replacement Surgery ही आखिरी ऑप्शन बचता है.आजकल नई तकनीक, बेहतर इम्प्लांट और रोबोटिक सर्जरी की मदद से Hip Replacement पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और सफल माना जा रहा है. इसके बाद मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकते हैं. ऐसे में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि कोविड के बाद होने वाले लगातार कूल्हे के दर्द को हल्के में न लें. बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड दवाइयों का इस्तेमाल न करें और किसी भी तरह की लगातार हड्डी या जोड़ की समस्या होने पर तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराएं.
यह भी पढ़ें - Breast Reduction Surgery: क्या है ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी, क्या स्तनों का साइज घटवाना सेफ है?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Breast Reduction Surgery: क्या है ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी, क्या स्तनों का साइज घटवाना सेफ है?</title>
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        <description><![CDATA[ Is Breast Reduction Surgery Safe For Women: ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी, जिसे मेडिकल टर्म में रिडक्शन मैमोप्लास्टी कहा जाता है, आजकल तेजी से चर्चा में है. कई महिलाएं सिर्फ सुंदर दिखने के लिए नहीं बल्कि शारीरिक दर्द और मेंटर दिक्कत से राहत पाने के लिए भी इस सर्जरी का सहारा ले रही हैं. एकसपर्ट के मुताबिक यह सर्जरी स्तनों के अतिरिक्त टिश्यू, फैट और त्वचा को हटाकर ब्रेस्ट का आकार शरीर के अनुसार संतुलित करने के लिए की जाती है.&amp;nbsp;
क्यों महिलाएं करवा रही हैं ये सर्जरी?
&amp;nbsp;हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था mayoclinic की रिपोर्ट के अनुसार, &amp;nbsp;जरूरत से ज्यादा बड़े ब्रेस्ट कई महिलाओं के लिए गंभीर शारीरिक परेशानी का कारण बन जाते हैं. लगातार गर्दन, पीठ और कंधों में दर्द, त्वचा में जलन, रैशेज और सही कपड़े न मिल पाना आम समस्याएं हैं. कई महिलाएं मानसिक रूप से भी असहज महसूस करती हैं और आत्मविश्वास की कमी का सामना करती हैं. ऐसे मामलों में ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी राहत देने में मदद कर सकती है.&amp;nbsp;
क्या होता है इस सर्जरी?
सर्जरी के दौरान डॉक्टर आमतौर पर ब्रेस्ट के आसपास चीरा लगाकर अतिरिक्त टिश्यू और फैट हटाते हैं. इसके बाद बचे हुए टिश्यू को नया आकार दिया जाता है ताकि ब्रेस्ट ज्यादा संतुलित और प्राकृतिक दिखें. यह प्रक्रिया जनरल एनेस्थीसिया में की जाती है और इसमें कई घंटे लग सकते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि हर महिला के लिए एक जैसी तकनीक इस्तेमाल नहीं होती. कुछ मामलों में पारंपरिक सर्जरी की जाती है, जबकि कुछ मरीजों में लिपोसक्शन के जरिए अतिरिक्त फैट हटाया जाता है. लॉलीपॉप टेक्नीक और फ्री निप्पल ग्राफ्ट जैसी प्रक्रियाएं भी जरूरत के हिसाब से अपनाई जाती हैं. कौन-सी तकनीक बेहतर रहेगी, यह मरीज की बॉडी स्ट्रक्चर और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है. &amp;nbsp;
हालांकि डॉक्टर यह भी साफ करते हैं कि यह सर्जरी हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होती. अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, धूम्रपान की आदत या एक्टिव इंफेक्शन जैसी स्थितियों में सर्जरी का जोखिम बढ़ सकता है. गर्भवती महिलाओं या जल्द प्रेग्नेंसी प्लान कर रही महिलाओं को भी सर्जरी टालने की सलाह दी जाती है.
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इन चीजों का रखना होता है ध्यान
डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी से पहले पूरी मेडिकल जांच बेहद जरूरी होती है. मरीज को कुछ दवाइयां बंद करनी पड़ सकती हैं और स्मोकिंग छोड़ने की सलाह दी जाती है. सर्जरी के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक सूजन, दर्द और थकान महसूस हो सकती है. आमतौर पर दो हफ्ते बाद मरीज सामान्य काम शुरू कर सकते हैं, लेकिन पूरी रिकवरी में कई महीने लग सकते हैं.
क्या यह पूरी तरह सेफ है?
एक्सपर्ट का कहना है कि ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी के कई फायदे हैं. इससे शरीर का दर्द कम हो सकता है, पोस्चर बेहतर होता है, एक्सरसाइज करना आसान हो जाता है और आत्मविश्वास बढ़ सकता है. हालांकि किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी इंफेक्शन, स्कार, ब्लीडिंग और ब्रेस्ट सेंसिटिविटी में बदलाव जैसे जोखिम मौजूद रहते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Mental Health Crisis: हर 8 में से 1 व्यक्ति मेंटल डिसऑर्डर का शिकार, 43 सेकंड में 1 सुसाइड, WHO के आंकड़े हैं खौफनाक</title>
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        <description><![CDATA[ One In Eight People In The World Suffer From Mental Disorder: दुनियाभर में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक इस समय दुनिया का हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहा है. यही वजह है कि स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में मेंटल हेल्थ सबसे अहम मुद्दों में शामिल किया गया है. चलिए आपको बताते हैं कि इस दिक्कत से कैसे निपटना चाहिए.
दुनिया की कितनी बड़ी आबादी इससे परेशान?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में एक अरब से ज्यादा लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है. सबसे ज्यादा असर युवाओं पर दिखाई दे रहा है. वहीं पुरुषों में आत्महत्या के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं, जबकि महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य आज भी दुनिया के सबसे ज्यादा नजरअंदाज किए जाने वाले हेल्थ संकटों में शामिल है. वैश्विक स्तर पर सरकारें अपने कुल स्वास्थ्य बजट का औसतन सिर्फ दो प्रतिशत हिस्सा ही मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च करती हैं.&amp;nbsp;
क्या होता है मेंटल डिसऑर्डर और कितने तरह का होता है?
मेंटल डिसऑर्डर एक ऐसा कंडीशन है, जो लोग कैसे सोचेंगे, वर्ताव करेंगे और कैसा फील करेंगे इसको प्रभावित करता है. &amp;nbsp;एक्सपर्ट &amp;nbsp;के अनुसार मानसिक विकार कई तरह के होते हैं. इनमें डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, एंग्जायटी, सोशल फोबिया,पीटीएसडी, स्किजोफ्रेनिया और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्याएं शामिल हैं. ये बीमारियां इंसान के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को प्रभावित करती हैं. WHO और DSM-5 की रिपोर्ट के मुताबिक एंग्जायटी और डिप्रेशन सबसे आम मेंटस बीमारियां बन चुकी हैं.
दुनियाभर में कितने प्रतिशत बढ़े इसके मामले?&amp;nbsp;वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका क्षेत्र में मेंटल डिसऑर्डर की दर सबसे ज्यादा 15.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि यूरोप में यह 14.2 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 13.2 प्रतिशत रही. कोविड-19 महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में अचानक तेजी देखी गई. खासतौर पर एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामलों में बड़ा उछाल आया. स्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवोल्यूशन &amp;nbsp;की रिपोर्ट के मुताबिक डिप्रेशन और एंग्जायटी दुनियाभर में विकलांगता का सबसे बड़ा कारण बनते जा रहे हैं.
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सुसाइड के भी बढ़ रहे हैं मामले
मेंटल हेल्थ संकट का सबसे खतरनाक पहलू आत्महत्या के बढ़ते मामले हैं. मेडिकल जर्नल द लैंसेट में पब्लिश एनालिसिस के अनुसार हर साल करीब 7.4 लाख लोग आत्महत्या करते हैं. इसका मतलब है कि दुनिया में हर 43 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान दे रहा है. 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है. &amp;nbsp;डब्ल्यूएचओ के अनुसार महिलाओं में मानसिक समस्याएं अक्सर डिप्रेशन और एंग्जायटी के रूप में सामने आती हैं, जबकि पुरुषों में नशे की लत और आक्रामक व्यवहार ज्यादा देखने को मिलता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पुर्तगाल में एंग्जायटी के सबसे ज्यादा मामले हैं, जबकि डिप्रेशन के मामलों में सीरिया शीर्ष पर है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर समय रहते मेंटल समस्याओं की पहचान और इलाज न किया जाए, तो इसका असर व्यक्ति की जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ सकता है.
कैसे कर सकते हैं बचाव&amp;nbsp;
हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएंरोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें, फिजिकली एक्टिव रहें और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाएं.
अपनों से खुलकर बात करेंअकेलापन या उदासी महसूस होने पर अपनी भावनाओं को मन में दबाकर रखने के बजाय, परिवार या किसी भरोसेमंद दोस्त के साथ जरूर शेयर करें.
प्रोफेशनल मदद लेने में न हिचकिचाएं&amp;nbsp;अगर एंग्जायटी या डिप्रेशन के लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे छिपाने या इग्नोर करने के बजाय तुरंत किसी काउंसलर की सलाह लें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Mango And Pimples: आम बदनाम है या सच में बढ़ाता है Acne, डॉक्टर्स से जानें पिंपल्स की असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Can Eating Mangoes Cause Pimples: गर्मी का मौसम आते ही आम को लेकर एक सवाल फिर चर्चा में आ जाता है कि क्या ज्यादा आम खाने से चेहरे पर पिंपल्स निकलते हैं? कई लोग सिर्फ इस डर से आम खाने से बचते हैं कि इससे मुंहासे बढ़ जाएंगे. हालांकि मुंबई के जिनोवा शाल्बी हॉस्पिटल की कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ सुरभी देशपांडे का कहना है कि आम को सीधे तौर पर पिंपल्स की वजह मानना सही नहीं है.&amp;nbsp;
क्या आप बनते हैं पिंपल्स का कारण?
डॉ. सुरभि देशपांडे के मुताबिक आम खुद आमतौर पर मुंहासों का कारण नहीं बनता, लेकिन जरूरत से ज्यादा सेवन और खराब लाइफस्टाइल कुछ लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं. उन्होंने बताया कि पिंपल्स होने के पीछे हार्मोनल बदलाव, ऑयली स्किन, तनाव, नींद की कमी, गलत स्किन केयर, जंक फूड, डिहाइड्रेशन और जेनेटिक कारण ज्यादा जिम्मेदार होते हैं. यानी अगर ये वजहें मौजूद हैं तो आम खाए बिना भी चेहरे पर मुंहासे हो सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों गर्मियों में निकलते हैं पिंपल्स?
विशेषज्ञों का कहना है कि आम त्वचा के लिए नुकसानदायक नहीं बल्कि फायदेमंद फल माना जाता है. इसमें विटामिन A, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्किन को हेल्दी रखने में मदद करते हैं. डॉक्टरों के अनुसार समस्या आम में नहीं बल्कि उसे खाने के तरीके और मात्रा में होती है. दरअसल कई लोग आम को आइसक्रीम, मीठे डेजर्ट और तली-भुनी चीजों के साथ खाते हैं. यही कॉम्बिनेशन शरीर में सूजन और स्किन समस्याओं को बढ़ाने का काम करता है. गर्मियों में ज्यादा पसीना आना, चेहरे को बार-बार छूना और साफ-सफाई की कमी भी मुंहासों की समस्या को बढ़ा सकती है. ऐसे में लोग गलती से इसका दोष आम को देने लगते हैं.
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इन लोगों को होती है ये दिक्कत?
डॉ. सुरभि देशपांडे ने एक और महत्वपूर्ण बात बताई. कई बार लोग जिस समस्या को पिंपल समझते हैं, वह असल में मैंगो डर्मेटाइटिस होती है. आम के छिलके में मौजूद उरुशियोल नामक कंपाउंड कुछ लोगों में एलर्जी पैदा कर सकता है. इससे मुंह और चेहरे के आसपास खुजली, लाल चकत्ते या छोटे दाने हो जाते हैं. इसे लोग अक्सर मुंहासे समझ लेते हैं, जबकि यह एक तरह की एलर्जिक रिएक्शन होती है. एक्सपर्ट की सलाह है कि आम खाने से पहले उसे अच्छी तरह धोना चाहिए और छीलने के बाद हाथ भी साफ करने चाहिए. डॉक्टर का कहना है कि सीमित मात्रा में आम खाना पूरी तरह सुरक्षित है. एक दिन में एक छोटा आम खाना ठीक माना जाता है. वहीं डायबिटीज के मरीजों को सिर्फ दो से तीन छोटे स्लाइस तक ही सीमित रहने की सलाह दी गई है.
इसे बात का रखें ध्यान
डॉक्टरों ने यह भी चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल मैंगो ड्रिंक्स और फ्लेवर वाले प्रोडक्ट्स से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि इनमें रिफाइंड शुगर और प्रिजर्वेटिव्स ज्यादा मात्रा में होते हैं, जो वास्तव में त्वचा और स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Teenage Daughter Problems: टीनएज बेटियों के बदलते बर्ताव को न लें हल्के में, पैरेंट्स की 1 गलती पड़ सकती है भारी</title>
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        <description><![CDATA[ Signs Your Teenage Daughter Is Struggling: टीनएज का दौर हर बच्चे के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन बेटियों के लिए यह समय अक्सर ज्यादा इमोशनल और उलझनों से भरा माना जाता है. इस उम्र में वे शारीरिक बदलावों, सामाजिक दबाव और खुद को साबित करने की चिंता से गुजरती हैं. कई बार उनका व्यवहार अचानक बदलता हुआ दिखाई देता है. कभी वे आत्मविश्वास से भरी नजर आती हैं, तो कभी छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या उदासी जाहिर करने लगती हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि इन बदलावों के पीछे सिर्फ मूड स्विंग नहीं बल्कि गहरे इमोशनल संघर्ष छिपे होते हैं.
क्या होती है सबसे बड़ी चुनौती?
सबसे बड़ी चुनौती शरीर में होने वाले बदलावों को स्वीकार करना होती है. प्यूबर्टी के दौरान शरीर तेजी से बदलता है और कई लड़कियां इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होतीं. चेहरे पर पिंपल्स आना, पीरियड्स शुरू होना, वजन बढ़ना या हार्मोनल बदलाव उन्हें असहज बना सकते हैं. ऐसे समय में माता-पिता की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. एक्सपर्ट का कहना है कि बेटियों के सामने उनके लुक्स या वजन को लेकर मजाक या आलोचना करने से बचना चाहिए. उन्हें यह एहसास दिलाना जरूरी है कि शरीर में होने वाले ये बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
परफेक्ट दिखने का दबाव
इसके अलावा आज की किशोर लड़कियां परफेक्ट दिखने के दबाव में भी जी रही हैं. सोशल मीडिया पर दिखने वाली ग्लैमरस तस्वीरें और लगातार तुलना का माहौल उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करता है. उन्हें लगता है कि उन्हें पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करना है, खूबसूरत भी दिखना है और हर समय भावनात्मक रूप से मजबूत भी बने रहना है. यही दबाव कई बार चिंता, तनाव और मानसिक थकान का कारण बनता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि घर का माहौल ऐसा होना चाहिए जहां गलतियों को स्वीकार किया जाए. बच्चों की सिर्फ उपलब्धियों की नहीं बल्कि उनकी कोशिशों की भी सराहना करनी चाहिए.
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दोस्ती से भी लड़कियों को पड़ता है असर
दोस्ती भी किशोर लड़कियों की जिंदगी में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इस उम्र में दोस्त सिर्फ साथी नहीं बल्कि इमोशनल सहारा बन जाते हैं. ऐसे में छोटी बहस, दोस्तों द्वारा नजरअंदाज किया जाना या ग्रुप से अलग महसूस करना उन्हें अंदर तक तोड़ सकता है. माता-पिता अगर उनकी भावनाओं को छोटी बात कहकर टाल देते हैं तो बच्चियां खुद को अकेला महसूस करने लगती हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि बेटियों को खुलकर अपनी इमोशनल व्यक्त करने का मौका देना चाहिए.
लड़कियों में क्यों रहता है डर?
किशोर लड़कियों के मन में एक डर यह भी रहता है कि अगर वे परफेक्ट नहीं रहीं तो शायद लोग उनसे प्यार नहीं करेंगे. यही डर कई बार गुस्से, ओवरथिंकिंग और इमोशनल टूटन के रूप में सामने आता है. ऐसे समय में बेटियों को भाषण नहीं बल्कि भरोसे और भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है. एक्सपर्ट का कहना है कि माता-पिता अगर कठिन समय में शांत रहकर अपनी बेटियों का साथ दें, तो बच्चियां भावनाओं को बेहतर तरीके से संभालना सीखती हैं और भविष्य में ज्यादा आत्मविश्वासी बनती हैं.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>High Protein Lunch Box: वजन घटाने वालों के लिए 5 आसान हाई प्रोटीन लंच बॉक्स, ऑफिस ले जाने के लिए हैं बेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ High Protein Lunch Box: वजन घटाने वालों के लिए 5 आसान हाई प्रोटीन लंच बॉक्स, ऑफिस ले जाने के लिए हैं बेस्ट ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 21:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Bel Ka Sharbat: कम चीनी में घर पर ऐसे बनाएं बेल का मीठा शरबत, आसपास भी नहीं फटकेगी गर्मी</title>
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        <description><![CDATA[ Bel Ka Sharbat: इस समय सुबह से ही लू चलने लग रही है, 10 बजे के बाद से ही सड़कों पर धूप के कारण सन्नाटा छा जाता है. ऐसी गर्मी से परेशान लोग बदन को ठंडा रखने के लिए कोल्ड ड्रिंक, छाछ, शरबत सब चीजें पी रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक देसी बेल का शरबत आपको पूरे दिन ठंडक दे सकता है. साथ ही यह शरबत आपके पेट और पाचन के लिए भी फायदेमंद है.&amp;nbsp;
हम जब भी अपने बुजुर्गों के पास बैठते थे तो वह हमेशा बताते थे कि गर्मी में बेल का शरबत शरीर को ठंडा रखता है और यह बात सही भी निकली. डॉक्टर भी इस बात को सही बताते हैं और इस बेल के शरबत के फायदे भी गिनाते हैं. आइए जानते हैं इसके कितने सारे फायदे हैं...
कम चीनी में ऐसे बनाएं बेल का शरबत
बेल का शरबत बहुत आसानी से बन भी जाता है. इसको बनाने के लिए बस चाहिए पके हुए बेल, ठंडा पानी और गुड़ या चीनी. सबसे पहले पके हुए बेल के अंदर के गुदे को निकाल लीजिए फिर इसे अच्छे से पानी में मिला कर छान लें और बस मिलाएं स्वाद अनुसार चीनी या गुड और तैयार है आपका देसी बेल का शरबत. इस बेल के शरबत को कम चीनी या बिना चीनी के भी बनाया जा सकता है. चीनी की जगह गुड़ को इसमें डालकर इसको और हेल्दी बनाया जा सकता है. कोल्ड ड्रिंक जिसमें चीनी भरी हुई होती है, उसकी जगह इसको पीयें तो ज्यादा फायदा होगा शरीर ठंडा और स्वस्थ दोनों रहेगा.
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बेल के शरबत के जबरदस्त फायदे

बेल के शरबत को गर्मियों में पीने से शरीर ठंडा रहता है.
पेट के पाचन को सही रखता है और खराब पेट को सही भी करता है.
इसकी ठंडी तासीर के कारण लू से बचाता है.
बेल में विटामिन C और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने में मदद भी करते हैं.
बेल का जूस ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद कर सकता है. हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को चीनी कम डालकर या डॉक्टर की सलाह से इसका सेवन पीना चाहिए.

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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Summer Health Tips: गर्मी में Energy Drink बना चीनी वाला दूध, आयुष मंत्रालय ने बताया हीटवेव से बचने का देसी नुस्खा⁩ </title>
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        <description><![CDATA[ Summer Health Tips: देश के कई राज्यों में इस समय तेज गर्मी और हीटवेव का असर देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, 25 मई से 2 जून तक नौतपा रहने वाला है. इस दौरान सूरज की गर्मी सबसे ज्यादा मानी जाती है और तापमान कई इलाकों में 45 डिग्री के पार जा सकता है. इसी को देखते हुए आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए खास सलाह जारी की है.
मंत्रालय ने शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखने के लिए कई देसी उपाय बताए हैं. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा चीनी मिलाकर दूध पीने की सलाह की हो रही है. मंत्रालय का कहना है कि यह शरीर को ऊर्जा देने और पानी की कमी से बचाने में मदद कर सकता है. इसके अलावा छाछ, नारियल पानी, नींबू पानी, सत्तू और मौसमी फलों को भी गर्मी से राहत देने वाला बताया गया है.&amp;nbsp;
चीनी वाला दूध क्यों माना जा रहा फायदेमंद
तेज गर्मी में शरीर से पसीने के जरिए पानी और जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं. इससे कमजोरी, थकान और चक्कर जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, दूध में कैल्शियम, पोटैशियम, प्रोटीन और पानी जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देने में मदद करते हैं. वहीं चीनी तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है. इसी वजह से आयुष मंत्रालय ने गर्मी के दौरान चीनी वाला दूध पीने की सलाह दी है. खासकर नौतपा के दिनों में जब लू चलने का खतरा ज्यादा रहता है, तब यह शरीर को थोड़ी राहत दे सकता है. कुछ डॉक्टरों का कहना है कि ठंडा दूध शरीर को अंदर से ठंडक देने में मदद करता है और कमजोरी कम कर सकता है. आयुर्वेद में भी दूध को शरीर को शांत रखने वाला माना गया है.&amp;nbsp;
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एक्सपर्ट्स ने दी सावधानी बरतने की सलाह
हालांकि, कई डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा है कि चीनी वाला दूध हर व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकता. जिन लोगों को डायबिटीज, मोटापा या पेट से जुड़ी परेशानी है, उन्हें ज्यादा चीनी लेने से बचना चाहिए. कुछ लोगों को दूध पचाने में भी दिक्कत होती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे सिर्फ एक घरेलू उपाय की तरह अपनाना चाहिए, न कि हीटवेव से बचने का पूरा इलाज समझना चाहिए. साथ ही डॉक्टरों ने ORS, नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी जैसे ड्रिंक्स को भी जरूरी बताया है. उनका कहना है कि गर्मी में सबसे जरूरी है शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी न होने देना. इसलिए सिर्फ चीनी वाले दूध पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित खानपान और ज्यादा पानी पीना जरूरी है.&amp;nbsp;
नौतपा में ऐसे रखें अपनी सेहत का ध्यान
आयुष मंत्रालय ने लोगों को दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है. खासकर नौतपा के दौरान लू लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसके साथ ही हल्के सूती कपड़े पहनने, ज्यादा पानी पीने और तला-भुना खाना कम खाने की सलाह भी दी गई है. मंत्रालय के अनुसार, तरबूज, खीरा, खरबूजा, बेल का शरबत और सत्तू जैसे देसी पेय शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं. वहीं बच्चों और बुजुर्गों को इस दौरान ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत है क्योंकि उन पर गर्मी का असर जल्दी पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही खानपान और सावधानी रखी जाए तो नौतपा की तेज गर्मी से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Extreme Heatwave: नौतपा में किस वक्त घर से निकलना बेहद खतरनाक, सेहत को क्या हो सकता है नुकसान?</title>
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        <description><![CDATA[ Extreme Heatwave:&amp;nbsp; 25 मई से नौतपा शुरू होने जा रहा है, जो 2 जून तक चलेगा. इन नौ दिनों को साल का सबसे गर्म समय माना जाता है. इस दौरान सूरज की गर्मी बहुत तेज हो जाती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है और लू चलने का खतरा बढ़ जाता है. मौसम विभाग के अनुसार, नौतपा के नौ दिनों में तापमान काफी ऊपर चला जाता है, जिससे लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है.
डॉक्टरों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा के दौरान दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक घर से बाहर निकलना सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है. इस समय धूप बहुत तेज होती है और शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होने लगता है. अगर जरूरी काम न हो तो लोगों को इस समय घर के अंदर रहने की सलाह दी जा रही है. बाहर निकलते समय सिर और चेहरे को ढकना भी जरूरी बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, नौतपा के दौरान ज्यादा देर धूप में रहने से हीटस्ट्रोक, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं.&amp;nbsp;
तेज धूप से शरीर को क्या नुकसान हो सकता है
नौतपा के दौरान शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है. अगर शरीर को समय पर पानी और ठंडक नहीं मिले तो हीटस्ट्रोक का खतरा हो सकता है. इसके कारण तेज सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी और बेहोशी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कई बार हालत ज्यादा खराब होने पर व्यक्ति की जान तक खतरे में पड़ सकती है. डॉक्टरों के अनुसार, लगातार धूप में रहने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है. यही वजह है कि लोग जल्दी थकने लगते हैं. ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों पर गर्मी का असर ज्यादा होता है. साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा चक्कर आए या शरीर बहुत गर्म लगे तो उसे तुरंत छांव में ले जाकर पानी या ORS देना चाहिए.&amp;nbsp;
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नौतपा में खुद को कैसे रखें सुरक्षित
विशेषज्ञों के अनुसार नौतपा के दौरान खानपान और रोजमर्रा की आदतों का भी खास ध्यान रखना जरूरी है. साथ ही घर से खाली पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए क्योंकि इससे लू लगने का खतरा बढ़ जाता है. शरीर को ठंडा रखने के लिए तरबूज, खीरा, खरबूजा, दही और छाछ जैसी चीजें फायदेमंद मानी गई हैं. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, बेल का शरबत और आम पन्ना जैसे देसी ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. जिसमे डॉक्टर हल्के और सूती कपड़े पहनने की सलाह देते हैं ताकि शरीर में हवा आसानी से पहुंच सके. ऐसे में जरूरी है की धूप में निकलते समय टोपी, गमछा या छाता इस्तेमाल करें. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए और मिट्टी के घड़े का पानी ज्यादा अच्छा माना जाता है.&amp;nbsp;
लापरवाही पड़ सकती है भारी
नौतपा के दौरान छोटी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि दोपहर के समय भारी काम करने और ज्यादा देर धूप में रहने से बचना चाहिए. साथ ही ऑयली और मसालेदार खाना भी शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है. वही अगर किसी को लगातार कमजोरी, उल्टी, तेज बुखार या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार नौतपा के दिनों में सबसे जरूरी है शरीर में पानी की कमी न होने दें और तेज धूप से बचें. सही खानपान, पर्याप्त पानी और थोड़ी सावधानी से ही इस भीषण गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Extreme, Heatwave:, नौतपा, में, किस, वक्त, घर, से, निकलना, बेहद, खतरनाक, सेहत, को, क्या, हो, सकता, है, नुकसान</media:keywords>
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        <title>Summer Stomach Infection: तेज गर्मी के बीच बढ़े पेट से जुड़ी बीमारी के मामले, अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की भीड़</title>
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        <description><![CDATA[ Summer Stomach Infection: देश के कई हिस्सों में इस समय इतनी तेज गर्मी पड़ रही है कि लोगों का जीना मुश्किल हो गया है. कई शहरों में तापमान 40 से 46 डिग्री तक पहुंच चुका है. डॉक्टरों का कहना है कि इसी गर्मी की वजह से पेट से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं. उनका कहना हैं कि अस्पतालों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है.
दरअसल, गर्मी में खाना जल्दी खराब हो जाता है और लोग कई बार बाहर का या खुला खाना खा लेते हैं, जिससे पेट में इंफेक्शन हो जाता है. इसके अलावा लोग प्यास बुझाने के लिए कहीं का भी पानी पी लेते हैं, जो कई बार साफ नहीं होता और बीमारी की बड़ी वजह बन जाता है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ जाता है गर्मी में पेट खराब होने का खतरा?
डॉक्टरों के मुताबिक, तेज गर्मी और उमस में वायरस और बैक्टीरिया ज्यादा तेजी से फैलते हैं. यही कारण है कि इस मौसम में &amp;ldquo;स्टमक फ्लू&amp;rdquo; या पेट का इंफेक्शन बढ़ जाता है. इस बीमारी में पेट और आंतों में सूजन आ जाती है, जिससे खाना सही से पच नहीं पाता. इसके कारण दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़ और तेज दर्द जैसी परेशानी होने लगती है. वही कई बार तो लोग बाहर रखा हुआ खाना या लंबे समय तक रखा फल-सब्जियां खा लेते हैं, जो गर्मी में जल्दी खराब हो जाती हैं. यही छोटी-छोटी लापरवाही लोगों को बीमार बना देती है. साथ ही बच्चों और बुजुर्गों को इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है क्योंकि उनका शरीर जल्दी कमजोर हो जाता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः Thyroid In Children: छोटे बच्चों का बढ़ता वजन न करें अनदेखा, हो सकती है यह खतरनाक बीमारी
कब समझें कि तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?
डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी को लगातार उल्टी हो रही हो, शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी लग रही हो या पानी पीने के बाद भी आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए. अगर उल्टी या दस्त में खून दिखाई दे, तेज बुखार आए या शरीर में पानी की कमी महसूस होने लगे तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. छोटे बच्चों में यह बीमारी ज्यादा खतरनाक हो सकती है क्योंकि उनके शरीर में पानी बहुत जल्दी कम हो जाता है. कई लोग सोचते हैं कि पेट खराब होना आम बात है, लेकिन तेज गर्मी में यह परेशानी गंभीर भी हो सकती है. इसलिए समय रहते इलाज करवाना बहुत जरूरी है.&amp;nbsp;
गर्मी में खुद को बीमार होने से कैसे बचाएं?
डॉक्टरों की सलाह है कि इस मौसम में सबसे ज्यादा ध्यान साफ पानी और खाने पर देना चाहिए. हमेशा ताजा खाना खाएं और बाहर का खुला खाना खाने से बचें. &amp;nbsp;खाने से पहले और टॉयलेट के बाद हाथों को अच्छे से साबुन से धोना बहुत जरूरी है. सिर्फ सैनिटाइजर के भरोसे नहीं रहना चाहिए क्योंकि कई वायरस उस पर असर नहीं करते. साथ ही शरीर में पानी की कमी न हो इसलिए खूब पानी, ORS, नींबू पानी और नारियल पानी पीते रहें. लंबे समय तक बाहर रखा फल, सब्जियां और खाना खाने से बचें. थोड़ी सी सावधानी और साफ-सफाई की आदत आपको इस भीषण गर्मी में पेट की बीमारियों से बचा सकती है.
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        <pubDate>Sun, 24 May 2026 05:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Summer, Stomach, Infection:, तेज, गर्मी, के, बीच, बढ़े, पेट, से, जुड़ी, बीमारी, के, मामले, अस्पतालों, में, बढ़, रही, मरीजों, की, भीड़</media:keywords>
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        <title>Africa Ebola outbreak: अफ्रीका में बढ़ते Ebola केसों के बीच भारत की एंट्री, Bundibugyo वैक्सीन बनाने में जुटा सीरम इंस्टीट्यूट</title>
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        <description><![CDATA[ Africa Ebola outbreak: अफ्रीका एक बार फिर इबोला वायरस के बड़े खतरे का सामना कर रहा है. इस बार चिंता की वजह इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन है, जिसके लिए अभी तक कोई मंजूर वैक्सीन मौजूद नहीं है. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में तेजी से बढ़ते मामलों ने दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, सैकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हुई है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह वायरस अब घनी आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहा है, जिससे दूसरे देशों में फैलने का खतरा भी बढ़ गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अफ्रीका CDC ने इस स्थिति को गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल माना है. अभी तक इबोला के जिस जेरे स्ट्रेन के लिए वैक्सीन मौजूद है, वह बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पर कितना असर करेगी, यह साफ नहीं है. &amp;nbsp;इसी कारण दुनिया अब नई वैक्सीन तैयार करने की दौड़ में जुट गई है.&amp;nbsp;
वैक्सीन बनाने की दौड़ में भारत की बड़ी भूमिका
इस मुश्किल समय में भारत की बड़ी वैक्सीन कंपनी Serum Institute of India अहम भूमिका निभाने जा रही है. पुणे स्थित यह कंपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और CEPI के साथ मिलकर नई वैक्सीन बनाने की तैयारी कर रही है. यह वैक्सीन ChAdOx प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी, जिसका इस्तेमाल कोविड-19 के समय कोविशील्ड वैक्सीन में भी किया गया था. सीरम इंस्टीट्यूट का कहना है कि उसके पास पहले से ऐसी तकनीक और मशीनें मौजूद हैं, जिनकी मदद से बहुत कम समय में वैक्सीन की खुराक तैयार की जा सकती है.
कंपनी के अनुसार, अगर सब कुछ सही रहा तो 20 से 30 दिनों के अंदर शुरुआती उत्पादन शुरू किया जा सकता है. कोविड महामारी के दौरान भारत ने जिस तरह दुनिया को बड़ी मात्रा में वैक्सीन दी थी, उसी तरह अब इबोला संकट में भी भारत एक भरोसेमंद साथी बनकर सामने आ सकता है. साथ ही यह भारत की मेडिकल और बायोटेक ताकत को भी दिखाता है.&amp;nbsp;
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वैज्ञानिकों के सामने समय और सुरक्षा की चुनौती
फिलहाल वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की है. बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए दो वैक्सीन उम्मीदवारों पर काम हो रहा है. पहला rVSV तकनीक पर आधारित है, जो पहले से मौजूद Ervebo वैक्सीन जैसी तकनीक का इस्तेमाल करता है, लेकिन इसकी समस्या यह है कि इसकी खुराक अभी उपलब्ध नहीं है और इसे तैयार करने में कई महीने लग सकते हैं. दूसरी तरफ ChAdOx प्लेटफॉर्म की खासियत इसकी तेज उत्पादन क्षमता है क्योंकि कोविड के समय इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो चुका है, इसलिए इसकी फैक्ट्री व्यवस्था पहले से तैयार है. हालांकि इसकी भी एक कमजोरी है. अभी तक इस वैक्सीन का जानवरों या इंसानों पर बुंडीबुग्यो वायरस के खिलाफ पूरा परीक्षण नहीं हुआ है. ऐसे में स्वास्थ्य एजेंसियों को यह फैसला बहुत सोच-समझकर लेना होगा कि तेज़ी को प्राथमिकता दी जाए या लंबे परीक्षण का इंतजार किया जाए. यह फैसला आने वाले समय में लाखों लोगों की सुरक्षा तय कर सकता है.&amp;nbsp;
दुनिया की उम्मीद बना भारत
अफ्रीका में फैल रहा यह इबोला संकट पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि महामारी कभी भी वापस आ सकती है. साथ ही संघर्ष और गरीबी से जूझ रहे इलाकों में बीमारी को रोकना और भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे समय में भारत की एंट्री उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है. अगर सीरम इंस्टीट्यूट और उसके सहयोगी जल्द सुरक्षित और असरदार वैक्सीन तैयार करने में सफल होते हैं, तो इससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है. साथ ही यह साबित होगा कि भारत केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के स्वास्थ्य संकट में मदद करने की क्षमता रखता है. आने वाले कुछ महीने बेहद अहम होंगे, क्योंकि यही तय करेंगे कि दुनिया इस नए इबोला खतरे को कितनी तेजी से रोक पाती है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>AC And Heatwave Health Risks: AC से निकलते ही धूप में जाना पड़ सकता है भारी, अचानक तापमान बदलने से पड़ सकते हैं बीमार</title>
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        <description><![CDATA[ Why Stepping Out Of AC Into Heat Can Make You Sick: भीषण गर्मी के बीच एसी अब लोगों की जरूरत बन चुका है. घर हो, ऑफिस हो या सफर, ज्यादातर लोग घंटों एयर कंडीशनर में समय बिता रहे हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक एसी में रहने के बाद अचानक तेज धूप और गर्म हवा में निकलना शरीर पर भारी पड़ सकता है. यही वजह है कि इन दिनों कई लोग गले में खराश, सूखी खांसी, सिरदर्द, थकान और चक्कर जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं.
क्यों होता है असर?
अपोलो क्लीनिक के कंसल्टेंसेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. निलेश सोनावणे की एक रिपोर्ट के अनुसार, लोग अक्सर इन लक्षणों को वायरल इंफेक्शन या समर कोल्ड समझ लेते हैं, जबकि कई मामलों में इसकी वजह एसी से बदलने वाली इनडोर एयर क्वालिटी और हवा में नमी की कमी होती है. डॉ के मुताबिक, &quot;एयर कंडीशनर कमरे की गर्मी और नमी दोनों को कम करता है. इससे कमरे की हवा काफी ड्राई हो जाती है, जिसका असर सीधे गले और रेस्पिरेटरी सिस्टम पर पड़ता है.&quot; एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक एसी में बैठने के बाद जैसे ही व्यक्ति बाहर निकलता है, उसे तेज गर्म हवा और तापमान में अचानक बदलाव का सामना करना पड़ता है. यह बदलाव शरीर के लिए किसी झटके से कम नहीं होता. खासकर उन लोगों के लिए जो ऑफिस में घंटों एसी में बैठते हैं और फिर सीधे दोपहर की धूप में बाहर निकलते हैं.
हमें किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है?
डॉक्टरों के मुताबिक, अचानक तापमान बदलने से शरीर को खुद को एडजस्ट करने में समय लगता है। इसी दौरान डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर और कई बार हीट एक्सॉशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जिन लोगों को पहले से अस्थमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी दिक्कतें हैं, उनके लिए यह स्थिति और ज्यादा परेशानी बढ़ा सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि एसी से निकलते ही तुरंत धूप में जाने से बचना चाहिए, अगर संभव हो तो पहले कुछ मिनट सामान्य तापमान वाली जगह पर रुकें, ताकि शरीर धीरे-धीरे बाहर के मौसम के अनुसार खुद को तैयार कर सके.
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किन चीजों का रखना चाहिए ध्यान?
शरीर को हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी माना जाता है. क्योंकि एसी में लंबे समय तक रहने से शरीर और त्वचा दोनों में ड्राईनेस बढ़ जाती है. कई लोगों को इसका एहसास भी नहीं होता और बाहर निकलते ही शरीर में पानी की कमी महसूस होने लगती है. डॉक्टरों का कहना है कि दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए. नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों का जूस शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.
एक्सपर्ट यह भी सलाह देते हैं कि गर्मियों में कॉटन के हल्के और ढीले कपड़े पहनें. इसके साथ ही बाहर निकलते समय छाता, टोपी या स्कार्फ का इस्तेमाल करें. वहीं तेज धूप से आने के तुरंत बाद बर्फ जैसा ठंडा पानी या ड्रिंक पीने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे गले में जलन और परेशानी बढ़ सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:33 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bill Gates Favourite Indian Food: बिल गेट्स को दीवाना बना चुकी है ये इंडियन डिश, नाम सुनकर आ जाएगा मुंह में पानी, जानें रेसिपी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bill-gates-favourite-indian-food-बिल-गेट्स-को-दीवाना-बना-चुकी-है-ये-इंडियन-डिश-नाम-सुनकर-आ-जाएगा-मुंह-में-पानी-जानें-रेसिपी</link>
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        <description><![CDATA[ Why Bill Gates Loves Chicken Tikka Masala: भारतीय डिशेज दुनियाभर में पसंद की जाती हैं, इसका एक उदाहरण यह है कि जब बिल गेट्स से साल 2024 में IIT दिल्ली के एक कार्यक्रम के दौरान उनका पसंदीदा भारतीय खाना पूछा गया, तो उन्होंने बिना सोचे तुरंत जवाब दिया कि चिकन टिक्का मसाला. उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, क्योंकि यह डिश दुनियाभर में भारतीय खाने की सबसे पहचान वाली डिशों में गिनी जाती है.&amp;nbsp;
क्या होता है चिकन टिक्का मसाला?
कई लोग चिकन टिक्का मसाला को बटर चिकन समझ लेते हैं, लेकिन दोनों का स्वाद और बनाने का तरीका काफी अलग होता है. चिकन टिक्का मसाला अपनी स्मोकी खुशबू, मसालों के गहरे स्वाद और क्रीमी ग्रेवी की वजह से दुनिया के कई देशों में बेहद लोकप्रिय हो चुका है. लंदन से लेकर न्यूयॉर्क तक, यह डिश भारतीय रेस्तरां के मेन्यू में आसानी से दिखाई देती है.
IIT दिल्ली में हुए एक रैपिड फायर सेशन के दौरान बिल गेट्स से टेक्नोलॉजी, फिल्मों, ट्रैवल और खाने को लेकर कई सवाल पूछे गए. जब उनसे पसंदीदा भारतीय डिश के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पहले मजाक में चाय कहा, लेकिन फिर चिकन टिक्का मसाला का नाम लिया. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस जवाब को लेकर काफी चर्चा की.&amp;nbsp;
क्या है चिकन टिक्का मसाले की कहानी?
चिकन टिक्का मसाला की सबसे दिलचस्प बात इसकी कहानी है. इस डिश की असली शुरुआत कहां से हुई, इसे लेकर आज भी बहस होती है. कुछ लोग इसे भारतीय डिश मानते हैं, तो कुछ का कहना है कि इसका आधुनिक रूप ब्रिटेन में तैयार हुआ. एक मशहूर कहानी के मुताबिक, ब्रिटेन में काम करने वाले दक्षिण एशियाई शेफ ने पारंपरिक चिकन टिक्का में टमाटर और क्रीम से बनी ग्रेवी जोड़ दी, ताकि स्थानीय लोगों के स्वाद के मुताबिक डिश को थोड़ा ज्यादा क्रीमी बनाया जा सके. यही प्रयोग बाद में इतना पसंद किया गया कि चिकन टिक्का मसाला दुनिया की सबसे लोकप्रिय भारतीय डिशों में शामिल हो गया.&amp;nbsp;
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क्या होती है इसकी खासियत?
आज यह डिश यूरोप, अमेरिका, मिडिल ईस्ट और एशिया के कई देशों में बड़े चाव से खाई जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ग्रिल्ड चिकन का स्मोकी स्वाद, मसालों की खुशबू और क्रीमी ग्रेवी का ऐसा संतुलन होता है, जो लगभग हर तरह के स्वाद पसंद करने वाले लोगों को पसंद आ जाता है. भारतीय खाना आज दुनिया की सबसे प्रभावशाली फूड कल्चर में गिना जाता है. बिरयानी, समोसा, डोसा, नान और टिक्का मसाला जैसी डिशें अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहीं. अलग-अलग देशों में इन्हें स्थानीय स्वाद के हिसाब से बदला जरूर गया, लेकिन भारतीय मसालों की पहचान अब भी बरकरार है.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:26 +0530</pubDate>
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        <title>Thyroid In Children: छोटे बच्चों का बढ़ता वजन न करें अनदेखा, हो सकती है यह खतरनाक बीमारी</title>
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        <description><![CDATA[ Can Sudden Weight Gain In Children Be A Sign Of Thyroid Disease: आजकल छोटे बच्चों में तेजी से बढ़ता वजन कई माता-पिता के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है. अक्सर लोग इसे ज्यादा खाना, जंक फूड या कम खेलकूद का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार अचानक बढ़ता वजन थायरॉइड जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. खासकर अगर बच्चे का वजन बढ़ने के साथ थकान, सुस्ती और कमजोरी जैसी समस्याएं भी दिखाई दें, तो सावधान होने की जरूरत है.
क्या होता है थायरॉइड का काम?
थायरॉइड गले के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्लैंड होती है, जो शरीर के कई जरूरी कामों को कंट्रोल करती है. यह ग्लैंड ऐसे हार्मोन बनाती है, जो बच्चों की ग्रोथ, दिमाग के विकास और शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं. जब यह ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती, तब शरीर में कई तरह की दिक्कतें शुरू हो सकती हैं.बच्चों में थायरॉइड की सबसे आम समस्या हाइपोथायरॉइडिज्म मानी जाती है. इसका मतलब है कि थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन बना रही है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा कारण हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस नाम की ऑटोइम्यून बीमारी हो सकती है, जो कई बार परिवार में पहले से मौजूद रहती है.&amp;nbsp;
जन्म के समय भी हो सकती है दिक्कत
डॉ. नईम मित्रे, बाल रोग एंडोक्रिनोलॉजी बताते हैं कि जन्म के समय भी कुछ बच्चों में यह बीमारी हो सकती है, जिसे जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है. वहीं कुछ बच्चों में यह समस्या बड़े होने के साथ विकसित होती है. ऐसे बच्चों में धीरे-धीरे वजन बढ़ना, हमेशा थकान महसूस होना, कब्ज, ठंड ज्यादा लगना, बाल सूखना और पढ़ाई में ध्यान कम लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
क्या होता है दिक्कत?
डॉक्टरों के अनुसार, सिर्फ वजन बढ़ना हमेशा थायरॉइड का संकेत नहीं होता. लेकिन अगर बच्चा मोटापे के साथ सुस्त रहने लगे या उसकी ग्रोथ प्रभावित हो रही हो, तो जांच कराना जरूरी हो जाता है. कई बार गले में सूजन या थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ना भी दिखाई दे सकता है. इसकी पहचान एक साधारण ब्लड टेस्ट से की जा सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि बच्चों में हाइपरथायरॉइडिज्म की समस्या भी हो सकती है. इसमें थायरॉइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है. ऐसे बच्चों में तेजी से वजन कम होना, ज्यादा घबराहट, चिड़चिड़ापन, बार-बार दस्त होना और आंखों का बाहर की तरफ उभरना जैसे लक्षण दिख सकते हैं.
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अगर इलाज न मिले तो क्या हो सकती है दिक्कत?
अगर समय पर इलाज न मिले, तो थायरॉइड बच्चों की शारीरिक और मानसिक ग्रोथ दोनों को प्रभावित कर सकता है. गंभीर मामलों में पढ़ाई पर असर पड़ना, लंबाई कम रह जाना और लगातार कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. डॉक्टरों का कहना है कि थायरॉइड का इलाज संभव है. ज्यादातर मामलों में बच्चों को रोज एक दवा दी जाती है, जिससे हार्मोन संतुलित रहने लगते हैं. इसलिए अगर बच्चे का वजन अचानक बढ़ रहा है या शरीर में असामान्य बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Diabetes Prevention Tips: फीकी चाय पीकर खुद को सेफ समझने वाले सावधान, आपकी ये 3 आदतें दे रही हैं डायबिटीज को दावत</title>
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        <description><![CDATA[ Can You Get Diabetes Even Without Eating Sugar: आजकल बहुत लोग सुबह बिना चीनी वाली चाय या कॉफी पीकर खुद को हेल्दी मानने लगे हैं. उन्हें लगता है कि अगर चीनी छोड़ दी, तो डायबिटीज का खतरा भी खत्म हो जाएगा. लेकिन मुंबई के सैफी अस्पताल की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शहला शेख कहती हैं कि हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है. सिर्फ चाय से चीनी हटाने भर से डायबिटीज नहीं रुकती. कई लोग बिना चीनी की चाय पीते हुए भी इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं.&amp;nbsp;
क्या चाय छोड़ देने से बन जाता है काम?
डॉ. शहला शेख ने TOI को बताया कि कई लोगों को लगता है कि चाय और कॉफी में चीनी नहीं लेने से वे डायबिटीज से सुरक्षित रहेंगे. जबकि सिर्फ इतना करना काफी नहीं है. कुछ दूसरी आदतें ब्लड शुगर को इससे कहीं ज्यादा प्रभावित करती हैं. असल खतरा हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में छिपा है. सुबह से शाम तक कुर्सी पर बैठे रहना, कम नींद लेना, तनाव में रहना और प्रोसेस्ड फूड खाना धीरे-धीरे शरीर को अंदर से बीमार बना रहा है. ऑफिसों में घंटों लैपटॉप के सामने बैठना अब सामान्य हो गया है. लोग 8 से 10 घंटे तक मुश्किल से अपनी सीट छोड़ते हैं. यही आदत शरीर को इंसुलिन के प्रति कमजोर बनाने लगती है.
क्या बैठे रहने से भी बढ़ता है डायबिटीज का खतरा?
रिसर्च बताती है कि रोज लंबे समय तक बैठे रहने से डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ता है. जब शरीर एक्टिव नहीं रहता, तो मांसपेशियां ग्लूकोज को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पातीं. इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे ब्लड शुगर कंट्रोल से बाहर जाने लगता है. डॉ. शहला शेख के मुताबिक &quot;लगातार बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का बड़ा कारण बन चुकी है. यह आदत स्मोकिंग जितनी नुकसानदायक हो सकती है.&quot;
नींद की कमी के चलते क्या होता है दिक्कत?
सिर्फ बैठे रहना ही नहीं, नींद की कमी भी शरीर पर गहरा असर डालती है. आज ज्यादातर लोग देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या काम करते रहते हैं. फिर सुबह जल्दी उठ जाते हैं. शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता. इसका सीधा असर ब्लड शुगर पर पड़ता है. स्टडीज में पाया गया है कि कम नींद लेने से इंसुलिन सेंसिटिविटी घट जाती है. यानी शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता. इसके साथ ही शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने लगते हैं, जो ब्लड शुगर को और बिगाड़ देते हैं.
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बिना मीठा खाए क्यों होती है दिक्कत?
तनाव भी डायबिटीज का बड़ा कारण बनता जा रहा है. लगातार तनाव में रहने से शरीर ज्यादा ग्लूकोज रिलीज करता है. यही वजह है कि कई लोग ज्यादा मीठा खाए बिना भी हाई ब्लड शुगर की समस्या से जूझने लगते हैं. इसके अलावा बाजार में मिलने वाले शुगर फ्री प्रोडक्ट्स भी लोगों को भ्रमित कर रहे हैं. पैकेट पर शुगर फ्री लिखा होने का मतलब यह नहीं कि वह हेल्दी है. कई ऐसे प्रोडक्ट्स में रिफाइंड मैदा, प्रोसेस्ड ऑयल और हाई कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं, जो ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं.
एक्सपर्ट का कहना है कि डायबिटीज से बचने के लिए सिर्फ चीनी कम करना काफी नहीं है. रोज थोड़ा चलना, हर घंटे सीट से उठना, फाइबर और प्रोटीन वाला खाना खाना, तनाव कम करना और 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेना ज्यादा जरूरी है. क्योंकि असली फर्क सिर्फ चाय में चीनी छोड़ने से नहीं, बल्कि पूरी लाइफस्टाइल बदलने से पड़ता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Calorie in Roti: गेहूं से लेकर बाजरे तक… कौन सी रोटी में कितनी कैलोरी? जानें अपनी थाली का हेल्थ सीक्रेट</title>
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        <description><![CDATA[ Calorie in Roti: भारतीय खाने में रोटी सबसे जरूरी चीजों में से एक मानी जाती है. लगभग हर घर में दिन और रात के खाने में रोटी जरूर बनती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर आटे की रोटी में कैलोरी अलग-अलग होती है? यही वजह है कि आजकल लोग अपनी हेल्थ और फिटनेस के हिसाब से अलग-अलग आटे की रोटी खाना पसंद कर रहे हैं. कोई वजन घटाने के लिए रागी की रोटी खाता है तो कोई ज्वार और बाजरा. ऐसे में कई लोगों के मन ये सवाल आता है के कि कौन सी रोटी शरीर को ज्यादा एनर्जी देती है और किसमें कम कैलोरी होती है.&amp;nbsp;
गेहूं और ज्वार की रोटी क्यों मानी जाती है हेल्दी?
सबसे ज्यादा खाई जाने वाली गेहूं की रोटी में फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जिसमें करीब 40 ग्राम की एक गेहूं की रोटी में लगभग 120 कैलोरी होती है. यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करती है और शरीर को लगातार एनर्जी देती है. वहीं ज्वार की रोटी में करीब 100 कैलोरी होती है. ज्वार ग्लूटेन-फ्री अनाज माना जाता है और इसमें कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. यही वजह है कि डाइजेशन ठीक रखने और हल्का खाना चाहने वाले लोग ज्वार की रोटी को अपनी डाइट में शामिल करते हैं.&amp;nbsp;
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रागी, बाजरा और मक्के की रोटी में कितना फर्क?
अगर कम कैलोरी वाली रोटी की बात करें तो रागी की रोटी सबसे आगे मानी जाती है, जिसमें लगभग 40 ग्राम रागी रोटी में करीब 90 कैलोरी होती है. इसमें कैल्शियम और फाइबर भी भरपूर मात्रा में मिलता है, इसलिए इसे महिलाओं और बच्चों के लिए अच्छा माना जाता है. वहीं बाजरे की रोटी में करीब 105 कैलोरी होती है. बाजरा शरीर को ताकत देने के साथ आयरन की कमी दूर करने में भी मदद करता है. दूसरी तरफ मक्के की रोटी में लगभग 110 कैलोरी होती है. इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो आंखों के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. हालांकि गर्मियों में मक्के और बाजरे की रोटी ज्यादा खाने से बचने की सलाह भी दी जाती है क्योंकि इनकी तासीर गर्म मानी जाती है. &amp;nbsp;
बेसन की रोटी भी बन रही फिटनेस वालों की पसंद
आजकल जिम जाने वाले और फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोग बेसन की रोटी भी काफी पसंद कर रहे हैं. लगभग 40 ग्राम बेसन की रोटी में करीब 115 कैलोरी होती है. इसमें प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करता है. यही वजह है कि कई लोग अब नॉर्मल आटे की जगह हाई-प्रोटीन आटे और बेसन को अपनी डाइट में शामिल करते हैं. साथ ही &amp;nbsp;सोशल मीडिया पर भी लोग अलग-अलग तरह के हेल्दी आटे की रोटियों को लेकर काफी चर्चा कर रहे हैं.
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        <pubDate>Sat, 23 May 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Pregnancy Nutrition: प्रेग्नेंसी में खून और विटामिन की कमी बन रही साइलेंट किलर, भूलकर भी नजरअंदाज न करें ये लक्षण</title>
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        <description><![CDATA[ Signs Of Iron Deficiency During Pregnancy: मां बनना हर महिला के जीवन का बेहद खास अनुभव होता है. परिवार की खुशियां, नए मेहमान की तैयारी और चेहरे की चमक के बीच एक ऐसी समस्या भी छिपी रहती है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं जाता, वह है शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी. भारत में आज भी बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं आयरन, विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी से जूझ रही हैं. परेशानी की बात यह है कि इन कमियों के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं और ज्यादातर महिलाएं इन्हें सामान्य गर्भावस्था का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं. थकान, चक्कर आना, शरीर में दर्द, कमजोरी, नींद की परेशानी या मूड बदलना जैसे संकेत कई बार शरीर में पोषण की कमी की ओर इशारा करते हैं.&amp;nbsp;
प्रेग्नेंसी के दौरान न्यूट्रिशन की जरूरत क्यों नहीं?
स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रजनन आयु की महिलाओं में एनीमिया अब भी बेहद आम है और गर्भावस्था के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है. डॉ. श्वेता मेंदिरत्ता बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बड़े बदलाव होते हैं, इसलिए पोषण की जरूरत भी काफी बढ़ जाती है. लेकिन कई महिलाएं गर्भधारण से पहले ही कमजोर पोषण स्तर के साथ इस दौर में प्रवेश करती हैं. वर्षों तक गलत खानपान, तनाव, काम का दबाव और मासिक धर्म के दौरान खून की कमी शरीर को पहले से कमजोर बना देती है.&amp;nbsp;
प्रेग्नेंसी में किस चीज की होती है सबसे ज्यादा कमी?
आयरन की कमी गर्भवती महिलाओं में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली समस्या है. &amp;nbsp;गर्भावस्था में शरीर को बच्चे के विकास के लिए ज्यादा खून बनाना पड़ता है, जिससे आयरन की जरूरत बढ़ जाती है. आयरन की कमी से अत्यधिक थकान, सांस फूलना, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. गंभीर स्थिति में समय से पहले प्रसव और बच्चे का वजन कम होने का खतरा भी बढ़ जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, आयरन से भरपूर भोजन के साथ विटामिन सी लेना फायदेमंद हो सकता है. जैसे पालक पर नींबू डालना या दाल के साथ टमाटर खाना शरीर में आयरन के एब्जॉर्व को बेहतर बनाता है.
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धूप होने के बावजूद क्यों विटामिन की कमी?
भारत में भरपूर धूप होने के बावजूद विटामिन डी की कमी भी तेजी से बढ़ रही है. आधुनिक लाइफस्टाइल इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है. लोग ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर बिताते हैं, जिससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती. विटामिन डी बच्चे की हड्डियों के विकास, इम्युन सिस्टम और कैल्शियम के अब्जॉर्व के लिए बेहद जरूरी होता है. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि इसकी कमी गर्भावधि डायबिटीज और हाईबीपी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ और भारतीय मेडिकल संस्थानों की कई रिसर्च में गर्भवती महिलाओं में विटामिन डी की कमी को लेकर चिंता जताई गई है.&amp;nbsp;
इस बात का रखें ध्यान
वहीं विटामिन बी12 की कमी भी खासकर शाकाहारी महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है. यह विटामिन बच्चे के ब्रेन और नर्वस सिस्टम के विकास के लिए जरूरी माना जाता है. इसकी कमी से कमजोरी, याददाश्त कमजोर होना और शरीर में झुनझुनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि गर्भावस्था में सिर्फ ज्यादा खाना नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना ज्यादा जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Heatwave Risk: रात की गर्मी से बढ़ा बीमारियों का खतरा, दिल्ली में बढ़ रहे हार्ट के मरीज</title>
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        <description><![CDATA[ How Rising Night Temperatures Increase Disease Risk: दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में गर्मी इस बार सिर्फ दिन में ही नहीं, बल्कि रात में भी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. पहले जहां रात का समय शरीर को दिनभर की गर्मी से राहत देता था, वहीं अब बढ़ता तापमान रात में भी शरीर को आराम नहीं लेने दे रहा. डॉक्टरों और रिसर्चर्स का मानना है कि लगातार गर्म रातें अब दिल की बीमारियों, डिहाइड्रेशन और स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरे बढ़ाने लगी हैं.&amp;nbsp;
दिल्ली में पारा 45 पार
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं. लेकिन चिंता की बात सिर्फ दिन की तेज धूप नहीं है. एक्सपर्ट का कहना है कि रात में तापमान कम न होना शरीर के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है. सामान्य तौर पर रात में शरीर खुद को ठंडा करता है और दिनभर के तनाव से रिकवर करता है. लेकिन जब रात में भी गर्मी बनी रहती है, तो शरीर लगातार दबाव में रहता है.&amp;nbsp;
रात की गर्मी से क्या होता है नुकसान?
रिसर्च में सामने आया है कि गर्म रातें दिल और स्ट्रोक से जुड़ी मौतों का खतरा बढ़ा सकती हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से जुड़े स्टडी में पाया गया कि जब बेहद गर्म दिन के बाद रात भी असामान्य रूप से गर्म रहती है, तो शरीर को राहत नहीं मिल पाती और स्वास्थ्य जोखिम कई गुना बढ़ जाते हैं. खासकर स्ट्रोक और हार्ट डिजीज का खतरा अधिक देखा गया.&amp;nbsp;
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दिल्ली जैसे शहरों के लिए क्यों दिक्कत?
दिल्ली जैसे बड़े शहरों में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. कंक्रीट की इमारतें, कम हरियाली और खराब वेंटिलेशन रातभर गर्मी को फंसा कर रखते हैं. इसका असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ता है जो छोटे घरों या बिना एयर कंडीशनर वाले कमरों में रहते हैं. कई घरों में रात के समय भी तापमान 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहता है, जिससे नींद प्रभावित होती है और शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता.&amp;nbsp;
दिल्ली में क्यों बढ़ रही है दिक्कत?
दिल्ली के अस्पतालों में भी गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. डॉ. अरविंद कुमार अग्रवाल के मुताबिक, इमरजेंसी वार्ड में डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है. वहीं डॉ अतुल का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और दिल, फेफड़ों या किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. अब डॉक्टर सिर्फ दिन में धूप से बचने की नहीं, बल्कि रात में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने की भी सलाह दे रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी गर्मी को दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरों में शामिल किया है.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Drink: गर्मियों में घर पर ही बनाएं रुहअफजा जैसा शरबत, बगैर चीनी महीनों तक रहेगी मिठास</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Rooh Afza Style Sharbat At Home: गर्मियों का मौसम आते ही ठंडे और ताजगी भरे शरबत की याद सबसे पहले आती है. खासकर उत्तर भारत में रुहअफजा का नाम सुनते ही बचपन की गर्मियां, दोपहर की ठंडक और घर की रसोई की खुशबू याद आ जाती है. पहले हर घर में ठंडाई, आम पन्ना और रुहअफजा जैसे देसी ड्रिंक्स का अलग ही क्रेज हुआ करता था. आज भले ही बाजार में कोल्ड ड्रिंक्स की भरमार हो, लेकिन घर पर बने पारंपरिक शरबत का स्वाद अब भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है. &amp;nbsp;
अगर आप भी इस गर्मी कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वाद में बिल्कुल रुहअफजा जैसा लगे, लेकिन उसमें ज्यादा चीनी न हो और लंबे समय तक खराब भी न हो, तो घर पर आसानी से इसका हेल्दी वर्जन तैयार किया जा सकता है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती और इसका स्वाद बाजार वाले शरबत जैसा ही ताजगी भरा लगता है.&amp;nbsp;
घर पर कैसे कर सकते हैं तैयार?
घर पर तैयार किया गया यह शरबत गुलाब की खुशबू और ठंडक से भरपूर होता है. इसे बनाने के लिए गुलाब का अर्क, थोड़ा सा शहद या खजूर का सिरप, पानी और कुछ घरेलू चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कई लोग इसमें तुलसी के बीज या नींबू का रस मिलाकर भी इसका स्वाद बढ़ाते हैं. यही वजह है कि यह सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि गर्मी से राहत देने वाला पारंपरिक कूलर बन जाता है.&amp;nbsp;
मिठास का रखें ध्यान
इस शरबत की सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसकी मिठास अपने स्वाद के हिसाब से तय कर सकते हैं. अगर ज्यादा मीठा पसंद हो तो थोड़ा अधिक सिरप डाल सकते हैं और हल्का स्वाद चाहिए तो पानी की मात्रा बढ़ा सकते हैं. ठंडे पानी या दूध के साथ इसका स्वाद और भी शानदार हो जाता है. कुछ लोग इसमें वनीला आइसक्रीम डालकर इसे डेजर्ट ड्रिंक का रूप भी दे देते हैं.&amp;nbsp;
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शरबत बनाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
शरबत बनाते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जैसे इसे हमेशा ठंडे पानी के साथ तैयार करें, बर्फ सर्व करने से ठीक पहले डालें और सिरप को अच्छे से मिलाएं ताकि स्वाद हर घूंट में बराबर महसूस हो. अगर ज्यादा मात्रा में बनाकर रखना हो, तो इसे एयरटाइट बोतल में भरकर फ्रिज में स्टोर किया जा सकता है. सही तरीके से रखने पर इसकी मिठास और स्वाद कई दिनों तक बरकरार रहता है. &amp;nbsp;कई लोग इसे शाम की चाय की जगह भी इसे पीना पसंद करते हैं. सबसे खास बात यह है कि घर पर बना यह देसी ड्रिंक न सिर्फ गर्मी से राहत देता है, बल्कि पुराने स्वाद और यादों को भी ताजा कर देता है.
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        <pubDate>Fri, 22 May 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>House Party Drinks: रम विद हाजमोला और वोदका विद रसना... पीने के शौकीन गेस्ट को पिलाएं ये दो कॉकटेल, लूट लेंगे महफिल</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Homemade Cocktails For Guests: घर पर आए मेहमानों को हम अलग-अलग चीजें खाने-पीने को देते हैं, ताकि उनकी खातिरदारी में कोई कमी न रहे. हालांकि, इस दौरान जो गेस्ट ड्रिंक नहीं करते, उनको लेकर हमें उतनी परेशानी नहीं होती, लेकिन जो गेस्ट ड्रिंक करते हैं, उनको लेकर हमें यह सोचने के लिए मजबूर होना पड़ता है कि उन्हें क्या सर्व करें, जिससे उनका दिल खुश हो जाए. ऐसे में लोग कुछ नया, मजेदार और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला टेस्ट ट्राय करना चाहते हैं. यही वजह है कि इन दिनों रम विद हाजमोला और वोदका विद रसना जैसे अनोखे कॉकटेल तेजी से चर्चा में हैं.
रम विद हाजमोला, क्या है कमाल?
हाजमोला का खट्टा-चटपटा स्वाद बचपन से लोगों का फेवरेट रहा है. अब इसी देसी फ्लेवर को लोग रम के साथ मिलाकर नया ट्विस्ट दे रहे हैं. इसको बनाने के लिए आपको एक लंबा-सा ग्लास लेना है. उसमें दो हाजमोला के टुकड़े डालकर पीस लेना है. उसके बाद आपको इसमें थोड़ा-सा लाइम जूस डालना है. इसके साथ ही आपको 2-3 आइस क्यूब और 60 एमएल रम डाल देनी है और ऊपर से कोका-कोला डाल दीजिए. इसका स्वाद आपको अनोखेपन का एहसास कराएगा और आप जिसके सामने इसको सर्व करेंगे, वह भी आपकी ड्रिंक च्वाइस का फैन हो जाएगा.
वोदका विद रसना कैसे मेहमानों को कर देगा लट्टू?
वहीं दूसरी तरफ, वोदका विद रसना उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है. इसके लिए आपको करना यह है कि आपके घर में जो रसना पड़ा है, उसमें शुगर ऐड करनी है. इसके साथ ही आपको उसमें थोड़ा-सा नींबू का जूस भी ऐड कर लेना है. उसके बाद ग्लास में आइस क्यूब डालकर रसना डाल दीजिए और ऊपर से 60 एमएल वोदका डालकर इनको अच्छी तरीके से मिक्स कर लीजिए. एक बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि मिक्स करते समय इसको पूरी तरह से अच्छे से करना है, वरना जो वोदका है, वह ऊपर काफी अजीब-सा टेस्ट दे सकता है. अच्छी तरीके से मिलाने के बाद आप इसको पिलाइए और यकीन मानिए कि आपका गेस्ट इसको पीकर खुश हो जाएगा.
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इन बातों का जरूर रखें ध्यान
इन दोनों कॉकटेल की सबसे खास बात यह है कि इन्हें बनाने में ज्यादा खर्च नहीं आता और घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. यही कारण है कि हाउस पार्टी, रूफटॉप गेट-टुगेदर और दोस्तों की नाइट पार्टी में ये ड्रिंक्स तेजी से फेमस हो रहे हैं और लोग इनको बनाने का नुस्खा एक दूसरे से शेयर कर रहे हैं. जिससे इनकी लोकप्रियता और बढ़ रही है. हालांकि, एक्सपेरिमेंटल ड्रिंक्स ट्राय करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. शराब की मात्रा संतुलित रखें और बहुत ज्यादा फ्लेवर मिलाने से बचें, वरना स्वाद बिगड़ सकता है.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kidney Health: किडनी स्टोन में बेहद फायदेमंद है इन सब्जियों का जूस, इस तरह से बनाएंगे तो मिलने लगेगा आराम</title>
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        <description><![CDATA[ Which Vegetable Juice Is Best For Kidney Stones: किडनी स्टोन की समस्या आजकल तेजी से बढ़ रही है. गलत खानपान, कम पानी पीना और खराब लाइफस्टाइल की वजह से कई लोग इस परेशानी का सामना कर रहे हैं. स्टोन होने पर पेट और कमर में तेज दर्द, पेशाब में जलन और बार-बार यूरिन आने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. ऐसे में लोग दवाइयों के साथ घरेलू उपाय भी तलाशते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कुछ सब्जियों और नेचुरल ड्रिंक्स का सही तरीके से सेवन किडनी को हेल्दी रखने और स्टोन के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट goodrx के अनुसार, डॉक्टर साफ कहते हैं कि किडनी क्लीन जैसा कोई मेडिकल टर्म नहीं होता. किडनी खुद शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने का काम करती है. लेकिन कुछ ड्रिंक्स ऐसे जरूर हैं, जो किडनी की काम करने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने और स्टोन बनने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं.&amp;nbsp;
गाजर का जूस
गाजर का जूस किडनी हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. रिसर्च में पाया गया है कि गाजर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में सूजन कम करने में मदद करते हैं. कुछ एनिमल स्टडीज में यह भी देखा गया कि गाजर किडनी को डैमेज से बचाने और स्टोन बनने के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिन में करीब 2 गिलास गाजर का जूस फायदेमंद माना जाता है.&amp;nbsp;
चुकंदर का जूस
चुकंदर का जूस भी किडनी के लिए लाभदायक माना जाता है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. कुछ स्टडीज में देखा गया कि यह किडनी डैमेज को कम करने में मदद कर सकता है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने में भी सहायक हो सकता है. हालांकि जिन लोगों को कैल्शियम-ऑक्सलेट स्टोन की समस्या रहती है, उन्हें चुकंदर का जूस सीमित मात्रा में ही पीने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसमें ऑक्सलेट ज्यादा होता है.&amp;nbsp;
नींबू पानी&amp;nbsp;
नींबू पानी भी किडनी स्टोन के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद साइट्रेट यूरिन की एसिडिटी कम करने में मदद करता है, जिससे स्टोन बनने का खतरा कम हो सकता है. एक स्टडी में पाया गया कि दिन में दो बार करीब 2 औंस नींबू का रस लेने से कुछ लोगों में स्टोन दोबारा बनने का खतरा कम देखा गया.
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किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन ड्रिंक्स को सही तरीके से बनाना भी जरूरी है. जूस में ज्यादा चीनी मिलाने से फायदा कम हो सकता है. कोशिश करें कि ताजा सब्जियों का जूस बिना ज्यादा नमक-चीनी के पिया जाए. वहीं पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे जरूरी माना जाता है, क्योंकि सही हाइड्रेशन किडनी स्टोन से बचाव में अहम भूमिका निभाता है।. इसके अलावा &amp;nbsp;अगर किडनी स्टोन की समस्या बार-बार हो रही हो या तेज दर्द महसूस हो, तो घरेलू उपायों के भरोसे नहीं रहना चाहिए. समय पर मेडिकल सलाह और सही इलाज बेहद जरूरी होता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Summer Skin Care: गर्मियों में सनस्क्रीन का काम करेंगे ये फल, बस मुंह धोते ही इस तरह से करना होगा इस्तेमाल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/summer-skin-care-गर्मियों-में-सनस्क्रीन-का-काम-करेंगे-ये-फल-बस-मुंह-धोते-ही-इस-तरह-से-करना-होगा-इस्तेमाल</link>
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        <description><![CDATA[ Which Fruits Work Like Natural Sunscreen In Summer: गर्मियों में तेज धूप और यूवी किरणें सिर्फ स्किन को टैन ही नहीं करतीं, बल्कि धीरे-धीरे उसे डैमेज भी करने लगती हैं. यही वजह है कि इस मौसम में लोग सनस्क्रीन, फेस जेल और कई तरह के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ फल और सुपरफूड्स ऐसे भी हैं, जो आपकी स्किन को अंदर से सूरज की नुकसानदायक किरणों से बचाने में मदद कर सकते हैं?. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
खानपान क्यों जरूरी होती है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सही खानपान सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि स्किन की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी होता है. खासतौर पर सुबह के समय खाए गए कुछ फल और पोषक तत्व स्किन को यूवी डैमेज से लड़ने में मदद कर सकते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के पीटर ओ डॉनेल जूनियर ब्रेन इंस्टीट्यूट के न्यूरोसाइंस चेयरमैन डॉ. जोसेफ एस. ताकाहाशी की स्टडी के मुताबिक, हमारी स्किन का भी एक स्किन क्लॉक होता है. यह शरीर के उस सिस्टम से जुड़ा होता है, जो दिन के समय सूरज की किरणों से स्किन को बचाने और डैमेज रिपेयर करने में मदद करता है. रिसर्च में पाया गया कि सही समय पर सही चीजें खाना स्किन की सुरक्षा को बेहतर बना सकता है.
ब्लूबेरी&amp;nbsp;
ब्लूबेरी गर्मियों में स्किन के लिए सबसे फायदेमंद फलों में मानी जाती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं, जो धूप और प्रदूषण की वजह से स्किन को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके साथ ही इसमें मौजूद विटामिन-C स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद करता है.
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तरबूज
तरबूज भी इस मौसम में नेचुरल स्किन प्रोटेक्टर की तरह काम कर सकता है. इसमें लाइकोपीन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो UVB रेडिएशन के असर को कम करने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, सुबह चेहरा धोने के बाद तरबूज का रस या इसका ठंडा पल्प स्किन को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है.
ये भी होता है फायदेमंद?
इसके अलावा ग्रीन टी, गाजर, पालक, अखरोट, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स भी स्किन के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, बीटा कैरोटीन और पॉलीफेनॉल्स स्किन को अंदर से मजबूत बनाते हैं और धूप से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करते हैं.
सुबह के समय क्या खाना फायदेमंद?
हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सुबह के समय इन फलों और हेल्दी चीजों को स्मूदी, सलाद या जूस के रूप में डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, सिर्फ इन चीजों के भरोसे धूप में निकलना सही नहीं है। स्किन को सुरक्षित रखने के लिए सनस्क्रीन, पानी और सही स्किनकेयर रूटीन भी जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>International Tea Day: ग्रीन टी&amp;माचा और लैवेंडर टी... दुनिया में कितनी तरह की चाय मशहूर? जानें इन्हें बनाने के तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ How Many Types Of Tea Are Famous Around The World: 21 मई को दुनियाभर में इंटरनेशनल टी डे मनाया जाता है. भारत समेत कई देशों में चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और भावनाओं का हिस्सा बन चुकी है. किसी के दिन की शुरुआत बेड टी से होती है, तो कोई शाम की थकान दूर करने के लिए चाय का सहारा लेता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सिर्फ एक-दो नहीं, बल्कि कई तरह की चाय मशहूर हैं और हर चाय को बनाने का तरीका भी अलग होता है.&amp;nbsp;
क्यों अलग-अलग तरीके से बनती है चाय?
दरअसल, ज्यादातर असली चाय कैमेलिया साइनेंसिस नाम के पौधे की पत्तियों से बनती है. इन्हीं पत्तियों को अलग-अलग तरीके से प्रोसेस करके ब्लैक टी, ग्रीन टी, वूलॉन्ग टी, व्हाइट टी, पु-एर टी और डार्क टी तैयार की जाती है. वहीं लैवेंडर टी, कैमोमाइल टी, पेपरमिंट टी और हर्बल टी जैसी ड्रिंक्स तकनीकी रूप से चाय नहीं मानी जातीं, क्योंकि ये अलग पौधों और फूलों से तैयार होती हैं.&amp;nbsp;
ग्रीन टी- हेल्दी विकल्प
ग्रीन टी दुनिया की सबसे लोकप्रिय हेल्दी टी में गिनी जाती है. इसकी पत्तियों को तोड़ने के तुरंत बाद तेज गर्मी देकर प्रोसेस किया जाता है, ताकि ऑक्सीडेशन न हो और पत्तियों का हरा रंग बना रहे. ग्रीन टी को हल्के स्वाद और एंटीऑक्सीडेंट्स के लिए जाना जाता है. चीन में इसे पैन में गर्म करके तैयार किया जाता है, जबकि जापान में स्टीम देकर प्रोसेस किया जाता है.&amp;nbsp;
जापान की खास टी- माचा टी
माचा टी जापान की खास चाय मानी जाती है. इसे बनाने के लिए पहले चाय की पत्तियों को छाया में उगाया जाता है, फिर उनकी नसें और डंठल हटाकर बारीक पाउडर तैयार किया जाता है. इस पाउडर को गर्म पानी में फेंटकर पिया जाता है. यही वजह है कि माचा टी सामान्य ग्रीन टी से काफी अलग होती है.
ब्लैक चाय
ब्लैक टी सबसे ज्यादा पी जाने वाली चायों में शामिल है. इसकी पत्तियों को पूरी तरह ऑक्सीडाइज किया जाता है, जिससे इसका रंग गहरा और स्वाद मजबूत हो जाता है. भारत की मसाला चाय और ब्रेकफास्ट टी इसी कैटेगरी में आती हैं. मसाला चाय में ब्लैक टी के साथ दूध, चीनी, अदरक, दालचीनी, इलायची और लौंग जैसे मसाले डाले जाते हैं.
ऊलोंग टी
ऊलोंग टी को पार्टली ऑक्सीडाइज्ड टी कहा जाता है. इसकी पत्तियों को हल्का सुखाने, हिलाने और फिर गर्म करने की प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. इसका स्वाद ग्रीन टी और ब्लैक टी के बीच का माना जाता है.
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व्हाइट टी
व्हाइट टी सबसे कम प्रोसेस की जाने वाली चाय है. इसकी पत्तियों को तोड़ने के बाद बस धीरे-धीरे सुखाया जाता है, जिससे इसका हल्का और नेचुरल फ्लेवर बना रहता है.
पु-एर टी और डार्क टी
पु-एर टी और डार्क टी खास तरह की फर्मेंटेड चाय होती हैं. इन्हें लंबे समय तक स्टोर और एज किया जाता है, जिससे इनका स्वाद समय के साथ और गहरा होता जाता है.
ऐसे बनाया जाता है इन्हें
वहीं लैवेंडर टी, कैमोमाइल टी, हिबिस्कस टी, रूइबोस टी और पेपरमिंट टी जैसी हर्बल टी फूलों, जड़ी-बूटियों और पत्तियों को गर्म पानी में भिगोकर तैयार की जाती हैं. इनमें ज्यादातर कैफीन नहीं होता, इसलिए लोग इन्हें रिलैक्सेशन और अच्छी नींद के लिए पीना पसंद करते हैं.
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        <pubDate>Thu, 21 May 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Fiber Displacement Trick: बिना खाना छोड़े फिट रहने का तरीका, डॉक्टर ने बताई फाइबर डिस्प्लेसमेंट ट्रिक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fiber-displacement-trick-बिना-खाना-छोड़े-फिट-रहने-का-तरीका-डॉक्टर-ने-बताई-फाइबर-डिस्प्लेसमेंट-ट्रिक</link>
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        <description><![CDATA[ Fiber Displacement Trick: आजकल फिट रहने और वजन कम करने के लिए लोग सबसे पहले अपनी पसंदीदा चीजें खाना छोड़ने लगते हैं. कई लोग अचानक सख्त डाइट शुरू कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक उसे फॉलो करना आसान नहीं होता. ऐसे में कई एक्सपर्ट्स कुछ आसान तरीके बताते हैं, जिन्हें वे फाइबर डिस्प्लेसमेंट नाम दिया है. खास बात यह है कि इसमें आपको अपनी पूरी डाइट बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि रोज खाए जाने वाले खाने में ही कुछ बदलाव करके फाइबर बढ़ाया जा सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार हेल्दी रहने के लिए हर बार नई और अलग हेल्दी डाइट अपनाना जरूरी नहीं है. अगर लोग अपने रोजाना के खाने में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फाइबर वाली चीज शामिल करें तो इससे शरीर को काफी फायदा मिल सकता है. उनका कहना है कि फाइबर डिस्प्लेसमेंट का मतलब है कि आप वहीं खाना खाए जो पहले से खाते आ रहे हैं, लेकिन उसमें फाइबर बढ़ाने वाले छोटे बदलाव कर लें.&amp;nbsp;
क्या है फाइबर डिस्प्लेसमेंट ट्रिक?&amp;nbsp;
डॉक्टरों के अनुसार अगर आप सुबह स्मूदी पीते हैं तो उसमें थोड़ी पालक मिलाई जा सकती है. इससे स्वाद में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन शरीर को एक्स्ट्रा फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिल जाते हैं. इसी तरह सफेद बींस या मसूर को पकाकर पास्ता, करी या सूप में मिलाया जा सकता है. &amp;nbsp;इससे खाने की टेक्सचर भी बनी रहती है और फाइबर की मात्रा बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि सिर्फ एक चौथाई सफेद बींस करीब 4 ग्राम फाइबर बढ़ा सकती है. वहीं दही और उसमें दो चम्मच पिसा हुआ अलसी का बीज मिलाने से 4 से 6 ग्राम तक एक्स्ट्रा फाइबर मिल सकता है. इस तरह बिना अलग डाइट अपने दिन के पहले हिस्से में ही शरीर को लगभग 10 ग्राम फाइबर मिल सकता है.&amp;nbsp;
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सिर्फ मात्र नहीं, फाइबर की विविधता भी जरूरी&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ज्यादा फाइबर खाना ही काफी नहीं है, बल्कि अलग-अलग तरह के फाइबर लेना भी जरूरी है. पानक, बींस और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया को सपोर्ट करते हैं, इससे आंतों की सेहत बेहतर रहती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है. इसे लेकर कुछ स्टडी भी बताती है कि फाइबर की विविधता और आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम को बेहतर बनाने में मदद करती है. यही कारण है कि केवल एक तय संख्या में फाइबर लेने पर ध्यान देने की बजाय अलग-अलग सोर्स से फाइबर लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.&amp;nbsp;
खाने में छोटे बदलाव से मिल सकते हैं बड़े फायदे&amp;nbsp;
डॉक्टरों के अनुसार रोजमर्रा के खाने में बदलाव किए जा सकते हैं. जैसे स्क्रैंबल एग्स में फ्रोजन मटर मिलना, खाने में मैश किया हुआ एवाकाडो जोड़ना या सफेद चावल की मात्रा कम करके उसमें ब्राउन राइस मिलना. यह बदलाव देखने में छोटे लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय में शरीर की सेहत पर अच्छा असर डाल सकते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Student Mental Stress: छात्रों में मानसिक तनाव के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें पैरेंट्स? दिक्कत से पहले हो जाएं अवेयर</title>
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        <description><![CDATA[ Student Mental Stress: देश भर में बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम घोषित होते ही, ऐसे में कई घरों में गर्व, राहत, निराशा, चिंता और अनिश्चितता जैसी मिली-जुली भावनाएं देखने को मिलेंगी. कई स्टूडेंट्स बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर तनाव, डर और चिंता से जूझ रहे होते हैं. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि कई बच्चे अपने मन की बात घरवालों से भी नहीं कह पाते, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि लोग उन्हें कमजोर समझेंगे. ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि बच्चे के व्यवहार में छोटे-छोटे बदलाव भी मानसिक तनाव का संकेत हो सकते हैं.&amp;nbsp;
बच्चों में दिखने लगते हैं ये शुरुआती संकेत
मानसिक तनाव अचानक नहीं आता, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता है. सबसे पहले बच्चे के स्वभाव और आदतों में बदलाव दिखने लगता है. जैसे बच्चा चिड़चिड़ा रहने लगे, अकेला रहने लगे, दोस्तों या परिवार से दूरी बनाने लगे या पहले जिन चीजों में मजा आता था उनमें अब रुचि न दिखाए. कई बच्चों की नींद खराब होने लगती है, भूख कम हो जाती है या बार-बार सिर और पेट दर्द जैसी शिकायतें होने लगती हैं. कुछ बच्चे हर समय परफेक्ट बनने का दबाव महसूस करते हैं, जबकि कुछ पढ़ाई से पूरी तरह मन हटाने लगते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन संकेतों को सिर्फ मूड समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.&amp;nbsp;
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क्यों नहीं बता पाते बच्चे अपने दिल की बात?
कई स्टूडेंट्स अपने माता-पिता को परेशान नहीं करना चाहते, इसलिए चुपचाप तनाव सहते रहते हैं. &amp;nbsp;सोशल मीडिया, दूसरों से तुलना, अच्छे कॉलेज का दबाव और हर समय सफल दिखने की होड़ बच्चों के मन पर असर डाल रही है. &amp;nbsp;कुछ बच्चों को लगता है कि अगर उनके नंबर कम आए तो लोग उन्हें कम समझेंगे. यही वजह है कि वे अपने डर और चिंता को छिपाने लगते हैं. सोशल मीडिया पर भी कई स्टूडेंट्स ने माना कि जब उन्होंने घर पर तनाव की बात की, तो उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया. ऐसे माहौल में बच्चे खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं.&amp;nbsp;
माता-पिता ऐसे बन सकते हैं बच्चों का सबसे बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को डांटने या हर समय नंबरों की बात करने के बजाय उन्हें समझने की जरूरत है. माता-पिता को बच्चों से रोज खुलकर बात करनी चाहिए और ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां बच्चा बिना डर अपनी बात कह सके. साथ ही &amp;nbsp;बच्चों की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए और सिर्फ रिजल्ट नहीं, बल्कि उनकी मेहनत की भी तारीफ करनी चाहिए. &amp;nbsp;अगर बच्चा उदास दिखे या उसके व्यवहार में लंबे समय तक बदलाव नजर आए, तो उसे नजरअंदाज न करें. &amp;nbsp;कई बार सिर्फ प्यार से सुन लेना भी बच्चे का आधा तनाव कम कर देता है. &amp;nbsp;बच्चों को यह एहसास होना चाहिए कि उनकी पहचान सिर्फ नंबरों से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और मेहनत से होती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Student, Mental, Stress:, छात्रों, में, मानसिक, तनाव, के, शुरुआती, लक्षण, कैसे, पहचानें, पैरेंट्स, दिक्कत, से, पहले, हो, जाएं, अवेयर</media:keywords>
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        <title>Falling Birth Rates: स्मार्टफोन की वजह से बच्चे पैदा नहीं कर रहे लोग, पढ़ें हैरान कर देने वाली ये रिपोर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ How Smartphones Are Affecting Birth Rates: भारत में करीब 30 साल पहले भारतीय महिलाएं औसतन 3.4 बच्चों को जन्म देती थीं, लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर 2.0 पर पहुंच गया है. सरकारी सर्वे के मुताबिक यह रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से भी नीचे है, यानी अब आबादी खुद को स्थिर रखने लायक रफ्तार से नहीं बढ़ रही. लेकिन यह बदलाव सिर्फ भारत में नहीं हो रहा, दुनिया के कई देशों में जन्म दर तेजी से गिर रही है. कई जगहों पर महिलाओं के औसत बच्चों की संख्या दो से घटकर एक के करीब पहुंच चुकी है और कुछ देशों में सबसे आम संख्या शून्य हो गई है. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है.&amp;nbsp;
महिलाएं क्यों पैदा कर रही हैं कम बच्चे?
लंबे समय तक एक्सपर्ट्स बढ़ती महंगाई, महंगे घर, देर से शादी, करियर का दबाव और बदलती सामाजिक सोच को इसकी बड़ी वजह मानते रहे. ये कारण आज भी मौजूद हैं, लेकिन अब रिसर्चर्स एक और नई चीज की जांच कर रहे हैं कि स्मार्टफोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का असर. कई नई रिसर्च यह इशारा कर रही हैं कि टेक्नोलॉजी ने सिर्फ इंसानों के बातचीत करने का तरीका नहीं बदला, बल्कि बच्चों के जन्म की दर पर भी असर डालना शुरू कर दिया है.&amp;nbsp;
क्या सच में स्मार्टफोन से फर्टिलिटी रेट पर असर हो रहा?
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के रिसर्चर्स नाथन हडसन और हर्नान मॉस्कोसो-बोएडो ने अमेरिका और ब्रिटेन में 4जी मोबाइल इंटरनेट शुरू होने के बाद जन्म दर के आंकड़ों का अध्ययन किया. रिसर्च में पाया गया कि जिन इलाकों में हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट पहले पहुंचा, वहां जन्म दर भी पहले और ज्यादा तेजी से गिरनी शुरू हुई. रिसर्चर्स का मानना है कि स्मार्टफोन ने युवाओं के आपसी रिश्तों का तरीका पूरी तरह बदल दिया. लोग आमने-सामने मिलने की बजाय ज्यादा समय ऑनलाइन बिताने लगे, जिससे व्यक्तिगत बातचीत और सामाजिक मेलजोल कम हो गया. रिसर्च के अनुसार इसी बदलाव ने जन्म दर घटाने में भूमिका निभाई हो सकती है.
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किन देशों में दिख रहा इसका असर?
यह पैटर्न सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन तक सीमित नहीं दिखता. फाइनेंशियल टाइम्स के एनालिसिस में पाया गया कि कई देशों में जन्म दर उसी समय तेजी से गिरने लगी, जब स्मार्टफोन आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनने लगे. अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में 2007 के बाद किशोरों और युवाओं में जन्म दर अचानक तेजी से कम हुई. यही वह समय था जब स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप्स तेजी से लोकप्रिय हुए थे. खास बात यह रही कि सबसे ज्यादा गिरावट उन्हीं उम्र के लोगों में दिखी, जो सबसे ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं.
माता- पिता क्यों नहीं बनना चाहते हैं युवा?
फिनलैंड की जनसंख्या एक्सपर्ट अन्ना रोटकिर्च का कहना है कि जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले युवाओं में रिश्तों और निजी जिंदगी से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं. उनके मुताबिक सोशल मीडिया लगातार लोगों को दूसरों की चमकदार जिंदगी, आर्थिक दबाव और तुलना की दुनिया दिखाता रहता है, जिससे असुरक्षा और अस्थिरता की भावना पैदा हो सकती है. कई रिसर्चर्स मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पैसे, करियर और घर को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को और बढ़ा देते हैं, जिससे युवा खुद को माता-पिता बनने के लिए तैयार नहीं मानते.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Diabetes In India: सावधान! डायबिटीज का HbA1c टेस्ट आपको दे रहा गलत रिपोर्ट, जानें क्यों फेल हो रही ये जांच</title>
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        <description><![CDATA[ Why HbA1c Test May Give Wrong Results In Indians: डायबिटीज चेक करने के लिए जिस एचबीए1सी टेस्ट को अब तक सबसे भरोसेमंद माना जाता था, वही टेस्ट भारतीय लोगों के लिए कई बार गलत रिपोर्ट दे सकता है. नई रिसर्च में पता चला है कि खून से जुड़ी कई आम परेशानियां इस जांच के नतीजों को बदल देती हैं, जिससे बीमारी का सही समय पर पता नहीं चल पाता. यही वजह है कि अब डॉक्टर सिर्फ एक टेस्ट पर भरोसा करने के बजाय कई जांच एक साथ कराने की सलाह दे रहे हैं.&amp;nbsp;
रिपोर्ट और शरीर में क्यों दिख रहा है अंतर?
TOI की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली के फोर्टिस सी-डॉक सेंटर फॉर एक्सीलेंस में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. अनूप मिश्रा के सामने एक ऐसा मामला आया जिसने डॉक्टरों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. मध्य प्रदेश के एक 45 साल के आदिवासी मरीज का एचबीए1सी स्तर 5.8 प्रतिशत था. आमतौर पर इसे प्रीडायबिटीज माना जाता है, लेकिन उसका फास्टिंग ब्लड शुगर लगातार ज्यादा था और आंखों में डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षण भी दिखने लगे थे. यानी रिपोर्ट कुछ और कह रही थी और शरीर कुछ और संकेत दे रहा था.
इन चीजों की कमी रिपोर्ट पर डाल सकती है असर
इसके बाद डॉ. अनूप मिश्रा, डॉ. शंबो सम्राट समाजदार, डॉ. शशांक आर. जोशी और डॉ. नवल के. विक्रम ने मिलकर एक रिसर्च की, जिसको द लैंसेट रीजनल हेल्थ &amp;nbsp;साउथईस्ट एशिया में पब्लिश किया गया. इसमें &amp;nbsp;सामने आया कि भारत और दक्षिण एशिया में एनीमिया, थैलेसीमिया, जी6पीडी की कमी और दूसरी खून से जुड़ी बीमारियां एचबीए1सी रिपोर्ट को गलत बना सकती हैं.&amp;nbsp;
कैसे बदल जाती है रिपोर्ट?
असल में एचबीए1सी टेस्ट पिछले तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर का अंदाजा देता है. लेकिन अगर रेड ब्लड सेल्स की उम्र बदल जाए तो रिपोर्ट भी बदल जाती है. भारत में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया बहुत आम है और यह एचबीए1सी को जरूरत से ज्यादा दिखा सकता है. वहीं जी6पीडी की कमी जैसी स्थिति में रेड ब्लड सेल्स जल्दी टूट जाती हैं, जिससे एचबीए1सी कम दिखाई देता है, जबकि असली ब्लड शुगर ज्यादा हो सकती है.&amp;nbsp;
किस चीज की जांच है जरूरी?
डॉ. अनूप मिश्रा का कहना है कि एचबीए1सी हीमोग्लोबिन से बनता है, इसलिए जो भी बीमारी हीमोग्लोबिन को प्रभावित करती है, वह इस टेस्ट की सटीकता खराब कर सकती है. उन्होंने साफ कहा कि भारतीयों में डायबिटीज की पहचान के लिए सिर्फ एचबीए1सी पर निर्भर रहना सही नहीं है. इसके बजाय ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट, नियमित ब्लड शुगर जांच और जरूरत पड़ने पर लगातार ग्लूकोज मॉनिटरिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है.
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भारत में कम उम्र में लोग हो रहे हैं शिकार
अमृता अस्पताल के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निशांत रायजादा भी मानते हैं कि भारत में लोग कम उम्र और कम वजन में भी डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं. ऐसे में सही जांच बेहद जरूरी हो जाती है. रिसर्च में यह भी सामने आया कि दक्षिण भारत में हुए एक स्टडी में ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट ने करीब 88 प्रतिशत लोगों में प्रीडायबिटीज पकड़ ली, जबकि एचबीए1सी सिर्फ 45 प्रतिशत मामलों को पहचान पाया. एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले समय में डायबिटीज का इलाज प्रिसीजन मेडिसिन की तरफ बढ़ेगा, जहां सिर्फ एक रिपोर्ट नहीं बल्कि मरीज की बॉडी, खानपान, जेनेटिक्स और लाइफस्टाइल को देखकर इलाज तय होगा. हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ऐसी एडवांस जांचें अभी हर आम इंसान की पहुंच में नहीं हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Postmortem: कैसे होता है डेडबॉडी का पोस्टमॉर्टम, किन अंगों की होती है जांच?</title>
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        <description><![CDATA[ How Is A Dead Body Postmortem Done: किसी व्यक्ति की मौत के बाद जब उसकी मृत्यु की असली वजह जानना जरूरी होता है, तब पोस्टमॉर्टम किया जाता है. कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर पोस्टमॉर्टम के दौरान शरीर के साथ क्या किया जाता है और डॉक्टर किन अंगों की जांच करते हैं. दरअसल, यह एक मेडिकल प्रक्रिया होती है, जिसे बेहद सावधानी और तय नियमों के तहत किया जाता है.
पोस्टमॉर्टम के दौरान क्या किया जाता है?
रॉयल कॉलेज ऑफ पैथोलॉजिस्ट्स के अनुसार पोस्टमॉर्टम सम्मानजनक तरीके से किया जाता है और इस दौरान मृतक के परिजनों की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाता है. ज्यादातर पोस्टमॉर्टम हिस्टोपैथोलॉजी के एक्सपर्ट डॉक्टर करते हैं. यह मेडिकल साइंस की वह ब्रांच है, जिसमें बीमारी और प्रभावित टिश्यू की स्टडी की जाती है. इस प्रक्रिया में एनाटॉमिक पैथोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट भी डॉक्टरों की मदद करते हैं.&amp;nbsp;
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कैसे किया जाता है पोस्टमॉर्टम?
पोस्टमॉर्टम आमतौर पर अस्पताल की मोर्चरी में बने स्पेशल कमरे में किया जाता है, जो ऑपरेशन थिएटर की तरह होता है. सबसे पहले शव को सम्मानपूर्वक जांच कक्ष तक लाया जाता है. इसके बाद शरीर के सामने वाले हिस्से में लंबा चीरा लगाया जाता है, ताकि अंदर मौजूद अंगों को बाहर निकालकर जांचा जा सके. दिमाग की जांच के लिए सिर के पीछे की तरफ भी एक कट लगाया जाता है, जिससे खोपड़ी का ऊपरी हिस्सा हटाया जा सके.
किन अंगों की होती है जांच?
पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टर दिल, फेफड़े, लीवर, किडनी, पेट, आंत और दिमाग जैसे अंगों की बारीकी से जांच करते हैं. यह देखा जाता है कि कहीं शरीर में खून का थक्का, ट्यूमर, चोट या किसी बीमारी के संकेत तो नहीं हैं. कई बार डॉक्टर छोटे-छोटे टिश्यू सैंपल भी लेते हैं, जिन्हें माइक्रोस्कोप से जांचा जाता है. इसके अलावा खून या शरीर के अन्य फ्लूइड के नमूने भी लैब टेस्ट के लिए भेजे जा सकते हैं.&amp;nbsp;
जांच पूरी होने के बाद क्या किया जात है?
जांच पूरी होने के बाद सभी अंगों को दोबारा शरीर के अंदर रख दिया जाता है. बिना परिवार या संबंधित अधिकारी की अनुमति के किसी अंग या टिश्यू को सुरक्षित नहीं रखा जाता. अगर किसी मामले में अपराध की आशंका होती है, तो कुछ टिश्यू या अंगों को सबूत के तौर पर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. अगर मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हो, तो पोस्टमॉर्टम फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट करते हैं. ये विशेषज्ञ हत्या, हिरासत में मौत या अन्य कानूनी मामलों की जांच में शामिल होते हैं. ऐसे मामलों में कोर्ट या जांच एजेंसियों के कहने पर दूसरा पोस्टमॉर्टम भी कराया जा सकता है, ताकि किसी तरह का विवाद न रहे.
कानूनी जांच और मेडिकल रिसर्च के लिए अहम
एक्सपर्ट के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम सिर्फ मौत का कारण पता लगाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह कई मामलों में कानूनी जांच और मेडिकल रिसर्च के लिए भी बेहद अहम होता है. जांच के बाद शव को इस तरह तैयार किया जाता है कि परिजन अंतिम दर्शन कर सकें और शरीर पर किए गए कट सामान्य कपड़ों में दिखाई न दें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>Healthy Cooking Oil: सरसों का तेल या ऑलिव ऑयल... वजन घटा रहे हैं तो क्या है बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ Which Oil Is Best For Weight Loss:&amp;nbsp;वजन घटाने और फिट रहने की कोशिश कर रहे लोगों के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा सुनने को मिलता है कि खाना बनाने के लिए कौन-सा तेल बेहतर है? कई लोग सोचते हैं कि सिर्फ तेल बदल देने से वजन तेजी से कम हो जाएगा. कुछ लोग सरसों के तेल को सबसे हेल्दी मानते हैं, तो कुछ नारियल के तेल या जैतून के तेल को बेहतर बताते हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि सिर्फ तेल बदलने से वजन कम नहीं होता, बल्कि यह इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि आप तेल कितना इस्तेमाल कर रहे हैं और आपका पूरा खानपान कैसा है.&amp;nbsp;
क्या कैलोरी में फर्क होता है?
न्यूट्रिशनिस्ट &amp;nbsp;के मुताबिक लगभग हर खाने वाले तेल में कैलोरी की मात्रा करीब एक जैसी होती है. एक चम्मच सरसों का तेल, नारियल का तेल और जैतून का तेल तीनों में लगभग 120 कैलोरी के आसपास होती है. यानी अगर आपका मकसद सिर्फ कैलोरी कम करना है, तो एक तेल छोड़कर दूसरा अपनाने से बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा. असली फर्क इस बात से पड़ता है कि तेल में किस तरह की वसा मौजूद है और वह शरीर पर क्या असर डालती है.
सरसों के तेल के क्या होते हैं फायदे?
भारतीय रसोई में सरसों का तेल सालों से इस्तेमाल होता आ रहा है. इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट पाए जाते हैं, जिन्हें दिल के लिए बेहतर माना जाता है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भी मौजूद होते हैं. इसकी तेज खुशबू और स्वाद की वजह से लोग इसे कम मात्रा में इस्तेमाल करते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से कैलोरी कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. हालांकि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि किसी भी तेल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर डीप फ्राई करने पर.&amp;nbsp;
जैतून के लिए के क्या होते हैं फायदे?
जैतून का तेल अक्सर वजन घटाने वाली डाइट और दिल की सेहत से जोड़कर देखा जाता है. इसमें हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन कम करने और हार्ट हेल्थ बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल सलाद, हल्की सब्जियां या कम आंच पर पकाने में ज्यादा अच्छा माना जाता है. हालांकि यह दूसरे तेलों की तुलना में महंगा होता है और हर तरह की भारतीय कुकिंग के लिए हमेशा सही विकल्प नहीं माना जाता.
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वजन घटाने के लिए क्या रखें ध्यान?
एक्सपर्ट का कहना है कि वजन घटाने के लिए सबसे जरूरी चीज है पोर्शन कंट्रोल, यानी तेल की मात्रा पर ध्यान देना. अगर आप रोज जरूरत से ज्यादा तेल इस्तेमाल करेंगे, तो कोई भी तेल हेल्दी साबित नहीं होगा. इसके अलावा नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और सही कुकिंग तरीका वजन कम करने में ज्यादा असरदार होता है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बार-बार डीप फ्राई खाने से बचें, तेल नापकर इस्तेमाल करें और एक ही तेल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग तेलों को संतुलित तरीके से इस्तेमाल करें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Top Best Scuba Diving Destinations in India: स्कूबा डाइविंग के लिए बेस्ट हैं ये Indian place, कम खर्च में आ जाएगा थाईलैंड का मजा</title>
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        <title>Thailand DTV Visa: सिर्फ 25 हजार रुपये में थाईलैंड में 5 साल तक रहने का मौका, जानिए कैसे मिलता है यह खास वीजा?</title>
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        <description><![CDATA[ Thailand DTV Visa: गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही ज्यादातर लोग घूमने का प्लान बनाने लगते हैं. लेकिन हर बार लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर ऐसी कौन-सी जगह जाएं जहां घूमने के साथ उन्हें आराम भी मिले और खर्च भी ज्यादा न हो. ऐसे में थाईलैंड भारतीयों के लिए एक शानदार विकल्प बनकर सामने आया है. &amp;nbsp;जो अपनी खूबसूरत बीच, शानदार नाइट लाइफ, स्वादिष्ट खाना और कम बजट में लग्जरी जैसी सुविधाओं से लोगों को अपनी तरफ खींचती हैं. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में भारतीय थाईलैंड घूमने जाते हैं. &amp;nbsp;
बता दें कि थाईलैंड ने भारत समेत कई योग्य देशों के नागरिकों के लिए DTV वीजा की सुविधा शुरू की है. जिससे लोग वहां सिर्फ घूमने ही नहीं बल्कि लंबे समय तक रह भी सकते हैं. &amp;nbsp;खास बात यह है कि इस वीजा की फीस करीब 25 हजार रुपये रखी गई है और इसकी मदद से 5 साल तक थाईलैंड आने-जाने की सुविधा मिल सकती है.&amp;nbsp;
क्या है DTV Visa और किसे मिलेगा फायदा?
थाईलैंड सरकार ने इस खास वीजा का नाम &amp;ldquo;Destination Thailand Visa&amp;rdquo; यानी DTV रखा है. &amp;nbsp;यह 5 साल का multiple-entry वीजा देता है, जिसके जरिए लोग कई बार थाईलैंड जा और आ सकते हैं. &amp;nbsp;इस वीजा के तहत एक बार में 180 दिनों तक रहने की अनुमति मिलती है, जिसे बाद जरूरत पड़ने पर ये 180 दिन और बढ़ाया जा सकता है. &amp;nbsp;यानी कोई व्यक्ति लगभग एक साल तक लगातार वहां रह सकता है. &amp;nbsp;यह वीजा खास तौर पर डिजिटल नोमैड्स, फ्रीलांसर, रिमोट वर्क करने वाले लोग और लंबे समय तक विदेश में रहकर काम करने वालों के लिए बनाया गया है. साथ ही एक जरूरी नियम भी बनाया है जिसमें यह है कि आवेदन करने वाले लोग विदेशी कंपनी या विदेश के क्लाइंट्स के लिए ऑनलाइन काम कर सकते हैं, लेकिन बिना थाई वर्क परमिट के किसी थाई कंपनी में काम नहीं कर सकते.&amp;nbsp;
इसके अलावा DTV वीजा की सबसे ज्यादा चर्चा थाईलैंड की &amp;ldquo;सॉफ्ट पावर&amp;rdquo; नीति को लेकर हो रही है, जिसमें इस वीजा को सिर्फ रिमोट वर्कर्स तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसमें संस्कृति और लाइफस्टाइल से जुड़े कई प्रोग्राम भी शामिल किए गए हैं, ताकि देश के पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा मिल सके जैसे मुआय थाई ट्रेनिंग लेने वाले, थाई कुकिंग क्लास जॉइन करने वाले, स्पोर्ट्स और फिटनेस ट्रेनिंग करने वाले, मेडिकल टूरिज्म या वेलनेस प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले लोग भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. साथ ही आवेदन करने वाले व्यक्ति की उम्र कम से कम 20 साल होनी चाहिए और उसके पास वैध पासपोर्ट होना जरूरी है.&amp;nbsp;
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DTV Visa के लिए जरूरी दस्तावेज
इसमें आवेदन करने के लिए ऐसा पासपोर्ट होना चाहिए जिसकी वैधता कम से कम 6 महीने बाकी हो. &amp;nbsp;साथ ही पासपोर्ट साइज फोटो, &amp;nbsp;बैंक स्टेटमेंट या सैलरी से जुड़े दस्तावेज देने होंगे जिससे आपकी आर्थिक स्थिति साबित हो सके. वही अगर आप रिमोट वर्क या विदेश की कंपनी के लिए काम करते हैं, तो उसका प्रूफ देना होगा. इसके अलावा थाईलैंड में जिस प्रोग्राम या एक्टिविटी के लिए जा रहे हैं, उससे जुड़े दस्तावेज भी जमा करने होंगे. &amp;nbsp;कुछ मामलों में पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट भी मांगा जा सकता है. इसके अलावा अगर आप मुआय थाई ट्रेनिंग, कुकिंग क्लास या वेलनेस प्रोग्राम जॉइन कर रहे हैं, तो उस संस्थान का एडमिशन लेटर या इनविटेशन लेटर भी देना होगा.&amp;nbsp;
DTV Visa के लिए कैसे करें आवेदन?
अगर आप इस वीजा के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ जरूरी दस्तावेज और प्रक्रिया पूरी करनी होगी. &amp;nbsp;आवेदन ऑनलाइन ई-वीजा पोर्टल या अधिकृत वीजा सेंटर के जरिए किया जा सकता है. &amp;nbsp;जैसे&amp;nbsp;

सबसे पहले थाईलैंड के आधिकारिक ई-वीजा पोर्टल पर जाकर अकाउंट बनाना होगा.
इसके बाद DTV Visa का ऑप्शन चुनकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. &amp;nbsp;
फॉर्म में पासपोर्ट डिटेल, रहने की जानकारी और यात्रा से जुड़ी जानकारी भरनी होगी.
पासपोर्ट की कॉपी, पासपोर्ट साइज फोटो और बैंक स्टेटमेंट अपलोड करना होगा.
आवेदक को यह भी दिखाना होगा कि उसके खाते में करीब 5 लाख थाई बाट यानी लगभग 14 से 15 लाख रुपये की रकम मौजूद है या नहीं.
अगर कोई व्यक्ति रिमोट वर्क या फ्रीलांसिंग करता है तो उसे अपने काम से जुड़े दस्तावेज, कॉन्ट्रैक्ट या इनकम प्रूफ भी जमा करने होंगे.
साथ ही मेडिकल या wellness program के लिए आवेदन करने वालों को संबंधित संस्थान का प्रमाण पत्र देना होगा.
आवेदन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस और रहने की जानकारी भी देनी पड़ सकती है.
सभी दस्तावेज जमा करने के बाद भारत में इसकी वीजा फीस करीब 25 हजार रुपये ऑनलाइन जमा करनी होगी.
आवेदन की जांच पूरी होने के बाद कुछ दिनों या एक हफ्ते के अंदर वीजा जारी किया जा सकता है.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fake Turmeric: मिलावटी हल्दी से गई दुल्हन की जान, कहीं आप भी बाजार से तो नहीं ला रहे? ऐसे करें पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ How To Identify Adulterated Turmeric At Home: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक शादी की खुशी उस समय मातम में बदल गई, जब हल्दी की रस्म के बाद दुल्हन की मौत हो गई और दूल्हे की तबीयत भी अचानक बिगड़ गई. इस घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जिस हल्दी को भारतीय घरों में सालों से औषधि और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, क्या वही अब मिलावट की वजह से खतरनाक बनती जा रही है? शादी-ब्याह में हल्दी की रस्म सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और शुभता का प्रतीक मानी जाती है. लेकिन अब एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि बाजार में बिकने वाली हर हल्दी शुद्ध और सुरक्षित नहीं होती.&amp;nbsp;
भारतीय घरों में हल्दी का बड़े पैमाने पर यूज
दरअसल हल्दी भारत के लगभग हर घर में इस्तेमाल होती है. इसे खाने से लेकर स्किन केयर और घरेलू उपचार तक में उपयोग किया जाता है. आयुर्वेद में भी हल्दी को सूजन कम करने और बैक्टीरिया से लड़ने वाला माना गया है. लेकिन अब कई जगहों पर हल्दी में आर्टिफिशियल रंग और हानिकारक पदार्थ मिलाए जा रहे हैं, ताकि उसका रंग ज्यादा चमकीला दिखे और लोग उसे आसानी से खरीद लें. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसी मिलावटी हल्दी लंबे समय तक शरीर में जाने पर डाइजेशन सिस्टम और ओवरऑल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकती है.&amp;nbsp;
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कैसे पहचान सकते हैं नकली हल्दी?
एफएसएसएआई ने हल्दी की पहचान के लिए एक आसान वॉटर टेस्ट बताया है, जिसे घर पर कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है. इसके लिए दो साफ गिलास में पानी लें और उसमें थोड़ा-सा हल्दी पाउडर डाल दें. इसके बाद फिर मिश्रण को कुछ मिनट बिना हिलाए छोड़ दें. अगर हल्दी शुद्ध होगी तो वह धीरे-धीरे नीचे बैठ जाएगी और पानी हल्का पीला दिखाई देगा. लेकिन अगर पानी तुरंत तेज चमकीला पीला हो जाए, तो समझिए उसमें कृत्रिम रंग मिलाए गए हैं. यह छोटा-सा टेस्ट आपको मिलावटी हल्दी पहचानने में मदद कर सकता है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

Artificial colors have no place in a healthy diet. A quick water test can reveal the truth about turmeric powder. Always check before you use. #EatRightIndia #NoToAdulteration #FoodSafety pic.twitter.com/zdGBTKpK0u
&amp;mdash; FSSAI (@fssaiindia) April 4, 2026



खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
एफएसएसएआई का कहना है कि लोगों को मसाले खरीदते समय कुछ और बातों का भी ध्यान रखना चाहिए. हमेशा भरोसेमंद ब्रांड या विश्वसनीय दुकानों से ही हल्दी खरीदें. जरूरत से ज्यादा चमकीले पीले रंग की हल्दी लेने से बचें, क्योंकि यह मिलावट का संकेत हो सकता है. पैकेट पर एफएसएसएआई प्रमाणन जरूर जांचें और मसालों को सही तरीके से स्टोर करें, ताकि उनकी क्वालिटी बनी रहे.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 20 May 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Havan Vidhi: घर में हवन करने का सही तरीका क्या है, नहीं जानते हैं तो जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ Havan Vidhi: सुबह का शांत माहौल, घी और कपूर की हल्की खुशबू, मंत्रों की धीमी आवाज और हवन कुंड से उठती अग्नि भारतीय परंपरा में हवन एक धार्मिक प्रक्रिया है. आज भी कई लोग नए घर में प्रवेश, किसी शुभ काम की शुरुआत या परिवार की सुख-शांति के लिए हवन करवाते हैं. लेकिन बदलते समय के साथ लोग हवन तो करना चाहते हैं, लेकिन सही विधि नहीं जानते है.&amp;nbsp;
कई बार बिना जानकारी के की गई छोटी गलतियां पूरी पूजा का असर कम कर देती हैं. पारंपरिक हवन पद्धति में हर छोटी चीज को महत्व दिया गया है. हवन केवल आग में सामग्री डालने की प्रक्रिया नहीं है, इसका संबंध श्रद्धा, शुद्धता और सही विधि से माना जाता है.&amp;nbsp;
हवन से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
हवन शुरू करने से पहले सबसे जरूरी है पूजा की जगह को साफ और शांत रखना. पारंपरिक विधि में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ जाता है. इसके बाद हवन कुंड स्थापित किया जाता है. हवन सामग्री में आमतौर पर घी, कपूर, हवन सामग्री, आम की लकड़ी, फूल, कलश, दीपक, दूर्वा, पान, कुशा और चावल जैसी चीजें रखी जाती हैं. &amp;nbsp;

कलश स्थापना
हवन शुरू करने से पहले पारंपरिक विधि में स्थान, कलश और देवताओं की स्थापना को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. सबसे पहले ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में गणेश, लक्ष्मी, चौसठ योगिनी और गौरी आदि देवियों का स्मरण करके स्थापना की जाती है. इसके बाद कलश स्थापित कर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है और दीपक जलाया जाता है.
फिर पूजा शुरू करने से पहले सभी पूजा सामग्री और वस्तुओं पर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है. इस दौरान शुद्धि मंत्र बोला जाता है&amp;nbsp;
&amp;ldquo;ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥&amp;rdquo;
मान्यता है कि इस मंत्र के उच्चारण से वातावरण और मन दोनों की शुद्धि होती है.
गणेश पूजन
भगवान गणेश की कृपा और विघ्नों को दूर करने के लिए यह मंत्र बोला जाता है
&amp;ldquo;वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥&amp;rdquo;
किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी को याद करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और पूजा शांतिपूर्वक पूरी होती है.&amp;nbsp;
अग्नि प्रज्वलित करने की सही विधि
हवन कुंड में सबसे पहले छोटी लकड़ियां और कपूर रखा जाता है. फिर धीरे-धीरे अग्नि जलाई जाती है. जब अग्नि स्थिर हो जाती है, तब घी की पहली आहुति(हवन कुंड में हवन सामग्री को डालना) दी जाती है. इस दौरान सामान्य रूप से यह मंत्र बोला जाता है&amp;nbsp;
&amp;ldquo;ॐ अग्नये स्वाहा&amp;rdquo;
इसके बाद हवन सामग्री अग्नि में डाली जाती है. हर आहुति के अंत में &amp;ldquo;स्वाहा&amp;rdquo; बोलना जरूरी माना जाता है, क्योंकि स्वाहा अग्नि देव की पत्नी का नाम है. बिना अपनी पत्नी के नाम के अग्नि देव आहुति स्वीकार नहीं करते है. &amp;nbsp;
आहुति देते समय क्यों बोले जाते हैं मंत्र?
हवन में मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है. मंत्रों की ध्वनि मन को शांत और एकाग्र करती है. पुराने समय में ऋषि-मुनि यज्ञ और हवन में उच्चारण की शुद्धता पर बहुत ध्यान देते थे. अगर आपको पूरे वैदिक मंत्र न आते हों, तो भी श्रद्धा के साथ छोटा हवन किया जा सकता है. कई लोग गायत्री मंत्र के साथ भी आहुति देते हैं&amp;nbsp;
&amp;ldquo;ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यंभर्गो देवस्य धीमहिधियो यो नः प्रचोदयात्&amp;zwnj; स्वाहा&amp;rdquo;
इस मंत्र के साथ दी गई आहुति मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करती है.
अंत में शांति और मंगलकामना के लिए यह मंत्र बोला जाता है&amp;nbsp;
&amp;ldquo;ॐ शांति: शांति: शांति:&amp;rdquo;
माना जाता है कि इस मंत्र के साथ पूजा का समापन करने से घर में सकारात्मक और शांत वातावरण बना रहता है.
हवन के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:

हवन हमेशा हवादार जगह पर करें
बहुत ज्यादा धुआं न होने दें
प्लास्टिक या गलत चीजें अग्नि में न डालें
छोटे बच्चों को अकेले हवन कुंड के पास न बैठाएं
पूजा के दौरान मोबाइल और शोर-शराबे से दूर रहें

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>टॉक्सिक इन&amp;लॉज के साथ कैसे रहें? जानें दिमाग को शांत रखने के आसान और असरदार तरीके</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/टॉक्सिक-इन-लॉज-के-साथ-कैसे-रहें-जानें-दिमाग-को-शांत-रखने-के-आसान-और-असरदार-तरीके</link>
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        <description><![CDATA[ टॉक्सिक इन-लॉज के साथ कैसे रहें? जानें दिमाग को शांत रखने के आसान और असरदार तरीके ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kids Care Tips: ऑन्कोलॉजिस्ट की चेतावनी, बच्चों पर कभी न यूज करें ये प्रोडक्ट्स! जानें क्या है इसकी वजह?</title>
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        <description><![CDATA[ Kids Care Tips : हर पेरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा हेल्दी और सेफ बढ़ा हो. हम अक्सर सोचते हैं कि जो चीजें बाजार में आसानी से मिलती हैं, वे बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय के अनुसार, कुछ नॉर्मल चीजें जो हम रोजमर्रा में बच्चों पर यूज करते हैं, वे उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं.
ऑन्कोलॉजिस्ट का कहना है कि बच्चों की स्किन और शरीर बड़ो की तुलना में बहुत ज्यादा सेंसिटिव होता है. इसलिए कुछ सामान्य घरेलू प्रोडक्ट्स, जिन्हें हम सुरक्षित मानते हैं, बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं. ऑन्कोलॉजिस्ट ने हाल ही में कुछ प्रोडक्ट्स की लिस्ट शेयर की है, जिन्हें बच्चों पर कभी नहीं यूज करना चाहिए. तो आइए जानते हैं कि बच्चों पर कौन से प्रोडक्ट्स यूज ना करें.&amp;nbsp;
1. टैलकम पाउडर - बच्चों की स्किन बहुत सॉफ्ट और रैश फ्री रखने के लिए टैलकम पाउडर का यूज बहुत आम है. लेकिन ऑन्कोलॉजिस्ट के अनुसार, टैलकम पाउडर हमेशा से प्रदूषित होने का खतरा रखता है. ऐसे में बच्चों की नाभि और जेनटल एरिया पर टैलकम पाउडर का यूज न करें. पाउडर की जगह सूखी सफाई या हल्की मॉइस्चराइजिंग क्रीम का यूज करें.
2. प्लास्टिक फीडिंग बॉटल - आजकल बाजार में कई प्लास्टिक बॉटल्स बीपीए, बीपीएस और बीपीएफ फ्री बताई जाती हैं, लेकिन बार-बार स्टरलाइजेशन से प्लास्टिक धीरे-धीरे टूटता है और इसमें से केमिकल पदार्थ या माइक्रोप्लास्टिक्स दूध या पानी में मिल सकते हैं. इसलिए अगर सही हो तो ग्लास या स्टेनलेस स्टील की बॉटल्स का यूज करें. प्लास्टिक बॉटल्स को लंबे समय तक बार-बार यूज करने से बचें.&amp;nbsp;
3. &amp;nbsp;केमिकल सनस्क्रीन - सूरज की UV किरणों से बच्चों को बचाना जरूरी है, लेकिन हर सनस्क्रीन बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं होती है. केमिकल सनस्क्रीन बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती हैं. ऐसे में बच्चों के लिए मिनरल बेस्ड सनस्क्रीन का यूज करें, जिसमें जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड हो. ये सनस्क्रीन बच्चों की सेंसिटिव स्किन के लिए ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं.
4. सिंथेटिक फ्रेगरेंस वाले बाथ और शैम्पू - कुछ बाथ और शैम्पू में बहुत सारे फ्थैलेट्स और फॉर्माल्डिहाइड-रिलीजिंग एजेंट्स होते हैं. ये केमिकल बच्चों की स्किन और हार्मोन सिस्टम के लिए खतरनाक हो सकते हैं. इसलिए बच्चों के लिए फ्रेगरेंस-फ्री शैम्पू और बाथ सोप का यूज करें. खासकर 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सिंथेटिक सुगंध वाले प्रोडक्ट्स से बचें.
यह भी पढ़ें - Dog Pain Signs: बेजुबान कुत्ते दर्द में होने पर देते हैं ये संकेत, पेट पेरेंट्स भूलकर भी न करें इग्नोर
5. सिक्की रबर खिलौने - बच्चों के लिए रंग-बिरंगे बाथ टॉयज बहुत आम हैं, लेकिन ये खिलौने अक्सर फ्थैलेट्स से बने होते हैं. जब ये पानी में भीगते हैं, तो इनसे केमिकल पदार्थ निकल सकते हैं, जो बच्चों के हेल्थ के लिए खतरनाक हैं.बच्चों के लिए सिक्की या रबर खिलौने चुनते समय सुरक्षित और फ्री-फॉम-फ्थैलेट वाले ऑप्शन देखें.&amp;nbsp;
6. सेंटेड बेबी वाइप्स - बेबी वाइप्स तो बहुत कंफर्टेबल होती हैं, लेकिन अगर वे सुगंधित हों तो बच्चों की स्किन के लिए खतरनाक हो सकते हैं. इनमें अक्सर फ्रेगरेंस, PEGs और एथिलीन ऑक्साइड जैसे रसायन होते हैं. ऐसे में सेंसिटिव स्किन वाले बच्चों के लिए असेंटेड या सिर्फ पानी वाले वाइप्स यूज करें या फिर मुलायम कपड़े और पानी का यूज करके सफाई करें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Ebola Virus: कितना खतरनाक है इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन, भारत को इससे कितना खतरा? ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Kids, Care, Tips:, ऑन्कोलॉजिस्ट, की, चेतावनी, बच्चों, पर, कभी, न, यूज, करें, ये, प्रोडक्ट्स, जानें, क्या, है, इसकी, वजह</media:keywords>
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        <title>Ebola Virus: कितना खतरनाक है इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन, भारत को इससे कितना खतरा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ebola-virus-कितना-खतरनाक-है-इबोला-का-बुंडीबुग्यो-स्ट्रेन-भारत-को-इससे-कितना-खतरा</link>
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        <description><![CDATA[ How Dangerous Is The Bundibugyo Strain Of Ebola: अफ्रीका के कांगो और युगांडा में फैले इबोला वायरस के नए प्रकोप ने दुनियाभर में चिंता बढ़ा दी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन &amp;nbsp;ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित किया है. &amp;nbsp;इस बार इंफेक्शन के पीछे इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन बताया जा रहा है, जिसने कई लोगों की जान ले ली है. ऐसे में भारत समेत कई देशों में डर बढ़ गया है कि क्या यह वायरस यहां भी खतरा बन सकता है.&amp;nbsp;
कैसे फैलती है यह बीमारी?
अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, इबोला एक बेहद गंभीर और कई मामलों में जानलेवा बीमारी है, जो इंफेक्टेड व्यक्ति के बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क से फैलती है. इसमें खून, उल्टी, पसीना, लार, यूरिन और शरीर से निकलने वाले दूसरे फ्लूइड शामिल हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह वायरस कोविड-19 की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता, लेकिन इंफेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा होता है.&amp;nbsp;
क्या इससे जा सकती है जान?&amp;nbsp;
WHO के अनुसार, बुंडीबुग्यो वायरस ऑर्थोइबोलावायरस फैमिली का हिस्सा है और यह इबोला बीमारी का कारण बनता है. इस वायरस की मृत्यु दर 80 से 90 प्रतिशत तक हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक इस प्रकोप में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संदिग्ध मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।.
क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण?
डॉक्टरों के मुताबिक, इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं. इसमें तेज बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी, सिर दर्द और गले में खराश शामिल है. लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर के अंदर व बाहर ब्लीडिंग जैसे गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं. कई मामलों में उल्टी और मल में खून, नाक और मसूड़ों से ब्लीडिंग तक हो सकती है. वायरस दिमाग पर भी असर डाल सकता है, जिससे मरीज में कन्फ्यूजन, चिड़चिड़ापन और आक्रामक व्यवहार देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
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भारत में क्या है स्थिति?
भारत में फिलहाल इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है. हेल्थ मिनिस्ट्री और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है. &amp;nbsp;डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि इबोला कोविड-19 से अलग है, क्योंकि यह मुख्य रूप से इंफेक्टेड बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क से फैलता है, जबकि कोविड हवा और रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स के जरिए तेजी से फैलता था. यही वजह है कि इबोला का इंफेक्शन सीमित संपर्क में ज्यादा फैलता है, लेकिन इसकी गंभीरता कहीं ज्यादा मानी जाती है.&amp;nbsp;
कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?
एक्सपर्ट्स लोगों को सलाह दे रहे हैं कि संक्रमित व्यक्ति के खून, कपड़ों, बिस्तर या मेडिकल उपकरणों के संपर्क से बचें. इसके साथ ही प्रभावित देशों से लौटने वाले लोगों को 21 दिनों तक अपनी हेल्थ मॉनिटर करनी चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते पहचान और सख्त निगरानी ही इस वायरस को फैलने से रोकने का सबसे बड़ा तरीका है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Child Safety At Home: घर में है छोटा बच्चा तो तुरंत करें ये चीज, घर को ऐसे बनाएं बेबी प्रूफ</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Your Home Baby Proof: घर में छोटा बच्चा आते ही माता-पिता की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ जाती हैं. बच्चे स्वभाव से बेहद चंचल होते हैं और आसपास की हर चीज को छूकर, पकड़कर और मुंह में डालकर समझने की कोशिश करते हैं. यही उनकी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन कई बार घर की सामान्य चीजें भी उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सही समय पर बेबी प्रूफिंग करना बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
बेबी प्रूफिंग का क्या होता है मतलब?
डॉक्टरों के मुताबिक, बेबी प्रूफिंग का मतलब घर को इस तरह तैयार करना है कि बच्चा बिना चोट या खतरे के सुरक्षित तरीके से खेल और सीख सके. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इसकी शुरुआत बच्चे के जन्म से पहले ही कर देनी चाहिए. क्योंकि शुरुआती दिनों में माता-पिता को रात में अंधेरे में बच्चे को गोद में लेकर चलना पड़ सकता है, ऐसे में घर में फैले वायर, फिसलन या नुकीली चीजें हादसे का कारण बन सकती हैं.
किन चीजों का रखना होता है ध्यान?
बच्चों के बारे में तरह- तरह की जानकारी देने वाली बेवसाइट drgolly के अनुसार, घर में मौजूद ट्रिप हैजर्ड्स, खुले इलेक्ट्रिक कॉर्ड्स, शार्प कॉर्नर्स और खिड़कियों की सुरक्षा पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिए. बेबी क्रिब और नर्सरी फर्नीचर भी पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए. इसके अलावा जहां संभव हो, कॉर्डलेस विंडो कवरिंग्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है ताकि बच्चा उनमें उलझ न सके.
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किस उम्र के बच्चों को सेफ्टी की सबसे ज्यादा जरूरत?&amp;nbsp;
जब बच्चा घुटनों के बल चलना या खुद खड़े होकर चलना शुरू करता है, तब घर को और ज्यादा सुरक्षित बनाने की जरूरत पड़ती है. डॉक्टरों का कहना है कि इस स्टेज पर कपबोर्ड और ड्रॉअर्स में चाइल्ड लॉक लगाना जरूरी हो जाता है. इसके साथ ही इलेक्ट्रिक सॉकेट्स को कवर करना और भारी फर्नीचर को दीवार से फिक्स करना चाहिए ताकि बच्चा उन्हें खींचकर अपने ऊपर न गिरा ले. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सीढ़ियों के ऊपर और नीचे सेफ्टी गेट लगाना सबसे जरूरी सुरक्षा उपायों में से एक है.
इसके अलावा किचन, बाथरूम, लॉन्ड्री एरिया और बालकनी जैसी जगहों पर भी गेट लगाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यहां गर्म चीजें, केमिकल्स और फिसलन का खतरा ज्यादा होता है. इसके साथ ही पालतू जानवरों के खाने की जगह और फायरप्लेस जैसी जगहों को भी बच्चे की पहुंच से दूर रखना जरूरी है. डॉक्टरों का कहना है कि CPR और फर्स्ट एड की बेसिक ट्रेनिंग लेना भी बेहद जरूरी है. इसके साथ ही घर और कार में फर्स्ट एड किट हमेशा तैयार रखनी चाहिए.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fatty Liver Disease: साइलेंट किलर बन रहा फैटी लिवर, बिना शराब पिए भी डैमेज हो रहा लिवर, जानें शुरुआती लक्षण</title>
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        <description><![CDATA[ Early Signs Of Fatty Liver Disease: फैटी लिवर की बीमारी अब सिर्फ शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रह गई है. डॉक्टरों का कहना है कि आज बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं जो या तो बहुत कम शराब पीते हैं या बिल्कुल नहीं पीते. मेडिकल भाषा में इसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीयाटोटिक लिवर डिजीज कहा जाता है. यह बीमारी तब होती है जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है. सबसे खतरनाक बात यह है कि यह बीमारी धीरे-धीरे और बिना शोर किए बढ़ती है.&amp;nbsp;
भारत में तेजी से बढ़ रहा मोटापा
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च &amp;nbsp;के मुताबिक, भारत में मोटापा, डायबिटीज और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स तेजी से बढ़ रहे हैं और यही फैटी लिवर के मामलों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह बन रहे हैं.&amp;nbsp;
आपकी लाइफस्टाइल कर रही है आपको बीमार
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी डायरेक्टर डॉ. पंकज पुरी कहते हैं कि फैटी लिवर अब दुनियाभर में लिवर सिरोसिस की सबसे आम वजह बनता जा रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. डायबिटीज, मोटापा और बैठे-बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल के कारण ऐसे मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें बीमारी बिना किसी लक्षण से लेकर लिवर फेलियर तक पहुंच रही है.&amp;nbsp;
क्या होते हैं शुरुआती लक्षण?
डॉक्टरों के मुताबिक, इस बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यही है कि शुरुआती दौर में मरीज खुद को बीमार महसूस नहीं करता. लगातार थकान रहना, खाना खाने के बाद भारीपन, पेट फूलना, स्टैमिना कम होना या पेट के आसपास अचानक फैट बढ़ना जैसे संकेत लोग आम थकावट या खराब लाइफस्टाइल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन अंदर ही अंदर लिवर में फैट जमा होता रहता है.
गंभीर लक्षण क्या होते हैं इसके?
डॉ. पंकज पुरी बताते हैं कि जब बीमारी गंभीर हो जाती है तब शरीर में पीलिया, पेट में पानी भरना, पैरों में सूजन, खून की उल्टी और कोमा जैसी स्थिति तक देखने को मिल सकती है. यही वजह है कि कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है जब वे डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल या किसी दूसरी जांच के लिए ब्लड टेस्ट करवाते हैं.&amp;nbsp;
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किन कारणों से होती है लिवर की दिक्कत?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फैटी लिवर सिर्फ लिवर की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की पूरी मेटाबॉलिक हेल्थ से जुड़ी समस्या है. खराब खानपान, देर रात खाना, पैकेज्ड फूड, मीठे ड्रिंक्स, कम फिजिकल एक्टिविटी और घंटों बैठकर काम करने की आदत लिवर पर लगातार दबाव डाल रही है. हैरानी की बात यह है कि सामान्य वजन वाले लोग भी फैटी लिवर का शिकार हो सकते हैं.
कैसे कर सकते हैं ठीक?
डॉक्टरों के अनुसार, अच्छी बात यह है कि अगर बीमारी शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए तो लाइफस्टाइल में बदलाव करके लिवर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. डॉ. पुरी कहते हैं कि इलाज का सबसे अहम हिस्सा वजन कम करना, ब्लड शुगर कंट्रोल करना और डाइट सुधारना है. ज्यादा शुगर, ट्रांस फैट और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही रेगुलर एक्सरसाइज, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और एरोबिक एक्टिविटी को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Oats Vs Poha: ओट्स या पोहा... वजन घटाने और दिनभर एनर्जी के लिए जान लें कौन सा नाश्ता है सबसे बेस्ट</title>
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        <description><![CDATA[ Which Is Better Oats Or Poha For Weight Loss: आजकल हेल्दी ब्रेकफास्ट को लेकर लोगों के बीच बहस लगातार बढ़ रही है. कोई सुबह की शुरुआत ओट्स से करना बेहतर मानता है, तो किसी के लिए मूंगफली, करी पत्ता और नींबू से बना गर्मागर्म पोहा सबसे अच्छा नाश्ता है. दोनों ही जल्दी तैयार हो जाते हैं, जेब पर भारी नहीं पड़ते और पेट के लिए भी हल्के माने जाते हैं. लेकिन जब बात वजन घटाने और पूरे दिन शरीर में एनर्जी बनाए रखने की आती है, तो मामला इतना आसान नहीं रह जाता.&amp;nbsp;
कौन सा ब्रेकफास्ट सबसे अच्छा?&amp;nbsp;
न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे अच्छा ब्रेकफास्ट वही है जो लंबे समय तक पेट भरा रखे, पाचन को सपोर्ट करे और शरीर को बिना भारी महसूस कराए पर्याप्त ऊर्जा दे. भारत में ओट्स और पोहा दोनों ही हेल्दी ब्रेकफास्ट के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हुए हैं, लेकिन शरीर पर इनका असर अलग-अलग तरीके से पड़ता है.&amp;nbsp;
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ओट्स खाने के क्या होते हैं फायदे?&amp;nbsp;
ओट्स को फिटनेस और वेट लॉस से जोड़कर देखा जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकन नाम का घुलनशील फाइबर है, जो डाइजेशन प्रक्रिया को धीमा करता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च के मुताबिक, बीटा-ग्लूकन पेट भरे होने का एहसास बढ़ाने और भूख कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. यही कारण है कि ओट्स खाने के बाद बार-बार स्नैकिंग की जरूरत कम महसूस होती है.&amp;nbsp;
क्या ओट्स हेल्दी होते हैं?
इसके अलावा ओट्स धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे शरीर को लगातार एनर्जी मिलती रहती है और ब्लड शुगर अचानक तेजी से नहीं बढ़ता. हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी देते हैं कि फ्लेवर्ड इंस्टेंट ओट्स, जिनमें ज्यादा चीनी होती है, हेल्दी विकल्प नहीं माने जा सकते. सबसे बेहतर विकल्प प्लेन रोल्ड या स्टील-कट ओट्स &amp;nbsp;को माना जाता है.
पोहा क्या करता है हमारा हाल?
दूसरी तरफ पोहा को अक्सर कमतर आंका जाता है, क्योंकि यह ओट्स की तुलना में हल्का महसूस होता है. लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी खासियत भी है. चपटे चावल से बनने वाला पोहा आसानी से पच जाता है और जल्दी तैयार हो जाता है. जब इसमें सब्जियां, मूंगफली, राई और करी पत्ता डाला जाता है, तो इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू काफी बढ़ जाती है. मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट देती है, जबकि नींबू आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करता है.
दोनों में आपके लिए बेहतर कौन?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, वजन घटाने के लिए सिर्फ एक मील पर फोकस करने के बजाय पूरे डाइट पैटर्न को समझना ज्यादा जरूरी है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि असली सवाल ओट्स बनाम पोहा नहीं, बल्कि यह है कि आपका नाश्ता कितना संतुलित है. ऐसा ब्रेकफास्ट जिसमें पर्याप्त फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी इंग्रीडिएंट्स हों, वही शरीर को लंबे समय तक एनर्जी और संतुष्टि देता है.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dog Pain Signs: बेजुबान कुत्ते दर्द में होने पर देते हैं ये संकेत, पेट पेरेंट्स भूलकर भी न करें इग्नोर</title>
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        <description><![CDATA[ Common Signs That Your Dog Is In Pain: पालतू कुत्ते इंसानों के सबसे वफादार साथी माने जाते हैं. वे बिना कुछ कहे अपने मालिक के हर सुख-दुख में साथ निभाते हैं, लेकिन जब बात दर्द की आती है तो कुत्ते अपनी तकलीफ शब्दों में बयां नहीं कर पाते. यही वजह है कि कई बार उनकी परेशानी लंबे समय तक नजर नहीं आती. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डॉग्स अक्सर अपने दर्द को छिपाने की कोशिश करते हैं, इसलिए उनके व्यवहार और बॉडी लैंग्वेज में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को समझना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
कुत्तों को क्या हो सकती है दिक्कत?
जानकारों के मुताबिक, कुत्तों में दर्द कई कारणों से हो सकता है. इसमें चोट लगना, गठिया, दांतों की समस्या, पेट से जुड़ी दिक्कतें या कोई गंभीर बीमारी शामिल हो सकती है. हालांकि, डॉग्स अपने व्यवहार और रोजमर्रा की आदतों के जरिए यह संकेत जरूर देते हैं कि वे किसी परेशानी से गुजर रहे हैं.
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कुत्तों में क्या होता है दर्द का संकेत?
अगर आपका कुत्ता अचानक ज्यादा आवाजें निकालने लगे, जैसे बार-बार कराहना, रोना, गुर्राना या बिना वजह भौंकना, तो यह दर्द का संकेत हो सकता है. कई बार दर्द में डॉग्स आराम की स्थिति में भी तेजी से सांस लेने लगते हैं या लगातार हांफते रहते हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आंखों का लाल होना और हार्ट रेट बढ़ना भी परेशानी की ओर इशारा कर सकता है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
व्यवहार से कैसे पता लगा सकते हैं आप?
व्यवहार में बदलाव भी दर्द की बड़ी निशानी माना जाता है. अगर आपका हमेशा एक्टिव और खुश रहने वाला डॉग अचानक अकेला रहने लगे, खेलने में दिलचस्पी न दिखाए या बाहर घूमने जाने से बचने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार दर्द की वजह से कुत्ते चिड़चिड़े हो जाते हैं और छूने पर गुर्राने या काटने की कोशिश भी कर सकते हैं. किसी खास जगह को बार-बार चाटना, बेचैनी में इधर-उधर घूमना या बिना वजह परेशान दिखना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं.
फिजिकल एक्टिविटी में क्या होते हैं बदलाव?
फिजिकल बदलावों पर नजर रखना भी जरूरी है. चलने में लंगड़ापन, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी, उठने-बैठने में दिक्कत या सुबह के समय शरीर में अकड़न गठिया और जोड़ों के दर्द की तरफ इशारा कर सकती है. वहीं, चेहरे, पंजों या पैरों में सूजन और खाना चबाने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी दर्द से जुड़ी हो सकती हैं.
इस बात का रखना चाहिए ध्यान, वरना हो सकता है नुकसान
एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि कभी भी कुत्तों को इंसानों वाली दर्द की दवा नहीं देनी चाहिए. यह उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है. अगर डॉग खाना कम कर दे, खाना खाते वक्त मुंह से गिराने लगे या पानी पीने की आदत अचानक बदल जाए, तो तुरंत वेट डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. समय रहते इलाज मिलने से पालतू जानवर जल्दी ठीक हो सकते हैं.
इसे भी पढ़ें -&amp;nbsp;Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fridge Vegetable Storage: फ्रिज के अंदर भी पॉलिथीन में रखते हैं सब्जियां, जानें ऐसा करना कितना खतरनाक?</title>
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        <description><![CDATA[ Fridge Vegetable Storage: फ्रिज के अंदर भी पॉलिथीन में रखते हैं सब्जियां, जानें ऐसा करना कितना खतरनाक? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>World Hypertension Day 2026: बिना किसी लक्षण के बढ़ रहा ब्लड प्रेशर बन सकता है बड़ा खतरा, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ World Hypertension Day 2026: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम, तनाव और खराब खानपान में इतने उलझ गए हैं कि अपनी सेहत पर ध्यान ही नहीं दे पाते. लोग अक्सर तभी डॉक्टर के पास जाते हैं जब शरीर में दर्द या कोई बड़ी परेशानी महसूस होती है, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी समस्या है, जो कई बार बिना किसी साफ संकेत के शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती रहती है.
सबसे चिंता की बात यह है कि यह बीमारी अक्सर बिना किसी साफ लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. यही वजह है कि डॉक्टर इसे &amp;ldquo;साइलेंट किलर&amp;rdquo; कहते हैं, क्योंकि कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते इसकी जांच न हो, तो यह दिल, दिमाग और किडनी जैसी जरूरी चीजों पर बुरा असर डाल सकता है.&amp;nbsp;
युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा खतरा
पहले हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार तनाव, देर रात तक काम करना, नींद पूरी न होना, ज्यादा नमक वाला खाना और घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहना इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं. वहीं कई लोग बाहर से पूरी तरह फिट दिखते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उनका शरीर इस बीमारी से जूझ रहा होता है. डॉक्टरों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि दिमाग, किडनी और शरीर के दूसरे हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकता है.&amp;nbsp;
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क्यों कहा जाता है &amp;lsquo;साइलेंट किलर&amp;rsquo;?
हाई ब्लड प्रेशर की सबसे खतरनाक बात यही है कि इसके लक्षण कई बार नजर ही नहीं आते. कुछ लोगों को सिर दर्द, चक्कर, थकान या सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में कोई संकेत नहीं मिलता. अगर समय रहते इसका पता न चले तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. &amp;nbsp;विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ लक्षणों का इंतजार करना सही नहीं है, बल्कि समय-समय पर ब्लड प्रेशर चेक करवाना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
छोटी आदतें बदलकर बचा सकते हैं खुद को
डॉक्टरों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर से बचने के लिए रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव बहुत मदद कर सकते हैं. जैसे नमक कम खाना, रोज थोड़ा व्यायाम करना, तनाव कम लेना, अच्छी नींद लेना और धूम्रपान या शराब से दूरी बनाना जरूरी है. इस साल वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2026 की थीम भी लोगों को मिलकर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और नियमित जांच कराने के लिए जागरूक कर रही है. विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर समय रहते सावधानी बरती जाए तो इस &amp;ldquo;साइलेंट किलर&amp;rdquo; से बचा जा सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>World, Hypertension, Day, 2026:, बिना, किसी, लक्षण, के, बढ़, रहा, ब्लड, प्रेशर, बन, सकता, है, बड़ा, खतरा, डॉक्टरों, ने, दी, बड़ी, चेतावनी</media:keywords>
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        <title>Pregnancy High BP: 2 मिनट का टेस्ट और मां&amp;बच्चे की जिंदगी सुरक्षित, जानें प्रेग्नेंसी में क्यों है यह जरूरी?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Blood Pressure Test Is Important During Pregnancy: प्रेग्नेंसी के दौरान लोग अक्सर अच्छे खाने, ज्यादा आराम और बेबी की ग्रोथ पर पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन इसी बीच एक छोटा सा टेस्ट कई बार नजरअंदाज हो जाता है/ ये टेस्ट सिर्फ दो मिनट में होता है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यही छोटा सा चेकअप मां और बच्चे दोनों की जान बचा सकता है. बात हो रही है ब्लड प्रेशर टेस्ट की, जिसे कई महिलाएं इसलिए सीरियस नहीं लेतीं क्योंकि उन्हें कोई परेशानी महसूस नहीं होती.&amp;nbsp;
दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौत की वजह
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली हाई बीपी की दिक्कतें, खासकर प्रीक्लेम्पसिया, दुनियाभर में मां की मौत की बड़ी वजहों में शामिल हैं. सबसे खतरनाक बात ये है कि ये बीमारी अक्सर बिना किसी साफ लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है. कई बार महिला पूरी तरह नॉर्मल महसूस करती है, लेकिन अंदर ही अंदर बॉडी पर दबाव बढ़ रहा होता है.&amp;nbsp;
दो मिनट से भी कम समय में टेस्ट
आर्टेमिस हॉस्पिटल की ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट की चेयरपर्सन डॉ. रेनू रैना सहगल बताती हैं कि डिजिटल या मैनुअल बीपी मॉनिटर से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक प्रेशर चेक किया जाता है. इसमें दो मिनट से भी कम समय लगता है, लेकिन इससे पता चलता है कि बॉडी प्रेग्नेंसी के दौरान खुद को कैसे एडजस्ट कर रही है.
कब होता है खतरे का निशान?
कुछ मामलों में डॉक्टर रोल-ओवर टेस्ट भी करते हैं, खासकर 28 से 32 हफ्ते की प्रेग्नेंसी के बीच. पिंकी प्रॉमिस की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. विनती मनियार कहती हैं, इस टेस्ट में महिला पहले लेफ्ट साइड लेटती है और फिर पीठ के बल होती है. अगर डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 20 mmHg या उससे ज्यादा बढ़ जाए, तो ये खतरे का संकेत हो सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक इससे पता चलता है कि ब्लड वेसल्स सही तरीके से काम कर रही हैं या नहीं.
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प्रेग्नेंसी में हाई बीपी का क्या होता है खतरा?
प्रेग्नेंसी में हाई बीपी का खतरा इसलिए ज्यादा माना जाता है क्योंकि इसका असर सिर्फ मां पर नहीं, बल्कि बच्चे पर भी पड़ता है. अगर समय पर पता न चले तो प्लेसेंटा तक खून का फ्लो कम हो सकता है, जिससे बच्चे को ऑक्सीजन और जरूरी पोषण सही मात्रा में नहीं मिल पाता. इससे लो बर्थ वेट, समय से पहले डिलीवरी, दौरे पड़ना और कई गंभीर कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की रिसर्च के मुताबिक समय रहते जांच और मॉनिटरिंग करना सबसे असरदार तरीका माना जाता है.
प्रेग्नेंसी के दौरान जांच क्यों जरूरी है?
डॉक्टर सिर्फ बीपी टेस्ट पर भरोसा नहीं करते. डॉ. विनती मनियार इसे एसेंशियल ट्रायो कहती हैं. इसमें यूरिन एल्ब्यूमिन टेस्ट, यूरिक एसिड और क्रिएटिनिन जैसे ब्लड मार्कर्स और प्लेटलेट काउंट शामिल होते हैं. इन टेस्ट्स से पता चलता है कि किडनी, ब्लड और दूसरे अंग सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं. डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान हर छोटी जांच जरूरी होती है और दो मिनट का ये बीपी टेस्ट सिर्फ फॉर्मेलिटी नहीं, बल्कि मां और बच्चे की सुरक्षा का अहम हिस्सा है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Pregnancy, High, BP:, मिनट, का, टेस्ट, और, मां-बच्चे, की, जिंदगी, सुरक्षित, जानें, प्रेग्नेंसी, में, क्यों, है, यह, जरूरी</media:keywords>
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        <title>Dengue Recovery Diet: अभी&amp;अभी डेंगू से ठीक हुए हैं तो ऐसी रखें डाइट, फटाफट होगी रिकवरी</title>
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        <description><![CDATA[ Dengue Recovery Diet: डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो एडीज मच्छर के काटने से फैलता है. बुखार और शरीर में दर्द, ये डेंगू के आम लक्षण हैं. इसके साथ ही साथ डेंगू में मरीज के शरीर की प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगती हैं. डॉक्टर्स के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सामान्य रूप से डेढ़ से चार लाख तक प्लेटलेट्स काउंट होता है. डेंगू के बुखार में जब ये प्लेटलेट्स घटकर 50 हजार के नीचे चली जाए तो मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है.
असल चुनौती तब शुरू होती है, जब मरीज बुखार से ठीक हो जाता है. बुखार के बाद शरीर पूरी तरह थक जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है. ऐसे में प्लेटलेट्स की संख्या को सामान्य स्तर पर लाने के लिए सही डाइट बहुत अहम भूमिका निभाती है. आइए जानते हैं डेंगू बुखार से उबरने के बाद तेजी से रिकवरी करने के लिए क्या करना चाहिए, साथ ही जानेंगे कौन-सी हैं वो चीजें जो शरीर को ताकत देने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और प्लेटलेट्स की &amp;nbsp;संख्या में सुधार करने में भी मदद करती हैं.&amp;nbsp;
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डेंगू के मरीज सुपरफास्ट रिकवरी के लिए करें इन चीजों का सेवन
1. हरी पत्तेदार सब्जियां- डेंगू के बुखार से मरीज काफी कमजोर हो जाता है. ऐसे में डेंगू के मरीज को हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए. मरीज सब्जियों से बने सूप, सलाद का भी सेवन कर सकता है.
2. पानी- डेंगू के मरीज को पानी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए. इसके साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए आप फलों के जूस का भी सेवन भी कर सकते हैं.
3. दलिया- दलिया को पोषण से भरपूर माना जाता है. डेंगू के मरीज को पौष्टिक दलिया खिलाना चाहिए. इसमें हरी सब्जियों को भी एड कर सकते हैं.
4. खिचड़ी- इसके साथ ही खिचड़ी कोभी मरीज के खाने में एड किया जा सकता है. डॉक्टर भी मरीज को खिचड़ी खिलाने की सलाह देते हैं.
5. बकरी का दूध- डेंगू के बुखार में प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने के लिए बकरी का दूध सबसे अच्छा माना जाता है, इसलिए मरीज को आप बकरी का दूध दे सकते हैं. इससे उसे जल्दी रिकवर होने में मदद मिल सकती है.&amp;nbsp;
6. लहसुन- लहसुन को सेहत के लिए बेहद ही फायदेमंद माना जाता है. डेंगू के मरीजों के खाने में लहसुन का इस्तेमाल करना चाहिए&amp;nbsp;
7. तुलसी की चाय- गर आप डेंगू के मरीज को चाय दे रहे हैं तो कोशिश करें कि उसमें तुलसी के पत्ते, अदरक जैसी सामग्री शामिल हों, ये ना केवल शरीर को सेहतमंद रखने में सहायक हैं बल्कि, फास्ट रिकवरी में भी मदद करती हैं.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Hotel Safety Tips: टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदी होती हैं होटल की ये चीजें, यूज करने से पहले जान लें जरूरी बात</title>
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        <description><![CDATA[ Dirtiest Things Found In Hotel Rooms: होटल का कमरा बाहर से कितना भी साफ और चमकदार क्यों न दिखे, लेकिन कई बार वहां ऐसी चीजें होती हैं जिनमें सबसे ज्यादा गंदगी छिपी होती है. साफ बेडशीट, चमकता शीशा, अच्छे से रखे तौलिए और अच्छी खुशबू देखकर लोग मान लेते हैं कि कमरा पूरी तरह हाइजीनिक है. लेकिन सच्चाई कई बार इससे बिल्कुल अलग होती है. हैरानी की बात ये है कि होटल का बाथरूम हमेशा सबसे गंदी जगह नहीं होता. कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें लगभग हर गेस्ट छूता है, लेकिन उनकी सफाई उतनी अच्छी तरह नहीं होती जितना लोग सोचते हैं.&amp;nbsp;
होटल में टीवी का रिमोर्ट
सबसे पहले आता है टीवी का रिमोट. होटल रूम में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में यही शामिल है. लगभग हर गेस्ट इसे हाथ लगाता है, लेकिन हर कोई हाथ धोकर इसका इस्तेमाल नहीं करता. रिमोट के छोटे-छोटे बटन और किनारों की वजह से इसे अच्छी तरह साफ करना भी आसान नहीं होता. कई बार हाउसकीपिंग स्टाफ जल्दी-जल्दी में सिर्फ ऊपर से कपड़ा मार देता है. ऐसे में खाने के दाग, छींक, खांसी और गंदे हाथों के कीटाणु लंबे समय तक उस पर बने रह सकते हैं. इसी वजह से कई ट्रैवलर्स रूम में पहुंचते ही रिमोट को टिश्यू या सैनिटाइजर से साफ करते हैं.
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सजावटी कुशन और रंगीन कपड़े
दूसरी सबसे गंदी चीज मानी जाती है बेड पर रखे सजावटी कुशन और रंगीन कपड़े. सफेद चादरें और तकिए के कवर तो अक्सर बदले जाते हैं, लेकिन सजावट के लिए रखे गए कुशन और फैब्रिक रनर कई दिनों तक बिना धुले पड़े रह सकते हैं. लोग उन पर बैग रखते हैं, जूते रख देते हैं और कई बार बाहर पहनकर आए कपड़ों के साथ सीधे उन पर बैठ जाते हैं. यही वजह है कि कई अनुभवी ट्रैवलर्स होटल पहुंचते ही इन सजावटी चीजों को बेड से हटा देते हैं.
इलेक्ट्रिक केतली या कॉफी मेकर&amp;nbsp;
होटल के कमरे में रखा इलेक्ट्रिक केतली या कॉफी मेकर भी लोगों को परेशान करता है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि उबलता पानी सबकुछ साफ कर देता है, लेकिन असली चिंता मशीन की सफाई को लेकर होती है. कई बार इनकी रेगुलर सफाई नहीं होती, जिससे बैक्टीरिया या फंगस पनप सकते हैं. कुछ ट्रैवलर्स इस्तेमाल से पहले केतली को अच्छी तरह धोते हैं, जबकि कई लोग होटल की केतली यूज ही नहीं करते.
पानी पीने का ग्लास भी सुरक्षित नहीं
बाथरूम के पास रखा पानी पीने वाला ग्लास भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता. कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि कुछ जगहों पर ग्लास को ठीक से डिसइन्फेक्ट करने के बजाय सिर्फ पानी से धो दिया जाता है. कभी-कभी वही कपड़ा इस्तेमाल कर लिया जाता है जिससे कमरे की दूसरी चीजें साफ की गई हों. इसलिए कई लोग होटल का ग्लास इस्तेमाल करने से पहले खुद धोते हैं या फिर सिर्फ सील बंद बोतल का पानी पीना पसंद करते हैं.
इन चीजों पर भी होती है गंदगी
इसके अलावा लाइट स्विच, दरवाजे के हैंडल, फोन, पर्दों के हैंडल और बेड के पास लगे छोटे बटन जैसी चीजें भी सबसे ज्यादा छुई जाती हैं, लेकिन उनकी सफाई कई बार नजरअंदाज हो जाती है. कोरोना महामारी के बाद लोगों में इन चीजों को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है और अब कई ट्रैवलर्स अपने साथ डिसइन्फेक्टेंट वाइप्स रखना जरूरी मानते हैं.
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        <pubDate>Mon, 18 May 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Home Cleaning Tips : रोज पोछा लगाने के बाद भी पीले हो रहे फर्श पर लगे टाइल्स, ये ट्रिक आएगी काम</title>
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        <description><![CDATA[ Home Cleaning Tips : घर को सुंदर और साफ-सुथरा रखना हर किसी के लिए जरूरी होता है, लेकिन कई बार हमारी मेहनत के बाद भी फर्श की टाइल्स पर जिद्दी दाग और पीली परतें बनी रहती हैं. चाहे आप रोज झाड़ू-पोछा लगाएं या साफ-सुथरे रखने की कोशिश करें, इन दागों से छुटकारा पाना मुश्किल लगता है. समय के साथ फर्श पर धूल-मिट्टी, पानी के दाग और रोजमर्रा के इस्तेमाल से टाइल्स का रंग फीका पड़ने लगता है. कई बार यह पीली परतें और दाग इतने जिद्दी हो जाते हैं कि नॉर्मल पोछा लगाने से नहीं हटते हैं. ऐसे में घर की खूबसूरती और साफ-सफाई का पूरा असर भी फीका पड़ जाता है, लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान और घरेलू नुस्खों की मदद से आप अपने फर्श की टाइल्स को चमकदार और दाग फ्री बना सकते हैं, तो आइए जानते हैं कि रोज पोछा लगाने के बाद भी फर्श पर लगे टाइल्स पीले हो रहे हैं तो कौन सी ट्रिक काम आएगी.&amp;nbsp;
फर्श पर लगे टाइल्स पीले हो रहे हैं तो कौन सी ट्रिक आएगी काम?
1. सफेद सिरका - सफेद सिरका एक नेचुरल और बहुत ही असरदार क्लीनर है. इसमें हल्का एसिड होता है, जो जिद्दी दागों को हटाने में मदद करता है. इसका यूज करने के लिए एक बाल्टी पानी में एक ढक्कन सफेद सिरका मिलाएं. इसके बाद पोछे को इस पानी में भिगोकर फर्श साफ करें. साथ ही ज्यादा दाग वाले हिस्सों पर सीधे सिरके का पानी डालकर कपड़े से पोंछें. इससे न सिर्फ दाग हटेंगे, बल्कि बैक्टीरिया भी खत्म होंगे और फर्श चमकदार बनेगा.&amp;nbsp;
2. बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट - बेकिंग सोडा घर के कई कामों में मदद करता है और फर्श की सफाई में भी मदद कर सकता है. इसे यूज करने के लिए बेकिंग सोडा और पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें. इसे दाग वाले हिस्सों पर लगाएं और 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें फिर हल्के हाथों से स्पंज या कपड़े से रगड़ें और पानी से धो दें. यह तरीका पुराने दाग और जमी गंदगी को आसानी से हटाने में मदद करता है.&amp;nbsp;
3. नींबू का रस - नींबू में साइट्रिक एसिड होता है, जो दाग हटाने में मदद करता है और फर्श को ताजगी भी देता है. इसे यूज करने के लिए नींबू निचोड़कर उसका रस पानी में मिलाएं इस पानी में पोछा भिगोकर फर्श पोंछें. ज्यादा दाग वाली जगह पर नींबू का रस सीधे स्प्रे करें और कपड़े से पोंछें. नींबू का इस्तेमाल फर्श को नेचुरल फ्रेशनर भी बनाता है.&amp;nbsp;
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4. सेंधा नमक और शैम्पू - अगर फर्श पर जमी गंदगी और दाग बहुत पुराने हैं, तो यह नुस्खा बहुत मदद कर सकता है. इस ट्रिक को यूज करने के लिए एक बाल्टी में पानी डालें और उसमें 1 चम्मच सेंधा नमक और थोड़ा शैम्पू मिलाएं पोछा इस पानी में भिगोकर फर्श साफ करें. सूखने पर फर्श में नेचुरल चमक आ जाएगी.&amp;nbsp;
रोजाना पोछा लगाना कितना जरूरी?
फर्श की सफाई रोजाना करना बहुत जरूरी है. रोजाना पोछा लगाने से गंदगी जमा नहीं होती और दाग बनने का खतरा कम हो जाता है, वहीं अगर कोई दाग छूट गया है, तो उसे तुरंत साफ करें. हल्के गुनगुने पानी से भी फर्श समय-समय पर साफ करना अच्छा रहता है.साथ ही टाइल्स की सफाई करते समय रबड़ के दस्ताने पहनना जरूरी है. इससे न सिर्फ आपके हाथ सुरक्षित रहेंगे बल्कि लंबे समय तक सफाई करने में आसानी होगी.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Weight Loss Tips: 22 किलो वजन कम कर पाई PMOS पर फतह, जानिए इस फिटनेस इंफ्लुएंसर ने कैसे किया यह कारनामा?</title>
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        <description><![CDATA[ Weight Loss Tips: कई महिलाओं के लिए वजन कम करना आसान काम नहीं होता है, खासकर जब महिला Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) या Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome (PMOS) जैसी स्थिति से जूझ रही हों. इस स्थिति में हार्मोन और मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है. PMOS से पीड़ित महिलाओं को अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस, अनियमित पीरियड्स, थकान और वजन कम न होने जैसी समस्याएं होती हैं. लेकिन सही और लगातार लाइफस्टाइल के बदलाव के साथ वजन कम किया जा सकता है, खासकर अगर आप हार्मोनल बैलेंस और मेटाबॉलिक हेल्थ पर ध्यान दें.
हाल ही में एक फिटनेस इन्फ्लुएंसर ने PMOS के बाद भी अपने 22 किलो वजन घटाने के सिक्रेट शेयर किए. फिटनेस इन्फ्लुएंसर तनिषा चड्ढा ने PMOS के बाद भी 80 किलो से 58 किलो तक का सफर तय किया. उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने एक्सपीरियंस शेयर किए और बताया कि यह कोई मुश्किल डाइट या भूख मारकर किया गया काम नहीं था. उन्होंने सही और आसान आदतों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करके यह बदलाव हासिल किया. तनिषा ने अपने सात मुख्य आदतों का जिक्र किया, जिन्हें अपनाकर उन्होंने वजन घटाया.&amp;nbsp;
फिटनेस इन्फ्लुएंसर ने PMOS के बाद कैसे घटाया 22 किलो वजन?
1. हल्का कैलोरी डेफिसिट (Calorie Deficit) - तनिषा ने कहा, मैंने खुद को भूखा नहीं रखा. मैंने सिर्फ हल्का, टिकाऊ कैलोरी डेफिसिट बनाया. इसका मतलब है कि उन्होंने अपने रोजमर्रा के कैलोरी की तुलना में 200 से 300 कैलोरी कम ली, जिससे उनका वजन धीरे-धीरे और स्थायी रूप से घटे. साथ ही शरीर को एनर्जी मिलती रहे, इसलिए कभी भी जबरदस्ती भूखा नहीं रहना चाहिए.&amp;nbsp;
2. हर खाने में प्रोटीन (High-Protein Diet) - तनिषा ने हर खाने में 25 से 30 ग्राम प्रोटीन लेने पर जोर दिया. प्रोटीन से भूख कम होती है. ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. मसल्स बनी रहती हैं और फैट घटता है. PMOS में प्रोटीन बहुत मददगार है क्योंकि यह क्रेविंग्स और वजन बढ़ने को रोकता है.&amp;nbsp;
3. &amp;nbsp;स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) - तनिषा ने बताया कि कार्डियो की जगह वेट ट्रेनिंग ज्यादा असरदार है. हफ्ते में 3 से 4 बार वजन उठाने की ट्रेनिंग से मेटाबॉलिज्म तेज होता है. शरीर टोंड और शेप में आता है. आराम करते समय भी कैलोरी बर्न होती रहती है. सिर्फ चलना या दौड़ना हमेशा पर्याप्त नहीं होता है. मसल्स बनाने से शरीर ज्यादा फैट जलाता है.&amp;nbsp;
4. &amp;nbsp;रोजाना हल्की एक्टिविटी (Daily Movement) - दिनभर छोटे-छोटे कदम और हल्की मूवमेंट करना भी बेहद जरूरी है. तनिषा रोजाना 8 से 10 हजार कदम चलती हैं. इससे अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है. एनर्जी खर्च बिना थकावट के होती है. ऐसे में छोटे बदलाव जैसे घर में चलना या ऑफिस में स्टैंड लेना भी मदद करता है.&amp;nbsp;
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5. खान के बाद टहलना (Walk After Meals) - खाने के तुरंत बाद 5-10 मिनट की वॉक से पाचन सुधरता है. ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. फुलनेस और ब्लोटिंग कम होती है. PMOS में ग्लूकोज के अचानक बढ़ने को रोकना जरूरी है.&amp;nbsp;
6. फिक्स्ड मील टाइम (Fixed Meal Timing) - तनिषा ने अपने खाने का टाइम स्थिर रखा और लगातार स्नैकिंग से बची. उन्होंने तीन बैलेंस डाइट और 4- 5 घंटे का अंतर रखा. इससे इंसुलिन का लेवल नियंत्रित रहता है और एक्स्ट्रा खाने से बचा जा सकता है.&amp;nbsp;
7. नींद और स्ट्रेस कंट्रोल (Sleep &amp;amp; Stress Control) - तनिषा ने कहा, 7 से 8 घंटे की नींद और स्ट्रेस कम करना बहुत जरूरी है. कम नींद और ज्यादा तनाव कॉर्टिसोल बढ़ाता है, जिससे शरीर वजन रोक लेता है. पूरी नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट से शरीर वजन कम करने में मदद करता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>First Aid Tips: घर में बिगड़ जाए किसी की तबीयत तो घबराएं नहीं! डॉक्टर के बताए ये 10 जरूरी कदम बचा सकते हैं जान</title>
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        <description><![CDATA[ First Aid Tips: घर में अचानक किसी की तबीयत बिगड़ जाए, सांस रुकने लगे, ज्यादा खून बहने लगे या कोई बेहोश हो जाए, तो उस पल इंसान घबरा जाता है. &amp;nbsp;ऐसे समय में दिमाग काम करना बंद कर देता है और समझ नहीं आता कि सबसे पहले क्या करें. &amp;nbsp;लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि मेडिकल इमरजेंसी के शुरुआती कुछ मिनट बहुत अहम होते हैं. अगर सही समय पर सही कदम उठा लिया जाए, तो किसी की जान बचाई जा सकती है. &amp;nbsp;इसलिए हर इंसान को कुछ जरूरी फर्स्ट एड और इमरजेंसी स्टेप्स की जानकारी जरूर होनी चाहिए.&amp;nbsp;
किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में लोग बिना सोचे-समझे सीधे मदद करने दौड़ पड़ते हैं, लेकिन सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि आसपास कोई खतरा तो नहीं है. &amp;nbsp;जैसे आग, बिजली का करंट, गैस लीकेज या सड़क पर ट्रैफिक. अगर जगह सुरक्षित नहीं होगी, तो मदद करने वाला भी खतरे में पड़ सकता है. &amp;nbsp;इसके बाद मरीज को ध्यान से देखें कि वह होश में है या नहीं, सांस ले रहा है या नहीं और कहीं ज्यादा खून तो नहीं बह रहा. यही शुरुआती जांच आगे क्या करना है, यह सोचने में मदद करती है. &amp;nbsp; &amp;nbsp;
तुरंत इमरजेंसी हेल्प को कॉल करें
अगर स्थिति गंभीर लगे तो समय बर्बाद किए बिना एम्बुलेंस या इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें. भारत में 112 और कई राज्यों में 108 एम्बुलेंस सेवा के लिए इस्तेमाल होता है. फोन पर साफ-साफ बताएं कि मरीज की हालत कैसी है, वह कहां है और क्या परेशानी हो रही है. अगर आसपास और लोग हैं तो किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदारी देकर कॉल करने को कहें, क्योंकि कई बार लोग सोचते रहते हैं कि कोई और फोन कर देगा.&amp;nbsp;
सांस और होश जरूर चेक करें
अगर व्यक्ति जवाब नहीं दे रहा है, तो उसके कंधे को हल्के से छूकर पूछें कि वह ठीक है या नहीं. इसके बाद उसकी सांस चेक करें. छाती ऊपर-नीचे हो रही है या नहीं, सांस की आवाज आ रही है या नहीं, यह ध्यान से देखें. अगर सांस नहीं चल रही हो या बहुत हल्की हो, तो यह खतरनाक स्थिति हो सकती है. ऐसे में तुरंत CPR यानी कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन शुरू करना जरूरी हो जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक सही समय पर किया गया CPR कई लोगों की जान बचा सकता है.&amp;nbsp;
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ज्यादा खून बह रहा हो तो क्या करें
किसी हादसे में अगर बहुत ज्यादा खून बह रहा हो, तो देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसे में साफ कपड़ा या पट्टी लेकर घाव पर जोर से दबाव डालें. &amp;nbsp;अगर कपड़ा भीग जाए तो उसे हटाने की बजाय उसके ऊपर दूसरा कपड़ा रखें. &amp;nbsp;कोशिश करें कि घायल हिस्सा दिल से थोड़ा ऊपर रहे. &amp;nbsp;ऐसा करने से खून का बहाव कम हो सकता है. जब तक डॉक्टर या एम्बुलेंस न आ जाए, दबाव बनाए रखें.&amp;nbsp;
किसी का खाना गले में फंस जाए तो तुरंत करें ये काम
कई बार खाना खाते समय अचानक सांस की नली में कुछ फंस जाता है. अगर व्यक्ति बोल नहीं पा रहा, खांस नहीं पा रहा या सांस लेने में दिक्कत हो रही है, तो तुरंत मदद करनी चाहिए. डॉक्टरों के मुताबिक पहले पीठ पर जोर से पांच थपकी दें. अगर इससे आराम न मिले, तो Heimlich Maneuver किया जा सकता है, जिसमें पेट के ऊपर दबाव देकर फंसी चीज बाहर निकालने की कोशिश की जाती है. अगर व्यक्ति बेहोश हो जाए, तो तुरंत CPR शुरू करना चाहिए.&amp;nbsp;
बेहोश व्यक्ति को सही पोजीशन में रखें
अगर कोई व्यक्ति बेहोश है लेकिन उसकी सांस चल रही है, तो उसे करवट करके लेटा दें. इसे रिकवरी पोजीशन कहा जाता है. &amp;nbsp;इससे सांस की नली खुली रहती है और उल्टी या किसी चीज से दम घुटने का खतरा कम हो जाता है. &amp;nbsp;साथ ही बार-बार उसकी सांस पर नजर रखना भी जरूरी है. बिना जरूरत मरीज को ज्यादा हिलाना-डुलाना नहीं चाहिए.&amp;nbsp;
शांत रहें, क्योंकि आपकी हिम्मत ही मरीज को संभाल सकती है
मेडिकल इमरजेंसी में मरीज जितना डरता है, उतना ही उसके आसपास के लोग भी घबरा जाते हैं. &amp;nbsp;लेकिन ऐसे समय में शांत रहना सबसे जरूरी होता है. &amp;nbsp;मरीज से धीरे और भरोसे के साथ बात करें. डॉक्टरों का कहना है कि घबराहट कई बार मरीज की हालत और बिगाड़ सकती है. इसलिए समझदारी और धैर्य ही सबसे बड़ी ताकत बनते हैं. &amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Digestion Health: हर 2&amp;3 घंटे में पेट पूजा करने की आदत पड़ सकती है भारी, बार&amp;बार खाने से हो सकती है यह बीमारी</title>
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        <description><![CDATA[ Why Eating Every Two Hours May Not Be Healthy: कई सालों तक लोगों को यह बताया गया कि हर दो-तीन घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना फिट रहने, वजन कंट्रोल करने और पूरे दिन एनर्जी बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है. ऑफिस जाने वाले लोग अपने साथ स्नैक बॉक्स लेकर चलते थे, जिम करने वाले लोग मीटिंग्स के बीच प्रोटीन बार खाते थे और धीरे-धीरे हेल्दी स्नैकिंग एक लाइफस्टाइल बन गई. माना जाता था कि अगर शरीर को लगातार थोड़ी-थोड़ी ऊर्जा मिलती रहेगी, तो मेटाबॉलिज्म एक्टिव रहेगा और वजन बढ़ने का खतरा कम होगा.
क्या बार- बार खाना सच में फायदेमंद?
लेकिन अब न्यूट्रिशन साइंस इस आदत को नए नजरिए से देख रही है. एक्सपर्ट का कहना है कि बार-बार खाना हमेशा शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होता, खासकर तब जब लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि दिनभर में कुल कितनी कैलोरी ले रहे हैं. समस्या सिर्फ खाने की फ्रीक्वेंसी नहीं, बल्कि उन चीजों की भी है जो लोग स्नैकिंग के दौरान खाते हैं. पैकेज्ड स्नैक्स, बिस्किट, मीठी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड अब लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुके हैं.&amp;nbsp;
क्या लगातार खाने से शरीर को एनर्जी मिलती है?
डीटी पारुल यादव, चीफ डाइटीशियन, मरेंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के अनुसार, पहले माना जाता था कि छोटे-छोटे मील बार-बार खाने से वजन कम करने और एनर्जी बनाए रखने में मदद मिलती है, लेकिन नई रिसर्च यह संकेत दे रही है कि लगातार खाते रहना शरीर के लिए उतना अच्छा नहीं हो सकता जितना पहले समझा जाता था.&amp;nbsp;
हेल्दी खाने के बाद भी क्यों बढ़ता है वजन?
एक्सपर्ट का कहना है कि बार-बार खाने से बिना एहसास के कैलोरी तेजी से बढ़ सकती है. चाय के साथ बिस्किट, काम के दौरान चिप्स, शाम की कॉफी या जिम के बाद प्रोटीन बार भले ही पूरा खाना न लगे, लेकिन दिनभर में ये सैकड़ों अतिरिक्त कैलोरी जोड़ देते हैं. यही वजह है कि कई लोग हेल्दी खाने की कोशिश के बावजूद वजन बढ़ने की शिकायत करते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि कि लगातार कुछ न कुछ खाते रहने से लोग असली भूख और आदत में फर्क करना भूल जाते हैं. कई बार लोग भूख की वजह से नहीं, बल्कि बोरियत, तनाव या सिर्फ आदत के कारण खाते रहते हैं.
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हमारे शरीर पर क्या होता है असर?
इसका असर शरीर में इंसुलिन लेवल पर भी पड़ता है. जब भी हम खाना खाते हैं, खासकर मीठी या रिफाइंड चीजें, तब ब्लड शुगर बढ़ता है और शरीर इंसुलिन रिलीज करता है. अगर पूरे दिन बार-बार खाना खाया जाए, तो इंसुलिन लगातार ऊंचा बना रह सकता है. रिसर्च के मुताबिक लंबे समय तक ऐसा होने से शरीर की फैट बर्न करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है. एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि पाचन तंत्र को भी आराम की जरूरत होती है. लगातार खाना खाने से ब्लोटिंग, भारीपन और भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके बजाय प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर संतुलित भोजन ज्यादा देर तक पेट भरा रखने में मदद करता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Digestion, Health:, हर, 2-3, घंटे, में, पेट, पूजा, करने, की, आदत, पड़, सकती, है, भारी, बार-बार, खाने, से, हो, सकती, है, यह, बीमारी</media:keywords>
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        <title>Hantavirus: क्या ब्रेस्ट मिल्क और स्पर्म से भी फैल सकता है हंता वायरस, जानें यह कितना खतरनाक?</title>
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        <description><![CDATA[ Can Hantavirus Spread Through Breast Milk: हंता वायरस को लेकर इन दिनों एक नई चिंता सामने आ रही है. सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ये खतरनाक वायरस ब्रेस्ट मिल्क और स्पर्म के जरिए भी फैल सकता है. इसके बाद लोगों के मन में डर बढ़ गया है, खासकर उन परिवारों में जहां छोटे बच्चे या प्रेग्नेंट महिलाएं हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे मामले बेहद रेयर हैं और बिना पूरी जानकारी के घबराने की जरूरत नहीं है.
कब हुई थी इस तरह की चर्चा की शुरुआत
इस चर्चा की शुरुआत 2023 में जर्नल वायरसेस में पब्लिश एक स्टडी के बाद हुई. इस रिसर्च में पाया गया कि चूहों से फैलने वाले एंडीज स्ट्रेन का वायरल आरएनए इंसानी स्पर्म में रिकवरी के कई साल बाद तक मौजूद रह सकता है. स्विट्जरलैंड के स्पीएज लैबोरेटरी के साइंटिस्ट्स ने अपनी रिसर्च में बताया कि एंडीज वायरस मेल रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में लंबे समय तक टिक सकता है, ठीक वैसे ही जैसे इबोला और जीका जैसे कुछ दूसरे वायरस. रिसर्च में कहा गया कि एंडीज वायरस में सेक्शुअल ट्रांसमिशन की संभावना हो सकती है, लेकिन अब तक ऐसा कोई कन्फर्म केस सामने नहीं आया है.&amp;nbsp;
क्या रिकवरी के बाद भी हो सकता है इंफेक्शन?
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन रिसर्च सेल के कन्वीनर डॉ. राजीव जयदेवन ने HealthandMe से बातचीत में बताया कि रिकवरी के बाद स्पर्म में वायरस का आरएनए मिलना कोई नई बात नहीं हैय उनके मुताबिक कम से कम 27 अलग-अलग वायरस में ऐसा देखा जा चुका है. डॉ. राजीव कहते हैं, टेस्टिस बॉडी का ऐसा हिस्सा है जो इम्यून सिस्टम से काफी हद तक सुरक्षित रहता है. इसी वजह से कुछ वायरस वहां लंबे समय तक बने रह सकते हैं. हालांकि उन्होंने साफ किया कि रिसर्च में सिर्फ वायरल आरएनए मिला था, जिंदा वायरस नहीं. यानी अभी तक इस बात का सबूत नहीं है कि रिकवरी के बाद भी वायरस इंसान को इंफेक्टेड कर सकता है.&amp;nbsp;
क्या ब्रेस्ट मिल्क को लेकर भी होती है दिक्कत?
ब्रेस्ट मिल्क को लेकर भी एक स्टडी ने चिंता बढ़ाई थी. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के जर्नल इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज रिसर्च में चिली की एक इंफेक्टेड मां के ब्रेस्ट मिल्क में एंडीज वायरस के जीनोम और प्रोटीन मिलने की बात कही गई थी. रिसर्चर्स का मानना था कि इससे मां से बच्चे में वायरस पहुंचने की संभावना हो सकती है.
आम लोगों को जरूरत से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं
लेकिन डीवाई पाटिल विद्यापीठ, पुणे के प्रोफेसर और एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अमिताव बनर्जी ने healthandme से कहा कि ऐसे मामले बेहद कम हैं. उन्होंने बताया कि ब्रेस्ट मिल्क के जरिए हंता वायरस फैलने के केस बहुत रेयर हैं. आम लोगों को जरूरत से ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है. डॉ. अमिताव के मुताबिक बीमारी के शुरुआती तेज बुखार वाले फेज में मां कुछ समय के लिए ब्रेस्टफीडिंग रोक सकती है, क्योंकि उस दौरान वायरल लोड ज्यादा होता है. लेकिन सिर्फ डर की वजह से हमेशा के लिए ब्रेस्टफीडिंग बंद करना सही नहीं माना जाता.&amp;nbsp;
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हंता वायरस और एचआईवी में बड़ा फर्क
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हंता वायरस और एचआईवी में बड़ा फर्क है. एचआईवी लंबे समय तक बॉडी फ्लूइड्स में बना रहता है, जबकि हंता वायरस आमतौर पर रिकवरी के बाद शरीर से खत्म हो जाता है. डॉ. अमिताव बनर्जी ने ये भी कहा कि आरटी- पीसीआर टेस्ट बेहद सेंसिटिव होते हैं और कई बार सिर्फ वायरस के मृत कणों को भी पकड़ लेते हैं. इसलिए अगर किसी टेस्ट में वायरल मटेरियल मिल जाए, तो इसका मतलब हमेशा ये नहीं होता कि इंसान अभी भी दूसरों को इंफेक्टेड कर सकता है. फिलहाल एक्सपर्ट्स के पास ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि रिकवरी के लंबे समय बाद हंता वायरस सेक्शुअली फैलता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sweets Recipes with curdled milk : फटे दूध से सिर्फ पनीर नहीं बनता, बना सकते हैं इतनी सारी मिठाइयां</title>
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        <description><![CDATA[ Sweets Recipes with curdled milk : फटे दूध से सिर्फ पनीर नहीं बनता, बना सकते हैं इतनी सारी मिठाइयां ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Restless Legs Syndrome: रात को बिस्तर पर जाते ही पैरों में होती है झनझनाहट, इस बीमारी का है संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ Restless Legs Syndrome: दिनभर की थकान के बाद रात का समय शरीर और दिमाग को आराम देने के लिए होता है. लेकिन कुछ लोगों के लिए यही वक्त सबसे ज्यादा बेचैनी भरा बन जाता है. जैसे ही वह बिस्तर पर लेटते हैं पैरों में झनझनाहट, खिंचाव जलन या अजीब सी बेचैनी शुरू हो जाती है. कई बार पैरों को लगातार हिलाने या उठाकर चलने से थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन आराम करते ही परेशानी दोबारा लौट आती है. ऐसे में चलिए अब हम आपको बताते हैं की रात में बिस्तर पर जाते ही पैरों में झनझनाहट क्यों होने लगती है और यह किस बीमारी का संकेत हो सकती है.&amp;nbsp;
क्या है रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम?
रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम एक न्यूरोलॉजिकल और स्लीप डिसऑर्डर माना जाता है. इसमें व्यक्ति के पैरों को बार-बार हिलाने की तेज इच्छा होती है, यह परेशानी खास तौर पर तब बढ़ती है जब व्यक्ति आराम की स्थिति में होता है. जैसे लेटने या लंबे समय तक बैठने पर कई लोग को ऐसा महसूस होता है जैसे पैरों में कुछ रेंग रहा हो, खिंचाव हो रहा हो या अंदर से खुजली और जलन हो रही हो. एक्सपर्ट के अनुसार यह समस्या नींद पर भी गंभीर असर डाल सकती है. बार-बार नींद टूटने से दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है.&amp;nbsp;
क्यों होती है यह परेशानी?&amp;nbsp;
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस समस्या का संबंध दिमाग में डोपामाइन नाम के केमिकल से जुड़ा हो सकता है. डोपामाइन शरीर की मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है. जब इसका संतुलन बिगड़ता है तो पैरों को लगातार हिलाने की इच्छा बढ़ सकती है. इसके अलावा आयरन की कमी भी इस बीमारी का एक बड़ा कारण मानी जाती है. शरीर में आयरन कम होने पर दिमाग के कामकाज और डोपामाइन के स्तर पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि एनीमिया या आयरन की कमी से जूझ रहे लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है.&amp;nbsp;
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किन लोगों को होता है खतरा?&amp;nbsp;
डॉक्टरों के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ ही परेशानी बढ़ सकती है. महिलाओं और प्रेग्नेंट महिलाओं में इसके मामले ज्यादा देखे जाते हैं. कुछ मामलों में यह समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है. वही डायबिटीज, किडनी रोग, नसों से जुड़ी बीमारियों और विटामिन की कमी जैसी स्थितियां भी रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम से जुड़ी मानी जाती है. इस बीमारी के लक्षण हर व्यक्ति में भी अलग-अलग हो सकते हैं. आमतौर पर पैरों में झनझनाहट, जलन, खिंचाव, खुजली या धड़कन जैसा एहसास हो सकता है. यह परेशान रात में ज्यादा बढ़ती है और चलने-फिरने से थोड़ी राहत मिल सकती है. कई लोग सोते समय पैरों में झटका या अनियंत्रित मूवमेंट भी महसूस करते हैं.&amp;nbsp;
पैरों में झनझनाहट से बचाव का तरीका&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और संतुलित खान-पान इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है. कैफीन का सेवन कम करना, सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करना और आयरन व विटामिन की कमी को पूरा करना भी फायदेमंद माना जाता है. वहीं अगर लगातार यह परेशानी बनी रहे तो इसके लिए आप डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Homemade Anti&amp;Aging Cream Tips: घर पर ऐसे बनाएं एंटी&amp;एजिंग क्रीम, महंगे प्रोडक्ट्स को करें टाटा बाय&amp;बाय</title>
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        <description><![CDATA[ Homemade Anti-Aging Cream Tips : आजकल हर कोई अपनी स्किन को जवान और ग्लोइंग रखना चाहता है. सोशल मीडिया और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में ऐसी कई क्रीम्स और ट्रीटमेंट्स वायरल होते रहते हैं, जो स्किन को दोबारा टाइट और जवान बनाने का दावा करते हैं, लेकिन इन महंगी क्रीम्स की कीमत अक्सर 2000 से 3000 रुपये या इससे भी ज्यादा होती है. वहीं सस्ते प्रोडक्ट्स यूज करने पर कभी-कभी नुकसान भी हो सकता है. ऐसे में नेचुरल और घर पर बनने वाले उपाय सबसे सुरक्षित और बेस्ट ऑप्शन होते हैं. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि घर पर एंटी-एजिंग क्रीम कैसे बनाएं और महंगे प्रोडक्ट्स को टाटा बाय-बाय करें.&amp;nbsp;
क्यों जरूरी है कोलेजन और एंटी-एजिंग?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, चेहरे पर लाइन्स और झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं. इसका मुख्य कारण स्किन में कोलेजन का टूटना या प्रोडक्शन कम हो जाना होता है. कोलेजन एक प्रोटीन है जो स्किन को लचीला बनाता है. अगर यह कम हो जाए, तो झुर्रियां और स्किन सैगिंग जैसी समस्याएं जल्दी दिखने लगती हैं. खराब खानपान, गलत स्किन केयर और सूरज की हानिकारक किरणें भी कोलेजन की कमी का कारण बन सकती हैं. ऐसे में महंगी क्रीम्स की जगह आप घर पर ही नेचुरल एंटी-एजिंग क्रीम बना सकते हैं.&amp;nbsp;
घर पर एंटी-एजिंग क्रीम कैसे बनाएं?
1. घर पर एंटी-एजिंग क्रीम बनाने के लिए सबसे पहले शिया बटर को डबल बॉयलर में पिघलाएं और हल्का ठंडा होने दें.&amp;nbsp;
2. इसके बाद रोजहिप और जोजोबा ऑयल मिलाएं और खुशबू के लिए लैवेंडर ऑयल डालें.
3. अब इसमें एलोवेरा जेल डालकर ब्लेंडर से क्रीम जैसा स्मूद टेक्सचर तैयार करें और लास्ट में विटामिन ई कैप्सूल का जेल मिलाएं.
4. अब तैयार क्रीम को एयरटाइट कंटेनर में ठंडी जगह पर स्टोर करें.
5. इसे इस्तेमाल करने के लिए रात को चेहरे को क्लीन करें, थोड़ा टोनर लगाएं और फिर क्रीम की पतली लेयर चेहरे पर अप्लाई करें. रोजाना इस्तेमाल करने से स्किन टाइट, सॉफ्ट और ग्लोइंग बनती है.&amp;nbsp;
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स्किन पर पिंक ग्लो और हाइड्रेशन के लिए क्या करें?
अगर आप स्किन पर हल्का गुलाबी ग्लो और हाइड्रेशन चाहते हैं, तो घर पर बना पिंक जेल एक परफेक्ट ऑप्शन है. यह जेल केमिकल फ्री है और हर किसी की स्किन के लिए सुरक्षित है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एलोवेरा जेल को एक बाउल में डालें. &amp;nbsp;इसमें गुलाब जल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अब ग्लिसरीन और चुकंदर पाउडर डालकर अच्छे से मिक्स करें और तब तक मिक्स करें. जब तक स्मूद पिंक जेल टेक्सचर न हो जाए. यह जेल स्किन को &amp;nbsp;को तुरंत ग्लो और हाइड्रेशन देता है. साथ ही ड्राई स्किन को गहराई से मॉइस्चराइज करता है. इससे स्किन हेल्दी और फ्रेश दिखती है. इसके अलावा डलनेस कम करता है और स्किन को शांत करता है. इसके नियमित इस्तेमाल से स्किन प्लंप, सॉफ्ट और टाइट नजर आती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Hantavirus Outbreak: बदलते मौसम के साथ तेजी से फैल रहा हंतावायरस वायरस, क्लाइमेट चेंज का नया खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ Hantavirus Outbreak: दुनियाभर में बढ़ता क्लाइमेट चेंज अब सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर इंसानों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते मौसम और पर्यावरणीय असंतुलन की वजह से कई संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. इन्हीं में से एक हंतावायरस वायरस है, जिसे पहले केवल कुछ सीमित इलाकों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब इसके मामले कई देशों में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं.
एक्सपर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन की वजह से चूहाें और दूसरे कृंतक जीवों के रहने की जगह और उनकी संख्या में बदलाव हो रहा है. यही जीव हंतावायरस के मुख्य वाहक माने जाते हैं. ऐसे में इंसानों के संपर्क में इनके आने का खतरा भी पहले से ज्यादा बढ़ गया है.&amp;nbsp;
क्या है हंतावायरस वायरस?
हंतावायरस एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से चूहाें और चूहाें जैसी प्रजातियों से फैलता है. यह वायरस उनके पेशाब, मल और लार के जरिए वातावरण में पहुंचता है. जब संक्रमित धूल या कण इंसान सांस के जरिए शरीर में लेते हैं तब संक्रमण हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, हंतावायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन एंडीज वायरस ऐसा स्ट्रेन है जो इंसानों से इंसान में फैल सकता है. यह वायरस मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है.&amp;nbsp;
क्लाइमेट चेंज से क्यों बढ़ रहा खतरा?
रिपोर्ट के अनुसार, मौसम में बदलाव और अनियमित बारिश हंतावायरस फैलाने वाले कृंतकों की संख्या को प्रभावित कर रही है. भारी बारिश के बाद वनस्पति तेजी से बढ़ती है, जैसे चूहों को ज्यादा भोजन मिलता है और उनकी आबादी बढ़ने लगती है. वहीं बाढ़ आने पर यह जीव अपने प्राकृतिक आवास छोड़कर इंसानी बस्तियों की ओर आने लगते हैं. दूसरी तरफ सूखे की स्थिति में भी भोजन और पानी की तलाश में यह जीव मानव आबादी के करीब पहुंच जाते हैं. यही वजह है की मौसम में बदलाव के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ते तापमान की वजह से चूहों के प्रजनन चक्र पर भी असर पड़ रहा है. पहले ठंड का मौसम उनकी संख्या को सीमित करने में मदद करता था, लेकिन अब तापमान बढ़ने से यह जीव नए इलाकों तक फैलने लगे हैं.&amp;nbsp;
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कई देशों में बड़े मामले&amp;nbsp;
पैन अमेरिकन हेल्थ आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया और पराग्वे में हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम के मामले में तेजी देखी गई है. वहीं अर्जेंटीना में अब भी सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह खतरा और बढ़ सकता है, क्योंकि वायरस फैलाने वाले जीव उन क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, जिन्हें पहले कम खतरे वाला माना जाता था. इसके अलावा एक्सपर्ट्स के अनुसार जंगलों की कटाई और कृषि विस्तार भी इस खतरे को बढ़ा रहे हैंं. खेती और शहरीकरण के लिए जंगलों को साफ करने से इंसानों और वन्य जीवों के बीच दूरी कम हो रही है. इससे जानवरों से इंसानों में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले लोगों या जंगलों के आसपास ज्यादा समय बताने वालों में संक्रमण का खतरा ज्यादा हो सकता है.&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी&amp;nbsp;
रिसर्चर्स का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे वायरस नए क्षेत्रों में भी फैल सकते हैं, जहां पहले उनके मामले नहीं देखे गए थे. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह बड़ा खतरा बन सकता है.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Healthy Aging Test: उम्र बढ़ने के साथ शरीर कितना मजबूत है? 30 सेकंड का ये टेस्ट बताएगा आपकी असली फिटनेस</title>
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        <description><![CDATA[ Healthy Aging Test: उम्र बढ़ाना एक नेचुरल प्रक्रिया है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ शरीर कितना मजबूत और एक्टिव बना हुआ है, यह जानना भी उतना ही जरूरी है. कई लोग लंबे समय तक हेल्दी और स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं, लेकिन शरीर के मांसपेशियों में धीरे-धीरे होने वाली कमजोरी इसका सबसे बड़ा संकट बन सकती है. अब वैज्ञानिकों ने एक बहुत आसान तरीका बताया है, जिससे घर बैठे सिर्फ 30 सेकंड में ही शरीर की ताकत और बढ़ती उम्र के असर का अंदाजा लगाया जा सकता है.
जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, 30 सेकंड का सिट-टू-स्टैंड टेस्ट यह बता सकता है कि किसी व्यक्ति में गिरने, अस्पताल में भर्ती होने या समय से पहले मृत्यु का खतरा कितना है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह टेस्ट मांसपेशियों की ताकत और शरीर की कार्य क्षमता को समझने का आसान तरीका बन सकता है.&amp;nbsp;
उम्र बढ़ने के साथ क्यों कमजोर होने लगती है मांसपेशियां?
एक्सपर्ट्स के अनुसार बढ़ती उम्र का सबसे ज्यादा असर शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों पर पड़ता है. यह प्रक्रिया 30 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे शुरू होती है और 60 साल के बाद तेजी से बढ़ने लगती है. रिसर्चर्स के अनुसार उम्र बढ़ने पर शरीर की फास्ट ट्वीच मसल फाइबर यानी तेजी से काम करने वाली मांसपेशियां कमजोर होने लगती है. साथ ही तंत्रिका तंत्र भी पहले की तरह मांसपेशियों को एक्टिव नहीं कर पाता. इसके अलावा मांसपेशियों में फैट और अन्य टिश्यू जमा होने लगते हैं, जिससे शरीर की ताकत और मूवमेंट पर असर पड़ता है.&amp;nbsp;
क्या है 30 सेकंड सिट-टू-स्टैंड टेस्ट?
सिट-टू-स्टैंड टेस्ट बहुत आसान माना जाता है और इसे घर पर भी किया जा सकता है. इसके लिए एक कुर्सी की जरूरत होती है. टेस्ट करने के लिए व्यक्ति को कुर्सी पर बैठना होता है और फिर 30 सेकंड के अंदर जितनी बार संभव हो सके बैठना और खड़ा होना होता है. इस दौरान हाथों को सीने पर क्रॉस करके रखना होता है. इसके बाद उम्र, वजन, लंबाई और कुल रिपीटेशन के आधार पर मांसपेशियों की ताकत का आकलन किया जाता है.&amp;nbsp;
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रिसर्च में क्या आया सामने?
इस रिसर्च में 65 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के 1876 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया. जिसमें रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों की रिलेटिव एसटीएस पावर कम थी, उनमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा ज्यादा देखा गया. पुरुषों में कम मसल पावर वाले लोगों में गिरने और फ्रैक्चर का खतरा ज्यादा पाया गया. वहीं महिलाओं में हिप फ्रैक्चर और गिरने का खतरा ज्यादा देखा गया. स्टडी के अनुसार जिन महिलाओं की मांसपेशियों की ताकत कम थी, उनमें हॉस्पिटल में भर्ती होने का खतरा 29 प्रतिशत ज्यादा था. इतना ही नहीं उन्हें अस्पताल में ज्यादा दिन बिताने पड़े.
रिसर्चर्स ने यह भी पाया कि कम मसल पावर वाले पुरुषों में मृत्यु का खतरा 57 प्रतिशत तक ज्यादा था. वहीं महिलाओं में यह खतरा दोगुने से भी ज्यादा पाया गया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि मांसपेशियों की ताकत सिर्फ फिटनेस का मामला नहीं बल्कि यह शरीर की कुल कार्य क्षमता और हेल्दी जीवन जीने की क्षमता से भी जुड़ी होती है. वहीं डॉक्टर के अनुसार यह टेस्ट बढ़ती उम्र में शरीर की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद कर सकता है. इससे यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति की मांसपेशियां कितनी मजबूत है और फ्यूचर में उसे किन हेल्थ से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
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        <pubDate>Sun, 17 May 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Best Time To Exercise: सुबह या शाम... किस वक्त एक्सरसाइज करना ज्यादा फायदेमंद? तुरंत समझें हर बात</title>
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        <description><![CDATA[ Morning Vs Evening Workout Benefits: सुबह एक्सरसाइज करना बेहतर है या शाम को वर्कआउट ज्यादा फायदा देता है? यह सवाल लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. कुछ लोग दिन की शुरुआत एक्सरसाइज से करना पसंद करते हैं, जबकि कई लोग शाम को काम खत्म होने के बाद वर्कआउट करते हैं. अब इसको लेकर कई रिसर्च और डॉक्टरों की राय सामने आई है, जो बताती है कि दोनों समय के अपने अलग फायदे हैं.&amp;nbsp;
सुबह या शाम, कौन सा फायदेमंद?
losrobleshospital की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सरसाइज का सही समय समझने के लिए शरीर की सर्कैडियन रिद्म को समझना जरूरी है. यह शरीर की 24 घंटे चलने वाली शरीर की जैविक घड़ी होती है, जो नींद, हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और बॉडी टेम्परेचर को कंट्रोल करती है. रिसर्च बताती है कि सुबह शरीर का तापमान कम होता है, जबकि शाम के समय यह ज्यादा रहता है. ज्यादा बॉडी टेम्परेचर मांसपेशियों को ज्यादा लचीला बनाता है और वर्कआउट प्रदर्शन बेहतर हो सकता है.&amp;nbsp;
सुबह के एक्सरसाइज में क्या फायदा?
रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच की गई एक्सरसाइज दिल की बीमारियों और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है, खासतौर पर महिलाओं में. सुबह वर्कआउट करने से शरीर जमा फैट को ज्यादा तेजी से एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, जिससे वजन कंट्रोल और हार्ट हेल्थ दोनों को फायदा मिल सकता है. जिन लोगों को हार्ट से जुड़ी बीमारी है, उनके लिए देर सुबह एक्सरसाइज करना ज्यादा सुरक्षित माना गया है.
शाम के एक्ससाइज में क्या फायदा?
शाम के समय एक्सरसाइज करने के भी कई फायदे बताए गए हैं. शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक किया गया वर्कआउट ब्लड प्रेशर कम करने में मदद कर सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इस समय धमनियां ज्यादा लचीली होती हैं, जिससे हार्ट पर दबाव कम पड़ता है. हाई ब्लड प्रेशर वाले बुजुर्गों के लिए शाम का वर्कआउट ज्यादा असरदार माना गया है. इसके अलावा शाम को शरीर में एनर्जी का स्तर बेहतर होने की वजह से लोग ज्यादा इंटेंस वर्कआउट भी कर पाते हैं.&amp;nbsp;
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महिलाओं के लिए क्या फायदेमंद?
द जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित 2024 की एक स्टडी में पाया गया कि जो महिलाएं हफ्ते में दो से तीन दिन स्ट्रेंथ और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग करती हैं, उनमें दिल की बीमारी का खतरा कम हो सकता है. वहीं तेज चाल से चलने जैसी मॉडरेट एक्सरसाइज करने वाली महिलाओं में समय से पहले मौत का खतरा 24 प्रतिशत तक कम देखा गया.&amp;nbsp;
एक्सरसाइज के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि सुबह या शाम से ज्यादा जरूरी नियमितता है. अगर कोई व्यक्ति रोजाना अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से किसी भी समय एक्सरसाइज करता है, तो उसका शरीर धीरे-धीरे बेहतर प्रतिक्रिया देने लगता है. एक्सरसाइज सलाह देते हैं कि शुरुआत 10 से 15 मिनट की एक्सरसाइज से करनी चाहिए और धीरे-धीरे समय बढ़ाना चाहिए. इसके साथ ही किसी भी नई फिटनेस रूटीन को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, खासकर अगर व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर या दिल से जुड़ी बीमारी हो.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Cancer Shot India: भारत में लॉन्च हुई नई इम्यूनोथेरेपी दवा, 7 मिनट में कैंसर को करेगी टारगेट, जानें इसकी कीमत</title>
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        <description><![CDATA[ &amp;nbsp;Cancer Shot India: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में मरीज और उनके परिवार के लिए इलाज का तरीका बहुत जरूरी होता है. इसी को देखते हुए हाल ही में भारत में एक नई इम्यूनोथेरेपी दवा लॉन्च की गई है, जो फेफड़ों के कैंसर के मरीजों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. इस दवा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे अब सिर्फ 7 मिनट में शरीर में इंजेक्शन के रूप में दिया जा सकता है, जबकि पहले यह सिर्फ लंबी IV (इन्ट्रावेनस) इन्फ्यूजन के माध्यम से उपलब्ध थी. ऐसे में आइए जानते हैं कि भारत में लॉन्च हुई नई इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन की कीमत कितनी है.&amp;nbsp;
नई इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन क्या है?
नई इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन मुख्य रूप से नॉन-स्मॉल सेल फेफड़ों के कैंसर (NSCLC) के मरीजों के लिए है. भारत में हर साल लगभग 81,000 नए फेफड़ों के कैंसर के केस सामने आते हैं, जिनमें यह प्रकार सबसे ज्यादा होता है, लेकिन हर मरीज को यह दवा नहीं दी जा सकती है. यह PD-L1 प्रोटीन पर काम करती है. इसलिए सिर्फ वही मरीज इसका फायदा उठा सकते हैं जिनके कैंसर सेल्स पर PD-L1 प्रोटीन उच्च स्तर पर मौजूद हो. विशेषज्ञों के अनुसार, NSCLC मरीजों में लगभग आधे इस इलाज के लिए योग्य हैं.&amp;nbsp;
दवा कैसे काम करती है?
हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम के T सेल्स असामान्य या हानिकारक कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें खत्म करते हैं, &amp;nbsp;लेकिन कई कैंसर सेल्स अपने ऊपर PD-L1 नामक प्रोटीन दिखाते हैं, जो T सेल्स को कंफ्यूज करता है और उन्हें हमला करने से रोकता है. एटेजोलिज़ुमैब इस प्रोटीन से बंधकर इसे ब्लॉक कर देता है. इससे T सेल्स फिर से कैंसर सेल्स को पहचानने लगते हैं और उन्हें खत्म कर देते हैं.
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नई इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन का नया तरीका कितना सही है?
पहले यह दवा IV इन्फ्यूजन के रूप में दी जाती थी, जिसमें मरीज को घंटों तक अस्पताल में रहना पड़ता था, लेकिन नई सबक्यूटेनियस इंजेक्शन तकनीक में यह सिर्फ जांघ में 7 मिनट में दी जा सकती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अब अस्पताल के पांच मरीज SC इंजेक्शन के माध्यम से इलाज ले सकते हैं, जबकि एक ही मरीज को IV इन्फ्यूजन में इतना समय लगता था. इस नई विधि को मरीज भी पसंद कर रहे हैं. वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि 5 में से 4 मरीज IV की जगह SC इंजेक्शन को लेते हैं.&amp;nbsp;
भारत में लॉन्च हुई नई इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन की कीमत कितनी है?
भारत में लॉन्च हुई नई इम्यूनोथेरेपी इंजेक्शन की कीमत बहुत ज्यादा है. भारत में एक डोज का खर्च लगभग 3.7 लाख रुपये है और आमतौर पर मरीज को 6 डोज की जरूरत होती है. लेकिन Blue Tree नामक कंपनी का पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम मरीजों की लागत कम करने में मदद करता है. इसे सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत भी शामिल किया गया है. SC इंजेक्शन में बायो-इक्विवेलेंट डोज 1800 mg है, जबकि IV में 1200 mg, जिसकी कीमत में लगभग 25,000 से 30,000 रुपये का अंतर है. &amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Gestational Diabetes Risk: प्रेग्नेंसी के बाद डायबिटीज खत्म, पर ये लक्षण बना देंगे हार्ट-थायरॉयड का मरीज, न करें इग्नोर&amp;nbsp;Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Cancer, Shot, India:, भारत, में, लॉन्च, हुई, नई, इम्यूनोथेरेपी, दवा, मिनट, में, कैंसर, को, करेगी, टारगेट, जानें, इसकी, कीमत</media:keywords>
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        <title>Cancer Recurrence: ठीक होने के बाद भी कितनी बार लौट सकता है कैंसर? शारिब हाशमी की वाइफ छठी बार हुई शिकार</title>
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        <description><![CDATA[ How Many Times Can Cancer Return: एक्टर शारिब हासमी और उनकी पत्नी नसरीन इस समय जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रहे हैं. नसरीन एक बार फिर कैंसर की चपेट में आ गई हैं और इस बार यह बीमारी छठी बार लौटी है. लंबे इलाज और कई सर्जरी के बाद भी कैंसर का दोबारा लौट आना लोगों के मन में यही सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर कैंसर कितनी बार वापस आ सकता है और क्या इससे पूरी तरह छुटकारा पाना हमेशा संभव होता है.&amp;nbsp;
पहली बार नसरीन को कब हुआ था कैंसर?
नसरीन को पहली बार अगस्त 2018 में माउथ खैंसर कैंसर पता चला था. इसके बाद उन्होंने ट्यूमर हटाने के लिए पांच बड़ी सर्जरी करवाईं. सितंबर 2024 में आखिरी सर्जरी के बाद उनकी हालत बेहतर बताई जा रही थी और बीमारी नियंत्रण में थी, लेकिन फरवरी में कैंसर फिर लौट आया. इस बार बीमारी पहले से ज्यादा गंभीर हो चुकी है और शरीर के कई हिस्सों तक फैल गई है.
फेफड़ों, हड्डियों और हार्ट व लीवर के आसपास तक फैला कैंसर
शारिब हाशमी ने बताया कि शुरुआत में परिवार को लगा कि नसरीन की लगातार खांसी खराब हवा की वजह से हो रही है। एक्स-रे रिपोर्ट भी सामान्य आई थी, लेकिन बाद में मुंह में छाला होने पर डॉक्टरों ने बायोप्सी और स्कैन कराने की सलाह दी. जांच में पता चला कि कैंसर अब लंग्स, हड्डियों और हार्ट व लीवर के आसपास तक फैल चुका है. फिलहाल नसरीन की कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी चल रही है, क्योंकि अब सर्जरी संभव नहीं मानी जा रही.&amp;nbsp;
कितनी बार लौट सकता है कैंसर?
कैंसर के बारे में जानकारी देने वाली संस्था अमेरिकन कैंसर सोसायटी के मुताबिक, जब इलाज के बाद कैंसर कुछ समय तक नजर नहीं आता और फिर वापस लौटता है, तो उसे कैंसर रिकरेंस कहा जाता है. यह उसी जगह लौट सकता है जहां पहले था या शरीर के किसी दूसरे हिस्से में फैल सकता है. &amp;nbsp;एक्सपर्ट आमतौर पर इसे रिकरेंस तब मानते हैं जब बीमारी कम से कम एक साल तक दिखाई न दे और फिर दोबारा सामने आए.&amp;nbsp;
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क्या इलाज सही से नहीं होने के कारण लौटता है कैंसर?
webmd की रिपोर्ट के अनुसार, कि कैंसर दोबारा इसलिए लौटता है क्योंकि इलाज के बाद भी शरीर में कुछ सेल्स बच जाती हैं. ये सेल्स धीरे-धीरे फिर बढ़ने लगती हैं और समय के साथ ट्यूमर का रूप ले सकती हैं. इसका मतलब यह नहीं होता कि पहले इलाज गलत था. कई बार कैंसर सेल्स इतनी जिद्दी होती हैं कि वे मजबूत इलाज के बाद भी बच जाती हैं. &amp;nbsp;एक्सपर्ट के अनुसार, कुछ तरह के कैंसर में दोबारा लौटने का खतरा ज्यादा होता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओवेरियन कैंसर से पीड़ित 10 में से करीब 7 महिलाओं में बीमारी दोबारा लौट सकती है। वहीं कोलोरेक्टल कैंसर के कई मरीजों में सर्जरी के शुरुआती तीन साल के भीतर कैंसर वापस आने का खतरा बना रहता है.&amp;nbsp;
अमेरिकन कैंसर सोसायटी की एक स्टडी में पाया गया कि कैंसर से जूझ चुके ज्यादातर लोग इस डर के साथ जीते हैं कि बीमारी फिर लौट सकती है. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इलाज में लगातार सुधार हो रहा है और सही उपचार के सहारे कई मरीज लंबे समय तक सामान्य जिंदगी जी पा रहे. हालांकि, इसका यह नहीं पता होता कि कौन सा कैंसर कितनी बार लौट सकता है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>PCOS Is Being Renamed To PMOS: महिलाओं की हार्मोनल समस्या PCOS का नया नाम अब PMOS, AIIMS डॉक्टर ने बताया क्यों जरूरी था बदलाव?</title>
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        <description><![CDATA[ PCOS Is Being Renamed To PMOS: महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल समस्याओं में से एक पीसीओएस (PCOS) को लेकर अब दुनिया भर में बड़ा बदलाव किया गया है. वर्षों से इस्तेमाल हो रहे पीसीओएस का नाम को बदलकर अब पीएमओएस (PMOS) किया जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुराना नाम इस बीमारी की पूरी गंभीरता और इसके शरीर पर पड़ने वाले व्यापक असर को सही तरीके से नहीं दर्शाता था. दरअसल, यह माना जा रहा है कि यह केवल ओवरी से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि हार्मोनल, मेटाबॉलिक, मानसिक और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी एक खतरनाक स्थिति है.
इस वजह से वैश्विक स्तर पर मेडिकल एक्सपर्ट्स ने इसका नया नाम तय किया है. एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, इस बदलाव का मकसद महिलाओं और डॉक्टर दोनों को यह समझाना है कि यह बीमारी सिर्फ पीरियड से ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शरीर के कई हिस्से प्रभावित हो सकते हैं.&amp;nbsp;
आखिर क्या होता है पीसीओएस या पीएमओएस?&amp;nbsp;
इस स्थिति महिलाओं में एंड्रोजन हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगता है. इसके कारण पीरियड्स और अनियमित हो जाते हैं. चेहरे पर बाल आने लगते हैं, मुंहासे बढ़ सकते हैं, वजन तेजी से बढ़ता है और कई महिलाओं को प्रेगनेंसी में दिक्कत आती है. अब तक पीसीओएस का नाम इसलिए इस्तेमाल किया जाता था क्योंकि अल्ट्रासाउंड में ओवरी के आसपास छोटे-छोटे दाने जैसे स्ट्रक्चर दिखाई देते थे, जिन्हें सिस्ट समझ लिया जाता था. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यह असली सिस्ट नहीं होते, बल्कि अधूरे विकसित फॉलिकल्स होते हैं. नॉर्मल कंडीशन में हर महीने ओवरी में कई फॉलिकल्स बनते हैं, जिनमें से एक पूरी तरह विकसित होकर अंडा रिलीज करता है. लेकिन इस समस्या में फॉलिकल्स बीच में ही रुक जाते हैं और पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते. यही अल्ट्रासाउंड में छोटे गोलाकार के रूप में नजर आते हैं.&amp;nbsp;
क्यों जरूरी पड़ा नाम बदलना?&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स के अनुसार पीसीओएस नाम कई मामलों में भ्रम पैदा करता है. कई महिलाओं में सिस्ट दिखाई नहीं देते, फिर भी उन्हें यह समस्या होती है. इससे बीमारी की पहचान में देरी होती है और मरीज भी इसे सही तरीके से समझ नहीं पाते. नई टर्म पीएमओएस यह बताती है कि यह सिर्फ ओवरी से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली स्थिति है. इस समय हार्मोनल असंतुलन के साथ-साथ मेटाबॉलिक दिक्कतें भी शामिल होती है..
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शरीर पर कैसे पड़ता है असर?&amp;nbsp;
डॉक्टर के अनुसार इस समस्या से महिलाओं में मोटापा, ब्लड शुगर, टाइप टू डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, खराब कोलेस्ट्रॉल, फैटी लीवर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा कई महिलाओं में ओव्यूलेशन की समस्या बांझपन, प्रेगनेंसी कॉम्प्लिकेशन और एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है. मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है. डिप्रेशन, एंग्जायटी, कॉन्फिडेंस में कमी, ईटिंग डिसऑर्डर जैसी समस्याएं भी इससे जुड़ी मानी जाती है. वहीं स्किन और बालों पर भी इसके लक्षण दिखाई देते हैं. चेहरे पर ज्यादा बाल आना, बाल झड़ना और लगातार एक्ने होना इसके आम संकेत माने जाते हैं.&amp;nbsp;
इलाज और जांच में क्या हो सकता है बदलाव?&amp;nbsp;
डॉक्टर का कहना है कि फिलहाल सिर्फ इस बीमारी का नाम बदल गया है, इलाज और डायग्नोसिस की प्रक्रिया तुरंत नहीं बदलेगी. लेकिन नए नाम से महिलाओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि यह बीमारी केवल पीरियड्स तक सीमित नहीं है. इसके बाद डॉक्टर मरीज की जांच से फार्मूला या प्रजनन संबंधित समस्याओं पर नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और दूसरी मेटाबॉलिक समस्याओं पर भी ज्यादा ध्यान देंगे.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Coronavirus Deaths: कोरोना का खौफनाक सच! जितनी बताई गई उससे तिगुनी ज्यादा हुई थीं मौतें, WHO के आंकड़ों ने चौंकाया</title>
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        <description><![CDATA[ WHO Says Covid Deaths Were Underreported: कोरोना महामारी को लेकर दुनिया भर में जो आंकड़े सामने आए थे, असल तस्वीर उससे कहीं ज्यादा डरावनी हो सकती है.वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की नई रिपोर्ट ने दावा किया है कि महामारी के दौरान जितनी मौतें आधिकारिक तौर पर दर्ज की गईं, वास्तविक संख्या उससे करीब तीन गुना ज्यादा थी. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 से 2023 के बीच दुनिया भर में लगभग 2.21 करोड़ अतिरिक्त मौतें हुईं, जबकि इसी दौरान देशों ने करीब 70 लाख कोरोना मौतों की ही पुष्टि की थी.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, इन अतिरिक्त मौतों में सिर्फ कोरोना इंफेक्शन से हुई मौतें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि वे लोग भी शामिल हैं जिनकी जान महामारी के अप्रत्यक्ष असर की वजह से गई. महामारी के दौरान कई देशों में अस्पतालों पर इतना दबाव बढ़ गया था कि दूसरे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल सका. कई जगह डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी रही, जबकि लॉकडाउन और स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा के कारण लोग दूसरी गंभीर बीमारियों का इलाज भी नहीं करा पाए.
किस साल हुई थीं सबसे ज्यादा मौत?
रिपोर्ट में बताया गया कि महामारी का सबसे खतरनाक दौर साल 2021 था. &amp;nbsp;इसी दौरान दुनिया में करीब 1.04 करोड़ अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं. यह वही समय था जब कोरोना के ज्यादा खतरनाक वेरिएंट तेजी से फैल रहे थे और दुनिया भर के अस्पताल ऑक्सीजन, आईसीयू बेड, दवाइयों और मेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहे थे. हालांकि 2021 के बाद अतिरिक्त मौतों के आंकड़ों में गिरावट आने लगी, लेकिन महामारी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में भी दुनिया भर में लगभग 33 लाख अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं. इससे साफ है कि कोरोना का प्रभाव संक्रमण की बड़ी लहरों के खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बना रहा.&amp;nbsp;
महिला या पुरुष, किसकी मौत सबसे ज्यादा?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि महामारी के दौरान पुरुषों में मौत का खतरा महिलाओं की तुलना में ज्यादा था. साल 2021 में पुरुषों की मृत्यु दर महिलाओं से लगभग 50 प्रतिशत अधिक रही. एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे पहले से मौजूद बीमारियां, कामकाज के दौरान ज्यादा जोखिम और इलाज लेने में देरी जैसे कई कारण हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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किस उम्र के लोगों की सबसे ज्यादा मौत हुई थी?
उम्र भी महामारी में मौत का बड़ा कारण बनी. रिपोर्ट के अनुसार, 85 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में मृत्यु दर युवाओं की तुलना में करीब 10 गुना ज्यादा थी. बुजुर्गों में डायबिटीज, दिल की बीमारी, लंग्स की परेशानी और कमजोर इम्यून सिस्टम जैसी दिक्कतें पहले से मौजूद थीं, जिससे कोरोना इंफेक्शन उनके लिए ज्यादा घातक साबित हुआ. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई गरीब और विकासशील देशों में मौतों का वास्तविक आंकड़ा कभी सामने ही नहीं आ पाया, क्योंकि वहां मौतों के पंजीकरण और स्वास्थ्य डेटा रिकॉर्ड करने की व्यवस्था बेहद कमजोर है.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Ear Wax Removal Tips : कान में फंसे मैल को साफ करने में न करें ऐसी गलती, हो सकता है बहरापन</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ear-wax-removal-tips-कान-में-फंसे-मैल-को-साफ-करने-में-न-करें-ऐसी-गलती-हो-सकता-है-बहरापन</link>
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        <description><![CDATA[ Ear Wax Removal Tips : कान में फंसे मैल को साफ करने में न करें ऐसी गलती, हो सकता है बहरापन ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Prateek Yadav Last Rites: अर्पणा के पिता ने दी प्रतीक को मुखाग्नि, क्या ससुर को है दामाद के अंतिम संस्कार का अधिकार</title>
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        <description><![CDATA[ Prateek Yadav Last Rites: भारतीय जनता पार्टी की नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का निधन हो गया. आज 14 मई को लखनऊ के भैंसाकुंड में प्रतीक का अंतिम संस्कार किया गया. अर्पणा के पिता अरविंद सिंह बिष्ट ने नम आंखों से अपने दामाद को मुखाग्नि दी.
प्रतीक यादव के पंचतत्व में विलीन होने के बाद अब चारों ओर यही चर्चा है कि, क्या ससुर अपने दामाद का अंतिम संस्कार कर सकता है? क्या शास्त्रों में ससुर को अपने दामाम के अंतिम संस्कार का अधिकार है? आइए सनातन धर्म के 18 महापुराणों में एक गरुण पुराण के अनुसार जानते हैं कि, मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार या मुखाग्नि का अधिकार आखिर किसे होता है?
बता दें कि, प्रतीक यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे थे, जिनकी शादी बीजेपी नेता अर्पणा यादव से हुई. महज 38 साल की आयु में प्रतीक यादव का निधन हो गया. प्रतीक की दो बेटियां हैं. आमतौर पर पिता के अंतिम संस्कार या मुखाग्नि का अधिकार बेटे को होता है. लेकिन प्रतीक की दो बेटियां हैं. इस दुख की घड़ी में समस्या यह थी कि, मुखाग्नि की परंपरा कौन निभाएगा.
हालांकि आजकल समाज में सोच बदल रहे हैं, जिसमें बेटियों को भी मुखाग्नि देने का अधिकार है और इसे नैतिक माना जाता है. लेकिन हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु के बाद मुखाग्नि या अंतिम संस्कार की परंपरा को लेकर कई तरह की धारणाएं, मान्यताएं और नियम होते हैं. गरुड़ पुराण और शास्त्रों में इस संबंध में कई बातें बताई गई हैं.
पुत्र न हो तो कौन दे सकता है मुखाग्नि
गरुड़ पुराण के अनुसार, अंतिम संस्कार या मुखाग्नि को लेकर बताए गए नियम के अनुसार, मुखाग्नि का पहला अधिकार मृतक के पुत्र को है. लेकिन परिवार में पुत्र न हो तो पोता, भाई, भतीजा या फिर पत्नी भी यह नियम कर सकती है. कई बार बेटियां भी मुखाग्नि की जिम्मेदारी निभा सकती हैं.
हिंदू धर्म और शास्त्रों के अनुसार, ससुर अपने दामाद को मुखाग्नि नहीं दे सकता. धार्मिक मान्यताओं में दामाद (जमाई) को यमराज का रूप माना गया है. अंतिम संस्कार का पहला अधिकार पुत्र, पौत्र, या परिवार के अन्य रक्त संबंधी (सपिंड) का होता है. वहीं ससुर और दामाद का गोत्र भी अलग होता है. हालांकि, ससुर द्वारा दामाद का अंतिम संस्कार किए जाने पर स्पष्ट निषेध भी नहीं है. यदि परिवार में कोई निकट पुरुष सदस्य मौजूद न हो या परिस्थितियां विशेष हों, तो ससुर भी यह जिम्मेदारी निभा सकते हैं. हिंदू परंपरा में भावना, कर्तव्य और परिवार की सहमति को भी मान्यता दी गई है.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Over Affection In Relationship: पति कर रहा हद से ज्यादा प्यार तो संभल जाएं आप, आपके बीच किसी तीसरे की हो सकती है आहट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/over-affection-in-relationship-पति-कर-रहा-हद-से-ज्यादा-प्यार-तो-संभल-जाएं-आप-आपके-बीच-किसी-तीसरे-की-हो-सकती-है-आहट</link>
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        <description><![CDATA[ Signs Your Partner Is Overcompensating With Love: रिश्तों में प्यार, भरोसा और अपनापन बेहद जरूरी माना जाता है. गले लगाना, हाथ पकड़ना या पार्टनर पर प्यार जताना किसी भी शादीशुदा रिश्ते को मजबूत बनाता है. लेकिन अगर अचानक आपका पार्टनर जरूरत से ज्यादा प्यार जताने लगे, हर समय जरूरत से ज्यादा केयर दिखाए या रिश्ता बहुत जल्दी परफेक्ट लगने लगे, तो कई बार यह एक चेतावनी संकेत भी हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आपको सावधान होने की जरूरत होती है.&amp;nbsp;
लंबे समय बाद तलाक का खतरा ज्यादा
जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी में सामने आया कि जो कपल्स रिश्ते की शुरुआत में जरूरत से ज्यादा ओवर-अफेक्शन दिखाते थे, उनमें लंबे समय बाद तलाक का खतरा ज्यादा देखा गया. रिसर्चर्स ने 168 कपल्स को 13 साल तक फॉलो किया और पाया कि जिन लोगों ने रिश्ते की शुरुआत में जरूरत से ज्यादा रोमांटिक और गिडिली अफेक्शनट व्यवहार दिखाया, उनमें कई रिश्ते समय के साथ टूट गए. स्टडी के मुताबिक ऐसे कपल्स उन लोगों की तुलना में करीब एक-तिहाई ज्यादा अफेक्शन दिखाते थे, जिनकी शादी लंबे समय तक खुशहाल रही.&amp;nbsp;
जरूरत से ज्यादा प्यार क्यों है खतरनाक?
डेटिंग ऐप Badoo की डेटा एनालिस्ट और रिलेशनशिप साइकोलॉजिस्ट क्लेयर स्टॉट ने बिजनेस इनसाइडर से बातचीत में कहा कि जरूरत से ज्यादा प्यार कई बार रिश्ते में भरोसे या कम्युनिकेशन की कमी को छिपाने की कोशिश भी हो सकता है. उनके मुताबिक बहुत ज्यादा इंटेंस अफेक्शन लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होता. शुरुआत में रिश्ता जितना ज्यादा ओवर द टॉप होता है, बाद में उतना ही ज्यादा खालीपन महसूस होने लगता है.&amp;nbsp;
क्यों रेड फ्लैग साबित होता है ज्यादा प्यार?
एक्सपर्ट मानते हैं कि हर रिश्ते में हनीमून फेज आता है, जब दोनों पार्टनर एक-दूसरे के बेहद करीब महसूस करते हैं. लेकिन समय के साथ यह जुनून थोड़ा कम होना सामान्य बात है। समस्या तब होती है जब रिश्ता शुरुआत से ही बहुत ज्यादा एक्सट्रीम इमोशन्स पर टिका हो. ऐसे में जैसे ही वह इंटेंसिटी कम होती है, पार्टनर को लगने लगता है कि प्यार खत्म हो गया है. क्लेयर स्टॉट कहती हैं कि एक मजबूत रिश्ता सिर्फ अफेक्शन से नहीं चलता. ईमानदारी, भरोसा, बातचीत और सहयोग लंबे रिश्ते की असली नींव होते हैं. अगर किसी रिश्ते में प्यार जरूरत से ज्यादा परफॉर्म किया जा रहा हो, तो यह ओवरकम्पनसेशन का संकेत भी हो सकता है.
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लव बॉम्बिंग क्यों खतरनाक?
एक्सप्ट लव बॉम्बिंग को भी एक बड़ा रेड फ्लैग मानते हैं. इसमें कोई व्यक्ति शुरुआत में अपने पार्टनर पर जरूरत से ज्यादा प्यार, गिफ्ट्स और तारीफों की बारिश करता है, ताकि सामने वाला जल्दी इमोशनली जुड़ जाए. बाद में वही व्यवहार अचानक बदलने लगता है. कई बार पार्टनर खुद को दोष देने लगता है और रिश्ते को पहले जैसा बनाने की कोशिश करता रहता है, &amp;nbsp;हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर ज्यादा प्यार करने वाला पार्टनर गलत है या रिश्ते में तीसरा व्यक्ति जरूर है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Over, Affection, Relationship:, पति, कर, रहा, हद, से, ज्यादा, प्यार, तो, संभल, जाएं, आप, आपके, बीच, किसी, तीसरे, की, हो, सकती, है, आहट</media:keywords>
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        <title>Char Dham Yatra: भारी बारिश और ओलावृष्टि के बीच कैसे करें चार धाम यात्रा? ये टिप्स आएंगे काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Travel Safely During Char Dham Yatra: उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि के बीच प्रशासन ने चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. भारतीय मौसम विभाग ने पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया था. ऐसे में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले यात्रियों के लिए सावधानी पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है.
क्यों बिना मौसम की तैयारी पड़ सकती है आप पर भारी?
चार धाम यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि हिमालय के कठिन रास्तों से गुजरने वाला एक लंबा अनुभव भी है. बारिश के मौसम में यह यात्रा और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है. लगातार बारिश, भूस्खलन, फिसलन भरे रास्ते, अचानक मौसम बदलना और सड़क बंद होने जैसी समस्याएं यात्रियों की मुश्किल बढ़ा सकती हैं. &amp;nbsp;ऐसे में बिना तैयारी यात्रा करना भारी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
चार धाम यात्रा पर निकलते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी?
सबसे जरूरी बात यह है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का अपडेट लगातार देखते रहें. उत्तराखंड में मौसम कुछ घंटों में बदल सकता है. सुबह धूप रहने के बाद अचानक तेज बारिश, धुंध या ओलावृष्टि शुरू हो सकती है. अगर किसी इलाके में रेड अलर्ट जारी हो तो वहां यात्रा टालना ही बेहतर माना जाता है.&amp;nbsp;
मानसून के सीजन में यात्रा की कैसे करें तैयारी?
यात्रा का प्लान बनाते समय एक-दो अतिरिक्त दिन जरूर रखें। पहाड़ों में बारिश के दौरान सड़कें कई घंटे या कई बार पूरे दिन के लिए बंद हो जाती हैं. अगर आपका शेड्यूल बहुत टाइट होगा तो तनाव बढ़ सकता है. &amp;nbsp;इसलिए होटल बुकिंग और वापसी का प्लान थोड़ा लचीला रखना समझदारी होगी. &amp;nbsp;बारिश के मौसम में सुबह जल्दी सफर शुरू करना सबसे सुरक्षित माना जाता है. &amp;nbsp;शाम होते-होते पहाड़ों में धुंध और बारिश बढ़ने लगती है, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है. कोशिश करें कि लंबा सफर शाम से पहले पूरा कर लें और रात में पहाड़ी रास्तों पर यात्रा से बचें.&amp;nbsp;
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इन चीजों को अपने साथ रखना जरूरी
चार धाम यात्रा पर निकलते समय रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, अतिरिक्त मोजे और अच्छी ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज जरूर साथ रखें. खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री ट्रैक बारिश में बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं. गलत जूते या भारी सामान यात्रा को मुश्किल बना सकते हैं. हल्का सामान रखें और सिर्फ जरूरी चीजें ही साथ ले जाएं. &amp;nbsp;बुजुर्गों और बच्चों को इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है. &amp;nbsp;ठंड, ऊंचाई और लगातार बारिश की वजह से सांस लेने में दिक्कत, थकान, बुखार और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जिन लोगों को अस्थमा, हार्ट या ब्लड प्रेशर की बीमारी है, उन्हें यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
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        <pubDate>Fri, 15 May 2026 08:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Char, Dham, Yatra:, भारी, बारिश, और, ओलावृष्टि, के, बीच, कैसे, करें, चार, धाम, यात्रा, ये, टिप्स, आएंगे, काम</media:keywords>
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        <title>Mango Pickle Making Tips: घर पर बना रहे आम का अचार तो इन बातों का रखें ध्यान, सालभर नहीं होगा खराब और स्वाद रहेगा लाजवाब</title>
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        <description><![CDATA[ Mango Pickle Making Tips: घर पर बना रहे आम का अचार तो इन बातों का रखें ध्यान, सालभर नहीं होगा खराब और स्वाद रहेगा लाजवाब ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Mango, Pickle, Making, Tips:, घर, पर, बना, रहे, आम, का, अचार, तो, इन, बातों, का, रखें, ध्यान, सालभर, नहीं, होगा, खराब, और, स्वाद, रहेगा, लाजवाब</media:keywords>
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        <title>Norovirus: उल्टी, दस्त, पेट दर्द और इंसान का खेल खत्म, जानें कितना खतरनाक है नोरो वायरस?</title>
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        <description><![CDATA[ Norovirus Symptoms In Adults: कोरोना वायरस, हंता वायरस के बाद अब नोरा वायरस ... &amp;nbsp;यह एक कंटैगियस इन्फेक्शन है, जो अचानक उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा करता है. यह वायरस खासतौर पर भीड़भाड़ और बंद जगहों में तेजी से फैलता है, इसलिए स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल और क्रूज शिप जैसी जगहों पर इसके मामले अचानक बढ़ जाते हैं. हाल ही में इसका जो मामला आया है उसमें कैरेबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर नोरो वायरस फैलने के बाद 100 से ज्यादा यात्री और क्रू मेंबर बीमार पड़ गए. अमेरिकी हेल्थ एजेंसी सीडीसी के मुताबिक जहाज पर मौजूद हजारों यात्रियों में से बड़ी संख्या में लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी शिकायतें हुईं. &amp;nbsp;
कितना खतरनाक है नोरा वायरस?
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंश के मुताबिक, नोरो वायरस दुनिया में एक्यूट गैस्ट्रोएन्टेराइटिस यानी पेट और आंतों में इंफेक्शन की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. हर साल करोड़ों लोग इसकी चपेट में आते हैं और उल्टी-दस्त के मामलों में इसकी बड़ी भूमिका मानी जाती है. ज्यादातर मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह इंफेक्शन गंभीर रूप ले सकता है.&amp;nbsp;
कैसे आते हैं आप इस वायरस की चपेट में?
इस इंफेक्शन के लक्षण अचानक शुरू होते हैं. मरीज को तेज उल्टी, बार-बार दस्त, मतली और पेट में मरोड़ की शिकायत हो सकती है. कई लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ठंड लगने जैसे लक्षण भी दिखते हैं. आमतौर पर मरीज एक से तीन दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि ठीक होने के बाद भी इंफेक्टेड व्यक्ति वायरस फैलाता रह सकता है. CDC के अनुसार नोरो वायरस के कई अलग-अलग प्रकार मौजूद हैं, इसलिए किसी व्यक्ति को जीवन में कई बार यह इंफेक्टेड हो सकता है. एक बार इंफेक्टेड होने के बाद भी शरीर को दूसरे प्रकार के वायरस से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती. यही वजह है कि दुनिया भर में इसके प्रकोप बार-बार देखने को मिलते हैं.
हर साल कितने लोग आते हैं इसकी चपेट में?
CDC का अनुमान है कि दुनियाभर में हर साल करीब 68.5 करोड़ मामले नोरो वायरस से जुड़े होते हैं. इनमें लगभग 20 करोड़ बच्चे पांच साल से कम उम्र के होते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब 50 हजार बच्चों की मौत इस इंफेक्शन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से होती है, खासकर उन देशों में जहां इलाज और हाइड्रेशन सुविधाएं सीमित हैं.
कितने देर में शरीर में दिखाई देने लगते हैं इसके लक्षण?
इंफेक्शन के 12 से 48 घंटे के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं. सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का होता है. लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर तेजी से पानी खो देता है. मुंह सूखना, चक्कर आना, कमजोरी और यूरिन कम होना इसके संकेत हो सकते हैं. बच्चों में रोते समय आंसू कम आना और अत्यधिक नींद आना भी इसके लक्षण माने जाते हैं.&amp;nbsp;
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कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?
नोरो वायरस बहुत तेजी से फैलता है. इंफेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने, दूषित खाना खाने, गंदा पानी पीने या इंफेक्टेड सतह छूने से इंफेक्शन हो सकता है. क्रूज शिप, स्कूल, अस्पताल और नर्सिंग होम जैसी जगहों पर इसका खतरा ज्यादा रहता है. CDC के मुताबिक इंफेक्टेड व्यक्ति ठीक होने के दो हफ्ते बाद तक भी वायरस फैला सकता है. &amp;nbsp;फिलहाल नोरो वायरस का कोई खास इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. डॉक्टर मरीजों को ज्यादा तरल पदार्थ लेने, आराम करने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की सलाह देते हैं. एंटीबायोटिक दवाएं इस संक्रमण पर असर नहीं करतीं, क्योंकि यह बैक्टीरिया नहीं बल्कि वायरस से होने वाली बीमारी है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Norovirus:, उल्टी, दस्त, पेट, दर्द, और, इंसान, का, खेल, खत्म, जानें, कितना, खतरनाक, है, नोरो, वायरस</media:keywords>
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        <title>Kitchen Sponge Cancer Claim: कैंसर को दावत दे रहा आपका किचन स्क्रबर! वजह जान आज ही बदल लेंगे बर्तन धोने का तरीका</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/kitchen-sponge-cancer-claim-कैंसर-को-दावत-दे-रहा-आपका-किचन-स्क्रबर-वजह-जान-आज-ही-बदल-लेंगे-बर्तन-धोने-का-तरीका</link>
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        <description><![CDATA[ How Often Should You Change Kitchen Sponge: सोशल मीडिया पर कब क्या वायरल हो जाए, किसी को कुछ नहीं पता होता है. ऐसा ही एक वायरल दावा किचन स्क्रबर या स्पंज को लेकर किया जा रहा है. इसमें बताया गया कि रोज बर्तन धोने में इस्तेमाल होने वाला किचन स्क्रबर या स्पंज कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को न्योता दे सकता है. सुनने में यह बात डराने वाली जरूर लगती है, क्योंकि यह वही चीज है जो हर घर की रसोई में मौजूद रहती है. प्लेट, बर्तन, किचन स्लैब और कई बार हमारे हाथ तक इसी स्क्रबर के संपर्क में आते हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सच में किचन स्पंज इतना खतरनाक हो सकता है?. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
किचन स्पंज में पनप सकते हैं लाखों बैक्टीरिया 
दरअसल किचन स्पंज कैंसर कोई मेडिकल बीमारी या वैज्ञानिक शब्द नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक दावा है. लोगों की चिंता की वजह वे रिसर्च हैं जिनमें बताया गया कि गीले और लंबे समय तक इस्तेमाल किए गए किचन स्पंज में लाखों बैक्टीरिया पनप सकते हैं. &amp;nbsp;NIH में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक नमी वाले स्पंज माइक्रोब्स के लिए बेहद अनुकूल जगह बन जाते हैं. &amp;nbsp;हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि स्क्रबर सीधे कैंसर का कारण बनता है.&amp;nbsp;
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क्या सच में इससे कैंसर का खतरा होता है?
&amp;nbsp;डॉ. अभिजीत कोटाबागी ने इसको लेकर TOI को बताया कि &amp;nbsp;किचन स्पंज को कैंसर से जोड़ना डर जरूर पैदा करता है, लेकिन विज्ञान और मिथक के बीच फर्क समझना जरूरी है. उनके मुताबिक स्पंज में बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, खासकर तब जब उन्हें समय-समय पर साफ या बदला न जाए. लेकिन अभी तक ऐसा कोई साइंटफिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि किचन स्पंज सीधे कैंसर का कारण बनता है. असली खतरा संक्रमण फैलाने वाले हानिकारक बैक्टीरिया से है, जो खाने और किचन की सतहों को दूषित कर सकते हैं.
बढ़ जाता है पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा 
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्क्रबर इस्तेमाल करना पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है. गंदा स्पंज बर्तनों और खाने तक बैक्टीरिया पहुंचा सकता है, जिससे फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है. यानी समस्या कैंसर नहीं, बल्कि खराब किचन हाइजीन है. अच्छी बात यह है कि इस खतरे से बचना बेहद आसान हैय एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि किचन स्पंज को हर एक से दो हफ्ते में बदल देना चाहिए. इस्तेमाल के बाद उसे पूरी तरह सूखने दें और समय-समय पर गर्म पानी से साफ करें. जहां तक संभव हो, बर्तन धोने और किचन साफ करने के लिए अलग-अलग स्क्रबर इस्तेमाल करें.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Turmeric Purity Test: हल्दी असली है या नकली? इस आसान ट्रिक से ऐसे लगाएं पता, घर बैठे हो जाएगा काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/turmeric-purity-test-हल्दी-असली-है-या-नकली-इस-आसान-ट्रिक-से-ऐसे-लगाएं-पता-घर-बैठे-हो-जाएगा-काम</link>
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        <description><![CDATA[ How To Identify Fake Turmeric At Home: मध्य प्रदेश में हाल ही में कई ऐसे मामले आए हैं, जहां शादी में हल्दी लगाने से दूल्हा और दुल्हन अस्पताल पहुंच गए. ऐसे में इसको लेकर सवाल उठना लाजिम है कि क्योंकि &amp;nbsp;भारतीय रसोई में हल्दी सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि स्वाद, रंग और सेहत का अहम हिस्सा मानी जाती है. दाल से लेकर सब्जी और घरेलू नुस्खों तक, हल्दी का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है. आयुर्वेद में भी इसे औषधीय गुणों के लिए सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन आज बाजार में मिलने वाली हर हल्दी शुद्ध हो, यह जरूरी नहीं.
बढ़ती मिलावट के बीच कई बार हल्दी में ऐसे केमिकल और रंग मिला दिए जाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं. ऐसे में घर बैठे इसकी शुद्धता जांचना बेहद जरूरी हो जाता है.
हल्दी में कैसे की जाती है मिलावट?
दरअसल हल्दी में चमकदार पीला रंग और मुलायम टेक्सचर देने के लिए कई बार मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट जैसे आर्टिफिशियल रंग और केमिकल मिलाए जाते हैं. कुछ मामलों में चॉक पाउडर, जंगली हल्दी या खराब क्वालिटी के कच्चे पदार्थों का भी इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि हल्दी खरीदते समय सिर्फ रंग देखकर भरोसा करना सही नहीं माना जाता.&amp;nbsp;
नकली है या असली, कैसे पता कर सकते हैं?
हल्दी असली है या नकली, इसका पता लगाने के लिए सबसे आसान तरीका वॉटर टेस्ट माना जाता है. इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर कुछ देर छोड़ दें. अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला रहे तो हल्दी शुद्ध मानी जाती है. लेकिन अगर पानी गहरा पीला हो जाए और हल्दी पूरी तरह घुलने लगे, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है.
हथेली पर रगड़ कर पता कर सकते हैं
हथेली टेस्ट भी काफी आसान और असरदार माना जाता है. बस एक चुटकी हल्दी हथेली पर रखें और अंगूठे से 10 से 20 सेकंड तक रगड़ें. अगर हल्दी असली होगी तो हथेली पर हल्का पीला दाग छोड़ देगी. नकली या ज्यादा मिलावटी हल्दी अक्सर अलग तरह का रंग छोड़ती है या जल्दी फीकी पड़ जाती है.
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मिलावटी हल्दी से क्या होते हैं नुकसान?
हल्दी में मेटानिल येलो जैसी मिलावट जांचने के लिए एक टेस्ट ट्यूब में थोड़ा हल्दी पाउडर डालकर उसमें कुछ बूंदें हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मिलाई जाती हैं. अगर घोल गुलाबी रंग में बदल जाए तो समझिए हल्दी में मेटानिल येलो की मिलावट हो सकती है. यह केमिकल फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, मतली और अपच जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.
बाजार से हल्दी खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
वहीं चॉक पाउडर की मिलावट जांचने के लिए हल्दी में पानी और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाया जाता है. अगर इसमें बुलबुले बनने लगें तो यह चॉक पाउडर मौजूद होने का संकेत माना जाता है. &amp;nbsp;एक्सपर्ट मानते हैं कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों की शुद्धता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. हल्दी भले ही कम मात्रा में इस्तेमाल होती हो, लेकिन अगर उसमें मिलावट हो तो लंबे समय में यह सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए बाजार से हल्दी खरीदते समय भरोसेमंद ब्रांड चुनना और समय-समय पर घर में उसकी जांच करना बेहतर माना जाता है.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Workplace Romance: ऑफिस में प्यार और फिर शादी, दुनिया में इतने पर्सेंट लोग वर्कप्लेस पर ही ढूंढ लेते हैं पार्टनर</title>
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        <description><![CDATA[ How Many People Find Their Partner At Workplace: आजकल लोगों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा ऑफिस में ही गुजरता है. सुबह से शाम तक साथ काम करते-करते कई बार सहकर्मियों के बीच दोस्ती गहरी हो जाती है और यही रिश्ता धीरे-धीरे प्यार तक पहुंच जाता है. यही वजह है कि अब वर्कप्लेस सिर्फ काम करने की जगह नहीं, बल्कि लोगों के लिए पार्टनर ढूंढने की जगह भी बनता जा रहा है. चलिए आपको बताते हैं कि कितने प्रतिशत लोग वर्क प्लेस पर रोमांस करते हैं और इसमें से शादी के बंधन में कितने लोग बंध जाते हैं.
कितने प्रतिशत लोग ऑफिस में करते हैं रोमांस?
forbes की एक रिपोर्ट के अनुसार, &amp;nbsp;हाल ही में सामने आए वर्कप्लेस रोमांस सर्वे के मुताबिक, 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग अपने जीवन में कभी न कभी ऑफिस रोमांस का हिस्सा रह चुके हैं. इतना ही नहीं, सर्वे में शामिल 43 प्रतिशत लोगों ने बताया कि ऑफिस में शुरू हुआ रिश्ता बाद में शादी तक पहुंच गया.&amp;nbsp;
क्यों ऑफिस रोमांस के मामले बढ़ रहे हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कम्फर्ट को माना गया है. करीब 65 प्रतिशत लोगों ने कहा कि रोज साथ काम करने और एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने की वजह से रिश्ता बनना आसान हो जाता है. वहीं 61 प्रतिशत लोगों का कहना था कि काम की व्यस्तता के कारण उन्हें ऑफिस के बाहर नए लोगों से मिलने का ज्यादा समय नहीं मिल पाता.&amp;nbsp;
ऑफिस में इस वजह से सही से चल जाता है चक्कर
ऑफिस में साथ काम करने वाले लोग एक-दूसरे की प्रोफेशनल लाइफ, स्ट्रेस और डेली रूटीन को बेहतर तरीके से समझते हैं. यही वजह है कि कई लोगों को अपने सहकर्मी के साथ इमोशनल कनेक्शन जल्दी महसूस होने लगता है. सर्वे में यह भी सामने आया कि लोग सिर्फ वर्कडे को मजेदार बनाने के लिए रिश्ते में नहीं आते, बल्कि वे चाहते हैं कि उनका पार्टनर उनकी लाइफ और काम दोनों को समझे.&amp;nbsp;
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क्या ब्रेकअप का भी रहता है खतरा?
हालांकि ऑफिस रोमांस हमेशा आसान नहीं होता. सर्वे के मुताबिक, वर्कप्लेस रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों में ब्रेकअप का डर 17 प्रतिशत तक ज्यादा पाया गया. इसकी वजह यह मानी गई कि रिश्ता टूटने का असर सिर्फ पर्सनल लाइफ पर नहीं, बल्कि प्रोफेशनल लाइफ पर भी पड़ सकता है. &amp;nbsp;करीब 54 प्रतिशत लोगों ने माना कि ऑफिस रिलेशनशिप का असर उनके वर्क-लाइफ बैलेंस पर भी पड़ा. कई लोगों ने बताया कि छुट्टियां प्लान करने से लेकर निजी और प्रोफेशनल लाइफ को अलग रखना उनके लिए मुश्किल हो गया था.&amp;nbsp;
ऑफिस रोमांस गॉसिप और जलन की वजह
सर्वे में यह भी सामने आया कि ऑफिस रोमांस कई बार गॉसिप और जलन की वजह भी बन जाता हैय 52 प्रतिशत लोगों ने कहा कि रिश्ते के बाद सहकर्मियों का व्यवहार बदल गया, जबकि लगभग 50 प्रतिशत लोगों का मानना था कि ऐसे रिश्ते ऑफिस में फेवरिटिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं. हालांकि तमाम चुनौतियों के बावजूद कई रिश्ते लंबे समय तक चलते भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिस में डेट करने वाले कई लोग बाद में शादी तक पहुंचे. &amp;nbsp;यही वजह है कि आज भी बहुत से लोग अपने लाइफ पार्टनर से पहली बार ऑफिस में ही मिलते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 14 May 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cooking Without Oil: क्या बिना तेल के भी बन सकता है खाना? पीएम मोदी ने की खाने के तेल का इस्तेमाल कम करने की अपील</title>
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        <description><![CDATA[ Can Food Be Cooked Without Oil: हाल ही में हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से रोजमर्रा की कुछ आदतों पर दोबारा सोचने की अपील की.उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बदलाव सिर्फ हमारी सेहत ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं. &amp;nbsp;इसी दौरान उन्होंने खाने में इस्तेमाल होने वाले तेल को कम करने की बात भी कही.&amp;nbsp; पीएम मोदी के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाने के तेल के रूप में दूसरे देशों से आयात करता है. ऐसे में अगर लोग जरूरत से ज्यादा तेल का इस्तेमाल कम करें, तो इससे देश की आयात निर्भरता भी घट सकती है. साथ ही यह हमारी सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
भारतीय घरों में खाने की चीजों में तेल की जरूरत क्यों ?
भारतीय खाने में तेल का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है. तड़का लगाने से लेकर फ्राई करने तक कई चीजें तेल के बिना अधूरी मानी जाती हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि जरूरत से ज्यादा तेल शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट डिजीज और कई दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिना तेल के भी खाना बनाया जा सकता है? जवाब है हां. आजकल कई ऐसे तरीके मौजूद हैं, जिनकी मदद से कम तेल या बिना तेल के भी स्वादिष्ट खाना तैयार किया जा सकता है.&amp;nbsp;
कम तेल में खाना बनाने का क्या है विकल्प?
सबसे आसान तरीका है नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल. अच्छी क्वालिटी के नॉन-स्टिक पैन में बहुत कम तेल में खाना पकाया जा सकता है. &amp;nbsp;कई लोग बिना तेल के भी सब्जियां और दूसरी चीजें आसानी से तैयार कर लेते हैं. इसके अलावा रोस्टिंग और बेकिंग भी हेल्दी कुकिंग के अच्छे विकल्प माने जाते हैं. जैसे तले हुए पापड़ की जगह भुना हुआ पापड़ ज्यादा हेल्दी माना जाता है. इसी तरह ओवन में बेक की गई चीजों में तेल की मात्रा काफी कम हो जाती है.&amp;nbsp;
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स्टीमिंग भी है बेहतर विकल्प
स्टीमिंग भी बिना तेल खाना बनाने का सबसे हेल्दी तरीका माना जाता है. स्टीम्ड फूड में अतिरिक्त फैट नहीं होता और इससे खाने के पोषक तत्व भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं. अगर किसी को फ्राइड चीजें पसंद हैं, तो एयर फ्रायर भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसमें बहुत कम तेल में चीजें क्रिस्पी बनाई जा सकती हैं. यही वजह है कि पिछले कुछ समय में एयर फ्रायर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है.
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Home Cooling Tips: मई की घातक गर्मी से घर को ठंडा रखेंगे ये पौधे, जानिए इन्हें लगाने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Home Cooling Tips: मई का महीना आते ही तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान करने लगती हैं. ऐसे में घर के अंदर भी गर्मी महसूस होने लगती है फिर चाहे कूलर हो, पंखा हो या एसी कम ही पड़ जाता है. &amp;nbsp;वही डॉक्टरों का मानना है कि ज्यादा देर तक एसी में रहना शरीर के लिए अच्छा नहीं होता और इससे सेहत पर भी असर पड़ता है. &amp;nbsp;वहीं जिन लोगों के घर में एसी नहीं होता, उन्हें इस तेज गर्मी में उमस और चिपचिपाहट से काफी परेशानी होती है. &amp;nbsp;ऐसे में अगर आपको पता चले कि आप अपने घर में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके उसे प्राकृतिक रूप से ठंडा रख सकते हैं, तो यह आपके लिए किसी आसान उपाय से कम नहीं होगा.
ऐसे में बालकनी या घर के छोटे से हिस्से में कुछ खास पौधे लगाकर आप अपने घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रख सकते हैं. यह पौधे न सिर्फ घर की हवा को साफ करते हैं बल्कि गर्मी के असर को भी कम करते हैं. &amp;nbsp;यही वजह है कि लोग अब अपने घरों में गार्डनिंग की तरफ ज्यादा ध्यान देने लगे हैं. &amp;nbsp;ऐसे में आइए आपको बताते है ऐसे पौधों के बारे में जिन्हें मई में लगाने से आपको पूरे सीजन ठंडी और सुकूनभरी हवा मिल सकती है.&amp;nbsp;
कौन से पौधे लगाएं जो गर्मी से राहत दें?
इस समय ऐसे पौधे लगाने चाहिए जो गर्मी में भी आसानी से बढ़ते हैं और घर को ठंडक देते हैं. जिसमें &amp;nbsp;तुलसी, एलोवेरा, मनी प्लांट, मोगरा और स्नेक प्लांट जैसे पौधे सबसे अच्छे माने जाते हैं. &amp;nbsp;ये पौधे न केवल घर की सजावट को बढ़ाता है, बल्कि वातावरण को ठंडा रखने में भी मदद करता है. वही ये कम देखभाल में भी अच्छे से बढ़ जाते हैं और हवा को शुद्ध रखते हैं. &amp;nbsp;साथ ही यह हवा में नमी बनाए रखने में मदद करता है, जिससे कमरे का तापमान ठंडा रहता है. वही खास बात यह है कि ये पौधे घर के अंदर और बालकनी दोनों जगह लगाए जा सकते हैं. &amp;nbsp;इनसे घर में ताजगी बनी रहती है और गर्मी का असर कम महसूस होता है.&amp;nbsp;
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पौधे लगाने और देखभाल का सही तरीका
पौधे लगाने के लिए सबसे पहले सही गमले और मिट्टी का चुनाव करना जरूरी है. साथ ही गमले में पानी निकलने की जगह होनी चाहिए ताकि पानी जमा न हो. वही ध्यान रखें ऐसे पौधों को ज्यादा तेज धूप से बचाना चाहिए, इसलिए उन्हें हल्की छांव में रखना बेहतर होता है. इसके अलावा पानी हमेशा सुबह या शाम के समय ही देना चाहिए ताकि पौधे अच्छे से बढ़ सकें. साथ ही ज्यादा पानी देने से पौधे खराब भी हो सकते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Healthy Cooking Tips: क्या है जीरो ऑयल कुकिंग? बगैर एक बूंद तेल डाले खाने में आएगा मजेदार स्वाद</title>
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        <description><![CDATA[ Healthy Cooking Tips: क्या है जीरो ऑयल कुकिंग? बगैर एक बूंद तेल डाले खाने में आएगा मजेदार स्वाद ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 13 May 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Kumar Vishwas Luxury House: किसी 5 स्टार होटल से कम नहीं कुमार विश्वास का घर, 60 फीट लंबी पेंटिंग और सैलून देख उड़ेंगे होश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/kumar-vishwas-luxury-house-किसी-5-स्टार-होटल-से-कम-नहीं-कुमार-विश्वास-का-घर-60-फीट-लंबी-पेंटिंग-और-सैलून-देख-उड़ेंगे-होश</link>
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        <description><![CDATA[ Kumar Vishwas Luxury House: किसी 5 स्टार होटल से कम नहीं कुमार विश्वास का घर, 60 फीट लंबी पेंटिंग और सैलून देख उड़ेंगे होश ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:23 +0530</pubDate>
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        <title>Foods Harmful For Kidneys: नबावी शौक आपको पहुंचा सकते हैं अस्पताल, खाना छोड़ें ये 7 फूड, वरना होंगे किडनी स्टोन के शिकार</title>
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        <description><![CDATA[ Foods That Can Slowly Damage Your Kidneys: किडनी शरीर के उन अंगों में से है जो शुरुआत में ज्यादा शोर नहीं मचाती. दिनभर चुपचाप काम करते हुए यह खून को फिल्टर करती है, शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालती है, पानी का संतुलन बनाए रखती है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करती है. लेकिन खराब खानपान धीरे-धीरे इस पर दबाव बढ़ाता रहता है और लंबे समय तक इसके संकेत भी साफ नजर नहीं आते.&amp;nbsp;
दुनियाभर में लगातार बढ़ रहे हैं किड़नी डिजीज के मामले
आज दुनियाभर में डॉक्टर किडनी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जता रहे हैं. अमेरिकी संस्था नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, अमेरिका में हर 7 में से 1 व्यक्ति क्रॉनिक किडनी डिजीज से प्रभावित है और कई लोगों को इसका पता तक नहीं होता. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक, मीठे ड्रिंक्स और हाई-प्रोटीन डाइट का बढ़ता चलन इसकी बड़ी वजह बन रहा है.
&amp;nbsp;प्रोटीन शेक, रेड मीट और हाई-प्रोटीन स्नैक्स हाई बीपी वालों के लिए खतरा
सोशल मीडिया ने प्रोटीन को हेल्दी लाइफस्टाइल का सिंबल बना दिया है. प्रोटीन शेक, रेड मीट और हाई-प्रोटीन स्नैक्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. लेकिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स डिपार्टमेंट के टीम लीड अंशुल सिंह कहते हैं कि जरूरत से ज्यादा प्रोटीन किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या किडनी की समस्या हो.
किड़नी के लिए पैकेज्ड फूड बना बड़ा खतरा
मैरेंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम की चीफ डाइटिशियन डीटी. पारुल यादव ने TOI को बताया कि पैकेज्ड फूड सबसे बड़ा छिपा हुआ खतरा बन चुका है. चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स और फ्रोजन फूड में सोडियम, प्रिजर्वेटिव्स और फॉस्फेट की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जो समय के साथ किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है. &amp;nbsp;नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज की रिसर्च भी ज्यादा नमक को हाई ब्लड प्रेशर और किडनी स्ट्रेस से जोड़ चुकी है.
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अगर आप बाहर का खाना खाते हैं, तो सावधान हो जाइए
बहुत ज्यादा नमक वाली चीजें जैसे अचार, नमकीन, सॉस और बाहर का खाना भी धीरे-धीरे किडनी की काम करने की क्षमता कमजोर कर सकता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, एक वयस्क को दिनभर में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं लेना चाहिए, लेकिन ज्यादातर लोग प्रोसेस्ड फूड और रेस्टोरेंट मील्स के जरिए इससे कहीं ज्यादा नमक खा लेते हैं. इसके अलावा मीठे ड्रिंक्स और सोडा भी किडनी के लिए नुकसानदायक माने जाते हैं. पारुल यादव के मुताबिक, लगातार सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है, जो किडनी डिजीज की बड़ी वजह हैं. &amp;nbsp;नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक स्टडी में भी शुगर वाली ड्रिंक्स को किडनी डैमेज के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है.
पालक, चुकंदर, चॉकलेट और नट्स क्यों नहीं हैं हेल्दी?
एक और दिलचस्प बात यह है कि हर हेल्दी चीज हर इंसान के लिए सही नहीं होती. पारुल यादव बताती हैं कि पालक, चुकंदर, चॉकलेट और नट्स जैसे ऑक्सलेट-रिच फूड्स कुछ लोगों में किडनी स्टोन का खतरा बढ़ा सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि किडनी को किसी चमत्कारी डाइट की नहीं, बल्कि संतुलित खाने की जरूरत होती है. घर का ताजा खाना, पर्याप्त पानी, कम नमक और कम प्रोसेस्ड फूड लंबे समय तक किडनी को स्वस्थ रखने में सबसे ज्यादा मदद करते हैं.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Pasta Cooking Tips: रेस्तरां जैसा पास्ता घर में नहीं बनता तो सुधारें ये 7 गलतियां, चाटते रह जाएंगे उंगलियां</title>
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        <description><![CDATA[ Common Mistakes That Ruin Pasta Taste: पास्ता बनाना सुनने में जितना आसान लगता है, असल में उतना होता नहीं. कुछ लोगों को लगता है कि बस पानी उबालो, पास्ता डालो और ऊपर से सॉस मिलाकर काम खत्म. लेकिन कई बार अच्छी सामग्री इस्तेमाल करने के बाद भी पास्ता वैसा स्वाद नहीं देता जैसा रेस्टोरेंट में मिलता है. कभी नूडल्स चिपचिपे हो जाते हैं, कभी सॉस उन पर टिकता ही नहीं, तो कभी पूरा डिश फीका लगता है. &amp;nbsp;दरअसल, पास्ता छोटी-छोटी बातों पर टिका होता है. पानी में नमक कितना है, पास्ता कितनी देर पका, और सॉस कब मिलाया गया, यही बातें पूरे स्वाद को बदल देती हैं.&amp;nbsp;
सही नमक न डालने से यह होता है नुकसान
सबसे आम गलती होती है पास्ता के पानी में पर्याप्त नमक न डालना. पास्ता पकते समय पानी को सोखता है, इसलिए अगर पानी फीका होगा तो पास्ता भी बेस्वाद रहेगा. सही तरीका यह है कि पानी में इतना नमक डालें कि उसका स्वाद हल्के समुद्री पानी जैसा लगे. इससे फ्लेवर पास्ता के अंदर तक जाता है.&amp;nbsp;
पास्ता पकाते समय इस बात का रखें विशेष ध्यान
दूसरी बड़ी गलती है छोटे बर्तन में पास्ता पकाना. जब पास्ता को फैलने की जगह नहीं मिलती, तो उसमें से निकलने वाला स्टार्च पानी को जल्दी गाढ़ा कर देता है और नूडल्स आपस में चिपकने लगते हैं. बड़े बर्तन और ज्यादा पानी में पास्ता बेहतर तरीके से पकता है और उसकी बनावट सही रहती है.&amp;nbsp;
इस कारण से भी बिगड़ जाता है स्वाद
पास्ता को जरूरत से ज्यादा पकाना भी स्वाद बिगाड़ देता है. अल डेंटे यानी हल्का सा कड़ा पास्ता सबसे बेहतर माना जाता है। इसलिए पैकेट पर दिए समय से एक-दो मिनट पहले ही पास्ता चखना शुरू कर दें. अगर बीच में हल्का महसूस हो और कच्चापन न लगे, तो समझिए पास्ता तैयार है.
पास्ता छानने के दौरान नहीं करना चाहिए ये गलती
कई लोग पास्ता छानने के बाद उसे पानी से धो देते हैं, जबकि यही गलती सॉस का स्वाद खराब कर देती है. पास्ता के ऊपर मौजूद स्टार्च ही सॉस को अच्छी तरह चिपकने में मदद करता है. इसलिए अगर ठंडा पास्ता सलाद नहीं बना रहे हैं, तो उसे धोने से बचें.
सॉस बिगड़ सकता है आपके स्वाद का मजा
एक और जरूरी बात यह है कि सॉस को सिर्फ ऊपर से डालने के बजाय पास्ता के साथ पैन में मिलाकर थोड़ा पकाएं. इससे सॉस और पास्ता अलग-अलग नहीं लगते, बल्कि स्वाद एकसाथ घुल जाता है.&amp;nbsp;
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स्टार्च वाला पानी फेंकना स्वाद बढ़ा सकता है
इसके अलावा, पास्ता उबालने के बाद बचा हुआ स्टार्च वाला पानी फेंकना भी गलती है. यही पानी सॉस को स्मूद और क्रीमी बनाता है. थोड़ा सा पानी मिलाने से सॉस बेहतर तरीके से पास्ता पर चढ़ता है.&amp;nbsp;
आखिरी गलती जो सब करते हैं आपको नहीं करना है
आखिर में, पास्ता में बहुत ज्यादा चीजें डालने की कोशिश न करें. कई बार सिर्फ अच्छा ऑलिव ऑयल, लहसुन, टमाटर, चीज और ताजी जड़ी-बूटियां ही शानदार स्वाद दे देती हैं. पास्ता की असली खूबसूरती उसकी सादगी में ही छिपी होती है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Pasta, Cooking, Tips:, रेस्तरां, जैसा, पास्ता, घर, में, नहीं, बनता, तो, सुधारें, ये, गलतियां, चाटते, रह, जाएंगे, उंगलियां</media:keywords>
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        <title>Summer Fungal Infection: गर्मियों में फंगल इंफेक्शन से हैं परेशान, आज ही छोड़ दें ये गलतियां</title>
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        <description><![CDATA[ How To Prevent Fungal Infection In Summer: गर्मी का मौसम आते ही सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ता, बल्कि स्किन से जुड़ी परेशानियां भी तेजी से बढ़ने लगती हैं. तेज धूप, पसीना, उमस और लंबे समय तक त्वचा में बनी रहने वाली नमी फंगल इंफेक्शन के लिए बिल्कुल सही माहौल तैयार कर देती है. यही वजह है कि गर्मियों में खुजली, लाल चकत्ते, दाद और पैरों की उंगलियों के बीच होने वाले फंगल इंफेक्शन के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. खासकर भारत जैसे गर्म और उमस वाले देशों में यह समस्या काफी आम हो चुकी है. NIH के मुताबिक, सतही फंगल इंफेक्शन ट्रॉपिकल देशों में सबसे ज्यादा देखी जाने वाली स्किन समस्याओं में शामिल हैं.&amp;nbsp;
गर्मियों के मौसम में क्यों बढ़ जाते हैं फंगल इंफेक्शन के मामले?
स्किन एक्सपर्ट डॉ. निधि रोहतगी बताती हैं कि गर्मियों में सिर्फ फंगल ही नहीं, बल्कि बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते हैं. उनका कहना है कि फंगस को गर्म और नम माहौल सबसे ज्यादा पसंद होता है. जिस तरह बरसात या गर्मी में कपड़ों और खाने की चीजों पर फंगस जल्दी लग जाती है, उसी तरह शरीर के उन हिस्सों में भी इंफेक्शन तेजी से फैलता है जहां ज्यादा पसीना आता है. अंडरआर्म्स, जांघों के आसपास, पैरों की उंगलियों के बीच और त्वचा की सिलवटों में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है.&amp;nbsp;
कपड़े पहनना, टाइट जींस या सिंथेटिक कपड़े इस्तेमाल हो सकता है नुकसानदायक
कई बार मौसम से ज्यादा हमारी रोजमर्रा की आदतें इस परेशानी को बढ़ा देती हैं. लंबे समय तक पसीने वाले कपड़े पहनना, टाइट जींस या सिंथेटिक कपड़े इस्तेमाल करना और घंटों तक जूते-मोजे पहने रहना फंगस के बढ़ने का कारण बन सकता है. डॉ. रोहतगी सलाह देती हैं कि गर्मियों में जितना हो सके ढीले और कॉटन के कपड़े पहनने चाहिए, ताकि त्वचा को हवा मिलती रहे।.&amp;nbsp;
नहाने के बाद आप करते हैं यह सबसे बड़ी गलती&amp;nbsp;
नहाने के बाद शरीर को ठीक से न सुखाना भी एक बड़ी गलती मानी जाती है. अक्सर लोग जल्दी में त्वचा की सिलवटों को गीला छोड़ देते हैं, जिससे वहां नमी बनी रहती है और फंगस पनपने लगता है. इसके अलावा तौलिया और साबुन शेयर करना भी इंफेक्शन फैलाने का कारण बन सकता है.&amp;nbsp;
इसे भी पढ़ें -&amp;nbsp;Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद
क्या बिना मेडिकल एक्सपर्ट से पूछे क्रीम लगाते हैं आप?
आजकल एक और समस्या तेजी से बढ़ रही है, बिना सलाह के मेडिकल स्टोर से क्रीम खरीदकर इस्तेमाल करना. NIH पहले भी चेतावनी दे चुका है कि स्टेरॉयड वाली क्रीम फंगल इंफेक्शन को और जिद्दी बना सकती हैं. शुरुआत में खुजली और लालपन कम जरूर दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर फंगस बढ़ता रहता है. डॉ. रोहतगी भी बिना सलाह के ऐसी क्रीम लगाने से बचने की सलाह देती हैं.&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि गर्मियों में स्किन को स्वस्थ रखने के लिए बहुत महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं होती. रोज नहाना, पसीने वाले कपड़े तुरंत बदलना, धूप में सूखे कपड़े पहनना और शरीर को सूखा रखना जैसी छोटी आदतें ही फंगल इंफेक्शन से काफी हद तक बचा सकती हैं.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Silent Killer Disease: क्या आपके शरीर में भी पल रहा यह साइलेंट किलर? जा सकती है जान, डॉक्टर ने दी चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ Early Signs Of High Cholesterol: हाई कोलेस्ट्रॉल को अक्सर &quot;साइलेंट किलर&quot; कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर में चुपचाप बढ़ता रहता है और लंबे समय तक कोई साफ लक्षण नहीं दिखाता. कई लोग सालों तक सामान्य जिंदगी जीते रहते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उनकी आर्टरीज में फैट जमा होता रहता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. सबसे चिंता की बात यह है कि ज्यादातर लोगों को इसका पता तब चलता है, जब स्थिति काफी बिगड़ चुकी होती है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;20 साल से अधिक उम्र के करीब 11.3 प्रतिशत लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल
हाल के आंकड़ों के मुताबिक, अब सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं बल्कि कम उम्र के लोग भी तेजी से हाई कोलेस्ट्रॉल की चपेट में आ रहे हैं. नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे 2021-2023 के अनुसार, अमेरिका में 20 साल से अधिक उम्र के करीब 11.3 प्रतिशत लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल पाया गया. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसकी शुरुआत 20 या 30 की उम्र में भी हो सकती है.&amp;nbsp;
हार्ट डिजीज या स्ट्रोक जैसे हो सकती है स्थिति
नोएडा के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. आशीष कुमार गोविल बताते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर बिना किसी लक्षण के बढ़ता रहता है. उनका कहना है कि जब तक लोगों को इसके बारे में पता चलता है, तब तक यह हार्ट डिजीज या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है. इसलिए कम उम्र से ही नियमित जांच बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
आंखों, कोहनी, घुटनों और हाथों में दिखते हैं लक्षण
डॉक्टर्स के मुताबिक, कई बार आंखें भी हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत देने लगती हैं. आंखों की पुतली के आसपास ग्रे या सफेद रंग का घेरा दिखना &quot;कॉर्नियल आर्कस&quot; कहलाता है, जो शरीर में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की ओर इशारा कर सकता है. इसके अलावा त्वचा के नीचे पीले रंग के छोटे उभार या गांठें, जिन्हें जैंथोमास कहा जाता है, भी हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकती हैं. ये अक्सर आंखों, कोहनी, घुटनों और हाथों के आसपास दिखाई देती हैं.&amp;nbsp;
50 साल के लोगों के लिए ये खतरे की घंटी
जर्नल ऑफ ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित 2021की एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों में कॉर्नियल आर्कस और जैंथोमास जैसे संकेत दिखाई देते हैं, उनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा ज्यादा हो सकता है. रिसर्च में यह भी कहा गया कि अगर 50 साल से कम उम्र के लोगों की आंखों के आसपास ऐसा घेरा दिखे, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.&amp;nbsp;
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किस कमी के कारण हो रही है परेशानी?
डॉ. गोविल के अनुसार, कम उम्र में हाई कोलेस्ट्रॉल के पीछे खराब लाइफस्टाइल सबसे बड़ा कारण बन रहा है. प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा फैट वाला खाना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, स्मोकिंग और लगातार बढ़ता तनाव इसके जोखिम को बढ़ाते हैं. मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और फैमिली हिस्ट्री भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाई कोलेस्ट्रॉल का पता सिर्फ ब्लड टेस्ट से ही लगाया जा सकता है. इसलिए अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही हो या शरीर में ऐसे संकेत दिखें, तो समय रहते लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर करवाना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Karela Bitterness Removal Tips: करेला कड़वा है... अब नहीं चलेगा बच्चों का यह बहाना, इस ट्रिक से बनाएंगे तो खत्म हो जाएगी कड़वाहट</title>
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        <description><![CDATA[ Easy Tricks To Remove Bitterness From Karela: अक्सर करेला देखते ही लोग मुंह बना लेते हैं. वजह साफ है उसकी कड़वाहट. लेकिन सच यह है कि करेला जितना स्वाद में कड़वा होता है, सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद माना जाता है. ब्लड शुगर कंट्रोल करने से लेकर पाचन और इम्यूनिटी मजबूत करने तक, इसमें कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो शरीर को फायदा पहुंचाते हैं.
क्यों करेला खाने से परहेज करते हैं लोग?
हालांकि ज्यादातर लोग सिर्फ इसकी कड़वाहट की वजह से इसे खाने से बचते हैं. लेकिन कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाकर करेला इतना स्वादिष्ट बनाया जा सकता है कि बच्चे भी बिना नखरे के खाने लगें. सबसे आसान तरीका है नमक और हल्दी का इस्तेमाल. कटे हुए करेले पर नमक और हल्दी लगाकर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ दें. इससे उसका कड़वा पानी बाहर निकलने लगता है और स्वाद काफी हल्का हो जाता है.&amp;nbsp;
कैसे कम होगी करेले की कड़वाहट?
अगर कड़वाहट और कम करनी हो तो नींबू का रस भी मदद कर सकता है. करेले के टुकड़ों पर थोड़ा नींबू निचोड़कर 20-30 मिनट छोड़ दें. नींबू की खटास कड़वेपन को बैलेंस करती है और स्वाद को बेहतर बना देती है. इसके साथ ही इसमें मौजूद विटामिन C पोषण बढ़ाने में भी मदद करता है.&amp;nbsp;
हल्का उबालने का भी होता है विकल्प
कई घरों में करेले को हल्का उबालने की ट्रिक भी इस्तेमाल की जाती है। इसके लिए पानी में थोड़ा नमक डालकर करेले को 2 मिनट तक उबालें और फिर तुरंत ठंडे पानी में डाल दें. इससे उसका स्वाद थोड़ा नरम हो जाता है और सब्जी ज्यादा स्वादिष्ट बनती है.
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कड़वाहट कम करने का आसान विकल्प क्या है?
एक और आसान तरीका है करेले के बीज निकाल देना. दरअसल, सबसे ज्यादा कड़वाहट बीज और उसकी ऊपरी खुरदुरी परत में होती है. इसलिए हल्के हाथ से उसका छिलका खुरच देने और बीज हटाने से स्वाद काफी बदल जाता है. कई लोग करेले की सूखी सब्जी में थोड़ा गुड़ भी डालते हैं, जिससे कड़वाहट बैलेंस हो जाती है और स्वाद बच्चों को भी पसंद आने लगता है.&amp;nbsp;
कैसे होगा कुरकुरा स्वाद?
अगर आप कुरकुरा स्वाद पसंद करते हैं तो करेले के पतले स्लाइस बनाकर हल्का फ्राई भी कर सकते हैं. फ्राई करने के बाद उसका कड़वापन कम महसूस होता है और स्वाद चिप्स जैसा लगने लगता है. यही वजह है कि कई बच्चे फ्राई किया हुआ करेला आसानी से खा लेते हैं. &amp;nbsp;सेहत के लिहाज से भी करेला काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें विटामिन C, आयरन, मैग्नीशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यह पाचन सुधारने, इम्यूनिटी मजबूत करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है.
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cheap Lehenga Markets In Delhi: चांदनी चौक ही नहीं यहां भी मिलते हैं सस्ते लहंगे, ये हैं दिल्ली के सबसे चीप मार्केट</title>
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        <description><![CDATA[ Cheap Lehenga Markets In Delhi: चांदनी चौक ही नहीं यहां भी मिलते हैं सस्ते लहंगे, ये हैं दिल्ली के सबसे चीप मार्केट ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 12 May 2026 08:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Aam Papad Recipe  : आम के सीजन में घर पर ऐसे बनाएं आम पापड़, नोट कर लें तरीका</title>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Hypertension And Exercise: हाई ब्लड प्रेशर में भारी वजन उठाना है खतरनाक, वर्कआउट से पहले जान लें ये नियम</title>
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        <description><![CDATA[ Exercises To Avoid With High Blood Pressure: हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन ऐसी बीमारी है, जो अक्सर बिना किसी साफ संकेत के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है. ज्यादातर लोगों को तब तक पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, जब तक कोई गंभीर समस्या सामने न आ जाए. यही वजह है कि इसे &quot;साइलेंट किलर&quot; कहा जाता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी WHO के अनुसार, दुनियाभर में करीब 1.28 अरब एडल्ट हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं और इनमें से लगभग आधे लोगों को अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं है. हर साल करीब 1 करोड़ मौतों के पीछे हाई ब्लड प्रेशर एक बड़ी वजह माना जाता है.&amp;nbsp;
क्या ब्लड प्रेशर वालों को व्यायाम नहीं करना चाहिए?
अक्सर लोगों को लगता है कि हाई ब्लड प्रेशर होने पर व्यायाम नहीं करना चाहिए, लेकिन एक्सपर्ट इससे सहमत नहीं हैं. डॉ. विनय कुमार पांडे ने TOI को बताया कि रेगुलर फिजिकल एक्सरसाइज ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने और हार्ट को स्वस्थ रखने में मदद करती है. हालांकि कुछ तरह की एक्सरसाइज अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती हैं, जिससे अनियंत्रित हाइपरटेंशन वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ जाता है.
क्या अनकंट्रोल बीपी वालों को वजन नहीं उठाना चाहिए?
डॉक्टर का कहना है कि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं रहता या जिन्हें पहले से दिल की बीमारी है, उन्हें भारी वजन उठाने से बचना चाहिए. खासतौर पर अपनी क्षमता के 75 प्रतिशत से ज्यादा वजन उठाना शरीर पर अचानक दबाव डाल सकता है. डेडलिफ्ट, भारी स्क्वैट्स या बहुत अधिक तीव्रता वाली बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज कुछ लोगों में चक्कर, सीने में दबाव और दिल से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं. कई लोग वजन उठाते समय सांस रोक लेते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है.
इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग करने से क्या होता है खतरा?
इसी तरह हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग यानी HIIT भी हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं मानी जाती. डॉ विनय बताते हैं कि जो लोग फिटनेस की शुरुआत कर रहे हैं, जिनका ब्लड प्रेशर ज्यादा रहता है या जो मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, उन्हें इस तरह की एक्सरसाइज सावधानी से करनी चाहिए. HIIT में शरीर को कम समय में बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर तेजी से ऊपर-नीचे होता है और दिल पर दबाव बढ़ सकता है. लंबी दूरी की तेज दौड़, स्प्रिंटिंग, क्रॉसफिट और अत्यधिक सहनशक्ति वाली ट्रेनिंग भी जोखिम बढ़ा सकती हैं.
इन चीजों से बचना चाहिए
डॉक्टर के मुताबिक, लगातार जोर लगाकर किए जाने वाले पुश-अप्स या रस्सी कूद जैसी एक्टिविटी भी ब्लड प्रेशर पर असर डाल सकती हैं. खासकर तब, जब सही तकनीक का पालन न किया जाए. प्रतिस्पर्धी खेलों या अत्यधिक दबाव वाली ट्रेनिंग के दौरान भी ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
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इन चीजों को अपनाना चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए सुरक्षित एक्सरसाइज सबसे बेहतर विकल्प हैं. तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, योग, स्ट्रेचिंग और हल्की एरोबिक एक्सरसाइज शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं. एक्सरसाइज से पहले शरीर को अच्छी तरह वार्मअप करना, पर्याप्त पानी पीना और बहुत गर्म मौसम में भारी वर्कआउट से बचना जरूरी है. अगर किसी को अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है, तो नई फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hypertension, And, Exercise:, हाई, ब्लड, प्रेशर, में, भारी, वजन, उठाना, है, खतरनाक, वर्कआउट, से, पहले, जान, लें, ये, नियम</media:keywords>
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        <title>AI Technology For Male Infertility: क्या बांझपन के शिकार पुरुष भी बन सकेंगे पिता? AI की नई तकनीक ने कर दिया कमाल</title>
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        <description><![CDATA[ How AI Technology Is Helping Treat Male Infertility: दुनियाभर में लाखों दंपति ऐसे हैं जो संतान सुख पाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करते हैं. कई मामलों में समस्या पुरुषों में पाई जाती है, जहां शरीर में स्पर्म बेहद कम होते हैं या बिल्कुल नहीं बनते. ऐसी स्थिति को मेडिकल टर्म में गंभीर पुरुष बांझपन माना जाता है. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से विकसित एक नई तकनीक ऐसे लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है.
टेक्नोलॉजी ने किया काम आसान
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में विकसित की गई इस तकनीक ने उन पुरुषों में भी स्पर्म खोजने में सफलता हासिल की है, जिन्हें पहले यह कह दिया गया था कि वे कभी पिता नहीं बन सकेंगे. यह सिस्टम बेहद उन्नत तकनीक और मशीन आधारित एनालिसिस का इस्तेमाल करती है. इसका उद्देश्य उन छिपे हुए स्पर्म को ढूंढना है, जो सामान्य जांच में दिखाई नहीं देते.&amp;nbsp;
क्या है मामला?
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, एक दंपति कई सालों से संतान पाने की कोशिश कर रहा था. जांच में पता चला कि पुरुष एक जेनेटिक समस्या से जूझ रहा था, जिसके कारण उसके सीमन में स्पर्म सेल मौजूद नहीं थे. डॉक्टरों ने उनकी संभावना बेहद कम बताई थी. इसके बावजूद नई तकनीक की मदद से नमूने में कुछ रेयर स्पर्म खोज लिए गए और उसी के जरिए गर्भधारण संभव हो सका.&amp;nbsp;
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट के मुताबिक यह तकनीक बेहद तेज गति से हजारों तस्वीरों का एनालिसिस करती है. जहां इंसानी आंखें स्पर्म नहीं खोज पातीं, वहां मशीन आधारित सिस्टम उन्हें पहचान लेती है. इसके बाद एक विशेष रोबोटिक प्रक्रिया उन स्पर्म को अलग करती है ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जा सके. &amp;nbsp;रिसर्च से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि इस तकनीक ने अब तक कई ऐसे मामलों में सफलता दिखाई है, जहां पहले उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी. शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिन लोगों को पूरी तरह बांझ माना गया था, उनमें से करीब 30 प्रतिशत मामलों में स्पर्म खोजने में सफलता मिली.&amp;nbsp;
अभी रिसर्च की जरूरत
हालांकि, एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि इस तकनीक पर अभी और बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है. लंबे समय तक इसके परिणामों और सुरक्षा को समझना जरूरी होगा. इसके अलावा गोपनीयता और संवेदनशील चिकित्सकीय जानकारी से जुड़े सवाल भी भविष्य में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Success Tips: क्या एग्जाम में आपका बच्चा भी लेता है स्ट्रेस? जानें कामयाब बच्चों के माता&amp;पिता का सीक्रेट</title>
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        <description><![CDATA[ How To Build Confidence In Children At Home: कुछ बच्चे परीक्षा के समय भी बेहद शांत और आत्मविश्वास से भरे दिखाई देते हैं. उन्हें देखकर लगता है जैसे दबाव का उन पर कोई असर ही नहीं पड़ता. इसकी वजह सिर्फ पढ़ाई या लंबे समय तक पढ़ने की आदत नहीं होती, बल्कि घर का माहौल भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. ऐसे बच्चों के माता-पिता केवल अंकों पर ध्यान नहीं देते, बल्कि बच्चों के भीतर भरोसा, संतुलन और मानसिक मजबूती विकसित करने की कोशिश करते हैं.&amp;nbsp;
क्यों होता है ऐसा?
आत्मविश्वास से भरे सफल बच्चे अक्सर ऐसे माहौल में बड़े होते हैं, जहां मेहनत को केवल परिणाम से नहीं जोड़ा जाता. उनके माता-पिता यह समझते हैं कि हर बार पहला स्थान आना जरूरी नहीं, लेकिन लगातार कोशिश करते रहना जरूरी है. जब बच्चों की तारीफ केवल अच्छे अंक आने पर नहीं, बल्कि मेहनत और लगन के लिए भी होती है, तो उनमें असफलता का डर कम होने लगता है. वे यह सीखते हैं कि खराब दिन आने का मतलब यह नहीं कि उनकी क्षमता खत्म हो गई.
क्यों जरूरी है घर का माहौल?
घर का माहौल भी इसमें बेहद अहम माना जाता है. ऐसे परिवार परीक्षा को युद्ध की तरह नहीं देखते. पढ़ाई को लेकर अनुशासन जरूर होता है, लेकिन डर और तनाव का वातावरण नहीं बनाया जाता. बच्चों को यह भरोसा दिया जाता है कि अगर कभी अंक कम भी आ जाएं, तो उन्हें डांट या अपमान का सामना नहीं करना पड़ेगा. यही भरोसा बच्चों को खुलकर सवाल पूछने और नई चीजें सीखने की हिम्मत देता है.&amp;nbsp;
क्या करते हैं माता-पिता?
ऐसे माता-पिता बच्चों को छोटी उम्र से ही असफलता को समझना सिखाते हैं. वे हर मुश्किल से तुरंत बाहर निकालने की कोशिश नहीं करते, बल्कि यह समझाते हैं कि गलती कहां हुई और अगली बार क्या बेहतर किया जा सकता है. इससे बच्चों में मानसिक मजबूती आती है और वे छोटी-छोटी असफलताओं से टूटते नहीं. एक और खास बात यह होती है कि इन घरों में बच्चों को केवल आदेश मानना नहीं सिखाया जाता, बल्कि सोचने और अपनी राय रखने की आजादी भी दी जाती है. माता-पिता बच्चों से सवाल पूछते हैं, उनकी बात सुनते हैं और उन्हें छोटे फैसले खुद लेने देते हैं. यही आदत आगे चलकर पढ़ाई और जिंदगी दोनों में आत्मविश्वास बढ़ाती है.
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दबाव या अकेलेपन है वजह?
सफल बच्चों के माता-पिता केवल अंकतालिका पर नजर नहीं रखते. वे बच्चों के व्यवहार, थकान, उदासी और तनाव को भी समझने की कोशिश करते हैं. कई बार पढ़ाई में गिरावट आलस की वजह से नहीं, बल्कि मेंटल दबाव या अकेलेपन की वजह से भी हो सकती है. जब बच्चे खुद को समझा हुआ महसूस करते हैं, तो वे ज्यादा खुलकर अपनी परेशानियां साझा कर पाते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>क्या लगातार कम होता जा रहा है लोगों का बोलना? आपको भी चौंका देगी यह स्टडी</title>
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        <description><![CDATA[ Why Conversation Is Declining: आज का दौर पूरी तरह बदल चुका है. कभी शाम होते ही लोग साथ बैठकर घंटों बातें करते थे, सुख-दुख बांटते थे. लेकिन अब स्मार्टफोन ने उस जगह को ले लिया है. हालात ये हैं कि परिवार के भीतर ही बातचीत कम हो गई है. लेकिन क्या सच में लोग अब पहले से कम बोल रहे हैं? नई स्टडी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, स्मार्टफोन के दौर में इंसानों की रोजाना बातचीत तेजी से घट रही है. &amp;nbsp;वजह जानेंगे तो आप भी हैरान रह जाएंगे.
क्या निकला रिसर्च में?
कई सालों तक चले एक बड़े एनालिसिस में सामने आया है कि आज लोग पहले की तुलना में काफी कम बोल रहे हैं. मिसौरी-कैनसस सिटी विश्वविद्यालय और एरिजोना विश्वविद्यालय के रिसर्चर ने 2005 से 2019 के बीच 22 अलग-अलग स्टडी के डेटा को देखा. इसमें करीब 2200 लोगों की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल थी. नतीजों के मुताबिक, रोज बोले जाने वाले शब्दों की औसत संख्या में लगभग 28 प्रतिशत की गिरावट आई है. पहले जहां लोग करीब 16,632 शब्द बोलते थे, अब यह घटकर करीब 11,900 रह गया है. खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को यह पता नहीं था कि उनके शब्दों की गिनती की जा रही है, जिससे उनके व्यवहार में बदलाव की संभावना कम रही.
युवाओं में सबसे ज्यादा असर
यह गिरावट खासतौर पर युवाओं में ज्यादा देखी गई. 25 साल से कम उम्र के लोग रोजाना औसतन 451 शब्द कम बोल रहे हैं, जबकि 25 साल से ऊपर के लोगों में यह कमी करीब 314 शब्दों की है.&amp;nbsp;
लाइफस्टाइल में बदलाव
एक्सपर्ट मानते हैं कि इसके पीछे हमारी बदलती लाइफस्टाइल है. अब आमने-सामने की बातचीत की जगह मोबाइल और ऐप आधारित बातचीत ने ले ली है. मैसेज और सोशल मीडिया ने बातचीत का तरीका ही बदल दिया है. पहले जिन कामों के लिए लोग सीधे बात करते थे, जैसे दुकान में मदद लेना, रास्ता पूछना या पड़ोसियों से बात करना, अब वह सब ऑनलाइन हो गया है.&amp;nbsp;
साइकोलॉजिस्ट का क्या है कहना?
साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि इसका असर सिर्फ अकेलेपन तक सीमित नहीं है. आमने-सामने की बातचीत में जो भाव, आवाज का उतार-चढ़ाव और जुड़ाव होता है, वह लिखे गए संदेशों में नहीं मिल पाता. धीरे-धीरे बातचीत की बुनियादी क्षमता, जैसे सामने वाले की बात समझना और सही समय पर प्रतिक्रिया देना भी कमजोर हो सकती है. एक और अहम बात मां और बच्चों से जुड़ी सामने आई है. ऑब्जर्वेशन आधारित रिसर्च में पाया गया कि जब मां स्मार्टफोन का इस्तेमाल करती हैं, तो वे अपने छोटे बच्चों से करीब 16 प्रतिशत कम बात करती हैं. यानी स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के साथ जरूरी बातचीत को भी कम कर रहा है. बात करना एक सक्रिय प्रक्रिया है। इसमें सामने वाले पर ध्यान देना, तुरंत जवाब देना और अपने हाव-भाव को नियंत्रित करना शामिल होता है.&amp;nbsp;
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महिलाएं ज्यादा बोलती हैं?
डेटा में यह भी सामने आया कि औसतन महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा बोलती हैं, जहां महिलाएं रोज 13,000 से ज्यादा शब्द बोलती हैं, वहीं पुरुष करीब 12,000 शब्दों के आसपास रहते हैं. हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर उल्टा भी हो जाता है. एक्सपर्ट का मानना है कि इस स्थिति को बदला जा सकता है. छोटे-छोटे बदलाव जैसे बच्चों के साथ ज्यादा बातचीत करना, फोन कॉल को बढ़ावा देना और समय-समय पर मोबाइल से दूरी बनाना इसमें मदद कर सकता है.
एक्सपर्ट ने क्या बताया?
स्टडी की को- राइटर &amp;nbsp;Valeria Pfeifer के अनुसार, अगर हर व्यक्ति रोज सिर्फ एक नए इंसान से बात करना शुरू कर दे, तो इस गिरावट को रोका जा सकता है. यानी समाधान आसान है, बस हमें फिर से बातचीत को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना होगा.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Mother&amp;apos;s Day 2026: &amp;apos;कूल&amp;apos; से लेकर &amp;apos;सख्त&amp;apos; तक, हर मां का प्यार जताने का तरीका होता है बिल्कुल अलग</title>
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        <description><![CDATA[ Different Types Of Moms And Their Parenting Styles: बचपन में हम अपनी मां को किसी किताब के किरदार की तरह समझने की कोशिश नहीं करते. बस उनके साथ रहते हैं, कभी लड़ते हैं, कभी जिद करते हैं और धीरे-धीरे बिना महसूस किए बहुत कुछ सीखते जाते हैं. समय बीतने के बाद समझ आता है कि हमारा बचपन यूं ही नहीं बना था, बल्कि उसे हमारी मां के स्वभाव और परवरिश ने आकार दिया था.
&amp;nbsp;पैरेंटिंग स्टाइल जैसी बातें किताबों में भले बड़े शब्द लगें, लेकिन असल जिंदगी में ये यादों, आदतों और उन छोटी-छोटी बातों में छिपी होती हैं, जिनका मतलब हमें बड़े होकर समझ आता है. मदर्स डे के मौके पर यह उन अलग-अलग तरह की मांओं को याद करने का वक्त है, जिन्होंने अपने तरीके से हमारी जिंदगी को गढ़ा.&amp;nbsp;
टोकाटाकी नहीं करनी वाली कूल मां&amp;nbsp;
कुछ मांएं ऐसी होती हैं जिन्हें बच्चे &#039;कूल मां&#039; मानते हैं. वे हर छोटी बात पर टोकाटाकी नहीं करतीं. देर तक बाहर रहने देना, अपनी राय खुलकर रखने देना या छोटी गलतियों पर ज्यादा हंगामा न करना, यही उनकी खासियत होती है. लेकिन फिर एक दिन ऐसा आता है जब आप कोई ऐसी गलती कर बैठते हैं, जो उनकी तय की हुई सीमा पार कर देती है. तब वे चिल्लाती नहीं, बस शांत होकर आपको एहसास करा देती हैं कि बात गंभीर है. उनकी यही शांति कई बार डांट से ज्यादा असर करती है. बाद में समझ आता है कि उन्होंने हर वक्त डर नहीं बनाया, बल्कि सही समय पर सही बात समझाई.&amp;nbsp;
परीक्षा से पहले संदेश से लेकर दो टूक में मूड समझ जाने वाली मां
फिर होती हैं &quot;हेलिकॉप्टर मां&quot;. यानी वो मां जो हर समय आपकी चिंता में लगी रहती हैं. परीक्षा से पहले संदेश भेजना, खाना समय पर खाया या नहीं पूछना, या सिर्फ दो शब्दों के जवाब से आपका मूड समझ जाना, ये सब उनकी आदत में शामिल होता है. बचपन में यह दखलअंदाजी जैसा लगता है, लेकिन उम्र बढ़ने पर एहसास होता है कि उनकी हर चिंता के पीछे सिर्फ प्यार छिपा था. उनका हर समय आसपास बने रहना दरअसल यह कहने का तरीका था कि &quot;तुम अकेले नहीं हो.&quot;
इन मांओं की बातें याद करके आ जाती है चेहरे पर मुस्कान
कुछ मांएं ऐसी भी होती हैं जिनकी बातें अनजाने में सबसे ज्यादा मजेदार लगती हैं. वे मजाक करने की कोशिश नहीं करतीं, लेकिन उनका बोलने का अंदाज, चेहरे का भाव और सीधी-सादी बातें बाद में याद करके हंसी दिला देती हैं. कई बार उनकी कही साधारण बातें ही परिवार के सबसे मजेदार किस्से बन जाती हैं. धीरे-धीरे उनकी वही आदतें हमारे स्वभाव और ह्यूमर का हिस्सा बन जाती हैं.
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सपोर्ट हमेशा लेकिन जताने से दूर रहने वाली मां
एक &#039;सहारा देने वाली मां&#039; भी होती हैं, जो प्यार का दिखावा नहीं करतीं, लेकिन हर वक्त आपके साथ खड़ी रहती हैं. उन्हें आपकी पसंद-नापसंद याद रहती है, आपकी चिंता रहती है और बिना बताए आपके लिए बहुत कुछ करती रहती हैं. उनका साथ शोर वाला नहीं, बल्कि सुकून देने वाला होता है. बाद में समझ आता है कि हर किसी को ऐसा शांत और भरोसेमंद साथ नहीं मिलता.&amp;nbsp;
क्या आपकी भी मां हैं सख्त?
आखिर में होती हैं &#039;सख्त मां&#039;. नियम, अनुशासन और साफ सीमाएं तय करने वाली मां. बचपन में उनकी रोक-टोक बुरी लग सकती है, लेकिन समय के साथ समझ आता है कि उनकी सख्ती में भी प्यार छिपा था. उन्होंने सिर्फ नियम नहीं बनाए, बल्कि हमें जिम्मेदार और मजबूत इंसान बनने की सीख दी.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Hantavirus: नॉर्मल बुखार को मेडिकल इमरजेंसी बना सकता है हंतावायरस, रूह कंपा देगी डॉक्टर की यह चेतावनी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hantavirus-नॉर्मल-बुखार-को-मेडिकल-इमरजेंसी-बना-सकता-है-हंतावायरस-रूह-कंपा-देगी-डॉक्टर-की-यह-चेतावनी</link>
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        <description><![CDATA[ Early Symptoms Of Hantavirus Infection: इस समय दुनियाभर में हंतावायरस का मामला काफी सुर्खियों में है. इसके अबतक आठ मामले सामने आ चुके हैं और तीन लोगों की मौत हो गई है. यह एक ऐसा इंफेक्शन है, जिसके बारे में लोग तब तक ज्यादा बात नहीं करते, जब तक कोई इसकी चपेट में न आ जाए. यह इंफेक्शन रेयर जरूर है, लेकिन बेहद खतरनाक माना जाता है. सबसे चिंता की बात यह है कि इसकी शुरुआत बिल्कुल सामान्य वायरल बीमारी जैसी होती है, इसलिए लोग अक्सर इसे हल्के में ले लेते हैं. लेकिन कुछ ही दिनों में यह फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.&amp;nbsp;
क्या डेंगू, स्वाइन फ्लू या कोविड जैसे दिख सकते हैं इसके भी लक्षण?
अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट और स्लीप मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. प्रदीप बजाद ने TOI को बताया कि जब बुखार और शरीर दर्द शुरू होता है, तो ज्यादातर लोग डेंगू, स्वाइन फ्लू या कोविड के बारे में सोचते हैं. हंतावायरस एक रेयर लेकिन जानलेवा इंफेक्शन है, जो कुछ ही दिनों में लंग्स को नुकसान पहुंचा सकता है और बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं.
क्या यह खांसने, छींकने या हाथ मिलाने से फैलता है?
यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में सामान्य तरीके से नहीं फैलता. यानी किसी के खांसने, छींकने या हाथ मिलाने से इंफेक्शन नहीं होता. हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका एक किस्म &#039;एंडीज वायरस&#039; इंसानों से इंसानों में फैल सकता है, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है. &amp;nbsp;यही वजह है कि लोग इसके खतरे को आसानी से समझ नहीं पाते. डॉ. प्रदीप बजाद बताते हैं कि यह इंफेक्शन मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और चूहों जैसे कृन्तकों से फैलता है. वायरस उनके यूरिन, लार और मल में मौजूद होता है. जब लोग लंबे समय से बंद पड़े कमरों, गोदामों, खेतों या स्टोर रूम की सफाई करते हैं, तब धूल के साथ ये इंफेक्शन कण हवा में फैल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं.
क्या होते हैं इस वायरस के शुरुआती लक्षण?
शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि किसी को भी लगेगा कि यह मौसम बदलने से हुई साधारण बीमारी है. &amp;nbsp;मरीज को बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, उल्टी, मतली या पेट में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कई लोग इसे फ्लू या फूड पॉइजनिंग समझकर घर पर आराम करते रहते हैं. शुरुआत में हालत ज्यादा गंभीर नहीं लगती, इसलिए बीमारी का खतरा समझ ही नहीं आता.
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कब शुरू होता है इसका असली खेल?
लेकिन असली खतरा इसके बाद शुरू होता है. कुछ ही समय में मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न, सूखी खांसी, दिल की धड़कन तेज होना और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. फेफड़ों के अंदर पानी भरने लगता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है. कई मरीजों की हालत इतनी तेजी से बिगड़ती है कि उन्हें कुछ ही घंटों में आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है.
इस वायरस का सबसे गंभीर रूप किसे माना जाता है?
हंतावायरस का सबसे गंभीर रूप हंतावायरस फुफ्फुसीय सिंड्रोम यानी HPS कहलाता है. &amp;nbsp;द लैंसेट औरक्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी रिव्यूज जैसी जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च में बताया गया है कि यह इंफेक्शन फेफड़ों और ब्लड वेसल्स में गंभीर सूजन पैदा कर सकता है. अमेरिकी संस्था CDC के अनुसार, गंभीर मामलों में इसकी मृत्यु दर 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है.
क्या है इससे बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका?
डॉक्टरों का कहना है कि इस संक्रमण से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है. घर या गोदाम में चूहों की संख्या नियंत्रित रखना, उनके मल-मूत्र को सुरक्षित तरीके से साफ करना, बंद कमरों में हवा आने-जाने की व्यवस्था रखना और सफाई के दौरान मास्क व दस्ताने पहनना इंफेक्शन के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Job Quit Tips: जल्दबाजी में नौकरी छोड़ने का फैसला पड़ सकता है भारी, पहले जान लें ये जरूरी बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Things To Do Before Quitting Your Job: नौकरी छोड़ने का विचार कई बार अचानक नहीं आता. धीरे-धीरे जमा हुई थकान, ऑफिस की राजनीति, कम वेतन या खुद को नजरअंदाज महसूस करना इंसान को उस मोड़ पर ला खड़ा करता है, जहां सब कुछ छोड़ देने का मन होने लगता है. लेकिन इस्तीफा देने से पहले थोड़ा ठहरकर सोचना जरूरी है, क्योंकि जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में परेशानी भी बन सकता है. इसलिए नौकरी छोड़ने से पहले कुछ बातों को समझ लेना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
जिंदगी में किस बात को समझना सबसे जरूरी
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि नौकरी और जीवन का उद्देश्य हमेशा एक ही चीज नहीं होते. लंबे समय से लोगों को यह सिखाया गया है कि वही काम करो जिससे प्यार हो, लेकिन असल जिंदगी हमेशा इतनी आसान नहीं होती. हर नौकरी आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर सकती. कई बार नौकरी सिर्फ आर्थिक स्थिरता देने का जरिया होती है, ताकि आप अपने अगले कदम के बारे में सोच सकें. इसलिए यह उम्मीद छोड़ देना बेहतर है कि हर नौकरी आपके जीवन का मकसद बन जाएगी.
नौकरी आपके जीवन में व्यक्तिगत असफलता नहीं होती&amp;nbsp;
इसके साथ ही खुद को केवल अपने पद या वेतन से जोड़कर देखना भी गलत है. आपकी पहचान सिर्फ आपके ऑफिस के नाम या कुर्सी से तय नहीं होती. हो सकता है कि इस बार आपकी परफॉर्मेंस अच्छी न रही हो या आपको मनचाहा सम्मान न मिला हो, लेकिन इससे आपकी असली कीमत कम नहीं हो जाती, आप एक अच्छे इंसान, दोस्त, साथी या परिवार के सदस्य भी हैं. जब इंसान अपनी आत्मसम्मान को नौकरी से अलग करना सीख लेता है, तब वह पेशेवर उतार-चढ़ाव को व्यक्तिगत असफलता की तरह नहीं देखता.
इंसान की जिंदगी सिर्फ ऑफिस तक नहीं
काम के दबाव से बाहर निकलने के लिए अपने लिए कुछ छोटे-छोटे पल बनाना भी जरूरी है. जैसे सुबह थोड़ी देर टहलना, पसंदीदा गाने सुनना या किसी पुराने शौक को फिर से शुरू करना. ये छोटी चीजें आपको याद दिलाती हैं कि जिंदगी सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं है. धीरे-धीरे यही आदतें मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं.
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नौकरी करते हुए तलाशें नए विकल्प
अगर आपको लगता है कि नौकरी छोड़ना ही सही फैसला है, तो पहले दूसरे विकल्पों को समझना शुरू करें. कोई नया कोर्स करें, दूसरे क्षेत्र के लोगों से बात करें या फ्रीलांस काम की संभावना तलाशें. नौकरी करते हुए नए रास्ते ढूंढना ज्यादा सुरक्षित होता है, क्योंकि इससे आर्थिक दबाव कम रहता है और सोचने का समय भी मिलता है.
फैसला लेने से पहले खुद को समय दीजिए
सबसे जरूरी बात यह है कि काम के बाहर भी अपनी एक दुनिया बनाइए. अच्छे दोस्त, परिवार, शौक और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना करियर. जब खुशी और आत्मविश्वास सिर्फ नौकरी पर निर्भर नहीं रहते, तब नौकरी की परेशानियां भी इंसान को पूरी तरह नहीं तोड़ पातीं. इसलिए फैसला लेने से पहले खुद को समय दीजिए, तैयारी कीजिए और फिर पूरे भरोसे के साथ आगे बढ़िए.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Travel Tips: गर्मी में दोस्तों के साथ घूमने का है प्लान तो भूलकर भी न करें ये गलतियां, सेफ्टी किट में जरूर होनी चाहिए ये चीजें</title>
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        <description><![CDATA[ Things To Carry In A Summer Travel Safety Kit: गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही दोस्तों के साथ ट्रिप का प्लान बनने लगता है. कोई पहाड़ों की ठंडी हवा का मजा लेना चाहता है तो कोई बीच या किसी नए शहर को एक्सप्लोर करने निकल पड़ता है. लेकिन तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच छोटी-सी लापरवाही भी पूरी ट्रिप खराब कर सकती है. ऐसे में अगर आप भी दोस्तों के साथ समर ट्रिप पर जाने वाले हैं, तो कुछ गलतियों से बचना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही आपकी ट्रैवल सेफ्टी किट में कुछ जरूरी चीजें जरूर होनी चाहिए.
कमजोरी, चक्कर और सिरदर्द से बचने के लिए रखें इसका ध्यान
सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है पानी कम पीना. गर्मी में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है, जिससे कमजोरी, चक्कर और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए ट्रिप के दौरान हमेशा पानी की बोतल साथ रखें. ORS, नारियल पानी, फ्रूट जूस और इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक जैसी चीजें भी बैग में रखना अच्छा विकल्प हो सकता है.&amp;nbsp;
तेज धूप से स्कीन को बचाने की जरूरत
धूप में बिना सनस्क्रीन लगाए घूमना भी भारी पड़ सकता है. तेज यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं और सनबर्न या टैनिंग की समस्या बढ़ा सकती हैं. इसलिए सनस्क्रीन, एलोवेरा जेल और आफ्टर-सन लोशन अपनी सेफ्टी किट में जरूर रखें. अगर लंबे समय तक बाहर रहने वाले हैं तो सनग्लासेस और कैप भी साथ रखें.
बैग में रखें हल्के कपड़े
कई लोग ट्रिप पर फैशन के चक्कर में भारी या टाइट कपड़े पहन लेते हैं, जिससे गर्मी और ज्यादा लगती है. समर ट्रैवल के लिए हमेशा हल्के रंग के कॉटन कपड़े चुनें. ढीले और आरामदायक कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं.
फोन चार्जर और पावर बैंक का रखें ध्यान
अगर आप दोस्तों के साथ घूमने निकल रहे हैं तो फोन चार्जर और पावर बैंक रखना बिल्कुल न भूलें. सफर के दौरान लोकेशन देखने, फोटो क्लिक करने और ऑनलाइन पेमेंट के कारण मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है. &amp;nbsp;ऐसे में पावर बैंक काफी मददगार साबित होता है.
जले- कटे का भी रखें ध्यान
सेफ्टी किट में बेसिक फर्स्ट एड आइटम जरूर होने चाहिए. इसमें अलग-अलग साइज की बैंडेज, स्टेराइल गॉज, मेडिकल टेप और एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट रखें, ताकि कट या चोट लगने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके. लंबे वॉक के दौरान पैरों में छाले पड़ने से बचने के लिए ब्लिस्टर पैड्स भी काम आते हैं.&amp;nbsp;
बुखार, दर्द या एलर्जी के लिए विशेष तैयारी
बुखार, दर्द या एलर्जी की बेसिक दवाइयां भी साथ रखें. डिजिटल थर्मामीटर, एंटीहिस्टामिन मेडिसिन, कैलामाइन लोशन और हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम कीड़ों के काटने या स्किन रैश में राहत दे सकती हैं. हैंड सैनिटाइजर, वेट वाइप्स, छोटे कैंची, ट्वीजर, टॉर्च और इंस्टेंट कोल्ड पैक जैसी चीजें भी ट्रिप के दौरान बेहद काम आती हैं.
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घूमने के बीच में ब्रेक लेना भी जरूरी
एक और गलती जो लोग करते हैं, वह है लगातार धूप में घूमते रहना. गर्मी में शरीर जल्दी थक जाता है, इसलिए बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है. कोशिश करें कि दोपहर की तेज धूप में ज्यादा देर बाहर न रहें. सही प्लानिंग और अच्छी सेफ्टी किट के साथ आपका समर ट्रिप मजेदार, सुरक्षित और यादगार हो सकता है.
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Summer, Travel, Tips:, गर्मी, में, दोस्तों, के, साथ, घूमने, का, है, प्लान, तो, भूलकर, भी, न, करें, ये, गलतियां, सेफ्टी, किट, में, जरूर, होनी, चाहिए, ये, चीजें</media:keywords>
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        <title>Protein And Fiber Balance: बॉडी बनाने के लिए फाइबर को भूलकर सिर्फ ले रहे हैं प्रोटीन? हो सकते हैं इस कैंसर के शिकार</title>
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        <description><![CDATA[ Side Effects Of Eating Too Much Protein: आजकल फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग के ट्रेंड में ज्यादातर लोग सिर्फ प्रोटीन पर ध्यान देने लगे हैं. जिम शुरू करते ही डाइट में प्रोटीन शेक, चिकन, अंडे और सप्लीमेंट्स की मात्रा बढ़ा दी जाती है, लेकिन इसी चक्कर में कई लोग फाइबर को लगभग भूल जाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर शरीर को सिर्फ प्रोटीन मिलेगा और फाइबर की कमी होगी, तो इसका उल्टा असर भी देखने को मिल सकता है.&amp;nbsp;
क्या फाइबर का ध्यान न रखने से हो सकती है दिक्कत?
नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट Dr. Olufemi Kassim के मुताबिक, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी फाइबर भी है. अगर हाई-प्रोटीन डाइट के साथ पर्याप्त फाइबर न लिया जाए, तो डाइजेशन सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है. इससे कब्ज, पेट फूलना, गैस और अनरेगुलर बाउल मूवमेंट जैसी समस्याएं होने लगती हैं.&amp;nbsp;
हमारे शरीर के लिए फाइबर क्यों है जरूरी?
डॉक्टर बताते हैं कि फाइबर सिर्फ पेट साफ रखने का काम नहीं करता, बल्कि यह आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को भी मजबूत बनाता है. यही बैक्टीरिया डाइजेशन को बेहतर रखने और शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों की डाइट में फाइबर ज्यादा होता है, उनका माइक्रोबायोम ज्यादा हेल्दी और विविध होता है, जिससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का खतरा कम हो सकता है.&amp;nbsp;
फाइबर के बिना प्रोटीन क्यों नहीं करेगा काम
एक्सपर्ट के अनुसार, फाइबर भोजन के पाचन की गति को धीमा करता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है. यही वजह है कि सिर्फ प्रोटीन लेने से शरीर को पूरा फायदा नहीं मिल पाता.
एक एडल्ट को हर दिन कितना चाहिए फाइबर?
डॉ. कासिम का कहना है कि ज्यादातर एडल्ट को रोजाना करीब 25 से 35 ग्राम फाइबर लेना चाहिए, लेकिन हाई-प्रोटीन डाइट फॉलो करने वाले कई लोग इस जरूरत का आधा भी पूरा नहीं कर पाते. दूसरी तरफ, कई लोग जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने लगते हैं. &amp;nbsp;आमतौर पर शरीर को रोजाना 50 से 60 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है, लेकिन हाई-प्रोटीन डाइट में यह मात्रा 80 से 90 ग्राम तक पहुंच सकती है.&amp;nbsp;
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कम फाइबर लेने वालों को कैंसर का भी खतरा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लंबे समय तक ज्यादा प्रोटीन और कम फाइबर वाली डाइट लेने से शरीर में सूजन, कब्ज और ब्लोटिंग जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. इतना ही नहीं, भविष्य में कोलन कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है. खासतौर पर स्मोक्ड मीट और प्रोसेस्ड रेड मीट को ज्यादा मात्रा में खाने वालों में यह जोखिम अधिक माना गया है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि डाइट में सिर्फ प्रोटीन नहीं, बल्कि फाइबर से भरपूर चीजें भी शामिल करनी चाहिए.&amp;nbsp;
कहां से मिलेगा शरीर को फाइबर?
फल, सब्जियां, ओट्स, चिया सीड्स, दालें, क्विनोआ और साबुत अनाज शरीर को जरूरी फाइबर देते हैं. इसके साथ ही फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए और पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, ताकि पेट से जुड़ी समस्याएं न हों.
इसे भी पढ़ें -&amp;nbsp;Supplements Side Effects: रोज सप्लीमेंट्स खाने वाले तुरंत हो जाएं अलर्ट, डॉक्टर ने बताई नुकसान की पूरी सच्चाई
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 11 May 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Mother’s Day Messages: मदर्स डे पर अपनी मां को भेजें ये प्यारे मैसेज, उनके चेहरे पर तुरंत आ जाएगी मुस्कान</title>
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        <description><![CDATA[ Mother&amp;rsquo;s Day Messages: मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि हमारी पूरी दुनिया होती है. वह बिना कुछ कहे हमारी हर तकलीफ समझ जाती हैं और हर मुश्किल में सबसे पहले साथ खड़ी नजर आती हैं. ऐसे में मदर्स डे मां को यह बताने का सबसे खूबसूरत मौका होता है कि वह हमारी जिंदगी में कितनी खास हैं. इस दिन अगर आप अपनी मां को एक प्यारा-सा मैसेज भेजते हैं, तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ सकती है और उनका दिन और भी खास बन सकता है. कई बार छोटे-छोटे शब्द भी दिल को छू जाते हैं और मां के लिए वही सबसे बड़ा तोहफा बन जाते हैं.
मां को भेजें ये प्यारे और इमोशनल मैसेज
मदर्स डे पर आप अपनी मां को कुछ खास और दिल छू लेने वाले मैसेज भेज सकते हैं. जैसे&amp;nbsp;&amp;ldquo;मां, आपकी ममता ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है.&amp;rdquo;&amp;ldquo;आपके बिना जिंदगी अधूरी लगती है मां.&amp;rdquo;&amp;ldquo;दुनिया में सबसे प्यारा रिश्ता सिर्फ मां का होता है.&amp;rdquo;&amp;ldquo;हर मुश्किल में आपका साथ मुझे हिम्मत देता है.&amp;rdquo;&amp;ldquo;मां, आपकी दुआएं ही मेरी सबसे बड़ी दौलत हैं.&amp;rdquo;ऐसे मैसेज पढ़कर मां को यह महसूस होता है कि उनके बच्चे उनसे कितना प्यार करते हैं.
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दूर रहकर भी मां को दिल के करीब महसूस कराएं
अगर आप अपनी मां से दूर रहते हैं, तो एक छोटा-सा मैसेज भी उन्हें आपके करीब होने का एहसास दिला सकता है. जैसे आप लिख सकते हैं&amp;nbsp;&amp;ldquo;मां, दूर हूं लेकिन आपकी याद हर दिन साथ रहती है.&amp;rdquo;&amp;ldquo;आपकी आवाज सुनते ही सारी टेंशन खत्म हो जाती है.&amp;rdquo;&amp;ldquo;आपका प्यार हर दूरी को छोटा बना देता है.&amp;rdquo;&amp;ldquo;मां, आपके बिना घर सिर्फ एक मकान लगता है.&amp;rdquo;ऐसे शब्द मां के दिल को छू लेते हैं और उन्हें भावुक कर देते हैं.
सोशल मीडिया पर भी लोग जता रहे मां के लिए प्यार
मदर्स डे के मौके पर सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी मां के लिए प्यार जाहिर करते नजर आते हैं. कोई पुरानी तस्वीर शेयर कर इमोशनल कैप्शन लिख रहा है, तो कोई वीडियो बनाकर मां को धन्यवाद कह रहा है. वही कुछ लोग लिखते हैं &amp;nbsp;&amp;ldquo;मेरी पहली टीचर मेरी मां हैं&amp;rdquo;, तो कुछ अपनी मां को जिंदगी की सबसे बड़ी प्रेरणा बताते हैं. यही वजह है कि मदर्स डे अब सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि मां के प्यार को सेलिब्रेट करने का खास मौका बन गया है.
मां की मुस्कान से बड़ा कोई गिफ्ट नहीं
मां को खुश करने के लिए हमेशा महंगे गिफ्ट की जरूरत नहीं होती. कई बार प्यार से बोला गया एक &amp;ldquo;आई लव यू मां&amp;rdquo; भी उनके लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी बन जाता है. अगर इस मदर्स डे आप अपनी मां के साथ थोड़ा वक्त बिताएं, उन्हें गले लगाएं या दिल से लिखा एक प्यारा मैसेज भेजें, तो शायद यही पल उनके लिए सबसे यादगार बन सकता है. आखिर मां का प्यार जिंदगी की सबसे अनमोल चीजों में से एक माना जाता है.
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Mothers Day Handmade Gifts: मदर्स डे पर &amp;apos;मां&amp;apos; को फील कराएं स्पेशल, अपने हाथों से बनाएं गिफ्ट; ये रहे यूनीक आइडिया</title>
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        <pubDate>Sun, 10 May 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Fitness Supplements Side Effects : फिटनेस सप्लीमेंट लेते हुए ये गलतियां तो नहीं करते आप, लिवर को हो सकता है नुकसान</title>
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        <description><![CDATA[ Fitness Supplements Side Effects : आजकल सोशल मीडिया खोलते ही हर तरफ फिटनेस, डाइट और बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से जुड़ी सलाहें देखने को मिलती हैं. कोई हाई-प्रोटीन डाइट अपनाने की बात करता है, तो कोई तेजी से वजन घटाने वाले सप्लीमेंट्स का प्रचार करता नजर आता है. कई फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और जिम ट्रेनर अलग-अलग तरह के प्रोटीन पाउडर, फैट बर्नर और प्री-वर्कआउट ड्रिंक को फिट रहने का आसान तरीका बताते हैं. शरीर को ताकत देने वाले कई सप्लीमेंट्स अगर गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा लिए जाएं, तो शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
हम जो भी खाते या पीते हैं, उसे शरीर में प्रोसेस करने का काम लिवर ही करता है. ऐसे में अगर लगातार भारी सप्लीमेंट्स, केमिकल्स या बिना जरूरत की फिटनेस दवाएं ली जाएं, तो लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं वे आम गलतियां, जो लोग फिटनेस के चक्कर में कर बैठते हैं और जिनसे लिवर को नुकसान पहुंच सकता है.&amp;nbsp;
1. जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेना पड़ सकता है भारी - इन दिनों प्रोटीन को लेकर लोगों में काफी क्रेज देखने को मिल रहा है. जिम जाने वाले कई लोग जरूरत से ज्यादा प्रोटीन पाउडर, शेक और बार्स का सेवन करने लगते हैं. &amp;nbsp;यह सच है कि प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है. यह मांसपेशियों की मजबूती और शरीर की मरम्मत में मदद करता है, लेकिन किसी भी चीज का ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकती है. अगर शरीर को जरूरत से ज्यादा प्रोटीन दिया जाए, खासकर सप्लीमेंट्स के रूप में, तो उसे प्रोसेस करने में लिवर और किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लंबे समय तक ऐसा होने पर शरीर में मेटाबॉलिक तनाव बढ़ सकता है. &amp;nbsp;विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए पहले प्राकृतिक चीजों पर ध्यान देना चाहिए, जैसे दालें, पनीर, अंडे, दूध और दही, सोया, मेवे और बीज जब तक डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट सलाह न दें, तब तक जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट्स लेने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
2. फैट बर्नर और प्री-वर्कआउट ड्रिंक का ज्यादा इस्तेमाल - जल्दी वजन घटाने और वर्कआउट में ज्यादा एनर्जी पाने के लिए लोग फैट बर्नर और प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स लेने लगते हैं. ये &amp;nbsp;सप्लीमेंट्स अक्सर दावा करते हैं कि वे तेजी से फैट कम करेंगे और शरीर को तुरंत एनर्जी देंगे, लेकिन इन सप्लीमेंट्स में कई बार ऐसे तत्व होते हैं जो लिवर पर बुरा असर डाल सकते हैं. इनमें मौजूद तेज पदार्थ, ज्यादा कैफीन और कुछ केमिकल्स लिवर में सूजन या विषाक्तता पैदा कर सकते हैं. बहुत से लोग जल्दी बॉडी बनाने या तेजी से वजन कम करने के लिए इनका जरूरत से ज्यादा सेवन करते हैं. इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.&amp;nbsp;
3. कई सप्लीमेंट्स को एक साथ लेना - आजकल फिटनेस इंडस्ट्री में स्टैकिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है. यानी लोग एक साथ कई तरह के सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं. जैसे प्रोटीन पाउडर, फैट बर्नर, प्री-वर्कआउट, विटामिन्स और मसल गेनर. लोग सोचते हैं कि ज्यादा सप्लीमेंट लेने से जल्दी रिजल्ट मिलेगा, लेकिन यह आदत लिवर के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है. हर सप्लीमेंट का असर अलग होता है. कई बार अलग-अलग &amp;nbsp;सप्लीमेंट्स में ऐसे तत्व होते हैं जो मिलकर शरीर पर गलत असर डाल सकते हैं. खासकर अगर ये &amp;nbsp;सप्लीमेंट्स अच्छी क्वालिटी वाले न हों, तो लिवर डैमेज का खतरा और बढ़ जाता है. इसलिए किसी भी सप्लीमेंट को लेने से पहले डॉक्टर या डाइट एक्सपर्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
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लिवर खराब होने के शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें
1. लिवर से जुड़ी समस्याएं शुरुआत में धीरे-धीरे बढ़ती हैं. कई बार इनके लक्षण सामान्य थकान या कमजोरी जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते. लेकिन अगर संकेत लगातार दिखें, तो तुरंत जांच करवानी चाहिए.&amp;nbsp;
2. अगर पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर थका हुआ महसूस करे, तो यह लिवर पर असर का संकेत हो सकता है.&amp;nbsp;
3. लिवर सही तरह काम न करे तो पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है और खाने की इच्छा कम हो सकती है.
4. पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या असहजता महसूस होना भी चेतावनी संकेत हो सकता है. स्किन और आंखों का पीला पड़ना पीलिया का लक्षण हो सकता है, जो लिवर की खराबी से जुड़ा होता है.&amp;nbsp;
5. अगर पानी पर्याप्त पीने के बावजूद पेशाब का रंग ज्यादा गहरा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
6. बिना किसी साफ कारण वजन में तेजी से बदलाव होना भी लिवर संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकता है.&amp;nbsp;
फिट रहने के लिए क्या करें?&amp;nbsp;
1. संतुलित और घर का बना खाना खाएं.&amp;nbsp;
2. पर्याप्त पानी पिएं. नियमित एक्सरसाइज करें.
3. पर्याप्त नींद लें.
4. बिना सलाह के सप्लीमेंट्स न लें.
5. समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाएं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:21 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Red Ants Home Remedies: गर्मी शुरू होते ही घर में लाल चीटियों ने बना लिया है घर, इन तरीकों से रख सकते हैं दूर</title>
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        <description><![CDATA[ Red Ants Home Remedies: भारत में गर्मी का मौसम शुरू होते ही घरों में परेशानी तेजी से बढ़ने लगती है जो कि लाल चीटियों का आतंक है. खासकर किचन में चीटियों का दिखाई देना लोगों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है. कभी चीनी के डिब्बे में, कभी ब्रेड पर तो, कभी खाने की प्लेट तक यह पहुंच जाती है. एक बार अगर चीटियों ने घर के अंदर आने का रास्ता बना लिया तो फिर उनकी लंबी लाइन लग जाती है और उन्हें हटाना मुश्किल हो जाता है. अक्सर लोग चीटियों से छुटकारा पाने के लिए बाजार में मिलने वाले केमिकल वाले स्प्रे या पाउडर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ये छोटे बच्चों, जानवरों और खाने पीने की चीजों के लिए खतरनाक हो सकता है. &amp;nbsp;ऐसे में कई लोग ऐसे घरेलू उपाय तलाशते हैं, जिससे बिना जहरीले केमिकल के चीटियों को दूर रखा जा सके. दरअसल घर में मौजूद कुछ आसान चीजें ही लाल चीटियों को भगाने में बहुत असरदार मानी जाती है. इनकी तेज गंध चीटियों के रास्ते को बिगाड़ देती है, जिससे वह दोबारा उस जगह पर नहीं आती.&amp;nbsp;
सिरका का इस्तेमाल&amp;nbsp;
सफेद सिरका लाल चीटियों को दूर करने के सबसे आसान उपायों में गिना जाता है. चीटियां चलते समय एक तरह की गंध छोड़ती है, जिससे बाकी चीटियां उसी रास्ते पर चलती है. सिरका इस गंध को खत्म कर देता है और उनकी लाइन टूट जाती है. इसके लिए एक स्प्रे बोतल में आधा पानी और आधा सफेद सिरका मिलकर उन जगहों पर छिड़काव करें, जहां चीटियां ज्यादा दिखाई देती है. दिन में एक दो बार इस्तेमाल करने पर ही असर दिखने लगता है.&amp;nbsp;
दालचीनी की तेज खुशबू&amp;nbsp;
दालचीनी की खुशबू इंसानों को भले पसंद आती हो, लेकिन चीटियां इससे दूर भागती है. इसकी तेज महक चीटियों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर देती है. चीटियों के आने-जाने वाले रास्तों या बिल के आसपास दालचीनी पाउडर छिड़का जा सकता है. इसके अलावा दालचीनी के तेल में रुई भिगोकर भी उन जगहों पर रखा जा सकता है, जहां चीटियां ज्यादा आती है. &amp;zwnj;
नींबू और उसके छिलके&amp;nbsp;
नींबू में मौजूद खट्टापन और उसकी तेज गंध भी चीटियों को दूर करने में मदद करती है. नींबू का रस उस जगह पर डाला जा सकता है, जहां चीटियां दिखाई देती है. इसके अलावा नींबू के छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर किचन के कोने में रखने से भी चीटियां दूर रहती है. कई लोग पोछा लगाते समय पानी में नींबू का रस मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं.
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नमक और बेकिंग सोडा&amp;nbsp;
नमक भी चीटियों को रोकने का आसान तरीका माना जाता है. पानी में नमक मिलाकर गोल तैयार करें और उसे चीटियों के रास्ते पर डाल दें. सुखा नमक भी उनके आने जाने वाले रास्तों पर छिड़का जा सकता है. कुछ लोग नमक के साथ बेकिंग सोडा मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे चीटियां उस जगह से दूर रहने लगती है.
पुदीना भी है असरदार&amp;nbsp;
पुदीने की तेज खुशबू चीटियों को पसंद नहीं आती है. ऐसे में पुदीने की पत्तियां या उसका तेल उन जगहों पर रखा जा सकता है, जहां चीटियां ज्यादा दिखाई देती है. पुदीने के तेल की कुछ बूंदे पानी में मिलाकर स्प्रे करने से भी फायदा मिल सकता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>गुजरात में अल्कलाइन वॉटर में मिला जरूरत से ज्यादा &amp;apos;फुल्विक एसिड&amp;apos;, इससे किन बीमारियों का खतरा?</title>
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        <description><![CDATA[ Health News India:&amp;nbsp;आजकल लोग खुद को फिट और हेल्दी रखने के लिए कई तरह के हेल्थ ड्रिंक्स और खास पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन्हीं में से एक &amp;ldquo;अल्कलाइन वॉटर&amp;rdquo; है, जिसे शरीर के लिए फायदेमंद बताकर बेचा जाता है. हालांकि, गुजरात से सामने आई एक खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने गुजरात में एक कंपनी के अल्कलाइन वॉटर में &amp;lsquo;फुल्विक एसिड&amp;rsquo; और काले कण मिलने के बाद बड़ी कार्रवाई की है. बताया गया कि करीब 31.61 लाख रुपये का स्टॉक जब्त किया गया है. इस खबर के बाद लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर फुल्विक एसिड क्या होता है और इससे शरीर को कितना नुकसान हो सकता है.&amp;nbsp;
जांच में क्या-क्या मिला?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला गुजरात के वडोदरा जिले के सावली इलाके से जुड़ा है. FSSAI को एक उपभोक्ता शिकायत मिली थी, जिसके बाद ही कंपनी के प्लांट की जांच की गई. जांच के दौरान अधिकारियों को पानी की बोतलों में काले रंग के कण दिखाई दिए. इसके अलावा पैकेजिंग पर कई जरूरी जानकारी भी नहीं दी गई थी. साथ ही लैब टेस्ट में यह भी सामने आया कि पानी में फुल्विक एसिड मौजूद था, जो मौजूदा नियमों के अनुसार पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं रखता है. FSSAI ने आगे कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानक (FSS) अधिनियम, 2006 के तहत औपचारिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है. इसके बाद अधिकारियों ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है.&amp;nbsp;
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क्या होता है फुल्विक एसिड?
फुल्विक एसिड एक तरह का प्राकृतिक कंपाउंड माना जाता है, जो मिट्टी, पौधों और कुछ खनिज पदार्थों में पाया जाता है. कई जगह इसे हेल्थ सप्लीमेंट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. दावा किया जाता है कि इससे शरीर को मिनरल्स मिलते हैं और ऊर्जा बढ़ती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पदार्थ का इस्तेमाल तय मात्रा और सही जांच के बाद ही सुरक्षित माना जाता है. अगर इसे बिना अनुमति या गलत तरीके से किसी खाने-पीने की चीज में मिलाया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. इसी वजह से FSSAI ने इसे पैकेज्ड पानी में अनुमति नहीं दी है.&amp;nbsp;
पैकेज्ड पानी को लेकर क्या कहते हैं भारतीय नियम?
भारतीय कानून के तहत, अगर किसी उत्पाद को पैकेटबंद पेयजल के रूप में बेचा जाता है, तो उसे भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS के तय नियमों का पालन करना जरूरी होता है. पैकेटबंद पेयजल के लिए IS 14543 और पैकेटबंद मिनरल वॉटर के लिए IS 13428 जैसे मानक लागू होते हैं. इन नियमों के अनुसार पानी में किसी भी तरह के निलंबित कण, तलछट या अनधिकृत पदार्थ की अनुमति नहीं होती है. यही वजह है कि पानी में मिले काले कण और फुल्विक एसिड को गंभीर मामला माना जा रहा है. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अल्कलाइन और मिनरल युक्त पानी शहरी लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और इसे साधारण पानी से ज्यादा हेल्दी बताकर बेचा जा रहा है.
किन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, अगर किसी पानी या खाद्य पदार्थ में अनजान या गैर-मान्य पदार्थ मिला हो, तो उससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इसमें उल्टी, दस्त, सिरदर्द, पेट दर्द और एलर्जी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. साथ ही लंबे समय तक ऐसे पदार्थ शरीर में जाने से लिवर और किडनी पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी हेल्थ प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और प्रमाणिकता जरूर जांचनी चाहिए.
हेल्थ प्रोडक्ट खरीदते समय बरतें सावधानी
यह मामला लोगों के लिए एक बड़ी सीख भी है. आजकल बाजार में कई ऐसे प्रोडक्ट बिक रहे हैं, जिन्हें &amp;ldquo;हेल्दी&amp;rdquo; और &amp;ldquo;फिटनेस फ्रेंडली&amp;rdquo; बताकर प्रचारित किया जाता है. लेकिन हर चमकती चीज सुरक्षित हो, यह जरूरी तो नहीं होता है. &amp;nbsp;विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी पैकेज्ड पानी या हेल्थ ड्रिंक को खरीदते समय उसकी लेबलिंग, FSSAI लाइसेंस और सामग्री की जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए. वही अगर पानी का रंग, स्वाद या गंध अलग लगे, तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए. गुजरात का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सेहत से जुड़ी चीजों में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः राजधानी में टीबी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, स्लम और हाई रिस्क इलाकों से सामने आए 12000 मरीज ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
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        <title>Cooler Bad Smell Solution: कूलर से आ रही गंदी स्मेल, ऐसे करें कमरे को फ्रेश और खुशबूदार </title>
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        <description><![CDATA[ Cooler Bad Smell Solution: देशभर में इस समय कड़ाके की गर्मियां पड़ रही है. वहीं गर्मियों में कूलर की जरूरत तेजी से बढ़ जाती है. तेज धूप और उमस भरे मौसम में कूलर की ठंडी हवा राहत जरूर देती है. लेकिन कई बार यही कूलर पूरे कमरे का माहौल खराब कर देता है. अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि कूलर चलाते ही उसमें से मछली जैसी या सीलन भरी बदबू आने लगती है. यह गंध न सिर्फ परेशान करती है, बल्कि लंबे समय तक कमरे में रहने पर भारीपन भी महसूस होने लगता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपके भी कूलर से गंदी स्मेल आ रही है तो आप कैमरे को फ्रेश और खुशबूदार कैसे रख सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों आने लगती है कूलर से बदबू?&amp;nbsp;
कूलर की टंकी में अगर कई दिनों तक वही पानी भरा रहे तो उसमें बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं. यही वजह है की कूलर से सड़ी हुई गंध आने लगती है. इसके अलावा कूलर की घास लगातार गीली रहती है, जिससे उसमें फफूंदी जम जाती है. अगर कमरे में वेंटिलेशन सही न हो और खिड़कियां पूरी तरह बंद रहे तो नमी बढ़ जाती है और बदबू ज्यादा महसूस होने लगती है. कई बार टंकी में कैल्शियम की सफेद परत और कीचड़ जम जाने से भी कूलर की हवा खराब हो जाती है.&amp;nbsp;
सिर्फ सफेद सिरका करेगा बदबू दूर&amp;nbsp;
कूलर की गंदी स्मेल हटाने के लिए सफेद सिरका काफी असरदार माना जाता है. इसके लिए सबसे पहले कूलर की टंकी खाली करें और उसमें साफ पानी भर लें. अब इसमें एक से दो कप सफेद सिरका डालकर कूलर को 10 से 15 मिनट तक चलाएं. इससे टंकी में मौजूद बैक्टीरिया कम होते हैं और गंध भी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है.&amp;nbsp;
बेकिंग सोडा भी है फायदेमंद&amp;nbsp;
अगर बदबू ज्यादा आ रही है तो कूलर के पानी में दो से तीन चम्मच बेकिंग सोडा डाल सकते हैं. बेकिंग सोडा दुर्गंध को सुखाने का काम करता है और पानी को लंबे समय तक ताजा बनाए रखने में मदद करता है. इससे टंकी की हल्की सफाई भी हो जाती है.&amp;nbsp;
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नीम और नींबू से मिलेगी ताजगी&amp;nbsp;
नीम को पुराने समय में नेचुरल क्लीनर माना जाता है. कूलर की टंकी में नीम की पत्तियों की छोटी पोटली डालने से बदबू कम होती है और बैक्टीरिया भी पनपने नहीं पाते. चाहे तो नीम के तेल की कुछ बूंदे भी इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं तेज गंध आने पर 4 से 5 नींबू का रस पानी में मिलाने से भी राहत मिलती है. नींबू की खुशबू पानी की बदबू को काम करती है और हवा को फ्रेश महसूस कराती है.&amp;nbsp;
कूलर की घास और टैंक की सफाई भी जरूरी&amp;nbsp;
सिर्फ पानी बदलना काफी नहीं होता है. कूलर के पैड्स यानी घास को समय-समय पर साफ करना भी जरूरी है. अगर घास बहुत पुरानी हो गई है, तो उसे बदल देना बेहतर होता है. बीच-बीच में इन्हें धूप में सुखाने से भी फंगस कम होती है. इसके अलावा टैंक, पंप और पाइप की सफाई भी करते रहना चाहिए. इनमें जमा गंदगी और काई बदबू बढ़ा सकती है.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Vaginal Health Myths: वेजाइनल वॉश से लेकर डिस्चार्ज तक... पर्सनल हाइजीन को लेकर यहां दूर कर लें सारी कंफ्यूजन</title>
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        <description><![CDATA[ Vaginal Health Myths : महिलाओं की पर्सनल हाइजीन और वेजाइनल हेल्थ को लेकर समाज में कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं. अक्सर लड़कियों और महिलाओं को बचपन से यह समझाया जाता है कि अगर वेजाइनल डिस्चार्ज हो रहा है, हल्की गंध आ रही है या नमी महसूस हो रही है तो यह गंदगी या किसी बीमारी का संकेत है. इसी डर और शर्म की वजह से कई महिलाएं जरूरत से ज्यादा इंटिमेट वॉश, सुगंधित प्रोडक्ट्स और बार-बार सफाई करने लगती हैं, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर डिस्चार्ज या हल्की गंध बीमारी नहीं होती है.
हमारी बॉडी खासकर वेजाइना खुद को नेचुरली साफ और संतुलित रखने की क्षमता रखती है. जरूरत से ज्यादा सफाई या केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है. ऐसे में महिलाओं के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि कौन-सी चीज सामान्य है और कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. सही जानकारी न सिर्फ संक्रमण से बचाती है बल्कि कॉन्फिडेंस भी बढ़ाती है.&amp;nbsp;
क्या हर वेजाइनल डिस्चार्ज संक्रमण का संकेत होता है?
बहुत-सी महिलाएं वेजाइनल डिस्चार्ज को सीधे इंफेक्शन से जोड़कर देखने लगती हैं, जबकि यह हमेशा सच नहीं होता है. डॉक्टरों के अनुसार, सामान्य डिस्चार्ज शरीर का एक नेचुरल प्रोसेस है. वेजाइनल डिस्चार्ज कई जरूरी काम करता है, जैसे वेजाइना को नम बनाए रखना, डेड सेल्स को बाहर निकालना, बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखना और संक्रमण से सुरक्षा देना. डिस्चार्ज की मात्रा और रंग पीरियड्स, हार्मोनल बदलाव, तनाव, डाइट और उम्र के हिसाब से बदल सकते हैं. कभी-कभी ओव्यूलेशन के दौरान डिस्चार्ज ज्यादा होना भी सामान्य माना जाता है.&amp;nbsp;
कब समझें कि समस्या हो सकती है?
अगर डिस्चार्ज के साथ कुछ लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. जैसे बहुत तेज या बदबूदार स्मेल, पीला, हरा या ग्रे रंग, खुजली या जलन, पेशाब के दौरान दर्द, वेजाइनल एरिया में सूजन या असहजता ऐसे लक्षण किसी इंफेक्शन की तरफ इशारा कर सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या सुगंधित वेजाइनल वॉश नुकसान पहुंचा सकते हैं?
आजकल मार्केट में कई तरह के इंटिमेट वॉश और फ्रेगरेंस वाले प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं. विज्ञापनों में इन्हें जरूरी बताया जाता है, जिससे महिलाएं सोचती हैं कि बिना इनके साफ-सफाई पूरी नहीं होती है, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो हर प्रोडक्ट सुरक्षित नहीं होता है. वेजाइना में अच्छे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जिन्हें लैक्टोबैसिलस कहा जाता है. ये बैक्टीरिया शरीर में ऐसा वातावरण बनाते हैं जिससे हानिकारक बैक्टीरिया और इंफेक्शन दूर रहते हैं. जब महिलाएं बार-बार सुगंधित या एंटीबैक्टीरियल वॉश का इस्तेमाल करती हैं, तो वेजाइनल pH बिगड़ सकता है. अच्छे बैक्टीरिया कम हो सकते हैं. ड्राइनेस और जलन बढ़ सकती है. इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है
सही तरीका क्या है?
डॉक्टरों के अनुसार वेजाइना को अंदर से साफ करने की जरूरत नहीं होती क्योंकि यह खुद को साफ रखती है.सिर्फ बाहरी हिस्से यानी वल्वा को हल्के गुनगुने पानी या बहुत माइल्ड और बिना खुशबू वाले साबुन से साफ करना पर्याप्त होता है.&amp;nbsp;
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जरूरत से ज्यादा सफाई भी बन सकती है परेशानी की वजह
कई महिलाएं सोचती हैं कि बार-बार सफाई करने से वे ज्यादा हेल्दी रहेंगी, लेकिन सच्चाई इसके उलट हो सकती है. जरूरत से ज्यादा धुलाई और अलग-अलग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल शरीर के नेचुरल बैलेंस को बिगाड़ देता है. ओवर-क्लीनिंग से अच्छे बैक्टीरिया खत्म होने लगते हैं. त्वचा में ड्राइनेस आ सकती है. खुजली और रैशेज हो सकते हैं. बार-बार इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ता है. वेजाइना एक सेल्फ-क्लीनिंग ऑर्गन है. इसका मतलब है कि शरीर खुद इसे स्वस्थ बनाए रखने का काम करता है. इसलिए हर समय सफाई करने की जरूरत नहीं होती है.&amp;nbsp;
इंटिमेट हेल्थ को बेहतर रखने के आसान तरीके
अच्छी वेजाइनल हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि सही आदतों की जरूरत होती है. ऐसे में कॉटन अंडरवियर पहनें. बहुत टाइट कपड़े लंबे समय तक न पहनें. पीरियड्स के दौरान पैड या टैम्पॉन समय पर बदलें. बिना जरूरत एंटीबायोटिक दवाइयां न लें. पर्याप्त पानी पिएं और हेल्दी डाइट लें. किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Chicken Pickle Shelf Life: कितने दिन तक चल जाता है चिकन मटन का अचार? आज ही दूर कर लें अपना कंफ्यूजन</title>
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        <description><![CDATA[ How Long Does Chicken Pickle Last In The Fridge: चिकन और मटन का अचार आजकल लोगों की पसंदीदा चीजों में शामिल हो चुका है. मसालों से भरपूर यह अचार खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है. लेकिन इसे लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर यह कितने दिनों तक सुरक्षित रहता है और कब तक इसे बिना डर खाया जा सकता है. अगर आपके मन में भी यही कंफ्यूजन है, तो अब इसे दूर कर लेना चाहिए.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट के अनुसार चिकन या मटन का अचार सही तरीके से बनाया और रखा जाए तो यह करीब 15 दिन से लेकर 3 महीने तक आराम से चल सकता है. इसकी अवधि इस बात पर निर्भर करती है कि अचार को कैसे तैयार किया गया है और किस तरह रखा जा रहा है. अगर साफ-सफाई और भंडारण में थोड़ी भी लापरवाही हुई, तो अचार जल्दी खराब हो सकता है.&amp;nbsp;
इन चीजों की होती है अहम भूमिका
दरअसल मांसाहारी अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में तेल, नमक और मसालों की बड़ी भूमिका होती है. तिल का तेल, सरसों का तेल, हल्दी, लहसुन, अदरक और लाल मिर्च जैसे मसाले प्राकृतिक रूप से अचार को खराब होने से बचाने में मदद करते हैं. कई जगहों पर इसमें नींबू, इमली या सिरके का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और टिकाऊपन दोनों बढ़ जाते हैं.&amp;nbsp;
पानी का रखना होता है ध्यान
द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल की लिली जॉय बताती हैं कि मांसाहारी अचार बनाते समय सबसे जरूरी बात यह है कि उसमें पानी बिल्कुल नहीं जाना चाहिए. अगर जरा भी नमी रह गई, तो अचार जल्दी खराब हो सकता है. यही वजह है कि मांस या चिकन को मसालों में पकाने के बाद पूरी तरह ठंडा करके ही कांच के सूखे बर्तन में रखा जाता है. इसको हमेशा साफ और सूखे कांच के जार में रखना चाहिए. गीला चम्मच इस्तेमाल करने से उसमें फफूंदी या खराब गंध आने का खतरा बढ़ जाता है. अगर अचार को ठंडी और सूखी जगह पर रखा जाए या फ्रिज में रखा जाए, तो इसकी उम्र और बढ़ सकती है.
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इन चीजों का रखना होता है ध्यान
चेन्नई के होम फूड एक्सपर्ट अब्राहम वर्गीज का दावा है कि सही मसाले और तेल के इस्तेमाल से कुछ अचार बिना फ्रिज के भी काफी लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं. उनके अनुसार जैसे-जैसे अचार पुराना होता जाता है, उसका स्वाद और गहरा होता जाता है. &amp;nbsp;अगर अचार से अजीब गंध आने लगे, रंग बदल जाए या उसमें सफेद परत दिखाई दे, तो उसे खाने से बचना चाहिए. सही तरीके से रखा गया चिकन या मटन का अचार लंबे समय तक स्वाद और खुशबू दोनों बनाए रख सकता है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mothers Day 2026: किसकी मां के लिए पहली बार मनाया गया था मदर्स डे, फिर दुनिया पर कैसे हुआ इसका असर?</title>
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        <description><![CDATA[ Mothers Day 2026 Special: मां का प्यार दुनिया का सबसे सच्चा रिश्ता माना जाता है. शायद यही वजह है कि मां को सम्मान देने के लिए पूरी दुनिया में मदर्स डे मनाया जाता है. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी शुरुआत आखिर कैसे हुई थी. बता दें, मदर्स डे की शुरुआत 114 साल पहले हुई थी. अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया की रहने वाली एना जार्विस (Anna Jarvis) ने अपनी मां ऐन रीव्स जार्विस की याद में की थी.
एना अपनी मां से बहुत प्यार करती थीं. एना की मां समाज सेवा का काम करती थीं और लोगों की मदद भी करती थीं. मां के निधन के बाद एना ने तय किया कि एक ऐसा दिन होना चाहिए, जब हर कोई अपनी मां को सम्मान दे सके और उनके प्यार को याद करे.&amp;nbsp;
पहली बार साल 1908 में मनाया गया था मदर्स डे
एना जार्विस ने पहली बार 10 मई 1908 को मदर्स डे मनाया था. माना जाता है कि मदर्स डे की शुरुआत के पीछे एना की मां की एक ख्वाहिश थी. एना की मां चाहती थीं कि मां के लिए समर्पित कम से कम एक दिन जरूर हो और उसे हॉलीडे घोषित किया जाए. 1905 में उनके निधन के बाद, एना जार्सिस ने चर्च में खास कार्यक्रम रखा और अपनी मां की पसंद के सफेद कार्नेशन फूल बांटे. धीरे-धीरे यह दिन लोगों को पसंद आने लगा और अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में भी मदर्स डे मनाया जाने लगा. एना ने इसके लिए खूब मेहनत की. उन्होंने नेताओं और अखबारों को चिट्ठियां लिखीं ताकि इस दिन को आधिकारिक पहचान मिल सके. आखिरकार साल 1914 में अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे के रूप में मनाने का ऐलान कर दिया. इसके बाद यह दिन पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा.
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जब खुद एना जार्विस ने शुरू कर दिया मदर्स डे का विरोध
दिलचस्प बात यह है कि जिस एना जार्विस ने मदर्स डे की शुरुआत की थी, वही बाद में इसके खिलाफ हो गईं. दरअसल, एना चाहती थीं कि यह दिन सिर्फ मां के प्यार और सम्मान के लिए हो, लेकिन धीरे-धीरे कंपनियों ने इसे बिजनेस बना दिया. कार्ड, फूल और गिफ्ट बेचने वाली कंपनियां इस दिन से खूब पैसा कमाने लगीं. यह देखकर एना बहुत दुखी हो गईं. उन्होंने कई जगह विरोध भी किया और लोगों से कहा कि मदर्स डे को सिर्फ दिखावे और महंगे गिफ्ट तक सीमित मत करो. कहा जाता है कि उन्होंने इस दिन को खत्म करने तक की मुहिम चला दी थी.&amp;nbsp;
आज भी मां के प्यार का सबसे खास दिन माना जाता है मदर्स डे
समय के साथ मदर्स डे पूरी दुनिया में एक खास दिन बन गया. भारत समेत कई देशों में लोग मई के दूसरे रविवार को अपनी मां के लिए यह दिन सेलिब्रेट करते हैं. कोई मां को गिफ्ट देता है, कोई उनके साथ समय बिताता है तो कोई बस एक प्यारा सा धन्यवाद बोलकर उन्हें खुश कर देता है. असल में मदर्स डे सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि मां के त्याग, मेहनत और प्यार को महसूस करने का मौका है. मां हर हाल में अपने बच्चों का साथ देती है और शायद इसी वजह से मां के लिए मनाया जाने वाला यह दिन आज भी लोगों के दिल के बहुत करीब है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Cardiac Arrest: जिस शिक्षक से सीखा जीवनदान, उन्हीं की रुकी सांसों को छात्रों ने CPR देकर फिर से लौटाया</title>
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        <description><![CDATA[ Teacher Suffers Cardiac Arrest During CPR Class: अमेरिका में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां छात्रों को सीपीआर और हार्ट अटैक के लक्षण समझा रहे शिक्षक खुद अचानक कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो गए. कुछ पल तक छात्रों को लगा कि यह क्लास का हिस्सा है, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि स्थिति सचमुच गंभीर हो चुकी है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या है मामला.
क्या है मामला
&amp;nbsp;The Washington Pos की रिपोर्ट के अनुसार, 72 वर्षीय कार्ल अर्प्स विस्कॉन्सिन के एपलटन स्थित फॉक्स वैली टेक्निकल कॉलेज में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन यानी ईएमटी की ट्रेनिंग दे रहे थे. क्लास के दौरान वह छात्रों को हार्ट अटैक और उससे जुड़ी इमरजेंसी स्थिति के बारे में समझा रहे थे. तभी अचानक उन्हें चक्कर आने लगे और सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई. कुछ ही देर बाद वह बेहोश होकर गिर पड़े.
छात्रों को लगा मजाक&amp;nbsp;
शुरुआत में छात्रों को लगा कि वह किसी मरीज की हालत का अभिनय कर रहे हैं, लेकिन छात्र लोगन लेहरर ने देखा कि कार्ल आर्प्स का हाथ अजीब तरह से मुड़ने लगा और उनका चेहरा बदल रहा था. &amp;nbsp;उन्होंने बताया कि उन्हें खर्राटों जैसी आवाज वाली सांसें सुनाई दे रही थीं, पहले लगा कि शायद यह किसी नए लक्षण को समझाने का तरीका है, लेकिन करीब दस सेकंड बाद उन्हें महसूस हुआ कि यह असली मेडिकल इमरजेंसी है.&amp;nbsp;
इसके तुरंत बाद छात्रों ने दूसरी प्रशिक्षक ट्रेसी ब्लॉन्डों को बुलाया. उन्होंने पहले कार्ल आर्प्स को सामान्य करने की कोशिश की, लेकिन जल्दी ही समझ आ गया कि वह अभिनय नहीं कर रहे हैं. इसके बाद एक छात्र ने तुरंत 911 पर कॉल किया, जबकि बाकी छात्रों ने मिलकर उन्हें क्लास में मौजूद मॉक एम्बुलेंस से बाहर निकालकर फर्श पर लिटाया.
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छात्रों ने की मदद&amp;nbsp;
इसके बाद जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। जिन छात्रों को कुछ देर पहले तक सीपीआर सिखाया जा रहा था, वही छात्र अब अपने शिक्षक की जान बचाने में जुट गए. प्रशिक्षकों की निगरानी में छात्रों ने बारी-बारी से सीपीआर दिया और डिफिब्रिलेटर मशीन का इस्तेमाल किया. जब तक पैरामेडिक्स मौके पर पहुंचे, तब तक कार्ल आर्प्स की नब्ज वापस आ चुकी थी.
देखना बेहद डरावना अनुभव
लोगन लेहरर ने कहा कि किताबों में कार्डियक अरेस्ट के बारे में पढ़ना अलग बात है, लेकिन उसे अपनी आंखों के सामने होते देखना बेहद डरावना अनुभव था. उन्होंने कहा कि उस वक्त हर छात्र को अपना काम पता था और किसी ने घबराहट में गलती नहीं की. बाद में कार्ल आर्प्स की ट्रिपल बायपास सर्जरी हुई और सात दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई. उन्होंने छात्रों का धन्यवाद करते हुए कहा कि छात्रों ने बिल्कुल वैसा ही किया जैसा उन्हें सीपीआर क्लास में सिखाया गया था. फिलहाल वह तेजी से ठीक हो रहे हैं और कुछ महीनों बाद दोबारा काम पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं.
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        <pubDate>Sat, 09 May 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>AI chatbot love: क्या चैटजीपीटी को भी हो सकता है इंसानों से प्यार, अचानक क्यों बढ़ रहे ऐसे मामले?</title>
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        <description><![CDATA[ AI chatbot love: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रह गया है. दुनिया भर में ऐसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, जहां लोग एआई चैटबॉट्स के साथ इमोशनल जुड़ाव महसूस करने लगे हैं. कुछ लोग तो यहां तक दावा करते हैं कि उन्हें एआई से प्यार हो गया है. हाल के सालों में एआई कंपनियां, एप्स और चाटबॉट्स के बढ़ते इस्तेमाल ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या मशीन भी इंसानों की तरह इमोशनल समझ सकती है या प्यार कर सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या चैटजीपीटी को भी इंसानों से प्यार हो सकता है और अचानक ऐसे मामले क्यों बढ़ रहे हैं.
क्या सच में एआई इंसानों से प्यार कर सकता है?
एक्सपर्ट्स की माने तो फिलहाल एआई इंसानों की तरह प्यार महसूस नहीं कर सकता. चैटबॉट्स सिर्फ उन्हीं एल्गोरिथम पर काम करता है, जिन्हें इंसानी बातचीत और इमोशन की नकल करने के लिए डिजाइन किया गया है. वह जवाब ऐसे देते हैं जैसे सामने वाला इंसान हो लेकिन उनके पीछे कोई असली भावना या चेतना नहीं होती है. सिंगापुर की नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में ह्यूमन कंप्यूटर इंटरैक्शन पर रिसर्च करने वाली प्रोफेसर रेन वेन झांग का कहना है कि आजकल कई चैट बॉट्स जानबूझकर खुद को इंसानों जैसा दिखाने की कोशिश करते हैं ताकि यूजर ज्यादा से ज्यादा समय तक उनसे जुड़े रहे और उन पर भरोसा करें. उनके अनुसार लोग एआई के साथ इमोशनल रिश्ता तो बना लेते है, लेकिन जब चैटबॉट्स अचानक जवाब देना बंद कर देता है या तकनीकी समस्या आती है. तब उन्हें यह एहसास होता है कि वह एक मशीन से बात कर रहे थे.
आखिर इंसान क्यों जुड़ रहे हैं एआई से?
एक्सपर्ट का कहना है कि इंसानों में Anthropomorphism नाम की एक प्रवृत्ति होती है, जिसमें लोग गैर इंसानी चीजों को भी इंसानों जैसी भावनाएं और व्यक्तित्व देने लगते हैं. जब कोई एआई चैटबॉट्स सहानुभूति, प्यार या समझदारी वाले जवाब देता है तो कई लोग उसे इमोशनल रूप से जुड़ने लगते हैं. एआई अब इतना एडवांस हो चुका है कि उसकी भाषा, आवाज और जवाब देने का तरीका काफी हद तक इंसानों जैसा लगता है. यही वजह है कि कुछ लोग एआई के साथ अपने रिश्तों को रियल मानने लगते हैं. खासकर वे लोग जो अकेलेपन, तनाव या रिश्तों की समस्याओं से गुजर रहे होते हैं. उनके लिए एआई एक ऐसा साथी बन जाता है जो हर समय उपलब्ध रहता है और बिना बहस किए उसकी बातें सुनता है.
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प्यार के पीछे दिमाग और शरीर की भूमिका
वैज्ञानिकों के अनुसार इंसानी प्यार सिर्फ इमोशनल नहीं बल्कि ऑर्गेनिक प्रक्रिया भी है. प्यार के दौरान शरीर और दिमाग में कई तरह के केमिकल्स एक्टिव होते हैं. डोपामाइन ऑक्सीटोसिन और दूसरे हार्मोन इंसानों में लगाव और खुशी की भावना पैदा करते हैं. यही वजह है कि किसी इंसान के प्यार में पड़ना, सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं होता बल्कि उसका असर दिमाग, सोच और व्यवहार पर भी पड़ता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि एआई इन भावनाओं की नकल तो कर सकता है लेकिन खुद उन्हें महसूस नहीं कर सकता. यानी कोई चैटबॉट्स इंसान की तरह खुशी, दुख, लगाव, दर्द का एक्सपीरियंस नहीं कर सकता है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Smartwatch Cause Cancer Risk : क्या स्मार्टवॉच पहनने से सच में होता है कैंसर, जानिए इसकी क्या है सच्चाई?</title>
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        <description><![CDATA[ Smartwatch Cause Cancer Risk : आज के समय में स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. लोग इन्हें सिर्फ समय देखने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए पहनते हैं. हार्ट रेट, नींद, कदमों की गिनती, कैलोरी बर्न और कई हेल्थ डेटा अब हमारी कलाई पर ही उपलब्ध होता है, लेकिन जैसे-जैसे इनका इस्तेमाल बढ़ा है, वैसे-वैसे एक सवाल भी तेजी से सामने आने लगा है कि क्या स्मार्टवॉच पहनने से कैंसर हो सकता है. इस सवाल को लेकर इंटरनेट पर कई तरह की बातें और रिसर्च सामने आती हैं, जिससे लोग अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि क्या स्मार्टवॉच पहनने से सच में कैंसर होता है, इसकी सच्चाई क्या है.&amp;nbsp;
क्या स्मार्टवॉच पहनने से सच में कैंसर होता है?
स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होते हैं जो हमारी कलाई पर पहने जाते हैं. ये फोन से कनेक्ट होकर काम करते हैं और ब्लूटूथ जैसे वायरलेस सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं. ये डिवाइस शरीर के अलग-अलग संकेतों को मापते हैं जैसे दिल की धड़कन (Heart rate), नींद की क्वालिटी, कदमों की संख्या और फिजिकल एक्टिविटी, इनसे निकलने वाला रेडियो सिग्नल बहुत कम ताकत वाला होता है और यह non-ionising radiation होता है, यह उस तरह की हानिकारक रेडिएशन नहीं है जो DNA को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का कारण बन सकती है.&amp;nbsp;
क्या स्मार्टवॉच की रेडिएशन खतरनाक है?
अब तक की वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, स्मार्टवॉच का रेडियो सिग्नल बहुत कम होता है. यह मोबाइल फोन से भी कम होता है. यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सीमाओं के भीतर रहता है. अभी तक इससे कैंसर होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है. इसलिए सिर्फ सिग्नल या ब्लूटूथ के कारण स्मार्टवॉच को कैंसर का कारण नहीं माना गया है.&amp;nbsp;
इसकी सच्चाई क्या है?
हाल के समय में एक नया मुद्दा सामने आया है, जो स्मार्टवॉच के सिग्नल से नहीं बल्कि उसके स्ट्रैप से जुड़ा है. कुछ रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कई फिटनेस बैंड और स्मार्टवॉच स्ट्रैप में सिंथेटिक रबर (fluoroelastomers) का इस्तेमाल होता है, जिसमें PFAS नामक केमिकल हो सकते हैं. इनमें से एक केमिकल PFHxA के बारे में चर्चा हुई है, जिसे forever chemicals भी कहा जाता है क्योंकि ये पर्यावरण में जल्दी नहीं टूटते हैं.&amp;nbsp;
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PFAS और PFHxA क्या हैं?
PFAS एक बड़ा केमिकल समूह है जो कई प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होता है जैसे कपड़े, नॉन-स्टिक कोटिंग, पैकेजिंग और रबर प्रोडक्ट्स, कुछ रिसर्च में इन केमिकल्स को लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में संपर्क में रहने पर संभावित स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ा गया है.हालांकि, अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि स्मार्टवॉच पहनने से सीधे कैंसर होता है.&amp;nbsp;
स्मार्टवॉच पहनने से क्या समस्याएं देखी जाती हैं?
डॉक्टरों के अनुसार स्मार्टवॉच से जुड़े जो आम मामले सामने आते हैं, वे स्किन एलर्जी, खुजली या रैश, स्ट्रैप की वजह से दबाव के निशान, लंबे समय तक टाइट पहनने से त्वचा में जलन है. ये समस्याएं ज्यादा सामान्य हैं और आसानी से ठीक हो जाती हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Eating Same Food Every Day: क्या आप भी रोज खाते हैं एक ही तरह का खाना? छिन सकती है आपके पेट की ताकत!</title>
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        <description><![CDATA[ What Happens If You Eat The Same Food Every Day: हर दिन एक ही तरह का खाना खाना कई लोगों को आसान और सुरक्षित लगता है. एक जैसा नाश्ता, वही दोपहर का भोजन और रात में भी वही थाली. इससे समय बचता है, खाने को लेकर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ती और लोग मानते हैं कि इससे शरीर भी संतुलित रहता है. लेकिन शरीर का डाइजेशन सिस्टम सिर्फ नियम से नहीं, बल्कि भोजन में बदलाव और विविधता से भी स्वस्थ रहता है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट चारु दुआ के अनुसार हमारे पेट के भीतर करोड़ों सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं, जो पाचन और शरीर की सेहत में बड़ी भूमिका निभाते हैं. इन सभी को अलग-अलग तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है. जब लंबे समय तक एक ही प्रकार का भोजन खाया जाता है, तो शरीर को कई जरूरी रेशे और प्राकृतिक तत्व नहीं मिल पाते. इसका असर धीरे-धीरे पेट के भीतर मौजूद अच्छे जीवों पर पड़ने लगता है.
&amp;nbsp;रिसर्च में यह पाया गया कि जो लोग सप्ताहभर में अलग-अलग तरह की वनस्पति आधारित चीजें खाते हैं, उनके पेट के जीव ज्यादा मजबूत और संतुलित रहते हैं. वहीं सीमित भोजन खाने वालों में यह विविधता कम देखी गई. यही विविधता अच्छे पाचन और मजबूत शरीर की पहचान मानी जाती है.&amp;nbsp;
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क्या होती है इससे दिक्कत?
&amp;nbsp;चारु दुआ बताती हैं कि बार-बार एक जैसा भोजन खाने से शरीर के भीतर मौजूद सूक्ष्म जीवों की ताकत धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है. इसका असर शुरुआत में मामूली दिखता है, लेकिन समय के साथ पेट फूलना, कब्ज, भारीपन और कुछ चीजों का ठीक से न पचना जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. &amp;nbsp;कई लोग यह सोचते हैं कि अगर उनकी थाली में दाल, चावल और सब्जी है तो शरीर को सबकुछ मिल रहा है. लेकिन सच यह है कि अलग-अलग अनाज, फल और सब्जियों में मौजूद रेशे भी अलग होते हैं. यही बदलाव पेट के भीतर मौजूद जीवों को संतुलित रखते हैं.
क्या हैं इसके फायदे?
हालांकि रोजमर्रा के भोजन में कुछ स्थिरता के भी फायदे हैं. इससे वजन कंट्रोल रखना आसान होता है, खाने की आदतें नियमित रहती हैं और शरीर को एक तय समय पर भोजन मिलने लगता है. लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब महीनों और सालों तक भोजन में कोई बदलाव नहीं किया जाता. एक्सपर्ट का कहना है कि अचानक पूरी खाने की आदत बदलने की जरूरत नहीं है. छोटे-छोटे बदलाव ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं. जैसे कभी चावल की जगह मोटा अनाज लेना, मौसम के अनुसार सब्जियां बदलना, अलग-अलग दालों को शामिल करना और दही या छाछ जैसी चीजों को भोजन में जोड़ना.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>WHO Hantavirus Alert: कोरोना से कितना खतरनाक हंता वायरस, क्या छूने से फैलता है इंफेक्शन? WHO ने जारी किया अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ How Dangerous Is Hantavirus Compared To Covid: इस समय हंता वायरस को लेकर हर तरफ चर्चा देखने को मिल रही है. &amp;nbsp;इसको बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वायरस भी कोरोना की तरह तेजी से फैल सकता है? क्या छूने भर से संक्रमण हो जाएगा और क्या दुनिया फिर किसी नई महामारी की तरफ बढ़ रही है? इन तमाम सवालों के बीच डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट जारी करते हुए स्थिति को लेकर बड़ी जानकारी दी है.&amp;nbsp;
क्या है मामला?
दरअसल यह मामला डच झंडे वाले लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है, जहां रहस्यमयी सांस संबंधी बीमारी के बाद अब हंता वायरस इंफेक्शन की पुष्टि हुई है. अब तक इस जहाज से जुड़े आठ मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पांच लोगों में हंता वायरस की पुष्टि हुई है जबकि तीन मामले संदिग्ध माने जा रहे हैं. तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है.&amp;nbsp;
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का क्या कहना?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अधिकारियों के मुताबिक जहाज पर पहला इंफेक्टेड व्यक्ति 6 अप्रैल को बीमार पड़ा था और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. शुरुआत में डॉक्टरों को हंता वायरस का शक नहीं हुआ क्योंकि उसके लक्षण सामान्य सांस संबंधी इंफेक्शन जैसे थे. इसी वजह से शुरुआती सैंपल भी नहीं लिए गए. बाद में जब दूसरे यात्री भी बीमार पड़ने लगे, तब स्वास्थ्य एजेंसियों ने हंता वायरस की जांच शुरू की.
एक्सपर्ट का क्या कहना?
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की इंफेक्शन रोग एक्सपर्ट Dr Maria Van Kerkhove ने साफ कहा कि इस वायरस की तुलना कोरोना से नहीं करनी चाहिए. उन्होंने कहा, &quot;यह SARS-CoV-2 नहीं है और यह उसी तरह नहीं फैलता. इंफेक्शन केवल बेहद करीबी और लंबे संपर्क में फैलने की आशंका होती है.&quot; उन्होंने यह भी बताया कि ज्यादातर हंता वायरस इंसान से इंसान में फैलते ही नहीं हैं.&amp;nbsp;
कैसे फैलता है यह वायरस?
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि हंता वायरस आमतौर पर इंफेक्टेड चूहों या उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है. हालांकि इस मामले में एंडीज स्ट्रेन का शक जताया जा रहा है, जो हंता वायरस का ऐसा रेयर प्रकार है जिसमें सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में इंफेक्शन फैलने की क्षमता देखी गई है। यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ इस मामले पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए है.&amp;nbsp;
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&amp;nbsp;इन्क्यूबेशन अवधि छह हफ्ते तक
डब्ल्यूएचओ ने यह भी बताया कि हंता वायरस की इन्क्यूबेशन अवधि छह हफ्ते तक हो सकती है. यानी इंफेक्शन होने के कई हफ्तों बाद भी लक्षण सामने आ सकते हैं. इसी कारण दुनिया के कई देशों में यात्रियों की निगरानी की जा रही है. &amp;nbsp;डब्ल्यूएचओ ने उन 12 देशों को अलर्ट भेजा है, जहां के यात्री सेंट हेलेना में जहाज से उतर चुके थे. &amp;nbsp;स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO के विशेषज्ञ, नीदरलैंड के डॉक्टर और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की टीम जहाज पर पहुंच चुकी है. यह टीम यात्रियों की मेडिकल जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इंफेक्शन जहाज के अंदर फैला या लोग पहले से इंफेक्टेड थे.
हालांकि, डब्ल्यूएचओ फिलहाल दुनियाभर में इसके खतरे को कम बता रहा है, लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि बंद जगहों जैसे क्रूज शिप में लंबे समय तक साथ रहने से इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां इस मामले पर बेहद सतर्क नजर बनाए हुए हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>WHO, Hantavirus, Alert:, कोरोना, से, कितना, खतरनाक, हंता, वायरस, क्या, छूने, से, फैलता, है, इंफेक्शन, WHO, ने, जारी, किया, अलर्ट</media:keywords>
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        <title>Asthma Symptoms:क्या प्रदूषण से बढ़ रहे हैं अस्थमा के मरीज? घर से निकलने से पहले जान लें ये सच</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/asthma-symptomsक्या-प्रदूषण-से-बढ़-रहे-हैं-अस्थमा-के-मरीज-घर-से-निकलने-से-पहले-जान-लें-ये-सच</link>
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        <description><![CDATA[ Can Air Pollution Trigger Asthma Attacks:&amp;nbsp;दिल्ली जैसी बड़ी आबादी वाले शहरों में सुबह धुंध और धुएं की परत अब आम बात बन चुकी है. लोग इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही जहरीली हवा धीरे-धीरे शरीर के भीतर गंभीर नुकसान पहुंचाती रहती है. सांस के जरिए शरीर में पहुंचने वाले बेहद छोटे कण लंग्स के अंदर जाकर जमने लगते हैं और समय के साथ सांस फूलना, सीने में जकड़न, लगातार खांसी और दमा जैसी परेशानियों की वजह बन जाते हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मुंबई के जसलोक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के सीनियर डॉ. निमिष शाह ने TOI को बताया कि अनुसार वायु प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है. यह कई वर्षों से लगातार बढ़ रहा है और अब इसका असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है. उनका कहना है कि रोजाना जहरीली हवा में रहना फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. ये असर डालती है और अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ाने का काम करती है.&amp;nbsp;
लंग्स के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों को नुकसान
दरअसल हवा में मौजूद प्रदूषण सिर्फ धूल तक सीमित नहीं होता। इसमें बेहद महीन कण और कई हानिकारक गैसें शामिल होती हैं. ये छोटे कण शरीर की नेचुरल सुरक्षा को पार कर सीधे लंग्स की गहराई तक पहुंच जाते हैं. कुछ कण तो खून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों तक भी पहुंचने लगते हैं. यही कारण है कि प्रदूषण का असर सिर्फ सांस तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दिल और शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि अस्थमा के मरीजों में खांसी, सीने में जकड़न, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्याएं अचानक बढ़ जाती हैं.&amp;nbsp;
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वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, कूड़ा जलाने से उठने वाला धुआं और घरों के भीतर बनने वाला धुआं इसके बड़े कारण माने जाते हैं. शहरों में रहने वाले लोग रोजाना इन चीजों के संपर्क में रहते हैं, जिससे शरीर पर लगातार दबाव बना रहता है.
स्टडी में क्या निकला?
एक स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों की क्षमता कमजोर हो सकती है और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. वहीं नेशनल हेल्थ संस्थान के आंकड़ों के अनुसार जब हवा की क्वालिटी खराब होती है, तब अस्पतालों में सांस और दमा के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन भी बाहरी वायु प्रदूषण को कैंसर पैदा करने वाले बड़े कारणों में शामिल कर चुका है. &amp;nbsp;एक्सपर्ट के मुताबिक प्रदूषण शरीर में सूजन बढ़ाने के साथ-साथ सेल्स को नुकसान पहुंचाता है, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
हवा की क्वालिटी पर ध्यान दें
एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि लोग घर से बाहर निकलने से पहले हवा की क्वालिटी पर ध्यान दें. ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों में मुंह ढंककर बाहर निकलना, घर के भीतर साफ हवा बनाए रखना और खुले में व्यायाम से बचना फायदेमंद माना जाता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Asthma, Symptoms:क्या, प्रदूषण, से, बढ़, रहे, हैं, अस्थमा, के, मरीज, घर, से, निकलने, से, पहले, जान, लें, ये, सच</media:keywords>
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        <title>Hantavirus Infection: क्या आपके घर में भी हैं चूहे? जानलेवा &amp;apos;हंता वायरस&amp;apos; को लेकर डॉक्टरों ने क्या कहा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hantavirus-infection-क्या-आपके-घर-में-भी-हैं-चूहे-जानलेवा-हंता-वायरस-को-लेकर-डॉक्टरों-ने-क्या-कहा</link>
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        <description><![CDATA[ Can Hantavirus Spread From Person To Person: हाल ही में एक रेयर इंफेक्शन ने पूरी दुनिया में चिंता बढ़ा दी है. एक जहाज पर कई लोगों की मौत के बाद यह बीमारी फिर चर्चा में आ गई. जांच में पता चला कि यह इंफेक्शन चूहों से फैलने वाले एक खास प्रकार के वायरस हंता वायरस से जुड़ा है. हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि आम लोगों के लिए इसका खतरा बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन लापरवाही करना भी ठीक नहीं माना जा रहा.&amp;nbsp;
कैसे फैलती है यह बीमारी?
यह इंफेक्शन नया नहीं है. कई दशकों से अलग-अलग देशों में इसके मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर समय यह बीमारी सामान्य चर्चा से दूर रही. अब जब इसके मामले बढ़ने लगे हैं, तो लोग इसके बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं. यह बीमारी मुख्य रूप से चूहों के मल, पेशाब और लार से फैलती है. जब बंद पड़े कमरे, गोदाम या धूलभरी जगहों की सफाई की जाती है, तब हवा में मौजूद इंफेक्शन कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं. यही वजह है कि लंबे समय से बंद घरों या स्टोर रूम की सफाई के दौरान खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
हैदराबाद के सीनियर डॉक्टर के. सी. मिश्रा ने TOI को बताया कि लोगों में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि यह बीमारी सामान्य बुखार की तरह तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है. जबकि अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता. उनका कहना है कि असली खतरा इंफेक्टेड वातावरण से होता है, न कि किसी इंफेक्टेड व्यक्ति के पास बैठने से. बेंगलुरु के इंफेक्शन रोग एक्सपर्ट सुब्रमण्यम स्वामीनाथन के मुताबिक, कई लोग मानते हैं कि यह बीमारी सिर्फ जंगलों या दूरदराज इलाकों तक सीमित है, जबकि सच्चाई यह है कि जहां चूहे मौजूद हैं, वहां खतरा हो सकता है. चाहे वह घर का स्टोर रूम हो, पुराना गोदाम या लंबे समय से बंद पड़ा कमरा.&amp;nbsp;
क्या होते हैं इस बीमारी के लक्षण?
इस बीमारी की शुरुआत बेहद सामान्य लक्षणों से होती है, तेज बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और थकान जैसी दिक्कतें शुरू में साधारण वायरल इंफेक्शन जैसी लगती हैं. यही कारण है कि कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते. लेकिन कुछ मामलों में अचानक सांस लेने में परेशानी, लंग्स में पानी भरना और शरीर के जरूरी अंगों पर असर जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि इस इंफेक्शन का कोई निश्चित इलाज या टीका फिलहाल उपलब्ध नहीं है. इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना और सही देखभाल सबसे जरूरी मानी जाती है. जल्दी इलाज मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Healthy Skin Tips: बगैर मेकअप 15 दिन में चमकने लगेगी स्कीन, केवल आधा घंटा करना होगा ये काम </title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/healthy-skin-tips-बगैर-मेकअप-15-दिन-में-चमकने-लगेगी-स्कीन-केवल-आधा-घंटा-करना-होगा-ये-काम</link>
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        <description><![CDATA[ Healthy Skin Tips:&amp;nbsp;सुबह की ताजी हवा, ओस से भीगी हरी घास और नंगे पैरों का हल्का-हल्का स्पर्श&amp;hellip; ये सिर्फ सुकून देने वाला एहसास नहीं है, बल्कि ये आपकी स्कीन के लिए भी किसी नेचुरल थेरेपी से कम नहीं मानी जाती. आजकल लोग चमकती त्वचा पाने के लिए महंगे मेकअप और ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार असली ग्लो हमारे आसपास की छोटी-छोटी आदतों में ही छिपा होता है. &amp;nbsp;ऐसी ही एक आदत है सुबह-सुबह नंगे पैर घास पर चलना. &amp;nbsp;कहा जाता है कि अगर इसे रोजाना केवल आधा घंटा किया जाए, तो कुछ ही दिनों में चेहरे पर नेचुरल चमक दिखने लगती है.&amp;nbsp;
अर्थिंग से बढ़ता है ब्लड सर्कुलेशन
दरअसल, सुबह की हरी घास पर नंगे पैर चलने को आयुर्वेद और नेचुरल हेल्थ थेरेपी में काफी फायदेमंद माना गया है. वही जब हमारे पैर सीधे धरती के संपर्क में आते हैं, तो शरीर को एक अलग तरह की शांति और ताजगी मिलती है. साथ ही आपको बता दें कि इसे अर्थिंग या ग्राउंडिंग भी कहा जाता है. माना जाता है कि इससे शरीर का तनाव कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. वही जब शरीर में रक्त प्रवाह सही रहता है, तो उसका असर चेहरे पर भी साफ नजर आने लगता है. इससे स्कीन ज्यादा फ्रेश और हेल्दी दिखती है.&amp;nbsp;
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तनाव कम होकर स्कीन पर दिखता है असर
सुबह के समय घास पर चलने से एक ओर बड़ा फायदा मिलता है, इससे शरीर का मानसिक तनाव भी कम होता है. साथ ही आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी, मोबाइल और देर रात तक जागने की आदत का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देता है. जिसमें डल स्कीन, पिंपल्स और थकान से चेहरे की चमक छीन जाती है. ऐसे में सुबह की हल्की धूप और प्रकृति के बीच बिताया गया समय मन को शांत करता है. वही जब मन रिलैक्स रहता है, तो उसका सीधा असर त्वचा पर पड़ता है. कई लोग बताते हैं कि नियमित रूप से यह आदत अपनाने के बाद उनकी स्कीन पहले से ज्यादा साफ और ग्लोइंग दिखने लगी है.&amp;nbsp;
आंखों और शरीर को भी मिलती है राहत
इसके अलावा, नंगे पैर घास पर चलने से आंखों को भी आराम मिलता है. पुराने समय में बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते थे कि सुबह ओस वाली घास पर चलना आंखों की रोशनी और शरीर की ऊर्जा के लिए अच्छा होता है. हालांकि यह कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन सुबह की ताजी हवा, हल्की एक्सरसाइज और प्रकृति के करीब रहने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं. यही वजह है कि लोग इसे हेल्दी लाइफस्टाइल का हिस्सा मानते हैं. &amp;nbsp;अगर इसके साथ सही खानपान और भरपूर पानी पीने की आदत भी जोड़ ली जाए, तो स्कीन पर असर और जल्दी दिखाई देता है.
ध्यान रखें साफ और सुरक्षित जगह पर ही करें वॉक&amp;nbsp;
ध्यान रखने वाली बात यह है कि घास साफ और सुरक्षित जगह की होनी चाहिए. जहां ज्यादा गंदगी या कीटनाशक का इस्तेमाल हो, वहां नंगे पैर चलने से बचना चाहिए. &amp;nbsp;शुरुआत में रोज 15 से 20 मिनट चलना भी काफी है, फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है. &amp;nbsp;स्कीन की असली खूबसूरती सिर्फ मेकअप से नहीं, बल्कि शरीर और मन की अच्छी सेहत से आती है. ऐसे में सुबह का आधा घंटा अगर खुद के लिए निकाला जाए, तो शायद चेहरे पर वही नेचुरल चमक लौट सकती है, जिसे पाने के लिए लोग हजारों रुपये खर्च कर देते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Healthy, Skin, Tips:, बगैर, मेकअप, दिन, में, चमकने, लगेगी, स्कीन, केवल, आधा, घंटा, करना, होगा, ये, काम </media:keywords>
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        <title>Genetic Testing In Cancer: क्या अब कैंसर का इलाज हुआ और आसान? जेनेटिक टेस्ट से महिला को मिला जीवनदान</title>
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        <description><![CDATA[ How Genetic Testing Helps In Cancer Treatment: बेंगलुरु की करीब पचास वर्ष की एक महिला कई महीनों तक शरीर में हो रहे छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज करती रही. पेट जल्दी भर जाना, सूजन महसूस होना और लगातार थकान जैसी समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ती गईं. जब हालत ज्यादा बिगड़ी तो जांच में पता चला कि उन्हें ओवरी का कैंसर है और बीमारी शरीर में फैल चुकी है. सर्जरी के जरिए दिखाई देने वाली गांठों को हटा दिया गया, लेकिन असली बदलाव उसके बाद हुई एक खास जांच से आया&amp;nbsp;
बेंगलुरु के एस्टर अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अश्विन केआर के मुताबिक महिला के ट्यूमर की गहराई से जांच की गई. इस जांच में पता चला कि कैंसर सेल्स शरीर के क्षतिग्रस्त जेनेटिक पदार्थ को ठीक करने में सक्षम नहीं थीं. यही जानकारी आगे के इलाज में सबसे अहम साबित हुई.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट के अनुसार कैंसर तब शुरू होता है जब शरीर की सेल्स के भीतर मौजूद जेनेटिक संरचना में बदलाव होने लगते हैं. लेकिन हर मरीज में यह बदलाव एक जैसे नहीं होते. कुछ बदलाव समय के साथ पैदा होते हैं, जबकि कुछ परिवार से विरासत में मिल सकते हैं. यही वजह है कि हर कैंसर मरीज का इलाज एक जैसा असर नहीं दिखाता. डॉ. अश्विन केआर बताते हैं कि इस तरह की जेनेटिक जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि आखिर कैंसर को बढ़ाने वाला मुख्य कारण क्या है. कई बार ऐसी जानकारी मिलने के बाद मरीज को वही दवा दी जाती है, जो उसकी बीमारी पर सबसे ज्यादा असर कर सके. इससे इलाज पर समय और शरीर दोनों की बर्बादी कम होती है.&amp;nbsp;
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इस केस में क्या देखने को मिला?
महिला के मामले में भी यही हुआ. &amp;nbsp;जांच में ऐसा संकेत मिला जिससे डॉक्टरों को एक खास प्रकार की टारगेटेड दवा देने का रास्ता मिला. यह दवा उन कैंसर सेल्स पर असर करती है जो खुद को ठीक नहीं कर पातीं. इलाज शुरू होने के बाद ट्यूमर छोटा होने लगा और अब महिला सामान्य जीवन जी रही है, हालांकि उनकी लगातार निगरानी की जा रही है. एक्सपर्ट का कहना है कि पहले कैंसर के इलाज में सामान्य तौर पर सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरपी पर ही निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन अब जेनेटिक जांच की मदद से इलाज को मरीज के शरीर और बीमारी के अनुसार तय किया जा रहा है. इससे इलाज ज्यादा सटीक और प्रभावी बनता जा रहा है.
लगातार बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले 
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल कैंसर पंजीकरण कार्यक्रम के अनुसार देश में कैंसर के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है. अनुमान है कि आने वाले वर्षों में मरीजों की संख्या और तेजी से बढ़ सकती है. ऐसे में एक्सपर्ट मानते हैं कि समय पर जांच और सही इलाज के साथ जेनेटिक परीक्षण मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mobile Addiction in Children: मोबाइल की लत से बच्चे बन रहे डफर, एम्स में की स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Can Mobile Addiction Affect Children Brain Development: आज के समय में छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल देना आम बात हो गई है. खाना खिलाना हो, बच्चे को चुप कराना हो या खुद थोड़ा समय निकालना हो, कई माता-पिता बच्चों को मोबाइल पकड़ा देते हैं. लेकिन अब एम्स की एक नई स्टडी ने इसे लेकर बड़ा खतरा बताया है. रिसर्च में सामने आया है कि बहुत कम उम्र से मोबाइल और स्क्रीन के संपर्क में आने वाले बच्चों में सीखने की क्षमता कमजोर हो सकती है और उनमें ऑटिज्म जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एम्स के पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. शेफाली गुलाटी के अनुसार &quot;एक साल की उम्र में ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म के लक्षण ज्यादा देखने को मिले.&quot; &amp;nbsp;यह असर लड़कों में ज्यादा दिखाई दिया, हालांकि लड़कियों में भी इसके संकेत मिले हैं.&amp;nbsp;
क्या हैं इसके कारण?
एक्सपर्ट का कहना है कि छोटे बच्चों का दिमाग शुरुआती वर्षों में तेजी से विकसित होता है. इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है माता-पिता के साथ बातचीत, चेहरे के हावभाव समझने और आसपास की चीजों से जुड़ने की. लेकिन जब बच्चा लगातार मोबाइल स्क्रीन में उलझा रहता है, तो उसका सामाजिक और मानसिक विकास प्रभावित होने लगता है.&amp;nbsp;
डॉ. शेफाली गुलाटी के मुताबिक बच्चों के साथ व्यक्तिगत रूप से समय बिताना बेहद जरूरी है. बच्चा माता-पिता के चेहरे को देखकर, उनकी आवाज सुनकर और उनके व्यवहार को समझकर सीखता है. यही चीजें उसके दिमाग के विकास में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A key finding from AIIMS New Delhi research highlights that increased screen time in children under one year of age is associated with a higher risk of autism by the age of three.The study suggests that greater screen exposure may increase the likelihood of autism-related&amp;hellip; pic.twitter.com/U3Ubmhedek
&amp;mdash; DD News (@DDNewslive) May 1, 2026



क्या होता है ऑटिज्म?
ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का दिमाग सामान्य तरीके से सामाजिक व्यवहार और भाषा को समझ नहीं पाता. &amp;nbsp;ऐसे बच्चों को लोगों से घुलने-मिलने, बातचीत करने और भावनाएं समझने में परेशानी हो सकती है. कुछ बच्चे बार-बार एक जैसी हरकतें करते हैं, कुछ अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं और कई बार उन्हें तेज आवाज या बदलाव से भी परेशानी होने लगती है.&amp;nbsp;
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किन चीजों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?
एक्सपर्ट के अनुसार अगर बच्चा नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देता, आंखों में कम देखता है, बोलने में देरी हो रही है या दूसरों के साथ खेलने से बचता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते जांच और सही मदद मिलने से स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है.&amp;nbsp;
18 महीने से कम उम्र के बच्चों पर ध्यान
एम्स के एक्सपर्ट का कहना है कि छोटे बच्चों की स्क्रीन की आदत धीरे-धीरे कम करनी चाहिए. अचानक मोबाइल छीन लेने से बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से जितना दूर रखा जाए, उतना बेहतर माना जाता है. एक्सपर्ट मानते हैं कि बच्चों के बेहतर मानसिक विकास के लिए मोबाइल नहीं, बल्कि माता-पिता का साथ सबसे ज्यादा जरूरी है, बच्चे को जितना ज्यादा वास्तविक दुनिया और परिवार के साथ समय मिलेगा, उसका मानसिक और सामाजिक विकास उतना ही बेहतर होगा.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Vitamin D Benefits: यह विटामिन खत्म कर देगा कैंसर होने की टेंशन! इस स्टडी से मिल रही गुड न्यूज</title>
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        <description><![CDATA[ Vitamin D Benefits: पहले कैंसर का खतरा बड़े लोगों में ही देखने को मिलता था, लेकिन आज के समय में हर कोई चाहे बच्चे हो, जवान हो, सब ही इसके चपेट में आ रहे हैं. वहीं, कीमोथेरेपी कैंसर के लिए एक कॉमन इलाज है, लेकिन इसका परिणाम हर मरीज में एक जैसा नहीं होता है. इसी बीच एक नई स्टडी ने उम्मीद की किरण दिखाई है. रिसर्च में सामने आया है कि एक खास विटामिन की डोज से कैंसर से मौत का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है. खास बात यह है कि यह कीमोथेरेपी जैसे महंगा नहीं है, बल्कि आसानी से मिलने वाला विटामिन D है. वैज्ञानिकों का मानना है कि विटामिन D सही मात्रा में लेने से शरीर में इम्युनिटी मजबूत होती है, जिससे कैंसर जैसी बीमारी के इलाज में बेहतर रिजल्ट मिल सकता है.
ब्राजील की रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा
इसे लेकर ब्राजील की sao paulo state university में एक रिसर्च की गई. इस रिसर्च में ब्लड कैंसर से पीड़ित 45 साल से ज्यादा उम्र की 80 महिलाओं को शामिल किया गया था, जिनकी कीमोथेरेपी होने वाली थी. रिसर्च के लिए महिलाओं को 2 ग्रुप में बांट दिया गया, जिसमें एक ग्रुप को रोजाना विटामिन D की 2,000 IU दी गई थी. वहीं, दूसरी तरफ दूसरे ग्रुप को प्लेसीबो गोली दी गई, यानी बिना असरदार वाली गोलियां. 6 महीने की इस प्रक्रिया के बाद, जो रिजल्ट आया, उसने सभी वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया.
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विटामिन D लेने वाली महिलाओं में दिखा बेहतर असर
उन्होंने इस स्टडी में पाया कि जिन महिलाओं को विटामिन D की गोली दी गई थी, उनमें से 43 प्रतिशत महिलाओं में कीमोथेरेपी के बाद कैंसर के लक्षण न के बराबर थे. वहीं, दूसरे ग्रुप की महिलाओं का आंकड़ा केवल 24 प्रतिशत ही था. इससे यह पता चला कि विटामिन D कैंसर के उपचार में सहायक भूमिका निभा सकता है.
शरीर में विटामिन D बढ़ने से बेहतर हुए नतीजे
रिसर्च के दौरान यह भी पता चला कि जिन महिलाओं को विटामिन D की गोलियां दी गई थीं, उनके शरीर में पहले से ही विटामिन D की कमी थी. वहीं, उपचार के दौरान जैसे-जैसे उनके शरीर में विटामिन D का स्तर बढ़ा, वैसे उनके नतीजे भी बेहतर होने लगे. ऐसे में ये कहना गलत नहीं हो सकता है कि विटामिन D सिर्फ कैंसर के मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि हर आदमी के लिए जरूरी होता है. साथ ही, सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है. इसको ज्यादा मात्रा में लेना भी नुकसान हो सकता है. इसको ज्यादा मात्रा में लेने से उल्टी, कमजोरी, और गुर्दे की समस्या जैसी परेशानी हो सकती है. ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह लिए इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए.
अभी और रिसर्च की है जरूरत
इस अध्ययन से पता चलता है कि विटामिन D, कीमोथेरेपी को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकता है और यह एक सस्ता व आसान तरीका हो सकता है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह साबित इलाज नहीं माना गया है. ऐसे में इस पर और रिसर्च की जरूरत है. वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआती नतीजे अच्छे हैं, लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि सिर्फ विटामिन D की वजह से ही फायदा हुआ. इसके पीछे दूसरे कारण भी हो सकते हैं. आगे की रिसर्च में यह समझने की कोशिश की जाएगी कि विटामिन D, कीमोथेरेपी के साथ मिलकर कैसे असर करता है.
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        <pubDate>Fri, 08 May 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Benefits Of Low Fat Vegan Diet: वीगन या मेडिटेरियन... वजन घटाने के लिए क्या है बेस्ट? रिसर्च में मिला जवाब</title>
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        <description><![CDATA[ How A Low Fat Vegan Diet Improves Health: लंबे समय से साइंटिस्ट यह मानते रहे हैं कि हमारा खानपान सीधे हमारी सेहत को प्रभावित करता है. लेकिन अब नई रिसर्च यह बता रही है कि हम क्या खाते हैं, इसका असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं बल्कि पर्यावरण पर भी पड़ता है. हाल ही में हुई एक क्लीनिकल स्टडी में सामने आया है कि कम वसा वाला शुद्ध शाकाहारी भोजन न केवल स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है.&amp;nbsp;
क्या निकला रिसर्च में
यह स्टडी बीएमजे न्यूट्रिशन, प्रिवेंशन एंड हेल्थ नाम की पत्रिका में पब्लिश हुआ है. इस रिसर्च का नेतृत्व डॉ. हाना काहलेओवा और उनकी टीम ने किया. खास बात यह रही कि यह स्टडी केवल अनुमान या कंप्यूटर मॉडल पर आधारित नहीं था, बल्कि इसमें वास्तविक लोगों की खानपान की आदतों और उनके शरीर पर पड़ने वाले असर को विस्तार से देखा गया.&amp;nbsp;
ऐसे हुई तुलना
रिसर्च में दो तरह के खानपान की तुलना की गई. पहला कम वसा वाला शुद्ध शाकाहारी भोजन था, जिसमें मांस, दूध और अंडे जैसी पशु आधारित चीजें शामिल नहीं थीं. दूसरा मेडिटेरियन फूड था, जिसमें मछली, जैतून का तेल, सब्जियां और सीमित मात्रा में मांस व डेयरी उत्पाद शामिल थे. दोनों तरह के भोजन को सेहत के लिए अच्छा माना जाता है.&amp;nbsp;
क्या निकला रिजल्ट
इस स्टडी में अधिक वजन वाले 62 एडल्ट को शामिल किया गया. सभी प्रतिभागियों ने 16 हफ्तों तक एक प्रकार का भोजन अपनाया और फिर अगले 16 हफ्तों तक दूसरे प्रकार का भोजन लिया. इससे रिसर्चर को दोनों खानपान के प्रभावों की बेहतर तुलना करने में मदद मिली. रिसर्च के नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे. जिन लोगों ने शुद्ध शाकाहारी भोजन अपनाया, उनके खानपान से जुड़ा प्रदूषण लगभग 57 प्रतिशत तक कम हो गया. वहीं मेडिटेरियन फूड में यह कमी करीब 20 प्रतिशत रही. यानी शुद्ध शाकाहारी भोजन का पर्यावरण पर असर काफी कम पाया गया.
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हेल्थ पर क्या हुआ असर
सेहत के मामले में भी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए. शुद्ध शाकाहारी भोजन लेने वाले लोगों का वजन तेजी से घटा, ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर हुआ और कोलेस्ट्रॉल स्तर में भी सुधार देखा गया. ये सभी बातें हार्ट रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने से जुड़ी मानी जाती हैं. रिसर्चर का कहना है कि पशु आधारित खाद्य पदार्थों के उत्पादन में ज्यादा संसाधन लगते हैं और उससे अधिक प्रदूषण पैदा होता है. ऐसे में पौधों पर आधारित भोजन अपनाना शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Fire Safety Tips:  अपने फ्लैट में रखें ये फायर सेफ्टी टूल्स, वरना गर्मियों में हो जाएगा जान माल का नुकसान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fire-safety-tips-अपने-फ्लैट-में-रखें-ये-फायर-सेफ्टी-टूल्स-वरना-गर्मियों-में-हो-जाएगा-जान-माल-का-नुकसान</link>
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        <description><![CDATA[ Fire Safety Tips:  अपने फ्लैट में रखें ये फायर सेफ्टी टूल्स, वरना गर्मियों में हो जाएगा जान माल का नुकसान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Curd And Sugar Benefits: कहां से शुरू हुई दही चीनी खाने की परंपरा, जानें पहली बार किस शुभ कार्य के लिए किया गया था ऐसा?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/curd-and-sugar-benefits-कहां-से-शुरू-हुई-दही-चीनी-खाने-की-परंपरा-जानें-पहली-बार-किस-शुभ-कार्य-के-लिए-किया-गया-था-ऐसा</link>
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        <description><![CDATA[ Curd And Sugar Benefits : भारतीय घरों में एक बहुत पुरानी और आम परंपरा आज भी देखने को मिलती है. यह परंपरा किसी भी शुभ या जरूरी काम पर निकलने से पहले दही-चीनी खिलाना है. चाहे परीक्षा देने जाना हो, इंटरव्यू हो, नया काम शुरू करना हो या किसी यात्रा पर निकलना हो, बड़े-बुजुर्ग हमेशा यही कहते हैं कि कुछ मीठा खा लो, दही-चीनी खाकर जाओ, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह परंपरा शुरू कहां से हुई और इसके पीछे कोई गहरा कारण भी है. तो आइए जानते हैं कि दही चीनी खाने की परंपरा कहां से शुरू हुई और पहली बार किस शुभ कार्य के लिए ऐसा किया गया था.&amp;nbsp;
दही-चीनी की परंपरा की शुरुआत कहां से मानी जाती है?
इस परंपरा की जड़ें बहुत पुराने समय से जुड़ी मानी जाती हैं. प्राचीन भारतीय जीवनशैली और आयुर्वेद में दही और चीनी दोनों को बहुत ही शुद्ध और फायदेमंद खाना माना गया है.उस समय माना जाता था कि दही शरीर को ठंडक देता है. पाचन को बेहतर बनाता है. मन को शांत करता है और चीनी तुरंत एनर्जी देती है. इन्हीं गुणों के कारण जब भी कोई व्यक्ति किसी जरूरी काम के लिए घर से निकलता था, तो उसे दही-चीनी खिलाकर भेजने की परंपरा शुरू हुई. धीरे-धीरे यह सिर्फ खाने की चीज नहीं रही, बल्कि एक शुभ शुरुआत का प्रतीक बन गई.&amp;nbsp;
पहली बार किस शुभ कार्य के लिए ऐसा किया गया था?
ऐसा माना जाता है कि यह परंपरा सबसे पहले उन स्थितियों में शुरू हुई जहां व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत और शरीर में एनर्जी की जरूरत होती थी, जैसे युद्ध पर जाने वाले सैनिक, लंबी यात्राओं पर निकलने वाले लोग, जरूरी धार्मिक कार्य या किसी बड़े निर्णय के समय, इन सभी मौकों पर दही-चीनी को शुभ शुरुआत और सफलता की कामना के रूप में दिया जाता था.&amp;nbsp;
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धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा कारण
भारतीय संस्कृति में यह भी माना जाता है कि सफेद रंग (दही का रंग) शांति और पवित्रता का प्रतीक है. साथ ही चीनी मिठास और शुभता का प्रतीक है. इसलिए जब कोई व्यक्ति घर से मीठा खाकर निकलता है, तो माना जाता है कि उसका काम अच्छे तरीके से पूरा होगा. इसी सोच के कारण यह परंपरा आज भी शादी, परीक्षा, इंटरव्यू और नए काम की शुरुआत में निभाई जाती है.&amp;nbsp;
इसके पीछे छुपा वैज्ञानिक कारण
यह सिर्फ परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे विज्ञान भी काम करता है. दही में मौजूद प्रोटीन और कैल्शियम शरीर को मजबूत बनाते हैं. इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पेट को स्वस्थ रखते हैं. चीनी शरीर को तुरंत ग्लूकोज देकर एनर्जी देती है. यह मिश्रण शरीर को तुरंत ताकत देता है और व्यक्ति को थकान महसूस नहीं होती है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Curd, And, Sugar, Benefits:, कहां, से, शुरू, हुई, दही, चीनी, खाने, की, परंपरा, जानें, पहली, बार, किस, शुभ, कार्य, के, लिए, किया, गया, था, ऐसा</media:keywords>
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        <title>Human Behavior: क्या आप भी छिपा रहे हैं अपने जज्बात? 1 सेकंड में जानें अपना सच</title>
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        <description><![CDATA[ What Your First Choice Says About Your Personality: हम सभी अपनी जिंदगी को एक तय तरीके से पेश करना जानते हैं. महफिलों में क्या कहना है, सोशल मीडिया पर खुद को कैसे दिखाना है और यह सब हम अच्छे से मैनेज कर लेते हैं. लेकिन एक चीज है जिसे कंट्रोल करना इतना आसान नहीं होता, वह है आपका पहला, अचानक आने वाला एहसास. वही जो बिना सोचे-समझे सामने आ जाता है. यही स्वाभाविक प्रवृत्ति अक्सर आपके असली मन और उस वक्त की मानसिक स्थिति को सबसे सटीक तरीके से दिखाता है.&amp;nbsp;
कैसे कर सकते हैं टेस्ट
साइकोलॉजी के अनुसार, इसी सोच पर आधारित यह छोटा सा पर्सनैलिटी टेस्ट है. आपके सामने चार चीजें हैं, एक टूटा हुआ आईना, एक पुरानी डायरी, एक जंग लगी चाबी और एक मुरझाया हुआ फूल. ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है, बस यह देखें कि आप सबसे पहले किसे चुनते हैं. आपका चुनाव आपके वर्तमान मनोदशा के बारे में काफी कुछ बता सकता है.&amp;nbsp;
आईना चुनने का क्या मतलब
अगर आपकी नजर सबसे पहले टूटे हुए आईने पर गई, तो इसका मतलब है कि आप सतह से आगे देखने वाले इंसान हैं. आपको चीजों का परफेक्ट रूप नहीं, बल्कि सच्चाई ज्यादा मायने रखती है. आप जिंदगी के बिखरे हुए हिस्सों में भी अर्थ ढूंढ लेते हैं. हो सकता है कि इस समय आप खुद को थोड़ा संवेदनशील महसूस कर रहे हों या दूसरों की राय आपको ज्यादा प्रभावित कर रही हो. &amp;nbsp;लेकिन यही वह दौर है जहां आप खुद को नए सिरे से समझ रहे हैं. आप उन लोगों में से हैं जो अपने घावों को देखने से नहीं डरते, बल्कि वहीं से सीखते हैं.&amp;nbsp;
पुरानी डायरी चुनने का क्या है मतलब
अगर आपने पुरानी डायरी चुनी, तो इसका मतलब है कि आप अपने अतीत से गहराई से जुड़े हुए हैं. आपके लिए यादें सिर्फ यादें नहीं, बल्कि आपकी पहचान का हिस्सा हैं. आप उन लोगों में से हैं जो रिश्तों और अनुभवों को आसानी से पीछे नहीं छोड़ पाते. लेकिन यह कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी गहराई को दिखाता है. आप अपने बीते हुए कल से सीखकर आगे बढ़ना जानते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि वही गलतियां दोबारा न हों.&amp;nbsp;
जंग वाली चाबी चुनने का क्या मतलब
अगर आपकी पसंद जंग लगी चाबी है, तो आप फिलहाल अपने भीतर की दुनिया को बहुत संभालकर रख रहे हैं. आपने जीवन में कुछ ऐसे अनुभव किए हैं जिन्होंने आपको थोड़ा सतर्क और सीमित बना दिया है. आप हर किसी को अपने करीब आने नहीं देते. इसका मतलब यह नहीं कि आप लोगों से दूर हैं, बल्कि आप चुनिंदा लोगों पर ही भरोसा करते हैं. आप भीड़ का हिस्सा बनने से ज्यादा अपनी शांति को महत्व देते हैं और मुश्किल समय में खुद ही रास्ता निकालना पसंद करते हैं.
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&amp;nbsp;मुरझाया हुआ फूल
अगर आपने मुरझाया हुआ फूल चुना, तो आप एक सकारात्मक सोच रखने वाले और संवेदनशील इंसान हैं. आप हर चीज में उम्मीद देखते हैं, चाहे हालात कितने ही मुश्किल क्यों न हों. आपके अंदर दूसरों के लिए गहरी समझ और सहानुभूति है. आप उन लोगों में से हैं जो मुश्किल समय में भी साथ नहीं छोड़ते. हो सकता है कि आप खुद भी किसी कठिन दौर से गुजर रहे हों, लेकिन फिर भी आप इसे बहुत शांति और गरिमा के साथ संभाल रहे हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>What Not To Eat With Curd: दही के साथ भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, पड़ जाएंगे लेने के देने</title>
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        <description><![CDATA[ Which Foods Should Not Be Eaten With Curd: दही भारतीय खाने का एक अहम हिस्सा माना जाता है. गर्मियों में तो लोग इसे रोजाना अपनी डाइट में शामिल करते हैं, क्योंकि यह पेट को ठंडक देने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाने में मदद करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ चीजों के साथ दही खाना शरीर को फायदा पहुंचाने की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है? आयुर्वेद में भी कई ऐसे फूड कॉम्बिनेशन बताए गए हैं, जिन्हें एक साथ खाने से पाचन बिगड़ सकता है और शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं.&amp;nbsp;
खट्टे फल
सबसे पहले बात खट्टे फलों की. कई लोग दही में संतरा, मौसंबी या दूसरे खट्टे फल मिलाकर खाते हैं, लेकिन यह आदत पेट के लिए ठीक नहीं मानी जाती. दही और खट्टे फलों का मेल पेट में एसिड बढ़ा सकता है, जिससे गैस, अपच और पेट दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं.
दही के साथ अनाज
इसके अलावा दही के साथ अनाज का कुछ कॉम्बिनेशन भी नुकसानदायक माना जाता है. खासतौर पर भारी अनाज के साथ दही खाने से कई बार डाइजेशन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है. इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व सही तरीके से नहीं मिल पाते और सुस्ती महसूस हो सकती है.
अचार के साथ खाना
बहुत से लोग स्वाद बढ़ाने के लिए दही के साथ अचार खाना पसंद करते हैं. लेकिन यह कॉम्बिनेशन पेट पर भारी पड़ सकता है. अचार में नमक और मसाले ज्यादा होते हैं, जबकि दही की तासीर अलग होती है. दोनों को साथ खाने से पेट में जलन, गैस और अपच की समस्या बढ़ सकती है.
दूध और दही&amp;nbsp;
दूध और दही को भी एक साथ खाने से बचने की सलाह दी जाती है. दोनों ही डेयरी प्रोडक्ट हैं, लेकिन इनकी प्रकृति अलग मानी जाती है. एक साथ सेवन करने पर डाइजेशन सिस्टम पर असर पड़ सकता है और पेट भारी महसूस हो सकता है.
दही और प्याज&amp;nbsp;
दही और प्याज का कॉम्बिनेशन भी हर किसी के लिए सही नहीं माना जाता. कई लोगों को इसे खाने के बाद एलर्जी, एसिडिटी या पेट संबंधी परेशानी हो सकती है. दरअसल, दोनों की तासीर अलग होती है, जिससे शरीर में असंतुलन पैदा हो सकता है.
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दही और अंडा
वहीं, अंडे के साथ दही खाना भी कुछ लोगों में पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकता है. यह कॉम्बिनेशन पेट में भारीपन और बेचैनी का कारण बन सकता है. हालांकि हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है, लेकिन अगर इन चीजों को साथ खाने के बाद आपको बार-बार पेट की समस्या महसूस होती है, तो बेहतर होगा कि इन फूड कॉम्बिनेशन से दूरी बना लें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>How To Make Hair Thick Naturally: ये पांच तरीके आपके बालों को कर देंगे पहले जैसा घना, घर में ही मौजूद है सारा इलाज</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Thin Hair Thick Again Naturally: आजकल कम उम्र में ही बाल झड़ने और पतले होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है. कभी तकिए पर टूटे बाल दिखते हैं, तो कभी कंघी करते समय मुट्ठीभर बाल निकल आते हैं. ऐसे में लोग महंगे इलाज और तरह-तरह के उत्पादों का सहारा लेने लगते हैं, लेकिन कई बार बालों को दोबारा घना बनाने का उपाय घर की रसोई और रोजमर्रा की आदतों में ही छिपा होता है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
pharmeasy के एक्सपर्ट के मुताबिक रोज कुछ बाल टूटना सामान्य माना जाता है, लेकिन जब नए बाल उगने की रफ्तार कम हो जाए और बाल लगातार पतले होने लगें, तब ध्यान देने की जरूरत होती है. बाल झड़ने के पीछे बढ़ती उम्र, शरीर में पोषण की कमी, तनाव, हार्मोन असंतुलन और गलत खानपान जैसी कई वजहें हो सकती हैं.&amp;nbsp;
आंवला बेहद कारगर
बालों को फिर से घना और मजबूत बनाने के लिए आंवला बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. नारियल तेल में सूखा आंवला पकाकर लगाने से बालों को पोषण मिल सकता है. वहीं आंवले का रस और नींबू मिलाकर लगाने से भी बालों का झड़ना कम करने में मदद मिलती है.&amp;nbsp;
प्याज भी फायदेमंद
प्याज भी बालों के लिए किसी घरेलू औषधि से कम नहीं माना जाता. इसमें मौजूद गंधक और दूसरे तत्व बालों की जड़ों को सक्रिय करने में मदद कर सकते हैं. जिन लोगों के सिर में जगह-जगह से बाल उड़ने लगे हों, उनके लिए प्याज का रस उपयोगी माना जाता है. प्रभावित हिस्से पर प्याज का रस लगाने के बाद थोड़ा शहद लगाने की सलाह दी जाती है.&amp;nbsp;
अखरोट का तेल
इसके अलावा कई तरह के सुगंधित तेल भी बालों की जड़ों तक ब्लड फ्लो बेहतर करने में मदद कर सकते हैं. नियमित मालिश से सिर की त्वचा को आराम मिलता है और बालों की पकड़ मजबूत हो सकती है. अखरोट का तेल भी बालों के लिए फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो बालों को भीतर से पोषण देने में मदद करते हैं.
गुड़हल के फूल और पत्तियां
गुड़हल के फूल और पत्तियां भी लंबे समय से बालों की देखभाल में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं. दही के साथ इसका लेप बनाकर बालों में लगाने से बाल मुलायम और घने दिख सकते हैं. वहीं हरी चाय का इस्तेमाल भी बालों की मजबूती बढ़ाने के लिए किया जाता है.&amp;nbsp;
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पुदीने के तेल
पांचवां उपाय है पुदीने के तेल की मालिश. इसे बालों की सेहत के लिए काफी असरदार माना जाता है. नियमित रूप से सिर की त्वचा पर इसकी हल्की मालिश करने से जड़ों तक ब्लड फ्लो बेहतर हो सकता है, जिससे बालों को मजबूती मिलने में मदद मिलती है.
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
अगर अचानक तेजी से बाल झड़ने लगें, सिर में गोल चकत्ते दिखें या जलन और खुजली महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Smoking And Voice Changes: क्या सिगरेट पीने से सच में भारी होती है आवाज? जानिए इसके पीछे की सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Does Smoking Really Make Your Voice Deeper: बहुत से लोग मानते हैं कि लगातार सिगरेट पीने से आवाज भारी और अलग तरह की हो जाती है. फिल्मों और आम जिंदगी में भी अक्सर धूम्रपान करने वालों की आवाज को भारीपन से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन क्या सच में धूम्रपान का असर आवाज पर पड़ता है? एक्सपर्ट के मुताबिक इसका जवाब हां है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था &amp;nbsp;clevelandclinic के अनुसार, &amp;nbsp;कान, नाक और गले से जुड़ी बीमारियों की एक्सपर्ट डॉक्टर कैंडेस ह्रेलैक बताती हैं कि धूम्रपान सीधे तौर पर आवाज की क्वालिटी, सुर और भारीपन को प्रभावित कर सकता है. दरअसल, सिगरेट या दूसरे तंबाकू उत्पादों के धुएं में सैकड़ों तरह के रसायन मौजूद होते हैं. जब कोई व्यक्ति धुआं अंदर खींचता है, तो यह सबसे पहले गले और स्वर पैदा करने वाली नलियों से होकर लंग्स तक पहुंचता है. यही वजह है कि इन हिस्सों में जलन और सूजन शुरू हो सकती है.
लगातार धूम्रपान से क्या होता है असर?
लगातार धूम्रपान करने से गले में खराश, बलगम और खांसी की समस्या बढ़ सकती है. बार-बार खांसने से आवाज बनाने वाली नलियां आपस में जोर से टकराती हैं, जिससे उनमें सूजन और ज्यादा बढ़ जाती है. यही सूजन धीरे-धीरे आवाज को भारी और बैठा हुआ बना सकती है. एक्सपर्ट के मुताबिक गाने वाले लोगों में इसका असर जल्दी दिखाई दे सकता है. ऊंचे सुर लगाने के दौरान स्वर पैदा करने वाली नलियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है. अगर उनमें पहले से सूजन हो, तो आवाज में बदलाव साफ महसूस होने लगता है.&amp;nbsp;
क्या होता है इसका असर?
धूम्रपान का असर सिर्फ आवाज भारी होने तक सीमित नहीं रहता. लंबे समय तक तंबाकू का सेवन गले में लगातार सूजन की स्थिति पैदा कर सकता है. कुछ मामलों में आवाज बैठने लगती है या कई दिनों तक ठीक से निकलती ही नहीं. इसके अलावा गले के अंदर मांस बढ़ने जैसी समस्या भी हो सकती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत तक होने लगती है. गंभीर स्थिति में ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है.&amp;nbsp;
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कैंसर का भी खतरा
एक्सपर्ट यह भी चेतावनी देते हैं कि लगातार धूम्रपान करने से गले के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. शुरुआती दौर में इसके संकेत आवाज में बदलाव के रूप में दिखाई दे सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति की आवाज तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक भारी या बदली हुई रहे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. जहां तक दूसरे नशे वाले धुएं या भाप वाले उत्पादों की बात है, एक्सपर्ट मानते हैं कि अभी इस पर पर्याप्त रिसर्च नहीं हुआ है. हालांकि यह जरूर माना जा रहा है कि किसी भी तरह का धुआं या रसायन गले और स्वर तंत्र पर असर डाल सकता है.
अच्छी बात यह है कि धूम्रपान छोड़ने के कुछ ही हफ्तों बाद आवाज में सुधार दिखने लगता है. पर्याप्त पानी पीना, गले का ध्यान रखना और धूम्रपान से दूरी बनाना आवाज को फिर से सामान्य बनाने में मदद कर सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 07 May 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Relationship Advice: रिश्ते में हैं या शादी हो गई... अपने पार्टनर से जरूर पूछें ये 5 सवाल, और मजबूत हो जाएगा रिश्ता</title>
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        <description><![CDATA[ Questions To Strengthen Your Relationship: रिश्ते समय के साथ बदलते हैं. &amp;nbsp;शुरुआत में सब कुछ नया और उत्साह से भरा होता है, लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता है, हम अपने पार्टनर को समझने लगते हैं और कई बार यह मान बैठते हैं कि अब सब कुछ जान चुके हैं. यहीं से धीरे-धीरे दूरी की शुरुआत भी हो सकती है. क्योंकि रिश्ता सिर्फ साथ रहने से नहीं, बल्कि लगातार एक-दूसरे को समझने और जानने से मजबूत होता है.&amp;nbsp;
अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता समय के साथ और गहरा हो, तो जरूरी है कि आप अपने पार्टनर से कुछ ऐसे सवाल पूछें जो सतह से आगे जाकर दिल तक पहुंचें. ये सवाल न सिर्फ बातचीत को बेहतर बनाते हैं, बल्कि आपको एक-दूसरे के और करीब भी लाते हैं.
1. आपके हिसाब से एक अच्छा रिश्ता कैसा होता है?
रिलेशनशिप के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट्स के अनुसार, &amp;nbsp;यह सवाल साधारण लग सकता है, लेकिन इसका जवाब बहुत कुछ साफ कर देता है. हर इंसान रिश्ते को अलग नजरिए से देखता है. &amp;nbsp;किसी के लिए भरोसा सबसे जरूरी होता है, तो किसी के लिए समय देना. जब आप अपने पार्टनर की सोच समझते हैं, तो गलतफहमियां कम होती हैं और आप दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ पाते हैं.
2. अगर पैसों की चिंता न हो, तो आप जिंदगी में क्या करना चाहेंगे?
यह सवाल आपके पार्टनर के असली सपनों और इच्छाओं को सामने लाता है. अक्सर जिम्मेदारियों के बीच हम अपने मन की बात दबा देते हैं. उनके जवाब से आपको समझ आएगा कि उन्हें क्या चीज सच में खुशी देती है और आप उस खुशी का हिस्सा कैसे बन सकते हैं.
3. आपके जीवन का वह कौन सा पल है जिसे आप दोबारा जीना चाहेंगे?
यह सवाल उनके दिल के करीब यादों को सामने लाता है. इससे आप जान पाते हैं कि उनके लिए कौन-से पल सबसे खास हैं और क्यों. यह बातचीत भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा करती है और आपको उनके अनुभवों को बेहतर तरीके से समझने में मदद करती है.
4. अभी आपकी जिंदगी में ऐसी कौन-सी चीज है, जिसके लिए आप ज्यादा समय निकालना चाहते हैं?
इस सवाल का जवाब आपको उनके वर्तमान मन और प्राथमिकताओं के बारे में बताता है. हो सकता है वे अपने किसी शौक, दोस्त या खुद के लिए समय चाहते हों. जब आप इसे समझते हैं, तो आप उन्हें वह स्पेस और सपोर्ट दे पाते हैं, जिसकी उन्हें जरूरत है.
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5. आपके लिए रिश्ते में सफलता का मतलब क्या है?
यह सवाल आपके रिश्ते की दिशा तय करने में मदद करता है. इससे आपको यह समझने में आसानी होती है कि आप दोनों इस रिश्ते से क्या उम्मीद रखते हैं. जब उम्मीदें साफ होती हैं, तो रिश्ते में संतुलन और स्थिरता बनी रहती है.
असल में, ये सवाल सिर्फ जवाब पाने के लिए नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे को महसूस करने के लिए हैं. जब आप सच्ची दिलचस्पी के साथ अपने पार्टनर की बात सुनते हैं, तो उन्हें यह एहसास होता है कि वे आपके लिए मायने रखते हैं. &amp;nbsp;कोई भी रिश्ता अपने आप मजबूत नहीं होता. उसे समय, समझ और बातचीत की जरूरत होती है और कई बार, सही सवाल ही उस बातचीत की शुरुआत बन जाते हैं.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Relationship, Advice:, रिश्ते, में, हैं, या, शादी, हो, गई..., अपने, पार्टनर, से, जरूर, पूछें, ये, सवाल, और, मजबूत, हो, जाएगा, रिश्ता</media:keywords>
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        <title>Summer Best Travel Destinations: मनाली या दार्जिलिंग, गर्मियों में घूमने के लिए कौन&amp;सी जगह है बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ Summer Best Travel Destinations : गर्मी का मौसम आते ही शहरों में तापमान बढ़ने लगता है और धूप इतनी तेज हो जाती है कि बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में हर किसी का मन करता है कि कुछ दिनों के लिए किसी ठंडी और शांत जगह पर चला जाए, जहां न सिर्फ मौसम अच्छा हो बल्कि प्रकृति की खूबसूरती भी देखने को मिले. भारत में ऐसे कई हिल स्टेशन हैं जो गर्मियों में घूमने के लिए बहुत फेमस हैं. उनमें से दो सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले डेस्टिनेशन मनाली और दार्जिलिंग हैं. यह दोनों ही जगहें अपनी-अपनी खासियतों के लिए जानी जाती हैं, लेकिन अगर आप कंफ्यूज हैं कि कम खर्च में ज्यादा मजा कहां मिलेगा, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि मनाली या दार्जिलिंग, गर्मियों में घूमने के लिए कौन सी जगह बेस्ट है.&amp;nbsp;
दोनों जगह पर मौसम और माहौल कैसा रहता है?
1. मनाली का मौसम - मनाली हिमाचल प्रदेश का एक बहुत ही सुंदर हिल स्टेशन है. मई के महीने में यहां का तापमान लगभग 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. यहां ठंडी हवा चलती रहती है और कभी-कभी आपको पहाड़ों पर हल्की बर्फ भी देखने को मिल सकती है. मनाली का माहौल थोड़ा एडवेंचर वाला और रोमांच से भरा होता है. यहां घूमने वाले लोग अक्सर ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और स्नो एक्टिविटीज का मजा लेते हैं. अगर आपको एडवेंचर और बर्फ चाहिए तो मनाली बेहतर है.
2. दार्जिलिंग का मौसम - दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का एक बहुत ही शांत और सुंदर हिल स्टेशन है. मई में यहां का तापमान लगभग 12 से 22 डिग्री सेल्सियस रहता है. यहां का मौसम हल्का ठंडा और बहुत आरामदायक होता है. दार्जिलिंग का माहौल ज्यादा शांत और रिलैक्सिंग होता है. यहां आपको चाय के बागान, बादलों से ढकी पहाड़ियां और कंचनजंगा की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है. अगर आपको शांति और सुंदर नजारे चाहिए तो दार्जिलिंग अच्छा ऑप्शन है.&amp;nbsp;
यात्रा का खर्च कितना आता है?
1. मनाली का बजट ट्रिप - दिल्ली से मनाली की 3-4 दिन की यात्रा में लगभग 5000 से 8000 तक का खर्च आ सकता है. इसमें बस या वोल्वो का किराया 800 से 1500, होटल 800-2500 प्रति रात और खाना 500 से 800 प्रतिदिन शामिल है. मनाली को एक बजट फ्रेंडली डेस्टिनेशन माना जाता है.
2. दार्जिलिंग का बजट ट्रिप - दार्जिलिंग की यात्रा थोड़ी महंगी पड़ सकती है. इसका खर्च लगभग 8000 से 15000 तक हो सकता है. इसमें ट्रेन, फ्लाइट और टैक्सी 2500 से 6000 खर्च, होटल 1000 से 3000 प्रति रात और खाना 600 से 1000 प्रतिदिन &amp;nbsp;शामिल है. दार्जिलिंग पहुंचने के लिए पहले न्यू जलपाईगुड़ी जाना पड़ता है और वहां से टैक्सी लेकर पहाड़ों तक जाना होता है.&amp;nbsp;
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घूमने की जगहें और एक्टिविटीज
मनाली में कई खूबसूरत जगहें हैं. जैसे सोलंग वैली, रोहतांग पास, हिडिंबा देवी मंदिर और अटल टनल. यहां आप पैराग्लाइडिंग, स्नो एक्टिविटीज और एडवेंचर स्पोर्ट्स का मजा ले सकते हैं. वहीं दार्जिलिंग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. यहां टाइगर हिल, बाटासिया लूप, चाय के बागान, टॉय ट्रेन का मजा ले सकते हैं. यहां का अनुभव बहुत शांत और यादगार होता है.&amp;nbsp;
गर्मियों में घूमने के लिए कौन सी जगह बेस्ट है?
दिल्ली से मनाली पहुंचना आसान है. आप बस, कैब या अपनी गाड़ी से भी जा सकते हैं. यात्रा में लगभग 12-14 घंटे लगते हैं. दार्जिलिंग जाने के लिए पहले न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचना होता है, फिर वहां से 3-4 घंटे टैक्सी में सफर करना पड़ता है. ऐसे में अगर आप कम बजट में जल्दी और आसान यात्रा चाहते हैं, साथ ही एडवेंचर और बर्फ का मजा लेना चाहते हैं, तो मनाली सबसे अच्छा ऑप्शन है, लेकिन अगर आप थोड़ा ज्यादा खर्च कर सकते हैं और एक शांत, सुंदर और प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना चाहते हैं, तो दार्जिलिंग एक बेहतरीन जगह है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dosa Making Tips: तवे पर बनने वाला पहला डोसा हमेशा हो जाता है खराब, ये टिप्स आजमाए तो नहीं होगी दिक्कत</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Perfect Crispy Dosa At Home: तवे पर बनने वाला पहला डोसा अक्सर खराब हो जाता है या तो चिपक जाता है, या सही से फैलता नहीं, या फिर टूट जाता है. यह समस्या इतनी आम है कि कई लोग इसे नॉर्मल मान लेते हैं. लेकिन सच यह है कि इसके पीछे कुछ खास कारण होते हैं, जिन्हें समझ लिया जाए तो हर बार परफेक्ट डोसा बनाना मुश्किल नहीं रहता. चलिए आपको बताते हैं कि आप परफेक्ट डोसा कैसे बना सकते हैं.
क्या चीजें होती हैं जरूरी?
दरअसल, डोसा बनाना सिर्फ बैटर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि तवा, तापमान और तकनीक तीनों का संतुलन जरूरी होता है. जब आप पहला डोसा डालते हैं, तो तवा अक्सर सही स्थिति में नहीं होता. &amp;nbsp;यही वजह है कि शुरुआत में गड़बड़ी हो जाती है.&amp;nbsp;
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तवा सही से तैयार करना
सबसे बड़ा कारण है तवे का सही तरीके से तैयार न होना. अगर तवा ठीक से गर्म नहीं हुआ है, तो बैटर सीधे सतह से चिपक जाता है. खासकर लोहे के तवे में यह समस्या ज्यादा दिखती है. एक अच्छी तरह से इस्तेमाल किया गया और हल्का तेल लगा तवा ही डोसा बनाने के लिए सही रहता है.
तापमान का संतुलन
दूसरी बड़ी गलती होती है तापमान का संतुलन बिगड़ना. अगर तवा बहुत ज्यादा गरम है, तो बैटर डालते ही जम जाता है और फैल नहीं पाता. इससे डोसा मोटा और असमान बनता है. वहीं अगर तवा ठंडा है, तो बैटर सेट ही नहीं होता और चिपकने लगता है. सही तरीका यह है कि तवा मध्यम आंच पर हो. आप पानी की कुछ बूंदें डालकर चेक कर सकते हैं, अगर बूंदें धीरे-धीरे सूखें, तो तापमान सही है. तवे की सतह भी बहुत मायने रखती है. अगर उस पर पुराना तेल, जली हुई परत या नमी रह जाती है, तो डोसा सही से नहीं बनता. इसलिए हर डोसा बनाने से पहले तवे को हल्के कपड़े या प्याज के टुकड़े से साफ करना एक अच्छा तरीका माना जाता है.
तेल का सही से यूज
तेल का इस्तेमाल भी संतुलित होना चाहिए. बहुत कम तेल होगा तो बैटर चिपकेगा और ज्यादा तेल होगा तो वह फैल नहीं पाएगा. हल्की और बराबर मात्रा ही सही रहती है. एक और जरूरी बात जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वह है बैटर की कंसिस्टेंसी. बहुत गाढ़ा बैटर ठीक से फैलता नहीं और बहुत पतला बैटर अपनी पकड़ खो देता है. बैटर स्मूद और बहने वाला होना चाहिए, तभी डोसा सही टेक्सचर के साथ बनेगा.&amp;nbsp;
इस चीज का रखें ध्यान
&amp;nbsp;कई बार लोग डोसा जल्दी पलटने या उठाने की कोशिश करते हैं, जिससे वह टूट जाता है. सही समय तब होता है जब किनारे हल्के उठने लगें और रंग सुनहरा हो जाए. तवे की क्वालिटी भी फर्क डालती है. अच्छा तवा हीट को बराबर फैलाता है और डोसा आसानी से बनता है.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Egg Freezing Process: तेजी से बढ़ रहा एग फ्रिजिंग का क्रेज, जानिए कितना दर्दनाक होता है इसका तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ 
Egg Freezing Process: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाओं की प्राथमिकता तेजी से बदल रही है. पढ़ाई, करियर और आर्थिक स्थिरता के बीच मां बनने का फैसला अक्सर टलता जा रहा है, लेकिन शरीर की अपनी एक जैविक घड़ी होती है जो समय के साथ बदलती रहती है. ऐसे में आधुनिक मेडिकल तकनीक ने महिलाओं को एग फ्रीजिंग का एक नया ऑप्शन दिया है. पिछले कुछ सालों में भारत के बड़े शहरों में एग फ्रीजिंग की तकनीक को लेकर रुचि तेजी से बढ़ी है और अब ज्यादा महिलाएं इसे अपने लगी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एग फ्रीजिंग का क्रेज तेजी से कैसे बढ़ रहा है और यह तरीका कितना दर्दनाक होता है.
क्या है एग फ्रीजिंग?
एग फ्रीजिंग, जिसे मेडिकल भाषा में ओओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन कहा जाता है. यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें महिला के अंडों को निकालकर बहुत कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है. बाद में जब महिला मां बनने के लिए तैयार होती है तो इन्हीं अंडों का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसका मकसद अंडों की मौजूदा गुणवत्ता को सुरक्षित रखना होता है, ताकि बढ़ती उम्र का असर उन पर न पड़े.
कैसे होती है एग फ्रीजिंग की पूरी प्रक्रिया?
एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया की शुरुआत फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लेने से होती है. इसके बाद महिलाओं को कुछ समय तक हार्मोनल दवाएं दी जाती है, जिससे अंडों का उत्पादन बढ़ाया जा सके. जब अंडे तैयार हो जाते हैं तो एक छोटी मेडिकल प्रक्रिया के जरिए उन्हें शरीर से निकाला जाता है. इसके बाद इन अंडों को विशेष तकनीक से फ्रिज करके सुरक्षित स्टोर कर लिया जाता है.
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कितना दर्दनाक होता है एग फ्रीजिंग का तरीका?
एग फ्रीजिंग को आमतौर पर सुरक्षित प्रक्रिया माना जाता है और यह बहुत दर्दनाक नहीं होती है. हालांकि हार्मोनल दवाओं के कारण कुछ महिलाओं को सूजन, मूड स्विंग, सिर दर्द या थकान जैसी समस्या हो सकती है. अंडे निकालने के बाद अगला हल्का दर्द या असहजता महसूस हो सकती है. लेकिन यह लक्षण आमतौर पर कुछ समय में ठीक हो जाते हैं. हालांकि गंभीर समस्याएं बहुत कम मामलों में देखने को मिलती है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार एग फ्रीजिंग के लिए 30 से 34 साल की उम्र सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इस समय अंडों की गुणवत्ता और संख्या बेहतर होती है. 35 साल के बाद फर्टिलिटी में गिरावट शुरू हो जाती है, जिससे सफलता की संभावना कब हो सकती है.
क्यों बढ़ रहा एग फ्रीजिंग का ट्रेंड?
आजकल कई महिलाएं करियर या पर्सनल कारणों से देर से शादी या मां बनने का फैसला करती है. इसके अलावा कुछ मेडिकल स्थितियों जैसे कैंसर या हार्मोनल समस्याओं के कारण भी एग फ्रीजिंग एक ऑप्शन बन जाता है. यही वजह है कि बड़े शहरों में इस तकनीक को लेकर जागरूकता और मांग दोनों बढ़ रही है. वहीं आपको बता दे की एग फ्रीजिंग का खर्च अलग-अलग क्लीनिक और शहरों के हिसाब से बदल सकता है. आमतौर पर एक साइकिल का खर्च करीब 1 लाख से 2.5 लख रुपये के बीच होता है. इसके अलावा अंडों को स्टोर करने का सालाना खर्च भी अलग से देना पड़ता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Healthy Sleep Habits: जल्दी उठना सेहत का राज है या मिथक? जानिए नींद से जुड़ा ये चौंकाने वाला सच</title>
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        <description><![CDATA[ How Sleep Affects Lung Function And Breathing: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जल्दी उठना जैसे सफलता का पैमाना बन गया है. वहीं दूसरी तरफ देर रात तक जागना भी आम हो चुका है कि कभी काम की वजह से, तो कभी स्क्रीन के कारण. ऐसे में सवाल उठता है कि शरीर वास्तव में क्या चाहता है? इसका जवाब समय से कम और शरीर की लय, नियमितता और बायोलॉजिकल प्रोसेस से ज्यादा जुड़ा है. नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि शरीर की मरम्मत का एक तयशुदा सिस्टम है, और जब इसका समय बिगड़ता है तो असर साफ दिखता है.
कैसे तय होता है नींद और जागने का अनुभव
हमारे दिमाग में एक बॉडी क्लॉक होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है. यह रोशनी और अंधेरे के हिसाब से काम करती है और शरीर को संकेत देती है कि कब जागना है और कब सोना है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, यही सिस्टम मेलाटोनिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन को कंट्रोल करता है, जो नींद और जागने के अनुभव को तय करते हैं. जब हमारी नींद इस लय के साथ तालमेल में होती है, तो शरीर बेहतर तरीके से काम करता है. लेकिन जब यह तालमेल बिगड़ता है, तो पूरी नींद लेने के बाद भी थकान बनी रहती है.&amp;nbsp;
देर से उठने का क्या होता है असर
आजकल देर से सोना और सुबह जल्दी उठना एक आम आदत बन चुकी है. लेकिन इसका सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है. खासकर गहरी नींद और REM स्लीप कम हो जाती है, जो शरीर की रिकवरी के लिए जरूरी होती है. डॉ. समीर गार्डे बताते हैं कि अगर कोई देर से सोता है और जल्दी उठता है, तो REM नींद पूरी नहीं हो पाती. यही वह समय होता है जब मांसपेशियां रिकवर करती हैं और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बेहतर रहता है. अस्थमा या लंग्स की समस्या वाले लोगों के लिए यह और भी नुकसानदेह हो सकता है.&amp;nbsp;
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क्या जल्दी उठने का कोई फायदा है
जल्दी उठना अक्सर अनुशासन और प्रोडक्टिविटी से जोड़ा जाता है. इसमें कुछ सच्चाई भी है क्योंकि सुबह की धूप शरीर की घड़ी को रीसेट करती है और दिनभर सतर्कता बढ़ाती है. &amp;nbsp;लेकिन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, वयस्कों को रोजाना 7-9 घंटे की नींद चाहिए, चाहे वे कब सोएं. यानी असली फायदा जल्दी उठने में नहीं, बल्कि एक नियमित नींद के पैटर्न में है. अनियमित नींद का असर सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहता. यह शरीर में सूजन बढ़ा सकता है, लंग्स के कामकाज को प्रभावित करता है और इम्यूनिटी को कमजोर करता है. नेशनल हेल्थ सर्विस के स्टडी भी बताते हैं कि खराब नींद शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को कम कर देती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 06 May 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Baby Cream As Moisturizer: बेबी क्रीम से मॉइश्चराइजर और पाउडर से ड्राई शैम्पू, एक्सपर्ट्स इसे लेकर क्यों दे रहे वॉर्निंग?</title>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Breast Cancer in Young Women: युवा महिलाओं में क्यों बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर? ये शुरुआती लक्षण अक्सर किए जाते हैं नजरअंदाज</title>
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Breast Cancer in Young Women: ब्रेस्ट कैंसर को लंबे समय तक एक ऐसी बीमारी माना जाता है जो ज्यादातर उम्रदराज महिलाओं को प्रभावित करती है. लेकिन अब यह धारणा बदल रही है. हाल ही के वर्षों में युवाओं खासकर कम उम्र की महिलाओं में भी इसके मामलों में बढ़ोतरी देखे जा रही है. आंकड़े बताते हैं कि युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में हर साल बढ़ोतरी हो रही है, जो चिंता का विषय बनती जा रही है. आंकड़ों के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर की दर 2012 से 2022 के बीच लगभग 1.4 प्रतिशत प्रति वर्ष थी जो 50 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाओं की तुलना में ज्यादा है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं और डॉक्टर इसकी शुरुआती लक्षण क्या बताते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है.
युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे का कारण
शराब का ज्यादा सेवन
एक्सपर्ट्स के अनुसार भारत में युवा आबादी ज्यादा होने की वजह से भी इस आयु वर्ग में मरीजों की संख्या ज्यादा दिखाई देती है. इसके अलावा लाइफस्टाइल से जुड़े कई कारण भी खतरा बढ़ा देते हैं. जैसे शराब का सेवन एक बड़ा कारण माना जा रहा है. क्योंकि यह शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को प्रभावित कर सकता है और डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है
मोटापे में बढ़ोतरी
मोटापे और निष्क्रिय लाइफस्टाइल भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं. क्योंकि इससे हार्मोनल असंतुलन और सूजन जैसी समस्याएं होती है जो कैंसर के विकास से जुड़ी होती है.
जेनेटिक कारक
इसके अलावा कुछ मामलों में जेनेटिक कारण भी ब्रेस्ट कैंसर में बड़ी भूमिका निभाते हैं. जैसे BRCA1 और BRCA2 जिन में बदलाव. हालांकि अधिकांश मामलों में ब्रेस्ट कैंसर जेनेटिक नहीं होता है.
एनवायरमेंटल कारक
पर्यावरण से जुड़े कारक जैसे प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले कारकों में शामिल माने जा रहे हैं. हालांकि इस पर भी अभी रिसर्च और रिसर्च जारी है.
स्क्रीनिंग की कमी और देरी से पहचान
एक्सर्ट्स का कहना है कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर के लिए व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं है. साथ ही यह धारणा की युवा महिलाओं में यह बीमारी नहीं होती है, कई बार सही समय पर जांच में देरी का कारण बनती है. जागरूकता की कमी और सामाजिक झिझक भी इसके पीछे अहम वजह मानी जाती है.
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण जिन्हें कर दिया जाता है नजरअंदाज &amp;nbsp;
डॉक्टरों के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती संकेत अक्सर बहुत हल्के होते हैं, जिन पर लोग ध्यान नहीं देते हैं. जैसे ब्रेस्ट में छोटा और बिना दर्द वाली गांठ बनना, हल्की असहता, स्किन में बदलाव या थकान जैसे संकेत. इसके अलावा निप्पल से असामान्य ब्लड, ब्रेस्ट के आकार या बनावट में बदलाव और लगातार रहने वाली हल्की परेशानी भी शुरुआती संकेत हो सकते हैं. बिजी लाइफस्टाइल के चलते कई महिला इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देती है, जिससे बीमारी का पता देर से चलता है. ये भी पढ़ें-दिल्ली में हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए स्पेशल यूनिट, जानें कैसे मिलेगा इसका फायदा?
युवा महिलाओं में पहचान क्यों हो जाती है मुश्किल?एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कम उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट टिश्यू ज्यादा घना होता है, जिससे जांच के दौरान छोटे बदलाव पकड़ना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा कई बार लक्षणों को सामान्य समस्याएं मान लिया जाता है, जैसे हार्मोनल बदलाव या फाइब्रोएडेनोमा. वहीं सामाजिक झिझक, डर और जागरूकता की कमी भी समय पर डॉक्टर के पास जाने में बाधा बनती है, जिससे बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Breast, Cancer, Young, Women:, युवा, महिलाओं, में, क्यों, बढ़, रहा, ब्रेस्ट, कैंसर, ये, शुरुआती, लक्षण, अक्सर, किए, जाते, हैं, नजरअंदाज</media:keywords>
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        <title>Kidney Stones: अचानक होने वाले कमर दर्द को मान रहे हैं नॉर्मल? कहीं यह किडनी स्टोन तो नहीं!</title>
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        <description><![CDATA[ What Causes Sudden Lower Back Pain: अचानक कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द होना आम बात लग सकती है. अक्सर लोग इसे लंबे समय तक बैठने, गलत तरीके से सोने या हल्की मोच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हर बार दर्द मांसपेशियों से जुड़ा हो, ऐसा जरूरी नहीं. कई बार यह शरीर का इशारा होता है कि अंदर कुछ और गंभीर हो रहा है, खासकर किडनी से जुड़ी समस्या. चलिए आपको बताते हैं कि एक्सपर्ट क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
किडनी स्टोन यानी पथरी ऐसी ही एक स्थिति है, जो बिना किसी चेतावनी के सामने आ सकती है और दर्द इतना तेज होता है कि समझ पाना मुश्किल हो जाता है. डॉ. अंकुर भटनागर ने TOI को बताया कि अचानक शुरू होने वाला कमर दर्द कई बार किडनी या यूरिन नली में पथरी का संकेत होता है. यह दर्द एक जगह टिकता नहीं, बल्कि कमर से आगे की तरफ पेट या जांघ के पास तक फैल सकता है, जो इसकी सबसे बड़ी पहचान है.
डॉ. रितेश मोंगा भी बताते हैं कि यह दर्द अक्सर कमर के किनारे से शुरू होकर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता है. &amp;nbsp;यही वजह है कि इसे सामान्य कमर दर्द समझने की गलती हो जाती है, जबकि मांसपेशियों का दर्द आमतौर पर एक ही जगह रहता है.
क्या होती है दिक्कत?
असल में जब पथरी किडनी से निकलकर यूरिन के रास्ते में फंस जाती है, तो यूरिन का फ्लो रुक जाता है. इससे किडनी में दबाव बढ़ता है और तेज दर्द महसूस होता है. यह दर्द लहरों की तरह आता-जाता है, कभी बहुत तेज और कभी थोड़ा कम. डॉ. मोंगा के अनुसार, पथरी का आकार छोटा हो या बड़ा, दर्द की तीव्रता उससे हमेशा तय नहीं होती.&amp;nbsp;
ये होते हैं संकेत
इसके साथ कुछ और संकेत भी दिख सकते हैं, जैसे उल्टी आना, पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब की इच्छा और कभी-कभी पेशाब में खून आना. कई लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और दर्द कम करने की दवाइयां लेकर काम चलाते रहते हैं. डॉ. भटनागर चेतावनी देते हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा दर्दनाशक दवाइयां लेने से किडनी को स्थायी नुकसान हो सकता है.
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आजकल यह समस्या पहले से ज्यादा आम होती जा रही है, खासकर शहरों में रहने वाले लोगों में. कम पानी पीना, ज्यादा नमक या मीठा खाना, मोटापा और डायबिटीड जैसी बीमारियां इसका खतरा बढ़ाती हैं. भारत जैसे गर्म देश में डिहाइड्रेशन भी एक बड़ा कारण है, जहां शरीर को जरूरत से कम पानी मिल पाता है.
पहले की तुलना में इलाज आसान
अच्छी बात यह है कि अब इसका इलाज पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. डॉ. भटनागर बताते हैं कि अब बिना चीरा लगाए आधुनिक तकनीकों से पथरी का इलाज संभव है. वहीं डॉ. मोंगा कहते हैं कि कई मामलों में लेजर तकनीक से भी बिना कट के पथरी हटाई जा सकती है. फिर भी सबसे जरूरी है समय पर ध्यान देना. अगर दर्द अचानक, तेज और जगह बदलने वाला हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर जांच और इलाज से बड़ी समस्या बनने से रोका जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?</title>
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        <description><![CDATA[ Early Signs Of Vitamin D Deficiency: विटामिन डी की कमी अक्सर अचानक सामने नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे शरीर में असर दिखाती है. शुरुआत में बस हल्की थकान महसूस होती है, मूड ठीक नहीं रहता और शरीर पहले से ज्यादा भारी लगने लगता है. आमतौर पर लोग इसे रोजमर्रा की थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही संकेत किसी गहरी कमी की ओर इशारा करते हैं.&amp;nbsp;
फंक्शनल न्यूट्रिशनिस्ट मुग्धा प्रधान, सीईओ और फाउंडर ऑफ iThrive ने TOI को बताया कि विटामिन डी सिर्फ एक विटामिन नहीं है, बल्कि यह शरीर में हार्मोन की तरह काम करता है. जब इसका स्तर कम होता है, तो शरीर पहले हल्के संकेत देता है और बाद में असर ज्यादा साफ दिखने लगता है.&amp;nbsp;
क्या होते हैं इसके कमी के संकेत?
ऐसी थकान जो आराम से भी दूर न हो, इस कमी का एक बड़ा संकेत हो सकती है. कई बार पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर में ऊर्जा महसूस नहीं होती. मुग्धा प्रधान के अनुसार, कम विटामिन डी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सेल्स में एनर्जी बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. यही वजह है कि व्यक्ति को हमेशा थकान महसूस होती है, जैसे शरीर पूरी तरह चार्ज ही नहीं हो पा रहा हो.&amp;nbsp;
बार-बार बीमार पड़ना भी संकेत
बार-बार बीमार पड़ना भी एक अहम संकेत है. छोटी-छोटी बीमारियां जल्दी-जल्दी होना और उनसे उबरने में ज्यादा समय लगना इस ओर इशारा करता है कि शरीर की इम्यूनिटी सही तरीके से काम नहीं कर रही. मुग्धा प्रधान बताती हैं कि विटामिन डी शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को संतुलित रखने में मदद करता है और इसकी कमी होने पर यह संतुलन बिगड़ जाता है.
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मूड खराब होना भी पहचान
मूड में लगातार गिरावट भी इस कमी से जुड़ी हो सकती है. बिना किसी खास वजह के चिड़चिड़ापन, उदासी या दिमाग का ठीक से काम न करना जैसे लक्षण नजर आते हैं. विटामिन डी दिमाग में उन केमिकल्स को प्रभावित करता है, जो हमारे मूड को नियंत्रित करते हैं. यही कारण है कि धूप में समय बिताने से मन हल्का महसूस होता है. इसके अलावा शरीर में बिना वजह दर्द और कमजोरी भी दिख सकती है. मांसपेशियों में हल्का दर्द, कमर में जकड़न या ताकत कम होना ऐसे संकेत हैं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. समय के साथ यह समस्या हड्डियों को भी प्रभावित कर सकती है.&amp;nbsp;
लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार
आज की जीवनशैली भी इस कमी को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है. लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना, धूप की कमी और संतुलित आहार न लेना इसके मुख्य कारण हैं. मुग्धा प्रधान सलाह देती हैं कि अगर थकान, मूड में बदलाव और शरीर में दर्द एक साथ महसूस हो रहे हों, तो इसे नजरअंदाज न करें और जांच करवाना बेहतर रहता है. इससे बचाव के लिए रोजाना कुछ समय धूप में बिताना जरूरी है, खासकर सुबह या शाम के समय. इसके साथ ही खानपान में पोषण से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए. हालांकि, किसी भी तरह के सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Dopamine Burnout: क्या सब कुछ होते हुए भी लगता है खालीपन? जानिए क्या होता है &amp;apos;डोपामिन बर्नआउट&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ How To Reset Dopamine Levels Naturally: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में एक अजीब सा बदलाव महसूस हो रहा है. पहले छोटी-छोटी चीजें भी खुशी दे जाती थीं. किसी दोस्त का मैसेज, वीकेंड का प्लान या पसंदीदा खाना भी मूड अच्छा कर देता था. लेकिन अब वही चीजें उतनी खास नहीं लगतीं. जैसे सब कुछ होते हुए भी अंदर से कोई खालीपन सा महसूस होता है. &amp;nbsp;इस बदलाव को अक्सर लोग तनाव या उम्र बढ़ने का असर मान लेते हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरी वजह हो सकती है, जिसे आजकल डोपामिन बर्नआउट कहा जा रहा है. यह कोई आधिकारिक बीमारी नहीं है, लेकिन इसका अनुभव बिल्कुल वास्तविक है.&amp;nbsp;
क्या होता है डोपामिन&amp;nbsp;
clevelandclinic के अनुसार, डोपामिन को आमतौर पर फील गुड केमिकल कहा जाता है, लेकिन असल में यह खुशी से ज्यादा मोटिवेशन और एक्सपेक्टेशन से जुड़ा होता है. यही हमें नई चीजें करने, खोजने और बार-बार कोशिश करने के लिए प्रेरित करता है. जब दिमाग लगातार तेज़ और आसान उत्तेजनाओं के संपर्क में रहता है, तो धीरे-धीरे इसकी संवेदनशीलता कम होने लगती है. मतलब, जितनी ज्यादा उत्तेजना मिलेगी, उतनी ही कम उसका असर महसूस होगा.&amp;nbsp;
बिगड़ रहा है ब्रेन का संतुलन
आज की डिजिटल दुनिया में हर समय कुछ न कुछ नया देखने को मिल जाता है. छोटे वीडियो, नोटिफिकेशन और लगातार स्क्रॉल करने की आदत दिमाग को तुरंत मिलने वाले छोटे-छोटे रिवॉर्ड्स की आदत डाल देती है. पहले जहां मेहनत के बाद खुशी मिलती थी, अब बिना मेहनत के सब कुछ तुरंत उपलब्ध है. इससे दिमाग का मेहनत और इनाम वाला संतुलन बिगड़ जाता है.&amp;nbsp;
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तनाव और थकान का भी असर
इसके साथ ही लगातार तनाव और थकान भी डोपामिन सिस्टम को प्रभावित करते हैं. जब शरीर थका होता है, तो दिमाग का फोकस सिर्फ सर्वाइव करने पर रहता है, न कि खुशी महसूस करने पर. ऊपर से सोशल मीडिया पर दूसरों की सजी-धजी जिंदगी देखकर अपनी सामान्य जिंदगी भी कमतर लगने लगती है.
क्या होते हैं इसके संकेत
डोपामिन बर्नआउट के संकेत धीरे-धीरे सामने आते हैं. जो चीजें पहले अच्छी लगती थीं, वे अब फीकी लगने लगती हैं. मोटिवेशन कम हो जाता है, ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है और बिना वजह बेचैनी बनी रहती है. इससे बाहर निकलने के लिए किसी कठोर बदलाव की जरूरत नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे संतुलन बनाने की जरूरत होती है. सबसे पहले लगातार मिलने वाली आसान उत्तेजनाओं को थोड़ा कम करना चाहिए. मोबाइल या स्क्रीन टाइम घटाने से फर्क पड़ता है. &amp;nbsp;इसके साथ ही ऐसी गतिविधियों को शामिल करना जरूरी है जिनमें मेहनत लगती हो, जैसे चलना, पढ़ना या कुछ नया सीखना. &amp;nbsp;बोरियत को भी थोड़ा जगह देना जरूरी है, क्योंकि वहीं से दिमाग फिर से सामान्य संवेदनशीलता हासिल करता है. &amp;nbsp;अच्छी नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी इसमें मदद करती है.
इसे भी पढ़ें -Pregnancy Care in Summer: बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Dopamine, Burnout:, क्या, सब, कुछ, होते, हुए, भी, लगता, है, खालीपन, जानिए, क्या, होता, है, डोपामिन, बर्नआउट</media:keywords>
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        <title>दिल्ली में हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए स्पेशल यूनिट, जानें कैसे मिलेगा इसका फायदा?</title>
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        <description><![CDATA[ उत्तर भारत में बढ़ती भीषण गर्मी और लू के खतरे के बीच दिल्ली के Dr. Ram Manohar Lohia Hospital ने गंभीर हीट स्ट्रोक मरीजों के इलाज के लिए विशेष यूनिट तैयार की है. यहां मरीजों का शरीर का तापमान तेजी से कम करने के लिए &amp;lsquo;कोल्ड वॉटर इमर्शन&amp;rsquo; तकनीक अपनाई जा रही है. माना जा रहा है कि इस साल भीषण गर्मी पड़ सकती है. ऐसे में यह व्यवस्था गर्मी से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत और जीवन बचाने की अहम कोशिश बन रही है.
गर्मी के बीच अस्पताल की तैयारी
भीषण गर्मी और लू के बढ़ते असर को देखते हुए अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में खास इंतजाम किए गए हैं. स्पेशल यूनिट में बर्फ से भरे टब, मॉनिटरिंग मशीनें और जरूरी मेडिकल उपकरण मौजूद हैं.&amp;nbsp;
कैसे काम करती है &amp;lsquo;कोल्ड वॉटर इमर्शन&amp;rsquo; तकनीक?
हीट स्ट्रोक मरीजों के इलाज के लिए &amp;lsquo;कोल्ड वॉटर इमर्शन&amp;rsquo; तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसमें टब में तेजी से पानी भरा जाता है और करीब 50 किलो बर्फ डाली जाती है. मरीज को ठंडे पानी में रखा जाता है, ताकि शरीर का तापमान जल्दी कम किया जा सके. डॉक्टरों के अनुसार, यह तकनीक गंभीर मरीजों के लिए बेहद असरदार मानी जाती है.
डेमो और इलाज की प्रक्रिया
इस तकनीक को समझाने के लिए वॉलंटियर के साथ डेमो भी किया गया है. डेमो में दिखाया गया है कि मरीज को किस तरह टब में रखा जाता है. मरीज की गर्दन का हिस्सा बाहर रहता है, जबकि शरीर का बाकी हिस्सा पानी के अंदर रखा जाता है. इलाज के दौरान लगातार मॉनिटरिंग की जाती है, ताकि मरीज की स्थिति पर नजर रखी जा सके.
क्या कहते हैं डॉक्टर?
Dr. Amlendu Yadav बताते हैं कि हीट स्ट्रोक में हर मिनट बेहद जरूरी होता है. मरीज का इलाज घर से शुरू किया जा सकता है, लेकिन शरीर का तापमान 104&amp;ndash;105 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंचने पर अस्पताल में इलाज जरूरी हो जाता है. &amp;nbsp;इस स्थिति में शरीर तापमान नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है. मरीज को तेजी से हाइड्रेट किया जाता है और शरीर का तापमान कम करने की कोशिश की जाती है. इलाज में देरी होने पर मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है.
अस्पताल में कैसे किया जाता है इलाज?
इलाज के दौरान हार्ट रेट, ऑक्सीजन सैचुरेशन, कोर बॉडी टेम्परेचर और पानी के तापमान पर लगातार नजर रखी जाती है. पानी का तापमान 1 से 5 डिग्री के बीच रखा जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज के शरीर का तापमान 38 डिग्री तक लाना जरूरी होता है।. हर मरीज को लगभग 25 से 35 मिनट तक इस थैरेपी में रखा जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, हीट स्ट्रोक बेहद खतरनाक स्थिति है. अगर समय पर इलाज न मिले तो मृत्यु दर 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
फील्ड और एम्बुलेंस में ऐसे किया जाता है शुरुआती इलाज
अस्पताल में इन्फ्लेटेबल टब की सुविधा भी मौजूद है, जिसमें जरूरत पड़ने पर मरीज का इलाज किया जा सकता है. इसके अलावा तिरपाल के जरिए &amp;lsquo;टाको तकनीक&amp;rsquo; का इस्तेमाल भी किया जाता है. इसमें मरीज को 20&amp;ndash;25 किलो बर्फ के साथ रखा जाता है. इस तकनीक का इस्तेमाल एम्बुलेंस और फील्ड में भी किया जा सकता है.
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, सिक्योरिटी गार्ड, कंस्ट्रक्शन वर्कर, प्रेग्नेंट महिलायें , पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी जैसे लोग ज्यादा समय तक धूप में रहते हैं. इस वजह से इन्हें हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>दिल्ली, में, हीट, स्ट्रोक, मरीजों, के, लिए, स्पेशल, यूनिट, जानें, कैसे, मिलेगा, इसका, फायदा</media:keywords>
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        <title>Phuchka Vs Golgappa: कैसे बनता है बंगाल का फुचका, गोलगप्पों से कितना अलग?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/phuchka-vs-golgappa-कैसे-बनता-है-बंगाल-का-फुचका-गोलगप्पों-से-कितना-अलग</link>
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        <description><![CDATA[ Difference Between Phuchka And Golgappa: 4 मई को पश्चिम बंगाल सहित देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने वाले हैं. ऐसे में यहां के स्ट्रीट फूड की भी खूब चर्चा देखने को मिल रही है. देश के अलग-अलग शहरों में एक ही स्ट्रीट फूड अलग-अलग नाम और स्वाद के साथ मिलता है. कहीं इसे पानीपुरी कहा जाता है, तो कहीं गोलगप्पा और कोलकाता पहुंचते ही यही फुचका बन जाता है. नाम बदलते हैं, लेकिन असली फर्क इसके स्वाद, पानी और भरावन में छिपा होता है.&amp;nbsp;
कितना अलग है पश्चिम बंगाल का पुचका&amp;nbsp;
अगर बात करें बंगाल के फुचका की, तो इसकी पहचान सबसे पहले उसके खट्टे और तीखे स्वाद से होती है. दिल्ली के गोलगप्पे जहां इमली और पुदीने के पानी के लिए जाने जाते हैं, वहीं फुचका का पानी ज्यादा खट्टा और तेज होता है. इसमें काला नमक और मसालों की मात्रा ज्यादा होती है, जो इसे एक अलग तीखा स्वाद देता है. यही वजह है कि इसका हर निवाला ज्यादा चटपटा और जोरदार लगता है.&amp;nbsp;
पुचका और गोलगप्पे में फर्क
फुचका और गोलगप्पे के बीच दूसरा बड़ा फर्क इसकी भरावन में दिखता है. गोलगप्पे में आमतौर पर उबले आलू और सफेद चने का इस्तेमाल होता है, जो स्वाद में हल्का और सीधा होता है. वहीं फुचका में आलू के साथ काले चने, मसाले, हरी मिर्च और इमली का गूदा मिलाया जाता है. यह मिश्रण ज्यादा मसालेदार और गहरा स्वाद देता है, जिससे हर बाइट में अलग ही मजा आता है.
दोनों की बनावट में अतर
आकार और बनावट भी दोनों को अलग बनाती है. फुचका आमतौर पर थोड़ा बड़ा और पतला होता है, जबकि गोलगप्पा छोटा और ज्यादा कुरकुरा होता है. यही वजह है कि फुचका खाते समय उसमें ज्यादा भरावन और पानी आता है, जिससे स्वाद और भी गहरा महसूस होता है.
कैसे तैयार होता है पुचका
अगर बनाने की बात करें, तो फुचका तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प होती है. सबसे पहले सूजी और आटे से छोटी-छोटी पूरियां बनाई जाती हैं, जिन्हें तलकर या बेक करके कुरकुरा किया जाता है. इसके बाद आलू और काले चनों को मसालों के साथ अच्छे से मिलाकर भरावन तैयार किया जाता है. इसमें भुना जीरा, काला नमक, चाट मसाला और इमली का स्वाद मिलाया जाता है.
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पानी का स्वाद
फुचका का असली स्वाद उसके पानी में छिपा होता है. इसके लिए इमली, पुदीना, हरी मिर्च और मसालों को मिलाकर एक खट्टा-तीखा पानी तैयार किया जाता है. इसे ठंडा करके रखा जाता है ताकि स्वाद और बेहतर हो सके. परोसने के समय पूरियों में हल्का सा छेद करके उसमें मसालेदार भरावन भरा जाता है और फिर उसे इस खास पानी में डुबोकर तुरंत खाया जाता है. यही ताजगी और तेज स्वाद इसे बाकी जगहों के गोलगप्पों से अलग बनाता है.
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <description><![CDATA[ Early Signs Of Heat Stroke In Summer: गर्मी बढ़ते ही शरीर कई बार ऐसे संकेत देने लगता है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यही छोटे-छोटे संकेत आगे चलकर लू जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकते हैं. लू तब लगती है जब शरीर का तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता. ऐसी स्थिति में समय रहते सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है.&amp;nbsp;
लू लगने से पहले शरीर में क्या होते हैं बदलाव?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार, लू लगने से पहले शरीर कई तरह के बदलाव दिखाता है. शुरुआत में हल्का चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना और सिर भारी लगना जैसे संकेत सामने आते हैं. कई बार व्यक्ति को उल्टी जैसा महसूस होता है या पेट भी खराब हो सकता है. यह वह समय होता है जब शरीर पहले ही चेतावनी दे रहा होता है कि अब ज्यादा देर तक गर्मी सहन करना मुश्किल हो रहा है.&amp;nbsp;
धीरे-धीरे गंभीर होती है स्थिति
धीरे-धीरे ये लक्षण और गंभीर हो सकते हैं. शरीर का तापमान बढ़ने लगता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और सांस भी सामान्य से तेज चलने लगती है. कुछ लोगों को पसीना आना बंद हो जाता है, जबकि कुछ मामलों में अत्यधिक पसीना भी देखा जाता है. त्वचा लाल या असामान्य रूप से सूखी लग सकती है. सबसे खतरनाक संकेत तब होते हैं जब इसका असर दिमाग पर पड़ने लगता है. व्यक्ति को भ्रम होने लगता है, बात करने में परेशानी होती है या वह सामान्य तरीके से सोच नहीं पाता. कुछ मामलों में बेहोशी भी आ सकती है. यही वह स्थिति है, जब लू जानलेवा बन सकती है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है.
लू लगने के क्या होते हैं कारण?
अब बात करते हैं इसके कारण की, तो &amp;nbsp;लू लगने के पीछे कई कारण होते हैं. तेज धूप में लंबे समय तक रहना, बंद और गर्म जगहों में रहना या बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करना इसका मुख्य कारण बनता है. जब शरीर जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है और पसीने के जरिए खुद को ठंडा नहीं कर पाता, तब यह समस्या पैदा होती है.
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किन लोगों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कत?
कुछ लोग दूसरों की तुलना में ज्यादा जोखिम में होते हैं. छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग जल्दी प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा जो लोग खुले में काम करते हैं या गर्मी में ज्यादा मेहनत करते हैं, उन्हें भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है.
इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
इससे बचने के लिए जरूरी है कि शरीर को समय-समय पर आराम दिया जाए. पर्याप्त पानी पीना, हल्के और ढीले कपड़े पहनना और तेज धूप से बचना बहुत जरूरी है. अगर किसी में शुरुआती लक्षण दिखें, तो तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें. लू कोई मामूली समस्या नहीं है. अगर शरीर के संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए, तो इससे बचा जा सकता है. लेकिन अगर इन्हें नजरअंदाज किया गया, तो यह स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है. इसलिए शरीर जो संकेत दे रहा है, उसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Childhood Diabetes: बच्चों में डायबिटीज पर सरकार का बड़ा कदम, फ्री स्क्रीनिंग और इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी</title>
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        <description><![CDATA[ Symptoms Of Diabetes In Children: भारत में बच्चों की सेहत को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. देश में पहली बार बच्चों में डायबिटीज के इलाज और देखभाल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में पब्लिक हेल्थ सर्विस से जुड़े राष्ट्रीय सम्मेलन में गाइडेंस डॉक्यूमेंट ऑन डायबिटीज मेलिटस इन चिल्ड्रेन पेश किया. यह डॉक्यूमेंट बच्चों में डायबिटीज की पहचान, जांच, इलाज और लंबे समय तक देखभाल के लिए एक साफ और व्यवस्थित तरीका तय करता है. इससे पहली बार बच्चों की डायबिटीज देखभाल को देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य सिस्टम से जोड़ा गया है.&amp;nbsp;
भारत में डायबिटीज की समस्या
भारत में डायबिटीज पहले से ही एक बड़ी समस्या है. देश को अक्सर डायबिटीज की राजधानी भी कहा जाता है, जहां करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं. अब बच्चों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. टाइप 1 डायबिटीज आमतौर पर बच्चों में देखने को मिलती है, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है. इसके पीछे जेनेटिक कारण, इंफेक्शन और बेहतर पहचान जैसी वजहें हो सकती हैं, वहीं टाइप 2 डायबिटीज में खानपान, जीवनशैली और शारीरिक गतिविधि की कमी बड़ी भूमिका निभाती है.&amp;nbsp;
गंभीर समस्याओं का कारण
अगर बच्चों में डायबिटीज का सही समय पर इलाज न हो, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. किडनी फेल होना, आंखों की रोशनी पर असर, दिल से जुड़ी बीमारी और कई मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है.&amp;nbsp;
पूरे देश में एक समान व्यवस्था&amp;nbsp;
नई गाइडलाइन के जरिए अब पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू की जाएगी. इसमें जन्म से लेकर 18 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग पर जोर दिया गया है. स्कूलों और समुदाय स्तर पर शुरुआती पहचान की जाएगी. अगर किसी बच्चे में लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे जिला अस्पताल भेजा जाएगा, जहां सही इलाज शुरू किया जाएगा.
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सरकारी अस्पतालों में बच्चों को मुफ्त इलाज&amp;nbsp;
इस योजना की खास बात यह है कि सरकारी अस्पतालों में बच्चों को मुफ्त इलाज मिलेगा. इसमें जरूरी जांच, इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप और नियमित फॉलोअप शामिल हैं. इससे खासतौर पर गरीब परिवारों को राहत मिलेगी, क्योंकि डायबिटीज का इलाज लंबे समय तक चलता है और खर्च भी ज्यादा होता है. नई व्यवस्था में इलाज की पूरी प्रक्रिया को आपस में जोड़ा गया है, ताकि कहीं भी रुकावट न आए. गांव और स्कूल स्तर से शुरू होकर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज तक इलाज की सुविधा उपलब्ध रहेगी. इससे बच्चों को लगातार देखभाल मिलती रहेगी, जो इस बीमारी में बहुत जरूरी है.
&amp;nbsp;4टी पर भी जोर&amp;nbsp;
जल्दी पहचान के लिए 4टी पर भी जोर दिया गया है. इसमें बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास लगना, लगातार थकान और अचानक वजन कम होना शामिल है. ये संकेत माता-पिता और शिक्षकों को समय रहते सतर्क कर सकते हैं. इसके साथ ही परिवार और देखभाल करने वालों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे बच्चों की सही देखभाल कर सकें. इंसुलिन देना, शुगर की जांच करना और इमरजेंसी में क्या करना है, इसकी जानकारी दी जाएगी.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Parenting Tips: क्या आप भी बच्चों पर थोप रहे हैं नियम? सानिया मिर्जा की यह बात खोल देगी आपकी आंखें!</title>
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        <description><![CDATA[  What Is The Right Way Of Parenting: बच्चों की परवरिश हमेशा से समाज, परंपराओं और परिवार की सोच से प्रभावित रही है. लेकिन पिछले कुछ सालों में लोगों का नजरिया काफी बदल गया है. अब सख्त नियमों की जगह समझ, लचीलापन और बच्चे की जरूरतों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. इसी बदलाव को सानिया मिर्जा के एक सरल लेकिन गहरे विचार में साफ देखा जा सकता है. उनका कहना है कि बच्चों की परवरिश के लिए कोई एक तय तरीका नहीं होता. सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चा स्वस्थ और खुश रहे. यही असली मापदंड होना चाहिए, न कि दूसरों से तुलना या समाज की उम्मीदें.
अलग होता है&amp;nbsp;हर परिवार 
यह सोच उनके अपने अनुभवों से जुड़ी है, जहां उन्होंने एक पब्लिक फिगर होने के साथ-साथ एक मां की भूमिका भी निभाई है. उनका मानना है कि हर परिवार अलग होता है, इसलिए एक ही तरीका सभी पर लागू नहीं हो सकता. यही कारण है कि आज के समय में पेरेंटिंग को ज्यादा व्यक्तिगत नजरिए से देखा जा रहा है. पहले जहां अनुशासन और तय नियमों पर जोर दिया जाता था, वहीं अब बच्चों की भावनाओं को समझना और उनसे खुलकर बात करना ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जब बच्चा खुद को सुरक्षित, समझा हुआ और महत्वपूर्ण महसूस करता है, तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
परवरिश केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं&amp;nbsp;
इस सोच में एक और जरूरी बात सामने आती है कि बच्चों की परवरिश केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए. आज के समय में माता-पिता दोनों काम करते हैं और घर की जिम्मेदारियां भी साझा करते हैं. ऐसे में बच्चों की देखभाल भी मिलकर करना ज्यादा संतुलित और असरदार होता है. इससे बच्चों का दोनों के साथ बेहतर जुड़ाव बनता है और परिवार में संतुलन बना रहता है.
अलग होता है हर बच्चा 
इसके अलावा, हर बच्चा अलग होता है. उसकी पसंद, उसकी आदतें और उसकी समझ अलग होती है. ऐसे में एक ही तरीका हर बच्चे पर लागू करना सही नहीं होता. लचीलापन ही वह चीज है जो माता-पिता को हर स्थिति के अनुसार अपने तरीके बदलने की आजादी देता है. भावनात्मक सहारा भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक देखभाल. जब माता-पिता बच्चों की बात सुनते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उन्हें समझने की कोशिश करते हैं, तो बच्चे खुद को ज्यादा सुरक्षित और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं.
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 उलझन होना स्वाभाविक
आज के समय में जहां हर जगह से सलाह मिलती है, वहां उलझन होना स्वाभाविक है. लेकिन यह सोच कि कोई एक सही तरीका नहीं है, माता-पिता को सुकून देती है. इससे वे अपने फैसलों पर भरोसा कर पाते हैं और बच्चों के लिए बेहतर माहौल बना सकते हैं. परवरिश का मतलब किसी तय ढांचे में फिट होना नहीं है, बल्कि बच्चे की जरूरतों को समझकर उसे खुश और स्वस्थ माहौल देना है. यही सोच आज के बदलते दौर में सबसे ज्यादा मायने रखती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 05 May 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Lauki Ki Barfi Recipe: घर पर ऐसे बनाएं लौकी की बर्फी, नोट कर लें रेसिपी</title>
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        <description><![CDATA[ Lauki Ki Barfi Recipe: घर पर ऐसे बनाएं लौकी की बर्फी, नोट कर लें रेसिपी ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 04 May 2026 12:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Screen Time Risk: बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम बना खतरे की घंटी, एम्स के डॉक्टरों ने दी सख्त चेतावनी</title>
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        <description><![CDATA[ राजधानी दिल्ली से सामने आई एक अहम चेतावनी ने पैरेंट्स की चिंता बढ़ा दी है. देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान एम्स के विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि बच्चों का ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके विकास पर गंभीर असर डाल सकता है. अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं.
जन्म के शुरुआती महीनों में स्क्रीन से दूरी जरूरी
पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी डिवीजन के फैकल्टी इंचार्ज प्रोफेसर शैफाली गुलाटी का कहना है कि जन्म से लेकर 18 महीने तक के बच्चों को मोबाइल, टीवी या किसी भी तरह की स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए. इस उम्र में बच्चों का दिमाग तेजी से विकसित होता है और स्क्रीन उनके प्राकृतिक विकास में बाधा डाल सकती है.
भाषा और व्यवहार पर पड़ता है सीधा असर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में भाषा सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही उनका सामाजिक व्यवहार भी कमजोर पड़ सकता है. कई बार ऐसे लक्षण सामने आते हैं जो ऑटिज्म जैसे दिखाई देते हैं, हालांकि इसे सीधे तौर पर ऑटिज्म का कारण नहीं माना गया है.
छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करना जरूरी
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि 18 महीने से 6 साल तक के बच्चों का स्क्रीन टाइम बेहद सीमित होना चाहिए. इस उम्र में बच्चों को खेलकूद, बातचीत और रचनात्मक गतिविधियों में ज्यादा शामिल करना जरूरी है ताकि उनका मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर हो सके.
ऑटिज्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर
अप्रैल महीने को दुनिया भर में ऑटिज्म अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है. साल 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने &quot;Autism &amp;amp; Humanity: Every Life has Value&quot; थीम तय की है. इसी के तहत 30 अप्रैल को एम्स, नई दिल्ली में एक विशेष पब्लिक हेल्थ लेक्चर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से जुड़ी जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा होगी.
कम उम्र में पहचान से बेहतर हो सकते हैं परिणाम
विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑटिज्म के लक्षण 12 से 18 महीने की उम्र में ही पहचाने जा सकते हैं. ऐसे में शुरुआती पहचान और सही समय पर इलाज बेहद जरूरी है. आंकड़ों के मुताबिक, हर 31 में से एक व्यक्ति ऑटिज्म से प्रभावित पाया जा रहा है, जो इसे एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनाता है.
ऑटिज्म से जुड़े अन्य स्वास्थ्य जोखिम भी चिंता का कारण
एम्स के आंकड़ों के अनुसार, ऑटिज्म से पीड़ित करीब 80 प्रतिशत बच्चों में अन्य समस्याएं भी पाई जाती हैं. इनमें मिर्गी, ध्यान की कमी, व्यवहारिक समस्याएं और नींद से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं. इन समस्याओं के कारण बच्चों और उनके परिवार की जिंदगी की गुणवत्ता पर गहरा असर पड़ता है.
परिवार आधारित इलाज और सही जानकारी की अहमियत
डॉक्टरों का मानना है कि ऑटिज्म के इलाज में परिवार की भूमिका बेहद अहम होती है. सही जानकारी, समय पर हस्तक्षेप और व्यक्तिगत देखभाल से बच्चों के विकास में काफी सुधार किया जा सकता है. साथ ही बिना वैज्ञानिक आधार वाली वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों से बचने की भी सलाह दी गई है.
समावेशी समाज की दिशा में बढ़ते कदम
इस पहल का मकसद सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाना और ऑटिज्म से प्रभावित लोगों को सम्मानजनक जीवन देना है. एम्स की ओर से हेल्पलाइन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और शैक्षणिक सामग्री के जरिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि हर बच्चे को बेहतर अवसर मिल सके और समाज में किसी के साथ भेदभाव न हो.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Mango Varieties: नूरजहां, लक्ष्मणभोग से लेकर फजली तक... आम की कितनी वैरायटी के बारे में जानते हैं आप?</title>
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        <description><![CDATA[ How Many Mango Varieties Are There In India: आम का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में कुछ गिनी-चुनी किस्में ही आती हैं. लेकिन असल में आम की दुनिया इससे कहीं ज्यादा बड़ी और दिलचस्प है. नूरजहां, लक्ष्मणभोग से लेकर फजली तक, हर किस्म की अपनी अलग पहचान, स्वाद और कहानी है, जिसे जानना हर आम प्रेमी के लिए मजेदार अनुभव हो सकता है. चलिए आपको इनके बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
कोहितूर आम
कोहितूर आम कभी मुगल दरबारों की शान हुआ करता था. इसकी खुशबू इतनी गहरी और खास होती है कि इसे एक बार चखने वाले लोग भूल नहीं पाते. आज यह किस्म बहुत कम बची है, इसलिए इसकी गिनती बेहद दुर्लभ और कीमती आमों में होती है, खास तौर पर ऐसे लोग, जो अनोखे स्वाद की तलाश में रहते हैं, इसके दीवाने माने जाते हैं.
मनकुराद आम
गोवा का मशहूर मानकुराद आम अपनी मीठी खुशबू और ट्रॉपिकल स्वाद के लिए जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसे खाने का अनुभव काफी अलग होता है, जो पर्यटकों को भी खूब पसंद आता है. यही वजह है कि इसकी मांग बाजार में लगातार बनी रहती है और यह सीधे बिक्री के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है.&amp;nbsp;
लक्ष्मणभोग
लक्ष्मणभोग आम पश्चिम बंगाल की खास पहचान है. जब ज्यादातर आम की किस्में खत्म होने लगती हैं, तब यह बाजार में आता है. इसका आकार बड़ा, स्वाद गहरा और समय खास होने की वजह से यह किसानों को बेहतर दाम दिलाने में मदद करता है। गर्मियों के आखिर में भी इसकी मांग बनी रहती है.
&amp;nbsp;नूरजहां आम
मध्य प्रदेश का नूरजहां आम अपने आकार के कारण सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है. यह इतना बड़ा होता है कि पहली नजर में ही लोगों का ध्यान खींच लेता है. इसकी यही खासियत इसे अलग बनाती है और लोगों को इसे देखने और खरीदने के लिए आकर्षित करती है.
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फजली आम&amp;nbsp;
फजली आम बिहार और बंगाल में काफी लोकप्रिय है. इसका इस्तेमाल खास तौर पर गूदा और प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है. यही वजह है कि इसकी मांग सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सालभर बनी रहती है, जिससे किसानों को स्थिर आमदनी मिलती है.
गुलाब खास
गुलाब खास आम अपनी खुशबू के लिए जाना जाता है, जो गुलाब जैसी महक देता है. इसका स्वाद और खुशबू इसे गिफ्ट के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाते हैं. &amp;nbsp;शहरों में खास तौर पर लोग इसे पसंद करते हैं, क्योंकि यह आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि अनुभव भी देता है. &amp;nbsp;हर आम की अपनी एक अलग पहचान है, कोई खुशबू के लिए जाना जाता है, कोई आकार के लिए, तो कोई अपने खास समय के लिए. यही विविधता आम को सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि एक अनुभव बना देती है.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Pickle Mold: अचार में इस वजह से लग जाती है फफूंदी, जानें इसे बचाने के तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ How To Prevent Mold In Homemade Pickles: घर का बना अचार सिर्फ खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि उसमें बचपन की यादें और घर की खुशबू भी बसी होती है. आम, नींबू, मिर्च या आंवले का अचार, हर किसी की अपनी पसंद होती है. लेकिन कई बार मेहनत से बनाया अचार कुछ ही दिनों में खराब होने लगता है, जब उसके ऊपर सफेद या हरे रंग की परत यानी फफूंदी दिखने लगती है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर अचार में फफूंदी क्यों लगती है और इसको कैसे रोक सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों लगती है फफूंदी?
अचार में फफूंदी लगना किसी एक मौसम तक सीमित नहीं है, यह साल के किसी भी समय हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह छोटी-छोटी लापरवाहियां होती हैं. जैसे ही जार के अंदर नमी या हवा पहुंचती है, अचार खराब होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो पूरा अचार बेकार हो सकता है.&amp;nbsp;
गंध से पहला संकेत
सबसे पहला संकेत उसकी गंध से मिलता है. अचार की खुशबू तीखी और खट्टी होनी चाहिए, लेकिन अगर उसमें सड़ी हुई या अजीब सी गंध आने लगे, तो समझ जाइए कि वह खराब हो चुका है. इसके अलावा अगर अचार की ऊपरी सतह पर फफूंदी दिखे, तो यह साफ इशारा है कि उसमें नमी या हवा पहुंच चुकी है. अक्सर गीला चम्मच इस्तेमाल करना या जार को खुला छोड़ देना इसकी वजह बनता है.&amp;nbsp;
बनावट में भी दिखता है असर
अचार के खराब होने का एक और संकेत उसकी बनावट में बदलाव है. अगर अचार चिपचिपा, बहुत नरम या रंग बदलने लगे, तो यह सामान्य नहीं है. उदाहरण के लिए, आम का अचार भूरा और ज्यादा मुलायम हो जाए या लहसुन का अचार लिसलिसा लगे, तो इसे खाने से बचना चाहिए. तेल या नमक के पानी में भी बदलाव दिख सकता है. अगर तेल धुंधला या अलग-अलग परतों में दिखे, या उसमें झाग बनने लगे, तो यह खराब होने का संकेत है. इसी तरह स्वाद में भी फर्क आ जाता है कि अगर अचार कड़वा, फीका या हल्का चुभने जैसा लगे, तो इसे तुरंत छोड़ देना चाहिए.&amp;nbsp;
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कैसे रख सकते हैं इसको सुरक्षित?
अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाना जरूरी है. हमेशा सूखा और साफ चम्मच ही इस्तेमाल करें, क्योंकि एक बूंद पानी भी फफूंदी की वजह बन सकती है. जार को हर बार अच्छी तरह बंद करें, ताकि हवा अंदर न जाए. &amp;nbsp;अचार को ठंडी और सूखी जगह पर रखना भी जरूरी है. सीधी धूप या ज्यादा गर्मी मसालों और तेल को खराब कर सकती है. इसके साथ ही, यह ध्यान रखें कि अचार पूरी तरह तेल की परत में ढका रहे. अगर तेल कम लगे, तो ऊपर से थोड़ा साफ तेल डाल दें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>दिल्ली में हीट वेव का असर, डॉक्टरों ने बताए बचाव के उपाय, येलो अलर्ट के बीच अस्पताल भी तैयार</title>
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        <description><![CDATA[ राजधानी दिल्ली इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है. हालात को देखते हुए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. लगातार बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है और स्वास्थ्य पर खतरा भी बढ़ा दिया है.
लू के बढ़ते असर ने बढ़ाई चिंता
पिछले कई दिनों से दिल्ली में हीट वेव का असर साफ देखा जा रहा है. तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान बिना जरूरी काम के बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.
हीट स्ट्रोक बन सकता है जानलेवा
डॉक्टरों के अनुसार हीट स्ट्रोक एक बेहद गंभीर स्थिति है, जिसमें समय पर इलाज न मिले तो जान जाने का खतरा काफी ज्यादा रहता है. आंकड़ों के मुताबिक ऐसे मामलों में मृत्यु दर 60 से 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. इसी खतरे को देखते हुए अस्पतालों ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है.
आरएमएल अस्पताल में विशेष वॉर्ड तैयार
दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इस साल भी हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए अलग वार्ड शुरू किया गया है. इस वार्ड की जिम्मेदारी डॉ. अजय चौहान को दी गई है. यहां प्राथमिक इलाज के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि मरीजों को तुरंत राहत मिल सके.
बर्फ और पानी से किया जाता है शुरुआती इलाज
वार्ड में हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए दो बेड रिजर्व रखे गए हैं. साथ ही बड़े टब में ठंडे पानी और बर्फ का इंतजाम किया गया है. मरीज के आते ही उसे ठंडे पानी में डालकर शरीर का तापमान कम किया जाता है. इसके बाद उसे बेड पर रखकर आगे का इलाज शुरू किया जाता है. स्थिति स्थिर होने पर मरीज को इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया जाता है. फिलहाल इस साल अभी तक कोई मरीज यहां नहीं पहुंचा है.
डॉक्टरों का कहना है कि हीट स्ट्रोक का सबसे ज्यादा असर मजदूरों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ता है. ऐसे लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है. सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक बाहर निकलने से बचना चाहिए. अगर बाहर जाना जरूरी हो तो बीच-बीच में छांव में आराम करें और लगातार पानी पीते रहें.
बचाव ही सबसे कारगर उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है. घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ रखें. हल्के कपड़े पहनें और सिर को ढककर रखें. थोड़ी-थोड़ी देर में आराम करना भी जरूरी है ताकि शरीर का तापमान संतुलित बना रहे.
ये लक्षण दिखें तो हो जाएं अलर्ट
हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों में शरीर का अत्यधिक गर्म होना, उल्टी, दस्त और चक्कर आना शामिल हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत ठंडा करने की कोशिश करनी चाहिए. गर्दन के नीचे पानी डालें और बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाएं. समय पर इलाज मिलने से जान बचाई जा सकती है. डॉ. अजय चौहान के अनुसार साल 2024 में इस वार्ड में 75 मरीज भर्ती हुए थे, जिनमें से 27 की मौत हो गई थी. ये आंकड़े बताते हैं कि हीट स्ट्रोक को हल्के में लेना कितना खतरनाक साबित हो सकता है.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Relationship Breakup: ब्रेकअप का फैसला लेने से पहले खुद से पूछें ये सवाल, नहीं तो जिंदगी भर रहेगा पछतावा!</title>
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        <description><![CDATA[ Relationship Breakup: ब्रेकअप का फैसला लेने से पहले खुद से पूछें ये सवाल, नहीं तो जिंदगी भर रहेगा पछतावा! ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Curd Making Tips : दही जमाते समय कर लिए ये दो काम तो नहीं होगा खट्टा, जान लें तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Curd Making Tips : दही जमाते समय कर लिए ये दो काम तो नहीं होगा खट्टा, जान लें तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Loose Skin After Weight Loss: वजन घटने के बाद लटक गई है स्किन? डॉक्टर से जानें इसे टाइट करने के आसान तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ Why Does Skin Sag After Weight Loss: आज के समय में लोगों के सामने जो सबसे बड़ी समस्या है, उसमें से एक है वजन और इसको कम करना आसान नहीं होता. महीनों की मेहनत, कंट्रोल्ड डाइट और लगातार एक्सरसाइज के बाद जब वजन घटता है, तो यह एक बड़ी उपलब्धि होती है. &amp;nbsp;लेकिन कई लोगों के साथ एक नई परेशानी भी सामने आती है, जैसे ढीली त्वचा. खासकर तब, जब वजन तेजी से कम हुआ हो. पेट, बाजू या जांघों के आसपास त्वचा लटकने लगती है, यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक नैचुरल प्रतिक्रिया है.
क्यों होता है ऐसा?
दरअसल, हमारी त्वचा में कोलेजन और इलास्टिन नाम के प्रोटीन होते हैं. कोलेजन त्वचा को मजबूती देता है, जबकि इलास्टिन उसे खिंचने और फिर वापस अपनी जगह आने की क्षमता देता है. जब वजन बढ़ता है, तो त्वचा लंबे समय तक खिंची रहती है. अगर यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रहे, तो इलास्टिन फाइबर कमजोर पड़ने लगते हैं. ऐसे में जब अचानक वजन कम होता है, तो त्वचा तुरंत सिकुड़ नहीं पाती.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. पंकज चतुर्वेदी, सीनियर कंसल्टेंट और डर्मेटोलॉजिस्ट, मेडलिंक्स बताते हैं कि तेजी से वजन घटने पर त्वचा को अपने पुराने आकार में लौटने का समय नहीं मिल पाता. उम्र, जेनेटिक्स और सूरज की किरणों का असर भी इसमें अहम भूमिका निभाता है. बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कोलेजन बनना कम हो जाता है, जिससे त्वचा की कसावट भी घटती है.&amp;nbsp;
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लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार
कुछ आदतें भी इस समस्या को बढ़ा सकती हैं. जैसे खराब खानपान, स्मोकिंग या शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी. &amp;nbsp;ये सभी चीजें ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करती हैं और त्वचा की रिपेयर प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं. वहीं, बहुत तेजी से वजन कम करना चाहे सर्जरी से हो या एक्सट्रीम डाइट से, यह ढीली त्वचा को ज्यादा दिखने लायक बना देता है. अच्छी बात यह है कि हल्के मामलों में त्वचा समय के साथ खुद भी थोड़ी टाइट हो सकती है, खासकर युवा लोगों में, लेकिन अगर त्वचा लंबे समय तक खिंची रही है या वजन बहुत ज्यादा कम हुआ है, तो सिर्फ प्राकृतिक तरीके काफी नहीं होते.&amp;nbsp;
इनको कैसे कम कर सकते हैं?
ऐसे में कुछ नॉन-सर्जिकल उपाय मदद कर सकते हैं. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग यानी मसल्स बनाने वाली एक्सरसाइज सबसे असरदार मानी जाती है. इससे शरीर का शेप बेहतर होता है और त्वचा ज्यादा ढीली नहीं दिखती. इसके साथ ही पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना भी जरूरी है, जिससे शरीर कोलेजन बनाने में सक्षम रहे. जो लोग ज्यादा बेहतर और तेज परिणाम चाहते हैं, उनके लिए प्रोफाइलो बॉडी जैसे ट्रीटमेंट एक विकल्प हो सकते हैं. इसमें हाईलूरोनिक एसिड का उपयोग किया जाता है, जो त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है और कोलेजन व इलास्टिन के उत्पादन को बढ़ाता है। इससे त्वचा की कसावट और टेक्सचर में सुधार आता है.
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 08:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Mango And Body Heat: क्या ज्यादा आम खाने से सच में बढ़ती है शरीर की गर्मी? डॉक्टर से जानें सच</title>
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        <description><![CDATA[ What Happens If You Eat Too Many Mangoes: गर्मी आते ही आम का मौसम शुरू हो जाता है और फिर यह सिर्फ फल नहीं, एक आदत बन जाता है. &amp;nbsp;नाश्ते से लेकर रात तक, हर वक्त इसे खाने का मन करता है. लेकिन हर साल एक बात जरूर सुनने को मिलती है कि &quot;ज्यादा आम मत खाओ, शरीर में गर्मी बढ़ जाएगी.&quot; तो क्या सच में ऐसा होता है या यह सिर्फ पुरानी मान्यता है जो आज तक चली आ रही है?. चलिए आपको बताते हैं कि एक्सपर्ट क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
&amp;nbsp;न्यूट्रिशन हेड डॉ. करुणा चतुर्वेदी ने TOI को बताया कि आम को पारंपरिक रूप से &quot;गर्म फल&quot; कहा जाता है, लेकिन साइंस इसे इस तरह नहीं देखता. उनके अनुसार, किसी भी खाने को उसके पोषक तत्वों के आधार पर समझा जाता है, न कि गर्म या ठंडा मानकर. आम में प्राकृतिक शर्करा और मैंगिफेरिन जैसे तत्व होते हैं, जो पाचन के दौरान शरीर में हल्की गर्माहट का एहसास दे सकते हैं. लेकिन यह बुखार की तरह शरीर का तापमान नहीं बढ़ाते. यानी जो गर्मी महसूस होती है, वह हल्की और अस्थायी होती है.&amp;nbsp;
किसका रखना चाहिए आपको ध्यान?
असल फर्क मात्रा से पड़ता है. एक आम खाना और एक साथ तीन-चार आम खा लेना, दोनों का असर अलग होता है. डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार, ज्यादा आम खाने से पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. इसमें मौजूद फाइबर और फ्रक्टोज ज्यादा मात्रा में लेने पर पेट फूलना, दस्त या ऐंठन जैसी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं.
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ज्यादा आम खाने के नुकसान
ज्यादा आम खाने के कुछ आम प्रभाव भी देखे जाते हैं. जैसे पाचन बिगड़ना, क्योंकि ज्यादा फाइबर और प्राकृतिक शक्कर आंतों को प्रभावित कर सकते हैं. ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज वाले लोगों के लिए चिंता की बात है. कुछ लोगों को होंठों के आसपास जलन या खुजली भी महसूस होती है. &amp;nbsp;इसकी वजह आम के छिलके के पास मौजूद चिपचिपा पदार्थ होता है, जिसमें ऐसे तत्व होते हैं जो त्वचा को रिएक्ट कर सकते हैं. इसके अलावा ज्यादा मात्रा में खाने से वजन बढ़ने का खतरा भी रहता है.
यह गर्म क्यों लगता है?
गर्मी के मौसम में आम गर्म क्यों लगता है, इसका कारण सिर्फ फल नहीं है. इस समय शरीर पहले से ही डिहाइड्रेशन और धीमे पाचन से गुजर रहा होता है. ऐसे में जब ज्यादा मीठा फल खाया जाता है, तो शरीर भारी और गर्म महसूस कर सकता है. यानी जो गर्मी का एहसास होता है, वह कई चीजों का मिला-जुला असर है. इसका मतलब यह नहीं कि आम खाना छोड़ दिया जाए. बस इसे समझदारी से खाने की जरूरत है. रोज एक या दो आम तक सीमित रहें, ज्यादा एक साथ खाने से बचें. दही या पानी वाली चीजों के साथ लें, ताकि संतुलन बना रहे. खाली पेट खाने से बचें अगर पाचन संवेदनशील है. खाने से पहले कुछ देर पानी में भिगोना भी फायदेमंद माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 08:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Nutrient Deficiency Symptoms: बिना वजह रहता है मूड खराब? शरीर में इन विटामिन की कमी तो नहीं है वजह</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/nutrient-deficiency-symptoms-बिना-वजह-रहता-है-मूड-खराब-शरीर-में-इन-विटामिन-की-कमी-तो-नहीं-है-वजह</link>
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        <description><![CDATA[ Which Deficiency Causes Mood Problems: जब मन अचानक भारी लगने लगे, तो वजह हमेशा बाहरी नहीं होती. कई बार शरीर खुद इशारा कर रहा होता है. कुछ दिन ऐसे आते हैं जब नींद ठीक होती है, काम का दबाव भी ज्यादा नहीं होता, फिर भी मूड गिरा हुआ महसूस होता है. &amp;nbsp;ऐसे में हम अक्सर लाइफस्टाइल को दोष देते हैं, लेकिन असली कहानी थोड़ी गहरी होती है. रोज प्लेट में क्या जा रहा है, इसका असर दिमाग के काम करने के तरीके पर पड़ता है.&amp;nbsp;
टामिन और मिनरल्स से जुड़ी दिक्कत
डॉक्टर अब एक पैटर्न देख रहे हैं. कई लोग चिंता, चिड़चिड़ापन या लो मूड की शिकायत लेकर आते हैं और बाद में पता चलता है कि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है. दिमाग सिर्फ भावनाओं से नहीं चलता, बल्कि यह केमिकल प्रक्रियाओं पर भी निर्भर करता है और ये प्रक्रियाएं विटामिन और मिनरल्स से जुड़ी होती हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मे़दांता के विशेषज्ञ डॉ. सौरभ मेहरोत्रा ने TOI को बताया कि &quot;तनाव, चिंता और मूड में बदलाव को अक्सर भागदौड़ भरी जिंदगी या नींद की कमी से जोड़ा जाता है, लेकिन कई मामलों में पोषण की कमी भी इसकी वजह हो सकती है. दिमाग को सेरोटोनिन, डोपामिन और गाबा जैसे न्यूरोट्रांसमीटर बनाने के लिए पर्याप्त विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है, जो मूड और फोकस को नियंत्रित करते हैं.&quot;
विटामिन डी की कमी का असर&amp;nbsp;
विटामिन डी की कमी अक्सर चुपचाप असर डालती है. इसे हड्डियों के लिए जरूरी माना जाता है, लेकिन यह मेंटल स्थिति को भी प्रभावित करता है. शहरों में धूप कम मिलना, लंबे समय तक घर या ऑफिस में रहना और प्रदूषण जैसे कारण शरीर में इसकी मात्रा घटा देते हैं. इससे थकान, सुस्ती और मूड में गिरावट महसूस हो सकती है. डॉ. मेहरोत्रा के अनुसार, यह सबसे आम कमियों में से एक है और इससे डिप्रेशन जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं.&amp;nbsp;
विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 की कमी धीरे-धीरे असर करती है। लगातार थकान, दिमाग में धुंधलापन और ध्यान की कमी इसके संकेत हो सकते हैं. यह समस्या खासकर शाकाहारी लोगों, बुजुर्गों और पाचन संबंधी दिक्कत वाले लोगों में ज्यादा देखी जाती है. &amp;nbsp;यह नसों और दिमाग के सही काम के लिए जरूरी है, इसलिए इसकी कमी इमोशनल स्थिति को भी प्रभावित करती है.&amp;nbsp;
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इन चीजों की कमी से ये होती है दिक्कत
इसी तरह विटामिन बी6 और फोलेट भी ब्रेन के लिए जरूरी होते हैं. ये ऐसे रसायनों के निर्माण में मदद करते हैं जो हमें शांत और संतुलित रखते हैं. इनकी कमी अक्सर शारीरिक नहीं, बल्कि इमोशनल असंतुलन के रूप में दिखती है. मैग्नीशियम शरीर का प्राकृतिक शांत करने वाला तत्व माना जाता है. इसकी कमी होने पर बेचैनी, सिरदर्द, नींद की कमी और चिंता बढ़ सकती है, &amp;nbsp;वहीं आयरन की कमी दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई घटा देती है, जिससे थकान, ध्यान की कमी और मूड में गिरावट आती है. हालांकि हर बार मूड खराब होने की वजह पोषण की कमी नहीं होती. डॉ. मेहरोत्रा कहते हैं कि चिंता और तनाव कई कारणों से हो सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 08:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Oats Benefits And Side Effects: क्या ओट्स खाना सच में है फायदेमंद? सुपरफूड मानकर कहीं आप भी तो नहीं कर रहे गलती</title>
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        <description><![CDATA[ Oats And Mineral Absorption Issues: ओट्स को आजकल हेल्दी खाने का सबसे बड़ा प्रतीक मान लिया गया है. सुबह के नाश्ते से लेकर रात के हल्के खाने तक, हर जगह इसकी मौजूदगी दिखती है. पैकेट पर लिखी जानकारी इसे फाइबर से भरपूर बताती है और फिटनेस रूटीन की शुरुआत भी अक्सर ओट्स से ही होती है. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ओट्स हर व्यक्ति के लिए उतने ही फायदेमंद हैं? डॉक्टरों के अनुसार इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. ओट्स के फायदे जरूर हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं जिन पर कम चर्चा होती है.&amp;nbsp;
क्या ओट्स सबके लिए फायदेमंद है?
ओट्स को &quot;सुपरफूड&quot; का दर्जा इसलिए मिला क्योंकि इसमें बीटा-ग्लूकन नाम का घुलनशील फाइबर पाया जाता है. यह डाइजेशन को धीमा करता है और समय के साथ कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है. इसी वजह से इसे दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. &amp;nbsp;डॉ. आलोक कुमार सिंह ने TOI को बताया कि &amp;nbsp;&quot;बीटा-ग्लूकन कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है, लेकिन इसका असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप ओट्स किस रूप में खा रहे हैं और आपकी शरीर की संवेदनशीलता कैसी है.&quot;&amp;nbsp;
&amp;nbsp;रिसर्च भी इसे सही मानती है कि नियमित सेवन से एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है. &amp;nbsp;न्यूट्रिशन एक्सपर्ट अंशुल सिंह कहते हैं कि इसमें मौजूद फाइबर पाचन सुधारता है और लंबे समय तक पेट भरा रखता है.&amp;nbsp;
ओट्स कैसे करता है काम?
लेकिन हर तरह के ओट्स एक जैसे काम नहीं करते. &amp;nbsp;खासकर इंस्टेंट ओट्स जल्दी पच जाते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. डॉ. सिंह के अनुसार, ज्यादा प्रोसेस्ड होने की वजह से ये शरीर में ग्लूकोज तेजी से बढ़ाते हैं. वहीं फ्लेवर्ड ओट्स में अतिरिक्त शक्कर भी होती है, जो समस्या बढ़ा सकती है. डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले लोगों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है. इसके मुकाबले स्टील-कट या रोल्ड ओट्स बेहतर माने जाते हैं क्योंकि ये धीरे पचते हैं.
फाइबर हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं
ओट्स में फाइबर ज्यादा होता है, जो हर किसी के लिए आरामदायक नहीं होता. अचानक ज्यादा मात्रा में लेने से पेट फूलना, गैस या दर्द जैसी दिक्कत हो सकती है. डॉ. सिंह बताते हैं कि कुछ लोगों को इससे पाचन संबंधी परेशानी होती है. इसके अलावा ओट्स में फाइटेट्स भी होते हैं, जो आयरन और जिंक जैसे जरूरी मिनरल्स के अब्जॉर्व को कम कर सकते हैं. अंशुल सिंह के मुताबिक, अगर रोजाना जरूरत से ज्यादा ओट्स खाए जाएं और खाने में विविधता न हो, तो यह समस्या बढ़ सकती है.
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सबके लिए सुरक्षित नहीं&amp;nbsp;
ओट्स ग्लूटेन-फ्री होते हैं, लेकिन फिर भी हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं हैं. कई बार इन्हें ऐसी जगह प्रोसेस किया जाता है जहां गेहूं भी होता है, जिससे मिलावट की संभावना रहती है। सीलिएक बीमारी या ग्लूटेन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है. इसके अलावा जिन लोगों का पाचन कमजोर है या ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता, उन्हें भी सावधानी रखनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 03 May 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>35 की उम्र के बाद चुपचाप कमजोर होने लगती हैं हड्डियां, जानें महिलाओं को क्यों रहना चाहिए अलर्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ 35 की उम्र के बाद चुपचाप कमजोर होने लगती हैं हड्डियां, जानें महिलाओं को क्यों रहना चाहिए अलर्ट? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:22 +0530</pubDate>
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        <title>Water Tank Cleaning: पानी की टंकी में जग गई है गंदगी की मोटी परत, बिना मेहनत के झट से ऐसे होगी साफ </title>
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        <description><![CDATA[ Water Tank Cleaning:&amp;nbsp; घर में इस्तेमाल होने वाला पानी जितना साफ दिखता है, उतना ही साफ होना भी जरूरी होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो पानी आप इस्तेमाल कर रहें है, वो पानी कितनी साफ जगह से आ रहा है. अक्सर लोग पानी की टंकी की सफाई को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे उसमें गंदगी की मोटी परत जम जाती है. साथ ही अगर इस चिलचिलाती गर्मी की बात करें इस मौसम में अगर टंकी साफ नहीं हो तो यही गंदगी आगे चलकर बीमारियों की वजह बन सकती है. ऐसे में समय-समय पर टंकी की सफाई करना बहुत जरूरी हो जाता है. अच्छी बात यह है कि अब इसे साफ करने के लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नही है. कुछ आसान होम टिप्स की मदद से आप इसे जल्दी और आसानी से साफ कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं इनके बारे में पूरी जानकारी.&amp;nbsp;
गंदगी जमने के पीछे की वजह
पानी की टंकी में गंदगी जमने के कई कारण होते हैं. समय के साथ पानी में मौजूद मिट्टी, धूल और छोटे कण टंकी के तल में जमा होने लगते हैं. इसके अलावा टंकी का ढक्कन ठीक से बंद न होने पर बाहर की गंदगी भी अंदर पहुंच जाती है. साथ ही &amp;nbsp;कई बार टंकी में काई भी जमने लगती है, जिससे पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है. इसलिए टंकी को लंबे समय तक बिना साफ किए छोड़ना सही नही माना जाता.
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सफाई से पहले जरूरी तैयारी
टंकी की सफाई शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले टंकी को पूरी तरह खाली कर लें. इसके बाद अंदर जमा मोटी गंदगी को हटाने के लिए ब्रश या किसी कपड़े का इस्तेमाल करके टंकी कि दीवारों &amp;nbsp;और फर्श को रगड़ें. उसे अच्छे से रगड़ने के बाद साफ पानी डालकर उसे अच्छे से धो लें. फिर ब्लीचिंग पाउडर, बेकिंग सोडा या सिरका डालकर उसे 15 से 20 मिनट तक छोड़ दें और फिर दोबारा साफ पानी से धो लें. इससे टंकी पूरी तरह साफ और सुरक्षित हो जाती है. फिर उसके बाद उसका ढक्कन बंद कर दें ताकि उसके अंदर धूल या कोई कीड़ा मकोड़ा ना जाए. अक्सर लोग ढक्कनों पर ध्यान नहीं देते. कई बार ढक्कन टूटे होते हैं या फिर लोग सही से लगाना भूल जाते हैं. जिस वजह से धूल और कीड़े मकोड़े अंदर पहुंच जाते हैं. इसलिए इस बात का खास ध्यान रखें. ध्यान रखें कि सफाई के दौरान साफ पानी और जरूरी सामान पहले से तैयार रखें. इससे सफाई का काम आसान और जल्दी हो जाता है.
नियमित सफाई से बनी रहेगी शुद्धता
अगर आप चाहते हैं कि आपके घर का पानी हमेशा साफ और सुरक्षित रहे, तो टंकी की सफाई नियमित रूप से करना जरूरी है. समय समय पर टंकी चेक करते रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत साफ करें. कोशिश करें कि हर 3 से 6 महीने में आप सफाई जरूर करें. इससे गंदगी की मोटी परत जमने से पहले ही उसे हटाया जा सकता है. ये आसान होम टिप्स अपनाकर आप बिना ज्यादा मेहनत के अपनी पानी की टंकी को साफ रख सकते हैं और परिवार की सेहत का ध्यान रख सकते हैं.
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&amp;nbsp;
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>एक रसोई में बनता है गुजरात के इस गांव का खाना, जानें इससे कैसे खत्म हो रहा अकेलापन?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/एक-रसोई-में-बनता-है-गुजरात-के-इस-गांव-का-खाना-जानें-इससे-कैसे-खत्म-हो-रहा-अकेलापन</link>
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        <description><![CDATA[ Gujarat Unique Community Living Kitchen :&amp;nbsp;गुजरात में एक ऐसा गांव है जहां लोग अपने-अपने घरों में खाना नहीं बनाते हैं. न सुबह की भागदौड़, न गैस सिलेंडर की चिंता, न रसोई का झंझट. इसके बजाय पूरा खाना एक ही जगह, एक शेयर रसोई में बनता है और फिर सभी लोग एक साथ सामुदायिक हॉल में बैठकर उसे खाते हैं. यह किसी फिल्म या कहानी की कल्पना नहीं है, बल्कि असल जिंदगी में गुजरात के छोटे से गांव चांदनकी (Chandanki) में ऐसा हो रहा है. यहां लोग सिर्फ खाना ही नहीं खाते, बल्कि एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं, बातें करते हैं, हंसते हैं और अपने दिल की बात भी शेयर करते हैं.&amp;nbsp;
कैसे शुरू हुआ यह किचन?
इस अनोखी व्यवस्था की शुरुआत एक बड़ी समस्या से हुई थी. गांव के कई युवा काम के लिए शहरों में चले गए. इसके कारण गांव में ज्यादातर बुजुर्ग अकेले रह गए. धीरे-धीरे उनका अकेलापन बढ़ने लगा और जीवन थोड़ा मुश्किल और सुना महसूस होने लगा. &amp;nbsp;इसी समस्या को समझते हुए गांव के सरपंच पूनम भाई पटेल ने एक नया और अलग विचार दिया. पूनम भाई पहले करीब 20 साल तक न्यूयॉर्क में रह चुके थे. वहां के जीवन और सुविधाओं को देखकर उन्होंने सोचा कि क्यों न गांव में भी एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जहां लोग अकेले न रहें.उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे गांव के लिए एक ही रसोई और एक ही खाने का हॉल बनाया जाए, जहां सभी लोग साथ बैठकर खाना खाएं.&amp;nbsp;
एक रसोई, एक हॉल और पूरा गांव एक साथ
आज चांदनकी गांव में एक केंद्रीय रसोई है जहां रोज पारंपरिक गुजराती खाना बनता है, यहां खाना घर जैसा ही हेल्दी और टेस्टी होता है. &amp;nbsp;लोग हर महीने लगभग 2000 का योगदान देते हैं और इसके बदले उन्हें रोज दो समय का खाना मिलता है. रसोई में काम करने वाले रसोइयों को लगभग 11,000 की सैलरी दी जाती है, जिससे यह व्यवस्था टिकाऊ भी बन जाती है.
कैसे यह यूनिक कम्युनिटी लिविंग खत्म कर रही है अकेलापन
जहां खाना बनता है और खाया जाता है, वह स्थान भी खास है. गांव का सामुदायिक हॉल पूरी तरह एयर कंडीशन्ड है और सोलर पैनल से चलता है. यह जगह सिर्फ खाने के लिए नहीं है, बल्कि बातचीत और रिश्तों को मजबूत करने की जगह बन गई है. यहां लोग साथ बैठकर खाना खाते हैं और अपने जीवन की बातें शेयर करते हैं. बुजुर्ग अपने पुराने अनुभव बताते हैं, महिलाएं परिवार की बातें करती हैं, दोस्त हंसी-मजाक करते हैं और कई लोग अपने अकेलेपन को भी खुलकर व्यक्त करते हैं.&amp;nbsp;
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शुरुआत में लोगों को थी दिक्कत
जब यह व्यवस्था शुरू की गई थी, तो कई लोग इसके खिलाफ थे. कुछ लोगों को लगता था कि इससे घर जैसा अपनापन खत्म हो जाएगा. कुछ लोग सोचते थे कि खाना बनाना छोड़ना सही नहीं होगा, लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों ने इसका फायदा देखा, तो उनकी सोच बदल गई. अब बुजुर्गों को रोज खाना बनाने की चिंता नहीं रहती. उनके पास आराम करने और लोगों से मिलने का समय बढ़ गया है. इस सामुदायिक रसोई ने सिर्फ खाना ही नहीं दिया, बल्कि लोगों को एक-दूसरे से जोड़ दिया है.अब गांव में लोग साथ बैठते हैं, बातें करते हैं, एक-दूसरे की मदद करते हैं और एक परिवार की तरह रहते हैं. जहां पहले अकेलापन था, वहां अब अपनापन महसूस होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:17 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Heatwave Health Risks: गर्मी में 5 लीटर पानी पीने के कुछ ही घंटों बाद ICU में पहुंचा युवक, डॉक्टर ने बताया कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Heatwave Health Risks:&amp;nbsp;इस भीषण गर्मी और तेज धूप में आपने अक्सर सुना होगा कि एक व्यक्ति को रोज कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो. लेकिन क्या होगा अगर आपको पता चलें कि, &amp;nbsp;कोई 5 लीटर पानी पीने के बाद भी अस्पताल के ICU तक पहुंच गया? ऐसे में ये हैरान होने वाली बात है. दिल्ली से सामने आया एक मामला यही सवाल खड़ा करता है, &amp;nbsp;कि सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं होता. जहां ज्यादा पानी पीने के बावजूद एक युवक की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे तुरंत भर्ती कराना पड़ा. एक 25 साल का युवक पूरे दिन करीब 5 लीटर पानी पीता रहा, फिर भी कुछ ही घंटों में उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे ICU में भर्ती कराना पड़ा. यह घटना दिखाती है कि गर्मी में शरीर को सही तरीके से हाइड्रेट करना कितना जरूरी है?
क्या हुआ उस युवक के साथ?
रिपोर्ट के अनुसार, 25 साल का युवक दिनभर तेज गर्मी में बाइक से काम कर रहा था. कई युवा लोगों की तरह उसे भी लगता था कि ज्यादा पानी पीना सही है. &amp;nbsp;इसलिए वह बार-बार अपनी बोतल भरता था और पूरे दिन में करीब 5 लीटर पानी पी लेता था, लेकिन उसने कुछ भी ठोस नहीं खाया. न फल, न कोई इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक और न ही नमक वाला पेय लिया. जिसके कारण शाम तक उसे चक्कर आने लगे, उल्टी जैसा महसूस होने लगा जिसे उसने थकान समझ कर नजरअंदाज कर दिया फिर धिरे-धिरे उसकी हालत ओर बिगड़ने लगी. उसकी बोली भी धीमी हो गई और वह कन्फ्यूज होने लगा, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने जांच में पाया कि युवक के शरीर में सोडियम का स्तर काफी कम हो गया था. सामान्य स्तर 135&amp;ndash;145 mEq/L होता है, लेकिन उसका स्तर 124 तक गिर गया था. इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है. यह तब होता है जब पसीने के जरिए शरीर से नमक निकल जाता है और उसकी भरपाई सिर्फ पानी से की जाती है. इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है.&amp;nbsp;
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असली वजह: शरीर में नमक की कमी
डॉक्टरों ने जांच में पाया कि युवक के शरीर में सोडियम का स्तर काफी कम हो गया था. सामान्य स्तर 135&amp;ndash;145 mEq/L होता है, लेकिन उसका स्तर 124 तक गिर गया था. इस स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है. यह तब होता है जब पसीने के जरिए शरीर से नमक निकल जाता है और उसकी भरपाई सिर्फ पानी से की जाती है. इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है. यह यह सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है. पूरे भारत में, जहां गर्मियों में तापमान अक्सर 44 से 47 डिग्री तक पहुंच जाता है, अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं. &amp;nbsp;
क्यों खतरनाक है यह स्थिति?
पसीना आना शरीर का खुद को ठंडा रखने का तरीका है. जब पसीना त्वचा से सूखता है, तो शरीर की गर्मी कम होती है और तापमान नियंत्रित रहता है. लेकिन पसीना सिर्फ पानी नहीं होता. इसमें नमक और जरूरी खनिज जैसे सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड भी होते हैं. सोडियम शरीर में पानी के संतुलन और दिमाग के सही काम के लिए जरूरी होता है. जब इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो पानी कोशिकाओं में जाने लगता है, जिससे दिमाग की कोशिकाएं सूज सकती हैं. शुरुआत में सिरदर्द, थकान, चक्कर और उल्टी जैसे लक्षण दिखते हैं, लेकिन हालत गंभीर होने पर बेहोशी, दौरे और कोमा तक हो सकता है.
हाइड्रेशन का सही तरीका क्या है?
अगर शरीर में पानी की कमी को सही तरीके से पूरा नहीं किया जाए, तो समस्या और बढ़ सकती है. &amp;nbsp;भारत में गर्मियों में अक्सर कहा जाता है कि &amp;ldquo;ज्यादा पानी पिएं&amp;rdquo;, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. &amp;nbsp;सिर्फ पानी पीने से शरीर में जरूरी नमक और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा नहीं करता है. अगर आप ज्यादा पानी पीते हैं लेकिन नमक नहीं लेते, तो खून में सोडियम कम हो सकता है, जो खतरनाक हो सकता है. इसलिए सिर्फ पानी नहीं, बल्कि ऐसे पेय भी जरूरी हैं जिनमें इलेक्ट्रोलाइट्स हों, ताकि शरीर का संतुलन बना रहे. जैसे नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, ORS, फलों का जूस जिससे शरीर को नमक और मिनरल्स मिलते रहें. &amp;nbsp;साथ ही समय पर खाना और धूप से बचाव भी जरूरी है.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Screen Time And Autism Risk In Children: खाना खिलाने के लिए बच्चों को दे देते हैं फोन तो हो जाएं सावधान, बढ़ जाता है इस बीमारी का खतरा</title>
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        <description><![CDATA[ Is It Safe To Use Mobile While Feeding Children: बच्चों को खाना खिलाते समय मोबाइल थमा देना आजकल आम आदत बन चुकी है. रोते हुए बच्चे को चुप कराने से लेकर उसे कुछ देर व्यस्त रखने तक, स्क्रीन एक आसान उपाय लगती है. लेकिन अब डॉक्टर और रिसर्चर्स इसे लेकर साफ चेतावनी दे रहे हैं. खासतौर पर एक साल से छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन एक्सपोजर खतरनाक हो सकता है और तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म जैसे लक्षण विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है.
क्या निकला रिसर्च में?
दिल्ली के एम्स और अन्य संस्थानों के रिसर्चर ने पाया है कि छोटे बच्चे डिजिटल स्क्रीन के प्रभाव के प्रति बेहद सेंसिटिव होते हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को बिल्कुल भी स्क्रीन न दिखाई जाए और आदर्श रूप से तीन साल तक इससे दूर रखा जाए. हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि स्क्रीन टाइम और क्लिनिकल ऑटिज्म के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध साबित नहीं हुआ है, लेकिन &quot;वर्चुअल ऑटिज्म&quot; जैसे लक्षण विकसित होने की संभावना जरूर बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
मेटा एनालिसिस किया गया
एम्स रायपुर के रिसर्चर ने पांच साल से कम उम्र के 2,857 बच्चों पर एक मेटा-एनालिसिस किया. इसमें सामने आया कि बच्चों का औसत स्क्रीन टाइम 2.22 घंटे प्रतिदिन था, जो वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की सिफारिश से लगभग दोगुना है. अक्सर माता-पिता बच्चों को शांत रखने, गुस्सा संभालने या खुद को थोड़ा समय देने के लिए स्क्रीन का सहारा लेते हैं. यह तरीका तुरंत राहत तो देता है, लेकिन लंबे समय में बच्चे के दिमागी विकास पर असर डाल सकता है.&amp;nbsp;
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एक अन्य स्टडी में 3 से 18 वर्ष के 150 ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों और 50 सामान्य बच्चों को शामिल किया गया. इस रिसर्च में सिर्फ स्क्रीन एक्सपोजर ही नहीं, बल्कि डिवाइस की लत और उसके साइकोलॉजिकल व व्यवहारिक प्रभावों पर भी ध्यान दिया गया. यह एक क्रॉस-सेक्शनल स्टडी थी, यानी एक ही समय पर बच्चों के डेटा का एनालिसिस किया गया, इसलिए लंबे समय के प्रभावों पर पूरी तस्वीर सामने नहीं आती.
क्या निकला रिजल्ट?
रिसर्च में यह पाया गया कि जिन बच्चों में ऑटिज्म के लक्षण थे, उन्हें कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर मिला था. शुरुआती उम्र में स्क्रीन देखने और ऑटिज्म के बीच मजबूत संबंध जरूर दिखा, लेकिन इसे सीधा कारण नहीं माना गया.
ऑटिज्म क्या है?
ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जो बच्चे के संवाद और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करती है. शुरुआती सालों में दिमाग तेजी से विकसित होता है, इसलिए यह समय बेहद अहम होता है. इसके संकेतों में आंखों से संपर्क न करना, बोलने में देरी और पहले सीखी गई चीजों को भूलना शामिल है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
&amp;nbsp;

A key finding from AIIMS New Delhi research highlights that increased screen time in children under one year of age is associated with a higher risk of autism by the age of three.The study suggests that greater screen exposure may increase the likelihood of autism-related&amp;hellip; pic.twitter.com/U3Ubmhedek
&amp;mdash; DD News (@DDNewslive) May 1, 2026



एम्स में पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. शेफाली गुलाटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ठऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और स्क्रीन टाइम को लेकर काफी रिसर्च हुई है. जिन बच्चों को एक साल की उम्र में ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर मिला, उनमें तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म के लक्षण ज्यादा देखने को मिले, खासकर लड़कों में, हालांकि लड़कियों में भी ये संकेत दिखे.&quot;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Screen, Time, And, Autism, Risk, Children:, खाना, खिलाने, के, लिए, बच्चों, को, दे, देते, हैं, फोन, तो, हो, जाएं, सावधान, बढ़, जाता, है, इस, बीमारी, का, खतरा</media:keywords>
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        <title>Virat Kohli Life Lessons: विराट कोहली से सीखें जिंदगी के ये 7 फलसफे, कदम&amp;कदम पर आएंगे काम</title>
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        <description><![CDATA[ Virat Kohli Life Lessons: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली सिर्फ मैदान पर रन बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सोच, अनुशासन और लाइफस्टाइल के लिए भी जाने जाते हैं. क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण और खुद को लगातार बेहतर बनाने की कोशिश उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है. यही वजह है कि उनका कोहली का माइंडसेट आज सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के लिए जीवन जीने का एक तरीका बन चुका है. कोहली की जिंदगी बताती है कि सफलता सिर्फ टैलेंट से नहीं बल्कि मेहनत, धैर्य और सही सोच से मिलती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको कोहली की लाइफ से जुड़े ऐसे फलसफे बताते हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी में भी उतने ही जरूरी है.&amp;nbsp;
अनुशासन ही असली ताकत&amp;nbsp;
विराट कोहली की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण उनका अनुशासन है. उन्होंने अपनी फिटनेस और डाइट पर जिस तरह काम किया है. उसने उनके खेल को पूरी तरह बदल दिया. इससे लोगों को यह सीख मिलती है कि मोटिवेशन हमेशा साथ नहीं रहता, लेकिन अनुशासन ही वह चीज है जो हर दिन आपको आगे बढ़ाने के लिए मजबूर करता है.&amp;nbsp;
असफलता को सीख की तरह लें&amp;nbsp;कोहली के करियर में भी कई उतार-चढ़ाव आए हैं. खराब फाॅर्म और आलोचना के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. बल्कि उनसे सीख लेकर खुद को और बेहतर बनाया. ऐसे में लोगों को उनसे यह सीखना चाहिए की असफलता रुकने का संकेत नहीं, बल्कि सुधार करने का मौका होती है.&amp;nbsp;
फिटनेस सिर्फ दिखाने के लिए नहीं होती&amp;nbsp;
विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट में फिटनेस का स्तर बदल दिया है. उन्होंने दिखाया कि अच्छा शरीर सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर प्रदर्शन के लिए होता है. ऐसे में विराट कोहली से यह सीखा जा सकता है कि जब शरीर फिट रहता है, तो दिमाग भी बेहतर काम करता है और आप ज्यादा समय तक एक्टिव रह सकते हैं &amp;zwnj;
हार की जिम्मेदारी खुद लें&amp;nbsp;
मैदान पर आक्रामक दिखने वाले कोहली हार के समय जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटते है. वह टीम की हार को स्वीकार करते हैं और उससे सीखते हैं. इससे लोग यह सीख ले सकते हैं कि सच्चा कॉन्फिडेंस वही है, जिसमें इंसान अपनी गलतियों को स्वीकार करें.&amp;nbsp;
पर्सनल जिंदगी को सीमित रखें&amp;nbsp;
सोशल मीडिया के दौर में भी कोहली अपनी निजी जिंदगी को काफी हद तक पर्सनल रखते हैं. परिवार से जुड़े मामलों में वह संतुलन बनाए रखते हैं. इससे लोग भी यह सीख ले सकते हैं कि हर चीज को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं होता है. अपनी शांति और पर्सनल जीवन की रक्षा करना भी उतना ही अहम है.&amp;nbsp;
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मेहनत करें और बाकी पर भरोसा रखें&amp;nbsp;
हाल के समय में कोहली आध्यात्मिकता की ओर भी झुकाव दिखाते हैं. वह मेहनत करने के साथ-साथ परिणाम को स्वीकार करने की बात करते हैं. ऐसे में जब आपने पूरी मेहनत कर ली हो तो परिणाम को लेकर ज्यादा तनाव लेने की जरूरत नहीं होती है.&amp;nbsp;
निरंतर ही सफलता की कुंजी है&amp;nbsp;
कोहली की सबसे बड़ी खासियत उनकी निरंतरता है. वह हर मैच में बेहतर प्रदर्शन देने की कोशिश करते हैं और खुद को लगातार सुधारते रहते हैं. ऐसे में उनसे यह सीख ली जा सकती है कि छोटे-छोटे प्रयासों की निरंतरता ही बड़े परिणाम देती है.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Obesity Health Risk: ब्लड प्रेशर की तरह बार&amp;बार क्यों नहीं चेक किया जाता मोटापा, यह लापरवाही कितनी खतरनाक?</title>
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        <description><![CDATA[ 
Obesity Health Risk: भारत में मोटापा अब सिर्फ लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में तेजी से उभरा है. डायबिटीज, दिल की बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई समस्याओं से इसका सीधा संबंध है. इसके बावजूद जहां ब्लड प्रेशर की जांच हर क्लिनिक विजिट में आम है, वहीं मोटापा अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. यही अनदेखी अब चिंता की बड़ी वजह बन रही है.
देश में मोटापे के बढ़ते मामलों की तस्वीर भी चिंताजनक है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, लगभग हर चौथा वयस्क ओवरवेट या मोटापे का शिकार है. कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है. खास बात यह है कि यह समस्या सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से फैल रही है. आंकड़े बताते हैं कि गांव में भी बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष इस समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि ब्लड प्रेशर की तरह मोटापा बार-बार क्यों चेक नहीं किया जाता है.
अब लाइफस्टाइल इश्यू नहीं रहा मोटापा
एक समय था, जब मोटापे को आरामदायक लाइफस्टाइल का असर माना जाता था. लेकिन अब यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन चुका है. खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, जो डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाती है. वैश्विक स्तर पर भी हालत तेजी से बिगड़ रहे हैं. बीते 15 वर्षों में मोटापे के मामलों में दोगुनी और पिछले 30 सालों में तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह संकेत साफ है कि समस्या अब तेजी से फैल रही है.
आधुनिक लाइफस्टाइल से कैसे बढ़ा रहा खतरा?बदलती लाइफस्टाइल ने खाने-पीने और रोजमर्रा की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है. आजकल का खाना जल्दी मिलने वाला, सस्ता और अक्सर ज्यादा फैट, नमक और शुगर से भरा होता है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी नहीं कर पा रही है. भारत में एक और चुनौती यह है कि बड़ी संख्या में लोग संतुलित और हेल्दी डाइट अफोर्ड नहीं कर सकते. इसका असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है, जहां कम फिजिकल एक्टिविटी और हाई कैलोरी फूड की वजह से मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. 2017 में हुई ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज स्टडी के अनुमान के अनुसार भारत में 144 लाख से ज्यादा बच्चे मोटापे का शिकार है. ब्लड प्रेशर की तरह क्यों जरूरी है नियमित जांच?
ब्लड प्रेशर की नियमित जांच इसलिए आम हो गई है, क्योंकि यह आसान है और समय रहते खतरे का पता चल जाता है. मोटापे के मामले में भी यही सिद्धांत लागू होता है. बॉडी मास इंडेक्स और कमर का मैप जैसे साधारण तरीके शुरुआती खतरे को पहचान सकते हैं. लेकिन इन्हें अभी भी क्लीनिक में नियमित जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया. समय रहते पहचान होने से छोटे-छोटे बदलाव के जरिए बड़ी बीमारियों को रोका जा सकता है. साथ ही अब जब मोटापे को एक मेडिकल स्थिति की तरह देखा जाएगा तो इससे जुड़ा सामाजिक कलंक भी कम होगा. ये भी पढ़ें-Pneumonia Symptoms: क्या एक फेफड़े से भी जिंदा रह सकता है इंसान, जानें भयंकर निमोनिया में कैसे बचाई जाती है जान?
इलाज अब सिर्फ डाइटिंग तक सीमित नहीं
मोटापे को कंट्रोल करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद आज भी सबसे जरूरी उपाय है. लेकिन गंभीर मामलों में यह पर्याप्त नहीं होता. मेडिकल साइंस में भी काफी प्रगति हुई है, अब सर्जिकल ऑप्शंस जैसे स्लीव गेस्ट्रोक्टॉमी और गैस्ट्रिक बाईपास ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी माने जाते हैं. यह केवल वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म और भूख को कंट्रोल करने में भी मदद करते हैं.
ये भी पढ़ें-Summer Health Tips: क्या गर्मियों में आपको भी कम लगती है भूख, जानें ऐसा होना कब सही और कब खतरनाक?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ghee For Skin Benefits: क्या घी लगाने से निखरती है स्किन, जानें डर्मेटोलॉजिस्ट इस देसी नुस्खे को क्यों मानते हैं बेस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ 
Ghee For Skin Benefits: हमारे भारतीय घरों में अक्सर दादी-नानी की ओर से दिए गए स्किन के घरेलू नुस्खे में घी का नाम जरूर शामिल होता है. ड्राई स्किन, जलन या दाग धब्बों पर घी लगाने की सलाह लंबे समय से दी जाती रही है. हालांकि कई लोग इसे पुराने जमाने का तरीका मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अब आधुनिक स्किन साइंस भी इस पारंपरिक उपाय को गंभीरता से देखने लगा है.
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह सिर्फ नमी देने वाला साधारण उपाय नहीं, बल्कि स्किन के लिए कई स्तरों पर काम करने वाला तत्व है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या सच में स्किन पर घी लगाने से स्किन निखरती है और क्या डर्मेटोलॉजिस्ट इस देसी नुस्खे को बेस्ट मानते हैं या नहीं. घी में क्या होता है खास?घी को अगर सिर्फ तेल या चिकनाई समझा जाए तो यह अधूरी जानकारी है. इसमें मौजूद ब्यूटिरिक एसिड एक अहम तत्व है, जो स्किन में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करता है. यह लालिमा और जलन जैसी समस्याओं में राहत देने का काम करता है. इसके अलावा इसमें कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड और फैट- सॉल्युबल विटामिन भी होते हैं. विटामिन ई स्किन को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल से बचाने में मदद करता है, जबकि विटामिन ए स्किन की बाहरी परत को हेल्दी बनाए रखने में जरूरी भूमिका निभाता है. घी स्किन बैरियर को भी करता है मजबूत एयर कंडीशनर और प्रदूषण भरे माहौल में रहने से स्किन का प्राकृतिक बैरियर कमजोर हो जाता है. आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले प्रॉडक्ट्स सिर्फ ऊपर की सतह पर परत बना देते हैं. लेकिन घी की संरचना स्किन के प्राकृतिक तेल से मिलती-जुलती होती है. इस वजह से यह त्वचा की गहराई तक जाकर लिपिड्स की कमी को पूरा करता है. इससे स्किन में नमी बनी रहती है और पानी की कमी नहीं होती है. यही प्रक्रिया स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखने में मदद करती है और छोटी-मोटी स्किन डैमेज को तेजी से ठीक होने में भी सहायक होती है. वॉश्ड घी क्यों हो रहा है पॉपुलर?घी की गंध और भारीपन से बचने के लिए अब वॉश्ड घी का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इस पारंपरिक तरीके से घी को कई बार पानी के साथ धोकर तैयार किया जाता है. इस प्रक्रिया के दौरान इसकी बनावट बदल जाती है और हल्का बिना गंध वाला और स्किन में आसानी से समाने वाला बन जाता है. इससे पोर्स बंद होने की संभावना भी कम हो जाती है, जिससे यह अलग-अलग स्किन टाइप के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है ये भी पढ़ें-Summer Health Tips: क्या गर्मियों में आपको भी कम लगती है भूख, जानें ऐसा होना कब सही और कब खतरनाक?
नियमित इस्तेमाल करने पर ही दिखता है असर वहीं घी लगाने से तुरंत नमी का एहसास मिलता है, लेकिन इसके अन्य फायदे जैसे स्किन रिपेयर और दाग-धब्बों में सुधार समय के साथ दिखाई देते हैं. स्किन के नेचुरल रिन्यूअल साइकिल के अनुसार इसका लगातार इस्तेमाल जरूरी होता है, तभी इसके बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार हर तरह का घी स्किन के लिए समान रूप से फायदेमंद नहीं होता है. अच्छे रिजल्ट्स के लिए शुद्ध और अच्छे सोर्स से तैयार घी का इस्तेमाल जरूरी है, क्योंकि इसी में जरूरी फैटी एसिड और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bargi Dam Accident: बरगी डैम की तरह देश में कहां&amp;कहां चलता है क्रूज, जानें कहां कितना किराया?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/bargi-dam-accident-बरगी-डैम-की-तरह-देश-में-कहां-कहां-चलता-है-क्रूज-जानें-कहां-कितना-किराया</link>
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        <description><![CDATA[ 
Bargi Dam Accident: मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. तेज आंधी के बीच क्रूज में पानी भरने लगा और अफरा-तफरी के हालात में यह पलट गया. अब तक इस हादसे में नौ लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग लापता है, जिन्हें ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि आज यानी 1 मई को सुबह 5 लोगों के शव निकाले गए हैं.
इस घटना के बाद से ही ऐसे क्रूज को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बरगी डैम की तरह देश में क्रूज कहां-कहां चलता है और कहां कितना किराया लगता है. मुंबई से गोवा क्रूज का सबसे लोकप्रिय रूट मुंबई से गोवा के बीच चलने वाला क्रूज देश के सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले क्रूज में शामिल है. यह यात्रा आमतौर पर दो रात की होती है, जिसमें जहाज मुंबई से रवाना होकर समुद्र के रास्ते गोवा पहुंचता है और वापस लौटता है. किराए की बात करें तो अलग-अलग केबिन के हिसाब से कीमत तय होती है, जैसे इंटरियर केबिन करीब 35,000 से 45,000 रुपये प्रति व्यक्ति में बुक होता है. मुंबई का हाई सी क्रूज है पॉपुलर कुछ क्रूज ऐसे भी होते हैं, जो किसी पोर्ट पर नहीं रुकते और समुद्र में घूम कर वापस आ जाते हैं. इन्हें हाई सी क्रूज कहा जाता है. इस तरह के दो-तीन दिन के सफर का किराया थोड़ा कम होता है. इसमें में इंटीरियर केबिन किराया का किराया 32,000 से 40,000 रुपये होता है. वहीं ओशन व्यू केबिन में 42,000 से 52,000 रुपये प्रति व्यक्ति किराया होता है. ये भी पढ़ें-Labour Day 2026: क्या होता है न्यूनतम वेतन, जानें 2026 में आपके राज्य में कितना है मिनिमम वेज?
लक्षद्वीप में क्रूज मुंबई या कोच्चि से लक्षद्वीप जाने वाले क्रूज को प्रीमियम कैटेगरी में रखा जाता है. यह यात्रा करीब पांच रात की होती है और इसमें अलग-अलग द्वीपों का एक्सपीरियंस मिलता है. इन क्रूज में इंटीरियर केबिन के रेंट 75,000 से 95,000 रुपये होता है. वही ओशन व्यू में 95,000 से 1.5 लाख रुपये तक का किराया होता है. देश के अन्य क्रूज और वोटिंग डेस्टिनेशन बड़े क्रूज के अलावा भारत में कई जगह पर छोटे स्तर पर भी क्रूज और बोटिंग का एक्सपीरियंस लिया जाता है. जैसे केरल के बैकवाटर्स में हाउसबोट, गोवा में मांडोवी नदी पर डिनर क्रूज, मुंबई में अरब सागर पर शॉर्ट क्रूज, सुंदरबन में जंगल और नदी के बीच क्रूज और अंडमान निकोबार में समुद्री क्रूज इन जगहों पर किराया, एक्सपीरियंस और समय के अनुसार अलग-अलग होता है.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Stroke Risk: जलवायु परिवर्तन से सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, अब मेंटल हेल्थ को भी खतरा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/stroke-risk-जलवायु-परिवर्तन-से-सिर्फ-पर्यावरण-ही-नहीं-अब-मेंटल-हेल्थ-को-भी-खतरा</link>
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        <description><![CDATA[ Stroke Risk: जलवायु परिवर्तन से जुड़ी परेशानी अब बस पर्यावरण की समस्या जैसे ग्लेशियर के पिघलने या समुद्री जलस्तर के बढ़ने तक ही सीमित नहीं रह गया है. यह कहीं न कहीं हमारे स्वास्थ्य, खासकर दिमाग पर गहरा असर डाल रहा है. बढ़ती गर्मी से लेकर बदलते मौसम और प्रदूषण तक अब सीधे तौर पर स्ट्रोक जैसे गंभीर रोगों से जुड़ने लगे हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अब स्ट्रोक का खतरा केवल खान-पान या लाइफस्टाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस हवा और तापमान से भी जुड़ा है जिसमें हम जी रहे हैं. साथ ही यह एक दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक बनता जा रहा है.&amp;nbsp;
गर्मी और डिहाइड्रेशन से बढ़ता स्ट्रोक का खतरा
रिपोर्ट के अनुसार, अत्यधिक गर्मी स्ट्रोक के खतरे को काफी बढ़ा देती है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ स्ट्रोक में छपे वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गनाइजेशन के एक नए वैज्ञानिक बयान में यह बताया गया है कि बाहर का मौसम अब हमारे दिमाग के अंदर होने वाली गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर रहा है. इसका कारण है कि जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ता है तो शरीर से पानी तेजी से निकलने लगता है, जिससे डिहाइड्रेशन हो जाता है. इसी वजह से खून गाढ़ा हो जाता है और खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है यानी खून गाढ़ा होकर जमने लगता है, जो इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बन सकता है. इसके अलावा गर्मी दिल और ब्लड वेसल्स पर भी दबाव डालती है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
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अचानक बदलते मौसम का असर
अक्सर लोगों को लगता है कि ऐसा गर्मी का कारण हो रहा है लेकिन इस स्थिति में सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि मौसम मे अचानक बदलाव भी शरीर पर असर डालते हैं. तापमान, नमी और हवा के दबाव मे तेजी से बदलाव होने पर ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, जो स्ट्रोक का मुख्य कारण बनता है. इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि जब शरीर को बार-बार बदलते मौसम के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है, तो यह दिल और दिमाग पर अतिरिक्त दबाव डालता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
प्रदूषण और कंपाउंड वेदर का खतरा
इसके बाद ऐसी स्थितियां आती हैं जिन्हें विशेषज्ञ &amp;ldquo;संयुक्त घटनाएं&amp;rdquo; कहते हैं, यानी ऐसा मौसम जो एक साथ कई समस्याएं लेकर आता है. हम बात कर रहें है जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ वायु प्रदूषण का बढ़ना. ऐसे हालात में ये समस्याएं एक-दूसरे को और बढ़ा देती हैं, जिससे शरीर पर ज्यादा असर पड़ता है. जलवायु परिवर्तन के साथ बढ़ता वायु प्रदूषण भी स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है. गाड़ियों के धुएं, फैक्ट्रियों और जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाली घटनाएं जैसे जंगल की आग और धूल भरी आंधी से बहुत छोटे-छोटे कण हवा में फैल जाते हैं जो फेफड़ों के जरिए खून मे पहुंच जाते हैं और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ब्लॉकेज या फटने का खतरा बढ़ जाता है. दुनियाभर मे लगभग 20 प्रतिशत से ज्यादा स्ट्रोक के मामले प्रदूषण से जुड़े माने गए हैं. &amp;nbsp;इसके अलावा जब एक साथ कई मौसम की स्थितियां जैसे गर्मी और सूखा या ठंड और नमी आती हैं, तो यह खतरा और बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
किन लोगों पर ज्यादा असर और क्या उपाय
रिपोर्ट के अनुसार बुजुर्ग, बाहर काम करने वाले लोग और जो लोग पहले से ही कमजोर या बीमार हैं, उनके लिए यह स्थिति खतरनाक और कभी-कभी जानलेवा साबित होती है. खासकर कम आय वाले देशों मे स्ट्रोक के लगभग 89 प्रतिशत मामले देखे जाते हैं, जहां जलवायु का असर भी ज्यादा होता है, और उनके पास इससे निपटने के लिए संसाधन भी कम होते हैं. &amp;nbsp;विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे को कम करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाना, साफ ऊर्जा अपनाना और लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है. &amp;nbsp;साथ ही हेल्थ सिस्टम को भी मौसम से जुड़े जोखिमों के लिए तैयार करना भी बहुत आवश्यकता है.
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        <pubDate>Sat, 02 May 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Stroke, Risk:, जलवायु, परिवर्तन, से, सिर्फ, पर्यावरण, ही, नहीं, अब, मेंटल, हेल्थ, को, भी, खतरा</media:keywords>
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        <title>Nations Staring with letter &amp;apos;D&amp;apos;: सिर्फ इन 5 देशों के नाम D से होते हैं शुरू, जान लें यहां घूमने लायक जगहों के नाम</title>
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        <description><![CDATA[ Nations Staring with letter &#039;D&#039; : दुनिया में अनेकों सुंदर और अजीबो गरीब देश हैं. कुछ अपने खान पान, कुछ कला तो कुछ अपने इतिहास के लिए जाने जाते हैं. आजकल के ट्रैवल उत्साही तरह तरह की बकेट लिस्ट तैयार करते हैं, कोई खान पान के हिसाब से करता है तो कोई वहां की सुंदर जगहों के हिसाब से. उन्हीं में से कुछ क्रिएटिव लोग अल्फाबेट के हिसाब से भी देशों का चयन करते हैं. तो चलिए आज देखते हैं &#039;D&#039; से शुरू होने वाले देशों के बारे में.
Dominica
Dominica जो कैरिबिया में बसा एक बेहद ही सुंदर आइलैंड देश है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. यह आइलैंड ज्वालामुखी परिदृश्यों, वर्षावण और वॉटरफॉल्स का एक सुंदर पैकेज प्रस्तुत करता है. इसे कैरिबिया का नेचर आइलैंड भी कहा जाता है. यहां घूमने की कुछ खास जगहों में बॉइलिंग लेक, मोर्ने ट्रोइस पिटोंस नेशनल पार्क और ट्राफलगर फॉल्स जैसी नायाब जगहें शामिल हैं.
Denmark
अगला देश है Denmark, जो एक स्कैंडिनेवियाई देश है. यह अपने इतिहास और अच्छी क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए जाना जाता है. इस देश को अपने समुद्र तटों और Hans Christian Andersen (डेनिश लेखक) के फेयरी टेल्स के लिए भी जाना जाता है. कोपेनहेगन, जो इसकी राजधानी है, अपनी साइक्लिंग कल्चर के लिए मशहूर है. यहां घूमने की कुछ खास जगहों में नयहावन, टिवोली गार्डन्स और द लिटिल मरमेड जैसी लुभावनी जगहें शामिल हैं.
The Democratic Republic of Congo
अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा यह देश अपने वर्षावणों और भारी मात्रा में पाए जाने वाले प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है. यहां अत्यधिक मात्रा में कोबाल्ट और डायमंड भंडार होने के बावजूद काफी पॉलिटिकल इंस्टेबिलिटी और कॉन्फ्लिक्ट्स देखने को मिलते हैं. यहां की कुछ खास जगहों में विरुंगा नेशनल पार्क, न्यिरागोंगो ज्वालामुखी और काहुजी बिएगा नेशनल पार्क जैसी जगहें शामिल हैं.
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Dominican Republic
Dominican Republic हिस्पानियोला आइलैंड पर बसा एक सुंदर देश है, जो Haiti &amp;nbsp;के साथ इस आइलैंड को शेयर करता है. यह अपने खूबसूरत समुद्री तटों, कॉलोनियल हिस्ट्री और रंगीन कल्चर के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां की राजधानी सैंटो डोमिंगो को दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है. यहां की कुछ खास जगहों में पुंटा काना, सैंटो डोमिंगो कॉलोनियल जोन और साओना आइलैंड जैसी सुंदर जगहें शामिल हैं.
Djibouti
Djibouti, &amp;nbsp;रेड सी के पास अफ्रीकी महाद्वीप में बसा एक छोटा सा देश है. इसकी कोस्टल ब्यूटी देखने लायक होती है और यहां का अरब और अफ्रीकी संस्कृति का मिश्रण इसे ट्रैवलर्स के बीच बेहद ही आकर्षक बनाता है. यहां की कुछ खास जगहों में लेक असाल, लेक अब्बे और डे फॉरेस्ट नेशनल पार्क शामिल हैं.
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 12:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Success Quotes: जो शख्स खुश होता है... जिंदगी बना देंगे सुंदर पिचाई के ये सक्सेस कोट्स, आज ही करें फॉलो</title>
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        <description><![CDATA[ Success Quotes: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान खुश रहना चाहता है, लेकिन ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि खुशी तभी मिलेगी जब सब कुछ परफेक्ट होगा. यही सोच हमें अंदर से थका देती है. लेकिन Sundar Pichai का एक कोट इस सोच को पूरी तरह बदल देता है. &amp;nbsp;उनका कहना है किजो व्यक्ति खुश होता है, वह इसलिए नहीं होता कि उसकी जिंदगी में सब कुछ सही है, बल्कि वह इसलिए खुश होता है क्योंकि उसकी जिंदगी में हर चीज के प्रति उसका नजरिया सही होता है. मतलब खुश रहने का संबंध हालात से नहीं, बल्कि हमारे नजरिए से होता है. अगर हम अपने सोचने का तरीका बदल लें, तो जिंदगी अपने आप आसान और सुंदर लगने लगती है.&amp;nbsp;
मिडिल क्लास सोच से मिली बड़ी सीख
सुंदर पिचाई खुद एक मिडिल क्लास परिवार से आते हैं, और उन्होंने अपने जीवन में यह सीखा कि कम साधनों में भी खुश रहा जा सकता है. उन्होंने बताया कि मिडिल क्लास लाइफ हमें सिखाती है कि हर छोटी चीज की कदर कैसे करनी है. &amp;nbsp;कम सुविधाओं में भी संतुष्ट रहना और मेहनत के दम पर आगे बढ़ना, यही असली ताकत होती है. &amp;nbsp;यही कारण है कि सुंदर पिचाई का नजरिया इतना मजबूत है और वे हर हाल में पॉजिटिव रहने की बात करते हैं.&amp;nbsp;
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&amp;ldquo;सब कुछ सही होना जरूरी नहीं&amp;rdquo; बड़ी सीख
ज्यादातर लोग खुशी को एक लिस्ट की तरह पाने की कोशिश करते हैं, जैसे ज्यादा पैसा, अच्छी नौकरी, अच्छा रिश्ता, अच्छा शरीर और एक अच्छा घर. पिचाई का यह कथन उस भ्रम को दूर करता है और &amp;nbsp;उनका सबसे चर्चित कोट यही बताता है &amp;nbsp;कोई इंसान इसलिए खुश नहीं होता क्योंकि उसकी जिंदगी में सब कुछ सही है, बल्कि इसलिए खुश होता है क्योंकि उसका नजरिया सही होता है. &amp;nbsp; &amp;nbsp;असल में जिंदगी में समस्याएं हर किसी के पास होती हैं. &amp;nbsp;फर्क बस इतना है कि कुछ लोग उन्हें बोझ समझते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें सीखने का मौका मानते हैं. यही सोच इंसान को अंदर से मजबूत बनाती है और उसे आगे बढ़ने की ताकत देती है.&amp;nbsp;
सही एटीट्यूड ही असली सफलता की कुंजी
यह कोट हमें सिखाता है कि सफलता का सीधा संबंध हमारे एटीट्यूड से होता है. अगर हम हर परिस्थिति में पॉजिटिव रहने की कोशिश करें, तो मुश्किल हालात भी आसान लगने लगते हैं. &amp;nbsp; &amp;nbsp;एक अच्छा एटीट्यूड न सिर्फ हमें मानसिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि हमारे काम और रिश्तों में भी सुधार लाता है. यही वजह है कि सफल लोग हमेशा अपने सोचने के तरीके पर ज्यादा ध्यान देते हैं, न कि सिर्फ परिस्थितियों पर.&amp;nbsp;
रोजमर्रा की जिंदगी में कैसे अपनाएं ये सीख?
इस सोच को अपनाने के लिए जरूरी है कि हम छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढना शुरू करें. जैसे &amp;nbsp;अपने काम के लिए आभार महसूस करना, हर दिन कुछ नया सीखना और नेगेटिव सोच से दूरी बनाना. धीरे-धीरे यह आदत हमारी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाती है. वही &amp;nbsp;जब हम हर स्थिति में पॉजिटिव रहना सीख जाते हैं, तब हमें बाहरी चीजों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती और हम खुद से खुश रहना सीख जाते हैं. सही सोच रखने का मतलब यह नहीं है कि हर चीज ठीक है ऐसा दिखावा किया जाए। इसका असली मतलब है. समस्याओं से भागने के बजाय उन्हें मानना, लेकिन उन्हें खुद पर हावी न होने देना. और दिन में खुशी ढूंढना और हर चीज परफेक्ट हो, यह जरूरी नहीं है, इसलिए नतीजों की चिंता छोड़कर अपने प्रयास पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. जब आपकी सोच सही होती है, तो आप कोई सुपरहीरो नहीं बन जाते जिसे कभी दुख या परेशानी महसूस न हो. बल्कि आप एक समझदार और जमीन से जुड़े इंसान बनते हैं, जो हर हाल में डटा रहता है, मेहनत करता है और मुश्किल समय में भी छोटी-छोटी खुशियां ढूंढ लेता है.&amp;nbsp;
खुशी एक चुनाव है, मंजिल नहीं
सबसे बड़ी बात जो इस कोट से सीखने को मिलती है कि खुश रहने के लिए परफेक्ट जिंदगी का इंतजार करना जरूरी नहीं है. &amp;nbsp;आप अपनी अभी की जिंदगी को, उसकी कमियों और परेशानियों के साथ भी, समझदारी और सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार कर सकते हैं. &amp;nbsp;अगर हम हर दिन यह तय करें कि हमें परिस्थितियों से ज्यादा अपने नजरिए पर ध्यान देना है, तो जिंदगी अपने आप बेहतर होने लगती है. &amp;nbsp;सुंदर पिचाई का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि असली सफलता वही है, जब हम हर हाल में खुश रहना सीख जाएं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः रात में शरीर थका हुआ है लेकिन दिमाग रहता है एक्टिव? जानिए क्यों बढ़ती है ओवरथिंकिंग और नींद न आने की समस्या ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 01 May 2026 12:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Overthinking At Night: रात में शरीर थका हुआ है लेकिन दिमाग रहता है एक्टिव? जानिए क्यों बढ़ती है ओवरथिंकिंग और नींद न आने की समस्या</title>
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        <description><![CDATA[ Overthinking At Night: रात में शरीर थका हुआ है लेकिन दिमाग रहता है एक्टिव? जानिए क्यों बढ़ती है ओवरथिंकिंग और नींद न आने की समस्या ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ganga Expressway Tourism Benefits: गंगा एक्सप्रेसवे से टूरिज्म को कितना होगा फायदा, किन धार्मिक शहरों से होगा कनेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Ganga Expressway Tourism Benefits: उत्तर प्रदेश हमेशा से भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र रहा है. यहां की धरती पर ऐसे कई तीर्थ और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु और टूरिस्ट पहुंचते हैं, लेकिन लंबे समय तक इन जगहों तक पहुंचने में समय और सुविधा की कमी एक बड़ी चुनौती रही है. अब गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यह हालात तेजी से बदलने वाले हैं. करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से लेकर प्रयागराज तक फैला हुआ है. इससे न सिर्फ सफर का समय आधा हो जाएगा, बल्कि राज्य के कई धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को एक साथ जोड़ने का काम भी करेगा. तो आइए जानते हैं कि गंगा एक्सप्रेसवे से टूरिज्म को कितना फायदा होगा और किन धार्मिक शहरों से कनेक्शन होगा.&amp;nbsp;
गंगा एक्सप्रेसवे से टूरिज्म को कितना फायदा होगा
पहले मेरठ से प्रयागराज तक यात्रा करने में 10-12 घंटे लग जाते थे, लेकिन अब यह सफर लगभग 5-6 घंटे में पूरा हो सकेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो वीकेंड या छोटे समय में कई धार्मिक स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं. बेहतर सड़क, तेज कनेक्टिविटी और सुरक्षित यात्रा तीनों चीजें मिलकर पर्यटन को नए फायदे देंगे.&amp;nbsp;
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा सबसे बड़ा बढ़ावा
गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा असर धार्मिक पर्यटन पर पड़ेगा. यह कई प्रमुख तीर्थ स्थलों को सीधे जोड़ता है, जैसे Garhmukteshwar, Kalki Dham, Belha Devi Dham, Chandrika Devi Temple, Triveni Sangam. इन सभी स्थानों पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं. अब यहां पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.&amp;nbsp;
किन धार्मिक शहरों से कनेक्शन होगा
गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई बड़े धार्मिक शहर आपस में बेहतर तरीके से जुड़ जाएंगे, जिससे यात्रा आसान और तेज हो जाएगी. यह एक्सप्रेसवे Prayagraj को Varanasi और Vindhyachal Dham जैसे जरूरी स्थलों से जोड़ता है. इसके साथ ही Ayodhya और Gorakhnath Temple जैसे तीर्थ भी आसानी से पहुंच में आ जाएंगे. Naimisharanya जैसे पवित्र स्थल, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, अब बेहतर सड़कों के कारण और लोकप्रिय होंगे. इसके अलावा Chitrakoot, जो भगवान राम के वनवास से जुड़ा है, वहां पहुंचना भी आसान होगा. वहीं Mathura और Vrindavan जैसे प्रसिद्ध धार्मिक शहरों में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है, जिससे पूरे राज्य में धार्मिक पर्यटन को बड़ा फायदा मिलेगा.
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यहां भी मिलेगा फायदा
हस्तिनापुर, जो महाभारत काल से जुड़ा है और जैन धर्म का प्रमुख केंद्र भी है, अब ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएगा. इसके आसपास के स्थान जैसे:पांडेश्वर महादेव मंदिर, कर्ण मंदिर, Hastinapur Wildlife Sanctuary. इन सभी जगहों पर पर्यटन बढ़ेगा.&amp;nbsp;
कौन से छोटे शहरों को मिलेगा फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे का फायदा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा. इसके रास्ते में आने वाले छोटे शहर और कस्बे जैसे Sambhal, Budaun, Shahjahanpur, Rae Bareli, इन सभी जगहों पर होटल, दुकानें, ट्रांसपोर्ट और लोकल बिजनेस तेजी से बढ़ेंगे. पहले लोग एक बार में सिर्फ एक तीर्थ ही जा पाते थे, लेकिन अब एक्सप्रेसवे की मदद से एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन कर सकते हैं इससे यात्रा का समय बचेगा, खर्च बढ़ेगा और पर्यटन का अनुभव बेहतर होगा.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ganga, Expressway, Tourism, Benefits:, गंगा, एक्सप्रेसवे, से, टूरिज्म, को, कितना, होगा, फायदा, किन, धार्मिक, शहरों, से, होगा, कनेक्शन</media:keywords>
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        <title>Kitchen Cancer Risk: किचन में रखी ये चीजें दे रही हैं कैंसर को न्योता, आज ही निकालकर फेंक दें बाहर</title>
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        <description><![CDATA[ Kitchen Cancer Risk: सभी लोग अपने घर और किचन को साफ-सुथरा और सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं. लेकिन कई बार रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें ही हमारी सेहत के लिए खतरा बन जाती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि किचन में मौजूद कुछ आम सामान धीरे-धीरे शरीर में जहरीले तत्व पहुंचते हैं, जो लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपके भी किचन में रखी है यह चीज तो आप भी कैंसर को न्योता दे रहे हैं. ऐसे में कौन सी चीजों को आज ही किचन से निकालकर बाहर फेंक देना चाहिए.
किचन स्पंज दिखता है साफ, लेकिन खतरनाक
डॉक्टरों के अनुसार बर्तन साफ करने वाला स्पंज बैक्टीरिया का बड़ा अड्डा बन सकता है. इसके छोटे-छोटे छेद में नमी और खाने के कण फंसे रहते हैं, जहां खतरनाक बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं. यह बैक्टीरिया बर्तनों के जरिए शरीर में पहुंचकर इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकते हैं और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं.
प्लास्टिक के बर्तन और कंटेनर
किचन में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के बर्तन जैसे चोपिंग बोर्ड और स्टोरेज कंटेनर भी सेहत के लिए ठीक नहीं माने जाते हैं. खासकर जब इनमें गरम खाना रखा है या गर्म किया जाता है तो हानिकारक केमिकल्स खाने में मिल जाते हैं. माइक्रो प्लास्टिक और केमिकल्स शरीर में जाकर कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं.
एल्युमिनियम फॉयल और बर्तन
एल्युमिनियम का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसमें खट्टा या नमकीन खाना पकाने से धातु के कण भोजन में मिल सकते हैं. लंबे समय तक इसका असर शरीर पर पड़ सकता है और यह कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा माना जाता है.
नॉन स्टिक पैन का खतरा
नॉन स्टिक पैन में मौजूद कोटिंग ज्यादा गर्म होने पर हानिकारक केमिकल छोड़ सकती है. अगर पैन की सतह खराब या खरोंच वाली हो तो यह तत्व खाने में मिल सकते हैं, जो लीवर और फेफड़ों पर असर डाल सकते हैं.ये भी पढ़ें-Heat Cramps Symptoms and Causes : गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं हीट क्रैम्प्स के मामले, कैसे रखें खुद का ख्याल
प्रोसेस्ड और ज्यादा तला हुआ खाना
पैकेज्ड स्नेक्स, इंस्टेंट फूड और ज्यादा तला हुआ खाना भी खतरा बढ़ा सकते हैं. ऐसे खाने में मौजूद केमिकल और प्रिजर्वेटिव्स शरीर पर नेगेटिव असर डालते हैं. वहीं ज्यादा तेल में तले खाने में बनने वाले कुछ तत्व लंबे समय में हानिकारक हो सकते हैं..
ज्यादा शुगर वाली पैकेज्ड ड्रिंक्स
सोडा, जूस, पैकेज्ड ड्रिंक में हाई शुगर एडिटिव्स होते हैं. यह न केवल डायबिटीज का कारण बनते हैं, बल्कि कुछ रिसर्च के अनुसार कैंसर वाले खतरे को भी बढ़ा सकते हैं. घर में ताजे फल और हर्बल ड्रिंक को ही प्राथमिकता देनी चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Onion For Heatstroke Prevention : क्या प्याज खाने से सच में नहीं लगती लू, जानिए कितना सच्चा है यह दावा?</title>
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        <description><![CDATA[ Onion For Heatstroke Prevention : गर्मी का मौसम आते ही देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ने लगता है. तेज धूप, गर्म हवाएं, लू और उमस भरा मौसम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है. ऐसे में हर कोई खुद को ठंडा और सुरक्षित रखने के लिए तरह-तरह के उपाय अपनाता है. कुछ लोग ठंडे पेय पदार्थों का सहारा लेते हैं, तो कुछ घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं.
इन्हीं घरेलू उपायों में एक बहुत पुराना और आम नुस्खा जेब में प्याज रखना या कच्चा प्याज खाना लू से बचाता है. आपने भी अक्सर अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को यह कहते सुना होगा. हाल ही में इस बात को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई जब एक वायरल वीडियो में एक नेता भी प्याज को लू से बचाव का तरीका बताते नजर आए.लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सच में प्याज लू से बचा सकता है, या यह सिर्फ एक पारंपरिक मान्यता है. तो आइए जानते हैं कि क्या प्याज खाने से सच में लू नहीं लगती है और यह दावा कितना सच्चा है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;लू यानी हीटस्ट्रोक क्या होता है?
जब शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर का कूलिंग सिस्टम (पसीना आना) सही से काम नहीं करता, तब हीटस्ट्रोक यानी लू लगती है. यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है, जिसमें चक्कर आना, ज्यादा पसीना या बिल्कुल पसीना न आना, उल्टी या मितली, सिर दर्द, बेहोशी या कोमा तक की स्थिति जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत शरीर को ठंडा करना और पानी व इलेक्ट्रोलाइट देना बहुत जरूरी होता है.&amp;nbsp;
क्या प्याज खाने से सच में नहीं लगती लू?
प्याज को लेकर यह मान्यता कि उसे जेब में रखने या खाने से लू नहीं लगती है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से सही साबित नहीं माना जाता है. डॉक्टरों और मेडिकल साइंस के अनुसार लू तब लगती है जब शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता, इसलिए इससे बचने के लिए पानी, इलेक्ट्रोलाइट और धूप से बचाव जरूरी है. न कि किसी चीज को जेब में रखना, हालांकि प्याज में कुछ पोषक तत्व और पानी होता है जो शरीर को थोड़ा सहारा दे सकते हैं, लेकिन यह सीधे तौर पर हीटस्ट्रोक से बचाने का भरोसेमंद तरीका नहीं है, इसलिए इसे एक पारंपरिक मान्यता ही माना जाता है.&amp;nbsp;
यह दावा कितना सही?
यह दावा पूरी तरह सच नहीं है. प्याज सीधे तौर पर लू (हीटस्ट्रोक) से बचाने का वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं है, इसलिए इस पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं होगा. हालांकि, लोग इसे फायदेमंद इसलिए मानते हैं क्योंकि प्याज में पानी, विटामिन C और B6, पोटेशियम, मैग्नीशियम और क्वेरसेटिन जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखने, इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने और हल्की सूजन कम करने में मदद करते हैं.
प्याज खाने के फायदे और नुकसान
कच्चा प्याज गर्मियों में कुछ फायदे दे सकता है, जैसे शरीर को हल्की ठंडक महसूस कराना, पाचन सुधारना और इम्युनिटी को सपोर्ट करना, लेकिन इसे ज्यादा मात्रा में खाने से गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं, और कुछ लोगों को यह उल्टा गरम &amp;nbsp;भी लग सकता है. इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना बेहतर है, और अगर तीखापन ज्यादा लगे तो प्याज को पहले पानी या सिरके में भिगोकर खा सकते हैं. आयुर्वेद में भी प्याज को ठंडक देने वाला माना गया है और भुना प्याज, चटनी या रस जैसे घरेलू उपाय बताए गए हैं.&amp;nbsp;
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लू से बचने के आसान और असरदार तरीके
1. दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें और साथ में नारियल पानी, छाछ, लस्सी या आम पन्ना जैसे पेय लें, जिससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो.
2. तरबूज, खीरा, मौसमी फल और हल्का खाना खाएं, जिससे शरीर ठंडा रहे और पाचन भी सही बना रहे,&amp;nbsp;
3. हमेशा ढीले, हल्के और हल्के रंग के कपड़े पहनें, जिससे शरीर को हवा मिलती रहे और गर्मी कम लगे.&amp;nbsp;
4. खासकर दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें, और अगर निकलना जरूरी हो तो सिर और चेहरे को ढक कर ही जाएं.&amp;nbsp;
5. अगर चक्कर, कमजोरी, ज्यादा पसीना या उल्टी जैसा लगे तो तुरंत ORS या नमक-चीनी का पानी लें और शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Pneumonia Symptoms: क्या एक फेफड़े से भी जिंदा रह सकता है इंसान, जानें भयंकर निमोनिया में कैसे बचाई जाती है जान?</title>
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        <description><![CDATA[ 
Pneumonia Symptoms: हमारे देश में निमोनिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है. लेकिन इसके बारे में जागरूकता अभी भी काफी कम है. यह फेफड़ों से जुड़ा एक ऐसा संक्रमण है जो समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है. खास बात यह है कि कई मामलों में यह बीमारी इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीज का एक फेफड़ा तक निकलना पड़ जाता है. ऐसे में अक्सर लोगों के सवाल आते हैं कि क्या एक फेफड़ों के सारे भी इंसान जिंदा रह सकता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या इंसान एक फेफड़ों के सहारे भी जिंदा रह सकता है और भयंकर निमोनिया में जान कैसे बचाई जाती है?
क्या होता है निमोनिया और क्यों है खतरनाक?
निमोनिया फेफड़ों का इंफेक्शन है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है. इसमें फेफड़ों की वायु थैलियों में म्यूकस भर जाता है. जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है. इसकी सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सीने में दर्द, कमजोरी और सांस फूलना शामिल है. बच्चे, बुजुर्ग, स्मोकिंग करने वाले, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और पुरानी बीमारियों से जुड़े मरीज इसके ज्यादा खतरे में रहते हैं &amp;zwnj;
कैसे होती है निमोनिया की पहचान और इलाज?
डॉक्टर आमतौर पर जांच करते हैं और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या ब्लड टेस्ट के जरिए निमोनिया की पुष्टि करते हैं. इस बीमारी की वजह के अनुसार एंटीबायोटिक, एंटीवायरस या दूसरी दवाएं दी जाती है. गंभीर मामलों में ऑक्सीजन सपोर्ट या हॉस्पिटल में एडमिट करने की जरूरत भी पड़ती है. वहीं कुछ मामलों में निमोनिया या अन्य गंभीर इन्फेक्शन फेफड़ों को इतना नुकसान पहुंचा देते हैं कि उन्हें बचाना संभव नहीं होता है. ऐसे में न्यूमोनेक्टॉमी नाम की सर्जरी के जरिए पूरा फेफड़ा निकालना पड़ सकता है. यह स्थिति आमतौर पर खतरनाक इन्फेक्शन, टीबी, फंगल इन्फेक्शन या कैंसर जैसी बीमारियों में सामने आती है.
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क्या एक फेफड़ों के सहारे भी जिंदा रह सकता है इंसान?
एक्सपर्ट्स के अनुसार शरीर में अडॉप्शन की क्षमता होती है. अगर एक फेफड़ा निकाल दिया जाए तो दूसरा फेफड़ा धीरे-धीरे ज्यादा काम करने लगता है और शरीर की जरूरत के हिसाब से खुद को ढाल लेता है. ऐसे मरीज समय के साथ अपनी क्षमता का बड़ा हिस्सा वापस पा लेते हैं और रोजमर्रा का जीवन जी सकते हैं. हालांकि उन्हें भारी फिजिकल एक्टिविटी करने में दिक्कत हो सकती है और सांस जल्दी फूल सकती है, लेकिन सही देखभाल के साथ नॉर्मल जीवन भी संभव है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Back Pain And Kidney Connections: पीठ में हो रहा दर्द हर बार नहीं होता नॉर्मल, हो सकता है किडनी पेन; ऐसे करें पहचान</title>
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        <description><![CDATA[ 
Back Pain And Kidney Connections: अक्सर लोग पीठ में होने वाले दर्द को नॉर्मल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता, कई मामलों में यही दर्द किडनी से जुड़ी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है. किडनी शरीर का एक जरूरी अंग है, जो खून से गंदगी और टॉक्सिंस को फिल्टर करने का काम करती है. ऐसे में अगर इसमें किसी तरह की दिक्कत हो जाए तो उसका असर दर्द के रूप में महसूस हो सकता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पीठ में हो रहा दर्द हर बार नॉर्मल नहीं हो सकता है, कई बार यह किडनी पेन भी हो सकता है.
क्या होता है किडनी पेन?
किडनी पेन आमतौर पर पसलियों के नीचे, पीठ के दोनों ओर या एक तरफ महसूस होता है. यह दर्द अंदर की तरफ गहराई में होता है और कई बार पेट या ग्राेइट तक फैल सकता है. यह दर्द हल्का और लगातार भी हो सकता है या फिर तेज और लहरों में आने वाला हो सकता है, खासकर जब पथरी की समस्या हो.
कैसे समझें कि किडनी का है दर्द?
किडनी का दर्द और सामान्य पेट दर्द में फर्क करना आसान नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण होते हैं जो इसे पहचाने में मदद करते हैं. दरअसल किडनी पेन आमतौर पर पीठ के साइड में होता है, जबकि सामान्य पीठ दर्द बीच हिस्से में होता है. यह दर्द गहरा और लगातार बना रहता है जबकि मांसपेशियों का दर्द आराम या पोजीशन बदलने से कम हो जाता है. किडनी से जुड़ा दर्द कई बार जांघ या पेट की तरफ भी फैल सकता है. अगर दर्द के साथ पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, खून आना, बुखार या मतली जैसे समस्या हो तो यह किडनी से जुड़ा संकेत हो सकता है.
किन कारणों से होता है किडनी पेन?
किडनी में दर्द कई वजह से हो सकता है. सबसे आम कारणों में किडनी स्टोन और संक्रमण शामिल है. इसके अलावा पेशाब रुकना, यूरिन का उल्टा बहाव, यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट, किडनी में सूजन, सिस्ट या चोट भी दर्द का कारण बन सकते हैं. कुछ मामलों में किडनी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी इसके पीछे हो सकते हैं. हालांकि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण कम दिखाई देते हैं.
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कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं साथ में?
किडनी पेन के साथ कुछ दूसरे लक्षण भी नजर आ सकते हैं. जैसे पेशाब करते समय दर्द या जलन, बार-बार पेशाब लगना, पेशाब में खून या धुंधलापन, बुखार और ठंड लगना, उल्टी या मतली शरीर में कमजोरी या थकान यह लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि समस्या सिर्फ मांसपेशियों की नहीं बल्कि किडनी या यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी है.
कैसे होता है इलाज?
किडनी पेन का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है. संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक दवा दी जाती है, जबकि पथरी में दवाओं से लेकर प्रक्रिया या सर्जरी तक की जरूरत पड़ सकती है. गंभीर मामलों में जहां किडनी सही से काम नहीं कर रही हो, डायलिसिस जैसे प्रक्रियाएं भी करनी पड़ सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Heat and Blood Pressure: गर्मी से सिर्फ शरीर पर नहीं, ब्लड प्रेशर पर भी पड़ता है असर, जानें एक्सपर्ट ने क्या दी चेतावनी?</title>
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        <description><![CDATA[ 
Heat and Blood Pressure: देश के कई हिस्सों में इस समय तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसका असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिल रहा है. आमतौर पर गर्मी को थकान, पसीना और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि तेज गर्मी ब्लड प्रेशर पर भी सीधा असर डाल सकती है. बढ़ते तापमान में शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर की कई प्रक्रियाओं में बदलाव आता है और यही बदलाव ब्लड प्रेशर के स्तर को प्रभावित करता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार गर्मी में आमतौर पर ब्लड प्रेशर कम हो सकता है. लेकिन कुछ मामलों में यह अचानक बढ़ भी सकता है, जो खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है. ऐसे में बदलाव को समझना और समय रहते सावधानी बरतना बहुत जरूरी है.
गर्मी कैसे प्रभावित करती है ब्लड प्रेशर को?
डिहाइड्रेशन
तेज गर्मी में शरीर का तापमान कंट्रोल करने के लिए कई तरह की प्रतिक्रियाएं होती है. जिनका असर सीधे ब्लड प्रेशर पर पड़ता है. सबसे पहले ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है. जब शरीर में फ्लूइड कम हो जाता है, तो खून की मात्रा भी घटती है. जिससे ब्लड प्रेशर नीचे जा सकता है. इस स्थिति में चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना आम बात है.
वैसोडिलेशन
इसके अलावा गर्मी में शरीर की ब्लड सेल्स फैल जाती है, जिससे शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलती है. लेकिन इस प्रक्रिया के कारण भी ब्लड प्रेशर कम हो सकता है. खासकर उन लोगों में जो पहले से ही ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं.
हार्ट रेट में तेजी
शरीर में खून का सही प्रभाव बनाए रखने के लिए दिल को ज्यादा तेजी से धड़कना पड़ता है. इससे हार्ट एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है और लंबे समय तक ऐसा रहने पर यह दिल से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है.
स्ट्रेस रिस्पाॅन्स
वहीं, कुछ कंडीशन में ज्यादा गर्मी में तनाव हार्मोन को भी बढ़ा देता है. जिससे ब्लड प्रेशर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है. यही कारण है कि कई बार गर्मियों में ब्लड प्रेशर हाई और लॉ दोनों तरह के ब्लड प्रेशर की समस्या देखने को मिलती है.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर गर्मी के दौरान ब्लड प्रेशर कम हो जाए तो चक्कर आना, कमजोरी होना या बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. वहीं अगर ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाए तो सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, थकान, मतली या नजर धुंधली होना जैसे संकेत सामने आ सकते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए.ये भी पढ़ें-कितनी भी कोशिश कर लो भटूरे फूलते नहीं हैं? इस ट्रिक से बनाओगे तो बन जाओगे &#039;भटूरा मास्टर&#039;
गर्मी में ब्लड प्रेशर को कैसे करें कंट्रोल?
हाइड्रेट रहें
डॉक्टर के अनुसार गर्मी के मौसम में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर ब्लड प्रेशर को संतुलित रखा जा सकता है. सबसे जरूरी है कि शरीर को हाइड्रेट रखना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में फ्लूइड का संतुलन बना रहता है और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. &amp;zwnj;
ढीले कपड़े पहने और धूप से बचें
तेज धूप से बचना भी जरूरी है, दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचें और हल्के में ढीले कपड़े पहनें. ताकि शरीर का तापमान कंट्रोल में रहे.
फिजिकल एक्टिविटी सीमित करें
गर्मी में भारी फिजिकल एक्टिविटी को सीमित रखना चाहिए. खासकर दोपहर के समय अगर व्यायाम करना हो तो सुबह या शाम का समय बेहतर माना जाता है.
ब्लड प्रेशर चेक करते रहें
ब्लड प्रेशर की नियमित जांच भी जरूरी है, ताकि किसी भी असामान्य बदलाव का समय पर पता चल सके.
संतुलित आहार लें
गर्मियों के समय में खानपान पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है. फल और सब्जियां शरीर को जरूरी पोषक तत्व और पानी दोनों प्रदान करते हैं. जबकि नमक का ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है.
कैफीन और अल्कोहल से दूर रहें
इनके अलावा कैफीन और शराब जैसी चीजों से गर्मी में दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है. क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है. वहीं शरीर को ठंडा रखने के लिए कूलर पंखा या ठंडा पानी से नहाना जैसे उपाय भी मददगार हो सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Empty Stomach Almonds: हर दिन खाली पेट बादाम खाने के क्या हैं फायदे? जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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        <description><![CDATA[ Empty Stomach Almonds: आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर थकान, कमजोरी और फोकस की कमी जैसी समस्याओं से जूझते नजर आते हैं. ऐसे में दिन की शुरुआत कैसी हो इसका सीधा असर आपकी पूरे दिन की सेहत और एनर्जी पर पड़ता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुबह की छोटी सी हेल्दी आदत भी शरीर को लंबे समय तक फिट रखने में मदद कर सकती है. इन्हीं आदतों में से एक खाली पेट भीगे हुए बादाम का सेवन करना है, जिसे आयुर्वेद से लेकर आधुनिक पोषण विज्ञान तक फायदेमंद माना गया है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि हर दिन खाली पेट बादाम खाने के क्या फायदे होते हैं?
खाली पेट बादाम खाने के क्या होते हैं फायदे?
बादाम को रातभर भिगोकर खाने से उसके पोषक तत्व शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं. भीगने के बाद उसका छिलका नरम हो जाता है, जिससे पाचन आसान &amp;nbsp;होता है और शरीर को फायदा मिलता है. यही वजह है कि भीगे बादाम हुए बादाम को सूखे बादाम के मुकाबले ज्यादा असरदार माना जाता है. वहीं भीगे हुए बादाम को ब्रेन फूड भी कहा जाता है, इसमें मौजूद पोषक तत्व याददाश्त को बेहतर बनाने और दिमागी कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है.
दिल को रखते हैं हेल्दी
नियमित रूप से बादाम खाने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है. साथ यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है जिससे दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है.
वजन कंट्रोल में भी मददगार
बादाम में मौजूद फाइबर और प्रोटीन लंबे समय तक पेट भर रखते हैं. इससे बार-बार खाने की आदत कम होती है और वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है.
पाचन और ब्लड शुगर को रखते हैं संतुलित
भीगे हुए बादाम पचने में आसान होते हैं. उनके नियमित सेवन से, गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसे समस्याओं में राहत मिल सकती है और आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है. वहीं बादाम में मौजूद मैग्नीशियम और हेल्दी फैट्स ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं. यह इंसुलिन की कार्य क्षमता को भी बेहतर बनाते हैं.
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स्किन और बालों के लिए भी फायदेमंद
बादाम में मौजूद विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट स्किन को चमकदार बनाने और उम्र के असर को कम करने में मदद करते हैं. साथ ही यह बालों को मजबूत बनाकर झड़ने की समस्या को कम करने में भी सहायक होते हैं. कैल्शियम मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में जरूरी भूमिका भी निभाते हैं.
रोजाना कैसे करें बादाम का सेवन?
एक्सपर्ट्स के अनुसार रोजाना रात में 4 से 6 बादाम पानी में भिगोकर रख दें और सुबह छिलका हटाकर खाली पेट खा लें. बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसकी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी होता है.
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        <title>Summer Skincare Tips: फेस टैनिंग से कैसे करें बचाव? आप भी आज ही से शुरू कर दें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ Summer Skincare Tips: तेज धूप और चिलचिलाती गर्मी का असर शरीर पर साफ नजर आता है, जैसे डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान. &amp;nbsp;लेकिन इन सबके बीच एक बड़ी परेशानी टैनिंग की भी होती है, जो सिर्फ चेहरा धो लेने से आसानी से नहीं हटती. &amp;nbsp;धूप के लगातार संपर्क में रहने से त्वचा की रंगत बदलने लगती है और चेहरा डल दिखने लगता है. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते सही उपाय अपनाए जाएं ताकि टैनिंग से बचाव किया जा सके. वही इससे बचने के लिए लोग कई तरह के उपाय अपनाते हैं, यहां तक कि कुछ लोग मेडिकल ट्रीटमेंट भी लेते हैं, लेकिन हर बार इसका असर नहीं दिखता. ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं, जिनसे टैनिंग को कम किया जा सकता है. आइए जानते हैं कैसे?
दही और बेसन का फेस पैक
टैनिंग से छुटकारा पाने के लिए दही और बेसन का फेस पैक काफी असरदार माना जाता है. &amp;nbsp;इसे बनाने के लिए एक कटोरे में दही और बेसन को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. साथ ही इस पेस्ट को चेहरे और गर्दन पर लगाएं और करीब 20 मिनट तक सूखने के बाद इसे धो लें. &amp;nbsp;बेहतर रिजल्ट के लिए आप इसे हफ्ते में दो से तीन बार इस्तेमाल करें.
यह भी पढ़ेंः बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल
खीरा, टमाटर और दही का पैक
खीरा और हल्दी का पैक त्वचा को ठंडक देता है और टैनिंग कम करने में मदद करता है. इसके लिए खीरे को पीसकर उसमें हल्दी मिलाएं और चेहरे पर लगाएं. इसके अलावा टमाटर और दही का पैक भी फायदेमंद होता है. इसमें टमाटर को पीसकर, दही मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट तक सूखने के बाद धो लें. इन दोनों पैक्स का इस्तेमाल हफ्ते में एक से दो बार किया जा सकता है.
एलोवेरा और नींबू का इस्तेमाल
एलोवेरा जेल और नींबू का रस भी टैन हटाने में मदद करता है. इसके लिए दोनों को मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें और इसे चेहरे व गर्दन पर लगाएं. फिर लगभग 15 मिनट बाद इसे धो लें. &amp;nbsp;इसे भी हफ्ते में दो से तीन बार लगाया जा सकता है, जिससे त्वचा को ठंडक और निखार मिलता है. &amp;nbsp;
पपीता, शहद और हल्दी का पैक
पपीता, शहद और हल्दी से बना फेस पैक भी टैनिंग हटाने में मदद करता है. &amp;nbsp;इसके लिए पपीते का रस, शहद और हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करें और चेहरे पर लगाएं. वही इसे 10 मिनट तक रखने के बाद धो लें. &amp;nbsp;इस पैक को एक दिन छोड़कर इस्तेमाल किया जा सकता है, ये चीज ध्यान देने वाली बात यह है कि गर्मियों में टैनिंग के साथ-साथ स्किन एलर्जी की समस्या भी काफी देखने को मिलती है. टैनिंग और एलर्जी दोनों का प्रभाव त्वचा पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है, इसलिए इनकी सही समय पर पहचान करना बहुत जरूरी होता है. &amp;nbsp;किसी भी तरह की परेशानी बढ़ने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है, ताकि सही इलाज मिल सके.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं हीट क्रैम्प्स के मामले, कैसे रखें खुद का ख्याल ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Sugarcane Juice Risk: गर्मी में गन्ने का जूस पीना आपके लिए कितना सुरक्षित? डॉक्टर ने बताएं इसके छिपे खतरे</title>
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        <description><![CDATA[ 
Sugarcane Juice Risk: तेज धूप, गर्म हवाएं और पसीने से तरबतर दिन, ऐसे मौसम में सड़क किनारे मिलने वाला गन्ने का जूस किसी राहत से कम नहीं लगता है. नींबू, काला नमक और पुदीने के साथ इसका स्वाद और भी ताजगी भरा हो जाता है. यही वजह है कि गर्मियों में यह ड्रिंक लोगों की पहली पसंद बन जाता है, लेकिन जिस गन्ने के जूस को हम लोग सेहतमंद और तुरंत ठंडक देने वाला माना जाता है, क्या वह पूरी तरह सुरक्षित भी है. एक्सपर्ट का कहना है कि इसके फायदे जितने दिखते हैं. कुछ खतरे उतने ही अहम हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
गन्ने का जूस ज्यादा मात्रा में पीना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?
एक्सपर्ट के अनुसार गर्मियों में गन्ने के जूस की पॉपुलैरिटी के पीछे दो कारण हाइड्रेशन और तुरंत एनर्जी है. इसमें मौजूद नेचुरल शुगर शरीर को जल्दी एनर्जी देती है और थकान में डिहाइड्रेशन से राहत दिलाने में मदद करती है. यही वजह है कि लोग इसे तेज गर्मी में तुरंत राहत के तौर पर पीते हैं. हालांकि गन्ना प्राकृतिक रूप से मीठा होता है, लेकिन जब इसे जूस के रूप में लिया जाता है तो इसमें शुगर की मात्रा ज्यादा केंद्रित हो जाती है. जूस बनाते समय फाइबर लगभग खत्म हो जाता है, जो आमतौर पर शरीर में शुगर के अवशोषण को धीमा करता है. ऐसे में गन्ने का जूस पीने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए यह सुरक्षित नहीं माना जाता है. इसके अलावा जिन लोगों में फैटी लिवर, मोटापा या मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं हैं उन्हें भी इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. ज्यादा शुगर शरीर में फैट जमा होने के कारण बन सकती है और हेल्थ पर नेगेटिव इफेक्ट डाल सकती है.
गन्ने का जूस स्वच्छता से जुड़ा बड़ा खतरा
गन्ने के जूस से जुड़ा एक और बड़ा खतरा इसकी साफ सफाई से जुड़ा है. अक्सर यह जूस खुले में तैयार किया जाता है, जहां मशीन, बर्फ, पानी और गिलास की स्वच्छता पर पूरी तरह ध्यान नहीं दिया जाता. डॉक्टर के अनुसार अगर जूस बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीन या बर्फ साफ नहीं है, तो बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. इससे टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.ये भी पढ़ें-AIIMS Delhi New Director: कौन हैं डॉ. निखिल टंडन, बनाए गए Delhi AIIMS के डायरेक्टर; जानें इनके बारे में
किन लोगों को गन्ने के जूस से रहना चाहिए सावधान?
एक्सपर्ट्स के अनुसार गन्ने का जूस पीते समय सावधानी बरतनी चाहिए. जैसे डायबिटीज के मरीजों को, मोटापा या फैटी लिवर से जूझ रहे लोग, जिनका ब्लड शुगर तेजी बढ़ता है उन लोगों को इसे पीने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार गन्ने का जूस हमेशा साफ और हाइजेनिक जगह से ही जूस लें. &amp;nbsp;साफ मशीन, पानी और बर्फ की क्वालिटी की जो भी चेक करें और ज्यादा मात्रा में गन्ने के जूस से बचें.
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        <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>कितनी भी कोशिश कर लो भटूरे फूलते नहीं हैं? इस ट्रिक से बनाओगे तो बन जाओगे &amp;apos;भटूरा मास्टर&amp;apos;</title>
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        <description><![CDATA[ छोले भटूरे का नाम सुनते ही हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है. लेकिन जब बात घर पर भटूरे बनाने की आती है तो अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि भटूरे या तो सख्त बनते हैं या फिर फूलते नहीं है. वहीं बाजार या हलवाई की दुकान पर मिलने वाले भटूरे एकदम गुब्बारे जैसे फूलते और अंदर से नरम होते हैं. असल में उनके पीछे आटे की सही तैयारी और कुछ कुकिंग ट्रिक होती है. जिन्हें नजरअंदाज करने पर भटूरे सही से नहीं बन पाते हैं. ऐसे में अगर आप भी चाहते हैं कि आपके भटूरे बिल्कुल रेस्टोरेंट जैसे फूले और सॉफ्ट बने तो आटा गूंथने और तलने के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सही आटा तैयार करना सबसे जरूरी भटूरे के लिए आमतौर पर मैदा इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन केवल मैदा से कई बार भटूरे चपटे रह जाते हैं. बेहतर टेक्सचर के लिए आटे में थोड़ी सूज मिलना फायदेमंद माना जाता है. सूजी भटूरे को हल्का कुरकुरा बनाती है और उन्हें ज्यादा देर तक फूला रहने में मदद करती है. इसके साथ उबला हुआ आलू मिलने से आटे में नमी बनी रहती है, जिससे भटूरे अंदर से नरम बनते हैं और चलाते समय अच्छे से फूलते हैं. गुनगुना पानी और चीनी का कमाल भटूरे का आटा गूंथते समय सिर्फ दही पर निर्भर रहने के बजाय गुनगुने पानी में थोड़ी सी चीनी मिलाकर इस्तेमाल करना बेहतर रहता है. चीनी खमीर उठने की प्रक्रिया को तेज करती है, जिसे आटा हल्का और लचीला बनता है. इससे भटूरे तलते समय जल्दी खुलते हैं और उनका रंग भी सुनहरा आता है. ध्यान रखें कि आटा बहुत सख्त न हो, बल्कि थोड़ा नरम और लचीला होना चाहिए. इसके अलावा आटा गूंथने के बाद भी उसे तुरंत इस्तेमाल करने के बजाय कुछ समय के लिए ढक कर रखना जरूरी होता है. आमतौर पर एक से तीन घंटे का समय आटे को हल्का फर्मेट होने के लिए दिया जाता है. यही स्टेप भटूरे को अंदर से स्पंजी और बाहर से खुला हुआ बनता है. ये भी पढ़ें-Banana Lassi Recipe: क्या आपने खाई है &#039;Banana Lassi&#039;, एक बार बना लेंगे तो बार-बार करेंगे डिमांड
तलते समय यह गलती न करें भटूरे सही तरीके से तभी फूलते हैं, जब तेल का तापमान सही हो. अगर तेल कम गर्म होगा तो भटूरे तेल सोख लेंगे और नहीं फूलेंगे नहीं. वहीं बहुत ज्यादा गर्म तेल में वह ऊपर से जल्दी पक जाते. लेकिन अंदर से कच्चे रह जा सकते हैं. तेल में भटूरा डालते ही उसे हल्के से कलछी से दबाना चाहिए, इससे वह तुरंत फूल जाता है. यह गलतियां न करें

भटूरे का आटा लगाते समय उसे ठीक से गुंथे और आटे को ज्यादा से ज्यादा समय तक मसले.
आटे को पर्याप्त समय तक न रखें.
आटे को बहुत पतला न बैलें.
एक साथ ज्यादा भटूरे ने तलें.
तेल का तापमान सही रखें.

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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Pressure Cooker Blast Safety Tips : इन गलतियों की वजह से प्रेशर कुकर में हो जाता है ब्लास्ट, हमेशा ध्यान रखें ये बातें</title>
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        <description><![CDATA[ Pressure Cooker Blast Safety Tips : आज के समय में लगभग हर घर में प्रेशर कुकर का यूज होता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें खाना बहुत जल्दी बन जाता है. दाल, चावल, सब्जी या मांस सब कुछ कुकर में कम समय और कम मेहनत में तैयार हो जाता है, लेकिन जितना यह उपयोगी है, उतना ही गलत तरीके से यूज करने पर खतरनाक भी हो सकता है. कई बार खबरों में देखा जाता है कि प्रेशर कुकर फटने (ब्लास्ट) की घटनाएं हो जाती हैं, जिससे लोगों को गंभीर चोटें भी लगती हैं और कुछ मामलों में जान का नुकसान भी हो जाता है. अक्सर यह हादसे किसी बड़े कारण से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से होते हैं. अगर सही तरीके से सावधानी रखी जाए, तो इन दुर्घटनाओं से पूरी तरह बचा जा सकता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि किन गलतियों की वजह से प्रेशर कुकर में ब्लास्ट हो जाता है.&amp;nbsp;
किन गलतियों की वजह से प्रेशर कुकर में ब्लास्ट हो जाता है
1. गैसकेट और सेफ्टी वाल्व की अनदेखी - प्रेशर कुकर में रबर की गैसकेट और सेफ्टी वाल्व बहुत जरूरी होते हैं. ये दोनों मिलकर अंदर के दबाव को नियंत्रित करते हैं और अतिरिक्त भाप को बाहर निकालते हैं, लेकिन कई लोग लंबे समय तक इन्हें बदलते नहीं हैं या ध्यान नहीं देते हैं. अगर गैसकेट पुराना या ढीला हो जाए, तो भाप सही से बाहर नहीं निकलती है. वहीं अगर सेफ्टी वाल्व जाम हो जाए, तो अंदर दबाव बढ़ता जाता है. दबाव ज्यादा होने पर कुकर फटने का खतरा हो जाता है. ऐसे में समय-समय पर गैसकेट और वाल्व की जांच करें. खराब होने पर तुरंत नया लगाएं. सस्ते या नकली पार्ट्स का यूज न करें.&amp;nbsp;
2. कुकर को जरूरत से ज्यादा भर देना - कई लोग जल्दी में या ज्यादा खाना एक साथ बनाने के लिए प्रेशर कुकर को पूरी तरह भर देते हैं, लेकिन यह बहुत खतरनाक हो सकता है. जब खाना पकता है तो वह फूलता है और उसे फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, जिससे भाप निकलने का रास्ता भी बंद हो सकता है. इससे कुकर के अंदर बहुत ज्यादा दबाव बन जाता है, जो आगे चलकर ब्लास्ट का कारण बन सकता है. इस समस्या से बचने के लिए हमेशा कुकर को सिर्फ उसकी क्षमता के लगभग दो-तिहाई तक ही भरना चाहिए और खासकर दाल जैसे झाग बनाने वाले खाद्य पदार्थों को और भी कम मात्रा में पकाना चाहिए, जिससे भाप आसानी से निकलती रहे और दबाव सुरक्षित स्तर पर बना रहे.&amp;nbsp;
3. &amp;nbsp;सीटी (Whistle) की सफाई न करना - कुकर की सीटी यानी प्रेशर रिलीज वाल्व बहुत जरूरी हिस्सा है. अगर इसमें गंदगी या खाने के कण फंस जाएं, तो यह ठीक से काम नहीं करती है. इससे भाप बाहर नहीं निकल पाती, कुकर के अंदर प्रेशर बढ़ता जाता है और कुकर फटने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए हर यूज के बाद सीटी को अच्छी तरह साफ करें और वेंट पाइप में कोई रुकावट न रहने दें.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Evening Snacks Craving: शाम के मनपसंद स्नैक्स हो सकते हैं मोटापा बढ़ने का कारण, ऐसे दूर करें अपनी क्रेविंग
4. कम पानी डालना - कुछ लोग सोचते हैं कि कम पानी डालने से खाना जल्दी बन जाएगा, लेकिन यह सोच गलत और खतरनाक है. इससे खाना जल सकता है, कुकर ज्यादा गर्म हो सकता है, अंदर का तापमान असंतुलित हो जाता है और ब्लास्ट का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में हर खाने के अनुसार पर्याप्त पानी डालें और सूखा पकाने की कोशिश न करें.&amp;nbsp;
5. बहुत पुराना या खराब कुकर यूज करना - पुराना कुकर भी खतरे का कारण बन सकता है. समय के साथ उसकी बॉडी, ढक्कन और लॉक सिस्टम कमजोर हो जाते हैं. इसकी वजह से ढक्कन सही से लॉक नहीं होता, बॉडी में दरार आ सकती है, दबाव सहने की क्षमता कम हो जाती है और सीटी ठीक से काम नहीं करती है. ऐसे में पुराने और खराब कुकर को बदल दें. अच्छी कंपनी का नया कुकर खरीदें. समय-समय पर जांच करते रहें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Oily Hair Problem: शैंपू करने के अगले ही दिन ऑयली हो जाते हैं बाल, ये ट्रिक करेगी काम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/oily-hair-problem-शैंपू-करने-के-अगले-ही-दिन-ऑयली-हो-जाते-हैं-बाल-ये-ट्रिक-करेगी-काम</link>
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        <description><![CDATA[ 

Oily Hair Problem: लंबे बालों के देखभाल आसान नहीं होती है, खासकर तब जब बाल जल्दी ऑयली होने लगे. कई लोगों की शिकायत होती है कि शैंपू करने के अगले ही दिन बाल चिपचिपे और बेजान नजर आने लगते हैं. ऐसे में बार-बार बाल धोना सही नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे स्कैल्प में तेल का प्रोडक्शन और बढ़ सकता है. वहीं कम धोने पर भी बाल गंदे और ऑयली दिखते हैं. ऐसे में यह समस्या रोजाना की परेशानी बन जाती है. दरअसल बालों के जल्दी-जल्दी ऑयली होने के पीछे स्कैल्प में मौजूद ऑयल ग्लैंड्स जिम्मेदार होते हैं जो जरूरत से ज्यादा तेल बनाते हैं. इसके अलावा गलत शैंपू का इस्तेमाल बार-बार बालों को छूना, गंदी कंघी, अलग-अलग हेयर प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल और हार्मोनल बदलाव भी इसकी वजह हो सकती है. ऐसे में जरूरी है कि सही तरीके अपनाकर इस समस्या को कंट्रोल किया जाए. बिना शैंपू के भी पा सकते हैं फ्रेश बाल अगर आप रोज बाल धोने से बचना चाहते हैं तो कुछ आसान उपाय की मदद से बालों को फ्रेश और वॉल्यूम वाला रखा जा सकता है. सबसे आसान तरीका ड्राई शैंपू का इस्तेमाल है. इससे बालों की जड़ों पर स्प्रे करके हल्का मसाज करने से एक्स्ट्रा ऑयल सोख लिया जाता है और बाल फ्रेश दिखने लगते हैं. अगर आपके पास ड्राई शैंपू तो नहीं है तो टिशू पेपर या ब्लॉटिंग सीट से स्कैल्प का तेल हटाया जा सकता है. घर पर मौजूद टेलीकॉम पाउडर या कॉर्नफ्लोर भी ड्राई शैंपू की तरह काम करते हैं. वहीं एप्पल साइडर विनेगर को पानी में मिलाकर लगाने से स्कैल्प साफ रहता है और बाल हल्के महसूस होते हैं. ये भी पढ़ें-Evening Snacks Craving: शाम के मनपसंद स्नैक्स हो सकते हैं मोटापा बढ़ने का कारण, ऐसे दूर करें अपनी क्रेविंग
हेयरस्टाइल भी छुपा सकता है तेल जब समय कम हो तो स्लिक बन या पोनीटेल जैसी हेयरस्टाइल अपनाए जा सकते हैं. यह स्टाइल बालों के ऑयली लूक को छुपाने के साथ-साथ आपको साफ हो स्टाइलिश लुक भी देते हैं. इन आदतों से बढ़ सकती है समस्या कई बार छोटे-छोटे आदते भी बालों को जल्दी ऑयली बना देती है. जैसे बार-बार बालों में हाथ लगाना, गंदी कंघी का इस्तेमाल करना या हर दिन शैंपू करना एक्सपर्ट्स के अनुसार बालों को हफ्ते में दो से तीन बार ही धोना चाहिए और शैंपू को सीधे लगाने के बजाय पानी में मिलाकर इस्तेमाल करना होता है. इसके अलावा नींबू का इस्तेमाल स्कैल्प के ऑयल को कम करने में मदद करता है. बाल धोने के बाद नींबू पानी से रिंस करने पर बाल लंबे समय तक फ्रेश रहते हैं. वहीं एलोवेरा जेल स्किन को साफ करने और ऑयल कंट्रोल करने में मददगार होता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Home Remedies: दीवार के कोनों पर करें ये स्प्रे, खत्म हो जाएगा छिपकली का आतंक</title>
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        <description><![CDATA[ Home Remedies to Get Rid of Lizards : जैसे ही गर्मियां आती हैं, घर में छिपकलियों की परेशानी बढ़ जाती है. इनका नाम सुनते ही कई लोग डर जाते हैं. ये छोटी सी होती हैं और इंसानों से खुद भी डरती हैं, लेकिन फिर भी इन्हें देखते ही लोग घबरा जाते हैं, चीखने लगते हैं या कमरे से बाहर निकल जाते हैं. खासकर किचन, बाथरूम और दीवारों के कोनों में दिख जाएं तो और भी ज्यादा डर लगने लगता है. छिपकलियां घर में ज्यादातर इसलिए आती हैं क्योंकि उन्हें खाने के लिए कीड़े-मकोड़े मिलते हैं. जहां गंदगी, नमी और रोशनी ज्यादा होती है, वहां ये आसानी से दिख जाती हैं, लेकिन कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर और दीवार के कोनों पर खास स्प्रे करने से आप इन्हें बिना किसी नुकसान पहुंचाए घर से दूर रख सकते हैं. तो आइए आज हम आपको बताते हैं दीवार के कोनों पर कौन सा स्प्रे करें, जिससे घर में छिपकली का आतंक खत्म हो जाएगा.&amp;nbsp;
दीवार के कोनों पर कौन सा स्प्रे करें
1. काली मिर्च का स्प्रे - काली मिर्च की तेज गंध छिपकलियों को बिल्कुल पसंद नहीं होती है. इसे बनाने के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाएं और इसे स्प्रे बोतल में भर लें. इसे दीवारों के कोनों, किचन और उन जगहों पर छिड़कें जहां छिपकली ज्यादा आती है. इससे छिपकलियां दूर भागती हैं.&amp;nbsp;
2. प्याज और लहसुन का स्प्रे - प्याज और लहसुन में मौजूद तेज गंध भी छिपकलियों को दूर भगाने में मदद करती है. इसे बनाने के लिए एक प्याज और 4-5 लहसुन की कलियों का रस निकालकर पानी में मिलाएं और स्प्रे बोतल में भर लें. इस मिश्रण को उन जगहों पर स्प्रे करें जहां छिपकलियां दिखती हैं. हफ्ते में 2-3 बार इसका इस्तेमाल करने से अच्छा असर दिखेगा.&amp;nbsp;
3. कपूर और डिटॉल का स्प्रे - यह तरीका भी काफी असरदार माना जाता है. इसके लिए एक बोतल में पानी लें, उसमें 2-3 कपूर की गोलियां पीसकर डालें और 2-3 ढक्कन डिटॉल मिलाएं. इस घोल को दरवाजों, अलमारी के पीछे और दीवार के कोनों पर छिड़कें. इसकी गंध से छिपकलियां पास नहीं आती हैं.&amp;nbsp;
इन आसान घरेलू उपायों को भी करें ट्राई&amp;nbsp;
1. नेफ्थलीन बॉल्स का यूज - नेफ्थलीन की गोलियों की गंध भी छिपकलियों को पसंद नहीं होती है. इन्हें अलमारी, सिंक के नीचे या स्टोर रूम के कोनों में रख दें. इससे छिपकलियां दूर रहेंगी.
2. अंडे के छिलकों का ट्रिक - यह एक आसान और सस्ता उपाय है. अंडे के छिलकों को दीवार के कोनों या खिड़की के पास रख दें. माना जाता है कि छिपकलियां इन्हें देखकर डर जाती हैं और वहां नहीं आती हैं.&amp;nbsp;
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घर में रखें ये सावधानियां
1. रात में बेवजह लाइट चालू न रखें, क्योंकि इससे कीड़े और छिपकलियां आती हैं.
2. घर के कोनों, अलमारी और किचन को साफ रखें.
3. नमी और गंदगी से बचें, क्योंकि यही छिपकलियों को अट्रैक्ट करती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Heat Cramps Symptoms and Causes : गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं हीट क्रैम्प्स के मामले, कैसे रखें खुद का ख्याल</title>
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        <description><![CDATA[ Heat Cramps Symptoms and Causes : गर्मियों का मौसम आते ही शरीर पर असर साफ दिखने लगता है. तेज धूप, उमस और पसीना मिलकर शरीर को जल्दी थका देते हैं. कई बार लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही स्थिति आगे चलकर हीट क्रैम्प्स यानी गर्मी के कारण होने वाले मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन में बदल सकती है. यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो धूप में काम करते हैं, ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं या पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं.
हीट क्रैम्प्स को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह शरीर के ओवरहीट होने का पहला संकेत हो सकता है. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति आगे बढ़कर हीट एक्सॉशन या हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि गर्मियों में हीट क्रैम्प्स के मामले क्यों बढ़ जाते हैं और इससे कैसे खुद का ख्याल रखें.&amp;nbsp;
हीट क्रैम्प्स क्या होते हैं
हीट क्रैम्प्स मांसपेशियों में होने वाली दर्दनाक ऐंठन होती है, जो शरीर के ज्यादा गर्म हो जाने और पानी और जरूरी मिनरल्स (इलेक्ट्रोलाइट्स) की कमी के कारण होती है. ये ऐंठन आमतौर पर पैरों में, हाथों में, पेट या पेट के आसपास और पीठ के हिस्सों में होती है. जब हम बहुत ज्यादा पसीना बहाते हैं, तो शरीर से नमक और जरूरी तत्व बाहर निकल जाते हैं. इससे मांसपेशियां सही तरह से काम नहीं कर पाती और उनमें अकड़न या दर्द शुरू हो जाता है.&amp;nbsp;
गर्मियों में हीट क्रैम्प्स के मामले क्यों बढ़ जाते हैं
&amp;nbsp;1. शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) - गर्मी में पसीना ज्यादा आता है. अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इससे ब्लड सर्कुलेशन और तापमान कंट्रोल प्रभावित होता है.
2. इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी - सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे तत्व शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं. ये मांसपेशियों और नसों को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं. पसीने के साथ ये तत्व बाहर निकल जाते हैं, जिससे क्रैम्प्स होने लगते हैं.&amp;nbsp;
3. ज्यादा शारीरिक मेहनत - धूप में काम करना, एक्सरसाइज करना या भारी काम करना शरीर को जल्दी थका देता है और पसीना ज्यादा निकलता है, जिससे क्रैम्प्स का खतरा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
4. ज्यादा गर्मी और उमस - अगर आप बहुत गर्म और बंद जगह पर हैं, जहां हवा का सही प्रवाह नहीं है, तो शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता है. इससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
5. उम्र का असर - छोटे बच्चे और बुजुर्ग जल्दी प्रभावित होते हैं, बच्चों का शरीर तापमान जल्दी नियंत्रित नहीं कर पाता है और बुजुर्गों में पसीना कम बनता है, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Biryani and Watermelon Myth: क्या बिरयानी के बाद तरबूज खाना जानलेवा है? जानिए- क्या कहते हैं डॉक्टर्स
हीट क्रैम्प्स के लक्षण
हीट क्रैम्प्स धीरे-धीरे या अचानक शुरू हो सकते हैं. इसके कुछ आम लक्षण मांसपेशियों में तेज दर्द या ऐंठन, अचानक झटके या खिंचाव, बहुत ज्यादा पसीना आना, त्वचा का नम और लाल हो जाना, कमजोरी या थकान और कभी-कभी हल्का बुखार है.&amp;nbsp;
हीट क्रैम्प्स से कैसे खुद का ख्याल रखें
1. अगर आपको या किसी और को हीट क्रैम्प्स हो जाएं, तो धूप या गर्म जगह से हट कर ठंडी जगह पर जाएं और शरीर को आराम दें.&amp;nbsp;
2. ठंडा पानी पीएं, गीले कपड़े या ठंडी पट्टी शरीर पर रखें और पंखे या एसी के पास बैठें.&amp;nbsp;
3. ज्यादा से ज्यादा पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लें. जैसे नॉर्मल पानी, नारियल पानी, ORS या स्पोर्ट्स ड्रिंक.&amp;nbsp;
4. जिस मांसपेशी में दर्द है, उसे धीरे-धीरे स्ट्रेच करें और हल्की मालिश करें. &amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>AIIMS Delhi New Director: कौन हैं डॉ. निखिल टंडन, बनाए गए Delhi AIIMS के डायरेक्टर; जानें इनके बारे में</title>
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        <description><![CDATA[ 
AIIMS Delhi New Director: देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स नई दिल्ली की कमान अब वरिष्ठ एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. निखिल टंडन को सौंपी गई है. उन्हें संस्थान का कार्यकारी निदेशक बनाया गया है, यह जिम्मेदारी उन्हें तत्काल प्रभाव से दी गई है. जब मौजूदा निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास को नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है.
एम्स प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार डॉ. टंडन की नियुक्ति अगले आदेश तक के लिए कर दी गई है. इसी दौरान वे अपने मौजूदा पदों की जिम्मेदारियां भी साथ-साथ संभालते रहेंगे. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि डॉक्टर निखिल टंडन कौन हैं जिन्हें दिल्ली एम्स का नया डायरेक्टर बनाया गया है. फिलहाल किन पदों पर हैं डॉक्टर टंडन?डॉ. निखिल टंडन वर्तमान में एम्स के एंडोक्रोनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और एचओडी है. इसके साथ ही वह डीन की भूमिका भी निभा रहे हैं. लंबे समय से संस्थान से जुड़े होने और वरिष्ठता के चलते डॉ. निखिल टंडन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.कौन है डॉ. निखिल टंडन?डॉ. निखिल टंडन का जन्म साल 1963 में दिल्ली में हुआ था, उन्होंने एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई एम्स नई दिल्ली से पूरी की. उसके बाद वह हाई एजुकेशन के लिए भी यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज गए, जहां से उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की. साल 1993 में एम्स में फैकल्टी के रूप में शामिल हुए और तब से लगातार संस्थान में सेवाएं दे रहे हैं. चिकित्सा शिक्षा, रिसर्च और क्लिनिकल प्रैक्टिस तीनों क्षेत्रों में उनका लंबा एक्सपीरियंस रहा है. एंडोक्रोनोलॉजी के विशेषज्ञ है डॉ. निखिल टंडन डॉ टंडन देश के प्रमुख एंडोक्रोनोलॉजिस्ट माने जाते हैं. उनका काम मुख्य रूप से डायबिटीज, थाइरॉइड और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों पर केंद्रित रहा है. वह पिछले कई दशकों से कार्डियो मेटाबोलिक रोगों पर रिसर्च और उपचार से जुड़े हैं. उन्होंने सैकड़ों रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं और उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक पहचान मिली है. इसके अलावा वे विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायबिटीज से जुड़े तकनीकी सलाहकार समूह से भी जुड़े रहे हैं. डॉ. टंडन विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भी काम कर चुके हैं. वह एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के बेहतर प्रबंधन के लिए कई रिसर्च प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया है. प्रेगनेंसी के बाद होने वाली डायबिटीज और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े बड़े रिसर्च में भी उनकी महत्वपूर्ण योग्य भूमिका रही है. ये भी पढ़ें-IBS Problem: पेट की समस्या IBS में कारगर है सॉल्युबल फाइबर, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉक्टर टंडन को मिल चुके हैं बड़े सम्मान चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. टंडन को साल 2015 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा उन्हें प्रतिष्ठित बी. सी. रॉय अवॉर्ड भी मिल चुके हैं, जो मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा सम्मान माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Explained: मुंबई में तरबूज तो झारखंड में गोलगप्पे खाने से मौत! किन खानों से होती फूड पॉइजनिंग, आखिर खाएं क्या?</title>
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        <description><![CDATA[ इन दिनों देश भर से फूड पॉइजनिंग की कई चौंकाने वाली खबरें सामने आई हैं. हाल ही में मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की रहस्यमयी मौत, झारखंड में गोलगप्पे खाने से एक बच्चे की जान जाना और उत्तर प्रदेश में शादी की दावत में सैकड़ों लोगों का बीमार पड़ना. इन सभी घटनाओं ने एक बार फिर से हमारे खाने की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आइए एक्सप्लेनर में समझेंगे कि आखिर ये घटनाएं क्यों होती हैं, कौन से खाने सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं और आप अपनी सुरक्षा कैसे कर सकते हैं....
सवाल 1: मुंबई में बिरयानी और तरबूज खाने के बाद परिवार की मौत का मामला क्या है?जवाब: यह बेहद दुखद और फिलहाल रहस्यमयी मामला मुंबई के पायधुनी इलाके का है. 25 अप्रैल 2026 की रात अब्दुल्ला डोकाडिया (40), पत्नी नसरीन (35), दो बेटियां आयशा (16) और जेनब (13) ने परिवार के अन्य लोगों के साथ मिलकर बिरयानी खाई थी. खाना खाने वाले अन्य पांच रिश्तेदारों को कुछ नहीं हुआ. इसके बाद देर रात करीब 1-1:30 बजे जब बच्चियों को भूख लगी तो परिवार ने एक तरबूज काटकर खाया. यह तरबूज बाकी मेहमानों ने नहीं खाया था. सुबह करीब 5 बजे चारों को उल्टी और दस्त शुरू हुए और कुछ ही घंटों में उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई. अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार (26 अप्रैल) को चारों की मौत हो गई.
सवाल 2: तो क्या रात को तरबूज खाने से सीधे मौत हो सकती है?जवाब: फिलहाल इसका सीधा जवाब नहीं दिया जा सकता. पुलिस और फॉरेंसिक जांच अभी जारी है और मौत का वास्तविक कारण 15 दिनों में पोस्टमॉर्टम और फूड सैंपल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा. अभी तक की जानकारी के मुताबिक:

सबसे ज्यादा शक फूड पॉइजनिंग पर है.
पुलिस ने आधा खाया हुआ तरबूज जांच के लिए भेजा है.
राज्य का खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं तरबूज में कोई जहरीला पदार्थ या मिलावट तो नहीं था.
जेजे अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी लैब बैक्टीरिया या किसी अन्य संक्रमण की जांच कर रही है.

डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तरबूज अपने आप में जहरीला नहीं होता, लेकिन यह दूषित हो सकता है. अगर तरबूज को उगाते समय या काटते समय गंदे पानी या सतह का इस्तेमाल हुआ हो, या उसमें किसी जहरीले रसायन की मिलावट की गई हो, तो वह गंभीर रूप से नुकसानदेह हो सकता है. यह पहला मामला नहीं है जहां तरबूज खाने से मौत हुई हो, लेकिन ऐसे मामलों में आमतौर पर दूषित पानी या केमिकल इंजेक्शन (मिठास के लिए) ही वजह बनता है. जांच रिपोर्ट का इंतजार है.
&amp;nbsp;

दूषित तरबूज खाने से हो सकती है मौत

सवाल 3: क्या हाल ही में फूड पॉइजनिंग की ऐसी ही अन्य घटनाएं भी हुई हैं?जवाब: जी हां, देश के अलग-अलग हिस्सों से फूड पॉइजनिंग की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं:

झारखंड: गिरिडीह जिले में गोलगप्पे (पानी पूरी) खाने के बाद एक 7 साल के बच्चे की मौत हो गई और 19 लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुए. प्रारंभिक जांच में मुख्य संदेह गोलगप्पे के दूषित पानी पर है.
उत्तर प्रदेश: संभल जिले में एक शादी समारोह के दौरान लौकी की बर्फी खाने से 15 बच्चों समेत 100 से ज्यादा लोग फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए. खाद्य सुरक्षा विभाग ने लौकी की बर्फी का सैंपल जांच के लिए भेजा है.

ये घटनाएं दिखाती हैं कि फूड पॉइजनिंग सिर्फ एक हल्की बीमारी नहीं है, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो सकती है. स्ट्रीट फूड से लेकर बड़े आयोजनों के खाने तक कहीं भी खतरा हो सकता है.
सवाल 4: आखिर फूड पॉइजनिंग मौत के दरवाजे तक कैसे धकेल देती है?जवाब: फूड पॉइजनिंग को अक्सर लोग सामान्य अपच या पेट खराब होना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह जानलेवा तब बन जाती है जब स्थिति गंभीर रूप ले लेती है. NHS.UK की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 5 बड़ी वजहों से मौत हो सकती है:

गंभीर डिहाइड्रेशन: यह सबसे आम और बड़ा खतरा है. बहुत ज्यादा उल्टी और दस्त से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की भारी कमी हो जाती है. यह कमी खून के गाढ़े होने, ब्लड प्रेशर गिरने, किडनी फेल होने और शॉक की स्थिति पैदा कर सकती है, जो जानलेवा है.
खास किस्म के टॉक्सिन्स और संक्रमण: साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे कुछ बैक्टीरिया सिर्फ संक्रमण ही नहीं फैलाते बल्कि शरीर में ऐसे जहरीले पदार्थ छोड़ते हैं जो सीधे तौर पर नर्वस सिस्टम या अंगों को प्रभावित कर सकते हैं. बोटुलिज्म नाम का एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक बीमारी इसका उदाहरण है, जो नर्वस सिस्टम पर हमला करके लकवा और सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकती है.
रासायनिक संदूषण: अगर भोजन किसी जहरीले रसायन, कीटनाशक या मिलावटी पदार्थ से दूषित हो गया है, तो परिणाम बहुत गंभीर और तेजी से घातक हो सकते हैं.
सेप्टीसीमिया (खून में जहर मिलना): अगर आंतों से बैक्टीरिया खून में पहुंच जाए, तो पूरे शरीर में संक्रमण फैल सकता है, जिसे सेप्टिक शॉक कहते हैं. यह स्थिति कई अंगों को एक साथ काम करने से रोक सकती है. नतीजतन, मौत भी हो सकती है.
उम्र और कमजोर इम्यूनिटी: 5 साल से छोटे बच्चे, 65 से अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोग सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं.

सवाल 5: आखिर कौन से खाने सबसे ज्यादा फूड पॉइजनिंग की वजह बनते हैं?जवाब: मेडस्केप की रिपोर्ट के मुताबिक, कोई भी खाना अगर ठीक से न बनाया जाए या न रखा जाए तो फूड पॉइजनिंग की वजह बन सकता है, लेकिन कुछ खाद्य पदार्थों को &#039;हाई-रिस्क फूड&#039; माना जाता है क्योंकि उनमें हानिकारक कीटाणु आसानी से पनप सकते हैं.

पानी वाली चीजें: गोलगप्पे का पानी, बर्फ के गोले, बिना ढका कटा फल और गंदे पानी से धुली सब्जियां.
स्ट्रीट फूड और कटे हुए फल: विशेष रूप से वो जो खुली या अस्वच्छ जगहों पर रखे हों. जैसे, ऊपर बताए गए गोलगप्पे और तरबूज का मामला.
डेयरी प्रोडक्ट्स: बिना उबला दूध, गलत तरीके से रखी गई मिठाइयां, पनीर, रबड़ी आदि.
अंडे और मांस-मछली: अधपका या कच्चा मांस, चिकन, अंडा, मछली. बि ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Pregnancy Care in Summer: बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल</title>
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        <description><![CDATA[ 
Pregnancy Care in Summer: देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और इसका असर लोगों के साथ-साथ प्रेग्नेंट महिलाओं की सेहत पर भी साफ नजर आ रहा है. प्रेगनेंसी के दौरान शरीर पहले ही कई फिजिकल और हार्मोनल बदलावों से गुजर रहा होता है. ऐसे में तेज गर्मी इन चुनौतियों को और बढ़ा सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को कई दिक्कत हो सकती हैं, ऐसे में वह अपना ध्यान कैसे रख सकती है. गर्मी में क्यों बढ़ जाती है दिक्कत?डॉक्टर बताते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा ज्यादा रहता है और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ जाता है. ऐसे में जब बाहर का तापमान ज्यादा होता है तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इस वजह से डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर आना, सिर दर्द और कमजोरी जैसी समस्या आम हो जाती है. कई महिलाओं को ज्यादा पसीना आना, बेचैनी, गर्मी महसूस होना, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव जैसे परेशान भी हो सकती है. लंबे समय तक धूप में रहने से स्थिति और बिगड़ सकती है. किन गंभीर समस्याओं का रहता है खतरा?एक्सपर्ट के अनुसार ज्यादा गर्मी के कारण हीट एक्सॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है. शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने से कमजोरी, उलझन, तेज सिर दर्द और बेहोशी तक की नौबत आ सकती है. कुछ मामलों में लगातार डिहाइड्रेशन से प्री-टर्म लेबर और कम वजन वाले बच्चों के जन्म का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए समय रहते लक्षणों को पहचानना जरूरी है. डॉक्टर क्या देते हैं सलाह?डॉक्टर के अनुसार गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को अपनी लाइफस्टाइल में कुछ जरूरी बदलाव करने चाहिए. जैसे दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहे, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. नारियल पानी, छाछ और ताजा जूस जैसे तरल पदार्थ शामिल करें. संतुलित डाइट लें, जिसमें फल, सब्जियां और जरूरी पोषक तत्व हो. दोपहर की तेज धूप से बचें, बाहर जाने से जाना हो तो सिर ढक कर रखें, ज्यादा थकान से बचें और बीच-बीच में आराम करते रहे. ये भी पढ़ें-Evening Snacks Craving: शाम के मनपसंद स्नैक्स हो सकते हैं मोटापा बढ़ने का कारण, ऐसे दूर करें अपनी क्रेविंग
कपड़े और लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान गर्मी में हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनना ज्यादा आरामदायक रहता है. इससे शरीर को हवा मिलती है और पसीना कम होता है. टाइट या सिंथेटिक कपड़े और कंफर्टेबल हो सकते हैं. इसके अलावा दिन भर में छोटे-छोटे ब्रेक पर हल्का खाना खाना ज्यादा फायदेमंद होता है, ताकि शरीर को लगातार एनर्जी मिलती रहे. तला-भूना और ज्यादा मसालेदार खाना कम करना चाहिए. वहीं अगर बार-बार चक्कर आना, ज्यादा थकान, तेज सिर दर्द, उल्टी या बेहोशी जैसी समस्या महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से कांटेक्ट करना चाहिए. नियमित चेकअप भी बहुत जरूरी है, ताकि किसी भी समस्या को समय रहते पहचाना जा सके.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/heart-fights-cancer-दिल-धड़क-रहा-है-यानी-कैंसर-से-लड़-रहा-है-नई-स्टडी-से-जागी-उम्मीद</link>
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        <description><![CDATA[ Heart Fights Cancer : हम अक्सर दिल को सिर्फ एक पंप के रूप में जानते हैं, जो दिन-रात बिना रुके खून को पूरे शरीर में पहुंचाता रहता है. एक सामान्य इंसान का दिल रोज लगभग 1 लाख बार धड़कता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों की नई खोज में कुछ अलग सामने आया है. नए शोध के मुताबिक, दिल की ये लगातार धड़कन सिर्फ लाइफ को बनाए रखने का काम नहीं करती, बल्कि यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी बचाव कर सकती है.
यह सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन यह सच है कि दिल में कैंसर होना बहुत ही कम देखने को मिलता है, जबकि शरीर के दूसरे अंगों में कैंसर आम है, दिल किसी तरह इससे बचा रहता है. वैज्ञानिक लंबे समय से इस रहस्य को समझने की कोशिश कर रहे थे और अब उन्हें इसका एक बड़ा कारण मिल गया है.&amp;nbsp;
दिल कैसे होता है कैंसर से सुरक्षित
दिल के सेल्स बहुत कम बनते और बदलते हैं. आमतौर पर जहां सेल्स तेजी से बनते हैं, वहां कैंसर का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन दिल में ऐसा नहीं होता है. इसके बावजूद दिल में कैंसर न होना एक बड़ा सवाल था. अब वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका कारण दिल की लगातार चलने वाली मेहनत और दबाव हो सकता है. दिल हर समय खून को पंप करता है, जिससे उसमें एक खास तरह का मैकेनिकल दबाव (mechanical stress) बनता है. यह दबाव कैंसर कोशिकाओं (cells) को बढ़ने से रोक सकता है. नई स्टडी में यह सामने आया कि दिल की लगातार हरकत कैंसर कोशिकाओं के व्यवहार को बदल देती है, जिससे वे तेजी से बढ़ नहीं पाती हैं.
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क्या है नया शोध&amp;nbsp;
वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को समझने के लिए चूहों पर एक अनोखा प्रयोग किया. उन्होंने एक दिल को चूहे की गर्दन में ट्रांसप्लांट किया. इस ट्रांसप्लांट किए गए दिल में खून तो पहुंच रहा था, लेकिन वह सामान्य दिल की तरह मेहनत नहीं कर रहा था यानी उसमें धड़कन का दबाव कम था. &amp;nbsp;इसके बाद वैज्ञानिकों ने दोनों दिलों में कैंसर सेल्स डाले. जिसमें एक सामान्य, धड़कता हुआ दिल था &amp;nbsp;और दूसरा कम दबाव वाला ट्रांसप्लांट किया गया दिल था. इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले थे. जो दिल सामान्य तरीके से धड़क रहा था, उसमें कैंसर सेल्स नहीं बढ़ पाए, लेकिन जो दिल कम दबाव में था, उसमें ट्यूमर आसानी से बनने लगे. इससे साफ हो गया कि दिल की धड़कन खुद कैंसर के खिलाफ एक रक्षा प्रणाली की तरह काम करती है.&amp;nbsp;
जीन और प्रोटीन का क्या रोल है
वैज्ञानिकों ने आगे पाया कि यह सिर्फ बाहर का दबाव नहीं है, बल्कि यह कोशिकाओं के अंदर जाकर उनके जीन (genes) को भी प्रभावित करता है.इस प्रक्रिया में एक खास प्रोटीन नेसप्रिन-2 (Nesprin-2) अहम भूमिका निभाता है. यह प्रोटीन बाहरी दबाव को कोशिका के केंद्र (न्यूक्लियस) तक पहुंचाता है. वहां यह जीन की गतिविधियों को बदल देता है. जब यह प्रोटीन सही से काम करता है, तो कैंसर से जुड़े जीन धीमे पड़ जाते हैं और कोशिकाएं बढ़ नहीं पाती हैं. जब वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन को बंद कर दिया, तो स्थिति बदल गई. कैंसर कोशिकाएं फिर से तेजी से बढ़ने लगीं. यहां तक कि धड़कते दिल में भी ट्यूमर बनने लगे. इससे साबित हुआ कि यह पूरा सिस्टम एक सक्रिय रक्षा तंत्र है. &amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Char Dham Yatra 2026: हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन में टूटा रिकॉर्ड</title>
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        <description><![CDATA[ Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड की पावन चार धाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है. विशेष रूप से धर्मनगरी हरिद्वार में यात्रा की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है. जिला प्रशासन द्वारा 17 अप्रैल से शुरू किए गए ऑफलाइन पंजीकरण केंद्रों पर तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है. ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 25,000 से अधिक श्रद्धालु अपना ऑफलाइन पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस वर्ष यात्रा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता है.
प्रशासन की &#039;जीरो टॉलरेंस&#039; नीति और ग्राउंड जीरो पर सक्रियता
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तरह मुस्तैद हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. जिलाधिकारी स्वयं ऋषिकुल मैदान स्थित पंजीकरण केंद्रों और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का &#039;ग्राउंड जीरो&#039; पर पहुंचकर निरीक्षण कर रहे हैं.
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि:

श्रद्धालुओं को पंजीकरण के लिए लंबी लाइनों में न लगना पड़े, इसके लिए काउंटरों की संख्या और कार्यक्षमता बढ़ाई जाए.
पेयजल, बैठने की व्यवस्था और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं में कोई कोताही न बरती जाए.
यात्रियों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

पंजीकरण व्यवस्था: सुगम और डिजिटल समावेश
प्रशासन ने ऋषिकुल मैदान में 20 से अधिक पंजीकरण काउंटर स्थापित किए हैं. ऑफलाइन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ वहां स्वास्थ्य जांच (Screening) की भी व्यवस्था की गई है, ताकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जाने वाले यात्री अपनी शारीरिक क्षमता के प्रति आश्वस्त हो सकें. जिलाधिकारी ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत केंद्रों से ही पंजीकरण और हेलीकॉप्टर सेवा बुक करें, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके.
स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापार में नई जान
चार धाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की आर्थिक रीढ़ भी है. यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखकर स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और परिवहन संचालकों के चेहरे खिल उठे हैं. हरिद्वार के बाजारों में रौनक लौट आई है और होटलों में एडवांस बुकिंग तेजी से बढ़ रही है.
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
यदि आप भी 2026 की चार धाम यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

अनिवार्य पंजीकरण: यात्रा के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण अनिवार्य है. बिना क्यूआर कोड वाले पंजीकरण पत्र के यात्रा की अनुमति नहीं होगी.
दस्तावेज: अपने साथ आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र अवश्य रखें.
स्वास्थ्य: यात्रा शुरू करने से पहले स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं, क्योंकि केदारनाथ और यमुनोत्री की चढ़ाई अत्यधिक कठिन है.

Kal Ka Rashifal: 28 अप्रैल 2026 मंगलवार का दिन करियर, धन और स्वास्थ्य के मामले में आपके लिए कैसा रहेगा?
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Onion in Pocket Heat Stroke Myth: क्या जेब में प्याज रखने से लू नहीं लगती, जानें कितना असरदार है बुजुर्गों का यह तरीका?</title>
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        <description><![CDATA[ Onion in Pocket Heat Stroke Myth: देश के कई हिस्सों में फिलहाल भीषण गर्मी पड़ रही है. वहीं गर्मी से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं. हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे भी जेब में प्याज रखने को लू से बचाव का तरीका बताते नजर आ रहे हैं. इसके बाद एक बार फिर यह पुराना देसी नुस्खा चर्चा में आ गया. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि क्या सच में जेब में प्याज रखने से लू नहीं लगती है और बुजुर्ग का यह तरीका कितना असरदार है.क्या कहती है पुरानी मान्यता?ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से माना जाता रहा है कि प्याज गर्मी को सोख लेता है. यही वजह है कि बड़े बुजुर्ग बाहर निकलते समय जेब में प्याज रखने की सलाह देते थे. उनका मानना था कि इससे लू का असर शरीर पर कम पड़ता है.क्या कहता है मेडिकल साइंस?डॉक्टर और मेडिकल साइंस इस दावे को नहीं सही नहीं मानते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार लू तब लगती है, जब शरीर का आंतरिक तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर का कूलिंग सिस्टम यानी पसीना ठीक से काम करना बंद कर देता है. ऐसे में शरीर को ठंडा रखने के लिए पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत होती है न कि किसी चीज को जेब में रखने की.डॉक्टरों की क्या है राय?डॉक्टरों के अनुसार जेब में प्याज रखने से लू से बचाव नहीं होता है. इसका कोई वैज्ञानिक आधार भी नहीं है, वहीं अन्य एक्सपर्ट्स भी बताते हैं कि प्याज को शरीर के पास रखने से शरीर के तापमान पर कोई असर नहीं पड़ता है. डॉक्टरों का कहना है कि प्याज में मौजूद तत्व तभी फायदा देते हैं, जब इसे खाया जाए. जेब में रखने से न तो यह गर्मी सोख सकता है और न ही शरीर को ठंडा कर सकता है. कई बार यह सिर्फ मानसिक संतुष्टि देने वाले तरीका यानी प्लेसिबो इफेक्ट हो सकता है.ये भी पढ़ें-झुलसती लू का टमाटर की फसल पर नहीं होगा असर, अपनाएं ये तकनीक और गर्मी में भी पाएं बंपर पैदावार
प्याज में पाए जाने वाले तत्व और इसके फायदेप्याज में विटामिन सी, विटामिन बी6, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं. इसमें मौजूद क्वेरसेटिन नाम का कंपाउंड शरीर में सूजन कम करने और गर्मी के असर को घटाने में मदद करता है. साथ ही इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है.लू से बचने के सही तरीकेडॉक्टर के अनुसार लू से बचाव के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी जरूरी है. लू से बचने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखें और बार-बार पानी पिएं. नारियल पानी, छाछ, तरबूज और खीरा जैसे फूड लें. ढीले और हल्के कपड़े पहनें. दोपहर के समय तेज धूप से बचें, शरीर और चेहरे को ढक कर ही बाहर निकले.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>खजुराहो का रहस्यमयी शिवलिंग जहां चढ़ाया जल पलभर में हो जाता है गायब! जानिए मातंगेश्वर मंदिर का सच</title>
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        <description><![CDATA[ खजुराहो का रहस्यमयी शिवलिंग जहां चढ़ाया जल पलभर में हो जाता है गायब! जानिए मातंगेश्वर मंदिर का सच ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 12:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>IBS Problem: पेट की समस्या IBS में कारगर है सॉल्युबल फाइबर, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ 
IBS Problem: आजकल खराब लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. इनमें इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) एक आम समस्या बनती जा रही है, जिससे कई लोग परेशान रहते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डाइट में सही तरह का फाइबर शामिल करने से इस तरह की समस्या में काफी हद तक राहत मिल सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, सॉल्युबल फाइबर यानी घुलनशील फाइबर आईबीएस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है. क्यों फायदेमंद है सॉल्युबल फाइबर?डॉक्टरों के मुताबिक, आईबीएस कोई बीमारी नहीं बल्कि कई तरह के लक्षणों का एक समूह है. इसमें पेट फूलना कब्ज या दस्त जैसी समस्या शामिल हो सकती हैं. ऐसे में सॉल्युबल फाइबर का अहम भूमिका निभाता है. यह फाइबर पानी को सोखकर जेल जैसा रूप ले लेता है, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी होती है और मल त्याग को संतुलित करने में मदद मिलती है. यही वजह है कि यह कब्ज और दस्त दोनों ही स्थिति में राहत दे सकता है. इसके अलावा सॉल्युबल फाइबर प्रीबायोटिक की तरह काम करता है. यानी यह आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है. इससे समय के साथ ब्लोटिंग कम होती है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. किन चीजों में मिलता है सॉल्युबल फाइबर?डाइट में कुछ सामान्य चीजों को शामिल करके सॉल्युबल फाइबर की मात्रा बढ़ाई जा सकती है. इनमें ओट्स, चिया सीड्स, अलसी के बीज इसबगोल, सेब और बींस जैसी चीज शामिल हैं. ये भी पढ़ें-प्रेग्नेंसी के टाइम मलेरिया तो हो जाएं सावधान, बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह&amp;nbsp;
हर फाइबर नहीं होता फायदेमंद वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईबीएस के दौरान हर तरह का फाइबर फायदेमंद नहीं होता है. फाइबर मुख्य रूप से दो तरह का होता है. सॉल्युबल और इनसॉल्युबल. जहां सॉल्युबल फाइबर पानी में घुल जाता है वहीं इनसॉल्युबल फाइबर घूलता नहीं. इनसॉल्युबल फाइबर पाचन तंत्र में पदार्थों की गति को बढ़ाता है और मल का आकार बढ़ता है. लेकिन कुछ लोगों में यह आईबीएस के लक्षणों को बढ़ा सकता है. खासकर तब जब इसे अचानक से ज्यादा मात्रा में लेना शुरू किया जाए. ऐसे में डॉक्टर कहते हैं कि फाइबर लेते समय सही तरीका अपनाना जरूरी है. इसे अचानक ज्यादा मात्रा में लेने की बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए ताकि शरीर को इसे अपनाने का समय मिल सके.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Pancreatic cancer Vaccine: सबसे खतरनाक कैंसर के खिलाफ दमदार वैक्सीन, जानें इससे कितना सफल होगा पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज</title>
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        <description><![CDATA[ Pancreatic cancer Vaccine: कैंसर एक गंभीर समस्या है जिसके बारे में सुनते ही इंसान अंदर से टूट जाता है. इसी में अगर बात करें पैनक्रिएटिक कैंसर की, तो यह एक बेहद गंभीर और तेजी से बढ़ने वाला कैंसर है जो पैनक्रियास (Pancreas) में होता है. पैनक्रियास शरीर का वह अंग है जो पाचन एंजाइम और इंसुलिन जैसे हार्मोन बनाने में अहम भूमिका निभाता है. यह कैंसर अक्सर शुरुआती चरण में पकड़ में नहीं आता क्योंकि पैनक्रियास शरीर में काफी अंदर होता है और शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य या अस्पष्ट होते हैं, जैसे पेट दर्द, वजन कम होना या पाचन संबंधी समस्याएं, जो इतने गंभीर नहीं लगते. जब तक इसका पता चलता है, तब तक कई मामलों में यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है, जिससे इसका इलाज और भी कठिन हो जाता है.
इसी वजह से इसे सबसे खतरनाक और जानलेवा कैंसर में गिना जाता है. आंकड़ों के मुताबिक, मुताबिक दो दशकों में पैनक्रिएटिक कैंसर होने का आंकड़ा दोगुना बढ़ गया है. यह पहले 1000000 व्यक्तियों में से लगभग 2.5 से 3 था, अब बढ़कर 6 से 7 हो गया है. हाल ही में इस कैंसर के इलाज को लेकर एक वैक्सीन का ट्रायल संभव हुआ है, जिससे इसके इलाज में एक नई दिशा मिली है, जानते हैं पूरी बात.&amp;nbsp;
पैनक्रिएटिक कैंसर का इलाज करने वाली mRNA वैक्सीन क्या है?
हाल ही में पैनक्रिएटिक कैंसर के इलाज में ऑटोजीन सेव्युमेरन नाम की वैक्सीन के ट्रायल ने एक नई उम्मीद जगाई है. यह एक पर्सनलाइज्ड वैक्सीन है जो मरीज के ट्यूमर की जेनेटिक जानकारी (neoantigens) के आधार पर तैयार की जाती है और शरीर की इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स को पहचानने और खत्म करने के संकेत देती है. शोध करने वालों के अनुसार, यह mRNA टेक्नोलॉजी पर आधारित है- यानी मैसेंजर राइबो-न्यूक्लिक एसिड (mRNA) पर आधारित एक ऐसी तकनीक जिसे इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि बीमारी होने की संभावना को कम करने के लिए. यह वैक्सीन सर्जरी के बाद दी जाती है ताकि शरीर में बची हुई माइक्रोस्कोपिक कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सके और दोबारा कैंसर होने के खतरे को कम किया जा सके.
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क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजे - कितनी सफलता मिली
क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजों की बात करें तो फेज-1 स्टडी में कुल 16 मरीजों को पैनक्रिएटिक कैंसर की सर्जरी के बाद ऑटोजीन सेव्युमेरन वैक्सीन दी गई थी. इसके साथ मरीजों को कीमोथेरेपी और एक इम्यूनोथेरेपी दवा (चेकपॉइंट इनहिबिटर) भी दी गई. वैक्सीन हर मरीज के ट्यूमर के DNA के हिसाब से अलग-अलग तैयार की गई थी. इन 16 में से 8 मरीजों में वैक्सीन का अच्छा असर हुआ. इनके शरीर के इम्यून सिस्टम ने ट्यूमर को पहचाना और कैंसर सेल्स पर हमला करने वाले टी-सेल्स बनने लगे. 8 मरीजों में से 7 लोग सर्जरी के 4 से 6 साल बाद भी जिंदा रहे. दूसरी तरफ जिन 8 मरीजों में वैक्सीन का असर नहीं हुआ, उनमें से सिर्फ 2 ही जिंदा रहे. इन अच्छे शुरुआती नतीजों के बाद अब इस वैक्सीन का फेज-2 क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया गया है, जिसमें इसे ज्यादा मरीजों पर टेस्ट किया जा रहा है. यह स्टडी न्यूयॉर्क के MSK (मेमोरियल स्लोन केटरिंग) समेत कई दूसरी जगहों पर चल रही है, ताकि इसके असर और सुरक्षा को और अच्छे से समझा जा सके.
mRNA वैक्सीन पैनक्रिएटिक कैंसर के इलाज के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है. हालांकि इसका फेज-2 अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन मेडिकल साइंस के क्षेत्र में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर फेज-2 और फेज-3 में भी ऐसे ही नतीजे आते हैं, तो यह मेडिकल क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Heat Stroke In Children: गर्मी के साथ बच्चों में बढ़ रहा हीट स्ट्रोक का खतरा, डॉक्टर से जाने कैसे रखें उनका ख्याल</title>
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        <description><![CDATA[ 
Heat Stroke In Children: देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और तापमान 40 से 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है. ऐसे में बच्चों के लिए यह मौसम सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है. ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जहां तेज गर्मी और लू के कारण बच्चों की मौत हो गई है. ऐसी घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि हीट स्ट्रोक बच्चों के लिए कितना गंभीर खतरा बन सकता है.
डॉक्टर के अनुसार बच्चे गर्मी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनका शरीर तापमान को कंट्रोल करने में उतना सक्षम नहीं होता, जितना बड़ों का. यही वजह है कि तेज धूप और गर्म हवा के संपर्क में आने पर उनके शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और स्थिति जानलेवा हो सकती है. क्या होता है हीट स्ट्रोक और इसके लक्षण?हीट स्ट्रोक तब होता है, जब शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पसीना आना बंद हो जाता है. ऐसी स्थिति में शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, इसके प्रमुख लक्षणों में सूखी और लाल त्वचा, तेज बुखार, तेज नाड़ी, चक्कर आना, भ्रम और स्पष्ट बोलना शामिल है. वहीं हिट एग्जॉस्टशन इसके पहले की अवस्था होती है, जिसमें ज्यादा पसीना, कमजोरी, चिपचिपी, स्किन मांसपेशियों में ऐंठन और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति हीट स्ट्रोक में बदल सकती है. बच्चे क्यों ज्यादा होते हैं खतरे में?एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चों का शरीर तेजी से गर्म होता है और उन्हें पानी की कमी भी जल्दी हो जाती है. खेलते समय भी अक्सर पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं. ये भी पढ़ें-Summer Stomach Infection: क्या गर्मी में आपका भी पेट बार-बार हो रहा खराब? डॉक्टर से जानें इसकी असली वजह
डॉक्टर की सलाह ऐसे रखें बच्चों का ख्याल दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल की पीडियाट्रिक एक्सपर्ट डॉक्टर मंजू निमेष के अनुसार गर्मी के इस मौसम में खास सतर्कता जरूरी है. डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में हीट स्ट्रोक और हिट एग्जॉस्टशन से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा है कि बच्चों को पीक आवर्स यानी दोपहर के समय धूप में बिल्कुल न लें जाए. स्कूल आने जाने वाले वाहनों का वेंटिलेशन ठीक होना चाहिए और उन्हें पहले से ठंडा कर लेना चाहिए. उनका कहना है कि बच्चों की आउटडोर एक्टिविटी को कम रखना चाहिए और उन्हें हल्के सूती के ढीले कपड़े पहनने चाहिए. गहरे रंग के कपड़ों से बचना चाहिए, क्योंकि यह ज्यादा गर्मी सोखते हैं.
डॉक्टर मंजू निमेष के मुताबिक, अगर बच्चे को लू लग गई है, शरीर का तापमान बढ़ा है तो सबसे पहले कपड़े उतारकर शरीर पर ठंडे पानी से छिड़काव कर पानी को शरीर पर फैला कर पोछना चाहिए. अगर बच्चा बड़ा है तो उसे ठंडे पानी में बैठाएं. अगर बच्चा इधर-उधर की बात करता है या मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो तुरंत अस्पताल लेकर जाएं, क्योंकि ऐसे मामलों में जरा सी भी देरी खतरनाक साबित हो सकती है.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Evening Snacks Craving: शाम के मनपसंद स्नैक्स हो सकते हैं मोटापा बढ़ने का कारण, ऐसे दूर करें अपनी क्रेविंग</title>
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        <description><![CDATA[ Evening Snacks Craving: क्या आपको भी शाम में स्नैक्स की क्रेविंग होती है? इससे निपटने के लिए आप तरह-तरह के पकवानों का स्वाद लेते हैं. आपके यही मनपसंद और चटपटे स्नैक्स मोटापा कम न होने का बड़ा कारण हैं. चौंक गए? यह हमारी नहीं, बल्कि एक्सपर्ट्स की राय है.
शाम के समय होने वाली क्रेविंग्स काफी सामान्य है. इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण होते हैं. थकान भरी दिनचर्या के बाद शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है, जिससे ग्लूकोज लेवल कम हो जाता है और कुछ चटपटा खाने की इच्छा बढ़ने लगती है. शाम के समय हंगर हार्मोन घ्रेलिन (Ghrelin) बढ़ सकता है और अगर दिन का खाना सही से न हुआ हो तो क्रेविंग और ज्यादा होती है.
कितना हानिकारक हो सकता है मोटापा?
ओवरईटिंग और शाम की क्रेविंग्स धीरे-धीरे मोटापे का बड़ा कारण बन जाती हैं, क्योंकि इन दोनों का सीधा असर शरीर की कैलोरी बैलेंस और फैट स्टोरेज पर पड़ता है. दिनभर के बाद जब शाम को बार-बार भूख लगती है, तो लोग अक्सर ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स, जैसे तला-भुना, मीठा या पैकेज्ड फूड खा लेते हैं. इससे शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी पहुंचती है, जो तुरंत इस्तेमाल नहीं हो पाती और फैट के रूप में जमा होने लगती है.इसके अलावा, बार-बार स्नैक्स लेने से इंसुलिन लेवल बढ़ जाता है, जो फैट स्टोरेज को बढ़ावा देता है. खासकर मीठा और रिफाइंड कार्ब्स खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है, जिससे फिर से भूख लगती है और यह एक चक्र बन जाता है.
क्यों लगती है भूख?
कई रिसर्च से पता चलता है कि जो लोग सुबह और दोपहर के खाने में सही मात्रा में प्रोटीन और फाइबर नहीं लेते, उन्हें शाम को ज्यादा भूख लगती है, जिससे वे Unhealthy खाना खाने लगते हैं. रोजमर्रा के जीवन में होने वाला तनाव भी इसका एक बड़ा कारण हो सकता है.
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कैसे निपटें ईवनिंग क्रेविंग से
नमामी ने आगे बताया कि &#039;क्रेविंग से लड़ने के बजाय हमें उनसे समझदारी से निपटना चाहिए. जो लोग वेट लॉस करना चाहते हैं और अपनी ईवनिंग क्रेविंग को कंट्रोल करना चाहते हैं, उन्हें अपने स्नैक्स में प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए. इससे आपका शुगर लेवल कंट्रोल में रहेगा और पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होगा, जिससे आप ओवरईटिंग से बच पाएंगे.&#039;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट 
न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल ने हाल ही में एक रील के जरिए बताया कि &#039;खाने की क्रेविंग शाम में सबसे ज्यादा होती है? यह हार्मोन की वजह से होता है. जैसे-जैसे शाम होती है, लेप्टिन (Leptin) नाम का हार्मोन, जो भूख को नियंत्रित करता है, कम होने लगता है. लेप्टिन के गिरते ही शरीर की ऊर्जा भी कम होने लगती है, जिसके बाद दिमाग को शुगर या कार्ब्स की क्रेविंग होने लगती है.&#039;
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Mumbai Watermelon Death Case: तरबूज खाने से पूरे परिवार की मौत! बाजार से खरीदें फल तो इन बातों का रखें ध्यान, वरना हो जाएगी अनहोनी</title>
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        <description><![CDATA[ Mumbai Watermelon Death Case: मुंबई से एक चौंकाने वाला सामने आया है, जहां कथित तौर पर एक ही परिवार के 4 लोगों की तरबूज खाने से मौत हो गई. सुबह जब परिवार के लोग उठे तो उनमें उल्टी और पेट दर्द की समस्या देखी गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि परिवार के चारों लोगों की ही मौत हो गई है. इस घटना के बाद गर्मियों का पसंदीदा तरबूज खाने को लेकर चिंताएं बढ़ गई है.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?&amp;nbsp;
जानकारी के मुताबिक, परिवार के लोगों ने अपने रिश्तेदारों के साथ रात को पार्टी की थी, जब रिश्तेदार चले गए तो परिवार के सभी लोगों ने तरबूज खाया और सो गए. सुबह जब लोग उठे तो सभी लोगों को पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्या थी, जिसके बाद उन्होंने अपने फैमिली डॉक्टर को दिखाया. इसके बाद भी हालत में कोई सुधार नहीं आया और परिवार के लोगों की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई. हालत इतनी बिगड़ गई कि लोगों का शरीर नीला पड़ने लगा. परिवार के चारों लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.&amp;nbsp; डॉक्टरों द्वारा बताया गया है कि उनके शरीर में किसी प्रकार का टॉक्सिन गया है, जिससे उनकी मौत हुई है.

क्यों और कैसे होती है फूड पॉइजनिंग?&amp;nbsp;
फूड पॉइजनिंग तब होती है जब हम ऐसा खाना या पेय पदार्थ लेते हैं जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी या जहरीले पदार्थ (टॉक्सिन्स) मौजूद होते हैं. यह समस्या अक्सर खराब, केमिकल्स के इस्तेमाल, या गलत तरीके से स्टोर किए गए खाने से होती है. फूड पॉइजनिंग होने पर पेट दर्द, उल्टी, दस्त, कमजोरी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. गंभीर मामलों में शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) भी हो सकती है. अगर समय पर इलाज न मिले तो फूड पॉइजनिंग जानलेवा हो सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए.
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बाजार से तरबूज और अन्य फल खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
बाजार से फल खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले फल की बाहरी सतह को अच्छे से देखें कि कहीं उस पर कोई कट, दरार या सड़न के निशान तो नहीं हैं. पहले से कटे हुए फल खरीदने से बचें क्योंकि उनके अंदर भी केमिकल होने का खतरा हो सकता है. साथ ही खुले में रखे फल जल्दी खराब हो सकते हैं और उनमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है. फल खरीदने के बाद उन्हें अच्छे से धोकर ही खाएं ताकि उन पर लगी गंदगी या केमिकल हट जाएं, क्योंकि आजकल फलों को पकाने के लिए काफी ज्यादा केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. हो सके तो फलों को गुनगुने पानी से भी धो सकते हैं, जिससे केमिकल्स अच्छे से साफ हो जाते हैं.
तरबूज हो लेकर बरतें खास सावधानी
गर्मियों में तरबूज खाना हर किसी को पसंद होता है, लेकिन इसको लेकर कुछ सावधानी बरतनी जरूरी है. बाजार से लाए गए तरबूज को खाने से पहले उसे नॉर्मल टेंपरेचर पर ठंडा जरूर करें. गर्म फल खाने से बीमार पड़ सकते हैं. इसके अलावा सीधे धूप से आकर भी तरबूज को नहीं खाना चाहिए. तरबूज को अधिक मात्रा में खाने से भी बचना चाहिए.
यह भी पढ़ेंः Summer Heatwave Tips: हीटवेव से बेहाल! तेज गर्मी में क्या करें और क्या न करें? डॉक्टर से जानें बचाव के 6 आसान उपाय
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 20:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>प्रेग्नेंसी के टाइम  मलेरिया तो हो जाएं सावधान, बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह </title>
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        <description><![CDATA[ Malaria In Pregnancy: गर्मी और बरसात का मौसम आते ही मच्छरों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है और इसी के साथ मलेरिया जैसी बीमारी का डर भी सताने लगता है. ऐसे में मां के लिए पेट में पल रहे बच्चे का ख्याल रखना एक बहुत ही अनोखा और नाजुक एहसास होता है. इस दौरान हर मां चाहती है कि वे अपने बच्चे को हर खतरे से बचाये जिसके लिए वे पूरी कोशिश करती है. लेकिन क्या आपको पता है कि एक छोटा सा मच्छर भी इस सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है?
आम लोगों के लिए यह बीमारी जितनी खतरनाक है, प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह उससे भी कहीं ज्यादा गंभीर साबित हो सकती है. गर्भावस्था के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. वही अगर इसी समय उनको मलेरिया हो जाए तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है. यही कारण है कि डॉक्टर इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.
प्रीमैच्योर डिलीवरी का बढ़ सकता है खतरा
प्रेग्नेंसी के दौरान मलेरिया होने पर सबसे बड़ा खतरा प्रीमैच्योर डिलीवरी यानी समय से पहले बच्चे के जन्म का होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेग्नेंसी में मलेरिया को कभी भी एक सामान्य बुखार समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए. यह बीमारी केवल होने वाली मां के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है, बल्कि इसका सीधा और बुरा असर अजन्मे बच्चे के विकास पर भी पड़ता है. मलेरिया का परजीवी शरीर में खून को प्रभावित करता है, जिससे प्लेसेंटा पर भी असर पड़ सकता है. इससे बच्चे को सही मात्रा में पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता. कई मामलों में यह भी देखा गया है कि इससे बच्चे का वजन कम हो जाता है या फिर समय से पहले डिलीवरी हो जाती है. कुछ गंभीर स्थितियों में गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए इस बीमारी को हल्के में लेना बिल्कुल भी सही नहीं है.
यह भी पढ़ेंः सिर्फ त्वचा ही नहीं, स्कैल्प भी हो सकता है सनबर्न का शिकार, एक्सपर्ट बोले- इसे न करें नजरअंदाज
मां और बच्चे दोनों पर पड़ता है असर
मलेरिया केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां की सेहत के लिए भी खतरनाक होता है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर में नजर आने वाले लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. जैसे तेज बुखार, कमजोरी, सिर दर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह एनीमिया का कारण भी बन सकता है, जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है. मां की खराब सेहत का सीधा असर बच्चे के विकास पर पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाए और सही इलाज शुरू किया जाए.
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
प्रेग्नेंसी के दौरान मलेरिया से बचाव करना सबसे जरूरी होता है. इसके लिए मच्छरों से दूर रहना बेहद जरूरी है. इसके लिए आपके अपनी दिनचर्या में कुछ आसान कदम शामिल करना होगा, जैसे घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और पूरे कपड़े पहनें. डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें. अगर बुखार या मलेरिया के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच कराएं. डॉक्टर का मानना है कि इस बीमारी से डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है. समय पर इलाज और सही देखभाल से इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए सावधानी और जागरूकता बहुत जरूरी है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
यह भी पढ़ेंः मां बनने की राह में &#039;स्ट्रेस&#039; बड़ा रोड़ा... तनाव-एंग्जायटी से घट रहा IVF का सक्सेस रेट ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>इस तरह से काटेंगे प्याज तो कभी नहीं आएंगे आंसू, जान लें बेस्ट तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ इस तरह से काटेंगे प्याज तो कभी नहीं आएंगे आंसू, जान लें बेस्ट तरीका ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Fever Causes: क्या आपको भी गर्मी में आ रहा है बुखार? इग्नोर किया तो जा सकती है जान!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/summer-fever-causes-क्या-आपको-भी-गर्मी-में-आ-रहा-है-बुखार-इग्नोर-किया-तो-जा-सकती-है-जान</link>
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        <description><![CDATA[ How To Identify Malaria Symptoms Early:&amp;nbsp;गर्मियों में आने वाला बुखार अक्सर सामान्य वायरल कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. घरों और क्लीनिकों में हर साल यही पैटर्न देखने को मिलता है कि बुखार, शरीर में दर्द और थकान, और फिर इसे हल्का समझकर छोड़ दिया जाता है. ज्यादातर मामलों में यह सही भी होता है, लेकिन हर बार नहीं. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर डॉक्टर क्या कहते हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. संदीप रेड्डी कोप्पुला ने TOI को बताया &amp;nbsp;कि गर्मियों में ऐसे कई मामले आते हैं जिन्हें सीधे वायरल मान लिया जाता है, जबकि उनमें कुछ और गंभीर छिपा हो सकता है. असल चिंता यहीं से शुरू होती है. क्योंकि जब मलेरिया जैसे संक्रमण को साधारण बुखार समझ लिया जाता है, तो इलाज में देरी हो जाती है और स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ सकती है, सामान्य बुखार आमतौर पर तीन से चार दिनों में आराम, तरल पदार्थ और बुनियादी देखभाल से ठीक हो जाता है, लेकिन हर बुखार ऐसा नहीं होता.&amp;nbsp;
किस बात का आपको रखना चाहिए ध्यान?
वे बताते हैं कि कुछ बुखार लंबे समय तक बने रहते हैं, कुछ रुक-रुक कर आते हैं, और कुछ के साथ तेज ठंड लगना महसूस होता है. ये कोई सामान्य बदलाव नहीं, बल्कि संकेत हैं. भारत सरकार के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के अनुसार, मलेरिया के लक्षण शुरुआत में हल्के हो सकते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकता है. अक्सर लोग बुखार को सिर्फ शरीर के तापमान से जोड़कर देखते हैं, जबकि शरीर और भी संकेत देता है. अचानक ठंड लगना, फिर तेज बुखार आना और उसके बाद पसीना आना यह एक खास तरह का क्रम होता है. डॉ. संदीप बताते हैं कि ठंड और पसीना सिर्फ बुखार का हिस्सा नहीं, बल्कि एक अहम संकेत हो सकता है.&amp;nbsp;
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थकान भी अहम संकेत
थकान भी एक अहम संकेत है. सामान्य थकान और इस तरह की कमजोरी में फर्क होता है. कभी-कभी यह इतनी ज्यादा होती है कि छोटे-छोटे काम भी मुश्किल लगते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, मलेरिया शरीर के रेड ब्लड सेल्स को प्रभावित करता है, जिससे एनर्जी स्तर पर असर पड़ता है और थकान बढ़ जाती है. कई लोग यह सोचकर इंतजार करते हैं कि दो-तीन दिन में बुखार अपने आप ठीक हो जाएगा. हल्के मामलों में यह तरीका ठीक हो सकता है, लेकिन अगर बुखार इससे ज्यादा समय तक बना रहे, तो जांच जरूरी हो जाती है. साधारण खून की जांच से मलेरिया जैसे संक्रमण का जल्दी पता लगाया जा सकता है,&amp;nbsp;
कैसे फैलती हैं ये बीमारियां?
गर्मी और बरसात के मौसम में मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड जैसे कई इंफेक्शन एक साथ फैलते हैं. शुरुआती लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं, हल्का बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द. यही समानता भ्रम पैदा करती है और हर बुखार को वायरल मान लेना आसान रास्ता बन जाता है, लेकिन यह जोखिम भरा हो सकता है. बचाव के लिए जरूरी है कि बुखार के व्यवहार पर ध्यान दिया जाए, सिर्फ तापमान पर नहीं. अगर बुखार दो-तीन दिन से ज्यादा बना रहे, ठंड और पसीने का पैटर्न दिखे या असामान्य थकान हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए. इसके साथ ही, आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और साफ-सफाई का ध्यान रखें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Garden Care Tips: प्रचंड गर्मी में जा रहे हैं घर से बाहर तो ऐसे रखें अपने पौधों का ख्याल, रहेंगे एकदम हरे&amp;भरे</title>
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        <description><![CDATA[ How To Care For Plants In Extreme Heat: प्रचंड गर्मी में अगर आप घर से बाहर जा रहे हैं, तो सबसे बड़ी चिंता यही रहती है कि पीछे रह गए पौधों का क्या होगा. तेज धूप, सूखी हवा और तपती मिट्टी मिलकर कुछ ही दिनों में हरे-भरे पौधों को मुरझा सकती है. लेकिन थोड़ी सी समझदारी और पहले से की गई तैयारी आपके गार्डन को सुरक्षित रख सकती है, ताकि लौटने पर पौधे वैसे ही ताजगी से भरे मिलें.&amp;nbsp;
आपको क्या करना चाहिए?
होम टिप्स के बारे में जानकारी देने वाली तमाम बेवसाइट्स के अनुसार, &amp;nbsp; सबसे पहले अपने गार्डन को ध्यान से समझना जरूरी है. दोपहर के समय एक बार बाहर निकलकर देखें कि किन जगहों पर सबसे ज्यादा धूप पड़ती है. खुली जमीन, बिना छांव वाले हिस्से और दक्षिण दिशा की ओर बने क्यारी वाले स्थान सबसे जल्दी गर्म हो जाते हैं. वहीं पेड़ों के नीचे या छायादार कोनों में तापमान थोड़ा कम रहता है. &amp;nbsp;इन जगहों को पहचानकर आप तय कर सकते हैं कि किस पौधे को ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है.&amp;nbsp;
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गर्मी में मिट्टी की नमी बनाए रखना
गर्मी में मिट्टी की नमी बनाए रखना सबसे बड़ा काम होता है.इसके लिए पौधों के आसपास सूखी पत्तियां, भूसा या खाद की मोटी परत बिछा दें. यह परत मिट्टी को सीधे सूरज की तपिश से बचाती है, पानी को जल्दी सूखने नहीं देती और जड़ों को ठंडक देती है. इससे पौधे लंबे समय तक बिना ज्यादा पानी के भी टिके रह सकते हैं.&amp;nbsp;
पानी देने का सही समय
पानी देने का सही समय भी बहुत मायने रखता है. अगर आप घर से बाहर जाने वाले हैं, तो जाने से पहले सुबह या शाम के समय पौधों को अच्छी तरह से पानी दें, ताकि मिट्टी गहराई तक नम हो जाए. हल्का-हल्का पानी देने के बजाय एक बार में अच्छी सिंचाई करना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे जड़ें नीचे तक मजबूत होती हैं और पौधे ज्यादा समय तक सूखे को सहन कर पाते हैं.
अस्थायी छांव का इंतजाम
तेज धूप से बचाने के लिए अस्थायी छांव का इंतजाम भी किया जा सकता है. आप कपड़े, जाल या छतरी जैसी चीजों का इस्तेमाल करके नाजुक पौधों को ढक सकते हैं. अगर आपके गार्डन में बेल या बड़े पौधे हैं, तो उनके नीचे छोटे पौधों को रखें, ताकि उन्हें प्राकृतिक छांव मिल सके. इससे धूप का सीधा असर कम होगा और पौधे जल्दी नहीं सूखेंगे. अगर आप नए पौधे लगाने की सोच रहे हैं, तो ऐसे पौधों का चयन करें जो गर्मी सहने में सक्षम हों. देशी पौधे, रसीले पौधे और कम पानी में पनपने वाले पौधे इस मौसम के लिए बेहतर होते हैं. ऐसे पौधे न सिर्फ टिकाऊ होते हैं, बल्कि कम देखभाल में भी अच्छे बने रहते हैं.
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        <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Life in Kolkata: जिंदगी जीने के हिसाब से कैसा शहर है कोलकाता? अच्छा या खराब... रेटिंग से समझें</title>
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        <description><![CDATA[ Life in Kolkata: कोलकाता, जिसे भारत के लोगों के बीच &#039;City of Joy&#039; के नाम से जाना जाता है, पश्चिम बंगाल की राजधानी है. वहीं पश्चिम बंगाल, जिसने रवींद्रनाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस जैसे कई विद्वानों और स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया. यहां की धरती जितनी ऐतिहासिक और वीर गाथाओं से भरी है, वहीं यहां का रहन-सहन भी काफी अलग है.
कोलकाता के लोग इस समय चुनावी रंग में रंगे हुए हैं. बंगाल में BJP और TMC के बीच सीधी टक्कर बताई जा रही है. मतदान दो चरणों में होने वाला है, जिसमें पहला चरण 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को हो चुका है और दूसरा 142 सीटों के लिए 29 अप्रैल को होगा. वोटों की गिनती और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे.
रोजमर्रा के खर्च
कोलकाता की सबसे खास बातों में से एक यहां का कम खर्च है. मेट्रो शहर होने के बावजूद किराया और खाने से लेकर रोजमर्रा की हर जरूरत की चीज का खर्च काफी कम आता है. इससे कम आमदनी वाले लोग भी यहां आसानी से अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकते हैं. अगर तुलना करें मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों से, तो वहां के मुकाबले कोलकाता में चीजें ज्यादा सस्ती हैं. इसी वजह से बाहर के छात्र भी यहां आकर अपनी पढ़ाई पूरी करना पसंद करते हैं. किफायत के मामले में अधिकतर रेटिंग एजेंसियां इसे 5 में से लगभग 4.5 की रेटिंग देती हैं.
ट्रांसपोर्ट और कनेक्टिविटी
एक मेट्रो सिटी होने के कारण इस शहर में हर तरह की परिवहन सेवाएं जैसे बस, ऑटो, लोकल ट्रेन और मेट्रो उपलब्ध हैं, जिनका रोजाना लाखों लोग इस्तेमाल करते हैं. मेट्रो नेटवर्क को लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिससे सुविधाओं में और वृद्धि होगी. हालांकि Peak टाइम में भीड़ ज्यादा होती है, जो थोड़ी परेशानी पैदा करती है. कनेक्टिविटी के मामले में इसे आमतौर पर 5 में से 4 की रेटिंग दी जाती है.
करियर और एजुकेशन
यहां IIM-Calcutta, Jadavpur University और अन्य कई बड़े कॉलेज मौजूद हैं, जो हर साल हजारों छात्रों का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं. करियर की बात करें, तो कॉरपोरेट सेक्टर और आईटी फील्ड में हैदराबाद और बेंगलुरु जितने अवसर यहां नहीं हैं. लेकिन सरकारी और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में अच्छे मौके मिल जाते हैं. करियर के मामले में इसे आमतौर पर 5 में से 3.5 की रेटिंग दी जाती है.
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लाइफस्टाइल और संस्कृति
यही कोलकाता की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. कला, साहित्य और खान-पान के लिए मशहूर इस शहर की अपनी अलग चमक-दमक है. खासकर दुर्गा पूजा के दौरान यहां का माहौल देखने लायक होता है जब पूरा शहर इस पर्व के रंग में रंगा होता है. खाने के शौकीनों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है. वेज हो या नॉन-वेज, यहां हर तरह के पकवान का स्वाद लिया जा सकता है. लाइफस्टाइल के मामले में इसे आमतौर पर 5 में से 5 की रेटिंग दी जाती है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Bengali Kohl Eye Look: बंगाली लड़कियों जैसी खूबसूरत आंखें चाहिए? इन 7 आसान स्टेप्स में लगाएं काजल</title>
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        <description><![CDATA[ How To Create Bengali Kohl Eye Look Step By Step: बंगाली लड़कियों की बड़ी-बड़ी काजल लगी आंखें सिर्फ मेकअप का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि एक एहसास होती हैं, एक परंपरा, एक पहचान और एक हल्की-सी नजाकत भरी अदाकारी. सिर्फ एक हल्की रेखा से आंखों को ऐसा निखार मिल जाता है, जो साधारण लुक को भी खास बना देता है. दुर्गा पूजा के सजने-संवरने से लेकर रोजमर्रा की सादगी तक, यह अंदाज हर मौके पर फिट बैठता है. इसकी खासियत है हल्का-सा फैला हुआ काजल, जो आंखों को गहराई और एक अलग ही अट्रेक्शन देता है.
सदियों पुरानी परंपरा
यह चलन आज का नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा है. काजल को बुरी नजर से बचाव, ठंडक और सांस्कृतिक पहचान के रूप में भी देखा जाता है. लेकिन बंगाली अंदाज की खास बात यह है कि इसमें गहराई के साथ एक सॉफ्ट लेकिन प्रभावशाली भाव झलकता है, जहां आंखें खुद अपनी कहानी कहती हैं. अगर आप भी इस क्लासिक लुक को अपनाना चाहती हैं, तो इसे आसान स्टेप्स में समझिए-&amp;nbsp;
पहला कदम- &amp;nbsp;चेहरे की तैयारी
सबसे पहले आंखों के नीचे ठंडक देने के लिए बर्फ हल्के हाथ से लगाएं और फिर कोई हल्की क्रीम इस्तेमाल करें. इससे त्वचा तैयार होती है और काजल लंबे समय तक टिकता है.
दूसरा कदम- &amp;nbsp;अंदरूनी रेखा पर काम
ऊपरी पलकों की अंदरूनी लाइन पर काजल लगाएं. इससे पलकों की जड़ें घनी दिखती हैं और आंखों में बिना ज्यादा मेकअप के भी गहराई आ जाती है. यही इस लुक का सबसे बड़ा राज है.
तीसरा कदम- &amp;nbsp;निचली लाइन को उभारें
अब निचली पलकों की लाइन पर काजल लगाएं और उसे हल्का-सा बाहर की ओर बढ़ाएं. इससे आंखें बड़ी और ज्यादा स्पष्ट दिखती हैं.
चौथा कदम- &amp;nbsp;हल्का फैलाव दें
कॉटन या उंगली की मदद से काजल को हल्का-सा फैला दें, खासकर नीचे की लाइन को. ध्यान रखें कि किनारे बहुत शार्प न रहें, बल्कि हल्का धुंधलापन बना रहे.
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पांचवां कदम- मुलायम किनारा बनाएं
काजल को थोड़ा बाहर की ओर खींचें, लेकिन उसे हल्का-सा घुला हुआ ही रखें. इससे आंखों को लंबा और आकर्षक आकार मिलता है.
छठा कदम- &amp;nbsp;ऊपरी लाइन को संतुलित करें
ऊपरी पलकों के पास हल्की रेखा बनाएं और उसे भी थोड़ा-सा फैला दें, ताकि पूरा लुक एकसार और गहराई भरा लगे.
सातवां कदम- अंतिम स्पर्श
पलकों पर हल्का मस्कारा लगाएं और भौंहों को नेचुरल रखते हुए थोड़ा सधा हुआ आकार दें. पूरा लुक ज्यादा भारी नहीं, बल्कि सादगी में खूबसूरती दिखाने वाला होना चाहिए. इस अंदाज की खूबसूरती इसी में है कि यह ज्यादा मेहनत के बिना भी आपकी आंखों को बोलता हुआ बना देता है, जहां हर नजर में एक कहानी छुपी होती है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Stomach Infection: क्या गर्मी में आपका भी पेट बार&amp;बार हो रहा खराब? डॉक्टर से जानें इसकी असली वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Why Stomach Infections Increase In Summer: गर्मी के मौसम में अक्सर ऐसा होता है कि अचानक घर या दफ्तर में कई लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं. किसी को उल्टी, किसी को दस्त, तो किसी को पेट में मरोड़ की शिकायत. ज्यादातर लोग इसे सीधे तौर पर खाने की वजह मान लेते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा मुश्किल है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. आकाश चौधरी, जो केयर हॉस्पिटल में क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर सलाहकार हैं, उन्होंने TOI को बताया कि जिसे हम आमतौर पर फूड पॉइजनिंग कहते हैं, वह अक्सर कई कारणों का मिला-जुला असर होता है. इसमें गर्मी, खाना रखने का तरीका, पानी की क्वालिटी और आसपास का वातावरण सबकी भूमिका होती है. दरअसल, गर्मी सिर्फ असहज महसूस कराने तक सीमित नहीं है, यह खाने की सुरक्षा पर भी सीधा असर डालती है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. कई बार खाना देखने और सूंघने में बिल्कुल ठीक लगता है, लेकिन उसमें माइक्रोब्स खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके होते हैं. डॉक्टर चौधरी के मुताबिक, गर्मियों में खाना पकने और खाने के बीच थोड़ा सा अंतर भी जोखिम बढ़ा सकता है.&amp;nbsp;
किससे होती है दिक्कत?
लोग अक्सर यह सोचते हैं कि बीमारी सिर्फ खाने से हुई है, लेकिन कई बार असली वजह पानी होता है. पीने का पानी, पेय पदार्थों में डाली गई बर्फ, या कच्चे फल-सब्जियां जिन्हें ठीक से साफ नहीं किया गया, ये सभी इंफेक्शन के सोर्स बन सकते हैं. खास बात यह है कि पानी को लेकर हम उतनी सावधानी नहीं बरतते जितनी खाने को लेकर करते हैं, और यही चूक भारी पड़ जाती है.&amp;nbsp;
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लाइफस्टाइल से भी प्रभाव
गर्मियों में खानपान की आदतें भी बदल जाती हैं. बाहर खाना, यात्रा के दौरान खाना या सड़क किनारे से कुछ लेना ये सब आम हो जाता है. ज्यादातर बार सब ठीक रहता है, लेकिन कभी-कभी इनमें से कोई एक चीज समस्या पैदा कर देती है और यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि असल कारण क्या था. &amp;nbsp;अगर एक ही घर में कई लोग एक साथ बीमार पड़ते हैं, तो यह जरूरी नहीं कि वजह वही खाना हो. कई बार यह इंफेक्शन एक से दूसरे में फैलता है, जो आमतौर पर वायरस के कारण होता है. गंदे हाथ, साझा सतहें और साफ-सफाई की कमी इसके पीछे बड़ी वजह बनती हैं. डॉक्टर चौधरी साफ कहते हैं कि ऐसे मामलों में बीमारी किसी खास खाने से नहीं, बल्कि संपर्क से फैलती है.
कब डॉक्टर से करना चाहिए संपर्क?
इसके अलावा, गर्मी में शरीर खुद भी ज्यादा दबाव में रहता है. पानी की कमी, अनियमित भोजन और तेज तापमान डाइजेशन सिस्टम को सेंसेटिव बना देते हैं. ऐसे में वही खाना, जो पहले कभी नुकसान नहीं करता था, अब परेशानी पैदा कर सकता है. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह समस्या कुछ दिनों में खुद ही ठीक हो जाती है. लेकिन अगर उल्टी लगातार हो, तेज बुखार हो, मल में खून आए या शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Online Dating Tips: ऑनलाइन डेटिंग करने जा रहे हैं तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान, वरना बाद में होगा पछतावा</title>
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        <description><![CDATA[ Online Dating Tips: ऑनलाइन डेटिंग करने जा रहे हैं तो इन बातों का जरूर रखें ध्यान, वरना बाद में होगा पछतावा ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Office Air Theory: क्या ऑफिस की चिल्ड AC से बेजान हो जाते हैं बाल और स्किन, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/office-air-theory-क्या-ऑफिस-की-चिल्ड-ac-से-बेजान-हो-जाते-हैं-बाल-और-स्किन-क्या-कहते-हैं-एक्सपर्ट</link>
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        <description><![CDATA[ 
Office Air Theory: जब आप सुबह घर से ऑफिस के लिए निकलते होंगे, उस समय चेहरा फ्रेश, बाल सेट और लुक बिल्कुल परफेक्ट होता है, लेकिन ऑफिस पहुंचकर कुछ ही घंटों में स्किन बेजान और बाल चिपचिपे नजर आने लगते हैं. सोशल मीडिया पर इस बदलाव को अब ऑफिस एयर थ्योरी का नाम दिया जा रहा है. कई लोग मानते हैं कि एसी वाले ऑफिस का माहौल ही स्किन और बालों की इस हालात के लिए जिम्मेदार हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या ऑफिस की चिल्ड एसी से बाल और स्किन बेजान हो जाते हैं और इसे लेकर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं. क्या है ऑफिस एयर थ्योरी?यह ट्रेंड सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हुआ है. इसके अनुसार सुबह तैयार होकर निकलने के बाद दोपहर तक स्किन ड्राई होने लगती है. बाल फ्लैट और ऑयली दिखने लगते हैं और पूरा लुक फीका पड़ जाता है. कई यूजर्स ने इसे ऑफिस एयर कंडीशनिंग माहौल से जुड़ा बताया है &amp;nbsp;क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लोगों की यह समस्या पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ इसे सिर्फ टॉक्सिक ऑफिस एयर कहना सही नहीं होगा. एक्सपर्ट्स के अनुसार एसी वाले ऑफिस में नमी कम होती है, जिससे स्किन से पानी तेजी से निकलता है. इस प्रक्रिया को ट्रांस एपीडर्मल वाटर लॉस कहा जाता है. इस वजह से स्किन ड्राई और खींची हुई महसूस होती है. स्किन का नेचुरल बैरियर कमजोर पड़ता है और स्किन में संवेदनशीलता बढ़ जाती है. वहीं बालों के मामले में स्कैल्प सूखने पर शरीर ज्यादा तेल बनाने लगता है, जिससे बाल ऑयली और फ्लैट दिखते हैं. सिर्फ एसी ही नहीं यह वजह है भी है जिम्मेदारएक्सपर्ट्स बताते हैं कि सिर्फ ऑफिस का माहौल ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतें भी स्किन और बालों के बेजान होने में बड़ी भूमिका निभाती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बाहर की गर्मी, धूल और पसीना फिर अचानक एसी में आना, शहरों में प्रदूषण, दिन भर की थकान और समय के साथ स्किन का नेचुरल बदलाव इन सब का असर मिलकर स्किन और बालों पर दिखाई देता है. लगातार एसी में रहने से स्किन की नमी कम हो सकती है, जिससे खुजली और ड्राइनेस बढ़ती है. इसके अलावा कुछ लोगों को सिर दर्द, थकान और सांस से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती है. ठंडी और सूखी हवा शरीर को डिहाइड्रेट कर देती है, जिससे चेहरा और ज्यादा फीका नजर आने लगता है. ये भी पढ़ें-Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर के मिथक बन रहे खतरा, जानिए महिलाओं को इसका सच जानना क्यों है बेहद जरूरी
कैसे रखें स्किन और बालों का ख्याल?एक्सपर्ट के अनुसार कुछ आदतें अपना करें इस समस्या से बचा जा सकता है. जैसे बाहर से आने के बाद चेहरा साफ करें. मॉइश्चराइजर और हाइड्रेटिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें, दिन भर पर्याप्त पानी पिएं, सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, बालों को जरूरत से ज्यादा बार न धोएं और फेस मिस्ट या गुलाब जल का उपयोग कर सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Heatstroke Symptoms :गर्मी में लू लगने से पहले ही शरीर करने लगता है इशारे, इन्हें कैसे पहचानें?</title>
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        <description><![CDATA[ Heatstroke Symptoms : गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप और बढ़ता हुआ तापमान लेकर आता है. जैसे-जैसे पारा चढ़ता है, वैसे-वैसे लू लगने (Heatstroke) का खतरा भी बढ़ने लगता है. यह एक ऐसी स्थिति है जो शरीर के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है और अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है.&amp;nbsp;
अक्सर लोग सोचते हैं कि लू अचानक लग जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है. शरीर पहले ही कुछ संकेत देना शुरू कर देता है, जिन्हें अगर हम समझ लें तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है. खासकर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और जो लोग धूप में ज्यादा समय तक काम करते हैं, उन्हें इसका खतरा ज्यादा होता है. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि गर्मी में लू लगने से पहले शरीर क्या-क्या संकेत देता है और इन्हें कैसे पहचाना जा सकता है.&amp;nbsp;
गर्मी में लू लगने से पहले शरीर क्या-क्या संकेत देता है
1. तेज सिरदर्द और चक्कर आना - लू लगने से पहले सबसे आम संकेत है अचानक तेज सिरदर्द होना, ऐसा महसूस होता है जैसे सिर भारी हो गया हो या धड़क रहा हो. इसके साथ-साथ चक्कर भी आने लगते हैं. यह इस बात का संकेत होता है कि शरीर का तापमान बढ़ रहा है और दिमाग पर गर्मी का असर पड़ने लगा है. अगर ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत धूप से हट जाना चाहिए.&amp;nbsp;
2. बहुत ज्यादा कमजोरी और थकान महसूस होना - दूसरा बड़ा संकेत &amp;nbsp;शरीर में अचानक बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी आ जाना है. ऐसा लगता है जैसे शरीर में ताकत ही नहीं बची हो और कोई भी काम करना मुश्किल हो रहा हो. कभी-कभी व्यक्ति को चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगती है. यह इस बात का संकेत है कि शरीर गर्मी को संभाल नहीं पा रहा है.
3. पसीने में बदलाव - लू लगने से पहले पसीने में बदलाव एक बहुत जरूरी संकेत होता है.कुछ लोगों को बहुत ज्यादा पसीना आने लगता है, जबकि कुछ मामलों में पसीना अचानक बंद हो जाता है. दोनों ही स्थिति खतरनाक होती हैं क्योंकि इसका मतलब है कि शरीर अपना तापमान कंट्रोल नहीं कर पा रहा है.
&amp;nbsp;4. मुंह सूखना और प्यास ज्यादा लगना - गर्मी बढ़ने पर शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होने लगता है. ऐसे में मुंह सूखने लगता है और बार-बार पानी पीने की इच्छा होती है.अगर इस संकेत को नजरअंदाज किया जाए तो शरीर में पानी की कमी और बढ़ सकती है, जिससे लू लगने का खतरा बढ़ जाता है.
5. बेचैनी, घबराहट और ध्यान लगाने में परेशानी - लू लगने से पहले व्यक्ति को अचानक बेचैनी महसूस होने लगती है. दिल घबराने लगता है और किसी भी काम में मन नहीं लगता है. कई बार ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है और व्यक्ति उलझन महसूस करता है. यह दिमाग पर गर्मी के असर का संकेत होता है.
6. हल्का बुखार या शरीर का गर्म महसूस होना - शुरुआत में शरीर हल्का गर्म महसूस होने लगता है या बुखार जैसा लग सकता है. यह इस बात का संकेत है कि शरीर का तापमान सामान्य से ऊपर जा रहा है. अगर इसे समय पर नहीं संभाला गया तो स्थिति लू में बदल सकती है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें -&amp;nbsp;Summer Fatigue: गर्मी में बिना काम किए भी क्यों लगती है थकान? डॉक्टर ने बताया असली कारण
लू से बचाव के आसान तरीके
1. लू से बचने के लिए कुछ आसान सावधानियां बहुत मददगार होती हैं. जैसे दोपहर की तेज धूप में बाहर जाने से बचें.
2. हल्के और सूती कपड़े पहनें.
3. सिर को ढक कर रखें.
4. खूब पानी और लिक्विड पीते रहें.
5. नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें.
6. लंबे समय तक धूप में काम करते समय बीच-बीच में आराम करें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>City Of Joy Lifestyle: दिन में काम और शाम को कल्चर, जानें कैसी है सिटी ऑफ जॉय कोलकाता की लाइफस्टाइल?</title>
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        <description><![CDATA[ City Of Joy Lifestyle: दिन में काम और शाम को कल्चर, जानें कैसी है सिटी ऑफ जॉय कोलकाता की लाइफस्टाइल? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>World Malaria Day: हल्का बुखार इग्नोर करना पड़ सकता है भारी, हो सकता है मलेरिया</title>
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        <description><![CDATA[ World Malaria Day 2026:&amp;nbsp;लोग अक्सर आप हल्के बुखार, ठंड लगना या कमजोरी महसूस होने को बदलते मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शुरुआती लक्षण मलेरिया के संकेत हो सकते हैं. 25 अप्रैल 2026 को वर्ल्ड मलेरिया डे के रूप में मनाया जाता है और आज इस खास दिवस पर मलेरिया से जुड़ी बातें, लक्षण और गंभीरता के बारे में बात करते हैं. मलेरिया एक गंभीर बीमारी है और समय पर पहचान न होने पर यह तेजी से शरीर को कमजोर कर सकती है. इसलिए कई दिनों तक हल्का-हल्का बुखार आना, थकान महसूस होना-इन लक्षणों को नजरअंदाज करने की भूल बिल्कुल भी न करें.
मलेरिया क्या है?
मलेरिया एक बीमारी है जो Anopheles मादा मच्छर के काटने से फैलती है. इस बीमारी में आमतौर पर तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, शरीर दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कई मामलों में यह बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है, लेकिन इसके लक्षणों की पहचान में अक्सर लोग गलती कर लेते हैं और इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
ये तो सिर्फ हल्का बुखार है...
मलेरिया का गंभीर रूप ले लेने का सबसे बड़ा कारण उसके लक्षणों को गलत समझ लेना है. अक्सर मलेरिया की शुरुआत हल्के बुखार और ठंड लगने से होती है और लोग समझ लेते हैं कि यह सिर्फ मामूली सा बुखार है. डॉक्टर्स के अनुसार, लोग अक्सर हल्के लक्षणों को हल्का बुखार, ठंड लगना और थकान, जिसे आसानी से फ्लू या डेंगू समझ लेते हैं. मलेरिया होने का रहस्य इसी बात में छिपा है कि साधारण बुखार से अलग मलेरिया में बुखार घटता-बढ़ता रहता है, एक लय में आता है और स्थिर नहीं रहता.
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शरीर में कुछ असामान्य महसूस होना
मलेरिया के सभी शुरुआती लक्षण दिखने में गंभीर नहीं होते, बल्कि वे मामूली से लगते हैं. हालांकि, ये लक्षण इतने जरूर होते हैं कि आपका ध्यान अपनी तरफ खींच सकें. मलेरिया में इंसान के पूरे शरीर में हल्का-हल्का दर्द महसूस होता है. यह खासकर हाथ-पैर और पीठ में होता है और हल्के काम भी थका देने वाले लगने लगते हैं. पेट से जुड़ी कुछ समस्याएं भी होती हैं जैसे मितली, पेट में दर्द और भूख न लगना, साथ-साथ आंखों का रंग पीला हो जाना और पेशाब भी गहरे रंग का आना. इन लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
एक ऐसा मौसम जिसमें जागरूकता की आवश्यकता है
मलेरिया कोई नई बीमारी नहीं है फिर भी यह आज तक गंभीर बनी हुई है. हालांकि इसके मामलों में गिरावट जरूर देखी गई है. भारत ने इसके मामलों को कम करने में प्रगति तो की है, पर फिर भी मौसमी उछाल मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है. मच्छरों को भगाने वाली दवा का इस्तेमाल करना, पूरी बाजू के कपड़े पहनना जैसे विकल्प तो काफी मायने रखते हैं, पर फिर भी आज के समय में इसके लक्षणों की पहचान करना सबसे जरूरी माना जाता है.
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        <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर के मिथक बन रहे खतरा, जानिए महिलाओं को इसका सच जानना क्यों है बेहद जरूरी</title>
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        <description><![CDATA[ Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर के मिथक बन रहे खतरा, जानिए महिलाओं को इसका सच जानना क्यों है बेहद जरूरी ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 08:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Back Pain Relief Diet: उम्र बढ़ने के साथ कमर में बढ़ गया है दर्द, डाइट में ये चीजें शामिल करें महिलाएं</title>
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        <description><![CDATA[ 
Back Pain Relief Diet: बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द की समस्या काफी आम होती जा रही है. खासकर महिलाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा बढ़ रही है. 40 की उम्र के बाद शरीर में पोषक तत्वों की कमी, हड्डियों के कमजोरी और लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें इस परेशानी को और बढ़ा देती है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पॉश्चर और एक्सरसाइज की कमी भी रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालते हैं, जिससे दर्द लगातार बना रहता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं की उम्र बढ़ने के साथ अगर आपका भी कमर दर्द बढ़ गया है, तो महिलाओं को डाइट में कौन सी चीज शामिल करनी चाहिए. कमर दर्द में क्यों जरूरी है सही डाइट?कमर दर्द केवल मांसपेशियों की समस्या नहीं, बल्कि हड्डियों की कमजोरी, सूजन और पोषण की कमी से भी जुड़ होता है. शरीर में कैल्शियम, विटामिन डी और मैग्नीशियम की कमी होने पर शरीर कमजोर होने लगता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है. इसलिए रोजाना की डाइट में पोषक तत्व से भरपूर चीजे शामिल करना जरूरी है. इन चीजों को डाइट में जरूर शामिल करें अदरक और हल्दी अदरक और हल्दी में मौजूद एंटी इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इससे कमर दर्द में राहत मिल सकती है. वहीं हल्दी वाला दूध या अदरक को चाय और खाने में शामिल किया जा सकता है. इससे भी कमर दर्द में राहत मिलती है.अंडा और रागी अंडा, कैल्शियम और विटामिन डी का अच्छा सोर्स होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है. वहीं रागी शाकाहारी लोगों के लिए कैल्शियम का बेहतरीन ऑप्शन है, जो हड्डियों की मजबूती में मदद करता है. हरी पत्तेदार सब्जियां पालक, मेथी और पत्ता गोभी जैसी सब्जी विटामिन के से भरपूर होते हैं. यह हड्डियों को मजबूत बनाती है और चोट से बचाने में मदद करती है. डार्क चॉकलेट और अंगूर डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम पाया जाता है, जो हड्डियों के लिए जरूरी है. वहीं अंगूर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट सूजन कम करने में मदद करते हैं. मछली और ऑलिव ऑयल मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो सूजन कम करता है. वहीं ऑलिव ऑयल में मजबूत तत्व दर्द कम करने में सहायक माने जाते हैं. फर्मेंटेड फूड दही, इडली और डोसा जैसे फर्मेंटेड फूड में विटामिन बी12 और प्रोबायोटिक होते हैं, जो नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाते हैं और दर्द कम करने में मदद करते हैं. ये भी पढ़ें-Oral Cancer Causes: क्या तंबाकू और शराब न पीने वालों को भी हो सकता है मुंह का कैंसर, जवाब सुन नहीं होगा यकीन
किन चीजों से बनाएं दूरी?कमर दर्द की समस्या में कुछ खाने की चीजों इसे और बढ़ा सकती है. ज्यादा चीनी, नमक, मैदा, तली हुई चीजों और प्रोसेस्ड फूड शरीर में सूजन बढ़ाते हैं और हड्डियों को कमजोर करते हैं. इसके अलावा ज्यादा नमक कैल्शियम को शरीर से बाहर निकाल सकता है, जिससे समस्या और गंभीर हो सकती है. इसके अलावा डॉक्टर यह भी बताते हैं कि केवल डाइट ही नहीं बल्कि लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी है .नियमित एक्सरसाइज और सही पॉश्चर और संतुलित आहार से कमर दर्द को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Food Storage In Fridge: फ्रिज में रखा खाना कब हो जाता है खराब, खाने से पहले ये बातें जान लें</title>
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        <description><![CDATA[ Food Storage In Fridge: आज के समय में फ्रिज हर घर का जरूरी सामान बन चुका है. लोग समय बचाने के लिए खाना बनाकर स्टोर करते हैं या फिर बचा हुआ खाना फ्रिज में रख देते हैं. फ्रिज खाने को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर चीज हमेशा के लिए फ्रिज में ताजा रहती है.
दरअसल, हर खाने की एक तय समय सीमा होती है, जिसके बाद उसे खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि फ्रिज में रखा कौन सा खाना कितने दिन तक सुरक्षित रहता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि फ्रिज में रखा खाना कब खराब हो जाता है.
पका हुआ खाना और डेयरी प्रोडक्ट्स कितने दिन सुरक्षित?
घर का बना पका हुआ खाना आमतौर पर फ्रिज में दो से तीन दिन तक ही सुरक्षित रहता है. इसके बाद उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है. वहीं उबला हुआ दूध भी दो से तीन दिन तक ही इस्तेमाल करना बेहतर बन जाता है, जबकि पैकेट वाला दूध खोलने के बाद 2 दिन के अंदर खत्म कर लेना चाहिए. दही की बात करें तो ताजा दही चार से पांच दिन तक फ्रिज में सही रहती है, लेकिन अगर उसमें खट्टापन या अजीब गंध आने लगे तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
सब्जियां और फल कितने दिन तक रखें?
हरी पत्तेदार सब्जियां तीन से चार दिन तक फ्रिज में सुरक्षित रहती है, &amp;nbsp;जबकि गाजर, बीन्स और फूलगोभी जैसी सब्जियां 5 से 7 दिन तक चल सकती है. फलों में सेब और नाशपाती 1 से 2 हफ्ते तक सुरक्षित रहते हैं. लेकिन अंगूर और स्ट्रॉबेरी जैसे फल तीन से पांच दिन में खराब हो सकते हैं. कटे हुए फलों को ज्यादा देर तक फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता है. इन्हें 24 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए, वरना यह दूषित हो सकते हैं.
अंडे, मांस और ब्रेड की स्टोरेज लिमिट
कच्चे अंडे 7 से 10 दिन तक फ्रिज में सुरक्षित रहते हैं, जबकि उबले अंडे दो से तीन दिन के अंदर खा लेने चाहिए. कच्चा चिकन या मांस 1 से 2 दिन और मछली 24 घंटे से ज्यादा फ्रिज में नहीं रखनी चाहिए. ब्रेड को 5 से 7 दिन तक फ्रिज में रखा जा सकता है, लेकिन ज्यादा समय रखने पर इसका स्वाद और बनावट खराब हो सकती है.
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चावल, रोटी और दाल को लेकर सावधानी
फ्रिज में रखे चावल 1 से 2 दिन के अंदर खा लेने चाहिए. रोटी को 12 से 14 घंटे के अंदर इस्तेमाल करना बेहतर रहता है, क्योंकि ज्यादा देर रखने पर उसकी पौष्टिकता कम हो जाती है. वहीं दाल को भी दो दिन के अंदर खत्म कर लेना चाहिए, क्योंकि ज्यादा समय रखने पर यह पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
फ्रिज में खाना रखने के दौरान ये गलतियां न करें

कभी भी गरम खाना सीधा फ्रिज में नहीं रखना चाहिए.
कच्चे और पके खाने को अलग-अलग रखें.
खाना रखने के लिए हमेशा एयर टाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें.
फ्रिज का तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें.
खराब गंध, फफूंदी या रंग बदलने पर खाना तुरंत फेंक दें.

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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Arunachal Pradesh Tourism: नदी पर लग्जरी सफर और वॉटर स्पोर्ट्स, अरुणाचल प्रदेश में नदी के किनारे बना नया टूरिस्ट हब</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/arunachal-pradesh-tourism-नदी-पर-लग्जरी-सफर-और-वॉटर-स्पोर्ट्स-अरुणाचल-प्रदेश-में-नदी-के-किनारे-बना-नया-टूरिस्ट-हब</link>
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        <description><![CDATA[ Arunachal Pradesh New Tourism Project Details: अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी अब जमीन पर उतरती दिख रही है. राज्य सरकार ने सुबनसिरी नदी के किनारे बने लोअर पोंडेज इलाके को एक ऐसे पर्यटन केंद्र में बदलने की योजना बनाई है, जहां प्रकृति, रोमांच और स्थानीय कल्चर का अनोखा संगम देखने को मिल सके. यह पहल सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यटकों को एक पूरा अनुभव देने पर फोकस किया जा रहा है.
पर्यटन के लिए मौका
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत वह जलविद्युत परियोजना है, जिसके आसपास यह पूरा मॉडल तैयार हो रहा है. 2000 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजनाओं में गिनी जाती है और दिसंबर 2026 तक इसके पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है. इसके चार यूनिट पहले ही काम कर रहे हैं. इसी से बने जलाशय को अब पर्यटन के लिहाज से नए मौके के रूप में देखा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह इलाका बायोडायवर्सिटी के मामले में बेहद समृद्ध है. मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस योजना को लेकर केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है. इसके लिए पर्यटन, ऊर्जा, जल शक्ति, पोत परिवहन और पूर्वोत्तर विकास जैसे मंत्रालयों से तकनीकी मदद लेने की बात कही गई है, ताकि प्रोजेक्ट को एक समग्र तरीके से आगे बढ़ाया जा सके.

क्यों है यह खास?
दरअसल, इस परियोजना को खास बनाता है इसका मल्टीडाइमेंशनल फॉर्मेट. यहां प्रकृति के बीच ठहरने का अनुभव, एडवेंचर गतिविधियां, जल क्रीड़ा, कल्चर और विरासत से जुड़े टूर, मत्स्य पालन के जरिए रोजगार और नदी पर लग्जरी सफर जैसी कई संभावनाएं एक साथ विकसित की जाएंगी. मकसद यह है कि यहां आने वाला हर पर्यटक कुछ अलग महसूस करे.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;स्थानीय और जनजातीय समुदायों का रखा गया है ध्यान 
इस पूरी योजना में स्थानीय और जनजातीय समुदायों को केंद्र में रखा गया है. उन्हें इस विकास का सिर्फ हिस्सा ही नहीं, बल्कि इसका संरक्षक भी बनाया जाएगा. यही वजह है कि इसे सिर्फ पर्यटन प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आजीविका बढ़ाने की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है. सरकार को उम्मीद है कि इससे करीब ढाई हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और आने वाले समय में हर साल करीब डेढ़ लाख पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं. इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार मिलने की संभावना है.&amp;nbsp;

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सीएम ने की थी पदयात्रा
अभी इस दिशा में पहला कदम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करना है. इसके लिए एक्सपर्ट एजेंसियों को जोड़ा जाएगा, जो लागत, इम्प्लीमेंटेशन और स्थानीय भागीदारी जैसे पहलुओं पर काम करेंगी. गौरतलब है कि इसी साल मार्च में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ करीब 45 किलोमीटर लंबी नदी यात्रा की थी. डोलुंगमुख से कमले-सुबनसिरी संगम तक की इस यात्रा को उन्होंने संभावनाओं को समझने और पर्यटन को जलविद्युत विकास से जोड़ने की दिशा में अहम पहल बताया था.यह योजना अरुणाचल प्रदेश को पर्यटन के नक्शे पर एक नई पहचान देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>PM Modi Howrah Bridge Boat Ride: पीएम मोदी की तरह आपको भी नाव से निहारना है हावड़ा ब्रिज, जानें कैसे पहुंच सकते हैं यहां?</title>
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        <description><![CDATA[ PM Modi Howrah Bridge Boat Ride: पीएम मोदी की तरह आपको भी नाव से निहारना है हावड़ा ब्रिज, जानें कैसे पहुंच सकते हैं यहां? ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Fatigue: गर्मी में बिना काम किए भी क्यों लगती है थकान? डॉक्टर ने बताया असली कारण</title>
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        <description><![CDATA[ Summer Fatigue: अप्रैल खत्म होते-होते ही चिलचिलाती और चुभने वाली गर्मी ने कहर ढाना शुरू कर दिया है. तापमान 40 डिग्री के पार जाने के बाद लोगों ने अभी से&amp;nbsp; कयास लगाना शुरू कर दिया है कि इस बार की गर्मी कितनी भीषण होने वाली है. इस बीच डॉक्टर भी Peak Heat (11 से 3 बजे के बीच) के दौरान घर पर रहने की सलाह दे रहे हैं. हर साल Heat wave और UV Rays का खतरा लोगों पर मंडराता रहता है और इस मौसम में लोग बिना काम किए भी थका-थका महसूस करते हैं.
बहुत से लोग गर्मी में एक अजीब पैटर्न नोटिस कर रहे हैं, जिसमें शारीरिक काम न करने पर भी लोग अत्यधिक थका हुआ महसूस करने लगे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक यह कोई भ्रम नहीं, बल्कि आपके शरीर पर पड़ रहे बोझ के कारण हो रहा है. डॉक्टरों के अनुसार, &quot;गर्मी में होने वाली थकावट एक शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो हीट, डिहाइड्रेशन और नींद पूरी न होने के कारण होती है.&quot;
गर्मी के कारण बढ़ता है शरीर पर बोझ
गर्म मौसम में शरीर अपना आंतरिक तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है, जिसके कारण हमारे हार्ट को जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है. पसीना आने से मदद मिलती है, लेकिन पसीने के साथ शरीर में मौजूद जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं. हल्की-सी डिहाइड्रेशन भी ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करती है, जो थकावट, सिरदर्द और लो एनर्जी का कारण बन जाती है और आपकी पूरे दिन की प्रोडक्टिविटी को प्रभावित करती है.
नींद और सांस लेने में दिक्कत
गर्मी की रातें काफी कष्टदायक होती हैं और अच्छी नींद के लिए थोड़े ठंडे तापमान की जरूरत होती है. जब ऐसा नहीं होता तो नींद खराब होती है. ऐसे में घंटों नींद लेने के बाद भी थका-थका महसूस होता है. गर्मी के कारण सांस से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं, जैसे Sleep Apnea. जब नींद डिस्टर्ब होती है, तो कंसंट्रेशन और मूड बुरी तरह बिगड़ जाता है.
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क्या करना है जरूरी?
गर्मी से होने वाली थकावट आलस के कारण नहीं होती. इसलिए समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, जिससे आप हाइड्रेटेड रहेंगे और इलेक्ट्रोलाइट्स भी संतुलित रहेंगे. साथ ही अपनी सोने की जगह को भी ठंडा रखने की कोशिश करें.
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>कपाट खुलते ही केदारनाथ धाम में उमड़ी आस्था की भीड़, पहले दिन 38 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन!</title>
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Kedarnath Yatra 2026: उत्तराखंड के पवित्र धाम केदारनाथ मंदिर में कपाट खुलते ही आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. बुधवार सुबह विधि-विधान के साथ जैसे ही बाबा केदार के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, वैसे ही देश-विदेश से आए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. पहले ही दिन लगभग 38 हजार श्रद्धालु धाम पहुंच गए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया.
सुबह करीब 7:50 बजे कपाट खुलने के साथ ही &amp;lsquo;ॐ नमः शिवाय&amp;rsquo; और &amp;lsquo;जय बाबा केदार&amp;rsquo; के जयघोषों से वातावरण गूंज उठा. इस पावन अवसर पर सेना की सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के बैंड की मधुर धुनों ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया. परंपरा के अनुसार, पहली पूजा नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न हुई. कपाटोद्घाटन के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए करीब 10 हजार श्रद्धालु मौजूद रहे.
मुख्यमंत्री भी रहे मौजूद
इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम में उपस्थित रहे. उन्होंने देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की. कपाट खुलने के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई, जिसने पूरे आयोजन को और भी दिव्य बना दिया.
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भारी भीड़ से बढ़ी चुनौती
हालांकि, भारी भीड़ के कारण श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. कई भक्तों ने बताया कि उन्हें बाबा के दर्शन के लिए 10 से 12 घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ा. मंदिर तक पहुंचने वाले करीब 700 मीटर लंबे कॉरिडोर में श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगी रहीं, जिससे व्यवस्था पर दबाव साफ दिखाई दिया.
व्यवस्था में दिखी कमी
यात्रा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी तैनात किए गए थे, लेकिन पहले दिन समन्वय की कमी भी सामने आई. मंदिर के मुख्य द्वार पर कुछ श्रद्धालु रेलिंग पार कर अंदर जाने की कोशिश करते नजर आए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे. पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि व्यवस्थाओं को जल्द ही दुरुस्त किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.
भीम शिला पर भी उमड़ी भीड़
धाम में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक बनी भीम शिला पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली. वर्ष 2013 की आपदा के बाद से यह शिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है. तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद भीम शिला के दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है.
प्राकृतिक सौंदर्य ने बढ़ाया आकर्षण
प्राकृतिक सौंदर्य भी श्रद्धालुओं को खासा आकर्षित कर रहा है. चारों ओर बर्फ से ढके पहाड़, साफ नीला आसमान और ठंडी हवाएं धाम की भव्यता को और बढ़ा रहे हैं. भैरवनाथ मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालु बर्फ के बीच खेलते और तस्वीरें खींचते नजर आए. गुजरात से आए एक श्रद्धालु रमाभाई ने बताया कि इस बार कपाट खुलने के समय मौसम बेहद अनुकूल है, जिससे यात्रा का अनुभव और भी सुखद हो गया है.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, केदारनाथ धाम में कपाट खुलने के पहले ही दिन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला. हालांकि भारी भीड़ के कारण कुछ अव्यवस्थाएं जरूर सामने आईं, लेकिन प्रशासन ने जल्द सुधार का भरोसा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यात्रा और अधिक सुगम होने की उम्मीद है.
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Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;






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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 08:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>ये 7 चीजें बार&amp;बार दिखें तो समझ जाएं आपका वर्क प्लेस भी है टॉक्सिक, तुरंत बदल लें नौकरी</title>
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        <description><![CDATA[ ये 7 चीजें बार-बार दिखें तो समझ जाएं आपका वर्क प्लेस भी है टॉक्सिक, तुरंत बदल लें नौकरी ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Money Plant Growth Tips: इस एक ट्रिक से पूरी बालकनी में फैल जाएगी मनी प्लांट की बेल, बस कर लें ये काम</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Money Plant Vine Spread In Balcony: अगर आपके घर की बालकनी में रखा मनी प्लांट सही तरह से नहीं बढ़ रहा है या उसकी बेल लंबी होकर भी फैल नहीं रही, तो आपको सिर्फ एक छोटी सी ट्रिक अपनाने की जरूरत है. सही देखभाल और थोड़ी समझ से आप इसे पूरी बालकनी में फैला सकते हैं. दरअसल, मनी प्लांट एक ऐसा पौधा है जो अपने आप फैलने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके लिए सही दिशा और सहारा देना जरूरी होता है.
आपको क्या करना चाहिए?
&amp;nbsp;सबसे पहले इसे ऐसी जगह रखें जहां तेज धूप सीधे न पड़े, लेकिन भरपूर रोशनी मिलती रहे. हल्की और परोक्ष रोशनी में इसकी बेल तेजी से बढ़ती है और पत्तियां भी हरी-भरी रहती हैं.&amp;nbsp;
क्या है आसान ट्रिक?
पेड़- पौधों के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट plantshub के अनुसार,अगर उस ट्रिक की, जिससे पूरी बालकनी में इसकी बेल फैलाई जा सकती है. इसके लिए आपको मनी प्लांट को सहारा देना होगा. आप दीवार, ग्रिल या रस्सी का इस्तेमाल कर सकते हैं और बेल को धीरे-धीरे उसी दिशा में मोड़कर बांधते जाएं. जैसे-जैसे बेल बढ़ती जाएगी, उसे ऊपर या किनारे की ओर बढ़ने का रास्ता मिलता रहेगा और कुछ ही समय में पूरी बालकनी हरियाली से भर जाएगी.&amp;nbsp;
पानी देना भी अहम
पानी देने का तरीका भी बहुत अहम है. मनी प्लांट को ज्यादा पानी देने से इसकी जड़ें खराब हो सकती हैं, इसलिए जब मिट्टी ऊपर से सूखी लगे तभी पानी दें. अगर आप इसे पानी में उगा रहे हैं, तो हर 7 से 10 दिन में पानी बदलना जरूरी है, ताकि पौधा स्वस्थ बना रहे. इसके अलावा, समय-समय पर इसकी छंटाई करते रहना भी जरूरी है. सूखी या पीली पत्तियों को हटाने से नई और घनी बेल निकलती है. &amp;nbsp;अगर बेल बहुत लंबी हो जाए, तो उसे काटकर दोबारा लगा सकते हैं, जिससे एक पौधे से कई पौधे तैयार हो जाते हैं.&amp;nbsp;
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खाद के लिए क्या रखें ध्यान
मनी प्लांट को बढ़ने के लिए ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती, लेकिन महीने में एक बार हल्की खाद देने से इसकी ग्रोथ और तेज हो जाती है. इसके साथ ही, इसे ठंडी हवा से बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि यह पौधा गर्म वातावरण में ज्यादा अच्छा बढ़ता है. सबसे जरूरी बात यह है कि इस पौधे की बेल को खुला छोड़ने के बजाय सही दिशा में बढ़ने का मौका दें. &amp;nbsp;यही एक ट्रिक है, जो इसे छोटी सी गमले से निकालकर पूरी बालकनी तक फैला सकती है. थोड़ी सी देखभाल और सही तरीका अपनाकर आप अपने घर को हरे-भरे पौधों से सजा सकते हैं.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kedarnath Bag Pack Guide : केदारनाथ जाने का है प्लान तो बैग में जरूर पैक कर लें ये 5 चीजें, सफर हो जाएगा आसान</title>
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        <description><![CDATA[ Kedarnath Bag Pack Guide : केदारनाथ जाने का है प्लान तो बैग में जरूर पैक कर लें ये 5 चीजें, सफर हो जाएगा आसान ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Masala Chicken Recipe: घर पर बनाना है रेस्तरां जैसा मसालेदार चिकन? इस एक सीक्रेट तरीके से उंगलियां चाटते रह जाएंगे लोग</title>
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        <description><![CDATA[ How To Make Masala Chicken At Home Easy Recipe: घर पर मसालेदार चिकन बनाना अब पहले जितना मुश्किल नहीं रहा. थोड़ी समझ और सही तरीके से यह व्यंजन बिल्कुल बाहर जैसा स्वाद दे सकता है. खास बात यह है कि यह रेसिपी आसान है और नए लोग भी इसे आसानी से बना सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आप घर पर कैसे स्वादिष्ट मसालेदार चिकन बना सकते हैं.
आपको किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
यह मसालेदार चिकन रोटी और चावल दोनों के साथ खूब जंचता है. इसके साथ में सलाद और दही हो तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. इस व्यंजन का असली स्वाद मसालों को अच्छे से भूनने में छिपा होता है, इसलिए इस स्टेप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसे बनाने के लिए करीब 750 ग्राम चिकन, दो कप कटा प्याज, आधा कप टमाटर, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, दालचीनी, छोटी और बड़ी इलायची, तेज पत्ता, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा पाउडर, गरम मसाला, कसूरी मेथी, सरसों का तेल, घी और हरा धनिया चाहिए.&amp;nbsp;

सबसे पहले क्या करना चाहिए?
सबसे पहले चिकन को अच्छे से धो लें. इसे हल्के नमक वाले गुनगुने पानी में 10 मिनट के लिए रखें और फिर साफ पानी से दोबारा धो लें. इससे चिकन की गंध कम हो जाती है और वह साफ हो जाता है. अब एक कड़ाही में सरसों का तेल और थोड़ा घी डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें. जब तेल गर्म हो जाए, तो इसमें तेज पत्ता, इलायची और दालचीनी डालकर हल्का भून लें. इसके बाद बारीक कटा प्याज डालें और गुलाबी होने तक पकाएं.

भूनना और अच्छे से पकाना
अब इसमें अदरक और लहसुन का पेस्ट डालकर एक मिनट तक भूनें. फिर चिकन डालकर 2&amp;ndash;3 मिनट तक चलाते हुए पकाएं, ताकि उसका रंग बदल जाए. इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अब इसमें टमाटर और हरी मिर्च डालें और ढककर धीमी आंच पर 6 से 7 मिनट तक पकाएं. फिर बिना ढके तब तक पकाएं जब तक चिकन हल्का भुन न जाए.
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इस बात का रखें ध्यान
अब इसमें एक कप पानी डालें और ढककर 2 से 4 मिनट तक पकाएं, ताकि चिकन नरम हो जाए. इसके बाद ढक्कन हटाकर गरम मसाला, हरा धनिया और कसूरी मेथी डालें और तेज आंच पर तब तक पकाएं जब तक तेल अलग न दिखाई देने लगे. अगर आप इसे और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो चिकन को पहले हल्दी, नमक, दही, लहसुन और सरसों के तेल के साथ 30 मिनट के लिए रख सकते हैं। इससे स्वाद और भी गहरा हो जाता है.

ध्यान रखें कि चिकन को धीमी आंच पर पकाना सबसे अच्छा रहता है. इससे इसका रंग और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं। तैयार मसालेदार चिकन को गर्म-गर्म परोसें और घर पर ही लाजवाब स्वाद का आनंद लें.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Kedarnath Tour: कार&amp;बस&amp;ट्रेन या प्लेन... केदारनाथ जाने के लिए सबसे आसान तरीका कौन&amp;सा? जानें हर बात</title>
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        <description><![CDATA[ Kedarnath Tour: घूमने-फिरने की बात हो और भारतीय तीर्थ स्थलों का रुख न करें, ऐसा हो ही नहीं सकता. तीर्थ स्थलों पर जाना आजकल ट्रैवल प्रेमियों के बीच एक नया ट्रेंड बन गया है. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट एक बार फिर खोल दिए गए हैं. हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. हिमालय की चोटियों के बीच बसे इस पवित्र धाम तक पहुंचना जितना अनूठा अनुभव है, उतना ही एडवेंचरस भी. अगर आप भी यहां जाने की सोच रहे हैं तो कार, बस, ट्रेन या प्लेन में से कौन सा विकल्प है आपके लिए सबसे अच्छा, आइए जानें.
प्लेन से केदारनाथ का टूर
अगर आप कम समय में केदारनाथ पहुंचना चाहते हैं तो उसके लिए हवाई यात्रा सबसे अच्छा और आसान विकल्प है. इसके लिए आपको जॉली ग्रांट एयरपोर्ट तक की टिकट लेनी होगी, जो केदारनाथ से लगभग 250 किमी दूर है और यहां से बाकी यात्रा टैक्सी या बस के द्वारा की जा सकती है. अगर बजट की दिक्कत न हो तो जॉली ग्रांट से आप हेलीकॉप्टर सेवा भी ले सकते हैं, जो सीधे आपको केदारनाथ के पास उतार देगी. यह सबसे तेज और आधुनिक लेकिन महंगा विकल्प है. अनुमानित ट्रैवल खर्च, 10 से 20 हजार रुपए प्रति व्यक्ति तक जा सकता है
ट्रेन से कैसे पहुंचे केदारनाथा धाम 
सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले इस साधन से यात्रा करने वालों के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन या हरिद्वार रेलवे स्टेशन है. देश के कई बड़े शहरों से यहां तक सीधी ट्रेनें मिल जाती हैं. रेलवे स्टेशन से गौरीकुंड के लिए सीधे बस या टैक्सी मिल जाती है. यह तरीका उन यात्रियों के लिए अच्छा है जो किफायती यात्रा चाहते हैं और रास्ते के खूबसूरत नजारों का आनंद लेना पसंद करते हैं. ट्रेन से ट्रैवल करने वालों के लिए अनुमानित खर्च 3 से 4 हजार रुपए प्रति व्यक्ति तक जा सकता है.
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बस या कार से यात्रा
अगर आप रोड ट्रिप के शौकीन हैं तो बस या अपनी कार से जाना एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है, जो आपकी जर्नी को और यादगार बना देगा, जिससे आप सालों-साल याद रहने वाली अच्छी-अच्छी यादें बना पाएंगे. दिल्ली, हरिद्वार या ऋषिकेश से नियमित बस सेवाएं गौरीकुंड या सोनप्रयाग तक आसानी से मिल जाती हैं. उदाहरण के लिए, अगर आप दिल्ली से जा रहे हैं तो कश्मीरी गेट से सीधे सोनप्रयाग के लिए बस ले सकते हैं.
वहीं, खुद की कार से जाने पर आप रास्ते में देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग जैसे सुंदर संगम स्थलों का आनंद ले सकते हैं. हालांकि, पहाड़ी रास्ते होने के कारण ड्राइविंग थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, इसलिए अच्छी ड्राइविंग आना अनिवार्य है, या हो सके तो किसी अनुभवी ड्राइवर को साथ रखें क्योंकि सावधानी बहुत जरूरी है. कार से ट्रैवल करने वालों के लिए अनुमानित खर्च 7 से 10 हजार रुपए तक जा सकता है.
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Metabolic Diseases In India: भारत में तेजी से फैल रही हैं मेटाबॉलिक बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं इसके शिकार?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Metabolic Diseases Are Rising In India: भारत में मेटाबॉलिक बीमारियों का बोझ तेजी से बढ़ता जा रहा है और अब यह गंभीर चिंता का विषय बन चुका है. हालिया स्टडी के मुताबिक, टाइप 2 डायबिटीज से होने वाली मौतों और डिसेबिलिटी एडजस्टेड लाइफ ईयर वर्षों के मामले में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले स्थान पर पहुंच गया है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या निकला स्टडी में.&amp;nbsp;
स्टडी में क्या आया सामने?
11 देशों केएक्सपर्ट द्वारा किए गए इस अध्ययन में बताया गया कि वर्ष 1990 में टाइप 2 डायबिटीज के सबसे ज्यादा मामले चीन में थे, इसके बाद भारत, इंडोनेशिया, जापान और पाकिस्तान का स्थान था. लेकिन वर्ष 2023 तक स्थिति बदल गई और भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे अधिक मामलों वाला देश बन गया. &amp;nbsp;यह एनालिसिस ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों पर आधारित है. स्टडी में यह भी सामने आया कि भारत और चीन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पांच प्रमुख मेटाबॉलिक बीमारियों टाइप 2 डायबिटीज, हाईबीपी, बॉडी मास इंडेक्स, खराब कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी का सबसे ज्यादा बोझ उठा रहे हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
स्टजी के राइटर &amp;nbsp;अनूप मिश्रा के अनुसार, टाइप 2 डायबिटीज से जुड़े रोग भार और मौतों के मामले में भारत पहले स्थान पर है, जबकि बाकी चार बीमारियों में चीन पहले और भारत दूसरे स्थान पर है, जो गंभीर चिंता की बात है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मेटाबॉलिक बीमारियों का सबसे बड़ा बोझ झेल रहा है. केवल टाइप 2 डायबिटीज के कारण ही देश में 2.1 करोड़ से अधिक मामले और करीब 5.8 लाख मौतें दर्ज की गईं, जो इसके भारी प्रभाव को दिखाता है.&quot;
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उन्होंने यह भी बताया कि डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर आपस में जुड़ी हुई स्थितियां हैं, जो मुख्य रूप से खराब खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण बढ़ रही हैं. यही बीमारियां आगे चलकर किडनी फेल होना, दिल का दौरा, हार्ट फेलियर, लिवर की गंभीर बीमारी, लकवा और कई तरह के कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बनती हैं.
कितने लोग पीड़ित?
स्टडी के मुताबिक, वर्ष 2023 में भारत में टाइप 2 डायबिटीज से जुड़े 2,13,45,118 मामले और 5,78,367 मौतें दर्ज की गईं, जबकि चीन में यह आंकड़ा 1,09,40,382 मामले और 1,72,911 मौतों का रहा. पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वर्ष 2023 के दौरान टाइप 2 डायबिटीज के कारण करीब 4.9 करोड़ मामले दर्ज किए गए, जिसमें 54.1 प्रतिशत हिस्सा पुरुषों का था। वहीं, इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा बोझ हाई बीपी का रहा, जिसके कारण करीब 13.8 करोड़ रोग-भार वर्ष और 62.7 लाख मौतें हुईं. इसके बाद अधिक शरीर भार, खराब कोलेस्ट्रॉल, टाइप 2 डायबिटीज और फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी का स्थान रहा. वर्ष 1990 से 2023 के बीच कुल रोग-भार में 1.7 से 3.7 गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है. अनुमान है कि वर्ष 2030 तक इन बीमारियों का बोझ और बढ़ेगा, जिसमें हाई बीपी सबसे बड़ा कारण बना रहेगा.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Painkiller Side Effects: क्या पेन किलर से सच में खराब हो जाते हैं ऑर्गन, जानें किस मात्रा में सही रहता है इनका सेवन?</title>
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        <description><![CDATA[ Can Painkillers Cause Kidney Damage: सिर दर्द, बुखार या मांसपेशियों में दर्द होते ही ज्यादातर लोग दर्द कम करने वाली दवाओं का सहारा लेते हैं. ये दवाएं दर्द, बुखार और सूजन को कम करने में मदद करती हैं और आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या इनका ज्यादा इस्तेमाल शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है? जवाब है, हां, अगर इन्हें सही तरीके से न लिया जाए तो खतरा हो सकता है, खासकर किडनी पर असर पड़ता है.
शरीर के किन अंगों पर होता है इसका असर?
नेशनल किडनी फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, के मुताबिक, दर्द कम करने वाली दवाएं अगर लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में ली जाएं तो यह किडनी के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं. यह दवाएं किडनी में खून के फ्लो और टिश्यू पर असर डालती हैं, जिससे धीरे-धीरे नुकसान होने लगता है. जिन लोगों को पहले से किडनी से जुड़ी समस्या है, उनके लिए यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है. उम्र बढ़ने के साथ भी यह जोखिम बढ़ सकता है.
इस्तेमाल को लेकर सावधानी
इसलिए इन दवाओं का इस्तेमाल हमेशा सावधानी से करना जरूरी है. डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक इनका सेवन नहीं करना चाहिए. सबसे जरूरी बात यह है कि इन्हें हमेशा कम से कम मात्रा में और कम समय के लिए लिया जाए. &amp;nbsp;यही तरीका शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करता है.&amp;nbsp;
किन दवाओं से होता है नुकसान?
दर्द कम करने वाली दवाओं में कुछ दवाएं ऐसी होती हैं जिन्हें सामान्य तौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने पर इनके भी दुष्प्रभाव हो सकते हैं. वहीं कुछ दूसरी दवाएं सूजन और दर्द दोनों को कम करती हैं, लेकिन इनका लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है. जिन लोगों को दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी की समस्या है, उन्हें ऐसी दवाओं से खास सावधानी बरतनी चाहिए.
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किडनी को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. दवा लेते समय हमेशा उसके लेबल पर लिखे निर्देशों को पढ़ें और उसी के अनुसार सेवन करें. शरीर में पानी की कमी न होने दें, क्योंकि पानी की कमी से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसके साथ ही, एक साथ कई दवाओं का सेवन करने से बचें, खासकर वे दवाएं जिनमें एक से ज्यादा तत्व शामिल हों.&amp;nbsp;
डॉक्टरों से कब लेनी चाहिए सलाह?
अगर आपको लंबे समय तक इन दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. डॉक्टर खून की जांच के जरिए किडनी की स्थिति का पता लगा सकते हैं. एक साधारण जांच से यह जाना जा सकता है कि किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है. इसके अलावा यूरिन की जांच से भी शुरुआती नुकसान का पता लगाया जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Explained: क्या दिन से ज्यादा खतरनाक है रात की लू? अगर लग गई तो नतीजे गंभीर,  मध्यप्रदेश में पहली बार अलर्ट</title>
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        <description><![CDATA[ भारत में गर्मी ने अप्रैल के महीने में ही बेहाल कर दिया है. राजस्थान में उदयपुर से टूरिस्ट गायब हो गए और सड़कें सुनसान हैं. उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में लू का अलर्ट होने से स्कूल टाइम बदल गया. बिहार के 9 जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया. छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश समेत सभी जगह लू का अलर्ट है. मध्य प्रदेश में तो पहली बार रात में लू का अल्टीमेटम दिया गया है, लेकिन लू तो धूप में चलती है, तो फिर रात की लू का माजरा क्या है? जानेंगे एक्सप्लेनर में...
सवाल 1: भारत में अभी गर्मी की स्थिति कितनी भयानक है?जवाब: देश के कई इलाकों में अप्रैल 2026 के आखिरी सप्ताह में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में कई जगहों पर तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. प्रयागराज में 44.4 डिग्री, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 43.8 डिग्री और कई जगहों पर 42-43 डिग्री तक पारा चढ़ा है. मौसम विभाग ने इन राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया है. सबसे खास बात यह है कि मध्य प्रदेश में मंगलवार को पहली बार &#039;रात में लू&#039; यानी गर्म रात का अलर्ट जारी किया गया.
मध्य प्रदेश के भोपाल, छिंदवाड़ा, मंडला, नर्मदापुरम, ग्वालियर, रतलाम और छतरपुर समेत 16 जिलों में यह अलर्ट है. इससे पहले रविवार-मंगलवार की रातों में इन इलाकों में रात का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा रहा, जिससे लोगों को दिन की गर्मी के बाद भी राहत नहीं मिली. महाराष्ट्र और ओडिशा में दिन में सिग्नल बंद कर दिए, ताकि लोगों को चौराहे पर धूप में खड़ा न होना पड़े.
&amp;nbsp;

मध्य प्रदेश के 16 जिलों में रात की लू का अलर्ट जारी है

सवाल 2: लू तो हमेशा दिन की धूप और गर्म हवा में चलती है, फिर रात की लू कैसी होती है?जवाब: सामान्य लू दिन की घटना होती है. यह तेज धूप और गर्म, सूखी हवा होती है जो दोपहर में 40 डिग्री या उससे ऊपर चली जाती है, लेकिन &#039;रात की लू&#039; या &#039;गर्म रात&#039; बिल्कुल अलग है. यह हवा की तरह नहीं बहती, बल्कि रात का तापमान इतना ज्यादा रह जाता है कि सूरज ढलने के बाद भी दीवारें, जमीन और हवा ठंडी नहीं होती।
मौसम विभाग के नियम के मुताबिक, जब दिन का तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा हो और रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री ज्यादा हो, तो इसे &#039;गर्म रात&#039; कहा जाता है. अगर 6.4 डिग्री से ज्यादा हो तो &#039;बहुत गर्म रात&#039;. मध्य प्रदेश में यही हो रहा है. रात में भी गर्मी बनी रहती है, ठंडक नहीं मिलती.
सवाल 3: दिन के मुकाबले रात की लू में शरीर पर क्या असर पड़ता है?जवाब: हां, रात की गर्मी दिन की लू से भी ज्यादा चुपके से नुकसान पहुंचाती है. दिन में शरीर गर्म होता है, लेकिन रात में अगर तापमान कम न पड़े तो शरीर को ठंडक मिलने का मौका नहीं मिलता. शरीर का तापमान कंट्रोल करने वाला सिस्टम थक जाता है. इससे दिल, किडनी और दिमाग पर दबाव बढ़ता है. लोग बेचैनी की वजह से सो नहीं पाते, पसीना ज्यादा आता है और सुबह उठते ही थकान महसूस होती है.
गंभीर मामलों में चक्कर आना, उल्टी, बेहोशी और हीट स्ट्रोक के लक्षण दिख सकते हैं. मौसम विभाग और डॉक्टरों के मुताबिक गर्म रातों में नींद पूरी नहीं होती, जिससे अगले दिन शरीर कमजोर हो जाता है. खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं.
&amp;nbsp;

लू लगने पर शरीर में गंभीर लक्षण दिख सकते हैं

सवाल 4: क्या दिन की लू से ज्यादा रात की लू खतरनाक मानी जाती है? हां तो क्यों?जवाब: दिन की लू तेज होती है, लेकिन रात में राहत मिल जाती है. शरीर को रात में ठंडक मिलकर रिकवर करने का समय मिलता है, लेकिन जब रात भी गर्म हो तो यह रिकवरी नहीं होती. गर्मी का तनाव लगातार बढ़ता जाता है. इस पर कई रिसर्च स्टडीज हो चुकी हैं, जिसके मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से रातें दिन से ज्यादा तेजी से गर्म हो रही हैं. हवा में नमी ज्यादा होने से दिन की गर्मी रात में फंस जाती है. शहरों में कंक्रीट और इमारतें दिन में गर्मी सोख लेती हैं और रात में छोड़ती हैं.
नतीजा? कई दिनों तक लगातार गर्मी पड़ने पर मौत का खतरा बढ़ जाता है. एक अन्य स्टडी मानें तो अगर रात की गर्मी बढ़े तो सदी के अंत तक गर्मी से मौतें छह गुना बढ़ सकती हैं. रात की गर्मी नींद भी छीन लेती है. औसतन हर व्यक्ति साल में 44 घंटे कम सो रहा है.
सवाल 5: कब तक रात की लू से जूझना पड़ेगा और बचने के लिए क्या करें?जवाब: रात की लू लगने पर बहुत प्यास लगना, थकान, सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, शरीर का तापमान बढ़ना, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. अगर रात में पसीना ज्यादा आए, नींद न आए या सुबह कमजोरी लगे तो सावधान रहें:

रात में भी ज्यादा पानी पिएं.
हल्के, ढीले कपड़े पहनें.
कमरे में पंखा या कूलर चलाएं, खिड़कियां खुली रखें.
दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर न निकलें.
बुजुर्गों और बच्चों पर खास नजर रखें.
अस्पतालों में बेड रिजर्व किए जा रहे हैं. कई राज्यों में स्कूलों का समय बदला गया है और मजदूरों को दोपहर में काम नहीं करने दिया जा रहा है.

मौसम विभाग के अनुसार अगले 4-5 दिनों तक उत्तर और मध्य भारत में गर्मी बनी रहेगी. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और ओडिशा में लू और गर्म रातों का अलर्ट जारी है. जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसे मौसम पहले से ज्यादा आम हो गए हैं. अगर बारिश न हुई तो स्थिति और बिगड़ सकती है. सरकारें और मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं. लोगों को सलाह दी जा रही है कि गर्मी को हल्के में न लें, यह चुपके से जान ले सकती है.
रात की लू कोई हवा नहीं, बल्कि रात भर न रुकने वाली गर्मी है जो शरीर को ठंडक का मौका नहीं देती. दिन की लू से अलग यह लगातार थकान बढ़ाती है और लंबे समय में ज्यादा खतरनाक साबित होती है. मध्य प्रदेश में पहली बार यह अलर्ट इसलिए जारी हुआ क्योंकि रात का तापमान सामान्य से बहुत ज्यादा है. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>मेहंदीपुर बालाजी का रहस्य: यहां आवाजें करती हैं बेचैन और पीछे मुड़ना है मना!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मेहंदीपुर-बालाजी-का-रहस्य-यहां-आवाजें-करती-हैं-बेचैन-और-पीछे-मुड़ना-है-मना</link>
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        <description><![CDATA[ Mehandipur Balaji Temple: इस दुनिया में कुछ जगहें ऐसी भी होती हैं, जहां हम जिज्ञासावश जाते हैं और वे चुपचाप वास्तविकता के बारे में हमारी समझ को चुनौती देते हैं. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भी इसी श्रेणी में आता है. यह हमारे मन में एक गहरी छाप छोड़ता है, खासतौर से उस असहज स्थिति में जिसे हम देख और समझ सकते हैं.&amp;nbsp;
इस मंदिर में प्रवेश करते ही आपको सबसे पहले जो चीज महसूस होती है, वो है माहौल, जो भारी, तीव्र और थोड़ा असामान्य लग सकता है. यहां केवल मंत्रोच्चार नहीं होता, बल्कि ऐसी आवाजें भी गूंजती हैं जो सामान्य प्रार्थना जैसी नहीं लगतीं. कई बार ये आवाजें अचानक तेज चीखों या बेकाबू ध्वनियों में बदल जाती है. पहली बार सुनने पर दिमाग खुद से सवाल करता है कि, ये दर्द है, डर या फिर किसी तरह की मु्क्ति?&amp;nbsp;मंदिर का नजारा भी उतना ही हैरान करने वाला होता है. कुछ लोग अचानक से अजीब हरकतें करते दिखते हैं, तो कोई बार-बार शरीर झटकता है, तो कोई दीवार से टकराते दिखता है. और इन सबके बीच जो बात सबसे ज्यादा हैरान करती है, वो यह है कि, आसपास खड़े लोग घबराते नहीं है. उनके चेहरे पर किसी भी तरह का डर नहीं है, बल्कि एक तरह की आदत या स्वीकार्यता दिखाई देती है. मानो ये सब कुछ सामान्य हो.
यही सामान्यता सबसे अलग लगती है?
मंदिर में धीरे-धीरे आपको एहसास होने लगता है कि, इस जगह के अपने अनकहे नियम हैं. यहां लोग एक-दूसरे को न टोकते हैं, न सवाल करते हैं और न ही किसी की हालत पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं. आप खुद भी उसी ढर्रे में ढलने लगते हैं. बिना सोचे-समझे आप भी चुप हो जाते हैं, नजरों को झुका लेते हैं और बस देखते रहते हैं.&amp;nbsp;
लेकिन असली असर बाहर नहीं, बल्कि अंदर दिखाई देता है
मंदिर में कुछ देर रहने के बाद बिना किसी कारण के बेचैनी बढ़नी लगती है. सांस थोड़ी तेज चलती है, दिल की धड़कन को महसूस किया जा सकता है. ऐसा होने के पीछे जरूरी नहीं कि कोई खतरा दिखाई दे रहा हो, लेकिन माहौल आपको लगातार सर्तक रहने की हिदायत देता है. कई बार ऐसा भी लगता है, जैसे कोई पीछे खड़ा है, और आप अचानक मुड़कर देखने को मजबूर हो जाते हैं, हालांकि वहां कोई नहीं होता.&amp;nbsp;
मंदिर में जाने से पहले कुछ नियम भी बताए जाते हैं, जिसमें पहला सबसे जरूरी नियम यह है कि, प्रसाद बाहर नहीं ले जाना और सबसे अहम बाहर निकलते समय पीछे मुड़कर नहीं देखना. शुरुआत केवल परंपरा लगती हैं, लेकिन अंदर जाकर ये नियम चेतावनी जैसा एहसास कराते हैं.&amp;nbsp;
वहां समय का अंदाजा लगा पाना भी आसान नहीं होता. आपको समझ नहीं आता कि, आप कितनी देर से वहां खड़े हैं. कई छोटे-छोटे दृश्य आपके दिमाग में छप जाते हैं, जैसे कोई व्यक्ति अचानक शांत बैठा है, फिर कुछ पलों बाद सामान्य हो जाता है. ये बदलाव इतने सूक्ष्म होते हैं कि आप तय नहीं कर पाते कि आपने जो देखा है वो असल में था या केवल भ्रम.
सबसे जरूरी बात ये है कि आप खुद भी बदलने लगते हैं. आप तर्क करने वाले इंसान के तौर पर जाते हैं, लेकिन बिना सवाल किए हर नियम को मानते हैं. आपका व्यवहार, आपकी सोच सब धीरे-धीरे उस माहौल के हिसाब से ढलने लगता है.&amp;nbsp;
गया का ये मंदिर क्यों है अलग? यहां के हर रिवाज से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है!
यही इस जगह का असली प्रभाव है-
अब सवाल ये उठता है कि, जो कुछ वहां होता है, वो असल में बाहरी है या हमारे दिमाग की प्रतिक्रिया? क्या ये धार्मिक प्रक्रिया है या मनोवैज्ञानिक प्रभाव.
लेकिन इतना तय है कि, मेहंदीपुर बालाजी केवल एक मंदिर नहीं है. ये एक ऐसा अनुभव है, जो आपको अंदर तक प्रभावित करता है. और तो और जब आप वहां से लौटते हैं, तो वो जगहें केवल याद नहीं रहती, बल्कि आपके सोचने के तरीके में भी बस जाती है.&amp;nbsp;
बांग्लादेश की मंडी जनजाति की अजीबोगरीब परंपरा, जहां पिता बनता है बेटी का पति!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 00:30:02 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>मेहंदीपुर, बालाजी, का, रहस्य:, यहां, आवाजें, करती, हैं, बेचैन, और, पीछे, मुड़ना, है, मना</media:keywords>
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        <title>UP Board Results Stress: यूपी बोर्ड रिजल्ट से पहले प्रेशर से जूझ रहे बच्चे, क्यों गहराता जा रहा यह साइलेंट संकट?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Students Feel Stress Before Board Results: यूपी बोर्ड के नतीजों का इंतजार अपने आखिरी दौर में है और माना जा रहा है कि कक्षा 10 और 12 के रिजल्ट 25 से 29 अप्रैल के बीच कभी भी जारी हो सकते हैं.&amp;nbsp; 52 लाख से अधिक स्टूडेंट्स इसका इंतजार कर रहे हैं. रिजल्ट से पहले एक अलग तरह का दबाव बच्चों को भीतर से तोड़ रहा है. चलिए आपको बताते हैं कि परीक्षा परिणाम से पहले इस तरह की घबराहट क्यों देखने को मिलती है.&amp;nbsp;
रिजल्ट को लेकर बढ़ जाती है टेंशन
यह दबाव सिर्फ परीक्षा का नहीं है, बल्कि एक ऐसा साइलेंट संकट बन चुका है, जो धीरे-धीरे बच्चों के व्यवहार और सोच दोनों को बदल रहा है. कई छात्र देर रात तक जाग रहे हैं, बार-बार रिजल्ट के बारे में सोच रहे हैं और छोटी-छोटी बातों पर घबराहट महसूस कर रहे हैं.&amp;nbsp;
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mentalhealthcenterkids की रिपोर्ट के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण घर और समाज से आने वाला दबाव है. माता-पिता की उम्मीदें, रिश्तेदारों की तुलना और टॉप करने का माहौल बच्चों को लगातार यह महसूस कराता है कि अगर नंबर अच्छे नहीं आए, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा. इसके अलावा स्कूल का भारी सिलेबस और लगातार परीक्षाओं का दबाव भी इस स्थिति को और गंभीर बना देता है. कई विषयों की तैयारी एक साथ करना, समय को ठीक से मैनेज न कर पाना और हर वक्त रिजल्ट का डर बच्चों को मानसिक रूप से थका देता है.&amp;nbsp;
कब दिखता है इसका असर?
इसका असर साफ तौर पर दिखने लगता है. कुछ बच्चे चुप हो जाते हैं, दोस्तों से दूरी बना लेते हैं, तो कुछ में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है. नींद की कमी, सिरदर्द, भूख में बदलाव और थकान जैसे लक्षण भी सामने आते हैं, जो इस दबाव की गहराई को दिखाते हैं. इतना ही नहीं, लंबे समय तक बना रहने वाला यह तनाव बच्चों के सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है. वे दोस्तों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं, खेलकूद या अन्य एक्टिविटी से दूर हो जाते हैं और धीरे-धीरे खुद को अलग-थलग महसूस करने लगते हैं.
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि लगातार एकेडमिक दबाव बच्चों में घबराहट और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है, जिसका असर आगे चलकर उनके रिश्तों और भविष्य पर भी पड़ता है. इसे साइलेंट संकट कहा जाता है. बाहर से सब सामान्य दिखता है कि बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर वे लगातार दबाव से जूझ रहे होते हैं, जिसकी आवाज अक्सर सुनाई नहीं देती.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Mocktails: गर्मियों में जरूर ट्राई करें ये 5 फ्लेवर मॉकटेल, पूरे दिन बनी रहेगी ठंडक</title>
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        <description><![CDATA[ Mocktails: इस गर्मी में अगर राहत चाहते हो तो मॉकटेल एक बेहतर विकल्प है, इसके अंदर के अलग-अलग फ्लेवर्स स्वाद में तो आपको खूब लुभाएंगे साथ-साथ इसकी ठंडक आपको अंदर से राहत पहुंचाएगी, ये मॉकटेल्स सिर्फ पीने में ठंडी नहीं बल्कि इनके अंदर डाली जाने वाली चीजों की तासीर भी ठंडी ही है जो आपको पूरा दिन ठंडक देकर राहत पहुंचाएगी और आप पूरा दिन अच्छा महसूस करेंगे तो आइए आज आपको कुछ गर्मियों के लिए बेहतरीन मॉकटेल्स बताते हैं.
तरबूज-मिंट मॉकटेल
तरबूज में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे यह गर्मियों में हाइड्रेशन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है. तरबूज का जूस निकालकर उसमें ताजे पुदीने और नींबू का रस मिलाकर मॉकटेल तैयार कर सकते हैं. यह शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ डिहाइड्रेशन से भी बचाएगा. इसे बर्फ के साथ सर्व करने पर यह गर्मियों में ताजगी का एहसास दिलाता है. साथ ही साथ तरबूज में मौजूद विटामिन A और C आपकी सेहत के लिए भी अच्छे हैं.
मैंगो-मिंट मॉकटेल
गर्मियों में आम सभी लोगों की पहली पसंद होता है. आम-पुदीना मॉकटेल बनाने के लिए ताजे आम के टुकड़े, नींबू का रस और पुदीने की पत्तियां मिलाकर तैयार करें. इसे बर्फ के टुकड़ों के साथ सर्व करने पर यह तुरंत शरीर को ठंडक देता है और गर्मी से राहत दिलाता है. आप यह मॉकटेल बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आसानी से बना सकते हैं यह सभी को पसंद आती है. साथ-साथ आम-पुदीना मॉकटेल सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर है.
लेमन-जिंजर मॉकटेल
लेमन जिंजर मॉकटेल गर्मियों में पेट की समस्याओं और गर्मी से बचने का एक शानदार ड्रिंक हो सकता है. इसे बनाने के लिए नींबू के रस में कद्दूकस किया हुआ अदरक या अदरक का सिरप, थोड़ा काला नमक और पुदीना मिलाएं. इसका स्वाद खट्टा या नमकीन होता है, अदरक पाचन में मदद करता है और नींबू शरीर को डिटॉक्स करता है. जब इसे सोडा और बर्फ में परोसा जाता है तो यह काफी स्वादिष्ट लगता है हालांकि इसका खट्टापन बच्चों को कम पसंद आ सकता है.
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रॉ मैंगो-लेमन-मिंट मॉकटेल
गर्मियों में कच्चे आम की खटास और पुदीना शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं. इस मॉकटेल को बनाने के लिए कच्चे आम के पल्प (आम पन्ना की तरह), नींबू के रस और ढेर सारे ताजे पुदीने के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें काला नमक और भुना हुआ जीरा डालने से इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. यह ड्रिंक न केवल चिलचिलाती धूप और लू से बचाती है, बल्कि पाचन के लिए भी काफी फायदेमंद है.
कोकोनट वाटर-जीरा मॉकटेल
नारियल पानी अपने आप में एक नेचुरल हाइड्रेटिंग ड्रिंक है, लेकिन जब इसमें भुना हुआ जीरा डाला जाता है, तो यह एक शानदार मॉकटेल बन जाता है. इसे बनाने के लिए ताजे नारियल पानी में थोड़ा भुना हुआ जीरा पाउडर, काला नमक और हल्का सा नींबू का रस मिलाएं. जीरा न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि पाचन में भी सुधार करता है, जबकि नारियल पानी शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित रखता है.
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        <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Baisaran Valley Trip: दिल्ली से कैसे जा सकते हैं बैसरन घाटी, जानें कितने रुपये करने पड़ते हैं खर्च?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Reach Baisaran Valley From Delhi And Cost: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था. उसके बाद लगातार पहलगाम जाने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखने को मिली थी. हालांकि अब पर्यटकों की संख्या में धीरे- धीरे इजाफा देखने को मिल रहा है. लेकिन, बैसरन घाटी अभी भी सुरक्षा कारणों से बंद है. अगर आप दिल्ली से बैसरन घाटी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले यह समझ लेना जरूरी है कि यह जगह सीधे नहीं, बल्कि एक खूबसूरत सफर के बाद पहुंची जाती है. कश्मीर के पहलगाम के पास स्थित यह घाटी अपने हरे-भरे मैदान और चारों तरफ देवदार के जंगलों के लिए जानी जाती है. चलिए आपको बताते हैं कि आप इस खूबसूरत घाटी तक कैसे पहुंच सकते हैं?
दिल्ली से कैसे पहुंच सकते हैं?
दिल्ली से यहां पहुंचने का सबसे आसान तरीका हवाई यात्रा है. दिल्ली से श्रीनगर की फ्लाइट करीब 45 से 50 मिनट में पहुंचा देती है. दिल्ली से श्रीनगर फ्लाइट के लिए आपको 3 हजार से 5 हजार रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. वहां से पहलगाम तक सड़क मार्ग से करीब ढाई से साढ़े तीन घंटे का सफर तय करना पड़ता है. श्रीनगर एयरपोर्ट से पहलगाम जाने के लिए टैक्सी सबसे सुविधाजनक रहती है. निजी टैक्सी का किराया आमतौर पर 3000 से 4000 रुपये के बीच पड़ता है, जबकि शेयरिंग गाड़ी में यह खर्च थोड़ा कम हो सकता है.&amp;nbsp;
ट्रेन सस्ता विकल्प
अगर आप बजट में यात्रा करना चाहते हैं, तो सार्वजनिक परिवहन भी एक विकल्प है. इसके लिए पहले जम्मू तक ट्रेन से जाएं, फिर वहां से बस या साझा गाड़ी के जरिए श्रीनगर या अनंतनाग पहुंचें और अंत में पहलगाम तक दूसरी गाड़ी लें. हालांकि इस तरीके में समय ज्यादा लगता है.
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पहलगाम से बैसरन घाटी
पहलगाम पहुंचने के बाद बैसरन घाटी तक कोई गाड़ी नहीं जाती. यहां तक पहुंचने के लिए या तो आपको पैदल चढ़ाई करनी होगी या फिर टट्टू का सहारा लेना होगा। यह दूरी करीब 4 से 5 किलोमीटर की होती है और रास्ता बेहद खूबसूरत जंगलों से होकर गुजरता है. 2026 तक पहलगाम से बैसरन तक टट्टू की सवारी का किराया 1320 रुपये प्रति व्यक्ति है, जो मौसम और भीड़ के अनुसार बदल सकता है अगर आप गाइड लेते हैं, तो उसका अलग से खर्च आ सकता है.
मिनी स्विट्जरलैंड
बैसरन घाटी को कश्मीर का मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है. यह इलाका अपनी हरी घास के मैदानों, ऊंचे देवदार के पेड़ों और बर्फ से ढंकी पहाड़ियों के नजारों के लिए मशहूर है. यहां की शांति और खुला प्राकृतिक दृश्य इसे परिवार और नेचर लवर्स के लिए खास बनाता है. घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून माना जाता है, जब पूरी घाटी हरे कालीन की तरह दिखती है और मौसम सुहावना रहता है. जुलाई से सितंबर के बीच भी जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान बारिश होती है.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Onion Health Benefits: पीएम मोदी भी जमकर खाते हैं प्याज, जानें इसके फायदे और नुकसान?</title>
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        <description><![CDATA[ Is Eating Raw Onion Good For Health: पश्चिम बंगाल के दौरे के दौरान व्यस्त चुनावी रैलियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक हल्का-फुल्का पल भी चर्चा में आ गया, जब वह झारग्राम में रुककर झालमुड़ी का स्वाद लेते नजर आए. इसी दौरान एक दुकानदार ने उनसे पूछा कि क्या वह प्याज खाते हैं, जिस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया &quot;हां, प्याज खाते हैं.&quot; यह छोटी सी बातचीत अब लोगों के बीच दिलचस्प चर्चा का विषय बन गई है.&amp;nbsp;
भारतीय खानपान का हिस्सा
दरअसल, भारतीय खानपान में प्याज एक अहम हिस्सा है. चाहे सब्जी हो, सलाद हो या चटनी, इसके बिना स्वाद अधूरा लगता है. कई लोग इसे कच्चा खाना पसंद करते हैं, लेकिन सवाल यही उठता है कि क्या कच्चा प्याज सेहत के लिए अच्छा है? जवाब है हां, लेकिन संतुलित मात्रा में. चलिए आपको इसके फायदे बताते हैं.
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क्या होते हैं इसके फायदे?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली netmeds की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे प्याज में विटामिन सी, विटामिन बी6, फोलेट और पोटैशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं. खास बात यह है कि इसमें कैलोरी कम होती है, इसलिए यह डाइट में शामिल करने के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है.
इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद
इम्यूनिटी मजबूत करने में भी प्याज का बड़ा योगदान है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, खासकर क्वेरसेटिन, शरीर को इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं और सूजन को कम करते हैं. यही कारण है कि नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में कच्चा प्याज खाने से शरीर की रोग इम्यून सिस्टम बेहतर हो सकती है.
हार्ट के लिए फायदेमंद&amp;nbsp;
हार्ट की सेहत के लिए भी प्याज फायदेमंद माना जाता है. इसके तत्व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने और ब्लड सर्कुलेशन सुधारने में मदद कर सकते हैं. इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है.&amp;nbsp;
डाइजेशन सही रखता है
डाइजेशन सिस्टम को दुरुस्त रखने में भी कच्चा प्याज कारगर है. इसमें मौजूद प्रीबायोटिक फाइबर आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. इसकेसाथ ही यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है.&amp;nbsp;
क्या होते हैं इसके नुकसान?
हालांकि, हर चीज की तरह इसका ज्यादा सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. अधिक मात्रा में कच्चा प्याज खाने से कुछ लोगों को गैस, जलन या बदबू की समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में एलर्जी या दवाओं के साथ प्रतिक्रिया भी देखने को मिलती है. इसलिए इसे संतुलित मात्रा में ही खाना बेहतर है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Imran Khan Wife Health Update: इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी को हुआ &amp;apos;रेटिनल डिटैचमेंट&amp;apos;, जानें क्या है आंखों की यह गंभीर बीमारी?</title>
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        <description><![CDATA[ Imran Khan Wife Medical Update: पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित अडियाला जेल से जुड़ा एक स्वास्थ्य मामला इन दिनों चर्चा में है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी की आंख की गंभीर समस्या के चलते सर्जरी करानी पड़ी. जेल प्रशासन के अनुसार, उनकी दाईं आंख की रोशनी प्रभावित हो रही थी, जिसकी शिकायत के बाद तुरंत &amp;nbsp;एक्सपर्ट से जांच कराई गई. जांच में रेटिना के अपनी जगह से खिसकने यानी रेटिनल डिटैचमेंट की पुष्टि हुई, जो आंखों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति मानी जाती है.
डॉक्टरों की टीम, जिसमें प्रोफेसर डॉक्टर नदीम कुरैशी शामिल थे, ने उनका इलाज किया और सर्जरी की सलाह दी. 16 अप्रैल को उन्हें रावलपिंडी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जरूरी जांच के बाद ऑपरेशन किया गया. सर्जरी के बाद एक रात अस्पताल में निगरानी में रखने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. डॉक्टरों ने आगे भी नियमित जांच और देखभाल जारी रखने की सलाह दी है.
 रेटिनल डिटैचमेंट क्या होता है?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार रेटिनल डिटैचमेंट एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आंख के पीछे मौजूद बेहद संवेदनशील परत अपनी जगह से अलग हो जाती है. यह परत रोशनी को पहचानने और उसे दिमाग तक पहुंचाने का काम करती है. अगर समय पर इलाज न हो, तो यह स्थायी रूप से नजर कमजोर कर सकती है. एक्सपर्ट के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ आंख के अंदर मौजूद जेल जैसा पदार्थ बदलने लगता है, जिससे यह समस्या पैदा हो सकती है.
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इस तरह की स्थिति में सबसे जरूरी होता है तुरंत पहचान और इलाज. मरीज को अचानक धुंधला दिखना, आंखों के सामने परछाइयां या चमक जैसी चीजें दिखना या किसी हिस्से में अंधेरा महसूस होना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. ऐसे संकेत मिलते ही देरी किए बिना आंख के विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहद जरूरी होता है.
देखभाल भी होती है जरूरी
सर्जरी के बाद देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. मरीज को आंखों पर दबाव से बचना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेना और समय-समय पर जांच कराना जरूरी होता है. खासकर शुरुआती कुछ दिन बहुत अहम होते हैं, क्योंकि इसी दौरान आंख की रिकवरी तय होती है. बुशरा बीबी की सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने आगे की निगरानी और फॉलोअप जारी रखने की सलाह दी है. जेल प्रशासन के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है और डॉक्टरों की हिदायत के मुताबिक इलाज जारी रहेगा.
इससे पहले भी प्रोफेसर डॉक्टर नदीम कुरैशी की टीम ने इमरान खान की आंखों का परीक्षण किया था. वहीं, मामले के बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की ओर से उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई गई है और बेहतर इलाज की मांग की गई है.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Imran, Khan, Wife, Health, Update:, इमरान, खान, की, बेगम, बुशरा, बीबी, को, हुआ, रेटिनल, डिटैचमेंट, जानें, क्या, है, आंखों, की, यह, गंभीर, बीमारी</media:keywords>
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        <title>Sleeping With Bra Cancer Risk: क्या रात को ब्रा पहनकर सोने से होता है कैंसर? जान लीजिए इसके पीछे की सच्चाई</title>
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        <description><![CDATA[ Does Wearing A Bra At Night Cause Breast Cancer: सोशल मीडिया पर तमाम तरह के दावे किए जाते हैं. इन्हीं में से एक दावा फिटनेस कोच और इंफ्लुएंसर प्रियंक मेहता ने अपने वीाडियो में दावा किया था कि रात में ब्रा पहनकर सोने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. वीडियो में वह महिलाओं को सलाह देते हैं कि रात के समय ब्रा पहनने से बचें, ताकि किसी संभावित जोखिम से दूर रहा जा सके. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर इस तरह के दावे क्यों होते हैं और इसमें सच्चाई कितनी है.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;इंफ्लुएंसर ने क्या दावा किया था?
इस वीडियो में वह एक बातचीत के जरिए समझाते हैं कि रात में शरीर अपने अंदर जमा टॉक्सिक तत्वों को बाहर निकालने का काम करता है. उनके अनुसार बगल, ब्रेस्ट और चेस्ट के आसपास मौजूद लिम्फ नोड्स शरीर की सफाई करते हैं. उनका कहना है कि अगर कोई महिला बहुत टाइट या तार वाली ब्रा पहनकर सोती है, तो यह प्रक्रिया रुक सकती है, जिससे सूजन, तरल पदार्थ जमा होना और समय के साथ ब्रेस्ट के टिश्यू पर &amp;nbsp;असर पड़ सकता है.&amp;nbsp;
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क्या कहता है मेडिकल साइंस?
हालांकि यह दावा सुनने में गंभीर लगता है, लेकिन मेडिकल साइंस इसे सही नहीं मानता. इस तरह की बात पहली बार साल 1995 में सामने आई थी, जब सिडनी रॉस सिंगर और सोमा ग्रिसमाइजर ने अपनी किताब ड्रेस्ड टू किल में ब्रा और स्तन कैंसर के बीच संबंध होने की बात कही थी. इसके बाद में 2017 में इसका दूसरा पार्ट भी आया, लेकिन एक्सपर्ट ने इसे खारिज कर दिया.
अमेरिकी कैंसर सोसायटी की रिपोर्ट
अमेरिकी कैंसर सोसायटी के अनुसार ऐसा कोई साइंटफिक या मेडिकल प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि ब्रा पहनने से लिम्फ का प्रवाह रुकता है या इससे कैंसर होता है. इसी तरह अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान भी साफ कहते हैं कि ब्रा पहनना, पसीना रोकने वाले उत्पादों का उपयोग करना या स्तन प्रत्यारोपण, इनमें से किसी का भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से कोई संबंध नहीं है.
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ब्रिटेन की कैंसर रिसर्च का भी दावा
ब्रिटेन की कैंसर रिसर्च संस्था का भी यही कहना है कि इस विषय पर ज्यादा रिसर्च इसलिए नहीं हुआ क्योंकि ऐसा कोई साइंटफिक आधार ही नहीं है जो ब्रा और कैंसर के बीच संबंध दिखाता हो. उपलब्ध स्टडी में भी ऐसा कोई लिंक सामने नहीं आया है.
साल 2014 में 1500 से ज्यादा महिलाओं पर किए गए एक बड़े &amp;nbsp;स्टडी में भी यह पाया गया कि ब्रा पहनने की आदत, उसे कितने समय तक पहना गया, उसमें तार का उपयोग या पहनने की शुरुआत की उम्र, इनमें से किसी का भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से कोई संबंध नहीं है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
firstcheck_in की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर शुएब जैदी भी इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हैं. उनका कहना है कि दिन हो या रात, ब्रा पहनने से कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता. उन्होंने यह भी समझाया कि ब्रेस्ट में लिम्फ का प्रवाह कई रास्तों से होता है, इसलिए अगर किसी एक हिस्से पर दबाव भी पड़ता है, तो शरीर दूसरे रास्तों से इसे संतुलित कर लेता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>High Protein Diet:अपनी डाइट में ये तीन चीजें कर लें शामिल, प्रोटीन के लिए नहीं पड़ेगी नॉनवेज खाने की जरूरत</title>
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        <description><![CDATA[ High Protein Diet: भागदौड़ भरी इस जिंदगी में लोगों को आराम के साथ-साथ बैलेंस्ड डाइट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन लोग अक्सर अपनी डाइट ही भूल जाते हैं जिससे उनके शरीर को सभी जरूरी मिनरल्स नहीं मिल पाते. नॉन-वेज खाने वाले लोगों को तो कहीं न कहीं काफी हद तक प्रोटीन मिल जाता है, लेकिन जो लोग नॉन-वेज नहीं खाते वो लोग अपनी डाइट में ऐसा क्या खाएं जिससे उनको पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिले. वैसे तो काफी सारे वेज विकल्प मौजूद हैं, लेकिन आज आपको बताते हैं सबसे बेहतरीन विकल्प जिनसे आप अपने शरीर को पर्याप्त प्रोटीन दे सकते हो.
सोयाबीन
सोयाबीन एक हाई प्रोटीन वाला खाना है, शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का एक बेहतरीन सोर्स है. इसमें आवश्यक अमीनो एसिड, फाइबर और हेल्दी फैट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. सोयाबीन से सोया दूध, टोफू, सोया चंक्स और सोया ऑयल जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं, जो रोजाना की डाइट में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं. लगातार सोयाबीन खाने से नॉन-वेज खाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाती है, यह आपकी मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है.
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दूध और डेयरी चीजें
दूध, दही, पनीर और चीज जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत हैं. एक गिलास दूध में लगभग 5-8 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि पनीर और दही में यह मात्रा और भी अधिक मानी जाती है. इसके अलावा, ये हड्डियों के लिए जरूरी कैल्शियम भी देते हैं. यदि आप रोजाना डेयरी उत्पादों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, तो आप नॉन-वेज खाने को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
नट्स और सीड्स
बादाम, काजू, अखरोट, सूरजमुखी और कद्दू के बीज छोटे लेकिन प्रोटीन और हेल्दी फैट्स का एक बेहतरीन सोर्स हैं. ये स्नैक्स की तरह खाने में आसान हैं और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं, इन्हें अपने पास रखना काफी आसान है आप अपना काम करते हुए भी इन्हें खा सकते हैं. दिन में एक मुट्ठी नट्स और सीड्स खाने से प्रोटीन की जरूरत पूरी होती है और दिल की सेहत भी अच्छी रहती है.
यह है प्रोटीन के कुछ बेहतरीन सोर्सेज जिन्हें आप अपनी डाइट में मिलाकर प्रोटीन की पूर्ति कर सकते हैं और यह बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं. साथ ही इससे आपको नॉन-वेज खाने की जरूरत भी नहीं रहेगी ये चीजें शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, ऊर्जा, और मजबूती देते हैं और आपकी मांसपेशियों, हड्डियों और हृदय की हेल्थ को बेहतर करते हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>White Shirt Styling: व्हाइट शर्ट पहनने जा रहे हैं तो ऐसे करें स्टाइल, ऑफिस से पार्टी तक मुड़&amp;मुड़कर देखेंगी लड़कियां</title>
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        <description><![CDATA[ How To Style A White Shirt For Men: सफेद शर्ट हर पुरुष की अलमारी का ऐसा हिस्सा है जो कभी पुराना नहीं पड़ता. इसकी सादगी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. यही वजह है कि एक ही सफेद शर्ट को अलग-अलग तरीके से पहनकर आप ऑफिस से लेकर पार्टी तक हर जगह अलग अंदाज में नजर आ सकते हैं. सही तरीके से स्टाइल किया जाए, तो यह लुक इतना आकर्षक बन जाता है कि लोग बार-बार मुड़कर देखने पर मजबूर हो जाते हैं.
सफेद शर्ट और जींस
theformalclub की रिपोर्ट के अनुसार, अगर आप एक साफ-सुथरा और कंफर्टेबल लुक चाहते हैं, तो सफेद शर्ट के साथ जींस सबसे आसान और भरोसेमंद विकल्प है. हल्का ब्राउन बेल्ट और कैजुअल जूते इस लुक को और निखार देते हैं. यह स्टाइल डेट, आउटिंग या सेमी-फॉर्मल मौके के लिए बिल्कुल सही बैठता है.
सफेद शर्ट के साथ काला सूट
फॉर्मल मौकों के लिए सफेद शर्ट के साथ काला सूट हमेशा क्लासिक रहता है. अच्छी तरह प्रेस की हुई शर्ट, फिटिंग वाली पैंट और साथ में काले जूते और टाई, ये सब मिलकर एक दमदार और प्रोफेशनल लुक देते हैं. यह स्टाइल ऑफिस मीटिंग से लेकर पार्टी तक हर जगह काम करता है.
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सफेद शर्ट के साथ ग्रे पैंट
अगर आप कुछ हल्का और संतुलित लुक चाहते हैं, तो सफेद शर्ट के साथ ग्रे पैंट पहन सकते हैं. यह कॉम्बिनेशन न ज्यादा फॉर्मल लगता है और न ही ज्यादा कैजुअल. चाहें तो इसके साथ ब्लेजर जोड़कर इसे और स्टाइलिश बनाया जा सकता है, या फिर बिना ब्लेजर के भी इसे आरामदायक अंदाज़ में पहना जा सकता है.
नेवी ब्लेजर के साथ सफेद शर्ट
नेवी ब्लेजर के साथ सफेद शर्ट एक ऐसा कॉम्बिनेशन है जो हमेशा एलिगेंट दिखता है. यह लुक खासतौर पर बिजनेस मीटिंग या स्मार्ट कैजुअल आउटिंग के लिए परफेक्ट होता है. कॉलर खुला रखें या टाई जोड़ें, दोनों तरह से यह स्टाइल आकर्षक लगता है.
खाकी पैंट के साथ सफेद शर्ट
कैजुअल और सेमी-फॉर्मल के बीच संतुलन बनाने के लिए खाकी पैंट के साथ सफेद शर्ट एक बेहतरीन विकल्प है. आस्तीन हल्की मोड़ लें तो लुक और रिलैक्स लगता है, जबकि शर्ट को अंदर डालकर पहनने से वही लुक थोड़ा ज्यादा शार्प हो जाता है.
सफेद शर्ट के साथ स्टाइलिश जूते या स्नीकर्स
अगर आप थोड़ा अलग और मॉडर्न दिखना चाहते हैं, तो सफेद शर्ट के साथ स्टाइलिश जूते या स्नीकर्स पहन सकते हैं. इससे सिंपल लुक में भी एक अलग एनर्जी आ जाती है. वहीं, आस्तीन मोड़कर पहनना और हल्के एक्सेसरी जैसे घड़ी या बेल्ट जोड़ना आपके पूरे लुक को पूरा कर देता है. असल बात यह है कि सफेद शर्ट सिर्फ कपड़ा नहीं, एक कैनवास है. आप इसे जैसे चाहें वैसे ढाल सकते हैं. सही फिट, सही कॉम्बिनेशन और थोड़ा आत्मविश्वास, बस यही तीन चीजें आपको हर जगह अलग और स्टाइलिश दिखाने के लिए काफी हैं.
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Mango For Diabetes: डायबिटीज में आम खा सकते हैं या नहीं? एक्सपर्ट से जानें सेहत से जुड़ी बात</title>
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        <description><![CDATA[ Can Diabetic Patients Eat Mango Safely: डायबिटीज के मरीज अक्सर अपने पसंदीदा फलों से दूरी बना लेते हैं, खासकर आम से. वजह साफ है कि शुगर बढ़ने का डर. लेकिन क्या सच में आम पूरी तरह छोड़ देना चाहिए? या फिर सही तरीके से खाया जाए तो इसका आनंद लिया जा सकता है? यही सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जिसे डायबिटीज है और आम बेहद पसंद है. चलिए आपको इस सवाल का जवाब देते हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
&amp;nbsp;इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल एक्सपर्ट Luke Coutinho ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर अपने एक वीडियो में बताया कि आम से डरने की जरूरत नहीं, बल्कि समझदारी से खाने की जरूरत है. अगर आपकी शुगर कंट्रोल में नहीं है, या आप जरूरत से ज्यादा आम खा रहे हैं, खासकर रात में, तो यह नुकसानदायक हो सकता है. लेकिन अगर आप संतुलन बनाए रखें, तो आम को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है.
आम में नेचुरल शर्करा जरूर अधिक होती है, लेकिन इसमें कई पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं. खास बात यह है कि इसमें मैंगिफेरिन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जिसे एंटी-डायबिटिक गुणों के लिए जाना जाता है. यानी सही तरीके से खाया जाए तो यह शरीर को नुकसान पहुंचाने के बजाय फायदा भी दे सकता है.
किन बातों का रख सकते हैं ध्यान?
Luke Coutinho सलाह देते हैं कि आम को अकेले खाने के बजाय इसे संतुलित तरीके से लिया जाए. जैसे आप इसे मेवे, बीज या दही के साथ खा सकते हैं. इससे शरीर में शुगर का लेवल अचानक बढ़ने से बचता है और ग्लूकोज धीरे-धीरे रिलीज होता है. यही तरीका आम खाने को ज्यादा सुरक्षित बनाता है.
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सबसे जरूरी बात है मात्रा और समय का ध्यान रखना. एक बार में बहुत ज्यादा आम खाना सही नहीं है. अगर आपका शरीर सहन करता है तो एक छोटा हिस्सा खाया जा सकता है, और अगर शुगर बढ़ती महसूस हो तो मात्रा और कम करनी चाहिए. देर रात आम खाना भी सही नहीं माना जाता, क्योंकि उस समय शरीर की प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है.
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अगर शुगर लेवल बढ़े तो क्या करना चाहिए?
यह भी समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने शरीर को समझें और उसी के अनुसार फैसला लें. अगर आम खाने के बाद शुगर लेवल बढ़ता है, तो उसे सीमित करना ही बेहतर होगा. डायबिटीज में आम पूरी तरह वर्जित नहीं है, लेकिन लापरवाही बिल्कुल नहीं चलती. सही मात्रा, सही समय और सही तरीके के साथ आप इस फल का आनंद ले सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Adi Shankaracharya Jayanti 2026: आदि शंकराचार्य के 10 मोटिवेशनल कोट्स, इसमें छिपा है सुखी जीवन का रहस्य</title>
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        <description><![CDATA[ Adi Shankaracharya Motivational Quotes: 21 अप्रैल को आदिगुरु शंकराचार्य जयंती है. आदि शंकराचार्य 8वीं शताब्दी के महान दार्शनिक, संत और वेदांत के आचार्य थे, &amp;nbsp;जिन्होंने अद्वैत वेदांत (एकत्व का सिद्धांत) को स्थापित और लोकप्रिय बनाया. &amp;nbsp;शंकराचार्य ने कम उम्र में ही पूरे भारत का भ्रमण कर हिंदू धर्म को नई दिशा दी, जब विभिन्न मतों और भ्रमों के कारण एकता कमजोर हो रही थी. उन्होंने वेदों और उपनिषदों के गूढ़ ज्ञान को सरल भाषा में समझाकर लोगों को धर्म का वास्तविक स्वरूप बताया और सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया.
उनका अद्वैत सिद्धांत हमें एकता, शांति और आत्म-जागरूकता का मार्ग दिखाता है, जो आधुनिक जीवन के तनाव और भ्रम के बीच भी संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. यहां देखें आदि शंकराचार्य के कुछ अनमोल विचार जो व्यक्ति को मोह माया से दूर रहकर परम सत्य से अवगत कराते हैं.
1. इंद्रिय संयम का महत्वआंखों को संसार की चीजों की ओर आकर्षित नहीं होने देना चाहिए. खुद को मोह, क्रोध, लालच जैसी बुराइयों से बचाए रखना ही आत्म संयम है.
2. आत्मा का स्वप्रकाश स्वरूपएक जलते हुए दीपक को चमकाने के लिए दूसरे दीपक की आवश्यकता नहीं होती. ठीक इसी तरह आत्मा जो खुद ज्ञान है, उसे किसी और ज्ञान की जरुरत नहीं है.
3. माया और संसार का भ्रमयह संसार माया का परिणाम है, जो सत्य जैसा लगता है लेकिन अंतिम सत्य नहीं है. यह ब्रह्म के ऊपर एक भ्रम है.
4. आनंद का वास्तविक रहस्यहमें आनंद तब ही मिलता है जब हम आनंद की खोज नहीं कर रहे होते हैं.
5. ब्रह्म ही एकमात्र सत्यशंकराचार्य मानते हैं कि संसार में ब्रह्म ही सत्य है. बाकी सब मिथ्या है. जीव केवल अज्ञान के कारण ही ब्रह्म को नहीं जान पाता जबकि ब्रह्म तो उसके ही अंदर विराजमान है
6. ज्ञान बनाम ग्रंथग्रंथों को पढ़ने का तब तक कोई मतलब नहीं है जब तक कि हम उनसे ज्ञान प्राप्त न कर सकें. अगर हमें ज्ञान प्राप्त हो जाए तो ग्रंथों को पढने की जरुरत ही नहीं है.
7. सत्य की जिज्ञासा का प्रभावजब मन में सच जानने की जिज्ञासा पनप जाती है, तब दुनियाभर की सभी चीजें अर्थहीन हो जाती हैं. धन, लोगों, सम्बन्धियों और मित्रों, या यौवन पर अभिमान मत करो. पलक झपकते ही ये सब समय के साथ छीन लिया जाता है. इस मायावी संसार को त्याग कर परमात्मा को जानो और प्राप्त करो.
8. मोह का स्वभावमोह एक सपने की तरह ही है. ये तब तक ही सच लगता है जब तक कि हम अज्ञान की नींद में सो रहे होते हैं. जब अज्ञान दूर होता है तो मोह भी खत्म हो जाता है.
9. सत्य की परिभाषासत्य की कोई भाषा नहीं होती. सत्य की बस इतनी ही परिभाषा है की जो सदा था, जो सदा है और जो सदा रहेगा.
10. कृतज्ञता का महत्वमंदिर वही पहुंचता है जो धन्यवाद कहना जानते है सिर्फ मांगना नहीं.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Relationship Tips: झगड़े में पार्टनर से न कहें ये 4 बातें, हमेशा के लिए टूट सकता है आपका रिश्ता</title>
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        <description><![CDATA[ What Not To Say To Your Partner In A Relationship: रिश्ते निभाना जितना खूबसूरत लगता है, उतना ही संवेदनशील भी होता है. एक सही शब्द जहां रिश्ते को मजबूत बना सकता है, वहीं एक गलत बात सबकुछ बिगाड़ सकती है. अक्सर हम इस पर ध्यान देते हैं कि पार्टनर से क्या कहना चाहिए, लेकिन असली बात यह है कि क्या नहीं कहना चाहिए, यह समझना उससे भी ज्यादा जरूरी है. जब हम किसी से प्यार करते हैं, तो लगता है कि वही सबकुछ है, जो हमें समझता है, हमारी हर छोटी-बड़ी बात जानता है और हमें हंसाता है. लेकिन गुस्से या झुंझलाहट में निकले कुछ शब्द रिश्ते की नींव हिला सकते हैं. &amp;nbsp;रिश्ते कांच की तरह नाजुक होते हैं, जिन्हें संभालकर रखना पड़ता है.
रिश्ते में बड़ी खतरनाक चीज
सबसे पहली और सबसे खतरनाक बात कि &quot;मुझे तुमसे रिश्ता रखने का पछतावा है.&quot; चाहे झगड़ा कितना भी बड़ा क्यों न हो, ये शब्द कभी नहीं कहने चाहिए. यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि पूरे रिश्ते पर सवाल खड़ा कर देती है. एक बार कह देने के बाद इसे वापस लेना लगभग नामुमकिन होता है, और यह दिल पर गहरा असर छोड़ जाता है.&amp;nbsp;
रिश्ते पर तंज कसना
दूसरी बात, पार्टनर की आर्थिक स्थिति पर तंज कसना. किसी के पैसे या बैकग्राउंड को लेकर मजाक उड़ाना या ताना मारना बहुत गलत है. पैसे से जुड़ी बातें बहुत पर्सनल होती हैं और किसी की पहचान से जुड़ी होती हैं. ऐसे में इसे हथियार की तरह इस्तेमाल करना रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकता है.
परिवार या दोस्तों का अपमान
तीसरी बात, पार्टनर के परिवार या दोस्तों का अपमान करना. हो सकता है आपको उनके किसी करीबी से दिक्कत हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप उन्हें बुरा कहें. एक अनकहा नियम होता है कि अपने लोगों की शिकायत पार्टनर खुद कर सकता है, लेकिन आपको ऐसा करने का अधिकार नहीं होता.
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कमजोरियों का मजाक उड़ाना
चौथी और बेहद सेंसिटिव बात, पार्टनर की कमजोरियों का मजाक उड़ाना. अगर आपका पार्टनर किसी चीज को लेकर असुरक्षित महसूस करता है, तो उस पर मजाक करना उनके आत्मविश्वास को तोड़ सकता है. यह छोटी बात लग सकती है, लेकिन धीरे-धीरे यही चीज रिश्ते में दूरी पैदा कर देती है.
असल में प्यार का मतलब सिर्फ अच्छे समय में साथ रहना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में भी एक-दूसरे की इमोशन की कद्र करना है. झगड़े हर रिश्ते में होते हैं, लेकिन उन पलों में भी शब्दों का चयन बहुत मायने रखता है. इसलिए अगली बार जब बहस हो, तो बोलने से पहले एक पल रुककर सोचें. क्योंकि कुछ शब्द ऐसे होते हैं, जो कहे जाने के बाद कभी वापस नहीं लिए जा सकते और उनका असर लंबे समय तक बना रहता है.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Freezer Smell Problem: फ्रीजर की बर्फ से आती है बदबू? ये एक गलती बिगाड़ रही खाने का स्वाद और सेहत</title>
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        <description><![CDATA[ Why Does Ice Taste Like Freezer Smell: हम में से ज्यादातर लोग फ्रीजर को ऐसी जगह मानते हैं जहां खाना सुरक्षित रहता है और समय जैसे थम जाता है. बचा हुआ भोजन, सब्जियां और बर्फ के टुकड़े हम बिना सोचे उसमें रख देते हैं. लेकिन कई बार पानी में डाली गई बर्फ से अजीब-सी गंध आने लगती है या जमा हुआ मांस पकाने पर सूखा और स्वादहीन लगता है. दरअसल, फ्रीजर के भीतर लगातार केमिकल बदलाव होते रहते हैं, जो स्वाद और बनावट दोनों को प्रभावित करते हैं.&amp;nbsp;
क्यों होती है यह दिक्कत?
एक्सपर्ट बताते हैं कि असली समस्या केवल जमाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसकी गति और साथ में रखी चीजों से भी जुड़ी है. घरों में इस्तेमाल होने वाले फ्रीजर भोजन को धीरे-धीरे जमाते हैं, जिससे ओडोर-एक्टिव कंपाउंड माइग्रेशन जैसी प्रक्रिया होती है. आसान शब्दों में कहें तो फ्रीजर के अंदर गंध एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने लगती है. अगर मछली या अन्य खाद्य पदार्थ ठीक से ढके नहीं हैं, तो उनकी गंध बर्फ तक पहुंच जाती है.
क्यों बाजार जैसे नहीं लगते बर्फ के टुकड़े?
यही कारण है कि घर में बने बर्फ के टुकड़े बाजार जैसे ताजगी भरे नहीं लगते. इफेक्ट ऑफ फ्रीजिंग मेथड एंड फ्रोजन स्टोरेज ड्यूरेशन ऑन ओडर-एक्टिव कंपाउंड्स एंड सेंसरी परसेप्शन ऑफ लैम्ब नाम के रिसर्ट में साइंटिस्ट ने बताया कि धीमी जमावट के दौरान कुछ रासायनिक तत्व, जैसे स्ट्रेकर एल्डिहाइड बनते हैं, जो स्वाद को बिगाड़ते हैं. इसके साथ ही, भोजन की सूक्ष्म संरचना भी टूटने लगती है, जिससे उसका नेचुरल रस कम हो जाता है.
धीरे-धीरे जमने पर बनने वाले बर्फ के कण बड़े और खुरदरे होते हैं. ये छोटे स्पंज की तरह आसपास की गंध को सोख लेते हैं. यही वजह है कि लंबे समय तक रखी बर्फ का स्वाद बदल जाता है और पानी भी वैसा ताजा नहीं लगता.
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कितना पहुंचाता है नुकसान?
इसका असर केवल स्वाद तक सीमित नहीं है. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फूड रिसर्च में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, जमाने और पिघलाने की प्रक्रिया में भोजन की सेल्स टूट जाती हैं. खासकर मांस में, पिघलते समय उसका रस बाहर निकल जाता है, जिसे पर्ज लॉस कहा जाता है. इससे मांस सूखा और कम स्वादिष्ट हो जाता है. फ्रीजर में बार-बार हल्का पिघलना और फिर जमना भी नुकसान पहुंचाता है. यह प्रक्रिया स्वचालित बर्फ हटाने की &amp;nbsp;सिस्टम के कारण होती है, जिससे बर्फ की बनावट मोटी हो जाती है और गंध का फैलाव बढ़ जाता है.
कैसे रोक सकते हैं इसको?
हालांकि, कुछ आसान बदलावों से इस समस्या को रोका जा सकता है. सबसे पहले, बर्फ और खाने को हमेशा ढककर रखें ताकि गंध एक जगह से दूसरी जगह न जाए. नई चीजों को रखते समय उनके बीच पर्याप्त जगह छोड़ें, जिससे वे जल्दी जम सकें. गर्म भोजन को एक साथ रखने से बचें, क्योंकि इससे जमने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Dengue Vaccine India: भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मिली हरी झंडी, जानें किसे और कैसे लगेगी ये डोज?</title>
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        <description><![CDATA[ What Is Qdenga Dengue Vaccine In India: भारत में डेंगू का खतरा हर साल बढ़ता जा रहा है, खासकर मानसून के दौरान जब अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है. ऐसे में अब एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है कि देश को अपना पहला डेंगू वैक्सीन मिल गया है. यह कदम सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि रोकथाम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे यह देश के लिए राहत भरी खबर है.&amp;nbsp;
डेंगू से जुड़े मामले&amp;nbsp;
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. जहां 2020 में करीब 44 हजार केस सामने आए थे, वहीं 2023 और 2024 में यह संख्या 2.3 लाख के पार पहुंच गई. 2025 में भी नवंबर तक 1.13 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं. &amp;nbsp;एक्सपर्ट का मानना है कि असल आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि कई केस रिपोर्ट ही नहीं हो पाते.&amp;nbsp;
टीके को मंजूरी
अब भारत में TAK-003 वैक्सीन, जिसे Qdenga नाम से जाना जाता है, को मंजूरी मिल चुकी है. &amp;nbsp;इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के तहत एक्सपर्ट कमेटी ने 4 से 60 साल के लोगों के लिए उपयोग की अनुमति दी है. &amp;nbsp;यह वैक्सीन जापान की टाकेडा फार्मास्युटिकल कंपनी लिमिटेड ने विकसित किया है. इस वैक्सीन की सबसे खास बात यह है कि इसे पहले डेंगू हो चुका है या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता. पहले की वैक्सीन में यह बड़ी चुनौती थी. Qdenga चारों प्रकार के डेंगू वायरस सेरोटाइप से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है, जिससे यह ज्यादा व्यापक सुरक्षा प्रदान करती है.
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कैसे करता है काम?
इसे दो डोज में दिया जाता है, जिनके बीच तीन महीने का अंतर होता है. क्लीनिकल ट्रायल्स में पाया गया है कि यह वैक्सीन चार साल से ज्यादा समय तक सुरक्षा दे सकती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने भी इसे उन क्षेत्रों में उपयोगी माना है जहां डेंगू का खतरा ज्यादा रहता है. Dr Archana Pate ने TOI बताया कि भारत दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का हिस्सा है जो डेंगू के जोखिम में है. ऐसे में यह वैक्सीन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक अहम कदम साबित हो सकती है.
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह कोई जादुई समाधान नहीं है. वैक्सीन डेंगू के खतरे को कम जरूर करेगी, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती. डेंगू की गंभीरता अक्सर शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया पर निर्भर करती है, खासकर दूसरी बार इंफेक्शन होने पर. एक और अच्छी खबर यह है कि इस वैक्सीन का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए Takeda ने हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड के साथ साझेदारी की है, जिससे आने वाले समय में इसकी उपलब्धता और कीमत दोनों बेहतर हो सकती हैं. डॉक्टरों का कहना साफ है कि सिर्फ वैक्सीन से काम नहीं चलेगा. मच्छरों को पनपने से रोकना, साफ-सफाई रखना, समय पर जांच और सही इलाज ये सभी कदम उतने ही जरूरी हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Blood Test For Cancer Detection: इस छोटे&amp;से ब्लड टेस्ट से ही पता लग जाएंगे कई कैंसर, बीमार होने से पहले ही करा सकेंगे इलाज</title>
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        <description><![CDATA[ How MethylScan Blood Test Detects Cancer Early: मेडिकल साइंस तेजी से ऐसे दौर में पहुंच रही है, जहां एक साधारण ब्लड टेस्ट कई बड़ी बीमारियों का संकेत दे सकता है. इसी दिशा में एक अहम कदम कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स के रिसर्चर ने उठाया है, जिन्होंने एक नया टेस्ट विकसित किया है, जो कैंसर समेत कई बीमारियों का शुरुआती स्तर पर पता लगाने में मदद कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि रिसर्च में क्या निकला है.&amp;nbsp;
क्या निकला रिसर्च में?
यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि सिर्फ एक ब्लड सैंपल के जरिए शरीर के पूरे सेहत का आकलन किया जा सकता है. मेडिकल फील्ड में शुरुआती पहचान सबसे बड़ी चुनौती रही है. कैंसर जैसी बीमारियां अगर समय रहते पकड़ में आ जाएं, तो उनका इलाज काफी आसान हो जाता है. लेकिन अभी तक जो टेस्ट मौजूद हैं, वे अक्सर किसी एक बीमारी पर फोकस करते हैं और कई बार महंगे या असुविधाजनक भी होते हैं.
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इस तकनीक को क्या नाम दिया गया?
इस नई तकनीक को &quot;MethylScan&quot; नाम दिया गया है. यह टेस्ट खून में मौजूद डीएनए के छोटे-छोटे टुकड़ों का एनालिसिस करता है. ये डीएनए शरीर की अलग-अलग सेल्स से आते हैं और जब सेल्स नष्ट होती हैं, तो वे अपनी जानकारी खून में छोड़ देती हैं. इस टेस्ट की खासियत यह है कि यह डीएनए में मौजूद मिथाइलेशन पैटर्न को पढ़ता है. ये ऐसे केमिकल मार्कर होते हैं, जो सेल्स की स्थिति के हिसाब से बदलते रहते हैं. यानी स्वस्थ और बीमार सेल्स के मिथाइलेशन पैटर्न अलग होते हैं, जिन्हें पहचानकर बीमारी का संकेत मिल सकता है.
मुश्किलों से निपटने के लिए क्या किया गया?
ब्लड-बेस्ड टेस्टिंग में एक बड़ी समस्या यह होती है कि खून में ज्यादातर डीएनए सामान्य सेल्स का होता है, जिससे असली बीमारी के संकेत ढूंढना मुश्किल हो जाता है. इसे बैकग्राउंड नॉइज कहा जाता है. इस चुनौती से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक अपनाई, जिससे अनावश्यक डीएनए को हटाकर केवल जरूरी और जानकारी देने वाले डीएनए पर फोकस किया गया. इससे टेस्ट की सटीकता बढ़ी और लागत भी कम हुई. इस स्टडी में 1000 से ज्यादा लोगों पर परीक्षण किया गया, जिनमें कैंसर मरीज, लिवर डिजीज से पीड़ित लोग और स्वस्थ व्यक्ति शामिल थे. एडवांस कंप्यूटर एनालिसिस की मदद से डेटा को समझा गया.&amp;nbsp;
क्या निकला रिजल्ट?
परिणाम काफी उत्साहजनक रहे. टेस्ट ने कुल मिलाकर लगभग 63 प्रतिशत कैंसर मामलों की पहचान की और शुरुआती स्टेज के आधे से ज्यादा मामलों को भी पकड़ लिया. खासकर लिवर कैंसर के मामलों में, हाई-रिस्क ग्रुप में इसकी पहचान दर करीब 80 प्रतिशत तक रही. इसकी एक और बड़ी खासियत यह है कि यह टेस्ट यह भी बता सकता है कि शरीर का कौन सा अंग प्रभावित है. इससे डॉक्टरों को सही दिशा में आगे की जांच करने में मदद मिलती है. हालांकि, अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है और इसे आम इस्तेमाल में लाने से पहले बड़े स्तर पर और परीक्षण की जरूरत है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Summer Vacation Travel Guide: गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए ढूंढ रहे हैं बेस्ट लोकेशन, ये लिस्ट देख लें तो दूर हो जाएगी कंफ्यूजन</title>
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        <description><![CDATA[ Summer Vacation Travel Guide: गर्मियों की छुट्टियों में आप भी कहीं बाहर घूमने का प्लान कर रहे हैं और इस शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी और चिलचिलाती गर्मी से दूर कहीं ठंडी और शांत जगह घूमना चाहते हैं. ऐसे में अक्सर कंफ्यूजन यह रहती है कि आखिर कौन सी जगह बेहतर रहेगी घूमने के लिए. वैसे तो आपके पास काफी सारे विकल्प मौजूद हैं, उन्हीं में से आपको बताते हैं कुछ बेहतरीन विकल्प.
मनाली, हिमाचल प्रदेश
अगर आप शहर की इस तेज गर्मी से राहत पाना चाहते हैं तो मनाली आपके लिए बेहतरीन विकल्प रहेगा. ठंडी वादियां और बहती नदियां इसे सबसे बेहतरीन हिल स्टेशन बनाती हैं. यहां सोलंग वैली में पैराग्लाइडिंग जैसी मजेदार एक्टिविटीज का आनंद भी लिया जा सकता है, साथ ही साथ Rohtang Pass पर घूमना इसे और भी आनंददायक और यादगार बनाएगा.
ऊटी, तमिलनाडु
ऊटी को क्वीन ऑफ हिल्स भी कहा जाता है और यह दक्षिण भारत का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है. यहां चाय के बागान, रंग-बिरंगे फूलों से सजे गार्डन और ठंडी जलवायु यात्रियों को खूब पसंद आती है. ऊटी लेक में बोटिंग और नीलगिरी माउंटेन रेलवे की टॉय ट्रेन राइड काफी ज्यादा लोकप्रिय है.
लद्दाख
लद्दाख उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो एडवेंचर और अलग अनुभव की तलाश में रहते हैं. ऊंचाई पर बसे इस इलाके में आपको साफ नीला आसमान, शांत वातावरण और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं. पैंगोंग लेक और नुब्रा वैली यहां के सबसे लोकप्रिय स्पॉट हैं, जहां की खूबसूरती यात्रियों को काफी ज्यादा पसंद आती है.
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नैनीताल, उत्तराखंड &amp;nbsp;
नैनीताल को झीलों का शहर कहा जाता है और यह गर्मियों में घूमने के लिए एक बेहतरीन जगह है. Naini Lake में बोटिंग, Mall Road पर शॉपिंग और Snow View Point से हिमालय के खूबसूरत नजारे देखना यहां की खासियत है. यह जगह फैमिली ट्रिप और कपल्स दोनों के लिए परफेक्ट मानी जाती है.
दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल
दार्जिलिंग अपनी ठंडी हवा, हरे-भरे चाय के बागानों और शानदार पहाड़ी नजारों के लिए मशहूर है. यहां से कंचनजंगा की बर्फीली चोटियों का दृश्य बेहद सुंदर लगता है. इसके अलावा दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की टॉय ट्रेन की सवारी और टाइगर हिल से Sunrise देखना आपके सफर को यादगार बना देगा.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Premanand Maharaj Darshan: वृंदावन में किस वक्त दर्शन देते हैं प्रेमानंद महाराज? जान लें इसकी पूरी टाइमिंग</title>
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        <description><![CDATA[ When And Where To Get Premanand Ji Maharaj Darshan: वृंदावन की गलियों में भक्ति का एक अलग ही रंग नजर आता है, और इन्हीं पवित्र गलियों के बीच बसे हैं प्रेमानंद महाराज, जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं/ उनकी सादगी, भक्ति और श्रीराधा के प्रति प्रेम ने उन्हें लाखों लोगों के दिलों से जोड़ दिया है. चलिए आपको बताते हैं कि आप प्रेमानंद महाराज जी से मुलाकात कैसे कर सकते हैं और टाइमिंग क्या है.&amp;nbsp;
कहां है प्रेमानंद महाराज का आश्रम?
महाराज जी का आश्रम श्री हित राधा केली कुंज, परिक्रमा मार्ग पर स्थित है, जहां दिनभर अलग-अलग आध्यात्मिक गतिविधियां होती रहती हैं. अगर आप दर्शन के लिए जाना चाहते हैं, तो समय और प्रक्रिया को पहले समझ लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां हर दिन सीमित संख्या में ही लोगों को अवसर मिलता है.
कब होते हैं दर्शन?
सुबह की शुरुआत बहुत जल्दी होती है. करीब 4:10 बजे से 5:30 बजे तक महाराज जी का सत्संग होता है, जहां भक्त उनके विचार सुनते हैं. इसके बाद मंगला आरती और वन विहार का आयोजन होता है, जो सुबह 6:30 बजे तक चलता है सुबह 6:30 से 8:15 बजे के बीच अलग-अलग दिनों में पाठ होते हैं, कभी हित चौरासी, तो कभी राधा सुधानिधि. इसके बाद 8:15 से 9:15 बजे तक श्रृंगार आरती, भजन और नाम संकीर्तन का माहौल भक्तों को पूरी तरह भक्ति में डुबो देता है.
9:15 बजे से शाम 4 बजे तक आश्रम में सेवा और साधना का समय रहता है. इसके बाद शाम की आरती और वाणी पाठ शुरू होता है, जो करीब 6:15 बजे तक चलता है. सुबह 07:00 से 10:00 बजे भक्तों की भारी भीड़ रहती है. प्रेमानंद महाराज के दर्शन अब पारंपरिक परिक्रमा मार्ग पर नहीं होते. वे केलि कुंज आश्रम से सौरभि कुंड की ओर जाते हुए रास्ते में भक्तों को दर्शन देते हैं. सुबह 6 से 7 बजे के बीच इस मार्ग पर पहुंचकर श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकते हैं.
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टोकन की जरूरत
अगर आप व्यक्तिगत दर्शन या एकांत बातचीत करना चाहते हैं, तो इसके लिए टोकन लेना होता है. टोकन आमतौर पर सुबह करीब 9:30 बजे बांटे जाते हैं, जो अगले दिन के दर्शन के लिए होते हैं. आधार कार्ड साथ ले जाना जरूरी होता है, और स्लॉट सीमित होते हैं. दिन के समय 9:15 बजे से शाम 4 बजे तक सेवा और व्यक्तिगत साधना का समय होता है. इसके बाद शाम की आरती और वाणी पाठ शुरू होता है, जो धीरे-धीरे भक्ति के माहौल को फिर से जीवंत कर देता है. महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल दर्शन के लिए कोई आधिकारिक ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम नहीं है. हालांकि, आप वेबसाइट के जरिए अपनी रुचि जरूर दर्ज कर सकते हैं, लेकिन अंतिम पुष्टि आश्रम में ही टोकन मिलने पर होती है.
कैसे पहुंचे?
अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं, तो सबसे नजदीकी स्टेशन मथुरा जंक्शन है. वहां से वृंदावन तक टैक्सी या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं, जिसमें करीब 30 से 45 मिनट लगते हैं. अगर आप पहले से वृंदावन में हैं, तो शेयर ऑटो या लोकल कैब लेकर सीधे परिक्रमा मार्ग स्थित आश्रम पहुंच सकते हैं. रास्ता आसान है और स्थानीय लोग भी आसानी से गाइड कर देते हैं.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Premanand, Maharaj, Darshan:, वृंदावन, में, किस, वक्त, दर्शन, देते, हैं, प्रेमानंद, महाराज, जान, लें, इसकी, पूरी, टाइमिंग</media:keywords>
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        <title>Relationship Tips: इन 4 वजहों से टूट जाते हैं रिश्ते, अपने पार्टनर से कभी नहीं करनी चाहिए ऐसी बात</title>
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        <description><![CDATA[ Relationship Tips: हर रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए सही बात कहना जितना जरूरी होता है, उतना ही जरूरी होता है गलत बातें बोलने से बचना. कई बार गुस्से या मजाक में कही गई बातें दिल को गहरा चोट पहुंचा देती हैं और रिश्ते में दूरी ला सकती हैं. इसलिए यह समझना जरूरी है कि किन बातों को अपने पार्टनर से कभी नहीं कहना चाहिए. साथ ही एक मजबूत रिश्ता वही होता है जहां शब्दों का इस्तेमाल सोच समझकर किया जाए.
रिश्ते पर पछतावा जताना सबसे बड़ी गलती
सबसे पहली बात, कभी भी यह न कहें कि आपको इस रिश्ते पर पछतावा है. गुस्से में कही गई ऐसी बात सामने वाले के दिल को तोड़ सकती है और भरोसे को खत्म कर सकती है. यह शब्द रिश्ते को कमजोर बना सकता है. इसलिए चाहे झगड़ा कितना भी बड़ा हो, इस तरह के वाक्य बोलने से बचना चाहिए.
यह भी पढ़ेंः लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप खत्म करना क्यों बन जाता है सबसे मुश्किल फैसला? जानें वजह
पैसों और करीबियों पर ताना मारना गलत
दूसरी बात, अपने पार्टनर की आर्थिक स्थिति या पैसों को लेकर ताना मारना गलत है. पैसों से जुड़ी बातें बहुत पर्सनल होती हैं और इन पर मजाक या ताना रिश्ते में व्यक्ति के मन में खुद को दूसरों से बेकार, अयोग्य और छोटा समझने की भावना पैदा कर सकता है. इसी तरह उनके परिवार या दोस्तों के बारे में बुरा बोलना भी सही नहीं है, क्योंकि ये लोग उनके लिए खास होते हैं और ऐसी बातें रिश्ते में तनाव बढ़ा सकती हैं.
कमजोरियों का मजाक बनाना&amp;nbsp;
तीसरी और सबसे जरूरी बात, कभी भी अपने पार्टनर की कमजोरियों या उनकी असुरक्षाओं का मजाक नही बनाना चाहिए. जो बातें उन्हें अंदर से कमजोर करती हैं, उन पर मजाक करना उन्हें और चोट पहुंचाता है. प्यार का मतलब एक दूसरे को समझना और सहारा देना होता है, न कि उनकी कमियों को हथियार बनाना. इसलिए हमेशा अपने शब्दों का ध्यान रखें, क्योंकि एक गलत बात अच्छे रिश्ते को भी नुकसान पहुंचा सकती है.
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        <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 00:30:02 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Long Term Relationship Tips: लॉन्ग&amp;टर्म रिलेशनशिप खत्म करना क्यों बन जाता है सबसे मुश्किल फैसला? जानें वजह</title>
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        <description><![CDATA[ Long Term Relationship Tips: लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप खत्म करना क्यों बन जाता है सबसे मुश्किल फैसला? जानें वजह ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 12:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Traditional Indian Homes Designs: बिना AC भी ठंडे रहते थे गांव के घर, जानें इनके डिजाइन की खासियत और मॉर्डन घरों के लिए जरूरी टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ Traditional Indian Homes Designs : आज के समय में गर्मी हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रही है. घरों के अंदर रहना भी मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में एयर कंडीशनर (AC) और कूलर हमारी जरूरत बन चुके हैं. वहीं, एक समय ऐसा भी था जब बिना किसी मशीन या बिजली के सहारे घरों के अंदर ठंडक बनी रहती थी. हमारे पारंपरिक भारतीय घरों का डिजाइन इतना अलग होता था कि घर खुद ही नेचुरल तरीके से ठंडे रहते थे. पुराने समय के लोग जलवायु, हवा की दिशा, सूरज की रोशनी और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखकर घर बनाते थे.
यही वजह है कि उनके घर गर्मियों में भी आरामदायक रहते थे. आज जब बिजली की खपत बढ़ रही है और पर्यावरण पर दबाव भी बढ़ रहा है, तब इन पुराने तरीकों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि बिना AC के भी नेचुरली ठंडे रहने वाले पुराने भारतीय घर के डिजाइन की खासियत क्या है और मॉर्डन घरों के लिए जरूरी टिप्स क्या हैं.&amp;nbsp;
पुराने भारतीय घर के डिजाइन की खासियत क्या है
1. &amp;nbsp;दिशा और लेआउट का खास ध्यान - पुराने घरों को इस तरह बनाया जाता था कि सूरज की तेज धूप सीधे अंदर न आए. खिड़कियां और दरवाजे हवा की दिशा को ध्यान में रखकर लगाए जाते थे जिससे घर में क्रॉस वेंटिलेशन बना रहे. इससे घर के अंदर ताजी हवा लगातार आती-जाती रहती थी और गर्म हवा बाहर निकल जाती थी. इससे घर का तापमान नेचुरल &amp;nbsp;रूप से संतुलित रहता था.&amp;nbsp;
2. नेचुरल और स्थानीय सामग्री का यूज - पहले के घरों में मिट्टी, पत्थर, चूना और टाइल वाली छत जैसी चीजों का इस्तेमाल होता था. ये सामग्री गर्मी को जल्दी अंदर नहीं आने देती थीं. मोटी दीवारें दिन में गर्मी को रोकती थीं और रात में धीरे-धीरे बाहर छोड़ती थी. इससे घर दिन में ठंडा और रात में ज्यादा गर्म नहीं होता था. साथ ही, स्थानीय सामग्री का यूज होने से ये घर पर्यावरण के अनुकूल भी होते थे.&amp;nbsp;
3. आंगन का महत्व - पुराने भारतीय घरों में आंगन एक बहुत अहम हिस्सा होता था. यह खुला स्थान घर के बीच में होता था, जहां से हवा का फ्लो बेहतर होता था. गर्म हवा ऊपर उठकर बाहर निकल जाती थी और ठंडी हवा अंदर आती थी. कई बार आंगन में पेड़-पौधे या पानी का छोटा स्रोत भी होता था, जो ठंडक को और बढ़ा देता था.
4. छाया और ठंडक देने वाले डिजाइन - &amp;nbsp;बरामदा, जालीदार खिड़कियां और ढलान वाली छतें घर को सीधी धूप से बचाती थीं. &amp;nbsp;जालियां हवा को अंदर आने देती थीं लेकिन धूप को कम कर देती थीं. बरामदे छाया देते थे और घर के अंदर तापमान को संतुलित रखते थे. ये सभी डिजाइन न सिर्फ यूजफुल थे बल्कि देखने में भी सुंदर होते थे.&amp;nbsp;
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मॉर्डन घरों के लिए जरूरी टिप्स क्या हैं
1. आज के आर्किटेक्चर में पारंपरिक तरीकों को अपनाना बहुत फायदेमंद हो सकता है. इसके लिए घर में सही वेंटिलेशन रखना जरूरी है. जिससे ताजी हवा अंदर आती रहे और गर्म हवा बाहर निकल सके, जिससे अंदर का तापमान प्राकृतिक रूप से ठंडा बना रहता है.
2. घर की दिशा इस तरह तय करनी चाहिए कि सीधी धूप कम आए और हवा का फ्लो अच्छा बना रहे.&amp;nbsp;
3. मिट्टी, पत्थर और चूने जैसी नेचुरल सामग्री का यूज करने से घर में गर्मी कम प्रवेश करती है और तापमान संतुलित रहता है.
4. &amp;nbsp;घर में छाया वाले हिस्से जैसे बरामदा या जालीदार खिड़कियां शामिल करने से धूप का असर कम होता है और ठंडक बनी रहती है.
5. खुली जगह और हरियाली जैसे आंगन, पेड़-पौधे या छोटे बगीचे घर के वातावरण को ठंडा और ताजा बनाते हैं, जिससे कम एनर्जी में ज्यादा आराम मिल पाता है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Traditional, Indian, Homes, Designs:, बिना, भी, ठंडे, रहते, थे, गांव, के, घर, जानें, इनके, डिजाइन, की, खासियत, और, मॉर्डन, घरों, के, लिए, जरूरी, टिप्स</media:keywords>
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        <title>Weight Loss Tips: ग्रीन टी या ब्लैक कॉफी.. वेट लॉस के लिए क्या बेस्ट, यहां जानिए</title>
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        <description><![CDATA[ Weight Loss Tips: लाइफस्टाइल और खान-पान की गलत आदतों से काफी लोग मोटापे की समस्या से परेशान रहते हैं. &amp;nbsp;साथ ही वजन कम करना बहुत से लोगों के लिए एक बड़ा लक्ष्य बन गया है.बढ़ता हुआ वजन उनकी रोज की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है. &amp;nbsp;ऐसे में लोग फिट और हेल्दी रहने के लिए अलग अलग तरीके अपनाते हैं. सुबह उठकर अलग-अलग ड्रिंक पीते है ताकि वजन कंट्रोल हो सके. इनमें से एक आम उपाय है दूध वाली चाय को लोग छोड़ कर उसकी जगह पर ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी पीते हैं &amp;nbsp;जिन्हें वेट लॉस के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इन दोनों में से कौन सा ज्यादा बेहतर है. आइए आसान भाषा में समझते हैं.
ग्रीन टी के फायदे
ग्रीन टी में कैटेकिन्स नामक प्लांट कंपाउंड होते हैं जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर वजन घटाने में मदद कर सकते हैं. वहीं ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जो फैट को जलाने में मदद करते हैं. साथ ही ग्रीन टी पीने से शरीर को हल्कापन महसूस होता है और यह पाचन को भी बेहतर बनाती है. इसके अलावा यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में भी सहायक होती है. वही अगर आप दिन में 2 से 3 बार ग्रीन टी पीते हैं तो धीरे धीरे वजन कम करने में मदद मिल सकती है.
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ब्लैक कॉफी के फायदे
ब्लैक टी भी फ्लेवोनॉयड्स और पॉलीफेनॉल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है जो वेट लॉस के लिए काफी असरदार मानी जाती है. इसमें कैफीन होता है जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है और फैट बर्न करने में मदद करता है. साथ ही ब्लैक कॉफी पीने से भूख कम लगती है, जिससे आप कम कैलोरी लेते हैं. लेकिन इसका ज्यादा सेवन करने से नींद पर असर पड़ सकता है और शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए.
ग्रीन टी या ब्लैक टी क्या पिएं ?
अगर बात करें कि ग्रीन टी और ब्लैक कॉफी में कौन बेहतर है, तो यह पूरी तरह आपके शरीर और जरूरत पर निर्भर करता है. ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों का सेवन करने से लाभ मिल सकता है. लेकिन, वजन घटाने के मामले में ग्रीन टी को ज्यादा प्रभावी माना जाता है.ग्रीन टी कैटेकिन नामक प्लांट कंपाउंड से भरपूर होती है जो चयापचय की दर को बढ़ा देता है और अतिरिक्त कैलोरी को जलाने में मदद करता है.इसके विपरीत, ब्लैक टी में इतने ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट और फैट बर्निंग कंपाउंड नहीं होते. इसके अलावा सबसे जरूरी बात यह है कि इन दोनों के साथ सही डाइट और एक्सरसाइज भी जरूरी है, तभी सही तरीके से वेट लॉस हो सकता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 12:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>अक्षय तृतीया 2026: क्यों कभी&amp;कभी दो दिन मनाया जाता है अखा तीज? चंद्र कैलेंडर से समझिए</title>
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        <description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026: हिंदू पंचांग के हिसाब से अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है, जिसे आमतौर पर साल में एक बार मनाया जाता है. हालांकि कभी-कभी यह लगातार 2 दिनों तक पड़ती है, जिससे कई लोग इस त्योहार को मनाने की सही तारीख को लेकर भ्रमित हो जाते हैं.
यह घटना कोई गलती नहीं है, बल्कि हिंदू चंद्र पंचांग की कार्यप्रणाली का परिणाम है.&amp;nbsp;
साल में 2 अक्षय तृतीया मनाने का क्या कारण?
वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि ही अक्षय तृतीया है. निश्चित तिथियों पर आधारित ग्रेगोरियन पंचांग के विपरीत, हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है. इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रेल 2026, रविवार के दिन पड़ रहा है.
तिथि का कोई निश्चित 24 घंटे का चक्र नहीं होता और यह दिन के किसी भी समय से शुरू या समाप्त हो सकती है. इसी वजह से तृतीया तिथि एक दिन (अक्सर शाम को) शुरू होकर अगले दिन तक जारी रह सकती है.&amp;nbsp;
जब यह ओवरलैप होता है, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जहां अक्षय तृतीया दो अलग-अलग कैलेंडर तिथियों पर पड़ती हुई होती है.
अक्षय तृतीया 2026 से पहले लक्ष्मी पूजन के लिए घर की ऐसे करें तैयारी? अपनाएं आसान टिप्स
किस दिन को सही माना जाता है?
यदि तृतीया तिथि दो दिनों तक पड़ती है, तो अधिक शुभ तिथि का निर्धारण करने के लिए पारंपरिक नियमों का इस्तेमाल किया जाता है.
किस दिन को सही माना जाता है?
यदि तृतीया तिथि दो दिनों तक पड़ती है, तो अधिक शुभ तिथि का निर्धारण करने के लिए पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है.&amp;nbsp;
आमतौर पर तृतीया तिथि वाले दिन यदि तृतीया तिथि अधिक समय तक रहती है, तो दूसरा दिन चुना जाता है. कई ज्योतिषी तीन मुहूर्त नियमों को मानते हैं, जिसके मुताबिक यदि दूसरे दिन तृतीया तिथि तीन मुहूर्त (करीब 6 घंटे) से ज्यादा समय तक रहती है, तो वह दिन अनुष्ठानों या खरीदारी के लिए ज्यादा शुभ और पवित्र माना जाता है.&amp;nbsp;

यह ओवरलैप क्यों होता है?
यह ओवरलैप इसलिए होता है क्योंकि चंद्र कैलेंडर सौर कैलेंडर के साथ पूरी तरह से मेल नहीं खाता है. तिथियों का समय सूर्य और चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति पर निर्भर करता है, जो हर दिन थोड़ा-थोड़ा बदलती रहती है.&amp;nbsp;
परिणामस्वरूप तिथि किसी भी वक्त पर शुरू हो सकती है, जिससे दो तिथियों में आंशिक रूप से तिथि का असर पड़ता है. इस विसंगति की वजह से अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों के लिए कभी-कभी दोहरी तिथियां बन जाती हैं.&amp;nbsp;
अक्षय तृतीया क्यों हैं खास?
अक्षय शब्द का मतलब है, कभी न घटने वाला और माना जाता है कि यह दिन चिरस्थायी समृद्धि और सफलाता लाने का दिन होता है. इसे अबुझ मुहूर्त भी कहते हैं, जिसका मतलब पूरा दिन शुभ होता है और इसके लिए किसी खास समय की गणना करने की जरूरत नहीं होती है.&amp;nbsp;
इसलिए लोग इसी दिन सोना खरीदते हैं, नए बिजनेस शुरू करते हैं, पैसा निवेश करते हैं या धार्मिक अनुष्ठान करते हैं. दान-पुण्य, मंदिर &amp;nbsp;दर्शन और चंदा जैसे कार्य भी आमतौर पर किए जाते हैं.&amp;nbsp;
इस त्योहार को अखा तीज या अक्ती के नाम से भी जाना जाता है, और हिंदू समेत जैन धर्म दोनों ही धर्मावलंबी पीढ़ियों द्वारा वसंत ऋतु के त्योहार के रूप में मनाते हैं.&amp;nbsp;
Akshaya Tritiya 2026 Numerology: अक्षय तृतीया इन मूलांक वालों के लिए बेहद शुभ, चारों ओर से बरसेगा पैसा!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अक्षय, तृतीया, 2026:, क्यों, कभी-कभी, दो, दिन, मनाया, जाता, है, अखा, तीज, चंद्र, कैलेंडर, से, समझिए</media:keywords>
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        <title>Paracetamol Pregnancy Risks: क्या प्रेग्नेंसी में पैरासीटामॉल खाने से बच्चे को हो जाती है ऑटिज्म? स्टडी में सामने आया सच</title>
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        <description><![CDATA[ Paracetamol Pregnancy Risks : प्रेग्नेंसी के दौरान दवाइयों को लेकर अक्सर महिलाओं के मन में डर और सवाल होते हैं. खासकर जब बात दर्द या बुखार की हो तो यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि दवा लेना सही है या नहीं. पिछले कुछ समय में यह बात भी काफी फैली कि अगर प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासीटामॉल (अमेरिका में जिसे टाइलेनॉल कहा जाता है) लिया जाए तो इससे बच्चे में ऑटिज्म होने का खतरा बढ़ सकता है. इस दावे ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी, लेकिन अब एक बड़ी और भरोसेमंद रिसर्च ने इस बात को साफ कर दिया है.
मेडिकल जर्नल The Lancet Obstetrics, Gynaecology &amp;amp; Women&amp;rsquo;s Health में प्रकाशित एक बड़ी रिसर्च अध्ययन के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान सही तरीके से पैरासीटामॉल लेने और बच्चों में ऑटिज्म, ADHD या बच्चों के मानसिक विकास के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया. ऐसे में आइए जानते हैं कि लेकर स्टडी में और क्या-क्या सामने आया.&amp;nbsp;
क्या कहती है नई स्टडी?
इस बड़ी रिसर्च में 43 अलग-अलग क्लिनिकल स्टडीज का विश्लेषण किया गया. इसके अलावा स्वीडन में लगभग 25 लाख बच्चों के डेटा का अध्ययन भी शामिल था. शोधकर्ताओं ने खासतौर पर सिबलिंग कंपेरिजन तरीका अपनाया यानी एक ही मां के उन बच्चों की तुलना की गई, जिनमें एक प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासीटामॉल लिया गया था और दूसरे में नहीं. ऐसे में इसका रिजल्ट साफ था, दोनों बच्चों में ऑटिज्म या अन्य मानसिक समस्याओं के खतरे में कोई अंतर नहीं मिला.&amp;nbsp;
क्या प्रेग्नेंसी में पैरासीटामॉल खाने से बच्चे को ऑटिज्म हो जाती है?
पहले की कुछ स्टडीज में प्रेग्नेंसी में पैरासीटामॉल खाने से हल्का संबंध दिखा था, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने बताया कि यह असली कारण नहीं था. असल में, जिन महिलाओं ने पैरासीटामॉल लिया उन्हें बुखार, दर्द या संक्रमण जैसी समस्याएं थीं. ये समस्याएं खुद भी बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती हैं. साथ ही जेनेटिक कारण भी भूमिका निभाते हैं. इन्हीं कन्फाउंडिंग फैक्टर्स की वजह से पहले गलत निष्कर्ष निकाले गए. जिसके कारण लोगों को लगा कि &amp;nbsp;प्रेग्नेंसी में पैरासीटामॉल खाने से बच्चे को ऑटिज्म हो जाती है.&amp;nbsp;
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, पैरासीटामॉल आज भी प्रेग्नेंसी में सबसे सुरक्षित दर्द निवारक दवा मानी जाती है. यह NSAIDs और ओपिओइड्स से ज्यादा सुरक्षित है. इसे कम मात्रा में और जरूरत पड़ने पर लेना सही है. यह दवा World Health Organization (WHO) की जरूरी दवाओं की सूची में भी शामिल है.&amp;nbsp;
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कब ये दवा न लेना खतरनाक हो सकता है?
कई बार डर के कारण महिलाएं दवा लेने से बचती हैं, लेकिन यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है. अगर प्रेग्नेंसी में बुखार का इलाज न किया जाए या दर्द को नजरअंदाज किया जाए तो इससे अबॉर्शन का खतरा, समय से पहले डिलीवरी (Preterm Birth) या बच्चे में जन्मजात समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज लेना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
प्रेग्नेंसी में महिलाओं के लिए सही क्या है?
&amp;nbsp;1. जब सच में जरूरत हो तभी पैरासीटामॉल लें.
2. दवा लेने से पहले और दौरान डॉक्टर की सलाह जरूर मानें.
3. अपने मन से ज्यादा मात्रा या लंबे समय तक दवा न लें.
4. बुखार या दर्द को नजरअंदाज न करें, समय पर इलाज कराएं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अक्षय तृतीया पर चंदन अनुष्ठान से आएगी सुख&amp;समृद्धि? इंद्रेश उपाध्याय से जानिए सही तरीका और महत्व</title>
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        <description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म का बेहद ही खास और पवित्र तिथि है. माना जाता है कि, इस दिन दान, पूजा और पुण्य कर्म करने से अक्षय फल यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है. इसी वजह से इस दिन को समृद्धि, सौभाग्य और आधात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है. मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन शुरू किए गए कार्य दीर्घकाल तक शुभ परिणाम देते हैं.&amp;nbsp;
इस साल अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल 2026, रविवार के दिन पड़ रहा है. ऐसे में वृंदावन के कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने एक प्रवचन में चंदन से जुड़े विशेष भक्ति-भावपूर्ण अनुष्ठान का उल्लेख किया गया है. उन्होंने बताया कि, अक्षय तृतीया के दिन पहले से ही घर पर चंदन घिसना शुरू कर देना चाहिए. इसे नियमित रूप से एकत्र किया जाए, ताकि पर्याप्त मात्रा में शुद्ध चंदन तैयार हो सके. &amp;nbsp;
यह प्रक्रिया केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि मन को शांत और भक्ति के प्रति स्थिर भी करती है.
अक्षय तृतीया पर चंदन से जुड़ा उपाय
अपनी कथा में इंद्रेश महाराज ने बताया कि, घिसे हुए चंदन को एक साफ कपड़े में डालकर निचोड़कर उसका रस (पानी) अलग कर लेना चाहिए. इस प्रक्रिया के बाद चंदन का एक मुलायम पेस्ट या गोले के रूप में तैयार कर लेना चाहिए, जिसे शुद्ध और पवित्र माना जाता है. इसे पूजा के लिए सुरक्षित और साफ रखें, ताकि अक्षय तृतीया के दिन इसका इस्तेमाल किया जा सके.&amp;nbsp;
अक्षय तृतीया के दिन इस चंदन का इस्तेमाल ठाकुर जी के श्रृंगार के रूप में करने की परंपरा है. इसमें सिर से लेकर पैरों तक चंदन का लेप लगाना चाहिए. इसे केवल बाहरी सजावट नहीं, बल्कि शरीर को शीतलता देने और भक्ति भाव को गहरा करने का प्रतीक माना जाता है.
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 100 साल बाद &#039;अक्षय योग&#039;, 3 राशियों के टलेंगे बुरे दिन, मिलेगी सफलता
भारतीय संस्कृति में चंदन को पवित्रता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसका इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठान में खास महत्व रखता है.&amp;nbsp;
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान &amp;ldquo;राम रामा राम रामा, हरे हरे&amp;rdquo; जैसे नाम का उच्चारण और स्मरण और भक्ति मंत्रों का उच्चारण करने की सलाह दी जाती है. इसका उद्देश्य मन को एकाग्र करना और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को बढ़ाना बताया गया है. मान्यताओं के मुताबिक, नाम-स्मरण से मन की चंचला कम होती है और साधना में गहराई आती है.&amp;nbsp;

हालांकि इस बात को समझना बेहद जरूरी है कि, यह एक आध्यात्मिक और भक्ति आधारित परंपरा है, जिसे श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाया जाता है. इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से यह मनोवैज्ञानिक शांति और सकारात्मक से जोड़ा जाता है.&amp;nbsp;
कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया पर चंदन का यह इस्तेमाल एक प्रतीकात्मक साधना है, जिसका उद्देश्य बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धता, शांति और भक्ति को जागृत करना माना जाता है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अक्षय, तृतीया, पर, चंदन, अनुष्ठान, से, आएगी, सुख-समृद्धि, इंद्रेश, उपाध्याय, से, जानिए, सही, तरीका, और, महत्व</media:keywords>
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        <title>Loneliness Heart Disease Risks : वयस्कों में अकेलापन से दिल की बीमारी का खतरा, चौंका देगी यह स्टडी</title>
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        <description><![CDATA[ Loneliness Heart Disease Risks : आजकल बहुत से लोग भीड़ में रहकर भी खुद को अकेला महसूस करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अकेलापन सिर्फ मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि शरीर की गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है. हाल ही में एक बड़ी और चौंकाने वाली रिसर्च में यह सामने आया है कि जो लोग खुद को ज्यादा अकेला महसूस करते हैं, उनमें दिल के वाल्व (Heart Valve) की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है. यह अध्ययन Journal of the American Heart Association में प्रकाशित हुआ है. ऐसे में आइए जानते हैं कि वयस्कों में अकेलापन से दिल की बीमारी का खतरा क्यों होता है और स्टडी में क्या पाया गया.&amp;nbsp;
वयस्कों में अकेलापन से दिल की कौन सी बीमारी का खतरा होता है
वयस्कों में अकेलापन से दिल के वाल्व (Heart Valve) की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है. दिल में चार मुख्य वाल्व होते हैं, जो खून के सही बहाव को कंट्रोल करते हैं. जब इनमें से कोई भी वाल्व सही से काम नहीं करता, तो इसे वाल्वुलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart Disease) कहा जाता है. &amp;nbsp;इस बीमारी में दिल से खून का बहाव सही तरीके से नहीं हो पाता है. दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, धीरे-धीरे दिल कमजोर हो सकता है और गंभीर स्थिति में सर्जरी तक की जरूरत पड़ सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;स्टडी में क्या पाया गया?
इस रिसर्च में लगभग 4.63 लाख लोगों को शामिल किया गया, जो UK Biobank से जुड़े थे. इन लोगों की सेहत को लगभग 14 साल तक ट्रैक किया गया. &amp;nbsp;जो लोग ज्यादा अकेलापन महसूस करते हैं, उनमें दिल की वाल्व बीमारी का खतरा 19 प्रतिशत ज्यादा पाया गया. वहीं जिसमें Aortic valve stenosis का खतरा 21 प्रतिशत बढ़ा और Mitral valve regurgitation का खतरा 23 &amp;nbsp;प्रतिशत बढ़ा पाया गया.&amp;nbsp;
वयस्कों में अकेलापन से दिल की बीमारी का खतरा क्यों होता है
स्टडी में बहुत दिलचस्प बात सामने आई कि जब व्यक्ति अंदर से खुद को अकेला महसूस करता है तब व्यक्ति दूसरों से कम मिलता-जुलता है. रिसर्च में पाया गया कि सिर्फ अकेलापन महसूस करना दिल की बीमारी से जुड़ा है, लेकिन अकेले रहना सीधे तौर पर इतना बड़ा कारण नहीं पाया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्टडी ऑब्जर्वेशनल (observational) है. इससे यह साबित नहीं होता कि अकेलापन सीधे बीमारी पैदा करता है, लेकिन दोनों के बीच एक मजबूत संबंध जरूर दिखाई देता है.&amp;nbsp;
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कौन सी आदतें बढ़ाती हैं दिल की बीमारी खतरा
स्टडी में यह भी पाया गया कि अकेलेपन से जुड़ी कुछ आदतें इस बीमारी को और बढ़ा सकती हैं, जैसे धूम्रपान करना, शराब का ज्यादा सेवन, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और खराब नींद ये सभी चीजें मिलकर दिल की सेहत को कमजोर करती हैं.&amp;nbsp;
एक्सपर्ट्स की राय क्या है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अकेलापन सिर्फ इमोशनल समस्या नहीं है, यह शरीर को भी प्रभावित करता है. इसे गंभीरता से लेना चाहिए और मरीजों से डॉक्टरों को मानसिक स्थिति के बारे में भी बात करनी चाहिए विशेषज्ञ के अनुसार अगर अकेलेपन को कम किया जाए, तो दिल की बीमारी की गति धीमी हो सकती है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत भी टल सकती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है. साथ ही अकेलापन भी बढ़ने लगता है. इसलिए बुजुर्ग लोगों में यह जोखिम और भी ज्यादा हो सकता है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Loneliness, Heart, Disease, Risks, वयस्कों, में, अकेलापन, से, दिल, की, बीमारी, का, खतरा, चौंका, देगी, यह, स्टडी</media:keywords>
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        <title>घर पर ऐसे बनाएं आम का पना, आसपास भी नहीं फटकेगी गर्मी</title>
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        <description><![CDATA[ घर पर ऐसे बनाएं आम का पना, आसपास भी नहीं फटकेगी गर्मी ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 20:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Screen Time Effects: क्या फोन दूर होते ही हो जाते हैं बेचैन, जानें स्क्रीन कैसे बना रही समय से पहले बूढ़ा?</title>
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        <description><![CDATA[ Why You Feel Anxious Without Your Phone: अगर फोन आपसे थोड़ी देर के लिए भी दूर हो जाए और आपको बेचैनी होने लगे, तो यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक संकेत है कि स्क्रीन आपकी बॉडी और दिमाग पर असर डाल रही है. हाल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोग 2024 में कुल 1.1 ट्रिलियन घंटे स्मार्टफोन पर बिताते रहे यानी औसतन हर व्यक्ति करीब 5 घंटे रोज स्क्रीन पर रहता है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे कैसे आपको दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है.&amp;nbsp;
समय से पहले बना रही आपको बूढ़ा
यही बढ़ता स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे शरीर के अंदर एक ऐसी प्रक्रिया शुरू कर देता है, जो समय से पहले बूढ़ा होने की वजह बन सकती है. सबसे पहला असर पड़ता है नींद पर. रात में फोन चलाने से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है, जो नींद के लिए बेहद जरूरी है. एनपीजे डिजिटल हेल्थ में पब्लिश रिसर्च भी बताती है कि जितना ज्यादा रात में स्क्रीन का इस्तेमाल होगा, नींद उतनी ही खराब होगी.
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सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित&amp;nbsp;
नींद की कमी सिर्फ थकान तक सीमित नहीं रहती. इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. रिसर्च में पाया गया है कि इससे दिमाग की मेमोरी से जुड़ी स्ट्रक्चर कमजोर होने लगती हैं और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है. &amp;nbsp;द लैंसेट कमीशन (2024) की रिपोर्ट में तो यहां तक कहा गया है कि नींद की समस्या डिमेंशिया के बड़े कारणों में शामिल हो रही है. यह असर सिर्फ दिमाग तक नहीं रुकता. फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी (2023) में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब नींद का सीधा असर हमारे गट माइक्रोबायोम पर पड़ता है. यानी पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने लगता है. यही कारण है कि स्क्रीन एडिक्शन से एंग्जायटी, लो मूड और स्ट्रेस बढ़ने लगता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
Dr. Aaron Hartman बताते हैं कि नींद, स्ट्रेस और गट हेल्थ, ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं, इनमें से एक भी खराब हुआ तो बाकी भी प्रभावित हो जाते हैं. इसके अलावा, जेरोसाइंस (2024) की स्टडी बताती है कि रात में आर्टिफिशियल लाइट के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन बढ़ती है, जो दिमाग तक पहुंचकर न्यूरोइन्फ्लेमेशन पैदा कर सकती है. यही प्रक्रिया तेजी से बढ़ती उम्र का कारण बनती है. Dr. John La Puma ने इसे &quot;डिजिटल ओबेसिटी&quot; नाम दिया है, जहां स्क्रीन की लत शरीर और दिमाग दोनों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है. हर नोटिफिकेशन के साथ मिलने वाला डोपामिन दिमाग को उसी तरह प्रभावित करता है, जैसे किसी लत में होता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा के लिए कैसे होगा ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन? समझ लें यात्रा का पूरा रूट</title>
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        <description><![CDATA[ How To Register Offline For Char Dham Yatra 2026: चारधाम यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि हिमालय की कठिन और दिव्य यात्रा का अनुभव है. हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा पर निकलते हैं, और 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. अगर आप ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करना चाहते हैं, तो इसकी पूरी जानकारी पहले से जान लेना जरूरी है, ताकि यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके.&amp;nbsp;
कैसे करवा सकते हैं ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन?
उत्तराखंड सरकार ने इस बार ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने के लिए कई शहरों में काउंटर बनाए हैं. हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून में रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है. हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान और ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप व ISBT पर बड़ी संख्या में काउंटर लगाए गए हैं, जहां जाकर श्रद्धालु अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. इसके अलावा यात्रा रूट पर भी कई जगहों पर ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन सेंटर बनाए गए हैं, जैसे जानकीचट्टी, सोनप्रयाग, गौरीकुंड, जोशीमठ और गोविंद घाट. इन जगहों पर रजिस्ट्रेशन करवाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा करने पर परेशानी हो सकती है.&amp;nbsp;
क्या डॉक्यूमेंट चाहिए इसके लिए?
अगर बात करें कि इसके लिए कौन से डॉक्यूमेंट की जरूरत है, तो आपको इन चीजों की जरूरत होगी. आधार कार्ड/पहचान पत्र/पैन कार्ड/ड्राइविंग लाइसेंस इशके साथ एक अपना मोबाइल नंबर और फैमली मेंबर में से किसी एक का मोबाइल नम्बर, इसके अलावा चारधाम दर्शन का डेट बताना होगा.&amp;nbsp;
क्या है मार्ग?
अब बात करते हैं चारधाम के पूरे रूट की, तो यह यात्रा उत्तराखंड के चार प्रमुख धाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को कवर करती है. आमतौर पर यात्रा हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है और पारंपरिक क्रम में पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ जाया जाता है. यमुनोत्री पहुंचने के लिए जानकीचट्टी से करीब 6 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है. इसके बाद गंगोत्री का सफर अपेक्षाकृत आसान है, क्योंकि वहां सड़क सीधे मंदिर तक जाती है. लेकिन केदारनाथ की यात्रा सबसे कठिन मानी जाती है, जहां गौरीकुंड से लगभग 16 किलोमीटर का ट्रेक करना होता है.
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बद्रीनाथ की यात्रा सड़क मार्ग से पूरी की जा सकती है, जो इसे बाकी धामों के मुकाबले थोड़ा आसान बनाती है. हालांकि पूरे रूट में पहाड़ी रास्ते, लंबी दूरी और मौसम की चुनौतियां रहती हैं, इसलिए तैयारी बेहद जरूरी है. इसके अलावा हेलिकॉप्टर से भी आप यात्रा कर सकते हैं
हेल्थ के लिए सख्त प्रोटोकॉल
सरकार ने इस बार हेल्थ प्रोटोकॉल भी सख्त किए हैं. खासकर 55 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और पहले से बीमारियों से जूझ रहे श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल चेकअप अनिवार्य किया गया है. कई हेल्थ सेंटर और मेडिकल रिलीफ पोस्ट भी बनाए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो. इसके अलावा रात 10 बजे के बाद यात्रा रूट पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है. यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में रात के समय खतरा ज्यादा रहता है.
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Anushka Sharma Outfit: ब्लू रफल्ड शर्ट और व्हाइट मैक्सी स्कर्ट में अनुष्का ने लूटी महफिल, बड़े काम आएंगे ये फैशन टिप्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/anushka-sharma-outfit-ब्लू-रफल्ड-शर्ट-और-व्हाइट-मैक्सी-स्कर्ट-में-अनुष्का-ने-लूटी-महफिल-बड़े-काम-आएंगे-ये-फैशन-टिप्स</link>
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        <description><![CDATA[ Anushka Sharma Outfit: ब्लू रफल्ड शर्ट और व्हाइट मैक्सी स्कर्ट में अनुष्का ने लूटी महफिल, बड़े काम आएंगे ये फैशन टिप्स ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Corporate Grooming In Workplace: निदा खान की तरह क्या आपका बॉस भी कर रहा कॉर्पोरेट ग्रूमिंग? ये 5 सिग्नल समझाएंगे ऑफिस का माहौल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/corporate-grooming-in-workplace-निदा-खान-की-तरह-क्या-आपका-बॉस-भी-कर-रहा-कॉर्पोरेट-ग्रूमिंग-ये-5-सिग्नल-समझाएंगे-ऑफिस-का-माहौल</link>
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        <description><![CDATA[ What Is Corporate Grooming In Office: ऑफिस में बॉस का थोड़ा ज्यादा फ्रेंडली होना हमेशा गलत नहीं होता, लेकिन कब यही व्यवहार कॉर्पोरेट ग्रूमिंग में बदल जाता है, यह समझना जरूरी है. कई बार ये सब इतना धीरे-धीरे होता है कि सामने वाले को एहसास भी नहीं होता कि वह एक साइकोलॉजिकल जाल में फंस रहा है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज नासिक में इसको लेकर काफी बवाल मचा हुआ है. चलिए आपको बताते हैं कि कॉर्पोरेट ग्रूमिंग क्या होती है?
क्या होती है कॉर्पोरेट ग्रूमिंग?
Hracuity और Verywellmind की रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट ग्रूमिंग का मतलब होता है किसी के साथ भरोसा और इमोशनल कनेक्शन बनाकर उसे कंट्रोल या मैनिपुलेट करना. शुरुआत अक्सर सामान्य बातचीत से होती है, जैसे पर्सनल लाइफ के बारे में ज्यादा पूछना या ऑफिस के बाहर कनेक्ट होने की कोशिश करना. पहली नजर में ये सब सामान्य लगता है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी चाल होती है.
क्या होते हैं संकेत?
पहला संकेत है जरूरत से ज्यादा दोस्ती. अगर आपका बॉस बार-बार पर्सनल बातें जानने की कोशिश करे, बिना वजह मदद करे या बार-बार आपको खास महसूस कराए तो थोड़ा सतर्क हो जाएं. यह भरोसा जीतने की शुरुआत हो सकती है. दूसरा बड़ा सिग्नल है कि सीक्रेट शेयर करना और बदले में आपसे भी उम्मीद रखना. जैसे बॉस आपको खास जानकारी दे और बदले में वफादारी या निजी जुड़ाव की उम्मीद करे. यह एक तरह से इमोशनल कंट्रोल बनाने की प्रक्रिया होती है.
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तीसरा चरण थोड़ा खतरनाक होता है टेस्टिंग. &amp;nbsp;इसमें बॉस आपके रिएक्शन को परखता है, यह देखने के लिए कि आप कितनी हद तक उसके प्रभाव में आ सकते हैं. वह यह भी समझने की कोशिश करता है कि आप ऑफिस या निजी जिंदगी में कितने अकेले हैं. चौथा संकेत है आइसोलेशन. धीरे-धीरे आपको बाकी टीम या दोस्तों से दूर किया जाने लगता है. यह काम सीधे नहीं बल्कि इमोशनल तरीकों से होता है, जैसे &quot;तुम बदल गए हो&quot; या &quot;मुझे लगता है तुम मुझसे दूर हो रहे हो.&quot; आखिरी और सबसे गंभीर स्टेज है, एब्यूज या एक्सप्लॉइटेशन. इसमें बॉस अपने फायदे के लिए आपका इस्तेमाल करता है, और अगर आप सवाल उठाते हैं तो गैसलाइटिंग जैसी तकनीकों से आपको ही गलत महसूस कराया जाता है.
ये भी हैं संकेत
इसके अलावा एक टॉक्सिक बॉस की कुछ और पहचान भी होती है. जैसे हर समय आलोचना करना, दूसरों के काम का क्रेडिट खुद लेना, टीम का सम्मान न करना या हर छोटी चीज में दखल देना. क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. Jolie Silva के मुताबिक, &quot;एक टॉक्सिक बॉस अपने पावर का इस्तेमाल कर्मचारियों को कंट्रोल करने के लिए करता है, जिसमें मैनिपुलेशन और डराने-धमकाने जैसी चीजें शामिल होती हैं.&quot; अगर आपको अपने ऑफिस में ऐसे संकेत दिख रहे हैं, तो उन्हें नजरअंदाज न करें. अपनी सीमाएं तय करें, भरोसेमंद लोगों से बात करें और जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल मदद लें.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Corporate, Grooming, Workplace:, निदा, खान, की, तरह, क्या, आपका, बॉस, भी, कर, रहा, कॉर्पोरेट, ग्रूमिंग, ये, सिग्नल, समझाएंगे, ऑफिस, का, माहौल</media:keywords>
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        <title>Hair Dye Safety: क्या सफेद बालों को रंगने से डैमेज हो सकता है लिवर? हेयर डाई पर सामने आया बड़ा सच</title>
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        <description><![CDATA[ Can Hair Dye Cause Liver Damage: सैलून की कुर्सी पर बैठे-बैठे जब बालों का रंग बदलता दिखता है, तो मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या ये केमिकल्स वाकई शरीर के लिए नुकसानदेह हैं? तेज गंध और तरह-तरह की बातें सुनकर कई लोगों को लगता है कि हेयर डाई से लिवर तक खराब हो सकता है. लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
सैफी हॉस्पिटल के हेपेटोलॉजिस्ट और लिवर ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. चेतन कलाल ने &amp;nbsp;TOI को बताया कि रूटीन तरीके से कॉस्मेटिक हेयर डाई इस्तेमाल करने से आम लोगों में लिवर की गंभीर बीमारी होने का कोई ठोस क्लिनिकल सबूत नहीं है. &amp;nbsp;इसकी वजह भी सीधी है मार्केट में मिलने वाली ज्यादातर डाई रेगुलेटेड होती हैं और स्कैल्प के जरिए शरीर में इनका एब्जॉर्प्शन बहुत कम होता है. यानी ये केमिकल्स इतनी मात्रा में ब्लडस्ट्रीम तक नहीं पहुंचते कि लिवर को नुकसान पहुंचा सकें.
क्या नहीं होता है नुकसान?
हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि जोखिम बिल्कुल शून्य है. कुछ मामलों में लिवर डैमेज की रिपोर्ट सामने आई है, खासकर जब डाई में मौजूद पैरा-फिनाइलिन डायमीन &amp;nbsp;जैसे केमिकल शामिल हों. लेकिन ये मामले बेहद रेयर और इडियोसिंक्रेटिक होते हैं, यानी हर व्यक्ति में अलग तरह से, बिना किसी तय पैटर्न के. ये डोज पर निर्भर नहीं होते, बल्कि शरीर की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया पर आधारित होते हैं.
डॉ. हर्षिल एस. शाह बताते हैं कि PPD और अमोनिया जैसे तत्व तब नुकसानदेह हो सकते हैं, जब ये शरीर में ज्यादा मात्रा में प्रवेश करें कि जैसे कि स्कैल्प पर घाव हो या एप्लिकेशन के दौरान फ्यूम्स ज्यादा इनहेल किए जाएं. आम तौर पर इससे स्किन एलर्जी होती है, जो असहज तो होती है, लेकिन खतरनाक नहीं. जिन मामलों में हेयर डाई और हेपेटाइटिस के बीच संबंध पाया गया, उनमें लंबे समय तक या बार-बार इस्तेमाल के साथ पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल थीं.&amp;nbsp;
कब होती है दिक्कत?
असल चिंता तब बढ़ती है, जब कई जोखिम एक साथ जुड़ जाते हैं जैसे स्मोकिंग. स्मोकिंग खुद लिवर के लिए बड़ा खतरा है. यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन और फाइब्रोसिस को बढ़ाता है, जिससे लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है, खासकर अगर फैटी लिवर या शराब का इतिहास हो. ऐसे में जब शरीर केमिकल्स के संपर्क में आता है, तो कुल मिलाकर टॉक्सिक असर बढ़ सकता है. लेकिन डॉ. कलाल का जोर साफ है कि लिवर हेल्थ के लिए हेयर डाई छोड़ने से ज्यादा जरूरी स्मोकिंग छोड़ना है.&amp;nbsp;
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क्या है इसका उपाय?
तो क्या किया जाए? सबसे बेहतर तरीका है सावधानी के साथ उपयोग. हमेशा भरोसेमंद और रेगुलेटेड ब्रांड की डाई चुनें. अमोनिया-फ्री या हर्बल लिखे होने का मतलब पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं है. इनमें भी अलग तरह के केमिकल्स होते हैं. हर बार इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि एलर्जी का पता पहले ही चल सके. कभी भी डाई को कटे-फटे या इंफ्लेम्ड स्कैल्प पर न लगाएं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 04:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Vaishakh Amavasya 2026: अगर आपकी कुंडली में &amp;apos;काल सर्प दोष&amp;apos; है, तो डरें नहीं! वैशाख अमावस्या पर करें खास उपाय...</title>
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        <description><![CDATA[ Vaishakh Amavasya 2026 Kaal Sarp Dosha Upay: इस साल वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार के दिन है, जिसे कई लोग सतुवाई अमावस्या या वैशाखी अमावस्या के नाम से भी जानते हैं.&amp;nbsp;जिस भी व्यक्ति की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, उसे आमतौर पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
अमावस्या का दिन इस दोष से मुक्ति पाने के लिए बेहद ही शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं कि, अमावस्या के दिन आप इस दोष के प्रभावों को बेहतर तरीके से कैसे कम कर सकते हैं?
काल सर्प दोष क्या है?
वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी सात प्रमुख ग्रह छाया ग्रहों राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं, यानी कि वे सभी एक ही अक्ष पर संरेखित होते हैं, तो इस ग्रहीय स्थिति को काल सर्प दोष कहा जाता है.
ज्योतिष में इसे चुनौतीपूर्ण योग कहा जाता है, जो व्यक्ति के प्रयासों में बाधाएं उत्पन्न करने से साथ जीवन में संघर्ष को भी तीव्र कर देता है.&amp;nbsp;
Vaishakh Amavasya 2026: आज वैशाख अमावस्या, करें ये 8 काम, सफलता के खुलेंगे रास्ते
दोष के संकेत?
जब किसी कुंडली में काल सर्प दोष होता है, तो व्यक्ति को आमतौर पर डरावने और बुरे सपने आने लगते हैं और वह लगातार अस्पष्ट डर की भावना से घिर जाता है.&amp;nbsp;
भय के कारण अचानक नींद से जाग जाना, साथ ही सपनों में बार-बार सांपों को देखना भी काल सर्प दोष के मुख्य लक्ष्णों में से एक है.&amp;nbsp;
अधिक मेहनत करने के बाद भी व्यक्ति सफलता प्राप्त करने में विफल रहता है, और उसकी योजनाएं अक्सर अंतिम पल में विफल साबित हो जाते हैं.&amp;nbsp;
घर में लगातार कलह और तनाव का माहौल बना रहना भी काल सर्प दोष का कारण माना जाता है.&amp;nbsp;
इस दोष के कारण व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के अन्य लोगों के साथ शत्रुता या संघर्ष विकसित कर सकता है.&amp;nbsp;

#WATCH प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): बैसाख अमावस्या पर स्नान और दान के लिए बड़ी संख्या में भक्त संगम घाट पहुंचे।&quot; pic.twitter.com/bZlRrfQZut
&amp;mdash; ANI_HindiNews (@AHindinews) April 17, 2026



अमावस्या पर काल सर्प दोष से बचने के उपाय
अमावस्या के दिन चांदी से बनी दो सर्प की मूर्तियां(नर और मादा) को बहते पानी में विसर्जित कर दें.&amp;nbsp;
अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं.&amp;nbsp;
निर्धारित विधि-विधान के साथ भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.&amp;nbsp;
भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक कर काले तिल को पवित्र गंगाजल में मिलाएं.&amp;nbsp;
जरूरतमंदों को भोजन और कपड़ों का दान करने से काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है.
इस दोश से मुक्ति पाने के लिए अमावस्या के दिन गरीबों को काले कंबल जैसी वस्तुएं भी दान करनी चाहिए.&amp;nbsp;
अमावस्या पर अन्य प्रभावी उपाय
काल सर्प दोष को लेकर डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. व्यक्ति को इस दोष के निवारण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेकम और राहु-केतु के लिए खास उपास करने से इस दोष के नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो जाते हैं.&amp;nbsp;
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ को जल अर्पित करने के साथ 7 परिक्रमा लगाने से भी काल सर्प दोष की समस्या कम हो जाती है. इसके साथ ही अमावस्या से राहत पाने के लिए आप उज्जैन या नासिक के महाकालेश्वर मंदिर में काल सर्प दोष पूजा भी करवा सकते हैं.&amp;nbsp;
Amavasya Surya Grahan 2026: वैशाख अमावस्या पर क्या आज सूर्य ग्रहण लगा है, जानें सच्चाई
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Vaishakh, Amavasya, 2026:, अगर, आपकी, कुंडली, में, काल, सर्प, दोष, है, तो, डरें, नहीं, वैशाख, अमावस्या, पर, करें, खास, उपाय...</media:keywords>
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        <title>Summer Health Issues: क्या आजकल आप भी बुखार और पेटदर्द से हैं परेशान, जानें किस वजह से हो रहीं ये बीमारियां?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/summer-health-issues-क्या-आजकल-आप-भी-बुखार-और-पेटदर्द-से-हैं-परेशान-जानें-किस-वजह-से-हो-रहीं-ये-बीमारियां</link>
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        <description><![CDATA[ Why Fever And Stomach Issues Increase In Summer: अगर आपको हाल ही में बुखार, तेज सिरदर्द और पेट खराब जैसी दिक्कतें एक साथ महसूस हो रही हैं, तो आप अकेले नहीं हैं. साल के इस समय में फूड और वाटर-बॉर्न बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं. यह सिर्फ संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे मौसम की बड़ी भूमिका होती है. डॉ. सौरदीप &amp;nbsp;के अनुसार, गर्मी और नमी का मेल बैक्टीरिया और वायरस के लिए सबसे अनुकूल माहौल बना देता है. यानी जो मौसम हमें असहज लगता है, वही इन के पनपने के लिए परफेक्ट होता है. जैसे ही ये शरीर में प्रवेश करते हैं, सबसे पहले आपका डाइजेशन सिस्टम प्रभावित होता है.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
शुरुआत पेट से होती है, मतली, उल्टी, पेट में ऐंठन, दस्त, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं सामने आती हैं. यह स्थिति काफी परेशान करने वाली होती है और इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है. असली समस्या तब बढ़ती है, जब उल्टी और दस्त के कारण शरीर से पानी तेजी से निकलने लगता है और डिहाइड्रेशन हो जाता है.
डिहाइड्रेशन से क्या होती है दिक्कत?
डिहाइड्रेशन सिर्फ प्यास लगने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर के संतुलन को बिगाड़ देता है. इसी वजह से बुखार और सिरदर्द भी शुरू हो जाते हैं. शरीर इंफेक्शन से लड़ने की कोशिश करता है, लेकिन जब पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, तो रिकवरी और मुश्किल हो जाती है. सिरदर्द लंबे समय तक बना रहता है और कमजोरी बढ़ती जाती है.&amp;nbsp;
किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है?
कुछ लोग इस समय ज्यादा जोखिम में होते हैं. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है. इसके अलावा जो लोग बाहर का खाना ज्यादा खाते हैं, बार-बार यात्रा करते हैं या साफ पानी नहीं पीते, उनमें इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है. अगर शरीर पहले से ही डिहाइड्रेटेड या कमजोर है, तो बीमारी जल्दी पकड़ लेती है.&amp;nbsp;
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कैसे कर सकते हैं इससे बचाव?
बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि पानी और खाने को लेकर सख्ती. हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं. बाहर का कच्चा या खुला खाना खाने से बचें, चाहे वह कितना भी अच्छा क्यों न लगे. हमेशा ताजा और गरम खाना ही खाएं, क्योंकि गर्मी से ज्यादातर बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं. हाथ धोना एक साधारण लेकिन बेहद जरूरी आदत है. खाने से पहले और टॉयलेट के बाद हाथ जरूर धोएं। यह छोटी सी आदत आपको कई बीमारियों से बचा सकती है. अगर आप बीमार हो जाते हैं, तो हाइड्रेशन सबसे जरूरी हो जाता है। सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि ओआरएस या नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ लें, ताकि शरीर को जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स मिल सकें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Aaj Ka Panchang 17 April 2026: वैशाख अमावस्या पर अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग, स्नान&amp;दान मुहूर्त, राशिफल, पूरा पंचांग देखें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/aaj-ka-panchang-17-april-2026-वैशाख-अमावस्या-पर-अमृत-और-सर्वार्थ-सिद्धि-योग-स्नान-दान-मुहूर्त-राशिफल-पूरा-पंचांग-देखें</link>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang, 17 अप्रैल 2026: वैशाख अमावस्या पितरों की तिथि है. पुराणों के अनुसार इस दिन पितर सूक्ष्म रूप में धरती पर आते हैं. इस दिन किया गया तर्पण, दान पितरों की आत्मा को शांति देता है और पूर्वजन परिवारजन को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. वैशाख अमावस्या को सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है.
आज का व्रत
वैशाख अमावस्या पर कई लोग व्रत भी करते हैं. मान्यता है इससे सुहागिन को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है. वैशाख अमावस्या पर जल से भरा घड़ा, सत्तू खासतौर पर दान किया जाता है.&amp;nbsp;

16 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 16 April 2026)



तिथि

अमावस्या (16 अप्रैल 2026, रात 8.11 - 17 अप्रैल 2026, शाम 5.21)



वार
शुक्रवार


नक्षत्र
रेवती


योग
वैधृति, अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग


सूर्योदय 
सुबह 6.01


सूर्यास्त
शाम 6.44


चंद्रोदय
नहीं


चंद्रोस्त
शाम 6.46


चंद्र राशि
मीन




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 5.54 - सुबह 10.44


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 9.34 - रात 10.57




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 10.44 - दोपहर 12.21


यमगण्ड काल
दोपहर 3.34 - शाम 5.51


गुलिक काल
सुबह 7.31- सुबह 09.07


आडल योग
सुबह 5.54 - दोपहर 12.02


पंचक
सुबह 5.54 - दोपहर 12.02




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 17 April 2026)




सूर्य
मेष


चंद्रमा
मीन


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



17 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष (Aries) -आज खुशियों भरा दिन रहेगा, सरकारी कार्यों में लाभ और ऑफिस में सम्मान मिलेगा. परिवार के साथ अच्छा समय बितेगा, स्वास्थ्य भी उत्तम रहेगा.
वृष (Taurus - आत्मविश्वास बढ़ेगा और पुरानी समस्याओं का समाधान मिलेगा. परिवार में धार्मिक माहौल रहेगा, आर्थिक स्थिति स्थिर बनी रहेगी.
मिथुन (Gemini) - परिवार के साथ सुखद समय बितेगा, विद्यार्थियों को मेहनत बढ़ानी होगी. खर्चों पर नियंत्रण रखें और स्वास्थ्य का ध्यान दें.
कर्क (Cancer) - सभी कार्य सफल होंगे और बिजनेस में नए अवसर मिलेंगे. परिवार में खुशखबरी मिल सकती है, ऊर्जा बनी रहेगी.
सिंह (Leo) - सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सफलता मिलेगी, कर्ज से राहत मिलेगी. परिवार का सहयोग मिलेगा और मानसिक शांति बनी रहेगी.
कन्या (Virgo) - एकाग्रता से किया गया काम सफलता दिलाएगा, जिम्मेदारियां बढ़ेंगी. निवेश से पहले सलाह लें और स्वास्थ्य पर ध्यान दें.
तुला (Libra) - व्यापार में बड़ा लाभ होगा और योजनाएं सफल रहेंगी. पारिवारिक विवाद सुलझेंगे, यात्रा टालना बेहतर रहेगा.
वृश्चिक (Scorpio) - दिन खुशियों से भरा रहेगा, कार्यक्षेत्र में राहत मिलेगी. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा.
धनु (Sagittarius) - घर खरीदने के लिए दिन शुभ है, करियर में नए अवसर मिलेंगे.परिवार का साथ मिलेगा और स्वास्थ्य में सुधार होगा.
मकर (Capricorn) - बिजनेस में लाभ होगा और नई खुशियां जीवन में आएंगी. रिश्ते मजबूत होंगे और ऊर्जा बनी रहेगी.
कुंभ (Aquarius) - अचानक धन लाभ के योग हैं और नई स्किल सीखने का मौका मिलेगा. दोस्तों के साथ समय अच्छा बीतेगा और मन प्रसन्न रहेगा.
मीन (Pisces) - दिन अच्छा रहेगा लेकिन पैसों के मामलों में सावधानी रखें. करीबियों की सलाह लाभ देगी और स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है.

आज का उपाय&amp;nbsp;
गाय, कौवे और कुत्ते को भोजन कराएंं. चिड़िया को दाना डालें और पानी पिलाएं
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
शुक्रवार के दिन सिल्वर और सफेद रंग शुभ माना जाता है.
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ में 4 नहीं बल्कि 8 बड़े मंगल ? नोट करें तारीख, हनुमान जी की पूजा का खास महत्व



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, वैशाख, अमावस्या, पर, अमृत, और, सर्वार्थ, सिद्धि, योग, स्नान-दान, मुहूर्त, राशिफल, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
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        <title>Using Phone On Toilet Risks: टॉयलेट सीट पर बैठकर चलाते हैं फोन, डॉक्टर से जानें यह आदत आपको कैसे कर रही बीमार?</title>
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        <description><![CDATA[ Is It Bad To Use Phone On Toilet: हम में से ज्यादातर लोग ये आदत अपना चुके हैं कि टॉयलेट पर बैठते ही फोन निकाल लेना और फिर कब 10 से 15 मिनट निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता. यह आदत देखने में बिल्कुल सामान्य और हार्मलेस &amp;nbsp;लगती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह आपकी पेल्विक हेल्थ को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही है. चलिए आपको बताते हैं कि इससे क्या नुकसान होते हैं.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. प्रमोद कदम ने TOI को बताया कि &amp;nbsp;टॉयलेट का एक खास मकसद होता है और जितना ज्यादा समय आप वहां बिताते हैं, उतना ही शरीर पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है. जब आप टॉयलेट सीट पर बैठते हैं, तो आपके रेक्टम को वैसा सपोर्ट नहीं मिलता जैसा एक सामान्य कुर्सी पर मिलता है. ऐसे में ग्रैविटी के कारण खून नीचे की तरफ जमा होने लगता है और समय बढ़ने के साथ प्रेशर भी बढ़ता जाता है.
अगर आप 10 मिनट से ज्यादा बैठते हैं, तो यह दबाव आपके ब्लड वेसल्स पर असर डालने लगता है. इसका सबसे आम नतीजा होता है पाइल्स. यह दरअसल एनल कैनाल की सूजी हुई नसें होती हैं, जिनमें दर्द और ब्लीडिंग हो सकती है.
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बॉडी की नैचुरल सिस्टम भी प्रभावित
लेकिन समस्या सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती एक्सपर्ट बताते हैं कि फोन चलाते समय हमारी बॉडी की नैचुरल सिस्टम भी प्रभावित होती है. जब आप स्क्रीन में खो जाते हैं, तो शरीर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं. इससे मल ज्यादा देर तक कोलन में रहता है, सूख जाता है और बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. यही कारण है कि कब्ज, पाइल्स और एनल फिशर जैसी समस्याएं बढ़ती हैं.
क्या है बचने का तरीका?
डॉक्टर इसे स्ट्रेनिंग पैराडॉक्स भी कहते हैं. यानी आप जानबूझकर जोर नहीं लगा रहे होते, फिर भी लंबे समय तक बैठने से पेल्विक फ्लोर पर लगातार हल्का दबाव बना रहता है. इससे एनल कैनाल की नाजुक परत में दरार आ सकती है, जिसे फिशर कहा जाता है और यह काफी दर्दनाक होता है. इससे बचने का सबसे आसान तरीका है कि 5 मिनट का नियम. डॉ कदम के अनुसार, अगर 5 मिनट में काम पूरा नहीं होता, तो उठ जाना चाहिए और बाद में फिर कोशिश करनी चाहिए. टॉयलेट को लाइब्रेरी या ऑफिस की तरह इस्तेमाल करना सही नहीं है.
फोन को टॉयलेट से दूर रखा जाए
इस नियम को अपनाने के लिए सबसे जरूरी है कि फोन को टॉयलेट से दूर रखा जाए. बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के आप अपने शरीर के संकेतों को बेहतर समझ पाएंगे और जरूरत से ज्यादा समय भी नहीं बिताएंगे. इसके अलावा, बैठने का तरीका भी मायने रखता है. पैरों के नीचे छोटा स्टूल रखने से शरीर का एंगल सही हो जाता है, जिससे प्रक्रिया आसान और जल्दी पूरी होती है. डॉक्टर्स यह भी सलाह देते हैं कि शरीर के संकेतों को कभी नजरअंदाज न करें, पर्याप्त पानी पिएं और फाइबर युक्त खाना खाएं. ये छोटी-छोटी आदतें मिलकर बड़ी समस्याओं से बचाती हैं. टॉयलेट पर फोन चलाना भले ही मामूली लगे, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है. इसलिए अगली बार जब आप टॉयलेट जाएं, तो फोन बाहर ही छोड़ दें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Air New Zealand Skynest: इकोनॉमी में भी बंक&amp;बेड देने की तैयारी कर रही यह एयरलाइन, जानें किस रूट पर मिलेगा फायदा?</title>
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        <description><![CDATA[ What Is Air New Zealand Skynest: लंबी दूरी की फ्लाइट्स को लेकर एक बड़ा बदलाव आने वाला है. एयर न्यूजीलैंड ने अपने इकोनॉमी स्काईनेस्ट का एलान किया है, जो आने वाले समय में लंबी हवाई यात्राओं का अनुभव पूरी तरह बदल सकता है. एयरलाइन के प्रेस रिलीज के अनुसार, यह एक बंक बेड स्टाइल स्लीपिंग सिस्टम है, जिसे खास तौर पर इकॉनमी और प्रीमियम इकॉनमी क्लास के यात्रियों के लिए तैयार किया गया है, खासकर उन फ्लाइट्स के लिए जो 16 से 18 घंटे या उससे ज्यादा लंबी होती हैं.
कब शुरू होगी बुकिंग?
एयरलाइन ने बताया है कि स्काईनेस्ट की बुकिंग 18 मई 2026 से शुरू होगी और यह सुविधा नवंबर 2026 से उनकी नई Boeing 787-9 Dreamliner फ्लाइट्स में उपलब्ध होगी. यह दुनिया में अपनी तरह का पहला ऐसा कॉन्सेप्ट है, जिसे कई सालों की रिसर्च और टेस्टिंग के बाद तैयार किया गया है.
क्या होगी सुविधा?
Skynest के तहत विमान में कुल छह स्लीपिंग पॉड्स होंगे. ये छोटे-छोटे बंक बेड की तरह होंगे, जहां यात्री पूरी तरह लेटकर आराम कर सकेंगे, जो कि आमतौर पर इकॉनमी सीट्स में संभव नहीं होता. हर पॉड की लंबाई लगभग 6.6 फीट (करीब 203 सेमी) और चौड़ाई करीब 64 सेमी होगी, ताकि सीमित जगह में भी आरामदायक नींद मिल सके. यात्रियों को इसमें ताजा बिस्तर दिया जाएगा, जिसमें तकिया, चादर और कंबल शामिल होंगे. इसके अलावा एक छोटा अमेनिटी किट भी मिलेगा, जिसमें आई मास्क, मोजे और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स होंगे. हर पॉड में प्राइवेसी के लिए पर्दे, पढ़ने के लिए लाइट, वेंटिलेशन, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट, सीट बेल्ट और ईयरप्लग जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी.
टिकट का दाम कितना होगा?
हालांकि यह सुविधा टिकट के बेस प्राइस में शामिल नहीं होगी. इसे इस्तेमाल करने के लिए यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा. जानकारी के मुताबिक, एक यात्री चार घंटे के लिए करीब लगभग 28,000 में बुक कर सकता है. हर यात्री को एक ही सेशन बुक करने की अनुमति होगी और एक फ्लाइट में दो सेशन उपलब्ध होंगे, यानी कुल मिलाकर 12 यात्री इस सुविधा का फायदा उठा सकेंगे.
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क्या है रूल इसके लिए?
एयरलाइन ने इसके लिए कुछ नियम भी तय किए हैं, जैसे पॉड के अंदर खाना खाने की अनुमति नहीं होगी और एक पॉड में दो लोग साथ नहीं रह सकते. हालांकि खर्राटे लेने पर कोई रोक नहीं है. यह सुविधा सबसे पहले उन रूट्स पर शुरू की जाएगी जो दुनिया की सबसे लंबी फ्लाइट्स में गिने जाते हैं, जैसे ऑकलैंड से न्यूयॉर्क का रूट, जो करीब 17&amp;ndash;18 घंटे का होता है. एयरलाइन के सीईओ निखिल रविशंक के अनुसार, यह पहल यात्रियों को लंबी उड़ानों में बेहतर आराम देने के लिए की गई है, जिससे यात्रा ज्यादा सहज और सुविधाजनक बन सके.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Akshaya Tritiya 2026 पर लक्ष्मी जी को बुलाना चाहते हैं घर में, तो गरुड़ पुराण का ये उपाय करें?</title>
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        <description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है. इस दिन किए गए दान, जप और पूजन का फल &#039;अक्षय&#039; यानी कभी भी खत्म न होने वाला माना जाता है. खास तौर से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा इस दिन अत्यंत फलदायी मानी गई है.
इस साल अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल 2026, रविवार के दिन पड़ रहा है. अक्षय तृतीया के मौके पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए गरुड़ पुराण से जुड़ा खास उपाय करने से फायदा मिल सकता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.&amp;nbsp;
गरुड़ पुराण में लक्ष्मी साधना का वास्तविक मतलब
भगवान विष्णु द्वारा बताए गए सिद्धांतों में धन और समृद्धि को मात्र मंत्रों से नहीं, बल्कि धर्म, कर्म और सदाचार से भी जोड़ा गया है.&amp;nbsp;
गरुड़ पुराण में साफ-साफ लिखा है कि,&amp;nbsp;
जहां सच, स्वच्छता और दान का प्रभाव अधिक होता है, मां लक्ष्मी वहीं वास करती हैं.लालच, आलस्य और अधर्म से लक्ष्मी जी नाराज हो जाती हैं.&amp;nbsp;
मतलब साफ है कि, केवल नाम जपना पर्याप्त नहीं है, जीवनशैली भी वैसी होनी चाहिए.&amp;nbsp;

मां लक्ष्मी के 5 स्वरूप क्या दर्शाते हैं?
मां लक्ष्मी के अलग-अलग स्वरूप जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े होते हैं-
आदिलक्ष्मीयह मूल शक्ति का प्रतीक है. जीवन में स्थिरता और शांति देती हैं.
धन लक्ष्मीधन, वैभव और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक
धान्यलक्ष्मीअन्न, भोजन और पोषण का प्रतिनिधित्व करती हैं.&amp;nbsp;
गजलक्ष्मीराजसी सुख, प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रतीक&amp;nbsp;
वीरलक्ष्मीसाहस, शक्ति और निर्णय क्षमता प्रदान करती हैं.&amp;nbsp;
सबसे जरूरी बात यह है कि मां लक्ष्मी के नाम ये चमत्कारी नहीं हैं, बल्कि जीवन के अलग-अलग पहलुओं को बैलेंस करने का प्रतीक हैं.&amp;nbsp;
मोबाइल, टीवी या फ्रिज खरीदने का प्लान? अप्रैल 2026 में जानें कौन-सी तारीख है सबसे शुभ?
अक्षय तृतीया पर कैसे करें जाप?
अक्षय तृतीया के मौके पर अगर आप सच में इसका लाभ लेना चाहते हैं, तो इसे सही तरीके से जाप करें-
सुबह नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें.&amp;nbsp;घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं.&amp;nbsp;चावल (अक्षत) को शुद्धता के तौर पर हाथ में लें.&amp;nbsp;एक-एक करके इन 5 नामों का जाप करेंं.&amp;nbsp;आखिर में चावल को एक लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या पूजा कक्ष में रखें.&amp;nbsp;
क्या अक्षय तृतीया पर इन उपायों से पैसा डबल हो सकता है? जवाब है बिल्कुल भी नहीं.
कोई भी शास्त्र यह दावा नहीं करता कि केवल मंत्र जपने से पैसा डबल हो जाएगा. अगर ऐसा होता, तो दुनिया में हर कोई अमीर होता.
लक्ष्मी जी की कृपा का असल मतलब है,&amp;nbsp;

सही अवसर मिलना
मेहनत का फल मिलना
आर्थिक स्थिरता आना

अक्षय तृतीया पर मां लक्ष्मी के इन 5 नामों का जाप करने से सकारात्मक और आध्यात्म के प्रति रुचि बढ़ती है.
अगर आप सच में चाहते हैं कि, लक्ष्मी आपके घर में स्थायी रूप से आएं, तो&amp;nbsp;

ईमानदारी के साथ अपना काम करें.&amp;nbsp;
घर को साफ रखें.
जरूरतमंदों की मदद करें.&amp;nbsp;
नियमित रूप से पूजा-पाठ करें.&amp;nbsp;

Akshaya Tritiya 2026: बच्चों के लिए क्या खरीदें ? ये 5 चीजें बनेंगी उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive. com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Sock Odor Removal: मोजे की बदबू से होना पड़ता है शर्मिंदा? इस आसान ट्रिक से पूरी तरह मिल जाएगी निजात</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sock-odor-removal-मोजे-की-बदबू-से-होना-पड़ता-है-शर्मिंदा-इस-आसान-ट्रिक-से-पूरी-तरह-मिल-जाएगी-निजात</link>
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        <description><![CDATA[ 
Sock Odor Removal: अक्सर आपने भी महसूस किया होगा कि जूते उतारते ही पैरों और मोजों से आने वाली तेज बदबू आपके लिए परेशानी बन जाती होगी. यह न सिर्फ खुद को असहज महसूस कराती है, बल्कि आसपास बैठे लोग को भी परेशान कर देती है. गर्मियों में यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि ज्यादा पसीना और नमी बैक्टीरिया को पनपने का मौका देती है, जो बदबू का कारण बनते हैं. दरअसल पैरों में शरीर के अन्य हिस्सों के तुलना में ज्यादा पसीने की ग्रंथियां होती है. जब पूरे दिन पैर जूते और और मोजों के अंदर बंद रहते हैं, तो हवा नहीं लग पाती है और पसीना सूख नहीं पाता. यही नमी बैक्टीरिया के अनुकूल माहौल बनाती है जो पसीने को तोड़कर बदबू पैदा करते हैं. ऐसे में अगर मोजे सही तरीके के न हो या उन्हें समय पर न बदला जाए तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपको भी मोजे की बदबू से शर्मिंदा होना पड़ता है तो किस आसन ट्रिक से आपको इस शर्मिंदगी से पूरी तरह निजात मिल जाएगी?
मोजे की बदबू से बचने के आसान उपाय
इस समस्या से राहत पाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे पहले पैरों की सफाई का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. रोजाना पैरों को साबुन से धोकर अच्छी तरह सुखाएं, ताकि नमी न रहे. वहीं अगर पैरों में ज्यादा पसीना आता है, तो मोजे पहनने से पहले टैल्कम पाउडर या एंटी फंगल पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे पसीना कम होगा और बदबू भी नहीं आएगी. कई लोग मोजे पर हल्का परफ्यूम छिड़क कर भी बदबू को कंट्रोल करते हैं.
सही मोजे और जूते का चयन भी जरूरी
गर्मियों में हल्के और सांस लेने वाली फैब्रिक के मोजे पहनना ज्यादा फायदेमंद रहता है. कॉटन या बांस फाइबर वाले मोजे पसीने को सोखते हैं और पैरों को सुखा रखते हैं. वहीं नायलॉन या सिंथेटिक मोजे बदबू को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इनमें हवा का प्रवाह कम होता है. इसके अलावा जूते भी ऐसे पहनने चाहिए, जो हवादार हो और ज्यादा टाइट न हो. तंग जूतों में पसीना ज्यादा आता है और बदबू जल्दी बनने लगती है. जूते को रोजाना पहनने के बजाए बीच-बीच में बदलकर भी पहनना चाहिए, ताकि उनमें जमा नमी को सूखने के लिए समय मिल सके.
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जूते की सफाई भी जरूरी
जूते और उनके इनसोल को समय-समय पर साफ करना जरूरी है. जूते को धोने के बाद धूप या खुली हवा में अच्छी तरह सुखाना चाहिए. नमी खत्म होने से बैक्टीरिया पनप नहीं पाते और बदबू कम हो जाती है. एक आसान घरेलू ट्रिक के तौर पर रात में जूते के अंदर टी बैग रखकर छोड़ दिया जाए, तो सुबह तक बदबू काफी हद तक कम हो जाती है. इसके अलावा बेकिंग सोडा, नमक या अखबार जूतों की नमी सोखने में मदद करते हैं.
एसेंशियल ऑयल और डियोड्रेंट का इस्तेमाल
मोजों या जूते में लैवेंडर या टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें डालने से भी बदबू कम की जा सकती है. इनमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं. वहीं पैरों पर डियोड्रेंट या फुट स्प्रे का इस्तेमाल भी कारगर साबित होता है.
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        <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 00:30:03 +0530</pubDate>
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        <title>Yuzvendra Chahal House: 25 करोड़ का बंगला और धांसू कार कलेक्शन, राजाओं जैसी जिंदगी जीते हैं चहल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/yuzvendra-chahal-house-25-करोड़-का-बंगला-और-धांसू-कार-कलेक्शन-राजाओं-जैसी-जिंदगी-जीते-हैं-चहल</link>
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        <description><![CDATA[ Yuzvendra Chahal House: 25 करोड़ का बंगला और धांसू कार कलेक्शन, राजाओं जैसी जिंदगी जीते हैं चहल ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 16:31:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>देश की इस झील को क्यों कहा जाता है ‘आंसुओं का पानी’, जानें किस राज्य में मौजूद है यह जगह?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/देश-की-इस-झील-को-क्यों-कहा-जाता-है-आंसुओं-का-पानी-जानें-किस-राज्य-में-मौजूद-है-यह-जगह</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/देश-की-इस-झील-को-क्यों-कहा-जाता-है-आंसुओं-का-पानी-जानें-किस-राज्य-में-मौजूद-है-यह-जगह</guid>
        <description><![CDATA[ भारत में कई ऐसी खूबसूरत जगह है, जो अपनी सुंदरता के लिए तो प्रसिद्ध हैं ही लेकिन उनकी अनोखी कहानियां भी बहुत प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक उमियम(Umiam) लेक है, जो &quot;आंसुओं का पानी&quot; या &quot;water of tears&quot; के नाम से जाना जाता है. यह लेक दुनिया भर में अपनी सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस झील को आंसुओं से क्यों जोड़ा जाता है, आइए जानते हैं?
उमियम झील का नाम और उसकी कहानी
उमियम नाम खासी भाषा से आया है. खासी भाषा में &amp;nbsp;Um का अर्थ है पानी और iam का अर्थ है आंसू, इसलिए इसे water of tears कहा जाता है. साथ ही इस झील को &#039;आंसुओं का पानी&#039; कहे जाने के पीछे एक पुरानी कहानी भी है. खासी लोककथा के अनुसार, इस झील का निर्माण दुख की वजह से हुआ था. मानते हैं कि दो बहनें स्वर्ग से धरती पर घूमने आई थी,लेकिन रास्ते में एक बहन खो गई. दूसरी बहन के बहुत ढूंढने पर भी वह कहीं नहीं मिली. &amp;nbsp;इस दुख में वह इतना रोई कि उसके आंसुओं से यह झील का निर्माण हुआ. यही वजह है कि इसे &#039;आंसुओं का पानी&#039; कहा जाता है. यह कहानी इस झील को एक रहस्यमयी रूप देती है. स्थानीय लोग इसे &#039;बारापानी&#039; के नाम से भी जानते हैं, जिसका अर्थ होता है &#039;बड़ा पानी&#039;.
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मेघालय में स्थित यह खूबसूरत झील
यह खूबसूरत झील मेघालय राज्य में स्थित है और शिलॉन्ग से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है. चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ों का नजारा और साफ पानी इस जगह को बेहद आकर्षक बना देता है. यही वजह है कि यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं. यहां का शांत वातावरण और ठंडी हवाएं लोगों को सुकून देती हैं. &amp;nbsp;जो लोग शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय शांति में बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह जगह बेहद खास साबित हो सकती है.
घूमने का सही समय और अनुभव
उमियम झील घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल के बीच होता है. इसे सबसे अच्छा इसलिए माना जाता है क्योंकि इस दौरान बारिश कम होती है. वहीं जो यात्री बारिश पसंद करते हैं, वे मानसून के दौरान भी अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं, क्योंकि उस समय भी यह बहुत सुंदर होती है.
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 16:31:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>देश, की, इस, झील, को, क्यों, कहा, जाता, है, ‘आंसुओं, का, पानी’, जानें, किस, राज्य, में, मौजूद, है, यह, जगह</media:keywords>
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        <title>Shani Dev: नौकरी, पैसा और पारिवारिक समस्या..कहीं शनि आपसे नाराज तो नहीं, न करें ये गलती</title>
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        <description><![CDATA[ Shani Dev:&amp;nbsp;शनि कर्म प्रधान देवता है. उनका न्याय किसी व्यक्ति के पक्ष या विरोध में नहीं, बल्कि उसके कर्मों के आधार पर होता है. आज के दौर में लोग दूसरों के आगे निकलने की होड़ में कुछ ऐसी छोटी गलतिया कर जात हैं जो उनके तमाम सुखों पर ग्रहण लगा देते हैं.
मेहनत करने के बाद भी पैसा नहीं बचता, आए दिन किसी बीमारी के शिकार रहते हैं, मानसिक तौर पर समस्याएं कम होने का नाम नहीं लेती. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा तब होता है जब शनि आपसे नाराज हों. कौन से ऐसे लोग हैं जिसने शनि नाराज रहते हैं. क्या है शनि को प्रसन्न करने के उपाय जान लें.

&amp;nbsp;
शनि देव किन लोगों से नाराज रहते हैं
अन्याय और धोखा करने वाले लोग
जो लोग दूसरों के साथ छल, कपट या बेईमानी करते हैं, शनि देव उन्हें सबक सिखाते हैं.

क्या सजा देते हैं - धोखा देने पर शनि वित्तीय नुकसान, कानूनी परेशानी या प्रतिष्ठा गिरने के रूप में दंड देता है.

गरीब और कमजोरों को सताने वाले
शनि देव को &amp;ldquo;श्रमिकों और निम्न वर्ग का कारक&amp;rdquo; माना जाता है. जरूरतमंदों, बुजुर्गों, या मजदूर वर्ग का अपमान करने वालों पर शनि की विशेष दृष्टि कठोर मानी जाती है.
क्या सजा देते है - हंसती खेलते जीवन में अचानक कष्ट आना, बीमारी, नौकरी में समस्या या सामाजिक अपमान होना.
अहंकारी और घमंडी व्यक्ति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो लोग अपनी सफलता पर घमंड करते हैं और दूसरों को नीचा दिखाते हैं, वे शनि के अप्रसन्न होते हैं. अक्सर व्यक्ति पैसे और पद के मद में चूर होकर दूसरों को तन या मन से कष्ट पहुंचाता है.

क्या सजा देते हैं - शनि देव व्यक्ति को विनम्रता सिखाते हैं, इन अप्रिय कार्य करने पर शनि व्यक्ति को अर्श से फर्श पर ले आते हैं. इसलिए कई बार अचानक सफलता के बाद गिरावट भी शनि का ही खेल माना जाता है.

बुजुर्गों और गुरुओं का अनादर
बड़ों, माता-पिता या गुरु का अपमान करना शनि की दृष्टि में गंभीर दोष माना जाता है.

क्या सजा देते हैं - बेरोजार रहना, मानसिक प्रताड़ना, परिवार में क्लेश, तलाक तक की नौबत आ जाती है.

मेहनत से बचने वाले (आलसी लोग)
शनि देव कर्म और परिश्रम के प्रतीक हैं, इसलिए कामचोरी करने वालों को कष्ट झेलना पड़ सकता है. शनि देव बताते हैं बिना मेहनत के स्थायी सफलता नहीं मिलती.

क्या सजा देते हैं - काम में रुकावट, प्रमोशन में देरी, बार-बार असफलता

गलत आदतों और बुरे कर्मों में लिप्त लोग
नशा, गलत संगति, अनैतिक कार्य - ये सब शनि के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाते हैं. आज के दौर में व्यक्ति किसी न किसी तरह के नशे में डूबा है.ज्योतिष में यही उसकी असंतुष्टी और तनाव का कारण माना गया है.

क्या सजा देते हैं - आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य समस्या, मानसिक अशांति

सच्चे न्यायाधीश कहलाए
शनि देव का न्याय डराने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सही दिशा में ले जाने के लिए होता है.शनि देव अमीर-गरीब, बड़ा-छोटा नहीं देखते. हर किसी के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार करते हैं इसलिए इन्हें सच्चा न्यायाधीश कहा जाता है. वे हमें सिखाते हैं कि जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 16:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Heat Impact On Sperm Quality; गर्मियों में धूप में बाइक खड़ी करने से पहले 100 बार सोचना, वरना नहीं बन पाओगे पापा</title>
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        <description><![CDATA[ Can Heat Damage Sperm Quality In Men: गर्मियों में तेज धूप में बाइक खड़ी करना कई लोगों के लिए रोज की बात है. जल्दी में हम अक्सर इस बात पर ध्यान ही नहीं देते कि कुछ घंटों तक धूप में खड़ी रही बाइक कितनी ज्यादा गर्म हो जाती है. लेकिन शायद ही कोई यह सोचता हो कि इसका असर सिर्फ बाइक पर नहीं, बल्कि आपकी सेहत खासतौर पर पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है.&amp;nbsp;
क्या होता है असर?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट cloudninecare शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में स्पर्म सेल्स तापमान के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं. यही वजह है कि टेस्टिकल्स शरीर के बाहर होते हैं, ताकि उनका तापमान शरीर से 2&amp;ndash;4 डिग्री कम बना रहे. यह संतुलन स्पर्म के सही विकास के लिए बेहद जरूरी होता है. लेकिन जब आप धूप से गर्म चीजों के संपर्क में आते हैं, तो गर्मी सीधे इस हिस्से का तापमान बढ़ा देती है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक ज्यादा गर्मी के संपर्क में रहने से स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या दोनों पर असर पड़ सकता है. हाई टेम्परेचर स्पर्म की मूवमेंट &amp;nbsp;को धीमा कर देता है, जिससे उनकी स्टिकल्स तक पहुंचने की क्षमता कम हो जाती है. इतना ही नहीं, ज्यादा गर्मी स्पर्म के डीएनए को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे उनकी संरचना असामान्य हो जाती है.
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हार्मोनल बैलेंस पर भी असर
गर्मी का असर सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. लगातार शरीर के उस हिस्से का तापमान बढ़ने से हार्मोनल बैलेंस भी बिगड़ सकता है. टेस्टोस्टेरोन जैसे जरूरी हार्मोन, जो स्पर्म प्रोडक्शन को नियंत्रित करते हैं, उनका स्तर प्रभावित हो सकता है. इसके साथ ही, ज्यादा गर्मी से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो टेस्टिकल्स को नुकसान पहुंचा सकता है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन भी एक बड़ी समस्या बन जाता है. शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड फ्लो और हार्मोन का ट्रांसपोर्ट प्रभावित होता है. इससे स्पर्म बनने की प्रक्रिया और भी कमजोर हो सकती है. याद रखें, सीमन का बड़ा हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए शरीर का हाइड्रेटेड रहना बहुत जरूरी है.
इन चीजों का भी होता है असर
इसके अलावा टाइट कपड़े पहनना, लंबे समय तक गर्म सीट पर बैठना और लगातार धूप में रहना ये सभी चीजें मिलकर स्थिति को और खराब कर सकती हैं. यही कारण है कि एक्सपर्ट्स गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने और ज्यादा हीट एक्सपोजर से बचने की सलाह देते हैं. अगर आप रोजाना बाइक इस्तेमाल करते हैं, तो कोशिश करें कि उसे सीधी धूप में लंबे समय तक खड़ा न रखें. कवर का इस्तेमाल करें या छांव में पार्क करें. बाइक चलाने से पहले सीट को थोड़ा ठंडा होने दें. इसके साथ ही, ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें और शरीर को हाइड्रेट रखें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Machail Mata Mandir: जम्मू के मचैल माता मंदिर के पट खुले, अब दर्शन के लिए नया नियम लागू, ऐसे मिलेगी अनुमति</title>
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        <description><![CDATA[ Jammu Machail Mata Mandir: जम्मू के किश्तवाड़ जिले में पवित्र माता मचैल के मंदिर को दर्शनों के लिए खोला गया है. पिछले साल अगस्त महीने में किश्तवाड़ जिले के चिशोती में माता मचैल के मंदिर के पास बादल फटने से 69 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी.&amp;nbsp;
मचैल माता मंदिर में दर्शन फिर से शुरू
किश्तवाड़ जिले की मचैल घाटी के आध्यात्मिक क्षेत्र में स्थित पवित्र श्री मचैल माता मंदिर, बैसाखी के शुभ अवसर पर तीर्थयात्रियों के लिए फिर से खोल दिया गया. इसके साथ ही वार्षिक श्री मचैल माता यात्रा 2026 की शुरुआत भी हो गई.
इस धार्मिक आयोजन के दौरान, धार्मिक अनुष्ठानों और एक भव्य मेले के बीच, भक्तों की भारी भीड़ के बीच देवी मचैल माता (दुर्गा) की मूर्ति को स्थानीय पुजारी पहलवान सिंह के घर से मुख्य मंदिर में स्थानांतरित किया गया.
प्रशासन के अनुसार बिना पंजीकरण के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसके लिए गौरी शंकर मंदिर सरकोट और गुलाबगढ़ में मौके पर ही पंजीकरण के लिए काउंटर स्थापित किए जाएंगे.&amp;nbsp;यह जानकारी दी गई कि अनुमति प्राप्त होने के बाद हेलीकॉप्टर सेवाएं भी शुरू की जाएंगी.
&amp;nbsp;मचैल माता मंदिर का महत्व
श्री मचैल माता यात्रा का गहरा धार्मिक महत्व है और यह हर साल पूरे देश से लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. संभागीय आयुक्त ने सभी तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें.
मंदिर का इतिहास
इस मंदिर का इतिहास 1834 ई. में हुई जोरावर सिंह कालूरिया की लद्दाख विजय से जुड़ा माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार युद्ध पर जाने से पहले उन्होंने मचैल माता का आशीर्वाद लिया था और विजय के बाद वो माता के गहरे भक्त बन गए.
हर साल अगस्त महीने में यहां मचैल माता की पवित्र यात्रा आयोजित होती है, जिसमें दूर दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. साल 1987 में भद्रवाह के ठाकुर कुलवीर सिंह ने &amp;lsquo;छड़ी यात्रा&amp;rsquo; की शुरुआत की थी. यह यात्रा भद्रवाह के चिनोट से शुरू होकर मचैल तक जाती है और अब यह एक प्रमुख धार्मिक परंपरा बन चुकी है.
Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक के गुरु भैरवैक्य मंदिर की क्या है खासियत, आज पीएम मोदी ने किया उद्घाटन


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Washing Machine Stain Problem: क्या आपकी वॉशिंग मशीन भी लगा रही कपड़ों पर दाग, जानें क्यों होता है ऐसा?</title>
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        <description><![CDATA[ Why Do Clothes Come Out Dirty After Washing: कपड़े धोने के बाद उन पर अजीब दाग दिखना एक आम समस्या बनती जा रही है, जिससे कई लोग परेशान रहते हैं. अक्सर हम इसका कारण डिटर्जेंट या कपड़ों को मान लेते हैं, लेकिन हकीकत में समस्या वॉशिंग मशीन के अंदर ही छिपी होती है. एक्सपर्ट के मुताबिक, मशीन के अंदर जमा गंदगी, बैक्टीरिया और फफूंदी इसकी मुख्य वजह हो सकते हैं. दरअसल, हर वॉशिंग मशीन के अंदर समय के साथ डिटर्जेंट, सॉफ्टनर और गंदगी की परत जमा होने लगती है. यह जमा हुआ मलबा धीरे-धीरे ढीला होकर कपड़ों पर चिपक जाता है, जिससे उन पर ग्रे या अजीब दाग दिखाई देने लगते हैं. खासकर मशीन के ड्रम, रबर सील और डिटर्जेंट ट्रे में यह समस्या ज्यादा होती है.
क्या निकला रिसर्च में?
फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, वॉशिंग मशीन बैक्टीरिया का घर बन सकती है, खासकर उन जगहों पर जहां नमी बनी रहती है. यह बैक्टीरिया धुलाई के दौरान कपड़ों में ट्रांसफर हो सकते हैं, जिससे साफ कपड़ों पर भी दाग या दुर्गंध आ सकती है. इसके अलावा, ज्यादा डिटर्जेंट का इस्तेमाल भी समस्या को बढ़ा देता है। जरूरत से ज्यादा साबुन झाग बनाता है, जो पूरी तरह धुल नहीं पाता और कपड़ों पर निशान छोड़ देता है. इसी तरह, सॉफ्टनर को सीधे कपड़ों पर डालना भी दाग का कारण बन सकता है.
कपड़े भरना सबसे बड़ी गलती
मशीन में जरूरत से ज्यादा कपड़े भरना भी एक बड़ी गलती है. जब कपड़ों को घूमने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो वे ठीक से साफ नहीं हो पाते और गंदगी उन पर रह जाती है. फफूंदी भी इस समस्या में अहम भूमिका निभाती है. धुलाई के बाद मशीन का रबर हिस्सा अक्सर गीला रह जाता है, जो फंगस के लिए आदर्श जगह बन जाता है. समय के साथ यह न सिर्फ बदबू पैदा करता है, बल्कि कपड़ों पर दाग भी छोड़ सकता है.
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मशीन खराबी की तरफ इशारा
कई बार दाग मशीन की खराबी की ओर भी इशारा करते हैं. जैसे जंग के दाग इस बात का संकेत हो सकते हैं कि मशीन के अंदरूनी हिस्से खराब हो रहे हैं. वहीं, हार्ड वॉटर में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व भी कपड़ों पर सफेद या फीके निशान छोड़ सकते हैं. इस समस्या से बचने के लिए नियमित सफाई बेहद जरूरी है. महीने में एक बार गर्म पानी और मशीन क्लीनर से वॉशिंग मशीन को साफ करना चाहिए. इसके साथ ही, सही मात्रा में डिटर्जेंट का इस्तेमाल और मशीन को ओवरलोड न करना भी जरूरी है.
&amp;nbsp;वॉटर सॉफ्टनर का यूज
अगर आपके घर में हार्ड वॉटर की समस्या है, तो वॉटर सॉफ्टनर का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. इसके अलावा, मशीन के रबर सील, फिल्टर और अन्य हिस्सों की समय-समय पर जांच करते रहना चाहिए. थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से आप अपने कपड़ों को दाग-धब्बों से बचा सकते हैं और वॉशिंग मशीन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Tips To Keep Curd Fresh Longer: ऐसे जमाएंगे तो कभी खट्टा नहीं होगा दही, जान लें ट्रिक</title>
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        <description><![CDATA[ How To Stop Curd From Getting Sour In Summer: गर्मियों में दही खाना लगभग हर घर में रोज का हिस्सा होता है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पाचन को भी दुरुस्त रखता है. लेकिन जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, एक परेशानी भी बढ़ जाती है दही का जल्दी खट्टा हो जाना. कई बार रात में जमाया दही सुबह तक इतना खट्टा हो जाता है कि खाने का मन ही नहीं करता. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान तरीकों से आप दही को ज्यादा देर तक ताज़ा और सही स्वाद वाला रख सकते हैं.
किस बात का रखें ध्यान?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि दही का खट्टा होना एक नेचुरल प्रक्रिया है. दूध में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलते हैं, जिससे दही का स्वाद हल्का खट्टा होता है. लेकिन ज्यादा गर्मी में यही प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे दही जल्दी खट्टा हो जाता है. दही जमाने के लिए दूध का चुनाव बहुत अहम होता है. हमेशा ताजा और अच्छे क्वालिटी वाला दूध इस्तेमाल करें. एक्सपायरी के करीब दूध में बैक्टीरिया पहले से ज्यादा होते हैं, जिससे दही जल्दी खराब हो सकता है. दूध को अच्छे से उबालकर हल्का गुनगुना होने पर ही उसमें जामन स्टार्टर डालें.
साफ-सफाई का रखें ध्यान
साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखें. जिन बर्तनों में दही जमा रहे हैं, वे पूरी तरह साफ और सूखे होने चाहिए. थोड़ी सी भी गंदगी या बैक्टीरिया दही के स्वाद और टेक्सचर को खराब कर सकते हैं. गर्मी में सही जगह चुनना भी जरूरी है. दही को ऐसी जगह रखें जहां बहुत ज्यादा गर्मी या सीधी धूप न हो. बहुत गर्म माहौल में दही जल्दी खट्टा हो जाता है. अगर किचन ज्यादा गर्म है, तो घर के किसी ठंडे कोने में दही जमाना बेहतर रहेगा.
एक तरीका यह भी
एक छोटा सा आसान तरीका यह भी है कि दूध में दही जमाने से पहले एक चम्मच चीनी मिला दें. इससे अच्छे बैक्टीरिया को संतुलित तरीके से बढ़ने में मदद मिलती है और दही जल्दी खट्टा नहीं होता. इसके साथ ही, हमेशा ताज़ा दही का जामन इस्तेमाल करें. दही जमने के बाद उसे बाहर ज्यादा देर न रखें. तुरंत फ्रिज में रख दें. ठंडा तापमान बैक्टीरिया की गति को धीमा कर देता है, जिससे दही का स्वाद लंबे समय तक सही रहता है. ध्यान रखें कि दही को हमेशा एयरटाइट डिब्बे में रखें, ताकि उसमें बाहर की गंध न जाए.
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&amp;nbsp;चीनी मिलाकर भी जमा सकते हैं दही 
अगर आप मीठा दही पसंद करते हैं, तो दूध में पहले से चीनी मिलाकर भी दही जमा सकते हैं. इससे स्वाद भी अच्छा रहेगा और खट्टापन भी कम लगेगा. दही को खट्टा होने से बचाना कोई मुश्किल काम नहीं है. बस सही दूध, साफ बर्तन, संतुलित तापमान और सही स्टोरेज का ध्यान रखें. इन छोटी-छोटी बातों को अपनाकर आप हर बार स्वादिष्ट, गाढ़ा और बिल्कुल सही दही तैयार कर सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Balcony Pigeon Control Tips: आपके घर की बालकनी को कबूतरों ने बना लिया है घर, जानें आसानी से भगाने का तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ How To Permanently Get Rid Of Pigeons From Balcony: अगर आप शहर में रहते हैं, तो ये नजारा आपके लिए नया नहीं होगा, बालकनी की रेलिंग, खिड़कियों या एसी पर बैठे कबूतर. देखने में भले ही ये शांत लगें, लेकिन धीरे-धीरे ये बड़ी परेशानी बन जाते हैं. कबूतरों की बीट दीवारों और फर्श को गंदा कर देती है और इसमें मौजूद बैक्टीरिया से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी हो सकते हैं. इतना ही नहीं, ये छोटी-छोटी जगहों में घोंसला बना लेते हैं और एक बार आना शुरू कर दें, तो इन्हें हटाना मुश्किल हो जाता है. लगातार आवाज, गंदगी और पंखों का फैलना घर की शांति बिगाड़ देता है.
अच्छी बात ये है कि कबूतरों को भगाने के लिए आपको कोई महंगा या नुकसानदायक तरीका अपनाने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान और सुरक्षित उपाय अपनाकर आप अपनी बालकनी को साफ और कबूतरों से मुक्त रख सकते हैं.
कैसे भगा सकते हैं कबूतरों को?&amp;nbsp;
होम टिप्स के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट के अनुसार, बर्ड स्पाइक्स और नेट्स पहले नम्बर पर आता है. ये आजकल सबसे असरदार उपायों में से एक हैं. स्पाइक्स प्लास्टिक या मेटल की नुकीली स्ट्रिप्स होती हैं, जिन्हें रेलिंग या खिड़की पर लगाया जाता है ताकि कबूतर वहां बैठ ही न सकें. वहीं, अगर आप पूरी तरह से कबूतरों की एंट्री रोकना चाहते हैं, तो बालकनी में नेट लगवाना सबसे बेहतर विकल्प है. अच्छी बात यह है कि ये तरीके पक्षियों को नुकसान नहीं पहुंचाते, सिर्फ उन्हें दूर रखते हैं.
चमकदार चीजों का इस्तेमाल
दूसरा आसान तरीका है चमकदार चीजों का इस्तेमाल. कबूतर ऐसी चीज़ों से दूर रहते हैं जो चमकती हों या हिलती-डुलती हों. आप पुराने सीडी, एल्युमिनियम फॉयल या चमकीले रिबन बालकनी में टांग सकते हैं. हवा के साथ इनकी हरकत और रोशनी का रिफ्लेक्शन कबूतरों को भ्रमित करता है और वे पास नहीं आते. चाहें तो विंड चाइम्स भी लगा सकते हैं, जो दिखने में अच्छे लगते हैं और काम भी करते हैं.
तेज गंध का इस्तेमाल
तीसरा उपाय है तेज गंध का इस्तेमाल. &amp;nbsp;कबूतरों को तीखी गंध बिल्कुल पसंद नहीं होती. आप बालकनी के किनारों पर हल्का सा मिर्च पाउडर या काली मिर्च छिड़क सकते हैं. इसके अलावा लहसुन या सिरके का पानी बनाकर स्प्रे करना भी कारगर रहता है. ये उपाय इंसानों के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन कबूतरों को दूर रखते हैं. सके साथ ही सबसे जरूरी बात है साफ-सफाई और खाने से दूरी. अगर आपकी बालकनी में खाना या दाने गिरते हैं, तो कबूतर बार-बार वहीं आएंगे. इसलिए ध्यान रखें कि वहां कोई खाने की चीज न हो. इसके साथ ही गमले, पुराने डिब्बे या ऐसी चीज़ें हटा दें, जहां वे घोंसला बना सकें.
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मोशन सेंसर या साउंड डिवाइस
अगर समस्या ज्यादा बढ़ गई है, तो आप मोशन सेंसर या साउंड डिवाइस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ये डिवाइस कबूतर के आते ही आवाज़ या हलचल पैदा करते हैं, जिससे वे डरकर भाग जाते हैं. कबूतरों को भगाने के लिए उन्हें नुकसान पहुंचाना जरूरी नहीं है. सही तरीकों से आप अपनी बालकनी को साफ, शांत और सुरक्षित रख सकते हैं.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 20:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kitchen Cleaning Tips: चाय छानते छानते &amp;apos;चाय की छन्नी&amp;apos; के बंद हो गए हैं छेद, इस ट्रिक से तुरंत हो जाएगी साफ</title>
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        <description><![CDATA[ Kitchen Cleaning Tips: चाय छानते छानते &#039;चाय की छन्नी&#039; के बंद हो गए हैं छेद, इस ट्रिक से तुरंत हो जाएगी साफ ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kitchen Safety Tips: चॉपिंग बोर्ड खिसकने से कट सकता है हाथ! क्या आपने ट्राई किया यह वायरल हैक?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Stop Cutting Board From Slipping: रसोई में काम करते समय छोटी-सी चूक भी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है. मान लीजिए आप आराम से प्याज काट रहे हैं और अचानक आपका कटिंग बोर्ड काउंटर के किनारे की तरफ खिसकने लगता है, यह वो पल है जिसे हर होम कुक अच्छे से समझता है. हम महंगे चाकू खरीदते हैं, ऑर्गेनिक सब्जियां लाते हैं, लेकिन किचन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक अस्थिर काम करने की जगह पर ध्यान ही नहीं देते. दिलचस्प बात यह है कि इसका समाधान किसी महंगे प्रोडक्ट में नहीं, बल्कि एक बेहद साधारण चीज में छिपा है, वह है हल्का गीला किचन टॉवल. चलिए बताते हैं कि यह कैसे काम करता है.&amp;nbsp;
हल्का गीला किचन टॉवल कैसे काम करता है?
कटिंग बोर्ड के नीचे एक हल्का नम कपड़ा रखने से वह अपनी जगह पर मजबूती से टिक जाता है. यह तरीका जितना आसान लगता है, उतना ही प्रभावी भी है और इसके पीछे साफ-साफ साइंस काम करता है. जब सूखा लकड़ी या प्लास्टिक का बोर्ड चिकनी सतह पर रखा होता है, तो उनके बीच घर्षण बहुत कम होता है, जिससे बोर्ड आसानी से खिसक सकता है. लेकिन जैसे ही आप उसके नीचे गीला कपड़ा रखते हैं, पानी की वजह से सतहों के बीच पकड़ बढ़ जाती है.
किन समस्याओं के लिए कारगर उपाय?
यह तरीका सिर्फ फिसलन रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग सतहों की समस्याओं को भी संभालता है. एवाल्यूएशन ऑफ डिफरेंट टाइप्स ऑफ वेजिटेबल चॉपिंग बोर्ड्स नाम की स्टडी में बताया गया है कि बोर्ड की सतह और उसकी बनावट उसके इस्तेमाल को प्रभावित करती है. लकड़ी के बोर्ड भले ही खूबसूरत लगते हैं, लेकिन अगर वे सीधे पानी के संपर्क में ज्यादा समय तक रहें तो खराब हो सकते हैं. ऐसे में हल्का गीला टॉवल उन्हें न सिर्फ स्थिर रखता है, बल्कि अतिरिक्त नमी से बचाने में भी मदद करता है.
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लकड़ी और प्लास्टिक बोर्ड को लेकर हमेशा बहस रहती है, लेकिन दोनों ही मामलों में यह ट्रिक काम आती है.स्टडी के मुताबिक लकड़ी बैक्टीरिया को सोख लेती है और सूखने पर उन्हें खत्म भी कर देती है, इसलिए गीले के बजाय हल्के नम कपड़े का इस्तेमाल करना बेहतर होता है. दूसरी ओर, प्लास्टिक बोर्ड नीचे से काफी स्मूद होते हैं और जल्दी फिसलते हैं, इसलिए उनके लिए यह तरीका और भी जरूरी हो जाता है.
कैसे कर सकते हैं यूज?
इसे अपनाना बेहद आसान है, एक पतला कपड़ा लें, उसे हल्का गीला करें और अच्छी तरह निचोड़ लें. फिर उसे काउंटर पर फैलाकर उसके ऊपर कटिंग बोर्ड रखें. हल्का दबाने पर बोर्ड अपनी जगह पर टिक जाएगा. हालांकि सिलिकॉन मैट या रबर बेस वाले बोर्ड जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन यह साधारण तरीका अपनी सादगी और असर के कारण आज भी सबसे भरोसेमंद है. सिर्फ कुछ सेकंड की यह तैयारी आपकी कुकिंग को ज्यादा सुरक्षित, तेज और प्रोफेशनल बना सकती है.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Happy Bengali New Year 2026 Live: शुभो नबो बरसो!</title>
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        <description><![CDATA[ Happy Bengali New Year 2026 Live:&amp;nbsp;पोईला बैसाख पर हाल खाता रस्म भी निभाई जाती है. इस दिन व्यापारी वर्ग के लोग अपने पुराने खाते को बंद कर नया खाता तैयार करते हैं. इसे ही हाल खाता कहा जाता है.
डिजिटल दौर जहां ऑनलाइट पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है, इसके बाद भी पोईला बैसाख पर यह परंपरा पूर्ण श्रद्धा से निभाई जाती है. इसके साथ ही पोईला बोइशाख के दिन को मांगलिक कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन लोग गृह प्रवेश, खरीदारी, नया व्यापार शुरू करना, घर खरीदने आदि जैसे काम भी करते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Happy Bengali New Year 2026 Live: पोइला बैसाख यानी बंगाली नववर्ष 15 अप्रैल</title>
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डिजिटल दौर जहां ऑनलाइट पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है, इसके बाद भी पोईला बैसाख पर यह परंपरा पूर्ण श्रद्धा से निभाई जाती है. इसके साथ ही पोईला बोइशाख के दिन को मांगलिक कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन लोग गृह प्रवेश, खरीदारी, नया व्यापार शुरू करना, घर खरीदने आदि जैसे काम भी करते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:30:03 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>14 अप्रैल को खत्म होगा खरमास, 20 से गूंजेंगी शहनाइयां, शादी के लिए मिलेंगे कई शुभ मुहूर्त!</title>
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        <description><![CDATA[ 14 अप्रैल से खरमास समाप्त हो रहा है, जिसके बाद अब मांगलिक आयोजन की शुरुआत हो जाएगी. विशेष तौर पर हिंदू धर्म में खरमास की अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य और मांगलिक आयोजन नहीं किए जाते हैं. ऐसे में 14 अप्रैल की तिथि के बाद वह लोग, जो मांगलिक आयोजन को संपन्न करने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए अच्छी खबर है.
खरमास समाप्त होने के ठीक 6 दिन बाद 20 अप्रैल से शादी के भी लग्न मुहूर्त शुरू हो रहे हैं.
20 अप्रैल से शुरू हो जाएंगे शादी के मुहूर्त
काशी की परंपराओं के जानकार ज्योतिष विद पं. संजय उपाध्याय ने एबीपी लाइव से बातचीत के दौरान बताया कि 14 अप्रैल को सुबह 11:45 बजे, मंगलवार के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर रहा है. इस अवधि के बाद से ही खरमास समाप्त हो जाएगा.
विशेष तौर पर हिंदू धर्म में खरमास में किसी भी मांगलिक आयोजन और शुभ कार्य करने की परंपरा नहीं रही है. ऐसे में लोग इसके ठीक बाद अच्छे लग्न मुहूर्त का इंतजार करते हैं.
खरमास समाप्त होने के 6 दिन बाद इस बार शादी का लग्न मुहूर्त शुरू हो रहा है. 20 अप्रैल से लोगों के घरों में शादी अथवा अन्य मांगलिक आयोजन शुरू हो जाएंगे. 14 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास की तिथि रही.
Vivah Muhurat April 2026: 14 अप्रैल को खरमास खत्म, 19 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त, जानें इस माह कब-कब हैं शादियां
अप्रैल माह में शादी लग्न की अनेक तिथियां
जानकारों की मानें तो इस वर्ष बीते वर्षों की तुलना में शादी व मांगलिक आयोजन के लिए लग्न तिथियां अधिक हैं. खरमास समाप्त होने के बाद 20 अप्रैल, 21 अप्रैल, 25 अप्रैल, 27, 28, 29 अप्रैल को शादी के लिए उचित नक्षत्र, अच्छा मुहूर्त और तिथि निर्धारित है.
ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इन दिनों बड़ी संख्या में वैवाहिक आयोजन संपन्न किए जाएंगे.
बनारसी पंचांग के अनुसार, इस बार शादी से जुड़े 38 शुभ मुहूर्त हैं. इन मुहूर्तों में विवाह करना बेहद शुभ रहेगा.&amp;nbsp;
वहीं मिथिला पंचांग के अनुसार कुल 21 लग्न शुभ हैं, जिनमें शादी-विवाह किया जा सकता है. लोग अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार तिथि का चयन कर सकते हैं.&amp;nbsp;
एक बार मलमास खत्म हुआ तो फिर चातुर्मास शुरू हो जाएगा. ऐसे में करीब 4 महीने तक किसी भी तरह के मांगलिक कार्य का आयोजन पूर्ण रूप से बंद हो जाएगा.&amp;nbsp;
विवाह का शुभ मुहूर्त अप्रेल से जुलाई तक
बनारसी पंचांग के अनुसार, अप्रैल में शादी के लिए 15, 16, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29, 30&amp;nbsp;
मई में 1, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14
जून में 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 27, 28, 29
जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 12
हिंदू पंचांग के अनुसार, खरमास के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्य करने से बचा जाता है. लेकिन आज खरमास समाप्त हो चुका है. एक महीने से रुके हुए तमाम शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे.
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, खरमास का काल अशुभ माना जाता है, इसलिए इस अवधि में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ और नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
गृह प्रवेश में थोड़ा अधूरा घर क्यों माना जाता है शुभ? जानिए इसके पीछे की मान्यता
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:18 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>अप्रैल, को, खत्म, होगा, खरमास, से, गूंजेंगी, शहनाइयां, शादी, के, लिए, मिलेंगे, कई, शुभ, मुहूर्त</media:keywords>
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        <title>Aluminium Foil Door Trick: दरवाजे के हैंडल पर क्यों लपेट रहे हैं लोग एल्युमिनियम फॉयल? वजह जानकर चौंक जाएंगे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/aluminium-foil-door-trick-दरवाजे-के-हैंडल-पर-क्यों-लपेट-रहे-हैं-लोग-एल्युमिनियम-फॉयल-वजह-जानकर-चौंक-जाएंगे</link>
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        <description><![CDATA[ Does Aluminium Foil On Door Handle Prevent Theft: घर की सुरक्षा के लिए लोग आमतौर पर महंगे कैमरे, अलार्म सिस्टम या स्मार्ट डिवाइस लगाने के बारे में सोचते हैं, लेकिन हाल के दिनों में एक दिलचस्प और सस्ता तरीका भी चर्चा में है, वह है दरवाजे के हैंडल पर एल्युमिनियम फॉयल लपेटना. चलिए आपको बताते हैं कि यह कैसे काम करता है और यह सुरक्षा के लिए काफी है.&amp;nbsp;
कैसे करता है यह काम
पहली नजर में यह तरीका थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक सीधी और समझदार सोच काम करती है. फॉयल दरअसल टैंपर इंडिकेटर की तरह काम करता है. अगर कोई व्यक्ति दरवाजे को छेड़ता है, तो फॉयल तुरंत फट जाती है या अपनी जगह से हट जाती है. इससे घर के अंदर मौजूद व्यक्ति को साफ संकेत मिल जाता है कि किसी ने दरवाजे को खोलने की कोशिश की है. इसके अलावा, फॉयल के हिलने या फटने पर हल्की आवाज भी होती है, जो एक तरह का अलार्म बन जाती है.
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किन जगहों के लिए यह तरीका कारगर
यह तरीका खासतौर पर घर के पिछले दरवाजों, साइड एंट्री या उन जगहों के लिए उपयोगी माना जाता है, जहां निगरानी कम होती है. इस ट्रिक के पीछे सिर्फ घरेलू जुगाड़ नहीं, बल्कि कुछ साइंटफिक और साइकोलॉजिस्ट आधार भी हैं. प्रसेप्चुअल डिट्रेंस एमोंग एक्टिव रेजिडेंशियल बर्गलर्स नाम की एक स्टडी बताती है कि चोर किसी भी घर में घुसने से पहले यह आकलन करते हैं कि पकड़े जाने का खतरा कितना है. अगर उन्हें जरा सा भी संकेत मिलता है कि घर की निगरानी हो रही है, तो वे अक्सर उस जगह को छोड़ देते हैं.&amp;nbsp;
इसी तरह क्राइम प्रिवेंशन इन रेजिडेंशियल एरियाज पर हुई एक अन्य रिसर्च में पाया गया कि आसपास का माहौल और छोटे-छोटे संकेत भी अपराध को रोकने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. फॉयल की चमक और उसकी आवाज, दोनों मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं जिससे किसी अनजान व्यक्ति को लगे कि यहां सतर्कता है.&amp;nbsp;
क्या होता है साइकोलॉजिकल पहलू&amp;nbsp;
फॉयल का एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी होता है। इसकी चमक कई बार कैमरे या सेंसर जैसी चीज़ों का भ्रम पैदा करती है, जिससे संभावित चोर को लगता है कि वह नजर में है. जर्नल ऑफ एनवायरनमेंटल साइकोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, ऐसे संकेत जो निगरानी का एहसास कराते हैं, किसी भी संपत्ति को अपराधियों के लिए कम आकर्षक बना देते हैं.
क्या यह पूरी तरह सुरक्षा का पैमाना
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सिर्फ फॉयल लगाना पूरी सुरक्षा का समाधान नहीं है. मजबूत ताले, सीसीटीवी कैमरे और अलार्म सिस्टम जैसी बेसिक सुरक्षा व्यवस्था हमेशा जरूरी रहती है. लेकिन जब इन उपायों के साथ फॉयल जैसी छोटी तकनीक जोड़ दी जाए, तो सुरक्षा का स्तर और बेहतर हो सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बेहद सस्ता, आसान और तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. खासकर किराए के घरों में, जहां स्थायी बदलाव करना संभव नहीं होता, वहां यह एक अच्छा विकल्प बन सकता है.
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Amit Shah Diabetes Recovery: 6 साल में डायबिटीज से कैसे उबरे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह? खुद बयां किया जंग जीतने का किस्सा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/amit-shah-diabetes-recovery-6-साल-में-डायबिटीज-से-कैसे-उबरे-केंद्रीय-गृह-मंत्री-अमित-शाह-खुद-बयां-किया-जंग-जीतने-का-किस्सा</link>
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        <description><![CDATA[ Diabetes Control Without Insulin: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी सेहत को लेकर एक प्रेरणादायक अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि कैसे एक समय डायबिटीज से जूझने के बाद उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव कर न सिर्फ बीमारी पर काबू पाया, बल्कि खुद को पहले से ज्यादा फिट बना लिया. चलिए आपको बताते हैं कि उन्होने डायबिटीज से लड़ने में क्या उपाय अपनाया.
अमित शाह ने क्या कहा?
वर्ल्ड लीवर डे के मौके 2025 पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि &quot;मैं डायबिटिक था, लेकिन मई 2020 के बाद मैंने अपनी दिनचर्या में बड़े बदलाव किए.&quot; उन्होंने बताया कि सही मात्रा में नींद लेना, पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार अपनाना और नियमित एक्सरसाइज करना उनकी सेहत के लिए गेमचेंजर साबित हुआ. उन्होंने आगे कहा कि &quot;आज मैं आपके सामने बिना किसी एलोपैथिक दवा और इंसुलिन के खड़ा हूं.&quot;&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

#WATCH | Delhi: At the event organised by ILBS (Institute of Liver and Biliary Sciences) on World Liver Day, Union Home Minister Amit Shah says, &quot;... I made a huge change in my life since May 2020 till today. The required amount of sleep, water and diet, and routine exercise has&amp;hellip; pic.twitter.com/HxDZgv0YGh
&amp;mdash; ANI (@ANI) April 19, 2025



टी-छोटी आदतों को लगातार अपनाना
उन्होंने यह भी बताया कि इन बदलावों की वजह से उनका वजन 20 किलो से ज्यादा कम हुआ. उनका मानना है कि कोई भी बड़ा बदलाव अचानक नहीं होता, बल्कि छोटी-छोटी आदतों को लगातार अपनाने से ही लंबे समय तक असर दिखता है.
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखना जरूरी है. अपने शरीर के लिए रोजाना दो घंटे एक्सरसाइज और दिमाग के लिए कम से कम छह घंटे की नींद जरूर लें। यह मेरे अपने अनुभव से निकली सलाह है.
 डिसिप्लिन और संतुलन
अगर उनकी इस जर्नी से कुछ सीखना हो, तो सबसे जरूरी है डिसिप्लिन और संतुलन. अच्छी नींद, भरपूर पानी और घर का संतुलित खाना शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा शुगर से दूरी बनाकर रखना भी उतना ही जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए. यह जरूरी नहीं कि हमेशा जिम ही जाएं, आप वॉक, योग, या कोई खेल भी चुन सकते हैं. सबसे अहम है निरंतरता. इसके अलावा, जल्दी परिणाम पाने के चक्कर में क्रैश डाइट या शॉर्टकट अपनाने से बचना चाहिए. असली बदलाव धीरे-धीरे आता है और वही टिकाऊ होता है.
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लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करना चाहिए?
उन्होंने यह भी बताया कि लिवर का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. इसके लिए शराब का सीमित सेवन, ज्यादा तैलीय खाने से बचाव और हरी सब्जियां, खट्टे फल और हल्दी जैसे खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है. अंत में उनका यही संदेश था कि शुरुआत छोटी करें, लेकिन लगातार करें. एक-एक बदलाव जोड़ते जाएं, और समय के साथ यही आदतें आपकी सेहत को पूरी तरह बदल सकती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:16 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Amit, Shah, Diabetes, Recovery:, साल, में, डायबिटीज, से, कैसे, उबरे, केंद्रीय, गृह, मंत्री, अमित, शाह, खुद, बयां, किया, जंग, जीतने, का, किस्सा</media:keywords>
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        <title>Satuan 2026: असकतियन के तीन नहान, खिचड़ी फगुआ आ सतुआन, जानें सतुआन पर्व की परंपरा, महत्व और दान</title>
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        <description><![CDATA[ Satuan Sankranti 2026: सूर्य का गोचर जब मेष राशि में होता है तब नए सौर वर्ष (Solar New Year 2026) की शुरुआत होती है और कई राज्यों में इस दिन से नववर्ष की शुरुआत होती है. 14 अप्रैल को सुबह 09 बजकर 38 मिनट पर ग्रहों से राजा सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर चुके है.
नए सौर वर्ष में तमिलनाडु, पंजाब, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा जैसे कई राज्यों में नए वर्ष की शुरुआत होती है. इसी तरह बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस दिन सतुआन का पर्व मनाया जाता है. आज मंगलवार 14 अप्रैल 2026 को सतुआन का त्योहार मनाया जा रहा है. इसे सतुआनी, सत्तू पर्व या सतुआन संक्रांति जैसे नामों से भी जाना जाता है.
सतुआन पर्व का महत्व
सतुआन पर्व का त्योहार ग्रीष्ण ऋतु के स्वागत करता है. इसलिए इस पर्व में लोग विशेष रूप से सत्तू, कच्चे आम, मूली, खीरा-ककड़ी और गुड़ का सेवन करते हैं. साथ ही सतुआन पर्व पर लोग सत्तू, गुड़, चना, पंखा, जल से भरा घड़ा, आम और मौसमी फलों का दान करते हैं. सतुआन पर्व पर दिया गया यह दान अक्षय पुण्य के समान माना जाता है.
सतुआन का पर्व नई फसल के आगमन का भी प्रतीक है. यह त्योहार सूर्य देव को समर्पित है. सतुआन पर्व पर लोग सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं और उनसे अच्छी फसल, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं.&amp;nbsp;
असकतियन के तीन नहान, खिंचड़ी, फगुआ आ सतुआन
भोजपुरी संस्कृति में यह कहावत काफी प्रचलित है. मेष संक्रांति (Mesh Sankranti) या सतुआन के दिन लोग कहते हैं- जब कवनो आदमी ना नहाला, साफ सुथरा ना रहेला त ओकरा बारे में एगो कहावत कहल जाला कि- असकतियन के तीन नहान, खिचड़ी, फगुआ आ सतुआन.
अर्थ है कि, आलसी लोग जोकि नहाने या साफ-सुथरा रहने मे आलस दिखाते हैं, वो भी साल में तीन बार जरूर नहाते हैं. वो तीन दिन हैं- मकर संक्रांति, फगुआ (होली) आ सतुआन और वही सतुआन का दिन आज है. सतुआन पर लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं.
सुपर फूड का सत्तू
बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में गर्मी (Summer) की शुरुआत होते ही लोग अपने आहार और पेय में सत्तू को शामिल करते है. चना, जौ और मकई से बने सत्तू को सुपर फूड कहा जाता है. सत्तू में प्रोटीन, फाइबर और अन्य पौषक तत्व होते हैं जो शरीर को ऊर्जा देता है. विज्ञान के अनुसार, सत्तू की तासीर ठंडी होती है. इसलिए गर्मी या लू (Heat Wave) के दिनों में इसका सेवन करने से शरीर आंतरिक रूप से ठंडा रहता है. साथ ही हल्का होने के कारण जल्दी पचता है.&amp;nbsp;
गुड़, मूली और कच्चे आम में भी औषधीय गुण
सतुआन पर्व पर सत्तू के साथ ही गुड़, मूली और कच्चे आम का सेवन करने की भी परपंरा है. इन सभी में औषधीय गुण पाए जाते हैं जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं. गुड़ में आयरन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व होता है. कच्चे आम में विटामिन सी का अच्छा स्रोत होता है. साथ ही कच्चे आम में विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं. वहीं मूली की बात करें तो यह औषधीय गुणों से भरपूर है और सेहत के लिए फायदेमंद भी है. सतुआन पर्व में इन चीजों के सेवन&amp;nbsp; की परंपरा के कारण ही यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और ग्रीष्म ऋतु में खुद को मौसम के अनुसार ढालने का संदेश भी देता है.
ये भी पढ़ें: Solar New Year 2026: सूर्य के मेष राशि में आते ही शुरू होगा नए ऊर्जा का दौर, शुभता के लिए करें ये कामDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:15 +0530</pubDate>
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        <title>Home Remedies For Cuts: चोट लगने पर भूल जाएंगे एंटीसेप्टिक लोशन, ये देसी नुस्खे फटाफट भर देते हैं घाव</title>
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        <description><![CDATA[ Benefits Of Raw Honey For Skin: शहद को हम अक्सर सिर्फ मिठास के लिए जानते हैं, लेकिन यह नेचुरल उपचार का एक बेहद असरदार तरीका भी है. आजकल छोटे-मोटे घावों के इलाज में शहद फिर से चर्चा में हैय जब बागवानी करते समय या घर के काम में हल्की खरोंच लगती है, तो हम आमतौर पर एंटीसेप्टिक लोशन की तरफ बढ़ते हैं, लेकिन अब कई लोग रसोई में रखे शहद को ही प्राथमिक उपचार के तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं.
पहले भी होते थे यूज
दरअसल, शहद का उपयोग घाव भरने के लिए कोई नया तरीका नहीं है. प्राचीन मिस्र और रोम में भी इसे त्वचा के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज भी इसे एक बेहतरीन प्राकृतिक हीलिंग एजेंट माना जाता है. इसकी खासियत इसके केमिकल कंपोजिशन में छिपी है. जैसे ही शहद को किसी ताजा घाव पर लगाया जाता है, यह एक सुरक्षा परत बना देता है, जो धूल और बैक्टीरिया से बचाती हैय इस बारे में हनी: एन एडवांस्ड एंटीमाइक्रोबियल एंड वूंड हीलिंग बायोमटेरियल फॉर टिशू इंजीनियरिंग एप्लिकेशंस नामक रिसर्च में विस्तार से बताया गया है.
&amp;nbsp;बैक्टीरिया को खत्म करने में मददगार
शहद की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह त्वचा की नमी के संपर्क में आते ही हाइड्रोजन पेरॉक्साइड बनाता है, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है. इसका असर बाजार में मिलने वाले केमिकल एंटीसेप्टिक जैसा ही होता है, लेकिन बिना जलन या दर्द के. इसके साथ ही, शहद का हल्का एसिडिक स्वभाव घाव के pH स्तर को कम कर देता है, जिससे बैक्टीरिया के लिए जीवित रहना मुश्किल हो जाता है.
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&amp;nbsp;घाव को नम बनाए रखने में भी मददगार
इतना ही नहीं, शहद घाव को नम बनाए रखने में भी मदद करता है. सूखा घाव अक्सर खुजली और पपड़ी बनने का कारण बनता है, जिससे नई त्वचा को नुकसान हो सकता है. इसके विपरीत, शहद नमी बनाए रखकर सेल्स को तेजी से जुड़ने में मदद करता है और घाव जल्दी भरता है. हनी, वूंड रिपेयर एंड रीजेनेरेटिव मेडिसिन में बताया गया है कि शहद नई सेल्स के विकास के लिए ऊर्जा का काम करता है. इसके साथ ही, यह सूजन को भी कम करता है. जब घाव लाल, गर्म और दर्दनाक लगता है, तो यह शरीर की सूजन प्रतिक्रिया होती है. &amp;nbsp;शहद इस सूजन को शांत करता है और फ्री रेडिकल्स को कम करके हीलिंग को तेज करता है.
कैसे कर सकते हैं इसका यूज?
घर पर शहद का इस्तेमाल करना आसान है. सबसे पहले घाव को साफ पानी से धो लें, ताकि गंदगी हट जाए. फिर उस पर शहद की एक पतली परत लगाएं. अगर जरूरत हो तो उस पर गॉज या पट्टी लगा सकते हैं, ताकि शहद अपनी जगह बना रहे। बेहतर परिणाम के लिए कच्चा या मेडिकल ग्रेड शहद इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इनमें एंजाइम और एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 08:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Katahal Biryani Recipe: घर पर ऐसे बनाएं कटहल की बिरयानी, नॉनवेज लवर्स के मुंह में भी आ जाएगा पानी</title>
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        <description><![CDATA[ Katahal Biryani Recipe: घर पर ऐसे बनाएं कटहल की बिरयानी, नॉनवेज लवर्स के मुंह में भी आ जाएगा पानी ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:23 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Aaj Ka Panchang 13 April 2026: आज पंचक और वरुथिनी एकादशी का संयोग, पूजा मुहूर्त, राशिफल, और पंचांग देखें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/aaj-ka-panchang-13-april-2026-आज-पंचक-और-वरुथिनी-एकादशी-का-संयोग-पूजा-मुहूर्त-राशिफल-और-पंचांग-देखें</link>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 13 अप्रैल 2026: 13 अप्रैल 2026 को वैशाख की वरुथिनी एकादशी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं. कहा जाता है कि इस दिन किया गया पुण्य 1000 गायों के दान के बराबर फल देता है. इस दिन सोमवार भी है जो शिव साधना के लिए शुभ दिन है.&amp;nbsp;
आज का व्रत
आज वरुथिनी एकादशी व्रत के दिन विष्णु जी की पूजा में पीले फूल, गोपी चंदन का इस्तेमाल करें. सात्विक आहार लें और अगर व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो सोशल मीडिया और तमाम गैजेट्स से दूर बनाकर भी इस व्रत का पालन किया जा सकता है. मंत्रों का जाप करें.

13 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 13 April 2026)



तिथि

एकादशी (13 अप्रैल 2026, सुबह 1.16 - 14 अप्रैल 2026, सुबह 1.08)



वार
सोमवार


नक्षत्र
धनिष्ठा


योग
शुभ


सूर्योदय 
सुबह 6.01


सूर्यास्त
शाम 6.44


चंद्रोदय
सुबह 3.53, 14 अप्रैल


चंद्रोस्त
दोपहर 2.33


चंद्र राशि
कुंभ




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 9.10 - सुबह 10.46


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 6.45 - रात 8.10




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 7.34 - सुबह 9.10


यमगण्ड काल
सुबह&amp;nbsp; 10.46 - दोपहर 12.22&amp;nbsp;


गुलिक काल
दोपहर 1.58 - दोपहर 3.34


पंचक
पूरे दिन




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 13 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
कुंभ


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



13 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष (Aries) - आज पुरानी योजनाओं से लाभ होगा और कार्यक्षेत्र में मनचाहा काम मिलेगा. आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी, परिवार का सहयोग और मानसिक प्रसन्नता बनी रहेगी.
वृषभ (Taurus) - स्वास्थ्य और वाहन चलाने में सावधानी रखें, जोखिम भरे कार्यों से बचें. जीवनसाथी से मतभेद हो सकते हैं, निवेश सोच-समझकर करें.
मिथुन (Gemini) - परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और करियर में नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी. विदेशी लेनदेन और पुराने निवेश से लाभ मिलने के योग हैं.
कर्क (Cancer) - आर्थिक मामलों में सावधानी रखें और विवादों से दूर रहें. नए संपर्क लाभ देंगे, लेकिन तनाव से सिरदर्द हो सकता है.
सिंह (Leo) - रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आय में वृद्धि के योग हैं. परिवार का सहयोग मिलेगा, लेकिन किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.
कन्या (Virgo) - संपत्ति या वाहन खरीदने के योग हैं, सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी. करियर में प्रगति होगी, लेकिन परिवार की बातें गोपनीय रखें.
तुला (Libra) - साहस से कार्य पूरे होंगे और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. व्यापार में लाभ और नए आय स्रोत बनने के संकेत हैं.
वृश्चिक (Scorpio) - मिश्रित दिन रहेगा, परिवार में खुशी और थोड़ी चिंता दोनों रहेंगी. आत्मविश्वास बनाए रखें, मानसिक तनाव से बचने की जरूरत है.
धनु (Sagittarius) - करियर में रचनात्मकता दिखाने का मौका मिलेगा और लाभ होगा.परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा, निवेश में सलाह जरूरी है.
मकर (Capricorn) - रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखें. यात्रा के योग हैं, जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें.
कुंभ (Aquarius) - आमदनी के नए स्रोत बनेंगे और पुराने निवेश से फायदा होगा. परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय बीतेगा.
मीन (Pisces)- बकाया धन वापस मिल सकता है, खर्च और आय में संतुलन रखें. वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा, सकारात्मक सोच से लाभ होगा.

आज का उपाय&amp;nbsp;
&amp;ldquo;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&amp;rdquo; मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना चाहिए.
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 100 साल बाद &#039;अक्षय योग&#039;, इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, पंचक, और, वरुथिनी, एकादशी, का, संयोग, पूजा, मुहूर्त, राशिफल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
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        <title>कमर दर्द के साथ दिखें ये बदलाव तो तुरंत कराएं जांच, हो सकती है किडनी फेल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/कमर-दर्द-के-साथ-दिखें-ये-बदलाव-तो-तुरंत-कराएं-जांच-हो-सकती-है-किडनी-फेल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/कमर-दर्द-के-साथ-दिखें-ये-बदलाव-तो-तुरंत-कराएं-जांच-हो-सकती-है-किडनी-फेल</guid>
        <description><![CDATA[ How Back Pain Can Indicate Kidney Disease: पीठ दर्द आमतौर पर एक सामान्य समस्या माना जाता है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पोश्चर या ज्यादा एक्सरसाइज, इन वजहों को अक्सर इसका कारण मान लिया जाता है. ज्यादातर मामलों में यह सही भी होता है. लेकिन कई बार शरीर ऐसे संकेत देता है, जो सिर्फ मांसपेशियों तक सीमित नहीं होते. लगातार बना रहने वाला, अलग तरह का महसूस होने वाला दर्द किडनी से जुड़ी समस्या की ओर इशारा कर सकता है.&amp;nbsp;
मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर तरह का बैक पेन एक जैसा नहीं होता. मांसपेशियों से जुड़ा दर्द आमतौर पर मूवमेंट से बढ़ता है, आराम करने पर कम होता है और गर्म सिकाई या स्ट्रेचिंग से राहत मिलती है. लेकिन किडनी से जुड़ा दर्द अलग तरह का होता है कि यह गहराई में महसूस होता है, मूवमेंट से ज्यादा प्रभावित नहीं होता और आराम करने पर भी आसानी से नहीं जाता. यही फर्क इसे पहचानने में अहम बनाता है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. रतन झा ने TOI को बताया कि अक्सर बैक पेन को मसल्स की समस्या मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, खासकर जब यह धीरे-धीरे शुरू होता है. लेकिन किडनी से जुड़ा दर्द अलग व्यवहार करता है, जिसे समझना जरूरी है.&amp;nbsp;
क्या होते हैं किडनी दिक्कतें?
किडनी से जुड़ी समस्याएं शुरुआत में तेज लक्षणों के साथ नहीं आतीं। यह धीरे-धीरे बढ़ती हैं और सामान्य परेशानियों के पीछे छिप जाती हैं. पेशाब के पैटर्न में बदलाव, जलन, पेशाब का रंग गहरा होना या आंखों और पैरों के आसपास हल्की सूजन, ये सभी संकेत हो सकते हैं कि समस्या सिर्फ पीठ दर्द तक सीमित नहीं है. इसके अलावा लगातार थकान या शरीर में भारीपन महसूस होना भी एक संकेत हो सकता है.
&amp;nbsp;इसे भी पढ़ें - &amp;nbsp;ग्रेड-1 फैटी लिवर में फायदेमंद हो सकता है मेथी का पानी, जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे
डॉ. हिमा दीप्ति अल्ला बताती हैं कि किडनी से जुड़ा दर्द हमेशा तेज नहीं होता. यह अक्सर कमर या साइड में हल्का लेकिन लगातार रहने वाला दर्द होता है, जिसे लोग पोश्चर या लंबे समय तक बैठने का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.&amp;nbsp;
शरीर देता है चेतावनी
कई बार शरीर छोटे-छोटे बदलावों के जरिए चेतावनी देता है.जैसे झागदार पेशाब, ऐसा महसूस होना कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ या ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव. ये लक्षण आमतौर पर लोग रोजमर्रा में नोटिस नहीं करते, लेकिन यही शुरुआती संकेत हो सकते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के आंकड़ों के मुताबिक, क्रॉनिक किडनी डिजीज अक्सर शुरुआती स्टेज में इसलिए पकड़ में नहीं आती क्योंकि इसके लक्षण बहुत हल्के या अस्पष्ट होते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि हमारी रोज की आदतें भी किडनी हेल्थ पर बड़ा असर डालती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:21 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>कमर, दर्द, के, साथ, दिखें, ये, बदलाव, तो, तुरंत, कराएं, जांच, हो, सकती, है, किडनी, फेल</media:keywords>
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        <title>Adi Shankaracharya Jayanti 2026: सनातन धर्म के मास्टर माइंड थे आदि शंकराचार्य, जानें 4 दिशाओं में क्यों बनाए चार धाम</title>
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        <description><![CDATA[ Adi Shankaracharya Jayanti 2026: सनातन धर्म में आदि शंकराचार्य को एक महान दार्शनिक, संत और धर्म सुधारक के रूप में जाना जाता है. शंकराचार्य जयंती 21 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन आदि शंकराचार्य की 1238वीं जन्म वर्षगांठ होगी. उन्होंने उस समय हिन्दु संस्कृति को पुनर्जीवित किया, जिस समय हिन्दु संस्कृति अपने पतन की ओर अग्रसर थी. अद्वैत वेदांत का प्रचार-प्रसार किया. आदि शंकराचार्य का इतिहास, उन्होंने भारत में मठों की स्थापना क्यों की आइए जानते हैं.
कौन है आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य 8वीं शताब्दी के महान हिंदू दार्शनिक थे, जिनका जन्म केरल के कालड़ी गांव में हुआ था. उनका पूरा नाम शंकर था और उन्हें &amp;ldquo;आदि&amp;rdquo; (प्रथम) शंकराचार्य इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने शंकराचार्य परंपरा की स्थापना की. इनके पिता शिवगुरु और माता आर्याम्बा थीं, आदि शंकराचार्य बचपन से ही असाधारण बुद्धिमत्ता के धनी थे. 8 वर्ष की आयु में ही वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया. कहा जाता है कि उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही संन्यास ले लिया और ज्ञान की खोज में निकल पड़े.
आदि शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में क्यों की मठों की स्थापना
समाज में धार्मिक भ्रम, अलग-अलग मतों के बीच टकराव और वेदों की सही शिक्षा का अभाव के चलते और इन चुनौतियों को दूर करने के लिए मठों की स्थापना आदि शंकराचार्य का एक दूरदर्शी कदम था. आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों दिशाओं में मठ (पीठ) केवल धार्मिक केंद्र बनाने के लिए नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा, संगठन और ज्ञान के प्रसार के लिए स्थापित किए थे.

श्रृंगेरी मठ (दक्षिण &amp;ndash; कर्नाटक)
द्वारका मठ (पश्चिम &amp;ndash; गुजरात)
पुरी मठ (पूर्व &amp;ndash; ओडिशा)
ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ) (उत्तर &amp;ndash; उत्तराखंड)

आदि शंकराचार्य के विचार
आदि शंकराचार्य के रचित श्लोक आज भी आध्यात्मिक जीवन का मार्ग दिखाते हैं.
ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः॥
अर्थ: - ब्रह्म (ईश्वर) ही सत्य है. यह संसार मिथ्या (अस्थायी) है. जीव (आत्मा) और ब्रह्म अलग नहीं हैं.
भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढ़मते. सम्प्राप्ते सन्निहिते काले न हि न हि रक्षति डुकृञ्करणे॥
अर्थ -&amp;nbsp; हे मनुष्य! भगवान गोविंद (श्रीकृष्ण) का भजन करो. केवल व्याकरण या विद्या (ज्ञान का अहंकार) तुम्हें मृत्यु के समय नहीं बचा सकती. जीवन में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि भक्ति और ईश्वर से जुड़ाव भी आवश्यक है.
Akshaya Tritiya Muhurat 2026: अक्षय तृतीया पर कर रहे हैं गृह प्रवेश, तो इन 10 बातों का रखें ध्यान, मां लक्ष्मी घर में करेंगी वास


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:20 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Adi, Shankaracharya, Jayanti, 2026:, सनातन, धर्म, के, मास्टर, माइंड, थे, आदि, शंकराचार्य, जानें, दिशाओं, में, क्यों, बनाए, चार, धाम</media:keywords>
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        <title>Varuthini Ekadashi 2026 Paran: वरुथिनी एकादशी व्रत पारण 14 अप्रैल को, देखें पारण की विधि और मुहूर्त</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/varuthini-ekadashi-2026-paran-वरुथिनी-एकादशी-व्रत-पारण-14-अप्रैल-को-देखें-पारण-की-विधि-और-मुहूर्त</link>
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        <description><![CDATA[ Varuthini Ekadashi 2026 Paran: एकादशी व्रत को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाता है. मान्यता है कि, इस दिन किए व्रत और पूजा से पाप कर्मों का नाश होता है और सुख-समृद्धि बढ़ती है.
13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi 2026 )
सोमवार 13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी व्रत रखा जाएगा. पंचांग (Panchang) के अनुसार 13 अप्रैल पूर्वाह्न 01:17 पर एकादशी तिथि शुरू होकर 14 अप्रैल 2026 को पूर्वाह्न 01:09 तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार 13 अप्रैल को ही वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा और पूजा की जाएगी.
14 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी व्रत पारण (Varuthini Ekadashi 2026 Paran Time)
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में करने का विधान है. इसलिए वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण भी मंगलवार, 14 अप्रैल को किया जाएगा. पारण के लिए सुबह 06:54 से 08:31 तक का समय रहेगा. इस बीच आप एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं.
वरुथिनी एकादशी पारण विधि (Varuthini Ekadashi Vrat Paran)
कई लोग विधि-विधान से एकादशी का व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और सभी जरूरी नियमों का पालन भी करते हैं. लेकिन जाने-अनजाने में पारण में हुई छोटी सी भूल के कारण व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता. इसलिए&amp;nbsp;पारण यानी व्रत खोलने का सही समय और विधि जानना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि नियमों के अनुसार किया गया पारण ही एकादशी व्रत का पूर्ण फल देता है.
कैसे करें एकादशी व्रत का पारण (How to break the fast of Ekadashi)

वरुथिनी एकादशी व्रत पारण से पहले स्नान-दान और पूजन का विशेष महत्व होता है. पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की विधिवत पूजा करें. ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने के बाद ही वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण करें.
पारण यानी व्रत खोलने के लिए सबसे पहले अन्न या तामसिक चीजों को मुख में न रखें. सबसे पहले अपने मुख में तुलसी दल रखना चाहिए. लेकिन ध्यान रखें कि,&amp;nbsp;तुलसी को चबाएं नहीं बल्कि निगल जाएं. इसके अलावा पारण करने के लिए आप &amp;nbsp;आंवला या फिर भगवान को भोग लगाया हुआ प्रसाद भी ग्रहण कर सकते हैं.
एकादशी व्रत का पारण हमेशा सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि इससे पहले पारण की कोई विधि और नियम नहीं है. द्वादशी तिथि पर पारण के बाद चावल जरूर खाना चाहिए.
पारण के दिन तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज और मांसाहार से दूर रहना चाहिए. इसके अलावा क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें और दिनभर सकारात्मकता बनाए रखें. व्रत के बाद भी सात्विक जीवनशैली अपनाने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है.

&amp;nbsp;ये भी पढ़ें: Varuthini Ekadashi 2026: व्रत में स्मार्टफोन छोड़ें &#039;स्मार्ट-सोल&#039; बनें, वरुथिनी एकादशी पर अन्न के साथ गैजेट्स का त्याग भी जरूरीDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:30:18 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Varuthini, Ekadashi, 2026, Paran:, वरुथिनी, एकादशी, व्रत, पारण, अप्रैल, को, देखें, पारण, की, विधि, और, मुहूर्त</media:keywords>
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        <title>Asha Bhosle Death: मिर्च के अचार से कढ़ाई गोश्त तक... इन 5 डिश की दीवानी थीं आशा भोसले, जानें घर में कैसे बना सकती हैं इन्हें?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/asha-bhosle-death-मिर्च-के-अचार-से-कढ़ाई-गोश्त-तक-इन-5-डिश-की-दीवानी-थीं-आशा-भोसले-जानें-घर-में-कैसे-बना-सकती-हैं-इन्हें</link>
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        <description><![CDATA[ किसी के भी मन को अपने सुरों की झंकार से गूंजने पर मजबूर करने वाली आशा भोसले अब इस दुनिया में नहीं रहीं. उन्होंने 92 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया. क्या आप जानते हैं कि सुरों की यह रानी सिर्फ गाने में ही नहीं, बल्कि खाना बनाने में भी माहिर थीं. 92 साल की उम्र में भी आशा ताई खाने की इतनी शौकीन थीं कि उनके हाथ के बने व्यंजन देखकर सेलेब्स ललचा जाते थे. आइए आपको आशा भोंसले की उन पसंदीदा 5 डिश की रेसिपी बताते हैं, जिनसे वह किसी के भी दिल में जगह बना लेती थीं.&amp;nbsp;
खाना बनाकर मिटाती थीं थकान
आशा भोसले ने न सिर्फ हजारों गाने गाए, बल्कि खाना पकाने का शौक भी बचपन से था. शादी के बाद ससुराल में खाना बनाने का जुनून और बढ़ गया. उन्होंने दुबई और कुवैत में &#039;आशा&#039; नाम से रेस्टोरेंट भी खोले, जहां उनकी खुद की रेसिपी पर नॉर्थ इंडियन और महाराष्ट्रियन डिश परोसी जाती हैं. आशा ताई कहती थीं कि खाना बनाना उनकी थकान मिटाने का तरीका है. आइए जानते हैं उन पांच डिशेज के बारे में, जिनकी वह दीवानी थीं. इनकी रेसिपी बेहद आसान है और आप इन्हें अपने घर में भी बना सकती हैं.&amp;nbsp;
मिर्च का अचार: आशा ताई का रोज का साथी
आशा भोसले ने अपने कई इंटरव्यू में बताया था कि उनका सबसे पसंदीदा खाना सादा चावल, दाल और मिर्च का अचार है. यह अचार उनके लिए कम्फर्ट फूड था. जब भी वह थकी होती थीं तो यही खाती थीं. यह अचार तीखा, खट्टा और मसालेदार होता है. घर पर 10-15 दिन के लिए आसानी से बन जाता है.&amp;nbsp;
सामग्री (एक किलो अचार के लिए)

1 किलो हरी मिर्च (मोटी वाली, धोकर सुखा लें) &amp;nbsp;
4-5 बड़े चम्मच सरसों का तेल &amp;nbsp;
2 चम्मच हल्दी पाउडर &amp;nbsp;
4 चम्मच लाल मिर्च पाउडर &amp;nbsp;
3 चम्मच अमचूर पाउडर या नींबू का रस &amp;nbsp;
2 चम्मच मेथी दाना, 2 चम्मच राई &amp;nbsp;
1 चम्मच हींग, नमक स्वादानुसार &amp;nbsp;
1 चम्मच गरम मसाला &amp;nbsp;

बनाने का तरीका
सबसे पहले मिर्च को अच्छे से धो लें और सूखने दें. हर मिर्च को बीच से चीरा लगाएं. अब एक बर्तन में सरसों का तेल गर्म करें. उसमें मेथी, राई और हींग डालकर चटकने दें. आंच कम कर दें. अब हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, नमक, अमचूर और गरम मसाला डालकर मिलाएं. मिर्च डालकर अच्छे से मिला लें. 5-7 मिनट धीमी आंच पर पकाएं. ठंडा होने पर कांच के जार में भर लें. 2-3 दिन धूप में रखें और फिर फ्रिज में रखकर खाएं. चावल-दाल के साथ इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. आशा ताई इसे 10 दिन के लिए बनाती थीं.&amp;nbsp;
2. कढ़ाही गोश्त: सेलेब्स का फेवरेट
आशा भोसले ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी पसंदीदा डिश कढ़ाही गोश्त बेहद फेमस थी. यहां तक कि ऋषि कपूर जैसे स्टार उनसे यह डिश बार-बार बनवाते थे. ये मटन की मसालेदार और घी वाली डिश होती है, जिसे आप रेस्तरां स्टाइल में घर पर बना सकती हैं.
सामग्री (4 लोगों के लिए)

500 ग्राम मटन (बोनलेस या हड्डी वाला) &amp;nbsp;
4 बड़े प्याज (बारीक कटे) &amp;nbsp;
4 टमाटर (प्यूरी बनाकर) &amp;nbsp;
2 चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट &amp;nbsp;
1 चम्मच हल्दी, 2 चम्मच धनिया पाउडर &amp;nbsp;
1 चम्मच गरम मसाला, 2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर &amp;nbsp;
4-5 हरी मिर्च, कटे हुए &amp;nbsp;
4 चम्मच घी या तेल, नमक स्वादानुसार &amp;nbsp;
धनिया पत्ती सजाने के लिए &amp;nbsp;

बनाने का तरीका
प्रेशर कुकर में मटन, हल्दी, नमक और थोड़ा पानी डालकर 4-5 सीटी लगाएं. अलग बर्तन में घी गर्म करें. प्याज सुनहरा होने तक भूनें. अदरक-लहसुन पेस्ट डालें. टमाटर प्यूरी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर डालकर अच्छे से भूनें, जब तक तेल न छूटने लगे. अब पका हुआ मटन डालें. हरी मिर्च और गरम मसाला मिलाएं. 10 मिनट धीमी आंच पर पकाएं. गाढ़ी ग्रेवी बनने पर गैस बंद करें. धनिया से सजाएं. रोटी या नान के साथ खाएं. आशा ताई इसे खास मसाले से बनाती थीं.&amp;nbsp;
चिकन बिरयानी: आशा ताई की स्पेशल
आशा भोसले कई तरह की बिरयानी जैसे चिकन, फिश और केसर वाली बिरयानी बनाती थीं. उनकी बिरयानी दुबई के रेस्तरां में भी मशहूर है. घर पर एक बार ट्राई करें, फिर बार-बार बनाएंगी.&amp;nbsp;
सामग्री (6 लोगों के लिए)

1 किलो चिकन &amp;nbsp;
500 ग्राम बासमती चावल (भिगोकर रखें) &amp;nbsp;
4 प्याज (2 बारीक, 2 स्लाइस करके तले) &amp;nbsp;
3 टमाटर, 2 चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट &amp;nbsp;
1 कप दही, 1 चम्मच हल्दी, 2 चम्मच लाल मिर्च &amp;nbsp;
2 चम्मच गरम मसाला, 4-5 लौंग, 2 दालचीनी &amp;nbsp;
4 चम्मच घी
केसर दूध में भिगोकर
पुदीना-धनिया &amp;nbsp;

बनाने का तरीका
चिकन को दही, मसाले, अदरक-लहसुन और टमाटर में 2 घंटे मैरिनेट करें. चावल 70% पकाकर छान लें. बर्तन में घी गर्म करें. प्याज भूनें. मैरिनेट चिकन डालकर 15 मिनट पकाएं. अब लेयर लगाएं. नीचे चिकन, ऊपर चावल, फिर पुदीना, केसर वाला दूध और घी. डंपर पर 20-25 मिनट पकाएं. प्याज के बरिस्ता से सजाएं. आशा ताई कहती थीं कि बिरयानी प्यार से बनानी चाहिए.&amp;nbsp;
शामी कबाब: ऋषि कपूर का लाडला
आशा ताई के शामी कबाब इतने सॉफ्ट होते थे कि ऋषि कपूर बार-बार खाते थे. ये कबाब चिकन या मटन के बनते हैं. इन्हें चाय के साथ या मुख्य भोजन में परोसा जा सकता है.
सामग्री (10-12 कबाब के लिए)

500 ग्राम चिकन कीमा (या मटन) &amp;nbsp;
1/2 कप चने की दाल (भिगोकर) &amp;nbsp;
1 प्याज, 2 हरी मिर्च &amp;nbsp;
1 चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, नमक &amp;nbsp;
1 चम्मच गरम मसाला, 1 अंडा (बाइंडिंग के लिए) &amp;nbsp;
तलने के लिए तेल &amp;nbsp;

बनाने का तरीका
कीमा, दाल, प्याज, मिर्च, मसाले और थोड़ा पानी कुकर में डालकर 3-4 सीटी लगाएं. पानी सूखने पर ठंडा करें. मिक्सी में पीसकर अंडा मिलाएं. छोटी-छोटी टिक्की बनाएं. तवे पर तेल डालकर दोनों तरफ सुनहरा होने तक तलें. चटनी या दही के साथ खाएं. आशा ताई इसे हाथ से बनाती थीं.&amp;nbsp;
हरे बैंगन का भरता: दिलाता था मां की याद &amp;nbsp;
आशा भोसले की मां की यह रेसिपी उनकी फेवरेट थी. बैंगन को आग पर भूनकर इस डिश को बनाया जाता है. यह हेल्दी और स्वादिष्ट होती है.&amp;nbsp;
सामग्री ( ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Asha, Bhosle, Death:, मिर्च, के, अचार, से, कढ़ाई, गोश्त, तक..., इन, डिश, की, दीवानी, थीं, आशा, भोसले, जानें, घर, में, कैसे, बना, सकती, हैं, इन्हें</media:keywords>
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        <title>आशा भोसले के अंतिम संस्कार की रीति&amp;रिवाज, जानें मराठी ब्राह्मण परंपरा में अंत्येष्टि की प्रक्रिया?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/आशा-भोसले-के-अंतिम-संस्कार-की-रीति-रिवाज-जानें-मराठी-ब्राह्मण-परंपरा-में-अंत्येष्टि-की-प्रक्रिया</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/आशा-भोसले-के-अंतिम-संस्कार-की-रीति-रिवाज-जानें-मराठी-ब्राह्मण-परंपरा-में-अंत्येष्टि-की-प्रक्रिया</guid>
        <description><![CDATA[ Asha Bhosle Funeral Rituals: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज प्लेबैक सिंगर आशा भोसले का नाम उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार है, जिन्होंने अपनी आवाज की जादू से अलग-अलग पीढ़ियों को प्रभावित किया है. उनके निधन के बाद से ही देशभर में शोक की लहर दौर गई है. वहीं उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी हिंदू धर्म और खासतौर से मराठी ब्राह्मण परंपराओं के अनुसार संपन्न की जाएगी.
सिंगर को शनिवार 11 अप्रैल की रात अचानक से तबीयत बिगड़ जाने के कारण ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. भर्ती होने के बाद अस्पताल की ओर से पहले स्टेटमेंट में हार्ट अटैक की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में पोती ने जनाई ने स्टेटमेंट जारी कर इंफेक्शन की बात कही थी.
अब उनकी मौत के बाद लोगों के बीच इस बात की चर्चा हो रही है कि, आखिर उनका अंतिम संस्कार किस रीति-रिवाज के अनुसार किया जाएगा?
अंतिम संस्कार का पहला चरण
हिंदू रीति रिवाजों के मुताबिक, मरने के बाद सबसे पहले पार्थिव शरीर को स्नान कराया जाता है. इसे अंत्येष्टि की शुद्धि प्रक्रिया कहा जाता है. मराठी ब्राह्मण परंपराओं में शरीर को साफ कपड़ों में लपेटा जाता है, जहां पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनाई जाती है. माथे पर चंदन या कुमकुम का तिलक लगाने के साथ तुलसी के पत्ते और गंगाजल का इस्तेमाल किया जाता है.&amp;nbsp;
धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे मराठी ब्राह्मण ग्रंथों में अंत्येष्टि की विधि, मंत्र और समय का सटीक उल्लेख देखने को मिलता है, जिनका आज भी महाराष्ट्र में पालन किया जाता है.

#WATCH | Mumbai: Legendary singer Asha Bhosle&#039;s son, Anand Bhosle says, &quot;My mother passed away today. People can pay their last respects to her at 11 am tomorrow at Casa Grande, Lower Parel, where she lived. Her last rites will be performed at 4 pm tomorrow at Shivaji Park.&quot; https://t.co/enJlEizboY pic.twitter.com/4WqTd9HYxg
&amp;mdash; ANI (@ANI) April 12, 2026



शरीर की शुद्ध और अंतिम तैयारी
शास्त्रों के मुताबिक, मौत के बाद शरीर को स्नान कराया जाता है. गरुड़ पुराण में गंगाजल और तुलसी के इस्तेमाल को पवित्र माना गया है. मराठी ब्राह्मण परंपराओं में शरीर को सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं और माथे पर चंदन लगाया जाता है.
अर्थी और अंतिम यात्रा से जुड़ी परंपरा
अर्थी को दक्षिण दिशा की ओर ले जाया जाता है, क्योंकि शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यम का मार्ग बताया गया है. इस दौरान राम नाम सत्य है जैसे मंत्र बोले जाते हैं. ऋग्वेद में भी मृत्यु के समय आत्मा की शांति के लिए मंत्रोच्चार का उल्लेख मिलता है.&amp;nbsp;
मुखाग्नि और दाह संस्कार का महत्व
हिंदू धर्म में दाह संस्कार को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. याज्ञवल्कय स्मृति में बताया गया है कि, पुत्र या निकट सगे-संबंधी द्वारा मुखाग्नि देने से आत्मा को शांति मिलती है. मराठी ब्राह्मण समाज में यह प्रक्रिया वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न की जाती है.&amp;nbsp;
अस्थि विसर्जन की परंपरा
मराठी ब्राह्मण परिवारों में दाह संस्कार के बाद अस्थियों को एकत्र कर पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, यह प्रक्रिया आत्मा की मोक्ष यात्रा को सरल बनाने का काम करती है.&amp;nbsp;
श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा
मृत्यु के बाद 10वें या 13वें दिन श्राद्ध कर्म किया जाता है. मनुस्मृति में पिंडदान और ब्राह्मण भोज को आत्मा की तृप्ति के लिए जरूरी बताया गया है. मराठी ब्राह्मण परंपराओं में यह विधि अत्यंत विधिवत और नियमों के साथ निभाई जाती है.
Asha Bhosle: आशा भोसले के 10 भजन जो आज भी कानों में रस घोल देते हैं, सुनते ही मन हो जाता है शांत
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>आशा, भोसले, के, अंतिम, संस्कार, की, रीति-रिवाज, जानें, मराठी, ब्राह्मण, परंपरा, में, अंत्येष्टि, की, प्रक्रिया</media:keywords>
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        <title>Heart Attack Vs Cardiac Arrest: क्या आप भी रहते हैं हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को लेकर कन्फ्यूज, जानें दोनों में क्या अंतर?</title>
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        <description><![CDATA[ Difference Between Heart Attack And Cardiac Arrest: कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसको लेकर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं. उन्हीं में से एक है हार्ट से जुड़ी दो गंभीर स्थितियां, हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट, यह अक्सर लोगों को एक जैसी लगती हैं, लेकिन असल में दोनों बिल्कुल अलग होती हैं. आसान भाषा में समझें तो हार्ट अटैक ब्लड के फ्लो &amp;nbsp;से जुड़ी समस्या है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी का नतीजा होता है.&amp;nbsp;
क्या होता है हार्ट अटैक?
हार्ट के बारे में जानकारी देने वाली संस्था अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली किसी आर्टरीज में ब्लॉकेज हो जाता है. इस वजह से दिल के एक हिस्से तक खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. अगर समय रहते ब्लॉकेज नहीं हटाया गया, तो उस हिस्से की मांसपेशियां धीरे-धीरे डैमेज होने लगती हैंयहार्ट अटैक के लक्षण कई बार अचानक और तेज हो सकते हैं, लेकिन कई मामलों में यह धीरे-धीरे भी शुरू होता है, जैसे सीने में हल्का दर्द, दबाव, सांस लेने में तकलीफ या थकान. खास बात यह है कि हार्ट अटैक के दौरान दिल धड़कना बंद नहीं करता. महिलाओं में इसके लक्षण पुरुषों से अलग भी हो सकते हैं, इसलिए अक्सर इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है.
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क्या होता है सडन कार्डियक अरेस्ट?
सडन कार्डियक अरेस्ट अचानक होता है और कई बार बिना किसी चेतावनी के सामने आता है. इसमें दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाला इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल हो जाता है, जिससे दिल अनियमित तरीके से धड़कने लगता है या पूरी तरह रुक जाता है. ऐसी स्थिति में दिल शरीर के जरूरी अंगों जैसे दिमाग और फेफड़ों तक खून नहीं पहुंचा पाता. इसमें व्यक्ति तुरंत बेहोश हो जाता है, पल्स नहीं मिलती और अगर कुछ ही मिनटों में मदद न मिले, तो जान जाने का खतरा होता है.
दोनों के बीच क्या कनेक्शन है?
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट आपस में जुड़े हो सकते हैं. कई बार हार्ट अटैक के दौरान या उसके बाद कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. हालांकि, हर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट में नहीं बदलता.लेकिन यह जरूर है कि हार्ट अटैक से कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ जाता है. इसके अलावा, दिल से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हार्ट रिद्म को बिगाड़कर कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं.
हार्ट अटैक की स्थिति में क्या करें?
अगर हार्ट अटैक का शक हो, तो बिना समय गंवाए तुरंत इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें. हर मिनट कीमती होता है। एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचना बेहतर होता है, क्योंकि मेडिकल टीम रास्ते में ही इलाज शुरू कर सकती है और अस्पताल में भी जल्दी उपचार मिल पाता है.
कार्डियक अरेस्ट में क्या करें?
सडन कार्डियक अरेस्ट जानलेवा स्थिति है और तुरंत कार्रवाई जरूरी होती है. ऐसे में कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर देना जीवन बचा सकता है. समय पर सीपीआर मिलने से व्यक्ति के बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी तक हो सकती है. हार्ट से जुड़ी इन दोनों स्थितियों का फर्क समझना बेहद जरूरी है. सही समय पर पहचान और तुरंत मदद ही जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:22 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Rashifal 13 April 2026: मेष से मीन तक 13 अप्रैल का राशिफल, इन 3 राशियों को बिजनेस में हो सकता है अच्छा मुनाफा</title>
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        <description><![CDATA[ Rashifal: आज 13 अप्रैल 2026 दिन सोमवार है. पंचांग के अनुसार बैशाख कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि सुबह 01 बजकर 08 मिनट तक रहेगी (14 अप्रैल तक), उपरांत द्वादशी तिथि आरम्भ हो जाएगी. सूर्योदय कालीन ग्रहों की बात करें तो सूर्य के साथ शनि, मंगल और बुध मीन राशि में रहेंगे, जिससे मीन राशि में चातुर्ग्रही योग बना हुआ है.
चंद्रमा और राहु कुम्भ राशि में विराजमान रहेंगे. शुक्र मेष राशि में रहेंगे. चंद्रमा कुम्भ राशि में संचरण करेंगे. देव गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में हैं और केतु सिंह राशि में मौजूद रहेंगे. आज का दिन कैसा रहेगा, अगर आप जानना चाहते हैं, तो चिंता न करें. आपकी राशि पर पड़ने वाले ग्रह तथा नक्षत्रों का प्रभाव कैसा रहेगा, आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से मेष से लेकर मीन राशि के लिए आज का दिन कैसा रहेगा.
मेष राशि (Aries)
आज का दिन आपके लिए एनर्जी और उत्साह से भरा रहेगा. सुबह से ही कुछ नया करने का मन करेगा और आप अपने कामों को लेकर काफी एक्टिव रहेंगे. आज आपकी पर्सनालिटी लोगों को अट्रैक करेगी और आप जहां भी जाएंगे, ध्यान खींचेंगे.
पारिवारिक जीवन: घर में किसी बात को लेकर हल्की बहस हो सकती है, लेकिन आप अपनी समझदारी से माहौल संभाल लेंगे. बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा और परिवार में आपकी बात को महत्व दिया जाएगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपको नई जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा. बिजनेस करने वालों के लिए पुराने संपर्क फायदेमंद साबित होंगे और रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स के लिए दिन अच्छा है, खासकर जो किसी कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं. करियर में आगे बढ़ने के लिए नई प्लानिंग कर सकते हैं.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: लव लाइफ में थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है. पार्टनर की बातों को समझें, जल्दबाजी में रिएक्ट न करें. शादीशुदा लोगों के लिए दिन सामान्य रहेगा.
स्वास्थ्य: आज शरीर में हल्की थकान या सिरदर्द महसूस हो सकता है. पर्याप्त पानी पिएं और आराम करें.
लकी अंक: 7लकी कलर: लालउपाय: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं.आज क्या करें: नए काम की शुरुआत करें और आत्मविश्वास बनाए रखें.
वृषभ राशि (Taurus)
आज का दिन थोड़ा शांत लेकिन स्थिर रहेगा. आप हर काम को सोच-समझकर करेंगे और जल्दबाजी से दूर रहेंगे. धैर्य और समझदारी आज आपको आगे बढ़ाएगी.
पारिवारिक जीवन: घर में सुकून भरा माहौल रहेगा. माता-पिता के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और परिवार में आपसी तालमेल अच्छा रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में काम का प्रेशर थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन आप उसे अच्छे से मैनेज कर लेंगे. व्यापार में धीरे-धीरे लाभ होगा, कोई बड़ी डील हो सकती है.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स को मेहनत का फल मिलने वाला है. जो लोग नौकरी बदलने का सोच रहे हैं, उनके लिए समय अनुकूल है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ समझदारी और भरोसा बढ़ेगा. शादीशुदा जीवन में स्थिरता बनी रहेगी.
स्वास्थ्य: गले या सर्दी-जुकाम की समस्या हो सकती है, ठंडी चीजों से बचें.
लकी अंक: 4लकी कलर: सफेदउपाय: गाय को हरी घास खिलाएं.आज क्या करें: धैर्य रखें और जल्दबाजी से बचें.
मिथुन राशि (Gemini)
आज का दिन आपके लिए काफी एक्टिव और मौके देने वाला रहेगा. सुबह से ही दिमाग तेज चलेगा और आप एक साथ कई काम करने की कोशिश करेंगे. आपकी बात करने की कला आज लोगों को प्रभावित करेगी और नए कनेक्शन बनेंगे.
पारिवारिक जीवन: घर का माहौल खुशहाल रहेगा और परिवार के लोग आपका पूरा साथ देंगे. किसी पुराने मुद्दे पर खुलकर बातचीत होगी, जिससे रिश्तों में और मजबूती आएगी. भाई-बहनों के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपकी कम्युनिकेशन स्किल की तारीफ होगी और सीनियर्स आपसे खुश रहेंगे. बिजनेस में नए क्लाइंट जुड़ सकते हैं और कोई बड़ा ऑर्डर मिलने की संभावना है.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स के लिए दिन शानदार है, खासकर जो इंटरव्यू या एग्जाम दे रहे हैं. नई चीजें सीखने का मन करेगा और आपको सही दिशा भी मिलेगी.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: लव लाइफ में रोमांस बढ़ेगा और पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा. शादीशुदा लोग किसी छोटी ट्रिप का प्लान कर सकते हैं.
स्वास्थ्य: मानसिक थकान महसूस हो सकती है, इसलिए थोड़ा आराम जरूरी है. मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम रखें.
लकी अंक: 2लकी कलर: आसमानीउपाय: भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें.आज क्या करें: नए लोगों से मिलें और अपने आइडिया शेयर करें.
कर्क राशि
आज का दिन थोड़ा भावनात्मक और सोच-विचार वाला रहेगा. आप छोटी-छोटी बातों को ज्यादा महसूस कर सकते हैं. दिन के अंत में मन हल्का और संतुष्ट महसूस होगा.
पारिवारिक जीवन: घर में किसी पुराने मामले को लेकर चर्चा हो सकती है, लेकिन आप समझदारी से उसे सुलझा लेंगे. माता-पिता का सहयोग मिलेगा और परिवार में अपनापन महसूस होगा.
व्यापार तथा नौकरी: काम में शुरुआत में रुकावट आ सकती है, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक होता जाएगा. ऑफिस में धैर्य से काम लेना आपके लिए फायदेमंद रहेगा.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स को आज फोकस बनाए रखना जरूरी है. पढ़ाई में मन थोड़ा भटक सकता है, इसलिए टाइम टेबल फॉलो करें.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्तों में भावनाएं गहरी होंगी. पार्टनर के साथ खुलकर बात करने से गलतफहमियां दूर होंगी और नजदीकियां बढ़ेंगी.
स्वास्थ्य: पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती है, बाहर का खाना अवॉइड करें. हल्का और हेल्दी भोजन लें.
लकी अंक: 6लकी कलर: सफेदउपाय: चावल और दूध का दान करें.आज क्या करें: अपने मन की बात किसी करीबी से शेयर करें.
सिंह राशि (Leo)
आज का दिन आपके लिए आत्मविश्वास और पहचान बढ़ाने वाला रहेगा. आप अपने काम को लेकर पूरी तरह फोकस में रहेंगे. लोग आपकी पर्सनालिटी और फैसलों से प्रभावित होंगे.
पारिवारिक जीवन: घर में आपकी बात को महत्व मिलेगा और परिवार के लोग आपकी सलाह मानेंगे. किसी पारिव ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:20 +0530</pubDate>
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        <title>Natural Hair Gel: घर पर ऐसे बनाएं नेचुरल हेयर जेल, बिना महंगे प्रोडक्ट बाल हो जाएंगे सेट</title>
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        <description><![CDATA[ Natural Hair Gel: आजकल बाजार में मौजूद हेयर जेल में सिर्फ केमिकल्स पाए जाते हैं, जो लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर बालों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में नेचुरल हेयर जेल बालों के लिए एक सुरक्षित और किफायती विकल्प है. यह बालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है और उन्हें सेट करने में मदद करता है. घर पर बना जेल पूरी तरह से नेचुरल होता है, इसमें केमिकल्स का कोई इस्तेमाल नहीं होता और यह आपके स्कैल्प के लिए भी हेल्दी माना जाता है. आइए आज आपको बताते हैं घर पर ही नेचुरल हेयर जेल कैसे बना सकते हैं.
एलोवेरा से बना सकते हैं हेयर जेल
एलोवेरा बालों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसे बालों में जेल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. सबसे पहले पौधे से एलोवेरा की पत्तियां काट लें, उसके बाद उन्हें काटकर मोटा गूदा निकाल लें. अब इस गूदे को मिक्सर में डालकर स्मूथ जेल जैसा रूप दें. आप चाहें तो इसमें थोड़ा गुलाब जल भी मिला सकते हैं. यह जेल बालों को नेचुरल शाइन देता है और उन्हें लंबे समय तक होल्ड करता है. यह पूरी तरह से नेचुरल जेल है, इसमें किसी प्रकार के केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता.
अलसी (Flaxseed) से बनाएं स्ट्रॉन्ग होल्ड जेल
अलसी से बना हेयर जेल बालों को काफी स्ट्रॉन्ग होल्ड देता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले अलसी के बीजों को पानी में उबालें जब तक उसमें जेल जैसा टेक्सचर न आ जाए. अब इसे छान लें और ठंडा होने के लिए रख दें. ठंडा होने पर यह जेल थोड़ा और गाढ़ा हो सकता है. अब इसमें चाहें तो थोड़ा गुलाब जल मिला सकते हैं और इसे बालों में लगाएं. यह जेल खास तौर पर कर्ली बालों के लिए बेहतर माना जाता है और बालों को बिना किसी चिपचिपाहट के सेट करता है.
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नेचुरल हेयर जेल का उपयोग और फायदे
इस नेचुरल हेयर जेल को आप रोजाना या जरूरत के हिसाब से बालों में इस्तेमाल कर सकते हैं, यह बालों को नेचुरली नमी देता है, उन्हें टूटने से बचाता है और बालों को नेचुरल स्टाइल में रखता है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी तरह से नेचुरल है, इसमें कोई केमिकल नहीं होता जिससे कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता, यह काफी सस्ता और बनाने में आसान है.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 18:30:19 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>World Parkinson&amp;apos;s Day 2026: शरीर में कंपकंपी से पहले ही दिखने लगते हैं पार्किंसंस के ये लक्षण, पहचानने में न करें देरी</title>
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        <description><![CDATA[ World Parkinson&#039;s Day 2026: पार्किंसंस एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो ब्रेन में Dopamine नामक केमिकल की कमी के कारण होती है. अधिकतर लोग शरीर में होने वाली कंपकंपी और झटकों को ही इसका पहला लक्षण मान लेते हैं, लेकिन असल में कई ऐसे छोटे-छोटे संकेत होते हैं जो बरसों पहले से ही दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. पार्किंसंस के इन शुरुआती संकेतों को पकड़ना बेहद जरूरी होता है, जिन्हें लोग आमतौर पर दरकिनार कर देते हैं.
क्या होता है पार्किंसंस
पार्किंसंस, ब्रेन से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है जो धीरे-धीरे बढ़ते रहती है. यह मुख्य रूप से शरीर के मूवमेंट को प्रभावित करती है. यह तब होता है जब ब्रेन की वे cells नष्ट होने लगती हैं जो Dopamine नामक केमिकल बनाती हैं. Dopamine शरीर के मसल्स को कंट्रोल करने और तालमेल बनाए रखने के लिए जरूरी होता है. यह सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं, बल्कि जवान लोगों को भी हो सकती है, जिससे इसके लक्षणों को जानना और भी जरूरी हो जाता है.
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लिखावट (Hand writing) का छोटा होना - अगर आपकी लिखावट अचानक से छोटी होने लगे या शब्द एक-दूसरे से सटे हुए दिखने लगें, तो यह पार्किंसंस के प्रबल लक्षण हो सकते हैं.
सूंघने की क्षमता कम होना - गंध महसूस न होना या इलायची जैसी तेज गंध देने वाली चीजों की महक न आना इस बीमारी के सबसे पुराने लक्षणों में से एक माना जा सकता है. इस तरह के लक्षण अक्सर कंपकंपी से पहले ही दिखाई देने लगते हैं.
चेहरे के भाव कम होना - चेहरे के मसल्स में जकड़न आने के कारण इंसान का चेहरा हमेशा गंभीर या भावहीन दिखने लगता है, भले ही वह उदास न हो. पलकें झपकने की दर में भी कमी दिखने लगती है.
नींद की दिक्कत - सोने के दौरान बहुत ज्यादा हिलना-डुलना, चिल्लाना या सपने में होने वाली हरकतों को असलियत में करना, जैसे हाथ-पैर चलाना, खतरे की घंटी साबित हो सकती है.
पाचन तंत्र - पाचन तंत्र की धीमी गति या बार-बार कब्ज जैसी समस्याएं होना भी इसके शुरुआती लक्षणों में से एक माने जा सकते हैं.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
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        <title>बैसाखी 2026 पर दिल्ली के इन गुरुद्वारों में जरूर जाएं, जहां मिलेगा भक्ति और शांति का अनुभव!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बैसाखी-2026-पर-दिल्ली-के-इन-गुरुद्वारों-में-जरूर-जाएं-जहां-मिलेगा-भक्ति-और-शांति-का-अनुभव</link>
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        <description><![CDATA[ बैसाखी 2026 पर दिल्ली के इन गुरुद्वारों में जरूर जाएं, जहां मिलेगा भक्ति और शांति का अनुभव! ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>बैसाखी मानने के लिए 2238 सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान पहुंचे, ननकाना साहिब समेत इन पवित्र स्थलों के होंगे दर्शन!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बैसाखी-मानने-के-लिए-2238-सिख-तीर्थयात्री-पाकिस्तान-पहुंचे-ननकाना-साहिब-समेत-इन-पवित्र-स्थलों-के-होंगे-दर्शन</link>
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        <description><![CDATA[ बैसाखी 2026 (खालसा स्थापना दिवस) मनाने के लिए भारत से करीब 2,238 सिख तीर्थयात्री शुक्रवार को अटारी वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल हुए. मई 2025 में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान का दौरा करने वाला यह दूसरा सिख जत्था है, और भारत द्वारा बॉर्डर पार यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच अबतक का सबसे बड़ा सिख जत्था है.&amp;nbsp;
इससे पहले सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी की जयंती के मौके पर नवंबर 2025 में 1,932 तीर्थयात्री पाकिस्तान की यात्रा कर चुके थे.&amp;nbsp;
दरअसल पाकिस्तान उच्चायोग ने 10 दिवसीय तीर्थयात्रा के लिए भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को 2,800 से ज्यादा वीजा इश्यू किए थे, जिसके दौरान श्रद्धालु प्रमुख सिख मंदिर का दौरा करेंगे.

इसमें हसन अब्दाल में गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब (गुरु नानक जी का जन्मस्थान)
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब (गुरु नानक का अंतिम विश्राम स्थल)
फारूकाबाद में गुरुद्वारा सच्चा सौदा साहिब
लाहौर में गुरुद्वारा डेहरा साहिब&amp;nbsp;
एमिनाबाद में गुरुद्वारा रोरी साहिब शामिल हैं.&amp;nbsp;

19 अप्रैल को भारत वापस लौटेगे सिख जत्था
नानकाना साहिब में 2 दिन बिताने के बाद वे लाहौर से करीब 400 किलोमीटर दूर हसन अब्दाल स्थित गुरुद्वारा पंजा साहिब के लिए रवाना होंगे, जहां 14 अप्रैल को बैसाखी का मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा. इसके बाद 19 अप्रैल को समूह भारत लौट जाएगा.&amp;nbsp;
पंजाब से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में स्थित अपने कार्यालय से करीब 1763 तीर्थयात्रिों का एक जत्था भेजा है. इस जत्थे का नेतृत्व एसजीपीसी कार्यकारी समिति के सदस्य सुरजीत तुगलावाल ने महाप्रबंधक हरभजन सिंह के साथ मिलकर किया.
इस मौके पर SGPC के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नान ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से 2019 में गुरु नानक की 550वीं जयंती समारोह के दौरान खोले गए करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने का आग्रह किया है.
यह कॉरिडोर 7 मई 2025 से बंद है, जब भारतीय सशस्त्र बलों ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी.&amp;nbsp;
बॉर्डर के दूसरी ओर पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और सरकारी अधिकारियों जिनमें इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड भी शामिल है, उन्होंने तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके लिए लंगर सेवा के साथ परिवहन सुविधाओं की व्यवस्था भी की.&amp;nbsp;

Delhi: On the occasion of the festival of Baisakhi, a delegation of devotees departed today from Gurdwara Rakab Ganj Sahib in Delhi. This delegation will travel to Pakistan via the Wagah Border, passing through Amritsar pic.twitter.com/7GbcfI0lqs
&amp;mdash; IANS (@ians_india) April 9, 2026



70 तीर्थयात्रियों को भारत पार जाने से रोका
भारतीय सरकार से जरूरी अनुमित न मिलने की वजह से करीब 70 तीर्थयात्रियों को सीमा पार करन से अधिकारियों ने रोक दिया. इससे नाराज होकर उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए.
बैसाखी जिसे सिख समुदाय में खालसा सजना दिवस के रूप में मनाया जाता है, दुनियाभर के सिखों के लिए अपार धार्मिक महत्व रखती है, क्योंकि यह 1699 में गुरु गोविंद सिंह द्वारा खालसा पंथ की स्थापना की स्मृति में मनाई जाती है.&amp;nbsp;
1950 के नेहरू-लियाकत समझौते के अंतर्गत सिख तीर्थयात्रियों को 4 धार्मिक अवसर पाकिस्तान के गुरुद्वारों में जाने की अनुमति दी, जिसमें खालसा पंथ की स्थापना दिवस (बैसाखी), पांचवें सिख गुरु, गुरु अर्जन की शहादत की वर्षगांठ, महाराजा रणजीत सिंह की पुण्य तिथि और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जंयती.&amp;nbsp;
लेकिन पिछले साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने अटारी-वाघा सीमा चौकी के रास्ते भारतीय नागरिकों के पाकिस्तान जाने पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके जवाब में पाकिस्तान ने सिख तीर्थयात्रियों को छोड़कर भारतीय नागरिकों के लिए सार्क वीजा छूट योजना के तहत जारी वीजा निलंबित कर दिए.&amp;nbsp;
पहलगाम हमले से कुछ दिन पहले बैसाकी के मौके पर 5 हजार से ज्यादा भारतीय सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान के गुरुद्वारों में गए थे. यह अब तक पाकिस्तान जाने वाले सिख तीर्थयात्रियों की सबसे बड़ी संख्या थी.&amp;nbsp;
Baisakhi 2026: बैसाखी पर क्यों लगता है मेला और होता है भांगड़ा-गिद्दा ? जानें परंपरा का इतिहास ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बैसाखी, मानने, के, लिए, 2238, सिख, तीर्थयात्री, पाकिस्तान, पहुंचे, ननकाना, साहिब, समेत, इन, पवित्र, स्थलों, के, होंगे, दर्शन</media:keywords>
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        <title>Breathing problem: थोड़ा सा चलने पर भी फूलने लगती है सांस, यह किस बीमारी का संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल की भागदौड़ भरी और तेजी से बदलती दुनिया में सांस फूलना एक आम बात हो गई है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना आपकी सेहत के लिए बहुत जोखिम भरा हो सकता है. कई बार लोग इसे थकान या उम्र का हवाला देकर इग्नोर कर देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि थोड़ी दूर चलने या सीढ़ियां चढ़ने मात्र से ही आपकी सांसें क्यों फूलने लग जाती हैं? यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है, जिसे समय रहते सुधार लिया जाए तो आगे आने वाली मुश्किलों से बचा जा सकता है और एक स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिल सकती है.
सांस फूलने के पीछे छिपे संभावित कारण
Heart Problemsअगर आपका दिल ठीक से खून पंप नहीं कर पा रहा है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे सांस फूलने लगती है. हार्ट फेल्योर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट वाल्व की समस्या इसके पीछे के कारण हो सकते हैं. इन स्थितियों में मरीज को चलने या लेटने पर भी सांस लेने में तकलीफ हो सकती है.
Lung Diseasesफेफड़े ऑक्सीजन लेने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने का काम करते हैं. इनमें किसी भी तरह की समस्या सांस फूलने का कारण बन सकती है, जैसे अस्थमा (Asthma), क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और फेफड़ों में इन्फेक्शन या निमोनिया इसके पीछे के कारण हो सकते हैं. अगर सांस फूलने के साथ खांसी, सीने में जकड़न या घरघराहट भी हो, तो यह फेफड़ों की बीमारी का संकेत हो सकता है.
यह भी पढ़ें - World Parkinson&#039;s Day 2026: शरीर में कंपकंपी से पहले ही दिखने लगते हैं पार्किंसंस के ये लक्षण, पहचानने में न करें देरी
Anaemia (खून की कमी)जब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, तो ऑक्सीजन सही तरीके से शरीर के अंगों तक नहीं पहुंच पाती. इसका सीधा असर सांस पर पड़ता है, जिसमें जल्दी थकान, चक्कर आना और हल्का काम करने पर भी सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
Obesity (मोटापा)अधिक वजन होने पर शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है. साथ ही, छाती और फेफड़ों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है.
Thyroidथायरॉयड हार्मोन मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो सकती है और सांस फूलने लगती है.
कब समझें कि मामला गंभीर है?

आराम करने पर भी सांस फूलना.
सीने में दर्द या दबाव महसूस होना.
होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना.
लगातार खांसी या खून आना.
अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना.

यह भी पढ़ें - Obesity Hypoventilation Syndrome: क्या मोटापा ले सकता है जान? 160 किलो की महिला का सांस लेना हुआ मुश्किल, डॉक्टरों ने ऐसे बचाया ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Asha Bhosle Hospitalised: चेस्ट इंफेक्शन के बाद अस्पताल में भर्ती हुईं आशा भोसले, जानें इस उम्र में कैसे रखें अपना ख्याल?</title>
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        <description><![CDATA[ हाल ही में ताजा जानकारी के मुताबिक बॉलीवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले के चेस्ट में इंफेक्शन हुआ है और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ऐसे में दिग्गज गायिका Asha Bhosle की तबीयत बिगड़ने और चेस्ट इंफेक्शन की खबर ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बढ़ती उम्र में सेहत का ख्याल रखना कितना जरूरी हो जाता है. 91 साल की उम्र में शरीर पहले जैसा मजबूत नहीं रहता, इम्युनिटी कमजोर हो जाती है और छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है. खासकर छाती और सांस से जुड़ी समस्याएं बुजुर्गों के लिए गंभीर हो सकती हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि चेस्ट इंफेक्शन आखिर होता कैसे है, कितना खतरनाक हो सकता है और इस उम्र में इससे बचाव कैसे किया जा सकता है.
कैसे होता है चेस्ट इंफेक्शन
चेस्ट इंफेक्शन आमतौर पर वायरस, बैक्टीरिया या कभी-कभी फंगल इंफेक्शन की वजह से होता है, जो फेफड़ों और सांस की नलियों को प्रभावित करता है. सर्दी-खांसी को नजरअंदाज करना, ठंडी हवा में ज्यादा रहना, प्रदूषण, धूल या कमजोर इम्युनिटी इसके बड़े कारण होते हैं. बुजुर्गों में यह खतरा इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि उनका शरीर संक्रमण से लड़ने में उतना सक्षम नहीं रहता. कई बार साधारण जुकाम भी धीरे-धीरे चेस्ट इंफेक्शन में बदल जाता है.

My grandmother, Asha Bhosle due to extreme exhaustion and suffering a chest infection has been admitted to hospital and we request you to value our privacy. Treatment is ongoing and hopefully everything will be well and we shall update you positively.
&amp;mdash; Zanai Bhosle (@ZanaiBhosle) April 11, 2026



91 की उम्र में क्यों ज्यादा खतरनाक है चेस्ट इंफेक्शन
91 साल जैसी उम्र में चेस्ट इंफेक्शन को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. यह निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, ऑक्सीजन लेवल गिरना और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह जानलेवा भी हो सकता है. यही वजह है कि डॉक्टर बुजुर्गों में खांसी, बुखार या सीने में जकड़न जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराने की सलाह देते हैं.
यह भी पढ़ें: World Parkinson&#039;s Day 2026: शरीर में कंपकंपी से पहले ही दिखने लगते हैं पार्किंसंस के ये लक्षण, पहचानने में न करें देरी
बढ़ती उम्र में कैसे रखें चेस्ट का ख्याल
इस उम्र में सबसे जरूरी है सावधानी और नियमित देखभाल. ठंड और धूल से बचाव करना चाहिए, जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए. हल्की एक्सरसाइज और ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों को मजबूत रखने में मदद करती है. गर्म पानी, सूप और भाप लेना भी फायदेमंद होता है. साथ ही, समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप और जरूरी वैक्सीनेशन करवाना बेहद जरूरी है. सबसे अहम बात&amp;mdash;खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ को कभी नजरअंदाज न करें. ध्यान रहे कि इस उम्र में ठंडी चीजों को खाने और पीने से परहेज ही करें, जिससे गले और चेस्ट में कफ जमा ना हो.
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        <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Asha, Bhosle, Hospitalised:, चेस्ट, इंफेक्शन, के, बाद, अस्पताल, में, भर्ती, हुईं, आशा, भोसले, जानें, इस, उम्र, में, कैसे, रखें, अपना, ख्याल</media:keywords>
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        <title>Meen Saptahik Rashifal 12&amp;18 April 2026: मीन राशि के करियर की नई शुरुआत होगी, मिल सकता है अच्छा ऑफर</title>
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        <description><![CDATA[ Meen Weekly Horoscope 2026 (12 to 18 April 2026): अप्रैल 2026 महीने का यह नया सप्ताह मीन राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए कैसा रहेगा. मीन राशि वाले ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानें अपना पूरा साप्ताहिक राशिफल.


मीन राशि के जातकों के लिए अप्रैल का यह सप्ताह कुल मिलाकर सकारात्मक और प्रगति देने वाला रहेगा, हालांकि इसका पहला भाग दूसरे भाग की तुलना में अधिक शुभ और लाभकारी साबित होगा. सप्ताह की शुरुआत आपके लिए कई अच्छे अवसर लेकर आएगी.
इस दौरान करियर और व्यवसाय से जुड़े कामों के सिलसिले में की गई यात्रा आपके लिए सफल साबित हो सकती है. यह यात्रा न केवल आपके काम को गति देगी, बल्कि आपको नए लोगों से जुड़ने का मौका भी देगी.
इस अवधि में आपकी मुलाकात कुछ वरिष्ठ और प्रभावशाली व्यक्तियों से हो सकती है, जिनके साथ भविष्य में बड़ी योजनाओं पर काम करने का अवसर मिलेगा. उनके मार्गदर्शन और सहयोग से आपके करियर में नई दिशा मिल सकती है. नौकरीपेशा लोगों के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा.
इस दौरान आपके ऊपर आपके बॉस का विशेष आशीर्वाद बना रहेगा, जिससे आप अपने कार्यों को समय से पहले पूरा करने में सफल रहेंगे. आपकी मेहनत और समर्पण को सराहा जाएगा और संभव है कि आपको कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या पदोन्नति भी मिल जाए.
जो लोग लंबे समय से रोजगार की तलाश में हैं, उनके लिए भी यह सप्ताह अच्छी खबर लेकर आ सकता है. उन्हें किसी अच्छे अवसर का लाभ मिल सकता है, जिससे उनके करियर की नई शुरुआत होगी. यह समय आत्मविश्वास और उत्साह से भरा रहेगा, जिससे आप अपने लक्ष्यों को पाने के लिए और अधिक प्रेरित होंगे.
सप्ताह के मध्य में वातावरण थोड़ा हल्का और आनंदमय हो जाएगा. युवा वर्ग इस समय मौज-मस्ती और मनोरंजन में अधिक समय बिताएंगे. परिवार में भी खुशियों का माहौल बना रहेगा, खासकर किसी प्रिय सदस्य के आगमन से घर में रौनक बढ़ेगी. इस दौरान परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा, जिससे रिश्तों में और अधिक मजबूती आएगी.
व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा. बाजार में आपकी पकड़ मजबूत होगी और आप अपने काम में अच्छा मुनाफा कमाने में सफल रहेंगे. यदि आप किसी नए प्रोजेक्ट या योजना पर काम कर रहे हैं, तो उसमें भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है.
प्रेम जीवन के दृष्टिकोण से यह सप्ताह बेहद सुखद रहेगा. आपके और आपके लव पार्टनर के बीच संबंधों में और अधिक गहराई आएगी और आप एक-दूसरे के साथ अच्छा समय बिताएंगे. रिश्तों में समझ और अपनापन बढ़ेगा, जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा.
हालांकि सप्ताह के उत्तरार्ध में आपको अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है. ऐसे में उनका ध्यान रखना और समय-समय पर उनकी देखभाल करना जरूरी होगा. कुल मिलाकर, यह सप्ताह मीन राशि वालों के लिए सफलता, खुशी और संतुलन का संकेत दे रहा है, बशर्ते आप अपने प्रयासों को निरंतर बनाए रखें.

Kharmas 2026 End Date: खरमास कब खत्म ? शुरू होंगे विवाह, गृह प्रवेश, 4 राशियों की बदलेगी किस्मत
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Meen, Saptahik, Rashifal, 12-18, April, 2026:, मीन, राशि, के, करियर, की, नई, शुरुआत, होगी, मिल, सकता, है, अच्छा, ऑफर</media:keywords>
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        <title>Explained: कढ़ाई पनीर और मंचूरियन खाने के बाद युवक की मौत! एक्सपर्ट्स से जानें&amp; गर्मियों में कैसे पकाएं और खाएं खाना</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/explained-कढ़ाई-पनीर-और-मंचूरियन-खाने-के-बाद-युवक-की-मौत-एक्सपर्ट्स-से-जानें-गर्मियों-में-कैसे-पकाएं-और-खाएं-खाना</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/explained-कढ़ाई-पनीर-और-मंचूरियन-खाने-के-बाद-युवक-की-मौत-एक्सपर्ट्स-से-जानें-गर्मियों-में-कैसे-पकाएं-और-खाएं-खाना</guid>
        <description><![CDATA[ बिहार के भभुआ में 20 साल का विशाल रात करीब 10:30 बजे अपने भाई और दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट पहुंचा. वहां से मंचूरिन और कढ़ाई पनीर पैक करवाया और फिर खा-पीकर खत्म कर दिया. थोड़ी देर बाद उसे उल्टी शुरू हो गई. हालत बिगड़ने पर सुबह 4:30 बजे भभुआ सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिवार वालों से पता चला कि उसके जनेऊ की तैयारी चल रही थी, लेकिन एक रात में सब कुछ बदल गया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तो अभी आई नहीं, लेकिन डॉक्टरों ने वजह बताई- गर्मियों में गलत खाने की आदत. कहीं आप भी तो इस आदत के गुलाम नहीं? एक्सप्लेनर में समझते हैं...
सवाल 1: गर्मियों में गलत खाने की आदत का चक्कर क्या है?जवाब: गर्मी और नमी में सैल्मोनेला, ई.कोलाई और लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ते हैं. 4&amp;deg;C से 60&amp;deg;C के बीच का तापमान इनके लिए &#039;डेंजर जोन&#039; है. बाहर का खाना, रेस्टोरेंट का पैकेज्ड फूड या घर पर बचा हुआ खाना, 2 घंटे से ज्यादा बाहर रखा जाए तो बैक्टीरिया खाने को जहर बना देते हैं. रेस्टोरेंट में पानी, सब्जियां या पनीर गंदा हो तो एक ही प्लेट से पूरा परिवार बीमार हो सकता है, फिर होती है फूड पॉइजनिंग. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, गर्मियों में खाने की सेफ्टी पर खास ध्यान न दिया जाए तो हल्की बीमारी और मौत तक हो सकती है.
&amp;nbsp;

गर्मियों में फूड पॉइजन के बैक्टीरिया बहुत तेजी से बढ़ते हैं

सवाल 2: मंचूरियन और कढ़ाई पनीर जैसे डिशेज में खतरा क्यों ज्यादा होता है?जवाब: मंचूरियन में गोभी, गाजर जैसी सब्जियां होती हैं जो कीड़े-मकोड़ों की वजह से आसानी से दूषित हो जाती हैं. सोया सॉस, विनेगर, चिली सॉस या कॉर्नफ्लोर अगर एक्सपायर हो चुके हों या पुराने हों तो जहर बन जाते हैं. कढ़ाई पनीर में पनीर अक्सर मिलावटी मिलता है और मलाई-क्रीम के खराब होने पर समस्या बढ़ जाती है. दोनों डिशेज में तेल, मसाले और ग्रेवी होती है, जो गर्मी में जल्दी खराब हो जाते हैं. अगर खाना अच्छे से नहीं पका या ठंडा करके रखा जाए तो बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं. इसके साथ बढ़ जाता है खतरा.
सवाल 3: तो फिर घर पर खाना बनाते समय क्या-क्या सावधानी बरतें?जवाब: HealthyChildren.org की रिपोर्ट के मुताबिक:

सब्जियां और सामान साफ करें: मंचूरियन के लिए गोभी-कद्दूकस करके अच्छी तरह धोएं और कीड़े-मकोड़े चेक करें. पनीर की प्यूरिटी चेक करें, क्योंकि बाजार में मिलावटी पनीर बहुत आम है.
रसोई साफ रखें: चॉपिंग बोर्ड, चाकू, बर्तन हर बार गर्म पानी और साबुन से धोएं. कच्चा और पका खाना अलग रखें.
अच्छे से पकाएं: मंचूरियन बॉल्स या पनीर को अच्छे से फ्राई करें, बीच में कच्चा न छोड़ें. तेल न ज्यादा गर्म हो, न कम.
सॉस और मसाले चेक करें: सोया सॉस, विनेगर, चिली सॉस का एक्सपायरी डेट देखें. कढ़ाई पनीर में मलाई-क्रीम भी चेक करें.
बचा हुआ खाना सही से स्टोर करें: बचा खाना साफ डिब्बे में फ्रिज में रखें. दोबारा गर्म करते समय माइक्रोवेव-सेफ बर्तन में डालें. पैकेट में न गर्म करें. अगर बदबू या स्वाद खराब लगे तो फेंक दें.

ये सावधानियां सिर्फ मंचूरिय या कढ़ाई पनीर के लिए नहीं, बल्कि हर तरह के खाने के लिए बरतें.
&amp;nbsp;

गर्मियों में खाना बनाते समय सफाई का खास ध्यान रखें

सवाल 4: बाहर से मंगवाए या पैकेटेड खाने के समय क्या सावधानियां बरतें?जवाब: संप्रदा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की रिपोर्ट के मुताबिक,

पैकेटिंग चेक करें, सील टूटी हुई न हो और लीकेज न हो.
खाने की खुशबू और दिखावट देखें. कुछ भी संदिग्ध लगे तो मत खाएं.
खाना ठंडा हो गया हो तो उसे अलग बर्तन में डालकर अच्छे से गर्म करें (165&amp;deg;F या 74&amp;deg;C तक).
खाना आने के 30-40 मिनट के अंदर खा लें. ज्यादा देर बाहर न रखें.
गर्मियों में कभी भी खाना 2 घंटे से ज्यादा कमरे के तापमान पर न छोड़ें.

सवाल 5: एक छोटी सी भूल कितनी भारी पड़ सकती है?जवाब: WHO की रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मियों में एक गलत प्लेट खाने से पूरा परिवार अस्पताल पहुंच सकता है. घर पर बनाएं तो बेहतर, लेकिन बाहर का खाना भी सावधानी से खाएं. फ्रिज का इस्तेमाल सही करें, तापमान चेक करें और साफ-सफाई न भूलें. छोटे-छोटे नियम फॉलो करने से बड़ी मुसीबत टल सकती है. इन 5 बड़े नियमों को हमेशा फॉलो करें:

साफ-सफाई रखें: हाथ 20 सेकंड तक साबुन से धोएं, बर्तन-रसोई साफ रखें.
कच्चा और पका अलग रखें: कच्चा मीट/सब्जी का रस पके खाने में न मिले.
अच्छे से पकाएं: खाना कम से कम 70&amp;deg;C तक पकाएं. मांस को अच्छे से साफ करें.
सही तापमान पर रखें: गर्म खाना 60&amp;deg;C से ऊपर, ठंडा खाना 5&amp;deg;C से नीचे रखें. फ्रिज 4&amp;deg;C पर सेट रखें.
साफ पानी और सामान इस्तेमाल करें: पानी उबालकर पिएं, फल-सब्जी धोएं और एक्सपायरी चेक करें.

अगर उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ORS लें. गंभीर मामलों में अस्पताल में IV फ्लूइड और टेस्ट जरूरी है. फूड पॉइजनिंग के लक्षण 2-6 घंटे में शुरू हो सकते हैं. बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं में खतरा ज्यादा होता है. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Explained:, कढ़ाई, पनीर, और, मंचूरियन, खाने, के, बाद, युवक, की, मौत, एक्सपर्ट्स, से, जानें-, गर्मियों, में, कैसे, पकाएं, और, खाएं, खाना</media:keywords>
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        <title>मोबाइल, टीवी या फ्रिज खरीदने का प्लान? अप्रैल 2026 में जानें कौन&amp;सी तारीख है सबसे शुभ?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/मोबाइल-टीवी-या-फ्रिज-खरीदने-का-प्लान-अप्रैल-2026-में-जानें-कौन-सी-तारीख-है-सबसे-शुभ</link>
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        <description><![CDATA[ April 2026 Electronic Items Buying Shubh Muhurat: अगर आप भी अप्रैल में नया मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज या लैपटॉप खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो सिर्फ ऑफर या डिस्काउंट को ध्यान में रखना काफी नहीं है, बल्कि सही और शुभ मुहूर्त भी मायने रखता है.
हिंदू पंचांग के मुताबिक, सही तिथि, नक्षत्र और वार में खरीदी गई वस्तुएं लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करती हैं और बार-बार खराब होने या नुकसान की संभावना कम रहती है. आइए जानते हैं इस महीने इलेक्ट्रोनिक आइटम खरीदने के लिए कौन-सा दिन शुभ रहेगा?
अप्रैल में इलेक्ट्रोनिक आइटम खरीदने के लिए शुभ दिन?
अगर आप इस महीने इलेक्ट्रोनिक आइटम जैसे, टीवी, फ्रिज, लैपटॉप या स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो 19, 20 और 21 अप्रैल की तारीख सबसे शुभ है. &amp;nbsp;
19 अप्रैल 2026 का पंचांग और खरीदारी से जुड़ी विश्लेषण
19 अप्रैल 2026, रविवार के दिन अक्षय तृतीया भी है. इस दिन किसी भी तरह के नई वस्तु खरीदने के लिए शुभ मानी जाती है. तृतीया तिथि को &#039;वृद्धि कारक&#039; तिथि भी माना जाता है, यानी इस दिन खरीदी गई चीजें बढ़ोतरी और स्थिरता प्रदान करती हैं.&amp;nbsp;
रविवार का दिन होने के कारण सूर्य का प्रभाव अधिक रहेगा, जो इलेक्ट्रोनिक आइटम ( शनि और राहु से जुड़ी मानी जाती हैं) के लिए पूरी तरह से अनुकूल नहीं मानी जाती है. कुल मिलाकर 19 अप्रैल के दिन खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन काफी मंहगी या लंबे समय के निवेश वाली वस्तुओं की खरीद के लिए यह दिन औसत रहेगा.&amp;nbsp;
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है ?
21 अप्रैल 2026 का पंचांग और खरीदारी विश्लेषण
21 अप्रैल 2026, मंगलवार का दिन है. यह तारीख पंचमी तिथि पर पड़ रही है. पंचमी तिथि नई शुरुआत और खरीदारी के लिए उपयुक्त मानी जाती है. लेकिन मंगलवार मंगल को समर्पित दिन भी, जो ऊर्जा और अग्नि का कारक है.
इलेक्ट्रोनिक आइटम के लिए यह थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है. अगर इस दिन इलेक्ट्रोनिक आइटम खरीदना जरूरी हो, तभी खरीदें, अन्यथा थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है.&amp;nbsp;
25 अप्रैल 2026 का पंचांग और खरीदारी का विश्लेषण
25 अप्रैल 2026, शनिवार का दिन, इस दिन नवमी तिथि का प्रभाव रहेगा. नवमी तिथि को सामान्य रूप से नई चीजों की खरीदारी के लिए सही नहीं माना जाता है, क्योंकि यह संघर्ष और रुकावट से जुड़ी होती है.&amp;nbsp;
हालांकि शनिवार शनि ग्रह से जुड़ा दिन है, जो स्थिरता और लंबे समय तक टिकने वाली चीजों का कारक होता है.&amp;nbsp;
अगर तीनों दिन की तुलना करें तो 19 अप्रैल 2026, अक्षय तृतीया का दिन किसी भी तरह की इलेक्ट्रोनिक खरीदारी के लिए परफेक्ट है.&amp;nbsp;

इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते समय इन चीजों का रखें ध्यान!

राहुकाल और यमगंड काल में कभी भी खरीदारी नहीं करनी चाहिए.&amp;nbsp;
शुभ नक्षत्र (रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी आदि) में खरीदारी करें.&amp;nbsp;
बुधवार, शुक्रवार और शनिवार इलेक्ट्रॉनिक आइटम के लिए ज्यादा अनुकूल माने जाते हैं.&amp;nbsp;
खरीदारी से पहले भगवान गणेश की पूजा और स्मरण जरूर करनी चाहिए.&amp;nbsp;

अप्रैल 2026 में अगर आपको इलेक्ट्रॉनिक गैजेट खरीदना ही है, तो अक्षय तृतीया का मौका काफी शुभ रहने वाला है. अगर अन्य दिनों में खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो राहुकाल में खरीदने से बचें और ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें.&amp;nbsp;
Akshaya Tritiya Muhurat 2026: अक्षय तृतीया पर कर रहे हैं गृह प्रवेश, तो इन 10 बातों का रखें ध्यान, मां लक्ष्मी घर में करेंगी वास
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>मोबाइल, टीवी, या, फ्रिज, खरीदने, का, प्लान, अप्रैल, 2026, में, जानें, कौन-सी, तारीख, है, सबसे, शुभ</media:keywords>
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        <title>Animal Ride Weight Limit : ज्यादा है वजन तो इन जगहों पर नहीं जा सकते घूमने, जानें क्यों लागू हुआ कानून?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/animal-ride-weight-limit-ज्यादा-है-वजन-तो-इन-जगहों-पर-नहीं-जा-सकते-घूमने-जानें-क्यों-लागू-हुआ-कानून</link>
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        <description><![CDATA[ Animal Ride Weight Limit : ज्यादा है वजन तो इन जगहों पर नहीं जा सकते घूमने, जानें क्यों लागू हुआ कानून? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Home Tips: रोटी बनाते&amp;बनाते काला हो गया है तवा, बिना मेहनत झटपट ऐसे चमकाएं</title>
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        <description><![CDATA[ Home Tips: रोटी बनाते-बनाते काला हो गया है तवा, बिना मेहनत झटपट ऐसे चमकाएं ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Raw Egg Hair Wash Pregnancy Myth: क्या कच्चे अंडों से सिर धोने से जल्दी होती है प्रेग्नेंसी, जानें कितनी सही है वायरल पोस्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ Raw Egg Hair Wash Pregnancy Myth: क्या कच्चे अंडों से बाल धोने से प्रेग्नेंसी जल्दी हो सकती है? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे दावों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. कई महिलाएं इन घरेलू नुस्खों को अपनाने लगी हैं, लेकिन एक्सपर्ट इसे भ्रामक और नुकसानदायक मानते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इससे आपको क्या नुकसान हो सकता है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दक्षिण टाइनसाइड की रहने वाली 35 वर्षीय बारबोरा ग्रे भी ऐसी ही एक वायरल पोस्ट से प्रभावित हुई थीं. उन्हें गर्भधारण में दिक्कत हो रही थी और इसी दौरान उन्होंने ऑनलाइन एक सलाह देखी, जिसमें कच्चे अंडे से बाल धोने की बात कही गई थी. उन्होंने यह तरीका अपनाया, लेकिन बाद में महसूस किया कि यह सही दिशा नहीं थी. बारबोरा बताती हैं कि शुरुआत में यह सब सामान्य लगा, लेकिन धीरे-धीरे वह हर चीज को लेकर चिंतित रहने लगीं कि चाहे वह शैंपू हो या घर में इस्तेमाल होने वाले अन्य प्रोडक्ट्स. उन्हें एहसास हुआ कि सोशल मीडिया पर बिना वैज्ञानिक आधार के दी गई जानकारी लोगों को भ्रमित कर सकती है, खासकर तब जब वे किसी समस्या से जूझ रहे हों.&amp;nbsp;
इसी अनुभव के बाद उन्होंने She Thrives नाम से एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया, जिसका मकसद महिलाओं को स्वास्थ्य से जुड़ी सही और प्रमाण आधारित जानकारी देना है. यह प्लेटफॉर्म मानसिक स्वास्थ्य, पीरियड्स और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाने का काम करता है और महिलाओं को एक सुरक्षित जगह उपलब्ध कराता है, जहां वे सही जानकारी हासिल कर सकें.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
बीबीसी उर्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपर्ट का भी मानना है कि सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. कम्युनिटी गाइनाकोलॉजी डॉ. कैथरीन गिल्मोर कहती हैं कि उनके पास अक्सर ऐसे मरीज आते हैं, जो इंटरनेट पर देखी गई गलत जानकारी से प्रभावित होते हैं.
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डॉक्टर की सलाह जरूरी
उनके मुताबिक, समय की कमी के कारण महिलाएं अक्सर सोशल मीडिया को जानकारी का आसान सोर्स मान लेती हैं, लेकिन वहां मौजूद हर जानकारी सही नहीं होती. कई बार डर फैलाने वाले या बिना साइंटफिक आधार के दावे लोगों को गलत दिशा में ले जाते हैं. असल में, कच्चे अंडे से बाल धोने और प्रेग्नेंसी के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध साबित नहीं हुआ है. प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याएं हार्मोन, स्वास्थ्य स्थिति और मेडिकल कारणों पर निर्भर करती हैं, जिनका इलाज सही डॉक्टर की सलाह से ही संभव है. &amp;nbsp;एक्सपर्ट कहते हैं सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर घरेलू नुस्खे पर भरोसा करना सही नहीं है. खासकर जब बात प्रेग्नेंसी जैसी गंभीर विषय की हो, तो एक्सपर्ट की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित और सही रास्ता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Raw, Egg, Hair, Wash, Pregnancy, Myth:, क्या, कच्चे, अंडों, से, सिर, धोने, से, जल्दी, होती, है, प्रेग्नेंसी, जानें, कितनी, सही, है, वायरल, पोस्ट</media:keywords>
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        <title>Rashifal 11 April 2026:  मेष से मीन तक 11 अप्रैल का राशिफल, किसे मिलेगा फायदा, किसकी मेहनत पर फिरेगा पानी</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/rashifal-11-april-2026-मेष-से-मीन-तक-11-अप्रैल-का-राशिफल-किसे-मिलेगा-फायदा-किसकी-मेहनत-पर-फिरेगा-पानी</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/rashifal-11-april-2026-मेष-से-मीन-तक-11-अप्रैल-का-राशिफल-किसे-मिलेगा-फायदा-किसकी-मेहनत-पर-फिरेगा-पानी</guid>
        <description><![CDATA[ Rashifal: आज 11 अप्रैल 2026 दिन शनिवार है. आपकी राशि पर पड़ने वाले ग्रह तथा नक्षत्रों के प्रभाव कैसा रहेगा आइए जानते है,ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से मेष से लेकर मीन राशि के लिए आज का दिन कैसा रहेगा.
मेष राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की दशम भाव में संचरण करेगे.आपके लिए थोड़ा भागदौड़ भरा लेकिन फायदेमंद रहने वाला है. छोटी-छोटी बातों में भी आपको सीख मिलेगी. मन में कुछ नया करने की इच्छा जागेगी, जो आगे चलकर फायदा दे सकती है.

पारिवारिक जीवन: घर में हल्का-फुल्का तनाव हो सकता है, लेकिन समझदारी से संभाल लेंगे.
व्यापार तथा नौकरी: काम में तेजी आएगी, लेकिन जल्दबाजी से बचें.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स को फोकस बनाए रखना होगा, तभी रिजल्ट मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे.
स्वास्थ्य: सिरदर्द या थकान हो सकती है.
लकी अंक: 9
लकी कलर: पीला
उपाय: हनुमान जी को गुड़ अर्पित करें.
आज क्या करें: किसी पुराने काम को पूरा करने की कोशिश करें.

वृषभ राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की नवम भाव में संचरण करेगे.आपके लिए संतुलन बनाने का है. हर काम को सोच-समझकर करना बेहतर रहेगा. दिन में कुछ अच्छे मौके मिल सकते हैं.

पारिवारिक जीवन: परिवार में खुशी का माहौल रहेगा, सबका साथ मिलेगा.
व्यापार तथा नौकरी: बिजनेस में छोटा फायदा हो सकता है.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा और नया सीखने को मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्ते में मधुरता बढ़ेगी.
स्वास्थ्य: पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 6
लकी कलर: क्रीम
उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएं.
आज क्या करें: नए प्लान बनाने से पहले सलाह जरूर लें.

मिथुन राशि
आज आपका दिन आज चंद्रमा आपके राशि की अष्टम भाव में संचरण करेगे.काफी एक्टिव रहेगा. कई काम एक साथ आ सकते हैं, लेकिन आप उन्हें संभाल लेंगे. दिमाग तेज चलेगा और सही फैसले लेने में मदद करेगा.

पारिवारिक जीवन: भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपकी तारीफ हो सकती है.
करियर तथा शिक्षा: नई स्किल सीखने का मौका मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर से छोटी नोकझोंक हो सकती है.
स्वास्थ्य: गले या सर्दी की परेशानी हो सकती है.
लकी अंक: 5
लकी कलर: हरा
उपाय: तुलसी के पौधे में जल दें.
आज क्या करें: समय का सही उपयोग करें.

कर्क राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की सातवें भाव में संचरण करेगे.भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील बना सकता है. आप छोटी-छोटी बातों को दिल पर ले सकते हैं. खुद को शांत रखने की जरूरत है.

पारिवारिक जीवन: घर में शांति बनाए रखने की कोशिश करें.
व्यापार तथा नौकरी: काम में ध्यान देना जरूरी है.
करियर तथा शिक्षा: स्टूडेंट्स को मेहनत बढ़ानी होगी.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: रिश्ते में समझदारी से काम लें.
स्वास्थ्य: नींद पूरी न होने से थकान महसूस होगी.
लकी अंक: 2
लकी कलर: सफेद
उपाय: चावल का दान करें.
आज क्या करें: खुद के लिए थोड़ा समय निकालें.

सिंह राशि
आज आपका दिन आज चंद्रमा आपके राशि की छठे भाव में संचरण करेगे.आत्मविश्वास और ऊर्जावान रहेगा. आपके आसपास के लोग आपकी लीडरशिप और निर्णय क्षमता से प्रभावित होंगे. नए प्रोजेक्ट या जिम्मेदारी लेने का समय अनुकूल है. आज जो भी निर्णय आप लेंगे, वह भविष्य में आपको लाभ पहुंचा सकता है.

पारिवारिक जीवन: परिवार में हर किसी का सहयोग मिलेगा. माता-पिता से मार्गदर्शन मिलेगा और घर का माहौल खुशियों से भरा रहेगा. छोटे बच्चों के साथ समय बिताना आज लाभकारी रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपकी मेहनत की सराहना होगी. उच्च अधिकारियों से संबंध मजबूत होंगे. बिजनेस में नए क्लाइंट और ऑर्डर मिलने की संभावना है.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों के लिए दिन अनुकूल है. नए विषय सीखने का मौका मिलेगा और जो मेहनत कर रहे हैं, उन्हें अच्छे परिणाम मिलेंगे.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ रोमांटिक समय मिलेगा. सिंगल लोग आज किसी नए व्यक्ति से आकर्षित हो सकते हैं.
स्वास्थ्य: आपकी ऊर्जा अच्छी रहेगी. हल्की-फुल्की थकान महसूस हो सकती है, इसलिए आराम जरूरी है.
लकी अंक: 1
लकी कलर: गोल्डन
उपाय: सूर्य देव को जल अर्पित करें और सुबह सूरज को देखें.
आज क्या करें: अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें और किसी भी नए प्रोजेक्ट में पहल करें.

कन्या राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की पंचम भाव में संचरण करेगे.सोच-समझकर निर्णय लेने का रहेगा. आपके धैर्य और विवेक की परीक्षा हो सकती है. जो काम आपने लंबे समय से अधूरे छोड़े थे, उन्हें पूरा करने का अच्छा मौका है.

पारिवारिक जीवन: घर में तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा. किसी बुजुर्ग की सलाह आपको नई दिशा दिखा सकती है. घर के छोटे बच्चों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में आपका काम व्यवस्थित रहेगा. किसी नई जिम्मेदारी को संभालने की संभावना है. बिजनेस में छोटे-छोटे निवेश सोच-समझकर करें.
करियर तथा शिक्षा: छात्रों के लिए दिन अच्छा है. पढ़ाई में मन लगाकर काम करें. प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को फायदा मिलेगा.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ संवाद मजबूत रहेगा. किसी नकारात्मक स्थिति को समझदारी से सुलझाना आवश्यक होगा.
स्वास्थ्य: थोड़ी कमजोरी महसूस हो सकती है. खानपान में संतुलन बनाए रखें.
लकी अंक: 7
लकी कलर: नीला
उपाय: भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें.
आज क्या करें: हर काम को प्लानिंग और समयबद्ध तरीके से करें.

तुला राशि
आज का दिन आज चंद्रमा आपके राशि की चौथे भाव में संचरण करेगे. आपके लिए संतुलन और समझदारी से काम करने का है. कोई भी निर्णय लेने से पहले हर पहलू पर विचार करें. दिन के मध्य में आपकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है.

पारिवारिक जीवन: परिवार में भावनात्मक तालमेल बना रहेगा. छोटे-मोटे मतभेद धैर्य से ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rashifal, April, 2026:, मेष, से, मीन, तक, अप्रैल, का, राशिफल, किसे, मिलेगा, फायदा, किसकी, मेहनत, पर, फिरेगा, पानी</media:keywords>
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    <item>
        <title>Child Safety: अप्रैल में कभी धूप&amp;कभी बारिश, बदलते मौसम में ऐसे रखें अपने बच्चों का ख्याल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/child-safety-अप्रैल-में-कभी-धूप-कभी-बारिश-बदलते-मौसम-में-ऐसे-रखें-अपने-बच्चों-का-ख्याल</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/child-safety-अप्रैल-में-कभी-धूप-कभी-बारिश-बदलते-मौसम-में-ऐसे-रखें-अपने-बच्चों-का-ख्याल</guid>
        <description><![CDATA[ Child Safety:&amp;nbsp;अप्रैल का मौसम जितना हमारे लिए सुहाना और सुंदर होता है, बच्चों के लिए यह उतना ही खतरनाक साबित हो सकता है. बदलते मौसम में कभी खिली धूप और कभी झमाझम बारिश इसका सबसे बड़ा कारण है. इस तरह के मौसम में बच्चों का शरीर जल्दी एडजस्ट नहीं कर पाता, दिन में गर्मी और रात में ठंड जैसा माहौल बच्चों में सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल इंफेक्शन जैसी समस्या का खतरा बढ़ा देता है. हवा में नमी और धूल बढ़ने के कारण एलर्जी और स्किन प्रॉब्लम्स भी देखने को मिलते हैं. ऐसे में आइए जानें कैसे रखें इस बदलते मौसम में अपने बच्चे का ख्याल.
सही कपड़ों का चयन है जरूरी
इस मौसम में यही कोशिश रहनी चाहिए कि बच्चों को ना तो बहुत भारी या ना हल्के कपड़े पहनाएं. उन्हें हमेशा एक से अधिक कपड़े पहनाकर रखें ताकि जरूरत के हिसाब से कपड़ो को कम या ज्यादा किया जा सकें. बाहर जाते समय संग में शॉल या जैकेट रखना फायदेमंद हो सकता है, खासकर शाम में जब ठंड ज्यादा रहती है.
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खानपान का रखें खास ध्यान
बदलते मौसम में बच्चों का खान-पान भी बहुत मायने रखता है. उन्हें विटामिन से भरी ताजे फल-सब्जियां देना चाहिए, साथ ही उन्हें ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स देने से बचें. यह भी सुनिश्चित करें कि वे पर्याप्त मात्रा में पानी पी रहे हैं या नहीं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और इम्युनिटी मजबूत बनी रहे.
डॉक्टर की सलाह और सतर्कता
इस मौसम में इंफेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा होता है, इसलिए बच्चों में साफ-सफाई की आदत डलवाना एक कारगर उपाय साबित हो सकता है, जैसे कि बाहर से आते ही हाथ-पैर धोना, टाइम से नहाना और साफ कपड़े पहनना. साथ ही जल्दी सोने की आदत डालवाने से उनकी नींद भी पूरी होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. परहेजों के बावजूद अगर बच्चे को समस्या आ रही है तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जाकर मिलें, ताकि समस्या बढ़ने से पहले उसका समाधान हो सके.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kiara Advani Saree Look: पिंक साड़ी में कियारा ने ढाया कहर, बला की खूबसूरती देख फैंस हुए दीवाने; नजरें हटाना हुआ मुश्किल</title>
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        <description><![CDATA[ Kiara Advani Saree Look: पिंक साड़ी में कियारा ने ढाया कहर, बला की खूबसूरती देख फैंस हुए दीवाने; नजरें हटाना हुआ मुश्किल ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Kiara, Advani, Saree, Look:, पिंक, साड़ी, में, कियारा, ने, ढाया, कहर, बला, की, खूबसूरती, देख, फैंस, हुए, दीवाने, नजरें, हटाना, हुआ, मुश्किल</media:keywords>
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        <title>Bakrid 2026 Date: 27 या 28 मई कब होगी बकरीद, ईद&amp;उल&amp;अजहा की तारीख पर मौलाना ने क्या कहा</title>
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        <description><![CDATA[ Bakrid 2026 Date: माह-ए-रमजान और ईद की समाप्ति के बाद मुसलमानों को बकरीद का बेसब्री से इंतजार रहता है. बकरीद को बकरा ईद या ईद-उल-अजहा के नाम से जाना जाता है. ईद के बाद बकरीद मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है.
बकरीद 2026 कब
बकरीद कब मनाई जाएगी, यह सवाल हर मुसलमान के जहन में है. लेकिन मुस्लिम त्योहारों की तिथि चांद दिखने के बाद ही निर्धारित होती है. इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, बकरीद या ईद-उल-अजह का त्योहार जिलहिज्जा या जुल हिज्जा (इस्लामिक कैलेंडर का आखिरी महीना) की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. जानकारों के अनुसार, इस साल 2026 में बकरीद 27 या 28 मई को मनाए जाने की उम्मीद है. लेकिन तारीख पर अंतिम फैसला चांद दिखाई देने के बाद ही तय होती है.
बकरीद की तारीख पर मौलाना ने क्या कहा
मौलाना समीरुद्दीन कासमी से एक भारतीय मुसलमान ने बकरीद की तारीख पर सवाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है. बता दें कि, समीरुद्दीन कासमी ब्रिटेन में रहने वाले एक भारतीय इस्लामी विद्वान हैं. ये जो इस्लामी खगोल विज्ञान, हदीस, हनफी न्यायशास्त्र और इस्लामी धर्म-नीतियों में विशेषज्ञता रखते हैं. ईद-उल-अजहा की तारीख को लेकर समीरुद्दीन कासमी कहते हैं-

17 मई 2026 को भारत में चांद की ऊंचाई 9 डिग्री और उमर है 17 घंटे 39 मिनट. बर्मा में 8 डिग्री, &amp;nbsp;बांग्लादेश में 9 डिग्री, नेपाल में 9 डिग्री. वैसे तो चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां 9 डिग्री है ऐसे में दूरबीन की मदद से चांद मुश्किल से नजर आ सकता है. लेकिन बहुत अधित संभावना है कि, भारत में 17 मई को जुलहिज्जा की पहली तारीख नहीं होगी.
वहीं 18 मई 2026 भारत में चांद की ऊंचाई 23 डिग्री और उमर है 41 घंटे 40 मिनट. बर्मा में 22 डिग्री, &amp;nbsp;बांग्लादेश में 23 डिग्री, नेपाल में 23 डिग्री. चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां काफी ज्यादा है. ऐसे में चांद नजर आएगा और देर तक देखा जाएगा. इसलिए 19 मई को जुलहिज्जा (Dhul Hijjah 1447) की पहली तारीख हो सकती है.
भारत और पाकिस्तान में अलग-अलग दिन बकरीद!
दूसरी ओर 17 मई को कराची में 10 डिग्री, पेशावर में 10 डिग्री, ईरान में 10 डिग्री और अफगानिस्तान में 10 डिग्री है. चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां 10 डिग्री तो है लेकिन चांद की उमर कब है. लेकिन इन जगहों पर 18 मई को जुलहिज्जा की पहली तारीख हो सकती है. मौलाना कहते हैं कि, इस बार पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान की बकरीद इस बार सऊदी अरब के साथ 27 मई 2026 को बकरीद हो सकती है. वहीं बर्मा, नेपाल, बांग्लादेश और भारत में बकरीद 28 मई 2026 को हो सकती है.&amp;nbsp;

कुर्बानी का त्योहार है बकरीद
बकरीद का त्योहार मुख्य रूप से कुर्बानी की मिसाल के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन बकरे, भेड़ आदि जैसे पशु की कुर्बानी दी जाती है. कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें पहला हिस्सा रिशतेदारों और दोस्तों के लिए, &amp;nbsp;दूसरा गरीब और जरुरतमंद लोगों के लिए और तीसरा परिवार के लिए रखा जाता है.
ये भी पढ़ें: Jagannath Rath Yatra 2026 Date: जगन्नाथ रथ यात्रा कब है, जानें तिथि, महत्व और रीति-रिवाजDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 01:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>सिमसा माता मंदिर निःसंतान महिलाओं की आस्था का केंद्र, जहां देवी खुद देती हैं संतान का संकेत!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/सिमसा-माता-मंदिर-निःसंतान-महिलाओं-की-आस्था-का-केंद्र-जहां-देवी-खुद-देती-हैं-संतान-का-संकेत</link>
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        <description><![CDATA[ हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित Simsa Mata Temple अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं और गहरी आस्था के लिए प्रसिद्ध है. यह मंदिर विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के बीच जाना जाता है, जो संतान सुख की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं.
दरअसल नवरात्रि उत्सव के दौरान मंदिर में सालिंद्रा उत्सव मनाया जाता है, जिसका मतलब है कि, स्वप्न दर्शन. इस दौरान नि:संतान महिलाएं अक्सर मंदिर में विश्राम करते समय देवी के सपने देखने की बात बताती हैं. महिलाएं यहां न केवल रात में बल्कि दिन में भी सोती हुई पाई जा सकती हैं.&amp;nbsp;
सपने में अलग-अलग चीजों से मिलता संतान का संकेत
सच्ची आस्था के साथ मंदिर जाने वाली महिलाएं देवी से आशीर्वाद प्राप्त करने का दावा करती हैं. चाहे वह मानव स्वरूप में हों या प्रतीकों के रूप में. इसके साथ ही वे अक्सर फलो या धातुओं के सपने देखती हैं, जिन्हें शगुन माना जाता है. सपनों में दिखाई देने वाली अलग-अलग चीजों के अलग मायने होते हैं.&amp;nbsp;
उदाहरण के लिए फलो का स्वप्न देखना भी किसी अच्छी खबर का संकेत है. खास तौर पर सपने में अमरूद देखना एक लड़के के जन्म का संकेत देता है, जबकि भिंडी का सपना देखना एक लड़की के जन्म का संकेत है. इसके विपरीत धातु या लकड़ी के सपने देखना अशुभ माना जाता है.&amp;nbsp;
ऐसा भी कहा जाता है कि, यदि कोई महिला लकड़ी, पत्थर या धातु से जुड़ा सपना देखती हैं, तो इसका मतलब वह कभी मां नहीं बनेगी. यदि ऐसी शंकाएं आने के बाद भी कोई महिला मंदिर में रहती है, तो उसके शरीर पर लाल निशान देखने को मिल सकते हैं, जो उसे मंदिर छोड़ने के लिए बाध्य कर सकते हैं.
Cursed Temple: भारत से जापान तक रहस्यमय मंदिरों के श्राप! जानें शापित स्थलों की अनकही कहानियां?
मंदिर से जुड़ी संपूर्ण जानकारी
सिमसा माता मंदिर, जिन्हें स्थानीय लोग संतान दात्री मंदिर के नाम से भी पुकारते हैं. यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लडभड़ोल तहसील के सिमस गांव में स्थित एक प्रसिद्ध सिद्ध पीठ है, जहां निसंतान महिलाएं संतान सुख के लिए आते हैं.&amp;nbsp;
यह मंदिर जोगिंद्रनगर से करीब 50 किमी और बैजनाथ से करीब 25 से 30 किमी की दूरी पर स्थित है.
मंदिर के पास एक चमत्कारी शीला भी मौजूद है. कहा जाता है कि, इस शीला को पूरी ताकत लगाकर दोनों हाथों से हिलाने पर भी यह टस से मस नहीं होती है, लेकिन छोटी उंगली से हिलाने पर ये हिलने लगती है. मां के इस चमत्कार के आगे विज्ञान भी हैरान है. निःसंतान औरतें संतान प्राप्ति के लिए मंदिर में दूर-दूर से आती है.&amp;nbsp;

दिल्ली से सिमसा माता मंदिर कैसे जाएं?
बस से कैसे करें यात्रा?अगर आप भी हिमाचल प्रदेश स्थित सिमसा माता मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो दिल्ली ISBT से बस पकड़ें, जो बैजनाथ, कांगड़ा और मंडी के लिए जाती हो.
इन तीनों जगहों में से कहीं भी उतरकर टैक्सी या लोकल जीप ले, जो आपको मंदिर तक आसानी से पहुंचा देगी. इस पूरी यात्रा में 10 से 12 घंटे का समय लग सकता है.&amp;nbsp;
ट्रेने से कैसे करें यात्रा?वहीं ट्रेन से यात्रा करने के लिए दिल्ली से पठानकोट, कांगड़ा या बैजनाथ के लिए ट्रेन लें. इसके बाद वहां से टैक्सी या लोकल बस के जरिए सिमसा माता मंदिर पहुंच सकते हैं.&amp;nbsp;
फ्लाइट के जरिए कैसे करें यात्रा?वहीं फ्लाइट से जाने के लिए दिल्ली से कांगड़ा स्थित गग्गल एयरपोर्ट पहुंचे. इसके बाद टैक्सी या कैब के जरिए आसानी से सिमसा माता मंदिर पहुंच सकते हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>सिमसा, माता, मंदिर, निःसंतान, महिलाओं, की, आस्था, का, केंद्र, जहां, देवी, खुद, देती, हैं, संतान, का, संकेत</media:keywords>
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        <title>Emirati Women Leaders: बुरका छोड़ दुनिया पर छाईं यूएई की &amp;apos;शेखा&amp;apos;, शाही अंदाज और कारोबारी मिजाज से सबको किया हैरान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/emirati-women-leaders-बुरका-छोड़-दुनिया-पर-छाईं-यूएई-की-शेखा-शाही-अंदाज-और-कारोबारी-मिजाज-से-सबको-किया-हैरान</link>
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        <description><![CDATA[ Emirati Women Leaders: बुरका छोड़ दुनिया पर छाईं यूएई की &#039;शेखा&#039;, शाही अंदाज और कारोबारी मिजाज से सबको किया हैरान ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती अप्रैल में कब ? शत्रुओं पर जीत दिलाती हैं देवी, जानें इनकी पूजा कैसे करें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/baglamukhi-jayanti-2026-बगलामुखी-जयंती-अप्रैल-में-कब-शत्रुओं-पर-जीत-दिलाती-हैं-देवी-जानें-इनकी-पूजा-कैसे-करें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/baglamukhi-jayanti-2026-बगलामुखी-जयंती-अप्रैल-में-कब-शत्रुओं-पर-जीत-दिलाती-हैं-देवी-जानें-इनकी-पूजा-कैसे-करें</guid>
        <description><![CDATA[ Baglamukhi Jayanti 2026: 10 महाविद्याओं में मां बगलामुखी अष्&amp;zwj;टम (आठवीं) महाविद्या है. वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. इस साल बगलामुखी जयंती 25 अप्रैल 2026 शुक्रवार को है. कहा जाता है यदि सारे ब्रह्मांड की शक्तियां मिल भी जाए तो वह मां बगलामुखी का मुकाबला नहीं कर सकती हैं. &amp;nbsp;
देवी को बगलामुखी, पीताम्बरा, बगला, वल्गामुखी, वगलामुखी, ब्रह्मास्त्र विद्या आदि नामों से भी जाना जाता है. मां बगलामुखी वाणी, वाक्पटुता और नियंत्रण की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं. विशेषतौर पर तांत्रिक साधना के लिए मां बगलामुखी की पूजा प्रसिद्ध है.
मां बगलामुखी 2026 पूजा मुहूर्त
सुबह पूजा मुहूर्त - सुबह 5.47 - सुबह 10.41
तांत्रिक पूजा रात्रि काल में होती है, लेकिन इसे गुरु या किसी जानकार के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए नहीं तो उसका विपरीत असर साधक पर ही होता है.
मां बगलामुखी की पूजा के लाभ

शत्रुओं पर विजय
कोर्ट-केस में जीत
वाद-विवाद में सफलता
वाणी में वाक्पटुता
दरिद्रता के नाश
बाधाओं से मुक्ति के लिए मां बगलामुखी की पूजा अचूक मानी जाती है.

मां बगलामुखी की पूजा विधि

मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का अधिक इस्तेमाल करें. गृहस्थ जीवन वाले माता की सामान्य पूजा करें.
सुबह स्नान के बाद पीले रंग के वस्त्र पहनें.
माता को पीले फूल, हल्दी, अक्षत, सिंदूर, श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें.
केला या हलवे का भोग लगाएं.
ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः मंत्र का जाप करें. आरती कर अपनी मनोकामना कहें.

मां बगलामुखी से पहले मृत्युंजय भैरव पूजन
शक्ति की उपासना में भैरव पूजन का विशेष महत्व होता है. मां बगलामुखी के भैरव मृत्युंजय भैरव हैं. भैरव पूजन के लिए दशांश मृत्युंय भैरव मंत्र हौं जूं स: का जाप अवश्य करें.
मां बगलामुखी पूजा मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।
मां बगलामुखी कथा
एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए।इस समस्या का कोई हल न पा कर वह भगवान शिव को स्मरण करने लगे, तब भगवान शिव ने कहा: शक्ति रूप इस प्रलय को रोक सकती हैं.&amp;nbsp; इसके बाद भगवान विष्णु ने कठिन तपस्या की थी, तब माता बगलामुखी प्रकट हुई थीं।
कहां हैं मां बगलामुखी का मंदिर
भारत में मां बगलामुखी के तीन मुख्य सिद्धपीठ हैं- हिमाचल प्रदेश (बनखंडी), नलखेड़ा (मध्य प्रदेश), और दतिया (मध्यप्रदेश)
Char Dham Yatra 2026: 19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम यात्रा, बद्रीनाथ-केदारनाथ के कपाट कब खुलेंगे जान लें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Baglamukhi, Jayanti, 2026:, बगलामुखी, जयंती, अप्रैल, में, कब, शत्रुओं, पर, जीत, दिलाती, हैं, देवी, जानें, इनकी, पूजा, कैसे, करें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Aaj Ka Panchang 10 April 2026: आज कालाष्टमी, शत्रु पर जीत पाने इस मुहूर्त में करें काल भैरव की पूजा, राहुकाल, पंचांग देखें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/aaj-ka-panchang-10-april-2026-आज-कालाष्टमी-शत्रु-पर-जीत-पाने-इस-मुहूर्त-में-करें-काल-भैरव-की-पूजा-राहुकाल-पंचांग-देखें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/aaj-ka-panchang-10-april-2026-आज-कालाष्टमी-शत्रु-पर-जीत-पाने-इस-मुहूर्त-में-करें-काल-भैरव-की-पूजा-राहुकाल-पंचांग-देखें</guid>
        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 10 अप्रैल 2026: 10 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी यानी कालाष्टमी और शुक्रवार है. इस दिन को अत्यंत शक्तिशाली और तांत्रिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा करने से जीवन के अज्ञात भय, दुर्घटनाओं और शत्रु बाधाओं से रक्षा होती है. काल भैरव की पूजा रात्रि काल में शुभ मानी जाती है. इस दौरान भैरवाष्टक का पाठ कर सकते हैं.
10 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 10 April 2026)



तिथि

अष्टमी (9 अप्रैल 2026, रात 9.19 - 10 अप्रैल 2026, रात 11.15)



वार
शुक्रवार


नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा


योग
शिव


सूर्योदय 
सुबह 6.01


सूर्यास्त
शाम 6.44


चंद्रोदय
सुबह 2.10


चंद्रोस्त
सुबह 11.35, 11 अप्रैल


चंद्र राशि
धनु




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.01 - सुबह 10.47


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 9.33 - रात 10.58




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 10.47 - दोपहर 12.23


यमगण्ड काल
दोपहर 3.33 - शाम 5.09


आडल योग
सुबह 6.01 - सुबह 11.28


गुलिक काल
सुबह 7.37 - सुबह 9.12




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 10 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
धनु


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



10 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: भाग्य साथ देगा, निवेश और व्यापार में लाभ के संकेत हैं. दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा, लेकिन पेट व श्वसन से जुड़ी समस्या से सावधान रहें.
वृषभ: मेहनत से सफलता मिलेगी और परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा. नौकरी में प्रमोशन/वेतन वृद्धि के योग हैं, स्वास्थ्य सामान्य रहेगा.
मिथुन: व्यापार और निवेश में लाभ होगा, करियर में नई जिम्मेदारी मिल सकती है. वाहन चलाते समय सावधानी रखें, चोट का खतरा है.
कर्क: सोच-समझकर बोलें, वरना नुकसान हो सकता है. निवेश से बचें और रिश्तों में तालमेल बनाए रखें.
सिंह: धैर्य की परीक्षा होगी, लेकिन मेहनत से प्रमोशन के योग हैं. रिश्तों में संयम रखें और जोखिम लेने से बचें.
कन्या: रुके काम पूरे होंगे और संपत्ति मामलों में सफलता मिल सकती है. परिवार में सुख-शांति रहेगी, थोड़ी थकान हो सकती है.
तुला: आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर में नए अवसर मिलेंगे. आर्थिक लाभ के साथ रिश्ते भी मजबूत होंगे.
वृश्चिक: करियर में अच्छी खबर मिल सकती है और प्रेम जीवन सुखद रहेगा. धार्मिक कार्यों से मानसिक शांति मिलेगी.
धनु: सेहत अच्छी रहेगी और सामाजिक सम्मान बढ़ेगा. नए रिश्ते की शुरुआत या धार्मिक यात्रा के योग हैं.
मकर: पैसों के मामले में सावधानी रखें और उधार देने से बचें. परिवार का सहयोग मिलेगा, लेकिन कार्यक्षेत्र में बाधाएं आ सकती हैं.
कुंभ: पुराने संपर्क से फायदा होगा और बिजनेस में बड़ा मौका मिल सकता है. आय के साथ खर्च भी बढ़ेंगे, संतुलन जरूरी है.
मीन: व्यापार और नौकरी में बड़े अवसर मिलेंगे, धन लाभ के संकेत हैं. काम का दबाव बढ़ सकता है, स्वास्थ्य का ध्यान रखें.

आज का उपाय&amp;nbsp;
भैरव बाबा की कृपा से घर और जीवन में मौजूद बुरी शक्तियों का अंत होता है. काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए काले कुत्ते की सेवा करें.
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
शुक्रवार के दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना चाहिए.&amp;nbsp;
Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती अप्रैल में कब ? शत्रुओं पर जीत दिलाती हैं देवी, जानें इनकी पूजा कैसे करें



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, कालाष्टमी, शत्रु, पर, जीत, पाने, इस, मुहूर्त, में, करें, काल, भैरव, की, पूजा, राहुकाल, पंचांग, देखें</media:keywords>
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        <title>Vallabhacharya Jayanti 2026: वल्लभाचार्य जयंती क्यों मनाई जाती है, जानें श्रीनाथ जी से क्या है इनका संबंध</title>
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        <description><![CDATA[ Vallabhacharya Jayanti 2026:&amp;nbsp;श्रीकृष्ण के अनेक भक्तों में से एक है संत शिरोमणि वल्लभाचार्य. हर साल वल्लभाचार्य जयंती 13 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस साल श्री वल्लभाचार्य की 547वीं जन्म वर्षगांठ है. उन्होंने हिंदू धर्म में पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति पर आधारित है. पुष्टि मार्ग को वल्लभ सम्प्रदाय के नाम से भी जाना जाता है. खासतौर पर श्रीनाथ जी की पूजा करने वालों के लिए ये दिन बहुत खास है. &amp;nbsp;
कौन थे वल्लभाचार्य जी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री वल्लभाचार्य को श्रीनाथ जी का ही स्वरूप माना जाता है. वल्लभाचार्य का जन्म 1479 ईस्वी में वर्तमान चंपारण (बिहार) में हुआ था. इनके पिता का नाम लक्ष्मण भट्ट और माता का नाम इलम्मा था. बचपन से ही वे अत्यंत प्रतिभाशाली और धार्मिक प्रवृत्ति के थे. उन्होंने कम उम्र में ही वेद, उपनिषद और शास्त्रों का गहरा ज्ञान प्राप्त कर लिया था.

जन्म के समय दिखाई अपनी लीला
श्री वल्लभाचार्य जी का जब जन्म हुआ तब उनमें कोई चेतना नहीं थी. ऐसे में दुखी मन से उनके माता पिता उन्हें मृत समझकर छोड़ दिया था. ऐसे में श्री नाथ जी में श्री वल्लभ आचार्य की माता इल्लामागारू को सपने में दर्शन दिया और कहा कि जिस शिशु को तुम छोड़ आए हो वो जीवित है. तुम्हारे गर्भ से स्वयं श्रीनाथ ने जन्म लिया है. भगवान की अद्भुत वाणी सुनकर जब उनके माता- पिता वहां गए तो देखा कि शिशु के चारों तरह आग की लपटें हैं और वो बीच में बड़ी शांति से अंगूठा चूस रहे थे.
क्यों मनाई जाती है वल्लभाचार्य जयंती
वल्लभाचार्य जी ने &amp;ldquo;सेवा भाव&amp;rdquo; को भक्ति का मुख्य आधार बनाया, जिसमें भगवान को बच्चे की तरह प्रेम और सेवा से पूजा जाता है, जैसे उन्हें भोजन कराना, सजाना और सुलाना. उन्हें पूजने वाले वल्लभाचार्य जी को श्रीनाथ जी का प्रकट स्वरूप मानकर इस दिन को धूमधाम से मनाते हैं.
श्रीनाथजी को मुख्य रूप से भक्ति योग के अनुयायियों और गुजरात और राजस्थान में वैष्णव और भाटिया एवं अन्य लोगों द्वारा पूजा जाता है.
वल्लभाचार्य जयंती पर क्या करते हैं
श्रीकृष्ण के भक्त इस दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण, विशेष रूप से श्रीनाथजी की पूजा करते हैं. मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं. भक्तजन दिनभर कान्हा की भक्ति में ली रहते हैं.&amp;nbsp; शास्त्रों का पाठ करते हैं और वल्लभाचार्य जी की शिक्षाओं को सुनते हैं.
वल्लभाचार्य जी के विचार
वल्लभाचार्य अनुसार तीन ही तत्व हैं ब्रह्म, ब्रह्मांड और आत्मा. अर्थात ईश्वर, जगत और जीव. उक्त तीन तत्वों को केंद्र रखकर ही उन्होंने जगत और जीव के प्रकार बताए और इनके परस्पर संबंधों का खुलासा किया.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Vallabhacharya, Jayanti, 2026:, वल्लभाचार्य, जयंती, क्यों, मनाई, जाती, है, जानें, श्रीनाथ, जी, से, क्या, है, इनका, संबंध</media:keywords>
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        <title>Chand Baori History: भूलभुलैया से बैटमैन तक! हॉलीवुड&amp;बॉलीवुड का फेवरेट है यह &amp;apos;सीक्रेट&amp;apos; खजाना, बनाएं घूमने का प्लान</title>
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        <description><![CDATA[ What Is Special About Chand Baori Stepwell: राजस्थान अपनी भव्य वास्तुकला के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, यहां के किले, महल और मंदिर इसकी पहचान हैं. लेकिन इन मशहूर जगहों के बीच कुछ ऐसे भी अद्भुत स्थल हैं, जो अब भी लोगों की नजरों से दूर हैं. ऐसा ही एक अनोखा अजूबा है चांद बावड़ी, जिसे हाल ही में उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने फिर से चर्चा में ला दिया. आनंद महिंद्रा ने अपने पोस्ट में इस प्राचीन बावड़ी को सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि पत्थरों में तराशी गई सोच बताया. उनका कहना है कि जहां लोग राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं, वहीं यह जगह अपनी ज्योमेट्रिकल खूबसूरती और डिजाइन के कारण अलग पहचान रखती है.
&amp;nbsp;1000 साल पुराना अद्भुत निर्माण
आभानेरी गांव में स्थित चांद बावड़ी का निर्माण 8वीं-9वीं शताब्दी में निकुंभ वंश के राजा चंदा ने करवाया था. लगभग 30 मीटर गहरी यह बावड़ी 13 मंजिलों में फैली हुई है और इसमें करीब 3500 सीढ़ियां हैं, जो एकदम सटीक समरूपता में बनी हैं. पहली नजर में ही यह संरचना किसी को भी चौंका देती है. इसकी सबसे खास बात इसकी डिजाइन है. ऊपर से देखने पर सीढ़ियों का पैटर्न एक उल्टे पिरामिड जैसा नजर आता है, जो एक तरह का ऑप्टिकल इल्यूजन पैदा करता है. यही वजह है कि इसे देखने वाले लोग इसकी बनावट में खो जाते हैं.
&amp;nbsp;

People come from across the world to see Rajasthan&amp;rsquo;s palaces and forts rising into the sky.But one of its most remarkable sights does the exact opposite.It goes deep into the ground.Chand Baori, in Abhaneri, was built over a thousand years ago. It drops nearly 30 metres&amp;hellip; pic.twitter.com/BCjChiHSW6
&amp;mdash; anand mahindra (@anandmahindra) March 29, 2026



&amp;nbsp;सिर्फ खूबसूरती नहीं, उपयोगिता भी
चांद बावड़ी सिर्फ देखने के लिए नहीं बनाई गई थी, बल्कि यह एक बेहद उपयोगी संरचना थी. राजस्थान के गर्म और शुष्क मौसम में पानी की कमी हमेशा बड़ी समस्या रही है. ऐसे में यह बावड़ी वर्षा जल संचयन का एक महत्वपूर्ण साधन थी. यहां पानी जमा करके लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता था. इसके साथ ही, इसकी गहराई और संरचना आसपास के तापमान को भी ठंडा बनाए रखने में मदद करती थी. इस तरह यह जगह सिर्फ जल भंडारण ही नहीं, बल्कि जलवायु संतुलन का भी काम करती थी.
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फिल्मों से भी है कनेक्शन
चांद बावड़ी की खूबसूरती सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि फिल्मी दुनिया को भी आकर्षित कर चुकी है. यह स्थान बॉलीवुड फिल्म पहेली और भूल भुलैया में नजर आ चुका है. वहीं हॉलीवुड की फिल्म The Dark Knight Rises और The Fall में भी इसकी झलक देखने को मिली है।
कैसे पहुंचे यहां?
जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित यह बावड़ी सड़क मार्ग से आसानी से पहुंची जा सकती है. इसके पास में हर्षत माता मंदिर भी है, जहां पहले लोग दर्शन से पहले बावड़ी पर जरूर जाते थे. चांद बावड़ी सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि उस दौर की सोच और इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है. एक ऐसा छिपा खजाना, जिसे अब फिर से पहचान मिल रही है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:27 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Chand, Baori, History:, भूलभुलैया, से, बैटमैन, तक, हॉलीवुड-बॉलीवुड, का, फेवरेट, है, यह, सीक्रेट, खजाना, बनाएं, घूमने, का, प्लान</media:keywords>
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        <title>Pillow Hygiene Tips: आपको कितनी बार धोना चाहिए अपना तकिया, कहीं आप भी तो बार&amp;बार नहीं करतीं ये गलतियां?</title>
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        <description><![CDATA[ How Often Should You Clean Your Pillow: तकिया ऊपर से साफ दिख सकता है, लेकिन समय के साथ इसमें पसीना, शरीर के तेल, धूल और यहां तक कि डेड सेल्स भी जमा हो जाती हैं. यही वजह है कि एक्सपर्ट तकिए की नियमित सफाई को जरूरी मानते हैं, क्योंकि केवल तकिया कवर बदलना पूरी तरह से सफाई का समाधान नहीं है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको कितने दिनों में साफ कर लेना चाहिए और इससे क्या- क्या दिक्कत हो सकती है.&amp;nbsp;
कितने दिनों में कर लेना चाहिए साफ?
आमतौर पर सलाह दी जाती है कि तकियों को हर तीन से छह महीने में एक बार जरूर साफ किया जाए. हालांकि, अगर किसी को ज्यादा पसीना आता है, एलर्जी की समस्या है या वह पालतू जानवरों के साथ सोता है, तो दो से तीन महीने में सफाई करना बेहतर माना जाता है. यह आदत तकिए में जमा धूल, तेल और बैक्टीरिया को हटाने में मदद करती है. बिस्तर से जुड़े रिसर्च बताते हैं कि अगर तकियों की नियमित सफाई न की जाए, तो वे बैक्टीरिया और एलर्जन का बड़ा सोर्स बन सकते हैं. न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिनमें प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, तकियों और बिस्तर में डस्ट माइट एलर्जन बड़ी मात्रा में जमा हो सकते हैं, खासकर गर्म और नमी वाले वातावरण में.
इतना ही नहीं, अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, त्वचा के संपर्क में आने वाले कपड़ों पर जमा गंदगी, तेल और कीटाणु मुंहासों और स्किन इरिटेशन को बढ़ा सकते हैं. इसलिए तकिया कवर को हफ्ते में कम से कम एक बार धोना जरूरी है, ताकि गंदगी तकिए के अंदर गहराई तक न जाए.&amp;nbsp;
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कैसे कर सकते हैं सफाई?
तकिए की सफाई का तरीका उसके अंदर भरे मटेरियल पर निर्भर करता है. डाउन और माइक्रोफाइबर तकिए आमतौर पर मशीन में हल्के डिटर्जेंट के साथ धोए जा सकते हैं. वहीं, कुछ तकियों को पूरी तरह भिगोने के बजाय हल्के साबुन वाले कपड़े से साफ करना बेहतर होता है, ताकि उनका आकार खराब न हो. धोने के बाद तकिए को अच्छी तरह सुखाना भी उतना ही जरूरी है. अगर अंदर थोड़ी भी नमी रह जाए, तो फफूंदी पनप सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है. इसलिए धूप में सुखाना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है, या फिर ड्रायर में हल्की गर्मी पर पूरी तरह सूखने देना चाहिए.
कितने साल में इसको बदल लेना चाहिए?
सफाई के बावजूद, तकियों की एक सीमित उम्र होती है. एक्सपर्ट के अनुसार, हर एक से दो साल में तकिया बदल देना चाहिए, क्योंकि समय के साथ उसका सपोर्ट कम हो जाता है और उसमें एलर्जन जमा हो जाते हैं, जिन्हें पूरी तरह हटाना मुश्किल होता है. अगर तकिए से लगातार बदबू आ रही हो, उसमें गांठें बन गई हों या सुबह उठते समय गर्दन में दर्द महसूस हो, तो यह संकेत है कि अब उसे बदलने का समय आ गया है.
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Pillow, Hygiene, Tips:, आपको, कितनी, बार, धोना, चाहिए, अपना, तकिया, कहीं, आप, भी, तो, बार-बार, नहीं, करतीं, ये, गलतियां</media:keywords>
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        <title>Rashifal 10 April 2026: मेष से मीन तक 10 अप्रैल का राशिफल, मकर राशि को प्रमोशन के साथ मिल सकता है बोनस</title>
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        <description><![CDATA[ Rashifal: आज 10 अप्रैल 2026 दिन शुक्रवार है.पंचांग के अनुसार बैशाख कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि संध्या 07 बजकर 35 मिनट तक रहेगा,उपरांत नवमी तिथि आरम्भ हो जाएगी. आपकी राशि पर पड़ने वाले ग्रह तथा नक्षत्रों के प्रभाव कैसा रहेगा आइए जानते है,ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से मेष से लेकर मीन राशि के लिए आज का दिन कैसा रहेगा.








मेष राशि (Aries)
आज चंद्रमा आपके राशि की नवम भाव में संचरण करेगे.आज आपके दिन की शुरुआत थोड़ी उत्साह और हल्की चुनौतियों के साथ होगी. परिवार में छोटे-मोटे मतभेद आपको थोड़ा परेशान कर सकते हैं. काम और स्वास्थ्य पर ध्यान देने का समय है, हल्के-फुल्के निर्णय तुरंत न लें.

पारिवारिक जीवन: परिवार में हल्की बहस हो सकती है, लेकिन संवाद से सब ठीक हो जाएगा.
व्यापार तथा नौकरी: काम में थोड़ी तेजी आएगी, नए प्रोजेक्ट्स में हाथ आजमाने का समय है.
करियर तथा शिक्षा: शिक्षा में नई चीजें सीखने का मन रहेगा, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मेहनत जरूरी है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पार्टनर के साथ छोटी-छोटी बातें खुशी देंगी, रोमांस बढ़ेगा.
स्वास्थ्य: सिर दर्द या हल्की थकान महसूस हो सकती है, पर्याप्त नींद लें.
लकी अंक: 2
लकी कलर: नारंगी
उपाय: घर के मुख्य द्वार पर तुलसी का पौधा रखें.
आज क्या करें: काम में नए आइडिया पर फोकस करें और तनाव से दूर रहें.

वृषभ राशि (Taurus)
आज चंद्रमा आपके राशि की आठवें भाव में संचरण करेगे.आज का दिन आपके लिए स्थिरता और संतुलन लेकर आएगा. धैर्य और समझदारी से फैसले लेने का समय है. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा.

पारिवारिक जीवन: घर में माहौल शांत रहेगा, बुजुर्गों की बातों को महत्व दें.
व्यापार तथा नौकरी: वित्तीय लेन-देन में सतर्क रहें, निवेश सोच-समझ कर करें.
करियर तथा शिक्षा: ऑफिस या पढ़ाई में सफलता के लिए मेहनत जरूरी है, जल्दी परिणाम की उम्मीद न करें.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ टाइम बिताना अच्छा रहेगा, प्रेम संबंध मजबूत होंगे.
स्वास्थ्य: पेट या पाचन संबंधी समस्या हो सकती है, हल्का भोजन करें.
लकी अंक: 2
लकी कलर: हरा
उपाय: हर सुबह नीम के पेड़ के पास ध्यान करें.
आज क्या करें: खर्च पर नियंत्रण रखें और स्वास्थ्य पर ध्यान दें.

मिथुन राशि (Gemini)
आज चंद्रमा आपके राशि की सातवां भाव में संचरण करेगे.आज का दिन आपके लिए बदलाव और नई योजनाओं का है. मन में उत्साह और नई ऊर्जा महसूस होगी. समय पर सही निर्णय लेना सफलता की कुंजी बनेगा.

पारिवारिक जीवन: परिवार में हंसी-खुशी का माहौल रहेगा, छोटे बच्चों से खुशी मिलेगी.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है, ध्यान से काम करें.
करियर तथा शिक्षा: शिक्षा या ट्रेनिंग में प्रगति होगी, ऑनलाइन कोर्स करने का समय सही है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ रोमांटिक पल बितेंगे, प्यार में मजबूती आएगी.
स्वास्थ्य: हल्की थकान और आंखों में चिड़चिड़ापन हो सकता है.
लकी अंक: 5
लकी कलर: नीला
उपाय: सुबह सूरज की रोशनी में 10 मिनट रहें.
आज क्या करें: नए विचारों को नोट करें और व्यायाम जरूर करें.

कर्क राशि (Cancer)
आज चंद्रमा आपके राशि की छठे भाव में संचरण करेगे.आज का दिन आपके लिए भावनाओं और समझदारी का संतुलन लेकर आएगा. परिवार और काम में सामंजस्य बनाए रखना जरूरी है. छोटे निवेश और सोच-समझ कर लिए गए फैसले लाभ देंगे.

पारिवारिक जीवन: माता-पिता की सलाह आज काम आएगी, घर में प्यार भरा माहौल रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: व्यापार में नए क्लाइंट्स मिल सकते हैं, नौकरी में पदोन्नति की संभावना है.
करियर तथा शिक्षा: मेहनत का फल मिलेगा, पढ़ाई या काम में सफलता संभव है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: प्रेम में समझ बढ़ेगी, छोटी बातों पर झगड़े टालें.
स्वास्थ्य: पेट और लीवर पर ध्यान दें, हल्का और ताजा भोजन करें.
लकी अंक: 9
लकी कलर: सफ़ेद
उपाय: रात को दूध में हल्दी डालकर पीएं.
आज क्या करें: परिवार के साथ समय बिताएं और जरूरी निर्णय सोच-समझ कर लें.

सिंह राशि (Leo)
आज चंद्रमा आपके राशि की पंचम भाव में संचरण करेगे.आज आपका आत्मविश्वास और जोश उच्च रहेगा. करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन अहंकार से बचें. परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना आपके मूड को और बेहतर बनाएगा.

पारिवारिक जीवन: परिवार में बच्चों से खुशी मिलेगी, बड़े सदस्यों की बात सुनें.
व्यापार तथा नौकरी: ऑफिस में नेतृत्व का मौका मिलेगा, जिम्मेदारी संभालें.
करियर तथा शिक्षा: नई योजना बनाएं, टीमवर्क में सफलता मिलेगी.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: प्यार में रोमांस बढ़ेगा, साथी को सरप्राइज दें.
स्वास्थ्य: जोड़ों में दर्द या कमजोरी हो सकती है, हल्की एक्सरसाइज करें.
लकी अंक: 1
लकी कलर: सुनहरा
उपाय: पीले फूल मंदिर या पूजा में चढ़ाएं.
आज क्या करें: आत्मविश्वास के साथ अपने विचार दूसरों के सामने रखें.

कन्या राशि (Virgo)
आज चंद्रमा आपके राशि की चौथे भाव में संचरण करेगे.आज आपका दिन योजना और अनुशासन का है. काम और पढ़ाई में ध्यान देने से सफलता मिलेगी. छोटे फैसलों में सतर्क रहना जरूरी है, जल्दबाजी नुकसान कर सकती है.

पारिवारिक जीवन: घर में कोई पुराना मसला हल हो सकता है, रिश्ते मजबूत होंगे.
व्यापार तथा नौकरी: नौकरी या व्यवसाय में योजना अनुसार प्रगति होगी.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में ध्यान दें, नए विषय सीखने का समय है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ खुलकर बातचीत करें, प्यार बढ़ेगा.
स्वास्थ्य: आंखों और कानों में ध्यान रखें, नियमित ब्रेक लें.
लकी अंक: 6
लकी कलर: क्रीम
उपाय: प्रतिदिन गीले हाथों से किसी पेड़ को पानी दें.
आज क्या करें: अपने काम को व्यवस्थित तरीके से पूरा करें.

तुला राशि (Libra)
आज चंद्रमा आपके राशि की तीसरा भाव में संचरण करेगे.आज का दिन संतुलन और सामाजिक संबंधों के लिए उत्तम है. नए दोस्त बनाने और नेटवर्क बढ़ाने के लिए समय सही है. काम ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 21:30:24 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rashifal, April, 2026:, मेष, से, मीन, तक, अप्रैल, का, राशिफल, मकर, राशि, को, प्रमोशन, के, साथ, मिल, सकता, है, बोनस</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>नरेंद्रनगर राजमहल की खास परंपरा: तिल से बनता पवित्र गाडू घड़ा तेल, जिससे होता है बदरी विशाल का श्रृंगार!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/नरेंद्रनगर-राजमहल-की-खास-परंपरा-तिल-से-बनता-पवित्र-गाडू-घड़ा-तेल-जिससे-होता-है-बदरी-विशाल-का-श्रृंगार</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/नरेंद्रनगर-राजमहल-की-खास-परंपरा-तिल-से-बनता-पवित्र-गाडू-घड़ा-तेल-जिससे-होता-है-बदरी-विशाल-का-श्रृंगार</guid>
        <description><![CDATA[ टिहरी जिले के नरेंद्रनगर राजमहल में हाल ही में एक विशिष्ट और पावन कार्यक्रम आयोजित किया गया. महारानी की देखरेख में सुहागिन महिलाओं द्वारा ओखली और मूसल से तिल पिरोकर गाडू घड़ा तेल तैयार किया गया.
इस पवित्र तेल को कलश में भरकर पारंपरिक रूप से बद्रीनाथ धाम ले जाया जाता है, जहां इसका उपयोग भगवान बदरी विशाल के अभिषेक और श्रृंगार में किया जाता है.
अभिषेक की परंपरा
गाडू घड़ा तेल का मुख्य महत्व भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने के दिन के अभिषेक से जुड़ा है. शीतकाल के बाद होने वाले पहले विशेष अभिषेक में इस तेल का प्रयोग किया जाता है. इसे भगवान की मूर्ति को स्नान कराने और श्रृंगार के लिए उपयोग किया जाता है.
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक विश्वास और भक्ति का प्रतीक माना जाता है.
गाडू घड़ा यात्रा
तेल तैयार होने के बाद इसे कलश में रखा जाता है और नरेंद्रनगर से बद्रीनाथ धाम तक पारंपरिक गाडू घड़ा कलश यात्रा निकाली जाती है. यह यात्रा धार्मिक भक्ति और समुदाय के सहयोग का प्रतीक होती है. श्रद्धालु इस यात्रा में हिस्सा लेकर भगवान के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण दिखाते हैं.
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पवित्रता और शुचिता
तेल बनाने की पूरी प्रक्रिया महारानी की देखरेख में की जाती है. वे पीले वस्त्र धारण करके व्रत रखती हैं और सुहागिन महिलाएं पारंपरिक तरीके से तिलों से तेल निकालती हैं. यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक श्रद्धा बल्कि शुचिता और समर्पण का प्रतीक भी है.

छह महीने तक श्रृंगार में उपयोग
गाडू घड़ा तेल का महत्व केवल अभिषेक तक सीमित नहीं है. यह तेल अगले छह महीने तक भगवान बदरी विशाल की सुबह की पूजा (ब्रह्म बेला) में श्रृंगार हेतु उपयोग किया जाता है. तेल का कलश कपाट खुलने से पहले ही बद्रीनाथ धाम पहुंच जाता है, जिससे भक्ति और परंपरा का संपूर्ण चक्र पूरा होता है.
नरेंद्रनगर राजमहल में महारानी की देखरेख में तिल से तैयार किया गया यह गाडू घड़ा तेल धार्मिक परंपरा, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है. यह न केवल भगवान बदरी विशाल के अभिषेक और श्रृंगार में महत्व रखता है, बल्कि समुदाय और संस्कृति में जुड़ाव का भी एक मजबूत संदेश देता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Effects Of Bad Smells On Health: आसपास की बदबू आपको बना रही है बीमार? जानें सेहत पर इसके गंभीर असर</title>
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        <description><![CDATA[ Are Bad Smells Harmful To Health: आपके आसपास आने वाली तेज बदबू सिर्फ नाक को परेशान ही नहीं करती, बल्कि इसका असर आपकी सेहत और दिमाग दोनों पर पड़ सकता है. हाल के स्टडी में यह बात सामने आई है कि खराब गंध को अक्सर लोग हल्के में लेते हैं, लेकिन इसके प्रभाव कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसमें क्या निकला है और कैसे बदबू आपकी सेहत के लिए हानिकारण है.
हमारे शरीर के लिए चेतावनी
स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर Johan Lundstr&amp;ouml;m के मुताबिक, गंध हमारे शरीर के लिए एक चेतावनी संकेत की तरह काम करती है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, साइंटिस्ट के मुताबिक, सड़ी-गली चीजों या गंदगी से आने वाली गंध यह संकेत देती है कि वहां बैक्टीरिया या हानिकारक तत्व मौजूद हो सकते हैं. यही कारण है कि हमारा दिमाग बहुत तेजी से गंध को पहचानकर हमें उस जगह से दूर रहने के लिए अलर्ट करता है.
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सेहत पर कैसे होता है असर?
हालांकि, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक खराब गंध के संपर्क में रहता है, तो इसका सीधा असर उसकी सेहत पर दिखने लगता है. रिसर्च के अनुसार, लगातार बदबू में रहने से सिरदर्द, जी मिचलाना, सांस लेने में दिक्कत और नींद खराब होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इतना ही नहीं, यह मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन भी बढ़ा सकती है. एक्सपर्ट का कहना है कि गंध का असर केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी होता है. अगर कोई व्यक्ति किसी बदबू को लेकर ज्यादा चिंतित या परेशान रहता है, तो उसका असर और बढ़ जाता है. यानी गंध के प्रति हमारी प्रतिक्रिया भी हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.&amp;nbsp;
लाइफस्टाइल पर भी प्रभाव
लगातार बदबू वाले माहौल में रहना लोगों की लाइफस्टाइल को भी बदल देता है. कई लोग ऐसी स्थिति में खिड़कियां बंद रखने लगते हैं, बाहर निकलना कम कर देते हैं या सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना लेते हैं. इससे उनकी शारीरिक गतिविधि और मानसिक सेहत दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है. दिलचस्प बात यह है कि हर व्यक्ति बदबू को एक जैसा महसूस नहीं करता. उम्र, आदतें, एलर्जी और लाइफस्टाइल जैसे कई फैक्टर तय करते हैं कि किसी को गंध कितनी परेशान करेगी. लेकिन एक बात साफ है कि लंबे समय तक खराब गंध के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता.
एक्सपर्ट मानते हैं कि गंध की हमारी क्षमता भी सेहत से जुड़ी होती है. अच्छी सूंघने की क्षमता न सिर्फ हमें खतरों से बचाती है, बल्कि खाने और जीवन के अन्य अनुभवों का आनंद भी बढ़ाती है. वहीं, जिन लोगों की सूंघने की क्षमता कमजोर होती है, उनके स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Body Weight And Nutrition Needs: क्या मोटे लोगों को जरूरी होता है ज्यादा विटामिन सी? आपके होश उड़ा देगी यह स्टडी</title>
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        <description><![CDATA[ Do Overweight People Need More Vitamin C: हमारे शरीर के लिए विटामिन सी को लंबे समय से एक जरूरी पोषक तत्व माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे सर्दी-जुकाम से बचाव और इम्यूनिटी मजबूत करने से जोड़ते हैं. लेकिन अब नई रिसर्च यह बता रही है कि विटामिन सी का महत्व इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका वजन अधिक है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर रिसर्च में क्या निकला.&amp;nbsp;
क्या निकला रिसर्च में?
न्यूजीलैंड के ओटागो विश्वविद्यालय के रिसर्चर ने अपनी स्टडी जिसे क्रिटिकल रिव्यूज इन फूड साइंस एंड न्यूट्रिशन जर्नल में पब्लिश किया गया है, उसमें पाया कि ज्यादा वजन वाले लोगों को मौजूदा स्वास्थ्य मानकों से अधिक विटामिन सी की जरूरत हो सकती है. &amp;nbsp;यह रिजल्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि दुनिया भर में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई लोग अनजाने में इस जरूरी पोषक तत्व की कमी से जूझ रहे हो सकते हैं. विटामिन सी शरीर में कई अहम भूमिकाएं निभाता है. यह टिश्यू की मरम्मत करता है, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करता है, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है. इसके अलावा यह त्वचा, घाव भरने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है.&amp;nbsp;
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सही मात्रा में लेने की सलाह
आमतौर पर स्वास्थ्य दिशानिर्देश सभी लोगों के लिए एक तय मात्रा की सलाह देते हैं. उदाहरण के तौर पर, न्यूजीलैंड में रोजाना 45 मिलीग्राम विटामिन सी लेने की सिफारिश की जाती है, जो लगभग 70 किलो वजन वाले स्वस्थ व्यक्ति के आधार पर तय की गई है. हालांकि, इस स्टडी की प्रमुख रिसर्चर Anitra Carr का कहना है कि यह एक जैसा सभी के लिए वाला तरीका सही नहीं हो सकता. जैसे-जैसे शरीर का वजन बढ़ता है, विटामिन सी की जरूरत भी बढ़ सकती है.&amp;nbsp;
रिसर्च में क्या निकला?
शोध में पाया गया कि हर अतिरिक्त 10 किलो वजन पर शरीर को लगभग 17 से 22 मिलीग्राम अतिरिक्त विटामिन सी की जरूरत पड़ सकती है. यानी जिन लोगों का वजन ज्यादा है, उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से अधिक मात्रा में यह पोषक तत्व लेना चाहिए. इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने दो बड़े स्टडी के डेटा का एनालिसिस किया, जिनमें हजारों प्रतिभागी शामिल थे.&amp;nbsp;
नतीजों में यह सामने आया कि मौजूदा सिफारिशों के आधार पर तो अधिकांश लोगों में विटामिन सी पर्याप्त लग रहा था, लेकिन जब वजन को ध्यान में रखा गया, तो केवल एक-तिहाई से आधे लोगों में ही इसकी पर्याप्त मात्रा पाई गई. एक्सपर्ट का मानना है कि मोटापे में शरीर में हल्की सूजन &amp;nbsp;बनी रहती है, जिससे विटामिन सी तेजी से खर्च होता है. यही वजह है कि ज्यादा वजन वाले लोगों में इसकी कमी जल्दी हो सकती है.&amp;nbsp;
कैसे कर सकते हैं शरीर में पूर्ति?
अच्छी बात यह है कि विटामिन सी की पूर्ति करना आसान है. संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे फल और सब्जियां इसके अच्छे सोर्स हैं. छोटे-छोटे बदलाव, जैसे रोजाना एक-दो अतिरिक्त फल खाना, इस कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Ram Mandir: राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर, चिलचिलाती गर्मी से राहत के लिए सरयू जल का स्प्रे</title>
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        <description><![CDATA[ Ayodhya: अयोध्या नगर निगम ने रामनगरी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गर्मी से राहत देने के लिए एक अनोखी पहल की है. चिलचिलाती गर्मी में राम पथ और मंदिर क्षेत्र में पवित्र सरयू जल का स्प्रे किया जा रहा है.
यह कदम न केवल तापमान को नियंत्रित करने के लिए है, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव को भी सम्मान देता है.
फॉगिंग मशीनों से ठंडक
नगर निगम ने विशेष फॉगिंग मशीनों का इस्तेमाल करते हुए सुबह, दोपहर और शाम के समय सरयू जल का छिड़काव शुरू किया है. इसके जरिए वॉटर वेपर्स के माध्यम से माहौल को ठंडा रखा जा रहा है, ताकि दर्शन के लिए आए राम भक्तों को राहत मिले. इस पहल से भक्तों में उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिल रही है.
श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान

नगर निगम का कहना है कि यह पहल सिर्फ गर्मी कम करने तक सीमित नहीं है. पवित्र सरयू जल का उपयोग करके श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक अनुभव को भी सम्मानित किया जा रहा है. भक्तों का कहना है कि जल छिड़काव से न केवल गर्मी में राहत मिल रही है, बल्कि माहौल में पवित्रता और शांति का एहसास भी बढ़ रहा है.
अप्रैल-मई में क्यों टूटते हैं ज्यादा बाल? जानिए पित्त, सीजन और साइंस का सीधा कनेक्शन?
हनुमानगढ़ी क्षेत्र में अतिरिक्त इंतजाम
नगर निगम ने हनुमानगढ़ी क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए धूप से बचाव के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए हैं. स्थायी शेड का निर्माण जारी है और अस्थायी तौर पर तिरपाल लगाने की भी तैयारी की जा रही है. इसका उद्देश्य लाइन में खड़े लोगों को तेज धूप से बचाना और दर्शन के अनुभव को सहज बनाना है.
अयोध्या नगर निगम की यह पहल न केवल गर्मी से राहत देने में सफल हो रही है, बल्कि पवित्र सरयू जल के माध्यम से श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान भी कर रही है. फॉगिंग मशीनों से जल छिड़काव और हनुमानगढ़ी क्षेत्र में अतिरिक्त इंतजाम शहर में आने वाले भक्तों के अनुभव को आरामदायक और सुखद बना रहे हैं. इस प्रकार अयोध्या में धार्मिक आस्था और सुविधा का अद्भुत संयोजन देखने को मिल रहा है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>छोटे बच्चों की खांसी हो सकती है इस खतरनाक बीमारी का संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ Health: अक्सर माता-पिता बच्चों की खांसी को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. &amp;nbsp;और इससे मामूली खांसी समझ कर घरेलु नुख्से अजमाते है. मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी की यह खांसी कोई मामूली &amp;nbsp;खांसी नही बल्कि आपके बच्चे की ज़िन्दगी में आने वाली बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक, छोटे बच्चों में लगातार बनी रहने वाली खांसी कभी-कभी एक गंभीर बीमारी न्यूमोनिया का शुरुआती संकेत हो सकती है. इसलिए इसको नजरंदाज करना आपके बच्चे के लिए बेहद खतरा बन सकता है.&amp;nbsp;
वहीं अगर बात करें न्यूमोनिया कि तो ये एक ऐसी संक्रमणजनित बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करती है और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को होती है. खासतौर पर नवजात के लिए ये खतरनाक साबित हो सकती है. एक रिपोर्ट से पता चलता है कि, हर साल लाखों बच्चों की जान इस बीमारी के कारण ही जाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां समय पर इलाज और जागरूकता की कमी है.
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खांसी कब बनती है खतरे का संकेत?
कुछ विशेषज्ञ का मानना है कि अगर बच्चे को लगातार खांसी आ रही है और उसे तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, छाती का तेजी से ऊपर-नीचे होना, बच्चे का सुस्त पड़ जाना जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज बिलकुल न करें क्योंकि ये सभी संकेत न्यूमोनिया की ओर इशारा करते है. अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चों में यह बीमारी तेजी से बढ़ती है, इसलिए शुरुआती में ही इसकी पहचान बेहद जरूरी है. कई बार माता-पिता इसे सामान्य वायरल इंफेक्शन समझकर ध्यान नही देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है
कैसे होता है न्यूमोनिया?
न्यूमोनिया आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है. बच्चों में इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण वे इस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं.
कैसे करे बचाव?
डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी से बचाव संभव है, अगर कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए जैसे&amp;nbsp;&amp;bull; बच्चों को समय-समय पर टीकाकरण जरूर कराएं&amp;bull; ठंड और प्रदूषण से बचाव करें&amp;bull; बच्चे को पौष्टिक आहार दें जैसे हरी सब्जी, फल और मेवे&amp;nbsp;&amp;bull; खांसी या बुखार लंबे समय तक रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
अगर न्यूमोनिया का समय रहते पता चल जाए, तो इसका इलाज संभव है. डॉक्टर दवाइयों, एंटीबायोटिक्स और सही देखभाल से बच्चे को पूरी तरह ठीक कर सकते हैं. लेकिन लापरवाही की स्थिति में यह बीमारी खतरनाक और जानलेवा भी बन सकती है. इसलिए समय पर इलाज और डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 05:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए कितना होना चाहिए नट्स का सही पोर्शन? जानें खाने का सही तरीका और मात्रा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/हेल्दी-लाइफस्टाइल-के-लिए-कितना-होना-चाहिए-नट्स-का-सही-पोर्शन-जानें-खाने-का-सही-तरीका-और-मात्रा</link>
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        <description><![CDATA[ हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए कितना होना चाहिए नट्स का सही पोर्शन? जानें खाने का सही तरीका और मात्रा ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>क्या मां बनने के बाद महिलाओं में घटती है फिजिकल रिलेशन बनाने की इच्छा, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Improve Libido After Pregnancy: मां बनना किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास और इमोशनल अनुभव होता है. लेकिन इसके साथ ही शरीर और मन में कई बड़े बदलाव भी आते हैं, जिनका असर रिश्तों और खासकर फिजिकल इंटिमेसी पर पड़ सकता है. यही वजह है कि कई महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद फिजिकल इंटिमेसी यानी शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा कम हो जाती है. एक्सपर्ट इसे एक सामान्य और अस्थायी बदलाव मानते हैं.&amp;nbsp;
क्या होते हैं कारण?
&amp;nbsp;डिलीवरी के बाद सबसे बड़ा कारण होता है थकान. नवजात शिशु की देखभाल में दिन-रात का फर्क मिट जाता है. नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर लगातार थका हुआ महसूस करता है। ऐसे में फिजिकल रिलेशन की इच्छा कम होना स्वाभाविक है. इसके अलावा पोस्टनेटल डिप्रेशन भी एक बड़ी वजह है. कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद मानसिक दबाव, चिंता और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरती हैं. यह स्थिति न सिर्फ उनके मूड को प्रभावित करती है, बल्कि पार्टनर के साथ नजदीकी पर भी असर डालती है.&amp;nbsp;
हॉर्मोनल बदलाव का भी अहम रोल
हॉर्मोनल बदलाव भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हॉर्मोन का स्तर अचानक कम हो जाता है. इससे शरीर की प्राकृतिक लुब्रिकेशन प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे इंटिमेसी के दौरान असहजता महसूस हो सकती है और इच्छा में कमी आ सकती है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
यूरोपीय जर्नल ऑफ मिडवाइफरी में पब्लिश एक रिसर्च में बताया गया कि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है. ब्रेस्टफीडिंग &amp;nbsp;के दौरान भी एस्ट्रोजन का स्तर कम रहता है, जिससे फिजिकल इंटिमेसी पर असर पड़ता है. कुछ स्टडीज में यह भी सामने आया है कि जो महिलाएं एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनमें लुब्रिकेशन की कमी और दर्द जैसी समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं.
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शरीर में होते हैं बदलाव
इसके साथ ही शरीर में आए बदलाव भी महिलाओं के आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं. प्रेग्नेंसी के बाद वजन बढ़ना, स्ट्रेच मार्क्स या शरीर के आकार में बदलाव कई बार महिलाओं को असहज महसूस कराते हैं. इससे उनकी बॉडी इमेज पर असर पड़ता है और वे खुद को पहले जैसा आकर्षक नहीं मान पातीं, जिसका सीधा असर उनकी इंटिमेसी पर पड़ता है. हालांकि एक्सपर्ट साफ कहते हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं होती.
पार्टनर के साथ खुलकर बात करना
सही समय, बातचीत और देखभाल से इसे बेहतर किया जा सकता है. पार्टनर के साथ खुलकर बात करना, खुद के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि हर महिला का शरीर अलग होता है और डिलीवरी के बाद उसमें बदलाव आना पूरी तरह सामान्य है. ऐसे में खुद को समय देना और अपने शरीर को स्वीकार करना ही इस दौर से बाहर निकलने का सबसे बेहतर तरीका माना जाता है.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Heart Disease Prevention: हार्ट अटैक का खतरा 31% तक होगा कम! डायबिटीज मरीजों के लिए वरदान साबित होगी यह नई दवा</title>
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        <description><![CDATA[ Can Evolocumab Prevent First Heart Attack: दिल की बीमारियां आज भी दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं. अक्सर लोग तब इलाज शुरू करते हैं, जब हालत गंभीर हो चुकी होती है, जैसे धमनियों में ब्लॉकेज या हार्ट अटैक के बाद. लेकिन अब नई रिसर्च इशारा कर रही है कि अगर इलाज पहले और ज्यादा प्रभावी तरीके से शुरू किया जाए, तो इन खतरों को पहले ही रोका जा सकता है.&amp;nbsp;
हार्ट से जुड़ी दिक्कत को कम किया जा सकता है
अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल ब्रिगहम &amp;nbsp;की एक नई स्टडी, जो JAMA में पब्लिश हुई और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के सालाना साइंटिस्ट सत्र में पेश की गई, उसमें बताया गया कि इवोलोक्यूमैब नाम की दवा हाई-रिस्क डायबिटीज मरीजों में दिल से जुड़ी पहली बड़ी घटना के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है. भले ही उनमें अभी &amp;nbsp;आर्टरीज की बीमारी के साफ संकेत न हों.
क्यों बढ़ता है खतरा
हमारा हार्ट शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए साफ और खुली ब्लड वेसल्स पर निर्भर करता है. लेकिन समय के साथ आर्टरीज की दीवारों में प्लाक नाम का पदार्थ जमा होने लगता है, जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. जब यह जमाव बढ़ जाता है, तो ब्लड फ्लो रुक सकता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इस प्रक्रिया के पीछे एक बड़ा कारण एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल होता है. लंबे समय से डॉक्टर इसे कम करने के लिए स्टैटिन दवाओं का इस्तेमाल करते आ रहे हैं. हालांकि ये दवाएं असरदार हैं, लेकिन हाई-रिस्क मरीजों में हमेशा पर्याप्त कमी नहीं ला पातीं.
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नए विकल्प आते हैं
यहीं पर इवोलोक्यूमैब जैसे नए विकल्प सामने आते हैं. यह एक पीसीएसके9 इनहिबिटर दवा है, जो स्टैटिन से अलग तरीके से काम करती है और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को लगभग 60 प्रतिशत तक कम कर सकती है. अब तक इसका उपयोग मुख्य रूप से उन मरीजों में किया जाता था, जिन्हें पहले से दिल की बीमारी हो. इस स्टडी में यह जांचा गया कि क्या इस दवा का इस्तेमाल पहले से, यानी बीमारी के गंभीर होने से पहले, किया जाए तो क्या यह दिल की समस्याओं को रोक सकती है. इसके लिए 3,655 हाई-रिस्क डायबिटीज मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें लंबे समय से डायबिटीज, इंसुलिन पर निर्भरता या छोटी ब्लड वेसल्स में नुकसान जैसी स्थितियां थीं, लेकिन एथेरोस्क्लेरोसिस के स्पष्ट संकेत नहीं थे.
करीब एक साल बाद नतीजे सामने आए कि इवोलोक्यूमैब लेने वालों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल लगभग 51 प्रतिशत तक कम हो गया. &amp;nbsp;लेकिन असली असर लंबे समय में दिखा. करीब पांच साल के फॉलो-अप में पाया गया कि इस दवा का इस्तेमाल करने वालों में पहली बार हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल से जुड़ी मौत का खतरा 31 प्रतिशत तक कम था.
इसे भी पढ़ें:&amp;nbsp;नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Rajasthan Mystery Illness: किस रहस्यमयी बीमारी ने राजस्थान में रोकीं 6 बच्चों की सांसें, जानें लक्षण और यह कितनी खतरनाक?</title>
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        <description><![CDATA[ What Is Causing Fever Deaths In Rajasthan Children: राजस्थान के सलूम्बर जिले के लसाड़िया इलाके में पिछले कुछ दिनों में सामने आए बच्चों की मौत के मामलों ने हेल्थ सिस्टम को अलर्ट मोड पर ला दिया है. 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच दो गांवों में छह छोटे बच्चों की बुखार के बाद मौत और 652 मरीज का इलाज&amp;nbsp; होने से प्रशासन और मेडिकल विभाग हरकत में आ गया है. अब इस पूरी घटना को एक संभावित स्वास्थ्य संकट के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी गहन जांच शुरू कर दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार,&amp;nbsp; डॉक्टर इसको लेकर वायरल इन्सेफलाइटिस की आशंका जता रहे है.&amp;nbsp;
मेडिकल टीम जांच में जुटी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर स्थित आरएनटी मेडिकल कॉलेज के एक्सपर्ट की एक टीम को मौके पर भेजा गया है. यह टीम जमीनी स्तर पर जाकर बीमारी के कारणों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कोई इंफेक्शन है, मौसमी बीमारी है या फिर कोई नई स्वास्थ्य समस्या उभर रही है. इसके अलावा जयपुर से डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विस की टीम भी निगरानी और कंट्रोल के लिए तैनात की गई है. मुख्यमंत्री भजन लाल ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उन्होंने साफ कहा है कि मौतों के सही कारण का पता लगाया जाए और बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं.
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2 से 4 साल के बच्चों की मौत
मृत बच्चों की उम्र 2 से 4 साल के बीच बताई गई है, जो इस घटना को और भी संवेदनशील बना देती है. छोटे बच्चों में अचानक बुखार और फिर गंभीर हालत बनने के मामलों ने हेल्थ एक्सपर्ट को सतर्क कर दिया है. राज्य के मुख्य सचिव &amp;nbsp;वी. श्रीनिवास ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्थिति की समीक्षा की और सभी विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए. वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौर ने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे में लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा. गंभीर मामलों को बिना देरी के जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं.
एन्सेफलाइटिस क्या होता है?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट mayoclinic के अनुसार, एन्सेफलाइटिस एक गंभीर स्थिति है, जिसमें ब्रेन में सूजन आ जाती है. यह आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है, लेकिन कई बार शरीर की इम्यून ही गलती से मस्तिष्क पर हमला करने लगती है, जिसे ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस कहा जाता है. इस बीमारी के वायरस मच्छर और टिक जैसे कीड़ों के काटने से भी फैल सकते हैं. कुछ मामलों में इसका कारण क्लियर नहीं हो पाता.
क्या होते हैं इसके लक्षण?
यह बीमारी समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकती है, इसलिए तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है. इसके लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और कमजोरी. लेकिन कुछ ही समय में यह गंभीर रूप ले सकती है. अगर इसमें मरीज की जान बच जाए, तो उसे भविष्य में सुनने की दिक्कत या मिर्गी के दौरे की दिक्कत का सामना करना पड़ता है.&amp;nbsp;
बच्चे ही क्यों होते हैं चपेट में ज्यादा
एन्सेफलाइटिस बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है। इसका कारण यह है कि बच्चों की इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, जिससे वे सामान्य वायरल इंफेक्शन के प्रति अधिक संवेदनशील रहते हैं. हर्पीस और एंटेरोवायरस जैसे वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर ब्रेन तक पहुंच सकते हैं और वहां सूजन पैदा कर सकते हैं. वैसे यह बुखार हर उम्र के लोगों की अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन बच्चों की इम्यून क्षमता कमजोर होने के कारण वो जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं.&amp;nbsp;
इसे भी पढ़ें:&amp;nbsp;नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल, ये संकेत हो सकते हैं खतरनाक, तुरंत लें मेडिकल सलाह
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Personality Test: मीटिंग में आपकी सीट बताती है आपकी पर्सनैलिटी, जानें बैठने का तरीका कैसे खोलता है कई राज?</title>
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        <description><![CDATA[ Meeting behavior analysis: क्या आपने कभी नोटिस किया है कि जैसे ही आप किसी मीटिंग रूम या भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाते हैं, तब आपका दिमाग बिना सोचे-समझे एक कुर्सी चुन लेता है. यह चुनाव पूरी तरह से अचानक नहीं होता, बल्कि आपकी सोच, व्यवहार और व्यक्तित्व से जुड़ा होता है. आप किस सीट पर बैठना पसंद करते हैं, कोने में, बीच में या लीडर के पास यह आपकी पर्सनेलिटी के कई पहलुओं को उजागर कर सकता है. दरअसल सीट चुनना सिर्फ आराम के लिए नहीं होता, बल्कि यह इस बात का भी संकेत होता है कि आप लोगों के बीच खुद को कैसे प्रस्तुत करते हैं. इसी कॉन्सेप्ट पर आधारित यह पर्सनैलिटी टेस्ट बताता है कि मीटिंग में आपकी पसंदीदा सीट आपके स्वभाव के बारे में क्या बताती है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि मीटिंग में आपकी सीट आपकी पर्सनालिटी कैसे बताती है और बैठने का तरीका आपके कई राज कैसे खोल देता है.

को-पायलट

अगर आप ऐसी सीट चुनते हैं, जो लीडर या केंद्र के पास हो तो यह दर्शाती है कि आप जिम्मेदारी लेने से पीछे नहीं हटते. आप टीम में एक्टिव रहना पसंद करते हैं और चीजों को सही दिशा में आगे बढ़ाने में भरोसा रखते हैं. ऐसे लोग सिस्टम को समझते हैं और सहयोगी भूमिका में मजबूत होती है.

बफर जोन

जो लोग थोड़ी दूरी पर बैठना पसंद करते हैं, वह माहौल को समझकर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं. यह लोग सीधे स्पॉटलाइट में आने से बचते हैं, लेकिन हर चीज पर नजर रखते हैं. इनकी खासियत होती है संतुलन बनाए रखना और सही समय पर अपनी बात रखना.

कैलकुलेटेड थिंकर

कुछ लोग ऐसी जगह पर बैठते हैं, जहां वे ज्यादा ध्यान खींचे बिना पूरे माहौल को समझ सके. ऐसे लोग जल्दबाजी में बोलने के बजाय पहले हर पहलू पर सोचते हैं. जब यह अपनी राय देते हैं तो अक्सर वह बाकी लोगों से अलग और अहम होती है.
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इंटरनल ऑडिटर

ऐसी सीट चुनने वाले लोग हर बात को परखने की आदत रखते हैं. यह सिर्फ हां में हां मिलाने के बजाय हर निर्णय के पीछे की वजह समझना चाहते हैं. इनका नजरिया तार्किक होता है और यह गलतियों को जल्दी पकड़ लेते हैं.

द डायरेक्ट चैलेंजर

जो लोग मीटिंग में सीधे सामने बैठते हैं, वे आमतौर पर कॉन्फिडेंट और स्पष्ट बोलने वाले होते हैं. यह अपनी बात खुलकर रखते हैं और बहस से नहीं डरते हैं. ऐसे लोग चुनौती पूर्ण परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटते हैं.

द वॉलफ्लावर डिटेक्टिव

अगर आप मीटिंग में किनारे की सीट चुनते हैं, तो आप शांत रहकर लोगों को समझने वाले हो सकते हैं. आप कम बोलते हैं, लेकिन हर छोटी बड़ी चीज को नोटिस करते हैं. सही समय आने पर आपकी बात अहम साबित होती है.

स्ट्रेटेजिक पार्टिसिपेंट

कुछ लोग मीटिंग में हर बात पर रिएक्शन नहीं देते हैं. बल्कि सही मौके का इंतजार करते हैं. यह लोग अपनी उर्जा बचाकर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर ही बोलते हैं, जिससे उनकी बात ज्यादा प्रभावी होती है.

द सोशल ग्लू

ऐसी सीट सुनने वाले लोग ग्रुप में पॉजिटिव उर्जा बनाए रखते हैं. यह दूसरों को सहज महसूस कराने में माहिर होते हैं और औपचारिक माहौल को भी हल्का बना देते हैं.

द लॉयल प्रो

जो लोग लीडर के पास बैठना पसंद करते हैं. वह अक्सर सीखने और मार्गदर्शन लेने में आत्मविश्वास रखते हैं. यह लोग टीम में अपनी जगह मजबूत करने के लिए लीडर के साथ तालमेल बनाकर चलते हैं.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 13:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>स्किन बैरियर क्यों होता है डैमेज? डर्मेटोलॉजिस्ट ने बताए इसके 3 बड़े कारण और बचाव के टिप्स</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है. लोग कई तरह की दुकानों पर मिलने वाली दवाएं खरीद लेते हैं. लेकिन कुछ प्रोडक्ट स्किन को फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान पहुंचाते हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार स्किन बैरियर यानी स्किन की सबसे बाहरी परत अगर कमजोर हो जाए तो स्किन ड्राई, सेंसेटिव और कई समस्याओं के लिए ज्यादा संवेदनशील हो जाती है. ऐसे में लोगों को पहले यह समझने की जरूरत होती है कि आखिर स्किन बैरियर क्या होता है और यह डैमेज क्यों हो जाता है. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि स्किन बैरियर डैमेज क्यों होता है और डर्मेटोलॉजिस्ट इसके बड़े कारण और बचाव के टिप्स क्या बताते हैं.
क्या होता है स्किन बैरियर?
स्किन बैरियर स्किन की सबसे बाहरी परत होती है, जो एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है. यह नमी को बनाए रखने के साथ-साथ बैक्टीरिया, प्रदूषण और केमिकल जैसे बाहरी तत्वों से स्किन को बचाती है. जब यह परत मजबूत रहती है तो स्किन हेल्दी और संतुलित रहती है. लेकिन इसके कमजोर होने पर स्किन में कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती है.
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स्किन बैरियर डैमेज होने के तीन बड़े कारण 
1. स्किन केयर प्रोडक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल
डर्मेटोलॉजिस्ट के अनुसार आजकल लोग बिना समझे एक्सफोलिएटिंग एसिड, रेटिनॉइड और विटामिन सी जैसे एक्टिव इंग्रेडिएंट्स का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं. जरूरत से ज्यादा या गलत तरीके से इनका उपयोग डर्मेटोलॉजिस्ट के नेचुरल ऑयल लेयर को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे स्किन बैरियर कमजोर हो जाता है.
2. जरूरत से ज्यादा चेहरे की सफाई
कई बार हम बार-बार चेहरा धोने जैसी आदतों को सही समझते हैं, लेकिन बार-बार चेहरा धोना या हार्श क्लींजर का इस्तेमाल करना भी स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे स्क्रीन का नेचुरल बैलेंस बिगड़ता है और स्किन ड्राई होने लगती है, जिससे जलन और पिंपल्स की समस्या बढ़ जाती है.
3. बाहरी एनवायरनमेंट का असर
कई बार प्रदूषण, तेज धूप, मौसम में बदलाव और लंबे समय तक एसी में रहने जैसी चीज भी धीरे-धीरे स्किन बैरियर को नुकसान पहुंचाती है. इसके अलावा नींद की कमी, तनाव और शरीर में पानी की कमी भी स्किन को प्रभावित कर सकती है.
कैसे पहचानें स्किन बैरियर डैमेज?
स्किन बैरियर खराब होने पर स्क्रीन में लगातार ड्राइनेस, रेडनेस, इचिंग, खिंचाव, पपड़ी उतरना और पिंपल्स बढ़ने जैसी समस्याएं दिखाई देती है. वहीं कई बार मॉइश्चराइजर लगाने के बाद भी स्किन रूखी और बेजान सी नजर आती है. यह सभी लक्षण इशारा करते हैं कि आपकी स्किन बैरियर डैमेज है.
कैसे ठीक करें स्किन बैरियर?
एक्सपर्ट्स के अनुसार स्किन बैरियर को ठीक करने के लिए सबसे पहले स्किन केयर रूटीन को आसान बनाना जरूरी है. कुछ समय के लिए स्ट्रांग एक्टिव प्रोडक्ट का इस्तेमाल कम या बंद करना चाहिए. माइल्ड और साबुन रहित क्लींजर का इस्तेमाल करना बेहतर होता है, जिससे स्किन की नमी बनी रहती है. इसके साथ ही ऐसे मॉइस्चराइजर का उपयोग करना चाहिए, जिसमें सेरामाइड, ग्लिसरीन, हाइलूरोनिक एसिड और नियासिनामाइड जैसे तत्व मौजूद होते हैं. डेली सनस्क्रीन लगाना भी जरूरी है, क्योंकि वह धूप स्किन बैरियर को और कमजोर कर सकती है.
लाइफस्टाइल पर भी पड़ता है असर
स्किन हेल्थ केवल प्रोडक्ट्स पर निर्भर नहीं करती है, बल्कि लाइफस्टाइल भी इसमें बहुत जरूरी भूमिका निभाती है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित खाना खाना, तनाव कम करना और अच्छी नींद लेना स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है. इसके अलावा एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि हर किसी की स्किन अलग होती है, इसलिए किसी भी नए या स्ट्रांग प्रोडक्ट को लेने से पहले एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Eye drops side effects: क्या बिना डॉक्टर से पूछे आप भी डाल लेते हैं आई ड्रॉप? छिन सकती है आंखों की रोशनी</title>
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        <description><![CDATA[ 
Eye drops side effects: आज के समय में स्क्रीन पर ज्यादा देर तक काम करने और गेम खेलने के चलते हैं आंखों में कई तरह की दिक्कत हो जाती है. वहीं कई बार हल्की सी आंखों की समस्या होने पर लोग सीधे मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीद कर इस्तेमाल कर लेते हैं. आंखों में होने वाली रेडनेस, जलन या सूखापन जैसी दिक्कतों में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना अब नॉर्मल सा हो गया है. लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार यह आदत आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. कई बार गलत दवा न सिर्फ असली बीमारी को छुपा देती है, बल्कि आगे चलकर बड़ी समस्या भी खड़ी कर सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि क्या आप बिना डॉक्टर से पूछे आई ड्रॉप डाल लेते हैं तो इससे आपकी आंखों की रोशनी कैसे छीन सकती है?
हर लक्षण एक जैसा नहीं, बीमारी अलग-अलग
आंखों में होने वाली हर परेशानी का कारण अलग-अलग हो सकता है. यह एलर्जी, बैक्टीरिया या वायरल इनफेक्शन, ड्राई आई या फिर ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. ऐसे में बिना जांच के आई ड्रॉप इस्तेमाल करने से सही बीमारी का पता नहीं लग पाता है और इलाज में देरी हो सकती है. डॉक्टर के अनुसार बिना सलाह के वाले आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. यह दवाएं तुरंत राहत जरूर देती है. लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर आंखों का प्रेशर बढ़ा सकता है, इससे ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा अगर आंख में पहले से कोई इंफेक्शन है तो स्टेरॉयड उसे और ज्यादा गंभीर बना सकता है.
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एंटीबायोटिक और रेडनेस ड्रॉप्स का गलत इस्तेमाल
अक्सर लोग आंख लाल होने पर एंटीबायोटिक ड्रॉप्स इस्तेमाल कर लेते हैं, जबकि हर बार यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन नहीं होता, वायरल या एलर्जी में यह दवाएं बेअसर रहती है. ऐसे में बार-बार इस्तेमाल से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ सकता है. यानी दावों का असर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है. वहीं रेडनेस रिलीफ ड्रॉप्स कुछ समय के लिए आराम देती है, लेकिन इनके ज्यादा इस्तेमाल से आंखों में दोबारा ज्यादा लालिमा और सूखापन हो सकता है. वहीं आर्टिफीशियल टीयर्स जैसे ड्रॉप्स को लोग सुरक्षित मानते हैं, लेकिन अगर इन्हें बार-बार इस्तेमाल करना पड़ रहा है तो यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकते हैं. खासकर कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को बिना सलाह कोई भी ड्रॉप इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है.
आंखों के लिए कब जरूरी है डॉक्टर से मिलना?
अगर आपकी आंखों में तेज दर्द हो, रोशनी चुभे, धुंधला दिखाई दे, चोट लगे या फिर 2 से 3 दिन में समस्या ठीक न हो तो तुरंत आई स्पेशलिस्ट से कांटेक्ट करना चाहिए. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. वहीं डॉक्टरों का कहना है कि आंख शरीर का बहुत संवेदनशील हिस्सा है और गलत तरीके, गलत दवा का असर सीधे नजर पर पड़ सकता है. कई आई ड्रॉप सिर्फ लक्षणों को दबाते हैं, लेकिन बीमारी को खत्म नहीं करते हैं. ऐसे में बिना सलाह के दवा लेने से कंडीशन और बिगड़ सकती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Eye, drops, side, effects:, क्या, बिना, डॉक्टर, से, पूछे, आप, भी, डाल, लेते, हैं, आई, ड्रॉप, छिन, सकती, है, आंखों, की, रोशनी</media:keywords>
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        <title>Rashifal 8 April 2026: मेष से मीन तक 8 अप्रैल का राशिफल, ऑफिस में टीम वर्क से 3 राशियों का पूरा होगा टारगेट!</title>
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        <description><![CDATA[ Rashifal: 08 अप्रैल 2026 दिन बुधवार है.पंचांग के अनुसार बैशाख कृष्णपक्ष की षष्ठी तिथि संध्या 04 बजकर 08 मिनट तक रहेगा,उपरांत सप्तमी तिथि आरम्भ हो जाएगी. आपकी राशि पर पड़ने वाले ग्रह तथा नक्षत्रों के प्रभाव कैसा रहेगा आइए जानते है,ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से मेष से लेकर मीन राशि के लिए आज का दिन कैसा रहेगा.
मेष राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की नवम भाव में संचरण करेगे. आज का दिन आपके लिए ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा. सुबह जल्दी उठकर हल्का व्यायाम करने से मन और शरीर दोनों तरोताजा रहेंगे. परिवार और दोस्तों के साथ आपका संवाद मधुर रहेगा, जिससे रिश्तों में सकारात्मक माहौल बनेगा.

पारिवारिक जीवन: घर में बच्चों या बुजुर्गों के साथ समय बिताना लाभदायक रहेगा. किसी पुराने विवाद को सुलझाने का दिन है. घर में प्रेम और समझ बनी रहेगी.
व्यापार तथा नौकरी: व्यापार में नए क्लाइंट्स या प्रोजेक्ट मिल सकते हैं. जोखिम लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें. नौकरीपेशा लोग अपने वरिष्ठों को प्रभावित कर सकते हैं.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई और ऑफिस वर्क में ध्यान और मेहनत दोनों की जरूरत है. टीम वर्क में सहयोग बढ़ेगा और कुछ नए जिम्मेदारियां मिल सकती हैं.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ बातचीत से तनाव कम होगा. नए रिश्तों में रोमांस बढ़ेगा और पुरानी गलतफहमियों का निपटारा संभव है.
स्वास्थ्य: हल्की खांसी या थकान महसूस हो सकती है. पर्याप्त पानी और हल्का भोजन लाभकारी रहेगा.
लकी अंक: 5
लकी कलर: नारंगी
उपाय: घर के मुख्य दरवाजे पर लाल फूल रखें. माता या दादी का आशीर्वाद लें.
आज क्या करें: नए प्रोजेक्ट पर फोकस करें और घर में पूजा-अर्चना अवश्य करें.

वृषभ राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की आठवें भाव में संचरण करेगे. आज का दिन थोड़े उतार-चढ़ाव वाला रहेगा.

पारिवारिक जीवन: घर में छोटे-मोटे झगड़े हो सकते हैं. माता-पिता की सलाह से परिस्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं. बच्चों के साथ खेलकूद समय अच्छा रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: आज किसी नए अवसर या सौदे पर जल्दी फैसला न लें.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई या ऑफिस में चुनौतीपूर्ण काम आएंगे.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है.
स्वास्थ्य: सिरदर्द या आंखों में तनाव महसूस हो सकता है.
लकी अंक: 2
लकी कलर: गहरा नीला
उपाय: किसी गरीब को भोजन कराएं और घर में तुलसी का पौधा लगाएं.
आज क्या करें: परिवार और काम दोनों में संतुलन बनाए रखें.

मिथुन राशि
आज चंद्रमा आपके राशि की सातवें भाव में संचरण करेगे.आज आपका मूड हल्का-फुल्का और खुशमिजाज रहेगा. नए विचार आपके दिमाग में आएंगे और कुछ पुराने कामों को पूरा करने का समय मिलेगा.

पारिवारिक जीवन: घर में बच्चों या बुजुर्गों के साथ समय बिताना लाभदायक रहेगा.
व्यापार तथा नौकरी: व्यापार में आज नए क्लाइंट या अवसर मिल सकते हैं.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में ध्यान लगाना जरूरी है.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: पुराने रिश्तों में मिठास बढ़ेगी.
स्वास्थ्य: पेट और पाचन से जुड़ी हल्की दिक्कत हो सकती है.
लकी अंक: 9
लकी कलर: पीला
उपाय: सुबह सूर्य नमस्कार करें और घर में हल्की मिठाई रखें.
आज क्या करें: पुराने काम पूरे करें और दोस्तों से सलाह लें

कर्क राशि
&amp;nbsp;

आज चंद्रमा आपके राशि की छठे भाव में संचरण करेगे.आज का दिन भावनाओं और संवेदनाओं से भरा रहेगा. आप अपने घर और परिवार के लिए समय निकालेंगे और किसी पुराने मतभेद को सुलझाने का अवसर मिलेगा. बच्चों या बुजुर्गों की देखभाल में आनंद आएगा, जिससे घर का माहौल खुशहाल रहेगा.



पारिवारिक जीवन: परिवार में सभी के साथ समझ और सहयोग बना रहेगा. माता-पिता के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी. बच्चों की पढ़ाई या खेलकूद में आपका योगदान उनके लिए प्रेरणादायक होगा. छोटे-मोटे विवाद को धैर्य और समझदारी से सुलझाना जरूरी है. घर में परिवार के सभी सदस्यों की भावनाओं का ध्यान रखें.
व्यापार तथा नौकरी: नौकरीपेशा लोग आज अपने वरिष्ठों को प्रभावित करने में सफल रहेंगे. व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन किसी भी सौदे में जल्दबाजी नुकसान दे सकती है. निवेश से पहले योजना बनाएं और संभावित जोखिमों का आंकलन करें. पुराने ग्राहकों या साझेदारों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें.
करियर तथा शिक्षा: पढ़ाई में आज अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी है. नई तकनीक सीखने या किसी कठिन विषय को समझने में समय लग सकता है. ऑफिस में टीम वर्क से काम आसान होगा. अपने विचार साझा करें और सहयोगियों से मार्गदर्शन लें. समय पर काम पूरा करने की कोशिश करें.
प्रेम तथा वैवाहिक जीवन: साथी के साथ संवाद से तनाव कम होगा. पुराने मतभेद आज सुलझ सकते हैं. प्रेम संबंधों में समझ और धैर्य जरूरी है. रोमांस में मधुरता आएगी और साथ समय बिताने से रिश्ता मजबूत होगा.
स्वास्थ्य: मानसिक और शारीरिक थकान से बचें. पर्याप्त नींद और हल्का व्यायाम लाभकारी रहेगा. भूख और पाचन पर ध्यान दें. स्ट्रेस कम करने के लिए ध्यान या योग करें.
लकी अंक: 7
लकी कलर: सफेद
उपाय: घर में जलती हुई दीपक रखें और माता की पूजा करें. ध्यान करें कि पूजा स्थान साफ-सुथरा रहे.
आज क्या करें: अपने भावनाओं को नियंत्रित रखें और घर के जरूरी काम निपटाएं.


सिंह राशि
&amp;nbsp;

आज चंद्रमा आपके राशि की पंचम भाव में संचरण करेगे.आज का दिन आपके आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरा रहेगा. लोग आपके नेतृत्व और निर्णयों की सराहना करेंगे. परिवार और मित्रों के साथ संवाद मधुर रहेगा और नई जिम्मेदारियां खुशी दे सकती हैं.


पारिवारिक जीवन: घर में बच्चों और बुजुर्गों के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे. घर का वातावरण सकारात्मक रहेगा. घर के किसी सदस्य की मदद करना आज आपका मन खुश करेगा. पुराने मतभेदों को भुलाकर रिश्तों में मिठास बढ़ेगी. परिवार के सभी सदस्यों की भावनाओं का ध्यान रखें.
व्यापार तथा नौकरी: व्यापार में लाभ और नई योजनाएं आपके प ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Rashifal, April, 2026:, मेष, से, मीन, तक, अप्रैल, का, राशिफल, ऑफिस, में, टीम, वर्क, से, राशियों, का, पूरा, होगा, टारगेट</media:keywords>
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        <title>Neem Karoli Baba: 53 साल से सुरक्षित है नीम करोली बाबा का अस्थि कलश, सामने आया आध्यात्मिक रहस्य</title>
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        <description><![CDATA[ Neem Karoli Baba: भगवान हनुमान के परम भक्त और चमत्कारी संत नीम करोली बाबा से जुड़ा एक भावुक कर देने वाला आध्यात्मिक तथ्य सामने आया है. बाबा का अस्थि कलश पिछले 53 वर्षों से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पूरी श्रद्धा के साथ सुरक्षित रखा गया है.
जानकारी के अनुसार, बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में अनंत चतुर्दशी के दिन देह त्याग किया था. इसके बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किया गया, लेकिन एक हिस्सा उनके बड़े पुत्र अपने साथ भोपाल ले आए थे. वह अस्थि कलश आज भी परिवार द्वारा संरक्षित है.
नीम करोली बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने बताया कि, बाबा का भोपाल से विशेष लगाव रहा है. वर्ष 1970 में वे अरेरा कॉलोनी स्थित उनके घर में करीब 10 दिन तक रुके थे. इस दौरान उन्होंने शहर के कई इलाकों का दौरा किया और नेवरी मंदिर में रात्रि विश्राम भी किया.
उन्होंने यह भी बताया कि परिवार बाबा को हनुमान का ही स्वरूप मानता है. बाबा ने स्वयं उन्हें हनुमानजी की एक विशेष प्रतिमा भेंट की थी, जिसकी वे आज भी नियमित पूजा करते हैं. परिवार के अनुसार, यह अस्थि कलश बेहद अद्वितीय है और देश में कहीं और ऐसा दूसरा कलश मौजूद नहीं है.
Neem Karoli Baba: तरक्की चाहिए तो गांठ बांध लीजिए नीम करोली बाबा की ये बातें
भोपाल में बनेगा भव्य मंदिर और आश्रम
डॉ. धनंजय शर्मा के मुताबिक, भोपाल में जल्द ही नीम करोली बाबा का एक भव्य मंदिर और आश्रम बनाने की योजना है, जहां इस पवित्र अस्थि कलश को विधिवत स्थापित किया जाएगा.
बाबा की जिंदगी पर बनेगी फिल्म
इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नीम करोली बाबा के जीवन पर फिल्म बनाने की तैयारी चल रही है, जिससे उनके जीवन, चमत्कारों और आध्यात्मिक विचारों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा.
कौन थे बाबा नीम करोली
नीम करोली बाबा 20वीं सदी के महान संतों में गिने जाते हैं, जिन्हें भगवान हनुमान का परम भक्त और उनका अंश या अवतार माना जाता है. इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर (फिरोजाबाद क्षेत्र) में लक्ष्मण दास शर्मा के रूप में हुआ था. बाद में वे आध्यात्मिक साधना के मार्ग पर चल पड़े और देशभर में अपने चमत्कार, सरल जीवन और करुणा के लिए प्रसिद्ध हुए. उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आश्रम उनके प्रमुख आश्रमों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. आज भी भारत समेत विदेशों में भी उनके लाखों भक्त हैं कैंची धाम आते हैं.
ये भी पढ़ें: GEN Z में बढ़ रहा हेयर कलर का ट्रेंड, ब्लू, रेड या गोल्डन बालों से जानें व्यक्तित्व का राजDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Ozempic Side Effects: आंखों की रोशनी छीन सकती है डायबिटीज की यह दवा, नई रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Can Ozempic cause vision loss: डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक दवा अब नए रिसर्च के बाद चर्चा में आ गई है. हालिया रिसर्च में संकेत मिला है कि यह दवा एक रेयर लेकिन गंभीर आंखों की समस्या का खतरा बढ़ा सकती है, जो स्थायी रूप से नजर कमजोर या खत्म भी कर सकती है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर क्या नई जानकारी निकल कर सामने आई है और कैसे क्यों यह दवा चर्चा में है.&amp;nbsp;
क्यों बढ़ रहा है इसका यूज?
डेनमार्क की साउथ डेनमार्क विश्वविद्यालय &amp;nbsp;के वैज्ञानिकों ने दो बड़े स्टडी में ओजेम्पिक की सुरक्षा का आकलन किया. यह दवा टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ-साथ वजन घटाने में भी मदद करती है, जिसके चलते हाल के वर्षों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है. रिसर्च में जिस समस्या पर फोकस किया गया, उसे नॉन-आर्टेरिटिक एंटीरियर इस्केमिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी (NAION) &amp;nbsp;कहा जाता है. यह तब होती है जब आंख के ऑप्टिक नर्व तक ब्लड का फ्लो अचानक कम हो जाता है. ऑप्टिक नर्व आंख से दिमाग तक दृश्य जानकारी पहुंचाने का काम करता है, इसलिए इसके प्रभावित होने पर अचानक दृष्टि जा सकती है, जो कई मामलों में स्थायी होती है.&amp;nbsp;
बेहद रेयर है यह बीमारी
हालांकि NAION एक रेयर बीमारी है, लेकिन इसके गंभीर परिणामों के कारण डॉक्टर इसे बेहद गंभीरता से लेते हैं. मरीजों में एक आंख की रोशनी जा सकती है और कुछ मामलों में दूसरी आंख भी प्रभावित हो सकती है. इस मुद्दे की शुरुआत अमेरिका की एक छोटी स्टडी से हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ओजेम्पिक लेने से &amp;nbsp;NAION का खतरा दोगुना तक बढ़ सकता है. अब डेनमार्क के बड़े स्तर पर किए गए स्टडी ने इस आशंका को और मजबूती दी है.
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&amp;nbsp;4.24 लाख से ज्यादा टाइप 2 डायबिटीज मरीजों का एनालिसिस
एक स्टडी में 4.24 लाख से ज्यादा टाइप 2 डायबिटीज मरीजों के डेटा का एनालिसिस किया गया, जिनमें करीब 1.06 लाख लोग Ozempic ले रहे थे। नतीजों में सामने आया कि इस दवा का इस्तेमाल करने वालों में NAION का खतरा अन्य दवाएं लेने वालों की तुलना में लगभग दोगुना था. रिसर्चर ने समय के साथ बदलाव भी नोट किया. 2018 से पहले, जब इस दवा का उपयोग कम था, तब हर साल 60 से 70 NAION के मामले सामने आते थे. हाल के वर्षों में यह संख्या बढ़कर करीब 150 तक पहुंच गई है, और ज्यादातर मामले डायबिटीज मरीजों में देखे गए.
एक दूसरी स्टडी में नए मरीजों की तुलना अन्य दवाओं का उपयोग करने वालों से की गई, जिसमें भी यही पाया गया कि ओजेम्पिक लेने वालों में यह जोखिम करीब दोगुना था. हालांकि, एक्सपर्ट यह भी स्पष्ट करते हैं कि कुल मिलाकर यह जोखिम अभी भी कम है. ज्यादातर मरीजों को यह समस्या नहीं होती, और ब्लड शुगर कंट्रोल करने के फायदे भी काफी महत्वपूर्ण हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>How To Deal With Negative People: शिकायत करने वालों ने कर रखा है परेशान? इन आसान तरीकों से हैंडल करें नेगेटिव लोगों का ड्रामा</title>
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        <description><![CDATA[ How To Deal With Negative People: शिकायत करने वालों ने कर रखा है परेशान? इन आसान तरीकों से हैंडल करें नेगेटिव लोगों का ड्रामा ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>IIT बाबा अभय सिंह ने प्रतीका संग शादी कर बसाई गृहस्थी, महाशिवरात्रि पर लिए थे सात फेरे</title>
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        <description><![CDATA[ IIT Baba Abhay Singh: बीते वर्ष 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ था, जिसमें कई साधु-संत और संयासी चर्चा का विषय बने और कुछ तो काफी वायरल भी हुए, जिनमें अभय सिंह भी एक रहे. शांत चेहरा, घुंघराले बाल, रुद्राक्ष की माला पहने हुए आईआईटी वाले अभय सिंह का साधु जीवन महाकुंभ में चर्चा का विषय रहा.
लंबे समय से अभय सिंह मीडिया से दूर थे. लेकिन अब एक बार फिर से वे सुर्खियों में छाए हुए हैं, लेकिन इस बार चर्चा का विषय उनका आध्यात्मिक प्रवचन या साधु जीवन नहीं, बल्कि उनकी शादी है. एरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद नौकरी-पेशा छोड़ा संन्यास और अध्यात्म की राह पर चलने वाले अभय सिंह अब गृहस्थ जीवन शुरू कर चुके हैं. अभय सिंह ने प्रतीका (Prateeka) के साथ विवाह किया है.
संयासी जीवन अपनाकर सालों तक माता-पिता और परिवार से दूर रहने वाले अभय सिंह सोमवार 6 अप्रैल 2026 को हरियाणा के झज्जर पिता के पास पहुंचे. लेकिन इस बार वो अकेले नहीं बल्कि पत्नी प्रतीका के साथ माता-पिता से मिलने आएं.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि के दिन किया विवाह
अभय सिंह ने मीडिया को बताया कि, प्रतीका के साथ उन्होंने महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 15 फरवरी 2026 को हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में शादी की. इसके बाद 19 फरवरी 2026 को कोर्ट मैरिज भी किया. &#039;मेरी पत्नी प्रतीका, मूल रूप से कर्नाटक की रहने वाली हैं और वह भी इंजीनियर हैं. शादी के बाद दोनों फिलहाल हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं.&#039;
पत्नी प्रतीका ने कहा कि, &amp;lsquo;अभय बहुत सरल, ईमानदार और सच्चे इंसान है&amp;rsquo;. उन्होंने बताया कि, दोनों की मुलाकात एक साल पहले हुई थी. विवाह के बाद दोनों मिलकर सनातन और आध्यात्म को आगे बढ़ाने का काम करेंगे और भविष्य में सनातन यूनिवर्सिटी भी बनाने की योजना बनाएंगे.
महाशिवरात्रि पर विवाह का महत्व
हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का दिन बेहद पवित्र माना जाता है.धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन विवाह को शुभ और मंगलकारी माना जाता है. ऐसे पावन दिन पर अभय सिंह और प्रतीका ने अघंजर महादेव मंदिर में पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया.
संन्यास से गृहस्थ जीवन में अभय सिंह
धार्मिक दृष्टि से सनातन धर्म में जीवन को चार आश्रमों ब्रह्मचर्य (शिक्षा), गृहस्थ (पारिवारिक जीवन), वानप्रस्थ (त्याग की शुरुआत) और संन्यास (मोक्ष) में बांटा गया है. इनमें गृहस्थ आश्रम को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही आश्रम समाज और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने का आधार बनता है.
महाकुंभ से मिली पहचान
बता दे कि, IITian बाबा अभय सिंह उस समय खासा चर्चा में आए थे जब वे, Mahakumbh के दौरान साधु वेश में दिखे. उनकी पहचान इसलिए खास बनी, क्योंकि वे एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान Indian Institute of Technology Bombay से पढ़े हुए हैं. उच्च तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद उनका आध्यात्म की ओर झुकाव लोगों के लिए काफी दिलचस्प विषय बना. महाकुंभ में उनकी सादगी और विचारों के कारण वे सोशल मीडिया पर &amp;ldquo;IITian बाबा&amp;rdquo; के नाम से काफी वायरल हुए थे.
ये भी पढ़ें: Mahakumbh 2025 IIT Baba: महाकुंभ के IITian बाबा अभय सिंह की मोह माया वाली जिंदगी से वैराग्य तक की कहानीDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:30:10 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>IIT, बाबा, अभय, सिंह, ने, प्रतीका, संग, शादी, कर, बसाई, गृहस्थी, महाशिवरात्रि, पर, लिए, थे, सात, फेरे</media:keywords>
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        <title>खरमास समाप्त: 14 अप्रैल से फिर गूंजेंगी शहनाइयां, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया का &amp;apos;अबूझ मुहूर्त&amp;apos;; जानें साल 2026 की सभी शुभ तिथियां</title>
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        <description><![CDATA[ Kharmas: हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों पर लगा एक महीने का विराम अब समाप्त होने जा रहा है. 14 अप्रैल को सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा, जिससे विवाह, गृह प्रवेश और नूतन निर्माण जैसे शुभ कार्यों का मार्ग प्रशस्त होगा.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक और विख्यात ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, 15 मार्च से मीन राशि में सूर्य के प्रवेश के साथ शुरू हुआ खरमास 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ संपन्न होगा. इसके बाद 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के विशेष मुहूर्त के साथ शादियों का सीजन जोर-शोर से शुरू हो जाएगा.
19 अप्रैल को पहला विवाह मुहूर्त और अक्षय तृतीया की महिमा
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन बिना पंचांग देखे विवाह और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं. जिन जोड़ों की शादी की तारीख पंचांग से नहीं निकल पाती, उनके लिए अक्षय तृतीया सबसे उत्तम विकल्प होता है.
चातुर्मास और अधिक मास का प्रभाव
इस वर्ष विवाह की तिथियों पर अधिक मास और चातुर्मास का भी प्रभाव रहेगा:

अधिक मास: 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहने के कारण विवाह कार्यों पर करीब एक महीने का ब्रेक रहेगा.
चातुर्मास: 25 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से 20 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक भगवान विष्णु शयन काल में रहेंगे, इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होगा.

वर्ष 2026 के प्रमुख विवाह मुहूर्त
डा. अनीष व्यास के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2026 के बीच विवाह के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:



महीना
विवाह की शुभ तिथियां




अप्रैल 2026
19, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29


मई 2026
1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14


जून 2026
21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29


जुलाई 2026
1, 6, 7, 11


नवंबर 2026
21, 24, 25, 26


दिसंबर 2026
2, 3, 4, 5, 6, 11, 12



( कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट बढ़ सकती है और परिवर्तन हो सकता है. )
क्यों वर्जित थे मांगलिक कार्य?
ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि (मीन) में प्रवेश करते हैं, तो वे अपनी शक्ति खो देते हैं, जिसे &#039;खरमास&#039; कहा जाता है. इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. अब सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं और गुरु का बल भी बढ़ गया है, जिससे विवाह के बाद वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है.
विवाह का धार्मिक महत्व
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है. इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है. विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं. हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है. इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Onion And Baking Soda For Pests: क्या वाकई कीड़ों को खत्म करता है बेकिंग सोडा? जानें प्याज के साथ इसके इस्तेमाल का सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Does Onion And Baking Soda Kill Insects: प्याज और बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करके कीड़े-मकोड़ों को आकर्षित या नियंत्रित करने का तरीका थोड़ा अजीब लग सकता है. कई लोग इसे सिर्फ घरेलू नुस्खा या बिना आधार की मान्यता भी मान लेते हैं. लेकिन हकीकत यह है कि इसके पीछे कुछ हद तक विज्ञान और कीड़ों के व्यवहार की समझ काम करती है. कीड़े किसी जादू से आकर्षित नहीं होते, बल्कि वे गंध, नमी और भोजन के स्रोत की वजह से खिंचे चले आते हैं.&amp;nbsp;
क्या निकला रिसर्च में?
रिसर्च Repellent activity of green detergents and raw vegetable extracts against Drosophila melanogaster के मुताबिक, कीड़े अपनी सूंघने की क्षमता के जरिए भोजन ढूंढते हैं. जब प्याज काटा जाता है, तो उसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड्स के कारण तेज गंध निकलती है. यह गंध हवा में तेजी से फैलती है और कई कीड़ों को भोजन जैसी लगती है, खासकर उन कीड़ों को जो सड़े-गले पदार्थों पर निर्भर रहते हैं. यही वजह है कि कटा हुआ प्याज मक्खी, चींटी और कॉकरोच जैसे कीड़ों को आकर्षित कर सकता है.
बेकिंग सोडा का रोल&amp;nbsp;
अब बात बेकिंग सोडा की करें, तो इसका रोल थोड़ा अलग होता है. बेकिंग सोडा, जिसे सोडियम बाइकार्बोनेट भी कहा जाता है, अपने आप में कीड़ों को आकर्षित नहीं करता. लेकिन जब इसे प्याज या किसी मीठी चीज के साथ मिलाया जाता है, तो कीड़े इस मिश्रण को खा लेते हैं. माना जाता है कि बेकिंग सोडा कीड़ों के शरीर में मौजूद एसिड के साथ रिएक्ट कर गैस बनाता है, जिससे उनके डाइजेशन पर असर पड़ सकता है. हालांकि, यह भी सच है कि कीड़ों को मारने में इसकी प्रभावशीलता पर ठोस साइंटफिक प्रमाण अभी सीमित हैं.
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घर पर इसे बनाना भी काफी आसान है. एक छोटा प्याज काटकर किसी उथले बर्तन में रखें। उसमें एक से दो चम्मच बेकिंग सोडा मिला दें। चाहें तो थोड़ा सा चीनी भी डाल सकते हैं, ताकि यह और ज्यादा आकर्षक बन सके। इस बर्तन को किचन के उन हिस्सों में रखें, जहां अक्सर कीड़े नजर आते हैं, जैसे सिंक के पास, डस्टबिन के आसपास या कोनों में. ध्यान रखें कि इस मिश्रण को हर एक-दो दिन में बदलते रहें, क्योंकि समय के साथ प्याज की गंध कम हो जाती है। साथ ही इसे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें.
कीड़ों के व्यवहार पर आधारित
इस तरीके को बेट यानी चारा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह कीड़ों के व्यवहार पर आधारित है. Anticimex Malaysia के अनुसार, कीड़े प्याज की गंध से आकर्षित होकर इस मिश्रण को खाते हैं, जिसके बाद बेकिंग सोडा उनके शरीर में प्रतिक्रिया करता है. हालांकि, इसका असर हर तरह के कीड़ों पर समान नहीं होता, क्योंकि हर कीड़े की प्रतिक्रिया अलग होती है.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>विद्यार्थियों को हनुमान जी का नाम क्यों लेना चाहिए? जानिए इसके पीछे का वास्तविक महत्व!</title>
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        <description><![CDATA[ आज के समय में पढ़ाई में सफलता पाने के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि एकाग्रता, स्मरण शक्ति और सही दिशा में काम करना बेहद जरूरी है. भारतीय परंपराओं में इन गुणों को मजबूत करने के लिए भगवानों का स्मरण करने की सलाह दी जाती है.
खासकर हनुमान जी का नाम विद्यार्थियों के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. यह केवल आस्था का नहीं, बल्कि एक मानसिक और व्यवहारिक अभ्यास भी है, जो छात्रों को बेहतर बनाने में मदद करता है.&amp;nbsp;
नेपाल से मॉरीशस तक हनुमान जी को देवता से भी श्रेष्ठ क्यों माना जाता है? देखें फोटो
हनुमान जी की अद्भुत बुद्धिमत्ता
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, हनुमान जी केवल बलवान ही नहीं, बल्कि अत्यंत बुद्धिमान भी थे. मान्यताओं के मुताबिक, उन्होंने मात्र 15 दिनों में ही वेदों का अध्ययन कर उन्हें कंठस्थ कर लिया था.
यह कहानी भले ही प्रतीकात्मक लगे, लेकिन इसका संदेश साफ है कि, तेज दिमाग, अनुशासन और समर्पण से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.&amp;nbsp;
सूर्य देव का आशीर्वाद के पीछे का महत्व
मान्यताओं के मुताबिक, सूर्यदेव जिन्हें हनुमान जी का गुरु भी माना जाता है, उनकी प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि, उन्होंने आशीर्वाद दिया, जो विद्यार्थी हनुमान जी का नाम लेकर पढ़ाई करेगा, उसकी स्मरण शक्ति मजबूत होगी और वह पढ़ा हुआ भी नहीं भूलेगा.
अब इसे अंधविश्वास मानकर खारिज करने से पहले एक बात समझना बेहद जरूरी है कि, असल में यह एक मनोवैज्ञानिक ट्रिक है. जब कोई छात्र रोज एक ही तरीके से पढ़ाई करना शुरू करता है, तो उसका मांइड फोकस मोड में आ जाता है.

हनुमान चालीसा की चौपाई में छिपा रहस्य
महान संत तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में लिखा है कि, &quot;विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर&quot;
इसका अर्थ केवल यह नहीं कि, हनुमान जी पढ़े-लिखे थे, बल्कि वे अपने ज्ञान का सही समय पर सही इस्तेमाल करना जानते थे. आज के छात्रों की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि, वे पढ़ते तो बहुत हैं, लेकिन लागू नहीं कर पाते हैं.
अगर तुम केवल रटने में लगे हो और समझ नहीं रहे, तो तुम्हारा तरीका ही पूरी तरह से गलत है.&amp;nbsp;
श्रीराम के प्रति समर्पण- फोकस का सबसे बड़ा उदाहरण
हनुमान जी हमेशा श्रीराम के कार्यों को समझने और पूरा करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे. उनका लक्ष्य स्पष्ट था, कोई distraction नहीं, कोई बहाना नहीं.
अब तुम अपनी स्थिति को देखो फोन, सोशल मीडिया, टालमटोल अगर तुम सच में सफल होना चाहते हो, तो तुम्हें हनुमान जी की तरह एक ही लक्ष्य पर टिके रहना सीखना पड़ेगा.
विद्यार्थियों के लिए वास्तविक फायदे
हनुमान जी का नाम लेने का लाभ तभी है, जब तुम इसे केवल रस्म नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में उतारो. हनुमान जी का नाम लेने से जीवन में-
एकाग्रता बढ़ती है, दिमाग भटकने से बचता है, आत्मविश्वास मजबूत होता है, डर कम लगता है, स्मरण शक्ति बेहतर होती है, रिवीजन आसान होता है, जीवन में अनुशासन आता है और पढ़ाई में consistency बनती है.
लेकिन एक बात साफ है कि, अगर तुम केवल नाम जपते रहो और पढ़ाई न करो, तो कुछ नहीं होगा. ये कोई जादू नहीं है.&amp;nbsp;
हनुमान जी का स्मरण एक मानसिक अभ्यास है, कोई शॉर्टकट नहीं, अगर तुम इसे सही तरीके से अपनाओगे तो फोकस, अनुशासन और समझ के साथ तो यह तुम्हारी पढ़ाई को मजबूत बना सकता है.&amp;nbsp;
लेकिन अगर तुम सोचते हो कि, केवल नाम लेने से बिना मेहतन के टॉप कर जाओगे, तो ये सोच अभी बदल लो. असली काम तुम्हें ही करना है.&amp;nbsp;
बाल नोचकर क्यों बनते हैं जैन साधु? जानिए दर्द से मुक्ति की खौफनाक लेकिन सच्ची कहानी!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>How To Clean Fennel Seeds: क्या सौंफ बीनते&amp;बीनते आप भी हो जाती हैं परेशान? जानें इसे साफ करने का सबसे सही तरीका</title>
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        <description><![CDATA[ Quick Way To Clean Fennel Seeds At Home: अगर आप भी सौंफ को बार-बार बीनते-बीनते परेशान हो जाती हैं, तो पहले यह समझ लीजिए कि हर बार घंटों बैठकर उसे साफ करना जरूरी नहीं होता. सौंफ दरअसल फूल वाले पौधे से निकलने वाले सूखे बीज हैं. गर्म इलाकों में यह पौधा कई सालों तक चलता है, जबकि ठंडे मौसम में इसे एक सीजन के लिए उगाया जाता है. जब इसके फूल पूरी तरह सूखकर भूरे हो जाते हैं, तभी बीज तैयार माने जाते हैं. अगर घर में थोड़ी-सी भी जगह हो तो आप गमले में भी सौंफ उगा सकती हैं, वरना बाजार में अच्छी क्वालिटी की सौंफ आसानी से मिल जाती है.
सौंफ खरीदते समय थोड़ी सावधानी आगे की मेहनत बचा सकती है. कोशिश करें कि वह एयरटाइट डिब्बे में रखी हो ताकि नमी और धूल न लगे. बीजों का रंग हल्का हरा-भूरा और एकसमान होना चाहिए. अगर सौंफ फीकी, ज्यादा भूरी, बदरंग या धूल भरी दिखे तो उसे न लें. हाथ में लेकर देखें कि उसमें ज्यादा टूटे हुए टुकड़े या कचरा तो नहीं है. अगर मसालों की किसी लोकल दुकान से खरीद रही हैं, तो उसकी खुशबू जरूर सूंघ लें. अच्छी सौंफ में मीठी, ताजी और हल्की हर्बल महक होती है. अगर खुशबू कम है या बासी लग रही है, तो समझ लें कि वह पुरानी है.
कैसे करें सफाई?
अब बात आती है सफाई की. अक्सर लोग सौंफ को चावल की तरह एक-एक दाना चुनकर बीनने लगते हैं, जबकि सूखी सौंफ को इतनी मेहनत से साफ करने की जरूरत नहीं होती. सबसे आसान तरीका है कि उसे एक साफ थाली या सूखे कपड़े पर फैला दें और हल्की नजर से देख लें. अगर उसमें मिट्टी, डंठल, छोटे पत्थर या कोई कचरा दिखे तो निकाल दें. चाहें तो छलनी में डालकर दो-तीन बार हल्का झटका दें, इससे बारीक धूल नीचे गिर जाएगी और सौंफ साफ हो जाएगी. इसे पानी से धोने से बचें, क्योंकि नमी से इसकी खुशबू और स्वाद दोनों कम हो सकते हैं और स्टोरेज में भी दिक्कत आ सकती है.
इन बातों का रखें ध्यान
अगर आपने घर में उगाई सौंफ के फूलों से बीज निकाले हैं, तो पहले उन्हें अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. सूखे फूलों के गुच्छों को उल्टा लटकाकर ठंडी और सूखी जगह पर रखें. पूरी तरह सूखने के बाद हाथ से रगड़कर बीज अलग कर लें. फिर उन्हें एयरटाइट कांच की बोतल या स्टील के डिब्बे में भरकर रखें. ज्यादा मात्रा हो तो इसे फ्रीजर में भी स्टोर किया जा सकता है, हालांकि समय के साथ इसकी खुशबू थोड़ी कम हो सकती है. थोड़ी समझदारी और सही तरीके से काम लेंगी तो सौंफ बीनना अब झंझट नहीं, बल्कि कुछ ही मिनटों का आसान काम बन जाएगा.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 21:30:17 +0530</pubDate>
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        <title>Relationship Breakup Stages: किस स्टेज पर अक्सर टूट जाते हैं रिश्ते, जानें रिलेशनशिप में कब आती है दरार?</title>
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        <description><![CDATA[ At What Stage Do Relationships Usually Break: रिश्ते अचानक नहीं टूटते, बल्कि एक तय प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे कमजोर होते हैं. अक्सर लोग तब समझ पाते हैं जब दरार गहरी हो चुकी होती है. एक्सपर्ट्स और रिसर्च बताते हैं कि हर रिलेशनशिप कुछ स्टेज से गुजरता है, और इन्हीं में से कुछ खास पड़ाव ऐसे होते हैं, जहां रिश्ते सबसे ज्यादा टूटने के कगार पर पहुंच जाते हैं.&amp;nbsp;
कब होती है शुरुआत?
Sentio Counseling Cente की रिपोर्ट के &amp;nbsp;अनुसार, &amp;nbsp;शुरुआत होती है हनीमून फेज से. &amp;nbsp;इस दौर में सब कुछ परफेक्ट लगता है. पार्टनर की कमियां नजर नहीं आतीं और रिश्ते में एक्साइटमेंट बनी रहती है. लेकिन यह स्टेज ज्यादा समय तक नहीं रहती. जैसे-जैसे समय गुजरता है, रिश्ते में अगला फेज आता है, जिसे एक्सपर्ट्स एडजस्टमेंट या डिसइल्यूजनमेंट स्टेज कहते हैं. यही वह समय होता है जब असल परीक्षा शुरू होती है. पार्टनर की आदतें, सोच, व्यवहार और उम्मीदें साफ दिखने लगती हैं.य छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ने लगते हैं. रिसर्च के मुताबिक, ज्यादातर रिश्तों में गिरावट की शुरुआत इसी स्टेज में होती है, खासकर पहले 1 से 3 साल के बीच.&amp;nbsp;
अगर इस दौर में दोनों पार्टनर समझदारी और संवाद से काम लें, तो रिश्ता मजबूत हो सकता है. लेकिन अगर समस्याओं को नजरअंदाज किया गया, तो धीरे-धीरे दूरी बढ़ने लगती है. यह दूरी हमेशा बड़े झगड़ों के रूप में नहीं होती, बल्कि कई बार खामोशी, कम बातचीत और इमोशनल कनेक्शन की कमी के रूप में दिखती है.&amp;nbsp;
यह होता है अहम पड़ाव
एक और अहम पड़ाव होता है 5 से 7 साल के बीच, जिसे अक्सर सेवन ईयर इच कहा जाता है. इस समय तक रिश्ते में नई जिम्मेदारियां आ जाती हैं जैसे करियर का दबाव, शादी, बच्चे या लाइफस्टाइल में बदलाव. इन बदलावों के चलते रिश्ते पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और कई कपल्स इस फेज में टूट जाते हैं.
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मिलते हैं ऐसे संकेत
वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के जॉन गॉटमैन के मुताबिक, रिश्ते टूटने से पहले कुछ संकेत जरूर मिलते हैं. जैसे कि बार-बार आलोचना करना, पार्टनर को नीचा दिखाना, बात-बात पर बचाव करना या पूरी तरह चुप हो जाना. इसके अलावा, प्यार भरे पलों में कमी, भविष्य को लेकर बातचीत से बचना और साथ रहते हुए भी अकेलापन महसूस करना भी खतरे की घंटी हो सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि कई बार कपल्स सालों तक साथ रहते हैं, लेकिन अंदर से उनका रिश्ता खत्म हो चुका होता है. यह स्थिति धीरे-धीरे बढ़ती है और आखिरकार ब्रेकअप या अलगाव में बदल जाती है.&amp;nbsp;
ऐसे बच सकता है रिश्ता
हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है. सही समय पर संवाद, समझ और कोशिश से रिश्ते को बचाया जा सकता है. सबसे जरूरी है कि संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए और समय रहते उन पर काम किया जाए.
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Relationship, Breakup, Stages:, किस, स्टेज, पर, अक्सर, टूट, जाते, हैं, रिश्ते, जानें, रिलेशनशिप, में, कब, आती, है, दरार</media:keywords>
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        <title>Dahi Ke shole: &amp;apos;दही के शोले&amp;apos; नहीं खाए तो क्या खाया, इस रेसिपी से बनाएंगे तो उंगलियां चाट&amp;चाटकर खाएंगे लोग</title>
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        <description><![CDATA[ Dahi Ke shole: &#039;दही के शोले&#039; नहीं खाए तो क्या खाया, इस रेसिपी से बनाएंगे तो उंगलियां चाट-चाटकर खाएंगे लोग ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Excessive Yawning Causes: बार&amp;बार आ रही है जम्हाई तो हल्के में न लें, जानें किन&amp;किन बीमारियों का खतरा?</title>
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        <description><![CDATA[ Is Excessive Yawning A Sign Of Disease:&amp;nbsp;बार-बार जम्हाई आना अक्सर लोग थकान या नींद की कमी से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन नई रिसर्च यह इशारा कर रही है कि हर बार जम्हाई लेना इतना सामान्य नहीं होता. कई मामलों में यह शरीर के अंदर चल रही गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कब यह आपके सेहत के बारे में बताती है और किन इशारों को इग्नोर नहीं करना चाहिए.&amp;nbsp;
क्या कब होती है दिक्कत?
&amp;nbsp;लगातार और बिना किसी क्लियर कारण के आने वाली जम्हाई को हल्के में नहीं लेना चाहिए. क्लीनिकल रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई लेने का संबंध कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी हो सकता है, जैसे मिर्गी , स्ट्रोक या ब्रेन में घाव. कुछ मामलों में तो &amp;nbsp;जांच में यह भी सामने आया कि बार-बार जम्हाई लेना फ्रंटल लोब सीज़र का हिस्सा हो सकता है,&amp;nbsp;
ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम&amp;nbsp;
इसके अलावा, जम्हाई हमारे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से भी जुड़ी होती है, जो शरीर की कई अनैच्छिक कामों, जैसे दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और पाचन को कंट्रोल करता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश रिसर्च में पाया गया है कि ज्यादा जम्हाई आना इस सिस्टम में असंतुलन का संकेत हो सकता है. माइक्रोन्यूरोग्राफी जैसी तकनीक के जरिए यह देखा गया कि जम्हाई के दौरान मांसपेशियों से जुड़े नर्व सिग्नल्स कुछ समय के लिए दब जाते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि शरीर में पैरासिम्पेथेटिक एक्टिविटी बढ़ जाती है.
साइंटिस्ट यह भी मानते हैं कि जम्हाई का संबंध दिमाग के तापमान को नियंत्रित करने से हो सकता है. जब ब्रेन अपने तापमान को संतुलित रखने में संघर्ष करता है, तो जम्हाई के जरिए ठंडी हवा अंदर जाती है और ब्लड फ्लो बढ़ता है. स्ट्रोक के कुछ मरीजों में यह पाया गया कि जहां दिमाग के तापमान को कंट्रोल करने वाले हिस्से प्रभावित होते हैं, वहां ज्यादा जम्हाई देखी जाती है. इससे संकेत मिलता है कि यह शरीर की एक तरह की कूलिंग मैकेनिज्म हो सकती है.
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डोपामिन के असंतुलन का प्रभाव
इतना ही नहीं, जम्हाई का संबंध शरीर के मेटाबोलिज्म और ब्रेन के केमिकल्स से भी जुड़ा हुआ है। JAMA Network में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, जम्हाई का सीधा संबंध डोपामिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर से है, जो मूड, मोटिवेशन और मूवमेंट को नियंत्रित करता है। डोपामिन के असंतुलन की स्थिति में भी ज्यादा जम्हाई आ सकती है.
दूसरे भी होते हैं कारण
हालांकि, हर बार जम्हाई आना खतरे की घंटी नहीं है. नींद की कमी, ज्यादा काम या थकान भी इसका सामान्य कारण हो सकते हैं. लेकिन अगर जम्हाई लगातार आ रही हो, बिना वजह हो, या इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी या सोचने-समझने में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Excessive, Yawning, Causes:, बार-बार, आ, रही, है, जम्हाई, तो, हल्के, में, न, लें, जानें, किन-किन, बीमारियों, का, खतरा</media:keywords>
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        <title>Sankashti Chaturthi Moon Time: आज विकट संकष्टी चतुर्थी पर कब निकलेगा चांद ? आपके शहर में चंद्रोदय समय देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Sankashti Chaturthi 2026 Moonrise Time: वैशाख माह की विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को है.ये साल की बड़ी चतुर्थी&amp;nbsp; जीवन के दुख, बाधाएं और संकट से मुक्ति का मार्ग दिखाती है. इसके प्रभाव से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
इस दिन भगवान गणेश के विकट स्वरूप की पूजा की जाती है, उनके आशीर्वाद से कठिन से कठिन संकट भी टल जाते हैं. विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत में चांद का विशेष महत्व है क्योंकि चंद्रमा की पूजा के बिना ये व्रत पूरा नहीं माना जाता है. ऐसे में विकट संकष्टी चतुर्थी पर आपके शहर में चांद कब निकलेगा जान लें.
विकट संकष्टी चतुर्थी तिथि
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल 2026 को सुबह 11.59 पर शुरू होगी और अगले दिन 6 अप्रैल 2026 को दोपहर 2.10 पर समाप्त होगी.
वैशाख संकष्टी चतुर्थी 2026 गणेश जी पूजा मुहूर्त

पूजा मुहूर्त - सुबह 7.41 - दोपहर 12.24
शाम का मुहूर्त - शाम 6.41 - रात 10.58

विकट संकष्टी चतुर्थी 2026 शहर अनुसार चंद्रोदय समय



दिल्ली
रात 9 बजकर 58 मिनट


भोपाल
रात 9 बजकर 45 मिनट


मुंबई
रात 9 बजकर 54 मिनट


नोएडा
रात 9 बजकर 58 मिनट


लखनऊ
रात 9 बजकर 39 मिनट


पटना
रात 9 बजकर 18 मिनट


जयपुर
रात 9 बजकर 18 मिनट


गोरखपुर
रात 9 बजकर 28 मिनट


हैदराबाद
रात 9 बजकर 27 मिनट


अहमदाबाद
रात 10 बजकर 04 मिनट


इंदौर
रात 9 बजकर 50 मिनट


चंडीगढ़
रात 10 बजकर 06 मिनट


आगरा
रात 09 बजकर 51 मिनट



विकट संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा की पूजा करने से मन को शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
इस दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान गणेश की मूर्ति को लाल वस्त्र पर स्थापित करें
फिर गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और लड्डू अर्पित करें.
दीपक जलाकर &amp;ldquo;ॐ गं गणपतये नमः&amp;rdquo; मंत्र का जप करें.
पूजा के दौरान गणेश चालीसा का पाठ और आरती अवश्य करें.
संध्या के समय चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें और गणेश जी से परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.

विकट संकष्टी चतुर्थी नियम

इस दिन अन्न या नमक का सेवन न करें, केवल फलाहार लें.
ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन को शांत रखें.
किसी से झूठ न बोलें और क्रोध से दूर रहें.
चंद्र दर्शन के बिना व्रत का पारण न करें.
व्रत के बाद गरीबों को भोजन और वस्त्र दान अवश्य दें.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Sankashti, Chaturthi, Moon, Time:, आज, विकट, संकष्टी, चतुर्थी, पर, कब, निकलेगा, चांद, आपके, शहर, में, चंद्रोदय, समय, देखें</media:keywords>
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        <title>साप्ताहिक राशिफल 6&amp;12 अप्रैल 2026: 12 राशियों के लिए बड़े बदलाव! जानें शुभ अंक, रंग और उपाय, किस्मत चमकाएं!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/साप्ताहिक-राशिफल-6-12-अप्रैल-2026-12-राशियों-के-लिए-बड़े-बदलाव-जानें-शुभ-अंक-रंग-और-उपाय-किस्मत-चमकाएं</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/साप्ताहिक-राशिफल-6-12-अप्रैल-2026-12-राशियों-के-लिए-बड़े-बदलाव-जानें-शुभ-अंक-रंग-और-उपाय-किस्मत-चमकाएं</guid>
        <description><![CDATA[ Weekly Horoscope 6 to 12 April 2026: इस हफ्ते का साप्ताहिक राशिफल 6 अप्रैल 2026 से 12 अप्रैल 2026 आपके जीवन के हर पहलू को प्रभावित करने वाला है. चाहे आप करियर ग्रोथ, फैमिली, लव लाइफ, मनी या हेल्थ की प्लानिंग कर रहे हों, यह राशिफल आपके लिए गाइड की तरह काम करेगा.
जाने ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से कि इस हफ्ते 12 राशियों के लिए नए अवसर, चुनौतियां और रोमांचक बदलाव आने वाले हैं. साथ ही जानिए अपना शुभ अंक, रंग और आसान उपाय, जो आपकी किस्मत और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाएंगे.
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मेष (Aries)
इस हफ्ते की शुरुआत में चंद्रमा आपके राशि के अष्टम भाव में रहेंगे फिर नवम भाव में संचरण करेगे हफ्ते के अंतिम दिन दशम भाव में रहेंगे.आपके लिए ऊर्जा और उत्साह का समय है. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे शुरुआत में दबाव महसूस होगा, लेकिन आपकी मेहनत रंग लाएगी.
पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा, घर में खुशियों का माहौल रहेगा. आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा, छोटे निवेश लाभकारी साबित होंगे. स्वास्थ्य के मामले में थोड़ी सतर्कता रखें, अधिक थकान और अनियमित खानपान से बचें. प्रेम संबंधों में मिठास बढ़ेगी, साथी के साथ तालमेल अच्छा रहेगा. इस सप्ताह किसी नई योजना पर विचार करना लाभदायक रहेगा.
यात्रा के योग हैं, लेकिन यात्रा से पहले सभी व्यवस्थाओं की जांच करें. शिक्षा में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए नए अवसर खुलेंगे. सप्ताह के मध्य भाग में धैर्य और संयम बनाए रखें. मित्रों के साथ सामाजिक मेलजोल बढ़ेगा. किसी पुराने विवाद को सुलझाने का समय भी अनुकूल है. मानसिक शांति बनाए रखने के लिए ध्यान और योग लाभदायक होंगे.
शुभ रंग: कथईशुभ अंक: 5उपाय: मंगलवार को लाल फूल या लाल कपड़ा किसी मंदिर में अर्पित करें.
वृषभ (Taurus)
इस हफ्ते की शुरुआत में चंद्रमा आपके राशि के सातवें भाव में रहेंगे फिर अष्टम भाव में संचरण करेगे.हफ्ते के अंतिम दिन नवम भाव में रहेंगे.वृषभ राशि के जातकों के लिए स्थिरता और संतुलन का समय है. पेशेवर क्षेत्र में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा, वरिष्ठ अधिकारी आपकी क्षमताओं को सराहेंगे. आर्थिक मोर्चे पर अच्छे अवसर आएंगे, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें.
पारिवारिक जीवन में हल्की तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, संयम से काम लें. स्वास्थ्य के मामले में हल्के व्यायाम और संतुलित आहार फायदेमंद होंगे. प्रेम संबंधों में समय और ध्यान देने की आवश्यकता है, साथी के साथ संवाद बनाए रखें.
सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भागीदारी बढ़ सकती है. सप्ताह के अंत तक योजना बद्ध तरीके से कार्य करने से लाभ होगा. बच्चों या छात्रों के लिए शिक्षा में विशेष सफलता मिल सकती है. नए मित्र बनेंगे और पुराने मित्रों के साथ संबंध मजबूत होंगे. मानसिक शांति के लिए ध्यान व प्राणायाम करें.
शुभ रंग: क्रीमशुभ अंक: 8उपाय: शुक्रवार को वृषभ राशि के जातक हनुमानजी को लाल वस्त्र अर्पित करें.
मिथुन (Gemini)
इस हफ्ते की शुरुआत में चंद्रमा आपके छठे भाव में रहेंगे फिर सातवें भाव में संचरण करेगे,हफ्ते के अंतिम दिन आठवें भाव में रहेंगे.मिथुन राशि वालों के लिए यह सप्ताह बदलाव और नए अवसरों से भरा रहेगा. कार्यक्षेत्र में नये प्रोजेक्ट्स आएंगे, जिनमें आपकी सूझबूझ और तेज़ी से सफलता मिलेगी.
आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, पुराने निवेशों पर लाभ मिलने की संभावना है. पारिवारिक जीवन में थोड़ी असहमति हो सकती है, लेकिन समझदारी से सब ठीक होगा. स्वास्थ्य में हल्की बीमारियों से बचाव रखें. प्रेम संबंधों में रोमांटिक पल मिलेंगे, साथी के साथ समझदारी से मुद्दों का समाधान होगा.
यात्रा और सामाजिक गतिविधियों के अवसर मिलेंगे. शिक्षा में नए विषयों में रुचि बढ़ेगी. सप्ताह के मध्य भाग में आत्मविश्वास और धैर्य बनाए रखें. नए मित्रों और पुराने मित्रों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा. मानसिक शांति के लिए ध्यान, योग और प्रकृति में समय बिताना लाभकारी रहेगा.
शुभ रंग: सफेदशुभ अंक: 3उपाय: बुधवार को किसी नदी या तालाब के किनारे सफेद फूल अर्पित करें.
कर्क (Cancer)
इस हफ्ते की शुरुआत में चंद्रमा आपके पंचम भाव में रहेंगे फिर छठे भाव में संचरण करेगे, हफ्ते के अंतिम दिन सातवें भाव में रहेंगे.कर्क राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह भावनाओं और परिवार की प्राथमिकताओं का है. घर और कार्य में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है.
पेशेवर क्षेत्र में धीरे-धीरे प्रगति होगी, पर धैर्य बनाए रखें. आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, पुराने निवेश लाभ देंगे. स्वास्थ्य के मामले में हल्की थकान और नींद की कमी हो सकती है. प्रेम संबंधों में अधिक समय और संवेदनशीलता दिखाना जरूरी होगा. सामाजिक दायरे में नई जिम्मेदारियाँ आ सकती हैं.
यात्रा और नए अवसरों के योग हैं. शिक्षा और अध्ययन में मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा. सप्ताह के मध्य भाग में परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना फायदेमंद रहेगा. मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें. नए संबंध और साझेदारी बनाने के लिए समय अनुकूल है.
शुभ रंग: पिंकशुभ अंक: 2उपाय: सोमवार को हनुमानजी को चंदन या गुड़ का भोग लगाएं.
सिंह (Leo)
इस हफ्ते की शुरुआत में चंद्रमा आपके चौथे भाव में रहेंगे फिर पंचम भाव में संचरण करेगे.हफ्ते के अंतिम दिन छठे भाव में रहेंगे.सिंह राशि वालों के लिए यह सप्ताह नेतृत्व और साहस का है. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और अवसर मिलेंगे. आर्थिक मोर्चे पर निवेश और बचत लाभदायक साबित होंगे.
पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है, घर के किसी सदस्य के साथ मतभेद हो सकते हैं. स्वास्थ्य में ऊर्जा बनी रहेगी, पर मानसिक तनाव से बचें. प्रेम जीवन में साथी के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे. सामाजिक और सार्वजनिक क्षेत्रों में आपकी पहचान बढ़ेगी.
शिक्षा और अध्ययन में ध्यान केंद्रित रखना आवश्यक है. सप्ताह के मध्य ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>साप्ताहिक, राशिफल, 6-12, अप्रैल, 2026:, राशियों, के, लिए, बड़े, बदलाव, जानें, शुभ, अंक, रंग, और, उपाय, किस्मत, चमकाएं</media:keywords>
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        <title>Sugar Effects On Teeth: क्या चीनी खाने से पीले होते हैं दांत, जानें इससे डायबिटीज के अलावा क्या हो सकती हैं दिक्कतें?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/sugar-effects-on-teeth-क्या-चीनी-खाने-से-पीले-होते-हैं-दांत-जानें-इससे-डायबिटीज-के-अलावा-क्या-हो-सकती-हैं-दिक्कतें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/sugar-effects-on-teeth-क्या-चीनी-खाने-से-पीले-होते-हैं-दांत-जानें-इससे-डायबिटीज-के-अलावा-क्या-हो-सकती-हैं-दिक्कतें</guid>
        <description><![CDATA[ Does Eating Sugar Turn Teeth Yellow: क्या ज्यादा चीनी खाने से दांत पीले हो जाते हैं? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीनी सीधे दांतों को पीला नहीं करती, लेकिन यह ऐसी परिस्थितियां जरूर बना देती है, जिससे दांतों का रंग बिगड़ सकता है और कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि शुगर से डायबिटीज होने के अलावा बाकी क्या दिक्कत हो सकती है.&amp;nbsp;
शुगर से क्या होती है दिक्कत?
दरअसल, जब आप मीठी चीजें जैसे कैंडी, कुकीज या सॉफ्ट ड्रिंक्स लेते हैं, तो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया इन शुगर को तोड़कर एसिड बनाते हैं. colgate की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह एसिड दांतों की ऊपरी परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंचाता है. धीरे-धीरे इनेमल कमजोर होने लगता है और दांतों पर प्लाक जमने लगता है, जिससे उनका रंग पीला या बदरंग दिखने लगता है. &amp;nbsp;यही प्रक्रिया आगे चलकर कैविटी का कारण बनती है. बैक्टीरिया द्वारा बनाए गए एसिड इनेमल में छोटे-छोटे छेद कर देते हैं, जो समय के साथ बढ़ते जाते हैं. अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो यह इंफेक्शन दांत की अंदरूनी परत तक पहुंच सकता है और दर्द, इंफेक्शन यहां तक कि दांत टूटने की नौबत भी आ सकती है।
हालांकि, शरीर इस नुकसान को कुछ हद तक खुद भी ठीक करता है। लार में मौजूद कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे मिनरल्स दांतों को फिर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं, जिसे रीमिनरलाइजेशन कहा जाता है. लेकिन अगर दिनभर बार-बार मीठा खाया जाए या मुंह सूखा रहता हो, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है और नुकसान ज्यादा होने लगता है.
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डायबिटीज के अलावा समस्या
दांतों के अलावा, ज्यादा चीनी का असर पूरे शरीर पर भी पड़ता है। लगातार अधिक मात्रा में शुगर लेने से मोटापा बढ़ सकता है, जो आगे चलकर डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाता है. इसके अलावा, ज्यादा चीनी त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है, जिससे स्किन जल्दी ढीली और बेजान दिखने लगती है. कुछ आदतें इस खतरे को और बढ़ा देती हैं. जैसे बार-बार मीठे स्नैक्स खाना, मीठे या एसिडिक ड्रिंक्स को धीरे-धीरे सिप करना या चिपचिपी टॉफियां और कैंडी लंबे समय तक मुंह में रखना. इससे दांत लंबे समय तक एसिड के संपर्क में रहते हैं और नुकसान तेजी से बढ़ता है.
क्या हैं बचाव के तरीके?
इससे बचाव के लिए जरूरी है कि चीनी का सेवन सीमित रखा जाए. मीठी चीजों को दिनभर खाने की बजाय खाने के साथ लेना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा शुगर-फ्री च्युइंग गम चबाना, ज्यादा पानी पीना और नियमित रूप से ब्रश व फ्लॉस करना दांतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पूरी तरह चीनी छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन संतुलन और सही ओरल केयर से इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Sugar, Effects, Teeth:, क्या, चीनी, खाने, से, पीले, होते, हैं, दांत, जानें, इससे, डायबिटीज, के, अलावा, क्या, हो, सकती, हैं, दिक्कतें</media:keywords>
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        <title>Cursed Temple: भारत से जापान तक रहस्यमय मंदिरों के श्राप! जानें शापित स्थलों की अनकही कहानियां?</title>
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        <description><![CDATA[ Cursed Temple: भारत से जापान तक रहस्यमय मंदिरों के श्राप! जानें शापित स्थलों की अनकही कहानियां? ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>ब्लड प्रेशर और दिल की सेहत के लिए कौन से ड्राई फ्रूट्स खाएं, जानें क्यों जरूरी है सही चुनाव</title>
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        <description><![CDATA[ ड्राई फ्रूट्स को अक्सर हेल्दी स्नैक माना जाता है, लेकिन सभी विकल्प एक समान नहीं होते हैं. किम्स हॉस्पिटल की चीफ डाइटिशियन डॉ. अमरीन शेख के अनुसार, जब बात दिल की सेहत और ब्लड प्रेशर कंट्रोल की आती है तो सभी ड्राई फ्रूट्स एक जैसे फायदेमंद नहीं होते. उनको सही मात्रा और प्रोसेसिंग का तरीका उनके स्वास्थ्य लाभों को निर्धारित करता है, इन सभी बातों का सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ता है. इसलिए, दिल की सेहत के लिए इनका सेवन समझदारी से और सही मात्रा में करना चाहिए.&amp;nbsp;
दिल के लिए फायदेमंद ड्राई फ्रूट्स&amp;nbsp;
डायटीशियन शेख के अनुसार, दिल रोगियों को बादाम, अखरोट और पिस्ता जैसे अनसैचुरेटेड फैट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर नट्स का सेवन करना चाहिए. जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं. इसके अलावा, सीमित मात्रा में किशमिश लेने और अंजीर जैसे सूखे फल भी फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के अच्छे स्रोत हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ेंः हार्ट की यह मशहूर दवा आपको बना सकती है &#039;किडनी&#039; का मरीज, 9 लाख लोगों पर हुई रिसर्च में खुलासा
प्रोसेस्ड ड्राई फ्रूट्स से क्यों रहें दूर
हालांकि, वे प्रोसेस्ड ड्राई फ्रूट्स से सावधान रहना जरूरी हैं. बहुत ज़्यादा मीठे, चाशनी वाले या नमक वाले सूखे ड्राई फ्रूट्स से बचना चाहिए. ये शरीर में सोडियम और चीनी की मात्रा बढ़ा सकते हैं, जो ब्लड प्रेशर और दिल की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए हमेशा सादा और बिना प्रोसेस किए हुए ड्राई फ्रूट्स ही खाने चाहिए.&amp;nbsp;
डायबिटीज मरीजों के लिए जरूरी सावधानी
ड्राई फ्रूट्स में नेचुरल शुगर की मात्रा ज्यादा होती है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए हानिकारक हो सकती है. खासकर डायबिटीज या शुगर से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इन्हें सावधानी से खाना चाहिए. ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकने के लिए ड्राई फ्रूट्स को खाली पेट खाने के बजाय नट्स के साथ या खाने के बाद खाना चाहिए. ऐसे में ब्लड सुगर अचानक नहीं बढ़ता.&amp;nbsp;
सही मात्रा का रखें खास ध्यान
मात्रा का ध्यान रखना सबसे जरूरी है. रोजाना एक छोटी मुट्ठी यानी लगभग 5 से 10 नट्स या 1 से 2 चम्मच ड्राई फ्रूट्स खाना पर्याप्त होता है. ज्यादा खाने से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे वजन बढ़ सकता है. और वजन बढ़ना दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण माना जाता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 05:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>क्या चीज बेक करनी है और क्या रोस्ट? खाना बनाने के ये तरीके सीखें, वरना नहीं बनेंगी घर की फेवरेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/क्या-चीज-बेक-करनी-है-और-क्या-रोस्ट-खाना-बनाने-के-ये-तरीके-सीखें-वरना-नहीं-बनेंगी-घर-की-फेवरेट</link>
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        <description><![CDATA[ क्या चीज बेक करनी है और क्या रोस्ट? खाना बनाने के ये तरीके सीखें, वरना नहीं बनेंगी घर की फेवरेट ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 17:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Extramarital Dating App: 40 लाख भारतीय इस एक्स्ट्रा मैरिटल ऐप पर, बेंगलुरु नंबर&amp;1, जानें कहां है डिजिटल अफेयर का हब?</title>
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        <description><![CDATA[ Extramarital dating app : भारत को अक्सर एक ऐसा देश कहा जाता है, जहां परिवार और शादी को सबसे जरूरी माना जाता है, लेकिन हाल की कुछ रिसर्च यह दिखा रही हैं कि लोगों के रिश्तों और व्यक्तिगत फैसलों का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने लोगों को अब ज्यादा खुलापन और फ्रीडम दी है, खासकर तब जब बात &amp;nbsp;शादी और रिश्तों की आती है. एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप्स की लोकप्रियता इस बदलाव का एक साफ संकेत है. एक एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप ने हाल ही में यह बताया कि भारत में इसके 40 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं. यह संख्या सिर्फ बड़ी नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक बदलाव की तरफ इशारा करती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 40 लाख भारतीय किस एक्स्ट्रा मैरिटल ऐप पर हैं और आखिर यह डिजिटल अफेयर का हब क्या है.&amp;nbsp;
40 लाख भारतीय किस एक्स्ट्रा मैरिटल ऐप पर हैं?
Gleeden एक एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप है, जिस पर भारत के 40 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं. 2024 में Gleeden ने 1,503 शादीशुदा भारतीयों पर एक स्टडी की, जिनकी उम्र 25 से 50 साल के बीच थी और जो टियर 1 और टियर 2 शहरों में रहते थे. स्टडी में पता चला कि 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग गैर-परंपरागत डेटिंग या रिलेशनशिप प्रैक्टिस अपनाने के लिए तैयार हैं, जैसे कि स्विंगिंग, ओपन रिलेशन, या रिलेशनशिप एनार्की. यह बदलाव सिर्फ ऐप्स तक ही सीमित नहीं है. Ashley Madison, जो एक और ग्लोबल एक्स्ट्रा मैरिटल प्लेटफॉर्म है. उसने भी 2025 में बताया कि तमिलनाडु का कांचीपुरम अब देश में अफेयर के हॉटस्पॉट्स में से एक बन गया है. ये डेटा दिखाता है कि जो पहले टैबू माना जाता था, वह अब धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है.&amp;nbsp;
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Gleeden ऐप के यूजर कौन हैं?
Gleeden के डेटा के अनुसार, भारत में इस ऐप के 65 प्रतिशत यूजर पुरुष हैं, 35 प्रतिशत महिलाएं है. जिसमें ज्यादातर यूजर मैरिड या लंबी अवधि के रिश्तों में हैं. महिलाओं की भागीदारी पिछले दो साल में 148 प्रतिशत बढ़ी है. औसतन, भारतीय यूजर हर दिन 1 से 1.5 घंटे चैट करते हैं. जिसमें चैटिंग का टाइम दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक और रात 10 बजे से 3 तक है. इस ऐप पर पुरुष अक्सर 25 से 30 साल की महिलाओं की तलाश में रहते हैं और महिलाएं 30 से 40 साल के आर्थिक रूप से स्थिर पुरुषों जैसे डॉक्टर, सीनियर एग्जीक्यूटिव, चार्टर्ड अकाउंटेंट को प्राथमिकता देती हैं.&amp;nbsp;
कहां है इस डिजिटल अफेयर का हब?
भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है. जहां बेंगलुरु (18 प्रतिशत), हैदराबाद (17 प्रतिशत), दिल्ली (11 प्रतिशत), मुंबई (9 प्रतिशत) और पुणे (7 प्रतिशत) में सबसे ज्यादा यूजर हैं, वहीं छोटे शहरों जैसे लखनऊ, चंडीगढ़, सूरत, कोयम्बटूर, पटना और गुवाहाटी में भी इस ट्रेंड में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. डिजिटल अफेयर और गैर-पारंपरिक रिश्तों के प्रति रूचि अब बड़े शहरों की शहरी संस्कृति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि छोटे शहरों में भी लोग अपने निजी जीवन और भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ रहे हैं.
महिलाओं की संख्या ज्यादा
सबसे जरूरी बदलाव महिलाओं की संख्या में तेज वृद्धि है.Gleeden का कहना है कि इसके कई कारण हैं. जैसे महिलाएं अब अपने पर्सनल ऑप्शन में ज्यादा कॉन्फिडेंस दिखा रही हैं. साथ ही ये ऐप महिलाओं के लिए फ्री और सुरक्षित प्लेटफॉर्म प्रदान करता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Extramarital Dating: 148% महिलाएं कर रहीं एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग, जानें कैसे खतरे में पड़ रही आधुनिक शादी? ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Statins Side Effects On Kidneys: हार्ट की यह मशहूर दवा आपको बना सकती है &amp;apos;किडनी&amp;apos; का मरीज,  9 लाख लोगों पर हुई रिसर्च में खुलासा</title>
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        <description><![CDATA[ Does Rosuvastatin Cause Kidney Problems: दुनियाभर में कोलेस्ट्रॉल कम करने और हार्ट को सुरक्षित रखने के लिए स्टैटिन दवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. इन्हीं में से एक है रोसुवास्टेटिन, जिसे काफी प्रभावी माना जाता है. लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस दवा को लेकर एक अहम चिंता सामने रखी है, जो किडनी से जुड़ी है. चलिए आपको बताते हैं कि यह चिंता क्या है और इससे आपकी किडनी पर कितना असर देखने को मिलेगा.&amp;nbsp;
क्या होती है इससे दिक्कत?
अमेरिका के जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के रिसर्चर द्वारा की गई इस स्टडी में रोसुवास्टेटिन के किडनी पर असर को विस्तार से समझने की कोशिश की गई. दरअसल, जब इस दवा को पहली बार यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने मंजूरी दी थी, तब शुरुआती टेस्ट में कुछ मरीजों में किडनी से जुड़े संकेत दिखे थे, जैसे यूरिन में खून और यूरिन में प्रोटीन. &amp;nbsp;इन संकेतों का मतलब यह होता है कि किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है. हालांकि, दवा के इस्तेमाल के बाद लंबे समय तक बड़े स्तर पर इस पर ज्यादा रिसर्च नहीं हुई थी. ऐसे में इस नई स्टडी ने इस कमी को पूरा करने की कोशिश की.&amp;nbsp;
क्या निकला रिजल्ट?
इस शोध में करीब 9 लाख से ज्यादा लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड का एनालिसिस किया गया. इनमें से लगभग 1.5 लाख लोग रोसुवास्टेटिन ले रहे थे, जबकि करीब 8 लाख लोग दूसरी स्टैटिन दवा एटोरवास्टेटिन का इस्तेमाल कर रहे थे. तीन साल तक इन सभी मरीजों की किडनी हेल्थ पर नजर रखी गई. स्टडी के नतीजे चौंकाने वाले रहे। रोसुवास्टेटिन लेने वाले करीब 2.9 प्रतिशत लोगों के पेशाब में खून पाया गया, जबकि 1 प्रतिशत लोगों में पेशाब के जरिए प्रोटीन निकलने की समस्या सामने आई. जब इसकी तुलना एटोरवास्टेटिन लेने वालों से की गई, तो रोसुवास्टेटिन लेने वालों में यह खतरा ज्यादा पाया गया.
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किन चीजों का खतरा?
रिसर्च के मुताबिक, रोसुवास्टेटिन लेने वालों में हेमेट्यूरिया का खतरा 8 प्रतिशत और प्रोटीन्यूरिया का खतरा 17 प्रतिशत ज्यादा था. इतना ही नहीं, गंभीर किडनी फेल्योर का जोखिम भी करीब 15 प्रतिशत ज्यादा देखा गया, जिसमें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह रही कि जैसे-जैसे दवा की डोज बढ़ाई गई, जोखिम भी बढ़ता गया. यानी ज्यादा मात्रा में रोसुवास्टेटिन लेने वाले मरीजों में किडनी से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखी गईं.&amp;nbsp;
इतना ही नहीं, स्टडी में यह भी सामने आया कि जिन मरीजों की किडनी पहले से कमजोर थी, उन्हें भी कई बार इस दवा की ज्यादा डोज दी जा रही थी, जो कि यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की सिफारिशों के खिलाफ है. दिलचस्प बात यह है कि दिल की सुरक्षा के मामले में रोसुवास्टेटिन और एटोरवास्टेटिन दोनों ही समान रूप से प्रभावी पाए गए. यानी दोनों दवाएं हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में बराबर काम करती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 17:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Pradosh Vrat 2026 April: अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत कब&amp;कब, नोट करें डेट</title>
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        <description><![CDATA[ Pradosh Vrat 2026 April Date: शिवजी की पूजा के लिए कई शुभ तिथियां होती हैं, जिसमें प्रदोष व्रत भी एक है. प्रदोष व्रत महीने में दो बार आता है, जिसमें प्रदोष काल में शिव पूजन का महत्व है. मान्यता है कि, प्रदोष व्रत में की गई पूजा और व्रत से जीवन की समस्त परेशानियां दूर होती हैं और शिवजी भक्तों की सारी कामनाएं पूर्ण करते हैं.
प्रदोष व्रत हर महीने दो बार पड़ता है. यह व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इसमें विशेषरूप से संध्या के समय यानी प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. अभी अप्रैल का महीना चल रहा है. अप्रैल 2026 में भी भगवान शिव की पूजा के लिए दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं. आइए जानते हैं अप्रैल महीने में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत. नोट करें प्रदोष व्रत की तिथियां, महत्व और पूजा की विधि. अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां
अप्रैल 2026 का पहला प्रदोष व्रत 

तिथि (Budh Pradosh Vrat 2026 April)- वैशाख कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा. बुधवार का दिन होने से यह बुध प्रदोष व्रत कहलाएगा.
महत्व (Budh Pradosh Vrat Importance)- बुध प्रदोष व्रत के दिन किए पूजा-व्रत से बुद्धि और समझ में विकास होता है. संवाद कौशल में सुधार आता है और पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है.
पूजा मुहूर्त (Pradosh Vrat Puja Time)- 15 अप्रैल 2026, शाम 6:56 बजे से रात 9:13 बजे तक

अप्रैल 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत

तिथि (Bhaum Pradosh Vrat 2026 April)- अप्रैल महीने का दूसरा प्रदोष व्रत वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को 28 अप्रैल 2026 मंगलवार को रखा जाएगा. मंगलवार का दिन होने से यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा.
महत्व (Bhaum Pradosh Vrat Importance)- भौम प्रदोष व्रत मुख्य रूप से अच्छी सेहत, साहस में वृद्धि और कर्ज मुक्ति आदि के लिए किया जाता है.
पूजा मुहूर्त (Pradosh Vrat Puja Muhurat)- 28 अप्रैल 2026 शाम 07 बजकर 01 मिनट से रात 09 बजकर 07 मिनट तक

प्रदोष व्रत पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Method)
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. इसके बाद पूजाघर में दीप जलाकर भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें. इस दिन प्रदोष काल की पूजा तक व्रत रखा जाता है. कई लोग निर्जला व्रत रखते हैं तो वहीं कुछ फलाहार भी करते हैं. शाम के समय प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा करें.
पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, फूल और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. पूजा के दौरान &amp;ldquo;ॐ नमः शिवाय&amp;rdquo; मंत्र का जाप करे. साथ ही शिव चालीसा या प्रदोष व्रत की कथा (Pradosh Vrat Katha) का पाठ जरूर करें.
ये भी पढ़ें: Vikat Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी 5 या 6 अप्रैल कब है, पूजा के लिए फॉलो करें ये नियमDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 01:30:06 +0530</pubDate>
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        <title>Morning vs night skincare routine : मॉर्निंग या नाइट कौन सा स्किन केयर रूटीन? ग्लोइंग स्किन के लिए बेस्ट है, जानिए एक्सपर्ट की राय</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/morning-vs-night-skincare-routine-मॉर्निंग-या-नाइट-कौन-सा-स्किन-केयर-रूटीन-ग्लोइंग-स्किन-के-लिए-बेस्ट-है-जानिए-एक्सपर्ट-की-राय</link>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Morning, night, skincare, routine, मॉर्निंग, या, नाइट, कौन, सा, स्किन, केयर, रूटीन, ग्लोइंग, स्किन, के, लिए, बेस्ट, है, जानिए, एक्सपर्ट, की, राय</media:keywords>
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        <title>Happy Easter Wishes 2026: ऐ यीशू आ गए तुम वापस पास हमारे..ईस्टर पर भेजें दिल छू लेने वाले शुभकामनाएं</title>
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        <description><![CDATA[ Happy Easter Sunday Wishes 2026: क्रिसमस की तरह की ईस्टर या ईस्टर संडे भी ईसाई धर्म के महत्वपूर्ण पर्व में एक है, जिसे ईसाई धर्म के लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं. ईस्टर का पर्व प्रभु यीशु (Jesus Christ) के पुनरुत्थान की याद में मनाया जाता है.
ईसाई मान्यता के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन सूली (क्रूस) पर चढ़ाए जाने के दो दिन बाद यीशु पुनर्जीवित हो गए थे. इसी खुशी में लोग ईस्टर का त्योहार मनाते हैं. इस साल ईस्टर का त्योहार रविवार, 5 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है.
आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है ईस्टर
ईस्टर का पर्व प्रेम, क्षमा और नई शुरुआत का प्रतीक है. यह पर्व लोगों को यह संदेश देता है कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आने के बाद भी आशा और विश्वास बनाए रखना चाहिए. ईसा मसीह का पुनरुत्थान इस बात का प्रतीक है कि, सत्य और प्रेम की हमेशा जीत होती है.
ईस्टर के दिन दुनियाभर के चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती हैं. इस मौके पर लोग अपने परिवार, मित्रों और करीबियों को शुभकामनाएं देकर इस पर्व की खुशियां साझा करते हैं. आप भी अपनों को ईस्टर की बधाई देना चाहते हैं तो यहां देखिए दिल छू लेने वाले शुभकामनाएं संदेश (Easter Wishes 2026 messages quotes shayari images)-
ईस्टर की खुशियां कभी कम न हो,नई जिंदगी की दोस्ती कभी कम न हो,मुस्कान रहे हर एक चेहरे पर,नाज है हमें यीशू मसीह पर.
पुनर्जीवित मसीह आपके हृदय को आनंद से भर देंआपको नई आशा प्रदान करें और आपको शांति का आशीर्वाद देंईस्टर की शुभकामनाएं!

ऐ यीशू आ गए तुम वापस पास हमारेतरस गए थे दर्शन को हम तुम्&amp;zwj;हारेजिंदगी भर दी हमारी खुशियों से आपनेचमका दी किस्&amp;zwj;मत, पूरे किए सपने हमारे
Happy Easter 2026 Sunday

आपको और आपके परिवार को ईस्टर की शुभकामनाएं.
वसंत की सुंदरता और ईस्टर की आशा आपके दिल को
खुशी और सकारात्मकता से भर दे.
Happy Easter

प्रभु यीशु के चरणों की धूल है हम,
प्रभु के लिये, प्यारे फूल है हम,
इन्हीं फूलों को बचाया और बगीचे को सजाया
हमारे पापों को प्रभु यीशू ने है अपनाया.
हैप्पी ईस्टर!

लाता है सुख, लाता है प्यार, ये दिन दे सबको ब्लेसिंग हजार,
मन में न रहे किसी के गम, ईस्टर की विशेज देते हैं हम!
हैप्पी ईस्टर!

ईस्टर के अंडे, फूलों की खुशबू और प्यारे खरगोश
सब मिलकर आपके जीवन में खुशियां लाएं!
हैप्पी ईस्टर!

आशा&amp;nbsp;की&amp;nbsp;किरण फिर आई है,खुशियों&amp;nbsp;की&amp;nbsp;सौगात लाई है,ईस्टर का ये पावन पर्व,जीवन&amp;nbsp;में&amp;nbsp;नई राह दिखाई है.हैप्पी ईस्टर 2026
ईस्टर का अर्थ है, नई शुरुआत और प्रभु के प्रति असीम प्रेम.इस खूबसूरत दिन के लिए प्रभु का धन्यवाद करें.शुभ ईस्टर 2026
प्रभु यीशु का पुनरुत्थान हमारे जीवन में विश्वास की नई लौ जलाए.आप सभी को ईस्टर 2026 की ढेरों शुभकामनाएं
ये भी पढ़ें: Easter 2026: ईस्टर संडे 5 अप्रैल को, जानें गुड फ्राइडे के बाद इसे क्यों मनाया जाता हैDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 01:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Dengue Vaccine Qdenga: भारत में जल्द आ सकती है डेंगू की वैक्सीन Qdenga, जानिए कैसे करती है काम?</title>
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        <description><![CDATA[ How Effective Is Dengue Vaccine Qdenga: दुनियाभर में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच Qdenga नाम की डेंगू वैक्सीन को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वैक्सीन 2026 तक भारत में लॉन्च हो सकती है, हालांकि इसके लिए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की मंजूरी और क्लिनिकल ट्रायल्स की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. यह वैक्सीन जापान की कंपनी टाकेडा फार्मास्युटिकल कंपनी लिमिटेड &amp;nbsp;ने विकसित की है, जिसे भारत में &#039;मेक इन इंडिया&#039; पहल के तहत हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई के साथ मिलकर तैयार किया जा सकता है एक्सपर्ट मानते हैं कि देश में तेजी से बढ़ते डेंगू मामलों को देखते हुए यह एक अहम कदम साबित हो सकता है.
भारत में बढ़ रहे हैं मामले
दरअसल, भारत में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है. बायोइन्फॉर्मेटिक्स जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच डेंगू के मामलों में करीब 39.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसके क्लस्टर आउटब्रेक भी सामने आए हैं. &amp;nbsp;एगिलस डायग्नोस्टिक्स से जुड़ी डॉ. रश्मि खाडपकर ने NDTV को बताया कि भारत में डेंगू हाइपरएंडेमिक हो चुका है, यानी इसके सभी चार वायरस प्रकार एक साथ फैल रहे हैं. यही वजह है कि ऐसी वैक्सीन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी.&amp;nbsp;
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;अचानक टूटने लगे जरूरत से ज्यादा बाल, शरीर में छुपी हो सकती है यह बीमारी
क्या है यह वैक्सीन?
Qdenga एक लाइव एटेन्यूएटेड टेट्रावैलेंट वैक्सीन है, जिसका मतलब है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रमुख प्रकार- DEN1, DEN2, DEN3 और DEN4 के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए तैयार की गई है. यशोदा हॉस्पिटल के डॉक्टर हरि किशन बूरुगु के मुताबिक, यह वैक्सीन पहले की वैक्सीन डेंगवैक्सिया से अलग है, जिसे केवल उन्हीं लोगों के लिए सुझाया जाता था जिन्हें पहले डेंगू हो चुका हो.&amp;nbsp;
इन देशों में मिल चुकी है मंजूरी
इस वैक्सीन को अब तक 40 से ज्यादा देशों में मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें यूरोप, ब्रिटेन, इंडोनेशिया और ब्राजील शामिल हैं. इसके साथ ही, इसे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन से प्रीक्वालिफिकेशन भी मिला है, जो इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता पर वैश्विक भरोसे को दर्शाता है. क्लिनिकल ट्रायल्स की बात करें तो इस वैक्सीन का परीक्षण दुनिया भर में 60,000 से ज्यादा लोगों पर किया जा चुका है. वहीं, भारत में 4 से 60 वर्ष की उम्र के करीब 480 लोगों पर फेज-3 ट्रायल किया गया, जिसमें इसकी सुरक्षा और इम्यून रिस्पॉन्स का आकलन किया गया.
कितनी खतरनाक है डेंगू की बीमारी?
डेंगू एक मच्छरजनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से एडीस एजिप्टी मच्छर के जरिए फैलती है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द और त्वचा पर रैश शामिल हैं. गंभीर मामलों में यह डेंगू हेमरेजिक फीवर में बदल सकता है, जो जानलेवा भी हो सकता है.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;&amp;nbsp;Sleeping Habits: 7&amp;ndash;8 घंटे की नींद क्यों होती है जरूरी? एक्सपर्ट्स से जानिए सेहत पर इसका असर
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Dengue, Vaccine, Qdenga:, भारत, में, जल्द, आ, सकती, है, डेंगू, की, वैक्सीन, Qdenga, जानिए, कैसे, करती, है, काम</media:keywords>
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        <title>Good Friday 2026: प्रार्थना, जुलूस, श्रद्धांजलि, ईसा मसीह की याद में दुनियाभर में कैसे मनाया जाता है गुड फ्राइडे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/good-friday-2026-प्रार्थना-जुलूस-श्रद्धांजलि-ईसा-मसीह-की-याद-में-दुनियाभर-में-कैसे-मनाया-जाता-है-गुड-फ्राइडे</link>
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        <description><![CDATA[ Good Friday 2026: ईसाई धर्म के लिए गुड फ्राइडे का दिन बहुत ही पवित्र और भावनात्मक माना जाता है. इसका कारण यह ह कि इसी दिन यीशु मसीह को सूली (क्रूस) पर चढ़ाया गया था. इसले हर साल इस घटना की याद में गुड फ्राइडे मनाया जाता है.
लेकिन दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में गुड फ्राइडे के दिन को लोग अलग तरीके से मनाते हैं. ईसाई समुदाय के लोग इस विशेष दिन पर प्रार्थना, उपवास और श्रद्धांजलि के साथ मनाते हैं. चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं होती हैं और कई जगहों पर जुलूस भी निकाला जाता है.
गुड फ्राइडे शोक का दिन होता है. इसलिए इस दिन अधिकांश चर्चों में सुबह से ही विशेष प्रार्थना सभाओं की शुरुआत हो जाती हैं. लोग चर्च पहुंचकर यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हैं और शांति व मानवता के लिए प्रार्थना करते हैं. कई जगहों पर इस दिन लोग उपवास भी रखते हैं और सादगी के साथ दिन बिताते हैं.
दुनियाभर में कैसे मनाया जाता है गुड फ्राइडे
दुनिया के कई देशों में गुड फ्राइडे पर धार्मिक जुलूस निकालने की परंपरा भी है. जुलूस के माध्यम से ईसा मसीह के बलिदान को याद किया जाता है. इसी तरह का जुलूस इस साल भी स्पेन में निकाला गया, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर छाई हुई है. जुलूस में ईसा मसीह की अंतिम यात्रा और सूली पर चढ़ाए जाने की घटनाओं को प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जाता है. श्रद्धालु क्रॉस लेकर सड़कों पर चलते हैं और प्रभु यीशु के त्याग और प्रेम को याद करते हैं.

SPAIN ???????? Simply incredible scenes tonight as millions attend processions for Holy Thursday This one in Malaga is one of the most STUNNING pic.twitter.com/lG8R7IgzKL
&amp;mdash; Catholic Arena (@CatholicArena) April 2, 2026



यूरोप, अमेरिका, फिलीपींस, स्पेन और इटली जैसे देशों में गुड फ्राइडे के मौके पर विशेष आयोजन होते हैं. स्पेन में पारंपरिक जुलूस और धार्मिक कार्यक्रमों का विशेष महत्व होता है, जबकि फिलीपींस में कई लोग ईसा मसीह के कष्टों को याद करते हुए कठोर तपस्या और प्रार्थना करते हैं.
भारत में भी गुड फ्राइडे के दिन को बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है. वहीं भारत के गोवा, केरल, मुंबई, दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों के चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं. यह अवकाश का दिन होता है, जब श्रद्धालु चर्चों में जाकर मोमबत्तियां जलाते हैं और यीशु मसीह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुड फ्राइडे त्याग, प्रेम और मानवता का संदेश देता है. यह दिन लोगों को यह याद दिलाता है कि ईसा मसीह ने मानवता की भलाई के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था.
ये भी पढ़ें: Good Friday 2026: गुड फ्राइडे पर अपनाएं यीशु के सुविचार और करीबियों को भी भेजेंDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Good, Friday, 2026:, प्रार्थना, जुलूस, श्रद्धांजलि, ईसा, मसीह, की, याद, में, दुनियाभर, में, कैसे, मनाया, जाता, है, गुड, फ्राइडे</media:keywords>
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        <title>IVF Success Rate: क्या ब्लैक स्किन वाली औरतों पर कामयाब नहीं IVF? नई स्टडी ने खोले चौंकाने वाले राज</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ivf-success-rate-क्या-ब्लैक-स्किन-वाली-औरतों-पर-कामयाब-नहीं-ivf-नई-स्टडी-ने-खोले-चौंकाने-वाले-राज</link>
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        <description><![CDATA[ Why IVF Success Rate Is Lower In Black Women: क्या ब्लैक स्किन वाली महिलाओं पर IVF उतना असरदार नहीं होता जितना बाकी महिलाओं पर? यह सवाल लंबे समय से साइंटिस्ट और डॉक्टरों के बीच चर्चा का विषय रहा है. हाल ही में आई एक नई स्टडी ने इस मुद्दे पर कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं, जो इस बहस को और गहरा कर देते हैं.
करीब दो दशकों से फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर क्यों ब्लैक महिलाओं में IVF के बाद सफल जन्म दर &amp;nbsp;कम देखी जाती है. पहले माना जाता था कि इसका कारण उनके शरीर में फाइब्रॉइड्स की ज्यादा मौजूदगी हो सकती है, जो एम्ब्रियो के इम्प्लांटेशन में बाधा डालते हैं. इसके अलावा, IVF के दौरान दिए जाने वाले हार्मोनल इंजेक्शन्स पर शरीर का अलग रिस्पॉन्स भी एक वजह माना गया.
इसे भी पढ़ेंः ये पांच आदतें अपना लीं तो पक्का होगी नॉर्मल डिलीवरी, जानिए किस तरह से रखना होगा अपना ख्याल?
क्या निकला रिसर्च में?
हालांकि, हाल ही में जर्नल फर्टिलिटी एंड स्टेरिलिटी &amp;nbsp;में पब्लिश एक बड़े स्टडी ने इस धारणा को आंशिक रूप से चुनौती दी है. इस स्टडी में 2.46 लाख से ज्यादा IVF साइकिल्स का एनालिसिस किया गया, जिनमें करीब 7 प्रतिशत केस ब्लैक महिलाओं के थे. रिसर्च में पाया गया कि ओवेरियन स्टिमुलेशन दवाओं पर ब्लैक महिलाओं का रिस्पॉन्स अन्य समूहों की तुलना में थोड़ा बेहतर था. दिलचस्प बात यह रही कि इन महिलाओं के एग्स से बनने वाले एम्ब्रियो की क्वालिटी भी अच्छी पाई गई. यानी IVF की शुरुआती प्रक्रिया में कोई बड़ी कमी नहीं दिखी. रिसर्च में उम्र, बॉडी मास इंडेक्स, हार्मोन लेवल और इंफर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं जैसे फैक्टर्स को भी ध्यान में रखा गया.
रिजल्ट चौंकाने वाले
इसके बावजूद, अंतिम परिणाम यानी सफल जन्म दर में फर्क देखने को मिला. जहां व्हाइट महिलाओं में यह दर करीब 60 प्रतिशत थी, वहीं ब्लैक महिलाओं में यह लगभग 45 प्रतिशत ही रही. यही अंतर वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कहीं न कहीं कोई ऐसा फैक्टर है, जो आखिरी स्टेज में सफलता को प्रभावित कर रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया में &amp;nbsp;OB-GYN एक्सपर्ट Iris Tien-Lynn Lee के मुताबिक,&quot;स्पष्ट रूप से कोई ऐसी रुकावट है, जो इस प्रक्रिया को अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने से रोक रही है.&quot;
कई छिपे हुए कारण हो सकते हैं
रिसर्चर का यह भी कहना है कि इसके पीछे कई छिपे हुए कारण हो सकते हैं, जैसे गर्भाशय में फाइब्रॉइड्स की अधिकता या एनवायरमेंट से जुड़े ऐसे तत्व, जिनका असर ब्लैक महिलाओं पर ज्यादा पड़ता है. &amp;nbsp;नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर तरुन जैन का मानना है कि इस तरह के अध्ययन हेल्थकेयर सिस्टम की कमियों को समझने में भी मदद करते हैं. उनके अनुसार, ब्लैक महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं में अक्सर खराब परिणामों का सामना करना पड़ता है, चाहे बात मातृत्व की हो या इंफर्टिलिटी ट्रीटमेंट की.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Aaj Ka Panchang 4 April 2026: आज शनि देव की पूजा में सर्वार्थ सिद्धि का दुर्लभ संयोग, जानें आज का शुभ चौघड़िया और राहुकाल</title>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 4 अप्रैल 2026: 4 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और शनिवार है. शनिवार के दिन व्रत रखना, काले तिल और सरसों के तेल का दान करना, गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना, तथा पीपल के वृक्ष की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. शनि देव की कृपा से जीवन के कष्ट कम होने लगते हैं.&amp;nbsp;
आज का दिन क्यों खास
आज शनिवार शनि देव की पूजा के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बना है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए धार्मिक या मांगलिक कार्य सिद्ध होते हैं. इसके साथ शनिवार होने से शनि देव का आशीर्वाद भी साधक को प्राप्त होगा.&amp;nbsp;
4 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 4 April 2026)



तिथि

द्वितीया (3 अप्रैल 2026, सुबह 8.42 - 4 अप्रैल 2026, सुबह 10.08)



वार
शनिवार


नक्षत्र
स्वाती


योग
हर्षण


सूर्योदय 
सुबह 6.10


सूर्यास्त
शाम 6.39


चंद्रोदय
रात 9.01


चंद्रोस्त
सुबह 6.58


चंद्र राशि
तुला




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.09 - सुबह 10.51


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 9.32 - रात 10.58




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुहह 9.16 - सुबह 10.50


यमगण्ड काल
दोपहर 1.58 - दोपहर 3.32


गुलिक काल
सुबह 6.08 - सुबह 7.43


आडल योग
सुबह 6.08 - रात 9.35


विडाल योग
रात 9.35 - सुबह 6.07, 5 अप्रैल


भद्रा काल
रात 11.01 - सुबह 6.07, 5 अप्रैल




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 4 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
तुला


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



4 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: दूसरों की मदद में अपना काम प्रभावित हो सकता है, सतर्क रहें और तनाव से बचें.
वृषभ: सुखद दिन रहेगा, परिवार में खुशी और आर्थिक संतुलन बना रहेगा.
मिथुन: उन्नति के अवसर मिलेंगे, लेकिन काम का दबाव और सावधानी जरूरी है.
कर्क: अचानक धन लाभ और मान-सम्मान बढ़ेगा, सेहत का ध्यान रखें.
सिंह: सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी, लेकिन निवेश में सावधानी रखें.
कन्या: रचनात्मक सफलता मिलेगी, पर रिश्तों में संयम जरूरी है.
तुला: आय के नए स्रोत मिलेंगे और रुके काम पूरे होंगे.
वृश्चिक: आर्थिक लाभ और कर्ज से राहत मिलेगी, रिश्ते मजबूत होंगे.
धनु: कानूनी मामलों में सफलता, लेकिन शत्रुओं और विवाद से सावधान रहें.
मकर: काम में सफलता और शुभ समाचार मिलेगा, खर्चों पर नियंत्रण रखें.
कुंभ: व्यस्तता और पारिवारिक चिंता रहेगी, प्रॉपर्टी में लाभ संभव है.
मीन: व्यापार में सफलता और मानसिक शांति का अनुभव होगा.

आज का उपाय&amp;nbsp;
शनि देव को प्रसन्न करना है तो किसी मजदूर की मदद करें, गरीब की जितनी हो सके सहायता करें. इससे साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
शनिवार का शुभ रंग काला और नीला माना जाता है. शिवलिंग पर शंखपुष्पी के फूल चढ़ाएं. काली चीजों का दान करें.
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया 19 या 20 अप्रैल किस दिन है, सोना, वाहन, घर खरीदारी का श्रेष्ठ मुहूर्त कब



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, शनि, देव, की, पूजा, में, सर्वार्थ, सिद्धि, का, दुर्लभ, संयोग, जानें, आज, का, शुभ, चौघड़िया, और, राहुकाल</media:keywords>
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        <title>Cataract Prevention Tips: धुंधली न हो आंखों की रोशनी...मोतियाबिंद के खतरे को कम करने के लिए अपनाएं ये आसान आदतें</title>
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        <description><![CDATA[ How To Prevent Cataracts Naturally: आंखों की रोशनी उम्र के साथ कमजोर होना आम बात है, लेकिन अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो इस प्रक्रिया को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है. कैटरेक्ट भी ऐसी ही एक समस्या है, जो उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखने को मिलती है. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि कि आखिर यह दिक्कत क्यों होती है?
उम्र बढ़ने से होती है दिक्कत
दरअसल, उम्र बढ़ने के साथ आंखों का लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है, जिससे साफ दिखाई देना मुश्किल हो जाता है. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे धूप में ज्यादा रहना, डायबिटीज का कंट्रोल में न होना और धूम्रपान की आदत. womansworld की रिपोर्ट के अनुसार, सही लाइफस्टाइल अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
धूप से बचाव
सबसे पहला और आसान तरीका है धूप से बचाव. बाहर निकलते समय सनग्लासेस और टोपी पहनने से आंखों को हानिकारक यूवी किरणों से बचाया जा सकता है. खासतौर पर UV 400 वाले चश्मे आंखों के लिए ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं. खानपान भी इसमें अहम भूमिका निभाता है. विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे शिमला मिर्च, संतरा, स्ट्रॉबेरी और ब्रोकोली आंखों के लिए फायदेमंद होती हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं.
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खाने-पीने की चीजें
इसके अलावा, रोजाना सलाद खाने की आदत भी आंखों की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है. पालक और केल जैसी हरी सब्जियों में मौजूद ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे पोषक तत्व नजर को मजबूत रखने में मदद करते हैं. अगर सलाद में बेरीज शामिल कर ली जाएं तो इसका फायदा और बढ़ जाता है. फिजिकल एक्टिविटी भी उतनी ही जरूरी है. रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, जैसे वॉक करना, आंखों की ब्लड वेसल्स को स्वस्थ बनाए रखता है और उम्र से जुड़ी समस्याओं को धीमा करता है.
मल्टीविटामिन लेना फायदेमंद
सप्लीमेंट्स की बात करें तो मल्टीविटामिन लेना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें कई जरूरी पोषक तत्व एक साथ मिल जाते हैं. हालांकि, केवल एक ही विटामिन पर निर्भर रहना उतना असरदार नहीं माना जाता. दिलचस्प बात यह है कि तनाव भी आंखों की सेहत को प्रभावित कर सकता है. ज्यादा तनाव से शरीर में कोर्टिसोल बढ़ता है, जो ब्लड शुगर को बढ़ाकर आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है.
ऐसे में छोटे-छोटे तरीके, जैसे च्युइंग गम चबाना, तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं. मोतियाबिंद को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन सही खानपान, नियमित एक्सरसाइज और आंखों की देखभाल से इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. छोटी-छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा फर्क डाल सकती हैं.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 09:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>हनुमान जयंती पर अनोखा भंडार, वानर सेना ने पेट भरकर खाई मिठाईयां, Video Viral</title>
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        <description><![CDATA[ Viral Video: गुरुवार को देशभर में धूमधाम और श्रद्धापूर्वक हनुमान जयंती मनाई गई. भगवान हनुमान के जन्मोत्सव पर पूजा-व्रत के साथ ही मंदिरों, धार्मिक स्थलों या विशेष स्थानों पर भंडारे का भी आयोजन किया जात है. लेकिन हनुमान जयंती पर भंडारे का एक अनोखा वीडियो सामने आया है, जिसकी जमकर तारीफ हो रही है.
हनुमान जयंती के इस वायरल वीडियो में आस्था और सेवा का एक अनोखा संगम देखा गया. जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो महाराष्ट्र के अकोला जिले के बार्शीटाकली तालुका का है. वीडियो के अनुसार हनुमान जयंती पर &amp;lsquo;वानर सेना&amp;rsquo; के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया गया. भंडारे में वानरों को मिठाईयां भी परोई गई, जहां सैकड़ों लंगूरों को अनुशासन के साथ भोजन कराया गया.
हनुमान जयंती पर वानर सेना के लिए भंडारा
दरअसल, महाराष्ट्र के अकोला जिले के बार्शीटाकली तालुका में हनुमान जयंती पर वानर सेना के लिए भंडारा कराने की परंपरा है. यह भंडारा विशेषकर वानर सेना के लिए ही रखा गया. वीडियो में देखा जा सकता है कि, हनुमान जी के भक्त वानर अपने प्रभु के जन्मोत्सव का आनंद ले रहे हैं और मिठाईयां खा सकते हैं.
खास बात यह कि, वानर भी बिना किसी अफरा-तफरी के शांतिपूर्वक भोजन करते दिखाई दे रहे हैं. सभी पंक्ति में बैठकर आराम से थाली में परोसा गया भोजन खाते नजर आ रहे हैं. कई लोगों ने इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया. इंटरनेट पर यह वीडियो इस समय काफी चर्चा में है. साथ ही सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तारीफ भी हो रही है. कई यूजर्स इसे प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं. तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि हनुमान जयंती जैसे पावन पर्व पर इस तरह का आयोजन समाज में दया, सेवा और सह-अस्तित्व का संदेश देता है.

महाराष्ट्र के अकोला जिले के बार्शीटाकळी तालुका में हनुमान जयंती के अवसर पर &#039;वानर सेना&#039; के लिए रखा गया भंडारा, परोसी गईं मिठाइयां! #HanumanJayanti #MaharashtraNews #ABPNews pic.twitter.com/Hg7t2rgSxh
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) April 2, 2026



धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी का जन्म अंजना माता (जिन्हें एक श्राप के कारण वानर रूप मिला था) और केसरी के घर हुआ, जिन्हें शिवजी का वरदान प्राप्त था. भगवान हनुमान का जन्म शिव के 11वें रुद्रावतार में हुआ. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वानर, नर और वानर के बीच की एक विलक्षण प्रजाति थी जो वन में रहती थी. हनुमान जी को वानरों का राजा और रक्षक माना जाता है. इसलिए हनुमान जी के जन्मोत्सव पर वानरों को भोजन कराना या किसी भी तरह से उनकी सेवा करना बहुत शुभ माना जाता है.
इसी भावना के साथ महाराष्ट्र के अकोला में भी परंपरा को निभाते हए हनुमान जयंती पर वानरों के लिए लंगर का आयोजन किया गया, जिससे हनुमान जी की कृपा बनी रहे और समाज में सेवा व करुणा का संदेश भी पहुंचे. हनुमान जयंती के दिन व्रत, पूजा-पाठ, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ-साथ जरूरतमंदों और जीव-जंतुओं को भोजन कराने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 21:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>COVID In Children: हेल्दी किड्स को शिकार बना रहा कोविड का नया वैरिएंट सिकाडा, कितने सेफ हैं भारत के बच्चे?</title>
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        <description><![CDATA[ Is BA.3.2 Dangerous For Children: क्या कोविड का नया वैरिएंट बच्चों के लिए ज्यादा खतरा बन रहा है? अमेरिका में तेजी से फैल रहे &quot;सिकाडा&quot; नाम के कोविड वैरिएंट ने स्वास्थ्य एक्सपर्ट की चिंता बढ़ा दी है. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वैरिएंट खासतौर पर बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है, हालांकि फिलहाल इसके लक्षण पहले जैसे ही बताए जा रहे हैं. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
तेजी से फैल रहा नया वैरिएंट
यह नया वैरिएंट BA.3.2 के नाम से जाना जाता है, जिसे सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने कई राज्यों में ट्रैक किया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वैरिएंट अमेरिका के 25 राज्यों और 23 देशों में फैल चुका है. लेकिन अच्छी बात यह है कि अस्पताल में भर्ती होने के मामले फिलहाल कम हो रहे हैं. साइंटिस्ट का मानना है कि यह वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA.3 सब-वैरिएंट से जुड़ा हुआ है, जो पहले 2022 में सामने आया था. माना जा रहा है कि यह वायरस लंबे समय तक किसी कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्ति के शरीर में मौजूद रहा और धीरे-धीरे म्यूटेशन के जरिए एक नए रूप में सामने आया.&amp;nbsp;
अंडर मॉनिटरिंग की कैटेगरी
इस वैरिएंट को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने वैरिएंट अंडर मॉनिटरिंग की कैटेगरी में रखा है, यानी अभी इस पर नजर रखी जा रही है लेकिन इसे बेहद खतरनाक घोषित नहीं किया गया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि BA.3.2 बच्चों को ज्यादा इंफेक्टेड करता दिख रहा है. न्यूयॉर्क के डेटा के अनुसार, 3 से 15 साल के बच्चे इस वैरिएंट से लगभग पांच गुना ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि, कुल मामलों में इसकी हिस्सेदारी अभी भी सीमित है.&amp;nbsp;
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क्या हैं लक्षण?
लक्षणों की बात करें तो इसमें कोई नया बदलाव नहीं देखा गया है. बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, थकान और सांस लेने में दिक्कत जैसे सामान्य कोविड लक्षण ही सामने आ रहे हैं। स्वाद और गंध का जाना अब कम मामलों में देखा जा रहा है. &amp;nbsp;एक्सपर्ट का कहना है कि मौजूदा वैक्सीन इस वैरिएंट पर पूरी तरह असरदार नहीं हो सकती, लेकिन यह गंभीर बीमारी से बचाने में अब भी मदद करती है. इसके अलावा, मौजूदा एंटीवायरल दवाएं भी प्रभावी मानी जा रही है.&amp;nbsp;
भारत के बच्चों पर असर
अब सवाल उठता है कि क्या भारत के बच्चे सुरक्षित हैं? फिलहाल भारत में इस वैरिएंट के बड़े पैमाने पर फैलने की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्लोबल ट्रेंड को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है. डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि बच्चों की इम्यूनिटी मजबूत रखने, साफ-सफाई का ध्यान रखने और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचाव जैसे उपाय अपनाए जाएं. इसके साथ ही, जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना भी जरूरी है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 21:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>अचानक टूटने लगे जरूरत से ज्यादा बाल, शरीर में छुपी हो सकती है यह बीमारी</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल बालों का झड़ना एक आम समस्या बन चुकी है. आमतौर पर यह माना जाता है कि 50 से 100 रोजाना बाल का गिरना सामान्य होता है. हजारों लाखों बालों में 50-60 बालों का गिरना कोई परेशानी की बात नहीं होती, लेकिन जब अचानक बाल जरूरत से ज्यादा टूटने लगें तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है. कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जिनके बाल गुच्छों में झड़ते हैं, कंघी करने पर बाल का एक मोटा हिस्सा हाथ में आ जाता है और सिर से बाल गायब हो जाते हैं. कई लोग इसे सिर्फ मौसम , हेयर केयर की कमी या तनाव का असर समझकर टाल देते हैं, लेकिन कई बार यह शरीर में छुपी किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए समय रहते इसके कारण को समझ लेना बेहद जरूरी है
क्या है बालों का टूटने का कारण?&amp;nbsp;
यह बात सच है कि अच्छे बालों के लिए अच्छी सेहत, सही खानपान और कसरत बहुत ज़रूरी है. हालांकि, कभी-कभी शरीर में कोई बीमारी हमारे शरीर मे अपना घर बनाने लगती है, जिसकी वजह से बाल झड़ने लगते हैं साथ ही शरीर में दर्द और कमजोरी महसूस होने लगती है. इन छोटे-मोटे दिखने वाले लक्षणों के पीछे कोई बड़ी बीमारी भी हो सकती है जिसे आमतौर पर काफी लोग नजरअंदाज कर देते है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
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थायरॉइड की समस्या हो सकती है वजह
आजकल थायरॉइड एक आम बीमारी बन गई है. अधिकतर लोगों में थॉयरायड की बीमारी देखने को मिलती है चाहे वह पुरूष हो या महिला. आपको बता दें कि थॉयरायड गर्दन के सामने की तरफ तितली की तरह ग्लैंड होता है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने मे मदद करती है, जब इसमें गड़बड़ी होती है तो इसका असर बालों पर भी पड़ता है. हाइपोथायरॉइड या हाइपरथायरॉइड दोनों ही स्थितियों में बाल तेजी से झड़ने लगते हैं और कमजोर हो जाते हैं.&amp;nbsp;
ऐलोपेशिया एराइटा
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से बालों की जड़ों पर हमला करने लगता है इससे बाल अचानक झड़ने लगते हैं. इस बीमारी में स्कैल्प पर गोल-गोल चकती (पैचेस) जैसा गंजापन होते दिखने लगता है. ऐलोपेशिया एराइटा में कुछ भी निश्चित होकर नहीं कह सकते हैं कि बाल बिल्कुल गिर जायेंगे या फिर से वापस आयेंगे, ये शरीर पर निर्भर करता है क्योंकि बाल गिरकर कभी भी वापस आ सकता है या आने के बाद फिर से गिर सकता है.
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एनीमिया (खून की कमी)
खून की कमी यानी एनीमिया, विशेष रूप से आयरन की कमी, बालों के झड़ने के प्रमुख कारणों में से एक है. खून में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने से बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व ठीक से नहीं पहुंच पाते हैं. साथ ही जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो शरीर बालों को पोषण देने के बजाय उसे महत्वपूर्ण अंगों जैसे दिल, लिवर को बचाने में खर्च करता है. इससे बालों के विकास चक्र को बाधित करती है, जिससे बाल अपने विकास चरण (growth phase) को पूरा करने से पहले ही झड़ने और टूटने लगते हैं. खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.&amp;nbsp;
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 05:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>अचानक, टूटने, लगे, जरूरत, से, ज्यादा, बाल, शरीर, में, छुपी, हो, सकती, है, यह, बीमारी</media:keywords>
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        <title>Beetroot Lip Balm: होंठ होंगे इतने गुलाबी कि तमन्ना भाटिया भी आपके सामने लगेगी फीकी, चुकंदर से ऐसे बनाएं लिप बाम</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/beetroot-lip-balm-होंठ-होंगे-इतने-गुलाबी-कि-तमन्ना-भाटिया-भी-आपके-सामने-लगेगी-फीकी-चुकंदर-से-ऐसे-बनाएं-लिप-बाम</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/beetroot-lip-balm-होंठ-होंगे-इतने-गुलाबी-कि-तमन्ना-भाटिया-भी-आपके-सामने-लगेगी-फीकी-चुकंदर-से-ऐसे-बनाएं-लिप-बाम</guid>
        <description><![CDATA[ How To Make Beetroot Lip Balm At Home: क्या आपके होंठों की रंगत फीकी पड़ गई है और आप नेचुरल तरीके से उन्हें गुलाबी बनाना चाहते हैं? आजकल बाजार में कई प्रोडक्ट्स मिलते हैं, लेकिन केमिकल से भरे इन प्रोडक्ट्स की बजाय घर पर बना चुकंदर लिप बाम एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प बन सकता है. दरअसल, होंठों की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है, जिस पर मौसम, धूप और डिहाइड्रेशन का असर जल्दी दिखाई देता है. यही वजह है कि होंठ सूखे, फटे या काले पड़ने लगते हैं. ऐसे में सही देखभाल और नेचुरल इंग्रेडिएंट्स का इस्तेमाल बेहद जरूरी हो जाता है.
चुंकदर से लिप बाम&amp;nbsp;
व्यूटी प्रोडक्ट्स के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट yesmadam चुकंदर लिप बाम की खास बात यह है कि यह होंठों को सिर्फ मॉइश्चराइज ही नहीं करता, बल्कि उन्हें हल्का नेचुरल गुलाबी टिंट भी देता है. इसमें मौजूद नेचुरल पिगमेंट्स होंठों को हेल्दी ग्लो देने में मदद करते हैं. इसे बनाने के लिए ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती. थोड़ी सी बीजवैक्स, नारियल तेल, बादाम तेल और चुकंदर पाउडर मिलाकर इसे आसानी से घर पर तैयार किया जा सकता है. चाहें तो इसमें विटामिन E ऑयल भी मिलाया जा सकता है, जिससे होंठ और ज्यादा सॉफ्ट बने रहते हैं.
कैसा है इसे बनाने का प्रोसेस?
बनाने की प्रक्रिया भी आसान है. सबसे पहले सभी ऑयल और वैक्स को हल्की आंच पर पिघलाएं, फिर इसमें चुकंदर पाउडर मिलाएं और अच्छी तरह मिक्स करें. इसके बाद इस मिश्रण को किसी साफ कंटेनर में डालकर ठंडा होने दें. इस लिप बाम का इस्तेमाल करने से होंठों की ड्राइनेस कम होती है और फटे होंठ धीरे-धीरे ठीक होने लगते हैं. इसके साथ ही यह होंठों को स्मूद और सॉफ्ट बनाए रखता है. चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C होंठों की रंगत सुधारने में मदद करते हैं. नियमित इस्तेमाल से होंठों का रंग धीरे-धीरे बेहतर और साफ नजर आने लगता है.
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इस बात का रखें ध्यान
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चुकंदर लिप बाम का असर स्थायी नहीं होता. यह एक नेचुरल टिंट देता है, जो समय के साथ हल्का पड़ जाता है, इसलिए इसे नियमित रूप से लगाना जरूरी है. बेहतर परिणाम के लिए होंठों को हाइड्रेट रखना भी जरूरी है. पर्याप्त पानी पीना और धूप से बचाव करना होंठों की हेल्थ को बनाए रखने में मदद करता है. आप चाहें तो चुकंदर के साथ शहद या शुगर स्क्रब का इस्तेमाल करके होंठों की डेड स्किन भी हटा सकते हैं. इससे लिप बाम का असर और बेहतर दिखता है. घर पर बना यह लिप बाम न सिर्फ सस्ता है, बल्कि पूरी तरह नेचुरल भी है. इसमें किसी तरह के हानिकारक केमिकल्स नहीं होते, जिससे यह रोजाना इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रहता है.
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 05:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Beetroot, Lip, Balm:, होंठ, होंगे, इतने, गुलाबी, कि, तमन्ना, भाटिया, भी, आपके, सामने, लगेगी, फीकी, चुकंदर, से, ऐसे, बनाएं, लिप, बाम</media:keywords>
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        <title>Hanuman Jayanti 2027 Date: हनुमान जयंती 2027 में कब ? नोट कर लें डेट</title>
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        <description><![CDATA[ Hanuman Jayanti 2027 Date: श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की जयंती अर्थात जन्मोत्सव चैत्र पूर्णिमा पर हर साल धूमधाम से मनाया जाता है. राम जी और हनुमान जी के भक्तों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है, ऐसे में जान लें हनुमान जयंती 2027 में कब है.
अगले साल हनुमान जंयती 20 अप्रैल 2027 मंगलवार को मनाई जाएगी. हनुमान जी का जन्म धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए हुआ था. उनका अवतार विशेष रूप से भगवान विष्णु के राम अवतार की सहायता के लिए हुआ था. हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, सेवा और निष्ठा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं.
हनुमान जयंती 2027 का मुहूर्त
चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 20 अप्रैल 2027 को सुबह 4.51 मिनट पर होगी और इसका समापन 21 अप्रैल 2027 को सुबह 3.56 मिनट पर होगा.
हनुमान जन्मोत्सव 2027 का चौघड़िया

चर - सुबह 09:06 - सुबह 10:43
लाभ - सुबह 10:43 - दोपहर 12:20
अमृत - दोपहर 12:20 - दोपहर 01:58

क्यों शिव जी ने हनुमान रूप में लिया रुद्रअवतार
शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी शिव के ग्यारहवें रुद्र माने जाते हैं, इसलिए उन्हें &amp;ldquo;शंकर सुवन&amp;rdquo; भी कहा जाता है. उनका अवतार यह दर्शाता है कि जब भगवान स्वयं भी भक्त बनकर सेवा करते हैं, तो भक्ति का महत्व कितना महान है.
रुद्र अवतार लेने के पीछे मुख्य कारण थे -

धर्म की रक्षा: रावण जैसे अत्याचारी का अंत करने में सहायता करना.
रामभक्ति का आदर्श स्थापित करना: हनुमान जी ने दिखाया कि सच्ची भक्ति कैसी होती है - निस्वार्थ, समर्पित और अटूट.
शक्ति और विनम्रता का संतुलन: वे अत्यंत शक्तिशाली होने के बावजूद हमेशा विनम्र और सेवाभावी रहे.

बल, बुद्धि और विद्या का सागर हैं हनुमान जी
हनुमान जी चिरंजीवी (अमर) माने जाते हैं, अर्थात वे आज भी इस संसार में विद्यमान हैं. उन्हें संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों के संकट दूर करते हैं. रामायण में उनका सबसे प्रसिद्ध कार्य संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाना है. वे केवल बलवान ही नहीं, बल्कि अत्यंत विद्वान भी थे.
हनुमान जी की भक्ति के लाभ

हनुमान जी की भक्ति करने से डर, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.ऐसा माना जाता है कि जहां हनुमान जी का नाम लिया जाता है, वहां किसी भी प्रकार की बुरी शक्ति प्रवेश नहीं कर सकती.
हनुमान जी बल और पराक्रम के प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से व्यक्ति के भीतर साहस, आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों का सामना कर पाता है.
ज्योतिष के अनुसार हनुमान जी की पूजा से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और शनि से संबंधित कष्टों में कमी आती है इसलिए शनिवार और मंगलवार को हनुमान जी की पूजा विशेष लाभकारी मानी जाती है.

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया 19 या 20 अप्रैल किस दिन है, सोना, वाहन, घर खरीदारी का श्रेष्ठ मुहूर्त कब

Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 05:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Ayodhya 84 Kosi Parikrama: कारसेवक पुरम से 84 कोसी परिक्रमा शुरू, 24 अप्रैल को होगा समापन</title>
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        <description><![CDATA[ Ayodhya 84 Kosi Parikrama: राम जन्मभूमि अयोध्या से खबर है कि, हनुमान मंडल के तत्वावधन में ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर प्रारंभिक व्यवस्थाओं के साथ शुरू हो गई है. लेकिन विधिवत यात्रा 3 अप्रैल को मखोड़ा धाम से शुरू होगी. विश्व हिंदू परिषद के हनुमान मंडल दल की ओर से निकाली जाने वाली इस ऐतिहासिक परिक्रमा का&amp;nbsp; भव्य शुभारंभ हो गया है.
कारसेवक पुरम से शुरू हुई इस धार्मिक पदयात्रा में हजारों साधु-संतों और राम भक्तों के साथ आस्था के महासागर में बदल गई. परिक्रमा के लिए कारसेवक पुरम से मखौड़ा के लिए साधु-संतों का जत्था रवाना होगा. इस अवसर पर रामनगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति में डूबी नजर आ रही है कारसेवक पुरम से निकली यह यात्रा सरयू तट तक पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर अपनी यात्रा की शुरुआत की.
इस विशाल धार्मिक आयोजन में देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए हैं. परिक्रमा को मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और बजरंग दल के पूर्व संयोजक जयभान सिंह पवैया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. 23 दिनों तक चलने वाली यह परिक्रमा 3 अप्रैल से शुरू होकर 24 अप्रैल को संपन्न होगी. समापन के दिन श्रद्धालु राम मंदिर की परिक्रमा करेंगे. यह यात्रा अयोध्या समेत बस्ती, अंबेडकर नगर, बाराबंकी और गोंडा जनपदों से होकर गुजरेगी.
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को दो स्थानों पर सरयू नदी को नाव के जरिए पार करना होगा. परिक्रमा का अगला प्रमुख पड़ाव बस्ती का मखौड़ा धाम होगा, जहां से 3 अप्रैल को सुबह 6 बजे यात्रा आगे बढ़ेगी.
हनुमान मंडल दल के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह के मुताबिक, तमिलनाडु और केरल को छोड़कर देश के लगभग सभी राज्यों से श्रद्धालु इसमें शामिल हुए हैं. श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. कई श्रद्धालु वर्षों से इस परिक्रमा में शामिल होते आ रहे हैं और इसे अपना सौभाग्य मानते हैं. उनका कहना है कि यह यात्रा उन्हें आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा देती है.
जनमानस के बीच ऐसी मान्यता है कि, 84 कोसी परिक्रमा करने से 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्ति मिलती है. इसलिए इस धार्मिक यात्रा का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृति महत्व है. 23 दिन तक चलने वाली इस पदयात्रा के समापन पर श्रद्धालु रामकोट स्थित राम जन्मभूमि की परिक्रमा कर अपनी आस्था का समापन करेंगे.
ये भी पढ़ें: Hanuman Jayanti Vrat Katha: हनुमान जयंती पर पढ़ें ये पावन कथा, जानें कैसे शिव के अंशावतार में जन्मे बजरंगबलीDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 05:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>शुभ शुक्रवार, गुड फ्राइडे और मुबारक जुमा, हर धर्म के लिए पवित्र है Friday का दिन!</title>
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        <description><![CDATA[ शुभ शुक्रवार, गुड फ्राइडे और मुबारक जुमा, हर धर्म के लिए पवित्र है Friday का दिन! ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 05:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Hanuman Jayanti 2026 Trigrahi Yog: हनुमान जयंती पर बना त्रिग्रही योग, किन राशियों के लिए शुभ</title>
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        <description><![CDATA[ Hanuman Jayanti 2026 Trigrahi Yog: हनुमान जयंती पर बना त्रिग्रही योग, किन राशियों के लिए शुभ ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:30:12 +0530</pubDate>
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        <title>Heart Health Tips : 25 प्रतिशत वर्किंग हार्ट के साथ भी जी सकते हैं लंबा जीवन, डेली लाइफ में कर लें ये पांच बदलाव</title>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Sleeping Habits: 7–8 घंटे की नींद क्यों होती है जरूरी? एक्सपर्ट्स से जानिए सेहत पर इसका असर</title>
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        <description><![CDATA[ जितना जरूरी पेट के लिए खाना होता है उससे भी ज्यादा जरूरी आंखों के लिए नींद होती है, लेकिन आज के जमाने में नींद जैसी बेहद &amp;nbsp;जरूरी चीज को लोग नजरअंदाज कर देते है जो कि उनकी सेहत के लिए काफी घातक साबित हो सकता है
देर से सोना और सिर्फ 5&amp;ndash;6 घंटे की नींद लेना आजकल एक तरह का नॉर्म बन गया है, इसमें &amp;ldquo;हसल कल्चर&amp;rdquo; का भी बड़ा हाथ है, जो कम नींद लेकर ज्यादा काम करने को बढ़ावा देता है, काम के प्रति लगन होना बहुत जरूरी है, लेकिन इसके लिए अपनी नींद से समझौता करना बिल्कुल भी सही नहीं है
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आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय
Dr. Prashant Makhija, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, वॉकहार्ट, बताते हैं कि &quot;नींद के दौरान हमारा दिमाग दिनभर की गंदगी (वेस्ट) को साफ करता है और याददाश्त, लर्निंग और इमोशन्स से जुड़ी चीजों को रीसेट करता है, साथ ही शरीर में भूख, मेटाबॉलिज्म और तनाव से जुड़े हार्मोन को भी ठीक करता है, लेकिन जब नींद कम हो जाती है तो शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है, इसकी वजह से दिनभर थकान, ध्यान न लगना, चिड़चिड़ापन और सोचने की स्पीड धीमी हो सकती है. नींद की कमी का असर दिल, ब्लड प्रेशर और इम्यून सिस्टम पर भी पड़ता है, लंबे समय तक कम नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और ज्यादा तनाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
Dr. Dipesh Pimpale के अनुसार, &quot;इंसानी शरीर एक घड़ी की तरह काम करता है, जो समय आने पर हमें नींद के संकेत देता है. 7&amp;ndash;8 घंटे की नींद शरीर को बैलेंस में रखने और अगले दिन के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन जब नींद कम हो जाती है, तो दिमाग थका हुआ महसूस करता है और रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है. इसकी वजह से लोगों को मूड स्विंग्स और सिरदर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. साथ ही, इसका सीधा असर शरीर की स्ट्रेस और हार्मोन को संभालने की क्षमता पर भी पड़ता है&quot;.
Dr. Aniruddha Vasant More के अनुसार, हमारा दिमाग सही तरीके से काम करने के लिए नींद का इस्तेमाल करता है.जब हम सोते हैं, तो दिमाग यादों को प्रोसेस करता है और ऊर्जा को फिर से स्टोर करने में मदद करता है, इसलिए जब किसी को जरूरत के हिसाब से नींद नहीं मिलती, तो दिमाग सही से काम नहीं कर पाता, इसकी वजह से सोचने की गति धीमी हो जाती है, ध्यान कमजोर पड़ता है और चीजें भूलने की आदत हो जाती है. वहीं, अगर कोई व्यक्ति रोज एक ही समय पर सोने का रूटीन फॉलो करता है, तो उसे अच्छी नींद आती है और वह ज्यादा एक्टिव, संतुलित और प्रोडक्टिव महसूस करता है.
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>Vitamin D: रात में विटामिन D लेना सही या गलत, जानें आपकी नींद और हार्मोन से इसका कितना गहरा कनेक्शन?</title>
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        <description><![CDATA[ Should You Take Vitamin D At Night: विटामिन D हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि सूजन को कंट्रोल करने और नींद के पैटर्न को संतुलित रखने में भी मदद करता है. हालांकि, कई लोग यह नहीं जानते कि इसे किस समय लेना ज्यादा फायदेमंद होता है और क्या इसका असर नींद पर पड़ सकता है. चलिए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से.&amp;nbsp;
विटामिन डी रात में लेने का असर
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट health की रिपोर्ट के अनुसार, &amp;nbsp;कुछ रिसर्च यह संकेत देती हैं कि अगर विटामिन D रात में लिया जाए, तो यह शरीर में मेलाटोनिन के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. मेलाटोनिन वही हार्मोन है जो हमारे शरीर को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय है और यह नींद-जागने के साइकिल &amp;nbsp;सर्कैडियन रिदम को नियंत्रित करता है. चूंकि विटामिन D का मुख्य सोर्स सूर्य की रोशनी है, इसलिए माना जाता है कि दिन के समय इसका स्तर ज्यादा और रात में कम होना चाहिए. इसी वजह से कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसे दिन के समय लेना ज्यादा बेहतर हो सकता है, ताकि शरीर का नेचुरल स्लीप साइकिल प्रभावित न हो.
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क्या होता है इसका असर?
विटामिन D का असर सेरोटोनिन नाम के हार्मोन पर भी पड़ता है, जो मूड और मेलाटोनिन दोनों से जुड़ा होता है. सामान्य मात्रा में विटामिन D सेरोटोनिन के निर्माण में मदद करता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा बहुत ज्यादा हो जाए तो यह उल्टा असर भी डाल सकता है और सेरोटोनिन का स्तर कम कर सकता है. हालांकि, दूसरी तरफ कुछ स्टडीज यह भी बताती हैं कि विटामिन D की कमी से नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है. जिन लोगों के शरीर में इसका स्तर कम होता है, उनमें स्लीप डिसऑर्डर और कम नींद की समस्या ज्यादा देखी गई है.
इस बात का रखें ध्यान
इसका एक और पहलू यह है कि विटामिन D एक फैट-सोल्युबल विटामिन है, यानी यह शरीर में बेहतर तरीके से तब एब्जॉर्ब होता है जब इसे फैट वाली चीजों के साथ लिया जाए. इसलिए इसे नाश्ते या ऐसे भोजन के साथ लेना बेहतर माना जाता है, जिसमें हेल्दी फैट मौजूद हो. &amp;nbsp;इसे दिन के किसी भी समय लिया जा सकता है, लेकिन अगर रात में लेने से नींद पर असर महसूस हो, तो इसे दिन में लेना बेहतर रहेगा. सबसे जरूरी बात यह है कि इसे नियमित रूप से लिया जाए, क्योंकि सही स्तर बनाए रखना ही इसके असली फायदे देता है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Varuthini Ekadashi 2026: वैशाख मास की पहली एकादशी पर करें ये दान, मिलेगा 10 हजार साल की तपस्या का फल!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/varuthini-ekadashi-2026-वैशाख-मास-की-पहली-एकादशी-पर-करें-ये-दान-मिलेगा-10-हजार-साल-की-तपस्या-का-फल</link>
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        <description><![CDATA[ Varuthini Ekadashi 2026 Daan: वैशाख मास की पहली एकादशी को वरूथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. यह एकादशी वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को होती है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, वरूथिनी एकादशी का व्रत और पूजा करने से पाप, कष्ट, रोग और डर से मुक्ति मिलती है.
वरूथिनी एकादशी के दिन विष्णु जी की उपासना करने से 10 हजार साल तपस्या करने के समान पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. मृत्यु के बाद व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है. इस साल वरूथिनी एकादशी पर 2 खास शुभ योग भी बन रहे हैं.&amp;nbsp;
April Ekadashi 2026: अप्रैल में एकादशी कब-कब? वरूथिनी और मोहिनी एकादशी की डेट जानें
वैशाख मास की पहली एकादशी कब है?
इस साल वरूथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इस महीने किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है.&amp;nbsp;
पद्म पुराण के अनुसार- &quot;मासानां चैव सर्वेषां वैशाखः परमः स्मृतः। पुण्येनानेन तुल्यं हि नास्ति किञ्चित् सुरेश्वर।।&quot;
अर्थात सभी महीनों में वैशाख का महीना सर्वोत्तम माना गया है. इस मास में किया गया पुण्य अन्य किसी मास के पुण्य से कई गुना बढ़कर मिलता है. इस महीने में खास प्रकार के दान करने से व्यक्ति समस्त पापों से मुक्त हो जाता है.&amp;nbsp;
जल दान
वैशाख मास में जल का दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है. स्कंद पुराण में कहा गया है कि, वैशाखें दत्तं जलं शीतलं, स्वर्गदं भवति न संशय: कहने का मतलब, प्यासे को जल पिलाने या जल से भरा मटका दान करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं. जल दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है.
सत्तू का दान
वैशाख में ठंडी और सुपाच्य चीजों का दान करना शुभ माना जाता है. सत्तू इसमें सबसे सर्वोत्तम माना जाता है. सत्तू का दान करने से सेहत में सुधार होने के साथ समृद्धि बनी रहती है.&amp;nbsp;
वस्त्र दान
गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों को हल्के और सफेद कपड़ा दान करना काफी पुण्यदायक माना जाता है. इससे पापों का अंत होता है. साथ ही मानसिक शांति की प्राप्ति के साथ अग्नि और सूर्य दोष शांत होता है.&amp;nbsp;
छाता और चप्पल का दान
तपते सूरज की गर्मी से बचाव के लिए छाता, चप्पल या टोपी का दान करना काफी फलदायी माना जाता है. यह दान करने से व्यक्ति को दीर्घायु, प्रतिष्ठा और गर्मी से राहत मिलती है. इसके साथ ही राहु-केतु दोष भी शांत होता है.&amp;nbsp;
गुड़ और चीनी का दान
वैशाख मास में खासतौर पर मीठा जल, शरबत, या गुड़ देना शुभ माना जाता है. इससे वाणी मे मधुरता आती है, साथ ही पारिवारिक जीवन सुखद बनता है और शुक्र व बुध ग्रह की कृपा प्राप्त होती है.&amp;nbsp;
फल और बेल का दान
वैशाख माह के दौरान बेल का दान करना शुभ माना जाता है. इससे रोगों से मुक्ति मिलने के साथ भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.
Vikat Sankashti Chaturthi 2026: अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 13:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Varuthini, Ekadashi, 2026:, वैशाख, मास, की, पहली, एकादशी, पर, करें, ये, दान, मिलेगा, हजार, साल, की, तपस्या, का, फल</media:keywords>
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        <title>Aaj Ka Panchang 2 April 2026: हनुमान जन्मोत्सव पर ध्रुव योग का अद्भुत संगम, जानें आज का शुभ चौघड़िया और राहुकाल</title>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 2 अप्रैल 2026: 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जंयती और चैत्र पूर्णिमा दोनों है. आज गुरुवार विष्णु जी का दिन है. सुखी वैवाहिक जीवन, उच्च शिक्षा प्राप्ति और कार्यों में सफलता पाने के लिए गुरुवार को श्रीहरि, राधा-कृष्ण की विशेष पूजा करनी चाहिए.&amp;nbsp;
आज का व्रत
हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा व्रत है. चैत्र पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र जल से स्नान करना चाहिए और विष्णु जी का जल, पंचामृत से अभिषेक करें. हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली को चोला चढ़ाएं और घर में सुंदरकांड का पाठ करें. मान्यता है जहां हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ होता है वहां बजरंगबली स्वंय मौजूद रहते हैं भक्तें के कष्ट हर लेते हैं.&amp;nbsp;
2 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 2 April 2026)



तिथि

पूर्णिमा (1 अप्रैल 2026, सुबह 7.06 - 2 अप्रैल 2026, सुबह 7.41)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
हस्त


योग
ध्रुव


सूर्योदय 
सुबह 6.10


सूर्यास्त
शाम 6.39


चंद्रोदय
रात 7.07


चंद्रोस्त
अस्त नहीं


चंद्र राशि
कन्या




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.10 - सुबह 7.44


लाभ
सुबह 10.51 - दोपहर 1.59


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 5.06 - रात 89.32




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.59 - दोपहर 3.32


यमगण्ड काल
सुबह 6.10 - सुबह 7.44


गुलिक काल
सुबह 9.18 - सुबह 10.51


विडाल योग
सुबह 6.11 - शाम 4.17


आडल योग
सुबह 6.10 - शाम 5.38




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 2 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
कन्या


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



2 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: आज धैर्य से काम लें, जल्दबाजी से बचें और पारिवारिक मतभेद बातचीत से सुलझाएं.
वृषभ: भावनाओं पर नियंत्रण रखें और पैसों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें.
मिथुन: ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ नए अवसरों और संपर्कों का लाभ उठाएं.
कर्क: भावनात्मक संतुलन बनाए रखें, पुराने काम पूरे करने से राहत मिलेगी.
सिंह: आत्मविश्वास से आगे बढ़ें, सफलता और सराहना मिलने के योग हैं.
कन्या: वित्तीय मामलों में सावधानी रखें और काम को समय पर पूरा करें.
तुला: संतुलन और शांति बनाए रखें, बातचीत से समस्याओं का हल मिलेगा.
वृश्चिक: गंभीर सोच के साथ निर्णय लें, पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है.
धनु: उत्साह के साथ नए काम शुरू करें, सफलता के अच्छे संकेत हैं.
मकर: संतुलन बनाकर चलें और पुराने कार्यों को प्राथमिकता दें.
कुंभ: नए विचारों पर काम करें, योजनाएं सफलता की ओर ले जाएंगी.
मीन: नए अवसरों का स्वागत करें, सकारात्मक सोच से दिन बेहतर बनेगा.

आज का उपाय&amp;nbsp;
घर में सत्यनारायण की कथा, शाम को तुलसी के पास घी का दीपक लगाकर श्रीहरि का नाम जपें. मान्यता है इससे मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है. 
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
गुरुवार के दिन पीला रंग शुभ माना जाता है. पूजा में विष्णु जी को पीले रंग के फूल अर्पित करें. हनुमान जी को हलवे का भोग लगाएं.&amp;nbsp;
Vikat Sankashti Chaturthi 2026: अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 01:30:15 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, हनुमान, जन्मोत्सव, पर, ध्रुव, योग, का, अद्भुत, संगम, जानें, आज, का, शुभ, चौघड़िया, और, राहुकाल</media:keywords>
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        <title>Benefits of Nature Walk: 20 मिनट नेचर में बिताएं अपना दिन, पाएं बेहतर हेल्थ और मेंटल रिलेक्स, जानें इसके फायदे</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/benefits-of-nature-walk-20-मिनट-नेचर-में-बिताएं-अपना-दिन-पाएं-बेहतर-हेल्थ-और-मेंटल-रिलेक्स-जानें-इसके-फायदे</link>
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        <description><![CDATA[ Benefits of Nature Walk : आजकल की बिजी और स्ट्रेस से भरी लाइफ में हर किसी को रिलैक्स होने और अपनी सेहत का ख्याल रखने की जरूरत है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके लिए आपको जिम में घंटों पसीना बहाने या महंगे योग रिट्रीट्स की जरूरत नहीं है, सिर्फ 20 मिनट नेचर में बिताना चाहे वो आपके घर के पास का पार्क हो या सड़क किनारे कुछ हरे पेड़ आपकी सेहत और मन दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि हर दिन 20 मिनट नेचर में बिताने के कितने फायदे हैं.&amp;nbsp;
हर दिन 20 मिनट नेचर में बिताने के कितने फायदे हैं?
1. आप बिना सोचे ही रिलैक्स हो जाते हैं - जब आप हरे पेड़, फूल, या पत्तियों की सरसराहट देखते हैं, तो आपका ऑटोमेटिक नर्वस सिस्टम तुरंत एक्टिव हो जाता है. ये वह सिस्टम है जो हमारे शरीर के कई कामों को कंट्रोल करता है जैसे दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और सांस. जब आप नेचर में होते हैं, तो ब्लड प्रेशर कम होता है, हार्ट रेट धीरे हो जाता है, और आपका शरीर शांति की स्थिति में चला जाता है. &amp;nbsp;एक ब्रिटेन की स्टडी में यह पाया गया कि जो लोग हफ्ते में कम से कम 120 मिनट हरे-भरे इलाके में बिताते हैं, वे अपने स्वास्थ्य और मानसिक स्ट्रेस की रिपोर्ट ज्यादा पॉजिटिव देते हैं. इसी कारण कुछ जगहों पर ग्रीन सोशल प्रिस्क्राइबिंग लागू की जा रही है.डॉक्टर मरीजों को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नेचर के संपर्क में आने की सलाह देते हैं.&amp;nbsp;
2. आपके हार्मोन खुद रिबूट होते हैं - तनाव से लड़ने वाले हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालिन आपके शरीर को सतर्क कर देते हैं. नेचर में समय बिताने से ये हार्मोन कम हो जाते हैं. जापान में हुई एक स्टडी में पाया गया कि जो लोग हिनोकी &amp;nbsp;के तेल की खुशबू सांस के जरिए लेते हैं, उनके एड्रेनालिन के स्तर में कमी और नैचुरल किलर सेल्स की संख्या बढ़ जाती है. ये किलर सेल्स हमारे शरीर में वायरस और बीमारियों से लड़ते हैं. &amp;nbsp; 3 दिन का नेचर वीकेंड आपके इम्यून सिस्टम को इतना स्ट्रॉन्ग कर सकता है कि एक महीने बाद भी यह सामान्य स्तर से 24 प्रतिशत ज्यादा एक्टिव रहता है. छोटे समय के नेचर एक्सपोजर भी हार्मोन बैलेंस में मदद कर सकते हैं और मानसिक तनाव कम कर सकते हैं.&amp;nbsp;
3. नेचर स्मेल भी होती है फायदेमंद - हम अक्सर सिर्फ देखना और सुनना ही सोचते हैं, लेकिन सूंघने की क्षमता भी नेचर से रिलैक्स होने में बेहद अहम है. पेड़ और मिट्टी की खुशबू में ऐसे ऑर्गेनिक कंपाउंड्स होते हैं, जो सांस के साथ आपके ब्लडस्ट्रीम में पहुंचते हैं. जैसे पाइन की खुशबू सिर्फ 90 सेकंड में आपको शांत कर सकती है और यह असर लगभग 10 मिनट तक रहता है. बच्चों पर हुई स्टडी में यह भी देखा गया कि जो बच्चे किसी विशेष स्मेल को याद नहीं रखते, वे भी कैल्मिंग खुशबू से तुरंत शांत हो जाते हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Work From Home Problems: डाइनिंग टेबल या सोफे पर करते हैं ऑफिस का काम तो हो जाएं सावधान, जल्दी बदल लें WFH की यह आदत
4. नेचर आपके गट के लिए भी फायदेमंद है - नेचर में समय बिताने से सिर्फ दिमाग शांत नहीं होता, बल्कि आपकी माइक्रोबायोम हेल्थ भी बेहतर होती है. मिट्टी और पौधों में मौजूद गुड बैक्टीरिया आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और आपके इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग करते हैं. एक अध्ययन में पाया गया कि ये बैक्टीरिया मानसिक स्वास्थ्य और मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. बच्चों को जंगल में खेलते हुए मिट्टी से संपर्क कराने से उनका इम्यून सिस्टम एक्टिव और मजबूत बनता है.
5. नेचर अपने घर - &amp;nbsp;अगर आप रोजाना जंगल या पार्क नहीं जा सकते, तो चिंता की कोई बात नहीं है. छोटे-छोटे तरीकों से भी नेचर का फायदा घर पर लिया जा सकता है. जैसे घर में सफेद या पीले रंग के फूल रखें. ये ब्रेन को शांत करने में मदद करते हैं. पाइन या हिनोकी की एसेंशियल ऑयल्स का डिफ्यूजर लगाएं. जंगल या हरे-भरे सीन की तस्वीर देखें . यह भी आपके ब्रेन वेव को रिलैक्स करता है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 01:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Benefits, Nature, Walk:, मिनट, नेचर, में, बिताएं, अपना, दिन, पाएं, बेहतर, हेल्थ, और, मेंटल, रिलेक्स, जानें, इसके, फायदे</media:keywords>
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        <title>Hanuman Jayanti 2026 Wishes: संस्कृत में दें हनुमान जयंती की शुभकामनाएं कहें&amp; हनुमंत जन्मोत्सवस्य शुभाशयाः।</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hanuman-jayanti-2026-wishes-संस्कृत-में-दें-हनुमान-जयंती-की-शुभकामनाएं-कहें-हनुमंत-जन्मोत्सवस्य-शुभाशयाः</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/hanuman-jayanti-2026-wishes-संस्कृत-में-दें-हनुमान-जयंती-की-शुभकामनाएं-कहें-हनुमंत-जन्मोत्सवस्य-शुभाशयाः</guid>
        <description><![CDATA[ Hanuman Jayanti 2026 Wishes Messages in Sanskrit: चैत्र मास की पूर्णिमा को भगवान हनुमान की जयंती देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है. इस वर्ष हनुमान जयंती गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को पड़ रही है. इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किए जाते हैं. भक्तगण व्रत रखकर बजरंगबली की आराधना करते हैं. बजरंबली की पूजा सेशक्ति, साहस और भय व संकटों से मुक्ति मिलती है.
हिंदू धर्म में रामभक्त हनुमान को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार और कलयुग का देवता कहा जाता है. हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर पूजा-व्रत के साथ ही लोग एक दूसरे को इसकी शुभकामनाएं भी देते हैं. इस पावन अवसर पर आप संस्कृत में भी मंगलकामनाएं भेज सकते हैं, जिससे इस पर्व की आध्यात्मिक और अधिक बढ़ जाएगी.
क्यों खास है हनुमान जयंती
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है. वे भगवान राम के परम भक्त हैं. साथ ही भगवान हनुमान शक्ति, बुद्धि, साहस और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं. मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति को आत्मबल प्राप्त होता है.
हनुमान जयंती के दिन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, हवन और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है. कई स्थानों पर शोभायात्राएं और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं.
संस्कृत में हनुमान जयंती की शुभकामनाएं
हनुमान जयंती के अवसर पर आप अपने परिजनों और प्रियजनों को संस्कृत में शुभकामनाएं भेज सकते हैं. संस्कृत में शुभकामनाएं भेजने के लिए यहां देखिए बेहतरीन संदेश, मैसेज और इमेज (Happy&amp;nbsp;Hanuman Jayanti 2026 Sanskrit Wishes, Image and Quotes. Hanuman Jayanti Shubhkamna in Sanskri)-
बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता।अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्।।

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहंदनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशंरघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।

भगवान् हनुमानः यस्य प्रतीकं भवति तया आनन्देन आध्यात्मिकवृद्ध्या च भवतः जीवनं पूर्णं भवतु।

अस्मिन् हनुमत् जयन्ती पर बलं साहसं च कामना।भगवान् हनुमानः सुखं शान्तिं च ददातु।
आंजनेय स्वामी सतत् भजन निरता आत्मा राम मुनी सीतापति दूताश्री हनुमंत जन्मोत्सवस्य शुभाशयाः।

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,&amp;nbsp; दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्&amp;zwnj; ।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

बालार्कायुततेजसं त्रिभुवनप्रक्षोभकं सुन्दरं सुग्रीवाद्यखिलप्लवङ्गनिकरैराराधितं साञ्जलिम्।नादेनैव समस्तराक्षसगणान् सन्त्रासयन्तं प्रभुं श्रीमद्रामपदाम्बुजस्मृतिरतं ध्यायामि वातात्मजम्॥
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुन सुधारि।बरनऊं रघुवर बिम जसु, जो दायकु फल चारि।।

हनुमानजयन्ती भक्त्या प्रार्थनापूर्वक आचरामः।तस्य अचञ्चला श्रद्धया अस्माकं जीवनं स्पृशतु।

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप।।
&amp;nbsp;ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि।तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।बजरंगबली आपको शक्ति, बुद्धि और विद्या प्रदान करें।शुभ हनुमान जयंती 2026
श्री हनुमते नमः। हनुमान भवतः जीवनात् सर्वविघ्नान् निवारयतु।
ये भी पढ़ें: Purnima Chandra Grahan 2026: चैत्र पूर्णिमा पर क्यों हो रही चंद्र ग्रहण की बात, जानें भ्रम की वजह!Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 01:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Hanuman, Jayanti, 2026, Wishes:, संस्कृत, में, दें, हनुमान, जयंती, की, शुभकामनाएं, कहें-, हनुमंत, जन्मोत्सवस्य, शुभाशयाः।</media:keywords>
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        <title>Fatty Liver Without Alcohol: बिना शराब छुए भी बीमार हो सकता है आपका लिवर, जानें क्या है &amp;apos;साइलेंट किलर&amp;apos; फैटी लिवर</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/fatty-liver-without-alcohol-बिना-शराब-छुए-भी-बीमार-हो-सकता-है-आपका-लिवर-जानें-क्या-है-साइलेंट-किलर-फैटी-लिवर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/fatty-liver-without-alcohol-बिना-शराब-छुए-भी-बीमार-हो-सकता-है-आपका-लिवर-जानें-क्या-है-साइलेंट-किलर-फैटी-लिवर</guid>
        <description><![CDATA[ Why Fatty Liver Happens Without Alcohol: सिर्फ हेल्दी दिखने भर से लिवर स्वस्थ रहेगा, ऐसा मानना अब सही नहीं रह गया है. आजकल डॉक्टर ऐसे लोगों में भी फैटी लिवर की समस्या देख रहे हैं जो न शराब पीते हैं, न धूम्रपान करते हैं और घर का खाना ही खाते हैं. यह स्थिति इसलिए उलझन भरी लगती है क्योंकि बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर पर दबाव बढ़ता रहता है. असल वजह हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें हैं, जिन पर अक्सर ध्यान ही नहीं जाता.&amp;nbsp;
लाइफस्टाइल से जुड़ी है बीमारी
डॉक्टरों के मुताबिक, नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज तेजी से बढ़ने वाली लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी बन चुकी है. यह तब होता है जब बिना शराब के सेवन के भी लिवर में फैट जमा होने लगता है. साइंस डायरेक्ट में प्रकाशित एक बड़ी स्टडी बताती है कि शहरी भारत में यह समस्या अब आम होती जा रही है और इसका सीधा संबंध हमारी बदलती लाइफस्टाइल से है.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Benefits Of Drinking Water: चाय-कॉफी से नहीं मिटेगी शरीर की प्यास, डिहाइड्रेशन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉ. आम्रपाली पाटिल ने TOI को बताया कि &quot;यह एक आम गलतफहमी है कि लिवर की बीमारी सिर्फ शराब से होती है। कई नॉन-अल्कोहोलिक कारण भी लिवर के कामकाज को प्रभावित करते हैं.&quot; दरअसल, जिस नॉर्मल डाइट को हम सही मानते हैं, वह अब पहले जैसी नहीं रही. रिफाइंड आटा, छिपी हुई शुगर, पैकेज्ड स्नैक्स और बार-बार बाहर का खाना मंगाना धीरे-धीरे लिवर में फैट जमा करने लगता है. लिवर का काम शरीर में जाने वाली हर चीज को प्रोसेस करना है, लेकिन जब यह ओवरलोड हो जाता है तो फैट जमा होने लगता है.
इसके अलावा, कम चलना-फिरना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना और नींद की कमी मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन &amp;nbsp;के अनुसार, शारीरिक एक्टिविटी न करने की वजह से &amp;nbsp;मेटाबॉलिक बीमारियों का बड़ा कारण है. कुछ कारण ऐसे भी हैं जिन पर लोग ध्यान नहीं देते, वह है जैसे लंबे समय तक दवाइयों का सेवन, क्रैश डाइटिंग, अनियमित खाने की आदतें और अचानक तेजी से वजन कम करना. डॉ. पाटिल के अनुसार, &quot;ये सभी चीजें लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं और समय के साथ समस्या को बढ़ा सकती हैं.&quot;
शुरूआत में दिखाई नहीं देते हैं लक्षण
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. हल्की थकान, पेट फूलना या सामान्य असहजता को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. डॉ. पाटिल बताती हैं कि शुरुआती चरण में मरीज बिना किसी खास लक्षण के भी हो सकते हैं, और जब तक समस्या समझ आती है, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. इससे बचने के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है, बल्कि छोटे और लगातार किए जाने वाले सुधार ज्यादा असरदार होते हैं. प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा मीठे पेय, देर रात खाना और बिना जरूरत के सप्लीमेंट्स लेने से बचना चाहिए. लिवर की सेहत के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, संतुलित आहार और अच्छी नींद बेहद जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 01:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Fatty, Liver, Without, Alcohol:, बिना, शराब, छुए, भी, बीमार, हो, सकता, है, आपका, लिवर, जानें, क्या, है, साइलेंट, किलर, फैटी, लिवर</media:keywords>
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        <title>Weight loss habits: वजन घटाने के लिए अपनाएं ये 5 बोरिंग आदतें, एक्सपर्ट बोले&amp;यही देती हैं असली रिजल्ट</title>
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        <description><![CDATA[ 
Weight loss habits: आज के समय में तेजी से वजन घटाने के तरीके सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड करते हैं. लेकिन सच यह है कि ऐसे ज्यादातर तरीके लंबे समय तक काम नहीं करते हैं. वजन कम करना, जितना सुनने में आसान लगता है उतना ही इसे लगातार बनाए रखना मुश्किल होता है. फिटनेस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चमकदार और तेजी से असर दिखाने वाले तरीकों के बजाय रोजाना की नार्मल आदतें ही वजन घटाने के काम में आती है. एक्सपर्ट्स भी बताते हैं कि वजन घटाने का असली खेल छोटे-छोटे बदलाव में छिपा होता है, जिन्हें नियमित रूप से अपनाया जाना चाहिए. यह आदतें भले ही बोरिंग लगे, लेकिन इन्हीं से शरीर में स्थाई सुधार आता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि वजन घटाने के लिए आपको कौन सी पांच बोरिंग आदतें अपनानी चाहिए, जो भले ही देखने में बोरिंग लगे. लेकिन वहीं आदतें असली रिजल्ट देती है. ये भी पढ़ें-Benefits Of Vigorous Exercise: कसरत ऐसी करो कि फूलने लगे सांस, इससे 60% कम हो जाता है मौत का खतरा!
सही समय पर पर्याप्त पानी पीना जरूरी वजन कंट्रोल करने में पानी की अहम भूमिका होती है. यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और पाचन को सही रखता है. कई लोग खाने के दौरान ज्यादा पानी पी लेते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया थोड़ी प्रभावित हो सकती है. ऐसे में बेहतर है कि दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पिया जाए और खाने से करीब 30 मिनट पहले एक गिलास पानी पी लिया जाए. इससे भूख और प्यास के बीच फर्क समझने में भी मदद मिलती है. प्लेट में प्रोटीन और फाइबर का संतुलन रखें डाइट में केवल चीज हटाने पर ध्यान देने के बजाय, क्या शामिल करना है इस पर फोकस करना चाहिए. हर मील में प्रोटीन और फाइबर का संतुलन रखने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. प्रोटीन भूख को कंट्रोल करता है, जबकि फाइबर पाचन को धीमा करके शुगर लेवल को संतुलित बनाए रखता है. इससे एलर्जी बनी रहती है और बार-बार खाने की इच्छा कम होती है. धीरे-धीरे और अच्छे से चबाकर खाएं खाने की शुरुआत मुंह से होती है, इसलिए हर निवाले को अच्छी तरह चबाना जरूरी है. वहीं शरीर को यह समझने में करीब 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर चुका है. ऐसे में जल्दी-जल्दी खाने से जरूरत से ज्यादा खाना खाया जा सकता है. वहीं हर कोर को अच्छे से चबाना और बीच-बीच में थोड़ा रुकने से शरीर के अनुसार खान की मात्रा संतुलित रहती है. खाने के बाद 15 मिनट की वॉक भी जरूरी लंबे वर्कआउट के बजाय रोजाना हल्की एक्टिविटी भी असरदार होती है. खाना खाने के बाद करीब 15 मिनट टहलना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है. इससे शरीर ऊर्जा को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करता है और एक्स्ट्रा कैलोरी जमा नहीं होती है. अगर बाहर टहलना पॉसिबल न हो तो घर में ही चलना या सीढियां चढ़ना भी फायदेमंद हो सकता है. खाने का समय रखें तय हर दिन लगभग एक ही समय पर खाना खाने की आदत शरीर के अंदर की घड़ी को संतुलित करती है. इससे भूख अचानक नहीं बढ़ती और पाचन क्रिया बेहतर रहती है. खासतौर पर रात का खाना सोने से काफी पहले कर लेना चाहिए, ताकि शरीर को आराम और रिपेयर के लिए पर्याप्त समय मिल सके.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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        <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 01:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Weight, loss, habits:, वजन, घटाने, के, लिए, अपनाएं, ये, बोरिंग, आदतें, एक्सपर्ट, बोले-यही, देती, हैं, असली, रिजल्ट</media:keywords>
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    <item>
        <title>इन पांच तरीकों से आप बन जाएंगे जीनियस पेरेंट्स, बच्चों के बिगड़ने का सवाल ही नहीं</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/इन-पांच-तरीकों-से-आप-बन-जाएंगे-जीनियस-पेरेंट्स-बच्चों-के-बिगड़ने-का-सवाल-ही-नहीं</link>
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        <description><![CDATA[ इन पांच तरीकों से आप बन जाएंगे जीनियस पेरेंट्स, बच्चों के बिगड़ने का सवाल ही नहीं ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>इन, पांच, तरीकों, से, आप, बन, जाएंगे, जीनियस, पेरेंट्स, बच्चों, के, बिगड़ने, का, सवाल, ही, नहीं</media:keywords>
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        <title>Panchang 1 April 2026: चैत्र पूर्णिमा आज भी, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय, पूरा पंचांग देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 1 अप्रैल 2026: 1 अप्रैल 2026 को चैत्र पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के बाद शुरू हो रही है इसलिए व्रत और स्नान दान अगले&amp;nbsp; दिन 2 अप्रैल को रखा किया जाएगा लेकिन पूर्णिमा तिथि में जो लोग चंद्रमा की पूजा करते हैं उनके लिए आज शुभ दिन है. पूर्णिमा के दिन रात्रि काल में मां लक्ष्मी की आराधना करने पर आर्थिक रूप से लाभ मिलता है साथ ही इस दिन तुलसी पूजन घर में दुख, दरिद्रता का नाश करता है.&amp;nbsp;
1 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 1 April 2026)



तिथि

चतुर्दशी (31 मार्च 2026, सुबह 6.55 - 1 अप्रैल 2026, सुबह 7.06, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू)



वार
बुधवार


नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी


योग
वृद्धि, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
शाम 6.11


चंद्रोस्त
सुबह 5.57, 2 अप्रैल


चंद्र राशि
कन्या




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.11 - सुबह 9.18


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 8.05 - देर रात 12.25




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 12.25 - दोपहर 1.59


यमगण्ड काल
सुबह 7.45 - सुबह 9.18


गुलिक काल
सुबह 10.52 -दोपहर 12.25


विडाल योग
सुबह 6.11 - शाम 4.17


आडल योग
शाम 4.17 - सुबह 6.10, 2 अप्रैल


भद्रा काल
सुबह 7.06 - शाम 7.20




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 1 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
कन्या


मंगल
कुंभ


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



1 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: आज नई उम्मीदें जागेंगी, कार्यक्षेत्र में सराहना मिलेगी और संयम से लिए फैसले लाभ देंगे.
वृषभ: दिन संतुलित रहेगा, मेहनत का फल मिलेगा और रिश्तों में विश्वास मजबूत होगा.
मिथुन: उत्साह से भरा दिन रहेगा, नए विचारों से सफलता और संबंधों में सुधार होगा.
कर्क: जिम्मेदारियों के साथ दिन बीतेगा, धैर्य से काम लेने पर पारिवारिक और करियर में संतुलन बनेगा.
सिंह: आत्मविश्वास बढ़ेगा, करियर में सहयोग मिलेगा और रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी.
कन्या: सोच-समझकर काम करने से सफलता मिलेगी, रिश्तों में संवाद बनाए रखना जरूरी होगा.
तुला: संबंधों में संतुलन और सहयोग मिलेगा, छोटे प्रयासों से दिन सकारात्मक बनेगा.
वृश्चिक: समझदारी से फैसले लेने पर सफलता मिलेगी और रिश्तों में विश्वास बढ़ेगा.
धनु: नए अनुभव और अवसर मिलेंगे, मेहनत से करियर और रिश्तों में सुधार होगा.
मकर: जिम्मेदारी और मेहनत से दिन सफल रहेगा, करियर में सराहना और स्थिरता मिलेगी.
कुंभ: रचनात्मकता से सफलता मिलेगी, नए अवसर और संबंधों में खुलापन आएगा.
मीन: सहयोग और संवेदनशीलता से दिन बेहतर बनेगा, रिश्तों और काम में संतुलन रहेगा.

FAQs: 1 अप्रैल 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




चैत्र पूर्णिमा की शाम को तुलसी के पौधे दीपक लगाकर विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें. इसमें श्री हरि और मां लक्ष्मी का वास होता है. घर में आर्थिक स्थिरता आती है.




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन वृद्धि, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहा है.
Vikat Sankashti Chaturthi 2026: अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 09:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Panchang, April, 2026:, चैत्र, पूर्णिमा, आज, भी, शुभ, मुहूर्त, चंद्रोदय, समय, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>April Fools Day 2026: अप्रैल फूल डे &amp;apos;मजाक&amp;apos; नहीं करें ये अच्छे काम, कमाएं पुण्य</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/april-fools-day-2026-अप्रैल-फूल-डे-मजाक-नहीं-करें-ये-अच्छे-काम-कमाएं-पुण्य</link>
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        <description><![CDATA[ April Fools Day 2026: दुनियाभर में 1 अप्रैल के दिन को अप्रैल फूल डे के रूप में मनाया जाता है. इस दिन लोग एक दूसरे को बेवकूफ बनाते हैं. अप्रैल फूल डे का मतलब होता है, हल्की-फुल्की हंसी-मजाक के माध्यम से मुस्कुराहट बांटना और तनाव को दूर कर हंसना-खिलखिलाना.
लेकिन कई बार लोग हंसी-मजाक के नाम पर ऐसे मजाक या प्रैंक करते हैं, जो मानसिक या शारीरिक क्षति का कारण भी बन जाती है. इसलिए अप्रैल फूल डे पर प्रैंक करने से पहले यह जरूर निश्चित कर लें कि, इससे किसी को भी किसी तरह का नुकसान न पहुंचे.
हमारी भारतीय संस्कृति में भी किसी को धोखा देना या अपमानित करना उचित नहीं माना जाता है. इसलिए धर्मग्रंथों में सत्य, करुणा और सद्भावना की बात कही गई है और इसे ही सबसे बड़ा धर्म बताया गया है. इसलिए आप भले ही 1 अप्रैल को हल्के-फुलके मजाक के तौर पर अप्रैल फूल डे को इंजॉय करें. लेकिन अगर आप वाकई किसी की मुस्कुराहट की वजह बनना चाहते हैं और पुण्य पाना चाहते हैं तो आज के दिन कुछ अच्छे कार्य भी कर सकते हैं, जिससे आपका दिन सार्थक बन सकता है.
किसी को खुश करने की कोशिश करें- निदा फ़ाज़ली का शेर है-&amp;lsquo;घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए&amp;rsquo;. अप्रैल फूल डे के दिन भी यदि आप किसी को उपहार देकर, शुभ संदेश भेजकर या किसी पुराने मित्र से संपर्क कर उन्हें खुश करते हैं, तो यह भी एक सकारात्मक कार्य माना जाता है. इससे रिश्तों में मधुरता बढ़ती है.
किसी का दिल न दुखाएं- मजाक की आड़ में ऐसा कोई काम न करें, जिससे रिश्तों मे दरार आए या किसी का दिल दुखे. ऐसा प्रैंक बिल्कुल न करें जिससे सामने वाले के मन में असुरक्षा का भाव पैदा हो. धर्मशास्त्रों में भी कहा गया है कि मधुर वाणी सबसे बड़ा दान है. इसलिए इस दिन किसी का मजाक उड़ाने या अपमान करने के बजाय मीठे शब्द बोलें और लोगों के चेहरे पर सच्ची मुस्कान लाने की कोशिश करें.
जरूरतमंदों की मदद करें- 1 अप्रैल यानी अप्रैल फूल डे पर किसी गरीब, जरूरतमंद या असहाय व्यक्ति की मदद करना बहुत ही पुण्य का काम रहेगा. आप किसी को भोजन करा सकते हैं, कपड़े दान कर सकते हैं, किसी जरूरतमंद की छोटी-सी मदद भी कर सकते हैं, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर सकते हैं. धर्म में दान और सेवा को सबसे श्रेष्ठ कर्म बताया गया है.
डिजिटल जागरूकता फैलाएं- डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी कई तरह प्रैंक वीडियो वायरल होते हैं. लोग लाइक्स और व्यूज के चक्कर में ऐसे वीडियो को बढ़ावा देते हैं. वहीं अप्रैल फूल के नाम पर लोग किसी की दुर्घटना, लॉटरी या फ्री गिफ्ट आदि लगने की भी झूठी सूचना देकर फूल बनाने की कोशिश करते हैं. लेकिन ऐसा करने से बचें. आप अपने घर के बड़े या कम जानकार लोगों को ऑनलाइन फ्रॉड या झूठी खबरों से बचने के तरीके सिखाएं. सामाजिक सेवा भी सबसे बड़ा पुण्य है.
ये भी पढ़ें: April 2026 Festival Live: चैत्र पूर्णिमा, हनुमान जयंती से अक्षत तृतीया तक, जानें अप्रैल के व्रत-त्योहार का पूरा अपडेटDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 09:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>April, Fools, Day, 2026:, अप्रैल, फूल, डे, मजाक, नहीं, करें, ये, अच्छे, काम, कमाएं, पुण्य</media:keywords>
    </item>
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        <title>Water fasting Trend: डिटॉक्स के नाम पर वॉटर फास्टिंग खतरनाक, एक्सपर्ट बोले&amp; DIY करना हो सकता है नुकसानदायक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/water-fasting-trend-डिटॉक्स-के-नाम-पर-वॉटर-फास्टिंग-खतरनाक-एक्सपर्ट-बोले-diy-करना-हो-सकता-है-नुकसानदायक</link>
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        <description><![CDATA[ Water fasting Trend: डिटॉक्स के नाम पर वॉटर फास्टिंग खतरनाक, एक्सपर्ट बोले- DIY करना हो सकता है नुकसानदायक ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 09:30:06 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Water, fasting, Trend:, डिटॉक्स, के, नाम, पर, वॉटर, फास्टिंग, खतरनाक, एक्सपर्ट, बोले-, DIY, करना, हो, सकता, है, नुकसानदायक</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Hanuman Jayanti 2026 LIVE: हनुमान जयंती आज या कल, शुभ मुहूर्त, बजरंगबली की पूजा विधि, नियम जानें</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/hanuman-jayanti-2026-live-हनुमान-जयंती-आज-या-कल-शुभ-मुहूर्त-बजरंगबली-की-पूजा-विधि-नियम-जानें</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/hanuman-jayanti-2026-live-हनुमान-जयंती-आज-या-कल-शुभ-मुहूर्त-बजरंगबली-की-पूजा-विधि-नियम-जानें</guid>
        <description><![CDATA[ Hanuman Jayanti 2026 LIVE: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का प्राकट्य हुआ था. 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. बल, बुद्धि और विद्या के सागर माने जाने वाले हनुमान जी की पूजा अधूरी इच्छाएं पूरी हो जाती है. हनुमान जन्मोत्सव का मुहूर्त, विधि, नियम, मंत्र, भोग सारी जानकारी यहां देखें.
हनुमान जन्मोत्सव मुहूर्त 2026
चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी और इसकी समाप्त 2 अप्रैल 2026 को सुबह 4 बजकर 41 मिनट पर होगी. हनुमान जन्मोत्सव पर हनुमान जी की पूजा सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर निशिता काल से पहले तक कभी भी की जा सकती है.
हनुमान जयंती नहीं जन्मोत्सव
इस पर्व को हनुमान जयंती कहना उचित नहीं है क्योंकि बजरंगबली चिरंजीवी हैं, मान्यता है कि &#039;जयंती&#039; नश्वर प्राणियों के लिए इस्तेमाल होती है, जबकि हनुमान जी कलियुग में भी सशरीर मौजूद हैं. पुराणों के अनुसार कलियुग में हनुमान जी ऐसे देवता हैं जो उन्हें सच्ची श्रद्धा से एक बार पुकारता है उसके समस्त कष्ट दूर करने वे स्वंय चले आते हैं.
हनुमान जन्मोत्सव का धार्मिक महत्व
पुराणों के अनुसार अष्ट सिद्धि-नव निधि के दाता हनुमान जी की पूजा&amp;nbsp; इस दिन व्रत, पूजा, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से संकटों का नाश होता है.हनुमान जी सभी बुरी और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने वाले माने जाते हैं. नुमान जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं और इनको संकटमोचन भी कहा जाता है। हनुमानजी के अंदर साहस, पराक्रम, बुद्धि और दायुलता का भंडार है.
ज्योतिष में हनुमान जी की पूजा के लाभ
ज्योतिष के अनुसार हनुमान जी की आराधना विशेष रूप से ग्रह दोषों को शांत करने में सहायक मानी जाती है. शनि और मंगल दोष से राहत: हनुमान जी की पूजा से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और मंगल से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है.
हनुमानजी भगवान राम के सबसे प्रिय और अनन्य भक्त हैं और हनुमान जी को भगवान राम के नाम का जाप बहुत प्रिय है. जो भक्त भगवान राम का दिनभर नाम लेता है और उनकी पूजा करता है हनुमान उस पर बहुत ज्यादा प्रसन्न रहते हैं. ]]></description>
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        <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 09:30:05 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Hanuman, Jayanti, 2026, LIVE:, हनुमान, जयंती, आज, या, कल, शुभ, मुहूर्त, बजरंगबली, की, पूजा, विधि, नियम, जानें</media:keywords>
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    <item>
        <title>April 2026 Festival Live: चैत्र पूर्णिमा, हनुमान जयंती से अक्षत तृतीया तक, जानें अप्रैल के व्रत&amp;त्योहार का पूरा अपडेट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/april-2026-festival-live-चैत्र-पूर्णिमा-हनुमान-जयंती-से-अक्षत-तृतीया-तक-जानें-अप्रैल-के-व्रत-त्योहार-का-पूरा-अपडेट</link>
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        <description><![CDATA[ April 2026 Festival Live Updates:&amp;nbsp;अप्रैल 2026 का महीना धार्मिक आयोजनों से भरा रहेगा. साथ ही कई ग्रहों का गोचर भी होने वाला है. ऐसे में अप्रैल शुरू होने से पहले आपको व्रत-त्योहार की तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि, ज्योतिषीय प्रभाव और देशभर के मंदिरों से जुड़ी हर बड़ी अपडेट आपको इस लाइव ब्लॉग में मिलेगी.
अप्रैल महीने में चैत्र और वैशाख महीने का खास संयोग रहेगा और इसमें पड़ने वाले व्रत-त्योहार भी काफी महत्वपूर्ण रहेंगे. इसलिए अप्रैल महीने में ना सिर्फ मंदिर-मठ बल्कि घरों में भी पूजा-पाठ के साथ भक्तिमय माहौल बना रहेगा.
महीने की शुरुआत में चैत्र पूर्णिमा के साथ होगी. इसके बाद हनुमान जयंती का उत्सव मनाया जाएगा. इसके बाद ईसाई धर्म का बड़ा पर्व ईस्टर भी मनाया जाएगा. इसके अलावा अक्षय तृतीया, पशुराम जयंती, मासिक प्रदोष व्रत, वरुथिनी और मोहिनी एकादशी, गंगा सप्तमी, सीता नवमी जैसे कई पर्व-त्योहार पड़ेंगे.
इन पर्व-त्योहार पर भक्तजन व्रत रख कर देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि व मंगल की कामना करते हैं. धार्मिक पर्वों के साथ ही ज्योतिषीय दृष्टि से भी अप्रैल का महीना खास रहेगा. इस महीने कई बड़े ग्रहों का गोचर भी होने वाला है. महीने की शुरुआत में भूमिपुत्र मंगल गोचर करेंगे. इसके बाद कतार में बुध और सूर्य का भी राशि परिवर्तन होगा. वहीं शनि अस्त से उदय होंगे.&amp;nbsp;
अप्रैल में इन व्रत-त्योहारों, पूजा मुहूर्त, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं और धार्मिक यात्रा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी की जानकारी आपको यहां लाइव ब्लॉग में मिलती रहेगी. इसके अलावा देश के प्रमुख मंदिरों जैसे अयोध्या, काशी, उज्जैन, हरिद्वार, वृंदावन और तिरुपति से जुड़ी विशेष धार्मिक गतिविधियों और आयोजनों की अपडेट भी आप यहां देख सकते है.
साथ ही ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहों की चाल का असर विभिन्न राशियों और देश-दुनिया की घटनाओं पर भी देखने को मिल सकता है. इसलिए ग्रह गोचर से जुड़े विश्लेषण, उपाय और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी जानकारी भी आप जान सकते हैं, जिससे कि धर्म, आस्था और ज्योतिष से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी से आप जुड़े रहें.
ये भी पढ़ें: Jain Mandir in Pakistan: पाकिस्तान में हैं कई जैन मंदिर, एक तो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची तक पहुंचाDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:30:40 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Testoesterone increasing fruits: रिश्ते में हो रही प्यार की कमी? ये 5 फल बॉडी में भर देंगे टेस्टोस्टेरोन</title>
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        <description><![CDATA[ बदलती लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही कोई अपनी सेहत का सही ध्यान रख पाता है, ऐसे में अगर टेस्टोस्टेरोन को मेंटेन रखने की बात करें, तो लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, टेस्टोस्टेरोन, पुरुष शरीर का एक प्रमुख सेक्स हार्मोन है, हालांकि इसे मुख्य रूप से मेल हार्मोन माना जाता है लेकिन यह महिलाओं में भी कुछ मात्रा में मौजूद होता है.
यह मुख्य रूप से पुरुषों के वृषण (testicles) और महिलाओं के अंडाशय (ovaries) में बनता है, जो उनके शारीरिक विकास में अहम भूमिका निभाता है, पुरुषों में यह शुक्राणु (sperm) उत्पादन, हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने तथा यौन इच्छा को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वहीं महिलाओं में यह ओवरी के कार्यों को बनाए रखने, सेक्स ड्राइव और यौन इच्छा को नियंत्रित करने तथा ऊर्जा स्तर को संतुलित बनाए रखने में सहायक होता है.
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आइए जानें उन 5 फलों के बारे में, जो आपकी बॉडी में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ाने में मदद कर सकते हैं
1. एवोकाडोजो एक पौष्टिक सुपरफूड है, जो बोरॉन और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, यह शरीर में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में मदद कर सकता है, बोरॉन खासतौर पर सेक्स हार्मोन के स्तर को बढ़ाने के लिए जाना जाता है, हालांकि एवोकाडो खाना सुरक्षित है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के बोरॉन सप्लीमेंट लेने से बचें.
2. जामुन और चेरी&amp;nbsp;यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो शरीर में सूजन और नुकसान से बचाते हैं, ये टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने में भी मदद कर सकते हैं, आप इन्हें सीधे खा सकते हैं या जूस बनाकर पी सकते हैं, लेकिन पैकेट वाले जूस की जगह ताजे फल ही चुनें.
3.अनारयह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, यह हार्मोन बैलेंस में मदद करता है और टेस्टोस्टेरोन लेवल को सपोर्ट कर सकता है.
4. केलाकेले में मौजूद पोषक तत्व शरीर की ऊर्जा बढ़ाने के साथ हार्मोन प्रोडक्शन में मदद करते हैं, यह वर्कआउट के बाद खाने के लिए भी एक बेहतरीन ऑप्शन है.
5.अंगूरइसमें में पाया जाने वाला रेस्वेराट्रोल शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है और टेस्टोस्टेरोन को सपोर्ट कर सकता है.
तो ये थे कुछ फल, जिन्हें अपनी डाइट में शामिल करके आप अपनी अंदरूनी ऊर्जा बढ़ा सकते हैं, इससे आपकी सेहत भी बेहतर होगी और रिश्तों में चल रही छोटी-मोटी अनबन भी धीरे-धीरे ठीक हो सकती है, ताकि आप एक खुशहाल और संतुलित जीवन जी सकें.
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:30:39 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Marriage Astrology: शादी होगी या नहीं और कब होगी, कुंडली के ये 10 संकेत खोलेगा विवाह का राज !</title>
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:30:38 +0530</pubDate>
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        <title>Protein Condom Truth: अब मार्केट में आ गया प्रोटीन कंडोम, क्या इससे सच में बढ़ जाती है परफॉर्मेंस?</title>
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        <description><![CDATA[ Does Protein Condom Really Boost Performance: फिटनेस की दुनिया में प्रोटीन का नाम अब किसी से छुपा नहीं है. मसल्स बनाने से लेकर बॉडी रिकवरी तक, हर जगह इसकी अहम भूमिका मानी जाती है. लेकिन अब प्रोटीन सिर्फ डाइट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा प्रोडक्ट सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान भी किया है और हंसा भी दिया है प्रोटीन कंडोम. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं कि क्या यह परफॉर्मेंस बढ़ा सकता है.&amp;nbsp;
क्या है मामला?
हाल ही में सोशल मीडिया पर इस अनोखे प्रोडक्ट की खूब चर्चा हो रही है. दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का पहला प्रोटीन कंडोम होगा, जो न सिर्फ सुरक्षा देगा बल्कि परफॉर्मेंस भी बेहतर करने में मदद करेगा. सुनने में यह जितना अजीब लगता है, उतना ही तेजी से यह इंटरनेट पर वायरल हो गया है. इस प्रोडक्ट को फिटनेस इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर गोरव तनेजा यानी फ्लाइंग बीस्ट से जोड़ा जा रहा है। उनकी फिटनेस ब्रांड बीस्टलाइफ ने इसे पेश करने का दावा किया है. हाल ही में एक इंस्टाग्राम पोस्ट में इस प्रोडक्ट की झलक दिखाई गई, जिसमें &quot;Protein goodness coming soon&quot; लिखा गया था. इसके बाद &quot;world&amp;rsquo;s first protein condom&quot; का टीज़र सामने आया, जिसने लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी.
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अब सवाल यह है कि आखिर यह प्रोटीन कंडोम है क्या?
&amp;nbsp;रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें L-Arginine नाम का एक अमीनो एसिड इस्तेमाल किया गया है, जो शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ाने के लिए जाना जाता है. दावा किया जा रहा है कि इससे बेहतर सर्कुलेशन होगा और परफॉर्मेंस में सुधार आ सकता है. हालांकि, इस दावे को लेकर अभी तक कोई ठोस साइंटफिक प्रमाण सामने नहीं आया है. सइस प्रोडक्ट की एक और खास बात यह बताई जा रही है कि इसे अलग-अलग फ्लेवर, चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी और वनीला में लॉन्च किया जा सकता है. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि यह वाकई मार्केट में आएगा या सिर्फ एक मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है.
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लोगों की प्रतिक्रिया
इंटरनेट पर इस खबर को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी कम दिलचस्प नहीं हैं. कुछ लोग इसे मजाक मान रहे हैं, तो कुछ इसे अप्रैल फूल का प्रैंक बता रहे हैं. वहीं, कई यूजर्स ने मजेदार कमेंट करते हुए पूछा कि &quot;ये प्री-वर्कआउट है या पोस्ट-वर्कआउट?&quot;. फिलहाल, इस प्रोडक्ट को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है. लेकिन इतना जरूर है कि इसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और एक नई बहस छेड़ दी है क्या सच में ऐसे प्रोडक्ट्स परफॉर्मेंस बढ़ा सकते हैं या यह सिर्फ मार्केटिंग का खेल है.&amp;nbsp;
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;Benefits Of Drinking Water: चाय-कॉफी से नहीं मिटेगी शरीर की प्यास, डिहाइड्रेशन से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:30:36 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kitchen Cleaning Tips: किचन का प्लेटफॉर्म रोज साफ करते हैं लेकिन नहीं जाती चिपचिप, ऐसे दूर करें तेल के दाग</title>
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        <description><![CDATA[ How To Remove Grease From Kitchen Counter: किचन का प्लेटफॉर्म रोज साफ करने के बावजूद अगर उसमें चिपचिपाहट बनी रहती है, तो समझ लीजिए कि तेल और ग्रीस की परत धीरे-धीरे जमा हो रही है. यह समस्या लगभग हर घर में देखने को मिलती है, खासकर जहां रोज खाना बनता है. लेकिन कुछ आसान तरीकों से इस जिद्दी गंदगी से छुटकारा पाया जा सकता है. चलिए आपको कुछ आसान टिप्स बताते हैं.&amp;nbsp;
गंदगी रहता है चिपचिपा
होम टिप्स के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट loftsatwildlight के अनुसार, किचन में तेल का इस्तेमाल सबसे इसका बड़ा कारण होता है. फ्राइंग, तड़का या ग्रिलिंग के दौरान तेल के छोटे-छोटे कण हवा में फैलकर प्लेटफॉर्म, दीवारों और चूल्हे पर जम जाते हैं. समय के साथ यह परत चिपचिपी हो जाती है और सामान्य सफाई से हटती नहीं. इसको हटाने का सबसे आसान तरीका है डिशवॉश लिक्विड और गर्म पानी का इस्तेमाल. एक बाउल में गर्म पानी लेकर उसमें थोड़ा सा लिक्विड डालें और कपड़े की मदद से प्लेटफॉर्म को अच्छे से पोंछें. इससे तेल जल्दी ढीला पड़ता है और आसानी से साफ हो जाता है.&amp;nbsp;
ज्यादा गंदगी होने पर क्या करें?
अगर गंदगी ज्यादा जमी हुई है, तो बेकिंग सोडा आपके काम आ सकता है. बेकिंग सोडा में थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और उसे प्लेटफॉर्म पर लगाकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद हल्के हाथ से रगड़ें और साफ पानी से पोंछ लें। इससे जिद्दी दाग भी हट जाते हैं. वहीं, सफेद सिरका भी एक बेहतरीन नैचुरल क्लीनर है. बराबर मात्रा में पानी और सिरका मिलाकर स्प्रे करें और कुछ देर बाद कपड़े से साफ कर लें. इससे ग्रीस कटती है और प्लेटफॉर्म चमकने लगता है.
इसे भी पढ़ें- How To Keep Home Cool Without AC: AC का बिल आएगा जीरो! बिना बिजली खर्च किए घर को बर्फ जैसा ठंडा रखने के 5 &#039;जादुई&#039; तरीके
बेकिंग सोडा और नींबू का कॉम्बिनेशन
ज्यादा जिद्दी दाग के लिए बेकिंग सोडा और नींबू का कॉम्बिनेशन भी असरदार होता है. बेकिंग सोडा छिड़ककर उस पर नींबू का रस डालें और हल्के हाथ से रगड़ें. यह तरीका न सिर्फ सफाई करता है बल्कि बदबू भी दूर करता है. सिर्फ सफाई ही नहीं, कुछ आदतों में बदलाव भी जरूरी है. खाना बनाते समय स्प्लैटर गार्ड का इस्तेमाल करें, ताकि तेल इधर-उधर न फैले. इसके साथ ही, रोज हल्की सफाई करते रहें, ताकि गंदगी जमा ही न हो.
ध्यान रखें कि किचन में सही वेंटिलेशन भी जरूरी है. अगर धुआं और तेल बाहर नहीं निकल पाएगा, तो वह सतहों पर जमता रहेगा. इसलिए किचन में एग्जॉस्ट फैन या चिमनी का इस्तेमाल जरूर करें. &amp;nbsp;सही तरीके और थोड़ी सावधानी अपनाकर आप किचन के प्लेटफॉर्म को न सिर्फ साफ रख सकते हैं, बल्कि उसे लंबे समय तक चमकदार और चिपचिपाहट से मुक्त भी बना सकते हैं.
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 17:30:34 +0530</pubDate>
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        <title>चैत्र नवरात्रि में ज्वाला देवी मंदिर में चढ़ा 99 लाख से अधिक चढ़ावा, दर्ज हुआ नया रिकॉर्ड !</title>
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        <description><![CDATA[ कांगड़ा, चैत्र नवरात्रों के दौरान ज्वाला जी मंदिर में इस बार आस्था का जनसैलाब उमड़ा और चढ़ावे में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई. मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार कुल 99 लाख 77 हजार 209 रुपए का नकद चढ़ावा श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 लाख रुपए अधिक है.
नवरात्रों के दौरान करीब 3 लाख 50 हजार श्रद्धालुओं ने मां ज्वाला के दर्शन किए. भारी भीड़ के बावजूद पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न करवाया गया. नवरात्रों के दौरान मंदिर में विदेशी श्रद्धालुओं की भी भागीदारी देखने को मिली. चढ़ावे के रूप में विदेशी मुद्रा भी प्राप्त हुई, जिसमें-
कनाडा: 135 डॉलर, इंग्लैंड: 75 पाउंड, अमेरिका: 6 डॉलर और यूएई: 45 दिरहम है.
सीमित संसाधनों में भी बेहतर प्रबंधन की हो रही तारीफ&amp;nbsp;
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने जानकारी देते हुए बताया कि, सीमित संसाधनों के बावजूद श्रद्धालुओं को सुविधाजनक दर्शन करवाए गए. उन्होंने कहा कि मां ज्वाला जी के आशीर्वाद से पूरे नवरात्रों के दौरान कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई और आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ. उन्होंने इस सफलता के लिए सभी विभागों के सहयोग को अहम बताया और सभी का आभार व्यक्त किया.
अनुभव का मिला लाभ
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल इससे पहले चिंतपूर्णी मंदिर में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वहां के अनुभव को उन्होंने ज्वाला जी मंदिर में लागू किया, जिसका असर व्यवस्थाओं में साफ दिखाई दिया. इसका परिणाम रहा कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद दर्शन व्यवस्था सुचारू रही और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.
श्रद्धालुओं को मिली विशेष सुविधाएं
नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं की गईं. इनमें निशुल्क लंगर, धर्मार्थ औषधालय, निशुल्क शौचालय, स्नानागार जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं, जिससे बाहर से आए श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली.
प्रशासन ने जताया आभार
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने मंदिर न्यास के सदस्यों, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सहयोगी विभागों का विशेष रूप से धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही यह सफल आयोजन संभव हो पाया.
पुजारी कपिल शर्मा बोले देश विदेश से श्रद्धालुओं ने टेका माथा&amp;nbsp;
मंदिर के पुजारी कपिल शर्मा ने कहा कि चैत्र नवरात्रों के दौरान मां ज्वाला जी के दरबार में अपार आस्था देखने को मिली. देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा कि इस बार भक्तों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और सभी ने भक्तिभाव से चढ़ावा अर्पित किया. मां के आशीर्वाद से पूरे नवरात्र शांतिपूर्वक संपन्न हुए और हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर यहां से संतुष्ट होकर लौटा.
मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल बोले बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास जारी रहेगा. मंदिर अधिकारी अजय मंडयाल ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन करवाना रही. उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया गया, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई.
उन्होंने कहा कि सभी विभागों के समन्वय और टीमवर्क के चलते यह आयोजन सफल रहा. भविष्य में भी श्रद्धालुओं को और बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयास जारी रहेंगे.
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 09:30:14 +0530</pubDate>
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        <title>Happy Mahavir Jayanti 2026 Wishes: महावीर जयंती के 10 शुभकामना मैसेज, अपनों को भेजें महावीर स्वामी के कोट्स</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/happy-mahavir-jayanti-2026-wishes-महावीर-जयंती-के-10-शुभकामना-मैसेज-अपनों-को-भेजें-महावीर-स्वामी-के-कोट्स</link>
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        <description><![CDATA[ Happy Mahavir Jayanti 2026 Wishes: जैन धर्म में अंतिम तीर्थंकर स्वामी महावीर जी की जयंती 31 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. महावीर स्वामी ने अपने पूरे जीवन में मानवता को सत्य, अहिंसा और आत्मसंयम का संदेश दिया.&amp;nbsp;&amp;nbsp; राजघराने में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक सुखों का त्याग कर तपस्या और आध्यात्मिक मार्ग को अपनाया. लगभग 12 वर्षों की कठोर साधना के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई. महावीर जयंती के मौके पर जैन धर्म के अनुयायनी उनके विचारों को अपनाकर आध्यात्म की राह पर चलने और जियो और जीने दो की प्रेरणा अपनाने का संकल्प लेते हैं.
महावीर स्वामी का जीवन और उनके विचार हमें सिखाते हैं कि सच्चा सुख बाहरी चीजों में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सदाचार में छिपा होता है. महावीर जयंती के शुभ अवसर पर आप भी लोगों को ये प्रेरणादायक संदेश भेजकर महावीर जयंती की शुभकामनाएं भेज सकते हैं.
महावीर स्वामी, भगवान वर्धमानदें आपको ज्ञान का वरदानमहावीर जयंती की शुभकामनाएं
क्रोध को जीतें शांति सेदुष्ट को साधुता से जीत लेंकृपण को दान से जीतेंऔर असत्य को सत्य से जीत लेंमहावीर जयंती की शुभकामनाएं
सत्य-अहिंसा धर्म हमाराहमने भगवान महावीर जैसा नायक पायाजैन हमारी पहचान हैमहावीर जयंती की शुभकामनाएं
महावीर जिनका नाम है;पालीताना जिनका धाम है;अहिंसा जिनका नारा है;ऐसे त्रिशला नंदन को लाख प्रणाम हमारा है.महावीर जयंती की शुभकामनाएं
महावीर स्वामी की भावना आपके दिलों में&amp;nbsp;बनी रहे और आपकी आत्मा को भीतर से रोशन करे.महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!
सिद्धों का सार, आचार्यों का साथसाधुओं का साथ, अहिंसा का प्रचारयही है भगवान महावीर का सार ।हैप्पी महावीर जयंती
भगवान महावीर के दिखाए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलेंऔर अपने अंदर की अज्ञानता का नाश करें.महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!
जोय सत्य जानने में मदद करता है, जो मनको नियंत्रित करता हैजो हमारी आत्मा को शुद्ध करता हैवही ज्ञान है.
Mahavir Jayanti 2026: राजकुमार वर्धमान कैसे बनें भगवान महावीर, जानें दिलचस्प कहानी

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 09:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Hot Honey Egg Recipe: हॉट हनी एग ट्राई किया क्या? इंटरनेट पर ट्रेंड कर रही रेसिपी, इससे कितना मिलेगा न्यूट्रिशन</title>
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        <description><![CDATA[ Hot Honey Egg Recipe:&amp;nbsp;अगर आप भी अंडा खाने के शौकीन हैं तो आप इसे अलग-अलग तरीके से बनाकर जरूर खाते होंगे. अंडे की कोई भी डिश बनाएं, हर बार इसका स्वाद बढ़कर ही आता है. चाहे सामान्य उबला हुआ अंडा हो, अंडा भुर्जी हो, अंडा रोल हो या फिर अंडा ऑमलेट सभी स्वाद में लाजवाब लगते हैं. आजकल सोशल मीडिया पर एक नई रेसिपी वायरल हो रही है, जिसे देखकर लगता है इसे तो जरूर आजमाना चाहिए. कुछ मीठा, चीज के साथ मसाले का मेल सुनने में लाजवाब लगता है ना? तो सोचिए, आखिर इसे बनाने का मन कैसे न करे.
हॉट हनी एग बनाने की आसान विधि
सबसे पहले एक पैन लें, उस पर थोड़ा शहद डालें, फिर थोड़ा मोजरेला चीज डालें, उसके बाद उसपर 2 अंडे डाल दें, ऊपर से थोड़ी बारीक कटी हुई हरी मिर्च डालें ( मिर्च का तेल भी डाल सकते हैं), जिससे इसका स्वाद काफी हद तक बढ़ जाता है, मिर्च का इस्तेमाल अपने स्वाद अनुसार ही करें. अब इसे धीमी आंच पर अच्छे से पकाएं, पक जाने पर इसे बीच में से फोल्ड करके प्लेट में सर्व करें. इसके स्वाद की बात करें तो जब इसे खाया जाएगा तो पहले ही निवाले में आपको शहद की मिठास मिलेगी, जिसके बाद आपको मसाले और मिर्च का तीखापन महसूस होगा. यही तो इस डिश की असली पहचान है, उसके बाद अंडे का स्वाद मानो लाजवाब लगता है.
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कितना मिलता है पोषण?&amp;nbsp;
अब जब बात अंडे की हुई है तो भला पोषण की बात कैसे न हो. हमने इसमें 2 अंडे, लगभग 1 चम्मच शहद और थोड़ा चीज डाला है, जो कुल मिलाकर लगभग 380 से 400 कैलोरी देगा. इसमें मौजूद अंडे और चीज में मिलाकर लगभग 20 ग्राम से ज्यादा प्रोटीन होगा, जो कुल मिलाकर एक बेहतरीन डाइट मील हो सकता है.
फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा
इसमें फैट की मात्रा भी काफी अधिक है, लगभग 30 ग्राम, जो इसमें मौजूद चीज से मिलेगी. जबकि इसमें कार्बोहाइड्रेट काफी कम है, जो सिर्फ शहद से मिलेगा. कुल मिलाकर यह एक ऐसा डाइट मील है जो आपको वजन बढ़ाने में भी काफी मदद कर सकता है. अगर आप वजन घटा रहे हैं तो इसे कम से कम खाएं, क्योंकि इसमें मौजूद पोषण जल्दी वजन बढ़ा सकता है और स्वाद की तो बात ही अलग है - इसका मीठा और तीखा स्वाद खाने के बाद ही समझ आता है, इसे बताकर समझाया नहीं जा सकता.
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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 09:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>वाराणसी के संकटमोचन मंदीर में मुस्लिम कलाकार करेंगे परफॉर्म, शास्त्रीय संगीत से करेंगे स्तुति</title>
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        <description><![CDATA[ Varanasi Sankat Mochan Music Festival: वैसे तो संगीत जगत के लिए बनारस घराना का नाम ही काशी को पूरे विश्व में परिचित कराने के लिए पर्याप्त है, लेकिन इस प्राचीन शहर में अनेक ऐसे भी आयोजन होते हैं जो आज के भागम भाग व्यस्त दिनचर्या में भी उसी उत्साह के साथ सुने और देखे जाते हैं.
&amp;nbsp;
इस वर्ष भी वाराणसी के प्राचीन धर्मस्थल में से एक श्री संकट मोचन मंदिर में संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा जिसमें देश के दिग्गज कलाकार हनुमान जी के दरबार में अपनी प्रस्तुति से उनके चरणों में श्रद्धा भाव समर्पित करेंगे. यह प्रतिष्ठित आयोजन अपनी सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक माहौल के लिए देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है.
&amp;nbsp;
वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में 6 दिवसीय संगीत समारोह का आयोजन
&amp;nbsp;
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विशंभरनाथ मिश्रा ने एबीपी न्यूज़ को जानकारी देते हुए बताया कि - हनुमान जयंती के बाद 6 अप्रैल से 11 अप्रैल तक 6 दिवसीय संगीत समारोह का आयोजन संकट मोचन मंदिर में किया जाएगा. इस अवधि में 2 दिन को छोड़कर सभी दिन आठ आठ कार्यक्रम परंपरागत और सांस्कृतिक संगीत के निर्धारित किए गए हैं . कुल 47 कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी. 21 आर्टिस्ट ऐसे हैं जो पहली बार अपनी विधा की प्रस्तुति देंगे, 11 पद्म अवार्ड&amp;nbsp; प्राप्त कर चुके कलाकार इसमें अपने कार्यक्रम को प्रस्तुत करेंगे. इस बार हम लोग नए कलाकार को अधिक अवसर प्रदान कर रहे हैं .&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
मुस्लिम कलाकार भी पहुंचेंगे हनुमान जी के दरबार
&amp;nbsp;
महंत ने जानकारी देते हुए बताया कि संगीत और कला को किसी भी धर्म जाति से बाँधा नहीं जा सकता. इस बार करीब आधा दर्जन ऐसे मुस्लिम कलाकार होंगे जो संकट मोचन संगीत समारोह में प्रस्तुति देंगे. इसके अलावा हिंदू पंजाबी सभी वर्ग के लोग इसमें शामिल होंगे. इस आयोजन को संकट मोचन मंदिर परिसर में ही आयोजित किया जाएगा.&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
April 2026 Vrat Tyohar: अप्रैल में अक्षय तृतीया, गंगा सप्तमी, हनुमान जंयती समेत कई प्रमुख व्रत-त्योहार की लिस्ट देखें



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


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        <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 09:30:09 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>वाराणसी, के, संकटमोचन, मंदीर, में, मुस्लिम, कलाकार, करेंगे, परफॉर्म, शास्त्रीय, संगीत, से, करेंगे, स्तुति</media:keywords>
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        <title>Hepatitis in India: देश में हेपेटाइटिस के साथ जी रहे करोड़ों, बिन लक्षण कैसे छलनी कर रहा लिवर? जानें एक्सपर्ट की राय</title>
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        <description><![CDATA[ How Common Is Hepatitis In India: भारत में लाखों लोग हेपेटाइटिस बी या सी के साथ जी रहे हैं, लेकिन उन्हें इसका अंदाजा तक नहीं है. वे रोज काम पर जाते हैं, सामान्य जीवन जीते हैं, फिर भी एक वायरस चुपचाप उनके लिवर को नुकसान पहुंचाता रहता है. जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक अक्सर स्थिति गंभीर हो चुकी होती है, जैसे लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर या यहां तक कि लिवर कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के डॉ. सौरदीप चौधरी ने TOI को बताया कि, भारत में हेपेटाइटिस वायरस का बोझ काफी ज्यादा है. अनुमान है कि देश की लगभग 3-4 प्रतिशत आबादी हेपेटाइटिस बी से संक्रमित है, जबकि 0.5- 1 प्रतिशत लोगों में हेपेटाइटिस सी पाया जाता है. यानी करीब एक करोड़ से अधिक लोग क्रॉनिक इंफेक्शन के साथ जी रहे हैं. समस्या यह है कि दोनों वायरस वर्षों तक बिना लक्षण के रह सकते हैं, इसलिए अधिकांश लोग तब तक जांच नहीं कराते जब तक लिवर को गंभीर नुकसान न हो जाए.
बड़ी संख्या में आते हैं मरीज
भारत में हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई, इन पांचों प्रकार के वायरस बड़ी संख्या में मामले दर्ज करते हैं. हेपेटाइटिस ए आमतौर पर खराब स्वच्छता वाले इलाकों में 10- 30 प्रतिशत तीव्र मामलों के लिए जिम्मेदार है, जबकि हेपेटाइटिस ई 10-40 प्रतिशत तीव्र हेपेटाइटिस और 15-45 प्रतिशत तीव्र लिवर फेल्योर से जुड़ा पाया गया है, खासकर गर्भवती महिलाओं में. &amp;nbsp;जागरूकता की कमी भी बड़ी समस्या है। कई लोग मानते हैं कि लिवर की बीमारी सिर्फ शराब पीने वालों को होती है, जबकि यह पूरी तरह सही नहीं है. &amp;nbsp;कुछ लोगों को यह भी भ्रम है कि हेपेटाइटिस सामान्य संपर्क से साथ खाना खाने, गले मिलने या खांसने से फैलता है, जो कि गलत धारणा है.
कैसे फैल सकता है?
हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण अक्सर असुरक्षित इंजेक्शन, बिना जांचे गए रक्त चढ़ाने, असुरक्षित सर्जरी या डेंटल प्रक्रिया, इंफेक्टेड सुई से टैटू या पियर्सिंग और प्रसव के दौरान मां से बच्चे में फैल सकता है. अगर हेपेटाइटिस बी या सी का इलाज न कराया जाए तो यह धीरे-धीरे लिवर में फाइब्रोसिस और सिरोसिस का कारण बन सकता है, जो आगे चलकर लिवर कैंसर में बदल सकता है. अच्छी बात यह है कि हेपेटाइटिस सी का इलाज अब संभव है और 8 से 12 हफ्तों की दवा से इसे ठीक किया जा सकता है. हालांकि, हेपेटाइटिस बी के अधिकांश मामलों में लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ती है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:30:12 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>BA.3.2 Covid Variant: कैसे हैं Cicada कोविड स्ट्रेन के लक्षण, जिसकी वजह से तेजी से बढ़ रहे कोरोना के केस?</title>
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        <description><![CDATA[ Vaccine Effectiveness Against New Variant: अमेरिका में एक नया कोविड-19 वेरिएंट तेजी से चर्चा में आ गया है, जिसे &#039;सिकाडा&#039; नाम दिया गया है. साइंटफिक भाषा में इसे BA.3.2 स्ट्रेन कहा जा रहा है, जो ओमिक्रॉन का ही एक सब-वेरिएंट है. हेल्थ एजेंसियों के मुताबिक, यह वेरिएंट अब अमेरिका के कई राज्यों में फैल चुका है और दुनियाभर के कई देशों में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है. चलिए आपको बताते हैं कि यह कितना खतरनाक है और इसका प्रभाव कहां तक है.&amp;nbsp;
कहां मिले इसके लक्षण?
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, इस वेरिएंट के संकेत वेस्टवॉटर सैंपल्स में भी मिले हैं, जिससे इसके फैलाव का अंदाजा लगाया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क और इलिनॉय जैसे राज्यों में इसके लक्षण मिले हैं. पहली बार यह केस जून 2025 में सामने आया था, जब नीदरलैंड्स से आए एक यात्री में यह इंफेक्शन पाया गया. इस नए स्ट्रेन को सिकाडा नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि यह लंबे समय तक अंडरग्राउंड रहने के बाद अचानक सामने आया, ठीक वैसे ही जैसे सिकाडा नाम के कीड़े सालों बाद जमीन से बाहर आते हैं. साइंटिस्ट का कहना है कि यह वेरिएंट काफी ज्यादा म्यूटेटेड है और इसमें 70 से 75 तक म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे बाकी वेरिएंट्स से अलग बनाते हैं.
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इसके लक्षण और प्रभाव
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसके लक्षण क्या हैं और क्या यह ज्यादा खतरनाक है. फिलहाल एक्सपर्ट का कहना है कि इसके लक्षण बाकी कोविड वेरिएंट्स जैसे ही हैं. इसमें खांसी, बुखार या ठंड लगना, गले में खराश, नाक बंद होना, सांस लेने में दिक्कत, स्वाद और गंध का चले जाना, थकान, सिरदर्द और पेट से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं. Andrew Pekosz, जो जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ का कहना है कि इस वेरिएंट में इतनी ज्यादा म्यूटेशन हैं कि यह इम्यून सिस्टम के लिए अलग तरह से दिखाई दे सकता है. &amp;nbsp;वहीं, एपिडेमियोलॉजिस्ट Syra Madad के मुताबिक, अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि यह वेरिएंट ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा कर रहा है.
एंटीबॉडी से बच निकलने की क्षमता
हालांकि, शुरुआती स्टडीज में यह सामने आया है कि यह स्ट्रेन एंटीबॉडी से बच निकलने की क्षमता रखता है, जिससे यह सवाल उठता है कि वैक्सीन इसकी कितनी प्रभावी सुरक्षा दे पाएगी. इस पर अभी रिसर्च जारी है और वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल, स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि लक्षण भले ही सामान्य हों, लेकिन इंफेक्शन के फैलाव को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:30:11 +0530</pubDate>
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        <title>Python Weight Loss: खतरनाक अजगर कम करेगा आपका वजन? वैज्ञानिकों ने खून में खोजा &amp;apos;जादुई तत्व&amp;apos;, जो मिटा देगा आपकी भूख!</title>
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        <description><![CDATA[ Can Python Blood Help In Weight Loss: मोटापे को कम करने के लिए अब एक नया और दिलचस्प रास्ता सामने आया है. साइंटिस्ट ने बर्मीज अजगर के खून में एक ऐसे खास तत्व की पहचान की है, जो भविष्य में वजन घटाने की दवाओं के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. इस खोज ने मोटापे से जूझ रही दुनिया के लिए नई उम्मीद जगाई है, क्योंकि यह भूख को कंट्रोल करने का एक अलग तरीका दिखाती है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे अजगर आपका वजन कम करने वाला है.&amp;nbsp;
अजगर को क्यों चुना गया?
नेचर मेटाबॉलिज्म में पब्लिश स्टडी में बताया गया कि अजगर अपने खाने के अनोखे तरीके के लिए जाने जाते हैं. ये अपने शरीर के बराबर बड़े शिकार को खा सकते हैं और फिर महीनों तक बिना खाए रह सकते हैं. साइंटिस्ट ने पाया कि जब अजगर खाना खाते हैं, तो उनके खून में कुछ खास तत्व अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं, जो उनके मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में मदद करते हैं. इस स्टडी को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक जोनाथन लॉन्ग की टीम ने किया. उन्होंने छोटे अजगरों के खून के सैंपल खाने से पहले और बाद में जांचे. इसमें 200 से ज्यादा ऐसे तत्व मिले, जिनका स्तर खाने के बाद काफी बढ़ गया. इनमें से एक खास तत्व pTOS था, जो 1000 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया.&amp;nbsp;
क्या होता है यह?
यह खास तत्व आंत में मौजूद बैक्टीरिया द्वारा बनता है और दिलचस्प बात यह है कि यह इंसानों में भी बहुत कम मात्रा में पाया जाता है. इसके असर को समझने के लिए साइंटिस्ट ने मोटापे से ग्रसित चूहों पर इसका टेस्ट किया. रिसर्च के नतीजे काफी चौंकाने वाले थे. जिन चूहों को pTOS दिया गया, उन्होंने कम खाना शुरू कर दिया और करीब 28 दिनों में उनका वजन लगभग 9 प्रतिशत तक कम हो गया. यानी यह तत्व सीधे तौर पर भूख को कम करने में मदद करता है.
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अब तक की दवाओं से कितना अलग?
अब तक जो वजन घटाने की दवाएं इस्तेमाल होती हैं, जैसे Wegovy, वे पेट के खाली होने की प्रक्रिया को धीमा करके काम करती हैं और कई बार इससे मतली जैसे साइड इफेक्ट भी होते हैं. लेकिन pTOS का तरीका अलग है. यह सीधे दिमाग के उस हिस्से पर असर डालता है, जिसे हाइपोथैलेमस कहा जाता है और जो भूख को कंट्रोल करता है. स्टडी से जुड़े वैज्ञानिक लेस्ली लेनवैंड का कहना है कि यह खोज भूख को नियंत्रित करने का एक नया और बेहतर तरीका दिखाती है, जिसमें मौजूदा दवाओं की तरह साइड इफेक्ट्स कम हो सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>VIDEO: इंडियन क्रिकेटर स्नेह राणा ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में दिखीं लीन</title>
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        <description><![CDATA[ Mahakal Mandir, Sneh rana: इंडियन क्रिकेटर स्नेहा राणा एक बार फिर बाबा महाकाल के दरबार में नजर आईं. 30 मार्च की सुबह तड़के वो उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रसिद्ध भस्म आरती में भाग लेकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया.

#WATCH | Ujjain, Madhya Pradesh: Women&amp;rsquo;s Cricket World Cup winner, cricketer Sneh Rana visits Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple to attend the Bhasma Aarti. (Source: Shri Mahakaleshwar Temple) pic.twitter.com/UQyZIaAtZt
&amp;mdash; ANI (@ANI) March 30, 2026



सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंची स्नेहा राणा ने नंदी हॉल में लगभग दो घंटे तक .बैठकर ध्यान और आराधना की. इस दौरान वे पूरी तरह शिव भक्ति में लीन नजर आईं. भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसके बाद विधि-विधान से पुजारियों ने भव्य आरती संपन्न कराई.
आरती के बाद स्नेहा राणा ने चांदी द्वार से भगवान को जल अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की। जानकारी के अनुसार, वे अपने पारिवारिक मित्रों के साथ उज्जैन आई थीं. मंदिर प्रशासन की ओर से इस अवसर पर स्नेहा राणा का सम्मान और स्वागत किया गया.
कौन हैं स्नेह राणा
स्नेहा राणा भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक प्रमुख ऑलराउंडर खिलाड़ी हैं, जो अपनी शानदार गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने टीम इंडिया को कई अहम मुकाबलों में मजबूती दी है.
महाकाल मंदिर आ चुकी हैं ये महिला क्रिकेटर
महाकाल मंदिर में वीआईपी श्रद्धालुओं का आना लगातार जारी रहता है. यहां नेता, अभिनेता और खेल जगत की हस्तियां समय-समय पर दर्शन करने पहुंचती हैं. भारतीय महिला और पुरुष क्रिकेट टीम के खिलाड़ी भी बाबा महाकाल के प्रति अपनी आस्था जताते रहे हैं. स्नेहा राणा पहेल भी बाबा महाकाल में अपनी हाजरी लगा चुकी हैं, इसके अलावा&amp;nbsp; स्मृति मंधाना, शैफाली वर्मा, रेणुका सिंह ठाकुर, दीप्ति शर्मा, राधा यादव, अरुंधति रेड्डी और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी बाबा महाकाल के दर्शन किए हैं.
महाकालेश्वर मंदिर यात्रा: भस्म आरती से लेकर दर्शन तक, उज्जैन में 2-3 दिन में कैसे करें प्लान?
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Lancet Maternal Death Report: दुनिया की हर 10 में से एक मां की मौत भारत में! लैंसेट की रिपोर्ट ने उड़ाई नींद, जानें पूरा मामला</title>
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        <description><![CDATA[ India Accounts For Maternal Deaths Globally: दुनियाभर में हर साल लाखों महिलाएं गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी वजहों से जान गंवा रही हैं, और इन आंकड़ों में भारत की हिस्सेदारी अब भी बड़ी बनी हुई है. हाल ही में द लैंसेट ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी, और महिला स्वास्थ्य में प्रकाशित एक स्टडी &amp;nbsp;ने इस चिंता को फिर सामने ला दिया है. चलिए आपको बताते हैं कि इस रिपोर्ट में क्या निकला है और भारत के लिए चिंता क्यों जाहिर की गई है.&amp;nbsp;
क्या निकला रिपोर्ट में?
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में दुनिया भर में करीब 2.4 लाख महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी दिक्कतों के कारण हुई. इनमें से लगभग 24,700 मौतें भारत में दर्ज की गईं. यानी वैश्विक स्तर पर हर 10 मातृ मौतों में से लगभग एक भारत से जुड़ी है, जो स्थिति की गंभीरता को दिखाती है. हालांकि, तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है. बीते तीन दशकों में भारत ने इस दिशा में बड़ी प्रगति की है. 1990 में जहां मातृ मृत्यु का आंकड़ा करीब 1.19 लाख था, वह 2015 तक घटकर 36,900 और 2023 में 24,700 तक पहुंच गया. इसी तरह, मातृ मृत्यु दर &amp;nbsp;1990 में 508 से घटकर 2023 में 116 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गई है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सुधार अभी अधूरा है. डॉ. आभा मजूमदार ने TOI को बताया कि देश में मातृ मृत्यु दर में गिरावट जरूर आई है, लेकिन यह सभी राज्यों में समान नहीं है. केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य वर्ल्ड मानकों के करीब पहुंच चुके हैं, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अब भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. स्टडी में यह भी सामने आया कि मातृ मृत्यु के प्रमुख कारण अब भी वही हैं, जिन्हें काफी हद तक रोका जा सकता है. इनमें प्रसव के दौरान अत्यधिक ब्लड फ्लो, हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी दिक्कतों, और इंफेक्शन पहले से मौजूद बीमारियों के कारण होने वाली दिक्कतें शामिल हैं.
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कोविड का भी रोल
इसके अलावा, समय पर इलाज न मिल पाना, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में अंतर और ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों के बीच असमानता भी बड़ी वजह बन रही है. यही कारण है कि सुधार की रफ्तार 2015 के बाद धीमी पड़ गई है, जबकि इससे पहले 2000 से 2015 के बीच तेज गिरावट दर्ज की गई थी. वर्ल्ड लेवल पर भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. 2023 में दुनिया का औसत मातृ मृत्यु दर 190 प्रति एक लाख जीवित जन्म रहा, जो संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के 70 के लक्ष्य से काफी ज्यादा है. एक्सपर्ट का कहना है कि कोविड-19 महामारी ने भी इस समस्या को बढ़ाया, क्योंकि उस दौरान मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Home Tips: आपके घर के फ्रीजर में जम गई है बर्फ की मोटी परत, इस ट्रिक्स से तुरंत पिघल जाएगी</title>
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        <description><![CDATA[ Home Tips:&amp;nbsp;आजकल हर घर में फ्रिज का इस्तेमाल होता है. फ्रिज के बिना आज किसी का भी काम नहीं चल सकता, ये हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया &amp;nbsp;है. खासकर, गर्मियों की मौसम की बात करें तो इसकी जरूरत सबसे अधिक होती है. यह खाने-पीने के सामान को लंबे समय तक फ्रेश रखने में मदद करता है, लेकिन कई बार हम देखते हैं कि फ्रीजर में बर्फ की मोटी परत जम जाती है, जो अक्सर परेशानी का कारण बनता है.&amp;nbsp;
हर फ्रिज में एक डीफ्रॉस्ट बटन होता है, जिसे प्रेस करके फ्रीजर में बर्फ की मोटी परत को कम कर सकते हैं. हालांकि, किसी कारण से अगर डीफ्रॉस्ट बटन ही काम न करें तो बर्फ का पहाड़ बन जाता है और इससे न सिर्फ फ्रिज की कूलिंग कम होती है, बल्कि बिजली की खपत भी बढ़ जाती है. अब सवाल यह है कि इस बर्फ के पहाड़ को कैसे हटाएं ? इसके लिए कुछ आसान घरेलू ट्रिक्स अपनाकर आप इसे जल्दी साफ कर सकते हैं, आइए हम आपको बताते है कैसे .&amp;nbsp;
फ्रीजर में जमी मोटी बर्फ को तुरंत हटाने के लिए सबसे पहले फ्रिज को बंद करें और खाली कर दें.&amp;nbsp;

गर्म पानी का तरीका: यह एक सबसे सुरक्षित उपाय है. इसके लिए एक गहरे बर्तन में खौलता हुआ पानी लेकर उसे फ्रीजर में रख दें और फ्रीजर का दरवाजा बंद कर दें. ऐसा करने से भाप से बर्फ तुरंत नरम होकर गिरने लगती है.&amp;nbsp;
टेबल फैन का उपयोग: आसानी से बर्फ पिघलने के लिए फ्रिज का स्विच बंद करके उसका दरवाजा खोल दें, फिर ठंडी गैस निकलने के लिए सामने एक टेबल फैन चला दें, जिसकी हवा के बहाव से बर्फ जल्दी पिघलने लगती है.&amp;nbsp;

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हेयर ड्रायर का उपयोग: अगर आप बिना किसी तामझाम के और जल्दी बर्फ पिघलाना चाहते हैं तो उसके लिए एक हेयर ड्रायर का उपयोग करें. इससेआप आसानी से बर्फ पिघला सकते हैं, हेयर ड्रायर की गर्म हवा से बर्फ मिनटों में पिघल जाती है.&amp;nbsp;
नमक का पानी: एक बरतन में गुनगुने पानी लेकर उसमे नमक मिलाकर बर्फ के पहाड़ पर छिड़क दें, इससे बर्फ तेजी से गलती है और बर्फ पूरी तरह से गलकर खत्म हो जाती है.&amp;nbsp;


चाकू का प्रयोग न करें: बर्फ हटाने के लिए चाकू या नुकीली चीजों का इस्तेमाल भूल कर भी न करें, इससे कूलिंग लाइन पर खरोच लग सकती है और वह खराब हो सकती है.&amp;nbsp;
सफाई के बाद सुखाएं: बर्फ पिघलने के बाद फ्रीजर को सूखे कपड़े से पोंछकर उसे साफ करें और उसे सूखने तक उसे छोड़ दें, नहीं तो फ्रिज खराब होने का खतरा रहता है.&amp;nbsp;

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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 22:30:27 +0530</pubDate>
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        <title>क्या शुगर के मरीज पी सकते हैं गन्ने का जूस, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट?</title>
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        <description><![CDATA[ आजकल की लाइफस्टाइल में डायबिटीज एक आम बीमारी बन गई है. यह बीमारी ऐसी है, जिसमें खाने-पीने को लेकर बहुत सी सावधानियां रखनी पड़ती हैं.&amp;nbsp; गर्मियां चल रही हैं और ऐसे में ठंडा-ठंडा गन्ने का जूस पर किसका दिल नहीं आता. यह न सिर्फ दिमाग और पेट को राहत देता है, बल्कि हाइड्रेट रखने का काम भी करता है.&amp;nbsp;
हालांकि, शुगर के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या वे इसे पी सकते हैं या नहीं? कहा जाता है कि गन्ने का जूस ज्यादा मीठा होता है और शुगर रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है, ऐसे में आइए समझते है की इस पर एक्सपर्ट्स की क्या राय है.&amp;nbsp;
एक्सपर्ट की क्या राय है?
एक्सपर्ट्स की बात मानें तो कुछ डायबिटीज पेशेंट के लिए गन्ने के रस का सेवन करना संभव हो सकता है, लेकिन उन्हें नियंत्रित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए. एक्सपर्ट कहते हैं कि शुगर के मरीजों के लिए अच्छा यह है कि वह गन्ने के रस की जगह गन्ना खा सकते हैं, क्योंकि इसमें ज्यादा फाइबर और प्रोटीन पाया जाता है, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने नहीं देता.&amp;nbsp;
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गन्ने के रस में कितनी शुगर होती है
फार्माकोग्नॉसी रिव्यूज में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक, गन्ने के रस में 70-75% पानी, 13-15% सुक्रोज और 10-15% फाइबर होता है. इसके अलावा भारत में पीलिया, रक्तस्राव, पेशाब में जलन, पेशाब में जलन और टॉयलेट संबंधी बीमारी के इलाज में गन्ने का रस बेहद कारगर है. वैसे तो गन्ने का जूस प्राकृतिक होता है, लेकिन इसमें शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है, जो शरीर में जल्दी घुलता है और ब्लड में शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है. आपको बता दें कि एक छोटा गिलास गन्ने के रस यानी 240 एमएल गन्ने के रस में करीब 50 ग्राम चीनी होती है यानी 10 चम्मच चीनी.&amp;nbsp;
कुछ &amp;nbsp;बातों का रखें ध्यान
चाहे डाइबीटीज पेशेंट हो या आम आदमी सबको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी खाली पेट गन्ने का जूस बिल्कुल न पिएं. ध्यान रखें कि एक बार में ज्यादा मात्रा में गन्ने का जूस ना लें, इससे शरीर में सुगर लेवल तेजी से बढ़ता है. साथ ही डाइबीटीज पेशेंट को डॉक्टर की सलाह के बिना इसे डाइट में शामिल नहीं करना चाहिए. शुगर के मरीजों के लिए गन्ने के जूस के अलावा कुछ हेल्दी ऑप्शनस भी हैं जैसे नारियल पानी, बिना चीनी के नींबू पानी, छाछ और ग्रीन टी.
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 22:30:17 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>क्या, शुगर, के, मरीज, पी, सकते, हैं, गन्ने, का, जूस, जानें, क्या, कहते, हैं, एक्सपर्ट</media:keywords>
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        <title>Burning and Tingling Sensation in Feet: पैरों में हर वक्त महसूस होती है जलन और झुनझुनी, जानें किस बीमारी का है ये संकेत</title>
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        <description><![CDATA[ पैरों में लगातार जलन या झुनझुनी होना एक आम समस्या लगती है, लेकिन यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी तो हो सकता है. अक्सर लोग इसे थकान या कमजोरी से होने वाली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. हालांकि, यह शरीर के अंदर हो रही किसी गंभीर समस्या का इशारा भी हो सकता है. इसलिए जब भी आपकी ऐसी समस्या ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
पैरों में जलन और झुनझुनी का कारण

इस समस्या का सबसे आम कारण Peripheral Neuropathy हो सकता है. यह एक नसों से संबंधित समस्या है, इसमें पैरों में जलन, सुन्न होना और झुनझुनाहट महसूस होती है. यह ज्यादातर शुगर (डायबिटीज) के मरीजों में होती है, क्योंकि अधिक समय तक शुगर लेवल बढ़ा रहने से नसों को नुकसान होता है और इस प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं
इसके अलावा एक अन्य समस्या Sciatica हो सकती है, जो रीढ़ की हड्डी से निकलने वाली सबसे लंबी नर्व (साइटिक नर्व) पर दबाव के कारण होता है. नस दब जाती है, जिससे दर्द, जलन और झुनझुनी पैरों तक पहुंच जाती है. लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पोश्चर या भारी वजन उठाना इस समस्या को और अधिक बढ़ा सकता है.
Restless Legs Syndrome भी इस समस्या का कारण हो सकता है, ऐसे में लेटते या आराम करते वक्त पैरों में अजीब सी जलन और झुनझुनी महसूस होती है, बार-बार पैर हिलाने का मन करता है और अलग सी ही बेचैनी होने लगती है. यह समस्या ज्यादातर रात के समय होती है, जिससे सोने में भी काफी समस्या आती है
इस प्रकार की समस्या का एक कारण विटामिन्स की कमी भी हो सकती है, खासकर विटामिन B12 की कमी, जो नसों को नुकसान पहुंचाती है और जिसके कारण हाथों और पैरों में काफी अधिक जलन और झुनझुनी महसूस होने लगती है. यह समस्या गलत खानपान की आदत, कम पोषण वाला भोजन और जंक फूड का अधिक सेवन करने से हो सकती है, इसलिए संतुलित और पोषण वाला आहार लेना चाहिए.

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हो सकती है किडनी से जुडी बीमारी&amp;nbsp;
अगर आपको किडनी और थायरॉयड से जुड़ी समस्या है तो ऐसे में भी आपको ये लक्षण देखने को मिल सकते हैं. शरीर के टॉक्सिन्स नसों पर काफी गहरा असर डालते हैं. इस समस्या से बचाव के लिए सबसे पहले अपनी जीवनशैली में सुधार लाना जरूरी है, इसलिए नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें और जरूरत के अनुसार पानी पिएं. विटामिन और मिनरल्स से भरपूर डाइट अपनाएं. लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचें और समय-समय पर स्ट्रेचिंग भी करते रहें. अगर झुनझुनी लगातार बनी रहे, दर्द असहनीय हो जाए तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें. सही समय पर जांच और इलाज से समस्या को बढ़ने से पहले ही रोका जा सकता है. कुल मिलाकर, पैरों में जलन और झुनझुनी को नजरअंदाज करना सही नहीं है, क्योंकि यह शरीर का एक चेतावनी हो सकती है.
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&amp;nbsp; ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 22:30:16 +0530</pubDate>
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        <title>Heart Changes After 30: सावधान! 30 की उम्र पार करते ही &amp;apos;बूढ़ा&amp;apos; होने लगा आपका दिल, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां?</title>
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        <description><![CDATA[ How To Keep Your Heart Healthy After 30: 30 की उम्र पार करना अक्सर एक सामान्य पड़ाव लगता है, लेकिन इसी समय शरीर के अंदर, खासकर दिल में, कई छोटे बदलाव शुरू हो जाते हैं. ये बदलाव तुरंत महसूस नहीं होते, लेकिन आगे चलकर दिल की सेहत पर गहरा असर डाल सकते हैं. अगर इन्हें समय रहते समझ लिया जाए, तो भविष्य में हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बिपिन कुमार दुबे ने TOI को बताया कि 30 के बाद जिंदगी की रफ्तार तेज हो जाती है, काम का दबाव बढ़ता है, जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और लाइफस्टाइल बदलने लगती है. ऐसे में शरीर के अंदर धीरे-धीरे बदलाव शुरू होते हैं, जिनका असर दिल पर भी पड़ता है, भले ही बाहर से सब सामान्य लगे. डॉक्टर अक्सर &quot;हार्ट एज&quot; का जिक्र करते हैं, जो बताता है कि आपका दिल आपकी असली उम्र से कितना ज्यादा बूढ़ा हो चुका है. कई लोगों में यह उम्र 5-8 साल तक ज्यादा हो सकती है, खासकर अगर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा या स्मोकिंग जैसे रिस्क फैक्टर मौजूद हों. इसका मतलब है कि दिल सिर्फ उम्र से नहीं, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल से भी तेजी से प्रभावित होता है.
30 के बाद क्या होने लगती है दिक्कत?
30 के बाद मेटाबॉलिज्म धीरे-धीरे कम होने लगता है और खराब आदतों का असर ज्यादा दिखने लगता है. नींद की कमी, तनाव, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और अनहेल्दी खानपान ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और वजन को प्रभावित करने लगते हैं. ये सभी फैक्टर मिलकर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं. इस उम्र के बाद दिल में कुछ स्ट्रक्चरल बदलाव भी होने लगते हैं. दिल की मांसपेशियां थोड़ी सख्त हो सकती हैं, जिससे उसकी काम करने की क्षमता कम होती है. इसके साथ ही शरीर में हल्की-फुल्की सूजन &amp;nbsp;बढ़ने लगती है, जो धीरे-धीरे आर्टरीज में बदलाव ला सकती है. यही बदलाव आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और ब्लॉकेज जैसी समस्याओं की वजह बन सकते हैं.
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क्या होते हैं इसके लक्षण?
सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये बदलाव अक्सर बिना किसी लक्षण के होते हैं. हाई ब्लड प्रेशर, खराब कोलेस्ट्रॉल या प्री-डायबिटीज जैसी स्थितियां लंबे समय तक चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं और जब तक पता चलता है, तब तक समस्या गंभीर हो चुकी होती है. हालांकि अच्छी बात यह है कि 30 की उम्र दिल को स्वस्थ रखने के लिए सबसे सही समय भी होती है. रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव को कंट्रोस करना दिल की सेहत को बेहतर बनाए रख सकता है. इसके साथ ही कुछ जरूरी जांचों पर ध्यान देना भी जरूरी है, जैसे नियमित ब्लड प्रेशर चेक कराना, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच कराना.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 22:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Heart, Changes, After, 30:, सावधान, की, उम्र, पार, करते, ही, बूढ़ा, होने, लगा, आपका, दिल, कहीं, आप, भी, तो, नहीं, कर, रहे, ये, गलतियां</media:keywords>
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        <title>Trendy Sunglasses for Oval Face : ओवल फेस शेप है तो ट्राई करें ये ट्रेंडी सनग्लासेस, मिनटों में बदलेगा लुक, यहां देखें बेस्ट स्टाइल</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/trendy-sunglasses-for-oval-face-ओवल-फेस-शेप-है-तो-ट्राई-करें-ये-ट्रेंडी-सनग्लासेस-मिनटों-में-बदलेगा-लुक-यहां-देखें-बेस्ट-स्टाइल</link>
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        <description><![CDATA[ Trendy Sunglasses for Oval Face : ओवल फेस शेप है तो ट्राई करें ये ट्रेंडी सनग्लासेस, मिनटों में बदलेगा लुक, यहां देखें बेस्ट स्टाइल ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 22:30:04 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Trendy, Sunglasses, for, Oval, Face, ओवल, फेस, शेप, है, तो, ट्राई, करें, ये, ट्रेंडी, सनग्लासेस, मिनटों, में, बदलेगा, लुक, यहां, देखें, बेस्ट, स्टाइल</media:keywords>
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        <title>Panchang 29 March 2026: आज कामदा एकादशी पूजा का मुहूर्त, दुर्लभ संयोग, और पूरा पंचांग देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 29 मार्च 2026: 29 मार्च 2026 को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी कामदा एकादशी है. ये व्रत सभी कामनों की पूर्ति करने वाला माना गया है. इस दिन विष्णु जी का पूजन करने पर सहस्त्र गौ दान के समान पुण्य मिलता है. यह व्रत पितृ दोष, ग्रह दोष और कष्टों को दूर करने वाला भी माना गया है.
29 मार्च का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 29 March 2026)



तिथि

एकादशी (28 मार्च 2026, सुबह 8.45 - 29 मार्च 2026, सुबह 7.46)



वार
रविवार


नक्षत्र
अश्लेषा


योग
धृति योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
&amp;nbsp;दोपहर 3.15


चंद्रोस्त
सुबह 4.49, 30 मार्च


चंद्र राशि
कर्क




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 7.48 - दोपहर 12.26


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 6.37 - रात 10.58




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
शाम 5.04 - शाम 6.37


यमगण्ड काल
दोपहर 12.26 - दोपहर 1.59&amp;nbsp;


गुलिक काल
दोपहर 3.32 - शाम 5.04


भद्रा काल
सुबह 6.15 - शाम 7.46




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 29 March 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
कर्क


मंगल
कुंभ


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



29 मार्च 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: आज सोचे हुए काम पूरे होंगे और करीबी का सहयोग मिलेगा, यात्रा व वाहन खरीद के योग बनेंगे.
वृष: दिन शानदार रहेगा, परिवार में खुशियां रहेंगी और बिजनेस में अच्छा लाभ मिलेगा.
मिथुन: दिन सामान्य रहेगा, काम बेहतर होगा और नए अवसर व विवाह प्रस्ताव मिल सकते हैं.
कर्क: भाग-दौड़ भरा दिन रहेगा, कुछ काम रुक सकते हैं लेकिन दाम्पत्य जीवन बेहतर रहेगा.
सिंह: आत्मविश्वास से काम करें, मेहनत से रुकावटें दूर होंगी और धन से जुड़े मामले सुलझेंगे.
कन्या: दिन बेहद अच्छा रहेगा, बिजनेस में निवेश और पुराने दोस्त से लाभ मिलने के योग हैं.
तुला: मिला-जुला दिन रहेगा, काम में धीमापन लेकिन रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी.
वृश्चिक: उत्साह भरा दिन रहेगा, आत्मविश्वास बढ़ेगा और अच्छे समाचार मिल सकते हैं.
धनु: खुशियों भरा दिन रहेगा, बड़ी डील और धन लाभ के योग बन रहे हैं.
मकर: सामान्य दिन रहेगा, मेहनत अधिक होगी और विवाद से बचने की जरूरत है.
कुंभ: दिन शुभ रहेगा, आय में वृद्धि और नए बिजनेस अवसर मिल सकते हैं.
मीन: दिन अनुकूल रहेगा, कार्यों में सफलता और रुके काम पूरे होने के संकेत हैं.

FAQs: 29 मार्च 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. &amp;ldquo;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&amp;rdquo; मंत्र का जाप करें.




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन धृति योग बन रहा है.
Hanuman Jayanti 2026 Date: हनुमान जयंती 1 या 2 अप्रैल किस दिन ? दो दिन रहेगी पूर्णिमा, जानें सही तारीख, मुहूर्त



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:30:08 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Panchang, March, 2026:, आज, कामदा, एकादशी, पूजा, का, मुहूर्त, दुर्लभ, संयोग, और, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
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        <title>Kamada Ekadashi Vrat Katha: कामदा एकादशी व्रत की संपूर्ण कथा पढ़ें, विष्णु जी का मिलेगा आशीर्वाद</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/kamada-ekadashi-vrat-katha-कामदा-एकादशी-व्रत-की-संपूर्ण-कथा-पढ़ें-विष्णु-जी-का-मिलेगा-आशीर्वाद</link>
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        <description><![CDATA[ Kamada Ekadashi 2026: कामदा एकादशी 29 मार्च 2026 को है.यह समस्त पापों को नष्ट करने वाली है. जैसे अग्नि काष्ठ को जलाकर राख कर देती है, वैसे ही कामदा एकादशी के पुण्य के प्रभाव से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं तथा तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है. इसके उपवास से मनुष्य निकृष्ट योनि से मुक्त हो जाता है और अन्ततः उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है.
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में भागीपुर नामक एक नगर था. जिस पर पुण्डरीक नाम का राजा राज्य करता था. राजा पुण्डरीक अनेक ऐश्वर्यों से युक्त था. उसके राज्य में अनेक अप्सरायें, गन्धर्व, किन्नर आदि वास करते थे. उसी नगर में ललित एवं ललिता नाम के गायन विद्या में पारन्गत गन्धर्व स्त्री-पुरुष अति सम्पन्न घर में निवास करते हुये विहार किया करते थे. उन दोनों में इतना प्रेम था कि वे अलग हो जाने की कल्पना मात्र से ही व्यथित हो उठते थे.
एक बार राजा पुण्डरीक गन्धर्वों सहित सभा में विराजमान थे. वहाँ गन्धर्वों के साथ ललित भी गायन कर रहा था. उस समय उसकी प्रियतमा ललिता वहाँ उपस्थित नहीं थी. गायन करते-करते अचानक उसे ललिता का स्मरण हो उठा, जिसके कारण वह अशुद्ध गायन करने लगा.
नागराज कर्कोटक ने राजा पुण्डरीक से उसकी शिकायत की. इस पर राजा को भयङ्कर क्रोध आया और उन्होंने क्रोधवश ललित को श्राप दे दिया - &quot;अरे नीच! तू मेरे सम्मुख गायन करते हुये भी अपनी स्त्री का स्मरण कर रहा है, इससे तू नरभक्षी दैत्य बनकर अपने कर्म का फल भोग.&quot;
ललित गन्धर्व&amp;nbsp;उसी समय राजा पुण्डरीक के श्राप से एक भयङ्कर&amp;nbsp;दैत्य&amp;nbsp;में परिवर्तित हो गया. उसका मुख विकराल हो गया. उसके नेत्र&amp;nbsp;सूर्य, चन्द्र&amp;nbsp;के समान प्रदीप्त होने लगे. मुँह से आग की भयङ्कर ज्वालायें निकलने लगीं, उसकी नाक पर्वत की कन्दरा के समान विशाल हो गयी तथा गर्दन पहाड़ के समान दिखायी देने लगी. उसकी भुजायें दो-दो योजन लम्बी हो गयीं.
इस प्रकार उसका शरीर&amp;nbsp;आठ योजन&amp;nbsp;का हो गया. इस तरह राक्षस बन जाने पर वह अनेक दुःख भोगने लगा. अपने प्रियतम ललित का ऐसा हाल होने पर ललिता अथाह दुःख से व्यथित हो उठी. वह अपने पति के उद्धार के लिए विचार करने लगी कि मैं कहाँ जाऊँ और क्या करूँ? किस जतन से अपने पति को इस नरक तुल्य कष्ट से मुक्त कराऊँ?
राक्षस बना ललित घोर वनों में रहते हुये अनेक प्रकार के पाप करने लगा. उसकी स्त्री ललिता भी उसके पीछे-पीछे जाती और उसकी स्थिति देखकर विलाप करने लगती.
एक बार वह अपने पति के पीछे-पीछे चलते हुये&amp;nbsp;विन्ध्याचल पर्वत&amp;nbsp;पर पहुँच गयी. उस स्थान पर उसने&amp;nbsp;श्रृंगी मुनि&amp;nbsp;का आश्रम देखा. वह शीघ्रता से उस आश्रम में गयी तथा मुनि के समक्ष पहुँचकर दण्डवत् प्रणाम कर विनीत भाव से प्रार्थना करने लगी, &quot;हे महर्षि! मैं&amp;nbsp;वीरधन्वा&amp;nbsp;नामक गन्धर्व की पुत्री ललिता हूँ, मेरा पति राजा पुण्डरीक के श्राप से एक भयङ्कर दैत्य बन गया है. उससे मुझे अपार दुःख हो रहा है. अपने पति के कष्ट के कारण मैं बहुत दुखी हूँ. हे मुनिश्रेष्ठ! कृपा करके आप उसे राक्षस योनि से मुक्ति का कोई उत्तम उपाय बतायें.&quot;
समस्त वृत्तान्त सुनकर मुनि श्रृंगी ने कहा, &quot;हे पुत्री! चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम कामदा एकादशी है. उसके व्रत करने से प्राणी के सभी मनोरथ शीघ्र ही पूर्ण हो जाते हैं. यदि तू उसके व्रत के पुण्य को अपने पति को देगी तो वह सहज ही राक्षस योनि से मुक्त हो जायेगा एवं राजा का शाप श्राप शान्त हो जायेगा.&quot;
ऋषि के कहे अनुसार ललिता ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया तथा&amp;nbsp;द्वादशी&amp;nbsp;के दिन ब्राह्मणों के समक्ष अपने व्रत का फल अपने पति को दे दिया और ईश्वर से प्रार्थना करने लगी, &quot;हे प्रभु! मैंने जो यह उपवास किया है, उसका फल मेरे पतिदेव को मिले, जिससे उनकी राक्षस योनि से शीघ्र ही मुक्ति हो.&quot;
एकादशी का फल देते ही उसका पति राक्षस योनि से मुक्त हो गया और अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त हुआ. वह अनेक सुन्दर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलङ्कृत होकर पहले की भाँति ललिता के साथ विहार करने लगा. कामदा एकादशी के प्रभाव से वह पहले की भाँति सुन्दर हो गया तथा मृत्यु के पश्चात् दोनों&amp;nbsp;पुष्पक विमान&amp;nbsp;पर बैठकर&amp;nbsp;विष्णुलोक&amp;nbsp;को चले गये.
हे अर्जुन! इस उपवास को विधानपूर्वक करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. इस व्रत के पुण्य से मनुष्य&amp;nbsp;ब्रह्महत्यादि&amp;nbsp;के पाप तथा राक्षस आदि योनि से मुक्त हो जाते हैं. संसार में इससे उत्तम दूसरा कोई व्रत नहीं है. इसकी कथा व माहात्म्य के श्रवण व पठन से अनन्त फलों की प्राप्ति होती है.
April Ekadashi 2026: अप्रैल में एकादशी कब-कब ? वरूथिनी और मोहिनी एकादशी की डेट जानें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Kamada, Ekadashi, Vrat, Katha:, कामदा, एकादशी, व्रत, की, संपूर्ण, कथा, पढ़ें, विष्णु, जी, का, मिलेगा, आशीर्वाद</media:keywords>
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        <title>Metformin Study Brain Effect: दिमाग पर भी असर करती है डायबिटीज की दवा मेटफॉर्मिन, नई स्टडी में बड़ा खुलासा</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/metformin-study-brain-effect-दिमाग-पर-भी-असर-करती-है-डायबिटीज-की-दवा-मेटफॉर्मिन-नई-स्टडी-में-बड़ा-खुलासा</link>
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        <description><![CDATA[ 
Metformin Study Brain Effect: डायबिटीज के इलाज में सालों से इस्तेमाल हो रही दवा मेटफॉर्मिन को लेकर एक नई स्टडी में बड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल अब तक माना जाता था कि यह दावा मुख्य रूप से लीवर या आंतों पर असर डालकर ब्लड शुगर कंट्रोल करती है. लेकिन नई रिसर्च में सामने आया है कि इसका असर दिमाग पर भी होता है. यह रिसर्च डायबिटीज के इलाज के तरीकों को समझने में अहम बदलाव मानी जा रही है और फ्यूचर में नई तरह की टारगेटेड दवाओं का रास्ता भी खोल सकती है.
स्टडी में क्या आया सामने?
अमेरिका के बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में पाया कि मेटफॉर्मिन दिमाग के एक खास हिस्से के जरिए ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है. यह रिसर्च जर्नल साइंस एडवांस में पब्लिश हुई है. इस स्टडी के अनुसार दिमाग का हिस्सा वेंट्रोमेडियल हाइपोथैलेमस शरीर में ग्लूकोज के संतुलन को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है और मेटफॉर्मिन इसी पर असर डालते हैं.
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कैसे काम करती है मेटफार्मिन दवा?
रिसर्चर्स के अनुसार Rap1 नाम का एक प्रोटीन इस प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब इस प्रोटीन की एक्टिविटी को कम किया गया तो मेटफार्मिन ब्लड शुगर को प्रभावित तरीके से कम कर पाए. इसके अलावा SF1 नाम के न्यूरॉन्स भी इस प्रक्रिया में सक्रिय पाए गए, जो दवा के असर को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं. वहीं इस स्टडी में जेनेटिक रूप से बदले गए चूहों पर प्रयोग किया गया है, जिन चूहों में आर Rap1 प्रोटीन नहीं था. उनमें मेटफार्मिन का असर नहीं दिखा और ब्लड शुगर लेवल में सुधार नहीं हुआ. वहीं जब मेटफार्मिन को सीधे दिमाग में दिया गया तो बहुत कम मात्रा में ब्लड शुगर तेजी से कम होता देखा गया.
रिसर्च से क्या हुआ साफ?
इस रिसर्च को लेकर रिसर्चर्स का मानना है कि उन्होंने यह भी जांच की कि वेंट्रोमीडियल हाइपोथैलेमस में कौन से सेल्स मेटफार्मिन के असर को मीडिएट करने में शामिल थे. वहीं रिसर्चर्स ने ब्रेन टिशु सैंपल का एनालिसिस करते हुए SF1 न्यूरॉन्स न्यूरॉन्स की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को मापा मेटफार्मिन ने उनमें से ज्यादातर में एक्टिविटी बढ़ाई. लेकिन सिर्फ तब जब Rap1 मौजूद था. रिसर्चर्स के अनुसार इस रिसर्च ने मेटफार्मिन के बारे में उनकी सोच बदल दी. यह सिर्फ लीवर या अंत में ही काम नहीं करता, यह दिमाग में भी काम करता है. उन्होंने पाया कि लीवर और आंतों को रिस्पॉन्ड करने के लिए दवा को ज्यादा कंसंट्रेशन की जरूरत होती है, लेकिन दिमाग बहुत कम लेवल पर रिएक्ट करता है.
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>April Panchak 2026: 13 अप्रैल से सावधान! वरुथिनी एकादशी पर &amp;apos;राज पंचक&amp;apos; का साया, भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां!</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/april-panchak-2026-13-अप्रैल-से-सावधान-वरुथिनी-एकादशी-पर-राज-पंचक-का-साया-भूलकर-भी-न-करें-ये-5-गलतियां</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/april-panchak-2026-13-अप्रैल-से-सावधान-वरुथिनी-एकादशी-पर-राज-पंचक-का-साया-भूलकर-भी-न-करें-ये-5-गलतियां</guid>
        <description><![CDATA[ Raj Panchak April 2026: क्या आप जानते हैं कि 13 अप्रैल 2026 की सुबह आपके जीवन के अगले 5 दिनों का भाग्य तय करने वाली है? इस दिन न केवल भगवान विष्णु की प्रिय वरुथिनी एकादशी है, बल्कि इसी दिन से &#039;राज पंचक&#039; की शुरुआत भी हो रही है. वैदिक ग्रंथ और ज्योतिष की गणना के अनुसार, जब एकादशी और पंचक एक साथ मिलते हैं, तो गगन मंडल में ऊर्जा का संतुलन पूरी तरह डगमगा जाता है.
यदि आपने इन 5 दिनों में अनजाने में भी कोई वर्जित कार्य किया, तो सुख-समृद्धि के घर में &#039;दुख के बादल&#039; मंडराने में देर नहीं लगेगी. आइए जानते हैं गरुड़ पुराण और प्राचीन संहिताओं के अनुसार इस समय के खौफनाक प्रभाव और उनसे बचने के वो अचूक तरीके जो आपकी ढाल बनेंगे.
13 अप्रैल: पंचांग का वो पन्ना, जो डरा भी रहा है और जगा भी रहा है!
पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल 2026, सोमवार को धनिष्ठा नक्षत्र और वरुथिनी एकादशी का मेल हो रहा है. यह कोई सामान्य तारीख नहीं है. ग्रंथों में इस संयोग को विशेष माना गया है. पंचांग के अनुसार-

राज पंचक प्रारंभ: 13 अप्रैल, सोमवार को सुबह 03:44 बजे से शुरू होगा.
दोपहर 04:04 तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रभावी हो जाएगा.

सबसे बड़ी चेतावनी: लोग इस बात से खुश हैं कि 14 अप्रैल को खरमास खत्म हो रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि पंचक 17 अप्रैल दोपहर 12:02 तक आपका पीछा नहीं छोड़ेगा. इसका मतलब है कि शुभ कार्य चाहकर भी शुरू नहीं हो पाएंगे.
नक्षत्रों का &#039;खतरनाक जाल&#039;: जानें किस मोड़ पर खड़ा है आपका भाग्य?
पंचक के दौरान चंद्रमा 5 ऐसे नक्षत्रों से गुजरता है जो जीवन के अलग-अलग हिस्सों पर &#039;सर्जिकल स्ट्राइक&#039; करते हैं. ज्योतिष के अनुसार इनका प्रभाव इस प्रकार है:

धनिष्ठा नक्षत्र (अग्नि का खौफ): इस नक्षत्र के दौरान अग्नि का भय सबसे अधिक रहता है. शास्त्र कहते हैं कि इस समय घास, लकड़ी या कोई भी ईंधन इकट्ठा करना साक्षात आग को न्योता देना है.
शतभिषा नक्षत्र (कलह का योग): यह नक्षत्र रिश्तों में जहर घोलने का काम करता है. इस दौरान बिना बात के ऐसे वाद-विवाद होते हैं जो कोर्ट-कचहरी तक पहुंच सकते हैं.
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (बीमारियों का साया): इसे &#039;रोग कारक&#039; नक्षत्र माना गया है. इस समय शुरू हुई बीमारी लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ती और शरीर को अंदर से खोखला कर सकती है.
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (आर्थिक दंड): इस नक्षत्र में की गई छोटी सी लापरवाही भारी धन-हानि या कानूनी दंड (Penalty) का कारण बनती है.
रेवती नक्षत्र (कंगाली की आहट): इस नक्षत्र में धन हानि की संभावना सबसे ज्यादा होती है. विशेषकर घर की छत डलवाना इस समय वर्जित माना गया है.

गरुड़ पुराण की खौफनाक चेतावनी
सबसे ज्यादा डराने वाली बात पंचक में होने वाली मृत्यु है. शास्त्रों और गरुड़ पुराण के अनुसार, इसे &#039;वंश अनिष्ट&#039; माना गया है. ऐसी मान्यता है कि अगर इस समय शांति न की गई, तो उस परिवार या कुटुंब में 5 और मृत्यु का योग बन सकता है.
मृत्यु के समय करें ये &#039;महा-उपाय&#039; (शास्त्रीय विधि):यदि किसी अपने की मृत्यु पंचक में हो जाए, तो अंतिम संस्कार से पहले यह विधि अपनाना अनिवार्य है. भूमि शुद्ध कर कुश (घास) और यव (जौ) के आटे से मनुष्य के आकार की 5 प्रतिमाएं बनाएं.&amp;nbsp; इन प्रतिमाओं पर लेपन कर &#039;प्रेतवाहाय नमः&#039;, &#039;प्रेतसखायै नमः&#039; आदि मंत्रों से पूजन करें.&amp;nbsp;
प्रतिमाओं को रखने का स्थान भी जान लें, पहली प्रतिमा सिर पर, दूसरी दक्षिण पसलियों पर, तीसरी बांयी पसलियों पर, चौथी नाभि पर और पांचवीं पैरों पर रखें. इसके बाद ही शव का दाह संस्कार करें ताकि दोष वहीं समाप्त हो जाए.
शास्त्रीय पंचक शांति: मंत्र जो काल को भी टाल दें!
मृत्यु के दोष को पूरी तरह खत्म करने के लिए 11वें या 12वें दिन नदी तट या तीर्थ स्थान पर जाकर विशेष शांति करानी चाहिए.
नक्षत्रों के अनुसार शक्तिशाली वेद मंत्र:

धनिष्ठा के लिए: ॐ वसुभ्यो नमः
शतभिषा के लिए: ॐ वरुणाय नमः
पूर्वाभाद्रपद के लिए: ॐ अजैकपदे नमः
उत्तरभाद्रपद के लिए: ॐ अहिर्बुधाय नमः
रेवती के लिए: ॐ पूषणे नमः

वरुथिनी एकादशी और राज पंचक: क्या करें और क्या नहीं? (Do&#039;s &amp;amp; Don&#039;ts)
इस बार एकादशी और पंचक का दुर्लभ योग बन रहा है, इसलिए इन नियमों का पालन कर सकते हैं-



वर्जित कार्य
होने वाला नुकसान


दक्षिण दिशा की यात्रा
यह यम की दिशा है, यात्रा में दुर्घटना या भारी हानि का योग बनता है.


नई चारपाई या बिस्तर
विद्वानों के अनुसार इससे कोई बड़ा संकट या मानसिक बीमारी आ सकती है.


घर की छत डलवाना
विशेषकर रेवती नक्षत्र में ऐसा करने से घर में कभी लक्ष्मी नहीं टिकती और क्लेश रहता है.


नख और केश काटना
शास्त्र कहते हैं कि वर्षवृद्धि (जन्मदिन) या विशेष पर्वों पर बाल-नाखून काटना, मांस खाना और कलह करना वर्जित है.



सीक्रेट: क्या राज पंचक हमेशा बुरा होता है?
यहां एक सकारात्मक मोड़ भी है! सोमवार से शुरू होने के कारण इसे &#039;राज पंचक&#039; कहा जाता है. यद्यपि मांगलिक कार्य वर्जित हैं, लेकिन जो लोग सरकारी नौकरी, राजनीति, प्रशासनिक कार्य या संपत्ति की डीलिंग से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय उन्नति के द्वार खोल सकता है. बशर्ते आप वरुथिनी एकादशी का व्रत रखें और भगवान विष्णु की शरण में रहें.
अति विशेष: 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी पर &#039;मार्कण्डेय ऋषि&#039; की प्रार्थना करना और दूध का सेवन करना आयु और आरोग्य की वृद्धि करता है.
Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी 2026 में कब ? नोट करें डेट, पितृ दोष से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ दिन




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>April, Panchak, 2026:, अप्रैल, से, सावधान, वरुथिनी, एकादशी, पर, राज, पंचक, का, साया, भूलकर, भी, न, करें, ये, गलतियां</media:keywords>
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        <title>Jewar Airport: जेवर एयरपोर्ट से 200 किलोमीटर की रेंज में हैं ये बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस, जरूर करें एक्सप्लोर</title>
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        <description><![CDATA[ Jewar Airport :&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश का सबसे प्रतिष्ठित एयरपोर्ट नोएडा का जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अब पूरी तरह से संचालन के लिए तैयार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इसका उद्घाटन कर दिया है. यह एयरपोर्ट ग्रेटर नोएडा के पास स्थित है और दिल्ली से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर है. जेवर एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा हो चुका है और इसे कुल पांच चरणों में विकसित किया जाएगा. इस एयरपोर्ट पर 3900 मीटर लंबा रनवे है, साथ ही आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और ऑल-वेदर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है.
अब NCR और आसपास के जिलों में रहने वाले लोगों को फ्लाइट लेने के लिए दिल्ली जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस नए एयरपोर्ट से 200 किलोमीटर के अंदर कई बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशंस की यात्रा कर सकते हैं. जेवर एयरपोर्ट के खुलने के बाद आप आसानी से कई बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस घूम सकते हैं. तो आइए जानते हैं जेवर एयरपोर्ट से &amp;nbsp;200 किलोमीटर के अंदर कौन-कौन से बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस हैं. जिन्हें आप वीकेंड या छोटे ट्रिप में एक्सप्लोर कर सकते हैं.&amp;nbsp;
जेवर एयरपोर्ट से 200 किलोमीटर के अंदर बेहतरीन टूरिस्ट प्लेस
1. आगरा - अगर आप प्यार और इतिहास के मेल को देखना चाहते हैं, तो आगरा सबसे बेहतरीन जगह है. यहां आप ताजमहल का देख सकते हैं, जो दुनियाभर में प्यार का प्रतीक माना जाता है. जेवर एयरपोर्ट से आगरा की दूरी लगभग 139 किलोमीटर है. यहां से यात्रा का समय 2 से 2.5 घंटे का है. जिसका मार्ग यमुना एक्सप्रेसवे से है. अगर आपके पास अपना वाहन है, तो आप एक दिन में ताजमहल और आगरा के अन्य प्रमुख स्थलों का आनंद ले सकते हैं. यह ट्रिप खासतौर पर फैमिली और लव पार्टनर के लिए परफेक्ट है.&amp;nbsp;
2. मथुरा-वृंदावन - अगर आपकी आध्यात्मिक यात्रा ज्यादा पसंद करते हैं, तो मथुरा और वृंदावन आपके लिए सबसे अच्छी जगह हैं. भगवान कृष्ण से जुड़े इन पवित्र स्थलों की यात्रा शांति और आध्यात्मिक अनुभव देती है. जेवर एयरपोर्ट से वृंदावन लगभग 87 किलोमीटर, 1.5 घंटे दूर है और जेवर एयरपोर्ट से मथुरा लगभग 90 किलोमीटर, 1.5 घंटे दूर है. यहां आप मंदिर दर्शन कर सकते हैं. धार्मिक उत्सवों का आनंद ले सकते हैं.&amp;nbsp;
3. अलीगढ़ - अलीगढ़ अपनी पीतल नगरी और ऐतिहासिक धरोहर के लिए फेमस है. जेवर एयरपोर्ट से इसकी दूरी लगभग 24-25 किलोमीटर, 1 घंटे से कम है. यहां आप अलीगढ़ किला, शेखा पक्षी अभयारण्य, तीर्थधाम मंगलायतन, जामा मस्जिद, खेरेश्वर मंदिर घूम सकते हैं. यह जगह छोटे और आरामदायक ट्रिप के लिए बिल्कुल सही है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - पहली बार विदेश घूमने जा रहे हैं, तो इन 4 गलतियों से बचें, वरना खराब हो सकता है ट्रिप
4. ऋषिकेश - अगर आप नेचर और एडवेंचर के शौकीन हैं, तो ऋषिकेश एक बेहतरीन ऑप्शन है. जेवर एयरपोर्ट से ऋषिकेश की दूरी 290 किलोमीटर है. यहां से यात्रा का समय 4-5 घंटे है. &amp;nbsp;यहां आप त्रिवेदी घाट पर गंगा आरती, राफ्टिंग, आयुर्वेदिक मसाज इंजॉय कर सकते हैं. यहां का शांत वातावरण और नदी किनारे की खूबसूरती आपके ट्रिप को यादगार बना देगी.&amp;nbsp;
5. नीमराना - अगर आप इतिहास और एडवेंचर दोनों का मजा लेना चाहते हैं, तो नीमराना (राजस्थान) एक शानदार ऑप्शन है. जेवर एयरपोर्ट से इसकी दूरी 140-150 किलोमीटर है. यहां यात्रा का समय 2-3 घंटे है. नीमराना में आप नीमराना फोर्ट पैलेस घूम सकते हैं और यहां की ऐतिहासिक बावड़ियों और जिप लाइनिंग का अनुभव भी ले सकते हैं. यह जगह छोटे एडवेंचर ट्रिप और परिवारिक यात्रा दोनों के लिए परफेक्ट है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Travel In War Zone: आप भी युद्ध प्रभावित इलाकों में फंसे हैं तो न हों परेशान, फौरन अपनाएं ये 5 &#039;सर्वाइवल&#039; रूल्स! ]]></description>
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        <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:30:05 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Painkiller Infused Ice Cream : कितनी कारगर हैं पेनकिलर वाली आइसक्रीम, जानें ये सेहत के लिए कितनी खतरनाक?</title>
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        <description><![CDATA[ Painkiller Infused Ice Cream: आजकल सोशल मीडिया पर एक अजीब लेकिन काफी अट्रैक्टिव ट्रेंड देखने को मिलते हैं. यह नया ट्रेंड पेनकिलर मिली आइसक्रीम है. सुनने में यह नया आइडिया बहुत अलग और मजेदार लग रहा है, जिसमें एक तरफ ठंडी-ठंडी आइसक्रीम का टेस्ट और दूसरी तरफ सिरदर्द में राहत मिलती है. इसमें मजा और इलाज के एक साथ है, लेकिन कई लोगों के मन में यह कंफ्यूजन है कि यह सच में इतनी अच्छी है जितनी लगती है.
यह ट्रेंड नीदरलैंड से शुरू हुआ और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया. कई लोग इसे एक आसान और आरामदायक इलाज मान रहे हैं. वहीं डॉक्टरों का कहना है कि यह जितना आसान दिखता है,उतना सुरक्षित नहीं है, ऐसे में आइए जानते हैं कि पेनकिलर वाली आइसक्रीम कितनी कारगर हैं और ये सेहत के लिए कितनी खतरनाक है.&amp;nbsp;
पेनकिलर वाली आइसक्रीम कितनी कारगर हैं
पेनकिलर वाली आइसक्रीम ज्यादा कारगर नहीं मानी जा रही है. सुनने में यह आइडिया अच्छा लगता है, लेकिन मेडिकल के अनुसार इसमें कई बड़ी समस्याएं है. आइसक्रीम को लोग अक्सर खुशी, आराम और सुकून से जोड़ते हैं. कहा जाता है कि तनाव हो या थकान एक स्कूप आइसक्रीम मूड बेहतर कर देती है. ऐसे में अगर इसमें दवा मिला दी जाए, तो यह दो फायदे एक साथ जैसा लगता है. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि यहीं से समस्या शुरू होती है. दवाएं खाने के लिए नहीं बल्कि इलाज के लिए बनाई जाती हैं. उन्हें एक निश्चित तरीके और मात्रा में लेना जरूरी होता है. जब इन्हें खाने की चीजों में मिलाया जाता है तो उनका असर और सुरक्षा दोनों सवालों में आ जाता हैं.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - Anal Cancer Symptoms: टॉयलेट में आता है खून तो सिर्फ पाइल्स नहीं हो सकता है एनल कैंसर, जानें कितना खतरनाक?
पेनकिलर वाली आइसक्रीम सेहत के लिए कितनी खतरनाक है
1. पेनकिलर वाली आइसक्रीम सेहत के लिए कई कारणों से खतरनाक है. जब आप कोई गोली लेते हैं तो उसकी मात्रा पहले से तय होती है. डॉक्टर आपकी उम्र, वजन और बीमारी के हिसाब से सही डोज देते हैं. लेकिन अगर वही दवा आइसक्रीम में मिल जाए तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि आपने कितनी दवा ली. ज्यादा खाने पर ओवरडोज का खतरा हो सकता है.
2. बार-बार पेनकिलर लेने से सिरदर्द और बढ़ सकता है. इसे मेडिकेशन ओवरयूज हेडेक कहा जाता है. अगर आइसक्रीम के जरिए लोग बार-बार दवा ली जाए, तो सिरदर्द ठीक होने की जगह और बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
3. दवाएं इस तरह बनाई जाती हैं कि शरीर पर वह सही तरीके से असर कर सके, लेकिन जब इन्हें आइसक्रीम जैसे खाने में मिलाया जाता है, तो दवा ठीक से शरीर में नहीं घुल पाती है. दवा का असर कम या अनियमित हो सकता है. साथ ही दवा की क्वालिटी भी प्रभावित हो सकती है.&amp;nbsp;
4. कुछ लोगों के लिए आइसक्रीम ही सिरदर्द का कारण बन सकती है, खासकर माइग्रेन के मरीज के लिए या जिन्हें ठंडी चीजों से दिक्कत होती है और ज्यादा शुगर या फैट लेने वालों में सिरदर्द का कारण बन सकता है. ऐसे में पेनकिलर वाली आइसक्रीम उल्टा असर कर सकती है. इससे राहत की जगह दर्द बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
यह भी पढ़ें - &amp;nbsp; Kidney Problems: फूले हुए चेहरे को न करें इग्नोर, हो सकता है गुर्दे की बीमारी का पहला संकेत
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 18:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Morning Routine Mistakes: सुबह उठते ही ये गलतियां करते हैं 99% लोग, डॉक्टर ने बताया&amp; किन बातों का रखें ध्यान</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/morning-routine-mistakes-सुबह-उठते-ही-ये-गलतियां-करते-हैं-99-लोग-डॉक्टर-ने-बताया-किन-बातों-का-रखें-ध्यान</link>
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        <description><![CDATA[ Morning Routine Mistakes: आजकल परफेक्ट मॉर्निंग रूटीन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. सुबह जल्दी उठना, वर्कआउट करना, तुरंत ईमेल चेक करना और कॉफी पीना देखने में यह सब हेल्दी और प्रोडक्टिव लगता है. हालांकि, डॉक्टरों के अनुसार यही आदत कई बार शरीर पर उल्टा असर डालती है. डॉक्टर बताते हैं की असली समस्या इन आदतों में नहीं बल्कि इन्हें करने के तरीके और तेजी में हैं.
इंसान का शरीर नींद की अवस्था से एकदम एनर्जेटिक अवस्था में नहीं जाता है. उसे एक ब्रिज की जरूरत होती है, जब वह ब्रिज नहीं मिलता तो अच्छी आदतें भी ताकत के बजाय तनाव बढ़ा सकती है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि अचानक तनाव एक्टिव होने से दिन की शुरुआत में ही कॉर्टिसोल का लेवल बढ़ सकता है. जिससे इंसान का मूड और फोकस इफेक्ट होते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सुबह उठते ही 99 प्रतिशत लोग कौन सी गलतियां करते हैं और डॉक्टरों ने किन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा है.&amp;nbsp;
ये भी पढ़ें-Isometric Exercise: क्या होती है आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह कितनी फायदेमंद?
जल्दबाजी में दिन की शुरुआत बनती है समस्या&amp;nbsp;
कई लोग सुबह उठते ही अलार्म बंद करके सीधे फोन देखने लगते हैं या तुरंत काम में लग जाते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा करने से दिमाग को अचानक हाई अलर्ट मोड में जाना पड़ता है. इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन, सिर दर्द या मानसिक थकान महसूस हो सकती है.&amp;nbsp;
प्रोडक्टिव दिखने की चाह बढ़ा रही स्ट्रेस&amp;nbsp;
इसके अलावा डॉक्टर बताते हैं कि आजकल मॉर्निंग रूटीन को लेकर एक दबाव बन गया है कि जितना ज्यादा काम उतनी अच्छी शुरुआत. लेकिन शरीर इस तरह काम नहीं करता है, बिना तैयारी के तुरंत वर्कआउट या लगातार नोटिफिकेशन देखना शरीर में स्ट्रेस को बढ़ा सकता है. ऐसे में सुबह की शुरुआत शांत और संतुलित होना बहुत जरूरी होती है.&amp;nbsp;
रात की नींद का असर सुबह पर पड़ता है&amp;nbsp;
अगर रात की नींद पूरी नहीं होती या देर तक फोन इस्तेमाल किया जाता है तो सुबह की शुरुआत खराब हो जाती है. खराब नींद का असर याददाश्त, मूड और डिसीजन लेने की क्षमता पर पड़ता है. इसलिए अच्छी सुबह के लिए अच्छी नींद जरूरी है. वहीं कई लोग उठते ही सबसे पहले कॉफी पीते हैं, लेकिन डॉक्टर बताते हैं 6 से 8 घंटे की नींद के बाद शरीर हल्का डिहाइड्रेट हो जाता है. ऐसे में पहले पानी पीना ज्यादा जरूरी होता है. पानी पीने से दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है और थकान भी कम होती है.&amp;nbsp;
शरीर को चाहिए धीरे-धीरे शुरुआत&amp;nbsp;
डॉक्टर बताते हैं कि सुबह उठने के बाद पहला एक घंटा शरीर के लिए बहुत अहम होता है. इस समय शरीर का सर्केडियन रिदम सेट हो जाता है जो पूरे दिन की एनर्जी और मूड को प्रभावित करता है. अगर इस समय जल्दबाजी की जाए तो दिन भर थकान और फोकस की कमी महसूस हो सकती है.&amp;nbsp;
कैसी होनी चाहिए सही मॉर्निंग रूटीन?
डॉक्टर के अनुसार एक हेल्दी सुबह के लिए लोगों को कुछ आसान आदतें अपनानी चाहिए. जैसे धीरे-धीरे उठे और कुछ मिनट शांत बैठें. सबसे पहले पानी पिएं, हल्की धूप लें, स्ट्रेचिंग से शुरुआत करें फिर वर्कआउट करें. वहीं सुबह उठते ही फोन इस्तेमाल करने से बचे और दिन की शुरुआत आसान और शांत काम से करें.
ये भी पढ़ें-Are Black Plastic Containers Safe: प्लास्टिक के काले डब्बों में पैक करवाते हैं खाना, जानिए सेहत के लिए यह कितना खतरनाक?
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 18:30:10 +0530</pubDate>
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        <title>New Covid Variant: 75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट, जानें इससे डरने की जरूरत कितनी?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/new-covid-variant-75-म्यूटेशन-के-साथ-आया-कोरोना-का-नया-वैरिएंट-जानें-इससे-डरने-की-जरूरत-कितनी</link>
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        <description><![CDATA[ New Covid Variant : ऐसा लगने लगा था कि कोरोना महामारी अब हर जगह से धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. लोग बिना डर के बाहर निकल रहे थे. लोगों का मास्क लगाना बिल्कुल बंद हो गया था और अस्पतालों में भी पहले जैसी भीड़ नहीं थी, लेकिन अब एक नए कोविड वैरिएंट की खबर फिर से लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए वैरिएंट में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं. यह वही हिस्सा होता है जिससे वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं में जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह वैरिएंट हमारी इम्युनिटी को कुछ हद तक धोखा भी दे सकता है और इसके स्पाइक प्रोटीन वायरस को हमारे शरीर में घुसने में मदद करता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि 75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है और इससे डरने की जरूरत कितनी है.&amp;nbsp;
75 म्यूटेशन के साथ आया कोरोना का नया वैरिएंट क्या है?
यह नया कोरोना वैरिएंट पहली बार नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था. इसमें बहुत ज्यादा म्यूटेशन हैं. यह पहले के वैरिएंट (जैसे ओमिक्रॉन) से अलग है. यह शरीर की इम्युनिटी से कुछ हद तक बच सकता है. इसका मतलब यह है कि अगर आपने वैक्सीन लगवाई हो या पहले कोरोना हो चुका हो, फिर भी आपको दोबारा संक्रमण हो सकता है. अब वायरल थोड़ा बदल गया है इसलिए शरीर उसे तुरंत पहचान नहीं पाता है और इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.&amp;nbsp;
इस नए वैरिएंट से डरने की जरूरत कितनी है?
पिछले कुछ सालों में बहुत से लोगों में हाइब्रिड इम्युनिटी बन चुकी है. विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन और पहले हुए संक्रमण दोनों का असर मिलकर शरीर को कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं. इसके अलावा अब इलाज के तरीके पहले से बेहतर हैं, हॉस्पिटल ज्यादा तैयार हैं और टेस्टिंग दवाएं भी आसानी से उपलब्ध हैं. इसलिए अगर मामलों में बढ़ोतरी होती है तो उसका असर पहले जितना खतरनाक होने की संभावना कम है. वहीं ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण हल्के या मीडियम ही देखे जा सकते हैं. बुखार, खांसी, थकान, शरीर में दर्द और हल्की कमजोरी जैसे लक्षण सामने आते हैं. ज्यादातर लोग बिना हॉस्पिटल जाए, घर पर आराम और सामान्य इलाज से ठीक हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
हर किसी के लिए जोखिम एक जैसा नहीं होता है. कुछ लोगों को अभी भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. इसमें बुजुर्ग, पहले से किसी बीमारी (जैसे डायबिटीज या दिल की बीमारी) से पीड़ित लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग शामिल हैं. इन लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना अब एंडेमिक हो चुका है, यानी यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा बल्कि फ्लू की तरह समय-समय पर आता रहेगा. कभी इसके मामले बढ़ेंगे, तो कभी कम हो जाएंगे.&amp;nbsp;
क्या सावधानियां रखें?
वैक्सीन और अन्य सावधानियां आज भी कोविड से बचाव के सबसे जरूरी हैं. बूस्टर डोज लेना शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखता है और गंभीर बीमारी होने के जोखिम को कम करता है. इसके अलावा, अगर किसी में लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत टेस्ट करवाना संक्रमण को जल्दी पहचानने और फैलने से रोकने में मदद करता है. भीड़ भाड़ वाली जगहों में सावधानी रखें. मास्क पहन कर जाएं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 18:30:09 +0530</pubDate>
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        <title>Panic Attack Treatment: क्या होता है पैनिक अटैक, जानें इससे निपटने के लिए क्या हैं सबसे आसान तरीके?</title>
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        <description><![CDATA[ Panic Attack Treatment: क्या होता है पैनिक अटैक, जानें इससे निपटने के लिए क्या हैं सबसे आसान तरीके? ]]></description>
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 18:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>Wardrobe Organization Tips: घर की अलमारी है या कूड़ेदान... कपड़ों को ऐसे करेंगे ऑर्गनाइज तो आप भी कहलाएंगे स्मार्ट</title>
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        <description><![CDATA[ How To Organize A Messy Closet Easily: घर की अलमारी अगर खोलते ही कपड़े बाहर गिरने लगें, तो समझ लीजिए कि अब उसे ठीक करने का समय आ गया है. बिखरी हुई अलमारी न सिर्फ समय खराब करती है, बल्कि रोज के काम को भी मुश्किल बना देती है. थोड़ी-सी स्मार्ट प्लानिंग से आप अपनी वॉर्डरोब को ऐसा बना सकते हैं कि सब कुछ आसानी से मिल जाए और लुक भी साफ-सुथरा लगे. चलिए आपको इसके लिए कुछ टिप्स बताते हैं.&amp;nbsp;
बेकार कपड़ों को हटाना
woodenstreet की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहला कदम है कि बेकार कपड़ों को हटाना. जो कपड़े महीनों से नहीं पहने, उन्हें अलग कर दें. इन्हें दान करने से न सिर्फ जगह खाली होगी, बल्कि किसी जरूरतमंद के काम भी आएंगे. इससे आपकी अलमारी हल्की और मैनेज करने में आसान हो जाएगी.
यूज के हिसाब से रखने की जरूरत
इसके बाद कपड़ों को उनके इस्तेमाल के हिसाब से रखें. ऑफिस, कैजुअल और पार्टी वियर को अलग-अलग सेक्शन में रखना बहुत काम आता है. &amp;nbsp;इससे सुबह की जल्दी में आपको सब कुछ आसानी से मिल जाता है और बार-बार पूरा वार्डरोब उलटने की जरूरत नहीं पड़ती.&amp;nbsp;
हुक्स का इस्तेमाल
छोटी-छोटी चीजों के लिए हुक्स का इस्तेमाल करना भी एक स्मार्ट तरीका है. बेल्ट, टाई, स्कार्फ या बैग को हुक पर टांगने से ये चीजें इधर-उधर नहीं बिखरतीं और जल्दी मिल जाती हैं. इससे जगह भी बचती है और अलमारी ज्यादा व्यवस्थित दिखती है.
रैक्स जोड़ना एक अच्छा विकल्प
अगर आपकी अलमारी में जगह कम पड़ रही है, तो रैक्स जोड़ना एक अच्छा विकल्प है. अलमारी के अंदर ऊपर-नीचे की खाली जगह को इस्तेमाल करके आप ज्यादा सामान स्टोर कर सकते हैं. इससे हर चीज के लिए अलग जगह बन जाती है और भीड़भाड़ कम होती है. ड्रॉअर ऑर्गनाइजर भी काफी मददगार होते हैं छोटे-छोटे सेक्शन बनाकर आप मोजे, ज्वेलरी या अंडरगारमेंट्स को आसानी से व्यवस्थित रख सकते हैं. इससे चीजें खोजने में समय नहीं लगता और सब कुछ एक जगह पर रहता है.
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लाइटिंग का रोल
लाइटिंग का भी बड़ा रोल होता है. अच्छी रोशनी से न सिर्फ अलमारी साफ दिखती है, बल्कि कपड़े चुनना भी आसान हो जाता है. खासकर सुबह की जल्दी में यह काफी काम आता है. इसके अलावा, अलमारी की ऊपरी और साइड वाली जगह को खाली न छोड़ें. इन हिस्सों का सही इस्तेमाल करके आप और ज्यादा सामान रख सकते हैं. अगर सही तरीके से ऑर्गनाइज किया जाए, तो छोटी अलमारी भी बड़ी लगने लगती है.
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 06:30:06 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Kamada Ekadashi 2026: हिंदू नववर्ष की पहली कामदा एकादशी 29 मार्च को, करें ये काम, सालभर मिलता है सुख&amp;धन!</title>
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        <description><![CDATA[ Kamada Ekadashi 2026: सनातन धर्म में कामदा एकादशी का खास महत्व है. यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन जग के नाथ भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. साथ ही एकादशी पर फलाहार व्रत रखा जाता है. इस व्रत को करने से साधक को मनचाहा वरदान मिलता है. साथ ही जन्म-जन्मांतर में किए गए समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं.
इस बार ये एकादशी व्रत 29 मार्च&amp;nbsp; को पड़ रही है. कामदा एकादशी का व्रत जिस कामना से किया जाता है. वो पूरी होती है. पारिवारिक जीवन की समस्याएं भी खत्म हो जाती हैं. कामदा एकादशी का जिक्र विष्णु पुराण में किया गया है. राम नवमी के बाद ये पहली एकादशी होती है. कामदा एकादशी को सांसारिक कामनाएं पूरी करने वाला व्रत माना गया है. इसलिए इस व्रत को बेहद खास माना गया है. कामदा एकादशी को फलदा एकादशी भी कहते हैं.
कामदा एकादशी
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 28 मार्च को सुबह 08:45 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 29 मार्च को सुबह 07:46 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार,29 मार्च को कामदा एकादशी मनाई जाएगी. इसी दिन इसका व्रत और भगवान विष्णु का पूजन भी किया जाएगा.
पूजा विधि

शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है.
व्रत के एक दिन पहले एक बार भोजन करके भगवान का स्मरण किया जाता है.
कामदा एकादशी व्रत के दिन स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए.
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में फल, फूल, दूध, तिल और पंचामृत आदि सामग्री का प्रयोग करना चाहिए.
एकादशी व्रत की कथा सुनने का भी विशेष महत्व है. द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए.

कामदा एकादशी का महत्व
कामदा एकादशी व्रत के पुण्य से जीवात्मा को पाप से मुक्ति मिलती है. यह एकादशी कष्टों का निवारण करने वाली और मनोवांछित फल देने वाली होने के कारण फलदा और कामना पूर्ण करने वाली होने से कामदा कही जाती है.
इस एकादशी की कथा व महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने पाण्डु पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था. इससे पूर्व राजा दिलीप को यह महत्व वशिष्ठ मुनि ने बताया था. चैत्र मास में भारतीय नव संवत्सर की शुरुआत होने के कारण यह एकादशी अन्य महीनों की अपेक्षा और अधिक खास महत्व रखती है. शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य कामदा एकादशी का व्रत करता है वह प्रेत योनि से मुक्ति पाता है.
दशमी से ही शुरू हो जाती है तैयारी
कामदा एकादशी व्रत के एक दिन पहले से ही यानी दशमी की दोपहर में जौ, गेहूं और मूंग आदि का एक बार भोजन करके भगवान की पूजा की जाती है. दूसरे दिन यानी एकादशी को सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद व्रत और दान का संकल्प लिया जाता है.
पूजा करने के बाद कथा सुनकर श्रद्धा अनुसार दान किया जाता है. इस व्रत में नमक नहीं खाया जाता है. सात्विक दिनचर्या के साथ नियमों का पालन कर के व्रत पूरा किया जाता है. इसके बाद रात में भजन कीर्तन के साथ जागरण किया जाता है.
क्या करें
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. तुलसी, फल-फूल, धूप, दीप और प्रसाद चढ़ाकर भगवान विष्णु की आराधना करें. इस दिन निराहार (बिना खाए) या फलाहार व्रत रखने की परंपरा है. भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें , क्योंकि इस दिन श्रीहरि की भक्ति में लीन रहना शुभ माना जाता है. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन दान करना बहुत पुण्यदायी होता है. इस दिन भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन के साथ जागरण करने से विशेष लाभ मिलता है. द्वादशी के दिन ब्राह्मण भोजन कराने के बाद खुद सात्त्विक भोजन करें.
क्या नहीं करें
इस दिन चावल, गेहूं, मसूर दाल, प्याज-लहसुन और मांसाहार से परहेज करें. व्रत के दौरान मन और वाणी की शुद्धता बनाए रखें. इस दिन सत्य बोलना और अच्छे आचरण का पालन करना जरूरी होता है. वाणी पर संयम रखना एकादशी व्रत का मुख्य नियम है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शरीर के किसी भी अंग को काटना वर्जित है. खाने की बर्बादी न करें और भोजन को आदरपूर्वक ग्रहण करें.
राशि अनुसार कामदा एकादशी पर करें इन चीजों का दान

मेष राशि- कामदा एकादशी के दिन लाल रंग की मिठाई और लाल रंग के मौसमी फलों मसूर दाल का दान करें.
वृषभ राशि- चावल, गेहूं, चीनी, दूध आदि चीजों का दान करें.
मिथुन राशि- गाय को चारा खिलाएं और सेवा करें. साथ ही जरूरतमंद लोगों को हरी सब्जियों का दान करें.
कर्क राशि- माखन, मिश्री, लस्सी, छाछ आदि चीजों का दान करें.
सिंह राशि- कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद राह चलते लोगों में लाल रंग के फल और शरबत बाटें.
कन्या राशि- विवाहित महिलाओं को हरे रंग की चूड़ियां दान में दें.
तुला राशि- भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद जरूरतमंदों के मध्य सफेद वस्त्रों का दान करें.
वृश्चिक राशि- मसूर दाल, लाल मिर्च, लाल रंग के फल आदि चीजों का दान करें.
धनु राशि- केसर मिश्रित दूध राहगीरों में बाटें. साथ ही पीले रंग के फल और खाने पीने की अन्य चीजों का भी दान कर सकते हैं.
मकर राशि- भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ गरीबों के मध्य धन का दान करें.
कुंभ राशि- कामदा एकादशी पर चमड़े के जूते-चप्पल, छतरी और काले वस्त्र का दान करें.
मीन राशि- केला, चने की दाल, बेसन, पीले रंग के वस्त्र का दान करें.

Shardiya Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि समाप्त, अब शारदीय नवरात्रि कब ? नोट करें डेट, तिथि कैलेंडर


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 06:30:05 +0530</pubDate>
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        <title>Lakme Fashion Week: लाल लहंगे में लाल परी बन तमन्ना भाटिया ने ढाया कहर, रैंप पर उतरते ही थम गईं सबकी नजरें!</title>
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        <description><![CDATA[ Tamannaah Bhatia Lakme Fashion Week Look: फैशन की दुनिया में जब भी कोई बड़ा इवेंट होता है, तो कुछ लुक्स ऐसे होते हैं जो लोगों की नजरों में बस जाते हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला Lakme Fashion Week में, जहां तमन्ना भाटिया ने डिजाइनर भूमिका शर्मा के लिए रैंप वॉक करते हुए सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनका लुक इतना दमदार था कि वहां मौजूद लोगों की नजरें उन पर टिक गईं.

तमन्ना ने इस दौरान कलेक्शन को पेश किया, जिसमें उन्होंने लाल रंग का बेहद खूबसूरत आउटफिट पहना था. यह लुक पारंपरिक और मॉडर्न स्टाइल का शानदार मेल था. इसमें भारतीय पहनावे की झलक तो थी ही, लेकिन साथ ही एक ऐसा नया टच भी था, जो इसे आज के दौर के लिए बिल्कुल परफेक्ट बनाता है. सबसे खास बात यह रही कि यह लुक ओवरडन नहीं था, बल्कि सादगी के साथ स्टाइल का बैलेंस बनाए हुए था.
&amp;nbsp;

Tamannaah Bhatia walks the ramp as the showstopper for Bhumika Sharma at Lakmē Fashion Week 2026 ❤️/2#Tamannaah #TamannaahBhatia pic.twitter.com/qev9E6xkR8
&amp;mdash; WV - Media (@wvmediaa) March 21, 2026




अगर उनके ब्यूटी लुक की बात करें, तो वह भी आउटफिट के साथ पूरी तरह मेल खाता नजर आया. चेहरे पर सॉफ्ट ग्लो, हल्के गुलाबी गाल, ब्राउन और पिंक टोन का लिप कलर और शार्प विंग्ड आईलाइनर ने उनके लुक को और निखार दिया. बालों को उन्होंने हल्के कर्ल्स में खुला रखा, जिससे पूरा लुक और भी नैचुरल और एलिगेंट लगा.
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हालांकि, इस पूरे लुक की सबसे खास बात उनकी ज्वेलरी रही. तमन्ना ने दो लेयर्ड स्टेटमेंट नेकलेस पहने, जिनमें खूबसूरत स्टोन्स जड़े हुए थे. दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने इसके साथ इयररिंग्स, चूड़ियां या रिंग्स कुछ भी नहीं पहना. यह एक बोल्ड स्टाइल चॉइस थी, लेकिन इसने उनके पूरे लुक को और भी खास बना दिया और फोकस पूरी तरह उनके नेकपीस और आउटफिट पर ही रहा.

अपने आउटफिट को लेकर तमन्ना ने भी कहा कि यह लहंगा उन्हें काफी कंफर्टेबल, फेमिनिन और मॉडर्न फील दे रहा था. उन्होंने बताया कि यह कलेक्शन उन महिलाओं के लिए है, जो त्योहारों या खास मौकों पर स्टाइलिश दिखना चाहती हैं, लेकिन साथ ही कंफर्ट से समझौता नहीं करना चाहतीं

डिजाइनर भूमिका शर्मा की &quot;Afterglow&quot; कलेक्शन भी इसी सोच का नतीजा है. इस कलेक्शन में लहंगा, साड़ी और अन्य फेस्टिव आउटफिट्स शामिल हैं, जो पारंपरिक भारतीय स्टाइल को मॉडर्न अंदाज के साथ पेश करते हैं.

आने वाले वेडिंग सीजन के लिए यह कलेक्शन एक परफेक्ट ऑप्शन माना जा रहा है. रैंप वॉक के बाद तमन्ना ने सोशल मीडिया पर भी इस लुक को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने इसे ऐसा बताया जो सादा, सुकून भरा और अपनी अलग चमक के साथ नजर आता है.
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        <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 06:30:04 +0530</pubDate>
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        <title>Kidney Health Tips: आपकी ये 5 मामूली आदतें चुपचाप सड़ा रही हैं किडनी, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती</title>
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        <description><![CDATA[ Kidney Health Tips: आपकी ये 5 मामूली आदतें चुपचाप सड़ा रही हैं किडनी, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 14:30:08 +0530</pubDate>
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        <title>COVID Cases In America: अमेरिका में अचानक बढ़ने लगे कोरोना के मामले, भारत को कितना खतरा?</title>
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        <description><![CDATA[ Will COVID Surge In US Affect India: अमेरिका में एक बार फिर कोरोना के मामलों में अचानक बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है. नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, वायरस का एक नया BA.3.2 वेरिएंट सामने आया है. CDC के अनुसार, 11 फरवरी तक BA.3.2 वेरिएंट 23 देशों में पाया गया है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह वेरिएंट इम्यून सिस्टम को आंशिक रूप से चकमा देने की क्षमता रखता है, जिससे दोबारा इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि मौजूदा स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं है. पिछले कुछ सालों में बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन ले चुके हैं या इंफेक्शन से गुजर चुके हैं, जिससे उनमें हाइब्रिड इम्यूनिटी विकसित हो चुकी है. यही वजह है कि भले ही इंफेक्शन बढ़े, लेकिन गंभीर मामलों की संभावना पहले की तुलना में कम हो सकती है.&amp;nbsp;
भारत में क्या होगी स्थिति?
अब सवाल यह उठता है कि क्या इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोरोना वायरस अब पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह एक एंडेमिक वायरस बन चुका है, यानी समय-समय पर इसके केस बढ़ते-घटते रहेंगे. हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ नए वेरिएंट के आने का मतलब यह नहीं है कि फिर से महामारी जैसी स्थिति बनेगी.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
Dr. S M Fayaz ने TOI को बताया कि कोरोना वायरस अब एक एंडेमिक बीमारी बन चुका है, यानी यह पूरी तरह खत्म नहीं होगा बल्कि समय-समय पर नए रूप में सामने आता रहेगा. डॉक्टर का कहना है कि नए वेरिएंट की वजह से इंफेक्शन के मामले बढ़ सकते हैं. लेकिन ज्यादातर मामलों में लक्षण हल्के से मध्यम रह सकते हैं, जैसे बुखार, खांसी और थकान. ऐसे लक्षण आमतौर पर घर पर ही संभाले जा सकते हैं. कुछ लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. बुजुर्ग, पहले से बीमार लोग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज इस इंफेक्शन से ज्यादा प्रभावित हो सकते है.
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घबराने की जरूरत नहीं
एक्सपर्ट का मानना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है. &amp;nbsp;हेल्थ सिस्टम अब पहले से ज्यादा तैयार है और टेस्टिंग, इलाज और वैक्सीनेशन के बेहतर इंतजाम मौजूद हैं. इसके बावजूद, निगरानी बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके. कोरोना मामलों को एक चेतावनी के तौर पर देखा जा सकता है. भारत में अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लापरवाही से हालात बदल सकते हैं. ऐसे में जरूरी है कि लोग वैक्सीनेशन, समय पर जांच और बेसिक सावधानियों को नजरअंदाज न करें, ताकि किसी भी नए खतरे से बचा जा सके.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 14:30:07 +0530</pubDate>
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        <title>Are Black Plastic Containers Safe: प्लास्टिक के काले डब्बों में पैक करवाते हैं खाना, जानिए सेहत के लिए यह कितना खतरनाक?</title>
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        <description><![CDATA[ Is It Safe To Reheat Food In Black Plastic: 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में जनहित से जुड़े मामलों पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने ढाबों,होटल, और अन्य स्थानों पर काले रंग के प्लास्टिक बर्तनों के यूज को लेकर चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि ये सामान्य प्लास्टिक नहीं होते हैं, इनको ज्य् इलेक्ट्रॉनिक कचरे या अन्य अवशिष्ट प्लास्टिक सामग्री से तैयार किया जाता है. घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि अगर इसमें गर्म खाना रखा जाता है, तो माइक्रोप्लास्टिक कण खाने में मिल सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं.&amp;nbsp;
इसको कैसे बनाया जाता है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, काले प्लास्टिक में अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट और इंडस्ट्रियल प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है. इसे आग से बचाने के लिए डेकाबीडीई जैसे फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिलाए जाते हैं. समस्या यह है कि ये केमिकल प्लास्टिक में पूरी तरह बंधे नहीं रहते और गर्म होने पर खाने में मिल सकते हैं, खासकर जब खाना गरम या तैलीय हो. इसके अलावा, इस प्लास्टिक में BPA और फ्थेलेट्स जैसे केमिकल भी पाए जाते हैं, जो हार्मोन को प्रभावित करने वाले तत्व माने जाते हैं. जब आप ऐसे डिब्बों में खाना गरम करते हैं या बार-बार इस्तेमाल करते हैं, तो ये केमिकल धीरे-धीरे शरीर में जमा हो सकते हैं और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं.
इसे भी पढ़ें -&amp;nbsp;Anal Cancer Symptoms: टॉयलेट में आता है खून तो सिर्फ पाइल्स नहीं हो सकता है एनल कैंसर, जानें कितना खतरनाक?
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
2024 की एक स्टडी में 200 से ज्यादा ब्लैक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का एनालिसिस किया गया, जिसमें करीब 85 प्रतिशत में टॉक्सिक फ्लेम रिटार्डेंट पाए गए. TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, &amp;nbsp;Dr Aravind Badiger के अनुसार, इन केमिकल्स के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. वहीं, Dr Sachin Trivedi बताते हैं कि BPA और फ्थेलेट्स जैसे तत्व न सिर्फ हार्मोनल गड़बड़ी पैदा करते हैं, बल्कि दिल की बीमारी, डायबिटीज और प्रजनन से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा, Prof Chintamani का कहना है कि ब्लैक प्लास्टिक से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक भी शरीर में पहुंचकर टॉक्सिक लोड बढ़ाते हैं, जिससे लंबे समय में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.&amp;nbsp;
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किन लोगों को ज्यादा दिक्कत?
एक्सपर्च यह भी चेतावनी देते हैं कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है. हालांकि अभी तक सीधे तौर पर कैंसर से इसका संबंध पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन इसके केमिकल्स को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है.एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि काले प्लास्टिक के डिब्बों की जगह ग्लास, स्टील या लकड़ी के बर्तन इस्तेमाल करें. खासकर खाने को गरम करने के लिए प्लास्टिक से बचना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है.
इसे भी पढ़ें -&amp;nbsp;Weekend Warrior Exercise: हफ्ते में सिर्फ 2 दिन एक्सरसाइज करके भी रह सकते हैं हेल्दी, जानें बेहद आसान तरीके
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>Are, Black, Plastic, Containers, Safe:, प्लास्टिक, के, काले, डब्बों, में, पैक, करवाते, हैं, खाना, जानिए, सेहत, के, लिए, यह, कितना, खतरनाक</media:keywords>
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        <title>Weekend Warrior Exercise: हफ्ते में सिर्फ 2 दिन एक्सरसाइज करके भी रह सकते हैं हेल्दी, जानें बेहद आसान तरीके</title>
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        <description><![CDATA[ Is Exercising Twice A Week Enough To Stay Healthy: अगर आप रोज एक्सरसाइज नहीं कर पाते और हफ्ते में सिर्फ 1-2 दिन ही समय निकाल पाते हैं, तो भी चिंता की बात नहीं है. नई रिसर्च बताती है कि हफ्ते में सिर्फ दो दिन सही तरीके से एक्सरसाइज करके भी आप खुद को हेल्दी रख सकते हैं और कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं. दरअसल, इसे &quot;वीकेंड वॉरियर&quot; स्टाइल कहा जाता है, जहां लोग हफ्ते के बाकी दिनों में व्यस्त रहने के कारण सिर्फ एक या दो दिन जमकर एक्सरसाइज करते हैं. स्टडी के मुताबिक, अगर आप हफ्ते में कुल मिलाकर 150 मिनट की मॉडरेट या तेज एक्सरसाइज कर लेते हैं, तो यह रोज थोड़ा-थोड़ा करने जितना ही फायदेमंद हो सकता है.&amp;nbsp;
क्या निकला स्टडी में?
Journal of the American Heart Association Study में पब्लिश रिसर्च में 93 हजार से ज्यादा लोगों के डेटा का एनालिसिस किया गया और पाया गया कि जो लोग हफ्ते में 1 से 2 दिन एक्सरसाइज करते हैं, उनमें हार्ट डिजीज, कैंसर और अन्य कारणों से मौत का खतरा काफी कम हो जाता है. खास बात यह है कि यह फायदा उन लोगों जितना ही देखा गया, जो पूरे हफ्ते एक्सरसाइज को फैलाकर करते हैं. अगर इसको आसान शब्दों में समझें तो जरूरी यह नहीं है कि आप हर दिन जिम जाएं, बल्कि यह ज्यादा जरूरी है कि आप हफ्ते भर में पर्याप्त एक्टिविटी पूरी करें. इसमें सिर्फ जॉगिंग या जिम ही नहीं, बल्कि तेज चलना, साइकिल चलाना, घर के काम करना या गार्डनिंग भी शामिल हो सकती है, बशर्ते आपकी एक्टिविटी की तीव्रता ठीक हो.
किन बातों का ध्यान रखना जरूरी?
अगर आप इस तरीके को अपनाना चाहते हैं, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जैसे वीकेंड पर 60-75 मिनट का कार्डियो सेशन करें, जिसमें वॉकिंग, रनिंग या साइक्लिंग शामिल हो सकती है. इसके साथ हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जोड़ सकते हैं. हालांकि, एक साथ ज्यादा एक्सरसाइज करने से शरीर पर दबाव भी पड़ सकता है. इसलिए शुरुआत धीरे-धीरे करें और एक्सरसाइज से पहले वार्म-अप जरूर करें. इससे चोट लगने का खतरा कम होता है और शरीर बेहतर तरीके से एक्टिविटी को संभाल पाता है.
एक्सपर्ट का मानना है कि आज की व्यस्त जिंदगी में हर किसी के लिए रोज एक्सरसाइज करना संभव नहीं होता. ऐसे में हफ्ते में 1-2 दिन भी अगर सही तरीके से एक्टिव रहा जाए, तो यह आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि आप हर दिन घंटों पसीना बहाएं. अगर आप समझदारी से प्लान बनाकर हफ्ते में दो दिन भी एक्टिव रहते हैं, तो आप अपनी सेहत को लंबे समय तक बेहतर बनाए रख सकते हैं.
इसे भी पढ़ें -Vitamin Side Effects: सावधान! बिना डॉक्टरी सलाह के यह विटामिन लेना पड़ सकता है भारी, जा सकती है आंखों की रोशनी
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 22:30:14 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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        <title>Panchang 27 March 2026: राम नवमी और मां सिद्धिदात्री की पूजा का मुहूर्त, योग और पूरा पंचांग देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 27 मार्च 2026: 27 मार्च 2026 को राम नवमी और चैत्र नवरात्रि की नवमी मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी. मां सिद्धिदात्री की कृपा से साधक वो सिद्धियां प्राप्त कर सकता है जो हनुमान जी के पास हैं जैसे अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व जैसी 8 सिद्धियां.
मान्यात है कि चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन भक्त की सच्चे मन से की गई पूजा से उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. वहीं राम नवमी पर अयोध्या में रामलला का दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक होगा.
राम नवमी पूजा मुहूर्त - दोपहर 12.27
हवन मुहूर्त - सुबह 6.17 - सुबह 10.54
27 मार्च का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 27 March 2026)



तिथि

नवमी (26 मार्च 2026, सुबह 11.48 - 27 मार्च 2026, सुबह 10.06)



वार
शुक्रवार


नक्षत्र
पुनर्वसु


योग
अतिखण्ड, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
&amp;nbsp;दोपहर 1.06


चंद्रोस्त
सुबह 3.16, 27 मार्च


चंद्र राशि
मिथुन




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.17 - सुबह 10.54


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 5.04 - शाम 6.36




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 10.54 - दोपहर 12.27


यमगण्ड काल
दोपहर 3.14 - शाम 5.04


आडल योग
सुबह 6.17 - दोपहर 3.24


गुलिक काल
सुबह 7.50 - सुबह 9.22


विडाल योग
दोपहर 3.54 - सुबह 6.16, 28 मार्च&amp;nbsp;




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 27 March 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
मिथुन


मंगल
कुंभ


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



27 मार्च 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: खर्चों का दबाव रहेगा, लेकिन अटका पैसा मिलते ही राहत महसूस होगी, रिश्तों में संतुलन बनाए रखें.
वृषभ: दिन थोड़ा उलझा रहेगा, फिर भी किस्मत के सहारे काम पूरे होंगे और अपनों का साथ मिलेगा.
मिथुन: कमाई के नए रास्ते खुलेंगे, सम्मान बढ़ेगा और रिश्तों में नजदीकियां आएंगी.
कर्क: खुशखबरी मिलने के संकेत हैं, धन लाभ होगा और परिवार का पूरा सपोर्ट रहेगा.
सिंह: पार्टनरशिप में फायदा होगा, लेकिन हर फैसले में सावधानी जरूरी है.
कन्या: तरक्की के योग बनेंगे, करियर में नए मौके मिलेंगे और आय बढ़ेगी.
तुला: मेहनत रंग लाएगी, बिजनेस में लाभ होगा और दांपत्य जीवन सुखद रहेगा.
वृश्चिक: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, काम का प्रेशर रहेगा, धैर्य से काम लेना होगा.
धनु: सफलता आपके कदम चूमेगी, प्रेम जीवन बेहतर रहेगा और नई शुरुआत होगी.
मकर: समाज में मान-सम्मान मिलेगा, नए अवसर मिलेंगे और धन स्थिति मजबूत होगी.
कुंभ: दांपत्य जीवन खुशहाल रहेगा, काम के सिलसिले में यात्रा संभव है, सेहत पर ध्यान दे.
मीन: आत्मबल बढ़ेगा, अटके काम पूरे होंगे और परिवार में तालमेल बेहतर होगा.

FAQs: 27 मार्च 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




राम नवमी पर घर में राम दरबार की पूजा करें, श्रीराम यंत्र स्थापित कर सकते हैं इससे घर में सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती, साथ ही नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अतिखण्ड और रवि योग बन रहा है.
Navratri 2026 Day 9 Puja: नवरात्रि महानवमी 27 मार्च को, मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, भोग, हवन-कन्या पूजा का मुहूर्त देखें



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 22:30:13 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Panchang, March, 2026:, राम, नवमी, और, मां, सिद्धिदात्री, की, पूजा, का, मुहूर्त, योग, और, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
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    <item>
        <title>बार&amp;बार धोने से भी कपड़ों से नहीं जा रही पसीने की बदबू, आजमाएं ये ट्रिक</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/बार-बार-धोने-से-भी-कपड़ों-से-नहीं-जा-रही-पसीने-की-बदबू-आजमाएं-ये-ट्रिक</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/बार-बार-धोने-से-भी-कपड़ों-से-नहीं-जा-रही-पसीने-की-बदबू-आजमाएं-ये-ट्रिक</guid>
        <description><![CDATA[ बार-बार धोने से भी कपड़ों से नहीं जा रही पसीने की बदबू, आजमाएं ये ट्रिक ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 22:30:11 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>बार-बार, धोने, से, भी, कपड़ों, से, नहीं, जा, रही, पसीने, की, बदबू, आजमाएं, ये, ट्रिक</media:keywords>
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        <title>How To Make Dried Dates At Home: खजूर से घर में कैसे बना सकते हैं छुआरा, एक किलो के लिए चाहिए कितने खजूर?</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/how-to-make-dried-dates-at-home-खजूर-से-घर-में-कैसे-बना-सकते-हैं-छुआरा-एक-किलो-के-लिए-चाहिए-कितने-खजूर</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/how-to-make-dried-dates-at-home-खजूर-से-घर-में-कैसे-बना-सकते-हैं-छुआरा-एक-किलो-के-लिए-चाहिए-कितने-खजूर</guid>
        <description><![CDATA[ How To Make Dried Dates Step By Step At Home: खजूर सिर्फ स्वाद में ही नहीं, सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. यही वजह है कि लोग इन्हें ताजे फल के साथ-साथ सूखे रूप यानी छुआरे के तौर पर भी इस्तेमाल करते हैं. छुआरा न सिर्फ लंबे समय तक खराब नहीं होता, बल्कि इसकी मिठास और पोषण भी ज्यादा कंसंट्रेटेड हो जाते हैं. ऐसे में अगर आप घर पर ही छुआरा बनाना चाहते हैं, तो यह काम उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है.
1 किलो छुआरा कैसे बना सकते हैं?
सबसे पहले बात करते हैं कि 1 किलो छुआरा बनाने के लिए कितने खजूर चाहिएय आमतौर पर खजूर सुखाने के बाद उनका वजन करीब 30-40 प्रतिशत तक कम हो जाता है, क्योंकि उनमें मौजूद पानी सूख जाता है. यानी अगर आपको 1 किलो छुआरा बनाना है, तो आपको लगभग 1.5 से 1.7 किलो ताजे खजूर की जरूरत पड़ेगी. यह मात्रा खजूर की किस्म और उसमें मौजूद नमी पर भी निर्भर करती है.&amp;nbsp;
घर पर छुआरा बनाने का तरीका
होम टिप्स के बारे में जानकारी देने वाली तमाम बेवसाइटों के अनुसार, &amp;nbsp;घर पर छुआरा बनाने का सबसे आसान और पारंपरिक तरीका है धूप में सुखाना. इसके लिए सबसे पहले अच्छे और हल्के सख्त खजूर चुनें, क्योंकि ज्यादा नरम खजूर सही से सूख नहीं पाते. खजूर को साफ पानी से धो लें और पूरी तरह सूखने दें. इसके बाद इन्हें एक ट्रे या जाली पर फैलाकर तेज धूप में रख दें.
इसे भी पढ़ें- Homemade Raisins: घर में अंगूर से कैसे बना सकते हैं किशमिश, एक किलो बनाने के लिए कितना अंगूर होना जरूरी?
धूप में सुखाते समय ध्यान रखें कि खजूर एक-दूसरे के ऊपर न हों. दिन में 2-3 बार इन्हें पलटते रहें, ताकि हर तरफ से बराबर सूख सकें. इसके साथ ही इन्हें हल्के कपड़े या जाली से ढक दें, ताकि धूल या कीड़े न लगें. मौसम के हिसाब से यह प्रक्रिया 7 से 12 दिन तक चल सकती है. जब खजूर पूरी तरह सख्त और सूखे लगने लगें, तो समझिए आपका छुआरा तैयार है. अगर धूप में सुखाना संभव नहीं है, तो आप ओवन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इसके लिए ओवन को 60 से 70 डिग्री सेल्सियस पर सेट करें और खजूर को ट्रे में फैलाकर रखें. ओवन का दरवाजा थोड़ा खुला रखें, ताकि नमी बाहर निकलती रहे. करीब 6 से 8 घंटे में खजूर सूखकर छुआरे में बदल जाते हैं.
स्टोर करने का तरीका जरूरी
छुआरा बनने के बाद इसे सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है. इसे एयरटाइट डिब्बे में रखें और नमी से दूर रखें. अगर लंबे समय तक स्टोर करना हो, तो फ्रिज में भी रखा जा सकता है. छुआरा न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि यह ऊर्जा का अच्छा सोर्स भी है. इसमें फाइबर, आयरन, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं, जो पाचन, दिल की सेहत और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद होते हैं.
इसे भी पढ़ें-&amp;nbsp;गेहूं के आटे से भी बन जाते हैं गरमागरम भटूरे, नोट कर लें शानदार रेसिपी ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 22:30:08 +0530</pubDate>
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        <media:keywords>How, Make, Dried, Dates, Home:, खजूर, से, घर, में, कैसे, बना, सकते, हैं, छुआरा, एक, किलो, के, लिए, चाहिए, कितने, खजूर</media:keywords>
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        <title>Ram Navami in Jodhpur: जोधपुर में रामनवमी की भव्यता, उमड़ा जनसैलाब, झांकियों में दिखी आस्था और &amp;apos;पहलगाम&amp;apos; का कड़ा संदेश</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ram-navami-in-jodhpur-जोधपुर-में-रामनवमी-की-भव्यता-उमड़ा-जनसैलाब-झांकियों-में-दिखी-आस्था-और-पहलगाम-का-कड़ा-संदेश</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ram-navami-in-jodhpur-जोधपुर-में-रामनवमी-की-भव्यता-उमड़ा-जनसैलाब-झांकियों-में-दिखी-आस्था-और-पहलगाम-का-कड़ा-संदेश</guid>
        <description><![CDATA[ Ram Navami in Jodhpur: जोधपुर की गलियों में इस बार रामनवमी का उल्लास सिर्फ एक त्योहार भर नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, साहस और सामाजिक एकजुटता का एक महाकुंभ बन गया. राजस्थान के &#039;ब्लू सिटी&#039; ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब बात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की हो, तो पूरा शहर एक सूत्र में बंध जाता है.
भक्ति और भव्यता का संगम
जोधपुर में रामनवमी का महोत्सव इस बार अपनी भव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित कर गया. शहर के हर कोने से निकली शोभायात्राओं में जनसैलाब उमड़ पड़ा. जय श्री राम के उद्घोषों से गूंजते वातावरण में हजारों श्रद्धालु केसरिया ध्वज थामे नाचते-गाते नजर आए. हिंदू संगठनों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को एक सामूहिक उत्सव का रूप दे दिया, जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल देखने को मिला.
पहलगाम झांकी: आस्था के साथ वीरता का संदेश
इस वर्ष की शोभायात्रा में सबसे अधिक चर्चा का विषय रही &#039;पहलगाम आतंकी हमले&#039; पर आधारित विशेष झांकी. जहां एक ओर भगवान राम के जीवन प्रसंगों की मनमोहक झांकियां मन को शांति प्रदान कर रही थीं, वहीं पहलगाम की इस झांकी ने लोगों के भीतर राष्ट्रवाद की भावना को उद्वेलित कर दिया.
इस झांकी के माध्यम से निर्दोषों पर हुए कायरतापूर्ण हमले के प्रति रोष और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का कड़ा संदेश दिया गया. यह प्रयास केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि एक प्रखर सामाजिक संदेश था, जिसने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया और आयोजन में एक नई गंभीरता जोड़ दी.
घंटाघर: आस्था का केंद्र&amp;nbsp;
शहर का ऐतिहासिक घंटाघर इस पूरे आयोजन का मुख्य केंद्र रहा. रामनवमी महोत्सव समिति द्वारा आयोजित विशेष पूजा-अर्चना के बीच, यहां का माहौल तब और अधिक ऊर्जावान हो गया जब प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा वहां पहुंचे.
मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे. दोनों नेताओं ने भगवान रामलला की विधिवत आरती की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की. मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने न केवल स्थानीय लोगों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि इस महोत्सव की गरिमा को भी नई ऊंचाइयां प्रदान कीं.
इतनी बड़ी संख्या में जुटी भीड़ और प्रमुख राजनेताओं की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा. पुलिस बल की तैनाती और अधिकारियों की सतर्कता की वजह से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. संकरी गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक, सुरक्षा व्यवस्था ऐसी थी कि भक्तों की आस्था में कोई व्यवधान नहीं आया.
जोधपुर की यह रामनवमी न केवल अपनी भव्य झांकियों के लिए याद रखी जाएगी, बल्कि उस &#039;पहलगाम संदेश&#039; के लिए भी याद की जाएगी जिसने समाज को जागरूक करने का काम किया. आस्था के इस सैलाब ने यह स्पष्ट कर दिया कि जोधपुर की संस्कृति में धर्म और देशप्रेम एक ही सिक्के के दो पहलू हैं.
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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 22:30:07 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ram, Navami, Jodhpur:, जोधपुर, में, रामनवमी, की, भव्यता, उमड़ा, जनसैलाब, झांकियों, में, दिखी, आस्था, और, पहलगाम, का, कड़ा, संदेश</media:keywords>
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        <title>Panchang 26 March 2026: आज नवरात्रि अष्टमी की पूजा और कन्या पूजा का मुहूर्त, योग और पूरा पंचांग देखें</title>
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        <description><![CDATA[ Hindi Panchang 26 मार्च 2026: 26 मार्च 2026 को चैत्र का आठवां दिन यानी दुर्गा अष्टमी है. मां महागौरी की पूजा के साथ कन्या पूजन भी होगा. माता की अष्टमी पर देवी को नारियल का भोग लगाएं. गुलाबी रंग के कपड़े पहनें और ॐ देवी दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करें. 9 कन्याओं को घर आमंत्रित कर उनका पूजन और उन्हें भोजन कराएं. मान्यता है इससे देवी दुर्गा की 9 दिन की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है.&amp;nbsp;
26 मार्च का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 26 March 2026)



तिथि

अष्टमी (25 मार्च 2026, दोपहर 1.50 - 26 मार्च 2026, सुबह 11.48)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
आर्द्रा


योग
शोभन, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 11.59


चंद्रोस्त
सुबह 2.30, 27 मार्च


चंद्र राशि
मिथुन




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.18 - सुबह 7.50


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 5.03 - रात 9.31




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.59 - दोपहर 3.30


यमगण्ड काल
सुबह 6.18 - सुबह 7.50


आडल योग
शाम 4.19 - सुबह 6.17, 27 मार्च


गुलिक काल
सुबह 9.23 - सुबह 10.55




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 26 March 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
मिथुन


मंगल
कुंभ


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मीन


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



26 मार्च 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष राशि: खर्च बढ़ेंगे लेकिन रुका धन मिलने से राहत और शिक्षा कार्यों में सफलता मिलेगी.
वृषभ राशि: उलझनों के बीच भाग्य का साथ मिलेगा और परिवार का सहयोग बना रहेगा.
मिथुन राशि: आय में वृद्धि, सामाजिक सम्मान और जीवनसाथी के सहयोग से कार्य सफल होंगे.
कर्क राशि: खुशखबरी, आर्थिक लाभ और वाहन खरीद के योग बन सकते हैं.
सिंह राशि: साझेदारी में लाभ मिलेगा लेकिन भरोसे में सावधानी जरूरी है.
कन्या राशि: आय में वृद्धि, नए अवसर और रुके काम पूरे होने के संकेत हैं.
तुला राशि: मेहनत का फल मिलेगा, व्यापार में लाभ और वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा.
वृश्चिक राशि: काम का दबाव और मानसिक तनाव रह सकता है, धैर्य से काम लें.
धनु राशि: करियर में सफलता, शत्रुओं पर विजय और प्रेम जीवन में खुशियां रहेंगी.
मकर राशि: सम्मान, नए अवसर और परिवार में खुशी का माहौल रहेगा.
कुंभ राशि: जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा, व्यापार में अवसर और स्वास्थ्य का ध्यान रखें.
मीन राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, रुके कार्य पूरे होंगे और रिश्तों में सुधार आएगा.

FAQs: 26 मार्च 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




कन्याओं को भेंट में श्रृंगार की सामग्री दें. माता को लाल चुनरी में सूखे मेवे, सिक्का और नारियल रखकर अर्पित करें. मान्यता है इससे सौभाग्य की प्राप्ति होती है




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, शोभन और रवि योग बन रहा है.
Navratri Ashtami 2026: नवरात्रि की महाष्टमी पर इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक, माता दौड़ी चली आएंगी



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:30:28 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Panchang, March, 2026:, आज, नवरात्रि, अष्टमी, की, पूजा, और, कन्या, पूजा, का, मुहूर्त, योग, और, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
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        <title>Ashtami&amp;Navami 2026 Sanskrit Wishes: संस्कृत में दें अष्टमी&amp;नवमी की बधाई, कहें महाअष्टम्याः च महानवम्यां हार्दिक्यः शुभकामना:</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ashtami-navami-2026-sanskrit-wishes-संस्कृत-में-दें-अष्टमी-नवमी-की-बधाई-कहें-महाअष्टम्याः-च-महानवम्यां-हार्दिक्यः-शुभकामना</link>
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        <description><![CDATA[ Chaitra Navratri Ashtami-Navami 2026 Sanskrit Wishes: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026 को हुई थी और 27 मार्च को नवरात्रि समाप्त हो जाएगी. चैत्र नवरात्रि के 9 दिनों में मां भगवती के 9 रूपों की पूजा की जाती है. लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर भक्त हवन, कन्या पूजन और नवरात्रि व्रत का पारण करते हैं. इस साल चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 26 मार्च को होगी वहीं 27 मार्च को नवमी तिथि रहेगी.
पचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 25 मार्च दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी और 26 मार्च सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार, अष्टमी 26 मार्च को रहेगी. वहीं नवमी तिथि 26 मार्च सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 06 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार, 27 मार्च 2026 को राम नवमी मनाना अधिक शुभ माना जाएगा
चैत्र नवरात्रि के पावन दिन लोग माता रानी की भक्ति, भजन, मंत्र आदि में समय बिताते हैं. साथ ही लोग अपने परिवार, मित्रों और रिश्तेदारों को शुभकामनाएं भी भेजते हैं. अगर आप इस पवित्र दिन पर पारंपरिक और आध्यात्मिक तरीके से बधाई देना चाहते हैं तो संस्कृत में शुभकामनाएं देना सबसे अच्छा विकल्प है. संस्कृत को हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं की भाषा माना जाता है. ऐसे में अष्टमी और नवमी के अवसर पर संस्कृत में शुभकामनाएं देना धार्मिक भावनाओं को और भी गहरा बनाता है.&amp;nbsp;यहां देखें संस्कृत में भक्तिभय शुभकामनाएं संदेश.
देहि सौभाग्यमारोग्यं, देहि मे परमं सुखम्।यशः कीर्तिं च मे देहि, शत्रून् नाशय सर्वदा॥ नवरात्रि शुभाशयाः॥

अस्यां पावन-महाअष्टमी-पर्वण्यां भवतःजीवनं सुखमयं, समृद्धिमयं, यशोभयं च भवतु।
महाअष्टम्याः हार्दिक्यः शुभकामना:

शुभं करोतु कल्याणम्, आरोग्यं धनसंपदः।माता दुर्गा प्रसन्ना, भवतु ते सदा गृहे॥
महाअष्टम्याः च महानवम्यां हार्दिक्यः शुभकामना:

&quot;श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥&quot;

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
महाअष्टम्याः च महानवम्यां हार्दिक्यः शुभकामना:
&amp;emsp;
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके,शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते।
महानवम्यां हार्दिक्यः शुभकामनाः!

सिद्धिदात्री भवतः जीवनं सुखमयं समृद्धिमयं च करोतु।महानवम्यां हार्दिक्यः शुभकामनाः!

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।
महाअष्टम्याः च महानवम्यां हार्दिक्यः शुभकामना:

शङ्खचक्रगदाशार्ङगृहीत्परमायुधे।प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते।।
महाअष्टम्याः च महानवम्यां हार्दिक्यः शुभकामना:


&amp;ldquo;नवरात्रोत्सवस्य शुभाशयाः, अष्टमी-नवमी पर्वणि भवतः जीवनं सुख-समृद्ध्या पूर्यताम्।&amp;rdquo;
&amp;ldquo;अष्टमी-नवमी पावनपर्वे भवतः सर्वे मनोरथाः सिद्धयन्तु।&amp;rdquo;
&amp;ldquo;देवी दुर्गाया कृपया भवतः जीवनं सुखमयं भवतु, अष्टमी-नवमी शुभेच्छाः।&amp;rdquo;
&amp;nbsp;&amp;ldquo;शुभे अष्टमी-नवमी पर्वणि भवतः कुले सदा सुख-शान्तिः वर्धताम्।&amp;rdquo;
&amp;ldquo;जयतु देवी दुर्गा, मंगलमस्तु सर्वेषाम्। अष्टमी-नवमी शुभाशयाः।&amp;rdquo;

सिद्धिदात्री माता भवतां सर्वान् मनोरथान् पूरयतु, नवमी तिथिः भवतु सदा मंगलमयी च शुभप्रदा।


सिद्धिं बुद्धिं च देहि मे देवी सर्वार्थसाधिके, महानवमी दिने त्वां नमामि भक्त्या सदा।


ये भी पढ़ें: Chaitra Navratri Vrat Paran 2026: अष्टमी या नवमी कब करें चैत्र नवरात्रि व्रत पारण, जानें सही डेट और विधिDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:30:27 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ashtami-Navami, 2026, Sanskrit, Wishes:, संस्कृत, में, दें, अष्टमी-नवमी, की, बधाई, कहें, महाअष्टम्याः, च, महानवम्यां, हार्दिक्यः, शुभकामना:</media:keywords>
    </item>
    <item>
        <title>Ram Navami 2026 Vrat Katha: रामनवमी पर जरूर पढ़ें श्रीराम की पवित्र जन्मकथा, मिलेगा आशीष</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/ram-navami-2026-vrat-katha-रामनवमी-पर-जरूर-पढ़ें-श्रीराम-की-पवित्र-जन्मकथा-मिलेगा-आशीष</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/ram-navami-2026-vrat-katha-रामनवमी-पर-जरूर-पढ़ें-श्रीराम-की-पवित्र-जन्मकथा-मिलेगा-आशीष</guid>
        <description><![CDATA[ Ram Navami 2026 Vrat Katha: &amp;ldquo;भये प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी&amp;rdquo;
श्रीराम को भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है, जिनका जन्म पृथ्वी पर मानव रूप में हुआ. दशरथ पुत्र और मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर अभिजीत मुहूर्त में हुआ था. इसलिए हर साल इस तिथि पर रामजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे रामनवमी कहते हैं. इस वर्ष रामनवमी का त्योहार गुरुवार, 26 मार्च 2026 को है.
अयोध्या राजा दशरथ के घर जन्म लेकर भगवान राम रामचंद्र के रूप में कई अद्भुत लीलाएं रचीं और रावण का अंत किया. रामजन्म के पावन अवसर पर रामनवमी की ये कथा सभी को जरूर पढ़नी चाहिए.
रामनवमी व्रत कथा (Ram Navami 2026 Vrat Katha in Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए गुरु महर्षि वशिष्ठ के निर्देशों का पालन किया और महायज्ञ आयोजित कराया गया. इस महायत्र में राजा दशरथ ने सभी यशस्वी ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया. यज्ञ के दिन गुरु वशिष्ठ के साथ महाराज दशरथ के मित्र अंग प्रदेश के अधिपति ऋंग ऋषि और अन्य आगंतुक भी आएं.
यज्ञ विधिपूर्वक संपन्न हुआ और यक्ष के समापन के बाद दशरथ ने सभी ऋषि और पंडितों को दक्षिणा स्वरुप धन-धान्य का दान देकर सम्मानपूर्वक विदा किया. यज्ञ से मिला प्रसाद लेकर राजा दशरथ महल लौटे और अपनी तीनों रानियों को प्रसाद दिया. यज्ञ के पुण्य फल और प्रसाद से तीनों रानियों ने गर्भ धारण किया.
सबसे पहले माता कौशल्या ने चैत्र महीने शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया. कौशल्या के गर्भ से जन्मे बालक के मुख में करोड़ों सूर्य के समान आभा थी और बालक अत्यंत आकर्षण था. जो भी इस अनुपम छवि वाले बालक देखता तो मंत्रमुग्ध हो जाता. यह बालक श्रीविष्णु का सातवां अवतार था.
माता कौशल्या के बाद कैकयी और सुमित्रा ने भी शुभ नक्षत्रों में पुत्रों को जन्म दिया. कैकयी के गर्भ से भरत और माता सुमित्रा के गर्भ से दो पुत्र लक्ष्मण और शत्रुघ्न हुए.अयोध्या के राजकुमारों के जन्म का समाचार सुन पूरी अयोध्या नगरी में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई. गीत-संगीत जैसे समारोह से राजा दशरथ के पुत्र का स्वागत हुआ. देवताओं ने भी बालक को नमन कर आकाश से अनगिनत पुष्पों की वर्षा की.
इसके बाद चारों पुत्रों का नामकरण संस्कार किया गया. महर्षि वशिष्ठ के उनके नाम रामचन्द्र (राम), भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे. अत्यंत विलक्षण प्रतिभा के धनी रामचंद्र अल्पकाल में ही अयोध्यावासियों के प्रिय हो गए. उन्हें सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुणता प्राप्त हुई और वे हमेशा माता-पिता व गुरुजनों की सेवा में लगे रहते थे.
सीता स्वयंवर में धनुष तोड़ना, महाबली बाली का वध कर सुग्रीव की सहायता करना और रावाण वध जैसे कई महान और धर्म परायण कार्य रामजी ने किए. सीता से विवाह के बाद मर्यादा पुर्षोत्तम राम पिता की आज्ञा का पालन किया और पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया.
जगत के पालनहार और दुर्लभ शक्तियों के स्वामी होने के बावजूद भी श्रीराम ने एक सामान्य मनुष्य जीवन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया. इसलिए आज युगों युगों के बाद भी श्री रामचंद्र के आदर्श व्यक्तित्व, धैर्य, निष्ठा, त्याग व पराक्रम को श्रद्धा और सम्मान देते हुए राम नवमी के दिन भव्य रूप से उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है.
ये भी पढ़ें: Ram Navami 2026: कान्हा की नगरी से अयोध्या तक आस्था का महासंगम; 11 मन पंजीरी और विशेष उपहारों के साथ रथ रवानाDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:30:26 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
        <media:keywords>Ram, Navami, 2026, Vrat, Katha:, रामनवमी, पर, जरूर, पढ़ें, श्रीराम, की, पवित्र, जन्मकथा, मिलेगा, आशीष</media:keywords>
    </item>
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        <title>Dark Circles on Neck: गर्दन के पीछे बनने लगे हैं काले&amp;काले घेरे, समझ लीजिए खराब होने लगा है शरीर का यह पार्ट</title>
        <link>https://hindi.attentionindia.com/dark-circles-on-neck-गर्दन-के-पीछे-बनने-लगे-हैं-काले-काले-घेरे-समझ-लीजिए-खराब-होने-लगा-है-शरीर-का-यह-पार्ट</link>
        <guid>https://hindi.attentionindia.com/dark-circles-on-neck-गर्दन-के-पीछे-बनने-लगे-हैं-काले-काले-घेरे-समझ-लीजिए-खराब-होने-लगा-है-शरीर-का-यह-पार्ट</guid>
        <description><![CDATA[ हम में से कई लोग अक्सर गर्दन पर काले या मखमली जैसे निशान को सिर्फ गंदगी समझकर रगड़ देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ गंदगी नहीं बल्कि आपके शरीर में चल रही किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है. अगर यह निशान साफ करने पर भी नहीं हटते हैं, तो इसे अनदेखा करना खतरनाक साबित हो सकता है. &amp;nbsp;यह इस बात का शुरुआती संकेत हो सकते है कि आपके शरीर का कोई पार्ट खराब होने लगा है. तो आइए जानते हैं कि गर्दन पर काले निशान क्यों आते हैं, &amp;nbsp;इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है और &amp;nbsp;ये शरीर के किस पार्ट के खराब होने का संकेत है.&amp;nbsp;
गर्दन पर काले निशान क्यों होते हैं?
गर्दन के पीछे या साइड में काले, मोटे या मखमली धब्बे अचानक दिखाई दे सकते हैं. इसका कारण सिर्फ गंदगी नहीं बल्कि शरीर में हार्मोन, ब्लड शुगर या वजन से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. अगर यह निशान धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं या साफ करने के बावजूद नहीं हट रहे, तो इसे गंभीरता से लें.&amp;nbsp;
गर्दन पर काले निशान किन बीमारियों का संकेत हो सकते हैं?
1. इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) - गर्दन पर काले और मखमली धब्बे सिर्फ त्वचा की समस्या नहीं होते, बल्कि ये अक्सर शरीर में चल रही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी होते हैं. सबसे आम कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस है. जब शरीर इंसुलिन का सही यूज नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं. इसके साथ ही वजन बढ़ना, थकान या भूख में बदलाव जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का कारण बन सकता है.&amp;nbsp;
2. टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) - टाइप 2 डायबिटीज में लगातार बढ़े हुए ब्लड शुगर के कारण त्वचा पर बदलाव आ सकते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में Acanthosis Nigricans कहा जाता है. यह मुख्य रूप से गर्दन, बगल, कोहनी और जांघों के आसपास दिखता है. जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, उन्हें इन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए.&amp;nbsp;
3. हार्मोनल असंतुलन - हार्मोनल असंतुलन भी काले निशानों का कारण बन सकता है. थायराइड की समस्या या पीसीओएस जैसी स्थिति में त्वचा का रंग गहरा हो जाता है. महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, बाल झड़ना और वजन बढ़ना इसके साथ अक्सर दिखता है.
4. मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम - मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम भी गर्दन पर काले निशानों से जुड़े हैं. ज्यादा वजन शरीर में इंसुलिन स्तर को बढ़ा देता है, जिससे स्किन में मोटे और मखमली धब्बे बन जाते हैं. अगर पेट के आसपास भी चर्बी जमा हो रही है, तो यह संकेत है कि लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी है.&amp;nbsp;
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गर्दन के काले निशानों को कैसे ठीक करें?
1. लाइफस्टाइल में बदलाव - नियमित एक्सरसाइज करें, हेल्दी और संतुलित आहार लें, तनाव कम करें और नींद पूरी लें, स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन कम करें.&amp;nbsp;
2. &amp;nbsp;प्री डायबिटीज के लक्षण नियंत्रित करें - डायबिटीज में सिर्फ गर्दन पर काले निशान नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी असर होता है. वजन, ब्लड शुगर और हार्मोन स्तर पर ध्यान दें.&amp;nbsp;
3. थायराइड और हार्मोन जांच - स्किन पर पीले, लाल या भूरे धब्बे खुजली या जलन के साथ दिखें, तो थायराइड या हार्मोनल असंतुलन की संभावना होती है.&amp;nbsp;
4. डॉक्टर से सलाह लें - अगर गर्दन, कंधे या कमर पर मखमली स्किन दिखे, तो यह इंसुलिन की मात्रा बढ़ने का संकेत हो सकता है. समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है.&amp;nbsp;
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. ]]></description>
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        <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 10:30:25 +0530</pubDate>
        <dc:creator>Attention Desk</dc:creator>
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